raw_text
stringlengths
113
616k
normalized_text
stringlengths
98
618k
निंबाहेड़ा में सोमवार को बीजेपी ऑफिस में बैठक का आयोजन किया गया। इस दौरान पूर्व मंत्री श्रीचंद कृपलानी ने महंगाई राहत शिविर को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर निशाना साधा। इस दौरान पूर्व मंत्री ने कहा कि 'गहलोत सरकार महंगाई राहत कैंप के नाम पर राज्य की भोली भाली जनता को बरगला कर वोटों की खेती कर रहे हैं'। कृपलानी ने कहा कि यदि राज्य के सीएम गहलोत ईमानदारी से राज्य की जनता को राहत देना चाहते तो उज्ज्वला गैस, चिरंजीवी स्वास्थ्य योजना, सामाजिक पेंशन, निशुल्क बिजली जैसी योजना के लाभार्थियों को 45 डिग्री तापमान में परेशान नही कर उनकी ऑनलाइन फीडिंग कर सकती थी, लेकिन सरकार की मंशा इसके विपरीत ऑफलाइन फीडिंग करवा आमजन को राहत कम परेशान ज्यादा होना पड़ेगा। कृपलानी ने कांग्रेस सरकार पर इन महंगाई राहत कैंप के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पूर्ववर्ती वसुंधरा राजे की भाजपा सरकार में जहां किसानों को बिजली के बिल में दस हजार रुपये सालाना की राहत दी गई थी, उसे बंद कर चार साल सत्ता का सुख भोगने के दौरान आमजन की याद नही आई, अब चुनाव से ठीक पहले ऐसे राहत कैंप लगाने का कोई औचित्य नहीं है। आने वाले चुनाव में राज्य की जनता ने सत्ता परिवर्तन का मन बना लिया है। इस दौरान पूर्व विधायक और विधानसभा संयोजक अशोक नवलखा ने भी महंगाई राहत शिविर को कांग्रेस राहत शिविर बताते हुए कहा कि साढ़े चार साल कुम्भकर्णी नींद में सोई कांग्रेस सरकार को ऐसे शिविरों से राहत नहीं मिलेगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
निंबाहेड़ा में सोमवार को बीजेपी ऑफिस में बैठक का आयोजन किया गया। इस दौरान पूर्व मंत्री श्रीचंद कृपलानी ने महंगाई राहत शिविर को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर निशाना साधा। इस दौरान पूर्व मंत्री ने कहा कि 'गहलोत सरकार महंगाई राहत कैंप के नाम पर राज्य की भोली भाली जनता को बरगला कर वोटों की खेती कर रहे हैं'। कृपलानी ने कहा कि यदि राज्य के सीएम गहलोत ईमानदारी से राज्य की जनता को राहत देना चाहते तो उज्ज्वला गैस, चिरंजीवी स्वास्थ्य योजना, सामाजिक पेंशन, निशुल्क बिजली जैसी योजना के लाभार्थियों को पैंतालीस डिग्री तापमान में परेशान नही कर उनकी ऑनलाइन फीडिंग कर सकती थी, लेकिन सरकार की मंशा इसके विपरीत ऑफलाइन फीडिंग करवा आमजन को राहत कम परेशान ज्यादा होना पड़ेगा। कृपलानी ने कांग्रेस सरकार पर इन महंगाई राहत कैंप के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पूर्ववर्ती वसुंधरा राजे की भाजपा सरकार में जहां किसानों को बिजली के बिल में दस हजार रुपये सालाना की राहत दी गई थी, उसे बंद कर चार साल सत्ता का सुख भोगने के दौरान आमजन की याद नही आई, अब चुनाव से ठीक पहले ऐसे राहत कैंप लगाने का कोई औचित्य नहीं है। आने वाले चुनाव में राज्य की जनता ने सत्ता परिवर्तन का मन बना लिया है। इस दौरान पूर्व विधायक और विधानसभा संयोजक अशोक नवलखा ने भी महंगाई राहत शिविर को कांग्रेस राहत शिविर बताते हुए कहा कि साढ़े चार साल कुम्भकर्णी नींद में सोई कांग्रेस सरकार को ऐसे शिविरों से राहत नहीं मिलेगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
जयपुर (एजेंसी/वार्ता): राजस्थान में आगामी पांच दिसम्बर को चुरु जिले की सरदारशहर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले प्रदेश में करीब सौ उपचुनाव हो चुके हैं और इनमें आधे से ज्यादा बार कांग्रेस ने बाजी मारी और वर्तमान में सत्तारुढ़ कांग्रेस के पिछले चार वर्ष के शासन में हुए सात उपचुनाव में भी कांग्रेस ने पांच पर जीत हासिल कर अपना दबदबा रखा। राज्य निर्वाचन विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वर्ष 1955 से अब तक राज्य में 96 विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव हो चुके हैं जिनमें सर्वाधिक 56 बार कांग्रेस ने जीत हासिल कर इन उपचुनावों में अपना दबादबा बनाया जबकि वर्ष 1980 में अस्तित्व में आई भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इन चुनावों में 22 बार विजयी हासिल की। कांग्रेस ने इन चुनावों में पिछले करीब 77 वर्षों में 56 बार जीत हासिल की जबकि भाजपा ने 42 वर्षों में 22 बार उपचुनाव जीता राज्य में अब तक हुए विधानसभा उपचुनावों में एक वर्ष में सर्वाधिक उपचुनाव वर्ष 1955 में 17 विधानसभा क्षेत्रों में हुए जिनमें कांग्रेस ने लगभग एकतरफा 15 सीटों पर जीत हासिल कर इन चुनावों में अपना जोरदार दबदबा कायम किया जबकि एक सीट पर पीएसपी एवं एक अन्य उम्मीदवार ने जीत दर्ज की। इन उपचुनावों में निर्दलीयों का बहुत कम प्रतिनिधित्व रहा और केवल तीन निर्दलीय ही इस दौरान उपचुनाव जीत पाये इनमें वर्ष 1965 में हनुमानगढ़ जिले के नोहर विधानसभा सीट पर दयाराम, वर्ष 1991 में भरतपुर जिले के डीग में अरुण सिंह और वर्ष 2000 में चुरु जिले के सादुलपुर में नंदलाल पूनियां शामिल हैं। पिछले चार वर्षों में राज्य में ऐतिहासिक योजनाएं लाकर कई जनकल्याणकारी काम किए गए हैं और किसी प्रकार की कोई कमी नहीं रखने से इस उपचुनाव में कोई सत्ता विरोधी लहर कहीं नजर नहीं आ रही हैं, इस कारण यह उपचुनाव भी कांग्रेस प्रत्याशी जीतेगा। उधर भाजपा भी अपने उम्मीदवार की जीत का दावा कर रही हैं।
जयपुर : राजस्थान में आगामी पांच दिसम्बर को चुरु जिले की सरदारशहर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले प्रदेश में करीब सौ उपचुनाव हो चुके हैं और इनमें आधे से ज्यादा बार कांग्रेस ने बाजी मारी और वर्तमान में सत्तारुढ़ कांग्रेस के पिछले चार वर्ष के शासन में हुए सात उपचुनाव में भी कांग्रेस ने पांच पर जीत हासिल कर अपना दबदबा रखा। राज्य निर्वाचन विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वर्ष एक हज़ार नौ सौ पचपन से अब तक राज्य में छियानवे विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव हो चुके हैं जिनमें सर्वाधिक छप्पन बार कांग्रेस ने जीत हासिल कर इन उपचुनावों में अपना दबादबा बनाया जबकि वर्ष एक हज़ार नौ सौ अस्सी में अस्तित्व में आई भारतीय जनता पार्टी ने इन चुनावों में बाईस बार विजयी हासिल की। कांग्रेस ने इन चुनावों में पिछले करीब सतहत्तर वर्षों में छप्पन बार जीत हासिल की जबकि भाजपा ने बयालीस वर्षों में बाईस बार उपचुनाव जीता राज्य में अब तक हुए विधानसभा उपचुनावों में एक वर्ष में सर्वाधिक उपचुनाव वर्ष एक हज़ार नौ सौ पचपन में सत्रह विधानसभा क्षेत्रों में हुए जिनमें कांग्रेस ने लगभग एकतरफा पंद्रह सीटों पर जीत हासिल कर इन चुनावों में अपना जोरदार दबदबा कायम किया जबकि एक सीट पर पीएसपी एवं एक अन्य उम्मीदवार ने जीत दर्ज की। इन उपचुनावों में निर्दलीयों का बहुत कम प्रतिनिधित्व रहा और केवल तीन निर्दलीय ही इस दौरान उपचुनाव जीत पाये इनमें वर्ष एक हज़ार नौ सौ पैंसठ में हनुमानगढ़ जिले के नोहर विधानसभा सीट पर दयाराम, वर्ष एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे में भरतपुर जिले के डीग में अरुण सिंह और वर्ष दो हज़ार में चुरु जिले के सादुलपुर में नंदलाल पूनियां शामिल हैं। पिछले चार वर्षों में राज्य में ऐतिहासिक योजनाएं लाकर कई जनकल्याणकारी काम किए गए हैं और किसी प्रकार की कोई कमी नहीं रखने से इस उपचुनाव में कोई सत्ता विरोधी लहर कहीं नजर नहीं आ रही हैं, इस कारण यह उपचुनाव भी कांग्रेस प्रत्याशी जीतेगा। उधर भाजपा भी अपने उम्मीदवार की जीत का दावा कर रही हैं।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का पारा उस समय चढ़ गया जब उसे पता चला कि साढ़े दस साल पहले दिए आदेश पर भी अमल नहीं हो सका है। दरअसल हाईकोर्ट ने भोपाल गैस ट्रेजेडी रिलीफ एंड रिहेबिलेशन डिपार्टमेंट को आदेश दिया था कि गैस कांड के सभी पीड़ितों का रिकॉर्ड डिजीटल किया जाए। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत को पता चला कि आदेश अभी तक लंबित है तो फिर क्या था। जजों का गुस्सा सातवें आसमान पर जा पहुंचा। तुरंत रजिस्ट्री को आदेश जारी किया गया कि भोपाल गैस ट्रेजेडी रिलीफ एंड रिहेबिलेशन डिपार्टमेंट के सेक्रेट्री पर कंटेंप्ट का एक्शन हो। जस्टिस शील नागू और जस्टिस वीरेंद्र सिंह की बेंच मामले की सुनवाई कर रही थी। बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि केवल नेशनल इनफोर्मेटिक सेंटर (NIC) को ही नहीं बल्कि राज्य सरकार को भी रिकॉर्ड डिजीटल करने का काम करना था। कोर्ट ने NIC की तरफ से पेश वकील को भी तीखी फटकार लगाई। कोर्ट का कहना था इनको ये भी नहीं पता कि रिकॉर्ड डिजीटाइज और कंप्यूटर में चढ़ाने में फर्क होता है। कोर्ट ने रजिस्ट्री को आदेश दिया कि वो अवमानना के तहत अफसरों को नोटिस भेजे। 17 मार्च को उनके जवाबों पर सुनवाई की जाएगी। भोपाल गैस त्रासदी का मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा चुका है। सुप्रीम कोर्ट में दायर किए गए क्यूरेटिव पटीशन में मौतों की संख्या 5,295 और घायलों का आंकड़ा 5,27,894 बताया गया है। 2011 में दायर क्यूरेटिव पटीशन में यूनियन कार्बाइड कंपनी से और 7413 करोड़ रुपये का मुआवजा मांगा गया। गौरतलब है कि 2 दिसंबर 1984 की रात मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में गैस लीक होना शुरू हुई थी। 3 तारीख लगते ही ये हवा जहरीली के साथ जानलेवा भी हो गई। यूनियन कार्बाइड की फैक्ट्री से मिथाइल आइसोसाइनेट गैस के लीक होने से ये हादसा हुआ। गैस के लीक होने की वजह थी टैंक नंबर 610 में जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का पानी से मिल जाना। इससे टैंक में दबाव बन गया और वो खुल गया। उसके बाद टैंक से वो गैस निकली जिसने हजारों की जान ले ली। भारी तादाद में लोग विकलांग भी हो गए। मुआवजे के लिए लोग आज भी हाथ पैर मार रहे हैं।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का पारा उस समय चढ़ गया जब उसे पता चला कि साढ़े दस साल पहले दिए आदेश पर भी अमल नहीं हो सका है। दरअसल हाईकोर्ट ने भोपाल गैस ट्रेजेडी रिलीफ एंड रिहेबिलेशन डिपार्टमेंट को आदेश दिया था कि गैस कांड के सभी पीड़ितों का रिकॉर्ड डिजीटल किया जाए। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत को पता चला कि आदेश अभी तक लंबित है तो फिर क्या था। जजों का गुस्सा सातवें आसमान पर जा पहुंचा। तुरंत रजिस्ट्री को आदेश जारी किया गया कि भोपाल गैस ट्रेजेडी रिलीफ एंड रिहेबिलेशन डिपार्टमेंट के सेक्रेट्री पर कंटेंप्ट का एक्शन हो। जस्टिस शील नागू और जस्टिस वीरेंद्र सिंह की बेंच मामले की सुनवाई कर रही थी। बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि केवल नेशनल इनफोर्मेटिक सेंटर को ही नहीं बल्कि राज्य सरकार को भी रिकॉर्ड डिजीटल करने का काम करना था। कोर्ट ने NIC की तरफ से पेश वकील को भी तीखी फटकार लगाई। कोर्ट का कहना था इनको ये भी नहीं पता कि रिकॉर्ड डिजीटाइज और कंप्यूटर में चढ़ाने में फर्क होता है। कोर्ट ने रजिस्ट्री को आदेश दिया कि वो अवमानना के तहत अफसरों को नोटिस भेजे। सत्रह मार्च को उनके जवाबों पर सुनवाई की जाएगी। भोपाल गैस त्रासदी का मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा चुका है। सुप्रीम कोर्ट में दायर किए गए क्यूरेटिव पटीशन में मौतों की संख्या पाँच,दो सौ पचानवे और घायलों का आंकड़ा पाँच,सत्ताईस,आठ सौ चौरानवे बताया गया है। दो हज़ार ग्यारह में दायर क्यूरेटिव पटीशन में यूनियन कार्बाइड कंपनी से और सात हज़ार चार सौ तेरह करोड़ रुपये का मुआवजा मांगा गया। गौरतलब है कि दो दिसंबर एक हज़ार नौ सौ चौरासी की रात मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में गैस लीक होना शुरू हुई थी। तीन तारीख लगते ही ये हवा जहरीली के साथ जानलेवा भी हो गई। यूनियन कार्बाइड की फैक्ट्री से मिथाइल आइसोसाइनेट गैस के लीक होने से ये हादसा हुआ। गैस के लीक होने की वजह थी टैंक नंबर छः सौ दस में जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का पानी से मिल जाना। इससे टैंक में दबाव बन गया और वो खुल गया। उसके बाद टैंक से वो गैस निकली जिसने हजारों की जान ले ली। भारी तादाद में लोग विकलांग भी हो गए। मुआवजे के लिए लोग आज भी हाथ पैर मार रहे हैं।
छिंदवाड़ा। खूनी खेल के नाम से विख्यात गोटमार मेले में विगत दिवस देर शाम को सैकड़ों लोगों का खून बहा। भारी सुरक्षा के बावजूद पांढुर्ना में प्रतिबंधित गोफन भी धड़ल्ले से चला और शराब भी जमकर बिकी। एक-दूसरे पर पत्थरबाजी कर यहां के लोगों ने वर्षों पुरानी परम्परा कायम रखी। जिला मुख्यालय से 98 किलोमीटर दूर स्थित पांढुर्ना विकासखण्ड में शुक्रवार को सारगांव निवासी सुरेश कावले के यहां से पलाश रुपी झंडे को मान-सम्मान के साथ जाम नदी के बीचोबीच गाड़ा गया। जहां उसकी पूजा-अर्चना कर गोटमार खिलाडियों ने एक-दूसरे को पत्थर मार खूनी खेल का आगाज किया। गोटमार मेले में दिनभर जमकर पत्थरबाजी हुई। मेले में शाम 6 बजे तक लगभग 400 लोग घायल हुए, जिसमें से गम्भीर रूप से घायल 7 लोगों को नागपुर रेफर किया गया। बता दें कि यहां हर साल यह मेला लगता है। इस बार गोटमार की आराध्य देवी मां चंडी का दरबार भी शानदार रूप से सजाया गया। गोटमार मेले में प्रतिबंधित होने के बावजूद गोफन भी चला और अवैध रूप से शराब भी खूब परोसी गई। यूं तो प्रशासन की अपील थी कि पत्थर बाजी न करें लेकिन लोगों ने गोफन तक चलाये। गोटमार के इस खूनी खेल में प्रशासन ने बखूबी जिम्मेदारी निभाई। खतरे के बीच जहां स्वास्थ्य कर्मियों ने घायलों का उपचार किया, वहीँ पुलिस ने भी सुरक्षा बनाई। मेले को शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न करवाने के लिए लगभग 700 पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई थी। गोटमार मेले को सम्पन्न कराने कलेक्टर जेके जैन, एसपी जीके पाठक,अपर कलेक्टर आलोक श्रीवास्तव, एडिशनल एसपी राजेश त्रिपाठी, एसडीएम सहित अन्य आलाधिकारी अपनी टीम के साथ पूरे दिन तैनात रहे।
छिंदवाड़ा। खूनी खेल के नाम से विख्यात गोटमार मेले में विगत दिवस देर शाम को सैकड़ों लोगों का खून बहा। भारी सुरक्षा के बावजूद पांढुर्ना में प्रतिबंधित गोफन भी धड़ल्ले से चला और शराब भी जमकर बिकी। एक-दूसरे पर पत्थरबाजी कर यहां के लोगों ने वर्षों पुरानी परम्परा कायम रखी। जिला मुख्यालय से अट्ठानवे किलोग्राममीटर दूर स्थित पांढुर्ना विकासखण्ड में शुक्रवार को सारगांव निवासी सुरेश कावले के यहां से पलाश रुपी झंडे को मान-सम्मान के साथ जाम नदी के बीचोबीच गाड़ा गया। जहां उसकी पूजा-अर्चना कर गोटमार खिलाडियों ने एक-दूसरे को पत्थर मार खूनी खेल का आगाज किया। गोटमार मेले में दिनभर जमकर पत्थरबाजी हुई। मेले में शाम छः बजे तक लगभग चार सौ लोग घायल हुए, जिसमें से गम्भीर रूप से घायल सात लोगों को नागपुर रेफर किया गया। बता दें कि यहां हर साल यह मेला लगता है। इस बार गोटमार की आराध्य देवी मां चंडी का दरबार भी शानदार रूप से सजाया गया। गोटमार मेले में प्रतिबंधित होने के बावजूद गोफन भी चला और अवैध रूप से शराब भी खूब परोसी गई। यूं तो प्रशासन की अपील थी कि पत्थर बाजी न करें लेकिन लोगों ने गोफन तक चलाये। गोटमार के इस खूनी खेल में प्रशासन ने बखूबी जिम्मेदारी निभाई। खतरे के बीच जहां स्वास्थ्य कर्मियों ने घायलों का उपचार किया, वहीँ पुलिस ने भी सुरक्षा बनाई। मेले को शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न करवाने के लिए लगभग सात सौ पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई थी। गोटमार मेले को सम्पन्न कराने कलेक्टर जेके जैन, एसपी जीके पाठक,अपर कलेक्टर आलोक श्रीवास्तव, एडिशनल एसपी राजेश त्रिपाठी, एसडीएम सहित अन्य आलाधिकारी अपनी टीम के साथ पूरे दिन तैनात रहे।
राहुल गांधी कांग्रेस को दूर से छूने से भी घबराते हैं। जैसे कि कांग्रेस कोई 'बर्र का छत्ता' हो। -श्रवण गर्गeditorialWed, 29 Jan 2014 11:14 AM (IST) एनएसयूआई प्रदेश अध्यक्ष विपिन वानखेड़े ने बड़े नेताओं को लिया आड़े हाथों। वहीं एक प्रदेश सचिव ने कहा कांग्रेस मोदी को टारगेट नहीं कर रही। madhya pradeshFri, 24 Jan 2014 04:18 PM (IST) एनएसयूआई चुनाव में इस बार प्रदेश अध्यक्ष देवेन्द्र यादव और उपाध्यक्ष सुबोध हरितवाल चुनाव नहीं लड़ेंगे। देवेन्द्र यादव संगठन गुट से तो सुबोध हरितवाल जोगी खेमे से जुड़े हुए हैं। चुनाव नहीं लड़ने का दोनों ने अलग-अलग तर्क दिया . . . chhattisgarhThu, 23 Jan 2014 01:11 AM (IST) एनएसयूआई में सदस्यता अभियान समाप्त हो गया है। सदस्यता अभियान में जमा हुए फार्म की स्क्रूटनी और बार कोडिंग के बाद आंकड़े जारी किए जाएंगे। माना जा रहा है कि फरवरी प्रथम सप्ताह में एनएसयूआई की चुनावी प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। . . . chhattisgarhTue, 21 Jan 2014 01:34 AM (IST) बिलासपुर (निप्र)। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नवनियुक्त अध्यक्ष भूपेश बघेल सोमवार शाम कांग्रेसियों की बैठक ले रहे थे। इस दौरान बाहर एनएसयूआई के दो गुटों में जमकर मारपीट व गाली-गलौज हुई। यही नहीं, कार्यकर्ता चाकू लहराने से भ. . . chhattisgarhMon, 20 Jan 2014 09:19 PM (IST) बिलासपुर (निप्र)। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नवनियुक्त अध्यक्ष भूपेश बघेल सोमवार शाम कांग्रेसियों की बैठक ले रहे थे। इस दौरान बाहर एनएसयूआई के दो गुटों में जमकर मारपीट व गाली-गलौज हुई। यही नहीं, कार्यकर्ता चाकू लहराने से भ. . . chhattisgarhMon, 20 Jan 2014 07:49 PM (IST) htgvwh> YlYmgqytRo awltJ fUtu ˜ufUh stude ytih mkdXl Fubu fuU cea stuh ytsbtRN NwÁ ntu dRo ni> =tultü ne dwx m=ôg;t yrCgtl bü swxu ýY nî> YlYmgqytRo awltJ fUbuxe lu m=ôg;t yrCgtl fUe ;theF 15 mu c\ZtfUh 20 slJhe fUh =e. . . chhattisgarhMon, 13 Jan 2014 11:54 PM (IST) जेएनयू के छात्रसंघ अध्यक्ष अकबर चौधरी और संयुक्त सचिव सरफराज पर जेएनयू की ही एक छात्रा ने यौन शोषण का आरोप लगाया है। delhi ncrFri, 10 Jan 2014 07:24 PM (IST) शोभन सरकार के शिष्य और प्रवक्ता स्वामी ओम के बारे में नया खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि ओम पहले कांग्रेस पार्टी से जुड़े थे। उन्होंने हालही में भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेद्र मोदी को कानपुर म. . . nationalTue, 22 Oct 2013 07:22 PM (IST)
राहुल गांधी कांग्रेस को दूर से छूने से भी घबराते हैं। जैसे कि कांग्रेस कोई 'बर्र का छत्ता' हो। -श्रवण गर्गeditorialWed, उनतीस जनवरी दो हज़ार चौदह ग्यारह:चौदह AM एनएसयूआई प्रदेश अध्यक्ष विपिन वानखेड़े ने बड़े नेताओं को लिया आड़े हाथों। वहीं एक प्रदेश सचिव ने कहा कांग्रेस मोदी को टारगेट नहीं कर रही। madhya pradeshFri, चौबीस जनवरी दो हज़ार चौदह चार:अट्ठारह PM एनएसयूआई चुनाव में इस बार प्रदेश अध्यक्ष देवेन्द्र यादव और उपाध्यक्ष सुबोध हरितवाल चुनाव नहीं लड़ेंगे। देवेन्द्र यादव संगठन गुट से तो सुबोध हरितवाल जोगी खेमे से जुड़े हुए हैं। चुनाव नहीं लड़ने का दोनों ने अलग-अलग तर्क दिया . . . chhattisgarhThu, तेईस जनवरी दो हज़ार चौदह एक:ग्यारह AM एनएसयूआई में सदस्यता अभियान समाप्त हो गया है। सदस्यता अभियान में जमा हुए फार्म की स्क्रूटनी और बार कोडिंग के बाद आंकड़े जारी किए जाएंगे। माना जा रहा है कि फरवरी प्रथम सप्ताह में एनएसयूआई की चुनावी प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। . . . chhattisgarhTue, इक्कीस जनवरी दो हज़ार चौदह एक:चौंतीस AM बिलासपुर । प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नवनियुक्त अध्यक्ष भूपेश बघेल सोमवार शाम कांग्रेसियों की बैठक ले रहे थे। इस दौरान बाहर एनएसयूआई के दो गुटों में जमकर मारपीट व गाली-गलौज हुई। यही नहीं, कार्यकर्ता चाकू लहराने से भ. . . chhattisgarhMon, बीस जनवरी दो हज़ार चौदह नौ:उन्नीस PM बिलासपुर । प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नवनियुक्त अध्यक्ष भूपेश बघेल सोमवार शाम कांग्रेसियों की बैठक ले रहे थे। इस दौरान बाहर एनएसयूआई के दो गुटों में जमकर मारपीट व गाली-गलौज हुई। यही नहीं, कार्यकर्ता चाकू लहराने से भ. . . chhattisgarhMon, बीस जनवरी दो हज़ार चौदह सात:उनचास PM htgvwh> YlYmgqytRo awltJ fUtu ˜ufUh stude ytih mkdXl Fubu fuU cea stuh ytsbtRN NwÁ ntu dRo ni> =tultü ne dwx m=ôg;t yrCgtl bü swxu ýY nî> YlYmgqytRo awltJ fUbuxe lu m=ôg;t yrCgtl fUe ;theF पंद्रह mu c\ZtfUh बीस slJhe fUh =e. . . chhattisgarhMon, तेरह जनवरी दो हज़ार चौदह ग्यारह:चौवन PM जेएनयू के छात्रसंघ अध्यक्ष अकबर चौधरी और संयुक्त सचिव सरफराज पर जेएनयू की ही एक छात्रा ने यौन शोषण का आरोप लगाया है। delhi ncrFri, दस जनवरी दो हज़ार चौदह सात:चौबीस PM शोभन सरकार के शिष्य और प्रवक्ता स्वामी ओम के बारे में नया खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि ओम पहले कांग्रेस पार्टी से जुड़े थे। उन्होंने हालही में भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेद्र मोदी को कानपुर म. . . nationalTue, बाईस अक्टूबर दो हज़ार तेरह सात:बाईस PM
प्रिलिम्स के लियेः मौलिक कर्त्तव्य। मेन्स के लियेः मौलिक कर्तव्यों का महत्त्व, स्वर्ण सिंह समिति, मौलिक कर्त्तव्यों को लागू करना। चर्चा में क्यों? हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने व्यापक, अच्छी तरह से परिभाषित कानूनों के माध्यम से देशभक्ति और राष्ट्र की एकता सहित नागरिकों के मौलिक कर्त्तव्यों को लागू करने के लिये एक याचिका का जवाब देने हेतु केंद्र और राज्यों को नोटिस जारी किया। - मौलिक कर्त्तव्यों को संविधान के अनुच्छेद 51A (भाग IVA) के तहत निर्दिष्ट किया गया है, ये देश के आदर्शों को बनाए रखने और इसके विकास में योगदान करने का प्रयास करते हैं। मौलिक कर्त्तव्यः - मौलिक कर्तव्यों का विचार रूस के संविधान (तत्कालीन सोवियत संघ) से प्रेरित है। - इन्हें 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों पर संविधान के भाग IV-A में शामिल किया गया था। - मूल रूप से मौलिक कर्त्तव्यों की संख्या 10 थी, बाद में 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 के माध्यम से एक और कर्तव्य जोड़ा गया था। - राज्य के नीति निदेशक तत्त्वों की तरह, मौलिक कर्तव्य भी प्रकृति में गैर-न्यायिक हैं। - मौलिक कर्त्तव्यों की सूचीः - संविधान का पालन करें और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रध्वज एवं राष्ट्रीय गान का आदर करें। - स्वतंत्रता के लिये राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को हृदय में संजोये रखें और उनका पालन करें। - भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करें तथा उसे अक्षुण्ण रखें। - देश की रक्षा करें और आह्वान किये जाने पर राष्ट्र की सेवा करें। - भारत के सभी लोगों में समरसता और समान भातृत्व की भावना का निर्माण करें जो धर्म, भाषा व प्रदेश या वर्ग आधारित सभी प्रकार के भेदभाव से परे हो, ऐसी प्रथाओं का त्याग करें जो स्त्रियों के सम्मान के विरुद्ध हैं। - हमारी सामासिक संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्त्व समझें और उसका परिरक्षण करें। - प्राकृतिक पर्यावरण जिसके अंतर्गत वन, झील, नदी और वन्यजीव आते हैं, की रक्षा और संवर्द्धन करें तथा प्राणीमात्र के लिये दया भाव रखें। - वैज्ञानिक दृष्टिकोण से मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करें। - सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखें और हिंसा से दूर रहें। - व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत् प्रयास करें जिससे राष्ट्र प्रगति की और निरंतर बढ़ते हुए उपलब्धि की नई ऊँचाइयों को छू ले। - छह से चौदह वर्ष की आयु के बीच के अपने बच्चे को शिक्षा के अवसर प्रदान करना (86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा जोड़ा गया)। - अधिकार और कर्तव्य परस्पर संबंधित हैं। - मौलिक कर्तव्य देश के नागरिकों के लिये एक प्रकार से सचेतक का कार्य करते हैं, यद्यपि संविधान ने उन्हें विशेष रूप से कुछ मौलिक अधिकार प्रदान किये हैं, इसके लिये नागरिकों को लोकतांत्रिक आचरण एवं लोकतांत्रिक व्यवहार के बुनियादी मानदंडों का पालन करने की भी आवश्यकता है। - जो राष्ट्र का अपमान करते हैं, उन लोगों की असामाजिक गतिविधियों जैसे- झंडा जलाना, सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट करना या सार्वजनिक शांति भंग करना आदि के खिलाफ ये कर्तव्य चेतावनी के रूप में काम करते हैं। - ये अनुशासन और राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता की भावना को बढ़ावा देने में मदद करते हैं। ये केवल दर्शकों के बजाय नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से राष्ट्रीय लक्ष्यों को साकार करने में मदद करते हैं। - ये कानून की संवैधानिकता का निर्धारण करने में न्यायालय की सहायता करते हैं। उदाहरण के लिये विधायिकाओं द्वारा पारित कोई भी कानून, जब कानून की संवैधानिक वैधता के लिये न्यायालय में ले जाया जाता है और यदि वह किसी मौलिक कर्तव्य को बढ़ावा दे रहा है, तो ऐसे कानून को उचित माना जाएगा। मौलिक कर्तव्यों को कानूनी रूप से लागू करने की आवश्यकताः - प्राचीन काल से ही भारतीय समाज में शास्त्रों के अनुसार व्यक्ति के 'कार्तव्य' पर बल दिया जाता रहा है। - ये शास्त्र समाज, देश और विशेष रूप से अपने माता-पिता के प्रति कर्तव्यों पर बल देते हैं। - गीता और रामायण लोगों को अपने अधिकारों की परवाह किये बिना कर्तव्यों का पालन करने का आदेश देते हैं। - तत्कालीन सोवियत संघ के संविधान में अधिकारों और कर्तव्यों को समान स्तर पर रखा गया था। - कम-से-कम कुछ मौलिक कर्तव्यों को कानूनी रूप से लागू करने की तत्काल आवश्यकता है। - उदाहरण के लिये भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को बनाए रखने तथा भारत की रक्षा, राष्ट्रवाद की भावना का प्रसार करने तथा भारत की एकता को बनाए रखने के लिये देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देने संबंधी मौलिक कर्तव्य। - चीन के एक महाशक्ति के रूप में उभरने के बाद ये मौलिक कर्तव्य और भी महत्त्वपूर्ण हो गए हैं। - नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों पर वर्मा समिति (1999) ने कुछ मौलिक कर्तव्यों के कार्यान्वयन हेतु कानूनी प्रावधानों का समर्थन किया। समिति द्वारा प्रस्तावित कुछ प्रावधान निम्नलिखित हैंः - राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के तहत कोई भी व्यक्ति राष्ट्रीय ध्वज, भारत के संविधान और राष्ट्रगान का अनादर नहीं कर सकता है। - नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम (1955) जाति और धर्म से संबंधित किसी भी अपराध के मामले में दंड का प्रावधान करता है। - याचिका में तर्क दिया गया था कि मौलिक कर्तव्यों का पालन न करने पर भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानता) 19 (भाषण की स्वतंत्रता के संबंध में कुछ अधिकारों का संरक्षण) और 21 (जीवन का अधिकार) के तहत प्रदान किये गए गारंटीकृत मौलिक अधिकारों पर सीधा असर पड़ता है। - उदाहरण के लिये भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में प्रदर्शनकारियों द्वारा विरोध की नई अवैध प्रवृत्ति के कारण मौलिक कर्तव्यों को लागू करने की आवश्यकता को महसूस किया जाता है। मौलिक कर्तव्यों पर सर्वोच्च न्यायालय का रुखः - रंगनाथ मिश्रा निर्णय (2003) में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि मौलिक कर्तव्यों को न केवल कानूनी प्रतिबंधों से बल्कि सामाजिक प्रतिबंधों द्वारा भी लागू किया जाना चाहिये। - एम्स छात्र संघ बनाम एम्स मामले (2001) में, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यह माना गया था कि मौलिक कर्तव्य मौलिक अधिकारों की तरह समान रूप से महत्त्वपूर्ण हैं। - हालांँकि मौलिक कर्तव्यों को मौलिक अधिकारों की तरह लागू नहीं किया जा सकता है लेकिन उन्हें भाग IV A में कर्तव्यों के रूप में नज़रअंदाज भी नहीं किया जा सकता है। - मौलिक कर्तव्यों के "उचित संवेदीकरण, पूर्ण संचालन और प्रवर्तनीयता" हेतु एक समान नीति की आवश्यकता है जो "नागरिकों को ज़िम्मेदार बनाने में काफी मददगार साबित होगी"।
प्रिलिम्स के लियेः मौलिक कर्त्तव्य। मेन्स के लियेः मौलिक कर्तव्यों का महत्त्व, स्वर्ण सिंह समिति, मौलिक कर्त्तव्यों को लागू करना। चर्चा में क्यों? हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने व्यापक, अच्छी तरह से परिभाषित कानूनों के माध्यम से देशभक्ति और राष्ट्र की एकता सहित नागरिकों के मौलिक कर्त्तव्यों को लागू करने के लिये एक याचिका का जवाब देने हेतु केंद्र और राज्यों को नोटिस जारी किया। - मौलिक कर्त्तव्यों को संविधान के अनुच्छेद इक्यावन एम्पीयर के तहत निर्दिष्ट किया गया है, ये देश के आदर्शों को बनाए रखने और इसके विकास में योगदान करने का प्रयास करते हैं। मौलिक कर्त्तव्यः - मौलिक कर्तव्यों का विचार रूस के संविधान से प्रेरित है। - इन्हें बयालीसवें संविधान संशोधन अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ छिहत्तर द्वारा स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों पर संविधान के भाग IV-A में शामिल किया गया था। - मूल रूप से मौलिक कर्त्तव्यों की संख्या दस थी, बाद में छियासीवें संविधान संशोधन अधिनियम, दो हज़ार दो के माध्यम से एक और कर्तव्य जोड़ा गया था। - राज्य के नीति निदेशक तत्त्वों की तरह, मौलिक कर्तव्य भी प्रकृति में गैर-न्यायिक हैं। - मौलिक कर्त्तव्यों की सूचीः - संविधान का पालन करें और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रध्वज एवं राष्ट्रीय गान का आदर करें। - स्वतंत्रता के लिये राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को हृदय में संजोये रखें और उनका पालन करें। - भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करें तथा उसे अक्षुण्ण रखें। - देश की रक्षा करें और आह्वान किये जाने पर राष्ट्र की सेवा करें। - भारत के सभी लोगों में समरसता और समान भातृत्व की भावना का निर्माण करें जो धर्म, भाषा व प्रदेश या वर्ग आधारित सभी प्रकार के भेदभाव से परे हो, ऐसी प्रथाओं का त्याग करें जो स्त्रियों के सम्मान के विरुद्ध हैं। - हमारी सामासिक संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्त्व समझें और उसका परिरक्षण करें। - प्राकृतिक पर्यावरण जिसके अंतर्गत वन, झील, नदी और वन्यजीव आते हैं, की रक्षा और संवर्द्धन करें तथा प्राणीमात्र के लिये दया भाव रखें। - वैज्ञानिक दृष्टिकोण से मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करें। - सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखें और हिंसा से दूर रहें। - व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत् प्रयास करें जिससे राष्ट्र प्रगति की और निरंतर बढ़ते हुए उपलब्धि की नई ऊँचाइयों को छू ले। - छह से चौदह वर्ष की आयु के बीच के अपने बच्चे को शिक्षा के अवसर प्रदान करना । - अधिकार और कर्तव्य परस्पर संबंधित हैं। - मौलिक कर्तव्य देश के नागरिकों के लिये एक प्रकार से सचेतक का कार्य करते हैं, यद्यपि संविधान ने उन्हें विशेष रूप से कुछ मौलिक अधिकार प्रदान किये हैं, इसके लिये नागरिकों को लोकतांत्रिक आचरण एवं लोकतांत्रिक व्यवहार के बुनियादी मानदंडों का पालन करने की भी आवश्यकता है। - जो राष्ट्र का अपमान करते हैं, उन लोगों की असामाजिक गतिविधियों जैसे- झंडा जलाना, सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट करना या सार्वजनिक शांति भंग करना आदि के खिलाफ ये कर्तव्य चेतावनी के रूप में काम करते हैं। - ये अनुशासन और राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता की भावना को बढ़ावा देने में मदद करते हैं। ये केवल दर्शकों के बजाय नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से राष्ट्रीय लक्ष्यों को साकार करने में मदद करते हैं। - ये कानून की संवैधानिकता का निर्धारण करने में न्यायालय की सहायता करते हैं। उदाहरण के लिये विधायिकाओं द्वारा पारित कोई भी कानून, जब कानून की संवैधानिक वैधता के लिये न्यायालय में ले जाया जाता है और यदि वह किसी मौलिक कर्तव्य को बढ़ावा दे रहा है, तो ऐसे कानून को उचित माना जाएगा। मौलिक कर्तव्यों को कानूनी रूप से लागू करने की आवश्यकताः - प्राचीन काल से ही भारतीय समाज में शास्त्रों के अनुसार व्यक्ति के 'कार्तव्य' पर बल दिया जाता रहा है। - ये शास्त्र समाज, देश और विशेष रूप से अपने माता-पिता के प्रति कर्तव्यों पर बल देते हैं। - गीता और रामायण लोगों को अपने अधिकारों की परवाह किये बिना कर्तव्यों का पालन करने का आदेश देते हैं। - तत्कालीन सोवियत संघ के संविधान में अधिकारों और कर्तव्यों को समान स्तर पर रखा गया था। - कम-से-कम कुछ मौलिक कर्तव्यों को कानूनी रूप से लागू करने की तत्काल आवश्यकता है। - उदाहरण के लिये भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को बनाए रखने तथा भारत की रक्षा, राष्ट्रवाद की भावना का प्रसार करने तथा भारत की एकता को बनाए रखने के लिये देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देने संबंधी मौलिक कर्तव्य। - चीन के एक महाशक्ति के रूप में उभरने के बाद ये मौलिक कर्तव्य और भी महत्त्वपूर्ण हो गए हैं। - नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों पर वर्मा समिति ने कुछ मौलिक कर्तव्यों के कार्यान्वयन हेतु कानूनी प्रावधानों का समर्थन किया। समिति द्वारा प्रस्तावित कुछ प्रावधान निम्नलिखित हैंः - राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर के तहत कोई भी व्यक्ति राष्ट्रीय ध्वज, भारत के संविधान और राष्ट्रगान का अनादर नहीं कर सकता है। - नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम जाति और धर्म से संबंधित किसी भी अपराध के मामले में दंड का प्रावधान करता है। - याचिका में तर्क दिया गया था कि मौलिक कर्तव्यों का पालन न करने पर भारत के संविधान के अनुच्छेद चौदह उन्नीस और इक्कीस के तहत प्रदान किये गए गारंटीकृत मौलिक अधिकारों पर सीधा असर पड़ता है। - उदाहरण के लिये भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में प्रदर्शनकारियों द्वारा विरोध की नई अवैध प्रवृत्ति के कारण मौलिक कर्तव्यों को लागू करने की आवश्यकता को महसूस किया जाता है। मौलिक कर्तव्यों पर सर्वोच्च न्यायालय का रुखः - रंगनाथ मिश्रा निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि मौलिक कर्तव्यों को न केवल कानूनी प्रतिबंधों से बल्कि सामाजिक प्रतिबंधों द्वारा भी लागू किया जाना चाहिये। - एम्स छात्र संघ बनाम एम्स मामले में, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यह माना गया था कि मौलिक कर्तव्य मौलिक अधिकारों की तरह समान रूप से महत्त्वपूर्ण हैं। - हालांँकि मौलिक कर्तव्यों को मौलिक अधिकारों की तरह लागू नहीं किया जा सकता है लेकिन उन्हें भाग IV A में कर्तव्यों के रूप में नज़रअंदाज भी नहीं किया जा सकता है। - मौलिक कर्तव्यों के "उचित संवेदीकरण, पूर्ण संचालन और प्रवर्तनीयता" हेतु एक समान नीति की आवश्यकता है जो "नागरिकों को ज़िम्मेदार बनाने में काफी मददगार साबित होगी"।
'यह क्या बात है काका, वकील जगदीश एकाएक बिना सूचना दिए जङ्गल में क्यों चले गये ?" 'क्या बताऊँ बिटिया - गले को साफ करके दीवान ने कहना शुरू किया -- अभी तक तुम्हें बताया नहीं, जगदीश छद्मनाम है । यह आदमी बड़ा ही धोखाबाज़ जालिया है। असल में यह वही विजयगढ़ का आयारा कुमार दीपनारायण' अचानक जैसे रङ्गमहल फिर जगमगा उठा हो, उसी प्रकार दीवान जी के इस शब्द पर चन्द्रा का मन-मन्दिर भलभला उठा । आश्चर्य, आनन्दातिरेक, और शंका से उद्विग्न हो उठी। पर, शीघ्र ही अपने को सम्भाल कर बोली-'तब क्या करना चाहिये काका ? ऐसे व्यक्ति -- दीवान ने कुछ और ही समझ कर, बात काट कर बोला 'हाँ बेटा, ऐसे व्यक्ति का क्या ठिकाना-क्या कर बैठे १ मुझे तो सन्देह हो रहा है कि कहीं वह जङ्गलियों के साथ पड़यन्त्र रचकर राज्य के विरुद्ध कोई भारी उपद्रव न खड़ा करें। क्योंकि जङ्गी सरदार से उसका मेल हो ही चुका है। मेरी राय में, उसकी गिरफ्तारी के लिये फौरन ही सैनिक भेजे जायँ ।" रानी ने उत्तर दिया- 'नहीं नहीं काका, यह उचित न होगा। हमलोग चलें वहाँ शिकार खेलने आदमियों का काफी इन्तजाम कर लीजिय । जैसा मौका देखेंगे, उचित कार्यवाही की जायेगी ।। दीवान क्षणभर सांच कर बोलाapp
'यह क्या बात है काका, वकील जगदीश एकाएक बिना सूचना दिए जङ्गल में क्यों चले गये ?" 'क्या बताऊँ बिटिया - गले को साफ करके दीवान ने कहना शुरू किया -- अभी तक तुम्हें बताया नहीं, जगदीश छद्मनाम है । यह आदमी बड़ा ही धोखाबाज़ जालिया है। असल में यह वही विजयगढ़ का आयारा कुमार दीपनारायण' अचानक जैसे रङ्गमहल फिर जगमगा उठा हो, उसी प्रकार दीवान जी के इस शब्द पर चन्द्रा का मन-मन्दिर भलभला उठा । आश्चर्य, आनन्दातिरेक, और शंका से उद्विग्न हो उठी। पर, शीघ्र ही अपने को सम्भाल कर बोली-'तब क्या करना चाहिये काका ? ऐसे व्यक्ति -- दीवान ने कुछ और ही समझ कर, बात काट कर बोला 'हाँ बेटा, ऐसे व्यक्ति का क्या ठिकाना-क्या कर बैठे एक मुझे तो सन्देह हो रहा है कि कहीं वह जङ्गलियों के साथ पड़यन्त्र रचकर राज्य के विरुद्ध कोई भारी उपद्रव न खड़ा करें। क्योंकि जङ्गी सरदार से उसका मेल हो ही चुका है। मेरी राय में, उसकी गिरफ्तारी के लिये फौरन ही सैनिक भेजे जायँ ।" रानी ने उत्तर दिया- 'नहीं नहीं काका, यह उचित न होगा। हमलोग चलें वहाँ शिकार खेलने आदमियों का काफी इन्तजाम कर लीजिय । जैसा मौका देखेंगे, उचित कार्यवाही की जायेगी ।। दीवान क्षणभर सांच कर बोलाapp
१ : समयं गोयम ! मा पमायए १ - दुमपत्तए पंडुयए जहा, निवडइ राइगणाण अच्चए । एवं मणुयाण जीवियं, समयं गोयम मा पमायए । उ० १० ११ जैसे वृक्ष के पत्ते पीले पड़ते हुए समय आने पर पृथ्वी पर झड़ जाते हैं उसी तरह मनुष्य जीवन भी ( आयु शेप होने पर समाप्त हो जाता है) । हे जीव' ! समय' भरके लिए भी प्रमाद न कर । २ - कुसग्गे जह ओसविन्दुए, थोवं चिट्ठइ लम्बमाणए । एवं मणुयाण जीविर्य, समयं गोयम मा पमायए । जैसे कुशको नोक पर लटका हुआ ओस विडु कुछ ही समयके लिए टिकता है, वैसे ही मनुष्य जीवन भी । हे जीव ! समय भरके लिए भी प्रमाद न कर । १ -- मूलमें 'गोयम' - 'गौतम' शब्द है परन्तु यह उपदेश सबके प्रति समान रूप से लागू होनेसे अनुवाद में उसके स्थान पर 'जीव' शब्द का व्यवहार किया है । २ - कालका सबसे छोटा अंश ३ - इइ इत्तरियम्मि आउए, जीवियए बहुपच्चवायए । विहुणाहि रयं पुरे कडं, समयं गोयम मा पमायए ॥ आयु ऐसा ही नाशवान् और स्वरूप है और जीवनमें विघ्न बहुत हैं । पूर्व संचित कर्म-रूपी रजको शीघ्र दूर कर । हे जीव ! समय भरके लिए भी प्रमाद न कर । ४ - दुल्लहे खलु माणुसे भवे, चिरकालेण वि सव्वपाणिणं । गाढा य विवाग कम्मुणो, समयं गोयम मा पनायए ।। उ०१०।४ निश्चय ही मनुष्य भव बहुत दुर्लभ है और सभी प्राणियोंको वह वहुत दीर्घकालके बाद मिलता है । कर्मों के फल बड़े गाढ़ - तीव्र होते हे जीव ! समय भरके लिए भी प्रमाद न कर । ५ - परिजूरइ ते सरीरयं, केसा पण्डुरया हुवन्ति ते । से सोयबले' य हायई, समयं गोयम मा पमायए । उ० १०।२१-२५ दिन दिन तेरा शरीर जीर्ण होता जा रहा है, तेरे केश पककर श्वेत होते जा रहे हैं और तेरी इन्द्रियों ( कान, आंख, नाक, जीभ और शरीर ) का वल घटता जा रहा है । हे जीव ! तू समय भरके लिए भी प्रमाद न कर ! १ -'सोयवल' - श्रोतेन्द्रिय बल । इसके आगेकी २२ से लेकर २५ वीं गाथा में क्रमशः चक्षु, नाक, जिह्वा और शरीर बलके द्योतक शब्दों का प्रयोग है। संक्षेपके लिए २१ वीं गायाके अनुवाद उपलक्षण रूपसे सर्व इन्द्रियोंके नाम दे दिए हैं । प्रवचन : मापनायए ६ - परिजूरइ ते सरीरयं, केसा पण्डुरया हवन्ति ते । से सव्ववले य हायई, समयं गोयम मा पमायए । उ० १० । २६ जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, तेरा शरीर जीर्ण होता जा रहा है । तेरे केश पक रहे हैं और सर्वबल क्षीण होता जा रहा है । हे जीव ! समय भरके लिए भी प्रमाद न कर । ७ - अरई गण्डं विसूइया, आयंका विविहा फुसन्ति ते । विहडइ विद्धं सइ ते सरीरयं, समयं गोयम मा पमायए ।। उ०१०।२७ असूचि फोड़े-फुन्सी और विसूचिका आदि नाना प्रकारके आतंक तेरे शरीरको स्पर्श कर रहे हैं और उसे वलहीन कर उसको ध्वंस कर रहे हैं । हे जीव ! समय भरके लिए भी प्रमाद न कर । ८ - वोच्छिन्द सिणेहमप्पणो, कुमुयं सारइयं व पाणियं । से सव्व सिणेहवज्जिए, समयं गोयम मा पमायए ॥ उ० १० । २८ जैसे कमल शरद ऋतुके निर्मल जल से भी निर्लिप्त रहता है वैसे ही तू अपनी सारी आसक्तियोंको छोड़, सारे स्नेह बंधन छिटका दे । हे जीव ! समय भरके लिए भी प्रमाद न कर । ६ - अवसोहिय कण्टगापहं, ओइण्णोऽसि पहं महालयं । गच्छसि मग्गं विसोहिया, समयं गोयम मा पमायए । उ० १० ।३२ - कमल कांदे में उत्पन्न होकर भी उससे निर्लिप्त रहता है । कादे से ही नहीं शीत कालके विशेष निर्मल जलसे भी वह लिप्त नहीं होता । इस विशेषताका सहारा लेकर मुमुक्षको अल्प आसक्तिके त्यागका उपदेश दिया गया है । कंटकवाले पथको छोड़कर तू इस चौड़े पथ पर आया है । इस साफ घोरी मांर्गका ध्यान रखते हुए चल । के लिए भी प्रमाद न कर ! १० - अवले जह भारवाहए, मा मग्गे विसमेऽवगाहिया । . पच्छा पच्छाणुतावए, समयं गोयम मा पमायए । उ० १० । ३३ जैसे निर्वल भारवाहक विपम मार्ग में पड़कर वादमें पछताता है वैसा ही कहीं तेरे साथ न हो । हे जीव ! तूं समय मात्रके लिए भी प्रमाद न कर । ११ - तिण्णो हु सि अण्णवं महं, किं पुण चिट्ठसि तीरमागओ । अभितुर पारं गमत्तिए, समयं गोयम मा पमायए ।। उ० १० । ३४ महान समुद्र तो तू तिर चुका । अब किनारे श्राकर क्यों स्थिर है ? त्वरासे पार पहुंच । हे जीव ! समय भरके लिए भी प्रमाद न कर । १२ - अकलेवरसेणि उस्सिया, सिद्धि गोयम लोयं गच्छसि । खेमं च सिवं अणुत्तरं, समय गोयम मा पमायए । उं० १० १३५ सिद्धं पुरुषोंकी श्रेणी के अनुसरणसे तू क्षेम और कल्याणयुक्त उत्तम सिद्धलोगको प्राप्त करेगा । हे जीव ! एक समय भरके लिए भी प्रसाद न कर । २ : दुर्लभ संयोग १ - चत्तारि परमंगाणि, दुलहाणीह जन्तुणो । माणुसतं सुई सद्धा, संजमम्मि य वीरियं ॥ सार प्राणियोंको चार परम अंग - उत्तम संयोग- अत्यन्त दुर्लभ हैं : ( १ ) मनुष्य-भव - ( २ ) धर्म श्रुति - धर्मका सुनना ( ३ ) धर्म में श्रद्धा और ( ४ ) संयममें - धर्म में - वीर्य - पराक्रम । - समावन्नाणं संसारे, नाणागोत्तासु जाइसु । कम्मा नाणाविहा कट्टु, पुढो विस्संभया पया ।। यह विश्व नाना प्रजा - प्राणियोंसे भरा हुआ है । इस संसार में ये प्राणी नाना प्रकारके कर्मोंसे अलग-अलग जाति और गोत्रों में उत्पन्न हैं । ३ - एगया देवलोपसु, नरएसु वि एगया । एगया आसुरं कार्य, आहाकम्मेहिं गच्छई ।। उ० ३।३ १ - उत्तराध्ययन सूत्रके १० वें श्रध्ययनकी १६ तथा १७ वीं गाया में 'आर्यत्व' और 'अहोनपंचेन्द्रियता' - 'पांचों इन्द्रियोंकी सम्पूर्णता' इन दोनोंको भी दुर्लभ बताया गया है और इनको 'मनुष्य भव' के वाद और 'धर्मश्रुति' के पहले स्थान दिया है ।
एक : समयं गोयम ! मा पमायए एक - दुमपत्तए पंडुयए जहा, निवडइ राइगणाण अच्चए । एवं मणुयाण जीवियं, समयं गोयम मा पमायए । उशून्य दस ग्यारह जैसे वृक्ष के पत्ते पीले पड़ते हुए समय आने पर पृथ्वी पर झड़ जाते हैं उसी तरह मनुष्य जीवन भी । हे जीव' ! समय' भरके लिए भी प्रमाद न कर । दो - कुसग्गे जह ओसविन्दुए, थोवं चिट्ठइ लम्बमाणए । एवं मणुयाण जीविर्य, समयं गोयम मा पमायए । जैसे कुशको नोक पर लटका हुआ ओस विडु कुछ ही समयके लिए टिकता है, वैसे ही मनुष्य जीवन भी । हे जीव ! समय भरके लिए भी प्रमाद न कर । एक -- मूलमें 'गोयम' - 'गौतम' शब्द है परन्तु यह उपदेश सबके प्रति समान रूप से लागू होनेसे अनुवाद में उसके स्थान पर 'जीव' शब्द का व्यवहार किया है । दो - कालका सबसे छोटा अंश तीन - इइ इत्तरियम्मि आउए, जीवियए बहुपच्चवायए । विहुणाहि रयं पुरे कडं, समयं गोयम मा पमायए ॥ आयु ऐसा ही नाशवान् और स्वरूप है और जीवनमें विघ्न बहुत हैं । पूर्व संचित कर्म-रूपी रजको शीघ्र दूर कर । हे जीव ! समय भरके लिए भी प्रमाद न कर । चार - दुल्लहे खलु माणुसे भवे, चिरकालेण वि सव्वपाणिणं । गाढा य विवाग कम्मुणो, समयं गोयम मा पनायए ।। उदस।चार निश्चय ही मनुष्य भव बहुत दुर्लभ है और सभी प्राणियोंको वह वहुत दीर्घकालके बाद मिलता है । कर्मों के फल बड़े गाढ़ - तीव्र होते हे जीव ! समय भरके लिए भी प्रमाद न कर । पाँच - परिजूरइ ते सरीरयं, केसा पण्डुरया हुवन्ति ते । से सोयबले' य हायई, समयं गोयम मा पमायए । उशून्य दस।इक्कीस-पच्चीस दिन दिन तेरा शरीर जीर्ण होता जा रहा है, तेरे केश पककर श्वेत होते जा रहे हैं और तेरी इन्द्रियों का वल घटता जा रहा है । हे जीव ! तू समय भरके लिए भी प्रमाद न कर ! एक -'सोयवल' - श्रोतेन्द्रिय बल । इसके आगेकी बाईस से लेकर पच्चीस वीं गाथा में क्रमशः चक्षु, नाक, जिह्वा और शरीर बलके द्योतक शब्दों का प्रयोग है। संक्षेपके लिए इक्कीस वीं गायाके अनुवाद उपलक्षण रूपसे सर्व इन्द्रियोंके नाम दे दिए हैं । प्रवचन : मापनायए छः - परिजूरइ ते सरीरयं, केसा पण्डुरया हवन्ति ते । से सव्ववले य हायई, समयं गोयम मा पमायए । उशून्य दस । छब्बीस जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, तेरा शरीर जीर्ण होता जा रहा है । तेरे केश पक रहे हैं और सर्वबल क्षीण होता जा रहा है । हे जीव ! समय भरके लिए भी प्रमाद न कर । सात - अरई गण्डं विसूइया, आयंका विविहा फुसन्ति ते । विहडइ विद्धं सइ ते सरीरयं, समयं गोयम मा पमायए ।। उदस।सत्ताईस असूचि फोड़े-फुन्सी और विसूचिका आदि नाना प्रकारके आतंक तेरे शरीरको स्पर्श कर रहे हैं और उसे वलहीन कर उसको ध्वंस कर रहे हैं । हे जीव ! समय भरके लिए भी प्रमाद न कर । आठ - वोच्छिन्द सिणेहमप्पणो, कुमुयं सारइयं व पाणियं । से सव्व सिणेहवज्जिए, समयं गोयम मा पमायए ॥ उशून्य दस । अट्ठाईस जैसे कमल शरद ऋतुके निर्मल जल से भी निर्लिप्त रहता है वैसे ही तू अपनी सारी आसक्तियोंको छोड़, सारे स्नेह बंधन छिटका दे । हे जीव ! समय भरके लिए भी प्रमाद न कर । छः - अवसोहिय कण्टगापहं, ओइण्णोऽसि पहं महालयं । गच्छसि मग्गं विसोहिया, समयं गोयम मा पमायए । उशून्य दस ।बत्तीस - कमल कांदे में उत्पन्न होकर भी उससे निर्लिप्त रहता है । कादे से ही नहीं शीत कालके विशेष निर्मल जलसे भी वह लिप्त नहीं होता । इस विशेषताका सहारा लेकर मुमुक्षको अल्प आसक्तिके त्यागका उपदेश दिया गया है । कंटकवाले पथको छोड़कर तू इस चौड़े पथ पर आया है । इस साफ घोरी मांर्गका ध्यान रखते हुए चल । के लिए भी प्रमाद न कर ! दस - अवले जह भारवाहए, मा मग्गे विसमेऽवगाहिया । . पच्छा पच्छाणुतावए, समयं गोयम मा पमायए । उशून्य दस । तैंतीस जैसे निर्वल भारवाहक विपम मार्ग में पड़कर वादमें पछताता है वैसा ही कहीं तेरे साथ न हो । हे जीव ! तूं समय मात्रके लिए भी प्रमाद न कर । ग्यारह - तिण्णो हु सि अण्णवं महं, किं पुण चिट्ठसि तीरमागओ । अभितुर पारं गमत्तिए, समयं गोयम मा पमायए ।। उशून्य दस । चौंतीस महान समुद्र तो तू तिर चुका । अब किनारे श्राकर क्यों स्थिर है ? त्वरासे पार पहुंच । हे जीव ! समय भरके लिए भी प्रमाद न कर । बारह - अकलेवरसेणि उस्सिया, सिद्धि गोयम लोयं गच्छसि । खेमं च सिवं अणुत्तरं, समय गोयम मा पमायए । उंशून्य दस एक सौ पैंतीस सिद्धं पुरुषोंकी श्रेणी के अनुसरणसे तू क्षेम और कल्याणयुक्त उत्तम सिद्धलोगको प्राप्त करेगा । हे जीव ! एक समय भरके लिए भी प्रसाद न कर । दो : दुर्लभ संयोग एक - चत्तारि परमंगाणि, दुलहाणीह जन्तुणो । माणुसतं सुई सद्धा, संजमम्मि य वीरियं ॥ सार प्राणियोंको चार परम अंग - उत्तम संयोग- अत्यन्त दुर्लभ हैं : मनुष्य-भव - धर्म श्रुति - धर्मका सुनना धर्म में श्रद्धा और संयममें - धर्म में - वीर्य - पराक्रम । - समावन्नाणं संसारे, नाणागोत्तासु जाइसु । कम्मा नाणाविहा कट्टु, पुढो विस्संभया पया ।। यह विश्व नाना प्रजा - प्राणियोंसे भरा हुआ है । इस संसार में ये प्राणी नाना प्रकारके कर्मोंसे अलग-अलग जाति और गोत्रों में उत्पन्न हैं । तीन - एगया देवलोपसु, नरएसु वि एगया । एगया आसुरं कार्य, आहाकम्मेहिं गच्छई ।। उशून्य तीन।तीन एक - उत्तराध्ययन सूत्रके दस वें श्रध्ययनकी सोलह तथा सत्रह वीं गाया में 'आर्यत्व' और 'अहोनपंचेन्द्रियता' - 'पांचों इन्द्रियोंकी सम्पूर्णता' इन दोनोंको भी दुर्लभ बताया गया है और इनको 'मनुष्य भव' के वाद और 'धर्मश्रुति' के पहले स्थान दिया है ।
बीते कुछ दिनों से राहत में गिरता हुआ तापमान और गुलाबी सर्दी लोगों को राहत दे रही थी लेकिन दिन की गर्मी और उमस लोगों को जमकर परेशान भी कर रही थी लेकिन अक्टूबर का महीना समाप्त होने से पहले ही अब दिन के तापमान में गिरावट के साथ लोगों को दिन में मामूली राहत मिलना प्रारम्भ हो गया है। बीते 24 घंटों प्रदेश के अधिकांश जिलों में दिन के तापमान में करीब 1 से 2 डिग्री तक गिरावट दर्ज की गई तो वहीं इस सीजन में पहली बार सवाई माधोपुर में दिन का तापमान 30 डिग्री से नीचे पहुंचते हुए 29. 3 डिग्री दर्ज किया गया। साथ ही रात के तापमान में गिरावट के साथ ही लोगों को अब रात में मामूली सर्दी का अहसास होने लगा है। प्रदेश में बीते 24 घंटों में दिन और रात के तापमान में गिरावट के साथ ही मामूली राहत मिली है। बीती रात 10. 9 डिग्री के साथ चित्तौड़गढ़ में जहां सबसे कम तापमान दर्ज किय गया तो वहीं 11 जिलों में रात का तापमान 15 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया। इसके साथ ही करीब आधा दर्जन जिलों में रात का तापमान 13 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया। रात के साथ ही दिन के तापमान में भी गिरावट होने से लोगों को गर्मी से राहत मिली हालांकि अभी भी करीब दर्जनभर जिलों में दिन का तापमान 34 डिग्री के पार दर्ज किया जा रहा है।
बीते कुछ दिनों से राहत में गिरता हुआ तापमान और गुलाबी सर्दी लोगों को राहत दे रही थी लेकिन दिन की गर्मी और उमस लोगों को जमकर परेशान भी कर रही थी लेकिन अक्टूबर का महीना समाप्त होने से पहले ही अब दिन के तापमान में गिरावट के साथ लोगों को दिन में मामूली राहत मिलना प्रारम्भ हो गया है। बीते चौबीस घंटाटों प्रदेश के अधिकांश जिलों में दिन के तापमान में करीब एक से दो डिग्री तक गिरावट दर्ज की गई तो वहीं इस सीजन में पहली बार सवाई माधोपुर में दिन का तापमान तीस डिग्री से नीचे पहुंचते हुए उनतीस. तीन डिग्री दर्ज किया गया। साथ ही रात के तापमान में गिरावट के साथ ही लोगों को अब रात में मामूली सर्दी का अहसास होने लगा है। प्रदेश में बीते चौबीस घंटाटों में दिन और रात के तापमान में गिरावट के साथ ही मामूली राहत मिली है। बीती रात दस. नौ डिग्री के साथ चित्तौड़गढ़ में जहां सबसे कम तापमान दर्ज किय गया तो वहीं ग्यारह जिलों में रात का तापमान पंद्रह डिग्री से नीचे दर्ज किया गया। इसके साथ ही करीब आधा दर्जन जिलों में रात का तापमान तेरह डिग्री से नीचे दर्ज किया गया। रात के साथ ही दिन के तापमान में भी गिरावट होने से लोगों को गर्मी से राहत मिली हालांकि अभी भी करीब दर्जनभर जिलों में दिन का तापमान चौंतीस डिग्री के पार दर्ज किया जा रहा है।
बिहार की राजधानी पटना से सटे नौबतपुर से सामने आये एक अजीबोगरीब मामले में दो प्रेमी जोड़े जब घर से भाग रहे थे, तभी जीआरपी ने उन्हें पकड़ लिया। इसके बाद जब उन्हें परिवार को सौंपा गया तो एक नयी कहानी निकलकर सामने आई। दरअसल, नौबतपुर के एक गांव को लड़के का इश्क रांग नंबर के जरिये शुरू हुआ था और फिर वह लड़की के साथ घर से भागने के लिए ट्रेन में जा बैठा था। दरअसल, पूरा मामला पटना से सटे नौबतपुर के खजुरी गांव का है। इसी गांव में रहने वाले अंकित नाम के लड़के को श्रेया राज नाम की लड़की से प्यार हुआ। प्यार भी कुछ ऐसे शुरू हुआ की उसने कुछ समय पहले किसी नंबर पर फोन किया था, लेकिन वह नंबर किसी लड़की का निकला। इसी दौरान दोनों में प्रेम शुरू हुआ तो उन्होंने जीने-मरने की कसमें खा लीं। अंकित कुमार ने अपनी प्रेमिका श्रेया राज से कहा कि वह किसी दूसरे शहर में जाकर शादी कर लेंगे। अंकित और श्रेया की पहली बातचीत साल 2021 में हुई थी। करीब एक साल तक वह एक-दूसरे से बात करते रहे और बात जिन्दगी साथ निभाने जा पहुंची थी। इसी क्रम में अंकित प्रेमिका श्रेया के साथ रेलवे स्टेशन जा पहुंचा। अंकित, गुजरात के सूरत शहर जाने वाली ट्रेन में श्रेया के साथ जा बैठा। ट्रेन में बैठकर यह जोड़ा मुगलसराय ही पहुंचा था कि किन्हीं वजहों से जीआरपी को इस जोड़े पर शक हुआ और उन्हें हिरासत में ले लिया गया। पूछताछ में अंकित और श्रेया ने पूरी कहानी बताई, जिसके बाद अंकित के पिता विक्रमादित्य शर्मा और श्रेया राज के पिता नवनीत शर्मा से बात की गई। फिर रेल पुलिस ने दोनों के परिजनों को बुलाकर उन्हें सौंप दिया। अंकित कुमार और श्रेया राज जब अपने-अपने परिजनों के साथ घर लौटे तो दोनों परिवारों में आपस में बातचीत हुई। परिजनों की बातचीत में दोनों पक्ष राजी हुए और अंकित-श्रेया की मंदिर में विधि- विधान से शादी करा दी गई। अब रांग नंबर से हुए प्यार के बाद दोनों के परिवारों द्वारा कराई गई यह शादी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
बिहार की राजधानी पटना से सटे नौबतपुर से सामने आये एक अजीबोगरीब मामले में दो प्रेमी जोड़े जब घर से भाग रहे थे, तभी जीआरपी ने उन्हें पकड़ लिया। इसके बाद जब उन्हें परिवार को सौंपा गया तो एक नयी कहानी निकलकर सामने आई। दरअसल, नौबतपुर के एक गांव को लड़के का इश्क रांग नंबर के जरिये शुरू हुआ था और फिर वह लड़की के साथ घर से भागने के लिए ट्रेन में जा बैठा था। दरअसल, पूरा मामला पटना से सटे नौबतपुर के खजुरी गांव का है। इसी गांव में रहने वाले अंकित नाम के लड़के को श्रेया राज नाम की लड़की से प्यार हुआ। प्यार भी कुछ ऐसे शुरू हुआ की उसने कुछ समय पहले किसी नंबर पर फोन किया था, लेकिन वह नंबर किसी लड़की का निकला। इसी दौरान दोनों में प्रेम शुरू हुआ तो उन्होंने जीने-मरने की कसमें खा लीं। अंकित कुमार ने अपनी प्रेमिका श्रेया राज से कहा कि वह किसी दूसरे शहर में जाकर शादी कर लेंगे। अंकित और श्रेया की पहली बातचीत साल दो हज़ार इक्कीस में हुई थी। करीब एक साल तक वह एक-दूसरे से बात करते रहे और बात जिन्दगी साथ निभाने जा पहुंची थी। इसी क्रम में अंकित प्रेमिका श्रेया के साथ रेलवे स्टेशन जा पहुंचा। अंकित, गुजरात के सूरत शहर जाने वाली ट्रेन में श्रेया के साथ जा बैठा। ट्रेन में बैठकर यह जोड़ा मुगलसराय ही पहुंचा था कि किन्हीं वजहों से जीआरपी को इस जोड़े पर शक हुआ और उन्हें हिरासत में ले लिया गया। पूछताछ में अंकित और श्रेया ने पूरी कहानी बताई, जिसके बाद अंकित के पिता विक्रमादित्य शर्मा और श्रेया राज के पिता नवनीत शर्मा से बात की गई। फिर रेल पुलिस ने दोनों के परिजनों को बुलाकर उन्हें सौंप दिया। अंकित कुमार और श्रेया राज जब अपने-अपने परिजनों के साथ घर लौटे तो दोनों परिवारों में आपस में बातचीत हुई। परिजनों की बातचीत में दोनों पक्ष राजी हुए और अंकित-श्रेया की मंदिर में विधि- विधान से शादी करा दी गई। अब रांग नंबर से हुए प्यार के बाद दोनों के परिवारों द्वारा कराई गई यह शादी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
नागर विमानन मंत्रालय (एमओसीए) ने भारत के नागर विमानन क्षेत्र के वास्ते एक वैकल्पिक विवाद निपटारा तंत्र के तौर पर एक ओम्बडस्मैन स्थापित करने के बारे में हितधारकों से विचार विमर्श् करने का फैसला किया है। उनसे आग्रह किया गया है कि वे इस विषय पर 15 अप्रैल 2014 तक अपने विचार भारत सरकार के नागर विमानन मंत्रालय के आर्थिक सलाहकार को भेज दे। वे अपने विचार ई-मेल eco-adv.moca@nic.in के जरिए भेज सकते हैं। मंत्रालय ने इस बारे में एक कार्यसमूह गठित किया था। कार्यसमूह ने अपनी रिपोर्ट में एक नागर ओम्बडस्मैन स्थापित करने की सिफारिश की थी। भारतीय नागर विमानन क्षेत्र विश्व में सबसे तेजी से बढ़़ते उड्डयन क्षेत्रों में से एक है। यह अब ऐसा क्षेत्र बन गया है जहां पर बाजार की ताकतें सेवा प्रदान करने में एक मह्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है ऐसे में यात्रियों की शिकायतों का निवारण एक ही स्थान पर करने और विवाद निपटारे के लिए एक प्रभावी तंत्र आवश्यक हो गया हैं। भावी विकास की क्षमताओं और सेवा क्षेत्र के अनुभवों तथा बेहतर अंतर्राष्ट्रीय मानको को ध्यान में रखते हुए भारत में इस क्षेत्र की खातिर एक वैकल्पिक विवाद निपटारा तंत्र की संभावनाओं को तलाशना जरूरी हो गया था। बैकिंग, बीमा और विद्युत जैसे क्षेत्रों में सेवा प्रावधानों में विवाद निपटान के लिए पहले से ही एक ओम्बडसमेन स्थापित किए जा चुके हैं। परामर्श पत्र मंत्रालय की वेबसाइट www.civilation.gov.in पर उपलब्ध करा दिया है।
नागर विमानन मंत्रालय ने भारत के नागर विमानन क्षेत्र के वास्ते एक वैकल्पिक विवाद निपटारा तंत्र के तौर पर एक ओम्बडस्मैन स्थापित करने के बारे में हितधारकों से विचार विमर्श् करने का फैसला किया है। उनसे आग्रह किया गया है कि वे इस विषय पर पंद्रह अप्रैल दो हज़ार चौदह तक अपने विचार भारत सरकार के नागर विमानन मंत्रालय के आर्थिक सलाहकार को भेज दे। वे अपने विचार ई-मेल eco-adv.moca@nic.in के जरिए भेज सकते हैं। मंत्रालय ने इस बारे में एक कार्यसमूह गठित किया था। कार्यसमूह ने अपनी रिपोर्ट में एक नागर ओम्बडस्मैन स्थापित करने की सिफारिश की थी। भारतीय नागर विमानन क्षेत्र विश्व में सबसे तेजी से बढ़़ते उड्डयन क्षेत्रों में से एक है। यह अब ऐसा क्षेत्र बन गया है जहां पर बाजार की ताकतें सेवा प्रदान करने में एक मह्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है ऐसे में यात्रियों की शिकायतों का निवारण एक ही स्थान पर करने और विवाद निपटारे के लिए एक प्रभावी तंत्र आवश्यक हो गया हैं। भावी विकास की क्षमताओं और सेवा क्षेत्र के अनुभवों तथा बेहतर अंतर्राष्ट्रीय मानको को ध्यान में रखते हुए भारत में इस क्षेत्र की खातिर एक वैकल्पिक विवाद निपटारा तंत्र की संभावनाओं को तलाशना जरूरी हो गया था। बैकिंग, बीमा और विद्युत जैसे क्षेत्रों में सेवा प्रावधानों में विवाद निपटान के लिए पहले से ही एक ओम्बडसमेन स्थापित किए जा चुके हैं। परामर्श पत्र मंत्रालय की वेबसाइट www.civilation.gov.in पर उपलब्ध करा दिया है।
देश के प्रमुख स्वास्थ्य सेवा संस्थानों में प्रतिष्ठित मैक्स हेल्थकेयर ने डॉक्टर्स दिवस के अवसर पर आज मैक्स अस्पताल, साकेत में पूरे दिन का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। यह 'संपूर्ण जीवन आनंद' की खुशियां मनाने का अवसर था। इस विशेष प्रोग्राम 'दस में दस - लीवर ट्रांस्प्लांट के बाद जिन्दगी' में एक दशक पूर्व लीवर ट्रांस्प्लांट करा चुके 100 से अधिक मरीजों और उनकी देखभाल करने वालों ने भागीदारी की। लीवर ट्रांस्प्लांट के बाद इन मरीजों ने स्वस्थ जीवन का आनंद लिया है। चुने हुए कुछ मरीजों ने इस जानलेवा बीमारी पर जीत हासिल करने की अपनी कहानी सुनाई ताकि ऐसे अन्य मरीजों का जीवन के प्रति उत्साह बना रहे। मैक्स हेल्थकेयर की लीवर बिलियरी साइंसेज़ टीम ने जाने-माने लीवर ट्रांस्प्लांट सर्जन डॉ. सुभाष गुप्ता के नेतृत्व में यह आयोजन किया। डॉ. गुप्ता ने 20 से अधिक वर्षों पूर्व भारत/ दक्षिण एशिया में लीवर ट्रांस्प्लांट की शुरुआत की थी। इस अवसर की विशिष्ट भोभा बनीं सुश्री चित्रांगदा सिंह लीवर ट्रांस्प्लांट के बाद मरीज के जीवन में गुणात्मक सुधार देख चकित रह गईं। उन्होंने मैक्स के उत्कृष्ट क्लिनिकल कार्य की सराहना की और चिकित्सकों की टीम को बधाई दी। इस अवसर पर मोहन फाउंडेशन की कार्यकारी निदेशक सुश्री पल्लवी कुमार भी उपस्थित थीं। उन्होंने अंग दान की अहमियत बताई और लोगों को आगे बढ़ कर यह नेक काम करने के लिए उत्साहित किया। मनुष्य के शरीर में लीवर का बहुत महत्वपूर्ण कार्य है। हालांकि पिछले कई वर्षों से भारत में लीवर की बीमारियों का बोझ बढ़ रहा है। जीवनशैली का बदलना, मोटापा, डायबीटीज़ का प्रकोप, शराब की आदत खास तौर लीवर की बीमारी को महामारी का रूप दे रहे हैं। हालांकि आज असरदार हेपेटाइटिस बी वैक्सीन उपलब्ध है और हेपेटाइटिस सी का भी इलाज है। लीवर फेल्यर की वजह लीवर के कार्य में तेज गिरावट आना है। इसमें लीवर का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो जाता है। जल्द पता लगने और मरीज के जीवन में संयम रखने पर अधिकांश मामलों पर काबू पाया जा सकता है लेकिन बहुत देर हो जाने पर और केवल लीवर ट्रांस्प्लांट का विकल्प बचने पर जल्द राहत के लिए डॉक्टरों की अनुभवी टीम से संपर्क करना होगा। एक दशक पहले 'लीवर ट्रांस्प्लांट' एक असंभव और भयानक सर्जरी मानी जाती थी पर आधुनिक तकनीक, बेहतर कौशल, उच्च स्तरीय क्लिनिकल विशेषज्ञता, बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर, वैश्विक अनुभव और ज्ञान के आदान-प्रदान और मरीजों को नया जीवन देने के लिए अधिक संख्या में अंगदान करने वालों की वजह से आज लीवर ट्रांस्प्लांट आसान हो गया है। इस अवसर पर ऐसे 100 से अधिक मरीजों का एकत्र होना इसका प्रमाण है कि चिकित्सा विज्ञान की आधुनिकता और व्यक्तिगत इच्छा शक्ति के तालमेल से मरीजों के लिए लीवर ट्रांस्प्लांट जैसी जटिल और जोखिम भरी सर्जरी के बाद संपूर्ण जीवन का आनंद लेना मुमकिन है। सर्जरी इसलिए और महत्वपूर्ण हो जाता है कि समय से लीवर ट्रांस्प्लांट कर मरीज को सिरॉसिस से बचाया जा सकता है। लेकिन चिकित्सा विज्ञान के अत्याधुनिक होने से ऐसे चमत्कार हो रहे हैं जो केवल ऊपर वाले के हाथ था जबकि आज चिकित्सक इसे अंजाम दे रहे हैं। हम सदैव उनके आभारी रहेंगे। हम जिन्दगी के प्रति इस उत्साह की सराहना और सम्मान करते हैं। इन मरीजों के साहस के आगे नतमस्तक हैं और भविष्य में उनके सुखी जीवन की मंगलकामना करते हैं।
देश के प्रमुख स्वास्थ्य सेवा संस्थानों में प्रतिष्ठित मैक्स हेल्थकेयर ने डॉक्टर्स दिवस के अवसर पर आज मैक्स अस्पताल, साकेत में पूरे दिन का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। यह 'संपूर्ण जीवन आनंद' की खुशियां मनाने का अवसर था। इस विशेष प्रोग्राम 'दस में दस - लीवर ट्रांस्प्लांट के बाद जिन्दगी' में एक दशक पूर्व लीवर ट्रांस्प्लांट करा चुके एक सौ से अधिक मरीजों और उनकी देखभाल करने वालों ने भागीदारी की। लीवर ट्रांस्प्लांट के बाद इन मरीजों ने स्वस्थ जीवन का आनंद लिया है। चुने हुए कुछ मरीजों ने इस जानलेवा बीमारी पर जीत हासिल करने की अपनी कहानी सुनाई ताकि ऐसे अन्य मरीजों का जीवन के प्रति उत्साह बना रहे। मैक्स हेल्थकेयर की लीवर बिलियरी साइंसेज़ टीम ने जाने-माने लीवर ट्रांस्प्लांट सर्जन डॉ. सुभाष गुप्ता के नेतृत्व में यह आयोजन किया। डॉ. गुप्ता ने बीस से अधिक वर्षों पूर्व भारत/ दक्षिण एशिया में लीवर ट्रांस्प्लांट की शुरुआत की थी। इस अवसर की विशिष्ट भोभा बनीं सुश्री चित्रांगदा सिंह लीवर ट्रांस्प्लांट के बाद मरीज के जीवन में गुणात्मक सुधार देख चकित रह गईं। उन्होंने मैक्स के उत्कृष्ट क्लिनिकल कार्य की सराहना की और चिकित्सकों की टीम को बधाई दी। इस अवसर पर मोहन फाउंडेशन की कार्यकारी निदेशक सुश्री पल्लवी कुमार भी उपस्थित थीं। उन्होंने अंग दान की अहमियत बताई और लोगों को आगे बढ़ कर यह नेक काम करने के लिए उत्साहित किया। मनुष्य के शरीर में लीवर का बहुत महत्वपूर्ण कार्य है। हालांकि पिछले कई वर्षों से भारत में लीवर की बीमारियों का बोझ बढ़ रहा है। जीवनशैली का बदलना, मोटापा, डायबीटीज़ का प्रकोप, शराब की आदत खास तौर लीवर की बीमारी को महामारी का रूप दे रहे हैं। हालांकि आज असरदार हेपेटाइटिस बी वैक्सीन उपलब्ध है और हेपेटाइटिस सी का भी इलाज है। लीवर फेल्यर की वजह लीवर के कार्य में तेज गिरावट आना है। इसमें लीवर का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो जाता है। जल्द पता लगने और मरीज के जीवन में संयम रखने पर अधिकांश मामलों पर काबू पाया जा सकता है लेकिन बहुत देर हो जाने पर और केवल लीवर ट्रांस्प्लांट का विकल्प बचने पर जल्द राहत के लिए डॉक्टरों की अनुभवी टीम से संपर्क करना होगा। एक दशक पहले 'लीवर ट्रांस्प्लांट' एक असंभव और भयानक सर्जरी मानी जाती थी पर आधुनिक तकनीक, बेहतर कौशल, उच्च स्तरीय क्लिनिकल विशेषज्ञता, बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर, वैश्विक अनुभव और ज्ञान के आदान-प्रदान और मरीजों को नया जीवन देने के लिए अधिक संख्या में अंगदान करने वालों की वजह से आज लीवर ट्रांस्प्लांट आसान हो गया है। इस अवसर पर ऐसे एक सौ से अधिक मरीजों का एकत्र होना इसका प्रमाण है कि चिकित्सा विज्ञान की आधुनिकता और व्यक्तिगत इच्छा शक्ति के तालमेल से मरीजों के लिए लीवर ट्रांस्प्लांट जैसी जटिल और जोखिम भरी सर्जरी के बाद संपूर्ण जीवन का आनंद लेना मुमकिन है। सर्जरी इसलिए और महत्वपूर्ण हो जाता है कि समय से लीवर ट्रांस्प्लांट कर मरीज को सिरॉसिस से बचाया जा सकता है। लेकिन चिकित्सा विज्ञान के अत्याधुनिक होने से ऐसे चमत्कार हो रहे हैं जो केवल ऊपर वाले के हाथ था जबकि आज चिकित्सक इसे अंजाम दे रहे हैं। हम सदैव उनके आभारी रहेंगे। हम जिन्दगी के प्रति इस उत्साह की सराहना और सम्मान करते हैं। इन मरीजों के साहस के आगे नतमस्तक हैं और भविष्य में उनके सुखी जीवन की मंगलकामना करते हैं।
यूपी के महोबा से एक दंग करने वाला मामला सामने आया है. यहां एक खेत में काम कर रही स्त्री को सांप ने काट लिया. स्त्री के बेटे को जैसे ही इस बात का पता लगा, उसने सांप को एक पॉलीथीन में डाल लिया और अपनी मां को लेकर हॉस्पिटल में पहुंच गया. हॉस्पिटल में पॉलीथीन में पैक सांप को देखकर चिकित्सक भी दंग रह गए और सांप को साथ में लाने का कारण पूछा. इस पर बेटे ने बताया कि वह चिकित्सक को दिखाना चाहता था कि सांप किस प्रजाति का था और कितना जहरीला था, जिससे उपचार करने से पहले उन्हें ठीक जानकारी मिल सके. डॉक्टरों ने पीड़ित स्त्री को इमरजेंसी वॉर्ड में भर्ती किया है और उसका उपचार किया जा रहा है. ये मामला महोबा के श्रीनगर कोतवाली क्षेत्र के भीतर आने वाले सिजहरी गांव का है. यहां रहने वाले संजीव कुमार की 32 साल की पत्नी रमा को सांप ने खेत में काम करने के दौरान डस लिया. बताया जाता है कि रमा अपने खेत में मटर की फसल को उठाकर रख रही थी. इसी दौरान वहां बैठे सांप ने उसे काट लिया, जिसके बाद स्त्री की हालत बिगड़ने लगी. चीख पुकार के बाद स्त्री खेत में ही अचेत हो गई. महिला किसान की चीख सुनकर इर्द-गिर्द के ग्रामीण और उसके परिजन इकठ्ठा हो गए. वहीं मौके पर पहुंचे स्त्री के पुत्र निखिल ने पास में ही सांप को जाते देखा तो उसे पकड़कर पॉलीथीन में रख लिया. पॉलीथीन में सांप को लेकर स्त्री का पुत्र उपचार के लिए जिला हॉस्पिटल लेकर पहुंचा. यहां उसने अपनी मां को उपचार के लिए इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराकर चिकित्सक को सांप दिखाया और उपचार करने के लिए कहा. पॉलीथीन में सांप को देखकर उपस्थित लोग भी हैरत में पड़ गए. स्त्री के पुत्र ने बताया कि उसकी मां को खेत में काम करते समय सांप ने काट लिया था. मां का ठीक उपचार हो, इसलिए सांप की पहचान के लिए वह इसे चिकित्सक के पास लेकर आया. हालांकि अब पीड़ित स्त्री खतरे से बाहर है और उसका उपचार किया जा रहा है.
यूपी के महोबा से एक दंग करने वाला मामला सामने आया है. यहां एक खेत में काम कर रही स्त्री को सांप ने काट लिया. स्त्री के बेटे को जैसे ही इस बात का पता लगा, उसने सांप को एक पॉलीथीन में डाल लिया और अपनी मां को लेकर हॉस्पिटल में पहुंच गया. हॉस्पिटल में पॉलीथीन में पैक सांप को देखकर चिकित्सक भी दंग रह गए और सांप को साथ में लाने का कारण पूछा. इस पर बेटे ने बताया कि वह चिकित्सक को दिखाना चाहता था कि सांप किस प्रजाति का था और कितना जहरीला था, जिससे उपचार करने से पहले उन्हें ठीक जानकारी मिल सके. डॉक्टरों ने पीड़ित स्त्री को इमरजेंसी वॉर्ड में भर्ती किया है और उसका उपचार किया जा रहा है. ये मामला महोबा के श्रीनगर कोतवाली क्षेत्र के भीतर आने वाले सिजहरी गांव का है. यहां रहने वाले संजीव कुमार की बत्तीस साल की पत्नी रमा को सांप ने खेत में काम करने के दौरान डस लिया. बताया जाता है कि रमा अपने खेत में मटर की फसल को उठाकर रख रही थी. इसी दौरान वहां बैठे सांप ने उसे काट लिया, जिसके बाद स्त्री की हालत बिगड़ने लगी. चीख पुकार के बाद स्त्री खेत में ही अचेत हो गई. महिला किसान की चीख सुनकर इर्द-गिर्द के ग्रामीण और उसके परिजन इकठ्ठा हो गए. वहीं मौके पर पहुंचे स्त्री के पुत्र निखिल ने पास में ही सांप को जाते देखा तो उसे पकड़कर पॉलीथीन में रख लिया. पॉलीथीन में सांप को लेकर स्त्री का पुत्र उपचार के लिए जिला हॉस्पिटल लेकर पहुंचा. यहां उसने अपनी मां को उपचार के लिए इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराकर चिकित्सक को सांप दिखाया और उपचार करने के लिए कहा. पॉलीथीन में सांप को देखकर उपस्थित लोग भी हैरत में पड़ गए. स्त्री के पुत्र ने बताया कि उसकी मां को खेत में काम करते समय सांप ने काट लिया था. मां का ठीक उपचार हो, इसलिए सांप की पहचान के लिए वह इसे चिकित्सक के पास लेकर आया. हालांकि अब पीड़ित स्त्री खतरे से बाहर है और उसका उपचार किया जा रहा है.
पटना। भाकपा-माले विधायकों ने बिहार सरकार से केंद्र सरकार को जीएम सरसों की मंजूरी को वापस लेने का अनुरोध किया है। माले विधायक सत्यदेव राम, गोपाल रविदास और संदीप सौरव सहित अन्य विधायकों ने कहा है कि चूंकि यह मामला संसद में जल्द ही आने वाला है, इसलिए बिहार सरकार को इसमें त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए। इधर, अखिल भारतीय किसान महासभा के महासचिव और पूर्व विधायक राजाराम सिंह ने कहा है कि भारत सरकार ने आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) सरसों की पर्यावरणीय रिलीज की मंजूरी दे दी है। जो किसानों द्वारा वाणिज्यिक खेती के लिए एक अनुमोदन है। यह पहली बार है जब भारत में एक जीएम खाद्य फसल को मंजूरी दी गई है। वर्ष 2009 में ठोस वैज्ञानिक प्रमाण द्वारा समर्थित जन प्रतिरोध ने बीटी बैंगन की नियामक अनुमोदन को रोक दिया था। तत्कालीन केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने फरवरी 2010 में बीटी बैंगन के व्यवसायीकरण को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया था। भाकपा-माले ने कहा कि इस बीच, भारत में खेती के लिए अनुमोदित एकमात्र जीएम फसल, बीटी कपास का 20 साल की खेती के बाद प्रभाव हमारे सामने है। कपास की पैदावार में लगातार कमी आ रही है, कीटनाशकों और खरपतवारों जैसे रसायन का उपयोग बढ़ रहा है, किसानों को कीट प्रतिरोध के कारण भारी नुकसान उठाना पर रहा है, और राज्य सरकारों को सरकारी निधि के द्वारा किसानों की भरपाई करनी पड़ रही है, वहीं निजी बीज उद्योग, जिनमें 95 प्रतिशत मोनसेंटो/बायर द्वारा नियंत्रित हैं, मुनाफ़ा कमा रहे हैं। स्वीकृत जीएम सरसों को पेटेंट कराया गया है, जबकि यह दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा विकसित किया गया है। परागण नियंत्रण के लिए बार-बारसेज़-बारस्टार जीन की मूल तकनीक बायर की है और किसी ने भी उन नियमों और शर्तों को नहीं देखा है जिन पर दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा प्रौद्योगिकी का उपयोग किया गया है। यह एक तृणनाशक सहिष्णु (एचटी) सरसों है, जिसका पर्यावरण, मानव स्वास्थ्य के साथ-साथ आजीविका पर खतरनाक प्रभाव पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद जैव सुरक्षा दस्तावेज़ को सार्वजनिक नहीं किया गया है। जीएम सरसों को मंजूरी देने पर राज्य सरकारों से परामर्श भी नहीं किया गया है। सबसे महत्वपूर्ण बात, जब सरसों की बात आती है तो भारत पहले से आत्मनिर्भर है, और किसानों के लिए बाजार में पहले से ही दर्जनों गैर-जीएम संकर उपलब्ध हैं। सरसों की 45 प्रतिशत भूमि पर पहले से ही गैर-जीएम संकर फसल लगाया जाता है, जिसने भारत के खाद्य तेल आयात को नीचे नहीं लाया है-तो जीएम सरसों संकर यह कैसे करेगा? दूसरी ओर, जब इस साल देश में सरसों की रिकॉर्ड खेती और उत्पादन हुई है, तो भारत सरकार ने खाद्य तेल आयात शुल्क को कम कर दिया है, और हमारे किसानों को घोषित एमएसपी भी नहीं मिल पाया। यदि भारत अपने किसानों के साथ इस तरह से व्यवहार करते हैं तो खाद्य तेल उत्पादन कैसे बढ़ेगा? इस पृष्ठभूमि में, यह आश्चर्य की बात है कि बिहार सरकार ने जीएम एचटी सरसों के हमले के खिलाफ सरसों के किसानों, मधुमक्खी पालकों और कृषि श्रमिकों की रक्षा के लिए सक्रिय कदम नहीं उठाए हैं। अतीत में, बीटी बैंगन के मामले में, आप इस तरह के जीएम खाद्य फसल के खिलाफ चिंता व्यक्त करने वाले पहले मुख्यमंत्रियों में से एक थे और आपने 2009 में केन्द्र सरकार को पत्र भी लिखा था। 2011 में बिहार में मोनसेंटो के अवैद्य फील्ड ट्रायल के खिलाफ आपने केंद्र सरकार को पत्र लिखा था। 2016 में आपने जीएम सरसों के खिलाफ भी पत्र लिखा था, यह बात स्पष्ट है कि यदि जीएम सरसों को केंद्र सरकार द्वारा अनुमति दी जाती है, तो भले ही बिहार लाइसेंस जारी न करे, अवैध बीज अन्य राज्यों से आ जाएंगे। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि केंद्र सरकार ने जो अनुमोदन दिया है उसे वह वापस ले। बिहार के किसानों को उम्मीद है कि बिहार सरकार द्वारा सार्वजनिक हित में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री और भारत के प्रधानमंत्री को तुरंत पत्र भेजा जाएगा। (प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित।)
पटना। भाकपा-माले विधायकों ने बिहार सरकार से केंद्र सरकार को जीएम सरसों की मंजूरी को वापस लेने का अनुरोध किया है। माले विधायक सत्यदेव राम, गोपाल रविदास और संदीप सौरव सहित अन्य विधायकों ने कहा है कि चूंकि यह मामला संसद में जल्द ही आने वाला है, इसलिए बिहार सरकार को इसमें त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए। इधर, अखिल भारतीय किसान महासभा के महासचिव और पूर्व विधायक राजाराम सिंह ने कहा है कि भारत सरकार ने आनुवंशिक रूप से संशोधित सरसों की पर्यावरणीय रिलीज की मंजूरी दे दी है। जो किसानों द्वारा वाणिज्यिक खेती के लिए एक अनुमोदन है। यह पहली बार है जब भारत में एक जीएम खाद्य फसल को मंजूरी दी गई है। वर्ष दो हज़ार नौ में ठोस वैज्ञानिक प्रमाण द्वारा समर्थित जन प्रतिरोध ने बीटी बैंगन की नियामक अनुमोदन को रोक दिया था। तत्कालीन केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने फरवरी दो हज़ार दस में बीटी बैंगन के व्यवसायीकरण को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया था। भाकपा-माले ने कहा कि इस बीच, भारत में खेती के लिए अनुमोदित एकमात्र जीएम फसल, बीटी कपास का बीस साल की खेती के बाद प्रभाव हमारे सामने है। कपास की पैदावार में लगातार कमी आ रही है, कीटनाशकों और खरपतवारों जैसे रसायन का उपयोग बढ़ रहा है, किसानों को कीट प्रतिरोध के कारण भारी नुकसान उठाना पर रहा है, और राज्य सरकारों को सरकारी निधि के द्वारा किसानों की भरपाई करनी पड़ रही है, वहीं निजी बीज उद्योग, जिनमें पचानवे प्रतिशत मोनसेंटो/बायर द्वारा नियंत्रित हैं, मुनाफ़ा कमा रहे हैं। स्वीकृत जीएम सरसों को पेटेंट कराया गया है, जबकि यह दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा विकसित किया गया है। परागण नियंत्रण के लिए बार-बारसेज़-बारस्टार जीन की मूल तकनीक बायर की है और किसी ने भी उन नियमों और शर्तों को नहीं देखा है जिन पर दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा प्रौद्योगिकी का उपयोग किया गया है। यह एक तृणनाशक सहिष्णु सरसों है, जिसका पर्यावरण, मानव स्वास्थ्य के साथ-साथ आजीविका पर खतरनाक प्रभाव पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद जैव सुरक्षा दस्तावेज़ को सार्वजनिक नहीं किया गया है। जीएम सरसों को मंजूरी देने पर राज्य सरकारों से परामर्श भी नहीं किया गया है। सबसे महत्वपूर्ण बात, जब सरसों की बात आती है तो भारत पहले से आत्मनिर्भर है, और किसानों के लिए बाजार में पहले से ही दर्जनों गैर-जीएम संकर उपलब्ध हैं। सरसों की पैंतालीस प्रतिशत भूमि पर पहले से ही गैर-जीएम संकर फसल लगाया जाता है, जिसने भारत के खाद्य तेल आयात को नीचे नहीं लाया है-तो जीएम सरसों संकर यह कैसे करेगा? दूसरी ओर, जब इस साल देश में सरसों की रिकॉर्ड खेती और उत्पादन हुई है, तो भारत सरकार ने खाद्य तेल आयात शुल्क को कम कर दिया है, और हमारे किसानों को घोषित एमएसपी भी नहीं मिल पाया। यदि भारत अपने किसानों के साथ इस तरह से व्यवहार करते हैं तो खाद्य तेल उत्पादन कैसे बढ़ेगा? इस पृष्ठभूमि में, यह आश्चर्य की बात है कि बिहार सरकार ने जीएम एचटी सरसों के हमले के खिलाफ सरसों के किसानों, मधुमक्खी पालकों और कृषि श्रमिकों की रक्षा के लिए सक्रिय कदम नहीं उठाए हैं। अतीत में, बीटी बैंगन के मामले में, आप इस तरह के जीएम खाद्य फसल के खिलाफ चिंता व्यक्त करने वाले पहले मुख्यमंत्रियों में से एक थे और आपने दो हज़ार नौ में केन्द्र सरकार को पत्र भी लिखा था। दो हज़ार ग्यारह में बिहार में मोनसेंटो के अवैद्य फील्ड ट्रायल के खिलाफ आपने केंद्र सरकार को पत्र लिखा था। दो हज़ार सोलह में आपने जीएम सरसों के खिलाफ भी पत्र लिखा था, यह बात स्पष्ट है कि यदि जीएम सरसों को केंद्र सरकार द्वारा अनुमति दी जाती है, तो भले ही बिहार लाइसेंस जारी न करे, अवैध बीज अन्य राज्यों से आ जाएंगे। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि केंद्र सरकार ने जो अनुमोदन दिया है उसे वह वापस ले। बिहार के किसानों को उम्मीद है कि बिहार सरकार द्वारा सार्वजनिक हित में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री और भारत के प्रधानमंत्री को तुरंत पत्र भेजा जाएगा।
वाराणसी। लालू प्रसाद यादव के पुत्र तेज प्रताप यादव की कार आज रोहनिया करनाडाडी कस्बे में ऑटो से टकरा गई। हादसे में कोई जख्मी नहीं हुआ। मामला वीवीआईपी से जुड़ा देख क्षेत्रीय पुलिस ने विभागीय अफसरों को सूचना दी और दोनों पक्षों को थाने ले आई। बता दें कि तेज प्रताप इन दिनों वृंदावन में है। उनका पीए बीएमडब्ल्यू कार से उन्हें लेने वृंदावन जा रहा था। प्राप्त जानकारी के अनुसार रोहनिया बाईपास के रास्ते पर करनाडाडी के समीप कार ऑटो से टकरा गई। दुर्घटना होते ही कार बंद हो गई। चालक के तमाम प्रयास के बाद भी जब कार स्टार्ट नहीं हुई तो कार को किसी तरह सड़क के किनारे करके चालक ऑटो चालक से हर्जाना मांगने लगा। ऑटो चालक ने रुपये देने से इंकार कर दिया तो कार के पीछे चल रही स्कोर्ट की गाड़ियों में सवार सुरक्षा कर्मियों ने ऑटो चालक को अपने वाहन में बैठा लिया। तब तक वहां लोगों की भीड़ जुट गई और सूचना पाकर पुलिस भी पहुंच गई।
वाराणसी। लालू प्रसाद यादव के पुत्र तेज प्रताप यादव की कार आज रोहनिया करनाडाडी कस्बे में ऑटो से टकरा गई। हादसे में कोई जख्मी नहीं हुआ। मामला वीवीआईपी से जुड़ा देख क्षेत्रीय पुलिस ने विभागीय अफसरों को सूचना दी और दोनों पक्षों को थाने ले आई। बता दें कि तेज प्रताप इन दिनों वृंदावन में है। उनका पीए बीएमडब्ल्यू कार से उन्हें लेने वृंदावन जा रहा था। प्राप्त जानकारी के अनुसार रोहनिया बाईपास के रास्ते पर करनाडाडी के समीप कार ऑटो से टकरा गई। दुर्घटना होते ही कार बंद हो गई। चालक के तमाम प्रयास के बाद भी जब कार स्टार्ट नहीं हुई तो कार को किसी तरह सड़क के किनारे करके चालक ऑटो चालक से हर्जाना मांगने लगा। ऑटो चालक ने रुपये देने से इंकार कर दिया तो कार के पीछे चल रही स्कोर्ट की गाड़ियों में सवार सुरक्षा कर्मियों ने ऑटो चालक को अपने वाहन में बैठा लिया। तब तक वहां लोगों की भीड़ जुट गई और सूचना पाकर पुलिस भी पहुंच गई।
आगरा। सांसद व छत्तीसगढ़ के प्रभारी पीएल पूनिया के नेतृत्व में कांग्रेस का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधि मंडल आगरा पहुंचा जहां उन्होंने एत्माद्दौला के किशन गढ़ टेडी बगिया में हुए तिहरे हत्याकांड में मृतक के परिजनों से मुलाकात की। पूरे मामले की जानकारी लेने के बाद प्रतिनिधि मंडल में अपनी संवेदना प्रकट की और मृतकों के परिजनों को ढांढस बंधाया। इसके पश्चात प्रतिनिधि मंडल बदमाशों की गोली से बुरी तरह से घायल आगरा विवि के प्रो. आर के भारती व उनके भाई से मिला। उनके साथ हुए पूरे घटनाक्रम और दो बार जानलेवा हमले की जानकारी ली। दोनों पीड़ित परिवार के परिजनों से मुलाकात करने के बाद पी. एल. पूनिया व प्रतिनिधि मंडल ने जारी बयान में कहा कि पूरे प्रदेश में अनुसूचित जाति के लोगों को डराया धमकाया जा रहा है, उन पर सुनियोजित हमले व हत्याएं तक की जा रही हैं। योगी सरकार अपराधियों पर काबू करने में पूरी तरह से विफल साबित हुई है। प्रतिनिधि मंडल ने यूपी सरकार से मांग की कि वह तत्काल तिहरे हत्याकांड में प्रति व्यक्ति 25 - 25 लाख रुपए का मुआवजा दे एवं इस हत्याकांड की साज़िश रचने वाले दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलवाई जाए। सांसद पीएल पूनिया ने प्रो. आर के भारती व उनके भाई पर हुए जानलेवा हमले की कड़े शब्दों में भर्त्सना करते हुए शासन से मांग की है कि उनके इलाज का पूरा खर्चा उनके विश्विद्यालय को उठाए जाने के लिए सरकार को आदेश जारी करने चाहिए। उनके घर के बाहर पुलिस पिकेट की स्थाई रूप से तैनाती की जानी चाहिए, साथ ही प्रो. भारती को सुरक्षा अंगकर्मी दिया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त जेल में रहकर प्रो. आर के भारती के परिवार की हत्या की सुपारी लेने वाले गिरोह व सदस्यों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जानी चाहिए। प्रतिनिधि मंडल में यूपी के पूर्व मंत्री व उपाध्यक्ष प्रदेश कांग्रेस दीपक कुमार, योगी जाटव, कैलाश बाल्मिकी, योगेश कुमार, मोहन सिंह, कुलदीप, पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष उपेन्द्र सिंह, शहर कांग्रेस कमेटी के कपिल गौतम, विनोद ज़रारी, राजीव गुप्ता, अभिषेक डागौर, प्रो शिल्पा दीक्षित, समीक्षा दीक्षित आदि मौजूद रहे।
आगरा। सांसद व छत्तीसगढ़ के प्रभारी पीएल पूनिया के नेतृत्व में कांग्रेस का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधि मंडल आगरा पहुंचा जहां उन्होंने एत्माद्दौला के किशन गढ़ टेडी बगिया में हुए तिहरे हत्याकांड में मृतक के परिजनों से मुलाकात की। पूरे मामले की जानकारी लेने के बाद प्रतिनिधि मंडल में अपनी संवेदना प्रकट की और मृतकों के परिजनों को ढांढस बंधाया। इसके पश्चात प्रतिनिधि मंडल बदमाशों की गोली से बुरी तरह से घायल आगरा विवि के प्रो. आर के भारती व उनके भाई से मिला। उनके साथ हुए पूरे घटनाक्रम और दो बार जानलेवा हमले की जानकारी ली। दोनों पीड़ित परिवार के परिजनों से मुलाकात करने के बाद पी. एल. पूनिया व प्रतिनिधि मंडल ने जारी बयान में कहा कि पूरे प्रदेश में अनुसूचित जाति के लोगों को डराया धमकाया जा रहा है, उन पर सुनियोजित हमले व हत्याएं तक की जा रही हैं। योगी सरकार अपराधियों पर काबू करने में पूरी तरह से विफल साबित हुई है। प्रतिनिधि मंडल ने यूपी सरकार से मांग की कि वह तत्काल तिहरे हत्याकांड में प्रति व्यक्ति पच्चीस - पच्चीस लाख रुपए का मुआवजा दे एवं इस हत्याकांड की साज़िश रचने वाले दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलवाई जाए। सांसद पीएल पूनिया ने प्रो. आर के भारती व उनके भाई पर हुए जानलेवा हमले की कड़े शब्दों में भर्त्सना करते हुए शासन से मांग की है कि उनके इलाज का पूरा खर्चा उनके विश्विद्यालय को उठाए जाने के लिए सरकार को आदेश जारी करने चाहिए। उनके घर के बाहर पुलिस पिकेट की स्थाई रूप से तैनाती की जानी चाहिए, साथ ही प्रो. भारती को सुरक्षा अंगकर्मी दिया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त जेल में रहकर प्रो. आर के भारती के परिवार की हत्या की सुपारी लेने वाले गिरोह व सदस्यों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जानी चाहिए। प्रतिनिधि मंडल में यूपी के पूर्व मंत्री व उपाध्यक्ष प्रदेश कांग्रेस दीपक कुमार, योगी जाटव, कैलाश बाल्मिकी, योगेश कुमार, मोहन सिंह, कुलदीप, पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष उपेन्द्र सिंह, शहर कांग्रेस कमेटी के कपिल गौतम, विनोद ज़रारी, राजीव गुप्ता, अभिषेक डागौर, प्रो शिल्पा दीक्षित, समीक्षा दीक्षित आदि मौजूद रहे।
सीमा हैदर के पाकिस्तानी परिजनों ने कहा, "अब वो मुसलमान नहीं रही, भारत में ही रहे, नहीं चाहते हैं उसकी घर वापसी" पाकिस्तान से अपने चार बच्चों के साथ नेपाल के रास्ते अवैध तरीके से भारत में प्रवेश करने वाली सीमा हैदर को उसके पाकिस्तान स्थित परिवार वालों ने अपने घर से बेदखल करने का फैसला किया है। दिल्ली/कराचीः पाकिस्तान से अपने चार बच्चों के साथ नेपाल के रास्ते अवैध तरीके से भारत में प्रवेश करने वाली सीमा हैदर को उसके पाकिस्तान स्थित परिवार वालों ने अपने घर से बेदखल करने का फैसला किया है। भारतीय युवक सचिन से कथित प्यार के कारण सीमा बीते दिनों दोनों देशों से बिना किसी वैध दस्तावेज के नेपाल के रास्ते भारत में दखिल हुई और फिलहाल अपने प्रेमी सचिन के साथ रह रही है। सीमा की सचिन दोस्ती साल 2019 में ऑनलाइन गेम पबजी के माध्यम से हुई थी, जिसके बाद सीमा ने पाकिस्तान के कराची स्थित अपना घर बेचा और अपने प्रेमी सचिन के साथ रहने के लिए अपने 4 बच्चों को लेकर भारत आ गई। जानकारी के अनुसार इस घटना के बाद पाकिस्तान में रह रहे सीमा के परिजनों ने उससे घर वापसी की अपील की लेकिन सीमा द्वारा प्यार की दुहाई देते हुए पाकिस्तान जाने से इनकार करने पर आखिरकार उसके परिजनों ने सामाजिक नियमों का हवाला देते हुए परिवार से बेदखल करने का ऐलान कर दिया है। उत्तर प्रदेश पुलिस के अनुसार पाकिस्तान से आनो वाली 30 साल की सीमा और 22 साल के सचिन दिल्ली के पास ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा इलाके में रहते हैं, जहां सचिन नौकरी करता है। सीमा अपने चार बच्चों, जिनकी उम्र सात साल से कम है, सचिन के साथ रहने के लिए नेपाल के रास्ते अवैध रूप से भारत में प्रवेश की। जिसकी जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने उसे 4 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने सचिन को अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने वाली सीमा को अपने आवास में ठहराने के लिए हिरासत में लिया था। लेकिन कोर्ट से जमानत मिलने के बाद दोनों जेल से रिहा हुए और नोएडा में ही रह रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम पर पाकिस्तान स्थित सीमा के पड़ोसियों और एक रिश्तेदार ने स्पष्ट कर दिया कि वे अब सीमा की पाकिस्तान में वापसी नहीं चाहते हैं। सीमा कराची के जिस मकान में किराये पर रहती थी, उसके मकान मालिक के बेटे ने कहा, "उसे अपने बच्चों को वापस पाकिस्तान भेज देना चाहिए। वह वहां रह सकती है क्योंकि अब वह मुस्लिम भी नहीं रही। " मकान मालिक के बेटे नूर मुहम्मद ने बताया, "वह अपने बच्चों के साथ तीन साल तक हमारे यहां किरायेदार थी। वह अपने बच्चों के साथ अकेली रहती थी। उसके ससुर यहां से कुछ दूरी पर रहते हैं। " वहीं मकान मालिक मलिक ने कहा, "सीमा एक मुसलमान होते हुए हिंदू लड़के के साथ गई है, उसने न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे पाकिस्तान को शर्मसार किया है। देर-सबेर उसे अपने किए की सज़ा भुगतनी पड़ेगी। " चार बच्चों की निरक्षर सीमा द्वारा पाकिस्तान के रूढ़िवादी समाज में सब कुछ छोड़कर भारत आने की चर्चा न केवल भार-पाकिस्तान में है बल्कि विश्व के तमाम देशों में सीमा के अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने का घटना के पढ़ा, सुना और देखा जा रहा है। पाकिस्तान में सीमा का घर कराची के गुलिस्तान-ए-जौहर के मध्य में भिट्टईबाद के पड़ोस में है। खबरों के मुताबिक सऊदी अरब में काम करने वाले सीमा के पति गुलाम हैदर ने उसे 12 लाख रुपये में घर खरदी कर दिया था। सीमा और गुलाम हैदर की भी 10 साल पहले माता-पिता की इच्छा के विरुद्ध कराची में शादी हुई थी। सीमा के एक अन्य पड़ोसी जमाल जखरानी ने कहा, "हमने उसे एक दिन टैक्सी बुलाते और अपने बच्चों और कुछ बैग के साथ निकलते देखा और हमने सोचा कि वह जैकोबाबाद में अपने गांव जा रही है। लेकिन लगभग एक महीने के बाद जब हमने टीवी चैनलों पर उसके भागने के बारे में सुना, तो हम सभी हैरान रह गए। " सीम हैदर की जनजाति से ताल्लुक रखने वाले जमाल जखरानी ने कहा कि सीमा के लिए अच्छा होगा कि अब वो भारत में ही रहे। जमाल ने कहा, "अगर वह कभी वापस आने के बारे में सोचती है, तो हमारी बिरादरी उसे माफ नहीं करेगी और दूसरी बात कि उसने एक हिंदू के साथ रहने का फैसले करके सभी को नाराज कर दिया है। " जखरानी की बातों से इतर ग्रामीण सिंध में एक हाई-प्रोफाइल धार्मिक नेता मियां मिट्ठू ने खुले तौर पर सीमा के वापस पाकिस्तान लौटने पर दंडित करने की धमकी दी है। बताया जा रहा है कि मियां मिट्ठू सिंध में जिस मदरसे को चलाते हैं, वहां हिंदू लड़कियों को जबरन इस्लाम कबूल कराया जाता है। मिट्ठू के समर्थकों ने सीमा के गांव में हिंदू पूजा स्थलों पर हमला करने की भी धमकी दी है लेकिनकाश्मोर-कंधकोट के एसएसपी इरफान सामू ने हिंदुओं और सिखों को आश्वासन दिया कि उनकी रक्षा की जाएगी। हालांकि सामू पूरे मामले से हैरान है कि सीमा के दस्तावेजों और भारत भागने की कहानी में कई खामियां हैं। उन्होंने कहा, "उसका राष्ट्रीय पहचान पत्र कहता है कि उसका जन्म 2002 में हुआ था। इसलिए उसकी उम्र अभी 21 साल होनी चाहिए और फिर भी उसके 6 साल की उम्र तक के चार बच्चे हैं। " इसके साथ एसएसपी सामू ने यह भी कहा कि पुलिस ने गुलाम हैदर को सऊदी अरब से लौटने के लिए कहा है लेकिन वह केवल वीडियो या फोन कॉल पर ही उनके संपर्क में है। पुलिस अधिकारी सामू को यकीन नहीं है कि ग्रामीण पृष्ठभूमि वाली महिला दुबई और काठमांडू के रास्ते भारत जाने की योजना बनाने का साहस कर सकती है।
सीमा हैदर के पाकिस्तानी परिजनों ने कहा, "अब वो मुसलमान नहीं रही, भारत में ही रहे, नहीं चाहते हैं उसकी घर वापसी" पाकिस्तान से अपने चार बच्चों के साथ नेपाल के रास्ते अवैध तरीके से भारत में प्रवेश करने वाली सीमा हैदर को उसके पाकिस्तान स्थित परिवार वालों ने अपने घर से बेदखल करने का फैसला किया है। दिल्ली/कराचीः पाकिस्तान से अपने चार बच्चों के साथ नेपाल के रास्ते अवैध तरीके से भारत में प्रवेश करने वाली सीमा हैदर को उसके पाकिस्तान स्थित परिवार वालों ने अपने घर से बेदखल करने का फैसला किया है। भारतीय युवक सचिन से कथित प्यार के कारण सीमा बीते दिनों दोनों देशों से बिना किसी वैध दस्तावेज के नेपाल के रास्ते भारत में दखिल हुई और फिलहाल अपने प्रेमी सचिन के साथ रह रही है। सीमा की सचिन दोस्ती साल दो हज़ार उन्नीस में ऑनलाइन गेम पबजी के माध्यम से हुई थी, जिसके बाद सीमा ने पाकिस्तान के कराची स्थित अपना घर बेचा और अपने प्रेमी सचिन के साथ रहने के लिए अपने चार बच्चों को लेकर भारत आ गई। जानकारी के अनुसार इस घटना के बाद पाकिस्तान में रह रहे सीमा के परिजनों ने उससे घर वापसी की अपील की लेकिन सीमा द्वारा प्यार की दुहाई देते हुए पाकिस्तान जाने से इनकार करने पर आखिरकार उसके परिजनों ने सामाजिक नियमों का हवाला देते हुए परिवार से बेदखल करने का ऐलान कर दिया है। उत्तर प्रदेश पुलिस के अनुसार पाकिस्तान से आनो वाली तीस साल की सीमा और बाईस साल के सचिन दिल्ली के पास ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा इलाके में रहते हैं, जहां सचिन नौकरी करता है। सीमा अपने चार बच्चों, जिनकी उम्र सात साल से कम है, सचिन के साथ रहने के लिए नेपाल के रास्ते अवैध रूप से भारत में प्रवेश की। जिसकी जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने उसे चार जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने सचिन को अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने वाली सीमा को अपने आवास में ठहराने के लिए हिरासत में लिया था। लेकिन कोर्ट से जमानत मिलने के बाद दोनों जेल से रिहा हुए और नोएडा में ही रह रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम पर पाकिस्तान स्थित सीमा के पड़ोसियों और एक रिश्तेदार ने स्पष्ट कर दिया कि वे अब सीमा की पाकिस्तान में वापसी नहीं चाहते हैं। सीमा कराची के जिस मकान में किराये पर रहती थी, उसके मकान मालिक के बेटे ने कहा, "उसे अपने बच्चों को वापस पाकिस्तान भेज देना चाहिए। वह वहां रह सकती है क्योंकि अब वह मुस्लिम भी नहीं रही। " मकान मालिक के बेटे नूर मुहम्मद ने बताया, "वह अपने बच्चों के साथ तीन साल तक हमारे यहां किरायेदार थी। वह अपने बच्चों के साथ अकेली रहती थी। उसके ससुर यहां से कुछ दूरी पर रहते हैं। " वहीं मकान मालिक मलिक ने कहा, "सीमा एक मुसलमान होते हुए हिंदू लड़के के साथ गई है, उसने न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे पाकिस्तान को शर्मसार किया है। देर-सबेर उसे अपने किए की सज़ा भुगतनी पड़ेगी। " चार बच्चों की निरक्षर सीमा द्वारा पाकिस्तान के रूढ़िवादी समाज में सब कुछ छोड़कर भारत आने की चर्चा न केवल भार-पाकिस्तान में है बल्कि विश्व के तमाम देशों में सीमा के अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने का घटना के पढ़ा, सुना और देखा जा रहा है। पाकिस्तान में सीमा का घर कराची के गुलिस्तान-ए-जौहर के मध्य में भिट्टईबाद के पड़ोस में है। खबरों के मुताबिक सऊदी अरब में काम करने वाले सीमा के पति गुलाम हैदर ने उसे बारह लाख रुपये में घर खरदी कर दिया था। सीमा और गुलाम हैदर की भी दस साल पहले माता-पिता की इच्छा के विरुद्ध कराची में शादी हुई थी। सीमा के एक अन्य पड़ोसी जमाल जखरानी ने कहा, "हमने उसे एक दिन टैक्सी बुलाते और अपने बच्चों और कुछ बैग के साथ निकलते देखा और हमने सोचा कि वह जैकोबाबाद में अपने गांव जा रही है। लेकिन लगभग एक महीने के बाद जब हमने टीवी चैनलों पर उसके भागने के बारे में सुना, तो हम सभी हैरान रह गए। " सीम हैदर की जनजाति से ताल्लुक रखने वाले जमाल जखरानी ने कहा कि सीमा के लिए अच्छा होगा कि अब वो भारत में ही रहे। जमाल ने कहा, "अगर वह कभी वापस आने के बारे में सोचती है, तो हमारी बिरादरी उसे माफ नहीं करेगी और दूसरी बात कि उसने एक हिंदू के साथ रहने का फैसले करके सभी को नाराज कर दिया है। " जखरानी की बातों से इतर ग्रामीण सिंध में एक हाई-प्रोफाइल धार्मिक नेता मियां मिट्ठू ने खुले तौर पर सीमा के वापस पाकिस्तान लौटने पर दंडित करने की धमकी दी है। बताया जा रहा है कि मियां मिट्ठू सिंध में जिस मदरसे को चलाते हैं, वहां हिंदू लड़कियों को जबरन इस्लाम कबूल कराया जाता है। मिट्ठू के समर्थकों ने सीमा के गांव में हिंदू पूजा स्थलों पर हमला करने की भी धमकी दी है लेकिनकाश्मोर-कंधकोट के एसएसपी इरफान सामू ने हिंदुओं और सिखों को आश्वासन दिया कि उनकी रक्षा की जाएगी। हालांकि सामू पूरे मामले से हैरान है कि सीमा के दस्तावेजों और भारत भागने की कहानी में कई खामियां हैं। उन्होंने कहा, "उसका राष्ट्रीय पहचान पत्र कहता है कि उसका जन्म दो हज़ार दो में हुआ था। इसलिए उसकी उम्र अभी इक्कीस साल होनी चाहिए और फिर भी उसके छः साल की उम्र तक के चार बच्चे हैं। " इसके साथ एसएसपी सामू ने यह भी कहा कि पुलिस ने गुलाम हैदर को सऊदी अरब से लौटने के लिए कहा है लेकिन वह केवल वीडियो या फोन कॉल पर ही उनके संपर्क में है। पुलिस अधिकारी सामू को यकीन नहीं है कि ग्रामीण पृष्ठभूमि वाली महिला दुबई और काठमांडू के रास्ते भारत जाने की योजना बनाने का साहस कर सकती है।
मुखर हो उठे, अन्तर चचल विलोचन लोल । पर तारुण्य उसका वास्तव मे वसन्त मे पकता है । जब कुसुम निचय से हरितावरा धरा लचक पडती है । जब रक्ताशोक अपने कुसुमो के अगार से वनस्थली में आग लगा देता है । जब कमल साँझ को सम्पुट होता होता छिन भर मुँह खोल रखता है कि कही भटक रहा अनुनयी भौंरा अन्तर की राह पाले, कोठ का परचा कही बुरा न मान बैठे । जब पुस्कोकिल वौराये ग्राम को मजरी के मधु से वृत्त हो क्पायकण्ठ से टेर प्रिया को चूम लेता है - मदन का आदेश है वह टेर, मानिनियो के प्रति - मान तज दो, जीवन का यह क्षरण फिर लौटने का नही । भोगो इसे, वशी की गांठ-गांठ, रन्ध्र-रन्ध्र, तन्नी के तार तार, वारुणी की बूंद बूंद । और उदारमना वह कवि प्रिया का प्रसाधन करता हैचिबुक से कानो तक कपोलो पर खिंची टहनियाँ मे लिखे पत्र रग-रग भूम पडते हैं, विशेषक रोम-रोम को परसकर जगा देता है, भाल की भक्ति के श्वेत विन्दुप्रो के वृत्तायित केन्द्र में कुकुम की ग्ररुनाई किरन-सी चमक उठती है । चन्दन की श्वेत रेखाएं वक्ष के गोलार्धो को कटकित करती नाभि में उतर जाती हैं, जघनो को कोर देती हैं। सोमन्त को कुड्मल रेखाएँ धूप के धुंए से बसे अलक्जाल के मोतियो पर विहंस पड़ती है। और आफैले नेत्रो के श्याम उपान्त मधु के मद से वोझिल पलको वे वारण सहज जब झुक पडते हैं तभी जान पाते है कि दर्पण मे प्रतिबिंत्रित लाक्षारजित लोध्रचचित प्रघर पदो को आलता रची रेखा पर हँस नही पायेंगे, कारण कि राजा उन्हें चूम चुका है । बुछ हो गया उसे । यक्षो की नगरी मे उन्माद जागा । अनधिवारी उत्तरीय ने प्रातुर आँचल को समेट लिया। सयम का पाहरू सोया, असयम वा दैत्य जागा । मृणालतन्तुप्रो मे रोवा मनोवेग सोमाग्रो वो वहा ले चला। क्चुकवायबन्ध टूट गये ।
मुखर हो उठे, अन्तर चचल विलोचन लोल । पर तारुण्य उसका वास्तव मे वसन्त मे पकता है । जब कुसुम निचय से हरितावरा धरा लचक पडती है । जब रक्ताशोक अपने कुसुमो के अगार से वनस्थली में आग लगा देता है । जब कमल साँझ को सम्पुट होता होता छिन भर मुँह खोल रखता है कि कही भटक रहा अनुनयी भौंरा अन्तर की राह पाले, कोठ का परचा कही बुरा न मान बैठे । जब पुस्कोकिल वौराये ग्राम को मजरी के मधु से वृत्त हो क्पायकण्ठ से टेर प्रिया को चूम लेता है - मदन का आदेश है वह टेर, मानिनियो के प्रति - मान तज दो, जीवन का यह क्षरण फिर लौटने का नही । भोगो इसे, वशी की गांठ-गांठ, रन्ध्र-रन्ध्र, तन्नी के तार तार, वारुणी की बूंद बूंद । और उदारमना वह कवि प्रिया का प्रसाधन करता हैचिबुक से कानो तक कपोलो पर खिंची टहनियाँ मे लिखे पत्र रग-रग भूम पडते हैं, विशेषक रोम-रोम को परसकर जगा देता है, भाल की भक्ति के श्वेत विन्दुप्रो के वृत्तायित केन्द्र में कुकुम की ग्ररुनाई किरन-सी चमक उठती है । चन्दन की श्वेत रेखाएं वक्ष के गोलार्धो को कटकित करती नाभि में उतर जाती हैं, जघनो को कोर देती हैं। सोमन्त को कुड्मल रेखाएँ धूप के धुंए से बसे अलक्जाल के मोतियो पर विहंस पड़ती है। और आफैले नेत्रो के श्याम उपान्त मधु के मद से वोझिल पलको वे वारण सहज जब झुक पडते हैं तभी जान पाते है कि दर्पण मे प्रतिबिंत्रित लाक्षारजित लोध्रचचित प्रघर पदो को आलता रची रेखा पर हँस नही पायेंगे, कारण कि राजा उन्हें चूम चुका है । बुछ हो गया उसे । यक्षो की नगरी मे उन्माद जागा । अनधिवारी उत्तरीय ने प्रातुर आँचल को समेट लिया। सयम का पाहरू सोया, असयम वा दैत्य जागा । मृणालतन्तुप्रो मे रोवा मनोवेग सोमाग्रो वो वहा ले चला। क्चुकवायबन्ध टूट गये ।
सरकार ने फिर दोहराया कि अगर नक्सली हथियार त्याग दें तो केंद्र और राज्य सरकारें उनके साथ बातचीत के लिए तैयार हैं. राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि वामपंथी एक खास विचारधारा से प्रभावित हैं और वह सशस्त्र सैन्य क्रांति को जरूरी मानते हैं तथा इसके माध्यम से वह संसदीय व्यवस्था को ध्वस्त करना चाहते हैं. उन्होंने बसपा के एस पी सिंह बघेल के पूरक प्रश्न के उत्तर में कहा कि अगर नक्सली हथियार और हिंसा त्याग दें तो केंद्र और राज्य सरकारें उनके साथ बातचीत के लिए तैयार हैं. गृह मंत्री ने कहा कि नक्सल समस्या का गहराई से अध्ययन करने पर पता चलता है कि गरीबी और इलाकों की उपेक्षा वामपंथियों को समर्थन का मुख्य कारण है. उन्होंने कहा कि इस समस्या के हल के लिए दोतरफा नीति अपनाई जा रही है. नक्सल प्रभवित 60 जिलों में एक ओर जहां कानून व्यवस्था के लिए वामपंथियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की जा रही है वहीं दूसरी ओर विकास पर भी जोर दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि ओडिशा के मलकानगिरी जिले में 10 फरवरी 2012 को नक्सलियों के हमले में बीएसएफ के चार कर्मी मारे गए थे. इस मामले की जांच की जा रही है. चिदंबरम ने बताया कि इस तरह की कार्रवाई में मारे गए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के कर्मियों के परिजन को 15-15 लाख रूपये की अनुग्रह राशि दी जाती है. केंद्र सरकार सुरक्षा संबंधी व्यय योजना के तहत नक्सली हमले में मारे गए सुरक्षा कर्मी के परिवार को तीन लाख रूपये की अनुग्रह राशि देती है.
सरकार ने फिर दोहराया कि अगर नक्सली हथियार त्याग दें तो केंद्र और राज्य सरकारें उनके साथ बातचीत के लिए तैयार हैं. राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि वामपंथी एक खास विचारधारा से प्रभावित हैं और वह सशस्त्र सैन्य क्रांति को जरूरी मानते हैं तथा इसके माध्यम से वह संसदीय व्यवस्था को ध्वस्त करना चाहते हैं. उन्होंने बसपा के एस पी सिंह बघेल के पूरक प्रश्न के उत्तर में कहा कि अगर नक्सली हथियार और हिंसा त्याग दें तो केंद्र और राज्य सरकारें उनके साथ बातचीत के लिए तैयार हैं. गृह मंत्री ने कहा कि नक्सल समस्या का गहराई से अध्ययन करने पर पता चलता है कि गरीबी और इलाकों की उपेक्षा वामपंथियों को समर्थन का मुख्य कारण है. उन्होंने कहा कि इस समस्या के हल के लिए दोतरफा नीति अपनाई जा रही है. नक्सल प्रभवित साठ जिलों में एक ओर जहां कानून व्यवस्था के लिए वामपंथियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की जा रही है वहीं दूसरी ओर विकास पर भी जोर दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि ओडिशा के मलकानगिरी जिले में दस फरवरी दो हज़ार बारह को नक्सलियों के हमले में बीएसएफ के चार कर्मी मारे गए थे. इस मामले की जांच की जा रही है. चिदंबरम ने बताया कि इस तरह की कार्रवाई में मारे गए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के कर्मियों के परिजन को पंद्रह-पंद्रह लाख रूपये की अनुग्रह राशि दी जाती है. केंद्र सरकार सुरक्षा संबंधी व्यय योजना के तहत नक्सली हमले में मारे गए सुरक्षा कर्मी के परिवार को तीन लाख रूपये की अनुग्रह राशि देती है.
ऑर्निथोपोड्स - सामान्य- मध्यम आकार के, द्विपक्षीय, पौधे खाने वाले डायनासोर - बाद के मेसोज़ोइक युग के सबसे आम कशेरुकी जानवरों में से कुछ थे। निम्नलिखित स्लाइडों पर, आपको 70 ऑर्निथोपोड डायनासोर की तस्वीरें और विस्तृत प्रोफ़ाइल मिलेंगी, जिसमें ए (एब्रिटोसॉरस) से ज़ेड (ज़ल्मोक्स) तक होगी। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः प्रारंभिक जुरासिक (200 मिलियन वर्ष पूर्व) आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः कई डायनासोर के साथ, एबिटोसॉरस सीमित अवशेषों, दो व्यक्तियों के अपूर्ण जीवाश्मों से जाना जाता है। यह डायनासोर के विशिष्ट दांत इसे हेटरोडोंटोसॉरस के करीबी रिश्तेदार के रूप में चिह्नित करते हैं, और प्रारंभिक जुरासिक काल के कई सरीसृपों की तरह, यह काफी छोटा था, वयस्क केवल 100 पाउंड या उससे भी कम आकार तक पहुंचते थे - और यह प्राचीन के समय अस्तित्व में हो सकता था ऑर्निथिशियन और सॉरिश्चियन डायनासोर के बीच विभाजित करें। एबिटोसॉरस के एक नमूने में आदिम tusks की उपस्थिति के आधार पर, ऐसा माना जाता है कि यह प्रजातियां कामुक रूप से कमजोर हो सकती हैं , पुरुष नर से अलग होते हैं। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः मध्य जुरासिक (170-160 मिलियन वर्ष पूर्व) आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः विडंबना यह है कि, चीन के प्रसिद्ध दशानपू जीवाश्म बिस्तरों के निकट एक डायनासोर संग्रहालय के निर्माण के दौरान एगिलिसॉरस के निकट-पूर्ण कंकाल की खोज की गई थी। इसके पतले निर्माण, लंबे हिंद पैर और कठोर पूंछ के आधार पर, एगिलिसॉरस सबसे पुरानी ऑर्निथोपोड डायनासोर में से एक था, हालांकि ऑर्निथोपॉड परिवार के पेड़ पर इसकी सटीक जगह विवाद का विषय बनी हुई हैः यह होटर्डोंटोसॉरस या फैब्रोसॉरस से अधिक निकटता से संबंधित हो सकता है, या यह सच्चे ऑर्निथोपोड्स और सबसे शुरुआती मार्जिनसेफेलियन (जड़ी-बूटियों के डायनासोर का एक परिवार है जिसमें पैचिसफैलोसॉर और सेराटोप्सियन दोनों शामिल हैं) के बीच एक मध्यवर्ती स्थिति पर कब्जा कर लिया हो सकता है। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः देर क्रेटेसियस (80-75 मिलियन वर्ष पूर्व) आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः कनाडा के अल्बर्टा प्रांत में अब तक की सबसे छोटी ऑर्निथोपॉड की खोज की जा रही है, अल्बर्टाड्रोमस ने केवल अपने सिर से लगभग पांच फीट की पतली पूंछ को माप लिया है और एक अच्छी आकार के टर्की के रूप में वजन कम किया है - जिसने इसे अपने क्रेटेसियस पारिस्थितिकी तंत्र के एक वास्तविक भाग में बनाया है। असल में, अपने खोजकर्ताओं को यह जानने के लिए, अल्बर्टाड्रोमस ने मूल रूप से अल्बर्टोसॉरस नामक उत्तरी अमेरिकी शिकारियों के लिए स्वादिष्ट हॉर्स डी ' ओउवर की भूमिका निभाई। संभवतः, यह तेज़, द्विपक्षीय पौधे-खाने वाला कम से कम क्रेटेसियस डम्प्लिंग की तरह निगलने से पहले अपने पीछा करने वालों को एक अच्छा कसरत देने में सक्षम था! नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः मध्य क्रेटेसियस (125-100 मिलियन वर्ष पूर्व) आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः मध्य क्रेटेसियस काल के दौरान किसी बिंदु पर, बाद में ऑर्निथोपोड प्रारंभिक हैड्रोसॉर , या बतख-बिलित डायनासोर (तकनीकी रूप से, हैड्रोसॉर को ऑर्निथोपोड छतरी के नीचे वर्गीकृत किया जाता है) में विकसित किया गया। Altirhinus अक्सर इन दो निकट से संबंधित डायनासोर परिवारों के बीच एक संक्रमणकालीन रूप के रूप में इंगित किया जाता है, ज्यादातर इसकी नाक पर बहुत ही हैड्रोसौर-जैसे टक्कर की वजह से, जो पैरासॉरोलोफस जैसे बाद के बतख-बिलित डायनासोर के विस्तृत crests के प्रारंभिक संस्करण जैसा दिखता है। यदि आप इस वृद्धि को अनदेखा करते हैं, हालांकि, Altirhinus भी Iguanodon की तरह बहुत देखा, यही कारण है कि ज्यादातर विशेषज्ञ इसे एक असली हैड्रोसौर की बजाय एक iguanodont ऑर्निथोपॉड के रूप में वर्गीकृत करते हैं। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः देर क्रेटेसियस (95 मिलियन वर्ष पूर्व) आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः रहस्यमय, बहुत कम ऑर्निथोपोड्स के कारणों के कारण - छोटे, द्विपक्षीय, पौधे खाने वाले डायनासोर के परिवार - दक्षिण अमेरिका में खोजे गए हैं। Anabisetia (पुरातात्विक अना बिसेट के नाम पर) इस चुनिंदा समूह का सबसे अच्छा प्रमाणित है, एक पूर्ण कंकाल के साथ, केवल सिर की कमी, चार अलग जीवाश्म नमूनों से पुनर्निर्मित। अनाबिसेटिया अपने साथी दक्षिण अमेरिकी ऑर्निथोपोड, गैस्परिनिसौरा, और शायद अधिक अस्पष्ट नोटोइप्सिलोफोडन से भी निकटता से संबंधित था। देर से क्रेटेसियस दक्षिण अमेरिका की ओर बढ़ने वाले बड़े, मांसाहारी थेरोपोडों के भ्रम के आधार पर, अनाबीसिया एक बहुत तेज़ (और बहुत घबराहट) डायनासोर होना चाहिए! नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः प्रारंभिक-मध्य क्रेटेसियस (120-100 मिलियन वर्ष पूर्व) आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः एक निगम के नाम पर जाने वाले कुछ डायनासोरों में से एक (एटलस कोको, खनन उपकरण के एक स्वीडिश निर्माता, जो पालीटोलॉजिस्ट अपने क्षेत्र के काम में बहुत उपयोगी पाते हैं), एटलस्कोपकोसॉरस प्रारंभिक से मध्य क्रेटेसियस अवधि का एक छोटा ऑर्निथोपोड था जो एक समान समानता थी Hypsilophodon करने के लिए। इस ऑस्ट्रेलियाई डायनासोर की खोज टिम और पेट्रीसिया विकर्स-रिच की पति-पत्नी पत्नी ने की थी और वर्णन किया था, जिसने व्यापक रूप से बिखरे हुए जीवाश्म अवशेषों के आधार पर एटलस्कोस्कोकोसॉरस का निदान किया था, लगभग 100 अलग-अलग हड्डियों के टुकड़े जिनमें ज्यादातर जबड़े और दांत होते थे। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः देर जुरासिक (155-145 मिलियन वर्ष पूर्व) आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः डायनासोर की खोज की स्वर्ण युग, जो उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध से मध्य तक फैली हुई थी, डायनासोर भ्रम की सुनहरी उम्र भी थी। चूंकि कैम्पेटोसॉरस कभी भी खोजे जाने वाले सबसे पुराने ऑर्निथोपोडों में से एक था, इसलिए इसे आसानी से संभालने की तुलना में अधिक छिद्रों को अपनी छतरी के नीचे धकेलने का भाग्य भुगतना पड़ा। इस कारण से, अब यह माना जाता है कि केवल एक पहचाना जीवाश्म नमूना एक असली कैम्पोसोसस था; अन्य लोग इगुआनोडन की प्रजातियां भी हो सकते हैं (जो क्रेटेसियस काल के दौरान बहुत बाद में रहते थे)। किसी भी दर पर, अन्य ऑर्निथोपोड्स की तरह, वास्तविक कैम्पोसोसॉरस (जो उत्तरी अमेरिका के मूल निवासी थे) एक मध्यम आकार का, लंबे पूंछ वाले पौधे-खाने वाला था जो शिकारियों द्वारा चौंकाने या पीछा करते समय दो चरणों में दौड़ने में सक्षम हो सकता था (हालांकि यह लगभग निश्चित रूप से चौगुनी स्थिति में वनस्पति के लिए ब्राउज़ किया गया)। हाल ही में, यूटा में खोजे गए कैम्पोसोसस की एक अच्छी तरह से संरक्षित प्रजातियों को एक नए के रूप में पुनः वर्गीकृत किया गया था, लेकिन बहुत समान, ऑर्निथोपोड जीनसः यूटेडॉन, देर जुरासिक (155 मिलियन वर्ष पूर्व) 1 9वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में गिनोसॉर के बारे में एक संपूर्ण पुस्तक लिखी जा सकती है जिसे गलती से Iguanodon की प्रजाति के रूप में वर्गीकृत किया गया था। कंबोरिया एक अच्छा उदाहरण हैः जब यह ऑर्निथोपोड का "टाइप जीवाश्म" इंग्लैंड के किममेरिज क्ले गठन से पता चला था, इसे 1879 में ऑक्सफोर्ड पालीटोलॉजिस्ट द्वारा इगुआनोडन प्रजातियों के रूप में नियुक्त किया गया था (एक समय जब ऑर्निथोपोड विविधता की पूरी सीमा नहीं थी अभी तक ज्ञात)। कुछ साल बाद, हैरी सीली ने नए जीनस कंबोरिया (पहाड़ी के बाद जहां हड्डियों की खोज की थी) का निर्माण किया, लेकिन उसके बाद जल्द ही उसे एक और पालीटोलॉजिस्ट ने उलझा दिया, जिसने कैम्पोरोस को कैम्पोरोसॉर के साथ लम्बा कर दिया। अंततः 1 99 8 में, एक शताब्दी में मामला सुलझाया गया था, जब कंबोरिया को एक बार फिर अपने अवशेषों की पुनः जांच के बाद अपना खुद का जीनस दिया गया था। प्रारंभिक क्रेटेसियस (140 मिलियन वर्ष पूर्व) डार्विन्सॉरस एक लंबा सफर तय कर चुका है क्योंकि 1842 में प्रसिद्ध प्रकृति रिचर्ड ओवेन ने अंग्रेजी तट पर अपनी खोज के बाद इसका प्रकार जीवाश्म वर्णन किया था। 188 9 में, इस पौधे खाने वाले डायनासोर को इगुआनोडन की प्रजातियों के रूप में असाइन किया गया था (उस समय के नए खोज किए गए ऑर्निथोपोड्स के लिए असामान्य भाग्य नहीं), और एक सदी बाद में, 2010 में, इसे और भी अस्पष्ट जीनस हाइपसेलोस्पिनस को फिर से सौंपा गया था। अंत में, 2012 में, पालीटोलॉजिस्ट और चित्रकार ग्रेगरी पॉल ने फैसला किया कि यह डायनासोर का प्रकार जीवाश्म अपने स्वयं के जीनस और प्रजातियों, डार्विन्सॉरस इवोल्यूशनिस की योग्यता के लिए पर्याप्त विशिष्ट था, हालांकि उनके सभी साथी विशेषज्ञों को आश्वस्त नहीं है। डार्विन्सॉरस के विशिष्ट नाम के रूप में, पॉल का कहना है कि वह चार्ल्स डार्विन और उनके विकास के सिद्धांत दोनों का सम्मान करना चाहते थे, जैसा प्रारंभिक क्रेटेसियस यूरोप (जो बाद में, उत्तरी अमेरिका में) के ऑर्निथोपोड्स के बीच कुछ उलझन में और अंतःक्रियात्मक संबंधों से पैदा हुआ था, हैड्रोसॉर, या बतख-बिलित डायनासोर, जो जमीन पर मोटे थे जब तक कि सभी डायनासोर 65 मिलियन वर्ष पहले यूकाटन उल्का प्रभाव से विलुप्त नहीं हुए थे)। पौलुस इस विचार को छीनने वाला एकमात्र वैज्ञानिक नहीं है; शुरुआती पेट्रोसॉर डार्विनोपटेरस और प्रारंभिक (और व्यापक रूप से विवादित) पैतृक प्राइम Darwinius गवाह। प्रारंभिक क्रेटेसियस (130-125 मिलियन वर्ष पूर्व) Iguanodon के एक करीबी रिश्तेदार - वास्तव में, जब 1 9 58 में स्पेन में इस डायनासोर के अवशेषों की खोज की गई थी, तो उन्हें शुरुआत में इगुआनोडन बर्निसर्टेंसिस को सौंपा गया था - डेलप्पेरेटिया अपने प्रसिद्ध रिश्तेदार से भी बड़ा था, सिर से पूंछ के बारे में 27 फीट और ऊपर वजन चार या पांच टन का। डेलैपैरेन्टिया को केवल 2011 में अपना खुद का जीनस दिया गया था, इसका नाम, विचित्र रूप से पर्याप्त है, जिसने पालीटोलॉजिस्ट को सम्मानित किया, जिसने टाइप जीवाश्म, अल्बर्ट-फेलिक्स डी लापैरेंट को गलत तरीके से पहचान लिया। इसकी बदली हुई वर्गीकरण एक तरफ, डेलप्पेरेटिया प्रारंभिक क्रेटेसियस अवधि का एक सामान्य ऑर्निथोपोड था, जो एक अनजाने दिखने वाले पौधे-खाने वाला था जो शिकारियों द्वारा शुरू किए जाने पर अपने पिछड़े पैरों पर दौड़ने में सक्षम हो सकता था। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः प्रारंभिक क्रेटेसियस (130-125 मिलियन वर्ष पूर्व) आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः बेवकूफ-ध्वनि वाला गुड़िया - बेल्जियम पालीटोलॉजिस्ट लुई डॉलो के नाम पर, और ऐसा नहीं क्योंकि यह एक बच्चे की गुड़िया की तरह दिखता है - उन डायनासोरों में से एक है जिसकी दुर्भाग्य 1 9वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में इगुआनोडन की प्रजातियों के रूप में लुप्त हो गई थी। इस ऑर्निथोपोड के अवशेषों की आगे की परीक्षा के परिणामस्वरूप इसे अपने स्वयं के जीनस में सौंपा गया; अपने लंबे, मोटे शरीर और छोटे, संकीर्ण सिर के साथ, Iguanodon के लिए कोई गलती Dollodon के संबंध नहीं है, लेकिन इसकी अपेक्षाकृत लंबी बाहों और विशिष्ट गोलाकार चोंच इसे अपने डायनासोर के रूप में peg। नामः ड्रिंकर (अमेरिकी पालीटोलॉजिस्ट एडवर्ड ड्रिंकर कोप के बाद) पर्यावासः ऐतिहासिक कालः देर जुरासिक (155 से 145 मिलियन वर्ष पूर्व) आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः 1 9वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में, अमेरिकी जीवाश्म शिकारी एडवर्ड ड्रिंकर कोप और ओथनील सी मार्श प्राणघातक दुश्मन थे, लगातार एक-दूसरे (और यहां तक कि तबाही) को अपने कई पालीटोलॉजिकल खुदाई पर एक दूसरे की कोशिश कर रहे थे। यही कारण है कि यह विडंबनापूर्ण है कि छोटे, दो पैर वाले ऑर्निथोपोड ड्रिंकर (कोप के नाम पर) एक ही जानवर हो सकता है जो छोटे, दो पैर वाले ऑर्निथोपोड ओथनिएलिया (मार्श के नाम पर) जैसा ही हो; इन डायनासोर के बीच अंतर इतने कम हैं कि वे एक ही जीनस में एक दिन ध्वस्त हो सकते हैं। 20 वीं शताब्दी की शुरुआत से ही निराश, ड्रिंकर और मार्श लंबे समय से देखभाल कर रहे हैं! नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः देर जुरासिक (155-145 मिलियन वर्ष पूर्व) आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः ज्यादातर तरीकों से, ड्रायोसॉरस (इसका नाम, "ओक छिपकली", अपने कुछ दांतों के ओक-पत्ती जैसी आकृति को संदर्भित करता है) एक सादा-वेनिला ऑर्निथोपोड था , जो इसके छोटे आकार, द्विपक्षीय मुद्रा, कठोर पूंछ और पांच- उंगली हाथ अधिकांश ऑर्निथोपोड की तरह, ड्रायोसॉरस शायद झुंड में रहता था, और इस डायनासोर ने कम से कम आधा रास्ते अपने युवा को उठाया हो सकता है (यानी, कम से कम एक या दो साल तक छीनने के बाद)। ड्रियोसॉरस में भी विशेष रूप से बड़ी आंखें थीं, जो इस संभावना को बढ़ाती है कि देर से जुरासिक काल के अन्य जड़ी-बूटियों की तुलना में यह एक स्मिडजेन अधिक बुद्धिमान था। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः देर जुरासिक (150 मिलियन वर्ष पूर्व) आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः यह ध्यान में रखते हुए कि यह कितना अस्पष्ट है, डायसालोटोसॉरस में हमें डायनासोर विकास चरणों के बारे में सिखाने के लिए बहुत कुछ है। अफ्रीका में इस मध्यम आकार के जड़ी-बूटियों के विभिन्न नमूने खोजे गए हैं, जो पालीटोलॉजिस्टों के निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त हैं कि ए) डायसालोटोसॉरस अपेक्षाकृत तेज़ी से 10 वर्षों में परिपक्वता तक पहुंच गया है, बी) यह डायनासोर पैकेट की बीमारी के समान, अपने कंकाल के वायरल संक्रमण के अधीन था, और सी) Dysalotosaurus का मस्तिष्क बचपन और परिपक्वता के बीच प्रमुख संरचनात्मक परिवर्तनों के माध्यम से चला गया, हालांकि इसके श्रवण केंद्रों को जल्दी से विकसित किया गया था। अन्यथा, हालांकि, डिसालोटोसॉरस एक सादा-वेनिला प्लांट ईटर था, जो इसके समय और स्थान के अन्य ऑर्निथोपोड से अलग था। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः प्रारंभिक क्रेटेसियस (140 मिलियन वर्ष पूर्व) आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः ऑर्निथोपोड्स - ज्यादातर छोटे, ज्यादातर द्विपक्षीय, और पूरी तरह से असुरक्षित जड़ी-बूटियों के डायनासोर का परिवार - आखिरी जीव हैं जिन्हें आप अपने जबड़े में स्तनपायी जैसे कुत्ते खेलना चाहते हैं, अजीब विशेषता है जो इचिनोदोन को असामान्य जीवाश्म खोज बनाती है। अन्य ऑर्निथोपोड की तरह, एचिनोडन एक पुष्ट-पौधे की खानपान थी, इसलिए यह दांत उपकरण एक रहस्य का थोड़ा सा हिस्सा है - लेकिन शायद थोड़ा सा तो एक बार जब आप महसूस करते हैं कि यह छोटा डायनासोर समान रूप से अजीब रूप से दांत वाले हीटरोडोंटोसॉरस से संबंधित था ("अलग दांतों वाला छिपकली "), और संभवतः फैब्रोसॉरस भी। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः प्रारंभिक क्रेटेसियस (130-125 मिलियन वर्ष पूर्व) आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः डायनासोर जीवाश्मों को न केवल स्थानीय पारिस्थितिक तंत्र के बारे में बताने के लिए बहुत कुछ है, बल्कि मेसोज़ोइक युग के दौरान लाखों साल पहले दुनिया के महाद्वीपों के वितरण के बारे में भी बहुत कुछ है। हाल ही में, प्रारंभिक क्रेटेसियस एल्हाज़ोसॉरस - जिसकी हड्डियों को मध्य अफ्रीका में खोजा गया था - को इन दो महाद्वीपों के बीच एक भूमि कनेक्शन पर संकेत देने वाले एक समान डायनासोर, वाल्दोसॉरस की प्रजाति माना जाता था। एल्हाज़ोसॉरस के अपने जीनस के असाइनमेंट ने कुछ हद तक पानी को खराब कर दिया है, हालांकि इन दो द्विपक्षीय, पौधे खाने, टोडलर के आकार वाले ऑर्निथोपोड्स के बीच संबंधों में कोई विवाद नहीं है। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः प्रारंभिक जुरासिक (200-190 मिलियन वर्ष पूर्व) आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः फैब्रोसॉरस - फ्रांसीसी भूवैज्ञानिक जीन फेबर के नाम पर - डायनासोर इतिहास के इतिहास में एक गन्दा जगह पर कब्जा कर लिया। इस छोटे, दो पैर वाले, पौधे खाने वाले ऑर्निथोपोड को एक अपूर्ण खोपड़ी के आधार पर "निदान" किया गया था, और कई पालीटोलॉजिस्ट मानते हैं कि यह वास्तव में प्रारंभिक जुरासिक अफ्रीका, लेसोथोसॉरस से एक अन्य जड़ी-बूटियों के डायनासोर की प्रजाति (या नमूना) था। फैब्रोसॉरस (यदि यह वास्तव में इस तरह अस्तित्व में था) पूर्वी एशिया, ज़ियाओसॉरस के थोड़ी देर बाद ऑर्निथोपोड के लिए पूर्वज भी हो सकता है। इसकी स्थिति के किसी और निर्णायक दृढ़ संकल्प को भविष्य की जीवाश्म खोजों का इंतजार करना होगा। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः प्रारंभिक क्रेटेसियस (110 मिलियन वर्ष पूर्व) आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः फुकुइराएप्टर के साथ उलझन में नहीं होना चाहिए - जापान के उसी क्षेत्र में खोजे जाने वाले मध्यम आकार के थेप्रोपोड - फुक्यूसॉरस एक मामूली आकार का ऑर्निथोपॉड था जो शायद यूरेशिया और उत्तरी अमेरिका के बेहतर ज्ञात Iguanodon जैसा था (और निकटता से संबंधित था)। चूंकि वे लगभग उसी समय रहते थे, प्रारंभिक से मध्य क्रेटेसियस काल में, यह संभव है कि फुकुइसॉरस फुकुइराएप्टर के लंच मेनू पर लगा, लेकिन अभी तक इसके लिए कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं है - और क्योंकि ऑर्निथोपोड जापान में जमीन पर बहुत दुर्लभ हैं, यह है Fukuisaurus 'सटीक विकासवादी उद्भव स्थापित करने में मुश्किल है। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः देर क्रेटेसियस (90-85 मिलियन वर्ष पूर्व) आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः एक ठेठ दूसरे-ग्रेडर के आकार और वजन के बारे में, गैस्पारिनिसौरा महत्वपूर्ण है क्योंकि यह कुछ ऑर्निथोपोड डायनासोरों में से एक है जिसे दक्षिण अमेरिका में देर से क्रेटेसियस काल के दौरान रहने के लिए जाना जाता है। एक ही क्षेत्र में कई जीवाश्म अवशेषों की खोज के आधार पर, यह छोटा पौधे-खाने वाला शायद हर्ड्स में रहता था, जिसने इसे अपने पारिस्थितिकी तंत्र में बड़े शिकारियों से बचाने में मदद की थी (जैसा कि धमकी दी गई थी, उतनी जल्दी भागने की क्षमता थी! )। जैसा कि आपने देखा होगा, गैस्पारिनिसौरा कुछ डायनासोरों में से एक है, जिसका नाम मादा के नाम पर रखा गया है, प्रजातियों के पुरुष के बजाय, यह सम्मान मायासोरा और लीएललिनासौरा के साथ साझा करता है। प्रारंभिक क्रेटेसियस (130-125 मिलियन वर्ष पूर्व) जब 2006 में गिडोनमैंटेलिया का नाम बनाया गया था, 1 9वीं शताब्दी के प्रकृतिवादी गिदोन मंटेल कुछ लोगों में से एक नहीं थे, दो नहीं, बल्कि उसके बाद नामित तीन डायनासोर, अन्य लोग मंटेलिसॉरस और कुछ और संदिग्ध मंटेलोडन थे। उलझन में, गिडोनमैंटेलिया और मैन्टेलिसॉरस एक ही समय (प्रारंभिक क्रेटेसियस अवधि) और उसी पारिस्थितिक तंत्र (पश्चिमी यूरोप की वुडलैंड्स) में रहते थे, और इन दोनों को इग्यूनोडोन से निकटता से ऑर्निथोपोड के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। गिडोन मैन्टेल इस डबल सम्मान के लायक क्यों है? खैर, अपने जीवनकाल में, वह रिचर्ड ओवेन जैसे अधिक शक्तिशाली और आत्म केंद्रित पालीटोलॉजिस्टों द्वारा ढका हुआ था, और आधुनिक शोधकर्ताओं का मानना है कि उन्हें इतिहास द्वारा अन्यायपूर्ण रूप से अनदेखा किया गया है! देर क्रेटेसियस (85 मिलियन वर्ष पूर्व) दुनिया के अन्य हिस्सों की तुलना में, बहुत कम "बेसल" ऑर्निथोपोड्स - स्माल, द्विपक्षीय, पौधे खाने वाले डायनासोर - एशिया में पहचाने गए हैं (एक उल्लेखनीय अपवाद प्रारंभिक क्रेटेसियस जेहोलोसॉरस है, जिसने लगभग 100 पाउंड गीले भिगोने का वजन किया)। यही कारण है कि हाया की खोज ने इतनी बड़ी खबर बनाईः इस हल्के ऑर्निथोपोड ने लगभग 85 मिलियन वर्ष पहले, मध्य एशिया के एक क्षेत्र में आधुनिक मंगोलिया के अनुरूप क्रेटेसियस काल के दौरान रहते थे। (फिर भी, हम यह नहीं बता सकते कि बेसल ऑर्निथोपोड्स की कमी इसलिए है क्योंकि वे वास्तव में दुर्लभ जानवर थे, या सिर्फ उन सभी को जीवाश्म नहीं किया था)। हाया कुछ ऑर्निथोपोडों में से एक है जिसे गैस्ट्रोलिथ निगलने के लिए जाना जाता है, पत्थरों ने इस डायनासोर के पेट में सब्जी पदार्थ को पीसने में मदद की। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः प्रारंभिक जुरासिक (200-190 मिलियन वर्ष पूर्व) आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः हेटरोडोंटोसॉरस नाम एक मुंह से है, एक से अधिक तरीकों से। इस छोटे ऑर्निथोपोड ने अपने मोनिकर को अर्जित किया, जिसका अर्थ है "अलग-अलग दांतों वाला छिपकली", इसके तीन अलग-अलग प्रकार के दांतों के लिए धन्यवादः ऊपरी जबड़े, छिद्र के आकार के दांत (वनस्पति पीसने के लिए) पर incisors (वनस्पति के माध्यम से टुकड़ा करने के लिए) आगे, और ऊपरी और निचले होंठ से बाहर निकलने वाले दो जोड़े के टुकड़े। एक विकासवादी दृष्टिकोण से, हेटरोडोंटोसॉरस 'incisors और मोलर्स व्याख्या करने के लिए आसान हैं। Tusks एक और समस्या का सामना करना पड़ता हैः कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ये केवल पुरुषों पर पाए गए थे, और इस प्रकार एक यौन रूप से चयनित विशेषता थी (जिसका मतलब है कि मादा हेटरोडोंटोसॉरस बड़े-बड़े पुरुषों के साथ मिलकर अधिक इच्छुक थे)। हालांकि, यह भी संभव है कि नर और मादा दोनों में इन tusks था, और शिकारियों को डराने के लिए उन्हें इस्तेमाल किया। एक किशोर हेटरोडोंटोसॉरस की हालिया खोज ने कैनिन के एक पूर्ण सेट को इस मुद्दे पर और अधिक प्रकाश डाला है। अब यह माना जाता है कि यह छोटा डायनासोर कभी-कभी छोटे स्तनधारी या छिपकली के साथ अपने बड़े पैमाने पर शाकाहारी आहार को पूरक बना सकता है। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः मध्य जुरासिक (175 मिलियन वर्ष पूर्व) आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः मध्य जुरासिक चीन के प्रारंभिक, या "बेसल" ऑर्निथोपोड को वर्गीकृत करना मुश्किल साबित हुआ है, जिनमें से अधिकांश समान दिखते हैं। हेक्सिनलुसॉरस (एक चीनी प्रोफेसर के नाम पर) को हाल ही में समान रूप से अस्पष्ट यांडुसॉरस की प्रजातियों के रूप में वर्गीकृत किया गया था, और इन दोनों पौधों के खाने वालों के पास एग्लिसिसॉरस के साथ समान लक्षण थे (वास्तव में, कुछ पालीटोलॉजिस्ट मानते हैं कि हेक्सिनलुसॉरस का निदान नमूना वास्तव में था इस बेहतर ज्ञात जीनस का किशोर)। जहां भी आप इसे डायनासोर परिवार के पेड़ पर रखने के लिए चुनते हैं, हेक्सिनलुसॉरस एक छोटा, पतला सरीसृप था जो बड़े पैरों के द्वारा खाने से बचने के लिए दो पैरों पर दौड़ता था। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः प्रारंभिक क्रेटेसियस (125 मिलियन वर्ष पूर्व) आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः हाल ही में उथिथोपोड डायनासोर की एक जोड़ी में से एक यूटा में पाया गया - दूसरा प्रभावशाली नाम इगुआनाकोलोसस - हिप्पोड्राको, "घोड़ा ड्रैगन", इगुआआनोडन रिश्तेदार के लिए छोटी तरफ था, केवल 15 फीट लंबा और आधा टन ( जो एक सुराग हो सकता है कि एकमात्र, अधूरा नमूना एक पूर्ण वयस्क के बजाय किशोर का है)। लगभग 125 मिलियन वर्ष पहले क्रेटेसियस काल की शुरुआत में, हिप्पोड्राको तुलनात्मक रूप से "बेसल" iguanodont रहा है, जिसका निकटतम रिश्तेदार थोड़ी देर बाद (और अभी भी बेहद अस्पष्ट) थाइओफिटलिया था। प्रारंभिक क्रेटेसियस (140 मिलियन वर्ष पूर्व) 1 9वीं शताब्दी के दौरान, बड़ी संख्या में ऑर्निथोपोडों को इगुआनोडन की प्रजातियों के रूप में वर्गीकृत किया गया था, और फिर तुरंत पालीटोलॉजी के किनारों पर पहुंचाया गया। 2012 में, ग्रेगरी एस पॉल ने इन भूल गए प्रजातियों में से एक को बचाया, इगुआनोडन होलिंगटनियेंसिस , और इसे हक्सलेसॉरस नाम के तहत जीनस की स्थिति में ले जाया गया (थॉमस हेनरी हक्सले का सम्मान, चार्ल्स डार्विन के विकास के सिद्धांत के पहले समर्पित रक्षकों में से एक)। कुछ साल पहले, 2010 में, एक और वैज्ञानिक ने "समानार्थी" किया था । मैं हॉलिंगटनिसेंसिस हाइपसेलोस्पिनस के साथ, ताकि आप कल्पना कर सकें, हक्सलेसॉरस का अंतिम भाग्य अभी भी हवा में है! प्रारंभिक क्रेटेसियस (140 मिलियन वर्ष पूर्व) हाइपसेलोस्पिनस केवल कई डायनासोरों में से एक है जिसने इगुआनोडन की प्रजातियों के रूप में अपना टैक्सोनोमिक जीवन शुरू किया है (चूंकि इगुआनोडन आधुनिक पालीटोलॉजी के इतिहास में इतनी जल्दी खोजा गया था, यह एक "कचरा बास्केट जीनस" बन गया जिसके लिए बहुत कम समझने वाले डायनासोर को असाइन किया गया था)। रिचर्ड लिडेकर द्वारा 188 9 में इगुआनोडन फिट्टोनी के रूप में वर्गीकृत, इस ऑर्निथोपोड ने 100 वर्षों से अधिक समय तक अस्पष्टता में लम्बे समय तक, जब तक कि 2010 में अपने अवशेषों की पुनः परीक्षा न हो, एक नए जीनस के निर्माण को प्रेरित किया। अन्यथा इगुआनोडन के समान ही, प्रारंभिक क्रेटेसियस हाइपसेलोस्पिनस को ऊपरी हिस्से के साथ छोटी कशेरुकी कताई से अलग किया गया था, जिसने त्वचा की लचीली झपकी का समर्थन किया था। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः प्रारंभिक क्रेटेसियस (130-125 मिलियन वर्ष पूर्व) आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः शुरुआती क्रेटेसियस काल के अधिक कल्पनाशील नामित ऑर्निथोपोड डायनासोर में से एक, इगुआनाकोलोसस को हाल ही में यूटा में थोड़ी देर के साथ और बहुत छोटा, हिप्पोड्राको के साथ खोजा गया था। (जैसा कि आपने अनुमान लगाया होगा, इस डायनासोर के नाम में "iguana" इसका अधिक प्रसिद्ध, और तुलनात्मक रूप से अधिक उन्नत, रिश्तेदार इगुआआनोडन को संदर्भित करता है, न कि आधुनिक iguanas। ) Iguanacolossus के बारे में सबसे प्रभावशाली बात इसकी तीव्र थोक थी; 30 फीट लंबा और 2 से 3 टन पर, यह डायनासोर अपने उत्तरी अमेरिकी पारिस्थितिकी तंत्र के सबसे बड़े गैर- टाइटानोसौर पौधे-खाने वालों में से एक होता। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः प्रारंभिक क्रेटेसियस (130-125 मिलियन वर्ष पूर्व) आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः उत्तरी चीन के जोहोल क्षेत्र के नाम पर नामित प्रागैतिहासिक सरीसृपों के बारे में कुछ ऐसा है जो अवसरों पर विवाद करते हैं। पेरोसौर के एक जीनस जेहोलोप्टरस को एक वैज्ञानिक द्वारा फेंगने के रूप में पुनर्निर्मित किया गया है, और संभवतः बड़े डायनासोर के खून को चूसना (माना जाता है, वैज्ञानिक समुदाय में बहुत कम लोग इस परिकल्पना की सदस्यता लेते हैं)। जेहोलोसॉरस, एक छोटा, ऑर्निथोपोड डायनासोर, कुछ अजीब दांत भी था - उसके मुंह और मुंह के सामने तेज, मांसाहारी-जैसे दांत, पीठ में जड़ी बूटी की तरह पीसने वाले। वास्तव में, कुछ पालीटोलॉजिस्ट अनुमान लगाते हैं कि हिपिसिलोफोडन के इस करीबी रिश्तेदार ने एक सर्वव्यापी आहार, एक चौंकाने वाला अनुकूलन (यदि सच है) का पीछा किया हो सकता है क्योंकि ऑर्निथिशियन डायनासोर के विशाल बहुमत सख्त शाकाहारियों थे! नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः मध्य-देर क्रेटेसियस (95-90 मिलियन वर्ष पूर्व) आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः क्रेटेसियस अवधि के अंत तक सबसे प्रचुर मात्रा में जड़ी-बूटियों के लिए हेड्रोसॉर (बतख-बिलित डायनासोर), ऑर्निथोपोड्स के नाम से जाने वाली बड़ी डायनासोर नस्ल का हिस्सा थे - और सबसे उन्नत ऑर्निथोपोड्स और सबसे शुरुआती हैड्रोसॉर के बीच की रेखा वास्तव में बहुत अस्पष्ट है। यदि आपने केवल अपने सिर की जांच की है, तो आप जयावती को एक सच्चे हैड्रोसौर के लिए गलती कर सकते हैं, लेकिन इसके शरीर रचना के सूक्ष्म विवरण ने इसे ऑर्निथोपॉड शिविर में रखा है - अधिक विशेष रूप से, पालीटोलॉजिस्ट का मानना है कि जेवाती एक iguanodont डायनासोर था, और इस प्रकार इगुआनोडन से निकटता से संबंधित है। हालांकि आप इसे वर्गीकृत करना चुनते हैं, जेयावती एक मध्यम आकार का था, ज्यादातर द्विपक्षीय पौधे-भोजनालय अपने परिष्कृत दांत तंत्र (जो मध्य क्रेटेसियस के कठिन सब्जी पदार्थ को पीसने के लिए उपयुक्त था) और इसके चारों ओर अजीब, झुर्रीदार छत आँख का गढ़ा। जैसा कि अक्सर होता है, इस डायनासोर का आंशिक जीवाश्म 1 99 6 में न्यू मैक्सिको में पाया गया था, लेकिन यह 2010 तक नहीं था कि अंततः पालीटोलॉजिस्ट इस नए जीनस को "निदान" करने के लिए मिल गए। देर क्रेटेसियस (85-65 मिलियन वर्ष पूर्व) कोई आम तौर पर दक्षिण कोरिया को प्रमुख डायनासोर खोजों से जोड़ता नहीं है, इसलिए आप यह जानकर आश्चर्यचकित हो सकते हैं कि कोरियाईसॉरस का प्रतिनिधित्व 2003 में इस देश के सेनसो कांग्लोमेरेट में खोजे गए तीन अलग-अलग (लेकिन अपूर्ण) जीवाश्म नमूने से किया जाता है। आज तक, नहीं कोरियाईसॉरस के बारे में बहुत कुछ प्रकाशित किया गया है, जो कि देर से क्रेटेसियस काल के क्लासिक, छोटे-शरीर वाले ऑर्निथोपॉड प्रतीत होता है, शायद जोहोलोसॉरस से निकटता से संबंधित है और शायद (हालांकि यह सिद्ध होने से बहुत दूर है) एक बेहतर डायनासोर बेहतर तरीके से अज्ञात ओरीक्टोड्रोमस। प्रारंभिक क्रेटेसियस (135-125 मिलियन वर्ष पूर्व) आप उन सभी डायनासोरों के बारे में एक संपूर्ण पुस्तक लिख सकते हैं जिन्हें एक बार Iguanodon (या, 1 9वीं शताब्दी के गूढ़ पालीटोलॉजिस्ट , जैसे गिदोन मैन्टेल ) द्वारा इस जीनस को सौंपा गया था। लंदन प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय में स्थित एकल जीवाश्म जबड़े के साक्ष्य पर, सौ साल से अधिक के लिए, कुकुफेलिया को इगुआनोडन की प्रजातियों के रूप में वर्गीकृत किया गया था। 2010 में यह सब बदल गया, जब एक छात्र ने जबड़े का निरीक्षण किया, तो कुछ सूक्ष्म रचनात्मक विशिष्टताओं को देखा, और वैज्ञानिक समुदाय को नए ऑर्निथोपोड जीनस कुकुफेलिया ("कोकू का मैदान" बनाने के लिए आश्वस्त किया, जहां उस इलाके के पुराने अंग्रेजी नाम के बाद जहां जबड़ा खोजा गया था) । देर जुरासिक (160 मिलियन वर्ष पूर्व) लोकप्रिय मीडिया में आपने जो पढ़ा है, उसके बावजूद, कुलिंडाड्रोमस पंख रखने के लिए पहली पहचान वाले ऑर्निथोपोड डायनासोर नहीं हैः यह सम्मान कुछ साल पहले चीन में खोजा गया था, जो तियान्युलोंग से संबंधित है। लेकिन जबकि तियान्युलोंग की जीवाश्म पंख जैसी छाप कम से कम कुछ व्याख्या के लिए खुली थीं, देर से जुरासिक कुलिंडाड्रोमस में पंखों के अस्तित्व पर कोई संदेह नहीं है, जिसका अर्थ है कि पंख पहले डायनासोर साम्राज्य में अधिक व्यापक थे माना जाता है (पंख वाले डायनासोर का विशाल बहुमत थेप्रोपोड थे, जिनसे पक्षियों को विकसित किया जाता है)। कुलिंडाड्रोमस की खोज एक खरगोश-छेद के सवाल खोलती है, जो आने वाले वर्षों के लिए पुनरावृत्ति होगी। गर्म पंख वाले / ठंडे खून वाले डायनासोर बहस के लिए इस पंख वाले ऑर्निथोपोड का अस्तित्व क्या है? (पंखों का एक कार्य इन्सुलेशन होता है, और एक सरीसृप को इन्सुलेशन की आवश्यकता नहीं होती है जब तक कि उसे अपने शरीर की गर्मी को बचाने की आवश्यकता न हो, संभावना है कि यह एक एंडोथर्मिक चयापचय है)। क्या सभी डायनासोरों के पास उनके जीवन चक्र (यानी किशोरों के रूप में) में कुछ स्तर पर पंख होते हैं? क्या यह संभव है कि पक्षी चिकित्सकीय डायनासोर से नहीं विकसित हुए, लेकिन पंख वाले शाकाहारियों जैसे कि कुलिंडाड्रोमस और टियांयुलॉन्ग से? आगे के घटनाक्रम के लिए जुड़े रहें! नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः प्रारंभिक क्रेटेसियस (120-110 मिलियन वर्ष पूर्व) आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः जब 2005 में चीन में इसके आंशिक अवशेषों की खोज की गई, तो Lanzhousaurus दो कारणों से हलचल हुई। सबसे पहले, इस डायनासोर ने 30 फीट की लंबाई में मापा, जिससे क्रेटेसियस काल के अंत में हैड्रोसॉर के उदय से पहले यह सबसे बड़ी ऑर्निथोपोड्स में से एक बना। और दूसरा, कम से कम इस डायनासोर के दांत समान रूप से विशाल थेः हेलिकॉप्टरों के साथ 14 सेंटीमीटर लंबा (एक मीटर लंबे निचले जबड़े में), Lanzhousaurus सबसे लंबे समय तक पहने हुए जड़ी-बूटियों के डायनासोर हो सकता है। लगता है कि Lanzhousaurus मध्य अफ्रीका से एक और विशाल ऑर्निथोपोड, लर्डुसॉरस से निकटता से संबंधित है - एक मजबूत संकेत है कि डायनासोर प्रारंभिक क्रेटेसियस के दौरान अफ्रीका से यूरेशिया (और इसके विपरीत) में स्थानांतरित हो गए थे। देर जुरासिक (160-150 मिलियन वर्ष पूर्व) हड्डी युद्धों की ऊंचाई पर, 1 9वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में, नए डायनासोरों को तेजी से नामित किया जा रहा था, जो कि जीवाश्म सबूतों को समर्थन देने के लिए एकत्र किए जा सकते थे। एक अच्छा उदाहरण लाओसॉरस है, जो प्रसिद्ध पालीटोलॉजिस्ट ओथनील सी मार्श द्वारा वायोमिंग में खोजे गए मुट्ठी भर के आधार पर बनाया गया था। (इसके तुरंत बाद, मार्श ने दो नई लाओसॉरस प्रजातियों का निर्माण किया, लेकिन फिर पुनरावृत्ति और जीनस ड्रायोसॉरस के लिए एक नमूना सौंपा। ) दशकों के आगे भ्रम के बाद - जिसमें लाओसॉरस की प्रजातियां स्थानांतरित की गईं, या ऑरोड्रोमस और ओथनिएलिया के तहत शामिल करने के लिए विचार किया गया - देर से जुरासिक ऑर्निथोपोड अस्पष्टता में समाप्त हो गया, और आज इसे नामांकित ड्यूबियम माना जाता है । प्रारंभिक जुरासिक (200 मिलियन वर्ष पूर्व) पहले पौधे खाने वाले डायनासोर को वेनेजुएला में खोजा जा सकता है - और केवल दूसरा डायनासोर, अवधि, क्योंकि इसकी घोषणा उसी समय की गई थी जब मांस खाने वाले तचिरैप्टर - लक्विंटसौरा एक छोटे ऑर्निथिशियन थे जो त्रिज्या / जुरासिक सीमा, 200 मिलियन साल पहले। इसका अर्थ यह है कि लाक्विंटासौरा हाल ही में अपने मांसाहारी पूर्वजों (दक्षिण डायनासोर जो दक्षिण अमेरिका में 30 मिलियन वर्ष पहले उग आया था) से विकसित हुआ था - जो इस डायनासोर के दांतों के अजीब आकार को समझा सकता है, जो कि समान रूप से उपयुक्त है छोटी कीड़े और जानवरों के साथ-साथ फर्न और पत्तियों के सामान्य आहार को कम करना। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः प्रारंभिक क्रेटेसियस (120-110 मिलियन वर्ष पूर्व) आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः लर्डसॉरस उन डायनासोरों में से एक है जो पालीटोलॉजिस्ट को उनकी प्रसन्नता से बाहर हिलाता है। जब 1 999 में मध्य अफ्रीका में इसके अवशेषों की खोज हुई, तो इस जड़ी-बूटियों के विशाल आकार ने ऑर्निथोपोड विकास के बारे में लंबे समय तक विचारों को परेशान किया (यानी, जुरासिक और प्रारंभिक क्रेटेसियस काल के "छोटे" ऑर्निथोपोड धीरे-धीरे "बड़े" ऑर्निथोपोड, यानी हैड्रोसॉर देर से Cretaceous के)। 30 फीट लंबा और 6 टन, लर्डुसॉरस (और 2005 में चीन में खोजी जाने वाली इसकी समान विशाल बहन जीनस, लैनज़ौसॉरस) ने 40 मिलियन वर्ष बाद रहने वाले सबसे बड़े ज्ञात हैड्रोसौर, शांंटुंगोसॉरस के बड़े पैमाने पर संपर्क किया। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः प्रारंभिक जुरासिक (200 मिलियन वर्ष पूर्व) आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः जैसा कि आपने अपने नाम से अनुमान लगाया होगा - "भेड़िया स्नाउट" के लिए यूनानी - लाइकोरीनस को डायनासोर के रूप में पहचाना नहीं गया था जब इसके अवशेष पहली बार 1 9 24 में वापस खोजे गए थे, लेकिन एक थैरेसीड , या "स्तनपायी जैसे सरीसृप" ( यह गैर डायनासोर सरीसृपों की शाखा थी जो अंततः त्रैसिक काल के दौरान सच्चे स्तनधारियों में विकसित हुई)। पालीटोनोलॉजिस्ट के लिए लगभग 40 साल लग गए थे, जो लिकोरिनस को हेटरोडोंटोसॉरस से निकटता से शुरुआती ऑर्निथोपोड डायनासोर के रूप में पहचानने के लिए लिया गया था, जिसके साथ उसने कुछ अजीब आकार वाले दांत साझा किए (विशेष रूप से इसके जबड़े के सामने oversized canines के दो जोड़े)। देर क्रेटेसियस (9 0 मिलियन वर्ष पूर्व) आपको किसी भी डायनासोर की प्रशंसा करनी होगी जिसका नाम "बड़ा रहस्यमय छिपकली" के रूप में अनुवाद करता है - बीबीसी सीरीज़ के निर्माताओं द्वारा स्पष्ट रूप से साझा किया गया एक दृश्य जो डायनासोर के साथ चल रहा था , जिन्होंने एक बार मैक्रोग्राफोसॉरस को एक छोटा सा कैमो दिया था। लगता है कि दक्षिण अमेरिका में दुर्लभ ऑर्निथोपोड्स की खोज की जा रही है, मैक्रोग्रिफोसॉरस समान रूप से अस्पष्ट तालेनकोएन से निकटता से संबंधित है, और इसे "बेसल" iguanodont के रूप में वर्गीकृत किया गया है। चूंकि जीवाश्म एक किशोर का है, इसलिए कोई भी निश्चित नहीं है कि मैक्रोग्राफोसॉरस वयस्क कितने बड़े थे, हालांकि तीन या चार टन सवाल से बाहर नहीं हैं। मध्य जुरासिक (170-165 मिलियन वर्ष पूर्व) हेटरोडोंटोसॉरिड्स - ऑर्निथोपोड डायनासोर के परिवार द्वारा इसका उल्लेख किया गया है, आपने अनुमान लगाया है, हेटरोडोंटोसॉरस - प्रारंभिक से मध्य जुरासिक काल के सबसे अजीब और सबसे खराब समझा डायनासोर थे। हाल ही में खोजी गई मैनिडेन्स ("हाथ दांत") हेटरोडोंटोसॉरस के कुछ मिलियन साल बाद जीवित रही, लेकिन (अपने अजीब दांतों के आधार पर निर्णय) ऐसा लगता है कि संभवतः एक समान जीवनशैली का पीछा किया गया है, संभवतः एक सर्वव्यापी आहार सहित। एक नियम के रूप में, हेटरोडोंटोसॉरिड्स काफी छोटे थे (जीनस का सबसे बड़ा उदाहरण, लाइकोरीनस, 50 पाउंड गीले भिगोने से अधिक नहीं था), और ऐसा लगता है कि उन्हें अपने आहार को अपने निकट-टू-द-ग्राउंड स्थिति में अनुकूलित करना था डायनासोर खाद्य श्रृंखला। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः प्रारंभिक क्रेटेसियस (135-125 मिलियन वर्ष पूर्व) आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः अच्छी तरह से इक्कीसवीं शताब्दी में, पालीटोलॉजिस्ट अभी भी 1800 के अपने सुप्रसिद्ध पूर्ववर्तियों द्वारा बनाई गई भ्रम को साफ़ कर रहे हैं। एक अच्छा उदाहरण मैन्टेलिसॉरस है, जिसे 2006 तक Iguanodon की प्रजातियों के रूप में वर्गीकृत किया गया था - मुख्य रूप से क्योंकि इलुआनोडन को पालीटोलॉजी (1822 में वापस रास्ता) के इतिहास में इतनी जल्दी खोजा गया था कि हर डायनासोर जो इसे दूरस्थ रूप से देखता था उसे अपने जीनस को सौंपा गया था। Mantellisaurus एक और तरीके से इतिहास के अन्याय में से एक को सुधारता है। Iguanodon का मूल जीवाश्म प्रसिद्ध प्रकृतिवादी गिदोन मैन्टेल द्वारा खोजा गया था, जिसे बाद में अपने मध्य उत्साही प्रतिद्वंद्वी रिचर्ड ओवेन द्वारा उठाया गया था। मैन्टेल के बाद ऑर्निथोपोड के इस नए जीनस का नाम देकर, पालीटोलॉजिस्ट ने आखिरकार इस ट्रेलब्लैजिंग जीवाश्म शिकारी को वह सम्मान दिया जो वह पात्र है। (वास्तव में, मैन्टेल ने दो बार सम्मान प्राप्त किया है, क्योंकि दो अन्य ऑर्निथोपोड्स - गिडोनमैंटेलिया और मैन्टेलोडन - उसका नाम भालू! ) प्रारंभिक क्रेटेसियस (135-125 मिलियन वर्ष पूर्व) गिदोन मैन्टेल को अक्सर अपने समय (विशेष रूप से प्रसिद्ध पालीटोलॉजिस्ट रिचर्ड ओवेन द्वारा ) में अनदेखा किया गया था, लेकिन आज उनके नाम पर तीन डायनासोर नहीं हैंः गिडोनमैंटेलिया, मैन्टेलिसॉरस, और (गुच्छा का सबसे संदिग्ध) मैन्टेलोडन। 2012 में, ग्रेगरी पॉल ने इगुआनोडन से मैन्टेलोडन को "बचाया", जहां इसे पहले एक अलग प्रजाति के रूप में नियुक्त किया गया था, और इसे जीनस स्थिति में उठाया गया था। समस्या यह है कि इस बारे में महत्वपूर्ण असहमति है कि मैन्टेलोडन इस भेद को योग्यता देता है या नहीं; कम से कम एक वैज्ञानिक जोर देता है कि इसे इगुआनोडन-जैसी ऑर्निथोपोड मैन्टेलिसॉरस की प्रजातियों के रूप में उचित रूप से असाइन किया जाना चाहिए। देर क्रेटेसियस (75-70 मिलियन वर्ष पूर्व) एक सामान्य नियम के रूप में, किसी भी डायनासोर जिसे कभी भी इगुआनोडन की प्रजातियों के रूप में वर्गीकृत किया गया था, में एक जटिल टैक्सोनोमिक इतिहास था। आधुनिक ऑस्ट्रिया में खोजे जाने वाले कुछ डायनासोरों में से एक, मोक्लोडन को 1871 में इगुआनोडन सुसेई के रूप में नामित किया गया था, लेकिन जल्द ही यह स्पष्ट हो गया कि यह एक बहुत अधिक खूबसूरत ऑर्निथोपॉड था जो 1881 में हैरी सीली द्वारा निर्मित अपने स्वयं के जीनस के योग्य था। कुछ साल बाद, एक Mochlodon प्रजातियों को बेहतर ज्ञात Rhabdodon के लिए संदर्भित किया गया था, और 2003 में, एक और नए जीन Zalmoxes में विभाजित किया गया था। आज, मूल मोचलोडन से बहुत कम बचा है कि इसे व्यापक रूप से नामांकित ड्यूबियम माना जाता है, हालांकि कुछ पालीटोलॉजिस्ट नाम का उपयोग जारी रखते हैं। मध्य क्रेटेसियस (110-100 मिलियन वर्ष पूर्व) प्रारंभिक क्रेटेसियस अवधि के दौरान, सबसे बड़ा और सबसे उन्नत ऑर्निथोपोड (इगुआनोडन द्वारा विशिष्ट) पहले हीरोसॉर , या बतख-बिलित डायनासोर में विकसित होना शुरू हुआ। लगभग 100 मिलियन साल पहले डेटिंग, नैन्यांगोसॉरस को हेड्रोसौर परिवार के पेड़ के आधार पर (या एट) के पास एक iguanodontid ऑर्निथोपोड बिछाने के रूप में वर्गीकृत किया गया है। विशेष रूप से, यह पौधे-खाने वाला बाद में डकबिल (केवल 12 फीट लंबा और आधे टन) से काफी छोटा था, और हो सकता है कि पहले से ही प्रमुख अंगूठे की स्पाइक्स खो दी हों जो अन्य iguanodont डायनासोर की विशेषता है। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः देर क्रेटेसियस (75 मिलियन वर्ष पूर्व) आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः देर से क्रेटेसियस अवधि के सबसे छोटे ऑर्निथोपोड्स में से एक, ऑरोड्रोमस पालीटोलॉजिस्ट द्वारा समझने योग्य गूंज का विषय था। जब इस पौधे-खाने वाले अवशेषों की पहली खोज की गई, मोंटाना में एक जीवाश्म घोंसले के मैदान में "अंडे माउंटेन" के रूप में जाना जाता है, तो अंडों के एक समूह के निकट होने से यह निष्कर्ष निकाला गया कि ये अंडे ऑरोड्रोमस से संबंधित हैं। अब हम जानते हैं कि अंडे वास्तव में एक महिला ट्रोडन द्वारा रखी गई थीं , जो अंडे माउंटेन पर भी रहती थी - यह अपरिहार्य निष्कर्ष यह था कि ऑरोड्रोमस इन छोटे से बड़े शिकार किए गए थे, लेकिन बहुत तेज़, थेरोपोड डायनासोर! नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः मध्य क्रेटेसियस (95 मिलियन वर्ष पूर्व) आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः हाइप्सिलोफोडन से निकटता से संबंधित एक छोटा, तेज़ डायनासोर, ओरीक्टोड्रोमस एकमात्र ऑर्निथोपॉड साबित होता है जो बोरों में रहता है - यानी, इस जीनस के वयस्कों ने जंगल के तल में गहरे छेद खोले, जहां उन्होंने शिकारियों से छुपाया और (शायद) अंडे। विचित्र रूप से पर्याप्त, यद्यपि, ऑरीक्टोड्रोमस में लम्बे, विशेष हाथों और बाहों का प्रकार नहीं था, जो एक खोदने वाले जानवर में अपेक्षा करते थे; पालीटोलॉजिस्ट अनुमान लगाते हैं कि यह पूरक उपकरण के रूप में अपने नुकीले स्नैउट का उपयोग कर सकता है। ओरिक्टोड्रोमस की विशेष जीवनशैली का एक और संकेत यह है कि यह डायनासोर की पूंछ अन्य ऑर्निथोपोड की तुलना में अपेक्षाकृत लचीली थी, इसलिए यह अपने भूमिगत बोरों में आसानी से घुमाया जा सकता था। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः देर जुरासिक (155-145 मिलियन वर्ष पूर्व) आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः स्लिम, फास्ट, दो पैर वाले ओथनिएलिया का नाम मशहूर पालीटोलॉजिस्ट ओथनील सी मार्श - मार्श खुद (जो 1 9वीं शताब्दी में रहता था) के बाद नामित किया गया था, लेकिन 1 9 77 में श्रद्धांजलि अर्पित करने वाले पालीटोलॉजिस्ट द्वारा। (विचित्र रूप से, ओथनीलिया बहुत है मार्श के आर्क-नेमिसिस एडवर्ड ड्रिंकर कोप के नाम पर नामित एक और छोटा, जुरासिक प्लांट-ईटर। ड्रिंकर के समान । ) कई तरीकों से, ओथनिएलिया देर से जुरासिक काल का एक ठेठ ऑर्निथोपोड था। यह डायनासोर झुंडों में रहता है, और यह निश्चित रूप से अपने दिन के बड़े, मांसाहारी थेरोपोड के खाने के मेनू पर लगाया जाता है - जो इसकी अनुमानित गति और चपलता को समझाने की दिशा में एक लंबा रास्ता तय करता है। देर जुरासिक (155-150 मिलियन वर्ष पूर्व) ओथनील सी मार्श और एडवर्ड ड्रिंकर कोप ने अपने मस्तिष्क में बहुत नुकसान पहुंचाया, जिसने साफ करने के लिए एक शताब्दी ली है। 20 वीं शताब्दी में ओथनीलोसॉरस का निर्माण 1 9वीं शताब्दी के अंत में हड्डी युद्धों के दौरान मार्श और कोप द्वारा नामित पौधे खाने वाले डायनासोर की एक श्रृंखला के बेघर अवशेषों को घर बनाने के लिए किया गया था, अक्सर ओथनीलिया, लाओसॉरस और नैनोसॉरस सहित अपर्याप्त साक्ष्य के आधार पर। जैसा कि एक जीनस के रूप में निश्चित हो सकता है, इससे पहले भ्रम के विशाल रिम दिए गए थे, ओथनीलोसॉरस एक छोटा, द्विपक्षीय, जड़ी-बूटियों वाला डायनासोर था जो हिपिसिलोफोडन से निकटता से संबंधित था, और निश्चित रूप से शिकार किया गया था और इसके उत्तरी अमेरिकी पारिस्थितिक तंत्र के बड़े उपद्रवों द्वारा खाया गया था। देर क्रेटेसियस (70 मिलियन साल पहले) चूंकि हेड्रोसॉर (बतख-बिलित डायनासोर) छोटे ऑर्निथोपोड से विकसित हुए हैं, इसलिए आपको यह सोचने के लिए क्षमा किया जा सकता है कि देर से क्रेटेसियस काल के अधिकांश ऑर्निथोपोड डकबिल थे। पार्कसोसॉरस इसके विपरीत सबूत के रूप में गिना जाता हैः यह पांच फुट लंबा, 75 पौंड पौधे मुन्चर एक हैड्रोसौर के रूप में गिनने के लिए बहुत छोटा था, और डायनासोर विलुप्त होने से कुछ समय पहले ही नवीनतम पहचान ऑर्निथोपोड्स में से एक था। आधा शताब्दी से अधिक के लिए, पार्कसोसॉरस को थिसेलोसॉरस ( टी। वॉरेनि ) की प्रजातियों के रूप में पहचाना गया था, जब तक कि इसके अवशेषों की पुनः जांच न हो, तब तक हाइप्सिलोफोडन जैसे छोटे ऑर्निथोपोड डायनासोर के साथ अपनी रिश्ते को बढ़ा दिया। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः देर त्रैसिक (220 मिलियन वर्ष पूर्व) आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः पालीटोलॉजी में कुछ मुद्दे अधिक जटिल होते हैं, वास्तव में, पहले डायनासोर दो प्रमुख डायनासोर परिवारों में विभाजित होते हैंः ऑर्निथिशियन ("पक्षी-हिप") और सॉरिश्चियन ("छिपकली-छिपी हुई") डायनासोर। पिसनोसॉरस इस तरह की असामान्य खोज को बनाता है कि यह स्पष्ट रूप से एक ऑर्निथिशियन डायनासोर था जो दक्षिण अमेरिका में 220 मिलियन वर्ष पहले रहता था, साथ ही साथ एरोप्टर और हेरेरासॉरस जैसे प्रारंभिक थेरोपोड (जो ओर्निथिशियन लाइन को लाखों साल पहले की तुलना में धक्का दे रहा था पहले माना जाता था)। आगे जटिल मामलों में, पिसानोसॉरस में एक ऑर्निथिशियन-शैली वाला सिर था जो एक सॉरिश्चियन-शैली के शरीर के ऊपर था। ऐसा लगता है कि इसका निकटतम सापेक्ष दक्षिणी अफ्रीकी ईकर्सर रहा है , जिसने एक सर्वव्यापी आहार का पीछा किया हो सकता है। प्रारंभिक क्रेटेसियस (125 मिलियन वर्ष पूर्व) लगभग 125 मिलियन वर्ष पहले प्रारंभिक क्रेटेसियस उत्तरी अमेरिका के बड़े थेरोपोडों को शिकार के विश्वसनीय स्रोत की आवश्यकता थी, और स्कीट, भारी, अनगिनत ऑर्निथोपोड्स जैसे प्लेनिकोक्सिया से अधिक शिकार अधिक विश्वसनीय नहीं था। यह "iguanodontid" ऑर्निथोपोड (इसलिए नाम दिया गया क्योंकि यह इगुआआनोडन से निकटता से संबंधित था) पूरी तरह से असुरक्षित नहीं था, खासकर जब पूरी तरह से उगाया जाता था, लेकिन जब यह सामान्य रूप से चुपचाप चराई के बाद दो फीट पर शिकारियों से दूर हो जाता तो यह काफी दृष्टि से होना चाहिए चतुर्भुज मुद्रा। एक संबंधित ऑर्निथोपोड, कैम्पोसोसॉरस की एक प्रजाति को प्लानिकोक्सा को सौंपा गया है, जबकि एक प्लानिकोक्स प्रजातियों को तब से उस्माकासॉरस जीन बनाने के लिए हटा दिया गया है। प्रारंभिक क्रेटेसियस (110 मिलियन वर्ष पूर्व) एक हफ्ते तक नहीं जाता है, ऐसा लगता है, किसी के बिना, कहीं, मध्य क्रेटेसियस काल के एक और iguanodont ऑर्निथोपोड की खोज। कुछ साल पहले स्पेन के टेरेल प्रांत में प्रो के खंडित जीवाश्मों का पता लगाया गया था; इस डायनासोर के निचले जबड़े में विचित्र रूप से आकार की "भविष्यवाणियों" हड्डी ने अपना नाम प्रेरित किया, जो यूनानी है "प्र। " हम सभी को प्रो के बारे में निश्चित रूप से पता है कि यह एक क्लासिक ऑर्निथोपॉड था, जो इगुआआनोडन और शाब्दिक रूप से अन्य जेनेरा के दर्जनों में दिखाई देता था, जिसका मुख्य कार्य भूखे रैप्टर और ट्रायनोसॉर के लिए एक विश्वसनीय खाद्य स्रोत के रूप में कार्य करना था। (वैसे, प्रो स्मोक अपने नामों में चार अक्षरों के साथ विलुप्त सरीसृपों में से एक के रूप में शामिल हो जाती है। ) देर क्रेटेसियस (95 मिलियन वर्ष पूर्व) इतने सारे विकासवादी संक्रमणों के साथ, एक भी "आह" नहीं था! पल जब सबसे उन्नत ऑर्निथोपोड पहले हीरोसॉर , या बतख-बिलित डायनासोर में विकसित हुए। 1 99 0 के उत्तरार्ध में, प्रोटोहाड्रोस को अपने खोजकर्ता द्वारा पहली बार हैड्रोसौर के रूप में बताया गया था, और इसका नाम इस आकलन में अपना विश्वास दर्शाता है। हालांकि, अन्य पालीटोलॉजिस्ट कम निश्चित हैं, और तब से यह निष्कर्ष निकाला है कि प्रोटोहाड्रोस एक सच्चे डकबिल होने के कगार पर लगभग iguanodontid ऑर्निथोपोड था, लेकिन काफी नहीं। न केवल साक्ष्य का यह एक अधिक शांत मूल्यांकन है, बल्कि यह वर्तमान सिद्धांत को बरकरार रखता है कि उत्तरी अमरीका के बजाय एशिया में पहला सच्चा हैड्रोसौर विकसित हुआ था (टेक्सास में प्रोटोहाड्रोस का प्रकार नमूना पाया गया था। ) नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः देर क्रेटेसियस (75 मिलियन वर्ष पूर्व) आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः ऑर्निथोपोड्स 1 9वीं शताब्दी में पाए जाने वाले कुछ सबसे आम डायनासोर थे, मुख्य रूप से क्योंकि उनमें से बहुत से यूरोप में रहते थे (जहां 18 वीं और 1 9वीं सदी में पालीटोलॉजी का बहुत अधिक आविष्कार किया गया था)। 1869 में खोजे गए, रबडोडन को अभी तक उचित रूप से वर्गीकृत नहीं किया गया है, क्योंकि (बहुत तकनीकी नहीं होने के कारण) यह दो प्रकार के ऑर्निथोपोड्स की कुछ विशेषताओं को साझा करता हैः iguanodonts (आकार में समान जड़ी-बूटियों के डायनासोर और इगुआनोडोन के निर्माण) और हाइप्सिलोफोडोंट (डायनासोर समान , आपने अनुमान लगाया, हाइप्सिलोफोडन )। रबडोडन अपने समय और स्थान के लिए काफी छोटा ऑर्निथोपोड था; इसकी सबसे उल्लेखनीय विशेषताएं इसके गोलाकार दांत और असामान्य रूप से धुंधले सिर थे। प्रारंभिक क्रेटेसियस (110-100 मिलियन वर्ष पूर्व) टिटानोसॉर की तरह ऑर्निथोपोड्स, मध्य में देर से क्रेटेसियस काल के दौरान विश्वव्यापी वितरण था। सियामोडन का महत्व यह है कि यह आधुनिक डायनासोर (एक देश जिसे सियाम के नाम से जाना जाता था) में खोजे जाने वाले कुछ डायनासोरों में से एक है - और, अपने करीबी चचेरे भाई प्रोबैक्ट्रोसॉरस की तरह , यह विकासवादी जंक्शन के करीब रहता है जब पहले सच्चे हेड्रोसॉर ने अपने ऑर्निथोपॉड फोरबियर से ब्रांच किया था। आज तक, सियामोडन केवल एक दांत और जीवाश्म मस्तिष्क से जाना जाता है; आगे की खोजों को अपनी उपस्थिति और जीवनशैली पर अतिरिक्त प्रकाश डालना चाहिए। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः देर क्रेटेसियस (70-65 मिलियन वर्ष पूर्व) आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः ऑर्निथोपोड्स - मस्तिष्क, जड़ी-बूटियों, द्विपक्षीय डायनासोर - देर से क्रेटेसियस दक्षिण अमेरिका में जमीन पर स्पैस थे, केवल अब तक के कुछ मुट्ठी भर पाए गए हैं। तालेनकोएन अन्य दक्षिण अमेरिकी ऑर्निथोपोड्स जैसे एनाबिसेटिया और गैस्परिनिसॉररा से अलग है, जिसमें यह लंबे, मोटे शरीर और लगभग हास्यपूर्ण छोटे सिर के साथ बहुत बेहतर ज्ञात इगुआनोडन के लिए एक समान समानता है। इस डायनासोर के जीवाश्मों में पसलियों के पिंजरे को अस्तर वाली अंडाकार आकार की प्लेटों का एक दिलचस्प सेट शामिल है; यह स्पष्ट नहीं है कि सभी ऑर्निथोपोड ने इस सुविधा को साझा किया है (जिसे जीवाश्म रिकॉर्ड में शायद ही कभी संरक्षित किया गया है) या यदि यह केवल कुछ प्रजातियों तक सीमित था। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः प्रारंभिक क्रेटेसियस (110 मिलियन वर्ष पूर्व) आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः जब 1 9वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में थीओफिटलिया की बरकरार खोपड़ी की खोज की गई - "देवताओं का बाग" नामक एक पार्क के पास, इसलिए इस डायनासोर का नाम - प्रसिद्ध पालीटोलॉजिस्ट ओथनील सी मार्श ने माना कि यह कैम्पोसोसस की एक प्रजाति थी। बाद में, यह महसूस किया गया कि यह ऑर्निथोपोड देर से जुरासिक काल की बजाय शुरुआती क्रेटेसियस से दिनांकित है, जिससे एक और विशेषज्ञ इसे अपने स्वयं के जीनस को सौंपने के लिए प्रेरित करता है। आज, पालीटोलॉजिस्ट का मानना है कि थिओफिटलिया कैम्पेटोसॉरस और इगुआनोडन के बीच में मध्यवर्ती था; इन अन्य ऑर्निथोपोड की तरह, शिकारियों द्वारा पीछा किए जाने पर यह आधे टन जड़ी-बूटियों शायद दो पैरों पर दौड़ गया। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः देर जुरासिक (155 मिलियन वर्ष पूर्व) आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः तियान्युलोंग ने पालीटोलॉजिस्ट की सावधानी से तैयार वर्गीकरण योजनाओं में एक बंदर रिंच के बराबर डायनासोर फेंक दिया है। पहले, केवल पंखों के खेल के लिए जाने वाले एकमात्र डायनासोर छोटे थेरोपोड (दो पैर वाले मांसाहार) थे, ज्यादातर रैप्टर और संबंधित डिनो-पक्षियों (लेकिन संभवतः किशोर ट्रायनोसॉर भी)। तियान्युलोंग पूरी तरह से एक अलग प्राणी थाः एक ऑर्निथोपोड (छोटा, जड़ी-बूटियों वाला डायनासोर) जिसका जीवाश्म लंबे, बालों वाले प्रोटो-पंखों की अनूठी छाप पैदा करता है, इस प्रकार संभवतः एक गर्म खून वाले चयापचय पर संकेत देता है। लंबी कहानी छोटीः अगर तियान्युलोंग ने पंखों का खेल किया, तो कोई डायनासोर हो सकता है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उसका आहार या जीवनशैली क्या है! देर क्रेटेसियस (75-70 मिलियन वर्ष पूर्व) 2008 में अंटार्कटिका में खोजा गया, त्रिनिसौरा इस विशाल महाद्वीप से पहली बार पहचान की गई ऑर्निथोपोड है, और कुछ लोगों में से एक प्रजातियों की मादा के बाद नामित किया जाना चाहिए (दूसरा ऑस्ट्रेलिया से इसी तरह के लीएललिनासौरा है )। त्रिनिसौरा महत्वपूर्ण क्या है कि यह Mesozoic मानकों द्वारा असामान्य रूप से कठोर परिदृश्य में निवास किया; 70 मिलियन साल पहले, अंटार्कटिका लगभग उतना ही ठंडा नहीं था जितना आज है, लेकिन यह अभी भी अंधेरे में साल भर के लिए गिर गया था। ऑस्ट्रेलिया और अंटार्कटिका के अन्य डायनासोर की तरह, त्रिनिसौरा ने असामान्य रूप से बड़ी आंखों को विकसित करके अपने पर्यावरण को अनुकूलित किया, जिसने इसे स्वस्थ सूरज की रोशनी में इकट्ठा करने में मदद की और स्वस्थ दूरी से दूर वेश्यापूर्ण थ्रोपोडों को स्थान दिया। देर जुरासिक (150 मिलियन वर्ष पूर्व) पालीटोलॉजी में एक नियम प्रतीत होता है कि जेनेरा की संख्या स्थिर बनी हुई हैः जबकि कुछ डायनासोर अपने जीनस स्थिति से हटाए जाते हैं (यानी, पहले से नामित जेनेरा के व्यक्तियों के रूप में पुनः वर्गीकृत), दूसरों को विपरीत दिशा में पदोन्नत किया जाता है। यूटेडॉन के साथ ऐसा ही मामला है, जो एक शताब्दी से अधिक के लिए एक नमूना माना जाता था, और फिर प्रसिद्ध उत्तरी अमेरिकी ऑर्निथोपोड कैम्पोसोसस की एक अलग प्रजाति थी। भले ही यह कैम्पोसोसस से तकनीकी रूप से अलग था (विशेष रूप से इसके मस्तिष्क और कंधों की रूपरेखा के रूप में चिंतित है), यूटेडॉन ने शायद उसी प्रकार की जीवनशैली का नेतृत्व किया, वनस्पति ब्राउज़ किया और भूखे शिकारियों से शीर्ष गति पर भाग गया। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः प्रारंभिक क्रेटेसियस (130-125 मिलियन वर्ष पूर्व) आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः वाल्दोसॉरस प्रारंभिक क्रेटेसियस यूरोप का एक ठेठ ऑर्निथोपॉड थाः एक छोटा, दो पैर वाला, नुकीला पौधे-खाने वाला जो शायद गति के प्रभावशाली विस्फोटों में सक्षम था जब इसका निवास अपने बड़े आवास के पीछा किया जा रहा था। हाल ही में, इस डायनासोर को बेहतर ज्ञात ड्रायोसॉरस की प्रजातियों के रूप में वर्गीकृत किया गया था, लेकिन जीवाश्म अवशेषों के पुनर्मूल्यांकन पर इसे अपने स्वयं के जीनस से सम्मानित किया गया था। एक "iguanodont" ऑर्निथोपोड, वाल्दोसॉरस निकट से संबंधित था, आप अनुमान लगाया, Iguanodon । (हाल ही में, वाल्दोसॉरस की एक केंद्रीय अफ्रीकी प्रजातियों को अपने स्वयं के जीनस, एलाहाज़ोसॉरस को फिर से सौंप दिया गया था। ) नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः देर जुरासिक (170-160 मिलियन वर्ष पूर्व) आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः फिर भी प्रसिद्ध चीनी पालीटोलॉजिस्ट दांग झिमिंग के बेल्ट में एक और पायदान, जिसने 1 9 83 में अपने बिखरे हुए जीवाश्मों की खोज की, ज़ियाओसॉरस देर से जुरासिक काल के एक छोटे, अपमानजनक, पौधे खाने वाले ऑर्निथोपोड थे जो होप्सिलोफोडन के पूर्वज थे (और स्वयं के पास हो सकता है Fabrosaurus से उतरे गए)। उन नंगे तथ्यों के अलावा, हालांकि, इस डायनासोर के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है, और ज़ियाओसॉरस अभी भी ऑर्निथोपोड के पहले से नामित जीनस की प्रजाति बन सकता है (एक ऐसी स्थिति जिसे केवल जीवाश्म खोजों के लंबित हल किया जा सकता है)। प्रारंभिक क्रेटेसियस (130 मिलियन वर्ष पूर्व) Xuwulong, चीन के प्रारंभिक क्रेटेसियस ऑर्निथोपोड के बारे में बहुत कुछ प्रकाशित नहीं हुआ है जो "iguanodontid" ऑर्निथोपोड्स (यानी, इगुआनोडन के साथ एक समान समानता वाले) के बीच विभाजन के निकट रहता है और बहुत पहले हैड्रोसॉर , या बतख-बिल डायनासोर। अन्य iguandontids के साथ आम तौर पर, अनजाने दिखने वाले Xuwolong एक मोटी पूंछ, एक संकीर्ण चोंच, और लंबे हिंद पैर था जिस पर शिकारियों द्वारा धमकी दी जब यह भाग सकता है। शायद इस डायनासोर के बारे में सबसे असामान्य बात यह है कि इसके नाम के अंत में "लंबा" अर्थ "ड्रैगन" होता है; आम तौर पर, यह चीनी जड़ गुआनलांग या दिलोंग जैसे अधिक डरावनी मांस खाने वालों के लिए आरक्षित है। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः मध्य जुरासिक (170-160 मिलियन वर्ष पूर्व) आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः एक बार एक सुरक्षित रूप से सुरक्षित डायनासोर जीनस जिसमें दो नामित प्रजातियां शामिल हों, तब से यंडुसॉरस को पालीटोलॉजिस्ट ने इस बिंदु पर दबा दिया है कि इस छोटे ऑर्निथोपोड को अब कुछ डायनासोर बेस्टियरी में भी शामिल नहीं किया गया है। सबसे प्रमुख यांडुसॉरस प्रजातियों को कुछ साल पहले बेहतर ज्ञात एगिलिसॉरस में फिर से सौंपा गया था, और बाद में इसे एक पूरी तरह से नए जीनस, हेक्सिनलुसॉरस में पुनः पुनः असाइन किया गया था। "हाइप्सिलोफोडोंट" के रूप में वर्गीकृत, इन सभी छोटे, जड़ी-बूटियों, द्विपक्षीय डायनासोर से निकटता से संबंधित थे, आपने अनुमान लगाया, हाइप्सिलोफोडन , और अधिकांश मेसोज़ोइक युग के दौरान विश्वव्यापी वितरण था। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः देर क्रेटेसियस (70-65 मिलियन वर्ष पूर्व) आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः जैसे कि यह ऑर्निथोपोड डायनासोर को वर्गीकृत करने के लिए पहले से ही मुश्किल नहीं था, रोमानिया में ज़लमॉक्सिस की खोज ने इस परिवार की एक और उप-श्रेणी के लिए सबूत प्रदान किए हैं, जिसे जीभ-मोटे तौर पर रबडोडोंटिड iguanodonts के रूप में जाना जाता है (जिसका मतलब है कि डायनासोर के ज़ल्मोक्स के निकटतम रिश्तेदार परिवार में रबडोडन और इगुआनोडन दोनों शामिल थे)। अभी तक, इस रोमानियाई डायनासोर के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है, एक ऐसी स्थिति जिसे बदलना चाहिए क्योंकि इसके जीवाश्म आगे विश्लेषण के अधीन हैं। (एक बात जो हम जानते हैं वह यह है कि ज़ल्मॉक्सिस अपेक्षाकृत अलग द्वीप पर रहते थे और विकसित होते थे, जो इसकी असाधारण रचनात्मक विशेषताओं को समझाने में मदद कर सकते हैं। )
ऑर्निथोपोड्स - सामान्य- मध्यम आकार के, द्विपक्षीय, पौधे खाने वाले डायनासोर - बाद के मेसोज़ोइक युग के सबसे आम कशेरुकी जानवरों में से कुछ थे। निम्नलिखित स्लाइडों पर, आपको सत्तर ऑर्निथोपोड डायनासोर की तस्वीरें और विस्तृत प्रोफ़ाइल मिलेंगी, जिसमें ए से ज़ेड तक होगी। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः प्रारंभिक जुरासिक आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः कई डायनासोर के साथ, एबिटोसॉरस सीमित अवशेषों, दो व्यक्तियों के अपूर्ण जीवाश्मों से जाना जाता है। यह डायनासोर के विशिष्ट दांत इसे हेटरोडोंटोसॉरस के करीबी रिश्तेदार के रूप में चिह्नित करते हैं, और प्रारंभिक जुरासिक काल के कई सरीसृपों की तरह, यह काफी छोटा था, वयस्क केवल एक सौ पाउंड या उससे भी कम आकार तक पहुंचते थे - और यह प्राचीन के समय अस्तित्व में हो सकता था ऑर्निथिशियन और सॉरिश्चियन डायनासोर के बीच विभाजित करें। एबिटोसॉरस के एक नमूने में आदिम tusks की उपस्थिति के आधार पर, ऐसा माना जाता है कि यह प्रजातियां कामुक रूप से कमजोर हो सकती हैं , पुरुष नर से अलग होते हैं। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः मध्य जुरासिक आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः विडंबना यह है कि, चीन के प्रसिद्ध दशानपू जीवाश्म बिस्तरों के निकट एक डायनासोर संग्रहालय के निर्माण के दौरान एगिलिसॉरस के निकट-पूर्ण कंकाल की खोज की गई थी। इसके पतले निर्माण, लंबे हिंद पैर और कठोर पूंछ के आधार पर, एगिलिसॉरस सबसे पुरानी ऑर्निथोपोड डायनासोर में से एक था, हालांकि ऑर्निथोपॉड परिवार के पेड़ पर इसकी सटीक जगह विवाद का विषय बनी हुई हैः यह होटर्डोंटोसॉरस या फैब्रोसॉरस से अधिक निकटता से संबंधित हो सकता है, या यह सच्चे ऑर्निथोपोड्स और सबसे शुरुआती मार्जिनसेफेलियन के बीच एक मध्यवर्ती स्थिति पर कब्जा कर लिया हो सकता है। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः देर क्रेटेसियस आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः कनाडा के अल्बर्टा प्रांत में अब तक की सबसे छोटी ऑर्निथोपॉड की खोज की जा रही है, अल्बर्टाड्रोमस ने केवल अपने सिर से लगभग पांच फीट की पतली पूंछ को माप लिया है और एक अच्छी आकार के टर्की के रूप में वजन कम किया है - जिसने इसे अपने क्रेटेसियस पारिस्थितिकी तंत्र के एक वास्तविक भाग में बनाया है। असल में, अपने खोजकर्ताओं को यह जानने के लिए, अल्बर्टाड्रोमस ने मूल रूप से अल्बर्टोसॉरस नामक उत्तरी अमेरिकी शिकारियों के लिए स्वादिष्ट हॉर्स डी ' ओउवर की भूमिका निभाई। संभवतः, यह तेज़, द्विपक्षीय पौधे-खाने वाला कम से कम क्रेटेसियस डम्प्लिंग की तरह निगलने से पहले अपने पीछा करने वालों को एक अच्छा कसरत देने में सक्षम था! नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः मध्य क्रेटेसियस आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः मध्य क्रेटेसियस काल के दौरान किसी बिंदु पर, बाद में ऑर्निथोपोड प्रारंभिक हैड्रोसॉर , या बतख-बिलित डायनासोर में विकसित किया गया। Altirhinus अक्सर इन दो निकट से संबंधित डायनासोर परिवारों के बीच एक संक्रमणकालीन रूप के रूप में इंगित किया जाता है, ज्यादातर इसकी नाक पर बहुत ही हैड्रोसौर-जैसे टक्कर की वजह से, जो पैरासॉरोलोफस जैसे बाद के बतख-बिलित डायनासोर के विस्तृत crests के प्रारंभिक संस्करण जैसा दिखता है। यदि आप इस वृद्धि को अनदेखा करते हैं, हालांकि, Altirhinus भी Iguanodon की तरह बहुत देखा, यही कारण है कि ज्यादातर विशेषज्ञ इसे एक असली हैड्रोसौर की बजाय एक iguanodont ऑर्निथोपॉड के रूप में वर्गीकृत करते हैं। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः देर क्रेटेसियस आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः रहस्यमय, बहुत कम ऑर्निथोपोड्स के कारणों के कारण - छोटे, द्विपक्षीय, पौधे खाने वाले डायनासोर के परिवार - दक्षिण अमेरिका में खोजे गए हैं। Anabisetia इस चुनिंदा समूह का सबसे अच्छा प्रमाणित है, एक पूर्ण कंकाल के साथ, केवल सिर की कमी, चार अलग जीवाश्म नमूनों से पुनर्निर्मित। अनाबिसेटिया अपने साथी दक्षिण अमेरिकी ऑर्निथोपोड, गैस्परिनिसौरा, और शायद अधिक अस्पष्ट नोटोइप्सिलोफोडन से भी निकटता से संबंधित था। देर से क्रेटेसियस दक्षिण अमेरिका की ओर बढ़ने वाले बड़े, मांसाहारी थेरोपोडों के भ्रम के आधार पर, अनाबीसिया एक बहुत तेज़ डायनासोर होना चाहिए! नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः प्रारंभिक-मध्य क्रेटेसियस आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः एक निगम के नाम पर जाने वाले कुछ डायनासोरों में से एक , एटलस्कोपकोसॉरस प्रारंभिक से मध्य क्रेटेसियस अवधि का एक छोटा ऑर्निथोपोड था जो एक समान समानता थी Hypsilophodon करने के लिए। इस ऑस्ट्रेलियाई डायनासोर की खोज टिम और पेट्रीसिया विकर्स-रिच की पति-पत्नी पत्नी ने की थी और वर्णन किया था, जिसने व्यापक रूप से बिखरे हुए जीवाश्म अवशेषों के आधार पर एटलस्कोस्कोकोसॉरस का निदान किया था, लगभग एक सौ अलग-अलग हड्डियों के टुकड़े जिनमें ज्यादातर जबड़े और दांत होते थे। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः देर जुरासिक आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः डायनासोर की खोज की स्वर्ण युग, जो उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध से मध्य तक फैली हुई थी, डायनासोर भ्रम की सुनहरी उम्र भी थी। चूंकि कैम्पेटोसॉरस कभी भी खोजे जाने वाले सबसे पुराने ऑर्निथोपोडों में से एक था, इसलिए इसे आसानी से संभालने की तुलना में अधिक छिद्रों को अपनी छतरी के नीचे धकेलने का भाग्य भुगतना पड़ा। इस कारण से, अब यह माना जाता है कि केवल एक पहचाना जीवाश्म नमूना एक असली कैम्पोसोसस था; अन्य लोग इगुआनोडन की प्रजातियां भी हो सकते हैं । किसी भी दर पर, अन्य ऑर्निथोपोड्स की तरह, वास्तविक कैम्पोसोसॉरस एक मध्यम आकार का, लंबे पूंछ वाले पौधे-खाने वाला था जो शिकारियों द्वारा चौंकाने या पीछा करते समय दो चरणों में दौड़ने में सक्षम हो सकता था । हाल ही में, यूटा में खोजे गए कैम्पोसोसस की एक अच्छी तरह से संरक्षित प्रजातियों को एक नए के रूप में पुनः वर्गीकृत किया गया था, लेकिन बहुत समान, ऑर्निथोपोड जीनसः यूटेडॉन, देर जुरासिक एक नौवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में गिनोसॉर के बारे में एक संपूर्ण पुस्तक लिखी जा सकती है जिसे गलती से Iguanodon की प्रजाति के रूप में वर्गीकृत किया गया था। कंबोरिया एक अच्छा उदाहरण हैः जब यह ऑर्निथोपोड का "टाइप जीवाश्म" इंग्लैंड के किममेरिज क्ले गठन से पता चला था, इसे एक हज़ार आठ सौ उन्यासी में ऑक्सफोर्ड पालीटोलॉजिस्ट द्वारा इगुआनोडन प्रजातियों के रूप में नियुक्त किया गया था । कुछ साल बाद, हैरी सीली ने नए जीनस कंबोरिया का निर्माण किया, लेकिन उसके बाद जल्द ही उसे एक और पालीटोलॉजिस्ट ने उलझा दिया, जिसने कैम्पोरोस को कैम्पोरोसॉर के साथ लम्बा कर दिया। अंततः एक निन्यानवे आठ में, एक शताब्दी में मामला सुलझाया गया था, जब कंबोरिया को एक बार फिर अपने अवशेषों की पुनः जांच के बाद अपना खुद का जीनस दिया गया था। प्रारंभिक क्रेटेसियस डार्विन्सॉरस एक लंबा सफर तय कर चुका है क्योंकि एक हज़ार आठ सौ बयालीस में प्रसिद्ध प्रकृति रिचर्ड ओवेन ने अंग्रेजी तट पर अपनी खोज के बाद इसका प्रकार जीवाश्म वर्णन किया था। एक सौ अठासी नौ में, इस पौधे खाने वाले डायनासोर को इगुआनोडन की प्रजातियों के रूप में असाइन किया गया था , और एक सदी बाद में, दो हज़ार दस में, इसे और भी अस्पष्ट जीनस हाइपसेलोस्पिनस को फिर से सौंपा गया था। अंत में, दो हज़ार बारह में, पालीटोलॉजिस्ट और चित्रकार ग्रेगरी पॉल ने फैसला किया कि यह डायनासोर का प्रकार जीवाश्म अपने स्वयं के जीनस और प्रजातियों, डार्विन्सॉरस इवोल्यूशनिस की योग्यता के लिए पर्याप्त विशिष्ट था, हालांकि उनके सभी साथी विशेषज्ञों को आश्वस्त नहीं है। डार्विन्सॉरस के विशिष्ट नाम के रूप में, पॉल का कहना है कि वह चार्ल्स डार्विन और उनके विकास के सिद्धांत दोनों का सम्मान करना चाहते थे, जैसा प्रारंभिक क्रेटेसियस यूरोप के ऑर्निथोपोड्स के बीच कुछ उलझन में और अंतःक्रियात्मक संबंधों से पैदा हुआ था, हैड्रोसॉर, या बतख-बिलित डायनासोर, जो जमीन पर मोटे थे जब तक कि सभी डायनासोर पैंसठ मिलियन वर्ष पहले यूकाटन उल्का प्रभाव से विलुप्त नहीं हुए थे)। पौलुस इस विचार को छीनने वाला एकमात्र वैज्ञानिक नहीं है; शुरुआती पेट्रोसॉर डार्विनोपटेरस और प्रारंभिक पैतृक प्राइम Darwinius गवाह। प्रारंभिक क्रेटेसियस Iguanodon के एक करीबी रिश्तेदार - वास्तव में, जब एक नौ अट्ठावन में स्पेन में इस डायनासोर के अवशेषों की खोज की गई थी, तो उन्हें शुरुआत में इगुआनोडन बर्निसर्टेंसिस को सौंपा गया था - डेलप्पेरेटिया अपने प्रसिद्ध रिश्तेदार से भी बड़ा था, सिर से पूंछ के बारे में सत्ताईस फीट और ऊपर वजन चार या पांच टन का। डेलैपैरेन्टिया को केवल दो हज़ार ग्यारह में अपना खुद का जीनस दिया गया था, इसका नाम, विचित्र रूप से पर्याप्त है, जिसने पालीटोलॉजिस्ट को सम्मानित किया, जिसने टाइप जीवाश्म, अल्बर्ट-फेलिक्स डी लापैरेंट को गलत तरीके से पहचान लिया। इसकी बदली हुई वर्गीकरण एक तरफ, डेलप्पेरेटिया प्रारंभिक क्रेटेसियस अवधि का एक सामान्य ऑर्निथोपोड था, जो एक अनजाने दिखने वाले पौधे-खाने वाला था जो शिकारियों द्वारा शुरू किए जाने पर अपने पिछड़े पैरों पर दौड़ने में सक्षम हो सकता था। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः प्रारंभिक क्रेटेसियस आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः बेवकूफ-ध्वनि वाला गुड़िया - बेल्जियम पालीटोलॉजिस्ट लुई डॉलो के नाम पर, और ऐसा नहीं क्योंकि यह एक बच्चे की गुड़िया की तरह दिखता है - उन डायनासोरों में से एक है जिसकी दुर्भाग्य एक नौवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में इगुआनोडन की प्रजातियों के रूप में लुप्त हो गई थी। इस ऑर्निथोपोड के अवशेषों की आगे की परीक्षा के परिणामस्वरूप इसे अपने स्वयं के जीनस में सौंपा गया; अपने लंबे, मोटे शरीर और छोटे, संकीर्ण सिर के साथ, Iguanodon के लिए कोई गलती Dollodon के संबंध नहीं है, लेकिन इसकी अपेक्षाकृत लंबी बाहों और विशिष्ट गोलाकार चोंच इसे अपने डायनासोर के रूप में peg। नामः ड्रिंकर पर्यावासः ऐतिहासिक कालः देर जुरासिक आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः एक नौवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में, अमेरिकी जीवाश्म शिकारी एडवर्ड ड्रिंकर कोप और ओथनील सी मार्श प्राणघातक दुश्मन थे, लगातार एक-दूसरे को अपने कई पालीटोलॉजिकल खुदाई पर एक दूसरे की कोशिश कर रहे थे। यही कारण है कि यह विडंबनापूर्ण है कि छोटे, दो पैर वाले ऑर्निथोपोड ड्रिंकर एक ही जानवर हो सकता है जो छोटे, दो पैर वाले ऑर्निथोपोड ओथनिएलिया जैसा ही हो; इन डायनासोर के बीच अंतर इतने कम हैं कि वे एक ही जीनस में एक दिन ध्वस्त हो सकते हैं। बीस वीं शताब्दी की शुरुआत से ही निराश, ड्रिंकर और मार्श लंबे समय से देखभाल कर रहे हैं! नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः देर जुरासिक आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः ज्यादातर तरीकों से, ड्रायोसॉरस एक सादा-वेनिला ऑर्निथोपोड था , जो इसके छोटे आकार, द्विपक्षीय मुद्रा, कठोर पूंछ और पांच- उंगली हाथ अधिकांश ऑर्निथोपोड की तरह, ड्रायोसॉरस शायद झुंड में रहता था, और इस डायनासोर ने कम से कम आधा रास्ते अपने युवा को उठाया हो सकता है । ड्रियोसॉरस में भी विशेष रूप से बड़ी आंखें थीं, जो इस संभावना को बढ़ाती है कि देर से जुरासिक काल के अन्य जड़ी-बूटियों की तुलना में यह एक स्मिडजेन अधिक बुद्धिमान था। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः देर जुरासिक आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः यह ध्यान में रखते हुए कि यह कितना अस्पष्ट है, डायसालोटोसॉरस में हमें डायनासोर विकास चरणों के बारे में सिखाने के लिए बहुत कुछ है। अफ्रीका में इस मध्यम आकार के जड़ी-बूटियों के विभिन्न नमूने खोजे गए हैं, जो पालीटोलॉजिस्टों के निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त हैं कि ए) डायसालोटोसॉरस अपेक्षाकृत तेज़ी से दस वर्षों में परिपक्वता तक पहुंच गया है, बी) यह डायनासोर पैकेट की बीमारी के समान, अपने कंकाल के वायरल संक्रमण के अधीन था, और सी) Dysalotosaurus का मस्तिष्क बचपन और परिपक्वता के बीच प्रमुख संरचनात्मक परिवर्तनों के माध्यम से चला गया, हालांकि इसके श्रवण केंद्रों को जल्दी से विकसित किया गया था। अन्यथा, हालांकि, डिसालोटोसॉरस एक सादा-वेनिला प्लांट ईटर था, जो इसके समय और स्थान के अन्य ऑर्निथोपोड से अलग था। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः प्रारंभिक क्रेटेसियस आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः ऑर्निथोपोड्स - ज्यादातर छोटे, ज्यादातर द्विपक्षीय, और पूरी तरह से असुरक्षित जड़ी-बूटियों के डायनासोर का परिवार - आखिरी जीव हैं जिन्हें आप अपने जबड़े में स्तनपायी जैसे कुत्ते खेलना चाहते हैं, अजीब विशेषता है जो इचिनोदोन को असामान्य जीवाश्म खोज बनाती है। अन्य ऑर्निथोपोड की तरह, एचिनोडन एक पुष्ट-पौधे की खानपान थी, इसलिए यह दांत उपकरण एक रहस्य का थोड़ा सा हिस्सा है - लेकिन शायद थोड़ा सा तो एक बार जब आप महसूस करते हैं कि यह छोटा डायनासोर समान रूप से अजीब रूप से दांत वाले हीटरोडोंटोसॉरस से संबंधित था , और संभवतः फैब्रोसॉरस भी। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः प्रारंभिक क्रेटेसियस आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः डायनासोर जीवाश्मों को न केवल स्थानीय पारिस्थितिक तंत्र के बारे में बताने के लिए बहुत कुछ है, बल्कि मेसोज़ोइक युग के दौरान लाखों साल पहले दुनिया के महाद्वीपों के वितरण के बारे में भी बहुत कुछ है। हाल ही में, प्रारंभिक क्रेटेसियस एल्हाज़ोसॉरस - जिसकी हड्डियों को मध्य अफ्रीका में खोजा गया था - को इन दो महाद्वीपों के बीच एक भूमि कनेक्शन पर संकेत देने वाले एक समान डायनासोर, वाल्दोसॉरस की प्रजाति माना जाता था। एल्हाज़ोसॉरस के अपने जीनस के असाइनमेंट ने कुछ हद तक पानी को खराब कर दिया है, हालांकि इन दो द्विपक्षीय, पौधे खाने, टोडलर के आकार वाले ऑर्निथोपोड्स के बीच संबंधों में कोई विवाद नहीं है। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः प्रारंभिक जुरासिक आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः फैब्रोसॉरस - फ्रांसीसी भूवैज्ञानिक जीन फेबर के नाम पर - डायनासोर इतिहास के इतिहास में एक गन्दा जगह पर कब्जा कर लिया। इस छोटे, दो पैर वाले, पौधे खाने वाले ऑर्निथोपोड को एक अपूर्ण खोपड़ी के आधार पर "निदान" किया गया था, और कई पालीटोलॉजिस्ट मानते हैं कि यह वास्तव में प्रारंभिक जुरासिक अफ्रीका, लेसोथोसॉरस से एक अन्य जड़ी-बूटियों के डायनासोर की प्रजाति था। फैब्रोसॉरस पूर्वी एशिया, ज़ियाओसॉरस के थोड़ी देर बाद ऑर्निथोपोड के लिए पूर्वज भी हो सकता है। इसकी स्थिति के किसी और निर्णायक दृढ़ संकल्प को भविष्य की जीवाश्म खोजों का इंतजार करना होगा। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः प्रारंभिक क्रेटेसियस आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः फुकुइराएप्टर के साथ उलझन में नहीं होना चाहिए - जापान के उसी क्षेत्र में खोजे जाने वाले मध्यम आकार के थेप्रोपोड - फुक्यूसॉरस एक मामूली आकार का ऑर्निथोपॉड था जो शायद यूरेशिया और उत्तरी अमेरिका के बेहतर ज्ञात Iguanodon जैसा था । चूंकि वे लगभग उसी समय रहते थे, प्रारंभिक से मध्य क्रेटेसियस काल में, यह संभव है कि फुकुइसॉरस फुकुइराएप्टर के लंच मेनू पर लगा, लेकिन अभी तक इसके लिए कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं है - और क्योंकि ऑर्निथोपोड जापान में जमीन पर बहुत दुर्लभ हैं, यह है Fukuisaurus 'सटीक विकासवादी उद्भव स्थापित करने में मुश्किल है। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः देर क्रेटेसियस आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः एक ठेठ दूसरे-ग्रेडर के आकार और वजन के बारे में, गैस्पारिनिसौरा महत्वपूर्ण है क्योंकि यह कुछ ऑर्निथोपोड डायनासोरों में से एक है जिसे दक्षिण अमेरिका में देर से क्रेटेसियस काल के दौरान रहने के लिए जाना जाता है। एक ही क्षेत्र में कई जीवाश्म अवशेषों की खोज के आधार पर, यह छोटा पौधे-खाने वाला शायद हर्ड्स में रहता था, जिसने इसे अपने पारिस्थितिकी तंत्र में बड़े शिकारियों से बचाने में मदद की थी । जैसा कि आपने देखा होगा, गैस्पारिनिसौरा कुछ डायनासोरों में से एक है, जिसका नाम मादा के नाम पर रखा गया है, प्रजातियों के पुरुष के बजाय, यह सम्मान मायासोरा और लीएललिनासौरा के साथ साझा करता है। प्रारंभिक क्रेटेसियस जब दो हज़ार छः में गिडोनमैंटेलिया का नाम बनाया गया था, एक नौवीं शताब्दी के प्रकृतिवादी गिदोन मंटेल कुछ लोगों में से एक नहीं थे, दो नहीं, बल्कि उसके बाद नामित तीन डायनासोर, अन्य लोग मंटेलिसॉरस और कुछ और संदिग्ध मंटेलोडन थे। उलझन में, गिडोनमैंटेलिया और मैन्टेलिसॉरस एक ही समय और उसी पारिस्थितिक तंत्र में रहते थे, और इन दोनों को इग्यूनोडोन से निकटता से ऑर्निथोपोड के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। गिडोन मैन्टेल इस डबल सम्मान के लायक क्यों है? खैर, अपने जीवनकाल में, वह रिचर्ड ओवेन जैसे अधिक शक्तिशाली और आत्म केंद्रित पालीटोलॉजिस्टों द्वारा ढका हुआ था, और आधुनिक शोधकर्ताओं का मानना है कि उन्हें इतिहास द्वारा अन्यायपूर्ण रूप से अनदेखा किया गया है! देर क्रेटेसियस दुनिया के अन्य हिस्सों की तुलना में, बहुत कम "बेसल" ऑर्निथोपोड्स - स्माल, द्विपक्षीय, पौधे खाने वाले डायनासोर - एशिया में पहचाने गए हैं । यही कारण है कि हाया की खोज ने इतनी बड़ी खबर बनाईः इस हल्के ऑर्निथोपोड ने लगभग पचासी मिलियन वर्ष पहले, मध्य एशिया के एक क्षेत्र में आधुनिक मंगोलिया के अनुरूप क्रेटेसियस काल के दौरान रहते थे। । हाया कुछ ऑर्निथोपोडों में से एक है जिसे गैस्ट्रोलिथ निगलने के लिए जाना जाता है, पत्थरों ने इस डायनासोर के पेट में सब्जी पदार्थ को पीसने में मदद की। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः प्रारंभिक जुरासिक आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः हेटरोडोंटोसॉरस नाम एक मुंह से है, एक से अधिक तरीकों से। इस छोटे ऑर्निथोपोड ने अपने मोनिकर को अर्जित किया, जिसका अर्थ है "अलग-अलग दांतों वाला छिपकली", इसके तीन अलग-अलग प्रकार के दांतों के लिए धन्यवादः ऊपरी जबड़े, छिद्र के आकार के दांत पर incisors आगे, और ऊपरी और निचले होंठ से बाहर निकलने वाले दो जोड़े के टुकड़े। एक विकासवादी दृष्टिकोण से, हेटरोडोंटोसॉरस 'incisors और मोलर्स व्याख्या करने के लिए आसान हैं। Tusks एक और समस्या का सामना करना पड़ता हैः कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ये केवल पुरुषों पर पाए गए थे, और इस प्रकार एक यौन रूप से चयनित विशेषता थी । हालांकि, यह भी संभव है कि नर और मादा दोनों में इन tusks था, और शिकारियों को डराने के लिए उन्हें इस्तेमाल किया। एक किशोर हेटरोडोंटोसॉरस की हालिया खोज ने कैनिन के एक पूर्ण सेट को इस मुद्दे पर और अधिक प्रकाश डाला है। अब यह माना जाता है कि यह छोटा डायनासोर कभी-कभी छोटे स्तनधारी या छिपकली के साथ अपने बड़े पैमाने पर शाकाहारी आहार को पूरक बना सकता है। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः मध्य जुरासिक आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः मध्य जुरासिक चीन के प्रारंभिक, या "बेसल" ऑर्निथोपोड को वर्गीकृत करना मुश्किल साबित हुआ है, जिनमें से अधिकांश समान दिखते हैं। हेक्सिनलुसॉरस को हाल ही में समान रूप से अस्पष्ट यांडुसॉरस की प्रजातियों के रूप में वर्गीकृत किया गया था, और इन दोनों पौधों के खाने वालों के पास एग्लिसिसॉरस के साथ समान लक्षण थे । जहां भी आप इसे डायनासोर परिवार के पेड़ पर रखने के लिए चुनते हैं, हेक्सिनलुसॉरस एक छोटा, पतला सरीसृप था जो बड़े पैरों के द्वारा खाने से बचने के लिए दो पैरों पर दौड़ता था। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः प्रारंभिक क्रेटेसियस आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः हाल ही में उथिथोपोड डायनासोर की एक जोड़ी में से एक यूटा में पाया गया - दूसरा प्रभावशाली नाम इगुआनाकोलोसस - हिप्पोड्राको, "घोड़ा ड्रैगन", इगुआआनोडन रिश्तेदार के लिए छोटी तरफ था, केवल पंद्रह फीट लंबा और आधा टन । लगभग एक सौ पच्चीस मिलियन वर्ष पहले क्रेटेसियस काल की शुरुआत में, हिप्पोड्राको तुलनात्मक रूप से "बेसल" iguanodont रहा है, जिसका निकटतम रिश्तेदार थोड़ी देर बाद थाइओफिटलिया था। प्रारंभिक क्रेटेसियस एक नौवीं शताब्दी के दौरान, बड़ी संख्या में ऑर्निथोपोडों को इगुआनोडन की प्रजातियों के रूप में वर्गीकृत किया गया था, और फिर तुरंत पालीटोलॉजी के किनारों पर पहुंचाया गया। दो हज़ार बारह में, ग्रेगरी एस पॉल ने इन भूल गए प्रजातियों में से एक को बचाया, इगुआनोडन होलिंगटनियेंसिस , और इसे हक्सलेसॉरस नाम के तहत जीनस की स्थिति में ले जाया गया । कुछ साल पहले, दो हज़ार दस में, एक और वैज्ञानिक ने "समानार्थी" किया था । मैं हॉलिंगटनिसेंसिस हाइपसेलोस्पिनस के साथ, ताकि आप कल्पना कर सकें, हक्सलेसॉरस का अंतिम भाग्य अभी भी हवा में है! प्रारंभिक क्रेटेसियस हाइपसेलोस्पिनस केवल कई डायनासोरों में से एक है जिसने इगुआनोडन की प्रजातियों के रूप में अपना टैक्सोनोमिक जीवन शुरू किया है । रिचर्ड लिडेकर द्वारा एक सौ अठासी नौ में इगुआनोडन फिट्टोनी के रूप में वर्गीकृत, इस ऑर्निथोपोड ने एक सौ वर्षों से अधिक समय तक अस्पष्टता में लम्बे समय तक, जब तक कि दो हज़ार दस में अपने अवशेषों की पुनः परीक्षा न हो, एक नए जीनस के निर्माण को प्रेरित किया। अन्यथा इगुआनोडन के समान ही, प्रारंभिक क्रेटेसियस हाइपसेलोस्पिनस को ऊपरी हिस्से के साथ छोटी कशेरुकी कताई से अलग किया गया था, जिसने त्वचा की लचीली झपकी का समर्थन किया था। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः प्रारंभिक क्रेटेसियस आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः शुरुआती क्रेटेसियस काल के अधिक कल्पनाशील नामित ऑर्निथोपोड डायनासोर में से एक, इगुआनाकोलोसस को हाल ही में यूटा में थोड़ी देर के साथ और बहुत छोटा, हिप्पोड्राको के साथ खोजा गया था। Iguanacolossus के बारे में सबसे प्रभावशाली बात इसकी तीव्र थोक थी; तीस फीट लंबा और दो से तीन टन पर, यह डायनासोर अपने उत्तरी अमेरिकी पारिस्थितिकी तंत्र के सबसे बड़े गैर- टाइटानोसौर पौधे-खाने वालों में से एक होता। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः प्रारंभिक क्रेटेसियस आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः उत्तरी चीन के जोहोल क्षेत्र के नाम पर नामित प्रागैतिहासिक सरीसृपों के बारे में कुछ ऐसा है जो अवसरों पर विवाद करते हैं। पेरोसौर के एक जीनस जेहोलोप्टरस को एक वैज्ञानिक द्वारा फेंगने के रूप में पुनर्निर्मित किया गया है, और संभवतः बड़े डायनासोर के खून को चूसना । जेहोलोसॉरस, एक छोटा, ऑर्निथोपोड डायनासोर, कुछ अजीब दांत भी था - उसके मुंह और मुंह के सामने तेज, मांसाहारी-जैसे दांत, पीठ में जड़ी बूटी की तरह पीसने वाले। वास्तव में, कुछ पालीटोलॉजिस्ट अनुमान लगाते हैं कि हिपिसिलोफोडन के इस करीबी रिश्तेदार ने एक सर्वव्यापी आहार, एक चौंकाने वाला अनुकूलन का पीछा किया हो सकता है क्योंकि ऑर्निथिशियन डायनासोर के विशाल बहुमत सख्त शाकाहारियों थे! नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः मध्य-देर क्रेटेसियस आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः क्रेटेसियस अवधि के अंत तक सबसे प्रचुर मात्रा में जड़ी-बूटियों के लिए हेड्रोसॉर , ऑर्निथोपोड्स के नाम से जाने वाली बड़ी डायनासोर नस्ल का हिस्सा थे - और सबसे उन्नत ऑर्निथोपोड्स और सबसे शुरुआती हैड्रोसॉर के बीच की रेखा वास्तव में बहुत अस्पष्ट है। यदि आपने केवल अपने सिर की जांच की है, तो आप जयावती को एक सच्चे हैड्रोसौर के लिए गलती कर सकते हैं, लेकिन इसके शरीर रचना के सूक्ष्म विवरण ने इसे ऑर्निथोपॉड शिविर में रखा है - अधिक विशेष रूप से, पालीटोलॉजिस्ट का मानना है कि जेवाती एक iguanodont डायनासोर था, और इस प्रकार इगुआनोडन से निकटता से संबंधित है। हालांकि आप इसे वर्गीकृत करना चुनते हैं, जेयावती एक मध्यम आकार का था, ज्यादातर द्विपक्षीय पौधे-भोजनालय अपने परिष्कृत दांत तंत्र और इसके चारों ओर अजीब, झुर्रीदार छत आँख का गढ़ा। जैसा कि अक्सर होता है, इस डायनासोर का आंशिक जीवाश्म एक निन्यानवे छः में न्यू मैक्सिको में पाया गया था, लेकिन यह दो हज़ार दस तक नहीं था कि अंततः पालीटोलॉजिस्ट इस नए जीनस को "निदान" करने के लिए मिल गए। देर क्रेटेसियस कोई आम तौर पर दक्षिण कोरिया को प्रमुख डायनासोर खोजों से जोड़ता नहीं है, इसलिए आप यह जानकर आश्चर्यचकित हो सकते हैं कि कोरियाईसॉरस का प्रतिनिधित्व दो हज़ार तीन में इस देश के सेनसो कांग्लोमेरेट में खोजे गए तीन अलग-अलग जीवाश्म नमूने से किया जाता है। आज तक, नहीं कोरियाईसॉरस के बारे में बहुत कुछ प्रकाशित किया गया है, जो कि देर से क्रेटेसियस काल के क्लासिक, छोटे-शरीर वाले ऑर्निथोपॉड प्रतीत होता है, शायद जोहोलोसॉरस से निकटता से संबंधित है और शायद एक बेहतर डायनासोर बेहतर तरीके से अज्ञात ओरीक्टोड्रोमस। प्रारंभिक क्रेटेसियस आप उन सभी डायनासोरों के बारे में एक संपूर्ण पुस्तक लिख सकते हैं जिन्हें एक बार Iguanodon द्वारा इस जीनस को सौंपा गया था। लंदन प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय में स्थित एकल जीवाश्म जबड़े के साक्ष्य पर, सौ साल से अधिक के लिए, कुकुफेलिया को इगुआनोडन की प्रजातियों के रूप में वर्गीकृत किया गया था। दो हज़ार दस में यह सब बदल गया, जब एक छात्र ने जबड़े का निरीक्षण किया, तो कुछ सूक्ष्म रचनात्मक विशिष्टताओं को देखा, और वैज्ञानिक समुदाय को नए ऑर्निथोपोड जीनस कुकुफेलिया । देर जुरासिक लोकप्रिय मीडिया में आपने जो पढ़ा है, उसके बावजूद, कुलिंडाड्रोमस पंख रखने के लिए पहली पहचान वाले ऑर्निथोपोड डायनासोर नहीं हैः यह सम्मान कुछ साल पहले चीन में खोजा गया था, जो तियान्युलोंग से संबंधित है। लेकिन जबकि तियान्युलोंग की जीवाश्म पंख जैसी छाप कम से कम कुछ व्याख्या के लिए खुली थीं, देर से जुरासिक कुलिंडाड्रोमस में पंखों के अस्तित्व पर कोई संदेह नहीं है, जिसका अर्थ है कि पंख पहले डायनासोर साम्राज्य में अधिक व्यापक थे माना जाता है । कुलिंडाड्रोमस की खोज एक खरगोश-छेद के सवाल खोलती है, जो आने वाले वर्षों के लिए पुनरावृत्ति होगी। गर्म पंख वाले / ठंडे खून वाले डायनासोर बहस के लिए इस पंख वाले ऑर्निथोपोड का अस्तित्व क्या है? । क्या सभी डायनासोरों के पास उनके जीवन चक्र में कुछ स्तर पर पंख होते हैं? क्या यह संभव है कि पक्षी चिकित्सकीय डायनासोर से नहीं विकसित हुए, लेकिन पंख वाले शाकाहारियों जैसे कि कुलिंडाड्रोमस और टियांयुलॉन्ग से? आगे के घटनाक्रम के लिए जुड़े रहें! नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः प्रारंभिक क्रेटेसियस आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः जब दो हज़ार पाँच में चीन में इसके आंशिक अवशेषों की खोज की गई, तो Lanzhousaurus दो कारणों से हलचल हुई। सबसे पहले, इस डायनासोर ने तीस फीट की लंबाई में मापा, जिससे क्रेटेसियस काल के अंत में हैड्रोसॉर के उदय से पहले यह सबसे बड़ी ऑर्निथोपोड्स में से एक बना। और दूसरा, कम से कम इस डायनासोर के दांत समान रूप से विशाल थेः हेलिकॉप्टरों के साथ चौदह सेंटीमीटर लंबा , Lanzhousaurus सबसे लंबे समय तक पहने हुए जड़ी-बूटियों के डायनासोर हो सकता है। लगता है कि Lanzhousaurus मध्य अफ्रीका से एक और विशाल ऑर्निथोपोड, लर्डुसॉरस से निकटता से संबंधित है - एक मजबूत संकेत है कि डायनासोर प्रारंभिक क्रेटेसियस के दौरान अफ्रीका से यूरेशिया में स्थानांतरित हो गए थे। देर जुरासिक हड्डी युद्धों की ऊंचाई पर, एक नौवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में, नए डायनासोरों को तेजी से नामित किया जा रहा था, जो कि जीवाश्म सबूतों को समर्थन देने के लिए एकत्र किए जा सकते थे। एक अच्छा उदाहरण लाओसॉरस है, जो प्रसिद्ध पालीटोलॉजिस्ट ओथनील सी मार्श द्वारा वायोमिंग में खोजे गए मुट्ठी भर के आधार पर बनाया गया था। दशकों के आगे भ्रम के बाद - जिसमें लाओसॉरस की प्रजातियां स्थानांतरित की गईं, या ऑरोड्रोमस और ओथनिएलिया के तहत शामिल करने के लिए विचार किया गया - देर से जुरासिक ऑर्निथोपोड अस्पष्टता में समाप्त हो गया, और आज इसे नामांकित ड्यूबियम माना जाता है । प्रारंभिक जुरासिक पहले पौधे खाने वाले डायनासोर को वेनेजुएला में खोजा जा सकता है - और केवल दूसरा डायनासोर, अवधि, क्योंकि इसकी घोषणा उसी समय की गई थी जब मांस खाने वाले तचिरैप्टर - लक्विंटसौरा एक छोटे ऑर्निथिशियन थे जो त्रिज्या / जुरासिक सीमा, दो सौ मिलियन साल पहले। इसका अर्थ यह है कि लाक्विंटासौरा हाल ही में अपने मांसाहारी पूर्वजों से विकसित हुआ था - जो इस डायनासोर के दांतों के अजीब आकार को समझा सकता है, जो कि समान रूप से उपयुक्त है छोटी कीड़े और जानवरों के साथ-साथ फर्न और पत्तियों के सामान्य आहार को कम करना। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः प्रारंभिक क्रेटेसियस आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः लर्डसॉरस उन डायनासोरों में से एक है जो पालीटोलॉजिस्ट को उनकी प्रसन्नता से बाहर हिलाता है। जब एक नौ सौ निन्यानवे में मध्य अफ्रीका में इसके अवशेषों की खोज हुई, तो इस जड़ी-बूटियों के विशाल आकार ने ऑर्निथोपोड विकास के बारे में लंबे समय तक विचारों को परेशान किया । तीस फीट लंबा और छः टन, लर्डुसॉरस ने चालीस मिलियन वर्ष बाद रहने वाले सबसे बड़े ज्ञात हैड्रोसौर, शांंटुंगोसॉरस के बड़े पैमाने पर संपर्क किया। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः प्रारंभिक जुरासिक आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः जैसा कि आपने अपने नाम से अनुमान लगाया होगा - "भेड़िया स्नाउट" के लिए यूनानी - लाइकोरीनस को डायनासोर के रूप में पहचाना नहीं गया था जब इसके अवशेष पहली बार एक नौ चौबीस में वापस खोजे गए थे, लेकिन एक थैरेसीड , या "स्तनपायी जैसे सरीसृप" । पालीटोनोलॉजिस्ट के लिए लगभग चालीस साल लग गए थे, जो लिकोरिनस को हेटरोडोंटोसॉरस से निकटता से शुरुआती ऑर्निथोपोड डायनासोर के रूप में पहचानने के लिए लिया गया था, जिसके साथ उसने कुछ अजीब आकार वाले दांत साझा किए । देर क्रेटेसियस आपको किसी भी डायनासोर की प्रशंसा करनी होगी जिसका नाम "बड़ा रहस्यमय छिपकली" के रूप में अनुवाद करता है - बीबीसी सीरीज़ के निर्माताओं द्वारा स्पष्ट रूप से साझा किया गया एक दृश्य जो डायनासोर के साथ चल रहा था , जिन्होंने एक बार मैक्रोग्राफोसॉरस को एक छोटा सा कैमो दिया था। लगता है कि दक्षिण अमेरिका में दुर्लभ ऑर्निथोपोड्स की खोज की जा रही है, मैक्रोग्रिफोसॉरस समान रूप से अस्पष्ट तालेनकोएन से निकटता से संबंधित है, और इसे "बेसल" iguanodont के रूप में वर्गीकृत किया गया है। चूंकि जीवाश्म एक किशोर का है, इसलिए कोई भी निश्चित नहीं है कि मैक्रोग्राफोसॉरस वयस्क कितने बड़े थे, हालांकि तीन या चार टन सवाल से बाहर नहीं हैं। मध्य जुरासिक हेटरोडोंटोसॉरिड्स - ऑर्निथोपोड डायनासोर के परिवार द्वारा इसका उल्लेख किया गया है, आपने अनुमान लगाया है, हेटरोडोंटोसॉरस - प्रारंभिक से मध्य जुरासिक काल के सबसे अजीब और सबसे खराब समझा डायनासोर थे। हाल ही में खोजी गई मैनिडेन्स हेटरोडोंटोसॉरस के कुछ मिलियन साल बाद जीवित रही, लेकिन ऐसा लगता है कि संभवतः एक समान जीवनशैली का पीछा किया गया है, संभवतः एक सर्वव्यापी आहार सहित। एक नियम के रूप में, हेटरोडोंटोसॉरिड्स काफी छोटे थे , और ऐसा लगता है कि उन्हें अपने आहार को अपने निकट-टू-द-ग्राउंड स्थिति में अनुकूलित करना था डायनासोर खाद्य श्रृंखला। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः प्रारंभिक क्रेटेसियस आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः अच्छी तरह से इक्कीसवीं शताब्दी में, पालीटोलॉजिस्ट अभी भी एक हज़ार आठ सौ के अपने सुप्रसिद्ध पूर्ववर्तियों द्वारा बनाई गई भ्रम को साफ़ कर रहे हैं। एक अच्छा उदाहरण मैन्टेलिसॉरस है, जिसे दो हज़ार छः तक Iguanodon की प्रजातियों के रूप में वर्गीकृत किया गया था - मुख्य रूप से क्योंकि इलुआनोडन को पालीटोलॉजी के इतिहास में इतनी जल्दी खोजा गया था कि हर डायनासोर जो इसे दूरस्थ रूप से देखता था उसे अपने जीनस को सौंपा गया था। Mantellisaurus एक और तरीके से इतिहास के अन्याय में से एक को सुधारता है। Iguanodon का मूल जीवाश्म प्रसिद्ध प्रकृतिवादी गिदोन मैन्टेल द्वारा खोजा गया था, जिसे बाद में अपने मध्य उत्साही प्रतिद्वंद्वी रिचर्ड ओवेन द्वारा उठाया गया था। मैन्टेल के बाद ऑर्निथोपोड के इस नए जीनस का नाम देकर, पालीटोलॉजिस्ट ने आखिरकार इस ट्रेलब्लैजिंग जीवाश्म शिकारी को वह सम्मान दिया जो वह पात्र है। प्रारंभिक क्रेटेसियस गिदोन मैन्टेल को अक्सर अपने समय में अनदेखा किया गया था, लेकिन आज उनके नाम पर तीन डायनासोर नहीं हैंः गिडोनमैंटेलिया, मैन्टेलिसॉरस, और मैन्टेलोडन। दो हज़ार बारह में, ग्रेगरी पॉल ने इगुआनोडन से मैन्टेलोडन को "बचाया", जहां इसे पहले एक अलग प्रजाति के रूप में नियुक्त किया गया था, और इसे जीनस स्थिति में उठाया गया था। समस्या यह है कि इस बारे में महत्वपूर्ण असहमति है कि मैन्टेलोडन इस भेद को योग्यता देता है या नहीं; कम से कम एक वैज्ञानिक जोर देता है कि इसे इगुआनोडन-जैसी ऑर्निथोपोड मैन्टेलिसॉरस की प्रजातियों के रूप में उचित रूप से असाइन किया जाना चाहिए। देर क्रेटेसियस एक सामान्य नियम के रूप में, किसी भी डायनासोर जिसे कभी भी इगुआनोडन की प्रजातियों के रूप में वर्गीकृत किया गया था, में एक जटिल टैक्सोनोमिक इतिहास था। आधुनिक ऑस्ट्रिया में खोजे जाने वाले कुछ डायनासोरों में से एक, मोक्लोडन को एक हज़ार आठ सौ इकहत्तर में इगुआनोडन सुसेई के रूप में नामित किया गया था, लेकिन जल्द ही यह स्पष्ट हो गया कि यह एक बहुत अधिक खूबसूरत ऑर्निथोपॉड था जो एक हज़ार आठ सौ इक्यासी में हैरी सीली द्वारा निर्मित अपने स्वयं के जीनस के योग्य था। कुछ साल बाद, एक Mochlodon प्रजातियों को बेहतर ज्ञात Rhabdodon के लिए संदर्भित किया गया था, और दो हज़ार तीन में, एक और नए जीन Zalmoxes में विभाजित किया गया था। आज, मूल मोचलोडन से बहुत कम बचा है कि इसे व्यापक रूप से नामांकित ड्यूबियम माना जाता है, हालांकि कुछ पालीटोलॉजिस्ट नाम का उपयोग जारी रखते हैं। मध्य क्रेटेसियस प्रारंभिक क्रेटेसियस अवधि के दौरान, सबसे बड़ा और सबसे उन्नत ऑर्निथोपोड पहले हीरोसॉर , या बतख-बिलित डायनासोर में विकसित होना शुरू हुआ। लगभग एक सौ मिलियन साल पहले डेटिंग, नैन्यांगोसॉरस को हेड्रोसौर परिवार के पेड़ के आधार पर के पास एक iguanodontid ऑर्निथोपोड बिछाने के रूप में वर्गीकृत किया गया है। विशेष रूप से, यह पौधे-खाने वाला बाद में डकबिल से काफी छोटा था, और हो सकता है कि पहले से ही प्रमुख अंगूठे की स्पाइक्स खो दी हों जो अन्य iguanodont डायनासोर की विशेषता है। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः देर क्रेटेसियस आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः देर से क्रेटेसियस अवधि के सबसे छोटे ऑर्निथोपोड्स में से एक, ऑरोड्रोमस पालीटोलॉजिस्ट द्वारा समझने योग्य गूंज का विषय था। जब इस पौधे-खाने वाले अवशेषों की पहली खोज की गई, मोंटाना में एक जीवाश्म घोंसले के मैदान में "अंडे माउंटेन" के रूप में जाना जाता है, तो अंडों के एक समूह के निकट होने से यह निष्कर्ष निकाला गया कि ये अंडे ऑरोड्रोमस से संबंधित हैं। अब हम जानते हैं कि अंडे वास्तव में एक महिला ट्रोडन द्वारा रखी गई थीं , जो अंडे माउंटेन पर भी रहती थी - यह अपरिहार्य निष्कर्ष यह था कि ऑरोड्रोमस इन छोटे से बड़े शिकार किए गए थे, लेकिन बहुत तेज़, थेरोपोड डायनासोर! नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः मध्य क्रेटेसियस आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः हाइप्सिलोफोडन से निकटता से संबंधित एक छोटा, तेज़ डायनासोर, ओरीक्टोड्रोमस एकमात्र ऑर्निथोपॉड साबित होता है जो बोरों में रहता है - यानी, इस जीनस के वयस्कों ने जंगल के तल में गहरे छेद खोले, जहां उन्होंने शिकारियों से छुपाया और अंडे। विचित्र रूप से पर्याप्त, यद्यपि, ऑरीक्टोड्रोमस में लम्बे, विशेष हाथों और बाहों का प्रकार नहीं था, जो एक खोदने वाले जानवर में अपेक्षा करते थे; पालीटोलॉजिस्ट अनुमान लगाते हैं कि यह पूरक उपकरण के रूप में अपने नुकीले स्नैउट का उपयोग कर सकता है। ओरिक्टोड्रोमस की विशेष जीवनशैली का एक और संकेत यह है कि यह डायनासोर की पूंछ अन्य ऑर्निथोपोड की तुलना में अपेक्षाकृत लचीली थी, इसलिए यह अपने भूमिगत बोरों में आसानी से घुमाया जा सकता था। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः देर जुरासिक आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः स्लिम, फास्ट, दो पैर वाले ओथनिएलिया का नाम मशहूर पालीटोलॉजिस्ट ओथनील सी मार्श - मार्श खुद के बाद नामित किया गया था, लेकिन एक नौ सतहत्तर में श्रद्धांजलि अर्पित करने वाले पालीटोलॉजिस्ट द्वारा। कई तरीकों से, ओथनिएलिया देर से जुरासिक काल का एक ठेठ ऑर्निथोपोड था। यह डायनासोर झुंडों में रहता है, और यह निश्चित रूप से अपने दिन के बड़े, मांसाहारी थेरोपोड के खाने के मेनू पर लगाया जाता है - जो इसकी अनुमानित गति और चपलता को समझाने की दिशा में एक लंबा रास्ता तय करता है। देर जुरासिक ओथनील सी मार्श और एडवर्ड ड्रिंकर कोप ने अपने मस्तिष्क में बहुत नुकसान पहुंचाया, जिसने साफ करने के लिए एक शताब्दी ली है। बीस वीं शताब्दी में ओथनीलोसॉरस का निर्माण एक नौवीं शताब्दी के अंत में हड्डी युद्धों के दौरान मार्श और कोप द्वारा नामित पौधे खाने वाले डायनासोर की एक श्रृंखला के बेघर अवशेषों को घर बनाने के लिए किया गया था, अक्सर ओथनीलिया, लाओसॉरस और नैनोसॉरस सहित अपर्याप्त साक्ष्य के आधार पर। जैसा कि एक जीनस के रूप में निश्चित हो सकता है, इससे पहले भ्रम के विशाल रिम दिए गए थे, ओथनीलोसॉरस एक छोटा, द्विपक्षीय, जड़ी-बूटियों वाला डायनासोर था जो हिपिसिलोफोडन से निकटता से संबंधित था, और निश्चित रूप से शिकार किया गया था और इसके उत्तरी अमेरिकी पारिस्थितिक तंत्र के बड़े उपद्रवों द्वारा खाया गया था। देर क्रेटेसियस चूंकि हेड्रोसॉर छोटे ऑर्निथोपोड से विकसित हुए हैं, इसलिए आपको यह सोचने के लिए क्षमा किया जा सकता है कि देर से क्रेटेसियस काल के अधिकांश ऑर्निथोपोड डकबिल थे। पार्कसोसॉरस इसके विपरीत सबूत के रूप में गिना जाता हैः यह पांच फुट लंबा, पचहत्तर पौंड पौधे मुन्चर एक हैड्रोसौर के रूप में गिनने के लिए बहुत छोटा था, और डायनासोर विलुप्त होने से कुछ समय पहले ही नवीनतम पहचान ऑर्निथोपोड्स में से एक था। आधा शताब्दी से अधिक के लिए, पार्कसोसॉरस को थिसेलोसॉरस की प्रजातियों के रूप में पहचाना गया था, जब तक कि इसके अवशेषों की पुनः जांच न हो, तब तक हाइप्सिलोफोडन जैसे छोटे ऑर्निथोपोड डायनासोर के साथ अपनी रिश्ते को बढ़ा दिया। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः देर त्रैसिक आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः पालीटोलॉजी में कुछ मुद्दे अधिक जटिल होते हैं, वास्तव में, पहले डायनासोर दो प्रमुख डायनासोर परिवारों में विभाजित होते हैंः ऑर्निथिशियन और सॉरिश्चियन डायनासोर। पिसनोसॉरस इस तरह की असामान्य खोज को बनाता है कि यह स्पष्ट रूप से एक ऑर्निथिशियन डायनासोर था जो दक्षिण अमेरिका में दो सौ बीस मिलियन वर्ष पहले रहता था, साथ ही साथ एरोप्टर और हेरेरासॉरस जैसे प्रारंभिक थेरोपोड । आगे जटिल मामलों में, पिसानोसॉरस में एक ऑर्निथिशियन-शैली वाला सिर था जो एक सॉरिश्चियन-शैली के शरीर के ऊपर था। ऐसा लगता है कि इसका निकटतम सापेक्ष दक्षिणी अफ्रीकी ईकर्सर रहा है , जिसने एक सर्वव्यापी आहार का पीछा किया हो सकता है। प्रारंभिक क्रेटेसियस लगभग एक सौ पच्चीस मिलियन वर्ष पहले प्रारंभिक क्रेटेसियस उत्तरी अमेरिका के बड़े थेरोपोडों को शिकार के विश्वसनीय स्रोत की आवश्यकता थी, और स्कीट, भारी, अनगिनत ऑर्निथोपोड्स जैसे प्लेनिकोक्सिया से अधिक शिकार अधिक विश्वसनीय नहीं था। यह "iguanodontid" ऑर्निथोपोड पूरी तरह से असुरक्षित नहीं था, खासकर जब पूरी तरह से उगाया जाता था, लेकिन जब यह सामान्य रूप से चुपचाप चराई के बाद दो फीट पर शिकारियों से दूर हो जाता तो यह काफी दृष्टि से होना चाहिए चतुर्भुज मुद्रा। एक संबंधित ऑर्निथोपोड, कैम्पोसोसॉरस की एक प्रजाति को प्लानिकोक्सा को सौंपा गया है, जबकि एक प्लानिकोक्स प्रजातियों को तब से उस्माकासॉरस जीन बनाने के लिए हटा दिया गया है। प्रारंभिक क्रेटेसियस एक हफ्ते तक नहीं जाता है, ऐसा लगता है, किसी के बिना, कहीं, मध्य क्रेटेसियस काल के एक और iguanodont ऑर्निथोपोड की खोज। कुछ साल पहले स्पेन के टेरेल प्रांत में प्रो के खंडित जीवाश्मों का पता लगाया गया था; इस डायनासोर के निचले जबड़े में विचित्र रूप से आकार की "भविष्यवाणियों" हड्डी ने अपना नाम प्रेरित किया, जो यूनानी है "प्र। " हम सभी को प्रो के बारे में निश्चित रूप से पता है कि यह एक क्लासिक ऑर्निथोपॉड था, जो इगुआआनोडन और शाब्दिक रूप से अन्य जेनेरा के दर्जनों में दिखाई देता था, जिसका मुख्य कार्य भूखे रैप्टर और ट्रायनोसॉर के लिए एक विश्वसनीय खाद्य स्रोत के रूप में कार्य करना था। देर क्रेटेसियस इतने सारे विकासवादी संक्रमणों के साथ, एक भी "आह" नहीं था! पल जब सबसे उन्नत ऑर्निथोपोड पहले हीरोसॉर , या बतख-बिलित डायनासोर में विकसित हुए। एक निन्यानवे शून्य के उत्तरार्ध में, प्रोटोहाड्रोस को अपने खोजकर्ता द्वारा पहली बार हैड्रोसौर के रूप में बताया गया था, और इसका नाम इस आकलन में अपना विश्वास दर्शाता है। हालांकि, अन्य पालीटोलॉजिस्ट कम निश्चित हैं, और तब से यह निष्कर्ष निकाला है कि प्रोटोहाड्रोस एक सच्चे डकबिल होने के कगार पर लगभग iguanodontid ऑर्निथोपोड था, लेकिन काफी नहीं। न केवल साक्ष्य का यह एक अधिक शांत मूल्यांकन है, बल्कि यह वर्तमान सिद्धांत को बरकरार रखता है कि उत्तरी अमरीका के बजाय एशिया में पहला सच्चा हैड्रोसौर विकसित हुआ था नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः देर क्रेटेसियस आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः ऑर्निथोपोड्स एक नौवीं शताब्दी में पाए जाने वाले कुछ सबसे आम डायनासोर थे, मुख्य रूप से क्योंकि उनमें से बहुत से यूरोप में रहते थे । एक हज़ार आठ सौ उनहत्तर में खोजे गए, रबडोडन को अभी तक उचित रूप से वर्गीकृत नहीं किया गया है, क्योंकि यह दो प्रकार के ऑर्निथोपोड्स की कुछ विशेषताओं को साझा करता हैः iguanodonts और हाइप्सिलोफोडोंट । रबडोडन अपने समय और स्थान के लिए काफी छोटा ऑर्निथोपोड था; इसकी सबसे उल्लेखनीय विशेषताएं इसके गोलाकार दांत और असामान्य रूप से धुंधले सिर थे। प्रारंभिक क्रेटेसियस टिटानोसॉर की तरह ऑर्निथोपोड्स, मध्य में देर से क्रेटेसियस काल के दौरान विश्वव्यापी वितरण था। सियामोडन का महत्व यह है कि यह आधुनिक डायनासोर में खोजे जाने वाले कुछ डायनासोरों में से एक है - और, अपने करीबी चचेरे भाई प्रोबैक्ट्रोसॉरस की तरह , यह विकासवादी जंक्शन के करीब रहता है जब पहले सच्चे हेड्रोसॉर ने अपने ऑर्निथोपॉड फोरबियर से ब्रांच किया था। आज तक, सियामोडन केवल एक दांत और जीवाश्म मस्तिष्क से जाना जाता है; आगे की खोजों को अपनी उपस्थिति और जीवनशैली पर अतिरिक्त प्रकाश डालना चाहिए। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः देर क्रेटेसियस आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः ऑर्निथोपोड्स - मस्तिष्क, जड़ी-बूटियों, द्विपक्षीय डायनासोर - देर से क्रेटेसियस दक्षिण अमेरिका में जमीन पर स्पैस थे, केवल अब तक के कुछ मुट्ठी भर पाए गए हैं। तालेनकोएन अन्य दक्षिण अमेरिकी ऑर्निथोपोड्स जैसे एनाबिसेटिया और गैस्परिनिसॉररा से अलग है, जिसमें यह लंबे, मोटे शरीर और लगभग हास्यपूर्ण छोटे सिर के साथ बहुत बेहतर ज्ञात इगुआनोडन के लिए एक समान समानता है। इस डायनासोर के जीवाश्मों में पसलियों के पिंजरे को अस्तर वाली अंडाकार आकार की प्लेटों का एक दिलचस्प सेट शामिल है; यह स्पष्ट नहीं है कि सभी ऑर्निथोपोड ने इस सुविधा को साझा किया है या यदि यह केवल कुछ प्रजातियों तक सीमित था। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः प्रारंभिक क्रेटेसियस आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः जब एक नौवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में थीओफिटलिया की बरकरार खोपड़ी की खोज की गई - "देवताओं का बाग" नामक एक पार्क के पास, इसलिए इस डायनासोर का नाम - प्रसिद्ध पालीटोलॉजिस्ट ओथनील सी मार्श ने माना कि यह कैम्पोसोसस की एक प्रजाति थी। बाद में, यह महसूस किया गया कि यह ऑर्निथोपोड देर से जुरासिक काल की बजाय शुरुआती क्रेटेसियस से दिनांकित है, जिससे एक और विशेषज्ञ इसे अपने स्वयं के जीनस को सौंपने के लिए प्रेरित करता है। आज, पालीटोलॉजिस्ट का मानना है कि थिओफिटलिया कैम्पेटोसॉरस और इगुआनोडन के बीच में मध्यवर्ती था; इन अन्य ऑर्निथोपोड की तरह, शिकारियों द्वारा पीछा किए जाने पर यह आधे टन जड़ी-बूटियों शायद दो पैरों पर दौड़ गया। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः देर जुरासिक आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः तियान्युलोंग ने पालीटोलॉजिस्ट की सावधानी से तैयार वर्गीकरण योजनाओं में एक बंदर रिंच के बराबर डायनासोर फेंक दिया है। पहले, केवल पंखों के खेल के लिए जाने वाले एकमात्र डायनासोर छोटे थेरोपोड थे, ज्यादातर रैप्टर और संबंधित डिनो-पक्षियों । तियान्युलोंग पूरी तरह से एक अलग प्राणी थाः एक ऑर्निथोपोड जिसका जीवाश्म लंबे, बालों वाले प्रोटो-पंखों की अनूठी छाप पैदा करता है, इस प्रकार संभवतः एक गर्म खून वाले चयापचय पर संकेत देता है। लंबी कहानी छोटीः अगर तियान्युलोंग ने पंखों का खेल किया, तो कोई डायनासोर हो सकता है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उसका आहार या जीवनशैली क्या है! देर क्रेटेसियस दो हज़ार आठ में अंटार्कटिका में खोजा गया, त्रिनिसौरा इस विशाल महाद्वीप से पहली बार पहचान की गई ऑर्निथोपोड है, और कुछ लोगों में से एक प्रजातियों की मादा के बाद नामित किया जाना चाहिए । त्रिनिसौरा महत्वपूर्ण क्या है कि यह Mesozoic मानकों द्वारा असामान्य रूप से कठोर परिदृश्य में निवास किया; सत्तर मिलियन साल पहले, अंटार्कटिका लगभग उतना ही ठंडा नहीं था जितना आज है, लेकिन यह अभी भी अंधेरे में साल भर के लिए गिर गया था। ऑस्ट्रेलिया और अंटार्कटिका के अन्य डायनासोर की तरह, त्रिनिसौरा ने असामान्य रूप से बड़ी आंखों को विकसित करके अपने पर्यावरण को अनुकूलित किया, जिसने इसे स्वस्थ सूरज की रोशनी में इकट्ठा करने में मदद की और स्वस्थ दूरी से दूर वेश्यापूर्ण थ्रोपोडों को स्थान दिया। देर जुरासिक पालीटोलॉजी में एक नियम प्रतीत होता है कि जेनेरा की संख्या स्थिर बनी हुई हैः जबकि कुछ डायनासोर अपने जीनस स्थिति से हटाए जाते हैं , दूसरों को विपरीत दिशा में पदोन्नत किया जाता है। यूटेडॉन के साथ ऐसा ही मामला है, जो एक शताब्दी से अधिक के लिए एक नमूना माना जाता था, और फिर प्रसिद्ध उत्तरी अमेरिकी ऑर्निथोपोड कैम्पोसोसस की एक अलग प्रजाति थी। भले ही यह कैम्पोसोसस से तकनीकी रूप से अलग था , यूटेडॉन ने शायद उसी प्रकार की जीवनशैली का नेतृत्व किया, वनस्पति ब्राउज़ किया और भूखे शिकारियों से शीर्ष गति पर भाग गया। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः प्रारंभिक क्रेटेसियस आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः वाल्दोसॉरस प्रारंभिक क्रेटेसियस यूरोप का एक ठेठ ऑर्निथोपॉड थाः एक छोटा, दो पैर वाला, नुकीला पौधे-खाने वाला जो शायद गति के प्रभावशाली विस्फोटों में सक्षम था जब इसका निवास अपने बड़े आवास के पीछा किया जा रहा था। हाल ही में, इस डायनासोर को बेहतर ज्ञात ड्रायोसॉरस की प्रजातियों के रूप में वर्गीकृत किया गया था, लेकिन जीवाश्म अवशेषों के पुनर्मूल्यांकन पर इसे अपने स्वयं के जीनस से सम्मानित किया गया था। एक "iguanodont" ऑर्निथोपोड, वाल्दोसॉरस निकट से संबंधित था, आप अनुमान लगाया, Iguanodon । नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः देर जुरासिक आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः फिर भी प्रसिद्ध चीनी पालीटोलॉजिस्ट दांग झिमिंग के बेल्ट में एक और पायदान, जिसने एक नौ तिरासी में अपने बिखरे हुए जीवाश्मों की खोज की, ज़ियाओसॉरस देर से जुरासिक काल के एक छोटे, अपमानजनक, पौधे खाने वाले ऑर्निथोपोड थे जो होप्सिलोफोडन के पूर्वज थे । उन नंगे तथ्यों के अलावा, हालांकि, इस डायनासोर के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है, और ज़ियाओसॉरस अभी भी ऑर्निथोपोड के पहले से नामित जीनस की प्रजाति बन सकता है । प्रारंभिक क्रेटेसियस Xuwulong, चीन के प्रारंभिक क्रेटेसियस ऑर्निथोपोड के बारे में बहुत कुछ प्रकाशित नहीं हुआ है जो "iguanodontid" ऑर्निथोपोड्स के बीच विभाजन के निकट रहता है और बहुत पहले हैड्रोसॉर , या बतख-बिल डायनासोर। अन्य iguandontids के साथ आम तौर पर, अनजाने दिखने वाले Xuwolong एक मोटी पूंछ, एक संकीर्ण चोंच, और लंबे हिंद पैर था जिस पर शिकारियों द्वारा धमकी दी जब यह भाग सकता है। शायद इस डायनासोर के बारे में सबसे असामान्य बात यह है कि इसके नाम के अंत में "लंबा" अर्थ "ड्रैगन" होता है; आम तौर पर, यह चीनी जड़ गुआनलांग या दिलोंग जैसे अधिक डरावनी मांस खाने वालों के लिए आरक्षित है। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः मध्य जुरासिक आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः एक बार एक सुरक्षित रूप से सुरक्षित डायनासोर जीनस जिसमें दो नामित प्रजातियां शामिल हों, तब से यंडुसॉरस को पालीटोलॉजिस्ट ने इस बिंदु पर दबा दिया है कि इस छोटे ऑर्निथोपोड को अब कुछ डायनासोर बेस्टियरी में भी शामिल नहीं किया गया है। सबसे प्रमुख यांडुसॉरस प्रजातियों को कुछ साल पहले बेहतर ज्ञात एगिलिसॉरस में फिर से सौंपा गया था, और बाद में इसे एक पूरी तरह से नए जीनस, हेक्सिनलुसॉरस में पुनः पुनः असाइन किया गया था। "हाइप्सिलोफोडोंट" के रूप में वर्गीकृत, इन सभी छोटे, जड़ी-बूटियों, द्विपक्षीय डायनासोर से निकटता से संबंधित थे, आपने अनुमान लगाया, हाइप्सिलोफोडन , और अधिकांश मेसोज़ोइक युग के दौरान विश्वव्यापी वितरण था। नामः पर्यावासः ऐतिहासिक कालः देर क्रेटेसियस आकार और वजनः आहारः विशिष्ठ अभिलक्षणः जैसे कि यह ऑर्निथोपोड डायनासोर को वर्गीकृत करने के लिए पहले से ही मुश्किल नहीं था, रोमानिया में ज़लमॉक्सिस की खोज ने इस परिवार की एक और उप-श्रेणी के लिए सबूत प्रदान किए हैं, जिसे जीभ-मोटे तौर पर रबडोडोंटिड iguanodonts के रूप में जाना जाता है । अभी तक, इस रोमानियाई डायनासोर के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है, एक ऐसी स्थिति जिसे बदलना चाहिए क्योंकि इसके जीवाश्म आगे विश्लेषण के अधीन हैं।
Putrajeevak Beej in Hindi पुत्रजीवक बीज का उपयोग आयुर्वेद में महिला बांझपन (female infertility) उपचार के लिए किया जाता है। यह गर्भाशय की मांसपेशियों को मजबूत करता है और एक महिला को गर्भधारण करने में मदद करता है। पुत्रजीवक बीज के फायदे यौन स्वास्थ्य के लिए बहुत अधिक हैं। आयुर्वेद के अनुसार, यह प्रजनन प्रणाली पर प्रभाव डालता है, खासतौर पर महिलाओं में गर्भाशय, अंडाशय में और पुरुषों में वृषण (testes) में। पुत्रजीवक की मुख्य कार्रवाई इन संरचनाओं को मजबूत करने और इन अंगों के कार्यों में सुधार लाना है। इसका उचित मात्रा में सेवन करने से गर्भपात (abortion) के इलाज में भी सहायक प्राप्त होती है। इसके अलावा इसमें एफ्रोडायसियाक और शुक्राणुजन्य (spermatogenic) क्रियाएं भी होती हैं, इसलिए यह नर नपुंसकता और बांझपन के लिए भी फायदेमंद होता है। पुत्रजीवक बीज के बहुत से औषधीय गुण हैं, जो इसे पुरुषों और महिलाओं के लिए इसे उपयोगी बनाते हैं। इसमें एंटीआक्सीडेंट, पीड़ा हटानेवाला, एंटी इंफ्लामैंट्री, खट्टापन दूर करने वाला, वायुनाशी और स्पेर्मेटोजेनिक जैसे गुण होते है जो महिलाओं के संपूर्ण यौन स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं। पुत्रजीवक बीज यौन स्वास्थ्य (sexual Health) को बढ़ावा देने के साथ-साथ कब्ज, अत्यधिक प्यास, शारीरिक कमजोरी या दुर्बलता, आंतों की गैस और जलन आदि को कम करता है। यह द्रष्टि, प्रतिरक्षा, शारीरिक शक्ति और धीरज में सुधार करता है। मध्यम आकार के सदाबहार पेड़ जिनकी ऊंचाई लगभग 12 मीटर तक होती है। इसकी छाल का रंग गहरा भूरा होता है। यह पेड़ बिल्कुल सीधा, ऊंचा और मोटा होता है। इसके बीज में शामिल (kernel contains) हैं, फैटी तेल सरसों की गंध जैसा, आइसोथियोसाइनेट, उपजिंगग्लाइकोसाइड्स, ग्लूकोपुट्रानजिविन, ग्लुकोकोक्लेरिन, ग्लूकोजीपूटिन और ग्लूकोक्लेमोमिन के साथ एक आवश्यक (essential oil) तेल होता है। आवश्यक तेल में आइसोप्रोपील और 2-ब्यूटिल आइसोथियोसाइनेट्स मुख्य घटक और 2-मेथिलबूटिल आइसोथियोसाइनेट के रूप में एक मामूली घटक के रूप में होते हैं। महिला प्रजनन प्रणाली के अंगों को स्वास्थ्य लाभ दिलाने के लिए पुत्रजीवक बीज बहुत ही फायदेमंद होते है। यह गर्भाशय टॉनिक के रूप में कार्य करता है। यदि इसका उपयोग रोग के अनुसार सावधानी से किया जाता है तो यह मादा और नर दोनों में बांझपन (infertility) को ठीक करने में मदद करता है। यह गर्भावस्था को जारी रखने के लिए और प्रत्यारोपण के लिए सक्षम गर्भाशय बनाता है। इसलिए यह आवर्ती गर्भावस्था हानि या (आरपीएल) (recurrent pregnancy loss) गर्भपात के मामलों में भी उपयोगी होता है। (और पढ़े - जानें, मां बनने में महिला के अंगों की क्या है भूमिका) पुरुषों में यह शुक्राणुजन्यता (spermatogenesis) में सुधार करता है और उनकी संख्या बढ़ाने में मदद करता है। इसलिए यह अल्पशुक्राणुता, एसथेनोस्पर्मिया (Asthenospermia) और टेराटोजोस्पर्मिया (Teratozoospermia) के कारण होने वाली पुरुष बांझपन के उपचार में अत्यधिक फायदेमंद है। इस लेख में आप जानेंगे कि पुत्रजीवक किस तरह आपके लिए फायदेमंद है। महिलाओं के बांझपन के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन पुत्रजीवक बीज गर्भाशय को डेटॉक्सीफाइंग (detoxifying) के लिए सहायक दवा के रूप कार्य करता है। जिससे गर्भावस्था को जारी रखने, गर्भपात को रोकने और डिम्बग्रंथि कार्यों में सुधार करने में सक्षम बनाता है, गर्भधारण के लिए परिपक्व और स्वस्थ अंडे के निर्माण और निषेचन (fertilization) में मदद करता है। आयुर्वेद के अनुसार यह ज्यादातर महिलाओं के लिए उपयुक्त है जो वात दोष और पित्त दोष से पीडित हैं। यदि किसी महिला ऐसे लक्षण दिखते हैं तो पुत्रजीवक उनके लिए सबसे उपयुक्त औषधी हो सकती है। जैसे कि नाराजगी, एसिड रिफ्लेक्स (Acid Reflux), अति संवेदनशीलता, अपचन, सिर चकराना, मासिक धर्म के समय दर्द ऐंठन और अधिक खून बहना, आंखों के नीचे डार्क सर्कल, दुर्बलता, वजन घटना, कब्ज की परेशानी, सूजन, अनिद्रा मुंह का खराब स्वाद और अन्य लक्षण भी हो सकते हैं, इसलिए आपका डॉक्टर आपको सही तरीके से उनका विश्लेषण करने और पुत्रजीवक बीज (putrajeevak Seeds) का चयन करने में आपकी सहायता कर सकता है यदि यह आपके लिए उपयुक्त हो तो। (और पढ़े - महिला बांझपन के कारण, लक्षण, निदान और इलाज) आमतौर पर पुत्रजीवक बीज और शिवलिंगी बीज एक साथ लेने की सलाह दी जाती है। यदि आपको पित्त दोष के लक्षण हैं तो शिवलिंगी आपके लिए उपयुक्त नहीं हो सकती है। अगर शिवलिंगी (Bryonia laciniosa) की आवश्यकता है तो शिवलिंगी को न्यूनतम खुराक में लिया जाना चाहिए और पुत्रजीवक को अधिक मात्रा में सेवन करना चाहिए। इन दोनों औषधियों को दूध के साथ सेवन करना चाहिए। नोट : शिवलिंगी उन मरीजों के लिए सबसे अच्छा है, जिन्हें कफ से संबंधित परेशानियों होती हैं जैसे कि अतिरिक्त श्लेष्म (mucus) , आलस्य, अत्यधिक लापरवाही, नींद में कमी, मुंह के मीठे या नमकीन स्वाद, पेट का भारीपन, एडीमा, अत्यधिक नींद, सूजन या दर्द आदि। ऐसी समस्या के लिए शिवलिंगी को दूध से नहीं लिया जाना चाहिए बल्कि पानी के साथ लेना फायदेमंद होता है। (और पढ़े - शिवलिंगी बीज के फायदे, उपयोग और नुकसान) आयुर्वेद के अनुसार, गर्भाशय कमजोरी गर्भपात का मुख्य कारण है। ऐसे मामलों में गर्भाशय, गर्भावस्था जारी रखने में असमर्थ होने की संभावना होती है। पुत्रजीवक ऐसे मामलों के लिए सबसे अच्छा है। यह गर्भाशय टॉनिक के रूप में कार्य करता है, यह गर्भाशय लायनिंग (uterine linings) को शक्ति प्रदान करने में मदद करता है और गर्भावस्था को बनाये रखने में सक्षम बनाता है। इसका उपभोग कर आप गर्भपात को रोक सकते हैं। यह उचित प्रत्यारोपण में मदद करता है। ऐसे मामलों में, निम्नलिखित संयोजन अत्यधिक उपयोगी होते हैं। इस मिश्रण का सेवन 4 चम्मच दिन में दो बार गर्म दूध के साथ नियमित रूप से करना चाहिए। इसका उपभोग खाली पेट, भोजन के 1 घंटे पहले या भोजन के 3 घंटे बाद करना फायदेमंद होता है। (और पढ़े - गर्भपात के बाद होने वाली समस्याएं) पुरुषों में शुक्राणुओं की कमी (lack of sperm) को दूर करने के लिए पुत्रजीवक बहुत ही लाभकारी होता है। पुत्रजीवक बीज के पाउडर की 3 ग्राम मात्रा दूध के साथ सेवन करने से कुल शुक्राणुओं की संख्या में सुधार और ओलिगोस्पर्मिया का इलाज करने के लिए सबसे अच्छी दवा है। यह शुक्राणु गतिशीलता और आकार (spermatic and morphology) में भी सुधार करता है। (और पढ़े - शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने का घरेलू उपाय ) यदि रोगी को कब्ज हो और कठोर और शुष्क मल के कारण दर्द के साथ आंत्र में मरोड़ (bowel movement) हो, तो पुत्रजीवक बहुत उपयोगी होता है। ऐसे मामलों में पुत्रजीवक बीज पाउडर रोजाना दो बार 3 ग्राम दूध के साथ लिया जाना चाहिए। यह आपको कब्ज (constipation) से राहत दिलाएगा। (और पढ़े - कब्ज के कारण और इलाज) पुत्रजीवक गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान उपभोग करने के लिए संभवतःः सुरक्षित है ऐसी महिलाओं में कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है जो इसे बांझपन के इलाज के लिए लेते हैं और गर्भावस्था के पहले तिमाही के दौरान इसका उपभोग करते हैं। पुत्रजीवक का भ्रुण (fetus) पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है। Putrajeevak बीज बांझपन में इलाज के लिए एक प्राकृतिक जड़ी बूटी के रूप में जाना जाता है। यह एक नर बच्चे का वादा नहीं करता है, लेकिन इसके नाम से ऐसा भ्रम होता है, बच्चे का लिंग पूरी तरह से पिता गुण सूत्र ( लड़की के लिए X और लड़के के लिए Y) पर निर्भर करता है। पुत्रजीवक बीज गर्भधारण (pregnancy) की संभावनाओं को बढ़ा सकते हैं, लेकिन बच्चे के लिंग को निर्धारित करने में उसकी कोई भूमिका नहीं है। (और पढ़े - जाने गर्भ में लड़का होने के लक्षण क्या होते है) (यह भी पढ़े -बेकिंग सोडा से करें लिंग की जांच और जाने लड़का होगा या लड़की) (और पढ़े - लड़का पैदा करने के घरेलु उपाय) पेशेवर पर्यवेक्षण के तहत उपयुक्त खुराक में इसके संकेतों के अनुसार यह अधिकांश व्यक्तियों के लिए सुरक्षित है। यह उन मरीजों के लिए सबसे अच्छा है जिनके पास वात या पित्त (Vata or Pitta) दोष में वृद्धि हुई है लेकिन यह कफ दोष में वृद्धि के लिए कम उपयुक्त है। उचित मात्रा और रोग के अनुसार उपयोग किये जाने पर पुत्रजीवक के कोई दुष्प्रभाव नहीं हैं। इसकी किसी भी प्रकार की विषाक्तता का ज्ञान नहीं है और ना ही इससे होने वाली एलर्जी अभी तक पता चली है। (और पढ़े - तिल के बीज और तिल के तेल के फायदे) इसी तरह की अन्य जानकरी हिन्दी में पढ़ने के लिए हमारे एंड्रॉएड ऐप को डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं। और आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।
Putrajeevak Beej in Hindi पुत्रजीवक बीज का उपयोग आयुर्वेद में महिला बांझपन उपचार के लिए किया जाता है। यह गर्भाशय की मांसपेशियों को मजबूत करता है और एक महिला को गर्भधारण करने में मदद करता है। पुत्रजीवक बीज के फायदे यौन स्वास्थ्य के लिए बहुत अधिक हैं। आयुर्वेद के अनुसार, यह प्रजनन प्रणाली पर प्रभाव डालता है, खासतौर पर महिलाओं में गर्भाशय, अंडाशय में और पुरुषों में वृषण में। पुत्रजीवक की मुख्य कार्रवाई इन संरचनाओं को मजबूत करने और इन अंगों के कार्यों में सुधार लाना है। इसका उचित मात्रा में सेवन करने से गर्भपात के इलाज में भी सहायक प्राप्त होती है। इसके अलावा इसमें एफ्रोडायसियाक और शुक्राणुजन्य क्रियाएं भी होती हैं, इसलिए यह नर नपुंसकता और बांझपन के लिए भी फायदेमंद होता है। पुत्रजीवक बीज के बहुत से औषधीय गुण हैं, जो इसे पुरुषों और महिलाओं के लिए इसे उपयोगी बनाते हैं। इसमें एंटीआक्सीडेंट, पीड़ा हटानेवाला, एंटी इंफ्लामैंट्री, खट्टापन दूर करने वाला, वायुनाशी और स्पेर्मेटोजेनिक जैसे गुण होते है जो महिलाओं के संपूर्ण यौन स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं। पुत्रजीवक बीज यौन स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के साथ-साथ कब्ज, अत्यधिक प्यास, शारीरिक कमजोरी या दुर्बलता, आंतों की गैस और जलन आदि को कम करता है। यह द्रष्टि, प्रतिरक्षा, शारीरिक शक्ति और धीरज में सुधार करता है। मध्यम आकार के सदाबहार पेड़ जिनकी ऊंचाई लगभग बारह मीटर तक होती है। इसकी छाल का रंग गहरा भूरा होता है। यह पेड़ बिल्कुल सीधा, ऊंचा और मोटा होता है। इसके बीज में शामिल हैं, फैटी तेल सरसों की गंध जैसा, आइसोथियोसाइनेट, उपजिंगग्लाइकोसाइड्स, ग्लूकोपुट्रानजिविन, ग्लुकोकोक्लेरिन, ग्लूकोजीपूटिन और ग्लूकोक्लेमोमिन के साथ एक आवश्यक तेल होता है। आवश्यक तेल में आइसोप्रोपील और दो-ब्यूटिल आइसोथियोसाइनेट्स मुख्य घटक और दो-मेथिलबूटिल आइसोथियोसाइनेट के रूप में एक मामूली घटक के रूप में होते हैं। महिला प्रजनन प्रणाली के अंगों को स्वास्थ्य लाभ दिलाने के लिए पुत्रजीवक बीज बहुत ही फायदेमंद होते है। यह गर्भाशय टॉनिक के रूप में कार्य करता है। यदि इसका उपयोग रोग के अनुसार सावधानी से किया जाता है तो यह मादा और नर दोनों में बांझपन को ठीक करने में मदद करता है। यह गर्भावस्था को जारी रखने के लिए और प्रत्यारोपण के लिए सक्षम गर्भाशय बनाता है। इसलिए यह आवर्ती गर्भावस्था हानि या गर्भपात के मामलों में भी उपयोगी होता है। पुरुषों में यह शुक्राणुजन्यता में सुधार करता है और उनकी संख्या बढ़ाने में मदद करता है। इसलिए यह अल्पशुक्राणुता, एसथेनोस्पर्मिया और टेराटोजोस्पर्मिया के कारण होने वाली पुरुष बांझपन के उपचार में अत्यधिक फायदेमंद है। इस लेख में आप जानेंगे कि पुत्रजीवक किस तरह आपके लिए फायदेमंद है। महिलाओं के बांझपन के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन पुत्रजीवक बीज गर्भाशय को डेटॉक्सीफाइंग के लिए सहायक दवा के रूप कार्य करता है। जिससे गर्भावस्था को जारी रखने, गर्भपात को रोकने और डिम्बग्रंथि कार्यों में सुधार करने में सक्षम बनाता है, गर्भधारण के लिए परिपक्व और स्वस्थ अंडे के निर्माण और निषेचन में मदद करता है। आयुर्वेद के अनुसार यह ज्यादातर महिलाओं के लिए उपयुक्त है जो वात दोष और पित्त दोष से पीडित हैं। यदि किसी महिला ऐसे लक्षण दिखते हैं तो पुत्रजीवक उनके लिए सबसे उपयुक्त औषधी हो सकती है। जैसे कि नाराजगी, एसिड रिफ्लेक्स , अति संवेदनशीलता, अपचन, सिर चकराना, मासिक धर्म के समय दर्द ऐंठन और अधिक खून बहना, आंखों के नीचे डार्क सर्कल, दुर्बलता, वजन घटना, कब्ज की परेशानी, सूजन, अनिद्रा मुंह का खराब स्वाद और अन्य लक्षण भी हो सकते हैं, इसलिए आपका डॉक्टर आपको सही तरीके से उनका विश्लेषण करने और पुत्रजीवक बीज का चयन करने में आपकी सहायता कर सकता है यदि यह आपके लिए उपयुक्त हो तो। आमतौर पर पुत्रजीवक बीज और शिवलिंगी बीज एक साथ लेने की सलाह दी जाती है। यदि आपको पित्त दोष के लक्षण हैं तो शिवलिंगी आपके लिए उपयुक्त नहीं हो सकती है। अगर शिवलिंगी की आवश्यकता है तो शिवलिंगी को न्यूनतम खुराक में लिया जाना चाहिए और पुत्रजीवक को अधिक मात्रा में सेवन करना चाहिए। इन दोनों औषधियों को दूध के साथ सेवन करना चाहिए। नोट : शिवलिंगी उन मरीजों के लिए सबसे अच्छा है, जिन्हें कफ से संबंधित परेशानियों होती हैं जैसे कि अतिरिक्त श्लेष्म , आलस्य, अत्यधिक लापरवाही, नींद में कमी, मुंह के मीठे या नमकीन स्वाद, पेट का भारीपन, एडीमा, अत्यधिक नींद, सूजन या दर्द आदि। ऐसी समस्या के लिए शिवलिंगी को दूध से नहीं लिया जाना चाहिए बल्कि पानी के साथ लेना फायदेमंद होता है। आयुर्वेद के अनुसार, गर्भाशय कमजोरी गर्भपात का मुख्य कारण है। ऐसे मामलों में गर्भाशय, गर्भावस्था जारी रखने में असमर्थ होने की संभावना होती है। पुत्रजीवक ऐसे मामलों के लिए सबसे अच्छा है। यह गर्भाशय टॉनिक के रूप में कार्य करता है, यह गर्भाशय लायनिंग को शक्ति प्रदान करने में मदद करता है और गर्भावस्था को बनाये रखने में सक्षम बनाता है। इसका उपभोग कर आप गर्भपात को रोक सकते हैं। यह उचित प्रत्यारोपण में मदद करता है। ऐसे मामलों में, निम्नलिखित संयोजन अत्यधिक उपयोगी होते हैं। इस मिश्रण का सेवन चार चम्मच दिन में दो बार गर्म दूध के साथ नियमित रूप से करना चाहिए। इसका उपभोग खाली पेट, भोजन के एक घंटाटे पहले या भोजन के तीन घंटाटे बाद करना फायदेमंद होता है। पुरुषों में शुक्राणुओं की कमी को दूर करने के लिए पुत्रजीवक बहुत ही लाभकारी होता है। पुत्रजीवक बीज के पाउडर की तीन ग्राम मात्रा दूध के साथ सेवन करने से कुल शुक्राणुओं की संख्या में सुधार और ओलिगोस्पर्मिया का इलाज करने के लिए सबसे अच्छी दवा है। यह शुक्राणु गतिशीलता और आकार में भी सुधार करता है। यदि रोगी को कब्ज हो और कठोर और शुष्क मल के कारण दर्द के साथ आंत्र में मरोड़ हो, तो पुत्रजीवक बहुत उपयोगी होता है। ऐसे मामलों में पुत्रजीवक बीज पाउडर रोजाना दो बार तीन ग्राम दूध के साथ लिया जाना चाहिए। यह आपको कब्ज से राहत दिलाएगा। पुत्रजीवक गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान उपभोग करने के लिए संभवतःः सुरक्षित है ऐसी महिलाओं में कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है जो इसे बांझपन के इलाज के लिए लेते हैं और गर्भावस्था के पहले तिमाही के दौरान इसका उपभोग करते हैं। पुत्रजीवक का भ्रुण पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है। Putrajeevak बीज बांझपन में इलाज के लिए एक प्राकृतिक जड़ी बूटी के रूप में जाना जाता है। यह एक नर बच्चे का वादा नहीं करता है, लेकिन इसके नाम से ऐसा भ्रम होता है, बच्चे का लिंग पूरी तरह से पिता गुण सूत्र पर निर्भर करता है। पुत्रजीवक बीज गर्भधारण की संभावनाओं को बढ़ा सकते हैं, लेकिन बच्चे के लिंग को निर्धारित करने में उसकी कोई भूमिका नहीं है। पेशेवर पर्यवेक्षण के तहत उपयुक्त खुराक में इसके संकेतों के अनुसार यह अधिकांश व्यक्तियों के लिए सुरक्षित है। यह उन मरीजों के लिए सबसे अच्छा है जिनके पास वात या पित्त दोष में वृद्धि हुई है लेकिन यह कफ दोष में वृद्धि के लिए कम उपयुक्त है। उचित मात्रा और रोग के अनुसार उपयोग किये जाने पर पुत्रजीवक के कोई दुष्प्रभाव नहीं हैं। इसकी किसी भी प्रकार की विषाक्तता का ज्ञान नहीं है और ना ही इससे होने वाली एलर्जी अभी तक पता चली है। इसी तरह की अन्य जानकरी हिन्दी में पढ़ने के लिए हमारे एंड्रॉएड ऐप को डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं। और आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।
ठाणे : आजकल इस हिन्दूबहुसंख्यक देश में 'विधियां हिन्दुआें के लिए और लाभ दूसरों को' की स्थिति बनी है । भ्रष्टाचार के नाम पर सरकार ने अनेक मंदिरों को अपने नियंत्रण में कर लिया । विकास के लिए चर्च अथवा मस्जिदों का धन नहीं लिया जाता । राममंदिर का प्रश्न अभी भी लंबित है; परंतु डान्सबार पुनः आरंभ हो रहे हैं । पहले राजा और सेनापति के पद के लिए 'सिलेक्शन' की पद्धति है । कोई व्यक्ति किसी पद के लिए पात्र हो अथवा न हो; किंतु अब 'इलेक्शन' की पद्धति है । इस संपूर्ण स्थिति में परिवर्तन लाने हेतु अब हिन्दू राष्ट्र के अतिरिक्त अन्य कोई विकल्प नहीं है । हिन्दू जनजागृति समिति के श्री. नरेंद्र सुर्वे ने यह मार्गदर्शन किया । २० जनवरी को हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से यहां के आेंकार मित्रमंडल, खोपट में हिन्दू राष्ट्र-जागृति सभा का आयोजन किया गया । इस सभा में श्री. सुर्वे ऐसा बोल रहे थे । इस सभा में १५० धर्मप्रेमी उपस्थित थे । श्रीमती कविता लेले ने सभा का सूत्रसंचालन किया । शिवसेना के खोपट विभाग के शाखाप्रमुख श्री. राजेंद्र महाडिक सभा में उपस्थित थे । १. सभा के पश्चात वक्ताआें के साथ चर्चा करने के लिए २२ धर्मप्रेमी उपस्थित थे । २. बजरंग दल के वरिष्ठ नेता श्री. अनिल मोरे ने सभा का तडप के साथ प्रसार किया । ३. विश्व हिन्दू परिषद एवं बजरंग दल के ठाणे विभाग संयोजक श्री. दीपक मेढेकर ने प्रधानता लेकर ठाणे में और २ सभाआें के आयोजन की सिद्धता दर्शाई । ४. भाजपा के खोपट प्रभाग के सचिव श्री. संतोष खामितकर ने कार्य में सम्मिलित होने की सिद्धता दर्शाई । ५. सभास्थल के अर्थात आेंकार मित्रमंडल के मालिक श्री. मोरेश्वर बनसोडे ने सभास्थल, चाय और अल्पाहार का प्रबंध किया । सभा के चित्रीकरण के लिए पुलिसकर्मी उपस्थित ! सभा का स्वरूप छोटा होते हुए भी सभा के चित्रीकरण और छायाचित्र खींचने के लिए सामान्य वेशभूषा में पुलिसकर्मी उपस्थित थे । (पुलिस प्रशासन यदि यही समय आतंकियों को ढूंढने के लिए करता, तो देश कब का आतंकवादमुक्त हो चुका होता ! - संपादक) ठाणे : सरकार को राममंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश लाना चाहिए । धर्मांधों ने संपूर्ण देश में मंदिरों को गिराकर मस्जिदें बनवाईं । सरकार यदि एक बाबरी मस्जिद का विवाद सुलझा नहीं सकती, तो संपूर्ण देश के अन्य मस्जिदों का विवाद कब सुलझाएगी ? इसीलिए अब सरकार को राममंदिर निर्माण के अध्यादेश के साथ हिन्दू राष्ट्र का भी अध्यादेश लाना चाहिए । हिन्दू जनजागृति समिति के प्रवक्ता वैद्य उदय धुरी ने ऐसा प्रतिपादित किया । कोलशेत में आयोजित हिन्दू राष्ट्र-जागृति सभा में वे ऐसा बोल रहे थे । २० जनवरी को कोलशेत के बी. एस्. बने इंटरनैशनल स्कूल में यह सभा संपन्न हुई । वैद्य धुरी ने आगे कहा कि आज बडे मंदिरों का सरकारीकरण हो चुका है । छत्रपति शिवाजी महाराज मंदिरों को दान देते थे, जिससे धर्म का कार्य होता था; परंतु आज के राज्यकर्ता इसके विपरीत कर रहे हैं । उन्होंने भ्रष्टाचार कर सरकार का कोष को खाली किया है और उब उनकी कुदृष्टि मंदिरों की संपत्तिपर है, जो दुर्भाग्यजनक है ।
ठाणे : आजकल इस हिन्दूबहुसंख्यक देश में 'विधियां हिन्दुआें के लिए और लाभ दूसरों को' की स्थिति बनी है । भ्रष्टाचार के नाम पर सरकार ने अनेक मंदिरों को अपने नियंत्रण में कर लिया । विकास के लिए चर्च अथवा मस्जिदों का धन नहीं लिया जाता । राममंदिर का प्रश्न अभी भी लंबित है; परंतु डान्सबार पुनः आरंभ हो रहे हैं । पहले राजा और सेनापति के पद के लिए 'सिलेक्शन' की पद्धति है । कोई व्यक्ति किसी पद के लिए पात्र हो अथवा न हो; किंतु अब 'इलेक्शन' की पद्धति है । इस संपूर्ण स्थिति में परिवर्तन लाने हेतु अब हिन्दू राष्ट्र के अतिरिक्त अन्य कोई विकल्प नहीं है । हिन्दू जनजागृति समिति के श्री. नरेंद्र सुर्वे ने यह मार्गदर्शन किया । बीस जनवरी को हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से यहां के आेंकार मित्रमंडल, खोपट में हिन्दू राष्ट्र-जागृति सभा का आयोजन किया गया । इस सभा में श्री. सुर्वे ऐसा बोल रहे थे । इस सभा में एक सौ पचास धर्मप्रेमी उपस्थित थे । श्रीमती कविता लेले ने सभा का सूत्रसंचालन किया । शिवसेना के खोपट विभाग के शाखाप्रमुख श्री. राजेंद्र महाडिक सभा में उपस्थित थे । एक. सभा के पश्चात वक्ताआें के साथ चर्चा करने के लिए बाईस धर्मप्रेमी उपस्थित थे । दो. बजरंग दल के वरिष्ठ नेता श्री. अनिल मोरे ने सभा का तडप के साथ प्रसार किया । तीन. विश्व हिन्दू परिषद एवं बजरंग दल के ठाणे विभाग संयोजक श्री. दीपक मेढेकर ने प्रधानता लेकर ठाणे में और दो सभाआें के आयोजन की सिद्धता दर्शाई । चार. भाजपा के खोपट प्रभाग के सचिव श्री. संतोष खामितकर ने कार्य में सम्मिलित होने की सिद्धता दर्शाई । पाँच. सभास्थल के अर्थात आेंकार मित्रमंडल के मालिक श्री. मोरेश्वर बनसोडे ने सभास्थल, चाय और अल्पाहार का प्रबंध किया । सभा के चित्रीकरण के लिए पुलिसकर्मी उपस्थित ! सभा का स्वरूप छोटा होते हुए भी सभा के चित्रीकरण और छायाचित्र खींचने के लिए सामान्य वेशभूषा में पुलिसकर्मी उपस्थित थे । ठाणे : सरकार को राममंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश लाना चाहिए । धर्मांधों ने संपूर्ण देश में मंदिरों को गिराकर मस्जिदें बनवाईं । सरकार यदि एक बाबरी मस्जिद का विवाद सुलझा नहीं सकती, तो संपूर्ण देश के अन्य मस्जिदों का विवाद कब सुलझाएगी ? इसीलिए अब सरकार को राममंदिर निर्माण के अध्यादेश के साथ हिन्दू राष्ट्र का भी अध्यादेश लाना चाहिए । हिन्दू जनजागृति समिति के प्रवक्ता वैद्य उदय धुरी ने ऐसा प्रतिपादित किया । कोलशेत में आयोजित हिन्दू राष्ट्र-जागृति सभा में वे ऐसा बोल रहे थे । बीस जनवरी को कोलशेत के बी. एस्. बने इंटरनैशनल स्कूल में यह सभा संपन्न हुई । वैद्य धुरी ने आगे कहा कि आज बडे मंदिरों का सरकारीकरण हो चुका है । छत्रपति शिवाजी महाराज मंदिरों को दान देते थे, जिससे धर्म का कार्य होता था; परंतु आज के राज्यकर्ता इसके विपरीत कर रहे हैं । उन्होंने भ्रष्टाचार कर सरकार का कोष को खाली किया है और उब उनकी कुदृष्टि मंदिरों की संपत्तिपर है, जो दुर्भाग्यजनक है ।
The Annual Report of Amnesty International tells that South Asia is epicenter of deteriorating human rights. एमनेस्टी इन्टरनेशनल ने हाल में ही वार्षिक रिपोर्ट 2022/23 : द स्टेट ऑफ़ वर्ल्डस ह्यूमन राइट्स, प्रकाशित की है। इसमें भारत के बारे में बताया गया है कि बिना बहस और बिना कानूनी जानकारों के सलाह के ही नए क़ानून और नीतियाँ लागू कर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों को कुचला जा रहा है। सरकार धार्मिक अल्पसंख्यकों पर लगातार प्रहार कर रही है, और सत्ता में बैठे नेता, समर्थक और सरकारी अधिकारी अल्पसंख्यकों के विरुद्ध खुले आम नफरती बयान देते हैं, नारे लगाते हैं और इन्हें कोई सजा नहीं मिलती। मुस्लिम परिवारों और उनके व्यापार को सजा देने के नाम पर किसी कानूनी प्रक्रिया के बिना ही बुलडोज़र से ढहा दिया जाता है और इसमें किसी को सजा नहीं होती। एमनेस्टी की रिपोर्ट के अनुसार अल्पसंख्यकों की मांगों को उठाते आन्दोलनों को सत्ता और मीडिया देश के लिए ख़तरा बताती है और उन्हें इसके अनुरूप ही सजा भी दी जाती है। विरोध की हरेक आवाज को दबाने के लिए आतंकवादियों के लिए बनाये गए कानूनों का व्यापक दुरूपयोग किया जाता है। निष्पक्ष पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को खामोश करने के लिए डिजिटल टेक्नोलॉजी के साथ ही अवैध तरीके से उनकी निगरानी की जाती है। आदिवासियों और दलित जैसे हाशिये पर खड़े समुदायों के विरुद्ध हिंसा और भेदभाव देश में सामान्य है। इस रिपोर्ट में जिन विषयों का विस्तार से वर्णन है, वे हैं - अभिव्यक्ति और विरोध की आजादी, गैर-कानूनी हिरासत, गैरकानूनी हमले और हत्याएं, सुरक्षा बलों का अत्यधिक उपयोग, धार्मिक आजादी, भेदभाव और असमानता, आदिवासियों के अधिकार, जम्मू और कश्मीर, निजता का अधिकार, महिलाओं का अधिकार, जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने में विफलता और पर्यावरण विनाश। इस रिपोर्ट के अनुसार केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरा दक्षिण एशिया ही मानवाधिकार हनन का गढ़ बन चुका है। इस पूरे क्षेत्र में सत्ता के विरोध की आवाजों को कुचला जा रहा है, महिलाओं के अधिकार छीने जा रहे हैं और अल्पसंख्यक भेदभाव का शिकार हो रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण दक्षिण एशिया का वैश्विक आर्थिक गतिविधियों और राजनैतिक ताकतों की वैश्विक धुरी बनना है, जिसके कारण मानवाधिकारों की उपेक्षा की जा रही है और दुनिया का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा है। किसी भी अंतरराष्ट्रीय या क्षेत्रीय वार्ता में मानवाधिकार कोई मुद्दा ही नहीं रहता। सत्ता से त्रस्त जनता तमाम खतरों के बाद भी पिछले वर्ष अफ़ग़ानिस्तान, बांग्लादेश, भारत, नेपाल, मालदीव्स, म्यांमार, पकिस्तान और श्री लंका में सडकों पर प्रदर्शन करती रही। भारत, अफ़ग़ानिस्तान, म्यांमार और बांग्लादेश में सत्ता द्वारा प्रेस की आजादी को कुचला जा रहा है। भारत में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, निष्पक्ष पत्रकारों और विपक्षी नेताओं के विदेश जाने पर पाबंदी लगाई जाती है, जिससे मानवाधिकार को कुचलने की खबरें विदेशों तक नहीं पहुंचे। भारत में विरोध की आवाज कुचलने के लिए बिना मुकदमा चलाये ही मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को जेल में लम्बे समय तक बंद करने का एक नया चलन शुरू हो गया है। विरोधियों और निष्पक्ष पत्रकारों और मीडिया संस्थानों पर अचानक से मनीलाउनडरिंग की जांच शुरू कर दी जाती है। एमनेस्टी इन्टरनेशनल में दक्षिण एशिया के मामलों की उपनिदेशक दिनुशिखा दिसानायके के अनुसार इस पूरे क्षेत्र में मानवाधिकार डगमगाते हुए हाशिये पर पहुँच गया है, जहां सामने हिंसा है और भेदभाव है। एमनेस्टी इन्टरनेशनल से पहले ह्यूमन राइट्स वाच ने ग्लोबल एनालिसिस 2023 को प्रकाशित किया था, जिसमें वर्ष 2022 में वैश्विक मानवाधिकार की स्थिति का आकलन प्रस्तुत है। वैश्विक स्तर पर मानवाधिकार की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। अफगानिस्तान और म्यांमार में मानवाधिकार के साथ ही जीने के अधिकार का भी हनन किया जा रहा है, पर दुनिया खामोश है। चीन में लाखों उगियार और तुर्किक मुस्लिमों को गुलामों जैसी स्थिति में रखा जा रहा है। ह्यूमन राइट्स वाच की प्रमुख टिराना हसन के अनुसार कुछ देशों में जहां निरंकुश सत्ता के विरुद्ध कभी जनता खडी नहीं होती थी, वहां भी बड़े आन्दोलन और प्रदर्शन होते रहे। चीन में ही जीरो-कोविड के नाम पर लगाए गए सख्त प्रतिबंधों के खिलाफ अनेक शहरों में सडकों पर बड़े प्रदर्शन किया गए। इरान में 22 वर्षीय मेहसा अमिनी की पुलिस द्वारा ह्त्या के बाद लगभग पूरी आबादी सडकों पर उतर गयी। इरान जैसे निरंकुश देश में आन्दोलन की बात सोची भी नहीं जा सकती थी, पर इस आन्दोलन में महिलायें, पुरुष और बच्चे भी शामिल रहे, खिलाड़ियों और कलाकारों ने भी सक्रिय हिस्सा लिया। टिराना हसन के अनुसार कुछ घटनाओं के बाद आन्दोलन और प्रदर्शन किये जाते हैं, पर पूरी तरीके से मानवाधिकार की बहाली के लिए ऐसे आन्दोलनों को वैश्विक सहायता की जरूरत होती है, पर दुनिया इन आन्दोलनों को अनदेखा करती है। आज भी अफगानिस्तान, म्यांमार, फिलिस्तिन और इथियोपिया जैसे देशों में मानवाधिकार के बड़े पैमाने पर हनन के बाद भी अंतर्राष्ट्रीय समुदाय चुपचाप बैठकर तमाशा देखता है। वर्ष 2022 महिला अधिकारों के लिए बहुत ही खराब रहा। अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं से सारे अधिकार छीन लिए गए और अमेरिका में गर्भपात सम्बंधित क़ानून को निरस्त कर दिया गया। पर, दूसरी तरफ मेक्सिको, अर्जेंटीना और कोलंबिया जैसे अनेक दक्षिण अमेरिकी देशों में गर्भपात से सम्बंधित क़ानून का दायरा बढाया भी गया। इस रिपोर्ट में भारत के बारे में बताया गया है कि बीजेपी सरकार लगातार अल्पसंख्यकों को कुचलने का काम कर रही है और इसके समर्थक बिना किसी भय के अल्पसंख्यकों पर हमले करते हैं। बीजेपी की धार्मिक और छद्म राष्ट्रीयता की भावना अब न्याय व्यवस्था और नॅशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन जैसे संवैधानिक संस्थाओं में भी स्पष्ट होने लगी है। न्याय व्यवस्था भारी-भरकम बुलडोज़र के नीचे दब गयी है और अल्पसंख्यकों पर बुलडोज़र चलाने के समर्थन में जनता और मीडिया खडी रहती है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और स्वतंत्र पत्रकारों की आवाज को पुलिस और प्रशासन कुचल रहे हैं। देश में एक पुलिस राज स्थापित हो गया है, और वह कभी भी किसी की भी हत्या करने के लिए स्वतंत्र है। वर्ष 2022 के पहले 9 महीनों के दौरान ही पुलिस कस्टडी में 147 मौतें, न्यायिक हिरासत में 1882 मौतें और पुलिस द्वारा तथाकथित एनकाउंटर में 119 मौतें दर्ज की गयी हैं। जम्मू कश्मीर में अभिव्यक्ति की आजादी और आन्दोलनों के अधिकार को कुचलने के लिए क्रूरता का पैमाना बढ़ गया है। लम्बे से से कश्मिरी पंडितों के साथ खड़े होने का दावा करने वाले नेता और राजनैतिक दल इन्ही पंडितों की ह्त्या के बाद इन्हें धमकाने लगे हैं। जनवरी 2022 में बीजेपी समर्थित कुछ तथाकथित पत्रकारों ने कश्मीर प्रेस क्लब पर हमला कर उस पर अधिकार जमा लिया। अगस्त 2019 के बाद से अब तक 35 से अधिक पत्रकारों पर हिंसा की गयी है या उन्हें पुलिस द्वारा प्रताड़ित किया गया है और अनेक पत्रकार जेलों में बंद हैं। देश में मानवाधिकार हनन करने वाली भारत सरकार ने अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर भी मानवाधिकार हनन करने वाली सरकारों के साथ एकजुटता दिखाई है। निरंकुश सत्ता के विरुद्ध वर्ष 2022 में कुछ आवाजें तो उठीं, पर क्या इस वर्ष भी ऐसा होगा और विरोध का सिलसिला चलता रहेगा, यह तो समय ही बताएगा, पर भारत जैसे पारंपरिक प्रजातंत्र में जब लोकतंत्र द्वारा बार-बार निरंकुश सत्ता की वापसी होती है, तब निश्चित तौर पर यह खतरे का संकेत है।
The Annual Report of Amnesty International tells that South Asia is epicenter of deteriorating human rights. एमनेस्टी इन्टरनेशनल ने हाल में ही वार्षिक रिपोर्ट दो हज़ार बाईस/तेईस : द स्टेट ऑफ़ वर्ल्डस ह्यूमन राइट्स, प्रकाशित की है। इसमें भारत के बारे में बताया गया है कि बिना बहस और बिना कानूनी जानकारों के सलाह के ही नए क़ानून और नीतियाँ लागू कर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों को कुचला जा रहा है। सरकार धार्मिक अल्पसंख्यकों पर लगातार प्रहार कर रही है, और सत्ता में बैठे नेता, समर्थक और सरकारी अधिकारी अल्पसंख्यकों के विरुद्ध खुले आम नफरती बयान देते हैं, नारे लगाते हैं और इन्हें कोई सजा नहीं मिलती। मुस्लिम परिवारों और उनके व्यापार को सजा देने के नाम पर किसी कानूनी प्रक्रिया के बिना ही बुलडोज़र से ढहा दिया जाता है और इसमें किसी को सजा नहीं होती। एमनेस्टी की रिपोर्ट के अनुसार अल्पसंख्यकों की मांगों को उठाते आन्दोलनों को सत्ता और मीडिया देश के लिए ख़तरा बताती है और उन्हें इसके अनुरूप ही सजा भी दी जाती है। विरोध की हरेक आवाज को दबाने के लिए आतंकवादियों के लिए बनाये गए कानूनों का व्यापक दुरूपयोग किया जाता है। निष्पक्ष पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को खामोश करने के लिए डिजिटल टेक्नोलॉजी के साथ ही अवैध तरीके से उनकी निगरानी की जाती है। आदिवासियों और दलित जैसे हाशिये पर खड़े समुदायों के विरुद्ध हिंसा और भेदभाव देश में सामान्य है। इस रिपोर्ट में जिन विषयों का विस्तार से वर्णन है, वे हैं - अभिव्यक्ति और विरोध की आजादी, गैर-कानूनी हिरासत, गैरकानूनी हमले और हत्याएं, सुरक्षा बलों का अत्यधिक उपयोग, धार्मिक आजादी, भेदभाव और असमानता, आदिवासियों के अधिकार, जम्मू और कश्मीर, निजता का अधिकार, महिलाओं का अधिकार, जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने में विफलता और पर्यावरण विनाश। इस रिपोर्ट के अनुसार केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरा दक्षिण एशिया ही मानवाधिकार हनन का गढ़ बन चुका है। इस पूरे क्षेत्र में सत्ता के विरोध की आवाजों को कुचला जा रहा है, महिलाओं के अधिकार छीने जा रहे हैं और अल्पसंख्यक भेदभाव का शिकार हो रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण दक्षिण एशिया का वैश्विक आर्थिक गतिविधियों और राजनैतिक ताकतों की वैश्विक धुरी बनना है, जिसके कारण मानवाधिकारों की उपेक्षा की जा रही है और दुनिया का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा है। किसी भी अंतरराष्ट्रीय या क्षेत्रीय वार्ता में मानवाधिकार कोई मुद्दा ही नहीं रहता। सत्ता से त्रस्त जनता तमाम खतरों के बाद भी पिछले वर्ष अफ़ग़ानिस्तान, बांग्लादेश, भारत, नेपाल, मालदीव्स, म्यांमार, पकिस्तान और श्री लंका में सडकों पर प्रदर्शन करती रही। भारत, अफ़ग़ानिस्तान, म्यांमार और बांग्लादेश में सत्ता द्वारा प्रेस की आजादी को कुचला जा रहा है। भारत में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, निष्पक्ष पत्रकारों और विपक्षी नेताओं के विदेश जाने पर पाबंदी लगाई जाती है, जिससे मानवाधिकार को कुचलने की खबरें विदेशों तक नहीं पहुंचे। भारत में विरोध की आवाज कुचलने के लिए बिना मुकदमा चलाये ही मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को जेल में लम्बे समय तक बंद करने का एक नया चलन शुरू हो गया है। विरोधियों और निष्पक्ष पत्रकारों और मीडिया संस्थानों पर अचानक से मनीलाउनडरिंग की जांच शुरू कर दी जाती है। एमनेस्टी इन्टरनेशनल में दक्षिण एशिया के मामलों की उपनिदेशक दिनुशिखा दिसानायके के अनुसार इस पूरे क्षेत्र में मानवाधिकार डगमगाते हुए हाशिये पर पहुँच गया है, जहां सामने हिंसा है और भेदभाव है। एमनेस्टी इन्टरनेशनल से पहले ह्यूमन राइट्स वाच ने ग्लोबल एनालिसिस दो हज़ार तेईस को प्रकाशित किया था, जिसमें वर्ष दो हज़ार बाईस में वैश्विक मानवाधिकार की स्थिति का आकलन प्रस्तुत है। वैश्विक स्तर पर मानवाधिकार की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। अफगानिस्तान और म्यांमार में मानवाधिकार के साथ ही जीने के अधिकार का भी हनन किया जा रहा है, पर दुनिया खामोश है। चीन में लाखों उगियार और तुर्किक मुस्लिमों को गुलामों जैसी स्थिति में रखा जा रहा है। ह्यूमन राइट्स वाच की प्रमुख टिराना हसन के अनुसार कुछ देशों में जहां निरंकुश सत्ता के विरुद्ध कभी जनता खडी नहीं होती थी, वहां भी बड़े आन्दोलन और प्रदर्शन होते रहे। चीन में ही जीरो-कोविड के नाम पर लगाए गए सख्त प्रतिबंधों के खिलाफ अनेक शहरों में सडकों पर बड़े प्रदर्शन किया गए। इरान में बाईस वर्षीय मेहसा अमिनी की पुलिस द्वारा ह्त्या के बाद लगभग पूरी आबादी सडकों पर उतर गयी। इरान जैसे निरंकुश देश में आन्दोलन की बात सोची भी नहीं जा सकती थी, पर इस आन्दोलन में महिलायें, पुरुष और बच्चे भी शामिल रहे, खिलाड़ियों और कलाकारों ने भी सक्रिय हिस्सा लिया। टिराना हसन के अनुसार कुछ घटनाओं के बाद आन्दोलन और प्रदर्शन किये जाते हैं, पर पूरी तरीके से मानवाधिकार की बहाली के लिए ऐसे आन्दोलनों को वैश्विक सहायता की जरूरत होती है, पर दुनिया इन आन्दोलनों को अनदेखा करती है। आज भी अफगानिस्तान, म्यांमार, फिलिस्तिन और इथियोपिया जैसे देशों में मानवाधिकार के बड़े पैमाने पर हनन के बाद भी अंतर्राष्ट्रीय समुदाय चुपचाप बैठकर तमाशा देखता है। वर्ष दो हज़ार बाईस महिला अधिकारों के लिए बहुत ही खराब रहा। अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं से सारे अधिकार छीन लिए गए और अमेरिका में गर्भपात सम्बंधित क़ानून को निरस्त कर दिया गया। पर, दूसरी तरफ मेक्सिको, अर्जेंटीना और कोलंबिया जैसे अनेक दक्षिण अमेरिकी देशों में गर्भपात से सम्बंधित क़ानून का दायरा बढाया भी गया। इस रिपोर्ट में भारत के बारे में बताया गया है कि बीजेपी सरकार लगातार अल्पसंख्यकों को कुचलने का काम कर रही है और इसके समर्थक बिना किसी भय के अल्पसंख्यकों पर हमले करते हैं। बीजेपी की धार्मिक और छद्म राष्ट्रीयता की भावना अब न्याय व्यवस्था और नॅशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन जैसे संवैधानिक संस्थाओं में भी स्पष्ट होने लगी है। न्याय व्यवस्था भारी-भरकम बुलडोज़र के नीचे दब गयी है और अल्पसंख्यकों पर बुलडोज़र चलाने के समर्थन में जनता और मीडिया खडी रहती है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और स्वतंत्र पत्रकारों की आवाज को पुलिस और प्रशासन कुचल रहे हैं। देश में एक पुलिस राज स्थापित हो गया है, और वह कभी भी किसी की भी हत्या करने के लिए स्वतंत्र है। वर्ष दो हज़ार बाईस के पहले नौ महीनों के दौरान ही पुलिस कस्टडी में एक सौ सैंतालीस मौतें, न्यायिक हिरासत में एक हज़ार आठ सौ बयासी मौतें और पुलिस द्वारा तथाकथित एनकाउंटर में एक सौ उन्नीस मौतें दर्ज की गयी हैं। जम्मू कश्मीर में अभिव्यक्ति की आजादी और आन्दोलनों के अधिकार को कुचलने के लिए क्रूरता का पैमाना बढ़ गया है। लम्बे से से कश्मिरी पंडितों के साथ खड़े होने का दावा करने वाले नेता और राजनैतिक दल इन्ही पंडितों की ह्त्या के बाद इन्हें धमकाने लगे हैं। जनवरी दो हज़ार बाईस में बीजेपी समर्थित कुछ तथाकथित पत्रकारों ने कश्मीर प्रेस क्लब पर हमला कर उस पर अधिकार जमा लिया। अगस्त दो हज़ार उन्नीस के बाद से अब तक पैंतीस से अधिक पत्रकारों पर हिंसा की गयी है या उन्हें पुलिस द्वारा प्रताड़ित किया गया है और अनेक पत्रकार जेलों में बंद हैं। देश में मानवाधिकार हनन करने वाली भारत सरकार ने अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर भी मानवाधिकार हनन करने वाली सरकारों के साथ एकजुटता दिखाई है। निरंकुश सत्ता के विरुद्ध वर्ष दो हज़ार बाईस में कुछ आवाजें तो उठीं, पर क्या इस वर्ष भी ऐसा होगा और विरोध का सिलसिला चलता रहेगा, यह तो समय ही बताएगा, पर भारत जैसे पारंपरिक प्रजातंत्र में जब लोकतंत्र द्वारा बार-बार निरंकुश सत्ता की वापसी होती है, तब निश्चित तौर पर यह खतरे का संकेत है।
हॉलीडे से लौटते ही अस्पताल पहुंचे Virat Kohli और Anushka Sharma, क्या जल्द ही मिलने वाली है 'गुड न्यूज'? इस फिल्म में अनुष्का भारतीय क्रिकेटर झूलन गोस्वामी की भूमिका निभाती आएंगी। बॉलीवुड और खेल जगत के मोस्ट पॉपुलर पॉवर कपल अनुष्का शर्मा (Anushka Sharma) और विराट कोहली (Virat Kohli) अपनी बेटी वामिका के साथ सोमवार को मालदीव वेकेशन से लौटे। अनुष्का, विराट और वामिका को दिन में कलिना एयरपोर्ट पर देखा गया, लेकिन फिर कुछ समय बाद शाम ये कपल अस्पताल के बाहर देखा गया। जिसका वीडियो भी अब तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मशहूर पैरराजी मानव मंगलानी ने विराट और अनुष्का का कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल से निकलते हुए ये वीडियो अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है। उन्होंने इस वीडियो को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा, "#ViratKohli #AnushkaSharma को मुंबई में #KokilabenAmbani अस्पताल से बाहर निकलते हुए क्लिक किया। " जैसे ही ये वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया गया, वैसे ही कुछ नेटिजन्स ने वामिका के एक और भाई या बहन के आने का अनुमान लगाना शुरू कर दिया है। वहीं कमेंट सेक्शन में एक यूजर ने लिखा कि, 'दूसरा बच्चा प्लान कर रहे हैं'। तो इसी बीच दूसरे यूजर ने कमेंट करते हुए कहा कि, 'गुड न्यूज हो सकती है। ' लेकिन इन सब कयासों के बीच कई नेटिजन्स ने कहा कि ये रूटीन चेकअप भी हो सकता है, हर बात में दूसरा बच्चा ना सोचें। इससे पहले विराट और अनुष्का को अपनी प्यारी राजकुमारी वामिका के साथ मालदीव में एक शानदार वेकेशन मनाते देखा गया। अनुष्का ने अपने वेकेशन से जो तस्वीरें शेयर की थी, उनमें वो ऑरेंड कलर की मोनोकिनी में बोहो वाइब देती नजर आईं। इन तस्वीरों को शेयर करते हुए अनुष्का ने कैप्शन में लिखा, "अपनी खुद की तस्वीरें लेने का नतीजा। वर्कफ्रंट की बात करें तो, अनुष्का शर्मा को आखिरी बार 2018 की फिल्म जीरो में शाहरुख खान और कैटरीना कैफ के साथ देखा गया था। वहीं इन दिनों वो स्पोर्ट्स बायोपिक फिल्म 'चकदा एक्सप्रेस' को लेकर सुर्खियों में हैं। इस फिल्म में अनुष्का भारतीय क्रिकेटर झूलन गोस्वामी की भूमिका निभाती आएंगी।
हॉलीडे से लौटते ही अस्पताल पहुंचे Virat Kohli और Anushka Sharma, क्या जल्द ही मिलने वाली है 'गुड न्यूज'? इस फिल्म में अनुष्का भारतीय क्रिकेटर झूलन गोस्वामी की भूमिका निभाती आएंगी। बॉलीवुड और खेल जगत के मोस्ट पॉपुलर पॉवर कपल अनुष्का शर्मा और विराट कोहली अपनी बेटी वामिका के साथ सोमवार को मालदीव वेकेशन से लौटे। अनुष्का, विराट और वामिका को दिन में कलिना एयरपोर्ट पर देखा गया, लेकिन फिर कुछ समय बाद शाम ये कपल अस्पताल के बाहर देखा गया। जिसका वीडियो भी अब तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मशहूर पैरराजी मानव मंगलानी ने विराट और अनुष्का का कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल से निकलते हुए ये वीडियो अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है। उन्होंने इस वीडियो को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा, "#ViratKohli #AnushkaSharma को मुंबई में #KokilabenAmbani अस्पताल से बाहर निकलते हुए क्लिक किया। " जैसे ही ये वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया गया, वैसे ही कुछ नेटिजन्स ने वामिका के एक और भाई या बहन के आने का अनुमान लगाना शुरू कर दिया है। वहीं कमेंट सेक्शन में एक यूजर ने लिखा कि, 'दूसरा बच्चा प्लान कर रहे हैं'। तो इसी बीच दूसरे यूजर ने कमेंट करते हुए कहा कि, 'गुड न्यूज हो सकती है। ' लेकिन इन सब कयासों के बीच कई नेटिजन्स ने कहा कि ये रूटीन चेकअप भी हो सकता है, हर बात में दूसरा बच्चा ना सोचें। इससे पहले विराट और अनुष्का को अपनी प्यारी राजकुमारी वामिका के साथ मालदीव में एक शानदार वेकेशन मनाते देखा गया। अनुष्का ने अपने वेकेशन से जो तस्वीरें शेयर की थी, उनमें वो ऑरेंड कलर की मोनोकिनी में बोहो वाइब देती नजर आईं। इन तस्वीरों को शेयर करते हुए अनुष्का ने कैप्शन में लिखा, "अपनी खुद की तस्वीरें लेने का नतीजा। वर्कफ्रंट की बात करें तो, अनुष्का शर्मा को आखिरी बार दो हज़ार अट्ठारह की फिल्म जीरो में शाहरुख खान और कैटरीना कैफ के साथ देखा गया था। वहीं इन दिनों वो स्पोर्ट्स बायोपिक फिल्म 'चकदा एक्सप्रेस' को लेकर सुर्खियों में हैं। इस फिल्म में अनुष्का भारतीय क्रिकेटर झूलन गोस्वामी की भूमिका निभाती आएंगी।
प्रध्याय ३१७] वह परम पुरुष परमात्मा सेब और हाथ पैर वाला, सब जगह आँस सिर और मुखवाला ( तथा ) सब जगह कानां वाना है । ( वह परमात्मा हो) ससार मे सबको व्याप्त करके स्थित रहता है । जिस परमात्मा का पहले वर्णन किया गया है उस परमात्मा व हाथ पाँव, सिर मुख और कान सर्वने विद्यमान है। कहन वा तात्पय है कि संसार में जितने भी हाथ, पाँव, आँखें सिर मुख और कान हैं व सभी उसे परमात्मा के हैं। इसके अतिरिक्त वह परमात्मा सभी वस्तु म प्रोत प्रोत है । उसको सभी वस्तुग्रो में देखा जा सकता है । ससार में जितनी भी अच्छी वस्तुएँ हैं परमात्मा उन सभी मे समान रूप स व्याप्त है । इस प्रकार की भावना प्राय उपनिषदो एव परवर्ती साहित्य म पाई जाती है। गोता म एक स्थान पर वहा गया है कि ससारे में जो कुछ भी ऐश्वयवान् तथा ऊर्जा से युक्त हैं वह सब कुछ परमात्मा का ही प्रश है यद्यद्वि भूतिमत्सत्त्व श्रीमदूजितमेव था। तत्तदेवावगच्छ त्व मम तेजोऽशसभवम् । (गीता० १०४१) । उपाधिपादावीन्द्रराज्यस्य तद्वत्ताशङ्का मा भूदित्येवसर्वेन्द्रियगुणाभासं सर्वेन्द्रियविवजितम् । सर्वस्प प्रभुमीशानं सर्वस्य शरण बृहत् ।।१७।। मर्यमुत्तरतो मन्त्र शाकरमाध्यम्सर्वेन्द्रियेति । सर्वाणि च तानोन्द्रियाणि श्रोत्रादीनीन्द्रियाण्यात करापर्य न्तानि सर्वेद्रियग्रहणेन गृह्यन्ते । अन्त करणबहिष्करणोपाधिभूत सर्वेन्द्रियपुर्णर ध्यवसायस कल्पश्र वरणादिमिर्गुणवदाभासत इति सर्वेन्द्रियगुणाभासम् । सर्वेद्रियं र्याप्तमिव तज्ज्ञेयमित्यर्थं । "ध्यायतीव लेलायतोव" (चू० उ० ४ । ३७ ) इति श्रुते । कस्मात्पुन कारतद्वचा वृतमिवेति गृह्यते? इत्याह 'सर्वेन्द्रिमविवर्जितम्' सर्वकरणरहितमित्यर्थं । प्रतो न च करणव्यापारंर्व्याप्त तज्जेयम् । सर्वस्य जगत प्रभुमीशानम् । सर्वस्य शरण परायण बृहत्कारण च ।।१७।। ( उस परम पुरुष परमात्मा ) म सभी इन्द्रियों के रहित होने पर भी समस्त इंडिया का भास ( होता है ) ( वह ) सब वा स्वामी ( तथा ) शासक (है) (प्रोर) सबका महान् आश्रय (है) । परमात्मा सभी प्रकार की इन्द्रियों से रहित है परन्तु फिर भी उसमे सभी इन्द्रियाक गुणो का प्राभास होता है । इन्द्रिया से रहित होना अपने आप म उपनक्षण मात्र है। वह परमात्मा अविद्या आदि अन्य प्रकार के भावो से भी रहित है। कान नेत्र, वाग् और त्वचा ग्रादि इन्द्रियो से रहित होता हुआ भी वह परमात्मा
प्रध्याय तीन सौ सत्रह] वह परम पुरुष परमात्मा सेब और हाथ पैर वाला, सब जगह आँस सिर और मुखवाला सब जगह कानां वाना है । ससार मे सबको व्याप्त करके स्थित रहता है । जिस परमात्मा का पहले वर्णन किया गया है उस परमात्मा व हाथ पाँव, सिर मुख और कान सर्वने विद्यमान है। कहन वा तात्पय है कि संसार में जितने भी हाथ, पाँव, आँखें सिर मुख और कान हैं व सभी उसे परमात्मा के हैं। इसके अतिरिक्त वह परमात्मा सभी वस्तु म प्रोत प्रोत है । उसको सभी वस्तुग्रो में देखा जा सकता है । ससार में जितनी भी अच्छी वस्तुएँ हैं परमात्मा उन सभी मे समान रूप स व्याप्त है । इस प्रकार की भावना प्राय उपनिषदो एव परवर्ती साहित्य म पाई जाती है। गोता म एक स्थान पर वहा गया है कि ससारे में जो कुछ भी ऐश्वयवान् तथा ऊर्जा से युक्त हैं वह सब कुछ परमात्मा का ही प्रश है यद्यद्वि भूतिमत्सत्त्व श्रीमदूजितमेव था। तत्तदेवावगच्छ त्व मम तेजोऽशसभवम् । । उपाधिपादावीन्द्रराज्यस्य तद्वत्ताशङ्का मा भूदित्येवसर्वेन्द्रियगुणाभासं सर्वेन्द्रियविवजितम् । सर्वस्प प्रभुमीशानं सर्वस्य शरण बृहत् ।।सत्रह।। मर्यमुत्तरतो मन्त्र शाकरमाध्यम्सर्वेन्द्रियेति । सर्वाणि च तानोन्द्रियाणि श्रोत्रादीनीन्द्रियाण्यात करापर्य न्तानि सर्वेद्रियग्रहणेन गृह्यन्ते । अन्त करणबहिष्करणोपाधिभूत सर्वेन्द्रियपुर्णर ध्यवसायस कल्पश्र वरणादिमिर्गुणवदाभासत इति सर्वेन्द्रियगुणाभासम् । सर्वेद्रियं र्याप्तमिव तज्ज्ञेयमित्यर्थं । "ध्यायतीव लेलायतोव" इति श्रुते । कस्मात्पुन कारतद्वचा वृतमिवेति गृह्यते? इत्याह 'सर्वेन्द्रिमविवर्जितम्' सर्वकरणरहितमित्यर्थं । प्रतो न च करणव्यापारंर्व्याप्त तज्जेयम् । सर्वस्य जगत प्रभुमीशानम् । सर्वस्य शरण परायण बृहत्कारण च ।।सत्रह।। म सभी इन्द्रियों के रहित होने पर भी समस्त इंडिया का भास सब वा स्वामी शासक सबका महान् आश्रय । परमात्मा सभी प्रकार की इन्द्रियों से रहित है परन्तु फिर भी उसमे सभी इन्द्रियाक गुणो का प्राभास होता है । इन्द्रिया से रहित होना अपने आप म उपनक्षण मात्र है। वह परमात्मा अविद्या आदि अन्य प्रकार के भावो से भी रहित है। कान नेत्र, वाग् और त्वचा ग्रादि इन्द्रियो से रहित होता हुआ भी वह परमात्मा
गाड़ियां अब हाईटेक हो गई हैं और एडवांस फीचर्स के साथ लॉन्च हो रही है. शहरी क्षेत्र, ख़ासकर महानगरों में ऑटोमेटिक्स गियरबॉक्स वाली कारों की लोकप्रियता में भी इजाफा हुआ है. हालांकि, अब भी भारत में ज्यादातर चालक मैनुअल ट्रांसमिशन वाली कार को ड्राइव करना पसंद करते हैं. किफायती होने के चलते मैनुअल ट्रांसमिशन के साथ आने वाली गाड़ियों की बिक्री भी खूब होती है. लेकिन आपको यह जानना जरूरी है कि, जितनी मैनुअल कार 'आम' है, उतनी ही इसकी ड्राइविंग 'ख़ास' है. कई बार लोग मैनुअल कार चलाते समय बड़ी गलतियां करते हैं, जो न केवल ड्राइविंग एक्सपीरएंस को खराब करता है बल्कि इंजन पर भी इसका बहुत बुरा असर पड़ता है. हम यहां आपको उन 5 गलतियों के बारे में बता रहे हैं, जो मैनुअल कार चालक को भूल कर भी नहीं करनी चाहिए. कई गाड़ी चालकों की आदत होती है कि वे एक ही हाथ से स्टीयरिंग व्हील को हैंडल करते हैं. वहीं, अपना दूसरा हाथ गियर लीवर पर रखते हैं. गाड़ी चालक के इस आदत से गियर बॉक्स को भारी नुकसान हो सकता है. हल्के से प्रेशर से भी गियर बॉक्स को नुकसान होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं. इसके अलावा एक्सपर्ट के मुताबिक स्टीयरिंग व्हील को सीधे हाथों से यानी 3 टू 9 पोजीशन में पकड़ना चाहिए, आपके हाथों के बीच का एंगल 180 डिग्री होना चाहिए. कई बार वाहन चालक अपने बाएं पैर को हमेशा क्लच पर रखते हैं. लंबे समय तक क्लच पर पैर रखने से क्लच प्लेट पर दबाव पड़ता है. इससे क्लच प्लेट को ही नुकसान पहुंचता है. ऐसे में आपको जल्दी ही क्लच प्लेट को बदलने की जरूरत पड़ सकती है. हैंडब्रेक का सही इस्तेमालः पहाड़ी इलाकों में ऐसा अक्सर देखा जाता है कि जब गाड़ी एक ढलान पर होती है, तो चालक क्लच पेडल को 'बाइटिंग पॉइंट' पर आधा दबा कर रखते हैं. गाड़ी को कंट्रोल में रखने के लिए थ्रॉटल का उपयोग करते हैं. यह स्थिति आपके क्लच को भारी नुकसान पहुंचाएगी. यहां चालक हैंडब्रेक का जरूर इस्तेमाल करें. गाड़ी को ढलान पर न्यूट्रल में शिफ्ट ना करेंः ढलान पर गाड़ी चलाते वक्त ज्यादातर ड्राइवर अपनी गाड़ी न्यूट्रल में शिफ्ट कर देते हैं. उनका मानना है कि इससे ईंधन की बचत होगी. ऐसा करना बिल्कुल गलत है. गाड़ी के इंजन पर बुरा असर पड़ता है, साथ ही आपके ब्रेक्स ओवरहीट होने लगते हैं, ये किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकते हैं. गाड़ी को निचले गियर में रखने पर ढलान पर भी गाड़ी पर आपका कंट्रोल बेहतर रहेगा. मैनुअल ट्रांसमिशन गाड़ी के इंजन और पॉवर बैंड पर पूरा नियंत्रण देते हैं. गाड़ी की परफॉर्मेंस पर नजर रखने के लिए ड्राइवर को आरपीएम मीटर या टैकोमीटर पर नजर रखनी चाहिए. जब कार स्पीड में चलाई जा रही हो तो हाई आरपीएम ( RPM) पर शिफ्ट करना अच्छा होता है. हालांकि आप अगर गाड़ी की क्षमता से ज्यादा स्पीड में ड्राइव कर रहे हैं तो उसके इंजन के उड़ने की संभावनाएं अधिक होती है. ऐसे में ध्यान रखें की गाड़ी पर आप कितना दबाव डाल रहे हैं.
गाड़ियां अब हाईटेक हो गई हैं और एडवांस फीचर्स के साथ लॉन्च हो रही है. शहरी क्षेत्र, ख़ासकर महानगरों में ऑटोमेटिक्स गियरबॉक्स वाली कारों की लोकप्रियता में भी इजाफा हुआ है. हालांकि, अब भी भारत में ज्यादातर चालक मैनुअल ट्रांसमिशन वाली कार को ड्राइव करना पसंद करते हैं. किफायती होने के चलते मैनुअल ट्रांसमिशन के साथ आने वाली गाड़ियों की बिक्री भी खूब होती है. लेकिन आपको यह जानना जरूरी है कि, जितनी मैनुअल कार 'आम' है, उतनी ही इसकी ड्राइविंग 'ख़ास' है. कई बार लोग मैनुअल कार चलाते समय बड़ी गलतियां करते हैं, जो न केवल ड्राइविंग एक्सपीरएंस को खराब करता है बल्कि इंजन पर भी इसका बहुत बुरा असर पड़ता है. हम यहां आपको उन पाँच गलतियों के बारे में बता रहे हैं, जो मैनुअल कार चालक को भूल कर भी नहीं करनी चाहिए. कई गाड़ी चालकों की आदत होती है कि वे एक ही हाथ से स्टीयरिंग व्हील को हैंडल करते हैं. वहीं, अपना दूसरा हाथ गियर लीवर पर रखते हैं. गाड़ी चालक के इस आदत से गियर बॉक्स को भारी नुकसान हो सकता है. हल्के से प्रेशर से भी गियर बॉक्स को नुकसान होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं. इसके अलावा एक्सपर्ट के मुताबिक स्टीयरिंग व्हील को सीधे हाथों से यानी तीन टू नौ पोजीशन में पकड़ना चाहिए, आपके हाथों के बीच का एंगल एक सौ अस्सी डिग्री होना चाहिए. कई बार वाहन चालक अपने बाएं पैर को हमेशा क्लच पर रखते हैं. लंबे समय तक क्लच पर पैर रखने से क्लच प्लेट पर दबाव पड़ता है. इससे क्लच प्लेट को ही नुकसान पहुंचता है. ऐसे में आपको जल्दी ही क्लच प्लेट को बदलने की जरूरत पड़ सकती है. हैंडब्रेक का सही इस्तेमालः पहाड़ी इलाकों में ऐसा अक्सर देखा जाता है कि जब गाड़ी एक ढलान पर होती है, तो चालक क्लच पेडल को 'बाइटिंग पॉइंट' पर आधा दबा कर रखते हैं. गाड़ी को कंट्रोल में रखने के लिए थ्रॉटल का उपयोग करते हैं. यह स्थिति आपके क्लच को भारी नुकसान पहुंचाएगी. यहां चालक हैंडब्रेक का जरूर इस्तेमाल करें. गाड़ी को ढलान पर न्यूट्रल में शिफ्ट ना करेंः ढलान पर गाड़ी चलाते वक्त ज्यादातर ड्राइवर अपनी गाड़ी न्यूट्रल में शिफ्ट कर देते हैं. उनका मानना है कि इससे ईंधन की बचत होगी. ऐसा करना बिल्कुल गलत है. गाड़ी के इंजन पर बुरा असर पड़ता है, साथ ही आपके ब्रेक्स ओवरहीट होने लगते हैं, ये किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकते हैं. गाड़ी को निचले गियर में रखने पर ढलान पर भी गाड़ी पर आपका कंट्रोल बेहतर रहेगा. मैनुअल ट्रांसमिशन गाड़ी के इंजन और पॉवर बैंड पर पूरा नियंत्रण देते हैं. गाड़ी की परफॉर्मेंस पर नजर रखने के लिए ड्राइवर को आरपीएम मीटर या टैकोमीटर पर नजर रखनी चाहिए. जब कार स्पीड में चलाई जा रही हो तो हाई आरपीएम पर शिफ्ट करना अच्छा होता है. हालांकि आप अगर गाड़ी की क्षमता से ज्यादा स्पीड में ड्राइव कर रहे हैं तो उसके इंजन के उड़ने की संभावनाएं अधिक होती है. ऐसे में ध्यान रखें की गाड़ी पर आप कितना दबाव डाल रहे हैं.
मोहाली ,पंजाब, वरिष्ठ पत्रकार के जे सिंह और उनकी 90 साल से अधिक उम्र की मां यहां अपने घर में मृत मिलीं। मोहाली के पुलिस उपाधीक्षक आलम विजय सिंह ने कहा, "दोनों के गले पर जख्म हैं। " सिंह की उम्र 60 साल के आसपास थी और उनकी मां 92 साल की थीं। एक और वरिष्ठ पत्रकार की हुई हत्या.... .
मोहाली ,पंजाब, वरिष्ठ पत्रकार के जे सिंह और उनकी नब्बे साल से अधिक उम्र की मां यहां अपने घर में मृत मिलीं। मोहाली के पुलिस उपाधीक्षक आलम विजय सिंह ने कहा, "दोनों के गले पर जख्म हैं। " सिंह की उम्र साठ साल के आसपास थी और उनकी मां बानवे साल की थीं। एक और वरिष्ठ पत्रकार की हुई हत्या.... .
नयी दिल्लीः उपभोक्ताओं का पैसा वापस करने के केस में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट में याचिका दाखिल करके सहारा समूह के अध्यक्ष सुब्रत रॉय और उनकी 2 कंपनियों को निवेशकों का बकाया 626 अरब रुपए (8.4 बिलियन डॉलर) जमा करने का निर्देश देने को कहा है। सेबी ने याचिका में कहा है कि अगर सहारा ग्रुप बकाया नहीं चुकाता तो सहारा समूह के अध्यक्ष सुब्रत रॉय की पेरोल रद्द की जानी चाहिए। उल्लेखनीय है कि सहारा निवेशकों की पूरी राशि को 15 फीसदी सालाना ब्याज के साथ जमा करने के कोर्ट के वर्ष 2012 और 2015 के आदेश का पालन करने में असफल रहा है। सेबी ने कहा कि सहारा ने कोर्ट के आदेशों की अवमाननना की है।
नयी दिल्लीः उपभोक्ताओं का पैसा वापस करने के केस में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट में याचिका दाखिल करके सहारा समूह के अध्यक्ष सुब्रत रॉय और उनकी दो कंपनियों को निवेशकों का बकाया छः सौ छब्बीस अरब रुपए जमा करने का निर्देश देने को कहा है। सेबी ने याचिका में कहा है कि अगर सहारा ग्रुप बकाया नहीं चुकाता तो सहारा समूह के अध्यक्ष सुब्रत रॉय की पेरोल रद्द की जानी चाहिए। उल्लेखनीय है कि सहारा निवेशकों की पूरी राशि को पंद्रह फीसदी सालाना ब्याज के साथ जमा करने के कोर्ट के वर्ष दो हज़ार बारह और दो हज़ार पंद्रह के आदेश का पालन करने में असफल रहा है। सेबी ने कहा कि सहारा ने कोर्ट के आदेशों की अवमाननना की है।
दिल्ली सरकार के सभी कार्यालयों में इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग स्टेशन लगाए जाएंगे। तीन महीने में चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने का आदेश भी जारी कर दिया गया है। दिल्ली को इलेक्ट्रिक वाहनों(ईवी)की राजधानी बनाने की दिशा में केजरीवाल सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत अगले तीन महीने के भीतर दिल्ली के सभी सरकारी दफ्तरों में इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। सरकारी कर्मियों सहित अपने काम के सिलसिले में पहुंचने वाले नागरिकों के ई-वाहनों के लिए यहां चार्जिंग की सुविधा होगी। सरकार ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। इसमें सभी विभागों को जगह की पहचान के बाद चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने के लिए डिस्कॉम(बिजली आपूर्ति करने वाली कंपनियां) के पैनल में शामिल वेंडर के जरिए ईवी चार्जिंग स्टेशन लगवाने पर प्रत्येक चाजिंग पॉइंट पर छह हजार रुपये की सब्सिडी मिलेगी। डिस्कॉम के साथ मिलकर परिवहन विभाग ने सिंगल विंडो प्रक्रिया की शुरुआत कर दी है। इससे डिस्कॉम के पैनल वाले विक्रेताओं से रियायती दर पर ईवी चार्जर लगाए जा सकेंगे। सरकार ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए ईवी चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना करने को कहा है। दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सपने को साकार करने के लिए दिल्ली में तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके लिए इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं। सरकार के इस फैसले से सरकारी अधिकारी-कर्मचारी भी इलेक्ट्रिक वाहनों से दफ्तर आने के लिए प्रेरित होंगे। दिल्ली में सितंबर से नवंबर, 2021 के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों ने बिक्री के मामले में सीएनजी और डीजल वाहनों को पीछे छोड़ दिया है। इस दौरान कुल वाहनों में 9. 2 फीसदी ई वाहन हैं जबकि राष्ट्रीय औसत 1. 6 फीसदी है। सीएनजी वाहनों की बिक्री नवंबर में 6. 5 फीसदी रह गई है। इस दौरान कुल 9,540 इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री हुई। इसमें से सितंबर में 2,873, अक्तूबर में 3,275 जबकि नवंबर में 3,392 इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री हुई। पेट्रोल के बाद इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री दूसरे स्थान पर पहुंच गई है। दिल्ली सरकार ने दिल्ली में ई वाहनों को बढ़ावा देने के लिए अगस्त 2020 में दिल्ली इलेक्ट्रिक वाहन नीति की घोषणा की। इसे पूरे देश भर में सबसे प्रगतिशील नीति के रूप में स्वीकार किया गया है। दिल्ली सभी तरह के ई वाहनों के लिए रोड टैक्स और पंजीकरण शुल्क में पूर्ण छूट देने वाला पहला राज्य है। पात्रता मानदंड को सरल बनाया गया है ताकि लोगों को सब्सिडी का लाभ आासानी से मिल सके। 2024 तक सभी नए वाहन पंजीकरण में 25 फीसदी इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी का लक्ष्य है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
दिल्ली सरकार के सभी कार्यालयों में इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग स्टेशन लगाए जाएंगे। तीन महीने में चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने का आदेश भी जारी कर दिया गया है। दिल्ली को इलेक्ट्रिक वाहनोंकी राजधानी बनाने की दिशा में केजरीवाल सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत अगले तीन महीने के भीतर दिल्ली के सभी सरकारी दफ्तरों में इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। सरकारी कर्मियों सहित अपने काम के सिलसिले में पहुंचने वाले नागरिकों के ई-वाहनों के लिए यहां चार्जिंग की सुविधा होगी। सरकार ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। इसमें सभी विभागों को जगह की पहचान के बाद चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने के लिए डिस्कॉम के पैनल में शामिल वेंडर के जरिए ईवी चार्जिंग स्टेशन लगवाने पर प्रत्येक चाजिंग पॉइंट पर छह हजार रुपये की सब्सिडी मिलेगी। डिस्कॉम के साथ मिलकर परिवहन विभाग ने सिंगल विंडो प्रक्रिया की शुरुआत कर दी है। इससे डिस्कॉम के पैनल वाले विक्रेताओं से रियायती दर पर ईवी चार्जर लगाए जा सकेंगे। सरकार ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए ईवी चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना करने को कहा है। दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सपने को साकार करने के लिए दिल्ली में तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके लिए इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं। सरकार के इस फैसले से सरकारी अधिकारी-कर्मचारी भी इलेक्ट्रिक वाहनों से दफ्तर आने के लिए प्रेरित होंगे। दिल्ली में सितंबर से नवंबर, दो हज़ार इक्कीस के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों ने बिक्री के मामले में सीएनजी और डीजल वाहनों को पीछे छोड़ दिया है। इस दौरान कुल वाहनों में नौ. दो फीसदी ई वाहन हैं जबकि राष्ट्रीय औसत एक. छः फीसदी है। सीएनजी वाहनों की बिक्री नवंबर में छः. पाँच फीसदी रह गई है। इस दौरान कुल नौ,पाँच सौ चालीस इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री हुई। इसमें से सितंबर में दो,आठ सौ तिहत्तर, अक्तूबर में तीन,दो सौ पचहत्तर जबकि नवंबर में तीन,तीन सौ बानवे इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री हुई। पेट्रोल के बाद इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री दूसरे स्थान पर पहुंच गई है। दिल्ली सरकार ने दिल्ली में ई वाहनों को बढ़ावा देने के लिए अगस्त दो हज़ार बीस में दिल्ली इलेक्ट्रिक वाहन नीति की घोषणा की। इसे पूरे देश भर में सबसे प्रगतिशील नीति के रूप में स्वीकार किया गया है। दिल्ली सभी तरह के ई वाहनों के लिए रोड टैक्स और पंजीकरण शुल्क में पूर्ण छूट देने वाला पहला राज्य है। पात्रता मानदंड को सरल बनाया गया है ताकि लोगों को सब्सिडी का लाभ आासानी से मिल सके। दो हज़ार चौबीस तक सभी नए वाहन पंजीकरण में पच्चीस फीसदी इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी का लक्ष्य है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
देश की बात . . . में तह तक में देखिए नीतीश कुमार का वाराणसी दौरा. संघ मुक्त और शराब मुक्त का नारा देकर नीतीश राष्ट्रीय राजनीति में छाने की कोशिश कर रहे हैं. यूपी का चुनाव तो बस एक बहाना है. बिहार में कांग्रेस और आरजेडी के सहयोग से सीएम बनने वाले नीतीश दरअसल अब पीएम बनने का सपना देखने लगे हैं. अकेले चुनाव लड़ेगी सपा, गठबंधन पर मुलायम-अखिलेश में 'मतभेद' 'मुसलमान ही जेल से क्यों भागते हैं? ' अपनों से हारते नेताजी! धुल कर रहेगी क्रिकेट की कालिख!
देश की बात . . . में तह तक में देखिए नीतीश कुमार का वाराणसी दौरा. संघ मुक्त और शराब मुक्त का नारा देकर नीतीश राष्ट्रीय राजनीति में छाने की कोशिश कर रहे हैं. यूपी का चुनाव तो बस एक बहाना है. बिहार में कांग्रेस और आरजेडी के सहयोग से सीएम बनने वाले नीतीश दरअसल अब पीएम बनने का सपना देखने लगे हैं. अकेले चुनाव लड़ेगी सपा, गठबंधन पर मुलायम-अखिलेश में 'मतभेद' 'मुसलमान ही जेल से क्यों भागते हैं? ' अपनों से हारते नेताजी! धुल कर रहेगी क्रिकेट की कालिख!
अभी ज्यादातर गांव अउर शहर में डायरिया अउर मस्तिष्क ज्वर (दिमागी बुखार) हो रहल हई। एक ओर डायरिया के मरीज प्राईवेट से खरीदई छथिन त दोसर ओर दिमागी बुखार के ईलाज लेल कोई उचित व्यवस्था न हई। जबकि दिमागी बुखार से लगभग सौ से उपर बच्चा के मौत हो गेलई। ऐई के उपचार के लेल हर उपस्वास्थ्य केन्द्र पर कुछ भी दवा के सुविधा रहे के चाही ताकि तुरंत राहत मिल सके। लेकिन उपस्वास्थ्य केन्द्र त दूर हई सदर अस्पताल में भी लोग प्राईवेट से दवा खरीदई छथिन। जईसे शिवहर जिला के राजेश साह कहलथिन कि हम अपना भाभी के ईलाज के लेल भर्ती कईली लेकिन तीन दिन में तीन हजार के दवा प्राईवेट से खरीदली। दोसर ओर दिमागी बुखार से बच्चा के मौत के संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ ही रहल हई। अउर सरकारी अस्पताल में प्राईवेट डाॅक्टर आके इलाज करई छथिन त सरकारी स्वास्थ्य केन्द्र रहे के कोई जरूरी ही न रह गेलई। कोन कारण हई कि सरकारी अस्पताल से लोग सब संतुष्ट न होई छई। जबकि सरकार कड़ोरो रूपईया स्वास्थ्य विभाग पर खर्च करई छथिन।
अभी ज्यादातर गांव अउर शहर में डायरिया अउर मस्तिष्क ज्वर हो रहल हई। एक ओर डायरिया के मरीज प्राईवेट से खरीदई छथिन त दोसर ओर दिमागी बुखार के ईलाज लेल कोई उचित व्यवस्था न हई। जबकि दिमागी बुखार से लगभग सौ से उपर बच्चा के मौत हो गेलई। ऐई के उपचार के लेल हर उपस्वास्थ्य केन्द्र पर कुछ भी दवा के सुविधा रहे के चाही ताकि तुरंत राहत मिल सके। लेकिन उपस्वास्थ्य केन्द्र त दूर हई सदर अस्पताल में भी लोग प्राईवेट से दवा खरीदई छथिन। जईसे शिवहर जिला के राजेश साह कहलथिन कि हम अपना भाभी के ईलाज के लेल भर्ती कईली लेकिन तीन दिन में तीन हजार के दवा प्राईवेट से खरीदली। दोसर ओर दिमागी बुखार से बच्चा के मौत के संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ ही रहल हई। अउर सरकारी अस्पताल में प्राईवेट डाॅक्टर आके इलाज करई छथिन त सरकारी स्वास्थ्य केन्द्र रहे के कोई जरूरी ही न रह गेलई। कोन कारण हई कि सरकारी अस्पताल से लोग सब संतुष्ट न होई छई। जबकि सरकार कड़ोरो रूपईया स्वास्थ्य विभाग पर खर्च करई छथिन।
"छास वारे पीओ छास" छाछ के कितने प्रकार है ? छाछ कब नहीं पी सकते है ? छाछ से कौनसे रोगों का नाश होता है ? छाछ में कौन कौन से गुण होते है ? ऐसा क्यों कहते है की "तक्रं शक्रस्य दुर्लभं " की छाछ तो इंद्र को भी दुर्लभ है. और भी कई सारी रसप्रद बातें सुनिए छाछ के के बारे मैं. Widal Test Positive है। अभ्रक भस्म 5 ग्राम ( शत पुटी ) उपरोक्त में त्रिभुवन कीर्ति और संजीवनी वटी को पहले भलीभांति खरल में पीस लें फिर सभी ओषधियों को एक साथ मिलाकर 20 कागज की पुडिया बना लें उसके बाद एक पुड़िया सुबह एक शाम को लें साधारण पानी के साथ खाना खाने के बाद, (2). द्राक्षावलेह एक चमच सुबह एक चमच शाम को लें खाली पेट। (3). महासुदर्शन चूर्ण 3 ग्राम सुबह 3 ग्राम शाम को लें। साथ में आप गरिष्ठ भोजन का त्याग करें हल्का भोजन लें मूंग दाल खिचडी दलिया पालक का सूप लोकी तोराई की सब्जी फल सेव अनार लें गर्म पानी का सेवन करें, स्नान करें। ठंडे जल से स्नान न करें।
"छास वारे पीओ छास" छाछ के कितने प्रकार है ? छाछ कब नहीं पी सकते है ? छाछ से कौनसे रोगों का नाश होता है ? छाछ में कौन कौन से गुण होते है ? ऐसा क्यों कहते है की "तक्रं शक्रस्य दुर्लभं " की छाछ तो इंद्र को भी दुर्लभ है. और भी कई सारी रसप्रद बातें सुनिए छाछ के के बारे मैं. Widal Test Positive है। अभ्रक भस्म पाँच ग्राम उपरोक्त में त्रिभुवन कीर्ति और संजीवनी वटी को पहले भलीभांति खरल में पीस लें फिर सभी ओषधियों को एक साथ मिलाकर बीस कागज की पुडिया बना लें उसके बाद एक पुड़िया सुबह एक शाम को लें साधारण पानी के साथ खाना खाने के बाद, . द्राक्षावलेह एक चमच सुबह एक चमच शाम को लें खाली पेट। . महासुदर्शन चूर्ण तीन ग्राम सुबह तीन ग्राम शाम को लें। साथ में आप गरिष्ठ भोजन का त्याग करें हल्का भोजन लें मूंग दाल खिचडी दलिया पालक का सूप लोकी तोराई की सब्जी फल सेव अनार लें गर्म पानी का सेवन करें, स्नान करें। ठंडे जल से स्नान न करें।
रंगों के प्रतीक रूप में उमंग व उल्लास का पर्व होली गोरक्षपीठ के सामाजिक समरसता अभियान का ही एक हिस्सा है। छुआछूत, जातीय भेदभाव और ऊंच-नीच की खाई पाटने का एक महत्वपूर्ण मौका भी। इसे लेकर ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ ने जो पताका फहराई, उसे लेकर वर्तमान गोरक्षपीठाधीश्वर पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ रहे हैं। गोरक्षपीठ की अगुवाई वाला रंगोत्सव सामाजिक संदेश के ध्येय से विशिष्ट है। गोरक्षपीठ में होली के दिन की शुरुआत गुरु गोरक्षनाथ को भस्म लगाने के साथ होती है। इसके लिए गोरक्षपीठाधीश्वर साधु-संतों के साथ स्वयं उस स्थान पर जाते हैं, जहां होलिका दहन कार्यक्रम सम्पन्न हुआ रहता है। तुरही, नागफनी, मजीरा आदि वाद्ययंत्रों की ध्वनि होली गीतों की गूंज के बीच भस्म उठाते और गुरु गोरक्षनाथ को अर्पित करते हैं। उसके बाद सबसे भस्म से ही गोरक्षपीठाधीश्वर का तिलक किया जाता है और फिर साधु-संत उससे होली खेलते हैं। भस्म की होली के बाद मंदिर के चबूतरे पर गोरक्षपीठाधीश्वर संत समाज के साथ फाग गीतों का आनंद उठाते हैं। होली के अवसर पर करीब आठ दशक से गोरखपुर शहर में निकलने वाली परंपरागत नरसिंह शोभायात्रा को परिष्कृत रूप देने का श्रेय भले ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक नानाजी देशमुख को जाता है लेकिन इसे भव्यता नाथपीठ से जुड़कर मिली। पहले ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ के निर्देश पर महंत अवेद्यनाथ ने शोभायात्रा को भव्य स्वरूप दिया और जब यात्रा का नेतृत्व योगी आदित्यनाथ ने संभाला तो इसकी भव्यता की ख्याति देश भर में हो गई। नानाजी के साथ कार्य कर चुके 90 वर्षीय जगदीश प्रसाद बताते हैं कि होली में फूहड़पन दूर करने के लिए नानाजी ने पहले से चली आ रही नरसिंह यात्रा का कमान 1944 में अपने हाथ में ली। उनके प्रयास से होली का फूहड़पन तो दूर हो गया लेकिन भव्यता नहीं मिल पाई। इसके लिए उन्होंने तत्कालीन गोरक्षपीठाधीश्वर महंत दिग्विजयनाथ से संपर्क साधा। दिग्विजयनाथ ने यह जिम्मेदारी अपने उत्तराधिकारी अवेद्यनाथ को सौंपी। परिणामस्वरूप 1950 से अवेद्यनाथ शाेभायात्रा का नेतृत्व करने लगे। धीरे-धीरे संघ की शोभायात्रा नाथपीठ से अनिवार्य रूप से जुड़ गई। 1998 से बतौर गोरक्षपीठ के उत्ताधिकारी योगी आदित्यनाथ शोभायात्रा का नेतृत्व करने लगे तो उनके उत्सवी स्वभाव के चलते शोभायात्रा ने भव्यतम स्वरूप ले लिया और इसमें शहर के सभी प्रमुख लोग भागीदारी करने लगे। जैसे-जैसे देश-दुनिया में योगी की ख्याति बढ़ती गई, वैसे-वैसे उनसे जुड़ने की वजह से शोभायात्रा भी मशहूर होती गई। 2017 में प्रदेश के मुख्यमंत्री पद का दायित्व संभालने के बाद इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई कि योगी आदित्यनाथ अब नरसिंह शोभायात्रा में शामिल होने की परंपरा को नहीं निभा पाएंगे। वर्ष 2018 और 2019 की होली में बतौर मुख्यमंत्री यात्रा में शामिल होकर इन चर्चाओं पर विराम लगा दिया। 2019 और 2020 की शोभायात्रा में मुख्यमंत्री योगी शामिल नहीं हुए, इसकी वजह कोरोना संक्रमण रही। कोरोना काल समाप्त होते ही मुख्यमंत्री योगी बीते वर्ष से एक बार फिर से शोभायात्रा की अगुवाई करने लगे हैं। नरसिंह शोभायात्रा के शुभारंभ से पहले शहर के घंटाघर चौराहे पर मुख्यमंत्री भगवान नरसिंह की आरती उतारते हैं और फिर अबीर-गुलाल उड़ाकर होली खेलते हैं। लोगों के गुलाल का भी वह पूरी आत्मीयता से स्वागत करते हैं। नरसिंह यात्रा के साथ ही पीठ की होली का सिलसिला नहीं थमता। शाम को गोरखनाथ मंदिर में आयोजित होने वाला होली मिलन समारोह भी विशिष्ट होता है, जिसमें गोरक्षपीठाधीश्वर बिना किसी भेदभाव के हर आमखास से अबीर-गुलाल लगाकर मिलते हैं। इसमें जितना सम्मान गण्यमान्य व्यक्तियों मिलता है, उतना ही गरीब से गरीब व्यक्ति को। फाग गीत के बीच आयोजित होने वाला होली मिलन समारोह हर पहुंचने वाले के हृदय में गोरक्षपीठ के प्रति आस्था को और बढ़ा देता है। नाथ पीठ की भागीदारी केवल होली में ही नहीं होती है बल्कि इससे पहले होलिका दहन में गोरक्षपीठाधीश्वर बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हैं। पीठाधीश्वर की अगुवाई में गोरक्षनाथ मंदिर में तो होलिका दहन होता है, पांडेयहाता में आयोजित होलिका दहन कार्यक्रम में भी वह शामिल होते हैं। पांडेयहाता के होलिका दहन में गोरक्षपीठाधीश्वर की मौजूदगी भी अब परंपरा का रूप ले चुकी है।
रंगों के प्रतीक रूप में उमंग व उल्लास का पर्व होली गोरक्षपीठ के सामाजिक समरसता अभियान का ही एक हिस्सा है। छुआछूत, जातीय भेदभाव और ऊंच-नीच की खाई पाटने का एक महत्वपूर्ण मौका भी। इसे लेकर ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ ने जो पताका फहराई, उसे लेकर वर्तमान गोरक्षपीठाधीश्वर पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ रहे हैं। गोरक्षपीठ की अगुवाई वाला रंगोत्सव सामाजिक संदेश के ध्येय से विशिष्ट है। गोरक्षपीठ में होली के दिन की शुरुआत गुरु गोरक्षनाथ को भस्म लगाने के साथ होती है। इसके लिए गोरक्षपीठाधीश्वर साधु-संतों के साथ स्वयं उस स्थान पर जाते हैं, जहां होलिका दहन कार्यक्रम सम्पन्न हुआ रहता है। तुरही, नागफनी, मजीरा आदि वाद्ययंत्रों की ध्वनि होली गीतों की गूंज के बीच भस्म उठाते और गुरु गोरक्षनाथ को अर्पित करते हैं। उसके बाद सबसे भस्म से ही गोरक्षपीठाधीश्वर का तिलक किया जाता है और फिर साधु-संत उससे होली खेलते हैं। भस्म की होली के बाद मंदिर के चबूतरे पर गोरक्षपीठाधीश्वर संत समाज के साथ फाग गीतों का आनंद उठाते हैं। होली के अवसर पर करीब आठ दशक से गोरखपुर शहर में निकलने वाली परंपरागत नरसिंह शोभायात्रा को परिष्कृत रूप देने का श्रेय भले ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक नानाजी देशमुख को जाता है लेकिन इसे भव्यता नाथपीठ से जुड़कर मिली। पहले ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ के निर्देश पर महंत अवेद्यनाथ ने शोभायात्रा को भव्य स्वरूप दिया और जब यात्रा का नेतृत्व योगी आदित्यनाथ ने संभाला तो इसकी भव्यता की ख्याति देश भर में हो गई। नानाजी के साथ कार्य कर चुके नब्बे वर्षीय जगदीश प्रसाद बताते हैं कि होली में फूहड़पन दूर करने के लिए नानाजी ने पहले से चली आ रही नरसिंह यात्रा का कमान एक हज़ार नौ सौ चौंतालीस में अपने हाथ में ली। उनके प्रयास से होली का फूहड़पन तो दूर हो गया लेकिन भव्यता नहीं मिल पाई। इसके लिए उन्होंने तत्कालीन गोरक्षपीठाधीश्वर महंत दिग्विजयनाथ से संपर्क साधा। दिग्विजयनाथ ने यह जिम्मेदारी अपने उत्तराधिकारी अवेद्यनाथ को सौंपी। परिणामस्वरूप एक हज़ार नौ सौ पचास से अवेद्यनाथ शाेभायात्रा का नेतृत्व करने लगे। धीरे-धीरे संघ की शोभायात्रा नाथपीठ से अनिवार्य रूप से जुड़ गई। एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे से बतौर गोरक्षपीठ के उत्ताधिकारी योगी आदित्यनाथ शोभायात्रा का नेतृत्व करने लगे तो उनके उत्सवी स्वभाव के चलते शोभायात्रा ने भव्यतम स्वरूप ले लिया और इसमें शहर के सभी प्रमुख लोग भागीदारी करने लगे। जैसे-जैसे देश-दुनिया में योगी की ख्याति बढ़ती गई, वैसे-वैसे उनसे जुड़ने की वजह से शोभायात्रा भी मशहूर होती गई। दो हज़ार सत्रह में प्रदेश के मुख्यमंत्री पद का दायित्व संभालने के बाद इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई कि योगी आदित्यनाथ अब नरसिंह शोभायात्रा में शामिल होने की परंपरा को नहीं निभा पाएंगे। वर्ष दो हज़ार अट्ठारह और दो हज़ार उन्नीस की होली में बतौर मुख्यमंत्री यात्रा में शामिल होकर इन चर्चाओं पर विराम लगा दिया। दो हज़ार उन्नीस और दो हज़ार बीस की शोभायात्रा में मुख्यमंत्री योगी शामिल नहीं हुए, इसकी वजह कोरोना संक्रमण रही। कोरोना काल समाप्त होते ही मुख्यमंत्री योगी बीते वर्ष से एक बार फिर से शोभायात्रा की अगुवाई करने लगे हैं। नरसिंह शोभायात्रा के शुभारंभ से पहले शहर के घंटाघर चौराहे पर मुख्यमंत्री भगवान नरसिंह की आरती उतारते हैं और फिर अबीर-गुलाल उड़ाकर होली खेलते हैं। लोगों के गुलाल का भी वह पूरी आत्मीयता से स्वागत करते हैं। नरसिंह यात्रा के साथ ही पीठ की होली का सिलसिला नहीं थमता। शाम को गोरखनाथ मंदिर में आयोजित होने वाला होली मिलन समारोह भी विशिष्ट होता है, जिसमें गोरक्षपीठाधीश्वर बिना किसी भेदभाव के हर आमखास से अबीर-गुलाल लगाकर मिलते हैं। इसमें जितना सम्मान गण्यमान्य व्यक्तियों मिलता है, उतना ही गरीब से गरीब व्यक्ति को। फाग गीत के बीच आयोजित होने वाला होली मिलन समारोह हर पहुंचने वाले के हृदय में गोरक्षपीठ के प्रति आस्था को और बढ़ा देता है। नाथ पीठ की भागीदारी केवल होली में ही नहीं होती है बल्कि इससे पहले होलिका दहन में गोरक्षपीठाधीश्वर बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हैं। पीठाधीश्वर की अगुवाई में गोरक्षनाथ मंदिर में तो होलिका दहन होता है, पांडेयहाता में आयोजित होलिका दहन कार्यक्रम में भी वह शामिल होते हैं। पांडेयहाता के होलिका दहन में गोरक्षपीठाधीश्वर की मौजूदगी भी अब परंपरा का रूप ले चुकी है।
महिला ने बदायूं की बिसौली विधानसभा सीट से विधायक कुशाग्र सागर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है कि कुशाग्र ने उसे शादी का झांसा देकर दो साल तक रेप किया। पीड़िता ने विधायक के खिलाफ केस दर्ज करने की भी मांग की है। बरेली यूपी में अब एक और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधायक पर बलात्कार का आरोप लगा है। बारादरी क्षेत्र में रहने वाली एक महिला ने बदायूं में बिसौली विधानसभा सीट से विधायक कुशाग्र सागर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है कि कुशाग्र ने उसे शादी का झांसा देकर दो साल तक रेप किया। पीड़िता ने विधायक के खिलाफ केस दर्ज करने की भी मांग की है। बरेली के एसएसपी कलानिधि नैथानी ने पीड़िता को उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। पीड़िता ने बताया कि इस मामले को लेकर उसने पहले भी विरोध किया था, तब विधायक के पिता व पूर्व विधायक योगेंद्र सागर ने उसे भरोसा दिया था कि जब वह बालिग हो जाएगी तब उसकी शादी अपने बेटे कुशाग्र से करा देंगे। हालांकि, कुशाग्र के विधायक बनने के बाद वह अपने वादे से मुकर गए। विधायक के घर काम करती थी पीड़िता की मां पीड़िता की मां योगेंद्र के घर में काम किया करती थी। पीड़िता भी उनके साथ योगेंद्र के घर आने लगी, इसी बीच कथित रूप से कुशाग्र से उसके संबंध बन गए। एसएसपी कलानिधि नैथानी ने बताया कि युवती की शिकायत पर सीओ थर्ड नीति द्विवेदी को पूरे मामले की जांच कर तत्काल मौके पर भेजा गया है, क्योंकि जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे कोई कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि इससे पहले भी उन्नाव में बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ रेप का आरोप लगा था। अभी इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है और सेंगर जेल में हैं।
महिला ने बदायूं की बिसौली विधानसभा सीट से विधायक कुशाग्र सागर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है कि कुशाग्र ने उसे शादी का झांसा देकर दो साल तक रेप किया। पीड़िता ने विधायक के खिलाफ केस दर्ज करने की भी मांग की है। बरेली यूपी में अब एक और भारतीय जनता पार्टी के विधायक पर बलात्कार का आरोप लगा है। बारादरी क्षेत्र में रहने वाली एक महिला ने बदायूं में बिसौली विधानसभा सीट से विधायक कुशाग्र सागर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है कि कुशाग्र ने उसे शादी का झांसा देकर दो साल तक रेप किया। पीड़िता ने विधायक के खिलाफ केस दर्ज करने की भी मांग की है। बरेली के एसएसपी कलानिधि नैथानी ने पीड़िता को उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। पीड़िता ने बताया कि इस मामले को लेकर उसने पहले भी विरोध किया था, तब विधायक के पिता व पूर्व विधायक योगेंद्र सागर ने उसे भरोसा दिया था कि जब वह बालिग हो जाएगी तब उसकी शादी अपने बेटे कुशाग्र से करा देंगे। हालांकि, कुशाग्र के विधायक बनने के बाद वह अपने वादे से मुकर गए। विधायक के घर काम करती थी पीड़िता की मां पीड़िता की मां योगेंद्र के घर में काम किया करती थी। पीड़िता भी उनके साथ योगेंद्र के घर आने लगी, इसी बीच कथित रूप से कुशाग्र से उसके संबंध बन गए। एसएसपी कलानिधि नैथानी ने बताया कि युवती की शिकायत पर सीओ थर्ड नीति द्विवेदी को पूरे मामले की जांच कर तत्काल मौके पर भेजा गया है, क्योंकि जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे कोई कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि इससे पहले भी उन्नाव में बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ रेप का आरोप लगा था। अभी इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है और सेंगर जेल में हैं।
इस साल की शुरुआत में दिल्ली हाईकोर्ट में मैरिटल रेप को अपराध घोषित करने की मांग से संबंधित याचिकाओं पर एक अहम सुनवाई चल रही थी। इससे अलग सोशल मीडिया पर अलग बहस चल रही थी। #MaariageStrike के साथ भारतीय मर्द शादी नहीं करने का ऐलान कर रहे थे। ट्रेंड में कहा जा रहा था कि उन पर झूठे आरोप लगेंगे, उन्हें जेल में डाल दिया जाएगा। दूसरी ओर भारतीय परिवेश में लोग यह भी कहते हैं कि घर और रिश्ते महिलाओं के लिए संरक्षण प्रदान करते हैं। घर में महिलाओं के साथ हिंसा नहीं होती है यह कोरी बकवास है। ब्राह्मणवादी पितृसत्तात्मक सोच के अनुसार महिलाओं के लिए घर-परिवार सबसे सुरक्षित जगह मानी जाती है। यहां मैरिटल रेप पर कानून के विरोध और घर-रिश्तों को सुरक्षा कवच बताने की बात इसलिए हो रही है क्योंकि हाल में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो का जो डेटा सामने आया है उसके अनुसार भारत के 96 प्रतिशत बलात्कार के दर्ज मामलों में महिला के जानकारों ने ही उनके साथ हिंसा की है। आंकड़ों के मुताबिक महिला के पति या पार्टनर द्वारा किए गए रेप के मामलों की संख्या भी पहले से बढ़ी है। आमतौर पर बदनामी के डर से बड़ी संख्या में इस तरह के मामले दर्ज भी नहीं हो पाते, जब सर्वाइवर को अपने पति, परिवार के सदस्य या किसी परिचित के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज करवानी हो। बंदिश, शर्म और हिचक से निकलकर जो मामले सामने आए हैं वे आंकड़े बताते हैं कि महिलाएं अपने परिवार और परिचित के साथ ही सबसे असुरक्षित हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो का जो डेटा सामने आया है उसके अनुसार भारत के 96 प्रतिशत बलात्कार के दर्ज मामलों में महिला के जानकारों ने ही उनके साथ हिंसा की है। नैशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार देश में कुल बलात्कार के मामले में से 96. 5 प्रतिशत मामलों में आरोपी सर्वाइवर के परिचित थे। एनसीआरबी 2021 के डेटा के अनुसार 30,571 ऐसे मामले दर्ज किए गए हैं जिनमें वारदात करने वाला महिला का जानकार था। 2,424 मामलों में महिला के परिवार के किसी सदस्य ने ही उसके साथ बलात्कार किया। पारिवारिक मित्र, पड़ोसी या अन्य जानकार द्वारा किए गए रेप के 15,196 मामले दर्ज किए। महिला के मित्र, लिव इन पार्टनर, अलग हुए पति और शादी के वादे के बहाने बलात्कार के किए जाने वाले 12,951 मामले दर्ज किए। किसी परिचित द्वारा बलात्कार के दर्ज मामलों में राजस्थान (6074) सबसे ऊपर है। पश्चिम बंगाल केवल ऐसा राज्य है जहां किसी जानकार द्वारा रेप करने की दर 90 प्रतिशत से नीचे है। इसके अलावा देश के सभी राज्यों में यह दर 90 और 100 प्रतिशत तक है। एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक़ पांच राज्य- महाराष्ट्र, मिजोरम, मणिपुर, नगालैंड और सिक्किम ऐसे राज्य हैं जहां 100 प्रतिशत बलात्कार के मामलों में जानकार व्यक्ति ने ही अपराध किया है। ये आंकड़े उस बात को गलत साबित करता है जो यह कहती है कि महिलाएं अपने घर और अपनों के बीच सबसे ज्यादा सुरक्षित हैं। पंजाब, छत्तीसगढ़, केरल, आंध्र-प्रदेश, उड़ीसा और तेलगांना में महिलाओं के ख़िलाफ़ होनेवाली रेप की घटनाओं में 99 प्रतिशत आरोपी परिचित पाए गए। भारत में अधिकतर बलात्कार के मामलों में परिवार, मित्र, पड़ोसी या किसी अन्य जानकार व्यक्ति का शामिल होना पाया गया है। पिछले साल की तुलना में महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनाओं में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एनसीआरबी रिपोर्ट के जारी आंकड़े दिखाते हैं कि भारत में महिलाओं के ख़िलाफ़ बलात्कार, यौन हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं। इसमें बड़ा आंकड़ा महिला के ख़िलाफ़ बलात्कार की घटना करने वाला उसका परिचित या संबंधी से जुड़ा है जिसे वह पहले से जानती है। ये आंकड़े उस बात को गलत साबित करता है जो यह कहती है कि महिलाएं अपने घर और अपनों के बीच सबसे ज्यादा सुरक्षित हैं। पार्टनर या मित्र के द्वारा रेप के केस में राजस्थान सबसे ऊपर है। राज्य में 1700 से अधिक मामले दर्ज किए गए है जिनमें महिला के परिचित ने उसके साथ रेप किया। अगर बात साल 2020 की एनसीआरबी की रिपोर्ट की करें तो उसमें भी राजस्थान में 1531 रेप केस दर्ज किए गए थे जिनमें आरोपी लिव इन पार्टनर, पूर्व पति या मित्र शामिल था। पिछले साल की रिपोर्ट के अनुसार महिला के परिचित द्वारा बलात्कार के 26,808 मामले दर्ज किए गए थे। पिछले वर्ष की रिपोर्ट के अनुसार परिचित द्वारा बलात्कार के 95 प्रतिशत मामले दर्ज किए गए थे। किसी परिचित द्वारा बलात्कार के दर्ज मामलों में राजस्थान (6074) सबसे ऊपर है। पश्चिम बंगाल केवल ऐसा राज्य है जहां जानकार रेप करने वाली की दर 90 प्रतिशत से नीचे है। इसके अलावा देश के सभी राज्यों में यह दर 90 और 100 प्रतिशत तक है। भारतीय महिलाएं सबसे ज्यादा घर में अपने करीबियों के बीच असुरक्षित है इस बात पर मुहर लगाने के लिए सरकार द्वारा जारी दूसरा डेटा भी यही कहता है। नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 के अनुसार भी अधिकतर भारतीय महिलाएं अपनी शादी में यौन हिंसा का सामना करती हैं। द हिंदू बिजनेस लाइन में छपी ख़बर के मुताबिक़ 18-49 आयुवर्ग की महिलाओं नें अपने पति द्वारा यौन हिंसा होने की बात स्वीकारी है। इस आयुवर्ग की 83 प्रतिशत महिलाओं ने पति द्वारा यौन हिंसा की रिपोर्ट की है। सर्वे में शामिल 82 प्रतिशत महिलाओं ने अपने पति को ही अपने साथ होने वाली हिंसा का अपराधी बताया है। सर्वे में 13 प्रतिशत रिपोर्ट पूर्व पति द्वारा यौन हिंसा के केस भी दर्ज किए गए हैं। भारतीय महिलाएं सबसे ज्यादा घर में अपने करीबियों के बीच असुरक्षित है इस बात पर मुहर लगाने के लिए सरकार द्वारा जारी दूसरा डेटा भी यही कहता है। नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 के अनुसार भी अधिकतर भारतीय महिलाएं अपनी शादी में यौन हिंसा का सामना करती हैं। सरकार द्वारा जारी ये आंकड़े महिलाओं के साथ रिश्ते और प्यार में होने वाली उस हिंसा को दिखाते हैं जिस पर चर्चा करने से ही भारतीय पुरुषों के बीच हंगामा मच जाता है। यौन हिंसा और मैरिटल रेप जैसी मुद्दों पर बात न करने वाले पुरुषवादी समाज के लिए भले ही यह आंकड़े मायने न रखते हो लेकिन एक राष्ट्र के तौर पर भारत में महिलाओं की क्या स्थिति है उसे साफ-साफ जाहिर करता है। लैंगिक असमानता और सरकार के लिए महिलाओं की सुरक्षा के लिए बड़े वादे किए जा रहे है बावजूद इसके तस्वीर बदल नहीं रही है।
इस साल की शुरुआत में दिल्ली हाईकोर्ट में मैरिटल रेप को अपराध घोषित करने की मांग से संबंधित याचिकाओं पर एक अहम सुनवाई चल रही थी। इससे अलग सोशल मीडिया पर अलग बहस चल रही थी। #MaariageStrike के साथ भारतीय मर्द शादी नहीं करने का ऐलान कर रहे थे। ट्रेंड में कहा जा रहा था कि उन पर झूठे आरोप लगेंगे, उन्हें जेल में डाल दिया जाएगा। दूसरी ओर भारतीय परिवेश में लोग यह भी कहते हैं कि घर और रिश्ते महिलाओं के लिए संरक्षण प्रदान करते हैं। घर में महिलाओं के साथ हिंसा नहीं होती है यह कोरी बकवास है। ब्राह्मणवादी पितृसत्तात्मक सोच के अनुसार महिलाओं के लिए घर-परिवार सबसे सुरक्षित जगह मानी जाती है। यहां मैरिटल रेप पर कानून के विरोध और घर-रिश्तों को सुरक्षा कवच बताने की बात इसलिए हो रही है क्योंकि हाल में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो का जो डेटा सामने आया है उसके अनुसार भारत के छियानवे प्रतिशत बलात्कार के दर्ज मामलों में महिला के जानकारों ने ही उनके साथ हिंसा की है। आंकड़ों के मुताबिक महिला के पति या पार्टनर द्वारा किए गए रेप के मामलों की संख्या भी पहले से बढ़ी है। आमतौर पर बदनामी के डर से बड़ी संख्या में इस तरह के मामले दर्ज भी नहीं हो पाते, जब सर्वाइवर को अपने पति, परिवार के सदस्य या किसी परिचित के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज करवानी हो। बंदिश, शर्म और हिचक से निकलकर जो मामले सामने आए हैं वे आंकड़े बताते हैं कि महिलाएं अपने परिवार और परिचित के साथ ही सबसे असुरक्षित हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो का जो डेटा सामने आया है उसके अनुसार भारत के छियानवे प्रतिशत बलात्कार के दर्ज मामलों में महिला के जानकारों ने ही उनके साथ हिंसा की है। नैशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार देश में कुल बलात्कार के मामले में से छियानवे. पाँच प्रतिशत मामलों में आरोपी सर्वाइवर के परिचित थे। एनसीआरबी दो हज़ार इक्कीस के डेटा के अनुसार तीस,पाँच सौ इकहत्तर ऐसे मामले दर्ज किए गए हैं जिनमें वारदात करने वाला महिला का जानकार था। दो,चार सौ चौबीस मामलों में महिला के परिवार के किसी सदस्य ने ही उसके साथ बलात्कार किया। पारिवारिक मित्र, पड़ोसी या अन्य जानकार द्वारा किए गए रेप के पंद्रह,एक सौ छियानवे मामले दर्ज किए। महिला के मित्र, लिव इन पार्टनर, अलग हुए पति और शादी के वादे के बहाने बलात्कार के किए जाने वाले बारह,नौ सौ इक्यावन मामले दर्ज किए। किसी परिचित द्वारा बलात्कार के दर्ज मामलों में राजस्थान सबसे ऊपर है। पश्चिम बंगाल केवल ऐसा राज्य है जहां किसी जानकार द्वारा रेप करने की दर नब्बे प्रतिशत से नीचे है। इसके अलावा देश के सभी राज्यों में यह दर नब्बे और एक सौ प्रतिशत तक है। एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक़ पांच राज्य- महाराष्ट्र, मिजोरम, मणिपुर, नगालैंड और सिक्किम ऐसे राज्य हैं जहां एक सौ प्रतिशत बलात्कार के मामलों में जानकार व्यक्ति ने ही अपराध किया है। ये आंकड़े उस बात को गलत साबित करता है जो यह कहती है कि महिलाएं अपने घर और अपनों के बीच सबसे ज्यादा सुरक्षित हैं। पंजाब, छत्तीसगढ़, केरल, आंध्र-प्रदेश, उड़ीसा और तेलगांना में महिलाओं के ख़िलाफ़ होनेवाली रेप की घटनाओं में निन्यानवे प्रतिशत आरोपी परिचित पाए गए। भारत में अधिकतर बलात्कार के मामलों में परिवार, मित्र, पड़ोसी या किसी अन्य जानकार व्यक्ति का शामिल होना पाया गया है। पिछले साल की तुलना में महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनाओं में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एनसीआरबी रिपोर्ट के जारी आंकड़े दिखाते हैं कि भारत में महिलाओं के ख़िलाफ़ बलात्कार, यौन हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं। इसमें बड़ा आंकड़ा महिला के ख़िलाफ़ बलात्कार की घटना करने वाला उसका परिचित या संबंधी से जुड़ा है जिसे वह पहले से जानती है। ये आंकड़े उस बात को गलत साबित करता है जो यह कहती है कि महिलाएं अपने घर और अपनों के बीच सबसे ज्यादा सुरक्षित हैं। पार्टनर या मित्र के द्वारा रेप के केस में राजस्थान सबसे ऊपर है। राज्य में एक हज़ार सात सौ से अधिक मामले दर्ज किए गए है जिनमें महिला के परिचित ने उसके साथ रेप किया। अगर बात साल दो हज़ार बीस की एनसीआरबी की रिपोर्ट की करें तो उसमें भी राजस्थान में एक हज़ार पाँच सौ इकतीस रेप केस दर्ज किए गए थे जिनमें आरोपी लिव इन पार्टनर, पूर्व पति या मित्र शामिल था। पिछले साल की रिपोर्ट के अनुसार महिला के परिचित द्वारा बलात्कार के छब्बीस,आठ सौ आठ मामले दर्ज किए गए थे। पिछले वर्ष की रिपोर्ट के अनुसार परिचित द्वारा बलात्कार के पचानवे प्रतिशत मामले दर्ज किए गए थे। किसी परिचित द्वारा बलात्कार के दर्ज मामलों में राजस्थान सबसे ऊपर है। पश्चिम बंगाल केवल ऐसा राज्य है जहां जानकार रेप करने वाली की दर नब्बे प्रतिशत से नीचे है। इसके अलावा देश के सभी राज्यों में यह दर नब्बे और एक सौ प्रतिशत तक है। भारतीय महिलाएं सबसे ज्यादा घर में अपने करीबियों के बीच असुरक्षित है इस बात पर मुहर लगाने के लिए सरकार द्वारा जारी दूसरा डेटा भी यही कहता है। नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-पाँच के अनुसार भी अधिकतर भारतीय महिलाएं अपनी शादी में यौन हिंसा का सामना करती हैं। द हिंदू बिजनेस लाइन में छपी ख़बर के मुताबिक़ अट्ठारह-उनचास आयुवर्ग की महिलाओं नें अपने पति द्वारा यौन हिंसा होने की बात स्वीकारी है। इस आयुवर्ग की तिरासी प्रतिशत महिलाओं ने पति द्वारा यौन हिंसा की रिपोर्ट की है। सर्वे में शामिल बयासी प्रतिशत महिलाओं ने अपने पति को ही अपने साथ होने वाली हिंसा का अपराधी बताया है। सर्वे में तेरह प्रतिशत रिपोर्ट पूर्व पति द्वारा यौन हिंसा के केस भी दर्ज किए गए हैं। भारतीय महिलाएं सबसे ज्यादा घर में अपने करीबियों के बीच असुरक्षित है इस बात पर मुहर लगाने के लिए सरकार द्वारा जारी दूसरा डेटा भी यही कहता है। नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-पाँच के अनुसार भी अधिकतर भारतीय महिलाएं अपनी शादी में यौन हिंसा का सामना करती हैं। सरकार द्वारा जारी ये आंकड़े महिलाओं के साथ रिश्ते और प्यार में होने वाली उस हिंसा को दिखाते हैं जिस पर चर्चा करने से ही भारतीय पुरुषों के बीच हंगामा मच जाता है। यौन हिंसा और मैरिटल रेप जैसी मुद्दों पर बात न करने वाले पुरुषवादी समाज के लिए भले ही यह आंकड़े मायने न रखते हो लेकिन एक राष्ट्र के तौर पर भारत में महिलाओं की क्या स्थिति है उसे साफ-साफ जाहिर करता है। लैंगिक असमानता और सरकार के लिए महिलाओं की सुरक्षा के लिए बड़े वादे किए जा रहे है बावजूद इसके तस्वीर बदल नहीं रही है।
आते हैं। फिर हज़रत मलकुल-मौत आकर उसके सिरहाने बैठ जाते हैं और फ़रमाते हैं- ऐ इत्मीनान वाली रूह! अल्लाह की मग़फ़रत और रज़ामन्दी की तरफ़ चल । यह सुनते ही वह रूह उस बदन से ऐसे निकल जाती है जैसे मश्क के मुँह से पानी का क़तरा टपक जाए। उसी वक्त पलक झपकने के बराबर की देर में वे जन्नती फरिश्ते उस पाक रूह को अपने हाथों में ले लेते हैं और जन्नती कफ़न और जन्नती खुशबुओं में रख लेते । उसमें से ऐसी उम्दा और बेहतरीन खुशबू निकलती है कि कभी दुनिया वालों ने न सूँघी हो । अब ये उसे लेकर आसमान पर चढ़ते हैं। फरिश्तों की जो जमाअत उन्हें मिलती है वह पूछती है कि यह पाक रूह किसकी है? ये उसका बेहतर से बेहतर नाम जो दुनिया में मशहूर था, वह लेकर कहते हैं कि कुँला की, यहाँ तक कि दुनिया वाले आसमान तक पहुँच जाते हैं। दरवाज़ा खुलवाकर ऊपर चढ़ते हैं, यहाँ से उसके साथ दूसरे आसमान तक पहुँचाने के लिए फ़रिश्तों की और बड़ी जमाअत हो जाती है । इसी तरह सातवें आसमान तक पहुँचते हैं। अल्लाह जल्ल शानुहू फ़रमाता है मेरे इस बन्दे की किताब इल्लिय्यीन में रख लो और इसे ज़मीन की तरफ लौटा दो। मैंने इन्हें उसी से पैदा किया है, उसी में लौटाऊँगा और उसी से दोबारा निकालूँगा । पस वह रूह लौटा दी जाती है। वहीं उसके पास दो फरिश्ते आते हैं, उसे बैठाते हैं और उससे पूछते हैं कि तेरा रब कौन है? वह जवाब देता है कि मेरा रब अल्लाह है । फिर पूछते हैं कि तेरा दीन क्या है? वह कहता है मेरा दीन इस्लाम है। फिर पूछते हैं कि वह शख़्स जो तुम में भेजे गए वे कौन थे? वह कहता है वह रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम थे । फरिश्ते उससे मालूम करते हैं कि तुझे कैसे मालूम हुआ? जवाब देता है कि । मैंने खुदा की किताब पढ़ी, उस पर ईमान लाया और उसे सच्ची मानी । वहीं आसमान से एक आवाज़ देने वाला आवाज़ करता है कि मेरे बन्दा सच्चा है, इसके लिए जन्नत का फर्श बिछा दो और इसे जन्नती - लिबास पहना दो, और इसके लिए जन्नत का दरवाज़ा खोल दो । पस उसके पास जन्नत की तरोताज़गी और उसकी खुशबू और वहाँ की हवा आती रहती है। उसकी कब्र खोल दी जाती है, जहाँ तक उसकी नज़र पहुँचती है उसे कुशादगी ही कुशादगी नज़र आती है। उसके पास एक बहुत ही हसीन व ख़ूबसूरत शख़्स शानदार लिबास पहने हुए खुशबू लगाये हुए आता है और उससे कहता है कि खुश हो, यही वह दिन है जिसका तुझसे वादा किया जाता था । यह उससे पूछता है कि तू कौन है ? तेरे चेहरे से भलाई पाई जाती है? वह जवाब देता है कि मैं तेरा नेक अमल हूँ । अब तो मोमिन आरज़ू करने लगता है कि खुदा करे कियामत आज ही कायम हो जाए ताकि मैं जन्नत में पहुँचकर अपने माँ बाप, अपने घर वालों और बाल-बच्चों को पा लूँ। और काफिर की जब दुनिया की आखिरी घड़ी होती है तो उसके पास काले चेहरे वाले फरिश्ते आसमान से आते हैं। उनके साथ टाट होता है, उसकी निगाह तक उसे यही नज़र आते हैं। फिर मलकुल् मौत आकर उसके सिरहाने बैठ जाते हैं और फ़रमाते हैं- ऐ ख़बीस रूह ! अल्लाह की नाराज़गी और उसके ग़ज़ब की तरफ चल । यह सुनकर वह रूह बदन में छुपने लगती है जिसे मलकुल-मौत ( मौत का फ़रिश्ता ) जबरन घसीटकर निकालते हैं। उसी वक्त वे फरिश्ते उनके हाथ से एक आँख झपकने में ले लेते हैं, उसे जहन्नमी टाट में लपेट लेते हैं और उससे बहुत ही सड़ी हुई बू निकलती है। ये उसे लेकर चढ़ने लगते हैं। फ़रिश्तों का जो गिरोह मिलता है इनसे पूछता है कि यह नापाक रूह किसकी है? ये उसका जो सबसे बुरा नाम दुनिया में था उन्हें बतलाते हैं। फिर आसमान का दरवाज़ा उसके लिए खुलवाना चाहते हैं मगर खोला
आते हैं। फिर हज़रत मलकुल-मौत आकर उसके सिरहाने बैठ जाते हैं और फ़रमाते हैं- ऐ इत्मीनान वाली रूह! अल्लाह की मग़फ़रत और रज़ामन्दी की तरफ़ चल । यह सुनते ही वह रूह उस बदन से ऐसे निकल जाती है जैसे मश्क के मुँह से पानी का क़तरा टपक जाए। उसी वक्त पलक झपकने के बराबर की देर में वे जन्नती फरिश्ते उस पाक रूह को अपने हाथों में ले लेते हैं और जन्नती कफ़न और जन्नती खुशबुओं में रख लेते । उसमें से ऐसी उम्दा और बेहतरीन खुशबू निकलती है कि कभी दुनिया वालों ने न सूँघी हो । अब ये उसे लेकर आसमान पर चढ़ते हैं। फरिश्तों की जो जमाअत उन्हें मिलती है वह पूछती है कि यह पाक रूह किसकी है? ये उसका बेहतर से बेहतर नाम जो दुनिया में मशहूर था, वह लेकर कहते हैं कि कुँला की, यहाँ तक कि दुनिया वाले आसमान तक पहुँच जाते हैं। दरवाज़ा खुलवाकर ऊपर चढ़ते हैं, यहाँ से उसके साथ दूसरे आसमान तक पहुँचाने के लिए फ़रिश्तों की और बड़ी जमाअत हो जाती है । इसी तरह सातवें आसमान तक पहुँचते हैं। अल्लाह जल्ल शानुहू फ़रमाता है मेरे इस बन्दे की किताब इल्लिय्यीन में रख लो और इसे ज़मीन की तरफ लौटा दो। मैंने इन्हें उसी से पैदा किया है, उसी में लौटाऊँगा और उसी से दोबारा निकालूँगा । पस वह रूह लौटा दी जाती है। वहीं उसके पास दो फरिश्ते आते हैं, उसे बैठाते हैं और उससे पूछते हैं कि तेरा रब कौन है? वह जवाब देता है कि मेरा रब अल्लाह है । फिर पूछते हैं कि तेरा दीन क्या है? वह कहता है मेरा दीन इस्लाम है। फिर पूछते हैं कि वह शख़्स जो तुम में भेजे गए वे कौन थे? वह कहता है वह रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम थे । फरिश्ते उससे मालूम करते हैं कि तुझे कैसे मालूम हुआ? जवाब देता है कि । मैंने खुदा की किताब पढ़ी, उस पर ईमान लाया और उसे सच्ची मानी । वहीं आसमान से एक आवाज़ देने वाला आवाज़ करता है कि मेरे बन्दा सच्चा है, इसके लिए जन्नत का फर्श बिछा दो और इसे जन्नती - लिबास पहना दो, और इसके लिए जन्नत का दरवाज़ा खोल दो । पस उसके पास जन्नत की तरोताज़गी और उसकी खुशबू और वहाँ की हवा आती रहती है। उसकी कब्र खोल दी जाती है, जहाँ तक उसकी नज़र पहुँचती है उसे कुशादगी ही कुशादगी नज़र आती है। उसके पास एक बहुत ही हसीन व ख़ूबसूरत शख़्स शानदार लिबास पहने हुए खुशबू लगाये हुए आता है और उससे कहता है कि खुश हो, यही वह दिन है जिसका तुझसे वादा किया जाता था । यह उससे पूछता है कि तू कौन है ? तेरे चेहरे से भलाई पाई जाती है? वह जवाब देता है कि मैं तेरा नेक अमल हूँ । अब तो मोमिन आरज़ू करने लगता है कि खुदा करे कियामत आज ही कायम हो जाए ताकि मैं जन्नत में पहुँचकर अपने माँ बाप, अपने घर वालों और बाल-बच्चों को पा लूँ। और काफिर की जब दुनिया की आखिरी घड़ी होती है तो उसके पास काले चेहरे वाले फरिश्ते आसमान से आते हैं। उनके साथ टाट होता है, उसकी निगाह तक उसे यही नज़र आते हैं। फिर मलकुल् मौत आकर उसके सिरहाने बैठ जाते हैं और फ़रमाते हैं- ऐ ख़बीस रूह ! अल्लाह की नाराज़गी और उसके ग़ज़ब की तरफ चल । यह सुनकर वह रूह बदन में छुपने लगती है जिसे मलकुल-मौत जबरन घसीटकर निकालते हैं। उसी वक्त वे फरिश्ते उनके हाथ से एक आँख झपकने में ले लेते हैं, उसे जहन्नमी टाट में लपेट लेते हैं और उससे बहुत ही सड़ी हुई बू निकलती है। ये उसे लेकर चढ़ने लगते हैं। फ़रिश्तों का जो गिरोह मिलता है इनसे पूछता है कि यह नापाक रूह किसकी है? ये उसका जो सबसे बुरा नाम दुनिया में था उन्हें बतलाते हैं। फिर आसमान का दरवाज़ा उसके लिए खुलवाना चाहते हैं मगर खोला
Yeh Rishta Kya Kehlata Hai Written Update: 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' की कहानी अभीर के ईद-गिर्द घूम रही है। एक तरफ अभिमन्यु, अभीर के आने से खुश। दूसरी तरफ अक्षरा, अभीर के न होने से दुखी है। टीवी सीरियल 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' में दिखाया जाएगा कि कस्टडी केस के बाद कोई खुश नहीं रह पाएगा। न अभिमन्यु अपने बेटे के साथ खुलकर जी पाएगा। न अक्षरा, अभीर के बिना रह पाएगी। अक्षरा तो इन सब का दोष कान्हा जी पर डाल देगी। वह सबके सामने इस बात का ऐलान करेगी कि अब वह कभी भी कान्हा जी की पूजा नहीं करेगी। पढ़िए आज टेलीकास्ट होने वाले एपिसोड का रिटन अपडेट। एपिसोड की शुरुआत में दिखाया जाएगा कि हिचकी से परेशान अभीर सो नहीं पाएगा। वह अपने रूम से भागकर नीचे चला आएगा। अभीर को परेशान देख अभिमन्यु भी परेशान हो जाएगा। मंजरी कहेगी, 'इसकी हिचकी तो रुक ही नहीं रही है। इसे हॉस्पिटल लेकर जाना पड़ेगा'। अभिमन्यु, मंजरी की बात सुनकर अभीर को हॉस्पिटल लेकर जाने के लिए तैयार होगा। लेकिन तभी ही अक्षरा बिड़ला हाउस आ पहुंचेगी। अक्षरा को देखकर अभीर की हिचकी बंद हो जाएगी। अभीर को लगेगा की अक्षरा उसे लेने आई है। लेकिन अक्षरा, मंजरी को बताएगी कि वह यहां सिर्फ अभीर का तौहर देने आई है। अभीर भड़क जाएगा और तौहर लिए बिना अपने कमरे में चला जाएगा। अक्षरा के पीछे-पीछे अभिनव भी बिड़ला हाउस पहुंचेगा। वह अभीर को ढूंढने लगेगा। अभिनव को बुरा न लगे इसलिए अक्षरा कह देगी कि अभीर सो गया है। अभिनव बिड़ला परिवार से माफी मांगेगा। लेकिन अभिमन्यु, अभिनव की माफी स्वीकार नहीं करेगा। वह कहेगा, 'आप दोनों कभी भी अभीर से मिलने यहां आ सकते हैं'। वहीं, आरोही अक्षरा को समझाएगी। वह कहेगी, 'अभी तक ये बदलाव हम ही स्वीकार नहीं कर पाए, तो अभीर बच्चा है और उसे समय चाहिए। इसके बाद अक्षरा, अभीर का तौहर देकर चली जाएगी। अभीर खिड़की से अपने मां और पापा को देखकर खूब रोएगा'। अक्षरा के चले जाने के बाद आरोही, अभिमन्यु के पास जाएगी। वह अभिमन्यु को समझाएगी कि अभीर के लिए ये सब बहुत मुश्किल है। वह कहेगी, 'अभीर के मन को उसके सामान से थोड़ा आराम मिलेगा लेकिन, इससे उसका दर्द कम नहीं होगा। जब मां-बाप का तलाक होता है और बच्चे को उन दोनों में से किसी एक को चुनना पड़ता है। तब उसके दिल पर क्या गुजरती है ये कोई सोच भी नहीं सकता। यहां तो अभीर को मां और बाप दोनों को छोड़कर यहां आना पड़ा है। सोचो वह कितने बड़े ट्रॉमा में होगा। जैसे-जैसे अभीर को चीजें समझ में आने लगेंगी तुम उसके लिए बस वो इंसान बनकर रह जाओगे, जिसने उसे उसके मां पापा से अलग किया। ' अभिमन्यु, आरोही की बातें सुनकर परेशान हो जाएगा। वह अभीर के पास जाएगा और उसके ऊपर उसका तौहर डाल देगा। अभिमन्यु के जाते ही अभीर एक बार फिर रोना शुरू कर देगा। वहीं दूसरी तरफ अक्षरा, अभीर की गैरमौजूदगी में परेशान हो जाएगी। अभिनव उसे अभीर के पुराने किस्से सुनाकर संभालने की कोशिश करेगा। अगले दिन गोयनका हाउस में मिमी, मुस्कान को श्रीकृष्ण की आरती करने के लिए कहेगी। लेकिन, वह अक्षरा को पूजा करने का मौका देगी। हालांकि, अक्षरा कान्हा जी की पूजा करने से साफ इनकार कर देगी।
Yeh Rishta Kya Kehlata Hai Written Update: 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' की कहानी अभीर के ईद-गिर्द घूम रही है। एक तरफ अभिमन्यु, अभीर के आने से खुश। दूसरी तरफ अक्षरा, अभीर के न होने से दुखी है। टीवी सीरियल 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' में दिखाया जाएगा कि कस्टडी केस के बाद कोई खुश नहीं रह पाएगा। न अभिमन्यु अपने बेटे के साथ खुलकर जी पाएगा। न अक्षरा, अभीर के बिना रह पाएगी। अक्षरा तो इन सब का दोष कान्हा जी पर डाल देगी। वह सबके सामने इस बात का ऐलान करेगी कि अब वह कभी भी कान्हा जी की पूजा नहीं करेगी। पढ़िए आज टेलीकास्ट होने वाले एपिसोड का रिटन अपडेट। एपिसोड की शुरुआत में दिखाया जाएगा कि हिचकी से परेशान अभीर सो नहीं पाएगा। वह अपने रूम से भागकर नीचे चला आएगा। अभीर को परेशान देख अभिमन्यु भी परेशान हो जाएगा। मंजरी कहेगी, 'इसकी हिचकी तो रुक ही नहीं रही है। इसे हॉस्पिटल लेकर जाना पड़ेगा'। अभिमन्यु, मंजरी की बात सुनकर अभीर को हॉस्पिटल लेकर जाने के लिए तैयार होगा। लेकिन तभी ही अक्षरा बिड़ला हाउस आ पहुंचेगी। अक्षरा को देखकर अभीर की हिचकी बंद हो जाएगी। अभीर को लगेगा की अक्षरा उसे लेने आई है। लेकिन अक्षरा, मंजरी को बताएगी कि वह यहां सिर्फ अभीर का तौहर देने आई है। अभीर भड़क जाएगा और तौहर लिए बिना अपने कमरे में चला जाएगा। अक्षरा के पीछे-पीछे अभिनव भी बिड़ला हाउस पहुंचेगा। वह अभीर को ढूंढने लगेगा। अभिनव को बुरा न लगे इसलिए अक्षरा कह देगी कि अभीर सो गया है। अभिनव बिड़ला परिवार से माफी मांगेगा। लेकिन अभिमन्यु, अभिनव की माफी स्वीकार नहीं करेगा। वह कहेगा, 'आप दोनों कभी भी अभीर से मिलने यहां आ सकते हैं'। वहीं, आरोही अक्षरा को समझाएगी। वह कहेगी, 'अभी तक ये बदलाव हम ही स्वीकार नहीं कर पाए, तो अभीर बच्चा है और उसे समय चाहिए। इसके बाद अक्षरा, अभीर का तौहर देकर चली जाएगी। अभीर खिड़की से अपने मां और पापा को देखकर खूब रोएगा'। अक्षरा के चले जाने के बाद आरोही, अभिमन्यु के पास जाएगी। वह अभिमन्यु को समझाएगी कि अभीर के लिए ये सब बहुत मुश्किल है। वह कहेगी, 'अभीर के मन को उसके सामान से थोड़ा आराम मिलेगा लेकिन, इससे उसका दर्द कम नहीं होगा। जब मां-बाप का तलाक होता है और बच्चे को उन दोनों में से किसी एक को चुनना पड़ता है। तब उसके दिल पर क्या गुजरती है ये कोई सोच भी नहीं सकता। यहां तो अभीर को मां और बाप दोनों को छोड़कर यहां आना पड़ा है। सोचो वह कितने बड़े ट्रॉमा में होगा। जैसे-जैसे अभीर को चीजें समझ में आने लगेंगी तुम उसके लिए बस वो इंसान बनकर रह जाओगे, जिसने उसे उसके मां पापा से अलग किया। ' अभिमन्यु, आरोही की बातें सुनकर परेशान हो जाएगा। वह अभीर के पास जाएगा और उसके ऊपर उसका तौहर डाल देगा। अभिमन्यु के जाते ही अभीर एक बार फिर रोना शुरू कर देगा। वहीं दूसरी तरफ अक्षरा, अभीर की गैरमौजूदगी में परेशान हो जाएगी। अभिनव उसे अभीर के पुराने किस्से सुनाकर संभालने की कोशिश करेगा। अगले दिन गोयनका हाउस में मिमी, मुस्कान को श्रीकृष्ण की आरती करने के लिए कहेगी। लेकिन, वह अक्षरा को पूजा करने का मौका देगी। हालांकि, अक्षरा कान्हा जी की पूजा करने से साफ इनकार कर देगी।
तत्रास्ति च नास्ति समं भंगस्यास्यैकघर्मता नियमात् । न पुनः प्रमाणमिव किल विरुद्धधर्मद्वयाधिरूढत्वम् ।।६८९।। अर्थः- - उन भंगोंमें 'स्यादस्ति नास्ति' यह एक साथ बोला हुआ भंग नियमसे एक धर्मवाला है । वह प्रमाणके समान नही कहा जा सकता क्योकि प्रमाण एक ही समयमे दो विरुद्ध धर्मोका मैत्रीभावसे प्रतिपादन करता है । उस प्रकार यह भंग विरुद्ध दो धर्मोका प्रतिपादन नही करता है किन्तु पहले दूसरे भगकी मिली हुई तीसरी ही अवस्थाका प्रतिपादन करता है इसलिये वह ज्ञान भी अशरूप ही है । अयमर्थ श्वार्थवशादथ च विवक्षावशाचदंशत्वम् । युगपदिदं कथ्यमानं क्रमाज्ज्ञेयं तथापि तत्स यथा ॥ ६९० ॥ अर्थ :- ऊपर कहे हुए कथनका यह आशय है कि प्रयोजनवश अथवा विवक्षावश युगपत् क्रमसे कहा हुआ जो भंग है वह अशरूप है इसलिये वह नय ही है । अस्ति स्वरूपसिद्धेर्नास्ति च पररूपसिद्ध्यभावाच । अपरस्योभयरूपादितस्ततः कथितमस्ति नास्तीति ।। ६९१ ।। अर्थ :- वस्तुमे निजरूपकी अपेक्षासे अस्तित्व है, यह प्रथम भग है । उसमे पर रूपकी अपेक्षासे नास्तित्व है, यह द्वितीय भग है । तथा स्वरूपकी अपेक्षा अस्तित्व पररूपकी अपेक्षासे नास्तित्व ऐसा तृतीय भङ्ग उभयरूपकी अपेक्षा अस्ति नास्ति रूप कहा गया है । अर्थात् (१) स्यादस्ति (२) स्यान्नास्ति ( ३ ) स्यादस्तिनास्ति । ये तीन भङ्ग स्वरूप, पररूप, स्वरूप पररूपकी, अपेक्षासे क्रमसे जान लेने चाहिये । प्रमाण का स्वरूप इन भङ्गोसे जुदा ही है - उक्तं प्रमाणदर्शनमस्ति स योयं हि नास्तिमानर्थः । भवतीदमुदाहरणं न कथञ्चिद्वै प्रमाणतोऽन्यत्र ।। ६९२ ।। : - प्रमाणका जो स्वरूप कहा गया है वह नयोसे जुदा ही है वह इस प्रकार है - जो पदार्थ अस्तिरूप है वही पदार्थ नास्तिरूप है । तृतीय भङ्गमे स्वरूपसे अस्तित्व श्रौर पररूपसे नास्तित्व क्रमसे कहा जाता है प्रमाणमे दोनो धर्मोका प्रतिपादन समकालमे प्रत्यभिज्ञानरूपसे कहा जाता है । जो अस्ति रूप है वही नास्ति रूप है, यह उदाहरण प्रमाणको छोडकर अन्यत्र किसी प्रकार भी नही मिल सकता है, अर्थात् नयो द्वारा ऐसा विवेचन नही किया जा सकता । नयोसे युगपत् ऐसा विवेचन क्यो नही हो सकता उसे ही स्पष्ट करते है -
तत्रास्ति च नास्ति समं भंगस्यास्यैकघर्मता नियमात् । न पुनः प्रमाणमिव किल विरुद्धधर्मद्वयाधिरूढत्वम् ।।छः सौ नवासी।। अर्थः- - उन भंगोंमें 'स्यादस्ति नास्ति' यह एक साथ बोला हुआ भंग नियमसे एक धर्मवाला है । वह प्रमाणके समान नही कहा जा सकता क्योकि प्रमाण एक ही समयमे दो विरुद्ध धर्मोका मैत्रीभावसे प्रतिपादन करता है । उस प्रकार यह भंग विरुद्ध दो धर्मोका प्रतिपादन नही करता है किन्तु पहले दूसरे भगकी मिली हुई तीसरी ही अवस्थाका प्रतिपादन करता है इसलिये वह ज्ञान भी अशरूप ही है । अयमर्थ श्वार्थवशादथ च विवक्षावशाचदंशत्वम् । युगपदिदं कथ्यमानं क्रमाज्ज्ञेयं तथापि तत्स यथा ॥ छः सौ नब्बे ॥ अर्थ :- ऊपर कहे हुए कथनका यह आशय है कि प्रयोजनवश अथवा विवक्षावश युगपत् क्रमसे कहा हुआ जो भंग है वह अशरूप है इसलिये वह नय ही है । अस्ति स्वरूपसिद्धेर्नास्ति च पररूपसिद्ध्यभावाच । अपरस्योभयरूपादितस्ततः कथितमस्ति नास्तीति ।। छः सौ इक्यानवे ।। अर्थ :- वस्तुमे निजरूपकी अपेक्षासे अस्तित्व है, यह प्रथम भग है । उसमे पर रूपकी अपेक्षासे नास्तित्व है, यह द्वितीय भग है । तथा स्वरूपकी अपेक्षा अस्तित्व पररूपकी अपेक्षासे नास्तित्व ऐसा तृतीय भङ्ग उभयरूपकी अपेक्षा अस्ति नास्ति रूप कहा गया है । अर्थात् स्यादस्ति स्यान्नास्ति स्यादस्तिनास्ति । ये तीन भङ्ग स्वरूप, पररूप, स्वरूप पररूपकी, अपेक्षासे क्रमसे जान लेने चाहिये । प्रमाण का स्वरूप इन भङ्गोसे जुदा ही है - उक्तं प्रमाणदर्शनमस्ति स योयं हि नास्तिमानर्थः । भवतीदमुदाहरणं न कथञ्चिद्वै प्रमाणतोऽन्यत्र ।। छः सौ बानवे ।। : - प्रमाणका जो स्वरूप कहा गया है वह नयोसे जुदा ही है वह इस प्रकार है - जो पदार्थ अस्तिरूप है वही पदार्थ नास्तिरूप है । तृतीय भङ्गमे स्वरूपसे अस्तित्व श्रौर पररूपसे नास्तित्व क्रमसे कहा जाता है प्रमाणमे दोनो धर्मोका प्रतिपादन समकालमे प्रत्यभिज्ञानरूपसे कहा जाता है । जो अस्ति रूप है वही नास्ति रूप है, यह उदाहरण प्रमाणको छोडकर अन्यत्र किसी प्रकार भी नही मिल सकता है, अर्थात् नयो द्वारा ऐसा विवेचन नही किया जा सकता । नयोसे युगपत् ऐसा विवेचन क्यो नही हो सकता उसे ही स्पष्ट करते है -
CM Yogi Cabinet Meeting: यूपी कैबिनेट की अहम बैठक खत्म हो गई है। कैबिनेट बैठक में निकाय चुनाव के अध्यादेश पर मुहर लग गई है। अगले 48 घंटे के भीतर अधिसूचना जारी हो सकती है। कुल 22 प्रस्तावों पर मुहर लगी। CM Yogi Cabinet Meeting: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास पर बुधवार (29 मार्च) शाम कैबिनेट की बैठक हुई। बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए। यूपी कैबिनेट की अहम बैठक खत्म होने के बाद ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा (A. K. Sharma) ने मीडिया को जानकारी दी। एके शर्मा ने बताया कैबिनेट बैठक (UP Cabinet Meeting) में यूपी निकाय चुनाव (UP Nikay Chunav 2023) के अध्यादेश पर मुहर लग गई है। अगले 48 घंटों के भीतर अधिसूचना जारी हो सकती है। योगी सरकार की कैबिनेट बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई। प्रेस वार्ता को प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने संबोधित किया। उन्होंने कहा केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम किया जा रहा है। निकाय चुनाव पर बैठक में क्या? कैबिनेट मीटिंग के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने यूपी नगर निकाय चुनाव के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा, निकाय चुनाव के मद्देनजर ओबीसी आरक्षण पर आयोग की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई। आयोग ने तय समय सीमा में अपनी रिपोर्ट सौंपी। जिसके बाद सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय आया है। योगी सरकार के मंत्री ने बताया आयोग की रिपोर्ट के मद्देनजर कुछ कानूनी संशोधन होंगे। नगर पालिका एवं नगर निगम अधिनियम में संशोधन किए जाएंगे। मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने बताया, अध्यादेश लाने को लेकर मंत्रिपरिषद में चर्चा हुई। चर्चा में ऑर्डिनेंस लाने का प्रस्ताव पास हुआ। जल्द ही नगर पालिका एवं नगर निगम अधिनियम संशोधन अध्यादेश आएगा। ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर पर खर्च होंगे 4786 Cr. कैबिनेट बैठक के बाद सरकार की ओर से प्रेस वार्ता में नगर विकास मंत्री एके शर्मा ने कहा कि, 'भारत सरकार की ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर (Green Energy Corridor) की योजना है। जिसके लिए एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। जिसकी कुल लागत 4786 करोड़ रुपए आएगी। 2172 किलोमीटर लंबी इस ट्रांसमिशन लाइन में 20 सब स्टेशन भी स्थापित होंगे। 4 हजार मेगावाट की परियोजना स्थापित किए जाने का प्रस्ताव पास हुआ। सभी प्रोजेक्ट बुंदेल खण्ड क्षेत्र में लगेंगे। जिसका 20 प्रतिशत लागत प्रदेश सरकार देगी जबकि 33 फीसदी केंद्र सरकार उठाएगी। 47 प्रतिशत रकम साझेदार कंपनी लगाएगी।
CM Yogi Cabinet Meeting: यूपी कैबिनेट की अहम बैठक खत्म हो गई है। कैबिनेट बैठक में निकाय चुनाव के अध्यादेश पर मुहर लग गई है। अगले अड़तालीस घंटाटे के भीतर अधिसूचना जारी हो सकती है। कुल बाईस प्रस्तावों पर मुहर लगी। CM Yogi Cabinet Meeting: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास पर बुधवार शाम कैबिनेट की बैठक हुई। बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए। यूपी कैबिनेट की अहम बैठक खत्म होने के बाद ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने मीडिया को जानकारी दी। एके शर्मा ने बताया कैबिनेट बैठक में यूपी निकाय चुनाव के अध्यादेश पर मुहर लग गई है। अगले अड़तालीस घंटाटों के भीतर अधिसूचना जारी हो सकती है। योगी सरकार की कैबिनेट बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई। प्रेस वार्ता को प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने संबोधित किया। उन्होंने कहा केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम किया जा रहा है। निकाय चुनाव पर बैठक में क्या? कैबिनेट मीटिंग के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने यूपी नगर निकाय चुनाव के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा, निकाय चुनाव के मद्देनजर ओबीसी आरक्षण पर आयोग की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई। आयोग ने तय समय सीमा में अपनी रिपोर्ट सौंपी। जिसके बाद सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय आया है। योगी सरकार के मंत्री ने बताया आयोग की रिपोर्ट के मद्देनजर कुछ कानूनी संशोधन होंगे। नगर पालिका एवं नगर निगम अधिनियम में संशोधन किए जाएंगे। मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने बताया, अध्यादेश लाने को लेकर मंत्रिपरिषद में चर्चा हुई। चर्चा में ऑर्डिनेंस लाने का प्रस्ताव पास हुआ। जल्द ही नगर पालिका एवं नगर निगम अधिनियम संशोधन अध्यादेश आएगा। ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर पर खर्च होंगे चार हज़ार सात सौ छियासी Cr. कैबिनेट बैठक के बाद सरकार की ओर से प्रेस वार्ता में नगर विकास मंत्री एके शर्मा ने कहा कि, 'भारत सरकार की ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर की योजना है। जिसके लिए एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। जिसकी कुल लागत चार हज़ार सात सौ छियासी करोड़ रुपए आएगी। दो हज़ार एक सौ बहत्तर किलोग्राममीटर लंबी इस ट्रांसमिशन लाइन में बीस सब स्टेशन भी स्थापित होंगे। चार हजार मेगावाट की परियोजना स्थापित किए जाने का प्रस्ताव पास हुआ। सभी प्रोजेक्ट बुंदेल खण्ड क्षेत्र में लगेंगे। जिसका बीस प्रतिशत लागत प्रदेश सरकार देगी जबकि तैंतीस फीसदी केंद्र सरकार उठाएगी। सैंतालीस प्रतिशत रकम साझेदार कंपनी लगाएगी।
फ़िलहाल भारत की अर्थव्यवस्था की गति काफी धीमी है मगर इसमें लगातार सुधार की सम्भावनाये है. उम्मीद की जा रही है कि मौजूदा वित्त वर्ष 2015-16 में देश कि आर्थिक विकास दर में सुधार होगा. और यह लगभग 7. 5 प्रतिशत रहेगी. ग्लोबल वित्तीय फार्म के प्रमुख मॉर्गन स्टैनली के द्वारा जारी एक रिपोर्ट में उन्होंने इस बात का पूरा भरोसा जताया है कि आर्थिक सुधार, पूंजीगत खर्च, निर्यात और शहरी खपत का सामान स्तर पर आने के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था में खासी मदद की सम्भावना है. और इस रिपोर्ट में ख़ास बात यह है कि इस दौरान सर्वजनिक खर्च ज्यादा होगा. और उम्मीद जताई जा रही है कि चालू वर्ष 2015-16 में GDP की वृद्धि दर में 7. 5 प्रतिशत सुधार हो जायेगा. और यह अगले वित्त वर्ष में 8. 1 प्रतिशत तक पहुंच सकता है. इस रिपोर्ट में आगे कहा गया कि महंगाई दर में भी अगले दो साल में 5 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है. हालाँकि बाहरी मांग और ग्रामीण खपत से सम्बंधित चिन्ताओ के चलते इस वृद्धि की दिशा में थोड़ी कमी हो सकती है.
फ़िलहाल भारत की अर्थव्यवस्था की गति काफी धीमी है मगर इसमें लगातार सुधार की सम्भावनाये है. उम्मीद की जा रही है कि मौजूदा वित्त वर्ष दो हज़ार पंद्रह-सोलह में देश कि आर्थिक विकास दर में सुधार होगा. और यह लगभग सात. पाँच प्रतिशत रहेगी. ग्लोबल वित्तीय फार्म के प्रमुख मॉर्गन स्टैनली के द्वारा जारी एक रिपोर्ट में उन्होंने इस बात का पूरा भरोसा जताया है कि आर्थिक सुधार, पूंजीगत खर्च, निर्यात और शहरी खपत का सामान स्तर पर आने के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था में खासी मदद की सम्भावना है. और इस रिपोर्ट में ख़ास बात यह है कि इस दौरान सर्वजनिक खर्च ज्यादा होगा. और उम्मीद जताई जा रही है कि चालू वर्ष दो हज़ार पंद्रह-सोलह में GDP की वृद्धि दर में सात. पाँच प्रतिशत सुधार हो जायेगा. और यह अगले वित्त वर्ष में आठ. एक प्रतिशत तक पहुंच सकता है. इस रिपोर्ट में आगे कहा गया कि महंगाई दर में भी अगले दो साल में पाँच प्रतिशत तक की कमी आ सकती है. हालाँकि बाहरी मांग और ग्रामीण खपत से सम्बंधित चिन्ताओ के चलते इस वृद्धि की दिशा में थोड़ी कमी हो सकती है.
साउथ सिनेमा के सुपरस्टार प्रभास अपनी नई फिल्म साहो को लेकर इन दिनों खूब चर्चा में चल रहे हैं. लगभग 350 करोड़ के बजट में बनी यह एक्शन थ्रिलर फिल्म 30 अगस्त को रिलीज की जाएगी. जबकि इसके अलावा वह अनुष्का शेट्टी के साथ रिलेशनशिप को लेकर भी इन दिनों खूब सुर्खियों में छाए हुए हैं. हाल ही में चर्चा थी कि प्रभास और अनुष्का लॉस एंजिलिस में एक शानदार घर की तलाश में हैं और इसके अलावा यह भी खबरें हैं कि प्रभास द्वारा अनुष्का के लिए साहो की स्पेशल स्क्रीनिंग की व्यवस्था भी की थी. जबकि अब अनुष्का के साथ रिलेशनशिप की खबरों पर प्रभास ने अपनी चुप्पी तोड़ी है और कहा है कि हम सिर्फ दोस्त हैं. हाल ही में एक खास बातचीत में प्रभास से अनुष्का के साथ रिलेशन को लेकर सवाल किया गया था. जहां इसके जवाब में प्रभास ने कहा है कि, "अनुष्का और मैं सिर्फ दोस्त हैं. हालाँकि अगर इससे ज्यादा हमारे बीच कुछ होता है, तो क्या पिछले 2 सालों में किसी ने हमें साथ देखा नहीं होता? " प्रभास ने आगे कहा कि, "यह सवाल मुझसे करण जौहर के शो में पूछा गया था. मैंने राजामौली और राणा दग्गुबाती को इसका जवाब देने दिया था. उन्होंनें वहां पर कहा था कि हमारे बीच ऐसा कुछ नहीं है. " साथ ही आपको बता दें इससे पहले एक इंटरव्यू के दौरान अनुष्का शेट्टी से प्रभास के में पूछा था और इस पर उन्होंने जवाब दिया था, प्रभास और मैं शादी नहीं कर रहे हैं. प्लीज बाहुबली और देवसेना की केमिस्ट्री से रियल लाइफ में कोई उम्मीद न रखें जाए. यह सिर्फ स्क्रीन के लिए ही था.
साउथ सिनेमा के सुपरस्टार प्रभास अपनी नई फिल्म साहो को लेकर इन दिनों खूब चर्चा में चल रहे हैं. लगभग तीन सौ पचास करोड़ के बजट में बनी यह एक्शन थ्रिलर फिल्म तीस अगस्त को रिलीज की जाएगी. जबकि इसके अलावा वह अनुष्का शेट्टी के साथ रिलेशनशिप को लेकर भी इन दिनों खूब सुर्खियों में छाए हुए हैं. हाल ही में चर्चा थी कि प्रभास और अनुष्का लॉस एंजिलिस में एक शानदार घर की तलाश में हैं और इसके अलावा यह भी खबरें हैं कि प्रभास द्वारा अनुष्का के लिए साहो की स्पेशल स्क्रीनिंग की व्यवस्था भी की थी. जबकि अब अनुष्का के साथ रिलेशनशिप की खबरों पर प्रभास ने अपनी चुप्पी तोड़ी है और कहा है कि हम सिर्फ दोस्त हैं. हाल ही में एक खास बातचीत में प्रभास से अनुष्का के साथ रिलेशन को लेकर सवाल किया गया था. जहां इसके जवाब में प्रभास ने कहा है कि, "अनुष्का और मैं सिर्फ दोस्त हैं. हालाँकि अगर इससे ज्यादा हमारे बीच कुछ होता है, तो क्या पिछले दो सालों में किसी ने हमें साथ देखा नहीं होता? " प्रभास ने आगे कहा कि, "यह सवाल मुझसे करण जौहर के शो में पूछा गया था. मैंने राजामौली और राणा दग्गुबाती को इसका जवाब देने दिया था. उन्होंनें वहां पर कहा था कि हमारे बीच ऐसा कुछ नहीं है. " साथ ही आपको बता दें इससे पहले एक इंटरव्यू के दौरान अनुष्का शेट्टी से प्रभास के में पूछा था और इस पर उन्होंने जवाब दिया था, प्रभास और मैं शादी नहीं कर रहे हैं. प्लीज बाहुबली और देवसेना की केमिस्ट्री से रियल लाइफ में कोई उम्मीद न रखें जाए. यह सिर्फ स्क्रीन के लिए ही था.
संपादकीय 'पुलिस का चेहरा' पढ़ा। आम आदमी की राय पुलिस के बारे में नकारात्मक ही है। लेकिन पुलिस का आम आदमी से ऐसा व्यवहार क्यों होता है, यह भी जानने की आवश्यकता है। एक सिपाही का कोई ड्यूटी टाइम नहीं होता। 26 जनवरी, 15 अगस्त, 2 अक्तूबर जैसे राष्ट्रीय त्योहार हों या होली, दिवाली, ईद जैसे धार्मिक त्योहार हों, पुलिस वाले हमेशा सड़कों पर ड्यूटी कर रहे होते हैं। शायद ही कोई पुलिस वाला इन त्योहारों को अपने परिवार के साथ मना पाता हो। एक सिपाही के बच्चे का जन्मदिन हो या बहन की शादी, उसे छुट्टी कम ही मिलती है। ये कुछ वजह हैं, जिनके कारण पुलिस वाले तनाव में रहते हैं। लेकिन मेरे यह कहने का मतलब यह नहीं है कि मध्यप्रदेश में जो हुआ वह ठीक था। उन पुलिसकर्मियों को सजा अवश्य मिलनी चाहिए, लेकिन पुलिस वाले किन तनावपूर्ण हालात में ड्यूटी करते हैं उस पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। ड्यूटी और जिम्मेदारियों के बीच उनकी संवेदनात्मक जरूरतों पर गौर किया जाना चाहिए कि आखिर मनोवैज्ञानिक उथल-पुथल के बीच कैसे वे अमानवीय होते चले जाते हैं। उन्हें मानवीय बनाए रखने के लिए परिस्थितियां भी निर्मित की जानी चाहिए और प्रशिक्षण भी दिया जाना चाहिए।
संपादकीय 'पुलिस का चेहरा' पढ़ा। आम आदमी की राय पुलिस के बारे में नकारात्मक ही है। लेकिन पुलिस का आम आदमी से ऐसा व्यवहार क्यों होता है, यह भी जानने की आवश्यकता है। एक सिपाही का कोई ड्यूटी टाइम नहीं होता। छब्बीस जनवरी, पंद्रह अगस्त, दो अक्तूबर जैसे राष्ट्रीय त्योहार हों या होली, दिवाली, ईद जैसे धार्मिक त्योहार हों, पुलिस वाले हमेशा सड़कों पर ड्यूटी कर रहे होते हैं। शायद ही कोई पुलिस वाला इन त्योहारों को अपने परिवार के साथ मना पाता हो। एक सिपाही के बच्चे का जन्मदिन हो या बहन की शादी, उसे छुट्टी कम ही मिलती है। ये कुछ वजह हैं, जिनके कारण पुलिस वाले तनाव में रहते हैं। लेकिन मेरे यह कहने का मतलब यह नहीं है कि मध्यप्रदेश में जो हुआ वह ठीक था। उन पुलिसकर्मियों को सजा अवश्य मिलनी चाहिए, लेकिन पुलिस वाले किन तनावपूर्ण हालात में ड्यूटी करते हैं उस पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। ड्यूटी और जिम्मेदारियों के बीच उनकी संवेदनात्मक जरूरतों पर गौर किया जाना चाहिए कि आखिर मनोवैज्ञानिक उथल-पुथल के बीच कैसे वे अमानवीय होते चले जाते हैं। उन्हें मानवीय बनाए रखने के लिए परिस्थितियां भी निर्मित की जानी चाहिए और प्रशिक्षण भी दिया जाना चाहिए।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
राजस्थान में कोरोनाकाल की वजह से 2 साल बाद श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। जयपुर, उदयपुर, राजसमंद समेत प्रदेशभर के कृष्ण मंदिरो में भक्तों का तांता लगा रहा। इस दौरान जयपुर के गोविंद देव जी मंदिर पारंपरिक रीति-रिवाजों से श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया। वहीं, नाथद्वारा में 21 तोपों की सलामी देकर भगवान के जन्म पर खुशी का इजहार किया गया। इसके साथ ही कृष्ण भक्तों ने दही-हांडी फोड़ अपने आराध्य के जन्मदिन की खुशियां मनाईं। उधर, नाथद्वारा में शनिवार को नंद उत्सव मनाया जा रहा है। जन्माष्टमी के मौके पर गोविंद देव जी मंदिर में भक्तों का सैलाब उमड़ गया। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार गोविंद देवजी जयपुर में रजिस्टर्ड ठिकानेदार हैं। इसकी गवाही सरकारी रिकॉर्ड भी देते हैं। श्री गोविंद देवजी मंदिर ठिकाना के नाम से राजस्थान सरकार के देवस्थान विभाग में बाकायदा रजिस्टर्ड है। नाथद्वारा में देशभर से भक्त श्रीनाथ जी के दर्शन करने पहुंचे थे। इस दौरान 21 तोपों की सलामी देकर जन्माष्टमी का पर्व मनाया गया। उदयपुर के जगदीश मंदिर के साथ ही इस्कॉन मंदिर में भी विशेष श्रृंगार किया गया। इस दौरान देशी के साथ बड़ी संख्या में विदेशी सैलानी भी भगवान के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे। जन्माष्टमी के शुभ मौके पर जैसलमेर में गांधी कॉलोनी के आदर्श विद्या मंदिर में सजी महाभारत की झांकी। इसमें भगवान कृष्ण अर्जुन को उपदेश दे रहे हैं। जन्माष्टमी के मौके पर जयपुर के आराध्य गोविंद देव जी मंदिर में कृष्ण प्रतिमा का पंचामृत से अभिषेक किया गया। सिर्फ जन्माष्टमी पर ही गोविंद देव जी का यह स्वरूप नजर आता है। पाली के गोपीनाथ मंदिर को सीकर के खाटू श्याम मंदिर की प्रतिमा की तर्ज पर मोर पंख से सजाया गया। भगवान के इस अनोखे रूप को देखने के लिए बड़ी तादाद में भक्त दर्शन करने मंदिर पहुंचे। उदयपुर के जगदीश चौक में जन्माष्टमी पर मटकी फोड़ प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। इसके लिए कुल 5 राउंड हुए। अंतिम राउंड में जगदीश चौक के ओम साई राम ग्रुप ने मटकी फोड़ी। उन्हें 31 हजार रुपए का नकद पुरस्कार दिया गया। दौसा के गिरिराज धरण मंदिर में नाथद्वारा की तर्ज पर भगवान श्रीनाथ की प्रतिमा भी स्थापित की गई। कोटा के तलवंडी के राधा-कृष्ण मंदिर में भगवान का विशेष शृंगार किया गया है। इसे देखने के लिए शाम से ही भक्तों की भीड़ उमड़नी शुरू हो गई थी। अजमेर नगर निगम ने पहली बार आना सागर पर कृष्ण महोत्सव कराया। इसमें भगवान कृष्ण के जीवन पर आधारित रंगारंग प्रस्तुति दी गई। इसे देख सभी मंत्रमुग्ध हो गए। भरतपुर के राधा रमण मंदिर में जन्माष्टमी के मौके पर भगवान श्री कृष्ण का दही से अभिषेक किया गया। बीकानेर में जन्माष्टमी के मौके पर कृष्ण मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ रही। इस दौरान लोगों ने अपने बच्चों को भी कृष्ण के रूप में तैयार किया। राजस्थान सरकार के जलदाय मंत्री महेश जोशी ने जयपुर के गोविंद देव जी मंदिर में भजनों पर जमकर डांस किया। इस दौरान जोशी ने गोविंद देव जी के भजन भी गाए। भारत में वल्लभ संप्रदाय की प्रधान पीठ श्रीनाथ जी मंदिर की ओर से जन्माष्टमी के मौके पर नाथद्वारा में शोभायात्रा निकाली गई। इस दौरान आकर्षक झांकियों के साथ हथियार बंद जवानों ने भगवान के सम्मान में फ्लैग मार्च निकाला। बांसवाड़ा के खमेरा में मुंबई की तर्ज पर मटकी फोड़ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे। 4 युवा मंडल ने 9 बार मटकी फोड़ने के प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिली। चित्तौड़गढ़ के सांवलिया सेठ मंदिर में दीपावली जैसी रोशनी की गई। इस दौरान देशभर से भक्त सांवलिया जी के दर्शन करने पहुंचे। जैसलमेर के मंदिर पैलेस स्थित 250 साल पुराने बांके बिहारी व गिरधारी जी के मंदिर में कान्हा जी ने जन्म लिया। कोटा के राधा कृष्ण मंदिर में सजी झांकी। कान्हा के जन्म के साथ ही गूंजे जयकारे। राजस्थान बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने भी गोविंददेवजी के दर्शन किए।
राजस्थान में कोरोनाकाल की वजह से दो साल बाद श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। जयपुर, उदयपुर, राजसमंद समेत प्रदेशभर के कृष्ण मंदिरो में भक्तों का तांता लगा रहा। इस दौरान जयपुर के गोविंद देव जी मंदिर पारंपरिक रीति-रिवाजों से श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया। वहीं, नाथद्वारा में इक्कीस तोपों की सलामी देकर भगवान के जन्म पर खुशी का इजहार किया गया। इसके साथ ही कृष्ण भक्तों ने दही-हांडी फोड़ अपने आराध्य के जन्मदिन की खुशियां मनाईं। उधर, नाथद्वारा में शनिवार को नंद उत्सव मनाया जा रहा है। जन्माष्टमी के मौके पर गोविंद देव जी मंदिर में भक्तों का सैलाब उमड़ गया। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार गोविंद देवजी जयपुर में रजिस्टर्ड ठिकानेदार हैं। इसकी गवाही सरकारी रिकॉर्ड भी देते हैं। श्री गोविंद देवजी मंदिर ठिकाना के नाम से राजस्थान सरकार के देवस्थान विभाग में बाकायदा रजिस्टर्ड है। नाथद्वारा में देशभर से भक्त श्रीनाथ जी के दर्शन करने पहुंचे थे। इस दौरान इक्कीस तोपों की सलामी देकर जन्माष्टमी का पर्व मनाया गया। उदयपुर के जगदीश मंदिर के साथ ही इस्कॉन मंदिर में भी विशेष श्रृंगार किया गया। इस दौरान देशी के साथ बड़ी संख्या में विदेशी सैलानी भी भगवान के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे। जन्माष्टमी के शुभ मौके पर जैसलमेर में गांधी कॉलोनी के आदर्श विद्या मंदिर में सजी महाभारत की झांकी। इसमें भगवान कृष्ण अर्जुन को उपदेश दे रहे हैं। जन्माष्टमी के मौके पर जयपुर के आराध्य गोविंद देव जी मंदिर में कृष्ण प्रतिमा का पंचामृत से अभिषेक किया गया। सिर्फ जन्माष्टमी पर ही गोविंद देव जी का यह स्वरूप नजर आता है। पाली के गोपीनाथ मंदिर को सीकर के खाटू श्याम मंदिर की प्रतिमा की तर्ज पर मोर पंख से सजाया गया। भगवान के इस अनोखे रूप को देखने के लिए बड़ी तादाद में भक्त दर्शन करने मंदिर पहुंचे। उदयपुर के जगदीश चौक में जन्माष्टमी पर मटकी फोड़ प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। इसके लिए कुल पाँच राउंड हुए। अंतिम राउंड में जगदीश चौक के ओम साई राम ग्रुप ने मटकी फोड़ी। उन्हें इकतीस हजार रुपए का नकद पुरस्कार दिया गया। दौसा के गिरिराज धरण मंदिर में नाथद्वारा की तर्ज पर भगवान श्रीनाथ की प्रतिमा भी स्थापित की गई। कोटा के तलवंडी के राधा-कृष्ण मंदिर में भगवान का विशेष शृंगार किया गया है। इसे देखने के लिए शाम से ही भक्तों की भीड़ उमड़नी शुरू हो गई थी। अजमेर नगर निगम ने पहली बार आना सागर पर कृष्ण महोत्सव कराया। इसमें भगवान कृष्ण के जीवन पर आधारित रंगारंग प्रस्तुति दी गई। इसे देख सभी मंत्रमुग्ध हो गए। भरतपुर के राधा रमण मंदिर में जन्माष्टमी के मौके पर भगवान श्री कृष्ण का दही से अभिषेक किया गया। बीकानेर में जन्माष्टमी के मौके पर कृष्ण मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ रही। इस दौरान लोगों ने अपने बच्चों को भी कृष्ण के रूप में तैयार किया। राजस्थान सरकार के जलदाय मंत्री महेश जोशी ने जयपुर के गोविंद देव जी मंदिर में भजनों पर जमकर डांस किया। इस दौरान जोशी ने गोविंद देव जी के भजन भी गाए। भारत में वल्लभ संप्रदाय की प्रधान पीठ श्रीनाथ जी मंदिर की ओर से जन्माष्टमी के मौके पर नाथद्वारा में शोभायात्रा निकाली गई। इस दौरान आकर्षक झांकियों के साथ हथियार बंद जवानों ने भगवान के सम्मान में फ्लैग मार्च निकाला। बांसवाड़ा के खमेरा में मुंबई की तर्ज पर मटकी फोड़ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे। चार युवा मंडल ने नौ बार मटकी फोड़ने के प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिली। चित्तौड़गढ़ के सांवलिया सेठ मंदिर में दीपावली जैसी रोशनी की गई। इस दौरान देशभर से भक्त सांवलिया जी के दर्शन करने पहुंचे। जैसलमेर के मंदिर पैलेस स्थित दो सौ पचास साल पुराने बांके बिहारी व गिरधारी जी के मंदिर में कान्हा जी ने जन्म लिया। कोटा के राधा कृष्ण मंदिर में सजी झांकी। कान्हा के जन्म के साथ ही गूंजे जयकारे। राजस्थान बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने भी गोविंददेवजी के दर्शन किए।
१४२ मंध्ययुगीन हिन्दी कृष्ण-भक्तिवारा और चैनन्य सम्प्रदाय दुहु - प्रेम गुरु मेल शिष्य तनु मन । शिखाय दोहांरे नृत्य प्रति मनोरम ॥ चापल्य श्रौत्सुक्य हर्ष भाव-अलङ्कार । दुहु मन शिष्या परे भूषरगर भार । सुजृम्भादि उद्भाव सुदीप्त सात्विक । एई सबै भावभूषा राधार अधिक ॥ प्रयत्नज शोभा श्रादि सप्त अलङ्कार । स्वभावज विलासादि दश परकार ॥ भावादि अङ्गरजा तिन मौग्थ्य चकित । द्वाविंशति अलङ्कारे राधाङ्ग भूषित ॥ नाना भावे विभूषित कहने ना जाय। ए यदुनन्दन दास विस्तारिया गाय ॥१ इस मिलन के बाद होली-लीला होती है और फिर आन्दोलन (मूल) लोला । तदनन्तर राधाकृष्ण सखियो सहित वन में भ्रमण करते हैं। अवसर तक कर राधिका, कृष्ण की वंशी चुरा लेती हैं और क्रमशः सारी सखियों के पास उसे पहुँचाती जाती हैं। ख्याल आने पर कृष्ण वशी के लिए अनुनय-विनय करने लगते हैं । अन्त मे सखियो द्वारा व्यका लिये जाने पर राधा से उन्हें मुरली मिल जाती है। कानन की कुसुम- सुषमा तथा षट्ऋतुओं की शोभा का अवलोकन करते हुए राधाकृष्ण वन मे विचरण करते हैं । इस वन-विहार के उपरान्त किसी रत्न मन्दिर में सखियों सहित बैठ कर नागरी-नागर मधुपान करते हैं। मथुपान करके उनकी अवस्था और भी विचित्र हो जाती है। एक तो मधुर प्रेम का सहज उन्माद, उस पर मधुपान । राधाकृष्ण शिथिल हो जाते हैं, सारी सखियाँ अपने-अपने कुञ्ज मन्दिर मे शयन करने चली जाती है । यहाँ नागरी-नागर के केलि - विलास को देख कर मन्मथ भी कतरा जाता है । तदनन्तर श्रम-परिहार के लिए जलक्रीड़ा का आयोजन होता है। स्नान के बाद, राधाकृष्ण को दासियाँ फलफूल का सस्कार करके थाल मे अर्पण करती हैं । राधकृष्ण पर शारी-शुक का वार्तालाप चल पड़ता है। शुक, कृष्ण के रूप गुण का वर्णन करता है और शारिका राधा के । शुक की गुरु हैं वृन्दा, शारिका की ललिता । इस स्थल पर प्रायः राधा के रूप गुण की ही विजय होती है। कृष्ण के रूप की अनुपम व्यञ्जना जयदेव के शुक के शब्दों में इस प्रकार हुई हैसौरभ-सेवित-पुष्प-विनिर्मित निर्मल-बन-माला-परिमण्डित । मन्दतर - स्मित - कान्ति-करम्वित बदनाम्बुज नव-विभ्रम पण्डित ।। जय जय मरकत कन्दल सुन्दर ॥२ इसके बाद पाशकीड़ा होती है । परण मे नाना प्रकार की केलियाँ लगायी जाती हैं। शुक इस रसमय प्रसङ्ग की भङ्गकारिणी जटिला के आगमन को घोषणा १ - पदकल्पतरु, पद सं० २६०६
एक सौ बयालीस मंध्ययुगीन हिन्दी कृष्ण-भक्तिवारा और चैनन्य सम्प्रदाय दुहु - प्रेम गुरु मेल शिष्य तनु मन । शिखाय दोहांरे नृत्य प्रति मनोरम ॥ चापल्य श्रौत्सुक्य हर्ष भाव-अलङ्कार । दुहु मन शिष्या परे भूषरगर भार । सुजृम्भादि उद्भाव सुदीप्त सात्विक । एई सबै भावभूषा राधार अधिक ॥ प्रयत्नज शोभा श्रादि सप्त अलङ्कार । स्वभावज विलासादि दश परकार ॥ भावादि अङ्गरजा तिन मौग्थ्य चकित । द्वाविंशति अलङ्कारे राधाङ्ग भूषित ॥ नाना भावे विभूषित कहने ना जाय। ए यदुनन्दन दास विस्तारिया गाय ॥एक इस मिलन के बाद होली-लीला होती है और फिर आन्दोलन लोला । तदनन्तर राधाकृष्ण सखियो सहित वन में भ्रमण करते हैं। अवसर तक कर राधिका, कृष्ण की वंशी चुरा लेती हैं और क्रमशः सारी सखियों के पास उसे पहुँचाती जाती हैं। ख्याल आने पर कृष्ण वशी के लिए अनुनय-विनय करने लगते हैं । अन्त मे सखियो द्वारा व्यका लिये जाने पर राधा से उन्हें मुरली मिल जाती है। कानन की कुसुम- सुषमा तथा षट्ऋतुओं की शोभा का अवलोकन करते हुए राधाकृष्ण वन मे विचरण करते हैं । इस वन-विहार के उपरान्त किसी रत्न मन्दिर में सखियों सहित बैठ कर नागरी-नागर मधुपान करते हैं। मथुपान करके उनकी अवस्था और भी विचित्र हो जाती है। एक तो मधुर प्रेम का सहज उन्माद, उस पर मधुपान । राधाकृष्ण शिथिल हो जाते हैं, सारी सखियाँ अपने-अपने कुञ्ज मन्दिर मे शयन करने चली जाती है । यहाँ नागरी-नागर के केलि - विलास को देख कर मन्मथ भी कतरा जाता है । तदनन्तर श्रम-परिहार के लिए जलक्रीड़ा का आयोजन होता है। स्नान के बाद, राधाकृष्ण को दासियाँ फलफूल का सस्कार करके थाल मे अर्पण करती हैं । राधकृष्ण पर शारी-शुक का वार्तालाप चल पड़ता है। शुक, कृष्ण के रूप गुण का वर्णन करता है और शारिका राधा के । शुक की गुरु हैं वृन्दा, शारिका की ललिता । इस स्थल पर प्रायः राधा के रूप गुण की ही विजय होती है। कृष्ण के रूप की अनुपम व्यञ्जना जयदेव के शुक के शब्दों में इस प्रकार हुई हैसौरभ-सेवित-पुष्प-विनिर्मित निर्मल-बन-माला-परिमण्डित । मन्दतर - स्मित - कान्ति-करम्वित बदनाम्बुज नव-विभ्रम पण्डित ।। जय जय मरकत कन्दल सुन्दर ॥दो इसके बाद पाशकीड़ा होती है । परण मे नाना प्रकार की केलियाँ लगायी जाती हैं। शुक इस रसमय प्रसङ्ग की भङ्गकारिणी जटिला के आगमन को घोषणा एक - पदकल्पतरु, पद संशून्य दो हज़ार छः सौ छः
पिछले 25 सालों से भी ज़्यादा समय से तुपोलोव-154 विमान रूस और पूर्व सोवियत संघ के देशों में हवाई यातायात की रीढ़ रहे हैं. करीब एक हज़ार तुपोलोव-154 विमान बनाए जा चुके हैं और इनमें से कई अब भी रूस में इस्तेमाल किए जा रहे हैं. इन विमानों का उपयोग 1972 से शुरू हुआ और 1986 में इनका आधुनिकीकरण किया गया. इनमें नए इंजन लगाए गए और ईंधन खपत कम करने के लिए नए उपकरण भी लगाए गए. ये विमान ऐसे इलाक़े में संचालित किए जाते हैं जहाँ एयर ट्रेफ़िक कंट्रोल और संबंधित उपकरण ज़्यादा अच्छे नहीं है या फिर जहाँ मौसम खराब रहता है. अब तक करीब 28 तुपोलोव विमान दुर्घटनाओं का शिकार हुए हैं. लेकिन ज़्यादातर दुर्घटनाओं का संबंध विमान में गड़बड़ी से नहीं है. 1982 में रूस के ओमस्क में ये विमान भारी बर्फ़ीले तूफ़ान में उतरा लेकिन रनवे पर बर्फ़ हटाने का काम करने वाले कर्मचारियों को वहाँ से हटने के लिए नहीं कहा गया. जिसके बाद विमान दुर्घटना हुई. करीब पाँच तुपोलोव 154 विमानों को लेबनान, जॉर्जिया और अफ़ग़ानिस्तान में रूस के दुश्मनी खेमे या चरमपंथियों ने उस समय मार गिराया था जब इन देशों में गृह युद्ध चल रहा था. 2001 में तुपोलोव-154 विमान काले सागर में जा गिरा. एक अभियान के दौरान यूक्रेन की कुछ मिसाइलें इस विमान से जा टकराई थीं. जुलाई 2002 में तुपोलोव-154 और एक कार्गो विमान बीच उड़ान भिड़ गए थे. स्विस एयर कंट्रोलरों ने इस दुर्घटना की ज़िम्मेदारी ली थी. कुछ ही ऐसी दुर्घटनाएँ हैं जहाँ तुपोलोव-154 विमान में तकनीकी गड़बड़ी पाई गई हो. माना जाता है कि ये विमान रूस और पूर्व सोवियत संघ के अन्य देशों में एक दशक तक तो इस्तेमाल किए जाते रहेंगे. चीन ने 2001 में तुपोलोव-154 विमान इस्तेमाल न करने का फ़ैसला किया था और कई विमानों को रूस को बेच दिया गया था.
पिछले पच्चीस सालों से भी ज़्यादा समय से तुपोलोव-एक सौ चौवन विमान रूस और पूर्व सोवियत संघ के देशों में हवाई यातायात की रीढ़ रहे हैं. करीब एक हज़ार तुपोलोव-एक सौ चौवन विमान बनाए जा चुके हैं और इनमें से कई अब भी रूस में इस्तेमाल किए जा रहे हैं. इन विमानों का उपयोग एक हज़ार नौ सौ बहत्तर से शुरू हुआ और एक हज़ार नौ सौ छियासी में इनका आधुनिकीकरण किया गया. इनमें नए इंजन लगाए गए और ईंधन खपत कम करने के लिए नए उपकरण भी लगाए गए. ये विमान ऐसे इलाक़े में संचालित किए जाते हैं जहाँ एयर ट्रेफ़िक कंट्रोल और संबंधित उपकरण ज़्यादा अच्छे नहीं है या फिर जहाँ मौसम खराब रहता है. अब तक करीब अट्ठाईस तुपोलोव विमान दुर्घटनाओं का शिकार हुए हैं. लेकिन ज़्यादातर दुर्घटनाओं का संबंध विमान में गड़बड़ी से नहीं है. एक हज़ार नौ सौ बयासी में रूस के ओमस्क में ये विमान भारी बर्फ़ीले तूफ़ान में उतरा लेकिन रनवे पर बर्फ़ हटाने का काम करने वाले कर्मचारियों को वहाँ से हटने के लिए नहीं कहा गया. जिसके बाद विमान दुर्घटना हुई. करीब पाँच तुपोलोव एक सौ चौवन विमानों को लेबनान, जॉर्जिया और अफ़ग़ानिस्तान में रूस के दुश्मनी खेमे या चरमपंथियों ने उस समय मार गिराया था जब इन देशों में गृह युद्ध चल रहा था. दो हज़ार एक में तुपोलोव-एक सौ चौवन विमान काले सागर में जा गिरा. एक अभियान के दौरान यूक्रेन की कुछ मिसाइलें इस विमान से जा टकराई थीं. जुलाई दो हज़ार दो में तुपोलोव-एक सौ चौवन और एक कार्गो विमान बीच उड़ान भिड़ गए थे. स्विस एयर कंट्रोलरों ने इस दुर्घटना की ज़िम्मेदारी ली थी. कुछ ही ऐसी दुर्घटनाएँ हैं जहाँ तुपोलोव-एक सौ चौवन विमान में तकनीकी गड़बड़ी पाई गई हो. माना जाता है कि ये विमान रूस और पूर्व सोवियत संघ के अन्य देशों में एक दशक तक तो इस्तेमाल किए जाते रहेंगे. चीन ने दो हज़ार एक में तुपोलोव-एक सौ चौवन विमान इस्तेमाल न करने का फ़ैसला किया था और कई विमानों को रूस को बेच दिया गया था.
Arjun Kapoor- Malaika Arora Wedding Date: कॉफी विद करण शो से अर्जुन कपूर और मलाइका अरोड़ा की शादी को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। अर्जुन कपूर ने अपना पूरा वेडिंग प्लान बताया हैं। Arjun Kapoor- Malaika Arora Wedding Date: करण जौहर का शो कॉफी विद करण 7 (Koffee With Karan 7) इन दिनों चर्चा में बना हुआ है। इस शो में हर हफ्ते ऐसे खुलासे हो रहे है, जिसे जानने के बाद लोग काफी हैरान हो रहे है। इस में अब गेस्ट बनकर अर्जुन कपूर और सोनम कपूर (Sonam Kapoor) पहुंचे है। जो अपनी पर्सनल लाइफ की कई सारी बातों को लोगों के सामने रख रहे है। जानकारी के लिए बता दें अर्जुन कपूर गर्लफ्रेंड मलाइका अरोड़ा को लेकर काफी सुर्खियों में रहते हैं, दोनों को अक्सर साथ स्पॉट किया जाता है। अब करण के चैट शो में अर्जुन कपूर से मलाइका अरोड़ा को लेकर कई सवाल किए गए। इन सवालों का जावब देते हुए अपनी शादी के प्लान के बारे में भी बता दिया। तो चलिए जानते है, अर्जुन कपूर (Arjun Kapoor) ने अपनी और मलाइका अरोड़ा (Malaika Arora) शादी को लेकर क्या खुलासा किया है। करण जौहर के शो में हर किसी गेस्ट से उनकी पर्सनल लाइफ को लेकर सवाल किए जा रहे है। आमिर खान हो या रणवीर सिंह करण के सवाल से कोई नहीं बच। करण ने इस शो में आलिया भट्ट सहित काफी सारे स्टार्स से उनकी सेक्स लाइफ को लेकर भी सवाल किए है। लेकिन उन्होंने अर्जुन कपूर से वो सवाल पूछा जिसके जवाब का हर कोई इंताजर कर रहा था। करण ने एक्टर से पूछा आप और मलाइका अरोड़ा जल्द शादी करने वाले हैं? इसका जवाब देते हुए अर्जुन कपूर ने कहा, मैं इस समय अपने करियर पर पूरा ध्यान देना चाह रहा हूं, साथ-साथ मैं प्रोफेशनली थोड़ा स्टेबल होना चाहता हूं। इसके आगे उन्होंने कहा, 'मैं ऐसा काम करना चाहूंगा जिस से मुझे खुशी मिले, अगर मैं खुश रहूंगा तो अपने पार्टनर को खुश रख सकता हूं।' उनके इस जवाब से फैंस ज्यादा खुश नजर नहीं आ रहे है। क्योंकि फैंस को उम्मीद थी दोनों जल्द ही शादी कर लेंगे। अभी हाल ही में रिलीज हुई अर्जुन कपूर की फिल्म 'एक विलेन रिटर्न्स' बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह से फ्लॉप हो गई थी। इस फिल्म में अर्जुन कपूर के साथ-साथ जॉन अब्राहम और दिशा पटानी भी अहम रोल में थी। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
Arjun Kapoor- Malaika Arora Wedding Date: कॉफी विद करण शो से अर्जुन कपूर और मलाइका अरोड़ा की शादी को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। अर्जुन कपूर ने अपना पूरा वेडिंग प्लान बताया हैं। Arjun Kapoor- Malaika Arora Wedding Date: करण जौहर का शो कॉफी विद करण सात इन दिनों चर्चा में बना हुआ है। इस शो में हर हफ्ते ऐसे खुलासे हो रहे है, जिसे जानने के बाद लोग काफी हैरान हो रहे है। इस में अब गेस्ट बनकर अर्जुन कपूर और सोनम कपूर पहुंचे है। जो अपनी पर्सनल लाइफ की कई सारी बातों को लोगों के सामने रख रहे है। जानकारी के लिए बता दें अर्जुन कपूर गर्लफ्रेंड मलाइका अरोड़ा को लेकर काफी सुर्खियों में रहते हैं, दोनों को अक्सर साथ स्पॉट किया जाता है। अब करण के चैट शो में अर्जुन कपूर से मलाइका अरोड़ा को लेकर कई सवाल किए गए। इन सवालों का जावब देते हुए अपनी शादी के प्लान के बारे में भी बता दिया। तो चलिए जानते है, अर्जुन कपूर ने अपनी और मलाइका अरोड़ा शादी को लेकर क्या खुलासा किया है। करण जौहर के शो में हर किसी गेस्ट से उनकी पर्सनल लाइफ को लेकर सवाल किए जा रहे है। आमिर खान हो या रणवीर सिंह करण के सवाल से कोई नहीं बच। करण ने इस शो में आलिया भट्ट सहित काफी सारे स्टार्स से उनकी सेक्स लाइफ को लेकर भी सवाल किए है। लेकिन उन्होंने अर्जुन कपूर से वो सवाल पूछा जिसके जवाब का हर कोई इंताजर कर रहा था। करण ने एक्टर से पूछा आप और मलाइका अरोड़ा जल्द शादी करने वाले हैं? इसका जवाब देते हुए अर्जुन कपूर ने कहा, मैं इस समय अपने करियर पर पूरा ध्यान देना चाह रहा हूं, साथ-साथ मैं प्रोफेशनली थोड़ा स्टेबल होना चाहता हूं। इसके आगे उन्होंने कहा, 'मैं ऐसा काम करना चाहूंगा जिस से मुझे खुशी मिले, अगर मैं खुश रहूंगा तो अपने पार्टनर को खुश रख सकता हूं।' उनके इस जवाब से फैंस ज्यादा खुश नजर नहीं आ रहे है। क्योंकि फैंस को उम्मीद थी दोनों जल्द ही शादी कर लेंगे। अभी हाल ही में रिलीज हुई अर्जुन कपूर की फिल्म 'एक विलेन रिटर्न्स' बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह से फ्लॉप हो गई थी। इस फिल्म में अर्जुन कपूर के साथ-साथ जॉन अब्राहम और दिशा पटानी भी अहम रोल में थी। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 450 अंक से ज्यादा लुढ़का (Photo Credit: News Nation) नई दिल्लीः रूस यूक्रेन युद्ध के बाद मध्य पूर्व में इजरायल में आईएसआईएस के आतंकियों के हमले का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भी देखने मिल रहा है. भारत के प्रमुख इक्विटी सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी की सोमवार को गिरावट के साथ शुरुआत हुई. इसके बाद बाजार संभलने के बजाए और भी गोता लगाता चला गया. शुरुआती कारोबार में पिछले सप्ताह की तुलना में निचले स्तर पर कारोबार किया. दोपहर 12 बजे सेंसेक्स 0. 82 फीसदी यानी 468 अंक नीचे 56,893 अंक पर था, जबकि निफ्टी 0. 79 फीसदी यानी 135 अंकों की गिरावट के साथ 17,018 अंक पर कारोबार कर रहा है. एनएसई डेटा के अनुसार, यूपीएल, एचडीएफसी, एचडीएफसी बैंक, डॉ. रेड्डीज, और कोटक महिंद्रा बैंक के शेयर निफ्टी के 50 कंपनियों में सबसे ज्यादा नुकसान के साथ कारोबार कर रही है. जबकि बजाज ऑटो, सिप्ला, भारती एयरटेल, ओएनजीसी और हिंडाल्को शीर्ष पांच फायदे में कारोबार कर रही है. जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार, वी. के. विजय कुमार के मुताबिक खुदरा निवेशकों को निम्न श्रेणी के शेयरों से बचकर और उच्च गुणवत्ता वाले शेयरों में निवेश करके अपने निवेश में अधिक सतर्क रहना होगा.
शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स चार सौ पचास अंक से ज्यादा लुढ़का नई दिल्लीः रूस यूक्रेन युद्ध के बाद मध्य पूर्व में इजरायल में आईएसआईएस के आतंकियों के हमले का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भी देखने मिल रहा है. भारत के प्रमुख इक्विटी सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी की सोमवार को गिरावट के साथ शुरुआत हुई. इसके बाद बाजार संभलने के बजाए और भी गोता लगाता चला गया. शुरुआती कारोबार में पिछले सप्ताह की तुलना में निचले स्तर पर कारोबार किया. दोपहर बारह बजे सेंसेक्स शून्य. बयासी फीसदी यानी चार सौ अड़सठ अंक नीचे छप्पन,आठ सौ तिरानवे अंक पर था, जबकि निफ्टी शून्य. उन्यासी फीसदी यानी एक सौ पैंतीस अंकों की गिरावट के साथ सत्रह,अट्ठारह अंक पर कारोबार कर रहा है. एनएसई डेटा के अनुसार, यूपीएल, एचडीएफसी, एचडीएफसी बैंक, डॉ. रेड्डीज, और कोटक महिंद्रा बैंक के शेयर निफ्टी के पचास कंपनियों में सबसे ज्यादा नुकसान के साथ कारोबार कर रही है. जबकि बजाज ऑटो, सिप्ला, भारती एयरटेल, ओएनजीसी और हिंडाल्को शीर्ष पांच फायदे में कारोबार कर रही है. जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार, वी. के. विजय कुमार के मुताबिक खुदरा निवेशकों को निम्न श्रेणी के शेयरों से बचकर और उच्च गुणवत्ता वाले शेयरों में निवेश करके अपने निवेश में अधिक सतर्क रहना होगा.
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के स्याना में भी वही मथुरा वाली कहानी दोहराई गई। मथुरा में एसपी सिटी को हमराह छोड़कर भागे थे यहां कोतवाल को हमराहों ने अकेले छोड़ दिया। नतीजा दोनों को जान गंवानी पड़ी। स्याना क्षेत्र में लोगों के बीच बवाल में फंसे कोतवाल को उनके हमराह एवं पुलिस बल ने दगा दे दिया। भीड़ के पथराव-फायरिंग करते ही स्याना कोतवाल को वाहन में ही छोड़कर हमराह भाग निकले। करीब 15 मिनट तक घायल अवस्था में कोतवाल सुबोध कुमार सरकारी वाहन से खेत में लटकी अवस्था में पड़े रहे। बाद में उन्हें वहां से अस्पताल ले जाया गया। पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी की सुरक्षा एवं सहयोग के लिए हमराह की व्यवस्था होती है। हमराह का काम अधिकारी के साथ मौजूद रहने और उनकी सुरक्षा के लिए तत्पर रहना होता है। मथुरा में एसपी मुकुल द्विवेदी पर जब भीड़ ने हमला किया तो उस दौरान भी उनके हमराह उन्हें छोड़कर भाग निकले थे। कुछ ऐसा ही स्याना के मामले में हुआ। स्याना में गोकशी की घटना के बाद उत्तेजित लोगों को शांत करने का प्रयास में जुटे कोतवाल सुबोध कुमार सिंह के साथ भी यही हुआ। भीड़ ने अचानक उन पर हमला बोल दिया। पुलिस जीप पर पथराव एवं फायरिंग शुरू कर दी गई। बताया जाता है कि चालक ने खेत में वाहन ले जाकर वहां से निकलने का प्रयास किया, किंतु तब तक भीड़ की ओर से हमला तेज हो चुका था। पत्थर लगने से कोतवाल सुबोध कुमार भी घायल हो गए। इसके बावजूद हमराह एवं अन्य पुलिसकर्मी घायल कोतवाल को पुलिस वाहन में ही छोड़कर भाग निकले। कोतवाल ने घायलावस्था में वाहन से निकलना चाहा, किंतु वह दरवाजे से ही खेत में नीचे लटक गए और 15 मिनट तक उनके सिर में लगी चोट से खून बहता रहा। करीब 15 मिनट बाद पुलिसकर्मी जैसे-तैसे खेत में पहुंचे और घायल कोतवाल को अस्पताल भिजवाया। अस्पताल में कोतवाल को मृत घोषित कर दिया गया।
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के स्याना में भी वही मथुरा वाली कहानी दोहराई गई। मथुरा में एसपी सिटी को हमराह छोड़कर भागे थे यहां कोतवाल को हमराहों ने अकेले छोड़ दिया। नतीजा दोनों को जान गंवानी पड़ी। स्याना क्षेत्र में लोगों के बीच बवाल में फंसे कोतवाल को उनके हमराह एवं पुलिस बल ने दगा दे दिया। भीड़ के पथराव-फायरिंग करते ही स्याना कोतवाल को वाहन में ही छोड़कर हमराह भाग निकले। करीब पंद्रह मिनट तक घायल अवस्था में कोतवाल सुबोध कुमार सरकारी वाहन से खेत में लटकी अवस्था में पड़े रहे। बाद में उन्हें वहां से अस्पताल ले जाया गया। पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी की सुरक्षा एवं सहयोग के लिए हमराह की व्यवस्था होती है। हमराह का काम अधिकारी के साथ मौजूद रहने और उनकी सुरक्षा के लिए तत्पर रहना होता है। मथुरा में एसपी मुकुल द्विवेदी पर जब भीड़ ने हमला किया तो उस दौरान भी उनके हमराह उन्हें छोड़कर भाग निकले थे। कुछ ऐसा ही स्याना के मामले में हुआ। स्याना में गोकशी की घटना के बाद उत्तेजित लोगों को शांत करने का प्रयास में जुटे कोतवाल सुबोध कुमार सिंह के साथ भी यही हुआ। भीड़ ने अचानक उन पर हमला बोल दिया। पुलिस जीप पर पथराव एवं फायरिंग शुरू कर दी गई। बताया जाता है कि चालक ने खेत में वाहन ले जाकर वहां से निकलने का प्रयास किया, किंतु तब तक भीड़ की ओर से हमला तेज हो चुका था। पत्थर लगने से कोतवाल सुबोध कुमार भी घायल हो गए। इसके बावजूद हमराह एवं अन्य पुलिसकर्मी घायल कोतवाल को पुलिस वाहन में ही छोड़कर भाग निकले। कोतवाल ने घायलावस्था में वाहन से निकलना चाहा, किंतु वह दरवाजे से ही खेत में नीचे लटक गए और पंद्रह मिनट तक उनके सिर में लगी चोट से खून बहता रहा। करीब पंद्रह मिनट बाद पुलिसकर्मी जैसे-तैसे खेत में पहुंचे और घायल कोतवाल को अस्पताल भिजवाया। अस्पताल में कोतवाल को मृत घोषित कर दिया गया।
फिल्म '72 हूरें' के मेकर्स के खिलाफ मुंबई में एक सामाजिक कार्यकर्ता ने शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस को एक लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसमें कहा गया है कि मेकर्स ने विशेष समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत करने और देश को बांटने की कोशिश की है। शिकायत मुंबई के गोरेगांव पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी। उनके वकील अली काशिफ खान ने कहा कि कार्यकर्ता ने फिल्म की स्क्रीनिंग पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) को एक अलग शिकायत सौंपी है। पीटीआई के मुताबिक, अधिकारी ने कहा कि उन्हें शिकायत मिली है, लेकिन अभी तक कोई एफआईआर (प्रथम सूचना रिपोर्ट) दर्ज नहीं की गई है। क्या है विवाद? फिल्म को संजय पूरन सिंह चौहान ने डायरेक्ट किया है। फिल्म के ट्रेलर को लेकर ही विवाद शुरू हो गया था। खबर थी कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने फिल्म के ट्रेलर को सेंसर सर्टिफिकेट देने से इनकार कर दिया था। फिल्म के ट्रेलर को थिएटर में रिलीज करने पर रोक लगाने के बाद इसे यूट्यूब पर रिलीज किया गया था। फिल्म के ट्रेलर को लेकर क्यों हो रहा विवाद? ट्रेलर में दिखाया गया है कि कैसे किशोर मुसलमानों को आतंकवादी संगठनों में शामिल होने के लिए प्रेरित किया जाता है। पवन मल्होत्रा, आमिर बशीर, रशीद नाज़ और अशोक पाठक इसमें मुख्य भूमिका में हैं, यह फिल्म आस्था के साथ छेड़छाड़ का भंडाफोड़ करने का वादा करती है।
फिल्म 'बहत्तर हूरें' के मेकर्स के खिलाफ मुंबई में एक सामाजिक कार्यकर्ता ने शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस को एक लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसमें कहा गया है कि मेकर्स ने विशेष समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत करने और देश को बांटने की कोशिश की है। शिकायत मुंबई के गोरेगांव पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी। उनके वकील अली काशिफ खान ने कहा कि कार्यकर्ता ने फिल्म की स्क्रीनिंग पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड को एक अलग शिकायत सौंपी है। पीटीआई के मुताबिक, अधिकारी ने कहा कि उन्हें शिकायत मिली है, लेकिन अभी तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। क्या है विवाद? फिल्म को संजय पूरन सिंह चौहान ने डायरेक्ट किया है। फिल्म के ट्रेलर को लेकर ही विवाद शुरू हो गया था। खबर थी कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने फिल्म के ट्रेलर को सेंसर सर्टिफिकेट देने से इनकार कर दिया था। फिल्म के ट्रेलर को थिएटर में रिलीज करने पर रोक लगाने के बाद इसे यूट्यूब पर रिलीज किया गया था। फिल्म के ट्रेलर को लेकर क्यों हो रहा विवाद? ट्रेलर में दिखाया गया है कि कैसे किशोर मुसलमानों को आतंकवादी संगठनों में शामिल होने के लिए प्रेरित किया जाता है। पवन मल्होत्रा, आमिर बशीर, रशीद नाज़ और अशोक पाठक इसमें मुख्य भूमिका में हैं, यह फिल्म आस्था के साथ छेड़छाड़ का भंडाफोड़ करने का वादा करती है।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
शहर कितना रहने लायक है विषय पर चल रही परीक्षा में कहीं न कहीं पब्लिक फीडबैक बिंदु पर स्मार्ट सिटी लखनऊ पिछड़ता नजर आ रहा है। वजह यह है कि जहां एक तरफ स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने दो लाख के करीब पब्लिक फीडबैक का लक्ष्य रखा है, वहीं दूसरी तरफ अभी सिर्फ 600 के आसपास ही फीडबैक सामने आए हैं। अगर पब्लिक फीडबैक की रफ्तार यही रही तो निश्चित रूप से शहर की रैंकिंग पर खासा असर पड़ सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने शहर की पब्लिक से अधिक से अधिक फीडबैक दिए जाने की अपील की है। स्वच्छता सर्वेक्षण की तर्ज पर शुरू हुई इस परीक्षा में 14 कैटेगरी रखी गई हैं। हर बिंदु के अंक निर्धारित हैं। आपके द्वारा दिए जाने वाले फीडबैक के आधार पर स्कोरिंग होगी। बाद में फाइनल स्कोर को जोड़कर रैंकिंग जारी की जाएगी। 1-क्यूआर कोड को स्कैन करें, जो सीधे सिटीजन पार्टीसिपेशन सर्वे लिंक पर जाएगा। 2-वैकल्पिक रूप से प्रतिक्रिया को यूआरएल Eol2019. org/citizen feedback टाइप करके शेयर किया जा सकता है। 3-फीडबैक भरें और समिट करें। फीडबैक में आपको इतना बताना है कि शहर में मेडिकल फैसेलिटी कैसी है, रोज कूड़ा उठता है या नहीं, सफाई होती है या नहीं, कूड़ा निस्तारण की स्थिति क्या है, मनोरंजन के क्या साधन हैं, पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन के क्या साधन हैं, पॉल्यूशन का लेवल क्या है, सुरक्षा की कंडीशन कैसी है, रोजगार के अवसर मिलते हैं या नहीं आदि। अभी पब्लिक फीडबैक की स्थिति बहुत बेहतर नहीं है। लोगों से अपील है कि अधिक से अधिक संख्या में फीडबैक दें, जिससे शहर की रैंकिंग बेहतर आए।
शहर कितना रहने लायक है विषय पर चल रही परीक्षा में कहीं न कहीं पब्लिक फीडबैक बिंदु पर स्मार्ट सिटी लखनऊ पिछड़ता नजर आ रहा है। वजह यह है कि जहां एक तरफ स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने दो लाख के करीब पब्लिक फीडबैक का लक्ष्य रखा है, वहीं दूसरी तरफ अभी सिर्फ छः सौ के आसपास ही फीडबैक सामने आए हैं। अगर पब्लिक फीडबैक की रफ्तार यही रही तो निश्चित रूप से शहर की रैंकिंग पर खासा असर पड़ सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने शहर की पब्लिक से अधिक से अधिक फीडबैक दिए जाने की अपील की है। स्वच्छता सर्वेक्षण की तर्ज पर शुरू हुई इस परीक्षा में चौदह कैटेगरी रखी गई हैं। हर बिंदु के अंक निर्धारित हैं। आपके द्वारा दिए जाने वाले फीडबैक के आधार पर स्कोरिंग होगी। बाद में फाइनल स्कोर को जोड़कर रैंकिंग जारी की जाएगी। एक-क्यूआर कोड को स्कैन करें, जो सीधे सिटीजन पार्टीसिपेशन सर्वे लिंक पर जाएगा। दो-वैकल्पिक रूप से प्रतिक्रिया को यूआरएल Eolदो हज़ार उन्नीस. org/citizen feedback टाइप करके शेयर किया जा सकता है। तीन-फीडबैक भरें और समिट करें। फीडबैक में आपको इतना बताना है कि शहर में मेडिकल फैसेलिटी कैसी है, रोज कूड़ा उठता है या नहीं, सफाई होती है या नहीं, कूड़ा निस्तारण की स्थिति क्या है, मनोरंजन के क्या साधन हैं, पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन के क्या साधन हैं, पॉल्यूशन का लेवल क्या है, सुरक्षा की कंडीशन कैसी है, रोजगार के अवसर मिलते हैं या नहीं आदि। अभी पब्लिक फीडबैक की स्थिति बहुत बेहतर नहीं है। लोगों से अपील है कि अधिक से अधिक संख्या में फीडबैक दें, जिससे शहर की रैंकिंग बेहतर आए।
रिपोर्ट सईद रजा. प्रयागराज मे गंगा यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम की रेती पर कुंभ जैसा धार्मिक आध्यात्मिक मेला लगा हुआ जहाँ धर्म ,संस्कृति ,संस्कार , के साथ संतो और गृहस्थो का समागम होता है। इसी समागम मे कश्मीर मे हुए हिन्दुओं के साथ क्रूरता व अपने ही घर से बेघर कर उनका उत्पीड़न करने जैसी घटना को चित्रो की प्रदर्शनी लगा कर हिन्दुओं को जागृति करने की कोशिश की जा रही। इस प्रदर्शनी को सनातन हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से लगाई गई है। जिसमे कश्मीरी हिन्दुओं के साथ बंगलादेश और पाकिस्तानी हिन्दुओं पर भी जो जुल्म हो रहे उसे भी प्रदर्शित किया गया है। इस प्रदर्शनी मे खासकर जो कश्मीरी पंडितों पर जुल्म हुये ये सभी तस्वीरे फ्रांस के एक पत्रकार जिसने इस पर रिसर्च किया। उनके माध्यम से ये पूरी तस्वीरे इस संस्थान को मिली जिसे यहाँ कुंभ मेले मे प्रद्शनी के माध्यम से लगाकर लोगों तक इसे पहुचाया जा रहा है। जिसका मुख्य उद्देश्य सरकार पर दबाव बनाकर फिर से कश्मीर मे कश्मीर से बेघर किये गये पंडितों को वहाँ सुरक्षित पुनरस्थापित किया जाये। यह प्रदर्शनी के 5 हजार स्थानो पर लगाने के साथ प्रयागराज के कुंभ मे पहली बार लगाई गई है। जिसे देखने के लिए काफी संख्या मे लोग इकट्ठे हो रहे।
रिपोर्ट सईद रजा. प्रयागराज मे गंगा यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम की रेती पर कुंभ जैसा धार्मिक आध्यात्मिक मेला लगा हुआ जहाँ धर्म ,संस्कृति ,संस्कार , के साथ संतो और गृहस्थो का समागम होता है। इसी समागम मे कश्मीर मे हुए हिन्दुओं के साथ क्रूरता व अपने ही घर से बेघर कर उनका उत्पीड़न करने जैसी घटना को चित्रो की प्रदर्शनी लगा कर हिन्दुओं को जागृति करने की कोशिश की जा रही। इस प्रदर्शनी को सनातन हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से लगाई गई है। जिसमे कश्मीरी हिन्दुओं के साथ बंगलादेश और पाकिस्तानी हिन्दुओं पर भी जो जुल्म हो रहे उसे भी प्रदर्शित किया गया है। इस प्रदर्शनी मे खासकर जो कश्मीरी पंडितों पर जुल्म हुये ये सभी तस्वीरे फ्रांस के एक पत्रकार जिसने इस पर रिसर्च किया। उनके माध्यम से ये पूरी तस्वीरे इस संस्थान को मिली जिसे यहाँ कुंभ मेले मे प्रद्शनी के माध्यम से लगाकर लोगों तक इसे पहुचाया जा रहा है। जिसका मुख्य उद्देश्य सरकार पर दबाव बनाकर फिर से कश्मीर मे कश्मीर से बेघर किये गये पंडितों को वहाँ सुरक्षित पुनरस्थापित किया जाये। यह प्रदर्शनी के पाँच हजार स्थानो पर लगाने के साथ प्रयागराज के कुंभ मे पहली बार लगाई गई है। जिसे देखने के लिए काफी संख्या मे लोग इकट्ठे हो रहे।
लखनऊ : उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh,) के विभूति खंड इलाके में स्थित समिट बिल्डिंग (Summit Building) के बाहर मारपीट (Fight) का वीडियो गुरुवार रात से सोशल मीडिया (Social Media) पर वायरल (Viral) हो रहा है। जिसमें देखा जा सकता है कि किस तरह से दो किन्नरों (Eunuchs) के बीच में मारपीट और बहस हो रही है। किन्नरों ने एक दूसरे के कपड़े फाड़ डाले। सड़क पर अर्धनग्न हालत में किन्नरों ने मारपीट की। वहां कुछ लोग खड़े होकर वीडियो बना रहे थे। मामले की जानकारी होने के बाद भी पुलिस किन्नर विवाद को निपटाने की हिम्मत नहीं जुटा पाई। वीडियो में नजर आ रहा है कि दो किन्नरों में कहासुनी हो रही है। एक युवक उन्हें समझाने का प्रयास कर रहा है। इसी बीच एक किन्नर दौड़ता हुआ बीच सड़क पर पहुंच जाता है। वह अपने सारे कपड़े उतार देती है। इसके बाद दोनों किन्नर एक-दूसरे के बाल पकड़कर पीटने लगे। तीसरा किन्नर भी लड़ाई में शामिल हो जाता है। यह देख सड़क पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो जाती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की खबर पर इंस्पेक्टर राम सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पड़ताल शुरू की, आसपास के इलाकों में पूछताछ की तो पता चला कि वीडियो पुराना है और 25 दिसंबर का बताया जा रहा है। मामले में अभी तक किसी भी पक्ष से कोई तहरीर नहीं मिली है। बता दें कि घटना के वक्त सूचना मिलते ही पीआरवी मौके पर पहुंच गई थी, लेकिन मारपीट कर रहे किन्नर भाग निकले थे। यह पहली बार नहीं है जब समिट बिल्डिंग के बाहर मारपीट हुई हो। इससे पहले भी यहां विवाद होते रहे हैं। अक्सर यहां नशे में धुत लड़के-लड़कियां मारपीट करते हैं। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस चौकी भी स्थापित की गई, लेकिन इसके बाद भी ऐसे मामलों में कोई कमी नहीं आ रही है।
लखनऊ : उत्तर प्रदेश के विभूति खंड इलाके में स्थित समिट बिल्डिंग के बाहर मारपीट का वीडियो गुरुवार रात से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसमें देखा जा सकता है कि किस तरह से दो किन्नरों के बीच में मारपीट और बहस हो रही है। किन्नरों ने एक दूसरे के कपड़े फाड़ डाले। सड़क पर अर्धनग्न हालत में किन्नरों ने मारपीट की। वहां कुछ लोग खड़े होकर वीडियो बना रहे थे। मामले की जानकारी होने के बाद भी पुलिस किन्नर विवाद को निपटाने की हिम्मत नहीं जुटा पाई। वीडियो में नजर आ रहा है कि दो किन्नरों में कहासुनी हो रही है। एक युवक उन्हें समझाने का प्रयास कर रहा है। इसी बीच एक किन्नर दौड़ता हुआ बीच सड़क पर पहुंच जाता है। वह अपने सारे कपड़े उतार देती है। इसके बाद दोनों किन्नर एक-दूसरे के बाल पकड़कर पीटने लगे। तीसरा किन्नर भी लड़ाई में शामिल हो जाता है। यह देख सड़क पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो जाती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की खबर पर इंस्पेक्टर राम सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पड़ताल शुरू की, आसपास के इलाकों में पूछताछ की तो पता चला कि वीडियो पुराना है और पच्चीस दिसंबर का बताया जा रहा है। मामले में अभी तक किसी भी पक्ष से कोई तहरीर नहीं मिली है। बता दें कि घटना के वक्त सूचना मिलते ही पीआरवी मौके पर पहुंच गई थी, लेकिन मारपीट कर रहे किन्नर भाग निकले थे। यह पहली बार नहीं है जब समिट बिल्डिंग के बाहर मारपीट हुई हो। इससे पहले भी यहां विवाद होते रहे हैं। अक्सर यहां नशे में धुत लड़के-लड़कियां मारपीट करते हैं। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस चौकी भी स्थापित की गई, लेकिन इसके बाद भी ऐसे मामलों में कोई कमी नहीं आ रही है।
बरसात आती है। धरती को नहलाकर उसे हरियाली की चादर ओढ़ाकर चली जाती है। फिर दिवाली यानी दीपावली आती है। उत्तर भारत में दिवाली पाँच दिनों का त्योहार होता है। अनिवार्य रूप से खेती के चक्र से जुड़े इस त्योहार के साथ सुख, समृद्धि, प्रकाश, साफ- सफाई और तमाम अच्छे अच्छे भाव व कर्म जुड़े हैं। इस त्योहार में कब और कैसे प्रदूषण का प्रवेश हो गया, यह एक गहन शोध का विषय है लेकिन आज 21वीं सदी में जब इंसान को थोड़ा अधिक तार्किक, समझदार और जिम्मेदार होने की ज़रूरत थी, कम से कम आस्थाप्रधान देशों के लोगों ने इन अपेक्षाओं से पल्ला झाड़ लिया है और पूरे होशो-हवास में प्रकृति के ऊपर प्रदूषण को चुन लिया है। प्रकृति की रक्षा के लिए उसके पास सेव द नेचर, सेव द इनवायरमेंट, सेव द टाईगर और सेव द एवरीथिंग जैसे सबसे बड़े झूठ हैं। यह जुमले फेंकते समय यह गुमान ज़रूर हो सकता है कि आप इस धरती, जलवायु, पर्यावरण, शेर, नदियां आदि सब को बचा सकते हैं लेकिन इसमें अहंकार में जो बात छिपायी जाती है वो ये कि आप इससे बने हैं और आप महज़ अपने आप को बचाने की चिंता कीजिये। प्रकृति अपनी चिंता आप करती है। बहरहाल। इस दिवाली भी जबकि तमाम चिकित्सा अनुसन्धानों, वैज्ञानिकों, चिकित्सकों ने बार बार कहा कि प्रदूषण और कोरोना के बीच बहुत गहरा संबंध है और जिस अनुपात में प्रदूषण बढ़ेगा उसी अनुपात में कोरोना महामारी भी अपने पाँव पसारेगी। यह बात किसी गूढ़ भाषा में नहीं बल्कि आम चलन की भाषा में कही गयी। यह कोई नयी बात भी नहीं थी जिसका रहस्योद्घाटन हुआ हो बल्कि सभी ने देखा है कि कोरोना से संक्रमित व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ बढ़ जाती है। सांस लेने में तकलीफ प्रदूषित हवा की वजह से भी होती है। ऐसे में अगर दोनों वजहें एक साथ किसी इंसान को प्रभावित करें तो उसका गंभीर रूप से बीमार होना निश्चित है। फिर यह बीमारी केवल एक इंसान को बीमार नहीं करती बल्कि उसके संपर्क में आए कितने ही लोगों को संक्रमित कर सकती है। वैज्ञानिक मानते हैं कि एक इंसान 88000 लोगों तक को संक्रमित कर सकता है। इस अर्थ में इस दिवाली में प्रदूषण के हर कारण और कारक को त्योहार से दूर रखे जाने की एहतियात बरतने की ज़रूरत थी। इस लिहाज से दिवाली का चिकित्सकीय महत्व भी इस बार बहुत गंभीरता से जुड़ गया। जिसका पालन करते हुए लोग इक्कीसवीं सदी के ज़्यादा तार्किक, ज़्यादा समझदार और थोड़ा ज़्यादा जिम्मेदार होने की कसौटी पर खरे उतर सकते थे। औपचारिकता के लिए सही देश की लोकतान्त्रिक संस्थाओं ने अपनी ज़िम्मेदारी निभाई। राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल, कोर्ट्स, सरकारों ने अपने अपने स्तर पर प्रदूषण फैलाने वाली तमाम गतिविधियों को रोकने की समझाइशें दीं। अफसोस, फिर भी हमने प्रदूषण चुना। प्रदूषण है क्या? प्रदूषण, विकृति का पर्याय है। विकृति यानी जो जैसा होना चाहिए उसका वैसा न होना। इसे स्थान सूचक शब्दावली में भी समझ सकते हैं जिसे जहां होना चाहिए वहाँ न होना। अगर संस्कृति, प्रकृति के साथ मनुष्य का सकारात्मक संवाद या विनम्र हस्तक्षेप है तो विकृति उसी प्रकृति के साथ, उसी मनुष्य का नकारात्मक विवाद या गर्वीला अतिक्रमण है। प्रदूषण कई वजहों से होता है। दिवाली के संदर्भ में बात करें तो यह पटाखे जलाने से सबसे ज़्यादा होता है। और यह इतना जाना, समझा, परखा हुआ तथ्य है कि बीते कई सालों से दिल्ली जैसे महानगरों में अलग अलग तरह से समझाइशें जारी होती रहती हैं कि त्योहार सादगी से मनाएँ, पटाखे तो बिलकुल न चलाएं आदि आदि। कुछ लोग पटाखे जलाने को ज़रूरी नहीं भी मानते हैं और बिना पटाखे जलाए भी अपनी दिवाली मना लेते हैं। ज़्यादातर लोग वो हैं जो थोड़ा कम पटाखे जलाते हैं ताकि इस त्योहार से जुड़े अनुकूलन में स्मृतियों को तरोताजा किया जा सके । अधिकांश लोग वो हैं जो इसे पटाखों का ही त्योहार मानते हैं और यही वो मनवाना भी चाहते हैं। खुद का किसी बात को मानना एक बात है लेकिन किसी को जबर्दस्ती मनवाना एक हठ है। हठ को भी मानव स्वभाव के प्रदूषक के तौर पर देखा जाता है। इस हठ को तब और बल मिलता है जब इसे आस्था, धर्म, खतरे और बदले की कार्यवाही के तौर पर किसी राजनीतिक दल द्वारा प्रोजेक्ट कर दिया जाता है। इस बल में कई गुना इजाफा तब हो जाता है जब वह राजनीतिक दल सत्ता में भी हो। तो इस बार भी इस सत्तासीन दल के बल ने इंसान के हठ रूपी प्रदूषण से प्रकृति के साथ निर्लज्ज ढंग से ऐसी तैसी की। विचारणीय प्रश्न यह है कि हम जानबूझकर प्रदूषण क्यों चुन रहे हैं? अभी बिहार चुनाव सम्पन्न हुए और बिहार के लोगों ने रोजगार, दवाई, सिंचाई, पढ़ाई के स्थान पर श्मशान, कब्रिस्तान, घुसपैठिए,आतंकवादी, नक्सल, जंगलराज, अपहरण, फिरौती जैसे शब्दों को चुना। ये सारे शब्द कम से कम शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आजीविका, सिंचाई जैसे शब्दों के सामने तो अच्छे समाज और अच्छे देश के लिए प्रदूषण ही हैं। हैं न? इसी तरह मध्य प्रदेश में टिकाऊ और बिकाऊ विधायकों के बीच जनता ने बिकाऊ को चुन लिया। बिकाऊ होना विधानसभा और सरकार के लिए प्रदूषण हैं। लोगों ने यहाँ भी प्रदूषण चुना। दिवाली के त्योहार में मंदिरों का महत्व तो है लेकिन मंदिरों की जगह लोकतन्त्र में नहीं ही है। फिर भी लोकतन्त्र की शिखर संस्था तक पहुँचने के लिए मंदिर का इस्तेमाल जिस रूप में किया गया वह असल में प्रदूषण ही था पर अपनी आदत से मजबूर होते जा रहे हम फिर प्रदूषण चुन बैठे। ध्यान से देखें तो हमारे घरों और सार्वजनिक जीवन में हम जैसे प्रदूषण चुनने के अभ्यस्त होते जा रहे हैं। प्रदूषण का एक अर्थ कभी एक शिक्षक ने समझाया था जहां उनका मतलब किसी भी प्रकार के कूड़े से था और कूड़ा का सीधा सा मतलब था कि जो जहां नहीं होना चाहिए वो अगर वहाँ है तो वो कूड़ा कहलाएगा। मसलन, खाने की मेज पर अगर आप हीरे के रत्नजड़ित हार रख दें तो भले ही वह कितना ही मूल्यवान क्यों नो पर वो वहाँ कूड़ा है। यानी एक रत्नजड़ित हीरे के हार की खाने की मेज पर कोई ज़रूरत नहीं है। एक लोकतान्त्रिक देश में जैसे अपनी जाति, कुल, खानदान, धर्म, क्षेत्र, भाषा आदि का अभिमान इसलिए कूड़ा है क्योंकि यहाँ लोकतन्त्र खाने की मेज है और आपका तमाम ऐसी बातों पर अभिमान जो असल में आपके द्वारा अर्जित नहीं हैं वो रत्नजड़ित हीरे का हार है जिसका उपयोगिता वहाँ न होने से वह कूड़ा बन जाता है। अब एक समझदार मनुष्य को चाहिए कि वो अपनी खाने की मेज पर ऐसे कूड़े को न आने दे। लेकिन हमें अब सत्ता के हर प्रतिष्ठान, मीडिया, प्रचार माध्यमों से यही सिखाया जा रहा है कि ये प्रदूषण नहीं हैं वरन मुख्य बात यही है खाने की मेज पर लोकतन्त्र को सजाने से बेहतर है कि वहाँ इस कूड़े को प्रतिष्ठित किया जाये। हमें भी ऐसा करने में एक मौज मिल रही है। हम अब अपने अपने विषय या क्षेत्र के विद्वानों की बजाय ऐरों-गैरों को सुनने लगे हैं। देश की अर्थव्यवस्था गर्त में जा रही हो लेकिन हम सुनेंगे अपनी तरह के अनुपम, अनुपम खेर को, हम सुनेंगे कंगना रानौट को, रक्षा मामलों के लिए अक्षय कुमार हैं ही। देशभक्ति सिखाने के लिए ये सारे ऐरे-गैरे ज़िंदाबाद हैं। सूचनाएँ अब सूचनाएँ नहीं हैं बल्कि ध्वनियों का ऐसा प्रदूषण हैं जहां शोर है, शराबा है और ऐसी उत्तेजना है जिससे इंसान का इंसान बोध खत्म हो जाये फिर लोकतन्त्र की मेज़ पर बैठना तो केवल नागरिकों को था और उनका विवेक तो पूरी तरह इन चैनलों ने समूल ही निगल लिया है। राजनीति अब सत्य या करुणा या सहानुभूति से प्रेरित नहीं बल्कि एक इंसान की भरपूर हठ से संचालित है। और किसी लोकतन्त्र में किसी एक का ही होना और सर्वत्र होना और उसका हठधर्मी होना और करुणा, सत्य और सहानुभूति से निर्मम ढंग से रहित होना ही वो भी लोकतन्त्र की मेज़ पर सबसे बड़ा कूड़ा है, सबसे बड़ा प्रदूषण है। पटाखों जलाने की ज़िद से भी बड़ा। अब भले ही उसकी हठधर्मिता, उसका दिखावा, उसका छलावा, उसकी निर्ममता देश की बहुसंख्यक आबादी के लिए रत्नजड़ित हीरे का हार ही क्यों न हो पर अंततः और अनिवार्यतया वह कचरा है। कूड़ा है। प्रदूषण है। और अफसोस की बात है कि हम जैसा कि ऊपर कहा प्रदूषण चुनना सीख गए हैं। लेखक पिछले 15 सालों से सामाजिक आंदोलनों से जुड़कर काम कर रहे हैं। विचार व्यक्तिगत हैं। अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।
बरसात आती है। धरती को नहलाकर उसे हरियाली की चादर ओढ़ाकर चली जाती है। फिर दिवाली यानी दीपावली आती है। उत्तर भारत में दिवाली पाँच दिनों का त्योहार होता है। अनिवार्य रूप से खेती के चक्र से जुड़े इस त्योहार के साथ सुख, समृद्धि, प्रकाश, साफ- सफाई और तमाम अच्छे अच्छे भाव व कर्म जुड़े हैं। इस त्योहार में कब और कैसे प्रदूषण का प्रवेश हो गया, यह एक गहन शोध का विषय है लेकिन आज इक्कीसवीं सदी में जब इंसान को थोड़ा अधिक तार्किक, समझदार और जिम्मेदार होने की ज़रूरत थी, कम से कम आस्थाप्रधान देशों के लोगों ने इन अपेक्षाओं से पल्ला झाड़ लिया है और पूरे होशो-हवास में प्रकृति के ऊपर प्रदूषण को चुन लिया है। प्रकृति की रक्षा के लिए उसके पास सेव द नेचर, सेव द इनवायरमेंट, सेव द टाईगर और सेव द एवरीथिंग जैसे सबसे बड़े झूठ हैं। यह जुमले फेंकते समय यह गुमान ज़रूर हो सकता है कि आप इस धरती, जलवायु, पर्यावरण, शेर, नदियां आदि सब को बचा सकते हैं लेकिन इसमें अहंकार में जो बात छिपायी जाती है वो ये कि आप इससे बने हैं और आप महज़ अपने आप को बचाने की चिंता कीजिये। प्रकृति अपनी चिंता आप करती है। बहरहाल। इस दिवाली भी जबकि तमाम चिकित्सा अनुसन्धानों, वैज्ञानिकों, चिकित्सकों ने बार बार कहा कि प्रदूषण और कोरोना के बीच बहुत गहरा संबंध है और जिस अनुपात में प्रदूषण बढ़ेगा उसी अनुपात में कोरोना महामारी भी अपने पाँव पसारेगी। यह बात किसी गूढ़ भाषा में नहीं बल्कि आम चलन की भाषा में कही गयी। यह कोई नयी बात भी नहीं थी जिसका रहस्योद्घाटन हुआ हो बल्कि सभी ने देखा है कि कोरोना से संक्रमित व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ बढ़ जाती है। सांस लेने में तकलीफ प्रदूषित हवा की वजह से भी होती है। ऐसे में अगर दोनों वजहें एक साथ किसी इंसान को प्रभावित करें तो उसका गंभीर रूप से बीमार होना निश्चित है। फिर यह बीमारी केवल एक इंसान को बीमार नहीं करती बल्कि उसके संपर्क में आए कितने ही लोगों को संक्रमित कर सकती है। वैज्ञानिक मानते हैं कि एक इंसान अठासी हज़ार लोगों तक को संक्रमित कर सकता है। इस अर्थ में इस दिवाली में प्रदूषण के हर कारण और कारक को त्योहार से दूर रखे जाने की एहतियात बरतने की ज़रूरत थी। इस लिहाज से दिवाली का चिकित्सकीय महत्व भी इस बार बहुत गंभीरता से जुड़ गया। जिसका पालन करते हुए लोग इक्कीसवीं सदी के ज़्यादा तार्किक, ज़्यादा समझदार और थोड़ा ज़्यादा जिम्मेदार होने की कसौटी पर खरे उतर सकते थे। औपचारिकता के लिए सही देश की लोकतान्त्रिक संस्थाओं ने अपनी ज़िम्मेदारी निभाई। राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल, कोर्ट्स, सरकारों ने अपने अपने स्तर पर प्रदूषण फैलाने वाली तमाम गतिविधियों को रोकने की समझाइशें दीं। अफसोस, फिर भी हमने प्रदूषण चुना। प्रदूषण है क्या? प्रदूषण, विकृति का पर्याय है। विकृति यानी जो जैसा होना चाहिए उसका वैसा न होना। इसे स्थान सूचक शब्दावली में भी समझ सकते हैं जिसे जहां होना चाहिए वहाँ न होना। अगर संस्कृति, प्रकृति के साथ मनुष्य का सकारात्मक संवाद या विनम्र हस्तक्षेप है तो विकृति उसी प्रकृति के साथ, उसी मनुष्य का नकारात्मक विवाद या गर्वीला अतिक्रमण है। प्रदूषण कई वजहों से होता है। दिवाली के संदर्भ में बात करें तो यह पटाखे जलाने से सबसे ज़्यादा होता है। और यह इतना जाना, समझा, परखा हुआ तथ्य है कि बीते कई सालों से दिल्ली जैसे महानगरों में अलग अलग तरह से समझाइशें जारी होती रहती हैं कि त्योहार सादगी से मनाएँ, पटाखे तो बिलकुल न चलाएं आदि आदि। कुछ लोग पटाखे जलाने को ज़रूरी नहीं भी मानते हैं और बिना पटाखे जलाए भी अपनी दिवाली मना लेते हैं। ज़्यादातर लोग वो हैं जो थोड़ा कम पटाखे जलाते हैं ताकि इस त्योहार से जुड़े अनुकूलन में स्मृतियों को तरोताजा किया जा सके । अधिकांश लोग वो हैं जो इसे पटाखों का ही त्योहार मानते हैं और यही वो मनवाना भी चाहते हैं। खुद का किसी बात को मानना एक बात है लेकिन किसी को जबर्दस्ती मनवाना एक हठ है। हठ को भी मानव स्वभाव के प्रदूषक के तौर पर देखा जाता है। इस हठ को तब और बल मिलता है जब इसे आस्था, धर्म, खतरे और बदले की कार्यवाही के तौर पर किसी राजनीतिक दल द्वारा प्रोजेक्ट कर दिया जाता है। इस बल में कई गुना इजाफा तब हो जाता है जब वह राजनीतिक दल सत्ता में भी हो। तो इस बार भी इस सत्तासीन दल के बल ने इंसान के हठ रूपी प्रदूषण से प्रकृति के साथ निर्लज्ज ढंग से ऐसी तैसी की। विचारणीय प्रश्न यह है कि हम जानबूझकर प्रदूषण क्यों चुन रहे हैं? अभी बिहार चुनाव सम्पन्न हुए और बिहार के लोगों ने रोजगार, दवाई, सिंचाई, पढ़ाई के स्थान पर श्मशान, कब्रिस्तान, घुसपैठिए,आतंकवादी, नक्सल, जंगलराज, अपहरण, फिरौती जैसे शब्दों को चुना। ये सारे शब्द कम से कम शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आजीविका, सिंचाई जैसे शब्दों के सामने तो अच्छे समाज और अच्छे देश के लिए प्रदूषण ही हैं। हैं न? इसी तरह मध्य प्रदेश में टिकाऊ और बिकाऊ विधायकों के बीच जनता ने बिकाऊ को चुन लिया। बिकाऊ होना विधानसभा और सरकार के लिए प्रदूषण हैं। लोगों ने यहाँ भी प्रदूषण चुना। दिवाली के त्योहार में मंदिरों का महत्व तो है लेकिन मंदिरों की जगह लोकतन्त्र में नहीं ही है। फिर भी लोकतन्त्र की शिखर संस्था तक पहुँचने के लिए मंदिर का इस्तेमाल जिस रूप में किया गया वह असल में प्रदूषण ही था पर अपनी आदत से मजबूर होते जा रहे हम फिर प्रदूषण चुन बैठे। ध्यान से देखें तो हमारे घरों और सार्वजनिक जीवन में हम जैसे प्रदूषण चुनने के अभ्यस्त होते जा रहे हैं। प्रदूषण का एक अर्थ कभी एक शिक्षक ने समझाया था जहां उनका मतलब किसी भी प्रकार के कूड़े से था और कूड़ा का सीधा सा मतलब था कि जो जहां नहीं होना चाहिए वो अगर वहाँ है तो वो कूड़ा कहलाएगा। मसलन, खाने की मेज पर अगर आप हीरे के रत्नजड़ित हार रख दें तो भले ही वह कितना ही मूल्यवान क्यों नो पर वो वहाँ कूड़ा है। यानी एक रत्नजड़ित हीरे के हार की खाने की मेज पर कोई ज़रूरत नहीं है। एक लोकतान्त्रिक देश में जैसे अपनी जाति, कुल, खानदान, धर्म, क्षेत्र, भाषा आदि का अभिमान इसलिए कूड़ा है क्योंकि यहाँ लोकतन्त्र खाने की मेज है और आपका तमाम ऐसी बातों पर अभिमान जो असल में आपके द्वारा अर्जित नहीं हैं वो रत्नजड़ित हीरे का हार है जिसका उपयोगिता वहाँ न होने से वह कूड़ा बन जाता है। अब एक समझदार मनुष्य को चाहिए कि वो अपनी खाने की मेज पर ऐसे कूड़े को न आने दे। लेकिन हमें अब सत्ता के हर प्रतिष्ठान, मीडिया, प्रचार माध्यमों से यही सिखाया जा रहा है कि ये प्रदूषण नहीं हैं वरन मुख्य बात यही है खाने की मेज पर लोकतन्त्र को सजाने से बेहतर है कि वहाँ इस कूड़े को प्रतिष्ठित किया जाये। हमें भी ऐसा करने में एक मौज मिल रही है। हम अब अपने अपने विषय या क्षेत्र के विद्वानों की बजाय ऐरों-गैरों को सुनने लगे हैं। देश की अर्थव्यवस्था गर्त में जा रही हो लेकिन हम सुनेंगे अपनी तरह के अनुपम, अनुपम खेर को, हम सुनेंगे कंगना रानौट को, रक्षा मामलों के लिए अक्षय कुमार हैं ही। देशभक्ति सिखाने के लिए ये सारे ऐरे-गैरे ज़िंदाबाद हैं। सूचनाएँ अब सूचनाएँ नहीं हैं बल्कि ध्वनियों का ऐसा प्रदूषण हैं जहां शोर है, शराबा है और ऐसी उत्तेजना है जिससे इंसान का इंसान बोध खत्म हो जाये फिर लोकतन्त्र की मेज़ पर बैठना तो केवल नागरिकों को था और उनका विवेक तो पूरी तरह इन चैनलों ने समूल ही निगल लिया है। राजनीति अब सत्य या करुणा या सहानुभूति से प्रेरित नहीं बल्कि एक इंसान की भरपूर हठ से संचालित है। और किसी लोकतन्त्र में किसी एक का ही होना और सर्वत्र होना और उसका हठधर्मी होना और करुणा, सत्य और सहानुभूति से निर्मम ढंग से रहित होना ही वो भी लोकतन्त्र की मेज़ पर सबसे बड़ा कूड़ा है, सबसे बड़ा प्रदूषण है। पटाखों जलाने की ज़िद से भी बड़ा। अब भले ही उसकी हठधर्मिता, उसका दिखावा, उसका छलावा, उसकी निर्ममता देश की बहुसंख्यक आबादी के लिए रत्नजड़ित हीरे का हार ही क्यों न हो पर अंततः और अनिवार्यतया वह कचरा है। कूड़ा है। प्रदूषण है। और अफसोस की बात है कि हम जैसा कि ऊपर कहा प्रदूषण चुनना सीख गए हैं। लेखक पिछले पंद्रह सालों से सामाजिक आंदोलनों से जुड़कर काम कर रहे हैं। विचार व्यक्तिगत हैं। अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।
अधिक मात्रा में Oily Food का सेवन करना हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। आप हेल्थ को लेकर कितने ही कॉन्शियस हों लेकिन सामने गर्म-गर्म फ्रेंच फ्राई, समोसे, पकौड़े देखकर मुंह में पानी आ ही जाता है। यह ऑयली फूड ट्रांस फैट और सैचुरेटेड फैट से भरपूर होते है जो ना सिर्फ हमारा वज़न बढ़ाते हैं, बल्कि हमें कई बीमारियों का शिकार भी बना देते हैं। अच्छी सेहत के लिए ऑयली फूड्स का सेवन करने से परहेज़ करें। आइये इस बारे में चर्चा करें। ताली हुई चीज़ों की वजह से ही अपच, हाई ब्लड प्रेशर, अधिक कोलेस्ट्रोल, डायबिटीज और दिल की बीमारी होने का खतरा अधिक रहता है। - अपच, सिने में जलन, डायरिया और अन्य पेट संबंधी समस्याएं का सामना करना पड़ सकता है। - कब्ज और बवासीर रोग की शिकायत भी हो सकती है। - मोटापा और वजन बढ़ना जैसी दिक्कतें भी होती है। - टाइप-2 डायबिटीज और हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है। - उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) की समस्या पैदा हो सकती है। - खराब कोलेस्टेरॉल में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। - मुंहासे और त्वचा संबंधी अन्य समस्याएं भी बड़ जाते है। ऑयली फूड या डीप फ्राइड फूड के नुकसान से बचने के उपाय (How to Prevent Side Effects Of Oily Food In Hindi) 1- गुनगुना पानी पीएं (Drinking Lukewarm Water) 2- डिटॉक्स ड्रिंक लें (Detox Drink) 3- अगले भोजन की प्लानिंग करें (Plan To Next Meal) 4- थोड़ी देर वॉक करें (Walking) 5- प्रोबायोटिक्स लें (Probiotics) अस्वीकरणः सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें। स्पोर्ट्सकीड़ा हिंदी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
अधिक मात्रा में Oily Food का सेवन करना हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। आप हेल्थ को लेकर कितने ही कॉन्शियस हों लेकिन सामने गर्म-गर्म फ्रेंच फ्राई, समोसे, पकौड़े देखकर मुंह में पानी आ ही जाता है। यह ऑयली फूड ट्रांस फैट और सैचुरेटेड फैट से भरपूर होते है जो ना सिर्फ हमारा वज़न बढ़ाते हैं, बल्कि हमें कई बीमारियों का शिकार भी बना देते हैं। अच्छी सेहत के लिए ऑयली फूड्स का सेवन करने से परहेज़ करें। आइये इस बारे में चर्चा करें। ताली हुई चीज़ों की वजह से ही अपच, हाई ब्लड प्रेशर, अधिक कोलेस्ट्रोल, डायबिटीज और दिल की बीमारी होने का खतरा अधिक रहता है। - अपच, सिने में जलन, डायरिया और अन्य पेट संबंधी समस्याएं का सामना करना पड़ सकता है। - कब्ज और बवासीर रोग की शिकायत भी हो सकती है। - मोटापा और वजन बढ़ना जैसी दिक्कतें भी होती है। - टाइप-दो डायबिटीज और हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है। - उच्च रक्तचाप की समस्या पैदा हो सकती है। - खराब कोलेस्टेरॉल में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। - मुंहासे और त्वचा संबंधी अन्य समस्याएं भी बड़ जाते है। ऑयली फूड या डीप फ्राइड फूड के नुकसान से बचने के उपाय एक- गुनगुना पानी पीएं दो- डिटॉक्स ड्रिंक लें तीन- अगले भोजन की प्लानिंग करें चार- थोड़ी देर वॉक करें पाँच- प्रोबायोटिक्स लें अस्वीकरणः सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें। स्पोर्ट्सकीड़ा हिंदी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
राजस्थान सरकार होम गार्ड विभाग ने जिला ट्रेनिंग सेंटर , सब सेंटर और सीमा ग्रह रक्षा दल में होम गार्ड और स्वंय सेवक की भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है। इस भर्ती के तहत कुल 2500 होम गार्डों और स्वंय सेवकों की भर्ती की जाएगी। इस भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया 7 अप्रैल से जारी होगी। इन पदों पर आवेदन के लिए अंतिमा तारीख 6 मई 2020 रखी गई है। स्वंय सेवक पदों के लिए 8वीं पास उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। इन पदों के लिए उम्र सीमा 18 से 35 वर्ष है। वहीं आवेदनकर्ता तीन साल जिला ट्रेनिंग सेंटर में रहता होना चाहिए। इन पदों के लिए आवेदन करने के लिए आवेदन शुल्कः जनरल और ओबीसी उम्मीदवारों के लिए 200 रुपए और एससी, एसटी और ईडब्लूएस और एबीसी उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क 175 रुपए रखा गया है। इन पदों पर उम्मीदवारों का चयन Physical Endurance Test के जरिए होगा, जिसके एडमिट कार्ड भी ऑनलाइन जारी किए जाएंगे। इसमें एक पुरुष उम्मीदवार को 100 मीटर रेस में दौड़ना होगा, वहीं महिला उम्मीदवार को 800 मीटर रेस दिए गए समय में पूरी करनी होगी। इच्छुक उम्मीदवार वेबसाइट http://home. rajasthan. gov. in/ के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। उम्मीदवारों को राजस्थान होम गार्ड विभाग की वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन का कोई अन्य साधन / मोड स्वीकार नहीं किया जाएगा। आवेदन शुल्क जमा करने से पहले सभी उम्मीदवारों को फॉर्म में सभी प्रवेश भरने की जाँच करें क्योंकि किसी भी परिस्थिति में शुल्क जमा करने के बाद शुल्क वापस नहीं किया जाना चाहिए। ऑनलाइन आवेदन के लिए उम्मीदवारों को एसएसओ आईडी बनानी होगी। एसएसओ आईडी sso. rajasthan. gov. in पर जाकर बनाई जा सकती है। इस https://recruitment2. rajasthan. gov. in लिंक पर जाकर उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं।
राजस्थान सरकार होम गार्ड विभाग ने जिला ट्रेनिंग सेंटर , सब सेंटर और सीमा ग्रह रक्षा दल में होम गार्ड और स्वंय सेवक की भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है। इस भर्ती के तहत कुल दो हज़ार पाँच सौ होम गार्डों और स्वंय सेवकों की भर्ती की जाएगी। इस भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया सात अप्रैल से जारी होगी। इन पदों पर आवेदन के लिए अंतिमा तारीख छः मई दो हज़ार बीस रखी गई है। स्वंय सेवक पदों के लिए आठवीं पास उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। इन पदों के लिए उम्र सीमा अट्ठारह से पैंतीस वर्ष है। वहीं आवेदनकर्ता तीन साल जिला ट्रेनिंग सेंटर में रहता होना चाहिए। इन पदों के लिए आवेदन करने के लिए आवेदन शुल्कः जनरल और ओबीसी उम्मीदवारों के लिए दो सौ रुपयापए और एससी, एसटी और ईडब्लूएस और एबीसी उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क एक सौ पचहत्तर रुपयापए रखा गया है। इन पदों पर उम्मीदवारों का चयन Physical Endurance Test के जरिए होगा, जिसके एडमिट कार्ड भी ऑनलाइन जारी किए जाएंगे। इसमें एक पुरुष उम्मीदवार को एक सौ मीटर रेस में दौड़ना होगा, वहीं महिला उम्मीदवार को आठ सौ मीटर रेस दिए गए समय में पूरी करनी होगी। इच्छुक उम्मीदवार वेबसाइट http://home. rajasthan. gov. in/ के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। उम्मीदवारों को राजस्थान होम गार्ड विभाग की वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन का कोई अन्य साधन / मोड स्वीकार नहीं किया जाएगा। आवेदन शुल्क जमा करने से पहले सभी उम्मीदवारों को फॉर्म में सभी प्रवेश भरने की जाँच करें क्योंकि किसी भी परिस्थिति में शुल्क जमा करने के बाद शुल्क वापस नहीं किया जाना चाहिए। ऑनलाइन आवेदन के लिए उम्मीदवारों को एसएसओ आईडी बनानी होगी। एसएसओ आईडी sso. rajasthan. gov. in पर जाकर बनाई जा सकती है। इस https://recruitmentदो. rajasthan. gov. in लिंक पर जाकर उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं।
Night Anxiety Reason ऐसा कई बार होता है जब हम किसी बात को लेकर लगातार सोच में पड़ जाते हैं जिसकी वजह से खासतौर पर रात की नींद डिसटर्ब हो जाती है और आप सुबह समय पर उठ नहीं पाते। ऐसा अगर आपके साथ होता है तो आप अकेले नहीं हैं। रात में एंग्जाइटी या बेचैनी होने के पीछे कुछ कारण हैं आइए जानें इनके बारे में। नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। Reasons Of Anxiety: अक्सर लोगों को रात के समय ज्यादा एंग्जाइटी महसूस होती है, जिसकी वजह से नींद कई बार टूटती है। इसके पीछे की वजह लगातार स्ट्रेस और चिंता हो सकती है। जिसकी वजह से रात में सोते समय भी आपके दिमाग में वही ख्याल ज्यादा एंग्जाइटी का कारण बन जाते हैं। रात में अक्सर चिंता और डर लोगों के दिमाग में घर कर लेता है। लोग अपने विचारों पर कंट्रोल नहीं कर पाते और ज्यादा सोचने लगते हैं। मन में आने वाले ये नेगेटिव विचार आपको चैन की नींद भी नहीं लेने देते। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रात के समय ही सबसे ज्यादा एंग्जाइटी क्यों होती है? मनोवैज्ञानिक एवी सैंडर्स ने इसके कुछ कारण बताए हैं। रात में ही आखिर क्यों होती है ज्यादा एंग्जाइटी? रात के वक्त जब सब सो रहे होते हैं, तो माहौल बिल्कुल शांत हो जाता है। उस वक्त किसी तरह का डिस्ट्रेक्शन नहीं होता। शांत माहौल में जब हम अकेले होते हैं, उस समय हमारे दिमाग में कई तरह के विचार आते हैं, इसलिए एंग्जाइटी ज्यादा बढ़ जाती है। थकान निगेटिव विचारों को बढ़ावा देती है। रात में अगर थकान ज्यादा होती है, तो अक्सर हमें चिंता सताने लगती है, जिसकी वजह से हम ज्यादा सोचने लगते हैं। ज्यादा सोचने से रात में एंग्जाइटी बढ़ जाती है। रात में सोते समय कोर्टिसोल हार्मोन का लेवल कम हो जाता है। जिससे डर और चिंता वाले विचार ज्यादा आने लगते हैं, जो एंग्जाइटी का कारण बनते हैं। दिन के समय हम ज्यादा एक्टिव होते हैं। हमारा हर चीज पर कंट्रोल रहता है। इसी के विपरीत रात के समय हमारा आसपास के माहौल पर कंट्रोल बिल्कुल नहीं होता, जिससे चिंता बढ़ने लगती है और एंग्जाइटी ज्यादा हो जाती है। Disclaimer: लेख में उल्लिखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।
Night Anxiety Reason ऐसा कई बार होता है जब हम किसी बात को लेकर लगातार सोच में पड़ जाते हैं जिसकी वजह से खासतौर पर रात की नींद डिसटर्ब हो जाती है और आप सुबह समय पर उठ नहीं पाते। ऐसा अगर आपके साथ होता है तो आप अकेले नहीं हैं। रात में एंग्जाइटी या बेचैनी होने के पीछे कुछ कारण हैं आइए जानें इनके बारे में। नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। Reasons Of Anxiety: अक्सर लोगों को रात के समय ज्यादा एंग्जाइटी महसूस होती है, जिसकी वजह से नींद कई बार टूटती है। इसके पीछे की वजह लगातार स्ट्रेस और चिंता हो सकती है। जिसकी वजह से रात में सोते समय भी आपके दिमाग में वही ख्याल ज्यादा एंग्जाइटी का कारण बन जाते हैं। रात में अक्सर चिंता और डर लोगों के दिमाग में घर कर लेता है। लोग अपने विचारों पर कंट्रोल नहीं कर पाते और ज्यादा सोचने लगते हैं। मन में आने वाले ये नेगेटिव विचार आपको चैन की नींद भी नहीं लेने देते। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रात के समय ही सबसे ज्यादा एंग्जाइटी क्यों होती है? मनोवैज्ञानिक एवी सैंडर्स ने इसके कुछ कारण बताए हैं। रात में ही आखिर क्यों होती है ज्यादा एंग्जाइटी? रात के वक्त जब सब सो रहे होते हैं, तो माहौल बिल्कुल शांत हो जाता है। उस वक्त किसी तरह का डिस्ट्रेक्शन नहीं होता। शांत माहौल में जब हम अकेले होते हैं, उस समय हमारे दिमाग में कई तरह के विचार आते हैं, इसलिए एंग्जाइटी ज्यादा बढ़ जाती है। थकान निगेटिव विचारों को बढ़ावा देती है। रात में अगर थकान ज्यादा होती है, तो अक्सर हमें चिंता सताने लगती है, जिसकी वजह से हम ज्यादा सोचने लगते हैं। ज्यादा सोचने से रात में एंग्जाइटी बढ़ जाती है। रात में सोते समय कोर्टिसोल हार्मोन का लेवल कम हो जाता है। जिससे डर और चिंता वाले विचार ज्यादा आने लगते हैं, जो एंग्जाइटी का कारण बनते हैं। दिन के समय हम ज्यादा एक्टिव होते हैं। हमारा हर चीज पर कंट्रोल रहता है। इसी के विपरीत रात के समय हमारा आसपास के माहौल पर कंट्रोल बिल्कुल नहीं होता, जिससे चिंता बढ़ने लगती है और एंग्जाइटी ज्यादा हो जाती है। Disclaimer: लेख में उल्लिखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।
डाक्टर फ्रायड ने खोज करके पता चलाया है कि मनुष्य की वासनाओं के दमन से, विशेषकर कामवासना के दमन से, मनुष्य अपने मानसिक स्वास्थ्य को खो देता है । दमन करनेवाला तत्व मनुष्य के नैतिक संस्कार, जो मनुष्य के अचेतन मन के भाग होते हैं, कहते हैं । इसे सेन्सर थवा सुपर ईगी कहा गया है । दमित वासना कारण चिन्ता को उत्पन्न करती है । यह चिन्ता ही कारण भय उन्माद आदि रोगों में प्रगट होती है । जो मनुष्य कामवासना की गन्दी समझकर उसका दमन करता है, उसमें कामवासना कम न होकर और भी बढ़ जाती है । ऐसा व्यक्ति सत्र प्रकार की गंदगी से डरने लगता है । वह सब समय सफाई में लगा रहता है, मैले से इतना डरता है कि उसका व्यान आते ही वह भोजन नहीं कर सकता । कभी कभी अपने सभी श्रोर मैला ही मैला देखने लगता है । घंटों हाथ साफ करता है परंतु हाथ गन्दे ही दिखाई देते हैं । कामवासना को यदि नागिन के रूप में मान लिया जाय तो मनुष्य सर्प मे डरने लगता है, वह अपने आस-पास सर्पही सर्प देखता है । यदि उसे भूत का रूप माना जाय तो मनुष्य भूतों की दुनिया देखने लगता हैं और इनके डर के मारे जीवन भार रूप बन जाता है। कभी-कभी कामवासना मनुष्य की इच्छा के प्रतिकूल ही उसकी अचेतन अवस्था में प्रगट हो जाती है । संमोहन की अवस्था मे और स्वप्नावस्था मे कामवासना मनुष्य के समक्ष आ जाती है । अनेक प्रकार की साकेतिक चेष्टायें हाथ साफ करने का अभिनय, ठ काटना, पैर हिलाना ये सभी कामवासना के बाहर आने के गुप्त उपाय हैं । शारीरिक रोगों द्वारा भी दमित कामवासना बाहर आती है। देर तक ठहरनेवाली सिर की पीड़ा, दमा, एक्जिमा भी इसके दमन से हो जाता है । वासना के दमन का कार्य मनुष्य की चेतना के परे अपने आप होता है । रोगी मनुष्य को यह ज्ञात भी नहीं होता कि उसकी वासना का दमन हो रहा है । अतएव यदि वह इस दमन का अन्त भी करना चाहे तो उसमे वह असफल रहेगा। बाहरी लक्षण भीतरी मानसिक स्थिति के ठीक प्रतिकूल होते हैं । जिस व्यक्ति में क्रोध का दमन होता है वह बाहर से अति विनीत, जिसमे काम का दमन है वह तपस्वी और जिसमें ईर्ष्या का दमन है वह उदार दिखाई देता है । इस दमन को कम किये बिना रोग नहीं जाता । परन्तु इस दमन को हटाना अत्यन्त कठिन है क्योंकि इसका ज्ञान स्वयं रोगी को नहीं रहता । मानसिक स्वास्थ्य के लिये मनुष्य की सुख की इच्छा का दमन करना मात्र पर्यास नहीं है, उसके लिये अपने सभी कामों को सबकी भलाई के लिये करना श्रावश्यक है । डाक्टर फ्रायड ने बताया है कि जो लोग संतान निग्रह के उपायों को काम में लाकर कामेच्छा तृप्त करते हैं उन्हें किसी न किसी प्रकार का मानसिक रोग हो जाता है और जब वे संतान निग्रह के उपायों को काम में लाना बन्द कर देते हैं तो उनका रोग चला जाता है। इसका अर्थ है कि प्रकृति उस व्यक्ति को दण्ड देती है जो कामक्रीड़ा के सुख को बिना उसकी कीमत चुकाये भोगना चाहता है। प्रकृति ने सबसे अधिक सुख रति क्रिया में रखा है ताकि प्राणी उसके - सबसे महत्व के कार्य को प्रसन्नता से करे । प्रकृति का उद्देश्य व्यक्ति की रक्षा नहीं ' जाति की रक्षा है । जो व्यक्ति जाति की रक्षा में किसी प्रकार सहायक होता है उसे प्रकृति शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य प्रदान करती हैं अर्थात् जो व्यक्ति अपने आपके लिये न बीकर समाज के लिये, मानव जाति के लिये, संसार के लिए जीता है वह सुखी और स्वस्थ रहता है । काम वासना के सुख को छोड़ देने वाले सभी लोग अस्वस्थ नहीं हो जाते । जो लोग समाज सेवा में जीवन व्यतीत कर देते है वे स्वस्थ रहते हैं। इससे स्पष्ट है कि मनुष्य की व्यक्तिगत इच्छाओं की तृप्ति मे उसे श्रारोग्य प्राप्त नहीं होता, वरन् पित करने से प्रारोग्य लाभ होता है । दूसरों की सेवा करने के लिये अपनी रक्षा करना, इन्द्रियों शरीर को व्ली बनाना, उनको भूखों की तृप्ति करना आवश्यक है। इस तृप्ति के विना મનુષ્ય में काम करने की क्षमता नहीं आती। इन्हे तृप्त करने से मनुष्य को सुख होता है। ऐसा सुख मानसिक स्वास्थ्य के लिये आवश्यक है। प्रकृति मनुष्य को सुख उसका काम करने के लिये देती हैं । हरखर्ट स्पेन्सर के इस कथन में मौलिक -सत्य है कि जो वस्तु जीवनदायनी होती है वही सुखद भी होती है । यदि मनुष्य का जीवन प्राकृतिक हो तो उसे रोग न हों। प्रकृति स्वयं मनुष्य को परामार्थी और परोपकारी बनने की प्रेरणा देता है। जो लोग स्वार्थ और बस प्राकृतिक प्रवृत्तियों को दवाते हैं वे ही रोगी बनते हैं। कार को समर्पित करके जो प्रकृति के नियम को पालते है वे प्रसन्न मन और आरोग्यवान वनते है । प्रकृति का लक्ष्य श्राव्यात्मिक विकास है । प्राकृतिक विधान मौलिक विधान है । स्नेह और अहंकार मनुष्य के जीवन में दो तत्व फाम करते हैं एक स्नेह और दूसरा प्रकार । र मनुष्य को सीमित बनाता है। वह व्यक्तिगत उन्नति के लिये मनुष्य को प्रेरित करता है । इसी के कारण मनुष्य शरीर में, बुद्धि में, यश औौर कीर्ति में दूसरों से अच्छा सिद्ध करने की चेष्टा करता है। इसी के मनुष्य बनाता है और अपार धन संचय करता है । इसके जाने पर मनुष्य दूसरों पर प्रभुता जमाने की चेष्टा करता है । जब एक व्यक्ति का ग्रहकार दूसरे व्यक्ति के प्रकार से टकराता है तो बड़ी-बड़ी लड़ाइयाँ उत्पन्न होती है। ग्रहकार में छा लग जाने से मनुष्य का जीवन मृत्यु तुल्य हो जाता है। जो मनुष्य अपने किसी की कमी का अनुभव करता है, वह इस कमी को प दूसरों की दृष्टि से श्रोल करने के लिये किमी दूसरी र साधारण वृद्धि करने लगता है। इसके कारण वह संसार में असाधारण काम कर डालता है। जिस के में किसी कारण श्रात्मग्लानि होती है वह इसे भुलाने के लिये आत्मप्रशंसा प्राप्ति के अनेक उपाय रचता है । दूसरों पर अधिकार बनाने की इच्छा भी अहंकार तत्व का अंग है । सभी प्रकार की वृद्धि द्वारा हम दूसरों का ध्यान अपनी ओर आकर्पित करते है और इस प्रकार हम उनपर अधिकार जमाने की चेष्टा करते हैं। जिन लोगों में वास्तविक योग्यता है वे अपनी योग्यता द्वारा, भले कामों द्वारा, दूसरों पर अधिकार जमाते हैं और जिनमे यह योग्यता नहीं है वे अपने दुर्गुणों के द्वारा दी विकार जमाते है । ऐसे लोग दूसरों को त्रास देते हैं। दुराचरण अधिकार जमाने की इच्छा का ही परिणाम है । जब मनुष्य किमी प्रकार दूसरों पर अधिकार नहीं जा सकता तो वह बीमार होकर दूसरों पर अधिकार जमाने की चेष्टा करता है । डा० लफड एडलर के अनुसार मानसिक रोगों का एक मात्र कारण दूसरों पर श्रविकार जमाने की इच्छा है रोग में यह इच्छा विकृत मार्ग से प्रकाशित होती है । जिस मनुष्य का जितना अधिकार रहता है उसकी तृति की उतनी ही कम संभावना रहती है। ऐसे व्यक्ति का क्र र कर्मा होना अथवा मानसिक रोगी बनना उतना ही स्वाभाविक होता है । जन मनुष्य के स्वाभिमान को ठेस लगती है तो वह अपमान करने वाले लोगों का नाश कर देना चाहता है अथवा उन्हें दण्ड देना चाहता है । जब वह ऐसा करने में असमर्थ रहता है तो वह श्रात्महत्या करता है श्रथवा मानसिक या शारीरिक रोगी बन जाता है । मानसिक और शारीरिक रोग मनुष्य को श्रात्म-हत्या से बचाते है । जिस मनुष्य का जितना अभिमान रहता है હોદ ઔર અદંર उसका मानसिक असंतोष भी उतना ही बढ़ा रहता है। ऐसे व्यक्ति को रोगी बनने की उतनी ही अधिक होती है । सभी लोगों में सामान्य अभिमान होना अनिवार्य हैं । जिस मनुष्य में श्रभिमान की बिलकुल कमी होती है वह किसी काम को लगन के साथ नहीं कर पाता । मनुष्य अभिमान के कारण ही दूसरों का उपकार ग्रहण नहीं करता । वह स्वावलम्बी बनने की चेष्टा करता है और समाज में ख्याति प्राप्त करने के लिये उसकी भलाई के लिये अनेक कार्य करता है । श्रभिमान के कारण ही मनुष्य अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण करता और तपस्वी बनता है । तप मनुष्य की मानसिक शक्ति को बढाता है । इससे मनुष्य के व्यक्तित्व का बल बढ़ जाता है और वह दूसरे लोगों को अपने विचारानुसार चलाने में समर्थ होता है । श्रमिमानव अपनी सीमा से अधिक बढ़ जाता है तभी वह व्यक्ति और समान दोनों की हानि करता है । एक मनुष्य के अभिमान को देखकर दूसरे मनुष्य में भी अभिमान का भाव जाग्रत होता है और फिर दोनों के अभिमान में टक्कर हो जाता है । बढ़े चढ़े अभिमान से व्यक्ति हर जगह अपने शत्रु बना लेता है । ऐसे लोगों को पेरानोइया का रोग हो जाता है। ऐसे लोग हर एक व्यक्ति को सन्देह की दृष्टि से देखते हैं । वे सोचते हैं कि दूसरे लोग उनके प्रति षड़यंत्र कर रहे हैं, उनके चारों और गुप्तचर फैले हुए हैं। इस प्रकार की मनोवृत्ति से पीड़ित होकर वे श्रात्म-हत्या ही कर लेते हैं । श्रमिमान की औषधि स्नेह है । स्नेह मनुष्य को दूसरों के प्रति श्राकर्पित करता है और दूसरों के हित में अपने हित को पहचानने के लिये प्रेरणा देता है । जिस मनुष्य का स्नेह जितना ही अधिक होता है उसका अभिमान उतना ही कम होता है। मानसिक रोगी को अधिक आत्मग्लानि होती हैं। इसका कारण उसका बढ़ा-चढ़ा श्रभिमान ही होता है । आत्मग्लानि को भुलाने के लिये वह रोग का आवाहन करता है । वह आपको किसी न किसी प्रकार भूल जाना चाहता है। गेग आत्महीनता की विस्मृति का उपाय है । यदि मनुष्य का अभि मान किसी प्रकार कम हो जाय तो उसका रोग अपने आप ही चला जाय । जव रोगी को स्नेह दर्शाया जाता है तो वह भी अपने भीतर स्नेह का अनुभव करता । यह स्नेह के अनुभूति ही मनुष्य की श्रभिमान जन्य मानसिक ग्रन्थि को नष्ट कर देता है । जिन बालकों को बचपन से स्नेह नहीं मिलता, उनमें आत्महीनता की भावना उत्पन्न हो जाती है । यह श्रात्महीनता का भाव ही अभिमान का जनक होता है। यदि प्रारंभ से हो बालक को स्नेह के वातावरण में रखा जाय तो उसमें न तो, श्रात्म-हीनता की भावना उत्पन्न हो और न उसका अभिमान ही
डाक्टर फ्रायड ने खोज करके पता चलाया है कि मनुष्य की वासनाओं के दमन से, विशेषकर कामवासना के दमन से, मनुष्य अपने मानसिक स्वास्थ्य को खो देता है । दमन करनेवाला तत्व मनुष्य के नैतिक संस्कार, जो मनुष्य के अचेतन मन के भाग होते हैं, कहते हैं । इसे सेन्सर थवा सुपर ईगी कहा गया है । दमित वासना कारण चिन्ता को उत्पन्न करती है । यह चिन्ता ही कारण भय उन्माद आदि रोगों में प्रगट होती है । जो मनुष्य कामवासना की गन्दी समझकर उसका दमन करता है, उसमें कामवासना कम न होकर और भी बढ़ जाती है । ऐसा व्यक्ति सत्र प्रकार की गंदगी से डरने लगता है । वह सब समय सफाई में लगा रहता है, मैले से इतना डरता है कि उसका व्यान आते ही वह भोजन नहीं कर सकता । कभी कभी अपने सभी श्रोर मैला ही मैला देखने लगता है । घंटों हाथ साफ करता है परंतु हाथ गन्दे ही दिखाई देते हैं । कामवासना को यदि नागिन के रूप में मान लिया जाय तो मनुष्य सर्प मे डरने लगता है, वह अपने आस-पास सर्पही सर्प देखता है । यदि उसे भूत का रूप माना जाय तो मनुष्य भूतों की दुनिया देखने लगता हैं और इनके डर के मारे जीवन भार रूप बन जाता है। कभी-कभी कामवासना मनुष्य की इच्छा के प्रतिकूल ही उसकी अचेतन अवस्था में प्रगट हो जाती है । संमोहन की अवस्था मे और स्वप्नावस्था मे कामवासना मनुष्य के समक्ष आ जाती है । अनेक प्रकार की साकेतिक चेष्टायें हाथ साफ करने का अभिनय, ठ काटना, पैर हिलाना ये सभी कामवासना के बाहर आने के गुप्त उपाय हैं । शारीरिक रोगों द्वारा भी दमित कामवासना बाहर आती है। देर तक ठहरनेवाली सिर की पीड़ा, दमा, एक्जिमा भी इसके दमन से हो जाता है । वासना के दमन का कार्य मनुष्य की चेतना के परे अपने आप होता है । रोगी मनुष्य को यह ज्ञात भी नहीं होता कि उसकी वासना का दमन हो रहा है । अतएव यदि वह इस दमन का अन्त भी करना चाहे तो उसमे वह असफल रहेगा। बाहरी लक्षण भीतरी मानसिक स्थिति के ठीक प्रतिकूल होते हैं । जिस व्यक्ति में क्रोध का दमन होता है वह बाहर से अति विनीत, जिसमे काम का दमन है वह तपस्वी और जिसमें ईर्ष्या का दमन है वह उदार दिखाई देता है । इस दमन को कम किये बिना रोग नहीं जाता । परन्तु इस दमन को हटाना अत्यन्त कठिन है क्योंकि इसका ज्ञान स्वयं रोगी को नहीं रहता । मानसिक स्वास्थ्य के लिये मनुष्य की सुख की इच्छा का दमन करना मात्र पर्यास नहीं है, उसके लिये अपने सभी कामों को सबकी भलाई के लिये करना श्रावश्यक है । डाक्टर फ्रायड ने बताया है कि जो लोग संतान निग्रह के उपायों को काम में लाकर कामेच्छा तृप्त करते हैं उन्हें किसी न किसी प्रकार का मानसिक रोग हो जाता है और जब वे संतान निग्रह के उपायों को काम में लाना बन्द कर देते हैं तो उनका रोग चला जाता है। इसका अर्थ है कि प्रकृति उस व्यक्ति को दण्ड देती है जो कामक्रीड़ा के सुख को बिना उसकी कीमत चुकाये भोगना चाहता है। प्रकृति ने सबसे अधिक सुख रति क्रिया में रखा है ताकि प्राणी उसके - सबसे महत्व के कार्य को प्रसन्नता से करे । प्रकृति का उद्देश्य व्यक्ति की रक्षा नहीं ' जाति की रक्षा है । जो व्यक्ति जाति की रक्षा में किसी प्रकार सहायक होता है उसे प्रकृति शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य प्रदान करती हैं अर्थात् जो व्यक्ति अपने आपके लिये न बीकर समाज के लिये, मानव जाति के लिये, संसार के लिए जीता है वह सुखी और स्वस्थ रहता है । काम वासना के सुख को छोड़ देने वाले सभी लोग अस्वस्थ नहीं हो जाते । जो लोग समाज सेवा में जीवन व्यतीत कर देते है वे स्वस्थ रहते हैं। इससे स्पष्ट है कि मनुष्य की व्यक्तिगत इच्छाओं की तृप्ति मे उसे श्रारोग्य प्राप्त नहीं होता, वरन् पित करने से प्रारोग्य लाभ होता है । दूसरों की सेवा करने के लिये अपनी रक्षा करना, इन्द्रियों शरीर को व्ली बनाना, उनको भूखों की तृप्ति करना आवश्यक है। इस तृप्ति के विना મનુષ્ય में काम करने की क्षमता नहीं आती। इन्हे तृप्त करने से मनुष्य को सुख होता है। ऐसा सुख मानसिक स्वास्थ्य के लिये आवश्यक है। प्रकृति मनुष्य को सुख उसका काम करने के लिये देती हैं । हरखर्ट स्पेन्सर के इस कथन में मौलिक -सत्य है कि जो वस्तु जीवनदायनी होती है वही सुखद भी होती है । यदि मनुष्य का जीवन प्राकृतिक हो तो उसे रोग न हों। प्रकृति स्वयं मनुष्य को परामार्थी और परोपकारी बनने की प्रेरणा देता है। जो लोग स्वार्थ और बस प्राकृतिक प्रवृत्तियों को दवाते हैं वे ही रोगी बनते हैं। कार को समर्पित करके जो प्रकृति के नियम को पालते है वे प्रसन्न मन और आरोग्यवान वनते है । प्रकृति का लक्ष्य श्राव्यात्मिक विकास है । प्राकृतिक विधान मौलिक विधान है । स्नेह और अहंकार मनुष्य के जीवन में दो तत्व फाम करते हैं एक स्नेह और दूसरा प्रकार । र मनुष्य को सीमित बनाता है। वह व्यक्तिगत उन्नति के लिये मनुष्य को प्रेरित करता है । इसी के कारण मनुष्य शरीर में, बुद्धि में, यश औौर कीर्ति में दूसरों से अच्छा सिद्ध करने की चेष्टा करता है। इसी के मनुष्य बनाता है और अपार धन संचय करता है । इसके जाने पर मनुष्य दूसरों पर प्रभुता जमाने की चेष्टा करता है । जब एक व्यक्ति का ग्रहकार दूसरे व्यक्ति के प्रकार से टकराता है तो बड़ी-बड़ी लड़ाइयाँ उत्पन्न होती है। ग्रहकार में छा लग जाने से मनुष्य का जीवन मृत्यु तुल्य हो जाता है। जो मनुष्य अपने किसी की कमी का अनुभव करता है, वह इस कमी को प दूसरों की दृष्टि से श्रोल करने के लिये किमी दूसरी र साधारण वृद्धि करने लगता है। इसके कारण वह संसार में असाधारण काम कर डालता है। जिस के में किसी कारण श्रात्मग्लानि होती है वह इसे भुलाने के लिये आत्मप्रशंसा प्राप्ति के अनेक उपाय रचता है । दूसरों पर अधिकार बनाने की इच्छा भी अहंकार तत्व का अंग है । सभी प्रकार की वृद्धि द्वारा हम दूसरों का ध्यान अपनी ओर आकर्पित करते है और इस प्रकार हम उनपर अधिकार जमाने की चेष्टा करते हैं। जिन लोगों में वास्तविक योग्यता है वे अपनी योग्यता द्वारा, भले कामों द्वारा, दूसरों पर अधिकार जमाते हैं और जिनमे यह योग्यता नहीं है वे अपने दुर्गुणों के द्वारा दी विकार जमाते है । ऐसे लोग दूसरों को त्रास देते हैं। दुराचरण अधिकार जमाने की इच्छा का ही परिणाम है । जब मनुष्य किमी प्रकार दूसरों पर अधिकार नहीं जा सकता तो वह बीमार होकर दूसरों पर अधिकार जमाने की चेष्टा करता है । डाशून्य लफड एडलर के अनुसार मानसिक रोगों का एक मात्र कारण दूसरों पर श्रविकार जमाने की इच्छा है रोग में यह इच्छा विकृत मार्ग से प्रकाशित होती है । जिस मनुष्य का जितना अधिकार रहता है उसकी तृति की उतनी ही कम संभावना रहती है। ऐसे व्यक्ति का क्र र कर्मा होना अथवा मानसिक रोगी बनना उतना ही स्वाभाविक होता है । जन मनुष्य के स्वाभिमान को ठेस लगती है तो वह अपमान करने वाले लोगों का नाश कर देना चाहता है अथवा उन्हें दण्ड देना चाहता है । जब वह ऐसा करने में असमर्थ रहता है तो वह श्रात्महत्या करता है श्रथवा मानसिक या शारीरिक रोगी बन जाता है । मानसिक और शारीरिक रोग मनुष्य को श्रात्म-हत्या से बचाते है । जिस मनुष्य का जितना अभिमान रहता है હોદ ઔર અદંર उसका मानसिक असंतोष भी उतना ही बढ़ा रहता है। ऐसे व्यक्ति को रोगी बनने की उतनी ही अधिक होती है । सभी लोगों में सामान्य अभिमान होना अनिवार्य हैं । जिस मनुष्य में श्रभिमान की बिलकुल कमी होती है वह किसी काम को लगन के साथ नहीं कर पाता । मनुष्य अभिमान के कारण ही दूसरों का उपकार ग्रहण नहीं करता । वह स्वावलम्बी बनने की चेष्टा करता है और समाज में ख्याति प्राप्त करने के लिये उसकी भलाई के लिये अनेक कार्य करता है । श्रभिमान के कारण ही मनुष्य अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण करता और तपस्वी बनता है । तप मनुष्य की मानसिक शक्ति को बढाता है । इससे मनुष्य के व्यक्तित्व का बल बढ़ जाता है और वह दूसरे लोगों को अपने विचारानुसार चलाने में समर्थ होता है । श्रमिमानव अपनी सीमा से अधिक बढ़ जाता है तभी वह व्यक्ति और समान दोनों की हानि करता है । एक मनुष्य के अभिमान को देखकर दूसरे मनुष्य में भी अभिमान का भाव जाग्रत होता है और फिर दोनों के अभिमान में टक्कर हो जाता है । बढ़े चढ़े अभिमान से व्यक्ति हर जगह अपने शत्रु बना लेता है । ऐसे लोगों को पेरानोइया का रोग हो जाता है। ऐसे लोग हर एक व्यक्ति को सन्देह की दृष्टि से देखते हैं । वे सोचते हैं कि दूसरे लोग उनके प्रति षड़यंत्र कर रहे हैं, उनके चारों और गुप्तचर फैले हुए हैं। इस प्रकार की मनोवृत्ति से पीड़ित होकर वे श्रात्म-हत्या ही कर लेते हैं । श्रमिमान की औषधि स्नेह है । स्नेह मनुष्य को दूसरों के प्रति श्राकर्पित करता है और दूसरों के हित में अपने हित को पहचानने के लिये प्रेरणा देता है । जिस मनुष्य का स्नेह जितना ही अधिक होता है उसका अभिमान उतना ही कम होता है। मानसिक रोगी को अधिक आत्मग्लानि होती हैं। इसका कारण उसका बढ़ा-चढ़ा श्रभिमान ही होता है । आत्मग्लानि को भुलाने के लिये वह रोग का आवाहन करता है । वह आपको किसी न किसी प्रकार भूल जाना चाहता है। गेग आत्महीनता की विस्मृति का उपाय है । यदि मनुष्य का अभि मान किसी प्रकार कम हो जाय तो उसका रोग अपने आप ही चला जाय । जव रोगी को स्नेह दर्शाया जाता है तो वह भी अपने भीतर स्नेह का अनुभव करता । यह स्नेह के अनुभूति ही मनुष्य की श्रभिमान जन्य मानसिक ग्रन्थि को नष्ट कर देता है । जिन बालकों को बचपन से स्नेह नहीं मिलता, उनमें आत्महीनता की भावना उत्पन्न हो जाती है । यह श्रात्महीनता का भाव ही अभिमान का जनक होता है। यदि प्रारंभ से हो बालक को स्नेह के वातावरण में रखा जाय तो उसमें न तो, श्रात्म-हीनता की भावना उत्पन्न हो और न उसका अभिमान ही
Transfer Breaking : स्वास्थ्य विभाग में प्रमोशन के साथ डाक्टरों का हुआ तबादला, आदेश जारी, देखें लिस्ट . . Ajab- Gajab : छत्तीसगढ़ के इस गांव में देवी-देवता की नहीं दानव की होती है पूजा! शराब का चढ़ता है प्रसाद, पढ़े इंट्रेस्टिंग खबर.... Crime : प्लास्टिक बैग में मिली महिला की क्षत-विक्षत लाश, मंजर देख कांप उठी लोगों की रूह, 23 साल की बेटी ने वारदात को दिया अंजाम?
Transfer Breaking : स्वास्थ्य विभाग में प्रमोशन के साथ डाक्टरों का हुआ तबादला, आदेश जारी, देखें लिस्ट . . Ajab- Gajab : छत्तीसगढ़ के इस गांव में देवी-देवता की नहीं दानव की होती है पूजा! शराब का चढ़ता है प्रसाद, पढ़े इंट्रेस्टिंग खबर.... Crime : प्लास्टिक बैग में मिली महिला की क्षत-विक्षत लाश, मंजर देख कांप उठी लोगों की रूह, तेईस साल की बेटी ने वारदात को दिया अंजाम?
उपेंद्र कुशवाहा (Photo Credit: फाइल फोटो) Patna: बिहार में राजनेताओं के यात्राओं का दौर जारी है. जेडीयू से अलग होने के बाद उपेंद्र कुशवाहा ने भी यात्रा की राह पकड़ी है. उपेंद्र कुशवाहा इन दिनों 'विरासत बचाओ नमन यात्रा' पर हैं. यात्रा के क्रम में उपेंद्र कुशवाहा लगातार सूबे की नीतीश सरकार की खामियों को जनता के बीच रख रहे हैं. इस बीच उन्होंने बड़ा बयान दिया है. उपेंद्र कुशवाहा ने बीजेपी में जानें की अटकलों के बीच बड़ा बयान देते हुए कहा कि उन्हें मर जाना स्वीकार है लेकिन वो कभी भी बीजेपी में नहीं जाएंगे. बताते चलें कि उपेंद्र कुशवाहा इन दिनों अपनी 'विरासत बचाओ समाधान यात्रा' पर हैं. शुक्रवार को उपेंद्र कुशवाहा फारबिसगंज में थे. जब उनसे पत्रकारों द्वारा सवाल किया गया कि वो बीजेपी में कब शामिल हो रहे हैं? तो जवाब में उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि उन्हें मरना स्वीकार है लेकिन बीजेपी में जाना स्वीकार बिल्कुल भी नहीं है। यानि कि कुशवाहा ने साफ कर दिया है कि वो बीजेपी में शामिल होना नहीं चाह रहे हैं. बीते दिनों उपेंद्र कुशवाहा ने जेडीयू से इस्तीफा देने के बाद अपनी पार्टी के नाम की घोषणा की थी. उन्होंने अपनी पार्टी का नाम 'राष्ट्रीय लोक जनता दल' रखा है. उपेंद्र कुशवाहा बीते क़रीब दो माह से जेडीयू से नाराज़ चल रहे थे. उन्होंने जेडीयू को एक कमज़ोर पार्टी बताया था और सीएम नीतीश कुमार समेत तमाम जेडीयू के नेताओं पर हमले बोले थे. उन्होंने नीतीश कुमार और आरजेडी के बीच डील होने की भी कई बार बात कही थी.
उपेंद्र कुशवाहा Patna: बिहार में राजनेताओं के यात्राओं का दौर जारी है. जेडीयू से अलग होने के बाद उपेंद्र कुशवाहा ने भी यात्रा की राह पकड़ी है. उपेंद्र कुशवाहा इन दिनों 'विरासत बचाओ नमन यात्रा' पर हैं. यात्रा के क्रम में उपेंद्र कुशवाहा लगातार सूबे की नीतीश सरकार की खामियों को जनता के बीच रख रहे हैं. इस बीच उन्होंने बड़ा बयान दिया है. उपेंद्र कुशवाहा ने बीजेपी में जानें की अटकलों के बीच बड़ा बयान देते हुए कहा कि उन्हें मर जाना स्वीकार है लेकिन वो कभी भी बीजेपी में नहीं जाएंगे. बताते चलें कि उपेंद्र कुशवाहा इन दिनों अपनी 'विरासत बचाओ समाधान यात्रा' पर हैं. शुक्रवार को उपेंद्र कुशवाहा फारबिसगंज में थे. जब उनसे पत्रकारों द्वारा सवाल किया गया कि वो बीजेपी में कब शामिल हो रहे हैं? तो जवाब में उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि उन्हें मरना स्वीकार है लेकिन बीजेपी में जाना स्वीकार बिल्कुल भी नहीं है। यानि कि कुशवाहा ने साफ कर दिया है कि वो बीजेपी में शामिल होना नहीं चाह रहे हैं. बीते दिनों उपेंद्र कुशवाहा ने जेडीयू से इस्तीफा देने के बाद अपनी पार्टी के नाम की घोषणा की थी. उन्होंने अपनी पार्टी का नाम 'राष्ट्रीय लोक जनता दल' रखा है. उपेंद्र कुशवाहा बीते क़रीब दो माह से जेडीयू से नाराज़ चल रहे थे. उन्होंने जेडीयू को एक कमज़ोर पार्टी बताया था और सीएम नीतीश कुमार समेत तमाम जेडीयू के नेताओं पर हमले बोले थे. उन्होंने नीतीश कुमार और आरजेडी के बीच डील होने की भी कई बार बात कही थी.
चला न नेकी की हाय राह पर इलाही तौवा इलाही तौवा । दी इस लिये मुझको वादशाही कि तेरे बन्दों को पहुंचे राहत । वले किया मैंने जुल्म इन पर इलाही तौबा इलाही तौबा । रहा लगा नफ़स पर्वरी में न दिल दिया दाद गुस्तरी में । पड़े मेरे अक्ल पर ये पत्थर इलाही तौबा इलाही तौबा । बहाना ज़ालिमकुशी का करके किए बहुत मुल्क फ़तह हमने । वले किए जौर उनपः बदतर इलाही तौबा इलाही तौवा । भला हो इस हर पारला का उठाया आंखों से जिसने परदा । है ज़िश्त एमाल मेरे एकसर इलाही तौवा इलाही तौवा । हुआ है दामन गुनाह यो तर कि गर निचुड़ जाय वह जमी पर डूब जाऊं मैं उसमें ता सर इलाही तौबा इलाहो तौवा । फ़क़त तेरे बखशिशो करम का है एक भरोसा मुझे खुदाया नही कोई और अब है यावर इलाही तौवा इलाही तौवा । नज़र जो किरि पर मेरे की तो हो चुकी शक्ल मुख़लिसी की निगाह अपनी करम पः तू कर इलाही तौवा इलाही तौवा । * ( धीरे धीरे पटाक्षेप ।) ( स्थान दिल्ली शाही महल का एक कमरा । ) ( अकबर का चिन्तित भाव से प्रवेश । ) अकवर । हाय, मै इतने दिनों तक किस तारीकी में था, उम्र किस गुनहगारी में बिताई, इलाही, इस अपने वंदे पर करम कर श्रय इस दिले बेचैन को सम्र अता कर । * यह ग़ज़ल मित्रवर बाबू जगन्नाथ दास बी० ए० (रत्नाकर) की सहायता से बनी है।
चला न नेकी की हाय राह पर इलाही तौवा इलाही तौवा । दी इस लिये मुझको वादशाही कि तेरे बन्दों को पहुंचे राहत । वले किया मैंने जुल्म इन पर इलाही तौबा इलाही तौबा । रहा लगा नफ़स पर्वरी में न दिल दिया दाद गुस्तरी में । पड़े मेरे अक्ल पर ये पत्थर इलाही तौबा इलाही तौबा । बहाना ज़ालिमकुशी का करके किए बहुत मुल्क फ़तह हमने । वले किए जौर उनपः बदतर इलाही तौबा इलाही तौवा । भला हो इस हर पारला का उठाया आंखों से जिसने परदा । है ज़िश्त एमाल मेरे एकसर इलाही तौवा इलाही तौवा । हुआ है दामन गुनाह यो तर कि गर निचुड़ जाय वह जमी पर डूब जाऊं मैं उसमें ता सर इलाही तौबा इलाहो तौवा । फ़क़त तेरे बखशिशो करम का है एक भरोसा मुझे खुदाया नही कोई और अब है यावर इलाही तौवा इलाही तौवा । नज़र जो किरि पर मेरे की तो हो चुकी शक्ल मुख़लिसी की निगाह अपनी करम पः तू कर इलाही तौवा इलाही तौवा । * अकवर । हाय, मै इतने दिनों तक किस तारीकी में था, उम्र किस गुनहगारी में बिताई, इलाही, इस अपने वंदे पर करम कर श्रय इस दिले बेचैन को सम्र अता कर । * यह ग़ज़ल मित्रवर बाबू जगन्नाथ दास बीशून्य एशून्य की सहायता से बनी है।
- 56 min ago ब्रालेस ड्रेस पहनकर असहज हुईं जन्नत जुबैर? मीडिया के सामने ही करतीं बार बार फिक्स! - 1 hr ago रवीना टंडन की बेटी से लोगों ने कर दी ऐसी डिमांड, जवाब सुनकर खुला रह जाएगा मुंह! Don't Miss! - Travel क्या है पानीपुरी का इतिहास और क्यों सर्च इंजन गूगल कर रहा है इसे Celebrate? - Automobiles एलन मस्कः इस साल आ सकती है टेस्ला की सेल्फ-ड्राइविंग कारें - क्या हो पायेगा मुमकिन? अहमदाबाद (कन्हैया कोष्टी)। बदलते परिवेश में फिल्में अब जैसे केवल युवा वर्ग के आसपास रह गई हैं। फिल्में देखने वाले दर्शकों में 80 प्रतिशत युवा ही होते हैं। इतना ही नहीं, निर्माता-निर्देशक भी अब कोई भी फिल्म बनाने से पहले युवा वर्ग को ध्यान में रखते हैं। इसीलिए तो भाग मिल्खा भाग, रांझणा, आशिकी 2 जैसी फिल्में हिट होती हैं। ऐसा नहीं है कि फिल्में अब तमाम वर्गों के लोगों के लिए नहीं बनतीं, परंतु यह बात बिल्कुल सटीक है कि किसी भी फिल्म के केन्द्र में अब युवा वर्ग ही होता है। फिल्म का विषय भले अपराध पर आधारित हो या प्यार पर, सामाजिक हो या आर्थिक, परंतु केन्द्र में युवा वर्ग ही होता है। इसी श्रृंखला में एक और फिल्म आ रही है, जिसका विषय शायद वर्तमान युवा पीढ़ी के लिए दिलचस्प न हो, परंतु जिस किसी को भी अपने युवा और भारतीय होने पर गर्व है, अभिमान है, तो उसे यह फिल्म जरूर देखनी चाहिए। हाँ जी। यह फिल्म है भारतीय स्वाभिमान को समग्र विश्व में प्रकट करने वाले स्वामी विवेकानंद पर आधारित। ट्रायकलर प्रोडक्शन प्रा. लि. के बैनर तले जे मिश्रा निर्मित तथा उत्पल सिन्हा निर्देशित इस फिल्म का नाम है द लाइट स्वामी विवेकानंद। रामकृष्ण परमहंस के शिष्य स्वामी विवेकानंद के बारे में यहाँ कुछ लिखने का इरादा नहीं है, क्योंकि उनके बारे में बहुत कुछ लिखा-सुना-पढ़ा जा चुका है। इसके बावजूद द लाइट स्वामी विवेकानंद फिल्म बहुत कुछ कहने को तैयार दिखती है, जो शायद आज की युवा पीढ़ी लिख-सुन-पढ़ न सकी हो।
- छप्पन मिनट ago ब्रालेस ड्रेस पहनकर असहज हुईं जन्नत जुबैर? मीडिया के सामने ही करतीं बार बार फिक्स! - एक hr ago रवीना टंडन की बेटी से लोगों ने कर दी ऐसी डिमांड, जवाब सुनकर खुला रह जाएगा मुंह! Don't Miss! - Travel क्या है पानीपुरी का इतिहास और क्यों सर्च इंजन गूगल कर रहा है इसे Celebrate? - Automobiles एलन मस्कः इस साल आ सकती है टेस्ला की सेल्फ-ड्राइविंग कारें - क्या हो पायेगा मुमकिन? अहमदाबाद । बदलते परिवेश में फिल्में अब जैसे केवल युवा वर्ग के आसपास रह गई हैं। फिल्में देखने वाले दर्शकों में अस्सी प्रतिशत युवा ही होते हैं। इतना ही नहीं, निर्माता-निर्देशक भी अब कोई भी फिल्म बनाने से पहले युवा वर्ग को ध्यान में रखते हैं। इसीलिए तो भाग मिल्खा भाग, रांझणा, आशिकी दो जैसी फिल्में हिट होती हैं। ऐसा नहीं है कि फिल्में अब तमाम वर्गों के लोगों के लिए नहीं बनतीं, परंतु यह बात बिल्कुल सटीक है कि किसी भी फिल्म के केन्द्र में अब युवा वर्ग ही होता है। फिल्म का विषय भले अपराध पर आधारित हो या प्यार पर, सामाजिक हो या आर्थिक, परंतु केन्द्र में युवा वर्ग ही होता है। इसी श्रृंखला में एक और फिल्म आ रही है, जिसका विषय शायद वर्तमान युवा पीढ़ी के लिए दिलचस्प न हो, परंतु जिस किसी को भी अपने युवा और भारतीय होने पर गर्व है, अभिमान है, तो उसे यह फिल्म जरूर देखनी चाहिए। हाँ जी। यह फिल्म है भारतीय स्वाभिमान को समग्र विश्व में प्रकट करने वाले स्वामी विवेकानंद पर आधारित। ट्रायकलर प्रोडक्शन प्रा. लि. के बैनर तले जे मिश्रा निर्मित तथा उत्पल सिन्हा निर्देशित इस फिल्म का नाम है द लाइट स्वामी विवेकानंद। रामकृष्ण परमहंस के शिष्य स्वामी विवेकानंद के बारे में यहाँ कुछ लिखने का इरादा नहीं है, क्योंकि उनके बारे में बहुत कुछ लिखा-सुना-पढ़ा जा चुका है। इसके बावजूद द लाइट स्वामी विवेकानंद फिल्म बहुत कुछ कहने को तैयार दिखती है, जो शायद आज की युवा पीढ़ी लिख-सुन-पढ़ न सकी हो।
सूत्र - १ अथ योगानुशासनम् । अथ = अब; योगानुशासनम् - परम्परागत योगविषयक शास्त्र (आरम्भ करते हैं) । अनुवाद - अब परम्परागत योग विषयक शास्त्र आरम्भ करते व्याख्या - योग की परम्परा अत्यन्त प्राचीन है । यह सम्पूर्ण सृष्टि 'प्रकृति' तथा पुरुष के संयोग की ही अभिव्यक्ति है। इसलिए इसके हर कण में वह पुरुष (चेतन) तत्व व्याप्त है। प्रकृति जड़ है जो पुरुष संयोग से ही अपनी अभिव्यक्ति की क्षमता प्राप्त करती है । जीव का विकास भी इन दोनों के संयोग का ही परिणाम है । ये दोनों तत्व इस प्रकार संयुक्त हैं कि इनकी भिन्नता का ज्ञान सामान्य जन को नहीं होता। प्रकृति 'दृश्य' है तथा पुरुष 'दृष्टा' । जीव में जो आत्म तत्व है वही पुरुष है तथा प्रकृति को उसने अपने कार्य सम्पादन के लिए ग्रहण किया है इसलिए इस जीव का वास्तविक स्वरूप उसकी यह चैतन्य स्वरूप आत्मा हो है जिसने प्रकृति को अपना माध्यम बनाया है। जीव में मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार, शरीर, इन्द्रियाँ आदि इन दोनों के संयुक्त रूप का प्रतिफल है। 'चित्त' इन दोनों के संयोग का प्रथम रूप है जिसमें एक ओर सांसारिक भोग की वासनाएँ निहित हैं तथा दूसरी ओर यह 'पुरुष' की ओर आकर्षित होकर जीव के लिए मुक्ति का मार्ग दिखाता है । यही उसकी 'अविद्या' तथा 'विद्या' शक्ति है । अविद्या ही जीव को संसार के भोगों की ओर आकर्षित करती है किन्तु इसका विनाश होने पर मनुष्य में विद्या जनित संस्कार दृढ़ होकर उसे मुक्ति दिलाते हैं । इस स्थिति में वह चैतन्य आत्मा प्रकृति के साथ अपने संयोग को छोड़कर पुनः अपने रूप में स्थित हो जाती है । यही जीव की 'कैवल्य' अथवा 'मोक्ष' की अवस्था है । यह योग दर्शन उन समस्त विधियों का प्रतिपादन करता है जिससे साधक अपने प्रकृतिजन्य समस्त विकारों को दूर कर उस आत्मा के साथ संयुक्त होता है । इस आत्म स्वरूप की उपलब्धि के लिए वह शरीर, इन्द्रिय, मन, बुद्धि, अहंकार आदि का पूर्ण परिशोधन कर उन्हें इस योग्य बना देता है कि वह वास्तविक स्वरूप आत्मा को पहचान सके तथा उसी में स्थित हो जाए । इन सबके लिए एक ही विधि है । " चित्त की वृत्तियों का निरोध" जिनके लिये ये आठ साधन हैं यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान तथा समाधि । इन साधनों के विधिवत् अनुष्ठान से ही मनुष्य उस परम पद को प्राप्त करता है । महर्षि पतंजलि ऐसे ही समस्त मानवोपयोगी ग्रन्थ योग दर्शन का आरम्भ करते हुए इस प्रथम सूत्र में कहते हैं कि अब इस परम्परागत योग शास्त्र का आरम्भ करते हैं । यह शास्त्र एक अनुशासन है जिससे चित्त की वृत्तियों का निरोध होता है एवं मनुष्य अपने आत्म स्वरूप में स्थित हो जाता है । सूत्र - २ योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः । चित्तवृत्तिनिरोधः = चित्त की वृत्तियों का निरोध (सर्वथा रुक
सूत्र - एक अथ योगानुशासनम् । अथ = अब; योगानुशासनम् - परम्परागत योगविषयक शास्त्र । अनुवाद - अब परम्परागत योग विषयक शास्त्र आरम्भ करते व्याख्या - योग की परम्परा अत्यन्त प्राचीन है । यह सम्पूर्ण सृष्टि 'प्रकृति' तथा पुरुष के संयोग की ही अभिव्यक्ति है। इसलिए इसके हर कण में वह पुरुष तत्व व्याप्त है। प्रकृति जड़ है जो पुरुष संयोग से ही अपनी अभिव्यक्ति की क्षमता प्राप्त करती है । जीव का विकास भी इन दोनों के संयोग का ही परिणाम है । ये दोनों तत्व इस प्रकार संयुक्त हैं कि इनकी भिन्नता का ज्ञान सामान्य जन को नहीं होता। प्रकृति 'दृश्य' है तथा पुरुष 'दृष्टा' । जीव में जो आत्म तत्व है वही पुरुष है तथा प्रकृति को उसने अपने कार्य सम्पादन के लिए ग्रहण किया है इसलिए इस जीव का वास्तविक स्वरूप उसकी यह चैतन्य स्वरूप आत्मा हो है जिसने प्रकृति को अपना माध्यम बनाया है। जीव में मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार, शरीर, इन्द्रियाँ आदि इन दोनों के संयुक्त रूप का प्रतिफल है। 'चित्त' इन दोनों के संयोग का प्रथम रूप है जिसमें एक ओर सांसारिक भोग की वासनाएँ निहित हैं तथा दूसरी ओर यह 'पुरुष' की ओर आकर्षित होकर जीव के लिए मुक्ति का मार्ग दिखाता है । यही उसकी 'अविद्या' तथा 'विद्या' शक्ति है । अविद्या ही जीव को संसार के भोगों की ओर आकर्षित करती है किन्तु इसका विनाश होने पर मनुष्य में विद्या जनित संस्कार दृढ़ होकर उसे मुक्ति दिलाते हैं । इस स्थिति में वह चैतन्य आत्मा प्रकृति के साथ अपने संयोग को छोड़कर पुनः अपने रूप में स्थित हो जाती है । यही जीव की 'कैवल्य' अथवा 'मोक्ष' की अवस्था है । यह योग दर्शन उन समस्त विधियों का प्रतिपादन करता है जिससे साधक अपने प्रकृतिजन्य समस्त विकारों को दूर कर उस आत्मा के साथ संयुक्त होता है । इस आत्म स्वरूप की उपलब्धि के लिए वह शरीर, इन्द्रिय, मन, बुद्धि, अहंकार आदि का पूर्ण परिशोधन कर उन्हें इस योग्य बना देता है कि वह वास्तविक स्वरूप आत्मा को पहचान सके तथा उसी में स्थित हो जाए । इन सबके लिए एक ही विधि है । " चित्त की वृत्तियों का निरोध" जिनके लिये ये आठ साधन हैं यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान तथा समाधि । इन साधनों के विधिवत् अनुष्ठान से ही मनुष्य उस परम पद को प्राप्त करता है । महर्षि पतंजलि ऐसे ही समस्त मानवोपयोगी ग्रन्थ योग दर्शन का आरम्भ करते हुए इस प्रथम सूत्र में कहते हैं कि अब इस परम्परागत योग शास्त्र का आरम्भ करते हैं । यह शास्त्र एक अनुशासन है जिससे चित्त की वृत्तियों का निरोध होता है एवं मनुष्य अपने आत्म स्वरूप में स्थित हो जाता है । सूत्र - दो योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः । चित्तवृत्तिनिरोधः = चित्त की वृत्तियों का निरोध (सर्वथा रुक
पश्चिम बंगाल में 4 दिन में दो बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या पर पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमला बोलते हुए कहा कि ममता बनर्जी की सरकार राज्य में कानून व्यवस्था को बनाए रखने में पूरी तरह असफल रही है. ममता को सत्ता में रहने का अधिकार नहीं है. उन्होंने मृतक कार्यकर्ताओं के प्रति हार्दिक संवेदना भी प्रकट की. उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में चार दिनों में दूसरे व्यक्ति की लटकती हुई लाश मिली है. पुरुलिया में इससे पहले जहां 18 साल के दलित त्रिलोचन महतो की पेड़ से लटकती लाश मिली थी, वहीं अब 30 साल के दुलाल कुमार की बॉडी हाई टेंशन तार से लटकती हुई मिली. दोनों भाजपा के कार्यकर्ता बताए जा रहे हैं . बीजेपी अध्यक्ष ने ट्विटर पर शोकग्रस्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की . जबकि बीजेपी प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि 'ये तृणमूल कांग्रेस पार्टी नहीं है. ये तालिबान कांग्रेस पार्टी है. ममता बनर्जी को अब सत्ता में रहने का अधिकार नहीं है. बता दें कि दुलाल कुमार के परिवार ने आरोप लगाया है कि तृणमूल पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उनकी हत्या की है. परिवारवालों ने सुसाइड की आशंका को खारिज किया है. हालाँकि सरकार ने राज्य की सीआईडी से दोनों मामले की जांच कराने के आदेश दे दिए हैं. पुरुलिया के एसपी जॉय बिस्वास ने बीजेपी के 2 कार्यकर्ताओं के शव मिलने पर कहा कि शुरुआती जांच में पहला मामला आपसी दुश्मनी का लगता है. हमने जांच शुरू कर दी है.
पश्चिम बंगाल में चार दिन में दो बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या पर पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमला बोलते हुए कहा कि ममता बनर्जी की सरकार राज्य में कानून व्यवस्था को बनाए रखने में पूरी तरह असफल रही है. ममता को सत्ता में रहने का अधिकार नहीं है. उन्होंने मृतक कार्यकर्ताओं के प्रति हार्दिक संवेदना भी प्रकट की. उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में चार दिनों में दूसरे व्यक्ति की लटकती हुई लाश मिली है. पुरुलिया में इससे पहले जहां अट्ठारह साल के दलित त्रिलोचन महतो की पेड़ से लटकती लाश मिली थी, वहीं अब तीस साल के दुलाल कुमार की बॉडी हाई टेंशन तार से लटकती हुई मिली. दोनों भाजपा के कार्यकर्ता बताए जा रहे हैं . बीजेपी अध्यक्ष ने ट्विटर पर शोकग्रस्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की . जबकि बीजेपी प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि 'ये तृणमूल कांग्रेस पार्टी नहीं है. ये तालिबान कांग्रेस पार्टी है. ममता बनर्जी को अब सत्ता में रहने का अधिकार नहीं है. बता दें कि दुलाल कुमार के परिवार ने आरोप लगाया है कि तृणमूल पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उनकी हत्या की है. परिवारवालों ने सुसाइड की आशंका को खारिज किया है. हालाँकि सरकार ने राज्य की सीआईडी से दोनों मामले की जांच कराने के आदेश दे दिए हैं. पुरुलिया के एसपी जॉय बिस्वास ने बीजेपी के दो कार्यकर्ताओं के शव मिलने पर कहा कि शुरुआती जांच में पहला मामला आपसी दुश्मनी का लगता है. हमने जांच शुरू कर दी है.
फरीदाबाद के सूरजकुंड मेले की शुरुआत दो फरवरी से होने जा रही है। इसे अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला भी कहते हैं। इस मेले की खासियत है कि हर साल आने वाले उत्साही लोगों की संख्या में वृद्धि हो रही है। देश विदेश से लाखों लोग मेले में शिरकत करते हैं। यह मेला कलाकारों के लिए उनकी प्रतिभा और संस्कृति को प्रदर्शित करने के लिए एक मंच के रूप में भी कार्य करता है। हरियाणा पर्यटन विभाग ने इस बार हिमाचल प्रदेश को थीम स्टेट बनाया है। मेला परिसर को पूरी तरह से हिमाचल के रंग में रंगा जाएगा। कंट्री पार्टनर उज्बेकिस्तान की संस्कृति भी नजर आएगी। मेल में कला, शिल्प, नृत्य, संगीत के अलावा भी बहुत कुछ है, जो आपको रोमांच कर देगा। मेले का समय सुबह साढ़े दस बजे से लेकर रात साढ़े आठ बजे तक रहेगा। सूरजकुंड गुरुग्राम, दिल्ली और फरीदाबाद से सड़क मार्ग से अच्छी तरह से जुड़ा है। यदि रेल के माध्यम से जाना चाहते हैं तो दिल्ली सबसे निकटतम रेलवे जंक्शन है। रेलवे स्टेशन से कैब या बस से सूरजकुंड की यात्रा कर सकते हैं। वेबसाइट पर जा सकते हैं। जैसलमेर जैसी खूबसूरत और रोमांचक जगह जाने का मौका नहीं छोड़ना चाहिए। 7 से 9 फरवरी तक यहां पर जैसलमेर डेजर्ट फेस्टिवल शुरू होने जा रहा है। यह फेस्टिवल भारत के साथ साथ पूरी दुनिया में मशहूर और लोकप्रिय है। इस फेस्टिवल में मनोरंजन के लिए ऊंटों की दौड़, पगड़ी बांधने की प्रतियोगिता जैसे इवेंट कराए जाते हैं। लंबी मूंछ, मिस्टर डेजर्ट, फायर डांस जैसे कार्यक्रम मेले को बेहद खास बनाते हैं। भारत के साथ-साथ विदेशों से आए कलाकार भी इस फेस्टिवल में अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। जैसलमेर से करीब 40 किमी दूर स्थित रेत टिब्बा में यह फेस्टिवल मनाया जाता है। इसमें राजस्थान के लोक नृत्य, लोक-संगीत, लोक संस्कृति, घूमर और स्थानीय कलाकारों की बेहतरीन परफार्मेंस देखने को मिलेगी। यहां आपको पोलो खेलने से लेकर डेजर्ट सफारी का भी आनंद उठाने का मौका मिलेगा। अगर आपको हाथ से बनी चीजों का शौक है, तो यहां आप हैंडक्राफ्टेड कपड़े, बैग्स, फुटवियर आदि की खूब शापिंग कर सकते हैं। यहां जाएं तो साथ एक कैमरा या फिर अच्छे कैमरे वाला स्मार्ट फोन जरूर ले जाएं। यहां खींची गई तस्वीरें यादगार होंगी। आप यदि इस बार न्यू ईयर पर गोवा नहीं जा पाए हैं तो निराश होने की जरूरत नहीं है। 22 फरवरी से गोवा कार्निवाल शुरू हो रहा है। इस दौरान महाशिवरात्रि 21 फरवरी यानी शुक्रवार को पड़ रही है। इसके बाद शनिवार और रविवार की छुट्टी, ऐसे में इस कार्निवाल में एंज्वाय करने के अलावा आप सनसेट देखते हुए बीच पर रिलेक्स कर सकते हैं। यह फेस्टिवल पणजी, मापूसा, मडगांव और वास्को डी गामा में मनाया जा रहा है। इस बार का फेस्टिवल प्लास्टिक फ्री रहेगा। फेस्टिवल में संगीत, नृत्य, छोटे अवधि के नाटक आपको रोमांच से भर देंगे। इसकी शुरुआत एक भव्य परेड से होती है, जिसमें नर्तकी, बैंड, कलाबाज और अलग अलग रूप धारण किए होते हैं। यहां पर आप बेहतरीन खाने के साथ उच्च क्वालिटी की वाइन का भी लुत्फ उठा सकते हैं। गोवा कार्निवाल के लिए किसी भी टिकट की आवश्यकता नहीं है। गोवा कार्निवाल के वक्त बहुत भीड़ होती है। ऐसे में आप जाना चाहते हैं तो पहले से ही होटल की बुकिंग करवा दें।
फरीदाबाद के सूरजकुंड मेले की शुरुआत दो फरवरी से होने जा रही है। इसे अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला भी कहते हैं। इस मेले की खासियत है कि हर साल आने वाले उत्साही लोगों की संख्या में वृद्धि हो रही है। देश विदेश से लाखों लोग मेले में शिरकत करते हैं। यह मेला कलाकारों के लिए उनकी प्रतिभा और संस्कृति को प्रदर्शित करने के लिए एक मंच के रूप में भी कार्य करता है। हरियाणा पर्यटन विभाग ने इस बार हिमाचल प्रदेश को थीम स्टेट बनाया है। मेला परिसर को पूरी तरह से हिमाचल के रंग में रंगा जाएगा। कंट्री पार्टनर उज्बेकिस्तान की संस्कृति भी नजर आएगी। मेल में कला, शिल्प, नृत्य, संगीत के अलावा भी बहुत कुछ है, जो आपको रोमांच कर देगा। मेले का समय सुबह साढ़े दस बजे से लेकर रात साढ़े आठ बजे तक रहेगा। सूरजकुंड गुरुग्राम, दिल्ली और फरीदाबाद से सड़क मार्ग से अच्छी तरह से जुड़ा है। यदि रेल के माध्यम से जाना चाहते हैं तो दिल्ली सबसे निकटतम रेलवे जंक्शन है। रेलवे स्टेशन से कैब या बस से सूरजकुंड की यात्रा कर सकते हैं। वेबसाइट पर जा सकते हैं। जैसलमेर जैसी खूबसूरत और रोमांचक जगह जाने का मौका नहीं छोड़ना चाहिए। सात से नौ फरवरी तक यहां पर जैसलमेर डेजर्ट फेस्टिवल शुरू होने जा रहा है। यह फेस्टिवल भारत के साथ साथ पूरी दुनिया में मशहूर और लोकप्रिय है। इस फेस्टिवल में मनोरंजन के लिए ऊंटों की दौड़, पगड़ी बांधने की प्रतियोगिता जैसे इवेंट कराए जाते हैं। लंबी मूंछ, मिस्टर डेजर्ट, फायर डांस जैसे कार्यक्रम मेले को बेहद खास बनाते हैं। भारत के साथ-साथ विदेशों से आए कलाकार भी इस फेस्टिवल में अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। जैसलमेर से करीब चालीस किमी दूर स्थित रेत टिब्बा में यह फेस्टिवल मनाया जाता है। इसमें राजस्थान के लोक नृत्य, लोक-संगीत, लोक संस्कृति, घूमर और स्थानीय कलाकारों की बेहतरीन परफार्मेंस देखने को मिलेगी। यहां आपको पोलो खेलने से लेकर डेजर्ट सफारी का भी आनंद उठाने का मौका मिलेगा। अगर आपको हाथ से बनी चीजों का शौक है, तो यहां आप हैंडक्राफ्टेड कपड़े, बैग्स, फुटवियर आदि की खूब शापिंग कर सकते हैं। यहां जाएं तो साथ एक कैमरा या फिर अच्छे कैमरे वाला स्मार्ट फोन जरूर ले जाएं। यहां खींची गई तस्वीरें यादगार होंगी। आप यदि इस बार न्यू ईयर पर गोवा नहीं जा पाए हैं तो निराश होने की जरूरत नहीं है। बाईस फरवरी से गोवा कार्निवाल शुरू हो रहा है। इस दौरान महाशिवरात्रि इक्कीस फरवरी यानी शुक्रवार को पड़ रही है। इसके बाद शनिवार और रविवार की छुट्टी, ऐसे में इस कार्निवाल में एंज्वाय करने के अलावा आप सनसेट देखते हुए बीच पर रिलेक्स कर सकते हैं। यह फेस्टिवल पणजी, मापूसा, मडगांव और वास्को डी गामा में मनाया जा रहा है। इस बार का फेस्टिवल प्लास्टिक फ्री रहेगा। फेस्टिवल में संगीत, नृत्य, छोटे अवधि के नाटक आपको रोमांच से भर देंगे। इसकी शुरुआत एक भव्य परेड से होती है, जिसमें नर्तकी, बैंड, कलाबाज और अलग अलग रूप धारण किए होते हैं। यहां पर आप बेहतरीन खाने के साथ उच्च क्वालिटी की वाइन का भी लुत्फ उठा सकते हैं। गोवा कार्निवाल के लिए किसी भी टिकट की आवश्यकता नहीं है। गोवा कार्निवाल के वक्त बहुत भीड़ होती है। ऐसे में आप जाना चाहते हैं तो पहले से ही होटल की बुकिंग करवा दें।
Lok Sabha elections 2022 भाजपा प्रदेश मुख्यालय पर आयोजित बैठक में पार्टी के प्रदेश पदाधिकारियों क्षेत्रीय अध्यक्षों जिलाध्यक्षों और जिला प्रभारियों को हैदराबाद में हुई भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में पारित प्रस्तावों की जानकारी दी गई। लखनऊ [राज्य ब्यूरो]। लोकसभा चुनाव 2022 में उत्तर प्रदेश की सभी 80 सीटें जीतने के उद्देश्य से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) अपने बूथ प्रबंधन को तो धार देगी ही, पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण पर भी जोर रहेगा। लोगों को पार्टी से जोड़ने के लिए पार्टी के नेता और पदाधिकारी जनता के बीच अपनी सक्रियता बढ़ाएंगे। शुक्रवार को भाजपा प्रदेश मुख्यालय पर आयोजित बैठक में पार्टी के प्रदेश पदाधिकारियों, क्षेत्रीय अध्यक्षों, जिलाध्यक्षों और जिला प्रभारियों को हैदराबाद में हुई भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में पारित प्रस्तावों की जानकारी दी गई। पार्टी के आगामी कार्यक्रमों व अभियानों के बारे में भी चर्चा कर कार्ययोजना तैयार की गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा प्रदेश प्रभारी राधा मोहन सिंह, राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह की उपस्थिति में हुई इस बैठक में प्रदेश महामंत्री (संगठन) सुनील बंसल ने 20 जुलाई तक भाजपा के 98 संगठनात्मक जिलों में बैठकें करने का निर्देश दिया ताकि राष्ट्रीय कार्यसमिति की ओर से पारित प्रस्तावों की जानकारी नीचे तक पहुंच जाए। बैठक में जिला पदाधिकारी, मंडल अध्यक्ष, मंडल प्रभारी और मोर्चों के जिलाध्यक्ष शामिल होंगे। यह बैठकें जिला प्रभारी लेंगे। हारे हुए 22 हजार बूथों को जीतने पर मंथन : बूथ सशक्तीकरण अभियान के तहत चिन्हित किये गए उन 22 हजार बूथों पर भी फोकस रहा जिनमें भाजपा लोक सभा और विधान सभा चुनावों में हारी है। हारे हुए इन बूथों पर पार्टी के सांसद और विधायक संपर्क कार्य में जुटे हैं। इसमें और तेजी लाने पर जोर दिया गया। प्रदेश के जिन 14 लोकसभा क्षेत्रों में भाजपा के सांसद नहीं हैं, उनमें शुक्रवार आठ जुलाई से केंद्रीय मंत्रियों के प्रवास प्रारंभ होंगे। बैठक में बताया गया कि जिला व मंडल के प्रशिक्षण कार्यक्रम हो चुके हैं। इसके बाद 15 अगस्त तक मोर्चों के प्रशिक्षण होंगे। 21 अगस्त के बाद प्रदेश का प्रशिक्षण कार्यक्रम होगा। मंडल स्तर पर बनाएं वाट्सएप ग्रुप : पदाधिकारियों को मंडल स्तर से लेकर बूथ स्तर तक वाट्सएप ग्रुप बनाने का मंत्र दिया गया ताकि निचले स्तर तक कार्यकर्ताओं को तेजी से सूचनाएं दी जा सकें। पदाधिकारियों को यह भी हिदायत दी गई कि वाट्सएप ग्रुप से ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं को जोड़ें, सिर्फ पार्टी के नेताओं को नहीं। बूथ पर जाकर जनता के साथ देखें मन की बात : बैठक में इस बात पर आपत्ति जताई गई कि पार्टी के दिशानिर्देश के विपरीत कई नेता हर महीने के आखिरी रविवार को प्रसारित होने वाले प्रधानमंत्री के मन की बात कार्यक्रम को घर में बैठकर या अन्यत्र देखते हैं, बूथ पर जाकर नहीं। पदाधिकारियों को ताकीद किया गया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता बूथ पर जाकर मन की बात कार्यक्रम को बूथ की टोली और आम जनता के साथ ही सुनें। हर घर तिरंगा अभियान : आजादी के अमृत महोत्सव के तहत भाजपा स्वतंत्रता दिवस पर प्रदेश के सभी परिवारों में तिरंगा झंडा पहुंचाने का अभियान प्रारंभ करेगी। पार्टी प्रदेश के हर घर में 15 अगस्त को तिरंगा फहरा कर आजादी के अमृत महोत्सव को अविस्मणीय बनाएगी। बुद्धिजीवियों-युवाओं के बीच मोदी की चर्चा : भाजपा पदाधिकारियों को 'मोदी ऐट द रेट 20' नामक पुस्तक को पढ़ने की नसीहत दी गई। पुस्तक के अध्ययन के बाद हर जिले में दो कार्यक्रम आयोजित कर इस किताब की विषयवस्तु पर चर्चा करने पर जोर दिया गया। एक कार्यक्रम 500 से ज्यादा गैर भाजपाई बुद्धिजीवियों के बीच और दूसरा उच्च शिक्षण संस्थान में युवाओं के बीच आयोजित करने का निर्देश दिया गया।
Lok Sabha elections दो हज़ार बाईस भाजपा प्रदेश मुख्यालय पर आयोजित बैठक में पार्टी के प्रदेश पदाधिकारियों क्षेत्रीय अध्यक्षों जिलाध्यक्षों और जिला प्रभारियों को हैदराबाद में हुई भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में पारित प्रस्तावों की जानकारी दी गई। लखनऊ [राज्य ब्यूरो]। लोकसभा चुनाव दो हज़ार बाईस में उत्तर प्रदेश की सभी अस्सी सीटें जीतने के उद्देश्य से भारतीय जनता पार्टी अपने बूथ प्रबंधन को तो धार देगी ही, पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण पर भी जोर रहेगा। लोगों को पार्टी से जोड़ने के लिए पार्टी के नेता और पदाधिकारी जनता के बीच अपनी सक्रियता बढ़ाएंगे। शुक्रवार को भाजपा प्रदेश मुख्यालय पर आयोजित बैठक में पार्टी के प्रदेश पदाधिकारियों, क्षेत्रीय अध्यक्षों, जिलाध्यक्षों और जिला प्रभारियों को हैदराबाद में हुई भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में पारित प्रस्तावों की जानकारी दी गई। पार्टी के आगामी कार्यक्रमों व अभियानों के बारे में भी चर्चा कर कार्ययोजना तैयार की गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा प्रदेश प्रभारी राधा मोहन सिंह, राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह की उपस्थिति में हुई इस बैठक में प्रदेश महामंत्री सुनील बंसल ने बीस जुलाई तक भाजपा के अट्ठानवे संगठनात्मक जिलों में बैठकें करने का निर्देश दिया ताकि राष्ट्रीय कार्यसमिति की ओर से पारित प्रस्तावों की जानकारी नीचे तक पहुंच जाए। बैठक में जिला पदाधिकारी, मंडल अध्यक्ष, मंडल प्रभारी और मोर्चों के जिलाध्यक्ष शामिल होंगे। यह बैठकें जिला प्रभारी लेंगे। हारे हुए बाईस हजार बूथों को जीतने पर मंथन : बूथ सशक्तीकरण अभियान के तहत चिन्हित किये गए उन बाईस हजार बूथों पर भी फोकस रहा जिनमें भाजपा लोक सभा और विधान सभा चुनावों में हारी है। हारे हुए इन बूथों पर पार्टी के सांसद और विधायक संपर्क कार्य में जुटे हैं। इसमें और तेजी लाने पर जोर दिया गया। प्रदेश के जिन चौदह लोकसभा क्षेत्रों में भाजपा के सांसद नहीं हैं, उनमें शुक्रवार आठ जुलाई से केंद्रीय मंत्रियों के प्रवास प्रारंभ होंगे। बैठक में बताया गया कि जिला व मंडल के प्रशिक्षण कार्यक्रम हो चुके हैं। इसके बाद पंद्रह अगस्त तक मोर्चों के प्रशिक्षण होंगे। इक्कीस अगस्त के बाद प्रदेश का प्रशिक्षण कार्यक्रम होगा। मंडल स्तर पर बनाएं वाट्सएप ग्रुप : पदाधिकारियों को मंडल स्तर से लेकर बूथ स्तर तक वाट्सएप ग्रुप बनाने का मंत्र दिया गया ताकि निचले स्तर तक कार्यकर्ताओं को तेजी से सूचनाएं दी जा सकें। पदाधिकारियों को यह भी हिदायत दी गई कि वाट्सएप ग्रुप से ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं को जोड़ें, सिर्फ पार्टी के नेताओं को नहीं। बूथ पर जाकर जनता के साथ देखें मन की बात : बैठक में इस बात पर आपत्ति जताई गई कि पार्टी के दिशानिर्देश के विपरीत कई नेता हर महीने के आखिरी रविवार को प्रसारित होने वाले प्रधानमंत्री के मन की बात कार्यक्रम को घर में बैठकर या अन्यत्र देखते हैं, बूथ पर जाकर नहीं। पदाधिकारियों को ताकीद किया गया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता बूथ पर जाकर मन की बात कार्यक्रम को बूथ की टोली और आम जनता के साथ ही सुनें। हर घर तिरंगा अभियान : आजादी के अमृत महोत्सव के तहत भाजपा स्वतंत्रता दिवस पर प्रदेश के सभी परिवारों में तिरंगा झंडा पहुंचाने का अभियान प्रारंभ करेगी। पार्टी प्रदेश के हर घर में पंद्रह अगस्त को तिरंगा फहरा कर आजादी के अमृत महोत्सव को अविस्मणीय बनाएगी। बुद्धिजीवियों-युवाओं के बीच मोदी की चर्चा : भाजपा पदाधिकारियों को 'मोदी ऐट द रेट बीस' नामक पुस्तक को पढ़ने की नसीहत दी गई। पुस्तक के अध्ययन के बाद हर जिले में दो कार्यक्रम आयोजित कर इस किताब की विषयवस्तु पर चर्चा करने पर जोर दिया गया। एक कार्यक्रम पाँच सौ से ज्यादा गैर भाजपाई बुद्धिजीवियों के बीच और दूसरा उच्च शिक्षण संस्थान में युवाओं के बीच आयोजित करने का निर्देश दिया गया।
चर्चा में क्यों? 1 मई, 2022 को अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों को पेंशन का पारदर्शी और परेशानीमुक्त वितरण सुनिश्चित करने के लिये एक नया मंच ई-पेंशन पोर्टल शुरू किया। - पोर्टल के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एंड-टू-एंड ऑनलाइन पेंशन पोर्टल पेंशन प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिये वित्त विभाग द्वारा विकसित किया गया है। - यह पेंशनभोगियों को शारीरिक रूप से कहीं भी जाने की आवश्यकता को समाप्त कर देगा और प्रक्रिया को पारदर्शी, कागज़रहित, संपर्करहित और कैशलेस बनाएगा। - सेवानिवृत्त होने वाले राज्य सरकार के कर्मचारियों की शिकायतों को ध्यान में रखते हुए पोर्टल उनके आवेदनों (पीपीओ) की स्थिति को ट्रैक करेगा। - केंद्र सरकार द्वारा दिये गए दिशा-निर्देशों के अनुसार राज्य के वित्त विभाग ने पोर्टल बनाया है, जिसमें 59 वर्ष छह महीने की आयु प्राप्त करने वाले कर्मचारियों की स्थिति को ट्रैक करने का विकल्प होगा। इससे राज्य के लगभग 11.5 लाख पेंशनभोगियों को लाभ होगा। - यह प्रणाली राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिये लागू की गई है और जल्द ही अन्य विभाग भी इस प्रक्रिया में शामिल होंगे, जिससे लाखों लोगों को लाभ होगा और किसी को भी पेंशन के लिये भागना नहीं पड़ेगा। चर्चा में क्यों? 30 अप्रैल, 2022 को उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) और उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीईआईडीए) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का उद्घाटन अगले जून में किया जाएगा। - अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर 19 में से 14 फ्लाईओवर का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। बेतवा और यमुना नदी पर पुल का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। इस एक्सप्रेसवे को आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जोड़ने का काम भी पूरा हो चुका है। - बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 296.07 किमी. है। यह एक्सप्रेसवे चित्रकूट, बाँदा, हमीरपुर, जालौन, औरैया और इटावा से होकर गुज़रेगा। - उल्लेखनीय है कि इस एक्सप्रेसवे के बनने से पूरा बुंदेलखंड क्षेत्र आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के ज़रिये राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सीधे जुड़ जाएगा। चर्चा में क्यों? 1 मई, 2022 को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जयपुर में श्री सत्य साईं हार्ट हॉस्पिटल, राजकोट एवं अहमदाबाद द्वारा आयोजित मेगा फ्री हार्ट कैंप का उद्घाटन करते हुए कहा कि यूनिवर्सल हैल्थ कवरेज लागू करने वाला राजस्थान देश का अग्रणी राज्य बन चुका है। - मुख्यमंत्री ने कहा कि 'मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना' में प्रदेश के लगभग 1 करोड़ 34 लाख परिवार जुड़ चुके हैं तथा किडनी, हार्ट, लीवर, बोनमेरो ट्रांसप्लांट जैसे महँगे इलाज़ भी इस योजना में निःशुल्क किये जा रहे हैं। - सभी अस्पतालों में आईपीडी एवं ओपीडी मरीजों के लिये निःशुल्क उपचार व निःशुल्क एमआरआई, एक्स-रे तथा सीटी स्कैन की सुविधा भी शुरू कर दी गई है। - उल्लेखनीय है कि प्रदेशवासियों को इलाज के खर्च से चिंतामुक्त करने एवं बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध करवाने की दृष्टि से राज्य सरकार ने 'मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना' एवं 'मुख्यमंत्री निःशुल्क निरोगी राजस्थान' जैसी महत्त्वाकांक्षी योजनाएँ शुरू की हैं। - उन्होंने कहा कि सत्य साईं हार्ट हॉस्पिटल के साथ किये गए एमओयू के तहत 314 हृदय रोग से पीड़ित बच्चों और अन्य लोगों की निःशुल्क सर्जरी की गई है। सरकार द्वारा बच्चों को गुजरात आने एवं जाने के लिये 5 हज़ार रुपए की राशि उपलब्ध कराई जा रही है। - यह अस्पताल हार्ट ऑपरेशन जैसे महँगे ऑपरेशन निःशुल्क कर रहा है। इस दौरान मुख्यमंत्री अस्पताल से ठीक होकर आए बच्चों से मिले तथा बीमार बच्चों से मिलकर उन्हें निःशुल्क हार्ट सर्जरी का टोकन दिया। - मुख्यमंत्री ने कहा कि निःशुल्क निरोगी राजस्थान योजना में 5 हज़ार से अधिक दवाईयाँ, सर्जिकल्स एवं सूचर्स सूचीबद्ध करने की कार्यवाही की जा रही है। साथ ही सभी अस्पतालों में बिना किसी खर्च के पूरा इलाज़ कैशलेस करने की व्यवस्था की गई है। - वहीं मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत आने वाले, सामाजिक-आर्थिक जनगणना, 2011 में चिह्नित नागरिक, संविदाकर्मी, लघु और सीमांत किसान तथा कोविड अनुग्रह राशि प्राप्त करने वाले सभी परिवारों का बीमा प्रीमियम प्रदेश सरकार द्वारा भरा जा रहा है तथा अन्य सभी परिवार बीमा प्रीमियम की आधी राशि देकर योजना से जुड़ सकते हैं। चर्चा में क्यों? 1 मई, 2022 को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री आवास से राजस्थान मरुधरा ग्रामीण बैंक की मोबाइल एटीएम यूनिट वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान उन्होंने मोबाइल एटीएम वेन का अवलोकन कर पहला ट्रांजेक्शन भी किया। - राजस्थान मरुधरा ग्रामीण बैंक को नाबार्ड के सहयोग से कुल 4 मोबाइल एटीएम वैन उपलब्ध करवाई गई हैं। ये मोबाइल एटीएम वैन बैंक सेवा क्षेत्र के सभी ज़िलों में दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों एवं ढ़ाणियों में आमजन को बैकिंग सेवाएँ प्रदान करेंगी। - इसके साथ ही सीमा पर तैनात सैनिकों को बैकिंग सेवाएँ उपलब्ध करवाने का कार्य भी इन वैनों के द्वारा किया जाएगा। - मोबाइल एटीएम वैनों के माध्यम से वित्तीय साक्षरता एवं डिजिटल बैंकिंग के बारे में जागरुकता के लिये शिविर आयोजित कर आमजन को बैंकिंग के बारे में जागरूक किया जाएगा व सरकारी योजनाओं की जानकारी जन-जन तक पहुँचाई जाएगी। चर्चा में क्यों? 1 मई, 2022 को राज्य सरकार द्वारा 'मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना' में बीमित परिवारों को दुर्घटनाओं से होने वाली मृत्यु अथवा पूर्ण स्थायी अपंगता की स्थिति में आर्थिक संबल प्रदान करने के उद्देश्य से 'मुख्यमंत्री चिरंजीवी दुर्घटना बीमा योजना' की शुरुआत की गई है। - मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना में सभी बीमित परिवार योजना के पात्र लाभार्थी होंगे और बीमित परिवार के सदस्य अथवा सदस्यों की दुर्घटना में मृत्यु होने अथवा दुर्घटना के कारण हाथ, पैर, आँख की स्थायी पूर्ण क्षति होने पर पाँच लाख रुपए तक का आर्थिक संबल प्रदान किया जाएगा। - मुख्यमंत्री चिरंजीवी दुर्घटना बीमा योजना के अंतर्गत बीमित परिवार के सदस्य की सड़क दुर्घटना में, छत से गिरने के कारण, मकान के ढहने से, डूबने से, रासायनिक द्रव्यों के छिड़काव के कारण, बिजली के झटके तथा जलने से होने वाली मृत्यु/क्षति पर योजना का लाभ देय होगा। - बीमा योजना के तहत बीमित परिवार के सदस्य की दुर्घटना में मृत्यु हो जाने पर 5 लाख रुपए, दुर्घटना में दोनों हाथों या दोनों पैरों या दोनों आँखों अथवा एक हाथ एवं एक पैर या एक हाथ व एक आँख या एक पैर एवं एक आँख की पूर्ण क्षति पर 3 लाख रुपए तथा तथा दुर्घटना में हाथ पैर आँख की पूर्ण क्षति पर 1.5 लाख रुपए का लाभ दिया जाएगा। - योजना का संचालन राज्य बीमा एवं प्रावधाई निधि विभाग के माध्यम से किया जाएगा। चर्चा में क्यों? 30 अप्रैल, 2022 को केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी की मौज़ूदगी में राजस्थान के बाड़मेर ज़िले के बालोतरा इलाके में स्थित 'मियाँ का बाड़ा' रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर 'महेश नगर हॉल्ट' कर दिया गया। - इससे पहले 2018 में इस गाँव का नाम बदलकर मियाँ का बाड़ा से महेश नगर किया गया था, लेकिन रेलवे स्टेशन का नाम नहीं बदला जा सका था। यह गाँव पाकिस्तान के सीमावर्ती बाड़मेर ज़िले की समदड़ी तहसील में आता है। - उल्लेखनीय है कि 2018 में राजस्थान के तीन गाँवों के नाम तत्कालीन भाजपा सरकार ने बदले थे। इसमें मियाँ का बाड़ा गाँव का नाम बदलकर महेश नगर, इस्माइल खुर्द का नाम नाम बदलकर पिचनवा खुर्द और नरपाड़ा को नरपुरा किया गया था। चर्चा में क्यों? 30 अप्रैल, 2022 को फ्राँस में प्रदेश की पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रसार और कलात्मक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिये मध्य प्रदेश पर्यटन और संस्कृति, फ्रेंच इंस्टीट्यूट एवं अलायंस फ्राँसे के मध्य एमओयू हस्ताक्षरित किया गया। - काउंसिल जनरल ऑफ फ्राँस जीन मार्क सेरे चर्लेट की उपस्थिति में मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम के प्रबंध संचालक एस. विश्वनाथन, भारत में फ्राँस दूतावास/भारत में फ्रेंच इंस्टीट्यूट (IFI) के निदेशक इमैनुएल लेब्रन डेमियंस और अलायंस फ्राँसे भोपाल (AFB) की प्रेसीडेंट डॉ. बर्था रथिनम ने एमओयू पर हस्ताक्षर किये। - एमओयू के तहत मध्य प्रदेश और फ्राँस के बीच पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों को साझा किया जाएगा। साथ ही फ्राँस के पर्यटकों को मध्य प्रदेश के पर्यटन स्थलों और आयोजन के संबंध में जानकारी देकर आमंत्रित किया जाएगा। - एमओयू में शामिल गतिविधियों में सांस्कृतिक और कलात्मक आदान-प्रदान, संगोष्ठियों, सम्मेलनों का आयोजन, त्योहारों, कार्यक्रमों, वाद-विवाद, प्रदर्शनियाँ, कार्यशालाएँ, प्रशिक्षण, त्योहारों का विकास और संयुक्त कार्यक्रम, संगीत कार्यक्रम और फिल्मों की स्क्रीनिंग आदि है। - फ्राँस के प्रतिनिधि दल को संचालक विश्वनाथन ने प्रदेश के पर्यटन स्थलों, पर्यटन संबंधी गतिविधियों और निगम द्वारा दी जाने वाली पर्यटक सेवाओं तथा सुविधाओं और प्रदेश के संस्कृति विभाग द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले विभिन्न सांस्कृतिक आयोजन, जैसे- खजुराहो डांस फेस्टिवल, तानसेन समारोह ग्वालियर सहित अन्य आयोजनों की जानकारी दी। चर्चा में क्यों? 1 मई, 2022 को अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भवन एवं अन्य सन्निर्माण मंडल में पंजीकृत भवन कर्मकार कल्याण मंडल एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिकों के लिये मुख्यमंत्री श्रमिक सियान सहायता योजना की घोषणा की। - इस योजना में बुज़ुर्ग श्रमिकों को एकमुश्त 10 हज़ार रुपए की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। - इस योजना के लिये ऐसे श्रमिक पात्र होंगे, जिनकी न्यूनतम आयु 59 वर्ष तथा अधिकतम आयु 60 वर्ष होगी। इसके साथ ही ये श्रमिक विगत 5 वर्षों से मंडल के अंतर्गत पंजीकृत होने चाहिये। चर्चा में क्यों? 1 मई, 2022 को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 'मितान योजना' का शुभारंभ किया। इसके तहत नागरिक सेवाएँ घर तक पहुँचाई जाएंगी। - इस योजना को पायलट प्रोजेक्ट के तहत 14 नगर निगमों में शुरू किया गया है। शीघ्र ही पूरे प्रदेश में इस योजना का विस्तार किया जाएगा। - वर्तमान में 14 नगर निगमों में 13 प्रकार की सेवा उपलब्ध होगी और अन्य सेवाएँ भी इस योजना के माध्यम से प्राप्त की जा सकेंगी। - योजना के तहत लोगों को जन्म प्रमाण-पत्र, विवाह, निवास, आय, मृत्यु प्रमाण-पत्र एवं अन्य सेवाओं की घर पहुँच सुविधा प्राप्त होगी। - मितान योजना की सारी प्रक्रिया डिजिटल होगी। सेवाओं हेतु लोगों को मितान टोल फ्री नंबर 14545 पर कॉल करना होगा। - इस योजना के शुरू होने से सरकारी प्रक्रिया और आसान होगी। सरकारी ऑफिस के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी। - मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के माध्यम से सभी नागरिकों विशेषतः बुज़ुर्गों, दिव्यांगों एवं निरक्षरों को घर बैठे आसानी से कई प्रकार की सेवाएँ मिल सकेंगी। चर्चा में क्यों? 1 मई, 2022 को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद् की बैठक में कई महत्त्वपूर्ण निर्णय लिये गए। - मंत्रिपरिषद् ने 1 नवंबर, 2004 से नियुक्त शासकीय सेवकों के लिये नवीन अंशदायी पेंशन योजना के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना लागू करने के निर्णय का अनुमोदन किया। नवीन अंशदायी पेंशन योजना हेतु वेतन से की जा रही 10 प्रतिशत की मासिक अंशदान की कटौती 1 अप्रैल, 2022 से सामाप्त कर सामान्य भविष्य निधि नियम के अनुसार मूल वेतन के न्यूनतम 12 प्रतिशत कटौती के प्रस्ताव को सहमति दी गई। - अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों को मात्रात्मक त्रुटि के कारण जाति प्रमाण-पत्र प्राप्त करने में हो रही कठिनाइयों को दूर करने के उद्देश्य से अंग्रेज़ी में अधिसूचित जाति को मान्य करने तथा जाति प्रमाण-पत्रों में अंग्रेज़ी में ही अधिसूचित जाति का उल्लेख करने का निर्णय लिया गया। - छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग, छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल एवं विशेष कनिष्ठ कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा आयोजित परीक्षाओं के शुल्क माफ करने के निर्णय का अनुमोदन किया गया। - 'राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मज़दूर न्याय योजना' में हितग्राही परिवार के मुखिया को वार्षिक आधार पर प्रदाय सहायता राशि 6 हज़ार रुपए से बढ़ाकर 7 हज़ार रुपए तथा प्रदेश के अनुसूचित क्षेत्र में आदिवासियों के देवस्थलों पर पूजा करने वाले बैगा, गुनिया, पुजारी, देवस्थल के हाट पाहार्या एवं बाजा मोहरिया को भी इस योजना के तहत लाभ प्रदान करने का निर्णय लिया गया। - छत्तीसगढ़ राज्य प्रत्याभूति मोचन निधि योजना, 2022 प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया तथा छत्तीसगढ़ शासन भंडार क्रय नियम, 2002 (यथा संशोधित, 2022) में संशोधन के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। - छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 में संशोधन के प्रस्ताव तथा छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2022 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। - छत्तीसगढ़ टूरिज़्म बोर्ड द्वारा संचालित इकाइयों के लिये रियायती दर पर होटल बार लाइसेंस प्रदान किये जाने के निर्णय के साथ ही स्थानीय लोगों को रोज़गार के अवसर प्रदान करने और पर्यटकों की सुविधा में वृद्धि की दृष्टि से छत्तीसगढ़ टूरिज़्म बोर्ड के अधीन 26 इकाइयों को लीज पर दिये जाने का निर्णय लिया गया। - आदिवासियों की स्वयं की भूमि में वृक्ष कटाई की प्रक्रिया को सरलीकृत करने हेतु छत्तीसगढ़ आदिम जनजातियों का संरक्षण (वृक्षों में हित) संशोधन विधेयक, 2022 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। - छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक, 2022 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। - मिट्टी की उर्वरा शक्ति के पुनर्जीवन हेतु रासायनिक खादों एवं कीटनाशकों के बदले वर्मी कंपोस्ट खाद के उपयोग के साथ गौ-मूत्र एवं अन्य जैविक पदार्थों के उपयोग को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस वर्ष अक्षय तृतीया 3 मई, 2022 से प्रदेश में माटी पूजन महाअभियान का शुभारंभ करने का निर्णय लिया गया। - दुर्ग-भिलाई औद्योगिक क्षेत्र में सिटी बस प्रारंभ किये जाने एवं नवीन मार्गों के प्रकाशन के संबंध में परिवहन मंत्री को अधिकृत किया गया। - छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल अंतरण योजना नियम, 2010 में संशोधन के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। चर्चा में क्यों? 1 मई, 2022 को उत्तराखंड के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि उच्च शिक्षा में नई शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रम तैयार कर लिया गया है। इसे इसी साल नए शिक्षा सत्र से लागू किया जाएगा। - नई शिक्षा नीति के तहत तैयार पाठ्यक्रम को मुख्य सचिव के समक्ष प्रस्तुतीकरण के बाद इसे कैबिनेट की मंज़ूरी के लिये भेजा जाएगा। उत्तराखंड इसे सबसे पहले लागू करने वाला पहला राज्य होगा। - उल्लेखनीय है कि राज्य विश्वविद्यालयों की ओर से नई शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रम तैयार किये जाने के लिये माध्यमिक शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में पूर्व में टास्क फोर्स गठित की गई थी। उच्च शिक्षा मंत्री को इसका उपाध्यक्ष बनाया गया था। - विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में फैकल्टी की कमी के चलते वार्षिक परीक्षा प्रणाली को लागू किया गया था, लेकिन अब इसे समाप्त कर सेमेस्टर सिस्टम को लागू किया जाएगा। इस संबंध में जल्द निर्णय लिया जाएगा। - प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों में चॉइस इस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम लागू होगा। इस सिस्टम के तहत छात्रों का क्रेडिट बैंक बनेगा, इसी के आधार पर उनका एक से दूसरे महाविद्यालयों में दाखिला हो सकेगा। - नई शिक्षा नीति के तहत जो पाठ्यक्रम तैयार किया गया है, उसमें 70 फीसदी पाठ्यक्रम सभी विश्वविद्यालयों में समान रूप से लागू रहेगा, जबकि 30 फीसदी पाठ्यक्रम को विश्वविद्यालय अपने हिसाब से बदल सकेंगे। पाठ्यक्रम को रोज़गारपरक भी बनाया गया है।
चर्चा में क्यों? एक मई, दो हज़ार बाईस को अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों को पेंशन का पारदर्शी और परेशानीमुक्त वितरण सुनिश्चित करने के लिये एक नया मंच ई-पेंशन पोर्टल शुरू किया। - पोर्टल के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एंड-टू-एंड ऑनलाइन पेंशन पोर्टल पेंशन प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिये वित्त विभाग द्वारा विकसित किया गया है। - यह पेंशनभोगियों को शारीरिक रूप से कहीं भी जाने की आवश्यकता को समाप्त कर देगा और प्रक्रिया को पारदर्शी, कागज़रहित, संपर्करहित और कैशलेस बनाएगा। - सेवानिवृत्त होने वाले राज्य सरकार के कर्मचारियों की शिकायतों को ध्यान में रखते हुए पोर्टल उनके आवेदनों की स्थिति को ट्रैक करेगा। - केंद्र सरकार द्वारा दिये गए दिशा-निर्देशों के अनुसार राज्य के वित्त विभाग ने पोर्टल बनाया है, जिसमें उनसठ वर्ष छह महीने की आयु प्राप्त करने वाले कर्मचारियों की स्थिति को ट्रैक करने का विकल्प होगा। इससे राज्य के लगभग ग्यारह.पाँच लाख पेंशनभोगियों को लाभ होगा। - यह प्रणाली राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिये लागू की गई है और जल्द ही अन्य विभाग भी इस प्रक्रिया में शामिल होंगे, जिससे लाखों लोगों को लाभ होगा और किसी को भी पेंशन के लिये भागना नहीं पड़ेगा। चर्चा में क्यों? तीस अप्रैल, दो हज़ार बाईस को उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव और उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का उद्घाटन अगले जून में किया जाएगा। - अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर उन्नीस में से चौदह फ्लाईओवर का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। बेतवा और यमुना नदी पर पुल का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। इस एक्सप्रेसवे को आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जोड़ने का काम भी पूरा हो चुका है। - बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई दो सौ छियानवे.सात किमी. है। यह एक्सप्रेसवे चित्रकूट, बाँदा, हमीरपुर, जालौन, औरैया और इटावा से होकर गुज़रेगा। - उल्लेखनीय है कि इस एक्सप्रेसवे के बनने से पूरा बुंदेलखंड क्षेत्र आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के ज़रिये राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सीधे जुड़ जाएगा। चर्चा में क्यों? एक मई, दो हज़ार बाईस को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जयपुर में श्री सत्य साईं हार्ट हॉस्पिटल, राजकोट एवं अहमदाबाद द्वारा आयोजित मेगा फ्री हार्ट कैंप का उद्घाटन करते हुए कहा कि यूनिवर्सल हैल्थ कवरेज लागू करने वाला राजस्थान देश का अग्रणी राज्य बन चुका है। - मुख्यमंत्री ने कहा कि 'मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना' में प्रदेश के लगभग एक करोड़ चौंतीस लाख परिवार जुड़ चुके हैं तथा किडनी, हार्ट, लीवर, बोनमेरो ट्रांसप्लांट जैसे महँगे इलाज़ भी इस योजना में निःशुल्क किये जा रहे हैं। - सभी अस्पतालों में आईपीडी एवं ओपीडी मरीजों के लिये निःशुल्क उपचार व निःशुल्क एमआरआई, एक्स-रे तथा सीटी स्कैन की सुविधा भी शुरू कर दी गई है। - उल्लेखनीय है कि प्रदेशवासियों को इलाज के खर्च से चिंतामुक्त करने एवं बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध करवाने की दृष्टि से राज्य सरकार ने 'मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना' एवं 'मुख्यमंत्री निःशुल्क निरोगी राजस्थान' जैसी महत्त्वाकांक्षी योजनाएँ शुरू की हैं। - उन्होंने कहा कि सत्य साईं हार्ट हॉस्पिटल के साथ किये गए एमओयू के तहत तीन सौ चौदह हृदय रोग से पीड़ित बच्चों और अन्य लोगों की निःशुल्क सर्जरी की गई है। सरकार द्वारा बच्चों को गुजरात आने एवं जाने के लिये पाँच हज़ार रुपए की राशि उपलब्ध कराई जा रही है। - यह अस्पताल हार्ट ऑपरेशन जैसे महँगे ऑपरेशन निःशुल्क कर रहा है। इस दौरान मुख्यमंत्री अस्पताल से ठीक होकर आए बच्चों से मिले तथा बीमार बच्चों से मिलकर उन्हें निःशुल्क हार्ट सर्जरी का टोकन दिया। - मुख्यमंत्री ने कहा कि निःशुल्क निरोगी राजस्थान योजना में पाँच हज़ार से अधिक दवाईयाँ, सर्जिकल्स एवं सूचर्स सूचीबद्ध करने की कार्यवाही की जा रही है। साथ ही सभी अस्पतालों में बिना किसी खर्च के पूरा इलाज़ कैशलेस करने की व्यवस्था की गई है। - वहीं मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत आने वाले, सामाजिक-आर्थिक जनगणना, दो हज़ार ग्यारह में चिह्नित नागरिक, संविदाकर्मी, लघु और सीमांत किसान तथा कोविड अनुग्रह राशि प्राप्त करने वाले सभी परिवारों का बीमा प्रीमियम प्रदेश सरकार द्वारा भरा जा रहा है तथा अन्य सभी परिवार बीमा प्रीमियम की आधी राशि देकर योजना से जुड़ सकते हैं। चर्चा में क्यों? एक मई, दो हज़ार बाईस को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री आवास से राजस्थान मरुधरा ग्रामीण बैंक की मोबाइल एटीएम यूनिट वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान उन्होंने मोबाइल एटीएम वेन का अवलोकन कर पहला ट्रांजेक्शन भी किया। - राजस्थान मरुधरा ग्रामीण बैंक को नाबार्ड के सहयोग से कुल चार मोबाइल एटीएम वैन उपलब्ध करवाई गई हैं। ये मोबाइल एटीएम वैन बैंक सेवा क्षेत्र के सभी ज़िलों में दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों एवं ढ़ाणियों में आमजन को बैकिंग सेवाएँ प्रदान करेंगी। - इसके साथ ही सीमा पर तैनात सैनिकों को बैकिंग सेवाएँ उपलब्ध करवाने का कार्य भी इन वैनों के द्वारा किया जाएगा। - मोबाइल एटीएम वैनों के माध्यम से वित्तीय साक्षरता एवं डिजिटल बैंकिंग के बारे में जागरुकता के लिये शिविर आयोजित कर आमजन को बैंकिंग के बारे में जागरूक किया जाएगा व सरकारी योजनाओं की जानकारी जन-जन तक पहुँचाई जाएगी। चर्चा में क्यों? एक मई, दो हज़ार बाईस को राज्य सरकार द्वारा 'मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना' में बीमित परिवारों को दुर्घटनाओं से होने वाली मृत्यु अथवा पूर्ण स्थायी अपंगता की स्थिति में आर्थिक संबल प्रदान करने के उद्देश्य से 'मुख्यमंत्री चिरंजीवी दुर्घटना बीमा योजना' की शुरुआत की गई है। - मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना में सभी बीमित परिवार योजना के पात्र लाभार्थी होंगे और बीमित परिवार के सदस्य अथवा सदस्यों की दुर्घटना में मृत्यु होने अथवा दुर्घटना के कारण हाथ, पैर, आँख की स्थायी पूर्ण क्षति होने पर पाँच लाख रुपए तक का आर्थिक संबल प्रदान किया जाएगा। - मुख्यमंत्री चिरंजीवी दुर्घटना बीमा योजना के अंतर्गत बीमित परिवार के सदस्य की सड़क दुर्घटना में, छत से गिरने के कारण, मकान के ढहने से, डूबने से, रासायनिक द्रव्यों के छिड़काव के कारण, बिजली के झटके तथा जलने से होने वाली मृत्यु/क्षति पर योजना का लाभ देय होगा। - बीमा योजना के तहत बीमित परिवार के सदस्य की दुर्घटना में मृत्यु हो जाने पर पाँच लाख रुपए, दुर्घटना में दोनों हाथों या दोनों पैरों या दोनों आँखों अथवा एक हाथ एवं एक पैर या एक हाथ व एक आँख या एक पैर एवं एक आँख की पूर्ण क्षति पर तीन लाख रुपए तथा तथा दुर्घटना में हाथ पैर आँख की पूर्ण क्षति पर एक.पाँच लाख रुपए का लाभ दिया जाएगा। - योजना का संचालन राज्य बीमा एवं प्रावधाई निधि विभाग के माध्यम से किया जाएगा। चर्चा में क्यों? तीस अप्रैल, दो हज़ार बाईस को केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी की मौज़ूदगी में राजस्थान के बाड़मेर ज़िले के बालोतरा इलाके में स्थित 'मियाँ का बाड़ा' रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर 'महेश नगर हॉल्ट' कर दिया गया। - इससे पहले दो हज़ार अट्ठारह में इस गाँव का नाम बदलकर मियाँ का बाड़ा से महेश नगर किया गया था, लेकिन रेलवे स्टेशन का नाम नहीं बदला जा सका था। यह गाँव पाकिस्तान के सीमावर्ती बाड़मेर ज़िले की समदड़ी तहसील में आता है। - उल्लेखनीय है कि दो हज़ार अट्ठारह में राजस्थान के तीन गाँवों के नाम तत्कालीन भाजपा सरकार ने बदले थे। इसमें मियाँ का बाड़ा गाँव का नाम बदलकर महेश नगर, इस्माइल खुर्द का नाम नाम बदलकर पिचनवा खुर्द और नरपाड़ा को नरपुरा किया गया था। चर्चा में क्यों? तीस अप्रैल, दो हज़ार बाईस को फ्राँस में प्रदेश की पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रसार और कलात्मक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिये मध्य प्रदेश पर्यटन और संस्कृति, फ्रेंच इंस्टीट्यूट एवं अलायंस फ्राँसे के मध्य एमओयू हस्ताक्षरित किया गया। - काउंसिल जनरल ऑफ फ्राँस जीन मार्क सेरे चर्लेट की उपस्थिति में मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम के प्रबंध संचालक एस. विश्वनाथन, भारत में फ्राँस दूतावास/भारत में फ्रेंच इंस्टीट्यूट के निदेशक इमैनुएल लेब्रन डेमियंस और अलायंस फ्राँसे भोपाल की प्रेसीडेंट डॉ. बर्था रथिनम ने एमओयू पर हस्ताक्षर किये। - एमओयू के तहत मध्य प्रदेश और फ्राँस के बीच पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों को साझा किया जाएगा। साथ ही फ्राँस के पर्यटकों को मध्य प्रदेश के पर्यटन स्थलों और आयोजन के संबंध में जानकारी देकर आमंत्रित किया जाएगा। - एमओयू में शामिल गतिविधियों में सांस्कृतिक और कलात्मक आदान-प्रदान, संगोष्ठियों, सम्मेलनों का आयोजन, त्योहारों, कार्यक्रमों, वाद-विवाद, प्रदर्शनियाँ, कार्यशालाएँ, प्रशिक्षण, त्योहारों का विकास और संयुक्त कार्यक्रम, संगीत कार्यक्रम और फिल्मों की स्क्रीनिंग आदि है। - फ्राँस के प्रतिनिधि दल को संचालक विश्वनाथन ने प्रदेश के पर्यटन स्थलों, पर्यटन संबंधी गतिविधियों और निगम द्वारा दी जाने वाली पर्यटक सेवाओं तथा सुविधाओं और प्रदेश के संस्कृति विभाग द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले विभिन्न सांस्कृतिक आयोजन, जैसे- खजुराहो डांस फेस्टिवल, तानसेन समारोह ग्वालियर सहित अन्य आयोजनों की जानकारी दी। चर्चा में क्यों? एक मई, दो हज़ार बाईस को अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भवन एवं अन्य सन्निर्माण मंडल में पंजीकृत भवन कर्मकार कल्याण मंडल एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिकों के लिये मुख्यमंत्री श्रमिक सियान सहायता योजना की घोषणा की। - इस योजना में बुज़ुर्ग श्रमिकों को एकमुश्त दस हज़ार रुपए की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। - इस योजना के लिये ऐसे श्रमिक पात्र होंगे, जिनकी न्यूनतम आयु उनसठ वर्ष तथा अधिकतम आयु साठ वर्ष होगी। इसके साथ ही ये श्रमिक विगत पाँच वर्षों से मंडल के अंतर्गत पंजीकृत होने चाहिये। चर्चा में क्यों? एक मई, दो हज़ार बाईस को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 'मितान योजना' का शुभारंभ किया। इसके तहत नागरिक सेवाएँ घर तक पहुँचाई जाएंगी। - इस योजना को पायलट प्रोजेक्ट के तहत चौदह नगर निगमों में शुरू किया गया है। शीघ्र ही पूरे प्रदेश में इस योजना का विस्तार किया जाएगा। - वर्तमान में चौदह नगर निगमों में तेरह प्रकार की सेवा उपलब्ध होगी और अन्य सेवाएँ भी इस योजना के माध्यम से प्राप्त की जा सकेंगी। - योजना के तहत लोगों को जन्म प्रमाण-पत्र, विवाह, निवास, आय, मृत्यु प्रमाण-पत्र एवं अन्य सेवाओं की घर पहुँच सुविधा प्राप्त होगी। - मितान योजना की सारी प्रक्रिया डिजिटल होगी। सेवाओं हेतु लोगों को मितान टोल फ्री नंबर चौदह हज़ार पाँच सौ पैंतालीस पर कॉल करना होगा। - इस योजना के शुरू होने से सरकारी प्रक्रिया और आसान होगी। सरकारी ऑफिस के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी। - मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के माध्यम से सभी नागरिकों विशेषतः बुज़ुर्गों, दिव्यांगों एवं निरक्षरों को घर बैठे आसानी से कई प्रकार की सेवाएँ मिल सकेंगी। चर्चा में क्यों? एक मई, दो हज़ार बाईस को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद् की बैठक में कई महत्त्वपूर्ण निर्णय लिये गए। - मंत्रिपरिषद् ने एक नवंबर, दो हज़ार चार से नियुक्त शासकीय सेवकों के लिये नवीन अंशदायी पेंशन योजना के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना लागू करने के निर्णय का अनुमोदन किया। नवीन अंशदायी पेंशन योजना हेतु वेतन से की जा रही दस प्रतिशत की मासिक अंशदान की कटौती एक अप्रैल, दो हज़ार बाईस से सामाप्त कर सामान्य भविष्य निधि नियम के अनुसार मूल वेतन के न्यूनतम बारह प्रतिशत कटौती के प्रस्ताव को सहमति दी गई। - अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों को मात्रात्मक त्रुटि के कारण जाति प्रमाण-पत्र प्राप्त करने में हो रही कठिनाइयों को दूर करने के उद्देश्य से अंग्रेज़ी में अधिसूचित जाति को मान्य करने तथा जाति प्रमाण-पत्रों में अंग्रेज़ी में ही अधिसूचित जाति का उल्लेख करने का निर्णय लिया गया। - छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग, छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल एवं विशेष कनिष्ठ कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा आयोजित परीक्षाओं के शुल्क माफ करने के निर्णय का अनुमोदन किया गया। - 'राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मज़दूर न्याय योजना' में हितग्राही परिवार के मुखिया को वार्षिक आधार पर प्रदाय सहायता राशि छः हज़ार रुपए से बढ़ाकर सात हज़ार रुपए तथा प्रदेश के अनुसूचित क्षेत्र में आदिवासियों के देवस्थलों पर पूजा करने वाले बैगा, गुनिया, पुजारी, देवस्थल के हाट पाहार्या एवं बाजा मोहरिया को भी इस योजना के तहत लाभ प्रदान करने का निर्णय लिया गया। - छत्तीसगढ़ राज्य प्रत्याभूति मोचन निधि योजना, दो हज़ार बाईस प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया तथा छत्तीसगढ़ शासन भंडार क्रय नियम, दो हज़ार दो में संशोधन के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। - छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम, एक हज़ार नौ सौ पैंसठ में संशोधन के प्रस्ताव तथा छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय विधेयक, दो हज़ार बाईस के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। - छत्तीसगढ़ टूरिज़्म बोर्ड द्वारा संचालित इकाइयों के लिये रियायती दर पर होटल बार लाइसेंस प्रदान किये जाने के निर्णय के साथ ही स्थानीय लोगों को रोज़गार के अवसर प्रदान करने और पर्यटकों की सुविधा में वृद्धि की दृष्टि से छत्तीसगढ़ टूरिज़्म बोर्ड के अधीन छब्बीस इकाइयों को लीज पर दिये जाने का निर्णय लिया गया। - आदिवासियों की स्वयं की भूमि में वृक्ष कटाई की प्रक्रिया को सरलीकृत करने हेतु छत्तीसगढ़ आदिम जनजातियों का संरक्षण संशोधन विधेयक, दो हज़ार बाईस के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। - छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता विधेयक, दो हज़ार बाईस के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। - मिट्टी की उर्वरा शक्ति के पुनर्जीवन हेतु रासायनिक खादों एवं कीटनाशकों के बदले वर्मी कंपोस्ट खाद के उपयोग के साथ गौ-मूत्र एवं अन्य जैविक पदार्थों के उपयोग को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस वर्ष अक्षय तृतीया तीन मई, दो हज़ार बाईस से प्रदेश में माटी पूजन महाअभियान का शुभारंभ करने का निर्णय लिया गया। - दुर्ग-भिलाई औद्योगिक क्षेत्र में सिटी बस प्रारंभ किये जाने एवं नवीन मार्गों के प्रकाशन के संबंध में परिवहन मंत्री को अधिकृत किया गया। - छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल अंतरण योजना नियम, दो हज़ार दस में संशोधन के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। चर्चा में क्यों? एक मई, दो हज़ार बाईस को उत्तराखंड के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि उच्च शिक्षा में नई शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रम तैयार कर लिया गया है। इसे इसी साल नए शिक्षा सत्र से लागू किया जाएगा। - नई शिक्षा नीति के तहत तैयार पाठ्यक्रम को मुख्य सचिव के समक्ष प्रस्तुतीकरण के बाद इसे कैबिनेट की मंज़ूरी के लिये भेजा जाएगा। उत्तराखंड इसे सबसे पहले लागू करने वाला पहला राज्य होगा। - उल्लेखनीय है कि राज्य विश्वविद्यालयों की ओर से नई शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रम तैयार किये जाने के लिये माध्यमिक शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में पूर्व में टास्क फोर्स गठित की गई थी। उच्च शिक्षा मंत्री को इसका उपाध्यक्ष बनाया गया था। - विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में फैकल्टी की कमी के चलते वार्षिक परीक्षा प्रणाली को लागू किया गया था, लेकिन अब इसे समाप्त कर सेमेस्टर सिस्टम को लागू किया जाएगा। इस संबंध में जल्द निर्णय लिया जाएगा। - प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों में चॉइस इस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम लागू होगा। इस सिस्टम के तहत छात्रों का क्रेडिट बैंक बनेगा, इसी के आधार पर उनका एक से दूसरे महाविद्यालयों में दाखिला हो सकेगा। - नई शिक्षा नीति के तहत जो पाठ्यक्रम तैयार किया गया है, उसमें सत्तर फीसदी पाठ्यक्रम सभी विश्वविद्यालयों में समान रूप से लागू रहेगा, जबकि तीस फीसदी पाठ्यक्रम को विश्वविद्यालय अपने हिसाब से बदल सकेंगे। पाठ्यक्रम को रोज़गारपरक भी बनाया गया है।
आबूरोड में गाजर की आड़ में अवैध शराब गुजरात तस्करी कर ले जाई जा रही थी। जिस पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए हैं ट्रक को पकड़ा है। मौके से भारी मात्रा में शराब बरामद हुई है। एक आरोपी को भी गिरफ्तार किया गया है। जानकारी के अनुसार पुलिस को मुखबिर के जरिए सूचना मिली थी कि एक ट्रक में शराब भरकर गुजरात ले जाई जा रही है। जिस पर एसपी धर्मेंद्र सिंह के निर्देश पर मावल चौकी पर रीको पुलिस ने नाकेबंदी की। नाकेबंदी चौकी प्रभारी देवाराम मीणा, महेंद्र सिंह के नेतृत्व में की गई और इस दौरान एक ट्रक को रोककर तलाशी ली गई। जिसमें भारी मात्रा में गाजर की आड़ में शराब भरकर गुजरात ले जाई जा रही थी। जिस पर पुलिस ने गाजर को हटाकर शराब निकाली। पुलिस ने लाखों की कीमत की शराब को जब्त कर लिया है। शराब जोधपुर से अहमदाबाद ले जा रही थी। मौके से ट्रक चालक रामदयाल को गिरफ्तार किया जिससे पूछताछ जारी है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
आबूरोड में गाजर की आड़ में अवैध शराब गुजरात तस्करी कर ले जाई जा रही थी। जिस पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए हैं ट्रक को पकड़ा है। मौके से भारी मात्रा में शराब बरामद हुई है। एक आरोपी को भी गिरफ्तार किया गया है। जानकारी के अनुसार पुलिस को मुखबिर के जरिए सूचना मिली थी कि एक ट्रक में शराब भरकर गुजरात ले जाई जा रही है। जिस पर एसपी धर्मेंद्र सिंह के निर्देश पर मावल चौकी पर रीको पुलिस ने नाकेबंदी की। नाकेबंदी चौकी प्रभारी देवाराम मीणा, महेंद्र सिंह के नेतृत्व में की गई और इस दौरान एक ट्रक को रोककर तलाशी ली गई। जिसमें भारी मात्रा में गाजर की आड़ में शराब भरकर गुजरात ले जाई जा रही थी। जिस पर पुलिस ने गाजर को हटाकर शराब निकाली। पुलिस ने लाखों की कीमत की शराब को जब्त कर लिया है। शराब जोधपुर से अहमदाबाद ले जा रही थी। मौके से ट्रक चालक रामदयाल को गिरफ्तार किया जिससे पूछताछ जारी है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
BSEB 10th Result 2023: बिहार बोर्ड ने 10वीं कक्षा के छात्रों का रिजल्ट जारी कर दिया है। स्टूडेंट नीचे बताए गए स्टेप्स को फॉलो कर के रिजल्ट चेक कर सकते हैं। BSEB 10th Result 2023: बिहार बोर्ड में 10वीं के रिजल्ट का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों को एक अच्छी खबर है। बता दें कि बोर्ड ने 10वीं का रिजल्ट जारी कर दिया है। जो छात्र सत्र 2022-23 में बोर्ड परीक्षा में शामिल हुए थे, वे आयोग की आधिकारिक वेवसाइट biharboardonline. bihar. gov. in के माध्यम से अपना रिडल्ट चेक कर सकते हैं। बता दें कि बोर्ड ने टॉपर्स की भी लिस्ट जारी कर दी है। इस साल बिहार मैट्रिक की परीक्षा में शेखपुरा के मोहम्मद युम्मान अशरफ टॉप किया है। बिहार बोर्ड 10वीं कक्षा का रिजल्ट बोर्ड के अध्यक्ष आनंद किशोर ने जारी किया है। यह रिजल्ट ऑनलाइन मोड में जारी किया गया है। रिजल्ट का इंतजार कर रहे छात्र व अभिभावक नीचे बताए गए स्टेप्स को फॉलो कर रिजल्ट चेक कर सकते हैं। रिजल्ट चेक करने के लिए कैंडिडेट सबसे पहले बिहार बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट biharboardonline. bihar. gov. in पर जाएं। होम पेज पर Bihar Board लिंक पर क्लिक करें। इसके बाद Check Bihar Board 10th Result पर क्लिक करें। अगला पेज ओपन होगा। वहां रिजल्ट चेक का ऑप्शन आएगा। उम्मीदवार रिजल्ट चेक करने के लिए अपना रोल नंबर और रोल कोड डालें। अब लॉगइन करते ही आपका रिजल्ट स्क्रीन पर खुल जाएंगा। यहां अपना रिजल्ट चेक करें और भविष्य के लिए इसकी प्रति निकाल कर रख लें। इस साल बिहार बोर्ड मैट्रिक की परीक्षा में कुल 17 लाख छात्रों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया था। आयोग की ओर से आज रिजल्ट जारी कर दिया गया है।
BSEB दसth Result दो हज़ार तेईस: बिहार बोर्ड ने दसवीं कक्षा के छात्रों का रिजल्ट जारी कर दिया है। स्टूडेंट नीचे बताए गए स्टेप्स को फॉलो कर के रिजल्ट चेक कर सकते हैं। BSEB दसth Result दो हज़ार तेईस: बिहार बोर्ड में दसवीं के रिजल्ट का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों को एक अच्छी खबर है। बता दें कि बोर्ड ने दसवीं का रिजल्ट जारी कर दिया है। जो छात्र सत्र दो हज़ार बाईस-तेईस में बोर्ड परीक्षा में शामिल हुए थे, वे आयोग की आधिकारिक वेवसाइट biharboardonline. bihar. gov. in के माध्यम से अपना रिडल्ट चेक कर सकते हैं। बता दें कि बोर्ड ने टॉपर्स की भी लिस्ट जारी कर दी है। इस साल बिहार मैट्रिक की परीक्षा में शेखपुरा के मोहम्मद युम्मान अशरफ टॉप किया है। बिहार बोर्ड दसवीं कक्षा का रिजल्ट बोर्ड के अध्यक्ष आनंद किशोर ने जारी किया है। यह रिजल्ट ऑनलाइन मोड में जारी किया गया है। रिजल्ट का इंतजार कर रहे छात्र व अभिभावक नीचे बताए गए स्टेप्स को फॉलो कर रिजल्ट चेक कर सकते हैं। रिजल्ट चेक करने के लिए कैंडिडेट सबसे पहले बिहार बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट biharboardonline. bihar. gov. in पर जाएं। होम पेज पर Bihar Board लिंक पर क्लिक करें। इसके बाद Check Bihar Board दसth Result पर क्लिक करें। अगला पेज ओपन होगा। वहां रिजल्ट चेक का ऑप्शन आएगा। उम्मीदवार रिजल्ट चेक करने के लिए अपना रोल नंबर और रोल कोड डालें। अब लॉगइन करते ही आपका रिजल्ट स्क्रीन पर खुल जाएंगा। यहां अपना रिजल्ट चेक करें और भविष्य के लिए इसकी प्रति निकाल कर रख लें। इस साल बिहार बोर्ड मैट्रिक की परीक्षा में कुल सत्रह लाख छात्रों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया था। आयोग की ओर से आज रिजल्ट जारी कर दिया गया है।
घुमारवीं -उपमंडल घुमारवीं में बुधवार दोपहर बाद अचानक मौसम खराब हो गया। इससे डीहर-मोरसिंघी सड़क पर एक पेड़ की बड़ी टहनी गिर गई, जिसके कारण करीब आधा घंटा बंद रही। वाहन चालकों व अन्य लोगों ने पेड़ की टहनी को हटाया। तब जाकर रोड वाहनों की आवाजाही के लिए खुला। इससे यहां से गुजरने वाले वाहन चालकों व लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जानकारी के मुताबिक बुधवार दोपहर बाद घुमारवीं उपमंडल में झमाझम बारिश हुई। मौसम खराब होने से चली हवाओं के कारण डीहर-मोरसिंघी रोड पर एक पेड़ की बड़ी टहनी टूट कर पड़ गई। इससे यह रोड करीब आधा घंटा वाहनों की आवाजाही के लिए थमा रहा। लोगों की मदद से टहनी को सड़क से हटाया गया, जिसके बाद वाहनों की आवाजाही शुरू हुई।
घुमारवीं -उपमंडल घुमारवीं में बुधवार दोपहर बाद अचानक मौसम खराब हो गया। इससे डीहर-मोरसिंघी सड़क पर एक पेड़ की बड़ी टहनी गिर गई, जिसके कारण करीब आधा घंटा बंद रही। वाहन चालकों व अन्य लोगों ने पेड़ की टहनी को हटाया। तब जाकर रोड वाहनों की आवाजाही के लिए खुला। इससे यहां से गुजरने वाले वाहन चालकों व लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जानकारी के मुताबिक बुधवार दोपहर बाद घुमारवीं उपमंडल में झमाझम बारिश हुई। मौसम खराब होने से चली हवाओं के कारण डीहर-मोरसिंघी रोड पर एक पेड़ की बड़ी टहनी टूट कर पड़ गई। इससे यह रोड करीब आधा घंटा वाहनों की आवाजाही के लिए थमा रहा। लोगों की मदद से टहनी को सड़क से हटाया गया, जिसके बाद वाहनों की आवाजाही शुरू हुई।
एक्ट्रेस रवीना टंडन इनदिनों फिल्मों से भले दूर हैं लेकिन एक्ट्रेस ने बॉलीवुड कई हिट फिल्में दी हैं। इन फिल्मों में उन्होंने ना सिर्फ शानदार एक्टिंग की है बल्कि जबरदस्त डांस परफॉर्मेंस भी दी है। इस लिस्ट में दिलवाले, मोहरा, दुल्हे राजा, लाडला, अंदाज अपना अपना जैसी कई फिल्में शामिल हैं। इन सभी फिल्मों में उनके किरदार को लोगों ने खूब पसंद किया था। एक्ट्रेस रवीना टंडन ने कई हिट एक्टर के साथ स्क्रीन शेयर किया है। जिसमें शाहरख खान का भी नाम शामिल है। शाहरुख खान और रवीना टंडन ने जादू, पहला नशा, जमाना दीवाना, और ये लम्हें जुदाई के जैसी फिल्मों में साथ काम किया हैं। इन फिल्मों में उनके किरदार को लोगों ने खूब पसंद किया था। शाहरुख खान जब भी रवीना से मिलते हैं तो उनके पास आकर मिलते हैं ताकी उनकी खुशबू को सूंघ सकें। वह उनके पति से कहते हैं कि आपके पास सबसे अच्छी सुगंधित एक्ट्रेस है। रवीना टंडन की दो गोद ली हुई बेटियां हैं- छाया और पूजा। जिनकी शादी हो गई है और वो अब दोनों अब मां बन चुकी हैं। रवीना टंडन जब 21 वर्ष की थीं तब उन्होंने दो बच्चियों को गोद लिया था। उनकी बड़ी बेटी उस समय 11 वर्ष की थी। अब छाया और पूजा की शादी हो चुकी है और दोनों के अपने बच्चे हैं। इसी कारण रवीना 46 की उम्र में नानी बनी। साल 1994 में रवीना टंडन और अक्षय कुमार की फिल्म आई थी- मोहरा। इस फिल्म की शूटिंग के दौरान ही रवीना और अक्षय कुमार के बीच नजदीकियां बढ़ने लगी थीं। अक्षय कुमार और रवीना पर फिल्माया गया गाना 'तू चीज बड़ी है मस्त' इतना मशहूर हुआ कि रवीना को ही 'मस्त-मस्त गर्ल' का खिताब दे दिया गया। अक्षय और रवीना स्क्रीन पर सुपरहिट थे और इसलिए ये दोनों एक साथ कई सारी फिल्में साइन कर डाली। एक इंटरव्यू में रवीना ने खुद कहा था कि 'मोहरा' की शूटिंग के बाद वो और अक्षय शादी करने वाले थे। रवीना अपनी लव लाइफ के कारण भी अक्सर सुर्खियों में रही थी। रवीना का नाम सनी देओल, अक्षय कुमार और अजय देवगन के साथ जुड़ा था। इनमें अक्षय और रवीना का अफेयर सबसे चर्चित था। रवीना से ब्रेकअप के बाद एक इंटरव्यू में अक्षय कुमार पर कई आरोप लगाए थे। अक्षय कुमार से अलग होने के बाद रवीना टंडन ने स्टंप्ड फिल्म की शूटिंग की और इसी फिल्म के दौरान फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर अनिल थडानी से उनकी मुलाकात हुई। दोनों ने एक दूसरे को डेट करना शुरु कर दिया। अनिल उस वक्त तलाकशुदा थे। धीरे धीरे दोनों की दोस्ती प्यार में बदल गई और 2003 में दोनों ने सगाई कर ली। 22 फरवरी 2004 को दोनों शादी जैसे पवित्र रिश्ते में बंध गए। Times Now Navbharat पर पढ़ें Entertainment News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें ।
एक्ट्रेस रवीना टंडन इनदिनों फिल्मों से भले दूर हैं लेकिन एक्ट्रेस ने बॉलीवुड कई हिट फिल्में दी हैं। इन फिल्मों में उन्होंने ना सिर्फ शानदार एक्टिंग की है बल्कि जबरदस्त डांस परफॉर्मेंस भी दी है। इस लिस्ट में दिलवाले, मोहरा, दुल्हे राजा, लाडला, अंदाज अपना अपना जैसी कई फिल्में शामिल हैं। इन सभी फिल्मों में उनके किरदार को लोगों ने खूब पसंद किया था। एक्ट्रेस रवीना टंडन ने कई हिट एक्टर के साथ स्क्रीन शेयर किया है। जिसमें शाहरख खान का भी नाम शामिल है। शाहरुख खान और रवीना टंडन ने जादू, पहला नशा, जमाना दीवाना, और ये लम्हें जुदाई के जैसी फिल्मों में साथ काम किया हैं। इन फिल्मों में उनके किरदार को लोगों ने खूब पसंद किया था। शाहरुख खान जब भी रवीना से मिलते हैं तो उनके पास आकर मिलते हैं ताकी उनकी खुशबू को सूंघ सकें। वह उनके पति से कहते हैं कि आपके पास सबसे अच्छी सुगंधित एक्ट्रेस है। रवीना टंडन की दो गोद ली हुई बेटियां हैं- छाया और पूजा। जिनकी शादी हो गई है और वो अब दोनों अब मां बन चुकी हैं। रवीना टंडन जब इक्कीस वर्ष की थीं तब उन्होंने दो बच्चियों को गोद लिया था। उनकी बड़ी बेटी उस समय ग्यारह वर्ष की थी। अब छाया और पूजा की शादी हो चुकी है और दोनों के अपने बच्चे हैं। इसी कारण रवीना छियालीस की उम्र में नानी बनी। साल एक हज़ार नौ सौ चौरानवे में रवीना टंडन और अक्षय कुमार की फिल्म आई थी- मोहरा। इस फिल्म की शूटिंग के दौरान ही रवीना और अक्षय कुमार के बीच नजदीकियां बढ़ने लगी थीं। अक्षय कुमार और रवीना पर फिल्माया गया गाना 'तू चीज बड़ी है मस्त' इतना मशहूर हुआ कि रवीना को ही 'मस्त-मस्त गर्ल' का खिताब दे दिया गया। अक्षय और रवीना स्क्रीन पर सुपरहिट थे और इसलिए ये दोनों एक साथ कई सारी फिल्में साइन कर डाली। एक इंटरव्यू में रवीना ने खुद कहा था कि 'मोहरा' की शूटिंग के बाद वो और अक्षय शादी करने वाले थे। रवीना अपनी लव लाइफ के कारण भी अक्सर सुर्खियों में रही थी। रवीना का नाम सनी देओल, अक्षय कुमार और अजय देवगन के साथ जुड़ा था। इनमें अक्षय और रवीना का अफेयर सबसे चर्चित था। रवीना से ब्रेकअप के बाद एक इंटरव्यू में अक्षय कुमार पर कई आरोप लगाए थे। अक्षय कुमार से अलग होने के बाद रवीना टंडन ने स्टंप्ड फिल्म की शूटिंग की और इसी फिल्म के दौरान फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर अनिल थडानी से उनकी मुलाकात हुई। दोनों ने एक दूसरे को डेट करना शुरु कर दिया। अनिल उस वक्त तलाकशुदा थे। धीरे धीरे दोनों की दोस्ती प्यार में बदल गई और दो हज़ार तीन में दोनों ने सगाई कर ली। बाईस फरवरी दो हज़ार चार को दोनों शादी जैसे पवित्र रिश्ते में बंध गए। Times Now Navbharat पर पढ़ें Entertainment News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें ।
माला पहनाने वाले नहीं मिलते थे। उनका स्वास्थ्य गिरने लगा। डॉक्टरों ने उन्हें सलाह दी कि आप फूलमाला का सेवन करें। उन्होंने दस रुपये महीने पर एक माली को रोज़ माला पहनाने के लिए लगा लिया। शाम को वे सजकर कुर्सी पर बैठ जाते। माली आता और माला पहनाता। वे कहते-भाइयो और बहनो! उनकी सेहत अच्छी हो गई। मगर माली का स्वास्थ्य गिरने लगा। हर एक को माला पहनाना अनुकूल नहीं पड़ता। अपनी-अपनी प्रकृति है। भगवान भूतल पर कोई बड़ा काम करते थे, तो निठल्ले देवता आकाश से फूल बरसाते थे। दोनों का स्वास्थ्य ठीक रहता था। कर्मी के लिए फूल तोड़ने में निठल्ले का वक्त अच्छा कट जाता है। संयोजक अब निर्णय पर पहुंच रहे हैं। दूर हैं, पर हाव-भाव से पूरा वार्तालाप मैं सुन रहा हूं । एक कहता है-परसाईजी ठीक रहेंगे। दूसरे का चेहरा खिनन होता है। कहता है-नहीं यार, वह नहीं जमेंगे। तब तीसरा मेरे समर्थन में कहता है कोई और यहां है ही नहीं और टाइम बहुत हो गया। बहुमत मेरे पक्ष में हो गया है। मैं जाकिट के बटन लगा लेता हूं। बालों पर हाथ फेरता हूं। दुरुस्त हैं। रूमाल चेहरे पर फेरता हूं, जिससे उचक्कापन साफ हो जाए और नीचे दबी गम्भीरता ऊपर आ जाए। अब वे आते ही हैं। मालाएं एकटक नजर मेरी तरफ देख रही हैं । उन्हें गर्दन मिल गई। मैं मंच पर पहुंच गया। एवज़ में मुख्य अतिथि मैं पहले भी एक बार बन चुका था। तब संस्था के मंत्री ने श्रोताओं से कहा था- हमें बड़ा दुख है कि अमुकजी नहीं आए, इसलिए परसाईजी को मुख्य अतिथि बनाना पड़ रहा है। आशा है, आप लोग हमें क्षमा करेंगे। यह सुनकर भी मैं बेशर्मी लादकर बैठा रहा । मालाएं मुझे पहनाई जाने लगीं। मुझे इसका अभ्यास कम है। गर्दन भी अभी मालाओं के अनुकूल नहीं है। कई गर्दनें मैंने ऐसी देखी हैं जैसे वे माला पहनने के लिए ही बनी हों। गर्दन और माला बिल्कुल 'मेड फॉर ईच अदर" रहती हैं। माला लपककर गले में फिट हो जाती है। फूल की मार विकट होती है। कई गर्दनें जो संघर्ष में कटने के लिए पुष्ट कर दी गई थीं, माला पहनकर लचीली हो गई हैं। एक क्रांतिकारी इधर रहते हैं जिनकी कभी तनी हुई गर्दन थी। मगर उन्हें माला पहनने की लत लग गईं। अब उनकी गर्दन छूने से लगता है, भीतर पानी भरा है। पहले जन आन्दोलन में मुख्य अतिथि होते थे, अब मीना बाजार में मुख्य अतिथि होते हैं। मैंने 10-12 मालाएं पहनीं और मेरी सारी उद्धतता चली गई। फूल की मार बुरी होती है। शेर को अगर किसी तरह एक फूलमाला पहना दो तो गोली चलाने की ज़रूरत नहीं है। वह फौरन हाथ जोड़कर कहेगा- मेरे योग्य कोई और सेवा! मंत्री माइक पर कहता है- अब परसाईजी हमें दिशा-निर्देश करेंगे। यह तरुणों की संस्था है। मैं इन्हें क्या दिशा बताऊं? हर दिशा में यहां दिशा-शूल हैं। कभी सोचा था कि तकनीकी शिक्षा की दिशा में जाना चाहिए मगर हज़ारों बेकार इंजीनियर हैं। उस दिशा में भी दिशाशूल निकला। क्या दिशा बताऊं? ये तरुण मुझ जैसे के गले में यहां माला पहना रहे हैं और इन्हीं की उम्र के बंगाल के तरुण मुझ जैसे की गर्दन काट रहे हैं। कौन-सी सही दिशा है? माला पहनाने की, या गला काटने की? किसी को दिशा नहीं मालूम । दिशा पाने के लिए यहां की राजनैतिक पार्टियां एक अधिवेशन उत्तर में श्रीनगर में करती हैं, दूसरा दक्षिण में त्रिवेन्द्रम में, तीसरा पूर्व में पटना में और चौथा पश्चिम में जोधपुर में मगर चारों तरफ घूमकर भी जहां की तहां रहती हैं। बाएं जातेजाते लौटकर दाएं चलने लगती हैं। (६ दिशा मुझे मालूम ही नहीं है। कई साल पहले मैं नए लेखक के रूप में दिशा खोज रहा था। तभी दूसरों ने कहा-बेवकूफ, जो दिशा पा लेता है वह घटिया लेखक होता है। सही लेखक दिशाहीन होता है। ऊंचा लेखक वह जो नहीं जानता कि कहां जाना है, पर चला जा रहा है। दिशा मैंने छोड़ दी। देख रहा हूं, लेखक चौराहे से चारों सड़कों पर जाते हैं। मगर दूर नहीं जाते। लौट-लौटकर चौराहे पर आ जाते हैं और इंतज़ार करते हैं कि उन्हें उठा ले जाने वाली कार कब आती है और वे बैठकर बाकी लेखकों को "टा-टा" बोलकर चले जाते हैं । सुना है, बम्बई, कलकत्ता, दिल्ली में तो हवाई जहाज़ से उड़ा ले जाते हैं। मैं दिशा की खोज में जूते घिसता रहा और चौराहे का ध्यान नहीं रखा। देर से चौराहे पर लौटता हूं, देखता हूं, साथ के लोगों को उठा लिया गया है । नहीं, दिशा मैं नहीं बता सकता। फूल-मालाओं से लाद दो तब भी नहीं। दिशा आज सिर्फ अंधा बता सकता है। अंधे दिशा बता भी रहे हैं। सवेरे युवकों को दिशा बताएंगे, शाम को वृद्धों को। कल डॉक्टरों को दिशा बताएंगे, तो परसों पाकिटमारों को। अंधा दिशा भेद नहीं कर सकता, इसलिए सही दिशा दिखा सकता है। मैंने श्रोताओं से कहा-मैं दिशा नहीं जानता। फिर मैं बहुत दयालु और शरीफ मुख्य अतिथि । आपको बिल्कुल तकलीफ नहीं दूंगा। मैं भाषण नहीं दूंगा। श्रोताओं ने लम्बा भाषण सुनने के लिए सारी शक्ति बटोर ली थी। सांप दिखे तो आदमी उससे बचने के लिए स्नायुओं को तीव्र कर लेता है, मांसपेशियां मज़बूत हो जाती हैं। मगर फिर यह समझ में आया कि रस्सी है, तो राहत तो मिलती है, पर साथ ही एक तरह की शिथिलता और गिरावट भी आती है। मेरे श्रोताओं का यही हाल था। जिसे सांप समझे थे वह रस्सी निकला । बाद में संयोजकों ने कहा- आपने भाषण क्यों नहीं दिया? मैंने कहा- वे श्रोता मेरे नहीं थे। - तुम्हारे उन मुख्य अतिथि के थे। मैं दूसरे का मारा हुआ शिकार नहीं खाता। गै । चुनाव के ये अनंत आशावान चुनाव के नतीजे घोषित हो गए। अब मातमपुर्सी का काम ही रह गया है। इतने बड़े-बड़े हरे हैं कि मुझ जैसे की हिम्मत मातमपुर्सी की भी नहीं होती। मैंने एक बड़े की हार पर दुःख प्रकट करते हुए चिट्ठी लिखी थी। जवाब में उनके सचिव ने लिखा- तुम्हारी इतनी जुर्रत कि साहब की हार पर दुखी होओ? साहब का कहना है कि उनकी हार पर दुःख मनाना उनका अपमान है। वे क्या इसलिए हरे हैं कि तुम जैसे टुच्चे आदमी दुखी हों? बड़े की हार पर छोटे आदमी को दुखी होने का कोई हक नहीं। साहब आगे भी हररेंगे। पर तुम्हें चेतावनी दी जाती है कि अगर तुम दुखी हुए, तो तुम पर मानहानि का मुकदमा दायर किया जाएगा। बड़ी अजब स्थिति है। दुखी होना चाहता हूं, पर दुखी होने का मुझे अधिकार ही नहीं है। मुझे लगता है, समाजवाद इसी को कहते हैं, कि बड़े की हार पर बड़ा दुखी हो और छोटे की हार पर छोटा। हार के मामले में वर्ग संघर्ष खत्म हो गया। मैं अब किसी की हार पर दुःख की चिट्ठी नहीं लिखूंगा। पर जो आस-पास ही बैठे हैं, उनके प्रति तो कर्त्तव्य निभाना ही पड़ेगा। चिट्ठी में मातमपुर्सी करना आसान है। मैं हँसतेहँसते भी दुःख प्रकट कर सकता हूं। पर प्रत्यक्ष मातमपुर्सी कठिन काम है। मुझे उनकी हार पर हँसी आ रही है, पर जब वे सामने पड़ जाएं तो मुझे चेहरा ऐसा बना लेना चाहिए जैसे उनकी हार नहीं हुई, मेरे पिता की सुबह ही मृत्यु हुई है। इतना अपने से नहीं सघता। प्रत्यक्ष मातमपुर्सी में मैं हमेशा फेल हुआ हूं। मगर देखता हूं, कुछ लोग मातममुखी होते हैं। लगता है, भगवान ने इन्हें मातमपुर्सी की ड्यूटी करने के लिए ही संसार में भेजा है। किसी की मौत की खबर सुनते ही वे खुश हो जाते हैं। दुःख का मेक-अप करके फौरन उस परिवार में पहुंच जाते हैं। कहते हैं- जिसकी आ गई, वह तो जाएगा ही। उनकी इतनी ही उम्र थी। बड़े पुण्यात्मा थे। किसी का दिल नहीं दुखाया । (हालांकि उन्होंने कई लोगों की ज़मीन बैंदबल कराई थी।) उन्हें किसी के कुत्ते ने काट लिया हो और वह कुत्ता आगे मर जाए तो भी वे उसी शान से मातमपुर्सी करेंगे-बड़ा सुशील कुत्ता था। बड़ी सात्विक वृत्ति का। कभी किसी को तंग नहीं किया। उसके रिक्त स्थान की पूर्ति श्वान-जगत् में नहीं हो सकती। मैं कभी चुनाव नहीं लड़ा। एक बार सर्वसम्मति से अध्यापक संघ का अध्यक्ष हो गया था । एक साल में मैंने तीन संस्थाओं में हड़ताल और दो अध्यापकों से भूख हड़ताल करवाई। नतीजा यह हुआ कि सर्वसम्मति से निकाल दिया गया। अपनी इतनी ही संसदीय सेवा है। सोचता हूं, एक बार चुनाव लड़कर हार लूं तो अपनी पीढ़ी का नारा भोगा हुआ यथार्थ" सार्थक हो जाए। तब शायद मैं मातमपुर्सी के योग्य मूड बना सकूं । अपनी असमर्थता के कारण मैं चुनाव के बाद हारे हुओं की गली से नहीं निकलता। पर ये अनन्त आशावान लोग कहीं मिल ही जाते हैं। एक साहब पिछले पंद्रह सालों से हर चुनाव लड़ रहे हैं और हर बार ज़मानत ज़ब्त करवाने का गौरव प्राप्त कर रहे हैं। वे नगर निगम का चुनाव हारते हैं तो समझते हैं, जनता मुझे नगर के छोटे काम की अपेक्षा प्रदेश का काम सौंपना चाहती है। और वे विधान सभा का चुनाव लड़ जाते हैं। यहां भी ज़मानत ज़ब्त होती है तो वे सोचते हैं, जनता मुझे देश की ज़िम्मेदारी सौंपना चाहती है-और वे लोकसभा का चुनाव लड़ जाते हैं। हार के बाद वे मुझे मिल जाते हैं। बाल बिखरे हुए, बदहवास । मेरा हाथ पकड़ लेते हैं । झकझोर करते हैं-टेल मी परसाई, इज़ दिस डेमोक्रेसी ? क्या यह जनतंत्र है? मैं कुछ "हां-हूं! करके छूटना चाहता हूं तो वे मेरे पांव पर पांव रख देते हैं और मेरे मुंह से लगभग मुंह लगाकर कहते हैं- नहीं, नहीं, तुम्हीं बताओ। यह क्या जनतंत्र है? मुझे कहना पड़ता है - यह जनतंत्र नहीं है। पिछले 15-20 सालों में जब-जब वे चुनाव हरे हैं, तब-तब मुझे यह निर्णय लेना पड़ा है कि यह जनतंत्र झूठा है। जनतंत्र झूठा है या सच्चा-यह इस बात से तय होता है कि हम हारे या जीते? व्यक्तियों का ही नहीं, पार्टियों का भी यही सोचना है कि जनतंत्र उनकी हार-जीत पर निर्भर है। जो भी पार्टी हारती है, चिल्लाती है-अब जनतंत्र खतरे में पड़ गया। अगर वह जीत जाती तो जनतंत्र सुरक्षित एक और अनंत आशावान हैं। कोई शाम को उन्हें दो घंटे के लिए लाउड स्पीकर दिला दे तो वे चौराहे पर नेता हो जाते हैं और जनता की समस्या के लिए लड़ने लगते हैं। लाउड स्पीकर का नेता- जाति की वृद्धि में क्या स्थान है, यह शोध का विषय है। नेतागिरी आवाज़ के फैलाव का नाम है । ये नेता मुझे कभी शाम को चौराहे पर गर्म भाषण करते मिल जाते हैं। क्रोध से माइक पर चिल्लाते हैं- राइट टाउन में आवारा सूअर घूमते रहते हैं। कॉर्पोरेशन के अधिकारी क्या सो रहे हैं? मैं नगर निगम अधिकारी के इस्तीफे की मांग करता हूं। यह जनतंत्र का मज़ाक है कि राइट टाउन में आवारा सूअर घूमते रहते हैं और साहब चैन की नींद सोते हैं। इस प्रश्न पर प्रदेश सरकार को इस्तीफा देना चाहिए। मैं भारत सरकार से इस्तीफे की मांग करता हूं। राइट टाउन के आवारा सूअरों को लेकर वे भारत सरकार से पिछले 10 सालों से इस्तीफा मांग रहे हैं, पर सूअर भी जहां के तहां हैं और सरकार भी। मगर ये लाउड स्पीकरी नेता अपनी लोकप्रियता के बारे में इतने आश्वस्त हैं कि हर चुनाव में खड़े हो जाते हैं। उनकी ज़मानत ज़ब्त होती है। पर मैंने उनके चेहरे पर शिकन नहीं देखी। मिलते ही कहते हैं- पैसा चल गया। शराब चल गई। उन्होंने अपनी हार का एक कारण ढूंढ़ निकाला है कि चुनाव में पैसा और शराब चल जाते हैं और वे हरा दिए जाते हैं। वे खुश रहते हैं। उन्हें विधास है कि जनता तो उनके साथ है, मगर वह पैसे और शराब के कारण दूसरे को वोट दे देती है। वे जनता से बिल्कुल नाराज़ नहीं हैं। वे इस बात को जायज़ मानते हैं कि मतदाता उसी को वोट दे जो पैसा और शराब दे। अभी वे लोकसभा के चुनाव में ज़मानत ज़ब्त कराने के बाद मिले तो खुश थे। बड़े उत्साह से बोलेवही हुआ। पैसा चल गया। शराब चल गई। हमारे मनीषीजी छोटा चुनाव कभी नहीं लड़ते। हर बार सिर्फ लोकसभा का चुनाव लड़ते हैं। उनकी भी एक पार्टी है। अखिल भारतीय पार्टी है। लोगों ने उसका नाम न सुना होगा। उसका नाम है "वज्रवादी पार्टी'। वाद है, "वज्रवाद" और संस्थापक हैं-डॉ. वज्रप्रहार! इस पार्टी की स्थापना मध्य प्रदेश के एक कस्बे टिमरनी में डॉ. वज्रप्रहार ने की थी और वे जब देश में अनुयायी ढूंढ़ने निकले तो हमारे शहर में उन्हें मनीषीजी मिल गए। पार्टी में कुल ये दो सदस्य हैं और क्रांति के बारे में बहुत गंभीरता से सोचते हैं। मनगीषी फक्कड़ फकीर हैं। पर हर लोकसभा चुनाव के वक्त ज़मानत के लिए 500 रु. और पर्चा छपाने का खर्च कहीं से जुटा लेते हैं। हर बार उन्हें चुनाव लड़वाने के लिए डॉ. वज्रप्रहार आ जाते हैं। सभाएं होती हैं, भाषण होते हैं। मैं देखता हूं, दोनों धीरे-धीरे सड़क पर बड़ी गंभीरता से बातें करते चलते हैं। डॉ. वज्रप्रहार कहते हैं- मनीषी, रिवॉल्यूशन इज़ राउण्ड दी कॉर्नर ! क्रांति आने में देर नहीं है। तब मनीषी कहते हैं पर डॉक्टर साहब, क्रांति का रूप क्या होगा और उसके लिए हमें कैसा 'ऐलान' कर लेना चाहिए, यह अभी तय हो जाना चाहिए। डॉक्टर साहब कहते हैं- वो तुम मेरे ऊपर छोड़ दो। आईं शेल गिव यू गाइड लाइंस। तुम्हारा निर्देश करूंगा। पर तुम जनता को क्रांति के लिए तैयार कर डालो । ये दोनों सच्चे क्रांतिकारी कई सालों से गंभीरतापूर्वक क्रांति की योजना बना रहे हैं, पर पार्टी में तीसरा आदमी अभी तक नहीं आया। इस बार मैंने पूछा- मनीषीजी, डॉ. वज्रप्रहार नहीं आए? मनीषी ने कहा-मेरा उनसे सैद्धांतिक मतभेद हो गया। भारतीय राजनीति की कितनी बड़ी ट्रेजडी है कि जिस पार्टी में दो आदमी हों, उन्हीं में सैद्धान्तिक मतभेद हो जाए। मनीषी ने कहा- उनकी चिट्ठी आई है। इस पच्चें में छपी है। उन्होंने अपना पर्चा बढ़ा दिया - 'इंटरनेशनल न्यूज़। ' डॉक्टर साहब का बड़ा गंभीर पत्र है- आई एम रिप्लाइंग टु द पॉलिटिकल पार्ट ऑफ योर लेटर। मनीषी की ज़मानत ज़ब्त हो गई है, पर क्रांति की तैयारी दोनों नेता बराबर करते जा रहे हैं। एक दिन मैंने पोस्टर चिपके देखे-"जनता के उम्मीदवार सरदार केसरसिंह को वोट दो । " कोई नहीं जानता, ये कौन हैं? जिस जनता के उम्मीदवार हैं वह भी नहीं जानती। किसी ने मुझे बताया कि वे खड़े हैं सरदार केसरसिंह। मैंने पूछा- आप किस मकसद से चुनाव लड़ रहे हैं? उन्होंने सादा जवाब दिया - मकसद ? अजी मकसद यह क्या कम है कि आप जैसा आदमी पूछे कि सरदार केसरसिंह कौन हैं? एक साहब अभी जनता की आवाज़ पर दो चुनाव लड़ चुके और ज़मानत खो चुके हैं। जनता भी अजीब है। वह आवाज़ देती है, पर वोट नहीं देती। वे तीसरे चुनाव की योजना अभी से बना रहे हैं । लोग जनता की आवाज़ कैसे सुन लेते हैं? किस "वेव लेंग्थ' पर आती है यह? मैं भी जनता में रहता हूं, बहरा भी नहीं हूं, पर जनता की आवाज़ मुझे कभी सुनाई नहीं पड़ती। ये लोग आशा के किस झरने से पानी पीते हैं कि अनंत आशावान रहते हैं? इनकी अंतरात्मा में कौन-सी वह शक्ति है, जो इन्हें हर हाए के बाद नया उत्साह देती है? मुझे यह शक्ति और अनंत आशा मिल जाए तो कमाल कर दूं। जनतंत्र के इन शाश्वत आशावान रत्रों को सिर्फ प्रणाम करना ही अपने हिस्से में आया है। साधना का फौजदारी अन्त पहले वह ठीक था। वह अपर डिविज़न क्लर्क है। बीवी है, दो बच्चे हैं। कविता वगैरह का शौक है। तीसरा बच्चा होने तक यू. डी. सी. का काव्य-प्रेम बराबर रहता है। इसके बाद वह भजन पर आ जाता है - दया करो हे दयालु भगवन! और दयालु भगवन दया करके उसे परिवार नियोजन केन्द्र को भेज देते हैं, जहां लाल तिकोन में उसे ईश्वर की छवि दिखती है। वह मेरे पास कभी-कभी आता। कविता सुनाता। कोई पुस्तक पढ़ने को ले जाता, जिसे नहीं लौटाता । 2-3 महीने वह लगातार नहीं आया। फिर एक दिन टपक पड़ा। पहले जिज्ञासु की तरह आता था। अब कुछ इस ठाठ से आया जैसे जिज्ञासा शांत करने आया हो । उसका कुर्सी पर बैठना, देखना, बोलना - सब बदल गया था। उसने कविता की बात नहीं की। सुबह के अखबार की खबरों की बात भी नहीं की थी । बड़ी देर तो चुप ही बैठा रहा। फिर गम्भीर स्वर में बोला- मैं जीवन के सत्य की खोज कर रहा हूं। मैं चौंका। सत्य की खोज करने वालों से मैं छड़कता हूं। वे अकसर सत्य की ही तरफ पीठ करके उसे खोजते रहते हैं । मुझे उस पर सचमुच दया आई। इन गरीब क्लकों को सत्य की खोज करने के लिए कौन बहकाता है? सत्य की खोज कई लोगों के लिए ऐयाशी है। यह गरीब आदमी की हैसियत के बाहर है। कि मैं कुछ नहीं बोला। यही बोला-जीवन-भर मैं जीवन के सत्य की खोज करूंगा। यही मेरा व्रत है। मैंने कहा-रात-भर खटमल मारते रहोगे, तो सोओगे कब ! वह समझा नहीं। पूछा-क्या मैंने कहामतलब यह है कि जीवन भर जीवन के सत्य की खोज करते रहोगे, जीओगे क्या मरने के बाद? उसने कहा-जीना? जीना कैसा? पहले जीवन के उद्देश्य को तो मनुष्य जाने। उसे रटाया गया था। मैंने फिर उसे पटरी पर लाने की कोशिश की। कहा- देख भाई, बहुत से बेवकूफ जीवन का उद्देश्य खोजते हुए निरुद्देश्य जीवन जीते रहते हैं। तू क्या उन्हीं में शामिल होना चाहता है ? उसे कुछ बुरा लगा। कहने लगा- आप हमेशा इसी तरह की बातें करते हैं। फिर भी मैं आपके पास आता हूं। क्योंकि मैं जानता हूं कि आप भी सत्य की खोज करते हैं। आप जो लिखते हैं, उससे यही मालूम होता है। मैंने कहा- यह तुम्हारा ख़्याल गलत है। मैं तो हमेशा झूठ की तलाश में रहता हूं। कोने-कोने में झूठ को ढूंढ़ता फिरता हूं। झूठ मिल जाता है, तो बहुत खुश होता हूं।
माला पहनाने वाले नहीं मिलते थे। उनका स्वास्थ्य गिरने लगा। डॉक्टरों ने उन्हें सलाह दी कि आप फूलमाला का सेवन करें। उन्होंने दस रुपये महीने पर एक माली को रोज़ माला पहनाने के लिए लगा लिया। शाम को वे सजकर कुर्सी पर बैठ जाते। माली आता और माला पहनाता। वे कहते-भाइयो और बहनो! उनकी सेहत अच्छी हो गई। मगर माली का स्वास्थ्य गिरने लगा। हर एक को माला पहनाना अनुकूल नहीं पड़ता। अपनी-अपनी प्रकृति है। भगवान भूतल पर कोई बड़ा काम करते थे, तो निठल्ले देवता आकाश से फूल बरसाते थे। दोनों का स्वास्थ्य ठीक रहता था। कर्मी के लिए फूल तोड़ने में निठल्ले का वक्त अच्छा कट जाता है। संयोजक अब निर्णय पर पहुंच रहे हैं। दूर हैं, पर हाव-भाव से पूरा वार्तालाप मैं सुन रहा हूं । एक कहता है-परसाईजी ठीक रहेंगे। दूसरे का चेहरा खिनन होता है। कहता है-नहीं यार, वह नहीं जमेंगे। तब तीसरा मेरे समर्थन में कहता है कोई और यहां है ही नहीं और टाइम बहुत हो गया। बहुमत मेरे पक्ष में हो गया है। मैं जाकिट के बटन लगा लेता हूं। बालों पर हाथ फेरता हूं। दुरुस्त हैं। रूमाल चेहरे पर फेरता हूं, जिससे उचक्कापन साफ हो जाए और नीचे दबी गम्भीरता ऊपर आ जाए। अब वे आते ही हैं। मालाएं एकटक नजर मेरी तरफ देख रही हैं । उन्हें गर्दन मिल गई। मैं मंच पर पहुंच गया। एवज़ में मुख्य अतिथि मैं पहले भी एक बार बन चुका था। तब संस्था के मंत्री ने श्रोताओं से कहा था- हमें बड़ा दुख है कि अमुकजी नहीं आए, इसलिए परसाईजी को मुख्य अतिथि बनाना पड़ रहा है। आशा है, आप लोग हमें क्षमा करेंगे। यह सुनकर भी मैं बेशर्मी लादकर बैठा रहा । मालाएं मुझे पहनाई जाने लगीं। मुझे इसका अभ्यास कम है। गर्दन भी अभी मालाओं के अनुकूल नहीं है। कई गर्दनें मैंने ऐसी देखी हैं जैसे वे माला पहनने के लिए ही बनी हों। गर्दन और माला बिल्कुल 'मेड फॉर ईच अदर" रहती हैं। माला लपककर गले में फिट हो जाती है। फूल की मार विकट होती है। कई गर्दनें जो संघर्ष में कटने के लिए पुष्ट कर दी गई थीं, माला पहनकर लचीली हो गई हैं। एक क्रांतिकारी इधर रहते हैं जिनकी कभी तनी हुई गर्दन थी। मगर उन्हें माला पहनने की लत लग गईं। अब उनकी गर्दन छूने से लगता है, भीतर पानी भरा है। पहले जन आन्दोलन में मुख्य अतिथि होते थे, अब मीना बाजार में मुख्य अतिथि होते हैं। मैंने दस-बारह मालाएं पहनीं और मेरी सारी उद्धतता चली गई। फूल की मार बुरी होती है। शेर को अगर किसी तरह एक फूलमाला पहना दो तो गोली चलाने की ज़रूरत नहीं है। वह फौरन हाथ जोड़कर कहेगा- मेरे योग्य कोई और सेवा! मंत्री माइक पर कहता है- अब परसाईजी हमें दिशा-निर्देश करेंगे। यह तरुणों की संस्था है। मैं इन्हें क्या दिशा बताऊं? हर दिशा में यहां दिशा-शूल हैं। कभी सोचा था कि तकनीकी शिक्षा की दिशा में जाना चाहिए मगर हज़ारों बेकार इंजीनियर हैं। उस दिशा में भी दिशाशूल निकला। क्या दिशा बताऊं? ये तरुण मुझ जैसे के गले में यहां माला पहना रहे हैं और इन्हीं की उम्र के बंगाल के तरुण मुझ जैसे की गर्दन काट रहे हैं। कौन-सी सही दिशा है? माला पहनाने की, या गला काटने की? किसी को दिशा नहीं मालूम । दिशा पाने के लिए यहां की राजनैतिक पार्टियां एक अधिवेशन उत्तर में श्रीनगर में करती हैं, दूसरा दक्षिण में त्रिवेन्द्रम में, तीसरा पूर्व में पटना में और चौथा पश्चिम में जोधपुर में मगर चारों तरफ घूमकर भी जहां की तहां रहती हैं। बाएं जातेजाते लौटकर दाएं चलने लगती हैं। उन्हें किसी के कुत्ते ने काट लिया हो और वह कुत्ता आगे मर जाए तो भी वे उसी शान से मातमपुर्सी करेंगे-बड़ा सुशील कुत्ता था। बड़ी सात्विक वृत्ति का। कभी किसी को तंग नहीं किया। उसके रिक्त स्थान की पूर्ति श्वान-जगत् में नहीं हो सकती। मैं कभी चुनाव नहीं लड़ा। एक बार सर्वसम्मति से अध्यापक संघ का अध्यक्ष हो गया था । एक साल में मैंने तीन संस्थाओं में हड़ताल और दो अध्यापकों से भूख हड़ताल करवाई। नतीजा यह हुआ कि सर्वसम्मति से निकाल दिया गया। अपनी इतनी ही संसदीय सेवा है। सोचता हूं, एक बार चुनाव लड़कर हार लूं तो अपनी पीढ़ी का नारा भोगा हुआ यथार्थ" सार्थक हो जाए। तब शायद मैं मातमपुर्सी के योग्य मूड बना सकूं । अपनी असमर्थता के कारण मैं चुनाव के बाद हारे हुओं की गली से नहीं निकलता। पर ये अनन्त आशावान लोग कहीं मिल ही जाते हैं। एक साहब पिछले पंद्रह सालों से हर चुनाव लड़ रहे हैं और हर बार ज़मानत ज़ब्त करवाने का गौरव प्राप्त कर रहे हैं। वे नगर निगम का चुनाव हारते हैं तो समझते हैं, जनता मुझे नगर के छोटे काम की अपेक्षा प्रदेश का काम सौंपना चाहती है। और वे विधान सभा का चुनाव लड़ जाते हैं। यहां भी ज़मानत ज़ब्त होती है तो वे सोचते हैं, जनता मुझे देश की ज़िम्मेदारी सौंपना चाहती है-और वे लोकसभा का चुनाव लड़ जाते हैं। हार के बाद वे मुझे मिल जाते हैं। बाल बिखरे हुए, बदहवास । मेरा हाथ पकड़ लेते हैं । झकझोर करते हैं-टेल मी परसाई, इज़ दिस डेमोक्रेसी ? क्या यह जनतंत्र है? मैं कुछ "हां-हूं! करके छूटना चाहता हूं तो वे मेरे पांव पर पांव रख देते हैं और मेरे मुंह से लगभग मुंह लगाकर कहते हैं- नहीं, नहीं, तुम्हीं बताओ। यह क्या जनतंत्र है? मुझे कहना पड़ता है - यह जनतंत्र नहीं है। पिछले पंद्रह-बीस सालों में जब-जब वे चुनाव हरे हैं, तब-तब मुझे यह निर्णय लेना पड़ा है कि यह जनतंत्र झूठा है। जनतंत्र झूठा है या सच्चा-यह इस बात से तय होता है कि हम हारे या जीते? व्यक्तियों का ही नहीं, पार्टियों का भी यही सोचना है कि जनतंत्र उनकी हार-जीत पर निर्भर है। जो भी पार्टी हारती है, चिल्लाती है-अब जनतंत्र खतरे में पड़ गया। अगर वह जीत जाती तो जनतंत्र सुरक्षित एक और अनंत आशावान हैं। कोई शाम को उन्हें दो घंटे के लिए लाउड स्पीकर दिला दे तो वे चौराहे पर नेता हो जाते हैं और जनता की समस्या के लिए लड़ने लगते हैं। लाउड स्पीकर का नेता- जाति की वृद्धि में क्या स्थान है, यह शोध का विषय है। नेतागिरी आवाज़ के फैलाव का नाम है । ये नेता मुझे कभी शाम को चौराहे पर गर्म भाषण करते मिल जाते हैं। क्रोध से माइक पर चिल्लाते हैं- राइट टाउन में आवारा सूअर घूमते रहते हैं। कॉर्पोरेशन के अधिकारी क्या सो रहे हैं? मैं नगर निगम अधिकारी के इस्तीफे की मांग करता हूं। यह जनतंत्र का मज़ाक है कि राइट टाउन में आवारा सूअर घूमते रहते हैं और साहब चैन की नींद सोते हैं। इस प्रश्न पर प्रदेश सरकार को इस्तीफा देना चाहिए। मैं भारत सरकार से इस्तीफे की मांग करता हूं। राइट टाउन के आवारा सूअरों को लेकर वे भारत सरकार से पिछले दस सालों से इस्तीफा मांग रहे हैं, पर सूअर भी जहां के तहां हैं और सरकार भी। मगर ये लाउड स्पीकरी नेता अपनी लोकप्रियता के बारे में इतने आश्वस्त हैं कि हर चुनाव में खड़े हो जाते हैं। उनकी ज़मानत ज़ब्त होती है। पर मैंने उनके चेहरे पर शिकन नहीं देखी। मिलते ही कहते हैं- पैसा चल गया। शराब चल गई। उन्होंने अपनी हार का एक कारण ढूंढ़ निकाला है कि चुनाव में पैसा और शराब चल जाते हैं और वे हरा दिए जाते हैं। वे खुश रहते हैं। उन्हें विधास है कि जनता तो उनके साथ है, मगर वह पैसे और शराब के कारण दूसरे को वोट दे देती है। वे जनता से बिल्कुल नाराज़ नहीं हैं। वे इस बात को जायज़ मानते हैं कि मतदाता उसी को वोट दे जो पैसा और शराब दे। अभी वे लोकसभा के चुनाव में ज़मानत ज़ब्त कराने के बाद मिले तो खुश थे। बड़े उत्साह से बोलेवही हुआ। पैसा चल गया। शराब चल गई। हमारे मनीषीजी छोटा चुनाव कभी नहीं लड़ते। हर बार सिर्फ लोकसभा का चुनाव लड़ते हैं। उनकी भी एक पार्टी है। अखिल भारतीय पार्टी है। लोगों ने उसका नाम न सुना होगा। उसका नाम है "वज्रवादी पार्टी'। वाद है, "वज्रवाद" और संस्थापक हैं-डॉ. वज्रप्रहार! इस पार्टी की स्थापना मध्य प्रदेश के एक कस्बे टिमरनी में डॉ. वज्रप्रहार ने की थी और वे जब देश में अनुयायी ढूंढ़ने निकले तो हमारे शहर में उन्हें मनीषीजी मिल गए। पार्टी में कुल ये दो सदस्य हैं और क्रांति के बारे में बहुत गंभीरता से सोचते हैं। मनगीषी फक्कड़ फकीर हैं। पर हर लोकसभा चुनाव के वक्त ज़मानत के लिए पाँच सौ रुपया. और पर्चा छपाने का खर्च कहीं से जुटा लेते हैं। हर बार उन्हें चुनाव लड़वाने के लिए डॉ. वज्रप्रहार आ जाते हैं। सभाएं होती हैं, भाषण होते हैं। मैं देखता हूं, दोनों धीरे-धीरे सड़क पर बड़ी गंभीरता से बातें करते चलते हैं। डॉ. वज्रप्रहार कहते हैं- मनीषी, रिवॉल्यूशन इज़ राउण्ड दी कॉर्नर ! क्रांति आने में देर नहीं है। तब मनीषी कहते हैं पर डॉक्टर साहब, क्रांति का रूप क्या होगा और उसके लिए हमें कैसा 'ऐलान' कर लेना चाहिए, यह अभी तय हो जाना चाहिए। डॉक्टर साहब कहते हैं- वो तुम मेरे ऊपर छोड़ दो। आईं शेल गिव यू गाइड लाइंस। तुम्हारा निर्देश करूंगा। पर तुम जनता को क्रांति के लिए तैयार कर डालो । ये दोनों सच्चे क्रांतिकारी कई सालों से गंभीरतापूर्वक क्रांति की योजना बना रहे हैं, पर पार्टी में तीसरा आदमी अभी तक नहीं आया। इस बार मैंने पूछा- मनीषीजी, डॉ. वज्रप्रहार नहीं आए? मनीषी ने कहा-मेरा उनसे सैद्धांतिक मतभेद हो गया। भारतीय राजनीति की कितनी बड़ी ट्रेजडी है कि जिस पार्टी में दो आदमी हों, उन्हीं में सैद्धान्तिक मतभेद हो जाए। मनीषी ने कहा- उनकी चिट्ठी आई है। इस पच्चें में छपी है। उन्होंने अपना पर्चा बढ़ा दिया - 'इंटरनेशनल न्यूज़। ' डॉक्टर साहब का बड़ा गंभीर पत्र है- आई एम रिप्लाइंग टु द पॉलिटिकल पार्ट ऑफ योर लेटर। मनीषी की ज़मानत ज़ब्त हो गई है, पर क्रांति की तैयारी दोनों नेता बराबर करते जा रहे हैं। एक दिन मैंने पोस्टर चिपके देखे-"जनता के उम्मीदवार सरदार केसरसिंह को वोट दो । " कोई नहीं जानता, ये कौन हैं? जिस जनता के उम्मीदवार हैं वह भी नहीं जानती। किसी ने मुझे बताया कि वे खड़े हैं सरदार केसरसिंह। मैंने पूछा- आप किस मकसद से चुनाव लड़ रहे हैं? उन्होंने सादा जवाब दिया - मकसद ? अजी मकसद यह क्या कम है कि आप जैसा आदमी पूछे कि सरदार केसरसिंह कौन हैं? एक साहब अभी जनता की आवाज़ पर दो चुनाव लड़ चुके और ज़मानत खो चुके हैं। जनता भी अजीब है। वह आवाज़ देती है, पर वोट नहीं देती। वे तीसरे चुनाव की योजना अभी से बना रहे हैं । लोग जनता की आवाज़ कैसे सुन लेते हैं? किस "वेव लेंग्थ' पर आती है यह? मैं भी जनता में रहता हूं, बहरा भी नहीं हूं, पर जनता की आवाज़ मुझे कभी सुनाई नहीं पड़ती। ये लोग आशा के किस झरने से पानी पीते हैं कि अनंत आशावान रहते हैं? इनकी अंतरात्मा में कौन-सी वह शक्ति है, जो इन्हें हर हाए के बाद नया उत्साह देती है? मुझे यह शक्ति और अनंत आशा मिल जाए तो कमाल कर दूं। जनतंत्र के इन शाश्वत आशावान रत्रों को सिर्फ प्रणाम करना ही अपने हिस्से में आया है। साधना का फौजदारी अन्त पहले वह ठीक था। वह अपर डिविज़न क्लर्क है। बीवी है, दो बच्चे हैं। कविता वगैरह का शौक है। तीसरा बच्चा होने तक यू. डी. सी. का काव्य-प्रेम बराबर रहता है। इसके बाद वह भजन पर आ जाता है - दया करो हे दयालु भगवन! और दयालु भगवन दया करके उसे परिवार नियोजन केन्द्र को भेज देते हैं, जहां लाल तिकोन में उसे ईश्वर की छवि दिखती है। वह मेरे पास कभी-कभी आता। कविता सुनाता। कोई पुस्तक पढ़ने को ले जाता, जिसे नहीं लौटाता । दो-तीन महीने वह लगातार नहीं आया। फिर एक दिन टपक पड़ा। पहले जिज्ञासु की तरह आता था। अब कुछ इस ठाठ से आया जैसे जिज्ञासा शांत करने आया हो । उसका कुर्सी पर बैठना, देखना, बोलना - सब बदल गया था। उसने कविता की बात नहीं की। सुबह के अखबार की खबरों की बात भी नहीं की थी । बड़ी देर तो चुप ही बैठा रहा। फिर गम्भीर स्वर में बोला- मैं जीवन के सत्य की खोज कर रहा हूं। मैं चौंका। सत्य की खोज करने वालों से मैं छड़कता हूं। वे अकसर सत्य की ही तरफ पीठ करके उसे खोजते रहते हैं । मुझे उस पर सचमुच दया आई। इन गरीब क्लकों को सत्य की खोज करने के लिए कौन बहकाता है? सत्य की खोज कई लोगों के लिए ऐयाशी है। यह गरीब आदमी की हैसियत के बाहर है। कि मैं कुछ नहीं बोला। यही बोला-जीवन-भर मैं जीवन के सत्य की खोज करूंगा। यही मेरा व्रत है। मैंने कहा-रात-भर खटमल मारते रहोगे, तो सोओगे कब ! वह समझा नहीं। पूछा-क्या मैंने कहामतलब यह है कि जीवन भर जीवन के सत्य की खोज करते रहोगे, जीओगे क्या मरने के बाद? उसने कहा-जीना? जीना कैसा? पहले जीवन के उद्देश्य को तो मनुष्य जाने। उसे रटाया गया था। मैंने फिर उसे पटरी पर लाने की कोशिश की। कहा- देख भाई, बहुत से बेवकूफ जीवन का उद्देश्य खोजते हुए निरुद्देश्य जीवन जीते रहते हैं। तू क्या उन्हीं में शामिल होना चाहता है ? उसे कुछ बुरा लगा। कहने लगा- आप हमेशा इसी तरह की बातें करते हैं। फिर भी मैं आपके पास आता हूं। क्योंकि मैं जानता हूं कि आप भी सत्य की खोज करते हैं। आप जो लिखते हैं, उससे यही मालूम होता है। मैंने कहा- यह तुम्हारा ख़्याल गलत है। मैं तो हमेशा झूठ की तलाश में रहता हूं। कोने-कोने में झूठ को ढूंढ़ता फिरता हूं। झूठ मिल जाता है, तो बहुत खुश होता हूं।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. योगी आदित्यनाथ ने लगातार दूसरी बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली. योगी आदित्यनाथ ने लगातार दूसरी बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर ऐतिहासिक शपथ ली (CM Yogi Adityanath Oath Ceremony). राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. योगी ने लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेयी इकाना क्रिकेट स्टेडियम में शपथ ली. CM योगी के साथ केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Prasad Maurya) और ब्रजेश पाठक (Brajesh Pathak) ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली. इसके साथ ही आज कैबिनेट मंत्री के रूप में 16 विधायक भी शपथ ले रहे हैं (Yogi New Cabinet). योगी आदित्यनाथ के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) भी शामिल हुए. इसके साथ ही बीजेपी और NDA शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री भी कार्यक्रम में शामिल हुए. इसके साथ ही योगी कैबिनेट के लिए 52 मंत्रियों की लिस्ट फाइनल हुई है. ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य को डिप्टी सीएम बनाया गया है. नितिन अग्रवाल और कपिल देव अग्रवाल सहित 14 मंत्रियों को राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार दिया गया है. सूर्य प्रताप शाही, सुरेश कुमार खन्ना, स्वतंत्र देव सिंह, बेबी रानी मौर्य, लक्ष्मी नारायण चौधरी, जयवीर सिंह, धर्मपाल सिंह, नन्द गोपाल गुप्ता, भूपेंद्र सिंह चौधरी, अनिल राजभर, जितिन प्रसाद, राकेश सचान, अरविंद कुमार शर्मा, योगेन्द्र उपाध्याय, आशीष पटेल और संजय निषाद को कैबिनेट मंत्री बनाया जाएगा. इसके साथ ही कैबिनेट मंत्रियों के अलावा नितिन अग्रवाल, कपिल देव अग्रवाल, रवीन्द्र जायसवाल, संदीप सिंह, गुलाब देवी, गिरीश चंद्र यादव, धर्मवीर प्रजापति, असीम अरुण, जेपीएस राठौर, दयाशंकर सिंह, नरेंद्र कश्यप, दिनेश प्रताप सिंह, अरुण कुमार सक्सेना और दया शंकर मिश्र (दयालु) को राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार दिया गया है. मयंकेश्वर सिंह, दिनेश खटीक, संजीव गोंड, बलदेव सिंह ओलख, अजीत पाल, जसवंत सैनी, रामकेश निषाद, मनोहर लाल मन्नू कोरी, संजय गंगवार, बृजेश सिंह, केपी मलिक, सुरेश राही, सोमेंद्र तोमर, अनूप प्रधान, प्रतिभा शुक्ला, राकेश राठौर गुरु, रजनी तिवारी, सतीश शर्मा, दनिश आजाद अंसारी, वियज लक्ष्मी गौतम को राज्यमंत्री बनाया जाएगा. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूसरे शपथ ग्रहण में शामिल होने के लिए कई बड़े संत भी लखनऊ पहुंचे. इन संतों में आचार्य बालकृष्ण, परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष चिदानंद मुनि महाराज, रजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी महाराज और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविन्द्र पुरी शामिल हैं.
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. योगी आदित्यनाथ ने लगातार दूसरी बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली. योगी आदित्यनाथ ने लगातार दूसरी बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर ऐतिहासिक शपथ ली . राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. योगी ने लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेयी इकाना क्रिकेट स्टेडियम में शपथ ली. CM योगी के साथ केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली. इसके साथ ही आज कैबिनेट मंत्री के रूप में सोलह विधायक भी शपथ ले रहे हैं . योगी आदित्यनाथ के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए. इसके साथ ही बीजेपी और NDA शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री भी कार्यक्रम में शामिल हुए. इसके साथ ही योगी कैबिनेट के लिए बावन मंत्रियों की लिस्ट फाइनल हुई है. ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य को डिप्टी सीएम बनाया गया है. नितिन अग्रवाल और कपिल देव अग्रवाल सहित चौदह मंत्रियों को राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार दिया गया है. सूर्य प्रताप शाही, सुरेश कुमार खन्ना, स्वतंत्र देव सिंह, बेबी रानी मौर्य, लक्ष्मी नारायण चौधरी, जयवीर सिंह, धर्मपाल सिंह, नन्द गोपाल गुप्ता, भूपेंद्र सिंह चौधरी, अनिल राजभर, जितिन प्रसाद, राकेश सचान, अरविंद कुमार शर्मा, योगेन्द्र उपाध्याय, आशीष पटेल और संजय निषाद को कैबिनेट मंत्री बनाया जाएगा. इसके साथ ही कैबिनेट मंत्रियों के अलावा नितिन अग्रवाल, कपिल देव अग्रवाल, रवीन्द्र जायसवाल, संदीप सिंह, गुलाब देवी, गिरीश चंद्र यादव, धर्मवीर प्रजापति, असीम अरुण, जेपीएस राठौर, दयाशंकर सिंह, नरेंद्र कश्यप, दिनेश प्रताप सिंह, अरुण कुमार सक्सेना और दया शंकर मिश्र को राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार दिया गया है. मयंकेश्वर सिंह, दिनेश खटीक, संजीव गोंड, बलदेव सिंह ओलख, अजीत पाल, जसवंत सैनी, रामकेश निषाद, मनोहर लाल मन्नू कोरी, संजय गंगवार, बृजेश सिंह, केपी मलिक, सुरेश राही, सोमेंद्र तोमर, अनूप प्रधान, प्रतिभा शुक्ला, राकेश राठौर गुरु, रजनी तिवारी, सतीश शर्मा, दनिश आजाद अंसारी, वियज लक्ष्मी गौतम को राज्यमंत्री बनाया जाएगा. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूसरे शपथ ग्रहण में शामिल होने के लिए कई बड़े संत भी लखनऊ पहुंचे. इन संतों में आचार्य बालकृष्ण, परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष चिदानंद मुनि महाराज, रजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी महाराज और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविन्द्र पुरी शामिल हैं.
कोरोना वायरस ने चीन के बाद दुनिया के बड़े देशों में कोहराम मचाया हुआ है वही भारत भी अब इससे अछूता नहीं रहा है। एक तरफ बड़े बड़े कार्यक्रमों को रद्द किया जा रहा है वही अब इंडिया टुडे ग्रुप से भी बड़ी खबर निकल कर आयी है। दरअसल कोरोना वायरस के खौफ के कारण अब 'इंडिया टुडे ग्रुप' (India Today Group) ने दिल्ली में 13 और 14 मार्च 2020 को होने वाली 'इंडिया टुडे कॉन्क्लेव' (India Today Conclave) को फिलहाल स्थगित कर दिया है। ग्रुप की तरफ से भेजे गए सन्देश में लिखा गया है कि 'इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में हम आपका स्वागत करने के लिए पूरी तरह तैयार थे। देश में चुनौतीपूर्ण माहौल के बावजूद कल तक हम इस कॉन्क्लेव को करना चाह रहे थे। हमारा उद्देश्य बिना घबराहट फैलाए पूरी एहतियात के साथ इस आयोजन को करना था। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कोरोना वायरस को महामारी घोषित कर दिया है। भारत सरकार ने भी कई कदम उठाए हैं। कोरोना के खतरे को देखते हुए इस कॉन्क्लेव के लिए इंटरनेशनल स्पीकर्स भारत आने में असमर्थ हैं। इसके साथ ही घरेलू यात्रियों के लिए भी एडवाइजरी जारी की गई है कि जब तक बहुत जरूरी न हो, यात्रा न करें। समूह की ओर से कहा गया है, 'इन स्थितियों के मद्देनजर हमने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव को फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया है।
कोरोना वायरस ने चीन के बाद दुनिया के बड़े देशों में कोहराम मचाया हुआ है वही भारत भी अब इससे अछूता नहीं रहा है। एक तरफ बड़े बड़े कार्यक्रमों को रद्द किया जा रहा है वही अब इंडिया टुडे ग्रुप से भी बड़ी खबर निकल कर आयी है। दरअसल कोरोना वायरस के खौफ के कारण अब 'इंडिया टुडे ग्रुप' ने दिल्ली में तेरह और चौदह मार्च दो हज़ार बीस को होने वाली 'इंडिया टुडे कॉन्क्लेव' को फिलहाल स्थगित कर दिया है। ग्रुप की तरफ से भेजे गए सन्देश में लिखा गया है कि 'इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में हम आपका स्वागत करने के लिए पूरी तरह तैयार थे। देश में चुनौतीपूर्ण माहौल के बावजूद कल तक हम इस कॉन्क्लेव को करना चाह रहे थे। हमारा उद्देश्य बिना घबराहट फैलाए पूरी एहतियात के साथ इस आयोजन को करना था। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना वायरस को महामारी घोषित कर दिया है। भारत सरकार ने भी कई कदम उठाए हैं। कोरोना के खतरे को देखते हुए इस कॉन्क्लेव के लिए इंटरनेशनल स्पीकर्स भारत आने में असमर्थ हैं। इसके साथ ही घरेलू यात्रियों के लिए भी एडवाइजरी जारी की गई है कि जब तक बहुत जरूरी न हो, यात्रा न करें। समूह की ओर से कहा गया है, 'इन स्थितियों के मद्देनजर हमने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव को फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया है।
भोपाल, मध्यप्रदेश। सीएम हेल्पलाइन शिकायत निराकरण मामले में जिला निम्न स्तर पर होने की वजह से अब कलेक्टर अविनाश लवानिया ने अब जिले का प्रर्दशन उच्च स्तरीय करने के लिए कमर कस ली है। उन्होंने ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई करना शुरु कर दिया है, जिन्होंने चेतवानी देने के बाद भी सीएम हेल्पलाइन (CM Helpline) शिकायत मामलों को समय-सीमा में निराकरण नहीं किया है। सोमवार को कलेक्टर ने 6 विभागों के प्रमुखों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। नोटिस में दो माह की वेतनवृद्धि रोकने की बात कही गई है। छह अधिकारियों को दिया गया नोटिस : कलेक्टर लवानिया ने जिला शिक्षा अधिकारी नितिन सक्सेना, जैसमीन अली सहायक श्रमायुक्त श्रम विभाग, बलराम चौहान संभागीय पेंशन अधिकारी, सुमन प्रसाद उपसंचालक कृषि विभाग, डॉ. अजय रामटेके, उपसंचालक पशुपालन विभाग और राजेश बाथम जिला परियोजना समन्वयक राज्य शिक्षा केंद्र को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सभी छह अधिकारियों को अलग-अलग नोटिस दिए गए हैं। नोटिस में कहा गया है कि कई बैठकों में संबधित अधिकारियों को सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से की गई शिकायतें और समास्या के निराकरण को लेकर चेताया गया था, लेकिन इन पर चेतवानी का कोई असर नहीं हुआ और सीएम हेल्पलाईन पोर्टल पर प्राप्त हुए आवेदनों और शिकायतों का समय सीमा निराकरण नहीं किया गया जिससे लंबित प्रकरणों की संख्या कम नहीं हुई। शासन कार्य में लापरवाही और उदासीनता बरतने पर कलेक्टर अविनाश लवानिया ने 6 विभाग प्रमुख को नोटिस जारी कर 24 घंटे में उत्तर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। नोटिस का 24 घंटे में उत्तर नहीं दिया तो दो वार्षिक वेतनवृद्धियां रोक दी जाएंगी। 80 प्रतिशत लंबित शिकायतों का करना होगा निराकरण : कलेक्टर द्वारा जारी किए गए नोटिस में कहा गया है कि संबधित सभी अधिकारी अपने-अपने विभागों में कुल लंबित शिकायत या आवदेनों में से कम से कम 80 फीसदी प्रकरण को अगले 24 घंटे में निराकरण करने के बाद ही नोटिस का उत्तर प्रस्तुत करें। यह पहली बार है कि लापरवाह अधिकारियों को नोटिस जारी कर उत्तर मांगने के साथ ही कार्य भी पूर्ण करने के अनिवार्यता रखी गई है। नोटिस मिलने के बाद संबधित अधिकारी अपने विभाग में लंबित प्रकरणों का निराकरण करने में लग गए हैं। इससे पहले भी रोकी वेतनवृद्धि : कुछ दिन पहले ही कलेक्टर ने सीएम हेल्पलाइन की शिकायत निराकरण में लापरवाही करने पर वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी पीएस गोयल की एक वार्षिक वेतन वृद्धि तत्काल रोकने के आदेश दिए थे। सीएम हेल्पलाइन कार्य में लापरवाह पाए जाने पर श्री गोयल को पूर्व में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था जिसका समय सीमा में जवाब प्रस्तुत नहीं किये जाने पर यह कार्यवाही की गई है। पदीय कर्तव्यों के निर्वहन में उदासीनता, लापरवाही एवं कर्तव्य विमुखता मानते हुए वेतनवृद्धि रोकने की कार्रवाई की गई थी। ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
भोपाल, मध्यप्रदेश। सीएम हेल्पलाइन शिकायत निराकरण मामले में जिला निम्न स्तर पर होने की वजह से अब कलेक्टर अविनाश लवानिया ने अब जिले का प्रर्दशन उच्च स्तरीय करने के लिए कमर कस ली है। उन्होंने ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई करना शुरु कर दिया है, जिन्होंने चेतवानी देने के बाद भी सीएम हेल्पलाइन शिकायत मामलों को समय-सीमा में निराकरण नहीं किया है। सोमवार को कलेक्टर ने छः विभागों के प्रमुखों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। नोटिस में दो माह की वेतनवृद्धि रोकने की बात कही गई है। छह अधिकारियों को दिया गया नोटिस : कलेक्टर लवानिया ने जिला शिक्षा अधिकारी नितिन सक्सेना, जैसमीन अली सहायक श्रमायुक्त श्रम विभाग, बलराम चौहान संभागीय पेंशन अधिकारी, सुमन प्रसाद उपसंचालक कृषि विभाग, डॉ. अजय रामटेके, उपसंचालक पशुपालन विभाग और राजेश बाथम जिला परियोजना समन्वयक राज्य शिक्षा केंद्र को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सभी छह अधिकारियों को अलग-अलग नोटिस दिए गए हैं। नोटिस में कहा गया है कि कई बैठकों में संबधित अधिकारियों को सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से की गई शिकायतें और समास्या के निराकरण को लेकर चेताया गया था, लेकिन इन पर चेतवानी का कोई असर नहीं हुआ और सीएम हेल्पलाईन पोर्टल पर प्राप्त हुए आवेदनों और शिकायतों का समय सीमा निराकरण नहीं किया गया जिससे लंबित प्रकरणों की संख्या कम नहीं हुई। शासन कार्य में लापरवाही और उदासीनता बरतने पर कलेक्टर अविनाश लवानिया ने छः विभाग प्रमुख को नोटिस जारी कर चौबीस घंटाटे में उत्तर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। नोटिस का चौबीस घंटाटे में उत्तर नहीं दिया तो दो वार्षिक वेतनवृद्धियां रोक दी जाएंगी। अस्सी प्रतिशत लंबित शिकायतों का करना होगा निराकरण : कलेक्टर द्वारा जारी किए गए नोटिस में कहा गया है कि संबधित सभी अधिकारी अपने-अपने विभागों में कुल लंबित शिकायत या आवदेनों में से कम से कम अस्सी फीसदी प्रकरण को अगले चौबीस घंटाटे में निराकरण करने के बाद ही नोटिस का उत्तर प्रस्तुत करें। यह पहली बार है कि लापरवाह अधिकारियों को नोटिस जारी कर उत्तर मांगने के साथ ही कार्य भी पूर्ण करने के अनिवार्यता रखी गई है। नोटिस मिलने के बाद संबधित अधिकारी अपने विभाग में लंबित प्रकरणों का निराकरण करने में लग गए हैं। इससे पहले भी रोकी वेतनवृद्धि : कुछ दिन पहले ही कलेक्टर ने सीएम हेल्पलाइन की शिकायत निराकरण में लापरवाही करने पर वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी पीएस गोयल की एक वार्षिक वेतन वृद्धि तत्काल रोकने के आदेश दिए थे। सीएम हेल्पलाइन कार्य में लापरवाह पाए जाने पर श्री गोयल को पूर्व में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था जिसका समय सीमा में जवाब प्रस्तुत नहीं किये जाने पर यह कार्यवाही की गई है। पदीय कर्तव्यों के निर्वहन में उदासीनता, लापरवाही एवं कर्तव्य विमुखता मानते हुए वेतनवृद्धि रोकने की कार्रवाई की गई थी। ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
- #Yes Bankदेश के इन 3 बड़े बैंकों ने सर्विसेज में कई किए अहम बदलाव, कहीं ये आपकी बैंक तो नहीं है? - #Yes BankForeign Banks in India: क्या विदेशी बैंक भारत से अपना कारोबार समेट रहे हैं? नई दिल्ली, जून 6। सेविंग और सुरक्षित निवेश के लिए अधिकांश लोग फिक्स्ड डिपॉडिट में निवेश करते हैं। एफडी में निवेश को सेफ माना जाता है। निजी सेक्टर के बैंक यस बैंक ने एफडी के ब्याज दरों में बदलाव किया है। यस बैंक ने अपनी टर्म डिपोजिट पर ब्याज दरों को रिवाइज कर दिया है। यस बैंक ने 3 जून से ब्याज दरों में बदलाव कर दिया है। बैंक ने रेग्युलर और सीनियर सीटिजन की ब्याज दरों में बदलाव किया है। बैंक ने 7 दिन से लेकर 10 साल तक के एफडी की ब्याज दरों में बदलाव कर दिया है। देगी। वहीं 15 से 45 दिनों की मैच्योरिटी के लिए एफडी पर अब 3. 50 प्रतिशत ब्याज देगी। वहीं 46 से 90 दिनों में अब 4 फीसदी ब्याज मिलेगी । 3 महीने से लेकर 6 महीने के मैच्योरिटी के लिए 4. 5 फीसदी ब्याज मिलेगा। । वहीं 6 महीने से 9 महीने के लिए 5 फीसदी ब्याज दर मिलेगा। 9 महीने से 1 साल के लिए अब ब्याज दर 5. 25 फीसदी ब्याज मिलेगी। 1 से 3 साल की मैच्योरिटी वाली सावधि जमा पर 6% ब्याज दर मिलेगी। वहीं 5 साल से 10 साल में मैच्योर के लिए 6. 50 फीसदी ब्याज मिलेगा। वरिष्ठ नागरिकों को सामान्य नागरिकों की तुलना में अधिक ब्याज मिलता है। सीनियर सीटिजन को सामान्य नागरिकों की तुलना में 0. 75 फीसदी अधिक ब्याज मिलता है।
- #Yes Bankदेश के इन तीन बड़े बैंकों ने सर्विसेज में कई किए अहम बदलाव, कहीं ये आपकी बैंक तो नहीं है? - #Yes BankForeign Banks in India: क्या विदेशी बैंक भारत से अपना कारोबार समेट रहे हैं? नई दिल्ली, जून छः। सेविंग और सुरक्षित निवेश के लिए अधिकांश लोग फिक्स्ड डिपॉडिट में निवेश करते हैं। एफडी में निवेश को सेफ माना जाता है। निजी सेक्टर के बैंक यस बैंक ने एफडी के ब्याज दरों में बदलाव किया है। यस बैंक ने अपनी टर्म डिपोजिट पर ब्याज दरों को रिवाइज कर दिया है। यस बैंक ने तीन जून से ब्याज दरों में बदलाव कर दिया है। बैंक ने रेग्युलर और सीनियर सीटिजन की ब्याज दरों में बदलाव किया है। बैंक ने सात दिन से लेकर दस साल तक के एफडी की ब्याज दरों में बदलाव कर दिया है। देगी। वहीं पंद्रह से पैंतालीस दिनों की मैच्योरिटी के लिए एफडी पर अब तीन. पचास प्रतिशत ब्याज देगी। वहीं छियालीस से नब्बे दिनों में अब चार फीसदी ब्याज मिलेगी । तीन महीने से लेकर छः महीने के मैच्योरिटी के लिए चार. पाँच फीसदी ब्याज मिलेगा। । वहीं छः महीने से नौ महीने के लिए पाँच फीसदी ब्याज दर मिलेगा। नौ महीने से एक साल के लिए अब ब्याज दर पाँच. पच्चीस फीसदी ब्याज मिलेगी। एक से तीन साल की मैच्योरिटी वाली सावधि जमा पर छः% ब्याज दर मिलेगी। वहीं पाँच साल से दस साल में मैच्योर के लिए छः. पचास फीसदी ब्याज मिलेगा। वरिष्ठ नागरिकों को सामान्य नागरिकों की तुलना में अधिक ब्याज मिलता है। सीनियर सीटिजन को सामान्य नागरिकों की तुलना में शून्य. पचहत्तर फीसदी अधिक ब्याज मिलता है।
Pushpa: साउथ कलाकार अल्लू अर्जुन की हालिया रिलीज फिल्म पुष्पा ने सिनेमाघरों में 5 हफ्तों का सफर पूरा कर लिया है। इन 5 हफ्तों में पुष्पा के हिन्दी वर्जन ने कई ब्लॉकबस्टर हिन्दी फिल्मों को धूल चटा दी है। Pushpa: साउथ सुपरस्टार अल्लू अर्जुन (Allu Arjun) की फिल्म 'पुष्पा' (Pushpa) बॉक्स ऑफिस पर 5 हफ्तों का सफर पूरा कर चुकी है। इन 5 हफ्तों में फिल्म 'पुष्पा' ने दमदार आंकड़े दर्ज कराए हैं। 'पुष्पा' ने 5वें हफ्ते में 7.06 करोड़ रुपये की कमाई की है, जिसके साथ इसने एक और बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। फिल्म 'पुष्पा' अब 5वें हफ्ते में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली 9वीं सबसे बड़ी फिल्म बन गई है। अल्लू अर्जुन की फिल्म ने यह रिकॉर्ड प्रभास की 'बाहुबलीः द बिगिनिंग' को धूल चटाकर बनाया है। यहां देखें 5वें हफ्ते में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों की लिस्टः अल्लू अर्जुन और रश्मिका मंदाना की पुष्पा को हिन्दी दर्शकों ने बेशुमार प्यार दिया है। बाहुबली सीरीज और केजीएफ के बाद अगर किसी साउथ फिल्म को हिन्दी क्षेत्र में इतना प्यार मिला है तो वो पुष्पा ही है। पुष्पा की सधी हुई कहानी और देसी ऑडियंस को काफी पसंद आ रही है। ऐसा बताया जा रहा है कि हिन्दी फिल्में सिंगल स्क्रीन थिएटर्स के दर्शकों को बिल्कुल पसंद नहीं आ रही थीं। सिंगल स्क्रीन थिएटर्स के दर्शकों को एक देसी फिल्म की इंतजार था, जो पुष्पा के रूप में खत्म हुआ है। यही वजह है हिन्दी दर्शकों को पुष्पा इतनी पसंद आ रही है कि वो सिनेमाघरों में इसे बार-बार देख रहे हैं। फिल्म पुष्पा सिनेमाघरों के साथ-साथ ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी सुपरहिट रही है। कुछ दिनों पहले ही मेकर्स ने इसे ओटीटी पर रिलीज किया है, जिसे बम्पर व्यूअरशिप मिली है। फिल्म पुष्पा की अपार सफलता देखने के बाद मेकर्स पुष्पा 2 के लिए कुछ हिन्दी कलाकारों से बात कर रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि पुष्पा 2 में दर्शकों को हिन्दी कलाकार भी नजर आएंगे। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
Pushpa: साउथ कलाकार अल्लू अर्जुन की हालिया रिलीज फिल्म पुष्पा ने सिनेमाघरों में पाँच हफ्तों का सफर पूरा कर लिया है। इन पाँच हफ्तों में पुष्पा के हिन्दी वर्जन ने कई ब्लॉकबस्टर हिन्दी फिल्मों को धूल चटा दी है। Pushpa: साउथ सुपरस्टार अल्लू अर्जुन की फिल्म 'पुष्पा' बॉक्स ऑफिस पर पाँच हफ्तों का सफर पूरा कर चुकी है। इन पाँच हफ्तों में फिल्म 'पुष्पा' ने दमदार आंकड़े दर्ज कराए हैं। 'पुष्पा' ने पाँचवें हफ्ते में सात.छः करोड़ रुपये की कमाई की है, जिसके साथ इसने एक और बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। फिल्म 'पुष्पा' अब पाँचवें हफ्ते में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली नौवीं सबसे बड़ी फिल्म बन गई है। अल्लू अर्जुन की फिल्म ने यह रिकॉर्ड प्रभास की 'बाहुबलीः द बिगिनिंग' को धूल चटाकर बनाया है। यहां देखें पाँचवें हफ्ते में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों की लिस्टः अल्लू अर्जुन और रश्मिका मंदाना की पुष्पा को हिन्दी दर्शकों ने बेशुमार प्यार दिया है। बाहुबली सीरीज और केजीएफ के बाद अगर किसी साउथ फिल्म को हिन्दी क्षेत्र में इतना प्यार मिला है तो वो पुष्पा ही है। पुष्पा की सधी हुई कहानी और देसी ऑडियंस को काफी पसंद आ रही है। ऐसा बताया जा रहा है कि हिन्दी फिल्में सिंगल स्क्रीन थिएटर्स के दर्शकों को बिल्कुल पसंद नहीं आ रही थीं। सिंगल स्क्रीन थिएटर्स के दर्शकों को एक देसी फिल्म की इंतजार था, जो पुष्पा के रूप में खत्म हुआ है। यही वजह है हिन्दी दर्शकों को पुष्पा इतनी पसंद आ रही है कि वो सिनेमाघरों में इसे बार-बार देख रहे हैं। फिल्म पुष्पा सिनेमाघरों के साथ-साथ ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी सुपरहिट रही है। कुछ दिनों पहले ही मेकर्स ने इसे ओटीटी पर रिलीज किया है, जिसे बम्पर व्यूअरशिप मिली है। फिल्म पुष्पा की अपार सफलता देखने के बाद मेकर्स पुष्पा दो के लिए कुछ हिन्दी कलाकारों से बात कर रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि पुष्पा दो में दर्शकों को हिन्दी कलाकार भी नजर आएंगे। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
भोपाल, 8 दिसंबर । केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ बुलाए गए भारत बंद को कांग्रेस ने समर्थन दिया और मध्य प्रदेश की राजधानी में कांग्रेस नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव की अगुवाई में कांग्रेस कार्यकर्ता सकड़ों पर उतरे। यादव ने केंद्र सरकार को किसान विरोधी करार दिया। राजधानी भोपाल के रोशनपुरा चौराहे पर कांग्रेस द्वारा भारत बंद का समर्थन किया गया। इस कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारत कृषक समाज के प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। अरुण यादव ने कहा है कि, जो किसान बिल लाए गए हैं, वह पूरी तरह से किसान विरोधी हैं। कांग्रेस हमेशा किसानों के साथ खड़ी है और किसानों के हक के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार है। यह देश का आंदोलन है। देश का अन्नदाता आंदोलन कर रहा है। यह तीनों कानून किसान विरोधी हैं, इसके विरोध में देश का अन्नदाता आंदोलन कर रहा है। कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से इस आंदोलन का समर्थन करती है, जब तक केंद्र सरकार यह काले कानून वापस नहीं लेती है, तब तक हमारा समर्थन इस आंदोलन को जारी रहेगा। उन्होंने आगे कहा कि, तीनों बिल में किसानों के हित की कोई भी बात नहीं है, अगर आप इन कानूनों का अध्ययन करेंगे तो पता चलेगा कि एक भी प्रावधान इसमें किसान के हित में नहीं है, जो भी प्रावधान इन कानूनों में किए गए हैं, वह अडानी और अंबानी के हित में किए गए हैं। इसमें किसानों के हित में कुछ भी नहीं है। अगर प्रधानमंत्री किसानों के सच्चे हितैषी हैं, तो वह किसानों से क्यों चर्चा नहीं कर रहे हैं। पांच बार बैठक हो चुकी है, मगर कोई भी नतीजा नहीं निकला है। सरकार की नियत खराब है और सरकार किसानों के हित में बात ही नहीं करना चाहती है। यादव ने आगे कहा कि, जब जब कांग्रेस सरकार में रही है, तो हमने किसानों के हित में योजनाएं बनाई हैं। मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार ने थोड़े से समय में 11 हजार 600 करोड़ की कर्ज माफी का फायदा 27 लाख किसानों को दिया है। आगे भी किसानों के हित में कांग्रेस की लड़ाई जारी रहेगी।
भोपाल, आठ दिसंबर । केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ बुलाए गए भारत बंद को कांग्रेस ने समर्थन दिया और मध्य प्रदेश की राजधानी में कांग्रेस नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव की अगुवाई में कांग्रेस कार्यकर्ता सकड़ों पर उतरे। यादव ने केंद्र सरकार को किसान विरोधी करार दिया। राजधानी भोपाल के रोशनपुरा चौराहे पर कांग्रेस द्वारा भारत बंद का समर्थन किया गया। इस कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारत कृषक समाज के प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। अरुण यादव ने कहा है कि, जो किसान बिल लाए गए हैं, वह पूरी तरह से किसान विरोधी हैं। कांग्रेस हमेशा किसानों के साथ खड़ी है और किसानों के हक के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार है। यह देश का आंदोलन है। देश का अन्नदाता आंदोलन कर रहा है। यह तीनों कानून किसान विरोधी हैं, इसके विरोध में देश का अन्नदाता आंदोलन कर रहा है। कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से इस आंदोलन का समर्थन करती है, जब तक केंद्र सरकार यह काले कानून वापस नहीं लेती है, तब तक हमारा समर्थन इस आंदोलन को जारी रहेगा। उन्होंने आगे कहा कि, तीनों बिल में किसानों के हित की कोई भी बात नहीं है, अगर आप इन कानूनों का अध्ययन करेंगे तो पता चलेगा कि एक भी प्रावधान इसमें किसान के हित में नहीं है, जो भी प्रावधान इन कानूनों में किए गए हैं, वह अडानी और अंबानी के हित में किए गए हैं। इसमें किसानों के हित में कुछ भी नहीं है। अगर प्रधानमंत्री किसानों के सच्चे हितैषी हैं, तो वह किसानों से क्यों चर्चा नहीं कर रहे हैं। पांच बार बैठक हो चुकी है, मगर कोई भी नतीजा नहीं निकला है। सरकार की नियत खराब है और सरकार किसानों के हित में बात ही नहीं करना चाहती है। यादव ने आगे कहा कि, जब जब कांग्रेस सरकार में रही है, तो हमने किसानों के हित में योजनाएं बनाई हैं। मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार ने थोड़े से समय में ग्यारह हजार छः सौ करोड़ की कर्ज माफी का फायदा सत्ताईस लाख किसानों को दिया है। आगे भी किसानों के हित में कांग्रेस की लड़ाई जारी रहेगी।
महासमुंद। छत्तीसगढ़ राज्य कृषक कल्याण परिषद् के अध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा ने गुरुवार को बिरकोनी स्थित गोठान में रीपा अंतर्गत कर रहे आर्थिक गतिविधियों का अवलोकन किया। उन्होंने गोबर से पेंट बनाने की गतिविधियों का अवलोकन किया और महिलाओं से बातचीत की। महिलाओं ने बताया कि यहां 1000 क्विंटल वर्मी कंपोस्ट का उत्पादन किया गया है, जिसमें 775 क्विंटल विक्रय किया गया है। इससे 7 लाख 50 हजार रुपए का लाभ मिला है। इन गतिविधियों के साथ-साथ मसाले, अचार, पापड़ बनाकर आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। महिलाओं ने बताया कि अभी हाल ही में गोबर से पेंट बनाने का कार्य प्रारंभ हुआ है। जिससे 3000 लीटर पेंट बना है, इनमें से 2000 लीटर का विक्रय कर लिया गया है। इस दौरान शर्मा ने महिलाओं से उनकी गतिविधियों की जानकारी ली और सराहना की। इस दौरान जिला पंचायत सीईओ एस. आलोक ने गोठान में रीपा के तहत गोबर पेंट तथा मसाला उत्पादन मशीन तथा सीएनसी राउटर मशीन के साथ-साथ दोना पत्तल मशीन के बारे में अध्यक्ष शर्मा को जानकारी दी। अध्यक्ष शर्मा ने मल्टी एक्टिविटी सेंटर के बारे में जानकर बधाई दी। उन्होंने सभी महिलाएं से पूछा कि और आगे आप कुछ करना चाहेंगे तो हम उसे बढ़ावा देने के लिए पूरा प्रयास करेंगे। उन्होंने गोठान की महिलाओं से बात कर उनसे जानकारी पूछी कि उन्होंने कितने का लाभ प्राप्त किया। महिलाओं ने बताया कि प्राप्त धनराशि से उन्होंने गाड़ी खरीदी है। साथ ही साथ उन्होंने करधन खरीदने एवं बच्चों की पढ़ाई में लगाया। उनकी बातचीत से वे बहुत प्रभावित हुए। इसे और आगे बढ़ाने के लिए एवं फसल उत्पादन एवं फूल बागवानी के लिए सुझाव भी दिए। रीपा अवलोकन के दौरान एसडीएम उमेश साहू, जनपद पंचायत साईओ निखत सुल्ताना, बिरकोनी सरपंच, सचिव बिरकोनी एवं भंवरपुर के रागी फसल के किसान पटेल उपस्थित थे।
महासमुंद। छत्तीसगढ़ राज्य कृषक कल्याण परिषद् के अध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा ने गुरुवार को बिरकोनी स्थित गोठान में रीपा अंतर्गत कर रहे आर्थिक गतिविधियों का अवलोकन किया। उन्होंने गोबर से पेंट बनाने की गतिविधियों का अवलोकन किया और महिलाओं से बातचीत की। महिलाओं ने बताया कि यहां एक हज़ार क्विंटल वर्मी कंपोस्ट का उत्पादन किया गया है, जिसमें सात सौ पचहत्तर क्विंटल विक्रय किया गया है। इससे सात लाख पचास हजार रुपए का लाभ मिला है। इन गतिविधियों के साथ-साथ मसाले, अचार, पापड़ बनाकर आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। महिलाओं ने बताया कि अभी हाल ही में गोबर से पेंट बनाने का कार्य प्रारंभ हुआ है। जिससे तीन हज़ार लीटरटर पेंट बना है, इनमें से दो हज़ार लीटरटर का विक्रय कर लिया गया है। इस दौरान शर्मा ने महिलाओं से उनकी गतिविधियों की जानकारी ली और सराहना की। इस दौरान जिला पंचायत सीईओ एस. आलोक ने गोठान में रीपा के तहत गोबर पेंट तथा मसाला उत्पादन मशीन तथा सीएनसी राउटर मशीन के साथ-साथ दोना पत्तल मशीन के बारे में अध्यक्ष शर्मा को जानकारी दी। अध्यक्ष शर्मा ने मल्टी एक्टिविटी सेंटर के बारे में जानकर बधाई दी। उन्होंने सभी महिलाएं से पूछा कि और आगे आप कुछ करना चाहेंगे तो हम उसे बढ़ावा देने के लिए पूरा प्रयास करेंगे। उन्होंने गोठान की महिलाओं से बात कर उनसे जानकारी पूछी कि उन्होंने कितने का लाभ प्राप्त किया। महिलाओं ने बताया कि प्राप्त धनराशि से उन्होंने गाड़ी खरीदी है। साथ ही साथ उन्होंने करधन खरीदने एवं बच्चों की पढ़ाई में लगाया। उनकी बातचीत से वे बहुत प्रभावित हुए। इसे और आगे बढ़ाने के लिए एवं फसल उत्पादन एवं फूल बागवानी के लिए सुझाव भी दिए। रीपा अवलोकन के दौरान एसडीएम उमेश साहू, जनपद पंचायत साईओ निखत सुल्ताना, बिरकोनी सरपंच, सचिव बिरकोनी एवं भंवरपुर के रागी फसल के किसान पटेल उपस्थित थे।
दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi HC) ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए सोमवार को कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को 1984 के सिख विरोधी दंगा (1984 anti-sikh riots) मामले में दोषी करार दिया है. अदातल ने कांग्रेस नेता सज्जन कुमार (Sajjan Kumar) और अन्य को दोषी करार दिया है और उन्हें (सज्जन) आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. हाईकोर्ट के फैसले के बाद सज्जन कुमार को 31 दिसंबर तक सरेंडर करना होगा. इससे पहले 1984 सिख दंगा मामले में 2013 में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को निचली अदालत ने बरी कर दिया था. वहीं इस मामले में सज्जन कुमार पर सजा सुनाते हुए समय दिल्ली हाई कोर्ट के जज रो पड़े. जज ने सुनवाई के दौरान कहा कि मृतक के परिवार को दशको तक इंतजार करना पड़ा और इसके साथ उन्होंने कहा कि जांच एजेसिंयों की नाकामी है जिसके कारण अब तक कुछ नहीं हो पाया. फैसले के दौरान दोषियों के वकील भी कोर्ट में रो रहे थे. फैसले में जज में ने 5 लाख का जुर्माना भी लगाया है. अदालत ने सज्जन कुमार से 31 दिसंबर तक आत्मसमर्पण करने के लिए कहा है. बता दें कि न्यायाधीश एस. मुरलीधर और न्यायाधीश विनोद गोयल ( Justices S Muralidhar and Vinod Goel ) की खंडपीठ ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को बदल दिया है जिसने कांग्रेस नेता को बरी कर दिया था. गौरतलब हो कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा की 31 अक्टूबर 1984 के हुई हत्या के बाद दिल्ली के सैन्य छावनी क्षेत्र में पांच लोगों की हुई हत्या के मामले में सज्जन कुमार और पांच अन्य पर मुकदमा चल रहा था.
दिल्ली हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए सोमवार को कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को एक हज़ार नौ सौ चौरासी के सिख विरोधी दंगा मामले में दोषी करार दिया है. अदातल ने कांग्रेस नेता सज्जन कुमार और अन्य को दोषी करार दिया है और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. हाईकोर्ट के फैसले के बाद सज्जन कुमार को इकतीस दिसंबर तक सरेंडर करना होगा. इससे पहले एक हज़ार नौ सौ चौरासी सिख दंगा मामले में दो हज़ार तेरह में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को निचली अदालत ने बरी कर दिया था. वहीं इस मामले में सज्जन कुमार पर सजा सुनाते हुए समय दिल्ली हाई कोर्ट के जज रो पड़े. जज ने सुनवाई के दौरान कहा कि मृतक के परिवार को दशको तक इंतजार करना पड़ा और इसके साथ उन्होंने कहा कि जांच एजेसिंयों की नाकामी है जिसके कारण अब तक कुछ नहीं हो पाया. फैसले के दौरान दोषियों के वकील भी कोर्ट में रो रहे थे. फैसले में जज में ने पाँच लाख का जुर्माना भी लगाया है. अदालत ने सज्जन कुमार से इकतीस दिसंबर तक आत्मसमर्पण करने के लिए कहा है. बता दें कि न्यायाधीश एस. मुरलीधर और न्यायाधीश विनोद गोयल की खंडपीठ ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को बदल दिया है जिसने कांग्रेस नेता को बरी कर दिया था. गौरतलब हो कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा की इकतीस अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ चौरासी के हुई हत्या के बाद दिल्ली के सैन्य छावनी क्षेत्र में पांच लोगों की हुई हत्या के मामले में सज्जन कुमार और पांच अन्य पर मुकदमा चल रहा था.
ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी ने 6 अक्टूबर को अपना 74वां जन्मदिन मनाया. इस मौके पर अदाकारा ने मुंबई के इस्कॉन टेंपल में भगवान के दर्शन किए, साथ ही शाम को उनके घर पर पार्टी रखी गयी. इस बर्थडे बैश में फिल्म इंडस्ट्री के कई लेजेंड्री सेलेब्स शामिल हुए, उनमें से की सितारे ऐसे भी थे जिन्होंने हेमा के साथ ऑनस्क्रीन काम भी किया है. उनमें से रेखा और जितेंद्र ने भी पार्टी में शिरकत की. इन सेलेब्स ने न सिर्फ ऑनस्क्रीन काम किया है, बल्कि रियल लाइफ में तीनों की बॉन्डिंग बहुत खास है. अदाकारा ने इस पार्टी की फोटोज मंगलवार शाम को साझा की है. इन फोटोज में अदाकारा अपने करीबियों के साथ एंजॉय करते नजर आ रही हैं. हेमा ने 18 अक्टूबर को अपने बर्थडे पार्टी की फोटोज सोशल मीडिया पर शेयर कीं. इंस्टाग्राम पर फोटो शेयर करते हुए लिखा- अपने बर्थडे की कुछ और फोटोज साझा कर रही हूं. मैं काफी लकी हूं कि मेरा परिवार, दोस्त और फ्रेंड्स ने मुझे घर आकर शुभकामनाएं दीं और दिन को खास बनाया. मुझे खास महसूस करवाने के लिए मैं उन सभी को थैक्स बोलना चाहती हूं. राधे-राधे. हेमा की बर्थडे पार्टी में बेटी ईशा देओल और छोटी बेटी अहाना देओल और पति वैभव वोहरा ने शिरकत की. इसके अतिरिक्त पार्टी में जितेंद्र, रेखा, संजय खान और पत्नी जरीन खान भी शामिल हुए. पार्टी में फिल्म शोले के डायरेक्टर रमेश सिप्पी भी आए थे, जिन्होंने अदाकारा को अपने हाथों से केक खिलाया. सोशल मीडिया पर हेमा की ये बर्थडे फोटोज काफी सुर्खियों में हैं. एक्ट्रेस ने हेमा के साथ अपनी बर्थडे पार्टी की फोटोज शेयर की थी. फोटो के साथ अदाकारा ने लिखा- अपनी सबसे प्यारी दोस्त रेखा के साथ , जो बर्थडे पर मेरे घर आयीं थीं और मुझे बहुत खास महसूस करवाया. हमारी फ्रेंडशिप कई दशकों पुरानी है, और हम को एक्ट्रेसेस होने के अतिरिक्त खास दोस्त भी हैं. इनता नहीं हेमा ने धर्मेंद्र के साथ भी फोटो शेयर करते हुए लिखा था-'धरमजी के साथ रहना मुझे अच्छा लगता है.
ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी ने छः अक्टूबर को अपना चौहत्तरवां जन्मदिन मनाया. इस मौके पर अदाकारा ने मुंबई के इस्कॉन टेंपल में भगवान के दर्शन किए, साथ ही शाम को उनके घर पर पार्टी रखी गयी. इस बर्थडे बैश में फिल्म इंडस्ट्री के कई लेजेंड्री सेलेब्स शामिल हुए, उनमें से की सितारे ऐसे भी थे जिन्होंने हेमा के साथ ऑनस्क्रीन काम भी किया है. उनमें से रेखा और जितेंद्र ने भी पार्टी में शिरकत की. इन सेलेब्स ने न सिर्फ ऑनस्क्रीन काम किया है, बल्कि रियल लाइफ में तीनों की बॉन्डिंग बहुत खास है. अदाकारा ने इस पार्टी की फोटोज मंगलवार शाम को साझा की है. इन फोटोज में अदाकारा अपने करीबियों के साथ एंजॉय करते नजर आ रही हैं. हेमा ने अट्ठारह अक्टूबर को अपने बर्थडे पार्टी की फोटोज सोशल मीडिया पर शेयर कीं. इंस्टाग्राम पर फोटो शेयर करते हुए लिखा- अपने बर्थडे की कुछ और फोटोज साझा कर रही हूं. मैं काफी लकी हूं कि मेरा परिवार, दोस्त और फ्रेंड्स ने मुझे घर आकर शुभकामनाएं दीं और दिन को खास बनाया. मुझे खास महसूस करवाने के लिए मैं उन सभी को थैक्स बोलना चाहती हूं. राधे-राधे. हेमा की बर्थडे पार्टी में बेटी ईशा देओल और छोटी बेटी अहाना देओल और पति वैभव वोहरा ने शिरकत की. इसके अतिरिक्त पार्टी में जितेंद्र, रेखा, संजय खान और पत्नी जरीन खान भी शामिल हुए. पार्टी में फिल्म शोले के डायरेक्टर रमेश सिप्पी भी आए थे, जिन्होंने अदाकारा को अपने हाथों से केक खिलाया. सोशल मीडिया पर हेमा की ये बर्थडे फोटोज काफी सुर्खियों में हैं. एक्ट्रेस ने हेमा के साथ अपनी बर्थडे पार्टी की फोटोज शेयर की थी. फोटो के साथ अदाकारा ने लिखा- अपनी सबसे प्यारी दोस्त रेखा के साथ , जो बर्थडे पर मेरे घर आयीं थीं और मुझे बहुत खास महसूस करवाया. हमारी फ्रेंडशिप कई दशकों पुरानी है, और हम को एक्ट्रेसेस होने के अतिरिक्त खास दोस्त भी हैं. इनता नहीं हेमा ने धर्मेंद्र के साथ भी फोटो शेयर करते हुए लिखा था-'धरमजी के साथ रहना मुझे अच्छा लगता है.
कनिका को चंडीगढ़ में एक सप्ताह की ट्रेनिग के सिलसिले में उन्होंने होटल शिवालिक व्यू में कमरा बुक करना था। इसके लिए गूगल सर्च कर होटल का नंबर हासिल किया। दोनों आरोपितों ने 20 फीसद छूट का झांसा देकर उनसे 28 हजार ठग लिए। कुलदीप शुक्ला, चंडीगढ़। शहर के नामी सरकारी होटल शिवालिक व्यू के आधिकारिक साइट को हैककर साइबर ठगी करने वाले दो आरोपितों को साइबर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पुलिस इनके नाम का खुलासा थोड़ी देर में करेगी। आरोपितों ने बीते सप्ताह कनाडा में वकालत करने वाली उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद निवासी महिला वकील कनिका पाहवा से कमरे की आनलाइन बुकिंग के नाम पर 28 हजार रुपये की ठगी की थी। इसके बाद एसपी साइबर केतन बंसल के सुपरविजन में गठित स्पेशल टीम ने आरोपित गैंग को ट्रेस कर दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। कनिका ने बताया कि वह कनाडा से जून 2022 में वापस आई। चंडीगढ़ में एक सप्ताह की ट्रेनिग के सिलसिले में उन्होंने होटल शिवालिक व्यू में कमरा बुक करना था। इसके लिए गूगल सर्च कर होटल का नंबर हासिल किया। साइट पर उपलब्ध नंबर पर काल कर सुपर डीलक्स रूम का एक सप्ताह के लिए चार्ज पूछा। उन्होंने होटल कर्मी को बताया कि उनके पिता जसविदर सिंह बेदी चंडीगढ़ जाने पर वहीं ठहरते हैं। इस पर खुद को होटल कर्मी बताने वाले शख्स ने उन्हें डिस्काउंट देने का झांसा देकर ठगी कर ली। 20 फीसद छूट का झांसा देकर 28 हजार रुपये ठग लिए। शिकायतकर्ता ने बताया कि आरोपित कर्मी ने उससे कहा कि होटल के डीलक्स रूम की आनलाइन बुकिग पर 20 फीसद डिस्काउंट चल रहा है। इसके बाद शिकायतकर्ता ने आरोपित को अपने कनाडा के क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करने की कोशिश की। आरोपित ने क्रेडिट कार्ड से पेमेंट नहीं होने पर दूसरे क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करने की सलाह दी। इसी तरह उसने क्रेडिट कार्ड की डिटेल के साथ वन टाइम पासर्वड (ओटीपी) भी हासिल कर ठगी कर ली।
कनिका को चंडीगढ़ में एक सप्ताह की ट्रेनिग के सिलसिले में उन्होंने होटल शिवालिक व्यू में कमरा बुक करना था। इसके लिए गूगल सर्च कर होटल का नंबर हासिल किया। दोनों आरोपितों ने बीस फीसद छूट का झांसा देकर उनसे अट्ठाईस हजार ठग लिए। कुलदीप शुक्ला, चंडीगढ़। शहर के नामी सरकारी होटल शिवालिक व्यू के आधिकारिक साइट को हैककर साइबर ठगी करने वाले दो आरोपितों को साइबर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पुलिस इनके नाम का खुलासा थोड़ी देर में करेगी। आरोपितों ने बीते सप्ताह कनाडा में वकालत करने वाली उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद निवासी महिला वकील कनिका पाहवा से कमरे की आनलाइन बुकिंग के नाम पर अट्ठाईस हजार रुपये की ठगी की थी। इसके बाद एसपी साइबर केतन बंसल के सुपरविजन में गठित स्पेशल टीम ने आरोपित गैंग को ट्रेस कर दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। कनिका ने बताया कि वह कनाडा से जून दो हज़ार बाईस में वापस आई। चंडीगढ़ में एक सप्ताह की ट्रेनिग के सिलसिले में उन्होंने होटल शिवालिक व्यू में कमरा बुक करना था। इसके लिए गूगल सर्च कर होटल का नंबर हासिल किया। साइट पर उपलब्ध नंबर पर काल कर सुपर डीलक्स रूम का एक सप्ताह के लिए चार्ज पूछा। उन्होंने होटल कर्मी को बताया कि उनके पिता जसविदर सिंह बेदी चंडीगढ़ जाने पर वहीं ठहरते हैं। इस पर खुद को होटल कर्मी बताने वाले शख्स ने उन्हें डिस्काउंट देने का झांसा देकर ठगी कर ली। बीस फीसद छूट का झांसा देकर अट्ठाईस हजार रुपये ठग लिए। शिकायतकर्ता ने बताया कि आरोपित कर्मी ने उससे कहा कि होटल के डीलक्स रूम की आनलाइन बुकिग पर बीस फीसद डिस्काउंट चल रहा है। इसके बाद शिकायतकर्ता ने आरोपित को अपने कनाडा के क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करने की कोशिश की। आरोपित ने क्रेडिट कार्ड से पेमेंट नहीं होने पर दूसरे क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करने की सलाह दी। इसी तरह उसने क्रेडिट कार्ड की डिटेल के साथ वन टाइम पासर्वड भी हासिल कर ठगी कर ली।
कुंदन कुमार/गया. सावन के महीने में शिव के मंदिरों में अच्छी खासी भीड़ रहती है. भारत में हज़ारों की संख्या में शिव मंदिर हैं, लेकिन इनमें से 12 सबसे प्रमुख ज्योतिर्लिंग हैं. जहां मान्यता अनुसार शिव ज्योति रूप में विराजमान हैं. ऐसी मान्यता है कि सावन के महीने में शिवजी के 12 ज्योतिर्लिंगों में से किसी एक पर जाकर रुद्राभिषेक करने से भोलेबाबा बहुत प्रसन्न होते हैं. भक्तों की सभी इच्छाएं पूर्ण करते हैं. आप भी इस सावन मास में 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन करना चाहते हैं, लेकिन किसी कारणवश नहीं जा पा रहे हैं तो गया के गांधी मैदान में देश के सभी 12 ज्योतिर्लिंग की प्रदर्शनी लगाई गई है. यहां आप निःशुल्क सभी ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर सकते हैं. अपनी दुख कष्ट भगवान भोले के सामने रख सकते हैं. गया के प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के बैनर तले 10 दिवसीय द्वादश ज्योतिर्लिंग अध्यात्मिक दर्शन मेला बुधवार से शुरू हो गई है, जो 28 जुलाई तक लगेगी. सावन माह में इन तीर्थों का दर्शन करना काफी फलदायक माना जाता है. सावन में विशेष रूप से सोमवार को शिव की पूजा की जाती है. इसके पीछे का रहस्य है कि कलयुग के अंत में सभी मनुष्य आत्माएं घोर अज्ञान में फंस कर दुखी हो जाते हैं, तब भगवान धरती पर अवतरित होकर ज्ञान रूपी सोम अथवा अमृत पिलाते हैं और ज्ञान की वर्षा करते हैं. गया के गांधी मैदान में 12 ज्योतिर्लिंग में सोमनाथ, ओमकारेश्वर, मलिकार्जुन, वैद्यनाथ, महाकालेश्वर, भीमेश्वर, भुवनेश्वर, केदारनाथ, त्रयम्बकेश्वर, विश्वनाथ, रामेश्वर और नागेश्वर का दर्शन कर सकते हैं. यहां भगवान भोले के सभी रूपों की शिवलिंग की प्रदर्शनी लगाई गई है. इस पर अधिक जानकारी देते हुए प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के आकाश कुमार सिन्हा बताते हैं कि बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो विभिन्न कारणों से ज्योतिर्लिंग का दर्शन नहीं कर पाते. ऐसे में उनके लिए गया के गांधी मैदान में 28 जुलाई तक द्वादश ज्योतिर्लिंग अध्यात्मिक दर्शन कर सकते हैं. सभी ज्योतिर्लिंग के दिव्य कर्तव्य और उनके महत्व के बारे में जान सकते हैं. . आधे से ज्यादा प्लेयर्स से खुश नहीं हरभजन सिंह, बोले- 'विराट, रोहित, पंड्या बड़े खिलाड़ी हैं लेकिन बाकी. . . '
कुंदन कुमार/गया. सावन के महीने में शिव के मंदिरों में अच्छी खासी भीड़ रहती है. भारत में हज़ारों की संख्या में शिव मंदिर हैं, लेकिन इनमें से बारह सबसे प्रमुख ज्योतिर्लिंग हैं. जहां मान्यता अनुसार शिव ज्योति रूप में विराजमान हैं. ऐसी मान्यता है कि सावन के महीने में शिवजी के बारह ज्योतिर्लिंगों में से किसी एक पर जाकर रुद्राभिषेक करने से भोलेबाबा बहुत प्रसन्न होते हैं. भक्तों की सभी इच्छाएं पूर्ण करते हैं. आप भी इस सावन मास में बारह ज्योतिर्लिंग के दर्शन करना चाहते हैं, लेकिन किसी कारणवश नहीं जा पा रहे हैं तो गया के गांधी मैदान में देश के सभी बारह ज्योतिर्लिंग की प्रदर्शनी लगाई गई है. यहां आप निःशुल्क सभी ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर सकते हैं. अपनी दुख कष्ट भगवान भोले के सामने रख सकते हैं. गया के प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के बैनर तले दस दिवसीय द्वादश ज्योतिर्लिंग अध्यात्मिक दर्शन मेला बुधवार से शुरू हो गई है, जो अट्ठाईस जुलाई तक लगेगी. सावन माह में इन तीर्थों का दर्शन करना काफी फलदायक माना जाता है. सावन में विशेष रूप से सोमवार को शिव की पूजा की जाती है. इसके पीछे का रहस्य है कि कलयुग के अंत में सभी मनुष्य आत्माएं घोर अज्ञान में फंस कर दुखी हो जाते हैं, तब भगवान धरती पर अवतरित होकर ज्ञान रूपी सोम अथवा अमृत पिलाते हैं और ज्ञान की वर्षा करते हैं. गया के गांधी मैदान में बारह ज्योतिर्लिंग में सोमनाथ, ओमकारेश्वर, मलिकार्जुन, वैद्यनाथ, महाकालेश्वर, भीमेश्वर, भुवनेश्वर, केदारनाथ, त्रयम्बकेश्वर, विश्वनाथ, रामेश्वर और नागेश्वर का दर्शन कर सकते हैं. यहां भगवान भोले के सभी रूपों की शिवलिंग की प्रदर्शनी लगाई गई है. इस पर अधिक जानकारी देते हुए प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के आकाश कुमार सिन्हा बताते हैं कि बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो विभिन्न कारणों से ज्योतिर्लिंग का दर्शन नहीं कर पाते. ऐसे में उनके लिए गया के गांधी मैदान में अट्ठाईस जुलाई तक द्वादश ज्योतिर्लिंग अध्यात्मिक दर्शन कर सकते हैं. सभी ज्योतिर्लिंग के दिव्य कर्तव्य और उनके महत्व के बारे में जान सकते हैं. . आधे से ज्यादा प्लेयर्स से खुश नहीं हरभजन सिंह, बोले- 'विराट, रोहित, पंड्या बड़े खिलाड़ी हैं लेकिन बाकी. . . '
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। ओशिआनिया ओशिआनिया ओशिआनिया (जिसे कभी कभी ओशियानिका भी कहा जाता है), एक भौगोलिक क्षेत्र है जिसमे शामिल भूखण्ड जिनमें से अधिकतर द्वीप हैं जो, प्रशांत महासागर और इसके आस पास फैले हुये हैं। "ओशिआनिया" शब्द को 1831 में फ्रांसीसी अन्वेषक ड्यूमाँट द'उर्विल द्वारा गढ़ा गया था। आज यह शब्द कई भाषाओं में ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप और निकट के प्रशांत द्वीपों के लिए प्रयोग किया जाता है, यह क्षेत्र आठ स्थलीय पारिस्थितिक क्षेत्रों मे से भी एक है। ओशिआनिया की सीमाओं को कई तरीकों से परिभाषित किया जा सकता है। अधिकांश परिभाषाएँ ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और न्यू गिनी और मलय द्वीपसमूह के सभी भागों या कुछ भाग को ओशिआनिया बताती हैं।. पितृवंश समूह ऍम का ओशिआनिया में फैलाव - आंकड़े बता रहें हैं के इन इलाकों के कितने प्रतिशत पुरुष इस पितृवंश के वंशज हैं मनुष्यों की आनुवंशिकी (यानि जॅनॅटिक्स) में पितृवंश समूह ऍम या वाए-डी॰एन॰ए॰ हैपलोग्रुप M एक पितृवंश समूह है। यह पितृवंश स्वयं पितृवंश समूह ऍमऍनओपीऍस से उत्पन्न हुई एक शाखा है। इस पितृवंश के पुरुष अधिकतर ओशिआनिया के द्वीप राष्ट्रों में मिलते हैं, जैसे की नया गिनी, फ़िजी, टोंगा, सोलोमन द्वीपसमूह, वग़ैराह। पश्चिमी नया गिनी में (जो इण्डोनेशिया का एक राज्य है) अधिकाँश पुरुष इसी पितृवंश समूह के वंशज हैं। अनुमान है के जिस पुरुष से यह पितृवंश शुरू हुआ वह आज से लगभग ३२,०००-४७,००० वर्ष पहले दक्षिण पूर्व एशिया या ओशिआनिया के मॅलानिशिया क्षेत्र में रहता था।Laura Scheinfeldt, Françoise Friedlaender, Jonathan Friedlaender, Krista Latham, George Koki, Tatyana Karafet, Michael Hammer and Joseph Lorenz, "," Molecular Biology and Evolution 2006 23(8):1628-1641 . ओशिआनिया और पितृवंश समूह ऍम आम में 7 बातें हैं (यूनियनपीडिया में): टोंगा, नया गिनी, फ़िजी, मॅलानिशिया, सोलोमन द्वीपसमूह, इंडोनेशिया, अंग्रेज़ी भाषा। टोंगा, आधिकारिक रूप से टोंगा राजशाही, दक्षिण प्रशान्त महासागर में स्थित एक द्वीपमण्डल है, जिसमें १६९ द्वीप है, जिनमें से ३६ अबसासित हैं। राजशाही उत्तर-दक्षिण पंक्ति में लगभग ८०० किलोमीटर तक फैली हुई है। . नया गिनी (New Guinea), ऑस्ट्रेलिया के उत्तर में स्थित विश्व का दूसरा सबसे बड़ा द्वीप है। यह ऑस्ट्रेलिया की मुख्य भूमि से उस समय अलग हो गया जब इस क्षेत्र को जिसे अब टॉरेस जलडमरुमध्य के नाम से जाना जाता है को, पिछले हिमयुग के बाद आयी बाढ़ ने पानी से भर दिया। पापुआ नाम एक लंबे समय से इस द्वीप के साथ संबद्ध रहा है। द्वीप के पश्चिमी आधे भाग में इंडोनेशिया के प्रांत पापुआ और पश्चिम पापुआ स्थित हैं, जबकि पूर्वी आधा भाग एक स्वतंत्र देश पापुआ नया गिनी स्थित है। . फ़िजी जो कि आधिकारिक रूप से फ़िजी द्वीप समूह गणराज्य (फ़िजीयाईः Matanitu Tu-Vaka-i-koya ko Viti) के नाम से जाना जाता है, दक्षिण प्रशान्त महासागर के मेलानेशिया मे एक द्वीप देश है। यह न्यू ज़ीलैण्ड के नॉर्थ आईलैण्ड से करीब २००० किमी उत्तर-पूर्व मे स्थित है। इसके समीपवर्ती पड़ोसी राष्ट्रों मे पश्चिम की ओर वनुआतु, पूर्व में टोंगा और उत्तर मे तुवालु हैं। १७वीं और १८वीं शताब्दी के दौरान डच एवं अंग्रेजी खोजकर्तओं ने फ़िजी की खोज की थी। १९७० तक फ़िजी एक अंग्रेजी उपनिवेश था। प्रचुर मात्रा मे वन, खनिज एवं जलीय स्रोतों के कारण फ़िजी प्रशान्त महासागर के द्वीपों मे सबसे उन्नत राष्ट्र है। वर्तमान मे पर्यटन एवं चीनी का निर्यात इसके विदेशी मुद्रा के सबसे बड़े स्रोत हैं। यहाँ की मुद्रा फ़िजी डॉलर है। फ़िजी के अधिकांश द्वीप १५ करोड़ वर्ष पूर्व आरम्भ हुए ज्वालामुखीय गतिविधियों से गठित हुए। इस देश के द्वीपसमूह में कुल ३२२ द्वीप हैं, जिनमें से १०६ स्थायी रूप से बसे हुए हैं। इसके अतिरिक्त यहाँ लगभग ५०० क्षुद्र द्वीप हैं जो कुल मिला कर १८,३०० वर्ग किमी के क्षेत्रफल का निर्माण करते हैं। द्वीपसमूह के दो प्रमुख द्वीप विती लेवु और वनुआ लेवु हैं जिन पर देश की लगभग ८,५०,००० आबादी का ८७% निवास करती है। . मॅलानिशिया का सांस्कृतिक क्षेत्र मॅलानिशिया ओशिआनिया का एक उपक्षेत्र है जो प्रशांत महासागर के पश्चिमी भाग से लेकर आराफ़ूरा सागर तक और फिर पूर्व में फ़िजी तक का इलाक़ा है। इसमें ऑस्ट्रेलिया के उत्तर और उत्तर-पूर्व के कई द्वीप शामिल हैं, जैसे के नया गिनी, फ़िजी, सोलोमन द्वीपसमूह, वानुअतु, वग़ैराह। . सोलोमन द्वीप पापुआ न्यू गिनी के पूर्व में मेलानेसिया में करीब एक हजार द्वीपों वाला एक देश है। करीबन 28,400 वर्ग किलोमीटर (10,965 वर्ग मील) में फैले इस देश की राजधानी गुआडलकैनाल द्वीप पर स्थित होनिअरा है। माना जाता है कि सोलोमन द्वीप पर हजारों साल पहले मेलोनेशियाई लोग रहा करते थे। यूनाइटेड किंगडम ने 1890 में सोलोमन द्वीप पर एक संरक्षित राज्य की स्थापना की। द्वितीय विश्व युद्ध की सबसे संघर्षपूर्ण लड़ाई 1942-45 के सोलोमन द्वीप अभियान के दौरान लड़ी गई, जिसमें गुआडलकैनाल की लड़ाई शामिल है। 1976 में लोगों ने स्वशासन और दो साल बाद आजादी हासिल की थी। सोलोमन द्वीप एक संवैधानिक राजतंत्र है, जिसकी मुखिया महारानी एलिजाबेथ द्वितीय हैं। 1998 में हुई जातीय हिंसा, सरकारी भ्रष्ट व्यवहार और अपराध ने देश और समाज की स्थिरता को कमजोर किया है। जून 2003 में ऑस्ट्रेलियाई नीत बहुराष्ट्रीय बल क्षेत्रीय सहायता मिशन सोलोमन द्वीप (RAMSI) सोलोमन द्वीप पर शांति बहाल करने, जातीय उपद्रवियों पर लगाम लगाने और नागरिक प्रशासन में सुधार के उद्देश्य से पहुंची है। उत्तर सोलोमन द्वीप स्वतंत्र सोलोमन द्वीप और बौगैन्विल्ले प्रांत के बीच पापुआ न्यू गिनी में विभाजित हैं। . इंडोनेशिया गणराज्य (दीपान्तर गणराज्य) दक्षिण पूर्व एशिया और ओशिनिया में स्थित एक देश है। १७५०८ द्वीपों वाले इस देश की जनसंख्या लगभग 26 करोड़ है, यह दुनिया का तीसरा सबसे अधिक आबादी और दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी बौद्ध आबादी वाला देश है। देश की राजधानी जकार्ता है। देश की जमीनी सीमा पापुआ न्यू गिनी, पूर्वी तिमोर और मलेशिया के साथ मिलती है, जबकि अन्य पड़ोसी देशों सिंगापुर, फिलीपींस, ऑस्ट्रेलिया और भारत का अंडमान और निकोबार द्वीप समूह क्षेत्र शामिल है। . अंग्रेज़ी भाषा (अंग्रेज़ीः English हिन्दी उच्चारणः इंग्लिश) हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिवार में आती है और इस दृष्टि से हिंदी, उर्दू, फ़ारसी आदि के साथ इसका दूर का संबंध बनता है। ये इस परिवार की जर्मनिक शाखा में रखी जाती है। इसे दुनिया की सर्वप्रथम अन्तरराष्ट्रीय भाषा माना जाता है। ये दुनिया के कई देशों की मुख्य राजभाषा है और आज के दौर में कई देशों में (मुख्यतः भूतपूर्व ब्रिटिश उपनिवेशों में) विज्ञान, कम्प्यूटर, साहित्य, राजनीति और उच्च शिक्षा की भी मुख्य भाषा है। अंग्रेज़ी भाषा रोमन लिपि में लिखी जाती है। यह एक पश्चिम जर्मेनिक भाषा है जिसकी उत्पत्ति एंग्लो-सेक्सन इंग्लैंड में हुई थी। संयुक्त राज्य अमेरिका के 19 वीं शताब्दी के पूर्वार्ध और ब्रिटिश साम्राज्य के 18 वीं, 19 वीं और 20 वीं शताब्दी के सैन्य, वैज्ञानिक, राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक प्रभाव के परिणाम स्वरूप यह दुनिया के कई भागों में सामान्य (बोलचाल की) भाषा बन गई है। कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों और राष्ट्रमंडल देशों में बड़े पैमाने पर इसका इस्तेमाल एक द्वितीय भाषा और अधिकारिक भाषा के रूप में होता है। ऐतिहासिक दृष्टि से, अंग्रेजी भाषा की उत्पत्ति ५वीं शताब्दी की शुरुआत से इंग्लैंड में बसने वाले एंग्लो-सेक्सन लोगों द्वारा लायी गयी अनेक बोलियों, जिन्हें अब पुरानी अंग्रेजी कहा जाता है, से हुई है। वाइकिंग हमलावरों की प्राचीन नोर्स भाषा का अंग्रेजी भाषा पर गहरा प्रभाव पड़ा है। नॉर्मन विजय के बाद पुरानी अंग्रेजी का विकास मध्य अंग्रेजी के रूप में हुआ, इसके लिए नॉर्मन शब्दावली और वर्तनी के नियमों का भारी मात्र में उपयोग हुआ। वहां से आधुनिक अंग्रेजी का विकास हुआ और अभी भी इसमें अनेक भाषाओँ से विदेशी शब्दों को अपनाने और साथ ही साथ नए शब्दों को गढ़ने की प्रक्रिया निरंतर जारी है। एक बड़ी मात्र में अंग्रेजी के शब्दों, खासकर तकनीकी शब्दों, का गठन प्राचीन ग्रीक और लैटिन की जड़ों पर आधारित है। . ओशिआनिया 33 संबंध है और पितृवंश समूह ऍम 14 है। वे आम 7 में है, समानता सूचकांक 14.89% है = 7 / (33 + 14)। यह लेख ओशिआनिया और पितृवंश समूह ऍम के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। ओशिआनिया ओशिआनिया ओशिआनिया , एक भौगोलिक क्षेत्र है जिसमे शामिल भूखण्ड जिनमें से अधिकतर द्वीप हैं जो, प्रशांत महासागर और इसके आस पास फैले हुये हैं। "ओशिआनिया" शब्द को एक हज़ार आठ सौ इकतीस में फ्रांसीसी अन्वेषक ड्यूमाँट द'उर्विल द्वारा गढ़ा गया था। आज यह शब्द कई भाषाओं में ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप और निकट के प्रशांत द्वीपों के लिए प्रयोग किया जाता है, यह क्षेत्र आठ स्थलीय पारिस्थितिक क्षेत्रों मे से भी एक है। ओशिआनिया की सीमाओं को कई तरीकों से परिभाषित किया जा सकता है। अधिकांश परिभाषाएँ ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और न्यू गिनी और मलय द्वीपसमूह के सभी भागों या कुछ भाग को ओशिआनिया बताती हैं।. पितृवंश समूह ऍम का ओशिआनिया में फैलाव - आंकड़े बता रहें हैं के इन इलाकों के कितने प्रतिशत पुरुष इस पितृवंश के वंशज हैं मनुष्यों की आनुवंशिकी में पितृवंश समूह ऍम या वाए-डी॰एन॰ए॰ हैपलोग्रुप M एक पितृवंश समूह है। यह पितृवंश स्वयं पितृवंश समूह ऍमऍनओपीऍस से उत्पन्न हुई एक शाखा है। इस पितृवंश के पुरुष अधिकतर ओशिआनिया के द्वीप राष्ट्रों में मिलते हैं, जैसे की नया गिनी, फ़िजी, टोंगा, सोलोमन द्वीपसमूह, वग़ैराह। पश्चिमी नया गिनी में अधिकाँश पुरुष इसी पितृवंश समूह के वंशज हैं। अनुमान है के जिस पुरुष से यह पितृवंश शुरू हुआ वह आज से लगभग बत्तीस,शून्य-सैंतालीस,शून्य वर्ष पहले दक्षिण पूर्व एशिया या ओशिआनिया के मॅलानिशिया क्षेत्र में रहता था।Laura Scheinfeldt, Françoise Friedlaender, Jonathan Friedlaender, Krista Latham, George Koki, Tatyana Karafet, Michael Hammer and Joseph Lorenz, "," Molecular Biology and Evolution दो हज़ार छः तेईस:एक हज़ार छः सौ अट्ठाईस-एक हज़ार छः सौ इकतालीस . ओशिआनिया और पितृवंश समूह ऍम आम में सात बातें हैं : टोंगा, नया गिनी, फ़िजी, मॅलानिशिया, सोलोमन द्वीपसमूह, इंडोनेशिया, अंग्रेज़ी भाषा। टोंगा, आधिकारिक रूप से टोंगा राजशाही, दक्षिण प्रशान्त महासागर में स्थित एक द्वीपमण्डल है, जिसमें एक सौ उनहत्तर द्वीप है, जिनमें से छत्तीस अबसासित हैं। राजशाही उत्तर-दक्षिण पंक्ति में लगभग आठ सौ किलोग्राममीटर तक फैली हुई है। . नया गिनी , ऑस्ट्रेलिया के उत्तर में स्थित विश्व का दूसरा सबसे बड़ा द्वीप है। यह ऑस्ट्रेलिया की मुख्य भूमि से उस समय अलग हो गया जब इस क्षेत्र को जिसे अब टॉरेस जलडमरुमध्य के नाम से जाना जाता है को, पिछले हिमयुग के बाद आयी बाढ़ ने पानी से भर दिया। पापुआ नाम एक लंबे समय से इस द्वीप के साथ संबद्ध रहा है। द्वीप के पश्चिमी आधे भाग में इंडोनेशिया के प्रांत पापुआ और पश्चिम पापुआ स्थित हैं, जबकि पूर्वी आधा भाग एक स्वतंत्र देश पापुआ नया गिनी स्थित है। . फ़िजी जो कि आधिकारिक रूप से फ़िजी द्वीप समूह गणराज्य के नाम से जाना जाता है, दक्षिण प्रशान्त महासागर के मेलानेशिया मे एक द्वीप देश है। यह न्यू ज़ीलैण्ड के नॉर्थ आईलैण्ड से करीब दो हज़ार किमी उत्तर-पूर्व मे स्थित है। इसके समीपवर्ती पड़ोसी राष्ट्रों मे पश्चिम की ओर वनुआतु, पूर्व में टोंगा और उत्तर मे तुवालु हैं। सत्रहवीं और अट्ठारहवीं शताब्दी के दौरान डच एवं अंग्रेजी खोजकर्तओं ने फ़िजी की खोज की थी। एक हज़ार नौ सौ सत्तर तक फ़िजी एक अंग्रेजी उपनिवेश था। प्रचुर मात्रा मे वन, खनिज एवं जलीय स्रोतों के कारण फ़िजी प्रशान्त महासागर के द्वीपों मे सबसे उन्नत राष्ट्र है। वर्तमान मे पर्यटन एवं चीनी का निर्यात इसके विदेशी मुद्रा के सबसे बड़े स्रोत हैं। यहाँ की मुद्रा फ़िजी डॉलर है। फ़िजी के अधिकांश द्वीप पंद्रह करोड़ वर्ष पूर्व आरम्भ हुए ज्वालामुखीय गतिविधियों से गठित हुए। इस देश के द्वीपसमूह में कुल तीन सौ बाईस द्वीप हैं, जिनमें से एक सौ छः स्थायी रूप से बसे हुए हैं। इसके अतिरिक्त यहाँ लगभग पाँच सौ क्षुद्र द्वीप हैं जो कुल मिला कर अट्ठारह,तीन सौ वर्ग किमी के क्षेत्रफल का निर्माण करते हैं। द्वीपसमूह के दो प्रमुख द्वीप विती लेवु और वनुआ लेवु हैं जिन पर देश की लगभग आठ,पचास,शून्य आबादी का सत्तासी% निवास करती है। . मॅलानिशिया का सांस्कृतिक क्षेत्र मॅलानिशिया ओशिआनिया का एक उपक्षेत्र है जो प्रशांत महासागर के पश्चिमी भाग से लेकर आराफ़ूरा सागर तक और फिर पूर्व में फ़िजी तक का इलाक़ा है। इसमें ऑस्ट्रेलिया के उत्तर और उत्तर-पूर्व के कई द्वीप शामिल हैं, जैसे के नया गिनी, फ़िजी, सोलोमन द्वीपसमूह, वानुअतु, वग़ैराह। . सोलोमन द्वीप पापुआ न्यू गिनी के पूर्व में मेलानेसिया में करीब एक हजार द्वीपों वाला एक देश है। करीबन अट्ठाईस,चार सौ वर्ग किलोमीटर में फैले इस देश की राजधानी गुआडलकैनाल द्वीप पर स्थित होनिअरा है। माना जाता है कि सोलोमन द्वीप पर हजारों साल पहले मेलोनेशियाई लोग रहा करते थे। यूनाइटेड किंगडम ने एक हज़ार आठ सौ नब्बे में सोलोमन द्वीप पर एक संरक्षित राज्य की स्थापना की। द्वितीय विश्व युद्ध की सबसे संघर्षपूर्ण लड़ाई एक हज़ार नौ सौ बयालीस-पैंतालीस के सोलोमन द्वीप अभियान के दौरान लड़ी गई, जिसमें गुआडलकैनाल की लड़ाई शामिल है। एक हज़ार नौ सौ छिहत्तर में लोगों ने स्वशासन और दो साल बाद आजादी हासिल की थी। सोलोमन द्वीप एक संवैधानिक राजतंत्र है, जिसकी मुखिया महारानी एलिजाबेथ द्वितीय हैं। एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में हुई जातीय हिंसा, सरकारी भ्रष्ट व्यवहार और अपराध ने देश और समाज की स्थिरता को कमजोर किया है। जून दो हज़ार तीन में ऑस्ट्रेलियाई नीत बहुराष्ट्रीय बल क्षेत्रीय सहायता मिशन सोलोमन द्वीप सोलोमन द्वीप पर शांति बहाल करने, जातीय उपद्रवियों पर लगाम लगाने और नागरिक प्रशासन में सुधार के उद्देश्य से पहुंची है। उत्तर सोलोमन द्वीप स्वतंत्र सोलोमन द्वीप और बौगैन्विल्ले प्रांत के बीच पापुआ न्यू गिनी में विभाजित हैं। . इंडोनेशिया गणराज्य दक्षिण पूर्व एशिया और ओशिनिया में स्थित एक देश है। सत्रह हज़ार पाँच सौ आठ द्वीपों वाले इस देश की जनसंख्या लगभग छब्बीस करोड़ है, यह दुनिया का तीसरा सबसे अधिक आबादी और दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी बौद्ध आबादी वाला देश है। देश की राजधानी जकार्ता है। देश की जमीनी सीमा पापुआ न्यू गिनी, पूर्वी तिमोर और मलेशिया के साथ मिलती है, जबकि अन्य पड़ोसी देशों सिंगापुर, फिलीपींस, ऑस्ट्रेलिया और भारत का अंडमान और निकोबार द्वीप समूह क्षेत्र शामिल है। . अंग्रेज़ी भाषा हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिवार में आती है और इस दृष्टि से हिंदी, उर्दू, फ़ारसी आदि के साथ इसका दूर का संबंध बनता है। ये इस परिवार की जर्मनिक शाखा में रखी जाती है। इसे दुनिया की सर्वप्रथम अन्तरराष्ट्रीय भाषा माना जाता है। ये दुनिया के कई देशों की मुख्य राजभाषा है और आज के दौर में कई देशों में विज्ञान, कम्प्यूटर, साहित्य, राजनीति और उच्च शिक्षा की भी मुख्य भाषा है। अंग्रेज़ी भाषा रोमन लिपि में लिखी जाती है। यह एक पश्चिम जर्मेनिक भाषा है जिसकी उत्पत्ति एंग्लो-सेक्सन इंग्लैंड में हुई थी। संयुक्त राज्य अमेरिका के उन्नीस वीं शताब्दी के पूर्वार्ध और ब्रिटिश साम्राज्य के अट्ठारह वीं, उन्नीस वीं और बीस वीं शताब्दी के सैन्य, वैज्ञानिक, राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक प्रभाव के परिणाम स्वरूप यह दुनिया के कई भागों में सामान्य भाषा बन गई है। कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों और राष्ट्रमंडल देशों में बड़े पैमाने पर इसका इस्तेमाल एक द्वितीय भाषा और अधिकारिक भाषा के रूप में होता है। ऐतिहासिक दृष्टि से, अंग्रेजी भाषा की उत्पत्ति पाँचवीं शताब्दी की शुरुआत से इंग्लैंड में बसने वाले एंग्लो-सेक्सन लोगों द्वारा लायी गयी अनेक बोलियों, जिन्हें अब पुरानी अंग्रेजी कहा जाता है, से हुई है। वाइकिंग हमलावरों की प्राचीन नोर्स भाषा का अंग्रेजी भाषा पर गहरा प्रभाव पड़ा है। नॉर्मन विजय के बाद पुरानी अंग्रेजी का विकास मध्य अंग्रेजी के रूप में हुआ, इसके लिए नॉर्मन शब्दावली और वर्तनी के नियमों का भारी मात्र में उपयोग हुआ। वहां से आधुनिक अंग्रेजी का विकास हुआ और अभी भी इसमें अनेक भाषाओँ से विदेशी शब्दों को अपनाने और साथ ही साथ नए शब्दों को गढ़ने की प्रक्रिया निरंतर जारी है। एक बड़ी मात्र में अंग्रेजी के शब्दों, खासकर तकनीकी शब्दों, का गठन प्राचीन ग्रीक और लैटिन की जड़ों पर आधारित है। . ओशिआनिया तैंतीस संबंध है और पितृवंश समूह ऍम चौदह है। वे आम सात में है, समानता सूचकांक चौदह.नवासी% है = सात / । यह लेख ओशिआनिया और पितृवंश समूह ऍम के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
मधुबनी के हरलाखी थाना क्षेत्र के कौवाहा गांव में सोमवार को दो लोगों की संदेहास्पद स्थिति में मौत हो गयी। दोनों क्वारंटाइन सेंटर से लौटने के बाद घर में रह रहे थे। इससे ग्रामीणों में दहशत है। बताया जाता है कि एक युवक छपरा से व दूसरा युवक कोलकाता से आया था। कोलकाता से आने वाले युवक का अंतिम संस्कार परिवार के लोगों ने कर दिया। छपरा से आनेवाले युवक के शव की जांच की मांग की जा रही है। मिली जानकारी के मुताबिक, कोलकाता से आने वाले युवक को प्राइमरी स्कूल, कौआहा में रखने की बात कही जा रही है। यहां चलने वाले क्वारंटाइन सेंटर को बंद करने के आदेश के बाद वह अपने घर चला गया था। उसकी मौत कैसे हुई, यह स्पष्ट नहीं है। सोमवार देर शाम तक प्रशासनिक अधिकारी परिवार वालों से संपर्क करने की कोशिश में थे। इधर, छपरा से आने वाले युवक को मिडिल स्कूल, कौआहा में क्वारंटाइन किया गया था। करीब 10 दिनों तक सेंटर में रहने के बाद मेडिकल टीम ने स्क्रीनिंग भी की थी। तब वह पूरी तरह से स्वस्थ था। इसके बाद उसे छुट्टी दे दी गयी। बाद में उसमें सर्दी, खांसी व बुखार हो गया। बुखार का इलाज चल रहा था। इसी दौरान उमगांव स्थित एक निजी क्लीनिक ले जाने के दौरान उसकी मौत हो गयी। बीडीओ अरुणा कुमारी चौधरी ने बताया कि मौत कैसे हुई है इसकी जांच कराई जाएगी। मेडिकल टीम को गांव भेजा गया है। पुलिस भी जांच के लिए मौके पर पहुंच रही है। परिजन चाहेंगे कि मृतक की जांच हो तो शव को रखना होगा। मामले पर बातचीत की जा रही है। कोलकाता से आने वाले युवक की मौत पर जानकारी जुटायी जा रही है।
मधुबनी के हरलाखी थाना क्षेत्र के कौवाहा गांव में सोमवार को दो लोगों की संदेहास्पद स्थिति में मौत हो गयी। दोनों क्वारंटाइन सेंटर से लौटने के बाद घर में रह रहे थे। इससे ग्रामीणों में दहशत है। बताया जाता है कि एक युवक छपरा से व दूसरा युवक कोलकाता से आया था। कोलकाता से आने वाले युवक का अंतिम संस्कार परिवार के लोगों ने कर दिया। छपरा से आनेवाले युवक के शव की जांच की मांग की जा रही है। मिली जानकारी के मुताबिक, कोलकाता से आने वाले युवक को प्राइमरी स्कूल, कौआहा में रखने की बात कही जा रही है। यहां चलने वाले क्वारंटाइन सेंटर को बंद करने के आदेश के बाद वह अपने घर चला गया था। उसकी मौत कैसे हुई, यह स्पष्ट नहीं है। सोमवार देर शाम तक प्रशासनिक अधिकारी परिवार वालों से संपर्क करने की कोशिश में थे। इधर, छपरा से आने वाले युवक को मिडिल स्कूल, कौआहा में क्वारंटाइन किया गया था। करीब दस दिनों तक सेंटर में रहने के बाद मेडिकल टीम ने स्क्रीनिंग भी की थी। तब वह पूरी तरह से स्वस्थ था। इसके बाद उसे छुट्टी दे दी गयी। बाद में उसमें सर्दी, खांसी व बुखार हो गया। बुखार का इलाज चल रहा था। इसी दौरान उमगांव स्थित एक निजी क्लीनिक ले जाने के दौरान उसकी मौत हो गयी। बीडीओ अरुणा कुमारी चौधरी ने बताया कि मौत कैसे हुई है इसकी जांच कराई जाएगी। मेडिकल टीम को गांव भेजा गया है। पुलिस भी जांच के लिए मौके पर पहुंच रही है। परिजन चाहेंगे कि मृतक की जांच हो तो शव को रखना होगा। मामले पर बातचीत की जा रही है। कोलकाता से आने वाले युवक की मौत पर जानकारी जुटायी जा रही है।
गोपाल साल 2017 में गुजरात के गृह मंत्री प्रदीपसिंह जडेजा पर जूता फेंक चर्चा में आए थे। तब वह अहमदाबाद के धंधुका तालुका में अनुमंडल मजिस्ट्रेट कार्यालय में बतौर क्लर्क के पद पर तैनात थे। नई दिल्लीः गुजरात के आम आदमी पार्टी के संयोजक गोपाल इटालिया को दिल्ली में राष्ट्रीय महिला आयोग के दफ्तर से गिरफ्तार कर लिया गया है। इटालिया का हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वह पीएम मोदी पर विवादित टिप्पणी करते नजर आए थे। इसी सिलसिले में राष्ट्रीय महिला आयोग ने उन्हें आज तलब किया था। बता दें कि यह कोई पहली बार नहीं है जब गोपाल इटालिया विवादों में आए हैं। इससे पहले भी वह विवादों में रह चुके हैं और जेल भी जा चुके हैं। गोपाल साल 2017 में गुजरात के गृह मंत्री प्रदीपसिंह जडेजा पर जूता फेंक चर्चा में आए थे। तब वह अहमदाबाद के धंधुका तालुका में अनुमंडल मजिस्ट्रेट कार्यालय में बतौर क्लर्क के पद पर तैनात थे। इटालिया ने 2017 में राज्य सरकार में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए गृह राज्य मंत्री प्रदीपसिंह जडेजा पर जूता फेंका था। 2 मार्च 2017 को प्रदीपसिंह पर इटालिया ने उस वक्त जूता फेंका था जब वह विधानसभा भवन के बाहर मीडिया को संबोधित करने जा रहे थे। गोपाल इटालिया ने भ्रष्टाचार मुर्दाबाद चिल्लाते हुए गृह मंत्री पर जूता उछाला लेकिन वह निशाने से चूक गया। पुलिसकर्मियों ने उन्हें तब हिरासत में लिया था। इसकी चर्चा तब तमाम मीडिया प्लेटफॉर्मों रही। तब इटालिया को मानसिक रूप से अस्थिर और कुंठित बताया गया था। बता दें कि गोपाल इटालिया को राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) के दफ्तर से गिरफ्तार किया है। एनसीडब्ल्यू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अपशब्दों के इस्तेमाल के वीडियो को लेकर इटालिया को तलब किया था। सांसद संजय सिंह ने कहा, "पटेल समाज इस अपमान का बदला जरूर लेगा। "
गोपाल साल दो हज़ार सत्रह में गुजरात के गृह मंत्री प्रदीपसिंह जडेजा पर जूता फेंक चर्चा में आए थे। तब वह अहमदाबाद के धंधुका तालुका में अनुमंडल मजिस्ट्रेट कार्यालय में बतौर क्लर्क के पद पर तैनात थे। नई दिल्लीः गुजरात के आम आदमी पार्टी के संयोजक गोपाल इटालिया को दिल्ली में राष्ट्रीय महिला आयोग के दफ्तर से गिरफ्तार कर लिया गया है। इटालिया का हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वह पीएम मोदी पर विवादित टिप्पणी करते नजर आए थे। इसी सिलसिले में राष्ट्रीय महिला आयोग ने उन्हें आज तलब किया था। बता दें कि यह कोई पहली बार नहीं है जब गोपाल इटालिया विवादों में आए हैं। इससे पहले भी वह विवादों में रह चुके हैं और जेल भी जा चुके हैं। गोपाल साल दो हज़ार सत्रह में गुजरात के गृह मंत्री प्रदीपसिंह जडेजा पर जूता फेंक चर्चा में आए थे। तब वह अहमदाबाद के धंधुका तालुका में अनुमंडल मजिस्ट्रेट कार्यालय में बतौर क्लर्क के पद पर तैनात थे। इटालिया ने दो हज़ार सत्रह में राज्य सरकार में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए गृह राज्य मंत्री प्रदीपसिंह जडेजा पर जूता फेंका था। दो मार्च दो हज़ार सत्रह को प्रदीपसिंह पर इटालिया ने उस वक्त जूता फेंका था जब वह विधानसभा भवन के बाहर मीडिया को संबोधित करने जा रहे थे। गोपाल इटालिया ने भ्रष्टाचार मुर्दाबाद चिल्लाते हुए गृह मंत्री पर जूता उछाला लेकिन वह निशाने से चूक गया। पुलिसकर्मियों ने उन्हें तब हिरासत में लिया था। इसकी चर्चा तब तमाम मीडिया प्लेटफॉर्मों रही। तब इटालिया को मानसिक रूप से अस्थिर और कुंठित बताया गया था। बता दें कि गोपाल इटालिया को राष्ट्रीय महिला आयोग के दफ्तर से गिरफ्तार किया है। एनसीडब्ल्यू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अपशब्दों के इस्तेमाल के वीडियो को लेकर इटालिया को तलब किया था। सांसद संजय सिंह ने कहा, "पटेल समाज इस अपमान का बदला जरूर लेगा। "
हर साल की तरह इस बार भी होली के त्यौहार को रंगीन बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसे देखते हुए बेमेतरा जिले में महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा हर्बल गुलाल तैयार कर होली को सुरक्षित और खुशहाल बनाने की तैयारी की जा रही है। हर्बल गुलाल बनाने के लिए कृषि विज्ञान केन्द्र बेमेतरा द्वारा ग्राम झालम की आदिवासी महिला स्व-सहायता समूह एवं जय मॉं सरस्वती स्व-सहायता समूह को वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. जी. पी. आयम के मार्गदर्शन में हर्बल गुलाल बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। होली का त्यौहार आने वाला है जिसमें लोग रंग-गुलाल का उपयोग करते हैं जो विभिन्न रासायनिक सामग्रियों का उपयोग करते हुए बनाये जाते हैं जिससे त्वचा में एलर्जी, आंखों में इंफेक्शन, दमा, अस्थमा, खुजली जैसे कई प्रकार की समस्याएं हो जाती है, इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए कृषि विज्ञान केन्द्र बेमेतरा द्वारा प्राकृतिक पदार्थों जैसे हल्दी, पालक, पलाश के फूल, चुकन्दर आदि का उपयोग करते हुए त्वचा के लिए सुरक्षित हर्बल गुलाल बनाने की विधि समूह की महिलाओं को सिखाई जा रही है। कृषि विज्ञान केन्द्र बेमेतरा के प्रमुख डॉ. जी. पी. आयम के मार्गदर्शन में महिलाओं ने हर्बल गुलाल बनाने का प्रशिक्षण प्राप्त किया। डॉ. एकता ताम्रकार एवं डॉ. वेधिका साहू ने हर्बल गुलाल बनाने का प्रशिक्षण महिलाओं को दिया और बताया कि समूह की महिलाओं को इससे रोजगार मिलेगा साथ ही हर्बल गुलाल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी नहीं होंगे।
हर साल की तरह इस बार भी होली के त्यौहार को रंगीन बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसे देखते हुए बेमेतरा जिले में महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा हर्बल गुलाल तैयार कर होली को सुरक्षित और खुशहाल बनाने की तैयारी की जा रही है। हर्बल गुलाल बनाने के लिए कृषि विज्ञान केन्द्र बेमेतरा द्वारा ग्राम झालम की आदिवासी महिला स्व-सहायता समूह एवं जय मॉं सरस्वती स्व-सहायता समूह को वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. जी. पी. आयम के मार्गदर्शन में हर्बल गुलाल बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। होली का त्यौहार आने वाला है जिसमें लोग रंग-गुलाल का उपयोग करते हैं जो विभिन्न रासायनिक सामग्रियों का उपयोग करते हुए बनाये जाते हैं जिससे त्वचा में एलर्जी, आंखों में इंफेक्शन, दमा, अस्थमा, खुजली जैसे कई प्रकार की समस्याएं हो जाती है, इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए कृषि विज्ञान केन्द्र बेमेतरा द्वारा प्राकृतिक पदार्थों जैसे हल्दी, पालक, पलाश के फूल, चुकन्दर आदि का उपयोग करते हुए त्वचा के लिए सुरक्षित हर्बल गुलाल बनाने की विधि समूह की महिलाओं को सिखाई जा रही है। कृषि विज्ञान केन्द्र बेमेतरा के प्रमुख डॉ. जी. पी. आयम के मार्गदर्शन में महिलाओं ने हर्बल गुलाल बनाने का प्रशिक्षण प्राप्त किया। डॉ. एकता ताम्रकार एवं डॉ. वेधिका साहू ने हर्बल गुलाल बनाने का प्रशिक्षण महिलाओं को दिया और बताया कि समूह की महिलाओं को इससे रोजगार मिलेगा साथ ही हर्बल गुलाल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी नहीं होंगे।
पीड़िता की मां आशा देवी ने आयोग प्रमुख स्वाति मालीवाल को इस मामले से अवगत कराते हुए बताया कि सोशल मीडिया पर एक तस्वीर प्रसारित की जा रही है जिसमें पंजाब में एक आधिकारिक होर्डिंग पर बलात्कार मामले के दोषी मुकेश सिंह की तस्वीर लगी हुई है। दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) ने पंजाब में एक चुनाव होर्डिंग पर 2012 के दिल्ली सामूहिक बलात्कार मामले के दोषी की कथित रूप से तस्वीर लगाये जाने को लेकर सोमवार को चुनाव आयोग को एक नोटिस जारी किया। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि चुनाव आयोग ने इस मुद्दे पर पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मंगलवार की सुबह तक एक रिपोर्ट मांगी है। होशियारपुर जिला चुनाव कार्यालय द्वारा लोगों को मतदान के लिए प्रोत्साहित करने के लिए कथित तौर पर होर्डिंग लगाए गए थे। दिल्ली में 16 दिसम्बर, 2012 को छह लोगों ने चलती बस में 23 वर्षीय एक पैरामेडिकल छात्रा के साथ बलात्कार किया था और इसके बाद सिंगापुर के एक अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी।
पीड़िता की मां आशा देवी ने आयोग प्रमुख स्वाति मालीवाल को इस मामले से अवगत कराते हुए बताया कि सोशल मीडिया पर एक तस्वीर प्रसारित की जा रही है जिसमें पंजाब में एक आधिकारिक होर्डिंग पर बलात्कार मामले के दोषी मुकेश सिंह की तस्वीर लगी हुई है। दिल्ली महिला आयोग ने पंजाब में एक चुनाव होर्डिंग पर दो हज़ार बारह के दिल्ली सामूहिक बलात्कार मामले के दोषी की कथित रूप से तस्वीर लगाये जाने को लेकर सोमवार को चुनाव आयोग को एक नोटिस जारी किया। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि चुनाव आयोग ने इस मुद्दे पर पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मंगलवार की सुबह तक एक रिपोर्ट मांगी है। होशियारपुर जिला चुनाव कार्यालय द्वारा लोगों को मतदान के लिए प्रोत्साहित करने के लिए कथित तौर पर होर्डिंग लगाए गए थे। दिल्ली में सोलह दिसम्बर, दो हज़ार बारह को छह लोगों ने चलती बस में तेईस वर्षीय एक पैरामेडिकल छात्रा के साथ बलात्कार किया था और इसके बाद सिंगापुर के एक अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी।
अमेरिकी डांसर रिकी पॉन्ड ने गणेश चतुर्थी के मौके पर 'श्रीगणेशा देवा' गाने पर जबरदस्त डांस किया. लोगों को उनका डांस इतना पंसद आया है कि वह उन्हें जमकर शेयर कर रहे हैं. भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है. इस त्योहार का क्रेज न सिर्फ देश में बल्कि विदेशों में भी देखने को मिलता है. इसी कड़ी में एक विदेशी अंकल का डांस तेजी से वायरल हो रहा है. जिसमें वह 'देवा श्रीगणेशा देवा' गाने पर धमाकेदार डांस करते हुए नजर आ रहे हैं. हम जिस शख्स की बात कर रहे हैं उन्हें दुनिया 'डांसिंग डैड'के नाम से जानती है. बॉलीवुड गानों पर उनके डांस वीडियोज आए दिन वायरल होते रहते हैं. यही वजह है कि काफी इंडियन भी उनके फैन हैं. हाल के दिनों में 'डांसिंग डैड' का एक मजेदार वीडियो सामने आया है, जिसमें वह 'देवा श्रीगणेशा देवा' गाने पर धमाकेदार डांस कर रहे हैं. वीडियो में देख सकते हैं देसी स्टाइल में डांस करते हुए नजर आ रहे हैं. वहीं, बैकग्राउंड में बॉलीवुड फिल्म अग्निपथ का गाना 'श्रीगणेशा देवा' बज रहा है. इस गाने पर 'डांसिंग डैड' काफी मस्त होकर डांस कर रहे हैं. उनका ये वीडियो इंटरनेट की दुनिया में छाया हुआ है. जिसे खबर लिखे जाने तक 34 हजार से अधिक लाइक्स मिल चुके हैं. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रिकी पॉन्ड को भारतीय गानों पर डांस करने के लिए जाना जाता है. उन्हें भारतीय गानों से कितना प्यार है, ये इसी बात से साबित होता है कि उनका सोशल मीडिया अकाउंट ऐसी वीडियो से ही भरा हुआ है जिसमें वह अक्सर बॉलीवुड गानों पर डांस करते हुए नजर आते हैं.
अमेरिकी डांसर रिकी पॉन्ड ने गणेश चतुर्थी के मौके पर 'श्रीगणेशा देवा' गाने पर जबरदस्त डांस किया. लोगों को उनका डांस इतना पंसद आया है कि वह उन्हें जमकर शेयर कर रहे हैं. भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है. इस त्योहार का क्रेज न सिर्फ देश में बल्कि विदेशों में भी देखने को मिलता है. इसी कड़ी में एक विदेशी अंकल का डांस तेजी से वायरल हो रहा है. जिसमें वह 'देवा श्रीगणेशा देवा' गाने पर धमाकेदार डांस करते हुए नजर आ रहे हैं. हम जिस शख्स की बात कर रहे हैं उन्हें दुनिया 'डांसिंग डैड'के नाम से जानती है. बॉलीवुड गानों पर उनके डांस वीडियोज आए दिन वायरल होते रहते हैं. यही वजह है कि काफी इंडियन भी उनके फैन हैं. हाल के दिनों में 'डांसिंग डैड' का एक मजेदार वीडियो सामने आया है, जिसमें वह 'देवा श्रीगणेशा देवा' गाने पर धमाकेदार डांस कर रहे हैं. वीडियो में देख सकते हैं देसी स्टाइल में डांस करते हुए नजर आ रहे हैं. वहीं, बैकग्राउंड में बॉलीवुड फिल्म अग्निपथ का गाना 'श्रीगणेशा देवा' बज रहा है. इस गाने पर 'डांसिंग डैड' काफी मस्त होकर डांस कर रहे हैं. उनका ये वीडियो इंटरनेट की दुनिया में छाया हुआ है. जिसे खबर लिखे जाने तक चौंतीस हजार से अधिक लाइक्स मिल चुके हैं. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रिकी पॉन्ड को भारतीय गानों पर डांस करने के लिए जाना जाता है. उन्हें भारतीय गानों से कितना प्यार है, ये इसी बात से साबित होता है कि उनका सोशल मीडिया अकाउंट ऐसी वीडियो से ही भरा हुआ है जिसमें वह अक्सर बॉलीवुड गानों पर डांस करते हुए नजर आते हैं.
लखनऊ। समाजवादी पार्टी में टिकट बंटवारे को लेकर तकरार बढती जा रही है। टिकट बंटवारे से नाराज अखिलेश ने गुरुवार देर रात अपने 235 उम्मीदवारों की अलग लिस्ट जारी कर दी थी। इसके बाद शिवपाल ने 68 और उम्मीदवारों के नाम घोषित किया। गुरुवार को यह सारा घटनाक्रम चलने के बाद आज शिवपाल ने तीन और उम्मदवारों के नामों की घोषणा की। वहीं अखिलेश ने अपनी कोर कमिटी के साथ बैठक की। तो मुलायम सिंह ने भी पार्टी के उम्मीदवारों की बैठक बुलाई है। गौरतलब है कि सीएम अखिलेश अपने समर्थकों के कोर ग्रुप के साथ बैठक कर रहे हैं। माना जा रहा है कि अखिलेश अपने समर्थकों के बीच काम का बंटवारा करेंगे। साथ ही इस बैठक में सीटों पर उम्मीदवारों के चयन से लेकर गठबंधन तक पर चर्चा होगी। रामगोपाल बोले अब समझौता नहींः सपा में चल रही तकरार को लेकर रामगोपाल यादव ने कहा है कि वे अखिलेश के साथ हैं और अब समझौते की गुंजाइश नहीं बची है। साथ ही रामगोपाल ने स्पष्ट किया कि जो अखिलेश के विरोधी हैं वे मेरे भी विरोधी होंगे।
लखनऊ। समाजवादी पार्टी में टिकट बंटवारे को लेकर तकरार बढती जा रही है। टिकट बंटवारे से नाराज अखिलेश ने गुरुवार देर रात अपने दो सौ पैंतीस उम्मीदवारों की अलग लिस्ट जारी कर दी थी। इसके बाद शिवपाल ने अड़सठ और उम्मीदवारों के नाम घोषित किया। गुरुवार को यह सारा घटनाक्रम चलने के बाद आज शिवपाल ने तीन और उम्मदवारों के नामों की घोषणा की। वहीं अखिलेश ने अपनी कोर कमिटी के साथ बैठक की। तो मुलायम सिंह ने भी पार्टी के उम्मीदवारों की बैठक बुलाई है। गौरतलब है कि सीएम अखिलेश अपने समर्थकों के कोर ग्रुप के साथ बैठक कर रहे हैं। माना जा रहा है कि अखिलेश अपने समर्थकों के बीच काम का बंटवारा करेंगे। साथ ही इस बैठक में सीटों पर उम्मीदवारों के चयन से लेकर गठबंधन तक पर चर्चा होगी। रामगोपाल बोले अब समझौता नहींः सपा में चल रही तकरार को लेकर रामगोपाल यादव ने कहा है कि वे अखिलेश के साथ हैं और अब समझौते की गुंजाइश नहीं बची है। साथ ही रामगोपाल ने स्पष्ट किया कि जो अखिलेश के विरोधी हैं वे मेरे भी विरोधी होंगे।
एक दंपती ने गोद लिए अपने बच्चे को 5 साल तक बॉक्स में बंधक बनाकर रखा। यह मामला कोर्ट पहुंच चुका है और मामले की सुनवाई जारी है। बच्चे को सिर्फ एक बॉल्टी दी हुई थी, जिसे वह टायलेट की तरह इस्तेमाल करता था। उसकी निगरानी के लिए गैराज में कैमरा लगवाया हुआ था। बॉक्स में गद्दा रखा था, जिस पर वह सोता था। नई दिल्ली। बच्चों को माता-पिता कितना प्रेम करते हैं, यह बताने की जरूरत नहीं होती। हालांकि, जिन दंपती के बच्चे किसी वजह से नहीं होते, वे गोद लेते हैं और उन्हीं पर अपनी ममता तथा प्यार लुटाते हैं। लेकिन आपने कभी यह देखा या सुना है कि कोई मां-बाप अपने बच्चे को प्रताड़ित करे उसे बंधक बनाकर रखे। अब यह मामला कोर्ट पहुंच चुका है और मामले की सुनवाई जारी है। दंपती अब जेल से बेल पर बाहर हैं। मगर अब उन्हें बच्चे से किसी भी तरह का संपर्क रखने की मनाही है। ऐसा ही एक मामला अमरीका के फ्लोरिडा में सामने आया है। यहां एक दंपती ने गोद लिए अपने बच्चे को 5 साल तक बॉक्स में बंधक बनाकर रखा। यह क्रूर माता-पिता हैं ट्रेसी और टिमोथी फेरिटर। इन्होंने वर्ष 2017 में एक बच्चे को गोद लिया। इस बच्चे की उम्र अब 13 वर्ष हो चुकी है। इस दंपती पर आरोप है कि इन दोनों ने गोद लिए बच्चे को पांच साल तक गैराज के में एक बॉक्स में कैद रखा। ये दोनों क्रूर मां-बाप अपने बच्चे को रोज 18 घंटे तक कैद रखते थे और सिर्फ स्कूल जाने के लिए बाहर निकालते थे। इस मां-बाप ने बच्चे को सिर्फ एक बॉल्टी दी हुई थी, जिसे वह टायलेट की तरह इस्तेमाल करता था। उसकी निगरानी के लिए गैराज में कैमरा लगवाया हुआ था। बॉक्स में गद्दा रखा था, जिस पर वह सोता था। स्कूल से आने के बाद उसे उसी बॉक्स में डाल दिया जाता था। मामला एक दिन तब सामने आया, जब यह बच्चा स्कूल से भाग गया। तब ट्रेसी ने उसके गायब होने की रिपोर्ट पुलिस को दी। पुलिस जांच के लिए पहुंची तो उन्होंने बच्चे के रहने वाली जगह को देखा। इसके बाद बच्चा भी पुलिस स्टेशन पहुंच गया और खुद को गिरफ्तार करने की मांग की। पुलिस के मुताबिक, बच्चे का कहना था कि उसे कोई प्यार नहीं करता। घर में कैद करके रखा जाता है। ऐसे में अच्छा है कि वह घर के बजाय पुलिस की कैद में रहे। इसके बाद पुलिस ने दंपती को गिरफ्तार कर लिया। मामला अब कोर्ट में है। अब इस दंपती के वकील का दावा है कि बच्चे को रिएक्टिव अटैचमेंट डिसऑर्डर नाम की बीमारी है। इसी वजह से उसे बंद करके रखा गया था।
एक दंपती ने गोद लिए अपने बच्चे को पाँच साल तक बॉक्स में बंधक बनाकर रखा। यह मामला कोर्ट पहुंच चुका है और मामले की सुनवाई जारी है। बच्चे को सिर्फ एक बॉल्टी दी हुई थी, जिसे वह टायलेट की तरह इस्तेमाल करता था। उसकी निगरानी के लिए गैराज में कैमरा लगवाया हुआ था। बॉक्स में गद्दा रखा था, जिस पर वह सोता था। नई दिल्ली। बच्चों को माता-पिता कितना प्रेम करते हैं, यह बताने की जरूरत नहीं होती। हालांकि, जिन दंपती के बच्चे किसी वजह से नहीं होते, वे गोद लेते हैं और उन्हीं पर अपनी ममता तथा प्यार लुटाते हैं। लेकिन आपने कभी यह देखा या सुना है कि कोई मां-बाप अपने बच्चे को प्रताड़ित करे उसे बंधक बनाकर रखे। अब यह मामला कोर्ट पहुंच चुका है और मामले की सुनवाई जारी है। दंपती अब जेल से बेल पर बाहर हैं। मगर अब उन्हें बच्चे से किसी भी तरह का संपर्क रखने की मनाही है। ऐसा ही एक मामला अमरीका के फ्लोरिडा में सामने आया है। यहां एक दंपती ने गोद लिए अपने बच्चे को पाँच साल तक बॉक्स में बंधक बनाकर रखा। यह क्रूर माता-पिता हैं ट्रेसी और टिमोथी फेरिटर। इन्होंने वर्ष दो हज़ार सत्रह में एक बच्चे को गोद लिया। इस बच्चे की उम्र अब तेरह वर्ष हो चुकी है। इस दंपती पर आरोप है कि इन दोनों ने गोद लिए बच्चे को पांच साल तक गैराज के में एक बॉक्स में कैद रखा। ये दोनों क्रूर मां-बाप अपने बच्चे को रोज अट्ठारह घंटाटे तक कैद रखते थे और सिर्फ स्कूल जाने के लिए बाहर निकालते थे। इस मां-बाप ने बच्चे को सिर्फ एक बॉल्टी दी हुई थी, जिसे वह टायलेट की तरह इस्तेमाल करता था। उसकी निगरानी के लिए गैराज में कैमरा लगवाया हुआ था। बॉक्स में गद्दा रखा था, जिस पर वह सोता था। स्कूल से आने के बाद उसे उसी बॉक्स में डाल दिया जाता था। मामला एक दिन तब सामने आया, जब यह बच्चा स्कूल से भाग गया। तब ट्रेसी ने उसके गायब होने की रिपोर्ट पुलिस को दी। पुलिस जांच के लिए पहुंची तो उन्होंने बच्चे के रहने वाली जगह को देखा। इसके बाद बच्चा भी पुलिस स्टेशन पहुंच गया और खुद को गिरफ्तार करने की मांग की। पुलिस के मुताबिक, बच्चे का कहना था कि उसे कोई प्यार नहीं करता। घर में कैद करके रखा जाता है। ऐसे में अच्छा है कि वह घर के बजाय पुलिस की कैद में रहे। इसके बाद पुलिस ने दंपती को गिरफ्तार कर लिया। मामला अब कोर्ट में है। अब इस दंपती के वकील का दावा है कि बच्चे को रिएक्टिव अटैचमेंट डिसऑर्डर नाम की बीमारी है। इसी वजह से उसे बंद करके रखा गया था।
मुंबई, 13 अगस्त । बॉलीवुड की हिट फिल्म ताल को गुरुवार को रिलीज हुए 21 साल हो गए हैं, इस मौके पर बॉलीवड अभिनेता अनिल कपूर और अक्षय खन्ना ने फिल्म में अपने काम को याद किया। इस फिल्म को याद करने के लिए दोनों अभिनेताओं ने सोशल मीडिया का सहारा लिया। अनिल कपूर ने इंस्टाग्राम पर फिल्म से एक वीडियो क्लिप साझा करते हुए लिखा, ताल के 21 साल पूरे होने पर जश्न मनाते हुए। सुभाष घाई द्वारा निर्देशित फिल्म 1999 में रिलीज हुई थी, जिसमें ऐश्वर्या राय बच्चन भी मुख्य भूमिका में थीं। फिल्म की स्टोरी से ज्यादा लोगों ने इसके गीत को सूब पसंद किया। Disclaimer: This story is auto-generated from IANS service.
मुंबई, तेरह अगस्त । बॉलीवुड की हिट फिल्म ताल को गुरुवार को रिलीज हुए इक्कीस साल हो गए हैं, इस मौके पर बॉलीवड अभिनेता अनिल कपूर और अक्षय खन्ना ने फिल्म में अपने काम को याद किया। इस फिल्म को याद करने के लिए दोनों अभिनेताओं ने सोशल मीडिया का सहारा लिया। अनिल कपूर ने इंस्टाग्राम पर फिल्म से एक वीडियो क्लिप साझा करते हुए लिखा, ताल के इक्कीस साल पूरे होने पर जश्न मनाते हुए। सुभाष घाई द्वारा निर्देशित फिल्म एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में रिलीज हुई थी, जिसमें ऐश्वर्या राय बच्चन भी मुख्य भूमिका में थीं। फिल्म की स्टोरी से ज्यादा लोगों ने इसके गीत को सूब पसंद किया। Disclaimer: This story is auto-generated from IANS service.
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज धनशोधन के मामले में जैन 31 मई से तिहाड़ जेल में बंद हैं। इस साल पंजाब में हुए विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) ने कांग्रेस को हराकर कृषि प्रधान राज्य में सरकार बनायी थी। खट्टर ने कहा कि केजरीवाल ने पराली जलाने के लिए किसानों को दोषी ठहराया, लेकिन उन्होंने दिल्ली में वायु प्रदूषण के स्थानीय स्रोतों जैसे सड़कों और निर्माण गतिविधियों से उड़ने वाली धूल और वाहनों के उत्सर्जन जैसे मुद्दों को हल करने की परवाह नहीं की। उन्होंने कहा कि जब दिल्ली में पानी का संकट था तो हरियाणा ने दिल्ली का पानी का हिस्सा 750 क्यूसेक से बढ़ाकर 1,019 क्यूसेक कर दिया। खट्टर ने कहा कि अगर पंजाब ने हरियाणा को पर्याप्त पानी छोड़ा होता तो राष्ट्रीय राजधानी के लिए पानी की कमी नहीं होती। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आप के भ्रष्टाचार की कहानियां आम हैं। पराली जलाने से रोकने के लिए दिल्ली सरकार की पहल पर खट्टर ने दावा किया कि किसानों के नाम पर केजरीवाल सरकार ने बायोडीकंपोजर समाधान पर सिर्फ 40,000 रुपये और इसके वितरण पर 23 लाख रुपये खर्च किए हैं जबकि 14 करोड़ रुपये इसके बारे में प्रचार पर खर्च किए गए। उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि केवल 300 किसानों को लाभ हुआ। भाजपा ने आरोप लगाया है कि आप नेता को "वीआईपी सुविधा" दी जा रही है और मांग की है कि केजरीवाल उन्हें मंत्री पद से हटायें। जैन उन वीडियो को लेकर राजनीतिक दलों के निशाने पर हैं जिसमें वह कथित तौर पर मालिश कराते, अन्य विशेष सुविधाओं का लाभ उठाते और तिहाड़ जेल में अपनी कोठरी में एक जेल अधीक्षक से मुलाकात करते दिख रहे हैं।
प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज धनशोधन के मामले में जैन इकतीस मई से तिहाड़ जेल में बंद हैं। इस साल पंजाब में हुए विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस को हराकर कृषि प्रधान राज्य में सरकार बनायी थी। खट्टर ने कहा कि केजरीवाल ने पराली जलाने के लिए किसानों को दोषी ठहराया, लेकिन उन्होंने दिल्ली में वायु प्रदूषण के स्थानीय स्रोतों जैसे सड़कों और निर्माण गतिविधियों से उड़ने वाली धूल और वाहनों के उत्सर्जन जैसे मुद्दों को हल करने की परवाह नहीं की। उन्होंने कहा कि जब दिल्ली में पानी का संकट था तो हरियाणा ने दिल्ली का पानी का हिस्सा सात सौ पचास क्यूसेक से बढ़ाकर एक,उन्नीस क्यूसेक कर दिया। खट्टर ने कहा कि अगर पंजाब ने हरियाणा को पर्याप्त पानी छोड़ा होता तो राष्ट्रीय राजधानी के लिए पानी की कमी नहीं होती। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आप के भ्रष्टाचार की कहानियां आम हैं। पराली जलाने से रोकने के लिए दिल्ली सरकार की पहल पर खट्टर ने दावा किया कि किसानों के नाम पर केजरीवाल सरकार ने बायोडीकंपोजर समाधान पर सिर्फ चालीस,शून्य रुपयापये और इसके वितरण पर तेईस लाख रुपये खर्च किए हैं जबकि चौदह करोड़ रुपये इसके बारे में प्रचार पर खर्च किए गए। उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि केवल तीन सौ किसानों को लाभ हुआ। भाजपा ने आरोप लगाया है कि आप नेता को "वीआईपी सुविधा" दी जा रही है और मांग की है कि केजरीवाल उन्हें मंत्री पद से हटायें। जैन उन वीडियो को लेकर राजनीतिक दलों के निशाने पर हैं जिसमें वह कथित तौर पर मालिश कराते, अन्य विशेष सुविधाओं का लाभ उठाते और तिहाड़ जेल में अपनी कोठरी में एक जेल अधीक्षक से मुलाकात करते दिख रहे हैं।
इंग्लैंड के कप्तान इयोन मोर्गन ने भारत के खिलाफ अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले जा रहे तीसरे टी-20 इंटरनेशनल में टॉस जीतकर पहले करने का फैसला किया। इस मैच में विराट कोहली एंड मैनेजमेंट ने एक बड़ा फैसला लेते हुए सूर्यकुमार यादव को बाहर बैठा दिया और उनकी जगह रोहित शर्मा को प्लेइंग इलेवन में शामिल कर लिया। इससे पहले सूर्यकुमार यादव ने इंग्लैंड के ही खिलाफ दूसरे टी-20 में डेब्यू किया था लेकिन उन्हें बल्लेबाज़ी का मौका नहीं मिला और बिना उनका कौशल देखे उन्हें तीसरे टी-20 से बाहर कर दिया गया है जिसके बाद फैंस सोशल मीडिया पर विराट कोहली को जमकर ट्रोल कर रहे हैं। फैंस ट्विटर पर विराट और टीम मैनेजमेंट को जमकर लताड़ लगा रहे हैं और कह रहे हैं कि सूर्यकुमार यादव को बाहर करके उनके साथ गलत किया गया है। आइए देखते हैं कि सूर्यकुमार यादव को फैंस का समर्थन कैसे मिल रहा है।
इंग्लैंड के कप्तान इयोन मोर्गन ने भारत के खिलाफ अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले जा रहे तीसरे टी-बीस इंटरनेशनल में टॉस जीतकर पहले करने का फैसला किया। इस मैच में विराट कोहली एंड मैनेजमेंट ने एक बड़ा फैसला लेते हुए सूर्यकुमार यादव को बाहर बैठा दिया और उनकी जगह रोहित शर्मा को प्लेइंग इलेवन में शामिल कर लिया। इससे पहले सूर्यकुमार यादव ने इंग्लैंड के ही खिलाफ दूसरे टी-बीस में डेब्यू किया था लेकिन उन्हें बल्लेबाज़ी का मौका नहीं मिला और बिना उनका कौशल देखे उन्हें तीसरे टी-बीस से बाहर कर दिया गया है जिसके बाद फैंस सोशल मीडिया पर विराट कोहली को जमकर ट्रोल कर रहे हैं। फैंस ट्विटर पर विराट और टीम मैनेजमेंट को जमकर लताड़ लगा रहे हैं और कह रहे हैं कि सूर्यकुमार यादव को बाहर करके उनके साथ गलत किया गया है। आइए देखते हैं कि सूर्यकुमार यादव को फैंस का समर्थन कैसे मिल रहा है।
घरेलू क्रिकेट में दमदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को टीम इंडिया (Team India) में मौका दिया जाता है. कुछ खिलाड़ी अपने दमदार प्रदर्शन के दम पर अपनी जगह को भारतीय टीम में पक्की कर लेते हैं तो कुछ खिलाड़ी अपनी जगह को सुनिश्चित नहीं कर पाते हैं और महज कुछ मैच खेलकर टीम इंडिया से बाहर हो जाते हैं. आज के लेख में हम बात करने जा रहे हैं उन पांच खिलाड़ियों के बारे में जिन्होंने अपने दमदार प्रदर्शन के दम पर टीम इंडिया में अपनी जगह बनाई थी. लेकिन ये खिलाड़ी कुछ मैच खेलने के बाद टीम इंडिया से काफी दूर हो गए हैं. अब इन खिलाड़ियों की टीम में वापसी की कोई उम्मीद की किरण नहीं दिखाई देती है. शिवम दुबे (Shivam Dubey) टीम इंडिया (Team India)के बेहतरीन ऑलराउंडर में शुमार शिवम दुबे कभी टीम इंडिया के उभरते हुए सितारे थे. उनकी बल्लेबाज़ी को देखकर ऐसा लग रहा था कि वह टीम इंडिया में युवराज सिंह की जगह ले सकते हैं. हालांकि उन्होंने टीम इंडिया के लिए खेलते हुए निराश किया और कुछ खास कमाल नहीं कर पाए. अब भारतीय टीम में उनकी वापसी काफी मुश्किल लगती है. उन्होंने भारत के लिए केवल 1 वनडे मैच में 9 रन बनाए हैं. इसके अलावा उन्हें टीम इंडिया से 13 टी-20 मैच खेलने का अवसर प्राप्त हुआ लेकिन वे कुछ खास कमाल नहीं कर सके और 17. 5 की औसत के साथ 105 रन जोड़ पाए.
घरेलू क्रिकेट में दमदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को टीम इंडिया में मौका दिया जाता है. कुछ खिलाड़ी अपने दमदार प्रदर्शन के दम पर अपनी जगह को भारतीय टीम में पक्की कर लेते हैं तो कुछ खिलाड़ी अपनी जगह को सुनिश्चित नहीं कर पाते हैं और महज कुछ मैच खेलकर टीम इंडिया से बाहर हो जाते हैं. आज के लेख में हम बात करने जा रहे हैं उन पांच खिलाड़ियों के बारे में जिन्होंने अपने दमदार प्रदर्शन के दम पर टीम इंडिया में अपनी जगह बनाई थी. लेकिन ये खिलाड़ी कुछ मैच खेलने के बाद टीम इंडिया से काफी दूर हो गए हैं. अब इन खिलाड़ियों की टीम में वापसी की कोई उम्मीद की किरण नहीं दिखाई देती है. शिवम दुबे टीम इंडिया के बेहतरीन ऑलराउंडर में शुमार शिवम दुबे कभी टीम इंडिया के उभरते हुए सितारे थे. उनकी बल्लेबाज़ी को देखकर ऐसा लग रहा था कि वह टीम इंडिया में युवराज सिंह की जगह ले सकते हैं. हालांकि उन्होंने टीम इंडिया के लिए खेलते हुए निराश किया और कुछ खास कमाल नहीं कर पाए. अब भारतीय टीम में उनकी वापसी काफी मुश्किल लगती है. उन्होंने भारत के लिए केवल एक वनडे मैच में नौ रन बनाए हैं. इसके अलावा उन्हें टीम इंडिया से तेरह टी-बीस मैच खेलने का अवसर प्राप्त हुआ लेकिन वे कुछ खास कमाल नहीं कर सके और सत्रह. पाँच की औसत के साथ एक सौ पाँच रन जोड़ पाए.
आये दिन कई किस्से ऐसे सुन्नमे में आतें हैं जिनके बारे में सुन कर आप हैरान रह जातें हैं. दरअसल बीते दिन एक ऐसा किस्सा सामने आया जिसके बारे में सुन कर आपके पैरों तले जमीन खिसक जाएगी. सिविल अस्पताल में शराबी बाप अपनी चार वर्षीय बच्ची को अस्पताल के जच्चा-बच्चा वार्ड में छोड़कर फरार होने वाले बाप को पुलिस नहीं ढूढ पाई, हां थाना 4 की पुलिस ने बच्ची के नाना को ढूढ लिया और उसे अस्पताल बुलाकर बच्ची भावना को उनके हवाले कर दिया। गौर हो कि रुप लाल निवासी गांव भट्टियां गोराया अपनी बच्ची को बिमारी की हालत में अस्पताल शनिवार दाखिल करवाने के बाद अगले दिन फरार हो गया था, मामले की शिकायत पुलिस के पास पहुंची। थाना 4 के इंस्पैक्टर प्रेम कुमार ने बताया कि इस तरह बच्ची को छोडऩा गलत है कम से कम इंसानियत को इंसान में होनी चाहिए। शिकायत न मिलने के कारण पुलिस ने आरोपी पिता के खिलाफ कोई कारवाही नहीं की है। वहीं फोन पर संर्पक करने पर बच्ची की मां रेखा ने बताया कि उसके पहले पति की मौत हो चुकी है और पहला पति एक बेटी को छोड़ कर दुनिया से चला गया। इसके बाद उसके परिजनों ने उसकी दूसरी शादी रूप लाल से करवाई, रूप लाल लैबर का काम करता है। धीरे-धीरे वह शराब का आदी होने लगा और उस पर अत्याचार तक करने लगे। अपनी घरस्ती खराब न हो, इसलिए वह पति के जुल्म सहती रही। पीड़ित रेखा ने बताया कि जनवरी माह को उसकी छोटी बेटी भावना बिमार हो गई, उसे उपचार के लिए गढा रोड पिम्स अस्पताल दाखिल करवाया। अस्पताल में पति शराब पीकर आता और उससे विवाद करने के साथ मारपीट तक करता। एक दिन तो पति ने उसे अस्पताल से यह कहकर निकाल दिया कि वह बच्ची का खुद पालन-पोषण करेगा। इसके बाद से वह करतारपुर न्यू चंदन नगर अपने पिता के पास रहने लगी। रेखा के मुताबिक उसके पिता के नंबर पर फोन पुलिस ने किया और बताया कि भावना को बिमारी हालत में सिविल अस्पताल पति छोड़ कर चला गया और फाइल पर उनक नंबर लिख गया। अब दोनों बेटियों का वह पालन-पोषण कैसे करेगी?
आये दिन कई किस्से ऐसे सुन्नमे में आतें हैं जिनके बारे में सुन कर आप हैरान रह जातें हैं. दरअसल बीते दिन एक ऐसा किस्सा सामने आया जिसके बारे में सुन कर आपके पैरों तले जमीन खिसक जाएगी. सिविल अस्पताल में शराबी बाप अपनी चार वर्षीय बच्ची को अस्पताल के जच्चा-बच्चा वार्ड में छोड़कर फरार होने वाले बाप को पुलिस नहीं ढूढ पाई, हां थाना चार की पुलिस ने बच्ची के नाना को ढूढ लिया और उसे अस्पताल बुलाकर बच्ची भावना को उनके हवाले कर दिया। गौर हो कि रुप लाल निवासी गांव भट्टियां गोराया अपनी बच्ची को बिमारी की हालत में अस्पताल शनिवार दाखिल करवाने के बाद अगले दिन फरार हो गया था, मामले की शिकायत पुलिस के पास पहुंची। थाना चार के इंस्पैक्टर प्रेम कुमार ने बताया कि इस तरह बच्ची को छोडऩा गलत है कम से कम इंसानियत को इंसान में होनी चाहिए। शिकायत न मिलने के कारण पुलिस ने आरोपी पिता के खिलाफ कोई कारवाही नहीं की है। वहीं फोन पर संर्पक करने पर बच्ची की मां रेखा ने बताया कि उसके पहले पति की मौत हो चुकी है और पहला पति एक बेटी को छोड़ कर दुनिया से चला गया। इसके बाद उसके परिजनों ने उसकी दूसरी शादी रूप लाल से करवाई, रूप लाल लैबर का काम करता है। धीरे-धीरे वह शराब का आदी होने लगा और उस पर अत्याचार तक करने लगे। अपनी घरस्ती खराब न हो, इसलिए वह पति के जुल्म सहती रही। पीड़ित रेखा ने बताया कि जनवरी माह को उसकी छोटी बेटी भावना बिमार हो गई, उसे उपचार के लिए गढा रोड पिम्स अस्पताल दाखिल करवाया। अस्पताल में पति शराब पीकर आता और उससे विवाद करने के साथ मारपीट तक करता। एक दिन तो पति ने उसे अस्पताल से यह कहकर निकाल दिया कि वह बच्ची का खुद पालन-पोषण करेगा। इसके बाद से वह करतारपुर न्यू चंदन नगर अपने पिता के पास रहने लगी। रेखा के मुताबिक उसके पिता के नंबर पर फोन पुलिस ने किया और बताया कि भावना को बिमारी हालत में सिविल अस्पताल पति छोड़ कर चला गया और फाइल पर उनक नंबर लिख गया। अब दोनों बेटियों का वह पालन-पोषण कैसे करेगी?
अपने विवादास्पद बयानों से सुर्खियों में रहने वाले त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब देब के एक नए बयान में फिर राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। उनके बयान से आम आदमी पार्टी इतनी नाराज है कि उसने त्रिपुरा के मुख्यमंत्री का इस्तीफा ही मांग लिया है। कैलाश गहलोत ने बिप्लब देब के बयान पर नाराजगी जताई और हरियाणा के डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला से पूछा है कि, 'क्या वह जाट नहीं हैं? अगर आप जाट हैं तो क्या आप मंदबुद्धि हैं, क्या आप पागल हैं? अगर आप पागल हैं, मंदबुद्धि हैं तो आप डिप्टी सीएम कैसे बने? अगर आप मंदबुद्धि नहीं है, पागल नहींं है तो बिप्लब देब का इस्तीफा मांगिए। पूरी आम आदमी पार्टी बिप्लब देब के इस्तीफे की मांग करती है कि अगर किसी सीएम की ऐसी सोच है तो उसे सीएम रहने का कोई हक नहीं है। मैं भाजपा की सीनियर लीडरशिप से भी पूछना चाहता हूं कि आपने बिप्लब देब के खिलाफ क्या कार्रवाई की है। ' दरअसल बिप्लब देब ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि, 'अगर हम पंजाब के लोगों की बात करें तो हम कहते हैं, वह एक पंजाबी हैं, एक सरदार हैं! सरदार किसी से नहीं डरता। वे बहुत मजबूत होते हैं लेकिन दिमाग कम होता है। कोई भी उन्हें ताकत से नहीं बल्कि प्यार और स्नेह के साथ जीत सकता है। ' उन्होंने आगे कहा था, 'मैं आपको हरियाणा के जाटों के बारे में बताता हूं। तो लोग जाटों के बारे में कैसे बात करते हैं. . . वे कहते हैं. . . जाट कम बुद्धिमान हैं, लेकिन शारीरिक रूप से स्वस्थ हैं। यदि आप एक जाट को चुनौती देते हैं, तो वह अपनी बंदूक अपने घर से बाहर ले आएगा। ' दोनों समुदायों से माफी मांगते हुए बिप्लब देब ने कहा कि, अगर मेरे बयान से किसी की भावनाओं को ठेस पहुंची है तो उसके लिए मैं व्यक्तिगत रूप से क्षमाप्रार्थी हूं। मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर कहा, 'अगरतला प्रेस क्लब में आयोजित एक कार्यक्रम में मैंने अपने पंजाबी और जाट भाइयों के बारे मे कुछ लोगों की सोच का जिक्र किया था। मेरी धारणा किसी भी समाज को ठेस पहुंचाने की नहीं थी। मुझे पंजाबी और जाट दोनों ही समुदायों पर गर्व है। मैं खुद भी काफी समय तक इनके बीच रहा हूं। ' दोनों समुदाय से माफी मांगते हुए बिप्लब देब ने कहा, मेरे कई अभिन्न मित्र इसी समाज से आते हैं। अगर मेरे बयान से किसी की भावनाओं को ठेस पहुंची है तो उसके लिए मैं व्यक्तिगत रूप से क्षमाप्रार्थी हूं। देश के स्वतंत्रता संग्राम में पंजाबी और जाट समुदाय के योगदान को मैं सदैव नमन करता हूं और भारत को आगे बढ़ाने में इन दोनों समुदायों ने जो भूमिका निभाई है उसपर प्रश्न खड़ा करने की कभी मैं सोच भी नहीं सकता हूं। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
अपने विवादास्पद बयानों से सुर्खियों में रहने वाले त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब देब के एक नए बयान में फिर राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। उनके बयान से आम आदमी पार्टी इतनी नाराज है कि उसने त्रिपुरा के मुख्यमंत्री का इस्तीफा ही मांग लिया है। कैलाश गहलोत ने बिप्लब देब के बयान पर नाराजगी जताई और हरियाणा के डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला से पूछा है कि, 'क्या वह जाट नहीं हैं? अगर आप जाट हैं तो क्या आप मंदबुद्धि हैं, क्या आप पागल हैं? अगर आप पागल हैं, मंदबुद्धि हैं तो आप डिप्टी सीएम कैसे बने? अगर आप मंदबुद्धि नहीं है, पागल नहींं है तो बिप्लब देब का इस्तीफा मांगिए। पूरी आम आदमी पार्टी बिप्लब देब के इस्तीफे की मांग करती है कि अगर किसी सीएम की ऐसी सोच है तो उसे सीएम रहने का कोई हक नहीं है। मैं भाजपा की सीनियर लीडरशिप से भी पूछना चाहता हूं कि आपने बिप्लब देब के खिलाफ क्या कार्रवाई की है। ' दरअसल बिप्लब देब ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि, 'अगर हम पंजाब के लोगों की बात करें तो हम कहते हैं, वह एक पंजाबी हैं, एक सरदार हैं! सरदार किसी से नहीं डरता। वे बहुत मजबूत होते हैं लेकिन दिमाग कम होता है। कोई भी उन्हें ताकत से नहीं बल्कि प्यार और स्नेह के साथ जीत सकता है। ' उन्होंने आगे कहा था, 'मैं आपको हरियाणा के जाटों के बारे में बताता हूं। तो लोग जाटों के बारे में कैसे बात करते हैं. . . वे कहते हैं. . . जाट कम बुद्धिमान हैं, लेकिन शारीरिक रूप से स्वस्थ हैं। यदि आप एक जाट को चुनौती देते हैं, तो वह अपनी बंदूक अपने घर से बाहर ले आएगा। ' दोनों समुदायों से माफी मांगते हुए बिप्लब देब ने कहा कि, अगर मेरे बयान से किसी की भावनाओं को ठेस पहुंची है तो उसके लिए मैं व्यक्तिगत रूप से क्षमाप्रार्थी हूं। मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर कहा, 'अगरतला प्रेस क्लब में आयोजित एक कार्यक्रम में मैंने अपने पंजाबी और जाट भाइयों के बारे मे कुछ लोगों की सोच का जिक्र किया था। मेरी धारणा किसी भी समाज को ठेस पहुंचाने की नहीं थी। मुझे पंजाबी और जाट दोनों ही समुदायों पर गर्व है। मैं खुद भी काफी समय तक इनके बीच रहा हूं। ' दोनों समुदाय से माफी मांगते हुए बिप्लब देब ने कहा, मेरे कई अभिन्न मित्र इसी समाज से आते हैं। अगर मेरे बयान से किसी की भावनाओं को ठेस पहुंची है तो उसके लिए मैं व्यक्तिगत रूप से क्षमाप्रार्थी हूं। देश के स्वतंत्रता संग्राम में पंजाबी और जाट समुदाय के योगदान को मैं सदैव नमन करता हूं और भारत को आगे बढ़ाने में इन दोनों समुदायों ने जो भूमिका निभाई है उसपर प्रश्न खड़ा करने की कभी मैं सोच भी नहीं सकता हूं। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
आइए आपको बताते हैं कि जिस ऐप के लिए आपने पैसे दे दिए हैं उसे कैसे दूसरे एंड्रायड फ़ोन पर मुफ्त में इस्तेमाल किया जा सकता है। सबसे पहले दूसरे फ़ोन की सेटिंग्स में जाइए, उसके बाद उसमें एकाउंट्स चुनिए और 'ऐड अकाउंट' पर टैप कीजिए। उसके बाद एकाउंट टाइप में गूगल चुनिए और उसके बाद अपने एकाउंट की जानकारी वहाँ दीजिए। अपने एकाउंट के लिए दोनों फ़ोन के 'सिंक' को डिसएबल कर दीजिए ताकि आपके ईमेल दूसरे के इनबॉक्स में नहीं जाएँ। उसके बाद एकाउंट्स पेज पर वापस आइए और जहाँ पर गूगल चुना था उस पर टैप कीजिए और जो एकाउंट बनाया था उसको वहां ऐड कर दीजिए। आपके फ़ोन में दिखते हैं। अगर आप चाहें तो एक ऐसा गूगल एकाउंट बना सकते हैं जो पेड ऐप्स के लिए हो, उसको इस्तेमाल करके आप सभी ऐप डाउनलोड करके अपने दोस्तों और रिश्तेदारों में शेयर कर सकते हैं।
आइए आपको बताते हैं कि जिस ऐप के लिए आपने पैसे दे दिए हैं उसे कैसे दूसरे एंड्रायड फ़ोन पर मुफ्त में इस्तेमाल किया जा सकता है। सबसे पहले दूसरे फ़ोन की सेटिंग्स में जाइए, उसके बाद उसमें एकाउंट्स चुनिए और 'ऐड अकाउंट' पर टैप कीजिए। उसके बाद एकाउंट टाइप में गूगल चुनिए और उसके बाद अपने एकाउंट की जानकारी वहाँ दीजिए। अपने एकाउंट के लिए दोनों फ़ोन के 'सिंक' को डिसएबल कर दीजिए ताकि आपके ईमेल दूसरे के इनबॉक्स में नहीं जाएँ। उसके बाद एकाउंट्स पेज पर वापस आइए और जहाँ पर गूगल चुना था उस पर टैप कीजिए और जो एकाउंट बनाया था उसको वहां ऐड कर दीजिए। आपके फ़ोन में दिखते हैं। अगर आप चाहें तो एक ऐसा गूगल एकाउंट बना सकते हैं जो पेड ऐप्स के लिए हो, उसको इस्तेमाल करके आप सभी ऐप डाउनलोड करके अपने दोस्तों और रिश्तेदारों में शेयर कर सकते हैं।
अमरावती/प्रतिनिधि दि. 10 - केंद्र सरकार की ओर से 18 से 44 आयूू समुह के नागरिकों को ऑनलाइन पंजीयन किये बगैर कोविड का टीका नहीं दिया जा रहा है. लेकिन दिनभर पंजीयन के लिये कोशिश करने के बावजूद भी युवाओं का सिर दर्द बढ़ते जा रहा है. दिनभर लगातार प्रयास करने के बाद युवकों को ऑनलाइन टीका पंजीयन प्रक्रिया कब शुरु होती है, यह ध्यान में नहीं आने से परेशानियां बढ़ रही है. यहां बता दें कि ऑनलाइन टीकाकरण पंजीयन प्रक्रिया कोविन व स्वास्थ्य सेतु अॅप पर शुरु है. लेकिन पंजीयन कराते समय युवकों को अनेक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. इसके अलावा दिन में एक ही स्लॉट दिये जाने से अगली तारीख की बुकिंग नहीं होने से दिनभर प्रयास करने वाले युवाओं को परेशान होना पड़ रहा है. टीकाकरण की ऑनलाइन प्रक्रिया पूरा करने के बाद भी प्रत्यक्ष में टीका पाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है. ऑनलाइन पंजीयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्वास्थ्य केंद्र में कतार में खड़े रहकर पंजीयन किये जाने के सबूत भी दिखाने पड़ रहे हैं. ऑनलाइन बुकिंग करते समय दिनभर मोबाइल लेकर बैठे रहने से युवकों में नाराजगी देखने मिल रही है. वहीं कुछ युवक ऑनलाइन में गड़बड़ियां होने की बात भी कह रहे हैं. शहर में कोविड टीकाकरण की सुविधा निजी अस्पतालों में उपलब्ध करायी जाये, जिससे युवकों को पैसे भरकर टीका लगवाने का मौका मिल सके. वहीं सरकारी स्वास्थ्य विभाग का तनाव भी कम होगा. इसके अलावा वरिष्ठ नागरिकों को भी बड़े पैमाने पर टीकाकरण केंद्र पर आने वाली दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा. इसलिए निजी अस्पताल में टीकाकरण सुविधा उपलब्ध करायी जाये. आम नागरिकों की सुविधा के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया शुरु की गई है. वहीं ऑनलाइन पंजीयन भी आवश्यक है. जिले में सभी स्थलों के टीकाकरण केंद्र बुक होने की नजारा दिखाई दे रहा है. फिर टीकाकरण कैसे किया जा रहा है? यह सवाल भी उठ रहा है. टीकाकरण के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन हो चुका है. लेकिन अनेक दिनों से बुकिंग होने की बात सामने आ रही है. हर रोज बुकिंग दिखाई दे रही है. लेकिन यह बुकिंग कब होती है? यह पता नहीं चल पा रहा है. इसलिए संबंधित विभाग ने बुकिंग के लिए युवाओं को मार्गदर्शन करना चाहिए.
अमरावती/प्रतिनिधि दि. दस - केंद्र सरकार की ओर से अट्ठारह से चौंतालीस आयूू समुह के नागरिकों को ऑनलाइन पंजीयन किये बगैर कोविड का टीका नहीं दिया जा रहा है. लेकिन दिनभर पंजीयन के लिये कोशिश करने के बावजूद भी युवाओं का सिर दर्द बढ़ते जा रहा है. दिनभर लगातार प्रयास करने के बाद युवकों को ऑनलाइन टीका पंजीयन प्रक्रिया कब शुरु होती है, यह ध्यान में नहीं आने से परेशानियां बढ़ रही है. यहां बता दें कि ऑनलाइन टीकाकरण पंजीयन प्रक्रिया कोविन व स्वास्थ्य सेतु अॅप पर शुरु है. लेकिन पंजीयन कराते समय युवकों को अनेक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. इसके अलावा दिन में एक ही स्लॉट दिये जाने से अगली तारीख की बुकिंग नहीं होने से दिनभर प्रयास करने वाले युवाओं को परेशान होना पड़ रहा है. टीकाकरण की ऑनलाइन प्रक्रिया पूरा करने के बाद भी प्रत्यक्ष में टीका पाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है. ऑनलाइन पंजीयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्वास्थ्य केंद्र में कतार में खड़े रहकर पंजीयन किये जाने के सबूत भी दिखाने पड़ रहे हैं. ऑनलाइन बुकिंग करते समय दिनभर मोबाइल लेकर बैठे रहने से युवकों में नाराजगी देखने मिल रही है. वहीं कुछ युवक ऑनलाइन में गड़बड़ियां होने की बात भी कह रहे हैं. शहर में कोविड टीकाकरण की सुविधा निजी अस्पतालों में उपलब्ध करायी जाये, जिससे युवकों को पैसे भरकर टीका लगवाने का मौका मिल सके. वहीं सरकारी स्वास्थ्य विभाग का तनाव भी कम होगा. इसके अलावा वरिष्ठ नागरिकों को भी बड़े पैमाने पर टीकाकरण केंद्र पर आने वाली दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा. इसलिए निजी अस्पताल में टीकाकरण सुविधा उपलब्ध करायी जाये. आम नागरिकों की सुविधा के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया शुरु की गई है. वहीं ऑनलाइन पंजीयन भी आवश्यक है. जिले में सभी स्थलों के टीकाकरण केंद्र बुक होने की नजारा दिखाई दे रहा है. फिर टीकाकरण कैसे किया जा रहा है? यह सवाल भी उठ रहा है. टीकाकरण के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन हो चुका है. लेकिन अनेक दिनों से बुकिंग होने की बात सामने आ रही है. हर रोज बुकिंग दिखाई दे रही है. लेकिन यह बुकिंग कब होती है? यह पता नहीं चल पा रहा है. इसलिए संबंधित विभाग ने बुकिंग के लिए युवाओं को मार्गदर्शन करना चाहिए.