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अफगानिस्तान में तालिबान के आंतक के खिलाफ अमेरिका फिर से जंग की तैयारी कर रहा है। इसके संकेत अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन ने दिए हैं। पीटीआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, पेंटागन सचिव जॉन किर्बी ने कहा है कि अमेरिका को हक है कि वह अफगानिस्तान में ड्रोन स्ट्राइक जारी रखे। उन्होंने आगे कहा कि हमें अधिकार है कि हम आतंक से लड़ाई लड़ते हुए अपने राष्ट्र को सुरक्षित करें। Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.
अफगानिस्तान में तालिबान के आंतक के खिलाफ अमेरिका फिर से जंग की तैयारी कर रहा है। इसके संकेत अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन ने दिए हैं। पीटीआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, पेंटागन सचिव जॉन किर्बी ने कहा है कि अमेरिका को हक है कि वह अफगानिस्तान में ड्रोन स्ट्राइक जारी रखे। उन्होंने आगे कहा कि हमें अधिकार है कि हम आतंक से लड़ाई लड़ते हुए अपने राष्ट्र को सुरक्षित करें। Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.
नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। बवाना (Bawana) इलाके में एक नशेड़ी कार चालक ने सड़क किनारे खड़ी एक बोलेरो कार मेें जबर्दस्त टक्कर मारी। पास ही खड़े दो ट्रैफिक पुलिसवाले इसकी चपेट में आ गए। दोनों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी की पहचान मोहित के रूप में हुई है। वह कांडली सोनीपत का रहने वाला है। पुलिस ने आरोपी की कार को भी जब्त कर लिया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। जानकारी के मुताबिक, घायल पुलिसकर्मियों की पहचान कांस्टेबल धर्मेन्द्र और प्रदीप के रूप में हुई है। शाम चार बजकर 55 मिनट पर दोनों अपनी टीम के साथ कृष्णा गोशाला, कंझावला रोड पर ट्रैफिक को सुचारु रूप से चलाने की कोशिश कर रहे थे। उनकी तेज रफ्तार से चलने वाले दोपहिया वाहन और कारों पर नजर थी। दोनों सड़क के किनारे खड़े हुए थे। तभी मोहित अपनी सेंट्रो कार से काफी तेजी से चलाता हुआ आया। उसने पहले सड़क किनारे खड़ी बुलेरो कार में पीछे से जोर से टक्कर मारी। जिसकी चपेट में दोनों कांस्टेबल आ गए। पब्लिक और अन्य ट्रैफिक पुलिस कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर मोहित को कार से उतारा। जाच में पता चला की वे दोनों काफी ज्यादा मात्रा मे शराब का सेवन कर रखा था। उससे सड़क पर खड़ा तक नहीं पा रहा था। दोनों कांस्टेबल को तुरंत नजदीक के अस्पताल में भर्ती कराया गया। पीसीआर को हादसे की जानकारी दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मोहित का मेडिकल कराया। जिसमें उसका काफी ज्यादा मात्रा में शराब पीना आया। पुलिस ने मोहित के परिवार वालों को हादसे की जानकारी दी।
नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। बवाना इलाके में एक नशेड़ी कार चालक ने सड़क किनारे खड़ी एक बोलेरो कार मेें जबर्दस्त टक्कर मारी। पास ही खड़े दो ट्रैफिक पुलिसवाले इसकी चपेट में आ गए। दोनों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी की पहचान मोहित के रूप में हुई है। वह कांडली सोनीपत का रहने वाला है। पुलिस ने आरोपी की कार को भी जब्त कर लिया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। जानकारी के मुताबिक, घायल पुलिसकर्मियों की पहचान कांस्टेबल धर्मेन्द्र और प्रदीप के रूप में हुई है। शाम चार बजकर पचपन मिनट पर दोनों अपनी टीम के साथ कृष्णा गोशाला, कंझावला रोड पर ट्रैफिक को सुचारु रूप से चलाने की कोशिश कर रहे थे। उनकी तेज रफ्तार से चलने वाले दोपहिया वाहन और कारों पर नजर थी। दोनों सड़क के किनारे खड़े हुए थे। तभी मोहित अपनी सेंट्रो कार से काफी तेजी से चलाता हुआ आया। उसने पहले सड़क किनारे खड़ी बुलेरो कार में पीछे से जोर से टक्कर मारी। जिसकी चपेट में दोनों कांस्टेबल आ गए। पब्लिक और अन्य ट्रैफिक पुलिस कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर मोहित को कार से उतारा। जाच में पता चला की वे दोनों काफी ज्यादा मात्रा मे शराब का सेवन कर रखा था। उससे सड़क पर खड़ा तक नहीं पा रहा था। दोनों कांस्टेबल को तुरंत नजदीक के अस्पताल में भर्ती कराया गया। पीसीआर को हादसे की जानकारी दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मोहित का मेडिकल कराया। जिसमें उसका काफी ज्यादा मात्रा में शराब पीना आया। पुलिस ने मोहित के परिवार वालों को हादसे की जानकारी दी।
चेन्नईः बॉलीवुड और दक्षिण भारतीय फिल्मों के जाने माने अभिनेता धनुष की जबरदस्त एक्टिंग का हर कोई फैन हो चुका है। लेकिन अब वह अपनी दोस्ती को लेकर भी चर्चा में आ गए हैं। दरअसल हाल ही में धनुष ने बताया है कि वह और निर्देशक आनंद एल. राय एकदूसरे के लिए अपना जिंदगी भी खतरे में डाल सकते हैं। गौरतलब है कि दोनों अगले साल एक बार फिर साथ काम करने के लिए तैयार हैं। इससे पहले ये दोनों फिल्म 'रांझणा' में भी साथ काम कर चुके हैं। धनुष ने कहा, "अगर वेत्रिमारन के साथ मेरा रिश्ता विश्वास पर बना है तो आनंद संग प्यार के साथ। हम दोनों में एकदूसरे के लिए गहरा प्यार है। हम एक दूसरे के लिए जीवन को खतरे में डाल सकते हैं। आनंद मेरे लिए बड़े भाई की तरह हैं। " उन्होंने कहा, "हमारी परियोजना अगले वर्ष के अंत तक आएगी। जैसे ही आनंद, शाहरुख खान के साथ अपनी फिल्म पूरी कर लेते हैं, हम इसके लिए आगे जाएंगे। " धनुष वर्तमान में 'एनाई नोक्की पायुम थोटा', 'मारी 2' और 'वाडा चेन्नई' जैसी फिल्मों के साथ व्यस्त हैं। (राम रहीम को सजा दिए जाने पर शाहरुख खान दी ये प्रतिक्रिया)
चेन्नईः बॉलीवुड और दक्षिण भारतीय फिल्मों के जाने माने अभिनेता धनुष की जबरदस्त एक्टिंग का हर कोई फैन हो चुका है। लेकिन अब वह अपनी दोस्ती को लेकर भी चर्चा में आ गए हैं। दरअसल हाल ही में धनुष ने बताया है कि वह और निर्देशक आनंद एल. राय एकदूसरे के लिए अपना जिंदगी भी खतरे में डाल सकते हैं। गौरतलब है कि दोनों अगले साल एक बार फिर साथ काम करने के लिए तैयार हैं। इससे पहले ये दोनों फिल्म 'रांझणा' में भी साथ काम कर चुके हैं। धनुष ने कहा, "अगर वेत्रिमारन के साथ मेरा रिश्ता विश्वास पर बना है तो आनंद संग प्यार के साथ। हम दोनों में एकदूसरे के लिए गहरा प्यार है। हम एक दूसरे के लिए जीवन को खतरे में डाल सकते हैं। आनंद मेरे लिए बड़े भाई की तरह हैं। " उन्होंने कहा, "हमारी परियोजना अगले वर्ष के अंत तक आएगी। जैसे ही आनंद, शाहरुख खान के साथ अपनी फिल्म पूरी कर लेते हैं, हम इसके लिए आगे जाएंगे। " धनुष वर्तमान में 'एनाई नोक्की पायुम थोटा', 'मारी दो' और 'वाडा चेन्नई' जैसी फिल्मों के साथ व्यस्त हैं।
मॉस्को (आईएएनएस)। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने क्रेमलिन में अपने चीनी समकक्ष शी जिंगपिंग के साथ मुलाकात के दौरान कहा कि उनका देश हर समय बातचीत के लिए तैयार है। पुतिन ने सोमवार को चीन की यूक्रेन संकट को हल करने की योजना के जवाब में यह टिप्पणी की। बीबीसी ने बताया कि फरवरी में चीन द्वारा रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के उद्देश्य से योजना जारी की गई थी। हालांकि, अमेरिका ने इसके खिलाफ आगाह किया था। ब्रिटिश ब्रॉडकास्टर ने अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन के हवाले से कहा, चीन या किसी अन्य देश द्वारा समर्थित रूस द्वारा अपनी शर्तों पर युद्ध को रोकने के लिए दुनिया को किसी भी सामरिक कदम से मूर्ख नहीं बनना चाहिए। रूसी सरकारी समाचार एजेंसी आरआईए नोवोस्ती के मुताबिक, सोमवार को दोनों नेताओं के बीच साढ़े चार घंटे तक बातचीत चली। औपचारिक बैठक मंगलवार को होने की उम्मीद है। सीएनएन ने बताया कि पुतिन को अपना प्रिय मित्र कहने वाले शी ने अपने रूसी समकक्ष की प्रशंसा करते हुए कहा, उनके नेतृत्व में देश में उल्लेखनीय विकास हुआ है। शिन्हुआ समाचार एजेंसी ने बताया, दोनों पक्षों ने यूक्रेन मुद्दे पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
मॉस्को । रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने क्रेमलिन में अपने चीनी समकक्ष शी जिंगपिंग के साथ मुलाकात के दौरान कहा कि उनका देश हर समय बातचीत के लिए तैयार है। पुतिन ने सोमवार को चीन की यूक्रेन संकट को हल करने की योजना के जवाब में यह टिप्पणी की। बीबीसी ने बताया कि फरवरी में चीन द्वारा रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के उद्देश्य से योजना जारी की गई थी। हालांकि, अमेरिका ने इसके खिलाफ आगाह किया था। ब्रिटिश ब्रॉडकास्टर ने अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन के हवाले से कहा, चीन या किसी अन्य देश द्वारा समर्थित रूस द्वारा अपनी शर्तों पर युद्ध को रोकने के लिए दुनिया को किसी भी सामरिक कदम से मूर्ख नहीं बनना चाहिए। रूसी सरकारी समाचार एजेंसी आरआईए नोवोस्ती के मुताबिक, सोमवार को दोनों नेताओं के बीच साढ़े चार घंटे तक बातचीत चली। औपचारिक बैठक मंगलवार को होने की उम्मीद है। सीएनएन ने बताया कि पुतिन को अपना प्रिय मित्र कहने वाले शी ने अपने रूसी समकक्ष की प्रशंसा करते हुए कहा, उनके नेतृत्व में देश में उल्लेखनीय विकास हुआ है। शिन्हुआ समाचार एजेंसी ने बताया, दोनों पक्षों ने यूक्रेन मुद्दे पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
Dhanbad : धनबाद (Dhanbad) एसएसएलएनटी महिला कॉलेज 10 नवंबर को प्लेसमेंट ड्राइव के तहत कैंपस प्लेसमेंट शिविर का आयोजन किया गया. प्लेसमेंट ड्राइव का आयोजन टूकेन रिसर्च एंड डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड ने भाग लिया. ड्राइव में 17 छात्राओं ने हिस्सा लिया. कॉलेज की प्राचार्या डॉ शर्मिला रानी ने बताया कि यह पहले राउंड की काउंसिलिंग थी. दूसरे राउंड की काउंसलिंग के बाद अंतिम रिजल्ट जारी किया जाएगा. बता दें कि प्लेसमेंट ड्राइव का आयोजन कॉमर्स विभाग के सहायक प्रध्यापक प्रो विमल मिंज की देखरेख में संपन्न हुआ.
Dhanbad : धनबाद एसएसएलएनटी महिला कॉलेज दस नवंबर को प्लेसमेंट ड्राइव के तहत कैंपस प्लेसमेंट शिविर का आयोजन किया गया. प्लेसमेंट ड्राइव का आयोजन टूकेन रिसर्च एंड डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड ने भाग लिया. ड्राइव में सत्रह छात्राओं ने हिस्सा लिया. कॉलेज की प्राचार्या डॉ शर्मिला रानी ने बताया कि यह पहले राउंड की काउंसिलिंग थी. दूसरे राउंड की काउंसलिंग के बाद अंतिम रिजल्ट जारी किया जाएगा. बता दें कि प्लेसमेंट ड्राइव का आयोजन कॉमर्स विभाग के सहायक प्रध्यापक प्रो विमल मिंज की देखरेख में संपन्न हुआ.
मीन राशि वालों के लिए अभी तक तनाव का समय था। मान-सम्मान में कमी थी लेकिन अब बृहस्पति के मार्गी होने पर समय बदलेगा। मान-सम्मान में वृद्धि होगी। भाग्योदय होने के प्रबल योग हैं। पैसे का लाभ भी हो सकता है।
मीन राशि वालों के लिए अभी तक तनाव का समय था। मान-सम्मान में कमी थी लेकिन अब बृहस्पति के मार्गी होने पर समय बदलेगा। मान-सम्मान में वृद्धि होगी। भाग्योदय होने के प्रबल योग हैं। पैसे का लाभ भी हो सकता है।
बुकर पुरस्कार जीतने वाली उपन्यासकार किरण देसाई 1971 में भारत में पैदा हुईं और उनकी पढ़ाई भारत, इंग्लैंड और अमरीका में हुई. किरण जानी-मानी लेखिका अनिता देसाई की सुपुत्री हैं. अनिता देसाई को भी तीन बार बुकर पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया, लेकिन एक भी बार पुरस्कार उनकी झोली में नहीं आ सका. किरण ने अपना पहला उपन्यास 'हलाबालू इन द ग्वावा ऑरचर्ड' लिखा और इसके लिए बेट्टी ट्रस्ट पुरस्कार जीता. 'द इनहैरिटेंस ऑफ़ लॉस' उनका दूसरा उपन्यास है जिसके लिए उन्हें बुकर पुरस्कार दिया जा रहा है. दिलचस्प बात ये है कि किरण फ़िलहाल न्यूयॉर्क में रचनात्मक लेखन की पढ़ाई कर रही हैं और उन्हें यह उपन्यास लिखने में आठ साल का लंबा समय लगा. पैंतीस वर्षीय किरण देसाई का उपन्यास कैंब्रिज में पढ़े हुए एक अवकाशप्राप्त न्यायाधीश के जीवन पर आधारित है, जो हिमालय क्षेत्र में कंचनजंघा पर्वत की तलहटी में एक टूटे-फूटे मकान में रहता है. यहाँ शांति की खोज में आए न्यायाधीश का मन उस वक़्त अशांत हो जाता है जब उनकी अनाथ पोती वहाँ आ धमकती है. किरण बुकर पुरस्कार जीतने वाली दूसरी सबसे कम उम्र की महिला हैं. इससे पूर्व भारत की ही अरुंधती राय ने 1997 में 36 साल की उम्र में यह सम्मान हासिल किया था. बेन ओकेरी बुकर सम्मान पाने वाले सबसे युवा लेखक हैं. उन्होंने 1991 में यह पुरस्कार हासिल किया था और उस वक़्त उनकी उम्र सिर्फ़ 32 साल थी.
बुकर पुरस्कार जीतने वाली उपन्यासकार किरण देसाई एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में भारत में पैदा हुईं और उनकी पढ़ाई भारत, इंग्लैंड और अमरीका में हुई. किरण जानी-मानी लेखिका अनिता देसाई की सुपुत्री हैं. अनिता देसाई को भी तीन बार बुकर पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया, लेकिन एक भी बार पुरस्कार उनकी झोली में नहीं आ सका. किरण ने अपना पहला उपन्यास 'हलाबालू इन द ग्वावा ऑरचर्ड' लिखा और इसके लिए बेट्टी ट्रस्ट पुरस्कार जीता. 'द इनहैरिटेंस ऑफ़ लॉस' उनका दूसरा उपन्यास है जिसके लिए उन्हें बुकर पुरस्कार दिया जा रहा है. दिलचस्प बात ये है कि किरण फ़िलहाल न्यूयॉर्क में रचनात्मक लेखन की पढ़ाई कर रही हैं और उन्हें यह उपन्यास लिखने में आठ साल का लंबा समय लगा. पैंतीस वर्षीय किरण देसाई का उपन्यास कैंब्रिज में पढ़े हुए एक अवकाशप्राप्त न्यायाधीश के जीवन पर आधारित है, जो हिमालय क्षेत्र में कंचनजंघा पर्वत की तलहटी में एक टूटे-फूटे मकान में रहता है. यहाँ शांति की खोज में आए न्यायाधीश का मन उस वक़्त अशांत हो जाता है जब उनकी अनाथ पोती वहाँ आ धमकती है. किरण बुकर पुरस्कार जीतने वाली दूसरी सबसे कम उम्र की महिला हैं. इससे पूर्व भारत की ही अरुंधती राय ने एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे में छत्तीस साल की उम्र में यह सम्मान हासिल किया था. बेन ओकेरी बुकर सम्मान पाने वाले सबसे युवा लेखक हैं. उन्होंने एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे में यह पुरस्कार हासिल किया था और उस वक़्त उनकी उम्र सिर्फ़ बत्तीस साल थी.
सीएम ने अपने भाषण में आगे कहा कि इसी दुर्ग में भगवान नीलकंठेश्वर का मंदिर है। आदिकाल से भगवान भोलेनाथ की हम लोग पूजा करते हैं। ऐसे धार्मिक ऐतिहासिक और पौराणिक स्थल की अब उपेक्षा नहीं होगी। इसका भरपूर विकास किया जाएगा। सीएम योगी ने कहा कि पर्यटन विभाग इसमें होटल आदि की व्यवस्था कराएं और स्थानीय युवकों को गाइड के रूप में प्रशिक्षित किया जाए।
सीएम ने अपने भाषण में आगे कहा कि इसी दुर्ग में भगवान नीलकंठेश्वर का मंदिर है। आदिकाल से भगवान भोलेनाथ की हम लोग पूजा करते हैं। ऐसे धार्मिक ऐतिहासिक और पौराणिक स्थल की अब उपेक्षा नहीं होगी। इसका भरपूर विकास किया जाएगा। सीएम योगी ने कहा कि पर्यटन विभाग इसमें होटल आदि की व्यवस्था कराएं और स्थानीय युवकों को गाइड के रूप में प्रशिक्षित किया जाए।
उत्तर प्रदेश के मथुरा (Mathura) से भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सांसद और अभिनेत्री हेमा मालिनी ने गुरुवार को लोकसभा में डॉक्टरों पर हुए हमले (Attacks on Doctors) का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि मेरी चिंता देश भर के विभिन्न अस्पतालों में डॉक्टरों पर हुए भयानक हमलों को लेकर है. 17 जून को लगभग 8 लाख डॉक्टर अखिल भारतीय हड़ताल (All India Strike) पर चले गए. उन्होंने कहा कि एक मरीज के जीवन को बचाने के लिए डॉक्टर बहुत तनावपूर्ण स्थिति से गुजरता है. डॉक्टरों को लेकर हेमा मालिनी ने कहा कि वे हमारे सुपरहीरो (Superhero) और राष्ट्रीय संपत्ति हैं. हम भगवान पर भरोसा करते हैं और उतना ही भरोसा डॉक्टरों पर भी करते हैं. उन्होंने कहा कि मेडिकल समुदाय की सुरक्षा के लिए बहुत सख्त कानून होना चाहिए. उन्होंने कहा कि पेयजल के लिए कई नई परियोजनाएं पाइपलाइन में हैं. बता दें कि कुछ दिनों पहले हेमा मालिनी ने लोकसभा में कहा था कि पीएम मोदी के मजबूत नेतृत्व में देश में तेजी से बदलाव हो रहा है, 'न्यू इंडिया' का सपना देश के सवा सौ करोड़ लोगों की आंखों से देखा जा रहा है और आज किसी में दम नहीं है कि वह भारत को कोई आंख दिखाए.
उत्तर प्रदेश के मथुरा से भारतीय जनता पार्टी की सांसद और अभिनेत्री हेमा मालिनी ने गुरुवार को लोकसभा में डॉक्टरों पर हुए हमले का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि मेरी चिंता देश भर के विभिन्न अस्पतालों में डॉक्टरों पर हुए भयानक हमलों को लेकर है. सत्रह जून को लगभग आठ लाख डॉक्टर अखिल भारतीय हड़ताल पर चले गए. उन्होंने कहा कि एक मरीज के जीवन को बचाने के लिए डॉक्टर बहुत तनावपूर्ण स्थिति से गुजरता है. डॉक्टरों को लेकर हेमा मालिनी ने कहा कि वे हमारे सुपरहीरो और राष्ट्रीय संपत्ति हैं. हम भगवान पर भरोसा करते हैं और उतना ही भरोसा डॉक्टरों पर भी करते हैं. उन्होंने कहा कि मेडिकल समुदाय की सुरक्षा के लिए बहुत सख्त कानून होना चाहिए. उन्होंने कहा कि पेयजल के लिए कई नई परियोजनाएं पाइपलाइन में हैं. बता दें कि कुछ दिनों पहले हेमा मालिनी ने लोकसभा में कहा था कि पीएम मोदी के मजबूत नेतृत्व में देश में तेजी से बदलाव हो रहा है, 'न्यू इंडिया' का सपना देश के सवा सौ करोड़ लोगों की आंखों से देखा जा रहा है और आज किसी में दम नहीं है कि वह भारत को कोई आंख दिखाए.
इस्राईली सेना ने प्रतिरोधकर्ताओं के मीज़ाइल हमलों के मुक़ाबले में आयरन डोम एंटी मीज़ाइल सिस्टम की विफलता को एक बार फिर स्वीकार कर लिया है। फ़िलिस्तीन के प्रतिरोधकर्ता बलों ने सोमवार को ग़ज़्ज़ा पर ज़ायोनी शासन के हवाई हमले के जवाब में ज़ायोनी कालोनी सेदीरूत पर तीन मीज़ाइल फ़ायर किए। फ़िलिस्तीनियों के इस मीज़ाइल हमले में कई ज़ायोनियों के घायल होने की सूचना है। इस दौरान ज़ायोनी सेना के प्रवक्ता ओवीख़ाई अदरई ने एक बार फिर फ़िलिस्तीनियों के मीज़ाइल हमलों को रोकने में आयरन डोन की विफल को स्वीकार किया है। इस्राईली सेना के प्रवक्ता ने कहा कि पूर्वोत्तरी ग़ज़्ज़ा से ज़ायोन कालोनियों पर तीन मीज़ाइल फ़ायर किए गये जिनमें से एक मीज़ाइल आयरन डोन के काम करने के बावजूद सेदीरूत पर गिरा। इस्राईली सेना के प्रवक्ता ने कहा कि फ़िलिस्तनियों के इस मीज़ाइल हमले में कम से कम दो ज़ायोनी घायल हो गये जबकि बहुत से भयभीत हो गये जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। ज्ञात रहे कि इधर कुछ सप्ताह से अतिग्रहणकारी ज़ायोनी शासन आए दिन ग़ज़्ज़ा पट्टी पर हवाई हमले या गोलाबारी कर देता है। ज़ायोनी शासन के हवाई हमलों और गोलाबारी में दर्जनों फ़िलिस्तीनी शहीद और घायल हो चुके हैं। (AK)
इस्राईली सेना ने प्रतिरोधकर्ताओं के मीज़ाइल हमलों के मुक़ाबले में आयरन डोम एंटी मीज़ाइल सिस्टम की विफलता को एक बार फिर स्वीकार कर लिया है। फ़िलिस्तीन के प्रतिरोधकर्ता बलों ने सोमवार को ग़ज़्ज़ा पर ज़ायोनी शासन के हवाई हमले के जवाब में ज़ायोनी कालोनी सेदीरूत पर तीन मीज़ाइल फ़ायर किए। फ़िलिस्तीनियों के इस मीज़ाइल हमले में कई ज़ायोनियों के घायल होने की सूचना है। इस दौरान ज़ायोनी सेना के प्रवक्ता ओवीख़ाई अदरई ने एक बार फिर फ़िलिस्तीनियों के मीज़ाइल हमलों को रोकने में आयरन डोन की विफल को स्वीकार किया है। इस्राईली सेना के प्रवक्ता ने कहा कि पूर्वोत्तरी ग़ज़्ज़ा से ज़ायोन कालोनियों पर तीन मीज़ाइल फ़ायर किए गये जिनमें से एक मीज़ाइल आयरन डोन के काम करने के बावजूद सेदीरूत पर गिरा। इस्राईली सेना के प्रवक्ता ने कहा कि फ़िलिस्तनियों के इस मीज़ाइल हमले में कम से कम दो ज़ायोनी घायल हो गये जबकि बहुत से भयभीत हो गये जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। ज्ञात रहे कि इधर कुछ सप्ताह से अतिग्रहणकारी ज़ायोनी शासन आए दिन ग़ज़्ज़ा पट्टी पर हवाई हमले या गोलाबारी कर देता है। ज़ायोनी शासन के हवाई हमलों और गोलाबारी में दर्जनों फ़िलिस्तीनी शहीद और घायल हो चुके हैं।
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के प्रमुख इमरान खान पर लगाए उनकी पूर्व पत्नी रेहम खान ने एक से एक संगीन आरोप लगाए हैं, जानिए क्या हैं वो आरोप? पाकिस्तान में आम चुनाव के लिए वोटिंग हो चुकी है और जल्द ही कौन वहां की सत्ता पर राज करेगा, इसका फैसला हो जाएगा. पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग के साथ इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ भी ताल ठोंक रही है. लेकिन ऐन चुनावों से पहले इमरान खान की पूर्व पत्नी रेहम खान ने अपनी किताब के जरिए कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं. जानिए कि रेहम ने अपनी किताब के जरिए कौन कौन से आरोप लगाए. पाकिस्तान में नवाज शरीफ के भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलने वाले इमरान पर आरोप लगाते हुए रेहम ने लिखा कि उनके घर में आने वाली सब्जियां और दूसरे खाने के सामान के कभी पैसे नहीं दिए जाते थे. हमेशा चीज़ों को प्रभाव के बल पर फ्री में ही लाया जाता था. भ्रष्टाचार के और भी गंभीर आरोप लगाते हुए रेहम ने लिखा कि वो अपने मुख्यमंत्री परवेज खट्टक की सरकार में हो रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ किसी को आवाज़ नहीं उठाने देते. साथ ही सरकारी कामों को अपने प्रभाव से खास लोगों को दिलवाकर लाभ कमाते हैं. रेहम ने ये भी लिखा कि इमरान काले जादू में भी विश्वास रखते हैं. रेहम ने खुद इमरान को निर्वस्त्र होकर काले मसूर के पौधे को अपने शरीर पर रगड़ते देखा था. अपने दौर के कभी पाकिस्तान के बेहतरीन ऑलराउंडर रहे इमरान खान ड्रग्स के भी शिकार हैं. रेहम ने उन्हें बाथरूम में कोकीन लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था. इमरान के यौन व्यवहार पर भी रेहम ने अपने किताब रेहम खान में खुलकर लिखा. उन्होंने बताया कि इमरान के अपने करीबी दोस्त मोबी से समलैंगिक संबंध हैं. उन्होंने अपने बेडरूम में कई ऐसी चीज़ें देखीं, जो शक पैदा करती थीं. और पूछने पर इमरान हंस के टाल देते थे. कई मीडिया घरानों को इमरान अपने प्रभाव में रखते थे. उनके मीडिया में कई खास दोस्त थे. किताब के मुताबिक इनमें ताहिर ए खान और जफर सिद्दिकी का नाम शामिल है. रेहम ने ये सनसनीखेज आरोप भी लगाया कि उनका अपनी ही पार्टी की कई महिला नेताओं से संबंध है. रेहम का दावा है कि उन्होंने ऐसे मैसेजों को पढ़ा है, जो उनके संबंधों का खुलासा करते हैं. किताब के मुताबिक इमरान के पूर्व पत्नी जेमिमा से हुए बच्चों के अलावा कई अवैध संतानें हैं. रेहम के मुताबिक खुद इमरान ने माना है कि उनकी कई संतानें हैं. टायरन व्हाइट के अलावा उनके पांच और बच्चे हैं. इनमें सबसे बड़े की उम्र 34 साल है. PTI के मुख्यमंत्री परवेज खट्टक के बारे में भी रेहम ने किताब में खुलासा किया है. उन्होंने बताया कि वो नशे की लत के शिकार हैं. जब उन्होंने इमरान से इस बारे में पूछा तो उन्होंने हंसते हुए इसे माना. इमरान की पहली पत्नी जेमिमा गोल्डस्मिथ के बारे में भी रेहम ने कई सनसनीखेज खुलासे किए. उन्होंने बताया कि वो जेमिमा को शारीरिक रूप से प्रताड़ित करते थे. यहां तक कि जेमिमा को उनकी अवैध संतानों के बारे में पूरी जानकारी थी.
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के प्रमुख इमरान खान पर लगाए उनकी पूर्व पत्नी रेहम खान ने एक से एक संगीन आरोप लगाए हैं, जानिए क्या हैं वो आरोप? पाकिस्तान में आम चुनाव के लिए वोटिंग हो चुकी है और जल्द ही कौन वहां की सत्ता पर राज करेगा, इसका फैसला हो जाएगा. पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग के साथ इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ भी ताल ठोंक रही है. लेकिन ऐन चुनावों से पहले इमरान खान की पूर्व पत्नी रेहम खान ने अपनी किताब के जरिए कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं. जानिए कि रेहम ने अपनी किताब के जरिए कौन कौन से आरोप लगाए. पाकिस्तान में नवाज शरीफ के भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलने वाले इमरान पर आरोप लगाते हुए रेहम ने लिखा कि उनके घर में आने वाली सब्जियां और दूसरे खाने के सामान के कभी पैसे नहीं दिए जाते थे. हमेशा चीज़ों को प्रभाव के बल पर फ्री में ही लाया जाता था. भ्रष्टाचार के और भी गंभीर आरोप लगाते हुए रेहम ने लिखा कि वो अपने मुख्यमंत्री परवेज खट्टक की सरकार में हो रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ किसी को आवाज़ नहीं उठाने देते. साथ ही सरकारी कामों को अपने प्रभाव से खास लोगों को दिलवाकर लाभ कमाते हैं. रेहम ने ये भी लिखा कि इमरान काले जादू में भी विश्वास रखते हैं. रेहम ने खुद इमरान को निर्वस्त्र होकर काले मसूर के पौधे को अपने शरीर पर रगड़ते देखा था. अपने दौर के कभी पाकिस्तान के बेहतरीन ऑलराउंडर रहे इमरान खान ड्रग्स के भी शिकार हैं. रेहम ने उन्हें बाथरूम में कोकीन लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था. इमरान के यौन व्यवहार पर भी रेहम ने अपने किताब रेहम खान में खुलकर लिखा. उन्होंने बताया कि इमरान के अपने करीबी दोस्त मोबी से समलैंगिक संबंध हैं. उन्होंने अपने बेडरूम में कई ऐसी चीज़ें देखीं, जो शक पैदा करती थीं. और पूछने पर इमरान हंस के टाल देते थे. कई मीडिया घरानों को इमरान अपने प्रभाव में रखते थे. उनके मीडिया में कई खास दोस्त थे. किताब के मुताबिक इनमें ताहिर ए खान और जफर सिद्दिकी का नाम शामिल है. रेहम ने ये सनसनीखेज आरोप भी लगाया कि उनका अपनी ही पार्टी की कई महिला नेताओं से संबंध है. रेहम का दावा है कि उन्होंने ऐसे मैसेजों को पढ़ा है, जो उनके संबंधों का खुलासा करते हैं. किताब के मुताबिक इमरान के पूर्व पत्नी जेमिमा से हुए बच्चों के अलावा कई अवैध संतानें हैं. रेहम के मुताबिक खुद इमरान ने माना है कि उनकी कई संतानें हैं. टायरन व्हाइट के अलावा उनके पांच और बच्चे हैं. इनमें सबसे बड़े की उम्र चौंतीस साल है. PTI के मुख्यमंत्री परवेज खट्टक के बारे में भी रेहम ने किताब में खुलासा किया है. उन्होंने बताया कि वो नशे की लत के शिकार हैं. जब उन्होंने इमरान से इस बारे में पूछा तो उन्होंने हंसते हुए इसे माना. इमरान की पहली पत्नी जेमिमा गोल्डस्मिथ के बारे में भी रेहम ने कई सनसनीखेज खुलासे किए. उन्होंने बताया कि वो जेमिमा को शारीरिक रूप से प्रताड़ित करते थे. यहां तक कि जेमिमा को उनकी अवैध संतानों के बारे में पूरी जानकारी थी.
हल्दी एंटीसेप्टिक, एंटी-इंफ्लेमेट्री, एंटी-एजिंग व आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर होती है। आयुर्वेद के अनुसार, यह सेहत व स्किन के लिए बेहद फायदेमंद होती है। इसे एलोवेरा जेल, शहद, बेसन, मुल्तानी मिट्टी, चावल का आटा आदि में मिलाकर चेहरे पर लगा सकते हैं। यह स्किन को गहराई से पोषित करके उसे रिपेयर करने में मदद करती है। ऐसे में चेहरे पर पड़े दाग, धब्बे, पिंपल्स, झाइयां, सनटैन की परेशानी दूर होती है। साथ ही चेहरे पर गुलाबी निखार आने में मदद मिलती है। गर्मी का मौसम बस शुरु हो गया है। इस दौरान तेज धूप चेहरे पर पड़ने से स्किन संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वैसे तो इससे बचने के लिए कई लड़कियां अलग-अलग ब्यूटी प्रोडक्ट्स यूज करती है। मगर ये अधिक महंगे होते हैं। साथ ही इनमें कैमिकल होने से स्किन को नुकसान हो सकता है। ऐसे में आयुर्वेद द्वारा बताई घरेलू चीजों का इस्तेमाल करना बेस्ट ऑप्शन है। ये कोमलता से स्किन की सफाई करेंगे। ऐसे में चेहरा साफ, निखरा, मुलायम व जवां नजर आएगा।
हल्दी एंटीसेप्टिक, एंटी-इंफ्लेमेट्री, एंटी-एजिंग व आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर होती है। आयुर्वेद के अनुसार, यह सेहत व स्किन के लिए बेहद फायदेमंद होती है। इसे एलोवेरा जेल, शहद, बेसन, मुल्तानी मिट्टी, चावल का आटा आदि में मिलाकर चेहरे पर लगा सकते हैं। यह स्किन को गहराई से पोषित करके उसे रिपेयर करने में मदद करती है। ऐसे में चेहरे पर पड़े दाग, धब्बे, पिंपल्स, झाइयां, सनटैन की परेशानी दूर होती है। साथ ही चेहरे पर गुलाबी निखार आने में मदद मिलती है। गर्मी का मौसम बस शुरु हो गया है। इस दौरान तेज धूप चेहरे पर पड़ने से स्किन संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वैसे तो इससे बचने के लिए कई लड़कियां अलग-अलग ब्यूटी प्रोडक्ट्स यूज करती है। मगर ये अधिक महंगे होते हैं। साथ ही इनमें कैमिकल होने से स्किन को नुकसान हो सकता है। ऐसे में आयुर्वेद द्वारा बताई घरेलू चीजों का इस्तेमाल करना बेस्ट ऑप्शन है। ये कोमलता से स्किन की सफाई करेंगे। ऐसे में चेहरा साफ, निखरा, मुलायम व जवां नजर आएगा।
मंदसौर - मध्य प्रदेश के मंदसौर में किसानों पर हुई गोलीबारी की घटना की पहली बरसी पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के तीखे तेवर देखने को मिले। मंदसौर में किसानों की रैली को संबोधित करते हुए राहुल ने हमेशा की तरह मोदी पर जमकर निशाना तो साधा ही, इसी मौके पर उन्होंने मध्य प्रदेश में होने वाले चुनावों का बिगुल भी बजा दिया। कार्यक्रम में बोलते हुए राहुल ने एक बड़ा वादा भी कर डाला। उन्होंने मंच से लोगों से वादा किया कि जिस दिन मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आई, दस दिन के अंदर किसानों का कर्ज माफ कर दिया जाएगा। कार्यक्रम से पहले राहुल पुलिस फायरिंग में पिछले साल मारे गए लोगों के परिवार से मिले थे। मंच से उन्होंने परिवारों से वादा किया कि कांग्रेस की सरकार आने पर फायरिंग में मारे जाने वाले लोगों के परिवार को दस दिन के अंदर न्याय मिलेगा। उन्होंने बीजेपी सरकार पर आरोप लगाया कि बड़े उद्योगपतियों का लाखों करोड़ रुपए का कर्ज माफ हो जाता है, लेकिन किसानों का एक भी रुपया माफ नहीं होता। उन्होंने कहा कि शिवराज सरकार में किसान को मंडी में चेक मिलता है और बैंक में जाने पर रिश्वत ली जाती है। उन्होंने वादा किया कि कांग्रेस की सरकार आने पर किसानों को सीधा मंडी में पैसे दिए जाएंगे। उन्होंने हर जिला में फूड प्रोसेसिंग यूनिट खोलने और उनमें स्थानीय लोगों को रोजगार देने का वादा किया। इस सहारे चीन को कड़ी टक्कर दी जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि पीएम नरेंद्र मोदी ने लोगों से वादा किया था कि फसल का पूरा दाम मिलेगा, लेकिन उन्होंने धोखा किया। पीएम मोदी ने दो करोड़ युवाओं को हर साल रोजगार और 15 लाख रुपए बैंक अकाउंट में डालने का वादा किया था।
मंदसौर - मध्य प्रदेश के मंदसौर में किसानों पर हुई गोलीबारी की घटना की पहली बरसी पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के तीखे तेवर देखने को मिले। मंदसौर में किसानों की रैली को संबोधित करते हुए राहुल ने हमेशा की तरह मोदी पर जमकर निशाना तो साधा ही, इसी मौके पर उन्होंने मध्य प्रदेश में होने वाले चुनावों का बिगुल भी बजा दिया। कार्यक्रम में बोलते हुए राहुल ने एक बड़ा वादा भी कर डाला। उन्होंने मंच से लोगों से वादा किया कि जिस दिन मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आई, दस दिन के अंदर किसानों का कर्ज माफ कर दिया जाएगा। कार्यक्रम से पहले राहुल पुलिस फायरिंग में पिछले साल मारे गए लोगों के परिवार से मिले थे। मंच से उन्होंने परिवारों से वादा किया कि कांग्रेस की सरकार आने पर फायरिंग में मारे जाने वाले लोगों के परिवार को दस दिन के अंदर न्याय मिलेगा। उन्होंने बीजेपी सरकार पर आरोप लगाया कि बड़े उद्योगपतियों का लाखों करोड़ रुपए का कर्ज माफ हो जाता है, लेकिन किसानों का एक भी रुपया माफ नहीं होता। उन्होंने कहा कि शिवराज सरकार में किसान को मंडी में चेक मिलता है और बैंक में जाने पर रिश्वत ली जाती है। उन्होंने वादा किया कि कांग्रेस की सरकार आने पर किसानों को सीधा मंडी में पैसे दिए जाएंगे। उन्होंने हर जिला में फूड प्रोसेसिंग यूनिट खोलने और उनमें स्थानीय लोगों को रोजगार देने का वादा किया। इस सहारे चीन को कड़ी टक्कर दी जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि पीएम नरेंद्र मोदी ने लोगों से वादा किया था कि फसल का पूरा दाम मिलेगा, लेकिन उन्होंने धोखा किया। पीएम मोदी ने दो करोड़ युवाओं को हर साल रोजगार और पंद्रह लाख रुपए बैंक अकाउंट में डालने का वादा किया था।
सोलन - राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के अनुरूप रविवार को यहां विधिक जागरूकता वॉकथॉन का आयोजन किया गया। वॉकथॉन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सौजन्य से आयोजित की गई। जिला एवं सत्र न्यायाधीश सोलन भूपेश शर्मा ने वॉकथॉन को हरी झंडी दिखा कर रवाना किया। भूपेश शर्मा ने इस अवसर पर कहा कि वॉकथॉन का मुख्य उद्देश्य लोगों को विधिक साक्षरता, समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों को प्रदान की जाने वाली निःशुल्क कानूनी सहायता तथा मध्यस्तता के माध्यम से मामलों के निपटारे के विषय में लोगों को जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) के अंतर्गत दस दिवसीय अभियान 'कनेक्टिंग टू सर्व' आयोजित किया जा रहा है। यह अभियान नौ नवंबर को कानूनी सेवा दिवस के अवसर पर आरंभ किया गया था। इस अभियान के दौरान डोर-टू-डोर कार्यक्रम, कानूनी सहायता डेस्क, साइकिल और मोटरबाइक रैलियां, निबंध लेखन, स्पॉट पेंटिंग तथा स्कीट्स आदि पर जागरूकता शिविरों का आयोजन किया गया। वॉकथॉन में एलआर संस्थान सोलन, बाहरा विश्वविद्यालय वाकनाघाट, मानव भारती विश्वविद्यालय तथा शूलिनी विश्वविद्यालय सोलन के छात्रों ने भाग लिया।
सोलन - राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के अनुरूप रविवार को यहां विधिक जागरूकता वॉकथॉन का आयोजन किया गया। वॉकथॉन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सौजन्य से आयोजित की गई। जिला एवं सत्र न्यायाधीश सोलन भूपेश शर्मा ने वॉकथॉन को हरी झंडी दिखा कर रवाना किया। भूपेश शर्मा ने इस अवसर पर कहा कि वॉकथॉन का मुख्य उद्देश्य लोगों को विधिक साक्षरता, समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों को प्रदान की जाने वाली निःशुल्क कानूनी सहायता तथा मध्यस्तता के माध्यम से मामलों के निपटारे के विषय में लोगों को जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के अंतर्गत दस दिवसीय अभियान 'कनेक्टिंग टू सर्व' आयोजित किया जा रहा है। यह अभियान नौ नवंबर को कानूनी सेवा दिवस के अवसर पर आरंभ किया गया था। इस अभियान के दौरान डोर-टू-डोर कार्यक्रम, कानूनी सहायता डेस्क, साइकिल और मोटरबाइक रैलियां, निबंध लेखन, स्पॉट पेंटिंग तथा स्कीट्स आदि पर जागरूकता शिविरों का आयोजन किया गया। वॉकथॉन में एलआर संस्थान सोलन, बाहरा विश्वविद्यालय वाकनाघाट, मानव भारती विश्वविद्यालय तथा शूलिनी विश्वविद्यालय सोलन के छात्रों ने भाग लिया।
सिद्धा० - अहा ! मित्र समिद्धार्थक आप ही आ गए। ( बढ़कर) कहो मित्र ! क्षेम कुशल तो है ? ( दोनों गले से मिलते हैं ) समि० - भला ! यहाँ कुशल कहाँ कि तुम्हारे ऐसा मित्र बहुत दिन पीछे घर भी आया तो बिना मिले फिर चला गया ! सिद्धा० - मित्र ! क्षमा करो। मुझको देखते ही आर्य चाणक्य ने आज्ञा दी कि इस प्रिय वृत्तांत को अभी चंद्रमा सदश प्रकाशित शोभावाले परम प्रिय महाराज प्रियदर्शन से जाकर कहो। मैं उसी समय महाराज के पास चला गया और उनसे निवेदन करके यह सब पुरस्कार पाकर तुमसे मिलने को तुम्हारे घर अभी जाता ही था । समि० - मित्र ! जो सुनने के योग्य हो तो महाराज प्रियदर्शन से जो प्रिय वृत्तांत कहा है वह हम भी सुनें । सिद्धा० - मित्र ! तुमसे भी कोई बात छिपी है ! सुनो । आर्य चाणक्य की नीति से मोहित मति होकर उस नष्ट मलयकेतु ने राक्षस को दूर कर दिया और चित्रवर्मादिक पाँचो प्रबल राजों को मरवा डाला । यह देखते ही और सब राजे अपने प्राण और राज्य का संशय समझकर उसको छोड़कर सेना सहित अपने-अपने देश चले गए। जब शत्रु ऐसी निर्बल अवस्था में हुआ, तो भद्रभट, पुरुषदत्त, हिंगुरात, बलगुप्त, राजसेन, भागुरायण, रोहिताक्ष, विजयवर्मा इत्यादि लोगों ने मलयकेतु को कैद कर लिया । समि० - मित्र ! लोग तो यह जानते हैं कि भद्रभट इत्यादि लोग महाराज चंद्रश्री को छोड़कर मलयकेतु से मिल गए; तो क्या कुकवियों के नाटक की भाँति इसके मुख में और तथा निवर्हण में और बात है ? सिद्धा० - वयस्य ! सुनो, जैसे दैव की गति नहीं जानी जाती वैसे ही आर्य चाणक्य की जिस नीति की भी गति नहीं जानी जाती उसको नमस्कार है । समि०-हॉ ! कहो, तब क्या हुआ ? सिद्धा० तब इधर से सब सामग्री लेकर आर्य चाणक्य बाहर निकले और विपक्ष के शेष राजाओं को निःशेष करके बर्बर लोगों की सब सामग्री लूट ली । समि० - तो वह सब अब कहाँ हैं ? सिद्धा० - वह देखो । स्रवत गंडमद गरब गज, नदत मेघ अनुहार । चाबुक भय चितवत चपल, खड़े अस्व बहु द्वार ॥ समि० -- अच्छा, यह सब जाने दो। यह कहो कि सब लोगों के सामने इतना अनादर पाकर फिर भी आर्य चाणक्य उसी मंत्री के काम को क्यों करते हैं ? सिद्धा० - मित्र ! तुम अब तक निरे सीधे साधे बने हो । अरे, अमात्य राक्षस भी आर्य चाणक्य की जिन चालों को नहीं समझ सकते उनको हम-तुम क्या समझेंगे ! समि० ० - वयस्य । अमात्य राक्षस अब कहाँ है ? सिद्धा० - उस प्रलय कोलाहल के बढ़ने के समय मलयकेतु की सेना से निकलकर उंदुर नामक चर के साथ कुसुमपुर ही की ओर आते हैं, यह आर्य चाणक्य को समाचार मिला है । समि० - मित्र ! नंदराज्य के फिर स्थापन की प्रतिज्ञा करके स्वनाम-तुल्य पराक्रम अमात्य राक्षस, उस काम को पूरा किए बिना फिर कैसे कुसुमपुर आते हैं ? सिद्धा० -हम सोचते है कि चंदनदास के स्नेह से । समि०-- ठीक है, चंदनदास के स्नेह ही से। किंतु तुम सोचते हो कि चंदनदास के प्राण बचेंगे ? सिद्धा० - कहाँ उस दीन के प्राण बचेंगे ? हमीं दोनो को वधस्थान में ले जाकर उसको मारना पड़ेगा । समि० - ( क्रोध से ) क्या आर्य चाणक्य के पास कोई घातक नहीं है कि ऐसा नीच काम हम लोग करें ? सिद्धा० - मित्र ! ऐसा कौन है जिसको इस जीवलोक में रहना हो और वह आर्य चाणक्य की आज्ञा न माने ? चलो, हम
सिद्धाशून्य - अहा ! मित्र समिद्धार्थक आप ही आ गए। कहो मित्र ! क्षेम कुशल तो है ? समिशून्य - भला ! यहाँ कुशल कहाँ कि तुम्हारे ऐसा मित्र बहुत दिन पीछे घर भी आया तो बिना मिले फिर चला गया ! सिद्धाशून्य - मित्र ! क्षमा करो। मुझको देखते ही आर्य चाणक्य ने आज्ञा दी कि इस प्रिय वृत्तांत को अभी चंद्रमा सदश प्रकाशित शोभावाले परम प्रिय महाराज प्रियदर्शन से जाकर कहो। मैं उसी समय महाराज के पास चला गया और उनसे निवेदन करके यह सब पुरस्कार पाकर तुमसे मिलने को तुम्हारे घर अभी जाता ही था । समिशून्य - मित्र ! जो सुनने के योग्य हो तो महाराज प्रियदर्शन से जो प्रिय वृत्तांत कहा है वह हम भी सुनें । सिद्धाशून्य - मित्र ! तुमसे भी कोई बात छिपी है ! सुनो । आर्य चाणक्य की नीति से मोहित मति होकर उस नष्ट मलयकेतु ने राक्षस को दूर कर दिया और चित्रवर्मादिक पाँचो प्रबल राजों को मरवा डाला । यह देखते ही और सब राजे अपने प्राण और राज्य का संशय समझकर उसको छोड़कर सेना सहित अपने-अपने देश चले गए। जब शत्रु ऐसी निर्बल अवस्था में हुआ, तो भद्रभट, पुरुषदत्त, हिंगुरात, बलगुप्त, राजसेन, भागुरायण, रोहिताक्ष, विजयवर्मा इत्यादि लोगों ने मलयकेतु को कैद कर लिया । समिशून्य - मित्र ! लोग तो यह जानते हैं कि भद्रभट इत्यादि लोग महाराज चंद्रश्री को छोड़कर मलयकेतु से मिल गए; तो क्या कुकवियों के नाटक की भाँति इसके मुख में और तथा निवर्हण में और बात है ? सिद्धाशून्य - वयस्य ! सुनो, जैसे दैव की गति नहीं जानी जाती वैसे ही आर्य चाणक्य की जिस नीति की भी गति नहीं जानी जाती उसको नमस्कार है । समिशून्य-हॉ ! कहो, तब क्या हुआ ? सिद्धाशून्य तब इधर से सब सामग्री लेकर आर्य चाणक्य बाहर निकले और विपक्ष के शेष राजाओं को निःशेष करके बर्बर लोगों की सब सामग्री लूट ली । समिशून्य - तो वह सब अब कहाँ हैं ? सिद्धाशून्य - वह देखो । स्रवत गंडमद गरब गज, नदत मेघ अनुहार । चाबुक भय चितवत चपल, खड़े अस्व बहु द्वार ॥ समिशून्य -- अच्छा, यह सब जाने दो। यह कहो कि सब लोगों के सामने इतना अनादर पाकर फिर भी आर्य चाणक्य उसी मंत्री के काम को क्यों करते हैं ? सिद्धाशून्य - मित्र ! तुम अब तक निरे सीधे साधे बने हो । अरे, अमात्य राक्षस भी आर्य चाणक्य की जिन चालों को नहीं समझ सकते उनको हम-तुम क्या समझेंगे ! समिशून्य शून्य - वयस्य । अमात्य राक्षस अब कहाँ है ? सिद्धाशून्य - उस प्रलय कोलाहल के बढ़ने के समय मलयकेतु की सेना से निकलकर उंदुर नामक चर के साथ कुसुमपुर ही की ओर आते हैं, यह आर्य चाणक्य को समाचार मिला है । समिशून्य - मित्र ! नंदराज्य के फिर स्थापन की प्रतिज्ञा करके स्वनाम-तुल्य पराक्रम अमात्य राक्षस, उस काम को पूरा किए बिना फिर कैसे कुसुमपुर आते हैं ? सिद्धाशून्य -हम सोचते है कि चंदनदास के स्नेह से । समिशून्य-- ठीक है, चंदनदास के स्नेह ही से। किंतु तुम सोचते हो कि चंदनदास के प्राण बचेंगे ? सिद्धाशून्य - कहाँ उस दीन के प्राण बचेंगे ? हमीं दोनो को वधस्थान में ले जाकर उसको मारना पड़ेगा । समिशून्य - क्या आर्य चाणक्य के पास कोई घातक नहीं है कि ऐसा नीच काम हम लोग करें ? सिद्धाशून्य - मित्र ! ऐसा कौन है जिसको इस जीवलोक में रहना हो और वह आर्य चाणक्य की आज्ञा न माने ? चलो, हम
जन्मसे लेकर मृत्यु - पर्यंत अलग-अलग दिशाओमे मनुष्यका विकास करनेकी जो रीति होती है, असके लिये भाषामे भिन्न-भिन्न शब्दोका अपयोग किया जाता है । अन सबमे हमारे सादे गुजराती शब्द 'केळवणी' ( तालीम ) मे जितना अर्थ समाया हुआ है, अतना आम तौर पर प्रचलित किसी भी दूसरे अंक शब्दमे नही है । यदि अिसके लिओ किसी संस्कृत शब्दका प्रयोग करना ही हो, तो वह 'सस्क्रिया' अथवा 'सस्करण ' हो सकता है । सस्क्रियाका अर्थ है, शरीर, मन, वाणी, आदत, भावना, बुद्धि वगैरामे पाओ जानेवाली किसी भी प्रकारकी अव्यवस्थाको व्यवस्थित बनानेकी क्रिया । मेरे खयालसे हिन्दुस्तानीका 'तालीम' शब्द 'केळवणी' शब्दके बहुत करीब है और असी शब्दका यहा प्रयोग किया जायगा । 'सस्करण', 'सस्क्रिया' अथवा 'सस्कृति' की बुनियादे अधिक अटपटा प्रयोग हो जायगा । 'केळवणी' या 'तालीम' शब्दका अिस तरह पूरा अर्थ अच्छी तरह ध्यानमे रखने की जरूरत है । और अिसलिओ, यह जान लेना ठीक होगा कि दूसरे शब्दोकी अपेक्षा अिस शब्दमे क्या अधिक अर्थ समाया हुआ है । अिस परसे यह समझमे आ जायगा कि हम शालामे और घरमे अपने बच्चोके लिओ जो मेहनत करते है, असमे अन्हे कितनी तालीम मिलती है और कितनी नही मिलती या नष्ट हो जाती है, तथा जो मिलती है वह कितने महत्त्वकी है और जो नही मिलती असका कितना महत्त्व तालीम की बुनियाद है । भिसके अलावा, तालीमका व्येय और तत्त्व समझने पर यह भी संभव है कि हमे तालीम देनेकी कोअी नयी दिशा मिल जाय । 'तालीम' के अर्थमे हम 'शिक्षा' शब्दका वार-वार अपयोग करते है। 'शिक्षा' का अर्थ है सिखाना । और साधारण तीर पर असका अर्थ 'नमी बात सिखाना' ही समझा जाता है। बच्चेको लिपिका ज्ञान स्वभावत नहीं होता। सौ या हजार वर्ष पहलेकी घटनाओकी जानकारी असे नही होती । दूसरे किसी देशमे गये विना वहाकी आवहवा, रखना वगैराकी कुछ जानकारी नही होती । अपने समाजमे वोली जानेवाली भाषाके सिवाय दूसरी कोअी भाषा वह समझ नहीं सकता। शालामे यह सव ज्ञान, यह सव जानकारी असे मिलती है । न जानी हुआी वातोकी जानकारी करानेका अर्थ है 'शिक्षा' देना । लेकिन 'तालीम' सिर्फ जैसी 'शिक्षा' देकर ही नही रुक जाती । क्योकि शिक्षा ज्यादातर परोक्ष होती है। किसी देशके वारेमें हम जो जानकारी प्राप्त करते है, वह सही है या गलत, जिसका निश्चय अस देशको देखकर किया हुआ नही होता । जिस भाषाका अर्थ करना हम जानते है, अस भाषाको बोलनेवाले लोगोके सपर्कमे हम नही आये होते । किसी देशके अितिहासकी जो वाते हम पढते है, अन वातोंके मूल आधार हमारे जाचे हुओ नही होते । जिस तरह शिक्षा द्वारा हमें जो कुछ ज्ञान मिलता है, वह परोक्ष होता है, प्रत्यक्ष नही । जिस परोक्ष ज्ञानकी परीक्षा करके जब हम असे सच्चा वनाते है, तव वह प्रत्यक्ष होता है। जब तक ज्ञान परोक्ष है, केवल सीखा हुआ है, तब तक असके वारेमे केवल श्रद्धा ही रखनी होती है । यह श्रद्धा गलत भी हो सकती है। जिस जानकारीके वारेमे केवल श्रद्धा होती है, वह वास्तवमे 'ज्ञान' अर्थात् 'जानी हुआ' या 'अनुभव की हुमी' वस्तु नही है। वह केवल मान्यता ही है। ज्ञान प्राप्त करनेके लिये प्राप्त जानकारीको प्रत्यक्ष करनेकी जिज्ञासा और आदत होनी चाहिये । प्रत्यक्ष करनेकी जिज्ञाना और आदत संस्कारका विषय है । यह संस्कार देना तालीमका अंक अग है । शिक्षक, माता-पिता या मित्र विद्यार्थीको अनेक बातोका परोक्ष ज्ञान या शिक्षा तो दे सकते है, परन्तु अनेक का प्रत्यक्ष ज्ञान नही दे सकते । वह तो अधिकतर विद्यार्थीको ही कभी न कभी स्वयं प्राप्त करना होता है । लेकिन अगर तालीम देनेवाला किसी भी ज्ञानको जानकारीको प्रत्यक्ष करनेकी जिज्ञासा विद्यार्थीमे अत्पन्न कर सके और असके वारेमे प्रयत्न करनेकी आदत डाल सके, तो कहा जायगा कि असने विद्यार्थीक हाथमे ज्ञान प्राप्त करनेकी अंक कुजी दे दी । तालीमका अर्थ केवल जानकारी देकर रुक जाना नहीं है, बल्कि ज्ञानकी अलगअलग कृजियां देना भी है। अिस दृष्टिमे 'शिक्षा' की अपेक्षा तालीम' शब्दमे अधिक अर्थ समाया हुआ है । मनुष्य अनेक वस्तुओका प्रत्यक्ष ज्ञान नही प्राप्त कर सकता ! कितनी ही वातोमे असे मान्यता और जानकारीसे ही सतोष मानना पडता है। अगर अितनी परोक्ष जानकारी भी न हो, तो असे जीवनमे नुकसान अठाना पडता है । अिसलिये यह न मान लेना चाहिये कि शिक्षा निरर्थक है । मनुष्य जिस परिस्थितिमे जीवन विताता हो, असका विचार करके यदि वह अचित मात्रामे भी प्रत्यक्ष ज्ञान प्राप्त करनेकी आदत न डाले, तो असकी सारी जानकारी निकम्मी पडिताओी बन जाती है, अस जानकारीसे स्वय असे या समाजको कोओ लाभ नही होता । वह केवल अतनी जानकारीका वोझ ढोनेवाला मजदूर ही बना रहता है । जिस हद तक वह जानकारी गलत होगी, अस हद तक वह गलत ज्ञान फैलानेका निमित्त भी बनेगी। अिसलिये शिक्षा द्वारा दी जानेवाली तालीममे तीन प्रकारके कार्यका समावेश होता है :तालीमको बुनियादें १ प्रत्यक्ष ज्ञान प्राप्त करनेकी जिज्ञासा पैदा करना और असकी आदत डालना; और असके लिये, २. वन सके अतने विषयोका प्रत्यक्ष ज्ञान देना; और असकी भूमिकाके रूपमें, ३. जितने विषयोकी शिक्षा ( जानकारी, परोक्ष ज्ञान ) देनेकी सुविधा हो, अतनोकी शिक्षा देना । थोड़ी शिक्षा पाये हुओ और गरीब माता-पिता या शिक्षक भी निश्चय कर लें, तो कमसे कम सामग्री द्वारा भी जिस प्रकारकी तालीम देनेमें समर्थ हो सकते है । जिसमें जिस सामग्रीकी जरूरत है, वह तिनी ही है : बालक और तालीम देनेवालेके पास अिन्द्रियां हो, जिज्ञासा हो और परिश्रम करनेकी आदत और वृत्ति हो । जिज्ञासाकी जागृतिका सस्कार ज्ञानका बीज है । असमें से परिश्रमी विद्यार्थीके हृदयमें ज्ञानका वृक्ष अपने-आप अग आता है । तालीम' और 'विनय ' अग्रेजीके 'अज्युकेशन' शब्द और हमारी माध्यमिक शालाओंके नाममें प्रयुक्त 'विनय' शब्दके अर्थमे थोडा ही भेद है । 'अज्युकेशन' शब्दका अर्थ 'बाहर (यानी अज्ञानके बाहर) ले जाना होता है । विनय' का अर्थ होता है 'आगे (यानी थोडे ज्ञानसे ज्यादा ज्ञानकी तरफ) ले जाना' । सामान्य भाषामे विनयका अर्थ हम अच्छा आचरण, सभ्यता या शिष्टाचार ही समझते है । और अंसी आशा रखते है कि विद्यासे विनय आयेगा । जिसका कारण यह है कि जिसे सभ्यताका शिष्टाचारका ज्ञान नही है, वह अभी अनघड है, क्योकि वह कम समझवाला है। असे विनय देनेसे, यानी असका ज्ञान बढानेसे, वह सुघड अर्थात् सभ्य और शिष्टाचारयुक्त बनता है । विनय देनेके फलस्वरूप असमें सुघडता आती है। जिस परसे सामान्य भाषामें विनयका अर्थ ही सुघडता या शिष्टता हो गया है । पिछले लेखमें हमने शिक्षाके अर्थकी जो छानबीन की, अस परसे यह नहीं मालूम होता कि असमे विनयका अर्थ समाया हुआ ही है। असका अर्थ केवल न जानी हुआ चीजकी जानकारी पाना ही होता है । असी लेखमे हमने यह भी देखा कि 'तालीम' शब्दमे शिक्षाके अलावा और क्या अर्थ समाया हुआ है । लेकिन 'तालीम' अतनेसे ही पूरी नही होती । 'तालीम' में 'विनय' का अर्थ भी आ जाता है। जो शिष्ट व्यवहार करना नही जानता, वह शिक्षित भले हो लेकिन हम असे तालीम पाया हुआ नही कहते । दूसरी तरफ, कोअी शिक्षित न होने पर भी अगर सभ्यता और शिष्टाचार जानता है, तो अंक हद तक वह तालीम पाया हुआ माना जाता है । जिसलिओ 'शिक्षा' के वजाय 'विनय' का अधिक महत्त्व है और 'तालीम' में अिन दोनोकी आगा रखी जाती है। लेकिन शिष्टाचार जाननेके वारेमें भी 'विनय' के बनिस्वत 'तालीम' मे ज्यादा अर्थ समाया हुआ है। कुछ लोग कैसे भी समाजमें अनभ्य भाषा बोलते नही हिचकिचाते । अन्हे सभ्य या असभ्य भाषाके वारेमे कोओ भान ही नही होता, अथवा अिस विषयमें वे निर्लज्ज होते है । जैसे लोगोको हम अनघड या अविनयी कहते हैं । कुछको असभ्य भाषा बोलनेकी आदत होती है और अपने वरावरीके लोगोमें असी भाषा वोलनेमे अन्हे आनन्द भी आता है। लेकिन स्त्रियोंके बीच या पूज्य लोगोंके बीच वे सभ्य भाषा बोलते हैं । वाह्य दृष्टिसे वे विनयी कहे जा सकते है । लेकिन यह नहीं कहा जा सकता कि अनकी वाणी 'तालीम पानी हुमी ' है । कुछ लोग जैसे होते है, जो घरमे या समाजमें असभ्य भाषा बोलते तो नही, किन्तु असभ्य शब्द अनके मनमे जरूर आ जाते है । और जब वे अत्यन्त संतप्त या दुखी होते है, तव वाणीमे अनका अपयोग करते भी देखे जाते है । जिनकी वाणीको साधारण तौर पर अविनयी या तालीम न पामी हुआ नहीं कहा जा सकता, फिर भी जितना तो कहना पडेगा कि असम्य वाणी न निकालनेके संबंधमे अनके मनने पूरी तालीम नही ली है। और जिस हद तक वह तालीम न पाओी हुआ ही कही जायगी । जिस परसे मालूम होगा कि तालीम सिर्फ विनय या बाहरी शिष्टाचार और वाणीमे ही पूरी नही हो जाती, वल्कि वह शिष्टव्यवहार और वाणीके बारेमे बुद्धिपूर्वक विचार करके भले चुरेका निश्चय करने और मुसके मुताबिक मन, वाणी और कर्मको व्यवस्थित करनेकी अपेक्षा रखती है ।
जन्मसे लेकर मृत्यु - पर्यंत अलग-अलग दिशाओमे मनुष्यका विकास करनेकी जो रीति होती है, असके लिये भाषामे भिन्न-भिन्न शब्दोका अपयोग किया जाता है । अन सबमे हमारे सादे गुजराती शब्द 'केळवणी' मे जितना अर्थ समाया हुआ है, अतना आम तौर पर प्रचलित किसी भी दूसरे अंक शब्दमे नही है । यदि अिसके लिओ किसी संस्कृत शब्दका प्रयोग करना ही हो, तो वह 'सस्क्रिया' अथवा 'सस्करण ' हो सकता है । सस्क्रियाका अर्थ है, शरीर, मन, वाणी, आदत, भावना, बुद्धि वगैरामे पाओ जानेवाली किसी भी प्रकारकी अव्यवस्थाको व्यवस्थित बनानेकी क्रिया । मेरे खयालसे हिन्दुस्तानीका 'तालीम' शब्द 'केळवणी' शब्दके बहुत करीब है और असी शब्दका यहा प्रयोग किया जायगा । 'सस्करण', 'सस्क्रिया' अथवा 'सस्कृति' की बुनियादे अधिक अटपटा प्रयोग हो जायगा । 'केळवणी' या 'तालीम' शब्दका अिस तरह पूरा अर्थ अच्छी तरह ध्यानमे रखने की जरूरत है । और अिसलिओ, यह जान लेना ठीक होगा कि दूसरे शब्दोकी अपेक्षा अिस शब्दमे क्या अधिक अर्थ समाया हुआ है । अिस परसे यह समझमे आ जायगा कि हम शालामे और घरमे अपने बच्चोके लिओ जो मेहनत करते है, असमे अन्हे कितनी तालीम मिलती है और कितनी नही मिलती या नष्ट हो जाती है, तथा जो मिलती है वह कितने महत्त्वकी है और जो नही मिलती असका कितना महत्त्व तालीम की बुनियाद है । भिसके अलावा, तालीमका व्येय और तत्त्व समझने पर यह भी संभव है कि हमे तालीम देनेकी कोअी नयी दिशा मिल जाय । 'तालीम' के अर्थमे हम 'शिक्षा' शब्दका वार-वार अपयोग करते है। 'शिक्षा' का अर्थ है सिखाना । और साधारण तीर पर असका अर्थ 'नमी बात सिखाना' ही समझा जाता है। बच्चेको लिपिका ज्ञान स्वभावत नहीं होता। सौ या हजार वर्ष पहलेकी घटनाओकी जानकारी असे नही होती । दूसरे किसी देशमे गये विना वहाकी आवहवा, रखना वगैराकी कुछ जानकारी नही होती । अपने समाजमे वोली जानेवाली भाषाके सिवाय दूसरी कोअी भाषा वह समझ नहीं सकता। शालामे यह सव ज्ञान, यह सव जानकारी असे मिलती है । न जानी हुआी वातोकी जानकारी करानेका अर्थ है 'शिक्षा' देना । लेकिन 'तालीम' सिर्फ जैसी 'शिक्षा' देकर ही नही रुक जाती । क्योकि शिक्षा ज्यादातर परोक्ष होती है। किसी देशके वारेमें हम जो जानकारी प्राप्त करते है, वह सही है या गलत, जिसका निश्चय अस देशको देखकर किया हुआ नही होता । जिस भाषाका अर्थ करना हम जानते है, अस भाषाको बोलनेवाले लोगोके सपर्कमे हम नही आये होते । किसी देशके अितिहासकी जो वाते हम पढते है, अन वातोंके मूल आधार हमारे जाचे हुओ नही होते । जिस तरह शिक्षा द्वारा हमें जो कुछ ज्ञान मिलता है, वह परोक्ष होता है, प्रत्यक्ष नही । जिस परोक्ष ज्ञानकी परीक्षा करके जब हम असे सच्चा वनाते है, तव वह प्रत्यक्ष होता है। जब तक ज्ञान परोक्ष है, केवल सीखा हुआ है, तब तक असके वारेमे केवल श्रद्धा ही रखनी होती है । यह श्रद्धा गलत भी हो सकती है। जिस जानकारीके वारेमे केवल श्रद्धा होती है, वह वास्तवमे 'ज्ञान' अर्थात् 'जानी हुआ' या 'अनुभव की हुमी' वस्तु नही है। वह केवल मान्यता ही है। ज्ञान प्राप्त करनेके लिये प्राप्त जानकारीको प्रत्यक्ष करनेकी जिज्ञासा और आदत होनी चाहिये । प्रत्यक्ष करनेकी जिज्ञाना और आदत संस्कारका विषय है । यह संस्कार देना तालीमका अंक अग है । शिक्षक, माता-पिता या मित्र विद्यार्थीको अनेक बातोका परोक्ष ज्ञान या शिक्षा तो दे सकते है, परन्तु अनेक का प्रत्यक्ष ज्ञान नही दे सकते । वह तो अधिकतर विद्यार्थीको ही कभी न कभी स्वयं प्राप्त करना होता है । लेकिन अगर तालीम देनेवाला किसी भी ज्ञानको जानकारीको प्रत्यक्ष करनेकी जिज्ञासा विद्यार्थीमे अत्पन्न कर सके और असके वारेमे प्रयत्न करनेकी आदत डाल सके, तो कहा जायगा कि असने विद्यार्थीक हाथमे ज्ञान प्राप्त करनेकी अंक कुजी दे दी । तालीमका अर्थ केवल जानकारी देकर रुक जाना नहीं है, बल्कि ज्ञानकी अलगअलग कृजियां देना भी है। अिस दृष्टिमे 'शिक्षा' की अपेक्षा तालीम' शब्दमे अधिक अर्थ समाया हुआ है । मनुष्य अनेक वस्तुओका प्रत्यक्ष ज्ञान नही प्राप्त कर सकता ! कितनी ही वातोमे असे मान्यता और जानकारीसे ही सतोष मानना पडता है। अगर अितनी परोक्ष जानकारी भी न हो, तो असे जीवनमे नुकसान अठाना पडता है । अिसलिये यह न मान लेना चाहिये कि शिक्षा निरर्थक है । मनुष्य जिस परिस्थितिमे जीवन विताता हो, असका विचार करके यदि वह अचित मात्रामे भी प्रत्यक्ष ज्ञान प्राप्त करनेकी आदत न डाले, तो असकी सारी जानकारी निकम्मी पडिताओी बन जाती है, अस जानकारीसे स्वय असे या समाजको कोओ लाभ नही होता । वह केवल अतनी जानकारीका वोझ ढोनेवाला मजदूर ही बना रहता है । जिस हद तक वह जानकारी गलत होगी, अस हद तक वह गलत ज्ञान फैलानेका निमित्त भी बनेगी। अिसलिये शिक्षा द्वारा दी जानेवाली तालीममे तीन प्रकारके कार्यका समावेश होता है :तालीमको बुनियादें एक प्रत्यक्ष ज्ञान प्राप्त करनेकी जिज्ञासा पैदा करना और असकी आदत डालना; और असके लिये, दो. वन सके अतने विषयोका प्रत्यक्ष ज्ञान देना; और असकी भूमिकाके रूपमें, तीन. जितने विषयोकी शिक्षा देनेकी सुविधा हो, अतनोकी शिक्षा देना । थोड़ी शिक्षा पाये हुओ और गरीब माता-पिता या शिक्षक भी निश्चय कर लें, तो कमसे कम सामग्री द्वारा भी जिस प्रकारकी तालीम देनेमें समर्थ हो सकते है । जिसमें जिस सामग्रीकी जरूरत है, वह तिनी ही है : बालक और तालीम देनेवालेके पास अिन्द्रियां हो, जिज्ञासा हो और परिश्रम करनेकी आदत और वृत्ति हो । जिज्ञासाकी जागृतिका सस्कार ज्ञानका बीज है । असमें से परिश्रमी विद्यार्थीके हृदयमें ज्ञानका वृक्ष अपने-आप अग आता है । तालीम' और 'विनय ' अग्रेजीके 'अज्युकेशन' शब्द और हमारी माध्यमिक शालाओंके नाममें प्रयुक्त 'विनय' शब्दके अर्थमे थोडा ही भेद है । 'अज्युकेशन' शब्दका अर्थ 'बाहर ले जाना होता है । विनय' का अर्थ होता है 'आगे ले जाना' । सामान्य भाषामे विनयका अर्थ हम अच्छा आचरण, सभ्यता या शिष्टाचार ही समझते है । और अंसी आशा रखते है कि विद्यासे विनय आयेगा । जिसका कारण यह है कि जिसे सभ्यताका शिष्टाचारका ज्ञान नही है, वह अभी अनघड है, क्योकि वह कम समझवाला है। असे विनय देनेसे, यानी असका ज्ञान बढानेसे, वह सुघड अर्थात् सभ्य और शिष्टाचारयुक्त बनता है । विनय देनेके फलस्वरूप असमें सुघडता आती है। जिस परसे सामान्य भाषामें विनयका अर्थ ही सुघडता या शिष्टता हो गया है । पिछले लेखमें हमने शिक्षाके अर्थकी जो छानबीन की, अस परसे यह नहीं मालूम होता कि असमे विनयका अर्थ समाया हुआ ही है। असका अर्थ केवल न जानी हुआ चीजकी जानकारी पाना ही होता है । असी लेखमे हमने यह भी देखा कि 'तालीम' शब्दमे शिक्षाके अलावा और क्या अर्थ समाया हुआ है । लेकिन 'तालीम' अतनेसे ही पूरी नही होती । 'तालीम' में 'विनय' का अर्थ भी आ जाता है। जो शिष्ट व्यवहार करना नही जानता, वह शिक्षित भले हो लेकिन हम असे तालीम पाया हुआ नही कहते । दूसरी तरफ, कोअी शिक्षित न होने पर भी अगर सभ्यता और शिष्टाचार जानता है, तो अंक हद तक वह तालीम पाया हुआ माना जाता है । जिसलिओ 'शिक्षा' के वजाय 'विनय' का अधिक महत्त्व है और 'तालीम' में अिन दोनोकी आगा रखी जाती है। लेकिन शिष्टाचार जाननेके वारेमें भी 'विनय' के बनिस्वत 'तालीम' मे ज्यादा अर्थ समाया हुआ है। कुछ लोग कैसे भी समाजमें अनभ्य भाषा बोलते नही हिचकिचाते । अन्हे सभ्य या असभ्य भाषाके वारेमे कोओ भान ही नही होता, अथवा अिस विषयमें वे निर्लज्ज होते है । जैसे लोगोको हम अनघड या अविनयी कहते हैं । कुछको असभ्य भाषा बोलनेकी आदत होती है और अपने वरावरीके लोगोमें असी भाषा वोलनेमे अन्हे आनन्द भी आता है। लेकिन स्त्रियोंके बीच या पूज्य लोगोंके बीच वे सभ्य भाषा बोलते हैं । वाह्य दृष्टिसे वे विनयी कहे जा सकते है । लेकिन यह नहीं कहा जा सकता कि अनकी वाणी 'तालीम पानी हुमी ' है । कुछ लोग जैसे होते है, जो घरमे या समाजमें असभ्य भाषा बोलते तो नही, किन्तु असभ्य शब्द अनके मनमे जरूर आ जाते है । और जब वे अत्यन्त संतप्त या दुखी होते है, तव वाणीमे अनका अपयोग करते भी देखे जाते है । जिनकी वाणीको साधारण तौर पर अविनयी या तालीम न पामी हुआ नहीं कहा जा सकता, फिर भी जितना तो कहना पडेगा कि असम्य वाणी न निकालनेके संबंधमे अनके मनने पूरी तालीम नही ली है। और जिस हद तक वह तालीम न पाओी हुआ ही कही जायगी । जिस परसे मालूम होगा कि तालीम सिर्फ विनय या बाहरी शिष्टाचार और वाणीमे ही पूरी नही हो जाती, वल्कि वह शिष्टव्यवहार और वाणीके बारेमे बुद्धिपूर्वक विचार करके भले चुरेका निश्चय करने और मुसके मुताबिक मन, वाणी और कर्मको व्यवस्थित करनेकी अपेक्षा रखती है ।
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। जावास्क्रिप्ट एक कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग भाषा है। यह एक स्क्रिप्टिंग भाषा है और मुख्यतः क्लाएंट साइड में वेबपेज के निर्माण में प्रयुक्त होती है। . सबसे पहले हिन्दी टाइप शायद वर्डस्टार (वर्जन III प्लस) जैसे एक शब्द संसाधक 'अक्षर' में आया। फिर विंडोज़ आया और पेजमेकर व वेंचुरा का समय आया। इस सारी यात्रा में कम्प्यूटर केवल प्रिटिंग की दुनिया की सहायता भर कर रहा था। यूनिकोड के आगमन एवं प्रसार के पश्चात हिन्दी कम्प्यूटिंग प्रिंटिंग तक सीमित न रहकर संगणन के विभिन्न पहलुओं तक पहुँच गयी। अब भाषायी संगणन के सभी क्षेत्रों में हिन्दी अपनी पहुँच बना रही है। हिन्दी कम्प्यूटिंग को वर्तमान स्थिति तक पहुँचाने में सरकार, अनेक संस्थाओं, समूहों एवं प्रोग्रामरों-डैवलपरों का योगदान रहा। . जावास्क्रिप्ट और हिन्दी कम्प्यूटिंग का इतिहास आम में 2 बातें हैं (यूनियनपीडिया में): सी (प्रोग्रामिंग भाषा), जावा। सी (प्रोग्रामिंग भाषा) "'सी"' प्रोग्रामन भाषा के रचयिताओं की लिखी पुस्तक का मुखपृष्ठ। सी (C) एक सामान्य उपयोग में आने वाली कम्प्यूटर की प्रोग्रामन भाषा है। इसका विकास डेनिस रिची ने बेल्ल टेलीफोन प्रयोगशाला में सन् १९७२ में किया था जिसका उद्देश्य यूनिक्स संचालन तंत्र का निर्माण करना था। इस समय (२००९ में) 'सी' पहली या दूसरी सर्वाधिक लोकप्रिय प्रोग्रामिंग भाषा है। यह भाषा विभिन्न सॉफ्टवेयर फ्लेटफार्मों पर बहुतायत में उपयोग की जाती है। शायद ही कोई कम्प्यूटर-प्लेटफार्म हो जिसके लिये सी का कम्पाइलर उपलब्ध न हो। सी++, जावा, सी#(C-Sharp) आदि अनेक प्रोग्रामन भाषाओं पर सी भाषा का गहरा प्रभाव देखा जा सकता है। . कोई विवरण नहीं। जावास्क्रिप्ट 3 संबंध है और हिन्दी कम्प्यूटिंग का इतिहास 92 है। वे आम 2 में है, समानता सूचकांक 2.11% है = 2 / (3 + 92)। यह लेख जावास्क्रिप्ट और हिन्दी कम्प्यूटिंग का इतिहास के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। जावास्क्रिप्ट एक कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग भाषा है। यह एक स्क्रिप्टिंग भाषा है और मुख्यतः क्लाएंट साइड में वेबपेज के निर्माण में प्रयुक्त होती है। . सबसे पहले हिन्दी टाइप शायद वर्डस्टार जैसे एक शब्द संसाधक 'अक्षर' में आया। फिर विंडोज़ आया और पेजमेकर व वेंचुरा का समय आया। इस सारी यात्रा में कम्प्यूटर केवल प्रिटिंग की दुनिया की सहायता भर कर रहा था। यूनिकोड के आगमन एवं प्रसार के पश्चात हिन्दी कम्प्यूटिंग प्रिंटिंग तक सीमित न रहकर संगणन के विभिन्न पहलुओं तक पहुँच गयी। अब भाषायी संगणन के सभी क्षेत्रों में हिन्दी अपनी पहुँच बना रही है। हिन्दी कम्प्यूटिंग को वर्तमान स्थिति तक पहुँचाने में सरकार, अनेक संस्थाओं, समूहों एवं प्रोग्रामरों-डैवलपरों का योगदान रहा। . जावास्क्रिप्ट और हिन्दी कम्प्यूटिंग का इतिहास आम में दो बातें हैं : सी , जावा। सी "'सी"' प्रोग्रामन भाषा के रचयिताओं की लिखी पुस्तक का मुखपृष्ठ। सी एक सामान्य उपयोग में आने वाली कम्प्यूटर की प्रोग्रामन भाषा है। इसका विकास डेनिस रिची ने बेल्ल टेलीफोन प्रयोगशाला में सन् एक हज़ार नौ सौ बहत्तर में किया था जिसका उद्देश्य यूनिक्स संचालन तंत्र का निर्माण करना था। इस समय 'सी' पहली या दूसरी सर्वाधिक लोकप्रिय प्रोग्रामिंग भाषा है। यह भाषा विभिन्न सॉफ्टवेयर फ्लेटफार्मों पर बहुतायत में उपयोग की जाती है। शायद ही कोई कम्प्यूटर-प्लेटफार्म हो जिसके लिये सी का कम्पाइलर उपलब्ध न हो। सी++, जावा, सी# आदि अनेक प्रोग्रामन भाषाओं पर सी भाषा का गहरा प्रभाव देखा जा सकता है। . कोई विवरण नहीं। जावास्क्रिप्ट तीन संबंध है और हिन्दी कम्प्यूटिंग का इतिहास बानवे है। वे आम दो में है, समानता सूचकांक दो.ग्यारह% है = दो / । यह लेख जावास्क्रिप्ट और हिन्दी कम्प्यूटिंग का इतिहास के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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News Desk :बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा ने भ्रष्टाचार को लेकर नीतीश सरकार को घेरा है और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा है। लखीसराय में मीडिया से मुखातिब होते हुए विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि बिहार के अंदर अब मुख्यमंत्री के पाप उजागर हो रहे हैं। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि पहले करोड़ों की लागत से बन रहा पुल भरभराकर गिरा और अब 1600 करोड़ रुपये का एंबुलेंस घोटाला हुआ है। ये घोटाला जेडीयू सांसद के बेटे की कंपनी पर लग रहा है, जिसका नाम पशुपतिनाथ डिस्ट्रीब्यूटर प्राइवेट लिमिटेड (PDPL) है। उन्होंने कहा कि इन एंबुलेंसों में लाइफ सपोर्ट सिस्टम नहीं है. . . एंबुलेंस में ऑक्सीजन नहीं बल्कि एक्सपायरी दवाएं हैं। ये सारी बातें ऑडिट में सामने आयी हैं। विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि उस वक्त इन्हें पहला टेंडर साढ़े 400 करोड़ का मिला। ऑडिट रिपोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट गये, फिर सुप्रीम कोर्ट से हाईकोर्ट को ट्रांसफर किया गया और फिर हाईकोर्ट ने इन्हें सचेत किया। उसके बावजूद भी इन्होंने पांच साल का टेंडर दे दिया। इसमें पूरा घालमेल है इसलिए सरकार इस मामले की सीबीआई जांच कराए। ये केन्द्र की राशि है, इसकी जांच CBI से होनी चाहिेए। गौरतलब है कि बिहार सरकार ने 31 मई को 1600 करोड़ रुपये का नया ठेका PDPL को पांच साल के लिए देने का फैसला किया। यह ठेके को चुनौती देने वाली याचिका के निपटारे तक इंतजार करने के लिए अदालत की चेतावनी के बावजूद किया गया है। पीडीपीएल के निदेशक जद (यू) के सांसद चंदेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी के रिश्तेदार और परिवार के सदस्य हैं, जिन्होंने किसी भी तरह के पक्षपात से इनकार किया है।
News Desk :बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा ने भ्रष्टाचार को लेकर नीतीश सरकार को घेरा है और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा है। लखीसराय में मीडिया से मुखातिब होते हुए विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि बिहार के अंदर अब मुख्यमंत्री के पाप उजागर हो रहे हैं। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि पहले करोड़ों की लागत से बन रहा पुल भरभराकर गिरा और अब एक हज़ार छः सौ करोड़ रुपये का एंबुलेंस घोटाला हुआ है। ये घोटाला जेडीयू सांसद के बेटे की कंपनी पर लग रहा है, जिसका नाम पशुपतिनाथ डिस्ट्रीब्यूटर प्राइवेट लिमिटेड है। उन्होंने कहा कि इन एंबुलेंसों में लाइफ सपोर्ट सिस्टम नहीं है. . . एंबुलेंस में ऑक्सीजन नहीं बल्कि एक्सपायरी दवाएं हैं। ये सारी बातें ऑडिट में सामने आयी हैं। विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि उस वक्त इन्हें पहला टेंडर साढ़े चार सौ करोड़ का मिला। ऑडिट रिपोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट गये, फिर सुप्रीम कोर्ट से हाईकोर्ट को ट्रांसफर किया गया और फिर हाईकोर्ट ने इन्हें सचेत किया। उसके बावजूद भी इन्होंने पांच साल का टेंडर दे दिया। इसमें पूरा घालमेल है इसलिए सरकार इस मामले की सीबीआई जांच कराए। ये केन्द्र की राशि है, इसकी जांच CBI से होनी चाहिेए। गौरतलब है कि बिहार सरकार ने इकतीस मई को एक हज़ार छः सौ करोड़ रुपये का नया ठेका PDPL को पांच साल के लिए देने का फैसला किया। यह ठेके को चुनौती देने वाली याचिका के निपटारे तक इंतजार करने के लिए अदालत की चेतावनी के बावजूद किया गया है। पीडीपीएल के निदेशक जद के सांसद चंदेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी के रिश्तेदार और परिवार के सदस्य हैं, जिन्होंने किसी भी तरह के पक्षपात से इनकार किया है।
लियेव ने सिर खुजाया और मूखों की तरह उन्हें घूरा । "मुझे तो ठीक पता नहीं ।" त्वर ने गुस्से में उसका गला दबा दिया । "साले हरामी !" वह चिल्लाया। "अब भी गद्दारी करता है ? बता जल्दी वरना गला घोंट दूँगा । "छोड़ दो मुझे," लियेव ने स्त्रों से हो कहा, उसकी आँखें भय से सफेद हो गई" । "मैं बताता हूँ ! मैं बताता हूँ !" खुर ने तिरस्कार से उसे छोड़ दिया । "मैं समझता हूँ वह औौरत के साथ होगा पर कौनसी के साथ यह नहीं कह सकता, " लियेव फुसफुसाया । "उसके छोटे शरीर-रक्षक से ही पूछो। वह छोकरा ही उसे जहाँ कहीं भी वह जाये ले जाता है और वही उसे बुलाकर वापस भी लाता है। बस उसी को पता होगा ।" कल्लू ने हुक्म दिया कि कैदी और क़ब्ज़ाये हुए अस्त्र-शस्त्र सच तीसरे किये जायें । दा-श्वी, रवि को लेकर वह उस छोकरे से पूछने के लिए गया । सिर झुकाये और रोते हुए, लड़के ने यही कहा कि उसे नहीं मालूम जिनलुग कहाँ है । कल्लू ताड़ गया कि छोकरा डर रहा है । वह उसके पास बैठा और उसने अपना बड़ा हाथ लड़के के कंधे पर रख दिया । "तुम यहाँ कैसे आये, भैया ?" सिर उठाये बगैर होंठ हिलाकर लड़के ने उत्तर दिया । "मैं तो यहाँ बाप की जगह कुछ दिन काम करने आया था। लेकिन जिनलुरंग मुझे जाने ही नहीं देता ।" "ओह, तो इस तरह फँस गये तुम ! वह ग़द्दार हरामजादा जिनलुंग जापानियों का सा ही है - वह तो हमें चीनियों को मारता है। मुझे बता दो कहाँ है वह साला और हम उसे पकड़ लायेंगे ! तुम्हें छोड़ दिया जायगा और एक ग़द्दार से हम सब बच जायेंगे । क्या कहते हो फिर १" लड़के ने अपना आँसुओं से भरा हुआ चेहरा कल्लू की कर दिया । "मुझे - मु-झे हिम्मत नहीं होती, " वह रोते हुए बोला। "अगर उसे पता
लियेव ने सिर खुजाया और मूखों की तरह उन्हें घूरा । "मुझे तो ठीक पता नहीं ।" त्वर ने गुस्से में उसका गला दबा दिया । "साले हरामी !" वह चिल्लाया। "अब भी गद्दारी करता है ? बता जल्दी वरना गला घोंट दूँगा । "छोड़ दो मुझे," लियेव ने स्त्रों से हो कहा, उसकी आँखें भय से सफेद हो गई" । "मैं बताता हूँ ! मैं बताता हूँ !" खुर ने तिरस्कार से उसे छोड़ दिया । "मैं समझता हूँ वह औौरत के साथ होगा पर कौनसी के साथ यह नहीं कह सकता, " लियेव फुसफुसाया । "उसके छोटे शरीर-रक्षक से ही पूछो। वह छोकरा ही उसे जहाँ कहीं भी वह जाये ले जाता है और वही उसे बुलाकर वापस भी लाता है। बस उसी को पता होगा ।" कल्लू ने हुक्म दिया कि कैदी और क़ब्ज़ाये हुए अस्त्र-शस्त्र सच तीसरे किये जायें । दा-श्वी, रवि को लेकर वह उस छोकरे से पूछने के लिए गया । सिर झुकाये और रोते हुए, लड़के ने यही कहा कि उसे नहीं मालूम जिनलुग कहाँ है । कल्लू ताड़ गया कि छोकरा डर रहा है । वह उसके पास बैठा और उसने अपना बड़ा हाथ लड़के के कंधे पर रख दिया । "तुम यहाँ कैसे आये, भैया ?" सिर उठाये बगैर होंठ हिलाकर लड़के ने उत्तर दिया । "मैं तो यहाँ बाप की जगह कुछ दिन काम करने आया था। लेकिन जिनलुरंग मुझे जाने ही नहीं देता ।" "ओह, तो इस तरह फँस गये तुम ! वह ग़द्दार हरामजादा जिनलुंग जापानियों का सा ही है - वह तो हमें चीनियों को मारता है। मुझे बता दो कहाँ है वह साला और हम उसे पकड़ लायेंगे ! तुम्हें छोड़ दिया जायगा और एक ग़द्दार से हम सब बच जायेंगे । क्या कहते हो फिर एक" लड़के ने अपना आँसुओं से भरा हुआ चेहरा कल्लू की कर दिया । "मुझे - मु-झे हिम्मत नहीं होती, " वह रोते हुए बोला। "अगर उसे पता
यह आत्मा कर्म के आधीन होकर शरीरधारी सुखी दु खी क्रोध मान माया लोभ इत्यादि कषाय वाला तथा नाशवत, कामी, विकारी, एकेन्द्रिय घास, कीटक, स्त्री, पुरुष और नपु सक ऐसे अनेक प्रकार की अवस्था को धारण करनेवाला कहलाता है। अर्थात् वह अपने निजस्वरूप का अच्छी तरह प्रेमपूर्वक आप अपने अन्दर देखकर उस कर्म रूपी समूह को नाश करने से क्या वह अपने निजस्वरूप को प्राप्त नहीं होगा ? अवश्य होगा ।।६६।। 66 0, Aparajiteshwar । The promising Jiva who has comitted the auspicious & the unauspicious acts experience the fruits of both. This soul being enslaved by karmas, gets incarnated in various bodies, becomes happy & muserable, gets filled with anger pride etc, the passions If he contemplates upon his own nature then would he not destroy the karmas & realise his own self? Would certainly विवेचन - प्रन्थकार कहते हैं कि जिन्होंने पाप और पुण्य को अच्छी तरह सपादन कर उसके द्वारा होने वाले शुभाशुभ फल का अनुभव किया है, उसी के निमित्त यह आत्मा कर्मनश होकर सुखी, दु खी, क्रोधी, मानी लोभी, राव, रंक, पशु पक्षी, कामी, कीटक नरक, तिर्यच, मनुष्य देव, पृथ्वी हाथी, घोड़े, सिंह इत्यादि पर्याय धारण करते हुए अनेक योनियों में भ्रमण करते अनेक कष्ट सहते हुए अनेक अवस्था को प्राप्त होता है। अगर यह आत्मा अपने कर्म शत्रु को अच्छी तरह पहचान कर स्वपर भेदज्ञानरूपी छैनी के द्वारा दूर करने का प्रयत्न करेगा तो अवश्य ही कर्म-रहित होकर अपने निर्मल निजानंद आत्म स्वरूप को प्राप्त होगा। प्रवचनसार में भी कहा है कि - जदि सति हि पुराण/णिय, परिणाम सव्भवाणिविविहाणि । जनयन्ति विसय तरहं, जीवाणं देवदंताणं ॥ ७४ ॥ यदि इस जीव के शुभोपयोग से अनेक तरह के पुण्य संचय होते हैं तो भले ही उत्पन्न होवें, इस में कुछ विशेषता नहीं है, क्योंकि वे पुण्य देवताओं से लेकर सब संसारी जीव को तृष्णा उत्पन्न करने वाले हैं और जहां तृष्णा है वहां ही दुःख है, क्योंकि तृष्णा के बिना इन्द्रियों के रूपादि विषयों में प्रवृत्ति ही नहीं होती। जैसे जोंक तृष्णा के बिना विकार युक्त अर्थात् खराब रुधिर का पान नहीं करती, इसी प्रकार संसारी जीवों की विषयों में प्रवृत्ति तृष्णा के बिना नहीं होती है। इस कारण पुण्य तृष्णा का घर है अर्थात् पुण्य भी पापका बीज है चारों गतियों का कारण है। जैसे कहा भी है कितृष्णा बैतरणी नदी, यम स्वरूप है रोष । कामधेनु विद्या अहे, नन्दन बन संतोष ।। तृष्णा मिटे संतोष ते, सेवे श्रति बढ़ जाय । तृष्णा से अग्नि न बुझे, तुण विहीन बुझ जाय ॥ यह तृष्णा वैतरणी नदी के समान भयंकर, यमराज के समान महान् दुःख का कारण है और संतोष काम धेनु कल्पवृक्ष व नदन बन के समान है। जब तक तृष्णा नहीं मिटेगी तब तक सतोष सेवनीय नहीं होगा। जैसे अग्नि की तृष्णा तृरण से नहीं बुझती है, उसी तरह इस तृष्णावान् जीव की शान्ति इस क्षणिक बाह्य पदार्थों से नहीं बुझती है । इस तृष्णा की पूर्ति के लिये यह जीव कहां कहां नहीं जाता, और किन-किन की सेवा नहीं करता सो कहा भी हैःभ्रांतं देशमनेकदुर्गविषमं प्राप्तं न किचित्फलं । त्यक्त्वा जातिकुलाभिमानमुचितं, सेवा कृता निष्फलं ।। मुक्तं मानविवर्जितं परगृहेष्वाशंकया काक्रवात् । तृष्णे । जुम्भसि पापकर्मनिचितो नद्यापि संतुष्यति ॥ तृष्णावान् मानव प्राणी तृष्णा की पूर्ति के लिये अपने उत्तम कुल, उत्तम देश, उत्तम जाति, अभिमान, अपनी नीति, आचार विचार, मान मर्यादा इत्यादि का उल्लंघन करके अनेक देश विदेश, विषम दुर्ग, पहाड़, किला, भयानक जंगल, पहाड़ों के बड़े बड़े कंदराओं में प्रवेश करता है और तृष्णा की पूर्ति में काक
यह आत्मा कर्म के आधीन होकर शरीरधारी सुखी दु खी क्रोध मान माया लोभ इत्यादि कषाय वाला तथा नाशवत, कामी, विकारी, एकेन्द्रिय घास, कीटक, स्त्री, पुरुष और नपु सक ऐसे अनेक प्रकार की अवस्था को धारण करनेवाला कहलाता है। अर्थात् वह अपने निजस्वरूप का अच्छी तरह प्रेमपूर्वक आप अपने अन्दर देखकर उस कर्म रूपी समूह को नाश करने से क्या वह अपने निजस्वरूप को प्राप्त नहीं होगा ? अवश्य होगा ।।छयासठ।। छयासठ शून्य, Aparajiteshwar । The promising Jiva who has comitted the auspicious & the unauspicious acts experience the fruits of both. This soul being enslaved by karmas, gets incarnated in various bodies, becomes happy & muserable, gets filled with anger pride etc, the passions If he contemplates upon his own nature then would he not destroy the karmas & realise his own self? Would certainly विवेचन - प्रन्थकार कहते हैं कि जिन्होंने पाप और पुण्य को अच्छी तरह सपादन कर उसके द्वारा होने वाले शुभाशुभ फल का अनुभव किया है, उसी के निमित्त यह आत्मा कर्मनश होकर सुखी, दु खी, क्रोधी, मानी लोभी, राव, रंक, पशु पक्षी, कामी, कीटक नरक, तिर्यच, मनुष्य देव, पृथ्वी हाथी, घोड़े, सिंह इत्यादि पर्याय धारण करते हुए अनेक योनियों में भ्रमण करते अनेक कष्ट सहते हुए अनेक अवस्था को प्राप्त होता है। अगर यह आत्मा अपने कर्म शत्रु को अच्छी तरह पहचान कर स्वपर भेदज्ञानरूपी छैनी के द्वारा दूर करने का प्रयत्न करेगा तो अवश्य ही कर्म-रहित होकर अपने निर्मल निजानंद आत्म स्वरूप को प्राप्त होगा। प्रवचनसार में भी कहा है कि - जदि सति हि पुराण/णिय, परिणाम सव्भवाणिविविहाणि । जनयन्ति विसय तरहं, जीवाणं देवदंताणं ॥ चौहत्तर ॥ यदि इस जीव के शुभोपयोग से अनेक तरह के पुण्य संचय होते हैं तो भले ही उत्पन्न होवें, इस में कुछ विशेषता नहीं है, क्योंकि वे पुण्य देवताओं से लेकर सब संसारी जीव को तृष्णा उत्पन्न करने वाले हैं और जहां तृष्णा है वहां ही दुःख है, क्योंकि तृष्णा के बिना इन्द्रियों के रूपादि विषयों में प्रवृत्ति ही नहीं होती। जैसे जोंक तृष्णा के बिना विकार युक्त अर्थात् खराब रुधिर का पान नहीं करती, इसी प्रकार संसारी जीवों की विषयों में प्रवृत्ति तृष्णा के बिना नहीं होती है। इस कारण पुण्य तृष्णा का घर है अर्थात् पुण्य भी पापका बीज है चारों गतियों का कारण है। जैसे कहा भी है कितृष्णा बैतरणी नदी, यम स्वरूप है रोष । कामधेनु विद्या अहे, नन्दन बन संतोष ।। तृष्णा मिटे संतोष ते, सेवे श्रति बढ़ जाय । तृष्णा से अग्नि न बुझे, तुण विहीन बुझ जाय ॥ यह तृष्णा वैतरणी नदी के समान भयंकर, यमराज के समान महान् दुःख का कारण है और संतोष काम धेनु कल्पवृक्ष व नदन बन के समान है। जब तक तृष्णा नहीं मिटेगी तब तक सतोष सेवनीय नहीं होगा। जैसे अग्नि की तृष्णा तृरण से नहीं बुझती है, उसी तरह इस तृष्णावान् जीव की शान्ति इस क्षणिक बाह्य पदार्थों से नहीं बुझती है । इस तृष्णा की पूर्ति के लिये यह जीव कहां कहां नहीं जाता, और किन-किन की सेवा नहीं करता सो कहा भी हैःभ्रांतं देशमनेकदुर्गविषमं प्राप्तं न किचित्फलं । त्यक्त्वा जातिकुलाभिमानमुचितं, सेवा कृता निष्फलं ।। मुक्तं मानविवर्जितं परगृहेष्वाशंकया काक्रवात् । तृष्णे । जुम्भसि पापकर्मनिचितो नद्यापि संतुष्यति ॥ तृष्णावान् मानव प्राणी तृष्णा की पूर्ति के लिये अपने उत्तम कुल, उत्तम देश, उत्तम जाति, अभिमान, अपनी नीति, आचार विचार, मान मर्यादा इत्यादि का उल्लंघन करके अनेक देश विदेश, विषम दुर्ग, पहाड़, किला, भयानक जंगल, पहाड़ों के बड़े बड़े कंदराओं में प्रवेश करता है और तृष्णा की पूर्ति में काक
अपने यूट्यूब चैनल के एक वीडियो में रविचंद्रन अश्विन ने कोहली की बैंटिंग के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि "उस रात जिस तरह विराट बल्लेबाजी कर रहे थे। मुझे ऐसे लगा रहा था मानो कोई भूत उनके अंदर प्रवेश कर गया हो। नई दिल्ली, स्पोर्ट्स डेस्क। टी20 विश्व कप में पाकिस्तान को चार विकेट हाराकर भारत ने जीत हासिल की थी। सांस रोक देने वाले इस मैच को कोई भी अपने जहन से नहीं निकाल पा रहा है। भारतीय टीम के स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर खेले गए मैच को याद किया है। रोमांचक रात को याद करते हुए अश्विन ने कहा कि "विराट कोहली अंतिम के ओवरों में ऐसी बल्लेबाजी कर रहे थे जैसे उनके अंदर कोई भूत प्रवेश कर गया हो। गौरतलब हो कि पाकिस्तान के खिलाफ विराट कोहली ने 53 गेंदों में नाबाद 82 रन की शानदार पारी खेली। विराट ने इस दौरान 6 चौके और 4 छक्के जड़े और हार्दिक पांड्या के साथ शतकीय साझेदारी निभाई। भारत को आखिरी 8 गेंदों पर जीत के लिए 28 रनों की जरूत थी। हैरिस रऊफ के 19वें की अंतिम दो गेंदों पर विराट कोहली ने लगातार दो छक्के मारे। अब भारत को आखिरी 6 गेंदों पर 16 रन की जरूरत थी। जब अश्विन क्रीज पर आए, तब भारत को 1 गेंद पर 2 रन की जरूरत थी। इस दौरान अश्विन ने अपनी सूझबूझ का परिचय दिया और भारत को जीत दिला दी।
अपने यूट्यूब चैनल के एक वीडियो में रविचंद्रन अश्विन ने कोहली की बैंटिंग के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि "उस रात जिस तरह विराट बल्लेबाजी कर रहे थे। मुझे ऐसे लगा रहा था मानो कोई भूत उनके अंदर प्रवेश कर गया हो। नई दिल्ली, स्पोर्ट्स डेस्क। टीबीस विश्व कप में पाकिस्तान को चार विकेट हाराकर भारत ने जीत हासिल की थी। सांस रोक देने वाले इस मैच को कोई भी अपने जहन से नहीं निकाल पा रहा है। भारतीय टीम के स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर खेले गए मैच को याद किया है। रोमांचक रात को याद करते हुए अश्विन ने कहा कि "विराट कोहली अंतिम के ओवरों में ऐसी बल्लेबाजी कर रहे थे जैसे उनके अंदर कोई भूत प्रवेश कर गया हो। गौरतलब हो कि पाकिस्तान के खिलाफ विराट कोहली ने तिरेपन गेंदों में नाबाद बयासी रन की शानदार पारी खेली। विराट ने इस दौरान छः चौके और चार छक्के जड़े और हार्दिक पांड्या के साथ शतकीय साझेदारी निभाई। भारत को आखिरी आठ गेंदों पर जीत के लिए अट्ठाईस रनों की जरूत थी। हैरिस रऊफ के उन्नीसवें की अंतिम दो गेंदों पर विराट कोहली ने लगातार दो छक्के मारे। अब भारत को आखिरी छः गेंदों पर सोलह रन की जरूरत थी। जब अश्विन क्रीज पर आए, तब भारत को एक गेंद पर दो रन की जरूरत थी। इस दौरान अश्विन ने अपनी सूझबूझ का परिचय दिया और भारत को जीत दिला दी।
बहादुर सोरठ की विलायत के ज़मीदारों की सेना लेकर अहमदाबाद की ओर रवाना हुआ । मोर्जा अस्करी जो अहमदाबाद में था, पादशाह के पूर्व की ओर प्रस्थान कर जाने के उपरान्त अमीर हिन्दू वेग क्वचीन से मिलकर अपने नाम का खुत्वा पढवा देना चाहता था किन्तु यह सम्भव न हुआ। वह साधारण सा युद्ध करके चाम्पानीर पहुँचा। वहाँ के हाक्मि तरदी वेग ने किले की प्रतिरक्षा प्रारम्भ करंदी । अस्वरी मोर्ज़ा के विद्रोह सम्बन्धी पत्र दरवार मे भेजे । जिस समय पादशाह भन्दूर से आगरा की ओर प्रस्थान कर रहे थे मोर्जा अस्करी मार्ग में सेवा में पहुँचा। बहादुर ने चाम्पानीर को सधि द्वारा तरदी वेग से ले लिया । इमी वर्ष जमाली कम्बीह देहलवी इस नश्वर ससार से विदा हा गये । "खुरुरवे हिन्द बूदा ४" के अक्षरों से उनकी मृत्यु की तारीख निकलती है। इस वप शाह तह्मास्प नो एराक से साममोर्जा के प्रतिकार हेतु कन्धार पर आक्रमण किया। स्वाजावलाँबेग ने शहर को खाली छोड़कर तथा दीवानखाने को उत्तम फर्शो तथा सुन्दर बरतनो एव दरवार की समस्त सामग्रियो द्वारा सजा कर बन्द करा दिया और बाहर निकल गया, शाह तहमास्प उस स्थान पर पहुँच कर ठहरा उसने ख्वाजा कलाँ बेग की अत्याधव प्रशश की और कहा कि, "कामरान मीर्जा का यह सेवक बडा (३४८) ही उत्तम है।" शाह तहमास्प कन्चार को अपने एक अमीर वुदाग खा के सुपुर्द करके एराक लौट गया। इस बार भी मीर्जा कामरान शीघ्रातिशीघ्र लाहौर से वन्धार पहुँचा और उसे मुक्त करा लिया । मुहम्मद ज़मान मीर्जा ने, जिसे वहादुर ने अपनी पराजय वे समय हिन्दुस्तान में विघ्न डालने के लिए भेजा था, मीर्जा कामरान की अनुपस्थिति में लाहौर का अवरोध कर लिया। वह पादशाह के लौटने के समाचार सुनकर गुजरात पहुँचा। जब आगरा में पादशाह के निवास को एक वर्ष व्यतीत हो गया तो शेर खा अफग्रान १ एक इस्तलिपि में 'अहमदाबाद', यही उचित है। २ रैकिंग के अग्रेजी अनुवाद में 'मन्दिर' मन्दू () 'वे वाव' (७ ) को वह 'रे' (,) पढ़ गया। (१०४५५) । ३ हामिद बिन फजलुल्लाह, जो दरवेश जमाली शेख या मुल्ला जमाली कम्वोह देहलवी के नाम से प्रसिद्ध थे, बड़े ही योग्य कारसी कवि हुये हैं। वे पहिले जलाली तखल्नुम करते थे किंतु बाद में अपने मुर्शिद शेख समाउद्दीन ( मृत्यु १०१ हि० / १४६६ ई०) के कहने पर जमाली तखल्लुम करने लगे। देहली से वे हज के लिये मक्का चले गये और वहां से लौटते समय हिरात पहुॅचे तथा प्रसिद्ध फारसी कवि नुरुद्दीन अब्दुर्रहमान जाभी ( मृत्यु १४६२ ई०) से भेंट की। सुलान सिकन्दर लोदी (१४८८ १५१७६०) से भी इनकी बडी मित्रता थी। उन्होंने बाबर तथा हुमाय के सम्बन्ध में भी क़मीदों की रचना की हुमाय के गुजरात के अभियान के समय वे उसके साथ थे और १० जीकाद ६४२ ६ि० / १ मई १५३६ ६० को मृत्यु को प्राप्त हुये। उनके ज्येष्ठ पुत्र शेख गदाई को चकवर के राज्य काल के प्रारम्भ में बड़ी उन्नति प्राप्त हुई। (शेख अब्दुल हक मुहद्दिस देहलवी प्रबारुल अखियार देहली १३३२ ६ि०-१० २२८-२२६) । उनकी रचनाओं में सियल आरेफोन नामक प्रथ, जिसमें सूफ़ियों की जीवनियाँ दी हुई हैं, बड़ा प्रसिद्ध है । वह देहलो से १३११ ६ि०/१८६३ ई० में प्रकाशिन हो चुका है। ५. प्रकाशित पोधी में इस प्रकार है, "चू मुद्दते यक साल अज इसेक्लाले पादशाह दर भागरा गुजश्त ।" यह बाक्य स्पष्ट नहीं । इसका तात्पर्य यह है कि "जब हुमायू गुजरात से भागरा लौट थाया और एक वर्ष व्यतीत हो गया।"
बहादुर सोरठ की विलायत के ज़मीदारों की सेना लेकर अहमदाबाद की ओर रवाना हुआ । मोर्जा अस्करी जो अहमदाबाद में था, पादशाह के पूर्व की ओर प्रस्थान कर जाने के उपरान्त अमीर हिन्दू वेग क्वचीन से मिलकर अपने नाम का खुत्वा पढवा देना चाहता था किन्तु यह सम्भव न हुआ। वह साधारण सा युद्ध करके चाम्पानीर पहुँचा। वहाँ के हाक्मि तरदी वेग ने किले की प्रतिरक्षा प्रारम्भ करंदी । अस्वरी मोर्ज़ा के विद्रोह सम्बन्धी पत्र दरवार मे भेजे । जिस समय पादशाह भन्दूर से आगरा की ओर प्रस्थान कर रहे थे मोर्जा अस्करी मार्ग में सेवा में पहुँचा। बहादुर ने चाम्पानीर को सधि द्वारा तरदी वेग से ले लिया । इमी वर्ष जमाली कम्बीह देहलवी इस नश्वर ससार से विदा हा गये । "खुरुरवे हिन्द बूदा चार" के अक्षरों से उनकी मृत्यु की तारीख निकलती है। इस वप शाह तह्मास्प नो एराक से साममोर्जा के प्रतिकार हेतु कन्धार पर आक्रमण किया। स्वाजावलाँबेग ने शहर को खाली छोड़कर तथा दीवानखाने को उत्तम फर्शो तथा सुन्दर बरतनो एव दरवार की समस्त सामग्रियो द्वारा सजा कर बन्द करा दिया और बाहर निकल गया, शाह तहमास्प उस स्थान पर पहुँच कर ठहरा उसने ख्वाजा कलाँ बेग की अत्याधव प्रशश की और कहा कि, "कामरान मीर्जा का यह सेवक बडा ही उत्तम है।" शाह तहमास्प कन्चार को अपने एक अमीर वुदाग खा के सुपुर्द करके एराक लौट गया। इस बार भी मीर्जा कामरान शीघ्रातिशीघ्र लाहौर से वन्धार पहुँचा और उसे मुक्त करा लिया । मुहम्मद ज़मान मीर्जा ने, जिसे वहादुर ने अपनी पराजय वे समय हिन्दुस्तान में विघ्न डालने के लिए भेजा था, मीर्जा कामरान की अनुपस्थिति में लाहौर का अवरोध कर लिया। वह पादशाह के लौटने के समाचार सुनकर गुजरात पहुँचा। जब आगरा में पादशाह के निवास को एक वर्ष व्यतीत हो गया तो शेर खा अफग्रान एक एक इस्तलिपि में 'अहमदाबाद', यही उचित है। दो रैकिंग के अग्रेजी अनुवाद में 'मन्दिर' मन्दू 'वे वाव' को वह 'रे' पढ़ गया। । तीन हामिद बिन फजलुल्लाह, जो दरवेश जमाली शेख या मुल्ला जमाली कम्वोह देहलवी के नाम से प्रसिद्ध थे, बड़े ही योग्य कारसी कवि हुये हैं। वे पहिले जलाली तखल्नुम करते थे किंतु बाद में अपने मुर्शिद शेख समाउद्दीन के कहने पर जमाली तखल्लुम करने लगे। देहली से वे हज के लिये मक्का चले गये और वहां से लौटते समय हिरात पहुॅचे तथा प्रसिद्ध फारसी कवि नुरुद्दीन अब्दुर्रहमान जाभी से भेंट की। सुलान सिकन्दर लोदी से भी इनकी बडी मित्रता थी। उन्होंने बाबर तथा हुमाय के सम्बन्ध में भी क़मीदों की रचना की हुमाय के गुजरात के अभियान के समय वे उसके साथ थे और दस जीकाद छः सौ बयालीस छःिशून्य / एक मई एक हज़ार पाँच सौ छत्तीस साठ को मृत्यु को प्राप्त हुये। उनके ज्येष्ठ पुत्र शेख गदाई को चकवर के राज्य काल के प्रारम्भ में बड़ी उन्नति प्राप्त हुई। । उनकी रचनाओं में सियल आरेफोन नामक प्रथ, जिसमें सूफ़ियों की जीवनियाँ दी हुई हैं, बड़ा प्रसिद्ध है । वह देहलो से एक हज़ार तीन सौ ग्यारह छःिशून्य/एक हज़ार आठ सौ तिरेसठ ईशून्य में प्रकाशिन हो चुका है। पाँच. प्रकाशित पोधी में इस प्रकार है, "चू मुद्दते यक साल अज इसेक्लाले पादशाह दर भागरा गुजश्त ।" यह बाक्य स्पष्ट नहीं । इसका तात्पर्य यह है कि "जब हुमायू गुजरात से भागरा लौट थाया और एक वर्ष व्यतीत हो गया।"
यंग इंडियंस (वाईआई), जयपुर चैप्टर की ओर से और भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के सहयोग से गुरुवार को 'बिल्डिंग एन इकोसिस्टम फॉर बिजनेस एंड वर्क टुवर्ड्स इंडस्ट्री 4. 0' विषय पर ब्रेनस्टॉर्मिंग सेशन आयोजित किया जाएगा। सीतापुरा स्थित पूर्णिमा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी कैंपस में यह सेशन जी - 20 के तहत आयोजित किया जा रहा है, जिसमें यंग इंडियंस के अचीवर्स, बिजनेस नेटवर्किंग से जुड़े संस्थानों के प्रतिनिधि व इंडस्ट्री एक्सपर्ट शामिल हो रहे हैं। वाईआई, जयपुर चैप्टर (युवा) के चेयर राहुल कालानी ने बताया कि उद्घाटन के बाद विशेषज्ञों के दो सैशन आयोजित किए जाएंगे। 'फ्यूचर ऑफ जॉब्स इन आईटी एंड नॉन आईटी सेक्टर' एवं 'रिसर्च एंड इनोवेशन एज ए वे ऑफ लाइफ' विषयों पर होने वाले इस सैशंस में विशेषज्ञ आज के दौर की इंडस्ट्रीज के अनुसार बिजनेस का इकोसिस्टम तैयार करने से संबंधित सुझाव देंगे। जवाहर कला केन्द्र के जूनियर समर कैम्प में बच्चों ने संगीत से जुड़ी 7 विधाओं समेत अन्य कलाओं में अपनी रुचि दिखायी। लगभग 200 बच्चों ने भरतनाट्यम, कथक, सुगम संगीत, गिटार, तबला, सिंथेसाइजर की बारीकियां सीखी। यह सभी बच्चे गुरुवार, 15 जून को गुरुओं से सीखे सबक मंच पर साकार करेंगे। रंगायन सभागार में शाम 6:30 बजे होने वाली प्रस्तुति में कैम्प के प्रतिभागी बच्चे और उनके परिजन मौजूद रहेंगे। पं. जवाहर लाल नेहरू बाल साहित्य अकादमी बाल साहित्य लेखन को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्यरत है। बच्चों से जुडी रचनाएं लिखने वाले लेखकों के प्रोत्साहन के लिए भी अकादमी प्रयासरत है। इस दिशा में बड़ा कदम बढ़ाते हुए अकादमी अध्यक्ष इकराम राजस्थानी ने सत्र 2023-24 हेतु 'बाल साहित्य मनीषी' पुरस्कार के प्रस्ताव आमंत्रित करने की स्वीकृति प्रदान की है। इकराम राजस्थानी ने बताया कि विगत तीन से चार दशकों से बाल साहित्य लेखन से जुड़े पांच मनीषियों को यह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। आवेदक 5 जुलाई 2023 तक अकादमी को अपनी प्रविष्टि भेज सकते हैं। राजस्थान के मूल निवासी लेखकों को प्राथमिकता प्रदान की जायेगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
यंग इंडियंस , जयपुर चैप्टर की ओर से और भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के सहयोग से गुरुवार को 'बिल्डिंग एन इकोसिस्टम फॉर बिजनेस एंड वर्क टुवर्ड्स इंडस्ट्री चार. शून्य' विषय पर ब्रेनस्टॉर्मिंग सेशन आयोजित किया जाएगा। सीतापुरा स्थित पूर्णिमा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी कैंपस में यह सेशन जी - बीस के तहत आयोजित किया जा रहा है, जिसमें यंग इंडियंस के अचीवर्स, बिजनेस नेटवर्किंग से जुड़े संस्थानों के प्रतिनिधि व इंडस्ट्री एक्सपर्ट शामिल हो रहे हैं। वाईआई, जयपुर चैप्टर के चेयर राहुल कालानी ने बताया कि उद्घाटन के बाद विशेषज्ञों के दो सैशन आयोजित किए जाएंगे। 'फ्यूचर ऑफ जॉब्स इन आईटी एंड नॉन आईटी सेक्टर' एवं 'रिसर्च एंड इनोवेशन एज ए वे ऑफ लाइफ' विषयों पर होने वाले इस सैशंस में विशेषज्ञ आज के दौर की इंडस्ट्रीज के अनुसार बिजनेस का इकोसिस्टम तैयार करने से संबंधित सुझाव देंगे। जवाहर कला केन्द्र के जूनियर समर कैम्प में बच्चों ने संगीत से जुड़ी सात विधाओं समेत अन्य कलाओं में अपनी रुचि दिखायी। लगभग दो सौ बच्चों ने भरतनाट्यम, कथक, सुगम संगीत, गिटार, तबला, सिंथेसाइजर की बारीकियां सीखी। यह सभी बच्चे गुरुवार, पंद्रह जून को गुरुओं से सीखे सबक मंच पर साकार करेंगे। रंगायन सभागार में शाम छः:तीस बजे होने वाली प्रस्तुति में कैम्प के प्रतिभागी बच्चे और उनके परिजन मौजूद रहेंगे। पं. जवाहर लाल नेहरू बाल साहित्य अकादमी बाल साहित्य लेखन को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्यरत है। बच्चों से जुडी रचनाएं लिखने वाले लेखकों के प्रोत्साहन के लिए भी अकादमी प्रयासरत है। इस दिशा में बड़ा कदम बढ़ाते हुए अकादमी अध्यक्ष इकराम राजस्थानी ने सत्र दो हज़ार तेईस-चौबीस हेतु 'बाल साहित्य मनीषी' पुरस्कार के प्रस्ताव आमंत्रित करने की स्वीकृति प्रदान की है। इकराम राजस्थानी ने बताया कि विगत तीन से चार दशकों से बाल साहित्य लेखन से जुड़े पांच मनीषियों को यह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। आवेदक पाँच जुलाई दो हज़ार तेईस तक अकादमी को अपनी प्रविष्टि भेज सकते हैं। राजस्थान के मूल निवासी लेखकों को प्राथमिकता प्रदान की जायेगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
गोरखपुर में बिहार निवासी जालसाज की महिला ने खंभे में बांधकर पिटाई की। इसके बाद उसने युवक को पुलिस को सौंप दिया। महिला का आरोप है कि युवक ने एलबम की शूटिंग में काम दिलाने के नाम पर उसका शोषण किया, उसके खाते से 80 हजार रुपए निकाल लिए। तभी से आरोपी फरार हो गया था। गजपुर निवासी सुमन उर्फ रानी आर्केस्ट्रा में नर्तकी का काम करती है। एक साल पहले उसकी मुलाकात बिहार के मधुबनी जिले के फूलप्रास थाने के बेता निवासी सत्यम उर्फ रोहित से हुई। रोहित ने महिला को बिहार आकर फिल्म व गानों में शूटिंग का ऑफर दिया। इसके एवज में एक दिन में उसने महिला को तीन हजार रुपये देने का वादा भी किया। महिला युवक के बताए पते पर बिहार पहुंच गई। इसके बाद युवक ने महिला को बंधक बना लिया। उसे बिहार के कुसौदी बाजार में अजय राय के मकान में रखा। आरोप है कि युवक रोज उसे मारता-पीटता था। उसे खाना भी नहीं देता था। महिला का एटीएम लेकर युवक ने अस्सी हजार रुपए भी निकाल लिए थे। किसी तरह वह वहां से छूटकर आ गई। उसके बाद से ही महिला उसकी तलाश कर रही थी। गजपुर निवासी सुमन ने जालसाज को लिव इन रिलेशनशिप में रहने का बहाना बनाकर बुलाया। उसने युवक को फोन पर कहा कि उसका पति उसको रखने के लिए तैयार नहीं है। वह युवक के साथ रहने को तैयार है। वह गोरखपुर के गजपुर आ जाए, महिला उसके साथ जेवर व कपड़े लेकर चली जाएगी। महिला की बात में आकर युवक शुक्रवार की शाम करीब 6 बजे यहां चला आया। जिसके बाद महिला उसे बातों में उलझाए रही। फिर परिवारवालों की मदद से उसे खंभे में बांध दिया और पीटकर पुलिस के हवाले कर दिया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
गोरखपुर में बिहार निवासी जालसाज की महिला ने खंभे में बांधकर पिटाई की। इसके बाद उसने युवक को पुलिस को सौंप दिया। महिला का आरोप है कि युवक ने एलबम की शूटिंग में काम दिलाने के नाम पर उसका शोषण किया, उसके खाते से अस्सी हजार रुपए निकाल लिए। तभी से आरोपी फरार हो गया था। गजपुर निवासी सुमन उर्फ रानी आर्केस्ट्रा में नर्तकी का काम करती है। एक साल पहले उसकी मुलाकात बिहार के मधुबनी जिले के फूलप्रास थाने के बेता निवासी सत्यम उर्फ रोहित से हुई। रोहित ने महिला को बिहार आकर फिल्म व गानों में शूटिंग का ऑफर दिया। इसके एवज में एक दिन में उसने महिला को तीन हजार रुपये देने का वादा भी किया। महिला युवक के बताए पते पर बिहार पहुंच गई। इसके बाद युवक ने महिला को बंधक बना लिया। उसे बिहार के कुसौदी बाजार में अजय राय के मकान में रखा। आरोप है कि युवक रोज उसे मारता-पीटता था। उसे खाना भी नहीं देता था। महिला का एटीएम लेकर युवक ने अस्सी हजार रुपए भी निकाल लिए थे। किसी तरह वह वहां से छूटकर आ गई। उसके बाद से ही महिला उसकी तलाश कर रही थी। गजपुर निवासी सुमन ने जालसाज को लिव इन रिलेशनशिप में रहने का बहाना बनाकर बुलाया। उसने युवक को फोन पर कहा कि उसका पति उसको रखने के लिए तैयार नहीं है। वह युवक के साथ रहने को तैयार है। वह गोरखपुर के गजपुर आ जाए, महिला उसके साथ जेवर व कपड़े लेकर चली जाएगी। महिला की बात में आकर युवक शुक्रवार की शाम करीब छः बजे यहां चला आया। जिसके बाद महिला उसे बातों में उलझाए रही। फिर परिवारवालों की मदद से उसे खंभे में बांध दिया और पीटकर पुलिस के हवाले कर दिया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
असम की जीवनदायिनी नदी सियांग (ब्रह्मपुत्र) नदी का पानी लगातार प्रदूषित होता जा रहा है. इसका रंग लगातार काला होता जा रहा है. शनिवार को असम सरकार ने, राज्य की फायर सर्विस डिपार्टमेंट द्वारा 15 लोकेशंस से लिए गए ब्रह्मपुत्र नदी के पानी के सैंपल, जांच के लिए IICM हैदराबाद और IIT गुवाहाटी को भेजे हैं. आशंका है कि ब्रह्मपुत्र नदी के पानी काला होने के पीछे चीन का हाथ है. हाल ही में कांग्रेस सांसद निनॉंग एरिंग ने पीएम मोदी को खत लिखकर बताया था कि सर्दियों के महीने में ब्रह्मपुत्र नदी के पानी का रंग बदलना असामान्य घटना है. उन्होंने कहा कि यह चीनी सरकार सियांग नदी (तिब्बत में सांगपो) को संभवतः मोड़ने के कारण यह हो सकता है. उन्होंने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने के लिए पीएम से अनुरोध किया था. इसके पहले भी एक लैब की रिपोर्ट में ब्रह्मपुत्र नदी के पानी में सीमेंट की मात्रा पाई गई थी. असम स्वास्थ्य मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा था कि उनकी सरकार को डर है कि चीन या तो अपने क्षेत्र के तहत नदी पर कुछ बड़े निर्माण कार्य कर रहा है या ब्रह्मपुत्र नदी के जल को हटाने की कोशिश कर रहा है. इसके चलते नदी के पानी के रंग में असामान्य परिवर्तन आ रहा है. सियांग नदी में प्रदुषण बढ़ने से लगातार बड़ी मात्रा में मछलियों की मौत हो रही है.
असम की जीवनदायिनी नदी सियांग नदी का पानी लगातार प्रदूषित होता जा रहा है. इसका रंग लगातार काला होता जा रहा है. शनिवार को असम सरकार ने, राज्य की फायर सर्विस डिपार्टमेंट द्वारा पंद्रह लोकेशंस से लिए गए ब्रह्मपुत्र नदी के पानी के सैंपल, जांच के लिए IICM हैदराबाद और IIT गुवाहाटी को भेजे हैं. आशंका है कि ब्रह्मपुत्र नदी के पानी काला होने के पीछे चीन का हाथ है. हाल ही में कांग्रेस सांसद निनॉंग एरिंग ने पीएम मोदी को खत लिखकर बताया था कि सर्दियों के महीने में ब्रह्मपुत्र नदी के पानी का रंग बदलना असामान्य घटना है. उन्होंने कहा कि यह चीनी सरकार सियांग नदी को संभवतः मोड़ने के कारण यह हो सकता है. उन्होंने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने के लिए पीएम से अनुरोध किया था. इसके पहले भी एक लैब की रिपोर्ट में ब्रह्मपुत्र नदी के पानी में सीमेंट की मात्रा पाई गई थी. असम स्वास्थ्य मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा था कि उनकी सरकार को डर है कि चीन या तो अपने क्षेत्र के तहत नदी पर कुछ बड़े निर्माण कार्य कर रहा है या ब्रह्मपुत्र नदी के जल को हटाने की कोशिश कर रहा है. इसके चलते नदी के पानी के रंग में असामान्य परिवर्तन आ रहा है. सियांग नदी में प्रदुषण बढ़ने से लगातार बड़ी मात्रा में मछलियों की मौत हो रही है.
कानपुर। (www. arya-tv. com) शहर में चोरों का गिरोह फिर सक्रिय हो गया है, जो बड़े घरों को निशाना बनाकर माल पार कर रहा है। एक दिन पहले कल्याणपुर में आर्डिनेंस फैक्ट्री कर्मचारी के घर से 22 लाख की चोरी के दूसरे दिन शातिरों ने गोविंद नगर के रतनलाल नगर में कारोबारी के घर से करीब एक करोड़ रुपये का माल पार कर दिया। चोरों ने घटना को अंजाम देने के बाद हर कमरे और मेन गेट में बाहर से कुंडी लगा दी। सुबह स्वजन जागे तो मामले की जानकारी हुई और पुलिस को मामले की सूचना दी। रत्नलालनगर चौकी पुलिस ने पहुंचकर सीसीटीवी फुटेज खंगाले, जिसमें दो चोर कैद हुए हैं। परिवार ने गुरुवार को निकाले गए नौबस्ता के कर्मचारी पर शक जताया है। रतनलाल नगर निवासी श्याम नारायण तिवारी के परिवार में पत्नी स्नेहलता, चार बेटे शोभित, सचिन, सौरभ और गौरव हैं। श्यामनारायण के अनुसार दादानगर में लक्ष्मी इंडस्ट्रियल के नाम से फैक्ट्री है, जिसे सचिन देखता है। घर पर स्वीट हाउस है, जिसे शोभित और सौरभ देखते हैं, जबकि दूध डेयरी को वह खुद संभालते हैं। शोभित का गुरुवार रात पथरी का ऑपरेशन हुआ है। रात में श्याम नारायण अन्य बेटों के साथ हॉस्पिटल में थे। घर पर स्नेहलता और शोभित की पत्नी प्रियंका थीं। प्रियंका ने बताया कि बगल के मकान की छत के रास्ते चोर बेडरूम की खिड़की के रास्ते कमरे में दाखिल हुए। शातिरों ने अलमारी से पांच लाख नकद समेत करीब एक करोड़ के जेवर और कीमती सामान चोरी कर लिया। प्रियंका ने बताया कि सुबह जब वह उठीं तो कमरे का दरवाजा बंद था। उन्होंने सास स्नेहलता और घर पर रहने वाले कर्मचारी सतेंद्र उर्फ बड़कऊ को आवाज लगाई। प्रियंका ने दरवाजे के बगल की खिड़की से झांककर देखा तो अलमारी खुली मिली। इस पर वह शोर मचाते हुए दूसरी खिड़की से बाहर आईं। सीसीटीवी में शातिरों की फुटेज मिली है। पुलिस घटना की जांच कर रही है।
कानपुर। शहर में चोरों का गिरोह फिर सक्रिय हो गया है, जो बड़े घरों को निशाना बनाकर माल पार कर रहा है। एक दिन पहले कल्याणपुर में आर्डिनेंस फैक्ट्री कर्मचारी के घर से बाईस लाख की चोरी के दूसरे दिन शातिरों ने गोविंद नगर के रतनलाल नगर में कारोबारी के घर से करीब एक करोड़ रुपये का माल पार कर दिया। चोरों ने घटना को अंजाम देने के बाद हर कमरे और मेन गेट में बाहर से कुंडी लगा दी। सुबह स्वजन जागे तो मामले की जानकारी हुई और पुलिस को मामले की सूचना दी। रत्नलालनगर चौकी पुलिस ने पहुंचकर सीसीटीवी फुटेज खंगाले, जिसमें दो चोर कैद हुए हैं। परिवार ने गुरुवार को निकाले गए नौबस्ता के कर्मचारी पर शक जताया है। रतनलाल नगर निवासी श्याम नारायण तिवारी के परिवार में पत्नी स्नेहलता, चार बेटे शोभित, सचिन, सौरभ और गौरव हैं। श्यामनारायण के अनुसार दादानगर में लक्ष्मी इंडस्ट्रियल के नाम से फैक्ट्री है, जिसे सचिन देखता है। घर पर स्वीट हाउस है, जिसे शोभित और सौरभ देखते हैं, जबकि दूध डेयरी को वह खुद संभालते हैं। शोभित का गुरुवार रात पथरी का ऑपरेशन हुआ है। रात में श्याम नारायण अन्य बेटों के साथ हॉस्पिटल में थे। घर पर स्नेहलता और शोभित की पत्नी प्रियंका थीं। प्रियंका ने बताया कि बगल के मकान की छत के रास्ते चोर बेडरूम की खिड़की के रास्ते कमरे में दाखिल हुए। शातिरों ने अलमारी से पांच लाख नकद समेत करीब एक करोड़ के जेवर और कीमती सामान चोरी कर लिया। प्रियंका ने बताया कि सुबह जब वह उठीं तो कमरे का दरवाजा बंद था। उन्होंने सास स्नेहलता और घर पर रहने वाले कर्मचारी सतेंद्र उर्फ बड़कऊ को आवाज लगाई। प्रियंका ने दरवाजे के बगल की खिड़की से झांककर देखा तो अलमारी खुली मिली। इस पर वह शोर मचाते हुए दूसरी खिड़की से बाहर आईं। सीसीटीवी में शातिरों की फुटेज मिली है। पुलिस घटना की जांच कर रही है।
OnePlus Nord 3 Price Latest Update: टेक कद्दावर वनप्लस बहुत जल्द ही अपना फ्लैगशिप Smart Phone OnePlus Nord 3 को बहुत जल्द लॉन्च कर सकती है. OnePlus Nord 3 लॉन्चिंग डेट के बारे में साफतौर पर अभी कंपनी ने कोई भी जानकारी नहीं दी है लेकिन बताया जा रहा है इस महीने के अंत या फिर जुलाई के शुरुआती हफ्ते में यह लॉन्च हो सकता है. इस इस फ्लैगशिप Smart Phone को लेकर एक बड़ी समाचार सामने आई है. लॉन्च से पहले ही OnePlus Nord 3 की मूल्य का खुलासा हो चुका है. बता दें कि OnePlus Nord 3 चीन में लॉन्च हो चुके OnePlus Ace 2V का अपग्रेडेड या फिर रीब्रांडेड वर्जन हो सकता है. इस Smart Phone को लेकर लगातार नए नए लीक्स सामने आ रहे हैं अब इसके स्टोरेज वेरिएंट और प्राइस का भी सामने आ चुकी है. OnePlus Nord 3 की लेटेस्ट लीक्स के अनुसार यह Smart Phone यूरोप में दो स्टोरेज और दो रैम वेरिएंट के साथ आएगा. टिप्स्टर रोलैंड क्वांड ने OnePlus Nord 3 की प्राइस का खुलासा किया है. रोलेंड क्वांट के अनुसार यदि आप इसके 8GB RAM+ 128GB वेरिएंट को खरीदते हैं तो आपको 499 यूरो यानी करीब 40 हजार रुपये खर्च करने पड़ेंगे. अगर आप OnePlus Nord 3 के 16GB रैम और 256GB स्टोरेज वाले वेरिएंट को खरीदते हैं तो आपको 549 यूरो यानी करीब 48,500 रुपये खरीदना पड़ेगा. अभी इस Smart Phone की जो मूल्य सामने आई है वह भिन्न भिन्न बाजार में भिन्न भिन्न हो सकती है. हिंदुस्तान में इसे कम मूल्य में लॉन्च किया जा सकता है.
OnePlus Nord तीन Price Latest Update: टेक कद्दावर वनप्लस बहुत जल्द ही अपना फ्लैगशिप Smart Phone OnePlus Nord तीन को बहुत जल्द लॉन्च कर सकती है. OnePlus Nord तीन लॉन्चिंग डेट के बारे में साफतौर पर अभी कंपनी ने कोई भी जानकारी नहीं दी है लेकिन बताया जा रहा है इस महीने के अंत या फिर जुलाई के शुरुआती हफ्ते में यह लॉन्च हो सकता है. इस इस फ्लैगशिप Smart Phone को लेकर एक बड़ी समाचार सामने आई है. लॉन्च से पहले ही OnePlus Nord तीन की मूल्य का खुलासा हो चुका है. बता दें कि OnePlus Nord तीन चीन में लॉन्च हो चुके OnePlus Ace दो वोल्ट का अपग्रेडेड या फिर रीब्रांडेड वर्जन हो सकता है. इस Smart Phone को लेकर लगातार नए नए लीक्स सामने आ रहे हैं अब इसके स्टोरेज वेरिएंट और प्राइस का भी सामने आ चुकी है. OnePlus Nord तीन की लेटेस्ट लीक्स के अनुसार यह Smart Phone यूरोप में दो स्टोरेज और दो रैम वेरिएंट के साथ आएगा. टिप्स्टर रोलैंड क्वांड ने OnePlus Nord तीन की प्राइस का खुलासा किया है. रोलेंड क्वांट के अनुसार यदि आप इसके आठGB RAM+ एक सौ अट्ठाईसGB वेरिएंट को खरीदते हैं तो आपको चार सौ निन्यानवे यूरो यानी करीब चालीस हजार रुपये खर्च करने पड़ेंगे. अगर आप OnePlus Nord तीन के सोलहGB रैम और दो सौ छप्पनGB स्टोरेज वाले वेरिएंट को खरीदते हैं तो आपको पाँच सौ उनचास यूरो यानी करीब अड़तालीस,पाँच सौ रुपयापये खरीदना पड़ेगा. अभी इस Smart Phone की जो मूल्य सामने आई है वह भिन्न भिन्न बाजार में भिन्न भिन्न हो सकती है. हिंदुस्तान में इसे कम मूल्य में लॉन्च किया जा सकता है.
इस भाग में जिला स्तरीय पर्यटक स्थल की जानकारी दी गई है। इस भाग में जिला स्तरीय नागरिक सेवाओं की जानकारी दी गई है। इस भाग में जिला स्तरीय हेल्पलाइन नंबर दिये गये हैं। इस भाग में जिला स्तरीय आपदा प्रबंधन की जानकारी दी गई है। इस लेख में प्रसिद्ध वैज्ञानिकों, कहानियों,कविताओं, चुटकुलों, जीव जन्तुओं का अनोखा संसार और विज्ञान बच्चों के लिए किये गए कुछ प्रयोगों का विस्तृत उल्लेख है। इस भाग में भेड़ की विभिन्न नस्लों सहित, एक वाणिज्यिक भेड़ फार्म की स्थापना करना, रोग प्रबंधन, चारा प्रबंधन और वित्तीय सहायता आदि की जानकारी को शामिल किया जाता है। सिद्ध प्रणाली भारत में दवा की सबसे पुरानी प्रणालियों में से एक है। 'सिद्ध' शब्द का अर्थ है उपलब्धियां और सिद्ध, संत पुरुष होते थे जो दवा में परिणाम हासिल करते थे। है। इस भाग में इन्हीं परिणामों और उनका वर्तमान उपयोग बताया गया है।
इस भाग में जिला स्तरीय पर्यटक स्थल की जानकारी दी गई है। इस भाग में जिला स्तरीय नागरिक सेवाओं की जानकारी दी गई है। इस भाग में जिला स्तरीय हेल्पलाइन नंबर दिये गये हैं। इस भाग में जिला स्तरीय आपदा प्रबंधन की जानकारी दी गई है। इस लेख में प्रसिद्ध वैज्ञानिकों, कहानियों,कविताओं, चुटकुलों, जीव जन्तुओं का अनोखा संसार और विज्ञान बच्चों के लिए किये गए कुछ प्रयोगों का विस्तृत उल्लेख है। इस भाग में भेड़ की विभिन्न नस्लों सहित, एक वाणिज्यिक भेड़ फार्म की स्थापना करना, रोग प्रबंधन, चारा प्रबंधन और वित्तीय सहायता आदि की जानकारी को शामिल किया जाता है। सिद्ध प्रणाली भारत में दवा की सबसे पुरानी प्रणालियों में से एक है। 'सिद्ध' शब्द का अर्थ है उपलब्धियां और सिद्ध, संत पुरुष होते थे जो दवा में परिणाम हासिल करते थे। है। इस भाग में इन्हीं परिणामों और उनका वर्तमान उपयोग बताया गया है।
जन सरोकार ब्यूरो। आदमपुर। 3 नवंबर को होने वाले आदमपुर उपचुनाव के लिए काउंटडाऊन शुरू हो चुका है तथा चुनाव प्रचार थमने में 24 घंटे से भी कम समय बचा है। जैसे-जैसे चुनाव आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे कांग्रेस या यूं कहें की हुड्डा कैंप में हौंसला दिखना शुरू हो गया है। तीन दिन पहले तक मुकाबले में कमजोर दिख रही कांग्रेस में भूपेंद्र सिंह हुड्डा और दीपेंद्र हुड्डा के ताबड़तोड़ प्रचार ने जान फूंक दी है। यही कारण है कि सिर्फ आदमपुर ही नहीं बल्कि पूरे हरियाणा में अब इस मुकाबले को कांटे का मुकाबला माना जा रहा है। यहां बता दें कि पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा पिछले तीन दिन से लगातार आदमपुर में ही डटे हुए हैं तथा रोजाना ताबड़तोड़ प्रचार कर जयप्रकाश के लिए वोटों की अपील कर रहे हैं। वहीं, दीपेंद्र हुड्डा ने जाट बाहुल्य गांवों को टारगेट किया हुआ है और यूथ के बीच में जा कर अपना विजन बता और कुलदीप तथा भाजपा की नीतियों को आदमपुर के खिलाफ बताकर मतदाताओं को अपनी और आकर्षित करने में लगे हुए हैं। राजनीति के जानकार बताते हैं कि कांग्रेस पार्टी ने पिछले तीन दिन में बड़े ही योजनाबद्ध तरीके से और आदमपुर को विभिन्न जोन में बांटकर प्रचार किया है, जिसका उन्हें फायदा मिल रहा है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा और दीपेंद्र हुड्डा ने आदमपुर में भी बड़ौदा उपचुनाव वाली रणनीति बनाई हुई है। यहां भी कांग्रेस पार्टी चुनाव प्रचार के अंतिम दिन कोई रैली ना करके सीधे मतदाताओं से ही संपर्क करेगी ताकि पार्टी की ताकत का अंदाजा दूसरी पार्टियों को ना लग सके। आदमपुर में कांग्रेस पार्टी के लगातार बढ़ते ग्राफ का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ना सिर्फ भूपेंद्र हुड्डा और दीपेंद्र बल्कि जेपी और उदयभान की सभाओं में भी जहां भीड़ जुटने लगी है वहीं कांग्रेस नेताओं का गांवों में स्वागत भी जोशीला हो रहा है। हुड्डा पिता-पुत्र की मेहनत के साथ-साथ कांग्रेस पार्टी को यहां कुलदीप बिश्नोई के खराब चुनाव प्रबंधन का भी सीधे तौर पर फायदा मिल रहा है और खास बात तो यह है कि पार्टी कुलदीप के खराब चुनाव प्रबंधन को कैश करने में कोई कमी नहीं छोड़ रही है। उपचुनाव के मतदान में सिर्फ 2 दिन का समय बाकी है, अब सिर्फ कांग्रेस ही नहीं बाकी पार्टियां और खासकर सरकार भी अपनी पूरी ताकत चुनाव जीतने के लिए झोंकेगी। अब देखना होगा कि कुलदीप बिश्नोई के "चलताऊ" चुनाव प्रबंधन के चलते उन्हें वोटों के रूप में जो नुकसान हुआ है उसकाे खुद कुलदीप बिश्नोई, भाजपा संगठन और सरकार कितना कवर कर पाती है।
जन सरोकार ब्यूरो। आदमपुर। तीन नवंबर को होने वाले आदमपुर उपचुनाव के लिए काउंटडाऊन शुरू हो चुका है तथा चुनाव प्रचार थमने में चौबीस घंटाटे से भी कम समय बचा है। जैसे-जैसे चुनाव आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे कांग्रेस या यूं कहें की हुड्डा कैंप में हौंसला दिखना शुरू हो गया है। तीन दिन पहले तक मुकाबले में कमजोर दिख रही कांग्रेस में भूपेंद्र सिंह हुड्डा और दीपेंद्र हुड्डा के ताबड़तोड़ प्रचार ने जान फूंक दी है। यही कारण है कि सिर्फ आदमपुर ही नहीं बल्कि पूरे हरियाणा में अब इस मुकाबले को कांटे का मुकाबला माना जा रहा है। यहां बता दें कि पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा पिछले तीन दिन से लगातार आदमपुर में ही डटे हुए हैं तथा रोजाना ताबड़तोड़ प्रचार कर जयप्रकाश के लिए वोटों की अपील कर रहे हैं। वहीं, दीपेंद्र हुड्डा ने जाट बाहुल्य गांवों को टारगेट किया हुआ है और यूथ के बीच में जा कर अपना विजन बता और कुलदीप तथा भाजपा की नीतियों को आदमपुर के खिलाफ बताकर मतदाताओं को अपनी और आकर्षित करने में लगे हुए हैं। राजनीति के जानकार बताते हैं कि कांग्रेस पार्टी ने पिछले तीन दिन में बड़े ही योजनाबद्ध तरीके से और आदमपुर को विभिन्न जोन में बांटकर प्रचार किया है, जिसका उन्हें फायदा मिल रहा है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा और दीपेंद्र हुड्डा ने आदमपुर में भी बड़ौदा उपचुनाव वाली रणनीति बनाई हुई है। यहां भी कांग्रेस पार्टी चुनाव प्रचार के अंतिम दिन कोई रैली ना करके सीधे मतदाताओं से ही संपर्क करेगी ताकि पार्टी की ताकत का अंदाजा दूसरी पार्टियों को ना लग सके। आदमपुर में कांग्रेस पार्टी के लगातार बढ़ते ग्राफ का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ना सिर्फ भूपेंद्र हुड्डा और दीपेंद्र बल्कि जेपी और उदयभान की सभाओं में भी जहां भीड़ जुटने लगी है वहीं कांग्रेस नेताओं का गांवों में स्वागत भी जोशीला हो रहा है। हुड्डा पिता-पुत्र की मेहनत के साथ-साथ कांग्रेस पार्टी को यहां कुलदीप बिश्नोई के खराब चुनाव प्रबंधन का भी सीधे तौर पर फायदा मिल रहा है और खास बात तो यह है कि पार्टी कुलदीप के खराब चुनाव प्रबंधन को कैश करने में कोई कमी नहीं छोड़ रही है। उपचुनाव के मतदान में सिर्फ दो दिन का समय बाकी है, अब सिर्फ कांग्रेस ही नहीं बाकी पार्टियां और खासकर सरकार भी अपनी पूरी ताकत चुनाव जीतने के लिए झोंकेगी। अब देखना होगा कि कुलदीप बिश्नोई के "चलताऊ" चुनाव प्रबंधन के चलते उन्हें वोटों के रूप में जो नुकसान हुआ है उसकाे खुद कुलदीप बिश्नोई, भाजपा संगठन और सरकार कितना कवर कर पाती है।
ऊँची अटरिया जरद किनरिया, लगी नामकी डोरी । चाँद सुरज सम दियना बरतु है, ता बिच झूली डगरिया । पाँ पचीस तीन घर बनिया, मनुवाँ है चाधरिया । मुन्सी है कुतवाल ग्यानको, चहुँ दिस लागी बजरिया । आठ मरातिब दस दर्वाजा, नौमें लगी किवरिया । खिरकी बैठ गोरी चितवन लागी, उपराँ झाँप झोपरिया । कहत कबीर सुनो भाई साधो, गुरुके चरन बलिहरिया । साध संत मिलि सौदा करि हैं, झींखै मूरक अनरिया ॥ जहवाँसे आयो अमर वह देसवा । पानी न पान धरती अकसवा, चाँद न सूर न रैन दिवसवा । बाम्हन छत्री न सूद्र बैसवा, मुगल पठान न सैयद सेखवा । आदि जोति नहिं गौर गनेसवा, ब्रह्मा बिस्नु महेस न सेसवा । जोगी न जगम मुनि दुरबेसवा, आदि न अन्त न काल कलेसवा । दास कबीर ले आये सँदेसवा, सार सब्द गहि चलौ वहि देवा । साहेब है रँगरेज चुनरी मेरी रंग डारी स्याही रंग छुड़ायके रे दियो मजीठा रंग । धोयसे छूटे नहीं रे दिन दिन होत सुरंग ।। २२७ पाँच प्राण; पच्चीस तत्त्व; तीन गुण । आठ मरातिब = मरातिब महलके खंडोंको कहते हैं। आठसे आठ धातुओंका तात्पर्य है। सात धातुओंके साथ केश मिलाकर आठ धातु होते हैं (दे० ऊपर १३५ वें पदकी टिप्पणी) । दस दरवाजा = दो नेत्र, दो कान, दो नासा-छिद्र, मुख, मूत्रद्वार, मलद्वार और ब्रह्मरंत्र । इनमें प्रथम नौमें किवाड़ लगे हैं, प्राणायामके द्वारा योगी इन्हें बंद कर सकता है।
ऊँची अटरिया जरद किनरिया, लगी नामकी डोरी । चाँद सुरज सम दियना बरतु है, ता बिच झूली डगरिया । पाँ पचीस तीन घर बनिया, मनुवाँ है चाधरिया । मुन्सी है कुतवाल ग्यानको, चहुँ दिस लागी बजरिया । आठ मरातिब दस दर्वाजा, नौमें लगी किवरिया । खिरकी बैठ गोरी चितवन लागी, उपराँ झाँप झोपरिया । कहत कबीर सुनो भाई साधो, गुरुके चरन बलिहरिया । साध संत मिलि सौदा करि हैं, झींखै मूरक अनरिया ॥ जहवाँसे आयो अमर वह देसवा । पानी न पान धरती अकसवा, चाँद न सूर न रैन दिवसवा । बाम्हन छत्री न सूद्र बैसवा, मुगल पठान न सैयद सेखवा । आदि जोति नहिं गौर गनेसवा, ब्रह्मा बिस्नु महेस न सेसवा । जोगी न जगम मुनि दुरबेसवा, आदि न अन्त न काल कलेसवा । दास कबीर ले आये सँदेसवा, सार सब्द गहि चलौ वहि देवा । साहेब है रँगरेज चुनरी मेरी रंग डारी स्याही रंग छुड़ायके रे दियो मजीठा रंग । धोयसे छूटे नहीं रे दिन दिन होत सुरंग ।। दो सौ सत्ताईस पाँच प्राण; पच्चीस तत्त्व; तीन गुण । आठ मरातिब = मरातिब महलके खंडोंको कहते हैं। आठसे आठ धातुओंका तात्पर्य है। सात धातुओंके साथ केश मिलाकर आठ धातु होते हैं । दस दरवाजा = दो नेत्र, दो कान, दो नासा-छिद्र, मुख, मूत्रद्वार, मलद्वार और ब्रह्मरंत्र । इनमें प्रथम नौमें किवाड़ लगे हैं, प्राणायामके द्वारा योगी इन्हें बंद कर सकता है।
मुंबई में बुधवार को कोरोना वायरस से संक्रमण के 16 नए मामले सामने आने के बाद संक्रमित लोगों की संख्या शहर में 167 तक पहुंच गयी है. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने बताया कि अब तक शहर में आठ लोगों की मौत इस वायरस से हो चुकी है. अधिकारी ने कहा कि मुंबई में कुल 167 लोग इस वायरस से संक्रमित हैं. इनमें से 16 बुधवार को संक्रमित पाये गये. उन्होंने कहा कि मंगलवार रात में आठवीं मौत हुई लेकिन इसकी जानकारी आधिकारिक तौर पर बुधवार को मिली.
मुंबई में बुधवार को कोरोना वायरस से संक्रमण के सोलह नए मामले सामने आने के बाद संक्रमित लोगों की संख्या शहर में एक सौ सरसठ तक पहुंच गयी है. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने बताया कि अब तक शहर में आठ लोगों की मौत इस वायरस से हो चुकी है. अधिकारी ने कहा कि मुंबई में कुल एक सौ सरसठ लोग इस वायरस से संक्रमित हैं. इनमें से सोलह बुधवार को संक्रमित पाये गये. उन्होंने कहा कि मंगलवार रात में आठवीं मौत हुई लेकिन इसकी जानकारी आधिकारिक तौर पर बुधवार को मिली.
मानसिक चिन्ता रात चिन्ता करते करते अपने सोचने और समझनेकी शक्तिका विलकु नाश कर बैठते है और तब उनकी अवस्था दिनपर दिन इतनी अधि हीन होती जाती है कि उनके फिरसे उठनेकी कोई सम्भावना नही जाती । उसी दशामे वे निराश होकर उन चिन्ताओसे मुक्त होनेके लि मद्यपान करने लगते है अथवा और किसी प्रकारका नशा करने लग हे । मानो धीरे धीरे सुलगती हुई आग और जोरसे मुलगाई जा लगती है जो अन्तमे समस्त मानसिक और शारीरिक शक्तियोको भर करके ही छोड़ती है । जो व्यक्ति अपने जीवनमे कभी कोई काम अच्छी तरह या तोरसे न कर सका हो, उसे सबसे पहला काम यह करना चाहिए वह चिन्तासे अपने आपको मुक्त कर ले । हमारे सुख और उन्नति जितनी अधिक वावक छोटी छोटी चिन्ताएँ हुआ करती है, उतन अधिक बाधक और कोई वात या चीज नहीं होती । घोडा मेहन करनेसे उतना ज्यादा परेशान नहीं होता जितना मक्खिपोसे परेशान रहता है । मेहनत उसे चिन्तित नही करती, पर मक्खियो उसे चिन्ति कर देती हैं । फिर गाडी रवीचनेसे वह उतना नहीं घबराता जितन बार बार रासके खीचे जाने और चावुक के हिलनेसे घबड़ाता है। इस तरह आदमी भी वडे बडे कामोसे उतना परेशान नहीं होता जितन व्यर्थकी छोटी मोटी चिन्ताओसे । इसलिए प्रत्येक समझदार आदमीव यह मुख्य कर्तव्य है कि वह अपने आपको सदा सन प्रकारकी चिन्ता ओसे मुक्त रक्खे और व्यर्थकी बातोकी फिकरके अपने आपको परे शान न करे । क्योकि यही चिन्ता एक ऐसी चीन जो हमारी ि योका भी नाश करती है और हमारे सुखका भी ।
मानसिक चिन्ता रात चिन्ता करते करते अपने सोचने और समझनेकी शक्तिका विलकु नाश कर बैठते है और तब उनकी अवस्था दिनपर दिन इतनी अधि हीन होती जाती है कि उनके फिरसे उठनेकी कोई सम्भावना नही जाती । उसी दशामे वे निराश होकर उन चिन्ताओसे मुक्त होनेके लि मद्यपान करने लगते है अथवा और किसी प्रकारका नशा करने लग हे । मानो धीरे धीरे सुलगती हुई आग और जोरसे मुलगाई जा लगती है जो अन्तमे समस्त मानसिक और शारीरिक शक्तियोको भर करके ही छोड़ती है । जो व्यक्ति अपने जीवनमे कभी कोई काम अच्छी तरह या तोरसे न कर सका हो, उसे सबसे पहला काम यह करना चाहिए वह चिन्तासे अपने आपको मुक्त कर ले । हमारे सुख और उन्नति जितनी अधिक वावक छोटी छोटी चिन्ताएँ हुआ करती है, उतन अधिक बाधक और कोई वात या चीज नहीं होती । घोडा मेहन करनेसे उतना ज्यादा परेशान नहीं होता जितना मक्खिपोसे परेशान रहता है । मेहनत उसे चिन्तित नही करती, पर मक्खियो उसे चिन्ति कर देती हैं । फिर गाडी रवीचनेसे वह उतना नहीं घबराता जितन बार बार रासके खीचे जाने और चावुक के हिलनेसे घबड़ाता है। इस तरह आदमी भी वडे बडे कामोसे उतना परेशान नहीं होता जितन व्यर्थकी छोटी मोटी चिन्ताओसे । इसलिए प्रत्येक समझदार आदमीव यह मुख्य कर्तव्य है कि वह अपने आपको सदा सन प्रकारकी चिन्ता ओसे मुक्त रक्खे और व्यर्थकी बातोकी फिकरके अपने आपको परे शान न करे । क्योकि यही चिन्ता एक ऐसी चीन जो हमारी ि योका भी नाश करती है और हमारे सुखका भी ।
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। 2004 आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी का आयोजन सितंबर 2004 में इंग्लैंड में हुआ था। तीन जगहों पर 16 दिनों में 15 टीमों में 12 टीमों की भागीदारी हुईः एजबस्टन, द रोझ बाउल और ओवल प्रतिस्पर्धा में शामिल देशों में दस टेस्ट देशों, केन्या (एकदिवसीय स्थिति) और - एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय मैच बनाकर - संयुक्त राज्य अमेरिका ने 2004 के आईसीसी छः राष्ट्र चैलेंज को मार्जिन के सबसे छोटे से जीतकर (क्वार्टर रन रेट में नीचे) कनाडा, नामीबिया, और नीदरलैंड्स जो हाल ही में 2003 क्रिकेट विश्व कप में खेला था)। आईसीसी चैंपियन्स ट्रॉफ़ी वेस्ट इंडीज द्वारा एक आउट-आउट ओवल भीड़ के सामने जीत गई थी। रामनरेश सरवान को टूर्नामेंट के प्लेयर नाम दिया गया था। . बिली बोडेन ब्रेंट फ्रेजर "बिली" बोडेन (जन्म 11 अप्रैल,1963) न्यूजीलैंड से एक अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट अंपायर है। गठिया वात से पीड़ित होने से पहले वे एक खिलाड़ी थे और इसीलिये उन्होंने अंपायरिंग शुरू कर दी। अपने नाटकीय संकेतन शैली के लिए वे विशेष रूप से जाने जाते हैं जिसमे आऊट के संकेत के लिए "कयामत की कुटिल उंगली" शामिल है। . 2004 आईसीसी चैंपियन्स ट्रॉफ़ी और बिली बोडेन आम में एक बात है (यूनियनपीडिया में): एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय। ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच मेलबोर्न क्रिकेट ग्राउंड ने ओडीआई (ODI) मैच होस्ट किया। पीले कपड़ों में बल्लेबाज हैं जो ऑस्ट्रेलियाई है जबकि नीले कपड़ों में भारतीय क्षेत्ररक्षण टीम हैं। एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय (ओडीआई (ODI)) क्रिकेट की एक शैली है, जिसमें दो राष्ट्रीय क्रिकेट टीमों के बीच प्रति टीम 50 ओवर खेले जाते हैं। क्रिकेट विश्व कप इसी प्रारूप के अनुसार खेला जाता है। एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय मैचों को "लिमिटेड ओवर इंटरनेशनल (एलओआई (LOI))" भी कहा जाता है, क्योंकि राष्ट्रीय टीमों के बीच सीमित ओवर के क्रिकेट मैच खेले जाते हैं और यदि मौसम की वजह से व्यवधान उत्पन्न होता है तो वे हमेशा एक दिन में समाप्त नहीं होते. 2004 आईसीसी चैंपियन्स ट्रॉफ़ी 44 संबंध है और बिली बोडेन 6 है। वे आम 1 में है, समानता सूचकांक 2.00% है = 1 / (44 + 6)। यह लेख 2004 आईसीसी चैंपियन्स ट्रॉफ़ी और बिली बोडेन के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। दो हज़ार चार आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी का आयोजन सितंबर दो हज़ार चार में इंग्लैंड में हुआ था। तीन जगहों पर सोलह दिनों में पंद्रह टीमों में बारह टीमों की भागीदारी हुईः एजबस्टन, द रोझ बाउल और ओवल प्रतिस्पर्धा में शामिल देशों में दस टेस्ट देशों, केन्या और - एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय मैच बनाकर - संयुक्त राज्य अमेरिका ने दो हज़ार चार के आईसीसी छः राष्ट्र चैलेंज को मार्जिन के सबसे छोटे से जीतकर कनाडा, नामीबिया, और नीदरलैंड्स जो हाल ही में दो हज़ार तीन क्रिकेट विश्व कप में खेला था)। आईसीसी चैंपियन्स ट्रॉफ़ी वेस्ट इंडीज द्वारा एक आउट-आउट ओवल भीड़ के सामने जीत गई थी। रामनरेश सरवान को टूर्नामेंट के प्लेयर नाम दिया गया था। . बिली बोडेन ब्रेंट फ्रेजर "बिली" बोडेन न्यूजीलैंड से एक अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट अंपायर है। गठिया वात से पीड़ित होने से पहले वे एक खिलाड़ी थे और इसीलिये उन्होंने अंपायरिंग शुरू कर दी। अपने नाटकीय संकेतन शैली के लिए वे विशेष रूप से जाने जाते हैं जिसमे आऊट के संकेत के लिए "कयामत की कुटिल उंगली" शामिल है। . दो हज़ार चार आईसीसी चैंपियन्स ट्रॉफ़ी और बिली बोडेन आम में एक बात है : एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय। ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच मेलबोर्न क्रिकेट ग्राउंड ने ओडीआई मैच होस्ट किया। पीले कपड़ों में बल्लेबाज हैं जो ऑस्ट्रेलियाई है जबकि नीले कपड़ों में भारतीय क्षेत्ररक्षण टीम हैं। एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय ) क्रिकेट की एक शैली है, जिसमें दो राष्ट्रीय क्रिकेट टीमों के बीच प्रति टीम पचास ओवर खेले जाते हैं। क्रिकेट विश्व कप इसी प्रारूप के अनुसार खेला जाता है। एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय मैचों को "लिमिटेड ओवर इंटरनेशनल )" भी कहा जाता है, क्योंकि राष्ट्रीय टीमों के बीच सीमित ओवर के क्रिकेट मैच खेले जाते हैं और यदि मौसम की वजह से व्यवधान उत्पन्न होता है तो वे हमेशा एक दिन में समाप्त नहीं होते. दो हज़ार चार आईसीसी चैंपियन्स ट्रॉफ़ी चौंतालीस संबंध है और बिली बोडेन छः है। वे आम एक में है, समानता सूचकांक दो.शून्य% है = एक / । यह लेख दो हज़ार चार आईसीसी चैंपियन्स ट्रॉफ़ी और बिली बोडेन के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
५५८ ] आर्यामडिल्लछंद -- भुजङ्गप्रपात - श्रडिल्लल्छन्द[ गुटका सग्रह त्रिभुवनजनहितकर्ता भर्ता मुपवित्रमुक्तिवरलक्ष्म्या । कन्दर्प दर्पहर्ता सुमृतदेवी जयति गुणधर्ता ।।१।। यो वज्रमौलिसगतमुकुटमहारत्नरक्तनसनिकरं । प्रतिपालितवरचरणं केवलवोघे मंडितसुभगं ।।२।। तं मुनिसुव्रतनाथं नत्वा कथयामि तस्य छन्दोहं । श्रृण्वन्तु सकलभव्या. जिनधर्मपराः मौनसयुक्ताः ॥३॥ प्रथम कल्यारण कहु मनमोहन, मगध मुदेश वसे प्रति सोहन । राजगेह नयरि वर सुन्दर, सुमित्र भूप तिहा जिसो पुरदर ॥१॥ चन्द्रमुखीमृगनयनी वाला तस रागी मोमा सुविशाला। पछिमरयणी मलिकुलबाला, स्वप्न मोल देग्वें गुणमाला ॥२॥ इन्द्रादे से प्रति सु विचक्षरण, छप्पन कुमारि सेवे शुभलक्षरण । रत्नवृष्टि करें धनद मनोहर, एम छमाम गया सुभ मुखकर ॥३॥ हरिवर्म्मा भूपति भुवि मंगल, प्राणत स्वर्ग हवो खण्डल । श्रावणवदि बीजे गुरगधारी, जननी गर्भ रह्यो मुखकारी ।।४।। धरति अगे पर गर्भभार न रेखात्रयं भगमापन्नसार । तदा श्रागता इन्द्रचन्द्रानरेन्द्रासुरादाणवाया न युक्ता सुभद्रा ॥१॥ पुर त्रिः परित्याखिलंदेव संघा गृह प्राप्त सोमिन कंते गता या । स्थित गर्भवामे जिन निक्कुलकं प्रणम्याद ते गताहिम्बनाक ॥२॥ कुमार्यो हि सेवा प्रकुर्वन्ति॒ि गाढ किययोज्ज्वलद्दीपसुहवृत्यवाढं । वर पत्रपूगं ददानासु प्रति कुंभ सुपूर्णं ।।३।। सुरश्वमा सर्भवसत्पवित्र लृसदरत्नवृष्टि शुभ पुण्यपात्र । जिन गर्भवासा विनिर्मुक्तदेहं पर स्तौमि सौमात्मज सौरुह ॥४॥ श्रीजितवर श्रवतरो महि त्रिभुवन चिह्न हवा सुराता महि । घटा सिहं सुख पुरहारव, सुरपति सहसा करें जय जयरव ॥१॥ बैशाल, बदी दशमी जिन जायो, सुरनरवृ द वेगें तब प्रायौ । ऐरावण आरूढ पुरदर, सचीसहित सोहें गुरगमदिर ।।२।। गुटका-संग्रह ] मोतीरेछन्द - तब ऐरावण सजकरी, चढ्यो शतमुख आणंद भरी । जस कोटी सतावीस छे अमरी, करें गीत नृत्य वलीदें भमरी ।।३।। गज कानें सोहे सोवर्ण चमरो, घण्टा टड्कार वदि सहु भरी । प्राखण्डल अंकुशवेसेंधरी, उद्धवमंगल गया जिन नयरी । राजगणें मलया इन्द्रसहू, बाजें वाजित्र सुरंग बहु । कलसशक्रं का, जिनवर लावें सही, इन्द्रारगी तब घर मझे गई ।। जिन बालक दीठो निज नय, इन्द्रारणी वोले वर वयणें । माया मेसि सुतहि एक कोयौ, जिनवर युगतें जइ इन्द्र दीयो । इसी प्रकार तप, ज्ञान और मोक्ष कल्यारण का वर्णन है। सबसे अधिक जन्म कल्याण का वर्णन हैं जिसका रचना के आधे से अधिक भाग मे वर्णन किया गया है इसमे उक्त छन्दों के अतिरिक्त लीलावती छन्द, हनुमतछन्द, दूहा, बुंभारण बन्दो का और प्रयोग हुआ है। अन्त का पाठ इस प्रकार हैबोस धनुष जस देह जहे जिन कुछप लाछन । त्रीस सहस्र वर वर्ष आयु सज्जन मन रञ्जन ।। हरवंशी गुरणवीमल, भक्त दारिद्र विहंडन । मनवाछितदातार, नयस्वालोडमु मडन ॥ श्री मूलसंघ संघद तिलक, ज्ञानभूषण भट्टाभरण । श्रीप्रभाचन्द्र सुरिवर वहे, मुनिसुव्रतमगलुकरण ।। इति मुनिसुव्रत छद सम्पूर्णोऽय । पत्र १२० पर निम्न प्रशस्ति दी हुई है - सवत् १८१८ वर्षे शाके १६८४ प्रवर्त्तमाने ज्येष्ठ सुदी ६ सोमवासरे श्रीमूलसधे सरस्वतीगच्छे बलात्कारगणे श्रीकुंदकुदाचार्यान्वये भट्टारक श्री पद्मनन्दि तत्पट्ट भ० श्रीदेवेन्द्र पट्टभ० श्रीविद्यानन्द भट्टारक श्री मल्लिभूषण तत्पट्टळे भ० श्रीलक्ष्मीचन्द्र भ० तत्पश्रीवोरचन्द्र तत्पट्ट भ० श्री ज्ञानभूषण तत्पभ० श्रीप्रभाचन्द्र तत्पट्ट भ० श्रीवादीचन्द्र तत्पट्ट भ० श्रीमहीचन्द्र तत्पट्ट भ० श्रीमेरुचन्द्र भ० श्रीजैनचन्द्र तत्पट्टे भ० श्रीविद्यानन्द तच्छिष्य ब्रह्मनेमसागर पठनार्थं । पुण्यार्थं पुस्तक लिखायितं श्रीसूर्यपुरे श्री आदिनाथ चैत्यालये ।
पाँच सौ अट्ठावन ] आर्यामडिल्लछंद -- भुजङ्गप्रपात - श्रडिल्लल्छन्द[ गुटका सग्रह त्रिभुवनजनहितकर्ता भर्ता मुपवित्रमुक्तिवरलक्ष्म्या । कन्दर्प दर्पहर्ता सुमृतदेवी जयति गुणधर्ता ।।एक।। यो वज्रमौलिसगतमुकुटमहारत्नरक्तनसनिकरं । प्रतिपालितवरचरणं केवलवोघे मंडितसुभगं ।।दो।। तं मुनिसुव्रतनाथं नत्वा कथयामि तस्य छन्दोहं । श्रृण्वन्तु सकलभव्या. जिनधर्मपराः मौनसयुक्ताः ॥तीन॥ प्रथम कल्यारण कहु मनमोहन, मगध मुदेश वसे प्रति सोहन । राजगेह नयरि वर सुन्दर, सुमित्र भूप तिहा जिसो पुरदर ॥एक॥ चन्द्रमुखीमृगनयनी वाला तस रागी मोमा सुविशाला। पछिमरयणी मलिकुलबाला, स्वप्न मोल देग्वें गुणमाला ॥दो॥ इन्द्रादे से प्रति सु विचक्षरण, छप्पन कुमारि सेवे शुभलक्षरण । रत्नवृष्टि करें धनद मनोहर, एम छमाम गया सुभ मुखकर ॥तीन॥ हरिवर्म्मा भूपति भुवि मंगल, प्राणत स्वर्ग हवो खण्डल । श्रावणवदि बीजे गुरगधारी, जननी गर्भ रह्यो मुखकारी ।।चार।। धरति अगे पर गर्भभार न रेखात्रयं भगमापन्नसार । तदा श्रागता इन्द्रचन्द्रानरेन्द्रासुरादाणवाया न युक्ता सुभद्रा ॥एक॥ पुर त्रिः परित्याखिलंदेव संघा गृह प्राप्त सोमिन कंते गता या । स्थित गर्भवामे जिन निक्कुलकं प्रणम्याद ते गताहिम्बनाक ॥दो॥ कुमार्यो हि सेवा प्रकुर्वन्ति॒ि गाढ किययोज्ज्वलद्दीपसुहवृत्यवाढं । वर पत्रपूगं ददानासु प्रति कुंभ सुपूर्णं ।।तीन।। सुरश्वमा सर्भवसत्पवित्र लृसदरत्नवृष्टि शुभ पुण्यपात्र । जिन गर्भवासा विनिर्मुक्तदेहं पर स्तौमि सौमात्मज सौरुह ॥चार॥ श्रीजितवर श्रवतरो महि त्रिभुवन चिह्न हवा सुराता महि । घटा सिहं सुख पुरहारव, सुरपति सहसा करें जय जयरव ॥एक॥ बैशाल, बदी दशमी जिन जायो, सुरनरवृ द वेगें तब प्रायौ । ऐरावण आरूढ पुरदर, सचीसहित सोहें गुरगमदिर ।।दो।। गुटका-संग्रह ] मोतीरेछन्द - तब ऐरावण सजकरी, चढ्यो शतमुख आणंद भरी । जस कोटी सतावीस छे अमरी, करें गीत नृत्य वलीदें भमरी ।।तीन।। गज कानें सोहे सोवर्ण चमरो, घण्टा टड्कार वदि सहु भरी । प्राखण्डल अंकुशवेसेंधरी, उद्धवमंगल गया जिन नयरी । राजगणें मलया इन्द्रसहू, बाजें वाजित्र सुरंग बहु । कलसशक्रं का, जिनवर लावें सही, इन्द्रारगी तब घर मझे गई ।। जिन बालक दीठो निज नय, इन्द्रारणी वोले वर वयणें । माया मेसि सुतहि एक कोयौ, जिनवर युगतें जइ इन्द्र दीयो । इसी प्रकार तप, ज्ञान और मोक्ष कल्यारण का वर्णन है। सबसे अधिक जन्म कल्याण का वर्णन हैं जिसका रचना के आधे से अधिक भाग मे वर्णन किया गया है इसमे उक्त छन्दों के अतिरिक्त लीलावती छन्द, हनुमतछन्द, दूहा, बुंभारण बन्दो का और प्रयोग हुआ है। अन्त का पाठ इस प्रकार हैबोस धनुष जस देह जहे जिन कुछप लाछन । त्रीस सहस्र वर वर्ष आयु सज्जन मन रञ्जन ।। हरवंशी गुरणवीमल, भक्त दारिद्र विहंडन । मनवाछितदातार, नयस्वालोडमु मडन ॥ श्री मूलसंघ संघद तिलक, ज्ञानभूषण भट्टाभरण । श्रीप्रभाचन्द्र सुरिवर वहे, मुनिसुव्रतमगलुकरण ।। इति मुनिसुव्रत छद सम्पूर्णोऽय । पत्र एक सौ बीस पर निम्न प्रशस्ति दी हुई है - सवत् एक हज़ार आठ सौ अट्ठारह वर्षे शाके एक हज़ार छः सौ चौरासी प्रवर्त्तमाने ज्येष्ठ सुदी छः सोमवासरे श्रीमूलसधे सरस्वतीगच्छे बलात्कारगणे श्रीकुंदकुदाचार्यान्वये भट्टारक श्री पद्मनन्दि तत्पट्ट भशून्य श्रीदेवेन्द्र पट्टभशून्य श्रीविद्यानन्द भट्टारक श्री मल्लिभूषण तत्पट्टळे भशून्य श्रीलक्ष्मीचन्द्र भशून्य तत्पश्रीवोरचन्द्र तत्पट्ट भशून्य श्री ज्ञानभूषण तत्पभशून्य श्रीप्रभाचन्द्र तत्पट्ट भशून्य श्रीवादीचन्द्र तत्पट्ट भशून्य श्रीमहीचन्द्र तत्पट्ट भशून्य श्रीमेरुचन्द्र भशून्य श्रीजैनचन्द्र तत्पट्टे भशून्य श्रीविद्यानन्द तच्छिष्य ब्रह्मनेमसागर पठनार्थं । पुण्यार्थं पुस्तक लिखायितं श्रीसूर्यपुरे श्री आदिनाथ चैत्यालये ।
राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका पर लगाएं ये आरोप. . कोनराड संगमा ने मेघालय के मुख्यमंत्री पद की ली शपथ, PM सहित ये लोग रहे मौजूद . . बीजेपी अध्यक्ष नलिन कुमार ने राहुल गांधी पर दिया ये बड़ा विवादित बयान. .
राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका पर लगाएं ये आरोप. . कोनराड संगमा ने मेघालय के मुख्यमंत्री पद की ली शपथ, PM सहित ये लोग रहे मौजूद . . बीजेपी अध्यक्ष नलिन कुमार ने राहुल गांधी पर दिया ये बड़ा विवादित बयान. .
असम में विधानसभा चुनाव के दौरान एआईयूडीएफ प्रमुख मौलाना बदरुद्दीन अजमल का एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि रैली में आए लोग कटोरा लेकर खड़े हैं और मौलाना अजमल उसमें फूंक मार रहे हैं। भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने वीडियो शेयर कर लिखा, "बदबुद्दीन अजमल लोगो के प्यालों में थूक रहा है वो भी Covid समय में। क्या बदसलूकी है? " ऐसे में बताते हैं कि असम की राजनीति में प्याले में फूंकने की क्या राजनीति है और ऐसा करने के पीछे क्या वजह है? सबसे पहली बात तो ये कि ये वीडियो कब का है इसकी अभी तक जानकारी नहीं मिली है, लेकिन ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। साल 2016 के विधानसभा चुनाव में भी मौलाना अजमल ने ऐसा ही किया था। तब मीडिया में चला था जादुई पानी लो और वोट दो। लेकिन ये जादुई पानी क्या बला है? दरअसल, मौलाना अजमल की रैलियों में आने वाले लोग अपने साथ पानी लेकर आते हैं। इसके बाद मौलाना अजमल उस पानी में फूंक मारते हैं। यहां स्थानीय लोगों का मानना है कि मौलाना अजमल का फूंक मारा हुआ पानी पीने से बीमारियां ठीक हो जाती है। रैली में आए लोग कहते हैं, फूंक वाला पानी पीने से शरीर अच्छा रहता है। इसलिए लोग पानी लेकर आते हैं। एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि कोई बीमारी है तो उसके लिए अच्छा होगा। फूक में चमत्कार छिपा है। पानी में फूक मार दें तो उससे ठीक हो जाएंगे। असम की पॉलिटिक्स में मौलाना अजमल का अच्छा दखल है। सेंट और परफ्यूम का बिजनेस करने वाले मौलाना अजमल साहब कासमी 17वीं लोक सभा के सांसद हैं। वे 2019 में असम के धुबरी सीट से 'आल इंडिया यूनाईटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट' पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़कर निर्वाचित हुए। कासमी लगातार तीन बार 2009, 2014 और 2019 लोक सभा चुनाव में जीत दर्ज कर चुके हैं। 12 फरवरी, 1950 को नगांव में जन्मे कासमी ने 'दारुल उलूम देवबंद' से पढ़ाई की। आपको जानकर हैरानी होगी कि एक समय में कांग्रेस सरकार ने इन्हें पहचानने से मना कर दिया था, लेकिन इस विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने कासमी की पार्टी से गठबंधन किया है। 65 साल के अजमल कासमी ने 2005 में आल इंडिया यूनाईटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट(AIUDF) ने स्थापना की थी। तब 2006 में असम की तत्कालीन कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने अजमल को पहचानने से तक इनकार कर दिया था। लेकिन आज परिस्थतियां बदल गई हैं। इस विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने उनकी पार्टी के साथ गठबंधन किया है। मौलाना अजमल सेंट-परफ्यूम का बिजनेस करते हैं। उनका कारोबार 50 से ज्यादा देशों में फैला हुआ है। माना जाता है कि उनकी पार्टी AIUDF का बंगाली मूल के मुस्लिमों पर गहरा प्रभाव है।
असम में विधानसभा चुनाव के दौरान एआईयूडीएफ प्रमुख मौलाना बदरुद्दीन अजमल का एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि रैली में आए लोग कटोरा लेकर खड़े हैं और मौलाना अजमल उसमें फूंक मार रहे हैं। भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने वीडियो शेयर कर लिखा, "बदबुद्दीन अजमल लोगो के प्यालों में थूक रहा है वो भी Covid समय में। क्या बदसलूकी है? " ऐसे में बताते हैं कि असम की राजनीति में प्याले में फूंकने की क्या राजनीति है और ऐसा करने के पीछे क्या वजह है? सबसे पहली बात तो ये कि ये वीडियो कब का है इसकी अभी तक जानकारी नहीं मिली है, लेकिन ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। साल दो हज़ार सोलह के विधानसभा चुनाव में भी मौलाना अजमल ने ऐसा ही किया था। तब मीडिया में चला था जादुई पानी लो और वोट दो। लेकिन ये जादुई पानी क्या बला है? दरअसल, मौलाना अजमल की रैलियों में आने वाले लोग अपने साथ पानी लेकर आते हैं। इसके बाद मौलाना अजमल उस पानी में फूंक मारते हैं। यहां स्थानीय लोगों का मानना है कि मौलाना अजमल का फूंक मारा हुआ पानी पीने से बीमारियां ठीक हो जाती है। रैली में आए लोग कहते हैं, फूंक वाला पानी पीने से शरीर अच्छा रहता है। इसलिए लोग पानी लेकर आते हैं। एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि कोई बीमारी है तो उसके लिए अच्छा होगा। फूक में चमत्कार छिपा है। पानी में फूक मार दें तो उससे ठीक हो जाएंगे। असम की पॉलिटिक्स में मौलाना अजमल का अच्छा दखल है। सेंट और परफ्यूम का बिजनेस करने वाले मौलाना अजमल साहब कासमी सत्रहवीं लोक सभा के सांसद हैं। वे दो हज़ार उन्नीस में असम के धुबरी सीट से 'आल इंडिया यूनाईटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट' पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़कर निर्वाचित हुए। कासमी लगातार तीन बार दो हज़ार नौ, दो हज़ार चौदह और दो हज़ार उन्नीस लोक सभा चुनाव में जीत दर्ज कर चुके हैं। बारह फरवरी, एक हज़ार नौ सौ पचास को नगांव में जन्मे कासमी ने 'दारुल उलूम देवबंद' से पढ़ाई की। आपको जानकर हैरानी होगी कि एक समय में कांग्रेस सरकार ने इन्हें पहचानने से मना कर दिया था, लेकिन इस विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने कासमी की पार्टी से गठबंधन किया है। पैंसठ साल के अजमल कासमी ने दो हज़ार पाँच में आल इंडिया यूनाईटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट ने स्थापना की थी। तब दो हज़ार छः में असम की तत्कालीन कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने अजमल को पहचानने से तक इनकार कर दिया था। लेकिन आज परिस्थतियां बदल गई हैं। इस विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने उनकी पार्टी के साथ गठबंधन किया है। मौलाना अजमल सेंट-परफ्यूम का बिजनेस करते हैं। उनका कारोबार पचास से ज्यादा देशों में फैला हुआ है। माना जाता है कि उनकी पार्टी AIUDF का बंगाली मूल के मुस्लिमों पर गहरा प्रभाव है।
Sri Nagar G20 Meet: श्रीनगर में जी20 की मीटिंग का विरोध करने वाले चीन को अब भारत ने जवाब दिया है. भारत ने कहा कि हम अपने क्षेत्र में कहीं भी मीटिंग आयोजित करने के लिए स्वतंत्र हैं. G20 Meet In Sri Nagar: जम्मू कश्मीर के श्रीनगर में जी20 की मीटिंग का विरोध करने वाले चीन को भारत ने करारा जवाब दिया है. भारत ने कहा कि हम अपने क्षेत्र में कहीं भी मीटिंग आयोजित करने के लिए स्वतंत्र हैं. चीन ने यहां श्रीनगर में जी20 टूरिज्म ग्रुप की मीटिंग का बॉयकॉट किया. साथ ही जम्मू कश्मीर को विवादित क्षेत्र बताया और कहा कि वह इस तरह की किसी भी मीटिंग का हिस्सा नहीं होगा. एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने साफ किया कि हम अपने क्षेत्र में कहीं भी मीटिंग आयोजित कर सकते हैं. हम इसके लिए स्वतंत्र हैं. भारत ने साथ ही कहा कि सीमा पर शांति के बाद ही चीन के साथ संबंध सामान्य हो सकते हैं. चीन अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख को भी विवादित क्षेत्र मानता है, और यहां आयोजित बैठकों का भी चीन ने बॉयकॉट किया था. चीन के अलावा सऊदी अरब और तुर्की भी उन देशों में शामिल है जिसने शिरकत की पुष्टि नहीं की है. बताया जा रहा है कि एजिप्ट भी श्रीनगर मीटिंग से दूर रह सकता है. ये सभी देश ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक को-ऑपरेशन (ओआईसी) के सदस्य हैं, जो जम्मू कश्मीर पर भारत के आलोचक रहे हैं. खबर लिखे जाने ओआईसी के अन्य सदस्य देशों इंडोनेशिया, बांग्लादेश, ओमान, युनाइटेड अरब अमिरात ने मीटिंग में हिस्सा लेने की पुष्टि की है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो कुछ देशों के नेता मीटिंग में हिस्सा नहीं लेंगे, लेकिन वे अपने राजनयिकों को भेज सकते हैं. इंडोनेशिया भी दिल्ली में मौजूद अपने राजनयिक को मीटिंग में भेजने का फैसला किया है. मीडिया रिपोर्ट की मानें तो कुछ देशों ने सुरक्षा के लिहाज से मीटिंग से दूर रहने का फैसला किया. हालांकि, श्रीनगर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है. हाई-प्रोफाइल मीटिंग से पहले यहां सुरक्षा के कई लेयर तैयार किए गए हैं. अल्पसंख्यक पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत फर्नांड डी वेरेनेस ने भारत द्वारा श्रीनगर में मीटिंग का विरोध किया था. उन्होंने कहा था कि भारत श्रीनगर में इसलिए मीटिंग आयोजित कर रहा है ताकि यहां मानवाधिकार उल्लंघनों को नॉर्मलाइज किया जा सके. उन्होंने साथ ही लोकतांत्रिक मूल्यों और अन्य अधिकारों के उल्लंघन का दावा किया था. इसपर भारत ने मामले को राजनीतिक रूप देने का आरोप लगाया.
Sri Nagar Gबीस Meet: श्रीनगर में जीबीस की मीटिंग का विरोध करने वाले चीन को अब भारत ने जवाब दिया है. भारत ने कहा कि हम अपने क्षेत्र में कहीं भी मीटिंग आयोजित करने के लिए स्वतंत्र हैं. Gबीस Meet In Sri Nagar: जम्मू कश्मीर के श्रीनगर में जीबीस की मीटिंग का विरोध करने वाले चीन को भारत ने करारा जवाब दिया है. भारत ने कहा कि हम अपने क्षेत्र में कहीं भी मीटिंग आयोजित करने के लिए स्वतंत्र हैं. चीन ने यहां श्रीनगर में जीबीस टूरिज्म ग्रुप की मीटिंग का बॉयकॉट किया. साथ ही जम्मू कश्मीर को विवादित क्षेत्र बताया और कहा कि वह इस तरह की किसी भी मीटिंग का हिस्सा नहीं होगा. एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने साफ किया कि हम अपने क्षेत्र में कहीं भी मीटिंग आयोजित कर सकते हैं. हम इसके लिए स्वतंत्र हैं. भारत ने साथ ही कहा कि सीमा पर शांति के बाद ही चीन के साथ संबंध सामान्य हो सकते हैं. चीन अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख को भी विवादित क्षेत्र मानता है, और यहां आयोजित बैठकों का भी चीन ने बॉयकॉट किया था. चीन के अलावा सऊदी अरब और तुर्की भी उन देशों में शामिल है जिसने शिरकत की पुष्टि नहीं की है. बताया जा रहा है कि एजिप्ट भी श्रीनगर मीटिंग से दूर रह सकता है. ये सभी देश ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक को-ऑपरेशन के सदस्य हैं, जो जम्मू कश्मीर पर भारत के आलोचक रहे हैं. खबर लिखे जाने ओआईसी के अन्य सदस्य देशों इंडोनेशिया, बांग्लादेश, ओमान, युनाइटेड अरब अमिरात ने मीटिंग में हिस्सा लेने की पुष्टि की है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो कुछ देशों के नेता मीटिंग में हिस्सा नहीं लेंगे, लेकिन वे अपने राजनयिकों को भेज सकते हैं. इंडोनेशिया भी दिल्ली में मौजूद अपने राजनयिक को मीटिंग में भेजने का फैसला किया है. मीडिया रिपोर्ट की मानें तो कुछ देशों ने सुरक्षा के लिहाज से मीटिंग से दूर रहने का फैसला किया. हालांकि, श्रीनगर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है. हाई-प्रोफाइल मीटिंग से पहले यहां सुरक्षा के कई लेयर तैयार किए गए हैं. अल्पसंख्यक पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत फर्नांड डी वेरेनेस ने भारत द्वारा श्रीनगर में मीटिंग का विरोध किया था. उन्होंने कहा था कि भारत श्रीनगर में इसलिए मीटिंग आयोजित कर रहा है ताकि यहां मानवाधिकार उल्लंघनों को नॉर्मलाइज किया जा सके. उन्होंने साथ ही लोकतांत्रिक मूल्यों और अन्य अधिकारों के उल्लंघन का दावा किया था. इसपर भारत ने मामले को राजनीतिक रूप देने का आरोप लगाया.
Posted On: 17वीं लोकसभा का 13वां सत्र और राज्यसभा का 261वां सत्र सोमवार, 18 सितंबर, 2023 को शुरू होने जा रहा है और सरकारी कामकाज की अत्यावश्यकताओं के अनुसार संभवतः शुक्रवार, 22 सितंबर, 2023 को समाप्त होगा। इससे ठीक एक दिन पहले आज रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सरकार की संसद में सभी राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ बैठक संपन्न हुई। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री ने बैठक की शुरुआत करते हुए सदन के सभी नेताओं का स्वागत करने के बाद कहा कि पांच दिन चलने वाले इस सत्र में पांच बैठकें होंगी। उन्होंने सूचित किया कि इस सत्र के दौरान संभवतः आठ विधायी विषयों को उठाए जाने की संभावना है। उन्होंने यह भी बताया कि सोमवार, 18 सितंबर, 2023 को "संविधान सभा से लेकर 75 वर्षों की संसदीय यात्रा - उपलब्धियां, अनुभव, यादें और सीखें" विषय पर एक चर्चा आयोजित की जाएगी। उन्होंने इन नेताओं को बताया कि 19 सितंबर, 2023 को सुबह 10.00 बजे से 10.45 बजे तक फोटो सेशन होगा। उसके बाद सुबह 11.00 बजे सेंट्रल हॉल में एक समारोह शुरू होगा, जिसमें उपराष्ट्रपति / राज्य सभा के सभापति, प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, राज्यसभा में सदन के अध्यक्ष, संसदीय कार्य मंत्री, राज्यसभा में विपक्ष के नेता और लोकसभा में सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता और संसद के दोनों सदनों के सदस्य शामिल होंगे। सेंट्रल हॉल में समारोह के समापन के बाद दोनों सदन नए संसद भवन में अपने-अपने कक्षों में एकत्रित होंगे। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी ने संसद के दोनों सदनों के सुचारू कामकाज के लिए सभी पार्टियों के नेताओं से सक्रिय सहयोग और समर्थन का अनुरोध किया। इस बैठक में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग, उपभोक्ता कार्य, खाद्य और सार्वजनिक वितरण तथा कपड़ा मंत्री श्री पीयूष गोयल, जो राज्यसभा में सदन के नेता और कानून एवं न्याय मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) भी हैं; संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री और संस्कृति मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल और संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री और विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री वी. मुरलीधरन भी शामिल हुए। इस बैठक में 34 पार्टियों के 51 नेता शामिल हुए जिनमें भाजपा के नेता और मंत्रीगण मौजूद थे। नेताओं ने जो भी मुद्दे उठाए, उन्हें ध्यान में लिया गया। संसद के दोनों सदनों में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं द्वारा उठाए गए मुद्दों को सुनने के बाद बैठक का समापन करते हुए केंद्रीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने बैठक में सक्रिय और प्रभावी भागीदारी के लिए और जन महत्व के मुद्दों को उजागर करने के लिए नेताओं को धन्यवाद दिया। 19 सितंबर, 2023 से सभी सदस्यों को अपने संसदीय कर्तव्यों / कार्यों का निर्वहन करने के लिए नया संसद भवन मिलने जा रहा है इसके लिए उन्होंने सबको अग्रिम बधाई दी। अंत में, हाल ही में जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों से मुकाबला करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए हमारे सैनिकों और जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक अधिकारी के बलिदान के लिए सभी की तरफ से उन्होंने हार्दिक संवेदना व्यक्त की। उनके सम्मान में एक मिनट का मौन रखा गया।
Posted On: सत्रहवीं लोकसभा का तेरहवां सत्र और राज्यसभा का दो सौ इकसठवां सत्र सोमवार, अट्ठारह सितंबर, दो हज़ार तेईस को शुरू होने जा रहा है और सरकारी कामकाज की अत्यावश्यकताओं के अनुसार संभवतः शुक्रवार, बाईस सितंबर, दो हज़ार तेईस को समाप्त होगा। इससे ठीक एक दिन पहले आज रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सरकार की संसद में सभी राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ बैठक संपन्न हुई। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री ने बैठक की शुरुआत करते हुए सदन के सभी नेताओं का स्वागत करने के बाद कहा कि पांच दिन चलने वाले इस सत्र में पांच बैठकें होंगी। उन्होंने सूचित किया कि इस सत्र के दौरान संभवतः आठ विधायी विषयों को उठाए जाने की संभावना है। उन्होंने यह भी बताया कि सोमवार, अट्ठारह सितंबर, दो हज़ार तेईस को "संविधान सभा से लेकर पचहत्तर वर्षों की संसदीय यात्रा - उपलब्धियां, अनुभव, यादें और सीखें" विषय पर एक चर्चा आयोजित की जाएगी। उन्होंने इन नेताओं को बताया कि उन्नीस सितंबर, दो हज़ार तेईस को सुबह दस.शून्य बजे से दस.पैंतालीस बजे तक फोटो सेशन होगा। उसके बाद सुबह ग्यारह.शून्य बजे सेंट्रल हॉल में एक समारोह शुरू होगा, जिसमें उपराष्ट्रपति / राज्य सभा के सभापति, प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, राज्यसभा में सदन के अध्यक्ष, संसदीय कार्य मंत्री, राज्यसभा में विपक्ष के नेता और लोकसभा में सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता और संसद के दोनों सदनों के सदस्य शामिल होंगे। सेंट्रल हॉल में समारोह के समापन के बाद दोनों सदन नए संसद भवन में अपने-अपने कक्षों में एकत्रित होंगे। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी ने संसद के दोनों सदनों के सुचारू कामकाज के लिए सभी पार्टियों के नेताओं से सक्रिय सहयोग और समर्थन का अनुरोध किया। इस बैठक में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग, उपभोक्ता कार्य, खाद्य और सार्वजनिक वितरण तथा कपड़ा मंत्री श्री पीयूष गोयल, जो राज्यसभा में सदन के नेता और कानून एवं न्याय मंत्रालय के राज्य मंत्री भी हैं; संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री और संस्कृति मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल और संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री और विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री वी. मुरलीधरन भी शामिल हुए। इस बैठक में चौंतीस पार्टियों के इक्यावन नेता शामिल हुए जिनमें भाजपा के नेता और मंत्रीगण मौजूद थे। नेताओं ने जो भी मुद्दे उठाए, उन्हें ध्यान में लिया गया। संसद के दोनों सदनों में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं द्वारा उठाए गए मुद्दों को सुनने के बाद बैठक का समापन करते हुए केंद्रीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने बैठक में सक्रिय और प्रभावी भागीदारी के लिए और जन महत्व के मुद्दों को उजागर करने के लिए नेताओं को धन्यवाद दिया। उन्नीस सितंबर, दो हज़ार तेईस से सभी सदस्यों को अपने संसदीय कर्तव्यों / कार्यों का निर्वहन करने के लिए नया संसद भवन मिलने जा रहा है इसके लिए उन्होंने सबको अग्रिम बधाई दी। अंत में, हाल ही में जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों से मुकाबला करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए हमारे सैनिकों और जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक अधिकारी के बलिदान के लिए सभी की तरफ से उन्होंने हार्दिक संवेदना व्यक्त की। उनके सम्मान में एक मिनट का मौन रखा गया।
Dearness Allowance Hike: सरकार केंद्रीय कर्मचारियों को अभी 42% महंगाई भत्ता दे रही है. मार्च में डीए हाइक के ऐलान को 1 जनवरी 2023 से लागू किया गया था. अब अगले डीए हाइक का ऐलान सितंबर अक्टूबर में होने की उम्मीद है. DA Hike July 2023: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए महंगाई भत्ते का ऐलान इस बार सितंबर या अक्टूबर 2023 में किये जाने की उम्मीद है. सरकार की तरफ से इसे 1 जुलाई 2023 से लागू किया जाएगा. इससे पहले मार्च 2023 में डीए का ऐलान किया गया था. दअसल, सरकार हर छह महीने पर महंगाई भत्ता बढ़ाने की घोषणा करती है. जुलाई के डीए की घोषणा जनवरी से जून तक के एआईसीपीआई इंडेक्स (AICPI Index) के आधार पर की जाएगी. अप्रैल के एआईसीपीआई इंडेक्स आंकड़ा पहले ही आ चुका है. 30 जून को मई के AICPI Index का आंकड़ा आएगा. 1 जुलाई 2023 से सरकारी कर्मचारियों के लिए लागू होने वाले महंगाई भत्ते (DA Hike) में कितना इजाफा होगा? इसका आइडिया तो लग चुका है लेकिन मई के AICPI इंडेक्स का आंकड़ा सामने आने के बाद इसमें और स्पष्टता आ जाएगी. फिलहाल कर्मचारियों को सरकार की तरफ से 42% महंगाई भत्ता दिया जा रहा है. इसे जनवरी 2023 से लागू किया गया था. मई का आंकड़ा आने से 7वें वेतन आयोग (7th Pay Commission) के तहत जुलाई में मिलने वाले डीए हाइक की स्थिति और साफ हो जाएगी. जुलाई से बढ़ने वाला महंगाई भत्ता जनवरी से जून 2023 के AICPI Index के आधार पर दिया जाएगा. नए महंगााई भत्ते के लिए AICPI Index की मई की नई कैलकुलेशन 30 जून की शाम को आएगी. इससे साफ हो जाएगा कि इस बार महंगाई भत्ता (Dearness Allowance) कितना बढ़ेगा? अप्रैल का आंकड़ा बढ़कर पहले ही 134.02 अंक पर पहुंच गया है. इसके आधार पर महंगाई भत्ता 45.04% पर पहुंच गया है. इस बार यह 45.5% से ऊपर निकल सकता है. कौन जारी करता है आंकड़े? AICPI इंडेक्स के आधार पर ही तय किया जाता है कि कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में सरकार की तरफ से कितना इजाफा किया जाएगा? हर महीने के लास्ट वर्किंग डे को All India Consumer Price Index (AICPI) के आंकड़े लेबर मिनिस्ट्री (Labour Ministry) की तरफ से जारी किए जाते हैं. इस इंडेक्स को 88 केंद्रों और पूरे देश के लिए तैयार किया गया है. अगर किसी सरकारी कर्मचारी की फिलहाल बेसिक सैलरी 18000 रुपये है तो इस पर उसे 42 प्रतिशत यानी 7560 रुपये का महंगाई भत्ता मिलता है. लेकिन यदि महंगाई भत्ता बढ़कर 46 प्रतिशत हो जाता है तो महंगाई भत्ता बढ़कर 8280 रुपये महीने हो जाएगा. इस हिसाब से हर महीने सैलरी में 720 रुपये बढ़ जाएंगे.
Dearness Allowance Hike: सरकार केंद्रीय कर्मचारियों को अभी बयालीस% महंगाई भत्ता दे रही है. मार्च में डीए हाइक के ऐलान को एक जनवरी दो हज़ार तेईस से लागू किया गया था. अब अगले डीए हाइक का ऐलान सितंबर अक्टूबर में होने की उम्मीद है. DA Hike July दो हज़ार तेईस: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए महंगाई भत्ते का ऐलान इस बार सितंबर या अक्टूबर दो हज़ार तेईस में किये जाने की उम्मीद है. सरकार की तरफ से इसे एक जुलाई दो हज़ार तेईस से लागू किया जाएगा. इससे पहले मार्च दो हज़ार तेईस में डीए का ऐलान किया गया था. दअसल, सरकार हर छह महीने पर महंगाई भत्ता बढ़ाने की घोषणा करती है. जुलाई के डीए की घोषणा जनवरी से जून तक के एआईसीपीआई इंडेक्स के आधार पर की जाएगी. अप्रैल के एआईसीपीआई इंडेक्स आंकड़ा पहले ही आ चुका है. तीस जून को मई के AICPI Index का आंकड़ा आएगा. एक जुलाई दो हज़ार तेईस से सरकारी कर्मचारियों के लिए लागू होने वाले महंगाई भत्ते में कितना इजाफा होगा? इसका आइडिया तो लग चुका है लेकिन मई के AICPI इंडेक्स का आंकड़ा सामने आने के बाद इसमें और स्पष्टता आ जाएगी. फिलहाल कर्मचारियों को सरकार की तरफ से बयालीस% महंगाई भत्ता दिया जा रहा है. इसे जनवरी दो हज़ार तेईस से लागू किया गया था. मई का आंकड़ा आने से सातवें वेतन आयोग के तहत जुलाई में मिलने वाले डीए हाइक की स्थिति और साफ हो जाएगी. जुलाई से बढ़ने वाला महंगाई भत्ता जनवरी से जून दो हज़ार तेईस के AICPI Index के आधार पर दिया जाएगा. नए महंगााई भत्ते के लिए AICPI Index की मई की नई कैलकुलेशन तीस जून की शाम को आएगी. इससे साफ हो जाएगा कि इस बार महंगाई भत्ता कितना बढ़ेगा? अप्रैल का आंकड़ा बढ़कर पहले ही एक सौ चौंतीस.दो अंक पर पहुंच गया है. इसके आधार पर महंगाई भत्ता पैंतालीस.चार% पर पहुंच गया है. इस बार यह पैंतालीस.पाँच% से ऊपर निकल सकता है. कौन जारी करता है आंकड़े? AICPI इंडेक्स के आधार पर ही तय किया जाता है कि कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में सरकार की तरफ से कितना इजाफा किया जाएगा? हर महीने के लास्ट वर्किंग डे को All India Consumer Price Index के आंकड़े लेबर मिनिस्ट्री की तरफ से जारी किए जाते हैं. इस इंडेक्स को अठासी केंद्रों और पूरे देश के लिए तैयार किया गया है. अगर किसी सरकारी कर्मचारी की फिलहाल बेसिक सैलरी अट्ठारह हज़ार रुपयापये है तो इस पर उसे बयालीस प्रतिशत यानी सात हज़ार पाँच सौ साठ रुपयापये का महंगाई भत्ता मिलता है. लेकिन यदि महंगाई भत्ता बढ़कर छियालीस प्रतिशत हो जाता है तो महंगाई भत्ता बढ़कर आठ हज़ार दो सौ अस्सी रुपयापये महीने हो जाएगा. इस हिसाब से हर महीने सैलरी में सात सौ बीस रुपयापये बढ़ जाएंगे.
Aaron Finch Retirement : ऑस्ट्रेलियाई टीम के पूर्व कप्तान एरॉन फिंच ने इंटरनेशनल क्रिकेट से रिटायरमेंट का ऐलान कर दिया है। एरॉन फिंच ने वनडे क्रिकेट से पहले ही संन्यास ले लिया था, लेकिन अब वे टेस्ट और टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच भी नहीं खेलेंगे। हालांकि खबर है कि एरॉन फिंच अभी बीबीएल यानी बिग बैश लीग खेलते रहेंगे। खेल तो वे आईपीएल में भी सकते थे, लेकिन उन्हें इस बार की नीलामी में किसी ने खरीदा ही नहीं था। इसलिए अब वे इससे बाहर हैं। एरॉन फिंच की कप्तानी में ही ऑस्ट्रेलियाई टीम ने पहली बार टी20 विश्व कप का खिताब अपने नाम किया था। लेकिन इस बीच एरॉन फिंच अब इंटरनेशनल क्रिकेट खेलते हुए नजर नहीं आएंगे। लेकिन एरॉन फिंच के नाम एक ऐसा कीर्तिमान है, जो अब तक नहीं टूटा है और शायद टूटेगा भी नहीं। ये कीर्तिमान आईसीसी की टी20 रैंकिंग में उन्होंने बनाया था। आईसीसी टी20 रैंकिंग में एक वक्त एरॉन फिंच नंबर एक बल्लेबाज रहे हैं। उन्होंने सबसे ज्यादा 900 से ज्यादा की रेटिंग भी हासिल कर ली थी। एरॉन फिंच के नाम रिकॉर्ड है कि वे सबसे ज्यादा समय तक टी20 रैंकिंग में टॉप 3 में अपनी जगह सुरक्षित किए रहे। हालांकि एक बार बाबर आजम उनके करीब तक आए थे, लेकिन वे उसके बाद नंबर चार पर चले गए और कीर्तिमान तोड़ने से रह गए। एरॉन फिंच 77 महीने तक आईसीसी की टी20 रैंकिंग में टॉप 3 में रहे। इसके बाद नंबर आता है बाबर आजम का, जे 54 महीने तक टॉप 3 में अपनी जगह पक्की किए रहे। इसी रिकॉर्ड से समझा जा सकता है कि 77 महीने और 54 महीने में कितना फर्क है। जहां हर हफ्ते रैंकिंग में बदलाव होता है, वहां पर लगातार महीनों और सालों पर टॉप 3 में अपनी जगह बनाए रखना आसान नहीं होता। वैसे विराट कोहली भी इस लिस्ट में हैं, जो 50 महीने तक टॉप 3 में बने रहे, लेकिन इसके बाद वे भी टॉप 3 से बाहर होकर नीचे चले गए। दक्षिण अफ्रीका के कप्तान रहे ग्रीम स्मिथ इस मामले में चौथे नंबर पर हैं, जो 45 हफ्तों तक टॉप 3 में रहे। एरॉन फिंच ने तो अब रिटायरमेंट ले लिया है, लेकिन बाबर आजम और विराट कोहली अभी भी खेल रहे हैं। ये दोनों खिलाड़ी अभी भी टॉप 10 में हैं, लेकिन कोई भी बल्लेबाज इस वक्त टॉप 3 में नहीं है। बाबर आजम जहां नंबर चार पर पहुंच गए हैं, वहीं भारत के पूर्व कप्तान विराट कोहली 14वें नंबर पर संघर्ष कर रहे हैं। ये साल वनडे विश्व कप का है, इसलिए इस साल बहुत ज्यादा टी20 इंटरनेशनल मैच होंगे भी नहीं। इसलिए ऐसा नहीं लगता कि कम से कम इस साल ये रिकॉर्ड तोड़ पाएगा। कहा जाता है कि क्रिकेट में रिकॉर्ड बनते ही टूटने के लिए हैं, लेकिन ये ऐसा कीर्तिमान है, जिसे एक दो दिन या फिर एक दो महीने में न तो बनाया जा सकता है और न ही तोड़ा जा सकता है। इसके लिए लगातार रन बनाने होंगे, जो आज की तारीख में होता हुआ तो नजर नहीं आता। देखना होगा कि ये रिकॉर्ड कभी टूट भी पाता है या फिर नहीं।
Aaron Finch Retirement : ऑस्ट्रेलियाई टीम के पूर्व कप्तान एरॉन फिंच ने इंटरनेशनल क्रिकेट से रिटायरमेंट का ऐलान कर दिया है। एरॉन फिंच ने वनडे क्रिकेट से पहले ही संन्यास ले लिया था, लेकिन अब वे टेस्ट और टीबीस अंतरराष्ट्रीय मैच भी नहीं खेलेंगे। हालांकि खबर है कि एरॉन फिंच अभी बीबीएल यानी बिग बैश लीग खेलते रहेंगे। खेल तो वे आईपीएल में भी सकते थे, लेकिन उन्हें इस बार की नीलामी में किसी ने खरीदा ही नहीं था। इसलिए अब वे इससे बाहर हैं। एरॉन फिंच की कप्तानी में ही ऑस्ट्रेलियाई टीम ने पहली बार टीबीस विश्व कप का खिताब अपने नाम किया था। लेकिन इस बीच एरॉन फिंच अब इंटरनेशनल क्रिकेट खेलते हुए नजर नहीं आएंगे। लेकिन एरॉन फिंच के नाम एक ऐसा कीर्तिमान है, जो अब तक नहीं टूटा है और शायद टूटेगा भी नहीं। ये कीर्तिमान आईसीसी की टीबीस रैंकिंग में उन्होंने बनाया था। आईसीसी टीबीस रैंकिंग में एक वक्त एरॉन फिंच नंबर एक बल्लेबाज रहे हैं। उन्होंने सबसे ज्यादा नौ सौ से ज्यादा की रेटिंग भी हासिल कर ली थी। एरॉन फिंच के नाम रिकॉर्ड है कि वे सबसे ज्यादा समय तक टीबीस रैंकिंग में टॉप तीन में अपनी जगह सुरक्षित किए रहे। हालांकि एक बार बाबर आजम उनके करीब तक आए थे, लेकिन वे उसके बाद नंबर चार पर चले गए और कीर्तिमान तोड़ने से रह गए। एरॉन फिंच सतहत्तर महीने तक आईसीसी की टीबीस रैंकिंग में टॉप तीन में रहे। इसके बाद नंबर आता है बाबर आजम का, जे चौवन महीने तक टॉप तीन में अपनी जगह पक्की किए रहे। इसी रिकॉर्ड से समझा जा सकता है कि सतहत्तर महीने और चौवन महीने में कितना फर्क है। जहां हर हफ्ते रैंकिंग में बदलाव होता है, वहां पर लगातार महीनों और सालों पर टॉप तीन में अपनी जगह बनाए रखना आसान नहीं होता। वैसे विराट कोहली भी इस लिस्ट में हैं, जो पचास महीने तक टॉप तीन में बने रहे, लेकिन इसके बाद वे भी टॉप तीन से बाहर होकर नीचे चले गए। दक्षिण अफ्रीका के कप्तान रहे ग्रीम स्मिथ इस मामले में चौथे नंबर पर हैं, जो पैंतालीस हफ्तों तक टॉप तीन में रहे। एरॉन फिंच ने तो अब रिटायरमेंट ले लिया है, लेकिन बाबर आजम और विराट कोहली अभी भी खेल रहे हैं। ये दोनों खिलाड़ी अभी भी टॉप दस में हैं, लेकिन कोई भी बल्लेबाज इस वक्त टॉप तीन में नहीं है। बाबर आजम जहां नंबर चार पर पहुंच गए हैं, वहीं भारत के पूर्व कप्तान विराट कोहली चौदहवें नंबर पर संघर्ष कर रहे हैं। ये साल वनडे विश्व कप का है, इसलिए इस साल बहुत ज्यादा टीबीस इंटरनेशनल मैच होंगे भी नहीं। इसलिए ऐसा नहीं लगता कि कम से कम इस साल ये रिकॉर्ड तोड़ पाएगा। कहा जाता है कि क्रिकेट में रिकॉर्ड बनते ही टूटने के लिए हैं, लेकिन ये ऐसा कीर्तिमान है, जिसे एक दो दिन या फिर एक दो महीने में न तो बनाया जा सकता है और न ही तोड़ा जा सकता है। इसके लिए लगातार रन बनाने होंगे, जो आज की तारीख में होता हुआ तो नजर नहीं आता। देखना होगा कि ये रिकॉर्ड कभी टूट भी पाता है या फिर नहीं।
अगर आप सौंदर्य से जुड़ी समस्याओं का समाधान पाना चाहती हैं तो हमें परेशानी लिख भेजें। आपकी समस्याओं का समाधान करेंगी एल्पस ब्यूटी क्लीनिक की डायरेक्टर भारती तनेजा। रोटी मेकर आजकल अधिकतर कामकाजी महिलाओं की जरूरत बन चुकी है। अगर आप भी इसे अपने किचन का हिस्सा बनाना चाहती हैं, तो इसका चुनाव करते समय कुछ बातों का ध्यान अवश्य रखें, जैसे कि रोटी मेकअर का साइज, बॉडी, तवा, सैटिंग, पॉवर कंजंप्शन और अन्य फीचर्स आदि। ताकि यह सही मायने में आपका हैल्पिंग हैंड बन सके। गोवा यूनिवर्सिटी से बायोटेक्नोलॉजी में ग्रेजुएशन करने के बाद रुचिरा ने एल डेकोर जैसे लाइफस्टाइल मैगज़ीन के साथ-साथ इंटेरनेट और 3 ग्लोबल सर्विसेज जैसे कम्पनीज में काम किया। लेकिन उनका रुझान हमेशा ही कुछ अपना करने का था और यही से शुरू हुई उनकी कुछ अलग करने की कोशिश। आज वो वर्क बेटर की सह संस्थापक हैं और हर क्षेत्र के वर्किंग प्रोफेशनल्स को ट्रेन कर रही हैं। रुचिरा कार्णिक की इस उम्दा कोशिश के लिए हम बना रहे हैं उन्हें आज की गृहलक्ष्मी ऑफ द डे। रसमलाई...एक ऐसी स्वादिष्ट मिठाई जिसका नाम सुनते ही मुंह में पानी आने लगता...कैसा हो कि यह मिठाई आप घर में बनाएं और शान से खाएं व खिलाएं। आज चटोरी गृहलक्ष्मी से सीखें रसमलाई बनाना। ऐसी पास्ता रेसिपीज़ जिसे देखकर जी ललचाए. . इटैलियन खाने में पास्ता हर एक की पसंद होता है। और नाश्ते में या इवनिंग स्नैक्स में तो पास्ता का जवाब नहीं। सीखें डिफरेंट पास्ता रेसिपीज़। पुजारी जी भले ही अपनी कालोनी में सम्मानित वृद्ध थे, पर उनके घर में उनसे भी यही उम्मीद की जाती थी कि वे अपनी शक्ल ज्यादातर बाहर वालों को दिखाएं और धर्मशाला की भांति सिर्फ रात्रि-शयन के लिए घर पर आएं। वे प्रेमी -प्रेमिका थे। उनमें वादे थे, इच्छाएं थीं, बरसों से एकत्रित वाष्प थी। अगर यह चरित्र हीनता है तो इस चरित्रहीनता के एक पहलू पर सीमा थी और दूसरे पर रामेन्द्र। भाभी अगर यह कहती कि मेरे घर ना तुम आना और न सीमा को लाना, मगर भाभी ने सिर्फ सीमा को दोषी ठहरा कर फैसला सुनाया। उसे लगा कि यह अधूरा इंसाफ है।
अगर आप सौंदर्य से जुड़ी समस्याओं का समाधान पाना चाहती हैं तो हमें परेशानी लिख भेजें। आपकी समस्याओं का समाधान करेंगी एल्पस ब्यूटी क्लीनिक की डायरेक्टर भारती तनेजा। रोटी मेकर आजकल अधिकतर कामकाजी महिलाओं की जरूरत बन चुकी है। अगर आप भी इसे अपने किचन का हिस्सा बनाना चाहती हैं, तो इसका चुनाव करते समय कुछ बातों का ध्यान अवश्य रखें, जैसे कि रोटी मेकअर का साइज, बॉडी, तवा, सैटिंग, पॉवर कंजंप्शन और अन्य फीचर्स आदि। ताकि यह सही मायने में आपका हैल्पिंग हैंड बन सके। गोवा यूनिवर्सिटी से बायोटेक्नोलॉजी में ग्रेजुएशन करने के बाद रुचिरा ने एल डेकोर जैसे लाइफस्टाइल मैगज़ीन के साथ-साथ इंटेरनेट और तीन ग्लोबल सर्विसेज जैसे कम्पनीज में काम किया। लेकिन उनका रुझान हमेशा ही कुछ अपना करने का था और यही से शुरू हुई उनकी कुछ अलग करने की कोशिश। आज वो वर्क बेटर की सह संस्थापक हैं और हर क्षेत्र के वर्किंग प्रोफेशनल्स को ट्रेन कर रही हैं। रुचिरा कार्णिक की इस उम्दा कोशिश के लिए हम बना रहे हैं उन्हें आज की गृहलक्ष्मी ऑफ द डे। रसमलाई...एक ऐसी स्वादिष्ट मिठाई जिसका नाम सुनते ही मुंह में पानी आने लगता...कैसा हो कि यह मिठाई आप घर में बनाएं और शान से खाएं व खिलाएं। आज चटोरी गृहलक्ष्मी से सीखें रसमलाई बनाना। ऐसी पास्ता रेसिपीज़ जिसे देखकर जी ललचाए. . इटैलियन खाने में पास्ता हर एक की पसंद होता है। और नाश्ते में या इवनिंग स्नैक्स में तो पास्ता का जवाब नहीं। सीखें डिफरेंट पास्ता रेसिपीज़। पुजारी जी भले ही अपनी कालोनी में सम्मानित वृद्ध थे, पर उनके घर में उनसे भी यही उम्मीद की जाती थी कि वे अपनी शक्ल ज्यादातर बाहर वालों को दिखाएं और धर्मशाला की भांति सिर्फ रात्रि-शयन के लिए घर पर आएं। वे प्रेमी -प्रेमिका थे। उनमें वादे थे, इच्छाएं थीं, बरसों से एकत्रित वाष्प थी। अगर यह चरित्र हीनता है तो इस चरित्रहीनता के एक पहलू पर सीमा थी और दूसरे पर रामेन्द्र। भाभी अगर यह कहती कि मेरे घर ना तुम आना और न सीमा को लाना, मगर भाभी ने सिर्फ सीमा को दोषी ठहरा कर फैसला सुनाया। उसे लगा कि यह अधूरा इंसाफ है।
(गौरव मिश्रा) गांधीधाम- पुरी एक्सप्रेस मे शनिवार को एक बड़ा हादसा होने से बच गया । मिली जानकारी के मुताबिक, एक्सप्रेस ट्रेन की पैंट्री कार में सुबह लगभग 10:30 बजे आग लग गई। पैंट्री में जैसे ही लोगों ने धुआँ देखा वैसे ही दहशत का माहौल बन गया। कई यात्री तो चलती गाड़ी से नीचे कूदने लग गए। राहत की बात यह रही जिस समय आग लगने की जानकारी हुई, ट्रेन महाराष्ट्र से नंदुरबार स्टेशन पर पहुँच रही थी, जिस वजह ट्रेन की गति काफी कम थी। पश्चिमी रेल अधिकारियों ने बताया कि जिस ट्रेन मे हादसा हुआ, उसमें 22 कोच शामिल थे। 13वां कोच पेंट्री कार का था। आग लगने की सूचना मिलते ही पेंट्री कार को ट्रेन से अलग कर दिया गया और फायर ब्रिगेड को सूचित कर दिया गया। यात्री लोगों की सुरक्षा के लिए मेडिकल टीम व पैरामेडिकल स्टाफ को भी मौके पर भेज दिया गया। करीब 12:10 बजे आग पर काबू पा लिया गया और रेलवे ट्रैक पर दोनों तरफ का आवागमन फिर से शुरू कर दिया गया। रेलवे मंत्रालय से मिली सूचना से पता चला कि सभी यात्री सुरक्षित है और किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है। आग किस कारण से लगी ये पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
गांधीधाम- पुरी एक्सप्रेस मे शनिवार को एक बड़ा हादसा होने से बच गया । मिली जानकारी के मुताबिक, एक्सप्रेस ट्रेन की पैंट्री कार में सुबह लगभग दस:तीस बजे आग लग गई। पैंट्री में जैसे ही लोगों ने धुआँ देखा वैसे ही दहशत का माहौल बन गया। कई यात्री तो चलती गाड़ी से नीचे कूदने लग गए। राहत की बात यह रही जिस समय आग लगने की जानकारी हुई, ट्रेन महाराष्ट्र से नंदुरबार स्टेशन पर पहुँच रही थी, जिस वजह ट्रेन की गति काफी कम थी। पश्चिमी रेल अधिकारियों ने बताया कि जिस ट्रेन मे हादसा हुआ, उसमें बाईस कोच शामिल थे। तेरहवां कोच पेंट्री कार का था। आग लगने की सूचना मिलते ही पेंट्री कार को ट्रेन से अलग कर दिया गया और फायर ब्रिगेड को सूचित कर दिया गया। यात्री लोगों की सुरक्षा के लिए मेडिकल टीम व पैरामेडिकल स्टाफ को भी मौके पर भेज दिया गया। करीब बारह:दस बजे आग पर काबू पा लिया गया और रेलवे ट्रैक पर दोनों तरफ का आवागमन फिर से शुरू कर दिया गया। रेलवे मंत्रालय से मिली सूचना से पता चला कि सभी यात्री सुरक्षित है और किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है। आग किस कारण से लगी ये पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
गर्मियों का मौसम यानी खूब सारी स्किन केयर। सूरज की जलती रोशनी और गर्म-गर्म हवा जब आपके चेहरे और बदन पर पड़ती है, तो आपकी स्किन का खराब होना एक आम बात हो जाती है। डैमेज स्किन शिकार बनती है रैशेज, सन बर्न और न जाने किस किस परेशानी का। लेकिन आपकी मुरझाती त्वचा के लिए हम लेकर आए हैं कुछ घरेलू नुस्खें। जो न सिर्फ आपकी त्वचा को गर्मी से डैमेज होने से बचाएगा बल्कि त्वचा को हेल्दी भी बनाएगा। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि कैसे मिल्क पाउडर(Milk Powder) से आप फेस पैक बना सकते हैं। दही और मिल्क पाउडर(Milk Powder) आपकी बेजान और डल स्किन तुरंत ठीक हो जाएगी। इस पैक को बनाने के लिए आधा चम्मच कॉफी पाउडर लें और 1 से डेढ़ चम्मच मिल्क पाउडर मिला लें। आप चाहे तो इसमें नारियल का तेल भी मिला सकते हैं। इस पैक से तकरीबन 5 से 7 मिनट तक चेहरे पर मसाज करें। इसके बाद आपना चेहरा धो लें, मिल्क पाउडर हर तरह की त्वचा के लिए परफेक्ट होता है फिर चाहे आपकी त्वचा ऑयली हो या ड्राई या मिक्स हो। बेसन में त्वचा को चमकदार बनाने के लिए नेचुरल इंग्रेडिएंट्स होते हैं। इस पैक को बनाने के लिए आप बेसन में एक चम्मच मिल्क पाउडर(Milk Powder) मिलाएं और थोड़ा सा गुलाब जल मिलाकर अपने चेहरे पर अच्छे से लगा लें। इस पैक के सुखने के बाद इसे पानी से अच्छे से धो लें।
गर्मियों का मौसम यानी खूब सारी स्किन केयर। सूरज की जलती रोशनी और गर्म-गर्म हवा जब आपके चेहरे और बदन पर पड़ती है, तो आपकी स्किन का खराब होना एक आम बात हो जाती है। डैमेज स्किन शिकार बनती है रैशेज, सन बर्न और न जाने किस किस परेशानी का। लेकिन आपकी मुरझाती त्वचा के लिए हम लेकर आए हैं कुछ घरेलू नुस्खें। जो न सिर्फ आपकी त्वचा को गर्मी से डैमेज होने से बचाएगा बल्कि त्वचा को हेल्दी भी बनाएगा। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि कैसे मिल्क पाउडर से आप फेस पैक बना सकते हैं। दही और मिल्क पाउडर आपकी बेजान और डल स्किन तुरंत ठीक हो जाएगी। इस पैक को बनाने के लिए आधा चम्मच कॉफी पाउडर लें और एक से डेढ़ चम्मच मिल्क पाउडर मिला लें। आप चाहे तो इसमें नारियल का तेल भी मिला सकते हैं। इस पैक से तकरीबन पाँच से सात मिनट तक चेहरे पर मसाज करें। इसके बाद आपना चेहरा धो लें, मिल्क पाउडर हर तरह की त्वचा के लिए परफेक्ट होता है फिर चाहे आपकी त्वचा ऑयली हो या ड्राई या मिक्स हो। बेसन में त्वचा को चमकदार बनाने के लिए नेचुरल इंग्रेडिएंट्स होते हैं। इस पैक को बनाने के लिए आप बेसन में एक चम्मच मिल्क पाउडर मिलाएं और थोड़ा सा गुलाब जल मिलाकर अपने चेहरे पर अच्छे से लगा लें। इस पैक के सुखने के बाद इसे पानी से अच्छे से धो लें।
चर्चा में क्यों? प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय निर्यात-आयात बैंक (Export Import Bank of India-Exim Bank) के पुनर्पूंजीकरण को मंज़ूरी दे दी है। - भारतीय निर्यात-आयात बैंक में पूंजी लगाने के लिये भारत सरकार 6,000 करोड़ रुपए के पुनर्पूंजीकरण बॉण्ड (Recapitalization Bonds) जारी करेगी। - एक्ज़िम बैंक का पुनर्पूंजीकरण दो चरणों में किया जाएगा जिसके तहत वित्तीय वर्ष 2018-19 में 4,500 करोड़ रुपए और वित्तीय वर्ष 2019-20 में 1,500 करोड़ रुपए की पूंजी लगाई जाएगी। - कैबिनेट ने एक्ज़िम बैंक की अधिकृत पूंजी को 10,000 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 20,000 करोड़ रुपए करने की मंज़ूरी दे दी है। पुनर्पूंजीकरण बॉण्ड सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को जारी किये जाएंगे। - एक्ज़िम बैंक भारत के लिये प्रमुख निर्यात ऋण एजेंसी है। एक्ज़िम बैंक में पूंजी लगाने से यह पूंजी पर्याप्तता अनुपात बढ़ाने सहित ज़्यादा क्षमता के साथ भारतीय निर्यात के लिये आवश्यक सहायता देने में समर्थ हो जाएगा। - पुनर्पूंजीकरण से भारतीय कपड़ा उद्योगों को आवश्यक सहायता देने, रियायती वित्त योजना (Concessional Finance Scheme-CFS) में संभावित बदलावों, भारत की सक्रिय विदेश नीति और रणनीतिक मंशा को ध्यान में रखते हुए भविष्य के लिये ऋण की नई रूपरेखा की संभावनाओं जैसी पहलों को बढ़ावा मिलेगा। एक्ज़िम बैंक (EXIM Bank) - एक्ज़िम बैंक ऑफ इंडिया (एक्ज़िम बैंक) की स्थापना एक संसदीय अधिनियम (Act of Parliament) के तहत वर्ष 1982 में भारत के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के वित्तपोषण, इसे सुविधाजनक बनाने और बढ़ावा देने के लिये शीर्ष वित्तीय संस्थान के रूप में की गई थी। - यह बैंक मुख्यतः भारत से किये जाने वाले निर्यात के लिये ऋण उपलब्ध कराता है। - भारत के विकासात्मक एवं बुनियादी ढाँचागत परियोजनाओं, उपकरणों, वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात के लिये विदेशी खरीदारों और भारतीय आपूर्तिकर्त्ताओं को आवश्यक सहायता देना भी इसमें शामिल है। - इसका नियमन भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा किया जाता है।
चर्चा में क्यों? प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय निर्यात-आयात बैंक के पुनर्पूंजीकरण को मंज़ूरी दे दी है। - भारतीय निर्यात-आयात बैंक में पूंजी लगाने के लिये भारत सरकार छः,शून्य करोड़ रुपए के पुनर्पूंजीकरण बॉण्ड जारी करेगी। - एक्ज़िम बैंक का पुनर्पूंजीकरण दो चरणों में किया जाएगा जिसके तहत वित्तीय वर्ष दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस में चार,पाँच सौ करोड़ रुपए और वित्तीय वर्ष दो हज़ार उन्नीस-बीस में एक,पाँच सौ करोड़ रुपए की पूंजी लगाई जाएगी। - कैबिनेट ने एक्ज़िम बैंक की अधिकृत पूंजी को दस,शून्य करोड़ रुपए से बढ़ाकर बीस,शून्य करोड़ रुपए करने की मंज़ूरी दे दी है। पुनर्पूंजीकरण बॉण्ड सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को जारी किये जाएंगे। - एक्ज़िम बैंक भारत के लिये प्रमुख निर्यात ऋण एजेंसी है। एक्ज़िम बैंक में पूंजी लगाने से यह पूंजी पर्याप्तता अनुपात बढ़ाने सहित ज़्यादा क्षमता के साथ भारतीय निर्यात के लिये आवश्यक सहायता देने में समर्थ हो जाएगा। - पुनर्पूंजीकरण से भारतीय कपड़ा उद्योगों को आवश्यक सहायता देने, रियायती वित्त योजना में संभावित बदलावों, भारत की सक्रिय विदेश नीति और रणनीतिक मंशा को ध्यान में रखते हुए भविष्य के लिये ऋण की नई रूपरेखा की संभावनाओं जैसी पहलों को बढ़ावा मिलेगा। एक्ज़िम बैंक - एक्ज़िम बैंक ऑफ इंडिया की स्थापना एक संसदीय अधिनियम के तहत वर्ष एक हज़ार नौ सौ बयासी में भारत के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के वित्तपोषण, इसे सुविधाजनक बनाने और बढ़ावा देने के लिये शीर्ष वित्तीय संस्थान के रूप में की गई थी। - यह बैंक मुख्यतः भारत से किये जाने वाले निर्यात के लिये ऋण उपलब्ध कराता है। - भारत के विकासात्मक एवं बुनियादी ढाँचागत परियोजनाओं, उपकरणों, वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात के लिये विदेशी खरीदारों और भारतीय आपूर्तिकर्त्ताओं को आवश्यक सहायता देना भी इसमें शामिल है। - इसका नियमन भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा किया जाता है।
वी-मार्ट विघ्नहर्ता का स्वागत करता हैं, जिनके कदम पड़ते ही लॉकडाउन हट गया और मौसम के सबसे बड़े उत्सव गणेश चतुर्थी और मेगा एंड ऑफ सीजन फैशन सेल की शुरुआत का आवागमन हुआ। वी-मार्ट की बहुप्रतिक्षित मेगा एंड ऑफ सीजन फैशन सेल गणेश चुतर्थी समारोह के साथ फेस्टिवल की आखिरी सेल है। समापन की ओर बढ़ रही इस सेल में आप और ज्यादा आकर्षक छूट का फायदा उठा सकते हैं। अभी आप खरीददारी की योजना बना रहे हैं, तो तैयार हो जाइए इस सेल का लाभ लेने के लिए। वी-मार्ट के सीईओ समीर मिश्रा ने कहा है कि इस सेल में मानसून के आठ हफ्तों तक का सफर तय करना है, इस दौरान कंपनी अपना सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण देने का वादा भी निभा रही है। हमने पुख्ता इंतजाम किए हैं, इसलिए कोई भी आउटलेट में आएं और सुरक्षित और परेशानी मुक्त शॉपिंग का लुत्फ उठाए। बता दें कि भारत वर्ष में फैले वी मार्र्ट आउटलेट में गणेश चतुर्थी का समापन के साथ ही सीजन फैशन सेल के वार्षिक उत्सव के जश्न को लोगों ने सराहा। वी-मार्ट ने अपने प्रशंसकों की खुशी के लिए अपने एकदम ताजा और बेशुमार फैशन जो आपकी फैशन की जरूरतों को पूरा करता है और फेस्टिवल सीजन के अपने वादे को पूरा किया है।
वी-मार्ट विघ्नहर्ता का स्वागत करता हैं, जिनके कदम पड़ते ही लॉकडाउन हट गया और मौसम के सबसे बड़े उत्सव गणेश चतुर्थी और मेगा एंड ऑफ सीजन फैशन सेल की शुरुआत का आवागमन हुआ। वी-मार्ट की बहुप्रतिक्षित मेगा एंड ऑफ सीजन फैशन सेल गणेश चुतर्थी समारोह के साथ फेस्टिवल की आखिरी सेल है। समापन की ओर बढ़ रही इस सेल में आप और ज्यादा आकर्षक छूट का फायदा उठा सकते हैं। अभी आप खरीददारी की योजना बना रहे हैं, तो तैयार हो जाइए इस सेल का लाभ लेने के लिए। वी-मार्ट के सीईओ समीर मिश्रा ने कहा है कि इस सेल में मानसून के आठ हफ्तों तक का सफर तय करना है, इस दौरान कंपनी अपना सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण देने का वादा भी निभा रही है। हमने पुख्ता इंतजाम किए हैं, इसलिए कोई भी आउटलेट में आएं और सुरक्षित और परेशानी मुक्त शॉपिंग का लुत्फ उठाए। बता दें कि भारत वर्ष में फैले वी मार्र्ट आउटलेट में गणेश चतुर्थी का समापन के साथ ही सीजन फैशन सेल के वार्षिक उत्सव के जश्न को लोगों ने सराहा। वी-मार्ट ने अपने प्रशंसकों की खुशी के लिए अपने एकदम ताजा और बेशुमार फैशन जो आपकी फैशन की जरूरतों को पूरा करता है और फेस्टिवल सीजन के अपने वादे को पूरा किया है।
वोक्सवैगन केफेर (कैफर) एक यात्री कार हैएक कार जिसे जर्मन चिंता वीडब्ल्यू एजी द्वारा उत्पादित किया गया था, जो कि दुनिया में सबसे अमीर है। और समृद्ध। और वोक्सवैगन केफेर मॉडल 1 9 38 से 2003 तक बाहर आया! ये केवल अविश्वसनीय संकेतक हैं, यह देखते हुए कि हमारे समय मॉडल में पांच से दस साल का उत्पादन होता है, और फिर बंद हो जाता है। खैर, यह सम्मान और ध्यान के योग्य है, इसलिए इस विषय पर अधिक विस्तार से चर्चा की जानी चाहिए। पूरे उत्पादन अवधि के दौरान, 21,529,464 कारें बनाई गई थीं। यह एक बहुत बड़ी संख्या है। मॉडल का एक समृद्ध इतिहास है। और इसके बारे में आपको बताने की जरूरत है। 1 9 33 में एक बर्लिन होटल में बुलाया गया"कैसरहोफ" जैकोब वेरलीन, एडॉल्फ हिटलर के साथ-साथ फर्डिनेंड पोर्श के बीच आयोजित एक बैठक थी। जर्मन फुहरर ने अपनी मांग को आगे बढ़ाया - जर्मनी के लिए एक विश्वसनीय, ठोस और मजबूत कार का उत्पादन करने के लिए, साथ ही साथ एक हजार रिचमार्क की लागत भी होगी। यह विचार खुद को फर्डिनेंड पोर्श द्वारा हिटलर को पेश किया गया था। उन्होंने फिशरर "टूर 12" - एक पिछली इंजन कार, बल्कि बजटीय को भी सुझाव दिया। इस बार विचार कुछ अलग था। यह योजना बनाई गई थी कि वोक्सवैगन केफेर (जिसका नाम उस समय भी अज्ञात था) एक पिस्टन पावर यूनिट और एक स्वतंत्र निलंबन के साथ एक छोटी, लेकिन तकनीकी रूप से परिष्कृत कार बन जाएगा। यह मॉडल चार वयस्कों को समायोजित करना था। कीमत कम होनी चाहिए, और अधिकतम गति - उच्च (उस समय), यानी 100 किमी / घंटा। उद्यम के बाद लागू करने के कई प्रयासइस विचार को परियोजना को बड़े और आधिकारिक मोटरसाइकिल निर्माता - जुंडैप में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया था। फर्म सिर्फ कुछ नया, अधिक शक्तिशाली और गंभीर बनाना चाहता था। तो प्रक्रिया शुरू हुई। 1 931-32 में, तीन प्रोटोटाइप बनाए गए थे। यह एक बंद शरीर और एक परिवर्तनीय के साथ दो सेडान था। हुड के तहत उनके पास तरल शीतलन प्रणाली के साथ स्टार-आकार की पावर इकाइयां थीं। तकनीकी कमियां थीं। हां, और आर्थिक अक्षमता। तो फोक्सवैगन केफेर का विकास एक अन्य नूर्नबर्ग कंपनी - एनएसयू द्वारा लिया गया था। हालांकि, उन्होंने तीन प्रोटोटाइप भी बनाए जो विचार के पहलुओं को पसंद नहीं आया। यद्यपि कार मॉडल के समान ही निकली है जिसे हम आज जानते हैं। सच है, उसकी शक्ति 28 लीटर थी। के साथ, और निलंबन - टोरसन-लीवर। झटके के बावजूद, हिटलर को पुरस्कृत किया गयापरिणाम प्राप्त करने के लिए अन्य विशेषज्ञों को आकर्षित करके "पोर्श" प्रतिनिधियों की कोशिश कर रहा है। उसके बाद, वास्तव में एक गंभीर प्रक्रिया शुरू हुई, जो सफलतापूर्वक समाप्त हो गई। पहली कार वोक्सवैगन केफेर1 9 37 में दिखाई दिया। इसे क्रमशः भी जारी किया गया था - उत्पादित मॉडल की संख्या तीस इकाइयां थीं। विचार को वास्तविकता में अनुवाद करने की प्रक्रिया फुहरर द्वारा तेज हुई थी। उन्होंने मोटर वाहन डिजाइनरों का भी दौरा किया। पहली कारों में एक अंधेरे की दीवार थी। हिटलर को यह पसंद नहीं आया। क्योंकि इस कमी को तुरंत हटा दिया गया था। और सबसे पहले, बोलने के लिए, परीक्षण ड्राइव में योग्य ड्राइवरों ने भाग लिया था, जिसके लिए एसएस परिवहन सेवा उपकरण द्वारा जारी किया गया था। कुल मिलाकर, सभी कारों का परीक्षण रन था2 मिलियन किलोमीटर और 1938 में, परियोजना है, जो "जोय के माध्यम से शक्ति" कहा जाता था, आधिकारिक आकार हासिल की है। वोक्सवैगन कश्मीर fer है, जो, नीचे दिया गया है चित्रों असर सपाट तल, 4 सिलेंडर इकाई का विरोध किया कीचड़ रियर एक्सल और स्वतंत्र निलंबन (मरोड़) के पीछे अनुदैर्ध्य निपटारा वृद्धि की है। डिजाइन - बहुत सुव्यवस्थित, गोलाकार, "जैविक।" वह फुरर पसंद आया। एडॉल्फ हिटलर व्यक्तिगत रूप से स्केच (यह ज्ञात है कि वह एक अच्छे चित्रकार थे) के निर्माण में शामिल किया गया था। संशोधनों में से - 4-दरवाजे कैब्रिलेट और सेडान। सबसे बड़े पैमाने पर उत्पादित वोक्सवैगन केफर कारसमय 40 के दशक में लोकप्रियता हासिल करना शुरू कर दिया। तब यह था कि एक सेना कार की अवधारणा बनाई गई थी। कार अलग थी कि इसमें हल्के व्हील गियर, 16-इंच पहियों और, ज़ाहिर है, फ्लैट पैनलों के साथ हल्के वजन वाले 4-दरवाजे वाले शरीर थे। एक इंटर-व्हील सेल्फ लॉकिंग अंतर था, 2 9 सेंटीमीटर और 25 हॉर्स पावर मोटर की मंजूरी थी। 1 9 45 से पहले, लगभग 50 435 ऐसे मॉडल बनाए गए थे। यह उस समय सबसे बड़ी यात्री कार वोक्सवैगन केफेर था। अभी भी प्रकाश में मॉडल के ऑल-व्हील ड्राइव संस्करण को बाहर आया। यह ट्रांसमिशन का दावा कर सकता था, जो उभयचर टूर 166 (एक विशाल सेना कार) से लिया गया था। दस साल के लिए, यह "वोक्सवैगन" बन गया हैकाफी लोकप्रिय तो उत्पादन में सुधार जारी रहा। और 40 के उत्तरार्ध में, या अधिक सटीक रूप से, 1 9 48 में, पहली बीटल-कैब्रिलेट सड़कों पर दिखाई दिए। उन्होंने सफलता प्राप्त की और क्रमशः उत्पादन शुरू किया। और 50 की मशीनें जो काम करती हैंडीजल बिजली इकाइयों पर। और उन लोगों पर जो एक अच्छी मात्रा में भिन्न थे - 1.3 लीटर! प्रति घंटे 100 किलोमीटर तक इस तरह के इंजन के साथ मॉडल ठीक एक मिनट में तेज हो सकता है। यह उस समय एक भयानक आंकड़ा था। अगर हम इस तथ्य को ध्यान में रखते हैं कि कार में टर्बोचार्जर नहीं था। अपने पूर्ववर्ती की तुलना में फोक्सवैगन केफेर विशेषताओं में सुधार हुआ, उल्लेखनीय रूप से सुधार हुआ। और 1 9 67 में बिजली इकाई की शक्ति को लाया गया था54 अश्वशक्ति का संकेतक। बदल गया और उपस्थिति। शरीर कुछ हद तक बढ़ाया गया। वैसे, पांच साल बाद यह फैसला किया गया कि सुपर बीटल से अधिक सेडान न छोड़ें। इसलिए उन्होंने सामान्य, मानक, प्लस कैब्रिलेट्स का उत्पादन शुरू किया। उस समय वोक्सवैगन केफर समीक्षा केवल प्राप्त हुईसकारात्मक। मालिक जर्मन कार की प्रशंसा करते हुए दोस्तों के साथ अपने इंप्रेशन साझा करने में संकोच नहीं करते थे। उन्हें डिजाइन, काफी ऊंचा (उस समय) बिजली, आराम और अपेक्षाकृत कम कीमत पसंद आया। तो वोक्सवैगन की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। और क्योंकि चिंता ने एक ऐसे मॉडल का निर्माण शुरू करने का फैसला किया जो अधिक प्रतिष्ठित, स्टाइलिश बन जाएगा। इसलिए, शुरुआती 50 के दशक में, कर्मन स्टूडियो को कंपनी के प्रतिनिधियों से एक नया, अधिक सुंदर डिजाइन विकसित करने का आदेश मिला। तो चेसिस पर एक कार थी। यह एक रोडस्टर नहीं था, लेकिन एक सुंदर लम्बा दो दरवाजा कूप था। और उन वर्षों के कई आलोचकों ने कहा कि इसकी गुणवत्ता दुनिया में सबसे अच्छी है। कहने की जरूरत नहीं है, इन मशीनों को उन देशों को भी निर्यात किया गया था जहां बाएं हाथ के यातायात का आयोजन किया जाता है। "प्रतिष्ठित" मॉडल का कुल परिसंचरण 487 हजार कारों से अधिक था। और यह एक ठोस आंकड़ा था। कहने की जरूरत नहीं है, अब भी इसे काफी मात्रा में माना जाता है। कई अन्य कारों की तरह, यह एक"वोक्सवैगन" न केवल एक कार है, बल्कि संस्कृति का एक टुकड़ा भी है। इसलिए, उदाहरण के लिए, हम इस मॉडल को लोकप्रिय बैंड "द बीटल्स" के एल्बमों में से एक के कवर पर देख सकते हैं। इसे एबी रोड कहा जाता है। और उस कार (एलएमडब्ल्यू 281 एफ) की संख्या वाली प्लेट का अपहरण एक से अधिक बार अपहरण कर लिया गया था। इसे 1 9 66 में पॉल मैककार्टनी की मौत के एक प्रकार के "सबूत" के रूप में भी उद्धृत किया गया है (यह उसकी मृत्यु की किंवदंती को याद करने योग्य है)। और यह कार जिम बुचर द्वारा लिखी पुस्तकों में भी मौजूद है। श्रृंखला को ड्रेस्डेन डोजियर कहा जाता है। उनमें, नायक नीले वीडब्ल्यू कैफर का मालिक है और इसे लगातार सवारी करता है। और फिल्म में कार अक्सर दिखाया गया था। , "मोंटे कार्लो में डकैती," "हर्बी राइड्स फिर" प्यार बच्चे में "" "हर्बी जाता केले", "वोक्सवैगन बीटल 2", "हर्बीः फुल्ली लोडेड," "राइडर्स" - इन फिल्मों के सभी में, कार शामिल है। तो यह प्रसिद्ध मशीन है। यह जानना उपयोगी है कि यह मशीन पुस्तक में सूचीबद्ध हैगिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स! अपने सैलून के अंदर "भरवां" लोगों की अधिकतम संख्या रिकॉर्ड की गई - 36! वास्तव में एक रिकॉर्ड संकेतक। लेकिन उन्हें पर्वतारोहियों ने पीटा, जो छत पर और अंदर फिट बैठे ... 57. अद्भुत डेटा। वैसे, यह मॉडल था जो पूर्वज बन गयामशीनों की ऐसी उप-प्रजातियां बग्गी हैं बीटल हैं। यद्यपि आधिकारिक तौर पर जर्मनी में, मूल जर्मन में, यह "वोक्सवैगन" बीटल कभी भी बुलाया नहीं जाता है। इसके अलावा, इस मॉडल ने शीर्ष दस कारों में प्रवेश किया जो दुनिया को बदल दिया। यह डेटा विश्व प्रसिद्ध आधिकारिक पत्रिका फोर्ब्स द्वारा प्रकाशित किया गया था। और, वैसे, यह कैफर है - सभी स्पोर्ट्स कारों का एक दूरस्थ रिश्तेदार, जो वर्तमान में चिंता पोर्श द्वारा उत्पादित हैं।
वोक्सवैगन केफेर एक यात्री कार हैएक कार जिसे जर्मन चिंता वीडब्ल्यू एजी द्वारा उत्पादित किया गया था, जो कि दुनिया में सबसे अमीर है। और समृद्ध। और वोक्सवैगन केफेर मॉडल एक नौ अड़तीस से दो हज़ार तीन तक बाहर आया! ये केवल अविश्वसनीय संकेतक हैं, यह देखते हुए कि हमारे समय मॉडल में पांच से दस साल का उत्पादन होता है, और फिर बंद हो जाता है। खैर, यह सम्मान और ध्यान के योग्य है, इसलिए इस विषय पर अधिक विस्तार से चर्चा की जानी चाहिए। पूरे उत्पादन अवधि के दौरान, इक्कीस,पाँच सौ उनतीस,चार सौ चौंसठ कारें बनाई गई थीं। यह एक बहुत बड़ी संख्या है। मॉडल का एक समृद्ध इतिहास है। और इसके बारे में आपको बताने की जरूरत है। एक नौ तैंतीस में एक बर्लिन होटल में बुलाया गया"कैसरहोफ" जैकोब वेरलीन, एडॉल्फ हिटलर के साथ-साथ फर्डिनेंड पोर्श के बीच आयोजित एक बैठक थी। जर्मन फुहरर ने अपनी मांग को आगे बढ़ाया - जर्मनी के लिए एक विश्वसनीय, ठोस और मजबूत कार का उत्पादन करने के लिए, साथ ही साथ एक हजार रिचमार्क की लागत भी होगी। यह विचार खुद को फर्डिनेंड पोर्श द्वारा हिटलर को पेश किया गया था। उन्होंने फिशरर "टूर बारह" - एक पिछली इंजन कार, बल्कि बजटीय को भी सुझाव दिया। इस बार विचार कुछ अलग था। यह योजना बनाई गई थी कि वोक्सवैगन केफेर एक पिस्टन पावर यूनिट और एक स्वतंत्र निलंबन के साथ एक छोटी, लेकिन तकनीकी रूप से परिष्कृत कार बन जाएगा। यह मॉडल चार वयस्कों को समायोजित करना था। कीमत कम होनी चाहिए, और अधिकतम गति - उच्च , यानी एक सौ किमी / घंटा। उद्यम के बाद लागू करने के कई प्रयासइस विचार को परियोजना को बड़े और आधिकारिक मोटरसाइकिल निर्माता - जुंडैप में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया था। फर्म सिर्फ कुछ नया, अधिक शक्तिशाली और गंभीर बनाना चाहता था। तो प्रक्रिया शुरू हुई। एक नौ सौ इकतीस-बत्तीस में, तीन प्रोटोटाइप बनाए गए थे। यह एक बंद शरीर और एक परिवर्तनीय के साथ दो सेडान था। हुड के तहत उनके पास तरल शीतलन प्रणाली के साथ स्टार-आकार की पावर इकाइयां थीं। तकनीकी कमियां थीं। हां, और आर्थिक अक्षमता। तो फोक्सवैगन केफेर का विकास एक अन्य नूर्नबर्ग कंपनी - एनएसयू द्वारा लिया गया था। हालांकि, उन्होंने तीन प्रोटोटाइप भी बनाए जो विचार के पहलुओं को पसंद नहीं आया। यद्यपि कार मॉडल के समान ही निकली है जिसे हम आज जानते हैं। सच है, उसकी शक्ति अट्ठाईस लीटरटर थी। के साथ, और निलंबन - टोरसन-लीवर। झटके के बावजूद, हिटलर को पुरस्कृत किया गयापरिणाम प्राप्त करने के लिए अन्य विशेषज्ञों को आकर्षित करके "पोर्श" प्रतिनिधियों की कोशिश कर रहा है। उसके बाद, वास्तव में एक गंभीर प्रक्रिया शुरू हुई, जो सफलतापूर्वक समाप्त हो गई। पहली कार वोक्सवैगन केफेरएक नौ सैंतीस में दिखाई दिया। इसे क्रमशः भी जारी किया गया था - उत्पादित मॉडल की संख्या तीस इकाइयां थीं। विचार को वास्तविकता में अनुवाद करने की प्रक्रिया फुहरर द्वारा तेज हुई थी। उन्होंने मोटर वाहन डिजाइनरों का भी दौरा किया। पहली कारों में एक अंधेरे की दीवार थी। हिटलर को यह पसंद नहीं आया। क्योंकि इस कमी को तुरंत हटा दिया गया था। और सबसे पहले, बोलने के लिए, परीक्षण ड्राइव में योग्य ड्राइवरों ने भाग लिया था, जिसके लिए एसएस परिवहन सेवा उपकरण द्वारा जारी किया गया था। कुल मिलाकर, सभी कारों का परीक्षण रन थादो मिलियन किलोमीटर और एक हज़ार नौ सौ अड़तीस में, परियोजना है, जो "जोय के माध्यम से शक्ति" कहा जाता था, आधिकारिक आकार हासिल की है। वोक्सवैगन कश्मीर fer है, जो, नीचे दिया गया है चित्रों असर सपाट तल, चार सिलेंडर इकाई का विरोध किया कीचड़ रियर एक्सल और स्वतंत्र निलंबन के पीछे अनुदैर्ध्य निपटारा वृद्धि की है। डिजाइन - बहुत सुव्यवस्थित, गोलाकार, "जैविक।" वह फुरर पसंद आया। एडॉल्फ हिटलर व्यक्तिगत रूप से स्केच के निर्माण में शामिल किया गया था। संशोधनों में से - चार-दरवाजे कैब्रिलेट और सेडान। सबसे बड़े पैमाने पर उत्पादित वोक्सवैगन केफर कारसमय चालीस के दशक में लोकप्रियता हासिल करना शुरू कर दिया। तब यह था कि एक सेना कार की अवधारणा बनाई गई थी। कार अलग थी कि इसमें हल्के व्हील गियर, सोलह-इंच पहियों और, ज़ाहिर है, फ्लैट पैनलों के साथ हल्के वजन वाले चार-दरवाजे वाले शरीर थे। एक इंटर-व्हील सेल्फ लॉकिंग अंतर था, दो नौ सेंटीमीटर और पच्चीस हॉर्स पावर मोटर की मंजूरी थी। एक नौ पैंतालीस से पहले, लगभग पचास चार सौ पैंतीस ऐसे मॉडल बनाए गए थे। यह उस समय सबसे बड़ी यात्री कार वोक्सवैगन केफेर था। अभी भी प्रकाश में मॉडल के ऑल-व्हील ड्राइव संस्करण को बाहर आया। यह ट्रांसमिशन का दावा कर सकता था, जो उभयचर टूर एक सौ छयासठ से लिया गया था। दस साल के लिए, यह "वोक्सवैगन" बन गया हैकाफी लोकप्रिय तो उत्पादन में सुधार जारी रहा। और चालीस के उत्तरार्ध में, या अधिक सटीक रूप से, एक नौ अड़तालीस में, पहली बीटल-कैब्रिलेट सड़कों पर दिखाई दिए। उन्होंने सफलता प्राप्त की और क्रमशः उत्पादन शुरू किया। और पचास की मशीनें जो काम करती हैंडीजल बिजली इकाइयों पर। और उन लोगों पर जो एक अच्छी मात्रा में भिन्न थे - एक दशमलव तीन लीटरटर! प्रति घंटे एक सौ किलोग्राममीटर तक इस तरह के इंजन के साथ मॉडल ठीक एक मिनट में तेज हो सकता है। यह उस समय एक भयानक आंकड़ा था। अगर हम इस तथ्य को ध्यान में रखते हैं कि कार में टर्बोचार्जर नहीं था। अपने पूर्ववर्ती की तुलना में फोक्सवैगन केफेर विशेषताओं में सुधार हुआ, उल्लेखनीय रूप से सुधार हुआ। और एक नौ सरसठ में बिजली इकाई की शक्ति को लाया गया थाचौवन अश्वशक्ति का संकेतक। बदल गया और उपस्थिति। शरीर कुछ हद तक बढ़ाया गया। वैसे, पांच साल बाद यह फैसला किया गया कि सुपर बीटल से अधिक सेडान न छोड़ें। इसलिए उन्होंने सामान्य, मानक, प्लस कैब्रिलेट्स का उत्पादन शुरू किया। उस समय वोक्सवैगन केफर समीक्षा केवल प्राप्त हुईसकारात्मक। मालिक जर्मन कार की प्रशंसा करते हुए दोस्तों के साथ अपने इंप्रेशन साझा करने में संकोच नहीं करते थे। उन्हें डिजाइन, काफी ऊंचा बिजली, आराम और अपेक्षाकृत कम कीमत पसंद आया। तो वोक्सवैगन की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। और क्योंकि चिंता ने एक ऐसे मॉडल का निर्माण शुरू करने का फैसला किया जो अधिक प्रतिष्ठित, स्टाइलिश बन जाएगा। इसलिए, शुरुआती पचास के दशक में, कर्मन स्टूडियो को कंपनी के प्रतिनिधियों से एक नया, अधिक सुंदर डिजाइन विकसित करने का आदेश मिला। तो चेसिस पर एक कार थी। यह एक रोडस्टर नहीं था, लेकिन एक सुंदर लम्बा दो दरवाजा कूप था। और उन वर्षों के कई आलोचकों ने कहा कि इसकी गुणवत्ता दुनिया में सबसे अच्छी है। कहने की जरूरत नहीं है, इन मशीनों को उन देशों को भी निर्यात किया गया था जहां बाएं हाथ के यातायात का आयोजन किया जाता है। "प्रतिष्ठित" मॉडल का कुल परिसंचरण चार सौ सत्तासी हजार कारों से अधिक था। और यह एक ठोस आंकड़ा था। कहने की जरूरत नहीं है, अब भी इसे काफी मात्रा में माना जाता है। कई अन्य कारों की तरह, यह एक"वोक्सवैगन" न केवल एक कार है, बल्कि संस्कृति का एक टुकड़ा भी है। इसलिए, उदाहरण के लिए, हम इस मॉडल को लोकप्रिय बैंड "द बीटल्स" के एल्बमों में से एक के कवर पर देख सकते हैं। इसे एबी रोड कहा जाता है। और उस कार की संख्या वाली प्लेट का अपहरण एक से अधिक बार अपहरण कर लिया गया था। इसे एक नौ छयासठ में पॉल मैककार्टनी की मौत के एक प्रकार के "सबूत" के रूप में भी उद्धृत किया गया है । और यह कार जिम बुचर द्वारा लिखी पुस्तकों में भी मौजूद है। श्रृंखला को ड्रेस्डेन डोजियर कहा जाता है। उनमें, नायक नीले वीडब्ल्यू कैफर का मालिक है और इसे लगातार सवारी करता है। और फिल्म में कार अक्सर दिखाया गया था। , "मोंटे कार्लो में डकैती," "हर्बी राइड्स फिर" प्यार बच्चे में "" "हर्बी जाता केले", "वोक्सवैगन बीटल दो", "हर्बीः फुल्ली लोडेड," "राइडर्स" - इन फिल्मों के सभी में, कार शामिल है। तो यह प्रसिद्ध मशीन है। यह जानना उपयोगी है कि यह मशीन पुस्तक में सूचीबद्ध हैगिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स! अपने सैलून के अंदर "भरवां" लोगों की अधिकतम संख्या रिकॉर्ड की गई - छत्तीस! वास्तव में एक रिकॉर्ड संकेतक। लेकिन उन्हें पर्वतारोहियों ने पीटा, जो छत पर और अंदर फिट बैठे ... सत्तावन. अद्भुत डेटा। वैसे, यह मॉडल था जो पूर्वज बन गयामशीनों की ऐसी उप-प्रजातियां बग्गी हैं बीटल हैं। यद्यपि आधिकारिक तौर पर जर्मनी में, मूल जर्मन में, यह "वोक्सवैगन" बीटल कभी भी बुलाया नहीं जाता है। इसके अलावा, इस मॉडल ने शीर्ष दस कारों में प्रवेश किया जो दुनिया को बदल दिया। यह डेटा विश्व प्रसिद्ध आधिकारिक पत्रिका फोर्ब्स द्वारा प्रकाशित किया गया था। और, वैसे, यह कैफर है - सभी स्पोर्ट्स कारों का एक दूरस्थ रिश्तेदार, जो वर्तमान में चिंता पोर्श द्वारा उत्पादित हैं।
कोलकाता : प्रगति मैदान थानांतर्गत मेट्रोपोलिटन को-ऑपरेटिव हाइसिंग सोसायटी के निकट कपड़े के गोदाम में आग लग गयी। मौके पर पहुंचे दमकल के दो इंजन ने आग पर काबू पाया। हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ। जानकारी के अनुसार रविवार की सुबह 11 बजे मकान में आग लगी देख लोगों ने सूचना पुलिस और दमकल को दी। मौके पर पहुंचे दमकल कर्मियों ने तत्परता पूर्व आग पर काबू पाया। हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ। दमकल अधिकारियों का प्राथमिक अनुमान है कि आग संभवतः इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट के कारण लगी थी।
कोलकाता : प्रगति मैदान थानांतर्गत मेट्रोपोलिटन को-ऑपरेटिव हाइसिंग सोसायटी के निकट कपड़े के गोदाम में आग लग गयी। मौके पर पहुंचे दमकल के दो इंजन ने आग पर काबू पाया। हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ। जानकारी के अनुसार रविवार की सुबह ग्यारह बजे मकान में आग लगी देख लोगों ने सूचना पुलिस और दमकल को दी। मौके पर पहुंचे दमकल कर्मियों ने तत्परता पूर्व आग पर काबू पाया। हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ। दमकल अधिकारियों का प्राथमिक अनुमान है कि आग संभवतः इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट के कारण लगी थी।
मुंबई, 25 सितंबर महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) संजय पांडे ने कथित अवैध वसूली मामले में आईपीएस अधिकारी परमबीर सिंह समेत अन्य उन पुलिस अधिकारियों को निलंबित करने का प्रस्ताव हाल ही में भेजा है जिनका नाम इस मामले में सामने आया है। हालांकि, राज्य के गृह विभाग ने अधिक विवरण मांगा है। सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी। मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह के खिलाफ मुंबई और ठाणे में अवैध वसूली के आरोप वाली कम से कम चार प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। सरकारी सूत्रों ने बताया कि गृह विभाग ने इन मामलों में प्रत्येक आरोपी पुलिस अधिकारी की भूमिका के बारे में और अधिक विशिष्ट जानकारी मांगते हुए डीजीपी के प्रस्ताव को वापस भेज दिया है। सिंह के अलावा प्राथमिकियों में पुलिस उपायुक्त और सहायक पुलिस आयुक्त स्तर के अधिकारियों के नाम भी आरोपी के तौर पर शामिल हैं। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
मुंबई, पच्चीस सितंबर महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक संजय पांडे ने कथित अवैध वसूली मामले में आईपीएस अधिकारी परमबीर सिंह समेत अन्य उन पुलिस अधिकारियों को निलंबित करने का प्रस्ताव हाल ही में भेजा है जिनका नाम इस मामले में सामने आया है। हालांकि, राज्य के गृह विभाग ने अधिक विवरण मांगा है। सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी। मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह के खिलाफ मुंबई और ठाणे में अवैध वसूली के आरोप वाली कम से कम चार प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। सरकारी सूत्रों ने बताया कि गृह विभाग ने इन मामलों में प्रत्येक आरोपी पुलिस अधिकारी की भूमिका के बारे में और अधिक विशिष्ट जानकारी मांगते हुए डीजीपी के प्रस्ताव को वापस भेज दिया है। सिंह के अलावा प्राथमिकियों में पुलिस उपायुक्त और सहायक पुलिस आयुक्त स्तर के अधिकारियों के नाम भी आरोपी के तौर पर शामिल हैं। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
भाषाभारतसारपर्व २ मैहूं प्रसन्न भयो तुमह वर मांगी. ऐसे सहदेवकी वचन स णि श्रीकृष्ण बोले तुमे यह पतंग्या करो सोमै जादवनसौंज इ करों नहीं. जोतीस शास्त्रकों पूछे बिना जाया नहीं करूं तंब सहदेव बोले हे वास्फरूदेव जो तुम प्रसन्न भये होतो एक वरदान मौकों द्यौ. युधिष्ठिरको च्यादि हम पांच भैय्या है तिनकी महांदुष्पमै भी सदा सहाई करौंगा. यह रूणि श्रीकृष्ण अगिकार करत भये तब कही राजसूय यग्यको विचार क रचौहै सो सहाइ करिवेको चालिये, तब श्रीकृष्ण वाही समे सहदेवको सनमान करि द्वारिकारों इंद्रप्रस्थ पुरको चले. सौ क्रम करिकै मार्ग चलि इंद्रमस्याये सुधिष्ठिरा दिकसौ मि ले. सबनकों बडौ आनंद भयो तब युधिष्ठिर श्रीकृष्णकौं ए कांत में लेजाय बोले, मैराजसूय यग्य करिवेको विचार करयो है. सोयापकी अनुहोईगौ तब श्रीकृष्णाहू सबरीत, सौं सहाय करिवेकों अगिकार करतभये. ॥ ॥ इतिश्री भाषाभारतसारचंद्रिकायां सभापर्वणिमयमोऽध्यायः ॥ १ ॥ ॥ जनमेजय बोले हे मुने, श्रीकृष्ण चंद्रतो कहा क स्यौ युधिष्टिर कहा कस्यौ नकुल अर्जुन राजसूय महायग्य में कहा कयौ सो कहौ . तब वैशंपायन बोले कृष्ण अर्जुनज ग्यके अर्थ धन लेवेकों लंका पुरी गये. सोसमुद्रके तीर श्रीक ष्ण अर्जुन जाय बैटे हनुमंतको समरा कयौं तहां हनुमंत आये जब अर्जुन वचन बोलै मागे लंकाके जुन्हमें समुद्रम ध्य सेतबांधी बॉन्भर गये लंकाको घेरिजुड़ को श्रीराम मचंद्र विजेपाइ सो सेतु बांध्या जासों सर पंजरही बांधिवाभर पारक्यों नगये तब हनुमान बोले वान्भर बड़े पराक मी हैं सोउनके कूदिवेत सरपंजर छिन्न भिन्न होड़ जाइ र है नहीं. जब अर्जुन बोले जोमै सरपंजर बांधों ताकौं कौन छे देन करै तब हनुमंत कही तुम बांधी मैही छेदन करौंगो. भाषाभारतसारपर्ष २ जब अर्जुन सर पंजर बांध्यौ तब हनुमंत उछालकै परे सोतिल तिल छिन्नभिन्न करि डारयो तब अर्जुन उदास भयो, जब श्री कृष्ण बोलै फेरि सरपंजर बांधि तब अर्जुन फेरि सरपंजरब धी पुनः अर्जुन फेरि सरपंजर बांधत भयो श्रीकृष्ण वाकैनी जाइ कर्मरूप होई टाढे भये. अर्जुन कहि. अब यह तोडि यै तब हनुमत्त वापै कूदे सो बहुतेरे प्रहार किये परंतु नैकभी चलित भयौ नही. तब हुनुमंत अर्जुन बोले मै प्रसन्न भयो वरमांगि जब अर्जुन बोले जुसमै मेरी पुजा तुमआय विराजो सो हनुमत तयास्त कह्यौ फेरि श्रीकृष्ण बोले हम कौं लंका पुरीमै लेचली. सो हनुमंत श्रीकृष्ण अर्जुनले गये. वहां विभीषण बहुत सनमानकर पूजन करयो फेरि को प्राग्या कुरौ तब श्रीकृष्णबोले सुधिष्ठिर महाराज के राज सूयजग्यकौं धन चाहिये है सोद्यौ तब विभीषण असं प्यात रेफवर्ण निवेदन करयो फेरि आपके किंकरनसौँ कही जहांचे प्राय करे तहां पहुचाइयो सो श्रीकृष्ण अर्जुन व एलिकर इंद्रप्रस्थाये युधिष्ठिर महाराज अ एनिके पर्वत निवेदन किये युधिधिर बहुत प्रसन्नो कृष्णकी स्तुतिकरी अर्जुन कही में सरपंजर बांध्यो सोह नुमंतसौं भेद्यौनहीं. तब श्रीकृष्णचंद बोले क्षमा करो मेरो शिरदेषो छलसौं हनुमंतकों बस करि तुह्यारी कार्य करयो न ब राजा युधिष्ठिर कही सब पराक्रम श्रीकृष्णाहीको है. नौ रह जो कार्य होहिणेंसो इनहीसौं होइंगे. ऐसे मनमैं विचारि श्रीकृष्णको एकांत मै लेगये. तहां फेरि विनती करी हे श्रीक ग में राजसूय यग्य करिवेकों विचारयो है सो कैसे वाया आप मंत्र दीजै तब श्रीकृष्ण बोले सब राजानकी जीति करि पृथ्वीको बस करिसर्व सामग्री संचय करि महाजग्यको प्रारंभ करो ऐसौ कृष्णको वचन सणि प्रसन्न भये. श्रीकृ
भाषाभारतसारपर्व दो मैहूं प्रसन्न भयो तुमह वर मांगी. ऐसे सहदेवकी वचन स णि श्रीकृष्ण बोले तुमे यह पतंग्या करो सोमै जादवनसौंज इ करों नहीं. जोतीस शास्त्रकों पूछे बिना जाया नहीं करूं तंब सहदेव बोले हे वास्फरूदेव जो तुम प्रसन्न भये होतो एक वरदान मौकों द्यौ. युधिष्ठिरको च्यादि हम पांच भैय्या है तिनकी महांदुष्पमै भी सदा सहाई करौंगा. यह रूणि श्रीकृष्ण अगिकार करत भये तब कही राजसूय यग्यको विचार क रचौहै सो सहाइ करिवेको चालिये, तब श्रीकृष्ण वाही समे सहदेवको सनमान करि द्वारिकारों इंद्रप्रस्थ पुरको चले. सौ क्रम करिकै मार्ग चलि इंद्रमस्याये सुधिष्ठिरा दिकसौ मि ले. सबनकों बडौ आनंद भयो तब युधिष्ठिर श्रीकृष्णकौं ए कांत में लेजाय बोले, मैराजसूय यग्य करिवेको विचार करयो है. सोयापकी अनुहोईगौ तब श्रीकृष्णाहू सबरीत, सौं सहाय करिवेकों अगिकार करतभये. ॥ ॥ इतिश्री भाषाभारतसारचंद्रिकायां सभापर्वणिमयमोऽध्यायः ॥ एक ॥ ॥ जनमेजय बोले हे मुने, श्रीकृष्ण चंद्रतो कहा क स्यौ युधिष्टिर कहा कस्यौ नकुल अर्जुन राजसूय महायग्य में कहा कयौ सो कहौ . तब वैशंपायन बोले कृष्ण अर्जुनज ग्यके अर्थ धन लेवेकों लंका पुरी गये. सोसमुद्रके तीर श्रीक ष्ण अर्जुन जाय बैटे हनुमंतको समरा कयौं तहां हनुमंत आये जब अर्जुन वचन बोलै मागे लंकाके जुन्हमें समुद्रम ध्य सेतबांधी बॉन्भर गये लंकाको घेरिजुड़ को श्रीराम मचंद्र विजेपाइ सो सेतु बांध्या जासों सर पंजरही बांधिवाभर पारक्यों नगये तब हनुमान बोले वान्भर बड़े पराक मी हैं सोउनके कूदिवेत सरपंजर छिन्न भिन्न होड़ जाइ र है नहीं. जब अर्जुन बोले जोमै सरपंजर बांधों ताकौं कौन छे देन करै तब हनुमंत कही तुम बांधी मैही छेदन करौंगो. भाषाभारतसारपर्ष दो जब अर्जुन सर पंजर बांध्यौ तब हनुमंत उछालकै परे सोतिल तिल छिन्नभिन्न करि डारयो तब अर्जुन उदास भयो, जब श्री कृष्ण बोलै फेरि सरपंजर बांधि तब अर्जुन फेरि सरपंजरब धी पुनः अर्जुन फेरि सरपंजर बांधत भयो श्रीकृष्ण वाकैनी जाइ कर्मरूप होई टाढे भये. अर्जुन कहि. अब यह तोडि यै तब हनुमत्त वापै कूदे सो बहुतेरे प्रहार किये परंतु नैकभी चलित भयौ नही. तब हुनुमंत अर्जुन बोले मै प्रसन्न भयो वरमांगि जब अर्जुन बोले जुसमै मेरी पुजा तुमआय विराजो सो हनुमत तयास्त कह्यौ फेरि श्रीकृष्ण बोले हम कौं लंका पुरीमै लेचली. सो हनुमंत श्रीकृष्ण अर्जुनले गये. वहां विभीषण बहुत सनमानकर पूजन करयो फेरि को प्राग्या कुरौ तब श्रीकृष्णबोले सुधिष्ठिर महाराज के राज सूयजग्यकौं धन चाहिये है सोद्यौ तब विभीषण असं प्यात रेफवर्ण निवेदन करयो फेरि आपके किंकरनसौँ कही जहांचे प्राय करे तहां पहुचाइयो सो श्रीकृष्ण अर्जुन व एलिकर इंद्रप्रस्थाये युधिष्ठिर महाराज अ एनिके पर्वत निवेदन किये युधिधिर बहुत प्रसन्नो कृष्णकी स्तुतिकरी अर्जुन कही में सरपंजर बांध्यो सोह नुमंतसौं भेद्यौनहीं. तब श्रीकृष्णचंद बोले क्षमा करो मेरो शिरदेषो छलसौं हनुमंतकों बस करि तुह्यारी कार्य करयो न ब राजा युधिष्ठिर कही सब पराक्रम श्रीकृष्णाहीको है. नौ रह जो कार्य होहिणेंसो इनहीसौं होइंगे. ऐसे मनमैं विचारि श्रीकृष्णको एकांत मै लेगये. तहां फेरि विनती करी हे श्रीक ग में राजसूय यग्य करिवेकों विचारयो है सो कैसे वाया आप मंत्र दीजै तब श्रीकृष्ण बोले सब राजानकी जीति करि पृथ्वीको बस करिसर्व सामग्री संचय करि महाजग्यको प्रारंभ करो ऐसौ कृष्णको वचन सणि प्रसन्न भये. श्रीकृ
\Bएनबीटी, लखनऊ : \Bलखनऊ विश्वविद्यालय (एलयू) ने बीएड फर्स्ट और थर्ड सेमेस्टर की परीक्षाओं का शेड्यूल बुधवार को जारी कर दिया। न्यू और ओल्ड कोर्स की परीक्षाएं 10 दिसंबर से शुरू होकर 17 दिसंबर तक चलेंगी। छात्र-छात्राएं विवि की वेबसाइट से इसे डाउनलोड कर सकते हैं। परीक्षाओं का समय दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक रहेगा। इसमें करीब सात हजार छात्र-छात्राएं शामिल होंगे। बीएड परीक्षाओं के लिए केंद्रों का निर्धारण एक-दो दिन में हो जाएगा। \Bबीएड सेमेस्टर-1 (न्यू कोर्स) \Bबीएड सेमेस्टर-3(न्यू कोर्स) \Bबीएड सेमेस्टर-1(ओल्ड कोर्स) \Bबीएड सेमेस्टर-3(ओल्ड कोर्स)
\Bएनबीटी, लखनऊ : \Bलखनऊ विश्वविद्यालय ने बीएड फर्स्ट और थर्ड सेमेस्टर की परीक्षाओं का शेड्यूल बुधवार को जारी कर दिया। न्यू और ओल्ड कोर्स की परीक्षाएं दस दिसंबर से शुरू होकर सत्रह दिसंबर तक चलेंगी। छात्र-छात्राएं विवि की वेबसाइट से इसे डाउनलोड कर सकते हैं। परीक्षाओं का समय दोपहर दो से शाम पाँच बजे तक रहेगा। इसमें करीब सात हजार छात्र-छात्राएं शामिल होंगे। बीएड परीक्षाओं के लिए केंद्रों का निर्धारण एक-दो दिन में हो जाएगा। \Bबीएड सेमेस्टर-एक \Bबीएड सेमेस्टर-तीन \Bबीएड सेमेस्टर-एक \Bबीएड सेमेस्टर-तीन
नई दिल्ली. फटी एड़ियों की वजह से पैरों की खूबसूरती पूरी तरह बिगड़ जाती है, फिर लोग ऐसे फुटवियर पहनने को मजबूर हो जाते हैं जिससे उनकी एड़िया न नजर आएं. हील क्रैक होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, आमतौर पर खराब स्किन, गंदगी, सर्दियों में स्किन की ड्राइनेस जिम्मेदार होते है. लेकिन कई लोग इस बात से अंजान हैं कि आपका न्यूट्रीशन भी इसके पीछे जिम्मेदार हो सकता है, जिनमें विटामिंस की कमी हॉर्मोनल डिसबैलेंस भी शामिल है. आइए जानते हैं कि वो कौन-कौन से विटामिंस है जिनकी कमी से एड़ियां फटने लगती है. जब हमारे पैरों की त्वचा सूखने लगती है तो इसमें नमी कम हो चुकी होती है, जिससे त्वचा रफ और लेयर युक्त हो जाती है. आमतौर पर फिशर गहरी दरारें पैदा करने के लिए जिम्मेदार होता है, ये हमारी त्वचा की अंदरूनी परत में फैल जाता है, ये असर 3 विटामिन की कमी से होता है. इनमें विटामिन बी-3, विटामिन सी और विटामिन ई शामिल हैं. ये सभी विटामिन न सिर्फ एड़ियों बल्कि पूरी स्किन के लिए जरूरी होते हैं. इन न्यूट्रिएंट्स की मदद से कोलेजन का उत्पादन बढ़ाता है और त्वचा का बचाव होने लगता है, हालांकि एड़ियों को फटने से बचाने के लिए जिंक जैसे मिनरल्स युक्त भोजन भी खाने होंगे. हॉर्मोन इम्बैलेंस की वजह से आपकी एड़ियां फट सकती है, इसमें थायराइड और एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन्स का अहम रोल होता है. परेशानी बढ़ने पर एड़ियों में गहरी दरार आ जाती है और फिर दर्द के साथ खून भी निकल सकता है.
नई दिल्ली. फटी एड़ियों की वजह से पैरों की खूबसूरती पूरी तरह बिगड़ जाती है, फिर लोग ऐसे फुटवियर पहनने को मजबूर हो जाते हैं जिससे उनकी एड़िया न नजर आएं. हील क्रैक होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, आमतौर पर खराब स्किन, गंदगी, सर्दियों में स्किन की ड्राइनेस जिम्मेदार होते है. लेकिन कई लोग इस बात से अंजान हैं कि आपका न्यूट्रीशन भी इसके पीछे जिम्मेदार हो सकता है, जिनमें विटामिंस की कमी हॉर्मोनल डिसबैलेंस भी शामिल है. आइए जानते हैं कि वो कौन-कौन से विटामिंस है जिनकी कमी से एड़ियां फटने लगती है. जब हमारे पैरों की त्वचा सूखने लगती है तो इसमें नमी कम हो चुकी होती है, जिससे त्वचा रफ और लेयर युक्त हो जाती है. आमतौर पर फिशर गहरी दरारें पैदा करने के लिए जिम्मेदार होता है, ये हमारी त्वचा की अंदरूनी परत में फैल जाता है, ये असर तीन विटामिन की कमी से होता है. इनमें विटामिन बी-तीन, विटामिन सी और विटामिन ई शामिल हैं. ये सभी विटामिन न सिर्फ एड़ियों बल्कि पूरी स्किन के लिए जरूरी होते हैं. इन न्यूट्रिएंट्स की मदद से कोलेजन का उत्पादन बढ़ाता है और त्वचा का बचाव होने लगता है, हालांकि एड़ियों को फटने से बचाने के लिए जिंक जैसे मिनरल्स युक्त भोजन भी खाने होंगे. हॉर्मोन इम्बैलेंस की वजह से आपकी एड़ियां फट सकती है, इसमें थायराइड और एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन्स का अहम रोल होता है. परेशानी बढ़ने पर एड़ियों में गहरी दरार आ जाती है और फिर दर्द के साथ खून भी निकल सकता है.
गुवाहाटी। जिला कोर्ट ने देशद्रोह के आरोपी शरजील इमाम को चार दिन पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। शरजील इमाम को जांच के लिए गुवाहाटी लाया गया था। इसके बाद पुलिस रिमांड पर लेने के लिए स्थानीय कोर्ट में प्रस्तुत किया गया। Assam: Sharjeel Imam brought to Guwahati for interrogation, to be produced before a local court. दरअसल शरजील इमाम शातिर तरीके से एक मुस्लिम समुदाय के लोगों को भड़काने का काम कर रहा था और उसकी मंशा सीसीए विरोध की आड़ में मुस्लिम समुदाय का बड़ा नेता बनाने की थी। पुलिस के मुताबिक शरजील कट्टर सोच रखने वाले कई लोगों से सोशल मीडिया और वाट्सएप से जुड़ा था। इसके अलावा कट्टर सोच को बढ़ावा देने वाले विवादित पोस्टर जामिया नगर सहित मस्जिदों इत्यादि स्थानों पर बंटवाए थे। शरजील इमाम के वाट्सएप ग्रुप पर प्रतिबंधित संगठन पीएफआइ के सदस्य जुड़े हुए हैं, ऐसे में उसके आतंकी संगठनों से भी जुड़े होने की संभावनाओं को बल मिलता है। लिहाजा पुलिस को शक है कि उसका संबंध किसी आतंकी संगठन से भी हो सकता है। दिल्ली पुलिस का मानना है कि ऐसा भी हो सकता है कि शरजील इमाम के पास आतंकी संगठनों से मदद सीधे नहीं पहुंचती हो बल्कि अन्य लोगों के जरिये पैसा मिल रहा हो और इसका प्रयोग विरोध प्रदर्शन के दौरान किया जा रहा हो।
गुवाहाटी। जिला कोर्ट ने देशद्रोह के आरोपी शरजील इमाम को चार दिन पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। शरजील इमाम को जांच के लिए गुवाहाटी लाया गया था। इसके बाद पुलिस रिमांड पर लेने के लिए स्थानीय कोर्ट में प्रस्तुत किया गया। Assam: Sharjeel Imam brought to Guwahati for interrogation, to be produced before a local court. दरअसल शरजील इमाम शातिर तरीके से एक मुस्लिम समुदाय के लोगों को भड़काने का काम कर रहा था और उसकी मंशा सीसीए विरोध की आड़ में मुस्लिम समुदाय का बड़ा नेता बनाने की थी। पुलिस के मुताबिक शरजील कट्टर सोच रखने वाले कई लोगों से सोशल मीडिया और वाट्सएप से जुड़ा था। इसके अलावा कट्टर सोच को बढ़ावा देने वाले विवादित पोस्टर जामिया नगर सहित मस्जिदों इत्यादि स्थानों पर बंटवाए थे। शरजील इमाम के वाट्सएप ग्रुप पर प्रतिबंधित संगठन पीएफआइ के सदस्य जुड़े हुए हैं, ऐसे में उसके आतंकी संगठनों से भी जुड़े होने की संभावनाओं को बल मिलता है। लिहाजा पुलिस को शक है कि उसका संबंध किसी आतंकी संगठन से भी हो सकता है। दिल्ली पुलिस का मानना है कि ऐसा भी हो सकता है कि शरजील इमाम के पास आतंकी संगठनों से मदद सीधे नहीं पहुंचती हो बल्कि अन्य लोगों के जरिये पैसा मिल रहा हो और इसका प्रयोग विरोध प्रदर्शन के दौरान किया जा रहा हो।
जो, सब तत्त्वन को भेद । प्रत्यक्ष छोड़ि तब किमि करै, विविधि भरम के खेद ॥ ११ ॥ टीका - भेद कहिये पृथक-पृथक सब तत्व अपने- अपने गुण-धर्म युक्त स्वतंत्र है । यह निर्णय यदि मानने - निश्चय मे आ गया और देह व्यवहार मे भी पृथक-पृथक ठण्ढी, गर्मी, वायु, पृथ्वी सब तत्वो की बराबर आवश्यकता लगने से बर्ताव द्वारा सब तत्वो को स्वतंत्र मानने का परिचय मिल रहा है । तब फिर वर्तमान मे जैसे सब तत्व स्वतंत्र रूप पृथक-पृथक उत्पत्ति रहित देखे जा रहे है तैसे तीनों काल मे अनादि से मानने मे क्या आक्षेप ? आक्षेप नही बल्कि नि. सदेह जगत प्रत्यक्ष अनादि ही है फिर वतमानिक यथार्थ प्रत्यक्ष को छोड़कर कल्पित कर्ता कारण की अनेक कल्पनाओ की चिंता से क्यो दुखी होवे ? ॥ ११ ॥ छन्द - "सब ने अनादि है कहा इस जग्त मूला धार को । कोई तत्व जड कोई ईश कोई ब्रह्म वीचि बिचार को ।। कोई खुदा कोई शक्ति कोई सूर्य मे सर्वाधार को । एक मूल सो कि बने जो बिबिधि गुण ससार को ।।१।। चैतन्य जड दोउ छोड़कर कर्तादि शक्ति है कहाँ ? सर्व शक्ति के रहत मे पाप नाना हो रहा ।। जीव होते है नये तो नित्य क्यो खण्डित हुये । एक से नाना हुआ तो कार्य कारण जड हुये ।।२।। हेतु क्या उत्पत्ति का जब गुण गुणी सब नित्य है । चैतन्य जड़ दोउ भिन्न धर्मी सो. अनादि प्रत्यक्ष है ।। चव तत्व ही कारण लखो कर्त्ता ये जीव अनन्त है । इनके परे अनुमान क्यो भ्रम बारि डूबि मरन्त है ॥ ३ ॥ कारज तेज में टुकड़ा बनै, सो तौ सबहिं देखात । सूरज में देखा कवन जेहिसे जानी बात ॥ १२ ॥
जो, सब तत्त्वन को भेद । प्रत्यक्ष छोड़ि तब किमि करै, विविधि भरम के खेद ॥ ग्यारह ॥ टीका - भेद कहिये पृथक-पृथक सब तत्व अपने- अपने गुण-धर्म युक्त स्वतंत्र है । यह निर्णय यदि मानने - निश्चय मे आ गया और देह व्यवहार मे भी पृथक-पृथक ठण्ढी, गर्मी, वायु, पृथ्वी सब तत्वो की बराबर आवश्यकता लगने से बर्ताव द्वारा सब तत्वो को स्वतंत्र मानने का परिचय मिल रहा है । तब फिर वर्तमान मे जैसे सब तत्व स्वतंत्र रूप पृथक-पृथक उत्पत्ति रहित देखे जा रहे है तैसे तीनों काल मे अनादि से मानने मे क्या आक्षेप ? आक्षेप नही बल्कि नि. सदेह जगत प्रत्यक्ष अनादि ही है फिर वतमानिक यथार्थ प्रत्यक्ष को छोड़कर कल्पित कर्ता कारण की अनेक कल्पनाओ की चिंता से क्यो दुखी होवे ? ॥ ग्यारह ॥ छन्द - "सब ने अनादि है कहा इस जग्त मूला धार को । कोई तत्व जड कोई ईश कोई ब्रह्म वीचि बिचार को ।। कोई खुदा कोई शक्ति कोई सूर्य मे सर्वाधार को । एक मूल सो कि बने जो बिबिधि गुण ससार को ।।एक।। चैतन्य जड दोउ छोड़कर कर्तादि शक्ति है कहाँ ? सर्व शक्ति के रहत मे पाप नाना हो रहा ।। जीव होते है नये तो नित्य क्यो खण्डित हुये । एक से नाना हुआ तो कार्य कारण जड हुये ।।दो।। हेतु क्या उत्पत्ति का जब गुण गुणी सब नित्य है । चैतन्य जड़ दोउ भिन्न धर्मी सो. अनादि प्रत्यक्ष है ।। चव तत्व ही कारण लखो कर्त्ता ये जीव अनन्त है । इनके परे अनुमान क्यो भ्रम बारि डूबि मरन्त है ॥ तीन ॥ कारज तेज में टुकड़ा बनै, सो तौ सबहिं देखात । सूरज में देखा कवन जेहिसे जानी बात ॥ बारह ॥
देश में कोरोना की दूसरी लहर ने कोहराम मचा रखा है। मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी के चलते सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में ऑक्सीजन की किल्लत जारी है। इस बीच सोनू सूद, सलमान खान, अक्षय कुमार और ट्विंकल खन्ना के बाद अब सुनील शेट्टी ने भी कोरोना के खिलाफ अपना योगदान देने के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर दान करने का फैसला किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर यह जानकारी दी है। सुनील ने अपने पोस्ट में क्या लिखा, आइए जानते हैं। सुनील शेट्टी ने एक संस्था के साथ हाथ मिलाया है जो मुफ्त में ऑक्सीजन सिलेंडर दे रही है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, 'हम कठिन समय से गुजर रहे हैं, लेकिन हमारे लोगों ने एक-दूसरे की मदद को हाथ आगे बढ़ाया है, जो कि उम्मीद की किरण है। ' सुनील ने लिखा, 'मैं KVN फाउंडेशन से जुड़कर बहुत खुश हूं और खुद को भाग्यशाली मान रहा हूं, जो लोगों को मुफ्त में ऑक्सीजन सिलेंडर मुहैया करवा रही है। ' सुनील ने अपने दूसरे ट्वीट में कोरोना महामारी के समय एक-दूसरे की मदद करने की गुहार लगाई है। उन्होंने लिखा, 'मैं सभी दोस्तों और प्रशंसकों से यह अपील करना चाहता हूं कि अगर आपको मदद चाहिए तो आप मुझे सीधे मैसेज करें। ' उन्होंने लिखा, 'अगर आप किसी ऐसे को जानते हैं, जिसे मदद की जरूरत है तो बताइए। अगर आप इस मिशन का हिस्सा बनना चाहते हैं तब भी बताइए। मदद जितने लोगों तक पहुंचाई जा सके, पहुंचाएं। ' अक्षय कुमार और उनकी पत्नी ट्विंकल खन्ना ने हाल ही में एक संस्था को 100 ऑक्सीजन कॉन्सन्ट्रेटर दान किए। ट्विंकल ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर कर लिखा, 'एक बहुत अच्छी खबर है कि लंदन एलीट हेल्थ की डॉ. द्रश्निका पटेल और डॉ. गोविंद बंकानी देविक फाउंडेशन के माध्यम से 120 ऑक्सीजन कॉन्सन्ट्रेटर दान कर रहे हैं। ' उन्होंने लिखा, 'अक्षय और मैंने 100 ऑक्सीजन कॉन्सन्ट्रेटर की व्यवस्था की है। चलो सब अपना योगदान देते हैं। ' अजय देवगन ने भी बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) को 1 करोड़ रुपये दान किए हैं। उन्होंने एनवाय फाउंडेशन के अंतर्गत यह दान किया है, जिससे 20 बेड का एमरजेंसी अस्पताल तैयार हो सके। अजय के इस नेक कदम की काफी तारीफ हो रही है। इसके अलावा अजय ने मुंबई शिवाजी पार्क के ICU में 20 कोविड 19 के बेड, वेंटिलेटर, पैरा मॉनिटर्स और ऑक्सीजन सपोर्ट लगवाए हैं। आयुष्मान खुराना और उनकी पत्नी ताहिरा कश्यप ने कोरोना से प्रभावित लोगों की मदद के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री राहत कोष में योगदान दिया है। आयुष्मान ने इंस्टाग्राम पर लिखा, 'हम हरसंभव लोगों की मदद करने की कोशिश कर रहे हैं। अब जरूरत के समय महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री राहत कोष में योगदान दिया है। ' उन्होंने लिखा, 'जितना संभव हो सके, उतनी मदद करें। हम सब अपनी तरह से मदद करने के लिए तैयार हैं क्योंकि हम फिट हैं। '
देश में कोरोना की दूसरी लहर ने कोहराम मचा रखा है। मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी के चलते सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में ऑक्सीजन की किल्लत जारी है। इस बीच सोनू सूद, सलमान खान, अक्षय कुमार और ट्विंकल खन्ना के बाद अब सुनील शेट्टी ने भी कोरोना के खिलाफ अपना योगदान देने के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर दान करने का फैसला किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर यह जानकारी दी है। सुनील ने अपने पोस्ट में क्या लिखा, आइए जानते हैं। सुनील शेट्टी ने एक संस्था के साथ हाथ मिलाया है जो मुफ्त में ऑक्सीजन सिलेंडर दे रही है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, 'हम कठिन समय से गुजर रहे हैं, लेकिन हमारे लोगों ने एक-दूसरे की मदद को हाथ आगे बढ़ाया है, जो कि उम्मीद की किरण है। ' सुनील ने लिखा, 'मैं KVN फाउंडेशन से जुड़कर बहुत खुश हूं और खुद को भाग्यशाली मान रहा हूं, जो लोगों को मुफ्त में ऑक्सीजन सिलेंडर मुहैया करवा रही है। ' सुनील ने अपने दूसरे ट्वीट में कोरोना महामारी के समय एक-दूसरे की मदद करने की गुहार लगाई है। उन्होंने लिखा, 'मैं सभी दोस्तों और प्रशंसकों से यह अपील करना चाहता हूं कि अगर आपको मदद चाहिए तो आप मुझे सीधे मैसेज करें। ' उन्होंने लिखा, 'अगर आप किसी ऐसे को जानते हैं, जिसे मदद की जरूरत है तो बताइए। अगर आप इस मिशन का हिस्सा बनना चाहते हैं तब भी बताइए। मदद जितने लोगों तक पहुंचाई जा सके, पहुंचाएं। ' अक्षय कुमार और उनकी पत्नी ट्विंकल खन्ना ने हाल ही में एक संस्था को एक सौ ऑक्सीजन कॉन्सन्ट्रेटर दान किए। ट्विंकल ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर कर लिखा, 'एक बहुत अच्छी खबर है कि लंदन एलीट हेल्थ की डॉ. द्रश्निका पटेल और डॉ. गोविंद बंकानी देविक फाउंडेशन के माध्यम से एक सौ बीस ऑक्सीजन कॉन्सन्ट्रेटर दान कर रहे हैं। ' उन्होंने लिखा, 'अक्षय और मैंने एक सौ ऑक्सीजन कॉन्सन्ट्रेटर की व्यवस्था की है। चलो सब अपना योगदान देते हैं। ' अजय देवगन ने भी बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन को एक करोड़ रुपये दान किए हैं। उन्होंने एनवाय फाउंडेशन के अंतर्गत यह दान किया है, जिससे बीस बेड का एमरजेंसी अस्पताल तैयार हो सके। अजय के इस नेक कदम की काफी तारीफ हो रही है। इसके अलावा अजय ने मुंबई शिवाजी पार्क के ICU में बीस कोविड उन्नीस के बेड, वेंटिलेटर, पैरा मॉनिटर्स और ऑक्सीजन सपोर्ट लगवाए हैं। आयुष्मान खुराना और उनकी पत्नी ताहिरा कश्यप ने कोरोना से प्रभावित लोगों की मदद के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री राहत कोष में योगदान दिया है। आयुष्मान ने इंस्टाग्राम पर लिखा, 'हम हरसंभव लोगों की मदद करने की कोशिश कर रहे हैं। अब जरूरत के समय महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री राहत कोष में योगदान दिया है। ' उन्होंने लिखा, 'जितना संभव हो सके, उतनी मदद करें। हम सब अपनी तरह से मदद करने के लिए तैयार हैं क्योंकि हम फिट हैं। '
लाइव हिंदी खबर :-आज आपको अपने परिवार वालो सहयोग प्राप्त हो सकता है। जिससे आपको बहुत खुशी हो सकती है। आज आपको अपने प्रेम प्रसंगों मे निराशा मुँह देखना पड़ सकता है। इसलिए आप प्रेम मे पड़ कर अपना कीमती समय बर्बाद न करे। आज आपकी एलर्जी और गर्मी के कारण आपको बहुत दिक्कत हो सकती है। आप अपने वर्तमान वातावरण मे बिल्कुल भी कोई लापरवाही न करे। आपकी कोइ छोटी सी लापरवाही आपको बहुत महंगी पड़ सकती है। आज आपके लिए शुभ रंग लाल और शुभ अंक 1 है। आज आपको किसी को उधार दिया हुआ धन आपको वापस मिल सकता है। जिससे आपको बहुत खुशी हो सकती है। आपका आज का दिन पिछले दिनों से काफी अच्छा जा सकता है। बच्चों से संबंधित कोइ बड़ी समस्या आज हल हो सकती है। जिससे आपको सुकून भरी राहत मिल सकती है। आपके किसी नजदीकी से पुराने मतभेद आपके दूर हो सकते है। क्यूंकी उनके द्वारा समाज मे आपके खिलाफ कुछ गलतफहमियाँ उत्पन्न हो सकती है। कभी-कभी आप अपने गुस्से मे आप कोइ गलत कदम उठा सकते है। इस गलत कदम से आपको बचने की बहुत ही ज्यादा जरूरत है। आप अपने गुस्से मे उठाए हुए गलत कदम से अपने लिए कुछ परेशानी का आप कारण बन सकते है। अपने इस व्यवहार को आप कंट्रोल मे रखने की बहुत जरूरत है। आपको अपने व्यापार मे एक बार फिर से उठने के लिए आपको लगातार प्रयास और लगातार मेहनत करने की जरूरत है। आज आपको आंशिक रूप से अधिक मदद मिल सकती है। लेकिन आप कुछ लोगो से विरोधा भासी प्रवृति के लोगो से आपको दूरी बना कर रखने की जरूरत हैं। नौकरी मे आप अपने लक्ष्यों को पूरा करने के लिए आपके ऊपर अपने ऑफिस के उच्च अधिकारियों और बॉस का दवाब बना रहेगा। अपने व्यापार मे विपरीत परिस्थिति मिलने के करण आपको अपने सभी परिवार वालो का सहयोग प्राप्त हो सकता है। धनु राशि , मक राशि और सिंह राशि।
लाइव हिंदी खबर :-आज आपको अपने परिवार वालो सहयोग प्राप्त हो सकता है। जिससे आपको बहुत खुशी हो सकती है। आज आपको अपने प्रेम प्रसंगों मे निराशा मुँह देखना पड़ सकता है। इसलिए आप प्रेम मे पड़ कर अपना कीमती समय बर्बाद न करे। आज आपकी एलर्जी और गर्मी के कारण आपको बहुत दिक्कत हो सकती है। आप अपने वर्तमान वातावरण मे बिल्कुल भी कोई लापरवाही न करे। आपकी कोइ छोटी सी लापरवाही आपको बहुत महंगी पड़ सकती है। आज आपके लिए शुभ रंग लाल और शुभ अंक एक है। आज आपको किसी को उधार दिया हुआ धन आपको वापस मिल सकता है। जिससे आपको बहुत खुशी हो सकती है। आपका आज का दिन पिछले दिनों से काफी अच्छा जा सकता है। बच्चों से संबंधित कोइ बड़ी समस्या आज हल हो सकती है। जिससे आपको सुकून भरी राहत मिल सकती है। आपके किसी नजदीकी से पुराने मतभेद आपके दूर हो सकते है। क्यूंकी उनके द्वारा समाज मे आपके खिलाफ कुछ गलतफहमियाँ उत्पन्न हो सकती है। कभी-कभी आप अपने गुस्से मे आप कोइ गलत कदम उठा सकते है। इस गलत कदम से आपको बचने की बहुत ही ज्यादा जरूरत है। आप अपने गुस्से मे उठाए हुए गलत कदम से अपने लिए कुछ परेशानी का आप कारण बन सकते है। अपने इस व्यवहार को आप कंट्रोल मे रखने की बहुत जरूरत है। आपको अपने व्यापार मे एक बार फिर से उठने के लिए आपको लगातार प्रयास और लगातार मेहनत करने की जरूरत है। आज आपको आंशिक रूप से अधिक मदद मिल सकती है। लेकिन आप कुछ लोगो से विरोधा भासी प्रवृति के लोगो से आपको दूरी बना कर रखने की जरूरत हैं। नौकरी मे आप अपने लक्ष्यों को पूरा करने के लिए आपके ऊपर अपने ऑफिस के उच्च अधिकारियों और बॉस का दवाब बना रहेगा। अपने व्यापार मे विपरीत परिस्थिति मिलने के करण आपको अपने सभी परिवार वालो का सहयोग प्राप्त हो सकता है। धनु राशि , मक राशि और सिंह राशि।
Asos ROG Phone 5 को अब जल्द ही लॉन्च किया जाने वाला है। इस फोन के लिए गेमर्स काफी टाइम से इंतजार कर रहे हैं। अब इस गेमिंग फोन को भी लॉन्च करने का वक्त आ गया है। एक टिप्सटर ने इस फोन की जानकारी दी है और बताया है कि मार्च में इस फोन को लॉन्च किया जा सकता है। ताइवान का इस कंपनी Asus ने अपने इस गेमिंग फोन की कैटेगरी में पहले भी कई स्मार्टफोन को लॉन्च किया है और इस कैटेगरी की पांचवी सीरीज को लॉन्च किया जाना है। टिप्सटर मुकुल शर्मा ने इस फोन के बारे में जानकारी दी है और इस फोन के कई फीचर्स और स्पेसिफिकेशंस का खुलासा भी लॉन्च से पहले किया है। उन्होंने बताया कि लॉन्च की सटीक तारीख के बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं है लेकिन इतना कंफर्म है कि इस फोन को मार्च में लॉन्च किया जाने वाला है। मीडिया में इस फोन के बारे में आई पुरानी रिपोर्ट के मुताबिक कुछ फीचर्स के बारे में हम आपको बताते हैं। इस फोन में कंपनी 6. 78 इंच की एक बढ़िया और कई फीचर्स से लैस डिस्प्ले देने वाली है। इसके अलावा इस फोन में 6000 एमएएच की एक बैटरी भी कंपनी शामिल कर सकती है, जो यूज़र्स को ज्यादा देर तक बिना रूकावट के गेम खेलने में मदद करेगी। इसके अलावा इस फोन में क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 888 प्रोसेसर दिया जाएगा, जो इस फोन को एक अच्छा और स्ट्रांग पॉवर देगा। इस प्रोसेसर के साथ इस फोन में कंपनी 16 जीबी रैम देने जा रही है। यह फोन एंड्रॉयड 11 पर बेस्ड सॉफ्टवेयर पर काम करने वाला है। इससे ही पता चलता है कि यह फोन गेमर्स के लिए कितना खास होने वाला है। Asos ROG Phone 5 एक स्पेशल गेमिंग फोन है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसमें कैमरा सेटअप खास नहीं होगा। Asos ROG Phone के सभी सीरीज के फोन में काफी शानदार कैमरा सेटअप को भी हमेशा शामिल किया गया है। लिहाजा, इसमें कोई शक नहीं है कि Asos ROG Phone 5 में भी एक बेहतरीन बैक और फ्रंट कैमरा सेटअप दिया जाएगा।
Asos ROG Phone पाँच को अब जल्द ही लॉन्च किया जाने वाला है। इस फोन के लिए गेमर्स काफी टाइम से इंतजार कर रहे हैं। अब इस गेमिंग फोन को भी लॉन्च करने का वक्त आ गया है। एक टिप्सटर ने इस फोन की जानकारी दी है और बताया है कि मार्च में इस फोन को लॉन्च किया जा सकता है। ताइवान का इस कंपनी Asus ने अपने इस गेमिंग फोन की कैटेगरी में पहले भी कई स्मार्टफोन को लॉन्च किया है और इस कैटेगरी की पांचवी सीरीज को लॉन्च किया जाना है। टिप्सटर मुकुल शर्मा ने इस फोन के बारे में जानकारी दी है और इस फोन के कई फीचर्स और स्पेसिफिकेशंस का खुलासा भी लॉन्च से पहले किया है। उन्होंने बताया कि लॉन्च की सटीक तारीख के बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं है लेकिन इतना कंफर्म है कि इस फोन को मार्च में लॉन्च किया जाने वाला है। मीडिया में इस फोन के बारे में आई पुरानी रिपोर्ट के मुताबिक कुछ फीचर्स के बारे में हम आपको बताते हैं। इस फोन में कंपनी छः. अठहत्तर इंच की एक बढ़िया और कई फीचर्स से लैस डिस्प्ले देने वाली है। इसके अलावा इस फोन में छः हज़ार एमएएच की एक बैटरी भी कंपनी शामिल कर सकती है, जो यूज़र्स को ज्यादा देर तक बिना रूकावट के गेम खेलने में मदद करेगी। इसके अलावा इस फोन में क्वालकॉम स्नैपड्रैगन आठ सौ अठासी प्रोसेसर दिया जाएगा, जो इस फोन को एक अच्छा और स्ट्रांग पॉवर देगा। इस प्रोसेसर के साथ इस फोन में कंपनी सोलह जीबी रैम देने जा रही है। यह फोन एंड्रॉयड ग्यारह पर बेस्ड सॉफ्टवेयर पर काम करने वाला है। इससे ही पता चलता है कि यह फोन गेमर्स के लिए कितना खास होने वाला है। Asos ROG Phone पाँच एक स्पेशल गेमिंग फोन है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसमें कैमरा सेटअप खास नहीं होगा। Asos ROG Phone के सभी सीरीज के फोन में काफी शानदार कैमरा सेटअप को भी हमेशा शामिल किया गया है। लिहाजा, इसमें कोई शक नहीं है कि Asos ROG Phone पाँच में भी एक बेहतरीन बैक और फ्रंट कैमरा सेटअप दिया जाएगा।
शिमला, 10 जुलाई (निस) हिमाचल प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती की लिखित परीक्षा का परिणाम पुलिस मुख्यालय ने घोषित कर दिया है। पुलिस भर्ती के लिए 3 जुलाई को 1334 पदों के लिए लिखित परीक्षा ली गई थी । पुलिस मुख्यालय ने एक सप्ताह में ही लिखित परीक्षा का परिणाम जारी कर दिया । पुलिस भर्ती की लिखित परीक्षा में 69405 अभ्यर्थी उपस्थित हुए । लिखित परीक्षा में 12336 अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए हैं। उत्तीर्ण हुए अभ्यर्थियों में 9629 पुरूष और 2707 महिलाएं शामिल हैं। कांस्टेबल भर्ती की आगामी प्रक्रिया संबंधित जिलों द्वारा पूरी की जाएगी। गौरतलब है कि बीते 3 जुलाई को आयोजित परीक्षा को लेकर आंसर को अपलोड करने की भी मांग हुई थी, लेकिन मुख्यालय ने इस मांग को कोई तवज्जो नहीं दी और लिखित परीक्षा का परिणाम जारी कर दिया। पुलिस मुख्यालय की तरफ से बताया गया है कि लिखित परीक्षा का परिणाम हिमाचल प्रदेश पुलिस की वेबसाइट पर उपलब्ध है। गौरतलब है कि बीते मार्च माह में हुई पुलिस भर्ती की लिखित परीक्षा का पेपर लीक होने की वजह से सरकार ने इसे रद्द कर दिया था। बाकायदा मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने परीक्षा को रद्द करने की घोषणा के बाद मामला जांच के लिए सीबीआई के सुपुर्द करने का ऐलान किया था। 3 जुलाई को परीक्षा आयोजित करने से पहले प्रश्नपत्र लीक मामले में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट भी दायर की। पहली चार्जशीट कांगड़ा में दायर की गई थी। इसके बाद पेपर लीक मामले में दो और चार्जशीट दायर की जा चुकी हैं।
शिमला, दस जुलाई हिमाचल प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती की लिखित परीक्षा का परिणाम पुलिस मुख्यालय ने घोषित कर दिया है। पुलिस भर्ती के लिए तीन जुलाई को एक हज़ार तीन सौ चौंतीस पदों के लिए लिखित परीक्षा ली गई थी । पुलिस मुख्यालय ने एक सप्ताह में ही लिखित परीक्षा का परिणाम जारी कर दिया । पुलिस भर्ती की लिखित परीक्षा में उनहत्तर हज़ार चार सौ पाँच अभ्यर्थी उपस्थित हुए । लिखित परीक्षा में बारह हज़ार तीन सौ छत्तीस अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए हैं। उत्तीर्ण हुए अभ्यर्थियों में नौ हज़ार छः सौ उनतीस पुरूष और दो हज़ार सात सौ सात महिलाएं शामिल हैं। कांस्टेबल भर्ती की आगामी प्रक्रिया संबंधित जिलों द्वारा पूरी की जाएगी। गौरतलब है कि बीते तीन जुलाई को आयोजित परीक्षा को लेकर आंसर को अपलोड करने की भी मांग हुई थी, लेकिन मुख्यालय ने इस मांग को कोई तवज्जो नहीं दी और लिखित परीक्षा का परिणाम जारी कर दिया। पुलिस मुख्यालय की तरफ से बताया गया है कि लिखित परीक्षा का परिणाम हिमाचल प्रदेश पुलिस की वेबसाइट पर उपलब्ध है। गौरतलब है कि बीते मार्च माह में हुई पुलिस भर्ती की लिखित परीक्षा का पेपर लीक होने की वजह से सरकार ने इसे रद्द कर दिया था। बाकायदा मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने परीक्षा को रद्द करने की घोषणा के बाद मामला जांच के लिए सीबीआई के सुपुर्द करने का ऐलान किया था। तीन जुलाई को परीक्षा आयोजित करने से पहले प्रश्नपत्र लीक मामले में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट भी दायर की। पहली चार्जशीट कांगड़ा में दायर की गई थी। इसके बाद पेपर लीक मामले में दो और चार्जशीट दायर की जा चुकी हैं।
नाटकीय सरेंडर, वैसे ही रिहाई. . . हत्याकांड में वांछित धनंजय सिंह के सामने क्यों लाचार योगी सरकार की पुलिस? लखनऊ के चर्चित अजीत सिंह हत्याकांड में आरोपी पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने जितने नाटकीय ढंग से सरेंडर किया, उतने ही नाटकीय ढंग से फरारी भी काट ली। अजीत सिंह हत्याकांड में 25 हजार रुपये के इनामी बने धनंजय सिंह को पुलिस खोजती रही और उसने वकील के भेष में प्रयागराज की एमपी-एमएलए कोर्ट में आसानी से सरेंडर कर लिया। धनंजय को पुलिस यहां से नैनी जेल ले गई तो वहां जान का खतरा बताकर धनंजय ने खुद को फतेहगढ़ जेल में ट्रांसफर करा लिया।
नाटकीय सरेंडर, वैसे ही रिहाई. . . हत्याकांड में वांछित धनंजय सिंह के सामने क्यों लाचार योगी सरकार की पुलिस? लखनऊ के चर्चित अजीत सिंह हत्याकांड में आरोपी पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने जितने नाटकीय ढंग से सरेंडर किया, उतने ही नाटकीय ढंग से फरारी भी काट ली। अजीत सिंह हत्याकांड में पच्चीस हजार रुपये के इनामी बने धनंजय सिंह को पुलिस खोजती रही और उसने वकील के भेष में प्रयागराज की एमपी-एमएलए कोर्ट में आसानी से सरेंडर कर लिया। धनंजय को पुलिस यहां से नैनी जेल ले गई तो वहां जान का खतरा बताकर धनंजय ने खुद को फतेहगढ़ जेल में ट्रांसफर करा लिया।
ऊति यूति जूति सातिहेति कीर्तयश्च ।४।४।१७।। एते निपात्यन्ते । ज्वरत्वर त्रिव्य विभवामुपधायाश्च ।६।४।२०।। एषा मुपधावकारयोरुठ् अनुनासिके क्वौ भलादौ किङति च । ऊतीति - ऊति, यूति, जूति, साति, हेति और कीर्ति इन क्तिन् प्रत्ययान्त शब्दों का निपातन किया जाता है। ( तात्पर्य यह कि इनमें होने वाले यदि किसी कार्य का विधान किसी सूत्र द्वारा नहीं किया गया है, तो उसे निपातन से सिद्ध किया जाता है।) ऊतिः- (रक्षा) अव् (रक्षा करना) धातु से क्तिन्, ज्वरत्वर सूत्र से (जिसका व्याख्यान आगे किया जायेगा) अकार तथा वकार को ऊठ आदेश, (यहाँ 'स्त्रियां क्तिन्' से यद्यपि क्तिन् प्रत्यय सिद्ध था तथापि सूत्र में ऊति के ग्रहण का फल है, क्तिन् प्रत्यय परे उदात्त स्वर होना अतः उदात्त स्वर का ही निपातन होता है) इस प्रकार 'ऊति : ' रूप बनता है । यूतिः (मिश्रण) यु (मिश्रण करना ) धातु से क्तिन्, होकर यहाँ निपातन से दीर्घ होता है। इसी प्रकार जूतिः - (वेग) जु धातु से क्तिन् प्रत्यय, निपातन से दीर्घ होकर 'जूति : ' बनता है । सातिः - ( अन्त, अवसान) षो (अन्तःकर्म) धातु से क्तिन् यहाँ 'द्यतिस्यति' इत्यादि सूत्र से इत्व प्राप्त था उसके अभाव का निपातन हुआ, तब 'आदेच' इत्यादि सूत्र से धातुगत ओकार को आकार होकर 'साति : ' रूप बना है। अथवा 'सन्' धातु से क्तिनू "जनसन" सूत्र से आत्व करने पर 'सातिः' रूप बनता है, इस दशा में स्वरार्थ निपातन माना जायेगा । हेतिः - (अस्त्र शस्त्र ) हन् धातु से क्तिन्, निपातन से नकार को इकार करने पर हकरोत्तरवर्ती अकार के साथ गुण होकर 'हेतिः' बनता है । अथवा 'हि' धातु से क्तिनू, गुण निषेध को बाधकर निपातन से गुण करके 'हेतिः' बनता है । कीर्तिः- (यश) ण्यन्त चुरादि कृ. तू ( संशब्दन, ख्याति ) धातु से, ण्यन्त होने के कारण 'ण्यासश्रन्थो युच्' सूत्र से प्राप्त युच् प्रत्यय का अभाव तथा निपातन से क्तिन्, 'उपधायाश्च' सूत्र से ऋकार को इर् 'हलि च' से दीर्घ होकर 'कीतिः' रूप बनता है । ज्वर त्वरेति-ज्वर, त्वर, स्रिव, अव, और मव धातुओं के वकार तथा तग्दत अकार को ऊठ् होता है, अनुनासिक क्वि तथा झलादि किंतु ङित् प्रत्यय परे रहने पर ।
ऊति यूति जूति सातिहेति कीर्तयश्च ।चार।चार।सत्रह।। एते निपात्यन्ते । ज्वरत्वर त्रिव्य विभवामुपधायाश्च ।छः।चार।बीस।। एषा मुपधावकारयोरुठ् अनुनासिके क्वौ भलादौ किङति च । ऊतीति - ऊति, यूति, जूति, साति, हेति और कीर्ति इन क्तिन् प्रत्ययान्त शब्दों का निपातन किया जाता है। ऊतिः- अव् धातु से क्तिन्, ज्वरत्वर सूत्र से अकार तथा वकार को ऊठ आदेश, इस प्रकार 'ऊति : ' रूप बनता है । यूतिः यु धातु से क्तिन्, होकर यहाँ निपातन से दीर्घ होता है। इसी प्रकार जूतिः - जु धातु से क्तिन् प्रत्यय, निपातन से दीर्घ होकर 'जूति : ' बनता है । सातिः - षो धातु से क्तिन् यहाँ 'द्यतिस्यति' इत्यादि सूत्र से इत्व प्राप्त था उसके अभाव का निपातन हुआ, तब 'आदेच' इत्यादि सूत्र से धातुगत ओकार को आकार होकर 'साति : ' रूप बना है। अथवा 'सन्' धातु से क्तिनू "जनसन" सूत्र से आत्व करने पर 'सातिः' रूप बनता है, इस दशा में स्वरार्थ निपातन माना जायेगा । हेतिः - हन् धातु से क्तिन्, निपातन से नकार को इकार करने पर हकरोत्तरवर्ती अकार के साथ गुण होकर 'हेतिः' बनता है । अथवा 'हि' धातु से क्तिनू, गुण निषेध को बाधकर निपातन से गुण करके 'हेतिः' बनता है । कीर्तिः- ण्यन्त चुरादि कृ. तू धातु से, ण्यन्त होने के कारण 'ण्यासश्रन्थो युच्' सूत्र से प्राप्त युच् प्रत्यय का अभाव तथा निपातन से क्तिन्, 'उपधायाश्च' सूत्र से ऋकार को इर् 'हलि च' से दीर्घ होकर 'कीतिः' रूप बनता है । ज्वर त्वरेति-ज्वर, त्वर, स्रिव, अव, और मव धातुओं के वकार तथा तग्दत अकार को ऊठ् होता है, अनुनासिक क्वि तथा झलादि किंतु ङित् प्रत्यय परे रहने पर ।
नई दिल्लीः रूस में फंसे यात्रियों को लेने एयर इंडिया एयरलाइन आज गुरुवार (8 जून) को एक दूसरे विमान के जरिए सैन फ्रैंसिस्को रवाना हो गया है। बताया जा रहा है कि तकनीकी खराबी के कारण एयर इंडिया एयरलाइन की दिल्ली-सैन फ्रैंसिस्को फ्लाइट को मंगलवार (6 जून) को रूस के मगदान एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी थी। वहीं इसके बाद से ही लगभग 216 यात्री और चालक दल के 16 सदस्य रूस में ही फंसे थे। इतना ही नहीं एयर इंडिया ने इन्हें अपने गंतव्य तक पहुंचाने के लिए कल बुधवार (7 जून) को ही एक फेरी फ्लाइट रवाना कर दी थी। एयर इंडिया एयरलाइन ने आज गुरुवार को ट्वीट के जरिए ये बताया है कि एयर इंडिया विमान एआई173डी मगदान से सैन फ्रैंसिस्कों के लिए 8 जून को स्थानीय समय के मुताबिक सुबह 10:27 बजे रवाना हो चुका है। इसी रात 12:15 तक सैन फ्रैंसिस्को हवाई अड्डे पर पहुंचने की संभावना है। एयर इंडिया के मुताबिक यात्रियों को जल्द से जल्द रवाना करने के लिए एयरलाइन ने सैन फ्रैंसिस्को एयरपोर्ट पर काफी सहायता प्रदान की जाएगी ताकि यहां पहुंचने पर सभी पर्यटकों के क्लियरेंस से संबंधित औपचारिकताओं को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। इस ट्वीट के जरिए एयर इंडिया ने कहा कि सैन फ्रैंसिस्को एयरपोर्ट पर मौजूद टीम यात्रियों की हर तरह से सहायता के लिए तैयार है। वह न केवल चिकित्सीय सेवा के लिए बल्कि उनके परिवहन की आवश्यकताओं और इसके बाद हो सकने वाली सहायता के लिए भी तैयार है। दरअसल इससे पहले मंगलवार (6 जून) को दिल्ली-सैन फ्रांसिस्को उड़ान संख्या एआई-173 216 को मगादान एयरपोर्ट की तरफ मोड़ दिया गया था, क्योंकि बीच हवा में इसके एक इंजन में खराबी आ गई थी। इसके बाद रूस के मगादान एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी थी।
नई दिल्लीः रूस में फंसे यात्रियों को लेने एयर इंडिया एयरलाइन आज गुरुवार को एक दूसरे विमान के जरिए सैन फ्रैंसिस्को रवाना हो गया है। बताया जा रहा है कि तकनीकी खराबी के कारण एयर इंडिया एयरलाइन की दिल्ली-सैन फ्रैंसिस्को फ्लाइट को मंगलवार को रूस के मगदान एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी थी। वहीं इसके बाद से ही लगभग दो सौ सोलह यात्री और चालक दल के सोलह सदस्य रूस में ही फंसे थे। इतना ही नहीं एयर इंडिया ने इन्हें अपने गंतव्य तक पहुंचाने के लिए कल बुधवार को ही एक फेरी फ्लाइट रवाना कर दी थी। एयर इंडिया एयरलाइन ने आज गुरुवार को ट्वीट के जरिए ये बताया है कि एयर इंडिया विमान एआईएक सौ तिहत्तरडी मगदान से सैन फ्रैंसिस्कों के लिए आठ जून को स्थानीय समय के मुताबिक सुबह दस:सत्ताईस बजे रवाना हो चुका है। इसी रात बारह:पंद्रह तक सैन फ्रैंसिस्को हवाई अड्डे पर पहुंचने की संभावना है। एयर इंडिया के मुताबिक यात्रियों को जल्द से जल्द रवाना करने के लिए एयरलाइन ने सैन फ्रैंसिस्को एयरपोर्ट पर काफी सहायता प्रदान की जाएगी ताकि यहां पहुंचने पर सभी पर्यटकों के क्लियरेंस से संबंधित औपचारिकताओं को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। इस ट्वीट के जरिए एयर इंडिया ने कहा कि सैन फ्रैंसिस्को एयरपोर्ट पर मौजूद टीम यात्रियों की हर तरह से सहायता के लिए तैयार है। वह न केवल चिकित्सीय सेवा के लिए बल्कि उनके परिवहन की आवश्यकताओं और इसके बाद हो सकने वाली सहायता के लिए भी तैयार है। दरअसल इससे पहले मंगलवार को दिल्ली-सैन फ्रांसिस्को उड़ान संख्या एआई-एक सौ तिहत्तर दो सौ सोलह को मगादान एयरपोर्ट की तरफ मोड़ दिया गया था, क्योंकि बीच हवा में इसके एक इंजन में खराबी आ गई थी। इसके बाद रूस के मगादान एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी थी।
अपने इन नवीन ब्रह्मचारियोको देखती रहगयी। उनके करोने कब उनकी झोली भर दी, उन्हें पता नही । वे तो मुग्धनेत्र इस शोभाको देखरही हैं । माताओको, उग्रसेनको, उग्रसेनको, नागरिकोको, नगरकी वृद्धाओको-सभीको तो भिक्षा देनी है । सबने कितने समयसे कितनी लालसासे क्या-क्या संजोया है इन झोलियोंके लिए । किसीको निराश कैसे किया जासकता है। बहुत छोटी हैं झोलियाँ, किन्तु अनन्तकी झोलियाँ हैं वे । सवकी श्रद्धा सार्थक-सफल करनी है । लौटकर महर्षि गर्गाचार्य के सम्मुख उनके इन शिष्योंने अपनी झोलियाँ धर दी । महालक्ष्मी जिसके इङ्गितकी सदा प्रतीक्षा करती हैं, उसने आज भिक्षा माँगी है । वह दोनो हाथ जोड़े, मस्तक झुकाये प्रार्थना कररहे हैं - ' गुरुदेव ! इस तुच्छ मिक्षाको स्वीकार करनेकी कृपा करे ।' महषिने हाथ बढ़ाकर झोलियाँ उठायी और रख ली । इनमे क्या है ~ देखनेकी आवश्यकता ? क्या नहीं है इनमे ? महर्षिके लिए रामकृष्णकी श्रद्धासे बडा क्या होगा । उन वीतरागके लिए स्वर्ण या रत्नोका कहाँ महत्व है ; किन्तु इन झोलियोका एक कण पानेको सनकादि भी समुत्सुक वन सकते है । महपिने तो आज इन शिष्यो को पाया है - इन पद्मराग पीत और नीलमणिको पाकर कुछ पाना रह भी जाता है । अबसे तुम लोग भूमि-शयन करोगे सौम्य । केवल मृगचर्मका आस्तरण रखोगे । दण्ड मदा साथ रखना । मन लगाकर गुरुकुल मे अध्यन करना । गुरुकी आज्ञाका सावधानीसे पालन करना । उनके लिए नित्य पवित्र समिधाये लाना। प्रमादहीन होकर नित्य समयपर अग्निदेवकी आराधना करना ।' हाथ जोडे सम्मुख खडे अपने शिष्योको महपिने आचारका उपदेश किया। छोटे-बडे जाने कितने नियम वतलाये । सव नियम वही तो समझावेगे । उपनयन सम्पन्न हुआ। महर्षिने उन्हे मङ्गल आशीर्वाद दिया । ब्राह्मण दान-मानसे सन्तुष्ट हुए और उनकी वाणी आशीर्वाद देते थकती नही । अव वसुदेवजी सम्मुख आगये हैं महर्षिके और अञ्जलि बाँधकर प्रार्थना करने लगे हैं - ' कसने मेरी गाये, मेरा धन अधर्मपूर्वक हरण कर लिया था । मैं कारागारमें विवश वन्दी था । पुत्रोंके जन्मके समय इनके षष्ठी, नामकरण, चूडाकरणादिका समय अनुमान करके मै केवल मानसिक
अपने इन नवीन ब्रह्मचारियोको देखती रहगयी। उनके करोने कब उनकी झोली भर दी, उन्हें पता नही । वे तो मुग्धनेत्र इस शोभाको देखरही हैं । माताओको, उग्रसेनको, उग्रसेनको, नागरिकोको, नगरकी वृद्धाओको-सभीको तो भिक्षा देनी है । सबने कितने समयसे कितनी लालसासे क्या-क्या संजोया है इन झोलियोंके लिए । किसीको निराश कैसे किया जासकता है। बहुत छोटी हैं झोलियाँ, किन्तु अनन्तकी झोलियाँ हैं वे । सवकी श्रद्धा सार्थक-सफल करनी है । लौटकर महर्षि गर्गाचार्य के सम्मुख उनके इन शिष्योंने अपनी झोलियाँ धर दी । महालक्ष्मी जिसके इङ्गितकी सदा प्रतीक्षा करती हैं, उसने आज भिक्षा माँगी है । वह दोनो हाथ जोड़े, मस्तक झुकाये प्रार्थना कररहे हैं - ' गुरुदेव ! इस तुच्छ मिक्षाको स्वीकार करनेकी कृपा करे ।' महषिने हाथ बढ़ाकर झोलियाँ उठायी और रख ली । इनमे क्या है ~ देखनेकी आवश्यकता ? क्या नहीं है इनमे ? महर्षिके लिए रामकृष्णकी श्रद्धासे बडा क्या होगा । उन वीतरागके लिए स्वर्ण या रत्नोका कहाँ महत्व है ; किन्तु इन झोलियोका एक कण पानेको सनकादि भी समुत्सुक वन सकते है । महपिने तो आज इन शिष्यो को पाया है - इन पद्मराग पीत और नीलमणिको पाकर कुछ पाना रह भी जाता है । अबसे तुम लोग भूमि-शयन करोगे सौम्य । केवल मृगचर्मका आस्तरण रखोगे । दण्ड मदा साथ रखना । मन लगाकर गुरुकुल मे अध्यन करना । गुरुकी आज्ञाका सावधानीसे पालन करना । उनके लिए नित्य पवित्र समिधाये लाना। प्रमादहीन होकर नित्य समयपर अग्निदेवकी आराधना करना ।' हाथ जोडे सम्मुख खडे अपने शिष्योको महपिने आचारका उपदेश किया। छोटे-बडे जाने कितने नियम वतलाये । सव नियम वही तो समझावेगे । उपनयन सम्पन्न हुआ। महर्षिने उन्हे मङ्गल आशीर्वाद दिया । ब्राह्मण दान-मानसे सन्तुष्ट हुए और उनकी वाणी आशीर्वाद देते थकती नही । अव वसुदेवजी सम्मुख आगये हैं महर्षिके और अञ्जलि बाँधकर प्रार्थना करने लगे हैं - ' कसने मेरी गाये, मेरा धन अधर्मपूर्वक हरण कर लिया था । मैं कारागारमें विवश वन्दी था । पुत्रोंके जन्मके समय इनके षष्ठी, नामकरण, चूडाकरणादिका समय अनुमान करके मै केवल मानसिक
मुंबई, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। टीवी शो 'कुल्फी कुमार बाजेवाला' के आगामी दृश्य में एक सिख लड़के के रूप में नजर आने जा रहीं बाल कलाकार आकृति शर्मा का कहना है कि लड़के के रूप में किरदार को निभाने की तैयारी के गुर वह अपने भाई से सीख रही हैं। दृश्य में कुल्फी (आकृति), जिसने अपनी मां निम्रत (श्रुति शर्मा) को खो दिया है, वह अपने पिता सिकंदर सिंह गिल (मोहित मलिक) की खोज में मुंबई के लिए रवाना होगी। अपने पीछे पड़े कुछ लोगों को चकमा देने के लिए वह सिख लड़के का रूप धर लेगी। आकृति ने एक बयान में आईएएनएस से कहा, शो में 'सरदार' के रूप में मुझे अपना नया लुक वास्तव में बेहद पसंद आया। उन्होंने कहा, मैं अपने बड़े भाई से लड़के का व्यवहार करने, लड़के की तरह दिखने के गुर सीख रही हूं। सेट पर भी सबने मेरा लुक पसंद किया और इसे बहुत प्यारा कहा। 'कुल्फी कुमार बाजेवाला' स्टार प्लस चैनल पर प्रसारित होता है।
मुंबई, अट्ठारह अप्रैल । टीवी शो 'कुल्फी कुमार बाजेवाला' के आगामी दृश्य में एक सिख लड़के के रूप में नजर आने जा रहीं बाल कलाकार आकृति शर्मा का कहना है कि लड़के के रूप में किरदार को निभाने की तैयारी के गुर वह अपने भाई से सीख रही हैं। दृश्य में कुल्फी , जिसने अपनी मां निम्रत को खो दिया है, वह अपने पिता सिकंदर सिंह गिल की खोज में मुंबई के लिए रवाना होगी। अपने पीछे पड़े कुछ लोगों को चकमा देने के लिए वह सिख लड़के का रूप धर लेगी। आकृति ने एक बयान में आईएएनएस से कहा, शो में 'सरदार' के रूप में मुझे अपना नया लुक वास्तव में बेहद पसंद आया। उन्होंने कहा, मैं अपने बड़े भाई से लड़के का व्यवहार करने, लड़के की तरह दिखने के गुर सीख रही हूं। सेट पर भी सबने मेरा लुक पसंद किया और इसे बहुत प्यारा कहा। 'कुल्फी कुमार बाजेवाला' स्टार प्लस चैनल पर प्रसारित होता है।
कोरोना एक बार फिर लौट रहा है. चीन में तो कोरोना की अब तक की सबसे बड़ी लहर आई है. वहां संक्रमण की रफ्तार तेज हो चली है. सिर्फ चीन ही नहीं, बल्कि अमेरिका, जापान, ब्राजील, दक्षिण कोरिया जैसे देशों में भी संक्रमण बढ़ रहा है. वहीं, महामारी विशेषज्ञ एरिक फिगल डिंग ने दावा किया है कि अगले 90 दिनों में चीन की 60 फीसदी और दुनिया की 10 फीसदी आबादी कोरोना संक्रमित हो सकती है. उन्होंने आशंका जताई है कि इसकी वजह से लाखों मौतें हो सकतीं हैं. इससे पहले अमेरिका के भी एक हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि अगले साल चीन में कोरोना से 10 लाख लोग मारे जा सकते हैं. इस बीच भारत में भी कोरोना की नई लहर आने का खतरा बढ़ गया है. मंगलवार को केंद्र सरकार ने सभी राज्यों से कहा है कि सभी पॉजिटिव मामलों की जीनोम सिक्वेंसिंग करें ताकि वैरिएंट को ट्रैक किया जा सके. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया भी आज रिव्यू मीटिंग करने वाले हैं. भारत में कितने मामले? चीन समेत दुनिया के कई देशों में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. अब भी हर हफ्ते दुनिया में लगभग 35 लाख नए मामले सामने आ रहे हैं. लेकिन भारत में कोरोना के मामले तेजी से घट रहे हैं. भारत में जुलाई के बाद से ही कोरोना के मामलों में गिरावट आने लगी है. हफ्तेभर में देश में कोविड के 1100 से भी कम मामले सामने आए हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 14 से 20 दिसंबर के बीच देश में कोरोना के 1,083 नए मामले सामने आए हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, मंगलवार को देश में 131 नए मामले सामने आए हैं. इस समय देश में कुल 3,408 एक्टिव केसेस हैं. हालांकि, इसकी एक वजह टेस्टिंग में कमी भी हो सकती है. इस समय देश में टेस्टिंग बहुत कम हो गई है. इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के मुताबिक, मंगलवार को देश में 1. 15 लाख जांच हुई. जबकि, कोरोना के मामले जब बढ़ते हैं तो एक दिन में 20-20 लाख जांचें होती थीं. ओमिक्रॉन की वजह से आई तीसरी लहर का पीक इस साल 21 जनवरी को आया था. उस दिन देश में कोरोना के 3. 47 लाख से ज्यादा मामले सामने आए थे. 21 जनवरी को देश में 19. 60 लाख से ज्यादा जांच हुई थी. वहीं, दूसरी लहर का पीक 6 मई 2021 को आया था. तब एक दिन में 4. 14 लाख से ज्यादा मामले सामने आए थे और उस दिन 18. 26 लाख से ज्यादा टेस्ट हुए थे. यानी, पीक वाले दिन भारत में जितनी टेस्टिंग हुई थी, अब उसकी तुलना में 95 फीसदी कम टेस्ट हो रहे हैं. कितना मजबूत है भारत का हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर? चीन में अभी कोरोना से ठीक वैसे ही हालात हैं, जैसे दूसरी लहर के समय भारत में हुए थे. वहां पर अस्पतालों में जगह नहीं है. लोगों को अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है. स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है. चीन में कोविड की नई लहर से हालात इस कदर बिगड़ रहे हैं कि उससे उसकी स्वास्थ्य व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है. और ये सब तब है जब उसका हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर भारत से कहीं ज्यादा मजबूत है. वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, चीन में हर 10 हजार लोगों पर 22 से ज्यादा डॉक्टर हैं, जबकि भारत में इतनी आबादी पर 12 डॉक्टर भी नहीं हैं. चीन स्वास्थ्य पर अपनी जीडीपी का 7 फीसदी से भी ज्यादा खर्च करता है, लेकिन भारत 2 फीसदी के आसपास ही. ऐसे में अगर कोरोना की नई लहर आती है तो उससे निपटने के लिए भारत कितना तैयार है? सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जून 2022 तक देशभर में 13. 08 लाख से ज्यादा एलोपैथिक डॉक्टर हैं. इनके अलावा 5. 64 लाख आयुष डॉक्टर्स भी हैं. इस हिसाब से भारत में हर 834 लोगों पर एक डॉक्टर है. ये अच्छा भी है. क्योंकि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हर एक हजार आबादी पर एक डॉक्टर होना चाहिए. वहीं, पिछले साल सरकार ने संसद में जो आंकड़े दिए थे, उसके मुताबिक दिसंबर 2021 तक देशभर में एक करोड़ से ज्यादा हेल्थकेयर वर्कर्स थे. हेल्थकेयर वर्कर्स में डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल स्टाफ शामिल हैं.
कोरोना एक बार फिर लौट रहा है. चीन में तो कोरोना की अब तक की सबसे बड़ी लहर आई है. वहां संक्रमण की रफ्तार तेज हो चली है. सिर्फ चीन ही नहीं, बल्कि अमेरिका, जापान, ब्राजील, दक्षिण कोरिया जैसे देशों में भी संक्रमण बढ़ रहा है. वहीं, महामारी विशेषज्ञ एरिक फिगल डिंग ने दावा किया है कि अगले नब्बे दिनों में चीन की साठ फीसदी और दुनिया की दस फीसदी आबादी कोरोना संक्रमित हो सकती है. उन्होंने आशंका जताई है कि इसकी वजह से लाखों मौतें हो सकतीं हैं. इससे पहले अमेरिका के भी एक हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि अगले साल चीन में कोरोना से दस लाख लोग मारे जा सकते हैं. इस बीच भारत में भी कोरोना की नई लहर आने का खतरा बढ़ गया है. मंगलवार को केंद्र सरकार ने सभी राज्यों से कहा है कि सभी पॉजिटिव मामलों की जीनोम सिक्वेंसिंग करें ताकि वैरिएंट को ट्रैक किया जा सके. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया भी आज रिव्यू मीटिंग करने वाले हैं. भारत में कितने मामले? चीन समेत दुनिया के कई देशों में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. अब भी हर हफ्ते दुनिया में लगभग पैंतीस लाख नए मामले सामने आ रहे हैं. लेकिन भारत में कोरोना के मामले तेजी से घट रहे हैं. भारत में जुलाई के बाद से ही कोरोना के मामलों में गिरावट आने लगी है. हफ्तेभर में देश में कोविड के एक हज़ार एक सौ से भी कम मामले सामने आए हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, चौदह से बीस दिसंबर के बीच देश में कोरोना के एक,तिरासी नए मामले सामने आए हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, मंगलवार को देश में एक सौ इकतीस नए मामले सामने आए हैं. इस समय देश में कुल तीन,चार सौ आठ एक्टिव केसेस हैं. हालांकि, इसकी एक वजह टेस्टिंग में कमी भी हो सकती है. इस समय देश में टेस्टिंग बहुत कम हो गई है. इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के मुताबिक, मंगलवार को देश में एक. पंद्रह लाख जांच हुई. जबकि, कोरोना के मामले जब बढ़ते हैं तो एक दिन में बीस-बीस लाख जांचें होती थीं. ओमिक्रॉन की वजह से आई तीसरी लहर का पीक इस साल इक्कीस जनवरी को आया था. उस दिन देश में कोरोना के तीन. सैंतालीस लाख से ज्यादा मामले सामने आए थे. इक्कीस जनवरी को देश में उन्नीस. साठ लाख से ज्यादा जांच हुई थी. वहीं, दूसरी लहर का पीक छः मई दो हज़ार इक्कीस को आया था. तब एक दिन में चार. चौदह लाख से ज्यादा मामले सामने आए थे और उस दिन अट्ठारह. छब्बीस लाख से ज्यादा टेस्ट हुए थे. यानी, पीक वाले दिन भारत में जितनी टेस्टिंग हुई थी, अब उसकी तुलना में पचानवे फीसदी कम टेस्ट हो रहे हैं. कितना मजबूत है भारत का हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर? चीन में अभी कोरोना से ठीक वैसे ही हालात हैं, जैसे दूसरी लहर के समय भारत में हुए थे. वहां पर अस्पतालों में जगह नहीं है. लोगों को अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है. स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है. चीन में कोविड की नई लहर से हालात इस कदर बिगड़ रहे हैं कि उससे उसकी स्वास्थ्य व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है. और ये सब तब है जब उसका हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर भारत से कहीं ज्यादा मजबूत है. वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, चीन में हर दस हजार लोगों पर बाईस से ज्यादा डॉक्टर हैं, जबकि भारत में इतनी आबादी पर बारह डॉक्टर भी नहीं हैं. चीन स्वास्थ्य पर अपनी जीडीपी का सात फीसदी से भी ज्यादा खर्च करता है, लेकिन भारत दो फीसदी के आसपास ही. ऐसे में अगर कोरोना की नई लहर आती है तो उससे निपटने के लिए भारत कितना तैयार है? सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जून दो हज़ार बाईस तक देशभर में तेरह. आठ लाख से ज्यादा एलोपैथिक डॉक्टर हैं. इनके अलावा पाँच. चौंसठ लाख आयुष डॉक्टर्स भी हैं. इस हिसाब से भारत में हर आठ सौ चौंतीस लोगों पर एक डॉक्टर है. ये अच्छा भी है. क्योंकि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हर एक हजार आबादी पर एक डॉक्टर होना चाहिए. वहीं, पिछले साल सरकार ने संसद में जो आंकड़े दिए थे, उसके मुताबिक दिसंबर दो हज़ार इक्कीस तक देशभर में एक करोड़ से ज्यादा हेल्थकेयर वर्कर्स थे. हेल्थकेयर वर्कर्स में डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल स्टाफ शामिल हैं.
कन्नौज जिले में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर झपकी आ जाने से बाइक अनियंत्रित होकर डिवाइडर से जा टकरा गई। घटना में बाइक सवार एयर मैन की मौत हो गई। मृतक के पास मिले अभिलेखों से उसकी शिनाख्त कर विभागीय अधिकारियों और परिजनों को सूचना दी गई। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
कन्नौज जिले में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर झपकी आ जाने से बाइक अनियंत्रित होकर डिवाइडर से जा टकरा गई। घटना में बाइक सवार एयर मैन की मौत हो गई। मृतक के पास मिले अभिलेखों से उसकी शिनाख्त कर विभागीय अधिकारियों और परिजनों को सूचना दी गई। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
एयर इंटेलिजेंस यूनिट (एआईयू) के अधिकारियों ने 27 अगस्त को कोचीन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक शख्स के पास 1705 ग्राम से अधिक का सोना बरामद किया। शख्स का नाम आनंदवल्ली विजयकुमार है और वह कुवैत से आ रहा था। जब्त किए गए सोने की कीमत 90 लाख रुपये है। स्टोरी में आगे पढ़ेंः शख्स महिला यात्री के प्राइवेट पार्ट के अंदर कैप्सूल के आकार के 4 पैकेटों में सोना आयात करने की कोशिश कर रहा था। इस मामले में कस्टम की टीम आगे की जांच कर रही है। वहीं सोना जब्त करने का एक और मामला आंध्र प्रदेश से सामने आया है। जहां जब्त किए गए माल की कीमत 6.4 करोड़ रुपये आंकी गई है। मालूम हो कि यह मामला आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा का है। जहां एक व्यक्ति के पास से 6.4 करोड़ रुपये मूल्य का सोना जब्त किया गया। इसकी जानकारी रविववार को सीमा शुल्क विभाग ने दी। विभाग की तरफ से बताया गया कि यह सोना दुबई और श्रीलंका से तस्करी करके भारत लाया गया था। मिली जानकारी के मुताबिक सीमा शुल्क के अधिकारियों ने शुक्रवार, 25 अगस्त को बोल्लापल्ली टोल प्लाजा पर एक संदिग्ध कार को जांच के लिए रोका। जिसमें से आरोपी के पास से 4.3 किलोग्राम वजन की सोने की ईटें जब्त कीं। जिसके बाद उसे जब्त कर लिया गया। प्रधान आयुक्त आर. श्रीराम ने शनिवार रात एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि ऐसा मालूम पड़ता है कि सोने पर विदेशी चिह्नों को जानबूझकर मिटा दिया गया था जिससे पता न चले कि यह तस्करी के जरिए लाया गया है। उन्होंने बताया कि इसके बाद आरोपी के परिसर पर तलाशी अभियान चलाया गया जिसमें 6.8 किलोग्राम सोना बरामद हुआ। वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आरोपी को सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया । उन्होंने बताया कि विशाखापत्तनम की एक अदालत के विशेष न्यायाधीश ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
एयर इंटेलिजेंस यूनिट के अधिकारियों ने सत्ताईस अगस्त को कोचीन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक शख्स के पास एक हज़ार सात सौ पाँच ग्राम से अधिक का सोना बरामद किया। शख्स का नाम आनंदवल्ली विजयकुमार है और वह कुवैत से आ रहा था। जब्त किए गए सोने की कीमत नब्बे लाख रुपये है। स्टोरी में आगे पढ़ेंः शख्स महिला यात्री के प्राइवेट पार्ट के अंदर कैप्सूल के आकार के चार पैकेटों में सोना आयात करने की कोशिश कर रहा था। इस मामले में कस्टम की टीम आगे की जांच कर रही है। वहीं सोना जब्त करने का एक और मामला आंध्र प्रदेश से सामने आया है। जहां जब्त किए गए माल की कीमत छः.चार करोड़ रुपये आंकी गई है। मालूम हो कि यह मामला आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा का है। जहां एक व्यक्ति के पास से छः.चार करोड़ रुपये मूल्य का सोना जब्त किया गया। इसकी जानकारी रविववार को सीमा शुल्क विभाग ने दी। विभाग की तरफ से बताया गया कि यह सोना दुबई और श्रीलंका से तस्करी करके भारत लाया गया था। मिली जानकारी के मुताबिक सीमा शुल्क के अधिकारियों ने शुक्रवार, पच्चीस अगस्त को बोल्लापल्ली टोल प्लाजा पर एक संदिग्ध कार को जांच के लिए रोका। जिसमें से आरोपी के पास से चार दशमलव तीन किलोग्रामग्राम वजन की सोने की ईटें जब्त कीं। जिसके बाद उसे जब्त कर लिया गया। प्रधान आयुक्त आर. श्रीराम ने शनिवार रात एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि ऐसा मालूम पड़ता है कि सोने पर विदेशी चिह्नों को जानबूझकर मिटा दिया गया था जिससे पता न चले कि यह तस्करी के जरिए लाया गया है। उन्होंने बताया कि इसके बाद आरोपी के परिसर पर तलाशी अभियान चलाया गया जिसमें छः दशमलव आठ किलोग्रामग्राम सोना बरामद हुआ। वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आरोपी को सीमा शुल्क अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ बासठ के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया । उन्होंने बताया कि विशाखापत्तनम की एक अदालत के विशेष न्यायाधीश ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
बिहार विधानमंडल (Bihar Vidhan Sabha) के मानसून सत्र का आज अंतिम दिन है। आज विधानसभा की कार्यवाही जैसे ही शुरू हुई, बीजेपी सदस्यों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। बीजेपी विधायक पटना में गुरुवार को पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में नारेबाजी करने लगे। इसके चलते विधानसभा में जोरदार हंगामा हुआ इस दौरान बीजेपी विधायक संजय सिंह (Sanjay Singh) मेज पर चढ़ गए। जिसके बाद संजय सिंह को मार्शल आउट (Marshal out) करने का आदेश दिया। इस दौरान उनके सिर पर चोट लग गई।
बिहार विधानमंडल के मानसून सत्र का आज अंतिम दिन है। आज विधानसभा की कार्यवाही जैसे ही शुरू हुई, बीजेपी सदस्यों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। बीजेपी विधायक पटना में गुरुवार को पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में नारेबाजी करने लगे। इसके चलते विधानसभा में जोरदार हंगामा हुआ इस दौरान बीजेपी विधायक संजय सिंह मेज पर चढ़ गए। जिसके बाद संजय सिंह को मार्शल आउट करने का आदेश दिया। इस दौरान उनके सिर पर चोट लग गई।
मध्य प्रदेश पुलिस ने व्यापमं घोटाले के व्हिसलब्लोअर डॉ. आनंद राय को मुख्यमंत्री सचिवालय में पदस्थ एक अधिकारी द्वारा दी गई शिकायत के सिलसिले में शुक्रवार तड़के दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया गया है। मध्य प्रदेश पुलिस ने व्यापमं घोटाले (Vyapam Scam) के व्हिसलब्लोअर डॉ. आनंद राय को मुख्यमंत्री सचिवालय में पदस्थ एक अधिकारी द्वारा दी गई शिकायत के सिलसिले में शुक्रवार तड़के दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया गया । एक अधिकारी ने इस बारे में जानकारी दी। मुख्यमंत्री सचिवालय के उप सचिव लक्ष्मण सिंह मरकाम ने 25 मार्च को आयोजित मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी)-2022 का एक प्रश्नपत्र कथित रूप से लीक होने के विवाद में उनका नाम घसीटने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए आनंद राय और मध्य प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता के. के. मिश्रा के खिलाफ पिछले महीने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। उक्त परीक्षा मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा आयोजित की गई थी, जिसे पहले व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) के रूप में जाना जाता था। लीक हुए प्रश्न-सह-उत्तरपुस्तिका का एक कथित स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें किसी लक्ष्मण सिंह का नाम लिखा हुआ देखा जा सकता था। भोपाल पुलिस की क्राइम ब्रांच के सहायक पुलिस आयुक्त शिवपाल सिंह कुशवाहा ने को बताया कि राय को गुरुवार आधी रात के तुरंत बाद दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने बताया कि राय को भोपाल लाया जा रहा है। आनंद राय के करीबी सूत्रों ने बताया कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राय द्वारा उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने का अनुरोध करने वाली याचिका गुरुवार को खारिज कर दी। राय अदालत के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के उद्देश्य से दिल्ली गए थे। अपनी शिकायत में मरकाम ने राय और मिश्रा पर उनकी (मरकाम) छवि खराब करने का आरोप लगाया है। मध्य प्रदेश के विभिन्न विभागों में भर्तियों और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए होने वाली परीक्षाओं में धांधली को लेकर व्यापमं सुर्खियों में रहा है। व्यापमं में घोटाला 2011 में सामने आया था। सीबीआई ने 2015 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस भर्ती और प्रवेश घोटाले की जांच अपने हाथ में ले ली थी।
मध्य प्रदेश पुलिस ने व्यापमं घोटाले के व्हिसलब्लोअर डॉ. आनंद राय को मुख्यमंत्री सचिवालय में पदस्थ एक अधिकारी द्वारा दी गई शिकायत के सिलसिले में शुक्रवार तड़के दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया गया है। मध्य प्रदेश पुलिस ने व्यापमं घोटाले के व्हिसलब्लोअर डॉ. आनंद राय को मुख्यमंत्री सचिवालय में पदस्थ एक अधिकारी द्वारा दी गई शिकायत के सिलसिले में शुक्रवार तड़के दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया गया । एक अधिकारी ने इस बारे में जानकारी दी। मुख्यमंत्री सचिवालय के उप सचिव लक्ष्मण सिंह मरकाम ने पच्चीस मार्च को आयोजित मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा -दो हज़ार बाईस का एक प्रश्नपत्र कथित रूप से लीक होने के विवाद में उनका नाम घसीटने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए आनंद राय और मध्य प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता के. के. मिश्रा के खिलाफ पिछले महीने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। उक्त परीक्षा मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा आयोजित की गई थी, जिसे पहले व्यावसायिक परीक्षा मंडल के रूप में जाना जाता था। लीक हुए प्रश्न-सह-उत्तरपुस्तिका का एक कथित स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें किसी लक्ष्मण सिंह का नाम लिखा हुआ देखा जा सकता था। भोपाल पुलिस की क्राइम ब्रांच के सहायक पुलिस आयुक्त शिवपाल सिंह कुशवाहा ने को बताया कि राय को गुरुवार आधी रात के तुरंत बाद दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने बताया कि राय को भोपाल लाया जा रहा है। आनंद राय के करीबी सूत्रों ने बताया कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राय द्वारा उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने का अनुरोध करने वाली याचिका गुरुवार को खारिज कर दी। राय अदालत के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के उद्देश्य से दिल्ली गए थे। अपनी शिकायत में मरकाम ने राय और मिश्रा पर उनकी छवि खराब करने का आरोप लगाया है। मध्य प्रदेश के विभिन्न विभागों में भर्तियों और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए होने वाली परीक्षाओं में धांधली को लेकर व्यापमं सुर्खियों में रहा है। व्यापमं में घोटाला दो हज़ार ग्यारह में सामने आया था। सीबीआई ने दो हज़ार पंद्रह में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस भर्ती और प्रवेश घोटाले की जांच अपने हाथ में ले ली थी।
Amrita Rao: अमृता अपने पति और आरजे अनमोल के साथ जिंदगी बिता रही हैं। किसी को अंदाजा भी नहीं है ऊपर से खुश दिखने वाली अमृता बीते कितने सालों के संघर्ष से जूझ रही थी। एक्ट्रेस ने अपनी निजी जिंदगी को लेकर अब चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने बताया है कि कैसे वो 4 सालों तक बच्चे के लिए तड़पी हैं। WazirX: क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग की सुविधा देने वाली स्टार्टअप कंपनी WazirX के को-फाउंडर्स निश्चल शेट्टी और सिद्धार्थ मेनन अब भारत को छोड़ दुबई शिफ्ट हो गए हैं। हालांकि कंपनी के मुंबई और बेंगलुरू ऑफिस अभी बने हुए हैं और चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर और एक अन्य को फाउंडर समीर म्हात्रे भी देश में ही हैं और यहीं से काम कर रहे हैं, जबकि निश्चल शेट्टी और सिद्धार्थ मेनन के अपने परिवार के साथ दुबई शिफ्ट होने खबर मंगलवार को सामने आई। How to Apply for Shadi Shagun Yojana: राशन योजना, रोजगार योजना जैसी अन्य योजनाओं के अलावा केंद्र सरकार द्वारा देश की बेटियों के लिए भी एक खास योजना चलाई जाती है जिसका नाम है प्रधानमंत्री शादी शगुन योजना। इस योजना को देश के अल्पसंख्यक समाज की लड़कियों में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। इसमें आर्थिक लाभ दिया जाता है, ताकि लड़कियों को किसी तरह की कोई दिक्कत न हो। तो चलिए आपको इस प्रधानमंत्री शादी शगुन योजना के बारे में विस्तार से बताते हैं, ताकि अगर आप एक लड़की हैं तो आप भी इस योजना से जुड़ पाएं। UP: समाजवादी पार्टी को छोड़ भारतीय जनता पार्टी का दामन थामने वाली मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव जब से पार्टी में शामिल हुई है उनके तल्ख तेवर बने हुए हैं। कई मौकों पर अपर्णा यादव, सपा प्रमुख अखिलेश पर निशाना साध चुकी हैं तो वहीं अब एक बार फिर अपर्णा यादव ने नाम लिए बगैर मुलायम सिंह यादव के बेटे अखिलेश यादव पर हमला बोला है।
Amrita Rao: अमृता अपने पति और आरजे अनमोल के साथ जिंदगी बिता रही हैं। किसी को अंदाजा भी नहीं है ऊपर से खुश दिखने वाली अमृता बीते कितने सालों के संघर्ष से जूझ रही थी। एक्ट्रेस ने अपनी निजी जिंदगी को लेकर अब चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने बताया है कि कैसे वो चार सालों तक बच्चे के लिए तड़पी हैं। WazirX: क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग की सुविधा देने वाली स्टार्टअप कंपनी WazirX के को-फाउंडर्स निश्चल शेट्टी और सिद्धार्थ मेनन अब भारत को छोड़ दुबई शिफ्ट हो गए हैं। हालांकि कंपनी के मुंबई और बेंगलुरू ऑफिस अभी बने हुए हैं और चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर और एक अन्य को फाउंडर समीर म्हात्रे भी देश में ही हैं और यहीं से काम कर रहे हैं, जबकि निश्चल शेट्टी और सिद्धार्थ मेनन के अपने परिवार के साथ दुबई शिफ्ट होने खबर मंगलवार को सामने आई। How to Apply for Shadi Shagun Yojana: राशन योजना, रोजगार योजना जैसी अन्य योजनाओं के अलावा केंद्र सरकार द्वारा देश की बेटियों के लिए भी एक खास योजना चलाई जाती है जिसका नाम है प्रधानमंत्री शादी शगुन योजना। इस योजना को देश के अल्पसंख्यक समाज की लड़कियों में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। इसमें आर्थिक लाभ दिया जाता है, ताकि लड़कियों को किसी तरह की कोई दिक्कत न हो। तो चलिए आपको इस प्रधानमंत्री शादी शगुन योजना के बारे में विस्तार से बताते हैं, ताकि अगर आप एक लड़की हैं तो आप भी इस योजना से जुड़ पाएं। UP: समाजवादी पार्टी को छोड़ भारतीय जनता पार्टी का दामन थामने वाली मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव जब से पार्टी में शामिल हुई है उनके तल्ख तेवर बने हुए हैं। कई मौकों पर अपर्णा यादव, सपा प्रमुख अखिलेश पर निशाना साध चुकी हैं तो वहीं अब एक बार फिर अपर्णा यादव ने नाम लिए बगैर मुलायम सिंह यादव के बेटे अखिलेश यादव पर हमला बोला है।
फिल्मों और वेब सीरीज में नजर आने वाली पूनम राजपूत अपनी बोल्डनेस के लिए जानी जाती हैं। सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाली पूनम राजपूत अक्सर अपनी बोल्ड फोटोज शेयर करती रहती हैं। पूनम राजपूत की अच्छी फैन फॉलोइंग होने के चलते उनकी तस्वीरें तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो जाती हैं। पूनम राजपूत की कातिलाना अदाएं उनके फैंस को घायल कर जाती हैं। पूनम राजपूत का एक-एक अंदाज उनके फैंस को खूब पसंद आता है और वह अपनी पसंदीदा एक्ट्रेस की जमकर तारीफ करते हैं। यहां पर आप पूनम राजपूत की बोल्ड तस्वीरें देख सकते हैं।
फिल्मों और वेब सीरीज में नजर आने वाली पूनम राजपूत अपनी बोल्डनेस के लिए जानी जाती हैं। सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाली पूनम राजपूत अक्सर अपनी बोल्ड फोटोज शेयर करती रहती हैं। पूनम राजपूत की अच्छी फैन फॉलोइंग होने के चलते उनकी तस्वीरें तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो जाती हैं। पूनम राजपूत की कातिलाना अदाएं उनके फैंस को घायल कर जाती हैं। पूनम राजपूत का एक-एक अंदाज उनके फैंस को खूब पसंद आता है और वह अपनी पसंदीदा एक्ट्रेस की जमकर तारीफ करते हैं। यहां पर आप पूनम राजपूत की बोल्ड तस्वीरें देख सकते हैं।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सशस्त्र बल कर्मियों को सशस्त्र बल न्यायाधिकरणों के ढांचे के तहत समय पर न्याय प्रदान करने पर शनिवार को जोर दिया, लेकिन साथ ही जल्दबाजी में किए गए फैसलों से होने वाले नुकसान को लेकर आगाह भी किया। सिंह ने सशस्त्र बल न्यायाधिकरण पर आयोजित एक संगोष्ठी में कहा, हम अक्सर इस पर बात करते हैं कि 'न्याय में देरी न्याय से वंचित' करने के समान है। हमें एक व्यवस्थित प्रक्रिया विकसित करके समय पर न्याय सुनिश्चित करने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा, हालांकि, हमें ऐसा करते समय बहुत सावधान रहने की भी आवश्यकता है। अन्यथा, जल्दबाजी में न्याय प्रदान करने से सही तरह से न्याय नहीं मिलने का खतरा होता है। ऐसे में समय और प्रक्रिया के बीच संतुलन बनाए रखना आज के समय की एक महत्वपूर्ण मांग है। रक्षा मंत्री ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में वकीलों के योगदान पर भी प्रकाश डाला। सिंह ने कहा, चाहे वह महात्मा गांधी, पंडित (जवाहर लाल) नेहरू, सी. राजगोपालाचारी, बाल गंगाधर तिलक, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, एस. श्रीनिवास अयंगर, सरदार पटेल या डॉ. भीमराव आंबेडकर हों, एक नहीं बल्कि कई ऐसे नाम हैं, जिनके योगदान के बिना हमारा भारत ऐसा नहीं होता जैसा आज है। " रक्षा मंत्री ने सशस्त्र बल न्यायाधिकरणों के समग्र कामकाज में सुधार के प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि सरकार इन न्यायाधिकरणों को उन उद्देश्यों के प्रति अधिक उत्तरदायी बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, जिनके लिए इसे स्थापित किया गया था। सिंह ने कहा ,सशस्त्र बल न्यायाधिकरणों ने सेवारत सैनिकों और पूर्व सैनिकों की वैध आकांक्षाओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। रक्षा मंत्री ने विश्वास जताया कि सशस्त्र बल न्यायाधिकरण अपने कामकाज में बदलाव लाएगा और इसके लिए तैयारी अभी से शुरू करनी होगी।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सशस्त्र बल कर्मियों को सशस्त्र बल न्यायाधिकरणों के ढांचे के तहत समय पर न्याय प्रदान करने पर शनिवार को जोर दिया, लेकिन साथ ही जल्दबाजी में किए गए फैसलों से होने वाले नुकसान को लेकर आगाह भी किया। सिंह ने सशस्त्र बल न्यायाधिकरण पर आयोजित एक संगोष्ठी में कहा, हम अक्सर इस पर बात करते हैं कि 'न्याय में देरी न्याय से वंचित' करने के समान है। हमें एक व्यवस्थित प्रक्रिया विकसित करके समय पर न्याय सुनिश्चित करने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा, हालांकि, हमें ऐसा करते समय बहुत सावधान रहने की भी आवश्यकता है। अन्यथा, जल्दबाजी में न्याय प्रदान करने से सही तरह से न्याय नहीं मिलने का खतरा होता है। ऐसे में समय और प्रक्रिया के बीच संतुलन बनाए रखना आज के समय की एक महत्वपूर्ण मांग है। रक्षा मंत्री ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में वकीलों के योगदान पर भी प्रकाश डाला। सिंह ने कहा, चाहे वह महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, सी. राजगोपालाचारी, बाल गंगाधर तिलक, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, एस. श्रीनिवास अयंगर, सरदार पटेल या डॉ. भीमराव आंबेडकर हों, एक नहीं बल्कि कई ऐसे नाम हैं, जिनके योगदान के बिना हमारा भारत ऐसा नहीं होता जैसा आज है। " रक्षा मंत्री ने सशस्त्र बल न्यायाधिकरणों के समग्र कामकाज में सुधार के प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि सरकार इन न्यायाधिकरणों को उन उद्देश्यों के प्रति अधिक उत्तरदायी बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, जिनके लिए इसे स्थापित किया गया था। सिंह ने कहा ,सशस्त्र बल न्यायाधिकरणों ने सेवारत सैनिकों और पूर्व सैनिकों की वैध आकांक्षाओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। रक्षा मंत्री ने विश्वास जताया कि सशस्त्र बल न्यायाधिकरण अपने कामकाज में बदलाव लाएगा और इसके लिए तैयारी अभी से शुरू करनी होगी।
बहुत मुश्किल परिस्थितियों में बहुत से लोगों के बाद से लंबे समय तकजादू के लिए बदल गया। वह सफेद या काला होगा, उसने फैसला किया। कोई स्वतंत्र रूप से अनुमान लगाने में लगा हुआ था, किसी ने षड्यंत्रकारियों और जादूगरों की मदद की। इन दिनों, ये अनुष्ठान भी लोकप्रिय हैं, क्योंकि कुछ मामलों में किसी विशेष स्थिति के परिणाम को जानना आवश्यक है। घटना पर अनुमान लगाने और इसमें क्या शामिल हो सकता है, नीचे पढ़ें। हम आपको संचालन का एक तरीका बताएंगेकागज के साथ अनुष्ठान। किसी घटना में अनुमान लगाने के लिए, एक पेन और शीट लें। वापस बैठो और ध्यान से पढ़ें। आने वाली घटनाओं के लिए यह प्रवीणता आपको यह समझने में मदद करेगी कि इस दिन आपको क्या इंतजार है। यह संभव है कि एक निश्चित समय के लिए आपके पास एक महत्वपूर्ण घटना हो, इसलिए आप जानना चाहेंगे कि परिणाम क्या होगा। कागज का एक टुकड़ा काला होना चाहिए (आवश्यक)। अपने जन्मदिन की तारीख पर एक कलम लिखें। इसके बाद, उस तारीख को निर्दिष्ट करें जिस पर आप ईवेंट पर अनुमान लगा रहे हैं। यह सब डेटा एक पंक्ति में लिखा जाना चाहिए। फिर परिणामी आंकड़े जोड़ें। ऐसा तब तक करें जब तक आप एक नंबर प्राप्त न करें। उदाहरण के लिए, आपकी जन्मतिथि 12/12/19 9 0 है। जिस दिन आप अनुमान लगा रहे हैं वह 10/30/2016 है। संख्याएं जोड़ेंः 1 + 2 + 1 + 2 + 1 + 9 + 9 + 3 + 1 + 2 + 1 + 6 = 38। फिर 3 + 8 = 11, और 1 + 1 = 2। यह संख्या अंतिम परिणाम है। नीचे, आंकड़े का अर्थ क्या है, जो आपको मिलाः - 0 - परिणाम कुछ भी आश्चर्यजनक नहीं लाएगा, सब कुछ जगह में रहेगा। - 1 - इकाई कल्पना में महान भाग्य का वादा करता है। - 2 - दुर्भाग्यवश, इस दिन की घटनाएं निराशा लाएंगी। - 3 - सबसे अधिक संभावना है कि किसी के साथ एक लंबी और महत्वपूर्ण बातचीत होगी। - 4 - समाचार। - 5 - एक बैठक जिसमें आप के बारे में भी नहीं पता था। - 6 - योजनाएं गिर जाएगी, जब भी संभव हो योजनाबद्ध घटना को स्थानांतरित या रद्द करना बेहतर होता है। - 7 - सब ठीक वैसे ही होगा जैसा आप चाहते थे। - 8 - इस दिन दुर्भाग्यवश आपके मनोदशा को खराब कर सकते हैं, योजनाओं को बाधित कर सकते हैं। - 9 - एक चमत्कार होने की उम्मीद है। यदि आपको संदेह है कि आप एक सुखद उम्मीद कर रहे हैंसमाचार, फिर घटनाओं के लिए इस divination (सच्चे) का उपयोग करें। इस अनुष्ठान को सफलतापूर्वक उत्पन्न करने के लिए, कला के स्कूल को खत्म करना आवश्यक नहीं है, यह केवल छात्र के स्तर पर आकर्षित करने में सक्षम है। तो, कागज के कुछ टुकड़े और एक कलम लें, अलग चादरों पर पेंट करेंः एक आदमी और एक महिला, एक पक्षी, एक घर, एक बाड़, एक बिल्ली, एक फूल, एक नदी, एक दरवाजा के आंकड़े। इनमें से प्रत्येक चित्र एक प्रतीक है। यह भाषण आपको यह समझने में मदद करेगा कि आपने सही विकल्प चुना है या नहीं। इन सभी आंकड़ों को तैयार करने के बाद,निम्नलिखित करेंः उन्हें एक बैग में डाल दें। स्पष्ट रूप से उस प्रश्न को तैयार करें जिसे आप एक स्पष्ट जवाब प्राप्त करना चाहते हैं। मानसिक रूप से इसे अपने सिर में कहकर, बैग से तस्वीर प्राप्त करें। आपने जो खींचा है उसकी प्रतिलिपि पढ़ेंः - मैन - आप अपना लक्ष्य प्राप्त करने में सक्षम नहीं हैं। आपको मदद के लिए किसी के पास जाना होगा। - पक्षी - थोड़ी देर के लिए इच्छा की पूर्ति स्थगित कर दिया। - घर निकट भविष्य में नहीं बदला जा रहा है। - बाड़ - जल्द ही एक सफेद पट्टी शुरू करें। - एक बिल्ली - आपके पास एक मजबूत चरित्र है। जब आप प्रयास करना शुरू करते हैं तो इच्छा सच हो जाएगी। - फूल - आपके व्यक्तिगत जीवन में बदलाव आएंगे। - नदी - आपको आराम करने की ज़रूरत है। - दरवाजे - आप बड़ी सफलता प्राप्त करेंगे। चीजें बेहतर होंगी।
बहुत मुश्किल परिस्थितियों में बहुत से लोगों के बाद से लंबे समय तकजादू के लिए बदल गया। वह सफेद या काला होगा, उसने फैसला किया। कोई स्वतंत्र रूप से अनुमान लगाने में लगा हुआ था, किसी ने षड्यंत्रकारियों और जादूगरों की मदद की। इन दिनों, ये अनुष्ठान भी लोकप्रिय हैं, क्योंकि कुछ मामलों में किसी विशेष स्थिति के परिणाम को जानना आवश्यक है। घटना पर अनुमान लगाने और इसमें क्या शामिल हो सकता है, नीचे पढ़ें। हम आपको संचालन का एक तरीका बताएंगेकागज के साथ अनुष्ठान। किसी घटना में अनुमान लगाने के लिए, एक पेन और शीट लें। वापस बैठो और ध्यान से पढ़ें। आने वाली घटनाओं के लिए यह प्रवीणता आपको यह समझने में मदद करेगी कि इस दिन आपको क्या इंतजार है। यह संभव है कि एक निश्चित समय के लिए आपके पास एक महत्वपूर्ण घटना हो, इसलिए आप जानना चाहेंगे कि परिणाम क्या होगा। कागज का एक टुकड़ा काला होना चाहिए । अपने जन्मदिन की तारीख पर एक कलम लिखें। इसके बाद, उस तारीख को निर्दिष्ट करें जिस पर आप ईवेंट पर अनुमान लगा रहे हैं। यह सब डेटा एक पंक्ति में लिखा जाना चाहिए। फिर परिणामी आंकड़े जोड़ें। ऐसा तब तक करें जब तक आप एक नंबर प्राप्त न करें। उदाहरण के लिए, आपकी जन्मतिथि बारह दिसंबर उन्नीस नौ शून्य है। जिस दिन आप अनुमान लगा रहे हैं वह दस तीस दो हज़ार सोलह है। संख्याएं जोड़ेंः एक + दो + एक + दो + एक + नौ + नौ + तीन + एक + दो + एक + छः = अड़तीस। फिर तीन + आठ = ग्यारह, और एक + एक = दो। यह संख्या अंतिम परिणाम है। नीचे, आंकड़े का अर्थ क्या है, जो आपको मिलाः - शून्य - परिणाम कुछ भी आश्चर्यजनक नहीं लाएगा, सब कुछ जगह में रहेगा। - एक - इकाई कल्पना में महान भाग्य का वादा करता है। - दो - दुर्भाग्यवश, इस दिन की घटनाएं निराशा लाएंगी। - तीन - सबसे अधिक संभावना है कि किसी के साथ एक लंबी और महत्वपूर्ण बातचीत होगी। - चार - समाचार। - पाँच - एक बैठक जिसमें आप के बारे में भी नहीं पता था। - छः - योजनाएं गिर जाएगी, जब भी संभव हो योजनाबद्ध घटना को स्थानांतरित या रद्द करना बेहतर होता है। - सात - सब ठीक वैसे ही होगा जैसा आप चाहते थे। - आठ - इस दिन दुर्भाग्यवश आपके मनोदशा को खराब कर सकते हैं, योजनाओं को बाधित कर सकते हैं। - नौ - एक चमत्कार होने की उम्मीद है। यदि आपको संदेह है कि आप एक सुखद उम्मीद कर रहे हैंसमाचार, फिर घटनाओं के लिए इस divination का उपयोग करें। इस अनुष्ठान को सफलतापूर्वक उत्पन्न करने के लिए, कला के स्कूल को खत्म करना आवश्यक नहीं है, यह केवल छात्र के स्तर पर आकर्षित करने में सक्षम है। तो, कागज के कुछ टुकड़े और एक कलम लें, अलग चादरों पर पेंट करेंः एक आदमी और एक महिला, एक पक्षी, एक घर, एक बाड़, एक बिल्ली, एक फूल, एक नदी, एक दरवाजा के आंकड़े। इनमें से प्रत्येक चित्र एक प्रतीक है। यह भाषण आपको यह समझने में मदद करेगा कि आपने सही विकल्प चुना है या नहीं। इन सभी आंकड़ों को तैयार करने के बाद,निम्नलिखित करेंः उन्हें एक बैग में डाल दें। स्पष्ट रूप से उस प्रश्न को तैयार करें जिसे आप एक स्पष्ट जवाब प्राप्त करना चाहते हैं। मानसिक रूप से इसे अपने सिर में कहकर, बैग से तस्वीर प्राप्त करें। आपने जो खींचा है उसकी प्रतिलिपि पढ़ेंः - मैन - आप अपना लक्ष्य प्राप्त करने में सक्षम नहीं हैं। आपको मदद के लिए किसी के पास जाना होगा। - पक्षी - थोड़ी देर के लिए इच्छा की पूर्ति स्थगित कर दिया। - घर निकट भविष्य में नहीं बदला जा रहा है। - बाड़ - जल्द ही एक सफेद पट्टी शुरू करें। - एक बिल्ली - आपके पास एक मजबूत चरित्र है। जब आप प्रयास करना शुरू करते हैं तो इच्छा सच हो जाएगी। - फूल - आपके व्यक्तिगत जीवन में बदलाव आएंगे। - नदी - आपको आराम करने की ज़रूरत है। - दरवाजे - आप बड़ी सफलता प्राप्त करेंगे। चीजें बेहतर होंगी।
हरदोई में कोतवाली कछौना के बेरुआ गांव के बाहर स्थित टावर के गार्ड रूम में संदिग्ध अवस्था में युवक फांसी पर लटका मिला। परिजनों ने हत्या की आशंका जताई है। सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया और मामले की जांच-पड़ताल में जुटी है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। बेरुआ निवासी राधेश्याम का गांव के बाहर भूमि पर टावर व दुकानें हैं। जहां पर घर का कोई न कोई सदस्य रात में रुकता है। प्रतिदिन की भांति उनका पुत्र आलोक कुमार शनिवार की रात खाना खाकर दुकान पर रुकने चला गया। जहां पर गार्ड रूम में सुबह उनका बेटा आलोक कुमार फांसी के फंदे पर लटका मिला। परिजनों ने बताया सिर पर चोट का निशान है। किसी ने पुरानी रंजिश के चलते हत्या कर दी। इस घटना से परिजन काफी डरे सहमे हैं। बुजुर्ग पिता का रो-रो कर बुरा हाल है। बड़े भाई ओम जी ने हत्या की आशंका जताई। परिवार के लोग किराना की दुकान चलाकर परिवार का भरण पोषण करते हैं। कछौना पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस मामले की जांच कर रही है। युवक शव मिलने की सूचना पर भीम आर्मी के मंडल महासचिव चंद्र प्रकाश वर्मा अपनी टीम के साथ पहुंचे और परिजनों को न्याय दिलाने का आश्वासन दिया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
हरदोई में कोतवाली कछौना के बेरुआ गांव के बाहर स्थित टावर के गार्ड रूम में संदिग्ध अवस्था में युवक फांसी पर लटका मिला। परिजनों ने हत्या की आशंका जताई है। सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया और मामले की जांच-पड़ताल में जुटी है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। बेरुआ निवासी राधेश्याम का गांव के बाहर भूमि पर टावर व दुकानें हैं। जहां पर घर का कोई न कोई सदस्य रात में रुकता है। प्रतिदिन की भांति उनका पुत्र आलोक कुमार शनिवार की रात खाना खाकर दुकान पर रुकने चला गया। जहां पर गार्ड रूम में सुबह उनका बेटा आलोक कुमार फांसी के फंदे पर लटका मिला। परिजनों ने बताया सिर पर चोट का निशान है। किसी ने पुरानी रंजिश के चलते हत्या कर दी। इस घटना से परिजन काफी डरे सहमे हैं। बुजुर्ग पिता का रो-रो कर बुरा हाल है। बड़े भाई ओम जी ने हत्या की आशंका जताई। परिवार के लोग किराना की दुकान चलाकर परिवार का भरण पोषण करते हैं। कछौना पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस मामले की जांच कर रही है। युवक शव मिलने की सूचना पर भीम आर्मी के मंडल महासचिव चंद्र प्रकाश वर्मा अपनी टीम के साथ पहुंचे और परिजनों को न्याय दिलाने का आश्वासन दिया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
2015 के अंत में, सैन्य औद्योगिकीकरण कंपनी नए सार्वभौमिक लड़ाकू पहिएदार प्लेटफॉर्म बुमेरांग के विकास को पूरा करने का इरादा रखती है। इसके आधार पर, होनहार बख्तरबंद कर्मियों के वाहक (APCs), पैदल सेना से लड़ने वाले वाहनों (BMP) और भारी हथियारों से लड़ने वाले वाहनों (BMTV) का उत्पादन करने की योजना है। मई 9 पर, बोम VPK-7829 "बूमरैंग" के कई नमूने मास्को में रेड स्क्वायर पर विजय परेड में पहले ही दिखाए जा चुके हैं। यदि सब कुछ अनुसूची के अनुसार चला जाता है, और आर्थिक संकट के कारण कार्यक्रम के वित्तपोषण में कटौती नहीं की जाएगी, तो बख़्तरबंद कर्मियों के वाहक और अन्य बुमेरांगों का बड़े पैमाने पर उत्पादन 2017 में शुरू होगा, और 2019 में सैनिकों को बड़े पैमाने पर आपूर्ति। होनहार सेना के वाहनों के लिए विकसित किए जा रहे प्लेटफॉर्म के बारे में बहुत कम जानते हैं। इसका निर्माण 2000s के मध्य से चल रहा है। BTR और बुमेरांग परिवार के बाकी हिस्सों को "प्रकाश" और "मध्यम" ब्रिगेड के लिए एकीकृत तकनीक के रूप में विकसित किया जा रहा है। 2013 में, पहली बार निज़नी टैगिल में रूस आर्म्स EXPO प्रदर्शनी में मंच दिखाया गया था। नवीनता का पावर प्लांट सामने स्थित है। इस समाधान के लिए धन्यवाद, बीएमपी के लैंडिंग डिब्बे की उपयोगी मात्रा में वृद्धि करना और मशीन के पिछे भाग के माध्यम से लड़ाकू विमानों की लैंडिंग और लैंडिंग सुनिश्चित करना संभव था। इसके अलावा, इंजन डिब्बे के सामने का स्थान ललाट प्रक्षेपण में BTR के इंटीरियर के लिए अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करता है। मंच पहिया सूत्र 8x8 के साथ बनाया गया है। यह रिमोट-नियंत्रित हथियार मॉड्यूल से लैस होगा और सिरेमिक कवच प्राप्त करेगा। हल्के और मध्यम वजन के संशोधनों में, रूसी बख्तरबंद कर्मी "बूमरैंग" को पाल सकेंगे। यह उत्सुक है कि रूस के रक्षा मंत्रालय के तकनीकी असाइनमेंट में, बख्तरबंद कर्मियों के वाहक की उछाल सुनिश्चित करने के बावजूद, कार बॉडी में खामियों को दूर रखने की योजना बनाई गई थी ताकि लड़ाकू अंदर से आग लगा सकें। सैन्य परीक्षणों के बाद, यह उम्मीद की जाती है कि अरज़मास मशीन-निर्माण संयंत्र एक नए लड़ाकू मंच पर बख्तरबंद कर्मियों के वाहक, पैदल सेना से लड़ने वाले वाहनों और बीएमटीवी के बड़े पैमाने पर उत्पादन में लगे होंगे। बीएमपी-आधारित "बूमरैंग" को एक रिमोट नियंत्रित लड़ाकू मॉड्यूल "बूमरैंग-बीएम" प्राप्त होगा। यह मॉड्यूल निम्नलिखित हथियारों से लैस होगाः 2А42 स्वतः कैलिबर 30 कैलिबर मिलीमीटर के साथ चुनिंदा गोला-बारूद और 500 राउंड ऑफ़ गोला बारूद, PKTM मशीन गन 7,62 मिमी मिलीमीटर के साथ दो हज़ार राउंड गोला बारूद और दो दोहरे कोर्नेट एंटी टैंक मिसाइल लॉन्चर्स। मॉड्यूल गनर और बीएमपी के कमांडर को नियंत्रित करने में सक्षम होगा। जैसा कि अपेक्षित था, "बूमरैंग-बीएम" पूरी तरह से स्वायत्त मोड में काम करने में सक्षम होगा, अर्थात्, ऑपरेटर द्वारा आगे मानव हस्तक्षेप के बिना लक्ष्य पदनाम के बाद, लक्ष्य का पालन करें और विनाश होने तक उस पर आग लगाएं। यह भी माना जाता है कि बीएमपी में गोला बारूद और आयुध पूरी तरह से लैंडिंग बल से अलग हो जाएगा। यह समाधान चालक दल की समग्र सुरक्षा और मशीन की उत्तरजीविता को भी बढ़ाता है। अप्रैल 2015 के अंत में, यूनाइटेड इंस्ट्रूमेंट-मेकिंग कॉर्पोरेशन ने घोषणा की कि बख़्तरबंद कर्मियों के वाहक, पैदल सेना से लड़ने वाले वाहन, बुमेरांग पर आधारित भारी हथियार वाहन, साथ ही साथ अन्य होनहार सैन्य उपकरण (एक है जो आर्मटा यूनिवर्सल हेवी ट्रैक प्लेटफॉर्म के आधार पर बनाया जाएगा) और यह मुख्य मुकाबले के अतिरिक्त है टंका भारी पैदल सेना से लड़ने वाले वाहन, एक टैंक समर्थन लड़ाकू वाहन, एक बख्तरबंद वसूली और वसूली वाहन, स्व-चालित तोपखाने की स्थापना के लिए एक चेसिस, आदि) एकीकृत संचार, नेविगेशन और नियंत्रण उपकरण प्राप्त करेंगे। और यह उपकरण पूरी तरह से नेटवर्क-केंद्रित युद्ध की अवधारणा को पूरा करेगा। ऑन-बोर्ड उपकरण बीटीआर चालक दल को वास्तविक समय में सभी परिचालन-सामरिक डेटा प्राप्त करने और एक स्वचालित नियंत्रण प्रणाली में कमांड पोस्ट और अन्य सैन्य इकाइयों के साथ बातचीत करने की अनुमति देगा। XNXXs के अंत के बाद से दुनिया के कई देशों द्वारा नेटवर्क-केंद्रित सशस्त्र बलों के सिद्धांत का विकास किया गया है। यह आधिकारिक तौर पर 1970s में संयुक्त राज्य अमेरिका में तैयार किया गया था। इसमें एक ही सूचना प्रणाली में खुफिया, लक्ष्यीकरण और विनाश का एकीकरण शामिल है। उदाहरण के लिए, पेंटागन एकल डेटा विनिमय नेटवर्क वर्तमान में तैनात किया जा रहा है, जिसमें विभिन्न सैन्य इकाइयाँ और एपीसी जैसे सैन्य उपकरण पहले से जुड़े हुए हैं। यह इसके लिए धन्यवाद है कि निर्णय लेने और निर्णय लेने, निष्पादकों को आदेश लाने और सेना के संचालन की गति बढ़ाने के लिए युद्ध कमान और नियंत्रण चक्र को काफी कम किया जा सकता है। सामान्य तौर पर, नेटवर्क-केंद्रित सेना में पारंपरिक सशस्त्र बलों की तुलना में अधिक दक्षता और अस्तित्व है। रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका के अलावा, कनाडा, फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, भारत, दक्षिण कोरिया, जापान और कई अन्य देश भी नेटवर्क-केंद्रित सशस्त्र बलों के निर्माण में शामिल हैं। बख़्तरबंद कर्मियों के वाहक, पैदल सेना से लड़ने वाले वाहनों, बुमेरांग पर आधारित भारी आयुध वाहनों और अन्य प्रकार के उन्नत उपकरणों के लिए संचार, नेविगेशन और नियंत्रण उपकरण का विकास नक्षत्र चिंता द्वारा किया जा रहा है। तारामंडल के वैज्ञानिक नेता वसीली बोरिसोव के अनुसार, विकसित उपकरण गोलाबारी में लाभ की कीमत पर लड़ाई में जीतने की अनुमति नहीं देंगे, "लेकिन सूचना क्षमताओं में श्रेष्ठता और सैन्य संरचनाओं के उपयोग के परिणामस्वरूप, जो काफी दूरी पर बिखरे हुए हैं, कमांड पोस्ट से हटाए गए और संयुक्त हैं। यह एक स्थायी सूचना और संचार नेटवर्क में है। " दूसरे शब्दों में, होनहार बख्तरबंद कार्मिकों को सशस्त्र बलों के सैनिकों और हथियारों की स्वचालित कमान और नियंत्रण प्रणाली के एकल सूचना स्थान में एकीकृत किया जाएगा। सामान्य तौर पर, बूमरैंग परियोजना, अगर पूरी तरह से लागू की जाती है, तो रूसी सशस्त्र बलों को एक नए स्तर पर उठाने की अनुमति होगी, जो बख्तरबंद कर्मियों के तकनीकी उपकरणों और पैदल सेना से लड़ने वाले वाहनों को सबसे अधिक तकनीकी रूप से उन्नत सशस्त्र बलों के अनुरूप लाएगा। सच है, एक संभावना है कि आर्थिक संकट के कारण, उन्नत सेना परियोजनाओं का वित्तपोषण - जिसमें बुमेरांग बख़्तरबंद कार्मिक वाहक शामिल हैं - कम हो सकते हैं। यह पहले से ही अलग-अलग होनहार हथियारों के साथ हुआ है, विशेष रूप से, एक होनहार फ्रंट-लाइन एविएशन कॉम्प्लेक्स की परियोजनाओं के साथ विमानन टी -50 (PAK FA) और "आर्मटा"। सेना ने पहले ही घोषणा की है कि उनकी खरीद में काफी कमी आएगीः पहले मामले में, रूसी रक्षा मंत्रालय ने मौजूदा Su-27 परिवार के लड़ाकू विमानों के आधुनिकीकरण को प्राथमिकता दी, और दूसरे में "अल्माटी" की अत्यधिक उच्च लागत की घोषणा की।
दो हज़ार पंद्रह के अंत में, सैन्य औद्योगिकीकरण कंपनी नए सार्वभौमिक लड़ाकू पहिएदार प्लेटफॉर्म बुमेरांग के विकास को पूरा करने का इरादा रखती है। इसके आधार पर, होनहार बख्तरबंद कर्मियों के वाहक , पैदल सेना से लड़ने वाले वाहनों और भारी हथियारों से लड़ने वाले वाहनों का उत्पादन करने की योजना है। मई नौ पर, बोम VPK-सात हज़ार आठ सौ उनतीस "बूमरैंग" के कई नमूने मास्को में रेड स्क्वायर पर विजय परेड में पहले ही दिखाए जा चुके हैं। यदि सब कुछ अनुसूची के अनुसार चला जाता है, और आर्थिक संकट के कारण कार्यक्रम के वित्तपोषण में कटौती नहीं की जाएगी, तो बख़्तरबंद कर्मियों के वाहक और अन्य बुमेरांगों का बड़े पैमाने पर उत्पादन दो हज़ार सत्रह में शुरू होगा, और दो हज़ार उन्नीस में सैनिकों को बड़े पैमाने पर आपूर्ति। होनहार सेना के वाहनों के लिए विकसित किए जा रहे प्लेटफॉर्म के बारे में बहुत कम जानते हैं। इसका निर्माण दो हज़ार सेकंड के मध्य से चल रहा है। BTR और बुमेरांग परिवार के बाकी हिस्सों को "प्रकाश" और "मध्यम" ब्रिगेड के लिए एकीकृत तकनीक के रूप में विकसित किया जा रहा है। दो हज़ार तेरह में, पहली बार निज़नी टैगिल में रूस आर्म्स EXPO प्रदर्शनी में मंच दिखाया गया था। नवीनता का पावर प्लांट सामने स्थित है। इस समाधान के लिए धन्यवाद, बीएमपी के लैंडिंग डिब्बे की उपयोगी मात्रा में वृद्धि करना और मशीन के पिछे भाग के माध्यम से लड़ाकू विमानों की लैंडिंग और लैंडिंग सुनिश्चित करना संभव था। इसके अलावा, इंजन डिब्बे के सामने का स्थान ललाट प्रक्षेपण में BTR के इंटीरियर के लिए अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करता है। मंच पहिया सूत्र आठxआठ के साथ बनाया गया है। यह रिमोट-नियंत्रित हथियार मॉड्यूल से लैस होगा और सिरेमिक कवच प्राप्त करेगा। हल्के और मध्यम वजन के संशोधनों में, रूसी बख्तरबंद कर्मी "बूमरैंग" को पाल सकेंगे। यह उत्सुक है कि रूस के रक्षा मंत्रालय के तकनीकी असाइनमेंट में, बख्तरबंद कर्मियों के वाहक की उछाल सुनिश्चित करने के बावजूद, कार बॉडी में खामियों को दूर रखने की योजना बनाई गई थी ताकि लड़ाकू अंदर से आग लगा सकें। सैन्य परीक्षणों के बाद, यह उम्मीद की जाती है कि अरज़मास मशीन-निर्माण संयंत्र एक नए लड़ाकू मंच पर बख्तरबंद कर्मियों के वाहक, पैदल सेना से लड़ने वाले वाहनों और बीएमटीवी के बड़े पैमाने पर उत्पादन में लगे होंगे। बीएमपी-आधारित "बूमरैंग" को एक रिमोट नियंत्रित लड़ाकू मॉड्यूल "बूमरैंग-बीएम" प्राप्त होगा। यह मॉड्यूल निम्नलिखित हथियारों से लैस होगाः दोАबयालीस स्वतः कैलिबर तीस कैलिबर मिलीमीटर के साथ चुनिंदा गोला-बारूद और पाँच सौ राउंड ऑफ़ गोला बारूद, PKTM मशीन गन सात,बासठ मिमी मिलीमीटर के साथ दो हज़ार राउंड गोला बारूद और दो दोहरे कोर्नेट एंटी टैंक मिसाइल लॉन्चर्स। मॉड्यूल गनर और बीएमपी के कमांडर को नियंत्रित करने में सक्षम होगा। जैसा कि अपेक्षित था, "बूमरैंग-बीएम" पूरी तरह से स्वायत्त मोड में काम करने में सक्षम होगा, अर्थात्, ऑपरेटर द्वारा आगे मानव हस्तक्षेप के बिना लक्ष्य पदनाम के बाद, लक्ष्य का पालन करें और विनाश होने तक उस पर आग लगाएं। यह भी माना जाता है कि बीएमपी में गोला बारूद और आयुध पूरी तरह से लैंडिंग बल से अलग हो जाएगा। यह समाधान चालक दल की समग्र सुरक्षा और मशीन की उत्तरजीविता को भी बढ़ाता है। अप्रैल दो हज़ार पंद्रह के अंत में, यूनाइटेड इंस्ट्रूमेंट-मेकिंग कॉर्पोरेशन ने घोषणा की कि बख़्तरबंद कर्मियों के वाहक, पैदल सेना से लड़ने वाले वाहन, बुमेरांग पर आधारित भारी हथियार वाहन, साथ ही साथ अन्य होनहार सैन्य उपकरण और यह मुख्य मुकाबले के अतिरिक्त है टंका भारी पैदल सेना से लड़ने वाले वाहन, एक टैंक समर्थन लड़ाकू वाहन, एक बख्तरबंद वसूली और वसूली वाहन, स्व-चालित तोपखाने की स्थापना के लिए एक चेसिस, आदि) एकीकृत संचार, नेविगेशन और नियंत्रण उपकरण प्राप्त करेंगे। और यह उपकरण पूरी तरह से नेटवर्क-केंद्रित युद्ध की अवधारणा को पूरा करेगा। ऑन-बोर्ड उपकरण बीटीआर चालक दल को वास्तविक समय में सभी परिचालन-सामरिक डेटा प्राप्त करने और एक स्वचालित नियंत्रण प्रणाली में कमांड पोस्ट और अन्य सैन्य इकाइयों के साथ बातचीत करने की अनुमति देगा। XNXXs के अंत के बाद से दुनिया के कई देशों द्वारा नेटवर्क-केंद्रित सशस्त्र बलों के सिद्धांत का विकास किया गया है। यह आधिकारिक तौर पर एक हज़ार नौ सौ सत्तर सेकंड में संयुक्त राज्य अमेरिका में तैयार किया गया था। इसमें एक ही सूचना प्रणाली में खुफिया, लक्ष्यीकरण और विनाश का एकीकरण शामिल है। उदाहरण के लिए, पेंटागन एकल डेटा विनिमय नेटवर्क वर्तमान में तैनात किया जा रहा है, जिसमें विभिन्न सैन्य इकाइयाँ और एपीसी जैसे सैन्य उपकरण पहले से जुड़े हुए हैं। यह इसके लिए धन्यवाद है कि निर्णय लेने और निर्णय लेने, निष्पादकों को आदेश लाने और सेना के संचालन की गति बढ़ाने के लिए युद्ध कमान और नियंत्रण चक्र को काफी कम किया जा सकता है। सामान्य तौर पर, नेटवर्क-केंद्रित सेना में पारंपरिक सशस्त्र बलों की तुलना में अधिक दक्षता और अस्तित्व है। रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका के अलावा, कनाडा, फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, भारत, दक्षिण कोरिया, जापान और कई अन्य देश भी नेटवर्क-केंद्रित सशस्त्र बलों के निर्माण में शामिल हैं। बख़्तरबंद कर्मियों के वाहक, पैदल सेना से लड़ने वाले वाहनों, बुमेरांग पर आधारित भारी आयुध वाहनों और अन्य प्रकार के उन्नत उपकरणों के लिए संचार, नेविगेशन और नियंत्रण उपकरण का विकास नक्षत्र चिंता द्वारा किया जा रहा है। तारामंडल के वैज्ञानिक नेता वसीली बोरिसोव के अनुसार, विकसित उपकरण गोलाबारी में लाभ की कीमत पर लड़ाई में जीतने की अनुमति नहीं देंगे, "लेकिन सूचना क्षमताओं में श्रेष्ठता और सैन्य संरचनाओं के उपयोग के परिणामस्वरूप, जो काफी दूरी पर बिखरे हुए हैं, कमांड पोस्ट से हटाए गए और संयुक्त हैं। यह एक स्थायी सूचना और संचार नेटवर्क में है। " दूसरे शब्दों में, होनहार बख्तरबंद कार्मिकों को सशस्त्र बलों के सैनिकों और हथियारों की स्वचालित कमान और नियंत्रण प्रणाली के एकल सूचना स्थान में एकीकृत किया जाएगा। सामान्य तौर पर, बूमरैंग परियोजना, अगर पूरी तरह से लागू की जाती है, तो रूसी सशस्त्र बलों को एक नए स्तर पर उठाने की अनुमति होगी, जो बख्तरबंद कर्मियों के तकनीकी उपकरणों और पैदल सेना से लड़ने वाले वाहनों को सबसे अधिक तकनीकी रूप से उन्नत सशस्त्र बलों के अनुरूप लाएगा। सच है, एक संभावना है कि आर्थिक संकट के कारण, उन्नत सेना परियोजनाओं का वित्तपोषण - जिसमें बुमेरांग बख़्तरबंद कार्मिक वाहक शामिल हैं - कम हो सकते हैं। यह पहले से ही अलग-अलग होनहार हथियारों के साथ हुआ है, विशेष रूप से, एक होनहार फ्रंट-लाइन एविएशन कॉम्प्लेक्स की परियोजनाओं के साथ विमानन टी -पचास और "आर्मटा"। सेना ने पहले ही घोषणा की है कि उनकी खरीद में काफी कमी आएगीः पहले मामले में, रूसी रक्षा मंत्रालय ने मौजूदा Su-सत्ताईस परिवार के लड़ाकू विमानों के आधुनिकीकरण को प्राथमिकता दी, और दूसरे में "अल्माटी" की अत्यधिक उच्च लागत की घोषणा की।
चितेरों के महावीर ३३ एकाधिकार । अब तुम्हीं सोचो, जो व्यक्ति प्रचेनन पदार्थों पर प्रपना स्वामित्व, अधिकार नहीं रखना चाहता वह एक जीवित स्त्री का मालिक कैसे हो सकेगा? महावीर के सामने नारी की निकटता और त्याग का प्रश्न नहीं है । स्वयं के ग्रह कार के विसर्जन का संकल्प है। घर में वे इस प्रकार रहते थे जैसे न हों । उनकी इस अनुपस्थिति से अभी माँ बाप ही चिंतित रहते हैं । सन्तान के प्रति मोह जागृत कर अपने कर्मों को वृद्धि करते हैं। विवाह होने पर पत्नी भी इसमें सम्मिलित हो जायेगी । महावीर की यह दृष्टि थी ! वे इस जन्म में जीवों को कर्मों से मुक्ति पाने का मार्ग बताने माये थे, कर्मों का संचय कराने नहीं। महावीर तुम्हारी बान ही सोच रहे थे । नारी के संयोग से उन्हें प्रपनी मुक्ति का भय नहीं था। वे अपने कारण किसी नारी की मुक्ति की प्रबंधि लम्बी नहीं करना चाहते थे । इस बात पर भी सोची विवाह क्यों होता है ? इसलिए कि नारी एवं पुरुष दोनों कही न कहीं प्रपूर्ण हैं, उनके संयोग से परस्पर में पूर्णता की प्राप्ति हो । महावीर तो इस अपूर्णता से कब के ऊपर उठ चुके थे। देह धौर फात्मा की भिन्नता का जब से उन्होंने प्रनुभव किया, देह की प्रावश्यकताओं की पूर्ति करना उन्होंने छोड़ दिया था। उनके सम्पर्क में प्राकर कोई अपने को पूर्ण कर सकता था, उन्हें पूर्ण होने के लिए किसी की प्रपेक्षा नहीं थी। फिर वे विवाह किमलिए करते ? विवाह की तीसरी सार्थकता है संतान की प्राप्ति । इसके मूल में है व्यक्ति को वह आकांक्षा, जिसमें वह अपने प्रश को सुरक्षित रखना चाहता है । जिन इच्छाप्रों की पूर्ति वह स्वयं नहीं कर सका उनकी पूर्ति सन्तान के माध्यम से करना चाहता है । इच्छाप्रों के संग्रह का इतना लम्बा जाल महावीर कैसे स्वीकार कर लेते ? इच्छाओं के विसर्जन के लिए हो तो उनकी साधना थी । अतः उन्होंने जिस पथ का अनुसरण किया वह उनकी महावीरता का ही द्योतक है। श्रायुष्मति ! नाराज तो नही हो ?" 'गुरुदेव ! अपने प्रज्ञान पर लज्जित हूँ । ज्ञात नहीं था, महावीर के जीवन में प्राप का इतना प्रवेश है। प्राचार्यप्रवर ! आगे की कथा कहें ।' कनकप्रभा यह कहकर अपने आसन पर बैठ ही नहीं पायो थी कि शिल्पीसंघ से एक प्रश्न और उमरा - 'समाधानो के इस दौर में इस अन्तेवासी को ३४ चितेरों के महावीर भी कृतार्थ करें गुरुदेव ! जैनधर्म की श्वेताम्बर परम्परा महावीर के विवाह को स्वीकार करती है। कहते हैं, उनके 'प्रियदर्शनी' नाम की एक पुत्री भी थी जिसका 'जामालि' नामक विचारक से हुआा था। भाचार्यप्रवर ! एक ही धर्म की दो परम्पराओं में ऐसा विरोध क्यों ?" 'भद्र श्रीकण्ठ ! विरोध होने पर ही तो परम्परा बनती है किसी धर्म में । यह स्वाभाविक है, क्योंकि प्रत्येक महापुरुष के जीवन का मूल्यांकन करने के लिए हर व्यक्ति स्वतन्त्र होता है। जिसकी दृष्टि का जो पैमाना सदनुसार वह तथ्यों की गहराई तक पहुँच पाता है। जिस प्रसङ्ग को तुम बात कर रहे हो वह श्वेताम्बरों के 'कल्पसूत्र' नामक ग्रंथ में उल्लिखित है। उसके पूर्व के ग्रंथों में नहीं। महावीर को विवाहित मानने के कारणों पर विचार करें तो बात स्पष्ट हो सकेगी। प्रमुख कारण यह है कि महावीर की महिला का अर्थ - "कसी भी प्रारणी का मन न दुखाना, उस समय तक निश्चित हो चुका था। अतः जो व्यक्ति छोटे से छोटे प्रारणी के प्रति करुणावान् है, वह अपने माता-पिता की भावना को ठेस कैसे पहुंचायेगा ? उनकी किसी बात का विरोध में करेगा ? इसलिए जब माता-पिता ने कहा, उन्होंने विवाह कर लिया। जब तक वे जीवित रहे, महावीर ने गृहत्याग नहीं किया, प्रादि । इन बातों को श्वेताम्बर परम्परा ने इमलिए दृढ़ता से स्वीकार किया ताकि मह वीर की करुणामय अहिंसा एव अनाग्रही वृत्ति प्रधिक उजागर हो सके। इस प्रसङ्ग को स्वीकार करने में दूसरा कारण तत्कालीन सामाजिक प्रभाव है। समाज में मर्यादापुरुषोतम राम के प्रादर्श प्रचलित थे । मातापिता के प्रति कर्तव्यनिष्ठ एवं प्राज्ञाकारी के रूप में । ब्राह्मण परम्परा के एक आदर्शपुरुष के समकक्ष महावीर को गृह- दायित्वों से पलायन करने वाला कैसे मान लिया जाता ? प्रतः उनमें वे सभी गुरण प्रतिष्ठित किये गये जो एक महापुरुष में होना चाहिए । यद्यपि इन सभी गुणों और विशेषताथों को उपलब्धि महावीर को पिछले जन्मों में हो चुकी थी। इस भांतिम जन्म में वे इन सबसे ऊपर उटने आये थे सो उठे भो । किन्तु वहां तक दृष्टि कुछ ही साधकों की पहुंच पायी है । महावीर के जीवन से इस मान्यता के जुड़ने तक भगवान बुद्ध द्वारा पत्नी चितेरों के महावीर ३५ पुत्र को सोता हुआ छोड़कर गृहयाग की कथा अभी पुरानी नहीं पड़ी थी। वह महापुरुष कंमा, जो कठिनाईयों से भाग खडा हो ? प्रतः महावीर के जीवन के साथ जैसे चडकौशिक सर्प, कीलें ठाकने वाला ग्वाला, स्थाररुद्र, मादि की कथाएं जुड़ीं वैसे ही उनकी त्यागवृत्ति, कत्तं व्यपरायगगता एवं कारुणिकता को उजागर करने के लिए उनके भरे-पूरे परिवार की प्रतिष्ठा की गयो । पत्नी, पुत्री, दामाद इन सबको त्यागकर महावीर निकल पडे। कितने बड़े त्यागी, ? किन्तु वास्तविकता यह थी कि उन्होंने राजसी वंभव, राजभवन, परि बार के सदस्यों के अस्तित्व को ही नहीं स्वीकारा था, त्याग किसका करते ? इन सबकी भसारता का बोध जिस दिन पूर्ण रूप से सघन हो गया उस दिन वे इनसे बाहर हो गये। पुनः उनमें फंसने का प्रश्न ही नहीं उठता। इस प्रसंग में एक बात यह भी नजर पाती है कि यदि महावीर का विवाह हुआ होता तो गृह-त्याग के बाद ४२ वर्षों के तपस्वी जीवन में कहीं तो यशोदा से उनकी भेंट होती ? किसी स्थान पर उनकी पुत्री ने उन्हें महार दिया होता ? और कुछ नहीं तो इतिहास हो उनकी मस्पायु के सम्बन्ध में कुछ कहता ? किन्तु इस प्रसंग की जितनी अर्थवत्ता थी, उतना ही इसके साथ हुआ । भद्र श्रीकण्ठ ! इतना और समझ लें, हर महापुरुष अपने समय के बाद स्वयं के अनुरायिमों द्वारा निर्मित घेरों में जीवित रहता है। चाहे वे उसे अलौकिक बनायें या समारी। किन्तु उसकी गुणवत्ता में कोई कमी नहीं भाती । अतः यदि महावीर के व्यक्तित्व को गहरायी से समझना है तो कम से कम इतने दायरे तो बनायें, जिनमें सहजता से विचारों प्रादान-प्रदान हो सके। तुमने इस प्रश्न को उठाकर मुझे भौर चितन का अवसर दिया। मैं प्रसन्न हूं। किन्तु कुछ थक भी गया हूं । अतः भागे की कथा अब मध्यान्ह में कह सकूंगा। तब तक भाप सब भी बिराम ६. अभिनिष्क्रमरण मध्यान्ह के अंतिम प्रहर में शिल्पीसंघ पुनः एकत्र हुआ। इसके पूर्व अवकाश के क्षणों में प्राचार्य द्वारा कथित अब तक की कथा के सम्बन्ध में वे सभी कलाकार विचार-विमर्श कर यहां आये थे। आगे की कथा के प्रति भव वे पूर्ण सजग थे और उत्सुक भी। प्राचार्य अपने भासन पर बैठे हुए ध्यान मग्न थे। उनके सौम्य चेहरे को देखकर लगता था वे वैशाली के प्रास-पास विचरण करते हुए भगवान महावीर के प्रसगों को वातावरण से समेट रहे हैं। नयन खुलते ही उन्होंने कथासूत्र को सम्हाल लिया'महावीर माता-पिता को विवाह के प्रति अपनी विरक्ति के भाव बतलाकर निश्चित नहीं हो गये थे। उनकी चिन्तन की यात्रा और गतिशील हो गयी । पपने जीवन के सम्बन्ध में उन्होंने सोचा-में ग्राज जिन क्षरणभंगुर पदार्थों और रिस्ते-नातों के बीच हूं, उन्हें कितनी बार भोगा है ? क्रमशः उनके स्वरूप को जब जान पाया तो लगा इनसे मेरा सम्बन्ध हो क्या है ? भोर तब मैंने उसे खोजने की यात्रा प्रारम्भ कर दी जो मेरा था। मेरा है। पूर्व जन्म के अनन्त मव ग्रात्मा के स्वरूप को अनुभव करने में लग गए । आत्मा और ज्ञान की प्रभिन्नता से परिचित होते ही यह सारा संसार भज्ञान और मोह से पीड़ित नजर आने लगा। मैं क्रमशः इस बन्धन से विलग होने लगा । और भाज इस तिथि तक पहुंच पाया हूँ कि स्वयं को सत्य की उपलब्धि के समीप पाता हूँ ।' कभी वर्धमान अपने युग की स्थिति, वातावरण के सम्बन्ध में सोचने लगते तो पाते कि लोग धार्मिक क्रियाकाण्डों और दार्शनिक मत-मतान्तरों में बुरी तरह फम गये है। दूसरी ओर कुछ ऐसे विचारक भी हैं, जो इस प्रकार के विकृत धार्मिक क्रियाकाण्डों से मुक्ति तो चाहते हैं किन्तु उन्हें सही रास्ता नहीं मिल रहा है। प्रत्येक विचारक क्रान्ति का स्वयं भगुमा बनना चाहता चितेरों के महावीर ३७ है। इस धार्मिक प्रशान्ति का समाधान उसके पास भी नहीं है । इन सब विचारकों के प्रयत्नों का समन्वय कैसे हो ? किस प्रकार समाज को एक सरल एवं पुरुषार्थी धर्म की प्राप्ति हो, महावीर इस पर गहरायी से चितन करते रहते । जब कभी उनकी दृष्टि सामाजिक दशा पर उठ जाती तो उनका हृदय करुणा से भर जाता । वे देखते कि किस प्रकार समाज का एक वर्ग सब पर छाया हुआ है ? शिक्षा, सुविधाएं एवं स्वतन्त्रता किसी एक वर्ग तक ही सीमित हो गयी हैं। और सबसे बड़ी बात यह है कि समाज का आर्थिक पक्ष ही कटा जा रहा है, जो किसी भी समाज के विकास के लिए अनिवार्य है । तत्कालीन राजनीतिक दशा उन्होंने बहुत समीप से देखी थी । साम्राज्यबादी प्रवृत्ति के कारण स्वतन्त्र राज्यों का अस्तित्व ही समाप्त होता जा रहा है, जिसके मूल में है परिग्रही और भयात्मक प्रवृत्तियों की प्रबलता । समाज की इन परिस्थितियों के प्रभाव से मानव-मानव के बीच बहुत अन्तर आ गया है। कैसे होगा मेरी सात्रता एवं ज्ञान का इन सबके कल्याण में उपयोग ? मेरे पूर्व इतने तीर्थकर हुए हैं। प्रत्येक ने जनहित के लिए कुछ ल कुछ प्रयत्न किये हैं। किन्तु मेरे समय की स्थिति बिकट है। अतः मुझे निश्चित रूप से कुछ नया करना होगा । भले उसकी साधना में यह जीवन लगा देना पड़े । मुझे अब इन सब व्यवधानों के भागे निकलना होगा और लगना होगा माश्मशुद्धि की दिशा में एकाग्र हो । तभी यह उपलब्ध हो सकेगा, जिससे स्वयं मुझे और इस प्रशांत जगत् को अपना लक्ष्य प्राप्त होगा । इस प्रकार महावीर के मन में वैराग्य की तरंगें चंचल हो उठी थीं। उनके उफान से सासारिक बन्धनों का किनारा डहने हो बाला था ।' 'प्रायः महापुरुष जगत् की आवश्यकता हुआ करते हैं। इसलिए जगत् की शक्तियां, बाताबरण जो चाहें सो उनसे कार्य करालें । वे स्वयं कुछ महां करने नहीं पाते। महावीर का वैराग्य जब इतना प्रबल हो गया तो लोकान्तिक देवों ने आकर उनसे प्रार्थना की -- प्रभो ! आपने इस संसार का कल्याल करने के लिए इस जन्म को धारण किया है। आपका मन स्वयं बीत रागत्तम की उपलब्धि हेतु संकल्पित है । अतः आप अपनी साथमा और ज्ञान ३८ चितेरों के महावीर द्वारा जगत् को वह प्रकाश दें, जिसकी वह प्रतीक्षा कर रहा है। भाप स्वयं कारुणिक हैं। प्रापका अभिनिष्क्रमण अब निकट ही है ।' देवों को इस प्रकार की बन्दना मे महावीर साधना में प्रवृत्त होने के लिए और प्रातुर हो गये। उनके इम सकल्प का समाचार इन्द्र को प्रवधिज्ञान से प्राप्त हुआ। वह महावोर की जन्मभूमि कुण्डलग्राम में या पहुँचा तथा भनेक उत्सवों एवं प्रायोजनों को हर्षपूर्वक सम्पन्न करने लगा। महावीर अपने अभिनिष्क्रमण के प्रति जितने ही मौन थे, उतनी ही वैशाली के घर-घर में उसकी चर्चा होने लगी। परिपक्व बुद्धि के लोग वर्धमान के इम संकल्प को प्रशंसा में व्यस्त थे । वे सिद्धार्थ और माता त्रिशला को ऐसे सुपुत्र की प्राप्ति के लिए धन्य समझ रहे थे। कुछ ढलती उमर के लोग चिंतित थे कि देखो, इस बुढ़ापे में सिद्धार्थ को पुत्र से कोई सहारा न मिला। बच्चों को पता नहीं था कि यह क्या हो रहा है ? किन्तु वे खुश थे कि देखो कितने उत्सव हो रहे हैं। किशोरवय के लोगों को महावीर से स्पर्धा हो रही थी। कितना तेजस्वी है इसका स्वरूप, इसको कान्तिमयी देह ? किशोरियां फुस-फुसा रही थीं - - हाय ! हतभाग्या यशोदा ? ऐसा जीवनसाथी हाथ से निकल गया। इनके ये वन जाने के दिन हैं ? प्रौढ़ा महावीर से एक बात करने को तरस गयीं। इतने दिन ये राजभवन में बन्द रहे और अब निकलेगे तो मौन हो जायेंगे। माताएं, जननी त्रिशला के दुख की कल्पना कर रही थीं । जितने लोग, उतनी ही बातें । यह तो नगर की स्थिति थी। राजभवन की तो बात ही मत पूछो । एक विषाद-सा छा गया था। जिसे देखो वही चुप इशारों का साम्राज्य हो गया था। जैसे इस सबसे महावीर रुक जायेंगे। परिजनों ने जाना ही नही था कि वर्षमान की उन्होंने कोई सेवा की है। परिचारिकाएं अपनी-अपनी कलाए भूलने लगीं थीं। महावीर ने कोई अवसर ही नहीं दिया उन्हें अपनी माज्ञापालन करने का ! और सब यह व्यक्ति हमेशा के लिए चना जायेगा। सभी हैरान थे। निश्चिन्त थे तो मात्र सिद्धार्थ । उनके समक्ष स्वप्नमाला अब साकार हो रही थी। उन्होंने सोचा--'बर्धमान अपने लक्ष्य पर ही जा रहा है। वह मुझसे अच्छी तरह जानता है कि उसे क्या करना है। वह प्रशा और अनुभव चितेरों के महावार ३९ में मुझमे बडा है। दिनोंदिन भीर बड़ा होगा। किसी पिता का इससे बड़ा और क्या सोभाग्य होगा कि उसका पुत्र उससे श्रेष्ठ निकला। झात्मकल्याण का माग प्रशस्त हो ।' यह कहते हुए प्राचार्य कश्यप का गला रुंघ भाया । क्षण भर विराम के लिए वे रुके । तभी कनकप्रभा ने पूछ लिया -- गुरुदेव ! माता त्रिशला को इस समय कैसा लगा ? 'प्रायुष्मति ! तुम इसकी कल्पना अच्छी तरह कर सकोगी कि एक नारी को प्राणों से प्रिथ पुत्र के विछोह का दुख कितना हुआ होगा ? मां त्रिशला ने जैसे ही वर्षमान के इस प्राध्यात्मिक प्रयाण का समाचार सुना, उनको ममता बावली हो उठो । प्रारण सकट में फस गये । वे सोचने लग-- 'यही दिन देखने के लिए मैंने वर्धमान को जन्म दिया था ? उसे जन्में उन्तीस वर्ष हो गये । मैंन उसके कोमल चरणों के नीचे धूल नहीं लगने दी। बही प्रब बीहड़ पर्वतों में घूमेगा ? मेघ गरजते थे तो में भवन के सारे वातायन बन्द करा देती थी कि मेरा लाड़ला कहीं गर्जन से डर न जाये । वह अब सिहों कीं गजना मौर हाथियों की चिहाड़ को सुनता फिरेगा ? कैसे सहेगा वह मूसलधार वर्षा, पत्थर गला देने वाली ठंड और भस्म कर देने वाली प्रचड गर्मी ? यहां तो वह दस बार मनाने पर नाममात्र को भोजन करता था, वहां क्या खायेगा जंगलों मे ?" इन सब पाशंकामों से रानी त्रिशला का रोम-रोम काप उठा । वात्सल्य को तीव्रता से वे मूछित हो गयीं । परिचारिकामों के उपचार के बाद जब वे सचेत हुई तो मूर्छा के साथ उनका वात्सल्य-मोह भी टूटने लगा। उन्हें पति सिद्धाय द्वारा कथित स्वप्नों के परिणाम याद आने लगे। उन्होंने वर्धमान को प्रात्मकल्याण का पथिक और धर्म प्रवर्तक होना बतलाया था। अतः यह कुछ अनहोनी नहीं है। इस विचार के प्राते हो वे वर्धमान के जन्म से अपने को सार्थक मानने लगी । और उस सुपुत्र के दर्शन करने को लालायित हो उठीं, जो उनसे जन्म लेकर भी अब उनका नहीं था। वहां उपस्थित देवों ने भी माता त्रिशला को अपने बचनो द्वारा सान्त्वना दी और कहा- 'जगदम्बे ! प्राप एक लोकोद्धारक विभूति को जन्म देकर धन्य हो गयी हैं। वर्षमान तीर्थदूर हैं। वे सभी प्रकार के परिवहों को जीतने में समर्थ होते हैं । अतः प्राप उनके दुख की कल्पना से चितित न हों। बल्कि उन्हें प्राशीष दें कि वे अपने लक्ष्य की प्राप्ति में सफल हो ।' तभी वहां राजा सिद्धार्थ भी आ गये । प्रियकर बोले- 'हां' त्रिशले ! हमें श्रव यही करना चाहिए । चलो, से दृष्टि मिलते ही वर्धमान का जैसा हमने जन्मोत्सव मनाया था, जैसे ही उसके निष्क्रमगा की तैयारी करें ? मन मे ममता और प्रांखों में घिरे सावन-भादों वाली त्रिशला अब क्या उत्तर दे? वह सबके साथ चल दी । देवयोनि की सार्थकता इतनी है कि देवों को तीर्थंकरों के जीवन की महत्त्वपूर्ण घटनाओं में न केवल सम्मिलित होने अपितु विभिन्न उत्सवों का प्रायोजन करने का सौभाग्य भी प्राप्त होता है। वर्धमान का अभिनिष्क्रमण हुआ तो देव उसमें सबसे भागे थे। उन्होंने चन्द्रप्रभा नाम की पालकी सजायी । वर्धमान को वस्त्राभूषण पहनाकर उसमें बैठाया और गातेबजाते राजभवन से निकल पड़े। वे क्या निकले, सारा राजभवन ही सूना हो गया । राजकुटुम्ब, राज्याधिकारी, सम्भ्रान्त नागरिक, जिसने भी सुना वही उनके पीछे हो लिया । मार्गशीर्ष शुक्ला १०वीं (ई. पू. ५६६) के दिन का चौथा पहर कुम्डग्राम के लिए हर्ष और विषाद का प्रतीक बन गया । नागरिक भीड़ में सम्मिलित थे, किन्तु उनकी समझ में न आ रहा था कि वे अपने प्यारे राजकुमार के वनगमन, गृहत्याग पर दुखी हों अथवा मानव कल्याण जैसे कार्य के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले इस सपूत पर फूले न समायें ? थोड़ी ही देर बाद उनके मोह पर उनकी सद्बुद्धि की विजय हो चुकी थी और उनकी जयघोषो से सारा राजमार्ग गूंज उठा। उस क्षत्रिय कुण्डपुर के बाहर थोड़ी ही दूर पर 'ज्ञातखण्ड' नामक उद्यान था। चारों ओर हरा-भरा तथा पुष्प एव लताओं से रमणीक उसी के एक कोने में अशोकवृक्ष के नीचे वर्धमान की पालकी उतारी गयी । वह भूखण्ड वर्धमान के तेज से आलोकित हो उठा । बिम्बधुनों ने भारती उतारी । देवतामों ने उत्सवों से जंगल में मंगल कर दिया। बर्धमान अभी तक इस चितेरों के महावीर ४९ प्रायोजन में मौन भाव से सम्मिलित थे। जिसने जो कहा मो करते रहे । किन्तु उनका मन वीतरागता में ही लीन था। उद्यान में आते ही वे प्रमुदित मन से पालकी से उतरे औौर एक शिलाखण्ड पर, जिस पर स्वस्तिक अंकित था, बैठ गये । बिना किसी आकुलता के पल भर में साथ प्राये जनसमूह से उन्होंने बिहा लो और इस संसार के बन्धनों से मुक्त हो गये । देह की शोभास्वरूप जो भी उपकरण थे - वस्त्र, आभूषण, केश उन्हें क्रमशः उन्होंने उतार फेंका। पांच मुट्ठियों में भरकर उतारे गये सिर के केश मानों प्रतीक थे। उस कर्मकालिमा के, जो पांच व्रतों के पालन से क्रमशः धुल जाती है। वर्धमान का वस्त्र, माभूषणों से विमुक्त शरीर अपने असली स्वरूप में आकर मानों कह रहा था कि संसार की प्रत्येक वस्तु को तब तक जानने का प्रयत्न करो जब तक उस पर कोई प्रावरण शेष न रहे । इस प्रकार सिद्धों को नमस्कार कर उस शुभमुहूर्त में वर्षमान पद्मासन में प्रासीन हो गये । प्रात्मा की अनन्त गहराईयों में विचरण करने लगे । उन्हें देख लगता था जैसे उन्होंने प्रतीक्षित निधि पा ली है। जैसे कोई भात्मसिन्धु का तलस्पर्शी अन्वेषक उसको अतल गहराईयों से ज्ञान के मोती बटोर रहा हो । यह सब उस पद्मासन मुद्रा का हो प्रभाव था । भद्र ! तुम सब जानते हो मूर्तिकला और चित्रकला में इस पद्मासन मुद्रा को कितना महत्वपूर्ण स्थान मिला है। क्योंकि प्रात्मा से साक्षात्कार करने का यह प्रमुख साधन था। पौर महावीर की यात्रा इसके लिए ही थी ।' 'प्राचार्यप्रवर ! उस प्रात्म-प्रन्वेषक यात्री को सादर प्रणाम के साथ एक समाधान का आकांक्षी हूँ । क्या सचमुच इतने बड़े राजपाट, धन-गैभव, सुख-संपदा भौर स्नेही परिवार का त्याग उन्होंने पलभर में कर दिया था ? तनिक भी मोह नहीं हुआ उन्हें ? फिर भी उन्हें 'महावीर' तो कहा गया, 'महात्यागी' नहीं ? 'भद्र चित्रांगद ! तुम्हारा सोचना ठीक है। बिल्कुल गैसा ही, जैसा एक संसारी व्यक्ति सोच सकता है। महावीर को 'महात्यागी' नहीं कहा गया इसकाः गहरा कारण है। वास्तव में उन्होंने कुछ त्यागा हो नहीं । स्थागते तो वे हैं जिनके पास कुछ होता है। महावीर के चारों घोर जो कुछ ठोभव, सुखसम्पदा हमें दिखती है वह हमारे भोगी होने के कारण है। हम में उन सब सांसारिक वस्तुओं के संग्रह करने की लालसा है। इसलिए में बड़ी कीमती दिखती हैं। और लगता है कि जिन वस्तुओं की प्राप्ति के लिए हम मर मिटते हैं, उन्हें महावीर ने कैसे त्याग दिया ? यह हमारी दृष्टि का भ्रम है, जिसे महावीर कब का तोड़ चुके थे । 'महावीर दो कारणों से सांसारिक सम्पदा के स्वामी नहीं थे। प्रथम, दे निर्भय थे, अतः अपनी सुरक्षा के लिए उन्होंने किसी वस्तु का संग्रह नही किया। दूसरे वे यह भी जान चुके थे कि इन वस्तुओं की प्रात्मकल्याण के लिए कहीं कोई सार्थकता नहीं है । प्रतः ये मेरी नहीं हैं। यही भाव उनका परिवार के सदस्यों के प्रति था, राजभवन के प्रति था और जो भी उनसे अपने को सम्बन्धित मानता था उसके प्रति था । अतः जिस प्रकार हम रास्ते में मील के पत्थरों को छोड़ते हुए गन्तव्य की मोर बढ़ते जाते हैं उसी प्रकार वर्षमान इन सब वस्तुओं के बीच निस्पेक्ष भाव से गुजर गये। उनकी महावीरता भी किसी सर्प को पराजित करने अथवा कहीं पौरुष दिखलाने के कारण नहीं है, अपितु उन्होंने मानवमन की उन वृत्तियों को जीता है, जो प्रात्मकल्यारण के क्षेत्र मे पागे नहीं बढ़ने देती। प्रतः वे भोग को छोड़ने और त्याग को पकड़ने के कारण नहीं बल्कि दोनों स्थितियों में ग्रात्मस्वभाव के प्रति सजग बने रहने के कारण 'महावीर' है ।' 'भद्र श्रीकण्ठ ! कुछ दुविधा में दिखते हो । निःसंकोच चितन को गति दो ।' 'भाचार्यप्रवर ! भाप से क्या छिपा है ? महावीर वस्त्र त्यागकर दिगम्बर हो गये। पूर्ण अपरिग्रही होकर प्रात्मसाधना मे लीन । फिर भो उनके अनु. यापियों की एक परम्परा यह क्यों मानती है कि कुछ दिनो तक वे वस्त्र घारण किये रहे, भले वह देवताओं के द्वारा दिया गया हो ?' 'बहुत अध्ययन किया है श्रीकण्ठ तुमने । तुम निश्चित रूप से अपनी कला द्वारा मेरी कल्पना को साकार कर सकोगे। अभी जैसे मैंने कहा कि भोग में पगी दृष्टि ने महावीर को भी सम्पत्तिथाली मोर वैभवशाली मान लिया और चितेरों के महावीर ४३ फर उनका त्याग कराकर उन्हें प्रतिशय त्यागी स्वीकार कर लिया उसी प्रकार उन्हे निपट नग्न और सवस्त्र देखने वालों की भी अपनी दृष्टियां हैं। हो सकता है, जिन्होंने उन्हें उस अखण्ड व्यक्तित्व पर खडे हुए देखा हो, जहां उघाड़ने के लिए कुछ बचा ही न हो । सब कुछ स्वच्छ, निर्मल, आकाश सा । आत्मा अलग और शरीर अलग। अब शरीर को संभारने वाला रहा हो कौन ? अतः उन्हें महावीर की काया प्राकृतिक रूप में ही दिखायी पड़ेगी। और जिन लोगों की दृष्टि महावीर के व्यक्तित्व के विशेष गुणों के मूल्यांकन में ही तृप्त हो गयी होगो, उनकी आंख महावीर की नग्नता तक पहुंची हो न होगी । महावीर जैसा महापुरुष नग्न कैसे होगा ? प्रतः देवताघों द्वारा प्रदत्त वस्त्र का कथानक उनके साथ जुड़ जाना स्वाभाविक है । और जैसे-जैसे महावीर की साधना सघन हुई वह देवदूष्य भी उनसे विलग हो गया । वास्तव में महावीर किसी वस्तु को छोड़ने के प्रति चाग्रही नहीं रहे, क्योंकि उन्होंने किसी को पकड़ हो न रखा था। उनकी साधना में जब वस्त्र छूट गया जब भोजन छूट गया भोर जब स्वयं शरीर का ममत्व तिरोहित हो गया वे छोड़ते चले गये । यही उनकी अनासक्ति की पभिव्यक्ति है। अपरिग्रह का विस्तार ।' 'कहते हैं कि महावीर जैसे ही पद्मासन होकर ध्यानमुद्रा में लोन हुए तथा पूर्णरूपेण श्रामण्य-जीवन व्यतीत करने का संकल्प किया, उन्हें मनःपर्यंय ज्ञान की प्राप्ति हो गयी। ऐसा ज्ञान, जिसके द्वारा दूसरे के अन्तःकरण के हलन-चलन को भी जाना जा सके। यह संकेत था, उम केवलज्ञान रूपी प्रकाश के प्रति समर्पित होने का, जिसको उपलब्धि के लिए वर्धमान इस यात्रा पर निकल पड़े थे । धार्मिक जगत् में प्रात्मोपलब्धि के लिए प्रारम्भ की गयी यह मनोखी यात्रा थी ।' 'प्राचार्यप्रवर ! एक अनुरोध है मेरा । भाज कथा को अब यहीं विराम दे दें । मेरा मन वर्षमान के साथ इस गुहा, इस उपत्यका से अभिनिष्क्रमण कर गया है। शायद इन कलाकार बन्धुओ का भी । हमे भी वैशाली के नागरिकों, त्रिशला, सिद्धार्थ और राजभवन के उस विषाद मिश्रित हर्ष में सम्मिलित होन दें, जिसे रगों के माध्यम से हमें इन दीवालों पर मकित करना है। और फिर श्राप भी तो क्लान्त हुए होंगे गुरुदेव ! चलकर वेतवा के किनारे तक घूम ४४ चितेरों के महावीर मायें ।' 'भद्र' कनकप्रथा ! तुम ठीक कहती हो । चौदह सौ वर्ष पूर्व हुए महावीर के अभिनिष्क्रमण से ग्राज यह वनखण्ड मुझे सूना लगता है। अद्भुत था वह महापुरुष, जो वातावरण में इतना संजोया हुआ है।' क्षणभर बाद वह गुहा सिद्धार्थ के राजभवन-सी नीरव हो गयी । कुण्डग्राम के राजमार्गों-सी सुनी। ७. अभिव्यक्ति की खोज प्राज शिल्पी संघ गुहा के द्वार से थोड़ा हटकर एक मनोरम मैदान में एकत्र हुआ था । प्रातकाल की कुनकुनी धूप सब के वदन सेंक रही थी । मैदान के एक छोर पर बडी शिला पर प्राचार्य कश्यप विराजमान थे । लगता था- गुहारूपी राजभवन से अभिनिष्क्रमण कर स्वयं महावीर इस वनखण्ड में ध्यानस्थ हो गये हैं । और अपने तपस्वी जीवन की, सत्य को प्रकाशित करने के माध्यम खोजने की कथा स्वयं कह रहे हैं 'कलाकार मित्रों ! भगवान महावीर तीस वर्ष की अवस्था में अब उस यात्रा पर निकल पड़े थे, जहां से उन्हें ऐसी शक्ति प्राप्त करनी थी कि वे अपनी सत्य की अनुभूति को जनमानस तक पहुंचा सकें । अतः इस यात्रा में वे इतने घूमे-फिरे कि छोटे से छोटा और बड़े से बड़ा व्यक्ति उनके सम्पर्क में आया । तरह-तरह के अनुभव उन्हें हुए । अनेक कष्टों को उन्होंने सहा । किन्तु यह सब कुछ उनके लिए कर्मों की निजंरा का माध्यम था । इन सब घटनाओं के प्रति वे कृतज्ञ थे कि उन्होंने कर्मक्षय का उन्हें अवसर प्रदान किया। और उसकी उपलब्धि में सहयोग, जिसके माध्यम वे जगत् को अन्धकार से प्रकाश में ला सके । महावीर केवलज्ञान प्राप्ति के पूर्व लगभग १२ वर्षों तक तपश्चर्या करते रहे । इस अवधि का सम्पूर्ण इतिहास किसी एक ग्रन्थ में उपलब्ध नहीं है । हो भी नहीं सकता था, क्योंकि ये सब अनुभव महावीर के निजी थे । किन्तु कुछ घटनाओं के आधार पर, कुछ संकेतों की व्याख्या स्वरूप उनके इस जीवन को क्रमबद्ध रूप में उपस्थित किया जा सकता है। यहां भी दोनों परम्पराओं में प्रचलित मान्यताओं का महारा लेना पड़ेगा। उन तथ्यों का जो सत्य के द्वार तक पहुंचने में सहायक होंगे। एक बात और ध्यातव्य है कि महावीर के इस तपस्वी जीवन में जिन ग्रामों, नगरों, जनपदों व व्यक्तियों के नाम परम्परा से प्राप्त होते हैं, उन सभी को ऐतिहासिक सिद्ध नहीं किया जा सकता और ४६ चितेरों के महावीर न आज इतने समय बाद उनकी पहिचान ही की जा सकती है। इतना अवश्य है, संयोग से कुछ का अस्तित्व अभी भी मिल जाय। दूसरे, यह सब आवश्यक भी नहीं लगता। क्योंकि हमारा उद्देश्य महावीर के जीवन के उन सूत्रों को पकड़ना है, जिनसे जीवन में प्रकाश की सम्भावना है। वे कहां से प्राप्त हुए उन स्थितियों को समझना है। उनकी प्रामाणिकता पर विचार करना इतिहासज्ञों का कार्य है। इस प्राथमिक के साथ ही मैं आगे की कथा कह सकूँगा - 'एक मुहूर्त दिन शेष रहते महावीर उस वनखण्ड से निकल कर कमरिग्राम पहुंचे और वहीं रात्रि व्यतीत करने के विचार से ध्यान में खड़े हो गये । वे साधना में लीन थे अतः पूर्ण रूप से जाग्रत । उन्हें नींद लेने की आवश्यकता ही नहीं पड़ी। कहते हैं, उसी दिन सांयकाल किसी एक ग्वाले ने अपने बैलों की रक्षा का भार उन्हें सौंप दिया और वह कहीं कार्य से चला गया । लौटने पर उसे जब वहां बैल नहीं मिले तो उसने महावीर से पूछा । महावीर ध्यान में मौन थे । अतः उनके मौन के कारण उस ग्वाले का मन महावीर के प्रति शंका से भर गया। उसने बहुत से पाखण्डियों को इस प्रकार का कार्य करते देखा था । अतः वह खिन्न हो उन्हें रस्सी से मारने को प्रवत्त हुआ । तभी इस घटना के साक्षी इन्द्र ने उसे रोक लिया और महावीर का परिचय देकर उसे वहां से विदा किया। तदनन्तर इन्द्र ने महावीर से भी प्रार्थना की कि आपको इस साधनाकाल में अनेक कष्ट झेलने होंगे। अतः मुझे आप अपनी सेवा में रहने की आज्ञा दीजिए ताकि आपको ज्ञान की उपलब्धि निर्विघ्न हो सके । किन्तु तपस्वी महावीर ने इन्द्र को यह कह कर विदा कर दिया कि मर्हन्त अपने पुरुषार्थ और बल से ही केवल ज्ञान की स्थिति को प्राप्त होते हैं, किसी के सहारे नहीं । अतः मैं अंकेला ही साधनापथ में विचरण करूंगा । प्रातःकाल वहां से चल कर महावीर 'कोल्लाग' सन्निवेश में पहुंचे, जहां उन्होंने 'बहुल' ब्राह्मण के यहां क्षीरान से प्रथम पारणा की। वहां से विहार कर वे मोराक सन्निवेश में पहुंचे। वहां एक प्राश्रम के कुलपति ने उन्हें अपने यहां ठहरने का निमन्त्रण दिया। किन्तु महावीर वर्षावास में वहां पुनः पाने की बात कहकर आगे चल दिये । विभिन्न स्थानों में उन्होंने शिशिर चितेरों के महावीर ४७ और ग्रीष्म ऋतु में साधना की तथा वर्षा के प्रारम्भ होते ही वे पुनः उस ग्राश्रम में लौट आये । किन्तु कुछ समय व्यतीत होने पर ही उन्हें लगा कि प्राश्रम का वातावरण उनके अनुकूल नहीं है। प्रतः वे वहां से भी चल पड़े और शेष प्रथम वर्षाकाल उन्होंने अस्थिक ग्राम में पूरा किया । अस्थिक ग्राम का प्रथम वर्षावास भगवान महावीर के तापस जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यहां रहते हुए उन्होंने आगामी भ्रमण के सम्बन्ध में कुछ निर्णय लिये । ऐसे स्थानों पर ठहरने का निश्चय किया जहां ध्यान में बाघा न पढे । महावीर ने मौन रहना ही श्रेयस्कर समझा, क्योंकि लोग तरह-तरह के प्रश्न पूछकर उन्हें परेशान कर सकते थे। प्रश्नों का समाधान करना सरल था, किन्तु इससे प्रात्मध्यान में बाधा पड़ती थी । गृहस्थों से कोई विशेष सम्बन्ध न रखने का उन्होंने प्रयत्न किया । कहा जाता है कि इसी ग्राम के परिसर में शूलपाणि नामक व्यन्तर का एक चैत्य था। महावीर जब उसमें ठहरने के लिए गये तो ग्रामवासियों ने उस व्यन्तर देव की भयानकता और क्रूरता से उन्हें परिचित कराया। किन्तु वे उनकी आज्ञा लेकर उसी चैत्य के एक कोने में ध्यान लगाकर खड़े हो गये । शूलपारिग ने महावीर की इस निर्भयता को अपना अपमान समझा और सांझ होते ही उसने अपने पराक्रम दिखाना प्रारम्भ कर दिये । भयंकर हाथी, पिशाच एवं विषधर नाग आदि के नाना रूप धारण कर वह देव उन्हें रात्रि भर कष्ट देता रहा । महावीर का तन आहत हो गया, किन्तु मन से वे पूर्ववत् ध्यान में मग्न रहे । फलस्वरूप शूलपाणि का हृदय परिवर्तित हो गया । उसको क्रूरता विदा हो गयी । ग्रामवासी इस घटना को देखकर महावीर की साधनां के प्रति श्रद्धा से भर उठे । मार्गशीर्ष कृष्णा प्रतिपदा को महावीर ने अस्थिक ग्राम से वाचाला की तरफ विहार किया। वाचाला जाने के लिए कनकखल प्राश्रम पद से होकर जाना पड़ता था । भगवान महावीर जिस दृष्टिविष सर्प रहता था, जिसके नेत्रों से यद्यपि गांव के ग्वालों ने महावीर को इस रास्ते से जाने को रोका था, किन्तु प्रभय और करुणा के धारक वर्धमान को इसकी क्या चिन्ता ? वे उसी मार्ग ४८ चितेरों के महावीर में एक देवालय के समीप ध्यानारूढ़ हो गये। सांयकाल जब सर्प अपने निवास स्थान पर लौटा तो इस निर्जन प्रदेश में एक मानव को देखकर शंकित हो उठा । उसने अनेक बार अपनी विषभरी दृष्टि से महावीर को भस्म करना चाहा । किन्तु जब सफल न हुआ तो उन पर झपट कर उसने उनके पैर के अंगूठे में काट खाया । उसके आश्चर्य की सीमा न रही जब उसने देखा कि महावीर के पैर से खून की जगह दूध निकल रहा है। जैसे ही उसने महावीर से दृष्टि मिलायी उसे सुनायी पड़ा - समझ चण्डकौशिक ! समझ ।' यह नाम सुनते ही उस दृष्टिविष सर्प का सब क्रोध जाता रहा । उसे अपने पूर्वजन्म का स्मरण हो माया, जिसमें वह किसी आश्रम का कुलपति था और अपने कर्मों के कारण इस रूप में जी रहा था । उसने महावीर के समक्ष प्रायश्चित किया और कुछ दिनों पश्चात् देह छोड़कर स्वर्ग में देव हो गया । महावीर के साथ घटित इन प्रसंगों की अपनी अर्थवत्ता है। ऐसा लगता कि महावीर की साधना का स्वरूप इतना अनोखा था कि उन्हें उस युग में पहिचानना कठिन हो गया था। तत्कालीन सभी धार्मिक विचारक किसी न किसी मत के प्रतिपादक थे। उन्होंने कुछ निश्चित चिन्ह पकड़ रखे थे । जो उनके अनुयायी थे वे उनकी सेवा करते थे और जो नहीं थे, वे किनारा काटकर अलग हो जाते थे। किन्तु महावीर के साथ यह दिक्कत थी । वे इतने वीतरागी हो गये थे कि साधारण लोग उनसे निकटता का अनुभव नहीं कर पाते थे । न तो ये किसी को मुख-सम्पदा की प्राप्ति कराते थे और न ही उनके कष्टों का प्रत्यक्ष निवारण करते थे। यही कारण है कि उन्हें अपरिचित- सा जानकर कभी कोई सता लेता था । कभी कोई प्रणाम कर लेता था । तपश्चर्या के इस साधनाकाल में महावीर ने जो कठिन से कठिन रास्ता चुना है तथा लोगों के मना करने पर उन्हीं स्थानों पर रात्रि में ठहरे हैं, जहां किसी न किसी विघ्न की सम्भावना थी इसमें भी एक गहरा कारण है । वे यह जान लेना चाहते थे कि उनकी आत्मा प्रतिकूल परिस्थितियों में भी कितनी जागी हुई है ? उनके सम्पर्क में आने वाली ऐसी आत्मामों पर उसका क्या प्रभाव पड़ता है ? साथ ही इन कथा प्रसंगों से महावीर के आन्तरिक गुणों को भी ग्रहण करने में सुगमता होती है। सांप के काटने पर उनके चितेरों के महावीर ४ पैर से निकलना चमeकार भले लगे, अतिशयोक्ति भी, किन्तु वह इस बात का प्रमाण है कि महावीर में जीवों के प्रति अगाध ममत्व के भाव है। उनके साथ कोई कुछ भी करे, महावीर का प्रत्युत्तर करुणा ही होगा। महावीर की साधना के इस दूसरे वर्ष की प्रमुख घटना है-मक्खलिपुत्रं गोशालक का उनके साथ सम्बन्ध होना। कहा जाता है कि विहार करते हुए जब महावीर राजगिरि पहुंचे और पास के उपनगर नालन्दा में एक तन्तुवाय शाला में वर्षावास किया तो उसी समय वहीं पर गोशालक नामक एक मेख जातीय युवा भिक्षु भी ठहरा हुआ था। महावीर के तप, ध्यान और माचरणं आदि से गोशालक बहुत प्रभावित हुआ और उसने महावीर के शिष्य होने का निश्चय किया। किन्तु महावीर ने इसका कोई तत्काल उत्तर नहीं दिया। गोशालक निरन्तर उनके साथ लगा रहा । एक बार कार्तिक पूर्णिमा का दिन था । भिक्षा-चर्या को जाते हुए गौशालक ने महावीर से पूछा- 'ग्राज मुझे भिक्षा में क्या मिलेगा ?" उन्होंने उत्तर दिया- 'कोदों के नन्दुल, छाछ और कूट रुपया ।' गोशालक महावीर की इस भविष्यवाणी को मिथ्या प्रमाणित करने के लिए उस दिन धनाड्य लोगों के यहाँ ही भिक्षार्थ गया। किन्तु वहां कुछ प्राप्त न कर सका । मन्त में एक कर्मकार ने उसे भिक्षा में वही दिया जो महावीर ने कहा था । इस घटना का गोशालक पर बड़ा प्रभाव पड़ा। वह सोंचने लगा वही होता है जो पहले से निश्चित होता है। इस प्रकार वह नियतिवादी हो गया। अपने इस विचार को और अधिक पुष्ट करने के लिए वह भाजीवकों के उपकरण छोड़कर महावीर का शिष्य बन गया और निरन्तर उनसे इस प्रकार के प्रश्न पूछना रहा । नालन्दा से बिहार कर महावीर अपनी साधना के तीसरे और चौथे वर्ष में कोल्लाग सन्निवेश, सुवर्णखल, ब्राह्मणगांव, चम्पा, कलायसंनिवेश कुमारा, चोरात एवं कपंगला आादि अनेक स्थानों पर भ्रमण करते रहे। गोशालक उनके साथ बना रहा। कभी वह पार्श्व परम्पन के मुनियों से विवाद लेता तो कभी वैदिक परम्परा के साधुओं से । किन्तु महावीर उसे हमेशा समझाते रहते और आत्मध्यान का उपदेश देते थे। इस प्रकार के भ्रमण में महावीर को अनेक कष्ट झेलने पड़े। कभी उन्हें कोई गुप्तचर समझकर पकड़ लेता तो कभी वे डाकुओं से घिर जाते । किन्तु महावीर कहीं प्रतिरोध न करते। उनकी इस मध्यस्थ वृत्ति के कारण एक ओर जहाँ तत्कालीन तपस्वियों को ईर्षा होती, वहीं दूसरी भोर महावीर की साधना में श्रद्धा रखने वाले व्यक्तियों की भी संख्या बढ़ती जा रही थी। कभी-कभार महावीर के पिता सिद्धार्थ के मित्र या परिचित लोग भी उनको मिल जाते। वे उनकी इस अपूर्व साधना को देखकर सिद्धार्थ के भाग्य को सराहने लगते । महावीर ने अपने कष्ट निवारण के लिए किसी की सहायता नहीं ली। इसका भी एक कारण है। महावीर यह जानते थे कि जिस किसी के द्वारा मेरा शरीर सताया जाता है या जो मुझे उपसर्ग पहुंचाने का प्रयत्न करते हैं, ने भने अपनी हानि कर रहे हों, किन्तु मेरा भला कर रहे हैं। उनके निमित्त से मेरे कर्मों की निर्जरा हो रही है। इस बात का गहन दर्शन है। यदि कोई किसी को सता रहा हो तो ऊपर से तो लगेगा कि वह व्यक्ति दुष्ट है। गलत काम कर रहा है। किन्तु इससे सताये जाने वाला उपकृत हो रहा है। उसके प्रति अपने कर्मों से प्रऋरण हो रहा है। शायद यही कारण है कि एक दो प्रसंगों को छोड़कर महावीर ने अपने जीवन में शारीरिक दृष्टि से किसी की सहायता नहीं की। भले उनके अन्तस् की करुणा इससे अधिक कार्य करती रही हो। किन्तु इस गहराई का चिन्तन तभी भ्रा सकता है, जब व्यक्ति अपने पूर्वजन्मों की श्रृंखला में जागृत होकर उतरे। महावीर ने अपनी साधना में इसी का प्रयत्न किया है। अनार्य देश राढभूमि में विचरण कर महावीर ने अनार्य लोगों की अवहेलना, निन्दा, खर्चना और ताड़ना आदि को अनेक बार सहा । वे यदि किसी घर के बरामदे में रात्रि में खड़े होकर ध्यान करने लगते तो लोग उन्हें बोर समझकर भगा देते। वे जब भिक्षा लेने किसी द्वार पर पहुंचते तो दूसरे धर्म के साधु व भिखमंगे उन्हें धक्का देकर भागे सरका देते। किसी सराय यादि में यदि वे विभाग के लिए रुकते तो उनके कान्तिमय शरीर और तारुण्य की लालची स्त्रियां उन्हें परेशान करने लगतीं। किन्तु महावीर इन सबकी उपेक्षा करते चितेरों के महावीर ५१ रहे। उन्हें मात्र अपना लक्ष्य दिखता था, मार्ग के कंटक, कंकड़ नहीं इसीलिए वे बागे बढ़ते रहे । साधना के छठे वर्ष में कूपिय ग्राम मे कंसाली की ओर जाने के लिए महावीर ने जब विहार किया तो गोशालक ने साथ चलने के लिए मना कर दिया। उसने कहा - 'आपके साथ रहते हुए मुझे बहुत कष्ट उठाने पड़ते आप समर्थ होते हुए भी मेरी सहायता नहीं करते। इसलिए आपके साथ अब मैं नहीं चलूंगा।' महावीर मौन रहते हुए भागे बड़ गये । शालिशीर्ष ग्राम के उद्यान में कटपूतना नामक ब्यम्वरी ने महावीर पर चोर उपसर्ग किया। महावीर ध्यान से विचलित नहीं हुए। प्रतः उनकी मनःस्थिति क्रमशः इतनी विकसित हुई कि उन्हें उसी समय 'लोकावधि' नाम का ज्ञान प्राप्त हो गया, जिससे वे लोक के समस्त द्रव्यों को साझाङ जानने और देखने लगे। यहां से महावीर भद्दिया की ओर प्रस्थान कर गये । भदिया के चातुर्मास में ६ माह तक इधर-उधर घूमकर गोशालक फिर प्राकर महावीर के साथ हो गया किन्तु अभी तक उसने अपनी नियतिवादी विचारधारा को नहीं छोड़ा था। कहा जाता है कि एक बार महाबीर सिद्धार्थपुर से कर्मग्रान जा रहे यहाँ वैश्यामन नामक एक तापस से मोशालक का मतभेद हो गया। अतः उत सापस ने तेजोलेश्या छोड़कर उसे भस्म करना चाहा। तब महावीर ने तुरन्त शीतलेश्मा छोड़कर गोबालक को बचाया । तेजोलेश्या के प्रभाव से गोशालक बहुत प्रभावित हुआ और उसने महावीर से उसे प्राप्त करने की विधि पूछ ली। कुछ समय बाद, महावीर की साधना के बसवें वर्ष में वह उनसे प्रथम हो गया। छः माह तक रूप, भातापना आदि करके उसने तेजोलेश्या प्राप्त की, फिर निमित्तशास्त्र पढ़ा। और इस प्रकार असाधारण शक्तियों का चार होकर वह भाजीविक सम्प्रदाय का स्वर्ग तीर्थकर बन गया । इधर महावीर विभिन्न प्रकार के ध्यान करते हुए भावस्ती पहुंके यहाँ उन्होंने अपना दसवां वर्षावास किया। श्रावस्ती से कौसाम्बी वाराणसी, राजगिरि, मिथिला बादि नवरों में बिहार करते हुए महावीर पुनः भाये जहां उन्होंने साथवा का ग्यारहवां वर्ष पूरा किया ? :८. जगत् के प्रति समर्परण यहां तक की कथा कहकर आचार्य कश्यप क्षरण भर के लिए रुके। वे कथा का सूत्र पकडना ही चाहते थे कि एक जिज्ञासु कलाकार पूछ बैठाआचार्यप्रवर ! आपने महावीर की साधना का विस्तार से वर्णन किया । वे कितना घूमे-फिरे यह भी बतलाया । किन्तु गुरुदेव ! महावीर को तो ! प्रात्मसाधना करनी थी। एक स्थान पर ध्यानस्थ होकर भी तो वे ज्ञान प्राप्त कर सकते थे। तब इतना भ्रमण किसलिए ? प्राचार्य प्रश्न सुनकर थोडा मुस्कुराये । श्रोताओं पर दृष्टि डालते हुए वे समाधान की मुद्रा में हो गये -- 'भद्र सागरदत्त ! तुमने प्रथम प्रश्न पूछा । किन्तु बहुत ही महत्वपूर्ण सामान्य सी बात है, महावीर क्षत्रिय थे। राजा दिग्विजय करते ही हैं। अतः उन्होंने भी सोचा-मैं पदयात्रा द्वारा ही दिग्विजय लूं । हैन सही बान ?" मारा शिल्पीसब समाधान की सरलता का अनुभव करते ही एक-दूसरे की ओर देखते हुए इसने लगा । प्रश्नकर्ता को दुविधा में पड़ने का अधिक अवसर प्राचार्य ने नहीं दिया। वे गम्भीरता पर उतर भाये'नही भद्र ! केवल ऐसा नहीं था। महावीर जैसी आत्माएँ कोई कार्य निरर्थक और सासारिक दृष्टि से नहीं करती हैं। महावीर के निरन्तर बारह वर्षो तक घूमते रहने और देश के इस छोर से उस छोर तक के लोगों के बीच विचरने का एक दूसरा कारण था। इसलिए मैं कहता हूँ कि उन्होंने अपना घर नही त्यागा था, केवल उसके विस्तार को वे समझ गये । यह भवन, यह नगर, यह भूखण्ड, प्रदेश, देश कुछ भी उनका नहीं है, ऐसा कहना तभी सम्भव जब सारी धरती ही उनकी हो । जैसे कोई मकान मालिक भवन, बरामदे, प्रवेश कक्ष, शयनगृह, रसगृह आदि में से किसी एक को पकड़कर नहीं बैठ जाता, बल्कि पूरे भवन को अपना सानता है। उसी प्रकार महाजीद अपनी साधना में यह देखने निकले थे कि उनकी आत्मा का विस्तार कहां तक है इस चिंतेरों के महावीर ४३ धरती के कितने भूभाग ने उनके अस्तित्व को स्वीकार किया है ? 'वास्तव में महावीर का अमरण जीवन की व्याल्या का सजीव रूप वा लोगों को प्रासकि और मोह समझ में या जाय, इसलिए वे पूर्ण मनालकी और निर्मोही होकर घूमे। उनके द्वारा विभिन्न कष्टों को सहना और मौन रहना इस बात की उद्घोषणा करता था कि जो कष्ट पा रहा है वह कुछ और हैं, तथा जो शान्तखडा मानन्दित हो रहा है वह कोई और है। जीक सजीव के इस भेदविज्ञान की मूक व्याख्या करने हो महावीर विचरण करते रहे । उनके बिचरण से ही यह पता चलता है कि सद् एवं असद्वृत्तियों का कहां टकराव होता है तथा असद् की पराजय और सद् की विजय के मूल में क्या कारण हैं ? अतः महावीर की बिहार-यात्रा एक संसार है। स्वयं महावीर जीव के प्रतीक । उनको कष्टों में डालने वाले प्रसवृत्तियों के प्रतिरूप तथा इन सब स्थितियों में भी परम ज्ञान की उपलब्धि कर लेना मात्मा की पूर्णमुक्ति की सम्भावना का द्योतक है।' 'सुरुदेव ! सुन्दर व्याख्या की अापने महावीर की साधनामय यात्रा की। जितना जीवित प्रश्न उतना ही सशक्त समाधान। इस बातावरण में मेरा मन् भी तर्क पर उतर पाया। क्षमा करें प्राचार्य ! महावीर अपने इस साधना काल में अनेक बार वैशाली आये होंगे। अपनी जन्मभूमि के समीष । क्या कभी उनकी अपने माता-पिता से भेट हुई ? और यदि हुई तो क्या अनुभव किया होगा ममतामयी त्रिशला ने, ज्ञानी सिद्धार्थ ने और स्वयं महाबीर मे ?" 'आयुष्मत्ति कनकप्रभा ! तुम्हारे भावपुर्ण चेहरे से लग रहा है कि तुम उम्र दृश्य से गुजर रही हो जब भगवान बुद्ध अपनी जन्मभूमि में घाये थे। से उनके पिता पत्नी मशोधरा एवं पुत्र राहुल ने उनको अगवानी की बी कितना मर्शमक था वह दृश्य, जब पुत्र राहुल मां के कहने पर अपने पिता से दाम मांग रहा था । इसके उत्तर में बुद्ध ने उसे प्रभावित कर लिया था अपने संघ में । दुखहारी यशोधरा एक बार फिर चली गई थी ? देवी कनकप्रभा ! भगवान महावीर ने ऐसा कुछ नहीं किया। एक बार जिन बन्धनों से अपने को मुक्त क्रिया को किसर 1. महाकीर की याचा निरंतर मागे बढ़ने की कीली चायें होंगेः उन्हें कुछ ऐसा नहीं लगा कि उनका कोई भर भी है। माता-पिता अपवा स्वजन भी हैं। वे इन सम्बन्धों से ऊपर उठ चुके थे। जहां तक उनके मातापिता की अनुभूति का प्रश्न है, हो सकता है यदि ममता का बन्धन अधिक प्रबल रहा होगा तो वे महावीर के दर्शन करने गये हों। किन्तु इतिहास इस सम्बन्ध में मौन है। एक सम्भावना यह भी लगती है कि महावीर के मातापिता पार्श्वनाथ की परम्परा के अनुयायी थे और अभी तक महावीर के धर्म का कोई स्वरूप स्पष्ट नहीं हो सका था । भतः उनकी भोर इनका कोई झुकाव ही न रहा हो । धार्मिक मामले में उस युग में अधिक कहरता का पालन होता था। श्रीकन्ठ ! तुम्हें तो मालूम है, सम्भवतः इन्हीं प्रश्नों के कारण एक परम्परा में महावीर के अभिनिष्क्रमण के पूर्व ही उनके माता-पिता की मृत्यु स्वीकार की गई है।' 'आचार्य ! क्षमा करें व्यवधान के लिए। मुझे लगता है, हम तथ्यों की पकड़ मजबूत कर रहे हैं। इससे सत्य की व्याख्या मधूरी रह जावेगी। आपने महावीर की साधना की अभी विस्तार से बात की। अनेक उपसर्गों को उन्होंने सहा, रात्रि में वे सोये नहीं तथा भोजन भी बहुत ही कम उन्होंने किया, इत्यादि । किन्तु गुरुदेव ! मात्र इतने के लिए तो महावीर का निष्क्रमण नहीं हुया होगा ? वे ध्यान के द्वारा क्या उपलब्ध कराना चाहते थे, क्या उन्हें मिला ? मैं जानना चाहता हूं।' 'प्रिय चित्रांगद ! तुम्हारी प्रशा के अनुकुल है यह प्रश्न । महावीर निश्चय ही किसी अनुपम शक्ति, अलौकिक ज्ञान की खोज में निकले थे। हम प्रायः अपनी शक्ति और ज्ञान के पैमानों से नाप कर उनके व्यक्तित्व को छोटा कर देते हैं। कहते हैं-~महावीर अहिंसक थे, त्यागी थे, क्षमावान थे आदि-आदि । ये गुण हमारे लिए महत्व के हैं। महावीर जैसी बात्मा तो इनसे ऊपर उठ चुकी थी । अतः उनकी बारह वर्षों की साधना कोष और क्षमा, हिंसा और महिसा, त्याग और भोग बादि जैसे तुम्दों से मुक्त होने की थी । वे दोनों स्थितियों में दृष्टा होने का प्रयत्न कर रहे थे। और वे इतने बीतरागी हो जाते थे कि शरीर की सामान्य क्रियाओं की उन्हें आवश्यकता ही अनुभव नहीं होती थी इसलिए वे निद्रा न लेते थे। भोजन न करते थे। फिर भी उनका शरीर कान्तिमम एवं स्वस्थ बना रहा। यह भौतिक आवश्यकताओं को कम करने का सबसे बड़ा उदाहरण था। इस बात का प्रतीक भी कि व्यक्ति यदि आत्मा के प्रति निरन्तर जागृत होता जाये तो कर्मबन्धन की अनेक क्रियाएँ स्वमेव तिरोहित होती जाती हैं । 'महावीर की साधना और ध्यान इस बात पर भी केन्द्रित था कि वे सत्य की खबर जीवन के जितने रूप और स्तर हैं उन सब तक पहुंचा देना चाहते थे । जो उन्हें उपलब्ध हो रहा था उसे वे कण-करण में वितरण करते जा रहे थे । यही कारण है कि कथाओं, प्रसंगों में देव, मानव, व्यन्तर पशु, पक्षी, सज्जन, दुर्जन सभी प्रकार के जीव महावीर के सानिध्य से कृतार्थ हुए हैं। अतः आात्मिक जागरण की ओर प्रारणी जगत् को भाकर्षित करना महावीर की साधना का प्रतिपाद्य था। उन्होंने विभिन्न प्रकार ध्यानों द्वारा स्वयंपूर्ण जागरण की उपलब्धि की है। उनके केवलज्ञान प्राप्ति के प्रसंग को कहने के पूर्व उनके अन्तिम वर्ष की साधना से भाप सबके साथ और गुजरना चाहूंगा 3 एकाग्र हो सुनें ।" 'साधना के १० वें वर्ष में महाबीर मेंढिय ग्राम से बत्सदेश की राजधानी कौशाम्बी पधारे । सारी नगरी उनकी अगवानी के लिए उमड़ पड़ी । जो भीड़ में पीछे भी रह गए तो उनका मन सबसे आगे बन्दना करने दौड़ रहा था। महावीर के उस नगर में प्रवेश करते ही उसकी शोभा बढ़ गई । प्रत्येक नागरिक महावीर के सानिष्य के लिए आतुर था। क्योंकि उस समय तक महावीर की समतामयी दृष्टि एवं निरहंकारी भाव पर्याप्त प्रसिद्धि पा चुके थे । उनके चरणों से अपने ग्रांगन को पवित्र करने की हरेक के मन में भाकांक्षा थी। महावीर नासाग्र दृष्टि किए चलते जा रहे हैं। वे आगे-मागे और जनसमुदाय उनका गुणगान करते हुए पीछे-पीछे जिस मार्ग से वे निकल जांय वहीं के प्रासादों के बातायन खुल पड़ते देखने लगते हजारों नेत्र उनकी कान्तिमयी मनोरम छमी को । किन्तु यह क्या ? महावीर ने समस्त कौशाम्बी का भ्रमण कर लिया और किसी एक के घर भी बाहार ग्रहण नहीं किया ? जैसे ही लोगों का ध्यान इस तरफ गया, बात कानों-कानसरे मर में फैल गयी । सामन्मणों का ५६ चितेरों के महावीर गया। श्रावकों, सार्थवाहों, श्रष्ठों, सामन्तों के कुछ के कुछ उनके चरणों में लौटने लगे। किन्तु महावीर ने किसी की घोर भांख उठाकर भी नहीं देखा। उनकी वीतरागता और ध्यान की बात तो सुनी थी लोगों ने, लेकिन इस प्रकार भ्रमण करते हुए उनके प्रमुपस्थित होने का दृश्य उस दिन ही लोगों ने देखा । कितना अद्भुत ? कितना चिन्ताजनक ? कौशाम्बी के राजा से न रहा गया । वह दोडा भाया । उसने महावीर की अगवानी की। राजभवन में भोजन के लिए उन्हें मामन्त्रित किया। किन्तु महावीर हैं, जो सौम्य मुद्रा में धागे चले जा रहे हैं। इतने मौन कि लोग उनकी प्राकांक्षा की कल्पना भी न कर सके और हताश उन्हें जाता हुभा देखते रहे । महावीर नगर से निकलकर समीप के उद्यान में जाकर ध्यान सग्न हो भये । इघर नगर में तरह-तरह की बाते। जो श्रमण परम्परा के अनुयायी थे, महावीर के श्रद्धालु, उन्हें अपनी धार्मिकता पर सन्देह होने लगा । दुख इस बात पर कि उनके घर से अंतिम तीर्थकर आज भूखे लौट गये । तथा जो ब्राह्मण परम्परा के अनुयायी या अन्य तीर्थक थे, उन्हें यह कहने का अवसर मिल गया कि देखा-जैन साधु कितने मानी होते हैं ? महावीर ने हमारे राजा तक का निमन्त्रण नहीं माना। कुछ लोग यह खोजने में लग गये कि नगर में अवश्य कोई ऐसा अपुण्यशाली व्यक्ति है, जिसके प्रभाव से आज महावीर की पारणा में विघ्न आ गया । नगर सेठ कृषभानु की सेठानी तो और भी चिन्तित । उसे लगा कि उसके भवन के पिछवाड़े तलघर में जिस कुमारी चन्दना को उसने अपनी सौत समझकर बांधकर डाल रखा है, उसी के पाप के कारण महावीर उसके घर में तो नँया, उसकी रक्या तक में नहीं आये। उनके दर्शन से भी वह रह गयी । किन्तु उसने तुरन्त निश्चय किया कि अब में ध्यान रखूंगी कि महावीर इस ओर न आ जाय अन्यथा उन्हें किराना पड़ेगा और ने अपना प्रबन्ध पूरा कर लिया। राजकुमारी चन्दना क्या सोच रही थी, उसे शब्दों में कहना कठिन है बाद जा रहा था कि वह राजा चेतक की होने पर भी मान्य चिंतेरों के महावीर ५७ के कारण शत्रुओं के हाथ पड़ गयीं। वहां से किसी प्रकार छूटी तो सेठ कृषभानु उसे पुत्री बनाकर घर पर ले जाये। उसे लगा दूसरा पिता ही उसने पा लिया है। किन्तु उसका अप्रतिम रूप उसका बैरी बन बैठा। सेठानी से सौतिया ढाह के कारण अबसर देखकर उसे बेड़ी पहिला दीं और इस तलघर में डाल दिया । श्रद सूप में रखे इन कोंदो के भोजन से ही उसका जीवन है। बाहर की दुनिया कैसी है, उसे कोई खबर नहीं। पता नहीं वह कब मुक्त होगी ? दूसरे दिन कौशाम्बी में फिर वही जमघट और महावीर के निराहार मोट जाने पर वही विषादपूर्ण नीरवता । धीरे-धीरे यह एक कम बन गया । महावीर जब तक उस प्रदेश में रहे, खाली हाथ लौटते रहे। इधर-उधर बिहार करने भी चले गए तो किसी नगर में उनकी पारणा न हो सकी। लोगों ने उनको भोजन कराने के अनेकों प्रयत्न कर लिए । भ्रमण-परम्परा में साडु द्वारा आहार के लिए जो भी अभिग्रह लिए जाते थे उन्हें पूरा करने का अव कर लिया गया। किन्तु सब विकल । बोर इस प्रकार महावीर को निराहार भ्रमरण करते हुए लगभग पांच माह व्यतीत हो गए। उनके मौन, उनके ध्यान एब मुख पर वही सौम्यता देखकर लोग आश्चर्यचकित थे । छठा माह पूरे होने में मात्र पांच दिन रह गए। महावीर दैनिक क्रम में कौशाम्बी नगरी के मार्गों का भ्रमण कर रहे थे। जनसमुदाय उनकी जयजयकार करता हुआ उनका अनुगमन कर रहा था। किसी ने सेठ कृषजांनु की गली का मार्ग प्रशस्त किया । महावीर उघर चल पड़े। तलघर में राजकुमारी चन्द्रमा को कोलाहल सुनायी पड़ा। स्पष्ट होने पर ज्ञात हुआ महावीर इधर आ रहे हैं। वह मानन्द से उड़खना चाहती थी उनकी बन्दना करने के लिए । किन्तु सोचने लगी- मैं उन्हें बाहार में क्या दूंगी ? एक तो मेरो, ऐसी दशा और दूसरे ये असे कोंदों के दाने ? ऐसा मेरा. पुण्य कहां ?" तभी उसे लगा कि महावीर, तो इस भवन की ओर ही जा रहे हैं। वह उनके प्रति बंद्धा से भर गयी और उन्हें देखने उत्साह से जैसे ही उठी उसकी बेड़ियों की कड़ियां टूट सम। यह सूप में पदों को लेकर ही दरवाजे की ओर भावी देखा महाबीर उसी की कोर शान्तभाव से लेकर हैं । ५८ चितेरों के नहावीर चन्चना का रोम-रोम नाच उठा। वह आगे बढ़ी। भक्तिपूर्वक उसने वर्धमान अगवानी की। उन्होंने उसकी विनय को स्वीकार कर लिया और दोनों हाथ भोजन लेने की मुद्रा में कर दिये । यह एक अपूर्व दृश्य था। हजारों नर-नारी अपने नयनों को सार्थक कर रहे। देख रहे थे कि चन्द्रमा महावीर के हाथों में कोंदे डाल रही है, वे सीर बनते जा रहे हैं। महावीर दोनों स्थितियों में प्रसन्न हैं । चन्दना आत्मशक्ति से भरती जा रही है। उसे लग रहा है कि जितने दाने कोंदे वह दे पा रही है उससे असंख्य गुणा ज्ञान उसमें समाहित होता जा रहा है। पता ही नहीं चल रहा कि वह महावीर को आहार दे रही है या उनसे ज्ञान का आहार ले रही है। महावीर बहार लेकर वहां से कब चल दिये किसी को पता नहीं चला। क्योंकि सभी चन्दना के भाग्य की सराहना में खो गये थे। चारों ओर उसकी कीति ही उपस्थित थी। बहुत दिनों बाद एक भारतीय नारी का फिर सम्मान हुआ था । उसके शील का । उसकी प्रभु को समर्पित श्रद्धा का । कृषभानु सेठ की पत्नी चन्दना के चरणों पर नत थी और चन्दना उसके द्वारा दी गयीं बेड़ियों की कृतज्ञ थी, जिनके आशीर्वाद से आज वह आत्मबोष के द्वार पर खड़ी हो सकी है। सेठ कृषभानु इस सव अप्रत्यासित को देखता हुआ महावीर की चरण-रज को बटोरने में लगा था। आज वह कृतार्थ हो गया।' लोग जब यथार्थ पर लौटे, परस्पर विचार-विमर्श हुआ, शानियों ने अपनी बुद्धि को पैनी किया तब यह जान पाया कि महावीर को इतने समय तक आहार इसलिए नहीं मिला, क्योंकि उनका अभिग्रह था -- था -- 'मुण्डितसिर, पांवों में बेड़ियों सहित तीन दिन की भूखी, दासत्व को प्राप्त हुई कोई राजकुमारी यदि कोंदों के दाने सूप में रखकर द्वार पर खड़ी हुई मुझे आहार के लिए अवगाहन करेगी तो पारणा करूंगा, अन्यथा नहीं।' किसके वश में था यह अभिग्रह पूरा करना ? धन्य हो राजकुमारी चन्दनबाला को, जिसने हमें, हमारी नगरी को यह सौभाग्य प्रदान किया है।' 'और आचार्यप्रवर ! हमारा सौभाग्य है कि आप के मुख से सुनकर हम भगवान महावीर की कथा को अपने सामने घटता हुआ देख रहे हैं। उनके प्रति पूर्ण श्रद्धा के साथ एक छोटा-सा प्रश्न है। मैंने सुना है कि १२ वर्ष की साधना में महावीर ने केवल ३४९ दिन ही बाहार लिया। इतने दिनों तक बिना भोजन के थे कैसे रह लेते थे ? और इसने कठिन से कठिन मंभिवह करने की उन्हें क्या आवश्यकता थी ? जिज्ञासावश ही पूछ रहा हूं-गुरुदेव । 'वत्स श्रीकण्ड ! तुम्हारी विनम्रता और उत्कंठा हे मैं परिचित और तुम मेरी समाधान की शैली से। अतः उतना ही ग्रहण करना जो तुम्हें रुचिकर हो । तुम्हारी कला को सायंक। भोजन से हमारा गहरा सम्बन्ध है । इसलिए हम सोचते हैं कि महावीर इतने दिन बिना भोजन के कंसे रह गये ? वस्तुतः महावीर ने भोजन छोड़ने के लिए कोई प्रयत्न नहीं किया। उनसे अनायास भूजन छूट गया। उनकी साधना की यह उपलब्धि थी कि उनके शरीर को अब स्कूल भोजन की आवश्यकता नहीं रह गयी थी । शरीर को जिन कारणों से भूख लगती है, वे कार्य प्रायः विसर्जित हो चुके थे। यह इसलिए सम्भव हो सका क्योंकि महाबीर की उपस्थिति शरीर में बहुत कम ही रहती थी। मुझे तो लगता है, जितने दिन उन्होंने बाहार लिया उत्तने दिन ही वे शरीर के हो सके। अन्यथा हमेशा वे आत्मा के समीप रहे । आत्मा के साथ इस निकटता के कारण ही सम्भवतः वे अपने उन दिनों को 'उपवास' का दिन कहते थे। दूसरी बात यह भी प्रतीत होती है कि भोजन करना एक बडे बारम्भ के साथ जुड़ जाना है। न जाने कितने जीवों के कायिक और मानसिक घात-प्रतिषातों का इसमें भागीदार बनना पड़ता है। महावीर की अहिंसा बहुत गहरे तलों तक उतरी थी । अतः वे ऐसे सूक्ष्म भोजन से ही काम चला लेते थे, जिसमें कम से कम प्रारम्भ हो । अभिग्रह धारण करने के पीछे भी यही भावना निहित दिलायी देती है। इतनी कठिन प्रतिज्ञा लेने से शायद ही भोजन का संयोग बैठे ऐसे जितने दिन भी गुजरे वे महाबीर के लिए उपयोगी होते थे । अभिग्रह लेने के दूसरा प्रमुख कारण यह था कि अपनी प्रतिज्ञाओं के द्वारा महावीर यह जान लेना चाहते थे कि उनकी जगत् के लिए कितनी आवश्यकता है ? इस जन्म में वे स्वयं के लिए कुछ पाने व करने नहीं है जो कुछ उन्हें उपलब्ध अतः वे यह देख लेना चाहते वे कि उनके जीवन को सुरक्षित रखने में जगत् का वातावरण मिलना ६० चिंतेरों के महावीर सजग है ? 'महाबीर कभी-कभी अभिग्रह ले लेते थे कि जिस घर के सामने दो बैन खड़े होंगे, द्वार पर चम्पक पुष्पों का वृक्ष होगा तथा कोई सुहामिन पूर्ण कलश लिए खड़ी होगी वही भोजन करूंगा। अब इन स्थितियों से उनकी साधना व ध्यान का कोई सम्बन्ध नहीं है। किन्तु उनका यह अभिग्रह यदि पूरा होता है तो उसका अर्थ है कि वनस्पति, पशु-जगत् एवं मानव का समन्वय प्रयत्न महावीर को जीवन देने के लिए उत्सुक है। इसकी दूसरी अन्विति यह है कि महावीर का हृदय जीवन के निम्न से निम्न तल तक विकसित हो चुका था, जहां उसके स्पन्दन के अनुरूप व्यवस्था करने में होड़ लग जाती थी। जीवन के प्रति इतनी अनासक्ति, जीवषा के प्रति इतना अभय और जगत् के जड़चेतन पदार्थों की व्यवस्था के प्रति इतनी निश्चिन्ता महावीर जैसी विकसित भारमाएं ही कर सकती हैं। सम्पूर्ण जगत् महावीर का घर हो गया था एवं समस्त प्रारणी उनके स्वजन इस बात की घोषणा करते हैं उनके भोजन । के निमित्त लिए गये कठिन से कठिन अभिग्रह ' एक बात और आपको बता दूं । जिस प्रकार महावीर अपने भोजनादि भावश्यकताओं के लिए जगत् पर निर्भर थे उसी प्रकार वे अपने जीवन की सुरक्षा के प्रति भी निश्चित थे । भापको ज्ञात होगा कि उनके इस साधना काल में जब भी उन पर कोई उपसर्ग हुआ, उन्हें सताया गया तो इन्द्र ने आकर उनसे आज्ञा चाही कि वह उनकी रक्षा में सहायक हो किन्तु महावीर ने उसकी सहायता को स्वीकार नहीं किया। महावीर की इस निडरता की परीक्षा के लिए संगमक नामक एक देव लगातार छह माह तक उन्हें अनेकों कष्ट देकर उनको विचलित करने का प्रयत्न करता रहा, किन्तु अन्त में हार कर भाग गया। इस प्रकार की जितनी भी कवाएं उनकी अच्छी निष्पत्तियां हैं। इससे ज्ञात शक्तिशाली था कि उसे साधना में किसी महावीर के जीवन के साथ सम्बद्ध हैं, होता है कि महाबीर का चित्र इतना दूसरे की अपेक्षा नहीं थी। महावीर अपनी इस अन्तर्याईगह में चूंकि निःसन होकर अकेले चल सके, इसलिए समस्त खम उनका हो गया. उन्होंने यह प्रभारिणत कर दिया कि सच्चा साधु नहीं
चितेरों के महावीर तैंतीस एकाधिकार । अब तुम्हीं सोचो, जो व्यक्ति प्रचेनन पदार्थों पर प्रपना स्वामित्व, अधिकार नहीं रखना चाहता वह एक जीवित स्त्री का मालिक कैसे हो सकेगा? महावीर के सामने नारी की निकटता और त्याग का प्रश्न नहीं है । स्वयं के ग्रह कार के विसर्जन का संकल्प है। घर में वे इस प्रकार रहते थे जैसे न हों । उनकी इस अनुपस्थिति से अभी माँ बाप ही चिंतित रहते हैं । सन्तान के प्रति मोह जागृत कर अपने कर्मों को वृद्धि करते हैं। विवाह होने पर पत्नी भी इसमें सम्मिलित हो जायेगी । महावीर की यह दृष्टि थी ! वे इस जन्म में जीवों को कर्मों से मुक्ति पाने का मार्ग बताने माये थे, कर्मों का संचय कराने नहीं। महावीर तुम्हारी बान ही सोच रहे थे । नारी के संयोग से उन्हें प्रपनी मुक्ति का भय नहीं था। वे अपने कारण किसी नारी की मुक्ति की प्रबंधि लम्बी नहीं करना चाहते थे । इस बात पर भी सोची विवाह क्यों होता है ? इसलिए कि नारी एवं पुरुष दोनों कही न कहीं प्रपूर्ण हैं, उनके संयोग से परस्पर में पूर्णता की प्राप्ति हो । महावीर तो इस अपूर्णता से कब के ऊपर उठ चुके थे। देह धौर फात्मा की भिन्नता का जब से उन्होंने प्रनुभव किया, देह की प्रावश्यकताओं की पूर्ति करना उन्होंने छोड़ दिया था। उनके सम्पर्क में प्राकर कोई अपने को पूर्ण कर सकता था, उन्हें पूर्ण होने के लिए किसी की प्रपेक्षा नहीं थी। फिर वे विवाह किमलिए करते ? विवाह की तीसरी सार्थकता है संतान की प्राप्ति । इसके मूल में है व्यक्ति को वह आकांक्षा, जिसमें वह अपने प्रश को सुरक्षित रखना चाहता है । जिन इच्छाप्रों की पूर्ति वह स्वयं नहीं कर सका उनकी पूर्ति सन्तान के माध्यम से करना चाहता है । इच्छाप्रों के संग्रह का इतना लम्बा जाल महावीर कैसे स्वीकार कर लेते ? इच्छाओं के विसर्जन के लिए हो तो उनकी साधना थी । अतः उन्होंने जिस पथ का अनुसरण किया वह उनकी महावीरता का ही द्योतक है। श्रायुष्मति ! नाराज तो नही हो ?" 'गुरुदेव ! अपने प्रज्ञान पर लज्जित हूँ । ज्ञात नहीं था, महावीर के जीवन में प्राप का इतना प्रवेश है। प्राचार्यप्रवर ! आगे की कथा कहें ।' कनकप्रभा यह कहकर अपने आसन पर बैठ ही नहीं पायो थी कि शिल्पीसंघ से एक प्रश्न और उमरा - 'समाधानो के इस दौर में इस अन्तेवासी को चौंतीस चितेरों के महावीर भी कृतार्थ करें गुरुदेव ! जैनधर्म की श्वेताम्बर परम्परा महावीर के विवाह को स्वीकार करती है। कहते हैं, उनके 'प्रियदर्शनी' नाम की एक पुत्री भी थी जिसका 'जामालि' नामक विचारक से हुआा था। भाचार्यप्रवर ! एक ही धर्म की दो परम्पराओं में ऐसा विरोध क्यों ?" 'भद्र श्रीकण्ठ ! विरोध होने पर ही तो परम्परा बनती है किसी धर्म में । यह स्वाभाविक है, क्योंकि प्रत्येक महापुरुष के जीवन का मूल्यांकन करने के लिए हर व्यक्ति स्वतन्त्र होता है। जिसकी दृष्टि का जो पैमाना सदनुसार वह तथ्यों की गहराई तक पहुँच पाता है। जिस प्रसङ्ग को तुम बात कर रहे हो वह श्वेताम्बरों के 'कल्पसूत्र' नामक ग्रंथ में उल्लिखित है। उसके पूर्व के ग्रंथों में नहीं। महावीर को विवाहित मानने के कारणों पर विचार करें तो बात स्पष्ट हो सकेगी। प्रमुख कारण यह है कि महावीर की महिला का अर्थ - "कसी भी प्रारणी का मन न दुखाना, उस समय तक निश्चित हो चुका था। अतः जो व्यक्ति छोटे से छोटे प्रारणी के प्रति करुणावान् है, वह अपने माता-पिता की भावना को ठेस कैसे पहुंचायेगा ? उनकी किसी बात का विरोध में करेगा ? इसलिए जब माता-पिता ने कहा, उन्होंने विवाह कर लिया। जब तक वे जीवित रहे, महावीर ने गृहत्याग नहीं किया, प्रादि । इन बातों को श्वेताम्बर परम्परा ने इमलिए दृढ़ता से स्वीकार किया ताकि मह वीर की करुणामय अहिंसा एव अनाग्रही वृत्ति प्रधिक उजागर हो सके। इस प्रसङ्ग को स्वीकार करने में दूसरा कारण तत्कालीन सामाजिक प्रभाव है। समाज में मर्यादापुरुषोतम राम के प्रादर्श प्रचलित थे । मातापिता के प्रति कर्तव्यनिष्ठ एवं प्राज्ञाकारी के रूप में । ब्राह्मण परम्परा के एक आदर्शपुरुष के समकक्ष महावीर को गृह- दायित्वों से पलायन करने वाला कैसे मान लिया जाता ? प्रतः उनमें वे सभी गुरण प्रतिष्ठित किये गये जो एक महापुरुष में होना चाहिए । यद्यपि इन सभी गुणों और विशेषताथों को उपलब्धि महावीर को पिछले जन्मों में हो चुकी थी। इस भांतिम जन्म में वे इन सबसे ऊपर उटने आये थे सो उठे भो । किन्तु वहां तक दृष्टि कुछ ही साधकों की पहुंच पायी है । महावीर के जीवन से इस मान्यता के जुड़ने तक भगवान बुद्ध द्वारा पत्नी चितेरों के महावीर पैंतीस पुत्र को सोता हुआ छोड़कर गृहयाग की कथा अभी पुरानी नहीं पड़ी थी। वह महापुरुष कंमा, जो कठिनाईयों से भाग खडा हो ? प्रतः महावीर के जीवन के साथ जैसे चडकौशिक सर्प, कीलें ठाकने वाला ग्वाला, स्थाररुद्र, मादि की कथाएं जुड़ीं वैसे ही उनकी त्यागवृत्ति, कत्तं व्यपरायगगता एवं कारुणिकता को उजागर करने के लिए उनके भरे-पूरे परिवार की प्रतिष्ठा की गयो । पत्नी, पुत्री, दामाद इन सबको त्यागकर महावीर निकल पडे। कितने बड़े त्यागी, ? किन्तु वास्तविकता यह थी कि उन्होंने राजसी वंभव, राजभवन, परि बार के सदस्यों के अस्तित्व को ही नहीं स्वीकारा था, त्याग किसका करते ? इन सबकी भसारता का बोध जिस दिन पूर्ण रूप से सघन हो गया उस दिन वे इनसे बाहर हो गये। पुनः उनमें फंसने का प्रश्न ही नहीं उठता। इस प्रसंग में एक बात यह भी नजर पाती है कि यदि महावीर का विवाह हुआ होता तो गृह-त्याग के बाद बयालीस वर्षों के तपस्वी जीवन में कहीं तो यशोदा से उनकी भेंट होती ? किसी स्थान पर उनकी पुत्री ने उन्हें महार दिया होता ? और कुछ नहीं तो इतिहास हो उनकी मस्पायु के सम्बन्ध में कुछ कहता ? किन्तु इस प्रसंग की जितनी अर्थवत्ता थी, उतना ही इसके साथ हुआ । भद्र श्रीकण्ठ ! इतना और समझ लें, हर महापुरुष अपने समय के बाद स्वयं के अनुरायिमों द्वारा निर्मित घेरों में जीवित रहता है। चाहे वे उसे अलौकिक बनायें या समारी। किन्तु उसकी गुणवत्ता में कोई कमी नहीं भाती । अतः यदि महावीर के व्यक्तित्व को गहरायी से समझना है तो कम से कम इतने दायरे तो बनायें, जिनमें सहजता से विचारों प्रादान-प्रदान हो सके। तुमने इस प्रश्न को उठाकर मुझे भौर चितन का अवसर दिया। मैं प्रसन्न हूं। किन्तु कुछ थक भी गया हूं । अतः भागे की कथा अब मध्यान्ह में कह सकूंगा। तब तक भाप सब भी बिराम छः. अभिनिष्क्रमरण मध्यान्ह के अंतिम प्रहर में शिल्पीसंघ पुनः एकत्र हुआ। इसके पूर्व अवकाश के क्षणों में प्राचार्य द्वारा कथित अब तक की कथा के सम्बन्ध में वे सभी कलाकार विचार-विमर्श कर यहां आये थे। आगे की कथा के प्रति भव वे पूर्ण सजग थे और उत्सुक भी। प्राचार्य अपने भासन पर बैठे हुए ध्यान मग्न थे। उनके सौम्य चेहरे को देखकर लगता था वे वैशाली के प्रास-पास विचरण करते हुए भगवान महावीर के प्रसगों को वातावरण से समेट रहे हैं। नयन खुलते ही उन्होंने कथासूत्र को सम्हाल लिया'महावीर माता-पिता को विवाह के प्रति अपनी विरक्ति के भाव बतलाकर निश्चित नहीं हो गये थे। उनकी चिन्तन की यात्रा और गतिशील हो गयी । पपने जीवन के सम्बन्ध में उन्होंने सोचा-में ग्राज जिन क्षरणभंगुर पदार्थों और रिस्ते-नातों के बीच हूं, उन्हें कितनी बार भोगा है ? क्रमशः उनके स्वरूप को जब जान पाया तो लगा इनसे मेरा सम्बन्ध हो क्या है ? भोर तब मैंने उसे खोजने की यात्रा प्रारम्भ कर दी जो मेरा था। मेरा है। पूर्व जन्म के अनन्त मव ग्रात्मा के स्वरूप को अनुभव करने में लग गए । आत्मा और ज्ञान की प्रभिन्नता से परिचित होते ही यह सारा संसार भज्ञान और मोह से पीड़ित नजर आने लगा। मैं क्रमशः इस बन्धन से विलग होने लगा । और भाज इस तिथि तक पहुंच पाया हूँ कि स्वयं को सत्य की उपलब्धि के समीप पाता हूँ ।' कभी वर्धमान अपने युग की स्थिति, वातावरण के सम्बन्ध में सोचने लगते तो पाते कि लोग धार्मिक क्रियाकाण्डों और दार्शनिक मत-मतान्तरों में बुरी तरह फम गये है। दूसरी ओर कुछ ऐसे विचारक भी हैं, जो इस प्रकार के विकृत धार्मिक क्रियाकाण्डों से मुक्ति तो चाहते हैं किन्तु उन्हें सही रास्ता नहीं मिल रहा है। प्रत्येक विचारक क्रान्ति का स्वयं भगुमा बनना चाहता चितेरों के महावीर सैंतीस है। इस धार्मिक प्रशान्ति का समाधान उसके पास भी नहीं है । इन सब विचारकों के प्रयत्नों का समन्वय कैसे हो ? किस प्रकार समाज को एक सरल एवं पुरुषार्थी धर्म की प्राप्ति हो, महावीर इस पर गहरायी से चितन करते रहते । जब कभी उनकी दृष्टि सामाजिक दशा पर उठ जाती तो उनका हृदय करुणा से भर जाता । वे देखते कि किस प्रकार समाज का एक वर्ग सब पर छाया हुआ है ? शिक्षा, सुविधाएं एवं स्वतन्त्रता किसी एक वर्ग तक ही सीमित हो गयी हैं। और सबसे बड़ी बात यह है कि समाज का आर्थिक पक्ष ही कटा जा रहा है, जो किसी भी समाज के विकास के लिए अनिवार्य है । तत्कालीन राजनीतिक दशा उन्होंने बहुत समीप से देखी थी । साम्राज्यबादी प्रवृत्ति के कारण स्वतन्त्र राज्यों का अस्तित्व ही समाप्त होता जा रहा है, जिसके मूल में है परिग्रही और भयात्मक प्रवृत्तियों की प्रबलता । समाज की इन परिस्थितियों के प्रभाव से मानव-मानव के बीच बहुत अन्तर आ गया है। कैसे होगा मेरी सात्रता एवं ज्ञान का इन सबके कल्याण में उपयोग ? मेरे पूर्व इतने तीर्थकर हुए हैं। प्रत्येक ने जनहित के लिए कुछ ल कुछ प्रयत्न किये हैं। किन्तु मेरे समय की स्थिति बिकट है। अतः मुझे निश्चित रूप से कुछ नया करना होगा । भले उसकी साधना में यह जीवन लगा देना पड़े । मुझे अब इन सब व्यवधानों के भागे निकलना होगा और लगना होगा माश्मशुद्धि की दिशा में एकाग्र हो । तभी यह उपलब्ध हो सकेगा, जिससे स्वयं मुझे और इस प्रशांत जगत् को अपना लक्ष्य प्राप्त होगा । इस प्रकार महावीर के मन में वैराग्य की तरंगें चंचल हो उठी थीं। उनके उफान से सासारिक बन्धनों का किनारा डहने हो बाला था ।' 'प्रायः महापुरुष जगत् की आवश्यकता हुआ करते हैं। इसलिए जगत् की शक्तियां, बाताबरण जो चाहें सो उनसे कार्य करालें । वे स्वयं कुछ महां करने नहीं पाते। महावीर का वैराग्य जब इतना प्रबल हो गया तो लोकान्तिक देवों ने आकर उनसे प्रार्थना की -- प्रभो ! आपने इस संसार का कल्याल करने के लिए इस जन्म को धारण किया है। आपका मन स्वयं बीत रागत्तम की उपलब्धि हेतु संकल्पित है । अतः आप अपनी साथमा और ज्ञान अड़तीस चितेरों के महावीर द्वारा जगत् को वह प्रकाश दें, जिसकी वह प्रतीक्षा कर रहा है। भाप स्वयं कारुणिक हैं। प्रापका अभिनिष्क्रमण अब निकट ही है ।' देवों को इस प्रकार की बन्दना मे महावीर साधना में प्रवृत्त होने के लिए और प्रातुर हो गये। उनके इम सकल्प का समाचार इन्द्र को प्रवधिज्ञान से प्राप्त हुआ। वह महावोर की जन्मभूमि कुण्डलग्राम में या पहुँचा तथा भनेक उत्सवों एवं प्रायोजनों को हर्षपूर्वक सम्पन्न करने लगा। महावीर अपने अभिनिष्क्रमण के प्रति जितने ही मौन थे, उतनी ही वैशाली के घर-घर में उसकी चर्चा होने लगी। परिपक्व बुद्धि के लोग वर्धमान के इम संकल्प को प्रशंसा में व्यस्त थे । वे सिद्धार्थ और माता त्रिशला को ऐसे सुपुत्र की प्राप्ति के लिए धन्य समझ रहे थे। कुछ ढलती उमर के लोग चिंतित थे कि देखो, इस बुढ़ापे में सिद्धार्थ को पुत्र से कोई सहारा न मिला। बच्चों को पता नहीं था कि यह क्या हो रहा है ? किन्तु वे खुश थे कि देखो कितने उत्सव हो रहे हैं। किशोरवय के लोगों को महावीर से स्पर्धा हो रही थी। कितना तेजस्वी है इसका स्वरूप, इसको कान्तिमयी देह ? किशोरियां फुस-फुसा रही थीं - - हाय ! हतभाग्या यशोदा ? ऐसा जीवनसाथी हाथ से निकल गया। इनके ये वन जाने के दिन हैं ? प्रौढ़ा महावीर से एक बात करने को तरस गयीं। इतने दिन ये राजभवन में बन्द रहे और अब निकलेगे तो मौन हो जायेंगे। माताएं, जननी त्रिशला के दुख की कल्पना कर रही थीं । जितने लोग, उतनी ही बातें । यह तो नगर की स्थिति थी। राजभवन की तो बात ही मत पूछो । एक विषाद-सा छा गया था। जिसे देखो वही चुप इशारों का साम्राज्य हो गया था। जैसे इस सबसे महावीर रुक जायेंगे। परिजनों ने जाना ही नही था कि वर्षमान की उन्होंने कोई सेवा की है। परिचारिकाएं अपनी-अपनी कलाए भूलने लगीं थीं। महावीर ने कोई अवसर ही नहीं दिया उन्हें अपनी माज्ञापालन करने का ! और सब यह व्यक्ति हमेशा के लिए चना जायेगा। सभी हैरान थे। निश्चिन्त थे तो मात्र सिद्धार्थ । उनके समक्ष स्वप्नमाला अब साकार हो रही थी। उन्होंने सोचा--'बर्धमान अपने लक्ष्य पर ही जा रहा है। वह मुझसे अच्छी तरह जानता है कि उसे क्या करना है। वह प्रशा और अनुभव चितेरों के महावार उनतालीस में मुझमे बडा है। दिनोंदिन भीर बड़ा होगा। किसी पिता का इससे बड़ा और क्या सोभाग्य होगा कि उसका पुत्र उससे श्रेष्ठ निकला। झात्मकल्याण का माग प्रशस्त हो ।' यह कहते हुए प्राचार्य कश्यप का गला रुंघ भाया । क्षण भर विराम के लिए वे रुके । तभी कनकप्रभा ने पूछ लिया -- गुरुदेव ! माता त्रिशला को इस समय कैसा लगा ? 'प्रायुष्मति ! तुम इसकी कल्पना अच्छी तरह कर सकोगी कि एक नारी को प्राणों से प्रिथ पुत्र के विछोह का दुख कितना हुआ होगा ? मां त्रिशला ने जैसे ही वर्षमान के इस प्राध्यात्मिक प्रयाण का समाचार सुना, उनको ममता बावली हो उठो । प्रारण सकट में फस गये । वे सोचने लग-- 'यही दिन देखने के लिए मैंने वर्धमान को जन्म दिया था ? उसे जन्में उन्तीस वर्ष हो गये । मैंन उसके कोमल चरणों के नीचे धूल नहीं लगने दी। बही प्रब बीहड़ पर्वतों में घूमेगा ? मेघ गरजते थे तो में भवन के सारे वातायन बन्द करा देती थी कि मेरा लाड़ला कहीं गर्जन से डर न जाये । वह अब सिहों कीं गजना मौर हाथियों की चिहाड़ को सुनता फिरेगा ? कैसे सहेगा वह मूसलधार वर्षा, पत्थर गला देने वाली ठंड और भस्म कर देने वाली प्रचड गर्मी ? यहां तो वह दस बार मनाने पर नाममात्र को भोजन करता था, वहां क्या खायेगा जंगलों मे ?" इन सब पाशंकामों से रानी त्रिशला का रोम-रोम काप उठा । वात्सल्य को तीव्रता से वे मूछित हो गयीं । परिचारिकामों के उपचार के बाद जब वे सचेत हुई तो मूर्छा के साथ उनका वात्सल्य-मोह भी टूटने लगा। उन्हें पति सिद्धाय द्वारा कथित स्वप्नों के परिणाम याद आने लगे। उन्होंने वर्धमान को प्रात्मकल्याण का पथिक और धर्म प्रवर्तक होना बतलाया था। अतः यह कुछ अनहोनी नहीं है। इस विचार के प्राते हो वे वर्धमान के जन्म से अपने को सार्थक मानने लगी । और उस सुपुत्र के दर्शन करने को लालायित हो उठीं, जो उनसे जन्म लेकर भी अब उनका नहीं था। वहां उपस्थित देवों ने भी माता त्रिशला को अपने बचनो द्वारा सान्त्वना दी और कहा- 'जगदम्बे ! प्राप एक लोकोद्धारक विभूति को जन्म देकर धन्य हो गयी हैं। वर्षमान तीर्थदूर हैं। वे सभी प्रकार के परिवहों को जीतने में समर्थ होते हैं । अतः प्राप उनके दुख की कल्पना से चितित न हों। बल्कि उन्हें प्राशीष दें कि वे अपने लक्ष्य की प्राप्ति में सफल हो ।' तभी वहां राजा सिद्धार्थ भी आ गये । प्रियकर बोले- 'हां' त्रिशले ! हमें श्रव यही करना चाहिए । चलो, से दृष्टि मिलते ही वर्धमान का जैसा हमने जन्मोत्सव मनाया था, जैसे ही उसके निष्क्रमगा की तैयारी करें ? मन मे ममता और प्रांखों में घिरे सावन-भादों वाली त्रिशला अब क्या उत्तर दे? वह सबके साथ चल दी । देवयोनि की सार्थकता इतनी है कि देवों को तीर्थंकरों के जीवन की महत्त्वपूर्ण घटनाओं में न केवल सम्मिलित होने अपितु विभिन्न उत्सवों का प्रायोजन करने का सौभाग्य भी प्राप्त होता है। वर्धमान का अभिनिष्क्रमण हुआ तो देव उसमें सबसे भागे थे। उन्होंने चन्द्रप्रभा नाम की पालकी सजायी । वर्धमान को वस्त्राभूषण पहनाकर उसमें बैठाया और गातेबजाते राजभवन से निकल पड़े। वे क्या निकले, सारा राजभवन ही सूना हो गया । राजकुटुम्ब, राज्याधिकारी, सम्भ्रान्त नागरिक, जिसने भी सुना वही उनके पीछे हो लिया । मार्गशीर्ष शुक्ला दसवीं के दिन का चौथा पहर कुम्डग्राम के लिए हर्ष और विषाद का प्रतीक बन गया । नागरिक भीड़ में सम्मिलित थे, किन्तु उनकी समझ में न आ रहा था कि वे अपने प्यारे राजकुमार के वनगमन, गृहत्याग पर दुखी हों अथवा मानव कल्याण जैसे कार्य के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले इस सपूत पर फूले न समायें ? थोड़ी ही देर बाद उनके मोह पर उनकी सद्बुद्धि की विजय हो चुकी थी और उनकी जयघोषो से सारा राजमार्ग गूंज उठा। उस क्षत्रिय कुण्डपुर के बाहर थोड़ी ही दूर पर 'ज्ञातखण्ड' नामक उद्यान था। चारों ओर हरा-भरा तथा पुष्प एव लताओं से रमणीक उसी के एक कोने में अशोकवृक्ष के नीचे वर्धमान की पालकी उतारी गयी । वह भूखण्ड वर्धमान के तेज से आलोकित हो उठा । बिम्बधुनों ने भारती उतारी । देवतामों ने उत्सवों से जंगल में मंगल कर दिया। बर्धमान अभी तक इस चितेरों के महावीर उनचास प्रायोजन में मौन भाव से सम्मिलित थे। जिसने जो कहा मो करते रहे । किन्तु उनका मन वीतरागता में ही लीन था। उद्यान में आते ही वे प्रमुदित मन से पालकी से उतरे औौर एक शिलाखण्ड पर, जिस पर स्वस्तिक अंकित था, बैठ गये । बिना किसी आकुलता के पल भर में साथ प्राये जनसमूह से उन्होंने बिहा लो और इस संसार के बन्धनों से मुक्त हो गये । देह की शोभास्वरूप जो भी उपकरण थे - वस्त्र, आभूषण, केश उन्हें क्रमशः उन्होंने उतार फेंका। पांच मुट्ठियों में भरकर उतारे गये सिर के केश मानों प्रतीक थे। उस कर्मकालिमा के, जो पांच व्रतों के पालन से क्रमशः धुल जाती है। वर्धमान का वस्त्र, माभूषणों से विमुक्त शरीर अपने असली स्वरूप में आकर मानों कह रहा था कि संसार की प्रत्येक वस्तु को तब तक जानने का प्रयत्न करो जब तक उस पर कोई प्रावरण शेष न रहे । इस प्रकार सिद्धों को नमस्कार कर उस शुभमुहूर्त में वर्षमान पद्मासन में प्रासीन हो गये । प्रात्मा की अनन्त गहराईयों में विचरण करने लगे । उन्हें देख लगता था जैसे उन्होंने प्रतीक्षित निधि पा ली है। जैसे कोई भात्मसिन्धु का तलस्पर्शी अन्वेषक उसको अतल गहराईयों से ज्ञान के मोती बटोर रहा हो । यह सब उस पद्मासन मुद्रा का हो प्रभाव था । भद्र ! तुम सब जानते हो मूर्तिकला और चित्रकला में इस पद्मासन मुद्रा को कितना महत्वपूर्ण स्थान मिला है। क्योंकि प्रात्मा से साक्षात्कार करने का यह प्रमुख साधन था। पौर महावीर की यात्रा इसके लिए ही थी ।' 'प्राचार्यप्रवर ! उस प्रात्म-प्रन्वेषक यात्री को सादर प्रणाम के साथ एक समाधान का आकांक्षी हूँ । क्या सचमुच इतने बड़े राजपाट, धन-गैभव, सुख-संपदा भौर स्नेही परिवार का त्याग उन्होंने पलभर में कर दिया था ? तनिक भी मोह नहीं हुआ उन्हें ? फिर भी उन्हें 'महावीर' तो कहा गया, 'महात्यागी' नहीं ? 'भद्र चित्रांगद ! तुम्हारा सोचना ठीक है। बिल्कुल गैसा ही, जैसा एक संसारी व्यक्ति सोच सकता है। महावीर को 'महात्यागी' नहीं कहा गया इसकाः गहरा कारण है। वास्तव में उन्होंने कुछ त्यागा हो नहीं । स्थागते तो वे हैं जिनके पास कुछ होता है। महावीर के चारों घोर जो कुछ ठोभव, सुखसम्पदा हमें दिखती है वह हमारे भोगी होने के कारण है। हम में उन सब सांसारिक वस्तुओं के संग्रह करने की लालसा है। इसलिए में बड़ी कीमती दिखती हैं। और लगता है कि जिन वस्तुओं की प्राप्ति के लिए हम मर मिटते हैं, उन्हें महावीर ने कैसे त्याग दिया ? यह हमारी दृष्टि का भ्रम है, जिसे महावीर कब का तोड़ चुके थे । 'महावीर दो कारणों से सांसारिक सम्पदा के स्वामी नहीं थे। प्रथम, दे निर्भय थे, अतः अपनी सुरक्षा के लिए उन्होंने किसी वस्तु का संग्रह नही किया। दूसरे वे यह भी जान चुके थे कि इन वस्तुओं की प्रात्मकल्याण के लिए कहीं कोई सार्थकता नहीं है । प्रतः ये मेरी नहीं हैं। यही भाव उनका परिवार के सदस्यों के प्रति था, राजभवन के प्रति था और जो भी उनसे अपने को सम्बन्धित मानता था उसके प्रति था । अतः जिस प्रकार हम रास्ते में मील के पत्थरों को छोड़ते हुए गन्तव्य की मोर बढ़ते जाते हैं उसी प्रकार वर्षमान इन सब वस्तुओं के बीच निस्पेक्ष भाव से गुजर गये। उनकी महावीरता भी किसी सर्प को पराजित करने अथवा कहीं पौरुष दिखलाने के कारण नहीं है, अपितु उन्होंने मानवमन की उन वृत्तियों को जीता है, जो प्रात्मकल्यारण के क्षेत्र मे पागे नहीं बढ़ने देती। प्रतः वे भोग को छोड़ने और त्याग को पकड़ने के कारण नहीं बल्कि दोनों स्थितियों में ग्रात्मस्वभाव के प्रति सजग बने रहने के कारण 'महावीर' है ।' 'भद्र श्रीकण्ठ ! कुछ दुविधा में दिखते हो । निःसंकोच चितन को गति दो ।' 'भाचार्यप्रवर ! भाप से क्या छिपा है ? महावीर वस्त्र त्यागकर दिगम्बर हो गये। पूर्ण अपरिग्रही होकर प्रात्मसाधना मे लीन । फिर भो उनके अनु. यापियों की एक परम्परा यह क्यों मानती है कि कुछ दिनो तक वे वस्त्र घारण किये रहे, भले वह देवताओं के द्वारा दिया गया हो ?' 'बहुत अध्ययन किया है श्रीकण्ठ तुमने । तुम निश्चित रूप से अपनी कला द्वारा मेरी कल्पना को साकार कर सकोगे। अभी जैसे मैंने कहा कि भोग में पगी दृष्टि ने महावीर को भी सम्पत्तिथाली मोर वैभवशाली मान लिया और चितेरों के महावीर तैंतालीस फर उनका त्याग कराकर उन्हें प्रतिशय त्यागी स्वीकार कर लिया उसी प्रकार उन्हे निपट नग्न और सवस्त्र देखने वालों की भी अपनी दृष्टियां हैं। हो सकता है, जिन्होंने उन्हें उस अखण्ड व्यक्तित्व पर खडे हुए देखा हो, जहां उघाड़ने के लिए कुछ बचा ही न हो । सब कुछ स्वच्छ, निर्मल, आकाश सा । आत्मा अलग और शरीर अलग। अब शरीर को संभारने वाला रहा हो कौन ? अतः उन्हें महावीर की काया प्राकृतिक रूप में ही दिखायी पड़ेगी। और जिन लोगों की दृष्टि महावीर के व्यक्तित्व के विशेष गुणों के मूल्यांकन में ही तृप्त हो गयी होगो, उनकी आंख महावीर की नग्नता तक पहुंची हो न होगी । महावीर जैसा महापुरुष नग्न कैसे होगा ? प्रतः देवताघों द्वारा प्रदत्त वस्त्र का कथानक उनके साथ जुड़ जाना स्वाभाविक है । और जैसे-जैसे महावीर की साधना सघन हुई वह देवदूष्य भी उनसे विलग हो गया । वास्तव में महावीर किसी वस्तु को छोड़ने के प्रति चाग्रही नहीं रहे, क्योंकि उन्होंने किसी को पकड़ हो न रखा था। उनकी साधना में जब वस्त्र छूट गया जब भोजन छूट गया भोर जब स्वयं शरीर का ममत्व तिरोहित हो गया वे छोड़ते चले गये । यही उनकी अनासक्ति की पभिव्यक्ति है। अपरिग्रह का विस्तार ।' 'कहते हैं कि महावीर जैसे ही पद्मासन होकर ध्यानमुद्रा में लोन हुए तथा पूर्णरूपेण श्रामण्य-जीवन व्यतीत करने का संकल्प किया, उन्हें मनःपर्यंय ज्ञान की प्राप्ति हो गयी। ऐसा ज्ञान, जिसके द्वारा दूसरे के अन्तःकरण के हलन-चलन को भी जाना जा सके। यह संकेत था, उम केवलज्ञान रूपी प्रकाश के प्रति समर्पित होने का, जिसको उपलब्धि के लिए वर्धमान इस यात्रा पर निकल पड़े थे । धार्मिक जगत् में प्रात्मोपलब्धि के लिए प्रारम्भ की गयी यह मनोखी यात्रा थी ।' 'प्राचार्यप्रवर ! एक अनुरोध है मेरा । भाज कथा को अब यहीं विराम दे दें । मेरा मन वर्षमान के साथ इस गुहा, इस उपत्यका से अभिनिष्क्रमण कर गया है। शायद इन कलाकार बन्धुओ का भी । हमे भी वैशाली के नागरिकों, त्रिशला, सिद्धार्थ और राजभवन के उस विषाद मिश्रित हर्ष में सम्मिलित होन दें, जिसे रगों के माध्यम से हमें इन दीवालों पर मकित करना है। और फिर श्राप भी तो क्लान्त हुए होंगे गुरुदेव ! चलकर वेतवा के किनारे तक घूम चौंतालीस चितेरों के महावीर मायें ।' 'भद्र' कनकप्रथा ! तुम ठीक कहती हो । चौदह सौ वर्ष पूर्व हुए महावीर के अभिनिष्क्रमण से ग्राज यह वनखण्ड मुझे सूना लगता है। अद्भुत था वह महापुरुष, जो वातावरण में इतना संजोया हुआ है।' क्षणभर बाद वह गुहा सिद्धार्थ के राजभवन-सी नीरव हो गयी । कुण्डग्राम के राजमार्गों-सी सुनी। सात. अभिव्यक्ति की खोज प्राज शिल्पी संघ गुहा के द्वार से थोड़ा हटकर एक मनोरम मैदान में एकत्र हुआ था । प्रातकाल की कुनकुनी धूप सब के वदन सेंक रही थी । मैदान के एक छोर पर बडी शिला पर प्राचार्य कश्यप विराजमान थे । लगता था- गुहारूपी राजभवन से अभिनिष्क्रमण कर स्वयं महावीर इस वनखण्ड में ध्यानस्थ हो गये हैं । और अपने तपस्वी जीवन की, सत्य को प्रकाशित करने के माध्यम खोजने की कथा स्वयं कह रहे हैं 'कलाकार मित्रों ! भगवान महावीर तीस वर्ष की अवस्था में अब उस यात्रा पर निकल पड़े थे, जहां से उन्हें ऐसी शक्ति प्राप्त करनी थी कि वे अपनी सत्य की अनुभूति को जनमानस तक पहुंचा सकें । अतः इस यात्रा में वे इतने घूमे-फिरे कि छोटे से छोटा और बड़े से बड़ा व्यक्ति उनके सम्पर्क में आया । तरह-तरह के अनुभव उन्हें हुए । अनेक कष्टों को उन्होंने सहा । किन्तु यह सब कुछ उनके लिए कर्मों की निजंरा का माध्यम था । इन सब घटनाओं के प्रति वे कृतज्ञ थे कि उन्होंने कर्मक्षय का उन्हें अवसर प्रदान किया। और उसकी उपलब्धि में सहयोग, जिसके माध्यम वे जगत् को अन्धकार से प्रकाश में ला सके । महावीर केवलज्ञान प्राप्ति के पूर्व लगभग बारह वर्षों तक तपश्चर्या करते रहे । इस अवधि का सम्पूर्ण इतिहास किसी एक ग्रन्थ में उपलब्ध नहीं है । हो भी नहीं सकता था, क्योंकि ये सब अनुभव महावीर के निजी थे । किन्तु कुछ घटनाओं के आधार पर, कुछ संकेतों की व्याख्या स्वरूप उनके इस जीवन को क्रमबद्ध रूप में उपस्थित किया जा सकता है। यहां भी दोनों परम्पराओं में प्रचलित मान्यताओं का महारा लेना पड़ेगा। उन तथ्यों का जो सत्य के द्वार तक पहुंचने में सहायक होंगे। एक बात और ध्यातव्य है कि महावीर के इस तपस्वी जीवन में जिन ग्रामों, नगरों, जनपदों व व्यक्तियों के नाम परम्परा से प्राप्त होते हैं, उन सभी को ऐतिहासिक सिद्ध नहीं किया जा सकता और छियालीस चितेरों के महावीर न आज इतने समय बाद उनकी पहिचान ही की जा सकती है। इतना अवश्य है, संयोग से कुछ का अस्तित्व अभी भी मिल जाय। दूसरे, यह सब आवश्यक भी नहीं लगता। क्योंकि हमारा उद्देश्य महावीर के जीवन के उन सूत्रों को पकड़ना है, जिनसे जीवन में प्रकाश की सम्भावना है। वे कहां से प्राप्त हुए उन स्थितियों को समझना है। उनकी प्रामाणिकता पर विचार करना इतिहासज्ञों का कार्य है। इस प्राथमिक के साथ ही मैं आगे की कथा कह सकूँगा - 'एक मुहूर्त दिन शेष रहते महावीर उस वनखण्ड से निकल कर कमरिग्राम पहुंचे और वहीं रात्रि व्यतीत करने के विचार से ध्यान में खड़े हो गये । वे साधना में लीन थे अतः पूर्ण रूप से जाग्रत । उन्हें नींद लेने की आवश्यकता ही नहीं पड़ी। कहते हैं, उसी दिन सांयकाल किसी एक ग्वाले ने अपने बैलों की रक्षा का भार उन्हें सौंप दिया और वह कहीं कार्य से चला गया । लौटने पर उसे जब वहां बैल नहीं मिले तो उसने महावीर से पूछा । महावीर ध्यान में मौन थे । अतः उनके मौन के कारण उस ग्वाले का मन महावीर के प्रति शंका से भर गया। उसने बहुत से पाखण्डियों को इस प्रकार का कार्य करते देखा था । अतः वह खिन्न हो उन्हें रस्सी से मारने को प्रवत्त हुआ । तभी इस घटना के साक्षी इन्द्र ने उसे रोक लिया और महावीर का परिचय देकर उसे वहां से विदा किया। तदनन्तर इन्द्र ने महावीर से भी प्रार्थना की कि आपको इस साधनाकाल में अनेक कष्ट झेलने होंगे। अतः मुझे आप अपनी सेवा में रहने की आज्ञा दीजिए ताकि आपको ज्ञान की उपलब्धि निर्विघ्न हो सके । किन्तु तपस्वी महावीर ने इन्द्र को यह कह कर विदा कर दिया कि मर्हन्त अपने पुरुषार्थ और बल से ही केवल ज्ञान की स्थिति को प्राप्त होते हैं, किसी के सहारे नहीं । अतः मैं अंकेला ही साधनापथ में विचरण करूंगा । प्रातःकाल वहां से चल कर महावीर 'कोल्लाग' सन्निवेश में पहुंचे, जहां उन्होंने 'बहुल' ब्राह्मण के यहां क्षीरान से प्रथम पारणा की। वहां से विहार कर वे मोराक सन्निवेश में पहुंचे। वहां एक प्राश्रम के कुलपति ने उन्हें अपने यहां ठहरने का निमन्त्रण दिया। किन्तु महावीर वर्षावास में वहां पुनः पाने की बात कहकर आगे चल दिये । विभिन्न स्थानों में उन्होंने शिशिर चितेरों के महावीर सैंतालीस और ग्रीष्म ऋतु में साधना की तथा वर्षा के प्रारम्भ होते ही वे पुनः उस ग्राश्रम में लौट आये । किन्तु कुछ समय व्यतीत होने पर ही उन्हें लगा कि प्राश्रम का वातावरण उनके अनुकूल नहीं है। प्रतः वे वहां से भी चल पड़े और शेष प्रथम वर्षाकाल उन्होंने अस्थिक ग्राम में पूरा किया । अस्थिक ग्राम का प्रथम वर्षावास भगवान महावीर के तापस जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यहां रहते हुए उन्होंने आगामी भ्रमण के सम्बन्ध में कुछ निर्णय लिये । ऐसे स्थानों पर ठहरने का निश्चय किया जहां ध्यान में बाघा न पढे । महावीर ने मौन रहना ही श्रेयस्कर समझा, क्योंकि लोग तरह-तरह के प्रश्न पूछकर उन्हें परेशान कर सकते थे। प्रश्नों का समाधान करना सरल था, किन्तु इससे प्रात्मध्यान में बाधा पड़ती थी । गृहस्थों से कोई विशेष सम्बन्ध न रखने का उन्होंने प्रयत्न किया । कहा जाता है कि इसी ग्राम के परिसर में शूलपाणि नामक व्यन्तर का एक चैत्य था। महावीर जब उसमें ठहरने के लिए गये तो ग्रामवासियों ने उस व्यन्तर देव की भयानकता और क्रूरता से उन्हें परिचित कराया। किन्तु वे उनकी आज्ञा लेकर उसी चैत्य के एक कोने में ध्यान लगाकर खड़े हो गये । शूलपारिग ने महावीर की इस निर्भयता को अपना अपमान समझा और सांझ होते ही उसने अपने पराक्रम दिखाना प्रारम्भ कर दिये । भयंकर हाथी, पिशाच एवं विषधर नाग आदि के नाना रूप धारण कर वह देव उन्हें रात्रि भर कष्ट देता रहा । महावीर का तन आहत हो गया, किन्तु मन से वे पूर्ववत् ध्यान में मग्न रहे । फलस्वरूप शूलपाणि का हृदय परिवर्तित हो गया । उसको क्रूरता विदा हो गयी । ग्रामवासी इस घटना को देखकर महावीर की साधनां के प्रति श्रद्धा से भर उठे । मार्गशीर्ष कृष्णा प्रतिपदा को महावीर ने अस्थिक ग्राम से वाचाला की तरफ विहार किया। वाचाला जाने के लिए कनकखल प्राश्रम पद से होकर जाना पड़ता था । भगवान महावीर जिस दृष्टिविष सर्प रहता था, जिसके नेत्रों से यद्यपि गांव के ग्वालों ने महावीर को इस रास्ते से जाने को रोका था, किन्तु प्रभय और करुणा के धारक वर्धमान को इसकी क्या चिन्ता ? वे उसी मार्ग अड़तालीस चितेरों के महावीर में एक देवालय के समीप ध्यानारूढ़ हो गये। सांयकाल जब सर्प अपने निवास स्थान पर लौटा तो इस निर्जन प्रदेश में एक मानव को देखकर शंकित हो उठा । उसने अनेक बार अपनी विषभरी दृष्टि से महावीर को भस्म करना चाहा । किन्तु जब सफल न हुआ तो उन पर झपट कर उसने उनके पैर के अंगूठे में काट खाया । उसके आश्चर्य की सीमा न रही जब उसने देखा कि महावीर के पैर से खून की जगह दूध निकल रहा है। जैसे ही उसने महावीर से दृष्टि मिलायी उसे सुनायी पड़ा - समझ चण्डकौशिक ! समझ ।' यह नाम सुनते ही उस दृष्टिविष सर्प का सब क्रोध जाता रहा । उसे अपने पूर्वजन्म का स्मरण हो माया, जिसमें वह किसी आश्रम का कुलपति था और अपने कर्मों के कारण इस रूप में जी रहा था । उसने महावीर के समक्ष प्रायश्चित किया और कुछ दिनों पश्चात् देह छोड़कर स्वर्ग में देव हो गया । महावीर के साथ घटित इन प्रसंगों की अपनी अर्थवत्ता है। ऐसा लगता कि महावीर की साधना का स्वरूप इतना अनोखा था कि उन्हें उस युग में पहिचानना कठिन हो गया था। तत्कालीन सभी धार्मिक विचारक किसी न किसी मत के प्रतिपादक थे। उन्होंने कुछ निश्चित चिन्ह पकड़ रखे थे । जो उनके अनुयायी थे वे उनकी सेवा करते थे और जो नहीं थे, वे किनारा काटकर अलग हो जाते थे। किन्तु महावीर के साथ यह दिक्कत थी । वे इतने वीतरागी हो गये थे कि साधारण लोग उनसे निकटता का अनुभव नहीं कर पाते थे । न तो ये किसी को मुख-सम्पदा की प्राप्ति कराते थे और न ही उनके कष्टों का प्रत्यक्ष निवारण करते थे। यही कारण है कि उन्हें अपरिचित- सा जानकर कभी कोई सता लेता था । कभी कोई प्रणाम कर लेता था । तपश्चर्या के इस साधनाकाल में महावीर ने जो कठिन से कठिन रास्ता चुना है तथा लोगों के मना करने पर उन्हीं स्थानों पर रात्रि में ठहरे हैं, जहां किसी न किसी विघ्न की सम्भावना थी इसमें भी एक गहरा कारण है । वे यह जान लेना चाहते थे कि उनकी आत्मा प्रतिकूल परिस्थितियों में भी कितनी जागी हुई है ? उनके सम्पर्क में आने वाली ऐसी आत्मामों पर उसका क्या प्रभाव पड़ता है ? साथ ही इन कथा प्रसंगों से महावीर के आन्तरिक गुणों को भी ग्रहण करने में सुगमता होती है। सांप के काटने पर उनके चितेरों के महावीर चार पैर से निकलना चमeकार भले लगे, अतिशयोक्ति भी, किन्तु वह इस बात का प्रमाण है कि महावीर में जीवों के प्रति अगाध ममत्व के भाव है। उनके साथ कोई कुछ भी करे, महावीर का प्रत्युत्तर करुणा ही होगा। महावीर की साधना के इस दूसरे वर्ष की प्रमुख घटना है-मक्खलिपुत्रं गोशालक का उनके साथ सम्बन्ध होना। कहा जाता है कि विहार करते हुए जब महावीर राजगिरि पहुंचे और पास के उपनगर नालन्दा में एक तन्तुवाय शाला में वर्षावास किया तो उसी समय वहीं पर गोशालक नामक एक मेख जातीय युवा भिक्षु भी ठहरा हुआ था। महावीर के तप, ध्यान और माचरणं आदि से गोशालक बहुत प्रभावित हुआ और उसने महावीर के शिष्य होने का निश्चय किया। किन्तु महावीर ने इसका कोई तत्काल उत्तर नहीं दिया। गोशालक निरन्तर उनके साथ लगा रहा । एक बार कार्तिक पूर्णिमा का दिन था । भिक्षा-चर्या को जाते हुए गौशालक ने महावीर से पूछा- 'ग्राज मुझे भिक्षा में क्या मिलेगा ?" उन्होंने उत्तर दिया- 'कोदों के नन्दुल, छाछ और कूट रुपया ।' गोशालक महावीर की इस भविष्यवाणी को मिथ्या प्रमाणित करने के लिए उस दिन धनाड्य लोगों के यहाँ ही भिक्षार्थ गया। किन्तु वहां कुछ प्राप्त न कर सका । मन्त में एक कर्मकार ने उसे भिक्षा में वही दिया जो महावीर ने कहा था । इस घटना का गोशालक पर बड़ा प्रभाव पड़ा। वह सोंचने लगा वही होता है जो पहले से निश्चित होता है। इस प्रकार वह नियतिवादी हो गया। अपने इस विचार को और अधिक पुष्ट करने के लिए वह भाजीवकों के उपकरण छोड़कर महावीर का शिष्य बन गया और निरन्तर उनसे इस प्रकार के प्रश्न पूछना रहा । नालन्दा से बिहार कर महावीर अपनी साधना के तीसरे और चौथे वर्ष में कोल्लाग सन्निवेश, सुवर्णखल, ब्राह्मणगांव, चम्पा, कलायसंनिवेश कुमारा, चोरात एवं कपंगला आादि अनेक स्थानों पर भ्रमण करते रहे। गोशालक उनके साथ बना रहा। कभी वह पार्श्व परम्पन के मुनियों से विवाद लेता तो कभी वैदिक परम्परा के साधुओं से । किन्तु महावीर उसे हमेशा समझाते रहते और आत्मध्यान का उपदेश देते थे। इस प्रकार के भ्रमण में महावीर को अनेक कष्ट झेलने पड़े। कभी उन्हें कोई गुप्तचर समझकर पकड़ लेता तो कभी वे डाकुओं से घिर जाते । किन्तु महावीर कहीं प्रतिरोध न करते। उनकी इस मध्यस्थ वृत्ति के कारण एक ओर जहाँ तत्कालीन तपस्वियों को ईर्षा होती, वहीं दूसरी भोर महावीर की साधना में श्रद्धा रखने वाले व्यक्तियों की भी संख्या बढ़ती जा रही थी। कभी-कभार महावीर के पिता सिद्धार्थ के मित्र या परिचित लोग भी उनको मिल जाते। वे उनकी इस अपूर्व साधना को देखकर सिद्धार्थ के भाग्य को सराहने लगते । महावीर ने अपने कष्ट निवारण के लिए किसी की सहायता नहीं ली। इसका भी एक कारण है। महावीर यह जानते थे कि जिस किसी के द्वारा मेरा शरीर सताया जाता है या जो मुझे उपसर्ग पहुंचाने का प्रयत्न करते हैं, ने भने अपनी हानि कर रहे हों, किन्तु मेरा भला कर रहे हैं। उनके निमित्त से मेरे कर्मों की निर्जरा हो रही है। इस बात का गहन दर्शन है। यदि कोई किसी को सता रहा हो तो ऊपर से तो लगेगा कि वह व्यक्ति दुष्ट है। गलत काम कर रहा है। किन्तु इससे सताये जाने वाला उपकृत हो रहा है। उसके प्रति अपने कर्मों से प्रऋरण हो रहा है। शायद यही कारण है कि एक दो प्रसंगों को छोड़कर महावीर ने अपने जीवन में शारीरिक दृष्टि से किसी की सहायता नहीं की। भले उनके अन्तस् की करुणा इससे अधिक कार्य करती रही हो। किन्तु इस गहराई का चिन्तन तभी भ्रा सकता है, जब व्यक्ति अपने पूर्वजन्मों की श्रृंखला में जागृत होकर उतरे। महावीर ने अपनी साधना में इसी का प्रयत्न किया है। अनार्य देश राढभूमि में विचरण कर महावीर ने अनार्य लोगों की अवहेलना, निन्दा, खर्चना और ताड़ना आदि को अनेक बार सहा । वे यदि किसी घर के बरामदे में रात्रि में खड़े होकर ध्यान करने लगते तो लोग उन्हें बोर समझकर भगा देते। वे जब भिक्षा लेने किसी द्वार पर पहुंचते तो दूसरे धर्म के साधु व भिखमंगे उन्हें धक्का देकर भागे सरका देते। किसी सराय यादि में यदि वे विभाग के लिए रुकते तो उनके कान्तिमय शरीर और तारुण्य की लालची स्त्रियां उन्हें परेशान करने लगतीं। किन्तु महावीर इन सबकी उपेक्षा करते चितेरों के महावीर इक्यावन रहे। उन्हें मात्र अपना लक्ष्य दिखता था, मार्ग के कंटक, कंकड़ नहीं इसीलिए वे बागे बढ़ते रहे । साधना के छठे वर्ष में कूपिय ग्राम मे कंसाली की ओर जाने के लिए महावीर ने जब विहार किया तो गोशालक ने साथ चलने के लिए मना कर दिया। उसने कहा - 'आपके साथ रहते हुए मुझे बहुत कष्ट उठाने पड़ते आप समर्थ होते हुए भी मेरी सहायता नहीं करते। इसलिए आपके साथ अब मैं नहीं चलूंगा।' महावीर मौन रहते हुए भागे बड़ गये । शालिशीर्ष ग्राम के उद्यान में कटपूतना नामक ब्यम्वरी ने महावीर पर चोर उपसर्ग किया। महावीर ध्यान से विचलित नहीं हुए। प्रतः उनकी मनःस्थिति क्रमशः इतनी विकसित हुई कि उन्हें उसी समय 'लोकावधि' नाम का ज्ञान प्राप्त हो गया, जिससे वे लोक के समस्त द्रव्यों को साझाङ जानने और देखने लगे। यहां से महावीर भद्दिया की ओर प्रस्थान कर गये । भदिया के चातुर्मास में छः माह तक इधर-उधर घूमकर गोशालक फिर प्राकर महावीर के साथ हो गया किन्तु अभी तक उसने अपनी नियतिवादी विचारधारा को नहीं छोड़ा था। कहा जाता है कि एक बार महाबीर सिद्धार्थपुर से कर्मग्रान जा रहे यहाँ वैश्यामन नामक एक तापस से मोशालक का मतभेद हो गया। अतः उत सापस ने तेजोलेश्या छोड़कर उसे भस्म करना चाहा। तब महावीर ने तुरन्त शीतलेश्मा छोड़कर गोबालक को बचाया । तेजोलेश्या के प्रभाव से गोशालक बहुत प्रभावित हुआ और उसने महावीर से उसे प्राप्त करने की विधि पूछ ली। कुछ समय बाद, महावीर की साधना के बसवें वर्ष में वह उनसे प्रथम हो गया। छः माह तक रूप, भातापना आदि करके उसने तेजोलेश्या प्राप्त की, फिर निमित्तशास्त्र पढ़ा। और इस प्रकार असाधारण शक्तियों का चार होकर वह भाजीविक सम्प्रदाय का स्वर्ग तीर्थकर बन गया । इधर महावीर विभिन्न प्रकार के ध्यान करते हुए भावस्ती पहुंके यहाँ उन्होंने अपना दसवां वर्षावास किया। श्रावस्ती से कौसाम्बी वाराणसी, राजगिरि, मिथिला बादि नवरों में बिहार करते हुए महावीर पुनः भाये जहां उन्होंने साथवा का ग्यारहवां वर्ष पूरा किया ? :आठ. जगत् के प्रति समर्परण यहां तक की कथा कहकर आचार्य कश्यप क्षरण भर के लिए रुके। वे कथा का सूत्र पकडना ही चाहते थे कि एक जिज्ञासु कलाकार पूछ बैठाआचार्यप्रवर ! आपने महावीर की साधना का विस्तार से वर्णन किया । वे कितना घूमे-फिरे यह भी बतलाया । किन्तु गुरुदेव ! महावीर को तो ! प्रात्मसाधना करनी थी। एक स्थान पर ध्यानस्थ होकर भी तो वे ज्ञान प्राप्त कर सकते थे। तब इतना भ्रमण किसलिए ? प्राचार्य प्रश्न सुनकर थोडा मुस्कुराये । श्रोताओं पर दृष्टि डालते हुए वे समाधान की मुद्रा में हो गये -- 'भद्र सागरदत्त ! तुमने प्रथम प्रश्न पूछा । किन्तु बहुत ही महत्वपूर्ण सामान्य सी बात है, महावीर क्षत्रिय थे। राजा दिग्विजय करते ही हैं। अतः उन्होंने भी सोचा-मैं पदयात्रा द्वारा ही दिग्विजय लूं । हैन सही बान ?" मारा शिल्पीसब समाधान की सरलता का अनुभव करते ही एक-दूसरे की ओर देखते हुए इसने लगा । प्रश्नकर्ता को दुविधा में पड़ने का अधिक अवसर प्राचार्य ने नहीं दिया। वे गम्भीरता पर उतर भाये'नही भद्र ! केवल ऐसा नहीं था। महावीर जैसी आत्माएँ कोई कार्य निरर्थक और सासारिक दृष्टि से नहीं करती हैं। महावीर के निरन्तर बारह वर्षो तक घूमते रहने और देश के इस छोर से उस छोर तक के लोगों के बीच विचरने का एक दूसरा कारण था। इसलिए मैं कहता हूँ कि उन्होंने अपना घर नही त्यागा था, केवल उसके विस्तार को वे समझ गये । यह भवन, यह नगर, यह भूखण्ड, प्रदेश, देश कुछ भी उनका नहीं है, ऐसा कहना तभी सम्भव जब सारी धरती ही उनकी हो । जैसे कोई मकान मालिक भवन, बरामदे, प्रवेश कक्ष, शयनगृह, रसगृह आदि में से किसी एक को पकड़कर नहीं बैठ जाता, बल्कि पूरे भवन को अपना सानता है। उसी प्रकार महाजीद अपनी साधना में यह देखने निकले थे कि उनकी आत्मा का विस्तार कहां तक है इस चिंतेरों के महावीर तैंतालीस धरती के कितने भूभाग ने उनके अस्तित्व को स्वीकार किया है ? 'वास्तव में महावीर का अमरण जीवन की व्याल्या का सजीव रूप वा लोगों को प्रासकि और मोह समझ में या जाय, इसलिए वे पूर्ण मनालकी और निर्मोही होकर घूमे। उनके द्वारा विभिन्न कष्टों को सहना और मौन रहना इस बात की उद्घोषणा करता था कि जो कष्ट पा रहा है वह कुछ और हैं, तथा जो शान्तखडा मानन्दित हो रहा है वह कोई और है। जीक सजीव के इस भेदविज्ञान की मूक व्याख्या करने हो महावीर विचरण करते रहे । उनके बिचरण से ही यह पता चलता है कि सद् एवं असद्वृत्तियों का कहां टकराव होता है तथा असद् की पराजय और सद् की विजय के मूल में क्या कारण हैं ? अतः महावीर की बिहार-यात्रा एक संसार है। स्वयं महावीर जीव के प्रतीक । उनको कष्टों में डालने वाले प्रसवृत्तियों के प्रतिरूप तथा इन सब स्थितियों में भी परम ज्ञान की उपलब्धि कर लेना मात्मा की पूर्णमुक्ति की सम्भावना का द्योतक है।' 'सुरुदेव ! सुन्दर व्याख्या की अापने महावीर की साधनामय यात्रा की। जितना जीवित प्रश्न उतना ही सशक्त समाधान। इस बातावरण में मेरा मन् भी तर्क पर उतर पाया। क्षमा करें प्राचार्य ! महावीर अपने इस साधना काल में अनेक बार वैशाली आये होंगे। अपनी जन्मभूमि के समीष । क्या कभी उनकी अपने माता-पिता से भेट हुई ? और यदि हुई तो क्या अनुभव किया होगा ममतामयी त्रिशला ने, ज्ञानी सिद्धार्थ ने और स्वयं महाबीर मे ?" 'आयुष्मत्ति कनकप्रभा ! तुम्हारे भावपुर्ण चेहरे से लग रहा है कि तुम उम्र दृश्य से गुजर रही हो जब भगवान बुद्ध अपनी जन्मभूमि में घाये थे। से उनके पिता पत्नी मशोधरा एवं पुत्र राहुल ने उनको अगवानी की बी कितना मर्शमक था वह दृश्य, जब पुत्र राहुल मां के कहने पर अपने पिता से दाम मांग रहा था । इसके उत्तर में बुद्ध ने उसे प्रभावित कर लिया था अपने संघ में । दुखहारी यशोधरा एक बार फिर चली गई थी ? देवी कनकप्रभा ! भगवान महावीर ने ऐसा कुछ नहीं किया। एक बार जिन बन्धनों से अपने को मुक्त क्रिया को किसर एक. महाकीर की याचा निरंतर मागे बढ़ने की कीली चायें होंगेः उन्हें कुछ ऐसा नहीं लगा कि उनका कोई भर भी है। माता-पिता अपवा स्वजन भी हैं। वे इन सम्बन्धों से ऊपर उठ चुके थे। जहां तक उनके मातापिता की अनुभूति का प्रश्न है, हो सकता है यदि ममता का बन्धन अधिक प्रबल रहा होगा तो वे महावीर के दर्शन करने गये हों। किन्तु इतिहास इस सम्बन्ध में मौन है। एक सम्भावना यह भी लगती है कि महावीर के मातापिता पार्श्वनाथ की परम्परा के अनुयायी थे और अभी तक महावीर के धर्म का कोई स्वरूप स्पष्ट नहीं हो सका था । भतः उनकी भोर इनका कोई झुकाव ही न रहा हो । धार्मिक मामले में उस युग में अधिक कहरता का पालन होता था। श्रीकन्ठ ! तुम्हें तो मालूम है, सम्भवतः इन्हीं प्रश्नों के कारण एक परम्परा में महावीर के अभिनिष्क्रमण के पूर्व ही उनके माता-पिता की मृत्यु स्वीकार की गई है।' 'आचार्य ! क्षमा करें व्यवधान के लिए। मुझे लगता है, हम तथ्यों की पकड़ मजबूत कर रहे हैं। इससे सत्य की व्याख्या मधूरी रह जावेगी। आपने महावीर की साधना की अभी विस्तार से बात की। अनेक उपसर्गों को उन्होंने सहा, रात्रि में वे सोये नहीं तथा भोजन भी बहुत ही कम उन्होंने किया, इत्यादि । किन्तु गुरुदेव ! मात्र इतने के लिए तो महावीर का निष्क्रमण नहीं हुया होगा ? वे ध्यान के द्वारा क्या उपलब्ध कराना चाहते थे, क्या उन्हें मिला ? मैं जानना चाहता हूं।' 'प्रिय चित्रांगद ! तुम्हारी प्रशा के अनुकुल है यह प्रश्न । महावीर निश्चय ही किसी अनुपम शक्ति, अलौकिक ज्ञान की खोज में निकले थे। हम प्रायः अपनी शक्ति और ज्ञान के पैमानों से नाप कर उनके व्यक्तित्व को छोटा कर देते हैं। कहते हैं-~महावीर अहिंसक थे, त्यागी थे, क्षमावान थे आदि-आदि । ये गुण हमारे लिए महत्व के हैं। महावीर जैसी बात्मा तो इनसे ऊपर उठ चुकी थी । अतः उनकी बारह वर्षों की साधना कोष और क्षमा, हिंसा और महिसा, त्याग और भोग बादि जैसे तुम्दों से मुक्त होने की थी । वे दोनों स्थितियों में दृष्टा होने का प्रयत्न कर रहे थे। और वे इतने बीतरागी हो जाते थे कि शरीर की सामान्य क्रियाओं की उन्हें आवश्यकता ही अनुभव नहीं होती थी इसलिए वे निद्रा न लेते थे। भोजन न करते थे। फिर भी उनका शरीर कान्तिमम एवं स्वस्थ बना रहा। यह भौतिक आवश्यकताओं को कम करने का सबसे बड़ा उदाहरण था। इस बात का प्रतीक भी कि व्यक्ति यदि आत्मा के प्रति निरन्तर जागृत होता जाये तो कर्मबन्धन की अनेक क्रियाएँ स्वमेव तिरोहित होती जाती हैं । 'महावीर की साधना और ध्यान इस बात पर भी केन्द्रित था कि वे सत्य की खबर जीवन के जितने रूप और स्तर हैं उन सब तक पहुंचा देना चाहते थे । जो उन्हें उपलब्ध हो रहा था उसे वे कण-करण में वितरण करते जा रहे थे । यही कारण है कि कथाओं, प्रसंगों में देव, मानव, व्यन्तर पशु, पक्षी, सज्जन, दुर्जन सभी प्रकार के जीव महावीर के सानिध्य से कृतार्थ हुए हैं। अतः आात्मिक जागरण की ओर प्रारणी जगत् को भाकर्षित करना महावीर की साधना का प्रतिपाद्य था। उन्होंने विभिन्न प्रकार ध्यानों द्वारा स्वयंपूर्ण जागरण की उपलब्धि की है। उनके केवलज्ञान प्राप्ति के प्रसंग को कहने के पूर्व उनके अन्तिम वर्ष की साधना से भाप सबके साथ और गुजरना चाहूंगा तीन एकाग्र हो सुनें ।" 'साधना के दस वें वर्ष में महाबीर मेंढिय ग्राम से बत्सदेश की राजधानी कौशाम्बी पधारे । सारी नगरी उनकी अगवानी के लिए उमड़ पड़ी । जो भीड़ में पीछे भी रह गए तो उनका मन सबसे आगे बन्दना करने दौड़ रहा था। महावीर के उस नगर में प्रवेश करते ही उसकी शोभा बढ़ गई । प्रत्येक नागरिक महावीर के सानिष्य के लिए आतुर था। क्योंकि उस समय तक महावीर की समतामयी दृष्टि एवं निरहंकारी भाव पर्याप्त प्रसिद्धि पा चुके थे । उनके चरणों से अपने ग्रांगन को पवित्र करने की हरेक के मन में भाकांक्षा थी। महावीर नासाग्र दृष्टि किए चलते जा रहे हैं। वे आगे-मागे और जनसमुदाय उनका गुणगान करते हुए पीछे-पीछे जिस मार्ग से वे निकल जांय वहीं के प्रासादों के बातायन खुल पड़ते देखने लगते हजारों नेत्र उनकी कान्तिमयी मनोरम छमी को । किन्तु यह क्या ? महावीर ने समस्त कौशाम्बी का भ्रमण कर लिया और किसी एक के घर भी बाहार ग्रहण नहीं किया ? जैसे ही लोगों का ध्यान इस तरफ गया, बात कानों-कानसरे मर में फैल गयी । सामन्मणों का छप्पन चितेरों के महावीर गया। श्रावकों, सार्थवाहों, श्रष्ठों, सामन्तों के कुछ के कुछ उनके चरणों में लौटने लगे। किन्तु महावीर ने किसी की घोर भांख उठाकर भी नहीं देखा। उनकी वीतरागता और ध्यान की बात तो सुनी थी लोगों ने, लेकिन इस प्रकार भ्रमण करते हुए उनके प्रमुपस्थित होने का दृश्य उस दिन ही लोगों ने देखा । कितना अद्भुत ? कितना चिन्ताजनक ? कौशाम्बी के राजा से न रहा गया । वह दोडा भाया । उसने महावीर की अगवानी की। राजभवन में भोजन के लिए उन्हें मामन्त्रित किया। किन्तु महावीर हैं, जो सौम्य मुद्रा में धागे चले जा रहे हैं। इतने मौन कि लोग उनकी प्राकांक्षा की कल्पना भी न कर सके और हताश उन्हें जाता हुभा देखते रहे । महावीर नगर से निकलकर समीप के उद्यान में जाकर ध्यान सग्न हो भये । इघर नगर में तरह-तरह की बाते। जो श्रमण परम्परा के अनुयायी थे, महावीर के श्रद्धालु, उन्हें अपनी धार्मिकता पर सन्देह होने लगा । दुख इस बात पर कि उनके घर से अंतिम तीर्थकर आज भूखे लौट गये । तथा जो ब्राह्मण परम्परा के अनुयायी या अन्य तीर्थक थे, उन्हें यह कहने का अवसर मिल गया कि देखा-जैन साधु कितने मानी होते हैं ? महावीर ने हमारे राजा तक का निमन्त्रण नहीं माना। कुछ लोग यह खोजने में लग गये कि नगर में अवश्य कोई ऐसा अपुण्यशाली व्यक्ति है, जिसके प्रभाव से आज महावीर की पारणा में विघ्न आ गया । नगर सेठ कृषभानु की सेठानी तो और भी चिन्तित । उसे लगा कि उसके भवन के पिछवाड़े तलघर में जिस कुमारी चन्दना को उसने अपनी सौत समझकर बांधकर डाल रखा है, उसी के पाप के कारण महावीर उसके घर में तो नँया, उसकी रक्या तक में नहीं आये। उनके दर्शन से भी वह रह गयी । किन्तु उसने तुरन्त निश्चय किया कि अब में ध्यान रखूंगी कि महावीर इस ओर न आ जाय अन्यथा उन्हें किराना पड़ेगा और ने अपना प्रबन्ध पूरा कर लिया। राजकुमारी चन्दना क्या सोच रही थी, उसे शब्दों में कहना कठिन है बाद जा रहा था कि वह राजा चेतक की होने पर भी मान्य चिंतेरों के महावीर सत्तावन के कारण शत्रुओं के हाथ पड़ गयीं। वहां से किसी प्रकार छूटी तो सेठ कृषभानु उसे पुत्री बनाकर घर पर ले जाये। उसे लगा दूसरा पिता ही उसने पा लिया है। किन्तु उसका अप्रतिम रूप उसका बैरी बन बैठा। सेठानी से सौतिया ढाह के कारण अबसर देखकर उसे बेड़ी पहिला दीं और इस तलघर में डाल दिया । श्रद सूप में रखे इन कोंदो के भोजन से ही उसका जीवन है। बाहर की दुनिया कैसी है, उसे कोई खबर नहीं। पता नहीं वह कब मुक्त होगी ? दूसरे दिन कौशाम्बी में फिर वही जमघट और महावीर के निराहार मोट जाने पर वही विषादपूर्ण नीरवता । धीरे-धीरे यह एक कम बन गया । महावीर जब तक उस प्रदेश में रहे, खाली हाथ लौटते रहे। इधर-उधर बिहार करने भी चले गए तो किसी नगर में उनकी पारणा न हो सकी। लोगों ने उनको भोजन कराने के अनेकों प्रयत्न कर लिए । भ्रमण-परम्परा में साडु द्वारा आहार के लिए जो भी अभिग्रह लिए जाते थे उन्हें पूरा करने का अव कर लिया गया। किन्तु सब विकल । बोर इस प्रकार महावीर को निराहार भ्रमरण करते हुए लगभग पांच माह व्यतीत हो गए। उनके मौन, उनके ध्यान एब मुख पर वही सौम्यता देखकर लोग आश्चर्यचकित थे । छठा माह पूरे होने में मात्र पांच दिन रह गए। महावीर दैनिक क्रम में कौशाम्बी नगरी के मार्गों का भ्रमण कर रहे थे। जनसमुदाय उनकी जयजयकार करता हुआ उनका अनुगमन कर रहा था। किसी ने सेठ कृषजांनु की गली का मार्ग प्रशस्त किया । महावीर उघर चल पड़े। तलघर में राजकुमारी चन्द्रमा को कोलाहल सुनायी पड़ा। स्पष्ट होने पर ज्ञात हुआ महावीर इधर आ रहे हैं। वह मानन्द से उड़खना चाहती थी उनकी बन्दना करने के लिए । किन्तु सोचने लगी- मैं उन्हें बाहार में क्या दूंगी ? एक तो मेरो, ऐसी दशा और दूसरे ये असे कोंदों के दाने ? ऐसा मेरा. पुण्य कहां ?" तभी उसे लगा कि महावीर, तो इस भवन की ओर ही जा रहे हैं। वह उनके प्रति बंद्धा से भर गयी और उन्हें देखने उत्साह से जैसे ही उठी उसकी बेड़ियों की कड़ियां टूट सम। यह सूप में पदों को लेकर ही दरवाजे की ओर भावी देखा महाबीर उसी की कोर शान्तभाव से लेकर हैं । अट्ठावन चितेरों के नहावीर चन्चना का रोम-रोम नाच उठा। वह आगे बढ़ी। भक्तिपूर्वक उसने वर्धमान अगवानी की। उन्होंने उसकी विनय को स्वीकार कर लिया और दोनों हाथ भोजन लेने की मुद्रा में कर दिये । यह एक अपूर्व दृश्य था। हजारों नर-नारी अपने नयनों को सार्थक कर रहे। देख रहे थे कि चन्द्रमा महावीर के हाथों में कोंदे डाल रही है, वे सीर बनते जा रहे हैं। महावीर दोनों स्थितियों में प्रसन्न हैं । चन्दना आत्मशक्ति से भरती जा रही है। उसे लग रहा है कि जितने दाने कोंदे वह दे पा रही है उससे असंख्य गुणा ज्ञान उसमें समाहित होता जा रहा है। पता ही नहीं चल रहा कि वह महावीर को आहार दे रही है या उनसे ज्ञान का आहार ले रही है। महावीर बहार लेकर वहां से कब चल दिये किसी को पता नहीं चला। क्योंकि सभी चन्दना के भाग्य की सराहना में खो गये थे। चारों ओर उसकी कीति ही उपस्थित थी। बहुत दिनों बाद एक भारतीय नारी का फिर सम्मान हुआ था । उसके शील का । उसकी प्रभु को समर्पित श्रद्धा का । कृषभानु सेठ की पत्नी चन्दना के चरणों पर नत थी और चन्दना उसके द्वारा दी गयीं बेड़ियों की कृतज्ञ थी, जिनके आशीर्वाद से आज वह आत्मबोष के द्वार पर खड़ी हो सकी है। सेठ कृषभानु इस सव अप्रत्यासित को देखता हुआ महावीर की चरण-रज को बटोरने में लगा था। आज वह कृतार्थ हो गया।' लोग जब यथार्थ पर लौटे, परस्पर विचार-विमर्श हुआ, शानियों ने अपनी बुद्धि को पैनी किया तब यह जान पाया कि महावीर को इतने समय तक आहार इसलिए नहीं मिला, क्योंकि उनका अभिग्रह था -- था -- 'मुण्डितसिर, पांवों में बेड़ियों सहित तीन दिन की भूखी, दासत्व को प्राप्त हुई कोई राजकुमारी यदि कोंदों के दाने सूप में रखकर द्वार पर खड़ी हुई मुझे आहार के लिए अवगाहन करेगी तो पारणा करूंगा, अन्यथा नहीं।' किसके वश में था यह अभिग्रह पूरा करना ? धन्य हो राजकुमारी चन्दनबाला को, जिसने हमें, हमारी नगरी को यह सौभाग्य प्रदान किया है।' 'और आचार्यप्रवर ! हमारा सौभाग्य है कि आप के मुख से सुनकर हम भगवान महावीर की कथा को अपने सामने घटता हुआ देख रहे हैं। उनके प्रति पूर्ण श्रद्धा के साथ एक छोटा-सा प्रश्न है। मैंने सुना है कि बारह वर्ष की साधना में महावीर ने केवल तीन सौ उनचास दिन ही बाहार लिया। इतने दिनों तक बिना भोजन के थे कैसे रह लेते थे ? और इसने कठिन से कठिन मंभिवह करने की उन्हें क्या आवश्यकता थी ? जिज्ञासावश ही पूछ रहा हूं-गुरुदेव । 'वत्स श्रीकण्ड ! तुम्हारी विनम्रता और उत्कंठा हे मैं परिचित और तुम मेरी समाधान की शैली से। अतः उतना ही ग्रहण करना जो तुम्हें रुचिकर हो । तुम्हारी कला को सायंक। भोजन से हमारा गहरा सम्बन्ध है । इसलिए हम सोचते हैं कि महावीर इतने दिन बिना भोजन के कंसे रह गये ? वस्तुतः महावीर ने भोजन छोड़ने के लिए कोई प्रयत्न नहीं किया। उनसे अनायास भूजन छूट गया। उनकी साधना की यह उपलब्धि थी कि उनके शरीर को अब स्कूल भोजन की आवश्यकता नहीं रह गयी थी । शरीर को जिन कारणों से भूख लगती है, वे कार्य प्रायः विसर्जित हो चुके थे। यह इसलिए सम्भव हो सका क्योंकि महाबीर की उपस्थिति शरीर में बहुत कम ही रहती थी। मुझे तो लगता है, जितने दिन उन्होंने बाहार लिया उत्तने दिन ही वे शरीर के हो सके। अन्यथा हमेशा वे आत्मा के समीप रहे । आत्मा के साथ इस निकटता के कारण ही सम्भवतः वे अपने उन दिनों को 'उपवास' का दिन कहते थे। दूसरी बात यह भी प्रतीत होती है कि भोजन करना एक बडे बारम्भ के साथ जुड़ जाना है। न जाने कितने जीवों के कायिक और मानसिक घात-प्रतिषातों का इसमें भागीदार बनना पड़ता है। महावीर की अहिंसा बहुत गहरे तलों तक उतरी थी । अतः वे ऐसे सूक्ष्म भोजन से ही काम चला लेते थे, जिसमें कम से कम प्रारम्भ हो । अभिग्रह धारण करने के पीछे भी यही भावना निहित दिलायी देती है। इतनी कठिन प्रतिज्ञा लेने से शायद ही भोजन का संयोग बैठे ऐसे जितने दिन भी गुजरे वे महाबीर के लिए उपयोगी होते थे । अभिग्रह लेने के दूसरा प्रमुख कारण यह था कि अपनी प्रतिज्ञाओं के द्वारा महावीर यह जान लेना चाहते थे कि उनकी जगत् के लिए कितनी आवश्यकता है ? इस जन्म में वे स्वयं के लिए कुछ पाने व करने नहीं है जो कुछ उन्हें उपलब्ध अतः वे यह देख लेना चाहते वे कि उनके जीवन को सुरक्षित रखने में जगत् का वातावरण मिलना साठ चिंतेरों के महावीर सजग है ? 'महाबीर कभी-कभी अभिग्रह ले लेते थे कि जिस घर के सामने दो बैन खड़े होंगे, द्वार पर चम्पक पुष्पों का वृक्ष होगा तथा कोई सुहामिन पूर्ण कलश लिए खड़ी होगी वही भोजन करूंगा। अब इन स्थितियों से उनकी साधना व ध्यान का कोई सम्बन्ध नहीं है। किन्तु उनका यह अभिग्रह यदि पूरा होता है तो उसका अर्थ है कि वनस्पति, पशु-जगत् एवं मानव का समन्वय प्रयत्न महावीर को जीवन देने के लिए उत्सुक है। इसकी दूसरी अन्विति यह है कि महावीर का हृदय जीवन के निम्न से निम्न तल तक विकसित हो चुका था, जहां उसके स्पन्दन के अनुरूप व्यवस्था करने में होड़ लग जाती थी। जीवन के प्रति इतनी अनासक्ति, जीवषा के प्रति इतना अभय और जगत् के जड़चेतन पदार्थों की व्यवस्था के प्रति इतनी निश्चिन्ता महावीर जैसी विकसित भारमाएं ही कर सकती हैं। सम्पूर्ण जगत् महावीर का घर हो गया था एवं समस्त प्रारणी उनके स्वजन इस बात की घोषणा करते हैं उनके भोजन । के निमित्त लिए गये कठिन से कठिन अभिग्रह ' एक बात और आपको बता दूं । जिस प्रकार महावीर अपने भोजनादि भावश्यकताओं के लिए जगत् पर निर्भर थे उसी प्रकार वे अपने जीवन की सुरक्षा के प्रति भी निश्चित थे । भापको ज्ञात होगा कि उनके इस साधना काल में जब भी उन पर कोई उपसर्ग हुआ, उन्हें सताया गया तो इन्द्र ने आकर उनसे आज्ञा चाही कि वह उनकी रक्षा में सहायक हो किन्तु महावीर ने उसकी सहायता को स्वीकार नहीं किया। महावीर की इस निडरता की परीक्षा के लिए संगमक नामक एक देव लगातार छह माह तक उन्हें अनेकों कष्ट देकर उनको विचलित करने का प्रयत्न करता रहा, किन्तु अन्त में हार कर भाग गया। इस प्रकार की जितनी भी कवाएं उनकी अच्छी निष्पत्तियां हैं। इससे ज्ञात शक्तिशाली था कि उसे साधना में किसी महावीर के जीवन के साथ सम्बद्ध हैं, होता है कि महाबीर का चित्र इतना दूसरे की अपेक्षा नहीं थी। महावीर अपनी इस अन्तर्याईगह में चूंकि निःसन होकर अकेले चल सके, इसलिए समस्त खम उनका हो गया. उन्होंने यह प्रभारिणत कर दिया कि सच्चा साधु नहीं
60 विधानसभा सीटों वाले त्रिपुरा में 16 फरवरी को वोटिंग हो गई। मुकाबला दो गठबंधनों में है। एक तरफ सरकार चला रही BJP-IPFT (इंडीजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा) हैं, और दूसरी तरफ हैं CPI(M)-कांग्रेस। सत्ता बचाने की कोशिश कर रही BJP ने अपने सभी स्टार प्रचारक मैदान में उतार दिए थे। PM नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, यूपी के CM योगी आदित्यनाथ, असम के CM हेमंत बिस्व सरमा समेत कई बड़े नेताओं ने रैलियां की। लेकिन, समीकरण CPI(M)-कांग्रेस की तरफ जाते नजर आ रहे हैं। हालांकि, BJP ने भी राम मंदिर से यूटर्न लिया और मेनिफेस्टो में विकास के बडे़-बड़े वादे किए हैं। उधर, पहली बार चुनाव लड़ रही पार्टी टिपरा मोथा दोनों गठबंधनों का गणित बिगाड़ने की ताकत रखती है। BJP की चिंता यहीं खत्म नहीं होती, जमीन के हालात बताते हैं कि त्रिपुरा में अयोध्या में राम मंदिर बनवाने का मुद्दा काम नहीं आया। इसका सबूत गृह मंत्री अमित शाह की रैली है। ये रैली 5 जनवरी को सबरूम में हुई थी। शाह ने भीड़ से पूछा, 'अयोध्या में राम मंदिर बनना चाहिए या नहीं? ' जवाब आया, लेकिन आवाज उत्तर भारत जैसी तेज नहीं थी। अमित शाह ने फिर यही सवाल पूछा और कहा- जरा जोर से बोलिए। दूसरी बार भी भीड़ से वैसा जवाब नहीं मिला, जैसी उम्मीद थी। शाह ने बात आगे बढ़ाई, 'बाबर ने मंदिर गिराया था, नरेंद्र मोदी ने मंदिर बनाया। कोर्ट में इतने लंबे समय तक इस मामले को दबाए रखने के पीछे कांग्रेस थी। नरेंद्र मोदी आए और सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर बनने का आदेश दिया। ' तालियां बजीं, लेकिन तालियां बजाने वालों में ज्यादातर BJP कार्यकर्ता ही थे। तालियों की आवाज से साफ था कि हिंदुत्व का एजेंडा त्रिपुरा के लोगों पर उतना असरदार साबित नहीं हो रहा है। BJP को डेवलपमेंट के साथ मुख्यमंत्री माणिक साहा के करिश्मे से ही उम्मीद है। '8 फरवरी को योगी आदित्यनाथ की रैली हो या फिर 12 फरवरी को नरेंद्र मोदी की। खुद अमित शाह भी उसके बाद रैली करने आए, लेकिन उन्होंने अयोध्या का जिक्र नहीं किया। असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्व सरमा ने 9 फरवरी को दक्षिण त्रिपुरा के आदिवासी इलाके तोई बाजार में कहा- 'ये गठबंधन सांप-नेवले की जोड़ी है, आप लोगों को समझ आया कि ये लोग दिन में लड़ते थे और रात में इलू-इलू करते थे। अब खुलकर इनकी शादी हो गई है। ' दरअसल, त्रिपुरा में BJP की पैठ पिछले 5 साल में ही बनी, कांग्रेस वहां मुख्य विपक्षी पार्टी रही। गठबंधन से पहले कांग्रेस और CPI(M) एक दूसरे पर जुबानी ही नहीं, जमीनी हमले भी करते थे। दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं पर दूसरी पार्टी के समर्थकों की हत्या के आरोप भी हैं। उधर, टिपरा मोथा 60 में से 48 सीटों पर चुनाव लड़ रहा है। उसका एजेंडा त्रिपुरा से अलग त्रिपुरालैंड की मांग है। इस पार्टी के मुखिया प्रद्युत कुमार किशोर लगातार BJP पर हमलावर हैं। कांग्रेस और CPI(M) का विरोध उनके एजेंडे में नहीं है। ऐसी भी चर्चा है कि कांग्रेस उनकी पार्टी से गठबंधन कर सकती है। 2019 के लोकसभा चुनाव में BJP ने त्रिपुरा की दोनों सीटें जीती थीं, लेकिन कांग्रेस वोट शेयर बढ़ाने में कामयाब रही। 2018 के विधानसभा चुनाव में यह 1. 8% था, जो 2019 में बढ़कर 25% हो गया। इससे साफ हो गया कि 2018 में BJP की जीत के पीछे CPI(M) की सरकार से ऊबे कांग्रेस के पारंपरिक वोटर थे। वही वोटर एक साल में ही फिर कांग्रेस की तरफ लौट आया। यह BJP के लिए खतरे की घंटी थी। 2023 के विधानसभा चुनाव के लिए जब CPI(M) और कांग्रेस ने हाथ मिलाया, तो BJP के लिए चुनौती बड़ी हो गई। इसीलिए सबसे पहले 74% हिंदू वोटर वाले राज्य में अयोध्या का कार्ड खेला गया, लेकिन इसे फेल होते देख, पार्टी ने कभी एक-दूसरे के दुश्मन रहे कांग्रेस और CPI(M) के गठबंधन को निशाना बनाया। BJP भले पिछली जीत दोहराने के दावे करे, लेकिन जमीन पर काम कर रहे कार्यकर्ताओं के फीडबैक में वे अब भी पिछड़ रहे हैं। 9 फरवरी को राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पार्टी का मेनिफेस्टो जारी किया। अब तक गठबंधन और विकास के मोर्चे पर CPI(M) को फेल बता रही BJP ने त्रिपुरा के लिए खजाना खोलने का वादा किया। आयुष्मान भारत योजना, जिसके तहत पूरे देश में इलाज के लिए 5 लाख रुपए मिलते हैं, त्रिपुरा में यह रकम बढ़ाकर 10 लाख करने वादा किया गया। घर में लड़की पैदा होने पर 49 हजार रुपए देने और ग्रेजुएशन करने वाली लड़की को स्कूटी देने की बात भी मेनिफेस्टो में है। किसान सम्मान निधि पूरे देश में 6 हजार थी, उसे बढ़ाकर 8 हजार किया जाएगा। उज्ज्वला योजना के तहत मिलने वाले LPG सिलेंडरों की संख्या बढ़ाई जाएगी। मेनीफेस्टो में यह सब ऊपर और CPI(M) पर भ्रष्टाचार और विकास न करने के आरोप नीचे थे। IPFT त्रिपुरा की रीजनल पार्टी है। 2013 में इस पार्टी ने त्रिपुरालैंड की मांग उठाई थी। 2018 में उसी मांग को पूरा करने के वादे के साथ वह BJP में शामिल हुई। इसका फायदा BJP को हुआ। 20 में से 18 रिजर्व सीटें इस गठबंधन के खाते में आईं। IPFT 12 सीटों पर चुनाव लड़ी, 8 पर जीती। त्रिपुरालैंड की मांग करने वाली IPFT अब इस मुद्दे पर खामोश है। जबकि टिपरा मोथा ने लिखित में BJP से त्रिपुरालैंड की मांग की। BJP ने इनकार किया, तो उसने गठबंधन नहीं किया। IPFT के प्रमुख रहे एनसी देबबर्मा की मौत से भी संगठन कमजोर पड़ा। उधर, टिपरा मोथा ने त्रिपुरालैंड की मांग को जोर-शोर से उठाया। गैर राजनीतिक रहे इस संगठन ने पार्टी बनाई और चुनाव में उतर गया। BJP को इसका अंदाजा लग चुका था, इसलिए IPFT को 5 सीटें ही दीं। राज्य में अब दो आदिवासी पार्टियां हैं- IPFT और टिपरा मोथा। उधर CPI(M) ने भी CM फेस के तौर पर आदिवासी नेता जितेंद्र चौधरी को प्रोजेक्ट कर दिया है। यानी आदिवासी वोटर के पास अब तीन विकल्प हैं, जो पहले एक ही था। 2018 में टिपरा मोथा ने चुनाव नहीं लड़ा, लेकिन IPFT का समर्थन किया था। CPI(M) और कांग्रेस के गठबंधन की ताकत समझने के लिए 2019 में हुए उपचुनाव के गणित को समझना होगा। 3 विधानसभा सीटों पर 2022 में चुनाव हुए थे। बदरघाट विधानसभा सीट खाली होने पर चुनाव हुए। इसके नतीजे में BJP पास हुई। BJP उम्मीदवार को 20,471 वोट मिले, कांग्रेस उम्मीदवार को 9,101 और CPI(M) को 15,211 वोट मिले। दोनों को जोड़ दें तो 24,312 वोट होते हैं। वोटों का ये गणित इस चुनाव में BJP के नतीजे पलट सकता है। त्रिपुरा के सीनियर जर्नलिस्ट शेखर दत्त कहते हैं- 'BJP के लिए लड़ाई मुश्किल है। कांग्रेस का पारंपरिक वोटर और CPI(M) का वोटर मिल गया है। आदिवासी वोट टिपरा के साथ होगा। CPI(M) ने भी आदिवासी CM फेस बनाकर आदिवासी वोटर्स को मैसेज दे दिया है। ' 'BJP ने डेवलपमेंट को मुद्दा बनाया। एयरपोर्ट हो या ब्रिज, सारे प्रोजेक्ट्स CPI(M) के हैं। काम चल रहा था। BJP ने बस क्रेडिट लिया। उन्हें अपने CM को हटाना पड़ा। जनता तो पूछेगी ऐसा क्यों किया? भ्रष्टाचार के आरोप सामने न आ जाएं और लोगों की नाराजगी चुनाव में भारी न पड़े इसलिए। ' CPI(M) के जितेंद्र चौधरी कहते हैं, 'चुनाव में हिंसा हुई, तो हम तैयार हैं। हम जवाब देंगे, लेकिन उम्मीद है कि ऐसा नहीं होगा। पहली बार किसी राज्य में चुनाव आयोग ने लेटर जारी कर जीरो वायलेंस इलेक्शन कराने का वादा किया है। ' जर्नलिस्ट शेखर दत्त भी कहते हैं, 'हिंसा तो होगी, यह सही है कि दोनों तरफ के कार्यकर्ता लाठी-डंडों के साथ तैयार हैं। ' सूत्रों के मुताबिक, इंटेलिटेंस ब्यूरो यानी IB ने नतीजे वाले दिन हिंसा होने का इनपुट दिया है। इसके मुताबिक, नतीजा कुछ भी रहे। कोई भी पार्टी जीते, लेकिन हिंसा होगी और यह लाठी-डंडों तक सीमित नहीं रहेगा। पिछले चुनाव में BJP- IPFT के गठबंधन को 44 सीटें मिली थीं। इसमें BJP ने 36 और IPFT ने 8 सीटें जीती थीं। CPI(M) को 16 सीटें मिलीं, कांग्रेस खाता ही नहीं खोल पाई। BJP को 43% और IPFT को 7. 5% वोट मिले थे। CPI(M) को 42. 7% और कांग्रेस को 1. 8% वोट मिले थे। यानी BJP गठबंधन को 50. 5% और CPI(M) के गठबंधन को 44. 2% वोट मिले थे। अगर IPFT का वोट टिपरा और CPI(M) में बंटा तो BJP का शेयर कम होगा। रिजल्ट के बाद टिपरा मोथा किसके साथ जाएगी, ये अभी साफ नहीं है। इस पार्टी ने 2021 में ट्राइबल एरियाज ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल पर कब्जा किया था। BJP और CPI(M)-कांग्रेस गठबंधन दोनों ने चुनाव से पहले टिपरा मोथा से गठबंधन की पेशकश की थी। इससे साफ हो गया कि नई होकर भी टिपरा मोथा राज्य की राजनीति में बड़ी ताकत है। उसने पहले ही CPI(M)-कांग्रेस के साथ गठबंधन से इनकार कर दिया था। अलग प्रदेश की मांग पर BJP से भी बात नहीं बनी। हालांकि, CPI(M) के CM फेस जीतेंद्र चौधरी को उम्मीद है कि चुनाव के बाद तीनों पार्टियों मिलकर सरकार बनाएंगी। वे कहते हैं- 'इस पर दोबारा बातचीत की जरूरत नहीं है। टिपरा मोथा की प्रदेश के बंटवारे की डिमांड छोड़कर हम इकट्ठा हों। जिस मकसद से उन्होंने ये संघर्ष किया है, वही हमारा भी है। ' मकसद यानी BJP को हराना और आदिवासियों को सुविधा देना। RSS के एक सीनियर लीडर नाम न बताने की शर्त पर चुनाव का गणित समझाते हैं- 'त्रिपुरा में BJP के लिए चुनौती कड़ी है। गठबंधन सिर्फ कांग्रेस और CPI(M) का नहीं है, अगर सरकार बनानी पड़ी तो टिपरा साथ होगी। अगर CM बिप्लब देब को नहीं हटाते, तो यह चुनौती और बड़ी होती। केंद्र को RSS और IB ने रिपोर्ट सौंप दी थी। इसके 4 महीने बाद बिप्लब को हटाना, इनकी जमीन को कमजोर कर गया। जीत तो होगी, लेकिन अंतर कम होगा, इसलिए जोड़-तोड़ तो करना पड़ेगा। ' (संध्या द्विवेदी त्रिपुरा से लौटकर, इलेक्शन एनालिसिस और ओपिनियन निजी विचार हैं) त्रिपुरा के सिपाहीजाला जिले का सोनामुरा बांग्लादेश के साथ 79. 5 किलोमीटर बॉर्डर साझा करता है। इसमें से 9. 43 किलोमीटर में फेंसिंग नहीं हुई है। इसी तरह दक्षिणी त्रिपुरा के बिलोनिया में 2 किलोमीटर, खोवाई और उत्तरी त्रिपुरा के लाफुंगा समेत कुछ इलाकों में फेंसिंग बाकी है। यही एरिया तस्करों के लिए स्वर्ग है। सिक्योरिटी के लिए BSF है, लेकिन जवानों को गोली चलाने का इजाजत नहीं है। वे डंडों से तस्करों को रोक रहे हैं। त्रिपुरा की राजधानी अगरतला से करीब 55 किलोमीटर दूर गोमती जिले के काकराबन गांव के दरगाह बाजार में अब एक नई मस्जिद खड़ी है। इससे बस 5 फीट दूरी पर ही 19 अक्टूबर 2021 को एक पुरानी मस्जिद को जला दिया गया था। जली हुई मस्जिद को याद करने वाला कोई नहीं। मामले में सभी आरोपी बेल पर बाहर आ चुके हैं। मस्जिद की देखभाल करने वाले भी चुप है, कहते हैं कि ऊपर के लोगों ने बोलने से मना किया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
साठ विधानसभा सीटों वाले त्रिपुरा में सोलह फरवरी को वोटिंग हो गई। मुकाबला दो गठबंधनों में है। एक तरफ सरकार चला रही BJP-IPFT हैं, और दूसरी तरफ हैं CPI-कांग्रेस। सत्ता बचाने की कोशिश कर रही BJP ने अपने सभी स्टार प्रचारक मैदान में उतार दिए थे। PM नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, यूपी के CM योगी आदित्यनाथ, असम के CM हेमंत बिस्व सरमा समेत कई बड़े नेताओं ने रैलियां की। लेकिन, समीकरण CPI-कांग्रेस की तरफ जाते नजर आ रहे हैं। हालांकि, BJP ने भी राम मंदिर से यूटर्न लिया और मेनिफेस्टो में विकास के बडे़-बड़े वादे किए हैं। उधर, पहली बार चुनाव लड़ रही पार्टी टिपरा मोथा दोनों गठबंधनों का गणित बिगाड़ने की ताकत रखती है। BJP की चिंता यहीं खत्म नहीं होती, जमीन के हालात बताते हैं कि त्रिपुरा में अयोध्या में राम मंदिर बनवाने का मुद्दा काम नहीं आया। इसका सबूत गृह मंत्री अमित शाह की रैली है। ये रैली पाँच जनवरी को सबरूम में हुई थी। शाह ने भीड़ से पूछा, 'अयोध्या में राम मंदिर बनना चाहिए या नहीं? ' जवाब आया, लेकिन आवाज उत्तर भारत जैसी तेज नहीं थी। अमित शाह ने फिर यही सवाल पूछा और कहा- जरा जोर से बोलिए। दूसरी बार भी भीड़ से वैसा जवाब नहीं मिला, जैसी उम्मीद थी। शाह ने बात आगे बढ़ाई, 'बाबर ने मंदिर गिराया था, नरेंद्र मोदी ने मंदिर बनाया। कोर्ट में इतने लंबे समय तक इस मामले को दबाए रखने के पीछे कांग्रेस थी। नरेंद्र मोदी आए और सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर बनने का आदेश दिया। ' तालियां बजीं, लेकिन तालियां बजाने वालों में ज्यादातर BJP कार्यकर्ता ही थे। तालियों की आवाज से साफ था कि हिंदुत्व का एजेंडा त्रिपुरा के लोगों पर उतना असरदार साबित नहीं हो रहा है। BJP को डेवलपमेंट के साथ मुख्यमंत्री माणिक साहा के करिश्मे से ही उम्मीद है। 'आठ फरवरी को योगी आदित्यनाथ की रैली हो या फिर बारह फरवरी को नरेंद्र मोदी की। खुद अमित शाह भी उसके बाद रैली करने आए, लेकिन उन्होंने अयोध्या का जिक्र नहीं किया। असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्व सरमा ने नौ फरवरी को दक्षिण त्रिपुरा के आदिवासी इलाके तोई बाजार में कहा- 'ये गठबंधन सांप-नेवले की जोड़ी है, आप लोगों को समझ आया कि ये लोग दिन में लड़ते थे और रात में इलू-इलू करते थे। अब खुलकर इनकी शादी हो गई है। ' दरअसल, त्रिपुरा में BJP की पैठ पिछले पाँच साल में ही बनी, कांग्रेस वहां मुख्य विपक्षी पार्टी रही। गठबंधन से पहले कांग्रेस और CPI एक दूसरे पर जुबानी ही नहीं, जमीनी हमले भी करते थे। दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं पर दूसरी पार्टी के समर्थकों की हत्या के आरोप भी हैं। उधर, टिपरा मोथा साठ में से अड़तालीस सीटों पर चुनाव लड़ रहा है। उसका एजेंडा त्रिपुरा से अलग त्रिपुरालैंड की मांग है। इस पार्टी के मुखिया प्रद्युत कुमार किशोर लगातार BJP पर हमलावर हैं। कांग्रेस और CPI का विरोध उनके एजेंडे में नहीं है। ऐसी भी चर्चा है कि कांग्रेस उनकी पार्टी से गठबंधन कर सकती है। दो हज़ार उन्नीस के लोकसभा चुनाव में BJP ने त्रिपुरा की दोनों सीटें जीती थीं, लेकिन कांग्रेस वोट शेयर बढ़ाने में कामयाब रही। दो हज़ार अट्ठारह के विधानसभा चुनाव में यह एक. आठ% था, जो दो हज़ार उन्नीस में बढ़कर पच्चीस% हो गया। इससे साफ हो गया कि दो हज़ार अट्ठारह में BJP की जीत के पीछे CPI की सरकार से ऊबे कांग्रेस के पारंपरिक वोटर थे। वही वोटर एक साल में ही फिर कांग्रेस की तरफ लौट आया। यह BJP के लिए खतरे की घंटी थी। दो हज़ार तेईस के विधानसभा चुनाव के लिए जब CPI और कांग्रेस ने हाथ मिलाया, तो BJP के लिए चुनौती बड़ी हो गई। इसीलिए सबसे पहले चौहत्तर% हिंदू वोटर वाले राज्य में अयोध्या का कार्ड खेला गया, लेकिन इसे फेल होते देख, पार्टी ने कभी एक-दूसरे के दुश्मन रहे कांग्रेस और CPI के गठबंधन को निशाना बनाया। BJP भले पिछली जीत दोहराने के दावे करे, लेकिन जमीन पर काम कर रहे कार्यकर्ताओं के फीडबैक में वे अब भी पिछड़ रहे हैं। नौ फरवरी को राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पार्टी का मेनिफेस्टो जारी किया। अब तक गठबंधन और विकास के मोर्चे पर CPI को फेल बता रही BJP ने त्रिपुरा के लिए खजाना खोलने का वादा किया। आयुष्मान भारत योजना, जिसके तहत पूरे देश में इलाज के लिए पाँच लाख रुपए मिलते हैं, त्रिपुरा में यह रकम बढ़ाकर दस लाख करने वादा किया गया। घर में लड़की पैदा होने पर उनचास हजार रुपए देने और ग्रेजुएशन करने वाली लड़की को स्कूटी देने की बात भी मेनिफेस्टो में है। किसान सम्मान निधि पूरे देश में छः हजार थी, उसे बढ़ाकर आठ हजार किया जाएगा। उज्ज्वला योजना के तहत मिलने वाले LPG सिलेंडरों की संख्या बढ़ाई जाएगी। मेनीफेस्टो में यह सब ऊपर और CPI पर भ्रष्टाचार और विकास न करने के आरोप नीचे थे। IPFT त्रिपुरा की रीजनल पार्टी है। दो हज़ार तेरह में इस पार्टी ने त्रिपुरालैंड की मांग उठाई थी। दो हज़ार अट्ठारह में उसी मांग को पूरा करने के वादे के साथ वह BJP में शामिल हुई। इसका फायदा BJP को हुआ। बीस में से अट्ठारह रिजर्व सीटें इस गठबंधन के खाते में आईं। IPFT बारह सीटों पर चुनाव लड़ी, आठ पर जीती। त्रिपुरालैंड की मांग करने वाली IPFT अब इस मुद्दे पर खामोश है। जबकि टिपरा मोथा ने लिखित में BJP से त्रिपुरालैंड की मांग की। BJP ने इनकार किया, तो उसने गठबंधन नहीं किया। IPFT के प्रमुख रहे एनसी देबबर्मा की मौत से भी संगठन कमजोर पड़ा। उधर, टिपरा मोथा ने त्रिपुरालैंड की मांग को जोर-शोर से उठाया। गैर राजनीतिक रहे इस संगठन ने पार्टी बनाई और चुनाव में उतर गया। BJP को इसका अंदाजा लग चुका था, इसलिए IPFT को पाँच सीटें ही दीं। राज्य में अब दो आदिवासी पार्टियां हैं- IPFT और टिपरा मोथा। उधर CPI ने भी CM फेस के तौर पर आदिवासी नेता जितेंद्र चौधरी को प्रोजेक्ट कर दिया है। यानी आदिवासी वोटर के पास अब तीन विकल्प हैं, जो पहले एक ही था। दो हज़ार अट्ठारह में टिपरा मोथा ने चुनाव नहीं लड़ा, लेकिन IPFT का समर्थन किया था। CPI और कांग्रेस के गठबंधन की ताकत समझने के लिए दो हज़ार उन्नीस में हुए उपचुनाव के गणित को समझना होगा। तीन विधानसभा सीटों पर दो हज़ार बाईस में चुनाव हुए थे। बदरघाट विधानसभा सीट खाली होने पर चुनाव हुए। इसके नतीजे में BJP पास हुई। BJP उम्मीदवार को बीस,चार सौ इकहत्तर वोट मिले, कांग्रेस उम्मीदवार को नौ,एक सौ एक और CPI को पंद्रह,दो सौ ग्यारह वोट मिले। दोनों को जोड़ दें तो चौबीस,तीन सौ बारह वोट होते हैं। वोटों का ये गणित इस चुनाव में BJP के नतीजे पलट सकता है। त्रिपुरा के सीनियर जर्नलिस्ट शेखर दत्त कहते हैं- 'BJP के लिए लड़ाई मुश्किल है। कांग्रेस का पारंपरिक वोटर और CPI का वोटर मिल गया है। आदिवासी वोट टिपरा के साथ होगा। CPI ने भी आदिवासी CM फेस बनाकर आदिवासी वोटर्स को मैसेज दे दिया है। ' 'BJP ने डेवलपमेंट को मुद्दा बनाया। एयरपोर्ट हो या ब्रिज, सारे प्रोजेक्ट्स CPI के हैं। काम चल रहा था। BJP ने बस क्रेडिट लिया। उन्हें अपने CM को हटाना पड़ा। जनता तो पूछेगी ऐसा क्यों किया? भ्रष्टाचार के आरोप सामने न आ जाएं और लोगों की नाराजगी चुनाव में भारी न पड़े इसलिए। ' CPI के जितेंद्र चौधरी कहते हैं, 'चुनाव में हिंसा हुई, तो हम तैयार हैं। हम जवाब देंगे, लेकिन उम्मीद है कि ऐसा नहीं होगा। पहली बार किसी राज्य में चुनाव आयोग ने लेटर जारी कर जीरो वायलेंस इलेक्शन कराने का वादा किया है। ' जर्नलिस्ट शेखर दत्त भी कहते हैं, 'हिंसा तो होगी, यह सही है कि दोनों तरफ के कार्यकर्ता लाठी-डंडों के साथ तैयार हैं। ' सूत्रों के मुताबिक, इंटेलिटेंस ब्यूरो यानी IB ने नतीजे वाले दिन हिंसा होने का इनपुट दिया है। इसके मुताबिक, नतीजा कुछ भी रहे। कोई भी पार्टी जीते, लेकिन हिंसा होगी और यह लाठी-डंडों तक सीमित नहीं रहेगा। पिछले चुनाव में BJP- IPFT के गठबंधन को चौंतालीस सीटें मिली थीं। इसमें BJP ने छत्तीस और IPFT ने आठ सीटें जीती थीं। CPI को सोलह सीटें मिलीं, कांग्रेस खाता ही नहीं खोल पाई। BJP को तैंतालीस% और IPFT को सात. पाँच% वोट मिले थे। CPI को बयालीस. सात% और कांग्रेस को एक. आठ% वोट मिले थे। यानी BJP गठबंधन को पचास. पाँच% और CPI के गठबंधन को चौंतालीस. दो% वोट मिले थे। अगर IPFT का वोट टिपरा और CPI में बंटा तो BJP का शेयर कम होगा। रिजल्ट के बाद टिपरा मोथा किसके साथ जाएगी, ये अभी साफ नहीं है। इस पार्टी ने दो हज़ार इक्कीस में ट्राइबल एरियाज ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल पर कब्जा किया था। BJP और CPI-कांग्रेस गठबंधन दोनों ने चुनाव से पहले टिपरा मोथा से गठबंधन की पेशकश की थी। इससे साफ हो गया कि नई होकर भी टिपरा मोथा राज्य की राजनीति में बड़ी ताकत है। उसने पहले ही CPI-कांग्रेस के साथ गठबंधन से इनकार कर दिया था। अलग प्रदेश की मांग पर BJP से भी बात नहीं बनी। हालांकि, CPI के CM फेस जीतेंद्र चौधरी को उम्मीद है कि चुनाव के बाद तीनों पार्टियों मिलकर सरकार बनाएंगी। वे कहते हैं- 'इस पर दोबारा बातचीत की जरूरत नहीं है। टिपरा मोथा की प्रदेश के बंटवारे की डिमांड छोड़कर हम इकट्ठा हों। जिस मकसद से उन्होंने ये संघर्ष किया है, वही हमारा भी है। ' मकसद यानी BJP को हराना और आदिवासियों को सुविधा देना। RSS के एक सीनियर लीडर नाम न बताने की शर्त पर चुनाव का गणित समझाते हैं- 'त्रिपुरा में BJP के लिए चुनौती कड़ी है। गठबंधन सिर्फ कांग्रेस और CPI का नहीं है, अगर सरकार बनानी पड़ी तो टिपरा साथ होगी। अगर CM बिप्लब देब को नहीं हटाते, तो यह चुनौती और बड़ी होती। केंद्र को RSS और IB ने रिपोर्ट सौंप दी थी। इसके चार महीने बाद बिप्लब को हटाना, इनकी जमीन को कमजोर कर गया। जीत तो होगी, लेकिन अंतर कम होगा, इसलिए जोड़-तोड़ तो करना पड़ेगा। ' त्रिपुरा के सिपाहीजाला जिले का सोनामुरा बांग्लादेश के साथ उन्यासी. पाँच किलोग्राममीटर बॉर्डर साझा करता है। इसमें से नौ. तैंतालीस किलोग्राममीटर में फेंसिंग नहीं हुई है। इसी तरह दक्षिणी त्रिपुरा के बिलोनिया में दो किलोग्राममीटर, खोवाई और उत्तरी त्रिपुरा के लाफुंगा समेत कुछ इलाकों में फेंसिंग बाकी है। यही एरिया तस्करों के लिए स्वर्ग है। सिक्योरिटी के लिए BSF है, लेकिन जवानों को गोली चलाने का इजाजत नहीं है। वे डंडों से तस्करों को रोक रहे हैं। त्रिपुरा की राजधानी अगरतला से करीब पचपन किलोग्राममीटर दूर गोमती जिले के काकराबन गांव के दरगाह बाजार में अब एक नई मस्जिद खड़ी है। इससे बस पाँच फीट दूरी पर ही उन्नीस अक्टूबर दो हज़ार इक्कीस को एक पुरानी मस्जिद को जला दिया गया था। जली हुई मस्जिद को याद करने वाला कोई नहीं। मामले में सभी आरोपी बेल पर बाहर आ चुके हैं। मस्जिद की देखभाल करने वाले भी चुप है, कहते हैं कि ऊपर के लोगों ने बोलने से मना किया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
[१४] अदर्शन । अब पारूल को पिता के साथ चाग बाजारवाले मकान में ना पड़ा। वह सुरेश को कुछ ख़बर नहीं दे सकी । देने का कुछ उपाय भी नहीं था। उनका परस्पर परिचय भी बहुत नहीं हुआ था न आपस का उतना खाता खुला था । पारूल कहा था। उसके बाप हैं फूत्र है लेकिन उसने यह नहीं कहा था कि चाप का नाम काशीनाथ बोस है। क्योंकि वह सब कहने का अवसर नहीं आया था । पारुल भी नहीं जानती थी कि सुरेश का मकान कहां है और उसके कौन कौन हैं ? केवल दो दिन उसी वर्गीचे में उन का मिलान हुआ था। उन दोनों दिनों तक उनमें केवल प्रेम की बातें भर होती ही थीं । सुरेश सन्ध्या के बाद ठीक समय उसी वर्गीचे के लता कुञ्ज में पहुंचा ! देखा तो आज पारुल खड़ी उसकी राह नहीं देखती । मन में उसने समझा कि आज कुछ पहले पहुंचा है। बस वहीं बैठकर अपनी प्यारी की राह ताकने लगा । पाव घंटा चीता, श्राधा घंटा बीता, घंटा बीता लेकिन पारुल नहीं आयी । सुरेश को चिन्ता हुई उसके मिनट घंटे के समान बीतने लगे। इसी तरह रात बहुत गयी। चाँद डूव गया लेकिन सुरेश का उधर ध्यान ही नहीं गया । वह पारुल के पाँव की आवाज़ सुनने के लिये कान लगाये था लेकिन उसके कानों में केवल भिली और झींगुर की ही भनक प्राती रही । सुरेश अब उठ खड़ा हुआ । इधर उधर चारों ओर नजर दौड़ाने लगा। लेकिन पेड़ों की डालियां, पत्ते और लताओं के सिवाय और कुछ नहीं दिखलाई दिया। अब वह लताकुञ्ज से निकलकर बाहर आया तो देखता है कि कुछ दूरी पर मालियों के घर में चिराग जल रहा है। वह धीरे धीरे पञ्जे के वल उधर ही को चला । चलने चलते उसके पांव के पास ही से खर खराकर साँप की तरह कुछ निकल गया । और समय होता तो "वाप रे बाप" करके सुरेश कूद जाता । डर और क्रोध भी मौका देखा करते हैं । सुरेश ने मन में सोचा कि पारुल जान पड़ता है बीमार हो गयी इसी से नहीं आयी है। अब उसने अटारी की ओर देखा तो किसी भी खिड़की जंगले से रोशनी नहीं दिखाई दी। उसके मन में विस्मय हुआ कि ऐसा तो होना नहीं चाहिये । जय सुरेश मकान के पास गया तब मालूम हुआ कि उस घर में कोई नहीं है। सदर दरवाजे पर धीरे धीरे पहुंचने पर देखता है तो बाहर से ताला चन्द है। अब मन में सोचने लगा- "यह क्या हुआ ! क्या इस घर से वे लोग चले गये। लेकिन जाने की बात उसने बतलाया क्यों नहीं । वह बिना कहे क्यों चली गयी । वह तो ऐसी वेदर्द नहीं थी। उसके प्रेम में तो कुछ कलाम नहीं है।" व सुरेश का सिर चिन्ता के मारे चकराने. लगा । क्या करना चाहिये सो भी ठीक नहीं कर सका । लेकिन इस तरह दरवाजे के सामने बहुत देर तक रहना भी ठीक नहीं है। इसके सिवाय यहां छिपने के लिये भी कोई जगह नहीं देखी । केवल एक शिवाला देखा उसके दरवाजे पर भी ताला वन्द पाया । लेकिन भीतर चिराग़ टिम दिमाता देखकर समझा कि पुजारी सन्ध्या की आरतो कर के तालो बन्द कर गया है 1
[चौदह] अदर्शन । अब पारूल को पिता के साथ चाग बाजारवाले मकान में ना पड़ा। वह सुरेश को कुछ ख़बर नहीं दे सकी । देने का कुछ उपाय भी नहीं था। उनका परस्पर परिचय भी बहुत नहीं हुआ था न आपस का उतना खाता खुला था । पारूल कहा था। उसके बाप हैं फूत्र है लेकिन उसने यह नहीं कहा था कि चाप का नाम काशीनाथ बोस है। क्योंकि वह सब कहने का अवसर नहीं आया था । पारुल भी नहीं जानती थी कि सुरेश का मकान कहां है और उसके कौन कौन हैं ? केवल दो दिन उसी वर्गीचे में उन का मिलान हुआ था। उन दोनों दिनों तक उनमें केवल प्रेम की बातें भर होती ही थीं । सुरेश सन्ध्या के बाद ठीक समय उसी वर्गीचे के लता कुञ्ज में पहुंचा ! देखा तो आज पारुल खड़ी उसकी राह नहीं देखती । मन में उसने समझा कि आज कुछ पहले पहुंचा है। बस वहीं बैठकर अपनी प्यारी की राह ताकने लगा । पाव घंटा चीता, श्राधा घंटा बीता, घंटा बीता लेकिन पारुल नहीं आयी । सुरेश को चिन्ता हुई उसके मिनट घंटे के समान बीतने लगे। इसी तरह रात बहुत गयी। चाँद डूव गया लेकिन सुरेश का उधर ध्यान ही नहीं गया । वह पारुल के पाँव की आवाज़ सुनने के लिये कान लगाये था लेकिन उसके कानों में केवल भिली और झींगुर की ही भनक प्राती रही । सुरेश अब उठ खड़ा हुआ । इधर उधर चारों ओर नजर दौड़ाने लगा। लेकिन पेड़ों की डालियां, पत्ते और लताओं के सिवाय और कुछ नहीं दिखलाई दिया। अब वह लताकुञ्ज से निकलकर बाहर आया तो देखता है कि कुछ दूरी पर मालियों के घर में चिराग जल रहा है। वह धीरे धीरे पञ्जे के वल उधर ही को चला । चलने चलते उसके पांव के पास ही से खर खराकर साँप की तरह कुछ निकल गया । और समय होता तो "वाप रे बाप" करके सुरेश कूद जाता । डर और क्रोध भी मौका देखा करते हैं । सुरेश ने मन में सोचा कि पारुल जान पड़ता है बीमार हो गयी इसी से नहीं आयी है। अब उसने अटारी की ओर देखा तो किसी भी खिड़की जंगले से रोशनी नहीं दिखाई दी। उसके मन में विस्मय हुआ कि ऐसा तो होना नहीं चाहिये । जय सुरेश मकान के पास गया तब मालूम हुआ कि उस घर में कोई नहीं है। सदर दरवाजे पर धीरे धीरे पहुंचने पर देखता है तो बाहर से ताला चन्द है। अब मन में सोचने लगा- "यह क्या हुआ ! क्या इस घर से वे लोग चले गये। लेकिन जाने की बात उसने बतलाया क्यों नहीं । वह बिना कहे क्यों चली गयी । वह तो ऐसी वेदर्द नहीं थी। उसके प्रेम में तो कुछ कलाम नहीं है।" व सुरेश का सिर चिन्ता के मारे चकराने. लगा । क्या करना चाहिये सो भी ठीक नहीं कर सका । लेकिन इस तरह दरवाजे के सामने बहुत देर तक रहना भी ठीक नहीं है। इसके सिवाय यहां छिपने के लिये भी कोई जगह नहीं देखी । केवल एक शिवाला देखा उसके दरवाजे पर भी ताला वन्द पाया । लेकिन भीतर चिराग़ टिम दिमाता देखकर समझा कि पुजारी सन्ध्या की आरतो कर के तालो बन्द कर गया है एक
पंजाब में दीवार पर 'खालिस्तान जिंदाबाद' का स्लोगन लिखा होने के बाद कुमार विश्वास ने पंजाब की आप सरकार पर निशाना साधते हुए लिखा कि देश मेरी चेतावनी को याद रखे। पंजाब के फरीदकोट की स्थानीय बाजीगर बस्ती के एक पार्क की दीवार पर 'खालिस्तान जिंदाबाद' के नारे लिखे देखे गये। ये नारे एक सफाई कर्मी ने देखे। जिसके बाद उसने इसकी सूचना पुलिस को दी। घटना के बाद शहर की सुरक्षा बड़ा दी गई है और अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। इस पूरे मामले पर एसएसपी फरीदकोट अवनीत कौर का कहना है कि इलाके में लगे सीसीटीवी फुटेज को चेक किया जा रहा है। आरोपी जल्द ही गिरफ्त में होंगे। इस घटना से पहले पंजाब पुलिस के इंटेलिजेंस दफ्तर के बाहर धमाके के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई थीं। राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा था कि सूबे में शांति व्यवस्था खराब करने की कोशिशें की जा रही है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी बीच हिमाचल प्रदेश में भी खालिस्तानी झंडा लगाने की खबर आई थी। दोनों घटनाओं पर सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ी थी। कुछ दिन पहले अलगाववादी समूह 'सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे)' ने एक वीडियो जारी किया था, जिसमें दावा किया गया है कि धर्मशाला में हिमाचल प्रदेश विधानसभा में उठाए गए 'खालिस्तान' झंडे सिख कार्यकर्ताओं के माध्यम से भेजे गए थे, जो मंडी में अरविंद केजरीवाल जनसभा में भाग लेने के लिए भगवंत मान के साथ गए थे। तब भी कुमार विश्वास ने ट्वीट करते हुए लिखा था कि देश को मेरी चेतावनी याद रहे। कुछ दिन पहले केंद्र सरकार ने आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता व कवि कुमार विश्वास को सीआरपीएफ कवर वाली वाई श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की है. कुमार विश्वास अब सीआरपीएफ जवानों के सुरक्षा घेरे में रहते हैं. गृह मंत्रालय ने कुमार विश्वास को Y कैटगरी की सिक्योरिटी दी है।
पंजाब में दीवार पर 'खालिस्तान जिंदाबाद' का स्लोगन लिखा होने के बाद कुमार विश्वास ने पंजाब की आप सरकार पर निशाना साधते हुए लिखा कि देश मेरी चेतावनी को याद रखे। पंजाब के फरीदकोट की स्थानीय बाजीगर बस्ती के एक पार्क की दीवार पर 'खालिस्तान जिंदाबाद' के नारे लिखे देखे गये। ये नारे एक सफाई कर्मी ने देखे। जिसके बाद उसने इसकी सूचना पुलिस को दी। घटना के बाद शहर की सुरक्षा बड़ा दी गई है और अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। इस पूरे मामले पर एसएसपी फरीदकोट अवनीत कौर का कहना है कि इलाके में लगे सीसीटीवी फुटेज को चेक किया जा रहा है। आरोपी जल्द ही गिरफ्त में होंगे। इस घटना से पहले पंजाब पुलिस के इंटेलिजेंस दफ्तर के बाहर धमाके के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई थीं। राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा था कि सूबे में शांति व्यवस्था खराब करने की कोशिशें की जा रही है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी बीच हिमाचल प्रदेश में भी खालिस्तानी झंडा लगाने की खबर आई थी। दोनों घटनाओं पर सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ी थी। कुछ दिन पहले अलगाववादी समूह 'सिख फॉर जस्टिस ' ने एक वीडियो जारी किया था, जिसमें दावा किया गया है कि धर्मशाला में हिमाचल प्रदेश विधानसभा में उठाए गए 'खालिस्तान' झंडे सिख कार्यकर्ताओं के माध्यम से भेजे गए थे, जो मंडी में अरविंद केजरीवाल जनसभा में भाग लेने के लिए भगवंत मान के साथ गए थे। तब भी कुमार विश्वास ने ट्वीट करते हुए लिखा था कि देश को मेरी चेतावनी याद रहे। कुछ दिन पहले केंद्र सरकार ने आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता व कवि कुमार विश्वास को सीआरपीएफ कवर वाली वाई श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की है. कुमार विश्वास अब सीआरपीएफ जवानों के सुरक्षा घेरे में रहते हैं. गृह मंत्रालय ने कुमार विश्वास को Y कैटगरी की सिक्योरिटी दी है।
साहिबाबाद,। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) की ओर से रात आठ बजे से बसों का संचालन नहीं किया जाएगा। जो बसें जहां पर रहेंगी वहां सुरक्षित स्थान पर खड़ी कर दी जाएंगी। हालांकि इससे यात्रियों को परेशानी होगी लेकिन यूपीएसआरटीसी अधिकारियों का कहना है कि कोहरे के चलते होने वाले सड़क हादसों को रोकने के लिए यह फैसला लिया गया है। कोहरे से सड़क हादसे हो रहे हैं जिनमें लोगों की जानें जा रही हैं। ऐसे में यूपीएसआरटीसी ने यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रात आठ बजे के बाद बसों का संचालन बंद करने का फैसला लिया है। पूरे प्रदेश में किसी भी डिपों से रात आठ बजे के बाद बसों का संचालन नहीं किया जाएगा। अगले दिन सुबह आठ बजे के बाद ही बसों का संचालन होगा। यूपीएसआरटीसी के गाजियाबाद के क्षेत्रीय प्रबंधक एके सिंह ने बताया कि मंगलवार की दोपहर मुख्यालय की ओर से कोहरे के चलते रात आठ बजे के बाद बसों का संचालन बंद करने का आदेश दिया गया। रात आठ बजे के बाद बसें रास्ते में नजदीक के डिपो या अनुबंधित होटल/ढ़ाबे पर बसों को रोक दिया जाएगा। अगली सुबह आठ बजे दोबारा बसें चलाई जाएंगी। बस में बैठने के दौरान ही यात्रियों को इसकी जानकारी दे दी जाएगी। इससे यात्रियों को असुविधा होगी। यात्री समय पर गंतव्य तक नहीं पहुंच पाएंगे। दिल्ली - एनसीआर के नौकरीपेशा लोग दिन में नौकरी के बाद देर शाम या रात तक बस से गंतव्य तक जाना पसंद करते हैं। शाम पांच बजे से रात 10 बजे तक सबसे ज्यादा बसों का संचालन होता है। बसों का संचालन बन्द होने से यात्रियों को परेशानी होगी। इससे डग्गामार बसों में यात्रियों की भीड़ बढ़ जाएगी। साथ ही मनमाना किराया भी वसूलेंगे।
साहिबाबाद,। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की ओर से रात आठ बजे से बसों का संचालन नहीं किया जाएगा। जो बसें जहां पर रहेंगी वहां सुरक्षित स्थान पर खड़ी कर दी जाएंगी। हालांकि इससे यात्रियों को परेशानी होगी लेकिन यूपीएसआरटीसी अधिकारियों का कहना है कि कोहरे के चलते होने वाले सड़क हादसों को रोकने के लिए यह फैसला लिया गया है। कोहरे से सड़क हादसे हो रहे हैं जिनमें लोगों की जानें जा रही हैं। ऐसे में यूपीएसआरटीसी ने यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रात आठ बजे के बाद बसों का संचालन बंद करने का फैसला लिया है। पूरे प्रदेश में किसी भी डिपों से रात आठ बजे के बाद बसों का संचालन नहीं किया जाएगा। अगले दिन सुबह आठ बजे के बाद ही बसों का संचालन होगा। यूपीएसआरटीसी के गाजियाबाद के क्षेत्रीय प्रबंधक एके सिंह ने बताया कि मंगलवार की दोपहर मुख्यालय की ओर से कोहरे के चलते रात आठ बजे के बाद बसों का संचालन बंद करने का आदेश दिया गया। रात आठ बजे के बाद बसें रास्ते में नजदीक के डिपो या अनुबंधित होटल/ढ़ाबे पर बसों को रोक दिया जाएगा। अगली सुबह आठ बजे दोबारा बसें चलाई जाएंगी। बस में बैठने के दौरान ही यात्रियों को इसकी जानकारी दे दी जाएगी। इससे यात्रियों को असुविधा होगी। यात्री समय पर गंतव्य तक नहीं पहुंच पाएंगे। दिल्ली - एनसीआर के नौकरीपेशा लोग दिन में नौकरी के बाद देर शाम या रात तक बस से गंतव्य तक जाना पसंद करते हैं। शाम पांच बजे से रात दस बजे तक सबसे ज्यादा बसों का संचालन होता है। बसों का संचालन बन्द होने से यात्रियों को परेशानी होगी। इससे डग्गामार बसों में यात्रियों की भीड़ बढ़ जाएगी। साथ ही मनमाना किराया भी वसूलेंगे।
उस मोड़ पे तुम जो मुझे यूं छोड़ गए गलती थी क्या.. छोड़ा था क्यों हाथ से यूं वो हाथ मेरा ये तो बता क्यों समझा नहीं, क्यों जाना नहीं क्यों पुछा नहीं, थी क्या.. मेरी मजबूरियाँ.. मेरी मजबूरियाँ.. ओ.. मेरी मजबूरियाँ.. मेरी मजबूरियाँ.. थी मुश्किलें गर दरमियां मुझसे तो होता कहाँ क्यों प्यार को दे दे सजा www.hindtracks.in थी चाहे जो भी वजह हाँ मेरी वफ़ा तो होती खफ़ा पर करते बयाँ एक दफ़ा.. तेरी मजबूरियाँ.. तेरी मजबूरियाँ.. हम्म.. तेरी मजबूरियाँ.. तेरी मजबूरियाँ.. हाँ..
उस मोड़ पे तुम जो मुझे यूं छोड़ गए गलती थी क्या.. छोड़ा था क्यों हाथ से यूं वो हाथ मेरा ये तो बता क्यों समझा नहीं, क्यों जाना नहीं क्यों पुछा नहीं, थी क्या.. मेरी मजबूरियाँ.. मेरी मजबूरियाँ.. ओ.. मेरी मजबूरियाँ.. मेरी मजबूरियाँ.. थी मुश्किलें गर दरमियां मुझसे तो होता कहाँ क्यों प्यार को दे दे सजा www.hindtracks.in थी चाहे जो भी वजह हाँ मेरी वफ़ा तो होती खफ़ा पर करते बयाँ एक दफ़ा.. तेरी मजबूरियाँ.. तेरी मजबूरियाँ.. हम्म.. तेरी मजबूरियाँ.. तेरी मजबूरियाँ.. हाँ..
राजस्थान के उदयपुर जिले की रहने वाली नेहा सक्का सिंह वर्तमान में जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड में जूनियर इंजीनियर के पद पर तैनात हैं। कभी उन्हें तंगहाली वाली लड़की से जाना जाता था। राजस्थान के उदयपुर में एक मकान में शॉर्ट शर्किट होने पर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जब यह घटना घटी तो पता चला कि मकान मालिक ने लड़कियों की बाथरूम में स्पाई कैमरे लगा रखे थे। इस लड़की का नाम पायल बंजारा है, जो कि राजस्थान के ग्राणीण इलाके यानि एक छोटे से गांव की रहने वाली है। वह इंस्टाग्राम और फेसबुक पर अपनी रील्स बनाकर शेयर करती है। जिसे लाखों लोग पसंद करते हैं। यूपी के जिले अयोध्या के रायगंज में नरसिंह मंदिर के पुजारी ने गमछे से फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया। सुसाइड से पहले रविवार को फेसबुक पर लाइव आए। इस दौरान उन्होंने पुलिस वालों पर दो लाख रुपए घूस मांगने का आरोप लगाया। भारत सरकार द्वारा जारी ऑपरेशन कावेरी के जरिए देश के नागरिकों को सकुशल वापस लाने के लिए जुटी हुई है तो वहीं यूपी में अबतक 391 लोगों की सकुशल वापसी हो चुकी है। सभी को वॉल्वो बसों और कारों की व्यवस्था से उनके घर तक पहुंचाया जा चुका है। माफिया अतीक अहमद की पत्नी फरार है और उसकी तलाश में पुलिस दबिश दे रही है। इस बीच मुंडी पासी ने सामने आकर सफाई दी है कि उसका शाइस्ता से कोई लेना देना नहीं है। राजस्थान के जोधपुर में रहने वाली बेटी कविता नायला इंडियन नेवी में लेफ्टिनेंट बन गई है। अच्छी बात यह है कि कविता के पिता और भाई पहले से आर्मी में है। अब बेटी ने नेवी में भर्ती होकर परिवार का सपना पूरा कर दिया। यूपी के बरेली में बिना मर्जी के ब्याही गई दुल्हन आखिरकार जिंदगी की जंग हार गई। शादी के बाद मायके वालों ने ही उसे तेजाब से जलाया था। फेरों से पहले भी उसके साथ मारपीट की गई थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केशवदेव के नाम पर दर्ज ईदगाह की जमीन विवाद को लेकर मथुरा में दाखिल सिविल वाद को तय करने का निर्देश दिया है। पोषणीयता पर कोर्ट का कहना था कि इसको लेकर पहले ही फैसला आ चुका है। यह तस्वीर राजस्थान के करौली जिले की है, जहां रविवार का बिन मौसम बारिश ने हाहाकार मचा दिया। करणपुर क्षेत्र में तो दो घंटे जमकर बारिश होने से भकूला नाला उफन पड़ा। इससे नाले में 3 बच्चों समेत 6 लोग फंस गए। इन लोगों ने किसी तरह पेड़ पकड़कर अपनी जान बचाई।
राजस्थान के उदयपुर जिले की रहने वाली नेहा सक्का सिंह वर्तमान में जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड में जूनियर इंजीनियर के पद पर तैनात हैं। कभी उन्हें तंगहाली वाली लड़की से जाना जाता था। राजस्थान के उदयपुर में एक मकान में शॉर्ट शर्किट होने पर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जब यह घटना घटी तो पता चला कि मकान मालिक ने लड़कियों की बाथरूम में स्पाई कैमरे लगा रखे थे। इस लड़की का नाम पायल बंजारा है, जो कि राजस्थान के ग्राणीण इलाके यानि एक छोटे से गांव की रहने वाली है। वह इंस्टाग्राम और फेसबुक पर अपनी रील्स बनाकर शेयर करती है। जिसे लाखों लोग पसंद करते हैं। यूपी के जिले अयोध्या के रायगंज में नरसिंह मंदिर के पुजारी ने गमछे से फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया। सुसाइड से पहले रविवार को फेसबुक पर लाइव आए। इस दौरान उन्होंने पुलिस वालों पर दो लाख रुपए घूस मांगने का आरोप लगाया। भारत सरकार द्वारा जारी ऑपरेशन कावेरी के जरिए देश के नागरिकों को सकुशल वापस लाने के लिए जुटी हुई है तो वहीं यूपी में अबतक तीन सौ इक्यानवे लोगों की सकुशल वापसी हो चुकी है। सभी को वॉल्वो बसों और कारों की व्यवस्था से उनके घर तक पहुंचाया जा चुका है। माफिया अतीक अहमद की पत्नी फरार है और उसकी तलाश में पुलिस दबिश दे रही है। इस बीच मुंडी पासी ने सामने आकर सफाई दी है कि उसका शाइस्ता से कोई लेना देना नहीं है। राजस्थान के जोधपुर में रहने वाली बेटी कविता नायला इंडियन नेवी में लेफ्टिनेंट बन गई है। अच्छी बात यह है कि कविता के पिता और भाई पहले से आर्मी में है। अब बेटी ने नेवी में भर्ती होकर परिवार का सपना पूरा कर दिया। यूपी के बरेली में बिना मर्जी के ब्याही गई दुल्हन आखिरकार जिंदगी की जंग हार गई। शादी के बाद मायके वालों ने ही उसे तेजाब से जलाया था। फेरों से पहले भी उसके साथ मारपीट की गई थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केशवदेव के नाम पर दर्ज ईदगाह की जमीन विवाद को लेकर मथुरा में दाखिल सिविल वाद को तय करने का निर्देश दिया है। पोषणीयता पर कोर्ट का कहना था कि इसको लेकर पहले ही फैसला आ चुका है। यह तस्वीर राजस्थान के करौली जिले की है, जहां रविवार का बिन मौसम बारिश ने हाहाकार मचा दिया। करणपुर क्षेत्र में तो दो घंटे जमकर बारिश होने से भकूला नाला उफन पड़ा। इससे नाले में तीन बच्चों समेत छः लोग फंस गए। इन लोगों ने किसी तरह पेड़ पकड़कर अपनी जान बचाई।
हिमाचल के कांगडा के पपरोला मे आज बिजली आपूर्ति बाधित रहेगी। जिस के लिए बिजली विभाग के अधिकारियों ने लोगों से सहयोग की अपील की है। जानकारी देते हुए बिजली उपमंडल पपरोला के SDO मोहित ठाकुर ने बताया कि 11 केवी पपरोला फीडर, 11 केवी अल्हिलाल फीडर मे जरूरी रखरखाव हेतु सोमवार को सुबह 9 से 5 बजे तक बिजली बंद रहेगी। अगर मौसम अनुकूल नहीं रहा तो यह कार्य 7 फरवरी मंगलवार को किया जाएगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
हिमाचल के कांगडा के पपरोला मे आज बिजली आपूर्ति बाधित रहेगी। जिस के लिए बिजली विभाग के अधिकारियों ने लोगों से सहयोग की अपील की है। जानकारी देते हुए बिजली उपमंडल पपरोला के SDO मोहित ठाकुर ने बताया कि ग्यारह केवी पपरोला फीडर, ग्यारह केवी अल्हिलाल फीडर मे जरूरी रखरखाव हेतु सोमवार को सुबह नौ से पाँच बजे तक बिजली बंद रहेगी। अगर मौसम अनुकूल नहीं रहा तो यह कार्य सात फरवरी मंगलवार को किया जाएगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
साहित्य जीवन का प्रतिबिम्ब है, उसमें समाज और व्यक्ति, काल और गति, उत्थान और पतन, धर्म और श्रद्धा, राजनीति और कूटनीति सभी कुछ परिलक्षित होता है । जीवन के साथ मरण भी, शैशव के साथ यौवन मी, जरा के साथ अस हाय अवस्था भी सब कुछ जैसे अपने आप में पराई की तरह चमकने लगता है। वह काल की झुर्रियों के साथ मनुष्य के श्रम विश्वास को भी दिखाता है। संस्कृति उस जीवन में वेश की तरह प्राती है; आत्मविश्वास, धारणाएँ भावनाएँ, प्रेम उस साहित्य में अपने प्रतिमूर्त होते जाते हैं। आदर्श, यथार्थ दोनों का रूप कल्पना के पंखों से मढ़ा जाकर अभिव्यक्त होता है। मनुष्य के अन्तःकरण की प्रवृत्तियाँ साहित्य में विकसित होकर इतिहास बनती है। यहीं से समाज के निर्माण का कार्य प्रारम्भ होता है। हम व्यक्ति का, समाज का प्राण साहित्य में भर कर उसे अनुप्राणित करते हैं, किन्तु साहित्य छान-बीन कर कूड़ा-कर्कट फेंक कर शुद्धानुभूति द्वारा, कला के उत्कर्ष के द्वारा हमें अपनी ओर आकृष्ट करके हमारा अंग बन जाता है । जीवित प्राणियों का प्राण साहित्य जहाँ उनले लेता है वहाँ उन्हें देता भी है । यही क्रम बहुत काल से चला आ रहा है। जहाँ साहित्य का रूप, उसकी धारणा आदर्श की ओर झुकी रहती है, वहाँ वह सार्वजनिक जीवन का प्रतिबिम्ब न रह कर हमारी अनुकरणकारिता की प्राह्य शक्ति से समुर्व रित होता है। हम उसके पीछे चलते हैं वह हमारा पथदर्शक होता है। हम समझते हैं इस प्रकार हम एक लक्ष्य पर पहुँच जाँयेंगे । एक ऐसे स्थान पर पहुँच जायेंगे जहाँ जाकर हमें पीछे न लौटना होगा । यहाँ हमारा मनस्तोष होना, आत्मतृप्ति होगी । वहाँ हम जीवन का वास्तविक आनंद उठा सकेंगे ļ इस विचार में भ्रान्ति भी हो सकती है परन्तु यह निश्चय है जिस पुस्तक की भूमिका लिखने के लिये आज मुझ से कहा गया है उसकी वास्तविक धारणा यही थी। उसकी प्रेरणा हमारे समाज के कल्याण को व्यक्ति के उत्थान की भावना को लेकर आई थी । हमने उसमें जीवन की निराशा में आशा का एकमात्र दीपप्रकाश देखा । उसी के सहारे हमारे देश के मुमूर्षु प्राय ने आलोकित पथ पाया । हिन्दी साहित्य का सुविशाल प्रासाद जिन नींवों पर खड़ा किया गया हे रामे
साहित्य जीवन का प्रतिबिम्ब है, उसमें समाज और व्यक्ति, काल और गति, उत्थान और पतन, धर्म और श्रद्धा, राजनीति और कूटनीति सभी कुछ परिलक्षित होता है । जीवन के साथ मरण भी, शैशव के साथ यौवन मी, जरा के साथ अस हाय अवस्था भी सब कुछ जैसे अपने आप में पराई की तरह चमकने लगता है। वह काल की झुर्रियों के साथ मनुष्य के श्रम विश्वास को भी दिखाता है। संस्कृति उस जीवन में वेश की तरह प्राती है; आत्मविश्वास, धारणाएँ भावनाएँ, प्रेम उस साहित्य में अपने प्रतिमूर्त होते जाते हैं। आदर्श, यथार्थ दोनों का रूप कल्पना के पंखों से मढ़ा जाकर अभिव्यक्त होता है। मनुष्य के अन्तःकरण की प्रवृत्तियाँ साहित्य में विकसित होकर इतिहास बनती है। यहीं से समाज के निर्माण का कार्य प्रारम्भ होता है। हम व्यक्ति का, समाज का प्राण साहित्य में भर कर उसे अनुप्राणित करते हैं, किन्तु साहित्य छान-बीन कर कूड़ा-कर्कट फेंक कर शुद्धानुभूति द्वारा, कला के उत्कर्ष के द्वारा हमें अपनी ओर आकृष्ट करके हमारा अंग बन जाता है । जीवित प्राणियों का प्राण साहित्य जहाँ उनले लेता है वहाँ उन्हें देता भी है । यही क्रम बहुत काल से चला आ रहा है। जहाँ साहित्य का रूप, उसकी धारणा आदर्श की ओर झुकी रहती है, वहाँ वह सार्वजनिक जीवन का प्रतिबिम्ब न रह कर हमारी अनुकरणकारिता की प्राह्य शक्ति से समुर्व रित होता है। हम उसके पीछे चलते हैं वह हमारा पथदर्शक होता है। हम समझते हैं इस प्रकार हम एक लक्ष्य पर पहुँच जाँयेंगे । एक ऐसे स्थान पर पहुँच जायेंगे जहाँ जाकर हमें पीछे न लौटना होगा । यहाँ हमारा मनस्तोष होना, आत्मतृप्ति होगी । वहाँ हम जीवन का वास्तविक आनंद उठा सकेंगे ļ इस विचार में भ्रान्ति भी हो सकती है परन्तु यह निश्चय है जिस पुस्तक की भूमिका लिखने के लिये आज मुझ से कहा गया है उसकी वास्तविक धारणा यही थी। उसकी प्रेरणा हमारे समाज के कल्याण को व्यक्ति के उत्थान की भावना को लेकर आई थी । हमने उसमें जीवन की निराशा में आशा का एकमात्र दीपप्रकाश देखा । उसी के सहारे हमारे देश के मुमूर्षु प्राय ने आलोकित पथ पाया । हिन्दी साहित्य का सुविशाल प्रासाद जिन नींवों पर खड़ा किया गया हे रामे
कम्युनिकेशन डिजाइन से संबंधित इस कोर्स की अवधि करीबन चार वर्ष की होती है और इसमें महज 15 सीटें ही एनआईडी में उपलब्ध होती हैं। इस कोर्स को करने के बाद छात्र विभिन्न टीवी चैनल में एनिमेटर, करैक्टर डिजाइनर, स्टोरी बोर्ड आर्टिस्ट, क्रिएटिव डायरेक्टर, प्रोडूसर, कंसलटेंट आदि के रूप में काम कर सकते हैं या फिर खुद का बिजनेस भी शुरू कर सकते हैं। सिरामिक एवं ग्लास डिजाइन कला और रचनात्मकता के क्षेत्रों में शिल्प, वास्तु, चिकित्सा, सत्कार, सज्जा उत्पादों आदि शैलियों में कार्यात्मक सम्भावनायें भी प्रदान करता है। एनआईडी का यह विभाग भारतीय कला और शिल्प से प्रेरणा लेता है और छात्रों को भविष्य में बड़े पैमाने पर उत्पादन और नयी तकनीकों की क्षमता को समझने में मदद करता है। इस कोर्स को करने के बाद छात्र एन. जी. ओ. , डिजाइन स्टूडियो, शिल्प उद्योग में भी रोजगार के अवसर ढूंढ सकते हैं या खुद का बिजनेस भी शुरू कर सकते हैं। कम्युनिकेशन डिजाइन से संबंधित इस कोर्स की अवधि चार वर्ष है। इस कोर्स के दौरान छात्रों में ऐसी समझ का विकास किया जाता है, जिससे खुले और निर्मित स्थानों में संचार के लिए सही परिवेश की स्थापना हो सके। इसके साथ ही ऐसे अनुभवों का निर्माण हो सके जिनके समर्थन से दर्शकों के समक्ष विचारों की व्याख्या हो सके। फिल्म व वीडियो कम्युनिकेशन कोर्स के तहत छात्रों को छोटी एजुकेशनल, कल्चरल, सोशल, एंटरटेनिंग व मार्केट कम्युनिकेशन संबंधी शार्ट फिल्में बनाने करने के लिए तैयार किया जाता है। इस कोर्स को करने के बाद छात्र ऑडियो−विजुअल कम्युनिकेशन के क्षेत्र में अपना करियर बना सकते हैं। ऐसे छात्रों के लिए एड एजेंसी, फिल्म प्रॉडक्शन हाउस, टीवी चैनल्स व अन्य कई सरकारी क्षेत्रों व एनजीओ के रास्ते हमेशा खुले रहते हैं। फर्नीचर डिजाइन भी वास्तव में एक कला है और इस कला की पूरी जानकारी एनआईडी के चार वर्षीय फर्नीचर डिजाइन कोर्स से प्राप्त होती है। कोर्स में विभिन्न प्रकार के मैटीरियल, उनके इस्तेमाल और क्रिएटिविटी का इस्तेमाल करके कुछ नया बनाने के लिए प्रेरित किया जाता है। पिछले कुछ समय से ग्राफिक डिजाइनर की मांग काफी बढ़ी है। ऑनलाइन से लेकर ऑफलाइन तक लोग ग्राफिक्स का सहारा लेने लगे हैं। इसके जरिए चीजों को आसानी से समझा जा सकता है और यही कारण है कि यह कोर्स छात्रों के बीच खासा पसंद किया जाता है। प्रॉडक्ट डिजाइन उन वस्तुओं की रचना करना है, जो लोगों के लिए फायदेमंद है। वस्तुए बड़ी व्यवस्था का मुख्य अंश होती है। कोर्स के दौरान प्रोजेक्ट्स का मुख्य केंद्र उपयोगकर्ताओं की जरूरत, उत्पाद और आर्थिक प्रभाव के लिए प्रोडक्ट्स और सर्विसेज पर रहता है। टेक्सटाइल डिजाइन के कोर्स के तहत छात्रों के भीतर कपड़ा अथवा टेक्सटाइल की समझ का ज्ञान विकसित किया जाता है। इस कोर्स की अवधि चार वर्ष है। जीडीजीपी (ग्रेजुएट डिप्लोमा प्रोग्राम इन डिजाइन) 4 वर्ष का यह कोर्स विजयवाड़ा और कुरुक्षेत्र में उपलब्ध है। इसमें छात्रों का 12वीं पास होना आवश्यक है और उम्मीदवार की आयु 20 से अधिक न होनी चाहिए। स्नातकोत्तर डिजाइन (एम. डेस. )
कम्युनिकेशन डिजाइन से संबंधित इस कोर्स की अवधि करीबन चार वर्ष की होती है और इसमें महज पंद्रह सीटें ही एनआईडी में उपलब्ध होती हैं। इस कोर्स को करने के बाद छात्र विभिन्न टीवी चैनल में एनिमेटर, करैक्टर डिजाइनर, स्टोरी बोर्ड आर्टिस्ट, क्रिएटिव डायरेक्टर, प्रोडूसर, कंसलटेंट आदि के रूप में काम कर सकते हैं या फिर खुद का बिजनेस भी शुरू कर सकते हैं। सिरामिक एवं ग्लास डिजाइन कला और रचनात्मकता के क्षेत्रों में शिल्प, वास्तु, चिकित्सा, सत्कार, सज्जा उत्पादों आदि शैलियों में कार्यात्मक सम्भावनायें भी प्रदान करता है। एनआईडी का यह विभाग भारतीय कला और शिल्प से प्रेरणा लेता है और छात्रों को भविष्य में बड़े पैमाने पर उत्पादन और नयी तकनीकों की क्षमता को समझने में मदद करता है। इस कोर्स को करने के बाद छात्र एन. जी. ओ. , डिजाइन स्टूडियो, शिल्प उद्योग में भी रोजगार के अवसर ढूंढ सकते हैं या खुद का बिजनेस भी शुरू कर सकते हैं। कम्युनिकेशन डिजाइन से संबंधित इस कोर्स की अवधि चार वर्ष है। इस कोर्स के दौरान छात्रों में ऐसी समझ का विकास किया जाता है, जिससे खुले और निर्मित स्थानों में संचार के लिए सही परिवेश की स्थापना हो सके। इसके साथ ही ऐसे अनुभवों का निर्माण हो सके जिनके समर्थन से दर्शकों के समक्ष विचारों की व्याख्या हो सके। फिल्म व वीडियो कम्युनिकेशन कोर्स के तहत छात्रों को छोटी एजुकेशनल, कल्चरल, सोशल, एंटरटेनिंग व मार्केट कम्युनिकेशन संबंधी शार्ट फिल्में बनाने करने के लिए तैयार किया जाता है। इस कोर्स को करने के बाद छात्र ऑडियो−विजुअल कम्युनिकेशन के क्षेत्र में अपना करियर बना सकते हैं। ऐसे छात्रों के लिए एड एजेंसी, फिल्म प्रॉडक्शन हाउस, टीवी चैनल्स व अन्य कई सरकारी क्षेत्रों व एनजीओ के रास्ते हमेशा खुले रहते हैं। फर्नीचर डिजाइन भी वास्तव में एक कला है और इस कला की पूरी जानकारी एनआईडी के चार वर्षीय फर्नीचर डिजाइन कोर्स से प्राप्त होती है। कोर्स में विभिन्न प्रकार के मैटीरियल, उनके इस्तेमाल और क्रिएटिविटी का इस्तेमाल करके कुछ नया बनाने के लिए प्रेरित किया जाता है। पिछले कुछ समय से ग्राफिक डिजाइनर की मांग काफी बढ़ी है। ऑनलाइन से लेकर ऑफलाइन तक लोग ग्राफिक्स का सहारा लेने लगे हैं। इसके जरिए चीजों को आसानी से समझा जा सकता है और यही कारण है कि यह कोर्स छात्रों के बीच खासा पसंद किया जाता है। प्रॉडक्ट डिजाइन उन वस्तुओं की रचना करना है, जो लोगों के लिए फायदेमंद है। वस्तुए बड़ी व्यवस्था का मुख्य अंश होती है। कोर्स के दौरान प्रोजेक्ट्स का मुख्य केंद्र उपयोगकर्ताओं की जरूरत, उत्पाद और आर्थिक प्रभाव के लिए प्रोडक्ट्स और सर्विसेज पर रहता है। टेक्सटाइल डिजाइन के कोर्स के तहत छात्रों के भीतर कपड़ा अथवा टेक्सटाइल की समझ का ज्ञान विकसित किया जाता है। इस कोर्स की अवधि चार वर्ष है। जीडीजीपी चार वर्ष का यह कोर्स विजयवाड़ा और कुरुक्षेत्र में उपलब्ध है। इसमें छात्रों का बारहवीं पास होना आवश्यक है और उम्मीदवार की आयु बीस से अधिक न होनी चाहिए। स्नातकोत्तर डिजाइन
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। कैप्टन अमेरिका (अंग्रेजी; Captain America) मार्वेल कॉमिक्स का एक काल्पनिक किरदार है। इसका निर्माण जोए साइमन और जैक किर्बी ने टाइमली कॉमिक्स के लिए किया था। यह मार्च 1941 को पहली बार प्रकाशित हुआ था। इसे एक देशभक्त सैनिक के रूप में दिखाया गया है जो अपने शक्ति से द्वितीय विश्वयुद्ध में लड़ाई करता है। यह टाइमली कोमिक्स का उस समय का सबसे अधिक प्रसिद्ध किरदार था। इसके प्रसिद्धि का प्रभाव युद्ध पर भी पड़ रहा था और इस कारण इसे 1950 में बंद कर दिया गया और उसके कुछ ही वर्षों के बाद 1953 में यह फिर से प्रकाशित होने लगा। उसके बाद थोड़े ही समय तक यह प्रकाशित हुआ और 1964 में इसे मार्वेल कॉमिक्स ने प्रकाशित करना शुरू किया। तब से यह प्रकाशन में बना हुआ है। कैप्टन अमेरिका का पुस्तक 2011 में 100 सबसे अच्छे कॉमिक्स में 6वें स्थान पर था। . मार्वेल वर्ल्डवाइड, इंक (Marvel Worldwide, Inc.) या साधारणतः मार्वल कॉमिक्स एक अमरीकी कंपनी है जो कॉमिक्स पुस्तकें प्रकाशित करती है। २००९ में द वाल्ट डिज़्नी कंपनी ने मार्वल इंटरटेनमेंट को खरीद लिया जो मार्वल वर्ल्डवाइड की मातृ कंपनी है। मार्वेल की शुरुआत १९३९ में टाइमली पब्लिकेशंस के नाम से हुई और शुतुआत १९५० में यह एटलस कॉमिक्स बन गई। मार्वल के आधुनिक युग की शुरुआत १९६१ में हुई और आगे चलकर इसने फैंटास्टिक फोर व स्टेन ली, जैक किर्बी और स्टीव डीटको द्वारा बनाए गए अन्य सुपरहीरो के शीर्षकों वाले कॉमिक्स जारी किए। मार्वल में स्पाइडर-मैन, द एक्स मैन, आयरन मैन, द हल्क, द फैंटास्टिक फोर, थॉर, कैप्टन अमेरिका जैसे सुपरहीरो व डॉक्टर डूम, ग्रीन गोब्लिन, मैगनेटो, गलैकटस और रेड स्कल जैसे खलनायक शामिल है। इसके अधिकतर पात्र एक काल्पनिक विश्व मार्वल ब्रह्मांड में वास्तविक शहरों जैसे न्यूयॉर्क, लॉस ऐन्जेलिस और शिकागो में स्थित है। . कैप्टन अमेरिका और मार्वल कॉमिक्स आम में एक बात है (यूनियनपीडिया में): न्यूयॉर्क। यह लेख न्यूयॉर्क प्रांत के बारे में है। शहर के लिए देखे - न्यूयॉर्क शहर, अन्य विकल्प के लिए देखे न्यूयॉर्क (बहुविकल्पी) न्यूयॉर्क (New York) पूर्वोत्तर संयुक्त राज्य अमेरिका में एक राज्य है। न्यूयॉर्क उन तेरह उपनिवेश में से एक था जिसने संयुक्त राज्य का गठन किया था। राज्य के सबसे बड़े शहर न्यूयॉर्क शहर, में राज्य की 40% से अधिक आबादी रहती हैं। राज्य की दो-तिहाई जनसंख्या न्यू यॉर्क महानगरीय क्षेत्र में रहती है, और करीब 40% लोग लांग आईलैंड में रहते हैं। राज्य और शहर का नाम 17 वीं सदी के ड्यूक ऑफ यॉर्क यानी के इंग्लैंड के भावी राजा जेम्स द्वितीय के ऊपर रखा गया है। न्यूयॉर्क शहर संयुक्त राज्य अमेरिका में सबसे अधिक आबादी वाला शहर है और एक वैश्विक शहर है। न्यूयॉर्क शहर में संयुक्त राष्ट्र का मुख्यालय है। इसे दुनिया के सांस्कृतिक, वित्तीय और मीडिया राजधानी के रूप में वर्णित किया गया है और साथ ही यह दुनिया का आर्थिक रूप से सबसे शक्तिशाली शहर है। अन्य बड़े शहर हैं बफ़ेलो, रोचेस्टर, योंकर्स, और सिरैक्यूज़, जबकि राज्य की राजधानी अल्बानी है। राज्य की सीमा न्यू जर्सी और पेन्सिलवेनिया से दक्षिण में और कनेक्टिकट, मैसाचुसेट्स और वरमॉण्ट से पूर्व में लगती है। न्यूयार्क में यूरोपीय लोगों के आगमन से पहले कई सौ वर्षों तक अल्गोनक्वियन और इरक़ुओअन बोलने वाले मूल अमेरिकी जनजातियां बसी हुई थी। आने वाले पहले यूरोपीय लोग फ्रांसीसी उपनिवेशवादियों थे। 1609 में इस क्षेत्र पर डच के लिए हेनरी हडसन द्वारा दावा किया गया, जिन्होंने एक न्यू नीदरलैंड नाम से कॉलोनी बसाई। 1664 में इंग्लैंड ने डच से कॉलोनी लेकर उस पर का कब्जा कर लिया। 2016 के अनुमान के मुताबिक राज्य की जनसंख्या 1,97,45,289 हैं। इस हिसाब से इसका सभी राज्यों में चौथा स्थान हुआ। क्षेत्र के मामले में इसका स्थान 27वां है। लगभग 70% जनता सिर्फ अंग्रेजी बोलती है, 15% स्पेनी, 3% चीनी, बाकी अन्य। श्रेणीःसंयुक्त राज्य अमेरिका के राज्य. कैप्टन अमेरिका 14 संबंध है और मार्वल कॉमिक्स 18 है। वे आम 1 में है, समानता सूचकांक 3.12% है = 1 / (14 + 18)। यह लेख कैप्टन अमेरिका और मार्वल कॉमिक्स के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। कैप्टन अमेरिका मार्वेल कॉमिक्स का एक काल्पनिक किरदार है। इसका निर्माण जोए साइमन और जैक किर्बी ने टाइमली कॉमिक्स के लिए किया था। यह मार्च एक हज़ार नौ सौ इकतालीस को पहली बार प्रकाशित हुआ था। इसे एक देशभक्त सैनिक के रूप में दिखाया गया है जो अपने शक्ति से द्वितीय विश्वयुद्ध में लड़ाई करता है। यह टाइमली कोमिक्स का उस समय का सबसे अधिक प्रसिद्ध किरदार था। इसके प्रसिद्धि का प्रभाव युद्ध पर भी पड़ रहा था और इस कारण इसे एक हज़ार नौ सौ पचास में बंद कर दिया गया और उसके कुछ ही वर्षों के बाद एक हज़ार नौ सौ तिरेपन में यह फिर से प्रकाशित होने लगा। उसके बाद थोड़े ही समय तक यह प्रकाशित हुआ और एक हज़ार नौ सौ चौंसठ में इसे मार्वेल कॉमिक्स ने प्रकाशित करना शुरू किया। तब से यह प्रकाशन में बना हुआ है। कैप्टन अमेरिका का पुस्तक दो हज़ार ग्यारह में एक सौ सबसे अच्छे कॉमिक्स में छःवें स्थान पर था। . मार्वेल वर्ल्डवाइड, इंक या साधारणतः मार्वल कॉमिक्स एक अमरीकी कंपनी है जो कॉमिक्स पुस्तकें प्रकाशित करती है। दो हज़ार नौ में द वाल्ट डिज़्नी कंपनी ने मार्वल इंटरटेनमेंट को खरीद लिया जो मार्वल वर्ल्डवाइड की मातृ कंपनी है। मार्वेल की शुरुआत एक हज़ार नौ सौ उनतालीस में टाइमली पब्लिकेशंस के नाम से हुई और शुतुआत एक हज़ार नौ सौ पचास में यह एटलस कॉमिक्स बन गई। मार्वल के आधुनिक युग की शुरुआत एक हज़ार नौ सौ इकसठ में हुई और आगे चलकर इसने फैंटास्टिक फोर व स्टेन ली, जैक किर्बी और स्टीव डीटको द्वारा बनाए गए अन्य सुपरहीरो के शीर्षकों वाले कॉमिक्स जारी किए। मार्वल में स्पाइडर-मैन, द एक्स मैन, आयरन मैन, द हल्क, द फैंटास्टिक फोर, थॉर, कैप्टन अमेरिका जैसे सुपरहीरो व डॉक्टर डूम, ग्रीन गोब्लिन, मैगनेटो, गलैकटस और रेड स्कल जैसे खलनायक शामिल है। इसके अधिकतर पात्र एक काल्पनिक विश्व मार्वल ब्रह्मांड में वास्तविक शहरों जैसे न्यूयॉर्क, लॉस ऐन्जेलिस और शिकागो में स्थित है। . कैप्टन अमेरिका और मार्वल कॉमिक्स आम में एक बात है : न्यूयॉर्क। यह लेख न्यूयॉर्क प्रांत के बारे में है। शहर के लिए देखे - न्यूयॉर्क शहर, अन्य विकल्प के लिए देखे न्यूयॉर्क न्यूयॉर्क पूर्वोत्तर संयुक्त राज्य अमेरिका में एक राज्य है। न्यूयॉर्क उन तेरह उपनिवेश में से एक था जिसने संयुक्त राज्य का गठन किया था। राज्य के सबसे बड़े शहर न्यूयॉर्क शहर, में राज्य की चालीस% से अधिक आबादी रहती हैं। राज्य की दो-तिहाई जनसंख्या न्यू यॉर्क महानगरीय क्षेत्र में रहती है, और करीब चालीस% लोग लांग आईलैंड में रहते हैं। राज्य और शहर का नाम सत्रह वीं सदी के ड्यूक ऑफ यॉर्क यानी के इंग्लैंड के भावी राजा जेम्स द्वितीय के ऊपर रखा गया है। न्यूयॉर्क शहर संयुक्त राज्य अमेरिका में सबसे अधिक आबादी वाला शहर है और एक वैश्विक शहर है। न्यूयॉर्क शहर में संयुक्त राष्ट्र का मुख्यालय है। इसे दुनिया के सांस्कृतिक, वित्तीय और मीडिया राजधानी के रूप में वर्णित किया गया है और साथ ही यह दुनिया का आर्थिक रूप से सबसे शक्तिशाली शहर है। अन्य बड़े शहर हैं बफ़ेलो, रोचेस्टर, योंकर्स, और सिरैक्यूज़, जबकि राज्य की राजधानी अल्बानी है। राज्य की सीमा न्यू जर्सी और पेन्सिलवेनिया से दक्षिण में और कनेक्टिकट, मैसाचुसेट्स और वरमॉण्ट से पूर्व में लगती है। न्यूयार्क में यूरोपीय लोगों के आगमन से पहले कई सौ वर्षों तक अल्गोनक्वियन और इरक़ुओअन बोलने वाले मूल अमेरिकी जनजातियां बसी हुई थी। आने वाले पहले यूरोपीय लोग फ्रांसीसी उपनिवेशवादियों थे। एक हज़ार छः सौ नौ में इस क्षेत्र पर डच के लिए हेनरी हडसन द्वारा दावा किया गया, जिन्होंने एक न्यू नीदरलैंड नाम से कॉलोनी बसाई। एक हज़ार छः सौ चौंसठ में इंग्लैंड ने डच से कॉलोनी लेकर उस पर का कब्जा कर लिया। दो हज़ार सोलह के अनुमान के मुताबिक राज्य की जनसंख्या एक,सत्तानवे,पैंतालीस,दो सौ नवासी हैं। इस हिसाब से इसका सभी राज्यों में चौथा स्थान हुआ। क्षेत्र के मामले में इसका स्थान सत्ताईसवां है। लगभग सत्तर% जनता सिर्फ अंग्रेजी बोलती है, पंद्रह% स्पेनी, तीन% चीनी, बाकी अन्य। श्रेणीःसंयुक्त राज्य अमेरिका के राज्य. कैप्टन अमेरिका चौदह संबंध है और मार्वल कॉमिक्स अट्ठारह है। वे आम एक में है, समानता सूचकांक तीन.बारह% है = एक / । यह लेख कैप्टन अमेरिका और मार्वल कॉमिक्स के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
हैदराबादः देश में लगातार बढ़ रही जनसँख्या को लेकर इन दिनों बहस छिड़ी हुई है और एक तबके की ओर से इस पर नियंत्रण के लिए कानून बनाए जाने की मांग उठाई जा रही है। इस बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (AIMIM) चीफ और हैदराबाद से लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने जनसँख्या को लेकर बड़ा बयान दिया है। AIMIM चीफ का कहना है कि वह ऐसे किसी भी कानून के समर्थन नहीं करेंगे, जिसमें दो बच्चे पैदा करने की सीमा निर्धारित कर दी जाए। ओवैसी ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि, 'हमें चीन की गलती नहीं दोहरानी चाहिए। मैं ऐसे किसी कानून का समर्थन नहीं करूंगा, जिसमें दो बच्चों की नीति बनाने की बात कही गई हो। इससे देश को कोई लाभ नहीं होगा। ' बता दें कि, इससे पहले ओवैसी ने कहा था कि आबादी में वृद्धि के लिए मुस्लिमों को जिम्मेदार नहीं ठहराना चाहिए। ओवैसी ने दावा किया था कि मुस्लिम समुदाय गर्भ निरोधक का इस्तेमाल करने में सबसे आगे रहा है। हालाँकि, ओवैसी ने जो दावा किया है, NFHS-5 (National Family Health Survey) की रिपोर्ट इसके ठीक उलट आंकड़े पेश करती है। रिपोर्ट के अनुसार,देश में 15-49 वर्ष की महिलाओं द्वारा गर्भनिरोधकों का इस्तेमाल किए जाने का राष्ट्रीय औसत 66. 7 फीसद है। लेकिन देश के मुसलमानों में ये औसत 60. 3 फीसद है, जो कि समुदाय के आधार पर सबसे कम है। इतना ही नहीं ये देश के अन्य अल्पसंख्यक समुदाय के मुकाबले भी ये आकंड़ा काफी कम है।
हैदराबादः देश में लगातार बढ़ रही जनसँख्या को लेकर इन दिनों बहस छिड़ी हुई है और एक तबके की ओर से इस पर नियंत्रण के लिए कानून बनाए जाने की मांग उठाई जा रही है। इस बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन चीफ और हैदराबाद से लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने जनसँख्या को लेकर बड़ा बयान दिया है। AIMIM चीफ का कहना है कि वह ऐसे किसी भी कानून के समर्थन नहीं करेंगे, जिसमें दो बच्चे पैदा करने की सीमा निर्धारित कर दी जाए। ओवैसी ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि, 'हमें चीन की गलती नहीं दोहरानी चाहिए। मैं ऐसे किसी कानून का समर्थन नहीं करूंगा, जिसमें दो बच्चों की नीति बनाने की बात कही गई हो। इससे देश को कोई लाभ नहीं होगा। ' बता दें कि, इससे पहले ओवैसी ने कहा था कि आबादी में वृद्धि के लिए मुस्लिमों को जिम्मेदार नहीं ठहराना चाहिए। ओवैसी ने दावा किया था कि मुस्लिम समुदाय गर्भ निरोधक का इस्तेमाल करने में सबसे आगे रहा है। हालाँकि, ओवैसी ने जो दावा किया है, NFHS-पाँच की रिपोर्ट इसके ठीक उलट आंकड़े पेश करती है। रिपोर्ट के अनुसार,देश में पंद्रह-उनचास वर्ष की महिलाओं द्वारा गर्भनिरोधकों का इस्तेमाल किए जाने का राष्ट्रीय औसत छयासठ. सात फीसद है। लेकिन देश के मुसलमानों में ये औसत साठ. तीन फीसद है, जो कि समुदाय के आधार पर सबसे कम है। इतना ही नहीं ये देश के अन्य अल्पसंख्यक समुदाय के मुकाबले भी ये आकंड़ा काफी कम है।
इंटरनेट डेस्क। गर्मी के इस मौसम में वैसे तो किसी का भी मन घर से निकलने का नहीं करता है लेकिन इस गर्मी से बचने और अपने आपको रिफ्रेश करने के लिए ही लोग कुछ ठंडी जगहों की शरण लेते है। ऐसे में आप भी जाने का प्लान बना रहे है तो आज आपको बता दे की आप कहा जा सकते है। वैसे तो भारत में घूमने वाली ठंडी जगहों की लिस्ट काफी लंबी चोड़ी है लेकिन इन सबमें सबसे पहला नाम आता है वो है मनाली। ऐसे में आप भी इस बार की यात्रा में मनाली जा सकते है। यह एक पर्वतीय इलाका है। यहां का प्राकृतिक वातावरण आपको जरूर पसंद आएगा। आप अपनी इस यात्रा में यहां मनाली में आकर जोगिना वॉटरफॉल जा सकते है। इसके अलावा आप मानली में ट्रेकिंग, पैराग्लाइडिंग और राफ्टिंग का आनंद ले सकते हैं। इन सबके बीच आपको जो सबसे ज्यादा सुकुन देगा वो है यहा की शांति जो आपको पसंद आएगी। Copyright @ 2023 Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.
इंटरनेट डेस्क। गर्मी के इस मौसम में वैसे तो किसी का भी मन घर से निकलने का नहीं करता है लेकिन इस गर्मी से बचने और अपने आपको रिफ्रेश करने के लिए ही लोग कुछ ठंडी जगहों की शरण लेते है। ऐसे में आप भी जाने का प्लान बना रहे है तो आज आपको बता दे की आप कहा जा सकते है। वैसे तो भारत में घूमने वाली ठंडी जगहों की लिस्ट काफी लंबी चोड़ी है लेकिन इन सबमें सबसे पहला नाम आता है वो है मनाली। ऐसे में आप भी इस बार की यात्रा में मनाली जा सकते है। यह एक पर्वतीय इलाका है। यहां का प्राकृतिक वातावरण आपको जरूर पसंद आएगा। आप अपनी इस यात्रा में यहां मनाली में आकर जोगिना वॉटरफॉल जा सकते है। इसके अलावा आप मानली में ट्रेकिंग, पैराग्लाइडिंग और राफ्टिंग का आनंद ले सकते हैं। इन सबके बीच आपको जो सबसे ज्यादा सुकुन देगा वो है यहा की शांति जो आपको पसंद आएगी। Copyright @ दो हज़ार तेईस Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.
पाण्डवप्रवर! नरेश्वर! यह निश्चय मानिये, आपके पास पहले जो समृद्धिशाली राज्यवैभव था और जिसे आपने जूएमें खो दिया था, वह सारा राज्य अब दुर्योधन अपने जीतेजी आपको कभी नहीं दे सकता ॥ ४२ ।। इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि कृष्णवाक्ये त्रिसप्ततितमोऽध्यायः इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें श्रीकृष्णवाक्यविषयक तिहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ ।। ७३ ।।
पाण्डवप्रवर! नरेश्वर! यह निश्चय मानिये, आपके पास पहले जो समृद्धिशाली राज्यवैभव था और जिसे आपने जूएमें खो दिया था, वह सारा राज्य अब दुर्योधन अपने जीतेजी आपको कभी नहीं दे सकता ॥ बयालीस ।। इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि कृष्णवाक्ये त्रिसप्ततितमोऽध्यायः इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें श्रीकृष्णवाक्यविषयक तिहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ ।। तिहत्तर ।।
सप्ताह में सोमवार का दिन शिव पूजा को समर्पित किया गया हैं मान्यता है कि इस पावन दिन पर अगर भोलेनाथ की विधिवत पूजा की जाए तो भगवान प्रसन्न होकर अपनी कृपा बरसाते हैं ऐसे में हर भक्त आज शिव भक्ति में लीन रहता हैं और उनकी कृपा व आशीर्वाद पाने के लिए व्रत पूजन करता हैं ऐसे में अगर आप भी शिव शंकर का आशीर्वाद पाना चाहते हैं तो आज कुछ उपायों को आजमा सकते हैं। मान्यता है कि इन उपायों को करने से शिव शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं और अपने भक्तों पर कृपा करते हैं इस दिन पूजा में भगवान शिव के लिंग रूप की पूजा जरूर करें और शिवलिंग पर कुछ खास चीजों को अर्पित करें मान्यता है कि आज के दिन शिवलिंग पर कुछ चीजों को अर्पित करने से साधक की हर परेशानी दूर हो जाती हैं तो आज हम आपको अपने इस लेख में उन्ही के बारे में बता रहे हैं तो आइए जानते हैं। सोमवार के दिन शिव पूजा में शिवलिंग को पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद चंदन और भभूत लगाएं। भगवान शिव का ध्यान करते हुए शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा और शमीपत्र अर्पित करने से प्रभु जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं और सुख समृद्धि व शांति का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। इसके अलावा आज के दिन शिवलिंग का रुद्राभिषेक करना भी उत्तम होता हैं। ऐसे में अगर आप संतान सुख की इच्छा रखते हैं तो आज के दिन आप शिवलिंग का घी से अभिषेक करें। वही इसके अलावा गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करने से सभी दुखों का अंत हो जाता हैं। कामना पूर्ति की इच्छा रखने वाले आज शिवलिंग का गन्ने के रस से अभिषेक जरूर करें। इसके अलावा पितृदोष से मुक्ति के लिए कच्चे चावल में काला तिल मिलाकर दान जरूर करें।
सप्ताह में सोमवार का दिन शिव पूजा को समर्पित किया गया हैं मान्यता है कि इस पावन दिन पर अगर भोलेनाथ की विधिवत पूजा की जाए तो भगवान प्रसन्न होकर अपनी कृपा बरसाते हैं ऐसे में हर भक्त आज शिव भक्ति में लीन रहता हैं और उनकी कृपा व आशीर्वाद पाने के लिए व्रत पूजन करता हैं ऐसे में अगर आप भी शिव शंकर का आशीर्वाद पाना चाहते हैं तो आज कुछ उपायों को आजमा सकते हैं। मान्यता है कि इन उपायों को करने से शिव शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं और अपने भक्तों पर कृपा करते हैं इस दिन पूजा में भगवान शिव के लिंग रूप की पूजा जरूर करें और शिवलिंग पर कुछ खास चीजों को अर्पित करें मान्यता है कि आज के दिन शिवलिंग पर कुछ चीजों को अर्पित करने से साधक की हर परेशानी दूर हो जाती हैं तो आज हम आपको अपने इस लेख में उन्ही के बारे में बता रहे हैं तो आइए जानते हैं। सोमवार के दिन शिव पूजा में शिवलिंग को पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद चंदन और भभूत लगाएं। भगवान शिव का ध्यान करते हुए शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा और शमीपत्र अर्पित करने से प्रभु जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं और सुख समृद्धि व शांति का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। इसके अलावा आज के दिन शिवलिंग का रुद्राभिषेक करना भी उत्तम होता हैं। ऐसे में अगर आप संतान सुख की इच्छा रखते हैं तो आज के दिन आप शिवलिंग का घी से अभिषेक करें। वही इसके अलावा गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करने से सभी दुखों का अंत हो जाता हैं। कामना पूर्ति की इच्छा रखने वाले आज शिवलिंग का गन्ने के रस से अभिषेक जरूर करें। इसके अलावा पितृदोष से मुक्ति के लिए कच्चे चावल में काला तिल मिलाकर दान जरूर करें।
Tamil Thalaivas vs Haryana Steelers: हरियाणा स्टीलर्स ने प्रो कबड्डी लीग (पीकेएल) के सातवें सीजन में शनिवार को तमिल थलाइवाज को 43-35 से हरा दिया। हरियाणा स्टीलर्स के लिए एक बार फिर विकास कंडोला ने कमाल का प्रदर्शन किया। इसके अलावा धर्मराज चेरालाथन ने प्रो कबड्डी लीग में अपने 250 टैकल प्वॉइंट पूरे किए। पहले हाफ का खेल खत्म होने तक हरियाणा स्टीलर्स ने तमिल थलाइवाज पर दो अंकों की बढ़त हासिल कर ली थी। राहुल चौधरी फॉर्म में दिखाई दे रहे हैं, पहले हाफ के 10 रेड में उन्होंने पांच रेड अपने नाम किया। दूसरे हाफ की शुरुआत में तमिल थलाइवाज ने हरियाणा स्टीलर्स को ऑल आउट कर स्कोर को बराबरी पर ला दिया। विकास खंडोला ने इस मैच के दौरान सीजन का अपना सातवां सुपरटैन पूरा किया।
Tamil Thalaivas vs Haryana Steelers: हरियाणा स्टीलर्स ने प्रो कबड्डी लीग के सातवें सीजन में शनिवार को तमिल थलाइवाज को तैंतालीस-पैंतीस से हरा दिया। हरियाणा स्टीलर्स के लिए एक बार फिर विकास कंडोला ने कमाल का प्रदर्शन किया। इसके अलावा धर्मराज चेरालाथन ने प्रो कबड्डी लीग में अपने दो सौ पचास टैकल प्वॉइंट पूरे किए। पहले हाफ का खेल खत्म होने तक हरियाणा स्टीलर्स ने तमिल थलाइवाज पर दो अंकों की बढ़त हासिल कर ली थी। राहुल चौधरी फॉर्म में दिखाई दे रहे हैं, पहले हाफ के दस रेड में उन्होंने पांच रेड अपने नाम किया। दूसरे हाफ की शुरुआत में तमिल थलाइवाज ने हरियाणा स्टीलर्स को ऑल आउट कर स्कोर को बराबरी पर ला दिया। विकास खंडोला ने इस मैच के दौरान सीजन का अपना सातवां सुपरटैन पूरा किया।
शिलाॅन्ग. सीबीआई आज कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से शिलाॅन्ग में पूछताछ करेगी। उन पर शारदा चिटफंड घोटाले में सबूतों को नष्ट करने का आरोप है। जांच एजेंसी के एक अफसर ने बताया कि राजीव कुमार पश्चिम बंगाल कैडर के तीन अन्य आईपीएस अधिकारियों और अपने छोटे भाई के साथ शुक्रवार शाम ही कोलकाता से मेघालय की राजधानी शिलाॅन्ग पहुंच गए हैं।अफसर के मुताबिक, राजीव शिलाॅन्ग के एक निजी गेस्ट हाउस में ठहरे। उन्हें किसी से मिलने की इजाजत नहीं है। इस दौरान उनकी सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए हैं।' सीबीआई डायरेक्टर ऋषि कुमार शुक्ला ने 6 फरवरी के आदेश में एक पुलिस अधीक्षक (एसपी), तीन एडिशनल एसपी, दो डिप्टी एसपी और तीन इंस्पेक्टर समेत 10 अफसरों को एजेंसी की आठ से 20 फरवरी तक कोलकाता आर्थिक अपराध शाखा से संबद्ध कर दिया था। आदेश में सभी 10 अधिकारियों को कोलकाता में सीबीआई के ज्वाइंट डायरेक्टर को रिपोर्ट करने को कहा गया था।एक दिन पहले कोलकाता पुलिस ने सीबीआई के पूर्व चीफ के ठिकानों पर छापे मारेउधर, राजीव कुमार से पूछताछ से एक दिन पहले शुक्रवार को कोलकाता पुलिस ने बेहिसाब संपत्ति के मामले में सीबीआई के पूर्व अंतरिम चीफ नागेश्वर राव के ठिकानों पर छापे मारे। पुलिस ने जिन दो जगहों पर छापे मारे, उनमें से एक कोलकाता में है और दूसरी साल्ट लेक स्थित एंजेला मर्केंटाइल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का दफ्तर है। यह कंपनी राव की पत्नी की बताई जा रही है। हालांकि, राव ने कहा कि ये कार्रवाई प्रोपेगेंडा के तहत की गई। कंपनी से मेरा कोई संबंध नहीं है। यह कंपनी उनके एक पारिवारिक मित्र की है।3 फरवरी को पूछताछ नहीं कर पाई थी सीबीआईसीबीआई की टीम पूछताछ के लिए 3 फरवरी को राजीव कुमार के घर पहुंची थी, लेकिन उसे अंदर नहीं जाने दिया गया। उलटा सीबीआई अफसरों को ही पुलिस जबरन थाने ले गई। इस दौरान ममता ने सीबीआई की कार्रवाई के विरोध में धरना शुरू कर दिया था। इस मामले में सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने राजीव कुमार को सीबीआई के सामने पेश होने और ईमानदारी से जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया था। हालांकि, कोर्ट ने साफ कर दिया था कि कुमार को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।घोटाले की जांच के लिए बनी एसआईटी के प्रमुख थे कुमारशारदा घोटाले की जांच के लिए 2013 में एसआईटी बनाई गई थी। इसका नेतृत्व 1989 बैच के आईपीएस राजीव कुमार कर रहे थे। 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच का जिम्मा सीबीआई को दिया था। इसके बाद राजीव कुमार को जनवरी 2016 में कोलकाता पुलिस का मुखिया बनाया गया था।2460 करोड़ का शारदा चिटफंड घोटालाशारदा ग्रुप से जुड़े पश्चिम बंगाल के कथित चिटफंड घोटाले के 2,460 करोड़ रुपए तक का होने का अनुमान है। पश्चिम बंगाल पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि 80 फीसदी जमाकर्ताओं के पैसे का भुगतान किया जाना बाकी है। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, शारदा ग्रुप की चार कंपनियों का इस्तेमाल तीन स्कीमों के जरिए पैसा इधर-उधर करने में किया गया। ये तीन स्कीम थीं- फिक्स्ड डिपॉजिट, रिकरिंग डिपॉजिट और मंथली इनकम डिपॉजिट।
शिलाॅन्ग. सीबीआई आज कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से शिलाॅन्ग में पूछताछ करेगी। उन पर शारदा चिटफंड घोटाले में सबूतों को नष्ट करने का आरोप है। जांच एजेंसी के एक अफसर ने बताया कि राजीव कुमार पश्चिम बंगाल कैडर के तीन अन्य आईपीएस अधिकारियों और अपने छोटे भाई के साथ शुक्रवार शाम ही कोलकाता से मेघालय की राजधानी शिलाॅन्ग पहुंच गए हैं।अफसर के मुताबिक, राजीव शिलाॅन्ग के एक निजी गेस्ट हाउस में ठहरे। उन्हें किसी से मिलने की इजाजत नहीं है। इस दौरान उनकी सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए हैं।' सीबीआई डायरेक्टर ऋषि कुमार शुक्ला ने छः फरवरी के आदेश में एक पुलिस अधीक्षक , तीन एडिशनल एसपी, दो डिप्टी एसपी और तीन इंस्पेक्टर समेत दस अफसरों को एजेंसी की आठ से बीस फरवरी तक कोलकाता आर्थिक अपराध शाखा से संबद्ध कर दिया था। आदेश में सभी दस अधिकारियों को कोलकाता में सीबीआई के ज्वाइंट डायरेक्टर को रिपोर्ट करने को कहा गया था।एक दिन पहले कोलकाता पुलिस ने सीबीआई के पूर्व चीफ के ठिकानों पर छापे मारेउधर, राजीव कुमार से पूछताछ से एक दिन पहले शुक्रवार को कोलकाता पुलिस ने बेहिसाब संपत्ति के मामले में सीबीआई के पूर्व अंतरिम चीफ नागेश्वर राव के ठिकानों पर छापे मारे। पुलिस ने जिन दो जगहों पर छापे मारे, उनमें से एक कोलकाता में है और दूसरी साल्ट लेक स्थित एंजेला मर्केंटाइल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का दफ्तर है। यह कंपनी राव की पत्नी की बताई जा रही है। हालांकि, राव ने कहा कि ये कार्रवाई प्रोपेगेंडा के तहत की गई। कंपनी से मेरा कोई संबंध नहीं है। यह कंपनी उनके एक पारिवारिक मित्र की है।तीन फरवरी को पूछताछ नहीं कर पाई थी सीबीआईसीबीआई की टीम पूछताछ के लिए तीन फरवरी को राजीव कुमार के घर पहुंची थी, लेकिन उसे अंदर नहीं जाने दिया गया। उलटा सीबीआई अफसरों को ही पुलिस जबरन थाने ले गई। इस दौरान ममता ने सीबीआई की कार्रवाई के विरोध में धरना शुरू कर दिया था। इस मामले में सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने राजीव कुमार को सीबीआई के सामने पेश होने और ईमानदारी से जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया था। हालांकि, कोर्ट ने साफ कर दिया था कि कुमार को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।घोटाले की जांच के लिए बनी एसआईटी के प्रमुख थे कुमारशारदा घोटाले की जांच के लिए दो हज़ार तेरह में एसआईटी बनाई गई थी। इसका नेतृत्व एक हज़ार नौ सौ नवासी बैच के आईपीएस राजीव कुमार कर रहे थे। दो हज़ार चौदह में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच का जिम्मा सीबीआई को दिया था। इसके बाद राजीव कुमार को जनवरी दो हज़ार सोलह में कोलकाता पुलिस का मुखिया बनाया गया था।दो हज़ार चार सौ साठ करोड़ का शारदा चिटफंड घोटालाशारदा ग्रुप से जुड़े पश्चिम बंगाल के कथित चिटफंड घोटाले के दो,चार सौ साठ करोड़ रुपए तक का होने का अनुमान है। पश्चिम बंगाल पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय की जांच रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि अस्सी फीसदी जमाकर्ताओं के पैसे का भुगतान किया जाना बाकी है। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, शारदा ग्रुप की चार कंपनियों का इस्तेमाल तीन स्कीमों के जरिए पैसा इधर-उधर करने में किया गया। ये तीन स्कीम थीं- फिक्स्ड डिपॉजिट, रिकरिंग डिपॉजिट और मंथली इनकम डिपॉजिट।
लंदन, 21 अप्रैल (एपी) इंग्लैंड की पुरुष क्रिकेट टीम के राष्ट्रीय चयनकर्ता को हटा दिया गया है। पुनर्गठन की प्रक्रिया के तहत यह कदम उठाया गया है जिसके कारण एक शताब्दी से अधिक समय के बाद इस पद की कोई जरूरत नहीं रह गई थी। एड स्मिथ तीन साल तक राष्ट्रीय चयनकर्ता की भूमिका निभाने के बाद अप्रैल के अंत में पद छोड़ेंगे। इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) ने मंगलवार को यह जानकारी दी। भविष्य में टीम के चयन की जिम्मेदारी टीम के मुख्य कोच क्रिस सिल्वरवुड की होगी। सिल्वरवुड टीम के संबंधित कप्तानों जो रूट (टेस्ट) और इयोन मोर्गन (एकदिवसीय और टी20) के साथ मिलकर काम करेंगे। उन्होंने कहा, "नए ढांचे में जवाबदेही और स्पष्ट होगी जिसमें मुख्य कोच क्रिस सिल्वरवुड इंग्लैंड की सीनियर पुरुष टीमों के चयन की जिम्मेदारी उठाएंगे। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
लंदन, इक्कीस अप्रैल इंग्लैंड की पुरुष क्रिकेट टीम के राष्ट्रीय चयनकर्ता को हटा दिया गया है। पुनर्गठन की प्रक्रिया के तहत यह कदम उठाया गया है जिसके कारण एक शताब्दी से अधिक समय के बाद इस पद की कोई जरूरत नहीं रह गई थी। एड स्मिथ तीन साल तक राष्ट्रीय चयनकर्ता की भूमिका निभाने के बाद अप्रैल के अंत में पद छोड़ेंगे। इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड ने मंगलवार को यह जानकारी दी। भविष्य में टीम के चयन की जिम्मेदारी टीम के मुख्य कोच क्रिस सिल्वरवुड की होगी। सिल्वरवुड टीम के संबंधित कप्तानों जो रूट और इयोन मोर्गन के साथ मिलकर काम करेंगे। उन्होंने कहा, "नए ढांचे में जवाबदेही और स्पष्ट होगी जिसमें मुख्य कोच क्रिस सिल्वरवुड इंग्लैंड की सीनियर पुरुष टीमों के चयन की जिम्मेदारी उठाएंगे। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
Giridih : झामुमो जिलाध्यक्ष संजय सिंह ने 13 मार्च को पीरटांड़ प्रखंड के पालगंज स्थित कुलमती नाला समेत अन्य दो नालों पर तीन चेकडैम का शिलान्यास संयुक्त रूप से किया. गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू के प्रयास से इन तीनों चेकडैमों को स्वीकृति मिली है. कुलमति नाला पालगंज में 58 लाख, सरलाही नाला खरपोका में 45 लाख व गौचौथा नाला कुड़को में 53 लाख की लागत से चेकडैम का निर्माण किया जाएगा. मौके पर राकी सिंह, शोभा यादव, सुमित कुमार, अनिल राम, विकास सिन्हा, गोपाल शर्मा, संजय वर्मा, हारून, विवेक सिन्हा, राकेश टुन्ना, युवराज महतो, बाबूराम हेम्ब्रम, दिलीप मुर्मू, रामदेव, महेंद्र महतो समेत झामुमो के दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित थे.
Giridih : झामुमो जिलाध्यक्ष संजय सिंह ने तेरह मार्च को पीरटांड़ प्रखंड के पालगंज स्थित कुलमती नाला समेत अन्य दो नालों पर तीन चेकडैम का शिलान्यास संयुक्त रूप से किया. गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू के प्रयास से इन तीनों चेकडैमों को स्वीकृति मिली है. कुलमति नाला पालगंज में अट्ठावन लाख, सरलाही नाला खरपोका में पैंतालीस लाख व गौचौथा नाला कुड़को में तिरेपन लाख की लागत से चेकडैम का निर्माण किया जाएगा. मौके पर राकी सिंह, शोभा यादव, सुमित कुमार, अनिल राम, विकास सिन्हा, गोपाल शर्मा, संजय वर्मा, हारून, विवेक सिन्हा, राकेश टुन्ना, युवराज महतो, बाबूराम हेम्ब्रम, दिलीप मुर्मू, रामदेव, महेंद्र महतो समेत झामुमो के दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित थे.
मुंबई। बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनम कपूर कांस 2018 में अपनी दूसरी रेड कार्पेट अपीयरेंस पर हुस्न के जलवे बिखेरती नजर आईं। उन्होंने अपने ग्लैमरस अंदाज से सबको हैरान कर दिया। इस दौरान सोनम न्यूड कलर का ऑफ शोल्डर गाउन पहना था जिसके पीछे कंट्रास्ट के तौर पर यैलो कलर भी था। इस दौरान वह बेहद खूबसूरत अंदाज में नजर आईं। सोनम कपूर के इस स्टाइल को लोग काफी पसंद कर रहे हैं। सोनम के लुक को उनकी बहन रेहा कपूर और दीप कैली ने स्टाइल किया था। वहीं सोनम के साथ रेहा और दीप वहां मौजूद रही हैं। बता दें कि सोनम कांस फिल्मोत्सव में शिरकत करने के लिए अपनी शादी के महज 5 दिन बाद ही पहुंची थी। इस फिल्म फेस्टिवल में सोनम के अलावा दीपिका पादुकोण और ऐश्वर्या राय बच्चन ने भी हिस्सा लिया था। ये तीनों ही यहां एक कॉस्मेटिक ब्रांड को एंडोर्स करने पहुंची थी। कांस में तीनों ही बॉलीवुड हसीनाओं ने अपने अंदाज से सबको हैरान कर दिया।
मुंबई। बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनम कपूर कांस दो हज़ार अट्ठारह में अपनी दूसरी रेड कार्पेट अपीयरेंस पर हुस्न के जलवे बिखेरती नजर आईं। उन्होंने अपने ग्लैमरस अंदाज से सबको हैरान कर दिया। इस दौरान सोनम न्यूड कलर का ऑफ शोल्डर गाउन पहना था जिसके पीछे कंट्रास्ट के तौर पर यैलो कलर भी था। इस दौरान वह बेहद खूबसूरत अंदाज में नजर आईं। सोनम कपूर के इस स्टाइल को लोग काफी पसंद कर रहे हैं। सोनम के लुक को उनकी बहन रेहा कपूर और दीप कैली ने स्टाइल किया था। वहीं सोनम के साथ रेहा और दीप वहां मौजूद रही हैं। बता दें कि सोनम कांस फिल्मोत्सव में शिरकत करने के लिए अपनी शादी के महज पाँच दिन बाद ही पहुंची थी। इस फिल्म फेस्टिवल में सोनम के अलावा दीपिका पादुकोण और ऐश्वर्या राय बच्चन ने भी हिस्सा लिया था। ये तीनों ही यहां एक कॉस्मेटिक ब्रांड को एंडोर्स करने पहुंची थी। कांस में तीनों ही बॉलीवुड हसीनाओं ने अपने अंदाज से सबको हैरान कर दिया।
राजगढ़ में ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों से मिलने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कुछ देर बाद जिले के छायन गांव आ रहे हैं। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में कांग्रेस विधायक बापू सिंह तंवर 20 गांव के किसानों के साथ छायन गांव अपनी गाड़ी से जा रहे थे। इस दौरान पुलिस को इसकी सूचना मिली कि विधायक अपने साथ आसपास के ग्रामीणों को लेकर सीएम से मिलने आ रहे हैं। जिसे लेकर पुलिस ने बीच रास्ते में ही राजगढ़ विधायक बापू सिंह तवर और ग्रामीणों को रोक लिया। जिससे राजगढ़ विधायक नाराज हो कर सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। विधायक तंवर ने बताया कि हम हंगामा करने नहीं जा रहे हैं। हमें CM से क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को लेकर चर्चा करना है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
राजगढ़ में ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों से मिलने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कुछ देर बाद जिले के छायन गांव आ रहे हैं। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में कांग्रेस विधायक बापू सिंह तंवर बीस गांव के किसानों के साथ छायन गांव अपनी गाड़ी से जा रहे थे। इस दौरान पुलिस को इसकी सूचना मिली कि विधायक अपने साथ आसपास के ग्रामीणों को लेकर सीएम से मिलने आ रहे हैं। जिसे लेकर पुलिस ने बीच रास्ते में ही राजगढ़ विधायक बापू सिंह तवर और ग्रामीणों को रोक लिया। जिससे राजगढ़ विधायक नाराज हो कर सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। विधायक तंवर ने बताया कि हम हंगामा करने नहीं जा रहे हैं। हमें CM से क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को लेकर चर्चा करना है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
अक्सर आप कहीं जा रहे हैं और बिल्ली ने आपका रास्ता काट लिया, तो आप एक बार तो जरूर रुक जाते हैं सभी के मन में एक बार शंका तो जरूर आती हैं मगर बता दें कि अगर बिल्ली आपका रास्त काटते वक्त दाई से बाई ओर जाए तो इसे आप अपने लिए शुभ मान सकते हैं इसका अर्थ आप जिस भी काम के लिए घर से बाहर जा रहे हैं. इसके साथ ही वह जरूर ही सफल होगा। वही बिल्ली का रास्ता काटना तभी अशुभ माना जाता हैं जब काली बिल्ली आपका रास्ता काटे। इसके अलावा कोई भी रंग की बिल्ली रास्ता काटे तो उसे गलत या फिर बुरा नहीं माना जाता हैं। वही हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार दिवाली के दिन अगर आपके घर बिल्ली आए तो इसे शुभ माना गया हैं मान्यता हैं कि बिल्ली आपके घर सुख शांति का संदेशा पहुंचाने आती हैं। अआप्की जानकारी के लिए बता दें की बिल्ली अगर आपके घर बच्चों को जन्म दें तो भी इसे शुभ माना जाता हैं बिल्ली और उसके बच्चों को हर रोज दूध पिलाएं। जिससे आपके घर में सुख समृद्धि और शांति हमेशा ही बनी रह सकें।
अक्सर आप कहीं जा रहे हैं और बिल्ली ने आपका रास्ता काट लिया, तो आप एक बार तो जरूर रुक जाते हैं सभी के मन में एक बार शंका तो जरूर आती हैं मगर बता दें कि अगर बिल्ली आपका रास्त काटते वक्त दाई से बाई ओर जाए तो इसे आप अपने लिए शुभ मान सकते हैं इसका अर्थ आप जिस भी काम के लिए घर से बाहर जा रहे हैं. इसके साथ ही वह जरूर ही सफल होगा। वही बिल्ली का रास्ता काटना तभी अशुभ माना जाता हैं जब काली बिल्ली आपका रास्ता काटे। इसके अलावा कोई भी रंग की बिल्ली रास्ता काटे तो उसे गलत या फिर बुरा नहीं माना जाता हैं। वही हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार दिवाली के दिन अगर आपके घर बिल्ली आए तो इसे शुभ माना गया हैं मान्यता हैं कि बिल्ली आपके घर सुख शांति का संदेशा पहुंचाने आती हैं। अआप्की जानकारी के लिए बता दें की बिल्ली अगर आपके घर बच्चों को जन्म दें तो भी इसे शुभ माना जाता हैं बिल्ली और उसके बच्चों को हर रोज दूध पिलाएं। जिससे आपके घर में सुख समृद्धि और शांति हमेशा ही बनी रह सकें।
Success Story, IFS Parveen Kaswan: राजस्थान के रहने वाले परवीन कासवान आईएफएस यानी भारतीय वन सेवा में ऑफिसर हैं. यूपीएससी परीक्षा (UPSC Exam) के बारे में सोचते हुए आमतौर पर आईएएस (IAS), आईपीएस (IPS) और आईएफएस (Indian Foreign Service) आदि का ख्याल आता है. इंडियन फॉरेस्ट सर्विस (Indian Forest Service) यानी आईएफएस ऑफिसर (IFS Officer) का चयन भी यूपीएससी परीक्षा के जरिए किया जाता है. जानिए आईएफएस परवीन कासवान की सक्सेस स्टोरी (IFS Parveen Kaswan Success Story). Parveen Kaswan IFS Biography: इंडियन फॉरेस्ट सर्विस यानी भारतीय वन सेवा (Indian Forest Service) में ऑफिसर परवीन कासवान राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में स्थित मिर्जावाली मेर गांव के रहने वाले हैं. उनके पिता का नाम हंसराज कासवान है. उन्होंने एक बार ट्वीट कर बताया था कि शादी के वक्त उनकी मां की उम्र सिर्फ 13 साल थी. उनके 16 साल के होने पर परवीन कासवान (IFS Parveen Kaswan) का जन्म हो गया था. IFS Parveen Kaswan Education Qualification: IFS परवीन कासवान ने 2008 में एमिटी यूनिवर्सिटी से एयरोस्पेस, एयरोनॉटिकल एंड एयरोनॉटिकल/स्पेस इंजीनियरिंग में बीटेक किया है. एयरोस्पेस इंजीनियर परवीन ने 2012 में गेट परीक्षा में 191वीं रैंक हासिल की थी, जिसके बाद उन्हें MHRD की तरफ से स्कॉलरशिप दी गई थी. फिर उन्होंने IISc बेंगलुरु से इंजीनियरिंग डिजाइंस में मास्टर्स किया था. साल 2016-2018 में परवीन ने देहरादून में स्थित फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट से फॉरेस्ट्री में मास्टर्स किया था. Parveen Kaswan UPSC Rank: परवीन कासवान ने साल 2015 में हुई यूपीएससी परीक्षा (UPSC Exam) में 81वीं रैंक हासिल की थी. परवीन ने कई इंटरव्यू में बताया है कि आईएफएस जॉइन करने के लिए उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ी. दरअसल, आईएफएस का कट ऑफ अन्य प्रशासनिक सेवाओं की तुलना में ज्यादा रहता है. उन्होंने सरकारी नौकरी (Sarkari Naukri) की अपनी तैयारी NCERT किताबों, अखबारों और मॉक टेस्ट के जरिए की थी. IFS Parveen Kaswan Struggle: आईएफएस परवीन कासवान एक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखते हैं. उनके यहां हिंदी भाषा की प्रमुखता रही है. जब उन्होंने अपनी कॉलेज की पढ़ाई शुरू की थी तो काफी स्ट्रगल फेस करना पड़ा. दरअसल, कॉलेज में हर तरह के बैकग्राउंड के स्टूडेंट्स थे. उनमें से ज्यादातर अंग्रेजी भाषा में न सिर्फ बातें करते थे, बल्कि गाने भी इसी भाषा में सुनते थे. यह देखकर परवीन को शुरुआत में काफी अजीब लगता था. उनके लिए यह माहौल बिलकुल नया था. IFS Parveen Kaswan Instagram: आईएफएस परवीन कासवान सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हैं (IFS Parveen Kaswan Social Media). उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर 40 हजार 200 और ट्विटर पर 4 लाख 13 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं. वह दोनों सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जानवरों व जंगल की शानदार तस्वीरें शेयर करते रहते हैं. उनके फॉलोअर्स उनकी फोटोग्राफी (Parveen Kaswan Photography) के कायल हैं. Parveen Kaswan IFS Biography: इंडियन फॉरेस्ट सर्विस यानी भारतीय वन सेवा (Indian Forest Service) में ऑफिसर परवीन कासवान राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में स्थित मिर्जावाली मेर गांव के रहने वाले हैं. उनके पिता का नाम हंसराज कासवान है. उन्होंने एक बार ट्वीट कर बताया था कि शादी के वक्त उनकी मां की उम्र सिर्फ 13 साल थी. उनके 16 साल के होने पर परवीन कासवान (IFS Parveen Kaswan) का जन्म हो गया था.
Success Story, IFS Parveen Kaswan: राजस्थान के रहने वाले परवीन कासवान आईएफएस यानी भारतीय वन सेवा में ऑफिसर हैं. यूपीएससी परीक्षा के बारे में सोचते हुए आमतौर पर आईएएस , आईपीएस और आईएफएस आदि का ख्याल आता है. इंडियन फॉरेस्ट सर्विस यानी आईएफएस ऑफिसर का चयन भी यूपीएससी परीक्षा के जरिए किया जाता है. जानिए आईएफएस परवीन कासवान की सक्सेस स्टोरी . Parveen Kaswan IFS Biography: इंडियन फॉरेस्ट सर्विस यानी भारतीय वन सेवा में ऑफिसर परवीन कासवान राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में स्थित मिर्जावाली मेर गांव के रहने वाले हैं. उनके पिता का नाम हंसराज कासवान है. उन्होंने एक बार ट्वीट कर बताया था कि शादी के वक्त उनकी मां की उम्र सिर्फ तेरह साल थी. उनके सोलह साल के होने पर परवीन कासवान का जन्म हो गया था. IFS Parveen Kaswan Education Qualification: IFS परवीन कासवान ने दो हज़ार आठ में एमिटी यूनिवर्सिटी से एयरोस्पेस, एयरोनॉटिकल एंड एयरोनॉटिकल/स्पेस इंजीनियरिंग में बीटेक किया है. एयरोस्पेस इंजीनियर परवीन ने दो हज़ार बारह में गेट परीक्षा में एक सौ इक्यानवेवीं रैंक हासिल की थी, जिसके बाद उन्हें MHRD की तरफ से स्कॉलरशिप दी गई थी. फिर उन्होंने IISc बेंगलुरु से इंजीनियरिंग डिजाइंस में मास्टर्स किया था. साल दो हज़ार सोलह-दो हज़ार अट्ठारह में परवीन ने देहरादून में स्थित फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट से फॉरेस्ट्री में मास्टर्स किया था. Parveen Kaswan UPSC Rank: परवीन कासवान ने साल दो हज़ार पंद्रह में हुई यूपीएससी परीक्षा में इक्यासीवीं रैंक हासिल की थी. परवीन ने कई इंटरव्यू में बताया है कि आईएफएस जॉइन करने के लिए उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ी. दरअसल, आईएफएस का कट ऑफ अन्य प्रशासनिक सेवाओं की तुलना में ज्यादा रहता है. उन्होंने सरकारी नौकरी की अपनी तैयारी NCERT किताबों, अखबारों और मॉक टेस्ट के जरिए की थी. IFS Parveen Kaswan Struggle: आईएफएस परवीन कासवान एक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखते हैं. उनके यहां हिंदी भाषा की प्रमुखता रही है. जब उन्होंने अपनी कॉलेज की पढ़ाई शुरू की थी तो काफी स्ट्रगल फेस करना पड़ा. दरअसल, कॉलेज में हर तरह के बैकग्राउंड के स्टूडेंट्स थे. उनमें से ज्यादातर अंग्रेजी भाषा में न सिर्फ बातें करते थे, बल्कि गाने भी इसी भाषा में सुनते थे. यह देखकर परवीन को शुरुआत में काफी अजीब लगता था. उनके लिए यह माहौल बिलकुल नया था. IFS Parveen Kaswan Instagram: आईएफएस परवीन कासवान सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हैं . उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर चालीस हजार दो सौ और ट्विटर पर चार लाख तेरह हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं. वह दोनों सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जानवरों व जंगल की शानदार तस्वीरें शेयर करते रहते हैं. उनके फॉलोअर्स उनकी फोटोग्राफी के कायल हैं. Parveen Kaswan IFS Biography: इंडियन फॉरेस्ट सर्विस यानी भारतीय वन सेवा में ऑफिसर परवीन कासवान राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में स्थित मिर्जावाली मेर गांव के रहने वाले हैं. उनके पिता का नाम हंसराज कासवान है. उन्होंने एक बार ट्वीट कर बताया था कि शादी के वक्त उनकी मां की उम्र सिर्फ तेरह साल थी. उनके सोलह साल के होने पर परवीन कासवान का जन्म हो गया था.
विज्ञान इतना आगे बढ़ चुका है कि उसके पास हर समस्या का हल है। फिर भी कुछ बीमारियां ऐसी थी जिनका कुछ समय पहले तक कोई इलाज नहीं था। जिनमें से एक है एड्स। लेकिन हाल ही में लंदन के चिकित्स्कों ने दावा किया है कि उन्होंने एचआईवी वायरस से पीड़ित एक मरीज का सफल इलाज किया है। चिकित्स्कों ने दावा किया है कि उन्होंने एचआईवी वायरस से पीड़ित एक मरीज का सफलस्टेम ट्रांसप्लांट (अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण) करके उसे दुनिया का दूसरा एचआईवी मुक्त मरीज बना दिया है। इससे पहले 2007 में ये चमत्कार बर्लिन में हुआ था। एचआईवी से पीड़ित टिमोथी रे बाउन नामक शख्स का इसी थेरेपी के जरिए सफल इलाज किया था। जिसे बाद में 'बर्लिन मरीज' के नाम से भी जाना गया। वैसे तो एचआईवी से पीड़ित लोगों को वायरस का प्रभाव कम करने के लिए रोजाना एंटीबॉयोटिक दवाईयां खाने की आवश्यकता होती है। अगर एचआईवी मरीज ये दवाईयां रोक दे तो वायरस का दो से तीन सप्ताह के अंदर फिर से वापस आने का खतरा रहता है। हाल ही में लंदन में हुए एड्स के मरीज को ट्रांसप्लांटेशन के बाद 18 महीनों तक बिना दवाईयों के निगरानी पर रखा गया था और चिकित्सकों को वायरस का खतरा नहीं दिखा। ऐसे में एक बात तो साफ है कि आने वाले समय में वैज्ञानिक एड्स जैसी लाइलाज बीमारी का हल पूरी तरह खोज निकालेंगे।
विज्ञान इतना आगे बढ़ चुका है कि उसके पास हर समस्या का हल है। फिर भी कुछ बीमारियां ऐसी थी जिनका कुछ समय पहले तक कोई इलाज नहीं था। जिनमें से एक है एड्स। लेकिन हाल ही में लंदन के चिकित्स्कों ने दावा किया है कि उन्होंने एचआईवी वायरस से पीड़ित एक मरीज का सफल इलाज किया है। चिकित्स्कों ने दावा किया है कि उन्होंने एचआईवी वायरस से पीड़ित एक मरीज का सफलस्टेम ट्रांसप्लांट करके उसे दुनिया का दूसरा एचआईवी मुक्त मरीज बना दिया है। इससे पहले दो हज़ार सात में ये चमत्कार बर्लिन में हुआ था। एचआईवी से पीड़ित टिमोथी रे बाउन नामक शख्स का इसी थेरेपी के जरिए सफल इलाज किया था। जिसे बाद में 'बर्लिन मरीज' के नाम से भी जाना गया। वैसे तो एचआईवी से पीड़ित लोगों को वायरस का प्रभाव कम करने के लिए रोजाना एंटीबॉयोटिक दवाईयां खाने की आवश्यकता होती है। अगर एचआईवी मरीज ये दवाईयां रोक दे तो वायरस का दो से तीन सप्ताह के अंदर फिर से वापस आने का खतरा रहता है। हाल ही में लंदन में हुए एड्स के मरीज को ट्रांसप्लांटेशन के बाद अट्ठारह महीनों तक बिना दवाईयों के निगरानी पर रखा गया था और चिकित्सकों को वायरस का खतरा नहीं दिखा। ऐसे में एक बात तो साफ है कि आने वाले समय में वैज्ञानिक एड्स जैसी लाइलाज बीमारी का हल पूरी तरह खोज निकालेंगे।
नई दिल्ली. पीएम नरेंद्र मोदी ने बुधवार को अयोध्या में राम मंदिर का शिलान्यास किया। पीएम नरेंद्र मोदी के इस कार्यक्रम में शिरकत करने को लेकर AIMIM के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने उनपर बड़ा हमला बोला। असदुद्दीन ओवैसी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि भारत एक सेक्युलर मुल्क है, शिलान्यास कार्यक्रम में हिस्सा लेकर पीएम नरेंद्र मोदी ने जो प्रतिज्ञा की थी, उसका उल्लंघन किया है। उन्होंने संविधान के बुनियादी ढांचे 'सेक्युलरिज्म' (धर्मनिरपेक्षता) का उल्लंघन किया है। आज का दिन हिंदुत्व की कामयाबी का दिन है और सेक्युलरिज्म की शिकस्त का। असदुद्दीन ओवैसी ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री ने आज कहा कि वो भावुक थे। मैं कहना चाहता हूं कि मैं भी उतना ही भावुक हूं क्योंकि मैं सह-अस्तित्व और नागरिकता की समानता में विश्वास करता हूं। श्रीमान प्रधानमंत्री, मैं भावुक हूं क्योंकि एक मस्जिद 450 साल से वहां खड़ी थी। आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को 'श्री राम जन्मभूमि मंदिर' का शिलान्यास करने के बाद कहा कि राम मंदिर राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रीय भावना का प्रतीक है तथा इससे समूचे अयोध्या क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में सुधार होगा। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार स्वतंत्रता दिवस लाखों बलिदानों और स्वतंत्रता की भावना का प्रतीक है, उसी तरह राम मंदिर का निर्माण कई पीढ़ियों के अखंड तप, त्याग और संकल्प का प्रतीक है। पीएम मोदी ने कहा कि यह मंदिर राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रीय भावना का प्रतीक बनेगा तथा करोड़ों लोगों की सामूहिक शक्ति का भी प्रतीक बनेगा। यह आने वाली पीढ़ियों को आस्था और संकल्प की प्रेरणा देता रहेगा। इससे समूचे अयोध्या क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में सुधार होगा। 'श्री राम जन्मभूमि मंदिर' का शिलान्यास करने के बाद प्रधानमंत्री ने एक समारोह को संबोधित किया और इसकी शुरुआत "सियावर रामचंद्र की जय" के उद्घोष से की। उन्होंने कहा कि यह उद्घोष सिर्फ राम की नगरी में ही नहीं, बल्कि इसकी गूंज पूरे विश्व में सुनाई दे रही है।
नई दिल्ली. पीएम नरेंद्र मोदी ने बुधवार को अयोध्या में राम मंदिर का शिलान्यास किया। पीएम नरेंद्र मोदी के इस कार्यक्रम में शिरकत करने को लेकर AIMIM के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने उनपर बड़ा हमला बोला। असदुद्दीन ओवैसी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि भारत एक सेक्युलर मुल्क है, शिलान्यास कार्यक्रम में हिस्सा लेकर पीएम नरेंद्र मोदी ने जो प्रतिज्ञा की थी, उसका उल्लंघन किया है। उन्होंने संविधान के बुनियादी ढांचे 'सेक्युलरिज्म' का उल्लंघन किया है। आज का दिन हिंदुत्व की कामयाबी का दिन है और सेक्युलरिज्म की शिकस्त का। असदुद्दीन ओवैसी ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री ने आज कहा कि वो भावुक थे। मैं कहना चाहता हूं कि मैं भी उतना ही भावुक हूं क्योंकि मैं सह-अस्तित्व और नागरिकता की समानता में विश्वास करता हूं। श्रीमान प्रधानमंत्री, मैं भावुक हूं क्योंकि एक मस्जिद चार सौ पचास साल से वहां खड़ी थी। आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को 'श्री राम जन्मभूमि मंदिर' का शिलान्यास करने के बाद कहा कि राम मंदिर राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रीय भावना का प्रतीक है तथा इससे समूचे अयोध्या क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में सुधार होगा। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार स्वतंत्रता दिवस लाखों बलिदानों और स्वतंत्रता की भावना का प्रतीक है, उसी तरह राम मंदिर का निर्माण कई पीढ़ियों के अखंड तप, त्याग और संकल्प का प्रतीक है। पीएम मोदी ने कहा कि यह मंदिर राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रीय भावना का प्रतीक बनेगा तथा करोड़ों लोगों की सामूहिक शक्ति का भी प्रतीक बनेगा। यह आने वाली पीढ़ियों को आस्था और संकल्प की प्रेरणा देता रहेगा। इससे समूचे अयोध्या क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में सुधार होगा। 'श्री राम जन्मभूमि मंदिर' का शिलान्यास करने के बाद प्रधानमंत्री ने एक समारोह को संबोधित किया और इसकी शुरुआत "सियावर रामचंद्र की जय" के उद्घोष से की। उन्होंने कहा कि यह उद्घोष सिर्फ राम की नगरी में ही नहीं, बल्कि इसकी गूंज पूरे विश्व में सुनाई दे रही है।
भागा, लेकिन रास्कोलनिकोव का कही नाम निशान न था । उसे कोमता हुआ वह रेस्तरां मे लौटकर जेमेतोफ के पास गया । रास्कोलनिकोव क - पुल की रेलिंग पर दोनो कुहनिया टिका कर वडा हो गया और दूर क्षितिज की ओर देखने लगा । राजुमिहीन से विंदा लेने के बाद उसके शरीर में कमज़ोरी आ गई थी, और वह बडी मुशकिल से पुल तक पहुँचा था । वह किसी जगह आराम से बैठना या लेटना चाहता था । रेलिग पर भुक कर उसने सूर्यास्त की प्रतिम लालिमा और सध्या के झुपपुटे मे मकानो की कतारो और नहर के पानी की तरफ देखा । अधेरा बढ रहा था। उसका ध्यान बरबस पानी आकर्षित हो रहा था । सहसा उसकी आँखो के मागे लाल चक्र दिखाई देने लगे, और पुल पर आने-जाने वाले लोग, घोडागाडियाँ उसे चकराती हुई नजर आई । वह बेहोश होकर गिरने वाला ही था कि अचानक उसकी नजर एक कुरूप चीज़ पर पड़ी। उसने देखा कि उसके पास एक लम्बी औरत खडी थी - औरत के सर पर रुमाल बँधा था, उसका चेहरा पीला और निस्तेज था - गालो मे धसी हुई थी । वह टकटकी लगा कर रास्कोलनिकोव की ओर देख रही थीअगले ही क्षरण उस औरत ने रेलिग पर चढ़ कर नहर में छलॉग लगा दी । पानी ने उसे निगल लिया, लेकिन थोडी देर बाद वह पानी की सतह पर बहती नज़र आई, उसकी स्कर्ट गुब्बारे की तरह फूल गई थी । "कोई औरत डूब रही है । कोई औरत डूब रही है ।" दर्जनो आई। नहर के किनारों पर दर्शको की भीड लग गई । पुल पर भी बहुत से लोग आ गये । "हे ईश्वर दया करो ! यह तो हमारी एफ्रोसीन्या है ! नेकबख्तो बचाओ ! उसे बाहर निकालो ।" एक बुढिया करुण स्वर मे चीखने लगी । "नाव लाओ, नाव लाओ !" भीड मे से कोई चिल्लाया, लेकिन नाव लाने की कोई जरूरत नही थी । एक पुलिसमैन ने घाट पर आकर अपना कोट और बूट उतार दिये और वह नहर मे कूद पड़ा । एक हाथ से उसने औरत के कपडो को पकड़ा और दूसरे हाथ दूसरे हाथ से एक डडे को जो उसका एक साथी पकडे हुए था । औरत को डूबने से बचा लिया गया । जल्द ही उसे होश आ गई और वह बैठ कर छीकने और खासने लगी। फिर अपनी गीली पोशाक को निचोडने लगी । "यह शराब के नशे मे बावली हो रही है। अभी कुछ दिन पहले इसने अपने गले में फासी लगाने की कोशिश की थी । मैने अपनी छोटी लडकी को इसकी देखभाल के लिये बैठाया था, यह फिर भाग आई । यह मेरी पडौसिन है - सज्जनो वह सामने दूसरा मकान है न । बुढिया ने बताया । भीड तितर-बितर हो गई। पुलिस अभी भी उस औरत को घेरे थी । किसी ने थाने का जिक्र किया। रास्कोलनिकोव उदासीन आँखो से सारा दृश्य देखता रहा । उसे ग्लानि सी हो रही थी । वह अपने से बुडबुडाया, पानी छि छि इन्तज़ार करने से क्या फायदा होगा ? क्यो न पुलिस दफ्तर में जाकर..? ज़ेमेतोफ दफ्तर में क्यो नही होगा ? पुलिस दफ्तर दस बजे तक खुला रहता है." उसने अपने चारो तरफ देखा । "अच्छा यही सही," उसने दृढतापूर्वक कहा और वह पुलिस दफ्तर की ओर चल पडा । उसके हृदय और मस्तिष्क मे शून्य सा भर गया था। उसकी उदासी, और आवेश भी गायब हो चुके थे । इनके बदले में उदासीनता छा गई थी । नहर के किनारे चलते हुए उसने सोचा । "छुटकारे का यह भी एक रास्ता है । मै इस परेशानी को खत्म करना चाहता हूँ लेकिन क्या परेशानी सचमुच खत्म हो जायेगी ? क्या मै सब कुछ बता
भागा, लेकिन रास्कोलनिकोव का कही नाम निशान न था । उसे कोमता हुआ वह रेस्तरां मे लौटकर जेमेतोफ के पास गया । रास्कोलनिकोव क - पुल की रेलिंग पर दोनो कुहनिया टिका कर वडा हो गया और दूर क्षितिज की ओर देखने लगा । राजुमिहीन से विंदा लेने के बाद उसके शरीर में कमज़ोरी आ गई थी, और वह बडी मुशकिल से पुल तक पहुँचा था । वह किसी जगह आराम से बैठना या लेटना चाहता था । रेलिग पर भुक कर उसने सूर्यास्त की प्रतिम लालिमा और सध्या के झुपपुटे मे मकानो की कतारो और नहर के पानी की तरफ देखा । अधेरा बढ रहा था। उसका ध्यान बरबस पानी आकर्षित हो रहा था । सहसा उसकी आँखो के मागे लाल चक्र दिखाई देने लगे, और पुल पर आने-जाने वाले लोग, घोडागाडियाँ उसे चकराती हुई नजर आई । वह बेहोश होकर गिरने वाला ही था कि अचानक उसकी नजर एक कुरूप चीज़ पर पड़ी। उसने देखा कि उसके पास एक लम्बी औरत खडी थी - औरत के सर पर रुमाल बँधा था, उसका चेहरा पीला और निस्तेज था - गालो मे धसी हुई थी । वह टकटकी लगा कर रास्कोलनिकोव की ओर देख रही थीअगले ही क्षरण उस औरत ने रेलिग पर चढ़ कर नहर में छलॉग लगा दी । पानी ने उसे निगल लिया, लेकिन थोडी देर बाद वह पानी की सतह पर बहती नज़र आई, उसकी स्कर्ट गुब्बारे की तरह फूल गई थी । "कोई औरत डूब रही है । कोई औरत डूब रही है ।" दर्जनो आई। नहर के किनारों पर दर्शको की भीड लग गई । पुल पर भी बहुत से लोग आ गये । "हे ईश्वर दया करो ! यह तो हमारी एफ्रोसीन्या है ! नेकबख्तो बचाओ ! उसे बाहर निकालो ।" एक बुढिया करुण स्वर मे चीखने लगी । "नाव लाओ, नाव लाओ !" भीड मे से कोई चिल्लाया, लेकिन नाव लाने की कोई जरूरत नही थी । एक पुलिसमैन ने घाट पर आकर अपना कोट और बूट उतार दिये और वह नहर मे कूद पड़ा । एक हाथ से उसने औरत के कपडो को पकड़ा और दूसरे हाथ दूसरे हाथ से एक डडे को जो उसका एक साथी पकडे हुए था । औरत को डूबने से बचा लिया गया । जल्द ही उसे होश आ गई और वह बैठ कर छीकने और खासने लगी। फिर अपनी गीली पोशाक को निचोडने लगी । "यह शराब के नशे मे बावली हो रही है। अभी कुछ दिन पहले इसने अपने गले में फासी लगाने की कोशिश की थी । मैने अपनी छोटी लडकी को इसकी देखभाल के लिये बैठाया था, यह फिर भाग आई । यह मेरी पडौसिन है - सज्जनो वह सामने दूसरा मकान है न । बुढिया ने बताया । भीड तितर-बितर हो गई। पुलिस अभी भी उस औरत को घेरे थी । किसी ने थाने का जिक्र किया। रास्कोलनिकोव उदासीन आँखो से सारा दृश्य देखता रहा । उसे ग्लानि सी हो रही थी । वह अपने से बुडबुडाया, पानी छि छि इन्तज़ार करने से क्या फायदा होगा ? क्यो न पुलिस दफ्तर में जाकर..? ज़ेमेतोफ दफ्तर में क्यो नही होगा ? पुलिस दफ्तर दस बजे तक खुला रहता है." उसने अपने चारो तरफ देखा । "अच्छा यही सही," उसने दृढतापूर्वक कहा और वह पुलिस दफ्तर की ओर चल पडा । उसके हृदय और मस्तिष्क मे शून्य सा भर गया था। उसकी उदासी, और आवेश भी गायब हो चुके थे । इनके बदले में उदासीनता छा गई थी । नहर के किनारे चलते हुए उसने सोचा । "छुटकारे का यह भी एक रास्ता है । मै इस परेशानी को खत्म करना चाहता हूँ लेकिन क्या परेशानी सचमुच खत्म हो जायेगी ? क्या मै सब कुछ बता