raw_text stringlengths 113 616k | normalized_text stringlengths 98 618k |
|---|---|
गोवा के आबकारी आयुक्त (Excise Commissioner) ने राज्य के विवादास्पद रेस्तरां (Restaurant) को लाइसेंस जारी करने के मामले में गुरुवार को अंतिम दलीलें सुनीं। हाल ही में कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि यह रेस्तरां केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के परिवार से जुड़ा हुआ है।
पणजी, पीटीआई। गोवा के आबकारी आयुक्त (Excise Commissioner) ने राज्य के विवादास्पद रेस्तरां (Restaurant) को लाइसेंस जारी करने के मामले में गुरुवार को अंतिम दलीलें सुनीं। हाल ही में कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि यह रेस्तरां केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के परिवार से जुड़ा हुआ है। इस मामले में शिकायतकर्ता वकील और एक्टविस्ट आयर्स रॉड्रिक्स (Aires Rodrigues) ने कहा कि नारायण गाड (Narayan Gad) ने इस मामले में अंतिम दलीलें सुनी और इसपर 20 अक्टूबर को आदेश सुनाया जाएगा।
मालूम हो कि राड्रिक्स ने एक शिकायत दर्ज कराई थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि उत्तरी गोवा के असगाओ में 'Silly Souls Cafe and Bar' चलाने का लाइसेंस अवैध रूप से हासिल किया गया और साल 2021 में इसको मरने वाले व्यक्ति के नाम पर ही नवीनीकृत किया गया था। इस मामले में पहली सुनवाई 29 जुलाई को हुई थी।
शिकायतकर्ता राड्रिक्स ने दर्ज शिकायत में आरोप लगाया था कि रेस्तरां का आबकारी लाइसेंस का नवीनीकरण एंथोनी डीगामा के नाम पर किया गया, जिसकी एक साल पहले ही मृत्यु हो गई थी। शिकायतकर्ता ने इस बारे में कहा, 'इस मामले में अंतिम सुनवाई पूरी हो गई है। मैंने आबकारी आयुक्त नारायण गाड को बताया कि एंथनी डीजीएम के नाम से अवैध रूप से आबकारी लाइसेंस जारी किया गया था, जिसकी पहले ही मृत्यु हो गयी थी। '
इस मामले में डीगामा परिवार ( DGama Family) का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील बेनेडिक्ट नाजरेथ ने बताया कि दोनों पक्षों के वकीलों ने अपना-अपना काम किया है। हालांकि इस मामले पर फैसला आबकारी आयुक्त को ही करना है। उन्होंने कहा, 'हम एक जीवंत लोकतंत्र में रहते हैं और हम कानून के शासन में भरोसा रखते हैं। हमने आपना काम किया है और उन्होंने इस मामले पर आपना काम किया है। अब इस पर निर्णय आयुक्त को ही करना है। '
मालूम हो कि कांग्रेस ने इस मामले पर आरोप लगाते हुए कहा था कि यह संपत्ति केंद्रीय मंत्री ईरानी के बेटी से जुड़ा हुआ है। हालांकि केंद्रीय मंत्री ने इस आरोप को खारिज कर दिया था।
| गोवा के आबकारी आयुक्त ने राज्य के विवादास्पद रेस्तरां को लाइसेंस जारी करने के मामले में गुरुवार को अंतिम दलीलें सुनीं। हाल ही में कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि यह रेस्तरां केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के परिवार से जुड़ा हुआ है। पणजी, पीटीआई। गोवा के आबकारी आयुक्त ने राज्य के विवादास्पद रेस्तरां को लाइसेंस जारी करने के मामले में गुरुवार को अंतिम दलीलें सुनीं। हाल ही में कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि यह रेस्तरां केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के परिवार से जुड़ा हुआ है। इस मामले में शिकायतकर्ता वकील और एक्टविस्ट आयर्स रॉड्रिक्स ने कहा कि नारायण गाड ने इस मामले में अंतिम दलीलें सुनी और इसपर बीस अक्टूबर को आदेश सुनाया जाएगा। मालूम हो कि राड्रिक्स ने एक शिकायत दर्ज कराई थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि उत्तरी गोवा के असगाओ में 'Silly Souls Cafe and Bar' चलाने का लाइसेंस अवैध रूप से हासिल किया गया और साल दो हज़ार इक्कीस में इसको मरने वाले व्यक्ति के नाम पर ही नवीनीकृत किया गया था। इस मामले में पहली सुनवाई उनतीस जुलाई को हुई थी। शिकायतकर्ता राड्रिक्स ने दर्ज शिकायत में आरोप लगाया था कि रेस्तरां का आबकारी लाइसेंस का नवीनीकरण एंथोनी डीगामा के नाम पर किया गया, जिसकी एक साल पहले ही मृत्यु हो गई थी। शिकायतकर्ता ने इस बारे में कहा, 'इस मामले में अंतिम सुनवाई पूरी हो गई है। मैंने आबकारी आयुक्त नारायण गाड को बताया कि एंथनी डीजीएम के नाम से अवैध रूप से आबकारी लाइसेंस जारी किया गया था, जिसकी पहले ही मृत्यु हो गयी थी। ' इस मामले में डीगामा परिवार का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील बेनेडिक्ट नाजरेथ ने बताया कि दोनों पक्षों के वकीलों ने अपना-अपना काम किया है। हालांकि इस मामले पर फैसला आबकारी आयुक्त को ही करना है। उन्होंने कहा, 'हम एक जीवंत लोकतंत्र में रहते हैं और हम कानून के शासन में भरोसा रखते हैं। हमने आपना काम किया है और उन्होंने इस मामले पर आपना काम किया है। अब इस पर निर्णय आयुक्त को ही करना है। ' मालूम हो कि कांग्रेस ने इस मामले पर आरोप लगाते हुए कहा था कि यह संपत्ति केंद्रीय मंत्री ईरानी के बेटी से जुड़ा हुआ है। हालांकि केंद्रीय मंत्री ने इस आरोप को खारिज कर दिया था। |
पुलिस की जाँच के दौरान शेल्टर होम में केवल एक महिला और एक नाबालिग लड़की रहते हुए मिले।
उत्तर प्रदेश पुलिस ने गाजीपुर स्थित एक शेल्टर होम में शुक्रवार (10 अगस्त) को छापा मारकर तीन लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस को सूचना मिली थी कि शेल्टर हौम गैर-कानूनी रूप से संचालित किया जा रहा था। पुलिस की जाँच के दौरान शेल्टर होम में केवल एक महिला और एक नाबालिग लड़की रहते हुए मिले।
बिहार के मुजफ्फरपुर में एक बालिका शेल्टर होम की 34 लड़कियों के साथ सालों तक बलात्कार किए जाने के मामले के सामने आने के बाद पूरे देश में शेल्टर होम में लड़कियों और लड़कों की सुरक्षा का मुद्दा छाया हुआ है।
मुजफ्फरपर के बाद बिहार के ही आरा और मधुबनी इत्यादि जिलों में भी शेल्टर होम में बच्चियों के यौन शोषण के मामले सामने आये हैं।
वहीं उत्तर प्रदेश के देवरिया में भी एक प्रतिबंधित एनजीओ द्वारा चलाए जा रहे शेल्टर होम की नाबालिग लड़कियों से देह व्यापार कराए जाने का मामला सामने आया है।
देवरिया का मामला सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश के उन्नाव में जिलाधिकारी ने एक शेल्टर होम पर छापा मारा तो वहाँ रहने वाली लड़कियाँ नदारद मिलीं और संचालक ने कहा कि वो काम पर गई हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार और राज्य सरकारों से जवाब तलब किया।
इसी बीच मीडिया रिपोर्ट में सामने आया है कि सुप्रीम कोर्ट के देश के सभी राज्यों के शेल्टर होम के सोशल ऑडिट (सामाजिक जाँच) कराने के निर्देश को यूपी और बिहार समेत नौ राज्यों ने मना कर दिया था।
मुजफ्फपुर शेल्टर होम मामला भी टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) द्वारा किए गए ऑडिट में सामने आया था।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुजफ्फरपुर मामले की जाँच सीबीआई को सौंप दी है। मामले के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर से नजदीकी के आरोपों के बीच नीतीश कैबिनेट की मंत्री मंजू वर्मा ने इस्तीफा दिया है।
मीडिया रिपोर्ट से ये बात सामने आई कि मुख्य आरोपी ठाकुर मंजू वर्मा के पति से लगातार फ़ोन पर सम्पर्क में था। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार मंजू वर्मा के पित नियमित तौर पर मुजफ्फरपुर भी जाया करते थे।
देश-दुनिया की ताज़ा खबरों के लिए यहाँ क्लिक करे. यूट्यूब चैनल यहाँ सब्सक्राइब करें और देखें हमारा एक्सक्लूसिव वीडियो कंटेंट।
| पुलिस की जाँच के दौरान शेल्टर होम में केवल एक महिला और एक नाबालिग लड़की रहते हुए मिले। उत्तर प्रदेश पुलिस ने गाजीपुर स्थित एक शेल्टर होम में शुक्रवार को छापा मारकर तीन लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस को सूचना मिली थी कि शेल्टर हौम गैर-कानूनी रूप से संचालित किया जा रहा था। पुलिस की जाँच के दौरान शेल्टर होम में केवल एक महिला और एक नाबालिग लड़की रहते हुए मिले। बिहार के मुजफ्फरपुर में एक बालिका शेल्टर होम की चौंतीस लड़कियों के साथ सालों तक बलात्कार किए जाने के मामले के सामने आने के बाद पूरे देश में शेल्टर होम में लड़कियों और लड़कों की सुरक्षा का मुद्दा छाया हुआ है। मुजफ्फरपर के बाद बिहार के ही आरा और मधुबनी इत्यादि जिलों में भी शेल्टर होम में बच्चियों के यौन शोषण के मामले सामने आये हैं। वहीं उत्तर प्रदेश के देवरिया में भी एक प्रतिबंधित एनजीओ द्वारा चलाए जा रहे शेल्टर होम की नाबालिग लड़कियों से देह व्यापार कराए जाने का मामला सामने आया है। देवरिया का मामला सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश के उन्नाव में जिलाधिकारी ने एक शेल्टर होम पर छापा मारा तो वहाँ रहने वाली लड़कियाँ नदारद मिलीं और संचालक ने कहा कि वो काम पर गई हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार और राज्य सरकारों से जवाब तलब किया। इसी बीच मीडिया रिपोर्ट में सामने आया है कि सुप्रीम कोर्ट के देश के सभी राज्यों के शेल्टर होम के सोशल ऑडिट कराने के निर्देश को यूपी और बिहार समेत नौ राज्यों ने मना कर दिया था। मुजफ्फपुर शेल्टर होम मामला भी टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज द्वारा किए गए ऑडिट में सामने आया था। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुजफ्फरपुर मामले की जाँच सीबीआई को सौंप दी है। मामले के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर से नजदीकी के आरोपों के बीच नीतीश कैबिनेट की मंत्री मंजू वर्मा ने इस्तीफा दिया है। मीडिया रिपोर्ट से ये बात सामने आई कि मुख्य आरोपी ठाकुर मंजू वर्मा के पति से लगातार फ़ोन पर सम्पर्क में था। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार मंजू वर्मा के पित नियमित तौर पर मुजफ्फरपुर भी जाया करते थे। देश-दुनिया की ताज़ा खबरों के लिए यहाँ क्लिक करे. यूट्यूब चैनल यहाँ सब्सक्राइब करें और देखें हमारा एक्सक्लूसिव वीडियो कंटेंट। |
तो बाबूजी रामकथा सुनाते ही रहेंगे। बाद में थक जाते हैं। कुंयेनाच्चन ने पूछा"क्या है ?"
"कुछ नहीं।"
"मामा ज्यादा बातचीत करेंगे तो थक जाएंगे।' " बताने पर सुनें, तभी न ?"
ओह ! कैसी थकावट है। यह तो आयु की थकावट है । सो तो चुप रहने पर मो महसूस होती है। ब्याह की चर्चा हुई। इसलिए याद आयी। जब अक्काम्मा को शादी की तब मेरी उम्र उन्नीस साल की थी। उस जमाने के हिसाब से हमारी शादी बड़ी देर से चली थी । उचित समय पर ब्याह करा देने वाला कोई नहीं रहा था । पिताजी को ऐसी कोई बात नहीं सूझती थी। फिर करे कौन ? फुटकल सौदा करते-करते जेब में दो चार रुपये जमा हो गये । इस पर दूरके एक चाचाजी एक प्रस्ताव लाये । लड़की की उम्र चौदह वर्ष की । हृष्टपुष्ट तो नहीं थी। मगर चार-पाच महीने के बीतने पर एकदम बदल गयी । चौथे दर्जे तक स्कूली शिक्षा पायी थी । फादर के पिता छोटे बच्चों के शिक्षक थे। उन्होंने बहन को घर पर अच्छी तरह सिखाकर होशियार बना दिया था। गाना मीठा गाती थी । विदाई के वक्त बड़े साले ने कहा था - भलाई का बीज है लेबनान की अंगूर की बेल को तरह फलती-फूलती रहेगी ।
वही हुआ। उसने जिसे छुआ वह दस गुना सो गुना फला-फूला। वह चतुर थी । सब सहन करती थी। फिर भी आखिरी दिनों में ऐसी घटना हो गयी कि वह बर्दाशत नहीं कर सकी।
ईशो भैया के साथ साझे की दूकानदारी चल रही थी। उस दिन रात को थोड़ी देर से घर आया। हाथ में जलती मशाल थी। बड़े गुस्से में भी था क्योंकि ईशो भैया ने सौ-दो-सौ रुपये का छल किया था। उससे कुछ झड़प हो गयी थी । बक्काम्मा नियमानुसार दालान में ढिबरी रखे मेरे इंतजार में बैठी थी। पर बोली नहीं। थोड़ी देर बाद उसने पूछा"इतनी देर कैसे ?"
"ईसो भैया से झड़प हो गयी ।" "क्यों ?" | तो बाबूजी रामकथा सुनाते ही रहेंगे। बाद में थक जाते हैं। कुंयेनाच्चन ने पूछा"क्या है ?" "कुछ नहीं।" "मामा ज्यादा बातचीत करेंगे तो थक जाएंगे।' " बताने पर सुनें, तभी न ?" ओह ! कैसी थकावट है। यह तो आयु की थकावट है । सो तो चुप रहने पर मो महसूस होती है। ब्याह की चर्चा हुई। इसलिए याद आयी। जब अक्काम्मा को शादी की तब मेरी उम्र उन्नीस साल की थी। उस जमाने के हिसाब से हमारी शादी बड़ी देर से चली थी । उचित समय पर ब्याह करा देने वाला कोई नहीं रहा था । पिताजी को ऐसी कोई बात नहीं सूझती थी। फिर करे कौन ? फुटकल सौदा करते-करते जेब में दो चार रुपये जमा हो गये । इस पर दूरके एक चाचाजी एक प्रस्ताव लाये । लड़की की उम्र चौदह वर्ष की । हृष्टपुष्ट तो नहीं थी। मगर चार-पाच महीने के बीतने पर एकदम बदल गयी । चौथे दर्जे तक स्कूली शिक्षा पायी थी । फादर के पिता छोटे बच्चों के शिक्षक थे। उन्होंने बहन को घर पर अच्छी तरह सिखाकर होशियार बना दिया था। गाना मीठा गाती थी । विदाई के वक्त बड़े साले ने कहा था - भलाई का बीज है लेबनान की अंगूर की बेल को तरह फलती-फूलती रहेगी । वही हुआ। उसने जिसे छुआ वह दस गुना सो गुना फला-फूला। वह चतुर थी । सब सहन करती थी। फिर भी आखिरी दिनों में ऐसी घटना हो गयी कि वह बर्दाशत नहीं कर सकी। ईशो भैया के साथ साझे की दूकानदारी चल रही थी। उस दिन रात को थोड़ी देर से घर आया। हाथ में जलती मशाल थी। बड़े गुस्से में भी था क्योंकि ईशो भैया ने सौ-दो-सौ रुपये का छल किया था। उससे कुछ झड़प हो गयी थी । बक्काम्मा नियमानुसार दालान में ढिबरी रखे मेरे इंतजार में बैठी थी। पर बोली नहीं। थोड़ी देर बाद उसने पूछा"इतनी देर कैसे ?" "ईसो भैया से झड़प हो गयी ।" "क्यों ?" |
कुरुक्षेत्र, 19 दिसंबर (हप्र)
पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता अशोक अरोड़ा ने कहा कि हरियाणा की जनता और किसानों ने भाजपा द्वारा एसवाईएल के मुद्दे को लेकर दिए गए धरने को नकार दिया है। अपनी ही मोदी सरकार के विरुद्ध हरियाणा भाजपा और हरियाणा सरकार द्वारा दिए गए इस धरने और उपवास में केवल भाजपा के सांसद, विधायक और चंद कार्यकर्ता ही शामिल हुए। भाजपा ने किसान आंदोलन के डर से किसानों को लड़वाने के लिए यह धरना और उपवास रखा था। अरोड़ा ने कहा कि भाजपा का यह धरना नोटंकीबाजी है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के अनुसार उपवास का दावा करने वाले भाजपा नेता पकौड़े खाते दिखाई दे रहे हैं।
| कुरुक्षेत्र, उन्नीस दिसंबर पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता अशोक अरोड़ा ने कहा कि हरियाणा की जनता और किसानों ने भाजपा द्वारा एसवाईएल के मुद्दे को लेकर दिए गए धरने को नकार दिया है। अपनी ही मोदी सरकार के विरुद्ध हरियाणा भाजपा और हरियाणा सरकार द्वारा दिए गए इस धरने और उपवास में केवल भाजपा के सांसद, विधायक और चंद कार्यकर्ता ही शामिल हुए। भाजपा ने किसान आंदोलन के डर से किसानों को लड़वाने के लिए यह धरना और उपवास रखा था। अरोड़ा ने कहा कि भाजपा का यह धरना नोटंकीबाजी है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के अनुसार उपवास का दावा करने वाले भाजपा नेता पकौड़े खाते दिखाई दे रहे हैं। |
पीएम मोदी की सरकार की महत्वाकांक्षी योजना पीएम किसान योजना है। किसानों को हर साल हर तीन महीने में 2000 रुपये की किश्तों में कुल 6000 रुपये मिलते हैं। इस योजना के शुरू हुए अब चार साल हो जाएंगे। इस योजना की 13वीं किस्त अभी तक किसानों के खाते में नहीं आई है। लेकिन अब कहा गया है कि यह होली से पहले आएगी।
आप 13वीं किस्त के लाभार्थी हैं या नहीं, इसकी जांच कहां और कैसे करें? कहां चेक करें आपका नाम इस लिस्ट में है या नहीं, आइए जानते हैं विस्तार से। नहीं तो आपको नुकसान हो सकता है इसलिए आज आपको इस बात पर गौर करने की जरूरत है।
अगर आप पीएम किसान योजना की आने वाली किस्तों का लाभ लेना चाहते हैं तो ई-केवाईसी प्रक्रिया को पूरा करना जरूरी है। अगर आपने ई-केवाईसी नहीं कराया है तो आपको यह किस्त भुगतान नहीं मिलेगा। अगर आपको इस योजना को लेकर किसी तरह की समस्या है तो आप ईमेल आईडी pmkisan-ict@gov. in पर संपर्क कर सकते हैं।
इसके अलावा आपने पीएम किसान योजना के जरिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। अपने प्रश्नों या समस्याओं को साझा करने के लिए किसानों को 155261 या 1800115526 (टोल-फ्री) या 011-23381092 पर कॉल करें।
आपको पीएम किसान योजना की वेबसाइट पर जाकर लॉग इन करना होगा। वहां जाकर आप ई-केवाईसी कर सकते हैं। वहां आप लाभार्थी किसानों का नाम भी देख पाएंगे। यदि आपके पास नाम नहीं है, तो आपको यह भी जांचना होगा कि आपके पास कौन सा दस्तावेज़ नहीं है। इसलिए आपको तुरंत जांच करने की जरूरत है। किसी भी तरह की शंका होने पर टोल फ्री नंबर पर संपर्क करें।
अगर आप पीएम किसान योजना की आने वाली किस्तों का लाभ लेना चाहते हैं तो ई-केवाईसी प्रक्रिया को जरूर पूरा करें। इसके लिए आपको इस योजना की आधिकारिक वेबसाइट pmkisan. gov. in पर जाना होगा। वेबसाइट के अलावा आप किसी भी सीएससी सेंटर पर जाकर भी ई-केवाईसी कर सकते हैं। केंद्र सरकार ने कहा है कि ऐसा नहीं करने वाले किसानों को 13 तारीख और उसके बाद से कोई किस्त नहीं मिलेगी.
| पीएम मोदी की सरकार की महत्वाकांक्षी योजना पीएम किसान योजना है। किसानों को हर साल हर तीन महीने में दो हज़ार रुपयापये की किश्तों में कुल छः हज़ार रुपयापये मिलते हैं। इस योजना के शुरू हुए अब चार साल हो जाएंगे। इस योजना की तेरहवीं किस्त अभी तक किसानों के खाते में नहीं आई है। लेकिन अब कहा गया है कि यह होली से पहले आएगी। आप तेरहवीं किस्त के लाभार्थी हैं या नहीं, इसकी जांच कहां और कैसे करें? कहां चेक करें आपका नाम इस लिस्ट में है या नहीं, आइए जानते हैं विस्तार से। नहीं तो आपको नुकसान हो सकता है इसलिए आज आपको इस बात पर गौर करने की जरूरत है। अगर आप पीएम किसान योजना की आने वाली किस्तों का लाभ लेना चाहते हैं तो ई-केवाईसी प्रक्रिया को पूरा करना जरूरी है। अगर आपने ई-केवाईसी नहीं कराया है तो आपको यह किस्त भुगतान नहीं मिलेगा। अगर आपको इस योजना को लेकर किसी तरह की समस्या है तो आप ईमेल आईडी pmkisan-ict@gov. in पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा आपने पीएम किसान योजना के जरिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। अपने प्रश्नों या समस्याओं को साझा करने के लिए किसानों को एक लाख पचपन हज़ार दो सौ इकसठ या एक आठ शून्य शून्य एक एक पाँच पाँच दो छः या ग्यारह-दो करोड़ तैंतीस लाख इक्यासी हज़ार बानवे पर कॉल करें। आपको पीएम किसान योजना की वेबसाइट पर जाकर लॉग इन करना होगा। वहां जाकर आप ई-केवाईसी कर सकते हैं। वहां आप लाभार्थी किसानों का नाम भी देख पाएंगे। यदि आपके पास नाम नहीं है, तो आपको यह भी जांचना होगा कि आपके पास कौन सा दस्तावेज़ नहीं है। इसलिए आपको तुरंत जांच करने की जरूरत है। किसी भी तरह की शंका होने पर टोल फ्री नंबर पर संपर्क करें। अगर आप पीएम किसान योजना की आने वाली किस्तों का लाभ लेना चाहते हैं तो ई-केवाईसी प्रक्रिया को जरूर पूरा करें। इसके लिए आपको इस योजना की आधिकारिक वेबसाइट pmkisan. gov. in पर जाना होगा। वेबसाइट के अलावा आप किसी भी सीएससी सेंटर पर जाकर भी ई-केवाईसी कर सकते हैं। केंद्र सरकार ने कहा है कि ऐसा नहीं करने वाले किसानों को तेरह तारीख और उसके बाद से कोई किस्त नहीं मिलेगी. |
ये मामला जम्मू & कश्मीर के पुलवामा जिले का है जहां आज पुलिस ने जैश ए मोहम्मद के एक आतंकवादी का शव पाया। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि एक खुफिया जानकारी के आधार पर पुलिस ने करवाई करते हुए जिले के त्राल इलाके से शव बरामद किया।
उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि मृत आतंकी विदेशी नागरिक था। वह किसी गुप्त ठिकाने पर विस्फोटक बना रहा था और जब विस्फोट हो गया तो वह मारा गया। मृत आतंकी की पहचान का पता लगाया जा रहा है।
पुलिस महानिदेशक एस पी वैद ने कहा कि मृत आतंकी जैश ए मोहम्मद का सदस्य था और गुप्त ठिकाने पर आईईडी बनाते समय हुए विस्फोट में उसकी मौत हुई।
उन्होंने ट्विटर पर लिखा की हंडूरा अरिपाल त्राल के पास गुप्त ठिकाने पर आईईडी बनाते समय विस्फोट हुआ जिसमें मारा गया व्यक्ति कथित रूप से जैश ए मोहम्मद का सदस्य था। जम्मू-कश्मीर पुलिसासुरक्षा बलों ने उसका शव बरामद किया।
| ये मामला जम्मू & कश्मीर के पुलवामा जिले का है जहां आज पुलिस ने जैश ए मोहम्मद के एक आतंकवादी का शव पाया। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि एक खुफिया जानकारी के आधार पर पुलिस ने करवाई करते हुए जिले के त्राल इलाके से शव बरामद किया। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि मृत आतंकी विदेशी नागरिक था। वह किसी गुप्त ठिकाने पर विस्फोटक बना रहा था और जब विस्फोट हो गया तो वह मारा गया। मृत आतंकी की पहचान का पता लगाया जा रहा है। पुलिस महानिदेशक एस पी वैद ने कहा कि मृत आतंकी जैश ए मोहम्मद का सदस्य था और गुप्त ठिकाने पर आईईडी बनाते समय हुए विस्फोट में उसकी मौत हुई। उन्होंने ट्विटर पर लिखा की हंडूरा अरिपाल त्राल के पास गुप्त ठिकाने पर आईईडी बनाते समय विस्फोट हुआ जिसमें मारा गया व्यक्ति कथित रूप से जैश ए मोहम्मद का सदस्य था। जम्मू-कश्मीर पुलिसासुरक्षा बलों ने उसका शव बरामद किया। |
उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश समेत देश के कई अन्य राज्यों में आकाशीय बिजली गिरने से कुल 78 लोगों की जान चली गई। सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख व्यक्त करते हुए राहत राशि की घोषणा की है। उत्तर प्रदेश में 41 और मध्य प्रदेश में दो दिन के अंदर आकाशीय बिजली गिरने 14 की जान चली गई है। वहीं, आकाशीय बिजली गिरने से राजस्थान के छह जिलों में 23 लोगों की मौत हो गई। इसके साथ ही 28 घायल हो गए। सबसे ज्यादा 12 लोगों की मौत जयपुर में हुई है। ये सभी आमेर किले के वाच टावर पर खड़े होकर मौसम का आनंद ले रहे थे। आमेर किले के वाच टावर पर जिन लोगों की मौत हुई है, उनमें नौ स्थानीय और तीन पर्यटक थे। उधर, मध्य प्रदेश में आकाशीय बिजली की चपेट में आने से दो दिन (रविवार व सोमवार) में 14 की जान गई है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में भी रविवार को आकाशीय बिजली की वजह से 41 लोगों की जान चली गई थी।
| उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश समेत देश के कई अन्य राज्यों में आकाशीय बिजली गिरने से कुल अठहत्तर लोगों की जान चली गई। सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख व्यक्त करते हुए राहत राशि की घोषणा की है। उत्तर प्रदेश में इकतालीस और मध्य प्रदेश में दो दिन के अंदर आकाशीय बिजली गिरने चौदह की जान चली गई है। वहीं, आकाशीय बिजली गिरने से राजस्थान के छह जिलों में तेईस लोगों की मौत हो गई। इसके साथ ही अट्ठाईस घायल हो गए। सबसे ज्यादा बारह लोगों की मौत जयपुर में हुई है। ये सभी आमेर किले के वाच टावर पर खड़े होकर मौसम का आनंद ले रहे थे। आमेर किले के वाच टावर पर जिन लोगों की मौत हुई है, उनमें नौ स्थानीय और तीन पर्यटक थे। उधर, मध्य प्रदेश में आकाशीय बिजली की चपेट में आने से दो दिन में चौदह की जान गई है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में भी रविवार को आकाशीय बिजली की वजह से इकतालीस लोगों की जान चली गई थी। |
1) जबसे उनसे पूछा गया कि यह गाना उन्होंने किन लोगों के लिए बनाया है?
वह कहते हैं कि जो लोग जिंदी है यह गाना उसके लिए है। आपका मन ना भी हो तो भी आप इस तरीके की कला को जरूर सुने, तोकि आपके अंदज पॉजिटिविटी आ सके।
2) आप खुद को किस तरह का सिंगर मानते हैं?
मैं एक आर्टिस्ट हूं। मेरा कला बनाना काम है और मै वहीं कर कृरहा हूं। एक आर्टिस्ट का काम बिजनेस नहीं होता, जो कि अब बन गया है। बिजनेस ने इतना ओवरपावर कर दिया है कि अब आर्ट नाम की कोई चीज नहीं रही। पहले के सिंगर्स कला को समझते थे तब उसे लोगों तक पहुंचाते थे। अब जो लोगों का चाहिए वहीं बिकता है। पहले बहुत लीमीटेड आर्टिस्ट होते थे। बीच में थोड़ा सा गंद भी आया। लोग खामखा भर गए थे। लेकिन अब लोगों को समझ आ रहा है कि कला क्या है।
3) आपके करियर का अभी तक का बेस्ट परफॉर्मेंस?
चीड़िया और रावन को बनाना बेहद मुश्किल रहा है। 'क्यों ढूंढे' भी मेरे लिए काफी चैलेंजिंग रहा। वैसे तो यह सिंपल गाना है लेकिन इसे बनाने में कई सारे चैलैंजेज आए। लोगों को अभी यह नहीं समझ आ रहा है कि किसी सिंपल चीज को दिखाया सबसे मुश्किल टास्क होता है।
4) 'क्यों ढूंढे' को बनाने के दौरान एक Highlight जो आपको हमेशा याद रहेगा?
इस वीडियो को बनाने में बहुत सारे Highlight हैं क्योंकि यह गाना बेहद चैलेंजिंग था। कई सारे शहरों में हमने यह गाना शूट किया है। मेरे लिपसिंक के अलावा यह पूरा गाना कैंडिड है जो बेहद मुश्किल था।
5) बॉलीवुड में आप किसके लिए काम करना पसंद करेंगे।
अनुराग कश्यप मुझे बहुत पसंद हैं। मैं उन्हें बहुत एडमायर करता हूं। इसके अलावा मुझे Bohemia पसंद हैं। Bohemia एक आर्टिस्ट हैं। उन्होंने जो काम किया है सबके सब की बात नहीं। उनका एक अलग ही स्टाइल है। उनकी राइटिंग, उनका कंपोजिशन कमाल का होता है।
6) सिंगिंग की शुरुआत कैसे हुई?
मैं तो बिल्कुल ही छुपकर रहने वाला इंसान हूं। एक समय ऐसा था जब मैं मैं कोई काम नहीं करता था। पूरे दिन बिस्तर पर पड़ा रहता था। मेरी कोई अच्छाई नहीं बची थी। मैं सोटता था मैं करूं क्या. . . . फिर मैंने सोचा मैंने जो सीखा है उसे ही दुनिया तक पहुंचाऊ।
| एक) जबसे उनसे पूछा गया कि यह गाना उन्होंने किन लोगों के लिए बनाया है? वह कहते हैं कि जो लोग जिंदी है यह गाना उसके लिए है। आपका मन ना भी हो तो भी आप इस तरीके की कला को जरूर सुने, तोकि आपके अंदज पॉजिटिविटी आ सके। दो) आप खुद को किस तरह का सिंगर मानते हैं? मैं एक आर्टिस्ट हूं। मेरा कला बनाना काम है और मै वहीं कर कृरहा हूं। एक आर्टिस्ट का काम बिजनेस नहीं होता, जो कि अब बन गया है। बिजनेस ने इतना ओवरपावर कर दिया है कि अब आर्ट नाम की कोई चीज नहीं रही। पहले के सिंगर्स कला को समझते थे तब उसे लोगों तक पहुंचाते थे। अब जो लोगों का चाहिए वहीं बिकता है। पहले बहुत लीमीटेड आर्टिस्ट होते थे। बीच में थोड़ा सा गंद भी आया। लोग खामखा भर गए थे। लेकिन अब लोगों को समझ आ रहा है कि कला क्या है। तीन) आपके करियर का अभी तक का बेस्ट परफॉर्मेंस? चीड़िया और रावन को बनाना बेहद मुश्किल रहा है। 'क्यों ढूंढे' भी मेरे लिए काफी चैलेंजिंग रहा। वैसे तो यह सिंपल गाना है लेकिन इसे बनाने में कई सारे चैलैंजेज आए। लोगों को अभी यह नहीं समझ आ रहा है कि किसी सिंपल चीज को दिखाया सबसे मुश्किल टास्क होता है। चार) 'क्यों ढूंढे' को बनाने के दौरान एक Highlight जो आपको हमेशा याद रहेगा? इस वीडियो को बनाने में बहुत सारे Highlight हैं क्योंकि यह गाना बेहद चैलेंजिंग था। कई सारे शहरों में हमने यह गाना शूट किया है। मेरे लिपसिंक के अलावा यह पूरा गाना कैंडिड है जो बेहद मुश्किल था। पाँच) बॉलीवुड में आप किसके लिए काम करना पसंद करेंगे। अनुराग कश्यप मुझे बहुत पसंद हैं। मैं उन्हें बहुत एडमायर करता हूं। इसके अलावा मुझे Bohemia पसंद हैं। Bohemia एक आर्टिस्ट हैं। उन्होंने जो काम किया है सबके सब की बात नहीं। उनका एक अलग ही स्टाइल है। उनकी राइटिंग, उनका कंपोजिशन कमाल का होता है। छः) सिंगिंग की शुरुआत कैसे हुई? मैं तो बिल्कुल ही छुपकर रहने वाला इंसान हूं। एक समय ऐसा था जब मैं मैं कोई काम नहीं करता था। पूरे दिन बिस्तर पर पड़ा रहता था। मेरी कोई अच्छाई नहीं बची थी। मैं सोटता था मैं करूं क्या. . . . फिर मैंने सोचा मैंने जो सीखा है उसे ही दुनिया तक पहुंचाऊ। |
सीरिया के खिलाफ अमेरिकी आक्रामकता का लगातार खतरा एक बार फिर से नाटो देशों की कार्रवाई के अंतर्राष्ट्रीय कानूनी विश्लेषण की ओर मुड़ने के साथ-साथ लीबिया के बारे में संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व को भी आवश्यक बनाता है। समानताएं यहां अत्यधिक प्रासंगिक हैं।
इन मुद्दों में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्प संख्या 1970 और नंबर 1973 को अपनाने के साथ-साथ इन प्रस्तावों के कानूनी परिणाम भी शामिल हैं; लीबिया में अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय में स्थिति के हस्तांतरण के कानूनी आधार और परिणाम, साथ ही सशस्त्र संघर्ष के दौरान तथाकथित विपक्ष की सहायता के लिए कानूनी आधार। इन समस्याओं पर अधिक विस्तार से विचार करें।
परंपरागत रूप से, यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के अंतरराष्ट्रीय कानूनी परिणामों का विश्लेषण करने के लिए प्रथागत है। हालांकि, इन प्रस्तावों को स्वयं अपनाने के लिए कानूनी आधार पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। ऐसे मामले जिनमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय, अपने अधिकार से परे हो जाती है, अधिक बार हो रहे हैं (उदाहरण के लिए, पूर्व यूगोस्लाविया के लिए अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरणों की स्थापना पर संकल्प, रवांडा और लेबनान के लिए विशेष न्यायालय)। संकल्प 1970 और 1973 को अपनाने पर, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अधिकार से अधिक।
पहला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्प संख्या 1970 में निर्धारित उपायों को अपनाने के लिए वास्तविक औचित्य का विश्लेषण करते समय, यह स्पष्ट हो जाता है कि निर्णय के समय, परिषद के लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय VII को लागू करने के लिए कोई वास्तविक आधार नहीं था। तो, एक और 22 और 25 फरवरी 2011, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की दो बैठकें "शांति और सुरक्षा अफ्रीका में" शीर्षक के तहत आयोजित की गईं। राजनीतिक मामलों के लिए पहले संयुक्त राष्ट्र के अंडर-महासचिव, एल। पास्को (यूएसए) ने परिषद के सदस्यों को "हिंसा और बल के गैर-चयनात्मक उपयोग" के बारे में सूचित किया (बैठक को बंद कर दिया गया और आधिकारिक रिपोर्ट में कोई विशेष जानकारी शामिल नहीं थी; पस्को ने कहा कि केवल ज्ञात था; महासचिव बान की मून एक सप्ताह बाद)। दूसरी बैठक में, लीबिया के प्रतिनिधि, शाल्के ने कहाः "फरवरी 15 पर, नागरिकों के एक समूह ने तर्बेल नामक एक वकील को रिहा करने के लिए सड़कों पर ले जाया . . . प्रदर्शनकारियों के इस समूह के लिए, सिर और छाती में आग लगा दी गई थी, जैसे कि जिन सैनिकों ने गोली चलाई थी वे नहीं थे जीवित लोग . . . "उन्होंने यह भी कहाः" आज मैं गद्दाफी के शब्दों को सुनता हूंः "मैं या तो आप पर शासन करूंगा या आपको नष्ट कर दूंगा। " "हम लीबिया को बचाने के लिए संयुक्त राष्ट्र से अपील करते हैं," शाल्के ने अपना भाषण समाप्त किया। उसी बैठक में। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने एक हजार से अधिक लोगों को मृत घोषित कर दिया "हालांकि, सभी पिछली स्थितियों के विपरीत, विश्व समुदाय के लिए कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया था। इसके अलावा, जब इन" सबूतों "को मीडिया में प्रस्तुत करने की कोशिश की गई थी, तो यह उनके उत्पादन चरित्र के सबसे गंभीर संदेह, या अधिक सटीक रूप से उनके मिथ्याकरण का कारण नहीं बन सकता है।
मार्च में एक्सएनयूएमएक्स से रूसी विदेश मंत्रालय का संदेश, एक्सएनयूएमएक्स संकल्प को अपनाने की पूर्व संध्या पर, कहता है कि "बलों द्वारा विपक्ष और वफादार अधिकारियों के बीच संघर्ष में मारे गए लोगों की संख्या का अनुमान एक्सएनयूएमएक्स से एक्सएनयूएमएक्स हजार लोगों में भिन्न होता है। " हालांकि, सवाल यह उठता हैः परिषद "अनुमानित आंकड़ों" के साथ कैसे स्थिति में केवल एक ही पक्ष के पक्ष में इस तरह के कट्टरपंथी फैसले ले सकती है? एक और दो हजार मृतकों के बीच का अंतर एक हजार और शून्य के बीच का अंतर है। MFA संदेश औपचारिक रूप से इस तरह के अंतर की अनुमति देता है। और यह पूरी तरह से अस्पष्ट है, लेकिन वास्तव में, कौन मर गया? क्या यह "विरोध" या "निष्ठावान शक्ति" है? यदि ये देश के नागरिकों के प्रति वफादार अधिकारी हैं, तो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद उनके खिलाफ क्यों खड़ी हुई?
वे रूसी विदेश मंत्रालय द्वारा उपयोग किए गए स्रोतों सहित प्रश्नों और सूचना के स्रोतों को बढ़ाते हैं। इस प्रकार, फरवरी 22 की एक रिपोर्ट में, विदेश मंत्रालय का दावा है कि "प्रत्यक्षदर्शी खातों के अनुसार," जुलूस [यानी, सशस्त्र गिरोहों द्वारा किए गए हमलों से नहीं, बल्कि केवल कुछ जुलूस] हवा से बमबारी की गई थी। प्रश्नः संदेश में कुछ "प्रत्यक्षदर्शी" क्यों दिखाए गए हैं, लेकिन त्रिपोली में रूसी दूतावास नहीं? एक सुझाव है कि दूतावास ने अन्य जानकारी दी। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्प संख्या 1973 पर वोट की पूर्व संध्या पर रूसी राजदूत की बाद की वापसी से यह अप्रत्यक्ष रूप से पुष्टि की जाती है।
Имеются серьёзные вопросы и к деятельности Комиссии ООН по установлению фактов в Ливии, созданной решением Генерального секретаря ООН. Комиссия так и не смогла приступить к работе, так как в день её запланированного прибытия в Триполи начались бомбардировки ливийской территории авиацией НАТО. Возникает вопрос: для чего создавалась эта Комиссия? Обстоятельства создания Комиссии дают серьёзные основания полагать, что она была сформирована лишь с целью создания видимости установления фактов. Кроме того, явным нарушением принципа беспристрастности являлось назначение в состав этой Комиссии бывшего председателя Международного уголовного суда Ф. Кирша, являющегося гражданином Канады - государства-члена НАТО. Как Кирш может быть объективно признан беспристрастным во время подготовки агрессии и самой агрессии НАТО против Ливии?
इस प्रकार, यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि न तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय और न ही रूसी संघ के पास संकल्प संख्या XNXX द्वारा निर्धारित उपायों को लेने के लिए आवश्यक वास्तविक सबूत हैं। कम से कम अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए ऐसा कोई सबूत पेश नहीं किया गया था। UNSC संकल्पों 1970 और 1970 को अपनाने के साथ-साथ लीबिया में आईसीसी को स्थापित तथ्यों के अभाव में स्थिति का हस्तांतरण, साथ ही मामलों की वास्तविक स्थिति (विशेष रूप से, सबसे बड़े वीडियो सूचना प्रदाताओं से वीडियो फुटेज के बड़े पैमाने पर मिथ्याकरण) को स्थापित करने के लिए एक स्पष्ट अनिच्छा के संकेत हैं। संकल्पों की वैधता और उनकी सामग्री को अपनाया। और अन्य सभी मुद्दों को हल करने के लिए तथ्यों को स्थापित करने से इनकार मौलिक महत्व का है।
दूसरा। लीबिया में "सशस्त्र संघर्ष" के रूप में स्थिति की योग्यता कितनी उचित है? संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्प संख्या 1970 ने स्थापित किया कि अधिकारियों को "अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करना चाहिए। " इस तरह के एक बयान का मतलब है कि सुरक्षा परिषद की प्राथमिकता उस समय लीबिया की स्थिति को "सशस्त्र संघर्ष" के रूप में देखती थी। हालांकि, क्या इसके लिए कानूनी आधार थे? उनका प्रतिनिधित्व नहीं किया गया। फिर, वास्तविक जानकारी की कमी विभिन्न व्याख्याओं के लिए आधार देती है। इसलिए, उदाहरण के लिए, यह मानने के आधार थे कि नाटो आक्रमण शुरू होने से पहले लीबिया में "सशस्त्र संघर्ष" की कोई कानूनी रूप से स्थिति नहीं थी। मार्च 2011 तक, लीबिया में जो कुछ भी हो रहा था, वह सशस्त्र विद्रोह था, जो कि एक विशुद्ध रूप से आपराधिक अपराध था, जिसे अंतरराष्ट्रीय कानून के बजाय घरेलू द्वारा नियंत्रित किया जाता है और जिसे बिना किसी विदेशी हस्तक्षेप के देश के अधिकारियों द्वारा रोका जाना चाहिए। यह माना जाना चाहिए कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्प संख्या 1970 के लिए रूस का मतदान एक गंभीर गलती थी। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि यह उत्तरी काकेशस में रूसी "स्थितियों" के संबंध में प्रत्यक्ष कानूनी परिणाम हो सकता है। इन सबसे ऊपर, इस तरह की स्थिति राज्यों के अधिकार को उनके राष्ट्रीय कानून के भीतर आतंकवाद-विरोधी संचालन करने के लिए नुकसान पहुंचाती है और ऐसी स्थितियों को तुरंत "सशस्त्र संघर्ष" की श्रेणी में स्थानांतरित कर देती है - अर्थात, अंतर्राष्ट्रीय कानून के क्षेत्र में! यहां राज्यों के राष्ट्रीय कानून के एक गंभीर क्षरण का खतरा है, जो जल्द ही सार्वजनिक जीवन के सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों से निपटने के लिए कोई जगह नहीं होगी।
तीसरा। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा संयुक्त राष्ट्र चार्टर में प्रदान किए गए उपायों के लिए कानूनी आधार क्या हैं? संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्प संख्या XXUMX ने लीबिया पर तथाकथित नो-फ्लाई ज़ोन की घोषणा की है। इस तरह के उपाय के लिए कानूनी आधार क्या हैं? संकल्प उनका नाम नहीं लेता। और यह समझ में आता है, क्योंकि संयुक्त राष्ट्र चार्टर में कोई प्रावधान नहीं हैं जो संगठन के एक सदस्य राज्य के "हवाई क्षेत्र को बंद करने" की अनुमति देगा। हमने बार-बार (जब पूर्व यूगोस्लाविया, रवांडा और लेबनान के लिए एडहॉक अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरणों के निर्माण पर विचार किया) संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों की धूर्तता पर ध्यान दिया, "चार्टर के अध्याय VII के तहत कार्य करना"। अनिवार्य उपाय, विशेष रूप से इस तरह के महत्व को, चार्टर के प्रमुख के आधार पर लागू नहीं किया जा सकता है। उन्हें एक विशिष्ट लेख और यहां तक कि एक लेख खंड के आधार पर लागू किया जा सकता है। हालांकि, हम इसे केवल न्यायाधिकरण के मामले में ही नहीं, बल्कि "बंद क्षेत्रों" के मामले में भी देखते हैं। क्यों? क्या यह एक संयोग है? हमारी राय में, संयोग से नहीं। सुरक्षा परिषद को संदर्भित करने के लिए कुछ भी नहीं है। ऐसा कोई लेख नहीं। यह परिषद का अपना आविष्कार है। और यह अंतरराष्ट्रीय कानून द्वारा विनियमित नहीं है। इसका मतलब है कि यह उपाय संयुक्त राष्ट्र के सदस्य राज्य की संप्रभुता के सिद्धांत का सीधे उल्लंघन करता है, क्योंकि हवाई क्षेत्र राज्य के संप्रभु क्षेत्र का हिस्सा है। इस प्रकार, सुरक्षा परिषद के संकल्प संख्या 1973 का अनुच्छेद संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 1973 का उल्लंघन करता है (सदस्य राज्यों की संप्रभु समानता का सिद्धांत, क्षेत्रीय अखंडता और राज्यों की राजनीतिक स्वतंत्रता के खिलाफ बल के उपयोग पर रोक) और अंतरराष्ट्रीय वायु कानून के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय संधियों के मानदंड। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्प संख्या 2 के पैरा 6, लीबिया के क्षेत्र में हवाई उड़ानों पर प्रतिबंध स्थापित करता है। और 1973 पैराग्राफ सभी राज्यों को इस निषेध को लागू करने के लिए "सभी आवश्यक उपाय करने" की अनुमति देता है। यही है, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सभी को अपने स्वयं के क्षेत्र में लीबियाई विमानों को मारने की अनुमति दी है।
उक्त रिज़ॉल्यूशन का 17 पैराग्राफ, जिसने संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों को लीबियाई विमानों को अपने क्षेत्र में उतरने की अनुमति देने से रोक दिया, कोई कम अवैध नहीं दिखता है। इस तरह की स्थापना अंतरराष्ट्रीय विमानन के क्षेत्र में कई अंतर्राष्ट्रीय संधियों के अनुरूप नहीं हैः इन संधियों के उल्लंघन में, राज्यों को लीबिया से एक विमान को उतारने से इनकार करने के लिए बाध्य किया गया था, भले ही, उदाहरण के लिए, यह उड़ान भरने के लिए पर्याप्त ईंधन है या नहीं। यही है, वास्तव में, यह विमान को नष्ट करने के लिए निर्धारित किया गया था।
संकल्प संख्या 1970 और नंबर 1973 की मुख्य कानूनी समस्या लीबिया की नागरिक आबादी के अधिकारों का कुल उल्लंघन था। इस तथ्य के बावजूद कि औपचारिक रूप से दोनों संकल्प इसकी रक्षा करने की आवश्यकता से तीव्रता से आगे बढ़े, यह असैनिक आबादी थी जो सबसे अधिक मुख्य रूप से मुख्य लक्ष्य में बदल गई थी। वास्तव में, दोनों प्रस्तावों ने केवल "विद्रोहियों" को नागरिकों के रूप में मान्यता दी। उसी समय, यह काफी स्पष्ट था कि आबादी के पूर्ण बहुमत ने वैध अधिकारियों के प्रति वफादारी बनाए रखी।
इन प्रस्तावों की बहुत शब्दावली से पता चलता है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने आबादी के इस हिस्से को लीबिया के "लोगों" पर विचार नहीं किया था। उदाहरण के लिए, संकल्प संख्या 2 के पैराग्राफ 1973 में कहा गया है कि देश के अधिकारियों को "लोगों की वैध जरूरतों को पूरा करना चाहिए। " उन्होंने सशस्त्र विद्रोह से सुरक्षा और संरक्षण के लिए देश की आबादी के अधिकार को भी याद नहीं किया। यही है, शांति और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए मुख्य संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख संगठन (संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 24) को इस संगठन का एक भी सदस्य नहीं मिला, जो लीबिया की बहुसंख्यक आबादी के अधिकारों की रक्षा करेगा!
अगर कोई पूछता है कि कैसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्प संख्या 1970 और No. 1973 ने लीबिया के नागरिकों के अधिकारों का अधिकारियों के प्रति निष्ठा से बचाव किया, तो इसका जवाब एक होगाः कोई रास्ता नहीं! इन प्रस्तावों ने देश की बहुसंख्यक नागरिक आबादी के संरक्षण के अधिकार से वंचित कर दिया। यही है, ये संकल्प सीधे उन लोगों के अधिकारों के उल्लंघन के लिए प्रदान किए गए हैं, जिनके लिए यह प्रतीत होता है, वे रक्षा करने वाले थे।
इस बात पर जोर दिया जाना चाहिए कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्प संख्या 1973 के बहुत अस्पष्ट प्रावधान भी अंतरराष्ट्रीय कानून के दृष्टिकोण से, तथाकथित विद्रोहियों का समर्थन करने के लिए आधार प्रदान नहीं करते हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के पाठ ने विद्रोही समूहों को हथियार देने का अधिकार नहीं दिया, क्योंकि "सभी आवश्यक उपायों" के आवेदन पर सबसे अधिक समस्याग्रस्त शब्दकरण नागरिकों के अधिकारों को सुनिश्चित करने से जुड़ा था।
आज तक, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने दो स्थितियों को अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) में स्थानांतरित कर दिया हैः सूडान में स्थिति (2005 वर्ष, दारफुर) और लीबिया में स्थिति। हालांकि, इस तरह के हस्तांतरण का कानूनी आधार उनकी वैधता के बारे में कई गंभीर सवाल उठाता है।
इसलिए, संयुक्त राष्ट्र चार्टर में कहीं भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) में मामलों को स्थानांतरित करने का अधिकार निर्धारित नहीं है। यह अधिकार परिषद को एक अन्य अंतर्राष्ट्रीय संधि - स्टेट ऑफ द इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट में ही दिया जाता है। हालाँकि, यह तर्क गैर-पार्टियों के लिए इस संधि के लिए अप्रासंगिक है। वास्तव में, स्थिति उल्लंघन से भी बदतर दिखती है, यह सिर्फ बेतुका है! देखो क्या होता हैः राज्यों (यूएसए, रूस, चीन) जो एक अंतरराष्ट्रीय संधि (आईसीसी क़ानून) के पक्षकार नहीं हैं, ने एक राज्य के बारे में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय को ऐसी स्थिति बताई जो एक ही संधि (लीबिया) का पक्ष नहीं है! अंतर्राष्ट्रीय कानून का पूर्ण विनाश है।
इसके अलावा, सुरक्षा परिषद की गतिविधियों के लिए कानूनी आधार में अंतराल का सवाल उठता हैः ये आधार सुरक्षा परिषद के लिए ही कहां परिभाषित किए गए हैं? उनके मानदंड क्या हैं? चीजों का वास्तविक पक्ष क्या है? बोर्ड ने किन तथ्यों की समीक्षा की? उन्हें हमारे सामने क्यों नहीं पेश किया जाता? या "तथ्यों" का अर्थ वायु सेना की टीवी रिपोर्ट है?
इस प्रकार, संयुक्त राष्ट्र चार्टर के आधार पर नहीं, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय संधि के आधार पर कार्य करना, जिसके प्रतिभागी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के कुछ सदस्य नहीं हैं, न ही राज्य, जिसकी स्थिति को आईसीसी में स्थानांतरित कर दिया गया था, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अपने अधिकार को पार कर लिया। केवल संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार परिषद के अधिकार के भीतर अपनाए जाने वाले संकल्प निष्पादन के अधीन हैं। तदनुसार, संयुक्त राष्ट्र के सदस्य राज्यों द्वारा विचाराधीन प्रस्तावों को नहीं देखा जाना चाहिए।
यह लीबिया की स्थिति पर आईसीसी के साथ सहयोग करने के लिए "सभी" राज्यों के कर्तव्य के मुद्दे पर भी चिंता करता है। विशेष रूप से बताता है कि आईसीसी के सदस्य नहीं हैं। या जो आईसीसी के सदस्य हैं, लेकिन गैर-सदस्य राज्यों के खिलाफ मामलों के संबंध में अपनी स्थिति है।
इस तथ्य पर ध्यान आकर्षित करना असंभव नहीं है कि लीबिया की स्थिति, पहले से ही कोर्ट में ही, प्री-ट्रायल चैम्बर में स्थानांतरित कर दी गई थी, जिसकी अध्यक्षता इटली से जज टार्फूसर कर रहे हैं। यदि हम मानते हैं कि इटली न केवल लीबिया का पूर्व उपनिवेशवादी है, बल्कि लीबिया के खिलाफ नाटो आक्रमण में मुख्य भागीदार भी है, तो आईसीसी के अध्यक्ष की पसंद न केवल निष्पक्षता के सिद्धांत का उल्लंघन है, बल्कि एक दुर्भावनापूर्ण, प्रदर्शनकारी उल्लंघन है।
लीबिया में नाटो की आक्रामकता के बाद बीता समय स्पष्ट रूप से दिखा कि लीबिया में स्थिति के लिए "विपक्ष" और "विद्रोहियों" शब्दों का उपयोग लागू नहीं है। हालांकि, आंतरिक समूहों को विदेशी देशों की सहायता के अंतर्राष्ट्रीय कानूनी गलत विश्लेषण का विश्लेषण करने के उद्देश्य से, हम इस शब्द का उपयोग करेंगे, क्योंकि इसका उपयोग अंतरराष्ट्रीय कानूनी कृत्यों में किया जाता है, और इसके लिए कम से कम सख्त कानूनी शासन लागू होता है। इस प्रकार, यह साबित करना कि विद्रोहियों को विदेशी सहायता प्रदान करना अवैध है, हम अन्य सभी सशस्त्र समूहों को सहायता प्रदान करने की अवैधता साबित करेंगे।
सबसे पहले, कानून के स्रोतों को निर्धारित करना आवश्यक है जो सशस्त्र संघर्ष के दौरान राज्यों के व्यवहार को विनियमित करते हैं। सबसे पहले, ये वर्ष के युद्ध पीड़ितों के संरक्षण के लिए जेनेवा कन्वेंशन हैं (सभी चार सम्मेलनों के लिए सामान्य लेख 1949) और वर्ष के अतिरिक्त प्रोटोकॉल 1 के अनुच्छेद 1। इन कृत्यों के अनुसार, राज्यों को सभी परिस्थितियों में सम्मेलनों का अनुपालन करने के लिए बाध्य किया जाता है, और यह भी कि - दूसरों को अनुपालन करने के लिए मजबूर करना। इस प्रकार, संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य नाटो देश जो किसी दिए गए राज्य में विद्रोहियों को सहायता प्रदान करते हैं, न केवल लीबिया की सरकार, या कहें, सीरिया, लेकिन सशस्त्र संघर्ष में किसी भी अन्य प्रतिभागियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के अनुपालन को लागू करने के लिए बाध्य हैं। दोहरानाः यह एक कर्तव्य है, अधिकार नहीं। यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि जिनेवा सम्मेलनों का यह प्रावधान प्रथागत अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून का प्रतिबिंब है, इसलिए संबंधित अंतरराष्ट्रीय संधियों में किसी राज्य या पार्टी की भागीदारी का प्रश्न इसके लायक नहीं है। अमेरिका को एक बार विद्रोहियों का समर्थन करने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने का दोषी ठहराया गया है। यह संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय द्वारा 1977 में प्रसिद्ध मामले "निकारागुआ बनाम यूएसए" पर निर्णय में किया गया था, उदाहरण के लिए, अमेरिकी प्रशिक्षकों द्वारा कॉन्ट्रैक्ट टुकड़ियों को दिए गए रवैये के संबंध में और जिसने अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून के प्रावधानों का खंडन किया।
लीबिया सशस्त्र संघर्ष में तथाकथित विद्रोहियों ने बड़े पैमाने पर अपराध किए। यह लीबिया में घटनाओं की जांच के लिए स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय आयोग की रिपोर्ट में दर्ज है। आयोग की रिपोर्ट में नाटो बलों द्वारा लीबिया पर बमबारी के परिणामस्वरूप विद्रोहियों के अपराधों और नागरिकों की हत्या का उल्लेख है।
इस तरह के विद्रोहियों के लिए समर्थन का तात्पर्य संबंधित राज्यों की अंतर्राष्ट्रीय कानूनी जिम्मेदारी से है।
लीबिया में जो कुछ हुआ, आज हम सीरिया में देखते हैं। सीरियाई अरब गणराज्य में स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय जांच आयोग की रिपोर्ट, इस तथ्य के बावजूद कि यह रिपोर्ट सीरियाई विद्रोहियों के नेतृत्व [6] को सही ठहराने का प्रयास करती है, अंतर्राष्ट्रीय मानवतावादी कानून के उनके घोर उल्लंघन का प्रमाण है। आयोग ने तथाकथित "सीरियन फ़्री आर्मी" (SSA) के उग्रवादियों द्वारा किए गए हत्याओं, लिंच और अन्य मानव अधिकारों के घोर उल्लंघन के मामले दर्ज किए और बल दिया कानून।
| सीरिया के खिलाफ अमेरिकी आक्रामकता का लगातार खतरा एक बार फिर से नाटो देशों की कार्रवाई के अंतर्राष्ट्रीय कानूनी विश्लेषण की ओर मुड़ने के साथ-साथ लीबिया के बारे में संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व को भी आवश्यक बनाता है। समानताएं यहां अत्यधिक प्रासंगिक हैं। इन मुद्दों में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्प संख्या एक हज़ार नौ सौ सत्तर और नंबर एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर को अपनाने के साथ-साथ इन प्रस्तावों के कानूनी परिणाम भी शामिल हैं; लीबिया में अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय में स्थिति के हस्तांतरण के कानूनी आधार और परिणाम, साथ ही सशस्त्र संघर्ष के दौरान तथाकथित विपक्ष की सहायता के लिए कानूनी आधार। इन समस्याओं पर अधिक विस्तार से विचार करें। परंपरागत रूप से, यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के अंतरराष्ट्रीय कानूनी परिणामों का विश्लेषण करने के लिए प्रथागत है। हालांकि, इन प्रस्तावों को स्वयं अपनाने के लिए कानूनी आधार पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। ऐसे मामले जिनमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय, अपने अधिकार से परे हो जाती है, अधिक बार हो रहे हैं । संकल्प एक हज़ार नौ सौ सत्तर और एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर को अपनाने पर, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अधिकार से अधिक। पहला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्प संख्या एक हज़ार नौ सौ सत्तर में निर्धारित उपायों को अपनाने के लिए वास्तविक औचित्य का विश्लेषण करते समय, यह स्पष्ट हो जाता है कि निर्णय के समय, परिषद के लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय VII को लागू करने के लिए कोई वास्तविक आधार नहीं था। तो, एक और बाईस और पच्चीस फरवरी दो हज़ार ग्यारह, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की दो बैठकें "शांति और सुरक्षा अफ्रीका में" शीर्षक के तहत आयोजित की गईं। राजनीतिक मामलों के लिए पहले संयुक्त राष्ट्र के अंडर-महासचिव, एल। पास्को ने परिषद के सदस्यों को "हिंसा और बल के गैर-चयनात्मक उपयोग" के बारे में सूचित किया । दूसरी बैठक में, लीबिया के प्रतिनिधि, शाल्के ने कहाः "फरवरी पंद्रह पर, नागरिकों के एक समूह ने तर्बेल नामक एक वकील को रिहा करने के लिए सड़कों पर ले जाया . . . प्रदर्शनकारियों के इस समूह के लिए, सिर और छाती में आग लगा दी गई थी, जैसे कि जिन सैनिकों ने गोली चलाई थी वे नहीं थे जीवित लोग . . . "उन्होंने यह भी कहाः" आज मैं गद्दाफी के शब्दों को सुनता हूंः "मैं या तो आप पर शासन करूंगा या आपको नष्ट कर दूंगा। " "हम लीबिया को बचाने के लिए संयुक्त राष्ट्र से अपील करते हैं," शाल्के ने अपना भाषण समाप्त किया। उसी बैठक में। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने एक हजार से अधिक लोगों को मृत घोषित कर दिया "हालांकि, सभी पिछली स्थितियों के विपरीत, विश्व समुदाय के लिए कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया था। इसके अलावा, जब इन" सबूतों "को मीडिया में प्रस्तुत करने की कोशिश की गई थी, तो यह उनके उत्पादन चरित्र के सबसे गंभीर संदेह, या अधिक सटीक रूप से उनके मिथ्याकरण का कारण नहीं बन सकता है। मार्च में एक्सएनयूएमएक्स से रूसी विदेश मंत्रालय का संदेश, एक्सएनयूएमएक्स संकल्प को अपनाने की पूर्व संध्या पर, कहता है कि "बलों द्वारा विपक्ष और वफादार अधिकारियों के बीच संघर्ष में मारे गए लोगों की संख्या का अनुमान एक्सएनयूएमएक्स से एक्सएनयूएमएक्स हजार लोगों में भिन्न होता है। " हालांकि, सवाल यह उठता हैः परिषद "अनुमानित आंकड़ों" के साथ कैसे स्थिति में केवल एक ही पक्ष के पक्ष में इस तरह के कट्टरपंथी फैसले ले सकती है? एक और दो हजार मृतकों के बीच का अंतर एक हजार और शून्य के बीच का अंतर है। MFA संदेश औपचारिक रूप से इस तरह के अंतर की अनुमति देता है। और यह पूरी तरह से अस्पष्ट है, लेकिन वास्तव में, कौन मर गया? क्या यह "विरोध" या "निष्ठावान शक्ति" है? यदि ये देश के नागरिकों के प्रति वफादार अधिकारी हैं, तो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद उनके खिलाफ क्यों खड़ी हुई? वे रूसी विदेश मंत्रालय द्वारा उपयोग किए गए स्रोतों सहित प्रश्नों और सूचना के स्रोतों को बढ़ाते हैं। इस प्रकार, फरवरी बाईस की एक रिपोर्ट में, विदेश मंत्रालय का दावा है कि "प्रत्यक्षदर्शी खातों के अनुसार," जुलूस [यानी, सशस्त्र गिरोहों द्वारा किए गए हमलों से नहीं, बल्कि केवल कुछ जुलूस] हवा से बमबारी की गई थी। प्रश्नः संदेश में कुछ "प्रत्यक्षदर्शी" क्यों दिखाए गए हैं, लेकिन त्रिपोली में रूसी दूतावास नहीं? एक सुझाव है कि दूतावास ने अन्य जानकारी दी। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्प संख्या एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर पर वोट की पूर्व संध्या पर रूसी राजदूत की बाद की वापसी से यह अप्रत्यक्ष रूप से पुष्टि की जाती है। Имеются серьёзные вопросы и к деятельности Комиссии ООН по установлению фактов в Ливии, созданной решением Генерального секретаря ООН. Комиссия так и не смогла приступить к работе, так как в день её запланированного прибытия в Триполи начались бомбардировки ливийской территории авиацией НАТО. Возникает вопрос: для чего создавалась эта Комиссия? Обстоятельства создания Комиссии дают серьёзные основания полагать, что она была сформирована лишь с целью создания видимости установления фактов. Кроме того, явным нарушением принципа беспристрастности являлось назначение в состав этой Комиссии бывшего председателя Международного уголовного суда Ф. Кирша, являющегося гражданином Канады - государства-члена НАТО. Как Кирш может быть объективно признан беспристрастным во время подготовки агрессии и самой агрессии НАТО против Ливии? इस प्रकार, यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि न तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय और न ही रूसी संघ के पास संकल्प संख्या XNXX द्वारा निर्धारित उपायों को लेने के लिए आवश्यक वास्तविक सबूत हैं। कम से कम अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए ऐसा कोई सबूत पेश नहीं किया गया था। UNSC संकल्पों एक हज़ार नौ सौ सत्तर और एक हज़ार नौ सौ सत्तर को अपनाने के साथ-साथ लीबिया में आईसीसी को स्थापित तथ्यों के अभाव में स्थिति का हस्तांतरण, साथ ही मामलों की वास्तविक स्थिति को स्थापित करने के लिए एक स्पष्ट अनिच्छा के संकेत हैं। संकल्पों की वैधता और उनकी सामग्री को अपनाया। और अन्य सभी मुद्दों को हल करने के लिए तथ्यों को स्थापित करने से इनकार मौलिक महत्व का है। दूसरा। लीबिया में "सशस्त्र संघर्ष" के रूप में स्थिति की योग्यता कितनी उचित है? संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्प संख्या एक हज़ार नौ सौ सत्तर ने स्थापित किया कि अधिकारियों को "अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करना चाहिए। " इस तरह के एक बयान का मतलब है कि सुरक्षा परिषद की प्राथमिकता उस समय लीबिया की स्थिति को "सशस्त्र संघर्ष" के रूप में देखती थी। हालांकि, क्या इसके लिए कानूनी आधार थे? उनका प्रतिनिधित्व नहीं किया गया। फिर, वास्तविक जानकारी की कमी विभिन्न व्याख्याओं के लिए आधार देती है। इसलिए, उदाहरण के लिए, यह मानने के आधार थे कि नाटो आक्रमण शुरू होने से पहले लीबिया में "सशस्त्र संघर्ष" की कोई कानूनी रूप से स्थिति नहीं थी। मार्च दो हज़ार ग्यारह तक, लीबिया में जो कुछ भी हो रहा था, वह सशस्त्र विद्रोह था, जो कि एक विशुद्ध रूप से आपराधिक अपराध था, जिसे अंतरराष्ट्रीय कानून के बजाय घरेलू द्वारा नियंत्रित किया जाता है और जिसे बिना किसी विदेशी हस्तक्षेप के देश के अधिकारियों द्वारा रोका जाना चाहिए। यह माना जाना चाहिए कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्प संख्या एक हज़ार नौ सौ सत्तर के लिए रूस का मतदान एक गंभीर गलती थी। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि यह उत्तरी काकेशस में रूसी "स्थितियों" के संबंध में प्रत्यक्ष कानूनी परिणाम हो सकता है। इन सबसे ऊपर, इस तरह की स्थिति राज्यों के अधिकार को उनके राष्ट्रीय कानून के भीतर आतंकवाद-विरोधी संचालन करने के लिए नुकसान पहुंचाती है और ऐसी स्थितियों को तुरंत "सशस्त्र संघर्ष" की श्रेणी में स्थानांतरित कर देती है - अर्थात, अंतर्राष्ट्रीय कानून के क्षेत्र में! यहां राज्यों के राष्ट्रीय कानून के एक गंभीर क्षरण का खतरा है, जो जल्द ही सार्वजनिक जीवन के सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों से निपटने के लिए कोई जगह नहीं होगी। तीसरा। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा संयुक्त राष्ट्र चार्टर में प्रदान किए गए उपायों के लिए कानूनी आधार क्या हैं? संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्प संख्या XXUMX ने लीबिया पर तथाकथित नो-फ्लाई ज़ोन की घोषणा की है। इस तरह के उपाय के लिए कानूनी आधार क्या हैं? संकल्प उनका नाम नहीं लेता। और यह समझ में आता है, क्योंकि संयुक्त राष्ट्र चार्टर में कोई प्रावधान नहीं हैं जो संगठन के एक सदस्य राज्य के "हवाई क्षेत्र को बंद करने" की अनुमति देगा। हमने बार-बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों की धूर्तता पर ध्यान दिया, "चार्टर के अध्याय VII के तहत कार्य करना"। अनिवार्य उपाय, विशेष रूप से इस तरह के महत्व को, चार्टर के प्रमुख के आधार पर लागू नहीं किया जा सकता है। उन्हें एक विशिष्ट लेख और यहां तक कि एक लेख खंड के आधार पर लागू किया जा सकता है। हालांकि, हम इसे केवल न्यायाधिकरण के मामले में ही नहीं, बल्कि "बंद क्षेत्रों" के मामले में भी देखते हैं। क्यों? क्या यह एक संयोग है? हमारी राय में, संयोग से नहीं। सुरक्षा परिषद को संदर्भित करने के लिए कुछ भी नहीं है। ऐसा कोई लेख नहीं। यह परिषद का अपना आविष्कार है। और यह अंतरराष्ट्रीय कानून द्वारा विनियमित नहीं है। इसका मतलब है कि यह उपाय संयुक्त राष्ट्र के सदस्य राज्य की संप्रभुता के सिद्धांत का सीधे उल्लंघन करता है, क्योंकि हवाई क्षेत्र राज्य के संप्रभु क्षेत्र का हिस्सा है। इस प्रकार, सुरक्षा परिषद के संकल्प संख्या एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर का अनुच्छेद संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर का उल्लंघन करता है और अंतरराष्ट्रीय वायु कानून के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय संधियों के मानदंड। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्प संख्या दो के पैरा छः, लीबिया के क्षेत्र में हवाई उड़ानों पर प्रतिबंध स्थापित करता है। और एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर पैराग्राफ सभी राज्यों को इस निषेध को लागू करने के लिए "सभी आवश्यक उपाय करने" की अनुमति देता है। यही है, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सभी को अपने स्वयं के क्षेत्र में लीबियाई विमानों को मारने की अनुमति दी है। उक्त रिज़ॉल्यूशन का सत्रह पैराग्राफ, जिसने संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों को लीबियाई विमानों को अपने क्षेत्र में उतरने की अनुमति देने से रोक दिया, कोई कम अवैध नहीं दिखता है। इस तरह की स्थापना अंतरराष्ट्रीय विमानन के क्षेत्र में कई अंतर्राष्ट्रीय संधियों के अनुरूप नहीं हैः इन संधियों के उल्लंघन में, राज्यों को लीबिया से एक विमान को उतारने से इनकार करने के लिए बाध्य किया गया था, भले ही, उदाहरण के लिए, यह उड़ान भरने के लिए पर्याप्त ईंधन है या नहीं। यही है, वास्तव में, यह विमान को नष्ट करने के लिए निर्धारित किया गया था। संकल्प संख्या एक हज़ार नौ सौ सत्तर और नंबर एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर की मुख्य कानूनी समस्या लीबिया की नागरिक आबादी के अधिकारों का कुल उल्लंघन था। इस तथ्य के बावजूद कि औपचारिक रूप से दोनों संकल्प इसकी रक्षा करने की आवश्यकता से तीव्रता से आगे बढ़े, यह असैनिक आबादी थी जो सबसे अधिक मुख्य रूप से मुख्य लक्ष्य में बदल गई थी। वास्तव में, दोनों प्रस्तावों ने केवल "विद्रोहियों" को नागरिकों के रूप में मान्यता दी। उसी समय, यह काफी स्पष्ट था कि आबादी के पूर्ण बहुमत ने वैध अधिकारियों के प्रति वफादारी बनाए रखी। इन प्रस्तावों की बहुत शब्दावली से पता चलता है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने आबादी के इस हिस्से को लीबिया के "लोगों" पर विचार नहीं किया था। उदाहरण के लिए, संकल्प संख्या दो के पैराग्राफ एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर में कहा गया है कि देश के अधिकारियों को "लोगों की वैध जरूरतों को पूरा करना चाहिए। " उन्होंने सशस्त्र विद्रोह से सुरक्षा और संरक्षण के लिए देश की आबादी के अधिकार को भी याद नहीं किया। यही है, शांति और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए मुख्य संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख संगठन को इस संगठन का एक भी सदस्य नहीं मिला, जो लीबिया की बहुसंख्यक आबादी के अधिकारों की रक्षा करेगा! अगर कोई पूछता है कि कैसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्प संख्या एक हज़ार नौ सौ सत्तर और No. एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर ने लीबिया के नागरिकों के अधिकारों का अधिकारियों के प्रति निष्ठा से बचाव किया, तो इसका जवाब एक होगाः कोई रास्ता नहीं! इन प्रस्तावों ने देश की बहुसंख्यक नागरिक आबादी के संरक्षण के अधिकार से वंचित कर दिया। यही है, ये संकल्प सीधे उन लोगों के अधिकारों के उल्लंघन के लिए प्रदान किए गए हैं, जिनके लिए यह प्रतीत होता है, वे रक्षा करने वाले थे। इस बात पर जोर दिया जाना चाहिए कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्प संख्या एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर के बहुत अस्पष्ट प्रावधान भी अंतरराष्ट्रीय कानून के दृष्टिकोण से, तथाकथित विद्रोहियों का समर्थन करने के लिए आधार प्रदान नहीं करते हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के पाठ ने विद्रोही समूहों को हथियार देने का अधिकार नहीं दिया, क्योंकि "सभी आवश्यक उपायों" के आवेदन पर सबसे अधिक समस्याग्रस्त शब्दकरण नागरिकों के अधिकारों को सुनिश्चित करने से जुड़ा था। आज तक, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने दो स्थितियों को अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया हैः सूडान में स्थिति और लीबिया में स्थिति। हालांकि, इस तरह के हस्तांतरण का कानूनी आधार उनकी वैधता के बारे में कई गंभीर सवाल उठाता है। इसलिए, संयुक्त राष्ट्र चार्टर में कहीं भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय में मामलों को स्थानांतरित करने का अधिकार निर्धारित नहीं है। यह अधिकार परिषद को एक अन्य अंतर्राष्ट्रीय संधि - स्टेट ऑफ द इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट में ही दिया जाता है। हालाँकि, यह तर्क गैर-पार्टियों के लिए इस संधि के लिए अप्रासंगिक है। वास्तव में, स्थिति उल्लंघन से भी बदतर दिखती है, यह सिर्फ बेतुका है! देखो क्या होता हैः राज्यों जो एक अंतरराष्ट्रीय संधि के पक्षकार नहीं हैं, ने एक राज्य के बारे में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय को ऐसी स्थिति बताई जो एक ही संधि का पक्ष नहीं है! अंतर्राष्ट्रीय कानून का पूर्ण विनाश है। इसके अलावा, सुरक्षा परिषद की गतिविधियों के लिए कानूनी आधार में अंतराल का सवाल उठता हैः ये आधार सुरक्षा परिषद के लिए ही कहां परिभाषित किए गए हैं? उनके मानदंड क्या हैं? चीजों का वास्तविक पक्ष क्या है? बोर्ड ने किन तथ्यों की समीक्षा की? उन्हें हमारे सामने क्यों नहीं पेश किया जाता? या "तथ्यों" का अर्थ वायु सेना की टीवी रिपोर्ट है? इस प्रकार, संयुक्त राष्ट्र चार्टर के आधार पर नहीं, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय संधि के आधार पर कार्य करना, जिसके प्रतिभागी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के कुछ सदस्य नहीं हैं, न ही राज्य, जिसकी स्थिति को आईसीसी में स्थानांतरित कर दिया गया था, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अपने अधिकार को पार कर लिया। केवल संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार परिषद के अधिकार के भीतर अपनाए जाने वाले संकल्प निष्पादन के अधीन हैं। तदनुसार, संयुक्त राष्ट्र के सदस्य राज्यों द्वारा विचाराधीन प्रस्तावों को नहीं देखा जाना चाहिए। यह लीबिया की स्थिति पर आईसीसी के साथ सहयोग करने के लिए "सभी" राज्यों के कर्तव्य के मुद्दे पर भी चिंता करता है। विशेष रूप से बताता है कि आईसीसी के सदस्य नहीं हैं। या जो आईसीसी के सदस्य हैं, लेकिन गैर-सदस्य राज्यों के खिलाफ मामलों के संबंध में अपनी स्थिति है। इस तथ्य पर ध्यान आकर्षित करना असंभव नहीं है कि लीबिया की स्थिति, पहले से ही कोर्ट में ही, प्री-ट्रायल चैम्बर में स्थानांतरित कर दी गई थी, जिसकी अध्यक्षता इटली से जज टार्फूसर कर रहे हैं। यदि हम मानते हैं कि इटली न केवल लीबिया का पूर्व उपनिवेशवादी है, बल्कि लीबिया के खिलाफ नाटो आक्रमण में मुख्य भागीदार भी है, तो आईसीसी के अध्यक्ष की पसंद न केवल निष्पक्षता के सिद्धांत का उल्लंघन है, बल्कि एक दुर्भावनापूर्ण, प्रदर्शनकारी उल्लंघन है। लीबिया में नाटो की आक्रामकता के बाद बीता समय स्पष्ट रूप से दिखा कि लीबिया में स्थिति के लिए "विपक्ष" और "विद्रोहियों" शब्दों का उपयोग लागू नहीं है। हालांकि, आंतरिक समूहों को विदेशी देशों की सहायता के अंतर्राष्ट्रीय कानूनी गलत विश्लेषण का विश्लेषण करने के उद्देश्य से, हम इस शब्द का उपयोग करेंगे, क्योंकि इसका उपयोग अंतरराष्ट्रीय कानूनी कृत्यों में किया जाता है, और इसके लिए कम से कम सख्त कानूनी शासन लागू होता है। इस प्रकार, यह साबित करना कि विद्रोहियों को विदेशी सहायता प्रदान करना अवैध है, हम अन्य सभी सशस्त्र समूहों को सहायता प्रदान करने की अवैधता साबित करेंगे। सबसे पहले, कानून के स्रोतों को निर्धारित करना आवश्यक है जो सशस्त्र संघर्ष के दौरान राज्यों के व्यवहार को विनियमित करते हैं। सबसे पहले, ये वर्ष के युद्ध पीड़ितों के संरक्षण के लिए जेनेवा कन्वेंशन हैं और वर्ष के अतिरिक्त प्रोटोकॉल एक के अनुच्छेद एक। इन कृत्यों के अनुसार, राज्यों को सभी परिस्थितियों में सम्मेलनों का अनुपालन करने के लिए बाध्य किया जाता है, और यह भी कि - दूसरों को अनुपालन करने के लिए मजबूर करना। इस प्रकार, संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य नाटो देश जो किसी दिए गए राज्य में विद्रोहियों को सहायता प्रदान करते हैं, न केवल लीबिया की सरकार, या कहें, सीरिया, लेकिन सशस्त्र संघर्ष में किसी भी अन्य प्रतिभागियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के अनुपालन को लागू करने के लिए बाध्य हैं। दोहरानाः यह एक कर्तव्य है, अधिकार नहीं। यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि जिनेवा सम्मेलनों का यह प्रावधान प्रथागत अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून का प्रतिबिंब है, इसलिए संबंधित अंतरराष्ट्रीय संधियों में किसी राज्य या पार्टी की भागीदारी का प्रश्न इसके लायक नहीं है। अमेरिका को एक बार विद्रोहियों का समर्थन करने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने का दोषी ठहराया गया है। यह संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय द्वारा एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर में प्रसिद्ध मामले "निकारागुआ बनाम यूएसए" पर निर्णय में किया गया था, उदाहरण के लिए, अमेरिकी प्रशिक्षकों द्वारा कॉन्ट्रैक्ट टुकड़ियों को दिए गए रवैये के संबंध में और जिसने अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून के प्रावधानों का खंडन किया। लीबिया सशस्त्र संघर्ष में तथाकथित विद्रोहियों ने बड़े पैमाने पर अपराध किए। यह लीबिया में घटनाओं की जांच के लिए स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय आयोग की रिपोर्ट में दर्ज है। आयोग की रिपोर्ट में नाटो बलों द्वारा लीबिया पर बमबारी के परिणामस्वरूप विद्रोहियों के अपराधों और नागरिकों की हत्या का उल्लेख है। इस तरह के विद्रोहियों के लिए समर्थन का तात्पर्य संबंधित राज्यों की अंतर्राष्ट्रीय कानूनी जिम्मेदारी से है। लीबिया में जो कुछ हुआ, आज हम सीरिया में देखते हैं। सीरियाई अरब गणराज्य में स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय जांच आयोग की रिपोर्ट, इस तथ्य के बावजूद कि यह रिपोर्ट सीरियाई विद्रोहियों के नेतृत्व [छः] को सही ठहराने का प्रयास करती है, अंतर्राष्ट्रीय मानवतावादी कानून के उनके घोर उल्लंघन का प्रमाण है। आयोग ने तथाकथित "सीरियन फ़्री आर्मी" के उग्रवादियों द्वारा किए गए हत्याओं, लिंच और अन्य मानव अधिकारों के घोर उल्लंघन के मामले दर्ज किए और बल दिया कानून। |
इम्फाल। मणिपुर के थॉबाल जिले में गुरूवार शाम हथियारबंद गिरोह ने श्रमिकों के एक समूह पर हमला किया और 2. 30 लाख रूपये लूटकर फरार हो गए।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, हमला सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की चौकी से करीब आधा किलोमीटर दूर स्थित एक निर्माण स्थल पर हुआ।
मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, हथियारबंद गिरोह के सदस्य नागालैंड से हो सकते हैं।
हमले में घायल एक श्रमिक ने आईएएनएस को बताया कि हथियारबंद गिरोह ने थॉबाल के हीरोक में बैराज के निर्माण स्थल पर हमला कर दिया।
नाम न जाहिर करने की शर्त पर श्रमिक ने बताया, ""उन्होंने डंडों से हमारी पिटाई शुरू कर दी और ठेकेदार के बारे में पूछा। ""
हथियारबंद गिरोह के सदस्य वहां मारपीट, तो़डफो़ड मचाने के बाद 2. 30 लाख रूपये लेकर फरार हो गए।
| इम्फाल। मणिपुर के थॉबाल जिले में गुरूवार शाम हथियारबंद गिरोह ने श्रमिकों के एक समूह पर हमला किया और दो. तीस लाख रूपये लूटकर फरार हो गए। पुलिस सूत्रों के अनुसार, हमला सीमा सुरक्षा बल की चौकी से करीब आधा किलोमीटर दूर स्थित एक निर्माण स्थल पर हुआ। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, हथियारबंद गिरोह के सदस्य नागालैंड से हो सकते हैं। हमले में घायल एक श्रमिक ने आईएएनएस को बताया कि हथियारबंद गिरोह ने थॉबाल के हीरोक में बैराज के निर्माण स्थल पर हमला कर दिया। नाम न जाहिर करने की शर्त पर श्रमिक ने बताया, ""उन्होंने डंडों से हमारी पिटाई शुरू कर दी और ठेकेदार के बारे में पूछा। "" हथियारबंद गिरोह के सदस्य वहां मारपीट, तो़डफो़ड मचाने के बाद दो. तीस लाख रूपये लेकर फरार हो गए। |
ट्विटर के सीईओ एलन मस्क सोशल नेटवर्किंग साइट में नए फीचर जोड़ने की तैयारी कर रहे हैं. मस्क ने घोषणा की है कि ट्विटर यूजर इमोजीस के साथ थ्रेड में किसी भी संदेश को सीधे संदेश का जवाब दे सकते हैं. इसके अलावा, मस्क ने यह भी बताया है कि ट्विटर आने वाले दिनों में अपने प्लेटफॉर्म पर वॉयस और वीडियो चैट शुरू करने जा रहा है.
मस्क ने ट्वीट किया, "ऐप के नवीनतम संस्करण के साथ, आप थ्रेड में किसी भी संदेश का डीएम जवाब दे सकते हैं और किसी भी इमोजी प्रतिक्रिया का उपयोग कर सकते हैं. एन्क्रिप्टेड डीएम वी1. 0 की रिलीज होनी चाहिए. यह तेजी से बढ़ेगी. " कसौटी यह है कि मेरे सिर पर बंदूक होने पर भी मैं आपके डीएम को नहीं देख सकूं. जल्द ही आपके हैंडल से इस प्लेटफॉर्म पर किसी से भी वॉयस और वीडियो चैट होगी, ताकि आप दुनिया में कहीं भी लोगों से बिना फोन नंबर दिए बात कर सकें.
डीएम की सुविधा 11 मई से शुरू होगी. यह घोषणा ट्विटर द्वारा 'कई वर्षों से कोई गतिविधि नहीं' वाले खातों को हटाने के एक दिन बाद आई है.
एलन मस्क ने कुछ दिन पहले ट्वीट किया था, "हम उन खातों को देख रहे हैं जिनमें कई वर्षों से कोई गतिविधि नहीं हुई है, इसलिए आप शायद फॉलोअर्स की संख्या में गिरावट देखेंगे. " गौरतलब है कि कुछ दिन पहले, ट्विटर सुर्खियों में था क्योंकि कई हस्तियों ने अपने खातों से ब्लू टिक खो दिया था. बाद में कुछ लोगों के ब्लू टिक वापस आ गए थे.
ब्लू टिक प्रसिद्ध व्यक्तियों को प्रतिरूपण से बचाने और झूठी सूचनाओं से निपटने के तरीके के रूप में कार्य करता है.
उन्होंने ट्वीट किया था, "अगले महीने शुरू होने वाला यह प्लेटफॉर्म मीडिया प्रकाशकों को एक क्लिक के साथ प्रति-लेख के आधार पर उपयोगकर्ताओं से शुल्क लेने की अनुमति देगा. वे एक सामयिक लेख पढ़ना चाहते हैं. मीडिया संगठनों और जनता दोनों के लिए एक बड़ी जीत होनी चाहिए. "
| ट्विटर के सीईओ एलन मस्क सोशल नेटवर्किंग साइट में नए फीचर जोड़ने की तैयारी कर रहे हैं. मस्क ने घोषणा की है कि ट्विटर यूजर इमोजीस के साथ थ्रेड में किसी भी संदेश को सीधे संदेश का जवाब दे सकते हैं. इसके अलावा, मस्क ने यह भी बताया है कि ट्विटर आने वाले दिनों में अपने प्लेटफॉर्म पर वॉयस और वीडियो चैट शुरू करने जा रहा है. मस्क ने ट्वीट किया, "ऐप के नवीनतम संस्करण के साथ, आप थ्रेड में किसी भी संदेश का डीएम जवाब दे सकते हैं और किसी भी इमोजी प्रतिक्रिया का उपयोग कर सकते हैं. एन्क्रिप्टेड डीएम वीएक. शून्य की रिलीज होनी चाहिए. यह तेजी से बढ़ेगी. " कसौटी यह है कि मेरे सिर पर बंदूक होने पर भी मैं आपके डीएम को नहीं देख सकूं. जल्द ही आपके हैंडल से इस प्लेटफॉर्म पर किसी से भी वॉयस और वीडियो चैट होगी, ताकि आप दुनिया में कहीं भी लोगों से बिना फोन नंबर दिए बात कर सकें. डीएम की सुविधा ग्यारह मई से शुरू होगी. यह घोषणा ट्विटर द्वारा 'कई वर्षों से कोई गतिविधि नहीं' वाले खातों को हटाने के एक दिन बाद आई है. एलन मस्क ने कुछ दिन पहले ट्वीट किया था, "हम उन खातों को देख रहे हैं जिनमें कई वर्षों से कोई गतिविधि नहीं हुई है, इसलिए आप शायद फॉलोअर्स की संख्या में गिरावट देखेंगे. " गौरतलब है कि कुछ दिन पहले, ट्विटर सुर्खियों में था क्योंकि कई हस्तियों ने अपने खातों से ब्लू टिक खो दिया था. बाद में कुछ लोगों के ब्लू टिक वापस आ गए थे. ब्लू टिक प्रसिद्ध व्यक्तियों को प्रतिरूपण से बचाने और झूठी सूचनाओं से निपटने के तरीके के रूप में कार्य करता है. उन्होंने ट्वीट किया था, "अगले महीने शुरू होने वाला यह प्लेटफॉर्म मीडिया प्रकाशकों को एक क्लिक के साथ प्रति-लेख के आधार पर उपयोगकर्ताओं से शुल्क लेने की अनुमति देगा. वे एक सामयिक लेख पढ़ना चाहते हैं. मीडिया संगठनों और जनता दोनों के लिए एक बड़ी जीत होनी चाहिए. " |
पैरों में दर्द के कारण बहुत विविध हो सकते हैं।
ध्यान दें कि आपको और क्या परेशान करता है।ये निचले अंगों में पैरों, सूजन, जलने की उत्तेजना, मलिनकिरण, आवेगों की सूजन हो सकती है। गोलियों और संपीड़न की सहायता से, आप रोग के बाहरी अभिव्यक्तियों को हटा सकते हैं, लेकिन आपको इसके कारण को खत्म करने पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। उदाहरण के लिए, यदि पैर पीड़ित हैं, तो ऑस्टियोपैथ पर जाएं। एक विशेषज्ञ की पसंद दर्द की प्रकृति और क्षेत्र द्वारा निर्धारित की जानी चाहिए।
मानव पैर में तीन भाग होते हैं - पैर,शिन और जांघ, जिनमें से प्रत्येक में निम्नलिखित प्रकार के ऊतक शामिल हैंः अस्थिबंधन, टेंडन, हड्डियों, जोड़ों, मांसपेशियों। इनमें से किसी भी तत्व के आघात पर शरीर तेज दर्द से प्रतिक्रिया करता है। गिरते समय, एक नियम के रूप में, ऊतकों या मस्तिष्क का खतरा होता है; एक गंभीर चोट संयुक्त हड्डी फ्रैक्चर या संयुक्त के विस्थापन का कारण बन सकती है। हालांकि, पैरों में दर्द के कारण न केवल बाह्य कारकों के कारण हो सकते हैं। इनमें ऑर्थोपेडिक पैथोलॉजीज शामिल हैंः फ्लैट पैर, हिप संयुक्त, वक्रता का वक्रता।
पैरों में दर्द के कारणों में विभिन्न संयुक्त रोग, विशेष रूप से गठिया और आर्थ्रोसिस शामिल हैं।
| पैरों में दर्द के कारण बहुत विविध हो सकते हैं। ध्यान दें कि आपको और क्या परेशान करता है।ये निचले अंगों में पैरों, सूजन, जलने की उत्तेजना, मलिनकिरण, आवेगों की सूजन हो सकती है। गोलियों और संपीड़न की सहायता से, आप रोग के बाहरी अभिव्यक्तियों को हटा सकते हैं, लेकिन आपको इसके कारण को खत्म करने पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। उदाहरण के लिए, यदि पैर पीड़ित हैं, तो ऑस्टियोपैथ पर जाएं। एक विशेषज्ञ की पसंद दर्द की प्रकृति और क्षेत्र द्वारा निर्धारित की जानी चाहिए। मानव पैर में तीन भाग होते हैं - पैर,शिन और जांघ, जिनमें से प्रत्येक में निम्नलिखित प्रकार के ऊतक शामिल हैंः अस्थिबंधन, टेंडन, हड्डियों, जोड़ों, मांसपेशियों। इनमें से किसी भी तत्व के आघात पर शरीर तेज दर्द से प्रतिक्रिया करता है। गिरते समय, एक नियम के रूप में, ऊतकों या मस्तिष्क का खतरा होता है; एक गंभीर चोट संयुक्त हड्डी फ्रैक्चर या संयुक्त के विस्थापन का कारण बन सकती है। हालांकि, पैरों में दर्द के कारण न केवल बाह्य कारकों के कारण हो सकते हैं। इनमें ऑर्थोपेडिक पैथोलॉजीज शामिल हैंः फ्लैट पैर, हिप संयुक्त, वक्रता का वक्रता। पैरों में दर्द के कारणों में विभिन्न संयुक्त रोग, विशेष रूप से गठिया और आर्थ्रोसिस शामिल हैं। |
सोनुकेदार अम्बिकापुर - अम्बिकापुर शहर में चोरी की वारदात तेजी बढ़ रही है,शहर में लगे लॉकडाउन खुलते ही चोर गिरोह सक्रिय हो गए हैं,शहर में पूर्व में हुए चोरी के मामले में अभी तक पुलिस के हाथ खाली है वही चोरों ने एक ही रात में शहर की 7 से अधिक दुकानों को अपना निशाना बनाया है,पूरा मामला कोतवाली थाना क्षेत्र का है,जहा शहर में मध्य स्थित गुदरी बाजार में बीती शाम व्यपारियो द्वारा निर्धारित समय पर दुकान बंद कर दी गई थी।
आज सुबह घटना की जानकारी मिलने पर दुकान संचालक अपने दुकान गुदरी बाजार पहुचे जहा चोरों के द्वारा दुकान के ऊपर सीमेंट के कराकेट को तोड़ कर दुकान में चोरी की वारदात को अंजाम दिया है। जिन दुकानों में चोरी हुई है वो अनाज भंडार व सब्जी सहित एक कपड़े की दुकान शामिल है,चोरों के द्वारा दुकानों से दुकान में रखा नगदी समेत खाद्यान समानों पर हाथ साफ किया है। शहर में लगातार हो रही चोरी से पुलिस की गश्त पर भी सवाल खड़े हो रहे है,एक ही रात में आधा दर्जन से अधिक दुकानों में चोरी होने से व्यपारियो में भी आक्रोश व्याप्त हो गया है।
बता दें कि शहर के गुदरी बाजार में सात से आठ दुकानों में चोरी की वारदात हुई है जहां अनाज सहित हजारों रुपए चोर ले उड़े। लगातार हो रही चोरी की वारदात से व्यापारियों मैं पुलिस के खिलाफ आक्रोश का माहौल है और पुलिस गस्त पर भी सवाल उठ रहे हैं। इससे पहले भी चोरों ने कई घरो को निशाना बना चुके हैं पर अब तक पुलिस के हाथ खाली है। कोतवाली थाना क्षेत्र का यह पूरा मामला है।
बहरहाल अभी तक चोरी का आंकलन नही हो सका है,व्यपारियो द्वारा इसकी शिकायत कोतवाली में दर्ज कराई जा रही है,और दुकान दारो के मौके पर पहुचे से और दुकानों में चोरी होने की बात कही जा रही ही,जिसके बाद पता चल सकेगा कि शहर के मध्य में स्थित गुदरी बाजार में एक ही रात में कितने दुकानों में और कितने की चोरी हुई है।
| सोनुकेदार अम्बिकापुर - अम्बिकापुर शहर में चोरी की वारदात तेजी बढ़ रही है,शहर में लगे लॉकडाउन खुलते ही चोर गिरोह सक्रिय हो गए हैं,शहर में पूर्व में हुए चोरी के मामले में अभी तक पुलिस के हाथ खाली है वही चोरों ने एक ही रात में शहर की सात से अधिक दुकानों को अपना निशाना बनाया है,पूरा मामला कोतवाली थाना क्षेत्र का है,जहा शहर में मध्य स्थित गुदरी बाजार में बीती शाम व्यपारियो द्वारा निर्धारित समय पर दुकान बंद कर दी गई थी। आज सुबह घटना की जानकारी मिलने पर दुकान संचालक अपने दुकान गुदरी बाजार पहुचे जहा चोरों के द्वारा दुकान के ऊपर सीमेंट के कराकेट को तोड़ कर दुकान में चोरी की वारदात को अंजाम दिया है। जिन दुकानों में चोरी हुई है वो अनाज भंडार व सब्जी सहित एक कपड़े की दुकान शामिल है,चोरों के द्वारा दुकानों से दुकान में रखा नगदी समेत खाद्यान समानों पर हाथ साफ किया है। शहर में लगातार हो रही चोरी से पुलिस की गश्त पर भी सवाल खड़े हो रहे है,एक ही रात में आधा दर्जन से अधिक दुकानों में चोरी होने से व्यपारियो में भी आक्रोश व्याप्त हो गया है। बता दें कि शहर के गुदरी बाजार में सात से आठ दुकानों में चोरी की वारदात हुई है जहां अनाज सहित हजारों रुपए चोर ले उड़े। लगातार हो रही चोरी की वारदात से व्यापारियों मैं पुलिस के खिलाफ आक्रोश का माहौल है और पुलिस गस्त पर भी सवाल उठ रहे हैं। इससे पहले भी चोरों ने कई घरो को निशाना बना चुके हैं पर अब तक पुलिस के हाथ खाली है। कोतवाली थाना क्षेत्र का यह पूरा मामला है। बहरहाल अभी तक चोरी का आंकलन नही हो सका है,व्यपारियो द्वारा इसकी शिकायत कोतवाली में दर्ज कराई जा रही है,और दुकान दारो के मौके पर पहुचे से और दुकानों में चोरी होने की बात कही जा रही ही,जिसके बाद पता चल सकेगा कि शहर के मध्य में स्थित गुदरी बाजार में एक ही रात में कितने दुकानों में और कितने की चोरी हुई है। |
Adityapur (Sanjeev Mehta) : आदित्यपुर स्थित पीएचईडी कार्यालय व आवासीय कॉलोनी के क्वार्टर जर्जर हो गए हैं. क्वार्टर के जर्जर छत और दीवारें भरभराकर गिर रही है. यहां तक की चहारदीवारी भी अब गिरने लगी है, जिससे कार्यालय के साथ क्वार्टर की सुरक्षा व्यवस्था पर आंच आ सकती है. कॉलोनी के आधे से अधिक क्वार्टर जर्जर हालत की वजह से खाली पड़े हैं. वहीं, कॉलोनी में कई अवांछित परिवारों का भी कब्जा है जो सेवानिवृत्त होने के बावजूद अवैध तरीके से निजी कंस्ट्रक्शन कर रह रहे हैं. इस कारण पीएचईडी कॉलोनी के अंदर असामाजिक तत्वों का डेरा लगता है, जो कई प्रकार के नशे का सेवन कॉलोनी के अंदर करते हैं. इसमें मुख्य रूप से ब्राउन शुगर का सेवन करने वाले ज्यादातर युवा हैं. आदित्यपुर थाना के ठीक सामने होने के बावजूद नशेड़ियों के लिए यह कॉलोनी सबसे सुरक्षित जगह है.
पीएचईडी कार्यालय आदित्यपुर के साथ जमशेदपुर डिवीजन का भी मुख्यालय है. यहां दोनों डिवीजन के कार्यपालक अभियंता के साथ अधीक्षण अभियंता का कार्यालय और आवासीय क्वार्टर भी है. इस संबंध में कार्यपालक अभियंता जेसन होरो ने बताया कि जहां तक जर्जर क्वार्टर और चहारदीवारी गिरने की बात है तो कई बार जेई द्वारा इस्टीमेट तैयार कर उसे अधीक्षण अभियंता से टेक्निकल स्वीकृति दिलाकर हेडक्वार्टर को भेजा गया है. लेकिन वहां से आज तक फंड नहीं मिला है. वहीं, अवैध क्वार्टरों को खाली करने के लिए लोगों को नोटिस भेजा जाता है. लेकिन उनके विरुद्ध कोई कठोर कार्रवाई नहीं होती है. इसके वजह से वे लोग यहां वर्षों से डेरा जमाए हुए हैं.
इस संबंध में भी हेडक्वार्टर को ही अपने स्तर से सेवानिवृत्त कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई करनी होगी तभी यहां से अवैध रूप से रह रहे लोगों को बाहर किया जा सकता है. वहीं, इस मामले को जनहित के सवाल पर उठाते हुए टीएमसी के युवा जिलाध्यक्ष बाबू तांती ने अधीक्षण अभियंता को ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया है. चूंकि पीएचईडी कॉलोनी के चहारदीवारी गिरने और यहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगने से आसपास के रिहायशी इलाकों के लोगों को भी सुरक्षा व्यवस्था का भय है.
| Adityapur : आदित्यपुर स्थित पीएचईडी कार्यालय व आवासीय कॉलोनी के क्वार्टर जर्जर हो गए हैं. क्वार्टर के जर्जर छत और दीवारें भरभराकर गिर रही है. यहां तक की चहारदीवारी भी अब गिरने लगी है, जिससे कार्यालय के साथ क्वार्टर की सुरक्षा व्यवस्था पर आंच आ सकती है. कॉलोनी के आधे से अधिक क्वार्टर जर्जर हालत की वजह से खाली पड़े हैं. वहीं, कॉलोनी में कई अवांछित परिवारों का भी कब्जा है जो सेवानिवृत्त होने के बावजूद अवैध तरीके से निजी कंस्ट्रक्शन कर रह रहे हैं. इस कारण पीएचईडी कॉलोनी के अंदर असामाजिक तत्वों का डेरा लगता है, जो कई प्रकार के नशे का सेवन कॉलोनी के अंदर करते हैं. इसमें मुख्य रूप से ब्राउन शुगर का सेवन करने वाले ज्यादातर युवा हैं. आदित्यपुर थाना के ठीक सामने होने के बावजूद नशेड़ियों के लिए यह कॉलोनी सबसे सुरक्षित जगह है. पीएचईडी कार्यालय आदित्यपुर के साथ जमशेदपुर डिवीजन का भी मुख्यालय है. यहां दोनों डिवीजन के कार्यपालक अभियंता के साथ अधीक्षण अभियंता का कार्यालय और आवासीय क्वार्टर भी है. इस संबंध में कार्यपालक अभियंता जेसन होरो ने बताया कि जहां तक जर्जर क्वार्टर और चहारदीवारी गिरने की बात है तो कई बार जेई द्वारा इस्टीमेट तैयार कर उसे अधीक्षण अभियंता से टेक्निकल स्वीकृति दिलाकर हेडक्वार्टर को भेजा गया है. लेकिन वहां से आज तक फंड नहीं मिला है. वहीं, अवैध क्वार्टरों को खाली करने के लिए लोगों को नोटिस भेजा जाता है. लेकिन उनके विरुद्ध कोई कठोर कार्रवाई नहीं होती है. इसके वजह से वे लोग यहां वर्षों से डेरा जमाए हुए हैं. इस संबंध में भी हेडक्वार्टर को ही अपने स्तर से सेवानिवृत्त कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई करनी होगी तभी यहां से अवैध रूप से रह रहे लोगों को बाहर किया जा सकता है. वहीं, इस मामले को जनहित के सवाल पर उठाते हुए टीएमसी के युवा जिलाध्यक्ष बाबू तांती ने अधीक्षण अभियंता को ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया है. चूंकि पीएचईडी कॉलोनी के चहारदीवारी गिरने और यहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगने से आसपास के रिहायशी इलाकों के लोगों को भी सुरक्षा व्यवस्था का भय है. |
Mulayam Singh Yadav: गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव की तबीयत में थोड़ा सुधार है। यह अपडेट राष्ट्रीय जनता दल के नेता और बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव की तरफ से आया है। तेजस्वी कल कल अपने पिता लालू प्रसाद के साथ मेदांता अस्पताल गए थे और मुलायम सिंह यादव के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली थी।
तेजस्वी यादव ने कहा-मैं और लालू जी अस्पताल गए थे, मुलायम जी की तबीयत में थोड़ा सुधार है। वहां अखिलेश यादव से मुलाकात हुई और नेता जी (मुलायम सिंह यादव) की तबियत के बारे में बातचीत हुई। मेदांता अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में उनका इलाज किया जा रहा है।
उधर सपा द्वारा बुधवार को ट्वीट किए गए अस्पताल के मेडिकल बुलेटिन में कहा गया है कि सपा संस्थापक की स्थिति अब भी चिंताजनक है और उन्हें जीवन रक्षक औषधियां दी जा रही हैं। उन्हें मेदांता अस्पताल के आईसीयू में रखा गया है जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम उनका उपचार कर रही है।
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री को निम्न रक्तचाप और सांस लेने में तकलीफ के कारण पहले भी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस बीच, यादव की तबियत में सुधार के लिए उनके पैतृक गांव सैफई समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों में विशेष प्रार्थनाएं और दुआएं की जा रही हैं।
| Mulayam Singh Yadav: गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव की तबीयत में थोड़ा सुधार है। यह अपडेट राष्ट्रीय जनता दल के नेता और बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव की तरफ से आया है। तेजस्वी कल कल अपने पिता लालू प्रसाद के साथ मेदांता अस्पताल गए थे और मुलायम सिंह यादव के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली थी। तेजस्वी यादव ने कहा-मैं और लालू जी अस्पताल गए थे, मुलायम जी की तबीयत में थोड़ा सुधार है। वहां अखिलेश यादव से मुलाकात हुई और नेता जी की तबियत के बारे में बातचीत हुई। मेदांता अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष में उनका इलाज किया जा रहा है। उधर सपा द्वारा बुधवार को ट्वीट किए गए अस्पताल के मेडिकल बुलेटिन में कहा गया है कि सपा संस्थापक की स्थिति अब भी चिंताजनक है और उन्हें जीवन रक्षक औषधियां दी जा रही हैं। उन्हें मेदांता अस्पताल के आईसीयू में रखा गया है जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम उनका उपचार कर रही है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री को निम्न रक्तचाप और सांस लेने में तकलीफ के कारण पहले भी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस बीच, यादव की तबियत में सुधार के लिए उनके पैतृक गांव सैफई समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों में विशेष प्रार्थनाएं और दुआएं की जा रही हैं। |
साध्वी प्राची ने हिंदुओं को भी नसीहत दे दी। उन्होंने कहा कि हिंदू सिर्फ पैसे कमाने में जुटा रहता है। जबकि, दूसरा समुदाय देश पर राज करने के लिए काम कर रहा है। उन्होंने ये भी कहा कि बड़ी साजिश के तहत मुसलमान समुदाय देश के हाइवे पर पंचर बनाने की दुकान खोलते हैं। इन बयान से विवाद पैदा होने के आसार हैं।
इससे पहले योगी सरकार ने मदरसों का सर्वे कराया था। जिसमें सैकड़ों मदरसे बिना रजिस्ट्रेशन के चलते मिले थे। इनमें दुनियाभर में प्रसिद्ध दारुल उलूम का मदरसा भी शामिल है। योगी सरकार के मदरसों में रविवार को छुट्टी करने के फैसले के बाद अब सियासत के एक बार फिर गरमान के पूरे आसार दिख रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक अल्पसंख्यक कल्याण और वक्फ विभाग के विशेष सचिव एके सिंह ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के निदेशक को चिट्ठी भेजी है। इसमें कहा गया है कि सर्वशिक्षा अभियान में 558 मान्यता प्राप्त और अनुदान पाने वाले यूपी के मदरसों में 8वीं तक के छात्रों को मुफ्त में किताबें दी जा रही हैं।
मौलाना अरशद मदनी ने ये भी कहा कि हर मजहब के लोगों की तरह हम भी अपने धर्म की हिफाजत करते हैं। समाज के साथ देश को भी धार्मिक लोगों की जरूरत है। कभी किसी ने नहीं सुना होगा कि तलबा (मदरसे में पढ़ने वालों) ने सेना भर्ती को लेकर हुए बवाल में किसी ट्रेन को फूंक दिया। उन्होंने मदरसों पर आरोप लगने पर दुख भी जताया।
सपा के पूर्व विधायक हाजी जमीरुल्लाह ने न्यूज चैनल 'एबीपी गंगा' से कहा कि अगर जांच के बाद मदरसों पर पाबंदी लगी, तो घर-घर मदरसे खोले जाएंगे। वहीं, दारुल उलूम माज बिन जबल मदरसा के संचालक मौलाना मुफ्ती अकबर कासिमी ने भी टीवी चैनल से कहा कि मदरसों को टारगेट कर जांच कराना ठीक नहीं है। उनका कहना है कि सरकार की साजिश मुसलमानों को कमजोर करने की है।
National Anthem in Madarsa: बता दें इस आदेश में कहा गया है कि राज्य के सभी मान्यता प्राप्त अनिदानित और गैर अनुदानित मदरसों में शिक्षण कक्षाएं शुरु होने से पहले अन्य गतिविधियों के साथ शिक्षकों और मदरसों के बच्चों को राष्ट्रगान का गायन अनिवार्य करना होगा।
Madhya Pradesh Minister Usha Thakur: असम के बाद अब मध्य प्रदेश में भी मदरसों को लेकर राजनीति शुरू हो गई है। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की शिवराज सिंह सरकार में कैबिनेट मंत्री उषा ठाकुर (Usha Thakur) ने मदरसों को लेकर बड़ा बयान दिया है।
| साध्वी प्राची ने हिंदुओं को भी नसीहत दे दी। उन्होंने कहा कि हिंदू सिर्फ पैसे कमाने में जुटा रहता है। जबकि, दूसरा समुदाय देश पर राज करने के लिए काम कर रहा है। उन्होंने ये भी कहा कि बड़ी साजिश के तहत मुसलमान समुदाय देश के हाइवे पर पंचर बनाने की दुकान खोलते हैं। इन बयान से विवाद पैदा होने के आसार हैं। इससे पहले योगी सरकार ने मदरसों का सर्वे कराया था। जिसमें सैकड़ों मदरसे बिना रजिस्ट्रेशन के चलते मिले थे। इनमें दुनियाभर में प्रसिद्ध दारुल उलूम का मदरसा भी शामिल है। योगी सरकार के मदरसों में रविवार को छुट्टी करने के फैसले के बाद अब सियासत के एक बार फिर गरमान के पूरे आसार दिख रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक अल्पसंख्यक कल्याण और वक्फ विभाग के विशेष सचिव एके सिंह ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के निदेशक को चिट्ठी भेजी है। इसमें कहा गया है कि सर्वशिक्षा अभियान में पाँच सौ अट्ठावन मान्यता प्राप्त और अनुदान पाने वाले यूपी के मदरसों में आठवीं तक के छात्रों को मुफ्त में किताबें दी जा रही हैं। मौलाना अरशद मदनी ने ये भी कहा कि हर मजहब के लोगों की तरह हम भी अपने धर्म की हिफाजत करते हैं। समाज के साथ देश को भी धार्मिक लोगों की जरूरत है। कभी किसी ने नहीं सुना होगा कि तलबा ने सेना भर्ती को लेकर हुए बवाल में किसी ट्रेन को फूंक दिया। उन्होंने मदरसों पर आरोप लगने पर दुख भी जताया। सपा के पूर्व विधायक हाजी जमीरुल्लाह ने न्यूज चैनल 'एबीपी गंगा' से कहा कि अगर जांच के बाद मदरसों पर पाबंदी लगी, तो घर-घर मदरसे खोले जाएंगे। वहीं, दारुल उलूम माज बिन जबल मदरसा के संचालक मौलाना मुफ्ती अकबर कासिमी ने भी टीवी चैनल से कहा कि मदरसों को टारगेट कर जांच कराना ठीक नहीं है। उनका कहना है कि सरकार की साजिश मुसलमानों को कमजोर करने की है। National Anthem in Madarsa: बता दें इस आदेश में कहा गया है कि राज्य के सभी मान्यता प्राप्त अनिदानित और गैर अनुदानित मदरसों में शिक्षण कक्षाएं शुरु होने से पहले अन्य गतिविधियों के साथ शिक्षकों और मदरसों के बच्चों को राष्ट्रगान का गायन अनिवार्य करना होगा। Madhya Pradesh Minister Usha Thakur: असम के बाद अब मध्य प्रदेश में भी मदरसों को लेकर राजनीति शुरू हो गई है। मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह सरकार में कैबिनेट मंत्री उषा ठाकुर ने मदरसों को लेकर बड़ा बयान दिया है। |
परम आत्मीय स्वजन,
"अब मुस्कुरा के भूल न जाएँ तो क्या करें "
(बह्रः मुजारे मुसम्मन् अखरब मक्फूफ महजूफ )
मुशायरे की अवधि केवल दो दिन है । मुशायरे की शुरुआत दिनाकं 23 फरवरी दिन शुक्रवार को हो जाएगी और दिनांक 24 फरवरी दिन शनिवार समाप्त होते ही मुशायरे का समापन कर दिया जायेगा.
(सदस्य प्रबंधन समूह)
Replies are closed for this discussion.
आदरणीय गंगाधर जी आदाब,
ग़ज़ल का अच्छा प्रयास । दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें ।
जनाब गंगाधर शर्मा 'हिंदुस्तान' जी आदाब,तरही ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिन ग्गज़ल अभी बहुत समय चाहती है,बहरहाल सहभागिता के लिए आपका धन्यवाद ।
जनाब गंगाधर साहिब ,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है ,मिसरों में रब्त की कमी ,ग़ज़ल समय चाह रही है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं।
//कान्हा ने दौड़ भाग मिटा दी तमाम अब.
वाह! अच्छी कहन के साथ खूबसूरत ग़ज़ल हुई हेै आदरणीय। बहुत बधाई आपकाो।
| परम आत्मीय स्वजन, "अब मुस्कुरा के भूल न जाएँ तो क्या करें " मुशायरे की अवधि केवल दो दिन है । मुशायरे की शुरुआत दिनाकं तेईस फरवरी दिन शुक्रवार को हो जाएगी और दिनांक चौबीस फरवरी दिन शनिवार समाप्त होते ही मुशायरे का समापन कर दिया जायेगा. Replies are closed for this discussion. आदरणीय गंगाधर जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास । दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें । जनाब गंगाधर शर्मा 'हिंदुस्तान' जी आदाब,तरही ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिन ग्गज़ल अभी बहुत समय चाहती है,बहरहाल सहभागिता के लिए आपका धन्यवाद । जनाब गंगाधर साहिब ,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है ,मिसरों में रब्त की कमी ,ग़ज़ल समय चाह रही है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं। //कान्हा ने दौड़ भाग मिटा दी तमाम अब. वाह! अच्छी कहन के साथ खूबसूरत ग़ज़ल हुई हेै आदरणीय। बहुत बधाई आपकाो। |
मैनपुरी। देश में हर सुहागिन के लिए करवाचौथ का त्योहार बेहद खास होता है। उस पर अगर उसका पहला करवाचौथ हो तो फिर बात ही अनूठी हो जाती है। लेकिन यूपी के मैनपुरी में एक ऐसी वारदात का पता चला है जिसने इस पावन व्रत को भी शर्मसार कर दिया है।
यहां एक महिला का पहला करवाचौथ व्रत था। उसने पति के लिए निर्जल व्रत रखा था। वह सोलह श्रृंगार कर उसका इंतजार भी कर रही थी। पति आया लेकिन अपने दोस्त के साथ। उसने दोस्त के हाथों पत्नी को सौंप दिया।
दरिंदे दोस्त ने पति की मौजूदगी में ही उससे रेप किया और सुबह बदहवास हालत में छोड़कर चला गया। पति ने मुंह खोलने पर पत्नी को जान से मारने की धमकी दे डाली। इस बारे में महिला ने थाने में तहरीर दी है।
तहरीर में पीडि़ता ने लिखा है कि उसकी शादी बीते 8 अप्रैल 2017 को थाना बेवर निवासी युवक से हुई थी। शादी के 4 दिन बाद वो घर चली गई। इसके बाद उसे कोई भी बुलाने नहीं गया। करवाचौथ के एक दिन पहले पति और उसके पिता उसे ससुराल ले आए थे। इसके बाद ये घिनौनापन हो गया।
बताया जा रहा है कि रविवार को विवाहिता करवाचौथ के त्योहार के लिए तैयार हुई थी। पूजा से पहले ही पति का एक दोस्त भी आ गया। दोस्त के आने के बाद पति ने विवाहिता की पिटाई कर उसे तमंचे के बल पर दोस्त के साथ रात गुजारने को मजबूर कर दिया।
इसके बाद दोस्त और पत्नी को कमरे में बंद कर दिया और खुद रातभर घर के बाहर चौकीदारी करता रहा। सुबह दोस्त के जाने के बाद पत्नी कमरे से बाहर आ गई तो पति ने उसे धमकाया। पति ने कहा कि अगर वो इस बारे में किसी को बताएगी तो वो उसे और उसके भाई को जान से मार देगा।
आरोपित ने विवाहिता के साथ तमंचे के बल पर रेप किया। बाद में पति ने किसी को भी बात बताने पर महिला और भाई को जान से मारने की धमकी दे डाली। सोमवार की सुबह किसी तरह विवाहिता घर से निकलकर मां के पास पहुंची।
उन्हें पूरी घटना के बारे में जानकारी दी। इसके बाद परिवारीजन पीड़िता को लेकर थाने पहुंच गए। थाने में तहरीर देकर आरोपित पति और रेप करने वाले दोस्त के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। हालांकि पुलिस पूरे मामले को संदिग्ध मान रही है। पुलिस का कहना है कि महिला को जब मेडिकल चेकअप के लिए कहा गया तो वो उठकर चली गई। मामले की जांच चल रही है।
| मैनपुरी। देश में हर सुहागिन के लिए करवाचौथ का त्योहार बेहद खास होता है। उस पर अगर उसका पहला करवाचौथ हो तो फिर बात ही अनूठी हो जाती है। लेकिन यूपी के मैनपुरी में एक ऐसी वारदात का पता चला है जिसने इस पावन व्रत को भी शर्मसार कर दिया है। यहां एक महिला का पहला करवाचौथ व्रत था। उसने पति के लिए निर्जल व्रत रखा था। वह सोलह श्रृंगार कर उसका इंतजार भी कर रही थी। पति आया लेकिन अपने दोस्त के साथ। उसने दोस्त के हाथों पत्नी को सौंप दिया। दरिंदे दोस्त ने पति की मौजूदगी में ही उससे रेप किया और सुबह बदहवास हालत में छोड़कर चला गया। पति ने मुंह खोलने पर पत्नी को जान से मारने की धमकी दे डाली। इस बारे में महिला ने थाने में तहरीर दी है। तहरीर में पीडि़ता ने लिखा है कि उसकी शादी बीते आठ अप्रैल दो हज़ार सत्रह को थाना बेवर निवासी युवक से हुई थी। शादी के चार दिन बाद वो घर चली गई। इसके बाद उसे कोई भी बुलाने नहीं गया। करवाचौथ के एक दिन पहले पति और उसके पिता उसे ससुराल ले आए थे। इसके बाद ये घिनौनापन हो गया। बताया जा रहा है कि रविवार को विवाहिता करवाचौथ के त्योहार के लिए तैयार हुई थी। पूजा से पहले ही पति का एक दोस्त भी आ गया। दोस्त के आने के बाद पति ने विवाहिता की पिटाई कर उसे तमंचे के बल पर दोस्त के साथ रात गुजारने को मजबूर कर दिया। इसके बाद दोस्त और पत्नी को कमरे में बंद कर दिया और खुद रातभर घर के बाहर चौकीदारी करता रहा। सुबह दोस्त के जाने के बाद पत्नी कमरे से बाहर आ गई तो पति ने उसे धमकाया। पति ने कहा कि अगर वो इस बारे में किसी को बताएगी तो वो उसे और उसके भाई को जान से मार देगा। आरोपित ने विवाहिता के साथ तमंचे के बल पर रेप किया। बाद में पति ने किसी को भी बात बताने पर महिला और भाई को जान से मारने की धमकी दे डाली। सोमवार की सुबह किसी तरह विवाहिता घर से निकलकर मां के पास पहुंची। उन्हें पूरी घटना के बारे में जानकारी दी। इसके बाद परिवारीजन पीड़िता को लेकर थाने पहुंच गए। थाने में तहरीर देकर आरोपित पति और रेप करने वाले दोस्त के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। हालांकि पुलिस पूरे मामले को संदिग्ध मान रही है। पुलिस का कहना है कि महिला को जब मेडिकल चेकअप के लिए कहा गया तो वो उठकर चली गई। मामले की जांच चल रही है। |
बटाला (साहिल): बटाला-कादियां मार्ग पर तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आने से साइकिल सवार घायल हो गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रेम नगर कादियां निवासी रफीक पुत्र नामा अपनी साइकिल पर सवार होकर आ रहा था। जब यह बटाला-कादियां मार्ग पर कस्बा वडाला ग्रन्थियां के पास स्थित गुरुद्वारा श्री फलाही साहिब के नजदीक पहुंचा तो एक तेज रफ्तार वाहन ने इसे जोरदार टक्कर मार दी, जिसके फलस्वरूप यह घायल हो गया। यह भी पता चला है कि साइिकल सवार रफीक को वाहन चालक ने तत्काल इलाज के लिए बटाला सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया।
| बटाला : बटाला-कादियां मार्ग पर तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आने से साइकिल सवार घायल हो गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रेम नगर कादियां निवासी रफीक पुत्र नामा अपनी साइकिल पर सवार होकर आ रहा था। जब यह बटाला-कादियां मार्ग पर कस्बा वडाला ग्रन्थियां के पास स्थित गुरुद्वारा श्री फलाही साहिब के नजदीक पहुंचा तो एक तेज रफ्तार वाहन ने इसे जोरदार टक्कर मार दी, जिसके फलस्वरूप यह घायल हो गया। यह भी पता चला है कि साइिकल सवार रफीक को वाहन चालक ने तत्काल इलाज के लिए बटाला सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया। |
आश्चर्यजनक नहीं है कि बुढ़ऊ के स्वास्थ्य को इस घोर स्वास्थ्यकर कमरे में इतने वर्षों तक रहने पर भी जरा भी ठेस नहीं पहुँची थी । पहले ही कहा जा चुका है कि वह अपने कारमय कमरे में अक्सर केही बैठे रहते और हुका गुड़गुड़ाते हुए उस बुढ़ापे में भी बिना चश्मे की सहायता के या तो हिन्दी का समाचार पत्र पढ़ने में लगे रहते (जी वह बहुत कम जानते थे, यद्यपि अँफसरों के संसर्ग में उन्हें घनिष्ठ रूप से आना पड़ा था) या अपनी या अपने सगे-सम्बन्धियों की जमीन-जायदाद के हिसाब-किताब से सम्बन्ध रखनेवाले अथवा कुछ दूसरी तरह के जरूरी कागजात देखने में व्यस्त रहते। जिस कमरे में दिन-दहाड़े दिया जलाने की जरूरत पड़नी चाहिए थी, वहाँ वह तीसरे पहर भी खूब मजे में (और जैसा कि पहले कहा जा चुका है, बिना चश्मे के) लिखने-पढ़ने का काम करते रहते ।
ठाकुर साहब के पूर्व जीवन के सम्बन्ध में तरह-तरह के किस्से जनता में प्रचलित थे । इतना तो सबको निश्चित रूप से मालूम था कि पहले वह कुछ दिनों तक के किसी जिले में पेशकार रहे थे औौर फर अवध तहसीलदार के पद पर नियुक्त कर दिये गये थे। पर कहा जाता था कि इस साधारण पद पर रहकर भी उन्होंने अपनी तहसील के लोगों पर अपने कूटकर निर्मम अत्याचारों के कारण आतंक फैला रक्खा था और सव त्राहि-त्राहि चिल्लाया करते थे। इनके वंश पर सरकार बहादुर की विशेष कृपा होने के कारण इनके घोर से घोर अत्याचार की शिकायत पर कोई सुनवाई नहीं होती थी। जमींदार और ताल्लुकेदार किसानों का रच चूसते थे और ठाकुर साहब के बारे में कहा जाता था कि वह इन लोगों का रक्त चूसते थे। खून के बहुत से मामलों को वे इस तरह दबा दिया करते थे कि जानकारों को आश्चर्य हुए विना न रहता । कई बार निर्दोष व्यक्तियों के ऊपर हत्या का दोष मढ़कर, प्रमाणों का ऐसा पक्का प्रबन्ध कर दिया कि उन्हें फाँसी पर चढ़ने से ब्रह्मा भी नहीं बचा सकता था। यह भी कहा जाता था कि उन्होंने कभी तो अर्थ के लोभ से और | आश्चर्यजनक नहीं है कि बुढ़ऊ के स्वास्थ्य को इस घोर स्वास्थ्यकर कमरे में इतने वर्षों तक रहने पर भी जरा भी ठेस नहीं पहुँची थी । पहले ही कहा जा चुका है कि वह अपने कारमय कमरे में अक्सर केही बैठे रहते और हुका गुड़गुड़ाते हुए उस बुढ़ापे में भी बिना चश्मे की सहायता के या तो हिन्दी का समाचार पत्र पढ़ने में लगे रहते या अपनी या अपने सगे-सम्बन्धियों की जमीन-जायदाद के हिसाब-किताब से सम्बन्ध रखनेवाले अथवा कुछ दूसरी तरह के जरूरी कागजात देखने में व्यस्त रहते। जिस कमरे में दिन-दहाड़े दिया जलाने की जरूरत पड़नी चाहिए थी, वहाँ वह तीसरे पहर भी खूब मजे में लिखने-पढ़ने का काम करते रहते । ठाकुर साहब के पूर्व जीवन के सम्बन्ध में तरह-तरह के किस्से जनता में प्रचलित थे । इतना तो सबको निश्चित रूप से मालूम था कि पहले वह कुछ दिनों तक के किसी जिले में पेशकार रहे थे औौर फर अवध तहसीलदार के पद पर नियुक्त कर दिये गये थे। पर कहा जाता था कि इस साधारण पद पर रहकर भी उन्होंने अपनी तहसील के लोगों पर अपने कूटकर निर्मम अत्याचारों के कारण आतंक फैला रक्खा था और सव त्राहि-त्राहि चिल्लाया करते थे। इनके वंश पर सरकार बहादुर की विशेष कृपा होने के कारण इनके घोर से घोर अत्याचार की शिकायत पर कोई सुनवाई नहीं होती थी। जमींदार और ताल्लुकेदार किसानों का रच चूसते थे और ठाकुर साहब के बारे में कहा जाता था कि वह इन लोगों का रक्त चूसते थे। खून के बहुत से मामलों को वे इस तरह दबा दिया करते थे कि जानकारों को आश्चर्य हुए विना न रहता । कई बार निर्दोष व्यक्तियों के ऊपर हत्या का दोष मढ़कर, प्रमाणों का ऐसा पक्का प्रबन्ध कर दिया कि उन्हें फाँसी पर चढ़ने से ब्रह्मा भी नहीं बचा सकता था। यह भी कहा जाता था कि उन्होंने कभी तो अर्थ के लोभ से और |
रायगढ़। जो श्रीराम पूरे विश्व को ज्ञान का मार्ग बताते हैं। उन्हें छत्तीसगढ़ में रहने वाली वनवासी माता शबरी ने ज्ञान का मार्ग दिखाया। शबरी ने ही उन्हें कहा कि पंपा सरोवर जाएं और सुग्रीव से मिलें। रामकथा के प्रस्तोता तथा प्रख्यात कवि श्री कुमार विश्वास ने यह बात कही। श्री विश्वास राष्ट्रीय रामायण महोत्सव में अपनी प्रस्तुति देने रायगढ़ पहुंचे हुए हैं।
विश्वास ने कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए सौभाग्य है कि यहां श्रीराम के चरणों की धूलि पड़ी। विश्वास ने कहा कि भगवान श्री राम विश्व मंगल, लोक मंगल और समरस शासन की सबसे बड़ी अवधारणा हैं। 1932 में महात्मा गांधी ने नव जीवन अखबार में रामराज्य और भारत पर अपने विचार लिखे थे। मैं बरसों से छत्तीसगढ़ आ रहा हूं। छत्तीसगढ़ में श्री राम के वनगमनपथ के विकास के संबंध में राष्ट्रीय स्तर पर बात हो रही है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तथा संस्कृति मंत्री श्री अमरजीत भगत से इस संबंध में चर्चा होती है। मुख्यमंत्री जी को रामवनपथगमन के विकास और राष्ट्रीय स्तर पर इस सुंदर आयोजन के लिए मैं धन्यवाद देता हूँ। रामकथा को लेकर, उनके पुण्यस्थलों को सहेजने को लेकर बहुत अच्छा काम हो रहा है। श्री विश्वास ने कहा कि वह उन सभी जगहों पर जाना चाहेंगे, जहां से श्रीराम के चरण पड़े। मैं उस मार्ग का विचरण करना चाहता हूं जहां से राघवेंद्र सरकार गुजरे तथा उनकी चरण धूलि लेना चाहता हूं।
विश्वास ने कहा कि आज अरण्यकांड पर मेरी प्रस्तुति होगी, जब श्री राम छत्तीसगढ़ में वनवास में आए होंगे। उस समय यहां सघन वन रहा होगा। उस समय जनजातियों से उनके आत्मीय संवाद हुए। श्रीराम ने हमें बताया कि यहां के वनवासी कितने सरल हैं। कितने आत्मीय हैं और हमेशा सत्य के साथ खड़े रहते हैं। उन्होंने कहा कि मेरी विशेष इच्छा माता कौशल्या एवं माता शबरी पर केंद्रित व्याख्यान करने की है। माता कौशल्या जिन्होंने अपने पुत्र को लोक कल्याण के लिए वन भेज दिया। इसके लिए बहुत बड़ा दिल चाहिए। इन सब की कथा कहना चाहता हूं। रायगढ़ संस्कारधानी में सुंदर आयोजन हो रहा है। बहुत सुंदर कार्य राम कथा को लेकर भी हुआ है।
| रायगढ़। जो श्रीराम पूरे विश्व को ज्ञान का मार्ग बताते हैं। उन्हें छत्तीसगढ़ में रहने वाली वनवासी माता शबरी ने ज्ञान का मार्ग दिखाया। शबरी ने ही उन्हें कहा कि पंपा सरोवर जाएं और सुग्रीव से मिलें। रामकथा के प्रस्तोता तथा प्रख्यात कवि श्री कुमार विश्वास ने यह बात कही। श्री विश्वास राष्ट्रीय रामायण महोत्सव में अपनी प्रस्तुति देने रायगढ़ पहुंचे हुए हैं। विश्वास ने कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए सौभाग्य है कि यहां श्रीराम के चरणों की धूलि पड़ी। विश्वास ने कहा कि भगवान श्री राम विश्व मंगल, लोक मंगल और समरस शासन की सबसे बड़ी अवधारणा हैं। एक हज़ार नौ सौ बत्तीस में महात्मा गांधी ने नव जीवन अखबार में रामराज्य और भारत पर अपने विचार लिखे थे। मैं बरसों से छत्तीसगढ़ आ रहा हूं। छत्तीसगढ़ में श्री राम के वनगमनपथ के विकास के संबंध में राष्ट्रीय स्तर पर बात हो रही है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तथा संस्कृति मंत्री श्री अमरजीत भगत से इस संबंध में चर्चा होती है। मुख्यमंत्री जी को रामवनपथगमन के विकास और राष्ट्रीय स्तर पर इस सुंदर आयोजन के लिए मैं धन्यवाद देता हूँ। रामकथा को लेकर, उनके पुण्यस्थलों को सहेजने को लेकर बहुत अच्छा काम हो रहा है। श्री विश्वास ने कहा कि वह उन सभी जगहों पर जाना चाहेंगे, जहां से श्रीराम के चरण पड़े। मैं उस मार्ग का विचरण करना चाहता हूं जहां से राघवेंद्र सरकार गुजरे तथा उनकी चरण धूलि लेना चाहता हूं। विश्वास ने कहा कि आज अरण्यकांड पर मेरी प्रस्तुति होगी, जब श्री राम छत्तीसगढ़ में वनवास में आए होंगे। उस समय यहां सघन वन रहा होगा। उस समय जनजातियों से उनके आत्मीय संवाद हुए। श्रीराम ने हमें बताया कि यहां के वनवासी कितने सरल हैं। कितने आत्मीय हैं और हमेशा सत्य के साथ खड़े रहते हैं। उन्होंने कहा कि मेरी विशेष इच्छा माता कौशल्या एवं माता शबरी पर केंद्रित व्याख्यान करने की है। माता कौशल्या जिन्होंने अपने पुत्र को लोक कल्याण के लिए वन भेज दिया। इसके लिए बहुत बड़ा दिल चाहिए। इन सब की कथा कहना चाहता हूं। रायगढ़ संस्कारधानी में सुंदर आयोजन हो रहा है। बहुत सुंदर कार्य राम कथा को लेकर भी हुआ है। |
इंटरकॉन्टिनेंटल कप में रविवार यानी 10 जून को भारतीय फुटबॉल टीम ने केन्या को फानइल मैच में 2-0 से हरा दिया और खिताब अपने नाम कर लिया। Sunil Chhetri की कप्तानी वाली भारतीय फुटबॉल टीम ने फाइनल मे केन्या को करारी श्किस्त देकर खिताब अपने नाम कर लिया।
यह दौरा भारतीय टीम के लिए काफी अच्छा रहा है। इस दौरे पर भारतीय फुटबॉल टीम के कप्तान Sunil Chhetri ने खुद नेतृत्व किया था। हर तरफ से सुनील छेत्री की कप्तानी वाली टीम को बधाई संदेश मिल रहे हैं।
भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली ने भी Sunil Chhetri की और पूरी टीम की सराहना की है। विराट ने पूरी टीम के प्रयासों की बहुत सराहना की है। छेत्री ने विराट कोहली की इस सराहना पर बहुत मजेदार जवाब दिया है जिसे दोनों खिलाडिय़ों के रिश्तों को झलकाता है।
छेत्री ने कहा फैन्स से कहा था कि स्टेडियम में ज्यादा से ज्यादा लोग आएं। छेत्री के इस ट्वीट पर सबसे पहले कोहली ने देखा और अपने आपको भारतीय फुटबॉल टीम का फैन बताया और लोगों से टीम को समर्थन करने का अनुरोध किया।
भारतीय फुटबॉल टीम के पहले दिन पर Sunil Chhetri और पूरी टीम को विराट कोहली ने दी थी बधाई। इसके साथ ही विराट ने पूरी टीम के खिलाडिय़ों के प्रयासों की भी सराहना की थी। https://twitter. com/imVkohli/status/1006099910117285888 विराट ने कहा था कि भारतीय फुटबॉल टीम के लिया यह जीत एक महत्वपूर्ण बढ़ावा साबित होगी।
कोहली के इस ट्वीट पर Sunil Chhetri ने भी प्रतिक्रिया देते हुए क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली के लिए एक संदेश पोस्ट किया। इसी बीच छेत्री ने कल रात को पूरे देश को पूरी टीम को समर्थन देने के लिए धन्यवाद किया।
| इंटरकॉन्टिनेंटल कप में रविवार यानी दस जून को भारतीय फुटबॉल टीम ने केन्या को फानइल मैच में दो-शून्य से हरा दिया और खिताब अपने नाम कर लिया। Sunil Chhetri की कप्तानी वाली भारतीय फुटबॉल टीम ने फाइनल मे केन्या को करारी श्किस्त देकर खिताब अपने नाम कर लिया। यह दौरा भारतीय टीम के लिए काफी अच्छा रहा है। इस दौरे पर भारतीय फुटबॉल टीम के कप्तान Sunil Chhetri ने खुद नेतृत्व किया था। हर तरफ से सुनील छेत्री की कप्तानी वाली टीम को बधाई संदेश मिल रहे हैं। भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली ने भी Sunil Chhetri की और पूरी टीम की सराहना की है। विराट ने पूरी टीम के प्रयासों की बहुत सराहना की है। छेत्री ने विराट कोहली की इस सराहना पर बहुत मजेदार जवाब दिया है जिसे दोनों खिलाडिय़ों के रिश्तों को झलकाता है। छेत्री ने कहा फैन्स से कहा था कि स्टेडियम में ज्यादा से ज्यादा लोग आएं। छेत्री के इस ट्वीट पर सबसे पहले कोहली ने देखा और अपने आपको भारतीय फुटबॉल टीम का फैन बताया और लोगों से टीम को समर्थन करने का अनुरोध किया। भारतीय फुटबॉल टीम के पहले दिन पर Sunil Chhetri और पूरी टीम को विराट कोहली ने दी थी बधाई। इसके साथ ही विराट ने पूरी टीम के खिलाडिय़ों के प्रयासों की भी सराहना की थी। https://twitter. com/imVkohli/status/ एक शून्य शून्य छः शून्य नौ नौ नौ एक शून्य एक एक सात दो आठ पाँच आठ आठ आठ विराट ने कहा था कि भारतीय फुटबॉल टीम के लिया यह जीत एक महत्वपूर्ण बढ़ावा साबित होगी। कोहली के इस ट्वीट पर Sunil Chhetri ने भी प्रतिक्रिया देते हुए क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली के लिए एक संदेश पोस्ट किया। इसी बीच छेत्री ने कल रात को पूरे देश को पूरी टीम को समर्थन देने के लिए धन्यवाद किया। |
मुंबई, 29 जून (हि. स. )। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने सभी विधायकों को बुधवार शाम तक मुंबई पहुंचने का आदेश (Order to reach Mumbai) दिया है। महाराष्ट्र विधानसभा के गुरुवार को होने वाले विशेष अधिवेशन (Special session) के लिए भाजपा नेता बुधवार दोपहर देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) के आवास पर बैठक करने वाले हैं। इस बैठक में देवेंद्र फडणवीस, चंद्रकांत पाटिल, सुधीर मुनगंटीवार, आशीष शेलार और गिरीश महाजन जैसे नेता मौजूद रहेंगे।
इसी बैठक में शक्ति परीक्षण के लिए पार्टी की तैयारी की समीक्षा की जाएगी। उद्धव ठाकरे सरकार अगर अल्पमत में आती है देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनने के आसार हैं।
उल्लेखनीय है कि विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को राज्यपाल से मुलाकात कर विशेष अधिवेशन बुलाने का आग्रह किया था। इसके बाद राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को विधानसभा में बहुमत साबित करने का आदेश दिया है।
| मुंबई, उनतीस जून । भारतीय जनता पार्टी ने अपने सभी विधायकों को बुधवार शाम तक मुंबई पहुंचने का आदेश दिया है। महाराष्ट्र विधानसभा के गुरुवार को होने वाले विशेष अधिवेशन के लिए भाजपा नेता बुधवार दोपहर देवेंद्र फडणवीस के आवास पर बैठक करने वाले हैं। इस बैठक में देवेंद्र फडणवीस, चंद्रकांत पाटिल, सुधीर मुनगंटीवार, आशीष शेलार और गिरीश महाजन जैसे नेता मौजूद रहेंगे। इसी बैठक में शक्ति परीक्षण के लिए पार्टी की तैयारी की समीक्षा की जाएगी। उद्धव ठाकरे सरकार अगर अल्पमत में आती है देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनने के आसार हैं। उल्लेखनीय है कि विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को राज्यपाल से मुलाकात कर विशेष अधिवेशन बुलाने का आग्रह किया था। इसके बाद राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को विधानसभा में बहुमत साबित करने का आदेश दिया है। |
मध्य प्रदेश के गुना में शादी की तैयारियों में उस वक्त हड़कंप मच गया जब ब्लास्ट की आवाजें आने लगी. . . शादी के पंडाल में चारो तरफ आग ही आग दिखने लगी. . . आखिर इस ब्लास्ट की वजह क्या थी देखिए इस रिपोर्ट में।
| मध्य प्रदेश के गुना में शादी की तैयारियों में उस वक्त हड़कंप मच गया जब ब्लास्ट की आवाजें आने लगी. . . शादी के पंडाल में चारो तरफ आग ही आग दिखने लगी. . . आखिर इस ब्लास्ट की वजह क्या थी देखिए इस रिपोर्ट में। |
Q गुरु और चेला
गुरु एक थे और था एक चेला, चले घूमने पास में था न धेला । चले चलते-चलते मिली एक नगरी, चमाचम थी सड़कें चमाचम थी डगरी ।
मिली एक ग्वालिन धरे शीश गगरी, गुरु ने कहा तेज़ ग्वालिन न भग री । बता कौन नगरी, बता कौन राजा, कि जिसके सुयश का यहाँ बजता बाजा ।
कहा बढके ग्वालिन ने महाराज पंडित, पधारे भले हो यहाँ आज पंडित । यह अंधेर नगरी है अनबूझ राजा, टके सेर भाजी, टके सेर खाजा ।
गुरु ने कहा- जान देना नहीं है, मुसीबत मुझे मोल लेना नहीं है। न जाने की अंधेर हो कौन छन में? यहाँ ठीक रहना समझता न मन में ।
गुरु ने कहा किंतु चेला न माना गुरु को विवश हो पड़ा लौट जाना। गुरुजी गए, रह गया किंतु चेला यही सोचता हूँगा मोटा अकेला
चला हाट को देखने आज चेला, तो देखा वहाँ पर अजब रेल-पेला । टके सेर हल्दी, टके सेर जीरा, टके सेर ककड़ी टके सेर खीरा ।
टके सेर मिलती थी रबड़ी मलाई, बहुत रोज़ उसने मलाई उड़ाई । सुनो और आगे का फिर हाल ताज़ा। थी अंधेर नगरी, था अनबूझ राजा ।
बरसता था पानी, चमकती थी बिजली, थी बरसात आई, दमकती थी बिजली । गरजते थे बादल, झमकती थी बिजली, थी बरसात गहरी, धमकती थी बिजली ।
गिरी राज्य की एक दीवार भारी, जहाँ राजा पहुँचे तुरत ले सवारी । झपट संतरी को डपट कर बुलाया, गिरी क्यों यह दीवार, किसने गिराया?
कहा संतरी ने महाराज साहब, न इसमें खता मेरी, ना मेरा करतब ! यह दीवार कमज़ोर पहले बनी थी, इसी से गिरी, यह न मोटी घनी थी।
ल BOO
| Q गुरु और चेला गुरु एक थे और था एक चेला, चले घूमने पास में था न धेला । चले चलते-चलते मिली एक नगरी, चमाचम थी सड़कें चमाचम थी डगरी । मिली एक ग्वालिन धरे शीश गगरी, गुरु ने कहा तेज़ ग्वालिन न भग री । बता कौन नगरी, बता कौन राजा, कि जिसके सुयश का यहाँ बजता बाजा । कहा बढके ग्वालिन ने महाराज पंडित, पधारे भले हो यहाँ आज पंडित । यह अंधेर नगरी है अनबूझ राजा, टके सेर भाजी, टके सेर खाजा । गुरु ने कहा- जान देना नहीं है, मुसीबत मुझे मोल लेना नहीं है। न जाने की अंधेर हो कौन छन में? यहाँ ठीक रहना समझता न मन में । गुरु ने कहा किंतु चेला न माना गुरु को विवश हो पड़ा लौट जाना। गुरुजी गए, रह गया किंतु चेला यही सोचता हूँगा मोटा अकेला चला हाट को देखने आज चेला, तो देखा वहाँ पर अजब रेल-पेला । टके सेर हल्दी, टके सेर जीरा, टके सेर ककड़ी टके सेर खीरा । टके सेर मिलती थी रबड़ी मलाई, बहुत रोज़ उसने मलाई उड़ाई । सुनो और आगे का फिर हाल ताज़ा। थी अंधेर नगरी, था अनबूझ राजा । बरसता था पानी, चमकती थी बिजली, थी बरसात आई, दमकती थी बिजली । गरजते थे बादल, झमकती थी बिजली, थी बरसात गहरी, धमकती थी बिजली । गिरी राज्य की एक दीवार भारी, जहाँ राजा पहुँचे तुरत ले सवारी । झपट संतरी को डपट कर बुलाया, गिरी क्यों यह दीवार, किसने गिराया? कहा संतरी ने महाराज साहब, न इसमें खता मेरी, ना मेरा करतब ! यह दीवार कमज़ोर पहले बनी थी, इसी से गिरी, यह न मोटी घनी थी। ल BOO |
Don't Miss!
मुंबई। बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा आजकल फिल्म निर्माण में गहरी रूचि दिखा रही हैं। अनुष्का इन दिनों अपनी पहली फिल्म 'एनएच 10' का निर्माण कर रही हैं, जिसमें वह खुद ही मुख्य भूमिका में भी हैं। लेकिन निर्माता बनी अनुष्का का दिल सिर्फ इतने से नहीं माना और उन्होंने अपनी दूसरी प्रोडक्शन फिल्म का भी एलान कर दिया है।
अनुष्का के इस नए फिल्म का निर्माण नवदीप सिंह करेंगे, जो एनएच 10 का भी निर्देशन कर रहे हैं। वहीं, चर्चा है कि एचएच 10 के स्क्रिप्ट राइटर सुदीप शर्मा ही इस फिल्म की स्क्रिप्टिंग करेंगे। हालांकि फिल्म के बारे में अभी ज्यादा कुछ जानकारी नहीं दी गई है। लेकिन उम्मीद है कि इस फिल्म में अनुष्का खुद ही अभिनय करेंगी।
आपको बता दें, अनुष्का शर्मा पहली अभिनेत्री नहीं हैं, जिन्होंने निर्माण के क्षेत्र में कदम रखा है। इससे पहले अभिनेत्री दिया मिर्जा, आमिर खान, शाहरूख खान, अक्षय कुमार, जॉन अब्राहम, सैफ अली खान आदि भी बतौर निर्माता कई फिल्मों को बड़े पर्दे ला चुके हैं। इनमें से कई ने अपने पांव जमा लिए हैं, जबकि कई को निर्माण के क्षेत्र में मुंह की खानी पड़ी।
बहरहाल, अनुष्का शर्मा को उनके इस नए कदम के लिए शुभकामनाएं, ऑल दि बेस्ट अनुष्का। अनुष्का शर्मा जल्द ही 'पीके', 'दिल धड़कने दो' और 'बॉम्बे वेलवेट' जैसी फिल्मो में नज़र आएंगी।
| Don't Miss! मुंबई। बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा आजकल फिल्म निर्माण में गहरी रूचि दिखा रही हैं। अनुष्का इन दिनों अपनी पहली फिल्म 'एनएच दस' का निर्माण कर रही हैं, जिसमें वह खुद ही मुख्य भूमिका में भी हैं। लेकिन निर्माता बनी अनुष्का का दिल सिर्फ इतने से नहीं माना और उन्होंने अपनी दूसरी प्रोडक्शन फिल्म का भी एलान कर दिया है। अनुष्का के इस नए फिल्म का निर्माण नवदीप सिंह करेंगे, जो एनएच दस का भी निर्देशन कर रहे हैं। वहीं, चर्चा है कि एचएच दस के स्क्रिप्ट राइटर सुदीप शर्मा ही इस फिल्म की स्क्रिप्टिंग करेंगे। हालांकि फिल्म के बारे में अभी ज्यादा कुछ जानकारी नहीं दी गई है। लेकिन उम्मीद है कि इस फिल्म में अनुष्का खुद ही अभिनय करेंगी। आपको बता दें, अनुष्का शर्मा पहली अभिनेत्री नहीं हैं, जिन्होंने निर्माण के क्षेत्र में कदम रखा है। इससे पहले अभिनेत्री दिया मिर्जा, आमिर खान, शाहरूख खान, अक्षय कुमार, जॉन अब्राहम, सैफ अली खान आदि भी बतौर निर्माता कई फिल्मों को बड़े पर्दे ला चुके हैं। इनमें से कई ने अपने पांव जमा लिए हैं, जबकि कई को निर्माण के क्षेत्र में मुंह की खानी पड़ी। बहरहाल, अनुष्का शर्मा को उनके इस नए कदम के लिए शुभकामनाएं, ऑल दि बेस्ट अनुष्का। अनुष्का शर्मा जल्द ही 'पीके', 'दिल धड़कने दो' और 'बॉम्बे वेलवेट' जैसी फिल्मो में नज़र आएंगी। |
नई दिल्लीः 25 जनवरी को रिलीज़ होने के बाद से शाहरुख खान(Shahrukh Khan) की पठान (Pathan) ने बॉक्स ऑफिस के कई रिकॉर्ड तोड़ दिए, अभिनेता कंगना रनौत फिल्म के बारे में ट्वीट कर रहे हैं. पठान ने 'दुश्मन' पाकिस्तान को अच्छी रोशनी में चित्रित करने के बाद, और फिल्म की सफलता के बाद 'नफरत पर जीत' के बारे में बोलने वालों को फटकार लगाते हुए, कंगना ने बॉलीवुड को चेतावनी जारी की, फिल्म उद्योग के लोगों को ट्वीट किया कि 'अपनी सफलता का आनंद लें' और 'दूर रहें' राजनीति से'. हाल ही में एक्ट्रेस आलिया भट्ट और फिल्ममेकर करण जौहर ने इंस्टाग्राम पर पठान की तारीफ की थी.
आलिया ने कहा है कि 'प्यार हमेशा जीतता है', करण ने 'प्यार हमेशा नफरत को जीतता है' लिखा है, क्योंकि उन्होंने पठान के पहले दिन दुनिया भर में ₹106 करोड़ की कमाई पर प्रतिक्रिया दी थी.
Bollywood walon yeh narrative banane ki koshish mat karna ki iss desh mein tum Hindu hate se suffer kar rahe ho, agar maine phir se yeh word suna 'triumph over hate' toh tum logon ki wahi class lagegi jo kal lagi thi, enjoy your success and do good work, stay away from politics.
As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future.
| नई दिल्लीः पच्चीस जनवरी को रिलीज़ होने के बाद से शाहरुख खान की पठान ने बॉक्स ऑफिस के कई रिकॉर्ड तोड़ दिए, अभिनेता कंगना रनौत फिल्म के बारे में ट्वीट कर रहे हैं. पठान ने 'दुश्मन' पाकिस्तान को अच्छी रोशनी में चित्रित करने के बाद, और फिल्म की सफलता के बाद 'नफरत पर जीत' के बारे में बोलने वालों को फटकार लगाते हुए, कंगना ने बॉलीवुड को चेतावनी जारी की, फिल्म उद्योग के लोगों को ट्वीट किया कि 'अपनी सफलता का आनंद लें' और 'दूर रहें' राजनीति से'. हाल ही में एक्ट्रेस आलिया भट्ट और फिल्ममेकर करण जौहर ने इंस्टाग्राम पर पठान की तारीफ की थी. आलिया ने कहा है कि 'प्यार हमेशा जीतता है', करण ने 'प्यार हमेशा नफरत को जीतता है' लिखा है, क्योंकि उन्होंने पठान के पहले दिन दुनिया भर में एक सौ छः रुपया करोड़ की कमाई पर प्रतिक्रिया दी थी. Bollywood walon yeh narrative banane ki koshish mat karna ki iss desh mein tum Hindu hate se suffer kar rahe ho, agar maine phir se yeh word suna 'triumph over hate' toh tum logon ki wahi class lagegi jo kal lagi thi, enjoy your success and do good work, stay away from politics. As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future. |
देश में बलात्कार पीड़ित महिलाओं और नाबालिग बच्चियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए शीघ्र न्याय दिलाने की दिशा में नरेंद्र मोदी सरकार की कैबिनेट ने अहम फैसला लिया है. केंद्रीय कैबिनेट ने 1023 फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की योजना को अपनी मंजूरी दे दी है. इस योजना के तहत केंद्र सरकार बड़ी संख्या में फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करेगी.
केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा है कि नाबालिग बच्चियों और महिलाओं को रेप के मामलों में न्याय दिलाने के लिए 1,023 फास्ट ट्रैक कोर्ट चलाए जाएंगे. इस योजना में कुल 1,586 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिसे 31 मार्च 2023 तक जारी रखा जाएगा. अगले दो वर्षों में तेज गति से फास्ट ट्रैक कोर्ट का निर्माण किया जाएगा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बुधवार की अहम बैठक में केंद्रीय कैबिनेट ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं. केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने यह भी कहा है कि नाबालिग बच्चियों से होने वाले यौन अपराधों में जल्द न्याय दिलाने के लिए इन फास्ट ट्रैक कोर्ट्स में से, 389 पॉक्सो ( Protection of Children from Sexual Offences act) कोर्ट हैं.
Explainer: क्या है POCSO एक्ट का सेक्शन-8, बॉम्बे HC के फैसले से उठे सवाल?
केंद्र सरकार ने साफ किया है कि इन फास्ट ट्रैक कोर्ट्स पर होने वाले खर्चों में 971 करोड़ रुपये के करीब केंद्र सरकार वहन करेगी, वहीं 601. 16 करोड़ रुपये राज्य सरकारों को वहन करना होगा. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस योजना को जब 2019 में लॉन्च किया गया था, तब सरकार की यही मानसिकता थी कि यौन अपराधों की शिकार महिलाओं और बच्चियों को जल्द से जल्द न्याय मिल सके. उसके लिए कई अदालतें शुरू की गई थीं.
2018 में क्रिमिनल लॉ एमेंडमेंट एक्ट में संशोधन कर यौन अपराधों के जघन्य मामलों में दोषियों के मृत्युदंड तक की व्यवस्था की गई थी. फास्ट ट्रैक की यह योजना मार्च 2023 तक जारी रहेगी. केंद्र सरकार की इस पहल से पीड़िताओं को जल्द से जल्द इंसाफ मिल सकेगा.
वहीं स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए समग्र शिक्षा योजना पर सरकार विशेष बल देगी. समग्र शिक्षा अभियान पर लगभग 3 लाख करोड़ रुपये 2026 तक खर्च किए जाएंगी. तीन साल के बच्चों को भी खेल से जोड़ा जाएगा. सर्व शिक्षा अभियान को भी इसमें जोड़ा गया है. इस योजना से करीब 15. 6 करोड़ छात्रों को भी फायदा पहुंचेगा. पहली बार प्ले स्कूल की भी परिकल्पना इस योजना में की गई है. बच्चों की सुरक्षा को इसमें शामिल किया गया है.
समग्र शिक्षा अभियान योजना में बच्चों को ट्रांसपोर्टेशन के लिए भी इंसेटिव दिया जाएगा. स्कूल में खेल को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त ग्रांट दिया जाएगा. बैगलेस स्कूल पर भी योजना के तहत काम किया जाएगा. कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय को 12वीं तक किया जाएगा. रानी लक्ष्मीबाई आत्म रक्षा प्रशिक्षण को 3 हजार से 5 हजार किया जाएगा.
पढ़ाई और कमाई स्किल और स्कूल को बढ़ावा दिया जाएगा. 6 से 12वीं तक के बच्चों को एक्सपोजर दिया जाएगा. साथ ही गांवों तक इंटरनेट की योजना पहुंचाई जाएगी. गांव में भी इंटरनेट का फायदा पहुंचेगा, जिससे स्मार्ट क्लास रूम और डिजिटिल बोर्ड को बढ़ावा मिले.
| देश में बलात्कार पीड़ित महिलाओं और नाबालिग बच्चियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए शीघ्र न्याय दिलाने की दिशा में नरेंद्र मोदी सरकार की कैबिनेट ने अहम फैसला लिया है. केंद्रीय कैबिनेट ने एक हज़ार तेईस फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की योजना को अपनी मंजूरी दे दी है. इस योजना के तहत केंद्र सरकार बड़ी संख्या में फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करेगी. केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा है कि नाबालिग बच्चियों और महिलाओं को रेप के मामलों में न्याय दिलाने के लिए एक,तेईस फास्ट ट्रैक कोर्ट चलाए जाएंगे. इस योजना में कुल एक,पाँच सौ छियासी करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिसे इकतीस मार्च दो हज़ार तेईस तक जारी रखा जाएगा. अगले दो वर्षों में तेज गति से फास्ट ट्रैक कोर्ट का निर्माण किया जाएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बुधवार की अहम बैठक में केंद्रीय कैबिनेट ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं. केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने यह भी कहा है कि नाबालिग बच्चियों से होने वाले यौन अपराधों में जल्द न्याय दिलाने के लिए इन फास्ट ट्रैक कोर्ट्स में से, तीन सौ नवासी पॉक्सो कोर्ट हैं. Explainer: क्या है POCSO एक्ट का सेक्शन-आठ, बॉम्बे HC के फैसले से उठे सवाल? केंद्र सरकार ने साफ किया है कि इन फास्ट ट्रैक कोर्ट्स पर होने वाले खर्चों में नौ सौ इकहत्तर करोड़ रुपये के करीब केंद्र सरकार वहन करेगी, वहीं छः सौ एक. सोलह करोड़ रुपये राज्य सरकारों को वहन करना होगा. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस योजना को जब दो हज़ार उन्नीस में लॉन्च किया गया था, तब सरकार की यही मानसिकता थी कि यौन अपराधों की शिकार महिलाओं और बच्चियों को जल्द से जल्द न्याय मिल सके. उसके लिए कई अदालतें शुरू की गई थीं. दो हज़ार अट्ठारह में क्रिमिनल लॉ एमेंडमेंट एक्ट में संशोधन कर यौन अपराधों के जघन्य मामलों में दोषियों के मृत्युदंड तक की व्यवस्था की गई थी. फास्ट ट्रैक की यह योजना मार्च दो हज़ार तेईस तक जारी रहेगी. केंद्र सरकार की इस पहल से पीड़िताओं को जल्द से जल्द इंसाफ मिल सकेगा. वहीं स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए समग्र शिक्षा योजना पर सरकार विशेष बल देगी. समग्र शिक्षा अभियान पर लगभग तीन लाख करोड़ दो हज़ार छब्बीस रुपया तक खर्च किए जाएंगी. तीन साल के बच्चों को भी खेल से जोड़ा जाएगा. सर्व शिक्षा अभियान को भी इसमें जोड़ा गया है. इस योजना से करीब पंद्रह. छः करोड़ छात्रों को भी फायदा पहुंचेगा. पहली बार प्ले स्कूल की भी परिकल्पना इस योजना में की गई है. बच्चों की सुरक्षा को इसमें शामिल किया गया है. समग्र शिक्षा अभियान योजना में बच्चों को ट्रांसपोर्टेशन के लिए भी इंसेटिव दिया जाएगा. स्कूल में खेल को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त ग्रांट दिया जाएगा. बैगलेस स्कूल पर भी योजना के तहत काम किया जाएगा. कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय को बारहवीं तक किया जाएगा. रानी लक्ष्मीबाई आत्म रक्षा प्रशिक्षण को तीन हजार से पाँच हजार किया जाएगा. पढ़ाई और कमाई स्किल और स्कूल को बढ़ावा दिया जाएगा. छः से बारहवीं तक के बच्चों को एक्सपोजर दिया जाएगा. साथ ही गांवों तक इंटरनेट की योजना पहुंचाई जाएगी. गांव में भी इंटरनेट का फायदा पहुंचेगा, जिससे स्मार्ट क्लास रूम और डिजिटिल बोर्ड को बढ़ावा मिले. |
नई दिल्ली। बुधवार रात दिल्ली और उत्तराखंड समेत उत्तर भारत के कई इलाकों में भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5. 5 मापी गई। भूकंप 8. 49 मिनट पर आया।
भूकंप का केंद्र उत्तराखंड का रुद्रप्रयाग था। केंद्र जमीन के अंदर 30 किलोमीटर की गहराई में था। राज्य में पिछले 24 घंटों के दौरान दूसरी बार भूकंप आया है।
मंगलवार को राज्य में 3. 3 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। वहीं हरियाणा और उत्तर प्रदेश के विभिन्ना इलाकों से भी भूकंप के झटके महसूस किये गए।
अभी तक किसी प्रकार के जानमाल के नुकसान की कोई खबर नहीं है। भूकंप के झटके महसूस होते ही लोग घरों से बाहर निकल आए। इससे लोगों में अफरा-तफरी की स्थिति रही।
भूकंप से कई घरों में दरारें आ गई। भूकंप का झटका दूसरी मंजिले से ऊपर रहने वालों को सबसे ज्यादा महसूस किया गया। कुमाऊं में भी भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए।
दिल्ली भी हिली : भूकंप के झटके से बुधवार शाम दिल्ली भी हिल गई। लोगों ने झटके महसूस किए। भूकंप के झटके महसूस होते ही ऊंची-ऊंची इमारतों में रहने वाले लोग बाहर पार्क में पहुंच गए।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक भूकंप का केंद्र रुद्रप्रयाग में था और तीव्रता रिक्टर पैमाने पर लगभग 5. 5 रही। अभी तक किसी तरह के नुकसान की जानकारी नहीं मिली है लेकिन सभी जिलाधिकारियों का एलर्ट कर दिया गया है। आपदा प्रबंधन टीमों को भी एलर्ट मोड पर रखा गया है।
| नई दिल्ली। बुधवार रात दिल्ली और उत्तराखंड समेत उत्तर भारत के कई इलाकों में भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर पाँच. पाँच मापी गई। भूकंप आठ. उनचास मिनट पर आया। भूकंप का केंद्र उत्तराखंड का रुद्रप्रयाग था। केंद्र जमीन के अंदर तीस किलोग्राममीटर की गहराई में था। राज्य में पिछले चौबीस घंटाटों के दौरान दूसरी बार भूकंप आया है। मंगलवार को राज्य में तीन. तीन तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। वहीं हरियाणा और उत्तर प्रदेश के विभिन्ना इलाकों से भी भूकंप के झटके महसूस किये गए। अभी तक किसी प्रकार के जानमाल के नुकसान की कोई खबर नहीं है। भूकंप के झटके महसूस होते ही लोग घरों से बाहर निकल आए। इससे लोगों में अफरा-तफरी की स्थिति रही। भूकंप से कई घरों में दरारें आ गई। भूकंप का झटका दूसरी मंजिले से ऊपर रहने वालों को सबसे ज्यादा महसूस किया गया। कुमाऊं में भी भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। दिल्ली भी हिली : भूकंप के झटके से बुधवार शाम दिल्ली भी हिल गई। लोगों ने झटके महसूस किए। भूकंप के झटके महसूस होते ही ऊंची-ऊंची इमारतों में रहने वाले लोग बाहर पार्क में पहुंच गए। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक भूकंप का केंद्र रुद्रप्रयाग में था और तीव्रता रिक्टर पैमाने पर लगभग पाँच. पाँच रही। अभी तक किसी तरह के नुकसान की जानकारी नहीं मिली है लेकिन सभी जिलाधिकारियों का एलर्ट कर दिया गया है। आपदा प्रबंधन टीमों को भी एलर्ट मोड पर रखा गया है। |
Vaibhavi Upadhyaya Fiance (Photo Credit: Social Media)
New Delhi:
टीवी एक्ट्रेस वैभवी उपाध्याय (Vaibhavi Upadhyaya) की एक्सीडेंट के कारण निधन ने पूरी टेलिविजन इंडस्ट्री को झकझोर कर रख दिया. उनकी मौत के कुछ दिनों बाद अब वैभवी के मंगेतर जय गांधी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है. उन्होंने इंस्टाग्राम पर दिवंगत एक्ट्रेस के साथ अपनी एक थ्रोबैक फोटो पोस्ट की और पोस्ट में उन्होंने कैप्शन लिखा, "जब तक हम दोबारा नहीं मिलते. आपकी वो खास यादें हमेशा आपके चेहरे पर मुस्कान लाएंगी, अगर मैं आपको थोड़ी देर के लिए वापस पा सकता, तो फिर हम फिर से बैठ कर बात कर सकते थे जैसे हम किया करते थे. आप हमेशा बहुत ज्यादा मायने रखते थे और हमेशा करेंगे भी. यह फैक्ट कि अब आप यहां नहीं हैं, मुझे हमेशा दर्द देगा, लेकिन आप हमेशा मेरे दिल में हैं. " उन्होंने इन शब्दों के साथ हस्ताक्षर किए, "जब तक हम फिर से नहीं मिलते . . . RIP माय लव. "
इससे पहले जय गांधी ने अपनी दिवंगत मंगेतर के साथ यह थ्रोबैक तस्वीर शेयर की थी और उन्होंने इसके कैप्शन में लिखा था, "मैं आपको हर दिन के हर मिनट याद करता हूं. आप वास्तव में कभी नहीं जाएंगे, मैं आपको हमेशा के लिए अपने दिल में सुरक्षित रखूंगा. बहुत जल्दी चला गया. " RIP मेरी गुंडी, मैं तुमसे प्यार करता हूं. "
आपको बता दें कि, वैभवी उपाध्याय और जय गांधी ने कथित तौर पर इस साल वेलेंटाइन डे पर सगाई की थी और कथित तौर पर वह साल के अंत तक शादी करने के लिए तैयार थे.
जिनको नहीं पता उन्हें बता दें कि, वैभवी उपाध्याय का पिछले हफ्ते एक कार एक्सीडेंट में निधन हो गया था. वह कई टीवी शोज का हिस्सा रह चुकी हैं और उन्होंने 'साराभाई vs साराभाई' (Sarabhai Vs Sarabhai) में भी काम किया है. वैभवी उपाध्याय ने दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) के साथ 2020 में फिल्म 'छपाक' (Chapaak) में भी काम किया था.
| Vaibhavi Upadhyaya Fiance New Delhi: टीवी एक्ट्रेस वैभवी उपाध्याय की एक्सीडेंट के कारण निधन ने पूरी टेलिविजन इंडस्ट्री को झकझोर कर रख दिया. उनकी मौत के कुछ दिनों बाद अब वैभवी के मंगेतर जय गांधी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है. उन्होंने इंस्टाग्राम पर दिवंगत एक्ट्रेस के साथ अपनी एक थ्रोबैक फोटो पोस्ट की और पोस्ट में उन्होंने कैप्शन लिखा, "जब तक हम दोबारा नहीं मिलते. आपकी वो खास यादें हमेशा आपके चेहरे पर मुस्कान लाएंगी, अगर मैं आपको थोड़ी देर के लिए वापस पा सकता, तो फिर हम फिर से बैठ कर बात कर सकते थे जैसे हम किया करते थे. आप हमेशा बहुत ज्यादा मायने रखते थे और हमेशा करेंगे भी. यह फैक्ट कि अब आप यहां नहीं हैं, मुझे हमेशा दर्द देगा, लेकिन आप हमेशा मेरे दिल में हैं. " उन्होंने इन शब्दों के साथ हस्ताक्षर किए, "जब तक हम फिर से नहीं मिलते . . . RIP माय लव. " इससे पहले जय गांधी ने अपनी दिवंगत मंगेतर के साथ यह थ्रोबैक तस्वीर शेयर की थी और उन्होंने इसके कैप्शन में लिखा था, "मैं आपको हर दिन के हर मिनट याद करता हूं. आप वास्तव में कभी नहीं जाएंगे, मैं आपको हमेशा के लिए अपने दिल में सुरक्षित रखूंगा. बहुत जल्दी चला गया. " RIP मेरी गुंडी, मैं तुमसे प्यार करता हूं. " आपको बता दें कि, वैभवी उपाध्याय और जय गांधी ने कथित तौर पर इस साल वेलेंटाइन डे पर सगाई की थी और कथित तौर पर वह साल के अंत तक शादी करने के लिए तैयार थे. जिनको नहीं पता उन्हें बता दें कि, वैभवी उपाध्याय का पिछले हफ्ते एक कार एक्सीडेंट में निधन हो गया था. वह कई टीवी शोज का हिस्सा रह चुकी हैं और उन्होंने 'साराभाई vs साराभाई' में भी काम किया है. वैभवी उपाध्याय ने दीपिका पादुकोण के साथ दो हज़ार बीस में फिल्म 'छपाक' में भी काम किया था. |
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली-एनसीआर के कई हिस्सों में मंगलवार को हल्की बारिश हुई।
नई दिल्ली, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली-एनसीआर के कई हिस्सों में मंगलवार को हल्की बारिश हुई। आसमान में बादल अभी भी छाए हुए हैं। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में यूपी, एमपी, छत्तीसगढ़ और गुजरात समेत कई राज्यों के लिए बारिश का अलर्ट जारी किया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 27 जुलाई से उत्तर भारतीय राज्यों में भारी बारिश की भविष्यवाणी की है।
इसके साथ ही मौसम विभाग ने ओडिशा, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई है।
मौसम विभाग के अनुसार राजस्थान के पूर्वी भागों में पिछले दिनों कुछ स्थानों पर भारी बारिश हुई है। शहर में भारी बारिश और भीषण जलजमाव के बीच जोधपुर जिला कलेक्टर ने स्कूलों में छुट्टी की घोषणा की है। चित्तौड़गढ़, जयपुर, अजमेर, सवाई माधोपुर, राजसमंद, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, कोटा, सिरोही, जोधपुर, पाली, नागौर और जालोर जिलों के कई हिस्सों में भारी बारिश हुई है। मौसम विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि फिलहाल पूर्वी राजस्थान में बारिश होने की संभावना है। अगले 48 घंटों के दौरान अजमेर, जोधपुर और उदयपुर संभाग के जिलों में बारिश हो सकती है।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की बात करें तो शहर में मंगलवार को आमतौर पर दिन में हल्की बारिश या बूंदा बांदी के साथ आसमान में बादल छाए रहने की भविष्यवाणी की गई। बुधवार को भी ऐसा ही मौसम होने का अनुमान है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार शहर में सोमवार सुबह 8:30 बजे से मंगलवार सुबह 8:30 बजे तक 2 मिमी बारिश दर्ज की गई। सुबह साढ़े आठ बजे सापेक्षिक आर्द्रता 84 फीसदी रही है।
मौसम विभाग के अनुसार गुजरात, पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तटीय कर्नाटक और तेलंगाना में गरज के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। 26 से 28 जुलाई के दौरान मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, तटीय आंध्र प्रदेश, आंतरिक कर्नाटक और तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल के अलग-अलह हिस्सों में बारिश की संभावना जताई गई है।
आइएमडी के अनुसार 28 और 29 जुलाई को झारखंड के कई हिस्सों में बारिश का अलर्ट है। 26 से 27 जुलाई के दौरान तेलंगाना में 27-29 जुलाई के दौरान दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और 26 से 29 जुलाई दौरान तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में बारिश होने की संभावना जताई गई है।
| राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली-एनसीआर के कई हिस्सों में मंगलवार को हल्की बारिश हुई। नई दिल्ली, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली-एनसीआर के कई हिस्सों में मंगलवार को हल्की बारिश हुई। आसमान में बादल अभी भी छाए हुए हैं। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में यूपी, एमपी, छत्तीसगढ़ और गुजरात समेत कई राज्यों के लिए बारिश का अलर्ट जारी किया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने सत्ताईस जुलाई से उत्तर भारतीय राज्यों में भारी बारिश की भविष्यवाणी की है। इसके साथ ही मौसम विभाग ने ओडिशा, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग के अनुसार राजस्थान के पूर्वी भागों में पिछले दिनों कुछ स्थानों पर भारी बारिश हुई है। शहर में भारी बारिश और भीषण जलजमाव के बीच जोधपुर जिला कलेक्टर ने स्कूलों में छुट्टी की घोषणा की है। चित्तौड़गढ़, जयपुर, अजमेर, सवाई माधोपुर, राजसमंद, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, कोटा, सिरोही, जोधपुर, पाली, नागौर और जालोर जिलों के कई हिस्सों में भारी बारिश हुई है। मौसम विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि फिलहाल पूर्वी राजस्थान में बारिश होने की संभावना है। अगले अड़तालीस घंटाटों के दौरान अजमेर, जोधपुर और उदयपुर संभाग के जिलों में बारिश हो सकती है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की बात करें तो शहर में मंगलवार को आमतौर पर दिन में हल्की बारिश या बूंदा बांदी के साथ आसमान में बादल छाए रहने की भविष्यवाणी की गई। बुधवार को भी ऐसा ही मौसम होने का अनुमान है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार शहर में सोमवार सुबह आठ:तीस बजे से मंगलवार सुबह आठ:तीस बजे तक दो मिमी बारिश दर्ज की गई। सुबह साढ़े आठ बजे सापेक्षिक आर्द्रता चौरासी फीसदी रही है। मौसम विभाग के अनुसार गुजरात, पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तटीय कर्नाटक और तेलंगाना में गरज के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। छब्बीस से अट्ठाईस जुलाई के दौरान मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, तटीय आंध्र प्रदेश, आंतरिक कर्नाटक और तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल के अलग-अलह हिस्सों में बारिश की संभावना जताई गई है। आइएमडी के अनुसार अट्ठाईस और उनतीस जुलाई को झारखंड के कई हिस्सों में बारिश का अलर्ट है। छब्बीस से सत्ताईस जुलाई के दौरान तेलंगाना में सत्ताईस-उनतीस जुलाई के दौरान दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और छब्बीस से उनतीस जुलाई दौरान तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में बारिश होने की संभावना जताई गई है। |
प्रयागराज (ब्यूरो)। कौशांबी के पिपरी कादीपुर निवासी चन्द्रशेखर (22) पुत्र छेद्दन मजदूरी करके परिवार का भरण-पोषण करता था। उसका दो वर्ष पूर्व सरिता के साथ विवाह हुआ था। सरिता गर्भवती है। बताया जाता है कि बुधवार की देर शाम वह पड़ोसी मंजीत के साथ बाइक से घर वापस लौट रहा था। तभी मंदर मोड के पास अज्ञात वाहन ने बाइक में जोरदार टक्कर मार दिया। जिससे दोनों गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गये। दोनों को स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल ले जाया गया। जहां चन्द्रशेखर को डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मंजीत का इलाज चल रहा है। पुलिस ने चन्द्रशेखर की बॉडी को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। युवक की मौत से मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया। पूरामुफ्ती थाना प्रभारी उपेन्द्र सिंह ने बताया कि हादसे में एक युवक की मौत हुई है। दूसरे घायल हुआ था उसका इलाज चल रहा है।
| प्रयागराज । कौशांबी के पिपरी कादीपुर निवासी चन्द्रशेखर पुत्र छेद्दन मजदूरी करके परिवार का भरण-पोषण करता था। उसका दो वर्ष पूर्व सरिता के साथ विवाह हुआ था। सरिता गर्भवती है। बताया जाता है कि बुधवार की देर शाम वह पड़ोसी मंजीत के साथ बाइक से घर वापस लौट रहा था। तभी मंदर मोड के पास अज्ञात वाहन ने बाइक में जोरदार टक्कर मार दिया। जिससे दोनों गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गये। दोनों को स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल ले जाया गया। जहां चन्द्रशेखर को डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मंजीत का इलाज चल रहा है। पुलिस ने चन्द्रशेखर की बॉडी को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। युवक की मौत से मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया। पूरामुफ्ती थाना प्रभारी उपेन्द्र सिंह ने बताया कि हादसे में एक युवक की मौत हुई है। दूसरे घायल हुआ था उसका इलाज चल रहा है। |
अगर आप दिल्ली या इसके आसपास के इलाकों में रहते हैं तो इस मौसम में हिमाचल की बर्फीली वादियों में जाना शायद ही पसंद करें क्योंकि वहाँ पर बहुत अधिक ठंड पड़नी शुरू हो चुकी है। इस मौसम में ज्यादा बर्फ़बारी होने के कारण कुछ पर्यटक वहाँ जाना पसंद नहीं करते हैं और वे दिल्ली के आस-पास ही घूमने के कुछ अच्छे विकल्प खोजते हैं।
दिल्ली के पास आगरा ही ऐसा शहर है जो अपनी ऐतिहासिक विरासत के लिए दिल्ली से टक्कर लेता है। अगर आप इस समय दिल्ली में हैं तो आगरा घूमने का प्लान बना सकते हैं। जैसा कि सभी जानते हैं कि आगरा ताजमहल (Taj Mahal) के लिए प्रसिद्ध है। ताजमहल को देखने की कई लोगों की ख्वाहिश होती है। इस मौसम में आप अपनी यह दिली ख्वाहिश पूरी कर सकते हैं।
ताजमहल के अलावा आप आगरा में आगरा फोर्ट, मेहताब बाग़, सिकंदरा जैसी जगहों का भी लुफ्त उठा सकते हैं। यहाँ से फतेहपुर सीकरी भी जाया जा सकता है। यहाँ का मौसम दिल्ली के मौसम की तरह ही रहता है। आप आगरा लॉन्ग ड्राइव का मजा लेते हुए भी जा सकते हैं। इसके अलावा आप दिल्ली से बस या ट्रेन भी पकड़ सकते हैं।
राजस्थान का अलवर जिला भी अपने ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है। यह दिल्ली के नज़दीक भी पड़ता है। इस मौसम में यहाँ जाया जा सकता है। यहाँ की ऐतिहासिक इमारतें अपने आप में एक रोमांच छिपाएं बैठी हुई हैं। इसके अलावा आप यहाँ सिलीसेढ़ झील (Siliserh Lake) का भी आनंद ले सकते हैं। पार्टनर के साथ बैठकर झील का नज़ारा देखना सोने पे सुहागा जैसा होगा।
यहाँ एक नीमराना नाम की बहुत ही खूबसूरत इमारत भी है। दोस्तों के साथ इस इमारत का दीदार करना ट्रिप में चार चाँद लगा देगा। अलवर में एक लग्जरी रिजॉर्ट भी है, इसे सबसे रोमांटिक स्थलों में से एक माना जाता है।
राजस्थान की राजधानी और पिंक सिटी के नाम से मशहूर जयपुर अपनी ख़ूबसूरती के लिए फेमस है। अगर आप इस मौसम में जयपुर जाना चाहते हैं तो यह बहुत ही अच्छा समय है। जयपुर अपने शानदार महलों और इमारतों के लिए प्रसिद्ध है। यह शॉपिंग के लिहाज से भी काफी अच्छा शहर माना जाता है।
यहाँ पर हर साल वार्षिकी कार्यक्रम होते हैं जिसमे भाग लेने के लिए देश-विदेश से लोग आते हैं। यहाँ की हस्तशिल्पों की हज़ारों दुकानें पर्यटकों को ख़ासा भाती है। जयपुर में आप आमेर का किला, नाहरगढ़ किला, शीश महल, हवा महल, गणेश पोल और जल महल, जैसे लोकप्रिय पर्यटक स्थलों का मजा ले सकते हैं। इस मौसम में यहाँ एक बार घूमना तो बनता है।
अगर आप दिल्ली के आसपास ठंड का मजा लेना चाहते है तो तो इस वीकेंड आप लैंसडाउन का रुख कर सकते हैं। यह स्थान पर्यटकों को हर मौसम में भाता है। कारण यह है कि यहाँ का मौसम हमेशा खुशनुमा बना रहता है। यही इसकी खासियत है। अगर आप प्रकृति प्रेमी है तो यह जगह आपके लिए एक दम परफेक्ट रहेगी।
लैंसडाउन भारत के सबसे शांत और निर्जन हिल स्टेशनों में से एक है और जब से ब्रिटिश भारत आए थे, तब से यह एक लोकप्रिय डेस्टिनेशन रहा है।
लैंसडाउन अन्य हिल स्टेशनों के एकदम उल्टा है, क्योंकि यह अच्छी तरह से सड़कों के साथ जुड़ा हुआ है लेकिन शहर से दूर भी बहुत है। यह उत्तराखंड राज्य के पौड़ी गढ़वाल जिले में घने बांज और नीले देवदार के जंगलों से घिरे समुद्र तल से 1,700 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है।
मसूरी को 'पर्वतों की रानी' कहा जाता है। यह उत्तराखंड में स्थित है। मसूरी एक हिल स्टेशन है। यह राजधानी देहरादून से लगभग 35 किलोमीटर (22 मील) और राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली से 290 किलोमीटर (180 मील) उत्तर में स्थित है। यह हिल स्टेशन गढ़वाल हिमालय श्रृंखला की तलहटी में है।
| अगर आप दिल्ली या इसके आसपास के इलाकों में रहते हैं तो इस मौसम में हिमाचल की बर्फीली वादियों में जाना शायद ही पसंद करें क्योंकि वहाँ पर बहुत अधिक ठंड पड़नी शुरू हो चुकी है। इस मौसम में ज्यादा बर्फ़बारी होने के कारण कुछ पर्यटक वहाँ जाना पसंद नहीं करते हैं और वे दिल्ली के आस-पास ही घूमने के कुछ अच्छे विकल्प खोजते हैं। दिल्ली के पास आगरा ही ऐसा शहर है जो अपनी ऐतिहासिक विरासत के लिए दिल्ली से टक्कर लेता है। अगर आप इस समय दिल्ली में हैं तो आगरा घूमने का प्लान बना सकते हैं। जैसा कि सभी जानते हैं कि आगरा ताजमहल के लिए प्रसिद्ध है। ताजमहल को देखने की कई लोगों की ख्वाहिश होती है। इस मौसम में आप अपनी यह दिली ख्वाहिश पूरी कर सकते हैं। ताजमहल के अलावा आप आगरा में आगरा फोर्ट, मेहताब बाग़, सिकंदरा जैसी जगहों का भी लुफ्त उठा सकते हैं। यहाँ से फतेहपुर सीकरी भी जाया जा सकता है। यहाँ का मौसम दिल्ली के मौसम की तरह ही रहता है। आप आगरा लॉन्ग ड्राइव का मजा लेते हुए भी जा सकते हैं। इसके अलावा आप दिल्ली से बस या ट्रेन भी पकड़ सकते हैं। राजस्थान का अलवर जिला भी अपने ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है। यह दिल्ली के नज़दीक भी पड़ता है। इस मौसम में यहाँ जाया जा सकता है। यहाँ की ऐतिहासिक इमारतें अपने आप में एक रोमांच छिपाएं बैठी हुई हैं। इसके अलावा आप यहाँ सिलीसेढ़ झील का भी आनंद ले सकते हैं। पार्टनर के साथ बैठकर झील का नज़ारा देखना सोने पे सुहागा जैसा होगा। यहाँ एक नीमराना नाम की बहुत ही खूबसूरत इमारत भी है। दोस्तों के साथ इस इमारत का दीदार करना ट्रिप में चार चाँद लगा देगा। अलवर में एक लग्जरी रिजॉर्ट भी है, इसे सबसे रोमांटिक स्थलों में से एक माना जाता है। राजस्थान की राजधानी और पिंक सिटी के नाम से मशहूर जयपुर अपनी ख़ूबसूरती के लिए फेमस है। अगर आप इस मौसम में जयपुर जाना चाहते हैं तो यह बहुत ही अच्छा समय है। जयपुर अपने शानदार महलों और इमारतों के लिए प्रसिद्ध है। यह शॉपिंग के लिहाज से भी काफी अच्छा शहर माना जाता है। यहाँ पर हर साल वार्षिकी कार्यक्रम होते हैं जिसमे भाग लेने के लिए देश-विदेश से लोग आते हैं। यहाँ की हस्तशिल्पों की हज़ारों दुकानें पर्यटकों को ख़ासा भाती है। जयपुर में आप आमेर का किला, नाहरगढ़ किला, शीश महल, हवा महल, गणेश पोल और जल महल, जैसे लोकप्रिय पर्यटक स्थलों का मजा ले सकते हैं। इस मौसम में यहाँ एक बार घूमना तो बनता है। अगर आप दिल्ली के आसपास ठंड का मजा लेना चाहते है तो तो इस वीकेंड आप लैंसडाउन का रुख कर सकते हैं। यह स्थान पर्यटकों को हर मौसम में भाता है। कारण यह है कि यहाँ का मौसम हमेशा खुशनुमा बना रहता है। यही इसकी खासियत है। अगर आप प्रकृति प्रेमी है तो यह जगह आपके लिए एक दम परफेक्ट रहेगी। लैंसडाउन भारत के सबसे शांत और निर्जन हिल स्टेशनों में से एक है और जब से ब्रिटिश भारत आए थे, तब से यह एक लोकप्रिय डेस्टिनेशन रहा है। लैंसडाउन अन्य हिल स्टेशनों के एकदम उल्टा है, क्योंकि यह अच्छी तरह से सड़कों के साथ जुड़ा हुआ है लेकिन शहर से दूर भी बहुत है। यह उत्तराखंड राज्य के पौड़ी गढ़वाल जिले में घने बांज और नीले देवदार के जंगलों से घिरे समुद्र तल से एक,सात सौ मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। मसूरी को 'पर्वतों की रानी' कहा जाता है। यह उत्तराखंड में स्थित है। मसूरी एक हिल स्टेशन है। यह राजधानी देहरादून से लगभग पैंतीस किलोग्राममीटर और राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली से दो सौ नब्बे किलोग्राममीटर उत्तर में स्थित है। यह हिल स्टेशन गढ़वाल हिमालय श्रृंखला की तलहटी में है। |
312 / पतंजलि योग सूत्र भाग : 4
होने को - जला दो ! और उन चौखटों से बाहर आ जाओ। अगर तुम अपनी धारणाओं से, सिद्धांतों से, पूर्वाग्रहों से बाहर निकल सको तो तुम समग्रता को, पूर्णता को उपलब्ध हो सकते हो।
तीसरा प्रश्नः आप अक्सर कहते हैं कि संबुद्ध पुरुष कभी भी स्वप्न नहीं देखते हैं। लेकिन आपने हमें बताया कि एक बार च्वांगत्सु ने स्वप्न देखा कि वह तितली बन गया है! कृपया इस पर कुछ कहें।
पूछा है स्वामी योग चिन्मय ने। लगता है कि वे हंसी-मजाक तक को भी नहीं समझ सकते हैं। और मैं जानता हूं कि वे क्यों नहीं समझ सकतेः क्योंकि वे बहुत गलत संग-साथ में रहे हैं - वे परंपरागत योगियों और साधुओं के साथ बहुत रहे हैं - और इसी कारण वे हंसी-मजाक को भी भूल गए हैं। और धार्मिक होने के लिए हास्य ही एकमात्र आधारभूत गुणवत्ता है। धार्मिक आदमी विनोदप्रिय होता है। लेकिन चिन्मय तो अभी भी एक निश्चित बंधी-बंधाई धारणा से ही घिरे हुए हैं।
जब मैंने कहा कि च्वांगत्सु ने स्वप्न देखा, तो च्वांगत्सु ने स्वयं उस स्वप्न से संबंधित कुछ बात बतायी थी । ऐसा नहीं कि उसने स्वप्न देखा। इस बहाने उसने स्वयं के ऊपर एक सुंदर मजाक किया है - वह अपने ऊपर ही हंस रहा है।
दूसरों के ऊपर हंस लेना तो बहुत ही आसान बात है; लेकिन अपने ऊपर हंसना बहुत कठिन होता है। लेकिन जिस दिन व्यक्ति स्वयं के ऊपर हंसने में सक्षम हो जाता है, वह निरहंकारिता को उपलब्ध हो जाता है। क्योंकि अहंकार दूसरों के ऊपर हंसकर बहुत प्रसन्नता अनुभव करता है। जब व्यक्ति स्वयं के ऊपर ही हंसने लगते हैं, तो फिर अहंकार का अस्तित्व नहीं रह जाता है।
हां, कोई भी संबुद्ध व्यक्ति कभी स्वप्न नहीं देखता है, लेकिन संबुद्ध व्यक्तियों के पास विनोदप्रियता का गुण होता है। वे हंस सकते हैं, और वे दूसरों को हंसने में सहयोग भी दे सकते हैं।
ऐसा हुआ कि तीन आदमी सत्य की तलाश में थे, इसलिए वे दूर-दूर देशों की यात्रा कर रहे थे। उन तीनों में एक यहूदी था, दूसरा ईसाई था, और तीसरा मुसलमान था। उन तीनों में आपस में बड़ी गहरी दोस्ती थी। एक दिन उन लोगों को कहीं से एक रुपया मिल गया । उस रुपए से उन्होंने हलुवा खरीद लिया। मुसलमान और ईसाई आदमियों ने तो कुछ देर पहले ही कुछ खाया था, इसलिए वे थोड़े परेशान हुए कि कहीं यह यहूदी पूरा हलवा न खा जाए। उनके तो पेट भरे हुए थे, उन्होंने बहुत डटकर खा रखा था। इसलिए उन्होंने सुझाव दिया - उन्होंने यहूदी के विरुद्ध षड्यंत्र रचा - उन्होंने कहा, 'ऐसा करते हैं, अभी तो हम सो जाते हैं। सुबह हम अपने-अपने सपने एक-दूसरे को सुनाएंगे । उनमें से जिसका सपना सबसे अच्छा होगा वही हलवा खाएगा।' और चूंकि उनमें से दो इस बात के पक्ष में थे - तो यहूदी को भी यह बात माननी पड़ी - लोकतांत्रिक ढंग से उसे भी बात माननी पड़ी और उसके पास इसके अलावा कोई उपाय भी न था ।
यहूदी जो कि बहुत भूखा था, उसे भूख के कारण नींद ही नहीं आ रही थी । और ऐसे समय में सोना मुश्किल भी होता है जब कि हलवा रखा हो और तुम्हें भूख लगी हो और दो आदमियों ने तुम्हारे विरुद्ध षड्यंत्र रचा हो । | तीन सौ बारह / पतंजलि योग सूत्र भाग : चार होने को - जला दो ! और उन चौखटों से बाहर आ जाओ। अगर तुम अपनी धारणाओं से, सिद्धांतों से, पूर्वाग्रहों से बाहर निकल सको तो तुम समग्रता को, पूर्णता को उपलब्ध हो सकते हो। तीसरा प्रश्नः आप अक्सर कहते हैं कि संबुद्ध पुरुष कभी भी स्वप्न नहीं देखते हैं। लेकिन आपने हमें बताया कि एक बार च्वांगत्सु ने स्वप्न देखा कि वह तितली बन गया है! कृपया इस पर कुछ कहें। पूछा है स्वामी योग चिन्मय ने। लगता है कि वे हंसी-मजाक तक को भी नहीं समझ सकते हैं। और मैं जानता हूं कि वे क्यों नहीं समझ सकतेः क्योंकि वे बहुत गलत संग-साथ में रहे हैं - वे परंपरागत योगियों और साधुओं के साथ बहुत रहे हैं - और इसी कारण वे हंसी-मजाक को भी भूल गए हैं। और धार्मिक होने के लिए हास्य ही एकमात्र आधारभूत गुणवत्ता है। धार्मिक आदमी विनोदप्रिय होता है। लेकिन चिन्मय तो अभी भी एक निश्चित बंधी-बंधाई धारणा से ही घिरे हुए हैं। जब मैंने कहा कि च्वांगत्सु ने स्वप्न देखा, तो च्वांगत्सु ने स्वयं उस स्वप्न से संबंधित कुछ बात बतायी थी । ऐसा नहीं कि उसने स्वप्न देखा। इस बहाने उसने स्वयं के ऊपर एक सुंदर मजाक किया है - वह अपने ऊपर ही हंस रहा है। दूसरों के ऊपर हंस लेना तो बहुत ही आसान बात है; लेकिन अपने ऊपर हंसना बहुत कठिन होता है। लेकिन जिस दिन व्यक्ति स्वयं के ऊपर हंसने में सक्षम हो जाता है, वह निरहंकारिता को उपलब्ध हो जाता है। क्योंकि अहंकार दूसरों के ऊपर हंसकर बहुत प्रसन्नता अनुभव करता है। जब व्यक्ति स्वयं के ऊपर ही हंसने लगते हैं, तो फिर अहंकार का अस्तित्व नहीं रह जाता है। हां, कोई भी संबुद्ध व्यक्ति कभी स्वप्न नहीं देखता है, लेकिन संबुद्ध व्यक्तियों के पास विनोदप्रियता का गुण होता है। वे हंस सकते हैं, और वे दूसरों को हंसने में सहयोग भी दे सकते हैं। ऐसा हुआ कि तीन आदमी सत्य की तलाश में थे, इसलिए वे दूर-दूर देशों की यात्रा कर रहे थे। उन तीनों में एक यहूदी था, दूसरा ईसाई था, और तीसरा मुसलमान था। उन तीनों में आपस में बड़ी गहरी दोस्ती थी। एक दिन उन लोगों को कहीं से एक रुपया मिल गया । उस रुपए से उन्होंने हलुवा खरीद लिया। मुसलमान और ईसाई आदमियों ने तो कुछ देर पहले ही कुछ खाया था, इसलिए वे थोड़े परेशान हुए कि कहीं यह यहूदी पूरा हलवा न खा जाए। उनके तो पेट भरे हुए थे, उन्होंने बहुत डटकर खा रखा था। इसलिए उन्होंने सुझाव दिया - उन्होंने यहूदी के विरुद्ध षड्यंत्र रचा - उन्होंने कहा, 'ऐसा करते हैं, अभी तो हम सो जाते हैं। सुबह हम अपने-अपने सपने एक-दूसरे को सुनाएंगे । उनमें से जिसका सपना सबसे अच्छा होगा वही हलवा खाएगा।' और चूंकि उनमें से दो इस बात के पक्ष में थे - तो यहूदी को भी यह बात माननी पड़ी - लोकतांत्रिक ढंग से उसे भी बात माननी पड़ी और उसके पास इसके अलावा कोई उपाय भी न था । यहूदी जो कि बहुत भूखा था, उसे भूख के कारण नींद ही नहीं आ रही थी । और ऐसे समय में सोना मुश्किल भी होता है जब कि हलवा रखा हो और तुम्हें भूख लगी हो और दो आदमियों ने तुम्हारे विरुद्ध षड्यंत्र रचा हो । |
नालागढ़ - उत्तर भारत के नामी अस्पतालों में शुमार मेदांता दि मेडिसिटी अस्पताल के लिए लार्ड महावीरा कालेज ऑफ नर्सिंग नालागढ़ की 13 प्रशिक्षु नर्सों का चयन हुआ है। नालागढ़ में रखे गए साक्षात्कार में मेदांता अस्पताल के नर्सिंग विभाग में कार्यरत कृष्णा दास गुप्ता व एचआर विभाग से सुरभि ने इंटरव्यू लिए। दो चरणों लिखित व मौखिक के आधार पर इंटरव्यू में लार्ड महावीरा कालेज ऑफ नर्सिंग की प्रशिक्षु नर्सों ने भाग लिया और 13 नर्सों का चयन मेदांता दि मेडिसिटी अस्पताल के लिए हुआ है, जो अब मेदांता दि मेडिसिटी में अपना करियर बनाएगी। लार्ड महावीरा कालेज ऑफ नर्सिंग की प्रिंसीपल सुरेंद्र कपूर ने कहा कि इस साक्षात्कार में 13 नर्सों आरती देवी, अल्का राणा, आंचल गुप्ता, अंकिता कंवर, कनिका शर्मा, मीना कुमारी, नीतू शर्मा, पूनम, प्रिया देवी, सपना देवी, सुषमा कुमारी, उर्मिला देवी, अंकिता कुमारी का चयन मेदांता दि मेडिसिटी के लिए हुआ है। उन्होंने कहा कि साक्षात्कार में चयनित नर्सों को दि मेडिसिटी अस्पताल की ओर से आकर्षक वेतन और खाने-पीने व ठहरने के लिए होस्टल की सुविधा मुहैया करवाई जाएगी। संस्थान के चेयरमैन डा. अजीत पाल जैन ने कहा कि नर्सिंग एक पुनीत व समाज से जुड़ा हुआ कार्य है और प्रशिक्षु नर्सों को सर्वांगीण विकास वाली शिक्षा देने के लिए कालेज प्रबंधन कृतसंकल्प है। उन्होंने कहा कि इंटरव्यू में चयनित नर्सें अब अपना आगामी भविष्य मेदांता दि मेडिसिटी अस्पताल से बनाएगी। उन्होंने कहा कि एक अग्रिम नर्सिंग विद्यालय के तौर पर संस्थान ने राज्य में नर्सिंग सेवाओं की जरूरत को ध्यान में रखते हुए इस नर्सिंग कालेज की नींव रखी और वर्ष 2009 में संस्थान को एचपीयू और आईएनसी, एचपीएनआरसी द्वारा बीएससी नर्सिंग स्नातक कोर्स को प्रमाणित किया। उन्होंने कहा कि मेडिसिटी हास्पिटल देश के नामी अस्पतालों में शुमार है और साक्षात्कार के बाद चयनित होने पर नर्सें अपना यहां करियर बनाएगी।
| नालागढ़ - उत्तर भारत के नामी अस्पतालों में शुमार मेदांता दि मेडिसिटी अस्पताल के लिए लार्ड महावीरा कालेज ऑफ नर्सिंग नालागढ़ की तेरह प्रशिक्षु नर्सों का चयन हुआ है। नालागढ़ में रखे गए साक्षात्कार में मेदांता अस्पताल के नर्सिंग विभाग में कार्यरत कृष्णा दास गुप्ता व एचआर विभाग से सुरभि ने इंटरव्यू लिए। दो चरणों लिखित व मौखिक के आधार पर इंटरव्यू में लार्ड महावीरा कालेज ऑफ नर्सिंग की प्रशिक्षु नर्सों ने भाग लिया और तेरह नर्सों का चयन मेदांता दि मेडिसिटी अस्पताल के लिए हुआ है, जो अब मेदांता दि मेडिसिटी में अपना करियर बनाएगी। लार्ड महावीरा कालेज ऑफ नर्सिंग की प्रिंसीपल सुरेंद्र कपूर ने कहा कि इस साक्षात्कार में तेरह नर्सों आरती देवी, अल्का राणा, आंचल गुप्ता, अंकिता कंवर, कनिका शर्मा, मीना कुमारी, नीतू शर्मा, पूनम, प्रिया देवी, सपना देवी, सुषमा कुमारी, उर्मिला देवी, अंकिता कुमारी का चयन मेदांता दि मेडिसिटी के लिए हुआ है। उन्होंने कहा कि साक्षात्कार में चयनित नर्सों को दि मेडिसिटी अस्पताल की ओर से आकर्षक वेतन और खाने-पीने व ठहरने के लिए होस्टल की सुविधा मुहैया करवाई जाएगी। संस्थान के चेयरमैन डा. अजीत पाल जैन ने कहा कि नर्सिंग एक पुनीत व समाज से जुड़ा हुआ कार्य है और प्रशिक्षु नर्सों को सर्वांगीण विकास वाली शिक्षा देने के लिए कालेज प्रबंधन कृतसंकल्प है। उन्होंने कहा कि इंटरव्यू में चयनित नर्सें अब अपना आगामी भविष्य मेदांता दि मेडिसिटी अस्पताल से बनाएगी। उन्होंने कहा कि एक अग्रिम नर्सिंग विद्यालय के तौर पर संस्थान ने राज्य में नर्सिंग सेवाओं की जरूरत को ध्यान में रखते हुए इस नर्सिंग कालेज की नींव रखी और वर्ष दो हज़ार नौ में संस्थान को एचपीयू और आईएनसी, एचपीएनआरसी द्वारा बीएससी नर्सिंग स्नातक कोर्स को प्रमाणित किया। उन्होंने कहा कि मेडिसिटी हास्पिटल देश के नामी अस्पतालों में शुमार है और साक्षात्कार के बाद चयनित होने पर नर्सें अपना यहां करियर बनाएगी। |
यक़ीन हो गया कि जबतक में वज़ू न कर लूं मेरा बेटा दूध नही पीता है इसीलिए खानदान में आपको सब बहुत मानते थे। घर का खाना छोड़ दिया
आप शरीयत के पाबन्द थे । हराम हलाल का ख़्याल रखते थे। एक बार आपने 2 महीने घर का खाना नही खाया। जब भूख लगती आप जंगलो मे चले जाते और घास पत्ते खा लेते जब वालिद ने देखा तो उन्होंने कहा बेटे इतना कमज़ोर हो गए हो क्या बात है खाना क्यों नही खाते हो आपने जवाब दिया अब्बा जान आप शहर के क़ाज़ी (जज) है आपका दबदबा अवाम पर है आपको पूरा गुजरात जानता है मुझे शक है कि जब आपका खादिम बाजार से सब्ज़ी लाता है तो शायद आपके दबदबे और ओहदे की वजह से वो पैसा न लेता हो और हम अंजान में हराम लुकमा खाते हो इसी डर से में घर का खाना नही खाता हूँ। बेटे का जवाब सुनकर वालिद साहब मुरकुराये और कहा बेटे अगर में हराम और हलाल लुकमे पर ध्यान न देता होता तो अल्लाह मुझे तुझ जेसा नेक सालेह बेटा न अता फरमाता। आप आखरी वक़्त में बहुत कमज़ोर हो गए थे। एक दिन आपने सोचा अब कल से में हदीस नही पढ़ाऊंगा क्योंकि उम्र बहुत ज्यादा हो चुकी थी उसी रात आपक़ो नबी क़रीम की ज़ियारत
हुई और कहा ए नवासे तुम जब हदीस पढ़ाते हो तो हम तुम्हारे हल्के मे बेठकर सुनते हैं सुबह हुई तो आप रोने लगें और उसके बाद से आप जबतक बज़ाहिर ज़िंदा रहे आपने खुद हदीस पढ़ाई बड़े शोक से आप हदीस पढ़ाते थे । जब आपका इंतेक़ाल हुआ तो सारा गुजरात सदमे में था। आप के जनाज़े में एक सैलाब था हर किसी की यही ख्वाहिश थी काश में एक बार नायब ए गौसे आज़म के जनाज़े को कांधा दे सकूँ लाखो के मजमे के बीच से आशिके रसूल का जनाज़ा जा रहा था आज भी आपके आस्ताने से लोगो को फेज़ मिलता है और ताक़यामत मिलता रहेगा।
सैयद वजीहुद्दीन अल्वी रहमतुल्लाह अलैह एक नज़र में 1-- आप कहते रहते की ख्वाज़ा गौस मोहम्मद ग्वालियरी रहमतुल्लाह अलैह ने मुझे खुदा तक पहुँचाया है।
2 -- शाह मुहद्दिस अब्दुल हक़ देहलवी रहमतुल्लाह अलैह लिखते हैं कि जब में गुजरात मे रुका तो मे भी उनसे मिलने गया मेने उन्हें वली ए क़ामिल पाया और आप रियाज़त बहुत करते थे ।
3-- मुल्ला अब्दुल कादिर बदायूनी अलैहिर्रहमा ने अपनी किताब मुन्तख़बुत तवारीख में लिखा है कि शायद ही कोई
किताब बची हो जिसकी शरह या हाशिया न लिखी हो और आप जिसके हक़ में दुआ करते थे वो फौरन पूरी हो जाती थी। 4--आपने सिर्फ 4 बार मदरसे से बाहर अपने कदम निकाले हैं वरना आप हमेशा मदरसे में ही रहते और तालीम सिखाते रहते।
5-- शेख़ अली मुत्तक़ी अलैहिर्रहमा ने आपको मुजद्दीद कहा। 6--आप कहते रहते थे कि ज़ाहिर शरीयत पर ऐसी नज़र होनी चाहिए जैसी शेख अब्दुल मुत्तक़ी अलैहिर्रहमा की है और हक़ाएक़ पर एसी नज़र होनी चाहिए जैसी हमारे मुर्शिद ख्वाज़ा गौस मुहम्मद ग्वालियरी रहमतुल्लाह अलैह की है।
7--आपक़ो 60 से ज्यादा उलूम आते थे 80 हज़ार तलबा को आपने हाफिज़/आलिम बनाया है।
8--आपके जद्दे अमजद यमन से हिन्द आये थे।
9--आपका आस्ताना हिंद के शहर गुजरात मे है। आप का सिलसिला सत्तारिया है।
10--आप एक वली ए क़ामिल, क़ुतुब ए गुजरात, मुजद्दीद, मुहक़्क़ीक़ है ताक़यामत तक आप ज़िंदा रहेगें।
शाह मुहद्दिस अब्दुल हक़ देहलवी रहमतुल्लाह अलैह
जब भी कहीं पर लफ़्ज़े मुहद्दिस का जिक्र हो तो एक नाम ज़हन में गर्दिश करता रहता है और वो नाम है हज़रत अल्लामा शाह मुहद्दिस अब्दुल हक़ देहलवी क़ादरी रहमतुल्लाह अलैह का है।
आप की विलादत 1551 ईस्वी दिल्ली में हुई। आपके बचपन का नाम अब्दुल हक़ था ।
आप हज़रत आगा मुहम्मद तुर्क बुखारी रहमतुल्लाह अलैह की औलाद में से हैं। आपके वालिद का नाम हज़रत अल्लामा सैफ़ुद्दीन रहमतुल्लाह अलैह था।आपके जद्दे अमजद आगा मुहम्मद तुर्क बुखारी रहमतुल्लाह अलैह जब बुखारा से दिल्ली आए थे उस वक़्त अलाउद्दीन खिलजी की हुकूमत थी। आगा मुहम्मद रहमतुल्लाह अलैह अदब और अस्करी निजाम में
बहुत माहिर थे आपने जब बुखारा से हिंदुस्तान के लिए हिजरत की उस वक़्त आपके साथ मुरीद और कुछ लोग भी आये थे सबको लेकर आप गुजरात आये और क़याम किया। एक रिवायात के मुताबिक अल्लाह ने आपको तकरीबन 100 औलादे अता की थी जिसमे 99 बच्चे इंतेक़ाल कर गए थे और सिर्फ 1बच्चा बचा था जिसका नाम शेख मोइजुद्दीन था, उसके बाद शेख मूसा, और शेख फ़िरोज़ जो कि जंग में शहीद हो गए थे उनके बाद एक बेटा हुआ जिसका नाम शाद उल्लाह था। उनके दो बेटे थे जिनमें आपके वालिद हज़रत शेख सैफ़ुद्दीन अलैहिर्रहमा भी थे।
आपके वालिद
आपके वालिद का तज़किरा किये बगैर आपकी सवानेह का एक भी हिस्सा बयान नही किया जा सकता है और न ही समझाया जा सकता है ।
आपके वालिद को शेख अमानुल्लाह पानीपती अलैहिर्रहमा जैसे आलिम और वली की सोहबत मिली है। आप एक सूफी/आलिम/मुत्तक़ी/परहेजगार/वली थे। जिसका असर आप पर भी पड़ा।आपके वालिद सुल्तानुल औलिया महबूबे सुब्हानी हज़रत सैयदना शेख अब्दुल कादिर जीलानी
रहमतुल्लाह अलैह के सच्चे आशिक थे । हर वक़्त उनका विर्द करते रहते थे।
आपने बचपन मे अपने वालिद हज़रत सैफ़ुद्दीन अलैहिर्रहमा से तालीम हासिल की। सबसे पहले वालिद साहब से आपने तीन पारे पढ़े उसके बाद आपने खुद क़ुरआन पढ़ना शुरू किया और 3 महीने में क़ुरआन मुकम्मल किया
फिर आपने खत्ताती(लिखना) सीखनी शुर किया।क्योंकि उस दौर में आजकल की तरह प्रिंटिंग प्रेस नही थे लिहाजा मुसन्निफ़ को अपने हाथों से ही लिखना होता था। लिहाजा आपने ये हुनर भी सिर्फ 1 महीने में सीख लिया फिर जो किताब आपके वालिद को अहम लगती वो आपको शुरू का पढ़ा देते थे उसके बाद आप उसको पूरी पढ़ते और याद कर लेते।आप फरमाते हैं कि एक बार किताब पढ़ने के बाद वो किताब आपको हमेशा याद रहती। आपने सबसे पहली किताब दीवाने हाफिज़ और हज़रत शेख सादी रहमतुल्लाह अलैह की किताब बोस्तान पढ़ी। उस दौर में बच्चो को नज़्म बहुत याद कराई जाती थी लेकिन आपके वालिद ने आपको चन्द नज़्म याद करने के लिए दिए और आपने उनको चन्द
दिनों में याद कर लिया। फिर आपने मीज़ान, मिस्बाह, काफिया जैसी किताबो को याद कर लिया आप जिस किताब को पढ़ते सारी आपको याद हो जाती थी।
12 साल की उम्र में शरह शमशिया, शरह अक़ाएद जैसी किताबें याद कर लीं। उसके बाद जब आपकी उम्र 15 साल हुई तो आपको जो किताब मिलती आप पढ़ने लग जाते और याद कर लेते।
तालीम से लगाव
तालीम से लगाव ही है कि आप का तज़किरा आज भी हो रहा है और ताक़यामत तक आपका
नाम यूं ही अदब के साथ लिया जाता रहेगा। आप 18-18 घण्टे रोज मुसलसल पढ़ते रहते और कभी कभी तो 20-22 घण्टे तक आप पढ़ते रहते थे। मिया यूं ही नही कोई मुहद्दिस बन जाता है अल्लाह अल्लाह एक तो आपका ज़हन माशाल्लाह उसके बाद ये ग़ौरो फिक्र तो फिर क्यों न आपकी जात मुहद्दिस हो। आप तालीम में इतना मशगूल रहते की उलेमा फरमाते हैं कि कभी कभी सर पर जो पगड़ी बंधी हुई थी उसमें आग लग जाती और जबतक वो आग आपकी दाढ़ी में न लग जाती तबतक आपको मालूम ही न होता। हिंदुस्तान में इल्म
हासिल करने के बाद आप बुखारा और समरकंद भी गए फिर आप तालीम हासिल करने के बाद दिल्ली आ गए।
(नोट--) यहाँ ये ध्यान देना जरूरी है कि उन दिनों लोग चराग के सामने ही बैठकर पढ़ते थे इसीलिए आपक़ी पगड़ी में कभी कभी चराग की लपटों के छूने की वजह से ही आग लग जाती थी।
जब आप बुखारा और समरकंद से तालीम हासिल करके दिल्ली आए तो आपके वालिद साहब ने आपको कहा कि जाओ फतेहपुर सीकरी और हज़रत सैयदना शेख मुहम्मद मूसा गिलानी रहमतुल्लाह से बैत करके आओ।अज़ीज़ों यहाँ ये जरूर समझो कि आखिर क्यों आपके वालिद साहब ने आपको सैयदना शेख मुहम्मद मूसा गिलानी के पास ही भेजा जब की उस वक़्त दिल्ली और भी दीगर आसपास के इलाकों में एक से बढ़कर एक वली अल्लाह, मशायख की जमात थी तो उसके पीछे सबसे बड़ी वजह ये है कि आपके वालिद साहब सैयदना सरकार गोसे आज़म रहमतुल्लाह अलैह के जानिसार आशिक थे और हज़रत सैयदना शेख़ मुहम्मद मूसा रहमतुल्लाह अलैह हुज़ूर गौसे आज़म सरकार रहमतुल्लाह
अलैह की औलाद में से हैं यानी आपके पीरो मुर्शिद हसनी/हुसैनी सादात हैं। इसलिए आपके नाम मे क़ादरी लगा रहता है।
वालिद साहब का आखरी वक़्त
आपके वालिद हज़रत सैफ़ुद्दीन अलैहिर्रहमा आखरी वक़्त में क़ुरआन की बहुत तिलावत करते थे जब किसी सूरह की आयत में अज़ाब का तज़किरा होता तो वो ज़ोर-ज़ोर से रोने लगते और जब कही पर अल्लाह की रहीमी का ज़िक्र होता है उसकी समदानियत का ज़िक्र होता तब आप मुस्कुरा देते । जब आपका आखरी वक़्त आया तो आपने अपने बेटे हज़रत शाह मुहद्दिस अब्दुल हक़ देहलवी रहमतुल्लाह अलैह को बुलाया और क़ुरआन सुनना चाहा। फिर आपने वालिद साहब को क़ुरआन सुनाया उसके बाद उनको सुकून मिला फिर उनकी जुबान से एक जुमला निकला जो यूं था
"में करीम के पास आया हूँ न तोशा है न की है और तोशा लेकर क्यो जाए तो जब वो क़रीम है तो तोशा लेकर जाने से उसकी बडाई कम हो जायेगी"
फिर आपके वालिद साहब ने आखरी जुमला अदा किया और दुनिया ए फानी को अलविदा कह दिया
"मेरा रब अल्लाह है, मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहूँ अलैही वसल्लम मेरे नबी और रसूल है मेरा दीन इस्लाम है और मेरे शेख़ अब्दुल कादिर जीलानी रहमतुल्लाह अलैह हैं "
(नोट-) जीलानी को गिलानी भी पढ़ा जाता है।
हज का इरादा
जब आपकी उम्र 31 साल थी तो उस वक़्त दिल्ली में हज़रत शेख़ इस्हाक़ सोहरावर्दी रहमतुल्लाह अलैह दीन की तब्लीग कर रहे थे आप उनकी महफ़िल में भी जाकर बैठते थे। उस वक़्त आप बहुत मायूस रहने लगे थे जिसकी दो वजह थी एक तो आपके रहबर आपके उस्ताद आपके वालिद हज़रत सैफ़ुद्दीन अलैहिर्रहमा का इंतेक़ाल हो गया था और दूसरा उस वक़्त हिंदुस्तान के हालात बहुत खराब थे। दीने अकबरी जैसा फितना उस दौर में ही सर उठा चुका था। आपने अपनी वालिदा से हज पर जाने की इजाजत माँगी तो उन्होंने कहा ठीक है लेकिन एक वायदा करो कि किसी तीसरे मुल्क नही जाओगे आपने कहा नही जाऊंगा अम्मी जान उसके बाद आप गुजरात गए लेकिन तबतक पता चला कि पानी का जहाज जा
चुका है क्योंकि उन दिनों पानी के रास्ते से ही लोग हज पर जाते थे।फिर जब आप पहले हज पे नही जा सके तो आपकी मुलाकात गुलज़ार ए अबरार के मुसन्निफ़ से हुई। तबकाते अकबरी के मुसन्निफ़ मिर्जा निजामुद्दीन के घर अहमदाबाद में रहे उसके बाद सैयद वजीहुद्दीन अल्वी क़ादरी रहमतुल्लाह अलैह से आपने मुलाकात की और शहबाज़ ए लामकानी मीर ए नूरानी शेख अब्दुल क़ादिर जीलानी रहमतुअल्लाह अलैह पढ़ने की इजाजत ली।
पहला हज
1588 ईस्वी में जब आप हज के लिए निकले तो जिस जहाज में आप सफर कर रहे थे उसमे एक दीवाना जो एक कौन कौन में बैठा "या शेख अब्दुल कादिर, या शेख़ अब्दुल कादिर का विर्द कर रहा था। उसे देखकर आप बहुत खुश हुए क्योंकि आप और आपका खानदान गौसे आज़म रहमतुल्लाह अलैह का शैदाई आशिक था ।
मक्का शरीफ में आमद
जब आपकी आमद मक्का शरीफ में हुई तो उस वक़्त शेख अब्दुल वहाब मुत्तक़ी रहमतुल्लाह अलैह के इल्म व तक़वे की तूती बोलती थी । मक्का के बड़े बड़े उलेमा इनसे हदीस सीखते
और पढ़ते जब आपने उनके बारे में सुना तो आप उनकी बारगाह में चले गए आप की मोहब्बत शेख से बढ़ती जा रही थी फिर रमज़ान में आपने वहीँ पर एतिकाफ किया फिर जब हज का महीना आया आपने उन्ही के साथ हज किया उसके बाद शेख़ अब्दुल वहाब मुत्तक़ी रहमतुल्लाह अलैह ने आपको एक हुजरा दिया जिसमें रहकर आप मुशाहिदा, मुजाहिदा और अमल करते रहे आपसे मिलने के लिए शेख़ हफ्ते में एक दिन जाते और चले आते।
नूरानी ख्वाब
नूरानी ख्वाब से मुराद उस ख्वाब की जिसमें मोमिन अपने प्यारे आक़ा हज़रत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम का दीदार करे। और आप सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम की हदीस मुबारक भी है कि
"जिसने ख्वाब में मुझे देखा उसने मुझे ही देखा क्योंकि शैतान हर शक्ल में आ सकता है सिवाय मेरे "
एक दिन आपको नबी क़रीम का ख्वाब आया की हदीस पढ़ा रहे है और फिर दूसरा ख़्वाब आपको सरकार सैयदना मौला
इमाम हुसैन रजिअल्लाहू तआला अन्हु का ख्वाब आया कि आप दुश्मनो से जंग लड़ रहे हैं। उसके बाद आप नींद से बेदार हुए तो शेख को बताया ख्वाब सुनकर शेख ने फ़रमाया कि तुमको हदीस की तालीम लेनी है और हिन्द में जो लोग आज हदीस की बेहुरमती करने में लगे हैं उनसे इल्मी जंग करनी है। हदीस की तरफ तवज़्ज़ो
इस नूरानी ख्वाब और शेख की पेशनगुई के बाद आप ने हदीस शरीफ को फिर से पढ़ना शुरू कर दिया आपने शेख अब्दुल वहाब मुत्तक़ी रहमतुल्लाह अलैह से तीन साल तक हदीस पढ़ी आपने सबसे ज्यादा मुस्लिम शरीफ पढ़ी उसके बाद आप एक हुजरे में बैठकर रियाज़त व इबादत करते रहे जब आपकी तालीम मुकम्मल हुई तो शेख ने आपको हिन्द वापिस लौटने को कहा। लेकिन आप ने ज़िद कर ली और कहने लगे में मदीना मुनव्वरा छोड़ कर नही जाऊंगा आप का इश्क़ आपको जाने नही दे रहा था और शेख का फर्ज उन्हें रुकने नही दे रहा था फिर आपने कहा अच्छा मुझे बगदाद तो चले जाने दो वहां की हाजरी करके चला जाऊँगा । शेख ने कहा हरगिज़ नही तुम शेख़ अब्दुल कादिर जीलानी रहमतुल्लाह अलैह से जिस क़दर मोहब्बत करते हो मुझे यकीन है कि तुम
वही रुक जाओगे और लौटकर कभी घर नही जाओगे और एक तो आपकी माँ की भी आखरी नसीहत भी थी कि बेटा किसी तीसरे मुल्क मत जाना क्योंकि वो भी जानती थी कि आप बगदाद पहुंचने के बाद कभी वापिस नही आएंगे। उसके बाद जब आपको माँ की दी हुई नसीहत याद आई तो आप हिन्द वापिस आने को तैयार हुए जितने दिन आप मदीना मुनव्वरा में रहे आपने कभी जूते या चप्पल नही पहनी आप नंगे पैर ही वहाँ अदब के साथ बैठे रहते। फिर जब आप वहां से हिन्द के लिए रवाना होने लगे तो शेख ने आपको हुज़ूर गौसे आज़म रहमतुल्लाह अलैह का झुब्बा मुबारक अता किया अल्लाह अल्लाह ये आपके लिए शायद सबसे नायाब तोहफा था जिसे पाकर आप शेख के क़दमो में गिर गए क़दमबोशी करके हिन्द की और चल पड़े।
दिल्ली वापसी
फिर जब आप वहां से रवाना हुए तो 1591 में आप दिल्ली पहुंचे।यहाँ पहुंचकर आपने एक मदरसा और एक बहुत बड़ी लाइब्रेरी बनाई।जो उस वक्त दिल्ली की सबसे बड़ी लाईब्रेरी थी क्योंकि आप मक्का से अपने साथ बहुत सारी किताबे भी लाये थे आपकी लाइब्रेरी में बड़े बड़े उलमा आते जो किताबो
को ले जाते और पढ़कर वापिस कर देते फिर यही से आपने दीन की तब्लीग का काम शुरू कर दिया।
आपके कारनामे
आप रहमतुल्लाह अलैह इल्म व इश्क़ दोनो के समंदर थे।आपने 100 किताबें लिखी हैं जिसमें 60 किताबे बहुत ही मोतबर(विशेष) हैं और 40 रिसाले हैं। जिनमे कुछ मशहूर व मोतबर किताबें जैसे अखबारुल अख़्यार, फतुहुल ग़ैब, जज्बुल कुलूब,तकमितुल ईमान, मिश्कात शरीफ का तर्जुमा आपने अरबी और फारसी दोनो जुबानों में किया है। उस वक़्त हिन्द में फारसी जुबान का बोलबाला था इसलिए आपने फारसी और अरबी दोनो जुबान में तरजुमा किया है। आपने सरकार गौसे आज़म रहमतुल्लाह अलैह की शान और
तसव्वुफ़/अमल/अक़ाएद पर बहुत बड़ी बड़ी किताबे लिखी
अबुल फ़ज़ल फैज़ी
अबुल फजल फैज़ी जो उस वक़्त बादशाह अकबर के दरबार मे नवरत्न था उससे आपकी दोस्ती थी लेकिन जब वो कुफ्र के रास्ते पर चल पड़ा तो आपने फ़रमाया
"फैज़ी नफासत व बलाग़त ने मुमताज़ रोजगार तो था ही लेकिन अफसोस उसने कुफ्र और गुमराही में गिरकर बदबख्ती के निशान अपने जिस्म व किरदार पर लगा लिए अब मोमिनो के लिए उसका और उसकी जमात का नाम लेना मुनासिब नही"
(फेहरिस्तुत तवालीफ)
मुजद्दीद अल्फे सानी रहमतुल्लाह अलैह और आप
अमूमन हज़रात ये समझते हैं कि हज़रत शेख मुजद्दीद अल्फे सानी रहमतुल्लाह अलैह और आप के बीच इख़्तिलाफ़ था जबकि हक़ीक़त में ऐसा कुछ भी नही था । एक मुजद्दीद था तो दूसरा मुहद्दिस एक ने तौहीद को सामने रखकर काम किया है तो दूसरे ने रिसालत को दोनो के रास्ते अलग अलग लेकिन काम एक ही था। यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि आप मुजद्दीद अल्फे सानी रहमतुल्लाह अलैह से 9 साल बड़े है। आप मे और मुजद्दीद अल्फे सानी रहमतुल्लाह अलैह में एक फ़र्क़ ये था तो आपने दरबार से दूर रहकर अकबर के फ़ितने की मजम्मत (विरोध) किया और मुजद्दीद अल्फे सानी रहमतुल्लाह अलैह ने दराबर में घुसकर अकबर के सामने उसे चैलेंज किया। लेकिन इसका मतलब ये नही की आप और
मुजद्दीद में इख्तिलाफ था लिहाजा अवाम को वैसे भी बड़ो के मसले पर चुप रहने का हुक्म है तो इस मामले में खुदा के लिए इन दोनों मुकद्दस हस्तियों पर अपनी जुबान बन्द ही रखे तो बहतर है।
हनफी से शाफई
एक बार आपके मन मे आया कि मेरे पेशवा सरकार गौसे आज़म रहमतुल्लाह अलैह हम्बली हैं तो में शाफ़ाई बन जाऊं तभी शेख़ अब्दुल वहाब मुतक़्क़ी रहमतुल्लाह अलैह ने इमाम ए आज़म अबू हनीफ़ा नोमान बिन साबित रहमतुल्लाह अलैह की शान में ऐसा लेक्चर दिया उस दिन से आपने कभी भी शाफई होने की सोची भी नही ।
(नोट- हनफी - ये उसको कहते है जो इमाम ए आज़म अबू हनीफ़ा रहमतुल्लाह अलैह की मानने वाले होते हैं आप पहले इमाम माने जाते है
शाफई--ये इमाम शाफई रहमतुल्लाह अलैह के मानने वाले हैं इन्हें दूसरा इमाम कहा जाता है
हम्बली--ये तीसरे इमाम इमाम हम्बल रहमतुल्लाह अलैह के मानने वाले होते हैं सैयदना सरकार शेख अब्दुल कादिर जीलानी रहमतुल्लाह अलैह भी हम्बली हैं
मालिकी--ये चौथे और आखरी इमाम इमाम मलिक रहमतुल्लाह अलैह के मानने वाले होते हैं।)
(मसलके आला हजरत-- ये कोई नया मसलक नही है अगर कोई ऐसा सोचता है तो वो गलत है ये मसलके आज़म अबू हनीफा रहमतुल्लाह अलैह का ही एक नक्शा (रूप है ये इमाम ए आज़म के मसलक से हटकर नही है अगर कोई इसे नया मसलक समझ कर इसे फॉलो करता तो ये गुनाह ए अज़ीम है
आपने 1611 में एक खानकाह बनाई जिसका नाम रखा ख़ानक़ाह ए कादरिया।जहां पर आपने हदीस, तसव्वुफ़, फ़िक़्ह ए हनफी,हुकुकुल इबाद पर उम्दा किताबे तहरीर की आपकी ज़िंदगी का एक एक लम्हा सुन्नते मुस्तफा सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम पर अमल करते हुए गुजरा है आप एक क़ामिल वली
अल्लाह भी है तसव्वुफ़ पर आपने बहुत सारी किताबे लिखीं है।आपके तसव्वुफ़ की झलक यहां से मिलती है कि आप अहले बैत को बेझिझक अलैहिस्सलाम कहते थे। आप औलिया अल्लाह के आस्ताने पर जब भी जाते तो चप्पल उतार देते थे।1619 ईस्वी में आपका इंतेक़ाल हुआ लेकिन आपके काम ताक़यामत तक आपके इल्म व इश्क़ की गवाही देते रहेंगे।
मीर सैयद अब्दुल वाहिद बिलग्रामी रहमतुल्लाह अलैह
आपकी विलादत 915 हिजरी में हुई आपका नाम मीर सैयद अब्दुल वाहिद था!
आपका शजरा ए नसब आला खानदान से मिलता है आप इमाम जैनुल आब्दीन रजिअल्लाहू तआला अन्हु के शहज़ादे इमाम जैद शहीद रजिअल्लाहू तआला अन्हु की औलाद में से हैं। इसीलिए आप को जैदी हसैनी सैयद भी कहा जाता है।
आपकी तालीम
आप रहमतुल्लाह अलैह ने अपने घर पे ही इब्तिदाई तालीम हासिल की और दीन की तब्लीग में लग गए और तसव्वुफ़ के रास्ते पर निकल पड़े आप तसव्वुफ़ बचपन ही से पसन्द करते थे और आपका खानदान मुबारक हमेशा से ही इल्म और
रूहानियत का शफ़्फ़ाफ़ आईना रहा है अल्लाह रब्बुल इज्जत का खास करम इस खानवादे पर रहा है कि हर वक़्त में इस खानदान से एक न एक नगीना जरूर मिलता रहा है जिससे मारफत व रूहानियत फ़ख़ कर सके आपकी शान बहुत ही निराली है आप का मक़ाम बहुत आला है।
आप के नाम में बिलग्रामी लगा रहता है दरसअल आप बिलग्राम में रहने की वजह से आपके नाम मे बिलग्रामी लगा रहता है अब बिलग्राम शरीफ की अज़मत जानने के लिए इतना जानना जरूरी है कि आला हज़रत अजीमुल बरक़त इमाम अहमद रज़ा खान फ़ाज़िले बरेलवी रहमतुल्लाह अलैह के पीरो-मुर्शिद और उनका पीर खाना महरेरा शरीफ़ के सादात के जद्दे अमज़द बिलग्राम शरीफ से ही गये थे आज भी महरेरा शरीफ और मसौली शरीफ में आप के खानदान के लोग रहते हैं यानि की जितने भी जैदी सादात हिन्द के यूपी में है उनकी असल बिलग्राम शरीफ में है जिनमे फातहै बिलग्राम मखदूम सैयद मोहम्मद सुगरा रहमतुल्लाह अलैह सारे सैयदों के जद हैं। आप रहमतुल्लाह अलैह की शान और अज़मत
निराली है आप तक़वे और परहेज़गारी के कायल थे। आप अपने वक़्त के इमाम ए शरीयत व तरीक़त थे।
नबी करीम से आपकी निस्बत और आपकी मोहब्बत
आप रहमतुल्लाह अलैह की निस्बत अपने जद्दे आला ताजदारे मदीना सैय्दुल अम्बिया हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम से आपकी मोहब्बत और निस्बत का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक बार मौलाना आजाद बिलग्रामी अलैहिर्रहमा दिल्ली में रुके हुए थे वहां उनकी मुलाकात सिलसिला ए चिश्तिया के अज़ीम बुजुर्ग शेख कलीमुल्लाह चिश्ती अलैहिर्रहमा से हुई दोनों बुजुर्गो में देर तक बात हुई तभी मौलाना आजाद बिलग्रामी अलैहिर्रहमा ने आप रहमतुल्लाह अलैह का तज़किरा छेड़ा तो शेख कलीमुल्लाह चिश्ती ने आप की बहुत तारीफ की और फरमाया कि मैने एक बार ख्वाब देखा की में मदीने शरीफ में हूँ प्यारे आक़ा अलैहिस्सलाम का दरबार सज़ा था मेने देखा कि आक़ा अलैहिस्सलाम किसी शख्श से मुस्कुरा कर गुफ्तगू कर रहे थे मेने सोचा कि आखिर ऐसा कौन खुशनसीब होगा जिससे ताजदारे आलम महबूबे खुदा शफकत और मोहब्बत
के साथ गुफ्तगू कर रहे हैं इतने में मेरे साथ एक बुजुर्ग थे वो बोल पड़े की ये कोई और नही बल्कि मीर सैयद अब्दुल वाहिद बिलग्रामी रहमतुल्लाह अलैह हैं अल्लाहु अकबर मौत से डर लगता है
एक बार एक शख्श आपकी बारगाह में हाज़िर हुआ और उसने फ़रमाया कि में मौत से बहुत डरता हूँ कोई ऐसा वज़ाएफ़ बता दीजिए कि मौत का डर खत्म जो जाए आपने उससे फ़रमाया की जाओ आज से रोजाना जो हो सके सदका दिया करो और फ़र्ज़ नमाज़ों के साथ नफिल भी अदा किया करो उसने ऐसा ही किया कुछ दिनों बाद वो शख्श आपकी बारगाह में हाजिर हुआ तो आपने पूछा क्या हुआ अब केसी हालत है उसने आपके क़दमो में गिरकर क़दमबोशी की और कहा हुज़ूर कल तक मौत से डरता था और आज मौत को गले लगाने का हर वक़्त मन करता है लेकिन ऐसा क्यों और कैसे हुआ--?आपने आखिर कौन सा जादू कर दिया।
आप रहमतुल्लाह अलैह ने फरमाया की जब बन्दा कहीं पर रहने के लिए अपना घर बना लेता है तो उसे वहां जाकर रहने का मन करने लगता है और जबसे आप सदक़ा करने लगे हो तबसे जन्नत में तुम्हारा घर तामीर हो गया है इसीलिए अब तुम्हे
मरने से डर नही लगता है क्योंकि अब तुम्हारे पास मरने के बाद रहने का ठिकाना हो गया है
शबा सनाबिल शरीफ
शबा सनाबिल शरीफ आपकी बहुत ही मोतबर किताब है जो आपकी शोहरत के लिए भी काफी जानी जाती है आप की शान व अज़मत बहुत ही निराली है आपकी शान में आला हज़रत अजीमुल बरक़त अलैहिर्रहमा ने अपनी किताब फतावा रिज़्विया में आपकी शान को 2 पेज में तसानीफ़ किया है जिससे आपकी शान का अंदाज़ा लगाया जा सकता है आप का नाम हम अहले तसव्वुफ ता कयामत तक अदब से लेते रहेंगे आज भी आपका मुबारक खानदान शाद व आबाद है और ये सिलसिला ता क़यामत तक चलता रहेगा।
शाह मुहिबबुल्लाह इलाहाबादी रहमतुल्लाह अलैह
आपकी विलादत 2 सफर 996 हिजरी और अंग्रेज़ी केलेंडर के मुताबिक 1558 ईस्वी में सदरपुर जिला खैराबाद में एक अज़ीम खानदान में हुई थी उस वक़्त मुगल बादशाह अकबर की हुकूमत पूरे मुल्क पर थी। आपका नाम शाह मुहिबबुल्लाह था।आप चिश्तिया सिलसिला के अज़ीम बुजुर्ग हैं। मुगल बादशाह शाहजहां के दौर में आपकी विलायत के डंके हिन्द की सरजमीं पर बज रहे थे। आप वहदतुल वजूद के कायल थे। आपके वालिद का नाम शेख मुबारिज़ व दादा का नाम शेख पीर था। आपके पूर्वज हज़रत क़ाज़ी शुएब अलैहिर्रहमा जो हज़रत ख्वाजा फरीदुद्दीन गंज शकर रहमतुल्लाह अलैह के दादा थे वो चंगेज़ खान के जुल्म से तंग आकर लाहौर चले और क़स्बा कसूर में रहने लगे उस वक़्त वो हिस्सा भी हिन्द में ही था। | यक़ीन हो गया कि जबतक में वज़ू न कर लूं मेरा बेटा दूध नही पीता है इसीलिए खानदान में आपको सब बहुत मानते थे। घर का खाना छोड़ दिया आप शरीयत के पाबन्द थे । हराम हलाल का ख़्याल रखते थे। एक बार आपने दो महीने घर का खाना नही खाया। जब भूख लगती आप जंगलो मे चले जाते और घास पत्ते खा लेते जब वालिद ने देखा तो उन्होंने कहा बेटे इतना कमज़ोर हो गए हो क्या बात है खाना क्यों नही खाते हो आपने जवाब दिया अब्बा जान आप शहर के क़ाज़ी है आपका दबदबा अवाम पर है आपको पूरा गुजरात जानता है मुझे शक है कि जब आपका खादिम बाजार से सब्ज़ी लाता है तो शायद आपके दबदबे और ओहदे की वजह से वो पैसा न लेता हो और हम अंजान में हराम लुकमा खाते हो इसी डर से में घर का खाना नही खाता हूँ। बेटे का जवाब सुनकर वालिद साहब मुरकुराये और कहा बेटे अगर में हराम और हलाल लुकमे पर ध्यान न देता होता तो अल्लाह मुझे तुझ जेसा नेक सालेह बेटा न अता फरमाता। आप आखरी वक़्त में बहुत कमज़ोर हो गए थे। एक दिन आपने सोचा अब कल से में हदीस नही पढ़ाऊंगा क्योंकि उम्र बहुत ज्यादा हो चुकी थी उसी रात आपक़ो नबी क़रीम की ज़ियारत हुई और कहा ए नवासे तुम जब हदीस पढ़ाते हो तो हम तुम्हारे हल्के मे बेठकर सुनते हैं सुबह हुई तो आप रोने लगें और उसके बाद से आप जबतक बज़ाहिर ज़िंदा रहे आपने खुद हदीस पढ़ाई बड़े शोक से आप हदीस पढ़ाते थे । जब आपका इंतेक़ाल हुआ तो सारा गुजरात सदमे में था। आप के जनाज़े में एक सैलाब था हर किसी की यही ख्वाहिश थी काश में एक बार नायब ए गौसे आज़म के जनाज़े को कांधा दे सकूँ लाखो के मजमे के बीच से आशिके रसूल का जनाज़ा जा रहा था आज भी आपके आस्ताने से लोगो को फेज़ मिलता है और ताक़यामत मिलता रहेगा। सैयद वजीहुद्दीन अल्वी रहमतुल्लाह अलैह एक नज़र में एक-- आप कहते रहते की ख्वाज़ा गौस मोहम्मद ग्वालियरी रहमतुल्लाह अलैह ने मुझे खुदा तक पहुँचाया है। दो -- शाह मुहद्दिस अब्दुल हक़ देहलवी रहमतुल्लाह अलैह लिखते हैं कि जब में गुजरात मे रुका तो मे भी उनसे मिलने गया मेने उन्हें वली ए क़ामिल पाया और आप रियाज़त बहुत करते थे । तीन-- मुल्ला अब्दुल कादिर बदायूनी अलैहिर्रहमा ने अपनी किताब मुन्तख़बुत तवारीख में लिखा है कि शायद ही कोई किताब बची हो जिसकी शरह या हाशिया न लिखी हो और आप जिसके हक़ में दुआ करते थे वो फौरन पूरी हो जाती थी। चार--आपने सिर्फ चार बार मदरसे से बाहर अपने कदम निकाले हैं वरना आप हमेशा मदरसे में ही रहते और तालीम सिखाते रहते। पाँच-- शेख़ अली मुत्तक़ी अलैहिर्रहमा ने आपको मुजद्दीद कहा। छः--आप कहते रहते थे कि ज़ाहिर शरीयत पर ऐसी नज़र होनी चाहिए जैसी शेख अब्दुल मुत्तक़ी अलैहिर्रहमा की है और हक़ाएक़ पर एसी नज़र होनी चाहिए जैसी हमारे मुर्शिद ख्वाज़ा गौस मुहम्मद ग्वालियरी रहमतुल्लाह अलैह की है। सात--आपक़ो साठ से ज्यादा उलूम आते थे अस्सी हज़ार तलबा को आपने हाफिज़/आलिम बनाया है। आठ--आपके जद्दे अमजद यमन से हिन्द आये थे। नौ--आपका आस्ताना हिंद के शहर गुजरात मे है। आप का सिलसिला सत्तारिया है। दस--आप एक वली ए क़ामिल, क़ुतुब ए गुजरात, मुजद्दीद, मुहक़्क़ीक़ है ताक़यामत तक आप ज़िंदा रहेगें। शाह मुहद्दिस अब्दुल हक़ देहलवी रहमतुल्लाह अलैह जब भी कहीं पर लफ़्ज़े मुहद्दिस का जिक्र हो तो एक नाम ज़हन में गर्दिश करता रहता है और वो नाम है हज़रत अल्लामा शाह मुहद्दिस अब्दुल हक़ देहलवी क़ादरी रहमतुल्लाह अलैह का है। आप की विलादत एक हज़ार पाँच सौ इक्यावन ईस्वी दिल्ली में हुई। आपके बचपन का नाम अब्दुल हक़ था । आप हज़रत आगा मुहम्मद तुर्क बुखारी रहमतुल्लाह अलैह की औलाद में से हैं। आपके वालिद का नाम हज़रत अल्लामा सैफ़ुद्दीन रहमतुल्लाह अलैह था।आपके जद्दे अमजद आगा मुहम्मद तुर्क बुखारी रहमतुल्लाह अलैह जब बुखारा से दिल्ली आए थे उस वक़्त अलाउद्दीन खिलजी की हुकूमत थी। आगा मुहम्मद रहमतुल्लाह अलैह अदब और अस्करी निजाम में बहुत माहिर थे आपने जब बुखारा से हिंदुस्तान के लिए हिजरत की उस वक़्त आपके साथ मुरीद और कुछ लोग भी आये थे सबको लेकर आप गुजरात आये और क़याम किया। एक रिवायात के मुताबिक अल्लाह ने आपको तकरीबन एक सौ औलादे अता की थी जिसमे निन्यानवे बच्चे इंतेक़ाल कर गए थे और सिर्फ एकबच्चा बचा था जिसका नाम शेख मोइजुद्दीन था, उसके बाद शेख मूसा, और शेख फ़िरोज़ जो कि जंग में शहीद हो गए थे उनके बाद एक बेटा हुआ जिसका नाम शाद उल्लाह था। उनके दो बेटे थे जिनमें आपके वालिद हज़रत शेख सैफ़ुद्दीन अलैहिर्रहमा भी थे। आपके वालिद आपके वालिद का तज़किरा किये बगैर आपकी सवानेह का एक भी हिस्सा बयान नही किया जा सकता है और न ही समझाया जा सकता है । आपके वालिद को शेख अमानुल्लाह पानीपती अलैहिर्रहमा जैसे आलिम और वली की सोहबत मिली है। आप एक सूफी/आलिम/मुत्तक़ी/परहेजगार/वली थे। जिसका असर आप पर भी पड़ा।आपके वालिद सुल्तानुल औलिया महबूबे सुब्हानी हज़रत सैयदना शेख अब्दुल कादिर जीलानी रहमतुल्लाह अलैह के सच्चे आशिक थे । हर वक़्त उनका विर्द करते रहते थे। आपने बचपन मे अपने वालिद हज़रत सैफ़ुद्दीन अलैहिर्रहमा से तालीम हासिल की। सबसे पहले वालिद साहब से आपने तीन पारे पढ़े उसके बाद आपने खुद क़ुरआन पढ़ना शुरू किया और तीन महीने में क़ुरआन मुकम्मल किया फिर आपने खत्ताती सीखनी शुर किया।क्योंकि उस दौर में आजकल की तरह प्रिंटिंग प्रेस नही थे लिहाजा मुसन्निफ़ को अपने हाथों से ही लिखना होता था। लिहाजा आपने ये हुनर भी सिर्फ एक महीने में सीख लिया फिर जो किताब आपके वालिद को अहम लगती वो आपको शुरू का पढ़ा देते थे उसके बाद आप उसको पूरी पढ़ते और याद कर लेते।आप फरमाते हैं कि एक बार किताब पढ़ने के बाद वो किताब आपको हमेशा याद रहती। आपने सबसे पहली किताब दीवाने हाफिज़ और हज़रत शेख सादी रहमतुल्लाह अलैह की किताब बोस्तान पढ़ी। उस दौर में बच्चो को नज़्म बहुत याद कराई जाती थी लेकिन आपके वालिद ने आपको चन्द नज़्म याद करने के लिए दिए और आपने उनको चन्द दिनों में याद कर लिया। फिर आपने मीज़ान, मिस्बाह, काफिया जैसी किताबो को याद कर लिया आप जिस किताब को पढ़ते सारी आपको याद हो जाती थी। बारह साल की उम्र में शरह शमशिया, शरह अक़ाएद जैसी किताबें याद कर लीं। उसके बाद जब आपकी उम्र पंद्रह साल हुई तो आपको जो किताब मिलती आप पढ़ने लग जाते और याद कर लेते। तालीम से लगाव तालीम से लगाव ही है कि आप का तज़किरा आज भी हो रहा है और ताक़यामत तक आपका नाम यूं ही अदब के साथ लिया जाता रहेगा। आप अट्ठारह-अट्ठारह घण्टे रोज मुसलसल पढ़ते रहते और कभी कभी तो बीस-बाईस घण्टे तक आप पढ़ते रहते थे। मिया यूं ही नही कोई मुहद्दिस बन जाता है अल्लाह अल्लाह एक तो आपका ज़हन माशाल्लाह उसके बाद ये ग़ौरो फिक्र तो फिर क्यों न आपकी जात मुहद्दिस हो। आप तालीम में इतना मशगूल रहते की उलेमा फरमाते हैं कि कभी कभी सर पर जो पगड़ी बंधी हुई थी उसमें आग लग जाती और जबतक वो आग आपकी दाढ़ी में न लग जाती तबतक आपको मालूम ही न होता। हिंदुस्तान में इल्म हासिल करने के बाद आप बुखारा और समरकंद भी गए फिर आप तालीम हासिल करने के बाद दिल्ली आ गए। यहाँ ये ध्यान देना जरूरी है कि उन दिनों लोग चराग के सामने ही बैठकर पढ़ते थे इसीलिए आपक़ी पगड़ी में कभी कभी चराग की लपटों के छूने की वजह से ही आग लग जाती थी। जब आप बुखारा और समरकंद से तालीम हासिल करके दिल्ली आए तो आपके वालिद साहब ने आपको कहा कि जाओ फतेहपुर सीकरी और हज़रत सैयदना शेख मुहम्मद मूसा गिलानी रहमतुल्लाह से बैत करके आओ।अज़ीज़ों यहाँ ये जरूर समझो कि आखिर क्यों आपके वालिद साहब ने आपको सैयदना शेख मुहम्मद मूसा गिलानी के पास ही भेजा जब की उस वक़्त दिल्ली और भी दीगर आसपास के इलाकों में एक से बढ़कर एक वली अल्लाह, मशायख की जमात थी तो उसके पीछे सबसे बड़ी वजह ये है कि आपके वालिद साहब सैयदना सरकार गोसे आज़म रहमतुल्लाह अलैह के जानिसार आशिक थे और हज़रत सैयदना शेख़ मुहम्मद मूसा रहमतुल्लाह अलैह हुज़ूर गौसे आज़म सरकार रहमतुल्लाह अलैह की औलाद में से हैं यानी आपके पीरो मुर्शिद हसनी/हुसैनी सादात हैं। इसलिए आपके नाम मे क़ादरी लगा रहता है। वालिद साहब का आखरी वक़्त आपके वालिद हज़रत सैफ़ुद्दीन अलैहिर्रहमा आखरी वक़्त में क़ुरआन की बहुत तिलावत करते थे जब किसी सूरह की आयत में अज़ाब का तज़किरा होता तो वो ज़ोर-ज़ोर से रोने लगते और जब कही पर अल्लाह की रहीमी का ज़िक्र होता है उसकी समदानियत का ज़िक्र होता तब आप मुस्कुरा देते । जब आपका आखरी वक़्त आया तो आपने अपने बेटे हज़रत शाह मुहद्दिस अब्दुल हक़ देहलवी रहमतुल्लाह अलैह को बुलाया और क़ुरआन सुनना चाहा। फिर आपने वालिद साहब को क़ुरआन सुनाया उसके बाद उनको सुकून मिला फिर उनकी जुबान से एक जुमला निकला जो यूं था "में करीम के पास आया हूँ न तोशा है न की है और तोशा लेकर क्यो जाए तो जब वो क़रीम है तो तोशा लेकर जाने से उसकी बडाई कम हो जायेगी" फिर आपके वालिद साहब ने आखरी जुमला अदा किया और दुनिया ए फानी को अलविदा कह दिया "मेरा रब अल्लाह है, मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहूँ अलैही वसल्लम मेरे नबी और रसूल है मेरा दीन इस्लाम है और मेरे शेख़ अब्दुल कादिर जीलानी रहमतुल्लाह अलैह हैं " जीलानी को गिलानी भी पढ़ा जाता है। हज का इरादा जब आपकी उम्र इकतीस साल थी तो उस वक़्त दिल्ली में हज़रत शेख़ इस्हाक़ सोहरावर्दी रहमतुल्लाह अलैह दीन की तब्लीग कर रहे थे आप उनकी महफ़िल में भी जाकर बैठते थे। उस वक़्त आप बहुत मायूस रहने लगे थे जिसकी दो वजह थी एक तो आपके रहबर आपके उस्ताद आपके वालिद हज़रत सैफ़ुद्दीन अलैहिर्रहमा का इंतेक़ाल हो गया था और दूसरा उस वक़्त हिंदुस्तान के हालात बहुत खराब थे। दीने अकबरी जैसा फितना उस दौर में ही सर उठा चुका था। आपने अपनी वालिदा से हज पर जाने की इजाजत माँगी तो उन्होंने कहा ठीक है लेकिन एक वायदा करो कि किसी तीसरे मुल्क नही जाओगे आपने कहा नही जाऊंगा अम्मी जान उसके बाद आप गुजरात गए लेकिन तबतक पता चला कि पानी का जहाज जा चुका है क्योंकि उन दिनों पानी के रास्ते से ही लोग हज पर जाते थे।फिर जब आप पहले हज पे नही जा सके तो आपकी मुलाकात गुलज़ार ए अबरार के मुसन्निफ़ से हुई। तबकाते अकबरी के मुसन्निफ़ मिर्जा निजामुद्दीन के घर अहमदाबाद में रहे उसके बाद सैयद वजीहुद्दीन अल्वी क़ादरी रहमतुल्लाह अलैह से आपने मुलाकात की और शहबाज़ ए लामकानी मीर ए नूरानी शेख अब्दुल क़ादिर जीलानी रहमतुअल्लाह अलैह पढ़ने की इजाजत ली। पहला हज एक हज़ार पाँच सौ अठासी ईस्वी में जब आप हज के लिए निकले तो जिस जहाज में आप सफर कर रहे थे उसमे एक दीवाना जो एक कौन कौन में बैठा "या शेख अब्दुल कादिर, या शेख़ अब्दुल कादिर का विर्द कर रहा था। उसे देखकर आप बहुत खुश हुए क्योंकि आप और आपका खानदान गौसे आज़म रहमतुल्लाह अलैह का शैदाई आशिक था । मक्का शरीफ में आमद जब आपकी आमद मक्का शरीफ में हुई तो उस वक़्त शेख अब्दुल वहाब मुत्तक़ी रहमतुल्लाह अलैह के इल्म व तक़वे की तूती बोलती थी । मक्का के बड़े बड़े उलेमा इनसे हदीस सीखते और पढ़ते जब आपने उनके बारे में सुना तो आप उनकी बारगाह में चले गए आप की मोहब्बत शेख से बढ़ती जा रही थी फिर रमज़ान में आपने वहीँ पर एतिकाफ किया फिर जब हज का महीना आया आपने उन्ही के साथ हज किया उसके बाद शेख़ अब्दुल वहाब मुत्तक़ी रहमतुल्लाह अलैह ने आपको एक हुजरा दिया जिसमें रहकर आप मुशाहिदा, मुजाहिदा और अमल करते रहे आपसे मिलने के लिए शेख़ हफ्ते में एक दिन जाते और चले आते। नूरानी ख्वाब नूरानी ख्वाब से मुराद उस ख्वाब की जिसमें मोमिन अपने प्यारे आक़ा हज़रत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम का दीदार करे। और आप सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम की हदीस मुबारक भी है कि "जिसने ख्वाब में मुझे देखा उसने मुझे ही देखा क्योंकि शैतान हर शक्ल में आ सकता है सिवाय मेरे " एक दिन आपको नबी क़रीम का ख्वाब आया की हदीस पढ़ा रहे है और फिर दूसरा ख़्वाब आपको सरकार सैयदना मौला इमाम हुसैन रजिअल्लाहू तआला अन्हु का ख्वाब आया कि आप दुश्मनो से जंग लड़ रहे हैं। उसके बाद आप नींद से बेदार हुए तो शेख को बताया ख्वाब सुनकर शेख ने फ़रमाया कि तुमको हदीस की तालीम लेनी है और हिन्द में जो लोग आज हदीस की बेहुरमती करने में लगे हैं उनसे इल्मी जंग करनी है। हदीस की तरफ तवज़्ज़ो इस नूरानी ख्वाब और शेख की पेशनगुई के बाद आप ने हदीस शरीफ को फिर से पढ़ना शुरू कर दिया आपने शेख अब्दुल वहाब मुत्तक़ी रहमतुल्लाह अलैह से तीन साल तक हदीस पढ़ी आपने सबसे ज्यादा मुस्लिम शरीफ पढ़ी उसके बाद आप एक हुजरे में बैठकर रियाज़त व इबादत करते रहे जब आपकी तालीम मुकम्मल हुई तो शेख ने आपको हिन्द वापिस लौटने को कहा। लेकिन आप ने ज़िद कर ली और कहने लगे में मदीना मुनव्वरा छोड़ कर नही जाऊंगा आप का इश्क़ आपको जाने नही दे रहा था और शेख का फर्ज उन्हें रुकने नही दे रहा था फिर आपने कहा अच्छा मुझे बगदाद तो चले जाने दो वहां की हाजरी करके चला जाऊँगा । शेख ने कहा हरगिज़ नही तुम शेख़ अब्दुल कादिर जीलानी रहमतुल्लाह अलैह से जिस क़दर मोहब्बत करते हो मुझे यकीन है कि तुम वही रुक जाओगे और लौटकर कभी घर नही जाओगे और एक तो आपकी माँ की भी आखरी नसीहत भी थी कि बेटा किसी तीसरे मुल्क मत जाना क्योंकि वो भी जानती थी कि आप बगदाद पहुंचने के बाद कभी वापिस नही आएंगे। उसके बाद जब आपको माँ की दी हुई नसीहत याद आई तो आप हिन्द वापिस आने को तैयार हुए जितने दिन आप मदीना मुनव्वरा में रहे आपने कभी जूते या चप्पल नही पहनी आप नंगे पैर ही वहाँ अदब के साथ बैठे रहते। फिर जब आप वहां से हिन्द के लिए रवाना होने लगे तो शेख ने आपको हुज़ूर गौसे आज़म रहमतुल्लाह अलैह का झुब्बा मुबारक अता किया अल्लाह अल्लाह ये आपके लिए शायद सबसे नायाब तोहफा था जिसे पाकर आप शेख के क़दमो में गिर गए क़दमबोशी करके हिन्द की और चल पड़े। दिल्ली वापसी फिर जब आप वहां से रवाना हुए तो एक हज़ार पाँच सौ इक्यानवे में आप दिल्ली पहुंचे।यहाँ पहुंचकर आपने एक मदरसा और एक बहुत बड़ी लाइब्रेरी बनाई।जो उस वक्त दिल्ली की सबसे बड़ी लाईब्रेरी थी क्योंकि आप मक्का से अपने साथ बहुत सारी किताबे भी लाये थे आपकी लाइब्रेरी में बड़े बड़े उलमा आते जो किताबो को ले जाते और पढ़कर वापिस कर देते फिर यही से आपने दीन की तब्लीग का काम शुरू कर दिया। आपके कारनामे आप रहमतुल्लाह अलैह इल्म व इश्क़ दोनो के समंदर थे।आपने एक सौ किताबें लिखी हैं जिसमें साठ किताबे बहुत ही मोतबर हैं और चालीस रिसाले हैं। जिनमे कुछ मशहूर व मोतबर किताबें जैसे अखबारुल अख़्यार, फतुहुल ग़ैब, जज्बुल कुलूब,तकमितुल ईमान, मिश्कात शरीफ का तर्जुमा आपने अरबी और फारसी दोनो जुबानों में किया है। उस वक़्त हिन्द में फारसी जुबान का बोलबाला था इसलिए आपने फारसी और अरबी दोनो जुबान में तरजुमा किया है। आपने सरकार गौसे आज़म रहमतुल्लाह अलैह की शान और तसव्वुफ़/अमल/अक़ाएद पर बहुत बड़ी बड़ी किताबे लिखी अबुल फ़ज़ल फैज़ी अबुल फजल फैज़ी जो उस वक़्त बादशाह अकबर के दरबार मे नवरत्न था उससे आपकी दोस्ती थी लेकिन जब वो कुफ्र के रास्ते पर चल पड़ा तो आपने फ़रमाया "फैज़ी नफासत व बलाग़त ने मुमताज़ रोजगार तो था ही लेकिन अफसोस उसने कुफ्र और गुमराही में गिरकर बदबख्ती के निशान अपने जिस्म व किरदार पर लगा लिए अब मोमिनो के लिए उसका और उसकी जमात का नाम लेना मुनासिब नही" मुजद्दीद अल्फे सानी रहमतुल्लाह अलैह और आप अमूमन हज़रात ये समझते हैं कि हज़रत शेख मुजद्दीद अल्फे सानी रहमतुल्लाह अलैह और आप के बीच इख़्तिलाफ़ था जबकि हक़ीक़त में ऐसा कुछ भी नही था । एक मुजद्दीद था तो दूसरा मुहद्दिस एक ने तौहीद को सामने रखकर काम किया है तो दूसरे ने रिसालत को दोनो के रास्ते अलग अलग लेकिन काम एक ही था। यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि आप मुजद्दीद अल्फे सानी रहमतुल्लाह अलैह से नौ साल बड़े है। आप मे और मुजद्दीद अल्फे सानी रहमतुल्लाह अलैह में एक फ़र्क़ ये था तो आपने दरबार से दूर रहकर अकबर के फ़ितने की मजम्मत किया और मुजद्दीद अल्फे सानी रहमतुल्लाह अलैह ने दराबर में घुसकर अकबर के सामने उसे चैलेंज किया। लेकिन इसका मतलब ये नही की आप और मुजद्दीद में इख्तिलाफ था लिहाजा अवाम को वैसे भी बड़ो के मसले पर चुप रहने का हुक्म है तो इस मामले में खुदा के लिए इन दोनों मुकद्दस हस्तियों पर अपनी जुबान बन्द ही रखे तो बहतर है। हनफी से शाफई एक बार आपके मन मे आया कि मेरे पेशवा सरकार गौसे आज़म रहमतुल्लाह अलैह हम्बली हैं तो में शाफ़ाई बन जाऊं तभी शेख़ अब्दुल वहाब मुतक़्क़ी रहमतुल्लाह अलैह ने इमाम ए आज़म अबू हनीफ़ा नोमान बिन साबित रहमतुल्लाह अलैह की शान में ऐसा लेक्चर दिया उस दिन से आपने कभी भी शाफई होने की सोची भी नही । (मसलके आला हजरत-- ये कोई नया मसलक नही है अगर कोई ऐसा सोचता है तो वो गलत है ये मसलके आज़म अबू हनीफा रहमतुल्लाह अलैह का ही एक नक्शा (रूप है ये इमाम ए आज़म के मसलक से हटकर नही है अगर कोई इसे नया मसलक समझ कर इसे फॉलो करता तो ये गुनाह ए अज़ीम है आपने एक हज़ार छः सौ ग्यारह में एक खानकाह बनाई जिसका नाम रखा ख़ानक़ाह ए कादरिया।जहां पर आपने हदीस, तसव्वुफ़, फ़िक़्ह ए हनफी,हुकुकुल इबाद पर उम्दा किताबे तहरीर की आपकी ज़िंदगी का एक एक लम्हा सुन्नते मुस्तफा सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम पर अमल करते हुए गुजरा है आप एक क़ामिल वली अल्लाह भी है तसव्वुफ़ पर आपने बहुत सारी किताबे लिखीं है।आपके तसव्वुफ़ की झलक यहां से मिलती है कि आप अहले बैत को बेझिझक अलैहिस्सलाम कहते थे। आप औलिया अल्लाह के आस्ताने पर जब भी जाते तो चप्पल उतार देते थे।एक हज़ार छः सौ उन्नीस ईस्वी में आपका इंतेक़ाल हुआ लेकिन आपके काम ताक़यामत तक आपके इल्म व इश्क़ की गवाही देते रहेंगे। मीर सैयद अब्दुल वाहिद बिलग्रामी रहमतुल्लाह अलैह आपकी विलादत नौ सौ पंद्रह हिजरी में हुई आपका नाम मीर सैयद अब्दुल वाहिद था! आपका शजरा ए नसब आला खानदान से मिलता है आप इमाम जैनुल आब्दीन रजिअल्लाहू तआला अन्हु के शहज़ादे इमाम जैद शहीद रजिअल्लाहू तआला अन्हु की औलाद में से हैं। इसीलिए आप को जैदी हसैनी सैयद भी कहा जाता है। आपकी तालीम आप रहमतुल्लाह अलैह ने अपने घर पे ही इब्तिदाई तालीम हासिल की और दीन की तब्लीग में लग गए और तसव्वुफ़ के रास्ते पर निकल पड़े आप तसव्वुफ़ बचपन ही से पसन्द करते थे और आपका खानदान मुबारक हमेशा से ही इल्म और रूहानियत का शफ़्फ़ाफ़ आईना रहा है अल्लाह रब्बुल इज्जत का खास करम इस खानवादे पर रहा है कि हर वक़्त में इस खानदान से एक न एक नगीना जरूर मिलता रहा है जिससे मारफत व रूहानियत फ़ख़ कर सके आपकी शान बहुत ही निराली है आप का मक़ाम बहुत आला है। आप के नाम में बिलग्रामी लगा रहता है दरसअल आप बिलग्राम में रहने की वजह से आपके नाम मे बिलग्रामी लगा रहता है अब बिलग्राम शरीफ की अज़मत जानने के लिए इतना जानना जरूरी है कि आला हज़रत अजीमुल बरक़त इमाम अहमद रज़ा खान फ़ाज़िले बरेलवी रहमतुल्लाह अलैह के पीरो-मुर्शिद और उनका पीर खाना महरेरा शरीफ़ के सादात के जद्दे अमज़द बिलग्राम शरीफ से ही गये थे आज भी महरेरा शरीफ और मसौली शरीफ में आप के खानदान के लोग रहते हैं यानि की जितने भी जैदी सादात हिन्द के यूपी में है उनकी असल बिलग्राम शरीफ में है जिनमे फातहै बिलग्राम मखदूम सैयद मोहम्मद सुगरा रहमतुल्लाह अलैह सारे सैयदों के जद हैं। आप रहमतुल्लाह अलैह की शान और अज़मत निराली है आप तक़वे और परहेज़गारी के कायल थे। आप अपने वक़्त के इमाम ए शरीयत व तरीक़त थे। नबी करीम से आपकी निस्बत और आपकी मोहब्बत आप रहमतुल्लाह अलैह की निस्बत अपने जद्दे आला ताजदारे मदीना सैय्दुल अम्बिया हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम से आपकी मोहब्बत और निस्बत का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक बार मौलाना आजाद बिलग्रामी अलैहिर्रहमा दिल्ली में रुके हुए थे वहां उनकी मुलाकात सिलसिला ए चिश्तिया के अज़ीम बुजुर्ग शेख कलीमुल्लाह चिश्ती अलैहिर्रहमा से हुई दोनों बुजुर्गो में देर तक बात हुई तभी मौलाना आजाद बिलग्रामी अलैहिर्रहमा ने आप रहमतुल्लाह अलैह का तज़किरा छेड़ा तो शेख कलीमुल्लाह चिश्ती ने आप की बहुत तारीफ की और फरमाया कि मैने एक बार ख्वाब देखा की में मदीने शरीफ में हूँ प्यारे आक़ा अलैहिस्सलाम का दरबार सज़ा था मेने देखा कि आक़ा अलैहिस्सलाम किसी शख्श से मुस्कुरा कर गुफ्तगू कर रहे थे मेने सोचा कि आखिर ऐसा कौन खुशनसीब होगा जिससे ताजदारे आलम महबूबे खुदा शफकत और मोहब्बत के साथ गुफ्तगू कर रहे हैं इतने में मेरे साथ एक बुजुर्ग थे वो बोल पड़े की ये कोई और नही बल्कि मीर सैयद अब्दुल वाहिद बिलग्रामी रहमतुल्लाह अलैह हैं अल्लाहु अकबर मौत से डर लगता है एक बार एक शख्श आपकी बारगाह में हाज़िर हुआ और उसने फ़रमाया कि में मौत से बहुत डरता हूँ कोई ऐसा वज़ाएफ़ बता दीजिए कि मौत का डर खत्म जो जाए आपने उससे फ़रमाया की जाओ आज से रोजाना जो हो सके सदका दिया करो और फ़र्ज़ नमाज़ों के साथ नफिल भी अदा किया करो उसने ऐसा ही किया कुछ दिनों बाद वो शख्श आपकी बारगाह में हाजिर हुआ तो आपने पूछा क्या हुआ अब केसी हालत है उसने आपके क़दमो में गिरकर क़दमबोशी की और कहा हुज़ूर कल तक मौत से डरता था और आज मौत को गले लगाने का हर वक़्त मन करता है लेकिन ऐसा क्यों और कैसे हुआ--?आपने आखिर कौन सा जादू कर दिया। आप रहमतुल्लाह अलैह ने फरमाया की जब बन्दा कहीं पर रहने के लिए अपना घर बना लेता है तो उसे वहां जाकर रहने का मन करने लगता है और जबसे आप सदक़ा करने लगे हो तबसे जन्नत में तुम्हारा घर तामीर हो गया है इसीलिए अब तुम्हे मरने से डर नही लगता है क्योंकि अब तुम्हारे पास मरने के बाद रहने का ठिकाना हो गया है शबा सनाबिल शरीफ शबा सनाबिल शरीफ आपकी बहुत ही मोतबर किताब है जो आपकी शोहरत के लिए भी काफी जानी जाती है आप की शान व अज़मत बहुत ही निराली है आपकी शान में आला हज़रत अजीमुल बरक़त अलैहिर्रहमा ने अपनी किताब फतावा रिज़्विया में आपकी शान को दो पेज में तसानीफ़ किया है जिससे आपकी शान का अंदाज़ा लगाया जा सकता है आप का नाम हम अहले तसव्वुफ ता कयामत तक अदब से लेते रहेंगे आज भी आपका मुबारक खानदान शाद व आबाद है और ये सिलसिला ता क़यामत तक चलता रहेगा। शाह मुहिबबुल्लाह इलाहाबादी रहमतुल्लाह अलैह आपकी विलादत दो सफर नौ सौ छियानवे हिजरी और अंग्रेज़ी केलेंडर के मुताबिक एक हज़ार पाँच सौ अट्ठावन ईस्वी में सदरपुर जिला खैराबाद में एक अज़ीम खानदान में हुई थी उस वक़्त मुगल बादशाह अकबर की हुकूमत पूरे मुल्क पर थी। आपका नाम शाह मुहिबबुल्लाह था।आप चिश्तिया सिलसिला के अज़ीम बुजुर्ग हैं। मुगल बादशाह शाहजहां के दौर में आपकी विलायत के डंके हिन्द की सरजमीं पर बज रहे थे। आप वहदतुल वजूद के कायल थे। आपके वालिद का नाम शेख मुबारिज़ व दादा का नाम शेख पीर था। आपके पूर्वज हज़रत क़ाज़ी शुएब अलैहिर्रहमा जो हज़रत ख्वाजा फरीदुद्दीन गंज शकर रहमतुल्लाह अलैह के दादा थे वो चंगेज़ खान के जुल्म से तंग आकर लाहौर चले और क़स्बा कसूर में रहने लगे उस वक़्त वो हिस्सा भी हिन्द में ही था। |
- विदेशों में पढ़ाई को आसान बनाएगा 4 साल का डिग्री कोर्स, जल्द ही जारी होंगे फाइनल रेगुलेशंसदेशभर की ज्यादातर यूनिवर्सिटी में 4 साल के ग्रैजुएशन कोर्स को लागू करने की तैयारी की जा रही है। कई यूनविर्सिटी यूजीसी के साथ इस बारे में बात कर रही हैं। ऐसा करने से उन स्टूडेंट्स को फायदा होगा जो पीजी के लिए विदेश में जाकर पढ़ाई करना चाहते हैं।
- 16 अगस्त तक शुरू हो जाएगा नया सेशन, फीस वापसी पर भी सख्त नियमदिल्ली यूनिवर्सिटी में नया सेशन इस साल 16 अगस्त से शुरू होगा। यूजीसी के अध्यक्ष प्रो. जगदीश कुमार ने इस बारे में बताते हुए कहा है कि इस साल सेशन समय पर शुरू करने की पूरी कोशिश की जा रही है। बता दें कि अभी देश भर की यूनिवर्सिटीज मे एडमिशन के लिए सीयूईटी एग्जाम चल रहे हैं।
- JEE-अडवांस्ड में गाजियाबाद के ऋषि कालरा को तीसरी रैंक, NCR के छात्रों का जलवाIIT के एंट्रेंस एग्जाम JEE-अडवांस्ड 2023 जारी हो गया है। इस बार का टॉपर हैदराबाद जोन से है। वीसी रेड्डी ने 341 मार्क्स के साथ टॉप किया है। रमेश सूर्या दूसरे और रुड़की जोन के ऋषि कालरा ने तीसरा स्थान हासिल किया है। दिल्ली जोन में प्रभाव खंडेलवाल को छठी रैंक मिली है।
- NEET-UG रिजल्ट्स के टॉप 50 में सबसे ज्यादा 8 कैंडिडेट दिल्ली केNEET-UG Result 2023: नैशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए मंगलवार रात मेडिकल नीट (यूजी) का एग्जाम रिजल्ट जारी कर दिया है। तमिलनाडु के स्टूडेंट प्रबंजन जे और आंध्र प्रदेश के स्टूडेंट बोरा वरुण ने 99. 99 पर्सेंटाइल के साथ नीट परीक्षा में टॉप किया है।
- NEET-UG में आ जाए एक जैसा स्कोर, तो फिजिक्स के नंबरों से होगा फैसला! NMC का ये नियम जानते हैं आपअगर दो या ज्यादा छात्रों के नीट यूजी में एक जैसा स्कोर आ जाए तो उन्हें रैंक कैसे दी जाएगी? इसके लिए नैशनल मेडिकल कमिशन ने नया फॉर्म्युला बनाया है। इस तरह के केस में पहले फिजिक्स, फिर केमिस्ट्री और बायोलॉजी के नंबरों को प्रधानता दी जाएगी।
- 9 साल में पूरा करना होगा MBBS कोर्स, जानें क्या हैं कोर्स के नए रेग्युलेशनNMC ने नोटिफिकेशन जारी करके कहा है कि एमबीबीएस में दाखिला लेने वाले छात्रों को एडमिशन की तारीख से लेकर 9 साल के अंदर कोर्स पूरा करना होगा। अभी भारत में एमबीबीएस कोर्स करने के लिए कुल मिलाकर 5. 5 से 6 वर्षों तक का समय लगता है। जिसमें 4. 5 साल पढ़ाई और फिर 1 साल की इंटर्नशिप है।
- क्यों चलते फिरते अचानक हो रही है लोगों की मौत? ICMR वजह पता लगाने के लिए कर रहा स्टडीसडन डेथ यानी अचानक मौत के कारणों का पता लगाने के लिए ICMR (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) एक साथ चार स्टडी कर रहा है। इन स्टडी में मुख्य तौर पर तीन बातों की जांच की जा रही है। पहला- जिनकी अचानक मौत हुई है, क्या उनमें कोविड के सामान्य लक्षण थे? दूसरा- क्या गंभीर कोविड हुआ था। तीसरा- अस्पताल में भर्ती होने से पहले टीका लगा डिस्चार्ज होने के बाद। इन बातों के साथ ICMR देश के 39 अस्पतालों में 2020 से भर्ती कोविड मरीजों के डेटा का भी विश्लेषण कर रहा है। इसमें देखा जा रहा है कि अस्पतालों में भर्ती जो मरीज ठीक होकर घर थे, उनकी मौत कैसे हुई? जून के आखिर तक स्टडी का अंतरिम विश्लेषण पूरा हो जाएगा और कुछ तथ्य सामने आ सकते हैं। बताया जा रहा है कि अचानक मौत के मामलों में अभी तक जो स्टडी हुई है, उनमें कुछ चीजें सामने आई हैं, जो सडन डेथ के जोखिम को बढ़ाती हैं।
- CUET-UG: और आगे बढ़ाई जाएंगी एग्जाम की तारीखेंCUET- UG के एग्जाम की तारीखों में एक और एक्सटेंशन किया जाने वाले है। NTA ने 9-11 जून के एग्जाम के लिए एडमिट कार्ड जारी किए हैं। 11 जून के बाद भी काफी स्टूडेंट बच जाएँगे जिसे देखते हुए टेस्ट की तारीखों को बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। 12-14 जून के एग्जाम की तैयारी भी की जा रही है।
- NIRF रैंकिंगः यूनिवर्सिटी कैटिगरी में IISc बेंगलुरु नंबर वन, देखें बाकी कैटिगरी में कौन किस नंबर परराष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) की रैंकिंग में यूनिवर्सिटी कैटिगरी में IISc बेंगलुरु को पहला स्थान मिला है। इस रैंकिंग में केंद्र सरकार की ओर से उच्च शिक्षण संस्थानों को रैंकिंग दी जाती है। टॉप 10 रैंकिंग में 7 स्थानों पर आईआईटी ने अपना वर्चस्व साबित किया है।
- Civil Services Exam: सिविल सर्विसेज एग्ज़ाम में क्या आर्ट्स सब्जेक्ट्स की वापसी हो रही है? पिछले एक दो सालों का ट्रेंड देखें तो साफ पता चलता है कि अब सिविल सर्विसेज एग्जाम परीक्षाओं में आर्ट्स के स्टूडेंट भी बाजी मार रहे हैं। इस साल की यूपीएससी की टॉपर इशिता किशोर हों या फिर पिछले साल की टॉपर श्रुति शर्मा। इन स्टूडेंट्स ने आर्ट्स सब्जेक्ट से पढ़ाई करके सिविल परीक्षाओं में टॉप किया।
- अलग-अलग कोर्स पढ़ा रहे देश के एजुकेशन बोर्ड, फर्क घटाने की तैयारी कर रही है सरकारदेश में दो केंद्रीय बोर्ड के साथ-साथ राज्यों के करीब 60 बोर्ड हैं जिनमें अकैडमिक स्टैंडर्ड, सिलेबस, एग्जाम डेट्स का अलग-अलग फॉर्मूला है। सीबीएसई बोर्ड में पास पर्सेंटेज 95 फीसदी तक बोका है, वहीं राज्य बोर्ड की बात करें तो पास प्रतिशत 85 के आसपास है।
- UGC की नई वेबसाइट से अब आसानी से मिलेगी यूनिवर्सिटी-कॉलेज और एडमिशन की जानकारीयूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमिशन की नई वेबसाइट लॉन्च होने जा रही है। वेबसाउट को लेकर यूजीसी के अध्यक्ष ने बताया कि यूजीसी अब डिजिटल शिक्षा पर भी फोकस कर रही है और इसके लिए कई नई चीजें की जा रही है। नई साइट में स्टूडेंट के साथ-साथ शिक्षकों को भी मदद मिलेगी।
- UGC ने बदला क्वॉलिफिकेशन फ्रेमवर्क, किस लेवल पर कितने क्रेडिट मिलेंगे बनाया यह नया फॉर्म्युलायूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन ने नैशनल हायर एजुकेशन क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क में बदलाव करके अब 4. 5 से आठ लेवल कर दिया है। पहले यह 5 से 10 साल का था। नए व्यवस्था में यह फ्रेमवर्क ग्रेजुएशन से लेकर पीएचडी तक लागू होगा। इस बदलाव पर 25 मई को देश भर के यूनिवर्सिटी के कुलपति और कॉलेजों प्रिंसिपलों के बीच मीटिंग होगी।
- Assembly Election News: 2024 से पहले BJP का लिटमस टेस्ट, MP-राजस्थान समेत 5 राज्य तय करेंगे 'दिल्ली' का रास्ताKarnataka Chunav Results 2023: कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजे (Karnataka Election Results) आ चुके हैं। इसी के साथ आगे की रणनीतिक तैयारी भी शुरू हो गई है। कर्नाटक के बाद अगला मैदान तैयार है। आम चुनाव से पहले मध्य प्रदेश-राजस्थान समेत 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं। जिन्हें 2024 रण से पहले सत्ता का सेमीफाइनल माना जा रहा।
- CUET देने वाले छात्रों को राहत, एक दिन में 6 नहीं, अधिकतम 4 पेपर ही देने होंगेCUET एग्जाम देने वाले छात्रों के लिए अच्छी खबर हैं। अब परीक्षा में बैठने वाले छात्रों को एक दिन 6 पेपर के बजाए ज्यादा से ज्यादा 4 ही पेपर देने होंगे। पिछले साल सीयूईटी परीक्षा के बाद छात्रों की ओर से मिली शिकायतों के बाद यह फैसला लिया गया है।
- छोटे शहरों में पानी की कमी दूर करेंगे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स, इसे किया जाएगा पानी को रीयूजपानी की कमी को दूर करने के लिए पानी के रीयूज का प्लान बनाना जरूरी हो गया है। इससे देखते हुए अब छोटे शहरों के पानी के फिर से इस्तेमाल पर फोकस किया जा रहा है। स्वच्छ भारत मिशन शहरी 2. 0 के तहत छोटे शहरों में वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए 11,785 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
- CUET-UG में रेकॉर्ड 14. 99 लाख आवेदन, पिछली बार से 50% ज़्यादा, सबसे ज्यादा आवेदन इन दो यूनिवर्सिटीज के लिए आएइस साल देश भर की यूनिवर्सिटीज में अंडर ग्रैजुएट कोर्सों में एडमिशन के लिए कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट देने के लिए रेकॉर्ड स्टूडेंट्स ने रजिस्ट्रेशन किया है। खास बात यह है कि इस साल भी दिल्ली यूनिवर्सिटी और बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में दाखिले के लिए सबसे ज्यादा आवेदन किए गए हैं।
- भारत अपनी युवा आबादी का फायदा उठा पाएगा? चीन को पीछे छोड़ने के लिए क्या करना होगाइस साल जून में भारत चीन को पछाड़ कर दुनिया की सबसे अधिक आबादी वाला देश बन जाएगा। अब सवाल उठता है कि भारत के पास जब सबसे अधिक युवा आबादी होगी तो वह इसका फायदा किस तरह से उठा सकता है। ऐसे में देश में किस तरह से नीतिगत योजनाएं बनाने की आवश्यकता होगी।
| - विदेशों में पढ़ाई को आसान बनाएगा चार साल का डिग्री कोर्स, जल्द ही जारी होंगे फाइनल रेगुलेशंसदेशभर की ज्यादातर यूनिवर्सिटी में चार साल के ग्रैजुएशन कोर्स को लागू करने की तैयारी की जा रही है। कई यूनविर्सिटी यूजीसी के साथ इस बारे में बात कर रही हैं। ऐसा करने से उन स्टूडेंट्स को फायदा होगा जो पीजी के लिए विदेश में जाकर पढ़ाई करना चाहते हैं। - सोलह अगस्त तक शुरू हो जाएगा नया सेशन, फीस वापसी पर भी सख्त नियमदिल्ली यूनिवर्सिटी में नया सेशन इस साल सोलह अगस्त से शुरू होगा। यूजीसी के अध्यक्ष प्रो. जगदीश कुमार ने इस बारे में बताते हुए कहा है कि इस साल सेशन समय पर शुरू करने की पूरी कोशिश की जा रही है। बता दें कि अभी देश भर की यूनिवर्सिटीज मे एडमिशन के लिए सीयूईटी एग्जाम चल रहे हैं। - JEE-अडवांस्ड में गाजियाबाद के ऋषि कालरा को तीसरी रैंक, NCR के छात्रों का जलवाIIT के एंट्रेंस एग्जाम JEE-अडवांस्ड दो हज़ार तेईस जारी हो गया है। इस बार का टॉपर हैदराबाद जोन से है। वीसी रेड्डी ने तीन सौ इकतालीस मार्क्स के साथ टॉप किया है। रमेश सूर्या दूसरे और रुड़की जोन के ऋषि कालरा ने तीसरा स्थान हासिल किया है। दिल्ली जोन में प्रभाव खंडेलवाल को छठी रैंक मिली है। - NEET-UG रिजल्ट्स के टॉप पचास में सबसे ज्यादा आठ कैंडिडेट दिल्ली केNEET-UG Result दो हज़ार तेईस: नैशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए मंगलवार रात मेडिकल नीट का एग्जाम रिजल्ट जारी कर दिया है। तमिलनाडु के स्टूडेंट प्रबंजन जे और आंध्र प्रदेश के स्टूडेंट बोरा वरुण ने निन्यानवे. निन्यानवे पर्सेंटाइल के साथ नीट परीक्षा में टॉप किया है। - NEET-UG में आ जाए एक जैसा स्कोर, तो फिजिक्स के नंबरों से होगा फैसला! NMC का ये नियम जानते हैं आपअगर दो या ज्यादा छात्रों के नीट यूजी में एक जैसा स्कोर आ जाए तो उन्हें रैंक कैसे दी जाएगी? इसके लिए नैशनल मेडिकल कमिशन ने नया फॉर्म्युला बनाया है। इस तरह के केस में पहले फिजिक्स, फिर केमिस्ट्री और बायोलॉजी के नंबरों को प्रधानता दी जाएगी। - नौ साल में पूरा करना होगा MBBS कोर्स, जानें क्या हैं कोर्स के नए रेग्युलेशनNMC ने नोटिफिकेशन जारी करके कहा है कि एमबीबीएस में दाखिला लेने वाले छात्रों को एडमिशन की तारीख से लेकर नौ साल के अंदर कोर्स पूरा करना होगा। अभी भारत में एमबीबीएस कोर्स करने के लिए कुल मिलाकर पाँच. पाँच से छः वर्षों तक का समय लगता है। जिसमें चार. पाँच साल पढ़ाई और फिर एक साल की इंटर्नशिप है। - क्यों चलते फिरते अचानक हो रही है लोगों की मौत? ICMR वजह पता लगाने के लिए कर रहा स्टडीसडन डेथ यानी अचानक मौत के कारणों का पता लगाने के लिए ICMR एक साथ चार स्टडी कर रहा है। इन स्टडी में मुख्य तौर पर तीन बातों की जांच की जा रही है। पहला- जिनकी अचानक मौत हुई है, क्या उनमें कोविड के सामान्य लक्षण थे? दूसरा- क्या गंभीर कोविड हुआ था। तीसरा- अस्पताल में भर्ती होने से पहले टीका लगा डिस्चार्ज होने के बाद। इन बातों के साथ ICMR देश के उनतालीस अस्पतालों में दो हज़ार बीस से भर्ती कोविड मरीजों के डेटा का भी विश्लेषण कर रहा है। इसमें देखा जा रहा है कि अस्पतालों में भर्ती जो मरीज ठीक होकर घर थे, उनकी मौत कैसे हुई? जून के आखिर तक स्टडी का अंतरिम विश्लेषण पूरा हो जाएगा और कुछ तथ्य सामने आ सकते हैं। बताया जा रहा है कि अचानक मौत के मामलों में अभी तक जो स्टडी हुई है, उनमें कुछ चीजें सामने आई हैं, जो सडन डेथ के जोखिम को बढ़ाती हैं। - CUET-UG: और आगे बढ़ाई जाएंगी एग्जाम की तारीखेंCUET- UG के एग्जाम की तारीखों में एक और एक्सटेंशन किया जाने वाले है। NTA ने नौ-ग्यारह जून के एग्जाम के लिए एडमिट कार्ड जारी किए हैं। ग्यारह जून के बाद भी काफी स्टूडेंट बच जाएँगे जिसे देखते हुए टेस्ट की तारीखों को बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। बारह-चौदह जून के एग्जाम की तैयारी भी की जा रही है। - NIRF रैंकिंगः यूनिवर्सिटी कैटिगरी में IISc बेंगलुरु नंबर वन, देखें बाकी कैटिगरी में कौन किस नंबर परराष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क की रैंकिंग में यूनिवर्सिटी कैटिगरी में IISc बेंगलुरु को पहला स्थान मिला है। इस रैंकिंग में केंद्र सरकार की ओर से उच्च शिक्षण संस्थानों को रैंकिंग दी जाती है। टॉप दस रैंकिंग में सात स्थानों पर आईआईटी ने अपना वर्चस्व साबित किया है। - Civil Services Exam: सिविल सर्विसेज एग्ज़ाम में क्या आर्ट्स सब्जेक्ट्स की वापसी हो रही है? पिछले एक दो सालों का ट्रेंड देखें तो साफ पता चलता है कि अब सिविल सर्विसेज एग्जाम परीक्षाओं में आर्ट्स के स्टूडेंट भी बाजी मार रहे हैं। इस साल की यूपीएससी की टॉपर इशिता किशोर हों या फिर पिछले साल की टॉपर श्रुति शर्मा। इन स्टूडेंट्स ने आर्ट्स सब्जेक्ट से पढ़ाई करके सिविल परीक्षाओं में टॉप किया। - अलग-अलग कोर्स पढ़ा रहे देश के एजुकेशन बोर्ड, फर्क घटाने की तैयारी कर रही है सरकारदेश में दो केंद्रीय बोर्ड के साथ-साथ राज्यों के करीब साठ बोर्ड हैं जिनमें अकैडमिक स्टैंडर्ड, सिलेबस, एग्जाम डेट्स का अलग-अलग फॉर्मूला है। सीबीएसई बोर्ड में पास पर्सेंटेज पचानवे फीसदी तक बोका है, वहीं राज्य बोर्ड की बात करें तो पास प्रतिशत पचासी के आसपास है। - UGC की नई वेबसाइट से अब आसानी से मिलेगी यूनिवर्सिटी-कॉलेज और एडमिशन की जानकारीयूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमिशन की नई वेबसाइट लॉन्च होने जा रही है। वेबसाउट को लेकर यूजीसी के अध्यक्ष ने बताया कि यूजीसी अब डिजिटल शिक्षा पर भी फोकस कर रही है और इसके लिए कई नई चीजें की जा रही है। नई साइट में स्टूडेंट के साथ-साथ शिक्षकों को भी मदद मिलेगी। - UGC ने बदला क्वॉलिफिकेशन फ्रेमवर्क, किस लेवल पर कितने क्रेडिट मिलेंगे बनाया यह नया फॉर्म्युलायूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन ने नैशनल हायर एजुकेशन क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क में बदलाव करके अब चार. पाँच से आठ लेवल कर दिया है। पहले यह पाँच से दस साल का था। नए व्यवस्था में यह फ्रेमवर्क ग्रेजुएशन से लेकर पीएचडी तक लागू होगा। इस बदलाव पर पच्चीस मई को देश भर के यूनिवर्सिटी के कुलपति और कॉलेजों प्रिंसिपलों के बीच मीटिंग होगी। - Assembly Election News: दो हज़ार चौबीस से पहले BJP का लिटमस टेस्ट, MP-राजस्थान समेत पाँच राज्य तय करेंगे 'दिल्ली' का रास्ताKarnataka Chunav Results दो हज़ार तेईस: कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजे आ चुके हैं। इसी के साथ आगे की रणनीतिक तैयारी भी शुरू हो गई है। कर्नाटक के बाद अगला मैदान तैयार है। आम चुनाव से पहले मध्य प्रदेश-राजस्थान समेत पाँच राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं। जिन्हें दो हज़ार चौबीस रण से पहले सत्ता का सेमीफाइनल माना जा रहा। - CUET देने वाले छात्रों को राहत, एक दिन में छः नहीं, अधिकतम चार पेपर ही देने होंगेCUET एग्जाम देने वाले छात्रों के लिए अच्छी खबर हैं। अब परीक्षा में बैठने वाले छात्रों को एक दिन छः पेपर के बजाए ज्यादा से ज्यादा चार ही पेपर देने होंगे। पिछले साल सीयूईटी परीक्षा के बाद छात्रों की ओर से मिली शिकायतों के बाद यह फैसला लिया गया है। - छोटे शहरों में पानी की कमी दूर करेंगे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स, इसे किया जाएगा पानी को रीयूजपानी की कमी को दूर करने के लिए पानी के रीयूज का प्लान बनाना जरूरी हो गया है। इससे देखते हुए अब छोटे शहरों के पानी के फिर से इस्तेमाल पर फोकस किया जा रहा है। स्वच्छ भारत मिशन शहरी दो. शून्य के तहत छोटे शहरों में वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए ग्यारह,सात सौ पचासी करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। - CUET-UG में रेकॉर्ड चौदह. निन्यानवे लाख आवेदन, पिछली बार से पचास% ज़्यादा, सबसे ज्यादा आवेदन इन दो यूनिवर्सिटीज के लिए आएइस साल देश भर की यूनिवर्सिटीज में अंडर ग्रैजुएट कोर्सों में एडमिशन के लिए कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट देने के लिए रेकॉर्ड स्टूडेंट्स ने रजिस्ट्रेशन किया है। खास बात यह है कि इस साल भी दिल्ली यूनिवर्सिटी और बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में दाखिले के लिए सबसे ज्यादा आवेदन किए गए हैं। - भारत अपनी युवा आबादी का फायदा उठा पाएगा? चीन को पीछे छोड़ने के लिए क्या करना होगाइस साल जून में भारत चीन को पछाड़ कर दुनिया की सबसे अधिक आबादी वाला देश बन जाएगा। अब सवाल उठता है कि भारत के पास जब सबसे अधिक युवा आबादी होगी तो वह इसका फायदा किस तरह से उठा सकता है। ऐसे में देश में किस तरह से नीतिगत योजनाएं बनाने की आवश्यकता होगी। |
नई दिल्ली, 24 जुलाई (आईएएनएस)। तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री वाई. एस. चौधरी ने मंगलवार को अपनी पूर्व सहयोगी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर मित्रता और राजनीतिक नैतिकता के सिद्धांतों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उन्होंने भाजपा पर आंध्र प्रदेश में उनकी पार्टी की कीमत पर खुद का विस्तार करने का प्रयास करने का भी आरोप लगाया। आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2014 पर एक संक्षिप्त अवधि की चर्चा शुरू करते हुए चौधरी ने कहा, भाजपा ने यू-टर्न लिया और मित्रता व राजनीतिक नैतिकता के सिद्धांतों का उल्लंघन किया। उनका केवल एक ही मकसद है कि अपने विस्तार के लिए तेदेपा को खत्म कर दें। इसीलिए हमने भारी मन से अपने रास्ते अलग किए हैं।
भाजपानीत सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में तेदेपा चार साल तक सहयोगी रही और आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य के दर्जे की मांग को केंद्र के नकारे जाने के बाद भाजपा के साथ अपने संबंधों को खत्म कर दिया।
चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कथनी और करनी के बीच अंतर है, जिन्होंने 2014 में अपने चुनावी अभियान में न केवल एक बार बल्कि तीन बार आंध्र प्रदेश को विशेष श्रेणी का दर्जा देने का वादा किया था।
चौधरी ने कहा, अब सरकार आंध्र के लोगों और मीडिया को यह कहते हुए गुमराह कर रही है कि 14वें वित्त आयोग ने सिफारिश की है कि किसी भी राज्य को अब से विशेष राज्य का दर्जा नहीं दिया जाना चाहिए। यह सच से दूर है। यह राज्यसभा में सरकार द्वारा दिए गए लिखित जवाब से बिल्कुल विपरीत है।
उन्होंने कहा, हम भीख नहीं मांग रहे और न ही किसी से किसी तरह का एहसान करने के लिए कह रहे हैं। हम सिर्फ अधिनियम के तहत जो हमारा है, उसे मांग रहे हैं।
| नई दिल्ली, चौबीस जुलाई । तेलुगू देशम पार्टी के नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री वाई. एस. चौधरी ने मंगलवार को अपनी पूर्व सहयोगी भारतीय जनता पार्टी पर मित्रता और राजनीतिक नैतिकता के सिद्धांतों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उन्होंने भाजपा पर आंध्र प्रदेश में उनकी पार्टी की कीमत पर खुद का विस्तार करने का प्रयास करने का भी आरोप लगाया। आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम दो हज़ार चौदह पर एक संक्षिप्त अवधि की चर्चा शुरू करते हुए चौधरी ने कहा, भाजपा ने यू-टर्न लिया और मित्रता व राजनीतिक नैतिकता के सिद्धांतों का उल्लंघन किया। उनका केवल एक ही मकसद है कि अपने विस्तार के लिए तेदेपा को खत्म कर दें। इसीलिए हमने भारी मन से अपने रास्ते अलग किए हैं। भाजपानीत सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में तेदेपा चार साल तक सहयोगी रही और आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य के दर्जे की मांग को केंद्र के नकारे जाने के बाद भाजपा के साथ अपने संबंधों को खत्म कर दिया। चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कथनी और करनी के बीच अंतर है, जिन्होंने दो हज़ार चौदह में अपने चुनावी अभियान में न केवल एक बार बल्कि तीन बार आंध्र प्रदेश को विशेष श्रेणी का दर्जा देने का वादा किया था। चौधरी ने कहा, अब सरकार आंध्र के लोगों और मीडिया को यह कहते हुए गुमराह कर रही है कि चौदहवें वित्त आयोग ने सिफारिश की है कि किसी भी राज्य को अब से विशेष राज्य का दर्जा नहीं दिया जाना चाहिए। यह सच से दूर है। यह राज्यसभा में सरकार द्वारा दिए गए लिखित जवाब से बिल्कुल विपरीत है। उन्होंने कहा, हम भीख नहीं मांग रहे और न ही किसी से किसी तरह का एहसान करने के लिए कह रहे हैं। हम सिर्फ अधिनियम के तहत जो हमारा है, उसे मांग रहे हैं। |
नई दिल्ली। देश पर एक बार फिर खतरा मंडराने लगा है। कोरोना (Corona) वायरस महामारी फिर से लौट आई है। कोरोना के ताजा आंकड़े बेहद डरावने हैं। देश में पिछले 24 घंटे के भीतर तीन हजार 823 नए केस दर्ज किए गए। बड़ी बात यह है कि कल की तुलना में आज कोरोना (Corona) के मामलों में 27 फीसदी का इजाफा हुआ है। कल 2994 मामले सामने आए थे। जानिए क्या कहते हैं ताजा आंकड़े।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर जारी किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में 3823 मामलों के साथ नए एक्टिव मामलों की संख्या 18 हजार के पार पहुंच गई है।
देश में अब 18 हजार 389 एक्टिव केस हैं, यानी इतने लोगों का इलाज जारी है। देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना से 4 लोगों की जान गई। केरल, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और केरल में कल एक-एक मौत दर्ज की गई।
आंकड़ों के मुताबिक, देश में अब पॉजिटिविटी रेट बढ़कर 2। 87 फीसदी हो गया है। देश में कोरोना को अब तक 4 करोड़ 41 लाख 73 हजार 335 लोग मात दे चुके हैं।
आंकड़ों के जरिए बताया गया है कि कल देश में कोरोना की दो हजार 799 डोज दी गई। अब तक देश में कोरोना की दो अरब 20 करोड़ 66 लाख 11 हजार 814 डोज दी जा चुकी हैं।
| नई दिल्ली। देश पर एक बार फिर खतरा मंडराने लगा है। कोरोना वायरस महामारी फिर से लौट आई है। कोरोना के ताजा आंकड़े बेहद डरावने हैं। देश में पिछले चौबीस घंटाटे के भीतर तीन हजार आठ सौ तेईस नए केस दर्ज किए गए। बड़ी बात यह है कि कल की तुलना में आज कोरोना के मामलों में सत्ताईस फीसदी का इजाफा हुआ है। कल दो हज़ार नौ सौ चौरानवे मामले सामने आए थे। जानिए क्या कहते हैं ताजा आंकड़े। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर जारी किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में तीन हज़ार आठ सौ तेईस मामलों के साथ नए एक्टिव मामलों की संख्या अट्ठारह हजार के पार पहुंच गई है। देश में अब अट्ठारह हजार तीन सौ नवासी एक्टिव केस हैं, यानी इतने लोगों का इलाज जारी है। देश में पिछले चौबीस घंटाटों में कोरोना से चार लोगों की जान गई। केरल, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और केरल में कल एक-एक मौत दर्ज की गई। आंकड़ों के मुताबिक, देश में अब पॉजिटिविटी रेट बढ़कर दो। सत्तासी फीसदी हो गया है। देश में कोरोना को अब तक चार करोड़ इकतालीस लाख तिहत्तर हजार तीन सौ पैंतीस लोग मात दे चुके हैं। आंकड़ों के जरिए बताया गया है कि कल देश में कोरोना की दो हजार सात सौ निन्यानवे डोज दी गई। अब तक देश में कोरोना की दो अरब बीस करोड़ छयासठ लाख ग्यारह हजार आठ सौ चौदह डोज दी जा चुकी हैं। |
हर साल 21 अप्रैल को World Creativity And Innovation Day मनाया जाता है।
हर साल 22 मार्च को World Water Day मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य लोगों को पानी का महत्व बताना है।
International Happiness Day 2022: हमें कैसे खुश रहना है ये हम पर निर्भर करता है।
World Thinking Day 2022: आज यानी 22 फरवरी को पूरा विश्व World Thinking Day मना रहा है।
World Day of Social Justice: पूरे विश्व में आज 20 फरवरी को विश्व सामाजिक न्याय दिवस मनाया जा रहा है। यह मनाने का कारण यह है कि सभी लोगों को समान अवसर और सुविधाएं मिलें।
बात चॉकलेट की हो तो किसी से रहा नहीं जाता, चाहे बच्चा हो या बूढ़ा हर किसी आयुवर्ग की पसंदीदा होती है।
पूरे विश्व में 4 जनवरी को World Braille Day दिवस मनाया जाता है।
International Human Solidarity Day: जानिए क्या है इसका महत्व और इतिहास?
लोगों को वैश्विक क्षेत्र में एकजुटता के महत्व के बारे में जागरूक करने के लिए 20 दिसंबर को International Human Solidarity Day यानी अंतर्राष्ट्रीय मानव एकता दिवस मनाया जाता है। एकजुटता (Solidarity) समाज में साझा हितों और उद्देश्यों के बारे में एकता और संबंधों की मनोवैज्ञानिक भावना पैदा करता है जो लोगों को एक साथ बांधता है।
Migration एक वैश्विक परिघटना है जहां लोग कई तरह के कारणों से आते-जाते हैं। उनको ध्यान में रखते हुए हर साल 18 दिसंबर को International Migrants Day मनाया जाता है।
आज पुरे देश में International Universal Health coverage Day मनाया जा रहा है। जिसमें देशों से United Health coverage (UHC) की दिशा में तेजी से प्रगति करने का आग्रह किया गया है। International Universal Health coverage Day मजबूत स्वास्थ्य प्रणालियों और सार्वभौमिक स्वास्थ्य की आवश्यकता के बारे में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास करता है।
| हर साल इक्कीस अप्रैल को World Creativity And Innovation Day मनाया जाता है। हर साल बाईस मार्च को World Water Day मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य लोगों को पानी का महत्व बताना है। International Happiness Day दो हज़ार बाईस: हमें कैसे खुश रहना है ये हम पर निर्भर करता है। World Thinking Day दो हज़ार बाईस: आज यानी बाईस फरवरी को पूरा विश्व World Thinking Day मना रहा है। World Day of Social Justice: पूरे विश्व में आज बीस फरवरी को विश्व सामाजिक न्याय दिवस मनाया जा रहा है। यह मनाने का कारण यह है कि सभी लोगों को समान अवसर और सुविधाएं मिलें। बात चॉकलेट की हो तो किसी से रहा नहीं जाता, चाहे बच्चा हो या बूढ़ा हर किसी आयुवर्ग की पसंदीदा होती है। पूरे विश्व में चार जनवरी को World Braille Day दिवस मनाया जाता है। International Human Solidarity Day: जानिए क्या है इसका महत्व और इतिहास? लोगों को वैश्विक क्षेत्र में एकजुटता के महत्व के बारे में जागरूक करने के लिए बीस दिसंबर को International Human Solidarity Day यानी अंतर्राष्ट्रीय मानव एकता दिवस मनाया जाता है। एकजुटता समाज में साझा हितों और उद्देश्यों के बारे में एकता और संबंधों की मनोवैज्ञानिक भावना पैदा करता है जो लोगों को एक साथ बांधता है। Migration एक वैश्विक परिघटना है जहां लोग कई तरह के कारणों से आते-जाते हैं। उनको ध्यान में रखते हुए हर साल अट्ठारह दिसंबर को International Migrants Day मनाया जाता है। आज पुरे देश में International Universal Health coverage Day मनाया जा रहा है। जिसमें देशों से United Health coverage की दिशा में तेजी से प्रगति करने का आग्रह किया गया है। International Universal Health coverage Day मजबूत स्वास्थ्य प्रणालियों और सार्वभौमिक स्वास्थ्य की आवश्यकता के बारे में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास करता है। |
चीन ने अपने देश में एप्पल (Apple) कम्पनी के स्टोर से कुरान एप हटवा दिया है। एप्पल ने यह एक्शन चीन सरकार द्वारा किए गए निवेदन के बाद लिया। कुरान एप (Quran apps) दुनिया भर के मुस्लिमों में चर्चित है। वर्तमान में इस एप पर लगभग डेढ़ लाख रिव्यू हैं। हटाए जाने के समय इस ऐप के चीन में 1 मिलियन से अधिक यूजर हो चुके थे।
मीडिया रिपोर्ट्स से मिल रही जानकारी के अनुसार कुरान एप पर यह एक्शन अवैध धार्मिक सामग्री के चलते लिया गया है। एक आँकड़े के अनुसार, चीन में हटाए गए ऐप कुरान मजीद के वर्तमान समय में दुनिया भर में लगभग 35 मिलियन यूजर हैं। इस कार्रवाई की जानकारी सबसे पहले एप्पल सेंसरशिप नाम की वेबसाइट ने दी थी। यह वेबसाइट ऐप स्टोर में मौजूद ऐप की निगरानी करती है और उनकी गतिविधियों के बारे में अपडेट साझा करती है।
चीन में रहने वाले मुस्लिमों के मानवाधिकार हनन की शिकायतें अक्सर सामने आती रहती हैं। इसी वर्ष शिनजियांग प्रान्त में उईगर इमामों पर चीनी सरकार के अत्याचारों की खबर सुर्खियाँ बनी थीं। इतना ही नहीं, वहाँ मुस्लिमों के नरसंहार और उन्हें जेल में डालने जैसी घटनाओं पर पहले भी कई देश आपत्ति जता चुके हैं।
| चीन ने अपने देश में एप्पल कम्पनी के स्टोर से कुरान एप हटवा दिया है। एप्पल ने यह एक्शन चीन सरकार द्वारा किए गए निवेदन के बाद लिया। कुरान एप दुनिया भर के मुस्लिमों में चर्चित है। वर्तमान में इस एप पर लगभग डेढ़ लाख रिव्यू हैं। हटाए जाने के समय इस ऐप के चीन में एक मिलियन से अधिक यूजर हो चुके थे। मीडिया रिपोर्ट्स से मिल रही जानकारी के अनुसार कुरान एप पर यह एक्शन अवैध धार्मिक सामग्री के चलते लिया गया है। एक आँकड़े के अनुसार, चीन में हटाए गए ऐप कुरान मजीद के वर्तमान समय में दुनिया भर में लगभग पैंतीस मिलियन यूजर हैं। इस कार्रवाई की जानकारी सबसे पहले एप्पल सेंसरशिप नाम की वेबसाइट ने दी थी। यह वेबसाइट ऐप स्टोर में मौजूद ऐप की निगरानी करती है और उनकी गतिविधियों के बारे में अपडेट साझा करती है। चीन में रहने वाले मुस्लिमों के मानवाधिकार हनन की शिकायतें अक्सर सामने आती रहती हैं। इसी वर्ष शिनजियांग प्रान्त में उईगर इमामों पर चीनी सरकार के अत्याचारों की खबर सुर्खियाँ बनी थीं। इतना ही नहीं, वहाँ मुस्लिमों के नरसंहार और उन्हें जेल में डालने जैसी घटनाओं पर पहले भी कई देश आपत्ति जता चुके हैं। |
।अबादीन ने 'जज़िया कर' हटाया और राज्य में गाय का वध निषिद्ध कर दिया। उसके प्रशासन में अनेक हिन्दुओं को ऊँचे पद प्राप्त थे।
।जैनुल अबादीन को कश्मीरी अभी भी 'बडशाह' (महान सुल्तान) के नाम से पुकारते हैं। वह 'कुतुब' उपनाम से फ़ारसी में कविताएँ भी लिखा करता था।
।अबादीन को उसके द्वारा किये गए जनपिय कार्यों के कारण कश्मीर का अकबर कहा जाता है। मूल्य नियंत्रण की पद्धति चलाने के कारण ही उसे कश्मीर का अलाउद्दीन ख़िलजी भी कहा गया है।
जैनुल अबादीन (1420-1470 ई.) अलीशाह का भाई और कश्मीर का सुल्तान था। सभी धर्मों के प्रति सहिष्णुता का भाव रखने व अपने अच्छे कार्यों के कारण ही उसे 'कश्मीर का अकबर' कहा जाता है। अपने शासन के दौरान इसने हिन्दुओं को पूर्ण धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान की थी। जैनुल अबादीन ने हिन्दुओं के टूटे हुए मंदिरों का पुनर्निर्माण, गायों की सुरक्षा और सती होने पर लगे प्रतिबन्ध को हटाया और राज्य में एक बेहतर शासन व्यवस्था लागू की।
जैनुल अबादीन ने अन्य क्षेत्रों में भी सहिष्णुता की उदार नीति अपनाई। उसने जज़िया कर हटा दिया। गाय का वध निषिद्ध कर दिया, हिन्दुओं की भावनाओं का आदर करते हुए सती प्रथा पर से प्रतिबन्ध हटा लिया। उसके प्रशासन में अनेक हिन्दुओं को ऊँचे पद प्राप्त थे। श्रीय भट्ट उसका न्यायमंत्री और दरबारी चिकित्सक था। उसकी पहली दो रानियाँ हिन्दू थीं। ये दोनों जम्मू के राजा की कन्याएँ थीं। उसके चार पुत्र उन्हीं से थे। उसने उन दोनों की मृत्यु के पश्चात् तीसरी शादी की।
सुल्तान स्वयं एक विद्वान् व्यक्ति था और कविता करता था। वह फ़ारसी, कश्मीरी, संस्कृत और तिब्बती भाषाएँ भली-भाँति जानता था। वह संस्कृत और फ़रसी विद्वानों को संरक्षण देता था। उसके संकेत पर महाभारत जैसे अनेक संस्कृत ग्रंथों का तथा कल्हण के 'कश्मीर के इतिहास' (राजतरंगिणी) का फ़ारसी में अनुवाद हुआ। वह संगीत प्रेमी था। ग्वालियर के राजा ने उसके संगीत प्रेम के विषय में सुनकर उसे दो दुर्लभ संस्कृत संगीत ग्रंथ भेंट में भेजे थे।
सुल्तान ने कश्मीर की आर्थिक उन्नति पर भी ध्यान दिया। उसने दो आदमियों को काग़ज़ बनाने तथा जिल्दसाज़ी की कला सीखने के लिए समरकंद भेजा। उसने कश्मीर में कई कलाओं को प्रोत्साहन दिया। जैसे पत्थर तराशना और उस पर पालिश करना, बोतलें बनाना, स्वर्ण-पत्र बनाना इत्यादि। सम्भवतः उसी ने तिब्बत से शाल बनाने की कला का आयात किया, जिसके लिए कश्मीर आज तक प्रसिद्ध है। दस्ती बंदूक बनाने और आतिशबाज़ी बनाने की कला का भी वहाँ विकास हुआ। सुल्तान ने काफ़ी संख्या में बाँध और पुल बनवाकर कृषि को विकसित किया। वह उत्साही निर्माता था। उसकी सबसे बड़ी अभियात्रा की उपलब्धि जैना का लंका का निर्माण है, जो वुलर झील में नकली टापू के रूप में है। यहीं उसने अपना महल और मस्जिद बनवाई।
जैनुल अबादीन को कश्मीरी अभी भी 'बडशाह' (महान सुल्तान) के नाम से पुकारते हैं। यद्यपि वह महान् योद्धा नहीं था, फिर भी उसने लद्दाख पर मंगोल आक्रमण को विफल किया था। उसने बालटिस्तान क्षेत्र (जिसे तिब्बत-ए-ख़ुर्द कहा जाता है) को विजित किया, तथा जम्मू और राजौरी पर अपना अधिकार बनाये रखा। इस प्रकार उसने कश्मीर राज्य को एकता के सूत्र में पिरोया। जैनुल अबादीन का यश दूर-दूर तक फैल गया था। उसने भारत के अन्य बड़े शासकों तथा एशिया के बड़े शासकों से सम्पर्क बनाये रखा।
अबादीन ने अपने शासन काल में अनेक जनप्रिय कार्य किए थे। अपने इन्हीं कार्यों के कारण उसे 'कश्मीर का अकबर' कहा जाता है। मूल्य नियंत्रण की पद्धति चलाने के कारण ही उसे 'कश्मीर का अलाउद्दीन ख़िलजी' भी कहा गया है। अबादीन की 1470 ई. में मृत्यु हो गई। वह कश्मीरी, फ़ारसी, अरबी और संस्कृत भाषाओं का विद्वान् था। वह 'कुतुब उपनाम' से फ़ारसी में कविताएँ भी लिखा करता था।
| ।अबादीन ने 'जज़िया कर' हटाया और राज्य में गाय का वध निषिद्ध कर दिया। उसके प्रशासन में अनेक हिन्दुओं को ऊँचे पद प्राप्त थे। ।जैनुल अबादीन को कश्मीरी अभी भी 'बडशाह' के नाम से पुकारते हैं। वह 'कुतुब' उपनाम से फ़ारसी में कविताएँ भी लिखा करता था। ।अबादीन को उसके द्वारा किये गए जनपिय कार्यों के कारण कश्मीर का अकबर कहा जाता है। मूल्य नियंत्रण की पद्धति चलाने के कारण ही उसे कश्मीर का अलाउद्दीन ख़िलजी भी कहा गया है। जैनुल अबादीन अलीशाह का भाई और कश्मीर का सुल्तान था। सभी धर्मों के प्रति सहिष्णुता का भाव रखने व अपने अच्छे कार्यों के कारण ही उसे 'कश्मीर का अकबर' कहा जाता है। अपने शासन के दौरान इसने हिन्दुओं को पूर्ण धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान की थी। जैनुल अबादीन ने हिन्दुओं के टूटे हुए मंदिरों का पुनर्निर्माण, गायों की सुरक्षा और सती होने पर लगे प्रतिबन्ध को हटाया और राज्य में एक बेहतर शासन व्यवस्था लागू की। जैनुल अबादीन ने अन्य क्षेत्रों में भी सहिष्णुता की उदार नीति अपनाई। उसने जज़िया कर हटा दिया। गाय का वध निषिद्ध कर दिया, हिन्दुओं की भावनाओं का आदर करते हुए सती प्रथा पर से प्रतिबन्ध हटा लिया। उसके प्रशासन में अनेक हिन्दुओं को ऊँचे पद प्राप्त थे। श्रीय भट्ट उसका न्यायमंत्री और दरबारी चिकित्सक था। उसकी पहली दो रानियाँ हिन्दू थीं। ये दोनों जम्मू के राजा की कन्याएँ थीं। उसके चार पुत्र उन्हीं से थे। उसने उन दोनों की मृत्यु के पश्चात् तीसरी शादी की। सुल्तान स्वयं एक विद्वान् व्यक्ति था और कविता करता था। वह फ़ारसी, कश्मीरी, संस्कृत और तिब्बती भाषाएँ भली-भाँति जानता था। वह संस्कृत और फ़रसी विद्वानों को संरक्षण देता था। उसके संकेत पर महाभारत जैसे अनेक संस्कृत ग्रंथों का तथा कल्हण के 'कश्मीर के इतिहास' का फ़ारसी में अनुवाद हुआ। वह संगीत प्रेमी था। ग्वालियर के राजा ने उसके संगीत प्रेम के विषय में सुनकर उसे दो दुर्लभ संस्कृत संगीत ग्रंथ भेंट में भेजे थे। सुल्तान ने कश्मीर की आर्थिक उन्नति पर भी ध्यान दिया। उसने दो आदमियों को काग़ज़ बनाने तथा जिल्दसाज़ी की कला सीखने के लिए समरकंद भेजा। उसने कश्मीर में कई कलाओं को प्रोत्साहन दिया। जैसे पत्थर तराशना और उस पर पालिश करना, बोतलें बनाना, स्वर्ण-पत्र बनाना इत्यादि। सम्भवतः उसी ने तिब्बत से शाल बनाने की कला का आयात किया, जिसके लिए कश्मीर आज तक प्रसिद्ध है। दस्ती बंदूक बनाने और आतिशबाज़ी बनाने की कला का भी वहाँ विकास हुआ। सुल्तान ने काफ़ी संख्या में बाँध और पुल बनवाकर कृषि को विकसित किया। वह उत्साही निर्माता था। उसकी सबसे बड़ी अभियात्रा की उपलब्धि जैना का लंका का निर्माण है, जो वुलर झील में नकली टापू के रूप में है। यहीं उसने अपना महल और मस्जिद बनवाई। जैनुल अबादीन को कश्मीरी अभी भी 'बडशाह' के नाम से पुकारते हैं। यद्यपि वह महान् योद्धा नहीं था, फिर भी उसने लद्दाख पर मंगोल आक्रमण को विफल किया था। उसने बालटिस्तान क्षेत्र को विजित किया, तथा जम्मू और राजौरी पर अपना अधिकार बनाये रखा। इस प्रकार उसने कश्मीर राज्य को एकता के सूत्र में पिरोया। जैनुल अबादीन का यश दूर-दूर तक फैल गया था। उसने भारत के अन्य बड़े शासकों तथा एशिया के बड़े शासकों से सम्पर्क बनाये रखा। अबादीन ने अपने शासन काल में अनेक जनप्रिय कार्य किए थे। अपने इन्हीं कार्यों के कारण उसे 'कश्मीर का अकबर' कहा जाता है। मूल्य नियंत्रण की पद्धति चलाने के कारण ही उसे 'कश्मीर का अलाउद्दीन ख़िलजी' भी कहा गया है। अबादीन की एक हज़ार चार सौ सत्तर ई. में मृत्यु हो गई। वह कश्मीरी, फ़ारसी, अरबी और संस्कृत भाषाओं का विद्वान् था। वह 'कुतुब उपनाम' से फ़ारसी में कविताएँ भी लिखा करता था। |
हम सभी जानते हैं कि फिजूलखर्ची करना वाकई बुरा होता है. लेकिन एक महिला पैसे बचाने के लिए इतनी कंजूसी पर उतर आई है कि उसने पिछले 23 साल से कोई कपड़ा नहीं खरीदा. इसलिए इस महिला की चर्चा दुनियाभर में हो रही है.
अक्सर कहा जाता है कि फिजूलखर्ची करना अच्छी बात नहीं है. मगर एक महिला ने इस कहावत को कुछ ज्यादा ही सीरियस ले लिया. दरअसल हम आपको एक ऐसी महिला के बारे में बताने जा रहे हैं जो इस हद तक पैसे बचाती है कि जरूरी चीजों के लिए भी पैसे नहीं खर्च करती. न्यूयॉर्क में रहने वाली केट हाशीमोटो अपनी जिंदगी में इस्तेमाल होने वाली छोटी बड़ी चीजों को खरीदने में हमेशा कटौती करती हैं. जिसके चलते वो जरूरी सामानों को नहीं खरीदती. उनके अनुसार ये उनका पैसे बचाने का तरीका है.
एक शो में बात करते हुए केट ने अपने बारे में कई दिलचस्प बातें बताईं. उन्होंने बताया कि वो 3 साल से न्यूयॉर्क में रह रही हैं. भले ही शहर रहने के लिहाज से काफी महंगा है मगर उन्होंने कई खास तरीके खोज निकाले हैं जिससे वो अपने खर्चे कम करती हैं. इस तरह केट महीने में रहने के लिए सिर्फ 14, 800 रुपए ही खर्च करती हैं. केट ने इंटरव्यू में बताया कि वो घर के लिए कभी भी फर्नीचर नहीं खरीदती हैं. वो हमेशा सड़क किनारे पड़े कबाड़ का इस्तेमाल कर के घर के लिए फर्नीचर बना लेती हैं.
केट ने ये भी बताया- "कई बार लोग अपने पुराने टूटे सामान को घर के किनारे फेंक देते हैं तो मैं उसे अपने घर में लेकर आ जाती हूं. इस तरह मैंने काफी बचत कर ली." यही नहीं, केट ने बताया कि उन्होंने पिछले 8 साल से अपने लिए एक भी कपड़ा नहीं खरीदा. उन्होंने 1998 में अपने लिए आखिरी बार कोई कपड़ा खरीदा था. उसके बाद से आज तक उन्होंने कपड़ों पर किसी तरह की कोई रकम खर्च नहीं की. महिला ने बताया कि जब वो नहाती हैं उसी दौरान उनके कपड़े पानी में धुल जाते हैं.
एक हैरान करने वाली बात ये कि केट ने अलग से कपड़े धोने के साबुन का खर्चा बचाने के लिए 3 साल से कपड़े नहीं धुले हैं. इसके अलावा और भी ऐसी बातें है, जिन्हें जान किसी का भी दिमाग चकरा जाएगा. आपको बता दें कि यहां तक कि केट पैसे बचाने के लिए टॉयलेट पेपर नहीं खरीदती हैं. वो सिर्फ पानी और साबुन का इस्तेमाल खुद को साफ करने के लिए करती हैं इस तरह बचत कर के केट ने महज 6 महीने में 5 हजार पाउंड यानी 6 लाख से भी ज्यादा रुपए बचा लिए हैं.
| हम सभी जानते हैं कि फिजूलखर्ची करना वाकई बुरा होता है. लेकिन एक महिला पैसे बचाने के लिए इतनी कंजूसी पर उतर आई है कि उसने पिछले तेईस साल से कोई कपड़ा नहीं खरीदा. इसलिए इस महिला की चर्चा दुनियाभर में हो रही है. अक्सर कहा जाता है कि फिजूलखर्ची करना अच्छी बात नहीं है. मगर एक महिला ने इस कहावत को कुछ ज्यादा ही सीरियस ले लिया. दरअसल हम आपको एक ऐसी महिला के बारे में बताने जा रहे हैं जो इस हद तक पैसे बचाती है कि जरूरी चीजों के लिए भी पैसे नहीं खर्च करती. न्यूयॉर्क में रहने वाली केट हाशीमोटो अपनी जिंदगी में इस्तेमाल होने वाली छोटी बड़ी चीजों को खरीदने में हमेशा कटौती करती हैं. जिसके चलते वो जरूरी सामानों को नहीं खरीदती. उनके अनुसार ये उनका पैसे बचाने का तरीका है. एक शो में बात करते हुए केट ने अपने बारे में कई दिलचस्प बातें बताईं. उन्होंने बताया कि वो तीन साल से न्यूयॉर्क में रह रही हैं. भले ही शहर रहने के लिहाज से काफी महंगा है मगर उन्होंने कई खास तरीके खोज निकाले हैं जिससे वो अपने खर्चे कम करती हैं. इस तरह केट महीने में रहने के लिए सिर्फ चौदह, आठ सौ रुपयापए ही खर्च करती हैं. केट ने इंटरव्यू में बताया कि वो घर के लिए कभी भी फर्नीचर नहीं खरीदती हैं. वो हमेशा सड़क किनारे पड़े कबाड़ का इस्तेमाल कर के घर के लिए फर्नीचर बना लेती हैं. केट ने ये भी बताया- "कई बार लोग अपने पुराने टूटे सामान को घर के किनारे फेंक देते हैं तो मैं उसे अपने घर में लेकर आ जाती हूं. इस तरह मैंने काफी बचत कर ली." यही नहीं, केट ने बताया कि उन्होंने पिछले आठ साल से अपने लिए एक भी कपड़ा नहीं खरीदा. उन्होंने एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में अपने लिए आखिरी बार कोई कपड़ा खरीदा था. उसके बाद से आज तक उन्होंने कपड़ों पर किसी तरह की कोई रकम खर्च नहीं की. महिला ने बताया कि जब वो नहाती हैं उसी दौरान उनके कपड़े पानी में धुल जाते हैं. एक हैरान करने वाली बात ये कि केट ने अलग से कपड़े धोने के साबुन का खर्चा बचाने के लिए तीन साल से कपड़े नहीं धुले हैं. इसके अलावा और भी ऐसी बातें है, जिन्हें जान किसी का भी दिमाग चकरा जाएगा. आपको बता दें कि यहां तक कि केट पैसे बचाने के लिए टॉयलेट पेपर नहीं खरीदती हैं. वो सिर्फ पानी और साबुन का इस्तेमाल खुद को साफ करने के लिए करती हैं इस तरह बचत कर के केट ने महज छः महीने में पाँच हजार पाउंड यानी छः लाख से भी ज्यादा रुपए बचा लिए हैं. |
वीडियो डेस्क। टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड जीतने वाले नीरज चोपड़ा डांस+ 6 में पहुंचे हैं। इस शो का एक क्लिप जमकर वायरल हो रहा है जहां वे शो की जज शक्ति मोहन को प्रपोज करते नजर आ रहे हैं। ये क्लिप सोशल मीडिया पर छाया हुआ है।
वीडियो डेस्क। मान लो तो हार होगी ठान लो तो जीत होगी। ये कहावत तो सुनी होगी लेकिन इस चरितार्थ किया है अमेरिका के 23 साल के जियोन क्लार्क ने। जिन्होंने 4. 78 में 20 मीटर हाथों से चलकर नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है।
टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने के बाद नीरेज चोपड़ा ने एशियानेट से बातचीत के दौरान अभिनव बिंद्रा क्लब में शामिल होने की बात कही थी।
दरअसल, नीरज चोपड़ा ओलिंपिक की तैयारी के लिए जर्मनी जा रहे थे। उस दौरान वे अबुधाबी से फ्लाइट लेकर जर्मनी के शहर फ्रैंकफर्ट जा रहे थे।
पीएम मोदी को मिले गिफ्ट्स का ऑनलाइन ऑक्शन कल्चरल मिनिस्ट्री कर रही है। करीब 1300 सामानों का ऑनलाइन ऑक्शन 17 सितंबर से 7 अक्टूबर तक चलेगा।
वाडा ने यह निर्णय उस वक्त लिया है जब टोक्यो ओलंपिक में अमेरिकी एथलीट शा'कारी रिचर्डसन डोपिंग टेस्ट में भांग पॉजिटिव मिली थीं।
एम्मा रादुकानू (Emma Raducanu) ने इतिहास रचा और 53 साल में यूएस ओपन खिताब जीतने वाली पहली ब्रिटिश (British) महिला बनीं।
मुंबई : खेल और बॉलीवुड जगत का भी एक खास रिश्ता है। कई सारे फेमस खिलाड़ी, बॉलीवुड एक्टर-एक्ट्रेस इससे बेहद क्लोज हैं। उन्हीं में से एक है पीवी सिंधु (PV Sindhu) जो बी टाउन की फेमस सेलिब्रिटी दिपिका पदुकोण की करीबियों में से एक है। शनिवार को दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone), पीवी सिंधु और रणवीर सिंह एक साथ डिनर पर गए। जहां दीपिका और सिंधु को एक साथ देखा गया, वहीं रणवीर (Ranveer Singh) बाद में उनके साथ शामिल हुए। एक्ट्रेस और बैडमिंटन खिलाड़ी को मुंबई के एक लोकप्रिय रेस्तरां के बाहर स्पॉट किया गया। दोनों ने एक साथ पोज भी दिया। आइए आपको भी दिखाते हैं, उनकी ये फोटोज. .
| वीडियो डेस्क। टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड जीतने वाले नीरज चोपड़ा डांस+ छः में पहुंचे हैं। इस शो का एक क्लिप जमकर वायरल हो रहा है जहां वे शो की जज शक्ति मोहन को प्रपोज करते नजर आ रहे हैं। ये क्लिप सोशल मीडिया पर छाया हुआ है। वीडियो डेस्क। मान लो तो हार होगी ठान लो तो जीत होगी। ये कहावत तो सुनी होगी लेकिन इस चरितार्थ किया है अमेरिका के तेईस साल के जियोन क्लार्क ने। जिन्होंने चार. अठहत्तर में बीस मीटर हाथों से चलकर नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने के बाद नीरेज चोपड़ा ने एशियानेट से बातचीत के दौरान अभिनव बिंद्रा क्लब में शामिल होने की बात कही थी। दरअसल, नीरज चोपड़ा ओलिंपिक की तैयारी के लिए जर्मनी जा रहे थे। उस दौरान वे अबुधाबी से फ्लाइट लेकर जर्मनी के शहर फ्रैंकफर्ट जा रहे थे। पीएम मोदी को मिले गिफ्ट्स का ऑनलाइन ऑक्शन कल्चरल मिनिस्ट्री कर रही है। करीब एक हज़ार तीन सौ सामानों का ऑनलाइन ऑक्शन सत्रह सितंबर से सात अक्टूबर तक चलेगा। वाडा ने यह निर्णय उस वक्त लिया है जब टोक्यो ओलंपिक में अमेरिकी एथलीट शा'कारी रिचर्डसन डोपिंग टेस्ट में भांग पॉजिटिव मिली थीं। एम्मा रादुकानू ने इतिहास रचा और तिरेपन साल में यूएस ओपन खिताब जीतने वाली पहली ब्रिटिश महिला बनीं। मुंबई : खेल और बॉलीवुड जगत का भी एक खास रिश्ता है। कई सारे फेमस खिलाड़ी, बॉलीवुड एक्टर-एक्ट्रेस इससे बेहद क्लोज हैं। उन्हीं में से एक है पीवी सिंधु जो बी टाउन की फेमस सेलिब्रिटी दिपिका पदुकोण की करीबियों में से एक है। शनिवार को दीपिका पादुकोण , पीवी सिंधु और रणवीर सिंह एक साथ डिनर पर गए। जहां दीपिका और सिंधु को एक साथ देखा गया, वहीं रणवीर बाद में उनके साथ शामिल हुए। एक्ट्रेस और बैडमिंटन खिलाड़ी को मुंबई के एक लोकप्रिय रेस्तरां के बाहर स्पॉट किया गया। दोनों ने एक साथ पोज भी दिया। आइए आपको भी दिखाते हैं, उनकी ये फोटोज. . |
गुजरात. गुजरात में भारतीय जनता पार्टी रिकॉर्ड जीत की ओर बढ़ गई है। राज्य में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए भाजपा 150 से अधिक सीटों पर जीत हासिल कर सकती है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दावों से बेहद दूर रह गई है। कांग्रेस करीब 20 और आम आदमी पार्टी आधे दर्जन सीटों पर बढ़त बनाए हुए है।
भगवा आंधी में असदुद्दीन औवेसी की पार्टी को भी कोई खास सफलता नहीं मिली। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के उम्मीदवार ने भुज सीट पर जरूर दम दिखाया। ओवैसी की पार्टी ने यहां कांग्रेस को बड़ा झटका दिया और दूसरा स्थान कब्जाया। भुज से एआईएमआईएम उम्मीदवार सकील महामाद सामा दूसरे नंबर पर हैं। वह काफी देर तक सबसे आगे रहे, लेकिन बाद में भाजपा के केशुभाई शिवादास पटेल से पिछड़ गए।
ओवैसी की पार्टी ने गुजरात में इस बार 13 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। एआईएमआईएम को सुबह 10:40 तक 0. 42% वोट शेयर मिले हैं। भाजपा को करीब 54 फीसदी वोटशेयर मिले हैं। कांग्रेस को 26. 50 फीसदी वोट मिले हैं, जबकि आम आदमी पार्टी ने 12. 88 फीसदी वोटशेयर पर कब्जा किया है। ओवैसी ने गुजरात में कई सीटों पर प्रचार किया और मुस्लिम वोटर्स के बीच अपनी पार्टी की पकड़ बनाने की भरसक कोशिश की।
| गुजरात. गुजरात में भारतीय जनता पार्टी रिकॉर्ड जीत की ओर बढ़ गई है। राज्य में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए भाजपा एक सौ पचास से अधिक सीटों पर जीत हासिल कर सकती है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दावों से बेहद दूर रह गई है। कांग्रेस करीब बीस और आम आदमी पार्टी आधे दर्जन सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। भगवा आंधी में असदुद्दीन औवेसी की पार्टी को भी कोई खास सफलता नहीं मिली। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के उम्मीदवार ने भुज सीट पर जरूर दम दिखाया। ओवैसी की पार्टी ने यहां कांग्रेस को बड़ा झटका दिया और दूसरा स्थान कब्जाया। भुज से एआईएमआईएम उम्मीदवार सकील महामाद सामा दूसरे नंबर पर हैं। वह काफी देर तक सबसे आगे रहे, लेकिन बाद में भाजपा के केशुभाई शिवादास पटेल से पिछड़ गए। ओवैसी की पार्टी ने गुजरात में इस बार तेरह सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। एआईएमआईएम को सुबह दस:चालीस तक शून्य. बयालीस% वोट शेयर मिले हैं। भाजपा को करीब चौवन फीसदी वोटशेयर मिले हैं। कांग्रेस को छब्बीस. पचास फीसदी वोट मिले हैं, जबकि आम आदमी पार्टी ने बारह. अठासी फीसदी वोटशेयर पर कब्जा किया है। ओवैसी ने गुजरात में कई सीटों पर प्रचार किया और मुस्लिम वोटर्स के बीच अपनी पार्टी की पकड़ बनाने की भरसक कोशिश की। |
कोलकाता : पश्चिम बंगाल में हो रहे पंचायत चुनाव के दौरान हिंसा का दौर शुरू हुआ और शनिवार को दिनभर हमले, बमबारी, गोलीबारी और चाकूबाजी घटनाएं सामने आती रहीं। वोटिंग के बीच हिंसा में अब तक 11 लोगों के मारे जाने की खबर है। गुंडई और दबंगई का आलम ऐसा रहा कि कई जगह बैलेट पेपर लूटे गए। उनमें आग लगा दी गई। कहीं पानी डालकर खराब कर दिया। कूच बिहार में तो एक युवक बैलेट बॉक्स ही छीनकर भाग गया। कई जगह बैलेट पेपर लूटने और आगजनी की तस्वीरें आईं। कूचबिहार की इस घटना का वीडियो सामने आया है, जिसमें आरोपी युवक पहले मतपेटी छीनता है, फिर उसे हाथों में लेकर दौड़ लगा देता है। ये युवक खुलेआम मतपेटी लेकर भाग गया है। उसके बारे में कुछ पता नहीं चल सका है। घटना माथाभांगा की है। आरोपी के साथ एक अन्य शख्स भी भागते देखा गया।
उत्तर 24 परगना में टीएमसी और सीपीएम वर्कर्स में विवाद हो गया है और झड़प हुई है। सीपीएम ने आरोप लगाया कि टीएमसी वर्कर्स बाहरी लोगों को लेकर आई और इलाके में गोलीबारी की और ईंटें फेंकी। घटना राजारहाट ब्लॉक के जांगड़ा हटियारा ग्राम पंचायत 2 नंबर की है। विरोध में गौरांग नगर स्पोर्टिंग क्लब के बूथ नंबर 266 और 267 पर सीपीआईएम ने बूथ में घुसकर हमला किया। बूथ कक्ष को पूरी तरह तोड़ दिया है. आरोप है कि मतपेटी में पानी डाल दिया गया।
नदिया में ग्रामीणों ने मतपेटी को जला दिया है। बीजेपी ने काफी देर तक सड़क जाम कर प्रदर्शन किया है। घटना चकदा ब्लॉक के घेतुगाछी ग्राम पंचायत के बूथ नंबर 251, 252, 253 की है। आरोप है कि रात के अंधेरे में मतपेटियां लूटी गईं और सुबह मतपेटियां सील कर दी गईं। टीएमसी के खिलाफ शिकायत की गई है। घटना के विरोध में बीजेपी ने शिमुराली-कालीबाजार स्टेट हाईवे पर मंडलहाट में सड़क जाम कर दी। उधर, ग्रामीणों ने कथित तौर पर मतपेटियां जला दीं।
| कोलकाता : पश्चिम बंगाल में हो रहे पंचायत चुनाव के दौरान हिंसा का दौर शुरू हुआ और शनिवार को दिनभर हमले, बमबारी, गोलीबारी और चाकूबाजी घटनाएं सामने आती रहीं। वोटिंग के बीच हिंसा में अब तक ग्यारह लोगों के मारे जाने की खबर है। गुंडई और दबंगई का आलम ऐसा रहा कि कई जगह बैलेट पेपर लूटे गए। उनमें आग लगा दी गई। कहीं पानी डालकर खराब कर दिया। कूच बिहार में तो एक युवक बैलेट बॉक्स ही छीनकर भाग गया। कई जगह बैलेट पेपर लूटने और आगजनी की तस्वीरें आईं। कूचबिहार की इस घटना का वीडियो सामने आया है, जिसमें आरोपी युवक पहले मतपेटी छीनता है, फिर उसे हाथों में लेकर दौड़ लगा देता है। ये युवक खुलेआम मतपेटी लेकर भाग गया है। उसके बारे में कुछ पता नहीं चल सका है। घटना माथाभांगा की है। आरोपी के साथ एक अन्य शख्स भी भागते देखा गया। उत्तर चौबीस परगना में टीएमसी और सीपीएम वर्कर्स में विवाद हो गया है और झड़प हुई है। सीपीएम ने आरोप लगाया कि टीएमसी वर्कर्स बाहरी लोगों को लेकर आई और इलाके में गोलीबारी की और ईंटें फेंकी। घटना राजारहाट ब्लॉक के जांगड़ा हटियारा ग्राम पंचायत दो नंबर की है। विरोध में गौरांग नगर स्पोर्टिंग क्लब के बूथ नंबर दो सौ छयासठ और दो सौ सरसठ पर सीपीआईएम ने बूथ में घुसकर हमला किया। बूथ कक्ष को पूरी तरह तोड़ दिया है. आरोप है कि मतपेटी में पानी डाल दिया गया। नदिया में ग्रामीणों ने मतपेटी को जला दिया है। बीजेपी ने काफी देर तक सड़क जाम कर प्रदर्शन किया है। घटना चकदा ब्लॉक के घेतुगाछी ग्राम पंचायत के बूथ नंबर दो सौ इक्यावन, दो सौ बावन, दो सौ तिरेपन की है। आरोप है कि रात के अंधेरे में मतपेटियां लूटी गईं और सुबह मतपेटियां सील कर दी गईं। टीएमसी के खिलाफ शिकायत की गई है। घटना के विरोध में बीजेपी ने शिमुराली-कालीबाजार स्टेट हाईवे पर मंडलहाट में सड़क जाम कर दी। उधर, ग्रामीणों ने कथित तौर पर मतपेटियां जला दीं। |
अगर आप अपने दाम्पत्य जीवन को खुशहाल बनाये रखना चाहते हो और उसमें प्यार की कोई गुंजाइश नहीं रखना चाहते हो, तो आज के दिन कोई दो अच्छी-सी खुशबू वाले इत्र की शीशी खरीदें और उसमें से एक शीशी को किसी मन्दिर में दान कर दें और दूसरी शीशी को अपने जीवनसाथी को गिफ्ट कर दें। आज के दिन ऐसा करने से आपका दाम्पत्य जीवन खुशहाल रहेगा और आपके रिश्ते में प्यार ही प्यार होगा।
अपने सुख-सौभाग्य की वृद्धि के लिये आज के दिन गाय का शुद्ध देसी घी और एक कपूर की डिब्बी मन्दिर में दान करें। साथ ही मन्दिर जाकर उस कपूर की डिब्बी में से एक कपूर की टिकिया निकालकर अपने हाथों से जलाएं और भगवान की आरती करें। बाकी मन्दिर में ही रखी रहने दें। आज के ऐसा करने से आपके सुख-सौभाग्य में निश्चित रूप से वृद्धि होगी।
| अगर आप अपने दाम्पत्य जीवन को खुशहाल बनाये रखना चाहते हो और उसमें प्यार की कोई गुंजाइश नहीं रखना चाहते हो, तो आज के दिन कोई दो अच्छी-सी खुशबू वाले इत्र की शीशी खरीदें और उसमें से एक शीशी को किसी मन्दिर में दान कर दें और दूसरी शीशी को अपने जीवनसाथी को गिफ्ट कर दें। आज के दिन ऐसा करने से आपका दाम्पत्य जीवन खुशहाल रहेगा और आपके रिश्ते में प्यार ही प्यार होगा। अपने सुख-सौभाग्य की वृद्धि के लिये आज के दिन गाय का शुद्ध देसी घी और एक कपूर की डिब्बी मन्दिर में दान करें। साथ ही मन्दिर जाकर उस कपूर की डिब्बी में से एक कपूर की टिकिया निकालकर अपने हाथों से जलाएं और भगवान की आरती करें। बाकी मन्दिर में ही रखी रहने दें। आज के ऐसा करने से आपके सुख-सौभाग्य में निश्चित रूप से वृद्धि होगी। |
India News (इंडिया न्यूज़) Agra News Rinki Upadhyay आगरा : नगर निगम ने संजय प्लेस के 38 ब्लॉक में पार्किंग का ठेका उठाया।
विरोध में व्यापारी एक ब्लाक से दूसरे ब्लाक में पैसे वसूल रहे है। सड़कों पर पार्किंग की पर्ची काट रहे है।
इंडिया न्यूज़ संवाददाता रिंकी उपाध्याय की खबर के मुताबिक यदि आपने बैंक से पैसे निकाले तो आपको पार्किंग के नाम पर 50 रुपये देने होंगे।
वहीं, बगल में यदि आपको किसी और काम से जाना है और वो स्थान दूसरे ब्लाक में आता है तो आपको फिर से पार्किंग शुल्क देना होगा।
इस तरह आप जितने ब्लाक घूमेंगे उसके आधार से आपको प्रति ब्लाक बाइक पर 20 रुपये और कार के लिए 50 रुपये पार्किंग शुल्क अदा करना होगा।
दरअसल, निगम ने 10 जनवरी-2023 से 38 ब्लाक में पार्किंग का ठेका उठाया है। एक घंटे के लिए बाइक से 20 तो कार खड़ी करने के नाम पर 50 रुपये की वसूली की जा रही है, जो आम आदमी के लिए काफी ज्यादा है।
ठेकेदार मनमानी से सड़क किनारे और फुटपाथ पर खड़े वाहनों की पार्किंग रसीद काट रहा है। आहार रेस्टोरेंट के सामने तो सड़क पर ही वाहनों की पर्ची काटी जा रही है।
व्यापारी इसके विरोध में हैं। उनका कहना हैं कि ये पार्किंग स्पेस व्यापारियों के हैं। इसका मुकदमा भी कोर्ट में विचाराधीन है। कई स्थानों पर व्यापारियों ने ठेका उठने के बाद भी पार्किंग जमने न हीं दी है।
शहर का हृदय कहे जाने वाले संजय प्लेस को आगरा विकास प्राधिकरण ने विकसित किया था। प्राधिकरण ने 70 से अधिक ब्लॉक बनाए थे। प्रत्येक ब्लॉक में सरकारी, अर्द्धसरकारी और निजी कंपनियों के कार्यालय हैं।
50 से अधिक बैंक, उनके लोन डिपार्टमेंट और कार्यालय हैं। केंद्र और प्रदेश सरकार के 15 से अधिक प्रशासनिक विभाग हैं। 30 हजार से अधिक लोगों का यहां प्रतिदिन आगमन है।
बड़ी संख्या में मोटर साइकिल और चार पहिया के वाहनों का यहां आगमन होता है। परिक्षेत्र में मिशनरी स्कूल के साथ-साथ इलेक्ट्रिकल, कम्यूनिकेशन, फर्नीचर और कपड़ों का बाजार है।
दर्जनों होटल और रेस्टोरेंट यहां संचालित हैं। अधिकांश ब्लॉक के सामने पार्किंग का स्पेस है। नगर निगम इसकी देखरेख कर रहा है।
नगर निगम के 38 ब्लॉक में से आहार रेस्टोरेंट, पाकीजा, चाइनीज, रमन टॉवर, एचडीएफसी बैंक, एमकॉप, जीजी नर्सिंग होम और आधार सेंटर पर पार्किंग ठेका चल रहा है।
शेष स्थानों पर व्यापारी और ठेकेदार आमने-सामने आ गए हैं। हालात ये है कि आधार कार्ड बनवाने के लिए बड़ी संख्या में लोग गांव से शहर आते हैं। इनके नये आधार कार्ड तो निशुल्क बनते हैं।
लेकिन, पार्किंग के नाम पर इन्हें 20 से 50 रुपये अदा करने पड़ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों को ये धनराशि खल जाती है। उनके इनकार करने पर नगर निगम की पार्किंग बता दी जाती है।
कई दफा वे मोटर साइकिल को इधर-उधर खड़ा करके उसके पास अपने बच्चों को छोड़ जाते हैं।
प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने पार्किंग को लेकर साफ निर्देश दिए हैं। उनका कहना हैं कि जिस स्थान पर पार्किंग ठेका उठाया जाए। वहां शौचालय और पानी की व्यवस्था आवश्यक है।
लेकिन, संजय प्लेस की पार्किंग में इसका कोई ध्यान नहीं रखा गया है। पार्किंग का शुल्क तो लोग अदा कर रहे हैं। लेकिन, जनसुविधाओं से वंचित हैं। हालात ये हैं कि इन 38 स्थानों पर न शौचालय की कोई व्यवस्था है और न ही पेयजल की।
शहर के इतने बड़े बाजार में पर्याप्त शौचालय और पेयजल की सुविधा नहीं हैं। ऐसे में इस आदेश को दरकिनार कैसे कर दिया गया।
- ठेकेदार पार्किंग पर्ची पर नगर निगम का नाम कैसे कर रहे हैं इस्तेमाल?
- फुटपाथ और रोड पर खड़े वाहन व मोटर साइकिल की पर्ची कैसे रहीं कट?
- सरकारी कार्यालय या बैंक आने वाला व्यक्ति पार्किंग शुल्क क्यों अदा करे?
- संजय प्लेस व्यावसायिक हब है, पार्किंग में तैनात कर्मचारियों की पुलिस वेरीफिकेशन व श्रम विभाग में पंजीकरण क्यों नहीं?
- व्यापारियों का पार्किंग का विवाद कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में कैसे उठ गई पार्किंग?
हम संजय प्लेस का पूर्णरूप से विकास चाहते हैं। पार्किंग नियोजित होनी चाहिए। संजय प्लेस की पार्किंग व्यापारियों की हैं। पहले नगर निगम संजय प्लेस का विकास करें।
उफनते सीवर, स्ट्रीट लाइट, सफाई और रात्रि की नशेबाजी पर अंकुश लगना चाहिए। उसके बाद संजय प्लेस से कमाई की ओर ध्यान दिया जाए।
व्यापारियों के साथ पार्किंग शुल्क पर विचार हो। इसे कम किया जाए। ताकि, लोगों को परेशानी न हो।
संजय प्लेस का इतिहास ही अपने आप में स्वर्णिम रहा है। पुस्तक 'तवारीख-ए-आगरा' में इसके बारे में विस्तार से लिखा गया है।
इतिहासकार राजकिशोर राजे लिखते हैं कि मुगलकाल में संजय प्लेस के स्थान पर अमर सिंह राठौर की कचहरी हुआ करती थी।
साल 1644 में अमर सिंह राठौर की मृत्यु के बाद मुगलों ने यहां हाथियों व अन्य सैन्य, पशुओं को रखना शुरू कर दिया था।
साल 1803 में आगरा अंग्रेजों के अधीन हो गया। ईस्ट इंडिया कंपनी ने साल 1813 में इस स्थान को सेंट्रल जेल में तब्दील कर दिया। जेल में सात वर्ष से अधिक की सजा पाने वाले कैदियों को रखा जाता था।
साल 1971 में भारत पाकिस्तान युद्ध के समय बांग्लादेश में पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सेना के समक्ष समर्पण कर दिया था। समर्पण करने वाले सैनिकों को संजय प्लेस की इसी सेंट्रल जेल में रखा गया था।
1976 में संजय गांधी के निर्देश पर सेंट्रल जेल को तोड़कर कॉमर्शियल मार्केट की नींव रखी गई थी।
| India News Agra News Rinki Upadhyay आगरा : नगर निगम ने संजय प्लेस के अड़तीस ब्लॉक में पार्किंग का ठेका उठाया। विरोध में व्यापारी एक ब्लाक से दूसरे ब्लाक में पैसे वसूल रहे है। सड़कों पर पार्किंग की पर्ची काट रहे है। इंडिया न्यूज़ संवाददाता रिंकी उपाध्याय की खबर के मुताबिक यदि आपने बैंक से पैसे निकाले तो आपको पार्किंग के नाम पर पचास रुपयापये देने होंगे। वहीं, बगल में यदि आपको किसी और काम से जाना है और वो स्थान दूसरे ब्लाक में आता है तो आपको फिर से पार्किंग शुल्क देना होगा। इस तरह आप जितने ब्लाक घूमेंगे उसके आधार से आपको प्रति ब्लाक बाइक पर बीस रुपयापये और कार के लिए पचास रुपयापये पार्किंग शुल्क अदा करना होगा। दरअसल, निगम ने दस जनवरी-दो हज़ार तेईस से अड़तीस ब्लाक में पार्किंग का ठेका उठाया है। एक घंटे के लिए बाइक से बीस तो कार खड़ी करने के नाम पर पचास रुपयापये की वसूली की जा रही है, जो आम आदमी के लिए काफी ज्यादा है। ठेकेदार मनमानी से सड़क किनारे और फुटपाथ पर खड़े वाहनों की पार्किंग रसीद काट रहा है। आहार रेस्टोरेंट के सामने तो सड़क पर ही वाहनों की पर्ची काटी जा रही है। व्यापारी इसके विरोध में हैं। उनका कहना हैं कि ये पार्किंग स्पेस व्यापारियों के हैं। इसका मुकदमा भी कोर्ट में विचाराधीन है। कई स्थानों पर व्यापारियों ने ठेका उठने के बाद भी पार्किंग जमने न हीं दी है। शहर का हृदय कहे जाने वाले संजय प्लेस को आगरा विकास प्राधिकरण ने विकसित किया था। प्राधिकरण ने सत्तर से अधिक ब्लॉक बनाए थे। प्रत्येक ब्लॉक में सरकारी, अर्द्धसरकारी और निजी कंपनियों के कार्यालय हैं। पचास से अधिक बैंक, उनके लोन डिपार्टमेंट और कार्यालय हैं। केंद्र और प्रदेश सरकार के पंद्रह से अधिक प्रशासनिक विभाग हैं। तीस हजार से अधिक लोगों का यहां प्रतिदिन आगमन है। बड़ी संख्या में मोटर साइकिल और चार पहिया के वाहनों का यहां आगमन होता है। परिक्षेत्र में मिशनरी स्कूल के साथ-साथ इलेक्ट्रिकल, कम्यूनिकेशन, फर्नीचर और कपड़ों का बाजार है। दर्जनों होटल और रेस्टोरेंट यहां संचालित हैं। अधिकांश ब्लॉक के सामने पार्किंग का स्पेस है। नगर निगम इसकी देखरेख कर रहा है। नगर निगम के अड़तीस ब्लॉक में से आहार रेस्टोरेंट, पाकीजा, चाइनीज, रमन टॉवर, एचडीएफसी बैंक, एमकॉप, जीजी नर्सिंग होम और आधार सेंटर पर पार्किंग ठेका चल रहा है। शेष स्थानों पर व्यापारी और ठेकेदार आमने-सामने आ गए हैं। हालात ये है कि आधार कार्ड बनवाने के लिए बड़ी संख्या में लोग गांव से शहर आते हैं। इनके नये आधार कार्ड तो निशुल्क बनते हैं। लेकिन, पार्किंग के नाम पर इन्हें बीस से पचास रुपयापये अदा करने पड़ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों को ये धनराशि खल जाती है। उनके इनकार करने पर नगर निगम की पार्किंग बता दी जाती है। कई दफा वे मोटर साइकिल को इधर-उधर खड़ा करके उसके पास अपने बच्चों को छोड़ जाते हैं। प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने पार्किंग को लेकर साफ निर्देश दिए हैं। उनका कहना हैं कि जिस स्थान पर पार्किंग ठेका उठाया जाए। वहां शौचालय और पानी की व्यवस्था आवश्यक है। लेकिन, संजय प्लेस की पार्किंग में इसका कोई ध्यान नहीं रखा गया है। पार्किंग का शुल्क तो लोग अदा कर रहे हैं। लेकिन, जनसुविधाओं से वंचित हैं। हालात ये हैं कि इन अड़तीस स्थानों पर न शौचालय की कोई व्यवस्था है और न ही पेयजल की। शहर के इतने बड़े बाजार में पर्याप्त शौचालय और पेयजल की सुविधा नहीं हैं। ऐसे में इस आदेश को दरकिनार कैसे कर दिया गया। - ठेकेदार पार्किंग पर्ची पर नगर निगम का नाम कैसे कर रहे हैं इस्तेमाल? - फुटपाथ और रोड पर खड़े वाहन व मोटर साइकिल की पर्ची कैसे रहीं कट? - सरकारी कार्यालय या बैंक आने वाला व्यक्ति पार्किंग शुल्क क्यों अदा करे? - संजय प्लेस व्यावसायिक हब है, पार्किंग में तैनात कर्मचारियों की पुलिस वेरीफिकेशन व श्रम विभाग में पंजीकरण क्यों नहीं? - व्यापारियों का पार्किंग का विवाद कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में कैसे उठ गई पार्किंग? हम संजय प्लेस का पूर्णरूप से विकास चाहते हैं। पार्किंग नियोजित होनी चाहिए। संजय प्लेस की पार्किंग व्यापारियों की हैं। पहले नगर निगम संजय प्लेस का विकास करें। उफनते सीवर, स्ट्रीट लाइट, सफाई और रात्रि की नशेबाजी पर अंकुश लगना चाहिए। उसके बाद संजय प्लेस से कमाई की ओर ध्यान दिया जाए। व्यापारियों के साथ पार्किंग शुल्क पर विचार हो। इसे कम किया जाए। ताकि, लोगों को परेशानी न हो। संजय प्लेस का इतिहास ही अपने आप में स्वर्णिम रहा है। पुस्तक 'तवारीख-ए-आगरा' में इसके बारे में विस्तार से लिखा गया है। इतिहासकार राजकिशोर राजे लिखते हैं कि मुगलकाल में संजय प्लेस के स्थान पर अमर सिंह राठौर की कचहरी हुआ करती थी। साल एक हज़ार छः सौ चौंतालीस में अमर सिंह राठौर की मृत्यु के बाद मुगलों ने यहां हाथियों व अन्य सैन्य, पशुओं को रखना शुरू कर दिया था। साल एक हज़ार आठ सौ तीन में आगरा अंग्रेजों के अधीन हो गया। ईस्ट इंडिया कंपनी ने साल एक हज़ार आठ सौ तेरह में इस स्थान को सेंट्रल जेल में तब्दील कर दिया। जेल में सात वर्ष से अधिक की सजा पाने वाले कैदियों को रखा जाता था। साल एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में भारत पाकिस्तान युद्ध के समय बांग्लादेश में पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सेना के समक्ष समर्पण कर दिया था। समर्पण करने वाले सैनिकों को संजय प्लेस की इसी सेंट्रल जेल में रखा गया था। एक हज़ार नौ सौ छिहत्तर में संजय गांधी के निर्देश पर सेंट्रल जेल को तोड़कर कॉमर्शियल मार्केट की नींव रखी गई थी। |
What is cryptocurrency in Hindi :- आज के समय में क्रिप्टोकरेंसी के बारे में कौन नहीं जानता है। जिस तरह से कोरोना महामारी के बाद से बहुत सारे लोगो ने शेयर बाजार में निवेश करना शुरू कर दिया है ठीक उसी प्रकार क्रिप्टोकरेंसी पर भी अब बहुत लोगो का विश्वास बन गया है। इस करेंसी ने बहुत कम समय में बाजार में अपनी पहचान बना ली है जिसके चलते आज हर कोई इसके पीछे भाग रहा है। ऑनलाइन के ज़माने में यह पैसा कमाने का बहुत अच्छा तरीका है परन्तु आपकी जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि ऐसे बहुत सारे देश हैं जहाँ पर क्रिप्टोकरेंसी को लीगल नहीं माना (What is cryptocurrency trading in Hindi) जाता।
हमारे कहने का अर्थ यह हुआ कि जिन देशों में इसको मान्यता प्राप्त नहीं है वहाँ अगर आपके साथ कुछ गलत हो जाता है तो वहाँ की सरकार आपका किसी भी चीज़ में साथ नहीं देगी। इसलिए हमे हमेशा सोच समझ कर ही इसमें निवेश करना चाहिए। हम क्रिप्टोकरेंसी में निवेश ज़रूर कर रहे हैं परन्तु अगर कोई हमसे आकर पूछे कि क्रिप्टोकरेंसी आखिर क्या है तो शायद हम में से ऐसे बहुत सारे लोग होंगे जो इसके बारे में अच्छे से नहीं जानते होंगे। अगर आप भी उन लोगो में से हो जो क्रिप्टोकरेंसी के बारे में नहीं जानते हो तो हमारा आज का आर्टिकल अवश्य (What is crypto trading in Hindi) पढ़ें।
आज के आर्टिकल में हम आपको क्रिप्टोकरेंसी के बारे में विस्तार से बतांएगे। इस आर्टिकल में हम आपको क्रिप्टोकरेंसी से जुडी सारी महत्वपूर्ण चीज़ों के बारे में जानकारी देंगे। साथ ही हम आपको इसके प्रकार, फायदे और नुकसान के बारे में भी जानकरी देंगे। सबसे पहले हम क्रिप्टोकरेंसी क्या होता है यह जान लेते हैं।
क्रिप्टोकरेंसी क्या है? (What is cryptocurrency in Hindi)
क्रिप्टोकरेंसी एक प्रकार की डिजिटल करेंसी है जिसको आप ऑनलाइन खरीद और बेच कर पैसे कमा सकते हैं। जिस तरह से शेयर बाजार में हम शेयर्स में निवेश करते हैं, उनको खरीदते और बेचते हैं उसी प्रकार क्रिप्टोकरेंसी में भी हम ऑनलाइन निवेश कर सकते (How cryptocurrency works) हैं। क्रिप्टोकरेंसी में आप केवल ऑनलाइन ही निवेश कर सकते हैं। इस करेंसी को किसी भी देश की सरकार या बोर्ड द्वारा नहीं चलाया जाता इसीलिए इसे डीसेंटेरलाइज़्ड करेंसी भी कहा जाता है।
अगर आप शेयर बाजार के बारे में थोड़ा बहुत भी जानते हैं तो आपको पता होगा कि भारत में SEBI पूरे शेयर बाजार को संभालता है परन्तु क्रिप्टोकरेंसी के साथ ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। जिस तरह से सभी देशों की अपनी खुद की करेंसी होती है जैसे भारत की रूपए, अमेरिका की डॉलर, यूरोप की यूरो, ऑस्ट्रेलिया की ऑस्ट्रेलियन डॉलर आदि वैसे ही क्रिप्टोकरेंसी को दुनियाभर में इस्तेमाल किया जाता है इसको आप देश के किसी भी कोने से खरीद और बेच सकते (Cryptocurrency full details in Hindi) हैं।
भारत में अभी तक क्रिप्टोकरेंसी को मान्यता प्राप्त नहीं हुई है परन्तु भारत के अलावा ऐसे बहुत सारे देश और कंपनियां है जिन्होंने इसे मान्यता दे दी है। क्रिप्टोकरेन्सी में ब्लॉकचैन तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है जिसके चलते इसको अलग अलग जगह पर ऑनलाइन स्टोर किया जाता है। क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करना बहुत ही सरल है। आज के समय में बहुत सारे ऑनलाइन ऐप्लिकेशन्स है जिन पर अलग अलग प्रकार की क्रिप्टोकरेंसी उपलब्ध (Cryptocurrency ki jankari) है।
क्रिप्टोकरेंसी की शुरुआत कब हुई? (When does cryptocurrency started in Hindi)
क्रिप्टोकरेंसी की शुरुआत सबसे पहले साल 2009 में हुई थी, जिसका नाम बिटकॉइन था। इस करेंसी को जापान के एक इंजीनियर सतोषी नकमोतो ने बनाया था। उस समय में बहुत कम लोग इसके बारे में जानते थे जिसके कारण यह लोगों के बीच अपनी जगह नहीं बना पायी परन्तु कुछ ही सालो में इसने लोगों को अपने पीछे दीवाना कर दिया था। इस करेंसी की वैल्यू आसमान छूने लगी और यह पूरी दुनिया में छा (Cryptocurrency ki shuruaat kab hui) गयी।
आज के समय में बिटकॉइन को नंबर 1 क्रिप्टोकरेंसी कहा जाता है, क्योंकि इस करेंसी ने बहुत ही कम समय में बहुत अच्छी ग्रोथ दिखाई है। जिन लोगो ने भी क्रिप्टोकरेंसी में निवेश किया था उनका पैसा 10,000 गुणा से बढ़ा है जिसके कारण आज हर कोई बस क्रिप्टोकरेंसी की ही बात कर रहा है।
क्रिप्टोकरेंसी के प्रकार (How many types of cryptocurrency are there in Hindi)
अब तक हमने आपको क्रिप्टोकरेंसी क्या होता है और यह कब आया था इसके बारे में बताया। अब हम क्रिप्टोकरेंसी के प्रकार के बारे में बताएँगे जिससे आप इसके बारे में और अच्छे से समझ सकेंगे। वैसे तो क्रिप्टोकरेंसी कई तरह की होती है परन्तु उनमे से कुछ ही ऐसी करेंसीज़ है जो अच्छा परफॉर्म कर रही है। आइये हम विस्तार से क्रिप्टोकरेन्सी के प्रकार के बारे में जानते (Cryptocurrency kitne prakar ki hai) है।
क्रिप्टोकरेंसी की लिस्ट में सबसे पहले नंबर पर नाम आता है बिटकॉइन का। यह करेंसी दुनियाभर में सबसे ज़्यादा मशहूर है। अगर कहीं क्रिप्टोकरेंसी की बात चल रही हो तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं हो सकता की बिटकॉइन की बात ना हो। बिटकॉइन एक डिजिटल करेंसी है जिसको आप ऑनलाइन खरीद और बेच सकते हैं। जब क्रिप्टोकरेंसी को दुनिया के सामने लाया गया था तब सबसे पहले बिटकॉइन की ही चर्चा की गयी थी। उस समय इसकी डिमांड बहुत कम थी परन्तु आज इसकी वैल्यू आसमान छू रही है जिसके कारण यह खूब चर्चा में है।
आज के समय में इस करेंसी की वैल्यू 13 लाख के पार है। इसमें निवेश करके आप बहुत सारा पैसा कमा सकते हैं। आज इसके एक कॉइन की कीमत बहुत ज़्यादा है और यह बहुत अच्छी बात है। अगर इसी तरह इसकी वैल्यू बढ़ती रही तो यह करेंसी और भी ज़्यादा मशहूर हो जाएगी जिससे और भी ज़्यादा लोग इसमें निवेश करेंगे।
इथरम भी एक प्रकार की क्रिप्टोकरेंसी है जिसमे आप ऑनलाइन निवेश कर के खूब सारा पैसा कमा सकते हैं। बिटकॉइन के बाद इस करेंसी को सबसे ज़्यादा लोकप्रिय माना जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इसने बिटकॉइन की तरह बहुत कम समय में अच्छी ग्रोथ दिखाई है जिसके कारण इस करेंसी में जिन लोगों ने निवेश कर रखा था उनको खूब मुनाफा हुआ। इस करेंसी के फाउंडर का नाम विटालिक बुटेरिन है। इस करेंसी को ईथर के नाम से भी जाना जाता है।
कुछ ही समय पहले इथरम को दो भागो में बांटा गया है एक का नाम है इथरम (इटीएच) और दूसरी का नाम है इथरम (इटीसी)। इसमें निवेश करना बहुत ही आसान और सरल है। परन्तु आपको बहुत सोच समझकर ही इसमें निवेश करना चाहिए क्योंकि अगर आपने सोच समझकर इसमें निवेश नहीं किया तो आपका पैसा बढ़ने की बजाय डूब भी सकता है।
लाइटकॉइन एक पीआर टू पीयर क्रिप्टोकरेंसी है जिसको ओपन सॉफ्टवेयर के ज़रिये बनाया गया है। इस करेंसी के पीछे बिटकॉइन का बहुत बड़ा हाथ है। इस करेंसी को अक्टूबर 2011 में चार्ल्स ली द्वारा शुरू किया गया था। चार्ल्स ली गूगल कंपनी में काम कर चुके हैं। इस करेंसी में ऐसी बहुत सारी चीज़ें है जो बिटकॉइन से मिलती जुलती है परन्तु यह करेंसी बिटकॉइन जितनी सफल नहीं हो पायी जिसके कारण बहुत कम लोग इसके बारे में जानते हैं।
आपकी जानकरी के लिए हम आपको बता दें कि लाइटकॉइन की ब्लॉक जनरेशन की टाइम बिटकॉइन के मुकाबले बहुत कम है जो कि इस करेंसी के लिए अच्छी बात है। इसका मतलब यह हुआ कि इस करेंसी में ट्रांजैक्शंस बहुत जल्दी पूरी हो जाती है जिससे लोग ज़्यादा से ज़्यादा इसमें निवेश कर सकते हैं।
क्रिप्टोकरेंसी की लिस्ट में अगला नंबर आता है डॉगकॉइन का। इस करेंसी के बनने के कहानी बहुत ही दिलचस्प और रोचक है। डॉगकॉइन का बिटकॉइन ने मज़ाक उड़ाने के लिए कुत्ते के साथ उसकी तुलना की गयी थी। डॉगकॉइन के फाउंडर का नाम बील्ली मार्क्स है। इस क्रिप्टोकरेंसी में स्क्रिप्ट अल्गोरिथम का इस्तेमाल किया जाता है।
इस क्रिप्टोकरेंसी ने भी अपने निवेशकों को खूब सारा पैसा कमा के दिया है। इसकी मार्केट वैल्यू आज के समय में $197 मिलियन से भी कहीं ज़्यादा है। डॉगकॉइन करेंसी को भी दुनियाभर में एक्सेप्ट किया जाता है। इस क्रिप्टोकरेंसी में माइनिंग बाकि सभी क्रिप्टोकरेंसी के मुकाबले जल्दी होती है जो की बहुत बड़ी बात है।
यह क्रिप्टोकरेंसी भी दुनियाभर में बहुत मशहूर है। साथ ही यह करेंसी वॉल्यूम के हिसाब से सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी है। कहने का अर्थ यह हुआ कि इस क्रिप्टोकरेंसी में बहुत सारे लोग निवेश करते हैं। इस करेंसी को साल 2017 में लॉन्च किया गया था परन्तु इसने केवल कुछ ही समय में लोगों के बीच अपनी अलग पहचान बना ली जिसके कारण आज हर कोई इसमें निवेश करना चाहता है।
इस करेंसी की 2017 में कीमत केवल $0. 10 थी जो 2022 में बढ़ कर 5,200 के पार चली गयी थी। इस करेंसी ने अपने निवेशकों को खूब मुनाफा कमा के दिया है। इसकी मार्केट कैपिटलाइजेशन करेंसी चौथे स्थान पर आती है।
क्रिप्टोकरेंसी की लिस्ट में अब बात करते हैं रिप्पल करेंसी की। यह करेंसी साल 2012 में मार्केट में लॉन्च हुई थी जो कि डिस्ट्रिब्यूटेड ओपन सोर्स प्रोटोकॉल के ऊपर बेस्ड है। इस करेंसी की अपनी खुद की एक करेंसी है जिसको रिप्पल (एक्सआरपी) कहा जाता है और यह रियल टाइम ग्रॉस सेट्लमेंट की तरह काम करती है।
इस करेंसी ने भी अपने निवेशकों को खूब सफलता लाकर दी है। इसकी मार्केट कैपिटलाइजेशन भी $10 बिलियन से ज़्यादा है। यह करेंसी अपने निवेशकों को सुरक्षित, सरल और जल्दी ट्रांजेक्शन पूरे होने का वादा करती है। साथ ही यह करेंसी अपने निवेशकों से किसी ट्रांजेक्शन का कोई चार्ज नहीं लेती जो की बहुत अच्छी बात है।
टेथर भी एक प्रकार की क्रिप्टोकरेंसी है जिसकी मार्केट कैपिटलाइजेशन भी बहुत ज़्यादा है। इस साल इस क्रिप्टोकरेंसी से निवेशक बहुत उमीदें लगाए बैठे है। इस करेंसी में बिटकॉइन में इस्तेमाल होने वाली ब्लॉकचैन तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है।
यह करेंसी बहुत सारे निवेशकों की पसंदीदा लिस्ट में से एक है परन्तु इस करेंसी में काफी उतार चढ़ाव भी होता है इसलिए इसमें सोच समझ कर ही निवेश करना चाहिए।
क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने के फायदे (Benefits of cryptocurrency on economy in Hindi)
ऊपर हमने आपको क्रिप्टोकरेंसी के अनेक प्रकारों के बारे में बताया अब हम इसमें निवेश करने के फायदों के बारे में बताएंगे। जिस प्रकार आज के समय में हम शेयर्स की ऑनलाइन लेया बेची कर सकते हैं उसी प्रकार क्रिप्टोकरेंसी को भी ऑनलाइन खरीदना और बेचना हमारे लिए एक सुविधा के बराबर है। अब हम विस्तार से आपको क्रिप्टोकरेंसी के फायदों के बारे में बताते (Benefits of Cryptocurrency in Hindi) है।
- क्रिप्टोकरेंसी की मदद से आप ऑनलाइन निवेश कर सकते हैं। आप घर बैठे बैठे ही इसमें निवेश कर के खूब सारा पैसा कमा सकते है। क्रिप्टोकरेंसी को खरीदना और बेचना बहुत ही आसान है जिसको आप बहुत ही जल्दी सिख सकते है।
- हालाँकि क्रिप्टोकरेंसी का कोई रेगुलेटर नहीं है परन्तु इसमें फ्रॉड होने के चान्सेस बहुत ही कम है क्योंकि इसमें सब कुछ ऑनलाइन होता है जिसमे सभी ऑनलाइन ट्रांजैक्शंस मॉनिटर की जाती है और किसी भी प्रकार के फ्रॉड या स्कैम के चान्सेस बहुत कम होते है।
- अगर आप क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करते हैं तो आपको पता ही होगा की इसमें कोई भी ट्रांजेक्शन बहुत जल्दी सेटल हो जाती है। इसमें आपको बहुत देर तक वेट नहीं करना पड़ता बल्कि इसमें बहुत सारी ट्रांजैक्शंस एक साथ कुछ ही समय में सेटल हो जाती है।
- क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने की ट्रांजेक्शन फीस भी बहुत कम है। यह इस करेंसी की बहुत बड़ी खासियत है जिससे बहुत सारे निवेशक इसमें निवेश करना चाहते हैं।
क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने के नुकसान (Negative impact of cryptocurrency on economy in Hindi)
हमने क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने के फायदे के बारे में तो जान लिया। अब हम इसके नुकसान के बारे में भी जान लेते है।
- क्रिप्टोकरेंसी को अभी तक बहुत सारे देशों में मान्यता प्राप्त नहीं हुई है जो कि इसको निवेश करने का बहुत ज़्यादा रिस्की तरीका बनाता है। क्रिप्टोकरेंसी को शेयर्स के मुकाबले ज़्यादा रिस्की माना जाता है।
- क्रिप्टोकरेंसी के भाव में उतर चढ़ाव बहुत ज़्यादा होता है जिसका अनुमान लगा पाना बहुत ही मुश्किल होता है। इसलिए हमे हमेशा सोच समझ कर ही इसमें निवेश करना चाहिए और उतना ही निवेश करना चाहिए जितने का नुक्सान हम उठा सके।
- क्योंकि क्रिप्टोकरेंसी का पूरा सिस्टम ऑनलाइन है तो इसमें फ्रॉड होने के चान्सेस भी कई ज़्यादा हैं। इसमें आपका अकाउंट कभी भी हैक हो सकता है और आप अपने सारे पैसे इसमें गवां सकते हैं।
- क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि अगर आपने एक बार कोई आर्डर प्लेस कर दिया तो फिर आप उसे कैंसिल नहीं कर सकते हैं जिससे निवेशकों को बहुत नुकसान हो सकता है।
प्रश्नः क्रिप्टोकरेंसी क्या होता है?
उत्तरः क्रिप्टोकरेंसी एक प्रकार की डिजिटल करेंसी है जिसको आप ऑनलाइन खरीद और बेच कर पैसे कमा सकते है।
प्रश्नः क्रिप्टोकरेंसी कितने प्रकार की होती है?
उत्तरः क्रिप्टोकरेंसी बहुत प्रकार की होती है जिनमे से कुछ है बिटकॉइन, इथरम, रिप्पल, डॉगकॉइन, टेथर, बाइनैंस कॉइन, लाइटकॉइन आदि।
प्रश्नः क्रिप्टोकरेंसी से क्या फायदा होता है?
उत्तरः क्रिप्टोकरेंसी में निवेश कर के आप बहुत सारा पैसा कमा सकते है। इसमें निवेश करना बहुत ही आसान और सरल है।
प्रश्नः क्रिप्टो अच्छा है या बुरा?
उत्तरः अगर आप संभल कर क्रिप्टो में निवेश करते है तो आप इससे खूब सारा पैसा कमा सकते है परन्तु अगर आपको इसकी जानकरी नहीं है तो आप इसमें अपना पैसा गवां भी सकते है।
प्रश्नः क्रिप्टो करेंसी से क्या खतरा है?
उत्तरः क्रिप्टोकरेंसी की शुरुआत सबसे पहले साल 2009 में हुई थी जिसका नाम बिटकॉइन था। इस करेंसी के मालिक जापान के एक इंजीनियर सतोषी नकमोतो है।
प्रश्नः क्रिप्टोकरेंसी के क्या नुकसान हो सकते है?
उत्तरः क्रिप्टोकरेंसी का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि इस करेंसी का कोई रेगुलेटर नहीं है जिससे इसमें निवेश करना बहुत जोखिम भरा काम है।
तो इस तरह से आपने क्रिप्टोकरेंसी के बारे में संपूर्ण जानकारी प्राप्त कर ली है कि क्रिप्टोकरेंसी क्या है यह कितने प्रकार की होती है इसके फायदे और नुकसान क्या क्या हैं इत्यादि।
| What is cryptocurrency in Hindi :- आज के समय में क्रिप्टोकरेंसी के बारे में कौन नहीं जानता है। जिस तरह से कोरोना महामारी के बाद से बहुत सारे लोगो ने शेयर बाजार में निवेश करना शुरू कर दिया है ठीक उसी प्रकार क्रिप्टोकरेंसी पर भी अब बहुत लोगो का विश्वास बन गया है। इस करेंसी ने बहुत कम समय में बाजार में अपनी पहचान बना ली है जिसके चलते आज हर कोई इसके पीछे भाग रहा है। ऑनलाइन के ज़माने में यह पैसा कमाने का बहुत अच्छा तरीका है परन्तु आपकी जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि ऐसे बहुत सारे देश हैं जहाँ पर क्रिप्टोकरेंसी को लीगल नहीं माना जाता। हमारे कहने का अर्थ यह हुआ कि जिन देशों में इसको मान्यता प्राप्त नहीं है वहाँ अगर आपके साथ कुछ गलत हो जाता है तो वहाँ की सरकार आपका किसी भी चीज़ में साथ नहीं देगी। इसलिए हमे हमेशा सोच समझ कर ही इसमें निवेश करना चाहिए। हम क्रिप्टोकरेंसी में निवेश ज़रूर कर रहे हैं परन्तु अगर कोई हमसे आकर पूछे कि क्रिप्टोकरेंसी आखिर क्या है तो शायद हम में से ऐसे बहुत सारे लोग होंगे जो इसके बारे में अच्छे से नहीं जानते होंगे। अगर आप भी उन लोगो में से हो जो क्रिप्टोकरेंसी के बारे में नहीं जानते हो तो हमारा आज का आर्टिकल अवश्य पढ़ें। आज के आर्टिकल में हम आपको क्रिप्टोकरेंसी के बारे में विस्तार से बतांएगे। इस आर्टिकल में हम आपको क्रिप्टोकरेंसी से जुडी सारी महत्वपूर्ण चीज़ों के बारे में जानकारी देंगे। साथ ही हम आपको इसके प्रकार, फायदे और नुकसान के बारे में भी जानकरी देंगे। सबसे पहले हम क्रिप्टोकरेंसी क्या होता है यह जान लेते हैं। क्रिप्टोकरेंसी क्या है? क्रिप्टोकरेंसी एक प्रकार की डिजिटल करेंसी है जिसको आप ऑनलाइन खरीद और बेच कर पैसे कमा सकते हैं। जिस तरह से शेयर बाजार में हम शेयर्स में निवेश करते हैं, उनको खरीदते और बेचते हैं उसी प्रकार क्रिप्टोकरेंसी में भी हम ऑनलाइन निवेश कर सकते हैं। क्रिप्टोकरेंसी में आप केवल ऑनलाइन ही निवेश कर सकते हैं। इस करेंसी को किसी भी देश की सरकार या बोर्ड द्वारा नहीं चलाया जाता इसीलिए इसे डीसेंटेरलाइज़्ड करेंसी भी कहा जाता है। अगर आप शेयर बाजार के बारे में थोड़ा बहुत भी जानते हैं तो आपको पता होगा कि भारत में SEBI पूरे शेयर बाजार को संभालता है परन्तु क्रिप्टोकरेंसी के साथ ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। जिस तरह से सभी देशों की अपनी खुद की करेंसी होती है जैसे भारत की रूपए, अमेरिका की डॉलर, यूरोप की यूरो, ऑस्ट्रेलिया की ऑस्ट्रेलियन डॉलर आदि वैसे ही क्रिप्टोकरेंसी को दुनियाभर में इस्तेमाल किया जाता है इसको आप देश के किसी भी कोने से खरीद और बेच सकते हैं। भारत में अभी तक क्रिप्टोकरेंसी को मान्यता प्राप्त नहीं हुई है परन्तु भारत के अलावा ऐसे बहुत सारे देश और कंपनियां है जिन्होंने इसे मान्यता दे दी है। क्रिप्टोकरेन्सी में ब्लॉकचैन तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है जिसके चलते इसको अलग अलग जगह पर ऑनलाइन स्टोर किया जाता है। क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करना बहुत ही सरल है। आज के समय में बहुत सारे ऑनलाइन ऐप्लिकेशन्स है जिन पर अलग अलग प्रकार की क्रिप्टोकरेंसी उपलब्ध है। क्रिप्टोकरेंसी की शुरुआत कब हुई? क्रिप्टोकरेंसी की शुरुआत सबसे पहले साल दो हज़ार नौ में हुई थी, जिसका नाम बिटकॉइन था। इस करेंसी को जापान के एक इंजीनियर सतोषी नकमोतो ने बनाया था। उस समय में बहुत कम लोग इसके बारे में जानते थे जिसके कारण यह लोगों के बीच अपनी जगह नहीं बना पायी परन्तु कुछ ही सालो में इसने लोगों को अपने पीछे दीवाना कर दिया था। इस करेंसी की वैल्यू आसमान छूने लगी और यह पूरी दुनिया में छा गयी। आज के समय में बिटकॉइन को नंबर एक क्रिप्टोकरेंसी कहा जाता है, क्योंकि इस करेंसी ने बहुत ही कम समय में बहुत अच्छी ग्रोथ दिखाई है। जिन लोगो ने भी क्रिप्टोकरेंसी में निवेश किया था उनका पैसा दस,शून्य गुणा से बढ़ा है जिसके कारण आज हर कोई बस क्रिप्टोकरेंसी की ही बात कर रहा है। क्रिप्टोकरेंसी के प्रकार अब तक हमने आपको क्रिप्टोकरेंसी क्या होता है और यह कब आया था इसके बारे में बताया। अब हम क्रिप्टोकरेंसी के प्रकार के बारे में बताएँगे जिससे आप इसके बारे में और अच्छे से समझ सकेंगे। वैसे तो क्रिप्टोकरेंसी कई तरह की होती है परन्तु उनमे से कुछ ही ऐसी करेंसीज़ है जो अच्छा परफॉर्म कर रही है। आइये हम विस्तार से क्रिप्टोकरेन्सी के प्रकार के बारे में जानते है। क्रिप्टोकरेंसी की लिस्ट में सबसे पहले नंबर पर नाम आता है बिटकॉइन का। यह करेंसी दुनियाभर में सबसे ज़्यादा मशहूर है। अगर कहीं क्रिप्टोकरेंसी की बात चल रही हो तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं हो सकता की बिटकॉइन की बात ना हो। बिटकॉइन एक डिजिटल करेंसी है जिसको आप ऑनलाइन खरीद और बेच सकते हैं। जब क्रिप्टोकरेंसी को दुनिया के सामने लाया गया था तब सबसे पहले बिटकॉइन की ही चर्चा की गयी थी। उस समय इसकी डिमांड बहुत कम थी परन्तु आज इसकी वैल्यू आसमान छू रही है जिसके कारण यह खूब चर्चा में है। आज के समय में इस करेंसी की वैल्यू तेरह लाख के पार है। इसमें निवेश करके आप बहुत सारा पैसा कमा सकते हैं। आज इसके एक कॉइन की कीमत बहुत ज़्यादा है और यह बहुत अच्छी बात है। अगर इसी तरह इसकी वैल्यू बढ़ती रही तो यह करेंसी और भी ज़्यादा मशहूर हो जाएगी जिससे और भी ज़्यादा लोग इसमें निवेश करेंगे। इथरम भी एक प्रकार की क्रिप्टोकरेंसी है जिसमे आप ऑनलाइन निवेश कर के खूब सारा पैसा कमा सकते हैं। बिटकॉइन के बाद इस करेंसी को सबसे ज़्यादा लोकप्रिय माना जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इसने बिटकॉइन की तरह बहुत कम समय में अच्छी ग्रोथ दिखाई है जिसके कारण इस करेंसी में जिन लोगों ने निवेश कर रखा था उनको खूब मुनाफा हुआ। इस करेंसी के फाउंडर का नाम विटालिक बुटेरिन है। इस करेंसी को ईथर के नाम से भी जाना जाता है। कुछ ही समय पहले इथरम को दो भागो में बांटा गया है एक का नाम है इथरम और दूसरी का नाम है इथरम । इसमें निवेश करना बहुत ही आसान और सरल है। परन्तु आपको बहुत सोच समझकर ही इसमें निवेश करना चाहिए क्योंकि अगर आपने सोच समझकर इसमें निवेश नहीं किया तो आपका पैसा बढ़ने की बजाय डूब भी सकता है। लाइटकॉइन एक पीआर टू पीयर क्रिप्टोकरेंसी है जिसको ओपन सॉफ्टवेयर के ज़रिये बनाया गया है। इस करेंसी के पीछे बिटकॉइन का बहुत बड़ा हाथ है। इस करेंसी को अक्टूबर दो हज़ार ग्यारह में चार्ल्स ली द्वारा शुरू किया गया था। चार्ल्स ली गूगल कंपनी में काम कर चुके हैं। इस करेंसी में ऐसी बहुत सारी चीज़ें है जो बिटकॉइन से मिलती जुलती है परन्तु यह करेंसी बिटकॉइन जितनी सफल नहीं हो पायी जिसके कारण बहुत कम लोग इसके बारे में जानते हैं। आपकी जानकरी के लिए हम आपको बता दें कि लाइटकॉइन की ब्लॉक जनरेशन की टाइम बिटकॉइन के मुकाबले बहुत कम है जो कि इस करेंसी के लिए अच्छी बात है। इसका मतलब यह हुआ कि इस करेंसी में ट्रांजैक्शंस बहुत जल्दी पूरी हो जाती है जिससे लोग ज़्यादा से ज़्यादा इसमें निवेश कर सकते हैं। क्रिप्टोकरेंसी की लिस्ट में अगला नंबर आता है डॉगकॉइन का। इस करेंसी के बनने के कहानी बहुत ही दिलचस्प और रोचक है। डॉगकॉइन का बिटकॉइन ने मज़ाक उड़ाने के लिए कुत्ते के साथ उसकी तुलना की गयी थी। डॉगकॉइन के फाउंडर का नाम बील्ली मार्क्स है। इस क्रिप्टोकरेंसी में स्क्रिप्ट अल्गोरिथम का इस्तेमाल किया जाता है। इस क्रिप्टोकरेंसी ने भी अपने निवेशकों को खूब सारा पैसा कमा के दिया है। इसकी मार्केट वैल्यू आज के समय में एक सौ सत्तानवे डॉलर मिलियन से भी कहीं ज़्यादा है। डॉगकॉइन करेंसी को भी दुनियाभर में एक्सेप्ट किया जाता है। इस क्रिप्टोकरेंसी में माइनिंग बाकि सभी क्रिप्टोकरेंसी के मुकाबले जल्दी होती है जो की बहुत बड़ी बात है। यह क्रिप्टोकरेंसी भी दुनियाभर में बहुत मशहूर है। साथ ही यह करेंसी वॉल्यूम के हिसाब से सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी है। कहने का अर्थ यह हुआ कि इस क्रिप्टोकरेंसी में बहुत सारे लोग निवेश करते हैं। इस करेंसी को साल दो हज़ार सत्रह में लॉन्च किया गया था परन्तु इसने केवल कुछ ही समय में लोगों के बीच अपनी अलग पहचान बना ली जिसके कारण आज हर कोई इसमें निवेश करना चाहता है। इस करेंसी की दो हज़ार सत्रह में कीमत केवल शून्य डॉलर. दस थी जो दो हज़ार बाईस में बढ़ कर पाँच,दो सौ के पार चली गयी थी। इस करेंसी ने अपने निवेशकों को खूब मुनाफा कमा के दिया है। इसकी मार्केट कैपिटलाइजेशन करेंसी चौथे स्थान पर आती है। क्रिप्टोकरेंसी की लिस्ट में अब बात करते हैं रिप्पल करेंसी की। यह करेंसी साल दो हज़ार बारह में मार्केट में लॉन्च हुई थी जो कि डिस्ट्रिब्यूटेड ओपन सोर्स प्रोटोकॉल के ऊपर बेस्ड है। इस करेंसी की अपनी खुद की एक करेंसी है जिसको रिप्पल कहा जाता है और यह रियल टाइम ग्रॉस सेट्लमेंट की तरह काम करती है। इस करेंसी ने भी अपने निवेशकों को खूब सफलता लाकर दी है। इसकी मार्केट कैपिटलाइजेशन भी दस डॉलर बिलियन से ज़्यादा है। यह करेंसी अपने निवेशकों को सुरक्षित, सरल और जल्दी ट्रांजेक्शन पूरे होने का वादा करती है। साथ ही यह करेंसी अपने निवेशकों से किसी ट्रांजेक्शन का कोई चार्ज नहीं लेती जो की बहुत अच्छी बात है। टेथर भी एक प्रकार की क्रिप्टोकरेंसी है जिसकी मार्केट कैपिटलाइजेशन भी बहुत ज़्यादा है। इस साल इस क्रिप्टोकरेंसी से निवेशक बहुत उमीदें लगाए बैठे है। इस करेंसी में बिटकॉइन में इस्तेमाल होने वाली ब्लॉकचैन तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। यह करेंसी बहुत सारे निवेशकों की पसंदीदा लिस्ट में से एक है परन्तु इस करेंसी में काफी उतार चढ़ाव भी होता है इसलिए इसमें सोच समझ कर ही निवेश करना चाहिए। क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने के फायदे ऊपर हमने आपको क्रिप्टोकरेंसी के अनेक प्रकारों के बारे में बताया अब हम इसमें निवेश करने के फायदों के बारे में बताएंगे। जिस प्रकार आज के समय में हम शेयर्स की ऑनलाइन लेया बेची कर सकते हैं उसी प्रकार क्रिप्टोकरेंसी को भी ऑनलाइन खरीदना और बेचना हमारे लिए एक सुविधा के बराबर है। अब हम विस्तार से आपको क्रिप्टोकरेंसी के फायदों के बारे में बताते है। - क्रिप्टोकरेंसी की मदद से आप ऑनलाइन निवेश कर सकते हैं। आप घर बैठे बैठे ही इसमें निवेश कर के खूब सारा पैसा कमा सकते है। क्रिप्टोकरेंसी को खरीदना और बेचना बहुत ही आसान है जिसको आप बहुत ही जल्दी सिख सकते है। - हालाँकि क्रिप्टोकरेंसी का कोई रेगुलेटर नहीं है परन्तु इसमें फ्रॉड होने के चान्सेस बहुत ही कम है क्योंकि इसमें सब कुछ ऑनलाइन होता है जिसमे सभी ऑनलाइन ट्रांजैक्शंस मॉनिटर की जाती है और किसी भी प्रकार के फ्रॉड या स्कैम के चान्सेस बहुत कम होते है। - अगर आप क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करते हैं तो आपको पता ही होगा की इसमें कोई भी ट्रांजेक्शन बहुत जल्दी सेटल हो जाती है। इसमें आपको बहुत देर तक वेट नहीं करना पड़ता बल्कि इसमें बहुत सारी ट्रांजैक्शंस एक साथ कुछ ही समय में सेटल हो जाती है। - क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने की ट्रांजेक्शन फीस भी बहुत कम है। यह इस करेंसी की बहुत बड़ी खासियत है जिससे बहुत सारे निवेशक इसमें निवेश करना चाहते हैं। क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने के नुकसान हमने क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने के फायदे के बारे में तो जान लिया। अब हम इसके नुकसान के बारे में भी जान लेते है। - क्रिप्टोकरेंसी को अभी तक बहुत सारे देशों में मान्यता प्राप्त नहीं हुई है जो कि इसको निवेश करने का बहुत ज़्यादा रिस्की तरीका बनाता है। क्रिप्टोकरेंसी को शेयर्स के मुकाबले ज़्यादा रिस्की माना जाता है। - क्रिप्टोकरेंसी के भाव में उतर चढ़ाव बहुत ज़्यादा होता है जिसका अनुमान लगा पाना बहुत ही मुश्किल होता है। इसलिए हमे हमेशा सोच समझ कर ही इसमें निवेश करना चाहिए और उतना ही निवेश करना चाहिए जितने का नुक्सान हम उठा सके। - क्योंकि क्रिप्टोकरेंसी का पूरा सिस्टम ऑनलाइन है तो इसमें फ्रॉड होने के चान्सेस भी कई ज़्यादा हैं। इसमें आपका अकाउंट कभी भी हैक हो सकता है और आप अपने सारे पैसे इसमें गवां सकते हैं। - क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि अगर आपने एक बार कोई आर्डर प्लेस कर दिया तो फिर आप उसे कैंसिल नहीं कर सकते हैं जिससे निवेशकों को बहुत नुकसान हो सकता है। प्रश्नः क्रिप्टोकरेंसी क्या होता है? उत्तरः क्रिप्टोकरेंसी एक प्रकार की डिजिटल करेंसी है जिसको आप ऑनलाइन खरीद और बेच कर पैसे कमा सकते है। प्रश्नः क्रिप्टोकरेंसी कितने प्रकार की होती है? उत्तरः क्रिप्टोकरेंसी बहुत प्रकार की होती है जिनमे से कुछ है बिटकॉइन, इथरम, रिप्पल, डॉगकॉइन, टेथर, बाइनैंस कॉइन, लाइटकॉइन आदि। प्रश्नः क्रिप्टोकरेंसी से क्या फायदा होता है? उत्तरः क्रिप्टोकरेंसी में निवेश कर के आप बहुत सारा पैसा कमा सकते है। इसमें निवेश करना बहुत ही आसान और सरल है। प्रश्नः क्रिप्टो अच्छा है या बुरा? उत्तरः अगर आप संभल कर क्रिप्टो में निवेश करते है तो आप इससे खूब सारा पैसा कमा सकते है परन्तु अगर आपको इसकी जानकरी नहीं है तो आप इसमें अपना पैसा गवां भी सकते है। प्रश्नः क्रिप्टो करेंसी से क्या खतरा है? उत्तरः क्रिप्टोकरेंसी की शुरुआत सबसे पहले साल दो हज़ार नौ में हुई थी जिसका नाम बिटकॉइन था। इस करेंसी के मालिक जापान के एक इंजीनियर सतोषी नकमोतो है। प्रश्नः क्रिप्टोकरेंसी के क्या नुकसान हो सकते है? उत्तरः क्रिप्टोकरेंसी का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि इस करेंसी का कोई रेगुलेटर नहीं है जिससे इसमें निवेश करना बहुत जोखिम भरा काम है। तो इस तरह से आपने क्रिप्टोकरेंसी के बारे में संपूर्ण जानकारी प्राप्त कर ली है कि क्रिप्टोकरेंसी क्या है यह कितने प्रकार की होती है इसके फायदे और नुकसान क्या क्या हैं इत्यादि। |
यह विचार भी गलत है। मैं नहीं समझता कि जिन लोगों ने यह विचार अभी प्रकट किया कि अप्रत्यक्ष चुनाव होने चाहिए, उनका पहले से कोई भिन्न विचार था। सम्भव है, पहले से भी उनके मन में वह रहा हो और किसी कारण उसे प्रकट न कर सके हों और अब प्रकट कर रहे हों। यह तो मैंने सिर्फ एक मिसाल दो ।
इस तरह हृदय परिवर्तन की कई मिसालें हिंदुस्तान में और उसके बाहर भी हो रही है । इमसे जिसका पहले ज्यादा मेल नहीं था, उससे अब थोड़ा ज्यादा हो गया है। जाहिर है कि मेल अगर थोडा ज्यादा हो गया, तो फर्क थोडा ही बचा है। इसलिए उस फर्क पर हम जोर न दें । बल्कि अगर वे कहते है आप और हम एकरूप हैं, तो हम भी उसे कबूल करें, यह समझकर कि उनकी मार्फत कुछ काम हो । काम होने के बाद विचार की सफाई के लिए गुंजाइश होगी, तब हम विचार की सफाई के लिए और कोशिश करें ।
पास आनेवाले को आने दिया जाय
इस तरह का मत परिवर्तन न सिर्फ राजनैतिक क्षेत्र में ही हो रहा है, बल्कि आर्थिक क्षेत्र में भी हो रहा है। मुझे तो खुशी हुई, जब मैंने 'खादी-बोर्ड' वालों का यह प्रस्ताव पढ़ा कि 'फलाने-पलाने उत्तम कार्य का सरकार ने एक अंश तो कबूल किया, अम्बर चरखे की हद तक ।' उस प्रस्ताव में वे यह भी कहते हैं कि 'अब तक हमें "सर्व-सेवा-संघ" की मदद मिली और आगे भी मिलेगी, क्योंकि सर्व-सेवा संघ का जन्म ही इसी काम के लिए हुआ है।' मै कबूल करता हूँ, वद प्रस्ताव पढ़ने पर मुझे बड़ा आनन्द हुआ। इसलिए नहीं कि इस विचार में कोई भ्रम नहीं है, बल्कि इसलिए कि ऐसे भ्रम की जरूरत होती है। सामनेवाले को तो यह लगे कि आप और हम एक हैं, लेकिन आप कहें कि 'नहीं, नहीं, आप और हम एक नहीं, हमारा अपना अलग है', यद्द ठीक नहीं। जब वह कहता कि 'आप और हम एष हैं, तो हम भी समझें कि 'हाँ, टीक है।' जो बारीक फर्क होता है, वह रहने दें । हमारे मन में कोई गडबडी ( कन्फ्यूजन ) न हो,
यह जरूरी है, परंतु अगर यह हमारे साथ अपनी एकरूपता मानता है, तो हम | यह विचार भी गलत है। मैं नहीं समझता कि जिन लोगों ने यह विचार अभी प्रकट किया कि अप्रत्यक्ष चुनाव होने चाहिए, उनका पहले से कोई भिन्न विचार था। सम्भव है, पहले से भी उनके मन में वह रहा हो और किसी कारण उसे प्रकट न कर सके हों और अब प्रकट कर रहे हों। यह तो मैंने सिर्फ एक मिसाल दो । इस तरह हृदय परिवर्तन की कई मिसालें हिंदुस्तान में और उसके बाहर भी हो रही है । इमसे जिसका पहले ज्यादा मेल नहीं था, उससे अब थोड़ा ज्यादा हो गया है। जाहिर है कि मेल अगर थोडा ज्यादा हो गया, तो फर्क थोडा ही बचा है। इसलिए उस फर्क पर हम जोर न दें । बल्कि अगर वे कहते है आप और हम एकरूप हैं, तो हम भी उसे कबूल करें, यह समझकर कि उनकी मार्फत कुछ काम हो । काम होने के बाद विचार की सफाई के लिए गुंजाइश होगी, तब हम विचार की सफाई के लिए और कोशिश करें । पास आनेवाले को आने दिया जाय इस तरह का मत परिवर्तन न सिर्फ राजनैतिक क्षेत्र में ही हो रहा है, बल्कि आर्थिक क्षेत्र में भी हो रहा है। मुझे तो खुशी हुई, जब मैंने 'खादी-बोर्ड' वालों का यह प्रस्ताव पढ़ा कि 'फलाने-पलाने उत्तम कार्य का सरकार ने एक अंश तो कबूल किया, अम्बर चरखे की हद तक ।' उस प्रस्ताव में वे यह भी कहते हैं कि 'अब तक हमें "सर्व-सेवा-संघ" की मदद मिली और आगे भी मिलेगी, क्योंकि सर्व-सेवा संघ का जन्म ही इसी काम के लिए हुआ है।' मै कबूल करता हूँ, वद प्रस्ताव पढ़ने पर मुझे बड़ा आनन्द हुआ। इसलिए नहीं कि इस विचार में कोई भ्रम नहीं है, बल्कि इसलिए कि ऐसे भ्रम की जरूरत होती है। सामनेवाले को तो यह लगे कि आप और हम एक हैं, लेकिन आप कहें कि 'नहीं, नहीं, आप और हम एक नहीं, हमारा अपना अलग है', यद्द ठीक नहीं। जब वह कहता कि 'आप और हम एष हैं, तो हम भी समझें कि 'हाँ, टीक है।' जो बारीक फर्क होता है, वह रहने दें । हमारे मन में कोई गडबडी न हो, यह जरूरी है, परंतु अगर यह हमारे साथ अपनी एकरूपता मानता है, तो हम |
कार सेक्टर में उन कारों की डिमांड सबसे ज्यादा रहती है जो कम बजट में लंबी माइलेज और प्रीमियम फीचर्स के साथ आती हैं जिसमें आज हम बात कर रहे हैं डैटसन गो के बारे में जो एक बहुत कम बजट में आने वाली कार है जिसे लंबी माइलेज और फीचर्स के लिए पसंद किया जाता है।
इस डैटसन गो कार को अगर आप खरीदते हैं तो इसके लिए आपको 4. 02 लाख रुपये से लेकर 6. 51 लाख रुपये तक खर्च करने होंगे लेकिन आपके पास इतना बड़ा बजट नहीं है तो यहां जान लीजिए इस कार को बहुत आसान डाउन पेमेंट पर खरीदे के प्लान की पूरी डिटेल।
कार सेक्टर की जानकारी देने वाली वेबसाइट CARDEKHO पर दिए गए डाउन पेमेंट और ईएमआई कैलकुलेटर के मुताबिक, अगर आप इस डैटसन गो का ए ऑप्शनल पेट्रोल वेरिएंट खरीदते हैं तो बैंक इस कार पर 4 लाख रुपये का लोन देगा।
इस लोन के बाद आपको 59,322 रुपये की न्यूनतम डाउन पेमेंट देनी होगी और उसके बाद हर महीने 11,298 रुपये की मंथली ईएमआई चुकानी होगी।
इस कार पर मिलने वाले लोन की अवधि बैंक की तरफ से 60 महीने रखी गई है और बैंक इस लोन राशि पर 9. 8 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज लेगा।
अगर आप इस कार को खरीदना चाहते हैं तो इस डाउन पेमेंट प्लान के बाद जान लीजिए इस कार के फीचर्स, स्पेसिफिकेशन और माइलेज की पूरी डिटेल।
डैटसन गो अपनी कंपनी की एक प्रीमियम कार है जिसे कंपनी ने पांच वेरिएंट के साथ मार्केट में लॉन्च किया है, इस कार में डैटसन ने 1198 सीसी का इंजन दिया है जो 1. 2 लीटर पेट्रोल इंजन है।
(ये भी पढ़ें- सबसे कम कीमत में सबसे ज्यादा सुरक्षित टॉप 3 कार, जिन्हें मिली है Global NCAP क्रैश टेस्ट में 5 स्टार सेफ्टी रेटिंग)
यह इंजन 77 पीएस की पावर और 104 एनएम का पीक टॉर्क जनरेट करता है जिसके साथ 5 स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स दिया गया है।
(ये भी पढ़ें- प्रीमियम फीचर्स के साथ मिड रेंज में आती हैं ये टॉप 3 सनरूफ कार, जानें कीमत और फीचर्स की पूरी डिटेल)
कार के फीचर्स की बात करें तो इसमें एंड्रॉयड ऑटो और एप्पल कारप्ले की कनेक्टिविटी वाला 7 इंच का इंफोटेनमेंट सिस्टम दिया गया है।
इसके अलावा कर में कीलेस एंट्री, मैनुअल एसी, हीटर, रियर पार्किंग सेंसर, एबीएस, ईबीडी और फ्रंट सीटों पर डुअल एयरबैग जैसे फीचर्स दिए गए हैं।
डैटसन गो की माइलेज को लेकर कंपनी का दावा है कि ये कार 19. 59 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देती है और यह माइलेज ARAI द्वारा प्रमाणित है।
| कार सेक्टर में उन कारों की डिमांड सबसे ज्यादा रहती है जो कम बजट में लंबी माइलेज और प्रीमियम फीचर्स के साथ आती हैं जिसमें आज हम बात कर रहे हैं डैटसन गो के बारे में जो एक बहुत कम बजट में आने वाली कार है जिसे लंबी माइलेज और फीचर्स के लिए पसंद किया जाता है। इस डैटसन गो कार को अगर आप खरीदते हैं तो इसके लिए आपको चार. दो लाख रुपये से लेकर छः. इक्यावन लाख रुपये तक खर्च करने होंगे लेकिन आपके पास इतना बड़ा बजट नहीं है तो यहां जान लीजिए इस कार को बहुत आसान डाउन पेमेंट पर खरीदे के प्लान की पूरी डिटेल। कार सेक्टर की जानकारी देने वाली वेबसाइट CARDEKHO पर दिए गए डाउन पेमेंट और ईएमआई कैलकुलेटर के मुताबिक, अगर आप इस डैटसन गो का ए ऑप्शनल पेट्रोल वेरिएंट खरीदते हैं तो बैंक इस कार पर चार लाख रुपये का लोन देगा। इस लोन के बाद आपको उनसठ,तीन सौ बाईस रुपयापये की न्यूनतम डाउन पेमेंट देनी होगी और उसके बाद हर महीने ग्यारह,दो सौ अट्ठानवे रुपयापये की मंथली ईएमआई चुकानी होगी। इस कार पर मिलने वाले लोन की अवधि बैंक की तरफ से साठ महीने रखी गई है और बैंक इस लोन राशि पर नौ. आठ प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज लेगा। अगर आप इस कार को खरीदना चाहते हैं तो इस डाउन पेमेंट प्लान के बाद जान लीजिए इस कार के फीचर्स, स्पेसिफिकेशन और माइलेज की पूरी डिटेल। डैटसन गो अपनी कंपनी की एक प्रीमियम कार है जिसे कंपनी ने पांच वेरिएंट के साथ मार्केट में लॉन्च किया है, इस कार में डैटसन ने एक हज़ार एक सौ अट्ठानवे सीसी का इंजन दिया है जो एक. दो लीटरटर पेट्रोल इंजन है। यह इंजन सतहत्तर पीएस की पावर और एक सौ चार एनएम का पीक टॉर्क जनरेट करता है जिसके साथ पाँच स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स दिया गया है। कार के फीचर्स की बात करें तो इसमें एंड्रॉयड ऑटो और एप्पल कारप्ले की कनेक्टिविटी वाला सात इंच का इंफोटेनमेंट सिस्टम दिया गया है। इसके अलावा कर में कीलेस एंट्री, मैनुअल एसी, हीटर, रियर पार्किंग सेंसर, एबीएस, ईबीडी और फ्रंट सीटों पर डुअल एयरबैग जैसे फीचर्स दिए गए हैं। डैटसन गो की माइलेज को लेकर कंपनी का दावा है कि ये कार उन्नीस. उनसठ किलोग्राममीटर प्रति लीटर का माइलेज देती है और यह माइलेज ARAI द्वारा प्रमाणित है। |
गणतंत्र दिवस 2019 (Republic Day 2019) आने में सिर्फ दो दिन ही रह गए हैं, इस खास पर्व को सेलिब्रेट करने के लिए पूरा देश तैयारी कर रहा है।
गढ़तंत्र दिवस 2019 (Republic Day 2019) आने में सिर्फ दो दिन ही रह गए हैं, इस खास पर्व को सेलिब्रेट करने के लिए पूरा देश तैयारी कर रहा है।
वहीं देश की दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनियां अपने तरीके से गढ़तंत्र दिवस 2019 (Republic Day 2019) को सेलिब्रेट कर रही हैं।
सभी ई-कॉमर्स कंपनियां ग्राहकों को खासा डिस्काउंट दे रही है और ग्राहक भी इन डील्स का फायदा उठा रहे है।
इस कड़ी में ई-कॉमर्स वेबसाइट Togofogo ने भी अपने ग्राहकों के लिए सेल का आगाज़ किया है, यह सेल 21 जनवरी से लेकर 26 जनवरी 2019 तक चलेगी।
ई-कॉमर्स वेबसाइट Togofogo की सेल 6 दिन चलेगी और टोगोफोगो वारंटी बाजार के साथ मिलकर हर फोन पर 1 साल तक की वारंटी देगा। वारंटी बाजार सभी इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स पर एक्सटेंडेंट वारंटी की सर्विस प्रदान करता है।
ई-कॉमर्स वेबसाइट Togofogo के सीईओ सौमित्र गुप्ता ने कहा हैं कि ऐप्पल, शाओमी और मोटोरोला के स्मार्टफोन पर इस सेल का आयोजन किया है। इस सेल में ग्राहक इन कंपनियों के स्मार्टफोन पर आसानी से खरीद सकते है।
जो लोग अपने लिए बजट स्मार्टफोन खरीदने का प्लान बना रहे है, तो वे लोग togofogo. com जाकर फोन को खरीद सकते है। इस वेबसाइट पर दुनिया के टॉप स्मार्टफोन ब्रांड मौजूद हैं, जिनके स्मार्टफोन पर 70 प्रतिशत का डिस्काउंट मिल रहा है।
बता दें कि लोग इस वेबसाइट पर से फोन की एसेसरीज को भी खरीद सकते है, जिसपर लोगों को डिस्काउंट मिल सकते है।
| गणतंत्र दिवस दो हज़ार उन्नीस आने में सिर्फ दो दिन ही रह गए हैं, इस खास पर्व को सेलिब्रेट करने के लिए पूरा देश तैयारी कर रहा है। गढ़तंत्र दिवस दो हज़ार उन्नीस आने में सिर्फ दो दिन ही रह गए हैं, इस खास पर्व को सेलिब्रेट करने के लिए पूरा देश तैयारी कर रहा है। वहीं देश की दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनियां अपने तरीके से गढ़तंत्र दिवस दो हज़ार उन्नीस को सेलिब्रेट कर रही हैं। सभी ई-कॉमर्स कंपनियां ग्राहकों को खासा डिस्काउंट दे रही है और ग्राहक भी इन डील्स का फायदा उठा रहे है। इस कड़ी में ई-कॉमर्स वेबसाइट Togofogo ने भी अपने ग्राहकों के लिए सेल का आगाज़ किया है, यह सेल इक्कीस जनवरी से लेकर छब्बीस जनवरी दो हज़ार उन्नीस तक चलेगी। ई-कॉमर्स वेबसाइट Togofogo की सेल छः दिन चलेगी और टोगोफोगो वारंटी बाजार के साथ मिलकर हर फोन पर एक साल तक की वारंटी देगा। वारंटी बाजार सभी इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स पर एक्सटेंडेंट वारंटी की सर्विस प्रदान करता है। ई-कॉमर्स वेबसाइट Togofogo के सीईओ सौमित्र गुप्ता ने कहा हैं कि ऐप्पल, शाओमी और मोटोरोला के स्मार्टफोन पर इस सेल का आयोजन किया है। इस सेल में ग्राहक इन कंपनियों के स्मार्टफोन पर आसानी से खरीद सकते है। जो लोग अपने लिए बजट स्मार्टफोन खरीदने का प्लान बना रहे है, तो वे लोग togofogo. com जाकर फोन को खरीद सकते है। इस वेबसाइट पर दुनिया के टॉप स्मार्टफोन ब्रांड मौजूद हैं, जिनके स्मार्टफोन पर सत्तर प्रतिशत का डिस्काउंट मिल रहा है। बता दें कि लोग इस वेबसाइट पर से फोन की एसेसरीज को भी खरीद सकते है, जिसपर लोगों को डिस्काउंट मिल सकते है। |
आजकल महानगरों में बढ़ते वायु प्रदूषण की वजह से लोगों में सांस संबंधी अनेक तकलीफें उभरने लगी हैं। अब तो छोटे बच्चों को भी सांस संबंधी परेशानियां पैदा हो जाती हैं। सांस संबंधी बीमारियों में सबसे अधिक दमा यानी अस्थमा से लोग परेशान हैं। दमा फेफड़ों की ऐसी बीमारी होती है, जिसके कारण व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई होती है। दमा होने पर श्वास नलियों में सूजन आने से श्वसन मार्ग सिकुड़ जाता है। जब यह सूजन बढ़ जाती है तो सांस लेने में कठिनाई के साथ-साथ खांसी, घरघराहट और सीने में जकड़न जैसे लक्षण उत्पन्न होते हैं। खांसी के कारण फेफड़े से कफ पैदा होता है, लेकिन उसको बाहर लाना कठिन होता है।
आयुर्वेद में अस्थमा को तमक श्वास कहा गया है। यह वात और कफ दोष के विकृत होने से होता है। इसमें श्वास नलियां संकुचित हो जाती हैं, जिसके कारण छाती में भारीपन का अनुभव होता है।
दमा यानी अस्थमा के कई प्रकार होते हैं। पेरिनियल अस्थमा, मौसमी अस्थमा, एलर्जिक अस्थमा, नान एलर्जिक अस्थमा, अकुपेशनल अस्थमा। एलर्जिक अस्थमा किसी विशेष चीज से एलर्जी होने की वजह से होता है, जैसे धूल, मिट्टी, धुआं, पराग कण के संपर्क में आते ही सांस फूलने लगती है। मौसम में बदलाव के कारण भी दमा हो सकता है। नान एलर्जिक अस्थमा अधिक तनाव होने या बहुत सर्दी या खांसी-जुकाम होने पर होता है। मौसमी अस्थमा पूरे वर्ष न होकर किसी विशेष मौसम में पराग कणों या नमी के कारण होता है। कारखानों में काम करने वाले लोगों को अकुपेशनल दमा हो जाता है।
दमा या अस्थमा में सबसे पहले सांस लेने में तकलीफ होती है। इसके अलावा बार-बार खांसी आना, सांस लेते समय सीटी की आवाज आना, छाती में जकड़न तथा भारीपन, सांस फूलना, गले का अवरुद्ध और शुष्क होना, बेचैनी होना आदि लक्षण दिखाई देते हैं।
अस्थमा के मरीजों को बारिश, सर्दी और धूल से बचना चाहिए। घर से बाहर निकलते समय मास्क लगा कर निकलें। सर्दी के मौसम में धुंध में जाने से बचें। ताजा पेंट, कीटनाशक, स्प्रे, अगरबत्ती, मच्छर भगाने की दवा, खुशबूदार इत्र से जितना हो सके बचें। धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों से दूर रहें। इसके अलावा जीवनशैली और आहार में बदलाव करके भी दमा के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
दमा के रोगियों को गेहूं, पुराना चावल, मूंग, कुल्थी, जौ और परवल का सेवन करना चाहिए। हरी पत्तेदार सब्जियों, पालक और गाजर का रस अस्थमा में काफी फायदेमंद होता है। लहसुन, अदरक, हल्दी और काली मिर्च को जरूर भोजन में शामिल करें, ये अस्थमा से लड़ने में मदद करते हैं। गुनगुने पानी का सेवन करने से दमा में आराम मिलता है। शहद का सेवन करें। मछली, गरिष्ठ भोजन, तले हुए पदार्थ न खाएं। अधिक मीठा, ठंडा पानी, दही का सेवन न करें।
नियमित रूप से प्राणायाम और सूर्य नमस्कार करने से दमा से राहत मिलती है। अधिक शारीरिक व्यायाम न करें। योगासन करना इस रोग में मददगार होता है।
आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार कई ऐसे घरेलू उपाय हैं, जिनके उपयोग से अस्थमा के इलाज में मदद मिलती है। लहसुन अस्थमा में फायदेमंद होता है। लहसुन की पांच कलियां रोज सेवन करने से दमा में आराम मिलता है। अंजीर कफ को जमने से रोकता है। इसे पानी में रात भर भिगोकर रखें और सुबह खाली पेट खा लें। पानी में अजवायन डाल कर उबालें और उसकी भाप लें, यह अस्थमा का जड़ से इलाज करता है। मेथी शरीर की भीतरी एलर्जी को खत्म करती है। मेथी के कुछ दानों को एक गिलास पानी के साथ तब तक उबालें जब तक पानी एक तिहाई न हो जाए। इस पानी में शहद और अदरक का रस मिलाकर रोज सुबह-शाम सेवन करें।
दमा में कच्चे प्याज का सेवन लाभदायक होता है। प्याज में मौजूद सल्फर फेफड़ों की जलन और अन्य समस्याओं को कम करने में मदद करता है। विटामिन-सी युक्त फलों और सब्जियों का सेवन करें। नींबू, संतरे, जामुन, स्ट्राबेरी और पपीता विटामिन-सी के अच्छे स्रोत हैं। सब्जियों में फूलगोभी और पत्तागोभी का सेवन करें। इससे दमा में राहत मिलती है। आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार आंवला हमारी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा कर दमा को नियंत्रित करने में मदद करता है। काफी में मौजूद कैफीन में ब्रोंको डायलेटर का गुण पाया जाता है, जो दमा के लक्षणों को कम करने में मदद करता है। मगर ध्यान रखें कि अधिक मात्रा में काफी का सेवन सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है।
(यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए है। उपचार या स्वास्थ्य संबंधी सलाह के लिए विशेषज्ञ की मदद लें। )
| आजकल महानगरों में बढ़ते वायु प्रदूषण की वजह से लोगों में सांस संबंधी अनेक तकलीफें उभरने लगी हैं। अब तो छोटे बच्चों को भी सांस संबंधी परेशानियां पैदा हो जाती हैं। सांस संबंधी बीमारियों में सबसे अधिक दमा यानी अस्थमा से लोग परेशान हैं। दमा फेफड़ों की ऐसी बीमारी होती है, जिसके कारण व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई होती है। दमा होने पर श्वास नलियों में सूजन आने से श्वसन मार्ग सिकुड़ जाता है। जब यह सूजन बढ़ जाती है तो सांस लेने में कठिनाई के साथ-साथ खांसी, घरघराहट और सीने में जकड़न जैसे लक्षण उत्पन्न होते हैं। खांसी के कारण फेफड़े से कफ पैदा होता है, लेकिन उसको बाहर लाना कठिन होता है। आयुर्वेद में अस्थमा को तमक श्वास कहा गया है। यह वात और कफ दोष के विकृत होने से होता है। इसमें श्वास नलियां संकुचित हो जाती हैं, जिसके कारण छाती में भारीपन का अनुभव होता है। दमा यानी अस्थमा के कई प्रकार होते हैं। पेरिनियल अस्थमा, मौसमी अस्थमा, एलर्जिक अस्थमा, नान एलर्जिक अस्थमा, अकुपेशनल अस्थमा। एलर्जिक अस्थमा किसी विशेष चीज से एलर्जी होने की वजह से होता है, जैसे धूल, मिट्टी, धुआं, पराग कण के संपर्क में आते ही सांस फूलने लगती है। मौसम में बदलाव के कारण भी दमा हो सकता है। नान एलर्जिक अस्थमा अधिक तनाव होने या बहुत सर्दी या खांसी-जुकाम होने पर होता है। मौसमी अस्थमा पूरे वर्ष न होकर किसी विशेष मौसम में पराग कणों या नमी के कारण होता है। कारखानों में काम करने वाले लोगों को अकुपेशनल दमा हो जाता है। दमा या अस्थमा में सबसे पहले सांस लेने में तकलीफ होती है। इसके अलावा बार-बार खांसी आना, सांस लेते समय सीटी की आवाज आना, छाती में जकड़न तथा भारीपन, सांस फूलना, गले का अवरुद्ध और शुष्क होना, बेचैनी होना आदि लक्षण दिखाई देते हैं। अस्थमा के मरीजों को बारिश, सर्दी और धूल से बचना चाहिए। घर से बाहर निकलते समय मास्क लगा कर निकलें। सर्दी के मौसम में धुंध में जाने से बचें। ताजा पेंट, कीटनाशक, स्प्रे, अगरबत्ती, मच्छर भगाने की दवा, खुशबूदार इत्र से जितना हो सके बचें। धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों से दूर रहें। इसके अलावा जीवनशैली और आहार में बदलाव करके भी दमा के प्रभाव को कम किया जा सकता है। दमा के रोगियों को गेहूं, पुराना चावल, मूंग, कुल्थी, जौ और परवल का सेवन करना चाहिए। हरी पत्तेदार सब्जियों, पालक और गाजर का रस अस्थमा में काफी फायदेमंद होता है। लहसुन, अदरक, हल्दी और काली मिर्च को जरूर भोजन में शामिल करें, ये अस्थमा से लड़ने में मदद करते हैं। गुनगुने पानी का सेवन करने से दमा में आराम मिलता है। शहद का सेवन करें। मछली, गरिष्ठ भोजन, तले हुए पदार्थ न खाएं। अधिक मीठा, ठंडा पानी, दही का सेवन न करें। नियमित रूप से प्राणायाम और सूर्य नमस्कार करने से दमा से राहत मिलती है। अधिक शारीरिक व्यायाम न करें। योगासन करना इस रोग में मददगार होता है। आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार कई ऐसे घरेलू उपाय हैं, जिनके उपयोग से अस्थमा के इलाज में मदद मिलती है। लहसुन अस्थमा में फायदेमंद होता है। लहसुन की पांच कलियां रोज सेवन करने से दमा में आराम मिलता है। अंजीर कफ को जमने से रोकता है। इसे पानी में रात भर भिगोकर रखें और सुबह खाली पेट खा लें। पानी में अजवायन डाल कर उबालें और उसकी भाप लें, यह अस्थमा का जड़ से इलाज करता है। मेथी शरीर की भीतरी एलर्जी को खत्म करती है। मेथी के कुछ दानों को एक गिलास पानी के साथ तब तक उबालें जब तक पानी एक तिहाई न हो जाए। इस पानी में शहद और अदरक का रस मिलाकर रोज सुबह-शाम सेवन करें। दमा में कच्चे प्याज का सेवन लाभदायक होता है। प्याज में मौजूद सल्फर फेफड़ों की जलन और अन्य समस्याओं को कम करने में मदद करता है। विटामिन-सी युक्त फलों और सब्जियों का सेवन करें। नींबू, संतरे, जामुन, स्ट्राबेरी और पपीता विटामिन-सी के अच्छे स्रोत हैं। सब्जियों में फूलगोभी और पत्तागोभी का सेवन करें। इससे दमा में राहत मिलती है। आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार आंवला हमारी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा कर दमा को नियंत्रित करने में मदद करता है। काफी में मौजूद कैफीन में ब्रोंको डायलेटर का गुण पाया जाता है, जो दमा के लक्षणों को कम करने में मदद करता है। मगर ध्यान रखें कि अधिक मात्रा में काफी का सेवन सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। |
सागर में कोबरा सांप दुनिया के सबसे जहरीले सांपों में शामिल रसेल वाइपर को निगल गया। आसपास के लोगों ने कोबरा देखा तो सांप पकड़ने वाले को बुलाया। जैसे ही उन्होंने सांप को पकड़ा तो उसने फूंफकार मारना शुरू कर दिया। आसपास के लोग भाग खड़े हुए। जैसे-तैसे कोबरा को पकड़ा और सड़क पर लाया गया, जहां कोबरा ने रसेल वाइपर को उगला। यह नजारा देख मौके पर मौजूद लोग दंग रह गए। सांप सड़क पर ही बैठ गया। उसे बाद में जंगल में छोड़ा गया।
दरअसल, सागर-गढ़ाकोटा मार्ग पर सानौधा थाना क्षेत्र में स्थित टोल नाके के पास मंगलवार को एक गोदाम में कोबरा सांप था। आसपास के लोगों ने सांप पकड़ने में एक्सपर्ट अकील बाबा को सूचना दी। अकील ने सांप का रेस्क्यू शुरू किया। करीब आधे घंटे की मशक्कत करने के बाद गोदाम में छिपा कोबरा पकड़ में आया। उसे पकड़कर सड़क पर लाया गया। कोबरा ने कुछ निगल रखा था। जैसे ही उसे लटकाया गया तो उसने रसेल वाइपर सांप को उगल दिया। रसेल वाइपर मर चुका था। यहां बता दें रसेल वाइपर सांप दुनिया के जहरीले सांपों में से एक है। वहीं कोबरा भी बेहद जहरीला सांप होता है।
अकील ने सड़क पर सांप को छोड़ा। इसके बाद सांप अकील को डंसने के लिए फुंकार मारने लगा। देखते ही देखते कोबरा फन उठाकर खड़ा हो गया। जैसे-तैसे उसे पकड़कर डिब्बे में बंद किया गया। इसके बाद कोबरा को जंगल में छोड़ा गया। अकील बाबा ने बताया कि कोबरा करीब 6 फीट लंबा था। उसने बेहद जहरीले रसेल वाइपर सांप को निगल रखा था। यह पहली बार देखा कि कोबरा ने रसेल वाइपर को निगल लिया हो। कोबरा को पकड़कर जंगल में छोड़ा गया है।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
| सागर में कोबरा सांप दुनिया के सबसे जहरीले सांपों में शामिल रसेल वाइपर को निगल गया। आसपास के लोगों ने कोबरा देखा तो सांप पकड़ने वाले को बुलाया। जैसे ही उन्होंने सांप को पकड़ा तो उसने फूंफकार मारना शुरू कर दिया। आसपास के लोग भाग खड़े हुए। जैसे-तैसे कोबरा को पकड़ा और सड़क पर लाया गया, जहां कोबरा ने रसेल वाइपर को उगला। यह नजारा देख मौके पर मौजूद लोग दंग रह गए। सांप सड़क पर ही बैठ गया। उसे बाद में जंगल में छोड़ा गया। दरअसल, सागर-गढ़ाकोटा मार्ग पर सानौधा थाना क्षेत्र में स्थित टोल नाके के पास मंगलवार को एक गोदाम में कोबरा सांप था। आसपास के लोगों ने सांप पकड़ने में एक्सपर्ट अकील बाबा को सूचना दी। अकील ने सांप का रेस्क्यू शुरू किया। करीब आधे घंटे की मशक्कत करने के बाद गोदाम में छिपा कोबरा पकड़ में आया। उसे पकड़कर सड़क पर लाया गया। कोबरा ने कुछ निगल रखा था। जैसे ही उसे लटकाया गया तो उसने रसेल वाइपर सांप को उगल दिया। रसेल वाइपर मर चुका था। यहां बता दें रसेल वाइपर सांप दुनिया के जहरीले सांपों में से एक है। वहीं कोबरा भी बेहद जहरीला सांप होता है। अकील ने सड़क पर सांप को छोड़ा। इसके बाद सांप अकील को डंसने के लिए फुंकार मारने लगा। देखते ही देखते कोबरा फन उठाकर खड़ा हो गया। जैसे-तैसे उसे पकड़कर डिब्बे में बंद किया गया। इसके बाद कोबरा को जंगल में छोड़ा गया। अकील बाबा ने बताया कि कोबरा करीब छः फीट लंबा था। उसने बेहद जहरीले रसेल वाइपर सांप को निगल रखा था। यह पहली बार देखा कि कोबरा ने रसेल वाइपर को निगल लिया हो। कोबरा को पकड़कर जंगल में छोड़ा गया है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
इंसानों और डायनासोर के बीच दिखाए गए संघर्ष पर आधारित सीरीज 'Jurassic World' को दशकों का काफी प्यार मिला हैं। हमेशा से ही लोग डायनासोर से जुड़ी कहानियां देखने के उत्सुक नजर आए हैं शायद इसका कारण यह रहा है कि, लोगों ने कभी डायनासोर असली में नहीं देखे। इसलिए इस सीरीज की हर एक फिल्म को काफी लोकप्रियता मिली आई है। बता दें कि इस सीरीज की आखिरी फिल्म 'जुरासिक वर्ल्ड डोमिनियन' (Jurassic World Dominion) सीरीज की बड़े परदे पर कामयाबी के बाद इसे OTT के दशकों के लिए रिलीज किया जाएगा। जिसकी तारीख सामने आ गई है।
'जुरासिक वर्ल्ड' (Jurassic World) सीरीज की फिल्में बच्चों से लेकर बड़ों तक हर उम्र के दर्शकों को काफी आकर्षित करती हैं। भारत में भी जुरासिक वर्ल्ड सीरीज को काफी पसंद किया जाता रहा है। इसी सीरीज की आखिरी रिलीज फिल्म जुरासिक वर्ल्ड डोमिनियन (Jurassic World Dominion) को अब OTT प्लेटफॉर्म अमेज़न प्राइम वीडियो (Amazon Prime Video) पर आगामी सोमवार यानी 17 अक्टूबर को रिलीज किया जाएगा। बता दें कि इस फिल्म में आपको क्रिस प्रैट और ब्रायस डलास हॉवर्ड जैसे कलाकार नजर आएंगे। साथ ही यह भी बता दें कि, यह फिल्म अंग्रेजी, हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम भाषाओं में OTT पर रिलीज होगी।
जुरासिक वर्ल्ड डोमिनियन बड़े पर्दे पर रिलीज हुए 4 महीने हो चुके हैं। यह सिनेमाघरों में 10 जून को रिलीज हुई थी। इसके बाद रिलीज के कुल 6 हफ्तों बाद इसे 22 जुलाई को वीडियो-ऑन-डिमांड प्लेटफॉर्म- ऐपल टीवी, गूगल प्ले मूवीज, हंगामा प्ले, प्राइम वीडियो स्टोर, यूट्यूब मूवीज और जी प्लेक्स जैसे प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया गया था। वहीं, साढ़े तीन हफ्ते बाद यानी 16 अगस्त को इस फिल्म को डीवीडी, ब्लू-रे और 4K ब्लू-रे पर उतारा गया था। वहीं, अब इस फिल्म को प्राइम वीडियो पर रिलीज किया जाएगा।
फिल्म जुरासिक वर्ल्ड डोमिनियन के ग्लोबल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन की बात करें तो यह फिल्म अब तक एक अरब डॉलर की कमाई कर चुकी है। हालांकि, इस रिलीज की और फिल्मों से तुलना की जाए तो फिर भी इस फिल्म की कमाई कम ही मानी जाएगी। क्योंकि, इससे पहले साल 2015 में जुरासिक वर्ल्ड सीरीज की रिलीज हुई फिल्म ने 1.67 अरब डॉलर (लगभग 13,743 करोड़ रुपये) की कमाई की थी। जबकि साल 2018 के सीक्वल की कमाई 1.31 अरब डॉलर (लगभग 10,780 करोड़ रुपये) थी।
फिल्म Jurassic World Dominion का डायरेक्शन कॉलिन ट्रेवोरो ने किया है। जबकि इस फिल्म का स्क्रीनप्ले कॉलिन और एमिली कारमाइकल द्वारा मिलकर लिखा गया था। इस फिल्म की कहानी में डायनासोर एक बार फिर पृथ्वी पर घूमते हुए नजर आने वाला है। यह इस सीरीज की तीसरी फिल्म है जिसमें काफी एक्शन से भरपूर सीन देखने को मिलेंगे। अगर आपने अब तक जुरासिक वर्ल्ड सीरीज की जुरासिक वर्ल्ड डोमिनियन फिल्म नहीं देखी है तो, आप सोमवार से फिल्म को अमेज़न प्राइम वीडियाे पर देख पाएंगे।
| इंसानों और डायनासोर के बीच दिखाए गए संघर्ष पर आधारित सीरीज 'Jurassic World' को दशकों का काफी प्यार मिला हैं। हमेशा से ही लोग डायनासोर से जुड़ी कहानियां देखने के उत्सुक नजर आए हैं शायद इसका कारण यह रहा है कि, लोगों ने कभी डायनासोर असली में नहीं देखे। इसलिए इस सीरीज की हर एक फिल्म को काफी लोकप्रियता मिली आई है। बता दें कि इस सीरीज की आखिरी फिल्म 'जुरासिक वर्ल्ड डोमिनियन' सीरीज की बड़े परदे पर कामयाबी के बाद इसे OTT के दशकों के लिए रिलीज किया जाएगा। जिसकी तारीख सामने आ गई है। 'जुरासिक वर्ल्ड' सीरीज की फिल्में बच्चों से लेकर बड़ों तक हर उम्र के दर्शकों को काफी आकर्षित करती हैं। भारत में भी जुरासिक वर्ल्ड सीरीज को काफी पसंद किया जाता रहा है। इसी सीरीज की आखिरी रिलीज फिल्म जुरासिक वर्ल्ड डोमिनियन को अब OTT प्लेटफॉर्म अमेज़न प्राइम वीडियो पर आगामी सोमवार यानी सत्रह अक्टूबर को रिलीज किया जाएगा। बता दें कि इस फिल्म में आपको क्रिस प्रैट और ब्रायस डलास हॉवर्ड जैसे कलाकार नजर आएंगे। साथ ही यह भी बता दें कि, यह फिल्म अंग्रेजी, हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम भाषाओं में OTT पर रिलीज होगी। जुरासिक वर्ल्ड डोमिनियन बड़े पर्दे पर रिलीज हुए चार महीने हो चुके हैं। यह सिनेमाघरों में दस जून को रिलीज हुई थी। इसके बाद रिलीज के कुल छः हफ्तों बाद इसे बाईस जुलाई को वीडियो-ऑन-डिमांड प्लेटफॉर्म- ऐपल टीवी, गूगल प्ले मूवीज, हंगामा प्ले, प्राइम वीडियो स्टोर, यूट्यूब मूवीज और जी प्लेक्स जैसे प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया गया था। वहीं, साढ़े तीन हफ्ते बाद यानी सोलह अगस्त को इस फिल्म को डीवीडी, ब्लू-रे और चार केल्विन ब्लू-रे पर उतारा गया था। वहीं, अब इस फिल्म को प्राइम वीडियो पर रिलीज किया जाएगा। फिल्म जुरासिक वर्ल्ड डोमिनियन के ग्लोबल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन की बात करें तो यह फिल्म अब तक एक अरब डॉलर की कमाई कर चुकी है। हालांकि, इस रिलीज की और फिल्मों से तुलना की जाए तो फिर भी इस फिल्म की कमाई कम ही मानी जाएगी। क्योंकि, इससे पहले साल दो हज़ार पंद्रह में जुरासिक वर्ल्ड सीरीज की रिलीज हुई फिल्म ने एक.सरसठ अरब डॉलर की कमाई की थी। जबकि साल दो हज़ार अट्ठारह के सीक्वल की कमाई एक.इकतीस अरब डॉलर थी। फिल्म Jurassic World Dominion का डायरेक्शन कॉलिन ट्रेवोरो ने किया है। जबकि इस फिल्म का स्क्रीनप्ले कॉलिन और एमिली कारमाइकल द्वारा मिलकर लिखा गया था। इस फिल्म की कहानी में डायनासोर एक बार फिर पृथ्वी पर घूमते हुए नजर आने वाला है। यह इस सीरीज की तीसरी फिल्म है जिसमें काफी एक्शन से भरपूर सीन देखने को मिलेंगे। अगर आपने अब तक जुरासिक वर्ल्ड सीरीज की जुरासिक वर्ल्ड डोमिनियन फिल्म नहीं देखी है तो, आप सोमवार से फिल्म को अमेज़न प्राइम वीडियाे पर देख पाएंगे। |
Mega Box Office Clash: दिवाली 2021 पर दीपिका पादुकोण की 'महाभारत' और संजय लीला भंसाली की 'बैजू बावरा' के साथ दो-दो हाथ करेगी अजय देवगन की 'गोलमाल 5'
साल 2021 में दिवाली के खास मौके पर संजय लीला भंसाली की फिल्म 'बैजू बावरा', अजय देवगन की फिल्म 'गोलमाल 5' और दीपिका पादुकोण की फिल्म 'महाभारत' बॉक्स ऑफिस पर एक साथ रिलीज़ होने जा रही हैं।
बॉलीवुड में इस पहले भी कई बार बॉक्स ऑफिस पर एक साथ दो बड़े स्टार्स की फ़िल्में रिलीज़ हो चुकी हैं। लेकिन इस बार दो बड़े स्टार्स नहीं बल्कि तीन स्टार्स की फ़िल्में एक साथ साल 2021 में दिवाली के खास मौके पर रिलीज़ होने जा रही हैं। इस मेगा क्लैश के बाद फैंस भी असमंजस में पड़ गए कि आखिर इस रेस में कौन सी फिल्म हिट होगी। बता दें, साल 2021 में दीपिका पादुकोण की 'महाभारत' (Mahabharat), संजय लीला भंसाली की फिल्म 'बैजू बावरा' (Baiju Bawra) और अजय देवगन की फिल्म 'गोलमाल 5' (Golmaal 5) एक साथ साल 2021 में दिवाली के खास मौके पर रिलीज़ होने जा रही हैं।
संजय लीला भंसाली (Sanjay Leela Bhansali) की फिल्म 'बैजू बावरा'(Baiju Bawra) की बात करें तो इस फिल्म में बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह का नाम लीड रोल के लिए सामने आ रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि संजय पहली बार संगीत पर आधारित फिल्म का निर्देशन करने जा रहे हैं। बताया जा रहा कि 2 गायकों पर निर्भर होगी जिसमे दर्जनों गाने होंगे। संजय इससे पहले फिल्म 'गोलियों की रासलीलाः राम-लीला' जैसी बेहतरीन फिल्म का म्यूजिक कंपोज़ कर चुके हैं। संजय की यह फिल्म साल 2021 में दिवाली के मौके पर रिलीज की जाएगी।
अब बात करें दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) की फिल्म 'महाभारत' (Mahabharat) की तो यह एक पीरियड ड्रामा हैं। इस फिल्म में दीपिका 'द्रोपदी' के किरदार में नजर आएंगी। फिल्म को मधु मंतेना और दीपिका दोनों मिलकर को-प्रोड्यूस कर रहे हैं। दीपिका की 'महाभारत' साल 2021 में दिवाली के खास मौके पर रिलीज़ होगी।
'गोलमाल 5' (Golmaal FIVE)
वैसे तो अजय देवगन (Ajay Devgn) और दीपिका पादुकोण की फ़िल्में साल 2020 में भी बॉक्स ऑफिस पर क्लैश होने जा रही हैं। बता दें, 10 जनवरी 2020 के दिन अजय देवगन की 'तानाजी' और दीपिका पादुकोण की 'छपाक' एक साथ सिनेमाघरों में रिलीज़ होंगी। अब बात करें 'गोलमाल' की 5वीं इंस्टालमेंट की तो हाल ही में फिल्म डायरेक्टर रोहित शेट्टी (Rohit Shetty) ने फिल्म की घोषणा कर दी है। और यह फिल्म भी दिवाली 2021 पर सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी।
बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज,
ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
| Mega Box Office Clash: दिवाली दो हज़ार इक्कीस पर दीपिका पादुकोण की 'महाभारत' और संजय लीला भंसाली की 'बैजू बावरा' के साथ दो-दो हाथ करेगी अजय देवगन की 'गोलमाल पाँच' साल दो हज़ार इक्कीस में दिवाली के खास मौके पर संजय लीला भंसाली की फिल्म 'बैजू बावरा', अजय देवगन की फिल्म 'गोलमाल पाँच' और दीपिका पादुकोण की फिल्म 'महाभारत' बॉक्स ऑफिस पर एक साथ रिलीज़ होने जा रही हैं। बॉलीवुड में इस पहले भी कई बार बॉक्स ऑफिस पर एक साथ दो बड़े स्टार्स की फ़िल्में रिलीज़ हो चुकी हैं। लेकिन इस बार दो बड़े स्टार्स नहीं बल्कि तीन स्टार्स की फ़िल्में एक साथ साल दो हज़ार इक्कीस में दिवाली के खास मौके पर रिलीज़ होने जा रही हैं। इस मेगा क्लैश के बाद फैंस भी असमंजस में पड़ गए कि आखिर इस रेस में कौन सी फिल्म हिट होगी। बता दें, साल दो हज़ार इक्कीस में दीपिका पादुकोण की 'महाभारत' , संजय लीला भंसाली की फिल्म 'बैजू बावरा' और अजय देवगन की फिल्म 'गोलमाल पाँच' एक साथ साल दो हज़ार इक्कीस में दिवाली के खास मौके पर रिलीज़ होने जा रही हैं। संजय लीला भंसाली की फिल्म 'बैजू बावरा' की बात करें तो इस फिल्म में बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह का नाम लीड रोल के लिए सामने आ रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि संजय पहली बार संगीत पर आधारित फिल्म का निर्देशन करने जा रहे हैं। बताया जा रहा कि दो गायकों पर निर्भर होगी जिसमे दर्जनों गाने होंगे। संजय इससे पहले फिल्म 'गोलियों की रासलीलाः राम-लीला' जैसी बेहतरीन फिल्म का म्यूजिक कंपोज़ कर चुके हैं। संजय की यह फिल्म साल दो हज़ार इक्कीस में दिवाली के मौके पर रिलीज की जाएगी। अब बात करें दीपिका पादुकोण की फिल्म 'महाभारत' की तो यह एक पीरियड ड्रामा हैं। इस फिल्म में दीपिका 'द्रोपदी' के किरदार में नजर आएंगी। फिल्म को मधु मंतेना और दीपिका दोनों मिलकर को-प्रोड्यूस कर रहे हैं। दीपिका की 'महाभारत' साल दो हज़ार इक्कीस में दिवाली के खास मौके पर रिलीज़ होगी। 'गोलमाल पाँच' वैसे तो अजय देवगन और दीपिका पादुकोण की फ़िल्में साल दो हज़ार बीस में भी बॉक्स ऑफिस पर क्लैश होने जा रही हैं। बता दें, दस जनवरी दो हज़ार बीस के दिन अजय देवगन की 'तानाजी' और दीपिका पादुकोण की 'छपाक' एक साथ सिनेमाघरों में रिलीज़ होंगी। अब बात करें 'गोलमाल' की पाँचवीं इंस्टालमेंट की तो हाल ही में फिल्म डायरेक्टर रोहित शेट्टी ने फिल्म की घोषणा कर दी है। और यह फिल्म भी दिवाली दो हज़ार इक्कीस पर सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें। |
उत्तर पश्चिमी चीन के गंसू प्रांत में एक उड़ान शो के दौरान एक एयरोबैटिक विमान जमीन पर आ गिरा जिससे उसके पायलट की मौत हो गई। सरकारी समाचार एजंसी शिन्हुआ ने उड़ान शो के आयोजक के हवाले से बताया कि झांग्ये शहर में डानक्सिया हवाई अड्डे पर प्रथम सिल्क रोड इंटरनेशनल जनरल एविएशन कन्वेंशन के दौरान हुई दुर्घटना में पॉल स्मिथ की मौत हो गई। एक दर्शक की ओर से दिए गए वीडियो क्लिप में दिखाया गया है कि विमान ने गोता लगाने के दौरान नियंत्रण खो दिया और हवाई अड्डा रनवे से करीब 100 मीटर दूर गोबी मरुस्थल में विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। दुर्घटना में जमीन पर कोई अन्य हताहत नहीं हुआ है। जानकारी के मुताबिक, जिस अमेरिकी एयरोबैटिक टीम में स्मिथ काम करते थे, उसने सारी उड़ानें रद्द कर दी हैं। अन्य एयरोबैटिक उड़ानें दोपहर में अपने निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक रवाना हुईं।
| उत्तर पश्चिमी चीन के गंसू प्रांत में एक उड़ान शो के दौरान एक एयरोबैटिक विमान जमीन पर आ गिरा जिससे उसके पायलट की मौत हो गई। सरकारी समाचार एजंसी शिन्हुआ ने उड़ान शो के आयोजक के हवाले से बताया कि झांग्ये शहर में डानक्सिया हवाई अड्डे पर प्रथम सिल्क रोड इंटरनेशनल जनरल एविएशन कन्वेंशन के दौरान हुई दुर्घटना में पॉल स्मिथ की मौत हो गई। एक दर्शक की ओर से दिए गए वीडियो क्लिप में दिखाया गया है कि विमान ने गोता लगाने के दौरान नियंत्रण खो दिया और हवाई अड्डा रनवे से करीब एक सौ मीटर दूर गोबी मरुस्थल में विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। दुर्घटना में जमीन पर कोई अन्य हताहत नहीं हुआ है। जानकारी के मुताबिक, जिस अमेरिकी एयरोबैटिक टीम में स्मिथ काम करते थे, उसने सारी उड़ानें रद्द कर दी हैं। अन्य एयरोबैटिक उड़ानें दोपहर में अपने निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक रवाना हुईं। |
दोस्तों बॉलीवुड फिल्म जगत में कई नयी अभिनेत्रियां है जो अपने अभिनय से लोगो के दिलो में जगह बन रही रही है, उन्ही में से एक है खूबसूरत अभिनेत्री जाह्नवी कपूर। इनकी लोकप्रियता भी बहुत तेजी से बढ़ रही है। दर्शकों ने पिछले 1 साल से इन्हीं किसी भी फिल्म में अभिनय करते हुए नहीं देखा है। लेकिन इसके बावजूद भी यह अभिनेत्री बहुत ही ज्यादा फेमस हो रही है।
हाल ही में जाह्नवी कपूर अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में माथा टेकने पहुंची थी। बता दें कि अपनी खूबसूरती और बेहतरीन अदाओं से लोगों को दीवाना बनाने वाली अभिनेत्री जाह्नवी कपूर बहुत ही जल्दी बॉलीवुड फिल्म दोस्ताना 2 की शूटिंग की शुरुआत करने जा रही है। इस फिल्म की शूटिंग से पहले यह अभिनेत्री डायरेक्टर कॉलिंग डी कुन्हा के साथ अमृतसर के स्वर्ण मंदिर गई थी। यहां पर इन्होंने वाहेगुरु का आशीर्वाद भी लिया।
स्वर्ण मंदिर की कुछ तस्वीरें इस अभिनेत्री ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट की है। इनकी तस्वीरें बहुत ही तेजी से वायरल हो रही है। इन तस्वीरों में यह अभिनेत्री आसमानी रंग के सूट में नजर आ रही हैं। जाह्नवी कपूर इन तस्वीरों में बहुत ज्यादा सुंदर दिखाई दे रही है।जान्हवी कपूर सिल्वर स्क्रीन पर फिट दिखने के लिए अपनी फिजीक का बहुत ध्यान रखती हैं। वो अक्सर सोशल मीडिया पर तस्वीरें शेयर करती रहती हैं।आपको बता दें कि फिल्मों में आने के बाद जानवी कपूर पहले से ज्यादा हॉट नजर आने लगी है।
जान्हवी ने ईशान खट्टर के साथ शशांक खेतान के निर्देशन में बनी फिल्म 'धड़क' से बॉलीवुड में अपने करियर की शुरुआत की थी। इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 110 करोड रुपए का बेहतरीन कारोबार किया था। अब यह अभिनेत्री गुंजन सक्सेना की बायोपिक फिल्म में भी दिखाई देंगी। अब जान्हवी अपनी दूसरी फिल्म के लिए तैयार हैं। इन दिनों वो अपनी अपकमिंग फिल्म 'गुंजन सक्सेना' की बायोपिक में काम कर रही हैं। फिल्म का टीजर और पोस्टर रिलीज हो चुका है। इसमें जान्हवी के साथ पंकज त्रिपाठी और अंगद बेदी नजर आएंगे।
22 साल की उम्र में दे दी 110 करोड़ की सुपरहिट फिल्म, अब माथा टेकने पहुंची स्वर्ण मंदिर!
दोस्तों बॉलीवुड फिल्म जगत में कई नयी अभिनेत्रियां है जो अपने अभिनय से लोगो के दिलो में जगह बन रही रही है, उन्ही में से एक है खूबसूरत अभिनेत्री जाह्नवी कपूर। इनकी लोकप्रियता भी बहुत तेजी से बढ़ रही है। दर्शकों ने पिछले 1 साल से इन्हीं किसी भी फिल्म में अभिनय करते हुए नहीं देखा है। लेकिन इसके बावजूद भी यह अभिनेत्री बहुत ही ज्यादा फेमस हो रही है।
| दोस्तों बॉलीवुड फिल्म जगत में कई नयी अभिनेत्रियां है जो अपने अभिनय से लोगो के दिलो में जगह बन रही रही है, उन्ही में से एक है खूबसूरत अभिनेत्री जाह्नवी कपूर। इनकी लोकप्रियता भी बहुत तेजी से बढ़ रही है। दर्शकों ने पिछले एक साल से इन्हीं किसी भी फिल्म में अभिनय करते हुए नहीं देखा है। लेकिन इसके बावजूद भी यह अभिनेत्री बहुत ही ज्यादा फेमस हो रही है। हाल ही में जाह्नवी कपूर अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में माथा टेकने पहुंची थी। बता दें कि अपनी खूबसूरती और बेहतरीन अदाओं से लोगों को दीवाना बनाने वाली अभिनेत्री जाह्नवी कपूर बहुत ही जल्दी बॉलीवुड फिल्म दोस्ताना दो की शूटिंग की शुरुआत करने जा रही है। इस फिल्म की शूटिंग से पहले यह अभिनेत्री डायरेक्टर कॉलिंग डी कुन्हा के साथ अमृतसर के स्वर्ण मंदिर गई थी। यहां पर इन्होंने वाहेगुरु का आशीर्वाद भी लिया। स्वर्ण मंदिर की कुछ तस्वीरें इस अभिनेत्री ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट की है। इनकी तस्वीरें बहुत ही तेजी से वायरल हो रही है। इन तस्वीरों में यह अभिनेत्री आसमानी रंग के सूट में नजर आ रही हैं। जाह्नवी कपूर इन तस्वीरों में बहुत ज्यादा सुंदर दिखाई दे रही है।जान्हवी कपूर सिल्वर स्क्रीन पर फिट दिखने के लिए अपनी फिजीक का बहुत ध्यान रखती हैं। वो अक्सर सोशल मीडिया पर तस्वीरें शेयर करती रहती हैं।आपको बता दें कि फिल्मों में आने के बाद जानवी कपूर पहले से ज्यादा हॉट नजर आने लगी है। जान्हवी ने ईशान खट्टर के साथ शशांक खेतान के निर्देशन में बनी फिल्म 'धड़क' से बॉलीवुड में अपने करियर की शुरुआत की थी। इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर एक सौ दस करोड रुपए का बेहतरीन कारोबार किया था। अब यह अभिनेत्री गुंजन सक्सेना की बायोपिक फिल्म में भी दिखाई देंगी। अब जान्हवी अपनी दूसरी फिल्म के लिए तैयार हैं। इन दिनों वो अपनी अपकमिंग फिल्म 'गुंजन सक्सेना' की बायोपिक में काम कर रही हैं। फिल्म का टीजर और पोस्टर रिलीज हो चुका है। इसमें जान्हवी के साथ पंकज त्रिपाठी और अंगद बेदी नजर आएंगे। बाईस साल की उम्र में दे दी एक सौ दस करोड़ की सुपरहिट फिल्म, अब माथा टेकने पहुंची स्वर्ण मंदिर! दोस्तों बॉलीवुड फिल्म जगत में कई नयी अभिनेत्रियां है जो अपने अभिनय से लोगो के दिलो में जगह बन रही रही है, उन्ही में से एक है खूबसूरत अभिनेत्री जाह्नवी कपूर। इनकी लोकप्रियता भी बहुत तेजी से बढ़ रही है। दर्शकों ने पिछले एक साल से इन्हीं किसी भी फिल्म में अभिनय करते हुए नहीं देखा है। लेकिन इसके बावजूद भी यह अभिनेत्री बहुत ही ज्यादा फेमस हो रही है। |
बजरंगी भाईजान की 'मुन्नी' अब नहीं रही मुन्नी, बड़ी होकर लगने लगी है हुस्न की परी, साल 2015 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई फिल्म 'बजरंगी भाईजान' की 'मुन्नी' यानी हर्षाली मल्होत्रा अब पहले से काफी बड़ी हो चुकी हैं और सोशल नेटवर्किंग साइट इंस्टाग्राम पर काफी एक्टिव रहने लगी हैं. वह इंस्टाग्राम पर आए दिन अपनी लेटेस्ट तस्वीरें और वीडियोज शेयर करती रहती हैं, और उनके शेयर करते ही उनके पोस्ट वायरल हो जाते हैं. इसी क्रम में उन्होंने अपना एक और वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया है, जो इन दिनों इंटरनेट पर छाया हुआ है।
इस वीडियो में हर्षाली मल्होत्रा खुद की खूबसूरती की तारीफ करती नजर आ रही हैं, लेकिन मजाकिया अंदाज में. वह कहती हैं, 'पता है, कुछ लोग न फूल से भी ज्यादा खूबसूरत होते हैं. जैसे कि आप... मुझे ही देख लो. ' इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर काफी पसंद किया जा रहा है।
बता दें कि हर्षाली मल्होत्रा (Harshaali Malhotra) को फिल्म 'बजरंगी भाईजान' के बाद लोग उन्हें मुन्नी के नाम से जानने लगे थे. उन्होंने तब मुन्नी के किरदार से खूब लोकप्रियता हासिल की थी. फिल्म 'बजरंगी भाईजान' के बाद हर्षाली मल्होत्रा की क्यूटनेस इंटरनेट पर छा गई थी।
इस फिल्म के बाद उन्होंने 'नास्तिक' में अर्जुन रामपाल के साथ काम किया था. आप यकीन नहीं करेंगे, लेकिन इस समय हर्षाली मल्होत्रा के इंस्टाग्राम पर 7 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं. वह एक फिल्म स्टार होने के अलावा सोशल मीडिया स्टार भी हैं।
| बजरंगी भाईजान की 'मुन्नी' अब नहीं रही मुन्नी, बड़ी होकर लगने लगी है हुस्न की परी, साल दो हज़ार पंद्रह को सिनेमाघरों में रिलीज हुई फिल्म 'बजरंगी भाईजान' की 'मुन्नी' यानी हर्षाली मल्होत्रा अब पहले से काफी बड़ी हो चुकी हैं और सोशल नेटवर्किंग साइट इंस्टाग्राम पर काफी एक्टिव रहने लगी हैं. वह इंस्टाग्राम पर आए दिन अपनी लेटेस्ट तस्वीरें और वीडियोज शेयर करती रहती हैं, और उनके शेयर करते ही उनके पोस्ट वायरल हो जाते हैं. इसी क्रम में उन्होंने अपना एक और वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया है, जो इन दिनों इंटरनेट पर छाया हुआ है। इस वीडियो में हर्षाली मल्होत्रा खुद की खूबसूरती की तारीफ करती नजर आ रही हैं, लेकिन मजाकिया अंदाज में. वह कहती हैं, 'पता है, कुछ लोग न फूल से भी ज्यादा खूबसूरत होते हैं. जैसे कि आप... मुझे ही देख लो. ' इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर काफी पसंद किया जा रहा है। बता दें कि हर्षाली मल्होत्रा को फिल्म 'बजरंगी भाईजान' के बाद लोग उन्हें मुन्नी के नाम से जानने लगे थे. उन्होंने तब मुन्नी के किरदार से खूब लोकप्रियता हासिल की थी. फिल्म 'बजरंगी भाईजान' के बाद हर्षाली मल्होत्रा की क्यूटनेस इंटरनेट पर छा गई थी। इस फिल्म के बाद उन्होंने 'नास्तिक' में अर्जुन रामपाल के साथ काम किया था. आप यकीन नहीं करेंगे, लेकिन इस समय हर्षाली मल्होत्रा के इंस्टाग्राम पर सात लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं. वह एक फिल्म स्टार होने के अलावा सोशल मीडिया स्टार भी हैं। |
भारत और ऑस्ट्रेलिया की टीमें रविवार को बेंगलुरू के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में 3 मैचों की सीरीज का तीसरा और निर्णायक मैच खेलने उतरीं. ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया.
भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी जब फील्डिंग के लिए मैदान पर उतरे तो उनके बाजू पर काली पट्टी बंधी हुई थीं. ऐसा इसलिए क्योंकि इस सप्ताह भारतीय टीम के पूर्व ऑलराउंडर बापू नाडकर्णी का निधन हो गया था. नाडकर्णी को श्रद्धांजलि देने के लिए टीम इंडिया ने ऐसा किया.
'बापू' 86 वर्ष के थे. उनके परिवार में पत्नी और दो बेटियां हैं. उन्होंने शुक्रवार को अंतिम सांस ली थी. नाडकर्णी वही खिलाड़ी थे जिनके नाम लगातार 21 ओवर मेडन फेंकने का रिकॉर्ड था.
नाडकर्णी बाएं हाथ के बल्लेबाज और बाएं हाथ के स्पिनर थे. उन्होंने भारत की तरफ से 41 टेस्ट मैचों में 1,414 रन बनाए और 88 विकेट लिए. उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 43 रन देकर छह विकेट रहा. वह मुंबई के शीर्ष क्रिकेटरों में शामिल थे. उन्होंने 191 प्रथम श्रेणी मैच खेले जिसमें 500 विकेट लिए और 8,880 रन बनाए.
इस समय भारत और ऑस्ट्रेलिया की टीमें सीरीज में 1-1 की बराबरी पर हैं. सीरीज का पहला वनडे ऑस्ट्रेलिया ने 10 विकेट से जीता था जबकि टीम इंडिया ने राजकोट में वापसी करते हुए 36 रन से जीत दर्ज कर सीरीज में 1-1 की बराबरी की.
| भारत और ऑस्ट्रेलिया की टीमें रविवार को बेंगलुरू के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में तीन मैचों की सीरीज का तीसरा और निर्णायक मैच खेलने उतरीं. ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया. भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी जब फील्डिंग के लिए मैदान पर उतरे तो उनके बाजू पर काली पट्टी बंधी हुई थीं. ऐसा इसलिए क्योंकि इस सप्ताह भारतीय टीम के पूर्व ऑलराउंडर बापू नाडकर्णी का निधन हो गया था. नाडकर्णी को श्रद्धांजलि देने के लिए टीम इंडिया ने ऐसा किया. 'बापू' छियासी वर्ष के थे. उनके परिवार में पत्नी और दो बेटियां हैं. उन्होंने शुक्रवार को अंतिम सांस ली थी. नाडकर्णी वही खिलाड़ी थे जिनके नाम लगातार इक्कीस ओवर मेडन फेंकने का रिकॉर्ड था. नाडकर्णी बाएं हाथ के बल्लेबाज और बाएं हाथ के स्पिनर थे. उन्होंने भारत की तरफ से इकतालीस टेस्ट मैचों में एक,चार सौ चौदह रन बनाए और अठासी विकेट लिए. उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन तैंतालीस रन देकर छह विकेट रहा. वह मुंबई के शीर्ष क्रिकेटरों में शामिल थे. उन्होंने एक सौ इक्यानवे प्रथम श्रेणी मैच खेले जिसमें पाँच सौ विकेट लिए और आठ,आठ सौ अस्सी रन बनाए. इस समय भारत और ऑस्ट्रेलिया की टीमें सीरीज में एक-एक की बराबरी पर हैं. सीरीज का पहला वनडे ऑस्ट्रेलिया ने दस विकेट से जीता था जबकि टीम इंडिया ने राजकोट में वापसी करते हुए छत्तीस रन से जीत दर्ज कर सीरीज में एक-एक की बराबरी की. |
इंडिया न्यूज, Rajasthan News: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नवाचार एक बार फिर से देश मे चर्चा में है। गहलोत द्वारा इस बजट में मनरेगा की तर्ज पर इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारन्टी योजना शुरू की है। कल प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति ने भी इस बात की पैरवी की कि शहरी रोजगार गारन्टी योजना देश भर में लागू की जानी चाहिए।
आज खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस बात की चर्चा पीसीसी में मीडिया से चर्चा करते हुए की। गहलोत ने कहा कि प्रदेश में जो सरकार नवाचार कर रही है उसको केंद्र सरकार भी मान रही है। गौरतलब है कि गहलोत ने अपना विजन दिखाते हुए इसी बजट में इस योजना का एलान कर शुभारंभ किया था।
इस योजना के माध्यम से शहरी क्षेत्रों में मनरेगा की तर्ज पर मांगे जाने वाले काम पर 100 दिन का रोजगार प्रदान किया जाएगा। इस योजना के संचालन के लिए 800 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इस योजना को अब तक ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित किया जा रहा था।
लेकिन अब इस योजना को शहरी क्षेत्रों में निवास करने वाले नागरिकों के लिए भी कार्यान्वित किया जाएगा। शहरी क्षेत्रों के नागरिकों को उनके निवास क्षेत्र के पास रोजगार उपलब्ध करवाया जाएगा। जिससे कि शहरी परिवारों को संबल प्रदान हो सके। यह योजना शहरी क्षेत्र के बेरोजगार नागरिकों को रोजगार प्रदान करने में कारगर साबित होगी। इसके अलावा इस योजना के माध्यम से प्रदेश के नागरिकों के जीवन स्तर में भी सुधार आएगा।
मीडिया से चर्चा करते हुए गहलोत ने केंद्र सरकार पर भी महंगाई को लेकर हमला बोला कहा महंगाई पर कल मैंने ट्वीट भी किया कि महंगाई की चिंता कौन कर रहा है? महंगाई की चिंता नहीं कर रहे हैं कोई, बेरोजगारी की चिंता नहीं कर रहे हैं, जब कैंपेन किया 2014 के अंदर तो मोदी जी ने कहा कि 2 करोड़ लोगों को रोजगार मिलेगा प्रतिवर्ष, उसको तो सब भूल गए हैं और इसीलिए देश के अंदर जो माहौल बना रखा है तनाव का, दंगों का, जिससे कि ध्यान डायवर्ट रहे। बात महंगाई की होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कोरोना को लेकर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि मैं कहना चाहूंगा कि कोरोना को भी गंभीरता से लेना चाहिए। डॉक्टर्स से मेरी बात होती रहती है। कल रात को ही मैंने बातचीत की। दिल्ली के आंकड़े आप देख रहे हो टीवी में भी आंकड़े आ रहे हैं। आज लंग्स के अंदर जो स्कोर कोविड चल रहा था तब आता था। उसी ढंग के स्कोर आने लग गए हैं। तो मैं प्रदेशवासियों को निवेदन करना चाहूंगा कि आप ध्यान रखें। कोई सिम्प्टम्स दिखें तो डॉक्टर को दिखाएं। इसको लेकर कोई लापरवाही न करें यह मेरा आग्रह है।
गहलोत ने कहा कि वो ही मैं देख रहा हूं कि महंगाई को लेकर, बेरोजगारी को लेकर कि देश किस दिशा में जा रहा है। देश किस दिशा में जाएगा यह किसी को नहीं पता। क्योंकि जो लोग सत्ता में बैठे हुए हैं इनको जनता का भय नहीं है। ये लोग हिंदू धर्म के नाम पर राजनीति कर रहे हैं। इनको इस बात का घमंड आ गया है कि सब हिंदू हमारे साथ हैं। हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
कांग्रेस के शासन में जैसे ही मीडिया आरोप लगाता था। तो तो हम समझते थे कि मीडिया जनता की भावनाओं को रीप्रजेंट कर रहा है। कांग्रेस नेतृत्व हमेशा देखता था लोग क्या कहेंगे? लोग क्या सोचेंगे हमारे बारे में। हम सत्ता में बैठे हुए हैं और ये घटना हो रही है। उस समय तत्काल फैसले होते थे। लेकिन इनको कोई मतलब ही नहीं है कि लोग क्या कहेंगे। ये डेमोक्रेसी के लिए खतरा है, ये आम जनता को समझना पड़ेगा कि हिंदुत्व के नाम पर आपको जो भ्रमित कर रहे हैं, ये हमारे लिए उल्टा पड़ेगा।
गहलोत ने कहा कि ईआरसीपी को लेकर अभियान के रूप मे मूवमेंट खड़ा होना चाहिए। जनता को आगे अना पड़ेगा। हम भी केंद्र सरकार पर दबाव दे रहे हैं। प्रधानमंत्री जी को उनका किया वादा याद दिला रहे हैं। उन्होंने ने जयपुर में और अजमेर में वादा किया। उनके मंत्री कह रहे हैं उन्होंने कोई वादा किया ही नहीं। अगर उन्होंने कहा हो तो मैं संन्यास ले लूंगा राजनीति से लेकिन अब उनके मुंह पर ताला लग गया है। वो संन्यास कब लेंगे पता नहीं।
| इंडिया न्यूज, Rajasthan News: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नवाचार एक बार फिर से देश मे चर्चा में है। गहलोत द्वारा इस बजट में मनरेगा की तर्ज पर इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारन्टी योजना शुरू की है। कल प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति ने भी इस बात की पैरवी की कि शहरी रोजगार गारन्टी योजना देश भर में लागू की जानी चाहिए। आज खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस बात की चर्चा पीसीसी में मीडिया से चर्चा करते हुए की। गहलोत ने कहा कि प्रदेश में जो सरकार नवाचार कर रही है उसको केंद्र सरकार भी मान रही है। गौरतलब है कि गहलोत ने अपना विजन दिखाते हुए इसी बजट में इस योजना का एलान कर शुभारंभ किया था। इस योजना के माध्यम से शहरी क्षेत्रों में मनरेगा की तर्ज पर मांगे जाने वाले काम पर एक सौ दिन का रोजगार प्रदान किया जाएगा। इस योजना के संचालन के लिए आठ सौ करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इस योजना को अब तक ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित किया जा रहा था। लेकिन अब इस योजना को शहरी क्षेत्रों में निवास करने वाले नागरिकों के लिए भी कार्यान्वित किया जाएगा। शहरी क्षेत्रों के नागरिकों को उनके निवास क्षेत्र के पास रोजगार उपलब्ध करवाया जाएगा। जिससे कि शहरी परिवारों को संबल प्रदान हो सके। यह योजना शहरी क्षेत्र के बेरोजगार नागरिकों को रोजगार प्रदान करने में कारगर साबित होगी। इसके अलावा इस योजना के माध्यम से प्रदेश के नागरिकों के जीवन स्तर में भी सुधार आएगा। मीडिया से चर्चा करते हुए गहलोत ने केंद्र सरकार पर भी महंगाई को लेकर हमला बोला कहा महंगाई पर कल मैंने ट्वीट भी किया कि महंगाई की चिंता कौन कर रहा है? महंगाई की चिंता नहीं कर रहे हैं कोई, बेरोजगारी की चिंता नहीं कर रहे हैं, जब कैंपेन किया दो हज़ार चौदह के अंदर तो मोदी जी ने कहा कि दो करोड़ लोगों को रोजगार मिलेगा प्रतिवर्ष, उसको तो सब भूल गए हैं और इसीलिए देश के अंदर जो माहौल बना रखा है तनाव का, दंगों का, जिससे कि ध्यान डायवर्ट रहे। बात महंगाई की होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कोरोना को लेकर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि मैं कहना चाहूंगा कि कोरोना को भी गंभीरता से लेना चाहिए। डॉक्टर्स से मेरी बात होती रहती है। कल रात को ही मैंने बातचीत की। दिल्ली के आंकड़े आप देख रहे हो टीवी में भी आंकड़े आ रहे हैं। आज लंग्स के अंदर जो स्कोर कोविड चल रहा था तब आता था। उसी ढंग के स्कोर आने लग गए हैं। तो मैं प्रदेशवासियों को निवेदन करना चाहूंगा कि आप ध्यान रखें। कोई सिम्प्टम्स दिखें तो डॉक्टर को दिखाएं। इसको लेकर कोई लापरवाही न करें यह मेरा आग्रह है। गहलोत ने कहा कि वो ही मैं देख रहा हूं कि महंगाई को लेकर, बेरोजगारी को लेकर कि देश किस दिशा में जा रहा है। देश किस दिशा में जाएगा यह किसी को नहीं पता। क्योंकि जो लोग सत्ता में बैठे हुए हैं इनको जनता का भय नहीं है। ये लोग हिंदू धर्म के नाम पर राजनीति कर रहे हैं। इनको इस बात का घमंड आ गया है कि सब हिंदू हमारे साथ हैं। हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। कांग्रेस के शासन में जैसे ही मीडिया आरोप लगाता था। तो तो हम समझते थे कि मीडिया जनता की भावनाओं को रीप्रजेंट कर रहा है। कांग्रेस नेतृत्व हमेशा देखता था लोग क्या कहेंगे? लोग क्या सोचेंगे हमारे बारे में। हम सत्ता में बैठे हुए हैं और ये घटना हो रही है। उस समय तत्काल फैसले होते थे। लेकिन इनको कोई मतलब ही नहीं है कि लोग क्या कहेंगे। ये डेमोक्रेसी के लिए खतरा है, ये आम जनता को समझना पड़ेगा कि हिंदुत्व के नाम पर आपको जो भ्रमित कर रहे हैं, ये हमारे लिए उल्टा पड़ेगा। गहलोत ने कहा कि ईआरसीपी को लेकर अभियान के रूप मे मूवमेंट खड़ा होना चाहिए। जनता को आगे अना पड़ेगा। हम भी केंद्र सरकार पर दबाव दे रहे हैं। प्रधानमंत्री जी को उनका किया वादा याद दिला रहे हैं। उन्होंने ने जयपुर में और अजमेर में वादा किया। उनके मंत्री कह रहे हैं उन्होंने कोई वादा किया ही नहीं। अगर उन्होंने कहा हो तो मैं संन्यास ले लूंगा राजनीति से लेकिन अब उनके मुंह पर ताला लग गया है। वो संन्यास कब लेंगे पता नहीं। |
राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा है और कांग्रेस पार्टी के नेता दिग्विजय सिंह और कमलनाथ पर जमकर हमला बोला है। शिवराज कैबिनेट के विस्तार के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राजभवन से बाहर निकलकर मीडिया से बात की और कांग्रेस पर जमकर प्रहार किया है। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि जनता भ्रष्टों की सरकार को जवाब देगी।
दिग्विजय सिंह और कमलनाथ पर गरजते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि मुझे कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है। देश की जनता के सामने तथ्य है कि इन लोगों ने किस तरह से प्रदेश का भंडार लूटा है। वादाखिलाफी का लोगों ने इतिहास देखा है। समय आएगा तो मैं जवाब दूंगा। इन दोनों को मैं यहीं कहना चाहता हूं, टाइगर अभी जिंदा है।
राज्य में 24 सीटों पर होने वाले विधानसभा उपचुनाव को लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि मेरी जनता 15 महीने की भ्रष्टों की सरकार को जवाब देगी। न्याय के रास्ते पर चलना हम सबका धर्म है। अगर उसके लिए युद्ध भी करना पड़े तो ज्योतिरादित्य सिंधिया हमेशा पहली पंक्ति में खड़ा रहेगा।
सिंधिया ने कहा कि कांग्रेस ने कोरोना महामारी के दौरान कुछ नहीं किया है। कोरोना महामारी के दौरान कांग्रेस क्या कर रही थी। एक व्यक्ति की भी इन लोगों ने मदद नहीं की है। कोरोना के दौरान मैंने एक-एक खाने के पैकेट का वितरण किया है। मैंने सीएम रिलीफ फंड में राशि दी है। बाहर फंसे एमपी के लोगों को मैं लाया हूं।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की तारीफ करते हुए सिंधिया ने कहा कि शिवराज सिंह सरकार ने हमेशा जनता की सेवा का रास्ता अपनाया है। 15 महीने में कांग्रेस की सरकार ने प्रदेश को नुकसान पहुंचाया था। 100 दिन में शिवराज सिंह चौहान ने जो कर दिखाया है, उसके लिए मैं साधुवाद देना चाहता हूं। कमलनाथ ने कोरोना के लिए एक बैठक नहीं की थी।
सिंधिया ने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि उपचुनाव की 24 की 24 सीटों में बीजेपी का झंडा बुलंद होगा। वहीं मंत्रिमंडल के विस्तार पर इन्होंने ने कहा कि 'मध्य प्रदेश के मंत्रिमंडल का विस्तार जनसेवकों का विस्तार है। यहां पर सिंहासन पकड़ने के लिए गलत तरीके अपनाए गए। आज शिवराज जी के जनसेवकों की सेना का गठन हुआ है।
बीजेपी में शामिल होने के बाद ये पहला मौका है जब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एमपी कांग्रेस के नेताओं पर खुलकर वार किया है। दरअसल मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार गिराने में ज्योतिरादित्य सिंधिया की भूमिका अहम रही है। जिसके बाद से कांग्रेस के नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर कई सारे बयान दे रहे थे। लंबे समय तक चुप रहने के बाद आज ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस के नेताओं पर जुबानी हमला किया है।
गौरतलब है कि आज मध्य प्रदेश सरकार का विस्तार किया गया है और कई सारे विधायकों को मंत्री बनाया गया है। इस शपथ ग्रहण कार्यक्रम में सिंधिया ने भी हिस्सा लिया था।
| राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा है और कांग्रेस पार्टी के नेता दिग्विजय सिंह और कमलनाथ पर जमकर हमला बोला है। शिवराज कैबिनेट के विस्तार के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राजभवन से बाहर निकलकर मीडिया से बात की और कांग्रेस पर जमकर प्रहार किया है। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि जनता भ्रष्टों की सरकार को जवाब देगी। दिग्विजय सिंह और कमलनाथ पर गरजते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि मुझे कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है। देश की जनता के सामने तथ्य है कि इन लोगों ने किस तरह से प्रदेश का भंडार लूटा है। वादाखिलाफी का लोगों ने इतिहास देखा है। समय आएगा तो मैं जवाब दूंगा। इन दोनों को मैं यहीं कहना चाहता हूं, टाइगर अभी जिंदा है। राज्य में चौबीस सीटों पर होने वाले विधानसभा उपचुनाव को लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि मेरी जनता पंद्रह महीने की भ्रष्टों की सरकार को जवाब देगी। न्याय के रास्ते पर चलना हम सबका धर्म है। अगर उसके लिए युद्ध भी करना पड़े तो ज्योतिरादित्य सिंधिया हमेशा पहली पंक्ति में खड़ा रहेगा। सिंधिया ने कहा कि कांग्रेस ने कोरोना महामारी के दौरान कुछ नहीं किया है। कोरोना महामारी के दौरान कांग्रेस क्या कर रही थी। एक व्यक्ति की भी इन लोगों ने मदद नहीं की है। कोरोना के दौरान मैंने एक-एक खाने के पैकेट का वितरण किया है। मैंने सीएम रिलीफ फंड में राशि दी है। बाहर फंसे एमपी के लोगों को मैं लाया हूं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की तारीफ करते हुए सिंधिया ने कहा कि शिवराज सिंह सरकार ने हमेशा जनता की सेवा का रास्ता अपनाया है। पंद्रह महीने में कांग्रेस की सरकार ने प्रदेश को नुकसान पहुंचाया था। एक सौ दिन में शिवराज सिंह चौहान ने जो कर दिखाया है, उसके लिए मैं साधुवाद देना चाहता हूं। कमलनाथ ने कोरोना के लिए एक बैठक नहीं की थी। सिंधिया ने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि उपचुनाव की चौबीस की चौबीस सीटों में बीजेपी का झंडा बुलंद होगा। वहीं मंत्रिमंडल के विस्तार पर इन्होंने ने कहा कि 'मध्य प्रदेश के मंत्रिमंडल का विस्तार जनसेवकों का विस्तार है। यहां पर सिंहासन पकड़ने के लिए गलत तरीके अपनाए गए। आज शिवराज जी के जनसेवकों की सेना का गठन हुआ है। बीजेपी में शामिल होने के बाद ये पहला मौका है जब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एमपी कांग्रेस के नेताओं पर खुलकर वार किया है। दरअसल मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार गिराने में ज्योतिरादित्य सिंधिया की भूमिका अहम रही है। जिसके बाद से कांग्रेस के नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर कई सारे बयान दे रहे थे। लंबे समय तक चुप रहने के बाद आज ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस के नेताओं पर जुबानी हमला किया है। गौरतलब है कि आज मध्य प्रदेश सरकार का विस्तार किया गया है और कई सारे विधायकों को मंत्री बनाया गया है। इस शपथ ग्रहण कार्यक्रम में सिंधिया ने भी हिस्सा लिया था। |
यूक्रेन की अर्थव्यवस्था स्वर्ग और पृथ्वी के बीच मँडराती है, अभाव समाचार सूचना स्थान में, कोलमोइस्की में छिपा हुआ फ्रोजन, लेकिन विवादास्पद पूर्वी मोर्चा, जो या तो इजरायल में है या यूएसए में, जिन्हें बेसबॉल देखने के लिए एक दशक में पहली बार वीजा जारी किया गया था, उसी क्रम की घटना है।
यूक्रेन, ईयू, यूएसए और रूस की नियति और यूक्रेन और एलडीएनआर के नागरिकों के भविष्य में होने वाली घटनाएं एक द्विभाजित बिंदु पर आ रही हैं - एक जटिल सामाजिक प्रणाली की महत्वपूर्ण स्थिति जिसमें सिस्टम या तो आदेश देने की प्रक्रिया शुरू करता है या और भी अराजक हो जाता है। और देशों के आंदोलन के प्रक्षेपवक्र और उनकी टक्कर के स्थान के साथ-साथ इसके बाद के टुकड़ों के प्रसार की भविष्यवाणी करना, बिल्कुल असंभव है। बहुत से कारक, दोनों ओवरट और गुप्त, राजनीतिक निर्णय लेने को प्रभावित करते हैं। बहुत सारे गुप्त स्प्रिंग्स, सीमा के संकुचित, राजनीतिक वास्तविकता के पतले कपड़े की परतदार परतों के नीचे छिपे हुए।
यह स्पष्ट है कि ट्रस जल्द या बाद में टूट जाएगा, और मैदान में एक दूसरे के सामने खड़ी होने वाली सेनाएं फिर से कड़वाहट और उन्माद के साथ एक-दूसरे को नष्ट करना शुरू कर देंगी। यह एक तथ्य है, साथ ही इस तथ्य पर भी कि यूरोप को किसी तरह की प्रतिक्रिया देनी होगी। झाड़ियों में बैठने का समय बीत रहा है - अब या तो अमेरिकी यूरोपीय झाड़ियों को जलाएंगे, या अपने निवासियों को अंडरग्राउंड से बाहर निकालेंगे और उनके हितों के लिए वध के लिए ड्राइव करेंगे। और ब्याज, वास्तव में, अपरिवर्तित है - विश्व शक्ति और भालू की त्वचा जो अभी तक नहीं मारे गए हैं।
भालू कैसे प्रतिक्रिया करेगा यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है। वह पिछले महीने के लिए बेहद शांत और विनम्र है, लेकिन जाहिर है कि वह कुछ करने के लिए तैयार है।
भालू की एक प्रतिक्रिया, हालांकि महत्वपूर्ण है, अभी भी एक माध्यमिक प्रकृति की है। बहुत अधिक महत्वपूर्ण यूरोपीय राजनीतिक पापुआंस की प्रतिक्रिया है जिन्होंने अपने जंगल और कांच और कंक्रीट के केबिन में बैठने का फैसला किया है।
समझना कि वे यूक्रेनी संकट के बारे में क्या सोचते हैं, बेहद कठिन है, लेकिन कई कारकों ने अभी भी उनकी स्थिति का खुलासा किया हैः
1. मिन्स्क ट्रूस को सख्ती से देखा जाना चाहिए। यह पेरिस और बर्लिन दोनों से चिल्लाया गया है। "मिन्स्क" यूरोपीय संघ के लिए पवित्र है। यह जंगलों के जंगलों में छिपने और अपने भविष्य के मुद्दों को तय न करने, निर्णय को स्थगित करने का अवसर है, जिसके तहत टैंक बिस्तर पर जाएं - रूसी या अमेरिकी।
2। तोड़-फोड़ के लिए जिम्मेदार लोगों को दंडित किया जाएगा।
हालांकि, दोषी किसे नियुक्त किया गया है?
वहाँ वास्तव में दो विकल्प हैंः कीव या रूस। ईयू कौन चुनेगा यह सुनिश्चित करने के लिए नहीं जाना जाता है। हालांकि, कई गंभीर बयानों से संकेत मिलता है कि यूरोपीय संघ ने महसूस किया हैः कीव एक ही बैल टेरियर है जिसे अमेरिका पट्टे पर पकड़ रहा है, और उसके मुंह से लार पहले से ही यूरोपीय राजनेताओं के चेहरे पर टपक रही है।
इसलिए, उतार-चढ़ाव के अंक - अप्रत्याशितता के क्षण - हैंः
पहला यूरोपीय आयोग के प्रमुख ने कीव के लिए उड़ान नहीं भरी और जीन-क्लाउड जुनैकर के बाद फेडरिका मोघेरिनी ने यूक्रेनी राजधानी का दौरा करने से इनकार कर दिया।
दूसरा। पेरिस, मीडिया के माध्यम से, एक रिसाव की अनुमति दी, जिसमें उन्होंने कीव पर मिन्स्क की शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया।
तीसरा। OSCE कीव द्वारा संघर्ष विराम उल्लंघन के तथ्यों को रिकॉर्ड करता है, विशेष रूप से, कीव सुरक्षा बलों द्वारा शिरोकिनो के निपटान का कवच। इससे पहले, ओएससीई ने खुद को अनुमति नहीं दी थी।
चौथा। यूरोपीय उधारदाताओं को कीव के अहंकार से मारा जाता है, जो कि वित्त मंत्री नताल्या यारेस्को के व्यक्ति में, पहले से ही लेनदारों के लिए 15 बिलियन डॉलर की राशि में यूक्रेन के सार्वजनिक ऋण का मुद्दा तय कर चुका है। इसे लिखा जाना माना जाता है। इसलिए यूरोप के लिए संयुक्त राज्य का फैसला किया।
पाँचवाँ। भूमिगत भंडारण में आपको कम से कम 15 बिलियन क्यूबिक मीटर डाउनलोड करने की आवश्यकता होती है। नीला ईंधन, जिसे कीव के पास भुगतान करने के लिए कुछ भी नहीं है। और यूक्रेनी अधिकारियों ने यूरोपीय संघ को ब्लैकमेल करने की शुरुआत करने से बेहतर कुछ नहीं पाया, अपनी गैस खरीद प्रतिबद्धताओं को कवर करने के लिए उससे पैसे की मांग की। दूसरी ओर, मास्को ने यूरोपीय संघ को महत्वपूर्ण रियायतें दी हैं, जो पेरिस और बर्लिन को उसके अच्छे इरादों को समझाने की कोशिश कर रहा है।
छठा। रूस विरोधी प्रतिबंधों की संभावना जो रूस को झटका दे सकती है, जिससे यूरोपीय संघ को अपेक्षाकृत स्वीकार्य नुकसान हो सकता है। फिर केवल अंगों का विच्छेदन, जो कि यूरोपीय संघ की अर्थव्यवस्था की शाखाएं हैं या रूस के स्विफ्ट से अलग होने के रूप में आत्महत्या के बाहरी कार्य हैं, जो बहुत अधिक नुकसान के कारण नासमझ माना जाता है। प्रतिबंध स्वयं काम नहीं करते हैं, जो यूरोपीय नौकरशाहों द्वारा मान्यता प्राप्त था और उनकी कार्रवाई का वर्ष साबित हुआ।
सातवीं। कीव युद्ध की तैयारी कर रहा है। पोरोशेंको नए प्रकार के हथियारों का दावा करता है, एक खौफनाक बंडेरा के साथ छलावरण में चलते हुए, निचले रैंक के अधिकारियों का कहना है कि रूस (जो नहीं तो वह? ) आक्रामक पर जाएगा। असल में, मंच पर लटकी हुई बंदूक गोली नहीं मार सकती, और सैनिक, युद्ध के बिना, ध्यान में लिप्त रहते हैं, जो सेना के लड़ने के गुणों पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।
आठवीं। कीव और एलडीएनआर ने चीजों को पीछे से क्रम में रखाः टर्बनेट स्वतंत्रता को समाप्त कर दिया गया (कम से कम शब्दों में), और राइट सेक्टर को सेना के ढांचे में शामिल किया गया। डोनेट्स्क और लुहानस्क ने उन सभी लोगों को निहत्था कर दिया, जिन्होंने आज्ञा का पालन नहीं किया और यहां तक कि मुक्त वामपंथी मोजग्वॉय एलपीआर के लोगों के मिलिशिया का हिस्सा बन गए। इसलिए, हैंडलिंग में सुधार हुआ है, और यदि ऐसा है, तो फिर जोखिम क्यों न लें और एक और 1000 सैनिकों को वल्लाह में भेजें?
खासकर जब से संयुक्त राज्य अमेरिका संघर्ष की अवहेलना की मांग कर रहा हैः वे यूरोपीय elites के साथ छिपाने और मास्को के साथ इस मुद्दे पर उनकी अनिश्चितता से थक गए हैं। "न तो युद्ध और न ही शांति" की स्थिति उनके अनुरूप नहीं है। लक्ष्य यूरोपीय संघ और रूसी संघ के बीच संबंधों का पूर्ण विघटन है; ट्रांसएटलांटिक एफटीए पर यूरोपीय संघ के समझौते को लागू करने से सफलता नहीं मिली, पुतिन को फांसी नहीं दी गई है, और रूस, हालांकि कमजोर है, बरकरार है।
क्योंकि बंदूक से गोली जरूर चलेगी। दरअसल, न केवल बंदूक, बल्कि सब कुछ जो कैलिबर से बड़ा है।
लेकिन द्विभाजित बिंदु के पारित होने के बाद घटनाओं का विकास कैसे होगा और यूरोप क्या फैसला करता है, फिर भी रूस को किस तरह से प्रतिक्रिया करनी है, यह चुनना होगा - यह भविष्यवाणी नहीं की जा सकती।
इसलिए, जबकि ढोल बजता है, और अदालत द्वारा दोषी ठहराया जाता है कहानियां पाड़ के लिए नेतृत्व, यह केवल प्रतीक्षा करने के लिए बनी हुई है।
| यूक्रेन की अर्थव्यवस्था स्वर्ग और पृथ्वी के बीच मँडराती है, अभाव समाचार सूचना स्थान में, कोलमोइस्की में छिपा हुआ फ्रोजन, लेकिन विवादास्पद पूर्वी मोर्चा, जो या तो इजरायल में है या यूएसए में, जिन्हें बेसबॉल देखने के लिए एक दशक में पहली बार वीजा जारी किया गया था, उसी क्रम की घटना है। यूक्रेन, ईयू, यूएसए और रूस की नियति और यूक्रेन और एलडीएनआर के नागरिकों के भविष्य में होने वाली घटनाएं एक द्विभाजित बिंदु पर आ रही हैं - एक जटिल सामाजिक प्रणाली की महत्वपूर्ण स्थिति जिसमें सिस्टम या तो आदेश देने की प्रक्रिया शुरू करता है या और भी अराजक हो जाता है। और देशों के आंदोलन के प्रक्षेपवक्र और उनकी टक्कर के स्थान के साथ-साथ इसके बाद के टुकड़ों के प्रसार की भविष्यवाणी करना, बिल्कुल असंभव है। बहुत से कारक, दोनों ओवरट और गुप्त, राजनीतिक निर्णय लेने को प्रभावित करते हैं। बहुत सारे गुप्त स्प्रिंग्स, सीमा के संकुचित, राजनीतिक वास्तविकता के पतले कपड़े की परतदार परतों के नीचे छिपे हुए। यह स्पष्ट है कि ट्रस जल्द या बाद में टूट जाएगा, और मैदान में एक दूसरे के सामने खड़ी होने वाली सेनाएं फिर से कड़वाहट और उन्माद के साथ एक-दूसरे को नष्ट करना शुरू कर देंगी। यह एक तथ्य है, साथ ही इस तथ्य पर भी कि यूरोप को किसी तरह की प्रतिक्रिया देनी होगी। झाड़ियों में बैठने का समय बीत रहा है - अब या तो अमेरिकी यूरोपीय झाड़ियों को जलाएंगे, या अपने निवासियों को अंडरग्राउंड से बाहर निकालेंगे और उनके हितों के लिए वध के लिए ड्राइव करेंगे। और ब्याज, वास्तव में, अपरिवर्तित है - विश्व शक्ति और भालू की त्वचा जो अभी तक नहीं मारे गए हैं। भालू कैसे प्रतिक्रिया करेगा यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है। वह पिछले महीने के लिए बेहद शांत और विनम्र है, लेकिन जाहिर है कि वह कुछ करने के लिए तैयार है। भालू की एक प्रतिक्रिया, हालांकि महत्वपूर्ण है, अभी भी एक माध्यमिक प्रकृति की है। बहुत अधिक महत्वपूर्ण यूरोपीय राजनीतिक पापुआंस की प्रतिक्रिया है जिन्होंने अपने जंगल और कांच और कंक्रीट के केबिन में बैठने का फैसला किया है। समझना कि वे यूक्रेनी संकट के बारे में क्या सोचते हैं, बेहद कठिन है, लेकिन कई कारकों ने अभी भी उनकी स्थिति का खुलासा किया हैः एक. मिन्स्क ट्रूस को सख्ती से देखा जाना चाहिए। यह पेरिस और बर्लिन दोनों से चिल्लाया गया है। "मिन्स्क" यूरोपीय संघ के लिए पवित्र है। यह जंगलों के जंगलों में छिपने और अपने भविष्य के मुद्दों को तय न करने, निर्णय को स्थगित करने का अवसर है, जिसके तहत टैंक बिस्तर पर जाएं - रूसी या अमेरिकी। दो। तोड़-फोड़ के लिए जिम्मेदार लोगों को दंडित किया जाएगा। हालांकि, दोषी किसे नियुक्त किया गया है? वहाँ वास्तव में दो विकल्प हैंः कीव या रूस। ईयू कौन चुनेगा यह सुनिश्चित करने के लिए नहीं जाना जाता है। हालांकि, कई गंभीर बयानों से संकेत मिलता है कि यूरोपीय संघ ने महसूस किया हैः कीव एक ही बैल टेरियर है जिसे अमेरिका पट्टे पर पकड़ रहा है, और उसके मुंह से लार पहले से ही यूरोपीय राजनेताओं के चेहरे पर टपक रही है। इसलिए, उतार-चढ़ाव के अंक - अप्रत्याशितता के क्षण - हैंः पहला यूरोपीय आयोग के प्रमुख ने कीव के लिए उड़ान नहीं भरी और जीन-क्लाउड जुनैकर के बाद फेडरिका मोघेरिनी ने यूक्रेनी राजधानी का दौरा करने से इनकार कर दिया। दूसरा। पेरिस, मीडिया के माध्यम से, एक रिसाव की अनुमति दी, जिसमें उन्होंने कीव पर मिन्स्क की शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। तीसरा। OSCE कीव द्वारा संघर्ष विराम उल्लंघन के तथ्यों को रिकॉर्ड करता है, विशेष रूप से, कीव सुरक्षा बलों द्वारा शिरोकिनो के निपटान का कवच। इससे पहले, ओएससीई ने खुद को अनुमति नहीं दी थी। चौथा। यूरोपीय उधारदाताओं को कीव के अहंकार से मारा जाता है, जो कि वित्त मंत्री नताल्या यारेस्को के व्यक्ति में, पहले से ही लेनदारों के लिए पंद्रह बिलियन डॉलर की राशि में यूक्रेन के सार्वजनिक ऋण का मुद्दा तय कर चुका है। इसे लिखा जाना माना जाता है। इसलिए यूरोप के लिए संयुक्त राज्य का फैसला किया। पाँचवाँ। भूमिगत भंडारण में आपको कम से कम पंद्रह बिलियन क्यूबिक मीटर डाउनलोड करने की आवश्यकता होती है। नीला ईंधन, जिसे कीव के पास भुगतान करने के लिए कुछ भी नहीं है। और यूक्रेनी अधिकारियों ने यूरोपीय संघ को ब्लैकमेल करने की शुरुआत करने से बेहतर कुछ नहीं पाया, अपनी गैस खरीद प्रतिबद्धताओं को कवर करने के लिए उससे पैसे की मांग की। दूसरी ओर, मास्को ने यूरोपीय संघ को महत्वपूर्ण रियायतें दी हैं, जो पेरिस और बर्लिन को उसके अच्छे इरादों को समझाने की कोशिश कर रहा है। छठा। रूस विरोधी प्रतिबंधों की संभावना जो रूस को झटका दे सकती है, जिससे यूरोपीय संघ को अपेक्षाकृत स्वीकार्य नुकसान हो सकता है। फिर केवल अंगों का विच्छेदन, जो कि यूरोपीय संघ की अर्थव्यवस्था की शाखाएं हैं या रूस के स्विफ्ट से अलग होने के रूप में आत्महत्या के बाहरी कार्य हैं, जो बहुत अधिक नुकसान के कारण नासमझ माना जाता है। प्रतिबंध स्वयं काम नहीं करते हैं, जो यूरोपीय नौकरशाहों द्वारा मान्यता प्राप्त था और उनकी कार्रवाई का वर्ष साबित हुआ। सातवीं। कीव युद्ध की तैयारी कर रहा है। पोरोशेंको नए प्रकार के हथियारों का दावा करता है, एक खौफनाक बंडेरा के साथ छलावरण में चलते हुए, निचले रैंक के अधिकारियों का कहना है कि रूस आक्रामक पर जाएगा। असल में, मंच पर लटकी हुई बंदूक गोली नहीं मार सकती, और सैनिक, युद्ध के बिना, ध्यान में लिप्त रहते हैं, जो सेना के लड़ने के गुणों पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। आठवीं। कीव और एलडीएनआर ने चीजों को पीछे से क्रम में रखाः टर्बनेट स्वतंत्रता को समाप्त कर दिया गया , और राइट सेक्टर को सेना के ढांचे में शामिल किया गया। डोनेट्स्क और लुहानस्क ने उन सभी लोगों को निहत्था कर दिया, जिन्होंने आज्ञा का पालन नहीं किया और यहां तक कि मुक्त वामपंथी मोजग्वॉय एलपीआर के लोगों के मिलिशिया का हिस्सा बन गए। इसलिए, हैंडलिंग में सुधार हुआ है, और यदि ऐसा है, तो फिर जोखिम क्यों न लें और एक और एक हज़ार सैनिकों को वल्लाह में भेजें? खासकर जब से संयुक्त राज्य अमेरिका संघर्ष की अवहेलना की मांग कर रहा हैः वे यूरोपीय elites के साथ छिपाने और मास्को के साथ इस मुद्दे पर उनकी अनिश्चितता से थक गए हैं। "न तो युद्ध और न ही शांति" की स्थिति उनके अनुरूप नहीं है। लक्ष्य यूरोपीय संघ और रूसी संघ के बीच संबंधों का पूर्ण विघटन है; ट्रांसएटलांटिक एफटीए पर यूरोपीय संघ के समझौते को लागू करने से सफलता नहीं मिली, पुतिन को फांसी नहीं दी गई है, और रूस, हालांकि कमजोर है, बरकरार है। क्योंकि बंदूक से गोली जरूर चलेगी। दरअसल, न केवल बंदूक, बल्कि सब कुछ जो कैलिबर से बड़ा है। लेकिन द्विभाजित बिंदु के पारित होने के बाद घटनाओं का विकास कैसे होगा और यूरोप क्या फैसला करता है, फिर भी रूस को किस तरह से प्रतिक्रिया करनी है, यह चुनना होगा - यह भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। इसलिए, जबकि ढोल बजता है, और अदालत द्वारा दोषी ठहराया जाता है कहानियां पाड़ के लिए नेतृत्व, यह केवल प्रतीक्षा करने के लिए बनी हुई है। |
नगर निगम नए सदन के लिए मेयर और डिप्टी मेयर फाइनल हो गए हैं। कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और प्रदेशाध्यक्षा प्रतिभा सिंह ने रविवार को मुख्यमंत्री आवास ओकओवर में कांग्रेस के सभी नए पार्षदों की बैठक ली। बैठक में तीन दावेदार मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए खड़े हुए। इसमें दो पुरुष और एक महिला बताई जा रही है। सूत्रों की माने तो मेयर पद के लिए छोटा शिमला के पार्षद सुरेंद्र चौहान जो कि मुख्यमंत्री के करीबी भी हैं और डिप्टी मेयर पद के लिए टुटीकंडी वार्ड की पार्षद उमा कौशल को बनाने की संभावनाएं हैं। बैठक में तीनों उम्मीदवार मजबूत बतायए गए, जिसमें सुरेंद्र चौहान, नरेंद्र ठाकुर और उमा कौशल हैं। इसमें उमा कौशल चौथी बार नगर निगम के सदन पहुंची हैं।
ऐसे में उमा कौशल को डिप्टी मेयर पद के लिए चुना गया है। हालांकि अभी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव आज यानी सोमवार को किए जाने है,ं जिसमें साफ पता लग जाएगा कि किसे मेयर और किसे डिप्टी मेयर का पद सौंपा जाएगा। सूत्रों का कहना है कि पार्टी के हाईकमान और प्रदेश मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दोनों के नामों पर मोहर लगा दी है। बस घोषित करना बाकी रह गया है। ऐसे में कांग्रेस ने मेयर और डिप्टी मेयर के पद फाइनल कर दिए हैं। हालांकि अभी पार्टी के हाईकमान इससे लेकर पुष्टि तो नहीं कर रहे हैं, लेकिन उनका कहना है कि पार्टी ने महिलाओं और पुरुषों दोनों को प्राथमिकता दी है। बता दें कि अभी तक दोनों पदों के लिए नौ पार्षदों ने दावा ठोका था, वहीं मुख्य बैठक तक सिर्फ तीन ही नाम शेष बचे थे, जिसमें मेयर और डिप्टी मेयर का चयन किया जाना था। महिला पार्षदों की मांग थी कि मेयर के लिए महिला पार्षद को चुना जाना चाहिए, वहीं बैठक में भी यही बात लंबे समय तक चलती रही। इसके बाद हाईकमान ने सभी पार्षदों की बात को सुन कर निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हर एक पार्षद से पर्सनली बंद कमरे में बैठक ली और मेयर और डिप्टी मेयर के बारे में सुझाव मांगे। जिसमें सभी मुख्यमंत्री ने पुछा कि किसे मेयर बनाना चाहिए और क्यों जिस पर सभी पार्षदों ने अपनी राय दी। वहीं इस दौरान सभी पार्षदों से बैठक कर उन्हें सर्वसहमति से चुनाव करने का भी आग्रह किया। पार्षदों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने जो भी ओपिनियन मांगे वह बहुत सहरानिय थे क्योंकि उन्होंने इस तरह ओपिनियन मांगे मानो वह मुख्यमंत्री नहीं परिवार के मुख्या हैं। ऐसे में सभी पार्षदों ने पार्टी हाईकमान पर फैसला छोड़ दिया है कि किसे मेयर और डिप्टी मेयर बनाना है।
| नगर निगम नए सदन के लिए मेयर और डिप्टी मेयर फाइनल हो गए हैं। कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और प्रदेशाध्यक्षा प्रतिभा सिंह ने रविवार को मुख्यमंत्री आवास ओकओवर में कांग्रेस के सभी नए पार्षदों की बैठक ली। बैठक में तीन दावेदार मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए खड़े हुए। इसमें दो पुरुष और एक महिला बताई जा रही है। सूत्रों की माने तो मेयर पद के लिए छोटा शिमला के पार्षद सुरेंद्र चौहान जो कि मुख्यमंत्री के करीबी भी हैं और डिप्टी मेयर पद के लिए टुटीकंडी वार्ड की पार्षद उमा कौशल को बनाने की संभावनाएं हैं। बैठक में तीनों उम्मीदवार मजबूत बतायए गए, जिसमें सुरेंद्र चौहान, नरेंद्र ठाकुर और उमा कौशल हैं। इसमें उमा कौशल चौथी बार नगर निगम के सदन पहुंची हैं। ऐसे में उमा कौशल को डिप्टी मेयर पद के लिए चुना गया है। हालांकि अभी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव आज यानी सोमवार को किए जाने है,ं जिसमें साफ पता लग जाएगा कि किसे मेयर और किसे डिप्टी मेयर का पद सौंपा जाएगा। सूत्रों का कहना है कि पार्टी के हाईकमान और प्रदेश मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दोनों के नामों पर मोहर लगा दी है। बस घोषित करना बाकी रह गया है। ऐसे में कांग्रेस ने मेयर और डिप्टी मेयर के पद फाइनल कर दिए हैं। हालांकि अभी पार्टी के हाईकमान इससे लेकर पुष्टि तो नहीं कर रहे हैं, लेकिन उनका कहना है कि पार्टी ने महिलाओं और पुरुषों दोनों को प्राथमिकता दी है। बता दें कि अभी तक दोनों पदों के लिए नौ पार्षदों ने दावा ठोका था, वहीं मुख्य बैठक तक सिर्फ तीन ही नाम शेष बचे थे, जिसमें मेयर और डिप्टी मेयर का चयन किया जाना था। महिला पार्षदों की मांग थी कि मेयर के लिए महिला पार्षद को चुना जाना चाहिए, वहीं बैठक में भी यही बात लंबे समय तक चलती रही। इसके बाद हाईकमान ने सभी पार्षदों की बात को सुन कर निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हर एक पार्षद से पर्सनली बंद कमरे में बैठक ली और मेयर और डिप्टी मेयर के बारे में सुझाव मांगे। जिसमें सभी मुख्यमंत्री ने पुछा कि किसे मेयर बनाना चाहिए और क्यों जिस पर सभी पार्षदों ने अपनी राय दी। वहीं इस दौरान सभी पार्षदों से बैठक कर उन्हें सर्वसहमति से चुनाव करने का भी आग्रह किया। पार्षदों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने जो भी ओपिनियन मांगे वह बहुत सहरानिय थे क्योंकि उन्होंने इस तरह ओपिनियन मांगे मानो वह मुख्यमंत्री नहीं परिवार के मुख्या हैं। ऐसे में सभी पार्षदों ने पार्टी हाईकमान पर फैसला छोड़ दिया है कि किसे मेयर और डिप्टी मेयर बनाना है। |
जकार्ता, 1 जनवरी । चीनी बायोफार्मास्युटिकल कंपनी सिनोवैक बायोटेक द्वारा बनाई गई कोविड-19 वैक्सीन के 18 लाख डोज गुरुवार को इंडोनेशिया पहुंच गए हैं। इसकी पुष्टि इंडोनेशियाई सरकारी अधिकारियों ने की है।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, विदेश मंत्री रेटनो मासुर्डी ने कहा कि यह इंडोनेशिया में सिनोवैक वैक्सीन का दूसरा बैच है, इससे पहले 6 दिसंबर को 12 लाख डोज का पहला बैच आया था।
उन्होंने एक वर्चुअल प्रेस ब्रीफिंग में कहा, इससे पहले ही इंडोनेशिया में सिनोवैक वैक्सीन की 30 लाख डोज हैं।
स्वास्थ्य मंत्री बुदी गुनादि सादिकिन ने कहा कि कोविड-19 महामारी से लड़ने के लिए टीकाकरण करना इंडोनेशिया की प्रमुख रणनीतियों में से एक है।
अपनी आबादी की इम्युनिटी बढ़ाने के लिए और कोरोनावायरस फैलने की श्रृंखला को तोड़ने के लिए इंडोनेशिया साल 2021 में अपनी 18 करोड़ आबादी का टीकाकरण करने की योजना बना रहा है।
टीकाकरण का पहला सत्र जनवरी से अप्रैल के बीच होगा, इसमें 13 लाख चिकित्सा कर्मचारी, 1. 74 करोड़ सार्वजनिक कर्मचारी और 2. 15 करोड़ बुजुर्ग शामिल हैं।
टीकाकरण का दूसरा सत्र अप्रैल 2021 से मार्च 2022 तक चलेगा, इसमें 6. 39 करोड़ कमजोर लोगों और अन्य समूहों के 7. 74 करोड़ लोगों का टीकाकरण किया जाएगा।
| जकार्ता, एक जनवरी । चीनी बायोफार्मास्युटिकल कंपनी सिनोवैक बायोटेक द्वारा बनाई गई कोविड-उन्नीस वैक्सीन के अट्ठारह लाख डोज गुरुवार को इंडोनेशिया पहुंच गए हैं। इसकी पुष्टि इंडोनेशियाई सरकारी अधिकारियों ने की है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, विदेश मंत्री रेटनो मासुर्डी ने कहा कि यह इंडोनेशिया में सिनोवैक वैक्सीन का दूसरा बैच है, इससे पहले छः दिसंबर को बारह लाख डोज का पहला बैच आया था। उन्होंने एक वर्चुअल प्रेस ब्रीफिंग में कहा, इससे पहले ही इंडोनेशिया में सिनोवैक वैक्सीन की तीस लाख डोज हैं। स्वास्थ्य मंत्री बुदी गुनादि सादिकिन ने कहा कि कोविड-उन्नीस महामारी से लड़ने के लिए टीकाकरण करना इंडोनेशिया की प्रमुख रणनीतियों में से एक है। अपनी आबादी की इम्युनिटी बढ़ाने के लिए और कोरोनावायरस फैलने की श्रृंखला को तोड़ने के लिए इंडोनेशिया साल दो हज़ार इक्कीस में अपनी अट्ठारह करोड़ आबादी का टीकाकरण करने की योजना बना रहा है। टीकाकरण का पहला सत्र जनवरी से अप्रैल के बीच होगा, इसमें तेरह लाख चिकित्सा कर्मचारी, एक. चौहत्तर करोड़ सार्वजनिक कर्मचारी और दो. पंद्रह करोड़ बुजुर्ग शामिल हैं। टीकाकरण का दूसरा सत्र अप्रैल दो हज़ार इक्कीस से मार्च दो हज़ार बाईस तक चलेगा, इसमें छः. उनतालीस करोड़ कमजोर लोगों और अन्य समूहों के सात. चौहत्तर करोड़ लोगों का टीकाकरण किया जाएगा। |
चकुलादेवी का पुत्र क्षेमराज था किन्तु छोटी रानी उदयमती को प्रसन्न रखने के लिए भीम ने उसके पुत्र कर्ण को राज्य दिया ।
उपरोक्त साक्ष्यों में मेरुतुग द्वारा दी गई कुमारपाल की वंशावली शिलालेखों के आधार पर त्रुटिपूर्ण है । कुमारपाल के चित्तौड़ शिलालेख से हेमचंद्र द्वारा दी गई वंशावली की पुष्टि होती है। मेरुतुंग द्वारा कुमारपाल की हीन कुलोत्पत्ति का उल्लेख किसी आधार पर किया गया प्रतीत होता है क्योंकि प्रभाचन्द्र ने भी देवप्रसाद को कर्ण का भतीजा न बताकर उसे 'बंधु' कहा है । हेमचन्द्र का यह कथन भी संदिग्ध है कि क्षेमराज ने सिंहासन स्वेच्छा से त्याग दिया और देवप्रसाद ने करण की मृत्यु से शोकाकुल हो स्वयं को भस्म कर लिया। अतः यह प्रतीत होता है कि निम्न उत्पत्ति के कारण सिद्धराज कुमारपाल से घृणा करता था किन्तु सिद्धराज द्वारा कुमारपाल के बहनोई कृष्णराज को सेनापति पद देना और कुमारपाल के भाई कीर्तिपाल को नवघन के विरुद्ध सैनिक अभियान पर भेजना यह प्रकट करता है कि सिद्धराज कुमारपाल के सारे परिवार से घृणा नहीं करता था। कुमारपाल के प्रति उसका आक्रोश केवल इसलिए था कि वह राजसिंहासन के लिए एक प्रत्याशी था । मेरुतुग ने लिखा है कि नीच कुलोत्पन्न कुमारपाल का उत्तराधिकारी होना सिद्धराज के लिये या और इसीलिये वह कुमारपाल के विनाश हेतु सदैव प्रयत्नशील रहा ।
हेमचन्द्र ने कुमारपाल द्वारा सिद्धराज की मृत्यु के बाद सिंहासनारूढ़ होने का ही उल्लेख किया है । किन्तु अन्य साक्ष्यों से प्रकट होता है कि सिद्धराज के कोप से बचने के लिए कुमारपाल को भागकर विभिन्न स्थानों पर शरण लेनी पड़ी । यशपाल कृत नाटक "मोहराज पराजय" से विदित होता है कि कुमारपाल ने सकल भू-मंडल में भ्रमरण किया । प्रभाचंद्र ने इस भ्रमरण का विस्तार से वर्णन किया है । उसके अनुसार सिद्धराज को दैवी प्रेरणा से ज्ञात हुआ कि कुमारपाल उसका उत्तराधिकारी वनेगा तो प्रतः उसने कुमारपाल के विनाश का प्रयास किया किन्तु कुमारपाल भिक्षु वेश में भाग गया । जब वह अन्य साधुओं के साथ सिद्धराज के आमंत्ररण पर राजधानी तो सिद्धराज ने साधुम्रों के पैर घोते समय कुमारपाल के पैर में कमल, ध्वज और छत्र के चिह्न देखकर उसे पहिचान लिया । कुमारपाल ने गुप्तचरी से बचने के लिये भाग कर हेमचन्द्र के घर पर शरण ली। इसके बाद वह आलि नामक किसान के यहाँ छिपा । इस प्रकार अपनी जान बचाते हुए वह कैम्वे प्राया और हेमचन्द्र के साथ रहा । हेमचंद्र ने सात वर्ष बाद उसके राजा बनने की भविष्यवाणी की और उसे कुछ धन देकर विदा किया । कुमारपाल कापालिक के भेष में यात्रा करता रहा । उसकी पत्नी भोपलदेवी और बच्चे उसके साथ हो गये । सिद्धराज की मृत्यु की सूचना पाते ही कुमारपाल राजधानो गया और हेमवन्द्र तथा अपने वहनोई कृष्णदेव कान्हडदेव की सहायता से सिंहासन पर बैठ गया । मेरुतुंग ने भी लगभग ऐसा ही वर्णन किया है । | चकुलादेवी का पुत्र क्षेमराज था किन्तु छोटी रानी उदयमती को प्रसन्न रखने के लिए भीम ने उसके पुत्र कर्ण को राज्य दिया । उपरोक्त साक्ष्यों में मेरुतुग द्वारा दी गई कुमारपाल की वंशावली शिलालेखों के आधार पर त्रुटिपूर्ण है । कुमारपाल के चित्तौड़ शिलालेख से हेमचंद्र द्वारा दी गई वंशावली की पुष्टि होती है। मेरुतुंग द्वारा कुमारपाल की हीन कुलोत्पत्ति का उल्लेख किसी आधार पर किया गया प्रतीत होता है क्योंकि प्रभाचन्द्र ने भी देवप्रसाद को कर्ण का भतीजा न बताकर उसे 'बंधु' कहा है । हेमचन्द्र का यह कथन भी संदिग्ध है कि क्षेमराज ने सिंहासन स्वेच्छा से त्याग दिया और देवप्रसाद ने करण की मृत्यु से शोकाकुल हो स्वयं को भस्म कर लिया। अतः यह प्रतीत होता है कि निम्न उत्पत्ति के कारण सिद्धराज कुमारपाल से घृणा करता था किन्तु सिद्धराज द्वारा कुमारपाल के बहनोई कृष्णराज को सेनापति पद देना और कुमारपाल के भाई कीर्तिपाल को नवघन के विरुद्ध सैनिक अभियान पर भेजना यह प्रकट करता है कि सिद्धराज कुमारपाल के सारे परिवार से घृणा नहीं करता था। कुमारपाल के प्रति उसका आक्रोश केवल इसलिए था कि वह राजसिंहासन के लिए एक प्रत्याशी था । मेरुतुग ने लिखा है कि नीच कुलोत्पन्न कुमारपाल का उत्तराधिकारी होना सिद्धराज के लिये या और इसीलिये वह कुमारपाल के विनाश हेतु सदैव प्रयत्नशील रहा । हेमचन्द्र ने कुमारपाल द्वारा सिद्धराज की मृत्यु के बाद सिंहासनारूढ़ होने का ही उल्लेख किया है । किन्तु अन्य साक्ष्यों से प्रकट होता है कि सिद्धराज के कोप से बचने के लिए कुमारपाल को भागकर विभिन्न स्थानों पर शरण लेनी पड़ी । यशपाल कृत नाटक "मोहराज पराजय" से विदित होता है कि कुमारपाल ने सकल भू-मंडल में भ्रमरण किया । प्रभाचंद्र ने इस भ्रमरण का विस्तार से वर्णन किया है । उसके अनुसार सिद्धराज को दैवी प्रेरणा से ज्ञात हुआ कि कुमारपाल उसका उत्तराधिकारी वनेगा तो प्रतः उसने कुमारपाल के विनाश का प्रयास किया किन्तु कुमारपाल भिक्षु वेश में भाग गया । जब वह अन्य साधुओं के साथ सिद्धराज के आमंत्ररण पर राजधानी तो सिद्धराज ने साधुम्रों के पैर घोते समय कुमारपाल के पैर में कमल, ध्वज और छत्र के चिह्न देखकर उसे पहिचान लिया । कुमारपाल ने गुप्तचरी से बचने के लिये भाग कर हेमचन्द्र के घर पर शरण ली। इसके बाद वह आलि नामक किसान के यहाँ छिपा । इस प्रकार अपनी जान बचाते हुए वह कैम्वे प्राया और हेमचन्द्र के साथ रहा । हेमचंद्र ने सात वर्ष बाद उसके राजा बनने की भविष्यवाणी की और उसे कुछ धन देकर विदा किया । कुमारपाल कापालिक के भेष में यात्रा करता रहा । उसकी पत्नी भोपलदेवी और बच्चे उसके साथ हो गये । सिद्धराज की मृत्यु की सूचना पाते ही कुमारपाल राजधानो गया और हेमवन्द्र तथा अपने वहनोई कृष्णदेव कान्हडदेव की सहायता से सिंहासन पर बैठ गया । मेरुतुंग ने भी लगभग ऐसा ही वर्णन किया है । |
भारत में सबसे पहले इलेक्ट्रिक कार लाने वाली कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा के प्रमुख आनंद महिंद्रा ने एक अनोखी गाड़ी का वीडियो अपने ट्विटर हैंडल से शेयर किया है। यह अनोखी गाड़ी चलती-फिरती डाइनिंट टेबल की तरह है। अगर आप इस डाइनिंट टेबल वाली गाड़ी पर बैठते हैं तो आप बैठे-बैठे रेस्तरां के अंदर पहुंच जाएंगे। आनंद महिंद्रा ने कहा यही है असली E-Mobility। उन्होंने ई-मोबिलिटी में E का असली मतलब भी बताया है।
बता दें कि इस वीडियो को लेकर लोगों ने अनोखे कमेंट्स भी किए हैं। एक यूजर ने लिखा है कि "I guess this is e-mobility. Where 'e' stands for eat..."। एक यूजर ने अपने बेटे का एक वीडियो शेयर किया है "जिसमें वो अपनी खिलौने वाली गाड़ियों को जोड़कर एक सोफा गाड़ी बना लेता है। यूजर का कहना है कि वो अपने बेटे को ये वीडियो दिखाएगा ताकि वो भी अपनी गाड़ी में ये डाइनिंग टेबल जोड़ सके"।
एक और यूजर ने लंदन की साइकिल ई-एटर कार्ट का फोटो शेयर किया है। इस कार्ट में लोग साइकिल चलाते हुए अपनी खाने की टेबल को आगे ले जाते हैं।
वहां, एक यूजर ने लिखा कि "Found a better one in London where the e-aters actually cycle for their meal"। जिस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आने लगीं।
वैसे कुछ यूजर्स ने वीडियो की कमियों को भी ढूंढ़ा है। कुछ ने इस वीडियो की तरह ही गाड़ी इंडिया में लॉन्च करने को लेकर आनंद महिंद्रा का प्लान भी पूछा है।
| भारत में सबसे पहले इलेक्ट्रिक कार लाने वाली कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा के प्रमुख आनंद महिंद्रा ने एक अनोखी गाड़ी का वीडियो अपने ट्विटर हैंडल से शेयर किया है। यह अनोखी गाड़ी चलती-फिरती डाइनिंट टेबल की तरह है। अगर आप इस डाइनिंट टेबल वाली गाड़ी पर बैठते हैं तो आप बैठे-बैठे रेस्तरां के अंदर पहुंच जाएंगे। आनंद महिंद्रा ने कहा यही है असली E-Mobility। उन्होंने ई-मोबिलिटी में E का असली मतलब भी बताया है। बता दें कि इस वीडियो को लेकर लोगों ने अनोखे कमेंट्स भी किए हैं। एक यूजर ने लिखा है कि "I guess this is e-mobility. Where 'e' stands for eat..."। एक यूजर ने अपने बेटे का एक वीडियो शेयर किया है "जिसमें वो अपनी खिलौने वाली गाड़ियों को जोड़कर एक सोफा गाड़ी बना लेता है। यूजर का कहना है कि वो अपने बेटे को ये वीडियो दिखाएगा ताकि वो भी अपनी गाड़ी में ये डाइनिंग टेबल जोड़ सके"। एक और यूजर ने लंदन की साइकिल ई-एटर कार्ट का फोटो शेयर किया है। इस कार्ट में लोग साइकिल चलाते हुए अपनी खाने की टेबल को आगे ले जाते हैं। वहां, एक यूजर ने लिखा कि "Found a better one in London where the e-aters actually cycle for their meal"। जिस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आने लगीं। वैसे कुछ यूजर्स ने वीडियो की कमियों को भी ढूंढ़ा है। कुछ ने इस वीडियो की तरह ही गाड़ी इंडिया में लॉन्च करने को लेकर आनंद महिंद्रा का प्लान भी पूछा है। |
रूस और बेलारूस के ध्वजों को शुरूआती दिन कोर्ट से इतर एक घटना के बाद से ऑस्ट्रेलियन ओपन से प्रतिबंधित कर दिया गया है। ईशान ने खुलासा किया कि जब उन्होंने अपने टेस्ट चयनित होने की खबर दी, तो उनके पिता बहुत उत्साहित हुए।
दो बार के ग्रैंड स्लैम चैंपियन एंडी मरे ने मंगलवार को 13वें वरीय इटली के मातियो बेरेटिनी को पांचवें सेट के टाई-ब्रेक में 6-3, 6-3, 4-6, 6-7(7), 7-6 (10-5) से हरा दिया। वह आस्ट्रेलियन ओपन के दूसरे दौर में आगे बढ़ेंगे। यह जीत चार साल से अधिक समय में किसी ग्रैंड स्लैम में मरे की पहली शीर्ष-20 जीत थी, जिसे रॉड लेवर एरिना में कुल परिणाम हासिल करने के लिए चार घंटे और 49 मिनट लगे।
वह अगले दौर में या तो एक अन्य इतालवी फैबियो फोगनिनी या घरेलू पसंदीदा थानासी कोकीनाकिस से भिड़ेंगे।
आस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले दो मैचों के लिए पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किए गए युवा विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन ने उस पल को याद किया, जब उन्होंने अपने पिता को टेस्ट टीम में शामिल होने की खबर सुनाई थी। शुभमन गिल के साथ बातचीत में अपने पहले टेस्ट चयन और रेड-बॉल क्रिकेट खेलने के उत्साह के बारे में बात करते हुए, ईशान ने खुलासा किया कि जब उन्होंने अपने टेस्ट चयनित होने की खबर दी, तो उनके पिता बहुत उत्साहित हुए और कहा, "टेस्ट में असली चुनौती है। आपको इसी तरह मेहनत करनी होगी। "
ईशान ने ट्विटर पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड द्वारा पोस्ट किए गए एक वीडियो में खुलासा किया, "मैं बहुत खुश हूं। जब भी मैं सफेद गेंद के क्रिकेट में अच्छा कर रहा था, तो मेरे पिता कहते थे कि टेस्ट क्रिकेट ही असली चुनौती है। यह बल्लेबाजों के कौशल का परीक्षण करता है और टेस्ट क्रिकेट खेलना एक बड़ी बात है। "
उन्होंने कहा, "मैं टेस्ट टीम में जगह बनाकर बहुत खुश हूं, क्योंकि लोग इसे असली खेल के रूप में देखते हैं। मैं अच्छा प्रदर्शन करने के लिए कड़ी मेहनत करूंगा। मैंने घर फोन किया और उन्हें खबर दी। मेरे पिता बहुत उत्साहित थे और उन्होंने मुझे इस तरह कड़ी मेहनत करने के लिए कहा। "
भारतीय मध्य क्रम के बल्लेबाज श्रेयस अय्यर पीठ की चोट के कारण न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी तीन मैचों की वनडे सीरीज से बाहर हो गए हैं। वह आगे के आकलन और प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) जाएंगे।
बीसीसीआई ने एक बयान में कहा कि अखिल भारतीय वरिष्ठ चयन समिति ने श्रेयस अय्यर की जगह रजत पाटीदार को टीम में शामिल किया है। भारत को पहला वनडे 18 जनवरी को हैदराबाद में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेलना है।
पूर्व भारतीय ओपनर रोबिन उथप्पा ने डीपी वल्र्ड आईएल टी20 में सोमवार को दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में गल्फ जायंट्स के खिलाफ 46 गेंदों पर 79 रन की शानदार पारी खेली और इसके साथ ही वह ग्रीन बेल्ट पाने वाले पहले खिलाड़ी बन गए। उथप्पा प्रतियोगिता में अब तक 122 रन बनाकर रन चार्ट में शीर्ष पर चल रहे हैं।
रूस और बेलारूस के ध्वजों को शुरूआती दिन कोर्ट से इतर एक घटना के बाद से ऑस्ट्रेलियन ओपन से प्रतिबंधित कर दिया गया है। ऑस्ट्रेलिया में यूक्रेन के राजदूत वासिल मिरोशनीचेंको ने आयोजकों से कार्रवाई की मांग की है जब प्रशंसकों ने कैमिला रखिमोवा के समर्थन में रूसी ध्वज लहरा दिए थे। रखिमोवा का यूक्रेन की कैटरिना बैंडल से मुकाबला था।
मिरोशनीचेंको ने ट्वीट किया, "मैं यूक्रेन की खिलाड़ी के खिलाफ ऑस्ट्रेलियन ओपन में आज रूसी ध्वज को सार्वजनिक रूप से लहराने की कड़ी निंदा करता हूं। मैं टेनिस ऑस्ट्रेलिया से आग्रह करता हूं कि वह अपनी निष्पक्ष ध्वज नीति को तत्काल प्रभाव से लागू करे। "
| रूस और बेलारूस के ध्वजों को शुरूआती दिन कोर्ट से इतर एक घटना के बाद से ऑस्ट्रेलियन ओपन से प्रतिबंधित कर दिया गया है। ईशान ने खुलासा किया कि जब उन्होंने अपने टेस्ट चयनित होने की खबर दी, तो उनके पिता बहुत उत्साहित हुए। दो बार के ग्रैंड स्लैम चैंपियन एंडी मरे ने मंगलवार को तेरहवें वरीय इटली के मातियो बेरेटिनी को पांचवें सेट के टाई-ब्रेक में छः-तीन, छः-तीन, चार-छः, छः-सात, सात-छः से हरा दिया। वह आस्ट्रेलियन ओपन के दूसरे दौर में आगे बढ़ेंगे। यह जीत चार साल से अधिक समय में किसी ग्रैंड स्लैम में मरे की पहली शीर्ष-बीस जीत थी, जिसे रॉड लेवर एरिना में कुल परिणाम हासिल करने के लिए चार घंटे और उनचास मिनट लगे। वह अगले दौर में या तो एक अन्य इतालवी फैबियो फोगनिनी या घरेलू पसंदीदा थानासी कोकीनाकिस से भिड़ेंगे। आस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले दो मैचों के लिए पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किए गए युवा विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन ने उस पल को याद किया, जब उन्होंने अपने पिता को टेस्ट टीम में शामिल होने की खबर सुनाई थी। शुभमन गिल के साथ बातचीत में अपने पहले टेस्ट चयन और रेड-बॉल क्रिकेट खेलने के उत्साह के बारे में बात करते हुए, ईशान ने खुलासा किया कि जब उन्होंने अपने टेस्ट चयनित होने की खबर दी, तो उनके पिता बहुत उत्साहित हुए और कहा, "टेस्ट में असली चुनौती है। आपको इसी तरह मेहनत करनी होगी। " ईशान ने ट्विटर पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड द्वारा पोस्ट किए गए एक वीडियो में खुलासा किया, "मैं बहुत खुश हूं। जब भी मैं सफेद गेंद के क्रिकेट में अच्छा कर रहा था, तो मेरे पिता कहते थे कि टेस्ट क्रिकेट ही असली चुनौती है। यह बल्लेबाजों के कौशल का परीक्षण करता है और टेस्ट क्रिकेट खेलना एक बड़ी बात है। " उन्होंने कहा, "मैं टेस्ट टीम में जगह बनाकर बहुत खुश हूं, क्योंकि लोग इसे असली खेल के रूप में देखते हैं। मैं अच्छा प्रदर्शन करने के लिए कड़ी मेहनत करूंगा। मैंने घर फोन किया और उन्हें खबर दी। मेरे पिता बहुत उत्साहित थे और उन्होंने मुझे इस तरह कड़ी मेहनत करने के लिए कहा। " भारतीय मध्य क्रम के बल्लेबाज श्रेयस अय्यर पीठ की चोट के कारण न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी तीन मैचों की वनडे सीरीज से बाहर हो गए हैं। वह आगे के आकलन और प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी जाएंगे। बीसीसीआई ने एक बयान में कहा कि अखिल भारतीय वरिष्ठ चयन समिति ने श्रेयस अय्यर की जगह रजत पाटीदार को टीम में शामिल किया है। भारत को पहला वनडे अट्ठारह जनवरी को हैदराबाद में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेलना है। पूर्व भारतीय ओपनर रोबिन उथप्पा ने डीपी वल्र्ड आईएल टीबीस में सोमवार को दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में गल्फ जायंट्स के खिलाफ छियालीस गेंदों पर उन्यासी रन की शानदार पारी खेली और इसके साथ ही वह ग्रीन बेल्ट पाने वाले पहले खिलाड़ी बन गए। उथप्पा प्रतियोगिता में अब तक एक सौ बाईस रन बनाकर रन चार्ट में शीर्ष पर चल रहे हैं। रूस और बेलारूस के ध्वजों को शुरूआती दिन कोर्ट से इतर एक घटना के बाद से ऑस्ट्रेलियन ओपन से प्रतिबंधित कर दिया गया है। ऑस्ट्रेलिया में यूक्रेन के राजदूत वासिल मिरोशनीचेंको ने आयोजकों से कार्रवाई की मांग की है जब प्रशंसकों ने कैमिला रखिमोवा के समर्थन में रूसी ध्वज लहरा दिए थे। रखिमोवा का यूक्रेन की कैटरिना बैंडल से मुकाबला था। मिरोशनीचेंको ने ट्वीट किया, "मैं यूक्रेन की खिलाड़ी के खिलाफ ऑस्ट्रेलियन ओपन में आज रूसी ध्वज को सार्वजनिक रूप से लहराने की कड़ी निंदा करता हूं। मैं टेनिस ऑस्ट्रेलिया से आग्रह करता हूं कि वह अपनी निष्पक्ष ध्वज नीति को तत्काल प्रभाव से लागू करे। " |
भोपाल. पति के सात-आठ दिन तक नहीं नहाने और शेविंग नहीं करने से परेशान पत्नी ने परिवार न्यायालय से गुहार कर तलाक की मांग की है। 25 वर्षीय युवक और 23 वर्षीय महिला का करीब एक साल पहले ही विवाह हुआ है। भोपाल कुटुम्ब न्यायालय की काउंसलर शैल अवस्थी ने बताया, 'इस दंपति ने पारस्परिक सहमति से विवाह विच्छेद के लिए यहां कुटुम्ब न्यायालय में मामला दायर किया है।
उन्होंने कहा कि महिला का कहना है कि शादी के बाद उसने सिंधी परिवार में किसी तरह से उनके खान-पान एवं रहन-सहन में कुछ दिन अपने आप को ढालने की कोशिश की, लेकिन वह इस परिवार में अपने आपको ढाल नहीं सकी। शैल ने बताया कि इस लड़की का आरोप था कि उसके पति के घर में सामान सुव्यवस्थित ढंग से रखने की बजाय इधर-उधर बिखरा रहता है। महिला को इस पर भी आपत्ति है उसका पति भविष्य के लिए पैसा नहीं बचा रहा है।
| भोपाल. पति के सात-आठ दिन तक नहीं नहाने और शेविंग नहीं करने से परेशान पत्नी ने परिवार न्यायालय से गुहार कर तलाक की मांग की है। पच्चीस वर्षीय युवक और तेईस वर्षीय महिला का करीब एक साल पहले ही विवाह हुआ है। भोपाल कुटुम्ब न्यायालय की काउंसलर शैल अवस्थी ने बताया, 'इस दंपति ने पारस्परिक सहमति से विवाह विच्छेद के लिए यहां कुटुम्ब न्यायालय में मामला दायर किया है। उन्होंने कहा कि महिला का कहना है कि शादी के बाद उसने सिंधी परिवार में किसी तरह से उनके खान-पान एवं रहन-सहन में कुछ दिन अपने आप को ढालने की कोशिश की, लेकिन वह इस परिवार में अपने आपको ढाल नहीं सकी। शैल ने बताया कि इस लड़की का आरोप था कि उसके पति के घर में सामान सुव्यवस्थित ढंग से रखने की बजाय इधर-उधर बिखरा रहता है। महिला को इस पर भी आपत्ति है उसका पति भविष्य के लिए पैसा नहीं बचा रहा है। |
अभय कुमार ने कोषाध्यक्ष को भी आठ डिब्यों सहित राजा के सामने उपस्थित किया । कोषाध्यक्ष की धूर्त्तता और व्यापारी की सत्यपरायणता देख राजा ने कोपाध्यक्ष को तो वम्दी गृह भेजा और व्यापारी को कोषाध्यक्ष नियुक्त किया ।
राजाने व्यापारी को सत्य बोलने के कारण अपराधी होते हुये भी उक्त अपराध का कोई दण्ड देने के बदले उसे कोषाध्यक्ष नियुक्त किया। इसका प्रभाव लोगों पर क्या पड़ा होगा यह विचारणीय बात है। अपराध तो व्यापारी और कोषाध्यक्ष का लगभग समान ही था। लेकिन व्यापारी सत्य बोला था और कोपाध्यक्ष झूठ । मूंठ के कारण ही कोषाध्यक्ष अपने पद से हटाया जा कर जेल भेजा गया और सत्य के कारण ही व्यापारी को अपराध का दण्ड मिलने के बदले कोषाध्यक्ष का पद प्राप्त हुआ राजा के ऐसा करने से लोगों के हृदय में उसके न्याय और सुप्रबन्ध में कितनी दृढ़ता हुई होगी।
व्यापारी जब कोपाध्यक्ष पद पर पहुँच गया तब उसने अपने दूसरे दुर्गुण भी त्याग दिये और वह धर्मात्मा बन गया । अब उसकी भावना ऐसी होगई कि उसने पहले जिस जिस के यहां श्वोरी की थी उन सब का माल उन्हें लौटा दिया ।
इस दृष्टान्त से स्पष्ट है कि प्राचीन समय में राजा किस प्रकार प्रजा की देखभाल किया करते थे और लोगों के भाव तथा बिचार देख कर दण्ड दिया करते थे- न कि आज कल के अनुसार केवल वन्दी गृह भर देने के लिये ।
भारतवर्ष में एक से एक बड़े बड़े राजा, महाराजा और सम्राट् होगये हैं जिनका राज करीब सारे भारतवर्ष, अफगानिस्तान
विलोचिस्तान और तिव्वत आदि देशों तक था । ( बुद्धकालीन भारत में छोटे २ प्रजातन्त्र राज्य भी थे ) इनमें दो मुख्य सम्राट् चन्द्र गुप्त और अशोक होगये हैं। अंग्रेजो के आने से पहले भारतवर्ष भिन्न २ बादशाहों, राजे, महाराजो के हाथ में बटा हुआ था । जैसे मुग़ल बादशाह, मरहठे, राजपूत, सिक्ख इत्यादि ।
वर्तमान समय में भारतवर्ष में अंग्रेजों का राज्य है। इनके अलावा यहाँ छोटी बड़ी कई सौ देशी रियासतें हैं। इन में से कई रियासतों के अधिकारी अपने आन्तरिक राज्य कार्य में बिलकुल स्वतन्त्र हैं जैसे मैसोर, बरोदा, इन्दौर, ग्वालियर, हैदराबाद, भूपाल और जयपुर इत्यादि । वर्तमान समय में इन देशी रियासतों की हालत अंग्रेजी राज्य के मुक़ाबिले कहीं पीछे है। अगर देशी रजवाड़ों ने उद्योग और परिश्रम किया होता तो वे उन्नति क्षेत्र में कहीं आगे होते । इस समय संसार में जो तरक्की देखते हैं वह पिछले डेढ़ सौ वर्ष में ही हुई है। जो शक्तियां निरन्तर उद्योग और प्रयत्न शील रहीं उन्होंने आज आश्चर्यजनक उन्नति करली है, जैसे अमेरिका, फ्रान्स, जर्मनी, कैनेडा, जापान, इत्यादि । यह कहावत मशहूर है किःजिन खोजा तिन पाइयां, गहरे पानी पैठि । हौं बौरी ढूंढ़न गई, रही किनारे बैठि ॥ अर्थात् जिन्होंने जी तोड़ परिश्रम किया उन्होंने हर प्रकार की उन्नति अथवा तरक्की की है, पर जो हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे या ऐशो-आराम में व्यस्त हो रहे हैं वे जहाँ के तहाँ हैं। उन्होंने बजाय उन्नति के अवनति ही को है । जिन रियासतों ने परिश्रम किया उन्होंने बहुत कुछ तरक्की करली है, जैसे ट्रावनकोर, मैसूर इत्यादि ।
स्वतन्त्र शक्तियों को तो सदा अपनी स्वतन्त्रता कायम रखने और अनापसनाप खर्चे फौज व लड़ाई के समान तैयार रखने में करने पड़ते हैं। जब कि हमारे देशी रजवाड़ों को किसी क़िस्म की लड़ाई वरौरः की फिक्र नहीं होती उनको अपने धन को प्रजा केहि में लगाने का अच्छा सुभीता रहता है । स्वतन्त्र शक्तियों को तो अपनी सारी आमदनी का पच्चीस से लेकर पचास फीसदी तक खर्च केवल फौज वगैरः पर करना पड़ता है किन्तु हमारे यहाँ के देशी रजवाड़ों को फ़ौज के लिये मुश्किल से दो चार फी सदी खर्च करना पड़ता होगा, क्योंकि बाहरी रक्षा का भार इङ्गरेजी सरकार पर है ।
अगर कोई यह कह कि ये देशी रियासतें परतन्त्र है अर्थात्अंग्रेजों के आधीन हैं इस कारण कुछ तरक्को नहीं कर सकतीं तो उनका यह कहना सत्य नहीं है। देशी रियासतें अपने अन्दरूनी मामलों में बिल्कुल स्वतन्त्र हैं। वे जी चाहे जो स्कीम अर्थात् वाणिज्य, व्यवसाय या दस्तकारी का कार्य जारी कर सकती हैं। यह दूसरी बात है कि अपनी काहिली और कमजोरी को दूसरे के सिर मढ़ा जाय । अगर सच पूंछो तो जितना तरक्की का मौक़ा देशी रियासतों में राजाओ को है उतना वृटिश राज्य की प्रजा को नहीं हो सकता । कारण बड़े बड़े जंगल, बड़ी बड़ी खनिज पदार्थों की खानें, हर प्रकार की पत्थर की खानें और नाना प्रकार की वस्तुओं की उपज मुख्तलिफ रियासतों में होती है जैसे लोहा, कोयला, गेरू, खड़िया, इमारती पत्थर, चूना, अवरक, जस्ता, सोना इत्यादि इसके अलावा इमारती लकड़ी, हर्र, वहेरा, आंवला, महुआ, ईंधन की लकड़ी और मुख्तलिफ किस्म के सब्जी वगैरः के जंगल के जंगल पड़े हुये हैं। अगर कोशिश और परिश्रम किया जाय तो नाना प्रकार के पदार्थ खोदकर निकाले जा सकते
'सफल साधना ।
हैं । अमेरिका, जापान, जर्मनी आदि देशो ने जो उन्नति की है वह निरन्तर परिश्रम और उद्यम का ही फल है । यह मानी हुई बात है कि परिश्रम का फल निष्फल नहीं होता ।
हमारे देशी रजवाड़ों के वास्ते तो वर्तमान समय एक स्वर्णहै। वे यदि अपना थोड़ा सा ध्यान रियासत को उन्नति की और दें तो बहुत कुछ कर सकते हैं। हमारे बहुत से राजा, महाराजा पढ़े लिखे व सभ्य व्यक्ति हैं। हर दूसरे चौथे वर्ष उनको यूरोप भ्रमण करने का शौक़ है पर वहाँ जाकर क्या वे खें बन्द कर लेते हैं या उनके हृदय नहीं है कि जिससे इस बात का अनुमान नहीं करते कि उनकी रियासतो की हालत एक बड़े सजे महल के मुक़ाबिले में एक टूटे फूटे झोंपड़े के सदृश हो रही है। यदि वे लोग यूरोप से कुछ सीख कर भी आते हैं तो अपने ऐश और आराम की बातें । प्रजा के हित की बातों की ओर बहुत ही कम ध्यान देते हैं। यह दूसरी बात है कि वे लोग अपनी आयु के मूल्य समय को और प्रजा के कठिन कमाई के धन को खो कर बाहरी ठाट बाट चाहे जैसा बनालें किन्तु प्रजा के लिये ठोस सुधार की योजना करना वे नहीं जानते।
हमारे देशी राज्यों का कर्त्तव्य
यद्यपि देशी राज्यों में उत्तरदायित्त्व पूर्ण प्रजातंत्र राज्य नहीं है और न वे पूर्णतया स्वतंत्र ही कहे जा सकते हैं तथापि एक अंश में हम उनको स्वराज्य के उदाहरण कह सकते हैं और जहां तक यह उदाहरण अच्छे बनाए जा सकते हैं वहाँ तक वे देश के लिये गौरव का विषय है । देशी राज्यों में देशी ही राजा होने के कारण शासकगरण प्रजा के रीति रिवाज, बोल चाल और रहन सहन को अच्छी तरह से समझ सकते हैं । यद्यपि देशी राज्य की प्रजा एक
व्यक्ति के राज्यशासन मे होने के कारण कभी कभी यथोचित न्याय से वंचित रहती है तथापि वहाँ पर इस बात की आशा रहती है कि राजा तक यदि पहुँच हो जाय और उसकी समझ में श्रा जावे तो वह कर्मचारियों के अन्याय एक क़लम से ठीक करा सकती है। अस्तु जो कुछ भी हां देशी राजागरण यदि चाहें तो अपने अपने राज्यों में बहुत जल्दी सुधार करके सुधार के फल को वृटिश इण्डिया के सामने नमूना के तौर पर रख सकते हैं। हर्ष की बात है कि ट्रावन्कोर, बड़ौदा आदि राज्यों में ऐसा ही हुआ है । बड़ौदा मे प्रारम्भिक शिक्षा अनिवार्य और निःशुक्ल कर दी गई है । वहाँ पर चलते फिरते पुस्तकालय आदि कई शिक्षा सम्बन्धी और भी प्रयोग हुए हैं जो कि दूसरे राज्यो के लिये आदर्श हो सकते हैं। देशी राज्यो को चाहिये कि वह अपने न्याय निष्पक्षता और उदारता से इस बात को बतला दें कि देशी शासन कितना उत्तम हो सकता है।
अपने देशी रजवाड़ो के रईसों से मैं तो अनुरोधपूर्वक यही निवेदन करूँगा कि वे अपने कर्तव्य का स्मरण करें और उस पर चले अर्थात् रियासतों की हर प्रकार से उन्नति व तरक्की करें । उसी अवस्था मे वे आदर्श पुरुष कहलाये जा सकते हैं ।
वर्तमान समय मे तीन प्रकार की रियासतें हैं एक तो जिनके रईस यथार्थ मे उन्नति के वास्ते परिश्रम कर रहे हैं। दूसरे वे जो बाहरी दुनियाँ के वास्ते दिखावटी काग्रजी उन्नति करते हैं। तीसरे वे जिनकी अवस्था पहिले से भी खराब होती जाती है। ज्यादातर भारतवर्ष के देशी रजवाड़े काफ़ी कर्ज से दबे हुये हैं, यद्यपि उन्हें कोई बड़ी या छोटी लड़ाई नहीं लड़नी पड़ी है, जिसमें उनका अनाप सनाप रुपया खर्च होगया हो, उन्हें कोई बड़ी स्कीम नहीं | अभय कुमार ने कोषाध्यक्ष को भी आठ डिब्यों सहित राजा के सामने उपस्थित किया । कोषाध्यक्ष की धूर्त्तता और व्यापारी की सत्यपरायणता देख राजा ने कोपाध्यक्ष को तो वम्दी गृह भेजा और व्यापारी को कोषाध्यक्ष नियुक्त किया । राजाने व्यापारी को सत्य बोलने के कारण अपराधी होते हुये भी उक्त अपराध का कोई दण्ड देने के बदले उसे कोषाध्यक्ष नियुक्त किया। इसका प्रभाव लोगों पर क्या पड़ा होगा यह विचारणीय बात है। अपराध तो व्यापारी और कोषाध्यक्ष का लगभग समान ही था। लेकिन व्यापारी सत्य बोला था और कोपाध्यक्ष झूठ । मूंठ के कारण ही कोषाध्यक्ष अपने पद से हटाया जा कर जेल भेजा गया और सत्य के कारण ही व्यापारी को अपराध का दण्ड मिलने के बदले कोषाध्यक्ष का पद प्राप्त हुआ राजा के ऐसा करने से लोगों के हृदय में उसके न्याय और सुप्रबन्ध में कितनी दृढ़ता हुई होगी। व्यापारी जब कोपाध्यक्ष पद पर पहुँच गया तब उसने अपने दूसरे दुर्गुण भी त्याग दिये और वह धर्मात्मा बन गया । अब उसकी भावना ऐसी होगई कि उसने पहले जिस जिस के यहां श्वोरी की थी उन सब का माल उन्हें लौटा दिया । इस दृष्टान्त से स्पष्ट है कि प्राचीन समय में राजा किस प्रकार प्रजा की देखभाल किया करते थे और लोगों के भाव तथा बिचार देख कर दण्ड दिया करते थे- न कि आज कल के अनुसार केवल वन्दी गृह भर देने के लिये । भारतवर्ष में एक से एक बड़े बड़े राजा, महाराजा और सम्राट् होगये हैं जिनका राज करीब सारे भारतवर्ष, अफगानिस्तान विलोचिस्तान और तिव्वत आदि देशों तक था । इनमें दो मुख्य सम्राट् चन्द्र गुप्त और अशोक होगये हैं। अंग्रेजो के आने से पहले भारतवर्ष भिन्न दो बादशाहों, राजे, महाराजो के हाथ में बटा हुआ था । जैसे मुग़ल बादशाह, मरहठे, राजपूत, सिक्ख इत्यादि । वर्तमान समय में भारतवर्ष में अंग्रेजों का राज्य है। इनके अलावा यहाँ छोटी बड़ी कई सौ देशी रियासतें हैं। इन में से कई रियासतों के अधिकारी अपने आन्तरिक राज्य कार्य में बिलकुल स्वतन्त्र हैं जैसे मैसोर, बरोदा, इन्दौर, ग्वालियर, हैदराबाद, भूपाल और जयपुर इत्यादि । वर्तमान समय में इन देशी रियासतों की हालत अंग्रेजी राज्य के मुक़ाबिले कहीं पीछे है। अगर देशी रजवाड़ों ने उद्योग और परिश्रम किया होता तो वे उन्नति क्षेत्र में कहीं आगे होते । इस समय संसार में जो तरक्की देखते हैं वह पिछले डेढ़ सौ वर्ष में ही हुई है। जो शक्तियां निरन्तर उद्योग और प्रयत्न शील रहीं उन्होंने आज आश्चर्यजनक उन्नति करली है, जैसे अमेरिका, फ्रान्स, जर्मनी, कैनेडा, जापान, इत्यादि । यह कहावत मशहूर है किःजिन खोजा तिन पाइयां, गहरे पानी पैठि । हौं बौरी ढूंढ़न गई, रही किनारे बैठि ॥ अर्थात् जिन्होंने जी तोड़ परिश्रम किया उन्होंने हर प्रकार की उन्नति अथवा तरक्की की है, पर जो हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे या ऐशो-आराम में व्यस्त हो रहे हैं वे जहाँ के तहाँ हैं। उन्होंने बजाय उन्नति के अवनति ही को है । जिन रियासतों ने परिश्रम किया उन्होंने बहुत कुछ तरक्की करली है, जैसे ट्रावनकोर, मैसूर इत्यादि । स्वतन्त्र शक्तियों को तो सदा अपनी स्वतन्त्रता कायम रखने और अनापसनाप खर्चे फौज व लड़ाई के समान तैयार रखने में करने पड़ते हैं। जब कि हमारे देशी रजवाड़ों को किसी क़िस्म की लड़ाई वरौरः की फिक्र नहीं होती उनको अपने धन को प्रजा केहि में लगाने का अच्छा सुभीता रहता है । स्वतन्त्र शक्तियों को तो अपनी सारी आमदनी का पच्चीस से लेकर पचास फीसदी तक खर्च केवल फौज वगैरः पर करना पड़ता है किन्तु हमारे यहाँ के देशी रजवाड़ों को फ़ौज के लिये मुश्किल से दो चार फी सदी खर्च करना पड़ता होगा, क्योंकि बाहरी रक्षा का भार इङ्गरेजी सरकार पर है । अगर कोई यह कह कि ये देशी रियासतें परतन्त्र है अर्थात्अंग्रेजों के आधीन हैं इस कारण कुछ तरक्को नहीं कर सकतीं तो उनका यह कहना सत्य नहीं है। देशी रियासतें अपने अन्दरूनी मामलों में बिल्कुल स्वतन्त्र हैं। वे जी चाहे जो स्कीम अर्थात् वाणिज्य, व्यवसाय या दस्तकारी का कार्य जारी कर सकती हैं। यह दूसरी बात है कि अपनी काहिली और कमजोरी को दूसरे के सिर मढ़ा जाय । अगर सच पूंछो तो जितना तरक्की का मौक़ा देशी रियासतों में राजाओ को है उतना वृटिश राज्य की प्रजा को नहीं हो सकता । कारण बड़े बड़े जंगल, बड़ी बड़ी खनिज पदार्थों की खानें, हर प्रकार की पत्थर की खानें और नाना प्रकार की वस्तुओं की उपज मुख्तलिफ रियासतों में होती है जैसे लोहा, कोयला, गेरू, खड़िया, इमारती पत्थर, चूना, अवरक, जस्ता, सोना इत्यादि इसके अलावा इमारती लकड़ी, हर्र, वहेरा, आंवला, महुआ, ईंधन की लकड़ी और मुख्तलिफ किस्म के सब्जी वगैरः के जंगल के जंगल पड़े हुये हैं। अगर कोशिश और परिश्रम किया जाय तो नाना प्रकार के पदार्थ खोदकर निकाले जा सकते 'सफल साधना । हैं । अमेरिका, जापान, जर्मनी आदि देशो ने जो उन्नति की है वह निरन्तर परिश्रम और उद्यम का ही फल है । यह मानी हुई बात है कि परिश्रम का फल निष्फल नहीं होता । हमारे देशी रजवाड़ों के वास्ते तो वर्तमान समय एक स्वर्णहै। वे यदि अपना थोड़ा सा ध्यान रियासत को उन्नति की और दें तो बहुत कुछ कर सकते हैं। हमारे बहुत से राजा, महाराजा पढ़े लिखे व सभ्य व्यक्ति हैं। हर दूसरे चौथे वर्ष उनको यूरोप भ्रमण करने का शौक़ है पर वहाँ जाकर क्या वे खें बन्द कर लेते हैं या उनके हृदय नहीं है कि जिससे इस बात का अनुमान नहीं करते कि उनकी रियासतो की हालत एक बड़े सजे महल के मुक़ाबिले में एक टूटे फूटे झोंपड़े के सदृश हो रही है। यदि वे लोग यूरोप से कुछ सीख कर भी आते हैं तो अपने ऐश और आराम की बातें । प्रजा के हित की बातों की ओर बहुत ही कम ध्यान देते हैं। यह दूसरी बात है कि वे लोग अपनी आयु के मूल्य समय को और प्रजा के कठिन कमाई के धन को खो कर बाहरी ठाट बाट चाहे जैसा बनालें किन्तु प्रजा के लिये ठोस सुधार की योजना करना वे नहीं जानते। हमारे देशी राज्यों का कर्त्तव्य यद्यपि देशी राज्यों में उत्तरदायित्त्व पूर्ण प्रजातंत्र राज्य नहीं है और न वे पूर्णतया स्वतंत्र ही कहे जा सकते हैं तथापि एक अंश में हम उनको स्वराज्य के उदाहरण कह सकते हैं और जहां तक यह उदाहरण अच्छे बनाए जा सकते हैं वहाँ तक वे देश के लिये गौरव का विषय है । देशी राज्यों में देशी ही राजा होने के कारण शासकगरण प्रजा के रीति रिवाज, बोल चाल और रहन सहन को अच्छी तरह से समझ सकते हैं । यद्यपि देशी राज्य की प्रजा एक व्यक्ति के राज्यशासन मे होने के कारण कभी कभी यथोचित न्याय से वंचित रहती है तथापि वहाँ पर इस बात की आशा रहती है कि राजा तक यदि पहुँच हो जाय और उसकी समझ में श्रा जावे तो वह कर्मचारियों के अन्याय एक क़लम से ठीक करा सकती है। अस्तु जो कुछ भी हां देशी राजागरण यदि चाहें तो अपने अपने राज्यों में बहुत जल्दी सुधार करके सुधार के फल को वृटिश इण्डिया के सामने नमूना के तौर पर रख सकते हैं। हर्ष की बात है कि ट्रावन्कोर, बड़ौदा आदि राज्यों में ऐसा ही हुआ है । बड़ौदा मे प्रारम्भिक शिक्षा अनिवार्य और निःशुक्ल कर दी गई है । वहाँ पर चलते फिरते पुस्तकालय आदि कई शिक्षा सम्बन्धी और भी प्रयोग हुए हैं जो कि दूसरे राज्यो के लिये आदर्श हो सकते हैं। देशी राज्यो को चाहिये कि वह अपने न्याय निष्पक्षता और उदारता से इस बात को बतला दें कि देशी शासन कितना उत्तम हो सकता है। अपने देशी रजवाड़ो के रईसों से मैं तो अनुरोधपूर्वक यही निवेदन करूँगा कि वे अपने कर्तव्य का स्मरण करें और उस पर चले अर्थात् रियासतों की हर प्रकार से उन्नति व तरक्की करें । उसी अवस्था मे वे आदर्श पुरुष कहलाये जा सकते हैं । वर्तमान समय मे तीन प्रकार की रियासतें हैं एक तो जिनके रईस यथार्थ मे उन्नति के वास्ते परिश्रम कर रहे हैं। दूसरे वे जो बाहरी दुनियाँ के वास्ते दिखावटी काग्रजी उन्नति करते हैं। तीसरे वे जिनकी अवस्था पहिले से भी खराब होती जाती है। ज्यादातर भारतवर्ष के देशी रजवाड़े काफ़ी कर्ज से दबे हुये हैं, यद्यपि उन्हें कोई बड़ी या छोटी लड़ाई नहीं लड़नी पड़ी है, जिसमें उनका अनाप सनाप रुपया खर्च होगया हो, उन्हें कोई बड़ी स्कीम नहीं |
सरला--- "बस बस कह देती हूँ अच्छी बात न होगी ।"
भाषानन्दन-"हाँ-हाँ ! अच्छी बात तो तब होगी जब तू भी साहित्यिक भाषा बोलने लगेगी। क्योंकि मेरे ऐसे भाषानन्दन साहित्य सम्राट की पत्नी का ऐसी गड़बड़ बोली बोलना किसी प्रकार भी क्षम्य नहीं है जिसे सुनकर मैं खुद ही शर्म से पानी पानी हो जाता हूँ - नहीं नहीं - मैं स्वयं ही लज्जा से जल-जल हो जाता हूँ ।"
अब इनको अपनी योग्यतानुसार एक ऐसी नई पत्नी की चिन्ता होने लगी जो उच्च कोटि की लेखिका भी हो और सुन्दरता की देवी भी । इस उद्देश्य से एक पत्रिका निकालकर झट सम्पादक बन बैठे।
इनकी पुत्री चपला का प्रेमी संसारीनाथ अपने मित्र यदुनाथ, रमाकान्त के साथ इनके पास इसलिए आता है कि उसका विवाह चपला से सम्पन्न कर दिया जाये । भाषानन्दन विवाह के प्रस्ताव पर बहुत प्रसन्न होते हैं । समझते हैं कि यह बातचीत स्वयं उनके विवाह की बाबत है । मगर अन्त में यकायक दोनों के स्वप्न के किस प्रकार टूटते हैं इसका आनन्द भाषानन्दन की में लीजिये -
"अरे ! यह क्या ? मैं तो अपने पुनर्विवाह के बारे में बातचीत कर रहा हूँ और यह बदमाश बीच में कूद कर कहता है कि मैं आपकी पुत्री को प्यार करता हूँ । मेरे ही मुँह पर ऐसी धृष्टता ? खड़ा तो रह पाजी कहीं का - "5
यहाँ पर भ्रमपूर्ण बातों द्वारा नाटकीय प्राश्चर्य तथा हास्य उत्पन्न करने की युक्ति बड़ी ही मनोरञ्जक है ।
अब संसारीनाथ चपला को अपना प्रेम प्रगट करने के लिये भाषानन्दन की पत्रिका में तिलोत्तमा के नाम से प्रेमपूर्ण लेख लिखना
प्रारम्भ करता है । तिलोत्तमा की ओर से भाषानन्दन के पत्रा का उत्तर संसारीनाथ का मित्र यदुनाथ देने लगता है। इसका परिणाम यह होता है कि भाषानन्दन तिलोत्तमा के लिये पागल हा जाते हैं
तिलोत्तमा की ओर से भाषानन्दन दर्शनों के लिये हरा टीका लगाकर पार्क में बुलाये जाते हैं। वहाँ पर संसारीनाथ भी हरा टीका लगाकर पहुँचता है। उसे देखकर यह अपने चेहरे भर में हरा टीका लगा लेते हैं । परन्तु उनकी और कोई नहीं देखता । सब देखते हैं संसारीनाथ के हरे टीके की ओर। उसी को उसके मित्रगण तिलोत्तमा के सम्बन्धी बनकर बुला ले जाते हैं । यहाँ पर भाषानन्दन की परेशानी यही हास्यजनक है और जब उन्हें ज्ञात होता है कि उन्हीं के धोखे में संसारीनाथ का विवाह तिलोत्तमा से पक्का हो गया है तो इनकी सम्पादकीय योग्यता बलबला उठती है। एक से एक स्वरचित बेतुकी कवितायें जो काव्य संसार पर व्यंग वर्षा करती हैं चिल्ला कर सुनाना प्रारम्भ करते हैं ताकि संसारीनाथ पर जो सम्पादक होने का भ्रम किया गया है उसे इनकी योग्यता धाक जमा कर मिटा दे । यहाँ पर इनका कविता के सम्बन्ध में यह कहना -- "यदि कविता सभी के समझ में आ जाये तब उसके अर्थ गौरव का क्या महत्व रह जायेगा ?" चटपटे व्यंग से परिपूर्ण है ।
धाक तो जमी किन्तु तिलोत्तमा के सम्बन्धी विवाह के बचन से विमुख नहीं हो सके । तब इन्हें संसारीनाथ को मार डालने की चिन्ता सवार हुई।
संयोग से संसारीनाथ चपला से छिपकर मिलने । इन दोनों का प्रेमाभिनय मर्मस्पर्शी हुआ है । यह प्रेमलीला चपला की माता सरला देख लेती है। संसारीनाथ भागता है। किन्तु दूसरी ओर से भाषानन्दन को देखकर एक बड़ी सी बेंत की मेज़ के नीचे छिप | सरला--- "बस बस कह देती हूँ अच्छी बात न होगी ।" भाषानन्दन-"हाँ-हाँ ! अच्छी बात तो तब होगी जब तू भी साहित्यिक भाषा बोलने लगेगी। क्योंकि मेरे ऐसे भाषानन्दन साहित्य सम्राट की पत्नी का ऐसी गड़बड़ बोली बोलना किसी प्रकार भी क्षम्य नहीं है जिसे सुनकर मैं खुद ही शर्म से पानी पानी हो जाता हूँ - नहीं नहीं - मैं स्वयं ही लज्जा से जल-जल हो जाता हूँ ।" अब इनको अपनी योग्यतानुसार एक ऐसी नई पत्नी की चिन्ता होने लगी जो उच्च कोटि की लेखिका भी हो और सुन्दरता की देवी भी । इस उद्देश्य से एक पत्रिका निकालकर झट सम्पादक बन बैठे। इनकी पुत्री चपला का प्रेमी संसारीनाथ अपने मित्र यदुनाथ, रमाकान्त के साथ इनके पास इसलिए आता है कि उसका विवाह चपला से सम्पन्न कर दिया जाये । भाषानन्दन विवाह के प्रस्ताव पर बहुत प्रसन्न होते हैं । समझते हैं कि यह बातचीत स्वयं उनके विवाह की बाबत है । मगर अन्त में यकायक दोनों के स्वप्न के किस प्रकार टूटते हैं इसका आनन्द भाषानन्दन की में लीजिये - "अरे ! यह क्या ? मैं तो अपने पुनर्विवाह के बारे में बातचीत कर रहा हूँ और यह बदमाश बीच में कूद कर कहता है कि मैं आपकी पुत्री को प्यार करता हूँ । मेरे ही मुँह पर ऐसी धृष्टता ? खड़ा तो रह पाजी कहीं का - "पाँच यहाँ पर भ्रमपूर्ण बातों द्वारा नाटकीय प्राश्चर्य तथा हास्य उत्पन्न करने की युक्ति बड़ी ही मनोरञ्जक है । अब संसारीनाथ चपला को अपना प्रेम प्रगट करने के लिये भाषानन्दन की पत्रिका में तिलोत्तमा के नाम से प्रेमपूर्ण लेख लिखना प्रारम्भ करता है । तिलोत्तमा की ओर से भाषानन्दन के पत्रा का उत्तर संसारीनाथ का मित्र यदुनाथ देने लगता है। इसका परिणाम यह होता है कि भाषानन्दन तिलोत्तमा के लिये पागल हा जाते हैं तिलोत्तमा की ओर से भाषानन्दन दर्शनों के लिये हरा टीका लगाकर पार्क में बुलाये जाते हैं। वहाँ पर संसारीनाथ भी हरा टीका लगाकर पहुँचता है। उसे देखकर यह अपने चेहरे भर में हरा टीका लगा लेते हैं । परन्तु उनकी और कोई नहीं देखता । सब देखते हैं संसारीनाथ के हरे टीके की ओर। उसी को उसके मित्रगण तिलोत्तमा के सम्बन्धी बनकर बुला ले जाते हैं । यहाँ पर भाषानन्दन की परेशानी यही हास्यजनक है और जब उन्हें ज्ञात होता है कि उन्हीं के धोखे में संसारीनाथ का विवाह तिलोत्तमा से पक्का हो गया है तो इनकी सम्पादकीय योग्यता बलबला उठती है। एक से एक स्वरचित बेतुकी कवितायें जो काव्य संसार पर व्यंग वर्षा करती हैं चिल्ला कर सुनाना प्रारम्भ करते हैं ताकि संसारीनाथ पर जो सम्पादक होने का भ्रम किया गया है उसे इनकी योग्यता धाक जमा कर मिटा दे । यहाँ पर इनका कविता के सम्बन्ध में यह कहना -- "यदि कविता सभी के समझ में आ जाये तब उसके अर्थ गौरव का क्या महत्व रह जायेगा ?" चटपटे व्यंग से परिपूर्ण है । धाक तो जमी किन्तु तिलोत्तमा के सम्बन्धी विवाह के बचन से विमुख नहीं हो सके । तब इन्हें संसारीनाथ को मार डालने की चिन्ता सवार हुई। संयोग से संसारीनाथ चपला से छिपकर मिलने । इन दोनों का प्रेमाभिनय मर्मस्पर्शी हुआ है । यह प्रेमलीला चपला की माता सरला देख लेती है। संसारीनाथ भागता है। किन्तु दूसरी ओर से भाषानन्दन को देखकर एक बड़ी सी बेंत की मेज़ के नीचे छिप |
भविष्यपुराण भाषा । फल को प्राप्त होते हैं उसी स्वरूप पर परमेश्वर का हम ध्यान करते हैं और सूर्यरूप अपने ही पूजन करते हैं हे यमुनि ! यह बात सूर्य भगवान् ने अपने मुख से हमको कथन करी है ॥
चौंसठवां अध्याय ।
अनेक पाने का जुदा २ फल, मंदिर मार्जन और लेपन करने का फल, दीप आदिका फल, सिद्धार्थ सप्तमी का विधान फल ।। कहते हैं कि हे याज्ञवल्क्य ! पद्मरूप सूर्यभगवान् को कमल पुष्प और गुग्गुल के धूप से हम पूजते हैं सूर्य को चमेली के पुष्प और विजयनामक धूप से शिवजी का पूजन करते हैं और चक्ररूप सूर्यभगवान् का और ऋगुरु धूप से विष्णु भगवान् यजन करते हैं कस्तूरी मिल्काम सुगन्धि द्रव्य चन्दन गुरु क पूर नागरमोथा और शर्करा इन सब को मिलाने से विजय धूप होता है हमने सूर्यनारायण से पूछा कि कौन २ पुष्प आप को प्रिय हैं तब उनने जो २ बताये उनका हम वर्णन करते हैं भलिका पुष्प सूर्यनारायण को अर्पण करने से उत्तम भोग मिलते हैं श्वेत कमलों से सौभाग्य कुटज पुष्पों से घ्यक्षय वर्ष मन्दार अर्थात् व्याक के पुष्पों से कुष्ठरोग का नाश और दिल करके पूजन करने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है प्याक के पुष्पों की माला से धन मिलता है बकुल पुष्पों की माला से कन्या का लाभ पलाश के पुष्पों से और अगस्त्य पुष्पों से पूजा करे तो सूर्यनारायण का अनुग्रह होय करवीर के पुष्प जो सूर्यभगवान् के के समर्पण करें यह उनका गण होय कमल के हजारे पुष्प चढ़ावे तो सर्वलोक में निवास करें उत्तम गंध से लेपन करै तो सद्वति पनि सूर्यभगवान के मंदिर को जो मार्जन कर गोबर से | भविष्यपुराण भाषा । फल को प्राप्त होते हैं उसी स्वरूप पर परमेश्वर का हम ध्यान करते हैं और सूर्यरूप अपने ही पूजन करते हैं हे यमुनि ! यह बात सूर्य भगवान् ने अपने मुख से हमको कथन करी है ॥ चौंसठवां अध्याय । अनेक पाने का जुदा दो फल, मंदिर मार्जन और लेपन करने का फल, दीप आदिका फल, सिद्धार्थ सप्तमी का विधान फल ।। कहते हैं कि हे याज्ञवल्क्य ! पद्मरूप सूर्यभगवान् को कमल पुष्प और गुग्गुल के धूप से हम पूजते हैं सूर्य को चमेली के पुष्प और विजयनामक धूप से शिवजी का पूजन करते हैं और चक्ररूप सूर्यभगवान् का और ऋगुरु धूप से विष्णु भगवान् यजन करते हैं कस्तूरी मिल्काम सुगन्धि द्रव्य चन्दन गुरु क पूर नागरमोथा और शर्करा इन सब को मिलाने से विजय धूप होता है हमने सूर्यनारायण से पूछा कि कौन दो पुष्प आप को प्रिय हैं तब उनने जो दो बताये उनका हम वर्णन करते हैं भलिका पुष्प सूर्यनारायण को अर्पण करने से उत्तम भोग मिलते हैं श्वेत कमलों से सौभाग्य कुटज पुष्पों से घ्यक्षय वर्ष मन्दार अर्थात् व्याक के पुष्पों से कुष्ठरोग का नाश और दिल करके पूजन करने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है प्याक के पुष्पों की माला से धन मिलता है बकुल पुष्पों की माला से कन्या का लाभ पलाश के पुष्पों से और अगस्त्य पुष्पों से पूजा करे तो सूर्यनारायण का अनुग्रह होय करवीर के पुष्प जो सूर्यभगवान् के के समर्पण करें यह उनका गण होय कमल के हजारे पुष्प चढ़ावे तो सर्वलोक में निवास करें उत्तम गंध से लेपन करै तो सद्वति पनि सूर्यभगवान के मंदिर को जो मार्जन कर गोबर से |
मेष राशि के जातकों को इस हफ्ते किसी विदेशी स्रोत से ख़ासा लाभ मिल सकता है। इस हफ्ते आप किसी यात्रा पर जा सकते हैं, ये यात्रा किसी व्यापारिक उद्देश्य से भी हो सकती है। सप्ताह के मध्य में परिवार में होने वाले मतभेद की वजह से कुछ परेशान रह सकते हैं। आय के अच्छे मार्ग बनेंगें लेकिन साथ ही खर्चों में भी इजाफ़ा होगा। ये सप्ताह आपके बच्चों के लिए काफी अच्छा बीतने वाला है, उन्हें अपनी मेहनत का फल जरूर मिलेगा। वैवाहिक दृष्टिकोण से भी ये हफ्ता आपका काफी अच्छा बीतने वाला है। शत्रु पराजय होंगें, माता के साथ किसी प्रकार का मतभेद हो सकता है। वाद-विवाद की स्थिति उत्पन्न होने पर खुद को उससे दूर ही रखें। छोटे भाई बहन किसी प्रकार की बीमारी से ग्रस्त हो सकते हैं। कार्यक्षेत्र का माहौल आपके अनुकूल नहीं होने से मानसिक तनाव रहेगा।
इस समय आप अष्टम शनि के प्रभाव से ग्रसित हैं जो आपके लिए बहुत अच्छा नहीं सिद्ध होगा। इस समय अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखें। हफ्ते के मध्य में धन अर्जित करने के लिए आपको कठिन मेहनत की जरुरत पड़ सकती है। बिजनेस या कार्यक्षेत्र में की गई कोई पार्टनरशिप लाभदायक साबित हो सकती है। आप किसी ऐसे व्यक्ति से मिल सकते हैं जो बिजनेस में आपके साथ पार्टनरशिप करने के लिए पूरी तरह से तैयार होगा जो कि आपके लिए हर तरफ से फायदेमंद ही रहेगा। कार्यक्षेत्र में पदोन्नति संभव है। इस हफ्ते अपने बच्चे की सेहत को लेकर परेशान हो सकते हैं, इसलिए उनका विशेष ध्यान रखें। शिक्षा के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए कठिन परिश्रम की आवश्यकता होगी। इस दौरान लोग आपके द्वारा दी गई सलाह को ध्यानपूर्वक सुनेंगे और उसपर अमल करेंगे। इस सप्ताह योग, ध्यान और अध्यात्म की तरफ आपका रूझान होगा।
इस हफ्ते मिथुन राशि के जातकों को यात्रा से ख़ासा लाभ मिलने वाला है। आपकी आय में वृद्धि होगी लेकिन साथ ही खर्चों में भी इजाफा होगा। कार्यस्थल पर आपके अच्छे कामों की सराहना होगी। अपने पिता की सेहत का ख़ास ख्याल रखें। बच्चों के लिए ये सप्ताह काफी अच्छा गुजरने वाला है, पढ़ाई में उनका मन लगेगा जिससे सफलता प्राप्त करने में काफी आसानी होगी। पारिवारिक दृष्टिकोण से भी ये हफ्ता आपके लिए बेहद अच्छा बीतने वाला है। इस दौरान परिवार का माहौल अच्छा रहेगा और पारिवारिक जनों के साथ खुशनुमा वक़्त बीतेगा। इस हफ्ते आप अपने कार्यक्षेत्र में परिवर्तन कर सकते हैं। लेकिन कोई भी फैसला लेने से पहले अच्छी तरह से सोच विचार जरूर कर लें।
साप्ताहिक राशिफल के अनुसार, इस हफ्ते आप अपनी आय को भोग विलास की वस्तुओं को खरीदने पर व्यय कर सकते हैं। पारिवारिक दृष्टिकोण से ये हफ्ता आपका ख़ासा सुखद बीतेगा। हालाँकि केतु के आपके सातवें भाव में विराजमान होने की वजह से वैवाहिक जीवन में कुछ दिक्कतें आ सकती हैं। अपने खान-पान की आदतों का विशेष ध्यान रखें अन्यथा सेहत से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। बच्चों के लिए ये हफ्ता विशेष रूप से अच्छा व्यतीत होगा, इस हफ्ते उनके अनुसरण करने की क्षमता में वृद्धि होगी और किसी सृजनात्मक कार्य की तरफ रूझान होगा। किसी प्रकार की व्यर्थ चिंता आपको मानसिक तनाव दे सकती है। लंबे समय से चले आ रहे किसी कोर्ट कचहरी के मामले में फैसला आपके पक्ष में आएगा। अपने आप को व्यर्थ चीजों को सोचने से रोकेंगे जिससे आपको आंतरिक शांति मिलेगी।
| मेष राशि के जातकों को इस हफ्ते किसी विदेशी स्रोत से ख़ासा लाभ मिल सकता है। इस हफ्ते आप किसी यात्रा पर जा सकते हैं, ये यात्रा किसी व्यापारिक उद्देश्य से भी हो सकती है। सप्ताह के मध्य में परिवार में होने वाले मतभेद की वजह से कुछ परेशान रह सकते हैं। आय के अच्छे मार्ग बनेंगें लेकिन साथ ही खर्चों में भी इजाफ़ा होगा। ये सप्ताह आपके बच्चों के लिए काफी अच्छा बीतने वाला है, उन्हें अपनी मेहनत का फल जरूर मिलेगा। वैवाहिक दृष्टिकोण से भी ये हफ्ता आपका काफी अच्छा बीतने वाला है। शत्रु पराजय होंगें, माता के साथ किसी प्रकार का मतभेद हो सकता है। वाद-विवाद की स्थिति उत्पन्न होने पर खुद को उससे दूर ही रखें। छोटे भाई बहन किसी प्रकार की बीमारी से ग्रस्त हो सकते हैं। कार्यक्षेत्र का माहौल आपके अनुकूल नहीं होने से मानसिक तनाव रहेगा। इस समय आप अष्टम शनि के प्रभाव से ग्रसित हैं जो आपके लिए बहुत अच्छा नहीं सिद्ध होगा। इस समय अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखें। हफ्ते के मध्य में धन अर्जित करने के लिए आपको कठिन मेहनत की जरुरत पड़ सकती है। बिजनेस या कार्यक्षेत्र में की गई कोई पार्टनरशिप लाभदायक साबित हो सकती है। आप किसी ऐसे व्यक्ति से मिल सकते हैं जो बिजनेस में आपके साथ पार्टनरशिप करने के लिए पूरी तरह से तैयार होगा जो कि आपके लिए हर तरफ से फायदेमंद ही रहेगा। कार्यक्षेत्र में पदोन्नति संभव है। इस हफ्ते अपने बच्चे की सेहत को लेकर परेशान हो सकते हैं, इसलिए उनका विशेष ध्यान रखें। शिक्षा के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए कठिन परिश्रम की आवश्यकता होगी। इस दौरान लोग आपके द्वारा दी गई सलाह को ध्यानपूर्वक सुनेंगे और उसपर अमल करेंगे। इस सप्ताह योग, ध्यान और अध्यात्म की तरफ आपका रूझान होगा। इस हफ्ते मिथुन राशि के जातकों को यात्रा से ख़ासा लाभ मिलने वाला है। आपकी आय में वृद्धि होगी लेकिन साथ ही खर्चों में भी इजाफा होगा। कार्यस्थल पर आपके अच्छे कामों की सराहना होगी। अपने पिता की सेहत का ख़ास ख्याल रखें। बच्चों के लिए ये सप्ताह काफी अच्छा गुजरने वाला है, पढ़ाई में उनका मन लगेगा जिससे सफलता प्राप्त करने में काफी आसानी होगी। पारिवारिक दृष्टिकोण से भी ये हफ्ता आपके लिए बेहद अच्छा बीतने वाला है। इस दौरान परिवार का माहौल अच्छा रहेगा और पारिवारिक जनों के साथ खुशनुमा वक़्त बीतेगा। इस हफ्ते आप अपने कार्यक्षेत्र में परिवर्तन कर सकते हैं। लेकिन कोई भी फैसला लेने से पहले अच्छी तरह से सोच विचार जरूर कर लें। साप्ताहिक राशिफल के अनुसार, इस हफ्ते आप अपनी आय को भोग विलास की वस्तुओं को खरीदने पर व्यय कर सकते हैं। पारिवारिक दृष्टिकोण से ये हफ्ता आपका ख़ासा सुखद बीतेगा। हालाँकि केतु के आपके सातवें भाव में विराजमान होने की वजह से वैवाहिक जीवन में कुछ दिक्कतें आ सकती हैं। अपने खान-पान की आदतों का विशेष ध्यान रखें अन्यथा सेहत से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। बच्चों के लिए ये हफ्ता विशेष रूप से अच्छा व्यतीत होगा, इस हफ्ते उनके अनुसरण करने की क्षमता में वृद्धि होगी और किसी सृजनात्मक कार्य की तरफ रूझान होगा। किसी प्रकार की व्यर्थ चिंता आपको मानसिक तनाव दे सकती है। लंबे समय से चले आ रहे किसी कोर्ट कचहरी के मामले में फैसला आपके पक्ष में आएगा। अपने आप को व्यर्थ चीजों को सोचने से रोकेंगे जिससे आपको आंतरिक शांति मिलेगी। |
दुमका (झारखण्ड), 27 मई झारखंड में दुमका जिले के जामा थाना क्षेत्र अन्तर्गत जरपुरा ग्राम में पुलिस ने एक ट्रक पर लदी लगभग अस्सी लाख रुपये मूल्य की अरुणाचल प्रदेश में निर्मित शराब एंव स्पिरिट जब्त की है तथा इस सिलसिले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है।
गुरुवार को यह जानकारी देते हुए उत्पाद एवं मद्यपान निषेध विभाग, दुमका के अधीक्षक आशुतोष कुमार ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर जामा थाना पुलिस के सहयोग से कल देर शाम शराब जब्ती की उक्त कार्रवाई की गयी। उन्होंने बताया कि ड्रमों में कुल 6 हजार 80 लीटर स्पिरिट है तथा अवैध शराब की बोतलें पेटियों में बंद हैं।
उन्होंने बताया कि जब्त ट्रक का कोई भी कागजात उपलब्ध नहीं है एवं उसकी नम्बर प्लेट भी फर्जी है, जबकि जब्त शराब और स्पिरिट अरुणाचल प्रदेश से बाहर बेचना प्रतिबंधित है।
आशुतोष कुमार ने बताया कि ट्रक को अमर मंडल नामक व्यक्ति के परिसर से जब्त किया गया।
उन्होंने बताया कि मंडल की अभी गिरफ्तारी नहीं हुई है, परन्तु पूछताछ में उसने अवैध शराब के कारोबार में लिप्त बिहार राज्य स्थित शेखपुरा निवासी मुस्तफा खान का नाम लिया है जिसे फोन कर बुलाया गया एवं गिरफ्तार किया गया तथा मामले में आगे जांच जारी है।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
| दुमका , सत्ताईस मई झारखंड में दुमका जिले के जामा थाना क्षेत्र अन्तर्गत जरपुरा ग्राम में पुलिस ने एक ट्रक पर लदी लगभग अस्सी लाख रुपये मूल्य की अरुणाचल प्रदेश में निर्मित शराब एंव स्पिरिट जब्त की है तथा इस सिलसिले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। गुरुवार को यह जानकारी देते हुए उत्पाद एवं मद्यपान निषेध विभाग, दुमका के अधीक्षक आशुतोष कुमार ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर जामा थाना पुलिस के सहयोग से कल देर शाम शराब जब्ती की उक्त कार्रवाई की गयी। उन्होंने बताया कि ड्रमों में कुल छः हजार अस्सी लीटरटर स्पिरिट है तथा अवैध शराब की बोतलें पेटियों में बंद हैं। उन्होंने बताया कि जब्त ट्रक का कोई भी कागजात उपलब्ध नहीं है एवं उसकी नम्बर प्लेट भी फर्जी है, जबकि जब्त शराब और स्पिरिट अरुणाचल प्रदेश से बाहर बेचना प्रतिबंधित है। आशुतोष कुमार ने बताया कि ट्रक को अमर मंडल नामक व्यक्ति के परिसर से जब्त किया गया। उन्होंने बताया कि मंडल की अभी गिरफ्तारी नहीं हुई है, परन्तु पूछताछ में उसने अवैध शराब के कारोबार में लिप्त बिहार राज्य स्थित शेखपुरा निवासी मुस्तफा खान का नाम लिया है जिसे फोन कर बुलाया गया एवं गिरफ्तार किया गया तथा मामले में आगे जांच जारी है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है। |
दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मुरथल के सभागार में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग सहयोग एवं संपर्क कार्यक्रम में सीएम मनोहर लाल ने कहा कि छोटी इकाईयों को इस महीने से 20 किलोवाट तक के बिजली कनेक्शन के बिल पर 2 रुपये प्रति यूनिट की छूट मिलने लगेगी। इससे उनका 4. 75 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बिल आएगा।
सीएम ने कहा कि सरकारी नौकरी ज्यादा नहीं होने के कारण युवाओं को प्राइवेट सेक्टर की ओर कदम बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में एक लाख एमएसएमई हैं, जिनमें से 80 हजार रजिस्टर्ड हैं। एक लाख एमएसएमई में 8-10 लाख युवाओं को रोजगार मिला है। सीएम ने कहा कि चूंकि एमएसएमई अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, इसलिए इनकी समस्याओं को प्राथमिकता से दूर किया जाएगा।
इस तरह कलस्टर डेवलपमेंट स्कीम लागू की गई है, जिसमें 70 प्रतिशत राशि केंद्र प्रदान करेगा तो 20 प्रतिशत प्रदेश सरकार देगी और अन्य खुद वहन करनी होगी। दो करोड़ रुपये तक के टर्न ओवर वाले एमएसएमई के लिए मिनी कलस्टर डेवलपमेंट योजना तैयार है। इस दौरान मंत्री कविता जैन, सांसद रमेश कौशिक, नीति आयोग की संयुक्त सचिव सुमिता मिश्रा, सीएम मीडिया सलाहकार राजीव जैन आदि मौजूद रहे।
केंद्र सरकार की एमएसएमई के लिए शुरू की गई 100 दिन योजना के तहत वीडियो कांफ्रेंसिंग के सहारे पीएम नरेंद्र मोदी का पूरा कार्यक्रम उद्यमियों को दिखाया गया। पीएम मोदी ने एमएसएमई को राहत देने वाली कई घोषणाएं कीं तो पानीपत के हैंडलूम उद्योग को काफी सराहा है। एमएसएमई की योजना में चुने गए प्रदेश के चारों कलस्टरों की पीएम खुद मॉनीटरिंग करेंगे। अपने संबोधन में पीएम ने कहा है कि वह खुद इनकी मॉनीटरिंग करेंगे।
| दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मुरथल के सभागार में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग सहयोग एवं संपर्क कार्यक्रम में सीएम मनोहर लाल ने कहा कि छोटी इकाईयों को इस महीने से बीस किलोग्रामवाट तक के बिजली कनेक्शन के बिल पर दो रुपयापये प्रति यूनिट की छूट मिलने लगेगी। इससे उनका चार. पचहत्तर रुपयापये प्रति यूनिट के हिसाब से बिल आएगा। सीएम ने कहा कि सरकारी नौकरी ज्यादा नहीं होने के कारण युवाओं को प्राइवेट सेक्टर की ओर कदम बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में एक लाख एमएसएमई हैं, जिनमें से अस्सी हजार रजिस्टर्ड हैं। एक लाख एमएसएमई में आठ-दस लाख युवाओं को रोजगार मिला है। सीएम ने कहा कि चूंकि एमएसएमई अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, इसलिए इनकी समस्याओं को प्राथमिकता से दूर किया जाएगा। इस तरह कलस्टर डेवलपमेंट स्कीम लागू की गई है, जिसमें सत्तर प्रतिशत राशि केंद्र प्रदान करेगा तो बीस प्रतिशत प्रदेश सरकार देगी और अन्य खुद वहन करनी होगी। दो करोड़ रुपये तक के टर्न ओवर वाले एमएसएमई के लिए मिनी कलस्टर डेवलपमेंट योजना तैयार है। इस दौरान मंत्री कविता जैन, सांसद रमेश कौशिक, नीति आयोग की संयुक्त सचिव सुमिता मिश्रा, सीएम मीडिया सलाहकार राजीव जैन आदि मौजूद रहे। केंद्र सरकार की एमएसएमई के लिए शुरू की गई एक सौ दिन योजना के तहत वीडियो कांफ्रेंसिंग के सहारे पीएम नरेंद्र मोदी का पूरा कार्यक्रम उद्यमियों को दिखाया गया। पीएम मोदी ने एमएसएमई को राहत देने वाली कई घोषणाएं कीं तो पानीपत के हैंडलूम उद्योग को काफी सराहा है। एमएसएमई की योजना में चुने गए प्रदेश के चारों कलस्टरों की पीएम खुद मॉनीटरिंग करेंगे। अपने संबोधन में पीएम ने कहा है कि वह खुद इनकी मॉनीटरिंग करेंगे। |
The Kapil Sharma Show: 'द कपिल शर्मा शो' में कपिल और उनके को-स्टार दर्शकों को हंसाने का कोई मौका नहीं छोड़ते हैं. शो में कपिल और सुमोना चक्रवर्ती (Sumona Chakravarti) के बीच नोंक-झोंक लोगों को खूब पसन्द आती है. वहीं, कॉमेडी किंग अक्सर सुमोना यानी भूरी की शो में टांग खिंचाई करते नजर आते है. इस बीच एक्ट्रेस की एक तसवीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसपर कपिल उनका मजाक उड़ाते नजर आ रहे हैं.
इस तसवीर पर कॉमेडी किंग ने लिखा था, 'Wow बचपन में भी तुम्हारा मुंह कितना ज़्यादा खुलता था #HappyChildrensDay. हालांकि एक्ट्रेस की ये तसवीर लेटेस्ट नहीं है, लेकिन कपिल का इसपर कमेंट वायरल हो रहा है. कपिल के इस कमेंट पर सुमोना भी चुप नहीं बैठीं थी. उन्होंने कपिल के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा था, 'कप्पू, तुम सच में कमीने हो. . '
बता दें कि सुमोना चक्रवती और कपिल शर्मा पिछले काफी सालों से दर्शकों को हंसाते आ रहे हैं. उन्होंने कई फिल्मों और टीवी सीरीयल्स में काम किया है. सुमोना ने साल 2018 में 'कॉमेडी नाइट्स विद कपिल' में कपिल शर्मा की पत्नी मंजू के किरदार में नजर आईं. इस किरदार से उन्हें खासा पहचान मिली. दोनों की जुगलबंदी ने दर्शकों का खूब मन मोहा था.
सुमोना चक्रवर्ती ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत एक चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर आमिर खान और मनीषा कोईराला अभिनीत फिल्म 'मन' से की थी. इसके बाद कुछ सालों तक कई टेलीविजन शोज़ में नजर आईं. हालांकि उन्हें बड़ी सफलता साल 2011 में बालाजी टेलीफिल्म्स द्वारा निर्मित टेलीविजन शो 'बड़े अच्छे लगते हैं' में निभाए गए किरदार नताशा से मिली. वहीं, इस हफ्ते कपिल शर्मा शो में गेस्ट बनकर शत्रुघ्न सिन्हा आएंगे. शत्रुघ्न सिन्हा के साथ उनके बेटे लव सिन्हा भी आएंगे. शो में शत्रुघ्न सिन्हा अपनी जिंदगी के कई मजेदार किस्से शेयर करते दिखाई देंगे.
| The Kapil Sharma Show: 'द कपिल शर्मा शो' में कपिल और उनके को-स्टार दर्शकों को हंसाने का कोई मौका नहीं छोड़ते हैं. शो में कपिल और सुमोना चक्रवर्ती के बीच नोंक-झोंक लोगों को खूब पसन्द आती है. वहीं, कॉमेडी किंग अक्सर सुमोना यानी भूरी की शो में टांग खिंचाई करते नजर आते है. इस बीच एक्ट्रेस की एक तसवीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसपर कपिल उनका मजाक उड़ाते नजर आ रहे हैं. इस तसवीर पर कॉमेडी किंग ने लिखा था, 'Wow बचपन में भी तुम्हारा मुंह कितना ज़्यादा खुलता था #HappyChildrensDay. हालांकि एक्ट्रेस की ये तसवीर लेटेस्ट नहीं है, लेकिन कपिल का इसपर कमेंट वायरल हो रहा है. कपिल के इस कमेंट पर सुमोना भी चुप नहीं बैठीं थी. उन्होंने कपिल के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा था, 'कप्पू, तुम सच में कमीने हो. . ' बता दें कि सुमोना चक्रवती और कपिल शर्मा पिछले काफी सालों से दर्शकों को हंसाते आ रहे हैं. उन्होंने कई फिल्मों और टीवी सीरीयल्स में काम किया है. सुमोना ने साल दो हज़ार अट्ठारह में 'कॉमेडी नाइट्स विद कपिल' में कपिल शर्मा की पत्नी मंजू के किरदार में नजर आईं. इस किरदार से उन्हें खासा पहचान मिली. दोनों की जुगलबंदी ने दर्शकों का खूब मन मोहा था. सुमोना चक्रवर्ती ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत एक चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर आमिर खान और मनीषा कोईराला अभिनीत फिल्म 'मन' से की थी. इसके बाद कुछ सालों तक कई टेलीविजन शोज़ में नजर आईं. हालांकि उन्हें बड़ी सफलता साल दो हज़ार ग्यारह में बालाजी टेलीफिल्म्स द्वारा निर्मित टेलीविजन शो 'बड़े अच्छे लगते हैं' में निभाए गए किरदार नताशा से मिली. वहीं, इस हफ्ते कपिल शर्मा शो में गेस्ट बनकर शत्रुघ्न सिन्हा आएंगे. शत्रुघ्न सिन्हा के साथ उनके बेटे लव सिन्हा भी आएंगे. शो में शत्रुघ्न सिन्हा अपनी जिंदगी के कई मजेदार किस्से शेयर करते दिखाई देंगे. |
मुंबईः भोजपुरी सिनेमा के जानेमाने निर्देशक रजनीश मिश्रा का कहना है कि फिल्म डार्लिंग में अक्षरा सिंह के साथ काम करना उनके लिये शानदार अनुभव रहा है। रजनीश मिश्रा, बाबा मोशन पिक्चर्स के बैनर तले बन रही फिल्म डार्लिंग निर्देशित कर रहे हैं।
इस फिल्म में अक्षरा सिंह और राहुल शर्मा की मुख्य भूमिका है। इस फिल्म की शूटिंग इन दिनों अयोध्या में चल रही है। रजनीश मिश्रा ने बताया कि बाबा मोशन पिक्चर्स और निर्माता प्रदीप के शर्मा के साथ काम करना बेहद सहज होता है। उनके साथ मेरी अपनी बाउंडिंग है।
उन्होंने बताया कि बाबा मोशन पिक्चर्स के साथ फिल्म किये बेहद वक्त हो गया था। कोरोना की वजह से इंडस्ट्री बंद हो गयी, फिर मैं कुछ फिल्मों के सिलसिले में लन्दन चला गया। दूसरे बैनर की फ़िल्में कर रहा था। लेकिन प्रदीप के शर्मा के साथ काम करना है, ये मन में था। एक कहानी भी थी। मैंने प्रदीप के शर्मा को ये कहानी सुनाई। फिर तय हुआ कि फिल्म करनी है। और आज हम डार्लिंग में साथ काम कर रहे हैं। (वार्ता)
| मुंबईः भोजपुरी सिनेमा के जानेमाने निर्देशक रजनीश मिश्रा का कहना है कि फिल्म डार्लिंग में अक्षरा सिंह के साथ काम करना उनके लिये शानदार अनुभव रहा है। रजनीश मिश्रा, बाबा मोशन पिक्चर्स के बैनर तले बन रही फिल्म डार्लिंग निर्देशित कर रहे हैं। इस फिल्म में अक्षरा सिंह और राहुल शर्मा की मुख्य भूमिका है। इस फिल्म की शूटिंग इन दिनों अयोध्या में चल रही है। रजनीश मिश्रा ने बताया कि बाबा मोशन पिक्चर्स और निर्माता प्रदीप के शर्मा के साथ काम करना बेहद सहज होता है। उनके साथ मेरी अपनी बाउंडिंग है। उन्होंने बताया कि बाबा मोशन पिक्चर्स के साथ फिल्म किये बेहद वक्त हो गया था। कोरोना की वजह से इंडस्ट्री बंद हो गयी, फिर मैं कुछ फिल्मों के सिलसिले में लन्दन चला गया। दूसरे बैनर की फ़िल्में कर रहा था। लेकिन प्रदीप के शर्मा के साथ काम करना है, ये मन में था। एक कहानी भी थी। मैंने प्रदीप के शर्मा को ये कहानी सुनाई। फिर तय हुआ कि फिल्म करनी है। और आज हम डार्लिंग में साथ काम कर रहे हैं। |
इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला गुजरात के अरावली जिले से आया है। दरअसल, यहां एक आदमी को पत्नी का इलाज कराने के लिए रुपयों की जरूरत थी। कहीं से कोई मदद न मिलने पर उसने मजबूरी में अपने बेटे को 10 हजार रुपये में गिरवी रख दिया। मामले की जानकारी मिलने के बाद अधिकारी हरकत में आ गए। अधिकारियों ने बच्चे को रेस्क्यू करा लिया।
मामला उत्तर गुजरात के मालपुर क्षेत्र के वांकानेडा गांव में एक परिवार का है, जहाँ परिवार में पांच सदस्य (माता-पिता और तीन बच्चे) हैं। यह परिवार एक अस्थायी झोपड़ी में रहता है। तीनों बच्चों की मां हृदय रोग से जूझ रही है। ऐसे में उसके इलाज के लिए पैसों की जरूरत थी। और परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब होने के कारण पिता ने पैसों का इंतजाम करने के लिए अपने दिल पर पत्थर रखते हुए अपने बेटे को 10 हजार रुपये में गिरवी रख दिया।
दरअसल, पत्नी की दवाओं के लिए पैसों की सख्त जरूरत होने की वजह से पिता ने अपने 12 साल के बेटे को 10 हजार रुपये में भेड़-बकरी चराने के लिए गिरवी रख दिया।
आपको बता दें कि इस मामले की जानकारी मिलते ही प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच गया। उन्होंने आनन-फानन में कार्रवाई करते हुए बच्चे को रेस्क्यू किया और हिम्मत नगर स्थित चाइल्ड होम भेज दिया। अधिकारियों का कहना है कि बच्चे के रहने और शिक्षा के साथ-साथ अन्य लाभ दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस मामले में अधिकारियों ने दोनों पक्षों को आज (9 मार्च) बातचीत के लिए बुलाया है। साथ ही, बाल सुरक्षा समिति की बैठक भी बुलाई गई है।
| इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला गुजरात के अरावली जिले से आया है। दरअसल, यहां एक आदमी को पत्नी का इलाज कराने के लिए रुपयों की जरूरत थी। कहीं से कोई मदद न मिलने पर उसने मजबूरी में अपने बेटे को दस हजार रुपये में गिरवी रख दिया। मामले की जानकारी मिलने के बाद अधिकारी हरकत में आ गए। अधिकारियों ने बच्चे को रेस्क्यू करा लिया। मामला उत्तर गुजरात के मालपुर क्षेत्र के वांकानेडा गांव में एक परिवार का है, जहाँ परिवार में पांच सदस्य हैं। यह परिवार एक अस्थायी झोपड़ी में रहता है। तीनों बच्चों की मां हृदय रोग से जूझ रही है। ऐसे में उसके इलाज के लिए पैसों की जरूरत थी। और परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब होने के कारण पिता ने पैसों का इंतजाम करने के लिए अपने दिल पर पत्थर रखते हुए अपने बेटे को दस हजार रुपये में गिरवी रख दिया। दरअसल, पत्नी की दवाओं के लिए पैसों की सख्त जरूरत होने की वजह से पिता ने अपने बारह साल के बेटे को दस हजार रुपये में भेड़-बकरी चराने के लिए गिरवी रख दिया। आपको बता दें कि इस मामले की जानकारी मिलते ही प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच गया। उन्होंने आनन-फानन में कार्रवाई करते हुए बच्चे को रेस्क्यू किया और हिम्मत नगर स्थित चाइल्ड होम भेज दिया। अधिकारियों का कहना है कि बच्चे के रहने और शिक्षा के साथ-साथ अन्य लाभ दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस मामले में अधिकारियों ने दोनों पक्षों को आज बातचीत के लिए बुलाया है। साथ ही, बाल सुरक्षा समिति की बैठक भी बुलाई गई है। |
Ranchi : झारखंड की राजधानी रांची में हरी सब्जियों की कीमत बढ़ गई है. सावन आते ही करीब सभी सब्जियों की कीमतों में 10-15 रुपये तक की बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. मार्केट में धनिया 100 के पार चली गई है, मौसमी सब्जी खुखड़ी और रूगड़ा दोहरे शतक के दर पर बिक रहे हैं. सावन आने के साथ सब्जियों की मांग बढ़ गयी है, क्योंकि इस पावन माह में बहुत सारे लोग मांसाहार से दूरी बनाये रखते हैं. लोगों का झुकाव एक महीने तक ताजे साग-सब्जियों की ओर ही रहता है. वहीं दूसरी ओर चिकन सौ रूपये से नीचे गिर कर 80-90 रुपये प्रतिकिलो बिक रहा है.
परवल, भिंडी, धनिया पत्ती, गोभी जैसी सब्जियां उम्मीद से ज्यादा महंगी होकर आम लोगों की पॉकेट पर भारी पड़ रही है. राजधानी रांची के अधिकांश घरों की रसोई से ये तमाम सब्जियां दूर होने लगी हैं. इसके कारण लोग इसके विकल्प की ओर ध्यान देने लगे हैं. करीब हर हरी सब्जियों की कीमत 40-50 रुपये प्रति किलो है. सब्जी के दामों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण बारिश का मौसम भी है. बरसात के इस मौसम में हरी सब्जियां जल्दी सड़ने लगती हैं. इस कारण इसके इम्पोर्ट पर भी असर पड़ता है. मंडी में सब्जियों के स्टॉक कम रखे जा रहे हैं. वहीं डिमांड बढ़ने से सब्जियों की कीमत बढ़ गई है.
सब्जियों की कीमत बढ़ने से इनके विकल्प की ओर लोगों का रूझान होने लगा है. विकल्प के रूप में बेसन की सब्जी, चने की सब्जी, सोयाबीन, आदि की मांग बढ़ गई है.
न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.
| Ranchi : झारखंड की राजधानी रांची में हरी सब्जियों की कीमत बढ़ गई है. सावन आते ही करीब सभी सब्जियों की कीमतों में दस-पंद्रह रुपयापये तक की बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. मार्केट में धनिया एक सौ के पार चली गई है, मौसमी सब्जी खुखड़ी और रूगड़ा दोहरे शतक के दर पर बिक रहे हैं. सावन आने के साथ सब्जियों की मांग बढ़ गयी है, क्योंकि इस पावन माह में बहुत सारे लोग मांसाहार से दूरी बनाये रखते हैं. लोगों का झुकाव एक महीने तक ताजे साग-सब्जियों की ओर ही रहता है. वहीं दूसरी ओर चिकन सौ रूपये से नीचे गिर कर अस्सी-नब्बे रुपयापये प्रतिकिलो बिक रहा है. परवल, भिंडी, धनिया पत्ती, गोभी जैसी सब्जियां उम्मीद से ज्यादा महंगी होकर आम लोगों की पॉकेट पर भारी पड़ रही है. राजधानी रांची के अधिकांश घरों की रसोई से ये तमाम सब्जियां दूर होने लगी हैं. इसके कारण लोग इसके विकल्प की ओर ध्यान देने लगे हैं. करीब हर हरी सब्जियों की कीमत चालीस-पचास रुपयापये प्रति किलो है. सब्जी के दामों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण बारिश का मौसम भी है. बरसात के इस मौसम में हरी सब्जियां जल्दी सड़ने लगती हैं. इस कारण इसके इम्पोर्ट पर भी असर पड़ता है. मंडी में सब्जियों के स्टॉक कम रखे जा रहे हैं. वहीं डिमांड बढ़ने से सब्जियों की कीमत बढ़ गई है. सब्जियों की कीमत बढ़ने से इनके विकल्प की ओर लोगों का रूझान होने लगा है. विकल्प के रूप में बेसन की सब्जी, चने की सब्जी, सोयाबीन, आदि की मांग बढ़ गई है. न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं. |
IOC का स्टॉक 52-Week-High हाई छूने के बाद डाउन,कंपनी को मिला हैं नीलामी में आधा हिस्सा जाने पूरी जानकारी आज हम आप को इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL) के शेयरों में बहुत ही तेजी देखी जा सकती है। हमारे भारत में सरकारी तेल कंपनी डिविडेंड देने के लिए लोगों में बहुत ही मशहूर है। और बीते 6 मंथ की बात की जाए तो कंपनी ने 14. 77% का रिटर्न मुहैया कराया है।
52-Week-High IOCL का 91. 65 ₹ है। शुरुआती कारोबार में IOC आज हरे निशान में ट्रेडिंग कर रही है और मौजूदा टाइम में उसके शेयर के मूल्य 90. 85 रुपए हैं। उम्मीद की जा रही है कि यह शेयर आज कुछ और उछाल दर्ज कर सकते हैं। अब यह संभावना भी है कि आज कंपनी 52 सप्ताह के उच्चतम स्तर को पार कर जाए या छू लेगा।
गैस नीलामी में कंपनी को मिल चुका है आधा हिस्सा.
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन आईओसी ने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और उसकी ब्रिटिश भागीदार बीपी की केजी गैस की हालिया प्राकृतिक गैस नीलामी में करीब आधा हिस्सा हासिल किया है। बीते पिछले मंथ हुई नीलामी में आईओसी ने 25 लाख घनमीटर प्रतिदिन गैस हासिल की है।
| IOC का स्टॉक बावन-Week-High हाई छूने के बाद डाउन,कंपनी को मिला हैं नीलामी में आधा हिस्सा जाने पूरी जानकारी आज हम आप को इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड के शेयरों में बहुत ही तेजी देखी जा सकती है। हमारे भारत में सरकारी तेल कंपनी डिविडेंड देने के लिए लोगों में बहुत ही मशहूर है। और बीते छः मंथ की बात की जाए तो कंपनी ने चौदह. सतहत्तर% का रिटर्न मुहैया कराया है। बावन-Week-High IOCL का इक्यानवे. पैंसठ रुपया है। शुरुआती कारोबार में IOC आज हरे निशान में ट्रेडिंग कर रही है और मौजूदा टाइम में उसके शेयर के मूल्य नब्बे. पचासी रुपयापए हैं। उम्मीद की जा रही है कि यह शेयर आज कुछ और उछाल दर्ज कर सकते हैं। अब यह संभावना भी है कि आज कंपनी बावन सप्ताह के उच्चतम स्तर को पार कर जाए या छू लेगा। गैस नीलामी में कंपनी को मिल चुका है आधा हिस्सा. इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन आईओसी ने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और उसकी ब्रिटिश भागीदार बीपी की केजी गैस की हालिया प्राकृतिक गैस नीलामी में करीब आधा हिस्सा हासिल किया है। बीते पिछले मंथ हुई नीलामी में आईओसी ने पच्चीस लाख घनमीटर प्रतिदिन गैस हासिल की है। |
UN Report On China: चीन की काली करतूतें पूरी दुनिया के सामने आ गई हैं। यूएन की तरफ से जारी की गई रिपोर्ट में चीन को लेकर कई चौंकाने वाले दावे किए गए हैं। यूएन की मानवाधिकार रिपोर्ट के अनुसार चीन के शिनजियांग प्रांत में मुस्लिमों पर अत्याचार हो रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार जबरन उइगर मुसलमानों का यौन शोषण किया जा रहा है, नसबंदी कराई जा रही है। इसे मानवता के खिलाफ घोर अपराध करार दिया गया है। यूएन की इस रिपोर्ट का काफी समय से इंतजार किया जा रहा था, जिसे आखिरकार जेनेवा में जारी कर दिया गया है।
यूएन ह्यूमन राइट्स कमिश्नर मिशेल बाचेलेट के चार साल का कार्यकाल खत्म होने से ठीक पहले इस रिपोर्ट को सार्वजनिक किया गया है। उन्होंने इस रिपोर्ट को जारी करते हुए कहा, कि इसे लोगों के सामने लाया जाना जरूरी है। बता दें कि चीन की तरफ से इस रिपोर्ट को लेकर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही थी।
UN Report On China: UN की रिपोर्ट में क्या है?
यूएन की तरफ से जारी इस रिपोर्ट में उइगर और अन्य मुस्लिम समुदायों पर हो रहे अत्याचारों को उजागर किया गया है। चीन पर आरोप है कि उसने करीब 10 लाख उइगर मुस्लिमों को कई सालों तक शिनजियांग क्षेत्र में बंधक बनाकर रखा है। यूएन की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने जमकर मानवाधिकार और मौलिक अधिकारों का हनन किया है। बता दें कि खुद मिशेल बाचेलेट ने चीन के शिनजियांग क्षेत्र का दौरा किया था। जिसके बाद इस पूरी रिपोर्ट पर काम शुरू किया गया।
इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ यौन और लिंग आधारित हिंसा हुई। इस समुदाय के लोगों को हिरासत में रखकर कई तरह की यातनाएं दी गई और जबरन नसबंदी भी करायी गई। इसे यूएन ने अंतरराष्ट्रीय अपराध बताया है।
चीन यूएन की रिपोर्ट का लगातार विरोध कर रहा है। चीन ने पहले ही इस रिपोर्ट को जारी ना करने की अपील की थी। वहीं, अब रिपोर्ट जारी होने के बाद चीन ने आरोप लगाया है कि उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए ये एक साजिश है, जिसमें पश्चिमी देश शामिल हैं।
दरअसल, चीन ने इन आरोपों पर ये दलील दी है कि उइगर वो अल्पसंख्यकों के बीच मौजूद आतंकवादियों को निशाना बना रहे हैं। इसके लिए अलग तरह की रणनीति बनाई जाती है। चीन का कहना है कि यह चीन विरोधी ताकतों द्वारा गढ़ी गई गलत सूचना और झूठ पर आधारित है।
यह भी पढ़ेंः
| UN Report On China: चीन की काली करतूतें पूरी दुनिया के सामने आ गई हैं। यूएन की तरफ से जारी की गई रिपोर्ट में चीन को लेकर कई चौंकाने वाले दावे किए गए हैं। यूएन की मानवाधिकार रिपोर्ट के अनुसार चीन के शिनजियांग प्रांत में मुस्लिमों पर अत्याचार हो रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार जबरन उइगर मुसलमानों का यौन शोषण किया जा रहा है, नसबंदी कराई जा रही है। इसे मानवता के खिलाफ घोर अपराध करार दिया गया है। यूएन की इस रिपोर्ट का काफी समय से इंतजार किया जा रहा था, जिसे आखिरकार जेनेवा में जारी कर दिया गया है। यूएन ह्यूमन राइट्स कमिश्नर मिशेल बाचेलेट के चार साल का कार्यकाल खत्म होने से ठीक पहले इस रिपोर्ट को सार्वजनिक किया गया है। उन्होंने इस रिपोर्ट को जारी करते हुए कहा, कि इसे लोगों के सामने लाया जाना जरूरी है। बता दें कि चीन की तरफ से इस रिपोर्ट को लेकर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही थी। UN Report On China: UN की रिपोर्ट में क्या है? यूएन की तरफ से जारी इस रिपोर्ट में उइगर और अन्य मुस्लिम समुदायों पर हो रहे अत्याचारों को उजागर किया गया है। चीन पर आरोप है कि उसने करीब दस लाख उइगर मुस्लिमों को कई सालों तक शिनजियांग क्षेत्र में बंधक बनाकर रखा है। यूएन की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने जमकर मानवाधिकार और मौलिक अधिकारों का हनन किया है। बता दें कि खुद मिशेल बाचेलेट ने चीन के शिनजियांग क्षेत्र का दौरा किया था। जिसके बाद इस पूरी रिपोर्ट पर काम शुरू किया गया। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ यौन और लिंग आधारित हिंसा हुई। इस समुदाय के लोगों को हिरासत में रखकर कई तरह की यातनाएं दी गई और जबरन नसबंदी भी करायी गई। इसे यूएन ने अंतरराष्ट्रीय अपराध बताया है। चीन यूएन की रिपोर्ट का लगातार विरोध कर रहा है। चीन ने पहले ही इस रिपोर्ट को जारी ना करने की अपील की थी। वहीं, अब रिपोर्ट जारी होने के बाद चीन ने आरोप लगाया है कि उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए ये एक साजिश है, जिसमें पश्चिमी देश शामिल हैं। दरअसल, चीन ने इन आरोपों पर ये दलील दी है कि उइगर वो अल्पसंख्यकों के बीच मौजूद आतंकवादियों को निशाना बना रहे हैं। इसके लिए अलग तरह की रणनीति बनाई जाती है। चीन का कहना है कि यह चीन विरोधी ताकतों द्वारा गढ़ी गई गलत सूचना और झूठ पर आधारित है। यह भी पढ़ेंः |
बताया जा रहा है कि ग्राम रतावा निवासी सुरेश नेताम की पुत्री नेहा नेताम पेट दर्द से तड़प रही थी. बेटी को तड़पते देख पिता उसे बाइक में बैठाकर उपचार के लिए नगरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर जा रहा था। लेकिन दर्द से बेहाल लड़की ग्राम सांकरा और रानीगाँव के बीच रास्ते में ही बेहोश हो गयी। सुनसान सड़क और तेज धूप के बीच परेशान पिता समझ नहीं पा रहा था कि आखिर करे तो क्या करे।
पुलिस के जवानों ने बगैर कोई देरी किये बेहोश पड़ी लड़की को तत्काल पेट्रोलिंग वाहन से लेकर अस्पताल पहुँचाया. जहां त्वरित उपचार के बाद लड़की की स्थिति सामान्य हुई। परिजनों ने पुलिस कर्मियों का आभार मानते हुए कहा कि समय रहते उसकी बेटी को अस्पताल पहुँचाकर इलाज करवाया। उसने कहा फरिस्ता बनकर आए ऐसे पुलिसवालों का शुक्रिया अदा करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं है।
| बताया जा रहा है कि ग्राम रतावा निवासी सुरेश नेताम की पुत्री नेहा नेताम पेट दर्द से तड़प रही थी. बेटी को तड़पते देख पिता उसे बाइक में बैठाकर उपचार के लिए नगरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर जा रहा था। लेकिन दर्द से बेहाल लड़की ग्राम सांकरा और रानीगाँव के बीच रास्ते में ही बेहोश हो गयी। सुनसान सड़क और तेज धूप के बीच परेशान पिता समझ नहीं पा रहा था कि आखिर करे तो क्या करे। पुलिस के जवानों ने बगैर कोई देरी किये बेहोश पड़ी लड़की को तत्काल पेट्रोलिंग वाहन से लेकर अस्पताल पहुँचाया. जहां त्वरित उपचार के बाद लड़की की स्थिति सामान्य हुई। परिजनों ने पुलिस कर्मियों का आभार मानते हुए कहा कि समय रहते उसकी बेटी को अस्पताल पहुँचाकर इलाज करवाया। उसने कहा फरिस्ता बनकर आए ऐसे पुलिसवालों का शुक्रिया अदा करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं है। |
भारतीय टीम (Indian Cricket Team) ने पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले में रोमांचक जीत हासिल की और इस जीत का श्रेय जाता है दिग्गज बल्लेबाज हार्दिक पांड्या (Hardik Pandya) को जिन्होंने ऑलराउंड प्रदर्शन किया। हार्दिक पांड्या ने छक्के से जीत दिलाने के बाद पूर्व भारतीय कप्तान एम एस धोनी को याद किया। पांड्या ने बताया कि किस तरह से उन्होंने एम एस धोनी से ही मैच फिनिश करने की कला सीखी है। पांड्या ने कहा कि उन्होंने धोनी के अलावा हर एक क्रिकेटर से कुछ ना कुछ सीखा है जिनके साथ उन्होंने खेला है।
हार्दिक पांड्या ने पाकिस्तान के खिलाफ मैच में बेहतरीन प्रदर्शन किया। उन्होंने सबसे पहले गेंदबाजी में 3 विकेट चटकाए और उसके बाद बल्लेबाजी में भी 17 गेंद पर 4 चौके और 1 छक्के की मदद से नाबाद 33 रन बनाकर टीम को जीत दिला दी।
मैच के बाद स्टार स्पोर्ट्स पर बातचीत के दौरान हार्दिक पांड्या ने एम एस धोनी को याद किया और कहा कि उन्होंने उनकी ही तरह मैच फिनिश करने की कोशिश की। संजय बांगर और गौतम गंभीर से बातचीत में हार्दिक ने कहा,
मैं हमेशा सिंपल रखने की कोशिश करता हूं। निश्चित तौर पर माही भाई का भी असर है। जब भी उनके साथ खेला हूं देखा है मैंने, ज्यादा मैंने सवाल किए नहीं लेकिन नहीं भी देखा है तो भी मैं मानता हूं कि एक क्रिकेटर के तौर पर सिर्फ उनसे ही नहीं जिन-जिन प्लेयर्स के साथ मैंने खेला है और मैं उनसे जो-जो चीजें सीख सकता हूं वो सीखा है। मेरा मानना है कि अगर आपको कोई फैसला अपने जीवन में भी लेना है तो अगर आप शांत हैं और परिस्थितियों का आंकलन अच्छी तरह से कर सकते हैं तो फिर बेहतर फैसले ले सकते हैं।
आपको बता दें कि इससे पहले मोहम्मद कैफ को भी हार्दिक की पारी देखकर एम एस धोनी की याद आ गई थी। पूर्व खिलाड़ी ने कहा कि जिस तरह अहम मौकों पर एम एस धोनी के दौर में लोग टीवी नहीं बंद करते थे, ठीक उसी तरह अब हार्दिक की मौजूदगी में भी देखने को मिलेगा।
| भारतीय टीम ने पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले में रोमांचक जीत हासिल की और इस जीत का श्रेय जाता है दिग्गज बल्लेबाज हार्दिक पांड्या को जिन्होंने ऑलराउंड प्रदर्शन किया। हार्दिक पांड्या ने छक्के से जीत दिलाने के बाद पूर्व भारतीय कप्तान एम एस धोनी को याद किया। पांड्या ने बताया कि किस तरह से उन्होंने एम एस धोनी से ही मैच फिनिश करने की कला सीखी है। पांड्या ने कहा कि उन्होंने धोनी के अलावा हर एक क्रिकेटर से कुछ ना कुछ सीखा है जिनके साथ उन्होंने खेला है। हार्दिक पांड्या ने पाकिस्तान के खिलाफ मैच में बेहतरीन प्रदर्शन किया। उन्होंने सबसे पहले गेंदबाजी में तीन विकेट चटकाए और उसके बाद बल्लेबाजी में भी सत्रह गेंद पर चार चौके और एक छक्के की मदद से नाबाद तैंतीस रन बनाकर टीम को जीत दिला दी। मैच के बाद स्टार स्पोर्ट्स पर बातचीत के दौरान हार्दिक पांड्या ने एम एस धोनी को याद किया और कहा कि उन्होंने उनकी ही तरह मैच फिनिश करने की कोशिश की। संजय बांगर और गौतम गंभीर से बातचीत में हार्दिक ने कहा, मैं हमेशा सिंपल रखने की कोशिश करता हूं। निश्चित तौर पर माही भाई का भी असर है। जब भी उनके साथ खेला हूं देखा है मैंने, ज्यादा मैंने सवाल किए नहीं लेकिन नहीं भी देखा है तो भी मैं मानता हूं कि एक क्रिकेटर के तौर पर सिर्फ उनसे ही नहीं जिन-जिन प्लेयर्स के साथ मैंने खेला है और मैं उनसे जो-जो चीजें सीख सकता हूं वो सीखा है। मेरा मानना है कि अगर आपको कोई फैसला अपने जीवन में भी लेना है तो अगर आप शांत हैं और परिस्थितियों का आंकलन अच्छी तरह से कर सकते हैं तो फिर बेहतर फैसले ले सकते हैं। आपको बता दें कि इससे पहले मोहम्मद कैफ को भी हार्दिक की पारी देखकर एम एस धोनी की याद आ गई थी। पूर्व खिलाड़ी ने कहा कि जिस तरह अहम मौकों पर एम एस धोनी के दौर में लोग टीवी नहीं बंद करते थे, ठीक उसी तरह अब हार्दिक की मौजूदगी में भी देखने को मिलेगा। |
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि मृत महिला पर दबाव बनाकर लाया गया था या फिर वह अपनी मर्जी से आई थीं। पुलिस पूछताछ के लिए बॉयफ्रेंड शेजी खान की मेडिकल फिटनेस का इंतजार कर रही है। पुलिस की जाँच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
भाजपा के कार्यकर्ताओं ने त्रिची के सरकारी अस्पताल के बाहर हत्या के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन करते हुए आरोपितों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करने की माँग की। हालाँकि, पुलिस के आश्वासन पर आंदोलनकारियों ने विरोध-प्रदर्शन वापस ले लिया।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की वकील को हडकाते हुए ये भी कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट का कोई फैसला दिखाएँ, जिसमें जेल के अच्छे आचरण के कारण फाँसी की सज़ा को कम किया गया हो।
7 लोगों की हत्या का आदेश देना बाला बुढ जब शेखी बघार रहा था, तब डीसी और एसपी उसके सामने झुक कर खड़े थे। उसने कहा- "ये सातों मारे गए लोग उत्पाती थे। हमें पाँच बंदूकें और दे दो, फिर खेल देखो। "
इससे पहले, 15 नवंबर 2019 को नाका के खुर्शीदाबाद स्थित पार्टी दफ़्तर पर उर्दू में लिखा धमकीभरा पत्र उन्हें पहले भी मिल चुका है। इस पत्र में पार्टी के महासचिव समेत अन्य हस्तियों को भी कमलेश तिवारी की तरह मार देने की धमकी दी गई थी।
ग्रामसभा में 9 लोगों को मौत की सजा सुनाई गई। दो गायब हो गए। शेष 7 को बंधक बनाकर पीटा। फिर जंगल में ले जाकर हाथ-पैर बॉंध कर सिर कलम कर दिया। सभी शव बरामद करने में पुलिस को 21 घंटे लग गए।
सब-इंस्पेक्टर के मर्डर से ज्यादा बड़ी प्लानिंग थी आतंकी शमीम और तौफिक की, NIA करेगी अब केस की जाँच!
अब्दुल शमीम और तौफिक की प्लानिंग सब-इंस्पेक्टर विल्सन की हत्या तक सीमित नहीं थी। इन दोनों ने 26 जनवरी को आत्मघाती हमले की योजना भी बना रखी थी। तमिलनाडु सरकार ने इनके व्यापक इस्लामी मॉड्यूल को देखते हुए केस की जाँच NIA से कराने की सिफारिश की है।
बच्ची मदरसे से नहीं लौटी तो घरवालों ने उसकी तलाश शुरू की। मस्जिदों से उसकी गुमशुदगी की घोषणा भी की गई। बाद में बच्ची को तलाब से निकाला गया तो उसकी जान जा चुकी थी।
घटना झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले के गुदड़ी की है। पत्थलगढ़ी समर्थकों ने इसका विरोध करने वाले बुरुगुलीकेरा ग्राम पंचायत के उपमुखिया समेत सात ग्रामीणों की हत्या कर दी। पत्थलगड़ी समर्थक इन्हें अगवा कर जंगल में ले गए फिर बेरहमी से हत्या कर दी।
| फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि मृत महिला पर दबाव बनाकर लाया गया था या फिर वह अपनी मर्जी से आई थीं। पुलिस पूछताछ के लिए बॉयफ्रेंड शेजी खान की मेडिकल फिटनेस का इंतजार कर रही है। पुलिस की जाँच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। भाजपा के कार्यकर्ताओं ने त्रिची के सरकारी अस्पताल के बाहर हत्या के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन करते हुए आरोपितों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करने की माँग की। हालाँकि, पुलिस के आश्वासन पर आंदोलनकारियों ने विरोध-प्रदर्शन वापस ले लिया। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की वकील को हडकाते हुए ये भी कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट का कोई फैसला दिखाएँ, जिसमें जेल के अच्छे आचरण के कारण फाँसी की सज़ा को कम किया गया हो। सात लोगों की हत्या का आदेश देना बाला बुढ जब शेखी बघार रहा था, तब डीसी और एसपी उसके सामने झुक कर खड़े थे। उसने कहा- "ये सातों मारे गए लोग उत्पाती थे। हमें पाँच बंदूकें और दे दो, फिर खेल देखो। " इससे पहले, पंद्रह नवंबर दो हज़ार उन्नीस को नाका के खुर्शीदाबाद स्थित पार्टी दफ़्तर पर उर्दू में लिखा धमकीभरा पत्र उन्हें पहले भी मिल चुका है। इस पत्र में पार्टी के महासचिव समेत अन्य हस्तियों को भी कमलेश तिवारी की तरह मार देने की धमकी दी गई थी। ग्रामसभा में नौ लोगों को मौत की सजा सुनाई गई। दो गायब हो गए। शेष सात को बंधक बनाकर पीटा। फिर जंगल में ले जाकर हाथ-पैर बॉंध कर सिर कलम कर दिया। सभी शव बरामद करने में पुलिस को इक्कीस घंटाटे लग गए। सब-इंस्पेक्टर के मर्डर से ज्यादा बड़ी प्लानिंग थी आतंकी शमीम और तौफिक की, NIA करेगी अब केस की जाँच! अब्दुल शमीम और तौफिक की प्लानिंग सब-इंस्पेक्टर विल्सन की हत्या तक सीमित नहीं थी। इन दोनों ने छब्बीस जनवरी को आत्मघाती हमले की योजना भी बना रखी थी। तमिलनाडु सरकार ने इनके व्यापक इस्लामी मॉड्यूल को देखते हुए केस की जाँच NIA से कराने की सिफारिश की है। बच्ची मदरसे से नहीं लौटी तो घरवालों ने उसकी तलाश शुरू की। मस्जिदों से उसकी गुमशुदगी की घोषणा भी की गई। बाद में बच्ची को तलाब से निकाला गया तो उसकी जान जा चुकी थी। घटना झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले के गुदड़ी की है। पत्थलगढ़ी समर्थकों ने इसका विरोध करने वाले बुरुगुलीकेरा ग्राम पंचायत के उपमुखिया समेत सात ग्रामीणों की हत्या कर दी। पत्थलगड़ी समर्थक इन्हें अगवा कर जंगल में ले गए फिर बेरहमी से हत्या कर दी। |
देश के सबसे बड़े बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के शेयरों में सोमवार को अच्छी तेजी देखने को मिली है। सरकारी बैंक के शेयर 5 पर्सेंट से ज्यादा के उछाल के साथ 622. 90 रुपये के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गए हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के शेयरों में यह तेजी दूसरी तिमाही में बैंक के मुनाफे में आए जबरदस्त उछाल की वजह से आई है। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के शेयरों में अभी और उछाल देखने को मिल सकता है। बैंक के शेयर 700 रुपये के पार पहुंच सकते हैं।
घरेलू ब्रोकरेज हाउस ICICI सिक्योरिटीज ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के शेयरों को बाय (Buy) रेटिंग दी है और शेयरों के लिए 700 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। ब्रोकरेज हाउस एडलवाइस ने एसबीआई के शेयरों पर अपने रेटिंग अपग्रेड करके होल्ड से बाय (Buy) कर दी है। ब्रोकरेज हाउस ने बैंक के शेयरों के लिए 715 रुपये का नया टारगेट प्राइस दिया है। एडलवाइस ने पहले एसबीआई के शेयरों के लिए 595 रुपये का टारगेट दिया था। एक दूसरे ब्रोकरेज हाउस एंबिट ने भी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के शेयरों के लिए 715 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। बैंक के शेयर ब्रोकरेज हाउस के टॉप पिक्स में शामिल हैं। मोतीलाल ओसवाल ने भी SBI के शेयरों के लिए 700 रुपये का टारगेट दिया है।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को सितंबर 2022 तिमाही में अब तक का सबसे ज्यादा तिमाही मुनाफा हुआ है। जुलाई-सितंबर 2022 तिमाही में एसबीआई को 13,265 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट हुआ है। सालाना आधार पर स्टेट बैंक के मुनाफे में 73. 93 पर्सेंट का उछाल आया है। बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम में अच्छी ग्रोथ देखने को मिली है। साथ ही मार्जिन भी बढ़ा है। सितंबर 2022 तिमाही में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की नेट इंटरेस्ट इनकम 35,183 करोड़ रुपये रही है। सालाना आधार पर बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम में 12. 83 पर्सेंट का उछाल आया है।
| देश के सबसे बड़े बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के शेयरों में सोमवार को अच्छी तेजी देखने को मिली है। सरकारी बैंक के शेयर पाँच पर्सेंट से ज्यादा के उछाल के साथ छः सौ बाईस. नब्बे रुपयापये के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गए हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के शेयरों में यह तेजी दूसरी तिमाही में बैंक के मुनाफे में आए जबरदस्त उछाल की वजह से आई है। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के शेयरों में अभी और उछाल देखने को मिल सकता है। बैंक के शेयर सात सौ रुपयापये के पार पहुंच सकते हैं। घरेलू ब्रोकरेज हाउस ICICI सिक्योरिटीज ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के शेयरों को बाय रेटिंग दी है और शेयरों के लिए सात सौ रुपयापये का टारगेट प्राइस दिया है। ब्रोकरेज हाउस एडलवाइस ने एसबीआई के शेयरों पर अपने रेटिंग अपग्रेड करके होल्ड से बाय कर दी है। ब्रोकरेज हाउस ने बैंक के शेयरों के लिए सात सौ पंद्रह रुपयापये का नया टारगेट प्राइस दिया है। एडलवाइस ने पहले एसबीआई के शेयरों के लिए पाँच सौ पचानवे रुपयापये का टारगेट दिया था। एक दूसरे ब्रोकरेज हाउस एंबिट ने भी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के शेयरों के लिए सात सौ पंद्रह रुपयापये का टारगेट प्राइस दिया है। बैंक के शेयर ब्रोकरेज हाउस के टॉप पिक्स में शामिल हैं। मोतीलाल ओसवाल ने भी SBI के शेयरों के लिए सात सौ रुपयापये का टारगेट दिया है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को सितंबर दो हज़ार बाईस तिमाही में अब तक का सबसे ज्यादा तिमाही मुनाफा हुआ है। जुलाई-सितंबर दो हज़ार बाईस तिमाही में एसबीआई को तेरह,दो सौ पैंसठ करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट हुआ है। सालाना आधार पर स्टेट बैंक के मुनाफे में तिहत्तर. तिरानवे पर्सेंट का उछाल आया है। बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम में अच्छी ग्रोथ देखने को मिली है। साथ ही मार्जिन भी बढ़ा है। सितंबर दो हज़ार बाईस तिमाही में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की नेट इंटरेस्ट इनकम पैंतीस,एक सौ तिरासी करोड़ रुपये रही है। सालाना आधार पर बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम में बारह. तिरासी पर्सेंट का उछाल आया है। |
बाॅलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत अक्सर अपने बयानों को लेकर विवादों से घिर जाती हैं। इंडस्ट्री के बहुत सारे स्टार्स ऐसे हैं जिनके साथ कंगना का पंगा रह चुका है और एक्ट्रेस की यह तू-तू मैं-मैं अभी भी खत्म नहीं हुई है। वहीं अब कंगना सेलेब्स को छोड़ कांग्रेस नेता शशि थरूर के पीछे पड़ गई हैं। कमल हासन के दिए एक बयान की तारीफ करने पर कंगना ने शशि थरूर पर निशाना साधा है।
दरअसल, कमल हासन ने बयान देते हुए कहा था कि घर के काम को सैलरी प्रोफेशन बनाया जाना चाहिए। जिसकी तारीफ करते हुए शशि थरूर ने लिखा, 'मैं कमल हासन के उस विचार का स्वागत करता हूं जिसमें उन्होंने सैलरीड पेशे के रूप में गृहकार्य को मान्यता देने के लिए कहा गया है। राज्य सरकार को इसके लिए गृहणियों को मासिक वेतन का भुगतान करना चाहिए। यह समाज में घर का काम करने वाली महिलाओं की पहचान करेगा और उनकी सेवाओं का मुद्रीकरण होगा। '
जिसके बाद शशि थरूर के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए कंगना ने लिखा, 'हमारे प्यार और हमारी लैंगिगता का मूल्य मत लगाइए। हमें हमारे खुद के पालन-पोषण के लिए भुगतान न करें। हमें अपने छोटी सी दुनिया अपने घर की क्वीन बनने के लिए वेतन की आवश्यकता नहीं है। हर चीज़ को व्यवसाय के रूप में देखना बंद करें। '
आपको बता दें कंगना का इस तरह तंज कसना या निशाना साधना कोई पहली बार नहीं है। इससे पहले कंगना और एक्ट्रेस उर्मिला मातोंडकर एक दूसरे को जमकर निशाने पर ले चुकी हैं। दरअसल हाल ही में उर्मिला ने एक नया ऑफिस खरीदा। जिसकी कीमत करोड़ों में बताई जा रही है। वहीं इन खबरों के सामने आने के बाद कंगना रनौत कहां चुप बैठने वाली थी। उन्होंने उर्मिला को अपने निशाने पर लेते हुए ट्वीट कर उनपर तंज कसा था।
जिसके बाद उर्मिला ने भी कंगना को खूब खरी खोटी सुनाते हुए एक वीडियो जारी किया था।
| बाॅलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत अक्सर अपने बयानों को लेकर विवादों से घिर जाती हैं। इंडस्ट्री के बहुत सारे स्टार्स ऐसे हैं जिनके साथ कंगना का पंगा रह चुका है और एक्ट्रेस की यह तू-तू मैं-मैं अभी भी खत्म नहीं हुई है। वहीं अब कंगना सेलेब्स को छोड़ कांग्रेस नेता शशि थरूर के पीछे पड़ गई हैं। कमल हासन के दिए एक बयान की तारीफ करने पर कंगना ने शशि थरूर पर निशाना साधा है। दरअसल, कमल हासन ने बयान देते हुए कहा था कि घर के काम को सैलरी प्रोफेशन बनाया जाना चाहिए। जिसकी तारीफ करते हुए शशि थरूर ने लिखा, 'मैं कमल हासन के उस विचार का स्वागत करता हूं जिसमें उन्होंने सैलरीड पेशे के रूप में गृहकार्य को मान्यता देने के लिए कहा गया है। राज्य सरकार को इसके लिए गृहणियों को मासिक वेतन का भुगतान करना चाहिए। यह समाज में घर का काम करने वाली महिलाओं की पहचान करेगा और उनकी सेवाओं का मुद्रीकरण होगा। ' जिसके बाद शशि थरूर के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए कंगना ने लिखा, 'हमारे प्यार और हमारी लैंगिगता का मूल्य मत लगाइए। हमें हमारे खुद के पालन-पोषण के लिए भुगतान न करें। हमें अपने छोटी सी दुनिया अपने घर की क्वीन बनने के लिए वेतन की आवश्यकता नहीं है। हर चीज़ को व्यवसाय के रूप में देखना बंद करें। ' आपको बता दें कंगना का इस तरह तंज कसना या निशाना साधना कोई पहली बार नहीं है। इससे पहले कंगना और एक्ट्रेस उर्मिला मातोंडकर एक दूसरे को जमकर निशाने पर ले चुकी हैं। दरअसल हाल ही में उर्मिला ने एक नया ऑफिस खरीदा। जिसकी कीमत करोड़ों में बताई जा रही है। वहीं इन खबरों के सामने आने के बाद कंगना रनौत कहां चुप बैठने वाली थी। उन्होंने उर्मिला को अपने निशाने पर लेते हुए ट्वीट कर उनपर तंज कसा था। जिसके बाद उर्मिला ने भी कंगना को खूब खरी खोटी सुनाते हुए एक वीडियो जारी किया था। |
अपनी कॉमेडी से सबसे लोटपोट करने वाली कॉमेडियन भारती सिंह के घर पर आज नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने छापेमारी की हैं। एक ड्रग्स पैड़लर के बयान के बाद एनसीबी ने भारती और उनके पति के घर पर छापा मारा है। भारती और उनके पति पर ड्रग्स लेने का आरोप है। इसके बाद अंधेरी, लोखंडवाला और वर्सोवा स्थित घरों में रेड की गई । NCB ने यहां से नशीला पदार्थ भी बरामद किया है।
एनसीबी ने ड्रग्स मामलें को लेकर कई दिग्गज अभिनेताओं के घर पर छापेमारी कर रही है। एक्टर अर्जुन रामपाल से भी एनसीबी पिछले कई दिनों से लगातार पूछताछ कर रही है। ड्रग्स को लेकर एनसीबी ने अर्जुन रामपाल के घर पर भी छापेमारी की थी। हालांकि उनके घर से छापेमारी में कुछ नहीं मिला।
भारती इन दिनों कपिल शर्मा के शो का हिस्सा है। अपनी कॉमेडी से वह शो में आने वाले बॉलीवुड सेलिब्रिटी और दर्शकों को खूब हंसा रही है। फिलहाल मामले पर अभी तक एनसीबी ने कोई डिटेल जानकारी नहीं दी है। भारती पर एनसीबी का अगला कदम क्या होगा, यह देखने वाली बात होगी।
| अपनी कॉमेडी से सबसे लोटपोट करने वाली कॉमेडियन भारती सिंह के घर पर आज नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने छापेमारी की हैं। एक ड्रग्स पैड़लर के बयान के बाद एनसीबी ने भारती और उनके पति के घर पर छापा मारा है। भारती और उनके पति पर ड्रग्स लेने का आरोप है। इसके बाद अंधेरी, लोखंडवाला और वर्सोवा स्थित घरों में रेड की गई । NCB ने यहां से नशीला पदार्थ भी बरामद किया है। एनसीबी ने ड्रग्स मामलें को लेकर कई दिग्गज अभिनेताओं के घर पर छापेमारी कर रही है। एक्टर अर्जुन रामपाल से भी एनसीबी पिछले कई दिनों से लगातार पूछताछ कर रही है। ड्रग्स को लेकर एनसीबी ने अर्जुन रामपाल के घर पर भी छापेमारी की थी। हालांकि उनके घर से छापेमारी में कुछ नहीं मिला। भारती इन दिनों कपिल शर्मा के शो का हिस्सा है। अपनी कॉमेडी से वह शो में आने वाले बॉलीवुड सेलिब्रिटी और दर्शकों को खूब हंसा रही है। फिलहाल मामले पर अभी तक एनसीबी ने कोई डिटेल जानकारी नहीं दी है। भारती पर एनसीबी का अगला कदम क्या होगा, यह देखने वाली बात होगी। |
यह बतला देना उचित है कि चाय, काफी, कोकीन ये सभी वस्तुएँ हानिप्रद हैं; यद्यपि मुझे मालूम है कि मेरा इस बात का समर्थन बहुत कम लोग करेंगे। इन चीजों में एक प्रकार का विष होता है। चाय और कहवे में यदि दूध और खाँड़ न मिलाई जाय, तो इसमें कोई भी पोषक पदार्थ न रह जायगा । बार-बार के अनुभव से यह मान लिया गया है कि इन वस्तुओं में कोई भी ऐसा पदार्थ नहीं है जो खून को बढ़ा सके कुछ दिनों पहले इसका प्रयोग हम लोग किसी विशेष अवसर पर किया करते थे, परन्तु आज यह एक सामान्य प्रयोग हो गया है ।
सौभाग्यवश कोकीन की अधिक कीमत होने से साधारण व्यक्ति उसका इस्तेमाल नहीं कर सकते। फिर भी धनिकों के घर में इसका प्रयोग होता रहता है। चाय, काफी एवं कोकोन ये सभी पाचन शक्ति को मन्द करते हैं । ये कितने हानिकारक होते हैं,. .. इस बात से सिद्ध हो जाता है कि जो इसे एक बार भी प्रयोग करता है, उसे इसके बिना नहीं रहा जाता। पहले मुझे स्वयं सुस्ती मालूम होती थी यदि मैं नियमित समय पर चाय नहीं पीता था। एक बार किसी विशेष अवसर पर करीब चार सौ स्त्रियाँ और बच्चे इकट्ठे थे। प्रबन्धकर्ता उन्हें चाय नहीं देना चाहते थे । जो स्त्रियाँ वहाँ एकत्रित थीं उन्हें चार बजे चाय पीने की।धकारियों को इस बात की सूचना दी गई कि यदि उन्हें नियमित समय पर चाय नहीं दी गई, तो वे चलनेफिरने तक से लाचार हो जायँगीः अतः
प्रतिज्ञा भंग करनी पड़ी। चाय बनने में कुछ देर हो गई, जिस वजह से वहाँ बड़ा ही हल्ला हुआ जो स्त्रियों के हाथ में चाय का प्याला देने ही पर शान्त हुआ । मैं इस घटना के कारण को मैं अच्छी तरह से जानता हूँ ।
दूसरा एक उदाहरण यह है कि एक स्त्री चाय पीने की बुरी | यह बतला देना उचित है कि चाय, काफी, कोकीन ये सभी वस्तुएँ हानिप्रद हैं; यद्यपि मुझे मालूम है कि मेरा इस बात का समर्थन बहुत कम लोग करेंगे। इन चीजों में एक प्रकार का विष होता है। चाय और कहवे में यदि दूध और खाँड़ न मिलाई जाय, तो इसमें कोई भी पोषक पदार्थ न रह जायगा । बार-बार के अनुभव से यह मान लिया गया है कि इन वस्तुओं में कोई भी ऐसा पदार्थ नहीं है जो खून को बढ़ा सके कुछ दिनों पहले इसका प्रयोग हम लोग किसी विशेष अवसर पर किया करते थे, परन्तु आज यह एक सामान्य प्रयोग हो गया है । सौभाग्यवश कोकीन की अधिक कीमत होने से साधारण व्यक्ति उसका इस्तेमाल नहीं कर सकते। फिर भी धनिकों के घर में इसका प्रयोग होता रहता है। चाय, काफी एवं कोकोन ये सभी पाचन शक्ति को मन्द करते हैं । ये कितने हानिकारक होते हैं,. .. इस बात से सिद्ध हो जाता है कि जो इसे एक बार भी प्रयोग करता है, उसे इसके बिना नहीं रहा जाता। पहले मुझे स्वयं सुस्ती मालूम होती थी यदि मैं नियमित समय पर चाय नहीं पीता था। एक बार किसी विशेष अवसर पर करीब चार सौ स्त्रियाँ और बच्चे इकट्ठे थे। प्रबन्धकर्ता उन्हें चाय नहीं देना चाहते थे । जो स्त्रियाँ वहाँ एकत्रित थीं उन्हें चार बजे चाय पीने की।धकारियों को इस बात की सूचना दी गई कि यदि उन्हें नियमित समय पर चाय नहीं दी गई, तो वे चलनेफिरने तक से लाचार हो जायँगीः अतः प्रतिज्ञा भंग करनी पड़ी। चाय बनने में कुछ देर हो गई, जिस वजह से वहाँ बड़ा ही हल्ला हुआ जो स्त्रियों के हाथ में चाय का प्याला देने ही पर शान्त हुआ । मैं इस घटना के कारण को मैं अच्छी तरह से जानता हूँ । दूसरा एक उदाहरण यह है कि एक स्त्री चाय पीने की बुरी |
मुंबई, 3 अक्टूबरः दो साल के लंबे अंतराल के बाद, दिल्ली के लाल किले पर होने वाली प्रसिद्ध "लव-कुश रामलीला अपनी पूरी भव्यता और चमक-दमक के साथ लौट आई है। इस भव्य आयोजन में टीवी के फेमस कॉमेडी शो 'भाभीजी घर पर हैं' से पॉपुलर ऑन स्क्रीन जोड़ी- विभूति नारायण मिश्रा (आसिफ शेख) और अनीता मिश्रा (विदिशा श्रीवास्तव) ने शिरकत की। ये दोनों ही एक्टर्स दिल्ली वालों द्वारा दिल खोलकर किए गये स्वागत, रामायण की सुंदर प्रस्तुति और वहां मौजूद लोगों के साथ बातचीत करके बहुत खुश हुए। दोनों ने दिल्ली के राम लीला में पहुंचकर लोगों का दिल जीत लिया।
आसिफ शेख यानि सीरियल के विभूति नारायण मिश्रा ने अपनी खुशी का इजहार करते हुए मीडिया से कहा- लाल किले की रामलीला में आए लोग बेहतरीन थे। इन लोगों में बड़ा लगाव और जोश था, खासकर जब वह हमें पुकार रहे थे और हमारा उत्साह बढ़ा रहे थे। वह सबसे यादगार पलों में से एक था। उन्होंने आगे कहा- लव-कुश रामलीला सबसे पसंदीदा आयोजनों में से एक है, जहां देश के लाखों लोग जुटते हैं। इस साल का उत्सव ज्यादा भव्य और आकर्षक था।
आसिफ शेक ने कहा- ये रामलीला इसलिए भी ज्यादा खास थी क्योंकि लोगों की पसंदीदा रामलीला आखिरकार दो साल के बाद लौटी थी। इसमें कोई शक नहीं है कि मेरे लिए यह पूरा अनुभव जबरदस्त था। जब मैं छोटा था, तब अक्सर अपने परिवार के साथ रामलीला देखने जाया करता था। मैंने कभी सोचा नहीं था कि एक दिन मैं इस मंच पर आऊंगा और अपने शो और किरदार के बारे में लोगों से बात करूंगा। एक्टर के तौर पर यह मेरा दूसरा दौरा है।
आसिफ ने आगे कहा- मैं साल 2019 में अपने को-एक्टर रोहिताश्व (तिवारी जी) के साथ यहां आया था और उस वक्त भी लोगों के साथ हमारी जमकर बातचीत हुई थी। इस शानदार आयोजन में भाग लेने और दमदार परफॉरमेंस को देखने का यह बेहतरीन मौका देने के लिए हम पूरी आयोजन समिति के शुक्रगुजार हैं। दिल्ली वालों ने एक बार फिर मेरा दिल जीत लिया। विदिशा और मैं दिल्ली की कुछ जगहों पर भी गए और यहां के स्वादिष्ट व्यंजनों का लुत्फ भी उठाया था।
आसिफ शेख ने कहा- मैं अपने साथ इन कलात्मक जगह की कई खूबसूरत यादें लेकर जा रहा हूं। यहां के लोगों का दिल छू लेने वाला व्यवहार और लजीज पकवान बहुत याद आएंगे। लाल किले की रामलीला में पहली बार शिरकत करने के बारे में विदिशा श्रीवास्तव यानि अनीता भाभी ने कहा- यह सबसे देखने लायक आयोजनों में से एक और बेहतरीन अनुभव था। मैं हमेशा से लव-कुश रामलीला में जाना चाहती थी, क्योंकि मैंने इसके बारे में बहुत कुछ सुन रखा था। यहां के दर्शक बहुत प्यारे थे और उन्होंने हम पर खूब प्यार लुटाया।
इसे भी पढ़ेंः लग्जरी कार छोड़ सारा अली खान ने किया Maruti Alto से सफर, लोगों ने कहा- सेल में मिली है क्या?
विदिशा श्रीवास्तव ने कहा- रामलीला सबसे भव्य आयोजनों में से एक है और ऐसे बेहतरीन एक्ट को देखने का रोमांच बेहद खूबसूरत और यादगार था। सबसे अच्छी बात जो थी वह यह थी कि मंच पर आसिफ जी के साथ मजेदार नोंकझोंक और लोगों से सीधे बातचीत करना। उनकी एनर्जी और जोश बिजली के जैसे था और वह मुझे अनीता भाभी कहकर पुकार रहे थे। यह ऐसा पल है जो मुझे ताउम्र याद रहेगा। दिल्ली हमेशा से मेरे पसंदीदा शहरों में एक रहा है और मुझे यहां खरीदारी करना और खाना-पीना खूब पसंद है।
| मुंबई, तीन अक्टूबरः दो साल के लंबे अंतराल के बाद, दिल्ली के लाल किले पर होने वाली प्रसिद्ध "लव-कुश रामलीला अपनी पूरी भव्यता और चमक-दमक के साथ लौट आई है। इस भव्य आयोजन में टीवी के फेमस कॉमेडी शो 'भाभीजी घर पर हैं' से पॉपुलर ऑन स्क्रीन जोड़ी- विभूति नारायण मिश्रा और अनीता मिश्रा ने शिरकत की। ये दोनों ही एक्टर्स दिल्ली वालों द्वारा दिल खोलकर किए गये स्वागत, रामायण की सुंदर प्रस्तुति और वहां मौजूद लोगों के साथ बातचीत करके बहुत खुश हुए। दोनों ने दिल्ली के राम लीला में पहुंचकर लोगों का दिल जीत लिया। आसिफ शेख यानि सीरियल के विभूति नारायण मिश्रा ने अपनी खुशी का इजहार करते हुए मीडिया से कहा- लाल किले की रामलीला में आए लोग बेहतरीन थे। इन लोगों में बड़ा लगाव और जोश था, खासकर जब वह हमें पुकार रहे थे और हमारा उत्साह बढ़ा रहे थे। वह सबसे यादगार पलों में से एक था। उन्होंने आगे कहा- लव-कुश रामलीला सबसे पसंदीदा आयोजनों में से एक है, जहां देश के लाखों लोग जुटते हैं। इस साल का उत्सव ज्यादा भव्य और आकर्षक था। आसिफ शेक ने कहा- ये रामलीला इसलिए भी ज्यादा खास थी क्योंकि लोगों की पसंदीदा रामलीला आखिरकार दो साल के बाद लौटी थी। इसमें कोई शक नहीं है कि मेरे लिए यह पूरा अनुभव जबरदस्त था। जब मैं छोटा था, तब अक्सर अपने परिवार के साथ रामलीला देखने जाया करता था। मैंने कभी सोचा नहीं था कि एक दिन मैं इस मंच पर आऊंगा और अपने शो और किरदार के बारे में लोगों से बात करूंगा। एक्टर के तौर पर यह मेरा दूसरा दौरा है। आसिफ ने आगे कहा- मैं साल दो हज़ार उन्नीस में अपने को-एक्टर रोहिताश्व के साथ यहां आया था और उस वक्त भी लोगों के साथ हमारी जमकर बातचीत हुई थी। इस शानदार आयोजन में भाग लेने और दमदार परफॉरमेंस को देखने का यह बेहतरीन मौका देने के लिए हम पूरी आयोजन समिति के शुक्रगुजार हैं। दिल्ली वालों ने एक बार फिर मेरा दिल जीत लिया। विदिशा और मैं दिल्ली की कुछ जगहों पर भी गए और यहां के स्वादिष्ट व्यंजनों का लुत्फ भी उठाया था। आसिफ शेख ने कहा- मैं अपने साथ इन कलात्मक जगह की कई खूबसूरत यादें लेकर जा रहा हूं। यहां के लोगों का दिल छू लेने वाला व्यवहार और लजीज पकवान बहुत याद आएंगे। लाल किले की रामलीला में पहली बार शिरकत करने के बारे में विदिशा श्रीवास्तव यानि अनीता भाभी ने कहा- यह सबसे देखने लायक आयोजनों में से एक और बेहतरीन अनुभव था। मैं हमेशा से लव-कुश रामलीला में जाना चाहती थी, क्योंकि मैंने इसके बारे में बहुत कुछ सुन रखा था। यहां के दर्शक बहुत प्यारे थे और उन्होंने हम पर खूब प्यार लुटाया। इसे भी पढ़ेंः लग्जरी कार छोड़ सारा अली खान ने किया Maruti Alto से सफर, लोगों ने कहा- सेल में मिली है क्या? विदिशा श्रीवास्तव ने कहा- रामलीला सबसे भव्य आयोजनों में से एक है और ऐसे बेहतरीन एक्ट को देखने का रोमांच बेहद खूबसूरत और यादगार था। सबसे अच्छी बात जो थी वह यह थी कि मंच पर आसिफ जी के साथ मजेदार नोंकझोंक और लोगों से सीधे बातचीत करना। उनकी एनर्जी और जोश बिजली के जैसे था और वह मुझे अनीता भाभी कहकर पुकार रहे थे। यह ऐसा पल है जो मुझे ताउम्र याद रहेगा। दिल्ली हमेशा से मेरे पसंदीदा शहरों में एक रहा है और मुझे यहां खरीदारी करना और खाना-पीना खूब पसंद है। |
भारत में 5G के लॉन्च के साथ ही देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों ने अपनी 5G सर्विस को देश के अलग-अलग कोनों में लॉन्च करना शुरू कर दिया है। इस क्रम को बढ़ाते हुए एयरटेल ने ओडिशा के तीन शहरों में अपनी 5G सर्विस शुरू की है। दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल ने मंगलवार को ओडिशा के भुवनेश्वर, कटक और राउरकेला में अपनी 5जी सेवाएं शुरू करने की घोषणा की। कंपनी ने कहा कि उसने भुवनेश्वर और राउरकेला में क्रमशः कलिंगा और बिरसा मुंडा स्टेडियम में अल्ट्राफास्ट 5G सेवाओं को तैनात किया है, जो आगामी पुरुष हॉकी विश्व कप की मेजबानी कर रहे हैं। Airtel 5G Plus सर्विस कस्टमर्स के लिए चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध होंगी, क्योंकि कंपनी अपने नेटवर्क का निर्माण और रोल-आउट पूरा करना जारी रखे हुए है। मंगलवार को जारी बयान के अनुसार, जिन कस्टमर्स के पास 5G स्मार्टफोन है,वो बिना किसी अतिरिक्त लागत के हाई-स्पीड एयरटेल 5जी प्लस नेटवर्क का लाभ उठा सकेंगे। एयरटेल ने यह भी कहा कि वह अपने नेटवर्क का विस्तार करेगी और आने वाले समय में पूरे राज्य में अपनी सेवाएं उपलब्ध कराएगी। भारती एयरटेल ओडिशा के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर सौमेंद्र साहू ने कहा कि हम पुरुष हॉकी विश्व कप की मेजबानी करने वाले दो स्टेडियमों में 5G को तैनात करके बहुत रोमांचित हैं। स्टेडियम में कस्टमर्स एक सुपरफास्ट नेटवर्क का अनुभव कर सकते हैं, जो उन्हें हाई-डेफिनिशन वीडियो स्ट्रीमिंग और फोटो और वीडियो को तुरंत अपलोड करने जैसे सुविधाओं का लाभ उठाने देगा। एयरटेल 5G प्लस, हाई-डेफिनिशन वीडियो स्ट्रीमिंग, गेमिंग, मल्टीपल चैटिंग, फोटो को तुरंत अपलोड करने जैसे कुछ सुपरफास्ट एक्सेस की अनुमति देगा। उन्होंने यह भी कहा कि हम भुवनेश्वर और कटक और राउरकेला में भी अपनी 5G सेवाएं शुरू कर रहे हैं। ग्राहक अब अल्ट्राफास्ट नेटवर्क का अनुभव कर सकते हैं और मौजूदा 4G स्पीड की तुलना में 20-30 गुना तेज गति का आनंद ले सकते हैं।
| भारत में पाँचG के लॉन्च के साथ ही देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों ने अपनी पाँचG सर्विस को देश के अलग-अलग कोनों में लॉन्च करना शुरू कर दिया है। इस क्रम को बढ़ाते हुए एयरटेल ने ओडिशा के तीन शहरों में अपनी पाँचG सर्विस शुरू की है। दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल ने मंगलवार को ओडिशा के भुवनेश्वर, कटक और राउरकेला में अपनी पाँचजी सेवाएं शुरू करने की घोषणा की। कंपनी ने कहा कि उसने भुवनेश्वर और राउरकेला में क्रमशः कलिंगा और बिरसा मुंडा स्टेडियम में अल्ट्राफास्ट पाँचG सेवाओं को तैनात किया है, जो आगामी पुरुष हॉकी विश्व कप की मेजबानी कर रहे हैं। Airtel पाँचG Plus सर्विस कस्टमर्स के लिए चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध होंगी, क्योंकि कंपनी अपने नेटवर्क का निर्माण और रोल-आउट पूरा करना जारी रखे हुए है। मंगलवार को जारी बयान के अनुसार, जिन कस्टमर्स के पास पाँचG स्मार्टफोन है,वो बिना किसी अतिरिक्त लागत के हाई-स्पीड एयरटेल पाँचजी प्लस नेटवर्क का लाभ उठा सकेंगे। एयरटेल ने यह भी कहा कि वह अपने नेटवर्क का विस्तार करेगी और आने वाले समय में पूरे राज्य में अपनी सेवाएं उपलब्ध कराएगी। भारती एयरटेल ओडिशा के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर सौमेंद्र साहू ने कहा कि हम पुरुष हॉकी विश्व कप की मेजबानी करने वाले दो स्टेडियमों में पाँचG को तैनात करके बहुत रोमांचित हैं। स्टेडियम में कस्टमर्स एक सुपरफास्ट नेटवर्क का अनुभव कर सकते हैं, जो उन्हें हाई-डेफिनिशन वीडियो स्ट्रीमिंग और फोटो और वीडियो को तुरंत अपलोड करने जैसे सुविधाओं का लाभ उठाने देगा। एयरटेल पाँचG प्लस, हाई-डेफिनिशन वीडियो स्ट्रीमिंग, गेमिंग, मल्टीपल चैटिंग, फोटो को तुरंत अपलोड करने जैसे कुछ सुपरफास्ट एक्सेस की अनुमति देगा। उन्होंने यह भी कहा कि हम भुवनेश्वर और कटक और राउरकेला में भी अपनी पाँचG सेवाएं शुरू कर रहे हैं। ग्राहक अब अल्ट्राफास्ट नेटवर्क का अनुभव कर सकते हैं और मौजूदा चारG स्पीड की तुलना में बीस-तीस गुना तेज गति का आनंद ले सकते हैं। |
कांग्रेस विधायक संजय शुक्ला द्वारा रविवार को आयोजित किए जा रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं के सम्मेलन पर जिला प्रशासन द्वारा रोक लगा दी गई है। विधायक शुक्ला ने इसे अवैधानिक और भाजपा के नेताओं को खुश करने का जरिया निरूपित किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं के कहने पर प्रशासनिक अधिकारियों ने यह फैसला लिया है।
दरअसल विधानसभा क्षेत्र 1 के विधायक संजय शुक्ला द्वारा हर रविवार को अपने विधानसभा क्षेत्र के वार्ड में कार्यकर्ताओं का सम्मेलन आयोजित किया जाता है। इस सम्मेलन में वार्ड के बुजुर्गों तथा कोरोना योद्धाओं का सम्मान होता है। रविवार 14 नवंबर को वार्ड 7 के कांग्रेसियों का सम्मेलन हंसराज मठ पीलिया खाल पर आयोजित किया गया था। इस आयोजन की सूचना विधायक शुक्ला द्वारा जिला प्रशासन के अधिकारियों को नियम के अनुसार भेज दी गई थी। मामले में उन्हें मल्हारगंज एसडीएम पराग जैन द्वारा एक पत्र भेजा गया जिसमें अनुमति निरस्त करने की जानकारी दी गई है।
इस मामले विधायक शुक्ला ने कहा कि कोरोना के नाम पर एक ओर बुजुर्गों का सम्मान करने से रोका जा रहा है वहीं दूसरी ओर प्रदेश सरकार द्वारा पूरे प्रदेश से आदिवासियों को इकट्ठा कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में आयोजन किया जा रहा है। इंदौर का जिला प्रशासन एक ओर कोरोना के नाम पर भीड़ इकट्ठी होने से रोकने के लिए कदम उठाने की बात करता है तो दूसरी ओर खुद भोपाल के आयोजन में भाग लेने के लिए जा रहे आदिवासियों के लिए कैंप बनाकर व्यवस्था करने में लगा हुआ है। इस समय सारे शहर में सभी तरह के आयोजनों को अनुमति दी जा रही है। उन्होंने प्रदेश सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि इंदौर की जनता सब जानती है। भाजपा के शासन में जो कुछ हो रहा है उसका सही समय पर सही जवाब इंदौर की जनता देगी। मामले में एसडीएम पराग जैन ने बताया कि कोरोना को लेकर सितम्बर में जारी आदेश अभी यथावत है जिसमें समारोह, धरना, प्रदर्शन, रैली आदि प्रतिबंधित है। इसके पालन में उक्त अनुमति निरस्त की गई है।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
| कांग्रेस विधायक संजय शुक्ला द्वारा रविवार को आयोजित किए जा रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं के सम्मेलन पर जिला प्रशासन द्वारा रोक लगा दी गई है। विधायक शुक्ला ने इसे अवैधानिक और भाजपा के नेताओं को खुश करने का जरिया निरूपित किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं के कहने पर प्रशासनिक अधिकारियों ने यह फैसला लिया है। दरअसल विधानसभा क्षेत्र एक के विधायक संजय शुक्ला द्वारा हर रविवार को अपने विधानसभा क्षेत्र के वार्ड में कार्यकर्ताओं का सम्मेलन आयोजित किया जाता है। इस सम्मेलन में वार्ड के बुजुर्गों तथा कोरोना योद्धाओं का सम्मान होता है। रविवार चौदह नवंबर को वार्ड सात के कांग्रेसियों का सम्मेलन हंसराज मठ पीलिया खाल पर आयोजित किया गया था। इस आयोजन की सूचना विधायक शुक्ला द्वारा जिला प्रशासन के अधिकारियों को नियम के अनुसार भेज दी गई थी। मामले में उन्हें मल्हारगंज एसडीएम पराग जैन द्वारा एक पत्र भेजा गया जिसमें अनुमति निरस्त करने की जानकारी दी गई है। इस मामले विधायक शुक्ला ने कहा कि कोरोना के नाम पर एक ओर बुजुर्गों का सम्मान करने से रोका जा रहा है वहीं दूसरी ओर प्रदेश सरकार द्वारा पूरे प्रदेश से आदिवासियों को इकट्ठा कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में आयोजन किया जा रहा है। इंदौर का जिला प्रशासन एक ओर कोरोना के नाम पर भीड़ इकट्ठी होने से रोकने के लिए कदम उठाने की बात करता है तो दूसरी ओर खुद भोपाल के आयोजन में भाग लेने के लिए जा रहे आदिवासियों के लिए कैंप बनाकर व्यवस्था करने में लगा हुआ है। इस समय सारे शहर में सभी तरह के आयोजनों को अनुमति दी जा रही है। उन्होंने प्रदेश सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि इंदौर की जनता सब जानती है। भाजपा के शासन में जो कुछ हो रहा है उसका सही समय पर सही जवाब इंदौर की जनता देगी। मामले में एसडीएम पराग जैन ने बताया कि कोरोना को लेकर सितम्बर में जारी आदेश अभी यथावत है जिसमें समारोह, धरना, प्रदर्शन, रैली आदि प्रतिबंधित है। इसके पालन में उक्त अनुमति निरस्त की गई है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
'अनुपमा' बीते कई सालों से टीआरपी लिस्ट में नंबर वन पर रहने के साथ ही फैंस का सबसे पसंदीदा शो बना हुआ है। घर-घर में ये शो देखा जाता है। हर दिन फैंस को नए ट्विस्ट का इंतजार रहता है। फैंस अनुपमा और अनुज को हमेशा खुश और साथ देखने के लिए बेचैन रहते हैं। ऐसे में आने वाला एपिसोड बहुत मजेदार होने वाला है। फैंस की मनोकामना पूरी होती नजर आएगी। अनुपमा और अनुज एक बार फिर साथ होते नजर आएंगे। वहीं बा-बापूजी डिंपी से बहुत परेशान होकर घर छोड़ने का फैंसला लेंगे।
आने वाले एपिसोड में आप देखेंगे बा और डिंपी के बीच विवाद बढ़ता ही जाएगा। बा तय करेंगी कि वो डिंपी के साथ अपना आगे का जीवन नहीं बिता सकतीं। वो उसके बुरे व्यवहार से तंग आकर घर छोड़ने का फैसला करेंगी। डिंपी बा के बारे में गलत बाते करेगी और बा को कहेगी कि घर में हो रही लड़ाइयों की वो मुख्य वजह हैं। परिवार में सारा स्ट्रेस उन्हीं की वजह से है। बाकी पारिवार के लोगों को भी डिंपी खूब सुनाएगी और बा को सबके सामने विलेन की तरह खड़ा करेगी।
इस बेइज्जती के बाद बा तय करेंगी कि वो घर छोड़कर वृद्धा आश्रम में रहेंगी। बाबूजी भी उनके साथ जाने के लिए तैयार रहेंगे। वो अनुपमा से अपना दर्द बाटेंगी। वो कहेंगी कि उन्हें उनके परिवार से बहुत प्यार है, जिसे वो बिखरता नहीं देख सकतीं। ऐसे में अनुपमा, डिंपी को सही रास्ते पर ला पाएगी या नहीं, ये देखने वाली बात होगी। वहीं क्या बा सच में घर छोड़कर चली जाएंगी ये भी देखने वाली बात होगी।
वहीं दूसरी ओर अनुपमा अनुज का कमरे में रोमांस देखने को मिलेगा। दोनों साथ में अच्छा वक्त बिताएंगे। दोनों एक दूसरे को किस करते नजर आएंगे। इसी बीच दोनों को माया देख लेगी और वो जल भुनकर राख होगी। माया और अनुज को रोमांस करता देख माया एक नया बवाल मचा देगी। उसे लगेगा कि उससे छिपकर अनुज-अनुपमा रोमांस करते हैं और वो एक-दूसरे से कभी दूर नहीं हुए।
| 'अनुपमा' बीते कई सालों से टीआरपी लिस्ट में नंबर वन पर रहने के साथ ही फैंस का सबसे पसंदीदा शो बना हुआ है। घर-घर में ये शो देखा जाता है। हर दिन फैंस को नए ट्विस्ट का इंतजार रहता है। फैंस अनुपमा और अनुज को हमेशा खुश और साथ देखने के लिए बेचैन रहते हैं। ऐसे में आने वाला एपिसोड बहुत मजेदार होने वाला है। फैंस की मनोकामना पूरी होती नजर आएगी। अनुपमा और अनुज एक बार फिर साथ होते नजर आएंगे। वहीं बा-बापूजी डिंपी से बहुत परेशान होकर घर छोड़ने का फैंसला लेंगे। आने वाले एपिसोड में आप देखेंगे बा और डिंपी के बीच विवाद बढ़ता ही जाएगा। बा तय करेंगी कि वो डिंपी के साथ अपना आगे का जीवन नहीं बिता सकतीं। वो उसके बुरे व्यवहार से तंग आकर घर छोड़ने का फैसला करेंगी। डिंपी बा के बारे में गलत बाते करेगी और बा को कहेगी कि घर में हो रही लड़ाइयों की वो मुख्य वजह हैं। परिवार में सारा स्ट्रेस उन्हीं की वजह से है। बाकी पारिवार के लोगों को भी डिंपी खूब सुनाएगी और बा को सबके सामने विलेन की तरह खड़ा करेगी। इस बेइज्जती के बाद बा तय करेंगी कि वो घर छोड़कर वृद्धा आश्रम में रहेंगी। बाबूजी भी उनके साथ जाने के लिए तैयार रहेंगे। वो अनुपमा से अपना दर्द बाटेंगी। वो कहेंगी कि उन्हें उनके परिवार से बहुत प्यार है, जिसे वो बिखरता नहीं देख सकतीं। ऐसे में अनुपमा, डिंपी को सही रास्ते पर ला पाएगी या नहीं, ये देखने वाली बात होगी। वहीं क्या बा सच में घर छोड़कर चली जाएंगी ये भी देखने वाली बात होगी। वहीं दूसरी ओर अनुपमा अनुज का कमरे में रोमांस देखने को मिलेगा। दोनों साथ में अच्छा वक्त बिताएंगे। दोनों एक दूसरे को किस करते नजर आएंगे। इसी बीच दोनों को माया देख लेगी और वो जल भुनकर राख होगी। माया और अनुज को रोमांस करता देख माया एक नया बवाल मचा देगी। उसे लगेगा कि उससे छिपकर अनुज-अनुपमा रोमांस करते हैं और वो एक-दूसरे से कभी दूर नहीं हुए। |
लोकसभा की मतगणना में आज अहीरवाल में जिस प्रकार कांग्रेस धरासाही हुई वो ना केवल कांग्रेस समर्थकों के लिए बल्कि स्वयं उन कदावर नेताओं के लिए भी बडा झटका है, जो आने वाले विधानसभा चुनावों में ताल ठोकने के लिए बेताब हैं। हांलाकि मोदी फैक्टर पूरे देशभर में चला है, लेकिन कांगे्रस उम्मीद के वितरित अहीरवाल में अपना कोई जादू नही दिखा पाई। बात करें भिवानी-महेन्द्रगढ की तो इसमें अहीरवाल की चार विधानसभा सीटें पडती है और हैरानी की बात ये है कि इन चारों सीटों पर ही कांग्रेस के नेता काफी असरदार माने जाते है। महेन्द्रगढ में जहां पूर्व संसदीय सचिव राव दानसिंह अपना अच्छा खासा वजूद रखते है, वहीं नारनौल में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री राव नरेन्द्र सिंह, पूर्व विधायक राधेश्याम शर्मा वजनदार नेता माने जाते है। इसी प्रकार अटेली में पूर्व संसदीय सचिव अनिता यादव, पूर्व विधायक नरेश यादव है, वहीं नांगल चौधरी विधानसभा में पूर्व चेयरमैन सत्यपाल दहिया, ओबीसी सेल के राष्ट्रीय संयोजक अभिमन्यु राव, चेयरमैन एसोसिएशन के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष प्रवीण चौधरी, पूर्व प्रत्याशी चन्द्रप्रकाश गुर्जर, सतीश रावत, महेश सोढा समेत अनेक नेता कांग्रेस का झंडा बुलंद कर रहे है, इतना ही नहीं चुनाव के ऐन पहले नांगल चौधरी से पूर्व में विधायक रह चुके राव बहादुर सिंह ने भी पाला बदल कर कांग्रेस में अपनी आस्था जता दी थी, जिसके बाद माना यह जा रहा था कि उनके आने से जिले में कांग्रेस प्रत्याशी को ओर अधिक मजबूती मिलेगी, लेकिन इस सबके बावजूद जिले के चारों विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस प्रत्याशी श्रुति चौधरी को मिली बडी हार ने कांग्रेस समर्थकों के साथ-साथ पार्टी के नेताओं को भी सुन्नपात में लाने का काम कर दिया हैं। ना केवल नांगल चौधरी बल्कि जिले भर के सभी हलकों में भाजपा प्रत्याशी को प्रत्येक राऊंउ में मिली जीत के बाद जिले से कुल 237427 की कुल बढ़त मिलना इस बात का साफ संकेत है कि अहीरवाल में कांग्रेसी नेताओं को जादू बिलकुल नहीं चला हैं। प्रदेश में इस बार सत्ता का दरवाजा देखने को ललायित कांग्रेस को लोकसभा के इस चुनाव में प्रदेश के मतदाताओं ने ऐसा धोबी-पटका दिया है कि अब कुछ ही समय बाद होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस को इस करारी हार से उभरना भी एक बडी चुनौती साबित होगा।
| लोकसभा की मतगणना में आज अहीरवाल में जिस प्रकार कांग्रेस धरासाही हुई वो ना केवल कांग्रेस समर्थकों के लिए बल्कि स्वयं उन कदावर नेताओं के लिए भी बडा झटका है, जो आने वाले विधानसभा चुनावों में ताल ठोकने के लिए बेताब हैं। हांलाकि मोदी फैक्टर पूरे देशभर में चला है, लेकिन कांगे्रस उम्मीद के वितरित अहीरवाल में अपना कोई जादू नही दिखा पाई। बात करें भिवानी-महेन्द्रगढ की तो इसमें अहीरवाल की चार विधानसभा सीटें पडती है और हैरानी की बात ये है कि इन चारों सीटों पर ही कांग्रेस के नेता काफी असरदार माने जाते है। महेन्द्रगढ में जहां पूर्व संसदीय सचिव राव दानसिंह अपना अच्छा खासा वजूद रखते है, वहीं नारनौल में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री राव नरेन्द्र सिंह, पूर्व विधायक राधेश्याम शर्मा वजनदार नेता माने जाते है। इसी प्रकार अटेली में पूर्व संसदीय सचिव अनिता यादव, पूर्व विधायक नरेश यादव है, वहीं नांगल चौधरी विधानसभा में पूर्व चेयरमैन सत्यपाल दहिया, ओबीसी सेल के राष्ट्रीय संयोजक अभिमन्यु राव, चेयरमैन एसोसिएशन के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष प्रवीण चौधरी, पूर्व प्रत्याशी चन्द्रप्रकाश गुर्जर, सतीश रावत, महेश सोढा समेत अनेक नेता कांग्रेस का झंडा बुलंद कर रहे है, इतना ही नहीं चुनाव के ऐन पहले नांगल चौधरी से पूर्व में विधायक रह चुके राव बहादुर सिंह ने भी पाला बदल कर कांग्रेस में अपनी आस्था जता दी थी, जिसके बाद माना यह जा रहा था कि उनके आने से जिले में कांग्रेस प्रत्याशी को ओर अधिक मजबूती मिलेगी, लेकिन इस सबके बावजूद जिले के चारों विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस प्रत्याशी श्रुति चौधरी को मिली बडी हार ने कांग्रेस समर्थकों के साथ-साथ पार्टी के नेताओं को भी सुन्नपात में लाने का काम कर दिया हैं। ना केवल नांगल चौधरी बल्कि जिले भर के सभी हलकों में भाजपा प्रत्याशी को प्रत्येक राऊंउ में मिली जीत के बाद जिले से कुल दो लाख सैंतीस हज़ार चार सौ सत्ताईस की कुल बढ़त मिलना इस बात का साफ संकेत है कि अहीरवाल में कांग्रेसी नेताओं को जादू बिलकुल नहीं चला हैं। प्रदेश में इस बार सत्ता का दरवाजा देखने को ललायित कांग्रेस को लोकसभा के इस चुनाव में प्रदेश के मतदाताओं ने ऐसा धोबी-पटका दिया है कि अब कुछ ही समय बाद होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस को इस करारी हार से उभरना भी एक बडी चुनौती साबित होगा। |
दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक और आध्यात्मिक मेला कुंभ प्रयागराज में शुरू हो गया है, जो 4 मार्च तक चलेगा। इस दौरान इन 49 दिनों में करीब 13 से 15 करोड़ लोगों के कुंभ में आने की उम्मीद है। मेले की कई दिल को छू जाने वाली तस्वीरें आ रही हैं। ऐसी ही कुछ तस्वीरें देखिए नीचे।
पहला शाही स्नान 15 जनवरी को सुबह करीब 5:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक चला।
कुंभ में पहली बार साधु संतों पर हेलीकॉप्टर से फूल बरसाए गए।
कुंभ मेले के पहले दिन लाखों की संख्या में साधु संत और श्रद्धालुओं का प्रयाग में आगमन हुआ है। सभी मकर संक्रांति के अवसर पर कुंभ स्नान करके पुण्य कमाने की लालसा लिए हुए आए।
सरकारी आंकड़ों के माने तो कुंभ 2019 के आयोजन में 4,300 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। कुंभ और और भव्य और लोगों की भीड़ जुटाने के लिए सरकार ने 10 करोड़ लोगों के मोबाइल पर मैसेज भेजकर कुंभ में आने का निमंत्रण दिया है।
राज्य सरकार की माने तो ऐसा पहली बार हुआ है जब मेला क्षेत्र करीब 45 वर्ग किमी के दायरे में फैला है।
मेले में 50 करोड़ की लागत से कुल 4 टेंट सिटी- कल्प वृक्ष, कुंभ कैनवास, वैदिक टेंट सिटी, इन्द्रप्रस्थम सिटी बसाई गई हैं।
देश में कुंभ 4 जगहों पर होता है- प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक। इनमें से हर जगह पर हर 12वें साल कुंभ का आयोजन होता है।
कुंभ 2019 के आयोजन में राज्य सरकार की 20 और केंद्र सरकार की 6 संस्थाएं और विभाग लगे हैं। मेला क्षेत्र में पीने के पानी की पुख्ता व्यवस्था की गई है। इसके लिए 690 किमी लंबी पाइपलाइन बिछाई गई है।
इन तस्वीरों और तस्वीरों के साथ-साथ दी गई जानकारी के आंकलन पर कहा जा सकता है कि ये कुंभ वाकई भव्य कुंभ है।
| दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक और आध्यात्मिक मेला कुंभ प्रयागराज में शुरू हो गया है, जो चार मार्च तक चलेगा। इस दौरान इन उनचास दिनों में करीब तेरह से पंद्रह करोड़ लोगों के कुंभ में आने की उम्मीद है। मेले की कई दिल को छू जाने वाली तस्वीरें आ रही हैं। ऐसी ही कुछ तस्वीरें देखिए नीचे। पहला शाही स्नान पंद्रह जनवरी को सुबह करीब पाँच:तीस बजे से शाम चार:तीस बजे तक चला। कुंभ में पहली बार साधु संतों पर हेलीकॉप्टर से फूल बरसाए गए। कुंभ मेले के पहले दिन लाखों की संख्या में साधु संत और श्रद्धालुओं का प्रयाग में आगमन हुआ है। सभी मकर संक्रांति के अवसर पर कुंभ स्नान करके पुण्य कमाने की लालसा लिए हुए आए। सरकारी आंकड़ों के माने तो कुंभ दो हज़ार उन्नीस के आयोजन में चार,तीन सौ करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। कुंभ और और भव्य और लोगों की भीड़ जुटाने के लिए सरकार ने दस करोड़ लोगों के मोबाइल पर मैसेज भेजकर कुंभ में आने का निमंत्रण दिया है। राज्य सरकार की माने तो ऐसा पहली बार हुआ है जब मेला क्षेत्र करीब पैंतालीस वर्ग किमी के दायरे में फैला है। मेले में पचास करोड़ की लागत से कुल चार टेंट सिटी- कल्प वृक्ष, कुंभ कैनवास, वैदिक टेंट सिटी, इन्द्रप्रस्थम सिटी बसाई गई हैं। देश में कुंभ चार जगहों पर होता है- प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक। इनमें से हर जगह पर हर बारहवें साल कुंभ का आयोजन होता है। कुंभ दो हज़ार उन्नीस के आयोजन में राज्य सरकार की बीस और केंद्र सरकार की छः संस्थाएं और विभाग लगे हैं। मेला क्षेत्र में पीने के पानी की पुख्ता व्यवस्था की गई है। इसके लिए छः सौ नब्बे किमी लंबी पाइपलाइन बिछाई गई है। इन तस्वीरों और तस्वीरों के साथ-साथ दी गई जानकारी के आंकलन पर कहा जा सकता है कि ये कुंभ वाकई भव्य कुंभ है। |
Dr. Haleema YezdaniDr. Haleema Yezdani बेंगलुरु के प्रसिद्ध सामान्य चिकित्सा हैं। कई क्लीनिक और अस्पतालों में Dr. Haleema Yezdani को काम करने का 19 साल से अधिक अनुभव है। General physician, teleconsultation में स्पेशलिस्ट Dr. Haleema Yezdani हैं। कृपया Dr. Haleema Yezdani की विशेषज्ञता की सम्पूर्ण सूची के लिए प्रोफाइल पेज देखें।
| Dr. Haleema YezdaniDr. Haleema Yezdani बेंगलुरु के प्रसिद्ध सामान्य चिकित्सा हैं। कई क्लीनिक और अस्पतालों में Dr. Haleema Yezdani को काम करने का उन्नीस साल से अधिक अनुभव है। General physician, teleconsultation में स्पेशलिस्ट Dr. Haleema Yezdani हैं। कृपया Dr. Haleema Yezdani की विशेषज्ञता की सम्पूर्ण सूची के लिए प्रोफाइल पेज देखें। |
नई दिल्ली, 15 फरवरी । एनटीपीसी ने सोमवार को कहा कि वह उत्तराखंड के चमोली जिले में सात फरवरी को तपोवन परियोजना में प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को तत्काल मुआवजे के वितरण के लिए सभी तौर-तरीकों और प्रक्रियाओं पर अपनी नजर बनाए हुए है।
एनटीपीसी ने कहा कि आधुनिक मशीनरी के साथ बचाव अभियान भी पूरे जोर-शोर से जारी है।
एनटीपीसी परियोजना के निर्माण में लगी एजेंसी के ठेका मजदूरों के परिजनों को 20 लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा। वहीं उत्तराखंड और केंद्र सरकार ने भी क्रमशः चार लाख रुपये और दो लाख रुपये के मुआवजे के पैकेज की घोषणा की है। इसके अलावा जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को पांच लाख रुपये से 15 लाख रुपये तक पीएफ और कर्मचारी मुआवजा अधिनियम के तहत भी सहायता मिलेगी।
एनटीपीसी की टीम प्रत्येक लापता मजदूर का भी पता लगाने में जुटी हुई है। हर मजदूर के संबंध में आवश्यक सूचना का पता लगाने के साथ ही जिला प्रशासन के साथ संपर्क भी स्थापित किया जा रहा है।
एनटीपीसी के तपोवन विष्णुगाड परियोजना में बचाव अभियान पूरी तरह से जारी है। सुरंग में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए कई एजेंसियों द्वारा व्यापक समन्वित कार्य किया जा रहा है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि किसी भी देरी से बचने के लिए बचाव अभियान में शामिल सभी एजेंसियों के साथ वास्तविक समय की जानकारी साझा की जा रही है।
एनटीपीसी, टीएचडीसी, सीआईएसएफ, यूपीएनएल और अन्य एजेंसियों से इंजीनियर, अधिकारी, भूवैज्ञानिक, वैज्ञानिक, सुरक्षा अधिकारी सहित 325 से अधिक कर्मी मौके पर हैं और बचाव कार्य में लगे हुए हैं।
बयान में कहा गया है कि जिला प्रशासन, आईटीबीपी, बीआरओ, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना, राज्य पीडब्ल्यूडी, एसजेवीएन और आरवीएनएल से भी लगातार समर्थन मिल रहा है।
एनटीपीसी की समर्पित टीमें बचाव दलों की सहायता करके घटना के पीछे के पूरे बचाव अभियान का प्रबंधन कर रही हैं। कंपनी ऑपरेशन की गति बढ़ाने के लिए आधुनिक मशीनों का उपयोग कर रही है।
बता दें कि सात फरवरी को उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्लेशियर टूटने के बाद ऋषिगंगा नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया था। एक बड़े सैलाब में कई लोग बह गए थे। अभी भी काफी लोग लापता हैं, जिन्हें ढूंढने का काम लगातार जारी है।
Disclaimer: This story is auto-generated from IANS service.
| नई दिल्ली, पंद्रह फरवरी । एनटीपीसी ने सोमवार को कहा कि वह उत्तराखंड के चमोली जिले में सात फरवरी को तपोवन परियोजना में प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को तत्काल मुआवजे के वितरण के लिए सभी तौर-तरीकों और प्रक्रियाओं पर अपनी नजर बनाए हुए है। एनटीपीसी ने कहा कि आधुनिक मशीनरी के साथ बचाव अभियान भी पूरे जोर-शोर से जारी है। एनटीपीसी परियोजना के निर्माण में लगी एजेंसी के ठेका मजदूरों के परिजनों को बीस लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा। वहीं उत्तराखंड और केंद्र सरकार ने भी क्रमशः चार लाख रुपये और दो लाख रुपये के मुआवजे के पैकेज की घोषणा की है। इसके अलावा जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को पांच लाख रुपये से पंद्रह लाख रुपये तक पीएफ और कर्मचारी मुआवजा अधिनियम के तहत भी सहायता मिलेगी। एनटीपीसी की टीम प्रत्येक लापता मजदूर का भी पता लगाने में जुटी हुई है। हर मजदूर के संबंध में आवश्यक सूचना का पता लगाने के साथ ही जिला प्रशासन के साथ संपर्क भी स्थापित किया जा रहा है। एनटीपीसी के तपोवन विष्णुगाड परियोजना में बचाव अभियान पूरी तरह से जारी है। सुरंग में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए कई एजेंसियों द्वारा व्यापक समन्वित कार्य किया जा रहा है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि किसी भी देरी से बचने के लिए बचाव अभियान में शामिल सभी एजेंसियों के साथ वास्तविक समय की जानकारी साझा की जा रही है। एनटीपीसी, टीएचडीसी, सीआईएसएफ, यूपीएनएल और अन्य एजेंसियों से इंजीनियर, अधिकारी, भूवैज्ञानिक, वैज्ञानिक, सुरक्षा अधिकारी सहित तीन सौ पच्चीस से अधिक कर्मी मौके पर हैं और बचाव कार्य में लगे हुए हैं। बयान में कहा गया है कि जिला प्रशासन, आईटीबीपी, बीआरओ, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना, राज्य पीडब्ल्यूडी, एसजेवीएन और आरवीएनएल से भी लगातार समर्थन मिल रहा है। एनटीपीसी की समर्पित टीमें बचाव दलों की सहायता करके घटना के पीछे के पूरे बचाव अभियान का प्रबंधन कर रही हैं। कंपनी ऑपरेशन की गति बढ़ाने के लिए आधुनिक मशीनों का उपयोग कर रही है। बता दें कि सात फरवरी को उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्लेशियर टूटने के बाद ऋषिगंगा नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया था। एक बड़े सैलाब में कई लोग बह गए थे। अभी भी काफी लोग लापता हैं, जिन्हें ढूंढने का काम लगातार जारी है। Disclaimer: This story is auto-generated from IANS service. |
प्रदूषित पर्यावरण और आम विकास
पौष्टिक महत्व
भारतवर्ष में अनेक फल पैदा होते हैं, जिनमें आम सर्वश्रेष्ठ फल है। शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जो आम खाना न पसन्द करता हो । आस विटामिन-ए का एक अति प्रचुर स्रोत है। प्रति 100 ग्राम गूदे में 2743 मिलीग्राम विटामिन-ए की मात्रा विद्यमान रहती है । विटामिन-ए नेत्रों की ज्योति को बढ़ाने और सही रखने में बड़ा सहायक होता है। इसके अतिरिक्त इन गूदों में विटामिन-सी 31 मिलीग्राम, विटामिन बी-1 ( थायमिन) 40, विटामिन बी-2 ( राइबोफ्लैनि) 50, निकोटिनिक एसिड ( नियासिन ) 0-3, कैल्शियम 10-14 और फॉस्फोरस 16-20 मिलीग्राम तथा प्रोटीन 0-6 ग्राम, शर्करा 16.9 ग्राम और ऊष्मा शक्ति 50 कैलोरी पाई जाती है ।
आम चूसने वाले और काट कर खाने वाले - दो प्रकार के होते हैं । इस महत्वपूर्ध फल की हजारों किस्में हैं, जिनके अलग-अलग स्वाद और सुवास होते हैं । कोई बड़े तो कोई छोटे, कोई सुनहरे, कोई पीले तो कोई मीठे या खटमीठे ।
अपने देश में सबसे अच्छी किस्म अल्फॉन्जो है जिसके बाद पेरी की गणना की जाती है। ये दोनों किस्में महाराष्ट्र की हैं । बंगाल की किस्म गोपाल भोग, मालदा, कृष्ण भोग, जरदालू, हिमसागर, दक्षिणी भारत की रोमानी, नीलम, मालगोवा स्वर्ण रेखा, बंगलोरा ( तोतापरी), बिहार की किस्म, गुलाब खास, मिठुआ, सुकुल, सिपिया, हिम सागर, कृष्ण भोग और उत्तरी भारत की किस्म बाम्बे ग्रीन और बाम्बे यलो प्रमुख प्रचलित किस्में हैं ।
आम की किस्म "दशहरी " उत्तर प्रदेश की सर्वप्रिय व सर्वश्रेष्ठ किस्म है, जो विश्वविख्यात है । यह ख्याति लखनऊ जिले में मलीहाबाद के दशहरी नामक ग्राम से प्राप्त हुई । इसी प्रकार लखनऊ के ग्राम चौसा से वहां की विख्यात किस्म "समरबहिश्त चौसा " ( खजरी ) विकसित हुई । इनके अतिरिक्त लखनऊ की सफेदा मलीहाबाद और सफेदा लखनऊ, गोरखपुर की गौरजीत व कपुरी, वाराणसी की लंगड़ा बनारसी, मेरठ की रटौल उत्तर प्रदेश की प्रमुख व्यापारिक किस्में हैं। हुस्नेआरा, फजरी, ब्राइडऑफ रशा, सफ्दर पसंद, खासुलखास भी आम को अच्छी किस्में हैं ।
भारतीय कृषि अनुसन्धान संस्थान, नई दिल्ली द्वारा विकसित व हर साल फलने वाली दो किस्में - आम्रपाली (दशहरी x नीलम) और मल्लिका (नीलम x दशहरी) दिन प्रतिदिन ख्याति प्राप्त करती जा रही हैं। आम्रउपनिदेशक उद्यान, इलाहाबाद मण्डल ( अवकाश प्राप्त ), सी - 67, गुरू तेग बहादुर नगर (करेली हाउसिंग स्कीम ), इलाहाबाद- 211016
पाली आम के पौधों की माँगें विशेष रूप से इसलिये और बढ़ रही है कि इसे "हाई डेन्सिटी ऑरचर्ड" प्रक्रिया के अन्तरगत केवल 2.5 x 2.5 मीटर ( 9 x 9 फीट) की दूरी पर लगा सकते हैं और पौधे भी बौने होते हैं । इनके एक हेक्टेयर में 1337 पौधे वर्गाकार प्रणाली से लगाये जा सकते हैं, जबकि षटकोंण प्रणाली से यह संख्या बढ़कर 1555 हो जाती है । आम्रपाली आम की गृह बाटिका में भी लगा सकते हैं ।
फल संरक्षण
आम के पके फल से जैम, जेली, स्क्वास, चटनी, आम पापड़ व टॉफी निर्माण करते हैं । इनके कतरों की डिब्बाबन्दी भी की जाती है । कच्चे आम से नमकीन व मीठे अचार, चटनी शर्बत, पना तथा सुखा कर खटाई व आम चूर्ण तैयार करते हैं ।
विदेणी मुद्रा अर्जन का स्रोत
आम अपने देश की एक ऐसी महत्वपूर्ण प्राकृतिक सम्पदा है जिसके निर्यात से विदेशी मुद्रा अर्जित करने की प्रबल सम्भावनायें हैं । महाराष्ट्र के अल्फॉन्जो और उत्तर प्रदेश के दशहरी आम हर वर्ष विदेशों को निर्यात किये जाते हैं । इन्हीं सारी गुणवत्ताओं के ही कारण आम को फलों का राजा कहा जाता है ।
क्षेत्रफल व पैदावार
अपने देश में फलों के अंतर्गत कुल क्षेत्रफल का लगभग 44 प्रतिशत भाग ( लगभग 11 लाख हेक्टेयर ) केवल आम के ही अंतर्गत है । इसी का करीब 44 प्रतिशत ही भाग ( लगभग 4,84,000 हेक्टेयर) केवल उत्तर प्रदेश में हैं । आम की कुल पैदावार देश में 111 स्राख टन होती है । उत्तर प्रदेश में इसकी लगभग 31 प्रतिशत अर्थात् 34,41,000 टन पैदाबार होती है ।
समुद्र तल से 1000 मीटर की ऊँचाई तक अपने देश के कोने-कोने में आम उगाया जाता है। इनमें क्रमानुसार उत्तर प्रदेश, बिहार, आन्ध्र प्रदेश, पश्चिमी बंगाल, उड़ीसा, केरल, तमिलनाडु महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, त्रिपुरा, पंजाब, असम, मेघालय, लक्ष्वदीप व अण्डमन, जम्मू व कश्मीर, हिमांचल प्रदेश, सिक्किम तथा राजस्थान प्रमुख हैं ।
उत्तर प्रदेश में लखनऊ ( मलीहाबाद), इलाहाबाद ( कड़ा व सिराथू तथा चाका ), प्रतापगढ़ (कुण्डा), फतेहपुर, कानपुर, फरूखाबाद ( कायमगंज), अलीगढ़ ( अतरौली व सासनी), सहारनपुर, मेरठ, बुलन्दशहर, गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, वाराणसी, गोरखपुर, देवरिया ( पडरौना), फैजाबाद व अन्य अधिकांश जनपदों में आम के बाग स्थापित हैं ।
कुछ क्षेत्र तो ऐसे हैं जिनमें आम के अतिरिक्त अमरूद और आंवला जैसे महत्वपूर्ण फलों के भी बहुत बड़े बड़े क्षेत्रों में लगातार उन्हीं फलों के बाग स्थापित हैं । जैसे इलाहाबाद के सुलेम सराय क्षेत्र में असरूद के और प्रतापगढ़ के गोंडे ग्राम तथा उसके आस-पास आंवले के बाग ही बाग दिखाई पड़ते हैं । इसी प्रकार ग्राम पटहटिया
कलां ( प्रतापगढ़-वाराणसी सड़क पर ) में श्री महाबल सिंह के उद्यान में आंवले की विशिष्ट किस्में मौजूद हैं, जिनकी प्रतापगढ़ जनपद में सर्वप्रथम लगभग 30 वर्ष पूर्व उत्तर प्रदेश उद्यान विभाग ( उस समय कृषि विभाग का उद्यान अनुभाग) द्वारा आंवले की पौधशाला (नर्सरी) पंजीकृत की गई, जो यशवंत नर्संरी के नाम से जानी जाती है ।
प्रदूषण का प्रभाव
इन प्राकृतिक महत्वपूर्ण सम्पदाओं की सुरक्षा करना अपना पुनीत कर्तव्य है, जिसे युद्धस्तर पर अभियान के रूप में चलाना चाहिये । परन्तु अपने देश का दुर्भाग्य है कि दिन प्रति दिन बढ़ती हुई जनसंख्या के दबाव से बागबगीचे कटते जा रहे हैं जिनमें आवासीय कॉलनियाँ बनाई जा रही हैं, जिससे निश्चय ही पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, जबकि स्वच्छ वातावरण के लिए बाग-बगीचों व पेड़-पौधों का रहना अत्यन्त आवश्यक है ।
दूसरी ओर जो बाग-बगीचे बचे भी हैं वे प्रदूषित पर्यावरण से नष्ट होते जा रहे हैं । धूल धूसरित व दयनीय दशा में पड़ी सड़कों की हवा और वाहनों से उड़ती हुई गर्द तथा कारखानों व वाहनों के काले धुँये और कीड़ों मकोड़ों द्वारा छोड़े गये काले पदार्थ ( फफूंदियां ) आदि - ये सब वृक्षों की पत्तियों जौर फूलों-फलों पर अपनी तह जमाये जा रहे हैं, जिससे प्रकाशसंश्लेषण और श्वसन क्रिया में बाधा पड़ती है । फलतः अन्य कीड़े-मकोड़े और व्याधियां भी स्वतः आमंत्रित हो जाती हैं और पेड़-पौधों की स्वस्थ रूप से बढ़वार और फलों की पैदावार पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं। अधिकांश जनता बीड़ी-सिगरेट के धुंए और तम्बाकू की विषैली दुर्गन्ध हवा में तथा दूसरों के मुँह पर छोड़ने में निसंकोच व्यस्त रहती है। इन्हीं सभी कारणों से प्रदूषित वायु की अधिकता और प्राणवायु - ऑक्सीजन की कमी होती जा रही है ।
इसी प्रकार आम जैसे महत्वपूर्ण व सर्वश्रेष्ठ फल के साथ ज्यादती हो रही है और यह है आम के बागों के आस-पास ईंटों के भट्टों का स्थापित रहना । ईंटों के इन भट्टों में जलते हुए कोयलों के धुंए में मौजूद कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और इथिलीन गैसें पर्यावरण को प्रदूषित कर रही हैं । इसके फलस्वरूप ये गैसें आम के विकास में बाधक हो रही हैं, क्योंकि ये आम की फसल के लिए अत्यन्त घातक हैं ।
कोयलिया रोग व उसके लक्षण
आम की फसल के समय जब फलों की वृद्धि अप्रैल-मई में होती रहती है, उस समय ईंटों के भट्ठों के पास स्थित आम के बागों के फलों की शिखाएं जो नीचे की ओर लटकती रहती हैं (चोंच की ओर के भाग), काली पड़ जाती हैं । पहले वायुमण्डल में फैली ये गैसें वृद्धि करते हुए आम के कच्चे फलों की शिखाओं में प्रवेश करती हैं । इसके बाद शिखाओं पर हल्का सा दाग बनता है । फिर ये दाग पानी सोखे हुए जैसे -भूरे रंग के धब्बों बदल जाते हैं । बाद में ये धब्बे धीरे-धीरे काले पड़ जाते हैं और फलों में सड़न तथा कभी-कभी फटांव भी पैदा हो जाते हैं ।
रोग का प्रकोप हो जाने पर रोग ऊपर की ओर बढ़ता जाता है । अन्त में काले धब्बे छिलके व गूदे सहित सूख कर कड़े हो जाते हैं तथा सिकुड़ कर चपटे भी हो जाते हैं । प्रकोप अधिक भयंकर होने पर सूखे गूदे वाले भाग के पास से भीतर की गुठली का कुछ भाग बाहर को निकलआता है ।
वास्तव में आम का यह रोग एक दैहिकी विकार या असन्तुलन है, जिसे 'ब्लैकटिप' या 'कोयलिया' रोग कहते हैं । यह 'काला-सिरा' नाम से भी जाना जाता है ।
आम में कोयलिया रोग
कोयलिया रोग से नुकसान
कोयलिया रोग के प्रकोप से फलों की बढ़वार भी रुक जाती है और परिपक्व होने के पूर्व ही पेड़ पर से गिर भी जाते हैं । ऐसा भी पाया गया है कि प्रभावित फलों की अपेक्षा ये प्रभावित आम कुछ पके से भी हो जाते हैं । परन्तु इन आमों का बाजार में कोई दाम नहीं मिलता ।
प्रयोग एवं सर्वेक्षण
कुछ वैज्ञानिकों ने आम के मौसम में आम के बागों के आस-पास जहाँ ईंटों के भट्ठे नहीं थे वहां कोयले जला कर देखा तो फलों में यह विकार देखने में आया । इससे इस बात की पुष्टि हुई कि जलते हुए कोयले के धुंए से निकली हुई गैसें वास्तव में आम की फसल को क्षति पहुँचाती हैं ।
डॉ० पी० के० सेन 'एक औद्यानिक वैज्ञानिक' के एक सर्वेक्षण के अनुसार ईंटों के भट्ठों से धुँए की गैसें जो वातावरण को प्रदूषित करती हैं उनके पास स्थित बागों में आम के फलों को क्षति पहुँचाती हैं। बिहार, बंगाल, पंजाब और उत्तर प्रदेश जैसे प्रदेशों में ये प्रकोप अधिक पाये गये, जबकि भट्ठों से दूर स्थित बागों में ये प्रकोप नहीं पाये गये ।
यह भी ज्ञात हुआ कि फल जब 22 सेमी ० ( एक इन्च ) के हो जाते हैं उसी समय से ब्लैक टिप रोग का प्रकोप शुरू हो जाता है । ऐसा इसलिए ही होता है क्योंकि उस समय ईंटों के भट्ठे चालू रहते हैं । भट्ठे चालू रहते और आम की वृद्धि अर्थात् अप्रैल मई की अवधि के बाद ये गैसें फलों में यह विकार नहीं पैदा करती हैं, बल्कि फल अपेक्षाकृत कुछ जल्दी ही पक जाते हैं ।
कौन सी गैस आम के लिए अधिक हानिकारक है ?
वैसे तो स्पष्ट रूप से इस बात का पता नहीं चल पाया है कि कोयले के धुए की कौन सी गैस यह विकार अधिक उत्पन्न करती है, फिर भी रंजन (एस) एवं झा ( वी० एन० ) के अनुसार इतना अवश्य मालूम हुआ कि इन धुँओं की दो गैसें - इथिलीन और सल्फर डाइऑक्साइड विशेष रूप से फलों में यह विकार पैदा करती हैं ।
धुँए में एथिलीन के 1 : 1000 के अनुपात से कोयलिया रोग के लक्षण दिखाई पड़े, परन्तु इथिलीन गैस का अनुपात कम होने पर फलों की श्वसन क्रिया में तेजी आती है। इससे फल में शर्करा की मात्रा अधिक हो जाती है और फल मुलायम पड़ जाते हैं।
दूरी का प्रभाव
पुनः कुछ वैज्ञानिकों ने पाया कि केवल सल्फर डाइऑक्साइड गैस का प्रभाव तथा इथिलीन गैप के साथ भी - दोनों ही दशाओं में फलों पर उसी प्रकार का प्रभाव पाया गया। बल्कि फलों की दशा अपेक्षाकृत कुछ और भी बिगड़ गई। आगे यह भी ज्ञात हुआ कि इन तीनों गैसों में सल्फर डाइऑक्साइड गैस सर्वाधिक क्षति पहुँचाती है।
ईंटों के भट्ठों से आम के बाग या वृक्ष कितनी दूरी पर स्थित है - इसका भी कोयलिया विकार के प्रकोप
से विशेष सम्बन्ध है । पहले हुए शोध कार्यों से पता चला था कि जो क्षेत्र बाग से 1½ किलोमीटर तक की दूरी के भीतर थे उनमें इस विकार का प्रकोप पाया गया, जबकि 500 से 700 मीटर तक की दूरी वाले स्थित बागों में इन गैसों का प्रभाव और भी अधिक रहा ।
परन्तु अब यह ज्ञात हुआ कि ईंटों के भट्ठों से निकलने वाले धुँए की गैसों का प्रभाव स्थित बाग के 4-5 किमी० क्षेत्र के भीतर तक सबसे ज्यादा होता है। लेकिन अप्रैल से मई-जून तक के सूखे मौसम में यह क्षति 8 किमी० तक के फैलाव में होती हैं ।
दिशा का प्रभाव
ईंटों के भट्ठों से निकलते धुँए किस दिशा को जाते हैं - इस पर भी रोग का प्रकोप और फैलाव निर्भर करता है । अगर हवा का रुख बाग की ओर है तो उस बाग के फल अधिक प्रभावित होंगे। आम तौर से जो बाग ईंटों के भट्ठों के पूर्वी या पश्चिमी भागों में स्थित रहते हैं, वे फल अधिक प्रभावित होते हैं । भट्ठों के उत्तरी और दक्षिणी भागों में स्थित बोनों में इन गैसों का प्रभाव कम होता है ।
आम की किस्मों पर प्रभाव
कोयलिया विकार का प्रभाव कम या अधिक होना आम की किस्मों पर भी निर्भर करता है । प्रायः विख्यात किस्म "दशहरी" और "बम्बई" के फलों पर यह प्रकोप अधिक देखने को मिलता है ।
वृक्षों की स्थिति
आम के वृक्षों पर इस विकार से प्रभावित फलों के बावजूद भी वृक्ष सुरक्षित रहते हैं। फिर भी लेखक द्वारा कुछ ऐसे आम और अमरूद के बाग व वृक्ष देखे गये जिनके बिल्कुल पास में ही ईंटों के भट्ठे स्थापित थे । ऐसी स्थिति में आम के फलों के रोग ग्रस्त (ब्लैक टिप) होने के साथ-साथ भूमि के भीतर के तेज ताप वृक्षों की जड़ों तक पहुँच गये । इस कारण आम व अमरूद के भी अधिकांश वृक्ष पूरे के पूरे सूख गये ।
विकार का निदान
आम की फसल को कोयलिया रोग से बचाने के लिए विभिन्न वैज्ञानिकों द्वारा निम्नलिखित कार्यवाइयों की संस्तुतियाँ की गई हैं :
भट्ठे को चिमनी ऊँची करना
आम के बागों के पास जहाँ ईंटों के भट्ठे हों उनकी चिमनी कम से कम 15 मीटर (50 फीट) ऊँची जायें ।
भट्ठे बन्द करा दिये जायें
ईंटों के जो भट्ठे आम के बागों के 8 किलोमीटर क्षेत्र के भीतर हों उन्हें या तो बिल्कुल बन्द ही करा दिया जाये या मार्च से लेकर आम के मौसम तक कार्यान्वित होने पर कानूनन प्रतिबंध लगाया जाये । | प्रदूषित पर्यावरण और आम विकास पौष्टिक महत्व भारतवर्ष में अनेक फल पैदा होते हैं, जिनमें आम सर्वश्रेष्ठ फल है। शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जो आम खाना न पसन्द करता हो । आस विटामिन-ए का एक अति प्रचुर स्रोत है। प्रति एक सौ ग्राम गूदे में दो हज़ार सात सौ तैंतालीस मिलीग्राम विटामिन-ए की मात्रा विद्यमान रहती है । विटामिन-ए नेत्रों की ज्योति को बढ़ाने और सही रखने में बड़ा सहायक होता है। इसके अतिरिक्त इन गूदों में विटामिन-सी इकतीस मिलीग्राम, विटामिन बी-एक चालीस, विटामिन बी-दो पचास, निकोटिनिक एसिड शून्य-तीन, कैल्शियम दस-चौदह और फॉस्फोरस सोलह-बीस मिलीग्राम तथा प्रोटीन शून्य-छः ग्राम, शर्करा सोलह दशमलव नौ ग्राम और ऊष्मा शक्ति पचास कैलोरी पाई जाती है । आम चूसने वाले और काट कर खाने वाले - दो प्रकार के होते हैं । इस महत्वपूर्ध फल की हजारों किस्में हैं, जिनके अलग-अलग स्वाद और सुवास होते हैं । कोई बड़े तो कोई छोटे, कोई सुनहरे, कोई पीले तो कोई मीठे या खटमीठे । अपने देश में सबसे अच्छी किस्म अल्फॉन्जो है जिसके बाद पेरी की गणना की जाती है। ये दोनों किस्में महाराष्ट्र की हैं । बंगाल की किस्म गोपाल भोग, मालदा, कृष्ण भोग, जरदालू, हिमसागर, दक्षिणी भारत की रोमानी, नीलम, मालगोवा स्वर्ण रेखा, बंगलोरा , बिहार की किस्म, गुलाब खास, मिठुआ, सुकुल, सिपिया, हिम सागर, कृष्ण भोग और उत्तरी भारत की किस्म बाम्बे ग्रीन और बाम्बे यलो प्रमुख प्रचलित किस्में हैं । आम की किस्म "दशहरी " उत्तर प्रदेश की सर्वप्रिय व सर्वश्रेष्ठ किस्म है, जो विश्वविख्यात है । यह ख्याति लखनऊ जिले में मलीहाबाद के दशहरी नामक ग्राम से प्राप्त हुई । इसी प्रकार लखनऊ के ग्राम चौसा से वहां की विख्यात किस्म "समरबहिश्त चौसा " विकसित हुई । इनके अतिरिक्त लखनऊ की सफेदा मलीहाबाद और सफेदा लखनऊ, गोरखपुर की गौरजीत व कपुरी, वाराणसी की लंगड़ा बनारसी, मेरठ की रटौल उत्तर प्रदेश की प्रमुख व्यापारिक किस्में हैं। हुस्नेआरा, फजरी, ब्राइडऑफ रशा, सफ्दर पसंद, खासुलखास भी आम को अच्छी किस्में हैं । भारतीय कृषि अनुसन्धान संस्थान, नई दिल्ली द्वारा विकसित व हर साल फलने वाली दो किस्में - आम्रपाली और मल्लिका दिन प्रतिदिन ख्याति प्राप्त करती जा रही हैं। आम्रउपनिदेशक उद्यान, इलाहाबाद मण्डल , सी - सरसठ, गुरू तेग बहादुर नगर , इलाहाबाद- दो लाख ग्यारह हज़ार सोलह पाली आम के पौधों की माँगें विशेष रूप से इसलिये और बढ़ रही है कि इसे "हाई डेन्सिटी ऑरचर्ड" प्रक्रिया के अन्तरगत केवल दो.पाँच x दो दशमलव पाँच मीटर की दूरी पर लगा सकते हैं और पौधे भी बौने होते हैं । इनके एक हेक्टेयर में एक हज़ार तीन सौ सैंतीस पौधे वर्गाकार प्रणाली से लगाये जा सकते हैं, जबकि षटकोंण प्रणाली से यह संख्या बढ़कर एक हज़ार पाँच सौ पचपन हो जाती है । आम्रपाली आम की गृह बाटिका में भी लगा सकते हैं । फल संरक्षण आम के पके फल से जैम, जेली, स्क्वास, चटनी, आम पापड़ व टॉफी निर्माण करते हैं । इनके कतरों की डिब्बाबन्दी भी की जाती है । कच्चे आम से नमकीन व मीठे अचार, चटनी शर्बत, पना तथा सुखा कर खटाई व आम चूर्ण तैयार करते हैं । विदेणी मुद्रा अर्जन का स्रोत आम अपने देश की एक ऐसी महत्वपूर्ण प्राकृतिक सम्पदा है जिसके निर्यात से विदेशी मुद्रा अर्जित करने की प्रबल सम्भावनायें हैं । महाराष्ट्र के अल्फॉन्जो और उत्तर प्रदेश के दशहरी आम हर वर्ष विदेशों को निर्यात किये जाते हैं । इन्हीं सारी गुणवत्ताओं के ही कारण आम को फलों का राजा कहा जाता है । क्षेत्रफल व पैदावार अपने देश में फलों के अंतर्गत कुल क्षेत्रफल का लगभग चौंतालीस प्रतिशत भाग केवल आम के ही अंतर्गत है । इसी का करीब चौंतालीस प्रतिशत ही भाग केवल उत्तर प्रदेश में हैं । आम की कुल पैदावार देश में एक सौ ग्यारह स्राख टन होती है । उत्तर प्रदेश में इसकी लगभग इकतीस प्रतिशत अर्थात् चौंतीस,इकतालीस,शून्य टन पैदाबार होती है । समुद्र तल से एक हज़ार मीटर की ऊँचाई तक अपने देश के कोने-कोने में आम उगाया जाता है। इनमें क्रमानुसार उत्तर प्रदेश, बिहार, आन्ध्र प्रदेश, पश्चिमी बंगाल, उड़ीसा, केरल, तमिलनाडु महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, त्रिपुरा, पंजाब, असम, मेघालय, लक्ष्वदीप व अण्डमन, जम्मू व कश्मीर, हिमांचल प्रदेश, सिक्किम तथा राजस्थान प्रमुख हैं । उत्तर प्रदेश में लखनऊ , इलाहाबाद , प्रतापगढ़ , फतेहपुर, कानपुर, फरूखाबाद , अलीगढ़ , सहारनपुर, मेरठ, बुलन्दशहर, गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, वाराणसी, गोरखपुर, देवरिया , फैजाबाद व अन्य अधिकांश जनपदों में आम के बाग स्थापित हैं । कुछ क्षेत्र तो ऐसे हैं जिनमें आम के अतिरिक्त अमरूद और आंवला जैसे महत्वपूर्ण फलों के भी बहुत बड़े बड़े क्षेत्रों में लगातार उन्हीं फलों के बाग स्थापित हैं । जैसे इलाहाबाद के सुलेम सराय क्षेत्र में असरूद के और प्रतापगढ़ के गोंडे ग्राम तथा उसके आस-पास आंवले के बाग ही बाग दिखाई पड़ते हैं । इसी प्रकार ग्राम पटहटिया कलां में श्री महाबल सिंह के उद्यान में आंवले की विशिष्ट किस्में मौजूद हैं, जिनकी प्रतापगढ़ जनपद में सर्वप्रथम लगभग तीस वर्ष पूर्व उत्तर प्रदेश उद्यान विभाग द्वारा आंवले की पौधशाला पंजीकृत की गई, जो यशवंत नर्संरी के नाम से जानी जाती है । प्रदूषण का प्रभाव इन प्राकृतिक महत्वपूर्ण सम्पदाओं की सुरक्षा करना अपना पुनीत कर्तव्य है, जिसे युद्धस्तर पर अभियान के रूप में चलाना चाहिये । परन्तु अपने देश का दुर्भाग्य है कि दिन प्रति दिन बढ़ती हुई जनसंख्या के दबाव से बागबगीचे कटते जा रहे हैं जिनमें आवासीय कॉलनियाँ बनाई जा रही हैं, जिससे निश्चय ही पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, जबकि स्वच्छ वातावरण के लिए बाग-बगीचों व पेड़-पौधों का रहना अत्यन्त आवश्यक है । दूसरी ओर जो बाग-बगीचे बचे भी हैं वे प्रदूषित पर्यावरण से नष्ट होते जा रहे हैं । धूल धूसरित व दयनीय दशा में पड़ी सड़कों की हवा और वाहनों से उड़ती हुई गर्द तथा कारखानों व वाहनों के काले धुँये और कीड़ों मकोड़ों द्वारा छोड़े गये काले पदार्थ आदि - ये सब वृक्षों की पत्तियों जौर फूलों-फलों पर अपनी तह जमाये जा रहे हैं, जिससे प्रकाशसंश्लेषण और श्वसन क्रिया में बाधा पड़ती है । फलतः अन्य कीड़े-मकोड़े और व्याधियां भी स्वतः आमंत्रित हो जाती हैं और पेड़-पौधों की स्वस्थ रूप से बढ़वार और फलों की पैदावार पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं। अधिकांश जनता बीड़ी-सिगरेट के धुंए और तम्बाकू की विषैली दुर्गन्ध हवा में तथा दूसरों के मुँह पर छोड़ने में निसंकोच व्यस्त रहती है। इन्हीं सभी कारणों से प्रदूषित वायु की अधिकता और प्राणवायु - ऑक्सीजन की कमी होती जा रही है । इसी प्रकार आम जैसे महत्वपूर्ण व सर्वश्रेष्ठ फल के साथ ज्यादती हो रही है और यह है आम के बागों के आस-पास ईंटों के भट्टों का स्थापित रहना । ईंटों के इन भट्टों में जलते हुए कोयलों के धुंए में मौजूद कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और इथिलीन गैसें पर्यावरण को प्रदूषित कर रही हैं । इसके फलस्वरूप ये गैसें आम के विकास में बाधक हो रही हैं, क्योंकि ये आम की फसल के लिए अत्यन्त घातक हैं । कोयलिया रोग व उसके लक्षण आम की फसल के समय जब फलों की वृद्धि अप्रैल-मई में होती रहती है, उस समय ईंटों के भट्ठों के पास स्थित आम के बागों के फलों की शिखाएं जो नीचे की ओर लटकती रहती हैं , काली पड़ जाती हैं । पहले वायुमण्डल में फैली ये गैसें वृद्धि करते हुए आम के कच्चे फलों की शिखाओं में प्रवेश करती हैं । इसके बाद शिखाओं पर हल्का सा दाग बनता है । फिर ये दाग पानी सोखे हुए जैसे -भूरे रंग के धब्बों बदल जाते हैं । बाद में ये धब्बे धीरे-धीरे काले पड़ जाते हैं और फलों में सड़न तथा कभी-कभी फटांव भी पैदा हो जाते हैं । रोग का प्रकोप हो जाने पर रोग ऊपर की ओर बढ़ता जाता है । अन्त में काले धब्बे छिलके व गूदे सहित सूख कर कड़े हो जाते हैं तथा सिकुड़ कर चपटे भी हो जाते हैं । प्रकोप अधिक भयंकर होने पर सूखे गूदे वाले भाग के पास से भीतर की गुठली का कुछ भाग बाहर को निकलआता है । वास्तव में आम का यह रोग एक दैहिकी विकार या असन्तुलन है, जिसे 'ब्लैकटिप' या 'कोयलिया' रोग कहते हैं । यह 'काला-सिरा' नाम से भी जाना जाता है । आम में कोयलिया रोग कोयलिया रोग से नुकसान कोयलिया रोग के प्रकोप से फलों की बढ़वार भी रुक जाती है और परिपक्व होने के पूर्व ही पेड़ पर से गिर भी जाते हैं । ऐसा भी पाया गया है कि प्रभावित फलों की अपेक्षा ये प्रभावित आम कुछ पके से भी हो जाते हैं । परन्तु इन आमों का बाजार में कोई दाम नहीं मिलता । प्रयोग एवं सर्वेक्षण कुछ वैज्ञानिकों ने आम के मौसम में आम के बागों के आस-पास जहाँ ईंटों के भट्ठे नहीं थे वहां कोयले जला कर देखा तो फलों में यह विकार देखने में आया । इससे इस बात की पुष्टि हुई कि जलते हुए कोयले के धुंए से निकली हुई गैसें वास्तव में आम की फसल को क्षति पहुँचाती हैं । डॉशून्य पीशून्य केशून्य सेन 'एक औद्यानिक वैज्ञानिक' के एक सर्वेक्षण के अनुसार ईंटों के भट्ठों से धुँए की गैसें जो वातावरण को प्रदूषित करती हैं उनके पास स्थित बागों में आम के फलों को क्षति पहुँचाती हैं। बिहार, बंगाल, पंजाब और उत्तर प्रदेश जैसे प्रदेशों में ये प्रकोप अधिक पाये गये, जबकि भट्ठों से दूर स्थित बागों में ये प्रकोप नहीं पाये गये । यह भी ज्ञात हुआ कि फल जब बाईस सेमी शून्य के हो जाते हैं उसी समय से ब्लैक टिप रोग का प्रकोप शुरू हो जाता है । ऐसा इसलिए ही होता है क्योंकि उस समय ईंटों के भट्ठे चालू रहते हैं । भट्ठे चालू रहते और आम की वृद्धि अर्थात् अप्रैल मई की अवधि के बाद ये गैसें फलों में यह विकार नहीं पैदा करती हैं, बल्कि फल अपेक्षाकृत कुछ जल्दी ही पक जाते हैं । कौन सी गैस आम के लिए अधिक हानिकारक है ? वैसे तो स्पष्ट रूप से इस बात का पता नहीं चल पाया है कि कोयले के धुए की कौन सी गैस यह विकार अधिक उत्पन्न करती है, फिर भी रंजन एवं झा के अनुसार इतना अवश्य मालूम हुआ कि इन धुँओं की दो गैसें - इथिलीन और सल्फर डाइऑक्साइड विशेष रूप से फलों में यह विकार पैदा करती हैं । धुँए में एथिलीन के एक : एक हज़ार के अनुपात से कोयलिया रोग के लक्षण दिखाई पड़े, परन्तु इथिलीन गैस का अनुपात कम होने पर फलों की श्वसन क्रिया में तेजी आती है। इससे फल में शर्करा की मात्रा अधिक हो जाती है और फल मुलायम पड़ जाते हैं। दूरी का प्रभाव पुनः कुछ वैज्ञानिकों ने पाया कि केवल सल्फर डाइऑक्साइड गैस का प्रभाव तथा इथिलीन गैप के साथ भी - दोनों ही दशाओं में फलों पर उसी प्रकार का प्रभाव पाया गया। बल्कि फलों की दशा अपेक्षाकृत कुछ और भी बिगड़ गई। आगे यह भी ज्ञात हुआ कि इन तीनों गैसों में सल्फर डाइऑक्साइड गैस सर्वाधिक क्षति पहुँचाती है। ईंटों के भट्ठों से आम के बाग या वृक्ष कितनी दूरी पर स्थित है - इसका भी कोयलिया विकार के प्रकोप से विशेष सम्बन्ध है । पहले हुए शोध कार्यों से पता चला था कि जो क्षेत्र बाग से एक½ किलोमीटर तक की दूरी के भीतर थे उनमें इस विकार का प्रकोप पाया गया, जबकि पाँच सौ से सात सौ मीटर तक की दूरी वाले स्थित बागों में इन गैसों का प्रभाव और भी अधिक रहा । परन्तु अब यह ज्ञात हुआ कि ईंटों के भट्ठों से निकलने वाले धुँए की गैसों का प्रभाव स्थित बाग के चार-पाँच किमीशून्य क्षेत्र के भीतर तक सबसे ज्यादा होता है। लेकिन अप्रैल से मई-जून तक के सूखे मौसम में यह क्षति आठ किमीशून्य तक के फैलाव में होती हैं । दिशा का प्रभाव ईंटों के भट्ठों से निकलते धुँए किस दिशा को जाते हैं - इस पर भी रोग का प्रकोप और फैलाव निर्भर करता है । अगर हवा का रुख बाग की ओर है तो उस बाग के फल अधिक प्रभावित होंगे। आम तौर से जो बाग ईंटों के भट्ठों के पूर्वी या पश्चिमी भागों में स्थित रहते हैं, वे फल अधिक प्रभावित होते हैं । भट्ठों के उत्तरी और दक्षिणी भागों में स्थित बोनों में इन गैसों का प्रभाव कम होता है । आम की किस्मों पर प्रभाव कोयलिया विकार का प्रभाव कम या अधिक होना आम की किस्मों पर भी निर्भर करता है । प्रायः विख्यात किस्म "दशहरी" और "बम्बई" के फलों पर यह प्रकोप अधिक देखने को मिलता है । वृक्षों की स्थिति आम के वृक्षों पर इस विकार से प्रभावित फलों के बावजूद भी वृक्ष सुरक्षित रहते हैं। फिर भी लेखक द्वारा कुछ ऐसे आम और अमरूद के बाग व वृक्ष देखे गये जिनके बिल्कुल पास में ही ईंटों के भट्ठे स्थापित थे । ऐसी स्थिति में आम के फलों के रोग ग्रस्त होने के साथ-साथ भूमि के भीतर के तेज ताप वृक्षों की जड़ों तक पहुँच गये । इस कारण आम व अमरूद के भी अधिकांश वृक्ष पूरे के पूरे सूख गये । विकार का निदान आम की फसल को कोयलिया रोग से बचाने के लिए विभिन्न वैज्ञानिकों द्वारा निम्नलिखित कार्यवाइयों की संस्तुतियाँ की गई हैं : भट्ठे को चिमनी ऊँची करना आम के बागों के पास जहाँ ईंटों के भट्ठे हों उनकी चिमनी कम से कम पंद्रह मीटर ऊँची जायें । भट्ठे बन्द करा दिये जायें ईंटों के जो भट्ठे आम के बागों के आठ किलोग्राममीटर क्षेत्र के भीतर हों उन्हें या तो बिल्कुल बन्द ही करा दिया जाये या मार्च से लेकर आम के मौसम तक कार्यान्वित होने पर कानूनन प्रतिबंध लगाया जाये । |
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने मंगलवार को चुनाव पूर्व किए अपने वादे को पूरा करते हुए लघु और सीमांत किसानों का 36,359 करोड़ रुपये का कर्ज माफ करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई पहली मंत्रिमंडलीय बैठक में यह फैसला किया गया।
बैठक के बाद स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि इसके साथ ही चुनाव पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष अमित शाह द्वारा राज्य के किसानों से किए गए वादे को पूरा कर दिया गया। उन्होंने कहा कि राज्य के 2. 3 करोड़ किसानों में से 92. 5 फीसदी किसान (2. 15 करोड़) लघु और सीमांत हैं। किसानों द्वारा गेंहू और धान के बीज खरीदने और कीटनाशकों तथा खाद खरीदने के लिए लिए गए कर्ज माफ होंगे।
कर्ज माफी का फायदा राज्य के दो करोड़ 15 लाख किसानों को मिलेगा, जिनका कुल 30,729 करोड़ रुपये माफ होगा। सरकार ने किसानों का एक लाख रुपये तक का कर्ज माफ किया है।
सिद्धार्थनाथ ने कहा कि राज्य के कुल सात लाख किसानों ने बैंकों से लिया कर्ज नहीं चुकाया है, जिन्हें अब एनपीए करार दे दिया गया है। सरकार ने उनके 5,630 करोड़ रुपये का कर्ज भी माफ करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि इस तरह कुल मिलाकर राज्य सरकार राज्य के किसानों का कुल 36,359 करोड़ रुपये का कर्ज माफ कर रही है।
उन्होंने कहा कि बैठक में प्रदेश के किसानों को बिचौलियों से मुक्त करने का भी फैसला किया गया है। उन्होंने कहा कि चूंकि राज्य को अपना वित्तीय घाटा कुल सकल घरेलू उत्पाद का तीन फीसदी से कम रखना है, इसलिए राज्य सरकार किसानों की माफ की गई कर्ज की राशि की भरपाई 'किसान रिलीफ बॉण्ड' के जरिए की जाएगी।
सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि इस बॉण्ड के प्रारूप पर काम चल रहा है और संबंधित औपचारिकताएं विधानसभा के आगामी बजट सत्र के दौरान पूरी कर ली जाएंगी। उन्होंने यह भी बताया कि कर्ज माफी के दायरे में सहकारी बैंकों सहित सभी बैंक आते हैं।
भाजपा नेता ने कहा कि सरकार ने पाया है कि आलू के उचित मूल्य किसानों को नहीं मिलते, इसके लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है। सरकार ने एक बड़ा फैसला यह भी लिया है कि समिति इस बात का अध्ययन करेगी कि आने वाले समय में हम आलू पैदा करने वाले किसान को किस तरह से राहत दे सकें।
| लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने मंगलवार को चुनाव पूर्व किए अपने वादे को पूरा करते हुए लघु और सीमांत किसानों का छत्तीस,तीन सौ उनसठ करोड़ रुपये का कर्ज माफ करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई पहली मंत्रिमंडलीय बैठक में यह फैसला किया गया। बैठक के बाद स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि इसके साथ ही चुनाव पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष अमित शाह द्वारा राज्य के किसानों से किए गए वादे को पूरा कर दिया गया। उन्होंने कहा कि राज्य के दो. तीन करोड़ किसानों में से बानवे. पाँच फीसदी किसान लघु और सीमांत हैं। किसानों द्वारा गेंहू और धान के बीज खरीदने और कीटनाशकों तथा खाद खरीदने के लिए लिए गए कर्ज माफ होंगे। कर्ज माफी का फायदा राज्य के दो करोड़ पंद्रह लाख किसानों को मिलेगा, जिनका कुल तीस,सात सौ उनतीस करोड़ रुपये माफ होगा। सरकार ने किसानों का एक लाख रुपये तक का कर्ज माफ किया है। सिद्धार्थनाथ ने कहा कि राज्य के कुल सात लाख किसानों ने बैंकों से लिया कर्ज नहीं चुकाया है, जिन्हें अब एनपीए करार दे दिया गया है। सरकार ने उनके पाँच,छः सौ तीस करोड़ रुपये का कर्ज भी माफ करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि इस तरह कुल मिलाकर राज्य सरकार राज्य के किसानों का कुल छत्तीस,तीन सौ उनसठ करोड़ रुपये का कर्ज माफ कर रही है। उन्होंने कहा कि बैठक में प्रदेश के किसानों को बिचौलियों से मुक्त करने का भी फैसला किया गया है। उन्होंने कहा कि चूंकि राज्य को अपना वित्तीय घाटा कुल सकल घरेलू उत्पाद का तीन फीसदी से कम रखना है, इसलिए राज्य सरकार किसानों की माफ की गई कर्ज की राशि की भरपाई 'किसान रिलीफ बॉण्ड' के जरिए की जाएगी। सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि इस बॉण्ड के प्रारूप पर काम चल रहा है और संबंधित औपचारिकताएं विधानसभा के आगामी बजट सत्र के दौरान पूरी कर ली जाएंगी। उन्होंने यह भी बताया कि कर्ज माफी के दायरे में सहकारी बैंकों सहित सभी बैंक आते हैं। भाजपा नेता ने कहा कि सरकार ने पाया है कि आलू के उचित मूल्य किसानों को नहीं मिलते, इसके लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है। सरकार ने एक बड़ा फैसला यह भी लिया है कि समिति इस बात का अध्ययन करेगी कि आने वाले समय में हम आलू पैदा करने वाले किसान को किस तरह से राहत दे सकें। |
इतिहाससमुच्चय भाषा । पापों की नाश करनेवाली उसकी कथाओं कोभी श्रवण कर १६६ हे राजेन्द्र, युधिष्ठिर! तू वही कर्मकर जिससे कि सम्पूर्ण ईश्वरों केभी ईश्वर विष्णु भगवान् प्रसन्न हो - जावें १७० नारायण से विमुख होनेवाले पुरुष सैकड़ों अश्वमेध और बाजपेय यज्ञों करके भी श्रेष्ठ गतिको नहीं प्राप्त होते हैं १७१ औ एकरूप ध्यान ' करने के योग्य आदि अन्त से रहित त्रिगुणात्मक स्थूल सूक्ष्म अनुपमेय उपमेय से रहित योगियों से ध्यानगम्य त्रिभुवन के गुरु और ईशरूप होकर हे विष्णो ! मैं आप की शरण हूं १७२ भीष्मजी बोले- हे वत्स ! मुझे अब प्रातः कालही देह छोड़नी है क्योंकि मेरे प्राण स्वर्ग में जाने की शीघ्रता कररहे हैं १७३ हे पुत्र ! जो मैंने शान्तिपर्व में विस्तार पूर्वक धर्म कहा है उसको भी मैं यत्तसे कहता हूं उसे तू सुन १७४ हे परन्तप, धर्मरूप ! उस समुद्र के मथन से निकासा हुआ साररूप ऐसा धर्म है जैसा कि दही से निकाला हुआ नवनीत मक्खन होता है उस संसार धर्मको मैं तुझसे कहताहूं १७५ किसी भयंकर बन में कोई पुरुष किसी मारनेवाले हाथी के भय से भागता हुआ और दूसरे महाबन में पहुँचा १७६ वहां जाकर सिंहोंके समूहों को देखा वहांसे भी अधिक भयभीत होता हुआ दूसरी दिशा को भागा १७७ तहां हाथ में खड्ग लिये हुये एक भयानकरूप कन्या को देखा वह कन्या भागती हुई बिचररहीथी वह इससे ठहरो ठहरो ऐसा वचन कहती हुई १७८ उसको देखकर वहां से भी अलग हो फिर अन्य किसी दिशा को भागा वहां अग्नि
इतिहाससमुच्चय भाषा । से जलते हुये बन को देखा १७६ वहां ठहरकर चिन्ता करनेलगा कि बड़ा आश्चर्य है कि जहां जाता हूं वहां ही कष्ट दिखाई देता है कहीं हाथी कहीं सिंह और उधर को कन्या इधर को अग्नि बनको जला रही है १८० फिर भयभीत होकर वह एक कूप में गिरता भया वहां कुए में गिरकर एकबड़े विषधर सर्पको देखा हे राजेन्द्र ! वहां किसी बेल को पकड़ बेलसे नीचे को मुखकर तोंबेके समान उस बेलपरही लटकता भया वहां भी उस बेलकी जड़ को काटती हुई एक मूसी दिखाई पड़ी १८११८३ उसके सिवाय उस कुए में काटनेवाले मच्छर आदिक उपद्रव भी थे परन्तु उसदशामें भी उसके मुख में एक भौंरा पुष्पों के रस को देता था १८४ फिर रस पीने की इच्छा करता हुआ वह पुरुष उसके लाये हुये पुष्परस को पान करताभया हे वत्स ! जैसेकि वह पुरुष घोरसंकटों में पड़ा है १८५ उसी प्रकार सम्पूर्ण शरीरधारी जीव मात्रभी घोर संकट में वर्तमान रहते हैं. अब जो बड़ा पराक्रमी हाथी देखा वह तो वर्ष है और घोर सिंहों को जो देखा वही अनेक प्रकार के संसारी व्यवहार जानों और हाथ में खड्गलिये बड़ी बलवती जो कन्या देखी उसको जरा अर्थात् वृद्धावस्था जानों १८६ । १८७जो बन में अग्नि लगी देखी सो शोक है यह शोक लोभ मोह और भय का करनेवाला है कुआ मनुष्यलोक है और वह महासर्प कालरूप है उस कूप में आयु बेल है दिनोंका व्यतीत होना मूषिकी है और क्रोधादिकरूप काटने वाले मच्चररूप दारुण उपद्रव हैं और सम्पूर्ण
इतिहाससमुच्चय भाषा । प्राणियों में स्थित होनेवाले काम को मधु का देनेवाला भौंरा जानों अबभी जो मधुका स्वाद है वही काम काभी स्वादु है १८८५ । १९० हे वत्स ! श्रवण करनेके गुणों से युक्त होनेवाला तू धर्म में तत्पर हो और संसार में स्थित हुये अपने आत्मा को मोक्ष के निमित्त बड़े यत्र और कम से आरूढ़कर १९१ इस प्रकार संसाररूपी कृप में एक धर्मही परमगति है धर्म से परे कुछ नहीं है और धर्मही सुख का करनेवाला कहा है १६२ वैशंपायनजी बोले- हे जनमेजय ! इस प्रकार से सम्पूर्ण धर्मों को कह कर राजा युधिष्ठिर को मोक्ष का निर्मल मार्ग दिखाके विष्णु भगवान् के चरणों में अपने मन को स्थापित कर १६३ मकरराशि के निर्मल सूर्यहोने के समय माघ मास के शुक्लपक्ष की एकादशी को प्रातःकाल के समय भीष्मपितामह विष्णुलोक को प्राप्त होतेभये १९४ उन के परमधाम जातेही देवताओं के दुन्दुभी नकारे आदि बाजों का शब्द हुआ आकाश से पुष्पों की वर्षा होने लगी इन्द्रादिक देवता सिद्ध और वसुगण यह सब प्र सन्न हुये १६५ इस प्रकार धर्म- अर्थ और मोक्ष से सं युक्त महाफल के देनेवाले इस परम उत्तम पवित्र करने वाले इतिहास को सुनकर मनुष्य इसलोक और परलोक दोनों में आनन्दों को भोगता है १९६ इन महा पुण्यकारी पुण्यों के बढ़ानेवाले बत्तीस इतिहासों से यह इति ब. हासससुच्चय नाम ग्रन्थ समाप्त हुआ ॥ १७॥ 10243 इति श्री इतिहाससमुच्चयभाषायांनारद पुण्डरीकसंवादे द्वात्रिंशोऽध्यायः ॥ ३२ ॥ | इतिहाससमुच्चय भाषा । पापों की नाश करनेवाली उसकी कथाओं कोभी श्रवण कर एक सौ छयासठ हे राजेन्द्र, युधिष्ठिर! तू वही कर्मकर जिससे कि सम्पूर्ण ईश्वरों केभी ईश्वर विष्णु भगवान् प्रसन्न हो - जावें एक सौ सत्तर नारायण से विमुख होनेवाले पुरुष सैकड़ों अश्वमेध और बाजपेय यज्ञों करके भी श्रेष्ठ गतिको नहीं प्राप्त होते हैं एक सौ इकहत्तर औ एकरूप ध्यान ' करने के योग्य आदि अन्त से रहित त्रिगुणात्मक स्थूल सूक्ष्म अनुपमेय उपमेय से रहित योगियों से ध्यानगम्य त्रिभुवन के गुरु और ईशरूप होकर हे विष्णो ! मैं आप की शरण हूं एक सौ बहत्तर भीष्मजी बोले- हे वत्स ! मुझे अब प्रातः कालही देह छोड़नी है क्योंकि मेरे प्राण स्वर्ग में जाने की शीघ्रता कररहे हैं एक सौ तिहत्तर हे पुत्र ! जो मैंने शान्तिपर्व में विस्तार पूर्वक धर्म कहा है उसको भी मैं यत्तसे कहता हूं उसे तू सुन एक सौ चौहत्तर हे परन्तप, धर्मरूप ! उस समुद्र के मथन से निकासा हुआ साररूप ऐसा धर्म है जैसा कि दही से निकाला हुआ नवनीत मक्खन होता है उस संसार धर्मको मैं तुझसे कहताहूं एक सौ पचहत्तर किसी भयंकर बन में कोई पुरुष किसी मारनेवाले हाथी के भय से भागता हुआ और दूसरे महाबन में पहुँचा एक सौ छिहत्तर वहां जाकर सिंहोंके समूहों को देखा वहांसे भी अधिक भयभीत होता हुआ दूसरी दिशा को भागा एक सौ सतहत्तर तहां हाथ में खड्ग लिये हुये एक भयानकरूप कन्या को देखा वह कन्या भागती हुई बिचररहीथी वह इससे ठहरो ठहरो ऐसा वचन कहती हुई एक सौ अठहत्तर उसको देखकर वहां से भी अलग हो फिर अन्य किसी दिशा को भागा वहां अग्नि इतिहाससमुच्चय भाषा । से जलते हुये बन को देखा एक सौ छिहत्तर वहां ठहरकर चिन्ता करनेलगा कि बड़ा आश्चर्य है कि जहां जाता हूं वहां ही कष्ट दिखाई देता है कहीं हाथी कहीं सिंह और उधर को कन्या इधर को अग्नि बनको जला रही है एक सौ अस्सी फिर भयभीत होकर वह एक कूप में गिरता भया वहां कुए में गिरकर एकबड़े विषधर सर्पको देखा हे राजेन्द्र ! वहां किसी बेल को पकड़ बेलसे नीचे को मुखकर तोंबेके समान उस बेलपरही लटकता भया वहां भी उस बेलकी जड़ को काटती हुई एक मूसी दिखाई पड़ी एक लाख इक्यासी हज़ार एक सौ तिरासी उसके सिवाय उस कुए में काटनेवाले मच्छर आदिक उपद्रव भी थे परन्तु उसदशामें भी उसके मुख में एक भौंरा पुष्पों के रस को देता था एक सौ चौरासी फिर रस पीने की इच्छा करता हुआ वह पुरुष उसके लाये हुये पुष्परस को पान करताभया हे वत्स ! जैसेकि वह पुरुष घोरसंकटों में पड़ा है एक सौ पचासी उसी प्रकार सम्पूर्ण शरीरधारी जीव मात्रभी घोर संकट में वर्तमान रहते हैं. अब जो बड़ा पराक्रमी हाथी देखा वह तो वर्ष है और घोर सिंहों को जो देखा वही अनेक प्रकार के संसारी व्यवहार जानों और हाथ में खड्गलिये बड़ी बलवती जो कन्या देखी उसको जरा अर्थात् वृद्धावस्था जानों एक सौ छियासी । एक सौ सत्तासीजो बन में अग्नि लगी देखी सो शोक है यह शोक लोभ मोह और भय का करनेवाला है कुआ मनुष्यलोक है और वह महासर्प कालरूप है उस कूप में आयु बेल है दिनोंका व्यतीत होना मूषिकी है और क्रोधादिकरूप काटने वाले मच्चररूप दारुण उपद्रव हैं और सम्पूर्ण इतिहाससमुच्चय भाषा । प्राणियों में स्थित होनेवाले काम को मधु का देनेवाला भौंरा जानों अबभी जो मधुका स्वाद है वही काम काभी स्वादु है एक हज़ार आठ सौ पचासी । एक सौ नब्बे हे वत्स ! श्रवण करनेके गुणों से युक्त होनेवाला तू धर्म में तत्पर हो और संसार में स्थित हुये अपने आत्मा को मोक्ष के निमित्त बड़े यत्र और कम से आरूढ़कर एक सौ इक्यानवे इस प्रकार संसाररूपी कृप में एक धर्मही परमगति है धर्म से परे कुछ नहीं है और धर्मही सुख का करनेवाला कहा है एक सौ बासठ वैशंपायनजी बोले- हे जनमेजय ! इस प्रकार से सम्पूर्ण धर्मों को कह कर राजा युधिष्ठिर को मोक्ष का निर्मल मार्ग दिखाके विष्णु भगवान् के चरणों में अपने मन को स्थापित कर एक सौ तिरेसठ मकरराशि के निर्मल सूर्यहोने के समय माघ मास के शुक्लपक्ष की एकादशी को प्रातःकाल के समय भीष्मपितामह विष्णुलोक को प्राप्त होतेभये एक सौ चौरानवे उन के परमधाम जातेही देवताओं के दुन्दुभी नकारे आदि बाजों का शब्द हुआ आकाश से पुष्पों की वर्षा होने लगी इन्द्रादिक देवता सिद्ध और वसुगण यह सब प्र सन्न हुये एक सौ पैंसठ इस प्रकार धर्म- अर्थ और मोक्ष से सं युक्त महाफल के देनेवाले इस परम उत्तम पवित्र करने वाले इतिहास को सुनकर मनुष्य इसलोक और परलोक दोनों में आनन्दों को भोगता है एक सौ छियानवे इन महा पुण्यकारी पुण्यों के बढ़ानेवाले बत्तीस इतिहासों से यह इति ब. हासससुच्चय नाम ग्रन्थ समाप्त हुआ ॥ सत्रह॥ दस हज़ार दो सौ तैंतालीस इति श्री इतिहाससमुच्चयभाषायांनारद पुण्डरीकसंवादे द्वात्रिंशोऽध्यायः ॥ बत्तीस ॥ |
'बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद', इस मुहावरे से तो आप वाकिफ ही होंगे, लेकिन सोशल मीडिया पर एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है जिसमें बन्दर ने सच में अदरक का स्वाद लिया। कहते हैं की एक मूर्ख इंसान किसी अनमोल चीज़ की कदर नहीं समझ पाता, कुछ ऐसा ही इस वीडियो में दिखाई दिया। एक आदमी ने वीडियो में बन्दर को अदरक दी और बन्दर ने उसका स्वाद लेते ही फेंक दिया। सोशल मीडिया पर ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।
वीडियो में एक आदमी बंदरों के झुंड के पास गया और उन्हें अदरक का स्वाद चखाने की कोशिश की। एक बंदर ने अदरक अपनी तरफ ली, हाथ से तोड़ी और स्वाद लेकर तुरंत नीचे फेंक दी और साथ ही अजीबोगरीब एक्सप्रेशन बनाने लगा। आईएफएस ऑफिसर सुशांत नंदा ने इस वीडियो को ट्विटर पर शेयर किया और कैप्शन का सहारा लेकर लिखा है, बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद।
उन्होंने इस वीडियो को 6 जून को पोस्ट किया था, जिसे अब तक 24 हजार से ज्यादा व्यूज, 2 हजार से ज्यादा लाइक और 200 से ज्यादा रीट्वीट मिल चुके हैं। लोगों ने कमेंट करके बड़े जोरदार रिएक्शन लिखे।एक ने लिखा "मैंने सिर्फ सुना था, आज देख भी लिया " तो दूसरे ने लिखा " कहवत हेन्स प्रोव"
| 'बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद', इस मुहावरे से तो आप वाकिफ ही होंगे, लेकिन सोशल मीडिया पर एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है जिसमें बन्दर ने सच में अदरक का स्वाद लिया। कहते हैं की एक मूर्ख इंसान किसी अनमोल चीज़ की कदर नहीं समझ पाता, कुछ ऐसा ही इस वीडियो में दिखाई दिया। एक आदमी ने वीडियो में बन्दर को अदरक दी और बन्दर ने उसका स्वाद लेते ही फेंक दिया। सोशल मीडिया पर ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक आदमी बंदरों के झुंड के पास गया और उन्हें अदरक का स्वाद चखाने की कोशिश की। एक बंदर ने अदरक अपनी तरफ ली, हाथ से तोड़ी और स्वाद लेकर तुरंत नीचे फेंक दी और साथ ही अजीबोगरीब एक्सप्रेशन बनाने लगा। आईएफएस ऑफिसर सुशांत नंदा ने इस वीडियो को ट्विटर पर शेयर किया और कैप्शन का सहारा लेकर लिखा है, बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद। उन्होंने इस वीडियो को छः जून को पोस्ट किया था, जिसे अब तक चौबीस हजार से ज्यादा व्यूज, दो हजार से ज्यादा लाइक और दो सौ से ज्यादा रीट्वीट मिल चुके हैं। लोगों ने कमेंट करके बड़े जोरदार रिएक्शन लिखे।एक ने लिखा "मैंने सिर्फ सुना था, आज देख भी लिया " तो दूसरे ने लिखा " कहवत हेन्स प्रोव" |
Subsets and Splits
No community queries yet
The top public SQL queries from the community will appear here once available.