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अधीर रंजन चौधरी ने कहा- सेना खरीद की कॉन्ट्रैक्ट प्रक्रिया को चुस्त-दुरुस्त करने की जरूरत. (ANI)
नई दिल्ली. कांग्रेस के लोकसभा सांसद और संसद की लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee-PAC) के चेयरमैन अधीर रंजन चौधरी ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि PAC ने लोकसभा में अपनी 55वीं रिपोर्ट पेश की है. चौधरी ने कहा कि फौज हमारा नाज है, हमारा गर्व है. PAC कमेटी ने सेना के कुछ मुद्दों को चुना था. इसमें सेना के लिए खरीद, सेना की ड्रेस और राशन जैसे मुद्दे शामिल हैं. अधीर रंजन ने कहा कि देश के पहले CDS जनरल बिपिन रावत भी इस चर्चा में शामिल हुए थे. चौधरी ने कहा कि हम फौज या सरकार की कोई आलोचना नहीं कर रहे हैं, फिर भी कुछ कमियां पाई गई थीं. कमेटी ने देखा की जरूरी सामानों, जैसे-माउंटेन पर जरूरी स्पेशल क्लोथिंग और बर्फ पर चलने के लिए जरूरी गाड़ियों को लेकर समस्याएं थी.
अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि हमने देखा कि समान तो खरीद लिए जाते हैं लेकिन सही समय पर वहां पहुंचते नहीं हैं. चौधरी ने कहा कि हमारी मांग है कि स्टॉक को बराबर रखना चाहिए. इसके साथ ही कॉन्ट्रैक्ट की प्रक्रिया को चुस्त-दुरुस्त करने की जरूरत है. सही सामान खरीदा जाए, उसकी गुणवत्ता बरकरार रहे, ये हमारा लक्ष्य है. ऑर्डिनेंस फैक्ट्री को कॉर्पोरेशन में तब्दील किया है. इसमें शिकायत थी कि ये सही समय पर उत्पाद नहीं दे पाते हैं. इनको निर्णय लेने की आजादी मिले, ये कमेटी की मांग है. चौधरी ने कहा कि फौज की मांग के मुताबिक उनको सामान भेजे जाने में समय ज्यादा लगता है. ट्रायल में ही बहुत समय लगता है. इसलिए सिस्टम को दुरुस्त करना चाहिए. चौधरी ने कहा कि फौज को जो राशन या खाना जाता है, उसका टेस्ट और गुणवत्ता ये सब समय समय पर चेक किया जाना चाहिए. माइनस टेंपरेचर में रहने वाले सैनिकों के लिए स्पेशल खाने का इंतजाम होना चाहिए.
चौधरी ने कहा कि फॉरवर्ड लोकेशन पर मेडिकल फैसिलिटी बढ़ाने की जरूरत है. फॉरवर्ड लोकेशन पर केरोसिन टैंक और ज्यादा बनाए जाने चाहिए. जिससे सैनिकों को गर्मी और ईंधन के लिए कोई कमी न हो. केरोसिन के अलावा वहां ऊर्जा और गर्मी के लिए अन्य विकल्प भी देना चाहिए. आज के समय में भी केरोसिन का इस्तेमाल सही नहीं लगता. सोलर या अन्य चीज ट्राई करनी चाहिए. चौधरी ने कहा कि हम ये भी चाहते हैं कि फौज के लिए भी CSR दिया जाए. उन्होंने कहा कि ऊंचाई वाली जगहों पर फौज को और ज्यादा तैयार रहने के लिए जो साजो- सामान जरूरी है, ऐसी किसी भी चीज की खरीद में देरी नहीं होनी चहिए. चौधरी ने कहा कि FSSAI नामक संस्था खाने की क्वालिटी चेक करती है. उसमें कुछ खामी मिली है. ये कहीं कहीं मनमानी करते हैं और NOC दे देते हैं.
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'हमारे पास तेज गेंदबाजों की लाइन नहीं लगी हुई है. . . ' प्रेस कॉन्फ्रेंस में नाराज दिखे रोहित, क्यों कहा ऐसा?
| अधीर रंजन चौधरी ने कहा- सेना खरीद की कॉन्ट्रैक्ट प्रक्रिया को चुस्त-दुरुस्त करने की जरूरत. नई दिल्ली. कांग्रेस के लोकसभा सांसद और संसद की लोक लेखा समिति के चेयरमैन अधीर रंजन चौधरी ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि PAC ने लोकसभा में अपनी पचपनवीं रिपोर्ट पेश की है. चौधरी ने कहा कि फौज हमारा नाज है, हमारा गर्व है. PAC कमेटी ने सेना के कुछ मुद्दों को चुना था. इसमें सेना के लिए खरीद, सेना की ड्रेस और राशन जैसे मुद्दे शामिल हैं. अधीर रंजन ने कहा कि देश के पहले CDS जनरल बिपिन रावत भी इस चर्चा में शामिल हुए थे. चौधरी ने कहा कि हम फौज या सरकार की कोई आलोचना नहीं कर रहे हैं, फिर भी कुछ कमियां पाई गई थीं. कमेटी ने देखा की जरूरी सामानों, जैसे-माउंटेन पर जरूरी स्पेशल क्लोथिंग और बर्फ पर चलने के लिए जरूरी गाड़ियों को लेकर समस्याएं थी. अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि हमने देखा कि समान तो खरीद लिए जाते हैं लेकिन सही समय पर वहां पहुंचते नहीं हैं. चौधरी ने कहा कि हमारी मांग है कि स्टॉक को बराबर रखना चाहिए. इसके साथ ही कॉन्ट्रैक्ट की प्रक्रिया को चुस्त-दुरुस्त करने की जरूरत है. सही सामान खरीदा जाए, उसकी गुणवत्ता बरकरार रहे, ये हमारा लक्ष्य है. ऑर्डिनेंस फैक्ट्री को कॉर्पोरेशन में तब्दील किया है. इसमें शिकायत थी कि ये सही समय पर उत्पाद नहीं दे पाते हैं. इनको निर्णय लेने की आजादी मिले, ये कमेटी की मांग है. चौधरी ने कहा कि फौज की मांग के मुताबिक उनको सामान भेजे जाने में समय ज्यादा लगता है. ट्रायल में ही बहुत समय लगता है. इसलिए सिस्टम को दुरुस्त करना चाहिए. चौधरी ने कहा कि फौज को जो राशन या खाना जाता है, उसका टेस्ट और गुणवत्ता ये सब समय समय पर चेक किया जाना चाहिए. माइनस टेंपरेचर में रहने वाले सैनिकों के लिए स्पेशल खाने का इंतजाम होना चाहिए. चौधरी ने कहा कि फॉरवर्ड लोकेशन पर मेडिकल फैसिलिटी बढ़ाने की जरूरत है. फॉरवर्ड लोकेशन पर केरोसिन टैंक और ज्यादा बनाए जाने चाहिए. जिससे सैनिकों को गर्मी और ईंधन के लिए कोई कमी न हो. केरोसिन के अलावा वहां ऊर्जा और गर्मी के लिए अन्य विकल्प भी देना चाहिए. आज के समय में भी केरोसिन का इस्तेमाल सही नहीं लगता. सोलर या अन्य चीज ट्राई करनी चाहिए. चौधरी ने कहा कि हम ये भी चाहते हैं कि फौज के लिए भी CSR दिया जाए. उन्होंने कहा कि ऊंचाई वाली जगहों पर फौज को और ज्यादा तैयार रहने के लिए जो साजो- सामान जरूरी है, ऐसी किसी भी चीज की खरीद में देरी नहीं होनी चहिए. चौधरी ने कहा कि FSSAI नामक संस्था खाने की क्वालिटी चेक करती है. उसमें कुछ खामी मिली है. ये कहीं कहीं मनमानी करते हैं और NOC दे देते हैं. . 'हमारे पास तेज गेंदबाजों की लाइन नहीं लगी हुई है. . . ' प्रेस कॉन्फ्रेंस में नाराज दिखे रोहित, क्यों कहा ऐसा? |
लॉगिन से आप मातृभारती के "उपयोग के नियम" और "गोपनीयता नीति" से अपनी सहमती प्रकट करते हैं.
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| लॉगिन से आप मातृभारती के "उपयोग के नियम" और "गोपनीयता नीति" से अपनी सहमती प्रकट करते हैं. Copyright © दो हज़ार तेईस, Matrubharti Technologies Pvt. Ltd. All Rights Reserved. |
सुनो थी, वे भी जव डोरियन को देखते थे तब उन सब कहानियों पर विश्वास नहीं कर सकते थे। उसकी दृष्टि में कुछ ऐसी चमक थी जिसे देखकर किसी को भी उस पर कलंक लगाने का साहस नहीं पड़ता था । वे श्रावमो जो डोरियन के विषय में निरन्तर उसके चरित्र की चर्चा + किया करते थे, डोरियन को उस स्थान पर प्राते देखकर चुप हो जाते थे। उसके चेहरे पर पवित्रता की कुछ ऐसी झलक थी जिसे देख कर लोग अफवाहों को झूठा समझने लगते थे । उसको उपस्थिति से हो लोगों को मन हो मन इसप्रकार को ग्लानि होने लगती यो मानो वे पवित्रता पर व्यर्थ का कलंक लगा रहे थे । वे श्राश्चर्य किया करते थे कि डोरियन जैसा सुन्दर और आकर्षक युवक भला युग के वर्तमान दोषों से किसप्रकार अपने को बचा सका है।
रहस्यमयी और बहुत देर की लंबी अवधि तक लन्दन से अनुपस्थित रहकर जब वह वापिस लौटता तब वे लोग जो अपने को डोरियन का मित्र कहते थे, उनके मन में भी भांति-भांति को शंकायें उठने लगती थों और स्वयं डोरियन भी ऊपर के बन्द कमरे को खोलकर उसमें घुस जाता और वासिल हालवर्ड के बनाये हुए चित्र को शोशे में देखकर कंन्वस की शक्ल पर समय और पाप की रेखाओ को देखता धोर फिर अपने ताजे और जवान चेहरे को देखता। दोनों में श्राकाश-पाताल का घन्तर देखकर उसफा मन प्रसन्नता से फूला नहीं समाता । यह् और भी अपने सौन्वर्य के वशीभूत हो जाता और अपनी पार्यो में अधिक उत्सुकता दिखलाता। वह बड़ी सावधानी से, और कभी-कभी भयानक प्रसन्नता से झुरियों से भरे माये को विकृत रेखाओं पर वासना से पूर्व मुख का निरीक्षण करता और थाइचयं से सोचने लगता कि पाप के चिह्न धौर अवस्था को रेखाएं इन दोनों में से अधिक कौन भयानक और विकृत है । वह अपने श्वेत हाथ चित्र के रक्त में सने हाथों के सम्मुख रख देता औौर मुस्कराता । वह भद्दी शक्त और निर्बल हड्डियो का उपहास करता। कभी-कभी किसी रात को ऐसे | सुनो थी, वे भी जव डोरियन को देखते थे तब उन सब कहानियों पर विश्वास नहीं कर सकते थे। उसकी दृष्टि में कुछ ऐसी चमक थी जिसे देखकर किसी को भी उस पर कलंक लगाने का साहस नहीं पड़ता था । वे श्रावमो जो डोरियन के विषय में निरन्तर उसके चरित्र की चर्चा + किया करते थे, डोरियन को उस स्थान पर प्राते देखकर चुप हो जाते थे। उसके चेहरे पर पवित्रता की कुछ ऐसी झलक थी जिसे देख कर लोग अफवाहों को झूठा समझने लगते थे । उसको उपस्थिति से हो लोगों को मन हो मन इसप्रकार को ग्लानि होने लगती यो मानो वे पवित्रता पर व्यर्थ का कलंक लगा रहे थे । वे श्राश्चर्य किया करते थे कि डोरियन जैसा सुन्दर और आकर्षक युवक भला युग के वर्तमान दोषों से किसप्रकार अपने को बचा सका है। रहस्यमयी और बहुत देर की लंबी अवधि तक लन्दन से अनुपस्थित रहकर जब वह वापिस लौटता तब वे लोग जो अपने को डोरियन का मित्र कहते थे, उनके मन में भी भांति-भांति को शंकायें उठने लगती थों और स्वयं डोरियन भी ऊपर के बन्द कमरे को खोलकर उसमें घुस जाता और वासिल हालवर्ड के बनाये हुए चित्र को शोशे में देखकर कंन्वस की शक्ल पर समय और पाप की रेखाओ को देखता धोर फिर अपने ताजे और जवान चेहरे को देखता। दोनों में श्राकाश-पाताल का घन्तर देखकर उसफा मन प्रसन्नता से फूला नहीं समाता । यह् और भी अपने सौन्वर्य के वशीभूत हो जाता और अपनी पार्यो में अधिक उत्सुकता दिखलाता। वह बड़ी सावधानी से, और कभी-कभी भयानक प्रसन्नता से झुरियों से भरे माये को विकृत रेखाओं पर वासना से पूर्व मुख का निरीक्षण करता और थाइचयं से सोचने लगता कि पाप के चिह्न धौर अवस्था को रेखाएं इन दोनों में से अधिक कौन भयानक और विकृत है । वह अपने श्वेत हाथ चित्र के रक्त में सने हाथों के सम्मुख रख देता औौर मुस्कराता । वह भद्दी शक्त और निर्बल हड्डियो का उपहास करता। कभी-कभी किसी रात को ऐसे |
हरियाला सावन ले आया, नेह भरा उपहार।
आया राखी का त्यौहार!
आया राखी का त्यौहार!!
यही कामना करती मन में, गूँजे घर में शहनाई,
खुद चलकर बहना के द्वारे, आये उसका भाई,
कच्चे धागों में उमड़ा है भाई-बहन का प्यार।
आया राखी का त्यौहार!
आया राखी का त्यौहार!!
तिलक लगाती और खिलाती, उसको स्वयं मिठाई,
आज किसी के भइया की, ना सूनी रहे कलाई,
भाई के ही कन्धों पर, होता रक्षा का भार।
आया राखी का त्यौहार!
आया राखी का त्यौहार!!
पौध धान के जैसी बिटिया, बढ़ी कहीं पर-कहीं पली,
बाबुल के अँगने को तजकर, अन्जाने के संग चली,
रस्म-रिवाज़ों ने खोला है, नूतन घर का द्वार।
आया राखी का त्यौहार!
आया राखी का त्यौहार!!
रखती दोनों घर की लज्जा, सदा निभाती नाता,
राखी-भइयादूज, बहन-बेटी की याद दिलाता,
भइया मुझको भूल न जाना, विनती बारम्बार।
आया राखी का त्यौहार!
आया राखी का त्यौहार!!
"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।
आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।
कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!
और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए "आपका ब्लॉग" तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।
बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको "आपका ब्लॉग" पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।
गीत "भाई-बहन का प्यार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
दोहे "रंग-बिरंगे तार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
कितना अद्भुत है यहाँ, रिश्तों का संसार।
जीवन जीने के लिए, रिश्ते हैं आधार।१।
केवल भारत देश में, रिश्तों का सम्मान।
रक्षाबन्धन पर्व की, अलग अनोखी शान।२।
कच्चे धागों से बँधी, रक्षा की पतवार।
रोली-अक्षत-तिलक में, छिपा हुआ है प्यार।३।
भाई की लम्बी उमर, ईश्वर करो प्रदान।
बहनें भाई के लिए, माँग रहीं वरदान।४।
सदा बहन की मदद को, भइया हों तैयार।
रक्षा का यह सूत्र है, राखी का उपहार।५।
चाहे युग बदलें भले, बदल जाय संसार।
अमर रहेगा हमेशा, यह पावन त्यौहार।६।
राखी के ही तार में, छिपी हुई है प्रीत।
जब तक चन्दा-सूर हैं, अमर रहेगी रीत।७।
राखी के दिन किसी का, सूना रहे न हाथ।
प्रेम-प्रीत की रीत का, छूटे कभी न साथ।८।
रेशम-जरी-कपास के, रंग-बिरंगे तार।
ले करके बहना चली, अब बाबुल के द्वार।९।
गीत "राखी का त्यौहार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
आया राखी का त्यौहार!!
हरियाला सावन ले आया, ये पावन उपहार।
अमर रहा है, अमर रहेगा, राखी का त्यौहार।।
आया राखी का त्यौहार!!
जितनी ममता होती है, माता की मृदु लोरी में,
उससे भी ज्यादा ममता है, राखी की डोरी में,
भरा हुआ कच्चे धागों में, भाई-बहन का प्यार।
अमर रहा है, अमर रहेगा, राखी का त्यौहार।।
आया राखी का त्यौहार!!
भाई को जा करके बाँधें, प्यारी-प्यारी राखी,
हर बहना की यह ही इच्छा राखी के दिन जागी,
उमड़ा है भगिनी के मन में श्रद्धा-प्रेम अपार!
अमर रहा है, अमर रहेगा, राखी का त्यौहार।।
आया राखी का त्यौहार!!
खेल-कूदकर जिस अँगने में, बीता प्यारा बचपन,
कैसे याद भुलाएँ उसकी, जो मोहक था जीवन,
कभी रूठते और कभी करते थे, आपस में मनुहार।
अमर रहा है, अमर रहेगा, राखी का त्यौहार।।
आया राखी का त्यौहार!!
गुज़रे पल की याद दिलाने, आई बहना तेरी,
रक्षा करना मेरे भइया, विपदाओं में मेरी,
दीर्घ आयु हो हर भाई की, ऐसा वर दे दो दातार।
अमर रहा है, अमर रहेगा, राखी का त्यौहार।।आया राखी का त्यौहार!!
रक्षाबन्धन पर भाई की, सूनी न हो कलाई,
पहुँचा देना मेरी राखी, अरे डाकिए भाई,
बहुत दुआएँ दूँगी तुझको, तेरा मानूँगी उपकार!
अमर रहा है अमर रहेगा, राखी का त्यौहार!!
आया राखी का त्यौहार!!
देश भक्ति गीत "प्राणों से प्यारा है अपना वतन" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
जिसकी माटी में चहका हुआ है सुमन,
मुझको प्राणों से प्यारा वो अपना वतन।
जिसकी घाटी में महका हुआ है पवन,
मुझको प्राणों से प्यारा वो अपना वतन।
जिसके उत्तर में अविचल हिमालय खड़ा,
और दक्षिण में फैला है सागर बड़ा.
नीर से सींचती गंगा-यमुना चमन।
मुझको प्राणों से प्यारा वो अपना वतन।।
वेद, कुरआन-बाइबिल का पैगाम है,
ज़िन्दगी प्यार का दूसरा नाम है,
कामना है यही हो जगत में अमन।
मुझको प्राणों से प्यारा वो अपना वतन।।
सिंह के दाँत गिनता, जहाँ पर भरत,
धन्य आजाद हैं और विस्मिल-भगत,
प्राण आहूत करके किया था हवन।
मुझको प्राणों से प्यारा है अपना वतन।।
यह धरा देवताओं की जननी रही,
धर्मनिरपेक्ष दुनिया में है ये मही,
अपने भारत को करता हूँ शत्-शत् नमन।
मुझको प्राणों से प्यारा वो अपना वतन।।
गीत "स्वतन्त्रता का नारा है बेकार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
जिस उपवन में पढ़े-लिखे हों रोजी को लाचार।
उस कानन में स्वतन्त्रता का नारा है बेकार।।
जिनके बंगलों के ऊपर,
निर्लज्ज ध्वजा लहराती,
रैन-दिवस चरणों को जिनके,
निर्धन सुता दबाती,
जिस आँगन में खुलकर होता सत्ता का व्यापार।
उस कानन में स्वतन्त्रता का नारा है बेकार।।
मुस्टण्डों को दूध-मखाने,
बालक भूखों मरते,
जोशी, मुल्ला, पीर, नजूमी,
दौलत से घर भरते,
भोग रहे सुख आजादी का, बेईमान मक्कार।
उस कानन में स्वतन्त्रता का नारा है बेकार।।
वयोवृद्ध सीधा-सच्चा,
हो जहाँ भूख से मरता,
सत्तामद में चूर वहाँ हो,
शासक काजू चरता,
ऐसे निठुर वजीरों को, क्यों झेल रही सरकार।
उस कानन में स्वतन्त्रता का नारा है बेकार।।
"मैना चीख रही उपवन में" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
सज्जनता बेहोश हो गई,
दुर्जनता पसरी आँगन में।
कोयलिया खामोश हो गई,
मैना चीख रही उपवन में।।
गहने तारे, कपड़े फाड़े,
लाज घूमती बदन उघाड़े,
यौवन के बाजार लगे हैं,
नग्न-नग्न शृंगार सजे हैं,
काँटें बिखरे हैं कानन में।
मैना चीख रही उपवन में।।
मानवता की झोली खाली,
दानवता की है दीवाली,
चमन हुआ बेशर्म-मवाली,
मदिरा में डूबा है माली,
दम घुटता है आज वतन में।
मैना चीख रही उपवन में।।
शीतलता रवि ने फैलाई,
पूनम ताप बढ़ाने आई,
बेमौसम में बदली छाई,
धरती पर फैली है काई,
दशा देख दुख होता मन में।
मैना चीख रही उपवन में।।
सुख की खातिर पश्चिमवाले,
आते थे होकर मतवाले,
आज रीत ने पलटा खाया,
हमने उल्टा पथ अपनाया,
खोज रहे हम सुख को धन में।
मैना चीख रही उपवन में।।
शावक सिंह खिलाने वाले,
श्वान पालते बालों वाले,
बौने बने बड़े मनवाले,
जो थे राह दिखाने वाले,
भटक गये हैं बीहड-वन में।
मैना चीख रही उपवन में।।
दोहे "लोकतन्त्र की बात" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
बेटा उप-अध्यक्ष है, माता है अध्यक्ष।
दोनों मिलकर धो रहे, प्रजातन्त्र के पक्ष।।
आजीवन अध्यक्ष हों, जिस कुनबे के तात।
उस दल में बेकार है, लोकतन्त्र की बात।।
कुटुम-कबीले की चले, मनमानी के साथ।
चार-पाँच ही नाथ हैं, बाकी सभी अनाथ।।
कुर्सी पर बैठी बहन, सब पर हुक्म चलाय।
ठेकेदारी का चलन, मूरख रहा बनाय।।
चाय बनाता था कभी, वो है अब सरदार।
भारत माँ का पूत अब, चला रहा सरकार।।
वसुन्धरा का देश की, जो करता गुणगान।
बन जाता वो एक दिन, जन-गण का भगवान।।
खिसियानी सब बिल्लियाँ, खम्बा नोचें आज।
समझ गया है कुटिलता, इनकी देश-समाज।।
| हरियाला सावन ले आया, नेह भरा उपहार। आया राखी का त्यौहार! आया राखी का त्यौहार!! यही कामना करती मन में, गूँजे घर में शहनाई, खुद चलकर बहना के द्वारे, आये उसका भाई, कच्चे धागों में उमड़ा है भाई-बहन का प्यार। आया राखी का त्यौहार! आया राखी का त्यौहार!! तिलक लगाती और खिलाती, उसको स्वयं मिठाई, आज किसी के भइया की, ना सूनी रहे कलाई, भाई के ही कन्धों पर, होता रक्षा का भार। आया राखी का त्यौहार! आया राखी का त्यौहार!! पौध धान के जैसी बिटिया, बढ़ी कहीं पर-कहीं पली, बाबुल के अँगने को तजकर, अन्जाने के संग चली, रस्म-रिवाज़ों ने खोला है, नूतन घर का द्वार। आया राखी का त्यौहार! आया राखी का त्यौहार!! रखती दोनों घर की लज्जा, सदा निभाती नाता, राखी-भइयादूज, बहन-बेटी की याद दिलाता, भइया मुझको भूल न जाना, विनती बारम्बार। आया राखी का त्यौहार! आया राखी का त्यौहार!! "उच्चारण" एक हज़ार नौ सौ छियानवे से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा। आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है। कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...! और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए "आपका ब्लॉग" तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति दोहे "रंग-बिरंगे तार" कितना अद्भुत है यहाँ, रिश्तों का संसार। जीवन जीने के लिए, रिश्ते हैं आधार।एक। केवल भारत देश में, रिश्तों का सम्मान। रक्षाबन्धन पर्व की, अलग अनोखी शान।दो। कच्चे धागों से बँधी, रक्षा की पतवार। रोली-अक्षत-तिलक में, छिपा हुआ है प्यार।तीन। भाई की लम्बी उमर, ईश्वर करो प्रदान। बहनें भाई के लिए, माँग रहीं वरदान।चार। सदा बहन की मदद को, भइया हों तैयार। रक्षा का यह सूत्र है, राखी का उपहार।पाँच। चाहे युग बदलें भले, बदल जाय संसार। अमर रहेगा हमेशा, यह पावन त्यौहार।छः। राखी के ही तार में, छिपी हुई है प्रीत। जब तक चन्दा-सूर हैं, अमर रहेगी रीत।सात। राखी के दिन किसी का, सूना रहे न हाथ। प्रेम-प्रीत की रीत का, छूटे कभी न साथ।आठ। रेशम-जरी-कपास के, रंग-बिरंगे तार। ले करके बहना चली, अब बाबुल के द्वार।नौ। गीत "राखी का त्यौहार" आया राखी का त्यौहार!! हरियाला सावन ले आया, ये पावन उपहार। अमर रहा है, अमर रहेगा, राखी का त्यौहार।। आया राखी का त्यौहार!! जितनी ममता होती है, माता की मृदु लोरी में, उससे भी ज्यादा ममता है, राखी की डोरी में, भरा हुआ कच्चे धागों में, भाई-बहन का प्यार। अमर रहा है, अमर रहेगा, राखी का त्यौहार।। आया राखी का त्यौहार!! भाई को जा करके बाँधें, प्यारी-प्यारी राखी, हर बहना की यह ही इच्छा राखी के दिन जागी, उमड़ा है भगिनी के मन में श्रद्धा-प्रेम अपार! अमर रहा है, अमर रहेगा, राखी का त्यौहार।। आया राखी का त्यौहार!! खेल-कूदकर जिस अँगने में, बीता प्यारा बचपन, कैसे याद भुलाएँ उसकी, जो मोहक था जीवन, कभी रूठते और कभी करते थे, आपस में मनुहार। अमर रहा है, अमर रहेगा, राखी का त्यौहार।। आया राखी का त्यौहार!! गुज़रे पल की याद दिलाने, आई बहना तेरी, रक्षा करना मेरे भइया, विपदाओं में मेरी, दीर्घ आयु हो हर भाई की, ऐसा वर दे दो दातार। अमर रहा है, अमर रहेगा, राखी का त्यौहार।।आया राखी का त्यौहार!! रक्षाबन्धन पर भाई की, सूनी न हो कलाई, पहुँचा देना मेरी राखी, अरे डाकिए भाई, बहुत दुआएँ दूँगी तुझको, तेरा मानूँगी उपकार! अमर रहा है अमर रहेगा, राखी का त्यौहार!! आया राखी का त्यौहार!! देश भक्ति गीत "प्राणों से प्यारा है अपना वतन" जिसकी माटी में चहका हुआ है सुमन, मुझको प्राणों से प्यारा वो अपना वतन। जिसकी घाटी में महका हुआ है पवन, मुझको प्राणों से प्यारा वो अपना वतन। जिसके उत्तर में अविचल हिमालय खड़ा, और दक्षिण में फैला है सागर बड़ा. नीर से सींचती गंगा-यमुना चमन। मुझको प्राणों से प्यारा वो अपना वतन।। वेद, कुरआन-बाइबिल का पैगाम है, ज़िन्दगी प्यार का दूसरा नाम है, कामना है यही हो जगत में अमन। मुझको प्राणों से प्यारा वो अपना वतन।। सिंह के दाँत गिनता, जहाँ पर भरत, धन्य आजाद हैं और विस्मिल-भगत, प्राण आहूत करके किया था हवन। मुझको प्राणों से प्यारा है अपना वतन।। यह धरा देवताओं की जननी रही, धर्मनिरपेक्ष दुनिया में है ये मही, अपने भारत को करता हूँ शत्-शत् नमन। मुझको प्राणों से प्यारा वो अपना वतन।। गीत "स्वतन्त्रता का नारा है बेकार" जिस उपवन में पढ़े-लिखे हों रोजी को लाचार। उस कानन में स्वतन्त्रता का नारा है बेकार।। जिनके बंगलों के ऊपर, निर्लज्ज ध्वजा लहराती, रैन-दिवस चरणों को जिनके, निर्धन सुता दबाती, जिस आँगन में खुलकर होता सत्ता का व्यापार। उस कानन में स्वतन्त्रता का नारा है बेकार।। मुस्टण्डों को दूध-मखाने, बालक भूखों मरते, जोशी, मुल्ला, पीर, नजूमी, दौलत से घर भरते, भोग रहे सुख आजादी का, बेईमान मक्कार। उस कानन में स्वतन्त्रता का नारा है बेकार।। वयोवृद्ध सीधा-सच्चा, हो जहाँ भूख से मरता, सत्तामद में चूर वहाँ हो, शासक काजू चरता, ऐसे निठुर वजीरों को, क्यों झेल रही सरकार। उस कानन में स्वतन्त्रता का नारा है बेकार।। "मैना चीख रही उपवन में" सज्जनता बेहोश हो गई, दुर्जनता पसरी आँगन में। कोयलिया खामोश हो गई, मैना चीख रही उपवन में।। गहने तारे, कपड़े फाड़े, लाज घूमती बदन उघाड़े, यौवन के बाजार लगे हैं, नग्न-नग्न शृंगार सजे हैं, काँटें बिखरे हैं कानन में। मैना चीख रही उपवन में।। मानवता की झोली खाली, दानवता की है दीवाली, चमन हुआ बेशर्म-मवाली, मदिरा में डूबा है माली, दम घुटता है आज वतन में। मैना चीख रही उपवन में।। शीतलता रवि ने फैलाई, पूनम ताप बढ़ाने आई, बेमौसम में बदली छाई, धरती पर फैली है काई, दशा देख दुख होता मन में। मैना चीख रही उपवन में।। सुख की खातिर पश्चिमवाले, आते थे होकर मतवाले, आज रीत ने पलटा खाया, हमने उल्टा पथ अपनाया, खोज रहे हम सुख को धन में। मैना चीख रही उपवन में।। शावक सिंह खिलाने वाले, श्वान पालते बालों वाले, बौने बने बड़े मनवाले, जो थे राह दिखाने वाले, भटक गये हैं बीहड-वन में। मैना चीख रही उपवन में।। दोहे "लोकतन्त्र की बात" बेटा उप-अध्यक्ष है, माता है अध्यक्ष। दोनों मिलकर धो रहे, प्रजातन्त्र के पक्ष।। आजीवन अध्यक्ष हों, जिस कुनबे के तात। उस दल में बेकार है, लोकतन्त्र की बात।। कुटुम-कबीले की चले, मनमानी के साथ। चार-पाँच ही नाथ हैं, बाकी सभी अनाथ।। कुर्सी पर बैठी बहन, सब पर हुक्म चलाय। ठेकेदारी का चलन, मूरख रहा बनाय।। चाय बनाता था कभी, वो है अब सरदार। भारत माँ का पूत अब, चला रहा सरकार।। वसुन्धरा का देश की, जो करता गुणगान। बन जाता वो एक दिन, जन-गण का भगवान।। खिसियानी सब बिल्लियाँ, खम्बा नोचें आज। समझ गया है कुटिलता, इनकी देश-समाज।। |
मोदी सरकार एक ऐसा राज्य स्थापित करने की कोशिश में है जहां जनता सरकार से जवाबदेही न मांगे. नागरिकों के कर्तव्य की सोच को इंदिरा गांधी सरकार ने आपातकाल के दौरान संविधान में जोड़ा था. मोदी सरकार बिना आपातकाल की औपचारिक घोषणा के ही अधिकारहीन कर्तव्यपालक जनता गढ़ रही है.
पिछले कुछ महीने से झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में चल रहे सरकार को लगातार भाजपा व केंद्र द्वारा गिराने की कोशिशें हो रही हैं. एक तरफ राज्यपाल माइनिंग लीज मामले में हेमंत सोरेन की विधायकी रद्द करने के चुनाव आयोग के कथित अनुशंसा पर चुप्पी साध अस्थिरता का माहौल बनाए हुए हैं. दूसरी ओर, भाजपा द्वारा सरकार भंग करने की मांग तेज़ हो गई और साथ-ही-साथ सत्ता पक्ष के विधायकों की खरीद-बिक्री की हवा भी तेज़ हो गई.
हालांकि, हेमंत सोरेन विशेष विधान सभा सत्र में विश्वासमत हासिल कर भाजपा को उनके ही खेल में मात देने में सफल रहे, लेकिन खरीद-बिक्री के इस खेल में वोटर तो महज़ मूकदर्शक बनते जा रहे हैं.
भाजपा और केंद्र सरकार के इस 'ऑपरेशन कमल' का अन्य कई राज्य जैसे महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, गोवा व कई पूर्वोत्तर राज्य भी गवाह बन चुके हैं. खरीद-बिक्री व राज्यपाल के पद के दुरुपयोग के अलावा केंद्र सरकार द्वारा विपक्षी नेताओं और दलों को भ्रष्टाचार के नाम पर ईडी और सीबीआई जैसी सरकारी संस्थाओं के माध्यम से घेरा जा रहा है.
अगर मामला केवल भ्रष्टाचार पकड़ने का होता, तो भाजपा के अनेक नेताओं पर भी कार्रवाई होती. यह भी मज़ेदार बात है कि जैसे ही आरोपी विपक्षी नेता भाजपा से जुड़ जाते हैं या सरकार गिराने में सहयोग करते हैं, वैसे ही उनपर ईडी और सीबीआई का साया ख़त्म हो जाता है. अब भाजपा तो 'कांग्रेस-मुक्त भारत' के नारे के साथ-साथ क्षेत्रीय दलों के ख़ात्मे की भी बात कर रही है.
केंद्र द्वारा विपक्षी दलों की राज्य सरकारों को गिराने का इतिहास तो लंबा है, लेकिन 2014 में भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार बनने के बाद से देश के बहु-दलीय संसदीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक-पार्टी राज स्थापित करने की प्रक्रिया झलकती है. भारतीय लोकतंत्र की मूल अवधारणा ही बदलते हुए दिख रही है.
हालांकि इस देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था हमेशा से ही सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक रूप से ज्यादा मजबूत लोगों व समुदायों के पक्ष में झुकी रही है. लेकिन अगर 2014 से अब तक के सफ़र पर गौर किया जाए, तो लोकतंत्र का व्यापक रूप से सिमटना स्पष्ट है.
आज़ाद हिंदुस्तान की परिकल्पना एक धर्मंनिरपेक्ष बहु-धार्मिक व बहु-पंथिक देश की करी गई थी, जो बराबरी, न्याय और बंधुत्व के मूल्यों पर आधारित होगा. लेकिन आरएसएस की दशकों पुराने उद्देश्य के अनुरूप भाजपा हिंदू राष्ट्र की स्थापना में लगी हुई है. ऐसा राष्ट्र जहां हिंदू प्रथम दर्जे के नागरिक होंगे और मुसलमान समेत अन्य धर्म के लोग दूसरे दर्जे के.
भाजपा शासित केंद्र व राज्य सरकारें भी इस दिशा में अपनी भूमिका निष्ठा के साथ निभा रही हैं. चाहे राम मंदिर की स्थापना पूजा में पूर्ण भागीदारी हो या नए संसद भवन की स्थापना एवं अशोक स्तंभ के अनावरण में हिंदू रीति-रिवाज़ से पूजा करके हो, प्रधानमंत्री मोदी ने केंद्र सरकार के धार्मिक रंग को तो स्पष्ट कर दिया है.
नागरिकता कानून में संशोधन कर धर्म-आधारित नागरिकता की अवधारणा भी इसका एक उदहारण है. साथ ही, सरकारी पाठ्यक्रमों में हिंदुत्व आधारित व्यापक बदलाव की खबर कई भाजपा-शासित राज्यों से आ रही है. कहीं हिंदू धार्मिक ग्रंथ को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जा रहा है तो कहीं इतिहास में फेरबदल कर हिंदुत्व नेताओं को प्रमुखता दी जा रही है तो कहीं हिंदुत्व की बातों को पाठ्यक्रम में जोड़ा जा रहा है.
मुसलमानों पर विभिन्न रूप से सीधा दमन व हिंसा बढ़ने के भी कई उदहारण है. सीएए-एनआरसी के विरुद्ध आंदोलन से भाग लिए कई मुसलमानों पर मामले दर्ज करना और दिल्ली में मुसलमानों को सांप्रदायिक हिंसा का शिकार बनाना भी स्थिति को बयान करते हैं. भाजपा शासित राज्यों में गौ-रक्षा के नाम पर हिंसा करने वालों पर न के बराबर कार्रवाई होती है.
भाजपा व आरएसएस से जुड़े विभिन्न संगठन लगातार मुसलमानों के विरुद्ध सामाजिक, आर्थिक व सांस्कृतिक द्वेष फैला रहे है. अनगिनत उदहारण हैं, जैसे- 1) मुसलमानों को सार्वजानिक स्थलों पर नमाज़ न पढ़ने देना, 2) हिंदू उत्सवों में मुसलमानों के विरुद्ध सांप्रदायिक माहौल बनाना, 3) बिलकिस बानो के बलात्कारियों की सजा माफ कर धूमधाम से स्वागत करना, 4) मुसलमानों का लिंचिंग करने वालों को धूमधाम से स्वागत करना, 5) विपक्षी राज्यों में गैर-मुसलमानों के बीच इस्लामिक राज स्थापित होने का डर पैदा करना आदि.
यह महज़ संयोग नहीं है कि भाजपा मुसलमानों को चुनाव में न के बराबर टिकट देती है और संसद में लगातार मुसलमान सांसदों की संख्या कम हो रही है.
हिंसा व दूसरे दर्जे का सामाजिक-राजनीतिक व्यवहार सिर्फ मुसलमानों तक सीमित नहीं है बल्कि अन्य अल्पसंख्यक धर्म व वंचित समुदाय जैसे ईसाइयों, दलित व आदिवासियों के विरुद्ध भी दिखता है. लेकिन विभिन्न जातियों व समुदायों को हिंदुत्व आधारित राष्ट्रवाद के खेमे में खींचने के लिए भाजपा मुख्यतः मुसलमानों को हिंदुओं और देश के दुश्मन के हिसाब से स्थापित करने में लगी है.
हालांकि हिंदुत्व वर्ण व्यवस्था समाप्ति की बात तो करता ही नहीं है बल्कि बढ़ते हिंदुत्व के साथ सवर्ण जातियों का वर्चस्व भी बढ़ते दिख रहा है. लेकिन सोचने का विषय है कि इसके बावजूद अनेक दलित और पिछड़ी जातियां अपनी हिंदू पहचान को प्राथमिकता देकर हिंदुत्व खेमे में जुड़ रही हैं.
भारतीय संविधान का एक स्तंभ है नागरिकों का मौलिक अधिकार, जिनके प्रति सरकार व शासन प्रणाली बाध्य हैं. हालांकि आज तक कोई भी केंद्र सरकार मौलिक अधिकारों के प्रति पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध नहीं रही है, लेकिन लंबे संघर्षों के कारण पिछले कई दशको में जन अधिकारों का विस्तार भी हुआ है.
पर मोदी सरकार एक ऐसा राज्य स्थापित करने की कोशिश में है जहां जनता सरकार से जवाबदेही न मांगे और बल्कि अपने कर्तव्यों के पालन पर ध्यान दें. नागरिकों के कर्तव्य की सोच को इंदिरा गांधी सरकार ने आपातकाल के दौरान संविधान में जोड़ा था. मोदी सरकार बिना आपातकाल की औपचारिक घोषणा के ही अधिकारहीन कर्तव्यपालक जनता गढ़ रही है.
चाहे नोटबंदी कर लोगों को भूखे पेट लाइन में खड़ा कर देना हो या कोविड के दौरान थाली बजवाना हो या लगातार कर्तव्य की बात कर अधिकार के अवधारणा को समाप्त करना हो, प्रधानमंत्री मोदी की मंशा स्पष्ट है.
वहीं, दूसरी ओर सरकार जवाबदेही की प्रणालियों को लगातार कमज़ोर कर रही है और खुद को पारदर्शिता से परे बना रही है. कुछ चंद उदाहरण - 1) सूचना के अधिकार कानून को कमज़ोर करना, 2) पीएम केयर्स फंड को सूचना के अधिकार के दायरे से बाहर रखना, 3) चुनावी बॉन्ड का इस्तेमाल कर पार्टी को मिलने वाले चंदा को अदृश्य रखना, 4) प्रधानमंत्री द्वारा आज तक एक भी प्रेस वार्ता न करना, 5) संसद में सवाल-जवाब की प्रक्रिया को लगातार कम करते जाना आदि.
साथ ही, सरकार की ऐसी नीति व हिंदुत्व राजनीति पर सवाल करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं पर देशद्रोह समेत विभिन्न बेबुनियाद आरोप लगाकर कानूनी कार्रवाई की जा रही है. भीमा-कोरेगांव मामले और हाल में तीस्ता सीतलवाड़ व मोहम्मद ज़ुबैर पर लगाए गए मामले इसका उम्दा उदहारण हैं.
पिछले कई दशकों से (खासकर के 1990 के उदारवाद के बाद से) देश में निजीकरण को बढ़ावा मिल रहा है और किसान-मज़दूरों की तुलना में पूंजीवादियों के पक्ष में सरकारें खड़ी दिखती है. 2014 से इस प्रक्रिया ने विशेष गति पकड़ ली.
केंद्र द्वारा सरकारी संपत्तियों, इकाइयों और कंपनियों - बैंक, नवरत्न कंपनी, रेलवे, एअरपोर्ट, कोयला खदान आदि - को एक-एक कर के निजी हाथों में बेचा जा रहा है. दूसरी ओर, हाल के सालों में केंद्र द्वारा अब तक का सबसे ज्यादा कॉरपोरेट ऋण माफ़ किया गया है. कंपनियों के पक्ष में किसानों एवं मज़दूरों के अधिकारों को कमज़ोर करने की कोशिशें भी लगातार जारी हैं.
सरकार के इस रवैये का सबसे आला उदहारण है अडानी समूह, जिसका लगातार वृद्धि नरेंद्र मोदी के राजनीतिक सफ़र के साथ कदम-से-कदम मिलाकर हो रहा है. यह महज़ संयोग नहीं है कि आज गौतम अडानी देश के बैंकों से अरबों का लोन लेकर एवं विभिन्न सरकारी कंपनियों व संपत्तियों को खरीद कर दुनिया के तीसरे सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं.
वहीं, पिछले 8 सालों में गरीबों के पक्ष में पुनर्वितरण आर्थिक नीति न के बराबर दिखी है. यह आश्चर्य की बात नहीं है कि देश में आर्थिक गैर-बराबरी लगातार बढ़ रही है.
आज देश जिस मोड़ पर खड़ा है, इस रास्ते की शुरुआत कई मायनों में कांग्रेस पार्टी द्वारा ही की गई थी. लेकिन भाजपा, संघ के विभिन्न संगठनों और पूर्ण बहुमत की मदद से, इस रास्ते पर निरंकुश गति से आगे बढ़ रही है.
यह भी सोचने का विषय है कि इस दिशा में भाजपा के लिए जन समर्थन भी बढ़ रहा है. द्वेष फैलाने और लोगों को सच्चाई से दूर रखने के लिए सोशल मीडिया और मुख्यधारा मीडिया का भी पूर्ण इस्तेमाल किया जा रहा है.
ऐसी परिस्थिति में सबसे पहले विपक्षी दलों को भाजपा की नीतियों और राजनीति के विपरीत अपने मंतव्य को स्पष्ट करना होगा. भाजपा वैसे राज्य-स्तरीय चुनावों में थोड़ी कमज़ोर दिखती है जहां चुनाव स्थानीय मुद्दों और क्षेत्रीय पहचान पर होते हैं. विपक्षी दलों को इससे सीख लेते हुए 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले जन मुद्दों व गैर-धार्मिक राष्ट्रीय पहचान पर आधारित राजनीतिक पक्ष लोगों के सामने पेश करना होगा.
साथ ही, दलों को अपनी सीमित राजनीतिक विचारधारा को व्यापक करना होगा. वामपंथी दलों को वर्ग संघर्ष के साथ जातीय मुद्दों को जोड़ने की ज़रूरत है. वहीं, क्षेत्रीय दलों को सीमित जन-आधार के साथ-साथ अन्य मेहनतकश वर्गों तक भी पहुंचने की ज़रूरत है.
कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा पार्टी को पुनः जीवित करने में मदद कर सकती है लेकिन कांग्रेस को बिना नेतृत्व की अपेक्षा किए अपना स्थान अन्य विपक्षी-दलों की सामूहिक राजनीति के बीच खोजना पड़ेगा.
सबसे महत्वपूर्ण यह है कि हम सबको, इस देश की जनता को, इस सिकुड़ते लोकतंत्र के विरुद्ध और लोकतंत्र को पुनः बहाल करने के पक्ष में खड़ा होना होगा.
(लेखक सामाजिक कार्यकर्ता हैं. )
| मोदी सरकार एक ऐसा राज्य स्थापित करने की कोशिश में है जहां जनता सरकार से जवाबदेही न मांगे. नागरिकों के कर्तव्य की सोच को इंदिरा गांधी सरकार ने आपातकाल के दौरान संविधान में जोड़ा था. मोदी सरकार बिना आपातकाल की औपचारिक घोषणा के ही अधिकारहीन कर्तव्यपालक जनता गढ़ रही है. पिछले कुछ महीने से झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में चल रहे सरकार को लगातार भाजपा व केंद्र द्वारा गिराने की कोशिशें हो रही हैं. एक तरफ राज्यपाल माइनिंग लीज मामले में हेमंत सोरेन की विधायकी रद्द करने के चुनाव आयोग के कथित अनुशंसा पर चुप्पी साध अस्थिरता का माहौल बनाए हुए हैं. दूसरी ओर, भाजपा द्वारा सरकार भंग करने की मांग तेज़ हो गई और साथ-ही-साथ सत्ता पक्ष के विधायकों की खरीद-बिक्री की हवा भी तेज़ हो गई. हालांकि, हेमंत सोरेन विशेष विधान सभा सत्र में विश्वासमत हासिल कर भाजपा को उनके ही खेल में मात देने में सफल रहे, लेकिन खरीद-बिक्री के इस खेल में वोटर तो महज़ मूकदर्शक बनते जा रहे हैं. भाजपा और केंद्र सरकार के इस 'ऑपरेशन कमल' का अन्य कई राज्य जैसे महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, गोवा व कई पूर्वोत्तर राज्य भी गवाह बन चुके हैं. खरीद-बिक्री व राज्यपाल के पद के दुरुपयोग के अलावा केंद्र सरकार द्वारा विपक्षी नेताओं और दलों को भ्रष्टाचार के नाम पर ईडी और सीबीआई जैसी सरकारी संस्थाओं के माध्यम से घेरा जा रहा है. अगर मामला केवल भ्रष्टाचार पकड़ने का होता, तो भाजपा के अनेक नेताओं पर भी कार्रवाई होती. यह भी मज़ेदार बात है कि जैसे ही आरोपी विपक्षी नेता भाजपा से जुड़ जाते हैं या सरकार गिराने में सहयोग करते हैं, वैसे ही उनपर ईडी और सीबीआई का साया ख़त्म हो जाता है. अब भाजपा तो 'कांग्रेस-मुक्त भारत' के नारे के साथ-साथ क्षेत्रीय दलों के ख़ात्मे की भी बात कर रही है. केंद्र द्वारा विपक्षी दलों की राज्य सरकारों को गिराने का इतिहास तो लंबा है, लेकिन दो हज़ार चौदह में भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार बनने के बाद से देश के बहु-दलीय संसदीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक-पार्टी राज स्थापित करने की प्रक्रिया झलकती है. भारतीय लोकतंत्र की मूल अवधारणा ही बदलते हुए दिख रही है. हालांकि इस देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था हमेशा से ही सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक रूप से ज्यादा मजबूत लोगों व समुदायों के पक्ष में झुकी रही है. लेकिन अगर दो हज़ार चौदह से अब तक के सफ़र पर गौर किया जाए, तो लोकतंत्र का व्यापक रूप से सिमटना स्पष्ट है. आज़ाद हिंदुस्तान की परिकल्पना एक धर्मंनिरपेक्ष बहु-धार्मिक व बहु-पंथिक देश की करी गई थी, जो बराबरी, न्याय और बंधुत्व के मूल्यों पर आधारित होगा. लेकिन आरएसएस की दशकों पुराने उद्देश्य के अनुरूप भाजपा हिंदू राष्ट्र की स्थापना में लगी हुई है. ऐसा राष्ट्र जहां हिंदू प्रथम दर्जे के नागरिक होंगे और मुसलमान समेत अन्य धर्म के लोग दूसरे दर्जे के. भाजपा शासित केंद्र व राज्य सरकारें भी इस दिशा में अपनी भूमिका निष्ठा के साथ निभा रही हैं. चाहे राम मंदिर की स्थापना पूजा में पूर्ण भागीदारी हो या नए संसद भवन की स्थापना एवं अशोक स्तंभ के अनावरण में हिंदू रीति-रिवाज़ से पूजा करके हो, प्रधानमंत्री मोदी ने केंद्र सरकार के धार्मिक रंग को तो स्पष्ट कर दिया है. नागरिकता कानून में संशोधन कर धर्म-आधारित नागरिकता की अवधारणा भी इसका एक उदहारण है. साथ ही, सरकारी पाठ्यक्रमों में हिंदुत्व आधारित व्यापक बदलाव की खबर कई भाजपा-शासित राज्यों से आ रही है. कहीं हिंदू धार्मिक ग्रंथ को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जा रहा है तो कहीं इतिहास में फेरबदल कर हिंदुत्व नेताओं को प्रमुखता दी जा रही है तो कहीं हिंदुत्व की बातों को पाठ्यक्रम में जोड़ा जा रहा है. मुसलमानों पर विभिन्न रूप से सीधा दमन व हिंसा बढ़ने के भी कई उदहारण है. सीएए-एनआरसी के विरुद्ध आंदोलन से भाग लिए कई मुसलमानों पर मामले दर्ज करना और दिल्ली में मुसलमानों को सांप्रदायिक हिंसा का शिकार बनाना भी स्थिति को बयान करते हैं. भाजपा शासित राज्यों में गौ-रक्षा के नाम पर हिंसा करने वालों पर न के बराबर कार्रवाई होती है. भाजपा व आरएसएस से जुड़े विभिन्न संगठन लगातार मुसलमानों के विरुद्ध सामाजिक, आर्थिक व सांस्कृतिक द्वेष फैला रहे है. अनगिनत उदहारण हैं, जैसे- एक) मुसलमानों को सार्वजानिक स्थलों पर नमाज़ न पढ़ने देना, दो) हिंदू उत्सवों में मुसलमानों के विरुद्ध सांप्रदायिक माहौल बनाना, तीन) बिलकिस बानो के बलात्कारियों की सजा माफ कर धूमधाम से स्वागत करना, चार) मुसलमानों का लिंचिंग करने वालों को धूमधाम से स्वागत करना, पाँच) विपक्षी राज्यों में गैर-मुसलमानों के बीच इस्लामिक राज स्थापित होने का डर पैदा करना आदि. यह महज़ संयोग नहीं है कि भाजपा मुसलमानों को चुनाव में न के बराबर टिकट देती है और संसद में लगातार मुसलमान सांसदों की संख्या कम हो रही है. हिंसा व दूसरे दर्जे का सामाजिक-राजनीतिक व्यवहार सिर्फ मुसलमानों तक सीमित नहीं है बल्कि अन्य अल्पसंख्यक धर्म व वंचित समुदाय जैसे ईसाइयों, दलित व आदिवासियों के विरुद्ध भी दिखता है. लेकिन विभिन्न जातियों व समुदायों को हिंदुत्व आधारित राष्ट्रवाद के खेमे में खींचने के लिए भाजपा मुख्यतः मुसलमानों को हिंदुओं और देश के दुश्मन के हिसाब से स्थापित करने में लगी है. हालांकि हिंदुत्व वर्ण व्यवस्था समाप्ति की बात तो करता ही नहीं है बल्कि बढ़ते हिंदुत्व के साथ सवर्ण जातियों का वर्चस्व भी बढ़ते दिख रहा है. लेकिन सोचने का विषय है कि इसके बावजूद अनेक दलित और पिछड़ी जातियां अपनी हिंदू पहचान को प्राथमिकता देकर हिंदुत्व खेमे में जुड़ रही हैं. भारतीय संविधान का एक स्तंभ है नागरिकों का मौलिक अधिकार, जिनके प्रति सरकार व शासन प्रणाली बाध्य हैं. हालांकि आज तक कोई भी केंद्र सरकार मौलिक अधिकारों के प्रति पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध नहीं रही है, लेकिन लंबे संघर्षों के कारण पिछले कई दशको में जन अधिकारों का विस्तार भी हुआ है. पर मोदी सरकार एक ऐसा राज्य स्थापित करने की कोशिश में है जहां जनता सरकार से जवाबदेही न मांगे और बल्कि अपने कर्तव्यों के पालन पर ध्यान दें. नागरिकों के कर्तव्य की सोच को इंदिरा गांधी सरकार ने आपातकाल के दौरान संविधान में जोड़ा था. मोदी सरकार बिना आपातकाल की औपचारिक घोषणा के ही अधिकारहीन कर्तव्यपालक जनता गढ़ रही है. चाहे नोटबंदी कर लोगों को भूखे पेट लाइन में खड़ा कर देना हो या कोविड के दौरान थाली बजवाना हो या लगातार कर्तव्य की बात कर अधिकार के अवधारणा को समाप्त करना हो, प्रधानमंत्री मोदी की मंशा स्पष्ट है. वहीं, दूसरी ओर सरकार जवाबदेही की प्रणालियों को लगातार कमज़ोर कर रही है और खुद को पारदर्शिता से परे बना रही है. कुछ चंद उदाहरण - एक) सूचना के अधिकार कानून को कमज़ोर करना, दो) पीएम केयर्स फंड को सूचना के अधिकार के दायरे से बाहर रखना, तीन) चुनावी बॉन्ड का इस्तेमाल कर पार्टी को मिलने वाले चंदा को अदृश्य रखना, चार) प्रधानमंत्री द्वारा आज तक एक भी प्रेस वार्ता न करना, पाँच) संसद में सवाल-जवाब की प्रक्रिया को लगातार कम करते जाना आदि. साथ ही, सरकार की ऐसी नीति व हिंदुत्व राजनीति पर सवाल करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं पर देशद्रोह समेत विभिन्न बेबुनियाद आरोप लगाकर कानूनी कार्रवाई की जा रही है. भीमा-कोरेगांव मामले और हाल में तीस्ता सीतलवाड़ व मोहम्मद ज़ुबैर पर लगाए गए मामले इसका उम्दा उदहारण हैं. पिछले कई दशकों से देश में निजीकरण को बढ़ावा मिल रहा है और किसान-मज़दूरों की तुलना में पूंजीवादियों के पक्ष में सरकारें खड़ी दिखती है. दो हज़ार चौदह से इस प्रक्रिया ने विशेष गति पकड़ ली. केंद्र द्वारा सरकारी संपत्तियों, इकाइयों और कंपनियों - बैंक, नवरत्न कंपनी, रेलवे, एअरपोर्ट, कोयला खदान आदि - को एक-एक कर के निजी हाथों में बेचा जा रहा है. दूसरी ओर, हाल के सालों में केंद्र द्वारा अब तक का सबसे ज्यादा कॉरपोरेट ऋण माफ़ किया गया है. कंपनियों के पक्ष में किसानों एवं मज़दूरों के अधिकारों को कमज़ोर करने की कोशिशें भी लगातार जारी हैं. सरकार के इस रवैये का सबसे आला उदहारण है अडानी समूह, जिसका लगातार वृद्धि नरेंद्र मोदी के राजनीतिक सफ़र के साथ कदम-से-कदम मिलाकर हो रहा है. यह महज़ संयोग नहीं है कि आज गौतम अडानी देश के बैंकों से अरबों का लोन लेकर एवं विभिन्न सरकारी कंपनियों व संपत्तियों को खरीद कर दुनिया के तीसरे सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं. वहीं, पिछले आठ सालों में गरीबों के पक्ष में पुनर्वितरण आर्थिक नीति न के बराबर दिखी है. यह आश्चर्य की बात नहीं है कि देश में आर्थिक गैर-बराबरी लगातार बढ़ रही है. आज देश जिस मोड़ पर खड़ा है, इस रास्ते की शुरुआत कई मायनों में कांग्रेस पार्टी द्वारा ही की गई थी. लेकिन भाजपा, संघ के विभिन्न संगठनों और पूर्ण बहुमत की मदद से, इस रास्ते पर निरंकुश गति से आगे बढ़ रही है. यह भी सोचने का विषय है कि इस दिशा में भाजपा के लिए जन समर्थन भी बढ़ रहा है. द्वेष फैलाने और लोगों को सच्चाई से दूर रखने के लिए सोशल मीडिया और मुख्यधारा मीडिया का भी पूर्ण इस्तेमाल किया जा रहा है. ऐसी परिस्थिति में सबसे पहले विपक्षी दलों को भाजपा की नीतियों और राजनीति के विपरीत अपने मंतव्य को स्पष्ट करना होगा. भाजपा वैसे राज्य-स्तरीय चुनावों में थोड़ी कमज़ोर दिखती है जहां चुनाव स्थानीय मुद्दों और क्षेत्रीय पहचान पर होते हैं. विपक्षी दलों को इससे सीख लेते हुए दो हज़ार चौबीस के लोकसभा चुनाव से पहले जन मुद्दों व गैर-धार्मिक राष्ट्रीय पहचान पर आधारित राजनीतिक पक्ष लोगों के सामने पेश करना होगा. साथ ही, दलों को अपनी सीमित राजनीतिक विचारधारा को व्यापक करना होगा. वामपंथी दलों को वर्ग संघर्ष के साथ जातीय मुद्दों को जोड़ने की ज़रूरत है. वहीं, क्षेत्रीय दलों को सीमित जन-आधार के साथ-साथ अन्य मेहनतकश वर्गों तक भी पहुंचने की ज़रूरत है. कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा पार्टी को पुनः जीवित करने में मदद कर सकती है लेकिन कांग्रेस को बिना नेतृत्व की अपेक्षा किए अपना स्थान अन्य विपक्षी-दलों की सामूहिक राजनीति के बीच खोजना पड़ेगा. सबसे महत्वपूर्ण यह है कि हम सबको, इस देश की जनता को, इस सिकुड़ते लोकतंत्र के विरुद्ध और लोकतंत्र को पुनः बहाल करने के पक्ष में खड़ा होना होगा. |
असम के गोलपाड़ा जिले के कई गांवों के लोग सालों से नदी पर पुल बनवाने के लिए गुहार लगाते-लगाते थक गए, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई. बरसात के दिनों में उन्हें होने वाली दिक्कतों को दूर करने के लिए न तो स्थानीय जनप्रतिनिधि जागे और न ही सरकारी अधिकारियों की कुंभकर्णी नींद टूटी. ऐसे में थक हार कर चपलाई अम्बारी क्षेत्र के लोगों ने खुद ही ये बीड़ा उठाया और देओसिला नदी पर बांस का पुल खड़ा कर दिया.
चपलाई अम्बारी इलाका गोलपाड़ा और कामरूप जिलों की सीमा के पास स्थित है. यहां के लोगों ने स्थानीय विधायकों और सरकार से कई बार देओसिला नदी पर पुल निर्माण के लिए आग्रह किया. लेकिन उन्हें कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला. बरसात के दिनों में नदी के उफान पर होने की वजह से लोगों को इसे पार करना मुश्किल हो जाता है. अपनी खेती के लिए अधिकतर ग्रामीणों को नदी के पार जाना पड़ता है.
असमः 'लव जिहाद' पर बोले CM हिमंत बिस्वा सरमा- 'हिंदू या मुस्लिम, धोखा बर्दाश्त नहीं'
ग्रामीणों के मुताबिक, बरसात के दिनों में नदी को पार करने के दौरान पहले कई हादसे हो चुके हैं. इनमें इंसानों और मवेशियों की नदी में बहने से मौत हुई. नदी पर पुल बनने का इंतजार करते करते लोग थक गए तो उन्होंने आपस में ही चंदा इकट्ठा कर बांस का पुल बनाने का फैसला किया. कुछ स्थानीय एनजीओ भी इस काम में मदद के लिए आगे आए.
चपलाई अम्बारी गांव के स्थानीय नागरिक मोहम्मद अली का कहना है कि स्थानीय विधायकों और सरकार के पास पुल बनाने के लिए कई बार अर्जी भेजी गई लेकिन कुछ नहीं हुआ. मुहम्मद अली ने कहा, "हम लंबे अरसे से पुल नहीं होने की वजह से दिक्कतों का सामना कर रहे हैं. पिछले साल ही एक शख्स की नदी पार करने की कोशिश में डूबने से मौत हो गई. हमने खुद ही बांस का पुल बनाना शुरू कर दिया. हमें अब भी उम्मीद है कि सरकार हमारी दिक्कतों को समझेगी.
| असम के गोलपाड़ा जिले के कई गांवों के लोग सालों से नदी पर पुल बनवाने के लिए गुहार लगाते-लगाते थक गए, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई. बरसात के दिनों में उन्हें होने वाली दिक्कतों को दूर करने के लिए न तो स्थानीय जनप्रतिनिधि जागे और न ही सरकारी अधिकारियों की कुंभकर्णी नींद टूटी. ऐसे में थक हार कर चपलाई अम्बारी क्षेत्र के लोगों ने खुद ही ये बीड़ा उठाया और देओसिला नदी पर बांस का पुल खड़ा कर दिया. चपलाई अम्बारी इलाका गोलपाड़ा और कामरूप जिलों की सीमा के पास स्थित है. यहां के लोगों ने स्थानीय विधायकों और सरकार से कई बार देओसिला नदी पर पुल निर्माण के लिए आग्रह किया. लेकिन उन्हें कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला. बरसात के दिनों में नदी के उफान पर होने की वजह से लोगों को इसे पार करना मुश्किल हो जाता है. अपनी खेती के लिए अधिकतर ग्रामीणों को नदी के पार जाना पड़ता है. असमः 'लव जिहाद' पर बोले CM हिमंत बिस्वा सरमा- 'हिंदू या मुस्लिम, धोखा बर्दाश्त नहीं' ग्रामीणों के मुताबिक, बरसात के दिनों में नदी को पार करने के दौरान पहले कई हादसे हो चुके हैं. इनमें इंसानों और मवेशियों की नदी में बहने से मौत हुई. नदी पर पुल बनने का इंतजार करते करते लोग थक गए तो उन्होंने आपस में ही चंदा इकट्ठा कर बांस का पुल बनाने का फैसला किया. कुछ स्थानीय एनजीओ भी इस काम में मदद के लिए आगे आए. चपलाई अम्बारी गांव के स्थानीय नागरिक मोहम्मद अली का कहना है कि स्थानीय विधायकों और सरकार के पास पुल बनाने के लिए कई बार अर्जी भेजी गई लेकिन कुछ नहीं हुआ. मुहम्मद अली ने कहा, "हम लंबे अरसे से पुल नहीं होने की वजह से दिक्कतों का सामना कर रहे हैं. पिछले साल ही एक शख्स की नदी पार करने की कोशिश में डूबने से मौत हो गई. हमने खुद ही बांस का पुल बनाना शुरू कर दिया. हमें अब भी उम्मीद है कि सरकार हमारी दिक्कतों को समझेगी. |
एक अस्पताल के बाहर खड़ी डॉक्टर की कार में अचानक आग लग लग गई। आग इतनी भयानक थी कि कार धू-धू कर जल गई।
कार मालिक डॉ. विकास ने बताते हैं कि वह पंचकूला से रोजाना यहां अस्पताल में ओपीडी के लिए आते हैं। सुबह भी रोजाना की तरह उन्होंने अपनी इंडिगो कार अस्पताल में बाहर खड़ी की थी।
किसी ने सूचना दी कि उनकी कार से धुआं निकल रहा है। जब तक वह बाहर आए कार से आग की लपटें उठने लगी थीं। इस बीच किसी ने फायर ब्रिगेड को सूचना दे दी।
अस्पताल में लगे फायर सेफ्टी उपकरणों से आग बुझाने की कोशिश की गई, लेकिन आग नहीं रुकी। बाद में दमकल विभाग की गाड़ी पहुंची और आग पर काबू पाया। आग के कारणों का पता नहीं चल सका है।
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आपको बता दें कि चिराग पासवान की यह पहली फिल्म है। राहुल का कहना था कि यह चिराग की पहली फिल्म थी इसलिए वो यहां उसको हौसला देने के लिए पहुंचे हैं। राहुल के साथ रामविलास पासवान और फ़िल्म के हीरो चिराग भी साथ थे। वैसे राहुल के इस कदम को सियासी जामा पहनाया जा रहा है। कहा जा रहा है कि राहुल, रामविलास पासवान के दवाब में आकर यह फिल्म देखेने पहुंचे हैं, वह चिराग को नहीं बल्कि रामविलास पासवान को खुश करना चाहते थे।
कांग्रेस पार्टी के महासचिव राहुल गांधी खुद को चिराग पासवान की फिल्म मिले ना मिले हम देखने से रोक ना पाए। वो सोमवार को पीवीआर अनुपम मल्टीप्लेक्स में लोक जनशक्ति पार्टी प्रमुख राम विलास पासवान के बेटे चिराग की फिल्म देखने आखिरकार पहुंच ही गये।
चिराग का कहना है कि 'राहुल गांधी को उनकी फिल्म अच्छी लगी। उन्होंने मेरी भूमिका की तारीफ की। यह मेरे जैसे नए कलाकार के लिए काफी उत्साह बढ़ाने वाली बात है। 'राहुल गांधी ने दक्षिण दिल्ली के साकेत में पीवीआर अनुपम मल्टीप्लेक्स में यह फिल्म राम विलास पासवान और उनकी पत्नी रीना, चिराग और उनकी बहन निशा भारती के साथ इस फिल्म का मजा लिया।
राहुल गांधी ने फिल्म देखने के बीच में चिराग से यह भी कहा कि वो उन्हें अपनी पसंद की अंग्रेजी फिल्मों की डीवीडी भी भेंट करेंगे। 'मिले ना मिले हम' में चिराग ने एक टेनिस खिलाड़ी के रूप में दिखाई दिए हैं। इस राजनेता ने एक राजनेता के बेटे की फिल्म देखी भी और काफी के कसीदे भी पढ़े इससे चिराग तो खुश हो गये साथ ही रामविलास पासवान खुशी से फुलकर गुप्पा हो गये।
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करीना कपूर प्रेग्नेंसी में भी लगातार काम करती नजर आ रही हैं। वह अपने चैट शो के लिए भी लगातार मेहनत करती दिखती हैं तो वहीं घर को संभालते भी नजर आती हैं। अपने काम के साथ साथ वह बेटे तैमूर का भी पूरा ख्याल रखती हैं। हाल में ही करीना कपूर के साथ तैमूर अली खान भी नजर आए। जहां तैमूर ने पैपराजी के साथ फिर कुछ ऐसा कह दिया कि उनका वीडियो धड़ल्ले से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
दरअसल तैमूर मां करीना के साथ नजर आए। जब तैमूर ने देखा कि फोटोग्राफर्स उनकी तस्वीरें ले रहे हैं तो नाराज तैमूर ने कैमरामैन को कहा, नॉट अलाउड। तैमूर कैमरामैन से फोटो न खींचने को लेकर कहते हैं। इस दौरान करीना कपूर तैमूर को जबरदस्ती अंदर लेकर जाती हैं लेकिन वह मां का हाथ छोड़वाकर कैमरामैन से फोटो न लेने को कहते हैं।
देखते ही देखते ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। इस दौरान करीना कपूर ब्लू काफ्तान में नजर आ रही हैं। तो वहीं बेटे तैमूर भी ब्लू टी-शर्ट में दिख रहे हैं। वीडियो में करीना कपूर का बेबी बंप भी साफ नजर आ रहा है।
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नई दिल्ली। ऑप्टिकल रिटेल ब्रांड टाइटन आईप्लस ने एक और 'फ्लिप-ऑन कलेक्शन' पेश किया है। इसे चार अलग-अलग फैशनेबल फ्रेम स्टाइलों में उतारा गया है और इसकी कीमत 2,995 रुपये है, जिसमें फ्रेम और अलग से लेंस लगाए जाने वाले टिंटेड मैग्नेटिक क्लिप की कीमत शामिल है। मेन फ्रेम के लिए जरूरी लेंस को अलग से खरीदने की जरूरत है। चश्मे लगाने वालों को अक्सर सूरज की रोशनी में निकलते हुए एक समस्या का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि इसकी वजह से अपने चश्मे हटाकर सनग्लासेज लगाने पड़ते हैं। इन परेशानियों को देखते हुए नया फ्लिप-ऑन कलेक्शन पेश किया गया है।
आंखों के लिए सुविधाजनक, आरामदायक और साथ ही ट्रेंडी फ्लिप-ऑन कलेक्शन नियमित प्रयोग के लिए उपयुक्त है और यह अलग से फ्रेम और सनग्लासेज खरीदने का विकल्प साबित हो सकता है।
यह उत्पाद दो जोड़े फ्रेम के साथ आता है, जिसे आगे की तरफ एक अतिरिक्त मैग्नेटिक क्लिप के साथ जुड़े रोजाना इस्तेमाल किए जाने वाले चश्मों की तरह ही पावर वाले लेंसों के साथ इस्तेमाल किया जाता है और इनमें पोलराइज्ड ग्रे टिंटेड लेंस लगे होते हैं। जहां मुख्य फ्रेम को रोजाना इस्तेमाल किए जाने वाले चश्मे की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है, वही टिंटेड फ्रंट को सूर्य की रोशनी में बाहर निकलते हुए लगाया जा सकता है, जिससे चश्मा सनग्लास में बदल जाता है।
टाइटन आईप्लस,फ्लिप-ऑन कलेक्शन,
नई दिल्ली। भारत के सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ग्राहकों को कई तरह के ऑफर देता है। अगर आप भी एसबीआई में एफडी करवाने का प्लान बना रहे हैं तो आपको एसबीआई वीकेयर स्कीम (SBI WeCare Scheme) में निवेश करना चाहिए। इस स्कीम में निवेश करने के लिए अब बस कुछ ही दिन बचे हैं। इस स्कीम में आपको बाकी एफडी की तुलना से ज्यादा इंटरेस्ट और लाभ मिलता है।
ये स्कीम स्पेशल सीनियर सिटीजन के डिजाइन किया गया है। इसमें आप 5 साल तक के लिए एफडी करवा सकते हैं। इसमें ग्राहकों को अच्छा रिटर्न मिलता है। यह स्कीम 30 सितंबर 2023 को बंद हो जाएगी। इस स्कीम में निवेश करने के लिए केवल 2 दिन का ही समय बचा है। इस स्कीम की डेडलाइन एक बार बढ़ चुकी है, ऐसे में उम्मीद है कि इस बार भी इस स्कीम की डेडलाइन बढ़ सकती है।
इस स्कीम में ग्राहक को अतिरिक्त 0.50 फीसदी का ब्याज मिलता है।
स्कीम में आप 5 से 10 साल तक निवेश कर सकते हैं।
निवेश के हिसाब से इस स्कीम में आपको इंटरेस्ट मिलता है। इसका मतलब है कि ब्याज दर स्थिर नहीं रहता है।
अभी एसबीआई ग्राहकों को 7.50 फीसदी का ब्याज ऑफर करता है।
एसबीआई रेगुलर एफडी यानी 7 दिन से 10 साल के मैच्योरिटी वाले एफडी में 3.50 फीसदी से 7.50 फीसदी का ब्याज मिलता है। आपको बता दें कि SBI WeCare Scheme स्कीम में ग्राहकों को उच्च ब्याज दर के साथ टैक्स बेनिफिट का भी लाभ मिलता है। इसके लिए ग्राहक को 15H/15G फॉर्म जमा करना होता है।
| नई दिल्ली। ऑप्टिकल रिटेल ब्रांड टाइटन आईप्लस ने एक और 'फ्लिप-ऑन कलेक्शन' पेश किया है। इसे चार अलग-अलग फैशनेबल फ्रेम स्टाइलों में उतारा गया है और इसकी कीमत दो,नौ सौ पचानवे रुपयापये है, जिसमें फ्रेम और अलग से लेंस लगाए जाने वाले टिंटेड मैग्नेटिक क्लिप की कीमत शामिल है। मेन फ्रेम के लिए जरूरी लेंस को अलग से खरीदने की जरूरत है। चश्मे लगाने वालों को अक्सर सूरज की रोशनी में निकलते हुए एक समस्या का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि इसकी वजह से अपने चश्मे हटाकर सनग्लासेज लगाने पड़ते हैं। इन परेशानियों को देखते हुए नया फ्लिप-ऑन कलेक्शन पेश किया गया है। आंखों के लिए सुविधाजनक, आरामदायक और साथ ही ट्रेंडी फ्लिप-ऑन कलेक्शन नियमित प्रयोग के लिए उपयुक्त है और यह अलग से फ्रेम और सनग्लासेज खरीदने का विकल्प साबित हो सकता है। यह उत्पाद दो जोड़े फ्रेम के साथ आता है, जिसे आगे की तरफ एक अतिरिक्त मैग्नेटिक क्लिप के साथ जुड़े रोजाना इस्तेमाल किए जाने वाले चश्मों की तरह ही पावर वाले लेंसों के साथ इस्तेमाल किया जाता है और इनमें पोलराइज्ड ग्रे टिंटेड लेंस लगे होते हैं। जहां मुख्य फ्रेम को रोजाना इस्तेमाल किए जाने वाले चश्मे की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है, वही टिंटेड फ्रंट को सूर्य की रोशनी में बाहर निकलते हुए लगाया जा सकता है, जिससे चश्मा सनग्लास में बदल जाता है। टाइटन आईप्लस,फ्लिप-ऑन कलेक्शन, नई दिल्ली। भारत के सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ग्राहकों को कई तरह के ऑफर देता है। अगर आप भी एसबीआई में एफडी करवाने का प्लान बना रहे हैं तो आपको एसबीआई वीकेयर स्कीम में निवेश करना चाहिए। इस स्कीम में निवेश करने के लिए अब बस कुछ ही दिन बचे हैं। इस स्कीम में आपको बाकी एफडी की तुलना से ज्यादा इंटरेस्ट और लाभ मिलता है। ये स्कीम स्पेशल सीनियर सिटीजन के डिजाइन किया गया है। इसमें आप पाँच साल तक के लिए एफडी करवा सकते हैं। इसमें ग्राहकों को अच्छा रिटर्न मिलता है। यह स्कीम तीस सितंबर दो हज़ार तेईस को बंद हो जाएगी। इस स्कीम में निवेश करने के लिए केवल दो दिन का ही समय बचा है। इस स्कीम की डेडलाइन एक बार बढ़ चुकी है, ऐसे में उम्मीद है कि इस बार भी इस स्कीम की डेडलाइन बढ़ सकती है। इस स्कीम में ग्राहक को अतिरिक्त शून्य.पचास फीसदी का ब्याज मिलता है। स्कीम में आप पाँच से दस साल तक निवेश कर सकते हैं। निवेश के हिसाब से इस स्कीम में आपको इंटरेस्ट मिलता है। इसका मतलब है कि ब्याज दर स्थिर नहीं रहता है। अभी एसबीआई ग्राहकों को सात.पचास फीसदी का ब्याज ऑफर करता है। एसबीआई रेगुलर एफडी यानी सात दिन से दस साल के मैच्योरिटी वाले एफडी में तीन.पचास फीसदी से सात.पचास फीसदी का ब्याज मिलता है। आपको बता दें कि SBI WeCare Scheme स्कीम में ग्राहकों को उच्च ब्याज दर के साथ टैक्स बेनिफिट का भी लाभ मिलता है। इसके लिए ग्राहक को पंद्रहH/पंद्रहG फॉर्म जमा करना होता है। |
आज समाज डिजिटल, Raj Kundra Case : बॉलीवुड एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी (Bollywood actress Shilpa Shetty) के पति राज कुंद्रा पर कुछ समय पहले पार्न वीडियो बनाने के आरोप लगे थे, जिसमें वे गिरफ्तार भी हुए थो। हालांकि कुछ वक्त पहले तो ये मामला थम गया था और उन्हें कोर्ट से जमानत भी मिल गई थी। लेकिन इस मामले ने अब एक बार फिर तुल पकड़ लिया है।
महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने चार्जशीटर दायर की है जिसमें राज कुंद्रा और अन्य के खिलाफ अश्लील कॉन्टेंट बनाने और इसे ओटीटी प्लेटफार्मों पर दिखाने का आरोप लगाया गया है। इस चार्जशीट में शर्लिन चोपड़ा (Sherlyn Chopra) और पूनम पांडे (Poonam Pandey) का भी नाम है।
महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने कोर्ट में कहा कि बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति व्यवसायी राज कुंद्रा और अन्य पर कुछ फाइव स्टार होटलों में अश्लील फिल्में बनाने का आरोप लगाया गया है, जिसे प्लेटफार्म द्वारा मौद्रिक लाभ के लिए वितरित किया गया था।
साइबर पुलिस की पिछले हफ्ते कोर्ट में पेश की गई चार्जशीट के अनुसार, कुंद्रा ने मॉडल शर्लिन चोपड़ा और पूनम पांडे, फिल्म निर्माता मीता झुनझुनवाला और कैमरामैन राजू दुबे के साथ कथित तौर पर दो उपनगरीय पांच सितारा होटलों में अश्लील वीडियो शूट किए। इस चार्जशीट में प्राइम ओटीटी के सुवाजीत चौधरी और कुंद्रा के कर्मचारी उमेश कामथ का भी नाम लंदन स्थित कंपनी हॉटशॉट के प्रबंधक के रूप में है, जिसका स्वामित्व कुंद्रा के बहनोई प्रदीप बख्शी की कंपनी केनिन के पास है, जो यूके में रजिस्टर्ड है।
2019 में दर्ज हुआ था मामला (Raj Kundra Case)
गौरतलब है कि पुलिस ने 2019 में मामला दर्ज किया था, जिसमें बताया गया था कि आर्म्सप्राइम मीडिया लिमिटेड के निदेशक कुंद्रा कुछ वैबसाइटों पर अश्लील वीडियो बनाने और वितरित करने में लगे हुए थे। 2021 में मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने अप्रैल में अपनी अलग चार्जशीट दायर की थी, उसके बाद सितम्बर में सनसनीखेज अश्लील रैकेट मामले में एक पूरक चार्जशीट दायर की थी, जो फरवरी (2021) में मड द्वीप में एक बंगले पर छापेमारी के बाद सामने आई थी।
| आज समाज डिजिटल, Raj Kundra Case : बॉलीवुड एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा पर कुछ समय पहले पार्न वीडियो बनाने के आरोप लगे थे, जिसमें वे गिरफ्तार भी हुए थो। हालांकि कुछ वक्त पहले तो ये मामला थम गया था और उन्हें कोर्ट से जमानत भी मिल गई थी। लेकिन इस मामले ने अब एक बार फिर तुल पकड़ लिया है। महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने चार्जशीटर दायर की है जिसमें राज कुंद्रा और अन्य के खिलाफ अश्लील कॉन्टेंट बनाने और इसे ओटीटी प्लेटफार्मों पर दिखाने का आरोप लगाया गया है। इस चार्जशीट में शर्लिन चोपड़ा और पूनम पांडे का भी नाम है। महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने कोर्ट में कहा कि बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति व्यवसायी राज कुंद्रा और अन्य पर कुछ फाइव स्टार होटलों में अश्लील फिल्में बनाने का आरोप लगाया गया है, जिसे प्लेटफार्म द्वारा मौद्रिक लाभ के लिए वितरित किया गया था। साइबर पुलिस की पिछले हफ्ते कोर्ट में पेश की गई चार्जशीट के अनुसार, कुंद्रा ने मॉडल शर्लिन चोपड़ा और पूनम पांडे, फिल्म निर्माता मीता झुनझुनवाला और कैमरामैन राजू दुबे के साथ कथित तौर पर दो उपनगरीय पांच सितारा होटलों में अश्लील वीडियो शूट किए। इस चार्जशीट में प्राइम ओटीटी के सुवाजीत चौधरी और कुंद्रा के कर्मचारी उमेश कामथ का भी नाम लंदन स्थित कंपनी हॉटशॉट के प्रबंधक के रूप में है, जिसका स्वामित्व कुंद्रा के बहनोई प्रदीप बख्शी की कंपनी केनिन के पास है, जो यूके में रजिस्टर्ड है। दो हज़ार उन्नीस में दर्ज हुआ था मामला गौरतलब है कि पुलिस ने दो हज़ार उन्नीस में मामला दर्ज किया था, जिसमें बताया गया था कि आर्म्सप्राइम मीडिया लिमिटेड के निदेशक कुंद्रा कुछ वैबसाइटों पर अश्लील वीडियो बनाने और वितरित करने में लगे हुए थे। दो हज़ार इक्कीस में मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने अप्रैल में अपनी अलग चार्जशीट दायर की थी, उसके बाद सितम्बर में सनसनीखेज अश्लील रैकेट मामले में एक पूरक चार्जशीट दायर की थी, जो फरवरी में मड द्वीप में एक बंगले पर छापेमारी के बाद सामने आई थी। |
कोलकाता : कोलकाता में ब्रिटेन में सामने आए कोरोना वायरस के नए प्रकार (स्ट्रेन) का पहला मामला सामने आया है। स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि कलकत्ता मेडिकल कॉलेज अस्पताल के एक वरिष्ठ अधिकारी का बेटा लंदन से आने के बाद 'म्यूटेंट स्ट्रेन' से संक्रमित पाया गया है। सरकारी अस्पताल के 'सुपर-स्पेशलिस्ट सेक्शन' में उसका इलाज चल रहा है। इसके साथ ही उनके सम्पर्क में आए सभी लोगों का अलग रहने की सलाह दी गई है। उन्होंने बताया कि 10 दिन पहले कोलकता लौटने पर 'नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे' पर जांच के दौरान युवक संक्रमित पाया गया था। उसके सम्पर्क में आए छह अन्य लोगों के संक्रमित ना होने की पुष्टि हुई थी। उसके ब्रिटेन से लौटने के बाद उसके नमूनों को आनुवंशिक विश्लेषण के लिए भेजा गया था। इस जांच में उसके वायरस के नए 'स्ट्रेन' से संक्रमित होने की पुष्टि हुई। उसकी रिपोर्ट दिल्ली के राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केन्द्र को भेजी गई है। गौरतलब है कि देश में वायरस के इस नए 'स्ट्रेन' के 20 मामले सामने आ चुके हैं।
| कोलकाता : कोलकाता में ब्रिटेन में सामने आए कोरोना वायरस के नए प्रकार का पहला मामला सामने आया है। स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि कलकत्ता मेडिकल कॉलेज अस्पताल के एक वरिष्ठ अधिकारी का बेटा लंदन से आने के बाद 'म्यूटेंट स्ट्रेन' से संक्रमित पाया गया है। सरकारी अस्पताल के 'सुपर-स्पेशलिस्ट सेक्शन' में उसका इलाज चल रहा है। इसके साथ ही उनके सम्पर्क में आए सभी लोगों का अलग रहने की सलाह दी गई है। उन्होंने बताया कि दस दिन पहले कोलकता लौटने पर 'नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे' पर जांच के दौरान युवक संक्रमित पाया गया था। उसके सम्पर्क में आए छह अन्य लोगों के संक्रमित ना होने की पुष्टि हुई थी। उसके ब्रिटेन से लौटने के बाद उसके नमूनों को आनुवंशिक विश्लेषण के लिए भेजा गया था। इस जांच में उसके वायरस के नए 'स्ट्रेन' से संक्रमित होने की पुष्टि हुई। उसकी रिपोर्ट दिल्ली के राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केन्द्र को भेजी गई है। गौरतलब है कि देश में वायरस के इस नए 'स्ट्रेन' के बीस मामले सामने आ चुके हैं। |
'आदिपुरुष' को 16 जून को हिंदी के साथ-साथ तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम भाषा में भी रिलीज किया जाएगा। अब तक ऐसा कहा जा रहा था कि फिल्म को IMAX फॉर्मेट में रिलीज किया जाएगा। लेकिन अब खबर है कि ऐसा नहीं होगा।
एंटरटेनमेंट डेस्क. प्रभास (Prabhas) और कृति सेनन (Kriti Sanon) स्टारर 'आदिपुरुष' (Adipurush) की रिलीज का इंतजार कर रहे दर्शकों के यह खबर निराशाजनक और झटका देने वाली खबर है। रिपोर्ट्स की मानें तो इस फिल्म को IMAX फ़ॉर्मेट में रिलीज नहीं किया जाएगा। फिल्म के मेकर्स ने यह फैसला लिया है। बताया जा रहा है कि इस फिल्म को अब सिर्फ 3D फॉर्मेट में रिलीज किया जाएगा। खास बात यह है कि पहले इसकी IMAX और 3D फॉर्मेट रिलीज बताकर ही इसे प्रमोट किया जा रहा था।
आदिपुरुष के जो पोस्टर्स रिलीज किए जा रहे हैं, उनमें भी अब इस बात का जिक्र नहीं है कि इस फिल्म को IMAX फॉर्मेट में रिलीज किया जाएगा। हालांकि, मेकर्स की ओर से अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है कि इस IMAX फॉर्मेट में रिलीज किया जाएगा या नहीं।
ओम राउत (Om Raut) के निर्देशन में बनी 'आदिपुरुष' का एक्शन ट्रेलर यानी फाइनल ट्रेलर 6 जून को तिरुपति से रिलीज किया गया था, जिसमें सीता हरण से लेकर राम-रावण युद्ध तक की झलक दिखाई गई थी। ट्रेलर को दर्शकों का जबर्दस्त रिस्पॉन्स मिला है। हालांकि, इसमें कई तरह के ब्लंडर भी देखने को मिले हैं। जैसे कि ट्रेलर में माता सीता को सफ़ेद साड़ी में दिखाया गया है। रावण कको रूद्राक्ष की माला तोड़ते दिखाया गया है। जिस लंका को सभी सोने की लंका के रूप में जानते हैं, उसे काली और अंधकारमाय दिखाया गया गया है। (पढ़ें पूरी खबर)
550 करोड़ रुपए के बजट में बनी 'आदिपुरुष'
आदिपुरुष का निर्माण भूषण कुमार ने अपने प्रोडक्शन हाउस टी-सीरीज के बैनर तले किया है। फिल्म पर लगभग 550 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। फिल्म एके डायरेक्टर ओम राउत हैं, जो इससे पहले अजय देवगन (Ajay Devgn) स्टारर ब्लॉकबस्टर फिल्म 'तान्हाजी : द अनसंग वॉरियर' का डायरेक्शन कर चुके हैं। फिल्म में प्रभास और कृति सेनन के अलावा सनी सिंह, (Sunny Singh) सैफ अली खान (Saif Ali Khan) और देवदत्त नागे (Devdatt Nage) की भी अहम भूमिका है। फिल्म 16 जून को हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम में रिलीज होगी।
| 'आदिपुरुष' को सोलह जून को हिंदी के साथ-साथ तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम भाषा में भी रिलीज किया जाएगा। अब तक ऐसा कहा जा रहा था कि फिल्म को IMAX फॉर्मेट में रिलीज किया जाएगा। लेकिन अब खबर है कि ऐसा नहीं होगा। एंटरटेनमेंट डेस्क. प्रभास और कृति सेनन स्टारर 'आदिपुरुष' की रिलीज का इंतजार कर रहे दर्शकों के यह खबर निराशाजनक और झटका देने वाली खबर है। रिपोर्ट्स की मानें तो इस फिल्म को IMAX फ़ॉर्मेट में रिलीज नहीं किया जाएगा। फिल्म के मेकर्स ने यह फैसला लिया है। बताया जा रहा है कि इस फिल्म को अब सिर्फ तीनD फॉर्मेट में रिलीज किया जाएगा। खास बात यह है कि पहले इसकी IMAX और तीनD फॉर्मेट रिलीज बताकर ही इसे प्रमोट किया जा रहा था। आदिपुरुष के जो पोस्टर्स रिलीज किए जा रहे हैं, उनमें भी अब इस बात का जिक्र नहीं है कि इस फिल्म को IMAX फॉर्मेट में रिलीज किया जाएगा। हालांकि, मेकर्स की ओर से अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है कि इस IMAX फॉर्मेट में रिलीज किया जाएगा या नहीं। ओम राउत के निर्देशन में बनी 'आदिपुरुष' का एक्शन ट्रेलर यानी फाइनल ट्रेलर छः जून को तिरुपति से रिलीज किया गया था, जिसमें सीता हरण से लेकर राम-रावण युद्ध तक की झलक दिखाई गई थी। ट्रेलर को दर्शकों का जबर्दस्त रिस्पॉन्स मिला है। हालांकि, इसमें कई तरह के ब्लंडर भी देखने को मिले हैं। जैसे कि ट्रेलर में माता सीता को सफ़ेद साड़ी में दिखाया गया है। रावण कको रूद्राक्ष की माला तोड़ते दिखाया गया है। जिस लंका को सभी सोने की लंका के रूप में जानते हैं, उसे काली और अंधकारमाय दिखाया गया गया है। पाँच सौ पचास करोड़ रुपए के बजट में बनी 'आदिपुरुष' आदिपुरुष का निर्माण भूषण कुमार ने अपने प्रोडक्शन हाउस टी-सीरीज के बैनर तले किया है। फिल्म पर लगभग पाँच सौ पचास करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। फिल्म एके डायरेक्टर ओम राउत हैं, जो इससे पहले अजय देवगन स्टारर ब्लॉकबस्टर फिल्म 'तान्हाजी : द अनसंग वॉरियर' का डायरेक्शन कर चुके हैं। फिल्म में प्रभास और कृति सेनन के अलावा सनी सिंह, सैफ अली खान और देवदत्त नागे की भी अहम भूमिका है। फिल्म सोलह जून को हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम में रिलीज होगी। |
- 10 min ago एयरपोर्ट पर जाकर हसीना ने कैमरे के सामने उतारे कपड़े, फिर पैंट भी नीचे करके बोलीं- 'अब अच्छा लग रहा है'
- 17 min ago इस हीरोइन ने खोले डर्टी फ़िल्म इंडस्ट्री के गंदे राज, कहा- मैं गंदी फिल्मों की एक्ट्रेस हूं और ये काम मेरे लिए.
Don't Miss!
रिद्धि डोगरा एक शानदार अदाकारा हैं और कहा जाता है कि वो वो लगातार कुछ अच्छे प्रोजेक्ट्स को लेकर बिजी हैं। उनको हाल ही में 'असुर 2' के सीक्वल में देखा गया था और उन्होने इसमें धमाका कर दिया था। रिद्धि ने इस शो में जो किरदार निभाया था वो एक सीबीआई ऑफिसर का था और इसमें उनका नाम नुसरत सईद है।
उनकी भूमिका को जनता और आलोचकों द्वारा समान रूप से सराहा गया था। जैसा कि अभिनेत्री असुर 2 में अपने प्रदर्शन के लिए मिल रहे प्यार और प्रशंसा का आनंद लेना जारी रखे हुए है, वह अपनी अगली रिलीज में पहले ही पहुंच चुकी है।
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रिद्धि डोगरा शानदार अदाकारा होने के साथ साथ काफी बोल्ड और सेक्सी भी हैं। जी हां, इस वक्त उनकी कुछ हॉट तस्वीरें खबरों का हिस्सा हैं और लगातार वायरल हो रही हैं। रिद्धि डोगरा के इंस्टाग्राम से उनकी तस्वीरें सामने आई हैं।
रिद्धि की पर्सनल लाइफ भी काफी चर्चा में रही है और ऐसा कहा जाता है कि वो काफी सीरियस है। रिद्धि डोगरा शादी कर चुकी हैं और उनका तलाक भी हो चुका है। कहा जाता रहा है कि वो आने वाले समय में फिर से किसी को जीवनसाथी बना सकती हैं। हालांकि उन्होने खुलासा नहीं किया है कि वो शख्स कौन होगा।
वर्कफ्रंट पर वो बद्तमीज दिल में लिज के किरदार में नजर आ रही हैं। रोमांटिक ड्रामा में उनकी जोड़ी उनके 'असुर' के सह-कलाकार बरुण सोबती के साथ है। कहा जा रहा है कि दोनों के बीच कुछ चल रहा है लेकिन इसमें कितनी सच्चाई है ये तो वक्त ही बताएगा। असुर में रिद्धि के अलावा अरसद वारसी भी लीड रोल में नजर आए हैं और उनका काम हमेशा की तरह सराहनीय है।
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| - दस मिनट ago एयरपोर्ट पर जाकर हसीना ने कैमरे के सामने उतारे कपड़े, फिर पैंट भी नीचे करके बोलीं- 'अब अच्छा लग रहा है' - सत्रह मिनट ago इस हीरोइन ने खोले डर्टी फ़िल्म इंडस्ट्री के गंदे राज, कहा- मैं गंदी फिल्मों की एक्ट्रेस हूं और ये काम मेरे लिए. Don't Miss! रिद्धि डोगरा एक शानदार अदाकारा हैं और कहा जाता है कि वो वो लगातार कुछ अच्छे प्रोजेक्ट्स को लेकर बिजी हैं। उनको हाल ही में 'असुर दो' के सीक्वल में देखा गया था और उन्होने इसमें धमाका कर दिया था। रिद्धि ने इस शो में जो किरदार निभाया था वो एक सीबीआई ऑफिसर का था और इसमें उनका नाम नुसरत सईद है। उनकी भूमिका को जनता और आलोचकों द्वारा समान रूप से सराहा गया था। जैसा कि अभिनेत्री असुर दो में अपने प्रदर्शन के लिए मिल रहे प्यार और प्रशंसा का आनंद लेना जारी रखे हुए है, वह अपनी अगली रिलीज में पहले ही पहुंच चुकी है। Zara Hatke Zara Bachke Box Office- दस दिन में इतने करोड़ कमाकर हिट हुई सारा और विकी की फिल्म! रिद्धि डोगरा शानदार अदाकारा होने के साथ साथ काफी बोल्ड और सेक्सी भी हैं। जी हां, इस वक्त उनकी कुछ हॉट तस्वीरें खबरों का हिस्सा हैं और लगातार वायरल हो रही हैं। रिद्धि डोगरा के इंस्टाग्राम से उनकी तस्वीरें सामने आई हैं। रिद्धि की पर्सनल लाइफ भी काफी चर्चा में रही है और ऐसा कहा जाता है कि वो काफी सीरियस है। रिद्धि डोगरा शादी कर चुकी हैं और उनका तलाक भी हो चुका है। कहा जाता रहा है कि वो आने वाले समय में फिर से किसी को जीवनसाथी बना सकती हैं। हालांकि उन्होने खुलासा नहीं किया है कि वो शख्स कौन होगा। वर्कफ्रंट पर वो बद्तमीज दिल में लिज के किरदार में नजर आ रही हैं। रोमांटिक ड्रामा में उनकी जोड़ी उनके 'असुर' के सह-कलाकार बरुण सोबती के साथ है। कहा जा रहा है कि दोनों के बीच कुछ चल रहा है लेकिन इसमें कितनी सच्चाई है ये तो वक्त ही बताएगा। असुर में रिद्धि के अलावा अरसद वारसी भी लीड रोल में नजर आए हैं और उनका काम हमेशा की तरह सराहनीय है। फिल्म सिटी में सांप ने दिए एक सौ पचास अंडे, वीडियो देख लोग बोले- 'नागिन सीरियल का बदला लेने आई है' Thai Couple Kiss- इतने घंटों तक लगातार किस करता रहा ये कपल, आज तक के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त! |
प्रधानमन्त्री पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड ने युएई के ४ दिने भ्रमण से फिर्ता होने के बाद मन्त्रिपरिषद् विस्तार करने कि बात कहा है । प्रधानमन्त्री का प्रमुख राजनीतिक सल्लाहकार ने बताया है कि चौथा बड़ा दल राप्रपा को तीन मन्त्रालय तथा फोरम लोकतान्त्रिक को दो और छोटे दो दलों को भी सहभागी कर मन्त्रिपरिषद् विस्तार करने कि तैयारी में हैं प्रधान मंत्री ।
राप्रपा और फोरम लोकतान्त्रिक के अध्यक्ष को भी सरकार मे सहभागी कराने के लिए प्रधानमन्त्री ने सरकार विस्तार की तैयारी करने कि बात प्रमुख राजनीतिक सल्लाहकार ने बताया । मिली जानकारी अनुसार प्रधानमन्त्री ने राप्रपा को फिलहाल दो मन्त्रालय कायम रखाते ही उपप्रधान मन्त्री सहित तीन मन्त्रालय देने मे तैयार रहा हैं ।
फोरम लोकतान्त्रिक को भी उपप्रधान मन्त्री सहित दो और छोटे दो दलों को एक-एक मन्त्रालय देने मे प्रधानमन्त्री तैयारी में है । लेकिन , कौन- कौन मन्त्रालय किसको देना है वो अभी तक निश्चित नहीं हुआ हैं ।
| प्रधानमन्त्री पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड ने युएई के चार दिने भ्रमण से फिर्ता होने के बाद मन्त्रिपरिषद् विस्तार करने कि बात कहा है । प्रधानमन्त्री का प्रमुख राजनीतिक सल्लाहकार ने बताया है कि चौथा बड़ा दल राप्रपा को तीन मन्त्रालय तथा फोरम लोकतान्त्रिक को दो और छोटे दो दलों को भी सहभागी कर मन्त्रिपरिषद् विस्तार करने कि तैयारी में हैं प्रधान मंत्री । राप्रपा और फोरम लोकतान्त्रिक के अध्यक्ष को भी सरकार मे सहभागी कराने के लिए प्रधानमन्त्री ने सरकार विस्तार की तैयारी करने कि बात प्रमुख राजनीतिक सल्लाहकार ने बताया । मिली जानकारी अनुसार प्रधानमन्त्री ने राप्रपा को फिलहाल दो मन्त्रालय कायम रखाते ही उपप्रधान मन्त्री सहित तीन मन्त्रालय देने मे तैयार रहा हैं । फोरम लोकतान्त्रिक को भी उपप्रधान मन्त्री सहित दो और छोटे दो दलों को एक-एक मन्त्रालय देने मे प्रधानमन्त्री तैयारी में है । लेकिन , कौन- कौन मन्त्रालय किसको देना है वो अभी तक निश्चित नहीं हुआ हैं । |
एक्सचेंज4मीडिया समूह अंग्रेजी मीडिया जगत से जुड़े 40 साल से कम उम्र वाले 40 प्रतिभाशाली पत्रकारों को सम्मानित करने के लिए English Journalism 40 under 40 कार्यक्रम का आयोजन करने जा रहा है।
पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति ओम थानवी और संस्कृत विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अनुला मौर्या ने इस पर हस्ताक्षर किए और समझौता पत्र एक-दूसरे को हस्तांतरित किए ।
आजतक से एक बड़ी खबर सामने आयी है। दरअसल यहां वरिष्ठ पत्रकार अनुज खरे को नियुक्त किया गया है।
एचटी मीडिया में शामिल होने से पहले, देसाई ने फेसबुक के साथ चार वर्षों से भी ज्यादा समय तक पार्टनर सॉल्यूशंस इंडिया के हेड के तौर पर काम कर चुके हैं।
प्रो. दहिया का मानना है कि भारतीय छात्रवृत्ति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
टेक कंपनी गूगल ने गुरुवार को देश में स्वतंत्र स्थानीय या एकल विषय पर केंद्रित पत्रकारिता संगठनों के लिए एक प्रोत्साहन कार्यक्रम की घोषणा की।
नए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून की बड़ी कीमत एक अखबार को चुकानी पड़ी है। उसके बोर्ड के सभी सदस्य इस्तीफा देंगे और एम्प्लॉयीज को वेतन देने के लिए संपत्तियों को बेचने की योजना है।
भारत में ऑनलाइन शिक्षा की नई और चुनौतीभरी दुनिया में आवश्यकता, आविष्कार की या कहें कि नवाचार की जननी बन गई है।
देश में निजी टेलिविजन न्यूज चैनल्स का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह 'न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन' (NBA) ने अपना नाम बदलकर अब 'न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन' (NBDA) रख लिया है।
एबीपी नेटवर्क के सीईओ अविनाश पांडेय के अनुसार, स्थानीय अर्थव्यवस्था के उदय होने से पिछले कुछ वर्षों में रीजनल न्यूज में काफी बढ़ोतरी हुई है और इस क्षेत्र में निवेश का यह सबसे सही समय है।
पूर्वोत्तर (नॉर्थ ईस्ट) क्षेत्र के नौ डिजिटल मीडिया समूह ने मिलकर एक नया संगठन 'नैडकॉम' (NADCOM) बनाया है।
एनबीए बोर्ड का मानना है कि नए नाम से पता चलेगा कि डिजिटल मीडिया पब्लिशर्स भी इसके सदस्यों मे शामिल हैं।
प्रोफेसर सुरभि दहिया ने समाचार4मीडिया से बातचीत में अपने जीवन, परिवार और आने वाली किताब को लेकर चर्चा की है।
'न्यू मीडिया कम्युनिकेशन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। मल्टीमीडिया, ग्राफिक्स, एनिमेशन, प्रिंटिंग और पैकेजिंग आज मीडिया कंटेंट को बदल रहे हैं।
| एक्सचेंजचारमीडिया समूह अंग्रेजी मीडिया जगत से जुड़े चालीस साल से कम उम्र वाले चालीस प्रतिभाशाली पत्रकारों को सम्मानित करने के लिए English Journalism चालीस under चालीस कार्यक्रम का आयोजन करने जा रहा है। पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति ओम थानवी और संस्कृत विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अनुला मौर्या ने इस पर हस्ताक्षर किए और समझौता पत्र एक-दूसरे को हस्तांतरित किए । आजतक से एक बड़ी खबर सामने आयी है। दरअसल यहां वरिष्ठ पत्रकार अनुज खरे को नियुक्त किया गया है। एचटी मीडिया में शामिल होने से पहले, देसाई ने फेसबुक के साथ चार वर्षों से भी ज्यादा समय तक पार्टनर सॉल्यूशंस इंडिया के हेड के तौर पर काम कर चुके हैं। प्रो. दहिया का मानना है कि भारतीय छात्रवृत्ति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा दिया जाना चाहिए। टेक कंपनी गूगल ने गुरुवार को देश में स्वतंत्र स्थानीय या एकल विषय पर केंद्रित पत्रकारिता संगठनों के लिए एक प्रोत्साहन कार्यक्रम की घोषणा की। नए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून की बड़ी कीमत एक अखबार को चुकानी पड़ी है। उसके बोर्ड के सभी सदस्य इस्तीफा देंगे और एम्प्लॉयीज को वेतन देने के लिए संपत्तियों को बेचने की योजना है। भारत में ऑनलाइन शिक्षा की नई और चुनौतीभरी दुनिया में आवश्यकता, आविष्कार की या कहें कि नवाचार की जननी बन गई है। देश में निजी टेलिविजन न्यूज चैनल्स का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह 'न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन' ने अपना नाम बदलकर अब 'न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन' रख लिया है। एबीपी नेटवर्क के सीईओ अविनाश पांडेय के अनुसार, स्थानीय अर्थव्यवस्था के उदय होने से पिछले कुछ वर्षों में रीजनल न्यूज में काफी बढ़ोतरी हुई है और इस क्षेत्र में निवेश का यह सबसे सही समय है। पूर्वोत्तर क्षेत्र के नौ डिजिटल मीडिया समूह ने मिलकर एक नया संगठन 'नैडकॉम' बनाया है। एनबीए बोर्ड का मानना है कि नए नाम से पता चलेगा कि डिजिटल मीडिया पब्लिशर्स भी इसके सदस्यों मे शामिल हैं। प्रोफेसर सुरभि दहिया ने समाचारचारमीडिया से बातचीत में अपने जीवन, परिवार और आने वाली किताब को लेकर चर्चा की है। 'न्यू मीडिया कम्युनिकेशन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। मल्टीमीडिया, ग्राफिक्स, एनिमेशन, प्रिंटिंग और पैकेजिंग आज मीडिया कंटेंट को बदल रहे हैं। |
इंटेलिजेंस एजेंसियों ने एक चेतावनी में बताया है कि जैश के 8-10 आतंकी जम्मू कश्मीर के निकट वायुसेना के बेस पर हमले की फिराक में हैं। समाचार एजेंसी एएनआई ने शीर्ष सरकारी सूत्रों के हवाले से ये खबर दी है।
जम्मू कश्मीर के आर्टिकल 370 खत्म किए जाने के बाद जैश-ए-मोहम्मद एक बड़े हमले की साजिश कर रहा है। बुधवार को इंटेलिजेंस एजेंसियों ने एक चेतावनी में बताया है कि जैश के 8-10 आतंकी जम्मू कश्मीर के निकट वायुसेना के बेस पर हमले की फिराक में हैं। समाचार एजेंसी एएनआई ने शीर्ष सरकारी सूत्रों के हवाले से ये खबर दी है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक भारतीय वायुसेना के श्रीनगर, अवंतीपुरा, जम्मू, पठानकोट, हिंडोन बेस को हाई अलर्ट पर रखा गया है। वरिष्ठ अधिकारी सुरक्षा पर 24 घंटे नजर बनाए हुए हैं। यह अलर्ड जैश आतंकियों की गतिविधियों के बाद जारी किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक जैश ने पीएम नरेंद्र मोदी और एनएसए डोभाल को भी निशाने पर रखा है। बताया जा रहा है कि आईएसआई के साथ मिलकर जैश एक स्पेशल स्क्वॉड बना रहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक एक सनसनीखेज हमले को अंजाम देने के लिए जैश और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने हाथ मिला लिया है।
TOI की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय इंटेलिजेंस एजेंसी ने जैश के शमशेर वानी का एक इनपुट हासिल किया जिसमें सितंबर में एक बड़े हमले की योजना बनाई जा रही है। खतरे को देखते हुए 30 शहरों की पुलिस को अलर्ट भेज दिया गया है जिसमें जम्मू, अमृतसर, पठानकोट, जयपुर, गांधीनगर, कानपुर और लखनऊ शामिल हैं।
गौरतलब है कि बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद जैश-ए-मोहम्मद बदला लेना चाहता था। आर्टिकल 370 खत्म किए जाने के बाद जैश ने और बड़े हमले की योजना बनाना शुरू कर दिया है। पांच अगस्त के बाद से वो फिदायीन भेजने की कोशिश कर रहा है।
पाकिस्तान की बॉर्डर एक्शन टीम के सहयोग से आत्मघाती हमलावरों का एक बड़ा जत्था भारत में 12-13 सितंबर की रात को घुसने की फिराक में थे लेकिन भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने उनके इस इरादे को विफल कर दिया।
| इंटेलिजेंस एजेंसियों ने एक चेतावनी में बताया है कि जैश के आठ-दस आतंकी जम्मू कश्मीर के निकट वायुसेना के बेस पर हमले की फिराक में हैं। समाचार एजेंसी एएनआई ने शीर्ष सरकारी सूत्रों के हवाले से ये खबर दी है। जम्मू कश्मीर के आर्टिकल तीन सौ सत्तर खत्म किए जाने के बाद जैश-ए-मोहम्मद एक बड़े हमले की साजिश कर रहा है। बुधवार को इंटेलिजेंस एजेंसियों ने एक चेतावनी में बताया है कि जैश के आठ-दस आतंकी जम्मू कश्मीर के निकट वायुसेना के बेस पर हमले की फिराक में हैं। समाचार एजेंसी एएनआई ने शीर्ष सरकारी सूत्रों के हवाले से ये खबर दी है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक भारतीय वायुसेना के श्रीनगर, अवंतीपुरा, जम्मू, पठानकोट, हिंडोन बेस को हाई अलर्ट पर रखा गया है। वरिष्ठ अधिकारी सुरक्षा पर चौबीस घंटाटे नजर बनाए हुए हैं। यह अलर्ड जैश आतंकियों की गतिविधियों के बाद जारी किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक जैश ने पीएम नरेंद्र मोदी और एनएसए डोभाल को भी निशाने पर रखा है। बताया जा रहा है कि आईएसआई के साथ मिलकर जैश एक स्पेशल स्क्वॉड बना रहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक एक सनसनीखेज हमले को अंजाम देने के लिए जैश और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने हाथ मिला लिया है। TOI की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय इंटेलिजेंस एजेंसी ने जैश के शमशेर वानी का एक इनपुट हासिल किया जिसमें सितंबर में एक बड़े हमले की योजना बनाई जा रही है। खतरे को देखते हुए तीस शहरों की पुलिस को अलर्ट भेज दिया गया है जिसमें जम्मू, अमृतसर, पठानकोट, जयपुर, गांधीनगर, कानपुर और लखनऊ शामिल हैं। गौरतलब है कि बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद जैश-ए-मोहम्मद बदला लेना चाहता था। आर्टिकल तीन सौ सत्तर खत्म किए जाने के बाद जैश ने और बड़े हमले की योजना बनाना शुरू कर दिया है। पांच अगस्त के बाद से वो फिदायीन भेजने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान की बॉर्डर एक्शन टीम के सहयोग से आत्मघाती हमलावरों का एक बड़ा जत्था भारत में बारह-तेरह सितंबर की रात को घुसने की फिराक में थे लेकिन भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने उनके इस इरादे को विफल कर दिया। |
वर्क फ्रॉम होम हो या फिर वर्क फ्रॉम ऑफिस, दोनों में ही शरीर में थकावट मेहसूस होने लग जाती हैं. खासतौर पर डेस्क जॉब में आपके दिमाग और आंखो पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है. वहीं, लैपटॉप और स्मार्टफोन पर दिक्कत और भी बढ़ जाती है. अगर आपको थकावट के साथ-साथ हमेशा बॉडी में दर्द की परेशानी भी रहती है, तो फिर आप शवासन को करना प्रारंभ कर दें.
-शवासन में बस लेटने की आवश्यकता होती है. सर्वप्रथम घर का वह कोना तलाशें जहां शांति मौजूद हैं.
-अब वहां एक आसन या चटाई को बिछा लें और पीठ के बल लेट जाएं.
-दोनों हाथों को बॉडी से कम से कम पांच इंच की दूरी पर करें.
-दोनों पैरों के बीच में भी कम से कम एक फुट की दूरी रखें.
-हथेलियों को आसमान की और रखें और इसके बाद हाथों को ढ़ीला छोड़ दें.
-बॉडी को ढीला छोड़ दें.
-इसके बाद आंखों को बंद कर लें. अब धीरे-धीरे सांस लें.
-पूरा ख्याल अब अपनी सांसों पर केंद्रित करें.
-जैसा कि प्रारंभ में ही बताया गया यह आसन टेंशन को दूर कर देता है.
-उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मनोविकार, दिल की बीमारी वगैरह में भी इस योगासन से फायदा होता है.
-इस योगासन से बॉडी की थकान भी दूर हो जाती है और मन को शांति मिल जाती है.
-शवासन करने से याददाश्त, एकाग्रशक्ति भी तेजी से बढ़ जाती है.
| वर्क फ्रॉम होम हो या फिर वर्क फ्रॉम ऑफिस, दोनों में ही शरीर में थकावट मेहसूस होने लग जाती हैं. खासतौर पर डेस्क जॉब में आपके दिमाग और आंखो पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है. वहीं, लैपटॉप और स्मार्टफोन पर दिक्कत और भी बढ़ जाती है. अगर आपको थकावट के साथ-साथ हमेशा बॉडी में दर्द की परेशानी भी रहती है, तो फिर आप शवासन को करना प्रारंभ कर दें. -शवासन में बस लेटने की आवश्यकता होती है. सर्वप्रथम घर का वह कोना तलाशें जहां शांति मौजूद हैं. -अब वहां एक आसन या चटाई को बिछा लें और पीठ के बल लेट जाएं. -दोनों हाथों को बॉडी से कम से कम पांच इंच की दूरी पर करें. -दोनों पैरों के बीच में भी कम से कम एक फुट की दूरी रखें. -हथेलियों को आसमान की और रखें और इसके बाद हाथों को ढ़ीला छोड़ दें. -बॉडी को ढीला छोड़ दें. -इसके बाद आंखों को बंद कर लें. अब धीरे-धीरे सांस लें. -पूरा ख्याल अब अपनी सांसों पर केंद्रित करें. -जैसा कि प्रारंभ में ही बताया गया यह आसन टेंशन को दूर कर देता है. -उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मनोविकार, दिल की बीमारी वगैरह में भी इस योगासन से फायदा होता है. -इस योगासन से बॉडी की थकान भी दूर हो जाती है और मन को शांति मिल जाती है. -शवासन करने से याददाश्त, एकाग्रशक्ति भी तेजी से बढ़ जाती है. |
मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) ने अपने पहले ही प्रयास में नैक का ए ग्रेड प्रमाण पत्र हासिल कर लिया है। । इस सफलता को पाने वाला MMMUT राज्य का पहला विश्वविद्यालय है।
मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) ने अपने पहले ही प्रयास में नैक का ए ग्रेड प्रमाण पत्र हासिल कर लिया है। । इस सफलता को पाने वाला MMMUT राज्य का पहला विश्वविद्यालय है। इस मौके पर कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि नैक प्रमाणपत्र हासिल करने में एमएमएमयूटी सूबे के तकनीकी विश्वविद्यालयों में भी अव्वल है। हालांकि विश्वविद्यालय को यहां पर विराम नहीं लेना है। यह सिर्फ सफलता की पहली सीढ़ी है। विश्वविद्यालय को वर्ल्ड रैंकिंग में शामिल होने का प्रयास करना है। इसके लिए बेहतर गुणवत्ता युक्त शिक्षा और नवाचार को प्रोत्साहित करना पड़ेगा।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल सोमवार को विश्वविद्यालय के सातवें दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता कर रही थीं। इस दौरान उन्होंने कहा कि 25 साल बाद देश आजादी का 100वां साल मनाएगा। आज के छात्र उस समय देश की कमान संभाल रहे होंगे। ऐसे में इस दौर के छात्रों के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी है। आने वाले कल के ये छात्र भावी कर्णधार हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा पद्धति में गुरु और माता-पिता का स्थान सर्वोच्च है। अच्छी शिक्षा पाने वाले छात्रों को माता-पिता की सेवा में कमी नहीं करनी चाहिए। इस देश में वृद्धाश्रम नहीं होना चाहिए। यह हमारी शिक्षा पद्धति नहीं है। यह समाज का कुरूप चेहरा दिखाता है।
आगरा विश्वविद्यालय में हुई घटना का असर कुलाधिपति के भाषण में भी दिखा। उन्होंने छात्र नेताओं से नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि छात्र नेता विश्वविद्यालय को आगे बढ़ाने के बजाय बर्बाद करने पर तूले हैं। ज्यादातर छात्र नेताओं का शिक्षा से कोई वास्ता नहीं रह गया है। वह चंद युवाओं की नुमाइंदगी कर अपना उल्लू सीधा करते हैं। इसे नियंत्रित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आगरा विश्वविद्यालय में हुई घटना में शामिल छात्र नेताओं खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
दीक्षांत में बतौर मुख्य अतिथि एमजी मोटर्स के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक राजीव चाबा मौजूद रहे। वह एमएमएमयूटी के 1984 बैच के मैकेनिकल इंजीनियर रह चुके हैं। उन्होंने कहा, "समय बदल रहा है, महिलाएं औद्योगिक विकास की श्रेष्ठ सहयोगी बन चुकी है। कोई भी कंपनी तब तक प्रगति नहीं कर सकती जब तक उसमें महिलाओं की भागीदारी न हो। इसलिए हमने अपनी कंपनी में 30 प्रतिशत महिलाओं को नौकरी दी। अब महिलाओं की संख्या बढ़कर 37 फीसदी हो गई है। इसे 50 फीसदी करने का लक्ष्य है। "
राजीव चाबा ने छात्रों से कहा कि उन्हें लड़कियों के साथ कैसे काम करना है ये सीखना चाहिए। उन्होंने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कि किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए पांच मंत्र हैं। इसमें भरोसेमंद, बहुआयामी, उपयोगी, मेहनती और सतत प्रयत्नशील शामिल है। विद्यार्थी इन पांच मंत्रों को जीवन में उतार लेगा उसकी सफलता निश्चित हो जाएगी। उन्होंने कहा कि गुजरात के हल्लौर में कंपनी की शाखा है। जब नरेंद्र मोदी वहां के मुख्यमंत्री थे तब उनके साथ काम किया। उनके साथ मैं कोरिया जापान भी गया।
एमजी मोटर के अध्यक्ष ने अपने भाषण में कि ऐसी छात्राएं जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और आगे पढ़ना चाहती हैं उनकी मदद किया जाएगा। इसके लिए उन्होंने दो लाख रुपये प्रति वर्ष फेलोशिप दी जाएगी। उन्होंने साफ किया यह फेलोशिप कंपनी की ओर से नहीं बल्कि उनकी ओर से है।
समारोह में विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद रहे प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशीष पटेल ने कहा कि दुनिया में चौथी क्रांति चल रही है। पहली रेल इंजन, दूसरा बल्ब और तीसरी क्रांति रेडियो का अविष्कार रहा। अब विश्व में डेटा साइंस के रूप में चौथी क्रांति चल रही है। हमें डेटा का अधिक से अधिक उपयोग कर नए-नए अविष्कार करना चाहिए।
विश्वविद्यालय में भी ड्रोन तकनीक व आर्टिफिशियल टेक्नोलाजी पर कार्य किया जा रहा है। प्राविधिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि आज वह समय है जब 18 सौ पार्ट वाले इंजन को चार में बदल दिया गया है। हमें छात्रों को ऐसी शिक्षा देने की जरूरत है, ताकि वह यहां से बाहर जाकर बेहतर कार्य करें। छात्रों को प्रायोगिक शिक्षा दें। मैं चाहूंगा कि विश्वविद्यालय यहां के छात्रों को माह में एक बार किताबी शिक्षा न देकर उन्हें किसी इंडस्ट्री में ले जाएं। वहां जाकर जब ये वहां की समस्याएं देखेंगे तो उसे दूर करने की दिशा में कार्य करेंगे।
| मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने अपने पहले ही प्रयास में नैक का ए ग्रेड प्रमाण पत्र हासिल कर लिया है। । इस सफलता को पाने वाला MMMUT राज्य का पहला विश्वविद्यालय है। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने अपने पहले ही प्रयास में नैक का ए ग्रेड प्रमाण पत्र हासिल कर लिया है। । इस सफलता को पाने वाला MMMUT राज्य का पहला विश्वविद्यालय है। इस मौके पर कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि नैक प्रमाणपत्र हासिल करने में एमएमएमयूटी सूबे के तकनीकी विश्वविद्यालयों में भी अव्वल है। हालांकि विश्वविद्यालय को यहां पर विराम नहीं लेना है। यह सिर्फ सफलता की पहली सीढ़ी है। विश्वविद्यालय को वर्ल्ड रैंकिंग में शामिल होने का प्रयास करना है। इसके लिए बेहतर गुणवत्ता युक्त शिक्षा और नवाचार को प्रोत्साहित करना पड़ेगा। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल सोमवार को विश्वविद्यालय के सातवें दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता कर रही थीं। इस दौरान उन्होंने कहा कि पच्चीस साल बाद देश आजादी का एक सौवां साल मनाएगा। आज के छात्र उस समय देश की कमान संभाल रहे होंगे। ऐसे में इस दौर के छात्रों के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी है। आने वाले कल के ये छात्र भावी कर्णधार हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा पद्धति में गुरु और माता-पिता का स्थान सर्वोच्च है। अच्छी शिक्षा पाने वाले छात्रों को माता-पिता की सेवा में कमी नहीं करनी चाहिए। इस देश में वृद्धाश्रम नहीं होना चाहिए। यह हमारी शिक्षा पद्धति नहीं है। यह समाज का कुरूप चेहरा दिखाता है। आगरा विश्वविद्यालय में हुई घटना का असर कुलाधिपति के भाषण में भी दिखा। उन्होंने छात्र नेताओं से नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि छात्र नेता विश्वविद्यालय को आगे बढ़ाने के बजाय बर्बाद करने पर तूले हैं। ज्यादातर छात्र नेताओं का शिक्षा से कोई वास्ता नहीं रह गया है। वह चंद युवाओं की नुमाइंदगी कर अपना उल्लू सीधा करते हैं। इसे नियंत्रित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आगरा विश्वविद्यालय में हुई घटना में शामिल छात्र नेताओं खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। दीक्षांत में बतौर मुख्य अतिथि एमजी मोटर्स के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक राजीव चाबा मौजूद रहे। वह एमएमएमयूटी के एक हज़ार नौ सौ चौरासी बैच के मैकेनिकल इंजीनियर रह चुके हैं। उन्होंने कहा, "समय बदल रहा है, महिलाएं औद्योगिक विकास की श्रेष्ठ सहयोगी बन चुकी है। कोई भी कंपनी तब तक प्रगति नहीं कर सकती जब तक उसमें महिलाओं की भागीदारी न हो। इसलिए हमने अपनी कंपनी में तीस प्रतिशत महिलाओं को नौकरी दी। अब महिलाओं की संख्या बढ़कर सैंतीस फीसदी हो गई है। इसे पचास फीसदी करने का लक्ष्य है। " राजीव चाबा ने छात्रों से कहा कि उन्हें लड़कियों के साथ कैसे काम करना है ये सीखना चाहिए। उन्होंने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कि किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए पांच मंत्र हैं। इसमें भरोसेमंद, बहुआयामी, उपयोगी, मेहनती और सतत प्रयत्नशील शामिल है। विद्यार्थी इन पांच मंत्रों को जीवन में उतार लेगा उसकी सफलता निश्चित हो जाएगी। उन्होंने कहा कि गुजरात के हल्लौर में कंपनी की शाखा है। जब नरेंद्र मोदी वहां के मुख्यमंत्री थे तब उनके साथ काम किया। उनके साथ मैं कोरिया जापान भी गया। एमजी मोटर के अध्यक्ष ने अपने भाषण में कि ऐसी छात्राएं जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और आगे पढ़ना चाहती हैं उनकी मदद किया जाएगा। इसके लिए उन्होंने दो लाख रुपये प्रति वर्ष फेलोशिप दी जाएगी। उन्होंने साफ किया यह फेलोशिप कंपनी की ओर से नहीं बल्कि उनकी ओर से है। समारोह में विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद रहे प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशीष पटेल ने कहा कि दुनिया में चौथी क्रांति चल रही है। पहली रेल इंजन, दूसरा बल्ब और तीसरी क्रांति रेडियो का अविष्कार रहा। अब विश्व में डेटा साइंस के रूप में चौथी क्रांति चल रही है। हमें डेटा का अधिक से अधिक उपयोग कर नए-नए अविष्कार करना चाहिए। विश्वविद्यालय में भी ड्रोन तकनीक व आर्टिफिशियल टेक्नोलाजी पर कार्य किया जा रहा है। प्राविधिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि आज वह समय है जब अट्ठारह सौ पार्ट वाले इंजन को चार में बदल दिया गया है। हमें छात्रों को ऐसी शिक्षा देने की जरूरत है, ताकि वह यहां से बाहर जाकर बेहतर कार्य करें। छात्रों को प्रायोगिक शिक्षा दें। मैं चाहूंगा कि विश्वविद्यालय यहां के छात्रों को माह में एक बार किताबी शिक्षा न देकर उन्हें किसी इंडस्ट्री में ले जाएं। वहां जाकर जब ये वहां की समस्याएं देखेंगे तो उसे दूर करने की दिशा में कार्य करेंगे। |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
दुर्ग छत्तीसगढ़ प्रान्त के 27 जिलो मे तीसरा सबसे बड़ा जिला है। दुर्ग जिले के मुख्य शहर भिलाई और दुर्ग को सम्मिलित रूप से टि्वन सिटी कहा जाता है। भिलाई में लौह इस्पात संयंत्र की स्थापना के साथ ही दुर्ग का महत्व काफी बढ़ गया। शिवनाथ नदी के पूर्वी तट पर स्थित दुर्ग शहर के बीचोबीच से राष्ट्रीय राजमार्ग ६ (कोलकाता-मुंबई) गुजरती है। टि्वनसिटी के तौर पर दुर्ग-भिलाई शैक्षणिक और खेल केंद्र के रूप में न केवल प्रदेश में बल्कि देश में अपना स्थान रखता है। श्रेणीःछत्तीसगढ़ के नगर. शनिवार वाड़ा (अंग्रेजीःShaniwarwada) (Śanivāravāḍā) भारत के महाराष्ट्र राज्य के पुणे ज़िले में स्थित एक दुर्ग है जिनका निर्माण १८वीं सदी में १७४६ में किया था। यह मराठा पेशवाओं की सीट थी। जब मराठाओं ने ईस्ट इंडिया कम्पनी से नियंत्रण खो दिया तो तीसरा आंग्ल-मराठा युद्ध हुआ था तब मराठों ने इसका निर्माण करवाया था। दुर्ग खुद को काफी हद तक एक अस्पष्टीकृत आग से १८३८ में नष्ट हो गया था, लेकिन जीवित संरचनाएंअब एक पर्यटक स्थल के रूप में स्थित है। मराठा साम्राज्य में पेशवा बाजीराव जो कि छत्रपति शाहु के प्रधान (पेशवा) थे इन्होंने ने ही शनिवार वाड़ा का निर्माण करवाया था। शनिवार वाड़ा का मराठी में मतलब शनिवार (शनिवार/Saturday) तथा वाड़ा का मतलब टीक होता है। .
दुर्ग और शनिवार वाड़ा आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)।
दुर्ग 7 संबंध है और शनिवार वाड़ा 13 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (7 + 13)।
यह लेख दुर्ग और शनिवार वाड़ा के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
| शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। दुर्ग छत्तीसगढ़ प्रान्त के सत्ताईस जिलो मे तीसरा सबसे बड़ा जिला है। दुर्ग जिले के मुख्य शहर भिलाई और दुर्ग को सम्मिलित रूप से टि्वन सिटी कहा जाता है। भिलाई में लौह इस्पात संयंत्र की स्थापना के साथ ही दुर्ग का महत्व काफी बढ़ गया। शिवनाथ नदी के पूर्वी तट पर स्थित दुर्ग शहर के बीचोबीच से राष्ट्रीय राजमार्ग छः गुजरती है। टि्वनसिटी के तौर पर दुर्ग-भिलाई शैक्षणिक और खेल केंद्र के रूप में न केवल प्रदेश में बल्कि देश में अपना स्थान रखता है। श्रेणीःछत्तीसगढ़ के नगर. शनिवार वाड़ा भारत के महाराष्ट्र राज्य के पुणे ज़िले में स्थित एक दुर्ग है जिनका निर्माण अट्ठारहवीं सदी में एक हज़ार सात सौ छियालीस में किया था। यह मराठा पेशवाओं की सीट थी। जब मराठाओं ने ईस्ट इंडिया कम्पनी से नियंत्रण खो दिया तो तीसरा आंग्ल-मराठा युद्ध हुआ था तब मराठों ने इसका निर्माण करवाया था। दुर्ग खुद को काफी हद तक एक अस्पष्टीकृत आग से एक हज़ार आठ सौ अड़तीस में नष्ट हो गया था, लेकिन जीवित संरचनाएंअब एक पर्यटक स्थल के रूप में स्थित है। मराठा साम्राज्य में पेशवा बाजीराव जो कि छत्रपति शाहु के प्रधान थे इन्होंने ने ही शनिवार वाड़ा का निर्माण करवाया था। शनिवार वाड़ा का मराठी में मतलब शनिवार तथा वाड़ा का मतलब टीक होता है। . दुर्ग और शनिवार वाड़ा आम में शून्य बातें हैं । दुर्ग सात संबंध है और शनिवार वाड़ा तेरह है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख दुर्ग और शनिवार वाड़ा के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः |
चर्चा में क्यों?
1 नवंबर, 2023 को रेलवे बोर्ड की अतिरिक्त सदस्य (वित्त) सौम्या माथुर ने पूर्वोत्तर रेलवे (एनईआर) की पहली महिला महाप्रबंधक के रूप में अपना पदभार ग्रहण किया।
- पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक चंद्रवीर रमण का तबादला हो जाने के कारण उनकी जगह पर सौम्या माथुर को कैबिनेट की नियुक्ति समिति की मंज़ूरी के बाद रेलवे बोर्ड ने पूर्वोत्तर रेलवे का नया महाप्रबंधक नियुक्त किया है।
- सौम्या माथुर पूर्वोत्तर रेलवे की प्रथम महिला महाप्रबंधक हैं, 1952 में इसके गठन के बाद अब तक किसी महिला अधिकारी को एनईआर का महाप्रबंधक नहीं बनाया गया था।
- एनईआर की नई जीएम सौम्या माथुर ने भारतीय रेल लेखा सेवा (आईआरएएस) के 1987 बैच के माध्यम से रेल सेवा में प्रवेश किया। पहली नियुक्ति वडोदरा, पश्चिम रेलवे में हुई। इन्होंने पश्चिम, उत्तर एवं मध्य रेलवे में लेखा विभाग के अनेक महत्त्वपूर्ण पदों पर काम किया है।
- इसके अलावा वह अपर मंडल रेल प्रबंधक, पश्चिम रेलवे/मुंबई सेंट्रल, मंडल रेल प्रबंधक, उत्तर पश्चिम रेलवे/जयपुर, प्रधान वित्त सलाहकार/मेट्रो रेलवे/कोलकाता तथा प्रधान वित्त सलाहकार/दक्षिण पूर्व रेलवे/कोलकाता जैसे महत्त्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुकी हैं।
- उन्होंने मंडल रेल प्रबंधक जयपुर के रूप में भी कार्य किया है। इनके कार्यकाल में जयपुर स्टेशन को प्लैटिनम ग्रीन रेटिंग मिला था।
- सौम्या माथुर ने गांधीनगर-जयपुर रूट को पूर्ण रूप से महिला मुख्य लाइन स्टेशन के रूप में भी सफलतापूर्वक संचालित कराया। रेलवे बोर्ड द्वारा बदलाव की पहल के लिये इन्हें बेस्ट चेंज एजेंट फॉर ट्रांसफॉर्मेशन इनिशिएटिव का विशेष पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके अलावा इन्होंने जेआईसीए (जापान), आईएनएसईएडी (सिंगापुर) एवं आईसीएलआईएफ (मलेशिया) में उच्च प्रबंधक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लिया है।
- उल्लेखनीय है कि पूर्वोत्तर रेलवे 14 अप्रैल, 1952 को अस्तित्व में आया था। अवध तिरहुत रेलवे, असम रेलवे और पुरानी बीबी एंड सीआई रेलवे के फतेहगढ़ ज़िले को मिलाकर इसका गठन किया गया। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने इसका उद्घाटन किया था।
- 15 जनवरी, 1958 को उत्तर-पूर्व सीमांत रेलवे का गठन किया गया। इसके बाद पूर्वोत्तर रेलवे का मुख्यालय गोरखपुर को बनाया गया। वर्तमान में पूर्वोत्तर रेलवे में तीन मंडल हैं, जिनके मुख्यालय वाराणसी, लखनऊ और इज्जतनगर हैं।
चर्चा में क्यों?
31 अक्तूबर, 2023 को पटना के नॉलेजग्राम कैंपस में सीबीएसई ईस्ट ज़ोन जूडो चैंपियनशिप संपन्न हुआ, जिसमें पटना के छात्र श्वेतांक ने बेस्ट जुडोका अवार्ड अपने नाम किया।
- सीबीएसई ज़ोनल जूडो चैंपियनशिप में बेस्ट जुडोका अवार्ड (छात्रा) पर उत्तर प्रदेश की छात्रा अदिति शर्मा ने कब्जा जमाया।
- विदित हो कि 28 से 31 अक्तूबर, 2023 तक पटना के नॉलेजग्राम कैंपस में सीबीएसई ईस्ट ज़ोन जूडो चैंपियनशिप का आयोजन किया गया।
- जूडो चैंपियनशिप में 49 KG भार वर्ग में प्रतियोगिताएँ संपन्न हुईं। कुल 392 मेडल्स (स्वर्ण, रजत एवं काँस्य पदक) वितरित किये गए।
- चैंपियनशिप की विशिष्ट वैजयंतियों के विजेता :
चर्चा में क्यों?
31 अक्तूबर, 2023 को हरियाणा के शहरी स्थानीय निकाय मंत्री डॉ. कमल गुप्ता ने पत्रकारवार्ता में कहा कि हरियाणा पूरे देश में प्रॉपर्टी आईडी लागू करने वाला पहला राज्य है।
- डॉ. कमल गुप्ता ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल की 'क्रीएशन ऑफ न्यू प्रॉपर्टी-आईडी अंडर नॉर्मल एंड तत्काल स्कीम' की सराहना की और इसे अन्य राज्यों को अपनाने का सुझाव भी दिया।
- डॉ. गुप्ता ने प्रॉपर्टी आईडी के संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि लाल डोरे के अंदर आने वाली 34 लाख प्रॉपर्टीज़ को इंटिग्रेट कर नई प्रॉपर्टी आईडी में सम्मिलित किया गया और नई प्रॉपर्टी आईडी बनाई गई है। अब रजिस्ट्री ऑटोमेटिक प्रॉपर्टी आईडी डाटा में चढ़ाई जा सकती है।
- उन्होंने कहा कि अब तक 2274 अनधिकृत कॉलोनियों में से 494 को अधिकृत कर दिया गया है तथा अन्य पर कार्य चल रहा है। 31 जनवरी, 2024 तक लगभग 850 कॉलोनियों को अधिकृत कर दिया जाएगा।
- डॉ. गुप्ता ने बताया कि स्वामित्व योजना के तहत 31 दिसंबर, 2020 को 20 वर्ष पूरे होने वाले दुकानदारों को मालिकाना हक दिलाने का कार्य भी शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने किया है।
- मंत्री ने बताया कि प्रॉपर्टी से संबंधित कोई भी सूचना एसएमएस के माध्यम से शहरी स्थानीय निकाय के नागरिकों को भेज सकते हैं।
- डॉ. गुप्ता ने कहा कि वर्ष 2023-24 के प्रॉपर्टी टैक्स की पूर्ण अदायगी करने पर सीमित समय के लिये छूट दी है, जो छूट 15 नवंबर, 2023 तक जारी रहेगी। अब प्रॉपर्टीधारक किसी भी प्रकार की त्रुटि के निवारण हेतु विभागीय पोर्टल पर स्वयं भी अपनी प्रॉपर्टी का डाटा सत्यापित कर सकते हैं।
| चर्चा में क्यों? एक नवंबर, दो हज़ार तेईस को रेलवे बोर्ड की अतिरिक्त सदस्य सौम्या माथुर ने पूर्वोत्तर रेलवे की पहली महिला महाप्रबंधक के रूप में अपना पदभार ग्रहण किया। - पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक चंद्रवीर रमण का तबादला हो जाने के कारण उनकी जगह पर सौम्या माथुर को कैबिनेट की नियुक्ति समिति की मंज़ूरी के बाद रेलवे बोर्ड ने पूर्वोत्तर रेलवे का नया महाप्रबंधक नियुक्त किया है। - सौम्या माथुर पूर्वोत्तर रेलवे की प्रथम महिला महाप्रबंधक हैं, एक हज़ार नौ सौ बावन में इसके गठन के बाद अब तक किसी महिला अधिकारी को एनईआर का महाप्रबंधक नहीं बनाया गया था। - एनईआर की नई जीएम सौम्या माथुर ने भारतीय रेल लेखा सेवा के एक हज़ार नौ सौ सत्तासी बैच के माध्यम से रेल सेवा में प्रवेश किया। पहली नियुक्ति वडोदरा, पश्चिम रेलवे में हुई। इन्होंने पश्चिम, उत्तर एवं मध्य रेलवे में लेखा विभाग के अनेक महत्त्वपूर्ण पदों पर काम किया है। - इसके अलावा वह अपर मंडल रेल प्रबंधक, पश्चिम रेलवे/मुंबई सेंट्रल, मंडल रेल प्रबंधक, उत्तर पश्चिम रेलवे/जयपुर, प्रधान वित्त सलाहकार/मेट्रो रेलवे/कोलकाता तथा प्रधान वित्त सलाहकार/दक्षिण पूर्व रेलवे/कोलकाता जैसे महत्त्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुकी हैं। - उन्होंने मंडल रेल प्रबंधक जयपुर के रूप में भी कार्य किया है। इनके कार्यकाल में जयपुर स्टेशन को प्लैटिनम ग्रीन रेटिंग मिला था। - सौम्या माथुर ने गांधीनगर-जयपुर रूट को पूर्ण रूप से महिला मुख्य लाइन स्टेशन के रूप में भी सफलतापूर्वक संचालित कराया। रेलवे बोर्ड द्वारा बदलाव की पहल के लिये इन्हें बेस्ट चेंज एजेंट फॉर ट्रांसफॉर्मेशन इनिशिएटिव का विशेष पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके अलावा इन्होंने जेआईसीए , आईएनएसईएडी एवं आईसीएलआईएफ में उच्च प्रबंधक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लिया है। - उल्लेखनीय है कि पूर्वोत्तर रेलवे चौदह अप्रैल, एक हज़ार नौ सौ बावन को अस्तित्व में आया था। अवध तिरहुत रेलवे, असम रेलवे और पुरानी बीबी एंड सीआई रेलवे के फतेहगढ़ ज़िले को मिलाकर इसका गठन किया गया। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने इसका उद्घाटन किया था। - पंद्रह जनवरी, एक हज़ार नौ सौ अट्ठावन को उत्तर-पूर्व सीमांत रेलवे का गठन किया गया। इसके बाद पूर्वोत्तर रेलवे का मुख्यालय गोरखपुर को बनाया गया। वर्तमान में पूर्वोत्तर रेलवे में तीन मंडल हैं, जिनके मुख्यालय वाराणसी, लखनऊ और इज्जतनगर हैं। चर्चा में क्यों? इकतीस अक्तूबर, दो हज़ार तेईस को पटना के नॉलेजग्राम कैंपस में सीबीएसई ईस्ट ज़ोन जूडो चैंपियनशिप संपन्न हुआ, जिसमें पटना के छात्र श्वेतांक ने बेस्ट जुडोका अवार्ड अपने नाम किया। - सीबीएसई ज़ोनल जूडो चैंपियनशिप में बेस्ट जुडोका अवार्ड पर उत्तर प्रदेश की छात्रा अदिति शर्मा ने कब्जा जमाया। - विदित हो कि अट्ठाईस से इकतीस अक्तूबर, दो हज़ार तेईस तक पटना के नॉलेजग्राम कैंपस में सीबीएसई ईस्ट ज़ोन जूडो चैंपियनशिप का आयोजन किया गया। - जूडो चैंपियनशिप में उनचास KG भार वर्ग में प्रतियोगिताएँ संपन्न हुईं। कुल तीन सौ बानवे मेडल्स वितरित किये गए। - चैंपियनशिप की विशिष्ट वैजयंतियों के विजेता : चर्चा में क्यों? इकतीस अक्तूबर, दो हज़ार तेईस को हरियाणा के शहरी स्थानीय निकाय मंत्री डॉ. कमल गुप्ता ने पत्रकारवार्ता में कहा कि हरियाणा पूरे देश में प्रॉपर्टी आईडी लागू करने वाला पहला राज्य है। - डॉ. कमल गुप्ता ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल की 'क्रीएशन ऑफ न्यू प्रॉपर्टी-आईडी अंडर नॉर्मल एंड तत्काल स्कीम' की सराहना की और इसे अन्य राज्यों को अपनाने का सुझाव भी दिया। - डॉ. गुप्ता ने प्रॉपर्टी आईडी के संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि लाल डोरे के अंदर आने वाली चौंतीस लाख प्रॉपर्टीज़ को इंटिग्रेट कर नई प्रॉपर्टी आईडी में सम्मिलित किया गया और नई प्रॉपर्टी आईडी बनाई गई है। अब रजिस्ट्री ऑटोमेटिक प्रॉपर्टी आईडी डाटा में चढ़ाई जा सकती है। - उन्होंने कहा कि अब तक दो हज़ार दो सौ चौहत्तर अनधिकृत कॉलोनियों में से चार सौ चौरानवे को अधिकृत कर दिया गया है तथा अन्य पर कार्य चल रहा है। इकतीस जनवरी, दो हज़ार चौबीस तक लगभग आठ सौ पचास कॉलोनियों को अधिकृत कर दिया जाएगा। - डॉ. गुप्ता ने बताया कि स्वामित्व योजना के तहत इकतीस दिसंबर, दो हज़ार बीस को बीस वर्ष पूरे होने वाले दुकानदारों को मालिकाना हक दिलाने का कार्य भी शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने किया है। - मंत्री ने बताया कि प्रॉपर्टी से संबंधित कोई भी सूचना एसएमएस के माध्यम से शहरी स्थानीय निकाय के नागरिकों को भेज सकते हैं। - डॉ. गुप्ता ने कहा कि वर्ष दो हज़ार तेईस-चौबीस के प्रॉपर्टी टैक्स की पूर्ण अदायगी करने पर सीमित समय के लिये छूट दी है, जो छूट पंद्रह नवंबर, दो हज़ार तेईस तक जारी रहेगी। अब प्रॉपर्टीधारक किसी भी प्रकार की त्रुटि के निवारण हेतु विभागीय पोर्टल पर स्वयं भी अपनी प्रॉपर्टी का डाटा सत्यापित कर सकते हैं। |
मिर्जापुर में मंगलवार सुबह रोडवेज बस ने ठाकुरगंज निवासी बाइक सवार पिता-पुत्र को रौंद दिया। हादसे में गंभीर रूप से घायल इंजीनियर रामकुमार पांडेय (48) की अस्पताल में मौत हो गई। जबकि बेटे शुभम का इलाज चल रहा है। बाइक बेटा चला रहा था। हादसे के बाद चालक बस लेकर भाग निकला। पुलिस उसकी तलाश कर रही है।
देहात कोतवाली क्षेत्र के भिस्कुरी के पास वीवीपैड के गोदाम का निर्माण हो रहा है। गंगा इंटर प्राइजेज गोदाम के निर्माण का काम कर रही है। ठाकुरगंज के फरीदीपुर निवासी रामकुमार पांडेय निर्माण कार्य के लिए तैनात किए गए हैं। वह बेटे शुभम संग भरूहना स्थित विंध्यवासिनी कॉलोनी में रहते थे।
कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर मंगलवार को दोनों लोग सुबह बरिया घाट पर स्नान कर बाइक से लौट रहे थे। कटरा कोतवाली के बथुआ मोहल्ले के पास पीछे से तेज रफ्तार रोडवेज बस ने बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में पिता-पुत्र गंभीर रूप से घायल हो गए।
राहगीरों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने रामकुमार को मृत घोषित कर दिया। प्रभारी निरीक्षक ठाकुरगंज नीरज ओझा के मुताबिक, सुबह हादसे की सूचना मिलते ही परिवारीजन मिर्जापुर के लिए रवाना हो गए। घर पर ताला बंद है। (इनपुट : मिर्जापुर संवाद)
| मिर्जापुर में मंगलवार सुबह रोडवेज बस ने ठाकुरगंज निवासी बाइक सवार पिता-पुत्र को रौंद दिया। हादसे में गंभीर रूप से घायल इंजीनियर रामकुमार पांडेय की अस्पताल में मौत हो गई। जबकि बेटे शुभम का इलाज चल रहा है। बाइक बेटा चला रहा था। हादसे के बाद चालक बस लेकर भाग निकला। पुलिस उसकी तलाश कर रही है। देहात कोतवाली क्षेत्र के भिस्कुरी के पास वीवीपैड के गोदाम का निर्माण हो रहा है। गंगा इंटर प्राइजेज गोदाम के निर्माण का काम कर रही है। ठाकुरगंज के फरीदीपुर निवासी रामकुमार पांडेय निर्माण कार्य के लिए तैनात किए गए हैं। वह बेटे शुभम संग भरूहना स्थित विंध्यवासिनी कॉलोनी में रहते थे। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर मंगलवार को दोनों लोग सुबह बरिया घाट पर स्नान कर बाइक से लौट रहे थे। कटरा कोतवाली के बथुआ मोहल्ले के पास पीछे से तेज रफ्तार रोडवेज बस ने बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में पिता-पुत्र गंभीर रूप से घायल हो गए। राहगीरों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने रामकुमार को मृत घोषित कर दिया। प्रभारी निरीक्षक ठाकुरगंज नीरज ओझा के मुताबिक, सुबह हादसे की सूचना मिलते ही परिवारीजन मिर्जापुर के लिए रवाना हो गए। घर पर ताला बंद है। |
अभिनेता संजय कपूर और महीप की बेटी शनाया कपूर ने पेरिस में ले बाल के साथ अपनी शुरुआत की थी और अब वह एक अभिनेत्री के रूप में बॉलीवुड में लॉन्च होने का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं। वह कहती है कि अगर "सबसे अद्भुत निर्देशक" करण जौहर कभी उन्हें निर्देशित करेंगे, तो वह भावुक हो जाएगी और "बस मर जाएगी"।
करण बॉलीवुड में कई नए चेहरों को लेकर आए हैं। उनमें आलिया भट्ट, वरुण धवन और शनाया की कजिन जान्हवी कपूर शामिल हैं।
अगर वह अभिनय नहीं कर रही, तो 20 वर्षीय स्टार-किड करण की फिल्म में जरूर काम कर रही हैं। उनके द्वारा निर्मित फिल्म "गुंजन सक्सेनाः द कारगिल गर्ल" में शनाया को सहायक निर्देशक बनने का मौका मिला है।
हालांकि, एक अभिनेत्री होने के नाते उन्होंने अभी तक कोई फिल्म साइन नहीं की है।
| अभिनेता संजय कपूर और महीप की बेटी शनाया कपूर ने पेरिस में ले बाल के साथ अपनी शुरुआत की थी और अब वह एक अभिनेत्री के रूप में बॉलीवुड में लॉन्च होने का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं। वह कहती है कि अगर "सबसे अद्भुत निर्देशक" करण जौहर कभी उन्हें निर्देशित करेंगे, तो वह भावुक हो जाएगी और "बस मर जाएगी"। करण बॉलीवुड में कई नए चेहरों को लेकर आए हैं। उनमें आलिया भट्ट, वरुण धवन और शनाया की कजिन जान्हवी कपूर शामिल हैं। अगर वह अभिनय नहीं कर रही, तो बीस वर्षीय स्टार-किड करण की फिल्म में जरूर काम कर रही हैं। उनके द्वारा निर्मित फिल्म "गुंजन सक्सेनाः द कारगिल गर्ल" में शनाया को सहायक निर्देशक बनने का मौका मिला है। हालांकि, एक अभिनेत्री होने के नाते उन्होंने अभी तक कोई फिल्म साइन नहीं की है। |
चीन अपनी टेलीकॉम कंपनियों माध्यम से पूरी दुनिया में बादशाहत कायम करना चाहता है. यही वजह कि आज की तारीख कई देशों ने चीनी टेलीकॉम कंपनियों पर बैन लगा रखा है. आरोप है कि चीन इन कंपनियों के माध्यम से दूसरे देशों की गोपनीयता में सेंध लगाता है. दूसरे शब्दों में कहा जाए तो चीन इन कंपनियों के माध्यम से दूसरे देशों की जासूसी करता है. इस बात के प्रमाण भी सार्वजनिक हो चुके हैं. ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, भारत समेत कई देश इस पर सख्त कदम उठा चुके हैं. अब भारत जो कदम उठाने जा रहा है, उससे चीन की कमर टूटनी तय है.
भारत सरकार इस महीने टेलीकॉम लाइसेंस नियमों में बदलाव करने जा रही है. इसके तहत टेलीकॉम सेक्टर में राष्ट्रीय सुरक्षा निर्देश से संबंधित गाइडलाइन्स को जोड़ा जाएगा. इससे चीन और अन्य गैर-मित्र देशों से नेटवर्क डिवाइस की खरीद को कंट्रोल करने में मदद मिलेगी.
इन गाइडलाइन के तहत, सरकार देश के टेलीकम्यूनिकेशन नेटवर्क में यूज के लिए भरोसेमंद सोर्सिस और प्रोडक्ट की लिस्ट जारी करेगी. हालांकि इस लिस्ट में किन प्रोडक्ट्स को शामिल किया जाएगा, इसका फैसला डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (DNSA) की अध्यक्षता वाली समिति की मंजूरी पर निर्भर करेगा. इस समिति में संबंधित विभागों और मंत्रालयों के सदस्य होंगे. इसके अलावा समिति में इंडस्ट्री से जुड़े दो सदस्य और इंडिपेंडेंट स्पेशलिस्ट भी शामिल होंगे.
अधिकारियों ने बताया कि इन गाइडलाइन्स के चलते टेलीकॉम ऑपरेटरों को किसी भी प्रकार की दिक्कत का सामना नहीं करना होगा. नेटवर्क में पहले से लगे डिवाइस काम करते रहेंगे. उन्हें हटाने की जरूरत नहीं होगी. साथ ही इससे एनुअल मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट पर भी असर नहीं पड़ेगा.
हालांकि, सरकार ने सीधे तौर पर चीन की कंपनियों से डिवाइस की खरीद पर प्रतिबंध नहीं लगाया है, लेकिन जनरल फाइनेंसियल रूल (GFR) 2017 में संशोधन किया है. इसके तहत भारत के साथ जमीनी सीमा वाले देशों की कंपनियों के बोली लगाने पर अंकुश है. साथ ही ऐसे मामलों में भी बिडर्स पर भी रोक है जो डायरेक्ट और इनडायरेक्टली राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हैं.
बता दें कि चीन की टेलीकम्यूनिकेशन कंपनी हुवावे का कनाडा और अमेरिका की सरकारों के साथ विवाद चल रहता रहा है. अमेरिका का आरोप है कि हुवावे साइबर सिक्योरिटी और प्राइवेसी लॉ का फॉलो नहीं कर रही है, जिससे देश और नागरिकों की जासूसी का खतरा है.
| चीन अपनी टेलीकॉम कंपनियों माध्यम से पूरी दुनिया में बादशाहत कायम करना चाहता है. यही वजह कि आज की तारीख कई देशों ने चीनी टेलीकॉम कंपनियों पर बैन लगा रखा है. आरोप है कि चीन इन कंपनियों के माध्यम से दूसरे देशों की गोपनीयता में सेंध लगाता है. दूसरे शब्दों में कहा जाए तो चीन इन कंपनियों के माध्यम से दूसरे देशों की जासूसी करता है. इस बात के प्रमाण भी सार्वजनिक हो चुके हैं. ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, भारत समेत कई देश इस पर सख्त कदम उठा चुके हैं. अब भारत जो कदम उठाने जा रहा है, उससे चीन की कमर टूटनी तय है. भारत सरकार इस महीने टेलीकॉम लाइसेंस नियमों में बदलाव करने जा रही है. इसके तहत टेलीकॉम सेक्टर में राष्ट्रीय सुरक्षा निर्देश से संबंधित गाइडलाइन्स को जोड़ा जाएगा. इससे चीन और अन्य गैर-मित्र देशों से नेटवर्क डिवाइस की खरीद को कंट्रोल करने में मदद मिलेगी. इन गाइडलाइन के तहत, सरकार देश के टेलीकम्यूनिकेशन नेटवर्क में यूज के लिए भरोसेमंद सोर्सिस और प्रोडक्ट की लिस्ट जारी करेगी. हालांकि इस लिस्ट में किन प्रोडक्ट्स को शामिल किया जाएगा, इसका फैसला डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर की अध्यक्षता वाली समिति की मंजूरी पर निर्भर करेगा. इस समिति में संबंधित विभागों और मंत्रालयों के सदस्य होंगे. इसके अलावा समिति में इंडस्ट्री से जुड़े दो सदस्य और इंडिपेंडेंट स्पेशलिस्ट भी शामिल होंगे. अधिकारियों ने बताया कि इन गाइडलाइन्स के चलते टेलीकॉम ऑपरेटरों को किसी भी प्रकार की दिक्कत का सामना नहीं करना होगा. नेटवर्क में पहले से लगे डिवाइस काम करते रहेंगे. उन्हें हटाने की जरूरत नहीं होगी. साथ ही इससे एनुअल मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट पर भी असर नहीं पड़ेगा. हालांकि, सरकार ने सीधे तौर पर चीन की कंपनियों से डिवाइस की खरीद पर प्रतिबंध नहीं लगाया है, लेकिन जनरल फाइनेंसियल रूल दो हज़ार सत्रह में संशोधन किया है. इसके तहत भारत के साथ जमीनी सीमा वाले देशों की कंपनियों के बोली लगाने पर अंकुश है. साथ ही ऐसे मामलों में भी बिडर्स पर भी रोक है जो डायरेक्ट और इनडायरेक्टली राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हैं. बता दें कि चीन की टेलीकम्यूनिकेशन कंपनी हुवावे का कनाडा और अमेरिका की सरकारों के साथ विवाद चल रहता रहा है. अमेरिका का आरोप है कि हुवावे साइबर सिक्योरिटी और प्राइवेसी लॉ का फॉलो नहीं कर रही है, जिससे देश और नागरिकों की जासूसी का खतरा है. |
राजस्थान के भरतपुर में रविवार को एक होटल के स्विमिंग पूल में दिल्ली से आए युवक की मौत हो गई। अलीगढ़ निवासी यह व्यक्ति दिल्ली से अपने ग्रुप के साथ यहां आया था। नहाते समय उसे मिर्गी का दौरा पड़ गया और डूबने से उसकी मौत हो गई।
चिकसाना थाने के हेड कॉन्स्टेबल सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि दिल्ली से एक कंपनी का ग्रुप पिकनिक मनाने के लिए भरतपुर आया हुआ था। करीब 25 सदस्यीय यह ग्रुप नेशनल हाइवे 21 पर चिकसाना थाना क्षेत्र के नेशनल हाइवे स्थित होटल कदंब कुंज में ठहरा था। इसी ग्रुप के चार-पांच लोग स्विमिंग पूल में नहा रहे थे।
उसी दौरान अलीगढ़ निवासी 37 वर्षीय रामबाबू को अचानक मिर्गी का दौरा पड़ा और वह पानी में डूब गया। साथियों ने उसे पानी से निकाला तब तक उसकी मृत्यु हो चुकी थी। घटना की सूचना मिलते ही चिकसाना थाना पुलिस होटल कदंब कुंज पहुंची और मृतक युवक के शव को जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया।
(रिपोर्टः संत कौशिक)
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| राजस्थान के भरतपुर में रविवार को एक होटल के स्विमिंग पूल में दिल्ली से आए युवक की मौत हो गई। अलीगढ़ निवासी यह व्यक्ति दिल्ली से अपने ग्रुप के साथ यहां आया था। नहाते समय उसे मिर्गी का दौरा पड़ गया और डूबने से उसकी मौत हो गई। चिकसाना थाने के हेड कॉन्स्टेबल सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि दिल्ली से एक कंपनी का ग्रुप पिकनिक मनाने के लिए भरतपुर आया हुआ था। करीब पच्चीस सदस्यीय यह ग्रुप नेशनल हाइवे इक्कीस पर चिकसाना थाना क्षेत्र के नेशनल हाइवे स्थित होटल कदंब कुंज में ठहरा था। इसी ग्रुप के चार-पांच लोग स्विमिंग पूल में नहा रहे थे। उसी दौरान अलीगढ़ निवासी सैंतीस वर्षीय रामबाबू को अचानक मिर्गी का दौरा पड़ा और वह पानी में डूब गया। साथियों ने उसे पानी से निकाला तब तक उसकी मृत्यु हो चुकी थी। घटना की सूचना मिलते ही चिकसाना थाना पुलिस होटल कदंब कुंज पहुंची और मृतक युवक के शव को जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
इस्लामाबाद : पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने रविवार को विपक्षी दलों को चेतावनी दी कि अगर उन्हें (खान को) पद छोड़ने के लिए मजबूर किया गया तो वह और भी ज्यादा खतरनाक हो जाएंगे. इसके साथ ही खान ने विपक्ष की कोई भी बात मानने से इनकार कर दिया.
पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) द्वारा 23 मार्च को जुलूस निकालने की योजना पर पूछे गए सवाल के जवाब में खान ने कहा कि यह कदम विफल हो जाएगा.
प्रधानमंत्री ने कहा, 'अगर मैं सड़कों पर आ गया तो आप (विपक्ष) सबको छिपने की कोई जगह नहीं मिलेगी. ' उन्होंने कहा कि अगर उन्हें पद छोड़ने पर मजबूर किया गया तो वह और भी ज्यादा खतरनाक हो जाएंगे.
(यह खबर 'भाषा' न्यूज़ एजेंसी से 'ऑटो-फीड' द्वारा ली गई है. इसके कंटेट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है. )
| इस्लामाबाद : पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने रविवार को विपक्षी दलों को चेतावनी दी कि अगर उन्हें पद छोड़ने के लिए मजबूर किया गया तो वह और भी ज्यादा खतरनाक हो जाएंगे. इसके साथ ही खान ने विपक्ष की कोई भी बात मानने से इनकार कर दिया. पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट द्वारा तेईस मार्च को जुलूस निकालने की योजना पर पूछे गए सवाल के जवाब में खान ने कहा कि यह कदम विफल हो जाएगा. प्रधानमंत्री ने कहा, 'अगर मैं सड़कों पर आ गया तो आप सबको छिपने की कोई जगह नहीं मिलेगी. ' उन्होंने कहा कि अगर उन्हें पद छोड़ने पर मजबूर किया गया तो वह और भी ज्यादा खतरनाक हो जाएंगे. |
विरस, अव्यक्त और सानुनासिक दंषों को नहीं दुहराते । संगीत शास्त्रियों ने व्यक्त गान को दोष माना है, लेकिन क्या किसी भी ग्राज के शास्त्रीय गायक के गाने को सुनकर समझ सकते हैं, कि वह कौन सा पद
गा रहे हैं। हमें इन घर के शत्रुओं से भी संगीत की रक्षा करने की व श्यकता है, नहीं तो रेडियो का सारा प्रयत्न निष्फल होगा, और निष्फल ही नहीं होगा, बल्कि वह अपने प्रोग्रामों द्वारा लोगों में शास्त्रीय संगीत के प्रति घृणा पैदा करने में सहायक होगा ।
यहाँ प्रश्न हो सकता है, कि तब तो शास्त्रीय संगीत के निधिरक्षको उस्तादों को धता बताना होगा, जिसके कारण शास्त्रीय संगीत की भारी क्षति होगी। लेकिन मै उस्तादों को धता बताने का पक्षपाती नहीं हूँ । उन्हें हम गायक नहीं मानते, तो इसका यह अर्थ नहीं कि उनका कोई दूसरा उपयोग नहीं हो सकता । वह संगीत के योग्य शिक्षक और निर्देशक हो सकते हैं । रेडियो में स्वयंन गाकर अपने मधुरकण्ठ शिष्य या शिष्या को शुद्ध संगीत गायन का निर्देश दे सकते है । हमारी शिक्षण संस्थाओं में संगीत का अधिक प्रचार कराने का अभ्यास होना चाहिये, और वहाँ हम उस्ताद को अध्यापक रख सकते हैं । रेडियो में संगीत शिक्षा का काम उन्हें दिया जा सकता है । इसमें भी कोई हरज नहीं है, यदि विशेषज्ञों की रुचि को तृप्त करने के लिए संगीत के आयोजन किया
जाय, जिसमें निश्चय ही कलाविद उस्तादो की माँग होगी । आप चाहे जिस तरह उस्तादों का संरक्षण करें, उन्हें सम्मान प्रदान करें, लेकिन उनका ऐसा उपयोग नहीं होना चाहिये, जिससे शास्त्रीय संगीत हमारे समाज में अप्रिय हो जाय ।
बुद्ध का व्यक्तित्व समन्तभद्र, सर्वतोभद्र है । इतिहास में ऐसा व्यक्ति मिलना दुर्लभ है, जो प्रतिभा में, मधुर बर्ताव में, दीन-हीनों के प्रति, कार्यरूप में सम्वेदना दिखलाने में इतना ऊँचा हो, जितने कि भारत के सर्वश्रेष्ठ पुत्र और मानवता के सर्वोत्तम पथ-प्रदर्शक बुद्ध थे । ढाई हजार वर्षों के और परायों के हाथों काई और मोर्चे ने जमा होकर उस पुरुषोत्तम के असली रूप को छिपाने की कोशिश की, लेकिन वह उसमें सफल नहीं हुये । जो सर्वतोभद्र है, उसके एक अंग को लेकर दौड़ पड़ना उचित नहीं हो सकता । कितने ही भारतीय विद्वान् हैं, जो जाने या अन जाने कह बैठते है, कि बुद्ध तो चार पर जोर देते थे, वह सुकर्म- मार्ग पर लोगों को चलाना चाहते थे । इसमें शक नहीं, चारशुद्धि या शील
पर भी बुद्ध का बहुत जोर था । 'पर उपदेस कुशल बहुतेरे, जे प्राच रहि ते नर न घनेरै' की उक्ति के अनुसार आचरण दीन (सर्फ बात बघारने को वह कोई महत्व नहीं देते थे। केवल प्राचारविषयक शिक्षा को ही ले लिया जाये, तो भी बुद्ध मानवता के महान् विचारक सिद्ध होते हैं । लेकिन हमारे समन्तभद्र की सर्वतोभद्रता इतने एक अंग में सीमित नहीं । शंकराचार्य ने, 'यस्ते योगिनां चक्रवर्ती' कहकर बुद्ध को योगि यों का सम्राट् घोषित किया । बुद्ध ने शीलस्कन्ध की तरह ही समाधिस्कन्ध पर भी ज़ोर दिया । समाधि या मनुष्य की मानसिक शक्तियों को अभ्यास द्वारा विकसित करना, एक ऐसी वस्तु है, जिसके पक्ष में जितना सत्य का
श्रय लिया जाता है, उससे कई गुना झूठ का प्रचार किया जाता है। मनुष्य की मानसिक शक्तियाँ वस्तुवादी दृष्टि से एक गम्भीर अध्ययन और अनुसन्धान के विषय हैं । इस दिशा में काम करना अवश्य होगा। समाधि
और योग सिद्धियों के बारे में आज के जमाने में हम तब तक कुछ नहीं कह सकते, जब तक कि विज्ञान की प्रयोगशालाओं में मानसिक शक्तियों के हरेक प्राकट्य या दावे का अनुसन्धान निष्ठुरता पूर्वक न किया जाये । लेकिन यह तो साफ है कि विरोधी भी जिसे योगियों का चक्रवर्ती कहते हैं, वह इस अंश में भी अपने को सर्वतोभद्र साबित करता है ।
दर्शन से अनभिज्ञ ही नहीं, बल्कि दर्शन से जानकारी रखनेवाले भी कितने ही लोग बुद्ध के दर्शन की उपेक्षा करते बतलाना चाहते हैं, कि दर्शन से बुद्ध कोई सम्बन्ध नहीं रखते थे, वह तो केवल चार धम का प्रचार करते थे । मैं तो कहूँगा बुद्ध की जितनी जबर्दस्त देन दर्शन में हे उतनी ग्रोर किमी क्षेत्र में नहीं है अर्थात् वह सबसे पहले दार्शनिक हैं, उसके बाद और कुछ । दूसरी शताब्दी के महान् विचारक नागार्जुन ने श्रम शिष्टाचार के अनुसार अपनी पुस्तक "विग्रह व्यावर्तनी" के आरम्भ में कोई मंगलाचरण नहीं किया, लेकिन ग्रंथ समाप्त करते-करते गद्गद होकर कहा :यः प्रतीत्यसमुत्पादं मध्यमां प्रतीपद्मनेकार्थाम् । निजगाद प्रणमामि तमप्रतिसम्बुद्धम् ॥
मध्यमा प्रतिपद् (मध्यममार्ग) और प्रतीत्यसमुत्पाद बुद्ध दर्शन के इन दो मूलतत्वों को यहाँ नागार्जुन ने पकड़ा और उनके बतलाने वाले बुद्ध कोय ) कहा । सचमुच ही यह ऐसे सूत्र हैं जिनसे बुद्ध के सारे दर्शन की व्याख्या हो जाती है, और साथ ही यह किसी एक देश या काल के लिये ही नहीं, बल्कि सभी देशों और कालों के लिये परमार्थ सत्य हैं । इन दोनों के साथ 'सब्बं अनिच्च' ( सर्व नित्यं ) या 'सर्व क्षणिक' को ले लेने पर हमारे सामने बुद्ध का पूर्ण दर्शन चलता है ।
सभी वस्तुयें अनित्य ( क्षणिक ) हैं, क्षण क्षण परिवत नशील हैं, केवल ऊपर-ऊपर नहीं, बल्कि जड़ मूल से विनाशशील हैं। इस नियम को बुद्ध ने घोषित करके दुनिया को विश्व और उसके छोटे से छोटे श
(परमाणु) तक को क्षणभंगुर बतलाया । वेदान्ती या ब्रह्मवादी अद्वैती बाह्य विश्व के भीतर एक नित्य कूटस्थ ब्रह्म तत्त्व को मानते हैं । भौतिक जगत् उनके लिये माया मात्र है । वैशेषिक या पुराने ग्रोस के परमाणुवादी दार्शनिक बाह्य जगत् को क्षणभंगुर मानने के लिये तैयार थे, लेकिन श्र तोम (छे ) या परमाणु उनके लिये नित्य और कूटस्थ था । बुद्ध और उनके अनुयायियों ने 'सब है' के नियम में कोई पवाद नहीं माना - बाह्य जगत् हर क्षण नष्ट होता रहता और उसका स्थान जो लेता है, वह भी अपने पूर्वज के अनुसार क्षणभर रहकर जड़-मूल से विलुप्त हो जाता है । बौद्ध दार्शनिकों ने इसे और स्पष्ट करते हुये घोषित किया, यत् सत् तत् क्षणिकं, अर्थात् जा भी मद्वस्तु है, वास्तविक सत्ता रखनेवाली चीज है, वह सभी क्षणिक, क्षण क्षण विनाशी है । जो क्षणिक नहीं, वह सद्वस्तु ही नहीं, वह वन्ध्यापुरकाशकुसुम की तरह केवल शब्दाडम्बर भर है । क्षणक्षण विनाश विश्व का ग्रटल नियम होने से वह हरेक वस्तु का सहज धर्म है । इस लिये बांद्ध दार्शनिको ने विनाश को निहेर्तुक कहा - यदि दूसरे ही क्षण वस्तु का विनाश निसर्गतः होता है, तो उसके लिये किसी विनाशकर्ता की आवश्यकता नहीं । उसकी यदि ग्रावश्यकता है, तो उत्पादन के लिये हा । काष्ठ को अग्नेि नष्ट कर दिया, इसकी जगह बौद्ध दार्शनिक कहते हैं अग्नि ने कोयले का उत्पादन किया । सारे बहिर् और अन्तर् जगत् के और (क्षणिक ) होने को
सिद्ध करने के लिये बहुत प्रयत्न करने को जरूरत नहीं है । सारे प्रमाणो का प्रमाण और वस्तुतः एकमात्र प्रमाण प्रत्यक्ष है, जिसके क्षेत्र में आने वाली सारी वस्तुयें क्षणिक देखी जाती हैं। दूसरे नम्बर का प्रमाण अनु मान भी प्रत्यक्ष के पदचिह्न पर चलते उसी बात को सिद्ध कर सकता है । वस्तुतः अन्तर् जगत् और बहिजगत् का जितना भी अंश प्रत्यक्षगोचर हैं, वह क्षणिक ही दीख पड़ता है। लोग प्रत्यक्ष-गोचर नहीं, बल्कि प्रमाण गोचर तत्त्व को लाकर उसे नित्य कूटस्थ साबित करने की कोशिश
करते हैं । धार्मिक रूढ़ि और पक्षपात के तौर पर वह इसे भले ही मनवा लं, लेकिन सवस्तु के तौर पर उसे मनवाना असम्भव है । विश्व की क्षणि कता सर्वानित्यता के काट्य सिद्धान्त को स्वीकार कर लेने पर यह कहने की ही नहीं रह जाती कि ग्रात्मा या ईश्वर (ब्रह्म ) जैसी सत्ता के बारे में बुद्ध का क्या विचार था । यदि कोई तत्त्व है, तो उस पर बात करने के लिये बुद्ध तभी तैयार हो सकते थे, जब यह मान निया जाय कि अनित्यता का नियमात्मा पर भी लागू होता है, ईश्वर या ब्रह्म पर भी लागू होता है। बुद्धकाल में आत्माका दार्शनिक सिद्धान्त माना जाता था, ग्रात्मा में जीवात्मा ( प्रत्यगात्मा) और परमात्मा दोनों सन्निविष्ट थे । ऐस मत का प्रत्याख्यान करने से ही बुद्ध के दर्शन कात्मवाद कहा जाने लगा ।
वाद-हित सर्वानियता के सिद्धान्त को बुद्ध और बौद्ध दार्शनिकों ने अव्याहत गति से सभा क्षेत्रों में लागू किया । इससे अगले ही कदम पर फिर दूसरा दार्शनिक प्रश्न उठा - यदि सभी वस्तुयें बिना किसी अपवाद के क्षणभंगुर हैं, तो कार्य और कारण का क्या सम्बन्ध होगा । कार्य-कारण के सम्बन्ध ही से आखिर संसार का व्यवहार चलता है। हम जानते हैं,
की गुठली अवश्य हमें ग्राम का मीठा फल देगी, तभी हम गुठली को लगाते हैं; गेहूँ का बीज गेहूं की फसल देगा, तभी हम उसे घर से निकाल कर खेत में डालते हैं। इससे कार्य कारण का सम्बन्ध टूट सिद्ध होता है । बुद्ध कार्य कारण के सम्बन्ध से इन्कार नहीं करते, वह
प्रतीत्यसमुताद द्वारा कहते हैं कि इसके होने पर यह होता है ( अस्मिन् सति इदं भवति ) । कारण वह है, जो एक क्षण के के बाद जड़-मूल से नष्ठ हुआ । उसके तुरन्त बाद दूसरे क्षण में जिस वस्तु लुप्त वस्तु का स्थान लिया वही कार्य है । ऐसे कार्य-कारण सम्बन्ध को बुद्ध इन्कार नहीं करते। गेहूँ यामको गुठली से फसल के नये गेहूँ और ये म के फल के अस्तित्व में आने तक हर क्षण प्रकट और | विरस, अव्यक्त और सानुनासिक दंषों को नहीं दुहराते । संगीत शास्त्रियों ने व्यक्त गान को दोष माना है, लेकिन क्या किसी भी ग्राज के शास्त्रीय गायक के गाने को सुनकर समझ सकते हैं, कि वह कौन सा पद गा रहे हैं। हमें इन घर के शत्रुओं से भी संगीत की रक्षा करने की व श्यकता है, नहीं तो रेडियो का सारा प्रयत्न निष्फल होगा, और निष्फल ही नहीं होगा, बल्कि वह अपने प्रोग्रामों द्वारा लोगों में शास्त्रीय संगीत के प्रति घृणा पैदा करने में सहायक होगा । यहाँ प्रश्न हो सकता है, कि तब तो शास्त्रीय संगीत के निधिरक्षको उस्तादों को धता बताना होगा, जिसके कारण शास्त्रीय संगीत की भारी क्षति होगी। लेकिन मै उस्तादों को धता बताने का पक्षपाती नहीं हूँ । उन्हें हम गायक नहीं मानते, तो इसका यह अर्थ नहीं कि उनका कोई दूसरा उपयोग नहीं हो सकता । वह संगीत के योग्य शिक्षक और निर्देशक हो सकते हैं । रेडियो में स्वयंन गाकर अपने मधुरकण्ठ शिष्य या शिष्या को शुद्ध संगीत गायन का निर्देश दे सकते है । हमारी शिक्षण संस्थाओं में संगीत का अधिक प्रचार कराने का अभ्यास होना चाहिये, और वहाँ हम उस्ताद को अध्यापक रख सकते हैं । रेडियो में संगीत शिक्षा का काम उन्हें दिया जा सकता है । इसमें भी कोई हरज नहीं है, यदि विशेषज्ञों की रुचि को तृप्त करने के लिए संगीत के आयोजन किया जाय, जिसमें निश्चय ही कलाविद उस्तादो की माँग होगी । आप चाहे जिस तरह उस्तादों का संरक्षण करें, उन्हें सम्मान प्रदान करें, लेकिन उनका ऐसा उपयोग नहीं होना चाहिये, जिससे शास्त्रीय संगीत हमारे समाज में अप्रिय हो जाय । बुद्ध का व्यक्तित्व समन्तभद्र, सर्वतोभद्र है । इतिहास में ऐसा व्यक्ति मिलना दुर्लभ है, जो प्रतिभा में, मधुर बर्ताव में, दीन-हीनों के प्रति, कार्यरूप में सम्वेदना दिखलाने में इतना ऊँचा हो, जितने कि भारत के सर्वश्रेष्ठ पुत्र और मानवता के सर्वोत्तम पथ-प्रदर्शक बुद्ध थे । ढाई हजार वर्षों के और परायों के हाथों काई और मोर्चे ने जमा होकर उस पुरुषोत्तम के असली रूप को छिपाने की कोशिश की, लेकिन वह उसमें सफल नहीं हुये । जो सर्वतोभद्र है, उसके एक अंग को लेकर दौड़ पड़ना उचित नहीं हो सकता । कितने ही भारतीय विद्वान् हैं, जो जाने या अन जाने कह बैठते है, कि बुद्ध तो चार पर जोर देते थे, वह सुकर्म- मार्ग पर लोगों को चलाना चाहते थे । इसमें शक नहीं, चारशुद्धि या शील पर भी बुद्ध का बहुत जोर था । 'पर उपदेस कुशल बहुतेरे, जे प्राच रहि ते नर न घनेरै' की उक्ति के अनुसार आचरण दीन और प्रतीत्यसमुत्पाद बुद्ध दर्शन के इन दो मूलतत्वों को यहाँ नागार्जुन ने पकड़ा और उनके बतलाने वाले बुद्ध कोय ) कहा । सचमुच ही यह ऐसे सूत्र हैं जिनसे बुद्ध के सारे दर्शन की व्याख्या हो जाती है, और साथ ही यह किसी एक देश या काल के लिये ही नहीं, बल्कि सभी देशों और कालों के लिये परमार्थ सत्य हैं । इन दोनों के साथ 'सब्बं अनिच्च' या 'सर्व क्षणिक' को ले लेने पर हमारे सामने बुद्ध का पूर्ण दर्शन चलता है । सभी वस्तुयें अनित्य हैं, क्षण क्षण परिवत नशील हैं, केवल ऊपर-ऊपर नहीं, बल्कि जड़ मूल से विनाशशील हैं। इस नियम को बुद्ध ने घोषित करके दुनिया को विश्व और उसके छोटे से छोटे श तक को क्षणभंगुर बतलाया । वेदान्ती या ब्रह्मवादी अद्वैती बाह्य विश्व के भीतर एक नित्य कूटस्थ ब्रह्म तत्त्व को मानते हैं । भौतिक जगत् उनके लिये माया मात्र है । वैशेषिक या पुराने ग्रोस के परमाणुवादी दार्शनिक बाह्य जगत् को क्षणभंगुर मानने के लिये तैयार थे, लेकिन श्र तोम या परमाणु उनके लिये नित्य और कूटस्थ था । बुद्ध और उनके अनुयायियों ने 'सब है' के नियम में कोई पवाद नहीं माना - बाह्य जगत् हर क्षण नष्ट होता रहता और उसका स्थान जो लेता है, वह भी अपने पूर्वज के अनुसार क्षणभर रहकर जड़-मूल से विलुप्त हो जाता है । बौद्ध दार्शनिकों ने इसे और स्पष्ट करते हुये घोषित किया, यत् सत् तत् क्षणिकं, अर्थात् जा भी मद्वस्तु है, वास्तविक सत्ता रखनेवाली चीज है, वह सभी क्षणिक, क्षण क्षण विनाशी है । जो क्षणिक नहीं, वह सद्वस्तु ही नहीं, वह वन्ध्यापुरकाशकुसुम की तरह केवल शब्दाडम्बर भर है । क्षणक्षण विनाश विश्व का ग्रटल नियम होने से वह हरेक वस्तु का सहज धर्म है । इस लिये बांद्ध दार्शनिको ने विनाश को निहेर्तुक कहा - यदि दूसरे ही क्षण वस्तु का विनाश निसर्गतः होता है, तो उसके लिये किसी विनाशकर्ता की आवश्यकता नहीं । उसकी यदि ग्रावश्यकता है, तो उत्पादन के लिये हा । काष्ठ को अग्नेि नष्ट कर दिया, इसकी जगह बौद्ध दार्शनिक कहते हैं अग्नि ने कोयले का उत्पादन किया । सारे बहिर् और अन्तर् जगत् के और होने को सिद्ध करने के लिये बहुत प्रयत्न करने को जरूरत नहीं है । सारे प्रमाणो का प्रमाण और वस्तुतः एकमात्र प्रमाण प्रत्यक्ष है, जिसके क्षेत्र में आने वाली सारी वस्तुयें क्षणिक देखी जाती हैं। दूसरे नम्बर का प्रमाण अनु मान भी प्रत्यक्ष के पदचिह्न पर चलते उसी बात को सिद्ध कर सकता है । वस्तुतः अन्तर् जगत् और बहिजगत् का जितना भी अंश प्रत्यक्षगोचर हैं, वह क्षणिक ही दीख पड़ता है। लोग प्रत्यक्ष-गोचर नहीं, बल्कि प्रमाण गोचर तत्त्व को लाकर उसे नित्य कूटस्थ साबित करने की कोशिश करते हैं । धार्मिक रूढ़ि और पक्षपात के तौर पर वह इसे भले ही मनवा लं, लेकिन सवस्तु के तौर पर उसे मनवाना असम्भव है । विश्व की क्षणि कता सर्वानित्यता के काट्य सिद्धान्त को स्वीकार कर लेने पर यह कहने की ही नहीं रह जाती कि ग्रात्मा या ईश्वर जैसी सत्ता के बारे में बुद्ध का क्या विचार था । यदि कोई तत्त्व है, तो उस पर बात करने के लिये बुद्ध तभी तैयार हो सकते थे, जब यह मान निया जाय कि अनित्यता का नियमात्मा पर भी लागू होता है, ईश्वर या ब्रह्म पर भी लागू होता है। बुद्धकाल में आत्माका दार्शनिक सिद्धान्त माना जाता था, ग्रात्मा में जीवात्मा और परमात्मा दोनों सन्निविष्ट थे । ऐस मत का प्रत्याख्यान करने से ही बुद्ध के दर्शन कात्मवाद कहा जाने लगा । वाद-हित सर्वानियता के सिद्धान्त को बुद्ध और बौद्ध दार्शनिकों ने अव्याहत गति से सभा क्षेत्रों में लागू किया । इससे अगले ही कदम पर फिर दूसरा दार्शनिक प्रश्न उठा - यदि सभी वस्तुयें बिना किसी अपवाद के क्षणभंगुर हैं, तो कार्य और कारण का क्या सम्बन्ध होगा । कार्य-कारण के सम्बन्ध ही से आखिर संसार का व्यवहार चलता है। हम जानते हैं, की गुठली अवश्य हमें ग्राम का मीठा फल देगी, तभी हम गुठली को लगाते हैं; गेहूँ का बीज गेहूं की फसल देगा, तभी हम उसे घर से निकाल कर खेत में डालते हैं। इससे कार्य कारण का सम्बन्ध टूट सिद्ध होता है । बुद्ध कार्य कारण के सम्बन्ध से इन्कार नहीं करते, वह प्रतीत्यसमुताद द्वारा कहते हैं कि इसके होने पर यह होता है । कारण वह है, जो एक क्षण के के बाद जड़-मूल से नष्ठ हुआ । उसके तुरन्त बाद दूसरे क्षण में जिस वस्तु लुप्त वस्तु का स्थान लिया वही कार्य है । ऐसे कार्य-कारण सम्बन्ध को बुद्ध इन्कार नहीं करते। गेहूँ यामको गुठली से फसल के नये गेहूँ और ये म के फल के अस्तित्व में आने तक हर क्षण प्रकट और |
रागी में पाए जाने वाले पोषक तत्व बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं। आप उन्हें 6 महीने के बाद रागी खाने में दे सकते हैं। इसका सेवन बच्चों को करवाने से पहले एक बार विशेषज्ञ की सलाह जरुर ले लें।
रागी बच्चों की हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायता करती है। इसका सेवन करने से उनकी हड्डियां मजबूत होंगी और उनके शरीर का संपूर्ण विकास भी अच्छे से होता है। रागी में विटामिन-डी काफी अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जो हड्डियों को स्वस्थ रखने में सहायता करता है। यह हड्डियों के टूटने के डर को भी कम करती हैं। नियमित तौर पर इसका सेवन करने से बच्चों के शरीर में कैल्शियम की मात्रा भी पूरी होती है। रागी से आप मीठी डिश तैयार कर सकते हैं। डिश में ड्राईफ्रूट्स मिलाकर आप बच्चे को इसका सेवन करवा सकते हैं।
रागी बच्चों का वजन बढ़ाने में भी बहुत ही फायदेमंद होती है। इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, फाइबर, विटामिन-डी, विटामिन-बी1 जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। यह पोषक तत्व बच्चे का वजन बढ़ाने में भी सहायता करते हैं।
प्रोटीन भी बच्चों के शरीर के लिए बहुत आवश्यक तत्व होता है। इसका सेवन करने से बच्चों को इंस्टेंट एनर्जी मिलती है। रागी खाने से बच्चे बीमार भी कम पड़ते हैं। इसका सेवन करने से उनकी इम्यूनिटी मजबूत होती है। इसके अलावा बच्चो की मांसपेशियां भी रागी का सेवन करने से मजबूत होती हैं।
रागी में फाइबर अच्छी मात्रा में पाया जाता है। इसका सेवन करने से बच्चों का खाना जल्दी पच जाता है। उनका पेट भी स्वस्थ रहता है। इसके अलावा उन्हें कब्ज की समस्या भी नहीं होती।
रागी बच्चों के शरीर में से खून की कमी पूरी करने में भी सहायता करती है। इसमें पाया जाने वाला आयरन खून की कमी दूर करता है। इसके अलावा इसमें विटामिन-सी भी काफी अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जो शरीर में आयरन की कमी पूरी करता है।
रागी ऐसे बच्चों के लिए बहुत ही फायदेमंद होती है, जिन्हें गेंहू से किसी भी तरह की एलर्जी है। ये ग्लूटेन फ्री होती है। परंतु इसका सेवन बच्चों को थोड़ी मात्रा में ही करवाएं। आप उन्हें रागी की खिचड़ी या दलिया भी बनाकर दे सकते हैं।
| रागी में पाए जाने वाले पोषक तत्व बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं। आप उन्हें छः महीने के बाद रागी खाने में दे सकते हैं। इसका सेवन बच्चों को करवाने से पहले एक बार विशेषज्ञ की सलाह जरुर ले लें। रागी बच्चों की हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायता करती है। इसका सेवन करने से उनकी हड्डियां मजबूत होंगी और उनके शरीर का संपूर्ण विकास भी अच्छे से होता है। रागी में विटामिन-डी काफी अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जो हड्डियों को स्वस्थ रखने में सहायता करता है। यह हड्डियों के टूटने के डर को भी कम करती हैं। नियमित तौर पर इसका सेवन करने से बच्चों के शरीर में कैल्शियम की मात्रा भी पूरी होती है। रागी से आप मीठी डिश तैयार कर सकते हैं। डिश में ड्राईफ्रूट्स मिलाकर आप बच्चे को इसका सेवन करवा सकते हैं। रागी बच्चों का वजन बढ़ाने में भी बहुत ही फायदेमंद होती है। इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, फाइबर, विटामिन-डी, विटामिन-बीएक जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। यह पोषक तत्व बच्चे का वजन बढ़ाने में भी सहायता करते हैं। प्रोटीन भी बच्चों के शरीर के लिए बहुत आवश्यक तत्व होता है। इसका सेवन करने से बच्चों को इंस्टेंट एनर्जी मिलती है। रागी खाने से बच्चे बीमार भी कम पड़ते हैं। इसका सेवन करने से उनकी इम्यूनिटी मजबूत होती है। इसके अलावा बच्चो की मांसपेशियां भी रागी का सेवन करने से मजबूत होती हैं। रागी में फाइबर अच्छी मात्रा में पाया जाता है। इसका सेवन करने से बच्चों का खाना जल्दी पच जाता है। उनका पेट भी स्वस्थ रहता है। इसके अलावा उन्हें कब्ज की समस्या भी नहीं होती। रागी बच्चों के शरीर में से खून की कमी पूरी करने में भी सहायता करती है। इसमें पाया जाने वाला आयरन खून की कमी दूर करता है। इसके अलावा इसमें विटामिन-सी भी काफी अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जो शरीर में आयरन की कमी पूरी करता है। रागी ऐसे बच्चों के लिए बहुत ही फायदेमंद होती है, जिन्हें गेंहू से किसी भी तरह की एलर्जी है। ये ग्लूटेन फ्री होती है। परंतु इसका सेवन बच्चों को थोड़ी मात्रा में ही करवाएं। आप उन्हें रागी की खिचड़ी या दलिया भी बनाकर दे सकते हैं। |
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कितना हुआ ब्रह्मास्त्र का कलेक्शन?
आलिया भट्ट - रणबीर कपूर की फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' ने जहां बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाते हुए ओपनिंग डे पर ही 36. 42 करोड़ रुपये की कमाई की थी। वहीं, शनिवार तक आते-आते यह आंकड़ा 41. 36 करोड़ रुपये तक जा पहुंचा। लोगों में अयान मुखर्जी की फिल्म का क्रेज इस कदर बना हुआ है कि रविवार को 'ब्रह्मास्त्र' के कलेक्शन में और इजाफा हुआ और इसने 45. 66 करोड़ का कारोबार कर लिया। इस तरह फिल्म ने अपने पहले वीकएंड पर कुल 124. 49 रुपये की कमाई कर डाली।
प्रभास की 'बाहुबली 2' की बात करें तो 'बाहुबलीः द बिगनिंग' की वजह से लोगों के बीच इस फिल्म का क्रेज इस कदर था कि इसने पहले ही दिन 121. 00 करोड़ रुपये की कमाई कर डाली थी। वहीं, वीकएंड कलेक्शन की बात करें तो 'बाहुबली 2' ने शुक्रवार, शनिवार और रविवार को कुल 304 करोड़ रुपये का कारोबार किया था। यानी रणबीर कपूर की फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' तीन दिनों में 'बाहुबली 2' के पहले का रिकॉर्ड तोड़ पाई है।
| कितना हुआ ब्रह्मास्त्र का कलेक्शन? आलिया भट्ट - रणबीर कपूर की फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' ने जहां बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाते हुए ओपनिंग डे पर ही छत्तीस. बयालीस करोड़ रुपये की कमाई की थी। वहीं, शनिवार तक आते-आते यह आंकड़ा इकतालीस. छत्तीस करोड़ रुपये तक जा पहुंचा। लोगों में अयान मुखर्जी की फिल्म का क्रेज इस कदर बना हुआ है कि रविवार को 'ब्रह्मास्त्र' के कलेक्शन में और इजाफा हुआ और इसने पैंतालीस. छयासठ करोड़ का कारोबार कर लिया। इस तरह फिल्म ने अपने पहले वीकएंड पर कुल एक सौ चौबीस. उनचास रुपयापये की कमाई कर डाली। प्रभास की 'बाहुबली दो' की बात करें तो 'बाहुबलीः द बिगनिंग' की वजह से लोगों के बीच इस फिल्म का क्रेज इस कदर था कि इसने पहले ही दिन एक सौ इक्कीस. शून्य करोड़ रुपये की कमाई कर डाली थी। वहीं, वीकएंड कलेक्शन की बात करें तो 'बाहुबली दो' ने शुक्रवार, शनिवार और रविवार को कुल तीन सौ चार करोड़ रुपये का कारोबार किया था। यानी रणबीर कपूर की फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' तीन दिनों में 'बाहुबली दो' के पहले का रिकॉर्ड तोड़ पाई है। |
सीतापुर के थाना इमलिया सुल्तानपुर छेत्र की चौकी काजी कमालपुर का ये सनसनीखेज मामला है। की एक नाबालिग लड़की का आरोप है। घर से काजी कमालपुर बाजार आई थी। बाजार से लौटते समय जब वह अपने घर जाने लगी तो हाजीपुर के पांच युवक जिनमें दो के नाम हैं शिबू और नाजिम बाकी तीन लोग अज्ञात हैं जिनको वह चेहरा देखकर पहचान लेगी। युवती को पांचों लोग जबरन उठाकर गन्ने के खेत में ले गए और उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया और यह धमकी दी कि अगर तुमने किसी को बताया तो तुम को जान से मार डालूंगा और उसका वीडियो भी बना लिया और कहा कि अगर तुमने नाम लिया तो इस वीडियो को वायरल कर दूंगा। पीड़ित के कथनानुसार इस घटना को हुए लगभग एक हफ्ता बीत चुका है।
लड़की डरी और सहमी थी आज उसने थाने में आकर के प्रार्थना पत्र दिया । पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया। इस खबर के फैलते ही एसपी सीतापुर आरपी सिंह ,एडिशनल एसपी राजीव दीक्षित, सीओ सदर सहित कई थाना छेत्र की पुलिस बल थाना इमलिया सुल्तानपुर पहुंच गए। एक अभियुक्त को गिरफ्तार कर लिया । अन्य अभियुक्तों की तलाश जारी है । मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने युवती से पूछताछ की। युवती दलित समाज की है। पांचों अभियुक्त थाना छेत्र के हाजीपुर के है।
| सीतापुर के थाना इमलिया सुल्तानपुर छेत्र की चौकी काजी कमालपुर का ये सनसनीखेज मामला है। की एक नाबालिग लड़की का आरोप है। घर से काजी कमालपुर बाजार आई थी। बाजार से लौटते समय जब वह अपने घर जाने लगी तो हाजीपुर के पांच युवक जिनमें दो के नाम हैं शिबू और नाजिम बाकी तीन लोग अज्ञात हैं जिनको वह चेहरा देखकर पहचान लेगी। युवती को पांचों लोग जबरन उठाकर गन्ने के खेत में ले गए और उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया और यह धमकी दी कि अगर तुमने किसी को बताया तो तुम को जान से मार डालूंगा और उसका वीडियो भी बना लिया और कहा कि अगर तुमने नाम लिया तो इस वीडियो को वायरल कर दूंगा। पीड़ित के कथनानुसार इस घटना को हुए लगभग एक हफ्ता बीत चुका है। लड़की डरी और सहमी थी आज उसने थाने में आकर के प्रार्थना पत्र दिया । पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया। इस खबर के फैलते ही एसपी सीतापुर आरपी सिंह ,एडिशनल एसपी राजीव दीक्षित, सीओ सदर सहित कई थाना छेत्र की पुलिस बल थाना इमलिया सुल्तानपुर पहुंच गए। एक अभियुक्त को गिरफ्तार कर लिया । अन्य अभियुक्तों की तलाश जारी है । मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने युवती से पूछताछ की। युवती दलित समाज की है। पांचों अभियुक्त थाना छेत्र के हाजीपुर के है। |
वाशिंगटन (एजेंसी)। भारत और अमेरिका ने लश्कर तैयबा, जमात उद दावा, हक्कानी नेटवर्क और इन आतंकी संगठनों से जुड़े अन्य आतंकी गुटों की धन जुटाने की गतिविधियों पर मिलकर निशाना साधने पर सहमति जतायी है। दोनों देशों द्वारा इस संबंध में निर्णय कल वित्त मंत्री पी चिदंबरम और अमेरिकी वित्त मंत्री जैक ल्यू के बीच हुई बैठक में किया गया। भारत और अमेरिका दोनों आतंकी खतरों से लगातार जूझ रहे हैं। हाल ही में अमेरिका में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राष्ट्रपति बराक ओमाबा से आतंक की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई थी। दोनों नेताओं ने इस पर साथ मिलकर मुकाबला करने की बात कही थी। इस बैठक में लिए गए इस महत्वपूर्ण को उसी कड़ी से जोड़कर देखा जा रहा है।
| वाशिंगटन । भारत और अमेरिका ने लश्कर तैयबा, जमात उद दावा, हक्कानी नेटवर्क और इन आतंकी संगठनों से जुड़े अन्य आतंकी गुटों की धन जुटाने की गतिविधियों पर मिलकर निशाना साधने पर सहमति जतायी है। दोनों देशों द्वारा इस संबंध में निर्णय कल वित्त मंत्री पी चिदंबरम और अमेरिकी वित्त मंत्री जैक ल्यू के बीच हुई बैठक में किया गया। भारत और अमेरिका दोनों आतंकी खतरों से लगातार जूझ रहे हैं। हाल ही में अमेरिका में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राष्ट्रपति बराक ओमाबा से आतंक की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई थी। दोनों नेताओं ने इस पर साथ मिलकर मुकाबला करने की बात कही थी। इस बैठक में लिए गए इस महत्वपूर्ण को उसी कड़ी से जोड़कर देखा जा रहा है। |
लखनऊ। कोरोना वायरस के बढ़ते असर को देखते हुए यूपी पुलिस पूरी तरह मुस्तैद है। यूपी पुलिस अपनी ड्यूटी में कोई कोताही नहीं बरत रही है। सीएम योगी का भी आदेश है कि लॉकडाउन का सख्ती से पालन करवाया जाए साथ ही हॉटस्पॉट वाले एरिया में घूम रहे हर शख्स से पूछताछ की जाए। इसी को देखते हुए यूपी पुलिस पूरी तत्परता से अपनी ड्यूटी निभा रही है। वह सड़कों पर लोगों से लॉकडाउन का पालन तो करवा ही रही है साथ ही खाने का पैकेट एवं दवाइयां तक जरूरत मन्दों के घर पहुंचा रहे हैं। साथ ही पुलिस के आलाधिकारी भी लोगों को इस खतरे से बचाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं।
औरैया के एडिशनल एसपी कमलेश दीक्षित को जानकारी मिली कि इलाके में लोग लॉकडाउन का पालन नहीं कर रहे हैं। ऐसे में उन्होंने कार की बजाय साईकिल से इलाकों का दौरा करने का फैसला किया। साइकिल से उन्हें कोई पहचान भी नहीं पाएगा और वह लॉकडाउन का पालन न कर रहे लोगों को समझा भी पाएंगे।
एडिशनल एसपी ने आवश्यक वस्तुओं के अलावा खुली अन्य दुकानों को बंद कराया। इसी के साथ उन्होंने दुकानदारों को चेतावनी भी दी। उन्होंने बाजार में खरीदारी करने के लिए आए लोगों को मास्क पहनकर निकलने की हिदायत दी। बाजार में सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने के लिए दुकानदारों को सख्त चेतावनी दी और फिर ऐसा मिलने पर कार्रवाई को कहा।
बता दें कि इसके पहले भी सूबे के कई अधिकारी लॉक डाउन की हकीकत का पता करने ऐसा ही तरीका अपना चुके हैं।
| लखनऊ। कोरोना वायरस के बढ़ते असर को देखते हुए यूपी पुलिस पूरी तरह मुस्तैद है। यूपी पुलिस अपनी ड्यूटी में कोई कोताही नहीं बरत रही है। सीएम योगी का भी आदेश है कि लॉकडाउन का सख्ती से पालन करवाया जाए साथ ही हॉटस्पॉट वाले एरिया में घूम रहे हर शख्स से पूछताछ की जाए। इसी को देखते हुए यूपी पुलिस पूरी तत्परता से अपनी ड्यूटी निभा रही है। वह सड़कों पर लोगों से लॉकडाउन का पालन तो करवा ही रही है साथ ही खाने का पैकेट एवं दवाइयां तक जरूरत मन्दों के घर पहुंचा रहे हैं। साथ ही पुलिस के आलाधिकारी भी लोगों को इस खतरे से बचाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। औरैया के एडिशनल एसपी कमलेश दीक्षित को जानकारी मिली कि इलाके में लोग लॉकडाउन का पालन नहीं कर रहे हैं। ऐसे में उन्होंने कार की बजाय साईकिल से इलाकों का दौरा करने का फैसला किया। साइकिल से उन्हें कोई पहचान भी नहीं पाएगा और वह लॉकडाउन का पालन न कर रहे लोगों को समझा भी पाएंगे। एडिशनल एसपी ने आवश्यक वस्तुओं के अलावा खुली अन्य दुकानों को बंद कराया। इसी के साथ उन्होंने दुकानदारों को चेतावनी भी दी। उन्होंने बाजार में खरीदारी करने के लिए आए लोगों को मास्क पहनकर निकलने की हिदायत दी। बाजार में सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने के लिए दुकानदारों को सख्त चेतावनी दी और फिर ऐसा मिलने पर कार्रवाई को कहा। बता दें कि इसके पहले भी सूबे के कई अधिकारी लॉक डाउन की हकीकत का पता करने ऐसा ही तरीका अपना चुके हैं। |
बीसीजी एक्स के प्रबंध निदेशक एवं वरिष्ठ साझेदार और ग्लोबल लीडर सिल्वैन डुरंटन तथा बीसीजी एक्स इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं साझेदार और प्रमुख निपुण कालरा ने बीसीजी के मुंबई कार्यालय में शिवानी शिंदे के साथ बातचीत में कहा कि उद्यमों में जनरेटिव एआई का कार्यान्वयन केवल तकनीक और उपकरणों के संबंध में ही नहीं है, बल्कि इसका 70 प्रतिशत भाग लोगों से भी संबंधित है। उन्होंने इस बारे में बात की कि जेनेरेटिव एआई के मामले में भारत किस तरह लाभ की स्थिति में है। संपादित अंशः
जनरेटिव एआई (जीएआई) चक्र में भारत कहां है?
हमने हाल ही में वैश्विक स्तर पर और भारत में एआई और अन्य सभी तकनीकों पर एक सर्वेक्षण किया और पाया कि भारत की स्थिति अलग है। भारत उन शीर्ष तीन देशों में शामिल है, जहां लोग एआई और जीएआई को लेकर आशावादी हैं। जब एआई और जीएआई की तैनाती के संबंध में चिंताओं और चुनौतियों की बात आती है, तो भारत नीचे के तीन देशों में से एक है। मुझे लगता है कि यह भारत के लिए एक सकारात्मक चीज होगी, जो अच्छी रह सकती है।
अब तक तकनीक की चर्चा क्लाउड के इर्द-गिर्द रहती थी। अब इसका केंद्र जीएआई की ओर स्थानांतरित हो गया है। कारोबार को तकनीकी परिदृश्य कैसे देखना चाहिए?
क्या कंपनियों ने क्लाउड की ओर जाना शुरू कर दिया है? हां। क्या उन्हें वह फायदा हुआ है, जिसका उनसे वादा किया गया था? नहीं। मुझे लगता है कि क्लाउड में अच्छा स्थानांतरण हुआ है और कंपनियों को इस पर ध्यान देना चाहिए। फिर भी एआई और जीएआई डेटा प्रबंधन वगैरह में सिर्फ दक्षता प्रदान करने से इतर है। यह कारोबार परिचालन के परिवर्तन के संबंध में है। इसलिए एआई की तैनात चुनौतीपूर्ण है।
लेकिन ज्यादातर कंपनियां जो सोच रही हैं, उससे ज्यादा वक्त लगेगा। बहुत से लोग सोचते हैं कि चैट जीपीटी की तैनाती बहुत आसान है और शायद ही कोई इंजीनियरिंग हो। वह एक मिथक है। अगर आप इसे कंपनियों में बड़े स्तर पर तैनात करना चाहते हैं, तो आपको इंजीनियरिंग की पूरी ताकत की जरूरत होगी।
जीएआई की तैनाती में क्या कुछ चुनौतिया क्या हैं?
जब हम पारंपरिक एआई की तैनाती पर नजर डालते हैं, तो पाते हैं कि लगभग 70 प्रतिशत कंपनियां विफल हो चुकी हैं। हम कह रहे हैं कि एआई कोई जादुई बटन नहीं है, इसमें तकनीकी चुनौतियां हैं। कंपनियों को नई तकनीक का निर्माण करना होगा और इसे पुरानी प्रणालियों में भी लाना होगा। कंपनियों और मुख्य कार्याधिकारियों को मेरी सलाह है कि उन्हें कुछ ऐसे क्षेत्रों को चुनने की जरूरत है जो वास्तव में बाधा पहुंचाएंगे। अगर कंपनियां इसे हर चीज में तैनात करना चाहती हैं, तो वे खो जाएंगी। उन्हें कारोबार पर उनके प्रभाव के आधार पर प्रक्रिया चुनने की जरूरत है।
कालरा : हां, पारंपरिक एआई के नजरिए से 70 प्रतिशत लोगों ने पैसा नहीं बनाया है। जीएआई को काफी डेटा की जरूरत होती और यह एक यात्रा है। हमने हाल ही में भारत में 45 मुख्य कार्याधिकारियों से मुलाकात की और एक बात दोहराई गई कि कर्मचारी आधार उत्पादक कैसे हो सकता है। वे छोटे-छोटे मामले देख रहे हैं।
जनरेटिव एआई द्वारा नौकरियों को प्रभावित करना एक बात है, लेकिन कर्मचारियों के लिए इसका उपयोग करने का क्या मतलब है?
डुरंटन : सही तकनीक या सही डेटा प्राप्त करना जीएआई का केवल 20 प्रतिशत हिस्सा ही है, 70 प्रतिशत हिस्सा इस संबंध में है कि लोग इसे कैसे अपनाएंगे। बहुत से लोग सोचते हैं कि जीएआई केवल टेक खरीदने और उसे लागू करने के संबंध में ही है। नहीं, लोगों जो काम करते हैं, यह उसमें परिवर्तन के संबंध में है।
दुनिया भर में 36 प्रतिशत कर्मचारियों को लगता है कि एआई उनकी नौकरियां ले लेगा। भारत में यह संख्या 50 प्रतिशत है। मैं नहीं मानता कि ये संख्याएं सही हैं। कार्यक्षेत्र में भारी चिंता है, जिसे दूर करने की जरूरत है।
| बीसीजी एक्स के प्रबंध निदेशक एवं वरिष्ठ साझेदार और ग्लोबल लीडर सिल्वैन डुरंटन तथा बीसीजी एक्स इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं साझेदार और प्रमुख निपुण कालरा ने बीसीजी के मुंबई कार्यालय में शिवानी शिंदे के साथ बातचीत में कहा कि उद्यमों में जनरेटिव एआई का कार्यान्वयन केवल तकनीक और उपकरणों के संबंध में ही नहीं है, बल्कि इसका सत्तर प्रतिशत भाग लोगों से भी संबंधित है। उन्होंने इस बारे में बात की कि जेनेरेटिव एआई के मामले में भारत किस तरह लाभ की स्थिति में है। संपादित अंशः जनरेटिव एआई चक्र में भारत कहां है? हमने हाल ही में वैश्विक स्तर पर और भारत में एआई और अन्य सभी तकनीकों पर एक सर्वेक्षण किया और पाया कि भारत की स्थिति अलग है। भारत उन शीर्ष तीन देशों में शामिल है, जहां लोग एआई और जीएआई को लेकर आशावादी हैं। जब एआई और जीएआई की तैनाती के संबंध में चिंताओं और चुनौतियों की बात आती है, तो भारत नीचे के तीन देशों में से एक है। मुझे लगता है कि यह भारत के लिए एक सकारात्मक चीज होगी, जो अच्छी रह सकती है। अब तक तकनीक की चर्चा क्लाउड के इर्द-गिर्द रहती थी। अब इसका केंद्र जीएआई की ओर स्थानांतरित हो गया है। कारोबार को तकनीकी परिदृश्य कैसे देखना चाहिए? क्या कंपनियों ने क्लाउड की ओर जाना शुरू कर दिया है? हां। क्या उन्हें वह फायदा हुआ है, जिसका उनसे वादा किया गया था? नहीं। मुझे लगता है कि क्लाउड में अच्छा स्थानांतरण हुआ है और कंपनियों को इस पर ध्यान देना चाहिए। फिर भी एआई और जीएआई डेटा प्रबंधन वगैरह में सिर्फ दक्षता प्रदान करने से इतर है। यह कारोबार परिचालन के परिवर्तन के संबंध में है। इसलिए एआई की तैनात चुनौतीपूर्ण है। लेकिन ज्यादातर कंपनियां जो सोच रही हैं, उससे ज्यादा वक्त लगेगा। बहुत से लोग सोचते हैं कि चैट जीपीटी की तैनाती बहुत आसान है और शायद ही कोई इंजीनियरिंग हो। वह एक मिथक है। अगर आप इसे कंपनियों में बड़े स्तर पर तैनात करना चाहते हैं, तो आपको इंजीनियरिंग की पूरी ताकत की जरूरत होगी। जीएआई की तैनाती में क्या कुछ चुनौतिया क्या हैं? जब हम पारंपरिक एआई की तैनाती पर नजर डालते हैं, तो पाते हैं कि लगभग सत्तर प्रतिशत कंपनियां विफल हो चुकी हैं। हम कह रहे हैं कि एआई कोई जादुई बटन नहीं है, इसमें तकनीकी चुनौतियां हैं। कंपनियों को नई तकनीक का निर्माण करना होगा और इसे पुरानी प्रणालियों में भी लाना होगा। कंपनियों और मुख्य कार्याधिकारियों को मेरी सलाह है कि उन्हें कुछ ऐसे क्षेत्रों को चुनने की जरूरत है जो वास्तव में बाधा पहुंचाएंगे। अगर कंपनियां इसे हर चीज में तैनात करना चाहती हैं, तो वे खो जाएंगी। उन्हें कारोबार पर उनके प्रभाव के आधार पर प्रक्रिया चुनने की जरूरत है। कालरा : हां, पारंपरिक एआई के नजरिए से सत्तर प्रतिशत लोगों ने पैसा नहीं बनाया है। जीएआई को काफी डेटा की जरूरत होती और यह एक यात्रा है। हमने हाल ही में भारत में पैंतालीस मुख्य कार्याधिकारियों से मुलाकात की और एक बात दोहराई गई कि कर्मचारी आधार उत्पादक कैसे हो सकता है। वे छोटे-छोटे मामले देख रहे हैं। जनरेटिव एआई द्वारा नौकरियों को प्रभावित करना एक बात है, लेकिन कर्मचारियों के लिए इसका उपयोग करने का क्या मतलब है? डुरंटन : सही तकनीक या सही डेटा प्राप्त करना जीएआई का केवल बीस प्रतिशत हिस्सा ही है, सत्तर प्रतिशत हिस्सा इस संबंध में है कि लोग इसे कैसे अपनाएंगे। बहुत से लोग सोचते हैं कि जीएआई केवल टेक खरीदने और उसे लागू करने के संबंध में ही है। नहीं, लोगों जो काम करते हैं, यह उसमें परिवर्तन के संबंध में है। दुनिया भर में छत्तीस प्रतिशत कर्मचारियों को लगता है कि एआई उनकी नौकरियां ले लेगा। भारत में यह संख्या पचास प्रतिशत है। मैं नहीं मानता कि ये संख्याएं सही हैं। कार्यक्षेत्र में भारी चिंता है, जिसे दूर करने की जरूरत है। |
Bholaa Worldwide Collection अजय देवगन की फिल्म भोला को रिलीज हुए 8 दिन बीत चुके हैं। टिकट विंडो पर फिल्म का अब तक का प्रदर्शन ठीकठाक रहा है। साउथ सुपरस्टार नानी की फिल्म दसरा से भोला फिल्म को कड़ी टक्कर मिल रही है।
नई दिल्ली, जेएनएन। 30 मार्च को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली अजय देवगन की फिल्म 'भोला' को सुपरस्टार नानी की फिल्म से कड़ी टक्कर मिल रही है। दोनों फिल्में एक ही दिन रिलीज हुई हैं। 'दृश्यम 2' के बाद यह अजय देवगन की अगली फिल्म है, जिससे दर्शकों को काफी उम्मीदें थीं। मगर जिस रफ्तार से फिल्म कमाई कर रही है, उसे देख यही लगता है कि 'भोला' दर्शकों की उम्मीदों पर धीमी गति से खरी उतर रही है।
'भोला' फिल्म ने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर 50 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है। अगर वर्ल्डवाइड कमाई की बात करें, तो भी मूवी 100 करोड़ का कलेक्शन करने से बहुत पीछे है। गुरुवार को को फिल्म का कलेक्शन 11. 2 रहा, जो कि किसी भी इंडियन फिल्म के लिए ठीकठाक आंकड़ा है। इसके पहले वीकेंड पर भोला ने 40 करोड़ का नेट कलेक्शन किया था।
हालांकि, सैकनिल्क की रिपोर्ट के अनुसार, कमाई में उतार चढ़ाव के बीच भोला मूवी की कमाई में बुधवार तक 31 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।
अजय देवगन स्टारर 'भोला' ने दुनियाभर में 74 करोड़ के आसपास का कलेक्शन किया है। इस फिल्म को अजय देवगन ने ही डायरेक्ट किया है। इससे पहले उन्होंने 'यू मी और हम', 'रनवे 34' और 'शिवाय' का भी निर्देशन किया है। इन तीनों फिल्में में से एक भी बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई। सलमान खान की 'किसी का भाई किसी की जान' रिलीज होने तक अजय देवगन की फिल्म को टिकट विंडो पर क्लियर रास्ता मिल सकता है।
'दसरा' के आगे नहीं टिक पाई 'भोला'
नवीन बाबू घन्टा उर्फ नानी की फिल्म 'दसरा' ने दुनियाभर में छह दिनों में 100 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया, और अब भी इसका कलेक्शन अच्छा जा रहा है। खुद सुपरस्टार नानी ने ग्लोबल लेवल पर 100 करोड़ पार होने की जानकारी शेयर की।
'दसरा' अभिनेता नानी की पहली पैन इंडिया फिल्म है, जिसमें उनकी जोड़ी कीर्ति सुरेश के साथ बनी है।
| Bholaa Worldwide Collection अजय देवगन की फिल्म भोला को रिलीज हुए आठ दिन बीत चुके हैं। टिकट विंडो पर फिल्म का अब तक का प्रदर्शन ठीकठाक रहा है। साउथ सुपरस्टार नानी की फिल्म दसरा से भोला फिल्म को कड़ी टक्कर मिल रही है। नई दिल्ली, जेएनएन। तीस मार्च को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली अजय देवगन की फिल्म 'भोला' को सुपरस्टार नानी की फिल्म से कड़ी टक्कर मिल रही है। दोनों फिल्में एक ही दिन रिलीज हुई हैं। 'दृश्यम दो' के बाद यह अजय देवगन की अगली फिल्म है, जिससे दर्शकों को काफी उम्मीदें थीं। मगर जिस रफ्तार से फिल्म कमाई कर रही है, उसे देख यही लगता है कि 'भोला' दर्शकों की उम्मीदों पर धीमी गति से खरी उतर रही है। 'भोला' फिल्म ने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर पचास करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है। अगर वर्ल्डवाइड कमाई की बात करें, तो भी मूवी एक सौ करोड़ का कलेक्शन करने से बहुत पीछे है। गुरुवार को को फिल्म का कलेक्शन ग्यारह. दो रहा, जो कि किसी भी इंडियन फिल्म के लिए ठीकठाक आंकड़ा है। इसके पहले वीकेंड पर भोला ने चालीस करोड़ का नेट कलेक्शन किया था। हालांकि, सैकनिल्क की रिपोर्ट के अनुसार, कमाई में उतार चढ़ाव के बीच भोला मूवी की कमाई में बुधवार तक इकतीस प्रतिशत की गिरावट देखी गई। अजय देवगन स्टारर 'भोला' ने दुनियाभर में चौहत्तर करोड़ के आसपास का कलेक्शन किया है। इस फिल्म को अजय देवगन ने ही डायरेक्ट किया है। इससे पहले उन्होंने 'यू मी और हम', 'रनवे चौंतीस' और 'शिवाय' का भी निर्देशन किया है। इन तीनों फिल्में में से एक भी बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई। सलमान खान की 'किसी का भाई किसी की जान' रिलीज होने तक अजय देवगन की फिल्म को टिकट विंडो पर क्लियर रास्ता मिल सकता है। 'दसरा' के आगे नहीं टिक पाई 'भोला' नवीन बाबू घन्टा उर्फ नानी की फिल्म 'दसरा' ने दुनियाभर में छह दिनों में एक सौ करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया, और अब भी इसका कलेक्शन अच्छा जा रहा है। खुद सुपरस्टार नानी ने ग्लोबल लेवल पर एक सौ करोड़ पार होने की जानकारी शेयर की। 'दसरा' अभिनेता नानी की पहली पैन इंडिया फिल्म है, जिसमें उनकी जोड़ी कीर्ति सुरेश के साथ बनी है। |
गांधीनगर से बीजेपी उम्मीदवार अनिल कुमार वाजपेयी जीते हैं। वाजपेयी ने आप के कैंडिडेट नवीन चौधरी को हराया। वहीं तीसरे नंबर पर कांग्रेस के अरविंदर सिंह लवली रहे।
नई दिल्ली. विधानसभा सीट क्रमांक 61 यानी गांधीनगर से बीजेपी उम्मीदवार अनिल कुमार वाजपेयी जीते हैं। वाजपेयी ने आप के कैंडिडेट नवीन चौधरी को हराया। वहीं तीसरे नंबर पर कांग्रेस के अरविंदर सिंह लवली रहे। बीजेपी को यहां 48824, आप को 42745 और कांग्रेस को 21913 वोट मिले।
2015 के चुनाव की बात करें तो आप के उम्मीदवार रहे अनिल कुमार वाजपेयी को 50946 वोट मिले थे, जबकि दूसरे नंबर पर रहे बीजेपी के जितेन्द्र को 43464 मत प्राप्त हुए थे। वहीं कांग्रेस के उम्मीदवार रहे सुरेन्द्र प्रकाश शर्मा को 16228 वोट मिले थे। गांधीनगर विधानसभा सीट पर कुल वोटर्स की संख्या 168799 है।
गांधीनगर (2015)
गांधी नगर यमुना पार दिल्ली का एक प्रमुख क्षेत्र है। यह पूर्वी दिल्ली जिले में आता है। यह गांधी नगर मार्केट के लिए फेमस है। इसे एशिया का सबसे बड़ा रेडीमेड गारमेंट्स मार्केट कहा जाता है। यहां कई फैक्टरियां भी हैं। यहां थोक में बहुत सस्ते कपड़े मिलते हैं। इस मार्केट में 140 रुपए में फुल साइज जींस तक मिल जाएगी। बच्चों के कपड़े भी काफी सस्ते मिलते हैं। यहां दूर-दूर से व्यापारी और सामान्य लोग भी खरीददारी करने आते हैं।
| गांधीनगर से बीजेपी उम्मीदवार अनिल कुमार वाजपेयी जीते हैं। वाजपेयी ने आप के कैंडिडेट नवीन चौधरी को हराया। वहीं तीसरे नंबर पर कांग्रेस के अरविंदर सिंह लवली रहे। नई दिल्ली. विधानसभा सीट क्रमांक इकसठ यानी गांधीनगर से बीजेपी उम्मीदवार अनिल कुमार वाजपेयी जीते हैं। वाजपेयी ने आप के कैंडिडेट नवीन चौधरी को हराया। वहीं तीसरे नंबर पर कांग्रेस के अरविंदर सिंह लवली रहे। बीजेपी को यहां अड़तालीस हज़ार आठ सौ चौबीस, आप को बयालीस हज़ार सात सौ पैंतालीस और कांग्रेस को इक्कीस हज़ार नौ सौ तेरह वोट मिले। दो हज़ार पंद्रह के चुनाव की बात करें तो आप के उम्मीदवार रहे अनिल कुमार वाजपेयी को पचास हज़ार नौ सौ छियालीस वोट मिले थे, जबकि दूसरे नंबर पर रहे बीजेपी के जितेन्द्र को तैंतालीस हज़ार चार सौ चौंसठ मत प्राप्त हुए थे। वहीं कांग्रेस के उम्मीदवार रहे सुरेन्द्र प्रकाश शर्मा को सोलह हज़ार दो सौ अट्ठाईस वोट मिले थे। गांधीनगर विधानसभा सीट पर कुल वोटर्स की संख्या एक लाख अड़सठ हज़ार सात सौ निन्यानवे है। गांधीनगर गांधी नगर यमुना पार दिल्ली का एक प्रमुख क्षेत्र है। यह पूर्वी दिल्ली जिले में आता है। यह गांधी नगर मार्केट के लिए फेमस है। इसे एशिया का सबसे बड़ा रेडीमेड गारमेंट्स मार्केट कहा जाता है। यहां कई फैक्टरियां भी हैं। यहां थोक में बहुत सस्ते कपड़े मिलते हैं। इस मार्केट में एक सौ चालीस रुपयापए में फुल साइज जींस तक मिल जाएगी। बच्चों के कपड़े भी काफी सस्ते मिलते हैं। यहां दूर-दूर से व्यापारी और सामान्य लोग भी खरीददारी करने आते हैं। |
2 दिसंबर 1984 को भोपाल में एक ऐसी त्रासदी हुई थी, जिसके जख्म 39 साल बाद भी भरे नहीं हैं। इस दिल दहला देने वाली घटना में हजारों लोग मारे गए थे, जो बच गए, उनमें से कई अंधेपन तो कई अपंगता का शिकार हो गए। उस दुर्घटना को जब भी याद करो, रोम-रोम सिहर उठता है। हादसे के पीछे कई कहानियां हैं, अलग-अलग लोगों की जुबानी। इस पर आधरित ये सीरीज है।
इस बहुचर्चित सीरीज की स्टार कास्ट की बातें करें तो इस सीरीज में कई सारे शानदार कलाकार काम कर रहे हैं। आर माधवन , बाबिल खान , के के मेनन और दिव्येंदु इस सीरीज में मु्ख्य किरदार में नजर आएंगे। इसके अलावा कई दूसरे भी किरदार हैं जो अपनी एक्टिंग का जादू दिखाते नजर आएंगे। इस सीरीज का निर्देशन शिव रवैल ने किया है।
शिव रवैल की निर्देशित सीरीज 'द रेलवे मेन' का ट्रेलर रिलीज हो गया है। सीरीज के ट्रेलर के रिलीज होते ही यह दर्शकों के बीच काफी वायरल हो रहा है। द रेलवे मेन के ट्रेलर में दिखाया गया है कि चार लोग हैं, जो भोपाल रेलवे स्टेशन पर अलग-अलग काम कर रहे हैं। कोई वर्दी में है तो किसी को रेलवे में नई-नई नौकरी मिली है। हर तरफ खुशी का माहौल है। तभी एक हादसा होता है। एक फैक्ट्री में गैस रिसने लगती है। वो गैस हवा में घुल जाती है। कोई सांस लेते ही मौत की आगोश में चला जाता है तो किसी का दम घुटने लगता है। इसके बाद ये चारो लोग सबकी मदद करते हैं।
| दो दिसंबर एक हज़ार नौ सौ चौरासी को भोपाल में एक ऐसी त्रासदी हुई थी, जिसके जख्म उनतालीस साल बाद भी भरे नहीं हैं। इस दिल दहला देने वाली घटना में हजारों लोग मारे गए थे, जो बच गए, उनमें से कई अंधेपन तो कई अपंगता का शिकार हो गए। उस दुर्घटना को जब भी याद करो, रोम-रोम सिहर उठता है। हादसे के पीछे कई कहानियां हैं, अलग-अलग लोगों की जुबानी। इस पर आधरित ये सीरीज है। इस बहुचर्चित सीरीज की स्टार कास्ट की बातें करें तो इस सीरीज में कई सारे शानदार कलाकार काम कर रहे हैं। आर माधवन , बाबिल खान , के के मेनन और दिव्येंदु इस सीरीज में मु्ख्य किरदार में नजर आएंगे। इसके अलावा कई दूसरे भी किरदार हैं जो अपनी एक्टिंग का जादू दिखाते नजर आएंगे। इस सीरीज का निर्देशन शिव रवैल ने किया है। शिव रवैल की निर्देशित सीरीज 'द रेलवे मेन' का ट्रेलर रिलीज हो गया है। सीरीज के ट्रेलर के रिलीज होते ही यह दर्शकों के बीच काफी वायरल हो रहा है। द रेलवे मेन के ट्रेलर में दिखाया गया है कि चार लोग हैं, जो भोपाल रेलवे स्टेशन पर अलग-अलग काम कर रहे हैं। कोई वर्दी में है तो किसी को रेलवे में नई-नई नौकरी मिली है। हर तरफ खुशी का माहौल है। तभी एक हादसा होता है। एक फैक्ट्री में गैस रिसने लगती है। वो गैस हवा में घुल जाती है। कोई सांस लेते ही मौत की आगोश में चला जाता है तो किसी का दम घुटने लगता है। इसके बाद ये चारो लोग सबकी मदद करते हैं। |
1। दो विस्फोटों की शक्ति 3 और 21 टन टीएनटी थी। टियांजिन, एक्सनम एक्सगस्ट एक्सएनयूएमएक्स।
2। टियांजिन, एक्सनम एक्सगस्ट एक्सएनयूएमएक्स। (रॉयटर्स द्वारा फोटो):
3। Firefighters। (फोटो नं हान गुआन द्वारा):
4। दमकल की गाड़ियां। (रॉयटर्स द्वारा फोटो):
5। पोर्ट में शॉक-वेव्ड कंटेनर।
6। टूटी खिड़कियां। टियांजिन, एक्सनम एक्सगस्ट एक्सएनयूएमएक्स। (फोटो ग्रेग बेकर द्वारा):
7। अर्दली पंक्तियों में जली हुई कारें। (रॉयटर्स द्वारा फोटो):
8। धमाका-विकृत चीनी ऑटो उद्योग। (फोटो जेसन ली । रॉयटर्स द्वारा):
9। विस्फोट की जगह। (फोटो ग्रेग बेकर द्वारा):
10। जली हुई कारों की कतार। (चीनफोटोप्रेस द्वारा फोटो):
11। विस्फोट स्थल के पास "कीड़े" जला। (फोटो ग्रेग बेकर द्वारा):
12। भवन, बंदरगाह से कंटेनर, कारें - सभी को चीन में मानव निर्मित आपदा के साथ मिलाया गया। (दामिर सागोलोज द्वारा फोटो। रॉयटर्स):
13। विस्फोट के स्थल से एक धातु का गोला यहां से उड़ गया, जो कई किलोमीटर तक था। (फोटो नं हान गुआन द्वारा):
14। इस तरह की इमारतों के अंदर।
15। खतरनाक। खिड़की के शीशे का हिस्सा।
16। विस्फोट की जगह से बहुत दूर नहीं। (फोटो ग्रेग बेकर द्वारा):
17। (फोटो ग्रेग बेकर द्वारा):
18। (फोटो जेसन ली । रॉयटर्स द्वारा):
19। (फोटो ग्रेग बेकर द्वारा):
20। चीन में मानव निर्मित आपदा, 13 अगस्त 2015।
| एक। दो विस्फोटों की शक्ति तीन और इक्कीस टन टीएनटी थी। टियांजिन, एक्सनम एक्सगस्ट एक्सएनयूएमएक्स। दो। टियांजिन, एक्सनम एक्सगस्ट एक्सएनयूएमएक्स। : तीन। Firefighters। : चार। दमकल की गाड़ियां। : पाँच। पोर्ट में शॉक-वेव्ड कंटेनर। छः। टूटी खिड़कियां। टियांजिन, एक्सनम एक्सगस्ट एक्सएनयूएमएक्स। : सात। अर्दली पंक्तियों में जली हुई कारें। : आठ। धमाका-विकृत चीनी ऑटो उद्योग। : नौ। विस्फोट की जगह। : दस। जली हुई कारों की कतार। : ग्यारह। विस्फोट स्थल के पास "कीड़े" जला। : बारह। भवन, बंदरगाह से कंटेनर, कारें - सभी को चीन में मानव निर्मित आपदा के साथ मिलाया गया। : तेरह। विस्फोट के स्थल से एक धातु का गोला यहां से उड़ गया, जो कई किलोमीटर तक था। : चौदह। इस तरह की इमारतों के अंदर। पंद्रह। खतरनाक। खिड़की के शीशे का हिस्सा। सोलह। विस्फोट की जगह से बहुत दूर नहीं। : सत्रह। : अट्ठारह। : उन्नीस। : बीस। चीन में मानव निर्मित आपदा, तेरह अगस्त दो हज़ार पंद्रह। |
IND W vs SL W Asia Cup Final: भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने एशिया कप 2022 के फाइनल में श्रीलंका को 8 विकेट से हराकर एक और बार एशिया कप जीत लिया। इस मैच में श्रीलंका ने भारत के सामने जीत के लिए 66 रनों का लक्ष्य मिला था जिसे टीम इंडिया ने 2 विकेट खोकर हासिल कर लिया। इस मैच में भारतीय गेंदबाज़ों ने तो शानदार काम किया ही लेकिन मैच खत्म होते-होते स्मृति मंधाना मेला लूट गई।
भारत को जीत के लिए 66 रनों का लक्ष्य मिला था और इन 66 में से 51 रन तो मंधाना के बल्ले से ही निकले। मंधाना ने अंत तक नाबाद रहते हुए 25 गेंदों में 51 रनों की तूफानी पारी खेली। इस दौरान उनके बल्ले से 6 चौके और 3 छक्के भी देखने को मिले। यहां तक कि मंधाना ने पारी का अंत भी छक्के के साथ ही किया।
| IND W vs SL W Asia Cup Final: भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने एशिया कप दो हज़ार बाईस के फाइनल में श्रीलंका को आठ विकेट से हराकर एक और बार एशिया कप जीत लिया। इस मैच में श्रीलंका ने भारत के सामने जीत के लिए छयासठ रनों का लक्ष्य मिला था जिसे टीम इंडिया ने दो विकेट खोकर हासिल कर लिया। इस मैच में भारतीय गेंदबाज़ों ने तो शानदार काम किया ही लेकिन मैच खत्म होते-होते स्मृति मंधाना मेला लूट गई। भारत को जीत के लिए छयासठ रनों का लक्ष्य मिला था और इन छयासठ में से इक्यावन रन तो मंधाना के बल्ले से ही निकले। मंधाना ने अंत तक नाबाद रहते हुए पच्चीस गेंदों में इक्यावन रनों की तूफानी पारी खेली। इस दौरान उनके बल्ले से छः चौके और तीन छक्के भी देखने को मिले। यहां तक कि मंधाना ने पारी का अंत भी छक्के के साथ ही किया। |
नई दिल्ली। भारत के खिलाफ तीसरा टी-20 मुकाबला इंग्लैंड के कप्तान इयोन मोर्गन का सबसे छोटे प्रारूप में 100वां अंतरराष्ट्रीय मैच था। इसके साथ ही मोर्गन विश्व के तीसरे खिलाड़ी बन गए जिन्होंने 100 टी-20 मुकाबले खेले हैं। मोर्गन के अलावा न्यूजीलैंड के रॉस टेलर, पाकिस्तान के शोएब मलिक और भारतीय सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा ने यह उपलब्धि हासिल की है।
यह खास उपलब्धि हासिल करने के बाद मोर्गन ने कहा,"यह मेरे लिए गर्व की बात है कि मैं 100 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच में अपनी टीम के लिए मैदान पर उतरा हूं। " मोर्गन के लिए उनका 100वां मैच खास था क्योंकि उनकी अगुआई में इंग्लैंड ने भारत को पांच मैचों की श्रृंखला के तीसरे मुकाबले में 8 विकेट से हराकर 2-1 की बढ़त हासिल की।
इस मुकाबले में इंग्लैंड की टीम ने टॉस जीतकर भारत को पहले बल्लेबाजी का न्योता दिया था। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में कप्तान विराट कोहली (77) को छोड़कर और कोई भी भारतीय खिलाड़ी कमाल नहीं दिखा सके, जिसके कारण टीम इंडिया निर्धारित 20 ओवर में 6 विकेट के नुकसान पर 156 रन ही बना सकी।
भारत के द्वारा दिए गए इस लक्ष्य को इंग्लैंड के विस्फोटक बल्लेबाज जोस बटलर के नाबाद 83 और जॉनी बेयरस्टो के नाबाद 40 रनों के बदौलत 18. 2 ओवर में 2 विकेट खोकर हासिल कर लिया।
| नई दिल्ली। भारत के खिलाफ तीसरा टी-बीस मुकाबला इंग्लैंड के कप्तान इयोन मोर्गन का सबसे छोटे प्रारूप में एक सौवां अंतरराष्ट्रीय मैच था। इसके साथ ही मोर्गन विश्व के तीसरे खिलाड़ी बन गए जिन्होंने एक सौ टी-बीस मुकाबले खेले हैं। मोर्गन के अलावा न्यूजीलैंड के रॉस टेलर, पाकिस्तान के शोएब मलिक और भारतीय सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा ने यह उपलब्धि हासिल की है। यह खास उपलब्धि हासिल करने के बाद मोर्गन ने कहा,"यह मेरे लिए गर्व की बात है कि मैं एक सौ टी-बीस अंतरराष्ट्रीय मैच में अपनी टीम के लिए मैदान पर उतरा हूं। " मोर्गन के लिए उनका एक सौवां मैच खास था क्योंकि उनकी अगुआई में इंग्लैंड ने भारत को पांच मैचों की श्रृंखला के तीसरे मुकाबले में आठ विकेट से हराकर दो-एक की बढ़त हासिल की। इस मुकाबले में इंग्लैंड की टीम ने टॉस जीतकर भारत को पहले बल्लेबाजी का न्योता दिया था। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में कप्तान विराट कोहली को छोड़कर और कोई भी भारतीय खिलाड़ी कमाल नहीं दिखा सके, जिसके कारण टीम इंडिया निर्धारित बीस ओवर में छः विकेट के नुकसान पर एक सौ छप्पन रन ही बना सकी। भारत के द्वारा दिए गए इस लक्ष्य को इंग्लैंड के विस्फोटक बल्लेबाज जोस बटलर के नाबाद तिरासी और जॉनी बेयरस्टो के नाबाद चालीस रनों के बदौलत अट्ठारह. दो ओवर में दो विकेट खोकर हासिल कर लिया। |
नगर निगम के वार्ड नंबर 19 शिवपुरम की गली नंबर एक की सड़क बनने के एक माह में टूटने लगी है। एक महीने पहले बनी सड़क के टूटने से नाराज क्षेत्रवासियों ने प्रदर्शन किया।
वार्ड नंबर 19 गली नंबर एक में रहने वाले लोगों ने नगर निगम के खिलाफ प्रदर्शन किया। आरोप है कि सड़क निर्माण के समय गुणवत्ता का ख्याल नहीं रख गया। स्थानीय निवासी मांगेराम सैनी का है कि गुणवत्ता की कमी के चलते लाखों की सड़क एक महीने में टूटनी शुरु हो गयी है। उन्होंने बताया कि इसके लिए मेयर, नगर निगम अधिकारियों और जेएम तक भी शिकायत की गयी। लेकिन सड़क को ठीक नहीं किया गया। क्षेत्रवासियों का कहना है कि नगर निगम ने एक माह पूर्व सीसी रोड का निर्मण किया था, परंतु एक माह के भीतर ही सड़क का किनारा धस जाने से सड़क टूट गई।
प्रदर्शन करने वालों में जनेश्वर सैनी, मेघराज सैनी, सुधीर सैनी, प्रेम सिंह नेगी,गोपाल सिंह नेगी, ओमपाल मलिक, सुनील सैनी, प्रेम पाल राणा,पिंकी सैनी, निशांत सैनी, मोहित मलिक, राजेश चौधरी, राधा नेगी, अंजू ममता,दिया,अरुण रावत, राजीव चौधरी,केशव पांडे आदि कॉलोनी वासी शामिल रहे।
मेयर गौरव गोयल का कहना है कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता में किसी प्रकार को कोई अनदेखी न करने के निर्देश ठेकेदारों को पूर्व दिए जा चुके हैं। मेरे पास कोई को शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलते ही ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
| नगर निगम के वार्ड नंबर उन्नीस शिवपुरम की गली नंबर एक की सड़क बनने के एक माह में टूटने लगी है। एक महीने पहले बनी सड़क के टूटने से नाराज क्षेत्रवासियों ने प्रदर्शन किया। वार्ड नंबर उन्नीस गली नंबर एक में रहने वाले लोगों ने नगर निगम के खिलाफ प्रदर्शन किया। आरोप है कि सड़क निर्माण के समय गुणवत्ता का ख्याल नहीं रख गया। स्थानीय निवासी मांगेराम सैनी का है कि गुणवत्ता की कमी के चलते लाखों की सड़क एक महीने में टूटनी शुरु हो गयी है। उन्होंने बताया कि इसके लिए मेयर, नगर निगम अधिकारियों और जेएम तक भी शिकायत की गयी। लेकिन सड़क को ठीक नहीं किया गया। क्षेत्रवासियों का कहना है कि नगर निगम ने एक माह पूर्व सीसी रोड का निर्मण किया था, परंतु एक माह के भीतर ही सड़क का किनारा धस जाने से सड़क टूट गई। प्रदर्शन करने वालों में जनेश्वर सैनी, मेघराज सैनी, सुधीर सैनी, प्रेम सिंह नेगी,गोपाल सिंह नेगी, ओमपाल मलिक, सुनील सैनी, प्रेम पाल राणा,पिंकी सैनी, निशांत सैनी, मोहित मलिक, राजेश चौधरी, राधा नेगी, अंजू ममता,दिया,अरुण रावत, राजीव चौधरी,केशव पांडे आदि कॉलोनी वासी शामिल रहे। मेयर गौरव गोयल का कहना है कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता में किसी प्रकार को कोई अनदेखी न करने के निर्देश ठेकेदारों को पूर्व दिए जा चुके हैं। मेरे पास कोई को शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलते ही ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। |
क्या आपके साथ भी एसे होता है कि आप सारा दिन काम करते करते इतना थक जाती है कि आप अपना मनपंसद टी. वी शो भी अच्छी तरह से नहीं देख पाती और घर में हमेशा थका-थका महसूस करती है। घर पर सीढियां चढ़ने के वक्त,कोई भी काम करने के वक्त या बैड से उठने के वक्त भी एसा महसूस होना कि जितनी नींद हमने ली है वो अभी भी पर्याप्त नहीं है।
स्वस्थ ऊर्जा का निर्माण स्वास्थ्यवर्द्धक पाचन प्रणाली से शुरू होता है। विटामिन बी की कमी से भी थकान महसूस होती है। हल्की थकान तथा गंभीर थकान में से आप खुद को किसका शिकार महसूस करती हैं और वास्तव में आपके साथ गलत क्या हो रहा है? थकावट महसूस होने के कई कारण हो सकते है। जब भी शरीर में थकावट महसूस हो तो थोड़ा इधर-उधर टहल कर आप अपनी थकावट को दूर कर सकती है।
- जब आप थकी होती हैं तो आपका मैटाबोलिक रेट कम हो जाता है और आप कम कैलोरीज बर्न करती हैं। इसी कारण आपको थकावट महसूस होती है। कसरत करने से भी आप सारा दिन बेहतर महसूस करेंगी और काम करने के बाद भी थकावट कम महसूस होगी।
- हमारे शरीर में थकान महसूस होने के कई कारण हो सकते है। कई बार विटामिन्स की कमी होने पर भी हम कोई भी काम करने के बाद थकावट महसूस करते है। आयरन की कमी होने पर भी थकान महसूस होती है। यदि आपको अपनी त्वचा पीली दिखाई दे, अपनी धड़कन तेज महसूस हो और चिड़चिड़ापन महसूस हो तो आयरन से भरपूर डाइट आपको इस समस्या से निजात पाने में सहायक हो सकती है।
- अपने वातावरण को ताजा बनाए रखें और बोर होने से बचें जब भी आप बोर हो रही हो तो संगीत का लुत्फ उठा सकती है और बोरियत आपके मूड को प्रभावित करती है।
- आपकी थकावट का कारण थायराइड भी हो सकता है। सुबह के समय थकान थायराइड की कमजोर कार्यप्रणाली का चिन्ह हो सकती है। इसलिए थायराइड की जांच अवश्य करवाएं।
- भरपूर नींद न लेने की वजह से भी आप सारा दिन थकान महसूस कर सकती है। शरीर के लिए भरपूर नींद लेना भी बहुत जरूरी होता है। इसलिए रात के समय कम से कम 8 घंटे नींद लेना जरूरी है और दिन के समय बीच में कम से कम 20-30 मिनट की नींद जरूर लें।
- दिन में भारी भोजन करने की बजाय अपने भोजन में साबुत अनाज, ओट्स, अंकुरित खाद्य तथा बहुत सारी सब्जियां तथा फल शामिल करें।
| क्या आपके साथ भी एसे होता है कि आप सारा दिन काम करते करते इतना थक जाती है कि आप अपना मनपंसद टी. वी शो भी अच्छी तरह से नहीं देख पाती और घर में हमेशा थका-थका महसूस करती है। घर पर सीढियां चढ़ने के वक्त,कोई भी काम करने के वक्त या बैड से उठने के वक्त भी एसा महसूस होना कि जितनी नींद हमने ली है वो अभी भी पर्याप्त नहीं है। स्वस्थ ऊर्जा का निर्माण स्वास्थ्यवर्द्धक पाचन प्रणाली से शुरू होता है। विटामिन बी की कमी से भी थकान महसूस होती है। हल्की थकान तथा गंभीर थकान में से आप खुद को किसका शिकार महसूस करती हैं और वास्तव में आपके साथ गलत क्या हो रहा है? थकावट महसूस होने के कई कारण हो सकते है। जब भी शरीर में थकावट महसूस हो तो थोड़ा इधर-उधर टहल कर आप अपनी थकावट को दूर कर सकती है। - जब आप थकी होती हैं तो आपका मैटाबोलिक रेट कम हो जाता है और आप कम कैलोरीज बर्न करती हैं। इसी कारण आपको थकावट महसूस होती है। कसरत करने से भी आप सारा दिन बेहतर महसूस करेंगी और काम करने के बाद भी थकावट कम महसूस होगी। - हमारे शरीर में थकान महसूस होने के कई कारण हो सकते है। कई बार विटामिन्स की कमी होने पर भी हम कोई भी काम करने के बाद थकावट महसूस करते है। आयरन की कमी होने पर भी थकान महसूस होती है। यदि आपको अपनी त्वचा पीली दिखाई दे, अपनी धड़कन तेज महसूस हो और चिड़चिड़ापन महसूस हो तो आयरन से भरपूर डाइट आपको इस समस्या से निजात पाने में सहायक हो सकती है। - अपने वातावरण को ताजा बनाए रखें और बोर होने से बचें जब भी आप बोर हो रही हो तो संगीत का लुत्फ उठा सकती है और बोरियत आपके मूड को प्रभावित करती है। - आपकी थकावट का कारण थायराइड भी हो सकता है। सुबह के समय थकान थायराइड की कमजोर कार्यप्रणाली का चिन्ह हो सकती है। इसलिए थायराइड की जांच अवश्य करवाएं। - भरपूर नींद न लेने की वजह से भी आप सारा दिन थकान महसूस कर सकती है। शरीर के लिए भरपूर नींद लेना भी बहुत जरूरी होता है। इसलिए रात के समय कम से कम आठ घंटाटे नींद लेना जरूरी है और दिन के समय बीच में कम से कम बीस-तीस मिनट की नींद जरूर लें। - दिन में भारी भोजन करने की बजाय अपने भोजन में साबुत अनाज, ओट्स, अंकुरित खाद्य तथा बहुत सारी सब्जियां तथा फल शामिल करें। |
श्रीनगर : जम्मू-कश्मीर में किश्तवाड के जिला अस्पताल में आतंकियों ने मंगलवार को फायरिंग कर दी। इसमें आरएसएस नेता चंद्रकांत शर्मा और उनके निजी गार्ड की मृत्यु हो गई। शर्मा संघ से जुडे थे और किश्तवाड के जिला अस्पताल में बतौर मेडिकल असिसटेंट कार्यरत थे।
पुलिस ने बताया कि आतंकियों ने मेडिकल असिसटेंट चंद्रकांत शर्मा और उनके निजी गार्ड पर फायरिंग की। गार्ड की मौके पर ही मृत्यु हो गई, जबकि आनंद शर्मा का अस्पताल में इलाज के दौरान मृत्यु हो गई। इलाके में कर्फ्यू लगा हुआ है।
| श्रीनगर : जम्मू-कश्मीर में किश्तवाड के जिला अस्पताल में आतंकियों ने मंगलवार को फायरिंग कर दी। इसमें आरएसएस नेता चंद्रकांत शर्मा और उनके निजी गार्ड की मृत्यु हो गई। शर्मा संघ से जुडे थे और किश्तवाड के जिला अस्पताल में बतौर मेडिकल असिसटेंट कार्यरत थे। पुलिस ने बताया कि आतंकियों ने मेडिकल असिसटेंट चंद्रकांत शर्मा और उनके निजी गार्ड पर फायरिंग की। गार्ड की मौके पर ही मृत्यु हो गई, जबकि आनंद शर्मा का अस्पताल में इलाज के दौरान मृत्यु हो गई। इलाके में कर्फ्यू लगा हुआ है। |
बॉलीवुड स्टार्स का हॉलीवुड में जाना एक बड़ी बात मानी जाती है। कई स्टार्स ने अपने काम के झंडे गाड़े है हॉलीवुड में। इरफान खान, प्रियंका चोपड़ा, दीपिका पादुकोण, और अब आलिया भट्ट भी अपना हॉलीवुड डेब्यू करने वाली है। आलिया भट्ट के आलावा बॉलीवुड से एक और नाम सामने आ रहा है जो इस साल अपना हॉलीवुड सफर शुरू करने वाले है। हम यहाँ बात कर रहे है फरहान अख्तर की।
एक्टर, राइटर, सिंगर, प्रोडूसर फरहान अख्तर बॉलीवुड में एक अच्छा खासा नाम रखते है। फरहान बॉलीवुड लिरिसिस्ट जावेद अख्तर के बेटे है। फरहान ने बॉलीवुड में कई बड़ी फिल्मो में काम किया है। उनकी फिल्मो में से ऋतिक रोशन के साथ 'ज़िन्दगी न मिलेगी दोबारा' और 'मिल्खा सिंह' अब तक की सबसे बड़ी फिल्मो में से एक है। फरहान अख्तर अब अपना हॉलीवुड डेब्यू भी करने वाले है।
सुनने में आया है की फरहान मार्वल यूनिवर्स की फिल्म 'Ms मार्वल' में cameo करते नज़र आएंगे। फरहान अख्तर जिस सीरीस का हिस्सा होंगे उसमे इमान वेल्लानी और अरामिस नाइट, सागर शेख, ऋष शाह, जेनोबिया श्रॉफ, मोहन कपूर, मैट लिंट्ज़, यास्मीन फ्लेचर, लैथ नाकली, अजहर उस्मान, ट्रैविना स्प्रिंगर और निमरा बुका जैसे नाम भी शामिल हैं।
हालाँकि इस सीरीस में फरहान क्या रोल प्ले करेंगे उसके बारे में कुछ भी पता नहीं चल पाया है। ऐसा कहा गया है की फरहान अख्तर इस सीरीस में gust अपीयरेंस देते नज़र आएंगे।
हॉलीवुड की मोस्ट वाटचेड सीरीस में से एक है मार्वल सीरीस। इंडिया में भी इस सुपर हीरो सीरीस की बहुत फैन फोल्लोविंग है। 'Ms मार्वल 8 जून को OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज़ की जाएगी। मार्वल सीरीस की पहली फिल्मे भी बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा चुकी है। अब देखना होगा की फरहान अख्तर इस सीरीस से किस तरह लोगो का दिल जीतते है।
| बॉलीवुड स्टार्स का हॉलीवुड में जाना एक बड़ी बात मानी जाती है। कई स्टार्स ने अपने काम के झंडे गाड़े है हॉलीवुड में। इरफान खान, प्रियंका चोपड़ा, दीपिका पादुकोण, और अब आलिया भट्ट भी अपना हॉलीवुड डेब्यू करने वाली है। आलिया भट्ट के आलावा बॉलीवुड से एक और नाम सामने आ रहा है जो इस साल अपना हॉलीवुड सफर शुरू करने वाले है। हम यहाँ बात कर रहे है फरहान अख्तर की। एक्टर, राइटर, सिंगर, प्रोडूसर फरहान अख्तर बॉलीवुड में एक अच्छा खासा नाम रखते है। फरहान बॉलीवुड लिरिसिस्ट जावेद अख्तर के बेटे है। फरहान ने बॉलीवुड में कई बड़ी फिल्मो में काम किया है। उनकी फिल्मो में से ऋतिक रोशन के साथ 'ज़िन्दगी न मिलेगी दोबारा' और 'मिल्खा सिंह' अब तक की सबसे बड़ी फिल्मो में से एक है। फरहान अख्तर अब अपना हॉलीवुड डेब्यू भी करने वाले है। सुनने में आया है की फरहान मार्वल यूनिवर्स की फिल्म 'Ms मार्वल' में cameo करते नज़र आएंगे। फरहान अख्तर जिस सीरीस का हिस्सा होंगे उसमे इमान वेल्लानी और अरामिस नाइट, सागर शेख, ऋष शाह, जेनोबिया श्रॉफ, मोहन कपूर, मैट लिंट्ज़, यास्मीन फ्लेचर, लैथ नाकली, अजहर उस्मान, ट्रैविना स्प्रिंगर और निमरा बुका जैसे नाम भी शामिल हैं। हालाँकि इस सीरीस में फरहान क्या रोल प्ले करेंगे उसके बारे में कुछ भी पता नहीं चल पाया है। ऐसा कहा गया है की फरहान अख्तर इस सीरीस में gust अपीयरेंस देते नज़र आएंगे। हॉलीवुड की मोस्ट वाटचेड सीरीस में से एक है मार्वल सीरीस। इंडिया में भी इस सुपर हीरो सीरीस की बहुत फैन फोल्लोविंग है। 'Ms मार्वल आठ जून को OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज़ की जाएगी। मार्वल सीरीस की पहली फिल्मे भी बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा चुकी है। अब देखना होगा की फरहान अख्तर इस सीरीस से किस तरह लोगो का दिल जीतते है। |
Modi Cabinet Important Decision: इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है जहां पर आज बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अहम फैसले लिए गए है जिसमें आज नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी। भारत ग्रीन हाइड्रोजन का ग्लोबल हब बनेगा। प्रतिवर्ष 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन होगा।
इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने जानकारी देते हुए बताया कि, नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के लिए 19,744 करोड़ रुपए की मंजूरी आज दी गई है। इस मिशन से 8 लाख करोड़ रुपए का सीधा निवेश होगा। 6 लाख नौकरियां इससे मिलेंगी। 50 मिलियन टन ग्रीन हाउस उत्सर्जन को कम किया जाएगा। 382 मेगावाट के सुन्नी बांध हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट हिमाचल प्रदेश के लिए मंजूर किया गया है। 2,614 करोड़ रुपए की लागत इसमें आएगी। ये सतलुज नदी पर बनेगा।
आपको बताते चलें कि, केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि, 60-100 गीगावाट की इलेक्ट्रोलाइजर क्षमता को तैयार किया जाएगा। इलेक्ट्रोलाइजर की मैन्युफैक्चरिंग और ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन पर 17,490 करोड़ प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। ग्रीन हाइड्रोजन के हब को विकसित करने के लिए 400 करोड़ का प्रावधान किया है।
| Modi Cabinet Important Decision: इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है जहां पर आज बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अहम फैसले लिए गए है जिसमें आज नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी। भारत ग्रीन हाइड्रोजन का ग्लोबल हब बनेगा। प्रतिवर्ष पचास लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन होगा। इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने जानकारी देते हुए बताया कि, नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के लिए उन्नीस,सात सौ चौंतालीस करोड़ रुपए की मंजूरी आज दी गई है। इस मिशन से आठ लाख करोड़ रुपए का सीधा निवेश होगा। छः लाख नौकरियां इससे मिलेंगी। पचास मिलियन टन ग्रीन हाउस उत्सर्जन को कम किया जाएगा। तीन सौ बयासी मेगावाट के सुन्नी बांध हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट हिमाचल प्रदेश के लिए मंजूर किया गया है। दो,छः सौ चौदह करोड़ रुपए की लागत इसमें आएगी। ये सतलुज नदी पर बनेगा। आपको बताते चलें कि, केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि, साठ-एक सौ गीगावाट की इलेक्ट्रोलाइजर क्षमता को तैयार किया जाएगा। इलेक्ट्रोलाइजर की मैन्युफैक्चरिंग और ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन पर सत्रह,चार सौ नब्बे करोड़ प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। ग्रीन हाइड्रोजन के हब को विकसित करने के लिए चार सौ करोड़ का प्रावधान किया है। |
गोंडा (उप्र), 22 मई (भाषा) उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के उमरी बेगमगंज थाना इलाक़े में एक सड़क हादसे में दो व्यक्तियों की मौत हो गयी। पुलिस ने सोमवार को यह जानकारी दी।
अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज ने यहां बताया कि जिले के उमरी बेगमगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत मिथुनिया के रहने वाले लल्लू चौहान (22) अपने ससुर करिया चौहान (45) के साथ रविवार देर रात मोटरसाइकिल से जिले के ही परसपुर थाना क्षेत्र के बारी गांव में एक विवाह समारोह में जा रहे थे।
उन्होंने बताया कि उमरी-गोंडा मार्ग पर डिक्सिर पेट्रोल पंप के पास वे एक वाहन की चपेट में आ गए जिससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। सूचना मिलते ही एंबुलेंस व स्थानीय पुलिस की टीम तत्काल मौके पर पहुंची तथा दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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| गोंडा , बाईस मई उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के उमरी बेगमगंज थाना इलाक़े में एक सड़क हादसे में दो व्यक्तियों की मौत हो गयी। पुलिस ने सोमवार को यह जानकारी दी। अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज ने यहां बताया कि जिले के उमरी बेगमगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत मिथुनिया के रहने वाले लल्लू चौहान अपने ससुर करिया चौहान के साथ रविवार देर रात मोटरसाइकिल से जिले के ही परसपुर थाना क्षेत्र के बारी गांव में एक विवाह समारोह में जा रहे थे। उन्होंने बताया कि उमरी-गोंडा मार्ग पर डिक्सिर पेट्रोल पंप के पास वे एक वाहन की चपेट में आ गए जिससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। सूचना मिलते ही एंबुलेंस व स्थानीय पुलिस की टीम तत्काल मौके पर पहुंची तथा दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पुलिस मामले की जांच कर रही है। |
केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानूनों को लेकर किसानों का दिल्ली की सीमा पर प्रदर्शन जारी है। पुलिस उन्हें दिल्ली में प्रवेश करने से रोके हुए है। वहीं, शिवसेना नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा कि सरकार किसानों पर लाठियां बरसा रही है, अगर ये प्रयोग उसने सीमा पर किया होता तो लद्दाख में चीनी नहीं घुसे होते।
गौरतलब है कि किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए सरकार सक्रिय हो गई है। सरकार ने किसानों के साथ बातचीत की पेशकश की है। वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री कानूनों को लेकर किसानों को समझाने में जुटे हुए हैं। अभी तक किसानों ने दिल्ली की सीमा पर प्रदर्शन जारी रखा है।
| केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानूनों को लेकर किसानों का दिल्ली की सीमा पर प्रदर्शन जारी है। पुलिस उन्हें दिल्ली में प्रवेश करने से रोके हुए है। वहीं, शिवसेना नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा कि सरकार किसानों पर लाठियां बरसा रही है, अगर ये प्रयोग उसने सीमा पर किया होता तो लद्दाख में चीनी नहीं घुसे होते। गौरतलब है कि किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए सरकार सक्रिय हो गई है। सरकार ने किसानों के साथ बातचीत की पेशकश की है। वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री कानूनों को लेकर किसानों को समझाने में जुटे हुए हैं। अभी तक किसानों ने दिल्ली की सीमा पर प्रदर्शन जारी रखा है। |
उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ ने मुख्य सचिव को पत्र भेजकर राजस्व निरीक्षक के खाली करीब 2500 पदों पर पदोन्नति देने की मांग की है। इसमें कहा गया है कि पिछले तीन सालों से पदोन्नति न दिए जाने की वजह से अधिक आयु वाले लेखपाल सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
लेखपाल संघ के महामंत्री ब्रजेश कुमार श्रीवास्तव ने मुख्य सचिव को भेजे ज्ञापन में कहा है कि राजस्व निरीक्षक का पद लेखपालों की पदोन्नति से भरे जाने की व्यवस्था है। प्रदेश में मौजूदा समय करीब 22000 लेखपाल काम कर रहे हैं, लेकिन तीन सालों से पदोन्नति नहीं दी जा रही है। ज्ञापन में कहा गया है कि लेखपाल संवर्ग के लिए पदोन्नति के अवसर बहुत कम हैं। पूरी नौकरी में 95 फीसदी लेखपालों को तो एक भी पदोन्नति नसीब नहीं हो रही है। केवल पांच फीसदी लेखपालों को 35 से 40 वर्ष की सेवा पर सेवानिवृत्त के निकट होने पर पदोन्नति का लाभ मिलने की संभावना बनती है।
मगर, पिछले तीन सालों से राजस्व निरीक्षक के पद पर पदोन्नति न दिए जाने की वजह से यह भी लाभ नहीं मिल पा रहा है। इससे लेखपालों के मनोबल पर लगातार प्रतिकूल असर पड़ रहा है। वर्ष 1985 तक की मौलिक नियुक्ति के लेखपाल की वरियता सूची में 1500 नाम पहले से शेष थे। इसके बाद वर्ष 2019 में 1996 से 2005 तक मंडलीय स्तर पर सूची तैयार कराई गई। इसके बावजूद भी अभी तक पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई। लेखपाल संघ ने मुख्य सचिव से मांग की है कि पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी की जाए, जिससे लेखपालों को इसका लाभ मिल सके।
| उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ ने मुख्य सचिव को पत्र भेजकर राजस्व निरीक्षक के खाली करीब दो हज़ार पाँच सौ पदों पर पदोन्नति देने की मांग की है। इसमें कहा गया है कि पिछले तीन सालों से पदोन्नति न दिए जाने की वजह से अधिक आयु वाले लेखपाल सेवानिवृत्त हो रहे हैं। लेखपाल संघ के महामंत्री ब्रजेश कुमार श्रीवास्तव ने मुख्य सचिव को भेजे ज्ञापन में कहा है कि राजस्व निरीक्षक का पद लेखपालों की पदोन्नति से भरे जाने की व्यवस्था है। प्रदेश में मौजूदा समय करीब बाईस हज़ार लेखपाल काम कर रहे हैं, लेकिन तीन सालों से पदोन्नति नहीं दी जा रही है। ज्ञापन में कहा गया है कि लेखपाल संवर्ग के लिए पदोन्नति के अवसर बहुत कम हैं। पूरी नौकरी में पचानवे फीसदी लेखपालों को तो एक भी पदोन्नति नसीब नहीं हो रही है। केवल पांच फीसदी लेखपालों को पैंतीस से चालीस वर्ष की सेवा पर सेवानिवृत्त के निकट होने पर पदोन्नति का लाभ मिलने की संभावना बनती है। मगर, पिछले तीन सालों से राजस्व निरीक्षक के पद पर पदोन्नति न दिए जाने की वजह से यह भी लाभ नहीं मिल पा रहा है। इससे लेखपालों के मनोबल पर लगातार प्रतिकूल असर पड़ रहा है। वर्ष एक हज़ार नौ सौ पचासी तक की मौलिक नियुक्ति के लेखपाल की वरियता सूची में एक हज़ार पाँच सौ नाम पहले से शेष थे। इसके बाद वर्ष दो हज़ार उन्नीस में एक हज़ार नौ सौ छियानवे से दो हज़ार पाँच तक मंडलीय स्तर पर सूची तैयार कराई गई। इसके बावजूद भी अभी तक पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई। लेखपाल संघ ने मुख्य सचिव से मांग की है कि पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी की जाए, जिससे लेखपालों को इसका लाभ मिल सके। |
देशभर में कोरोना वैक्सीन की अब तक 200 करोड़ से अधिक डोज लगाई जा चुकी है। वहीं पूरे देश में कोविड वैक्सीन की बूस्टर डोज फ्री लगाई जा रही है। हिमाचल प्रदेश में भी 18 साल से अधिक उम्र के लोगों को निशुल्क प्रीकाशन (बूस्टर) डोज लगाई जा रही। हिमाचल स्वास्थ्य विभाग की तरफ से प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और विशेष वैक्सीनेशन कैंप लगाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में निदेशक परिवहन कार्यालय शिमला में 60 कर्मचारियों और अन्य लोगों को बूस्टर डोज लगाई गई।
बता दें कि देश भर में कोरोना वैक्सीन की बूस्टर डोज या प्रिकॉशन डोज लगाई जा रही है। शुरुआत में तीसरी डोज फ्रंटलाइन वर्कर्स और हेल्थकेयर वर्कर्स के अलावा 60 साल से ऊपर के लोगों को भी लगाई जा रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी गाइडलाइन के मुताबिक, तीसरी डोज में वही वैक्सीन दी जाएगी, जिसकी पहली दो डोज लगी होगी। यानी, अगर पहली दो डोज कोविशील्ड की लगी है तो तीसरी डोज भी कोविशील्ड की ही लगेगी. इसी तरह अगर पहली दो डोज कोवैक्सीन (Covaxin) की लगी थी तो तीसरी डोज भी कोवैक्सीन की ही दी जाएगीपे नाऊ पर क्लिक करे।
| देशभर में कोरोना वैक्सीन की अब तक दो सौ करोड़ से अधिक डोज लगाई जा चुकी है। वहीं पूरे देश में कोविड वैक्सीन की बूस्टर डोज फ्री लगाई जा रही है। हिमाचल प्रदेश में भी अट्ठारह साल से अधिक उम्र के लोगों को निशुल्क प्रीकाशन डोज लगाई जा रही। हिमाचल स्वास्थ्य विभाग की तरफ से प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और विशेष वैक्सीनेशन कैंप लगाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में निदेशक परिवहन कार्यालय शिमला में साठ कर्मचारियों और अन्य लोगों को बूस्टर डोज लगाई गई। बता दें कि देश भर में कोरोना वैक्सीन की बूस्टर डोज या प्रिकॉशन डोज लगाई जा रही है। शुरुआत में तीसरी डोज फ्रंटलाइन वर्कर्स और हेल्थकेयर वर्कर्स के अलावा साठ साल से ऊपर के लोगों को भी लगाई जा रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी गाइडलाइन के मुताबिक, तीसरी डोज में वही वैक्सीन दी जाएगी, जिसकी पहली दो डोज लगी होगी। यानी, अगर पहली दो डोज कोविशील्ड की लगी है तो तीसरी डोज भी कोविशील्ड की ही लगेगी. इसी तरह अगर पहली दो डोज कोवैक्सीन की लगी थी तो तीसरी डोज भी कोवैक्सीन की ही दी जाएगीपे नाऊ पर क्लिक करे। |
अब आपके जेहन में यह सवाल उठ सकता है कि आखिर परीक्षा परिणाम घोषित होने इतना समय क्यों लगा? दरअसल, हुआ यूं था कि मणिपुर के उम्मीदवारों की परीक्षा आयोजित हिंसा की वजह से देर में आयोजित की गई थी। बता दें कि मणिपुर के उम्मीदवारों की परीक्षा गत 8 जून को आयोजित की गई थी। जिसकी वजह से परीक्षा परिणाम घोषित करने में थोड़ा विलंब हो गया था।
स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने ट्वीट कर कहा कि,'नीट-पीजी का रिजल्ट आ गया है। मैं उन सभी छात्रों को बधाई देता हूं, जिन्होंने नीट-पीजी के लिए क्वालिफाई किया है। मैं निर्धारित समय से काफी पहले रिकॉर्ड 10 दिनों में परिणाम घोषित करने के उनके सराहनीय कार्य के लिए @NBEMS_INDIA की सराहना करता हूं।
NEET 2020: राष्ट्रीय परीक्षा एंजेंसी (NTA) ने शुक्रवार को नीट यूजी 2020 परीक्षा का रिजल्ट (NEET Results 2020) घोषित कर दिया है। उम्मीदवार अपना रिजल्ट एनटीए के परीक्षा पोर्टल पर जा कर देख सकते हैं।
Neet 2020 : राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) आज नीट यूजी परीक्षा के परिणामों की घोषणा (NEET Results 2020) करेगा। मेडिकल प्रवेश परीक्षा के लिए नीट रिजल्ट 2020 की घोषणा एनटीए द्वारा परीक्षा पोर्टल पर जारी होगा।
Neet 2020 : नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (National Testing Agency, NTA) ने नीट यूजी 2020 के दूसरे फेज (NEET UG 2020 Phase 2) की प्रवेश परीक्षा का आयोजन 14 अक्टूबर को किया है। इसके लिए एजेंसी ने एडमिट कार्ड (Admit Card) जारी कर दिया।
NEET 2020 : राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET Exam 2020) देने वाले उम्मीदवारों को काफी समय से रिजल्ट (NEET Result) का इंतजार है। जिसके लिए उन्हें अभी थोड़ा इंतजार करना होगा। अब नीट रिजल्ट 16 अक्टूबर को जारी किया जाएगा।
Neet 2020: नीट रिजल्ट (Neet Result 2020) की डेट को लेकर लेटेस्ट अपडेट सामने आई है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) बहुत जल्द नीट रिजल्ट जारी कर सकती है।
| अब आपके जेहन में यह सवाल उठ सकता है कि आखिर परीक्षा परिणाम घोषित होने इतना समय क्यों लगा? दरअसल, हुआ यूं था कि मणिपुर के उम्मीदवारों की परीक्षा आयोजित हिंसा की वजह से देर में आयोजित की गई थी। बता दें कि मणिपुर के उम्मीदवारों की परीक्षा गत आठ जून को आयोजित की गई थी। जिसकी वजह से परीक्षा परिणाम घोषित करने में थोड़ा विलंब हो गया था। स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने ट्वीट कर कहा कि,'नीट-पीजी का रिजल्ट आ गया है। मैं उन सभी छात्रों को बधाई देता हूं, जिन्होंने नीट-पीजी के लिए क्वालिफाई किया है। मैं निर्धारित समय से काफी पहले रिकॉर्ड दस दिनों में परिणाम घोषित करने के उनके सराहनीय कार्य के लिए @NBEMS_INDIA की सराहना करता हूं। NEET दो हज़ार बीस: राष्ट्रीय परीक्षा एंजेंसी ने शुक्रवार को नीट यूजी दो हज़ार बीस परीक्षा का रिजल्ट घोषित कर दिया है। उम्मीदवार अपना रिजल्ट एनटीए के परीक्षा पोर्टल पर जा कर देख सकते हैं। Neet दो हज़ार बीस : राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी आज नीट यूजी परीक्षा के परिणामों की घोषणा करेगा। मेडिकल प्रवेश परीक्षा के लिए नीट रिजल्ट दो हज़ार बीस की घोषणा एनटीए द्वारा परीक्षा पोर्टल पर जारी होगा। Neet दो हज़ार बीस : नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने नीट यूजी दो हज़ार बीस के दूसरे फेज की प्रवेश परीक्षा का आयोजन चौदह अक्टूबर को किया है। इसके लिए एजेंसी ने एडमिट कार्ड जारी कर दिया। NEET दो हज़ार बीस : राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों को काफी समय से रिजल्ट का इंतजार है। जिसके लिए उन्हें अभी थोड़ा इंतजार करना होगा। अब नीट रिजल्ट सोलह अक्टूबर को जारी किया जाएगा। Neet दो हज़ार बीस: नीट रिजल्ट की डेट को लेकर लेटेस्ट अपडेट सामने आई है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी बहुत जल्द नीट रिजल्ट जारी कर सकती है। |
शिवपुरी। अपने विवादास्पद बयानों से सुर्खियों में रहने वाली महिला बाल विकास मंत्री इमरती देवी का शिवपुरी के मानस भवन में आयोजित बेटी सम्मान समारोह में दिया गया बयान चर्चा का विषय बन गया। समारोह में उन्होंने बेटियों को खूब पढ़ाने और आगे बढ़ाने की बात कहीं। लेकिन साथ ही यह भी कह गई कि अगर कोई बेटी कम पढ़ पाई हो तो भी फिक्र न करें क्योंकि वह इमरती देवी तो बन ही जाएगी। इस बयान से इमरती देवी ने जाहिर किया कि पढ़ाई लिखाई से उनका ज्यादा नाता नहीं हैं।
इमरती देवी ने कहा कि 50 फीसदी महिला आरक्षण है लेकिन आज भी पंचायत, जनपद और जिला पंचायतों सहित अन्य चुनावों में महिला आरक्षण सीटों पर महिलाओं को सिर्फ घूंघट में फॉर्म भरने तक सीमित रखा जाता है। वोट मांगने से लेकर बैठकों तक में उनके पति या परिजन पहुचंते हैं।
उन्होंने महिलाओं को अपने अधिकारों को जानने और पहचानने की सीख दी और कहा कि निर्वाचित होने के बाद अपने दायित्व का निर्वहन भी वह खुद करें। अपने पति, ससुर या परिजन टोंके तो उनसे कहें बहुत हो गया, अब तो मैं अपने दायित्व का निर्वहन करूंगी आप घर पर बैठो। उन्होंने महिला को सलाह दी कि यदि वह घूंघट में बैठी रही तो न तो वह खुद आगे बढ़ पाएंगी और न ही अपनी बेटियों को आगे बढ़ा पाएंगी।
| शिवपुरी। अपने विवादास्पद बयानों से सुर्खियों में रहने वाली महिला बाल विकास मंत्री इमरती देवी का शिवपुरी के मानस भवन में आयोजित बेटी सम्मान समारोह में दिया गया बयान चर्चा का विषय बन गया। समारोह में उन्होंने बेटियों को खूब पढ़ाने और आगे बढ़ाने की बात कहीं। लेकिन साथ ही यह भी कह गई कि अगर कोई बेटी कम पढ़ पाई हो तो भी फिक्र न करें क्योंकि वह इमरती देवी तो बन ही जाएगी। इस बयान से इमरती देवी ने जाहिर किया कि पढ़ाई लिखाई से उनका ज्यादा नाता नहीं हैं। इमरती देवी ने कहा कि पचास फीसदी महिला आरक्षण है लेकिन आज भी पंचायत, जनपद और जिला पंचायतों सहित अन्य चुनावों में महिला आरक्षण सीटों पर महिलाओं को सिर्फ घूंघट में फॉर्म भरने तक सीमित रखा जाता है। वोट मांगने से लेकर बैठकों तक में उनके पति या परिजन पहुचंते हैं। उन्होंने महिलाओं को अपने अधिकारों को जानने और पहचानने की सीख दी और कहा कि निर्वाचित होने के बाद अपने दायित्व का निर्वहन भी वह खुद करें। अपने पति, ससुर या परिजन टोंके तो उनसे कहें बहुत हो गया, अब तो मैं अपने दायित्व का निर्वहन करूंगी आप घर पर बैठो। उन्होंने महिला को सलाह दी कि यदि वह घूंघट में बैठी रही तो न तो वह खुद आगे बढ़ पाएंगी और न ही अपनी बेटियों को आगे बढ़ा पाएंगी। |
Indian Premier League 2020: इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के 2020 के आगामी सत्र की गुरुवार (19 दिसंबर) को कोलकाता में खिलाड़ियों की नीलामी होने वाली है। सभी निगाहें इस बात पर रहेंगी कि इस बार नीलामी में कौन सा खिलाड़ी सबसे महंगा बिकता है। नीलामी में कुल 332 खिलाड़ी भाग्य आजमाएंगे और इनमें से 29 विदेशियों सहित 73 खिलाड़ियों को खरीदा जाना है।
इस बार नीलामी में दो करोड़ रुपए के अधिकतम बेस प्राइस में जहां सभी विदेशी खिलाड़ियों को जगह मिली है, वहीं इसके बाद 1. 5 करोड़ रुपए के दूसरे ब्रैकेट में रॉबिन उथप्पा अकेले भारतीय हैं। आईपीएल नीलामी के लिए शुरुआत में रजिस्टर खिलाड़ियों की संख्या 971 थी, जिसे आठ फ्रेंचाइजियों की अंतिम सूची के बाद घटाकर 332 कर दिया गया है। नीलामी में कुल 186 भारतीय खिलाड़ी, 143 विदेशी खिलाड़ी और तीन एसोसिएट राष्ट्र के खिलाड़ी शामिल हैं। नीलामी में 73 खिलाड़ियों को खरीदा जाना है जिसमें विदेशियों की संख्या 29 रहेगी।
नीलामी से पहले आठ टीमों ने कुल 35 विदेशी खिलाड़ियों सहित 127 खिलाड़ियों को रिटेन किया था। आठ टीमें खिलाड़ियों को रिटेन करने में 472. 35 करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है और नीलामी में खरीद के लिए उनके पास 207. 65 करोड़ रुपये का पर्स बचा है। नीलामी में चेन्नई सुपर किंग्स को कुल पांच, दिल्ली कैपिटल्स को 11, किंग्स इलेवन पंजाब को नौ, कोलकाता नाइट राइडर्स को 11, मुंबई इंडियंस को सात, राजस्थान रॉयल्स को 11, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को 12 और सनराइजर्स हैदराबाद को सात खिलाड़ी खरीदने होंगे।
आठ टीमों की मौजूदा स्थिति इस प्रकार हैः
मुंबई इंडियंस : रोहित शर्मा, हार्दिक पांड्या, जसप्रीत बुमराह, क्रुणाल पांड्या, ईशान किशन, सूर्य कुमार यादव, राहुल चाहर, अनमोलप्रीत सिंह, जयंत यादव, आदित्य तारे, अनुकूल रॉय, धवल कुलकर्णी, क्विंटन डी कॉक, कीरोन पोलार्ड, शेरफेन रदरफोर्ड, लसित मलिंगा, मिशेल मैक्लेघन और ट्रेंट बोल्ट।
चेन्नई सुपर किंग्सः महेंद्र सिंह धौनी, सुरेश रैना, फैफ डुप्लेसी, अंबाती रायडू, मुरली विजय, ऋतुराज गायकवाड़, शेन वॉटसन, ड्वेन ब्रावो, केदार जाधव, स्कॉट कुगेलजिन, रवींद्र जडेजा, मिशेल सेंटनर, मोनू कुमार, एन जगदीशन, हरभजन सिंह, करण शर्मा, इमरान ताहिर, दीपक चाहर, लुंगी एनगिदी और के एम आसिफ।
दिल्ली कैपिटल्सः शिखर धवन, पृथ्वी शॉ, श्रेयस अय्यर, रिषभ पंत, इशांत शर्मा, अजिंक्या रहाणे, रविचंद्रन अश्विन, अक्षर पटेल, अमित मिश्रा हर्षल पटेल, आवेश खान, कगिसो रबाडा, कीमो पॉल और संदीप लमिछाने।
रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोरः विराट कोहली, मोहम्मद सिराज, नवदीप सैनी, देवदत्त पड्डीकल, पार्थिव पटेल, पवन नेगी, उमेश यादव, वाशिंगटन सुंदर, गुरकीरत सिंह मान, शिवम दुबे, मोईन अली, युजवेंद्र चहल और एबी डीविलयर्स।
राजस्थान रॉयल्सः स्टीवन स्मिथ, संजू सैमसन, जोफ्रा आर्चर, बेन स्टोक्स, जोस बटलर, रियान पराग, शशांक सिंह, श्रेयस गोपाल, महिपाल लोमरोर, वरुण एरोन, मनन वोहरा, मयंक मारकंडे, राहुल तेवतिया और अंकित राजपूत।
कोलकाता नाइट राइडर्सः आंद्रे रसेल, दिनेश कार्तिक, हैरी गुर्ने, कमलेश नागरकोटी, कुलदीप यादव, लॉकी फग्युर्सन, नीतीश राणा, प्रसिद्ध कृष्णा, रिंकू सिंह, संदीप वारियर, शिवम मावी, शुभमन गिल, सिद्धेश लाड और सुनील नारायण।
किंग्स इलेवन पंजाबः क्रिस गेल, लोकेश राहुल, अर्शदीप सिंह, दर्शन नालकंडे, गौतम कृष्णप्पा, हार्डस विलजोएन, जगदीश सुचित, करुण नायर, मनदीप सिंह, मयंक अग्रवाल, मोहम्मद शमी, मुजीब जादरान, मुरुगन अश्विन, निकोलस पूरन, हरप्रीत बरार और सरफराज खान।
सनराइजर्स हैदराबादः अभिषेक शर्मा, बासिल थम्पी, भुवनेश्वर कुमार, बिली स्टेनलेक, डेविड वार्नर, जॉनी बेयरस्टो, केन विलियम्सन, मनीष पांडे, मोहम्मद नबी, राशिद खान, संदीप शर्मा, शाहबाज नदीम, श्रीवत्स गोस्वामी, सिद्धार्थ कौल, सैयद खलील अहमद, टी नटराजन, विजय शंकर और ऋद्दिमान साहा।
| Indian Premier League दो हज़ार बीस: इंडियन प्रीमियर लीग के दो हज़ार बीस के आगामी सत्र की गुरुवार को कोलकाता में खिलाड़ियों की नीलामी होने वाली है। सभी निगाहें इस बात पर रहेंगी कि इस बार नीलामी में कौन सा खिलाड़ी सबसे महंगा बिकता है। नीलामी में कुल तीन सौ बत्तीस खिलाड़ी भाग्य आजमाएंगे और इनमें से उनतीस विदेशियों सहित तिहत्तर खिलाड़ियों को खरीदा जाना है। इस बार नीलामी में दो करोड़ रुपए के अधिकतम बेस प्राइस में जहां सभी विदेशी खिलाड़ियों को जगह मिली है, वहीं इसके बाद एक. पाँच करोड़ रुपए के दूसरे ब्रैकेट में रॉबिन उथप्पा अकेले भारतीय हैं। आईपीएल नीलामी के लिए शुरुआत में रजिस्टर खिलाड़ियों की संख्या नौ सौ इकहत्तर थी, जिसे आठ फ्रेंचाइजियों की अंतिम सूची के बाद घटाकर तीन सौ बत्तीस कर दिया गया है। नीलामी में कुल एक सौ छियासी भारतीय खिलाड़ी, एक सौ तैंतालीस विदेशी खिलाड़ी और तीन एसोसिएट राष्ट्र के खिलाड़ी शामिल हैं। नीलामी में तिहत्तर खिलाड़ियों को खरीदा जाना है जिसमें विदेशियों की संख्या उनतीस रहेगी। नीलामी से पहले आठ टीमों ने कुल पैंतीस विदेशी खिलाड़ियों सहित एक सौ सत्ताईस खिलाड़ियों को रिटेन किया था। आठ टीमें खिलाड़ियों को रिटेन करने में चार सौ बहत्तर. पैंतीस करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है और नीलामी में खरीद के लिए उनके पास दो सौ सात. पैंसठ करोड़ रुपये का पर्स बचा है। नीलामी में चेन्नई सुपर किंग्स को कुल पांच, दिल्ली कैपिटल्स को ग्यारह, किंग्स इलेवन पंजाब को नौ, कोलकाता नाइट राइडर्स को ग्यारह, मुंबई इंडियंस को सात, राजस्थान रॉयल्स को ग्यारह, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को बारह और सनराइजर्स हैदराबाद को सात खिलाड़ी खरीदने होंगे। आठ टीमों की मौजूदा स्थिति इस प्रकार हैः मुंबई इंडियंस : रोहित शर्मा, हार्दिक पांड्या, जसप्रीत बुमराह, क्रुणाल पांड्या, ईशान किशन, सूर्य कुमार यादव, राहुल चाहर, अनमोलप्रीत सिंह, जयंत यादव, आदित्य तारे, अनुकूल रॉय, धवल कुलकर्णी, क्विंटन डी कॉक, कीरोन पोलार्ड, शेरफेन रदरफोर्ड, लसित मलिंगा, मिशेल मैक्लेघन और ट्रेंट बोल्ट। चेन्नई सुपर किंग्सः महेंद्र सिंह धौनी, सुरेश रैना, फैफ डुप्लेसी, अंबाती रायडू, मुरली विजय, ऋतुराज गायकवाड़, शेन वॉटसन, ड्वेन ब्रावो, केदार जाधव, स्कॉट कुगेलजिन, रवींद्र जडेजा, मिशेल सेंटनर, मोनू कुमार, एन जगदीशन, हरभजन सिंह, करण शर्मा, इमरान ताहिर, दीपक चाहर, लुंगी एनगिदी और के एम आसिफ। दिल्ली कैपिटल्सः शिखर धवन, पृथ्वी शॉ, श्रेयस अय्यर, रिषभ पंत, इशांत शर्मा, अजिंक्या रहाणे, रविचंद्रन अश्विन, अक्षर पटेल, अमित मिश्रा हर्षल पटेल, आवेश खान, कगिसो रबाडा, कीमो पॉल और संदीप लमिछाने। रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोरः विराट कोहली, मोहम्मद सिराज, नवदीप सैनी, देवदत्त पड्डीकल, पार्थिव पटेल, पवन नेगी, उमेश यादव, वाशिंगटन सुंदर, गुरकीरत सिंह मान, शिवम दुबे, मोईन अली, युजवेंद्र चहल और एबी डीविलयर्स। राजस्थान रॉयल्सः स्टीवन स्मिथ, संजू सैमसन, जोफ्रा आर्चर, बेन स्टोक्स, जोस बटलर, रियान पराग, शशांक सिंह, श्रेयस गोपाल, महिपाल लोमरोर, वरुण एरोन, मनन वोहरा, मयंक मारकंडे, राहुल तेवतिया और अंकित राजपूत। कोलकाता नाइट राइडर्सः आंद्रे रसेल, दिनेश कार्तिक, हैरी गुर्ने, कमलेश नागरकोटी, कुलदीप यादव, लॉकी फग्युर्सन, नीतीश राणा, प्रसिद्ध कृष्णा, रिंकू सिंह, संदीप वारियर, शिवम मावी, शुभमन गिल, सिद्धेश लाड और सुनील नारायण। किंग्स इलेवन पंजाबः क्रिस गेल, लोकेश राहुल, अर्शदीप सिंह, दर्शन नालकंडे, गौतम कृष्णप्पा, हार्डस विलजोएन, जगदीश सुचित, करुण नायर, मनदीप सिंह, मयंक अग्रवाल, मोहम्मद शमी, मुजीब जादरान, मुरुगन अश्विन, निकोलस पूरन, हरप्रीत बरार और सरफराज खान। सनराइजर्स हैदराबादः अभिषेक शर्मा, बासिल थम्पी, भुवनेश्वर कुमार, बिली स्टेनलेक, डेविड वार्नर, जॉनी बेयरस्टो, केन विलियम्सन, मनीष पांडे, मोहम्मद नबी, राशिद खान, संदीप शर्मा, शाहबाज नदीम, श्रीवत्स गोस्वामी, सिद्धार्थ कौल, सैयद खलील अहमद, टी नटराजन, विजय शंकर और ऋद्दिमान साहा। |
राजेन्द्र सिंहजी जडेजा (अंग्रेज़ीः Rajendra Sinhji Jadeja, जन्म- 15 जून, 1899; मृत्यु- 1 जनवरी, 1964) भारतीय थल सेना के प्रथम थल सेनाध्यक्ष और फील्ड मार्शल के. एम. करिअप्पा के बाद द्वितीय भारतीय थे, जो भारतीय सशस्त्र बलों के 'कमांडर इन चीफ' और भारतीय थल सेना प्रमुख बने। उन्हें 'कुमार श्री राजेन्द्र सिंहजी' और 'के. एस. राजेन्द्र सिंहजी' के नाम से भी जाना जाता है।
राजेन्द्र सिंहजी जडेजा को 'चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ' पद की स्थापना होने के बाद भारतीय सेना का पहला थलसेना प्रमुख होने का गौरव प्राप्त है। जनरल महाराज राजेन्द्र सिंहजी जडेजा दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी फौज इंडियन आर्मी के पहले चीफ थे। ब्रिटिश काल के दौरान आर्मी में भर्ती होने वाले राजेन्द्र सिंहजी जडेजा ने साल 1921 में सेकेंड लेफ्टिनेंट के पद पर भारतीय सेना की सेकेंड लेंसर यूनिट में कमीशन प्राप्त किया था।
अपने कार्यकाल के दौरान राजेन्द्र सिंहजी जडेजा ने दूसरे विश्व युद्ध में विदेशों में जाकर शांति मोर्चा संभाला। उनके सराहनीय कार्य के लिए उन्हें विशिष्ट सेवा-पदक से सम्मानित किया गया। वहीं इन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रूमेन द्वारा अमेरिकन लीजन ऑफ़ मेरिट पदक से सम्मानित किया गया था। भारत की आजादी के बाद अपने पद से सेवानिवृत्त होने से ठीक एक माह पहले ही 1 अप्रैल, 1955 को उन्हें थल सेना का अध्यक्ष बना दिया गया।
- ↑ भारत के सबसे लोकप्रिय 'चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ' (हिंदी) roar.media। अभिगमन तिथिः 22 मई, 2020।
| राजेन्द्र सिंहजी जडेजा भारतीय थल सेना के प्रथम थल सेनाध्यक्ष और फील्ड मार्शल के. एम. करिअप्पा के बाद द्वितीय भारतीय थे, जो भारतीय सशस्त्र बलों के 'कमांडर इन चीफ' और भारतीय थल सेना प्रमुख बने। उन्हें 'कुमार श्री राजेन्द्र सिंहजी' और 'के. एस. राजेन्द्र सिंहजी' के नाम से भी जाना जाता है। राजेन्द्र सिंहजी जडेजा को 'चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ' पद की स्थापना होने के बाद भारतीय सेना का पहला थलसेना प्रमुख होने का गौरव प्राप्त है। जनरल महाराज राजेन्द्र सिंहजी जडेजा दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी फौज इंडियन आर्मी के पहले चीफ थे। ब्रिटिश काल के दौरान आर्मी में भर्ती होने वाले राजेन्द्र सिंहजी जडेजा ने साल एक हज़ार नौ सौ इक्कीस में सेकेंड लेफ्टिनेंट के पद पर भारतीय सेना की सेकेंड लेंसर यूनिट में कमीशन प्राप्त किया था। अपने कार्यकाल के दौरान राजेन्द्र सिंहजी जडेजा ने दूसरे विश्व युद्ध में विदेशों में जाकर शांति मोर्चा संभाला। उनके सराहनीय कार्य के लिए उन्हें विशिष्ट सेवा-पदक से सम्मानित किया गया। वहीं इन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रूमेन द्वारा अमेरिकन लीजन ऑफ़ मेरिट पदक से सम्मानित किया गया था। भारत की आजादी के बाद अपने पद से सेवानिवृत्त होने से ठीक एक माह पहले ही एक अप्रैल, एक हज़ार नौ सौ पचपन को उन्हें थल सेना का अध्यक्ष बना दिया गया। - ↑ भारत के सबसे लोकप्रिय 'चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ' roar.media। अभिगमन तिथिः बाईस मई, दो हज़ार बीस। |
भूकंप का केंद्र ताजिकिस्तान के गोर्नो-बदख्शां क्षेत्र में था।
आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के एक अधिकारी ने कहा, अभी तक किसी के हताहत होने या संपत्ति के नुकसान की तत्काल कोई रिपोर्ट नहीं थी, हालांकि श्रीनगर शहर और घाटी के कुछ अन्य हिस्सों में झटके महसूस किए गए।
कश्मीर भूकंप की ²ष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है और यहां पहले भी भूकंप के झटके आ चुके हैं।
8 अक्टूबर, 2005 को आए भूकंप से नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर 80,000 से अधिक लोग मारे गए थे। भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 7. 6 मापी गई थी।
| भूकंप का केंद्र ताजिकिस्तान के गोर्नो-बदख्शां क्षेत्र में था। आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के एक अधिकारी ने कहा, अभी तक किसी के हताहत होने या संपत्ति के नुकसान की तत्काल कोई रिपोर्ट नहीं थी, हालांकि श्रीनगर शहर और घाटी के कुछ अन्य हिस्सों में झटके महसूस किए गए। कश्मीर भूकंप की ²ष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है और यहां पहले भी भूकंप के झटके आ चुके हैं। आठ अक्टूबर, दो हज़ार पाँच को आए भूकंप से नियंत्रण रेखा पर अस्सी,शून्य से अधिक लोग मारे गए थे। भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर सात. छः मापी गई थी। |
पीसीएस प्री 2019 में जाति/वर्गबार आरक्षण को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है। इस याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई होने की संभावना है।
प्रयागराजः पीसीएस प्री 2019 में जाति/वर्गबार आरक्षण को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है। इस याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई होने की संभावना है।
अवनीश पांडेय की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि प्रारंभिक परीक्षा में पदों के सापेक्ष वर्गवार चयन करना असंवैधानिक है। मांग की गई है कि इस प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम अनुच्छेद 16(4) (ख) के साथ उत्तर प्रदेश आरक्षण नियमावली 1994 के खंड 3(2) का पालन करते हुए तैयार किया जाए।
साथ ही प्रारंभिक परीक्षा में कुछ पदों पर 13 गुना अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया जाए। साथ ही प्रारंभिक परीक्षा में सफल सभी अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा में शामिल किए जाएं और साक्षात्कार के बाद मुख्य परीक्षा व इंटरव्यू के अंक जोड़कर मेरिट बनाई जाए और आरक्षण प्रदान किया जाए।
| पीसीएस प्री दो हज़ार उन्नीस में जाति/वर्गबार आरक्षण को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है। इस याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई होने की संभावना है। प्रयागराजः पीसीएस प्री दो हज़ार उन्नीस में जाति/वर्गबार आरक्षण को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है। इस याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई होने की संभावना है। अवनीश पांडेय की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि प्रारंभिक परीक्षा में पदों के सापेक्ष वर्गवार चयन करना असंवैधानिक है। मांग की गई है कि इस प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम अनुच्छेद सोलह के साथ उत्तर प्रदेश आरक्षण नियमावली एक हज़ार नौ सौ चौरानवे के खंड तीन का पालन करते हुए तैयार किया जाए। साथ ही प्रारंभिक परीक्षा में कुछ पदों पर तेरह गुना अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया जाए। साथ ही प्रारंभिक परीक्षा में सफल सभी अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा में शामिल किए जाएं और साक्षात्कार के बाद मुख्य परीक्षा व इंटरव्यू के अंक जोड़कर मेरिट बनाई जाए और आरक्षण प्रदान किया जाए। |
मुंबईः एक्टर सुशांत सिंह राजपूत के सुसाइड करने के बाद अब इंडस्ट्री में भाई-भतीजावाद का मुद्दा फिर गर्मा गया है। इंडस्ट्री के कई स्टार्स ने नेपोटिज्म को लेकर अपनी भड़ास निकाली है। एक्ट्रेस कंगना रनौत, रवीना टंडन के बाद अब बिग बॉस 13 की कंटेस्टेंट कोएना मित्रा ने कहा कि बॉलीवुड में कई सुशांत सिंह राजपूत और विवेक ओबरॉय हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कोएना ने कहा-'सुशांत काफी तेज और हैंडसम एक्टर था।
उसकी कुछ फिल्में बेहतरीन और सफल थी। मैंने पढ़ा है कि इसके बावजूद उसे हमेश एक बाहरी व्यक्ति जैसा ट्रीट किया जाता था। न ही उसे शादी में और नही पार्टियों में बुलाया जाता था। 'कोएना ने आगे कहा- 'फिल्म इंडस्ट्री में वह पहला शख्स नहीं था, जिसने ऐसा अनुभव किया है। जब तक आप स्टारकिड या फिल्म इंडस्ट्री में एक्टिव लोगों के परिवार से नहीं है तो बॉलीवुड आपको परिवार की तरह ट्रीट नहीं करेगा। '
इंटरव्यू में कोएना कहती हैं- 'ये बेहद दुखद है, वो पहला नहीं है ऐसे कई सुशांत हमारी इंडस्ट्री में मौजूद हैं। मैं उसे कायर नहीं कहूंगी। कोई नहीं जानता कि उस पर क्या बीत रही थी। वो इसे झेल नहीं सका लेकिन कोई उसे कमजोर नहीं कह सकता है। शायद वह बेहद गुस्से में था और जानता था कि गुस्सा जाहिर करने का कोई फायदा नहीं है। 'कोएना ने आगे कहा हैं- 'बॉलीवुड में अब कला की कोई जगह नहीं है। अब यहां केवल फैशन और लाइफस्टाइल ही पॉपुलर है। यहां पर ग्रुपिज्म और दोस्ती चलती है, जहां दोस्त आपके लिए फ्री में काम करते हैं। इंडस्ट्री में आपकी रोटी छीनने वाले कई लोग है। ये अपने कैंप को फेवर देने के लिए आपके मुंह से आखिरी निवाला भी छीन लेंगे और आपको भूखा छोड़ देंगे। '
सुशांत की मौत के बाद कोएना ने सोशल मीडिया पर अनुभव सिन्हा के ट्वीट के जवाब में लिखा-'विवेक ओबरॉय बच गया, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि हर कोई बच जाए। दुख की बात ये है कि यहां कई विवेक हैं। ' कोएना कहती हैं- भाई- 'भतीजावाद, पक्षपात और गुंडागर्दी हमारी इंडस्ट्री का हिस्सा है। अब ये एक आदत बन गई हैं। '
बता दें कि सुशांत ने रविवार को अपने मुंबई के फ्लैट में सुसाइड कर लिया था। कल सुशांत का अंतिम संस्कार मुंबई स्थित पवन हंस शमशान घाट में किया गया। इसमें श्रद्धा कपूर, कृति सेनन, रणदीप हुड्डा, रणवीर शौरी, दिनेश विजन और राजकुमार राव शामिल हुए।
| मुंबईः एक्टर सुशांत सिंह राजपूत के सुसाइड करने के बाद अब इंडस्ट्री में भाई-भतीजावाद का मुद्दा फिर गर्मा गया है। इंडस्ट्री के कई स्टार्स ने नेपोटिज्म को लेकर अपनी भड़ास निकाली है। एक्ट्रेस कंगना रनौत, रवीना टंडन के बाद अब बिग बॉस तेरह की कंटेस्टेंट कोएना मित्रा ने कहा कि बॉलीवुड में कई सुशांत सिंह राजपूत और विवेक ओबरॉय हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कोएना ने कहा-'सुशांत काफी तेज और हैंडसम एक्टर था। उसकी कुछ फिल्में बेहतरीन और सफल थी। मैंने पढ़ा है कि इसके बावजूद उसे हमेश एक बाहरी व्यक्ति जैसा ट्रीट किया जाता था। न ही उसे शादी में और नही पार्टियों में बुलाया जाता था। 'कोएना ने आगे कहा- 'फिल्म इंडस्ट्री में वह पहला शख्स नहीं था, जिसने ऐसा अनुभव किया है। जब तक आप स्टारकिड या फिल्म इंडस्ट्री में एक्टिव लोगों के परिवार से नहीं है तो बॉलीवुड आपको परिवार की तरह ट्रीट नहीं करेगा। ' इंटरव्यू में कोएना कहती हैं- 'ये बेहद दुखद है, वो पहला नहीं है ऐसे कई सुशांत हमारी इंडस्ट्री में मौजूद हैं। मैं उसे कायर नहीं कहूंगी। कोई नहीं जानता कि उस पर क्या बीत रही थी। वो इसे झेल नहीं सका लेकिन कोई उसे कमजोर नहीं कह सकता है। शायद वह बेहद गुस्से में था और जानता था कि गुस्सा जाहिर करने का कोई फायदा नहीं है। 'कोएना ने आगे कहा हैं- 'बॉलीवुड में अब कला की कोई जगह नहीं है। अब यहां केवल फैशन और लाइफस्टाइल ही पॉपुलर है। यहां पर ग्रुपिज्म और दोस्ती चलती है, जहां दोस्त आपके लिए फ्री में काम करते हैं। इंडस्ट्री में आपकी रोटी छीनने वाले कई लोग है। ये अपने कैंप को फेवर देने के लिए आपके मुंह से आखिरी निवाला भी छीन लेंगे और आपको भूखा छोड़ देंगे। ' सुशांत की मौत के बाद कोएना ने सोशल मीडिया पर अनुभव सिन्हा के ट्वीट के जवाब में लिखा-'विवेक ओबरॉय बच गया, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि हर कोई बच जाए। दुख की बात ये है कि यहां कई विवेक हैं। ' कोएना कहती हैं- भाई- 'भतीजावाद, पक्षपात और गुंडागर्दी हमारी इंडस्ट्री का हिस्सा है। अब ये एक आदत बन गई हैं। ' बता दें कि सुशांत ने रविवार को अपने मुंबई के फ्लैट में सुसाइड कर लिया था। कल सुशांत का अंतिम संस्कार मुंबई स्थित पवन हंस शमशान घाट में किया गया। इसमें श्रद्धा कपूर, कृति सेनन, रणदीप हुड्डा, रणवीर शौरी, दिनेश विजन और राजकुमार राव शामिल हुए। |
प्रकृति के सामने किसी का बस नहीं चलता। यही कहानी राजस्थान के हाडोती संभाग में हर जुबानी सुनाई दे रही है। अंचल के चारों जिलों कोटा, बूंदी, बारां व झालावाड़ में 6 दिनों तक मूलाधार, अत्यंत मूसलाधार बारिश हुई। कुदरत के कहर और पानी के कटाव ने हाडौती की तस्वीर बदल डाली है। बाढ़ ग्रस्त इलाकों से नदी नालों का उफान खत्म होने पर अब बर्बादी के जख्मों की तस्वीरें नजर आने लगी है। मकान, दुकान, प्रतिष्ठान और घर में जलभराव होने से लोगों को निजी आर्थिक नुकसान हुआ है, तो राज्य सरकार को सड़के उखड़ने ,तालाब की पाल टूटने, पुलिया के ढ़हने-बहने जाने से सैकड़ों -करोड़ों रुपए का भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। किसानों को भी फसलें बर्बाद की पीड़ा को झेलना पड़ रहा है। अतिवृष्टि की त्रासदी की तस्वीरों को एनबीटी अब आपको दिखा रहा है। उल्लेखनीय है कि बर्बादी की यह तस्वीरें महज उन छह दिनों की बारिश की है, जो पांच के मानसून पर भारी दिखाई दे रही है। शायद इस बारिश को रिकॉर्ड को अब दर्द भरे इतिहास के नाम से जाना जाएगा।
उल्लेखनीय है कि बारिश के चलते हाड़ौती संभाग के जिलों में बहाव बेहद तेज है। इसी के चलते बूंदी जिले के तलवास क्षेत्र की रतनसागर झील की सेफ्टी वॉल टूटी गई है। यहां जंगल में पानी व्यर्थ बहता दिखाई दे रहा है।
कोटा संभाग के ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यहां कोटा के इटावा उपखंड में एक कच्चे मकान के गिरने की तस्वीर सामने आई है। इस तस्वीर के जरिए गांव की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है।
कोटा के खातौली रामखेड़ा गांव बरसाती नाले की पुलिया की अ0प्रोच सड़क बह गई है। यहां करीब 200 फिट तक का हिस्सा पूरी तरह बह गया है।
कोटा जिले में नदी- नालों में तेज बहाव के कारण कई जगह सड़के ही गायब हो गई है, जिसके चलते आपसी संपर्क कट गया है। कोटा के उटेड गांव के बरसाती नाले की पुलिया के पूरी सड़क बह गई है। वहीं यहां खातौली जाने का रास्ता कट गया है।
कोटा के झोपड़ियां व निमोल गांव से खौफनाक तस्वीर सामने आई है। यहां मुख्य सड़क बुरी तरह हुई क्षतिग्रस्त हो गई है। डामर, गिट्टी, मिट्टी और पानी के तेज बहाव के साथ कटाव ने काफी नुकसान पहुंचाया है।
कोटा जिले के खतौली कस्बे में सबसे ज्यादा बाढ़ का असर देखने को मिला है। यहां पार्वती नदी का उफान उठने के बाद बर्बादी का मंजर दिखा। एक गरीब परिवार का ताश के पत्तों की तरह कच्चा मकान ढह गया । वहीं गृहस्थी के सामान उसके नीचे दब गए।
पार्वती नदी में बाढ़ के उफान से पूरा कोटा जलमग्न हो गया है। वहीं नदी के आसपास के क्षेत्र कस्बों में मकान -दुकान जलमग्न है। कोटा जिले के खतौली कस्बे की इस दुकान आधी बिल्डिंग पानी में है। वहीं इसी तरह कोटा शहर के बोरखेड़ा इलाके में रायपुरा नाला उफान पर आया , तो कई कॉलोनियां बाढ़ की जद में आई। इससे तस्वीर में दिख रहा मकान भी चौतरफा पानी से घिर गया।
और मिट्टी को को उनसे स्थान से अलग कर दिया। वहीं बारिश के कारण गुड़ला स्टेशन पानी में डूबा दिखा। वहीं स्टेशन मास्टर की ऐसी तस्वीर सामने आई।
बूंदी जिले के करवर थाना का बाढ़ में हाले बेहाल हो गया। थाने के परिसर में करीब 3 फीट पानी का उफान देखने को मिला। इससे पुलिस थाने के रखे जरूरी रिकॉर्ड को बहुत नुकसान पहुंचा है।
कोटा में बाढ़ की स्थिति से दुकान और मकानों के अलावा फसलों को भी नुकसान हुआ है। आपके सामने कोटा के अरंडखेड़ा गांव और कैथून इलाके की तस्वीरे पेश है, जहां फसलों की बर्बादी दिख रही है।
| प्रकृति के सामने किसी का बस नहीं चलता। यही कहानी राजस्थान के हाडोती संभाग में हर जुबानी सुनाई दे रही है। अंचल के चारों जिलों कोटा, बूंदी, बारां व झालावाड़ में छः दिनों तक मूलाधार, अत्यंत मूसलाधार बारिश हुई। कुदरत के कहर और पानी के कटाव ने हाडौती की तस्वीर बदल डाली है। बाढ़ ग्रस्त इलाकों से नदी नालों का उफान खत्म होने पर अब बर्बादी के जख्मों की तस्वीरें नजर आने लगी है। मकान, दुकान, प्रतिष्ठान और घर में जलभराव होने से लोगों को निजी आर्थिक नुकसान हुआ है, तो राज्य सरकार को सड़के उखड़ने ,तालाब की पाल टूटने, पुलिया के ढ़हने-बहने जाने से सैकड़ों -करोड़ों रुपए का भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। किसानों को भी फसलें बर्बाद की पीड़ा को झेलना पड़ रहा है। अतिवृष्टि की त्रासदी की तस्वीरों को एनबीटी अब आपको दिखा रहा है। उल्लेखनीय है कि बर्बादी की यह तस्वीरें महज उन छह दिनों की बारिश की है, जो पांच के मानसून पर भारी दिखाई दे रही है। शायद इस बारिश को रिकॉर्ड को अब दर्द भरे इतिहास के नाम से जाना जाएगा। उल्लेखनीय है कि बारिश के चलते हाड़ौती संभाग के जिलों में बहाव बेहद तेज है। इसी के चलते बूंदी जिले के तलवास क्षेत्र की रतनसागर झील की सेफ्टी वॉल टूटी गई है। यहां जंगल में पानी व्यर्थ बहता दिखाई दे रहा है। कोटा संभाग के ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यहां कोटा के इटावा उपखंड में एक कच्चे मकान के गिरने की तस्वीर सामने आई है। इस तस्वीर के जरिए गांव की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है। कोटा के खातौली रामखेड़ा गांव बरसाती नाले की पुलिया की अशून्यप्रोच सड़क बह गई है। यहां करीब दो सौ फिट तक का हिस्सा पूरी तरह बह गया है। कोटा जिले में नदी- नालों में तेज बहाव के कारण कई जगह सड़के ही गायब हो गई है, जिसके चलते आपसी संपर्क कट गया है। कोटा के उटेड गांव के बरसाती नाले की पुलिया के पूरी सड़क बह गई है। वहीं यहां खातौली जाने का रास्ता कट गया है। कोटा के झोपड़ियां व निमोल गांव से खौफनाक तस्वीर सामने आई है। यहां मुख्य सड़क बुरी तरह हुई क्षतिग्रस्त हो गई है। डामर, गिट्टी, मिट्टी और पानी के तेज बहाव के साथ कटाव ने काफी नुकसान पहुंचाया है। कोटा जिले के खतौली कस्बे में सबसे ज्यादा बाढ़ का असर देखने को मिला है। यहां पार्वती नदी का उफान उठने के बाद बर्बादी का मंजर दिखा। एक गरीब परिवार का ताश के पत्तों की तरह कच्चा मकान ढह गया । वहीं गृहस्थी के सामान उसके नीचे दब गए। पार्वती नदी में बाढ़ के उफान से पूरा कोटा जलमग्न हो गया है। वहीं नदी के आसपास के क्षेत्र कस्बों में मकान -दुकान जलमग्न है। कोटा जिले के खतौली कस्बे की इस दुकान आधी बिल्डिंग पानी में है। वहीं इसी तरह कोटा शहर के बोरखेड़ा इलाके में रायपुरा नाला उफान पर आया , तो कई कॉलोनियां बाढ़ की जद में आई। इससे तस्वीर में दिख रहा मकान भी चौतरफा पानी से घिर गया। और मिट्टी को को उनसे स्थान से अलग कर दिया। वहीं बारिश के कारण गुड़ला स्टेशन पानी में डूबा दिखा। वहीं स्टेशन मास्टर की ऐसी तस्वीर सामने आई। बूंदी जिले के करवर थाना का बाढ़ में हाले बेहाल हो गया। थाने के परिसर में करीब तीन फीट पानी का उफान देखने को मिला। इससे पुलिस थाने के रखे जरूरी रिकॉर्ड को बहुत नुकसान पहुंचा है। कोटा में बाढ़ की स्थिति से दुकान और मकानों के अलावा फसलों को भी नुकसान हुआ है। आपके सामने कोटा के अरंडखेड़ा गांव और कैथून इलाके की तस्वीरे पेश है, जहां फसलों की बर्बादी दिख रही है। |
युवा भारतीय आल-राउंडर हार्दिक पंड्या आईपीएल के दौरान पहली बार मुंबई इंडियंस की ओर खेलते हुए सुर्खियो में आये थे. आईपीएल में दमदार प्रदर्शन करने बाद हार्दिक पंड्या को भारत के लिए अन्तराष्ट्रीय टी-ट्वेंटी मैच खेलने का मौका मिला. हार्दिक पंड्या ने टी-ट्वेंटी क्रिकेट में अपने आल-राउंड प्रदर्शन से सबको प्रभावित किया, हालाँकि उसके बाद पंड्या ख़राब फॉर्म से बाहर हुए.
हाल में पंड्या ने ऑस्ट्रेलिया में भारत ए की टीम से खेलते हुए शानदार प्रदर्शन किया, जिसके कारण चयनकर्ता उन्हें न्यूज़ीलैण्ड के विरुद्ध घरेलु एकदिवसीय सीरीज के लिए दोबारा मौका दे सकते हैं.
| युवा भारतीय आल-राउंडर हार्दिक पंड्या आईपीएल के दौरान पहली बार मुंबई इंडियंस की ओर खेलते हुए सुर्खियो में आये थे. आईपीएल में दमदार प्रदर्शन करने बाद हार्दिक पंड्या को भारत के लिए अन्तराष्ट्रीय टी-ट्वेंटी मैच खेलने का मौका मिला. हार्दिक पंड्या ने टी-ट्वेंटी क्रिकेट में अपने आल-राउंड प्रदर्शन से सबको प्रभावित किया, हालाँकि उसके बाद पंड्या ख़राब फॉर्म से बाहर हुए. हाल में पंड्या ने ऑस्ट्रेलिया में भारत ए की टीम से खेलते हुए शानदार प्रदर्शन किया, जिसके कारण चयनकर्ता उन्हें न्यूज़ीलैण्ड के विरुद्ध घरेलु एकदिवसीय सीरीज के लिए दोबारा मौका दे सकते हैं. |
चार मार्च से भारत और श्रीलंका के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज शुरू होने जार है, जिसका दूसरा और आखिरी टेस्ट पिंक बॉल से खेला जाएगा। इस मैच के लिए स्टेडियम में दर्शकों की एंट्री का इजाजत मिल गई है।
इस सीरीज का दूसरा और आखिरी टेस्ट पिंक बॉल टेस्ट मैच बेंगलुरु में आयोजित होने। यह टेस्ट मैच डे-नाइट टेस्ट होगा। इसी के साथ क्रिकेट फैंस के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। इस टेस्ट के लिए स्टेडियम में दर्शकों की एंट्री का इजाजत मिल गई है। बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम की कुल क्षमता के 50% दर्शक इस टेस्ट में उपस्थिति हो सकेंगे। भारत-श्रीलंका के बीच यह डे-नाइट टेस्ट 12 से 16 मार्च के बीच खेला जाएगा। इस टेस्ट के लिए टिकट की ऑनलाइन बिक्री 1 मार्च को सुबह 10. 30 से शुरू होगी। क्रिकेट फैंस टिकट काउंटर से भी इसे खरीद सकते हैं। टिकट काउंडर 6 मार्च को सुबह 10. 30 ओपन होगा, जो 16 मार्च तक खुला रहेगा। टिकट की कीमत 100 रुपये से लेकर 2500 रुपये तक तय की गई है। कर्नाटक क्रिकेट एसोसिएशन ने इस टेस्ट की टिकट बिक्री संबंधी एक प्रेस रिलीज जारी की है।
टीम इंडिया प्लेइंग 11:
रोहित शर्मा (कप्तान), मयंक अग्रवाल, प्रियंक पांचाल, विराट कोहली , श्रेयस अय्यर, हनुमा विहार, शुबमन गिल, ऋषभ पंत, केएस भरत, आर अश्विन (फिटनेस), जडेजा, जयंत यादव, कुलदीप यादव, जसप्रीत बुमराह (वाईस), मोहम्मद शमी, सिराज, उमेश यादव, सौरव कुमार।
| चार मार्च से भारत और श्रीलंका के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज शुरू होने जार है, जिसका दूसरा और आखिरी टेस्ट पिंक बॉल से खेला जाएगा। इस मैच के लिए स्टेडियम में दर्शकों की एंट्री का इजाजत मिल गई है। इस सीरीज का दूसरा और आखिरी टेस्ट पिंक बॉल टेस्ट मैच बेंगलुरु में आयोजित होने। यह टेस्ट मैच डे-नाइट टेस्ट होगा। इसी के साथ क्रिकेट फैंस के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। इस टेस्ट के लिए स्टेडियम में दर्शकों की एंट्री का इजाजत मिल गई है। बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम की कुल क्षमता के पचास% दर्शक इस टेस्ट में उपस्थिति हो सकेंगे। भारत-श्रीलंका के बीच यह डे-नाइट टेस्ट बारह से सोलह मार्च के बीच खेला जाएगा। इस टेस्ट के लिए टिकट की ऑनलाइन बिक्री एक मार्च को सुबह दस. तीस से शुरू होगी। क्रिकेट फैंस टिकट काउंटर से भी इसे खरीद सकते हैं। टिकट काउंडर छः मार्च को सुबह दस. तीस ओपन होगा, जो सोलह मार्च तक खुला रहेगा। टिकट की कीमत एक सौ रुपयापये से लेकर दो हज़ार पाँच सौ रुपयापये तक तय की गई है। कर्नाटक क्रिकेट एसोसिएशन ने इस टेस्ट की टिकट बिक्री संबंधी एक प्रेस रिलीज जारी की है। टीम इंडिया प्लेइंग ग्यारह: रोहित शर्मा , मयंक अग्रवाल, प्रियंक पांचाल, विराट कोहली , श्रेयस अय्यर, हनुमा विहार, शुबमन गिल, ऋषभ पंत, केएस भरत, आर अश्विन , जडेजा, जयंत यादव, कुलदीप यादव, जसप्रीत बुमराह , मोहम्मद शमी, सिराज, उमेश यादव, सौरव कुमार। |
सोनाक्षी सिन्हा को लेकर सभी को लगता होगा कि वो शत्रुघ्न सिन्हा की बेटी हैं तो उन्हें पैसों की क्या जरूरत रही होगी या फिर उन्हें शुरुआत में ही अच्छा खासा पैसा मिलने लगा होगा। लेकिन उनके बारे में बहुत कम लोग ही जानते होंगे कि एक्ट्रेस ने पहली कमाई 3000 रुपए थी। रिपोर्ट्स की मानें तो फिल्मों में आने से पहले उन्होंने एक फैशन वीक में बतौर वालंटियर काम किया था, जिसमें एक दिन काम करने के 500 रुपए मिलते थे।
सोनाक्षी सिन्हा की पहली फिल्म भले ही सलमान खान (Salman Khan) के साथ 'दबंग' रही थी। मगर, फिल्मों में काम करने से पहले एक्ट्रेस मॉडलिंग किया करती थीं। वो कई इवेंट्स में रैम्प वॉक भी कर चुकी हैं।
पैरेंट्स से लेती हैं पैसे!
सोनाक्षी सिन्हा ने हाल ही में करोड़ों का फ्लैट लिया है। आज वो करोड़ों की संपत्ति की मालकिन हैं। एक फिल्म के लिए भी मोटी रकम चार्ज करती हैं लेकिन क्या आपको पता है कि वो आज भी खर्चे के लिए पैरेंट्स पैसे मांगती हैं। रिपोर्ट्स की मानें तो एक्ट्रेस अपनी सारी कमाई पैरेंट्स के हाथ में रखती हैं और जरूरत के अनुसार, वो उनसे मांग लेती हैं।
आपको बता दें कि सोनाक्षी सिन्हा मल्टीटैलेंटेड हैं। उन्हें उनकी बेहतरीन एक्टिंग के लिए तो जाना ही जाता है साथ ही वो अपनी सिंगिंग के लिए भी फेमस हैं। इतना ही नहीं रियल लाइफ में वो एक पेंटर भी हैं।
रीना रॉय से मिलती है शक्ल!
इसके अलावा सोनाक्षी सिन्हा के बारे में सबसे दिलचस्प बात ये है कि उनकी शक्ल एक्ट्रेस रीना रॉय से मिलती है। इसके चर्चे खूब रहे हैं। जबकि खबरें ये भी रही हैं कि शत्रुघ्न सिन्हा और रीना रॉय रिलेशनशिप में भी रह चुके हैं। हालांकि, शक्ल मिलने को लेकर एक्ट्रेस ने एक बार इंटरव्यू में कहा था कि उनका चेहरा उनकी मां पूमन से मिलता है ना कि रीना रॉय से।
| सोनाक्षी सिन्हा को लेकर सभी को लगता होगा कि वो शत्रुघ्न सिन्हा की बेटी हैं तो उन्हें पैसों की क्या जरूरत रही होगी या फिर उन्हें शुरुआत में ही अच्छा खासा पैसा मिलने लगा होगा। लेकिन उनके बारे में बहुत कम लोग ही जानते होंगे कि एक्ट्रेस ने पहली कमाई तीन हज़ार रुपयापए थी। रिपोर्ट्स की मानें तो फिल्मों में आने से पहले उन्होंने एक फैशन वीक में बतौर वालंटियर काम किया था, जिसमें एक दिन काम करने के पाँच सौ रुपयापए मिलते थे। सोनाक्षी सिन्हा की पहली फिल्म भले ही सलमान खान के साथ 'दबंग' रही थी। मगर, फिल्मों में काम करने से पहले एक्ट्रेस मॉडलिंग किया करती थीं। वो कई इवेंट्स में रैम्प वॉक भी कर चुकी हैं। पैरेंट्स से लेती हैं पैसे! सोनाक्षी सिन्हा ने हाल ही में करोड़ों का फ्लैट लिया है। आज वो करोड़ों की संपत्ति की मालकिन हैं। एक फिल्म के लिए भी मोटी रकम चार्ज करती हैं लेकिन क्या आपको पता है कि वो आज भी खर्चे के लिए पैरेंट्स पैसे मांगती हैं। रिपोर्ट्स की मानें तो एक्ट्रेस अपनी सारी कमाई पैरेंट्स के हाथ में रखती हैं और जरूरत के अनुसार, वो उनसे मांग लेती हैं। आपको बता दें कि सोनाक्षी सिन्हा मल्टीटैलेंटेड हैं। उन्हें उनकी बेहतरीन एक्टिंग के लिए तो जाना ही जाता है साथ ही वो अपनी सिंगिंग के लिए भी फेमस हैं। इतना ही नहीं रियल लाइफ में वो एक पेंटर भी हैं। रीना रॉय से मिलती है शक्ल! इसके अलावा सोनाक्षी सिन्हा के बारे में सबसे दिलचस्प बात ये है कि उनकी शक्ल एक्ट्रेस रीना रॉय से मिलती है। इसके चर्चे खूब रहे हैं। जबकि खबरें ये भी रही हैं कि शत्रुघ्न सिन्हा और रीना रॉय रिलेशनशिप में भी रह चुके हैं। हालांकि, शक्ल मिलने को लेकर एक्ट्रेस ने एक बार इंटरव्यू में कहा था कि उनका चेहरा उनकी मां पूमन से मिलता है ना कि रीना रॉय से। |
लखनऊ। यूपी सरकार ने जब इस साल घोषणा की थी कि वह किसानों से 80 मीट्रिक टन गेहूं खरीदेगी तो किसानों के चेहरे खिल गए थे लेकिन इस काम की धीमी रफ्तार से उनमें मायूसी भी है।
उत्तर प्रदेश सरकार अभी तक मात्र 15.9 लाख टन ही गेहूं खरीद पाई है जबकि इसी सीजन में पंजाब ने 115 लाख टन, हरियाणा ने 73.4 लाख टन, मध्यप्रदेश ने 59.2 लाख टन गेहूं की खरीद किसानों से कर लिया है। उत्तर प्रदेश में गेहूं खरीद की धीमी रफ्तार बढ़ने की बजाय स्थिर है। यह हाल तब है कि जब सरकार की एजेंसियों की तरफ से गेहूं खरीदने के लिए जो समय निर्धारित किया गया था उसका 45 दिन बीत गया है। अब मात्र 30 दिन बचा है जिसमें गेहूं खरीदने वाली एजेंसियों का लक्ष्य पूरा करना है।
उत्तर प्रदेश खाद्य व रसद विभाग के अपर आयुक्त विपणन अशोक कुमार ने बताया, 'गेहूं क्रय केन्द्रों पर शुरुआत में किसान कम आ रहे थे लेकिन अब क्रय केंद्रों पर तेजी आई है, हालांकि लक्ष्य को पूरा करने के लिए एजेंसियों को और अधिक सक्रिय होना होगा।' खाद्य आपूर्ति के अधिकारी चाहे जितना भी दावा करें लेकिन स्थिति यह है एजेंसियों की तरफ से गेहूं खरीद की जो रफ्तार है उससे गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा होता नहीं दिख रहा है।
रबी विपणन वर्ष 2017-18 में केन्द्रीकृत प्रणाली के अंतर्गत न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना के तहत उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों से इस साल 80 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा है। सरकार की 9 गेहूं खरीद एजेंसियों के जरिए प्रदेश के 5 हजार गेहूं क्रय केन्द्रों पर 1 अप्रैल से गेहूं खरीदने काम शुरू हुआ था। 15 जून तक एजेंसियों की तरफ से गेहूं खरीदने का अंतिम दिन है।
उत्तर प्रदेश में क्रय केंद्रों पर जिन एजेंसियों को गेहूं खरीदने का जिम्मा दिया गया है उसमें खाद्य विभाग की विपणन शाख मल्टी स्टेट कोआपरेटिव सोसाइटी को 20 लाख मीट्रिक टन, उत्तर प्रदेश कर्मचारी कल्याण निगम को पांच लाख मीट्रिक , उत्तर प्रदेश राज्य खाद्य व आवश्यक वस्तु निगम यानी एसएफसी को तीन लाख मीट्रिक, उत्तर प्रदेश सहकारी संघ को 24 लाख मीट्रिक टन, उत्तर प्रदेश काआपरेटिव यूनियन यानि पीसीएफ को आठ लाख मीट्रिक टन, यूपी एग्रो को चार लाख मीट्रिक टन, एनसीसीएफ को 4 लाख मीट्रिक टन, नैफेड को दो लाख मीट्रिक टन और भारतीय खाद्य निगम को 10 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य दिया गया है।
इसके अलावा उत्तर प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश उपभोक्ता सहकारी संघ लिमिटेड को भी गेहूं क्रय के लिए नामित किया है। इसका न्यूनतम खरीद लक्ष्य 3.00 लाख मीट्रिक टन और कार्यकारी लक्ष्य पांच लाख मीट्रिक टन तय किया गया है। सहकारी संघ के क्रय एजेंसी नामित हो जाने के बाद अब खाद्य विभाग का न्यूनतम गेहूं खरीद लक्ष्य 10 लाख मीट्रिक टन से घटकर सात लाख मीट्रिक टन हो गया है, वहीं कार्यकारी लक्ष्य 20 लाख मीट्रिक टन के स्थान पर 15 लाख मीट्रिक टन हो गया है लेकिन सभी एजेंसियों में गेहूं खरीद की दर बहुत धीमी है। अगर गेहूं खरीद ऐसी ही सुस्त रफ्तार से चलती रही तो काई भी एजेंसी अपना लक्ष्य पूरा नहीं कर पाएगी।
| लखनऊ। यूपी सरकार ने जब इस साल घोषणा की थी कि वह किसानों से अस्सी मीट्रिक टन गेहूं खरीदेगी तो किसानों के चेहरे खिल गए थे लेकिन इस काम की धीमी रफ्तार से उनमें मायूसी भी है। उत्तर प्रदेश सरकार अभी तक मात्र पंद्रह.नौ लाख टन ही गेहूं खरीद पाई है जबकि इसी सीजन में पंजाब ने एक सौ पंद्रह लाख टन, हरियाणा ने तिहत्तर.चार लाख टन, मध्यप्रदेश ने उनसठ.दो लाख टन गेहूं की खरीद किसानों से कर लिया है। उत्तर प्रदेश में गेहूं खरीद की धीमी रफ्तार बढ़ने की बजाय स्थिर है। यह हाल तब है कि जब सरकार की एजेंसियों की तरफ से गेहूं खरीदने के लिए जो समय निर्धारित किया गया था उसका पैंतालीस दिन बीत गया है। अब मात्र तीस दिन बचा है जिसमें गेहूं खरीदने वाली एजेंसियों का लक्ष्य पूरा करना है। उत्तर प्रदेश खाद्य व रसद विभाग के अपर आयुक्त विपणन अशोक कुमार ने बताया, 'गेहूं क्रय केन्द्रों पर शुरुआत में किसान कम आ रहे थे लेकिन अब क्रय केंद्रों पर तेजी आई है, हालांकि लक्ष्य को पूरा करने के लिए एजेंसियों को और अधिक सक्रिय होना होगा।' खाद्य आपूर्ति के अधिकारी चाहे जितना भी दावा करें लेकिन स्थिति यह है एजेंसियों की तरफ से गेहूं खरीद की जो रफ्तार है उससे गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा होता नहीं दिख रहा है। रबी विपणन वर्ष दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह में केन्द्रीकृत प्रणाली के अंतर्गत न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना के तहत उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों से इस साल अस्सी लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा है। सरकार की नौ गेहूं खरीद एजेंसियों के जरिए प्रदेश के पाँच हजार गेहूं क्रय केन्द्रों पर एक अप्रैल से गेहूं खरीदने काम शुरू हुआ था। पंद्रह जून तक एजेंसियों की तरफ से गेहूं खरीदने का अंतिम दिन है। उत्तर प्रदेश में क्रय केंद्रों पर जिन एजेंसियों को गेहूं खरीदने का जिम्मा दिया गया है उसमें खाद्य विभाग की विपणन शाख मल्टी स्टेट कोआपरेटिव सोसाइटी को बीस लाख मीट्रिक टन, उत्तर प्रदेश कर्मचारी कल्याण निगम को पांच लाख मीट्रिक , उत्तर प्रदेश राज्य खाद्य व आवश्यक वस्तु निगम यानी एसएफसी को तीन लाख मीट्रिक, उत्तर प्रदेश सहकारी संघ को चौबीस लाख मीट्रिक टन, उत्तर प्रदेश काआपरेटिव यूनियन यानि पीसीएफ को आठ लाख मीट्रिक टन, यूपी एग्रो को चार लाख मीट्रिक टन, एनसीसीएफ को चार लाख मीट्रिक टन, नैफेड को दो लाख मीट्रिक टन और भारतीय खाद्य निगम को दस लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य दिया गया है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश उपभोक्ता सहकारी संघ लिमिटेड को भी गेहूं क्रय के लिए नामित किया है। इसका न्यूनतम खरीद लक्ष्य तीन.शून्य लाख मीट्रिक टन और कार्यकारी लक्ष्य पांच लाख मीट्रिक टन तय किया गया है। सहकारी संघ के क्रय एजेंसी नामित हो जाने के बाद अब खाद्य विभाग का न्यूनतम गेहूं खरीद लक्ष्य दस लाख मीट्रिक टन से घटकर सात लाख मीट्रिक टन हो गया है, वहीं कार्यकारी लक्ष्य बीस लाख मीट्रिक टन के स्थान पर पंद्रह लाख मीट्रिक टन हो गया है लेकिन सभी एजेंसियों में गेहूं खरीद की दर बहुत धीमी है। अगर गेहूं खरीद ऐसी ही सुस्त रफ्तार से चलती रही तो काई भी एजेंसी अपना लक्ष्य पूरा नहीं कर पाएगी। |
लखनऊ (ब्यूरो/एएनआई)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ-दिल्ली तेजस एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखा दी है। उन्होंने कहा है, 'यह देश की पहली कॉर्पोरेट ट्रेन है। मैं इसमें यात्रा करने वाले यात्रियों के पहले बैच को बधाई देता हूं और आशा करता हूं कि अन्य शहरों को भी जोड़ने के लिए इस तरह की पहल की गई है'।
सबसे खास बात यह है कि यह ऐसी पहली ट्रेन होगी जिसके लेट होने पर पैसेंजर्स को हर्जाना भी मिलेगा। एक घंटा लेट होने पर पैसेंजर को सौ रुपये और दो घंटे लेट होने पर ढाई सौ रुपये पैसेंजर को मिलेंगे। ट्रेन हफ्ते में छह दिन चलेगी। ट्रेन मंगलवार को नहीं चलेगी। लखनऊ से दिल्ली के बीच सफर करने में यह ट्रेन सवा छह घंटे लेगी। ट्रेन में सफर के दौरान पैसेंजर्स को चाय, काफी और पानी की सुविधा मुफ्त मिलेगी। इसके लिए टे्रन में मशीन लगा दी गई है। ट्रेन में दो बार नाश्ते के साथ एक बार खाना भी फ्री दिया जाएगा।
- हवाई जहाज की तरह ही इसमें अटेंडेंट बटन की सुविधा मिलेगी। किसी भी तरह की आवश्यकता पडऩे पर पैसेंजर अटेंडेंट को बुला सकेंगे।
- ट्रेन में हॉट-स्पॉट से इंटरनेट की सुविधा मिलेगी। ऐसे में फिल्म डाउनलोड कर सकेंगे।
- पैसेंजर्स ट्रेन के अंदर 50 रुपये किराया दे टैबलेट ले सकेंगे, वापसी में इसे जमा करना होगा।
- ट्रेन के अंदर एलसीडी की व्यवस्था है। किसी भी स्टेशन पर पहुंचने से पहले ही उस स्टेशन का नाम एलसीडी पर दिखेगा।
नोट- तेजस एक्सप्रेस का नई दिल्ली से नियमित संचालन 5 अक्टूबर से लखनऊ से 6 अक्टूबर को शुरू होगा।
'हम सभी को ट्रेन के संचालन का बेसब्री से इंतजार है। हम देश की पहली कॉरपोरेट तेजस एक्सप्रेस के संचालन करने जा रहे हैं। कई महीने से इसकी तैयारियां चल रही थी। आखिर वह वक्त भी आ पहुंचा। '
| लखनऊ । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ-दिल्ली तेजस एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखा दी है। उन्होंने कहा है, 'यह देश की पहली कॉर्पोरेट ट्रेन है। मैं इसमें यात्रा करने वाले यात्रियों के पहले बैच को बधाई देता हूं और आशा करता हूं कि अन्य शहरों को भी जोड़ने के लिए इस तरह की पहल की गई है'। सबसे खास बात यह है कि यह ऐसी पहली ट्रेन होगी जिसके लेट होने पर पैसेंजर्स को हर्जाना भी मिलेगा। एक घंटा लेट होने पर पैसेंजर को सौ रुपये और दो घंटे लेट होने पर ढाई सौ रुपये पैसेंजर को मिलेंगे। ट्रेन हफ्ते में छह दिन चलेगी। ट्रेन मंगलवार को नहीं चलेगी। लखनऊ से दिल्ली के बीच सफर करने में यह ट्रेन सवा छह घंटे लेगी। ट्रेन में सफर के दौरान पैसेंजर्स को चाय, काफी और पानी की सुविधा मुफ्त मिलेगी। इसके लिए टे्रन में मशीन लगा दी गई है। ट्रेन में दो बार नाश्ते के साथ एक बार खाना भी फ्री दिया जाएगा। - हवाई जहाज की तरह ही इसमें अटेंडेंट बटन की सुविधा मिलेगी। किसी भी तरह की आवश्यकता पडऩे पर पैसेंजर अटेंडेंट को बुला सकेंगे। - ट्रेन में हॉट-स्पॉट से इंटरनेट की सुविधा मिलेगी। ऐसे में फिल्म डाउनलोड कर सकेंगे। - पैसेंजर्स ट्रेन के अंदर पचास रुपयापये किराया दे टैबलेट ले सकेंगे, वापसी में इसे जमा करना होगा। - ट्रेन के अंदर एलसीडी की व्यवस्था है। किसी भी स्टेशन पर पहुंचने से पहले ही उस स्टेशन का नाम एलसीडी पर दिखेगा। नोट- तेजस एक्सप्रेस का नई दिल्ली से नियमित संचालन पाँच अक्टूबर से लखनऊ से छः अक्टूबर को शुरू होगा। 'हम सभी को ट्रेन के संचालन का बेसब्री से इंतजार है। हम देश की पहली कॉरपोरेट तेजस एक्सप्रेस के संचालन करने जा रहे हैं। कई महीने से इसकी तैयारियां चल रही थी। आखिर वह वक्त भी आ पहुंचा। ' |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
मैंने देखा, वे वकालत भी अपने को सँभाल कर करते थे। मालवीयजी महाराज ने जिस पवित्रता से वकालत की, वैसी ही पवित्रता से उनका जीवन बराबर बीता । वे रुपए के लोभी नहीं थे । रुपया मालवीयजी के लिए बहुत अर्थ नहीं रखता था और किसी तरह वे अपना काम चला लेते थे ।
" प्रातःस्मरणीय मालवीयजी महाराज काम स्वयं करते थे, पर नाम दूसरों का लागे रखते थे । यश की उन्हें चाह नहीं थी। अदालती कामों के लिए हिंदी को स्वीकार कराने के संबंध में सारा पत्र व्यवहार वही करते थे, पर उस पर नाम रहता था अयोध्यानरेश ददुआ. साहव का । हिंदू विश्वविद्यालय को सारी योजना उनकी थी, पर आगे रखते थे वे दरभंगानरेश को । 'नेकी कर, पानी में डाल' यह उनके जीवन का आदर्श था ।
"एक बार जब वाइसराय की कार्यकारिणी समिति में भारतीयों के लिए जाने की बहुत खबर थी, मैंने उनसे कहा कि सरकार शायद आपको भी निमंत्रित करे । उन्होंने उत्तर दिया इस विदेशी सरकार को तो बात ही क्या, स्वराज्य सरकार में भी आइ शॅल वी पीपिंग फॉर माइ पीपुल मैं अपनी जनता के लिए हो आवाज उठाता रहूँगा ।"
तो ऐसे थे मालवीयजी !
अपनी समस्त शक्ति, विद्या, प्रतिभा और आत्मबल को राष्ट्र के लिए न्योछावर कर उन्होंने ११ नववर, सन् १९४६ ई० को परलोक की यात्रा की ।
अध्याय ३३
भारत को अमर विभूति विश्वविख्यात संन्यासी स्वामी विवेकानंद का आविर्भाव १२ जनवरी, १८६३ ई० को मकर संक्रांति के दिन हुआ था । इनके पिता श्री विश्वनाथ दत्त कलकत्त के एक प्रसिद्ध वकील थे । जब आप वी० ए० के छात्र थे, तभी इन पर रामकृष्ण परमहंस की कृपा हुई । रामकृष्ण ने पहचान लिया कि यह युवक सामान्य लोगों जैसा जीवन व्यतीत करने के लिए नहीं है । इसे तो संसार में रह कर ज्ञान और अध्यात्म के क्षेत्र में असाधारण कार्य करते हैं ।
नरेंद्र (बाद में इनका नाम स्वामी विवेकानंद पड़ा) पहले तो रामकृष्ण की विचारधारा का विरोध करते थे, पर कुछ ही दिनों बाद ये उनके परमभक्त बन गए । रामकृष्ण ने अपना सारा ज्ञान और तेज उनके हृदय में डाल दिया । फलतः नरेंद्र स्वामी विवेकानंद हो गए और अपने ज्ञान - सागर में देश-विदेश के लोगों को नहलाने लगे । अपने अल्पकालीन जीवन में मानव कल्याणार्थ स्वामीजी ने जिस अध्यात्मवाद तथा भारतीय दर्शन के मौलिक सिद्धांतों का प्रतिपादन किया और प्राणिमात्र के कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया, वह संसार के इतिहास में सर्वदा स्तुत्य और स्मरणीय है ।
शिक्षा द्वारा ज्ञान-वास का प्रस्फुटीकरण
स्वामी विवेकानंद ने किसी शिक्षाशास्त्र की रचना नहीं की है, तथापि इस तेजस्वी महात्मा ने अखंड ब्रह्मचर्य की कठोर साधना के फलस्वरूप जनकल्याण के हितार्थं जिस समर संदेश का प्रतिपादन किया, उसमें शिक्षा जैसा विषय स्वतः
समाविष्ट है । स्वामीजी मनुष्य मात्र को धात्मविश्वासी, आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना चाहते थे । इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए उन्होंने सर्वदा दृढ़तापूर्वक इस तथ्य पर बल दिया कि हमें धर्म की वास्तविक मर्यादा स्थापित करनेवाली तथा सर्वा.. विकसित घरित्र के नागरिक निर्माण करने में समर्थ शिक्षा की आवश्यकता । उनका विश्वास था कि मनुष्य में ज्ञान का वास है । ज्ञान मनुष्य में स्वभावसिद्ध है । बाहर से कोई ज्ञान नहीं आता । चाहे लौकिक ज्ञान हो जयवा आध्यात्मिक, मनुष्य अपनी शक्तियों के प्रयोग से उसकी उद्भावना करता है या उसका अनुभव करके उसको प्रकाश में लाता है । यह मनुष्य की पूर्णतः पैतृक संपत्ति है और शिक्षा उसको प्रकाशित करने का कार्य करती है । हम जो कहते हैं कि मनुष्य 'जानता है', वास्तव में मानसशास्त्र की संगत भाषा में हमें यह कहना चाहिए कि वह 'आविष्कार करता है, अनावृत्त अथवा प्रकट करता है । ' अतः, हमारी शिक्षा ऐसी हो, जो इस लक्ष्य की पूर्ति में हमें समर्थ करे । शिक्षा से आत्मविश्वास आता है और आत्मविश्वास से अंतनिहित ब्रह्मभाव जाग उठता है ।
मन की एकाग्रता
स्वामीजी के मतानुसार वास्तविक शिक्षा की उपलब्धि में मन की एकाग्रता परम आवश्यक है । एकाग्र चित्त व्यक्ति को ही ज्ञान की महान शक्ति प्राप्त होती है । कार्य को सफलता ही नहीं, वरन् संपूर्ण जीवन की सफलता एकाग्रता की सीमा पर आधारित है। विद्यार्थी जितने एकाग्र चित्त होंगे, उनकी विद्या-ग्रहण करने की शक्ति भी उतनी ही अधिक और स्थायी होगी । कला, विज्ञान, शिल्प, संगीत आदि में बहुत अधिक प्रवीणता प्राप्त कर लेना इसी एकाग्रता का फल है । अन्य राष्ट्रों ने जो ज्ञानसंपदा दी, वह उनको एकाग्रता के फलस्वरूप ही संभव हुई । एकाग्रता के ही परिणामस्वरूप उन्हें कला और साहित्य आदि में पूर्णता प्राप्त हुई। हिंदुसों ने अंतर्जगत पर, जात्मा के अदृष्ट प्रदेश पर अपने चित्त को एकाग्र किया और इस प्रकार योगशास्त्र की उन्नति की । संसार की समस्त ईश्वरीय विभूतियाँ अपना रहस्य खोलने और स्पष्ट करने को प्रस्तुत हो जाएं, अगर हम एकाग्रता की शक्ति का वास्तविक रूप में प्रयोग करें। स्वामीजी एकाग्रता की महिमा का वर्णन इन शब्दों में करते हैं "मैं तो मन की एकाग्रता को ही शिक्षा का यथार्थ सार समझता हूँ, ज्ञातव्य विषयों के संग्रह को नहीं । यदि एक बार मुझे फिर शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिले, तो मैं विषयों का अध्ययन नहीं करूंगा । मैं तो एकाग्रता को तथा मन को विषय से अलग कर लेने की शक्ति को बढ़ाऊँगा और तव साधन अथवा मंत्र की पूर्णता प्राप्त हो जाने पर इच्छानुसार विषयों का संग्रह करूंगा।"
स्वामी विवेकानांद
ब्रह्मचर्य की साधना
स्वामीजी का कहना था कि मन अथवा चित्त की एकाग्रता की शक्ति के समुचित विकास के लिए ब्रह्मचर्य की साधना अत्यंत आवश्यक है । ब्रह्मचर्य की तेजोमय आभा के समक्ष संसार की शक्तियां कमजोर और फोकी पड़ जाती हैं । ब्रह्मचर्य-साधना के फलस्वरूप ही हनुमान पर्वत को भी उठा कर आकाश मार्ग के विचरण में समर्थ हुए, लक्ष्मण मेघनाथ का वध कर सके तथा यह ब्रह्मचर्य की महिमा का ही फल है कि भीष्मपितामह ने मृत्यु को भी अपने वश में किया । अतः, प्रत्येक बालक को पूर्ण ब्रह्मचर्य के अभ्यास की शिक्षा देनी चाहिए, तभी उनमें श्रद्धा एवं विश्वास की उत्पत्ति होगी और वे शिक्षा के वास्तविक रहस्य एवं उद्देश्य को समझ सकने में समर्थ तथा ग्रहण कर सकने में सक्षम होंगे। साथ ही, वे अपनी ही उन्नति नहीं, अपने समाज और राष्ट्र की हो उन्नति नहीं, अपितु समस्त संसार की उन्नति में योगदान करेंगे ।
प्राचीन गुरुकुल प्रणाली में विश्वास
स्वामी विवेकानंद प्राचीन भारतीय गुरुकुल शिक्षा प्रणाली को प्रश्रय देते थे । वर्तमान शिक्षा प्रणाली जिसमें ज्ञान- जैसी पवित्र वस्तु को मूल्य लेकर वेचा जाता है, उन्हें अमान्य थी । उनके विचानुरासार शिक्षा का अर्थ है-:-गुरुगृह निवास ।' शिष्य को बाल्यावस्था से ही ऐसे गुरु के साथ रहना चाहिए, जिसका चरित्र प्रज्ज्वलित अग्नि की भाँति हो, जिससे उच्चतम शिक्षा का सजीव आदर्श शिष्य के समक्ष बना रहे । शिक्षकों को भी मुक्तहस्त होकर विद्यादान तथा ज्ञानदान करना चाहिए । प्राचीन गुरुकुल शिक्षा प्रणाली में शिक्षकगण विद्यार्थियों को उनसे शुल्क लिए बिना ही अपने पास रखते थे। कई गुरुकुल आश्रमों में अन्न और वस्त्र की भी व्यवस्था थी । शिक्षकों के प्रति
स्वामीजी ने शिक्षक के आवश्यक गुणों की चर्चा करते हुए लिखा है कि उन्हें शास्त्रों का मर्मज्ञ होना चाहिए । विद्याओं में निष्णात व्यक्ति ही अपने शिष्यों को वास्तविक ज्ञानदान दे सकता है । शिक्षक का दूसरा और प्रमुख गुण उनका पवित्र एवं उज्ज्वल चरित्र है। भारतीय गुरुकुल के शिक्षकों का चरित्र अत्यंत निर्दोष होता था, तभी उनमें बालकों के सर्वांगीण विकास की क्षमता थी । शिक्षकका स्थान पिता से भी बढ़ कर है । विद्यार्थियों के अपरिपक्व कोमल मस्तिष्क पर उनके स्वभाव, रहन-सहन, व्यवहार आदि का वड़ा ही सूक्ष्म और तीव्र प्रभाव पड़ता व्वत एवं शिक्षक को चरित्रवान और पवित्र होना ही है। स्वयं के लिए आध्यात्मिक
सत्य की उपलब्धि करने तथा दूसरों में उसके संचार का एकमात्र उपाय है --- हृदय तथा मन को पवित्रता । शिक्षक को पूर्ण रूप से शुद्ध चित्त होना चाहिए, तभी उनके शब्दों का मूल्य होगा । वस्तुतः शिक्षकों का काम ही है कि वे अपने शिष्यों में आध्यात्मिक शक्ति का संचार करें, न कि शिष्य की वृद्धि, वृत्ति अथवा अन्य किसी ' शक्ति को उत्तेजित मात्र करें ।
स्वामी विवेकानंद ने शिक्षकों के लिए धर्मग्रंथों का ज्ञान आवश्यक बतलाया है । उनका विचार है कि धर्मग्रंथों के स्वत्वों का ज्ञान रखने वाला ही सच्चा शिक्षक हो सकता है । शिक्षक को धार्मिक क्षेत्र में प्रवेश पाना भी / नितांत आवश्यक है, तभी उनके आदेशों एवं सुझावों का महत्त्व होगा। शिक्षक का दृष्टिकोण यह होना चाहिए कि सभी धर्मों का लक्ष्य वस्तुतः समान ही है ।
शिक्षकों में अपने शिष्यों के प्रति प्रबल प्रेम की भावना होनी चाहिए । निःस्वार्थ प्रेम की भावना के अभाव में गुरु शिष्य को वास्तविक ज्ञान देने में सक्षम नहीं हो सकेंगे । विद्यार्थियों के ऊपर प्रेम से बढ़ कर आध्यात्मिक प्रभाव डालने वाला कोई तत्त्व नहीं है । अतः, शिक्षक को शिष्य के प्रति प्रेमपूर्ण व्यवहार करना चाहिए 1: शिष्यों के प्रति
स्वामी विवेकानंद ने शिष्यों के आवश्यक गुण को चर्चा करते हुए बतलाया है कि उन्हें मन, वचन और कर्म से शुद्ध रह कर सत्य का अनुसरण और पालन करना चाहिए । उनमें ज्ञानप्राप्ति की सच्ची लगन होनी चाहिए । ज्ञानप्राप्ति के संबंध में पुराना नियम यह है कि अंतःकरण से जो कुछ हम चाहते हैं, उसी को प्राप्त करते हैं । जिसे हम नहीं चाहते, उसकी उपलब्धि प्रायः हमें नहीं हो पाती । हमें तो अपनी पाशविक प्रवृत्ति के साथ निरंतर जूझना होगा, सतत् युद्ध करना होगा तथा उसे अपने वश में लाने के हेतु अविराम यत्नशील रहना होगा ।
शिष्यों को अपने शिक्षकों के प्रति अत्यंत आदर का भाव रखना चाहिए । के प्रति विश्वास, नम्रता, विनय तथा श्रद्धा के बिना हम में धर्म पनप नहीं सकता । जिन देशों में गुरु-शिष्य-संबंध की उपेक्षा हुई है, वहीं विद्या की सर्वथा अवनति हुई है, वहाँ की सभ्यता और संस्कृति को भी गहरा खाघात पहुँचा है ।
स्वामी विवेकानंद का विश्वास था कि बच्चा स्वयं शिक्षा ग्रहण करता है पेड़-पौधों की भांति उसका स्वतः विकास होता है। जिस प्रकार पेड़-पौधे स्वाभाविक रूप से विकसित होते हैं तथा माली उनकी प्रगति में सहायक मात्र होता है, उसी
प्रकार शिक्षक, माता-पिता और अभिभावक की जिम्मेवारी केवल उचित आवश्यक वातावरण की आयोजना कर उनकी प्रगति में पथप्रदर्शन, निरीक्षण तथा निर्देशन ही होता है। आधुनिक शिक्षा मनोविज्ञानशास्त्रियों के समान स्वामीजी ने भी इसे मान्यता दी है कि वच्चों को वलपूर्वक कुछ भी नहीं पढ़ाना चाहिए । बच्चे को अपनी अपरिमित प्रवृत्तियों की संतुष्टि के लिए पूर्ण अवसर प्राप्त होना चाहिए । उनकी इच्छा के विपरीत उन पर नियंत्रण रहने से उनके विकास पर कुप्रभाव पड़ता है तथा मानसिक जटिलता उत्पन्न होती है । वच्चे में केवल दोष निकालना अनुचित है, उनको सहानुभूति एवं सद्व्यवहारपूर्वक प्रोत्साहित करना अच्छा है ।
स्वामी विवेकानंद का विचार है कि शिक्षा ऐसी हो, जो बच्चे की आवश्य कताओं सामंजस्य रखती हो । बच्चों की आवश्यकताओं को निर्धारित करने में शिक्षक अपनी या उनके अभिभावकों को इच्छा को आधार नहीं मानें, उनकी जन्मजात प्रवृत्तियो को ध्यान में रखें । स्वामीजी का कहना था कि माता-पिता अथवा शिक्षक का यह विचार कि उनके द्वारा निर्धारित मार्ग पर चल कर वच्चा विकास की क्षोर बढ़ेगा या उसकी प्रगति होगी - तथ्यहीन है। हमें प्रत्येक आत्मा को ईश्व रीय क्षात्मा और प्रत्येक बच्चे को ब्रह्म का प्रतिरूप समझना चाहिए । व्यक्ति केवल ईश्वर की सेवा कर सकता है । अतः, शिक्षकों को बच्चों की सेवा करनी चाहिए । स्त्रियों के प्रति
भारतीय स्त्रियों की दशा देख कर स्वामीजी को बहुत दुःख होता था। स्त्रियों तथा पुरुषों के बीच व्याप्त गहरे भेद की आलोचना करते हुए उन्होंने बड़े स्पष्ट शब्दों में घोषणा की है कि सभी प्राणियों में वही एक आत्मा विद्यमान है, स्त्रियों के ऊपर अनुचित नियंत्रण सर्वथा जवांछनीय है । अवनति के युग में जब पुरोहितों ने अन्य जातियों को वेदाध्ययन के अयोग्य ठहराया, उसी समय उन्होंने स्त्रियों को भी अपने अधिकारों से वंचित कर दिया, जबकि वैदिक औपनिषदिक युग में मैत्रेयी, गार्गी आदि पुण्यस्मृति महिलाओं ने ऋषियों का स्थान ले लिया था एवं सहस्र वेदज्ञ ग्राह्मणों की सभा में भी गार्गी ने याज्ञवल्क्य को ब्रह्म के संबंध में शास्त्रार्य करने के लिए ललकारा था ।
सभी उन्नत राष्ट्रों ने स्त्रियों को समुचित संमान दे कर हो महानता प्राप्त की है। जो देश, जो राष्ट्र, स्त्रियों का आदर नहीं करते, वे कभी बड़े नहीं हो पाए और न भविष्य में ही बड़े होंगे । मनु महाराज का भी कथन है कि जहाँ स्त्रियों को उचित आदर और प्रतिष्ठा प्राप्त होती है, वहां देवताओं का निवास होता है। परंतु, | मैंने देखा, वे वकालत भी अपने को सँभाल कर करते थे। मालवीयजी महाराज ने जिस पवित्रता से वकालत की, वैसी ही पवित्रता से उनका जीवन बराबर बीता । वे रुपए के लोभी नहीं थे । रुपया मालवीयजी के लिए बहुत अर्थ नहीं रखता था और किसी तरह वे अपना काम चला लेते थे । " प्रातःस्मरणीय मालवीयजी महाराज काम स्वयं करते थे, पर नाम दूसरों का लागे रखते थे । यश की उन्हें चाह नहीं थी। अदालती कामों के लिए हिंदी को स्वीकार कराने के संबंध में सारा पत्र व्यवहार वही करते थे, पर उस पर नाम रहता था अयोध्यानरेश ददुआ. साहव का । हिंदू विश्वविद्यालय को सारी योजना उनकी थी, पर आगे रखते थे वे दरभंगानरेश को । 'नेकी कर, पानी में डाल' यह उनके जीवन का आदर्श था । "एक बार जब वाइसराय की कार्यकारिणी समिति में भारतीयों के लिए जाने की बहुत खबर थी, मैंने उनसे कहा कि सरकार शायद आपको भी निमंत्रित करे । उन्होंने उत्तर दिया इस विदेशी सरकार को तो बात ही क्या, स्वराज्य सरकार में भी आइ शॅल वी पीपिंग फॉर माइ पीपुल मैं अपनी जनता के लिए हो आवाज उठाता रहूँगा ।" तो ऐसे थे मालवीयजी ! अपनी समस्त शक्ति, विद्या, प्रतिभा और आत्मबल को राष्ट्र के लिए न्योछावर कर उन्होंने ग्यारह नववर, सन् एक हज़ार नौ सौ छियालीस ईशून्य को परलोक की यात्रा की । अध्याय तैंतीस भारत को अमर विभूति विश्वविख्यात संन्यासी स्वामी विवेकानंद का आविर्भाव बारह जनवरी, एक हज़ार आठ सौ तिरेसठ ईशून्य को मकर संक्रांति के दिन हुआ था । इनके पिता श्री विश्वनाथ दत्त कलकत्त के एक प्रसिद्ध वकील थे । जब आप वीशून्य एशून्य के छात्र थे, तभी इन पर रामकृष्ण परमहंस की कृपा हुई । रामकृष्ण ने पहचान लिया कि यह युवक सामान्य लोगों जैसा जीवन व्यतीत करने के लिए नहीं है । इसे तो संसार में रह कर ज्ञान और अध्यात्म के क्षेत्र में असाधारण कार्य करते हैं । नरेंद्र पहले तो रामकृष्ण की विचारधारा का विरोध करते थे, पर कुछ ही दिनों बाद ये उनके परमभक्त बन गए । रामकृष्ण ने अपना सारा ज्ञान और तेज उनके हृदय में डाल दिया । फलतः नरेंद्र स्वामी विवेकानंद हो गए और अपने ज्ञान - सागर में देश-विदेश के लोगों को नहलाने लगे । अपने अल्पकालीन जीवन में मानव कल्याणार्थ स्वामीजी ने जिस अध्यात्मवाद तथा भारतीय दर्शन के मौलिक सिद्धांतों का प्रतिपादन किया और प्राणिमात्र के कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया, वह संसार के इतिहास में सर्वदा स्तुत्य और स्मरणीय है । शिक्षा द्वारा ज्ञान-वास का प्रस्फुटीकरण स्वामी विवेकानंद ने किसी शिक्षाशास्त्र की रचना नहीं की है, तथापि इस तेजस्वी महात्मा ने अखंड ब्रह्मचर्य की कठोर साधना के फलस्वरूप जनकल्याण के हितार्थं जिस समर संदेश का प्रतिपादन किया, उसमें शिक्षा जैसा विषय स्वतः समाविष्ट है । स्वामीजी मनुष्य मात्र को धात्मविश्वासी, आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना चाहते थे । इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए उन्होंने सर्वदा दृढ़तापूर्वक इस तथ्य पर बल दिया कि हमें धर्म की वास्तविक मर्यादा स्थापित करनेवाली तथा सर्वा.. विकसित घरित्र के नागरिक निर्माण करने में समर्थ शिक्षा की आवश्यकता । उनका विश्वास था कि मनुष्य में ज्ञान का वास है । ज्ञान मनुष्य में स्वभावसिद्ध है । बाहर से कोई ज्ञान नहीं आता । चाहे लौकिक ज्ञान हो जयवा आध्यात्मिक, मनुष्य अपनी शक्तियों के प्रयोग से उसकी उद्भावना करता है या उसका अनुभव करके उसको प्रकाश में लाता है । यह मनुष्य की पूर्णतः पैतृक संपत्ति है और शिक्षा उसको प्रकाशित करने का कार्य करती है । हम जो कहते हैं कि मनुष्य 'जानता है', वास्तव में मानसशास्त्र की संगत भाषा में हमें यह कहना चाहिए कि वह 'आविष्कार करता है, अनावृत्त अथवा प्रकट करता है । ' अतः, हमारी शिक्षा ऐसी हो, जो इस लक्ष्य की पूर्ति में हमें समर्थ करे । शिक्षा से आत्मविश्वास आता है और आत्मविश्वास से अंतनिहित ब्रह्मभाव जाग उठता है । मन की एकाग्रता स्वामीजी के मतानुसार वास्तविक शिक्षा की उपलब्धि में मन की एकाग्रता परम आवश्यक है । एकाग्र चित्त व्यक्ति को ही ज्ञान की महान शक्ति प्राप्त होती है । कार्य को सफलता ही नहीं, वरन् संपूर्ण जीवन की सफलता एकाग्रता की सीमा पर आधारित है। विद्यार्थी जितने एकाग्र चित्त होंगे, उनकी विद्या-ग्रहण करने की शक्ति भी उतनी ही अधिक और स्थायी होगी । कला, विज्ञान, शिल्प, संगीत आदि में बहुत अधिक प्रवीणता प्राप्त कर लेना इसी एकाग्रता का फल है । अन्य राष्ट्रों ने जो ज्ञानसंपदा दी, वह उनको एकाग्रता के फलस्वरूप ही संभव हुई । एकाग्रता के ही परिणामस्वरूप उन्हें कला और साहित्य आदि में पूर्णता प्राप्त हुई। हिंदुसों ने अंतर्जगत पर, जात्मा के अदृष्ट प्रदेश पर अपने चित्त को एकाग्र किया और इस प्रकार योगशास्त्र की उन्नति की । संसार की समस्त ईश्वरीय विभूतियाँ अपना रहस्य खोलने और स्पष्ट करने को प्रस्तुत हो जाएं, अगर हम एकाग्रता की शक्ति का वास्तविक रूप में प्रयोग करें। स्वामीजी एकाग्रता की महिमा का वर्णन इन शब्दों में करते हैं "मैं तो मन की एकाग्रता को ही शिक्षा का यथार्थ सार समझता हूँ, ज्ञातव्य विषयों के संग्रह को नहीं । यदि एक बार मुझे फिर शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिले, तो मैं विषयों का अध्ययन नहीं करूंगा । मैं तो एकाग्रता को तथा मन को विषय से अलग कर लेने की शक्ति को बढ़ाऊँगा और तव साधन अथवा मंत्र की पूर्णता प्राप्त हो जाने पर इच्छानुसार विषयों का संग्रह करूंगा।" स्वामी विवेकानांद ब्रह्मचर्य की साधना स्वामीजी का कहना था कि मन अथवा चित्त की एकाग्रता की शक्ति के समुचित विकास के लिए ब्रह्मचर्य की साधना अत्यंत आवश्यक है । ब्रह्मचर्य की तेजोमय आभा के समक्ष संसार की शक्तियां कमजोर और फोकी पड़ जाती हैं । ब्रह्मचर्य-साधना के फलस्वरूप ही हनुमान पर्वत को भी उठा कर आकाश मार्ग के विचरण में समर्थ हुए, लक्ष्मण मेघनाथ का वध कर सके तथा यह ब्रह्मचर्य की महिमा का ही फल है कि भीष्मपितामह ने मृत्यु को भी अपने वश में किया । अतः, प्रत्येक बालक को पूर्ण ब्रह्मचर्य के अभ्यास की शिक्षा देनी चाहिए, तभी उनमें श्रद्धा एवं विश्वास की उत्पत्ति होगी और वे शिक्षा के वास्तविक रहस्य एवं उद्देश्य को समझ सकने में समर्थ तथा ग्रहण कर सकने में सक्षम होंगे। साथ ही, वे अपनी ही उन्नति नहीं, अपने समाज और राष्ट्र की हो उन्नति नहीं, अपितु समस्त संसार की उन्नति में योगदान करेंगे । प्राचीन गुरुकुल प्रणाली में विश्वास स्वामी विवेकानंद प्राचीन भारतीय गुरुकुल शिक्षा प्रणाली को प्रश्रय देते थे । वर्तमान शिक्षा प्रणाली जिसमें ज्ञान- जैसी पवित्र वस्तु को मूल्य लेकर वेचा जाता है, उन्हें अमान्य थी । उनके विचानुरासार शिक्षा का अर्थ है-:-गुरुगृह निवास ।' शिष्य को बाल्यावस्था से ही ऐसे गुरु के साथ रहना चाहिए, जिसका चरित्र प्रज्ज्वलित अग्नि की भाँति हो, जिससे उच्चतम शिक्षा का सजीव आदर्श शिष्य के समक्ष बना रहे । शिक्षकों को भी मुक्तहस्त होकर विद्यादान तथा ज्ञानदान करना चाहिए । प्राचीन गुरुकुल शिक्षा प्रणाली में शिक्षकगण विद्यार्थियों को उनसे शुल्क लिए बिना ही अपने पास रखते थे। कई गुरुकुल आश्रमों में अन्न और वस्त्र की भी व्यवस्था थी । शिक्षकों के प्रति स्वामीजी ने शिक्षक के आवश्यक गुणों की चर्चा करते हुए लिखा है कि उन्हें शास्त्रों का मर्मज्ञ होना चाहिए । विद्याओं में निष्णात व्यक्ति ही अपने शिष्यों को वास्तविक ज्ञानदान दे सकता है । शिक्षक का दूसरा और प्रमुख गुण उनका पवित्र एवं उज्ज्वल चरित्र है। भारतीय गुरुकुल के शिक्षकों का चरित्र अत्यंत निर्दोष होता था, तभी उनमें बालकों के सर्वांगीण विकास की क्षमता थी । शिक्षकका स्थान पिता से भी बढ़ कर है । विद्यार्थियों के अपरिपक्व कोमल मस्तिष्क पर उनके स्वभाव, रहन-सहन, व्यवहार आदि का वड़ा ही सूक्ष्म और तीव्र प्रभाव पड़ता व्वत एवं शिक्षक को चरित्रवान और पवित्र होना ही है। स्वयं के लिए आध्यात्मिक सत्य की उपलब्धि करने तथा दूसरों में उसके संचार का एकमात्र उपाय है --- हृदय तथा मन को पवित्रता । शिक्षक को पूर्ण रूप से शुद्ध चित्त होना चाहिए, तभी उनके शब्दों का मूल्य होगा । वस्तुतः शिक्षकों का काम ही है कि वे अपने शिष्यों में आध्यात्मिक शक्ति का संचार करें, न कि शिष्य की वृद्धि, वृत्ति अथवा अन्य किसी ' शक्ति को उत्तेजित मात्र करें । स्वामी विवेकानंद ने शिक्षकों के लिए धर्मग्रंथों का ज्ञान आवश्यक बतलाया है । उनका विचार है कि धर्मग्रंथों के स्वत्वों का ज्ञान रखने वाला ही सच्चा शिक्षक हो सकता है । शिक्षक को धार्मिक क्षेत्र में प्रवेश पाना भी / नितांत आवश्यक है, तभी उनके आदेशों एवं सुझावों का महत्त्व होगा। शिक्षक का दृष्टिकोण यह होना चाहिए कि सभी धर्मों का लक्ष्य वस्तुतः समान ही है । शिक्षकों में अपने शिष्यों के प्रति प्रबल प्रेम की भावना होनी चाहिए । निःस्वार्थ प्रेम की भावना के अभाव में गुरु शिष्य को वास्तविक ज्ञान देने में सक्षम नहीं हो सकेंगे । विद्यार्थियों के ऊपर प्रेम से बढ़ कर आध्यात्मिक प्रभाव डालने वाला कोई तत्त्व नहीं है । अतः, शिक्षक को शिष्य के प्रति प्रेमपूर्ण व्यवहार करना चाहिए एक: शिष्यों के प्रति स्वामी विवेकानंद ने शिष्यों के आवश्यक गुण को चर्चा करते हुए बतलाया है कि उन्हें मन, वचन और कर्म से शुद्ध रह कर सत्य का अनुसरण और पालन करना चाहिए । उनमें ज्ञानप्राप्ति की सच्ची लगन होनी चाहिए । ज्ञानप्राप्ति के संबंध में पुराना नियम यह है कि अंतःकरण से जो कुछ हम चाहते हैं, उसी को प्राप्त करते हैं । जिसे हम नहीं चाहते, उसकी उपलब्धि प्रायः हमें नहीं हो पाती । हमें तो अपनी पाशविक प्रवृत्ति के साथ निरंतर जूझना होगा, सतत् युद्ध करना होगा तथा उसे अपने वश में लाने के हेतु अविराम यत्नशील रहना होगा । शिष्यों को अपने शिक्षकों के प्रति अत्यंत आदर का भाव रखना चाहिए । के प्रति विश्वास, नम्रता, विनय तथा श्रद्धा के बिना हम में धर्म पनप नहीं सकता । जिन देशों में गुरु-शिष्य-संबंध की उपेक्षा हुई है, वहीं विद्या की सर्वथा अवनति हुई है, वहाँ की सभ्यता और संस्कृति को भी गहरा खाघात पहुँचा है । स्वामी विवेकानंद का विश्वास था कि बच्चा स्वयं शिक्षा ग्रहण करता है पेड़-पौधों की भांति उसका स्वतः विकास होता है। जिस प्रकार पेड़-पौधे स्वाभाविक रूप से विकसित होते हैं तथा माली उनकी प्रगति में सहायक मात्र होता है, उसी प्रकार शिक्षक, माता-पिता और अभिभावक की जिम्मेवारी केवल उचित आवश्यक वातावरण की आयोजना कर उनकी प्रगति में पथप्रदर्शन, निरीक्षण तथा निर्देशन ही होता है। आधुनिक शिक्षा मनोविज्ञानशास्त्रियों के समान स्वामीजी ने भी इसे मान्यता दी है कि वच्चों को वलपूर्वक कुछ भी नहीं पढ़ाना चाहिए । बच्चे को अपनी अपरिमित प्रवृत्तियों की संतुष्टि के लिए पूर्ण अवसर प्राप्त होना चाहिए । उनकी इच्छा के विपरीत उन पर नियंत्रण रहने से उनके विकास पर कुप्रभाव पड़ता है तथा मानसिक जटिलता उत्पन्न होती है । वच्चे में केवल दोष निकालना अनुचित है, उनको सहानुभूति एवं सद्व्यवहारपूर्वक प्रोत्साहित करना अच्छा है । स्वामी विवेकानंद का विचार है कि शिक्षा ऐसी हो, जो बच्चे की आवश्य कताओं सामंजस्य रखती हो । बच्चों की आवश्यकताओं को निर्धारित करने में शिक्षक अपनी या उनके अभिभावकों को इच्छा को आधार नहीं मानें, उनकी जन्मजात प्रवृत्तियो को ध्यान में रखें । स्वामीजी का कहना था कि माता-पिता अथवा शिक्षक का यह विचार कि उनके द्वारा निर्धारित मार्ग पर चल कर वच्चा विकास की क्षोर बढ़ेगा या उसकी प्रगति होगी - तथ्यहीन है। हमें प्रत्येक आत्मा को ईश्व रीय क्षात्मा और प्रत्येक बच्चे को ब्रह्म का प्रतिरूप समझना चाहिए । व्यक्ति केवल ईश्वर की सेवा कर सकता है । अतः, शिक्षकों को बच्चों की सेवा करनी चाहिए । स्त्रियों के प्रति भारतीय स्त्रियों की दशा देख कर स्वामीजी को बहुत दुःख होता था। स्त्रियों तथा पुरुषों के बीच व्याप्त गहरे भेद की आलोचना करते हुए उन्होंने बड़े स्पष्ट शब्दों में घोषणा की है कि सभी प्राणियों में वही एक आत्मा विद्यमान है, स्त्रियों के ऊपर अनुचित नियंत्रण सर्वथा जवांछनीय है । अवनति के युग में जब पुरोहितों ने अन्य जातियों को वेदाध्ययन के अयोग्य ठहराया, उसी समय उन्होंने स्त्रियों को भी अपने अधिकारों से वंचित कर दिया, जबकि वैदिक औपनिषदिक युग में मैत्रेयी, गार्गी आदि पुण्यस्मृति महिलाओं ने ऋषियों का स्थान ले लिया था एवं सहस्र वेदज्ञ ग्राह्मणों की सभा में भी गार्गी ने याज्ञवल्क्य को ब्रह्म के संबंध में शास्त्रार्य करने के लिए ललकारा था । सभी उन्नत राष्ट्रों ने स्त्रियों को समुचित संमान दे कर हो महानता प्राप्त की है। जो देश, जो राष्ट्र, स्त्रियों का आदर नहीं करते, वे कभी बड़े नहीं हो पाए और न भविष्य में ही बड़े होंगे । मनु महाराज का भी कथन है कि जहाँ स्त्रियों को उचित आदर और प्रतिष्ठा प्राप्त होती है, वहां देवताओं का निवास होता है। परंतु, |
( ७ ) प्रत्येक वस्तु दुःख उत्पन्न करने वाली है। यहाँ तक कि सुख और वेदना भी दुःख ही उत्पन्न करती हैं। इसलिए सौत्रान्तिक लोगों के मत में समस्त पदार्थ दुःखमय है।
( ८ ) इनके मत में अतीक ( भूत ) तथा अनागत ( भविष्य ) दोनों शून्य हैं। वर्तमान ही काल सत्य है। काल के विषय में इस प्रकार वैभाषिकों से इनका पर्याप्त मतभेद है । वैभाषिक लोग भूत, वर्तमान है। तथा भविष्य तीनों काल के अस्तित्व को स्वीकार करते हैं। परन्तु सौत्रान्तिक मत में वर्तमान काल की ही सता मानी जाती है ।
( १ ) निर्वाण के विषय में सौत्रान्तिक मत के आचार्य श्रीलब्ध का एक विशिष्ट मत था कि 'प्रतिसंख्यानिरोध' तथा 'अप्रति संख्या निरोध' में किसी प्रकार का अन्तर नहीं है। प्रतिसंख्या निरोध का अर्थ है प्रशानिबन्धन, भाविक्लेशानुत्पत्ति अर्थात् प्रज्ञा के कारण भविष्य में उत्पन्न होने वाले समस्त क्लेशों का न होना । अप्रति संख्या निरोध का अर्थ है क्लेश निवृत्तिमूलक दुःखानुत्पत्ति अर्थात् क्लेशों के निवृत्त हो जाने पर दुःख का उत्पन्न न होना । क्लेशों की निवृत्ति के ऊपर ही दुःख अर्थात् संसार को अनुत्पत्ति भवलम्बित है । अतः क्लेश का उत्पन्न न होना संसार के सत्पन्न न होने का कारण है। श्रीलब्ध की निर्वाण के विषय में यही कल्पना है।
( १० ) धर्मों का वर्गीकरण - सौत्रान्तिक मत के अनुसार धर्मों का एक नवीन वर्गीकरण है। जहाँ वैभाषिक लोग ७५ धर्म मानते हैं और विज्ञानवादी पूरे १०० धर्म मानते हैं, वहाँ सौत्रान्तिक केवल ४३ धर्मं स्वीकार करते हैं। यह वर्गीकरण साधारणतया उपलब्ध नहीं होता । सौभाग्यवश तामिळ देश के अरुणन्दीशिवाचार्य ( १२७५-१३२५ ई० ) द्वारा लिखित 'शिव्रज्ञान सिद्धिचर' नामक तामिळ ग्रन्थ में यह वर्गीकरण तथा सौत्रान्तिकमतेऽतीतानागतं शून्यमन्यदशून्यम् ।
- माध्यमिक वृत्ति पृ० ४४४ ।
उपलब्ध होता है । प्रमाण दो प्रकार का है- प्रत्यक्ष और अनुमान । इनके विषय सौत्रान्तिकों के अनुसार ४ प्रकार के हैं ( 9 ) रूप ( २ ) अरूप ( ३ ) निर्वाण ( ४ ) व्यवहार । रूप ४ ) व्यवहार । रूप दो प्रकार का उपादान और उपादाय, जो प्रत्येक ४ प्रकार का होता है। अन्तर्गत पृथ्वी, जल, तेज तथा वायु की गणना है तथा उपादाय में रूक्षता, आकर्षण, गति, तथा उष्णता इन चार धर्मों की गणना है । 'अरूप' भी दो प्रकार का होता है - चित्त और कर्म । निर्वाण दो प्रकार को है - सोपधि और निरुपधि व्यवहार भी दो प्रकार का होता है सत्य और असत्य । इस सामान्य वर्णन के अनन्तर ४३ धर्मों का वर्गकरण इस तरह है-( १ ) रूप = ८ ( ४ उपादान + ४ उपादाय
( २ ) वेदना = ३ ( सुख, दुःख, न सुख न दुःख ) । न ३) संज्ञा = ६ ( ५ इन्द्रियाँ तथा १ चित्त ) ।
( ४ ) विज्ञान = ६ ( चक्षु, श्रोत्र, घाण, रसन, काय तर्था मन ) -इन इन्द्रियों के विज्ञान । ( ५.) संस्कार = २० ( १० कुशल + १० अकुशल ) । (ग) सर्वास्तिवाद का समीक्षण
सर्वास्तिवादियों के सिद्धान्तों की समीक्षा अनेक आचार्यों ने की है बादरायण ने ब्रह्मसूत्र के तर्कपाद ( २ २ ) में इसकी बड़ो मार्मिक आलोचना की है। शङ्कराचार्य ने अपने भाष्य में इस समीक्षा की युक्तियों का बड़ा ही भव्य प्रदर्शन किया है। अबौद्ध दार्शनिकों ने अपनी उँगली बौद्धमत के सबसे दुर्बल अंश पर रखी है। वह दुर्बल अंश है संघातवाद ! सर्वास्तिवादियों की दृष्टि में परमाणुओं के संघात से भूतभौतिक जगत् का निर्माण होता
१- लम्बनपरीक्षा (रसंस्करण ) पृ. ११६-१८
है और पञ्चस्कन्धों से आन्तर जगत् ( चित्त - चैत्त ) की रचना होती है । भूत तथा चित्त दोनों संघातमात्र हैं। भूत परमाणुओं का संघात है । और चित्त पन्चस्कन्धाधोन होने से संघात है। सबसे बड़ी समस्या है इन समुदायों की सिद्धि । चेतन पदार्थों का संघात-मेलन युक्तियुक्त है, परन्तु यहाँ समुदायी द्रव्य ( अणु तथा संज्ञा ) अचेतन हैं। ऐसी परिस्थिति में समुदाय की सिद्धि नहीं बन सकती । चित्त अथवा विज्ञान इस संघात का कारण नहीं माना जा सकता। देह होने पर विज्ञान का का उदय होता है और विज्ञान के कारण देहात्मक संघात उत्पन्न होता है। ऐसी दशा में देह विज्ञान पर अवलम्बित रहता है और विज्ञान देह
पर । फलतः अन्योन्याश्रय दोष से दूषित होने से यह पक्ष समीचीन नहीं है । स्थिर संघातकर्ता की सत्ता बुद्धधर्म में मान्य नहीं है जो स्वयं चेतन होता हुआ इन अचैतनों को एक साथ संयुक्त कर देता । चेवनकर्ता के अभाव में परमाणुओं के संघात होने की प्रवृत्ति निरपेक्ष है अर्थात् विना किसी अपेक्षा ( आवश्यकता ) के ही ये समुदायी प्रवृत्ति उत्पन्न करते हैं, तब तो इस प्रवृत्ति के कभी न बन्द होने की भापत्ति उठ खड़ी होती है। साधारण नियम तो यही है कि कोई भी प्रवृत्ति किसी अपेक्षा के लिए होती है प्रवृत्ति का कर्ता चेतन होता है। जब तक उसे उसकी आवश्यकता बनी रहती है तब तक वह कार्य में प्रवृत्त रहता है। अपेक्षा की समाप्ति के साथ ही प्रवृत्ति का भी विराम हो जाता है । परन्तु अचेतन के लिए अपेक्षा कैसी ? अतः सर्वास्तिवादी मत में प्रवृत्ति के कहीं भी •समाप्त होने का अवसर ही नहीं भावेगा, जो व्यवहार से नितान्त विरुद्ध है।
विज्ञानवाढी कह सकते हैं कि श्रालय विज्ञान ( समस्त विज्ञानों का अण्डार ) इस संघात का कर्ता हो सकता है। पर प्रश्न यह है कि यह | प्रत्येक वस्तु दुःख उत्पन्न करने वाली है। यहाँ तक कि सुख और वेदना भी दुःख ही उत्पन्न करती हैं। इसलिए सौत्रान्तिक लोगों के मत में समस्त पदार्थ दुःखमय है। इनके मत में अतीक तथा अनागत दोनों शून्य हैं। वर्तमान ही काल सत्य है। काल के विषय में इस प्रकार वैभाषिकों से इनका पर्याप्त मतभेद है । वैभाषिक लोग भूत, वर्तमान है। तथा भविष्य तीनों काल के अस्तित्व को स्वीकार करते हैं। परन्तु सौत्रान्तिक मत में वर्तमान काल की ही सता मानी जाती है । निर्वाण के विषय में सौत्रान्तिक मत के आचार्य श्रीलब्ध का एक विशिष्ट मत था कि 'प्रतिसंख्यानिरोध' तथा 'अप्रति संख्या निरोध' में किसी प्रकार का अन्तर नहीं है। प्रतिसंख्या निरोध का अर्थ है प्रशानिबन्धन, भाविक्लेशानुत्पत्ति अर्थात् प्रज्ञा के कारण भविष्य में उत्पन्न होने वाले समस्त क्लेशों का न होना । अप्रति संख्या निरोध का अर्थ है क्लेश निवृत्तिमूलक दुःखानुत्पत्ति अर्थात् क्लेशों के निवृत्त हो जाने पर दुःख का उत्पन्न न होना । क्लेशों की निवृत्ति के ऊपर ही दुःख अर्थात् संसार को अनुत्पत्ति भवलम्बित है । अतः क्लेश का उत्पन्न न होना संसार के सत्पन्न न होने का कारण है। श्रीलब्ध की निर्वाण के विषय में यही कल्पना है। धर्मों का वर्गीकरण - सौत्रान्तिक मत के अनुसार धर्मों का एक नवीन वर्गीकरण है। जहाँ वैभाषिक लोग पचहत्तर धर्म मानते हैं और विज्ञानवादी पूरे एक सौ धर्म मानते हैं, वहाँ सौत्रान्तिक केवल तैंतालीस धर्मं स्वीकार करते हैं। यह वर्गीकरण साधारणतया उपलब्ध नहीं होता । सौभाग्यवश तामिळ देश के अरुणन्दीशिवाचार्य द्वारा लिखित 'शिव्रज्ञान सिद्धिचर' नामक तामिळ ग्रन्थ में यह वर्गीकरण तथा सौत्रान्तिकमतेऽतीतानागतं शून्यमन्यदशून्यम् । - माध्यमिक वृत्ति पृशून्य चार सौ चौंतालीस । उपलब्ध होता है । प्रमाण दो प्रकार का है- प्रत्यक्ष और अनुमान । इनके विषय सौत्रान्तिकों के अनुसार चार प्रकार के हैं रूप अरूप निर्वाण व्यवहार । रूप चार ) व्यवहार । रूप दो प्रकार का उपादान और उपादाय, जो प्रत्येक चार प्रकार का होता है। अन्तर्गत पृथ्वी, जल, तेज तथा वायु की गणना है तथा उपादाय में रूक्षता, आकर्षण, गति, तथा उष्णता इन चार धर्मों की गणना है । 'अरूप' भी दो प्रकार का होता है - चित्त और कर्म । निर्वाण दो प्रकार को है - सोपधि और निरुपधि व्यवहार भी दो प्रकार का होता है सत्य और असत्य । इस सामान्य वर्णन के अनन्तर तैंतालीस धर्मों का वर्गकरण इस तरह है- रूप = आठ वेदना = तीन । न तीन) संज्ञा = छः । विज्ञान = छः -इन इन्द्रियों के विज्ञान । संस्कार = बीस । सर्वास्तिवाद का समीक्षण सर्वास्तिवादियों के सिद्धान्तों की समीक्षा अनेक आचार्यों ने की है बादरायण ने ब्रह्मसूत्र के तर्कपाद में इसकी बड़ो मार्मिक आलोचना की है। शङ्कराचार्य ने अपने भाष्य में इस समीक्षा की युक्तियों का बड़ा ही भव्य प्रदर्शन किया है। अबौद्ध दार्शनिकों ने अपनी उँगली बौद्धमत के सबसे दुर्बल अंश पर रखी है। वह दुर्बल अंश है संघातवाद ! सर्वास्तिवादियों की दृष्टि में परमाणुओं के संघात से भूतभौतिक जगत् का निर्माण होता एक- लम्बनपरीक्षा पृ. एक सौ सोलह-अट्ठारह है और पञ्चस्कन्धों से आन्तर जगत् की रचना होती है । भूत तथा चित्त दोनों संघातमात्र हैं। भूत परमाणुओं का संघात है । और चित्त पन्चस्कन्धाधोन होने से संघात है। सबसे बड़ी समस्या है इन समुदायों की सिद्धि । चेतन पदार्थों का संघात-मेलन युक्तियुक्त है, परन्तु यहाँ समुदायी द्रव्य अचेतन हैं। ऐसी परिस्थिति में समुदाय की सिद्धि नहीं बन सकती । चित्त अथवा विज्ञान इस संघात का कारण नहीं माना जा सकता। देह होने पर विज्ञान का का उदय होता है और विज्ञान के कारण देहात्मक संघात उत्पन्न होता है। ऐसी दशा में देह विज्ञान पर अवलम्बित रहता है और विज्ञान देह पर । फलतः अन्योन्याश्रय दोष से दूषित होने से यह पक्ष समीचीन नहीं है । स्थिर संघातकर्ता की सत्ता बुद्धधर्म में मान्य नहीं है जो स्वयं चेतन होता हुआ इन अचैतनों को एक साथ संयुक्त कर देता । चेवनकर्ता के अभाव में परमाणुओं के संघात होने की प्रवृत्ति निरपेक्ष है अर्थात् विना किसी अपेक्षा के ही ये समुदायी प्रवृत्ति उत्पन्न करते हैं, तब तो इस प्रवृत्ति के कभी न बन्द होने की भापत्ति उठ खड़ी होती है। साधारण नियम तो यही है कि कोई भी प्रवृत्ति किसी अपेक्षा के लिए होती है प्रवृत्ति का कर्ता चेतन होता है। जब तक उसे उसकी आवश्यकता बनी रहती है तब तक वह कार्य में प्रवृत्त रहता है। अपेक्षा की समाप्ति के साथ ही प्रवृत्ति का भी विराम हो जाता है । परन्तु अचेतन के लिए अपेक्षा कैसी ? अतः सर्वास्तिवादी मत में प्रवृत्ति के कहीं भी •समाप्त होने का अवसर ही नहीं भावेगा, जो व्यवहार से नितान्त विरुद्ध है। विज्ञानवाढी कह सकते हैं कि श्रालय विज्ञान इस संघात का कर्ता हो सकता है। पर प्रश्न यह है कि यह |
सनी देओल की फिल्म 'गदर 2' सिनेमाघरों में 11 अगस्त से धमाल मचा रही है।
फिल्म 'गदर 2' को लोग खूब पसंद कर रहे हैं, जिसका नतीजा कलेक्शन में दिख रहा है।
फिल्म 'गदर 2' ने 11वें दिन करीब 13-15 करोड़ रुपये की कमाई की है।
सनी देओल की फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 390 करोड़ के करीब कमाई कर ली है।
सनी देओल की फिल्म 'गदर 2' की कमाई की रफ्तार जारी रहने वाली है।
अक्षय कुमार की फिल्म 'ओएमजी 2' 11 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी।
अक्षय कुमार की फिल्म 'ओएमजी 2' को भी ठीक रिस्पॉन्स मिल रहा है।
अक्षय कुमार की फिल्म बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर चुकी है।
फिल्म 'ओएमजी 2' ने रिलीज के 11वें दिन करीब 3 से 4 करोड़ रुपये का कमाई की है।
फिल्म 'ओएमजी 2' का बॉक्स ऑफिस का कलेक्शन 115 करोड़ के करीब पहुंच गया है।
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| सनी देओल की फिल्म 'गदर दो' सिनेमाघरों में ग्यारह अगस्त से धमाल मचा रही है। फिल्म 'गदर दो' को लोग खूब पसंद कर रहे हैं, जिसका नतीजा कलेक्शन में दिख रहा है। फिल्म 'गदर दो' ने ग्यारहवें दिन करीब तेरह-पंद्रह करोड़ रुपये की कमाई की है। सनी देओल की फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर तीन सौ नब्बे करोड़ के करीब कमाई कर ली है। सनी देओल की फिल्म 'गदर दो' की कमाई की रफ्तार जारी रहने वाली है। अक्षय कुमार की फिल्म 'ओएमजी दो' ग्यारह अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। अक्षय कुमार की फिल्म 'ओएमजी दो' को भी ठीक रिस्पॉन्स मिल रहा है। अक्षय कुमार की फिल्म बॉक्स ऑफिस पर एक सौ करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर चुकी है। फिल्म 'ओएमजी दो' ने रिलीज के ग्यारहवें दिन करीब तीन से चार करोड़ रुपये का कमाई की है। फिल्म 'ओएमजी दो' का बॉक्स ऑफिस का कलेक्शन एक सौ पंद्रह करोड़ के करीब पहुंच गया है। अगली वेब स्टोरी देखें. Thanks For Reading! |
मुंबई नगर निगम आयुक्त इकबाल सिंह चहल ने शहर के लिए एक भयावह भविष्यवाणी करते हुए कहा है कि 2050 तक, नरीमन पॉइंट के व्यापारिक जिले और राज्य सचिवालय मंत्रालय सहित दक्षिण मुंबई का एक बड़ा हिस्सा समुद्र के बढ़ते स्तर के कारण पानी के नीचे चला जाएगा।
शुक्रवार को महाराष्ट्र के पर्यावरण और पर्यटन मंत्री आदित्य ठाकरे के हाथों मुंबई जलवायु कार्य योजना और इसकी वेबसाइट के शुभारंभ पर बोलते हुए, चहल ने कहा कि दक्षिण मुंबई में शहर के ए, बी, सी और डी वार्डों का लगभग 70 प्रतिशत पानी के नीचे होगा। जलवायु परिवर्तन के कारण।
उन्होंने कहा कि प्रकृति चेतावनी देती रही है, लेकिन अगर लोग "जाग" नहीं गए तो स्थिति "खतरनाक" हो जाएगी।
नगर निगम प्रमुख ने यह भी कहा कि यह सिर्फ 25-30 साल की बात है क्योंकि 2050 बहुत दूर नहीं है।
"हमें प्रकृति से चेतावनी मिल रही है और अगर हम नहीं जागते हैं, तो यह अगले 25 वर्षों के लिए एक खतरनाक स्थिति होगी। और यह न केवल अगली पीढ़ी होगी बल्कि वर्तमान पीढ़ी को भी भुगतना होगा, "चहल ने चेतावनी दी।
उन्होंने कहा कि मुंबई दक्षिण एशिया का पहला शहर है जो अपनी जलवायु कार्य योजना तैयार कर उस पर कार्य कर रहा है।
चहल ने कहा कि पिछले साल 129 साल में पहली बार एक चक्रवात (निसारगा) मुंबई से टकराया और उसके बाद पिछले 15 महीनों में तीन चक्रवात आए हैं। उसके बाद 5 अगस्त 2020 को नरीमन प्वाइंट पर करीब 5 से 5. 5 फीट पानी जमा हो गया।
इस बात पर प्रकाश डालते हुए कि शहर ने हाल ही में कुछ चरम मौसम की स्थिति देखी है, उन्होंने कहा कि शहर ने मुंबई में तौकते चक्रवात का सामना किया और 17 मई को 214 मिमी बारिश देखी, हालांकि मानसून 6 या 7 जून को यहां आता है।
उन्होंने कहा कि 9 जून से पहले, मुंबई में जून की 84 फीसदी बारिश दर्ज की गई थी और जुलाई में 17 से 20 जुलाई के बीच महज चार दिनों में 70 फीसदी औसत बारिश हुई थी।
बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने एक विज्ञप्ति में कहा, मुंबई जलवायु कार्य योजना (एमसीएपी) के तहत, डेटा मूल्यांकन ने उन क्षेत्रों और समुदायों की पहचान की है जो बढ़ती जलवायु अनिश्चितता को देखते हुए सबसे कमजोर हैं।
पिछले 10 वर्षों में बीएमसी के 37 स्वचालित मौसम स्टेशनों (एडब्ल्यूएस) के डेटा से पता चलता है कि औसतन, मुंबई में प्रति वर्ष छह भारी, पांच बहुत भारी और चार बेहद भारी वर्षा वाले दिन देखे गए हैं। और मुंबई में मानसून के मौसम के दौरान होने वाली सभी वर्षा के लिए, प्रत्येक वर्ष लगभग 10 प्रतिशत भारी श्रेणी में आता है, नौ प्रतिशत बहुत भारी, और छह प्रतिशत अत्यधिक भारी।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के वर्गीकरण के अनुसार, 64. 5 मिमी से 115. 5 मिमी तक की दैनिक वर्षा को 'भारी', 115. 6 मिमी से 204. 4 मिमी को 'बहुत भारी' और 204. 5 मिमी से अधिक को 'चरम' माना जाता है।
"2017 और 2020 के बीच चार साल की अवधि में अत्यधिक भारी वर्षा की घटनाओं में लगातार वृद्धि देखी गई है। यह इंगित करता है कि विशेष रूप से पिछले चार वर्षों में मुंबई शहर के लिए इस तरह के चरम मौसम की घटनाओं की आवृत्ति बढ़ रही है, "लुबैना रंगवाला, एसोसिएट निदेशक, डब्ल्यूआरआई इंडिया रॉस सेंटर फॉर सस्टेनेबल सिटीज ने कहा।
| मुंबई नगर निगम आयुक्त इकबाल सिंह चहल ने शहर के लिए एक भयावह भविष्यवाणी करते हुए कहा है कि दो हज़ार पचास तक, नरीमन पॉइंट के व्यापारिक जिले और राज्य सचिवालय मंत्रालय सहित दक्षिण मुंबई का एक बड़ा हिस्सा समुद्र के बढ़ते स्तर के कारण पानी के नीचे चला जाएगा। शुक्रवार को महाराष्ट्र के पर्यावरण और पर्यटन मंत्री आदित्य ठाकरे के हाथों मुंबई जलवायु कार्य योजना और इसकी वेबसाइट के शुभारंभ पर बोलते हुए, चहल ने कहा कि दक्षिण मुंबई में शहर के ए, बी, सी और डी वार्डों का लगभग सत्तर प्रतिशत पानी के नीचे होगा। जलवायु परिवर्तन के कारण। उन्होंने कहा कि प्रकृति चेतावनी देती रही है, लेकिन अगर लोग "जाग" नहीं गए तो स्थिति "खतरनाक" हो जाएगी। नगर निगम प्रमुख ने यह भी कहा कि यह सिर्फ पच्चीस-तीस साल की बात है क्योंकि दो हज़ार पचास बहुत दूर नहीं है। "हमें प्रकृति से चेतावनी मिल रही है और अगर हम नहीं जागते हैं, तो यह अगले पच्चीस वर्षों के लिए एक खतरनाक स्थिति होगी। और यह न केवल अगली पीढ़ी होगी बल्कि वर्तमान पीढ़ी को भी भुगतना होगा, "चहल ने चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि मुंबई दक्षिण एशिया का पहला शहर है जो अपनी जलवायु कार्य योजना तैयार कर उस पर कार्य कर रहा है। चहल ने कहा कि पिछले साल एक सौ उनतीस साल में पहली बार एक चक्रवात मुंबई से टकराया और उसके बाद पिछले पंद्रह महीनों में तीन चक्रवात आए हैं। उसके बाद पाँच अगस्त दो हज़ार बीस को नरीमन प्वाइंट पर करीब पाँच से पाँच. पाँच फीट पानी जमा हो गया। इस बात पर प्रकाश डालते हुए कि शहर ने हाल ही में कुछ चरम मौसम की स्थिति देखी है, उन्होंने कहा कि शहर ने मुंबई में तौकते चक्रवात का सामना किया और सत्रह मई को दो सौ चौदह मिमी बारिश देखी, हालांकि मानसून छः या सात जून को यहां आता है। उन्होंने कहा कि नौ जून से पहले, मुंबई में जून की चौरासी फीसदी बारिश दर्ज की गई थी और जुलाई में सत्रह से बीस जुलाई के बीच महज चार दिनों में सत्तर फीसदी औसत बारिश हुई थी। बृहन्मुंबई नगर निगम ने एक विज्ञप्ति में कहा, मुंबई जलवायु कार्य योजना के तहत, डेटा मूल्यांकन ने उन क्षेत्रों और समुदायों की पहचान की है जो बढ़ती जलवायु अनिश्चितता को देखते हुए सबसे कमजोर हैं। पिछले दस वर्षों में बीएमसी के सैंतीस स्वचालित मौसम स्टेशनों के डेटा से पता चलता है कि औसतन, मुंबई में प्रति वर्ष छह भारी, पांच बहुत भारी और चार बेहद भारी वर्षा वाले दिन देखे गए हैं। और मुंबई में मानसून के मौसम के दौरान होने वाली सभी वर्षा के लिए, प्रत्येक वर्ष लगभग दस प्रतिशत भारी श्रेणी में आता है, नौ प्रतिशत बहुत भारी, और छह प्रतिशत अत्यधिक भारी। भारत मौसम विज्ञान विभाग के वर्गीकरण के अनुसार, चौंसठ. पाँच मिमी से एक सौ पंद्रह. पाँच मिमी तक की दैनिक वर्षा को 'भारी', एक सौ पंद्रह. छः मिमी से दो सौ चार. चार मिमी को 'बहुत भारी' और दो सौ चार. पाँच मिमी से अधिक को 'चरम' माना जाता है। "दो हज़ार सत्रह और दो हज़ार बीस के बीच चार साल की अवधि में अत्यधिक भारी वर्षा की घटनाओं में लगातार वृद्धि देखी गई है। यह इंगित करता है कि विशेष रूप से पिछले चार वर्षों में मुंबई शहर के लिए इस तरह के चरम मौसम की घटनाओं की आवृत्ति बढ़ रही है, "लुबैना रंगवाला, एसोसिएट निदेशक, डब्ल्यूआरआई इंडिया रॉस सेंटर फॉर सस्टेनेबल सिटीज ने कहा। |
- News चीन के विदेश मंत्री की नहीं मिल रही कोई खोज खबर, तमाम प्रोग्राम हो गये कैंसिल. . बीमार हैं या है कोई और बात?
- Movies ब्रालेस ड्रेस पहनकर असहज हुईं जन्नत जुबैर? मीडिया के सामने ही करतीं बार बार फिक्स!
बी टाउन की जानी मानी एक्ट्रेस गौहर खान अपनी फिटनेस और स्टाइलिश लुक के लिए जानी जाती हैं। अक्सर इंटरनेट पर गौहर खान का फैशनेबल लुक वायरल रहता हैं। गौहर खान अपने खूबसूरत स्टाइल और फैशन सेंस से सबको दीवाना बना देती हैं। गौहर खान सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं।
अक्सर इंटरनेट पर अपनी खूबसूरत फोटो शेयर करती रहती हैं। गौहर खान वेस्टर्न गाउन से लेकर इंडियन साड़ी में गजब की खूबसूरत लगती हैं। देखते हैं गौहर खान का स्टाइलिश लुक।
गौहर खान अपने फैशनेबल लुक से अक्सर फैंस को इंप्रेस करती रहती हैं। उनके इस लुक की बात करें तो उन्होंने लाइट पिंक कलर का ऑफ शोल्डर गाउन पहना हुआ हैं। उनके इस गाउन पर स्टोन वर्क किया हुआ हैं। उनके इस लुक की बात करें तो उन्होंने गाउन के साथ लाइट पिंक लिपस्टिक लगाई हुई हैं। खुले बालों में गौहर बहुत ही खूबसूरत लग रही हैं।
गौहर खान के इस लुक की बात करें तो उन्होंने हाफ स्लीव ब्लैक गाउन पहना हुआ हैं। शिमरी ब्लैक गाउन के साथ गौहर ने लाइट मेकअप कैरी किया हुआ हैं। गौहर खान का ये लुक बहुत ही प्यारा लग रहा हैं। ब्लैक ड्रेस के साथ गौहर खान ने कर्ली केयर कैरी किया हुआ हैं। आप भी पार्टी लुक के लिए गौहर खान के इस लुक को फॉलो कर सकती हैं।
गौहर खान के इस लुक की बात करें तो गौहर खान ने व्हाइट गाउन पहना हुआ हैं। कोल्ड शोल्डर गाउन डिजाइन के साथ उन्होंने लाइट मेकअप कैरी किया हुआ हैं। लाइट ब्राउन लिपस्टिक में गौहर खान गजब की बोल्ड लग रही हैं। आप भी उनके इस अंदाज को फॉलो कर सकती हैं।
गौहर खान इंस्टाग्राम पर काफी एक्टिव रहती हैं। अक्सर सोशल मीडिया पर उनकी खूबसूरत फोटो वायरल रहती हैं। गौहर खान ने रेड ऑफ शोल्डर गाउन पहना हुआ हैं। उन्होंने वन साइड अपने बाल कैरी किया हुआ हैं। लाइट ब्राउन लिपस्टिक में गौहर खान खूबसूरत लग रही हैं। रेड गाउन के साथ उन्होंने हाई हील्स पहनी हुई हैं।
| - News चीन के विदेश मंत्री की नहीं मिल रही कोई खोज खबर, तमाम प्रोग्राम हो गये कैंसिल. . बीमार हैं या है कोई और बात? - Movies ब्रालेस ड्रेस पहनकर असहज हुईं जन्नत जुबैर? मीडिया के सामने ही करतीं बार बार फिक्स! बी टाउन की जानी मानी एक्ट्रेस गौहर खान अपनी फिटनेस और स्टाइलिश लुक के लिए जानी जाती हैं। अक्सर इंटरनेट पर गौहर खान का फैशनेबल लुक वायरल रहता हैं। गौहर खान अपने खूबसूरत स्टाइल और फैशन सेंस से सबको दीवाना बना देती हैं। गौहर खान सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। अक्सर इंटरनेट पर अपनी खूबसूरत फोटो शेयर करती रहती हैं। गौहर खान वेस्टर्न गाउन से लेकर इंडियन साड़ी में गजब की खूबसूरत लगती हैं। देखते हैं गौहर खान का स्टाइलिश लुक। गौहर खान अपने फैशनेबल लुक से अक्सर फैंस को इंप्रेस करती रहती हैं। उनके इस लुक की बात करें तो उन्होंने लाइट पिंक कलर का ऑफ शोल्डर गाउन पहना हुआ हैं। उनके इस गाउन पर स्टोन वर्क किया हुआ हैं। उनके इस लुक की बात करें तो उन्होंने गाउन के साथ लाइट पिंक लिपस्टिक लगाई हुई हैं। खुले बालों में गौहर बहुत ही खूबसूरत लग रही हैं। गौहर खान के इस लुक की बात करें तो उन्होंने हाफ स्लीव ब्लैक गाउन पहना हुआ हैं। शिमरी ब्लैक गाउन के साथ गौहर ने लाइट मेकअप कैरी किया हुआ हैं। गौहर खान का ये लुक बहुत ही प्यारा लग रहा हैं। ब्लैक ड्रेस के साथ गौहर खान ने कर्ली केयर कैरी किया हुआ हैं। आप भी पार्टी लुक के लिए गौहर खान के इस लुक को फॉलो कर सकती हैं। गौहर खान के इस लुक की बात करें तो गौहर खान ने व्हाइट गाउन पहना हुआ हैं। कोल्ड शोल्डर गाउन डिजाइन के साथ उन्होंने लाइट मेकअप कैरी किया हुआ हैं। लाइट ब्राउन लिपस्टिक में गौहर खान गजब की बोल्ड लग रही हैं। आप भी उनके इस अंदाज को फॉलो कर सकती हैं। गौहर खान इंस्टाग्राम पर काफी एक्टिव रहती हैं। अक्सर सोशल मीडिया पर उनकी खूबसूरत फोटो वायरल रहती हैं। गौहर खान ने रेड ऑफ शोल्डर गाउन पहना हुआ हैं। उन्होंने वन साइड अपने बाल कैरी किया हुआ हैं। लाइट ब्राउन लिपस्टिक में गौहर खान खूबसूरत लग रही हैं। रेड गाउन के साथ उन्होंने हाई हील्स पहनी हुई हैं। |
पिछले दिनों बिहार के बांका में मस्जिद परिसर में बम धमाका हुआ। इसके बाद अररिया में भी हुए बम विस्फोट से डर फैला। यह बात भी दिख रही है कि पिछले छह - सात साल में बिहार में जितने भी बम विस्फोट हुए हैं, उनमें से ज्यादातर के तार किसी मस्जिद या मदरसे से जुड़े हैं।
गत दिनों बांका के नवटोलिया गांव में नूरी इस्लाम मस्जिद परिसर में जबरदस्त बम धमाका हुआ। कहा जा रहा है कि इसमें घातक विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया था। यह बम धमाका इतना तेज था कि मस्जिद परिसर स्थित मदरसा पूरी तरह ध्वस्त हो गया। मदरसा के इमाम अब्दुल मोबिन उर्फ सत्तार की मृत्यु हो गई। इस बम धमाके की गूंज अभी शांत भी नहीं हुई थी कि 10 जून को देर शाम अररिया के बैरगाछी में एक जबरदस्त बम विस्फोट हुआ। इस विस्फोट में मोहम्मद अफरोज नामक एक युवक गंभीर रूप से घायल हुआ है।
अमूमन हिंसक वारदातों में मस्जिदों और मदरसों की संलिप्तता की बात दबी जुबान से कही जाती है, लेकिन बांका में तो बम धमाका मस्जिद परिसर के अंदर ही हुआ। घटना के बाद आश्चर्यजनक ढंग से गांव के मुस्लिम पुरुष गायब हो गए। विशेषज्ञों का कहना है कि मदरसे का मौलाना अब्दुल मोमिन खुद बम तैयार कर रहा था।
इन दोनों बम धमाकों के बाद बिहार में पहले हुए बम धमाकों को जानने की उत्सुकता बढ़ गई है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर इन धमाकों के पीछे कौन लोग या संगठन हैं!
इससे पहले भागलपुर के नाथनगर थानाक्षेत्र में 24 अप्रैल, 2021 को एक तेज बम विस्फोट हुआ था। इसमें मुर्गियाचक निवासी मोहम्मद इकराम बुरी तरह घायल हो गया था। 2020 में 5 जून को दरभंगा के विश्वविद्यालय थानाक्षेत्र अन्तर्गत आजमनगर मुहल्ले में भयंकर विस्फोट हुआ था। मोहम्मद नजीर नदाफ के घर दोपहर के समय यह विस्फोट हुआ। विस्फोट की तीव्रता इतनी अधिक थी कि पूरा इलाका दहल उठा था। तीन किलोमीटर के दायरे में धमाके की आवाज सुनाई दी थी। इस धमाके में न सिर्फ नजीर का मकान ध्वस्त हुआ, बल्कि कई घरों को भी क्षति पहुंची थी। नजीर के तीन बच्चे शमशाद, साहिल और नजराना इस धमाके में गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस घटना की विस्तृत जांच अभी बाकी है।
औरंगाबाद के ओबरा थानाक्षेत्र में भी 8 सितंबर, 2020 को एक बम विस्फोट हुआ था। इसमें भरूप गांव की सीता देवी और उनका बेटा गंभीर रूप से घायल हो गए थे। बाद में सीता देवी ने बताया था कि वह घर से कुछ सामान लेने के लिए निकली थी। रास्ते में उसकी नजर चॉकलेट के डिब्बे पर पड़ी। वह उसे घर ले आई और विस्फोट हो गया।
16 जून, 2020 को पटना सिटी के सुल्तानगंज थानाक्षेत्र के दरगाह रोड में भी बम विस्फोट हुआ था। कहा जाता है कि तीन अपराधी किसी घटना को अंजाम देने के लिए बम ले जा रहे थे, तभी वह फट गया। इसमें सुल्तानगंज थाना क्षेत्र के कासिम कॉलोनी निवासी अपराधी नदीम घायल हुआ था।
इससे पहले 2018 में बिहारशरीफ में भी बम विस्फोट हुआ था। रहुई थानान्तर्गत खाजे एतवारसराय गांव में हुए इस विस्फोट से चार बच्चे जख्मी हुए थे। इसमें एक की हालत चिंताजनक थी।
27 अक्तूबर, 2013 को पटना के गांधी मैदान में हुए श्रृंखलाबद्ध बम विस्फोटों ने तो बिहार को हिला दिया था। उस दिन भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी गांधी मैदान में हुंकार रैली को संबोधित कर रहे थे। पहला धमाका 10 बजे पटना रेलवे स्टेशन के शौचालय में हुआ। फिर पांच धमाके गांधी मैदान के आस-पास हुए। इन बम धमाकों से छह लोगों की जान गई थी तथा 83 लोग घायल हुए थे। इन बम धमाकों का सरगना था इंडियन मुजाहिद्दीन का मोहम्म्द तहसीन अख्तर।
2013 में ही शांति की नगरी बोधगया में भी कई बम धमाके हुए थे। बोधगया के महाबोधि मंदिर और उसके आस-पास एक के बाद एक नौ विस्फोट हुए थे। आतंकियों ने महाबोधि वृक्ष के नीचे भी दो बम लगाए थे। तेरगर मठ में फटे तीन बम खेल के मैदान में लगाए गए थे, जहां नए भिक्षु फुटबॉल खेलते थे। पांच धमाके महाबोधि मंदिर परिसर के भीतर हुए थे। एक धमाका बुद्ध प्रतिमा के पास और एक धमाका बाईपास के करीब बस स्टैंड पर हुआ था। एनआईए की जांच में यह सामने आया था कि रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ कार्रवाई का बदला लेने के लिए बोधगया में श्रृंखलाबद्ध बम धमाके हुए थे। इंडियन मुजाहिद्दीन के अजहर कुरैशी, इम्तियाज अंसारी, मुजिबुल्ला अंसारी, हैदर अली और उमर सिद्दकी इस मामले में आरोपी थे।
बिहार में अब तक हुए बम विस्फोटों पर नजर मारने से स्पष्ट होता है कि इनके तार किसी न किसी मस्जिद या मदरसे से जुड़े रहे हैं। 2019-20 में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजीयन (एनआरसी) के विरोध में होने वाले प्रदर्शनों में भी मस्जिदों और मदरसों की संलिप्ता पाई गई है।
11 अप्रैल, 2021 को किशनगंज के थाना प्रभारी अश्विनी कुमार जब देर रात ग्वालपाड़ा पहुंचे तो मस्जिद से एलान करके उनकी हत्या के लिए लोगों को उकसाया गया था। 2020 में पटना के अशोक राजपथ पर माता सरस्वती की प्रतिमा विसर्जन करने जा रहे पटना विश्वविद्यालय के छात्रों पर लालबाग मस्जिद से पत्थर फेंके गए थे। गोली और बम भी मस्जिद से चलाए जाने की बात सामने आई थी। इस घटना में कुछ पुलिस वाले भी घायल हुए थे। पटना उच्च न्यायालय ने भी इस पर सख्त टिप्पणी की थी।
पटना के कुर्जी मुहल्ला स्थित मस्जिद से अप्रैल, 2020 में विदेशी तब्लीगी पकड़े गए थे। दिल्ली के मरकज में बिहार से तब्लीगी जमात के 162 लोग गए थे। तब्लीगी जमात से लौटने के बाद कई लोग फुलवारीशरीफ की संगी मस्जिद और पटना सिटी की नूरी मस्जिद में ठहरे थे।
अब बिहार के लोग साफ तौर पर कहने लगे हैं कि जितने भी बम विस्फोट हुए हैं, उनमें से ज्यादातर की जांच अच्छी तरह नहीं की गई है। यही कारण है कि बिहार में बम विस्फोट लगातार हो रहे हैं। सरकार इन सबकी जांच अच्छी तरह कराए, वरना आने वाले समय में बिहार एक बड़े संकट में फंस सकता है।
| पिछले दिनों बिहार के बांका में मस्जिद परिसर में बम धमाका हुआ। इसके बाद अररिया में भी हुए बम विस्फोट से डर फैला। यह बात भी दिख रही है कि पिछले छह - सात साल में बिहार में जितने भी बम विस्फोट हुए हैं, उनमें से ज्यादातर के तार किसी मस्जिद या मदरसे से जुड़े हैं। गत दिनों बांका के नवटोलिया गांव में नूरी इस्लाम मस्जिद परिसर में जबरदस्त बम धमाका हुआ। कहा जा रहा है कि इसमें घातक विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया था। यह बम धमाका इतना तेज था कि मस्जिद परिसर स्थित मदरसा पूरी तरह ध्वस्त हो गया। मदरसा के इमाम अब्दुल मोबिन उर्फ सत्तार की मृत्यु हो गई। इस बम धमाके की गूंज अभी शांत भी नहीं हुई थी कि दस जून को देर शाम अररिया के बैरगाछी में एक जबरदस्त बम विस्फोट हुआ। इस विस्फोट में मोहम्मद अफरोज नामक एक युवक गंभीर रूप से घायल हुआ है। अमूमन हिंसक वारदातों में मस्जिदों और मदरसों की संलिप्तता की बात दबी जुबान से कही जाती है, लेकिन बांका में तो बम धमाका मस्जिद परिसर के अंदर ही हुआ। घटना के बाद आश्चर्यजनक ढंग से गांव के मुस्लिम पुरुष गायब हो गए। विशेषज्ञों का कहना है कि मदरसे का मौलाना अब्दुल मोमिन खुद बम तैयार कर रहा था। इन दोनों बम धमाकों के बाद बिहार में पहले हुए बम धमाकों को जानने की उत्सुकता बढ़ गई है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर इन धमाकों के पीछे कौन लोग या संगठन हैं! इससे पहले भागलपुर के नाथनगर थानाक्षेत्र में चौबीस अप्रैल, दो हज़ार इक्कीस को एक तेज बम विस्फोट हुआ था। इसमें मुर्गियाचक निवासी मोहम्मद इकराम बुरी तरह घायल हो गया था। दो हज़ार बीस में पाँच जून को दरभंगा के विश्वविद्यालय थानाक्षेत्र अन्तर्गत आजमनगर मुहल्ले में भयंकर विस्फोट हुआ था। मोहम्मद नजीर नदाफ के घर दोपहर के समय यह विस्फोट हुआ। विस्फोट की तीव्रता इतनी अधिक थी कि पूरा इलाका दहल उठा था। तीन किलोमीटर के दायरे में धमाके की आवाज सुनाई दी थी। इस धमाके में न सिर्फ नजीर का मकान ध्वस्त हुआ, बल्कि कई घरों को भी क्षति पहुंची थी। नजीर के तीन बच्चे शमशाद, साहिल और नजराना इस धमाके में गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस घटना की विस्तृत जांच अभी बाकी है। औरंगाबाद के ओबरा थानाक्षेत्र में भी आठ सितंबर, दो हज़ार बीस को एक बम विस्फोट हुआ था। इसमें भरूप गांव की सीता देवी और उनका बेटा गंभीर रूप से घायल हो गए थे। बाद में सीता देवी ने बताया था कि वह घर से कुछ सामान लेने के लिए निकली थी। रास्ते में उसकी नजर चॉकलेट के डिब्बे पर पड़ी। वह उसे घर ले आई और विस्फोट हो गया। सोलह जून, दो हज़ार बीस को पटना सिटी के सुल्तानगंज थानाक्षेत्र के दरगाह रोड में भी बम विस्फोट हुआ था। कहा जाता है कि तीन अपराधी किसी घटना को अंजाम देने के लिए बम ले जा रहे थे, तभी वह फट गया। इसमें सुल्तानगंज थाना क्षेत्र के कासिम कॉलोनी निवासी अपराधी नदीम घायल हुआ था। इससे पहले दो हज़ार अट्ठारह में बिहारशरीफ में भी बम विस्फोट हुआ था। रहुई थानान्तर्गत खाजे एतवारसराय गांव में हुए इस विस्फोट से चार बच्चे जख्मी हुए थे। इसमें एक की हालत चिंताजनक थी। सत्ताईस अक्तूबर, दो हज़ार तेरह को पटना के गांधी मैदान में हुए श्रृंखलाबद्ध बम विस्फोटों ने तो बिहार को हिला दिया था। उस दिन भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी गांधी मैदान में हुंकार रैली को संबोधित कर रहे थे। पहला धमाका दस बजे पटना रेलवे स्टेशन के शौचालय में हुआ। फिर पांच धमाके गांधी मैदान के आस-पास हुए। इन बम धमाकों से छह लोगों की जान गई थी तथा तिरासी लोग घायल हुए थे। इन बम धमाकों का सरगना था इंडियन मुजाहिद्दीन का मोहम्म्द तहसीन अख्तर। दो हज़ार तेरह में ही शांति की नगरी बोधगया में भी कई बम धमाके हुए थे। बोधगया के महाबोधि मंदिर और उसके आस-पास एक के बाद एक नौ विस्फोट हुए थे। आतंकियों ने महाबोधि वृक्ष के नीचे भी दो बम लगाए थे। तेरगर मठ में फटे तीन बम खेल के मैदान में लगाए गए थे, जहां नए भिक्षु फुटबॉल खेलते थे। पांच धमाके महाबोधि मंदिर परिसर के भीतर हुए थे। एक धमाका बुद्ध प्रतिमा के पास और एक धमाका बाईपास के करीब बस स्टैंड पर हुआ था। एनआईए की जांच में यह सामने आया था कि रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ कार्रवाई का बदला लेने के लिए बोधगया में श्रृंखलाबद्ध बम धमाके हुए थे। इंडियन मुजाहिद्दीन के अजहर कुरैशी, इम्तियाज अंसारी, मुजिबुल्ला अंसारी, हैदर अली और उमर सिद्दकी इस मामले में आरोपी थे। बिहार में अब तक हुए बम विस्फोटों पर नजर मारने से स्पष्ट होता है कि इनके तार किसी न किसी मस्जिद या मदरसे से जुड़े रहे हैं। दो हज़ार उन्नीस-बीस में नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिक पंजीयन के विरोध में होने वाले प्रदर्शनों में भी मस्जिदों और मदरसों की संलिप्ता पाई गई है। ग्यारह अप्रैल, दो हज़ार इक्कीस को किशनगंज के थाना प्रभारी अश्विनी कुमार जब देर रात ग्वालपाड़ा पहुंचे तो मस्जिद से एलान करके उनकी हत्या के लिए लोगों को उकसाया गया था। दो हज़ार बीस में पटना के अशोक राजपथ पर माता सरस्वती की प्रतिमा विसर्जन करने जा रहे पटना विश्वविद्यालय के छात्रों पर लालबाग मस्जिद से पत्थर फेंके गए थे। गोली और बम भी मस्जिद से चलाए जाने की बात सामने आई थी। इस घटना में कुछ पुलिस वाले भी घायल हुए थे। पटना उच्च न्यायालय ने भी इस पर सख्त टिप्पणी की थी। पटना के कुर्जी मुहल्ला स्थित मस्जिद से अप्रैल, दो हज़ार बीस में विदेशी तब्लीगी पकड़े गए थे। दिल्ली के मरकज में बिहार से तब्लीगी जमात के एक सौ बासठ लोग गए थे। तब्लीगी जमात से लौटने के बाद कई लोग फुलवारीशरीफ की संगी मस्जिद और पटना सिटी की नूरी मस्जिद में ठहरे थे। अब बिहार के लोग साफ तौर पर कहने लगे हैं कि जितने भी बम विस्फोट हुए हैं, उनमें से ज्यादातर की जांच अच्छी तरह नहीं की गई है। यही कारण है कि बिहार में बम विस्फोट लगातार हो रहे हैं। सरकार इन सबकी जांच अच्छी तरह कराए, वरना आने वाले समय में बिहार एक बड़े संकट में फंस सकता है। |
सऊदी अरब के शहजादे मोहम्मद बिन सलमान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ जारी साझा बयान में पुलवामा आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत और सऊदी अरब के बीच आतंक को पनाह देने वाले और उसका समर्थन करने वाले देशों पर दबाव बनाने के लिए भी सहमति बनी है।
साझा बयान में कहा गया है कि भारत और सऊदी अरब ऐसे देशों से आतंकवाद के बुनियादी ढांचे को खत्म करने का आह्वान करते हैं।
इंडिया टीवी न्यूज़ डॉट कॉम के अनुसार, जैश ए मोहम्मद द्वारा पुलवामा में किए गए आतंकवादी हमले में CRPF के 40 जवानों के शहीद होने के बाद भारत एवं पाकिस्तान के बीच आपसी सम्बन्धों में आए नए तनाव के चलते अरब नेता के साझा बयान में दिए गए इस वक्तव्य को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आपको बता दें कि इससे पहले बुधवार को दोपहर बाद साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में सऊदी अरब के युवराज ने आतंकवाद पर भारत का सहयोग करने का आश्वासन तो दिया था, लेकिन उसमें पुलवामा हमले का कोई जिक्र नहीं था। ऐसे में साझा बयान में इस हमले का जिक्र होना काफी मायने रखता है।
वहीं, भारत और सऊदी अरब ने अपने आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने तथा ऊर्जा संबंधों को खरीददार-विक्रेता से आगे बढ़ाते हुए सामरिक गठजोड़ में तब्दील करने का संकल्प व्यक्त किया है । सऊदी अरब, भारत में विभिन्न क्षेत्रों में 100 अरब डालर निवेश का अवसर देखता है।
इसके अलावा सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनुरोध पर बुधवार को अपने देश की जेलों में बंद 850 भारतीय कैदियों को रिहा किए जाने का आदेश दिया है।
| सऊदी अरब के शहजादे मोहम्मद बिन सलमान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ जारी साझा बयान में पुलवामा आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत और सऊदी अरब के बीच आतंक को पनाह देने वाले और उसका समर्थन करने वाले देशों पर दबाव बनाने के लिए भी सहमति बनी है। साझा बयान में कहा गया है कि भारत और सऊदी अरब ऐसे देशों से आतंकवाद के बुनियादी ढांचे को खत्म करने का आह्वान करते हैं। इंडिया टीवी न्यूज़ डॉट कॉम के अनुसार, जैश ए मोहम्मद द्वारा पुलवामा में किए गए आतंकवादी हमले में CRPF के चालीस जवानों के शहीद होने के बाद भारत एवं पाकिस्तान के बीच आपसी सम्बन्धों में आए नए तनाव के चलते अरब नेता के साझा बयान में दिए गए इस वक्तव्य को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आपको बता दें कि इससे पहले बुधवार को दोपहर बाद साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में सऊदी अरब के युवराज ने आतंकवाद पर भारत का सहयोग करने का आश्वासन तो दिया था, लेकिन उसमें पुलवामा हमले का कोई जिक्र नहीं था। ऐसे में साझा बयान में इस हमले का जिक्र होना काफी मायने रखता है। वहीं, भारत और सऊदी अरब ने अपने आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने तथा ऊर्जा संबंधों को खरीददार-विक्रेता से आगे बढ़ाते हुए सामरिक गठजोड़ में तब्दील करने का संकल्प व्यक्त किया है । सऊदी अरब, भारत में विभिन्न क्षेत्रों में एक सौ अरब डालर निवेश का अवसर देखता है। इसके अलावा सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनुरोध पर बुधवार को अपने देश की जेलों में बंद आठ सौ पचास भारतीय कैदियों को रिहा किए जाने का आदेश दिया है। |
पटनाः कभी बीजेपी के शीर्ष नेताओं में शुमार रहे फायरब्रांड नेता और फिल्म स्टार शत्रुघ्न सिन्हा क्या फिर से बीजेपी में वापसी करेंगे? कम से कम रविवार को उनके द्वारा किये गये ट्विट को देखकर तो यही लग रहा है कि शत्रुघ्न सिन्हा का मूड बदल रहा है। दरअसल शत्रुघ्न सिन्हा ने ऐसा ट्विट किया है कि इससे इस बात को बल मिल गया है कि शत्रुघ्न सिन्हा आने वाले दिनों में बीजेपी में वापसी कर सकते हैं। रविवार को शत्रुघ्न सिन्हा ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से दुखी लोगों के नये वैरिएंट की जानकारी दी, जिसके बाद वह चर्चा में आ गये। दरअसल उन्होंने ट्वीट किया, दुनिया में चार तरह के दुखी लोग होते हैं। इनमें से एक नया वेरिएंट है बिना बात मोदी से दुखी रहने वाला वेरिएंट।
पटना साहिब से दो बार सांसद रह चुके शत्रुघ्न सिन्हा ने 2019 में लोकसभा चुनाव के पहले बीजेपी को छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया था। वे काफी लंबे समय से भाजपा से जुड़े हुए थे तथा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहार वाजपेयी की सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में उन्हें जगह नहीं मिली थी। इसके बाद से वह पीएम मोदी की खुलेआम आलोचना करते रहते थे।
भाजपा से नाता तोडने के बाद उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा था जिसके बाद कांग्रेस ने उनको पटना साहिब से प्रत्याशी भी बनाया था लेकिन तब वह भाजपा के कद्दावर नेता में शुमार रविशंकर प्रसाद से हार गये थे। इस हार के बाद से ही शत्रुघ्न सिन्हा एक तरह से नेपथ्य में चले गये थे। अब उनके द्वारा किये गये ट्विट ने एक साथ कई संदेश को जन्म दे दिया है।
| पटनाः कभी बीजेपी के शीर्ष नेताओं में शुमार रहे फायरब्रांड नेता और फिल्म स्टार शत्रुघ्न सिन्हा क्या फिर से बीजेपी में वापसी करेंगे? कम से कम रविवार को उनके द्वारा किये गये ट्विट को देखकर तो यही लग रहा है कि शत्रुघ्न सिन्हा का मूड बदल रहा है। दरअसल शत्रुघ्न सिन्हा ने ऐसा ट्विट किया है कि इससे इस बात को बल मिल गया है कि शत्रुघ्न सिन्हा आने वाले दिनों में बीजेपी में वापसी कर सकते हैं। रविवार को शत्रुघ्न सिन्हा ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से दुखी लोगों के नये वैरिएंट की जानकारी दी, जिसके बाद वह चर्चा में आ गये। दरअसल उन्होंने ट्वीट किया, दुनिया में चार तरह के दुखी लोग होते हैं। इनमें से एक नया वेरिएंट है बिना बात मोदी से दुखी रहने वाला वेरिएंट। पटना साहिब से दो बार सांसद रह चुके शत्रुघ्न सिन्हा ने दो हज़ार उन्नीस में लोकसभा चुनाव के पहले बीजेपी को छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया था। वे काफी लंबे समय से भाजपा से जुड़े हुए थे तथा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहार वाजपेयी की सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में उन्हें जगह नहीं मिली थी। इसके बाद से वह पीएम मोदी की खुलेआम आलोचना करते रहते थे। भाजपा से नाता तोडने के बाद उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा था जिसके बाद कांग्रेस ने उनको पटना साहिब से प्रत्याशी भी बनाया था लेकिन तब वह भाजपा के कद्दावर नेता में शुमार रविशंकर प्रसाद से हार गये थे। इस हार के बाद से ही शत्रुघ्न सिन्हा एक तरह से नेपथ्य में चले गये थे। अब उनके द्वारा किये गये ट्विट ने एक साथ कई संदेश को जन्म दे दिया है। |
DELHI : दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल 23 जून को विपक्षी एकता की बैठक में शामिल पटना आ रहे हैं। वहीं, इस बैठक में आने से पहले केजरीवाल ने विपक्षी नेताओं को चिट्ठी लिखी है। इसमें उन्होंने बिहार में विपक्षी पार्टियों की मीटिंग में एक दौरान दिल्ली में गवर्नर के तरफ से लाए गए अध्यादेश को संसद में पारित नहीं होने देने को लेकर भी चर्चा करने की बातें कही है।
आम आदमी के पार्टी के संरक्षक और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने लेटर में लिखा है कि, - आप लोगों ने केन्द्र सरकार के अध्यादेश के खिलाफ दिल्ली के लोगों का साथ देने का निर्णय लिया, इसके लिए आपका तहेदिल से शुक्रिया। मैंने इस विषय की तह तक जाकर अध्ययन किया है ये समझना गलत होगा कि ऐसा अध्यादेश केवल दिल्ली के संदर्भ में ही लाया जा सकता है। Concurrent list में दिए गए किसी भी विषय के सारे अधिकार ऐसा ही अध्यादेश लाकर केन्द्र सरकार किसी भी पूर्ण राज्य से भी छीन सकती है।
केजरीवाल ने लिखा है कि, केन्द्र सरकार ऐसा ही अध्यादेश लाकर किसी भी पूर्ण राज्य के बिजली, शिक्षा, व्यापार आदि विषयों पर से पूर्ण रूप से अधिकारी छीन सकती है। केन्द्र सरकार ने दिल्ली के संदर्भ में ऐसा अध्यादेश लाकर एक प्रयोग किया है। यदि केन्द्र सरकार इस प्रयोग सफल हो जाती है तो फिर वो एक एक करके सभी गैर बीजेपी राज्यों के लिए भी ऐसे ही अध्यादेश जारी करके Concurrent list में दिए गए सभी विषयों से राज्यों के अधिकारी छीन लेगी। इसी लिए ये बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है कि सभी पार्टियाँ और सभी लोग मिलकर इसे किसी हालत में संसद में पास न होने दें।
इसके आगे उन्होंने लिखा है कि, यदि यह अध्यादेश दिल्ली में ये लागू हो जाता है तो एक एक करके सभी राज्यों में जनतंत्र खत्म कर दिया जाएगा। वो दिन दूर नहीं जब प्रधानमन्त्री 33 राज्पालों / LG के माध्यम से सभी राज्य सरकारें चलायेंगे। दिल्ली में जनतंत्र खत्म हो जाएगा। फिर दिल्ली वाले जो मर्जी सरकार चुनें, उसकी कोई पॉवर नहीं होगी। इसलिए 23 जून को पटना में जब सभी पार्टियों की मीटिंग है तो मेरा आपसे आग्रह है कि इस मीटिंग में इस अध्यादेश पर सभी पार्टियों का स्टैंड और इसे संसद में हराने की रणनीति पर सबसे पहले चर्चा हो।
| DELHI : दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल तेईस जून को विपक्षी एकता की बैठक में शामिल पटना आ रहे हैं। वहीं, इस बैठक में आने से पहले केजरीवाल ने विपक्षी नेताओं को चिट्ठी लिखी है। इसमें उन्होंने बिहार में विपक्षी पार्टियों की मीटिंग में एक दौरान दिल्ली में गवर्नर के तरफ से लाए गए अध्यादेश को संसद में पारित नहीं होने देने को लेकर भी चर्चा करने की बातें कही है। आम आदमी के पार्टी के संरक्षक और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने लेटर में लिखा है कि, - आप लोगों ने केन्द्र सरकार के अध्यादेश के खिलाफ दिल्ली के लोगों का साथ देने का निर्णय लिया, इसके लिए आपका तहेदिल से शुक्रिया। मैंने इस विषय की तह तक जाकर अध्ययन किया है ये समझना गलत होगा कि ऐसा अध्यादेश केवल दिल्ली के संदर्भ में ही लाया जा सकता है। Concurrent list में दिए गए किसी भी विषय के सारे अधिकार ऐसा ही अध्यादेश लाकर केन्द्र सरकार किसी भी पूर्ण राज्य से भी छीन सकती है। केजरीवाल ने लिखा है कि, केन्द्र सरकार ऐसा ही अध्यादेश लाकर किसी भी पूर्ण राज्य के बिजली, शिक्षा, व्यापार आदि विषयों पर से पूर्ण रूप से अधिकारी छीन सकती है। केन्द्र सरकार ने दिल्ली के संदर्भ में ऐसा अध्यादेश लाकर एक प्रयोग किया है। यदि केन्द्र सरकार इस प्रयोग सफल हो जाती है तो फिर वो एक एक करके सभी गैर बीजेपी राज्यों के लिए भी ऐसे ही अध्यादेश जारी करके Concurrent list में दिए गए सभी विषयों से राज्यों के अधिकारी छीन लेगी। इसी लिए ये बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है कि सभी पार्टियाँ और सभी लोग मिलकर इसे किसी हालत में संसद में पास न होने दें। इसके आगे उन्होंने लिखा है कि, यदि यह अध्यादेश दिल्ली में ये लागू हो जाता है तो एक एक करके सभी राज्यों में जनतंत्र खत्म कर दिया जाएगा। वो दिन दूर नहीं जब प्रधानमन्त्री तैंतीस राज्पालों / LG के माध्यम से सभी राज्य सरकारें चलायेंगे। दिल्ली में जनतंत्र खत्म हो जाएगा। फिर दिल्ली वाले जो मर्जी सरकार चुनें, उसकी कोई पॉवर नहीं होगी। इसलिए तेईस जून को पटना में जब सभी पार्टियों की मीटिंग है तो मेरा आपसे आग्रह है कि इस मीटिंग में इस अध्यादेश पर सभी पार्टियों का स्टैंड और इसे संसद में हराने की रणनीति पर सबसे पहले चर्चा हो। |
गिरीश लाहौर का रहनेवाला है, विद्यार्थी है, युवा है और युवकों की साधारण भावुकता से भी सम्पन्न है। और इन सबके अतिरिक्त वह धनिक नहीं है। तो भी ऐसा है कि उसे कभी पहाड़ जाने के लिए खीस के बहाने घर से रुपये मँगा कर जोड़ने नहीं पड़ते, बिना बहाने ही मिल जाते हैं।
हाँ, तो गिरीश ने निश्चय किया है कि उसमें साहित्यिक प्रतिभा है और उसी को पनपने का अवसर देने के लिए वह यहाँ आया है। अनुभव से जानता है कि जो लोग पहाड़ों में जाते हैं, वे कुछ भी देखकर नहीं आते, कुछ देखने आते भी नहीं। उनसे कोई पूछे कि अमुक स्थान में क्या देखा या अमुक स्थान का जीवन कैसा है, तो केवल इतना ही बता पाते हैं कि वहाँ ठंड बहुत है, या बर्फ़ का दृश्य बहुत सुन्दर है या वहाँ घोड़े की सवारी का मज़ा आता है! बहुत हुआ तो कोई यह बता देगा कि वहाँ चीड़-वृक्षों में हवा चलती है तो उसका स्वर ऐसा होता है या कि वहाँ किसी जल-प्रपात को देखकर जीवन की नश्वरता का या अजस्रता का, अथवा प्रेम की अचल एकरूपता का, या अस्थायित्व का, या अपनी-अपनी रुचि के अनुसार ऐसी ही किसी बात का स्मरण हो आता है... पर, क्या यह सब वहाँ का जीवन है? क्या यही दर्शनीय है, और बस? क्या वहाँ के वासी चीड़ के वृक्ष खाकर जीते हैं या जल प्रवाह पहनते हैं, या बर्फ से प्रणय करते हैं, या घोड़ों पर रहते हैं?
गिरीश इन्हीं सब प्रश्नों का उत्तर पाने और उस उत्तर को शब्दबद्ध करने यहाँ आया है। उसका विश्वास है कि वह यहाँ के जीवन की सत्यता देखकर जाएगा और लिखेगा। वह उस दिन का स्वप्न देख रहा है, जब उसकी रचनाएँ प्रकाशित होंगी और साहित्य-क्षेत्र में तहलका मच जाएगा, लोग कहेंगे कि न-जाने इसने कहाँ कैसे यह सब देख लिया, जो लोग इतने वर्षों में भी नहीं देख पाये।
यह सब उसे एक दिन लाहौर में बैठे-बैठे सूझा था। और उसने तभी तैयारी कर ली थी और दो-तीन सप्ताह के लिए डलहौज़ी चला आया था। यहाँ आकर उसने अपना सामान इत्यादि एक होटल में रखा और खाना खाकर घूमने-पहाड़ी जीवन देखने-निकल पड़ा। किन्तु उसने देखा, वह जीवन वैसा नहीं है जो स्वयं उछल-उछल कर आँखों के आगे आये, जैसा कि आजकल की सभ्यता का, आत्म-विज्ञापन का जीवन होता है। जब वह शाम को होटल लौटा, तब उसने देखा, उसका मस्तिष्क उससे भी अधिक शून्य है, जैसा वह लाहौर में था! क्योंकि गिरीश उन चित्रों और दृश्यों की ओर ध्यान देने के लिए तैयार नहीं था जो और लोग - 'साधारण लोग' - देखते हैं। वह अपने कमरे में बैठ कर सोचने लगा कि कहाँ जाकर वह पहाड़ी जीवन का असली रूप देखे; किन्तु न जाने क्यों उसका मन इस विचार में भी नहीं लगा, भागने लगा। उसे न जाने क्यों एकाएक अपनी एक बाल्य-सखी और दूर के रिश्ते की बहिन करुणा का ध्यान आया, जो सदा पहाड़ पर जाने के लिए तरसा करती है, जो कहती रहती है कि पहाड़ का जीवन कितना स्वच्छन्द होगा, कितना निर्मल, कितना स्वतःसिद्ध - जैसे कि आनन्दातिरेक से अनायास गाया हुआ शब्दहीन आलाप! वह सोचने लगा कि क्या सचमुच पहाड़ी जीवन ऐसा ही होता है, या यह उसकी भावुक बहिन का इच्छा-स्वप्न है?
काफ़ी देर तक ऐसी बातें सोच चुकने पर जब उसे एकाएक विचार आया कि वह पहाड़ी जीवन का पता लगाना चाहता है, न कि करुणा की प्रकृति पर विचार करना, तब वह खीझ कर उठ बैठा। फिर उसने निश्चय किया कि कल वह जाकर बाज़ार में बैठेगा और वहाँ पहाड़ी लोगों को देखेगा - नहीं, वहाँ क्यों, वह मोटर के अड्डे पर जाएगा, जहाँ सैकड़ों पहाड़ी कुली आते हैं। वहीं उनका सच्चा रूप देखने को मिलेगा। उनके वास्तविक जीवन की झलक तो केवल तब देखने में आती है, जब मानव किसी आर्थिक दबाव का अनुभव करता है।
गिरीश एक मोटर कम्पनी के दफ़्तर में बैठा है, उसके आस-पास और भी लोग हैं, जो आनेवाली लारियों की प्रतीक्षा में हैं-कुछ तो अपने मित्र या सम्बन्धियों की अगवानी के लिए और कुछ होटलों के एजेन्ट इत्यादि। बाहर कोई सौ-डेढ़ सौ कुली, जिनमें कुछ कश्मीरी हैं बैठे, खड़े या चल-फिर रहे हैं। कोई सिगरेट पी रहा है, कोई गुड़गुड़ी; कोई तम्बाकू चबा रहा है; कोई अपने जूते उतार कर हाथ में लिये उनकी परीक्षा में तन्मय हो रहा है; कोई एक रस्सी का टुकड़ा अपनी उँगली पर ऐसे लपेट और खोल रहा है, मानो वही जगन्नियन्ता की सबसे बड़ी उलझन हो और वह उसे सुलझा रहा हो; कोई हँस रहा है; कोई शरारत-भरी आँखों से किसी दूसरे की जेब की ओर देख रहा है, जो किसी अज्ञात वस्तु के विस्तार से फूल रही है; कोई एक शून्य थकान-भरी दृष्टि से देख रहा है - न-जाने किस ओर; कोई अपने आरक्त नेत्र मोटर कम्पनी के साइनबोर्ड पर गड़ाये हुए है; और एक-आध बूढ़ा, भीड़ से अलग खड़ा, अन्धों की विशेषतापूर्ण, उत्सुक और अभिप्राय-भरी दृष्टि से (यदि अन्धी भी दृष्टि हो सकती है तो) देख रहा है अपने आगे के सभी लोगों की ओर, यानी किसी की ओर नहीं... पर गिरीश को जान पड़ता है और ठीक जान पड़ता है कि इस प्रकार अपने विभिन्न तात्कालिक धन्धों में निरत और व्यस्त जान पड़नेवाले इन व्यक्तियों की वास्तविक दृष्टि, वास्तविक प्रतीक्षा, किसी और ही ओर लगी हुई है। इन लोगों के सामान्य शारीरिक उद्योग से कुचले हुए शरीरों के भीतर छिपी हुई है भूखे भेड़िये की-सी प्रमादपूर्ण और अन्वेषण तत्परता, जो लारियों के आते ही फूट पड़ेगी।
इससे हटकर गिरीश की दृष्टि दूसरे व्यक्ति की ओर गयी। दो-तीन तो वहीं के (एजेंसी के काम करने वाले) थे, उन्हें गिरीश छोड़ गया। एक और था, खूब मोटा-सा आदमी, धोती और डबल-ब्रेस्थ कोट पहने, किसी तीखे सेंट की सौरभ में डूबा हुआ, ऊपर के ओठ पर तितली के परों-सी मूँछ मानो चिपकाये, और आँखों में एक उद्दंडता, एक बेशर्म औद्धत्य लिए हुए। इस व्यक्ति को दूसरे लोग 'सेठ साहब' कहकर सम्बोधन कर रहे थे।
इस ग्रुप का तीसरा व्यक्ति वर्णन से परे था। वह दुबला और साँवला था, इसके अतिरिक्त उसका कुछ वर्णन यदि हो सकता था, तो यही कि उसकी आयु का, उसके घर का और उसकी जात-पाँत का कुछ अनुमान नहीं हो सकता था - यह उन व्यक्तियों में से था, जो बहुत घूमते-फिरते हैं, और जहाँ जाते हैं, वहाँ अपने व्यक्तित्व का थोड़ा-सा अंश खोकर वहाँ के थोड़े-से ऐब ले लेते हैं; तब तक, जबकि अन्त में सर्वथा व्यक्तित्वहीन किन्तु सब अवस्थाओं के ऐबों से पूर्ण परिचित नहीं हो जाते। ऐसे व्यक्ति पहाड़ों में और अन्य स्थानों में, जहाँ लोग बसते नहीं, केवल आते-जाते हैं, अक्सर देखने में आते हैं।
इसी घटना को देखते-देखते उपर्युक्त बात छिड़ी थी, क्योंकि पेटियों का मालिक तेज़ होता जा रहा था और सब ओर यही प्रतीक्षा थी कि घोड़ेवाला या तो किसी प्रकार का बोझ लादता है, चाहे उतने पत्थर डाल कर ही बोझ को एक-सा करता है, या फिर पेटीवाले से पिटता है। कुली भी इसी दृश्य को देखने की उत्कंठा से उधर घिरे आ रहे थे। कुछ औरतें भी पास आकर देख रहीं थीं।
सेठ साहब ने फिर आत्मतुष्ट दृष्टि से सब ओर देखा और चुप हो गये।
गिरीश एक नये क्षीण-से कौतूहल से उस भीड़ की ओर देखने लगा, जो बाहर जुट रही थी। सोचने लगा कि इन लोगों में क्या सभी का जीवन एक-सा ही है - दिन-भर टें-टें, चें-चें करना, घोड़े हाँकना और शाम को खा-पीकर सो रहना, या ग़लौज कर लेना?
एकाएक उसकी दृष्टि अटक गयी - बैंगनी रंग के एक रूमाल के नीचे एक स्त्री-मुख पर। एक स्त्री-मुख में जड़ी हुई आँखों पर।
जो भीड़-सी इकट्ठी होकर सेठ की बात सुन रही थी - सुन नहीं रही थी, कानों से उसी भाँति बीन रही थी, जिस भाँति किसी धनिक की थाली में गिरी हुई जूठन को कुत्ते बीन कर खाते हैं -उसी भीड़ के स्त्री-अंश में से एक स्त्री कुछ आगे बढ़कर खड़ी थी एकाएक जड़ित हुई गति की अवस्था में, एक पैर कुछ आगे बढ़ा हुआ, शरीर सहसा रुकने के कारण कुछ पीछे खिंचा हुआ-सा, एक हाथ उठा हुआ माथे पर टिककर प्रकाश से आँखों पर ओट करता हुआ, ताकि आँखें अच्छी तरह देख सकें।
गिरीश ने बड़े यत्न से अपनी आँखें उन आँखों से हटायीं और उस स्त्री का सम्पूर्णत्व देखने लगा।
उसकी वेश-भूषा बिलकुल साधारण थी - सिर पर कस कर बाँधा हुआ बैंगनी रंग का रूमाल, कानों में चाँदी के झुमके, गले में एक लम्बा सफ़ेद कुरता (जो कभी सफेद था, अब नहीं है), जिसके ऊपर एक मनकों का हार, उसके नीचे मटियाले रंग की छींट का तंग पैजामा। किन्तु उसे देखकर ध्यान उस वेश की साधारणता की ओर नहीं, बल्कि उससे वेष्टित व्यक्तित्व की असाधारणता की ओर आकृष्ट होता था।
यद्यपि उसमें असाधारण क्या था? वह कोई विशेष सुन्दर नहीं थी, उसमें कुछ विशेष नहीं था, सिवा उन आँखों की उस स्थिरता के-वह इतनी तीखी और कठोर थीं कि निर्लज्ज तक जान पड़ती थीं, जैसे किसी संसारी अनुभव-प्राप्त पुरुष की।
किसी असाधारण वस्तु के देखने से जो एक हल्का-सा, शारीरिक खिंचाव-सा होता है, उसमें शायद शरीर की और इन्द्रियों की अनुभूति-शक्ति बढ़ जाती है, या शायद कोई अन्य अमानवीय इन्द्रिय काम करने लग जाती है। किसी ऐसी ही क्रिया के कारण गिरीश को मालूम हुआ कि उसके सामने की भीड़ के वातावरण में कुछ परिवर्तन हो गया है। उसने जाना कि कोई व्यक्ति भद्दे अभिप्राय से उस स्त्री की ओर देख रहा है, उसे हाथ से थोड़ा-सा हिलाकर सेठ साहब को इंगित करके कह रहा है, "हाँ, हाँ वह अमीर है... और-वैसा है..." उसने जाना कि स्त्री का ध्यान एकाएक टूट गया है वह कुछ सहम कर पीछे हट रही है।
वह उस समय तक वैसी ही खड़ी थी। गिरीश ने देखा, अपनी साधारण आँखों से देखा कि उस स्त्री के चिबुक पर एक छोटा-सा हल्के-नीले रंग का, गोदा हुआ बिन्दु है। इसके साथ ही उसकी वह विस्तृत हुई अनुभूति-शक्ति भी सकुच कर अपनी साधारण अवस्था में आ गयी।
वह स्त्री पीछे हट गयी; हट कर पास खड़े एक और पहाड़ी को देखकर उससे धीरे-धीरे कुछ कहने लगी, जिसे गिरीश नहीं सुन पाया। उस पहाड़ी से बात करते समय भी वह देख रही थी सेठ साहब की ओर ही। जब उसकी बात सुनकर उस पहाड़ी ने प्रश्न-भरी दृष्टि से मोटर-कम्पनी के दफ़्तर के भीतर देखा, तब उसने हाथ उठाकर सेठ साहब की ओर इशारा किया।
वह स्त्री घबराकर घूम गयी और उस पहाड़ी के साथ, जिससे उसने कुछ कहा था, जल्दी से भीड़ में से निकलकर अदृश्य हो गयी। गिरीश की स्मृति में उसका तो कुछ रहा नहीं, रहा केवल उसकी पीठ पर लदी हुई कोयले की धूल से काली डांडी का एक धूमिल चित्र; किन्तु मन में उससे सम्बद्ध अनेकों विचार उठने लगे। पूछने लगे कि वह अभिनय क्या था, भाँपने लगे कि उन दीप्त स्थिर आँखों का रहस्य उन्हें ज्ञात हो।
होगा, होगा... होता ही होगा... यही देखने, यही जानने तो वह यहाँ आया है, यही तो यहाँ के जीवन का छिपा हुआ रहस्य है, जो सतह के पास ही रहता है; किन्तु देखने में नहीं आता। वह इसी को उघाड़ कर रखेगा और अपना नाम अमर कर जाएगा।
और उसका ध्यान फिर गया करुणा की ओर। वह और करुणा बाल्यसखा थे; किन्तु पिछले दिनों धीरे-धीरे न जाने क्यों और कैसे अलग-अलग हो गये थे-वैसे ही, जैसे सभी लड़के-लड़कियाँ एकाएक वयःसन्धि के काल में हो जाते हैं-परस्पर रूखे, उदासीन, एक-दूसरे को न समझ सकनेवाले, विचार-विनिमय में असमर्थ। आज गिरीश यह भी नहीं कह सकता कि वर्तमान संसार के प्रति करुणा के भाव में क्या हैं, वह संसार को क्या समझती है और उससे क्या आशा करती है? वह सुखी भी है या नहीं, इसका उत्तर भी गिरीश नहीं दे सकता, यद्यपि करुणा से जितना परिचय उसका है, उतना शायद ही किसी का होगा।
यह क्यों है? ऐसा क्यों है कि वह करुणा के विचारों की यदि कोई बात जानता है, तो यही कि करुणा पहाड़ों को चाहती है, उनमें रहने की इच्छुक है, उनसे स्वतन्त्रता की और सुख की आशा करती है, और यह भी इसलिए कि एक बार चोरी से उसने करुणा के लिखे हुए कुछ पन्ने पढ़े थे। इसीलिए कि हम अपनी आँखें खुली रखकर भी अपने घर में ही कुछ नहीं देखते-देख नहीं पाते। हममें से कितने हैं जो अपने घर में ही अपने भाई-बहिनों के विचार जानते हैं, समझते हैं या जानने-समझने की चेष्टा भी करते हैं?
गिरीश सोचने लगा, मैं यहाँ क्यों आया हूँ? क्या यह अधिक उचित नहीं है कि घर जाकर पहले अपने निकटतम लोगों का जीवन समझूँ, फिर उसी का आश्रय लेकर यहाँ के जीवन का अध्ययन करूँ? क्योंकि प्रत्येक वस्तु को कसा तो किसी कसौटी पर ही जा सकता है, और उसके पास कसौटी तो कोई है ही नहीं।
नहीं, है क्यों नहीं? वह क्या इतने दिन तक आँखें बन्द ही किये रहा, क्या उसने संसार ही नहीं देखा, वह समझ सकता है और विचार कर सकता है, उसमें इतना विवेक है कि वह पहाड़ी जीवन को देखे, उसका सत्य अलग करके जाँच सके। और वह देखेगा, अवश्य देखेगा। करुणा का क्या है, वह तो घर में है ही, उसे किसी भी दिन जाकर गिरीश समझ सकता है। स्त्रियों को समझना कौन बड़ी बात है? और फिर करुणा को वह इतने दिनों से जानता है, वह कुछ छिपाएगी थोड़े ही!
और फिर, यह जो आज अभिनय देखा है, वह समझे बिना कैसे जाया जाय? यह मन से निकल नहीं सकता, जब तक उसका उत्तर न पा लिया जाए। और गिरीश समझता है कि वह ठीक पथ पर चल रहा है, उससे यह रहस्य छिपा नहीं करेगा, स्वयं भी खुलेगा और पहाड़ी जीवन की सत्यता भी दिखा जाएगा।
एक सप्ताह के-पहाड़ में आये हुए यात्रियों के-से जीवन के निरर्थक एक सप्ताह के बाद।
गिरीश डलहौज़ी से सैर करने निकलकर, चम्बे के रास्ते पर चल पड़ा था और लक्कड़मंडी में एक चीड़ की छाया में बैठा हुआ था। पास एक छोटी कापी, कुछ खुले काग़ज़ और फ़ाउंटेनपेन रखा हुआ था, हाथ में एक पत्र के दो-चार पन्ने थे, जिन्हें वह अभी कोई पाँचवीं-छठी बार पढ़ चुका था।
गिरीश होटल से यहाँ आया था कि एकान्त में बैठ कर कुछ विचार करेगा, कुछ लिखेगा, लिखने के लिए कुछ सुलझा कर मैटर रखेगा, पर साथ ही वह ताज़ी डाक में आए हुए पत्र भी ले आया था कि यहीं चलकर पढ़ूँगा और यदि जवाब भी देना होगा, तो वहीं लिख दूँगा। इन पत्रों में एक करुणा का भी था, जिसे उसने अभी पढ़ा है और जिसने उसके लिखने के विचारों को बिलकुल बिखेर दिया है।
यह नहीं कि गिरीश कुछ सोच ही न रहा हो; किन्तु वे विचार हैं उलझे हुए, पागलपन से भरे, अशान्ति को ओर बढ़ानेवाले। वह सोच रहा है कि मैंने क्यों करुणा को पत्र लिखा? जो हमारा बाल्य-सख्य टूट-सा गया था, उसे क्यों भावुकता के आवेश में आकर जमाने की चेष्टा की? क्योंकि यह आज की करुणा नहीं है, वह करुणा भी नहीं, जो पहाड़ी जीवन की स्वच्छन्दता के लिए तरसती थी। यह तो एक नयी कठोर, अत्यन्त अकरुण किन्तु जीवन से छलकती हुई करुणा है जिसे उसके पत्र ने जगा दिया है और जिसे अब कुछ लिख नहीं सकता, क्योंकि जिस आग्नेय तल पर करुणा का पत्र लिखा गया है, उस तल पर वह कैसे पहुँच सकता है, यद्यपि करुणा ने उसे ऐसे पत्र लिखा है, जैसे वह कोई बड़ा कवि, या पहुँचा हुआ फिलासफर हो-उस पत्र में से इतना विश्वास, इतनी श्रद्धा टपकती है।
गिरीश फिर एक बार उस अंश को पढ़ने लगा - "आपने पूछा है, मेरे जीवन में क्यों यह परिवर्तन आ गया है, क्यों मैं ऐसी अशान्त-सी रहती हूँ? आप पूछते हैं; पर मैं आपको न लिखूँगी, तो किसको लिखूँगी? यहाँ के लोगों को जिन्हें इतना भी पता नहीं कि शान्ति क्या होती है?
"मैं तो पूरा लिख भी नहीं सकती, थोड़ा-सा ही लिखती हूँ।
गिरीश को याद आया कि उसने अपनी कौन-सी कहानी में किस स्थान पर यह लिखा था। वह सोचने लगा, मैंने अपनी बुद्धि से जो लिखा था केवल प्रभाव के लिए, उसे सच समझने वाले, उसका यथातथ्य अनुभव करनेवाले भी संसार में हैं। इस विचार से वह एकाएक सहम-सा गया, वैसे-ही, जैसे कोई शिकारी पहले बन्दूक चलाये और फिर उसकी घातक शक्ति का प्रमाण पाकर एकाएक सहम जाये। और वह पढ़ने लगा-'इस देश में स्त्री होकर जन्म लेना मृत्यु-यन्त्रणा से भी बढ़ कर ही है। मृत्यु तो यन्त्रणाओं से छुटकारा दे देती हैं; किन्तु यह जन्म स्वयं समस्त यन्त्रणाओं का मूल है। आप इसे गौरव समझें या साहस; किन्तु उन्हें जीना पड़ता है। और वे कहीं से तनिक-सी सहानुभूति पा लें, तो उसके दाता के हाथ मानो बिक जाती हैं, बाज़ारू कुत्ते की भाँति वे अपना यह अधिकार भी नहीं समझतीं कि उन्हें सहानुभूति मिले! इस प्रकार वे कब कितना धोखा खाती हैं, पतन की ओर कैसे बढ़ती जाती हैं, समझ नहीं पातीं। समझें कैसे? निचाई का अनुभव वे कर सकते हैं, जिन्होंने कभी ऊपर उठ कर देखा हो; पर हम स्त्रियाँ तो सदा से ही दलित हैं!
गिरीश को ऐसा जान पड़ा, कोई उसके भीतर कहने को हो रहा है कि मैं क्या कर सकता हूँ? मैं तो कुछ जानता नहीं, कुछ देख ही नहीं सकता; किन्तु उसके अहंकार ने इसे दबा दिया। वह आगे पढ़ने लगा-परमात्मन्! हमें क्या हुआ है, जो हम मरने के योग्य होकर भी मरती नहीं, अहंकार में डूबी हुई हैं; ज़ंजीरों में जकड़ी जाने में ही अपना स्वातन्त्र्य समझती हैं?
गिरीश ने पत्र लपेट कर जेब में डाल लिया और सोचने लगा, मुझमें क्यों लोगों को श्रद्धा है, क्यों वे मुझसे आशाएँ करते हैं? यदि मैं कुछ न कर सका तो? यह उत्तरदायित्व मेरे सिर पर क्यों लादा जा रहा है? एकाएक वह खीझ उठा। यों मैं विवश किया जा रहा हूँ कि किसी एक दिशा में अग्रसर होऊँ, क्यों न अपनी स्वच्छन्द प्रगतियों का अनुसरण करूँ? कला तो किसी बाह्य प्रेरणा से चलती नहीं, वह तो स्वयं प्रमुख प्रेरक है।
वह सोचने लगा, यह दासत्व क्या एक बाह्य बन्धन है, या अन्तःशक्ति की एक निष्क्रिय परमुखापेक्षी अवस्था? आदमी केवल बँध जाने से ही दास नहीं हो जाता। दासता तो एक आत्मगत भावना है। तभी तो जो दास हो जाते हैं, वे स्वाधीनता पाकर उसका उपभोग नहीं कर सकते, न कभी उसकी इच्छा ही करते हैं।
उसे एक घटना याद आयी, जो उसी दिन की घटी थी, और जैसी यहाँ नित्य सैकड़ों बार घटती हैं। उसने उसे एकाएक ग्लानि से भरा दिया था।
वह कुछ सोचता हुआ चला आ रहा था, इधर ही लक्कड़मंडी की ओर। एका-एक उसने सुना कि एक बालक उसे देखकर, पथ की एक ओर खड़ा होकर कह रहा है, "सलाम, साहब!" गिरीश को यह कुछ अच्छा-सा लगा। उसने कुछ मुस्करा कर उत्तर दिया, "सलाम।" तब बालक ने एक दीन स्वर में, जो सर्वथा स्वाभाविक नहीं था, बालकों की स्वाभाविक नक़ल करने की शक्ति से प्रेरित था, कहा "बक्शीश,साहब!" गिरीश को एकाएक ध्यान आया, यह सलाम उसे नहीं, उसके सिर पर के टोप को किया गया था और वह भी एक पैसे की आशा में। वह सोचने लगा, यह है दासत्व की पराकाष्ठा, जहाँ पर किसी टोप को देख कर उसके आगे झुकना और झुकने के पुरस्कार-रूप में कुछ पाने की आशा करना एक अनैच्छिक क्रिया हो गयी है, और वह भी बच्चे-बच्चे में अभिभूत; और इतनी सामान्य कि लोगों का ध्यान ही इसके गूढ़ अभिप्राय की ओर नहीं जाता। वे सलाम ले लेते हैं और चले जाते हैं, और स्वयं हैट पहने रहते हैं।
इन विचारों की उग्रता से शायद गिरीश का मन थक गया। वह चीड़ के वृक्ष के सहारे लेट गया और आकाश की ओर देखने लगा।
"बाबू, बहुत बोलो मत! चुपचाप चले जाओ! नहीं तो अच्छा न होगा।" कहकर पहाड़ी नीचे बस्ती की ओर देखने लगा, मानो सहायता के लिए पुकारेगा। सेठ साहब भी यह देख कर कुछ ठंडे पड़ गये, भुनभुनाते हुए लौट पड़े। थोड़ी देर में वह गिरीश की आँखों से ओझल हो गये। गिरीश इस घटना पर विचार करने लगा - उसकी समझ में न आया कि वह पहाड़ी क्यों इतनी बदगुमानी से उत्तर दे रहा था, सेठ ने कोई बात तो ऐसी नहीं कही थी। शायद सदा दबते रहने से ये पहाड़ी ऐसे हो गये हैं कि मौका लगते ही अपना बदला निकालते हैं!
गिरीश चाहता था कि वह पहाड़ियों के प्रति न्याय करे और इसलिए वह प्रत्येक बात में उनके पक्ष को पुष्ट करने के लिए युक्तियाँ खोजा करता था। इसीलिए अब भी उसने यही निश्चय किया कि ये पहाड़ी हम लोगों से डरने लग गये हैं, और उसी डर से लज्जित होकर कभी-कभी दिलेर बन जाते हैं-एक दिखावटी दिलेरी से।
किन्तु आज शायद पहाड़ियों ने निश्चय किया था कि अपने जीवन की समस्त पहेलियाँ एक साथ उसके आगे बिखरा देंगे; उसे ललकारेंगे कि वह उन्हें सुलझा सकता हो तो सुलझाये। वह अभी इसी समस्या पर विचार कर रहा था कि उसने फिर सेठ साहब का स्वर सुना, अब की बार अपने बहुत निकट और धीमा, मानो कुछ गुपचुप बात कहने का यत्न कर रहे हों। वे किसी स्त्री से बात कर रहे थे, क्योंकि बीच-बीच में कभी एक-आध शब्द किसी स्त्रीकंठ का निकला हुआ भी सुन पड़ता था।
वह बात इतनी गोपनीय नहीं थी - उसका गोपन हो ही नहीं सकता, क्योंकि वह संसार की सबसे पुरानी बात, सबसे महत्त्वपूर्ण बात - और जो शक्ति का मूल्य समझते हैं, उनके लिए सबसे गौरव की बात थी; पर जिस प्रकार कला बेची जाकर केवल एक व्यावसायिक निपुणता रह जाती है, जिसका स्वामी स्वयं उसे व्यावसायिक गुण समझकर उसे स्वीकार करने में अपनी हेठी समझता है, उसी प्रकार शक्ति भी बेची जाकर एक लज्जाजनक वस्तु हो जाती है, और हम उसे छिपाते हैं, उसका चोरी से उपयोग करते हैं कि वह लज्जा दीख न पड़े, हमें और अधिक लज्जित न करे।
गिरीश ने सुना, सब सुना। एक सौदा हुआ था, जिसमें क्रेता अत्यन्त उत्सुक था, विक्रेता पहले असहमत, किन्तु अन्त में एक लम्बी साँस के साथ अपना विकल्प छोड़कर विक्रय के लिए तत्पर हो गया था; विनिमय का दिन और समय भी निश्चित हो गया था। वह स्त्री यहीं लक्कड़मंडी में रहती है, समय पर आ जाएगी, विशेष देख-भाल की आवश्यकता है, क्योंकि यह गाँव काफ़ी बदनाम हो चुका है, और यहाँ की स्त्रियों पर, यहाँ आने-जाने वालों पर भी, कड़ी निगाह रखी जाने लगी है; पर वह आएगी अवश्य, वादा जो किया है।
और गिरीश के मन ने अपनी ओर से जोड़ दिया - "पैसे जो लिये हैं...' क्योंकि उसने अपने रुपयों की-कई-एक रुपयों की-खन-खन भी सुनी थी।
गिरीश का सिर झुक गया, दम घुटने-सा लगा। यह है पहाड़ी जीवन का आन्तरिक सौन्दर्य जिसे देखने वह आया है, जिसके बूते वह संसार में यशःप्रार्थी होगा, यह, यह - यह, जिसके लिए शब्द नहीं मिलते!
सामने वह खड़ी है। उसी दिन वाली स्त्री, वही बैंगनी रंग का रूमाल सिर पर बँधा हुआ, वही कुरता, वही लाल छींट का पैजामा, वही हार, वही झुमके, वही गोदने का बिन्दु-चिह्न और वही आँखें, जो चौंककर उसे देख रही थीं, निर्भीकता से उसकी दृष्टि का सामना कर रही थीं।
और वह शायद यह बता देने में समर्थ भी हुआ। उस स्त्री की दृष्टि क्षण-भर के लिए काँपकर झुक भी गयी। किन्तु उसके बाद ही उसने सिर उठाया, एक अवज्ञा-भरी दर्प-भरी मुद्रा में लाकर हिलाया, जिससे उसके बालों की लट रूमाल के नियन्त्रण से निकल कर, हिलकर मानो बोली - "मैं क्या परवाह करती हूँ!" और फिर वह अवमानना-भरी हँसी-हँसकर चली; किन्तु पाँच-सात क़दम जाकर उसने गर्दन घुमाकर देखा, क्षण-भर ग्रीवा फेरे हुए ही पीड़ित-सी खड़ी रही, फिर चली गयी, अब मानो कुछ शान्त, कुछ सन्दिग्ध, कुछ आहत, कुछ उद्विग्न।
और गिरीश भी एकाएक आवेग में उठा और काग़ज़ उठाकर नीचे की ओर चल पड़ा। उसे मानो अपने सब प्रश्नों के उत्तर मिल गये थे; कितने कठोर उत्तर! सब समस्याओं का समाधान मिल गया था, कैसा उपहास-भरा समाधान!
वह कुछ ही दूर गया था कि सेठ साहब मिल गये; कुछ चौंके, कुछ झेंप-से गये। गिरीश को उस स्त्री के प्रति इतनी ग्लानि हो रही थी कि उसे यह ध्यान ही न आया कि सेठ साहब भी किसी सम्बन्ध में दोषी हो सकते हैं; वह उनके साथ हो लिया और बातचीत चलाने का ढोंग करने लगा। किन्तु इसमें स्वयं अपने को ही असमर्थ पाकर, वह क्षमा माँग कर आगे निकल गया और फिर विचार-सागर में उतराने लगा, उस आघात को मिटाने का यत्न करने लगा, जो उस स्त्री की अवज्ञापूर्ण हँसी ने उसके हृदय पर किया था।
वह सोचने लगा - "हम क्यों एक शारीरिक पवित्रता को इतना महत्त्व देते हैं, विशेषतया जब कि वह पवित्रता एक कृत्रिम बन्धन है? हम एक ओर तो मानते हैं, कि कृत्रिम बन्धन सब प्रकार के पतन के मूल हैं, दूसरी ओर हम यह भी मानते हैं कि पवित्रता, व्रत-निष्ठा एक मानसिक या आध्यात्मिक तथ्य है, शारीरिक नहीं; तब फिर क्यों हम एक नकारात्मक शारीरिक पवित्रता को इतना महत्त्व देते हैं कि उसके न होने पर किसी व्यक्ति को नरक का पात्र समझने लग जाते हैं? और विशेषतया स्त्री को?
"क्या ऐसा नहीं हो सकता कि कोई उस शारीरिक नियन्त्रण को उतना महत्त्व न दे; जो कर्मों को करे, जिन्हें हम वर्जित समझते हैं, किन्तु पापभावना से नहीं, केवल इसीलिए कि वह उन्हें इतना महत्त्व नहीं देता, इसीलिए कि वह इतनी छोटी-सी बात के लिए अपनी स्वाभाविक प्रगति को दबाना नहीं चाहता? यदि कोई ऐसा हो तो हम उसे कैसे दोषी ठहराएँ, यह जानते हुए कि पाप वह नहीं है जो बिना पाप-भावना के किया जाए?
एकाएक गिरीश की विचारधारा रुकी। उसने देखा कि वह भावुकता के आवेश में किधर बहा जा रहा है... किस अकर्मण्य विशृँखलता की ओर, जो उदारता की आड़ में फैल रही है। उसने अपनी ग़लती जानी कि जिस विषय की वह आलोचना कर रहा है उसका उद्भव उन भावनाओं से नहीं हुआ था, जो वह उन्हें दे रहा है, बल्कि केवल रुपये के लालच के लिए यानी रुपये के लिए इन पहाड़ियों का आचार और चरित्र बिकाऊ है।
पर यह धोखा है! ऐसे तर्क से केवल पतन ही पतन हो सकता है। उन्नति नियम के बिना, एक निष्ठा के बिना, नहीं होती।
इस तथ्य पर पहुँचकर गिरीश ने अपने विचार स्थिर कर लिए और फिर उससे आगे पहाड़ी जीवन की उन रहस्यमयी घटनाओं पर विचार करने की आवश्यकता नहीं पड़ी। वह करुणा के पत्र के बारे में ही सोचने लगा-करुणा अवश्य दुखी है, नहीं तो इतना उद्वेग-भरा पत्र नहीं लिख सकती थी - विशेषतया इसा अवस्था में, जबकि उसने अनेक दिनों से करुणा से कोई व्यवहार नहीं रखा। पर क्या करुणा का दुख, उसकी यन्त्रणा और-हाँ, उसे अखरने वाला वह दासत्व भी इस पहाड़ी जीवन से अच्छा नहीं है, इसी पहाड़ी जीवन से, जिसमें करुणा अपने सुख-स्वप्नों का चरम उत्कर्ष देखती है?
गिरीश ने जाना, उसमें यदि प्रतिभा है, लेखन-शक्ति है, तो वह यहाँ पहाड़ों में वृद्धिगत न होगी; यह उसका क्षेत्र नहीं; वह यहाँ रहकर उस स्वप्न को साकार नहीं बना सकता, जो वह कुछ दिन पहले देख रहा था। यहाँ, जहाँ के जीवन में प्रतिभा का आहार बिलकुल नहीं मिलता, जहाँ चरित्र घुटकर मर जाता है, और जीती हैं केवल लिप्साएँ, उग्र पाप-भावनाएँ, जहाँ के जीवन का सार है ग़रीबी, कायरता, दम्भ और व्यभिचार, जहाँ प्रत्येक वस्तु एक धातु के टुकड़े पर निछावर होती है, जहाँ लोग पर्वतों के मुख को काला कर रहे हैं अपने ओछे, छिछोरे, पतित, निरर्थक जीवन से! इससे वह दासत्व ही अच्छा, वह भीड़-भड़क्का, वह रोग, पीलापन और घुलती हुई मृत्यु। करुणा रोती है तो उसे रोने दो, वह यदि बलि है तो हमारी सभ्यता की, जिसे बनाए रखना हमारा कर्त्तव्य है और जिसमें मेरी प्रतिभा का एकमात्र आधार है।
और यह निश्चय करके गिरीश होटल पहुँचा। वहाँ उसने अपना सामान बाँधा और सायंकाल ही को लौट गया वहीं जहाँ से आया था - अपने संसार के सभ्य जीवन में, जो पहाड़ी जीवन की सभ्यताओं में उलझा हुआ नहीं है, यद्यपि उसमें भीड़ है, और रोग हैं, और घुला मारनेवाली मृत्यु है और है करुणा का रोदन, जिसे कोई सुनता ही नहीं।
और पहाड़ों में यह नित्य ही होता है, शायद दिन में कई बार होता है।
नीचे के समतल प्रदेशों से अपनी सभ्यता और शान्ति-रूपी घातक औषधियों द्वारा जीवित रहनेवाले लोग आते हैं - पहाड़ों पर अपने निर्बल हृदय और निर्बलतम पाचनशक्तियाँ लेकर, और लौट जाते हैं भन्नाते हुए मस्तिष्क और मतली से आक्रान्त उदर लेकर।
क्योंकि ये पर्वत-ये मूक, विराट्, अभिमानी और लापरवाह पर्वत-अपना रहस्य खोले नहीं फिरते, अपना हृदय उघाड़कर दिखाते नहीं फिरते, उन्हें वही देख और खोज पाता है, जो उनकी खोज़ में निरत रहता है, जो उनके लिए अनवरत यत्न करने की क्षमता रखता है, और जो इतना सहिष्णु होता है कि उन्हें देखकर चौंधिया नहीं जाता, अन्धा नहीं हो जाता। पहाड़ कुछ कहते नहीं, उनके जिह्वा है ही नहीं।
उनकी कहानी की सत्यता फिर भी न कही जाती, वैसी ही रह जाती, केवल पढ़ने की क्षमता रखनेवाले उसे पढ़ते और समझते और पर्वतों से प्रेम करते।
क्योंकि वह है ही अकथ्य, जैसे सभी गहरी बातें अकथ्य होती हैं - गहरा प्रेम, गहरी वेदना, गहरा सौन्दर्य, गहरा आह्लाद, गहरी भूख।
जब एक पहाड़ी घोड़ा न लादने पर पिटता है, और फिर संन्यासी होकर लापता हो जाता है, तब पहाड़ उसकी उस गहरी आत्मग्लानि का चित्र नहीं खींचते जिसके कारण वह ऐसा करने को बाध्य होता है, जिसके कारण वह अपने कुटुम्बियों, अपने बाल-बच्चों का ध्यान भुलाकर, अपने व्यक्तित्व को इसलिए कुचल डालता है कि उस व्यक्तिगत जीवन में केवल परमुखापेक्षा, झुकना, प्रपीड़न और दासत्व की प्रतारणा है; वे चुप ही रह जाते हैं। और जब उसी पहाड़ी की लड़की, अपने पिता को पीटने वाले के मुख से दर्प और आत्मश्लाघा-भरे शब्दों में वही कहानी सुनती है, तब वे किसी से उसके व्यथा भरे जड़-विस्मय का रहस्य कहने नहीं जाते; जब कोई पहाड़ी, यह समझकर कि लोग उनके घर आते हैं केवल उनकी स्त्रियों को भ्रष्ट करने, उनके भोलेपन से और उनकी नैसर्गिकता से लाभ उठाकर उन्हें पतित और बदनाम करने, उन लोगों के प्रति उपेक्षा का बर्ताव करता है, तब पर्वत किसी देखनेवाले को उस उपेक्षा का कारण नहीं बताते फिरते। जब एक पहाड़ी कन्या अपने शत्रु, अपने पिता के घातक से एक दिन और समय नियत करती है, ताकि वह उससे बदला लेने का उचित उपाय सोच सके, तब वे पर्वत उस कन्या के किसी आलोचक को सत्य का निदर्शन कराने नहीं जाते, उसकी मानसिक प्रगति समझाने की चेष्टा नहीं करते; और अन्त में, जब कोई उनके विषय में अत्यन्त अनुचित, अन्यायपूर्ण भावना लेकर, उनकी विशाल स्वच्छन्दता और शक्तिमत्ता को छोड़कर लौट जाता है अपने घिरे हुए, बँधे हुए, कलुषित, मारक, चूहेदान जैसे संसार में, तब वे उसे वापस भी नहीं बुलाते। वे उसी भव्य, विराट्, उपेक्षा-पूर्ण कठोर मुस्कराहट से निश्चल आकाश की ओर देखा करते हैं।
| गिरीश लाहौर का रहनेवाला है, विद्यार्थी है, युवा है और युवकों की साधारण भावुकता से भी सम्पन्न है। और इन सबके अतिरिक्त वह धनिक नहीं है। तो भी ऐसा है कि उसे कभी पहाड़ जाने के लिए खीस के बहाने घर से रुपये मँगा कर जोड़ने नहीं पड़ते, बिना बहाने ही मिल जाते हैं। हाँ, तो गिरीश ने निश्चय किया है कि उसमें साहित्यिक प्रतिभा है और उसी को पनपने का अवसर देने के लिए वह यहाँ आया है। अनुभव से जानता है कि जो लोग पहाड़ों में जाते हैं, वे कुछ भी देखकर नहीं आते, कुछ देखने आते भी नहीं। उनसे कोई पूछे कि अमुक स्थान में क्या देखा या अमुक स्थान का जीवन कैसा है, तो केवल इतना ही बता पाते हैं कि वहाँ ठंड बहुत है, या बर्फ़ का दृश्य बहुत सुन्दर है या वहाँ घोड़े की सवारी का मज़ा आता है! बहुत हुआ तो कोई यह बता देगा कि वहाँ चीड़-वृक्षों में हवा चलती है तो उसका स्वर ऐसा होता है या कि वहाँ किसी जल-प्रपात को देखकर जीवन की नश्वरता का या अजस्रता का, अथवा प्रेम की अचल एकरूपता का, या अस्थायित्व का, या अपनी-अपनी रुचि के अनुसार ऐसी ही किसी बात का स्मरण हो आता है... पर, क्या यह सब वहाँ का जीवन है? क्या यही दर्शनीय है, और बस? क्या वहाँ के वासी चीड़ के वृक्ष खाकर जीते हैं या जल प्रवाह पहनते हैं, या बर्फ से प्रणय करते हैं, या घोड़ों पर रहते हैं? गिरीश इन्हीं सब प्रश्नों का उत्तर पाने और उस उत्तर को शब्दबद्ध करने यहाँ आया है। उसका विश्वास है कि वह यहाँ के जीवन की सत्यता देखकर जाएगा और लिखेगा। वह उस दिन का स्वप्न देख रहा है, जब उसकी रचनाएँ प्रकाशित होंगी और साहित्य-क्षेत्र में तहलका मच जाएगा, लोग कहेंगे कि न-जाने इसने कहाँ कैसे यह सब देख लिया, जो लोग इतने वर्षों में भी नहीं देख पाये। यह सब उसे एक दिन लाहौर में बैठे-बैठे सूझा था। और उसने तभी तैयारी कर ली थी और दो-तीन सप्ताह के लिए डलहौज़ी चला आया था। यहाँ आकर उसने अपना सामान इत्यादि एक होटल में रखा और खाना खाकर घूमने-पहाड़ी जीवन देखने-निकल पड़ा। किन्तु उसने देखा, वह जीवन वैसा नहीं है जो स्वयं उछल-उछल कर आँखों के आगे आये, जैसा कि आजकल की सभ्यता का, आत्म-विज्ञापन का जीवन होता है। जब वह शाम को होटल लौटा, तब उसने देखा, उसका मस्तिष्क उससे भी अधिक शून्य है, जैसा वह लाहौर में था! क्योंकि गिरीश उन चित्रों और दृश्यों की ओर ध्यान देने के लिए तैयार नहीं था जो और लोग - 'साधारण लोग' - देखते हैं। वह अपने कमरे में बैठ कर सोचने लगा कि कहाँ जाकर वह पहाड़ी जीवन का असली रूप देखे; किन्तु न जाने क्यों उसका मन इस विचार में भी नहीं लगा, भागने लगा। उसे न जाने क्यों एकाएक अपनी एक बाल्य-सखी और दूर के रिश्ते की बहिन करुणा का ध्यान आया, जो सदा पहाड़ पर जाने के लिए तरसा करती है, जो कहती रहती है कि पहाड़ का जीवन कितना स्वच्छन्द होगा, कितना निर्मल, कितना स्वतःसिद्ध - जैसे कि आनन्दातिरेक से अनायास गाया हुआ शब्दहीन आलाप! वह सोचने लगा कि क्या सचमुच पहाड़ी जीवन ऐसा ही होता है, या यह उसकी भावुक बहिन का इच्छा-स्वप्न है? काफ़ी देर तक ऐसी बातें सोच चुकने पर जब उसे एकाएक विचार आया कि वह पहाड़ी जीवन का पता लगाना चाहता है, न कि करुणा की प्रकृति पर विचार करना, तब वह खीझ कर उठ बैठा। फिर उसने निश्चय किया कि कल वह जाकर बाज़ार में बैठेगा और वहाँ पहाड़ी लोगों को देखेगा - नहीं, वहाँ क्यों, वह मोटर के अड्डे पर जाएगा, जहाँ सैकड़ों पहाड़ी कुली आते हैं। वहीं उनका सच्चा रूप देखने को मिलेगा। उनके वास्तविक जीवन की झलक तो केवल तब देखने में आती है, जब मानव किसी आर्थिक दबाव का अनुभव करता है। गिरीश एक मोटर कम्पनी के दफ़्तर में बैठा है, उसके आस-पास और भी लोग हैं, जो आनेवाली लारियों की प्रतीक्षा में हैं-कुछ तो अपने मित्र या सम्बन्धियों की अगवानी के लिए और कुछ होटलों के एजेन्ट इत्यादि। बाहर कोई सौ-डेढ़ सौ कुली, जिनमें कुछ कश्मीरी हैं बैठे, खड़े या चल-फिर रहे हैं। कोई सिगरेट पी रहा है, कोई गुड़गुड़ी; कोई तम्बाकू चबा रहा है; कोई अपने जूते उतार कर हाथ में लिये उनकी परीक्षा में तन्मय हो रहा है; कोई एक रस्सी का टुकड़ा अपनी उँगली पर ऐसे लपेट और खोल रहा है, मानो वही जगन्नियन्ता की सबसे बड़ी उलझन हो और वह उसे सुलझा रहा हो; कोई हँस रहा है; कोई शरारत-भरी आँखों से किसी दूसरे की जेब की ओर देख रहा है, जो किसी अज्ञात वस्तु के विस्तार से फूल रही है; कोई एक शून्य थकान-भरी दृष्टि से देख रहा है - न-जाने किस ओर; कोई अपने आरक्त नेत्र मोटर कम्पनी के साइनबोर्ड पर गड़ाये हुए है; और एक-आध बूढ़ा, भीड़ से अलग खड़ा, अन्धों की विशेषतापूर्ण, उत्सुक और अभिप्राय-भरी दृष्टि से देख रहा है अपने आगे के सभी लोगों की ओर, यानी किसी की ओर नहीं... पर गिरीश को जान पड़ता है और ठीक जान पड़ता है कि इस प्रकार अपने विभिन्न तात्कालिक धन्धों में निरत और व्यस्त जान पड़नेवाले इन व्यक्तियों की वास्तविक दृष्टि, वास्तविक प्रतीक्षा, किसी और ही ओर लगी हुई है। इन लोगों के सामान्य शारीरिक उद्योग से कुचले हुए शरीरों के भीतर छिपी हुई है भूखे भेड़िये की-सी प्रमादपूर्ण और अन्वेषण तत्परता, जो लारियों के आते ही फूट पड़ेगी। इससे हटकर गिरीश की दृष्टि दूसरे व्यक्ति की ओर गयी। दो-तीन तो वहीं के थे, उन्हें गिरीश छोड़ गया। एक और था, खूब मोटा-सा आदमी, धोती और डबल-ब्रेस्थ कोट पहने, किसी तीखे सेंट की सौरभ में डूबा हुआ, ऊपर के ओठ पर तितली के परों-सी मूँछ मानो चिपकाये, और आँखों में एक उद्दंडता, एक बेशर्म औद्धत्य लिए हुए। इस व्यक्ति को दूसरे लोग 'सेठ साहब' कहकर सम्बोधन कर रहे थे। इस ग्रुप का तीसरा व्यक्ति वर्णन से परे था। वह दुबला और साँवला था, इसके अतिरिक्त उसका कुछ वर्णन यदि हो सकता था, तो यही कि उसकी आयु का, उसके घर का और उसकी जात-पाँत का कुछ अनुमान नहीं हो सकता था - यह उन व्यक्तियों में से था, जो बहुत घूमते-फिरते हैं, और जहाँ जाते हैं, वहाँ अपने व्यक्तित्व का थोड़ा-सा अंश खोकर वहाँ के थोड़े-से ऐब ले लेते हैं; तब तक, जबकि अन्त में सर्वथा व्यक्तित्वहीन किन्तु सब अवस्थाओं के ऐबों से पूर्ण परिचित नहीं हो जाते। ऐसे व्यक्ति पहाड़ों में और अन्य स्थानों में, जहाँ लोग बसते नहीं, केवल आते-जाते हैं, अक्सर देखने में आते हैं। इसी घटना को देखते-देखते उपर्युक्त बात छिड़ी थी, क्योंकि पेटियों का मालिक तेज़ होता जा रहा था और सब ओर यही प्रतीक्षा थी कि घोड़ेवाला या तो किसी प्रकार का बोझ लादता है, चाहे उतने पत्थर डाल कर ही बोझ को एक-सा करता है, या फिर पेटीवाले से पिटता है। कुली भी इसी दृश्य को देखने की उत्कंठा से उधर घिरे आ रहे थे। कुछ औरतें भी पास आकर देख रहीं थीं। सेठ साहब ने फिर आत्मतुष्ट दृष्टि से सब ओर देखा और चुप हो गये। गिरीश एक नये क्षीण-से कौतूहल से उस भीड़ की ओर देखने लगा, जो बाहर जुट रही थी। सोचने लगा कि इन लोगों में क्या सभी का जीवन एक-सा ही है - दिन-भर टें-टें, चें-चें करना, घोड़े हाँकना और शाम को खा-पीकर सो रहना, या ग़लौज कर लेना? एकाएक उसकी दृष्टि अटक गयी - बैंगनी रंग के एक रूमाल के नीचे एक स्त्री-मुख पर। एक स्त्री-मुख में जड़ी हुई आँखों पर। जो भीड़-सी इकट्ठी होकर सेठ की बात सुन रही थी - सुन नहीं रही थी, कानों से उसी भाँति बीन रही थी, जिस भाँति किसी धनिक की थाली में गिरी हुई जूठन को कुत्ते बीन कर खाते हैं -उसी भीड़ के स्त्री-अंश में से एक स्त्री कुछ आगे बढ़कर खड़ी थी एकाएक जड़ित हुई गति की अवस्था में, एक पैर कुछ आगे बढ़ा हुआ, शरीर सहसा रुकने के कारण कुछ पीछे खिंचा हुआ-सा, एक हाथ उठा हुआ माथे पर टिककर प्रकाश से आँखों पर ओट करता हुआ, ताकि आँखें अच्छी तरह देख सकें। गिरीश ने बड़े यत्न से अपनी आँखें उन आँखों से हटायीं और उस स्त्री का सम्पूर्णत्व देखने लगा। उसकी वेश-भूषा बिलकुल साधारण थी - सिर पर कस कर बाँधा हुआ बैंगनी रंग का रूमाल, कानों में चाँदी के झुमके, गले में एक लम्बा सफ़ेद कुरता , जिसके ऊपर एक मनकों का हार, उसके नीचे मटियाले रंग की छींट का तंग पैजामा। किन्तु उसे देखकर ध्यान उस वेश की साधारणता की ओर नहीं, बल्कि उससे वेष्टित व्यक्तित्व की असाधारणता की ओर आकृष्ट होता था। यद्यपि उसमें असाधारण क्या था? वह कोई विशेष सुन्दर नहीं थी, उसमें कुछ विशेष नहीं था, सिवा उन आँखों की उस स्थिरता के-वह इतनी तीखी और कठोर थीं कि निर्लज्ज तक जान पड़ती थीं, जैसे किसी संसारी अनुभव-प्राप्त पुरुष की। किसी असाधारण वस्तु के देखने से जो एक हल्का-सा, शारीरिक खिंचाव-सा होता है, उसमें शायद शरीर की और इन्द्रियों की अनुभूति-शक्ति बढ़ जाती है, या शायद कोई अन्य अमानवीय इन्द्रिय काम करने लग जाती है। किसी ऐसी ही क्रिया के कारण गिरीश को मालूम हुआ कि उसके सामने की भीड़ के वातावरण में कुछ परिवर्तन हो गया है। उसने जाना कि कोई व्यक्ति भद्दे अभिप्राय से उस स्त्री की ओर देख रहा है, उसे हाथ से थोड़ा-सा हिलाकर सेठ साहब को इंगित करके कह रहा है, "हाँ, हाँ वह अमीर है... और-वैसा है..." उसने जाना कि स्त्री का ध्यान एकाएक टूट गया है वह कुछ सहम कर पीछे हट रही है। वह उस समय तक वैसी ही खड़ी थी। गिरीश ने देखा, अपनी साधारण आँखों से देखा कि उस स्त्री के चिबुक पर एक छोटा-सा हल्के-नीले रंग का, गोदा हुआ बिन्दु है। इसके साथ ही उसकी वह विस्तृत हुई अनुभूति-शक्ति भी सकुच कर अपनी साधारण अवस्था में आ गयी। वह स्त्री पीछे हट गयी; हट कर पास खड़े एक और पहाड़ी को देखकर उससे धीरे-धीरे कुछ कहने लगी, जिसे गिरीश नहीं सुन पाया। उस पहाड़ी से बात करते समय भी वह देख रही थी सेठ साहब की ओर ही। जब उसकी बात सुनकर उस पहाड़ी ने प्रश्न-भरी दृष्टि से मोटर-कम्पनी के दफ़्तर के भीतर देखा, तब उसने हाथ उठाकर सेठ साहब की ओर इशारा किया। वह स्त्री घबराकर घूम गयी और उस पहाड़ी के साथ, जिससे उसने कुछ कहा था, जल्दी से भीड़ में से निकलकर अदृश्य हो गयी। गिरीश की स्मृति में उसका तो कुछ रहा नहीं, रहा केवल उसकी पीठ पर लदी हुई कोयले की धूल से काली डांडी का एक धूमिल चित्र; किन्तु मन में उससे सम्बद्ध अनेकों विचार उठने लगे। पूछने लगे कि वह अभिनय क्या था, भाँपने लगे कि उन दीप्त स्थिर आँखों का रहस्य उन्हें ज्ञात हो। होगा, होगा... होता ही होगा... यही देखने, यही जानने तो वह यहाँ आया है, यही तो यहाँ के जीवन का छिपा हुआ रहस्य है, जो सतह के पास ही रहता है; किन्तु देखने में नहीं आता। वह इसी को उघाड़ कर रखेगा और अपना नाम अमर कर जाएगा। और उसका ध्यान फिर गया करुणा की ओर। वह और करुणा बाल्यसखा थे; किन्तु पिछले दिनों धीरे-धीरे न जाने क्यों और कैसे अलग-अलग हो गये थे-वैसे ही, जैसे सभी लड़के-लड़कियाँ एकाएक वयःसन्धि के काल में हो जाते हैं-परस्पर रूखे, उदासीन, एक-दूसरे को न समझ सकनेवाले, विचार-विनिमय में असमर्थ। आज गिरीश यह भी नहीं कह सकता कि वर्तमान संसार के प्रति करुणा के भाव में क्या हैं, वह संसार को क्या समझती है और उससे क्या आशा करती है? वह सुखी भी है या नहीं, इसका उत्तर भी गिरीश नहीं दे सकता, यद्यपि करुणा से जितना परिचय उसका है, उतना शायद ही किसी का होगा। यह क्यों है? ऐसा क्यों है कि वह करुणा के विचारों की यदि कोई बात जानता है, तो यही कि करुणा पहाड़ों को चाहती है, उनमें रहने की इच्छुक है, उनसे स्वतन्त्रता की और सुख की आशा करती है, और यह भी इसलिए कि एक बार चोरी से उसने करुणा के लिखे हुए कुछ पन्ने पढ़े थे। इसीलिए कि हम अपनी आँखें खुली रखकर भी अपने घर में ही कुछ नहीं देखते-देख नहीं पाते। हममें से कितने हैं जो अपने घर में ही अपने भाई-बहिनों के विचार जानते हैं, समझते हैं या जानने-समझने की चेष्टा भी करते हैं? गिरीश सोचने लगा, मैं यहाँ क्यों आया हूँ? क्या यह अधिक उचित नहीं है कि घर जाकर पहले अपने निकटतम लोगों का जीवन समझूँ, फिर उसी का आश्रय लेकर यहाँ के जीवन का अध्ययन करूँ? क्योंकि प्रत्येक वस्तु को कसा तो किसी कसौटी पर ही जा सकता है, और उसके पास कसौटी तो कोई है ही नहीं। नहीं, है क्यों नहीं? वह क्या इतने दिन तक आँखें बन्द ही किये रहा, क्या उसने संसार ही नहीं देखा, वह समझ सकता है और विचार कर सकता है, उसमें इतना विवेक है कि वह पहाड़ी जीवन को देखे, उसका सत्य अलग करके जाँच सके। और वह देखेगा, अवश्य देखेगा। करुणा का क्या है, वह तो घर में है ही, उसे किसी भी दिन जाकर गिरीश समझ सकता है। स्त्रियों को समझना कौन बड़ी बात है? और फिर करुणा को वह इतने दिनों से जानता है, वह कुछ छिपाएगी थोड़े ही! और फिर, यह जो आज अभिनय देखा है, वह समझे बिना कैसे जाया जाय? यह मन से निकल नहीं सकता, जब तक उसका उत्तर न पा लिया जाए। और गिरीश समझता है कि वह ठीक पथ पर चल रहा है, उससे यह रहस्य छिपा नहीं करेगा, स्वयं भी खुलेगा और पहाड़ी जीवन की सत्यता भी दिखा जाएगा। एक सप्ताह के-पहाड़ में आये हुए यात्रियों के-से जीवन के निरर्थक एक सप्ताह के बाद। गिरीश डलहौज़ी से सैर करने निकलकर, चम्बे के रास्ते पर चल पड़ा था और लक्कड़मंडी में एक चीड़ की छाया में बैठा हुआ था। पास एक छोटी कापी, कुछ खुले काग़ज़ और फ़ाउंटेनपेन रखा हुआ था, हाथ में एक पत्र के दो-चार पन्ने थे, जिन्हें वह अभी कोई पाँचवीं-छठी बार पढ़ चुका था। गिरीश होटल से यहाँ आया था कि एकान्त में बैठ कर कुछ विचार करेगा, कुछ लिखेगा, लिखने के लिए कुछ सुलझा कर मैटर रखेगा, पर साथ ही वह ताज़ी डाक में आए हुए पत्र भी ले आया था कि यहीं चलकर पढ़ूँगा और यदि जवाब भी देना होगा, तो वहीं लिख दूँगा। इन पत्रों में एक करुणा का भी था, जिसे उसने अभी पढ़ा है और जिसने उसके लिखने के विचारों को बिलकुल बिखेर दिया है। यह नहीं कि गिरीश कुछ सोच ही न रहा हो; किन्तु वे विचार हैं उलझे हुए, पागलपन से भरे, अशान्ति को ओर बढ़ानेवाले। वह सोच रहा है कि मैंने क्यों करुणा को पत्र लिखा? जो हमारा बाल्य-सख्य टूट-सा गया था, उसे क्यों भावुकता के आवेश में आकर जमाने की चेष्टा की? क्योंकि यह आज की करुणा नहीं है, वह करुणा भी नहीं, जो पहाड़ी जीवन की स्वच्छन्दता के लिए तरसती थी। यह तो एक नयी कठोर, अत्यन्त अकरुण किन्तु जीवन से छलकती हुई करुणा है जिसे उसके पत्र ने जगा दिया है और जिसे अब कुछ लिख नहीं सकता, क्योंकि जिस आग्नेय तल पर करुणा का पत्र लिखा गया है, उस तल पर वह कैसे पहुँच सकता है, यद्यपि करुणा ने उसे ऐसे पत्र लिखा है, जैसे वह कोई बड़ा कवि, या पहुँचा हुआ फिलासफर हो-उस पत्र में से इतना विश्वास, इतनी श्रद्धा टपकती है। गिरीश फिर एक बार उस अंश को पढ़ने लगा - "आपने पूछा है, मेरे जीवन में क्यों यह परिवर्तन आ गया है, क्यों मैं ऐसी अशान्त-सी रहती हूँ? आप पूछते हैं; पर मैं आपको न लिखूँगी, तो किसको लिखूँगी? यहाँ के लोगों को जिन्हें इतना भी पता नहीं कि शान्ति क्या होती है? "मैं तो पूरा लिख भी नहीं सकती, थोड़ा-सा ही लिखती हूँ। गिरीश को याद आया कि उसने अपनी कौन-सी कहानी में किस स्थान पर यह लिखा था। वह सोचने लगा, मैंने अपनी बुद्धि से जो लिखा था केवल प्रभाव के लिए, उसे सच समझने वाले, उसका यथातथ्य अनुभव करनेवाले भी संसार में हैं। इस विचार से वह एकाएक सहम-सा गया, वैसे-ही, जैसे कोई शिकारी पहले बन्दूक चलाये और फिर उसकी घातक शक्ति का प्रमाण पाकर एकाएक सहम जाये। और वह पढ़ने लगा-'इस देश में स्त्री होकर जन्म लेना मृत्यु-यन्त्रणा से भी बढ़ कर ही है। मृत्यु तो यन्त्रणाओं से छुटकारा दे देती हैं; किन्तु यह जन्म स्वयं समस्त यन्त्रणाओं का मूल है। आप इसे गौरव समझें या साहस; किन्तु उन्हें जीना पड़ता है। और वे कहीं से तनिक-सी सहानुभूति पा लें, तो उसके दाता के हाथ मानो बिक जाती हैं, बाज़ारू कुत्ते की भाँति वे अपना यह अधिकार भी नहीं समझतीं कि उन्हें सहानुभूति मिले! इस प्रकार वे कब कितना धोखा खाती हैं, पतन की ओर कैसे बढ़ती जाती हैं, समझ नहीं पातीं। समझें कैसे? निचाई का अनुभव वे कर सकते हैं, जिन्होंने कभी ऊपर उठ कर देखा हो; पर हम स्त्रियाँ तो सदा से ही दलित हैं! गिरीश को ऐसा जान पड़ा, कोई उसके भीतर कहने को हो रहा है कि मैं क्या कर सकता हूँ? मैं तो कुछ जानता नहीं, कुछ देख ही नहीं सकता; किन्तु उसके अहंकार ने इसे दबा दिया। वह आगे पढ़ने लगा-परमात्मन्! हमें क्या हुआ है, जो हम मरने के योग्य होकर भी मरती नहीं, अहंकार में डूबी हुई हैं; ज़ंजीरों में जकड़ी जाने में ही अपना स्वातन्त्र्य समझती हैं? गिरीश ने पत्र लपेट कर जेब में डाल लिया और सोचने लगा, मुझमें क्यों लोगों को श्रद्धा है, क्यों वे मुझसे आशाएँ करते हैं? यदि मैं कुछ न कर सका तो? यह उत्तरदायित्व मेरे सिर पर क्यों लादा जा रहा है? एकाएक वह खीझ उठा। यों मैं विवश किया जा रहा हूँ कि किसी एक दिशा में अग्रसर होऊँ, क्यों न अपनी स्वच्छन्द प्रगतियों का अनुसरण करूँ? कला तो किसी बाह्य प्रेरणा से चलती नहीं, वह तो स्वयं प्रमुख प्रेरक है। वह सोचने लगा, यह दासत्व क्या एक बाह्य बन्धन है, या अन्तःशक्ति की एक निष्क्रिय परमुखापेक्षी अवस्था? आदमी केवल बँध जाने से ही दास नहीं हो जाता। दासता तो एक आत्मगत भावना है। तभी तो जो दास हो जाते हैं, वे स्वाधीनता पाकर उसका उपभोग नहीं कर सकते, न कभी उसकी इच्छा ही करते हैं। उसे एक घटना याद आयी, जो उसी दिन की घटी थी, और जैसी यहाँ नित्य सैकड़ों बार घटती हैं। उसने उसे एकाएक ग्लानि से भरा दिया था। वह कुछ सोचता हुआ चला आ रहा था, इधर ही लक्कड़मंडी की ओर। एका-एक उसने सुना कि एक बालक उसे देखकर, पथ की एक ओर खड़ा होकर कह रहा है, "सलाम, साहब!" गिरीश को यह कुछ अच्छा-सा लगा। उसने कुछ मुस्करा कर उत्तर दिया, "सलाम।" तब बालक ने एक दीन स्वर में, जो सर्वथा स्वाभाविक नहीं था, बालकों की स्वाभाविक नक़ल करने की शक्ति से प्रेरित था, कहा "बक्शीश,साहब!" गिरीश को एकाएक ध्यान आया, यह सलाम उसे नहीं, उसके सिर पर के टोप को किया गया था और वह भी एक पैसे की आशा में। वह सोचने लगा, यह है दासत्व की पराकाष्ठा, जहाँ पर किसी टोप को देख कर उसके आगे झुकना और झुकने के पुरस्कार-रूप में कुछ पाने की आशा करना एक अनैच्छिक क्रिया हो गयी है, और वह भी बच्चे-बच्चे में अभिभूत; और इतनी सामान्य कि लोगों का ध्यान ही इसके गूढ़ अभिप्राय की ओर नहीं जाता। वे सलाम ले लेते हैं और चले जाते हैं, और स्वयं हैट पहने रहते हैं। इन विचारों की उग्रता से शायद गिरीश का मन थक गया। वह चीड़ के वृक्ष के सहारे लेट गया और आकाश की ओर देखने लगा। "बाबू, बहुत बोलो मत! चुपचाप चले जाओ! नहीं तो अच्छा न होगा।" कहकर पहाड़ी नीचे बस्ती की ओर देखने लगा, मानो सहायता के लिए पुकारेगा। सेठ साहब भी यह देख कर कुछ ठंडे पड़ गये, भुनभुनाते हुए लौट पड़े। थोड़ी देर में वह गिरीश की आँखों से ओझल हो गये। गिरीश इस घटना पर विचार करने लगा - उसकी समझ में न आया कि वह पहाड़ी क्यों इतनी बदगुमानी से उत्तर दे रहा था, सेठ ने कोई बात तो ऐसी नहीं कही थी। शायद सदा दबते रहने से ये पहाड़ी ऐसे हो गये हैं कि मौका लगते ही अपना बदला निकालते हैं! गिरीश चाहता था कि वह पहाड़ियों के प्रति न्याय करे और इसलिए वह प्रत्येक बात में उनके पक्ष को पुष्ट करने के लिए युक्तियाँ खोजा करता था। इसीलिए अब भी उसने यही निश्चय किया कि ये पहाड़ी हम लोगों से डरने लग गये हैं, और उसी डर से लज्जित होकर कभी-कभी दिलेर बन जाते हैं-एक दिखावटी दिलेरी से। किन्तु आज शायद पहाड़ियों ने निश्चय किया था कि अपने जीवन की समस्त पहेलियाँ एक साथ उसके आगे बिखरा देंगे; उसे ललकारेंगे कि वह उन्हें सुलझा सकता हो तो सुलझाये। वह अभी इसी समस्या पर विचार कर रहा था कि उसने फिर सेठ साहब का स्वर सुना, अब की बार अपने बहुत निकट और धीमा, मानो कुछ गुपचुप बात कहने का यत्न कर रहे हों। वे किसी स्त्री से बात कर रहे थे, क्योंकि बीच-बीच में कभी एक-आध शब्द किसी स्त्रीकंठ का निकला हुआ भी सुन पड़ता था। वह बात इतनी गोपनीय नहीं थी - उसका गोपन हो ही नहीं सकता, क्योंकि वह संसार की सबसे पुरानी बात, सबसे महत्त्वपूर्ण बात - और जो शक्ति का मूल्य समझते हैं, उनके लिए सबसे गौरव की बात थी; पर जिस प्रकार कला बेची जाकर केवल एक व्यावसायिक निपुणता रह जाती है, जिसका स्वामी स्वयं उसे व्यावसायिक गुण समझकर उसे स्वीकार करने में अपनी हेठी समझता है, उसी प्रकार शक्ति भी बेची जाकर एक लज्जाजनक वस्तु हो जाती है, और हम उसे छिपाते हैं, उसका चोरी से उपयोग करते हैं कि वह लज्जा दीख न पड़े, हमें और अधिक लज्जित न करे। गिरीश ने सुना, सब सुना। एक सौदा हुआ था, जिसमें क्रेता अत्यन्त उत्सुक था, विक्रेता पहले असहमत, किन्तु अन्त में एक लम्बी साँस के साथ अपना विकल्प छोड़कर विक्रय के लिए तत्पर हो गया था; विनिमय का दिन और समय भी निश्चित हो गया था। वह स्त्री यहीं लक्कड़मंडी में रहती है, समय पर आ जाएगी, विशेष देख-भाल की आवश्यकता है, क्योंकि यह गाँव काफ़ी बदनाम हो चुका है, और यहाँ की स्त्रियों पर, यहाँ आने-जाने वालों पर भी, कड़ी निगाह रखी जाने लगी है; पर वह आएगी अवश्य, वादा जो किया है। और गिरीश के मन ने अपनी ओर से जोड़ दिया - "पैसे जो लिये हैं...' क्योंकि उसने अपने रुपयों की-कई-एक रुपयों की-खन-खन भी सुनी थी। गिरीश का सिर झुक गया, दम घुटने-सा लगा। यह है पहाड़ी जीवन का आन्तरिक सौन्दर्य जिसे देखने वह आया है, जिसके बूते वह संसार में यशःप्रार्थी होगा, यह, यह - यह, जिसके लिए शब्द नहीं मिलते! सामने वह खड़ी है। उसी दिन वाली स्त्री, वही बैंगनी रंग का रूमाल सिर पर बँधा हुआ, वही कुरता, वही लाल छींट का पैजामा, वही हार, वही झुमके, वही गोदने का बिन्दु-चिह्न और वही आँखें, जो चौंककर उसे देख रही थीं, निर्भीकता से उसकी दृष्टि का सामना कर रही थीं। और वह शायद यह बता देने में समर्थ भी हुआ। उस स्त्री की दृष्टि क्षण-भर के लिए काँपकर झुक भी गयी। किन्तु उसके बाद ही उसने सिर उठाया, एक अवज्ञा-भरी दर्प-भरी मुद्रा में लाकर हिलाया, जिससे उसके बालों की लट रूमाल के नियन्त्रण से निकल कर, हिलकर मानो बोली - "मैं क्या परवाह करती हूँ!" और फिर वह अवमानना-भरी हँसी-हँसकर चली; किन्तु पाँच-सात क़दम जाकर उसने गर्दन घुमाकर देखा, क्षण-भर ग्रीवा फेरे हुए ही पीड़ित-सी खड़ी रही, फिर चली गयी, अब मानो कुछ शान्त, कुछ सन्दिग्ध, कुछ आहत, कुछ उद्विग्न। और गिरीश भी एकाएक आवेग में उठा और काग़ज़ उठाकर नीचे की ओर चल पड़ा। उसे मानो अपने सब प्रश्नों के उत्तर मिल गये थे; कितने कठोर उत्तर! सब समस्याओं का समाधान मिल गया था, कैसा उपहास-भरा समाधान! वह कुछ ही दूर गया था कि सेठ साहब मिल गये; कुछ चौंके, कुछ झेंप-से गये। गिरीश को उस स्त्री के प्रति इतनी ग्लानि हो रही थी कि उसे यह ध्यान ही न आया कि सेठ साहब भी किसी सम्बन्ध में दोषी हो सकते हैं; वह उनके साथ हो लिया और बातचीत चलाने का ढोंग करने लगा। किन्तु इसमें स्वयं अपने को ही असमर्थ पाकर, वह क्षमा माँग कर आगे निकल गया और फिर विचार-सागर में उतराने लगा, उस आघात को मिटाने का यत्न करने लगा, जो उस स्त्री की अवज्ञापूर्ण हँसी ने उसके हृदय पर किया था। वह सोचने लगा - "हम क्यों एक शारीरिक पवित्रता को इतना महत्त्व देते हैं, विशेषतया जब कि वह पवित्रता एक कृत्रिम बन्धन है? हम एक ओर तो मानते हैं, कि कृत्रिम बन्धन सब प्रकार के पतन के मूल हैं, दूसरी ओर हम यह भी मानते हैं कि पवित्रता, व्रत-निष्ठा एक मानसिक या आध्यात्मिक तथ्य है, शारीरिक नहीं; तब फिर क्यों हम एक नकारात्मक शारीरिक पवित्रता को इतना महत्त्व देते हैं कि उसके न होने पर किसी व्यक्ति को नरक का पात्र समझने लग जाते हैं? और विशेषतया स्त्री को? "क्या ऐसा नहीं हो सकता कि कोई उस शारीरिक नियन्त्रण को उतना महत्त्व न दे; जो कर्मों को करे, जिन्हें हम वर्जित समझते हैं, किन्तु पापभावना से नहीं, केवल इसीलिए कि वह उन्हें इतना महत्त्व नहीं देता, इसीलिए कि वह इतनी छोटी-सी बात के लिए अपनी स्वाभाविक प्रगति को दबाना नहीं चाहता? यदि कोई ऐसा हो तो हम उसे कैसे दोषी ठहराएँ, यह जानते हुए कि पाप वह नहीं है जो बिना पाप-भावना के किया जाए? एकाएक गिरीश की विचारधारा रुकी। उसने देखा कि वह भावुकता के आवेश में किधर बहा जा रहा है... किस अकर्मण्य विशृँखलता की ओर, जो उदारता की आड़ में फैल रही है। उसने अपनी ग़लती जानी कि जिस विषय की वह आलोचना कर रहा है उसका उद्भव उन भावनाओं से नहीं हुआ था, जो वह उन्हें दे रहा है, बल्कि केवल रुपये के लालच के लिए यानी रुपये के लिए इन पहाड़ियों का आचार और चरित्र बिकाऊ है। पर यह धोखा है! ऐसे तर्क से केवल पतन ही पतन हो सकता है। उन्नति नियम के बिना, एक निष्ठा के बिना, नहीं होती। इस तथ्य पर पहुँचकर गिरीश ने अपने विचार स्थिर कर लिए और फिर उससे आगे पहाड़ी जीवन की उन रहस्यमयी घटनाओं पर विचार करने की आवश्यकता नहीं पड़ी। वह करुणा के पत्र के बारे में ही सोचने लगा-करुणा अवश्य दुखी है, नहीं तो इतना उद्वेग-भरा पत्र नहीं लिख सकती थी - विशेषतया इसा अवस्था में, जबकि उसने अनेक दिनों से करुणा से कोई व्यवहार नहीं रखा। पर क्या करुणा का दुख, उसकी यन्त्रणा और-हाँ, उसे अखरने वाला वह दासत्व भी इस पहाड़ी जीवन से अच्छा नहीं है, इसी पहाड़ी जीवन से, जिसमें करुणा अपने सुख-स्वप्नों का चरम उत्कर्ष देखती है? गिरीश ने जाना, उसमें यदि प्रतिभा है, लेखन-शक्ति है, तो वह यहाँ पहाड़ों में वृद्धिगत न होगी; यह उसका क्षेत्र नहीं; वह यहाँ रहकर उस स्वप्न को साकार नहीं बना सकता, जो वह कुछ दिन पहले देख रहा था। यहाँ, जहाँ के जीवन में प्रतिभा का आहार बिलकुल नहीं मिलता, जहाँ चरित्र घुटकर मर जाता है, और जीती हैं केवल लिप्साएँ, उग्र पाप-भावनाएँ, जहाँ के जीवन का सार है ग़रीबी, कायरता, दम्भ और व्यभिचार, जहाँ प्रत्येक वस्तु एक धातु के टुकड़े पर निछावर होती है, जहाँ लोग पर्वतों के मुख को काला कर रहे हैं अपने ओछे, छिछोरे, पतित, निरर्थक जीवन से! इससे वह दासत्व ही अच्छा, वह भीड़-भड़क्का, वह रोग, पीलापन और घुलती हुई मृत्यु। करुणा रोती है तो उसे रोने दो, वह यदि बलि है तो हमारी सभ्यता की, जिसे बनाए रखना हमारा कर्त्तव्य है और जिसमें मेरी प्रतिभा का एकमात्र आधार है। और यह निश्चय करके गिरीश होटल पहुँचा। वहाँ उसने अपना सामान बाँधा और सायंकाल ही को लौट गया वहीं जहाँ से आया था - अपने संसार के सभ्य जीवन में, जो पहाड़ी जीवन की सभ्यताओं में उलझा हुआ नहीं है, यद्यपि उसमें भीड़ है, और रोग हैं, और घुला मारनेवाली मृत्यु है और है करुणा का रोदन, जिसे कोई सुनता ही नहीं। और पहाड़ों में यह नित्य ही होता है, शायद दिन में कई बार होता है। नीचे के समतल प्रदेशों से अपनी सभ्यता और शान्ति-रूपी घातक औषधियों द्वारा जीवित रहनेवाले लोग आते हैं - पहाड़ों पर अपने निर्बल हृदय और निर्बलतम पाचनशक्तियाँ लेकर, और लौट जाते हैं भन्नाते हुए मस्तिष्क और मतली से आक्रान्त उदर लेकर। क्योंकि ये पर्वत-ये मूक, विराट्, अभिमानी और लापरवाह पर्वत-अपना रहस्य खोले नहीं फिरते, अपना हृदय उघाड़कर दिखाते नहीं फिरते, उन्हें वही देख और खोज पाता है, जो उनकी खोज़ में निरत रहता है, जो उनके लिए अनवरत यत्न करने की क्षमता रखता है, और जो इतना सहिष्णु होता है कि उन्हें देखकर चौंधिया नहीं जाता, अन्धा नहीं हो जाता। पहाड़ कुछ कहते नहीं, उनके जिह्वा है ही नहीं। उनकी कहानी की सत्यता फिर भी न कही जाती, वैसी ही रह जाती, केवल पढ़ने की क्षमता रखनेवाले उसे पढ़ते और समझते और पर्वतों से प्रेम करते। क्योंकि वह है ही अकथ्य, जैसे सभी गहरी बातें अकथ्य होती हैं - गहरा प्रेम, गहरी वेदना, गहरा सौन्दर्य, गहरा आह्लाद, गहरी भूख। जब एक पहाड़ी घोड़ा न लादने पर पिटता है, और फिर संन्यासी होकर लापता हो जाता है, तब पहाड़ उसकी उस गहरी आत्मग्लानि का चित्र नहीं खींचते जिसके कारण वह ऐसा करने को बाध्य होता है, जिसके कारण वह अपने कुटुम्बियों, अपने बाल-बच्चों का ध्यान भुलाकर, अपने व्यक्तित्व को इसलिए कुचल डालता है कि उस व्यक्तिगत जीवन में केवल परमुखापेक्षा, झुकना, प्रपीड़न और दासत्व की प्रतारणा है; वे चुप ही रह जाते हैं। और जब उसी पहाड़ी की लड़की, अपने पिता को पीटने वाले के मुख से दर्प और आत्मश्लाघा-भरे शब्दों में वही कहानी सुनती है, तब वे किसी से उसके व्यथा भरे जड़-विस्मय का रहस्य कहने नहीं जाते; जब कोई पहाड़ी, यह समझकर कि लोग उनके घर आते हैं केवल उनकी स्त्रियों को भ्रष्ट करने, उनके भोलेपन से और उनकी नैसर्गिकता से लाभ उठाकर उन्हें पतित और बदनाम करने, उन लोगों के प्रति उपेक्षा का बर्ताव करता है, तब पर्वत किसी देखनेवाले को उस उपेक्षा का कारण नहीं बताते फिरते। जब एक पहाड़ी कन्या अपने शत्रु, अपने पिता के घातक से एक दिन और समय नियत करती है, ताकि वह उससे बदला लेने का उचित उपाय सोच सके, तब वे पर्वत उस कन्या के किसी आलोचक को सत्य का निदर्शन कराने नहीं जाते, उसकी मानसिक प्रगति समझाने की चेष्टा नहीं करते; और अन्त में, जब कोई उनके विषय में अत्यन्त अनुचित, अन्यायपूर्ण भावना लेकर, उनकी विशाल स्वच्छन्दता और शक्तिमत्ता को छोड़कर लौट जाता है अपने घिरे हुए, बँधे हुए, कलुषित, मारक, चूहेदान जैसे संसार में, तब वे उसे वापस भी नहीं बुलाते। वे उसी भव्य, विराट्, उपेक्षा-पूर्ण कठोर मुस्कराहट से निश्चल आकाश की ओर देखा करते हैं। |
जोधपुर, 12 सितंबर (हि.स.)। राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान की ओर से चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय हिसार के अपैरल एवं टैक्सटाइल डिजाइन विभाग के स्टूडेन्ट्स के लिए दस दिवसीय एडवांस प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरूआत हुई।
इस कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए संस्थान के निदेशक प्रो. जीएचएस प्रसाद ने कहा कि यह कार्यक्रम छात्राओं को डिजाइन प्रक्रिया, पैटर्न बनाने, परिधान निर्माण, सतह सजावट और प्रिंट विकास का उन्नत ज्ञान प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस दस दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की योजना का उद्देश्य पैटर्न निर्माण, परिधान निर्माण और कपड़ा डिजाइनिंग के विभिन्न पहलुओं, डिज़ाइन के तत्वों और सिद्धांतों की समझ प्रदान करके प्राथमिक डिज़ाइन विकास पर ज़ोर देना व डिज़ाइन प्रक्रिया, मैनुअल और डिजिटल प्रिंट को विकसित करना है। असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रुचि खोलिया ने बताया कि इस कार्यक्रम के समापन पर इन छात्राओं द्वारा एक थीम आधारित परिधान डिजाइन निर्माण किया जायेगा। जिसका लाभ छात्राओं को अपने करियर निर्माण में होगा। इस कार्यक्रम के समन्वय फैशन डिजाइन विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. मदन लाल रेगर, डॉ. अदिति मेड़तिया और डॉ. रुचि खोलिया हैं।
| जोधपुर, बारह सितंबर । राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान की ओर से चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय हिसार के अपैरल एवं टैक्सटाइल डिजाइन विभाग के स्टूडेन्ट्स के लिए दस दिवसीय एडवांस प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरूआत हुई। इस कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए संस्थान के निदेशक प्रो. जीएचएस प्रसाद ने कहा कि यह कार्यक्रम छात्राओं को डिजाइन प्रक्रिया, पैटर्न बनाने, परिधान निर्माण, सतह सजावट और प्रिंट विकास का उन्नत ज्ञान प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस दस दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की योजना का उद्देश्य पैटर्न निर्माण, परिधान निर्माण और कपड़ा डिजाइनिंग के विभिन्न पहलुओं, डिज़ाइन के तत्वों और सिद्धांतों की समझ प्रदान करके प्राथमिक डिज़ाइन विकास पर ज़ोर देना व डिज़ाइन प्रक्रिया, मैनुअल और डिजिटल प्रिंट को विकसित करना है। असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रुचि खोलिया ने बताया कि इस कार्यक्रम के समापन पर इन छात्राओं द्वारा एक थीम आधारित परिधान डिजाइन निर्माण किया जायेगा। जिसका लाभ छात्राओं को अपने करियर निर्माण में होगा। इस कार्यक्रम के समन्वय फैशन डिजाइन विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. मदन लाल रेगर, डॉ. अदिति मेड़तिया और डॉ. रुचि खोलिया हैं। |
भा. उत्तम पुत्र उसको कहा जाता है जो पिता के मन की चार्ता समझ कर आगे ही कार्य करले, जो कहने पर करे वह मध्यम है जो माता पिता के कहे को श्रद्धा से करे या देर से करे सो अथम कहा है जो क्ले से भी काम को करे ही नहीं सो तो पुत्र नहीं है एक प्रकार रा माता पिता का मल समझा जाता है वेग होने पर मल गिर गया उसमें एक कोट पेदा होगया ।।८।।
३१ - नरक गति
लो. -ये परस्सापहर्तारि स्तद्गुणा नाम सूर्यकाः । परश्रियाऽभिस्तप्यन्ते तेरै निरय गामिनः ।१। अर्थ-नर्क गति कहते है जो पुरुष पराया धन हर लेते हैं किसी के गुणों में दोप लगाते है पराई निभूति को देस कर तपते रहते हैं ।१।
लो. -कृपानांच तडागानां प्रपानांच परं तपः । स्थ्यानां चैन भेचारस्ते निरयगामिनः । २ अर्थ -- जो हुआ वाडी, तलाव, प्रपा (जल पीने का मकान) गली बाजार इन सनको जो तोड फोड देते हैं । २। लो०- पिसृज्यादन्ति ये दारान् शिशून भृत्यातिथस्तथा । उत्सृज्य पितृदेवेज्या स्तेवै निरय गामिनः । ३। | भा. उत्तम पुत्र उसको कहा जाता है जो पिता के मन की चार्ता समझ कर आगे ही कार्य करले, जो कहने पर करे वह मध्यम है जो माता पिता के कहे को श्रद्धा से करे या देर से करे सो अथम कहा है जो क्ले से भी काम को करे ही नहीं सो तो पुत्र नहीं है एक प्रकार रा माता पिता का मल समझा जाता है वेग होने पर मल गिर गया उसमें एक कोट पेदा होगया ।।आठ।। इकतीस - नरक गति लो. -ये परस्सापहर्तारि स्तद्गुणा नाम सूर्यकाः । परश्रियाऽभिस्तप्यन्ते तेरै निरय गामिनः ।एक। अर्थ-नर्क गति कहते है जो पुरुष पराया धन हर लेते हैं किसी के गुणों में दोप लगाते है पराई निभूति को देस कर तपते रहते हैं ।एक। लो. -कृपानांच तडागानां प्रपानांच परं तपः । स्थ्यानां चैन भेचारस्ते निरयगामिनः । दो अर्थ -- जो हुआ वाडी, तलाव, प्रपा गली बाजार इन सनको जो तोड फोड देते हैं । दो। लोशून्य- पिसृज्यादन्ति ये दारान् शिशून भृत्यातिथस्तथा । उत्सृज्य पितृदेवेज्या स्तेवै निरय गामिनः । तीन। |
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इसके अलावा, यहां तक कि ग्राहक भी गैर-ग्राहकों के साथ साझा करने के लिए कहानियों के स्क्रीनशॉट नहीं ले पाएंगे। आगामी फीचर का उद्देश्य प्लेटफॉर्म पर उपयोगकर्ताओं को लुभाना है। यह उम्मीद की जाती है कि अधिक राजस्व धाराएँ सामग्री निर्माताओं को उनके इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर अधिक आकर्षक सामग्री साझा करने के लिए बढ़ावा देंगी।
| आपको शायद आने वाले भविष्य में इंस्टाग्राम स्टोरीज के लिए भुगतान करना शुरू करना पड़ सकता है, क्योंकि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कथित तौर पर अपने रचनाकारों के लिए एक नई मुद्रीकरण सुविधा शुरू करने की योजना बना रहा है। अनुमानित फीचर का इस्तेमाल करते हुए इंस्टाग्राम क्रिएटर्स अपने फॉलोअर्स को एक्सक्लूसिव स्टोरीज ऑफर करेंगे। यह फीचर ट्विटर के 'सुपर फॉलोअर्स' के समान है, जो केवल चुनिंदा उपयोगकर्ताओं को माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म पर किसी क्रिएटर के ट्वीट पढ़ने की अनुमति देता है। यहां तक कि YouTube भी चुनिंदा क्रिएटर्स को समान सदस्यता प्रदान करता है ताकि केवल सब्सक्राइबर ही उनकी सामग्री को स्ट्रीम करने के लिए भुगतान करें। ट्विटर ने हाल ही में 'सुपर फॉलो' फीचर लॉन्च किया था। फिलहाल, चुनिंदा फॉलोअर्स वाले ट्विटर क्रिएटर्स केवल अपने फॉलोअर्स को एक्सक्लूसिव ट्वीट्स ऑफर कर सकते हैं। इंस्टाग्राम अब माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म के नक्शेकदम पर चल रहा है। एएनआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, डेवलपर एलेसेंड्रो पलुज़ी ने सबसे पहले इंस्टाग्राम एक्सक्लूसिव स्टोरीज की खबर के बारे में बताया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने बाद में विकास की पुष्टि की। इसके अलावा, यहां तक कि ग्राहक भी गैर-ग्राहकों के साथ साझा करने के लिए कहानियों के स्क्रीनशॉट नहीं ले पाएंगे। आगामी फीचर का उद्देश्य प्लेटफॉर्म पर उपयोगकर्ताओं को लुभाना है। यह उम्मीद की जाती है कि अधिक राजस्व धाराएँ सामग्री निर्माताओं को उनके इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर अधिक आकर्षक सामग्री साझा करने के लिए बढ़ावा देंगी। |
रेल विभाग द्वारा बेशक यात्रियों को सुविधाएं देने का दावे करता है लेकिन विभाग के डीआरयूसीसी सदस्य ने विभागीय अधिकारियों की लापरवाही की पोल खोल दी।
संवाद सूत्र, फिरोजपुर : रेल विभाग द्वारा बेशक यात्रियों को सुविधाएं देने का दावे करता है, लेकिन विभाग के डीआरयूसीसी सदस्य ने विभागीय अधिकारियों की लापरवाही की पोल खोल दी। फिरोजपुर के राम बाग रोड निवासी एडवोकेट योगेश गुप्ता ने बताया कि रेल मंत्रालय की ओर से उन्हें फिरोजपुर मंडल का सदस्य नियुक्त किया गया था, ताकि वह यात्रियों की समस्याओं को अधिकारियो के समक्ष उठा उनका समाधान करवा सके। इसके लिए बकायदा तौर पर उनकी डीआरएम सहित अन्य अधिकारियो के साथ बैठक भी होती है।
संस, अबोहर : पीडब्ल्यूडी फील्ड एवं वर्कशाप वर्कर्ज यूनियन शाखा अबोहर की बैठक शनिवार को हुई, जिसमें वक्ताअेां ने कहा कि मांगें न मानने के विरोध में 16 फरवरी को वाटर सप्लाई एवं सीवरेज बोर्ड के एक्सईएन के खिलाफ धरना लगाया जाएगा।
प्रांतीय नेता लाल चंद सप्पांवाली ने कहा कि एक्सईएन ने कई बार उनकी मांगों को आश्वासन दिया लेकिन आज तक मांगें पूरी नहीं की। इसी के रोष स्वरूप 16 फरवरी को उनके कार्यालय के समक्ष धरना लगाया जाएगा। इस मौके पर रामराज, पूर्ण सिंह, लाल चंद सप्पांवाली, मुन्ना लाल, इन्द्र मोहन आदि मौजूद थे।
| रेल विभाग द्वारा बेशक यात्रियों को सुविधाएं देने का दावे करता है लेकिन विभाग के डीआरयूसीसी सदस्य ने विभागीय अधिकारियों की लापरवाही की पोल खोल दी। संवाद सूत्र, फिरोजपुर : रेल विभाग द्वारा बेशक यात्रियों को सुविधाएं देने का दावे करता है, लेकिन विभाग के डीआरयूसीसी सदस्य ने विभागीय अधिकारियों की लापरवाही की पोल खोल दी। फिरोजपुर के राम बाग रोड निवासी एडवोकेट योगेश गुप्ता ने बताया कि रेल मंत्रालय की ओर से उन्हें फिरोजपुर मंडल का सदस्य नियुक्त किया गया था, ताकि वह यात्रियों की समस्याओं को अधिकारियो के समक्ष उठा उनका समाधान करवा सके। इसके लिए बकायदा तौर पर उनकी डीआरएम सहित अन्य अधिकारियो के साथ बैठक भी होती है। संस, अबोहर : पीडब्ल्यूडी फील्ड एवं वर्कशाप वर्कर्ज यूनियन शाखा अबोहर की बैठक शनिवार को हुई, जिसमें वक्ताअेां ने कहा कि मांगें न मानने के विरोध में सोलह फरवरी को वाटर सप्लाई एवं सीवरेज बोर्ड के एक्सईएन के खिलाफ धरना लगाया जाएगा। प्रांतीय नेता लाल चंद सप्पांवाली ने कहा कि एक्सईएन ने कई बार उनकी मांगों को आश्वासन दिया लेकिन आज तक मांगें पूरी नहीं की। इसी के रोष स्वरूप सोलह फरवरी को उनके कार्यालय के समक्ष धरना लगाया जाएगा। इस मौके पर रामराज, पूर्ण सिंह, लाल चंद सप्पांवाली, मुन्ना लाल, इन्द्र मोहन आदि मौजूद थे। |
स्थान : देशनोक करणी माता का मंदिर। मंदिर के ठीक बाहर खुला मैदान। एक नहीं बल्कि दर्जनों अस्थायी दुकानें सज गई हैं। प्लास्टिक के डिब्बों में प्रसाद, करणी माता के चित्र वाले की रिंग, कार के आगे लगाने वाली तस्वीर, बच्चों के लिए हर तरह के खिलौने, चुनरी। वो सब कुछ इस चौक में नजर आता है जो आमतौर पर मेलों में दिखता है। दूर गांव से महिलाएं घरों पर चाकू, चकले, बैलन भी बनाकर लाई है ताकि बेचकर रोटी का इंतजाम कर सके।
इन सबके विपरीत चौक में सन्नाटा पसरा हुआ है। दुकानें है, खिलौने हैं, बस ग्राहक नहीं है। कोरोना के बढ़ते केस को देखते हुए करणी माता मंदिर को 13 से 21 अप्रैल तक बंद कर दिया गया है। श्रद्धालु मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकते। ऐसे में नवरात्र में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या महज 20% रह गई। ये श्रद्धालु भी मंदिर के बाहर से ही हाथ जोड़कर निकल जाते हैं। ऐसे में खरीददारों का अभाव है। दुकानदार आमतौर पर ग्राहक को अपनी ओर खींचने के लिए पानी से हाथ धुलवाने के बहाने पानी से भरी गिलास लिए खड़ा रहता है, जैसे ही श्रद्धालु हाथ धोता है, उसे प्रसाद लेने के लिए प्रेरित किया जाता है। इस बार दुकानदार गिलास लेकर ही खड़े है लेकिन ग्राहक नहीं है।
नवरात्र के दौरान देशनोक में प्रवेश करना मुश्किल होता है। एक से डेढ़ किलोमीटर दूर यातायात पुलिस वाहनों को रोक देती है। इस बार ऐसा कुछ नहीं है। आप मंदिर के ठीक पास अपना वाहन ले जा सकते हैं। आमतौर पर जहां कदम रखने को जगह नहीं है, वहां पक्षियों का जमावड़ा है और आराम से गेहूं के दाने चुग रहे हैं। मंदिर के मुख्य कपाट बंद है। कुछ मंदिर कर्मचारी ही अंदर आते-जाते दिख रहे हैं।
जो लोग आसपास की दुकानों से प्रसाद लेकर आ रहे हैं, वो सिक्याेरिटी पर ही एक शख्स ले लेता है। वो कुछ प्रसाद रखता है और शेष वापस दे देता है। कहा जा रहा है कि यह प्रसाद बाद में निज मंदिर तक पहुंच जाता है। हालांकि इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही।
बीकानेर में देशनोक के अलावा नागणेचीजी मंदिर में भी ऐसे ही हालात है। यहां मंदिर के बाहर एक LED लगा दिया गया है। जहां श्रद्धालु दर्शन करके वापस लौट रहे हैं। मंदिर के अंदर आम श्रद्धालुओं को प्रवेश नहीं मिल रहा है। ऐसे में यहां लगने वाला मेला भी खत्म हो गया। आमतौर पर यहां भी लंबे-चौड़े क्षेत्र में नवरात्र में शाम से देर रात तक मेला भरता है। मंदिर में दिनभर भजन-कीर्तन चलते हैं। श्रद्धालु बड़े भाव से यहां देर रात तक भजनों में हिस्सा लेते हैं।
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| स्थान : देशनोक करणी माता का मंदिर। मंदिर के ठीक बाहर खुला मैदान। एक नहीं बल्कि दर्जनों अस्थायी दुकानें सज गई हैं। प्लास्टिक के डिब्बों में प्रसाद, करणी माता के चित्र वाले की रिंग, कार के आगे लगाने वाली तस्वीर, बच्चों के लिए हर तरह के खिलौने, चुनरी। वो सब कुछ इस चौक में नजर आता है जो आमतौर पर मेलों में दिखता है। दूर गांव से महिलाएं घरों पर चाकू, चकले, बैलन भी बनाकर लाई है ताकि बेचकर रोटी का इंतजाम कर सके। इन सबके विपरीत चौक में सन्नाटा पसरा हुआ है। दुकानें है, खिलौने हैं, बस ग्राहक नहीं है। कोरोना के बढ़ते केस को देखते हुए करणी माता मंदिर को तेरह से इक्कीस अप्रैल तक बंद कर दिया गया है। श्रद्धालु मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकते। ऐसे में नवरात्र में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या महज बीस% रह गई। ये श्रद्धालु भी मंदिर के बाहर से ही हाथ जोड़कर निकल जाते हैं। ऐसे में खरीददारों का अभाव है। दुकानदार आमतौर पर ग्राहक को अपनी ओर खींचने के लिए पानी से हाथ धुलवाने के बहाने पानी से भरी गिलास लिए खड़ा रहता है, जैसे ही श्रद्धालु हाथ धोता है, उसे प्रसाद लेने के लिए प्रेरित किया जाता है। इस बार दुकानदार गिलास लेकर ही खड़े है लेकिन ग्राहक नहीं है। नवरात्र के दौरान देशनोक में प्रवेश करना मुश्किल होता है। एक से डेढ़ किलोमीटर दूर यातायात पुलिस वाहनों को रोक देती है। इस बार ऐसा कुछ नहीं है। आप मंदिर के ठीक पास अपना वाहन ले जा सकते हैं। आमतौर पर जहां कदम रखने को जगह नहीं है, वहां पक्षियों का जमावड़ा है और आराम से गेहूं के दाने चुग रहे हैं। मंदिर के मुख्य कपाट बंद है। कुछ मंदिर कर्मचारी ही अंदर आते-जाते दिख रहे हैं। जो लोग आसपास की दुकानों से प्रसाद लेकर आ रहे हैं, वो सिक्याेरिटी पर ही एक शख्स ले लेता है। वो कुछ प्रसाद रखता है और शेष वापस दे देता है। कहा जा रहा है कि यह प्रसाद बाद में निज मंदिर तक पहुंच जाता है। हालांकि इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही। बीकानेर में देशनोक के अलावा नागणेचीजी मंदिर में भी ऐसे ही हालात है। यहां मंदिर के बाहर एक LED लगा दिया गया है। जहां श्रद्धालु दर्शन करके वापस लौट रहे हैं। मंदिर के अंदर आम श्रद्धालुओं को प्रवेश नहीं मिल रहा है। ऐसे में यहां लगने वाला मेला भी खत्म हो गया। आमतौर पर यहां भी लंबे-चौड़े क्षेत्र में नवरात्र में शाम से देर रात तक मेला भरता है। मंदिर में दिनभर भजन-कीर्तन चलते हैं। श्रद्धालु बड़े भाव से यहां देर रात तक भजनों में हिस्सा लेते हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
अजब-गजब । । एक आम आदमी तब तक गरीब है, जब तक ईश्वर उसका साथ नहीं देता। लेकिन जब ईश्वर किसी की सुनता है तो फिर छप्पड़ फाड़ के देता है। ऐसे में तकदीर बलदने में देर नहीं लगती। कुछ ऐसी ही घटना हाल ही में देखने को मिली। जहाँ एक मामूली ट्रक Driver की जिंदगी रातों-रात बदल गई।
दरअसल, इस Driver ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि एक ही दिन में वह करोड़पति बन जाएगा। लेकिन उसकी किस्मत ने कुछ ऐसा रुख बदला कि वह Jackpot में 2 हज़ार करोड़ रुपए से भी ज्यादा धन राशि जीत गया।
बता दें कि यह पूरा मामला अमेरिका का है। जहाँ शुक्रवार (25 जनवरी) को न्यूयॉर्क में एक ट्रक Driver ने Jackpot जीत कर लाटरी इतिहास में दूसरी सबसे बड़ी रकम जीतने का दावा किया।
खबर के मुताबिक इस ट्रक Driver ने Jackpot में लगभग 2112 करोड़ रुपए जीते। सीएनएन से संबंधित WABC के अनुसार Driver का नाम डेविड Johnson है जोकि 56 वर्षीया है और न्यूयॉर्क में रहता है। Johnson ने कहा कि वह इतनी बड़ी रकम जीतने के बाद बेहद खुश है और काम पर जाना भी बंद कर चुका है।
Johnson ने कभी सोचा भी नही था कि मामूली ट्रक Driver होते हुए भी वह एक दिन करोड़पति बन जाएगा। न्यूयॉर्क लाटरी द्वारा ज़ारी किए गए एक बयान में उन्होंने बताया कि Johnson नामक व्यक्ति ने 26 दिसंबर को उनके यहाँ लाटरी खेली थी। इस लाटरी का नंबर 5-25-38-52-67 और पावरबॉल 24 था।
इस लाटरी में जीतने के बाद Johnson ने कैश आप्शन को चुना इसलिए सभी प्रकार के टैक्स काटने के बाद उसे कुल 8,08,26,57,000 रुपया दिया जाएगा। इस बड़ी जीत के बाद Johnson ने मीडिया को बताया कि वह इतना खुश है कि खाना तक नहीं ठीक से खा पा रहा। वैसे देखा जाए तो Johnson की ख़ुशी जायज़ है। जो व्यक्ति कल तक ठीक से रोटी कमाने के लायक भी नहीं था आज वो इतना कमा चुका है कि हर ऐशो आराम उसके लिए चुटकी बजाने जितना आसान होगा।
| अजब-गजब । । एक आम आदमी तब तक गरीब है, जब तक ईश्वर उसका साथ नहीं देता। लेकिन जब ईश्वर किसी की सुनता है तो फिर छप्पड़ फाड़ के देता है। ऐसे में तकदीर बलदने में देर नहीं लगती। कुछ ऐसी ही घटना हाल ही में देखने को मिली। जहाँ एक मामूली ट्रक Driver की जिंदगी रातों-रात बदल गई। दरअसल, इस Driver ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि एक ही दिन में वह करोड़पति बन जाएगा। लेकिन उसकी किस्मत ने कुछ ऐसा रुख बदला कि वह Jackpot में दो हज़ार करोड़ रुपए से भी ज्यादा धन राशि जीत गया। बता दें कि यह पूरा मामला अमेरिका का है। जहाँ शुक्रवार को न्यूयॉर्क में एक ट्रक Driver ने Jackpot जीत कर लाटरी इतिहास में दूसरी सबसे बड़ी रकम जीतने का दावा किया। खबर के मुताबिक इस ट्रक Driver ने Jackpot में लगभग दो हज़ार एक सौ बारह करोड़ रुपए जीते। सीएनएन से संबंधित WABC के अनुसार Driver का नाम डेविड Johnson है जोकि छप्पन वर्षीया है और न्यूयॉर्क में रहता है। Johnson ने कहा कि वह इतनी बड़ी रकम जीतने के बाद बेहद खुश है और काम पर जाना भी बंद कर चुका है। Johnson ने कभी सोचा भी नही था कि मामूली ट्रक Driver होते हुए भी वह एक दिन करोड़पति बन जाएगा। न्यूयॉर्क लाटरी द्वारा ज़ारी किए गए एक बयान में उन्होंने बताया कि Johnson नामक व्यक्ति ने छब्बीस दिसंबर को उनके यहाँ लाटरी खेली थी। इस लाटरी का नंबर पाँच पच्चीस अड़तीस-बावन-सरसठ और पावरबॉल चौबीस था। इस लाटरी में जीतने के बाद Johnson ने कैश आप्शन को चुना इसलिए सभी प्रकार के टैक्स काटने के बाद उसे कुल आठ,आठ,छब्बीस,सत्तावन,शून्य रुपयापया दिया जाएगा। इस बड़ी जीत के बाद Johnson ने मीडिया को बताया कि वह इतना खुश है कि खाना तक नहीं ठीक से खा पा रहा। वैसे देखा जाए तो Johnson की ख़ुशी जायज़ है। जो व्यक्ति कल तक ठीक से रोटी कमाने के लायक भी नहीं था आज वो इतना कमा चुका है कि हर ऐशो आराम उसके लिए चुटकी बजाने जितना आसान होगा। |
राधाकृष्णा के मुताबिक, वर्तमान में जो माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म हैं, उनमें अंग्रेजी भाषाई से बाहर के लोगों के बीच बढ़ने की संभावना नहीं है. जबकि Koo पर भारतीय भाषाओं में अपने विचार प्रकट करने की आजादी मिलती है.
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने पिछले साल जुलाई में आत्मनिर्भर भारत ऐप इनोवेशन चैलेंज (Aatm Nirbhar Bharat App Innovation Challenge) लॉन्च किया था. यह चैलेंज ऐसे भारतीय ऐप्स (Indian Apps) की पहचान के लिए था, जो लोग पहले से इस्तेमाल कर रहे हैं और जिनमें अपनी श्रेणी में विश्व स्तर (World level) के ऐप्स बनने की क्षमता है.
अटल इनोवेशन मिशन (Atal Innovation Mission) के तहत 8 कैटगरी में यह आत्मनिर्भर भारत ऐप इनोवेशन चैलेंज लॉन्च किया गया था, जिसमें एक कैटगरी सोशल नेटवर्किंग ऐप की भी थी. इसी कैटगरी में अप्रमेय राधाकृष्णा नाम के युवक ने Koo नाम से माइक्रोब्लॉगिगं स्टार्टअप के जरिये प्रतियोगिता जीती थी. तब से महज 10 महीने के अंदर इस माइक्रोब्लॉगिगं स्टार्टअप Koo ने 41 लाख डॉलर यानी 29.84 करोड़ रुपये का फंड जुटा लिया है.
10 महीने के अंदर 30 करोड़ रुपये जुटा लेना बड़ी बात है. स्वदेशी माइक्रोब्लॉगिंग स्टार्टअप Koo इस पूंजी के जरिये अपनी क्षमता और पहुंच बढ़ाएगा. कंपनी की ओर से जारी बयान के मुताबिक, भारतीय माहौल में सामने आने वाली चुनौतियों और अपने ऐप के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लिए इस फंड का इस्तेमाल किया जाएगा.
किन निवेशकों से जुटाए फंड?
कू (Koo) एक Made in India ऐप है, जो ट्विटर की तरह काम करता है. यह लोगों को अपनी भाषा में अपने विचार व्यक्त करने की आजादी देता है. इस ऐप को देसी ट्विटर भी कहा जाता है. स्वदेशी ऐप कू की शुरुआत अप्रमेय राधाकृष्णा ने किया था जो कैब-हेलिंग कंपनी TaxiForSure के को-फाउंडर भी रहे हैं. हालांकि इस ऐप को उसके सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी ने करीब 5 साल पहले अधिग्रहित कर लिया था.
खबरों के मुताबिक, कू ने 2984 करोड़ का यह फंड अर्ली स्टेड वेंचर कैपिटल फर्म थ्रीवनफोर कैपिटल (3one4 Capital), Accel Partners, Kalaari Capital, Blume Ventures और Dream Incubator जैसे निवेशकों से जुटाए हैं. थ्रीवनफोर कैपिटल के निवेशकों में इंफोसिस (Infosys) के पूर्व सीनियर एग्जेक्यूटिव मोहनदास पई भी एक हैं.
क्या खासियते हैं Koo ऐप की?
राधाकृष्णा के मुताबिक, वर्तमान में जो माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म हैं, उनमें अंग्रेजी भाषाई लोगों से बाहर के लोगों के बीच बढ़ने की संभावना नहीं है. जबकि Koo पर भारतीय भाषाओं में अपने विचार प्रकट करने की आजादी मिलती है. उनका मानना है कि Koo आने वाले समय में भारतीयों की आवाज को एक भारतीय प्लेटफॉर्म पर और मजबूत करेगा.
थ्रीवनफोर कैपिटल के प्रमुख अनुराग रामदासन के मुताबिक भारतीय संदर्भ में Koo बहुत वैल्यूबल और पॉवरफुल प्लेटफॉर्म है. उनका कहना है कि देश में सोशल प्लेटफॉर्म को भाषा से परे रखना चाहिए. देश में एक ऐसा सोशल प्लेटफॉर्म हो, जहां हर प्रकार के लोग अपनी राय व्यक्त करने में समर्थ हो.
भारत विविधताओं से भरा देश है. यहां कई भाषाएं बोली जाती हैं. ऐसे में फेसबुक, ट्विटर और वाट्सऐप के विकल्प के तौर पर कई ऐसे ऐप के यूजर्स तेजी से बढ़ रहे हैं, जो क्षेत्रीय भाषाओं में अपनी राय रखने की आजादी दे रहे हैं. इनमें नमस्ते भारत, इंडियन मैसेंजर, एलीमेंट्स, टूटर और कू(Koo) जैसे ऐप शामिल हैं.
बता दें कि बाबा रामदेव के पतंजलि आयुर्वेद ने भी करीब तीन साल पहले वर्ष 2018 में किम्भो ऐप (Kimbho App) के जरिये सोशल नेटवर्किंग सेग्मेंट में कदम रखा था. हालांकि प्राईवेसी से जुड़ी चिंताओं के कारण योजना सफल नहीं हो पाई थी.
स्टैटिस्टा के मुताबिक, देश में सोशल नेटवर्क यूजर्स की संख्या वर्ष 2015 में महज 14.2 करोड़ थी, जो 2018 में तेजी से बढ़कर 32.6 करोड़ हो गई. अनुमान है कि वर्ष 2023 तक यह आंकड़ा बढ़कर 44.7 करोड़ हो जाएगा. वेब ट्रैफिक एनालिसिस वेबसाइट स्टैटकाउंटर के मुताबिक जनवरी 2021 में फेसबुक की सोशल मीडिया मार्केट में हिस्सेदारी 82.53 फीसदी थी जबकि ट्विटर की महज 2.52 फीसदी हिस्सेदारी थी.
| राधाकृष्णा के मुताबिक, वर्तमान में जो माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म हैं, उनमें अंग्रेजी भाषाई से बाहर के लोगों के बीच बढ़ने की संभावना नहीं है. जबकि Koo पर भारतीय भाषाओं में अपने विचार प्रकट करने की आजादी मिलती है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले साल जुलाई में आत्मनिर्भर भारत ऐप इनोवेशन चैलेंज लॉन्च किया था. यह चैलेंज ऐसे भारतीय ऐप्स की पहचान के लिए था, जो लोग पहले से इस्तेमाल कर रहे हैं और जिनमें अपनी श्रेणी में विश्व स्तर के ऐप्स बनने की क्षमता है. अटल इनोवेशन मिशन के तहत आठ कैटगरी में यह आत्मनिर्भर भारत ऐप इनोवेशन चैलेंज लॉन्च किया गया था, जिसमें एक कैटगरी सोशल नेटवर्किंग ऐप की भी थी. इसी कैटगरी में अप्रमेय राधाकृष्णा नाम के युवक ने Koo नाम से माइक्रोब्लॉगिगं स्टार्टअप के जरिये प्रतियोगिता जीती थी. तब से महज दस महीने के अंदर इस माइक्रोब्लॉगिगं स्टार्टअप Koo ने इकतालीस लाख डॉलर यानी उनतीस.चौरासी करोड़ रुपये का फंड जुटा लिया है. दस महीने के अंदर तीस करोड़ रुपये जुटा लेना बड़ी बात है. स्वदेशी माइक्रोब्लॉगिंग स्टार्टअप Koo इस पूंजी के जरिये अपनी क्षमता और पहुंच बढ़ाएगा. कंपनी की ओर से जारी बयान के मुताबिक, भारतीय माहौल में सामने आने वाली चुनौतियों और अपने ऐप के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लिए इस फंड का इस्तेमाल किया जाएगा. किन निवेशकों से जुटाए फंड? कू एक Made in India ऐप है, जो ट्विटर की तरह काम करता है. यह लोगों को अपनी भाषा में अपने विचार व्यक्त करने की आजादी देता है. इस ऐप को देसी ट्विटर भी कहा जाता है. स्वदेशी ऐप कू की शुरुआत अप्रमेय राधाकृष्णा ने किया था जो कैब-हेलिंग कंपनी TaxiForSure के को-फाउंडर भी रहे हैं. हालांकि इस ऐप को उसके सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी ने करीब पाँच साल पहले अधिग्रहित कर लिया था. खबरों के मुताबिक, कू ने दो हज़ार नौ सौ चौरासी करोड़ का यह फंड अर्ली स्टेड वेंचर कैपिटल फर्म थ्रीवनफोर कैपिटल , Accel Partners, Kalaari Capital, Blume Ventures और Dream Incubator जैसे निवेशकों से जुटाए हैं. थ्रीवनफोर कैपिटल के निवेशकों में इंफोसिस के पूर्व सीनियर एग्जेक्यूटिव मोहनदास पई भी एक हैं. क्या खासियते हैं Koo ऐप की? राधाकृष्णा के मुताबिक, वर्तमान में जो माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म हैं, उनमें अंग्रेजी भाषाई लोगों से बाहर के लोगों के बीच बढ़ने की संभावना नहीं है. जबकि Koo पर भारतीय भाषाओं में अपने विचार प्रकट करने की आजादी मिलती है. उनका मानना है कि Koo आने वाले समय में भारतीयों की आवाज को एक भारतीय प्लेटफॉर्म पर और मजबूत करेगा. थ्रीवनफोर कैपिटल के प्रमुख अनुराग रामदासन के मुताबिक भारतीय संदर्भ में Koo बहुत वैल्यूबल और पॉवरफुल प्लेटफॉर्म है. उनका कहना है कि देश में सोशल प्लेटफॉर्म को भाषा से परे रखना चाहिए. देश में एक ऐसा सोशल प्लेटफॉर्म हो, जहां हर प्रकार के लोग अपनी राय व्यक्त करने में समर्थ हो. भारत विविधताओं से भरा देश है. यहां कई भाषाएं बोली जाती हैं. ऐसे में फेसबुक, ट्विटर और वाट्सऐप के विकल्प के तौर पर कई ऐसे ऐप के यूजर्स तेजी से बढ़ रहे हैं, जो क्षेत्रीय भाषाओं में अपनी राय रखने की आजादी दे रहे हैं. इनमें नमस्ते भारत, इंडियन मैसेंजर, एलीमेंट्स, टूटर और कू जैसे ऐप शामिल हैं. बता दें कि बाबा रामदेव के पतंजलि आयुर्वेद ने भी करीब तीन साल पहले वर्ष दो हज़ार अट्ठारह में किम्भो ऐप के जरिये सोशल नेटवर्किंग सेग्मेंट में कदम रखा था. हालांकि प्राईवेसी से जुड़ी चिंताओं के कारण योजना सफल नहीं हो पाई थी. स्टैटिस्टा के मुताबिक, देश में सोशल नेटवर्क यूजर्स की संख्या वर्ष दो हज़ार पंद्रह में महज चौदह.दो करोड़ थी, जो दो हज़ार अट्ठारह में तेजी से बढ़कर बत्तीस.छः करोड़ हो गई. अनुमान है कि वर्ष दो हज़ार तेईस तक यह आंकड़ा बढ़कर चौंतालीस.सात करोड़ हो जाएगा. वेब ट्रैफिक एनालिसिस वेबसाइट स्टैटकाउंटर के मुताबिक जनवरी दो हज़ार इक्कीस में फेसबुक की सोशल मीडिया मार्केट में हिस्सेदारी बयासी.तिरेपन फीसदी थी जबकि ट्विटर की महज दो.बावन फीसदी हिस्सेदारी थी. |
महंगाई भत्ता बढ़ाए जाने जैसी अपनी कई मांगों को लेकर सरकारी कर्मचारियों ने शुक्रवार को प्रदर्शन किया। वे हड़ताल पर रहे। इसके चलते लगभग पूरी सरकारी सेवाएं ठप रहीं। कलेक्ट्रेट में जहां सन्नाटा पसरा रहा, निगम, राजस्व, न्यायालय और अन्य सरकारी कार्यालयों में पूरे दिन कोई काम नहीं हुआ। इतना ही नहीं स्कूलों में भी बच्चों को छुट्टी दे दी गई। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर यह हड़ताल की गई थी। एक दिन पहले शासन ने 5 प्रतिशत महंगाई भत्ता दिए जाने की घोषणा की। इसका भी असर सरकारी अधिकारी और कर्मचारियों पर नहीं पड़ा। अधिकांश कर्मचारियों ने हड़ताल को अपना समर्थन दिया। हड़ताल के दौरान सिर्फ पेयजल, बिजली सप्लाई और स्वास्थ्य सुविधाओं को ही सुचारू रूप से चालू रखने का प्रयास किया गया। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी पहले ही हड़ताल पर चल रहे हैं। इसके चलते स्वास्थ्य सेवाएं पहले से ठप पड़ी हुई है।
9 प्रतिशत महंगाई भत्ता चाहिए सीएम ने 5% की घोषणा की काम कमल बंद काम बंद हड़ताल में स्वायत्तशासी कर्मचारी महासंघ भी पूरी तरह से शामिल हुआ। 5 सूत्रीय मांगों को लेकर एक दिवसीय हड़ताल में रहे। पहले सभी कर्मचारी -अधिकारी निगम गेट में सुबह 10 बजे एकजुट होकर नारेबाजी की। संगठन के शरद दुबे, संजय शर्मा, शशिभूषण मोहंती, अनिल सिंह, रामवृक्ष यादव ने कहा कि प्रदेश के कर्मचारियों को 9 प्रतिशत मंहगाई भत्ता मिलना चाहिए। लेकिन मुख्यमंत्री ने मात्र 5 प्रतिशत की घोषणा की है।
भीगते हुए भी डटे रहे कर्मचारी, जीई रोड पर लगा रहा घंटों का जाम पूरे जिले भर के अधिकारी-कर्मचारी धरना में शामिल धरना स्थल हिन्दी भवन दुर्ग के पास जुटे। जहां हजारों की संख्या में अधिकारी-कर्मचारी एकत्रित हुए। बारिश में भीगते हुए वे धरने में डटे रहे। वे रैली निकालकर पटेल चौक से न्यायालय गेट तक पहुंचे, उसके बाद वापस पटेल चौक से कलेक्ट्रेट गए। इस दौरान जीई रोड पर लंबा जाम लग गया। कर्मियों ने सातवें वेतनमान में गृह भाड़ा दिए जाने की भी मांग की संयुक्त मोर्चा ने कहा कि राज्य शासन को 7 वें वेतनमान में गृह भाड़ा भत्ता स्वीकृत करने, केंद्र के समान देय तिथि से महंगाई भत्ता स्वीकृत करने की मांग की जाएगी। पिंगुआ कमेटी का रिपोर्ट सार्वजनिक करने, जन घोषणा पत्र के अनुसार अनियमित,संविदा, दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों का नियमितीकरण करने की मांग की जाएगी।
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| महंगाई भत्ता बढ़ाए जाने जैसी अपनी कई मांगों को लेकर सरकारी कर्मचारियों ने शुक्रवार को प्रदर्शन किया। वे हड़ताल पर रहे। इसके चलते लगभग पूरी सरकारी सेवाएं ठप रहीं। कलेक्ट्रेट में जहां सन्नाटा पसरा रहा, निगम, राजस्व, न्यायालय और अन्य सरकारी कार्यालयों में पूरे दिन कोई काम नहीं हुआ। इतना ही नहीं स्कूलों में भी बच्चों को छुट्टी दे दी गई। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर यह हड़ताल की गई थी। एक दिन पहले शासन ने पाँच प्रतिशत महंगाई भत्ता दिए जाने की घोषणा की। इसका भी असर सरकारी अधिकारी और कर्मचारियों पर नहीं पड़ा। अधिकांश कर्मचारियों ने हड़ताल को अपना समर्थन दिया। हड़ताल के दौरान सिर्फ पेयजल, बिजली सप्लाई और स्वास्थ्य सुविधाओं को ही सुचारू रूप से चालू रखने का प्रयास किया गया। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी पहले ही हड़ताल पर चल रहे हैं। इसके चलते स्वास्थ्य सेवाएं पहले से ठप पड़ी हुई है। नौ प्रतिशत महंगाई भत्ता चाहिए सीएम ने पाँच% की घोषणा की काम कमल बंद काम बंद हड़ताल में स्वायत्तशासी कर्मचारी महासंघ भी पूरी तरह से शामिल हुआ। पाँच सूत्रीय मांगों को लेकर एक दिवसीय हड़ताल में रहे। पहले सभी कर्मचारी -अधिकारी निगम गेट में सुबह दस बजे एकजुट होकर नारेबाजी की। संगठन के शरद दुबे, संजय शर्मा, शशिभूषण मोहंती, अनिल सिंह, रामवृक्ष यादव ने कहा कि प्रदेश के कर्मचारियों को नौ प्रतिशत मंहगाई भत्ता मिलना चाहिए। लेकिन मुख्यमंत्री ने मात्र पाँच प्रतिशत की घोषणा की है। भीगते हुए भी डटे रहे कर्मचारी, जीई रोड पर लगा रहा घंटों का जाम पूरे जिले भर के अधिकारी-कर्मचारी धरना में शामिल धरना स्थल हिन्दी भवन दुर्ग के पास जुटे। जहां हजारों की संख्या में अधिकारी-कर्मचारी एकत्रित हुए। बारिश में भीगते हुए वे धरने में डटे रहे। वे रैली निकालकर पटेल चौक से न्यायालय गेट तक पहुंचे, उसके बाद वापस पटेल चौक से कलेक्ट्रेट गए। इस दौरान जीई रोड पर लंबा जाम लग गया। कर्मियों ने सातवें वेतनमान में गृह भाड़ा दिए जाने की भी मांग की संयुक्त मोर्चा ने कहा कि राज्य शासन को सात वें वेतनमान में गृह भाड़ा भत्ता स्वीकृत करने, केंद्र के समान देय तिथि से महंगाई भत्ता स्वीकृत करने की मांग की जाएगी। पिंगुआ कमेटी का रिपोर्ट सार्वजनिक करने, जन घोषणा पत्र के अनुसार अनियमित,संविदा, दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों का नियमितीकरण करने की मांग की जाएगी। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
लातेहार. सदर थाना क्षेत्र के बानुपर मुहल्ले से बबिता देवी पति टुनटुन भुईंया नामक एक महिला का शव घर से बरामद किया गया है. मृतका का मायका सदर थाना क्षेत्र के होटवाग ग्राम में है. मृतका के परिजनों ने बबिता की हत्या करने का आरोप पति टुनटुन भुईंया पर लगाया है. परिजनों का कहना है कि टुनटुन भुईयां ने गला दबा कर बबिता की हत्या कर दी है. पुलिस ने शव को अपने कब्जे में अंत्यपरीक्षण के लिए भेज दिया है. इस संबंध में पुलिस निरीक्षक सह थानेदार अमीत कुमार गुप्ता ने बताया कि पोस्टमार्टम रिर्पोट आने के बाद ही कुछ पता चल पायेगा.
| लातेहार. सदर थाना क्षेत्र के बानुपर मुहल्ले से बबिता देवी पति टुनटुन भुईंया नामक एक महिला का शव घर से बरामद किया गया है. मृतका का मायका सदर थाना क्षेत्र के होटवाग ग्राम में है. मृतका के परिजनों ने बबिता की हत्या करने का आरोप पति टुनटुन भुईंया पर लगाया है. परिजनों का कहना है कि टुनटुन भुईयां ने गला दबा कर बबिता की हत्या कर दी है. पुलिस ने शव को अपने कब्जे में अंत्यपरीक्षण के लिए भेज दिया है. इस संबंध में पुलिस निरीक्षक सह थानेदार अमीत कुमार गुप्ता ने बताया कि पोस्टमार्टम रिर्पोट आने के बाद ही कुछ पता चल पायेगा. |
25 May 2023, Rashifal: आज गुरुवार का दिन मेष, वृषभ राशि वालों के लिए बेहद खास रहने वाला है, कहीं नयी जगह जाने का मौका मिल सकता है और आज के दिन वाहन खरीदना आपके लिए अच्छा रहेगा। घर में नये लोगों का आगमन हो सकता है। जानिए मेष से लेकर मीन तक के राशि के बारें मे आज का दिन कैसा होगा।
मेष राशिफल (Aries)
मेष राशि वालों का भाग्य आज साथ दे रहा है। आज आप किसी काम के लिए संकल्प लेंगे तो वह कार्य पूर्ण हो जाएगा। आपने परिचित व्यक्ति से आज आपको अपमान का सामना करना पड़ सकता है, पत्नी का साथ मिलेगा।
वृषभ राशिफल (Taurus)
आज आप नया वाहन आदि खरीद सकते हैं, परिवार में नया मेहमान आ सकता है, आपको कोई नये कार्य का बड़ा ऑफर आज मिल सकता है। आज आपको अपने प्रिय से फोन पर काफी देर तक बातचीत होगी, जिससे आप काफी खुश नजर आएंगे।
मिथुन राशिफल (Gemini)
आज का दिन आपका शानदार रहेगा, मन स्थिर और प्रसन्न रहेगा, मिथुन राशि के लोगों को हर कार्य संभलकर करना चाहिए। यदि आप अपने करियर में बदलाव लाने की कोशिश कर रहे हैं तो अभी परिस्थितियां ठीक नहीं हैं।
कर्क राशिफल (Cancer)
आज का दिन आपका सोच-विचार कर काम करने का है, आप कोई बड़ा डिसीजन व्यापार व्यवसाय में न लें, नये साझेदारी में सावधानी बरतें, स्वास्थ्य का ध्यान रखें, अगर किसी की सहायता करेंगे तो आपको भी कुछ आर्थिक लाभ हो सकता है।
सिंह राशिफल (Leo)
सिंह राशि के लोगों का भाग्य साथ दे रहा है और आपको हर कार्य में सफलता प्राप्त होगी। व्यापार-व्यवसाय में अपने सहयोगी पार्टनरों से सावधान रहें वरना आपका काम बिगड़ सकता है, कोई नया लेन देन आज न करें ,वाहन आदि चलाते समय सावधानी बरतें।
कन्या राशिफल (Virgo)
कन्या राशि के लोग आज किसी प्रकार के तनाव से ग्रस्त रहेंगे। आज आप परिवारिक मतभेद में उलझ सकते हैं, आप कोई बड़ा जोखिम व्यापार में न उठाएं ,पत्नी के स्वास्थ्य के कारण चिंतित रह सकते हैं।
तुला राशिफल (Libra)
तुला राशि वाले जातकों की बात करें तो आज का दिन आपका मिलाजुला रहने वाला है। जो लोग व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए प्रयास कर रहे थे, परिवार में मांगलिक कार्यक्रम होंगे, कोई नया वाहन मकान खरीद सकते हैं, आप किसी धार्मिक यात्रा पर जा सकते हैं।
वृश्चिक राशिफल (Scorpio)
आज आप किसी अपने के स्वास्थ्य को लेकर परेशान रहेंगे, माता पिता का स्वास्थ्य अचानक बिगड़ सकता है, आर्थिक मामलों में यह वक्त अधिक शुभ नहीं है। कोई भी बड़ा फैसला आज न करें। आप कोई पुराना कर्ज आज चुका पाएंगे।
धनु राशिफल ( Sagittarius)
धनु राशि के लोगों का दिन आज मिलाजुला रहेगा। परिवार के किसी सदस्य की वजह से आप काफी तनाव में रहेंगे। आज आपका स्वास्थ्य भी बिगड़ सकता है, किसी विशेष व्यक्ति के प्रभाव से आपका कोई पुराना काम पूरा होगा।
मकर राशिफल (Capricorn)
मकर राशि के लोग आज ऊर्जा से भरपूर रहेंगे और आपकी शारीरिक शिथिलता और अस्वस्थता खत्म होगी। वाहन आदि के चलाने में सावधानी बरतें, लम्बी यात्रा पर न जाएं। आप अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें, पत्नी से वाद-विवाद हो सकता है।
कुंभ राशिफल (Aquarius)
आज का दिन शुभ होगा और कार्यक्षेत्र के वातावरण में सुधार होगा। कठोर प्रकृति का व्यक्ति आपकी नज़रों से दूर रहेगा किसी व्यक्ति विशेष से कोई बड़ी डील हो सकती है। मन प्रसन्न रहेगा, नया वाहन, मकान खरीद सकते हैं। परिवार में मांगलिक कार्यक्रम होंगे।
मीन राशिफल (Pisces)
| पच्चीस मई दो हज़ार तेईस, Rashifal: आज गुरुवार का दिन मेष, वृषभ राशि वालों के लिए बेहद खास रहने वाला है, कहीं नयी जगह जाने का मौका मिल सकता है और आज के दिन वाहन खरीदना आपके लिए अच्छा रहेगा। घर में नये लोगों का आगमन हो सकता है। जानिए मेष से लेकर मीन तक के राशि के बारें मे आज का दिन कैसा होगा। मेष राशिफल मेष राशि वालों का भाग्य आज साथ दे रहा है। आज आप किसी काम के लिए संकल्प लेंगे तो वह कार्य पूर्ण हो जाएगा। आपने परिचित व्यक्ति से आज आपको अपमान का सामना करना पड़ सकता है, पत्नी का साथ मिलेगा। वृषभ राशिफल आज आप नया वाहन आदि खरीद सकते हैं, परिवार में नया मेहमान आ सकता है, आपको कोई नये कार्य का बड़ा ऑफर आज मिल सकता है। आज आपको अपने प्रिय से फोन पर काफी देर तक बातचीत होगी, जिससे आप काफी खुश नजर आएंगे। मिथुन राशिफल आज का दिन आपका शानदार रहेगा, मन स्थिर और प्रसन्न रहेगा, मिथुन राशि के लोगों को हर कार्य संभलकर करना चाहिए। यदि आप अपने करियर में बदलाव लाने की कोशिश कर रहे हैं तो अभी परिस्थितियां ठीक नहीं हैं। कर्क राशिफल आज का दिन आपका सोच-विचार कर काम करने का है, आप कोई बड़ा डिसीजन व्यापार व्यवसाय में न लें, नये साझेदारी में सावधानी बरतें, स्वास्थ्य का ध्यान रखें, अगर किसी की सहायता करेंगे तो आपको भी कुछ आर्थिक लाभ हो सकता है। सिंह राशिफल सिंह राशि के लोगों का भाग्य साथ दे रहा है और आपको हर कार्य में सफलता प्राप्त होगी। व्यापार-व्यवसाय में अपने सहयोगी पार्टनरों से सावधान रहें वरना आपका काम बिगड़ सकता है, कोई नया लेन देन आज न करें ,वाहन आदि चलाते समय सावधानी बरतें। कन्या राशिफल कन्या राशि के लोग आज किसी प्रकार के तनाव से ग्रस्त रहेंगे। आज आप परिवारिक मतभेद में उलझ सकते हैं, आप कोई बड़ा जोखिम व्यापार में न उठाएं ,पत्नी के स्वास्थ्य के कारण चिंतित रह सकते हैं। तुला राशिफल तुला राशि वाले जातकों की बात करें तो आज का दिन आपका मिलाजुला रहने वाला है। जो लोग व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए प्रयास कर रहे थे, परिवार में मांगलिक कार्यक्रम होंगे, कोई नया वाहन मकान खरीद सकते हैं, आप किसी धार्मिक यात्रा पर जा सकते हैं। वृश्चिक राशिफल आज आप किसी अपने के स्वास्थ्य को लेकर परेशान रहेंगे, माता पिता का स्वास्थ्य अचानक बिगड़ सकता है, आर्थिक मामलों में यह वक्त अधिक शुभ नहीं है। कोई भी बड़ा फैसला आज न करें। आप कोई पुराना कर्ज आज चुका पाएंगे। धनु राशिफल धनु राशि के लोगों का दिन आज मिलाजुला रहेगा। परिवार के किसी सदस्य की वजह से आप काफी तनाव में रहेंगे। आज आपका स्वास्थ्य भी बिगड़ सकता है, किसी विशेष व्यक्ति के प्रभाव से आपका कोई पुराना काम पूरा होगा। मकर राशिफल मकर राशि के लोग आज ऊर्जा से भरपूर रहेंगे और आपकी शारीरिक शिथिलता और अस्वस्थता खत्म होगी। वाहन आदि के चलाने में सावधानी बरतें, लम्बी यात्रा पर न जाएं। आप अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें, पत्नी से वाद-विवाद हो सकता है। कुंभ राशिफल आज का दिन शुभ होगा और कार्यक्षेत्र के वातावरण में सुधार होगा। कठोर प्रकृति का व्यक्ति आपकी नज़रों से दूर रहेगा किसी व्यक्ति विशेष से कोई बड़ी डील हो सकती है। मन प्रसन्न रहेगा, नया वाहन, मकान खरीद सकते हैं। परिवार में मांगलिक कार्यक्रम होंगे। मीन राशिफल |
आईजीआई एयरपोर्ट (Delhi Indira Gandhi International Airport) के भीतर यात्रियों के बैग से सामान चुराने के मामले में दो युवतियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इनमें से एक महिला लोडर का काम करते हुए चोरी करती थी जबकि दूसरी इस काम में उसकी मदद करती थी। पुलिस ने इनके पास से 60 हजार रुपये कीमत के गहने, तीन बैग एवं अन्य सामान बरामद किये हैं। बताया जाता है कि इंडिगो प्रबंधन की शिकायत पर आरोपितों के खिलाफ आईजीआई एयरपोर्ट थाना पुलिस ने एफआई आर दर्ज की है।
डीसीपी देवेश महला के अनुसार आईजीआई एयरपोर्ट के भीतर चोरी की वारदातों को रोकने के लिए पुलिस टीम काम कर रही थी। इसके लिए विभिन्न विमान कंपनियों के अधिकारियों एवं सुरक्षा एजेंसी के अधिकारियों को भी निर्देश दिये गये थे। बीते 5 अप्रैल को पुलिस ने विमान कंपनी की विजिलेंस टीम के साथ मिलकर एक महिला लोडर सना मुमताज को चोरी के तीन बैग सहित पकड़ा। वह चोरी किये गये सामान को अपनी एक महिला दोस्त की मदद से किराये के मकान तक पहुंचाती थी।
इस बाबत मामला दर्ज कर थानाध्यक्ष यशपाल सिंह की टीम ने महिला से पूछताछ की। उसने बताया कि वह दो साल से लोडर का काम करती है। 20 हजार रुपये वेतन से उसका गुजारा नहीं होता था। इसलिए वह चोरी कर अपने साथ रहने वाली मालती को देने लगी। यह बैग उसने बीते 2 अप्रैल को चोरी किये थे। चोरी के सामान को वह आसानी से अपना आई-कार्ड इस्तेमाल कर बाहर निकाल लेती थी। इस जानकारी पर पुलिस टीम ने मालती को भी गिरफ्तार कर लिया।
उल्लेखनीय है कि इसी साल जनवरी महीने में इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा पुलिस और सतर्कता विभाग ने एयरपोर्ट में चोरी करने वाले एक रैकेट का भंडाफोड़ किया था। पुलिस ने चोरी के आरोप में आठ लोडरों को गिरफ्तार किया था। एयरपोर्ट थाना पुलिस ने आरोपियों के पास से 6 कीमती घड़ियां, 10 लाख के गहने, मोबाइल फोन और 1. 15 लाख रुपये नकद बरामद किए थे। आरोपियों में से अधिकांस तीन से एयरपोर्ट पर नौकरी कर रहे थे। आरोपी संगठित होकर चोरी की वारदातों को अंजाम देते थे।
| आईजीआई एयरपोर्ट के भीतर यात्रियों के बैग से सामान चुराने के मामले में दो युवतियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इनमें से एक महिला लोडर का काम करते हुए चोरी करती थी जबकि दूसरी इस काम में उसकी मदद करती थी। पुलिस ने इनके पास से साठ हजार रुपये कीमत के गहने, तीन बैग एवं अन्य सामान बरामद किये हैं। बताया जाता है कि इंडिगो प्रबंधन की शिकायत पर आरोपितों के खिलाफ आईजीआई एयरपोर्ट थाना पुलिस ने एफआई आर दर्ज की है। डीसीपी देवेश महला के अनुसार आईजीआई एयरपोर्ट के भीतर चोरी की वारदातों को रोकने के लिए पुलिस टीम काम कर रही थी। इसके लिए विभिन्न विमान कंपनियों के अधिकारियों एवं सुरक्षा एजेंसी के अधिकारियों को भी निर्देश दिये गये थे। बीते पाँच अप्रैल को पुलिस ने विमान कंपनी की विजिलेंस टीम के साथ मिलकर एक महिला लोडर सना मुमताज को चोरी के तीन बैग सहित पकड़ा। वह चोरी किये गये सामान को अपनी एक महिला दोस्त की मदद से किराये के मकान तक पहुंचाती थी। इस बाबत मामला दर्ज कर थानाध्यक्ष यशपाल सिंह की टीम ने महिला से पूछताछ की। उसने बताया कि वह दो साल से लोडर का काम करती है। बीस हजार रुपये वेतन से उसका गुजारा नहीं होता था। इसलिए वह चोरी कर अपने साथ रहने वाली मालती को देने लगी। यह बैग उसने बीते दो अप्रैल को चोरी किये थे। चोरी के सामान को वह आसानी से अपना आई-कार्ड इस्तेमाल कर बाहर निकाल लेती थी। इस जानकारी पर पुलिस टीम ने मालती को भी गिरफ्तार कर लिया। उल्लेखनीय है कि इसी साल जनवरी महीने में इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा पुलिस और सतर्कता विभाग ने एयरपोर्ट में चोरी करने वाले एक रैकेट का भंडाफोड़ किया था। पुलिस ने चोरी के आरोप में आठ लोडरों को गिरफ्तार किया था। एयरपोर्ट थाना पुलिस ने आरोपियों के पास से छः कीमती घड़ियां, दस लाख के गहने, मोबाइल फोन और एक. पंद्रह लाख रुपये नकद बरामद किए थे। आरोपियों में से अधिकांस तीन से एयरपोर्ट पर नौकरी कर रहे थे। आरोपी संगठित होकर चोरी की वारदातों को अंजाम देते थे। |
Starred Questions and Answers 21st March, 1953.
۔۔ اس کا جواب متعاقب عرض کرونگا شری مهدی نو از جنگ
DEATH RATE
†(As Shri Ch. Venkatrama Rao was not present in the House, Question No. 169 (94) was not answered,).
APPLICATIONS FOR APPOINTMENTS
*170 (246) Shri Udhavrao Patil (Osmanabad-General) : Will the hon. Minister for Education be pleased to state:
(a ) The number of applications for appointments received in the Office of the Inspector of Schools, Osmanabad during the year 1951-52?
(b) The number of appointments made between 16th August, 1952 and 15th February, 1953?
(c) How many of them belong to scheduled castes and other backward classes ?
श्री. देवीसिंग चोहान :- ( मिनिस्टर फार अज्युकेशन अँड रूरल रिकन्स्ट्रक्शन ) १९५११९५२ में १,०७२ अप्लिकेशन्स अस्मानाबाद के स्कूल अिन्स्पेक्टर के पास वसूल हुभे । अनमें से ४७३ मैट्रोक्युलेट्स के, ४०५ नॉन मेट्रिकस के, और १९४ मिडिल-पास कैंडिडेट्स के थे । (बी) १६ ऑगस्ट १९५२ से १५ फरवरी १९५२ तक १९ परमनेंट और ६ लिव्ह व्हेकन्सीज फिलअप की गयी । ( सी ) यह जो २५ व्हेकन्सीज थी अनमें से तीन अमीदवार शेड्युल्ड कास्टस और और बॅकवर्ड क्लासेस लिये गये । वीस दूसरे लिये गये, बाकी २ की कॉस्ट नहीं मालूम हुआ ।
श्री. अद्धवराव पाटील :- शेड्युल्ड कास्टस और बॅकवर्ड क्लासेस के लिये साडे बारा परसेंट व्हेकन्सीज भरने का सरकार का जो नियम है । असका लिहाज अिस वस्त किया गया था ?
श्री. देवीसिंग चोहान : -- जिसके मुताल्लुक गव्हर्नमेंट की पॉलिसी जाहिर है । हमने सारे डिपार्टमेंट्स को सरक्युलर भेजे हैं कि नये अपॉजिटमेंट करते समय १२ परसेंट का लिहाज रखा जाय। मुमकिन है असका लिहाज किया गया है ।
دمی کے لئے کتنے فیصدی دیا گیا ہے ؟ شری ایم ۔ بچیا ( سر پور )۔ بیاک ورڈ کلاس کے لئے
श्री. देवीसिंग चोहान :- बॅकवर्ड क्लासेस की अप्रुव्हड लिस्ट (Approved List ) बनाभी गयी है । लेकिन जिनको कितनी जायदादें देनी चाहिये, जिसके बारे में तफसीली अहकामात नहीं दिये गये हैं ।
†Answer to *169 (94) under Unstarred Questions and Answers,
| Starred Questions and Answers इक्कीस मार्चch, एक हज़ार नौ सौ तिरेपन. ۔۔ اس کا جواب متعاقب عرض کرونگا شری مهدی نو از جنگ DEATH RATE † was not answered,). APPLICATIONS FOR APPOINTMENTS *एक सौ सत्तर Shri Udhavrao Patil : Will the hon. Minister for Education be pleased to state: The number of applications for appointments received in the Office of the Inspector of Schools, Osmanabad during the year एक हज़ार नौ सौ इक्यावन-बावन? The number of appointments made between सोलह अगस्तust, एक हज़ार नौ सौ बावन and पंद्रह फ़रवरीruary, एक हज़ार नौ सौ तिरेपन? How many of them belong to scheduled castes and other backward classes ? श्री. देवीसिंग चोहान :- एक करोड़ पचानवे लाख ग्यारह हज़ार नौ सौ बावन में एक,बहत्तर अप्लिकेशन्स अस्मानाबाद के स्कूल अिन्स्पेक्टर के पास वसूल हुभे । अनमें से चार सौ तिहत्तर मैट्रोक्युलेट्स के, चार सौ पाँच नॉन मेट्रिकस के, और एक सौ चौरानवे मिडिल-पास कैंडिडेट्स के थे । सोलह ऑगस्ट एक हज़ार नौ सौ बावन से पंद्रह फरवरी एक हज़ार नौ सौ बावन तक उन्नीस परमनेंट और छः लिव्ह व्हेकन्सीज फिलअप की गयी । यह जो पच्चीस व्हेकन्सीज थी अनमें से तीन अमीदवार शेड्युल्ड कास्टस और और बॅकवर्ड क्लासेस लिये गये । वीस दूसरे लिये गये, बाकी दो की कॉस्ट नहीं मालूम हुआ । श्री. अद्धवराव पाटील :- शेड्युल्ड कास्टस और बॅकवर्ड क्लासेस के लिये साडे बारा परसेंट व्हेकन्सीज भरने का सरकार का जो नियम है । असका लिहाज अिस वस्त किया गया था ? श्री. देवीसिंग चोहान : -- जिसके मुताल्लुक गव्हर्नमेंट की पॉलिसी जाहिर है । हमने सारे डिपार्टमेंट्स को सरक्युलर भेजे हैं कि नये अपॉजिटमेंट करते समय बारह परसेंट का लिहाज रखा जाय। मुमकिन है असका लिहाज किया गया है । دمی کے لئے کتنے فیصدی دیا گیا ہے ؟ شری ایم ۔ بچیا ۔ بیاک ورڈ کلاس کے لئے श्री. देवीसिंग चोहान :- बॅकवर्ड क्लासेस की अप्रुव्हड लिस्ट बनाभी गयी है । लेकिन जिनको कितनी जायदादें देनी चाहिये, जिसके बारे में तफसीली अहकामात नहीं दिये गये हैं । †Answer to *एक सौ उनहत्तर under Unstarred Questions and Answers, |
गुमला,प्रतिनिधि। गुमला थाना के कतरी पंचायत स्थित कीता गांव में 65 वर्षीय देवकी देवी नामक महिला को डायन के आरोप में लाठियों से पीट कर अधमरा करने के आरोपी युवक को पुलिस ने गिरफ्तार कर रविवार को जेल भेज दिया। इस बाबत थाना प्रभारी मनोज कुमार ने बताया कि शनिवार की देर शाम कीता गांव के बुजुर्ग महिला 65 वर्षीय देवकी देवी के ही भतीजा मुनेश्वर तूरी उर्फ मने ने डायन बिसाही कह कर लाठी- डंडे से मार मार कर गंभीर रूप से घायल कर दिया था। पुलिस ने शनिवार रात ही आरोपी मुनेश्वर तूरी उर्फ मने को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। जानकारी के अनुसार देवकी देवी कीता गांव में अकेले रहती है और अपना भरण- पोषण खुद करती है। कुछ दिन पूर्व से ही मुनेश्वर तूरी उर्फ मने के पिता का निधन हो गया था। अंध विश्वासी मुनेश्वर तूरी उर्फ मने को लगता था कि देवकी देवी ने ही कुछ कर दी, जिसके कारण पिता कि मौत हो गई। फलस्वरूप उसने शनिवार देर शाम बुजुर्ग महिला को पीट-पीट कर घायल कर दिया। स्थानीय ग्रामीणों व पुलिस के मदद से बुजुर्ग महिल को गुमला सदर अस्पताल पहुंचाया गया। जहां वह फिलहाल इलाजरत है।
| गुमला,प्रतिनिधि। गुमला थाना के कतरी पंचायत स्थित कीता गांव में पैंसठ वर्षीय देवकी देवी नामक महिला को डायन के आरोप में लाठियों से पीट कर अधमरा करने के आरोपी युवक को पुलिस ने गिरफ्तार कर रविवार को जेल भेज दिया। इस बाबत थाना प्रभारी मनोज कुमार ने बताया कि शनिवार की देर शाम कीता गांव के बुजुर्ग महिला पैंसठ वर्षीय देवकी देवी के ही भतीजा मुनेश्वर तूरी उर्फ मने ने डायन बिसाही कह कर लाठी- डंडे से मार मार कर गंभीर रूप से घायल कर दिया था। पुलिस ने शनिवार रात ही आरोपी मुनेश्वर तूरी उर्फ मने को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। जानकारी के अनुसार देवकी देवी कीता गांव में अकेले रहती है और अपना भरण- पोषण खुद करती है। कुछ दिन पूर्व से ही मुनेश्वर तूरी उर्फ मने के पिता का निधन हो गया था। अंध विश्वासी मुनेश्वर तूरी उर्फ मने को लगता था कि देवकी देवी ने ही कुछ कर दी, जिसके कारण पिता कि मौत हो गई। फलस्वरूप उसने शनिवार देर शाम बुजुर्ग महिला को पीट-पीट कर घायल कर दिया। स्थानीय ग्रामीणों व पुलिस के मदद से बुजुर्ग महिल को गुमला सदर अस्पताल पहुंचाया गया। जहां वह फिलहाल इलाजरत है। |
नई दिल्ली। आखिरकार लॉकडाउन के 50 दिन बाद कल 12 मई से कुछ ट्रेनों के संचालन की तैयारी है, जिससे यात्रियों को कुछ राहत मिल सकती है। देशभर में 15 ट्रेनें चलाने का निर्णय लिया गया है। जिनकी बुकिंग आज सोमवार को शाम 4 बजे से शुरू हो जाएगी।
अभी सिर्फ IRCTC के माध्यम से ही बुकिंग होगी। उन्हीं यात्रियों को प्लेटफॉर्म तक पहुंचने की अनुमति होगी, जिनका टिकट कंफर्म है। इस दौरान यात्रियों के लिए मास्क लगाना अनिवार्य होगा। साथ ही टिकट बुकिंग इस तरह की जाएगी कि यात्री ट्रेन में बैठते समय भी फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करें। यात्रियों को प्लेटफॉर्म पर प्रवेश करते समय जांच से गुजरना होगा। यात्रियों से सामान्य किराया ही वसूला जाएगा।
रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि यह ट्रायल सफल रहा तो अन्य रुट्स पर भी ट्रेनें चलाई जा सकेगीं। अभी रेलवे रोज की 300 ट्रेनों को चलाने की तैयारी में हैं। यह प्लानिंग श्रमिक स्पेशल ट्रेन के लिए की गई है। रेलवे ने कोरोना वायरस के देखते हुए 20,000 स्पेशल बोगियां तैयार करवाई हैं।
इन ट्रेनों का पूरा शेड्यूल जारी कर दिया है। किसी भी ट्रेने की बुकिंग रेलवे काउंटर से नहीं होगी। यात्रियों से अपील की गई है कि वे हड़बड़ाहट में यात्रा का फैसला न ले। पहले जानकारी जुटा लें कि उनके शहर तक ट्रेन जा रही है या नहीं। साथ ही IRCTC की Website या इसके App के जरिए कंफर्म टिकट होने पर ही रेलवे स्टेशन पहुंचे।
ख़बरों की अपडेट्स पाने के लिए हमसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर भी जुड़ेंः
| नई दिल्ली। आखिरकार लॉकडाउन के पचास दिन बाद कल बारह मई से कुछ ट्रेनों के संचालन की तैयारी है, जिससे यात्रियों को कुछ राहत मिल सकती है। देशभर में पंद्रह ट्रेनें चलाने का निर्णय लिया गया है। जिनकी बुकिंग आज सोमवार को शाम चार बजे से शुरू हो जाएगी। अभी सिर्फ IRCTC के माध्यम से ही बुकिंग होगी। उन्हीं यात्रियों को प्लेटफॉर्म तक पहुंचने की अनुमति होगी, जिनका टिकट कंफर्म है। इस दौरान यात्रियों के लिए मास्क लगाना अनिवार्य होगा। साथ ही टिकट बुकिंग इस तरह की जाएगी कि यात्री ट्रेन में बैठते समय भी फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करें। यात्रियों को प्लेटफॉर्म पर प्रवेश करते समय जांच से गुजरना होगा। यात्रियों से सामान्य किराया ही वसूला जाएगा। रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि यह ट्रायल सफल रहा तो अन्य रुट्स पर भी ट्रेनें चलाई जा सकेगीं। अभी रेलवे रोज की तीन सौ ट्रेनों को चलाने की तैयारी में हैं। यह प्लानिंग श्रमिक स्पेशल ट्रेन के लिए की गई है। रेलवे ने कोरोना वायरस के देखते हुए बीस,शून्य स्पेशल बोगियां तैयार करवाई हैं। इन ट्रेनों का पूरा शेड्यूल जारी कर दिया है। किसी भी ट्रेने की बुकिंग रेलवे काउंटर से नहीं होगी। यात्रियों से अपील की गई है कि वे हड़बड़ाहट में यात्रा का फैसला न ले। पहले जानकारी जुटा लें कि उनके शहर तक ट्रेन जा रही है या नहीं। साथ ही IRCTC की Website या इसके App के जरिए कंफर्म टिकट होने पर ही रेलवे स्टेशन पहुंचे। ख़बरों की अपडेट्स पाने के लिए हमसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर भी जुड़ेंः |
हिमाचल विधानसभा शीतकालीन सत्र का आज अंतिम दिन है। विपक्ष ने साथ दिया तो पहला सवाल सुखराम चौधरी ने मुख्यमंत्री से पूछा है जिसमें सिरमौर को रेलवे से जोड़ने के प्रस्ताव पर जबाब मांगा गया है। आशा कुमारी ने आईपीएच विभाग से पानी को लेकर, विक्रमादित्य सिंह ने पेंशन, राम लाल ठाकुर ने श्री नैना देवी वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल में रिक्त पड़े टीचर्स के पदों, जिया लाल ने सड़कों-पुलों और पवन नय्यर ने चंबा वन विभाग में खाली पड़े पदों पर संबंधित मंत्रियों से सवाल पूछे हैं।
प्रश्नकाल के बाद किन्नौर के विधायक जगत नेगी ने नियम 62 के तहत "छात्रवृति घोटाले की जांच को ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी" पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाया है। इसके अलावा नियम 324 के अंर्तगत हर्षवर्धन चौहान, विक्रम जरयाल पवन काजल और आशीष बुटेल ने अपने-अपने क्षेत्र की समस्याओं को उठाया है।
इसके अलावा नियम 130 में बलबीर वर्मा और सुखराम ने प्रदेश में सिंचाई और जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाई जा रही पेयजल व अन्य कार्य की देनदारियों पर प्रस्ताव किया है। अंत मे संसदीय कार्य मंत्री सुरेश भारद्वाज हिमाचल विधानसभा की सालाना जरूरी 35 बैठकें पूरी न होने पर निलंबित प्रस्ताव प्रस्तुत करेंगे।
| हिमाचल विधानसभा शीतकालीन सत्र का आज अंतिम दिन है। विपक्ष ने साथ दिया तो पहला सवाल सुखराम चौधरी ने मुख्यमंत्री से पूछा है जिसमें सिरमौर को रेलवे से जोड़ने के प्रस्ताव पर जबाब मांगा गया है। आशा कुमारी ने आईपीएच विभाग से पानी को लेकर, विक्रमादित्य सिंह ने पेंशन, राम लाल ठाकुर ने श्री नैना देवी वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल में रिक्त पड़े टीचर्स के पदों, जिया लाल ने सड़कों-पुलों और पवन नय्यर ने चंबा वन विभाग में खाली पड़े पदों पर संबंधित मंत्रियों से सवाल पूछे हैं। प्रश्नकाल के बाद किन्नौर के विधायक जगत नेगी ने नियम बासठ के तहत "छात्रवृति घोटाले की जांच को ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी" पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाया है। इसके अलावा नियम तीन सौ चौबीस के अंर्तगत हर्षवर्धन चौहान, विक्रम जरयाल पवन काजल और आशीष बुटेल ने अपने-अपने क्षेत्र की समस्याओं को उठाया है। इसके अलावा नियम एक सौ तीस में बलबीर वर्मा और सुखराम ने प्रदेश में सिंचाई और जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाई जा रही पेयजल व अन्य कार्य की देनदारियों पर प्रस्ताव किया है। अंत मे संसदीय कार्य मंत्री सुरेश भारद्वाज हिमाचल विधानसभा की सालाना जरूरी पैंतीस बैठकें पूरी न होने पर निलंबित प्रस्ताव प्रस्तुत करेंगे। |
रिअलिटी टीवी स्टार किम करदाशियां का कहना है कि इन दिनों वे बेहद चिंता के दौर से गुजर रहे हैं। इसका कारण क्या है? यह तो उनकी भी नहीं पता। मगर हां इतना जरूर है कि इसके कारण कई बार वो पागलों सा व्यवहार करने लगती हैं।
शो 'कीपिंग अप विद द करदाशियां' में किम ने इस बात का खुलासा फैन्स के साथ किया है। पीपल्स मैगजीन की रिपोर्ट के मुताबिक 36 वर्षीय स्टार ने 'चिंता' और 'परेशानी' को लेकर चल रही खुद की लड़ाई को सभी के साथ शेयर किया है।
किम ने कहा 'मैं कई समय से चिंता से ग्रसित हूं। आमतौर पर मैं ऐसी इंसान नहीं हूं। इसके कारण कई बार मैं पागल जैसा व्यवहार करने लगती हूं। ' इस एपिसोड के बाद करदाशियां से मिलने के लिए एक थेरेपिस्ट भी पहुंचता है ताकि इस तरह के मामले पर बात कर सके।
| रिअलिटी टीवी स्टार किम करदाशियां का कहना है कि इन दिनों वे बेहद चिंता के दौर से गुजर रहे हैं। इसका कारण क्या है? यह तो उनकी भी नहीं पता। मगर हां इतना जरूर है कि इसके कारण कई बार वो पागलों सा व्यवहार करने लगती हैं। शो 'कीपिंग अप विद द करदाशियां' में किम ने इस बात का खुलासा फैन्स के साथ किया है। पीपल्स मैगजीन की रिपोर्ट के मुताबिक छत्तीस वर्षीय स्टार ने 'चिंता' और 'परेशानी' को लेकर चल रही खुद की लड़ाई को सभी के साथ शेयर किया है। किम ने कहा 'मैं कई समय से चिंता से ग्रसित हूं। आमतौर पर मैं ऐसी इंसान नहीं हूं। इसके कारण कई बार मैं पागल जैसा व्यवहार करने लगती हूं। ' इस एपिसोड के बाद करदाशियां से मिलने के लिए एक थेरेपिस्ट भी पहुंचता है ताकि इस तरह के मामले पर बात कर सके। |
Tiger Video: बाघों की गिनती दुनिया के सबसे खूंखार जानवरों में होती है. इनसे खिलवाड़ करना या उलझना जान पर भारी पड़ सकता है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में ऐसा नजारा देखने को मिलता है कि किसी की भी रूह कांप जाए.
कुछ जंगली जानवर ऐसे होते हैं, जो जंगल में रहें या ना रहें, उनका खौफ हर जगह बरकरार रहता है. इनमें शेर और बाघों का नंबर तो सबसे पहले आता है. ये दुनिया के सबसे खूंखार जानवरों में से एक माने जाते हैं, जिन्हें इंसानों पर भी हमला करने से गुरेज नहीं होता. अगर ये भूखे हों, फिर तो किसी को भी अपना शिकार बना सकते हैं. यही वजह है कि लोग इन खतरनाक जानवरों के पास जाने से कतराते हैं, भले ही वो पिंजरे में ही बंद क्यों न हों. सोशल मीडिया पर आजकल एक बाघ से ही जुड़ा वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें बाघ इंसानों को अपनी ताकत का अहसास कराते दिख रहा है.
दरअसल, इंसानों ने बाघ को पिंजरे में बंद कोई पालतू जानवर समझ लिया था और उसके पास फोटो खिंचाने के लिए चले गए, लेकिन उसकी एक दहाड़ से ही उनकी हालत खराब हो गई. वो गिरते-पड़ते वहां से भागने को मजबूर हो गए. वीडियो में आप देख सकते हैं कि एक खूंखार बाघ चबूतरे पर बैठा हुआ है और उसके गले में एक लोहे की जंजीर लगी हुई है और वहीं पर दो लोग भी मौजूद थे, जो उसके साथ फोटो खिंचवा रहे हैं. इस दौरान एक तीसरा शख्स डंडे से बाघ को परेशान कर रहा था. फिर क्या, बाघ ने परेशान होकर ऐसी दहाड़ मारी कि दोनों लोग गिरते-पड़ते वहां से भागे और बाहर जाकर भगवान का शुक्रिया अदा किया कि उनकी जान बच गई. आगे से शायद ही वो कभी इस तरह की हरकत करने के बारे में सोचें.
इस दिल दहला देने वाले वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर @HasnaZarooriHai नाम की आई़डी से शेयर किया गया है. महज 24 सेकंड के इस वीडियो को अब तक 71 हजार से भी अधिक बार देखा जा चुका है, जबकि सैकड़ों लोगों ने वीडियो को लाइक भी किया है और तरह-तरह की मजेदार प्रतिक्रियाएं भी दी हैं.
एक यूजर ने लिखा है, 'बच गए तो भीख मांग कर खा लेंगे, यही सोच कर भागे ये लोग', तो एक अन्य यूजर ने लिखा है कि बाघ भी सोच रहा है कि तुम्हें तो कुछ बोला ही नहीं, तुम क्यों भाग गए.
| Tiger Video: बाघों की गिनती दुनिया के सबसे खूंखार जानवरों में होती है. इनसे खिलवाड़ करना या उलझना जान पर भारी पड़ सकता है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में ऐसा नजारा देखने को मिलता है कि किसी की भी रूह कांप जाए. कुछ जंगली जानवर ऐसे होते हैं, जो जंगल में रहें या ना रहें, उनका खौफ हर जगह बरकरार रहता है. इनमें शेर और बाघों का नंबर तो सबसे पहले आता है. ये दुनिया के सबसे खूंखार जानवरों में से एक माने जाते हैं, जिन्हें इंसानों पर भी हमला करने से गुरेज नहीं होता. अगर ये भूखे हों, फिर तो किसी को भी अपना शिकार बना सकते हैं. यही वजह है कि लोग इन खतरनाक जानवरों के पास जाने से कतराते हैं, भले ही वो पिंजरे में ही बंद क्यों न हों. सोशल मीडिया पर आजकल एक बाघ से ही जुड़ा वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें बाघ इंसानों को अपनी ताकत का अहसास कराते दिख रहा है. दरअसल, इंसानों ने बाघ को पिंजरे में बंद कोई पालतू जानवर समझ लिया था और उसके पास फोटो खिंचाने के लिए चले गए, लेकिन उसकी एक दहाड़ से ही उनकी हालत खराब हो गई. वो गिरते-पड़ते वहां से भागने को मजबूर हो गए. वीडियो में आप देख सकते हैं कि एक खूंखार बाघ चबूतरे पर बैठा हुआ है और उसके गले में एक लोहे की जंजीर लगी हुई है और वहीं पर दो लोग भी मौजूद थे, जो उसके साथ फोटो खिंचवा रहे हैं. इस दौरान एक तीसरा शख्स डंडे से बाघ को परेशान कर रहा था. फिर क्या, बाघ ने परेशान होकर ऐसी दहाड़ मारी कि दोनों लोग गिरते-पड़ते वहां से भागे और बाहर जाकर भगवान का शुक्रिया अदा किया कि उनकी जान बच गई. आगे से शायद ही वो कभी इस तरह की हरकत करने के बारे में सोचें. इस दिल दहला देने वाले वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर @HasnaZarooriHai नाम की आई़डी से शेयर किया गया है. महज चौबीस सेकंड के इस वीडियो को अब तक इकहत्तर हजार से भी अधिक बार देखा जा चुका है, जबकि सैकड़ों लोगों ने वीडियो को लाइक भी किया है और तरह-तरह की मजेदार प्रतिक्रियाएं भी दी हैं. एक यूजर ने लिखा है, 'बच गए तो भीख मांग कर खा लेंगे, यही सोच कर भागे ये लोग', तो एक अन्य यूजर ने लिखा है कि बाघ भी सोच रहा है कि तुम्हें तो कुछ बोला ही नहीं, तुम क्यों भाग गए. |
मोर्शी/दि. ४- श्री शिवाजी शिक्षण संस्था अमरावती द्वारा संचालित स्थानीय शिवाजी उच्च माध्यमिक शाला में कला प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया. जिला क्रीडा अधिकारी कार्यालय अमरावती, शिवाजी उच्च माध्यमिक शाला व शिवाजी बहुउद्देशीय मंडल मोर्शी के संयुक्त तत्वावधान में दस दिवसीय कला व क्रीडा शिविर संपन्न हुआ. इस शिविर दौरान छात्रों को ग्राफ अॅन्ड स्केटिंग, बांधनी प्रिटं,गणेशमूर्ति सायकाम, मुखौटे बनाना, रंगकाम, थ्रेड वर्क ग्रीडिंग, वेस्ट से बेस् आदि विविध कला का प्रशिक्षण दिया गया. शिविरार्थियों बनाई गई विविध वस्तुओं की प्रदर्शनी स्कूल में लगाई गई. इस प्रदर्शनी का उद्घाटन तहसीलदार सागर ढवले के हाथों किया गया. उद्घाअन कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्याध्यापक एस. एम. बोंडे ने की. इस अवसर पर प्रमुख अतिथि के रूप में पुलिस निरीक्षक श्रीराम लांबाडे, प्र. जिला क्रीडा अधिकारी विजय खोकले, तहसील क्रीडा अधिकारी संजय पांडे, संजय उल्हे, शरद कनेर, शेखर चौधरी, डी. सी वानखडे, मंगेश राऊत, मिलिंद पन्नासे, प्रमोद वानखडे, उपमुख्याध्यापक प्रसाद देशमुख, मनोज देशमुख, श्रीकांत देशमुख, शिक्षक प्रतिनिधि प्रेमा नवरे, अजय हिवसे उपस्थित थे. कार्यक्रम का संचालन शिवशंकर बाजारे ने किया. आभार सचिन चोपडे ने माना. कार्यक्रम में विद्यार्थी व अभिभावक बड़ी संख्या में उपस्थित थे.
| मोर्शी/दि. चार- श्री शिवाजी शिक्षण संस्था अमरावती द्वारा संचालित स्थानीय शिवाजी उच्च माध्यमिक शाला में कला प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया. जिला क्रीडा अधिकारी कार्यालय अमरावती, शिवाजी उच्च माध्यमिक शाला व शिवाजी बहुउद्देशीय मंडल मोर्शी के संयुक्त तत्वावधान में दस दिवसीय कला व क्रीडा शिविर संपन्न हुआ. इस शिविर दौरान छात्रों को ग्राफ अॅन्ड स्केटिंग, बांधनी प्रिटं,गणेशमूर्ति सायकाम, मुखौटे बनाना, रंगकाम, थ्रेड वर्क ग्रीडिंग, वेस्ट से बेस् आदि विविध कला का प्रशिक्षण दिया गया. शिविरार्थियों बनाई गई विविध वस्तुओं की प्रदर्शनी स्कूल में लगाई गई. इस प्रदर्शनी का उद्घाटन तहसीलदार सागर ढवले के हाथों किया गया. उद्घाअन कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्याध्यापक एस. एम. बोंडे ने की. इस अवसर पर प्रमुख अतिथि के रूप में पुलिस निरीक्षक श्रीराम लांबाडे, प्र. जिला क्रीडा अधिकारी विजय खोकले, तहसील क्रीडा अधिकारी संजय पांडे, संजय उल्हे, शरद कनेर, शेखर चौधरी, डी. सी वानखडे, मंगेश राऊत, मिलिंद पन्नासे, प्रमोद वानखडे, उपमुख्याध्यापक प्रसाद देशमुख, मनोज देशमुख, श्रीकांत देशमुख, शिक्षक प्रतिनिधि प्रेमा नवरे, अजय हिवसे उपस्थित थे. कार्यक्रम का संचालन शिवशंकर बाजारे ने किया. आभार सचिन चोपडे ने माना. कार्यक्रम में विद्यार्थी व अभिभावक बड़ी संख्या में उपस्थित थे. |
Yogasana for Constipation : कब्ज की समस्या बहुत ही आम समस्या है। इस समस्या से हम सभी को कभी ना कभी गुजरना पड़ता है। लॉकडाउन के कारण लोगों के लाइफस्टाइल में काफी बदलाव हो गया है, जिसके कारण कई लोगों को पेट से जुड़ी (Quarantine Constipation) समस्याएं होने लगी हैं। इन्हीं में से कब्ज की समस्या प्रमुख है। लॉकडाउन के कारण देरी से उठना और लंबे समय तक एक ही जगह पर बैठकर काम करने से कब्ज की (Yogasan for Constipation) समस्याएं होने लगी हैं।
कब्ज की समस्या से परेशान लोगों को ना सिर्फ असहज महसूस होता है, बल्कि इसकी वजह से पूरा दिन भी खराब होता है। कब्ज की वजह (Digestive Health) से आप अपने काम पर पूरी तरह से ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं। इसके साथ ही खाने पीने में भी दिक्कत होती है। हमारा पूरा ध्यान पाचन के स्वास्थ्य पर चला जाता है। इन परेशानियों के कारण कई लोग (Relief from Constipation) अंत में दवाइयों और घरेलू उपचार का सहारा लेते हैं।
कब्ज की समस्या से छुटकारा (Yogasan for Constipation) पाने का एक और सुरक्षित और प्राकृतिक तरीका है योग। योग से ना केवल हमारा शरीर लचीला और टोंड बनता है, बल्कि इससे सेहत को आश्चर्य जनक लाभ भी होते हैं। योग करने से हमारे पेट में घुमाव और झुकाव होता है। इससे हमारे पेट की मालिश होती है। योगासन को करने से मल त्याग (Yogasan for Constipation) को प्रोत्साहन मिलता है।
इन आसन से कब्ज की समस्या को करें दूर (Yogasan for Constipation)
- सबसे पहले अपने पीठ के बल जमीन पर सीधे लेट जाएं, इसके बाद धीरे-धीरे सांस लें।
- फिर अपने पैरों को एक साथ उठाएं और पैर के घुटनों को मोड़ें।
- इसके बाद पैर के घुटनों को छाती की ओर अपने मुंह के पास लाएं और पैरों को अपने हाथों की उंगलियों से जकड़ लें।
- ध्यान रहे कि आपकी जांघें आपके पेट को छूना चाहिए और आपके पैर के घुटने आपकी नाक को छुए ऐसा प्रयास करें।
- इस स्थिति में कम से कम 20 से 30 सेकंड तक रहें।
- अब धीरे-धीरे सामान्य मुद्रा में वापस आ जाएं।
- इस आसन को आप दिन में 5 से 10 बार कर सकते हैं।
- नियमित रूप से इस आसन को करने से कब्ज और बवासीर की परेशानी ठीक होती है।
- मलासन करने के लिए सबसे पहले अपने घुटनों को मोड़ कर उस अवस्था में बैठ जाएं जिस अवस्था में मल त्याग करते समय बैठते है।
- बैठने के बाद अपने दोनों हाथो की बगल को दोनों घुटनों पर टिका दें।
- अब दोनों हाथो की हथेलियों को मिलाकर नमस्कार की मुद्रा बनाएं।
- इसके बाद धीरे-धीरे सांस को अन्दर लें फिर धीरे-धीरे बाहर छोड़ें, कुछ देर इसी स्थिति में बैठे रहें।
- अब धीरे-धीरे हाथों को खोलते हुए वापस उठ कर खड़े हो जाएं।
- इस मुद्रा को सुबह उठने के बाद कम से कम दस मिनट अवश्य बैठें।
- बालासन को करने के लिए सबसे पहले घुटने के बल जमीन पर बैठ जाएं और शरीर का सारा भार एड़ियों पर डाल दें।
- अब गहरी सांस भरते हुए आगे की ओर झुकें।
- ध्यान रहे कि आपका सीना जांघों से छूना चाहिए। फिर अपने माथे से फर्श को छूने की कोशिश करें।
- कुछ सेकंड तक इस स्थिति में रहने के बाद वापस सामान्य अवस्था में आ जाएं। इस प्रक्रिया को शुरुआत में पांच बार दोहरा सकते हैं। सहज होने पर आगे बढ़ाएं।
Total Wellness is now just a click away.
| Yogasana for Constipation : कब्ज की समस्या बहुत ही आम समस्या है। इस समस्या से हम सभी को कभी ना कभी गुजरना पड़ता है। लॉकडाउन के कारण लोगों के लाइफस्टाइल में काफी बदलाव हो गया है, जिसके कारण कई लोगों को पेट से जुड़ी समस्याएं होने लगी हैं। इन्हीं में से कब्ज की समस्या प्रमुख है। लॉकडाउन के कारण देरी से उठना और लंबे समय तक एक ही जगह पर बैठकर काम करने से कब्ज की समस्याएं होने लगी हैं। कब्ज की समस्या से परेशान लोगों को ना सिर्फ असहज महसूस होता है, बल्कि इसकी वजह से पूरा दिन भी खराब होता है। कब्ज की वजह से आप अपने काम पर पूरी तरह से ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं। इसके साथ ही खाने पीने में भी दिक्कत होती है। हमारा पूरा ध्यान पाचन के स्वास्थ्य पर चला जाता है। इन परेशानियों के कारण कई लोग अंत में दवाइयों और घरेलू उपचार का सहारा लेते हैं। कब्ज की समस्या से छुटकारा पाने का एक और सुरक्षित और प्राकृतिक तरीका है योग। योग से ना केवल हमारा शरीर लचीला और टोंड बनता है, बल्कि इससे सेहत को आश्चर्य जनक लाभ भी होते हैं। योग करने से हमारे पेट में घुमाव और झुकाव होता है। इससे हमारे पेट की मालिश होती है। योगासन को करने से मल त्याग को प्रोत्साहन मिलता है। इन आसन से कब्ज की समस्या को करें दूर - सबसे पहले अपने पीठ के बल जमीन पर सीधे लेट जाएं, इसके बाद धीरे-धीरे सांस लें। - फिर अपने पैरों को एक साथ उठाएं और पैर के घुटनों को मोड़ें। - इसके बाद पैर के घुटनों को छाती की ओर अपने मुंह के पास लाएं और पैरों को अपने हाथों की उंगलियों से जकड़ लें। - ध्यान रहे कि आपकी जांघें आपके पेट को छूना चाहिए और आपके पैर के घुटने आपकी नाक को छुए ऐसा प्रयास करें। - इस स्थिति में कम से कम बीस से तीस सेकंड तक रहें। - अब धीरे-धीरे सामान्य मुद्रा में वापस आ जाएं। - इस आसन को आप दिन में पाँच से दस बार कर सकते हैं। - नियमित रूप से इस आसन को करने से कब्ज और बवासीर की परेशानी ठीक होती है। - मलासन करने के लिए सबसे पहले अपने घुटनों को मोड़ कर उस अवस्था में बैठ जाएं जिस अवस्था में मल त्याग करते समय बैठते है। - बैठने के बाद अपने दोनों हाथो की बगल को दोनों घुटनों पर टिका दें। - अब दोनों हाथो की हथेलियों को मिलाकर नमस्कार की मुद्रा बनाएं। - इसके बाद धीरे-धीरे सांस को अन्दर लें फिर धीरे-धीरे बाहर छोड़ें, कुछ देर इसी स्थिति में बैठे रहें। - अब धीरे-धीरे हाथों को खोलते हुए वापस उठ कर खड़े हो जाएं। - इस मुद्रा को सुबह उठने के बाद कम से कम दस मिनट अवश्य बैठें। - बालासन को करने के लिए सबसे पहले घुटने के बल जमीन पर बैठ जाएं और शरीर का सारा भार एड़ियों पर डाल दें। - अब गहरी सांस भरते हुए आगे की ओर झुकें। - ध्यान रहे कि आपका सीना जांघों से छूना चाहिए। फिर अपने माथे से फर्श को छूने की कोशिश करें। - कुछ सेकंड तक इस स्थिति में रहने के बाद वापस सामान्य अवस्था में आ जाएं। इस प्रक्रिया को शुरुआत में पांच बार दोहरा सकते हैं। सहज होने पर आगे बढ़ाएं। Total Wellness is now just a click away. |
Viral Video: समाजवादी पार्टी के ट्विटर हैंडल पर पोस्ट किया गया महिला की पिटाई का वीडियो वायरल हो गया है। करीब 2 मिनट के इस वीडियो में एक पुलिसकर्मी एक महिला को बेरहमी से पीटता दिख रहा है।
वायरल वीडियो में पुलिसकर्मी की क्रूरता का पता चलता है, जो कानपुर के काकवां इलाके में एक सब-इंस्पेक्टर रैंक का अधिकारी लग रहा है। पिटाई के दौरान महिला दर्द से चिल्लाती और मदद मांगती हुई दिख रही है।
कानपुर पुलिस की एक और शर्मनाक करतूत!
रोज़ाना योगी सरकार की पुलिस की बर्बरता की घटनाएं आ रही सामने, मुख्यमंत्री मौन।
इस बीच, जैसे ही पुलिस वाले को पता चलता है कि उसकी हरकत फिल्माई जा रही है, वह कहने लगता है - "आप लोग पुलिस के साथ सही काम नहीं कर रहे हैं, आप जो भी कर रहे हैं वह गलत है"।
इस बीच इस घटना को लेकर समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश सरकार पर हमला बोला है। पार्टी ने ट्वीट कर लिखा, कानपुर पुलिस का शर्मनाक कृत्य। आए दिन योगी सरकार की पुलिस द्वारा नागरिकों पर अत्याचार के वीडियो सामने आते रहते हैं, लेकिन मुख्यमंत्री खामोश रहते हैं। मामले की जांच की जानी चाहिए और पुलिस वाले पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
डिस्क्लेमरः यह खबर वायरल वीडियो पर आधारित है। चूंकि खबर की सत्यता के लिए वीडियो को दिखाया जाना जरूरी है। न्यूज़24 किसी भी तरह की हिंसा का पुरजोर विरोध करता है।
| Viral Video: समाजवादी पार्टी के ट्विटर हैंडल पर पोस्ट किया गया महिला की पिटाई का वीडियो वायरल हो गया है। करीब दो मिनट के इस वीडियो में एक पुलिसकर्मी एक महिला को बेरहमी से पीटता दिख रहा है। वायरल वीडियो में पुलिसकर्मी की क्रूरता का पता चलता है, जो कानपुर के काकवां इलाके में एक सब-इंस्पेक्टर रैंक का अधिकारी लग रहा है। पिटाई के दौरान महिला दर्द से चिल्लाती और मदद मांगती हुई दिख रही है। कानपुर पुलिस की एक और शर्मनाक करतूत! रोज़ाना योगी सरकार की पुलिस की बर्बरता की घटनाएं आ रही सामने, मुख्यमंत्री मौन। इस बीच, जैसे ही पुलिस वाले को पता चलता है कि उसकी हरकत फिल्माई जा रही है, वह कहने लगता है - "आप लोग पुलिस के साथ सही काम नहीं कर रहे हैं, आप जो भी कर रहे हैं वह गलत है"। इस बीच इस घटना को लेकर समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश सरकार पर हमला बोला है। पार्टी ने ट्वीट कर लिखा, कानपुर पुलिस का शर्मनाक कृत्य। आए दिन योगी सरकार की पुलिस द्वारा नागरिकों पर अत्याचार के वीडियो सामने आते रहते हैं, लेकिन मुख्यमंत्री खामोश रहते हैं। मामले की जांच की जानी चाहिए और पुलिस वाले पर कार्रवाई की जानी चाहिए। डिस्क्लेमरः यह खबर वायरल वीडियो पर आधारित है। चूंकि खबर की सत्यता के लिए वीडियो को दिखाया जाना जरूरी है। न्यूज़चौबीस किसी भी तरह की हिंसा का पुरजोर विरोध करता है। |
क्या कोस्ट्रोमा में इवान सुसनिन का स्मारक है?
यह स्मारक हमारे समय में मौजूद है यहां आप वर्ष के किसी भी समय बहुत से पर्यटकों को देख सकते हैं। कई लोग इस सांस्कृतिक वस्तु से परिचित होने में रुचि रखते हैं, क्योंकि यह उन घटनाओं को उजागर करता है जो हमारे देश में संकट के समय में, सामान्य लोगों के वीरता पर प्रकाश डाला गया। एक अर्थ में, यह आपको इतिहास को छूने और इसे बेहतर ढंग से समझने की अनुमति देता है।
अब हमें इस स्मारक के इतिहास के बारे में बात करने की आवश्यकता है। जैसा कि पहले से ऊपर उल्लेख किया गया है, कोस्टोरोमा में इवान सूसिन के पहले स्मारक को XIX सदी में बनाया गया था। इस तरह के एक वस्तु के निर्माण के लिए शर्त निकोलस आई के शहर की यात्रा थी। सम्राट का मानना था कि इवान सूसिन की उपलब्धि को एक विशेष स्मारक बनाकर बनाए रखना चाहिए। यह 1835 में हुआ शुरू में, इसे शहर के केंद्रीय वर्ग पर ऑब्जेक्ट लगाने की योजना थी और इसे सुज़िनिन्काया का नाम दिया (पहले इसका दूसरा नाम था - एकटेरीरनिस्लावस्काया)।
तब स्मारक किस तरह दिखता है?
मूलतः, इवान सुसानिन का स्मारक लाल ग्रेनाइट से बना एक स्तंभ के रूप में बनाया गया था। वह एक कुरसी पर थी। रचना के शीर्ष पर, झार मिखाइल फेदोरोविच की प्रतिमा थी। उसके सिर पर मोनोमाख की टोपी और गर्दन पर एक बड़ा क्रॉस था। बस्ट के बगल में राज्य के प्रतीक को रखा गया था।
पूरे मूर्तिकला संरचना के नीचे सुसानिन का आंकड़ा था, जो घुटन टेक कर प्रार्थना करता था। इस प्रकार, स्मारक तब देखा, 1 9वीं शताब्दी में वापस।
स्मारक पतन कैसे हुआ?
यह सांस्कृतिक वस्तु कुछ समय के लिए शहर की केंद्रीय दृष्टि थी। बहुत से लोग यहां विशेष रूप से आए, जानते हुए कि कोस्ट्रोमा शहर में इवान सुसानिन का एक स्मारक है। हालांकि, यह लंबे समय तक नहीं था क्रांति के बाद, वह विध्वंस का खतरा था, क्योंकि एक विशेष दस्तावेज जारी किया गया था। उन्होंने उन वस्तुओं के विनाश के लिए प्रदान की जिन्हें राजाओं और उनके कर्मचारियों के सम्मान में कभी बनाया गया था इस प्रकार, स्मारक को बचाया नहीं जा सका, इसे 1 9 18 में ध्वस्त कर दिया गया।
इस स्मारक के आंकड़ों के भाग्य के बारे में भी कई संस्करण हैं। उनमें से एक के अनुसार, आंकड़े वोल्गा में दूसरे पर गिरा दिए गए - उन्हें अज्ञात जगह में दफन किया गया। एक और संस्करण है कि उन्हें अधिक उपयोगी प्रयोजनों के लिए रीमेल करने के लिए भेजा गया था। फिर स्मारक के स्थल पर केवल एक स्तंभ छोड़ा गया था।
आश्चर्य की बात नहीं, उस समय स्क्वायर का नाम क्रांति स्क्वायर में बदल दिया गया था। लंबे समय तक इस जगह पर वर्णित घटनाओं के बाद एक छोटा ओबिलिस्क था, जिसमें शेष स्तंभ शामिल था। एक लाल ध्वज उस पर लटका दिया गया था। कुछ समय बाद भी कॉलम को नष्ट करने का निर्णय लिया गया, 1 9 34 में आखिरकार स्मारक को ध्वस्त कर दिया गया था, इसकी कतरन टूट गई थी और सड़क फ़र्श के टुकड़े के रूप में इस्तेमाल किया गया था।
इसलिए, सांस्कृतिक विरासत के इस उद्देश्य के विनाश से संबंधित घटनाओं पर विचार किया गया। लंबे समय के लिए इस प्रश्न का उत्तर है कि क्या कोस्ट्रोमा में इवान सूसिन के स्मारक नकारात्मक थे। हालांकि, थोड़ी देर बाद, अधिकारियों ने फैसला किया कि इस घटना को अभी भी एक स्मारक के रूप में बनाए रखा जाना है, क्योंकि यह पूरे राज्य के इतिहास में एक महत्वपूर्ण चरण है। इसलिए, यह एक नया स्मारक तैयार करने का निर्णय लिया गया, जिसमें राजशाही और धार्मिक विषयों से संबंधित कोई विशेषताओं मौजूद नहीं होगी। यह घटना 1 9 47 में हुई हालांकि, निर्माण की तैयारी बहुत लंबी थी, और काम केवल 1 9 5 9 में शुरू हुआ। अपने युवा मूर्तिकार द्वारा संचालित - एनए लाविन्स्की उन्होंने अपने स्नातक स्तर की पढ़ाई के काम में स्मारक का मसौदा तैयार किया। इवान सुसानिन ने क्रांति स्क्वायर के किनारे पर एक स्मारक का निर्माण शुरू किया।
हालांकि, सब कुछ इतना आसान नहीं था इस परियोजना को अस्थायी रूप से एक निरीक्षण के कारण निलंबित कर दिया गया था, जो इस तरह के निर्माण को गलत मानते हैं। फिर भी, 1 9 65 में परियोजना को मंजूरी दी गई, और 1 9 67 में इस सुविधा का गंभीर उद्घाटन हुआ।
इस जगह पर यह कई सालों से खड़ा रहा है, हाल ही में कोस्सारमा से उस स्मारक को स्थानांतरित करने का सवाल है जहां सुज़िनिन की घटनाओं और सीधा सीट पर विचार किया जा रहा है।
इवान सुसानिन स्मारक - यह अब कैसे दिखता है?
आंकड़ा वोल्गा का सामना करना पड़ता है, और इसकी शुरुआत सुज़िनिन्स्का स्क्वायर के पास है। यह ध्यान देने योग्य है कि स्क्वायर का नाम बदलकर 1992 में बदल दिया गया था।
इवान सुसानिन को एक स्मारक बनाना, मूर्तिकार ने एक आदमी, एक रूसी देशभक्त की सच्ची वीरता को व्यक्त करने की कोशिश की। यह भी एक ऐतिहासिक आंकड़ा नहीं है, बल्कि उस व्यक्ति के व्यक्तित्व की एक छवि है जो अपने देश को प्यार करता है और यदि आवश्यक हो, तो उसके संरक्षण के लिए खड़े हो जाओ। एक शब्द में, स्मारक बहुत इंप्रेशन छोड़ देता है।
स्मारक का पता, यह कहां है?
इस प्रकार, स्मारक के पूरे इतिहास पर विचार किया गया, यह विचार था कि यह अलग-अलग वर्षों में कैसे देखा गया था। इसकी विध्वंस और बहाली के कारण, कई लोग अक्सर इस बात में दिलचस्पी रखते हैं कि क्या शहर में इवान सुसानिन का एक स्मारक है? अब इस प्रश्न का उत्तर ज्ञात है। कोस्ट्रोमा में एक बार, सांस्कृतिक विरासत के इस उद्देश्य को देखना सुनिश्चित करें। स्मारक आपको रूसी लोगों के वीरता के बारे में सोचेंगे, और आप अपने देश के इतिहास को बेहतर ढंग से जानने में भी मदद करेंगे। स्मारक का पताः कोस्ट्रोमा, सेंट Ostrovsky।
| क्या कोस्ट्रोमा में इवान सुसनिन का स्मारक है? यह स्मारक हमारे समय में मौजूद है यहां आप वर्ष के किसी भी समय बहुत से पर्यटकों को देख सकते हैं। कई लोग इस सांस्कृतिक वस्तु से परिचित होने में रुचि रखते हैं, क्योंकि यह उन घटनाओं को उजागर करता है जो हमारे देश में संकट के समय में, सामान्य लोगों के वीरता पर प्रकाश डाला गया। एक अर्थ में, यह आपको इतिहास को छूने और इसे बेहतर ढंग से समझने की अनुमति देता है। अब हमें इस स्मारक के इतिहास के बारे में बात करने की आवश्यकता है। जैसा कि पहले से ऊपर उल्लेख किया गया है, कोस्टोरोमा में इवान सूसिन के पहले स्मारक को XIX सदी में बनाया गया था। इस तरह के एक वस्तु के निर्माण के लिए शर्त निकोलस आई के शहर की यात्रा थी। सम्राट का मानना था कि इवान सूसिन की उपलब्धि को एक विशेष स्मारक बनाकर बनाए रखना चाहिए। यह एक हज़ार आठ सौ पैंतीस में हुआ शुरू में, इसे शहर के केंद्रीय वर्ग पर ऑब्जेक्ट लगाने की योजना थी और इसे सुज़िनिन्काया का नाम दिया । तब स्मारक किस तरह दिखता है? मूलतः, इवान सुसानिन का स्मारक लाल ग्रेनाइट से बना एक स्तंभ के रूप में बनाया गया था। वह एक कुरसी पर थी। रचना के शीर्ष पर, झार मिखाइल फेदोरोविच की प्रतिमा थी। उसके सिर पर मोनोमाख की टोपी और गर्दन पर एक बड़ा क्रॉस था। बस्ट के बगल में राज्य के प्रतीक को रखा गया था। पूरे मूर्तिकला संरचना के नीचे सुसानिन का आंकड़ा था, जो घुटन टेक कर प्रार्थना करता था। इस प्रकार, स्मारक तब देखा, एक नौवीं शताब्दी में वापस। स्मारक पतन कैसे हुआ? यह सांस्कृतिक वस्तु कुछ समय के लिए शहर की केंद्रीय दृष्टि थी। बहुत से लोग यहां विशेष रूप से आए, जानते हुए कि कोस्ट्रोमा शहर में इवान सुसानिन का एक स्मारक है। हालांकि, यह लंबे समय तक नहीं था क्रांति के बाद, वह विध्वंस का खतरा था, क्योंकि एक विशेष दस्तावेज जारी किया गया था। उन्होंने उन वस्तुओं के विनाश के लिए प्रदान की जिन्हें राजाओं और उनके कर्मचारियों के सम्मान में कभी बनाया गया था इस प्रकार, स्मारक को बचाया नहीं जा सका, इसे एक नौ अट्ठारह में ध्वस्त कर दिया गया। इस स्मारक के आंकड़ों के भाग्य के बारे में भी कई संस्करण हैं। उनमें से एक के अनुसार, आंकड़े वोल्गा में दूसरे पर गिरा दिए गए - उन्हें अज्ञात जगह में दफन किया गया। एक और संस्करण है कि उन्हें अधिक उपयोगी प्रयोजनों के लिए रीमेल करने के लिए भेजा गया था। फिर स्मारक के स्थल पर केवल एक स्तंभ छोड़ा गया था। आश्चर्य की बात नहीं, उस समय स्क्वायर का नाम क्रांति स्क्वायर में बदल दिया गया था। लंबे समय तक इस जगह पर वर्णित घटनाओं के बाद एक छोटा ओबिलिस्क था, जिसमें शेष स्तंभ शामिल था। एक लाल ध्वज उस पर लटका दिया गया था। कुछ समय बाद भी कॉलम को नष्ट करने का निर्णय लिया गया, एक नौ चौंतीस में आखिरकार स्मारक को ध्वस्त कर दिया गया था, इसकी कतरन टूट गई थी और सड़क फ़र्श के टुकड़े के रूप में इस्तेमाल किया गया था। इसलिए, सांस्कृतिक विरासत के इस उद्देश्य के विनाश से संबंधित घटनाओं पर विचार किया गया। लंबे समय के लिए इस प्रश्न का उत्तर है कि क्या कोस्ट्रोमा में इवान सूसिन के स्मारक नकारात्मक थे। हालांकि, थोड़ी देर बाद, अधिकारियों ने फैसला किया कि इस घटना को अभी भी एक स्मारक के रूप में बनाए रखा जाना है, क्योंकि यह पूरे राज्य के इतिहास में एक महत्वपूर्ण चरण है। इसलिए, यह एक नया स्मारक तैयार करने का निर्णय लिया गया, जिसमें राजशाही और धार्मिक विषयों से संबंधित कोई विशेषताओं मौजूद नहीं होगी। यह घटना एक नौ सैंतालीस में हुई हालांकि, निर्माण की तैयारी बहुत लंबी थी, और काम केवल एक नौ पाँच नौ में शुरू हुआ। अपने युवा मूर्तिकार द्वारा संचालित - एनए लाविन्स्की उन्होंने अपने स्नातक स्तर की पढ़ाई के काम में स्मारक का मसौदा तैयार किया। इवान सुसानिन ने क्रांति स्क्वायर के किनारे पर एक स्मारक का निर्माण शुरू किया। हालांकि, सब कुछ इतना आसान नहीं था इस परियोजना को अस्थायी रूप से एक निरीक्षण के कारण निलंबित कर दिया गया था, जो इस तरह के निर्माण को गलत मानते हैं। फिर भी, एक नौ पैंसठ में परियोजना को मंजूरी दी गई, और एक नौ सरसठ में इस सुविधा का गंभीर उद्घाटन हुआ। इस जगह पर यह कई सालों से खड़ा रहा है, हाल ही में कोस्सारमा से उस स्मारक को स्थानांतरित करने का सवाल है जहां सुज़िनिन की घटनाओं और सीधा सीट पर विचार किया जा रहा है। इवान सुसानिन स्मारक - यह अब कैसे दिखता है? आंकड़ा वोल्गा का सामना करना पड़ता है, और इसकी शुरुआत सुज़िनिन्स्का स्क्वायर के पास है। यह ध्यान देने योग्य है कि स्क्वायर का नाम बदलकर एक हज़ार नौ सौ बानवे में बदल दिया गया था। इवान सुसानिन को एक स्मारक बनाना, मूर्तिकार ने एक आदमी, एक रूसी देशभक्त की सच्ची वीरता को व्यक्त करने की कोशिश की। यह भी एक ऐतिहासिक आंकड़ा नहीं है, बल्कि उस व्यक्ति के व्यक्तित्व की एक छवि है जो अपने देश को प्यार करता है और यदि आवश्यक हो, तो उसके संरक्षण के लिए खड़े हो जाओ। एक शब्द में, स्मारक बहुत इंप्रेशन छोड़ देता है। स्मारक का पता, यह कहां है? इस प्रकार, स्मारक के पूरे इतिहास पर विचार किया गया, यह विचार था कि यह अलग-अलग वर्षों में कैसे देखा गया था। इसकी विध्वंस और बहाली के कारण, कई लोग अक्सर इस बात में दिलचस्पी रखते हैं कि क्या शहर में इवान सुसानिन का एक स्मारक है? अब इस प्रश्न का उत्तर ज्ञात है। कोस्ट्रोमा में एक बार, सांस्कृतिक विरासत के इस उद्देश्य को देखना सुनिश्चित करें। स्मारक आपको रूसी लोगों के वीरता के बारे में सोचेंगे, और आप अपने देश के इतिहास को बेहतर ढंग से जानने में भी मदद करेंगे। स्मारक का पताः कोस्ट्रोमा, सेंट Ostrovsky। |
रायपुर। छत्तीसगढ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में पुलिस ने मुठभेड में एक महिला नक्सली कमांडर को मार गिराया है। बस्तर क्षेत्र के डीआईजी एसआरपी कल्लूरी ने रविवार को बताया कि छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई में बीजापुर जिले के सेंडरा गांव के जंगल में एक महिला नक्सली कमांडर मंगी को मार गिराया है। मंगी के सिर पर पांच लाख रूपये का ईनाम घोषित था। कल्लूरी ने बताया कि बीजापुर और महाराष्ट्र के गढचिरौली जिले के पुलिस दल को सीमावर्ती क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियान में रवाना किया गया था। दल में बीजापुर जिले के एएसपी इंदिरा कल्याण एलेसेला के नेतृत्व में 80 जवान और गढचिरौली जिले के एएसपी मंजूनाथ सिंह के नेतृत्व में 75 जवान शामिल थे।
| रायपुर। छत्तीसगढ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में पुलिस ने मुठभेड में एक महिला नक्सली कमांडर को मार गिराया है। बस्तर क्षेत्र के डीआईजी एसआरपी कल्लूरी ने रविवार को बताया कि छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई में बीजापुर जिले के सेंडरा गांव के जंगल में एक महिला नक्सली कमांडर मंगी को मार गिराया है। मंगी के सिर पर पांच लाख रूपये का ईनाम घोषित था। कल्लूरी ने बताया कि बीजापुर और महाराष्ट्र के गढचिरौली जिले के पुलिस दल को सीमावर्ती क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियान में रवाना किया गया था। दल में बीजापुर जिले के एएसपी इंदिरा कल्याण एलेसेला के नेतृत्व में अस्सी जवान और गढचिरौली जिले के एएसपी मंजूनाथ सिंह के नेतृत्व में पचहत्तर जवान शामिल थे। |
अगर पॉलिसीहोल्डर की मृत्यु हो जाए तो उसके नॉमिनी को पहले से तय डेथ बेनिफिट का लाभ दिया जाता है. डेथ बेनिफिट देने के बाद पॉलिसी अपने आप बंद हो जाती है. अगर दुर्घटना के चलते पॉलिसीहोल्डर की मृत्यु होती है तो नॉमिनी को एक्सिडेंट डेथ बेनिफिट दिया जाता है.
बाजार में ऐसे कई प्रोडक्ट हैं जिनमें हर महीने कुछ हजार रुपये जमा कर अंत में कई लाख रुपये पाए जा सकते हैं. इन प्रोडक्ट में एक है मनी बैक पॉलिसी. जैसा कि नाम से स्पष्ट है मनी बैक पॉलिसी वो होती है जिसमें मैच्योरिटी पर पैसे वापस हो जाते हैं. इस तरह की पॉलिसी में निवेश के साथ जीवन बीमा का लाभ मिलता है. पॉलिसीहोल्डर की असामयिक मृत्यु हो जाए या वह किसी असाध्य बीमारी से ग्रसित हो जाए तो मनीबैक पॉलिसी परिवार को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है. ऐसे प्लान को तकनीकी रूप से मनी बैक लाइफ इंश्योरेंस प्लान कहा जाता है.
मनी बैक पॉलिसी में 100 परसेंट गारंटीड रिटर्न मिलता है. इसी तरह का एक प्लान है आदित्य बिरला सिक्योर प्लस प्लान. यह एक मनी बैक पॉलिसी है जिसमें हर महीने 5 हजार रुपये जमा करने पर अंत में 14.4 लाख रुपये मिलते हैं. यह रिटर्न 100 परसेंट गारंटीड होता है. इस प्लान में जमाकर्ता को पूरी अवधि में 6 लाख जमा करना होता है, लेकिन जब पॉलिसी मैच्योर हो जाती है तो 14.4 लाख रुपये मिलते हैं. इनकम टैक्स की धारा 80C के तहत रिटर्न पर कोई टैक्स नहीं लगता. यहां ध्यान रखने वाली बात है कि मैच्योरिटी की राशि पॉलिसी पूरी होने के बाद हर साल पेआउट के हिसाब से मिलता है.
यह पॉलिसी पूरी होने के बाद या पॉलिसी टर्म पूरा होने के बाद जमाकर्ता को हर साल के अंत में पेआउट के रूप में रकम मिलनी शुरू हो जाएगी. यह रकम पूरी तरह से गारंटीड होगी. यानी पहले जिस पेआउट का वादा होगा, उसी हिसाब से पैसे हर साल के अंत में पॉलिसीहोल्डर को दिए जाएंगे. हर साल जो प्रीमियम चुकाए जाते हैं, उस पर रिटर्न की दर पहले से निर्धारित रहती है. उसी दर के आधार पर पॉलिसीहोल्डर को रिटर्न दिया जाता है. इसके लिए पॉलिसी लेते वक्त जमाकर्ता को दो में से कोई एक ऑप्शन चुनना होता है.
पहले ऑप्शन के तहत हर साल पेआउट दिया जाता है और इस रकम में हर साल बढ़ोतरी होती रहती है. सालाना प्रीमियम के आधार पर साल के अंत में पेआउट मिलता है और यह 100 परसेंट से 600 परसेंट की बढ़ोतरी के आधार पर दिया जाता है. यह रिटर्न 6 साल तक के लिए दिया जाता है. दूसरा ऑप्शन बी है जिसमें सालाना प्रीमियम का 215 परसेंट तक रिटर्न मिलता है. यह रिटर्न पॉलिसी शुरू होने के 8, 10 और 12 साल पर मिलते हैं. इस पॉलिसी में 6 लाख का लाइफ इंश्योरेंस भी दिया जाता है. यह प्लान के प्रीमियम पर निर्भर करता है.
इसमें डेथ बेनिफिट भी मिलता है. अगर पॉलिसीहोल्डर की मृत्यु हो जाए तो उसके नॉमिनी को पहले से तय डेथ बेनिफिट का लाभ दिया जाता है. डेथ बेनिफिट देने के बाद पॉलिसी अपने आप बंद हो जाती है. अगर दुर्घटना के चलते पॉलिसीहोल्डर की मृत्यु होती है तो नॉमिनी को एक्सिडेंट डेथ बेनिफिट दिया जाता है. इसकी राशि 1 करोड़ रुपये तक हो सकती है. इस पॉलिसी में मैच्योरिटी बेनिफिट भी मिलता है. पॉलिसी का टर्म खत्म होने तक होल्डर जीवित रहता है तो उसे इनकम बेनिफिट दिया जाता है. इसे कम्युटेड वैल्यू कहा जाता है. प्रीमियम पर 9 परसेंट की ब्याज के हिसाब से मैच्योरिटी बेनिफिट दिया जाता है.
ये भी पढ़ेंः इन खास 38 करोड़ लोगों के लिए सरकार की अनूठी पहल, जानें- क्या आपको भी मिलेगा फायदा?
| अगर पॉलिसीहोल्डर की मृत्यु हो जाए तो उसके नॉमिनी को पहले से तय डेथ बेनिफिट का लाभ दिया जाता है. डेथ बेनिफिट देने के बाद पॉलिसी अपने आप बंद हो जाती है. अगर दुर्घटना के चलते पॉलिसीहोल्डर की मृत्यु होती है तो नॉमिनी को एक्सिडेंट डेथ बेनिफिट दिया जाता है. बाजार में ऐसे कई प्रोडक्ट हैं जिनमें हर महीने कुछ हजार रुपये जमा कर अंत में कई लाख रुपये पाए जा सकते हैं. इन प्रोडक्ट में एक है मनी बैक पॉलिसी. जैसा कि नाम से स्पष्ट है मनी बैक पॉलिसी वो होती है जिसमें मैच्योरिटी पर पैसे वापस हो जाते हैं. इस तरह की पॉलिसी में निवेश के साथ जीवन बीमा का लाभ मिलता है. पॉलिसीहोल्डर की असामयिक मृत्यु हो जाए या वह किसी असाध्य बीमारी से ग्रसित हो जाए तो मनीबैक पॉलिसी परिवार को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है. ऐसे प्लान को तकनीकी रूप से मनी बैक लाइफ इंश्योरेंस प्लान कहा जाता है. मनी बैक पॉलिसी में एक सौ परसेंट गारंटीड रिटर्न मिलता है. इसी तरह का एक प्लान है आदित्य बिरला सिक्योर प्लस प्लान. यह एक मनी बैक पॉलिसी है जिसमें हर महीने पाँच हजार रुपये जमा करने पर अंत में चौदह.चार लाख रुपये मिलते हैं. यह रिटर्न एक सौ परसेंट गारंटीड होता है. इस प्लान में जमाकर्ता को पूरी अवधि में छः लाख जमा करना होता है, लेकिन जब पॉलिसी मैच्योर हो जाती है तो चौदह.चार लाख रुपये मिलते हैं. इनकम टैक्स की धारा अस्सी डिग्री सेल्सियस के तहत रिटर्न पर कोई टैक्स नहीं लगता. यहां ध्यान रखने वाली बात है कि मैच्योरिटी की राशि पॉलिसी पूरी होने के बाद हर साल पेआउट के हिसाब से मिलता है. यह पॉलिसी पूरी होने के बाद या पॉलिसी टर्म पूरा होने के बाद जमाकर्ता को हर साल के अंत में पेआउट के रूप में रकम मिलनी शुरू हो जाएगी. यह रकम पूरी तरह से गारंटीड होगी. यानी पहले जिस पेआउट का वादा होगा, उसी हिसाब से पैसे हर साल के अंत में पॉलिसीहोल्डर को दिए जाएंगे. हर साल जो प्रीमियम चुकाए जाते हैं, उस पर रिटर्न की दर पहले से निर्धारित रहती है. उसी दर के आधार पर पॉलिसीहोल्डर को रिटर्न दिया जाता है. इसके लिए पॉलिसी लेते वक्त जमाकर्ता को दो में से कोई एक ऑप्शन चुनना होता है. पहले ऑप्शन के तहत हर साल पेआउट दिया जाता है और इस रकम में हर साल बढ़ोतरी होती रहती है. सालाना प्रीमियम के आधार पर साल के अंत में पेआउट मिलता है और यह एक सौ परसेंट से छः सौ परसेंट की बढ़ोतरी के आधार पर दिया जाता है. यह रिटर्न छः साल तक के लिए दिया जाता है. दूसरा ऑप्शन बी है जिसमें सालाना प्रीमियम का दो सौ पंद्रह परसेंट तक रिटर्न मिलता है. यह रिटर्न पॉलिसी शुरू होने के आठ, दस और बारह साल पर मिलते हैं. इस पॉलिसी में छः लाख का लाइफ इंश्योरेंस भी दिया जाता है. यह प्लान के प्रीमियम पर निर्भर करता है. इसमें डेथ बेनिफिट भी मिलता है. अगर पॉलिसीहोल्डर की मृत्यु हो जाए तो उसके नॉमिनी को पहले से तय डेथ बेनिफिट का लाभ दिया जाता है. डेथ बेनिफिट देने के बाद पॉलिसी अपने आप बंद हो जाती है. अगर दुर्घटना के चलते पॉलिसीहोल्डर की मृत्यु होती है तो नॉमिनी को एक्सिडेंट डेथ बेनिफिट दिया जाता है. इसकी राशि एक करोड़ रुपये तक हो सकती है. इस पॉलिसी में मैच्योरिटी बेनिफिट भी मिलता है. पॉलिसी का टर्म खत्म होने तक होल्डर जीवित रहता है तो उसे इनकम बेनिफिट दिया जाता है. इसे कम्युटेड वैल्यू कहा जाता है. प्रीमियम पर नौ परसेंट की ब्याज के हिसाब से मैच्योरिटी बेनिफिट दिया जाता है. ये भी पढ़ेंः इन खास अड़तीस करोड़ लोगों के लिए सरकार की अनूठी पहल, जानें- क्या आपको भी मिलेगा फायदा? |
Assam Flood Latest News : पूर्वोत्तर राज्य असम में बाढ़ (Assam Flood) की गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है। वर्तमान में राज्य के 32 जिलों के 5000 से अधिक गांव पूरी तरह बाढ़ में डूबे हुए हैं।
Assam Flood Latest News: कई राज्यों में इन दिनों भारी बारिश और आंधी तूफान का सिलसिला जारी रहने के कारण पूर्वोत्तर राज्य असम में बाढ़ (Flood In Assam) की गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है जिसके कारण राज्य में हर तरफ हाहाकार मचा हुआ है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक पिछले 24 घंटे के दौरान लैंडस्लाइड (Landslide) और बाढ़ के कारण असम में 11 लोगों की मौत हुई है। जिसके कारण राज्य में बाढ़ के कारण होने वाली मौतों का आंकड़ा 80 के पार जा चुका है।
बता दें मूसलाधार बारिश के कारण राज्य के ज्यादातर जिलों में बाढ़ थी गंभीर संकट उत्पन्न हो गई है। आपदा प्रबंधन द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक वर्तमान में राज्य के 32 जिले बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित है जिनमें 5,424 गांवों के करीब 47 लाख लोगों की जीवन बाढ़ से प्रभावित हुई है।
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक 35 जिलों में से 32 जिले इस वक्त बाढ़ से गंभीर रूप से प्रभावित हैं। इन जिलों के 5,000 से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में आ जाने के कारण अब तक 47 लाख 72 हजार से अधिक लोगों की जीवन प्रभावित हो चुकी है। बाढ़ में बेघर हुए लोगों के लिए असम सरकार ने करीब 1500 से अधिक राहत शिविरों को खोला है जिनमें 2. 5 लाख के करीब बेघर लोगों ने शरण लिया है।
बता दें असम में बीते 2 महीने से मूसलाधार बारिश का सिलसिला जारी है, जिसके कारण यहां हर रोज मौत के आंकड़ों में इजाफा देखा जा रहा है। रविवार को राज्य में भूस्खलन और बाढ़ के कारण 8 लोगों की मौत हुई थी जिसमें दो पुलिसकर्मी समेत एक सब-इंस्पेक्टर भी शामिल थे। वहीं, बीते दिन सोमवार को राज्य में बाढ़ और भूस्खलन के कारण 11 लोगों की मौत हुई है। इन मरने वालों में दो छोटे बच्चे भी शामिल हैं। इसके साथ ही राज्य में बाढ़ तथा भूस्खलन के कारण अब तक कुल 82 लोगों की मौत हो चुकी है।
असम में बाढ़ के कारण इस वक्त यहां का बारपेटा जिला सबसे अधिक प्रभावित है। राज्य आपदा प्रबंधन द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक बारपेटा जिले के करीब 90 फ़ीसदी इलाके इस वक्त बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं जिसके कारण यहां रहने वाले करीब 13 लाख लोगों की जिंदगी प्रभावित हुई है। बारपेटा के अलावा असम के नगांव तथा दरांग जिले में भी बाढ़ में अपना भीषण प्रकोप दिखाया है।
अकेले दरांग जिले में ही करीब 4 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। वहीं, नगांव में भी 3. 5 लाख से अधिक लोगों की ज़िंदगी प्रभावित हुई है। उधर कछार में लैंडस्लाइड के कारण लगातार मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। बीते दिन लैंडस्लाइड के मलबे में फंसने के कारण कछार में दो लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा शनिवार को भी कछार के पहाड़ी इलाके में लैंड स्लाइड के कारण 2 लोगों की मौत हुई थी।
असम में बाढ़ के कारण लगातार स्थितियां गंभीर होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के मुख्यमंत्री हेमंत विश्व सरमा से फोन पर बात की। प्रधानमंत्री ने असम के मुख्यमंत्री को यह आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार इस आपदा के वक्त में असम के साथ मजबूती से खड़ा है और हर संभव सहायता करने के लिए तैयार हैं। बता दें बीते शनिवार को मुख्यमंत्री सरमा ने राहत शिविरों का दौरा किया था। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि एनडीआरएफ के साथ सेना भी बाढ़ में फंसे लोगों की मदद के लिए मुस्तैद हैं। सभी जवानों ने मिलकर बड़ी संख्या में लोगों को बाढ़ प्रभावित इलाके से निकालकर सुरक्षित जगह पर पहुंचा दिया है इसकी ऑपरेशन के सिलसिला आगे भी जारी रखा जाएगा।
असम में ज्यादातर लोगों की रोजी-रोटी के लिए आय का स्रोत खेती है मगर मूसलाधार बारिश के कारण उत्पन्न बाढ़ की स्थिति ने किसानों के फसल को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। बता दे हर साल इस समय असम में किसान अपने खेतों में धान की फसल काटते हैं लेकिन इस बार मूसलाधार बारिश और बाढ़ ने उनके फसल को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। बाढ़ ग्रस्त नगांव जिले के गांव में एक किसान ने कहा कि 'हमने अपनी फसल का ज्यादातर हिस्सा खो दिया है और जो बचा हुआ है उसको बचाने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं ताकि पेट पालने भर का अपने परिवार के लिए कुछ बचा सकें। '
लगातार दो महीने से हुई मूसलाधार बारिश के कारण असम में बाढ़ की विकट स्थिति उत्पन्न हो गई है जिसके कारण राज्य के ज्यादातर जिलों का दूसरे जिलों के साथ संपर्क टूट गया है। सबसे ज्यादा पूरा प्रभाव असम के पर्वती हिस्सों में स्थित जिलों का हुआ है जहां निचले क्षेत्रों में पानी भर जाने के कारण यहां के लोगों को खाने का सामान भी ठीक से नहीं मिल पा रहा।
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक राज्य के 20 से अधिक जिलों में कई प्रमुख सड़कें बह चुकी हैं कई पुराने पुल भी भह चुके हैं। वहीं रेल सेवाओं पर भी बाढ़ का बुरा प्रभाव देखने को मिला है निचले क्षेत्रों में स्थित कई स्टेशनों पर पानी भर गया है तो कई जगहों पर ट्रैक भी बह गए हैं।
| Assam Flood Latest News : पूर्वोत्तर राज्य असम में बाढ़ की गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है। वर्तमान में राज्य के बत्तीस जिलों के पाँच हज़ार से अधिक गांव पूरी तरह बाढ़ में डूबे हुए हैं। Assam Flood Latest News: कई राज्यों में इन दिनों भारी बारिश और आंधी तूफान का सिलसिला जारी रहने के कारण पूर्वोत्तर राज्य असम में बाढ़ की गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है जिसके कारण राज्य में हर तरफ हाहाकार मचा हुआ है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक पिछले चौबीस घंटाटे के दौरान लैंडस्लाइड और बाढ़ के कारण असम में ग्यारह लोगों की मौत हुई है। जिसके कारण राज्य में बाढ़ के कारण होने वाली मौतों का आंकड़ा अस्सी के पार जा चुका है। बता दें मूसलाधार बारिश के कारण राज्य के ज्यादातर जिलों में बाढ़ थी गंभीर संकट उत्पन्न हो गई है। आपदा प्रबंधन द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक वर्तमान में राज्य के बत्तीस जिले बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित है जिनमें पाँच,चार सौ चौबीस गांवों के करीब सैंतालीस लाख लोगों की जीवन बाढ़ से प्रभावित हुई है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक पैंतीस जिलों में से बत्तीस जिले इस वक्त बाढ़ से गंभीर रूप से प्रभावित हैं। इन जिलों के पाँच,शून्य से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में आ जाने के कारण अब तक सैंतालीस लाख बहत्तर हजार से अधिक लोगों की जीवन प्रभावित हो चुकी है। बाढ़ में बेघर हुए लोगों के लिए असम सरकार ने करीब एक हज़ार पाँच सौ से अधिक राहत शिविरों को खोला है जिनमें दो. पाँच लाख के करीब बेघर लोगों ने शरण लिया है। बता दें असम में बीते दो महीने से मूसलाधार बारिश का सिलसिला जारी है, जिसके कारण यहां हर रोज मौत के आंकड़ों में इजाफा देखा जा रहा है। रविवार को राज्य में भूस्खलन और बाढ़ के कारण आठ लोगों की मौत हुई थी जिसमें दो पुलिसकर्मी समेत एक सब-इंस्पेक्टर भी शामिल थे। वहीं, बीते दिन सोमवार को राज्य में बाढ़ और भूस्खलन के कारण ग्यारह लोगों की मौत हुई है। इन मरने वालों में दो छोटे बच्चे भी शामिल हैं। इसके साथ ही राज्य में बाढ़ तथा भूस्खलन के कारण अब तक कुल बयासी लोगों की मौत हो चुकी है। असम में बाढ़ के कारण इस वक्त यहां का बारपेटा जिला सबसे अधिक प्रभावित है। राज्य आपदा प्रबंधन द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक बारपेटा जिले के करीब नब्बे फ़ीसदी इलाके इस वक्त बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं जिसके कारण यहां रहने वाले करीब तेरह लाख लोगों की जिंदगी प्रभावित हुई है। बारपेटा के अलावा असम के नगांव तथा दरांग जिले में भी बाढ़ में अपना भीषण प्रकोप दिखाया है। अकेले दरांग जिले में ही करीब चार लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। वहीं, नगांव में भी तीन. पाँच लाख से अधिक लोगों की ज़िंदगी प्रभावित हुई है। उधर कछार में लैंडस्लाइड के कारण लगातार मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। बीते दिन लैंडस्लाइड के मलबे में फंसने के कारण कछार में दो लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा शनिवार को भी कछार के पहाड़ी इलाके में लैंड स्लाइड के कारण दो लोगों की मौत हुई थी। असम में बाढ़ के कारण लगातार स्थितियां गंभीर होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के मुख्यमंत्री हेमंत विश्व सरमा से फोन पर बात की। प्रधानमंत्री ने असम के मुख्यमंत्री को यह आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार इस आपदा के वक्त में असम के साथ मजबूती से खड़ा है और हर संभव सहायता करने के लिए तैयार हैं। बता दें बीते शनिवार को मुख्यमंत्री सरमा ने राहत शिविरों का दौरा किया था। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि एनडीआरएफ के साथ सेना भी बाढ़ में फंसे लोगों की मदद के लिए मुस्तैद हैं। सभी जवानों ने मिलकर बड़ी संख्या में लोगों को बाढ़ प्रभावित इलाके से निकालकर सुरक्षित जगह पर पहुंचा दिया है इसकी ऑपरेशन के सिलसिला आगे भी जारी रखा जाएगा। असम में ज्यादातर लोगों की रोजी-रोटी के लिए आय का स्रोत खेती है मगर मूसलाधार बारिश के कारण उत्पन्न बाढ़ की स्थिति ने किसानों के फसल को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। बता दे हर साल इस समय असम में किसान अपने खेतों में धान की फसल काटते हैं लेकिन इस बार मूसलाधार बारिश और बाढ़ ने उनके फसल को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। बाढ़ ग्रस्त नगांव जिले के गांव में एक किसान ने कहा कि 'हमने अपनी फसल का ज्यादातर हिस्सा खो दिया है और जो बचा हुआ है उसको बचाने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं ताकि पेट पालने भर का अपने परिवार के लिए कुछ बचा सकें। ' लगातार दो महीने से हुई मूसलाधार बारिश के कारण असम में बाढ़ की विकट स्थिति उत्पन्न हो गई है जिसके कारण राज्य के ज्यादातर जिलों का दूसरे जिलों के साथ संपर्क टूट गया है। सबसे ज्यादा पूरा प्रभाव असम के पर्वती हिस्सों में स्थित जिलों का हुआ है जहां निचले क्षेत्रों में पानी भर जाने के कारण यहां के लोगों को खाने का सामान भी ठीक से नहीं मिल पा रहा। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक राज्य के बीस से अधिक जिलों में कई प्रमुख सड़कें बह चुकी हैं कई पुराने पुल भी भह चुके हैं। वहीं रेल सेवाओं पर भी बाढ़ का बुरा प्रभाव देखने को मिला है निचले क्षेत्रों में स्थित कई स्टेशनों पर पानी भर गया है तो कई जगहों पर ट्रैक भी बह गए हैं। |
दिल्ली के IGI स्टेडियम के नजदीक आज सुबह दो स्कूल बसों में आमने सामने से भिड़ंत हो गई। घटना में किसी छात्र को चोट नहीं आई है। ड्राइवर को हल्की चोट लगी है। सभी बच्चे सुरक्षित हैं।
दिल्ली के IGI स्टेडियम के निकट आज सुबह 2 स्कूल बसों में आमने-सामने से टक्कर हो गई। घटना में किसी भी छात्र के घायल या चोटिल होने की जानकारी नहीं मिली है। हालांकि बस के ड्राइवर को हल्की चोटें आई हैं और उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। रफ्तार कम होने से बड़ा हादसा टल गया।
स्थानीय लोगों ने घटना के बारे में बताया कि आज सुबह 2 बस अनियंत्रित होकर एक दूसरे से टकरा गईं। लोगों ने तुरंत बच्चों को बस से बाहर निकाला। जिसके बाद ड्राइवर को अस्पताल ले जाय गया। जहां प्राथमिक उपचार और पट्टी की गई। पुलिस ने दोनों स्कूलों को घटना की जानकारी दी है।
पुलिस ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि स्कूल बस की भिड़ंत में बच्चों को चोट नहीं लगी है। घटना के बारे में स्कूल प्रशासन को सूचित किया गया है। घटना की वजह के बारे में ड्राइवरों से पूछताछ की जा रही है।
| दिल्ली के IGI स्टेडियम के नजदीक आज सुबह दो स्कूल बसों में आमने सामने से भिड़ंत हो गई। घटना में किसी छात्र को चोट नहीं आई है। ड्राइवर को हल्की चोट लगी है। सभी बच्चे सुरक्षित हैं। दिल्ली के IGI स्टेडियम के निकट आज सुबह दो स्कूल बसों में आमने-सामने से टक्कर हो गई। घटना में किसी भी छात्र के घायल या चोटिल होने की जानकारी नहीं मिली है। हालांकि बस के ड्राइवर को हल्की चोटें आई हैं और उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। रफ्तार कम होने से बड़ा हादसा टल गया। स्थानीय लोगों ने घटना के बारे में बताया कि आज सुबह दो बस अनियंत्रित होकर एक दूसरे से टकरा गईं। लोगों ने तुरंत बच्चों को बस से बाहर निकाला। जिसके बाद ड्राइवर को अस्पताल ले जाय गया। जहां प्राथमिक उपचार और पट्टी की गई। पुलिस ने दोनों स्कूलों को घटना की जानकारी दी है। पुलिस ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि स्कूल बस की भिड़ंत में बच्चों को चोट नहीं लगी है। घटना के बारे में स्कूल प्रशासन को सूचित किया गया है। घटना की वजह के बारे में ड्राइवरों से पूछताछ की जा रही है। |
भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 में भारतीय राज्यों के बारे में निम्नलिखित प्रावधान शामिल हैंः महामहिम की सरकार और भारतीय राज्यों के शासकों के बीच सभी संधियाँ, समझौते आदि व्यपगत होंगे। शब्द 'भारत के सम्राट' को हटा दिया जाएगा। भारतीय राज्य भारत या पाकिस्तान के नए डोमिनियन में से किसी के लिए स्वतंत्र होंगे। राजशाही को समाप्त कर दिया गया था और इसलिए रियासतों को रद्द किया जाना था। राष्ट्रीय अनंतिम सरकार में सरदार वल्लभभाई पटेल ने राज्य विभाग का नेतृत्व किया। पटेल और उनके प्रमुख सहयोगी वीपी मेनन ने भारतीय राजकुमारों की देशभक्ति की भावना की अपील की और उन्हें भारतीय संघ में शामिल होने के लिए राजी किया। रक्षा, विदेश मामलों और संचार के तीन विषयों के आत्मसमर्पण के आधार पर यह घोषणाएँ होनी थीं। लॉर्ड माउंटबेटन ने अपने मिशन में पटेल को सहायता दी। कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने 26 अक्टूबर, 1947 को और 1948 में हैदराबाद के निज़ाम ने विलत पर हस्ताक्षर किए। दूसरी ओर वीपी मेनन ने उड़ीसा प्रांत के साथ उड़ीसा के कई छोटे राज्यों में प्रवेश के साधनों पर सफलतापूर्वक बातचीत की। 18 दिसंबर को छत्तीसगढ़ शासकों का मध्य प्रांत में विलय हो गया। 17 से 21 जनवरी 1948 की अवधि के बीच, मेनन ने काठियावाड़ में छोटे राज्यों के स्कोर के लिए समझौता किया, जो कि काठियावाड़ के संघ का गठन करने के लिए शुरू हुआ, जिसने 15 फरवरी को शासन करना शुरू कर दिया। भौगोलिक और प्रशासनिक कारणों से, बड़ौदा और कोल्हापुर को तत्कालीन बोमाबाई प्रांत में छोड़ दिया गया था; गुजरात राज्यों को भी बॉम्बे प्रांत के साथ मिला दिया गया था। 61 राज्यों के एकीकरण का दूसरा रूप सात केंद्र प्रशासित क्षेत्रों का गठन था। इस प्रकार हिमाचल प्रदेश, विंध्य प्रदेश (वर्तमान मध्य प्रदेश), त्रिपुरा, मणिपुर, भोपाल, कच्छ और बिलासपुर राज्यों का गठन किया गया। इनके अलावा संयुक्त राज्य के मत्स्य राज्य, विंध्य प्रदेश के संघ, मध्य भारत, पटियाला और पूर्वी पंजाब राज्य संघ, राजस्थान और संयुक्त राज्य के कोचीन-त्रावणकोर भी भारत में एकीकृत किए गए थे। हालाँकि, भारत का एकीकरण फ्रांसीसी और पुर्तगाली परिक्षेत्रों के बिना अभी भी अधूरा था। 1 नवंबर, 1954 को पांडिचेरी (पुदुचेरी) और चंदनागोरे को भारत में फ़्रांसीसियों ने सौंप दिया। हालांकि, पुर्तगाली सरकार ने कहा कि चूंकि गोवा पुर्तगाल के महानगरीय क्षेत्रों का हिस्सा था, इसलिए वे किसी भी तरह से प्रभावित नहीं हो सकते थे। जब बातचीत से पुर्तगाली सरकार नहीं मानी तो भारतीय सेना ने 19 दिसंबर, 1961 को गोवा, दमन और दीव को आजाद कराया गया और भारत को एक एकीकृत देश बना दिया गया।
| भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में भारतीय राज्यों के बारे में निम्नलिखित प्रावधान शामिल हैंः महामहिम की सरकार और भारतीय राज्यों के शासकों के बीच सभी संधियाँ, समझौते आदि व्यपगत होंगे। शब्द 'भारत के सम्राट' को हटा दिया जाएगा। भारतीय राज्य भारत या पाकिस्तान के नए डोमिनियन में से किसी के लिए स्वतंत्र होंगे। राजशाही को समाप्त कर दिया गया था और इसलिए रियासतों को रद्द किया जाना था। राष्ट्रीय अनंतिम सरकार में सरदार वल्लभभाई पटेल ने राज्य विभाग का नेतृत्व किया। पटेल और उनके प्रमुख सहयोगी वीपी मेनन ने भारतीय राजकुमारों की देशभक्ति की भावना की अपील की और उन्हें भारतीय संघ में शामिल होने के लिए राजी किया। रक्षा, विदेश मामलों और संचार के तीन विषयों के आत्मसमर्पण के आधार पर यह घोषणाएँ होनी थीं। लॉर्ड माउंटबेटन ने अपने मिशन में पटेल को सहायता दी। कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने छब्बीस अक्टूबर, एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस को और एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस में हैदराबाद के निज़ाम ने विलत पर हस्ताक्षर किए। दूसरी ओर वीपी मेनन ने उड़ीसा प्रांत के साथ उड़ीसा के कई छोटे राज्यों में प्रवेश के साधनों पर सफलतापूर्वक बातचीत की। अट्ठारह दिसंबर को छत्तीसगढ़ शासकों का मध्य प्रांत में विलय हो गया। सत्रह से इक्कीस जनवरी एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस की अवधि के बीच, मेनन ने काठियावाड़ में छोटे राज्यों के स्कोर के लिए समझौता किया, जो कि काठियावाड़ के संघ का गठन करने के लिए शुरू हुआ, जिसने पंद्रह फरवरी को शासन करना शुरू कर दिया। भौगोलिक और प्रशासनिक कारणों से, बड़ौदा और कोल्हापुर को तत्कालीन बोमाबाई प्रांत में छोड़ दिया गया था; गुजरात राज्यों को भी बॉम्बे प्रांत के साथ मिला दिया गया था। इकसठ राज्यों के एकीकरण का दूसरा रूप सात केंद्र प्रशासित क्षेत्रों का गठन था। इस प्रकार हिमाचल प्रदेश, विंध्य प्रदेश , त्रिपुरा, मणिपुर, भोपाल, कच्छ और बिलासपुर राज्यों का गठन किया गया। इनके अलावा संयुक्त राज्य के मत्स्य राज्य, विंध्य प्रदेश के संघ, मध्य भारत, पटियाला और पूर्वी पंजाब राज्य संघ, राजस्थान और संयुक्त राज्य के कोचीन-त्रावणकोर भी भारत में एकीकृत किए गए थे। हालाँकि, भारत का एकीकरण फ्रांसीसी और पुर्तगाली परिक्षेत्रों के बिना अभी भी अधूरा था। एक नवंबर, एक हज़ार नौ सौ चौवन को पांडिचेरी और चंदनागोरे को भारत में फ़्रांसीसियों ने सौंप दिया। हालांकि, पुर्तगाली सरकार ने कहा कि चूंकि गोवा पुर्तगाल के महानगरीय क्षेत्रों का हिस्सा था, इसलिए वे किसी भी तरह से प्रभावित नहीं हो सकते थे। जब बातचीत से पुर्तगाली सरकार नहीं मानी तो भारतीय सेना ने उन्नीस दिसंबर, एक हज़ार नौ सौ इकसठ को गोवा, दमन और दीव को आजाद कराया गया और भारत को एक एकीकृत देश बना दिया गया। |
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