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28 अप्रैल को जारी संशोधित सूची में कोरबा लोकसभा की सांसद श्रीमती ज्योत्सना चरणदास महंत की अनुशंसा से पूर्व में सरगुजा लोकसभा महिला काँग्रेस प्रभारी बनायी गयी कोरिया जिले की वरिष्ठ महिला काँग्रेस नेत्री श्रीमती बबीता सिंह को अब कोरबा लोकसभा का प्रभारी नियुक्त किया गया हैं।
चिरमिरी। छत्तीसगढ़ प्रदेश महिला काँग्रेस द्वारा 26 अप्रैल को जारी लोकसभा प्रभारी की सूची में आंशिक फेरबदल प्रदेश महिला काँग्रेस अध्यक्ष सह राज्यसभा सांसद फूलोदेवी नेताम ने की हैं। 28 अप्रैल को जारी संशोधित सूची में कोरबा लोकसभा की सांसद श्रीमती ज्योत्सना चरणदास महंत की अनुशंसा से पूर्व में सरगुजा लोकसभा महिला काँग्रेस प्रभारी बनायी गयी कोरिया जिले की वरिष्ठ महिला काँग्रेस नेत्री श्रीमती बबीता सिंह को अब कोरबा लोकसभा का प्रभारी नियुक्त किया गया हैं। प्रदेश उपाध्यक्ष बबीता सिंह अब कोरबा लोकसभा की सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत के निर्वाचन क्षेत्र में महिला काँग्रेस का काम-काज देखेगी व कोरबा लोकसभा में महिला संगठन को सशक्त करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगी। सांसद ज्योसना महंत की अनुशंसा से कोरबा लोकसभा क्षेत्र की महिला काँग्रेस प्रभारी बनायी गयी बबीता सिंह ने कोरबा लोकसभा क्षेत्र का प्रभार दिए जाने पर सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत के प्रति आभार जताते हुए कहा कि वे क्षेत्रीय सांसद की मंशानुरूप महिला काँग्रेस की मजबूती के लिए सक्रियता से काम करेगी। प्रदेश महिला काँग्रेस उपाध्यक्ष बबीता सिंह कोरबा लोकसभा के अंतर्गत आने वाले मनेन्द्रगढ़, बैकुंठपुर, भरतपुर-सोनहत,मरवाही,पाली तानाखार,कोरबा,रामपुर, विधानसभा में महिला काँग्रेस प्रभारी की भूमिका का निर्वहन कर संगठनात्मक गतिविधियों को सुदृढ़ बनाएगी। कोरबा लोकसभा का प्रभार दिए जाने पर बबीता सिंह ने कोरबा लोकसभा की सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत व राज्यसभा सांसद प्रदेशाध्यक्ष फूलोदेवी नेताम के प्रति आभार जताया हैं। क़रीब दो दशकों से काँग्रेस की राजनीति में सक्रिय बबीता सिंह को तेज़तर्रार महिला नेत्री में शुमार किया जाता हैं व श्रीमती सिंह क्षेत्रीय सांसद ज्योत्सना महंत की क़रीबी बताई जाती हैं जिनकी वजह से उन्हें श्रीमती महंत ने अपने निर्वाचन क्षेत्र का प्रभारी बनवाया।
| अट्ठाईस अप्रैल को जारी संशोधित सूची में कोरबा लोकसभा की सांसद श्रीमती ज्योत्सना चरणदास महंत की अनुशंसा से पूर्व में सरगुजा लोकसभा महिला काँग्रेस प्रभारी बनायी गयी कोरिया जिले की वरिष्ठ महिला काँग्रेस नेत्री श्रीमती बबीता सिंह को अब कोरबा लोकसभा का प्रभारी नियुक्त किया गया हैं। चिरमिरी। छत्तीसगढ़ प्रदेश महिला काँग्रेस द्वारा छब्बीस अप्रैल को जारी लोकसभा प्रभारी की सूची में आंशिक फेरबदल प्रदेश महिला काँग्रेस अध्यक्ष सह राज्यसभा सांसद फूलोदेवी नेताम ने की हैं। अट्ठाईस अप्रैल को जारी संशोधित सूची में कोरबा लोकसभा की सांसद श्रीमती ज्योत्सना चरणदास महंत की अनुशंसा से पूर्व में सरगुजा लोकसभा महिला काँग्रेस प्रभारी बनायी गयी कोरिया जिले की वरिष्ठ महिला काँग्रेस नेत्री श्रीमती बबीता सिंह को अब कोरबा लोकसभा का प्रभारी नियुक्त किया गया हैं। प्रदेश उपाध्यक्ष बबीता सिंह अब कोरबा लोकसभा की सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत के निर्वाचन क्षेत्र में महिला काँग्रेस का काम-काज देखेगी व कोरबा लोकसभा में महिला संगठन को सशक्त करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगी। सांसद ज्योसना महंत की अनुशंसा से कोरबा लोकसभा क्षेत्र की महिला काँग्रेस प्रभारी बनायी गयी बबीता सिंह ने कोरबा लोकसभा क्षेत्र का प्रभार दिए जाने पर सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत के प्रति आभार जताते हुए कहा कि वे क्षेत्रीय सांसद की मंशानुरूप महिला काँग्रेस की मजबूती के लिए सक्रियता से काम करेगी। प्रदेश महिला काँग्रेस उपाध्यक्ष बबीता सिंह कोरबा लोकसभा के अंतर्गत आने वाले मनेन्द्रगढ़, बैकुंठपुर, भरतपुर-सोनहत,मरवाही,पाली तानाखार,कोरबा,रामपुर, विधानसभा में महिला काँग्रेस प्रभारी की भूमिका का निर्वहन कर संगठनात्मक गतिविधियों को सुदृढ़ बनाएगी। कोरबा लोकसभा का प्रभार दिए जाने पर बबीता सिंह ने कोरबा लोकसभा की सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत व राज्यसभा सांसद प्रदेशाध्यक्ष फूलोदेवी नेताम के प्रति आभार जताया हैं। क़रीब दो दशकों से काँग्रेस की राजनीति में सक्रिय बबीता सिंह को तेज़तर्रार महिला नेत्री में शुमार किया जाता हैं व श्रीमती सिंह क्षेत्रीय सांसद ज्योत्सना महंत की क़रीबी बताई जाती हैं जिनकी वजह से उन्हें श्रीमती महंत ने अपने निर्वाचन क्षेत्र का प्रभारी बनवाया। |
Adipurush के डायरेक्टर ओम राउत ने योगी आदित्यनाथ से की मुलाकात, विवादों से घिरी है फिल्म 'आदिपुरुष'
Adipurush Director Meets Uttar Pradesh Chief Minister : फिल्म 'आदिपुरुष' के डायरेक्टर ओम राउत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिले हैं। ओम राउत ने मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की है।
Om Raut Meets Yogi Adityanath : प्रभास और कृति सेनॉन की अपकमिंग फिल्म 'आदिपुरुष' (Adipurush) जब से अनाउंस हुई तब से चर्चा में बनी हुई है। इस फिल्म को लेकर काफी बवाल भी हो रहा है। पहले फिल्म कैरेक्टर्स के लुक को लेकर हंगामा हुआ और अब फिल्म के नए पोस्टर पर आपत्ति जताई जा रही है। इसी बीच फिल्म 'आदिपुरुष' के डायरेक्टर ओम राउत (Om Raut) ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के साथ मुलाकात की है। ओम राउत ने इसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की है।
फिल्म 'आदिपुरुष' के डायरेक्टर ओम राउत ने मंगलवार को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक तस्वीर शेयर की है। इस तस्वीर में आप देख सकते हैं कि ओम राउत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करते नजर आ रहे हैं। ओम राउत ने सीएम योगी को छत्रपति शिवाजी महाराज और राज माता जीजाऊ की मूर्ति भेंट की। ओम राउत ने इस तस्वीर के साथ कैप्शन लिखा है, 'देश संस्कारों से बनता है। राज माता जीजाऊ ने बाल्यकाल में शिवबा को जो संस्कार दिये उसी के परिणाम स्वरूप वे हिंदवी स्वराज के ध्वजावाहक छत्रपति शिवाजी महाराज बनकर उभरे, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी को छत्रपति शिवाजी महाराज और राज माता जीजाऊ की मूर्ति उन्हें भेंट स्वरूप देकर मुझे अतुल्य आनंद प्राप्त हुआ है।'
ओम राउत के डायरेक्शन में बनने वाली फिल्म 'आदिपुरुष' में प्रभास और कृति सेनॉन के अलावा सनी सिंह, सैफ अली खान और देवदत्त नागे भी महत्वपूर्ण भूमिका में हैं। फिल्म में राम के रोल में प्रभास, सीता के रोल में कृति सेनॉन, लक्ष्मण के रोल में सनी सिंह और रावण के रोल में सैफ अली खान नजर आएंगे। फिल्म 'आदिपुरुष' 16 जून, 2023 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। बताते चलें कि हाल ही में रामनवमी के मौके पर मेकर्स ने फिल्म 'आदिपुरुष' के पोस्टर को शेयर किया था। इस पोस्टर पर आपत्ति जताते हुए फिल्म की टीम पर केस दर्ज कराया था। फिल्म के पोस्टर को लेकर लोगों का कहना था कि श्रीराम बिना जनेऊ और माता सीता बिना सिंदूर के नजर आ रही हैं।
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| Adipurush के डायरेक्टर ओम राउत ने योगी आदित्यनाथ से की मुलाकात, विवादों से घिरी है फिल्म 'आदिपुरुष' Adipurush Director Meets Uttar Pradesh Chief Minister : फिल्म 'आदिपुरुष' के डायरेक्टर ओम राउत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिले हैं। ओम राउत ने मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की है। Om Raut Meets Yogi Adityanath : प्रभास और कृति सेनॉन की अपकमिंग फिल्म 'आदिपुरुष' जब से अनाउंस हुई तब से चर्चा में बनी हुई है। इस फिल्म को लेकर काफी बवाल भी हो रहा है। पहले फिल्म कैरेक्टर्स के लुक को लेकर हंगामा हुआ और अब फिल्म के नए पोस्टर पर आपत्ति जताई जा रही है। इसी बीच फिल्म 'आदिपुरुष' के डायरेक्टर ओम राउत ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ मुलाकात की है। ओम राउत ने इसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की है। फिल्म 'आदिपुरुष' के डायरेक्टर ओम राउत ने मंगलवार को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक तस्वीर शेयर की है। इस तस्वीर में आप देख सकते हैं कि ओम राउत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करते नजर आ रहे हैं। ओम राउत ने सीएम योगी को छत्रपति शिवाजी महाराज और राज माता जीजाऊ की मूर्ति भेंट की। ओम राउत ने इस तस्वीर के साथ कैप्शन लिखा है, 'देश संस्कारों से बनता है। राज माता जीजाऊ ने बाल्यकाल में शिवबा को जो संस्कार दिये उसी के परिणाम स्वरूप वे हिंदवी स्वराज के ध्वजावाहक छत्रपति शिवाजी महाराज बनकर उभरे, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी को छत्रपति शिवाजी महाराज और राज माता जीजाऊ की मूर्ति उन्हें भेंट स्वरूप देकर मुझे अतुल्य आनंद प्राप्त हुआ है।' ओम राउत के डायरेक्शन में बनने वाली फिल्म 'आदिपुरुष' में प्रभास और कृति सेनॉन के अलावा सनी सिंह, सैफ अली खान और देवदत्त नागे भी महत्वपूर्ण भूमिका में हैं। फिल्म में राम के रोल में प्रभास, सीता के रोल में कृति सेनॉन, लक्ष्मण के रोल में सनी सिंह और रावण के रोल में सैफ अली खान नजर आएंगे। फिल्म 'आदिपुरुष' सोलह जून, दो हज़ार तेईस को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। बताते चलें कि हाल ही में रामनवमी के मौके पर मेकर्स ने फिल्म 'आदिपुरुष' के पोस्टर को शेयर किया था। इस पोस्टर पर आपत्ति जताते हुए फिल्म की टीम पर केस दर्ज कराया था। फिल्म के पोस्टर को लेकर लोगों का कहना था कि श्रीराम बिना जनेऊ और माता सीता बिना सिंदूर के नजर आ रही हैं। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें। |
मुंबई - मुंबई-पुणे द्रुतगति मार्ग की टोल वसूली की रकम कबकी वसूल हो चुकी है, फिर भी सरकार द्वारा यहां की टोल वसूली बंद नहीं की गई है। इस संबंध में टोल विश्लेषक बार बार टोल बंद करने की मांग कर रहे हैं, पर इस मांग पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस समेत एमएसआरडीसी द्वारा टालमटोल किया जा रहा हगै। जिसकी वजह से टोल विश्लेषक ने एंटी करप्शन व्यूरो के पास मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, सार्वजनिक निर्माण काम मंत्री एकनाथ शिंदे और एमएसआरडीसी के व्यवस्थापकीय संचालक राधेश्याम मोपलवार के खिलाफ शिकायत दर्ज की है। टोल विश्लेषक संजय शिरोडकर, विवेक वेलणकर, श्रीनिवास घाणेकर और प्रवीण वाटेगावर की शिकायत करने की जानकारी विवेक वेलणकर ने बुधवार को दी।
द्रुतगति मार्ग के टोल के झोल का पर्दाफाश टोल विश्लेषकों ने किया है। एक झोल में 2016 में टोल वसूली की पूरी रकम टोल ठेकेदारों ने वसूल की है। जिसकी वजह से 2019 तक टोल वसूली शुरु रहने वाली है। आम जनता की जेब काटते हुए टोल वसूली से ठेकेदारों को ढाई करोड़ का अतिरिक्त मुनाफा होने वाला है। जिसकी वजह से विश्लेषक इस टोल वसूली को रोकने में लगे हुए हैं। पर टोल वसूली फिर भी बंद नहीं हो रही है।
| मुंबई - मुंबई-पुणे द्रुतगति मार्ग की टोल वसूली की रकम कबकी वसूल हो चुकी है, फिर भी सरकार द्वारा यहां की टोल वसूली बंद नहीं की गई है। इस संबंध में टोल विश्लेषक बार बार टोल बंद करने की मांग कर रहे हैं, पर इस मांग पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस समेत एमएसआरडीसी द्वारा टालमटोल किया जा रहा हगै। जिसकी वजह से टोल विश्लेषक ने एंटी करप्शन व्यूरो के पास मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, सार्वजनिक निर्माण काम मंत्री एकनाथ शिंदे और एमएसआरडीसी के व्यवस्थापकीय संचालक राधेश्याम मोपलवार के खिलाफ शिकायत दर्ज की है। टोल विश्लेषक संजय शिरोडकर, विवेक वेलणकर, श्रीनिवास घाणेकर और प्रवीण वाटेगावर की शिकायत करने की जानकारी विवेक वेलणकर ने बुधवार को दी। द्रुतगति मार्ग के टोल के झोल का पर्दाफाश टोल विश्लेषकों ने किया है। एक झोल में दो हज़ार सोलह में टोल वसूली की पूरी रकम टोल ठेकेदारों ने वसूल की है। जिसकी वजह से दो हज़ार उन्नीस तक टोल वसूली शुरु रहने वाली है। आम जनता की जेब काटते हुए टोल वसूली से ठेकेदारों को ढाई करोड़ का अतिरिक्त मुनाफा होने वाला है। जिसकी वजह से विश्लेषक इस टोल वसूली को रोकने में लगे हुए हैं। पर टोल वसूली फिर भी बंद नहीं हो रही है। |
LUCKNOW: राजकीय स्कूलों में शिक्षकों के खाली पदों को भरने के लिए होने वाली एलटी ग्रेड भर्ती प्रक्रिया में बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। सब कुछ ठीक रहा तो आने वाले समय में एलटी शिक्षक भर्ती मेरिट की जगह रिटेन एग्जाम के माध्यम से लिया जाएगा। इसके लिए शिक्षक भर्ती नियमावली में संशोधन किया जाएगा। इसको लेकर विभागीय स्तर पर विचार चल रहा है। जल्द ही एक प्रस्ताव तैयार कर बोर्ड को भेजा जाएगा। बोर्ड के सूत्रों का कहना है कि अगली बार से एलटी ग्रेड भर्ती प्रक्रिया नए नियमों के आधार पर ही कराई जाएगी।
दरअसल, प्रदेश के क्8 मंडलों में राजकीय हाईस्कूल के करीब म्म्ब्8 पदों पर एलटी शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया ख्0क्ब् में शुरू हुई थी। भर्ती प्रक्रिया मेरिट के आधार पर चल रही है। ऐसे में बड़ी संख्या में फर्जी मार्कशीट्स लगाकर कैंडीडेट्स ने मेरिट में जगह बना ली। अकेले राजधानी लखनऊ में तीन सौ से ज्यादा फर्जी मार्कशीट पकड़ी जा चुकी हैं। चूंकि बिना सत्यापन के नियुक्ति नहीं दी जानी है, इसलिए जैसे-जैसे रिपोर्ट आ रही हैं, वैसे-वैसे फर्जीवाड़े का खुलासा हो रहा है। इन सबके बीच वे कैंडीडेट्स परेशान हो रहे हैं, जिनकी मार्कशीटें सही हैं। लेकिन सत्यापन न आने से भर्ती प्रक्रिया अधर में लटकी है।
मौजूदा समय में पूरे प्रदेश में राजकीय स्कूलों में करीब क्ब् हजार से अधिक शिक्षकों के पद खाली हैं। इन्हीं को भरने के लिए ख्0क्ब् में म्म्ब्8 पदों पर भर्ती शुरू की गई थी, जो अभी तक नहीं भरे जा सके हैं। इन बीते दो सालों में राजकीय स्कूलों में करीब एक हजार शिक्षक और सेवानिवृत्त हो चुके हैं। ऐसे में मेरिट के आधार पर भर्ती प्रक्रिया के होने और इसमें फर्जीवाड़े ने अधिकारियों को काफी परेशान कर दिया है। खाली पदों का असर सीधा इन स्कूलों की शिक्षण व्यवस्था पर देखा जा रहा है।
दो साल से भर्ती प्रक्रिया पूरी न होने की वजह से गुस्साए कैंडीडेट्स ने बीते दिनों इलाहाबाद में प्रदर्शन किया था। उन्होंने शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया जल्द पूरी करने और नई भर्ती में मेरिट की जगह लिखित परीक्षा कराने की मांग की थी। इस संबंध में छात्रों ने अपर निदेशक माध्यमिक रमेश को ज्ञापन भी दिया था।
एलटी शिक्षक भर्ती में अभी मेरिट के आधार पर चयन प्रक्रिया चल रही है। पिछले दिनों छात्रों ने लिखित परीक्षा कराने के संबंध में ज्ञापन दिया था। हम भी इस प्रक्रिया पर विचार कर पूरी नियमावली बनाकर एक प्रस्ताव शासन को भेजने वाले हैं।
- रमेश,
| LUCKNOW: राजकीय स्कूलों में शिक्षकों के खाली पदों को भरने के लिए होने वाली एलटी ग्रेड भर्ती प्रक्रिया में बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। सब कुछ ठीक रहा तो आने वाले समय में एलटी शिक्षक भर्ती मेरिट की जगह रिटेन एग्जाम के माध्यम से लिया जाएगा। इसके लिए शिक्षक भर्ती नियमावली में संशोधन किया जाएगा। इसको लेकर विभागीय स्तर पर विचार चल रहा है। जल्द ही एक प्रस्ताव तैयार कर बोर्ड को भेजा जाएगा। बोर्ड के सूत्रों का कहना है कि अगली बार से एलटी ग्रेड भर्ती प्रक्रिया नए नियमों के आधार पर ही कराई जाएगी। दरअसल, प्रदेश के क्आठ मंडलों में राजकीय हाईस्कूल के करीब म्म्ब्आठ पदों पर एलटी शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया ख्शून्यक्ब् में शुरू हुई थी। भर्ती प्रक्रिया मेरिट के आधार पर चल रही है। ऐसे में बड़ी संख्या में फर्जी मार्कशीट्स लगाकर कैंडीडेट्स ने मेरिट में जगह बना ली। अकेले राजधानी लखनऊ में तीन सौ से ज्यादा फर्जी मार्कशीट पकड़ी जा चुकी हैं। चूंकि बिना सत्यापन के नियुक्ति नहीं दी जानी है, इसलिए जैसे-जैसे रिपोर्ट आ रही हैं, वैसे-वैसे फर्जीवाड़े का खुलासा हो रहा है। इन सबके बीच वे कैंडीडेट्स परेशान हो रहे हैं, जिनकी मार्कशीटें सही हैं। लेकिन सत्यापन न आने से भर्ती प्रक्रिया अधर में लटकी है। मौजूदा समय में पूरे प्रदेश में राजकीय स्कूलों में करीब क्ब् हजार से अधिक शिक्षकों के पद खाली हैं। इन्हीं को भरने के लिए ख्शून्यक्ब् में म्म्ब्आठ पदों पर भर्ती शुरू की गई थी, जो अभी तक नहीं भरे जा सके हैं। इन बीते दो सालों में राजकीय स्कूलों में करीब एक हजार शिक्षक और सेवानिवृत्त हो चुके हैं। ऐसे में मेरिट के आधार पर भर्ती प्रक्रिया के होने और इसमें फर्जीवाड़े ने अधिकारियों को काफी परेशान कर दिया है। खाली पदों का असर सीधा इन स्कूलों की शिक्षण व्यवस्था पर देखा जा रहा है। दो साल से भर्ती प्रक्रिया पूरी न होने की वजह से गुस्साए कैंडीडेट्स ने बीते दिनों इलाहाबाद में प्रदर्शन किया था। उन्होंने शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया जल्द पूरी करने और नई भर्ती में मेरिट की जगह लिखित परीक्षा कराने की मांग की थी। इस संबंध में छात्रों ने अपर निदेशक माध्यमिक रमेश को ज्ञापन भी दिया था। एलटी शिक्षक भर्ती में अभी मेरिट के आधार पर चयन प्रक्रिया चल रही है। पिछले दिनों छात्रों ने लिखित परीक्षा कराने के संबंध में ज्ञापन दिया था। हम भी इस प्रक्रिया पर विचार कर पूरी नियमावली बनाकर एक प्रस्ताव शासन को भेजने वाले हैं। - रमेश, |
शौच, सन्तोष, तपः, स्वाध्याय, ईश्वर प्रणिधान ये पांच नियम कहलाते हैं ।
शौच दो प्रकारका होता है । बाह्य और आभ्यन्तरिक । बाह्य शौच उसे कहते हैं जो मृत्तिका और जलादिसे शरीरकी शुद्धि की जाती है तथा गोमूत्र, यवागू, उपवास, मेध्याभ्यवहरण- पवित्र वस्तुका भक्षण किया जाता है ।
चित्तके रागद्वेषादि मलोंके प्रक्षालन करनेका नाम आभ्यन्तर शौच है । सन्तोष - अत्यावश्यक प्राणयात्रानिर्वाहक विद्यमान साधनसे अतिरिक्त - की लिप्सा न करनेको सन्तोष कहते हैं ।
: - जिघत्सा - खानेकी इच्छा, पिपासा -पीनेकी इच्छा, शीत - उष्ण, स्थान - आसन, एकादशी, चान्द्रायणादि व्रत, ये सब तप कहे जाते हैं ।
स्वाध्याय - वेदान्त, श्रीवाल्मीकिरामायण, श्रीमद्वाल्मीकि संहिता, अगस्त्यसंहिता आदि मोक्ष शास्त्रोंका अध्ययन स्वाध्याय कहा जाता है । ईश्वरप्रणिधान - परम गुरु भगवान् श्रीरामचन्द्रजीमें समस्त कर्मोंका अर्पण ईश्वर प्रणिधान कहा जाता है ।
स्थिर - निश्चल, सुख सुखकर हो वैसा आसन करना चाहिये । पद्मासन, वीरासन आदि आसनों से जिससे स्थिरता और सुखपूर्वक बैठा जावे वही आसन करना चाहिये ।
सिद्ध होने पर श्वास और प्रश्वासकी गतिके विच्छेदन करनेको प्राणायाम कहते हैं ।
प्राणायाम मानवजातिके लिये एक अत्यावश्यक वस्तु है। इससे शारीरिक और आत्मिक दोनोंही उन्नति होती हैं । बन्ध और मोक्षके कारणभूत मनका निग्रहभी इसीके द्वारा ठीक २ होता है । योगियोंका कथन है कि -
" प्राणायामेन योगीन्द्रो लब्ध्वैश्वर्याष्टकानि वै । पापपुण्योदधिं तीर्खा त्रैलोक्यचरतामियात् ।। "
अर्थात् योगीन्द्र लोग प्राणायाम के द्वारा अणिमा, गरिमा, लघिमादि अष्ट सिद्धियों को प्राप्त होकर तथा पाप पुण्यसे पृथक् होकर तीनों लोकों में स्वेच्छा विहार करते हैं । तथा -
" प्राणायामेन सिद्धेन सर्वव्याधिक्षयो भवेत् । "
जो मनुष्य प्राणायामको भले प्रकार सिद्ध कर लेता है उसके सम्पूर्ण व्याधियोंका नाश हो जाता है। परन्तु -
" अयुक्ताभ्यासयोगेन सर्वव्याधिसमुद्भवः ।"
यदि उचित रीतिसे प्राणायामकान किया गया हो, आहार, विहारादि में संयमका पालन न किया गया हो तो सम्पूर्ण व्याधियों की उत्पत्तिभी हो जाती है । लिखा है कि -
" हिक्का श्वासरच काशच शिरः कर्णाक्षिवेदना । भवन्ति विविधा रोगाः पवनस्य व्यतिक्रमात् ।।
यदि प्राणायामकालमें वायुका व्यतिक्रम हो जावे तो हिक्का - हिचकी, श्वास, -- काश खांसी, शिरोवेदना, कर्णवेदना और अक्षवेदना आदि विविध रोग उत्पन्न हो जाते हैं ।
अनुभवी महात्माओंका कथन है कि" स्वेदः संजायते देहे योगिनः प्रथमोग्रमे । यदा संजायते स्वेदो मर्दनं कारयेत्सुधीः । अन्यथा विग्रहे धातुर्नष्टो भवति योगिनः ।।
प्राणायाम के प्रथम काल में योगियों के शरीरमें स्वेद - पसीना आ जाता
है । उसका प्रोक्षण नहीं करना चाहिये । किन्तु शरीरमेंही मर्दन करा देना चाहिये । नहीं तो शरीरके धातु नष्ट हो जाते हैं । | शौच, सन्तोष, तपः, स्वाध्याय, ईश्वर प्रणिधान ये पांच नियम कहलाते हैं । शौच दो प्रकारका होता है । बाह्य और आभ्यन्तरिक । बाह्य शौच उसे कहते हैं जो मृत्तिका और जलादिसे शरीरकी शुद्धि की जाती है तथा गोमूत्र, यवागू, उपवास, मेध्याभ्यवहरण- पवित्र वस्तुका भक्षण किया जाता है । चित्तके रागद्वेषादि मलोंके प्रक्षालन करनेका नाम आभ्यन्तर शौच है । सन्तोष - अत्यावश्यक प्राणयात्रानिर्वाहक विद्यमान साधनसे अतिरिक्त - की लिप्सा न करनेको सन्तोष कहते हैं । : - जिघत्सा - खानेकी इच्छा, पिपासा -पीनेकी इच्छा, शीत - उष्ण, स्थान - आसन, एकादशी, चान्द्रायणादि व्रत, ये सब तप कहे जाते हैं । स्वाध्याय - वेदान्त, श्रीवाल्मीकिरामायण, श्रीमद्वाल्मीकि संहिता, अगस्त्यसंहिता आदि मोक्ष शास्त्रोंका अध्ययन स्वाध्याय कहा जाता है । ईश्वरप्रणिधान - परम गुरु भगवान् श्रीरामचन्द्रजीमें समस्त कर्मोंका अर्पण ईश्वर प्रणिधान कहा जाता है । स्थिर - निश्चल, सुख सुखकर हो वैसा आसन करना चाहिये । पद्मासन, वीरासन आदि आसनों से जिससे स्थिरता और सुखपूर्वक बैठा जावे वही आसन करना चाहिये । सिद्ध होने पर श्वास और प्रश्वासकी गतिके विच्छेदन करनेको प्राणायाम कहते हैं । प्राणायाम मानवजातिके लिये एक अत्यावश्यक वस्तु है। इससे शारीरिक और आत्मिक दोनोंही उन्नति होती हैं । बन्ध और मोक्षके कारणभूत मनका निग्रहभी इसीके द्वारा ठीक दो होता है । योगियोंका कथन है कि - " प्राणायामेन योगीन्द्रो लब्ध्वैश्वर्याष्टकानि वै । पापपुण्योदधिं तीर्खा त्रैलोक्यचरतामियात् ।। " अर्थात् योगीन्द्र लोग प्राणायाम के द्वारा अणिमा, गरिमा, लघिमादि अष्ट सिद्धियों को प्राप्त होकर तथा पाप पुण्यसे पृथक् होकर तीनों लोकों में स्वेच्छा विहार करते हैं । तथा - " प्राणायामेन सिद्धेन सर्वव्याधिक्षयो भवेत् । " जो मनुष्य प्राणायामको भले प्रकार सिद्ध कर लेता है उसके सम्पूर्ण व्याधियोंका नाश हो जाता है। परन्तु - " अयुक्ताभ्यासयोगेन सर्वव्याधिसमुद्भवः ।" यदि उचित रीतिसे प्राणायामकान किया गया हो, आहार, विहारादि में संयमका पालन न किया गया हो तो सम्पूर्ण व्याधियों की उत्पत्तिभी हो जाती है । लिखा है कि - " हिक्का श्वासरच काशच शिरः कर्णाक्षिवेदना । भवन्ति विविधा रोगाः पवनस्य व्यतिक्रमात् ।। यदि प्राणायामकालमें वायुका व्यतिक्रम हो जावे तो हिक्का - हिचकी, श्वास, -- काश खांसी, शिरोवेदना, कर्णवेदना और अक्षवेदना आदि विविध रोग उत्पन्न हो जाते हैं । अनुभवी महात्माओंका कथन है कि" स्वेदः संजायते देहे योगिनः प्रथमोग्रमे । यदा संजायते स्वेदो मर्दनं कारयेत्सुधीः । अन्यथा विग्रहे धातुर्नष्टो भवति योगिनः ।। प्राणायाम के प्रथम काल में योगियों के शरीरमें स्वेद - पसीना आ जाता है । उसका प्रोक्षण नहीं करना चाहिये । किन्तु शरीरमेंही मर्दन करा देना चाहिये । नहीं तो शरीरके धातु नष्ट हो जाते हैं । |
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष रमीज राजा (Ramiz Raja) अपने बयानों को लेकर इन दिनों सुर्खियों में बने हुए हैं. कुछ दिन पहले ही उन्होंने पाकिस्तान क्रिकेट टीम के प्रदर्शन में हुए बदलाव को लेकर खिलाड़ियों को सराहा था. वहीं, पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर तनवीर अहमद पीसीबी के चेयरमैन से खफा हैं. उन्होंने पीसीबी अध्यक्ष को जमकर फटकार लगाई है.
दरअसल, पीसीबी अध्यक्ष रमीज राजा ((Ramiz Raja) ने बीते शुक्रवार को आने वाले वर्षों में पाकिस्तान क्रिकेट के लिए कई नई परियोजनाओं की घोषणा की है. उन्होंने बीते साल बोर्ड के अध्यक्ष बनने के बाद से अपनी और पाकिस्तान की टीम की उपलब्धियों पर भी लोगों का ध्यान खींचने की कोशिश की.
वहीं, पूर्व क्रिकेटर तनवीर अहमद का मानना है कि रमीज राजा के कार्यभार संभालने के बाद से कुछ भी सुधार नहीं हुआ है. अहमद (Tanvir Ahmed) ने अपने एक यूट्यूब चैनल पर बात करते हुए कहा,
उन्होंने आगे कहा,
| पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष रमीज राजा अपने बयानों को लेकर इन दिनों सुर्खियों में बने हुए हैं. कुछ दिन पहले ही उन्होंने पाकिस्तान क्रिकेट टीम के प्रदर्शन में हुए बदलाव को लेकर खिलाड़ियों को सराहा था. वहीं, पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर तनवीर अहमद पीसीबी के चेयरमैन से खफा हैं. उन्होंने पीसीबी अध्यक्ष को जमकर फटकार लगाई है. दरअसल, पीसीबी अध्यक्ष रमीज राजा ने बीते शुक्रवार को आने वाले वर्षों में पाकिस्तान क्रिकेट के लिए कई नई परियोजनाओं की घोषणा की है. उन्होंने बीते साल बोर्ड के अध्यक्ष बनने के बाद से अपनी और पाकिस्तान की टीम की उपलब्धियों पर भी लोगों का ध्यान खींचने की कोशिश की. वहीं, पूर्व क्रिकेटर तनवीर अहमद का मानना है कि रमीज राजा के कार्यभार संभालने के बाद से कुछ भी सुधार नहीं हुआ है. अहमद ने अपने एक यूट्यूब चैनल पर बात करते हुए कहा, उन्होंने आगे कहा, |
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित लोकभवन में आग लग गई है। लोकभवन के पंचम तल पर ही मुख्यमंत्री आदित्यनाथ कार्यालय है। आग लगने के बाद लोक भवन में अफरा-तफरी मच गई है।
लखनऊः राजधानी लखनऊ के लोकभवन में गुरुवार को आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। इसी बिल्डिंग में पंचम तल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी दफ्तर है। आग लगने की वजह का शार्ट सर्किट बताया जा रहा है। इसके अलावा किसी तरह के कोई नुकसान की जानकारी नहीं है।
आग लोक भवन की छठीं मंजिल से सी ब्लॉक में लगी थी। इस मंजिल पर गृह विभाग का दफ्तर है। सूचना मिलते ही दमकल विभाग के कई वाहन घटनास्थल पर पहुंच गए और आग पर काबू पा लिया।
हादसे के वक्त वह बिल्डिंग में मौजूद नहीं थे। हादसे के तुरंत बाद लोकभवन के ग्राउंड फ्लोर को खाली कराया गया। हादसे की जानकारी मिलते ही पुलिस तुरंत एक्शन में आ गई और एसएसपी कलानिधि नैथानी ने ग्राउंड फ्लोर पर चेकिंग शुरू कर दी।
सारे अधिकारियों और कर्मचारियों को ग्राउंड फ्लोर से बाहर कर दिया गया। दमकल विभाग के अधिकारियों ने आग पर काबू पा लिया है और किसी भी तरह के नुकसान की खबर नहीं है।
| उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित लोकभवन में आग लग गई है। लोकभवन के पंचम तल पर ही मुख्यमंत्री आदित्यनाथ कार्यालय है। आग लगने के बाद लोक भवन में अफरा-तफरी मच गई है। लखनऊः राजधानी लखनऊ के लोकभवन में गुरुवार को आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। इसी बिल्डिंग में पंचम तल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी दफ्तर है। आग लगने की वजह का शार्ट सर्किट बताया जा रहा है। इसके अलावा किसी तरह के कोई नुकसान की जानकारी नहीं है। आग लोक भवन की छठीं मंजिल से सी ब्लॉक में लगी थी। इस मंजिल पर गृह विभाग का दफ्तर है। सूचना मिलते ही दमकल विभाग के कई वाहन घटनास्थल पर पहुंच गए और आग पर काबू पा लिया। हादसे के वक्त वह बिल्डिंग में मौजूद नहीं थे। हादसे के तुरंत बाद लोकभवन के ग्राउंड फ्लोर को खाली कराया गया। हादसे की जानकारी मिलते ही पुलिस तुरंत एक्शन में आ गई और एसएसपी कलानिधि नैथानी ने ग्राउंड फ्लोर पर चेकिंग शुरू कर दी। सारे अधिकारियों और कर्मचारियों को ग्राउंड फ्लोर से बाहर कर दिया गया। दमकल विभाग के अधिकारियों ने आग पर काबू पा लिया है और किसी भी तरह के नुकसान की खबर नहीं है। |
मुंबई । अनीस बज्मी की आगामी मनोवैज्ञानिक और एक्शन थ्रिलर 'नाम' रिलीज होने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस में अजय देवगन नजर आएंगे। फिल्म की रिलीज को लेकर मेकर्स की नजर मई-जुलाई पर है। फिल्म ओटीटी पर रिलीज होगी या थिएटर में ये अभी तय नहीं हुआ है।
'नाम' एक मनोवैज्ञानिक थ्रिलर है जिसमें एक व्यक्ति अपनी याददाश्त खो देता है और अपनी पहचान खोजने के लिए एक यात्रा पर निकल जाता है। फिल्म की शूटिंग स्विट्जरलैंड और मुंबई में की गई है।
फिल्म 'हलचल', 'प्यार तो होना ही था' और 'दीवानगी' के बाद अजय के साथ बज्मी की चौथी फिल्म है।
इसे अब गुजरात स्थित रियल एस्टेट मुगल और बॉलीवुड निर्माता अनिल रूंगटा द्वारा अधिग्रहित कर लिया गया है और इसे रूंगटा एंटरटेनमेंट के बैनर तले रिलीज किया जाएगा।
रूंगटा का कहना है कि 'नाम' मेरे लिए वास्तव में खास है क्योंकि यह 'दीवानगी', 'प्यार तो होना ही था' और 'हलचल' के बाद अजय और अनीस की सुपरहिट जोड़ी का चौथा सहयोग है। अजय के साथ काम करना शानदार है। वह किसी भी किरदार को निभाने में बहुत मेहनत करते हैं फिर भी हमेशा स्क्रीन पर सहज दिखते हैं।
वर्क फ्रंट की बात करें तो अजय देवगन इन दिनों 'रनवे 34' का प्रमोशन कर रहे हैं।
| मुंबई । अनीस बज्मी की आगामी मनोवैज्ञानिक और एक्शन थ्रिलर 'नाम' रिलीज होने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस में अजय देवगन नजर आएंगे। फिल्म की रिलीज को लेकर मेकर्स की नजर मई-जुलाई पर है। फिल्म ओटीटी पर रिलीज होगी या थिएटर में ये अभी तय नहीं हुआ है। 'नाम' एक मनोवैज्ञानिक थ्रिलर है जिसमें एक व्यक्ति अपनी याददाश्त खो देता है और अपनी पहचान खोजने के लिए एक यात्रा पर निकल जाता है। फिल्म की शूटिंग स्विट्जरलैंड और मुंबई में की गई है। फिल्म 'हलचल', 'प्यार तो होना ही था' और 'दीवानगी' के बाद अजय के साथ बज्मी की चौथी फिल्म है। इसे अब गुजरात स्थित रियल एस्टेट मुगल और बॉलीवुड निर्माता अनिल रूंगटा द्वारा अधिग्रहित कर लिया गया है और इसे रूंगटा एंटरटेनमेंट के बैनर तले रिलीज किया जाएगा। रूंगटा का कहना है कि 'नाम' मेरे लिए वास्तव में खास है क्योंकि यह 'दीवानगी', 'प्यार तो होना ही था' और 'हलचल' के बाद अजय और अनीस की सुपरहिट जोड़ी का चौथा सहयोग है। अजय के साथ काम करना शानदार है। वह किसी भी किरदार को निभाने में बहुत मेहनत करते हैं फिर भी हमेशा स्क्रीन पर सहज दिखते हैं। वर्क फ्रंट की बात करें तो अजय देवगन इन दिनों 'रनवे चौंतीस' का प्रमोशन कर रहे हैं। |
यशपाल जैन
कुछ नये-पुराने चित्र
बहुत पुरानी बात है । संभवतः २८-२९ वर्ष पहले की । महात्मा गांधी इलाहाबाद गये हुए थे और आनन्द-भवन में ठहरे थे। शाम को उनकी रोज खुले लॉन पर प्रार्थना होती थी । काफी लोग इकट्ठे हो जाते थे। मैं उन दिनों प्रयाग विश्वविद्यालय में पढ़ता था । एक दिन अचानक शाम को प्रार्थना में शामिल होने के लिए आनन्द भवन जा पहुंचा। प्रार्थना शुरू होने में देर थी । दरियां बिछ चुकी थीं और लोग बैठ रहे थे। गांधीजी आनेवाले थे।
इतने में अन्दर से एक नौजवान आया । रंग गोरा-चिट्टा, चेहरा अत्यन्त भव्य, तेज से दीप्त । उसने घुटनों से नीचे तक का श्वेत खादी का कुरता और खादी की बारीक धोती पहन रखी थी । ऊपर से जाकेट । जहां गांधीजी के बैठने की जगह थी वहां खड़े होकर उसने उपस्थित लोगों पर एक निगाह डाली और सिपहसालार के रूप में एकदम बोला, "आप लोग एक-एक गज पीछे हट जायं ।"
कहने की देर थी कि लोग पीछे हट गये । उस भीड़ में कोई १७-१८ साल का एक लड़का था । उसने सोचा कि जब सब पीछे हट गये हैं तो उस एक के हटने-न हटने से क्या अन्तर पड़ेगा । सो वह वहीं बैठा रहा । नौजवान ने देखा कि वह लड़का न तो हटा और न हटने का नाम ले रहा है, तो वह आगे बढ़कर आया; आवेश के साथ लड़के की बातें पकड़कर खड़ा किया और इतने जोर से धक्का दिया कि बेचारा भीड़ के ऊपर जा गिरा। फिर कुछ होठों में बड़बड़ाता हुआ वह नौजवान वापस लौट
यह नौजवान थे हमारे जवाहरलाल नेहरू । उन्हें बहुत बार सभाओं में देखा था। उनके भाषण भी सुने थे। उनके जोश के भी नमूने सामने आये थे, पर उनकी उग्रता को इतने निकट से देखने का यह पहला ही अवसर था। सच बात यह है कि उसकी वह हरकत मुझे बहुत बुरी लगी, पर बाद में है देखा कि उस समय उन्होंने जो किया, वह उनके लिए बहुत स्वाभाविक था । वह किसी भी अवस्था में अनुशासन का भंग सहन नहीं कर सकते थे।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से आनन्द भवन अधिक दूर नहीं था। छात्र-छात्राएं अक्सर वहां चले जाते थे और मौका होता था तो जवाहरलालजी से मिल आते थे । आनन्द - भवन में आएदिन बड़े-बड़े नेताओं का जमघट लगा रहता था । जवाहरलालजी के साथ-साथ उनके भी दर्शन हो जाते थे ।
कुछ नये पुराने चित्र | यशपाल जैन कुछ नये-पुराने चित्र बहुत पुरानी बात है । संभवतः अट्ठाईस-उनतीस वर्ष पहले की । महात्मा गांधी इलाहाबाद गये हुए थे और आनन्द-भवन में ठहरे थे। शाम को उनकी रोज खुले लॉन पर प्रार्थना होती थी । काफी लोग इकट्ठे हो जाते थे। मैं उन दिनों प्रयाग विश्वविद्यालय में पढ़ता था । एक दिन अचानक शाम को प्रार्थना में शामिल होने के लिए आनन्द भवन जा पहुंचा। प्रार्थना शुरू होने में देर थी । दरियां बिछ चुकी थीं और लोग बैठ रहे थे। गांधीजी आनेवाले थे। इतने में अन्दर से एक नौजवान आया । रंग गोरा-चिट्टा, चेहरा अत्यन्त भव्य, तेज से दीप्त । उसने घुटनों से नीचे तक का श्वेत खादी का कुरता और खादी की बारीक धोती पहन रखी थी । ऊपर से जाकेट । जहां गांधीजी के बैठने की जगह थी वहां खड़े होकर उसने उपस्थित लोगों पर एक निगाह डाली और सिपहसालार के रूप में एकदम बोला, "आप लोग एक-एक गज पीछे हट जायं ।" कहने की देर थी कि लोग पीछे हट गये । उस भीड़ में कोई सत्रह-अट्ठारह साल का एक लड़का था । उसने सोचा कि जब सब पीछे हट गये हैं तो उस एक के हटने-न हटने से क्या अन्तर पड़ेगा । सो वह वहीं बैठा रहा । नौजवान ने देखा कि वह लड़का न तो हटा और न हटने का नाम ले रहा है, तो वह आगे बढ़कर आया; आवेश के साथ लड़के की बातें पकड़कर खड़ा किया और इतने जोर से धक्का दिया कि बेचारा भीड़ के ऊपर जा गिरा। फिर कुछ होठों में बड़बड़ाता हुआ वह नौजवान वापस लौट यह नौजवान थे हमारे जवाहरलाल नेहरू । उन्हें बहुत बार सभाओं में देखा था। उनके भाषण भी सुने थे। उनके जोश के भी नमूने सामने आये थे, पर उनकी उग्रता को इतने निकट से देखने का यह पहला ही अवसर था। सच बात यह है कि उसकी वह हरकत मुझे बहुत बुरी लगी, पर बाद में है देखा कि उस समय उन्होंने जो किया, वह उनके लिए बहुत स्वाभाविक था । वह किसी भी अवस्था में अनुशासन का भंग सहन नहीं कर सकते थे। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से आनन्द भवन अधिक दूर नहीं था। छात्र-छात्राएं अक्सर वहां चले जाते थे और मौका होता था तो जवाहरलालजी से मिल आते थे । आनन्द - भवन में आएदिन बड़े-बड़े नेताओं का जमघट लगा रहता था । जवाहरलालजी के साथ-साथ उनके भी दर्शन हो जाते थे । कुछ नये पुराने चित्र |
जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में कड़ी सुरक्षा के बावजूद हरि सिंह हाइट स्ट्रीट के पास आतंकियों ने ग्रेनेड फेंका है। इस हमले में 7 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। यह ग्रेनेड अटैक तब हुआ है, जब घाटी में सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम बेहद सख्त हैं और हर जगह जवानों की सघन तैनाती की गई है।
बतादें की जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के बाद से ही वहां आए दिन ग्रेनेड हमले होते रहे हैं।
बतादें पिछले हफ्ते ही जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में सुरक्षाबलों पर आतंकियों ने हमला किया था। आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर ग्रेनेड फेंकने की कोशिश की थी। क्योंकि हमला अनंतनाग के डिप्टी कमिश्नर ऑफिस के बाहर गेट पर हुआ था। जिसमें लगभग 10 लोग घायल हो गए हो गए थे।
कुछ समय पहले भी जम्मू कश्मीर में सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच दो अलग-अलग जगहों पर एक साथ मुठभेड़ की घटना सामने आई थी। इस घटना में छह आतंकवादी मारे गए थे। जिनमें से तीन पाकिस्तानी नागरिक थे। मुठभेड़ में एक जवान भी शहीद हो गया था, जबकि दो पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।
| जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में कड़ी सुरक्षा के बावजूद हरि सिंह हाइट स्ट्रीट के पास आतंकियों ने ग्रेनेड फेंका है। इस हमले में सात लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। यह ग्रेनेड अटैक तब हुआ है, जब घाटी में सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम बेहद सख्त हैं और हर जगह जवानों की सघन तैनाती की गई है। बतादें की जम्मू-कश्मीर से धारा तीन सौ सत्तर हटाए जाने के बाद से ही वहां आए दिन ग्रेनेड हमले होते रहे हैं। बतादें पिछले हफ्ते ही जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में सुरक्षाबलों पर आतंकियों ने हमला किया था। आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर ग्रेनेड फेंकने की कोशिश की थी। क्योंकि हमला अनंतनाग के डिप्टी कमिश्नर ऑफिस के बाहर गेट पर हुआ था। जिसमें लगभग दस लोग घायल हो गए हो गए थे। कुछ समय पहले भी जम्मू कश्मीर में सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच दो अलग-अलग जगहों पर एक साथ मुठभेड़ की घटना सामने आई थी। इस घटना में छह आतंकवादी मारे गए थे। जिनमें से तीन पाकिस्तानी नागरिक थे। मुठभेड़ में एक जवान भी शहीद हो गया था, जबकि दो पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। |
देवला : आज तक प्रेमी (Lover) के प्रेमिका (Girlfriend) को जलाने (Burning) की कई घटनाएं सामने आई है। लेकिन देवला तहसील (Devla Tehsil) के लोहणेर (Lohner) में प्रेमिका ने परिवार की मदद से प्रेमी के शरीर पर पेट्रोल (Petrol) छिड़कते हुए उसे जिंदा जलाने का प्रयास किया। इस घटना (Incident) में प्रेमी गंभीर रूप से झुलस चुका है, जिसे उपचार के लिए नाशिक जिला सरकारी अस्पताल (Nashik District Government Hospital) में दाखिल किया गया है।
देवला पुलिस (Devla Police) ने प्रेमिका सहित मां, पिता, दो भाई ऐसे कुल 5 व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज करते हुए जांच शुरू कर दी है। घटना की जानकारी मिलने के बाद अप्पर पुलिस अधीक्षक माधुरी कांगणे, उपविभागीय पुलिस अधिकारी अमोल गायकवाड़ ने घटनास्थल पहुंचकर जायजा लिया। पुलिस ने दी जानकारी के अनुसार लोहोणेर निवासी गोरख बच्छाव (31) यह पिछले कुछ साल पहले मालेगांव तहसील के रावलगाव निवासी युवती के संपर्क में था। दोनों में प्रेम संबंध बने। लेकिन युवती के परिवार ने उसकी शादी दूसरी जगह निश्चित की। दरमियान यह शादी टूट गई। इसके पीछे गोरख होने का संदेह युवती के परिवार को आया। इसलिए युवती के साथ परिवार लोहणेर पहुंचा। इसके बाद गोरख के सीर पर लोहे की छड़ से हमला कर युवती ने उसके शरीर पर पेट्रोल छिड़कते हुए उसे जिंदा जलाने का प्रयास किया। इस घटना में गोरख 55 प्रतिशत झुलस गया है।
देवला ग्रामीण अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद गोरख को अधिक उपचार के लिए नाशिक जिला सरकारी अस्पताल में दाखिल किया। घटना की जानकारी मिलते ही देवला पुलिस थाना के पुलिस निरीक्षक दिलीप लांडगे, निलेश सवकार, सचिन भामरे, सुनिल गांगुर्डे, सुरेश कोरडे आदि घटना स्थल पहुंचकर संदिग्ध आरोपी कल्याणी गोकुल सोनवणे (23), पिता गोकुल सोनवणे (57), मां निर्मला सोनवणे (52), भाई हेमंत सोनवणे (30) और प्रसाद सोनवणे (18) को हिरासत में लेते हुए मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
| देवला : आज तक प्रेमी के प्रेमिका को जलाने की कई घटनाएं सामने आई है। लेकिन देवला तहसील के लोहणेर में प्रेमिका ने परिवार की मदद से प्रेमी के शरीर पर पेट्रोल छिड़कते हुए उसे जिंदा जलाने का प्रयास किया। इस घटना में प्रेमी गंभीर रूप से झुलस चुका है, जिसे उपचार के लिए नाशिक जिला सरकारी अस्पताल में दाखिल किया गया है। देवला पुलिस ने प्रेमिका सहित मां, पिता, दो भाई ऐसे कुल पाँच व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज करते हुए जांच शुरू कर दी है। घटना की जानकारी मिलने के बाद अप्पर पुलिस अधीक्षक माधुरी कांगणे, उपविभागीय पुलिस अधिकारी अमोल गायकवाड़ ने घटनास्थल पहुंचकर जायजा लिया। पुलिस ने दी जानकारी के अनुसार लोहोणेर निवासी गोरख बच्छाव यह पिछले कुछ साल पहले मालेगांव तहसील के रावलगाव निवासी युवती के संपर्क में था। दोनों में प्रेम संबंध बने। लेकिन युवती के परिवार ने उसकी शादी दूसरी जगह निश्चित की। दरमियान यह शादी टूट गई। इसके पीछे गोरख होने का संदेह युवती के परिवार को आया। इसलिए युवती के साथ परिवार लोहणेर पहुंचा। इसके बाद गोरख के सीर पर लोहे की छड़ से हमला कर युवती ने उसके शरीर पर पेट्रोल छिड़कते हुए उसे जिंदा जलाने का प्रयास किया। इस घटना में गोरख पचपन प्रतिशत झुलस गया है। देवला ग्रामीण अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद गोरख को अधिक उपचार के लिए नाशिक जिला सरकारी अस्पताल में दाखिल किया। घटना की जानकारी मिलते ही देवला पुलिस थाना के पुलिस निरीक्षक दिलीप लांडगे, निलेश सवकार, सचिन भामरे, सुनिल गांगुर्डे, सुरेश कोरडे आदि घटना स्थल पहुंचकर संदिग्ध आरोपी कल्याणी गोकुल सोनवणे , पिता गोकुल सोनवणे , मां निर्मला सोनवणे , भाई हेमंत सोनवणे और प्रसाद सोनवणे को हिरासत में लेते हुए मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। |
कौन है पटियाला हिंसा का मास्टर माइंड Barjinder Singh Parwana?
सेनाध्यक्ष जनरल मनोज पांडे को गार्ड ऑफ ऑनर से किया गया सम्मानित, सुनिए उन्होंने क्या कहा ?
Akhilesh Yadav in Iftar Party: लखनऊ में इफ्तार पार्टी में शामिल होने के बाद क्या बोले अखिलेश यादव?
Power Crisis: कई राज्यों में गहराया बिजली संकट, क्यों है बत्ती गुल होने का खतरा?
Manipur Issue In Parliament: संसद में विपक्ष क्यों कर रहा है हंगामा, क्या है रूल नंबर 267 और 176?
Manipur Violence पर सांसद Navneet Kaur Rana का फूटा गुस्सा, गुस्से में PM Modi को लेकर कही बड़ा बात!
Manipur News: मुख्य आरोपी का फूंका घर, सजा-ए-मौत का आश्वासन।
AAP Protest: पीएम मोदी के बयान की मांग पर अड़ा विपक्ष, संजय सिंह बोले Manipur का मुद्दा उठाना हमारी जिम्मेदारी!
Sawan 2023: भगवान शिव को तीसरी आंख कैसे और क्यों प्राप्त हुई थी?
World News: तालिबान का दुश्मन बना अमेरिका! हिजाब ने कैसे बंद करवा दी कंपनी?
IND vs WI: West Indies के खिलाफ चौथे दिन Ishan Kishan बनें हीरो, फिर Pant को क्यों बोला थैंक्यू?
श्रीलंका की समस्याओं का अभी समग्र हल नहीं - Problems In Srilanka Persist (25 July 2023)
हैवानियत की घटना पर सर्वोच्च न्यायालय का रुख - Supreme Court stand on Manipur Violence (Duniya Mere Aage, 24 July 2023)
सामंती संस्कार सभ्य समाज पर धब्बा - Pilot Couple Harass And Molest Domestic Helper (24 July 2023)
जरूर पढ़ेंः
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ट्रैक्टर परेड से पहले किसान संगठनों ने फिर बड़ा ऐलान किया है. किसान एक फरवरी को संसद मार्च करेंगे. इस दिन आम बजट पेश होना है. किसान नेता दर्शन पाल ने कहा कि हमारी लड़ाई मोदी सरकार से है. कल 9 जगह से किसान गणतंत्र परेड निकलेगा, जो भी परेड होगा वो शांतिपूर्ण तरीके से होगा और इससे देश की गणतंत्र की इज्जत बढ़ेगी.
ट्रैक्टर परेड के लिए दिल्ली पुलिस ने 37 शर्तों के साथ NOC दे दी है. तय रूट पर ट्रैक्टर परेड की इजाजत होगी. भड़काऊ भाषण और हथियार की मनाही है. परेड के लिए दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक का समय तय किया गया है.
ट्रैक्टर परेड को लेकर गृहमंत्री अमित शाह के आवास पर उच्च स्तरीय बैठक जारी है. इस बैठक में गृह सचिव, दिल्ली पुलिस कमिश्नर, IB चीफ, दोनों गृह राज्य मंत्री शामिल हैं. बता दें कि दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने संजय गांधी ट्रांसपोर्ट और सिंघु बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया था, जिसकी जानकारी वो बैठक में गृहमंत्री को देंगे.
दिल्ली की संयुक्त पुलिस उपायुक्त मीनू चौधरी ने कहा है कि दिल्ली में बाहर से आने वाले लोग NH-44, जीटी रोड, संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर, बादली मेट्रो स्टेशन, बादली बवाना रोड, बवाना चौक पर जाने से बचें.
केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि सरकार किसान और कृषि दोनों के हितों के प्रति प्रतिबद्ध है. PM मोदी के नेतृत्व में विगत 6 वर्षों में किसान की आमदनी बढ़ाने, खेती को नई तकनीक से जुड़ने के लिए अनेक प्रकार की योजनाएं और प्रयास किए गए हैं. MSP को डेढ़ गुना करने का काम भी PM के नेतृत्व में हुआ.
कृषि मंत्री ने कहा कि किसान को उसके उत्पादन का सही दाम मिल सके, किसान महंगी फसलों की ओर आकर्षित हो सके इसलिए जहां कानून बनाने की आवश्यकता थी वहां कानून बनाए गए और जहां कानून में बदलाव की आवश्यकता थी वहां कानून में बदलाव भी किए गए. इसके पीछे सरकार और प्रधानमंत्री की साफ नीयत हैं.
ट्रैक्टर परेड के मद्देनजर कुछ रूट डायवर्ट किए गए हैं.
ट्रैक्टर परेड को लेकर दिल्ली पुलिस कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव का बयान आया है. उन्होंने कहा कि कुछ लोग परेड का फायदा उठाना चाहते हैं और गड़बड़ी की फराक में हैं. ऐसे लोगों पर हमारी नजर है. उम्मीद है कि किसान तय रूट पर परेड करेंगे, लेकिन वादा और नियम तोड़े गए तो पुलिस एक्शन लेने से पीछे नहीं हटेगी.
हम देश की जनता का दिल जीतने जा रहे हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज शाम पांच बजे बड़ी बैठक करेंगे. कल गणतंत्र दिवस है और किसानों की परेड भी निकलनी है. ऐसे में आज शाम दिल्ली पुलिस कमिश्नर, आईबी चीफ, गृह राज्य मंत्री समेत अन्य अधिकारियों के साथ गृह मंत्री की बैठक होगी. इस बैठक से पहले दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने केंद्रीय गृह सचिव से मुलाकात की है.
गणतंत्र दिवस के मौके पर निकलने वाली किसानों की ट्रैक्टर रैली को लेकर पुरिस मुस्तैद है. आज दोपहर करीब दो बजे संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर इलाके में दिल्ली पुलिस कमिश्नर एस. श्रीवास्तव पहुंचेंगे, जहां सारी व्यवस्था की पड़ताल करेंगे. ट्रैक्टर मार्च का एक रूट यहां से ही होकर गुजरेगा.
मंगलवार को गणतंत्र दिवस के मौके पर किसानों की ट्रैक्टर रैली निकलनी है. इसको लेकर गाजियाबाद पुलिस का कहना है कि दिल्ली पुलिस की ओर से उन्हें अभी किसी फाइनल रूट की जानकारी नहीं दी गई है. यानी अभी ये साफ नहीं है कि ट्रैक्टर रैली अक्षरधाम से होकर गुजरेगी या फिर आनंद विहार की तरफ जाएगी. बता दें कि दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर भी हजारों की संख्या में किसान ट्रैक्टर लेकर तैयार हैं.
गणतंत्र दिवस से पहले दिल्ली के राजीव चौक मेट्रो स्टेशन, साकेत मेट्रो स्टेशन के पास कुछ लोग किसान आंदोलन को लेकर पैम्फलेट बांट रहे थे. ये पर्चे ट्रेन के अंदर भी बांटे जा रहे थे. जिसके बाद सीआईएसएफ ने ऐसा करने वालों को मेट्रो से बाहर निकाला, दिल्ली पुलिस को सूचना दी.
दिल्ली के सिंघु बॉर्डर के पास एक लावारिस बैग मिला है, जिसके बाद यहां हड़कंप मच गया है. बाहरी दिल्ली में नरेला के पास ये बैग मिलने के बाद लोगों ने पुलिस को सूचित किया. पुलिस अब मौके पर पहुंच कर इसकी छानबीन में जुटी है. जहां ये बैग मिला है, उससे कुछ ही दूरी पर किसानों का जमावड़ा है. सूचना मिलने के बाद बम स्क्वायड और दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंची हैं. जांच के बाद ही बैग को खोला जाएगा.
दिल्ली में जारी किसान आंदोलन अब मुंबई तक पहुंचा है. आज हजारों की संख्या में किसान मुंबई में इकट्ठा हुए हैं, जहां पर मार्च निकाला जाना है. साथ ही आजाद मैदान में एक सभा भी होगी, जिसमें शरद पवार का संबोधन है.
कृषि कानून को लेकर आज जयपुर में ट्रैक्टर रैली निकाली जा रही है. यहां हजारों की संख्या में ट्रैक्टर एक तिरंगा परेड निकालेंगे. जिसके बाद शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि देने का कार्यक्रम है और फिर यहां से ही ट्रैक्टर दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे. इस ट्रैक्टर रैली के आयोजन को लेकर कांग्रेस पार्टी भी लंबे वक्त से तैयारियों में जुटी थी.
गणतंत्र दिवस से पहले राजधानी दिल्ली और देश के अन्य कई इलाकों में सुरक्षा को बढ़ा दिया गया है. इस सबके बीच CISF के कंट्रोल रूम में प्रतिबंधित संगठन की ओर से फोन कॉल किया गया, जिसमें 26 जनवरी को होने वाली किसानों की ट्रैक्टर रैली का जिक्र था.
देश कल अपना गणतंत्र दिवस मनाएगा तो दो झांकियां देखने को मिलेगी. पहली राजपथ पर और दूसरी दिल्ली की सीमाओं पर. किसान संगठनों को अपनी जिद पर अड़े रहने का फायदा मिला और उन्हें दिल्ली पुलिस ने करीब सौ किमी. के रूट पर ट्रैक्टर रैली निकालने की इजाजत दी है. टिकरी बॉर्डर, सिंघु बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर से किसान संगठन दिल्ली में एंट्री कर सकेंगे और कुछ किमी. तक अपनी रैली निकाल सकेंगे. हजारों की संख्या में ट्रैक्टर पहले ही दिल्ली की सीमाओं पर जुटे हैं.
दिल्ली की सीमाओं पर लंबे वक्त से किसानों का प्रदर्शन जारी है. अब आज मुंबई में इसकी झलक दिखेगी. अलग-अलग इलाकों से पैदल मार्च कर किसान मुंबई पहुंचे हैं, जहां आजाद मैदान में इनका जमावड़ा होगा. शरद पवार समेत अन्य कई नेता इन किसानों को संबोधित करेंगे. ये किसान दिल्ली में जारी किसान आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं और 26 जनवरी भी यहां ही मनाने का इरादा रखते हैं.
| ट्रैक्टर परेड से पहले किसान संगठनों ने फिर बड़ा ऐलान किया है. किसान एक फरवरी को संसद मार्च करेंगे. इस दिन आम बजट पेश होना है. किसान नेता दर्शन पाल ने कहा कि हमारी लड़ाई मोदी सरकार से है. कल नौ जगह से किसान गणतंत्र परेड निकलेगा, जो भी परेड होगा वो शांतिपूर्ण तरीके से होगा और इससे देश की गणतंत्र की इज्जत बढ़ेगी. ट्रैक्टर परेड के लिए दिल्ली पुलिस ने सैंतीस शर्तों के साथ NOC दे दी है. तय रूट पर ट्रैक्टर परेड की इजाजत होगी. भड़काऊ भाषण और हथियार की मनाही है. परेड के लिए दोपहर बारह बजे से शाम पाँच बजे तक का समय तय किया गया है. ट्रैक्टर परेड को लेकर गृहमंत्री अमित शाह के आवास पर उच्च स्तरीय बैठक जारी है. इस बैठक में गृह सचिव, दिल्ली पुलिस कमिश्नर, IB चीफ, दोनों गृह राज्य मंत्री शामिल हैं. बता दें कि दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने संजय गांधी ट्रांसपोर्ट और सिंघु बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया था, जिसकी जानकारी वो बैठक में गृहमंत्री को देंगे. दिल्ली की संयुक्त पुलिस उपायुक्त मीनू चौधरी ने कहा है कि दिल्ली में बाहर से आने वाले लोग NH-चौंतालीस, जीटी रोड, संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर, बादली मेट्रो स्टेशन, बादली बवाना रोड, बवाना चौक पर जाने से बचें. केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि सरकार किसान और कृषि दोनों के हितों के प्रति प्रतिबद्ध है. PM मोदी के नेतृत्व में विगत छः वर्षों में किसान की आमदनी बढ़ाने, खेती को नई तकनीक से जुड़ने के लिए अनेक प्रकार की योजनाएं और प्रयास किए गए हैं. MSP को डेढ़ गुना करने का काम भी PM के नेतृत्व में हुआ. कृषि मंत्री ने कहा कि किसान को उसके उत्पादन का सही दाम मिल सके, किसान महंगी फसलों की ओर आकर्षित हो सके इसलिए जहां कानून बनाने की आवश्यकता थी वहां कानून बनाए गए और जहां कानून में बदलाव की आवश्यकता थी वहां कानून में बदलाव भी किए गए. इसके पीछे सरकार और प्रधानमंत्री की साफ नीयत हैं. ट्रैक्टर परेड के मद्देनजर कुछ रूट डायवर्ट किए गए हैं. ट्रैक्टर परेड को लेकर दिल्ली पुलिस कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव का बयान आया है. उन्होंने कहा कि कुछ लोग परेड का फायदा उठाना चाहते हैं और गड़बड़ी की फराक में हैं. ऐसे लोगों पर हमारी नजर है. उम्मीद है कि किसान तय रूट पर परेड करेंगे, लेकिन वादा और नियम तोड़े गए तो पुलिस एक्शन लेने से पीछे नहीं हटेगी. हम देश की जनता का दिल जीतने जा रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज शाम पांच बजे बड़ी बैठक करेंगे. कल गणतंत्र दिवस है और किसानों की परेड भी निकलनी है. ऐसे में आज शाम दिल्ली पुलिस कमिश्नर, आईबी चीफ, गृह राज्य मंत्री समेत अन्य अधिकारियों के साथ गृह मंत्री की बैठक होगी. इस बैठक से पहले दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने केंद्रीय गृह सचिव से मुलाकात की है. गणतंत्र दिवस के मौके पर निकलने वाली किसानों की ट्रैक्टर रैली को लेकर पुरिस मुस्तैद है. आज दोपहर करीब दो बजे संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर इलाके में दिल्ली पुलिस कमिश्नर एस. श्रीवास्तव पहुंचेंगे, जहां सारी व्यवस्था की पड़ताल करेंगे. ट्रैक्टर मार्च का एक रूट यहां से ही होकर गुजरेगा. मंगलवार को गणतंत्र दिवस के मौके पर किसानों की ट्रैक्टर रैली निकलनी है. इसको लेकर गाजियाबाद पुलिस का कहना है कि दिल्ली पुलिस की ओर से उन्हें अभी किसी फाइनल रूट की जानकारी नहीं दी गई है. यानी अभी ये साफ नहीं है कि ट्रैक्टर रैली अक्षरधाम से होकर गुजरेगी या फिर आनंद विहार की तरफ जाएगी. बता दें कि दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर भी हजारों की संख्या में किसान ट्रैक्टर लेकर तैयार हैं. गणतंत्र दिवस से पहले दिल्ली के राजीव चौक मेट्रो स्टेशन, साकेत मेट्रो स्टेशन के पास कुछ लोग किसान आंदोलन को लेकर पैम्फलेट बांट रहे थे. ये पर्चे ट्रेन के अंदर भी बांटे जा रहे थे. जिसके बाद सीआईएसएफ ने ऐसा करने वालों को मेट्रो से बाहर निकाला, दिल्ली पुलिस को सूचना दी. दिल्ली के सिंघु बॉर्डर के पास एक लावारिस बैग मिला है, जिसके बाद यहां हड़कंप मच गया है. बाहरी दिल्ली में नरेला के पास ये बैग मिलने के बाद लोगों ने पुलिस को सूचित किया. पुलिस अब मौके पर पहुंच कर इसकी छानबीन में जुटी है. जहां ये बैग मिला है, उससे कुछ ही दूरी पर किसानों का जमावड़ा है. सूचना मिलने के बाद बम स्क्वायड और दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंची हैं. जांच के बाद ही बैग को खोला जाएगा. दिल्ली में जारी किसान आंदोलन अब मुंबई तक पहुंचा है. आज हजारों की संख्या में किसान मुंबई में इकट्ठा हुए हैं, जहां पर मार्च निकाला जाना है. साथ ही आजाद मैदान में एक सभा भी होगी, जिसमें शरद पवार का संबोधन है. कृषि कानून को लेकर आज जयपुर में ट्रैक्टर रैली निकाली जा रही है. यहां हजारों की संख्या में ट्रैक्टर एक तिरंगा परेड निकालेंगे. जिसके बाद शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि देने का कार्यक्रम है और फिर यहां से ही ट्रैक्टर दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे. इस ट्रैक्टर रैली के आयोजन को लेकर कांग्रेस पार्टी भी लंबे वक्त से तैयारियों में जुटी थी. गणतंत्र दिवस से पहले राजधानी दिल्ली और देश के अन्य कई इलाकों में सुरक्षा को बढ़ा दिया गया है. इस सबके बीच CISF के कंट्रोल रूम में प्रतिबंधित संगठन की ओर से फोन कॉल किया गया, जिसमें छब्बीस जनवरी को होने वाली किसानों की ट्रैक्टर रैली का जिक्र था. देश कल अपना गणतंत्र दिवस मनाएगा तो दो झांकियां देखने को मिलेगी. पहली राजपथ पर और दूसरी दिल्ली की सीमाओं पर. किसान संगठनों को अपनी जिद पर अड़े रहने का फायदा मिला और उन्हें दिल्ली पुलिस ने करीब सौ किमी. के रूट पर ट्रैक्टर रैली निकालने की इजाजत दी है. टिकरी बॉर्डर, सिंघु बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर से किसान संगठन दिल्ली में एंट्री कर सकेंगे और कुछ किमी. तक अपनी रैली निकाल सकेंगे. हजारों की संख्या में ट्रैक्टर पहले ही दिल्ली की सीमाओं पर जुटे हैं. दिल्ली की सीमाओं पर लंबे वक्त से किसानों का प्रदर्शन जारी है. अब आज मुंबई में इसकी झलक दिखेगी. अलग-अलग इलाकों से पैदल मार्च कर किसान मुंबई पहुंचे हैं, जहां आजाद मैदान में इनका जमावड़ा होगा. शरद पवार समेत अन्य कई नेता इन किसानों को संबोधित करेंगे. ये किसान दिल्ली में जारी किसान आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं और छब्बीस जनवरी भी यहां ही मनाने का इरादा रखते हैं. |
नई दिल्ली। रिएलिटी शो 'बिग बॉस 14' में अर्शी खान और राखी सावंत के बीच दोस्ती और दुश्मनी दोनों ही देखने को मिल रही है। अर्शी खान ने शो में दावा किया कि दोनों ही पिछले तीन साल से दोस्त हैं, लेकिन राखी सावंत के एक गलत बयान के चलते दोनों के बीच मनमुटाव आ गया था। उसके बाद से दोनों में बातचीत थोड़ी कम हो गई है। शो में राखी और अर्शी के बीच हंसी-मजाक भी देखने को मिल रहा है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें अर्शी खान, राखी सावंत की 'आईब्रोज' का मजाक उड़ाती नजर आ रही हैं।
राखी सावंत सुबह के समय बेडरूम में बैठकर अपनी आईब्रोज बना रही होती हैं। ऐसे में अर्शी खान उनका मजाक उड़ाते हुए कहती हैं, "आईब्रो तो है नहीं तुम्हारी काली-काली कर रही हो। " इस पर राखी कहती हैं कि तभी तो लगा रही हूं, क्योंकि आइब्रो नहीं है। अर्शी कहती हैं कि हां, तुम्हारी आइब्रो नेवले की तरह दिख रही हैं। इस पर राखी जवाब देते हुए कहती हैं कि मेरी नेवले जैसी हैं तो तेरी तो चमगादड़ की तरह है। बल्कि तेरी तो आंखें और नाक भी चमगादड़ की तरह दिखाई देती हैं।
राखी सावंत का रिएक्शन देखकर फैन्स अपनी हंसी नहीं रोक पा रहे हैं। फैन्स भी राखी और अर्शी की खट्टी-मीठी नोंकझोंक देखना पसंद कर रहे हैं।
| नई दिल्ली। रिएलिटी शो 'बिग बॉस चौदह' में अर्शी खान और राखी सावंत के बीच दोस्ती और दुश्मनी दोनों ही देखने को मिल रही है। अर्शी खान ने शो में दावा किया कि दोनों ही पिछले तीन साल से दोस्त हैं, लेकिन राखी सावंत के एक गलत बयान के चलते दोनों के बीच मनमुटाव आ गया था। उसके बाद से दोनों में बातचीत थोड़ी कम हो गई है। शो में राखी और अर्शी के बीच हंसी-मजाक भी देखने को मिल रहा है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें अर्शी खान, राखी सावंत की 'आईब्रोज' का मजाक उड़ाती नजर आ रही हैं। राखी सावंत सुबह के समय बेडरूम में बैठकर अपनी आईब्रोज बना रही होती हैं। ऐसे में अर्शी खान उनका मजाक उड़ाते हुए कहती हैं, "आईब्रो तो है नहीं तुम्हारी काली-काली कर रही हो। " इस पर राखी कहती हैं कि तभी तो लगा रही हूं, क्योंकि आइब्रो नहीं है। अर्शी कहती हैं कि हां, तुम्हारी आइब्रो नेवले की तरह दिख रही हैं। इस पर राखी जवाब देते हुए कहती हैं कि मेरी नेवले जैसी हैं तो तेरी तो चमगादड़ की तरह है। बल्कि तेरी तो आंखें और नाक भी चमगादड़ की तरह दिखाई देती हैं। राखी सावंत का रिएक्शन देखकर फैन्स अपनी हंसी नहीं रोक पा रहे हैं। फैन्स भी राखी और अर्शी की खट्टी-मीठी नोंकझोंक देखना पसंद कर रहे हैं। |
जाता है। कुछ समय के लिए आर्थिक गतिविधि उच्च बिन्दु पर स्थिर हो जाती है । किन्तु इस समृद्धि में विनाश के बीज छिपे रहते है । शीघ्र ही इस दिखावटी खुशहाली का दोर समाप्त हो सकता है। ऐसा निम्नलिखित कारणो से या उनके सयोग से हो सकता है -
व्यापार चक्र
( १ ) विस्तार के समय पूंजी नियोजन तेजी से होता है। कुछ समय के लिए ऊँचे स्तर पर स्थिर रहते हैं। किन्तु कुछ समय के पश्चात् जब पूँजी नियोजन के प्रभावी लाभ होने लगते हैं तो उत्पादन अत्यधिक बढ़ जाता है और पूँजी भी बढ़ जाती है । पूंजी स्टाक के अत्यधिक बढ जाने से लाभ की माना कम रह जाती है, श्रत उद्यमी अधिक पूंजा लगाने से हाथ खीचने लगते है। ऐसी स्थिति म गुणक (multipher) और गतिवर्द्धन (accelerator ) सिद्धान्त प्रभावशील हो जाते है । और शनं दशर्न अर्थव्यवस्था छिन्न-भिन होन लगती है ।
(२) जब पूंजी नियोजन को गति तीव्र होती है तो नियोजन वस्तुओं की कीमतें ऊंची हो जाती है । इससे उत्पादन व्यय बढ़ जाते हैं और फलस्वरूप लाभ की मात्रा सिकुड़ जाती है। अत अगले दौर में पूंजी नियोजन की गति पहले दौर की अपेक्षा मन्द पड जाती है ।
(३) मान लीजिए कि पूर्ण रोजगार की स्थिति है । जब किसी अर्थ व्यवस्था में पूर्ण रोजगार की स्थिति प्राप्त हो जाती है तो अर्थव्यवस्था में विस्तार इतनी गति से नहीं हो सकता कि पूर्ण नियोजन से भी अधिक नियोजन दे सके, क्योंकि जनमख्या भी तीव्र गति से बढ़ती है और उ पादन भी। इस प्रकार जब पूर्ण नियोजन की स्थिति होती है तो गतिवर्द्धन ( accelerator ) की गति कुण्ठित हो जाती है । फलस्वरूप कमजोर गतिवर्द्धक पूर्ण नियोजन की स्थिति को स्थिर नहीं रख सकता और आज या कल अर्थव्यवस्था अवश्य लडखडा जाएगी।
(४) जब समद्धि काल म प्राय ऊँची होती है तो आय का अधिकांश भाग लाभ के रूप में मालिकों को जेबा म जाने लगता है। किन्तु लाभ के घन म से उपभोग करने की सीमान्त प्रवृत्ति ( marginal propensity to consume) उतनी तीव्र नहीं होती जितनी कि प्राय म से उपभोग करने की प्रवृत्ति तीव्र होती है। इस प्रकार समस्त समाज को उपभोग करने की सीमान्त प्रवृत्ति गिर जाती है । इससे गुणुक का मूल्य गिर जाता है और फलस्वरूप पूंजी नियोजन की दर पहले की क्षम प्राय देने लगती है। इस प्रकार वस्तुओं की पूर्ति अधिक बढ़ती है किन्तु उनकी मांग म उसी अनुपात में वृद्धि नहीं होती । फल यह होता है कि कुछ समय पश्चात् व्यवसायी अपनी वस्तुप्रो को बेच नहीं पाते और हानि उठाते हैं। और तब वे पूंजी नियोजन कम करने लगते है ।
( ५ ) व्यापारिक समृद्धि के दिनों मसाख व्यवस्था में विस्तार हो जाता है किन्तु बैंक धन उधार देने पर अकुश रखना चाहते हैं इससे ब्याज को दर ऊँची हो जाती है, और बैंक अपनी सस्ती दरों पर लगाई गई पूंजी वापस मांगने लगते हैं। इससे मुद्रा बाजार में एक प्रकार की अव्यवस्था फैल जाती है जो बहते बढ़ने समस्त आर्थिक जीवन को मात्रान्त कर लेती 1 | जाता है। कुछ समय के लिए आर्थिक गतिविधि उच्च बिन्दु पर स्थिर हो जाती है । किन्तु इस समृद्धि में विनाश के बीज छिपे रहते है । शीघ्र ही इस दिखावटी खुशहाली का दोर समाप्त हो सकता है। ऐसा निम्नलिखित कारणो से या उनके सयोग से हो सकता है - व्यापार चक्र विस्तार के समय पूंजी नियोजन तेजी से होता है। कुछ समय के लिए ऊँचे स्तर पर स्थिर रहते हैं। किन्तु कुछ समय के पश्चात् जब पूँजी नियोजन के प्रभावी लाभ होने लगते हैं तो उत्पादन अत्यधिक बढ़ जाता है और पूँजी भी बढ़ जाती है । पूंजी स्टाक के अत्यधिक बढ जाने से लाभ की माना कम रह जाती है, श्रत उद्यमी अधिक पूंजा लगाने से हाथ खीचने लगते है। ऐसी स्थिति म गुणक और गतिवर्द्धन सिद्धान्त प्रभावशील हो जाते है । और शनं दशर्न अर्थव्यवस्था छिन्न-भिन होन लगती है । जब पूंजी नियोजन को गति तीव्र होती है तो नियोजन वस्तुओं की कीमतें ऊंची हो जाती है । इससे उत्पादन व्यय बढ़ जाते हैं और फलस्वरूप लाभ की मात्रा सिकुड़ जाती है। अत अगले दौर में पूंजी नियोजन की गति पहले दौर की अपेक्षा मन्द पड जाती है । मान लीजिए कि पूर्ण रोजगार की स्थिति है । जब किसी अर्थ व्यवस्था में पूर्ण रोजगार की स्थिति प्राप्त हो जाती है तो अर्थव्यवस्था में विस्तार इतनी गति से नहीं हो सकता कि पूर्ण नियोजन से भी अधिक नियोजन दे सके, क्योंकि जनमख्या भी तीव्र गति से बढ़ती है और उ पादन भी। इस प्रकार जब पूर्ण नियोजन की स्थिति होती है तो गतिवर्द्धन की गति कुण्ठित हो जाती है । फलस्वरूप कमजोर गतिवर्द्धक पूर्ण नियोजन की स्थिति को स्थिर नहीं रख सकता और आज या कल अर्थव्यवस्था अवश्य लडखडा जाएगी। जब समद्धि काल म प्राय ऊँची होती है तो आय का अधिकांश भाग लाभ के रूप में मालिकों को जेबा म जाने लगता है। किन्तु लाभ के घन म से उपभोग करने की सीमान्त प्रवृत्ति उतनी तीव्र नहीं होती जितनी कि प्राय म से उपभोग करने की प्रवृत्ति तीव्र होती है। इस प्रकार समस्त समाज को उपभोग करने की सीमान्त प्रवृत्ति गिर जाती है । इससे गुणुक का मूल्य गिर जाता है और फलस्वरूप पूंजी नियोजन की दर पहले की क्षम प्राय देने लगती है। इस प्रकार वस्तुओं की पूर्ति अधिक बढ़ती है किन्तु उनकी मांग म उसी अनुपात में वृद्धि नहीं होती । फल यह होता है कि कुछ समय पश्चात् व्यवसायी अपनी वस्तुप्रो को बेच नहीं पाते और हानि उठाते हैं। और तब वे पूंजी नियोजन कम करने लगते है । व्यापारिक समृद्धि के दिनों मसाख व्यवस्था में विस्तार हो जाता है किन्तु बैंक धन उधार देने पर अकुश रखना चाहते हैं इससे ब्याज को दर ऊँची हो जाती है, और बैंक अपनी सस्ती दरों पर लगाई गई पूंजी वापस मांगने लगते हैं। इससे मुद्रा बाजार में एक प्रकार की अव्यवस्था फैल जाती है जो बहते बढ़ने समस्त आर्थिक जीवन को मात्रान्त कर लेती एक |
( २ ) युरोपपर अभियान (१३२३-२४) - ईरानमे फमनेमे पहले उज्वेक यरोपकी खबर लेना चाहता था । ईरानके साथ वरावर अनिर्णीत युद्ध होते रहनेसे बहुत लाभ नही था, जब कि युरोपके समृद्ध नगर लाभके खास साधन थे । १३२३ ई० में उज्वेषकी सेनाने लिथुवानियापर आक्रमण किया। कन्स्तन्तिनोपोलके विजतीन "सम्राटो" के लिये भी यह बहुत सक्ट का समय था । मगोठोको प्रसन्न रखने के लिये कस्तन्तिनोपोलके सम्राटो और उनके सरदारोने अपनी सुदर कन्याये भेंट की, तो भी वह जान नही बचा पाये । १३२४ ई० मे मगोल अद्रियानोपोलपर एक लाख वीस हजार सेनाके साथ चढ़ आये । उन्होने श्रम प्रदेश ( युरोपीय तुर्की और बुल्गारिया) को चालीस दिनोतक लूटा, बहुत-सी सपत्ति और दासोकी तरह वेचने के लिये भारी संख्यामें वदी उनके हाथ आये। जब थ्रेमवालो ने चोरोकी तरह आकर हमला करनेकी निंदा की, तो मगोल- सेनापति तासबुगा (ताशवेग) ने जवाब दिया- "हम ऐसे शासक के अधीन है, जिसकी आज्ञा जब होती है, उसी वक्त हम आगे बढते, पीछे हटते अथवा उनी जगहपर जमे रहते है ।"
(३) मास्को राजुल- रूसी राजुलोके अव भी अलग-अलग राज्य थे । मगोलोने शासनके सुभीतके लिये मास्कोके महाराजुलको सवका मुखिया बना दिया था, किंतु वह यह नहीं चाहते थे कि, सारा रूस एक राजनीतिक इकाई वन जाये । सुवर्ण ओर्दू की शक्ति क्षीण होती जा रही थी । इस्लामने शक्तिशाली बनानेकी जगह आपसी झगटे पैदा करके मगोलाको निर्वल करना शुरू कर दिया, जिससे रूसी फायदा उठा सकते थे और मास्कोके महाराजुल जाजने फायदा उठाया भी। उसने अपने चचा त्वेग्के महाराजुल मिखाईलके खिलाफ खानका कान भग और उसे २२ नवम्बर १३१९ ई० को अपने प्राणोसे हाथ धोना पड़ा । उज्वेक बौद्धोका शत्रु था और इस्लामका कट्टर पक्षपाती, लेकिन ईसाई पादरियोंके साथ उसका वर्ताव अच्छा था । मास्कोके ऊपर उसकी विशेष कृपा थी । मास्कोके राजुलने र्याजनके राजुलको अपने अधीन बनाया । चचेरे भाई दिमित्र (स्वेर) ने इसीमें अच्छा समझा कि दो हजार रूवल* वार्षिक पर अपने महाराजुल पदसे इस्तीफा दे दे, लेकिन वह बापके हत्यारेको क्षमा नहीं कर सकता था, इसलिये २१ नवम्बर १३२५ ई० मे उसने मास्कोराजुलके पेटमें तलवार घुसेडकर उसका बदला लिया । इवान खलीता (१३२५-४१ ६०) अव मास्कोका राजुल वना। वह उज्वेकका और भी कृपापात्र था । उसके वाप यूरीको हत्याको उज्बेकने एक राजभक्तका वलिदान माना । लेकिन इवान केवल राजभक्त नहीं रहना चाहता था, वह घृणास्पद मगोलोके जुयेको हटाकर सारे रूसको एकतावद्ध करना चाहता था। इसी के शासनकाल मे मास्को सारे रूसकी राजधानी बनने लगा, और इसीके समय तातारो (मगोलो) को निकाल वाहर करने के लिये रूसमें सगठन ह ने लगा। लेकिन साथ ही, इसी वक्त दक्षिणी और उत्तरी रूसमें भेदकी खाई ज्यादा हो चली । इवानने व्लादिमिरको केवल कुछ समयके लिये ही राजवानी माना, तब भी वह अक्सर मास्कोमें रहता था। थोडे ही समय वाद उसने राजधानीका बिल्कुल मास्कोमें बदल दिया। यही नही उसने रूसी ईसाई सप्रदाय (ग्रीक चच) के महासघराज (मेत्रोपोलितन) को भी अपना केंद्र व्लादिमिरसे हटाकर मास्को लानेके लिये तैयार किया, और ४ अगस्त १३२६ ई०को मेयोपोलितन मास्को चला आया । इवानने मास्को में पत्थरका पहला गिर्जा बनवाया । उसने खानके दरवारकी कई यात्रायें की। १३३३ ई० में उज्वेकने उसे बहुतसे सम्मान प्रदान किये। अगले साल १३३४ ६० में वह फिर खानके ओम था । इवानका प्रतिद्वंद्वी राजुल अलेक्सान्द्र ( त्वेर) जगह-जगह धक्के खाता उकता गया । उसने सोचा- "ओह, अगर मैं इसी तरह निर्वासित रहूगा, तो मेरे बच्चे उत्तराधिकारविहीन रह जायेंगे ।" अन्तमे उसने उज्वेकको यह कहकर आत्म-समर्पण किया -- "महान् खान, मै तुम्हारे कोवका पात्र हू । मै अपने भाग्यको तुम्हारे हायोमें देता छ । भगवान और तुम्हारा हृदय जो चाहता हो, वही मेरे साथ करो । तुम्हें मुझे क्षमा करने या दड देनेका अधिकार है । क्षमा करनेपर मै तुम्हारी दयाके लिये भगवान् से प्राथना करूंगा और दड देना है, तो उसके लिये मैं अपने मिरको अपण करता हू।" उज्बेकने उसे क्षमा कर दिया और त्वेर ( आधुनिक कलिनिन ) का राज्य दकर सम्मानित किया । * उस समय रूवल तीन-चार इच लवा एक भगुल चौडा चादीका टुकडा होता था । | युरोपपर अभियान - ईरानमे फमनेमे पहले उज्वेक यरोपकी खबर लेना चाहता था । ईरानके साथ वरावर अनिर्णीत युद्ध होते रहनेसे बहुत लाभ नही था, जब कि युरोपके समृद्ध नगर लाभके खास साधन थे । एक हज़ार तीन सौ तेईस ईशून्य में उज्वेषकी सेनाने लिथुवानियापर आक्रमण किया। कन्स्तन्तिनोपोलके विजतीन "सम्राटो" के लिये भी यह बहुत सक्ट का समय था । मगोठोको प्रसन्न रखने के लिये कस्तन्तिनोपोलके सम्राटो और उनके सरदारोने अपनी सुदर कन्याये भेंट की, तो भी वह जान नही बचा पाये । एक हज़ार तीन सौ चौबीस ईशून्य मे मगोल अद्रियानोपोलपर एक लाख वीस हजार सेनाके साथ चढ़ आये । उन्होने श्रम प्रदेश को चालीस दिनोतक लूटा, बहुत-सी सपत्ति और दासोकी तरह वेचने के लिये भारी संख्यामें वदी उनके हाथ आये। जब थ्रेमवालो ने चोरोकी तरह आकर हमला करनेकी निंदा की, तो मगोल- सेनापति तासबुगा ने जवाब दिया- "हम ऐसे शासक के अधीन है, जिसकी आज्ञा जब होती है, उसी वक्त हम आगे बढते, पीछे हटते अथवा उनी जगहपर जमे रहते है ।" मास्को राजुल- रूसी राजुलोके अव भी अलग-अलग राज्य थे । मगोलोने शासनके सुभीतके लिये मास्कोके महाराजुलको सवका मुखिया बना दिया था, किंतु वह यह नहीं चाहते थे कि, सारा रूस एक राजनीतिक इकाई वन जाये । सुवर्ण ओर्दू की शक्ति क्षीण होती जा रही थी । इस्लामने शक्तिशाली बनानेकी जगह आपसी झगटे पैदा करके मगोलाको निर्वल करना शुरू कर दिया, जिससे रूसी फायदा उठा सकते थे और मास्कोके महाराजुल जाजने फायदा उठाया भी। उसने अपने चचा त्वेग्के महाराजुल मिखाईलके खिलाफ खानका कान भग और उसे बाईस नवम्बर एक हज़ार तीन सौ उन्नीस ईशून्य को अपने प्राणोसे हाथ धोना पड़ा । उज्वेक बौद्धोका शत्रु था और इस्लामका कट्टर पक्षपाती, लेकिन ईसाई पादरियोंके साथ उसका वर्ताव अच्छा था । मास्कोके ऊपर उसकी विशेष कृपा थी । मास्कोके राजुलने र्याजनके राजुलको अपने अधीन बनाया । चचेरे भाई दिमित्र ने इसीमें अच्छा समझा कि दो हजार रूवल* वार्षिक पर अपने महाराजुल पदसे इस्तीफा दे दे, लेकिन वह बापके हत्यारेको क्षमा नहीं कर सकता था, इसलिये इक्कीस नवम्बर एक हज़ार तीन सौ पच्चीस ईशून्य मे उसने मास्कोराजुलके पेटमें तलवार घुसेडकर उसका बदला लिया । इवान खलीता अव मास्कोका राजुल वना। वह उज्वेकका और भी कृपापात्र था । उसके वाप यूरीको हत्याको उज्बेकने एक राजभक्तका वलिदान माना । लेकिन इवान केवल राजभक्त नहीं रहना चाहता था, वह घृणास्पद मगोलोके जुयेको हटाकर सारे रूसको एकतावद्ध करना चाहता था। इसी के शासनकाल मे मास्को सारे रूसकी राजधानी बनने लगा, और इसीके समय तातारो को निकाल वाहर करने के लिये रूसमें सगठन ह ने लगा। लेकिन साथ ही, इसी वक्त दक्षिणी और उत्तरी रूसमें भेदकी खाई ज्यादा हो चली । इवानने व्लादिमिरको केवल कुछ समयके लिये ही राजवानी माना, तब भी वह अक्सर मास्कोमें रहता था। थोडे ही समय वाद उसने राजधानीका बिल्कुल मास्कोमें बदल दिया। यही नही उसने रूसी ईसाई सप्रदाय के महासघराज को भी अपना केंद्र व्लादिमिरसे हटाकर मास्को लानेके लिये तैयार किया, और चार अगस्त एक हज़ार तीन सौ छब्बीस ईशून्यको मेयोपोलितन मास्को चला आया । इवानने मास्को में पत्थरका पहला गिर्जा बनवाया । उसने खानके दरवारकी कई यात्रायें की। एक हज़ार तीन सौ तैंतीस ईशून्य में उज्वेकने उसे बहुतसे सम्मान प्रदान किये। अगले साल एक हज़ार तीन सौ चौंतीस साठ में वह फिर खानके ओम था । इवानका प्रतिद्वंद्वी राजुल अलेक्सान्द्र जगह-जगह धक्के खाता उकता गया । उसने सोचा- "ओह, अगर मैं इसी तरह निर्वासित रहूगा, तो मेरे बच्चे उत्तराधिकारविहीन रह जायेंगे ।" अन्तमे उसने उज्वेकको यह कहकर आत्म-समर्पण किया -- "महान् खान, मै तुम्हारे कोवका पात्र हू । मै अपने भाग्यको तुम्हारे हायोमें देता छ । भगवान और तुम्हारा हृदय जो चाहता हो, वही मेरे साथ करो । तुम्हें मुझे क्षमा करने या दड देनेका अधिकार है । क्षमा करनेपर मै तुम्हारी दयाके लिये भगवान् से प्राथना करूंगा और दड देना है, तो उसके लिये मैं अपने मिरको अपण करता हू।" उज्बेकने उसे क्षमा कर दिया और त्वेर का राज्य दकर सम्मानित किया । * उस समय रूवल तीन-चार इच लवा एक भगुल चौडा चादीका टुकडा होता था । |
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का चित्रयुक्त चंबा रूमाल जल्द साउथ अफ्रीका में शान बढ़ाएगा। उपायुक्त डीसी राणा ने नाट आन मैप संस्था की अगवाई में आजादी के अमृत महोत्सव पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान सरस्वती स्वयं सहायता समूह की महिलाओं अनामिका, लता, नीलम, पल्लवी, चंद्रेश व लता द्वारा कमला नैयर की देखरेख में तैयार राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के चित्रयुक्त चंबा रुमाल का विधिवत तरीके से विमोचन किया। इसके बाद नाट आन मैप संस्था की ओर से चंबा रूमाल को साउथ अफ्रीका भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। चंबा से रूमाल भेजे जाने के बाद साउथ अफ्रीका में नाट आन मैप संस्था की सदस्य सुंदरा रेड्डी प्राप्त करेंगी, जिसके बाद इसे स्थापित करने की प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाया जाएगा। साउथ अफ्रीका में चंबा रूमाल पर्यटकों सहित स्थानीय लोगों के आकर्षण का केंद्र बनेगा।
उपायुक्त डीसी राणा ने उपस्थित सभी लोगों को आजादी के अमृत महोत्सव की शुभकामनाएं दी। इसके बाद सरस्वती स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं की प्रशंसा करते हुए कहा जिस तरह से महिलाओं की ओर महात्मा गांधी की तस्वीर युक्त चंबा रूमाल उकेरा गया है, वह काबिलेतारीफ है। यह रूमाल जब साउथ अफ्रीका में सजेगा तो इस कला को अंतरराष्ट्रीय तौर पर एक अलग पहचान मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से कला को सहेजने के लिए हरसंभव सहयोग किया जाएगा। उन्होंने इस कार्य के लिए नाट आन मैप संस्था की भी सराहना की। नाट आन मैप संस्था के सह-संयोजक एवं चंबा क्रिकेट संघ के जिला संयोजक मनुज शर्मा ने कहा कि चंबा रूमाल तैयार करने की कला विश्व पटल पर नई पहचान दिलाने के लिए स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के साथ मिलकर कार्य किया जा रहा है। इस अवसर पर भूरि सिंह संग्रहालय के अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार भी मौजूद रहे।
| राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का चित्रयुक्त चंबा रूमाल जल्द साउथ अफ्रीका में शान बढ़ाएगा। उपायुक्त डीसी राणा ने नाट आन मैप संस्था की अगवाई में आजादी के अमृत महोत्सव पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान सरस्वती स्वयं सहायता समूह की महिलाओं अनामिका, लता, नीलम, पल्लवी, चंद्रेश व लता द्वारा कमला नैयर की देखरेख में तैयार राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के चित्रयुक्त चंबा रुमाल का विधिवत तरीके से विमोचन किया। इसके बाद नाट आन मैप संस्था की ओर से चंबा रूमाल को साउथ अफ्रीका भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। चंबा से रूमाल भेजे जाने के बाद साउथ अफ्रीका में नाट आन मैप संस्था की सदस्य सुंदरा रेड्डी प्राप्त करेंगी, जिसके बाद इसे स्थापित करने की प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाया जाएगा। साउथ अफ्रीका में चंबा रूमाल पर्यटकों सहित स्थानीय लोगों के आकर्षण का केंद्र बनेगा। उपायुक्त डीसी राणा ने उपस्थित सभी लोगों को आजादी के अमृत महोत्सव की शुभकामनाएं दी। इसके बाद सरस्वती स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं की प्रशंसा करते हुए कहा जिस तरह से महिलाओं की ओर महात्मा गांधी की तस्वीर युक्त चंबा रूमाल उकेरा गया है, वह काबिलेतारीफ है। यह रूमाल जब साउथ अफ्रीका में सजेगा तो इस कला को अंतरराष्ट्रीय तौर पर एक अलग पहचान मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से कला को सहेजने के लिए हरसंभव सहयोग किया जाएगा। उन्होंने इस कार्य के लिए नाट आन मैप संस्था की भी सराहना की। नाट आन मैप संस्था के सह-संयोजक एवं चंबा क्रिकेट संघ के जिला संयोजक मनुज शर्मा ने कहा कि चंबा रूमाल तैयार करने की कला विश्व पटल पर नई पहचान दिलाने के लिए स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के साथ मिलकर कार्य किया जा रहा है। इस अवसर पर भूरि सिंह संग्रहालय के अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार भी मौजूद रहे। |
जयपुरः राजस्थान के करौली से एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. जहां पर एक सरकारी स्कूल का शिक्षक शराब के नशे में बाइक से गिर गया. मौके पर मौजूद स्कूल के बच्चों ने इसका वीडियो उतार लिया. गाँव के लोगों का कहना है कि यह टीचर हमेशा ही शराब पीकर स्कूल जाता है. जब शराबी शिक्षक से पूछा गया कि बच्चों को क्या पढ़ाते हो इस पर वो बच्चों को कुएं में गिरने की बात कहने लगा.
इसके बाद ग्रामीणों ने उससे सवाल किया कि, ऐसा करने से तुम्हारी नौकरी चली जाएगी, इस पर उसने गाली देकर कहा कि मेरी नौकरी छीनने वाला कोई नहीं है. वायरल वीडियो को शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने गंभीरता से लेते हुए राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय शहराकर के तृतीय श्रेणी अध्यापक कालूराम मीणा को सस्पेंड कर दिया है. वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि ग्रामीण शिक्षक से पूछ रहे हैं कि आपकी ड्यूटी कहां हैं और आप शराब पीकर स्कूल में बच्चों को क्या पढ़ाते हो इस पर शराबी शिक्षक कालूराम मीणा ने कहां कि, 'मैं शराब पीता हूं सरकारी स्कूल में टीचर हूं'. बच्चों को पढ़ाने की बात पूछने पर टीचर ने कहा कि सब कुआं में जा गिरो.
ग्रामीणों ने जानकारी देते हुए बताया है कि टीचर हर दिन स्कूल में शराब पीकर आता है. इस दौरान कुछ लोगों ने इसकी वीडियो बना लिया जो अब क्षेत्र में जमकर वायरल हो रहा है. इस घटना के बाद से राज्य के शिक्षा विभाग की भी किरकिरी हो रही है.
| जयपुरः राजस्थान के करौली से एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. जहां पर एक सरकारी स्कूल का शिक्षक शराब के नशे में बाइक से गिर गया. मौके पर मौजूद स्कूल के बच्चों ने इसका वीडियो उतार लिया. गाँव के लोगों का कहना है कि यह टीचर हमेशा ही शराब पीकर स्कूल जाता है. जब शराबी शिक्षक से पूछा गया कि बच्चों को क्या पढ़ाते हो इस पर वो बच्चों को कुएं में गिरने की बात कहने लगा. इसके बाद ग्रामीणों ने उससे सवाल किया कि, ऐसा करने से तुम्हारी नौकरी चली जाएगी, इस पर उसने गाली देकर कहा कि मेरी नौकरी छीनने वाला कोई नहीं है. वायरल वीडियो को शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने गंभीरता से लेते हुए राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय शहराकर के तृतीय श्रेणी अध्यापक कालूराम मीणा को सस्पेंड कर दिया है. वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि ग्रामीण शिक्षक से पूछ रहे हैं कि आपकी ड्यूटी कहां हैं और आप शराब पीकर स्कूल में बच्चों को क्या पढ़ाते हो इस पर शराबी शिक्षक कालूराम मीणा ने कहां कि, 'मैं शराब पीता हूं सरकारी स्कूल में टीचर हूं'. बच्चों को पढ़ाने की बात पूछने पर टीचर ने कहा कि सब कुआं में जा गिरो. ग्रामीणों ने जानकारी देते हुए बताया है कि टीचर हर दिन स्कूल में शराब पीकर आता है. इस दौरान कुछ लोगों ने इसकी वीडियो बना लिया जो अब क्षेत्र में जमकर वायरल हो रहा है. इस घटना के बाद से राज्य के शिक्षा विभाग की भी किरकिरी हो रही है. |
फैक्ट चेक वेबसाइट ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर को उत्तर प्रदेश के सीतापुर में दर्ज एक मामले में सुप्रीम कोर्ट से पांच दिन की अंतरिम ज़मानत मिलने के तुरंत बाद लखीमपुर खीरी पुलिस ने एक अन्य मामले में उसी दिन एक वॉरंट तामील कराया था. बीते साल के एक ट्वीट में ज़ुबैर ने सुदर्शन टीवी के ट्विटर हैंडल से साझा की गई मदीना मस्जिद की छेड़छाड़ की गई तस्वीर पर सवाल उठाया था. इसे लेकर लखीमपुर के सुदर्शन टीवी के एक रिपोर्टर ने उनके ख़िलाफ़ केस दर्ज करवाया है.
लखीमपुर खीरीः उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले की एक अदालत ने फैक्ट चेक वेबसाइट ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर को दुश्मनी को बढ़ावा देने के 2021 में दर्ज एक मामले में 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.
सहायक अभियोजन अधिकारी अवधेश यादव ने सोमवार को बताया कि मोहम्मद जुबैर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) की अदालत में पेश किया गया और उन्हें 11 जुलाई से 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.
अभियोजन पक्ष ने 14 दिनों की पुलिस रिमांड की मांग की थी और जुबैर के अधिवक्ता ने इसके खिलाफ दलीलें पेश की.
यादव ने कहा कि मोहम्मद जुबैर के पुलिस रिमांड पर सुनवाई के लिए अदालत ने 13 जुलाई की तारीख मुकर्रर की है.
ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर को सीतापुर में दर्ज एक मामले में सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के तुरंत बाद लखीमपुर पुलिस ने एक अन्य मामले में उसी दिन (8 जुलाई) को वॉरंट तामील कराया था.
अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) अरुण कुमार सिंह ने बताया था कि लखीमपुर खीरी जिले में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) मोहम्मदी की अदालत ने मोहम्मद जुबैर के खिलाफ वॉरंट बी जारी किया था, जिसे शुक्रवार को खीरी पुलिस ने तामील करा दिया था.
रिपोर्ट के अनुसार, लखीमपुर पुलिस ने 18 सितंबर 2021 को एक अदालत के निर्देश पर मोहम्मद जुबैर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी. 16 मई, 2021 को किए गए एक ट्वीट के लिए उन पर धारा 153ए (दो समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) के तहत आरोप लगाया गया था.
इस ट्वीट में जुबैर ने बताया था कि कट्टर दक्षिणपंथी चैनल सुदर्शन टीवी ने 2021 में गाजा पट्टी पर इजरायल की बमबारी की रिपोर्ट करते हुए प्रसिद्ध मदीना मस्जिद की छेड़छाड़ की गई तस्वीर का इस्तेमाल किया था.
हैरानी की बात यह है कि जिस शिकायत के आधार पर अदालत ने यूपी पुलिस को जुबैर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया, वह लखीमपुर के सुदर्शन टीवी के एक रिपोर्टर ने दर्ज करवाई है, जिसने अपनी शिकायत में ट्विटर को भी सह-आरोपी बताया है.
हिंदू दक्षिणपंथियों के सोशल मीडिया पोस्ट में मदीना की अल-मस्जिद अन नबावी मस्जिद का लगातार दुरुपयोग एक नियमित और आम बात हो चुकी है.
गाजा में इजरायली मिसाइल हमलों के दौरान मस्जिद पर बमबारी की फोटोशॉप की गई तस्वीरों को फैक्ट-चेक करते हुए जुबैर ने उत्तर प्रदेश पुलिस, नोएडा पुलिस और यूपी के डीजीपी से भी आग्रह किया कि वह हिंसा भड़काने के इस जान-बूझकर किए गए प्रयास के खिलाफ कार्रवाई करें.
हालांकि पुलिस ने तक कोई कदम नहीं उठाया. अब घटना के लगभग एक साल बाद पुलिस ने उस ज़ुबैर के खिलाफ सितंबर 2021 में दर्ज की गई एफआईआर को जुबैर के खिलाफ वॉरंट निकाला है. वो भी ऐसे समय में जब उन्हें तीन हिंदुत्ववादी नेताओं- यति नरसिंहानंद, महंत बजरंग मुनि और आनंद स्वरूप, जो हेट स्पीच के मामले में आरोपी हैं, को 'घृणा फ़ैलाने वाला' कहने के आरोप में सीतापुर पुलिस द्वारा दर्ज मामले में सुप्रीम कोर्ट से बीते 8 जुलाई को ही पांच दिन की अंतरिम जमानत मिली है.
मोहम्मद जुबैर को सबसे पहले दिल्ली पुलिस ने बीते 27 जून को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 295 (किसी भी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके उनकी धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए किया गया जान-बूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य) और 153 (धर्म, जाति, जन्म स्थान, भाषा आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच विद्वेष को बढ़ाना) के तहत मामला दर्ज कर गिरफ़्तार किया गया था.
बीते दो जुलाई को दिल्ली पुलिस ने जुबैर के खिलाफ एफआईआर में आपराधिक साजिश, सबूत नष्ट करने और विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम की धारा 35 के तहत नए आरोप जोड़े हैं. ये आरोप जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की दखल का द्वार खोलते हैं.
जुबैर की गिरफ्तारी चार साल पुराने 2018 के उस ट्वीट को लेकर हुई थी जिसमें 1983 में बनी फिल्म 'किसी से न कहना' का एक स्क्रीनशॉट शेयर किया गया था.
बाद में, यह ट्विटर हैंडल डिलीट कर दिया गया. अब यह हैंडल दोबारा सक्रिय हुआ है, लेकिन जुबैर से संबंधित ट्वीट डिलीट कर दिया गया है.
दो जुलाई इसी मामले में मोहम्मद जुबैर को अदालत ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. इसके बाद सीतापुर पुलिस ने उनके यहां दर्ज एक मामले के संबंध में उनकी हिरासत मांगी थी, जिसके बाद उन्हें सीतापुर ले जाया गया. सुप्रीम कोर्ट से उन्हें इसी मामले में अंतरिम जमानत मिली है. हालांकि दिल्ली पुलिस और अब लखीमपुर पुलिस द्वारा दर्ज मामले के चलते वे अभी हिरासत में ही हैं.
(नोटः (5 नवंबर 2022) इस ख़बर को टेक फॉग ऐप संबंधी संदर्भ हटाने के लिए संपादित किया गया है. टेक फॉग संबंधी रिपोर्ट्स को वायर द्वारा की जा रही आंतरिक समीक्षा के चलते सार्वजनिक पटल से हटाया गया है. )
| फैक्ट चेक वेबसाइट ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर को उत्तर प्रदेश के सीतापुर में दर्ज एक मामले में सुप्रीम कोर्ट से पांच दिन की अंतरिम ज़मानत मिलने के तुरंत बाद लखीमपुर खीरी पुलिस ने एक अन्य मामले में उसी दिन एक वॉरंट तामील कराया था. बीते साल के एक ट्वीट में ज़ुबैर ने सुदर्शन टीवी के ट्विटर हैंडल से साझा की गई मदीना मस्जिद की छेड़छाड़ की गई तस्वीर पर सवाल उठाया था. इसे लेकर लखीमपुर के सुदर्शन टीवी के एक रिपोर्टर ने उनके ख़िलाफ़ केस दर्ज करवाया है. लखीमपुर खीरीः उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले की एक अदालत ने फैक्ट चेक वेबसाइट ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर को दुश्मनी को बढ़ावा देने के दो हज़ार इक्कीस में दर्ज एक मामले में चौदह दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. सहायक अभियोजन अधिकारी अवधेश यादव ने सोमवार को बताया कि मोहम्मद जुबैर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया और उन्हें ग्यारह जुलाई से चौदह दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. अभियोजन पक्ष ने चौदह दिनों की पुलिस रिमांड की मांग की थी और जुबैर के अधिवक्ता ने इसके खिलाफ दलीलें पेश की. यादव ने कहा कि मोहम्मद जुबैर के पुलिस रिमांड पर सुनवाई के लिए अदालत ने तेरह जुलाई की तारीख मुकर्रर की है. ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर को सीतापुर में दर्ज एक मामले में सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के तुरंत बाद लखीमपुर पुलिस ने एक अन्य मामले में उसी दिन को वॉरंट तामील कराया था. अपर पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने बताया था कि लखीमपुर खीरी जिले में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मोहम्मदी की अदालत ने मोहम्मद जुबैर के खिलाफ वॉरंट बी जारी किया था, जिसे शुक्रवार को खीरी पुलिस ने तामील करा दिया था. रिपोर्ट के अनुसार, लखीमपुर पुलिस ने अट्ठारह सितंबर दो हज़ार इक्कीस को एक अदालत के निर्देश पर मोहम्मद जुबैर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी. सोलह मई, दो हज़ार इक्कीस को किए गए एक ट्वीट के लिए उन पर धारा एक सौ तिरेपनए के तहत आरोप लगाया गया था. इस ट्वीट में जुबैर ने बताया था कि कट्टर दक्षिणपंथी चैनल सुदर्शन टीवी ने दो हज़ार इक्कीस में गाजा पट्टी पर इजरायल की बमबारी की रिपोर्ट करते हुए प्रसिद्ध मदीना मस्जिद की छेड़छाड़ की गई तस्वीर का इस्तेमाल किया था. हैरानी की बात यह है कि जिस शिकायत के आधार पर अदालत ने यूपी पुलिस को जुबैर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया, वह लखीमपुर के सुदर्शन टीवी के एक रिपोर्टर ने दर्ज करवाई है, जिसने अपनी शिकायत में ट्विटर को भी सह-आरोपी बताया है. हिंदू दक्षिणपंथियों के सोशल मीडिया पोस्ट में मदीना की अल-मस्जिद अन नबावी मस्जिद का लगातार दुरुपयोग एक नियमित और आम बात हो चुकी है. गाजा में इजरायली मिसाइल हमलों के दौरान मस्जिद पर बमबारी की फोटोशॉप की गई तस्वीरों को फैक्ट-चेक करते हुए जुबैर ने उत्तर प्रदेश पुलिस, नोएडा पुलिस और यूपी के डीजीपी से भी आग्रह किया कि वह हिंसा भड़काने के इस जान-बूझकर किए गए प्रयास के खिलाफ कार्रवाई करें. हालांकि पुलिस ने तक कोई कदम नहीं उठाया. अब घटना के लगभग एक साल बाद पुलिस ने उस ज़ुबैर के खिलाफ सितंबर दो हज़ार इक्कीस में दर्ज की गई एफआईआर को जुबैर के खिलाफ वॉरंट निकाला है. वो भी ऐसे समय में जब उन्हें तीन हिंदुत्ववादी नेताओं- यति नरसिंहानंद, महंत बजरंग मुनि और आनंद स्वरूप, जो हेट स्पीच के मामले में आरोपी हैं, को 'घृणा फ़ैलाने वाला' कहने के आरोप में सीतापुर पुलिस द्वारा दर्ज मामले में सुप्रीम कोर्ट से बीते आठ जुलाई को ही पांच दिन की अंतरिम जमानत मिली है. मोहम्मद जुबैर को सबसे पहले दिल्ली पुलिस ने बीते सत्ताईस जून को भारतीय दंड संहिता की धारा दो सौ पचानवे और एक सौ तिरेपन के तहत मामला दर्ज कर गिरफ़्तार किया गया था. बीते दो जुलाई को दिल्ली पुलिस ने जुबैर के खिलाफ एफआईआर में आपराधिक साजिश, सबूत नष्ट करने और विदेशी योगदान अधिनियम की धारा पैंतीस के तहत नए आरोप जोड़े हैं. ये आरोप जांच में प्रवर्तन निदेशालय की दखल का द्वार खोलते हैं. जुबैर की गिरफ्तारी चार साल पुराने दो हज़ार अट्ठारह के उस ट्वीट को लेकर हुई थी जिसमें एक हज़ार नौ सौ तिरासी में बनी फिल्म 'किसी से न कहना' का एक स्क्रीनशॉट शेयर किया गया था. बाद में, यह ट्विटर हैंडल डिलीट कर दिया गया. अब यह हैंडल दोबारा सक्रिय हुआ है, लेकिन जुबैर से संबंधित ट्वीट डिलीट कर दिया गया है. दो जुलाई इसी मामले में मोहम्मद जुबैर को अदालत ने चौदह दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. इसके बाद सीतापुर पुलिस ने उनके यहां दर्ज एक मामले के संबंध में उनकी हिरासत मांगी थी, जिसके बाद उन्हें सीतापुर ले जाया गया. सुप्रीम कोर्ट से उन्हें इसी मामले में अंतरिम जमानत मिली है. हालांकि दिल्ली पुलिस और अब लखीमपुर पुलिस द्वारा दर्ज मामले के चलते वे अभी हिरासत में ही हैं. इस ख़बर को टेक फॉग ऐप संबंधी संदर्भ हटाने के लिए संपादित किया गया है. टेक फॉग संबंधी रिपोर्ट्स को वायर द्वारा की जा रही आंतरिक समीक्षा के चलते सार्वजनिक पटल से हटाया गया है. ) |
बालों में नींबू लगाने से कई बार साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं.
Hair Care Tips: घरेलू नुस्खे ज्यादातर लोगों के डेली स्किन केयर रूटीन का अहम हिस्सा होते हैं. खासकर महिलाएं त्वचा और बालों को संवारने के लिए एलोवेरा जेल से लेकर दही और मुल्तानी मिट्टी तक कई नेचुरल चीजों (Home Remedies) का इस्तेमाल करती हैं. नींबू (Lemon) भी इन्हीं में से एक है. दरअसल नींबू को विटामिन सी, साइट्रिक एसिड और आयरन का अच्छा सोर्स माना जाता है. यही कारण है कि स्किन को ग्लोइंग और बालों को शाइनी बनाने में नींबू काफी असरदार नुस्खा है.
मगर बता दें कि कई बार बालों के लिए नींबू का इस्तेमाल नुकसानदायक (Problems) भी साबित हो सकता है. आप में से शायद बहुत लोग नींबू लगाने से बालों पर होने वाले साइड इफैक्ट्स से वाकिफ न हों. इसलिए आज हम आपको बताते हैं कि कैसे स्कैल्प पर नींबू का इस्तेमाल बालों की हेल्थ को प्रभावित कर सकता है.
कई लोग डैंड्रफ की समस्या से निजात पाने के लिए तेल के साथ नींबू का रस मिलाकर लगाते हैं. हालांकि डैंड्रफ दूर करने का ये एक असरदार तरीका है. लेकिन इसमें पर्याप्त मात्रा में साइट्रिक एसिड मौजूद होने के कारण बाल रूखे और बेजान होने लगते हैं. वहीं अगर आप एक्जिमा या सोरायसिस के शिकार हैं, तो सिर पर नींबू के इस्तेमाल से खुजली, रेडनेस और इरिटेशन जैसे स्किन इंफैक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है.
ये भी पढ़ेंः खानपान में की जाने वाली ये 5 गलतियां बनती हैं पुरुषों में हेयर फॉल का कारण, आप तो नहीं कर रहे ये मिस्टेक्स?
कई बार कुछ चीजें स्किन को सूट नहीं करती हैं या फिर उनके हद से ज्यादा इस्तेमाल से रिएक्शन देखने को मिलता है. इस फेहरिस्त में नींबू का नाम भी शामिल है. कई बार स्कैल्प पर नींबू का उपयोग सूजन और फफोलों का कारण भी बन सकता है. जिससे आप फाइटोफोटोइर्माटाइटिस नामक बीमारी का भी शिकार हो सकते हैं.
बालों पर नींबू लगाने के बाद भूलकर भी सूरज के संपर्क में न आएं. दरअसल नींबू में मौजूद साइट्रिक एसिड सूरज की रोशनी लगने के चलते रिएक्शन का कारण बन सकता है. इसलिए बालों में नींबू लगाने के बाद धूप में न बैठें.
स्कैल्प पर नींबू के रिएक्शन और फाइटोफोटोइर्माटाइटिस से बचने के लिए नींबू लगाने के पहले पैच टेस्ट अवश्य कर लें. इसके लिए अपनी स्किन के किसी हिस्से पर थोड़ा सा नींबू का रस लगाकर छोड़ दें. अगर, आधे घंटे में कोई रिएक्शन नहीं होता है, तो आप बेफिक्र होकर नींबू का इस्तेमाल कर सकते हैं. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें. )
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सनी देओल की हीरोइन को जब ज्यादा पढ़ी-लिखी होना पड़ा भारी, एक्ट्रेस ने खूब सुने थे ताने, बोलीं- इंडस्ट्री में. .
| बालों में नींबू लगाने से कई बार साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं. Hair Care Tips: घरेलू नुस्खे ज्यादातर लोगों के डेली स्किन केयर रूटीन का अहम हिस्सा होते हैं. खासकर महिलाएं त्वचा और बालों को संवारने के लिए एलोवेरा जेल से लेकर दही और मुल्तानी मिट्टी तक कई नेचुरल चीजों का इस्तेमाल करती हैं. नींबू भी इन्हीं में से एक है. दरअसल नींबू को विटामिन सी, साइट्रिक एसिड और आयरन का अच्छा सोर्स माना जाता है. यही कारण है कि स्किन को ग्लोइंग और बालों को शाइनी बनाने में नींबू काफी असरदार नुस्खा है. मगर बता दें कि कई बार बालों के लिए नींबू का इस्तेमाल नुकसानदायक भी साबित हो सकता है. आप में से शायद बहुत लोग नींबू लगाने से बालों पर होने वाले साइड इफैक्ट्स से वाकिफ न हों. इसलिए आज हम आपको बताते हैं कि कैसे स्कैल्प पर नींबू का इस्तेमाल बालों की हेल्थ को प्रभावित कर सकता है. कई लोग डैंड्रफ की समस्या से निजात पाने के लिए तेल के साथ नींबू का रस मिलाकर लगाते हैं. हालांकि डैंड्रफ दूर करने का ये एक असरदार तरीका है. लेकिन इसमें पर्याप्त मात्रा में साइट्रिक एसिड मौजूद होने के कारण बाल रूखे और बेजान होने लगते हैं. वहीं अगर आप एक्जिमा या सोरायसिस के शिकार हैं, तो सिर पर नींबू के इस्तेमाल से खुजली, रेडनेस और इरिटेशन जैसे स्किन इंफैक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है. ये भी पढ़ेंः खानपान में की जाने वाली ये पाँच गलतियां बनती हैं पुरुषों में हेयर फॉल का कारण, आप तो नहीं कर रहे ये मिस्टेक्स? कई बार कुछ चीजें स्किन को सूट नहीं करती हैं या फिर उनके हद से ज्यादा इस्तेमाल से रिएक्शन देखने को मिलता है. इस फेहरिस्त में नींबू का नाम भी शामिल है. कई बार स्कैल्प पर नींबू का उपयोग सूजन और फफोलों का कारण भी बन सकता है. जिससे आप फाइटोफोटोइर्माटाइटिस नामक बीमारी का भी शिकार हो सकते हैं. बालों पर नींबू लगाने के बाद भूलकर भी सूरज के संपर्क में न आएं. दरअसल नींबू में मौजूद साइट्रिक एसिड सूरज की रोशनी लगने के चलते रिएक्शन का कारण बन सकता है. इसलिए बालों में नींबू लगाने के बाद धूप में न बैठें. स्कैल्प पर नींबू के रिएक्शन और फाइटोफोटोइर्माटाइटिस से बचने के लिए नींबू लगाने के पहले पैच टेस्ट अवश्य कर लें. इसके लिए अपनी स्किन के किसी हिस्से पर थोड़ा सा नींबू का रस लगाकर छोड़ दें. अगर, आधे घंटे में कोई रिएक्शन नहीं होता है, तो आप बेफिक्र होकर नींबू का इस्तेमाल कर सकते हैं. . सनी देओल की हीरोइन को जब ज्यादा पढ़ी-लिखी होना पड़ा भारी, एक्ट्रेस ने खूब सुने थे ताने, बोलीं- इंडस्ट्री में. . |
Budh Pradosh Vrat Katha In Hindi: हर माह की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष तिथि का व्रत किया जाता है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित है। भगवान शिव की कृपा पाने के लिए इस दिन प्रदोष व्रत की कथा अवश्य सुननी चाहिए। बुध प्रदोष व्रत की कथा सुनने और कहने से हर पाप दूर होता है और जीवन में सब मंगल ही मंगल होता है।
| Budh Pradosh Vrat Katha In Hindi: हर माह की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष तिथि का व्रत किया जाता है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित है। भगवान शिव की कृपा पाने के लिए इस दिन प्रदोष व्रत की कथा अवश्य सुननी चाहिए। बुध प्रदोष व्रत की कथा सुनने और कहने से हर पाप दूर होता है और जीवन में सब मंगल ही मंगल होता है। |
हिंदी साहित्य का इतिहास
18.1 आधुनिक काल की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ
18.1.1 सन् 1857 की क्रांति
1849 ई. में सिक्खों को पराजित करने के बाद संपूर्ण देश पर अंग्रेजों का शासन हो गया था। 1856 ई. में अवध भी अंग्रेजी राज्य में सम्मिलित कर लिया गया। इससे अंग्रेज मदोन्मत्त हो गए और देशी राजाओं द्वारा एकजुट होकर 1857 ई. में व्यापक स्तर पर विद्रोह करते हुए ध्वस्तप्रायः मुगल साम्राज्य को पुनः स्थापित करने का प्रयास किया गया। देशी राज्यों का विलय और अवध प्रदेश का अंग्रेजी राज्य में समाहार लॉर्ड डलहौजी की नीति की ऐसी महत्त्वपूर्ण घटनाएँ थीं जिनसे जनता की भावना पर कठोर प्रहार हुआ । जनता, सिपाहियों एवं रजवाड़ों में जो असंतोष व्याप्त था वही 1857 की राज्य क्रांति (विद्रोह) के रूप में सामने आया । इस राज्य क्रांति का पूरे देश पर व्यापक प्रभाव पड़ा। इसने देश की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक परिस्थितियों को झकझोर दिया। अंग्रेजों ने ईस्ट इंडिया कंपनी समाप्त कर दी और भारतवर्ष ब्रिटिश साम्राज्य का उपनिवेश बन गया। अंग्रेजों ने अपनी आर्थिक, शैक्षणिक एवं प्रशासनिक नीतियों में परिवर्तन किया तो दूसरी ओर भारतीय जनमानस में भी नवीन चेतना जाग्रत हुई जिसने भारत को सांस्कृतिक रूप से पुनः जाग्रत कर दिया। क्रांति की लपटों ने साहित्य को प्रभावित किया और साहित्यकार में स्वातंत्र्य चेतना, राष्ट्रीय चेतना को काव्य में व्यक्त करने की बलवती इच्छा साफ दिखाई देने लगी। साहित्यकारों द्वारा व्यक्त इन भावनाओं ने जनता में राष्ट्रीय चेतना उद्बुद्ध करने में पर्याप्त योगदान दिया।
ईसाई धर्म प्रचारक भारतीय धर्म एवं समाज की मान्यताओं की खिल्ली उड़ा रहे थे। वे भारतीय धर्म तथा समाज में व्याप्त कुरीतियों का मजाक उड़ाकर हमें नीचा दिखाने का प्रयास कर रहे थे यही नहीं अपितु आर्थिक लालच देकर भोले-भाले भारतीयों को ईसाई धर्म स्वीकार करने के लिए लालायित भी कर रहे थे। अतः ऐसे माहौल में सांस्कृतिक पुनर्जागरण की आवश्यकता अनुभव की गई। राजा राममोहनराय, देवेंद्रनाथ ठाकुर, केशवचंद्र सेन, ईश्वरचंद्र विद्यासागर, दयानंद सरस्वती, विवेकानंद आदि महापुरुषों ने सांस्कृतिक एवं सामाजिक रूप से भारतीय जनता को जाग्रत करने का महत्त्वपूर्ण कार्य किया। देश के प्रबुद्धजनों, चिंतकों ने जनता को नई प्रेरणा दी। विधवा विवाह को उचित बताया, बाल विवाह को अनुचित बताया, सती प्रथा पर रोक लगाई गई, देश की उन्नति के लिए अछूतोद्धार का प्रयास किया गया। ब्रह्म समाज, प्रार्थना समाज, रामकृष्ण मिशन, आर्य समाज, थियोसोफीकल सोसाइटी की स्थापना की गई।
क्या आप जानते हैं
1857 के विद्रोह के बाद अंग्रेजों ने ईस्ट इंडिया कंपनी समाप्त कर दी और भारतवर्ष ब्रिटिश साम्राज्य का उपनिवेश बन गया।
1857 की राज्यक्रांति को भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का नाम दिया गया है। मेरठ में मंगल पांडे के नेतृत्व में विद्रोह का बिगुल फूँक दिया गया जिसने अंग्रेजों को यह बता दिया कि अब भारतीयों को बहुत दिनों तक दबाकर नहीं रखा जा सकता । कविता में स्वदेश प्रेम, राष्ट्रीय चेतना, नए विषयों की ओर उन्मुखता दिखाई देने लगी। कविता रीतिकालीन परिवेश से मुक्त होकर नवयुग का द्वार खोलने लगी । अंग्रेजी साम्राज्य में होने वाली भारत की दुर्दशा का चित्रण भी इन शब्दों में होने लगाअंग्रेज राज सुख साज सजे सब भारी।
पै धन विदेश चलि जात यहै अतिख्यारी ।
निश्चय ही 1857 की राज्यक्रांति ने सांस्कृतिक पुनर्जागरण का बिगुल साहित्य में भी फूँक दिया, ऐसा कहना असंगत न होगा।
LOVELY PROFESSIONAL UNIVERSITY
| हिंदी साहित्य का इतिहास अट्ठारह.एक आधुनिक काल की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ अट्ठारह.एक.एक सन् एक हज़ार आठ सौ सत्तावन की क्रांति एक हज़ार आठ सौ उनचास ई. में सिक्खों को पराजित करने के बाद संपूर्ण देश पर अंग्रेजों का शासन हो गया था। एक हज़ार आठ सौ छप्पन ई. में अवध भी अंग्रेजी राज्य में सम्मिलित कर लिया गया। इससे अंग्रेज मदोन्मत्त हो गए और देशी राजाओं द्वारा एकजुट होकर एक हज़ार आठ सौ सत्तावन ई. में व्यापक स्तर पर विद्रोह करते हुए ध्वस्तप्रायः मुगल साम्राज्य को पुनः स्थापित करने का प्रयास किया गया। देशी राज्यों का विलय और अवध प्रदेश का अंग्रेजी राज्य में समाहार लॉर्ड डलहौजी की नीति की ऐसी महत्त्वपूर्ण घटनाएँ थीं जिनसे जनता की भावना पर कठोर प्रहार हुआ । जनता, सिपाहियों एवं रजवाड़ों में जो असंतोष व्याप्त था वही एक हज़ार आठ सौ सत्तावन की राज्य क्रांति के रूप में सामने आया । इस राज्य क्रांति का पूरे देश पर व्यापक प्रभाव पड़ा। इसने देश की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक परिस्थितियों को झकझोर दिया। अंग्रेजों ने ईस्ट इंडिया कंपनी समाप्त कर दी और भारतवर्ष ब्रिटिश साम्राज्य का उपनिवेश बन गया। अंग्रेजों ने अपनी आर्थिक, शैक्षणिक एवं प्रशासनिक नीतियों में परिवर्तन किया तो दूसरी ओर भारतीय जनमानस में भी नवीन चेतना जाग्रत हुई जिसने भारत को सांस्कृतिक रूप से पुनः जाग्रत कर दिया। क्रांति की लपटों ने साहित्य को प्रभावित किया और साहित्यकार में स्वातंत्र्य चेतना, राष्ट्रीय चेतना को काव्य में व्यक्त करने की बलवती इच्छा साफ दिखाई देने लगी। साहित्यकारों द्वारा व्यक्त इन भावनाओं ने जनता में राष्ट्रीय चेतना उद्बुद्ध करने में पर्याप्त योगदान दिया। ईसाई धर्म प्रचारक भारतीय धर्म एवं समाज की मान्यताओं की खिल्ली उड़ा रहे थे। वे भारतीय धर्म तथा समाज में व्याप्त कुरीतियों का मजाक उड़ाकर हमें नीचा दिखाने का प्रयास कर रहे थे यही नहीं अपितु आर्थिक लालच देकर भोले-भाले भारतीयों को ईसाई धर्म स्वीकार करने के लिए लालायित भी कर रहे थे। अतः ऐसे माहौल में सांस्कृतिक पुनर्जागरण की आवश्यकता अनुभव की गई। राजा राममोहनराय, देवेंद्रनाथ ठाकुर, केशवचंद्र सेन, ईश्वरचंद्र विद्यासागर, दयानंद सरस्वती, विवेकानंद आदि महापुरुषों ने सांस्कृतिक एवं सामाजिक रूप से भारतीय जनता को जाग्रत करने का महत्त्वपूर्ण कार्य किया। देश के प्रबुद्धजनों, चिंतकों ने जनता को नई प्रेरणा दी। विधवा विवाह को उचित बताया, बाल विवाह को अनुचित बताया, सती प्रथा पर रोक लगाई गई, देश की उन्नति के लिए अछूतोद्धार का प्रयास किया गया। ब्रह्म समाज, प्रार्थना समाज, रामकृष्ण मिशन, आर्य समाज, थियोसोफीकल सोसाइटी की स्थापना की गई। क्या आप जानते हैं एक हज़ार आठ सौ सत्तावन के विद्रोह के बाद अंग्रेजों ने ईस्ट इंडिया कंपनी समाप्त कर दी और भारतवर्ष ब्रिटिश साम्राज्य का उपनिवेश बन गया। एक हज़ार आठ सौ सत्तावन की राज्यक्रांति को भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का नाम दिया गया है। मेरठ में मंगल पांडे के नेतृत्व में विद्रोह का बिगुल फूँक दिया गया जिसने अंग्रेजों को यह बता दिया कि अब भारतीयों को बहुत दिनों तक दबाकर नहीं रखा जा सकता । कविता में स्वदेश प्रेम, राष्ट्रीय चेतना, नए विषयों की ओर उन्मुखता दिखाई देने लगी। कविता रीतिकालीन परिवेश से मुक्त होकर नवयुग का द्वार खोलने लगी । अंग्रेजी साम्राज्य में होने वाली भारत की दुर्दशा का चित्रण भी इन शब्दों में होने लगाअंग्रेज राज सुख साज सजे सब भारी। पै धन विदेश चलि जात यहै अतिख्यारी । निश्चय ही एक हज़ार आठ सौ सत्तावन की राज्यक्रांति ने सांस्कृतिक पुनर्जागरण का बिगुल साहित्य में भी फूँक दिया, ऐसा कहना असंगत न होगा। LOVELY PROFESSIONAL UNIVERSITY |
ही रोमन इस्टर की तिथि निकालने की विधि भो जो व्हिटवी के यगडो वा एक विषय था स्वीकार की। और भी मतभेद थे जो बारहवी शती तक समाप्त नही हुए।
व्हिवी की परिषद् के बाद से सुदूर पश्चिमी सभ्यता अलग पड गयी और विनाश की ओर उमुख हो गयी । ईसा की नवी शनी में वाइकिंगो के आक्रमण आयरलड में होत रह और ऐसा में एक भी मठ नहीं बचा जहा लूट-पाट न हुई हो । जहा तक पता है नवी शती में जायरलड में एक भी पुस्तक लैटिन में नहीं लिखी गयो यद्यपि इसी समय जो आयरिश भाग कर यूरोप चले गय थे उनकी विद्वत्ता चरम सीमा पर पहुँच गयी थी । स्वैण्डिनवियाई चुनौती के कारण ही इग्लड और फास का निर्माण हुआ क्योंकि इससे इन देशा का अधिकतम स्फूति प्राप्त हुई । किन्तु आयरलैंड इसके फलस्वरूप इतना अधिक अलगाव (आइसालेशन) हो गया कि वह केवल एक अल्पकालिक विजय आक्रमणकारियो पर प्राप्त कर सका क्लोनटाफ पर ब्रायनवोरु द्वारा । जन्तिम जाधान उस समय हुआ जब एग्लोनारमन एजेबिन राजा हेनरी द्वितीय ने बारहवी शती के मध्य पोप का आशीर्वाद लेकर आयरल्ड पर विजय प्राप्त की। केल्टिक किनार के लोग अपनी निजी सभ्यता की नोव न डाल सके । उनके आत्मिक नेता के भाग्य म यह बदा था कि उन्ही प्रतिद्वद्विया क ऋणी हा जो उनको स्वतन्त्र सभ्यता के जन्मसिद्ध अधिकार को छीन रहे थे । आयरिश विद्वत्ता पश्चिमी महाद्वीपो सभ्यता के विकास में सहायता दे रही थी। क्याकि जायरिश विद्वान् स्वण्डिनेवियाई जाक्रमण के कारण आयरलड से भाग कर विस्थापिता के रूप म वहाँ गये । केरोलिंजियाई पुनजागरण में उनकी सेवाओं से काम लिया गया। इनमें आयरिश हेलेनीवादी दार्शनिक तथा धमशास्त्री जोहानस स्काटस एरिजेना निम्म देह सबसे योग्य व्यक्ति था ।
अकाल प्रसूत स्कैण्डिनेवियाई सभ्यता
हमने देखा कि पश्चिमी सभ्यता के निर्माण करने के एकाधिकार प्राप्त करने के लिए जो सघप रोम तथा आपरल्ड ने वीच चला उसमें रोम सम्मिलित हुआ। और जब पश्चिमी ईसाई समाज जभी नवजात हो था । उसे थाडे ही अवकाश के पश्चात् इसी काय के लिए सघप करना पडा । इस बार उत्तरी यूरोपीय बबरो से जा ट्यूटना के सबसे पाछे की पक्ति मे थे और स्कण्डिनेविया में तयार वठेथ । इस समय परिस्थिति अधिक कठिन थी । सनिक तथा सास्कृतिक दोना स्तरा पर सघप हुआ। दोनो विरोधी पक्ष एक दूसरे से अधिक शक्तिशाली जौर भित थे । दा शती पहले आयरिश और रामन दल जो पश्चिमी इसाई समान की नाव रख रहे थे एक दूसरे से शक्तिशाली तया मित्र नही थे ।
स्त्र पिनेवियाइया और आयरिशा का पश्चिमी ईसाई समाज से जो सघप चला उसके पहले वा इन देशा का इतिहास यहा तक समान है कि दाना अपने भावी विरोधी से एक काल तक अलग रह। ऐंग्लो भक्सन अधर्मियो ( पगन) ने इग्लड में जो अभियान किया उसके कारण जायरिश लोग अलग रहे । ईसा की छठी शती की समाप्ति के पहले अधर्मी स्लावो के बीच में आ जाने के कारण स्वण्डिनेवियाई लोग रामन ईसाई समाज से अलग हो गये । ये स्लाव बाल्टिक के दक्षिणी तट वे नीमर से एल्व नदी की रेखा व सीधे स्थल माग पर चले और उस स्थान में जाये जा टयूटनी बबरो के हट जाने से खाली पड़ गया था। य हेलेनियो के वाद व जनरेला में हटे । स्वण्डिनेवियाई लोग अपने निवास स्थान में ही रह गये । इस प्रकार आयरिश अपने ईसाई साथिया से बिछुड
गये और स्वण्डिनेवियाई साथिया से भी क्यावि इनके बीच बबर लाग आ गय । वित्तु दोना में महत्त्वपूर्ण अन्तर था । एग्लो सक्सन प्रवेश के पहले रोमना न आयरिशा म ईसाई धम यो चिनगारी सुलगा दी थी जो अलगाव (आइसोलेशन) वे समय आग के रूप म भडक उठी मगर स्वण्डिनेवियाई अधर्मी बने ही रहे ।
दूसरे जनरेलो वे समान स्वण्डिनेवियाई जारेला उस संघर्ष का परिणाम था जो एक बबर समाज का एवं सभ्य समाज से हुआ। यह शाल्मान के साम्राज्य में हुआ । यह साम्राज्य नितान्त असफल रहा क्योकि यह वेवल जाडम्बर था और जसमय था। यह महत्वावराक्षापूर्ण राजनीतिक ढाँचा मात्र था जो अविकसित सामाजिक तथा आर्थिक नीव पर बिना उचित ध्यान दिये बना था। इसी निस्सारता वा सबसे बडा उदाहरण है शालमान का सक्सनी को विजय में असाधारण शक्ति का प्रयोग । जय ७७२ ई० में शालमान सनिव बल पर सक्सनी को रोमन ईसाई जगत् में लाने चला वह उस शातिमय प्रवेश की नीति या बहुत बुरी तरह उल्लघन कर रहा था जिसका पालन पिछले एक गती में आयरिश और अग्रजी भिनरियो ने किया था। इस शातिमय नीति से इन लागा ने बवरियता, युरिजियना, हेसियना तथा मीसियना का धम परिवतन करके ईसाई जगत् की सीमा बढ़ा दी थी। को-सक्सन के तीस वर्षीय युद्ध की अग्नि परीक्षा ने नवजात पश्चिमी समाज व दुबल तन्तुआ को जजर कर दिया और स्वण्डिनवियाइया के हृदय में वही बबरी उत्साह उत्पन्न कर दिया जो कभी मेल्टा के हृदय में उभडा था जब आत्म्म के नीचे एट्रस्कना का उत्साहपूर्ण बढाव उन्होने रोका था ।
ईसा की आठवा तथा नवा शती में स्वण्डिनेवियाइयो का बढाव ईसा के पूर्व पाचवी से तीसरी शती के वेल्टा के बढाव से विस्तार में और प्रखरता में कही आग था। क्ल्टा ने जो हेल्नी जगत का घरने की विफल चेष्टा की वे अपना दाहिना पक्ष स्पेन के मध्य तक ले गय और बायाँ पक्ष एशिया माइनर के मध्य तक ले गये । किन्तु यह प्रयास, वाइकिंगा की सनिक वायवाहिया के कारण, जिन्होने परम्परावादी ईसाई सम्प्रदाय पर अपने वामपन द्वारा रूस में घुसकर और दाहिने पक्ष द्वारा उत्तरी अमरीका में घुसकर आश्रमण किया, विफल हो गया । एक बार पुन दोनो ईसाई सभ्यताएँ उस समय खतरे में पड गयी जब वाइकिंग दल टेम्स पार करने लंदन में घुस रहे थे, सन पार कर व परिस म ओर बासफरस पार करके कुसतुनतुनिया में यह खतरा उस समय से अधिक था जब वेल्ट कुछ वा के लिए राम और पसेडानिया व अधिकारी बन गय थे । अवाल प्रसूत स्वण्डिनवियाई सभ्यता, जिसका विकास आइमल्ड में ईमाइयत के उष्ण श्वास से वहाँ वे हिमखण्डा को गलावर फल रही थी, क्ल्टो सस्कृति से उपलधि और भविष्य की जाशा में कही आगे बढ़ गयी थी। इसव अवय आधुनिक पुरातत्वविदा ननिकाल है ।
जिस प्रणाली से हम अध्ययन कर रहे है उसमें स्वाभाविक है कि यही एतिहासिक घटनाएं भिन्न भिन्न संदर्भ में बार-बार जायें । हमने ऊपर उस सघप का वर्णन किया है जा इग्ल्ड और पास के लोगो का स्पण्डिनविपाई आत्रमण के समय करना पडा और यह भी दिखाया है कि इस
१ इमे 'लाटने क्लचर कहते हैं । इस कारण कि इसका पहले-पहल पता, समुचित प्रमाण यूचेटल झोल को बाढ़ के बाद लगा ।
सभ्यताओं को उपत्ति
चुनोती में दोना जातिया ने अपनी एक्ता स्थापित करने और स्वण्डिनेवियाई अधिवासिया ( सटल्स) पो अपनी सभ्यता में मिला करवे विजय प्राप्त थी । (देखिये पृष्ठ १०४ ) जिस प्रकार वेल्टी ईसाई सस्कृति की समाप्ति पर, उसके यशजा ने रोमन ईसाई जगत् को समृद्ध किया उसी प्रकार दो छातिया के बाद नारमन लोग लटिन लोगों पर आश्रमणवारी नता बने । एक इतिहासकार तो प्रथम धार्मिक युद्ध (भूमेड) वो, विरोधाभास में यह कहा है कि वह ईसाई वाइकिंग चढाई थी। हमा स्वण्डिनेवियाई सभ्यता व अविव मित जीवन में आइमलैंड के महत्त्व को भी बताया है और यह भी कल्पना की कि यदि स्वण्डिनेवियाई अधर्मी एवियाइया के बराबर सिद्धि प्राप्त करते और ईमाइया यो भगा कर सार पश्चिमी यूरोप में अपनी अधर्मी सभ्यता का था। दष्टि से प्रसार वरते, विहेनी सभ्यता के हमी एक मात्र उत्तराधिकारी है तो क्या परिणाम होता ? हमें अभी यह देखना है कि स्वण्डिनेवियाई सभ्यता पर उसकी ही भूमि पर किस प्रकार विजय हुई और किस प्रकार उसका विनाग हुआ । विजय उसी समर-तत्र (टेक्टिक्स) से हुई जिसे शालमान ने त्याग दिया था। पश्चिमा ईमाई जगत को विवश होकर अपनी रक्षा सनिय ढंग से भरनी पडी। परन्तु ज्यो ही पश्चिमी रक्षात्मक सनिव दाक्ति ने स्वैण्डिनेवियाई सैनिक आक्रमण को रोक दिया पश्चिम वाला ने शान्तिमय अभियान का ढंग पकडा । पश्चिम मे जो स्वण्डिनेवियाई बस गये उनका धम परिवतन यरव उनको पुराने धम से हटाया और यही नीति उन्हाने स्पेण्डिनेविया में जो रह गये उनके प्रति अपनायी । उसमें स्पॅण्डिनेवियाइया के एक गुण ने वडी महायता की । वह थी उनकी ग्रहण करने वाला प्रवल शक्ति । इसे एक समकालीन पश्चिमी ईसाई विद्वान् ने कविता में वर्णन किया है - 'जो लोग उनके झडे के साथ आते हैं उनकी भाषा, रीति रिवाज वे ले लेते है, परिणाम यह होता है कि वे एक जाति बन जाते ह
यह विचित्र बात है कि ईसाई धर्म स्वीकार करने के पहले ही स्वैण्डिनेवियाई शासक शालमान की वीर पूजा करने लग गये थे, यहाँ तक कि अपने पुत्र का नाम वाल्स या मैगनस रखने लग गये थे । उसी वाल में यदि पश्चिमी ईसाई जगत् के शासको मे मुहम्मद और उमर ईसाइया के प्रिय नाम होने लगते तो निश्चय ही हम इस परिणाम पर पहुँचते कि इस्लाम से सघप में पश्चिमी इसाई जगत वा भला नहीं होने वाला है ।
रूस, डॅनमाक तथा नारवे के स्वैण्डिनेवियाई राज्या म तीना स्वण्डिनेवियाई राजाओ ने, जो समकालीन थे, दसवा तो वे अन्त के लगभग मनमानी आदेश जारी कर दिया था जिसस सब लोग ईसाई धम में दीक्षित कर दिये गय । नारवे में पहले इसका जोरदार विराध हुआ रिन्तु डेनमान और रूस में परिवतन चुपचाप स्वीकार कर लिया गया । इस प्रकार स्वण्डिनेवियाई समाज पराजित ही नहीं हुआ, विभाजित भी हा गया क्यावि हर ईसाई जगत ने जिसन वाइकिंगा के आश्रमण का भार सहन किया था उसके बाद के धार्मिक और सास्कृतिक प्रत्याश्रमण (कोटर- अफसिव) वा भी बोझ उया
रूस वे (स्वैण्डिनेवियाई प्रदेश के) व्यापारी अथवा राजदूत जगला की मूर्ति पूजा को कुसतुन तुनिया के रमणीय अघ विश्वास से तुलना करते थे । उहानेसत सोपिया के गुम्बद को सराहना की दष्टि से देखा था उन्होन सत्ता तथा शहीदा के राजीव चित्रो को, पूजा के स्थान (आल्टर ) की सम्पत्ति को देखा था पादरिया की वेशभूषा और उनकी संख्या को, उनकी पूजा तथा सस्वारा वे आडवर को देखा था मोन तथा उसके बाद संगीतमय भजन सुनकर उनकी आत्मा का उप
हुआ था, और इसमें घटाई नहीं हुई कि उन्हें विश्वास हो जायप्रतिदिन ईगाइया का प्रार्थना में सम्मिलित हान के लिए स्वर्ग से आगे है ।"
इसके बाद शीघ्र ही १००० ई० म आदगड में धर्म परिहुआ और आदगढी राम्हति समाप्त हो गयी। यह सही है कि या वे आइसल्डी विद्वाना न जिल्हा सामाआया लिपिनद्ध किया और जिल्हान एडाई (एड्डिन) पविताआ पा राग्रह किया और सनविपाई पुराणा, (माझ्या लोजी), विधिया या सक्षम बनाया उउ सबमें ईसाई तथा उत्तरी राम्मिश्रण था उन्हान यह काय धम परवतन के पश्चात् पचास से ढाई सौ गाल ये भीतर किया था। वितुविद्वत्ता का विहान आगलडी प्रतिमा का अंतिम धमलार था। इससे हम हलनी इतिहास में होमरी बविताओं में मागदान की तुलना कर सकते हैं । ये पविताएँ विहगावलोमन का विद्वता का प्रमाण थी । क्यापि होमर ने इनवा साहित्यिक स्वरूप उस समय के बाद दिया जब धीरसार, जिनसे वे उत्प्राणित हुई बीत चुका था। परन्तु हेल्नी प्रतिभा इन महावाव्या का पूरा र उसी परिमाण वे दूसरे क्षेत्रा में काय वरन एगी और आइराल्डा प्रतिभा अपनी 'होमरा उपलब्धि के बाद ११५०-१२५० ६० में समाप्त हो गयी ।
(४) ईसाई जगत पर इस्लाम का आघात
इस अवर्षण को समाप्त परते हुए हम यह भी देख लें कि क्या ईमाई जगत् पर इस्लाम के आघात से 'तीन स्थितिया की तुलना या उदाहरण मिलता है, जिससे हमारे पाठक अब परिचित हो गये ह । एव दूसरे सम्बन्ध में हमने देखा है कि इस्लाम की चुनौती से अधिकतम स्फूर्ति मिली है । ईसा की आठवी शती म इस्लाम ने फेंको की चुनौती दी जिसक परिणाम में अनव शतिया तर ईसाइया की ओर से प्रत्याश्रमण होता रहा जिसन मुसल्माना को आइवोरी प्रायद्वीप से निकाल बाहर ही नहीं किया किन्तु अपने मूल अभिप्राय से अधिन स्पनी और पुतगाली लोग सागर पार करके ससार के सभी देशो में पहुँच गये । इस सम्बन्ध में एक घटना पर हमें ध्यान देना चाहिए जिसे हम सुदूर पश्चिमी तथा स्वण्डिनेवियाई सभ्यता के पराजय पर विचार करते
देख चुके ह । आइवीरी प्रायद्वीप से इस्लाम के पूणत निष्कासित हाने के पहल मुसलिम संस्कृति से उसके विजयी विरोधिया ने वहाँ बहुत लाभ उठाया । मध्ययुगीन पश्चिमो ईसाई दार्शनिको ने जो दाशनिक महल खडा किया था उसके निर्माण में अनात रूप से स्पेन क मुसलिम विद्वानो ने योग दान किया और हेलेनी दाशनिक अरस्तू की कुछ पुस्तकें पश्चिमी ईसाई जगत में अरबी अनुवाद द्वारा पहुँची। यह भी सत्य है कि पश्चिमी संस्कृति पर जो पूर्वी ( आरिएटल) प्रभाव पड़ा है इसका कारण यह बताया जाता है कि वह धार्मिक युद्ध करन वालो के राज्य, सीरिया के प्रदेशों से आया विन्तु सत्य यह है कि वह मुसलिम आइबीरिया से आया ।
आइबीरिया से और पिरिनीज के ऊपर से पश्चिमी ईसाई जगत पर मुसल्माना का जा आक्रमण हुआ वह इतना प्रबल नही था जितना वह प्रतीत होता है क्योकि इस्लामी शक्ति के स्रोत दक्षिण पश्चिमी एशिया तथा आइबीरी सीमाग्र (फ्ट ) के बीच को गमनागमन को रेखा बहुत लम्बी थो । एसे स्थल मिलते ह जहा सचरण की रेखा छोटी थी और वहाँ मुसलिम आश्रमण
१ ई० गिबन दहिस्ट्री आव द डिक्लाइन एण्ड फाल आव द रोमन एम्पायर, अध्याय ५५ ।
बहुत तीव्र हुआ। ऐसा प्रदेश है अनातोलिया जो उस समय परम्परावादी ईसाई सभ्यता का दुग था । अरब आश्रमण वा पहला रूप यह देना चाहते थे वि 'रूम' को (वे रोम को रूम कहते थे ) निष्यन्त कर दें और अनानालिया पर आक्रमण करते हुए साम्राज्य की राजधानी पर विजय प्राप्त कर पश्चिमी ईसाई जगत् को धराशायी कर दें । मुसलमाना ने ६७३-७७ ई० में और फिर ७१७-१८ में घुसतुनतुनिया को घेरा विन्तु असफल रह् । दूसरे घेरे की असफलता के बाद भी जब दोनो भक्तियो को सीमा टारस पहाड की रेखा मान ली गयी, मुसलमान दशक्ति अनातोलिया के बचे-खुचे परम्परावादी ईसाई जगत् पर साल म दो वार आश्रमण करते रहे ।
परम्परावादी ईसाई जगत् ने इस दबाव का सामना राजनीतिक युक्ति से किया । और यह प्रतिरोध देखने में तो सफल रहा क्योकि इसके कारण अरव दूर रखे जा सके, विन्तु वास्तव में यह ठीक नहीं था क्याकि परम्परावादी ईसाई समाज के आन्तरिक जीवन और विकास पर इसका प्रभाव घातव था । यह युक्ति थी सीरियाई ओवा परम्परावादी ईसाई जगत में रोमन साम्राज्य की 'छाया' वा आह्वान । यही काम दो पीटी बाद पश्चिम में शालमान ने किया था और वह असफल रहा और इस कारण उससे कोई क्षति भी नही हुई। सीरियाई लिओ की उप लब्धि का सबसे घातक परिणाम यह हुआ कि परम्परावादी ईसाई धम की हानि करके वाइजे टायन राज्य का उत्वप हुआ । उसका फल यह हुआ कि सौ साल तक पूर्वी रोमन साम्राज्य तथा ईसाई धार्मिक सत्ता और बुल्गेरियाई साम्राज्य तथा ईसाई धार्मिक सत्ता में आपसी विनाशकारी युद्ध हाते रहे। इस प्रकार परम्परावादी ईसाई समाज वा विनाश अपने आप ही घातन प्रहार करने से अपने ही घर में, अपने ही ढंग से हुआ । इन तथ्यो से स्पष्ट रूप से ज्ञात होता है कि परम्परा वादी ईसाई समाज पर जो इस्लामी प्रहार हुआ उससे अत्यधिक था जो प्रहार इस्लाम का पश्चिमी ईसाई जगत् पर हुआ था ।
क्या हमें ऐसा कोई उदाहरण मिल सकता है जहाँ इस्लामी आघात न पर्याप्त रूप से कठोर न होने के कारण कोई प्रेरणा न दी हा ? हाँ, आज भी इस प्रकार के आघात का परिणाम अविसीनिया में मिलता है। इस अफ्रीकी गढ़ में जो मोनोफाइसाइट? ईसाई समाज मिलता है वह ससार का एक सामाजिक आश्चय है। इसलिए कि वह अभी तक जीवित है, और जब अरबा ने मिस्र पर विजय प्राप्त की उससे आज तरह शतियों के बीतने पर भी सार ईसाई समाज से वह अलग है। दूसरे यह कि उसका सास्कृतिक स्तर बहुत नीचा है । यद्यपि ईसाई अविसीनिया कुछ हिचकिचाहट के साथ लीग आव नैशस में सम्मिलित कर लिया गया, यह अपनी अव्यवस्था और बवरता के लिए कुख्यात था । वहा सामती और कबीला के झगडे होते रहते थे और दासा का व्यापार होता था ।
लाइबीरिया का छोडवर जिसने अपनी स्वतंत्रता स्थिर रखी, इस एक अफ्रीकी राज्य की
१ चे लोग जो ईसा को केवल एष प्रवृत्ति मानते है ।-अनुवादक
अवस्था ऐसी थी कि शेप अफ्रीकावा यूरोपीय शक्तिया द्वारा विभाजन उचित समया जा सकता है ।
विचार करने पर नात होता है कि अविसोनिया की विशेषताएँ उसकी स्वतता का अस्तित्व तथा उसकी संस्कृति का गतिरोध - दोनो का कारण एक ही है। ऐसी गढी में उसकी स्थिति है जो दुर्भेद्य और अक्ष्मीभूत (पासिल ) होकर स्थिर हो गयी । इस्लाम की ज्वार और पश्चिमी सभ्यता की औौर भी प्रखर लहरे उसने पहाड़ा व चरणा तक ही पहुच सकी, वेवल कभी-कभी उसके शिखर तक पहुँच पायो जिसे व कभी अपने में डुवा नहीं सकी ।
जिन जवसरा पर विरोधी तरगा ने इस पठार की चोटी का स्पश किया वे बहुत क्षणिक थ और ऐसे अवसर भी वम थे । सोल्हवी शती के पहले पचासे में अविसोनिया को लालसागर के तट निवासी मुसल्मिो से पराजित होने का भय था जब अबिसोनिया से पहले इन्होंने आग्नयास्त्र प्राप्त कर लिया था। किन्तु ये अस्त्र, जो सोमालियो ने उसमानलियोस प्राप्त किया, अबिसोनियना वे पुतगालिया से ठीक ऐसे समय पहुँच गये कि ये नष्ट होने से अपने को बचा ले । जब पुतगाली यह सहायता कर चुके और जबीसोनियना को मोनोफाइसाइटवाद से क्योलिक ईसाई बनान का घृणित काय करन लगे वहाँ ईसाई धर्म का पश्चिमी रूप एकदम दबा दिया गया और पश्चिमी आगन्तुक सन् १६३० ई० के आस-पास वहाँ से निष्कासित कर दिये । उस समय यही नीति जापान ने भी बरती थी ।
सन् १६८८ का ब्रिटिश अभियान सफल हुआ विन्तु उसका कुछ परोक्ष परिणाम नही निकला, यद्यपि इसके विपरीत पद्रह वर्ष पहले अमरीकी जलसेना जापान का आवरण हटाने में सफल हो गयी थी । उनीसवी शती के अन्त में जब 'अमीषा की छोना-झपटी' चल रही थी, कोई-न कोई अफ्रीकी शक्ति अविसीनिया को हडपती रही और इटालियना न भी चष्टा की। जो वाय ढाई सौ साल पहले पुतगालिया ने किया था वही इस समय मासासियों ने किया। इन्होने सम्राट मेनेलिब को बीच-लोडिंग व दी जिनकी सहायता से १८९६ में अडोवा में इटालियना को उसने बेंतरह हराया। जब इटालियना न जो जान-बूवर एक नयी वबरता का विकास करक अपने को उसमें दुष्टतापूवक दढ कर चुके थ- १९३५ में अधिक दृत्तापूवक आश्रमण किया त क्षण भर के लिए जान पडा कि अविसोनिया की अभद्यता समाप्त हो जायगी और साथ ही पीडित पश्चिमी जगत् को नव-जनित सामूहिक सुरक्षा की आशा भी । किन्तु इथियोपिया व इटालियन साम्राज्य की घोषणा करने के चार ही साल व अतर भुसारिनीको १९३९-४५ मे विश्वयुद्ध में सम्मिलित होना पड़ा। इसके कारण ब्रिटिन जो १९३५-३६ में लीग आव नगम की रक्षा करने की भावना से अभी तक अविसोनिया की रक्षा करने नही आये थ, १९४१-४२
१ जय यह पुस्तष लिखो गयो तबसे अफ़ोन में काफी जागरण हो गया और बहुत से राज्य विदेशी सत्ता को हटाकर स्वतंत्र हो गये । अबिसोनिया को भो अब यह अवस्या नहीं रही। --अनुवादर
२ अपराजेयता तथा अमेधता के दार्शनिक आदशों के सम्बंध में आगे देखिए ।
में उन्होंने अपनी रक्षा करने के अभिप्राय से अविमोनिया के लिए वही किया जा पुतगालिया और पासोसिया ने इससे पहले ऐसे हो सक्ट के समय किया था।
ये ही चार विदेशी आश्रमण है जिनका ईसाई धर्म स्वीकार करने के बाद सालह सौ वर्षों में अबिसीनिया को सामना करना पड़ा । इनमें पहले तीन पर इतनी जल्दी विजय मिल गयी कि उनसे किसी प्रकार की स्फूर्ति नहीं मिल सकती थी। नही तो इसकी अनुभूति नितात कोरी रही है। यह बात इस कथन को यूठ प्रमाणित कर सकती है कि वह राष्ट्र सुखी है जिसका कोई इतिहास नही है। इसका इतिहास जडता ( अपयी) के प्रति निरथक तथा नीरस विरोध के अतिरिक्त और कुछ नहीं है । 'जपेयी' वा अथ मूल यूनानी भाषा में है क्ष्ट अथवा अनुभूति के प्रति जड रहना अर्थात् स्फूर्ति की भावना न होना । १९४६ में सम्राट हेल सेलासी तथा उसके उदार सहकमियो न सुधार करने की प्रबल चेष्टा की फिर भी दखना है कि क्या चौथे विदेशी जाश्रमण से, इसके पहले वे आश्रमणा की अपेक्षा अधिक प्रेरणा मिलेगी । | ही रोमन इस्टर की तिथि निकालने की विधि भो जो व्हिटवी के यगडो वा एक विषय था स्वीकार की। और भी मतभेद थे जो बारहवी शती तक समाप्त नही हुए। व्हिवी की परिषद् के बाद से सुदूर पश्चिमी सभ्यता अलग पड गयी और विनाश की ओर उमुख हो गयी । ईसा की नवी शनी में वाइकिंगो के आक्रमण आयरलड में होत रह और ऐसा में एक भी मठ नहीं बचा जहा लूट-पाट न हुई हो । जहा तक पता है नवी शती में जायरलड में एक भी पुस्तक लैटिन में नहीं लिखी गयो यद्यपि इसी समय जो आयरिश भाग कर यूरोप चले गय थे उनकी विद्वत्ता चरम सीमा पर पहुँच गयी थी । स्वैण्डिनवियाई चुनौती के कारण ही इग्लड और फास का निर्माण हुआ क्योंकि इससे इन देशा का अधिकतम स्फूति प्राप्त हुई । किन्तु आयरलैंड इसके फलस्वरूप इतना अधिक अलगाव हो गया कि वह केवल एक अल्पकालिक विजय आक्रमणकारियो पर प्राप्त कर सका क्लोनटाफ पर ब्रायनवोरु द्वारा । जन्तिम जाधान उस समय हुआ जब एग्लोनारमन एजेबिन राजा हेनरी द्वितीय ने बारहवी शती के मध्य पोप का आशीर्वाद लेकर आयरल्ड पर विजय प्राप्त की। केल्टिक किनार के लोग अपनी निजी सभ्यता की नोव न डाल सके । उनके आत्मिक नेता के भाग्य म यह बदा था कि उन्ही प्रतिद्वद्विया क ऋणी हा जो उनको स्वतन्त्र सभ्यता के जन्मसिद्ध अधिकार को छीन रहे थे । आयरिश विद्वत्ता पश्चिमी महाद्वीपो सभ्यता के विकास में सहायता दे रही थी। क्याकि जायरिश विद्वान् स्वण्डिनेवियाई जाक्रमण के कारण आयरलड से भाग कर विस्थापिता के रूप म वहाँ गये । केरोलिंजियाई पुनजागरण में उनकी सेवाओं से काम लिया गया। इनमें आयरिश हेलेनीवादी दार्शनिक तथा धमशास्त्री जोहानस स्काटस एरिजेना निम्म देह सबसे योग्य व्यक्ति था । अकाल प्रसूत स्कैण्डिनेवियाई सभ्यता हमने देखा कि पश्चिमी सभ्यता के निर्माण करने के एकाधिकार प्राप्त करने के लिए जो सघप रोम तथा आपरल्ड ने वीच चला उसमें रोम सम्मिलित हुआ। और जब पश्चिमी ईसाई समाज जभी नवजात हो था । उसे थाडे ही अवकाश के पश्चात् इसी काय के लिए सघप करना पडा । इस बार उत्तरी यूरोपीय बबरो से जा ट्यूटना के सबसे पाछे की पक्ति मे थे और स्कण्डिनेविया में तयार वठेथ । इस समय परिस्थिति अधिक कठिन थी । सनिक तथा सास्कृतिक दोना स्तरा पर सघप हुआ। दोनो विरोधी पक्ष एक दूसरे से अधिक शक्तिशाली जौर भित थे । दा शती पहले आयरिश और रामन दल जो पश्चिमी इसाई समान की नाव रख रहे थे एक दूसरे से शक्तिशाली तया मित्र नही थे । स्त्र पिनेवियाइया और आयरिशा का पश्चिमी ईसाई समाज से जो सघप चला उसके पहले वा इन देशा का इतिहास यहा तक समान है कि दाना अपने भावी विरोधी से एक काल तक अलग रह। ऐंग्लो भक्सन अधर्मियो ने इग्लड में जो अभियान किया उसके कारण जायरिश लोग अलग रहे । ईसा की छठी शती की समाप्ति के पहले अधर्मी स्लावो के बीच में आ जाने के कारण स्वण्डिनेवियाई लोग रामन ईसाई समाज से अलग हो गये । ये स्लाव बाल्टिक के दक्षिणी तट वे नीमर से एल्व नदी की रेखा व सीधे स्थल माग पर चले और उस स्थान में जाये जा टयूटनी बबरो के हट जाने से खाली पड़ गया था। य हेलेनियो के वाद व जनरेला में हटे । स्वण्डिनेवियाई लोग अपने निवास स्थान में ही रह गये । इस प्रकार आयरिश अपने ईसाई साथिया से बिछुड गये और स्वण्डिनेवियाई साथिया से भी क्यावि इनके बीच बबर लाग आ गय । वित्तु दोना में महत्त्वपूर्ण अन्तर था । एग्लो सक्सन प्रवेश के पहले रोमना न आयरिशा म ईसाई धम यो चिनगारी सुलगा दी थी जो अलगाव वे समय आग के रूप म भडक उठी मगर स्वण्डिनेवियाई अधर्मी बने ही रहे । दूसरे जनरेलो वे समान स्वण्डिनेवियाई जारेला उस संघर्ष का परिणाम था जो एक बबर समाज का एवं सभ्य समाज से हुआ। यह शाल्मान के साम्राज्य में हुआ । यह साम्राज्य नितान्त असफल रहा क्योकि यह वेवल जाडम्बर था और जसमय था। यह महत्वावराक्षापूर्ण राजनीतिक ढाँचा मात्र था जो अविकसित सामाजिक तथा आर्थिक नीव पर बिना उचित ध्यान दिये बना था। इसी निस्सारता वा सबसे बडा उदाहरण है शालमान का सक्सनी को विजय में असाधारण शक्ति का प्रयोग । जय सात सौ बहत्तर ईशून्य में शालमान सनिव बल पर सक्सनी को रोमन ईसाई जगत् में लाने चला वह उस शातिमय प्रवेश की नीति या बहुत बुरी तरह उल्लघन कर रहा था जिसका पालन पिछले एक गती में आयरिश और अग्रजी भिनरियो ने किया था। इस शातिमय नीति से इन लागा ने बवरियता, युरिजियना, हेसियना तथा मीसियना का धम परिवतन करके ईसाई जगत् की सीमा बढ़ा दी थी। को-सक्सन के तीस वर्षीय युद्ध की अग्नि परीक्षा ने नवजात पश्चिमी समाज व दुबल तन्तुआ को जजर कर दिया और स्वण्डिनवियाइया के हृदय में वही बबरी उत्साह उत्पन्न कर दिया जो कभी मेल्टा के हृदय में उभडा था जब आत्म्म के नीचे एट्रस्कना का उत्साहपूर्ण बढाव उन्होने रोका था । ईसा की आठवा तथा नवा शती में स्वण्डिनेवियाइयो का बढाव ईसा के पूर्व पाचवी से तीसरी शती के वेल्टा के बढाव से विस्तार में और प्रखरता में कही आग था। क्ल्टा ने जो हेल्नी जगत का घरने की विफल चेष्टा की वे अपना दाहिना पक्ष स्पेन के मध्य तक ले गय और बायाँ पक्ष एशिया माइनर के मध्य तक ले गये । किन्तु यह प्रयास, वाइकिंगा की सनिक वायवाहिया के कारण, जिन्होने परम्परावादी ईसाई सम्प्रदाय पर अपने वामपन द्वारा रूस में घुसकर और दाहिने पक्ष द्वारा उत्तरी अमरीका में घुसकर आश्रमण किया, विफल हो गया । एक बार पुन दोनो ईसाई सभ्यताएँ उस समय खतरे में पड गयी जब वाइकिंग दल टेम्स पार करने लंदन में घुस रहे थे, सन पार कर व परिस म ओर बासफरस पार करके कुसतुनतुनिया में यह खतरा उस समय से अधिक था जब वेल्ट कुछ वा के लिए राम और पसेडानिया व अधिकारी बन गय थे । अवाल प्रसूत स्वण्डिनवियाई सभ्यता, जिसका विकास आइमल्ड में ईमाइयत के उष्ण श्वास से वहाँ वे हिमखण्डा को गलावर फल रही थी, क्ल्टो सस्कृति से उपलधि और भविष्य की जाशा में कही आगे बढ़ गयी थी। इसव अवय आधुनिक पुरातत्वविदा ननिकाल है । जिस प्रणाली से हम अध्ययन कर रहे है उसमें स्वाभाविक है कि यही एतिहासिक घटनाएं भिन्न भिन्न संदर्भ में बार-बार जायें । हमने ऊपर उस सघप का वर्णन किया है जा इग्ल्ड और पास के लोगो का स्पण्डिनविपाई आत्रमण के समय करना पडा और यह भी दिखाया है कि इस एक इमे 'लाटने क्लचर कहते हैं । इस कारण कि इसका पहले-पहल पता, समुचित प्रमाण यूचेटल झोल को बाढ़ के बाद लगा । सभ्यताओं को उपत्ति चुनोती में दोना जातिया ने अपनी एक्ता स्थापित करने और स्वण्डिनेवियाई अधिवासिया पो अपनी सभ्यता में मिला करवे विजय प्राप्त थी । जिस प्रकार वेल्टी ईसाई सस्कृति की समाप्ति पर, उसके यशजा ने रोमन ईसाई जगत् को समृद्ध किया उसी प्रकार दो छातिया के बाद नारमन लोग लटिन लोगों पर आश्रमणवारी नता बने । एक इतिहासकार तो प्रथम धार्मिक युद्ध वो, विरोधाभास में यह कहा है कि वह ईसाई वाइकिंग चढाई थी। हमा स्वण्डिनेवियाई सभ्यता व अविव मित जीवन में आइमलैंड के महत्त्व को भी बताया है और यह भी कल्पना की कि यदि स्वण्डिनेवियाई अधर्मी एवियाइया के बराबर सिद्धि प्राप्त करते और ईमाइया यो भगा कर सार पश्चिमी यूरोप में अपनी अधर्मी सभ्यता का था। दष्टि से प्रसार वरते, विहेनी सभ्यता के हमी एक मात्र उत्तराधिकारी है तो क्या परिणाम होता ? हमें अभी यह देखना है कि स्वण्डिनेवियाई सभ्यता पर उसकी ही भूमि पर किस प्रकार विजय हुई और किस प्रकार उसका विनाग हुआ । विजय उसी समर-तत्र से हुई जिसे शालमान ने त्याग दिया था। पश्चिमा ईमाई जगत को विवश होकर अपनी रक्षा सनिय ढंग से भरनी पडी। परन्तु ज्यो ही पश्चिमी रक्षात्मक सनिव दाक्ति ने स्वैण्डिनेवियाई सैनिक आक्रमण को रोक दिया पश्चिम वाला ने शान्तिमय अभियान का ढंग पकडा । पश्चिम मे जो स्वण्डिनेवियाई बस गये उनका धम परिवतन यरव उनको पुराने धम से हटाया और यही नीति उन्हाने स्पेण्डिनेविया में जो रह गये उनके प्रति अपनायी । उसमें स्पॅण्डिनेवियाइया के एक गुण ने वडी महायता की । वह थी उनकी ग्रहण करने वाला प्रवल शक्ति । इसे एक समकालीन पश्चिमी ईसाई विद्वान् ने कविता में वर्णन किया है - 'जो लोग उनके झडे के साथ आते हैं उनकी भाषा, रीति रिवाज वे ले लेते है, परिणाम यह होता है कि वे एक जाति बन जाते ह यह विचित्र बात है कि ईसाई धर्म स्वीकार करने के पहले ही स्वैण्डिनेवियाई शासक शालमान की वीर पूजा करने लग गये थे, यहाँ तक कि अपने पुत्र का नाम वाल्स या मैगनस रखने लग गये थे । उसी वाल में यदि पश्चिमी ईसाई जगत् के शासको मे मुहम्मद और उमर ईसाइया के प्रिय नाम होने लगते तो निश्चय ही हम इस परिणाम पर पहुँचते कि इस्लाम से सघप में पश्चिमी इसाई जगत वा भला नहीं होने वाला है । रूस, डॅनमाक तथा नारवे के स्वैण्डिनेवियाई राज्या म तीना स्वण्डिनेवियाई राजाओ ने, जो समकालीन थे, दसवा तो वे अन्त के लगभग मनमानी आदेश जारी कर दिया था जिसस सब लोग ईसाई धम में दीक्षित कर दिये गय । नारवे में पहले इसका जोरदार विराध हुआ रिन्तु डेनमान और रूस में परिवतन चुपचाप स्वीकार कर लिया गया । इस प्रकार स्वण्डिनेवियाई समाज पराजित ही नहीं हुआ, विभाजित भी हा गया क्यावि हर ईसाई जगत ने जिसन वाइकिंगा के आश्रमण का भार सहन किया था उसके बाद के धार्मिक और सास्कृतिक प्रत्याश्रमण वा भी बोझ उया रूस वे व्यापारी अथवा राजदूत जगला की मूर्ति पूजा को कुसतुन तुनिया के रमणीय अघ विश्वास से तुलना करते थे । उहानेसत सोपिया के गुम्बद को सराहना की दष्टि से देखा था उन्होन सत्ता तथा शहीदा के राजीव चित्रो को, पूजा के स्थान की सम्पत्ति को देखा था पादरिया की वेशभूषा और उनकी संख्या को, उनकी पूजा तथा सस्वारा वे आडवर को देखा था मोन तथा उसके बाद संगीतमय भजन सुनकर उनकी आत्मा का उप हुआ था, और इसमें घटाई नहीं हुई कि उन्हें विश्वास हो जायप्रतिदिन ईगाइया का प्रार्थना में सम्मिलित हान के लिए स्वर्ग से आगे है ।" इसके बाद शीघ्र ही एक हज़ार ईशून्य म आदगड में धर्म परिहुआ और आदगढी राम्हति समाप्त हो गयी। यह सही है कि या वे आइसल्डी विद्वाना न जिल्हा सामाआया लिपिनद्ध किया और जिल्हान एडाई पविताआ पा राग्रह किया और सनविपाई पुराणा, , विधिया या सक्षम बनाया उउ सबमें ईसाई तथा उत्तरी राम्मिश्रण था उन्हान यह काय धम परवतन के पश्चात् पचास से ढाई सौ गाल ये भीतर किया था। वितुविद्वत्ता का विहान आगलडी प्रतिमा का अंतिम धमलार था। इससे हम हलनी इतिहास में होमरी बविताओं में मागदान की तुलना कर सकते हैं । ये पविताएँ विहगावलोमन का विद्वता का प्रमाण थी । क्यापि होमर ने इनवा साहित्यिक स्वरूप उस समय के बाद दिया जब धीरसार, जिनसे वे उत्प्राणित हुई बीत चुका था। परन्तु हेल्नी प्रतिभा इन महावाव्या का पूरा र उसी परिमाण वे दूसरे क्षेत्रा में काय वरन एगी और आइराल्डा प्रतिभा अपनी 'होमरा उपलब्धि के बाद एक हज़ार एक सौ पचास-एक हज़ार दो सौ पचास साठ में समाप्त हो गयी । ईसाई जगत पर इस्लाम का आघात इस अवर्षण को समाप्त परते हुए हम यह भी देख लें कि क्या ईमाई जगत् पर इस्लाम के आघात से 'तीन स्थितिया की तुलना या उदाहरण मिलता है, जिससे हमारे पाठक अब परिचित हो गये ह । एव दूसरे सम्बन्ध में हमने देखा है कि इस्लाम की चुनौती से अधिकतम स्फूर्ति मिली है । ईसा की आठवी शती म इस्लाम ने फेंको की चुनौती दी जिसक परिणाम में अनव शतिया तर ईसाइया की ओर से प्रत्याश्रमण होता रहा जिसन मुसल्माना को आइवोरी प्रायद्वीप से निकाल बाहर ही नहीं किया किन्तु अपने मूल अभिप्राय से अधिन स्पनी और पुतगाली लोग सागर पार करके ससार के सभी देशो में पहुँच गये । इस सम्बन्ध में एक घटना पर हमें ध्यान देना चाहिए जिसे हम सुदूर पश्चिमी तथा स्वण्डिनेवियाई सभ्यता के पराजय पर विचार करते देख चुके ह । आइवीरी प्रायद्वीप से इस्लाम के पूणत निष्कासित हाने के पहल मुसलिम संस्कृति से उसके विजयी विरोधिया ने वहाँ बहुत लाभ उठाया । मध्ययुगीन पश्चिमो ईसाई दार्शनिको ने जो दाशनिक महल खडा किया था उसके निर्माण में अनात रूप से स्पेन क मुसलिम विद्वानो ने योग दान किया और हेलेनी दाशनिक अरस्तू की कुछ पुस्तकें पश्चिमी ईसाई जगत में अरबी अनुवाद द्वारा पहुँची। यह भी सत्य है कि पश्चिमी संस्कृति पर जो पूर्वी प्रभाव पड़ा है इसका कारण यह बताया जाता है कि वह धार्मिक युद्ध करन वालो के राज्य, सीरिया के प्रदेशों से आया विन्तु सत्य यह है कि वह मुसलिम आइबीरिया से आया । आइबीरिया से और पिरिनीज के ऊपर से पश्चिमी ईसाई जगत पर मुसल्माना का जा आक्रमण हुआ वह इतना प्रबल नही था जितना वह प्रतीत होता है क्योकि इस्लामी शक्ति के स्रोत दक्षिण पश्चिमी एशिया तथा आइबीरी सीमाग्र के बीच को गमनागमन को रेखा बहुत लम्बी थो । एसे स्थल मिलते ह जहा सचरण की रेखा छोटी थी और वहाँ मुसलिम आश्रमण एक ईशून्य गिबन दहिस्ट्री आव द डिक्लाइन एण्ड फाल आव द रोमन एम्पायर, अध्याय पचपन । बहुत तीव्र हुआ। ऐसा प्रदेश है अनातोलिया जो उस समय परम्परावादी ईसाई सभ्यता का दुग था । अरब आश्रमण वा पहला रूप यह देना चाहते थे वि 'रूम' को निष्यन्त कर दें और अनानालिया पर आक्रमण करते हुए साम्राज्य की राजधानी पर विजय प्राप्त कर पश्चिमी ईसाई जगत् को धराशायी कर दें । मुसलमाना ने छः सौ तिहत्तर-सतहत्तर ईशून्य में और फिर सात सौ सत्रह-अट्ठारह में घुसतुनतुनिया को घेरा विन्तु असफल रह् । दूसरे घेरे की असफलता के बाद भी जब दोनो भक्तियो को सीमा टारस पहाड की रेखा मान ली गयी, मुसलमान दशक्ति अनातोलिया के बचे-खुचे परम्परावादी ईसाई जगत् पर साल म दो वार आश्रमण करते रहे । परम्परावादी ईसाई जगत् ने इस दबाव का सामना राजनीतिक युक्ति से किया । और यह प्रतिरोध देखने में तो सफल रहा क्योकि इसके कारण अरव दूर रखे जा सके, विन्तु वास्तव में यह ठीक नहीं था क्याकि परम्परावादी ईसाई समाज के आन्तरिक जीवन और विकास पर इसका प्रभाव घातव था । यह युक्ति थी सीरियाई ओवा परम्परावादी ईसाई जगत में रोमन साम्राज्य की 'छाया' वा आह्वान । यही काम दो पीटी बाद पश्चिम में शालमान ने किया था और वह असफल रहा और इस कारण उससे कोई क्षति भी नही हुई। सीरियाई लिओ की उप लब्धि का सबसे घातक परिणाम यह हुआ कि परम्परावादी ईसाई धम की हानि करके वाइजे टायन राज्य का उत्वप हुआ । उसका फल यह हुआ कि सौ साल तक पूर्वी रोमन साम्राज्य तथा ईसाई धार्मिक सत्ता और बुल्गेरियाई साम्राज्य तथा ईसाई धार्मिक सत्ता में आपसी विनाशकारी युद्ध हाते रहे। इस प्रकार परम्परावादी ईसाई समाज वा विनाश अपने आप ही घातन प्रहार करने से अपने ही घर में, अपने ही ढंग से हुआ । इन तथ्यो से स्पष्ट रूप से ज्ञात होता है कि परम्परा वादी ईसाई समाज पर जो इस्लामी प्रहार हुआ उससे अत्यधिक था जो प्रहार इस्लाम का पश्चिमी ईसाई जगत् पर हुआ था । क्या हमें ऐसा कोई उदाहरण मिल सकता है जहाँ इस्लामी आघात न पर्याप्त रूप से कठोर न होने के कारण कोई प्रेरणा न दी हा ? हाँ, आज भी इस प्रकार के आघात का परिणाम अविसीनिया में मिलता है। इस अफ्रीकी गढ़ में जो मोनोफाइसाइट? ईसाई समाज मिलता है वह ससार का एक सामाजिक आश्चय है। इसलिए कि वह अभी तक जीवित है, और जब अरबा ने मिस्र पर विजय प्राप्त की उससे आज तरह शतियों के बीतने पर भी सार ईसाई समाज से वह अलग है। दूसरे यह कि उसका सास्कृतिक स्तर बहुत नीचा है । यद्यपि ईसाई अविसीनिया कुछ हिचकिचाहट के साथ लीग आव नैशस में सम्मिलित कर लिया गया, यह अपनी अव्यवस्था और बवरता के लिए कुख्यात था । वहा सामती और कबीला के झगडे होते रहते थे और दासा का व्यापार होता था । लाइबीरिया का छोडवर जिसने अपनी स्वतंत्रता स्थिर रखी, इस एक अफ्रीकी राज्य की एक चे लोग जो ईसा को केवल एष प्रवृत्ति मानते है ।-अनुवादक अवस्था ऐसी थी कि शेप अफ्रीकावा यूरोपीय शक्तिया द्वारा विभाजन उचित समया जा सकता है । विचार करने पर नात होता है कि अविसोनिया की विशेषताएँ उसकी स्वतता का अस्तित्व तथा उसकी संस्कृति का गतिरोध - दोनो का कारण एक ही है। ऐसी गढी में उसकी स्थिति है जो दुर्भेद्य और अक्ष्मीभूत होकर स्थिर हो गयी । इस्लाम की ज्वार और पश्चिमी सभ्यता की औौर भी प्रखर लहरे उसने पहाड़ा व चरणा तक ही पहुच सकी, वेवल कभी-कभी उसके शिखर तक पहुँच पायो जिसे व कभी अपने में डुवा नहीं सकी । जिन जवसरा पर विरोधी तरगा ने इस पठार की चोटी का स्पश किया वे बहुत क्षणिक थ और ऐसे अवसर भी वम थे । सोल्हवी शती के पहले पचासे में अविसोनिया को लालसागर के तट निवासी मुसल्मिो से पराजित होने का भय था जब अबिसोनिया से पहले इन्होंने आग्नयास्त्र प्राप्त कर लिया था। किन्तु ये अस्त्र, जो सोमालियो ने उसमानलियोस प्राप्त किया, अबिसोनियना वे पुतगालिया से ठीक ऐसे समय पहुँच गये कि ये नष्ट होने से अपने को बचा ले । जब पुतगाली यह सहायता कर चुके और जबीसोनियना को मोनोफाइसाइटवाद से क्योलिक ईसाई बनान का घृणित काय करन लगे वहाँ ईसाई धर्म का पश्चिमी रूप एकदम दबा दिया गया और पश्चिमी आगन्तुक सन् एक हज़ार छः सौ तीस ईशून्य के आस-पास वहाँ से निष्कासित कर दिये । उस समय यही नीति जापान ने भी बरती थी । सन् एक हज़ार छः सौ अठासी का ब्रिटिश अभियान सफल हुआ विन्तु उसका कुछ परोक्ष परिणाम नही निकला, यद्यपि इसके विपरीत पद्रह वर्ष पहले अमरीकी जलसेना जापान का आवरण हटाने में सफल हो गयी थी । उनीसवी शती के अन्त में जब 'अमीषा की छोना-झपटी' चल रही थी, कोई-न कोई अफ्रीकी शक्ति अविसीनिया को हडपती रही और इटालियना न भी चष्टा की। जो वाय ढाई सौ साल पहले पुतगालिया ने किया था वही इस समय मासासियों ने किया। इन्होने सम्राट मेनेलिब को बीच-लोडिंग व दी जिनकी सहायता से एक हज़ार आठ सौ छियानवे में अडोवा में इटालियना को उसने बेंतरह हराया। जब इटालियना न जो जान-बूवर एक नयी वबरता का विकास करक अपने को उसमें दुष्टतापूवक दढ कर चुके थ- एक हज़ार नौ सौ पैंतीस में अधिक दृत्तापूवक आश्रमण किया त क्षण भर के लिए जान पडा कि अविसोनिया की अभद्यता समाप्त हो जायगी और साथ ही पीडित पश्चिमी जगत् को नव-जनित सामूहिक सुरक्षा की आशा भी । किन्तु इथियोपिया व इटालियन साम्राज्य की घोषणा करने के चार ही साल व अतर भुसारिनीको एक हज़ार नौ सौ उनतालीस-पैंतालीस मे विश्वयुद्ध में सम्मिलित होना पड़ा। इसके कारण ब्रिटिन जो एक हज़ार नौ सौ पैंतीस-छत्तीस में लीग आव नगम की रक्षा करने की भावना से अभी तक अविसोनिया की रक्षा करने नही आये थ, एक हज़ार नौ सौ इकतालीस-बयालीस एक जय यह पुस्तष लिखो गयो तबसे अफ़ोन में काफी जागरण हो गया और बहुत से राज्य विदेशी सत्ता को हटाकर स्वतंत्र हो गये । अबिसोनिया को भो अब यह अवस्या नहीं रही। --अनुवादर दो अपराजेयता तथा अमेधता के दार्शनिक आदशों के सम्बंध में आगे देखिए । में उन्होंने अपनी रक्षा करने के अभिप्राय से अविमोनिया के लिए वही किया जा पुतगालिया और पासोसिया ने इससे पहले ऐसे हो सक्ट के समय किया था। ये ही चार विदेशी आश्रमण है जिनका ईसाई धर्म स्वीकार करने के बाद सालह सौ वर्षों में अबिसीनिया को सामना करना पड़ा । इनमें पहले तीन पर इतनी जल्दी विजय मिल गयी कि उनसे किसी प्रकार की स्फूर्ति नहीं मिल सकती थी। नही तो इसकी अनुभूति नितात कोरी रही है। यह बात इस कथन को यूठ प्रमाणित कर सकती है कि वह राष्ट्र सुखी है जिसका कोई इतिहास नही है। इसका इतिहास जडता के प्रति निरथक तथा नीरस विरोध के अतिरिक्त और कुछ नहीं है । 'जपेयी' वा अथ मूल यूनानी भाषा में है क्ष्ट अथवा अनुभूति के प्रति जड रहना अर्थात् स्फूर्ति की भावना न होना । एक हज़ार नौ सौ छियालीस में सम्राट हेल सेलासी तथा उसके उदार सहकमियो न सुधार करने की प्रबल चेष्टा की फिर भी दखना है कि क्या चौथे विदेशी जाश्रमण से, इसके पहले वे आश्रमणा की अपेक्षा अधिक प्रेरणा मिलेगी । |
(झारखंड वेदर अपडेट) ( Image Source : ABP live )
Jharkhand Weather: झारखंड में पिछले तीन दिनों से लगातार मूसलाधार बारिश हो रही है. इस वजह से राजधानी रांची के तापमान में सात डिग्री तक की गिरावट दर्ज की गई है. वहीं सबसे ज्यादा बारिश पिछले 24 घंटे में साहिबगंज में 44. 5 मिलीमीटर रिकॉर्ड की गई है, लेकिन आने वाले दो दिनों बाद मौसम में बदलाव देखा जा सकता है. वहीं मौसम पूरी तरह साफ होगा और लोगों को फिर से गर्मी का कहर झेलना पड़ सकता है.
मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि, पिछले 24 घंटे में पूरे राज्य में हल्के मध्यम दर्जे की बारिश देखी गई है. यह बारिश बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव बनने के कारण है. इसलिए यह 24 घंटे जारी है. वहीं आज पूरे झारखंड में हल्के मध्यम दर्जे की बारिश देखी जा सकेगी. खासकर उत्तर पूर्वी जिले और पश्चिमी के जिले जैसे लातेहार, लोहरदगा, सिमडेगा और उसके आस-पास के एरिया में भारी बारिश देखने को मिलेगी.
अभिषेक आनंद ने आगे बताया कि, लगातार बारिश से लोगों को थोड़ा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन आने वाले तीन दिनों बाद मौसम बिल्कुल साफ हो जाएगा. 29 जून यानी आज से बारिश में कमी आएगी. 30 जून और एक जुलाई को इसमें और कमी आएगी. दो जुलाई से आसमान पूरा साफ दिखेगा. दो जुलाई से अधिकतम तापमान में 4-5 डिग्री की बढ़ोतरी देखी जाएगी. इससे लोगों को गर्मी का एहसास होगा.
वहीं चेतावनी की बात करें तो मौसम केंद्र के अनुसार पूरे झारखंड में 29 और 30 जून के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है. इस दौरान वज्रपात की आशंका और हवा की गति 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी. अभिषेक आनंद ने बताया इस दौरान लोगों को सचेत रहने की जरूरत है. घर से बाहर निकले और अगर वज्रपात की आशंका हल्की भी लग रही है तो फौरन सुरक्षित स्थान पर पहुंचे. यह वज्रपात जानलेवा हो सकती है.
Opposition Parties Meeting: BJP नेता का विपक्षी एकजुटता पर तंज, बोले- 'वहां सिर्फ परिवारवादी नेताओं की ही चलेगी, सेल्फ मेड इंसान. . . '
| Jharkhand Weather: झारखंड में पिछले तीन दिनों से लगातार मूसलाधार बारिश हो रही है. इस वजह से राजधानी रांची के तापमान में सात डिग्री तक की गिरावट दर्ज की गई है. वहीं सबसे ज्यादा बारिश पिछले चौबीस घंटाटे में साहिबगंज में चौंतालीस. पाँच मिलीमीटर रिकॉर्ड की गई है, लेकिन आने वाले दो दिनों बाद मौसम में बदलाव देखा जा सकता है. वहीं मौसम पूरी तरह साफ होगा और लोगों को फिर से गर्मी का कहर झेलना पड़ सकता है. मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि, पिछले चौबीस घंटाटे में पूरे राज्य में हल्के मध्यम दर्जे की बारिश देखी गई है. यह बारिश बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव बनने के कारण है. इसलिए यह चौबीस घंटाटे जारी है. वहीं आज पूरे झारखंड में हल्के मध्यम दर्जे की बारिश देखी जा सकेगी. खासकर उत्तर पूर्वी जिले और पश्चिमी के जिले जैसे लातेहार, लोहरदगा, सिमडेगा और उसके आस-पास के एरिया में भारी बारिश देखने को मिलेगी. अभिषेक आनंद ने आगे बताया कि, लगातार बारिश से लोगों को थोड़ा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन आने वाले तीन दिनों बाद मौसम बिल्कुल साफ हो जाएगा. उनतीस जून यानी आज से बारिश में कमी आएगी. तीस जून और एक जुलाई को इसमें और कमी आएगी. दो जुलाई से आसमान पूरा साफ दिखेगा. दो जुलाई से अधिकतम तापमान में चार-पाँच डिग्री की बढ़ोतरी देखी जाएगी. इससे लोगों को गर्मी का एहसास होगा. वहीं चेतावनी की बात करें तो मौसम केंद्र के अनुसार पूरे झारखंड में उनतीस और तीस जून के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है. इस दौरान वज्रपात की आशंका और हवा की गति तीस से चालीस किलोग्राममीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी. अभिषेक आनंद ने बताया इस दौरान लोगों को सचेत रहने की जरूरत है. घर से बाहर निकले और अगर वज्रपात की आशंका हल्की भी लग रही है तो फौरन सुरक्षित स्थान पर पहुंचे. यह वज्रपात जानलेवा हो सकती है. Opposition Parties Meeting: BJP नेता का विपक्षी एकजुटता पर तंज, बोले- 'वहां सिर्फ परिवारवादी नेताओं की ही चलेगी, सेल्फ मेड इंसान. . . ' |
OTT पर इस हफ्ते एंटरटेनमेंट का भरपूर डोज मिलने वाला है। मई की पहली तारीक को नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने वाली 1 या दो नहीं बल्कि हॉलीवुड की पूरी 5 फिल्मों के बारे में हम बताने वाले हैं। इन फिल्मों में लव, रोमांस, थ्रिलर से लेकर ढेर सारा सस्पेंस देखने को मिलने वाला है। जो लोग इस वीकेंड घर पर ही आराम करना चाहते हैं, उनके लिए नेटफ्लिक्स एक अच्छा ऑप्शन है। इन सभी फिल्मों को देख आपका फुल ऑन मनोरंजन होगा।
बेवॉच (Baywatch): हॉलीवुड में अपना सिक्का जमाने वाली बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा की बेवॉच 1 मई को नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो रही है। ये फिल्म अमेरिकी एक्शन कॉमेडी है, जिसे माइकल बर्क, डगलस श्वार्ट्ज और ग्रेगरी जे बोनन बनाया है। इस फिल्म में प्रियंका के साथ हॉलीवुड एक्टर रोहरबैक, और डेविड हैसलहॉफ नजर आने वाले हैं।
मेडागास्कर (Madagascar): अमेरिकी कंप्यूटर-एनिमेटेड कॉमेडी एडवेंचर फिल्म मेडागास्कर 1 मई को नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने वाली है। ये फिल्म युवाओं के साथ-साथ बच्चों को भी बेहद पसंद आने वाली है। फिल्म में मार्टी और उसके दोस्तों- एलेक्स द लायन, ग्लोरिया द हिप्पो और मेलमैन द जिराफ को देखकर बच्चे काफी खुश होने वाले है।
आफ्टर द सनसेट (After The Sunset): ये एक अमेरिकी एक्शन फिल्म है, जिसमें डकैती दिखाई गई है। ये फिल्म एक मई को नेटफ्लिक्स पर आने वाली है। फिल्म में दो मास्टर चोर जिनका नाम मैक्स और लोला है वो अपने सारे पैसे लेकर बहामास पहुंच चुके हैं। इस फिल्म की शूटिंग भी बहामास में हुई है।
द रीडर (The Reader): रोम कॉम लवर्स के लिए ये फिल्म बेस्ट च्वाइस है। इस फिल्म में ढेर सारा रोमांस और ड्रामा देखने को मिलेगा। फिल्म बर्नहार्ड की 1995 के जर्मन नॉवेल की कहानी पर बनाई गई है, जिसे स्टीफन डाल्ड्ररी द्वारा डायरेक्ट किया गया है। इसमें केट विंसलेट, राल्फ फिएनेस और डेविड क्रॉस मुख्य किरदार में नजर आएंगे।
अमेरिकन स्नाइपर(American Sniper) :अमेरिकन स्निपर एक बायोग्राफिकल वॉर ड्रामा फिल्म है, जो काइल की लाइफ पर आधारित है। इसका डायरेक्शन क्लिंट ईस्टवुड ने द्वारा किया गया है। फिल्म में इमोशन के साथ-साथ काफी सस्पेंस भी देखने को मिलने वाला है।
| OTT पर इस हफ्ते एंटरटेनमेंट का भरपूर डोज मिलने वाला है। मई की पहली तारीक को नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने वाली एक या दो नहीं बल्कि हॉलीवुड की पूरी पाँच फिल्मों के बारे में हम बताने वाले हैं। इन फिल्मों में लव, रोमांस, थ्रिलर से लेकर ढेर सारा सस्पेंस देखने को मिलने वाला है। जो लोग इस वीकेंड घर पर ही आराम करना चाहते हैं, उनके लिए नेटफ्लिक्स एक अच्छा ऑप्शन है। इन सभी फिल्मों को देख आपका फुल ऑन मनोरंजन होगा। बेवॉच : हॉलीवुड में अपना सिक्का जमाने वाली बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा की बेवॉच एक मई को नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो रही है। ये फिल्म अमेरिकी एक्शन कॉमेडी है, जिसे माइकल बर्क, डगलस श्वार्ट्ज और ग्रेगरी जे बोनन बनाया है। इस फिल्म में प्रियंका के साथ हॉलीवुड एक्टर रोहरबैक, और डेविड हैसलहॉफ नजर आने वाले हैं। मेडागास्कर : अमेरिकी कंप्यूटर-एनिमेटेड कॉमेडी एडवेंचर फिल्म मेडागास्कर एक मई को नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने वाली है। ये फिल्म युवाओं के साथ-साथ बच्चों को भी बेहद पसंद आने वाली है। फिल्म में मार्टी और उसके दोस्तों- एलेक्स द लायन, ग्लोरिया द हिप्पो और मेलमैन द जिराफ को देखकर बच्चे काफी खुश होने वाले है। आफ्टर द सनसेट : ये एक अमेरिकी एक्शन फिल्म है, जिसमें डकैती दिखाई गई है। ये फिल्म एक मई को नेटफ्लिक्स पर आने वाली है। फिल्म में दो मास्टर चोर जिनका नाम मैक्स और लोला है वो अपने सारे पैसे लेकर बहामास पहुंच चुके हैं। इस फिल्म की शूटिंग भी बहामास में हुई है। द रीडर : रोम कॉम लवर्स के लिए ये फिल्म बेस्ट च्वाइस है। इस फिल्म में ढेर सारा रोमांस और ड्रामा देखने को मिलेगा। फिल्म बर्नहार्ड की एक हज़ार नौ सौ पचानवे के जर्मन नॉवेल की कहानी पर बनाई गई है, जिसे स्टीफन डाल्ड्ररी द्वारा डायरेक्ट किया गया है। इसमें केट विंसलेट, राल्फ फिएनेस और डेविड क्रॉस मुख्य किरदार में नजर आएंगे। अमेरिकन स्नाइपर :अमेरिकन स्निपर एक बायोग्राफिकल वॉर ड्रामा फिल्म है, जो काइल की लाइफ पर आधारित है। इसका डायरेक्शन क्लिंट ईस्टवुड ने द्वारा किया गया है। फिल्म में इमोशन के साथ-साथ काफी सस्पेंस भी देखने को मिलने वाला है। |
मुकेश अंबानी ने अपनी इकलौती बेटी ईशा अंबानी की शादी की है जिस तरह की ये शादी है उसे देखकर यही कहा जा सकता है कि अगर अंबानी थोड़ा और पैसा खर्च करते तो इस शादी में और मजा आता.
यहीं दिल्ली में हमारे घर के बगल में अरोड़ा जी रहते हैं. करीब 59 साल के अरोड़ा जी पंजाबी हैं और एक निजी बैंक में ठीक ठाक पोजीशन पर हैं. हर महीने तकरीबन 80 हजार रुपए की सैलरी उनके बैंक अकाउंट में आती है. उनकी इकलौती बेटी की शादी थी. अरोड़ा जी का इंतजाम ऐसा था कि क्या कहने. जिसने भी देखा बिना तारीफ के नहीं रह सका. ग्रेटर नॉएडा के एक फार्म हाउस में हुई इस शादी में अरोड़ा जी ये उस कहावत को चरितार्थ कर दिया कि 'भले ही गांव में, बीघे के बीघे बिक जाएं मगर बारातियों का स्वागत केवल पान पराग से होगा. '
पंडाल, टेंट, फूल-पत्ती, चाट-पकोड़ी, खाना पीना सब क्लास और खाने के तो कहने ही क्या. करीबियों की मानें तो अरोड़ा जी ने बेटी की शादी में खाना बनाने के लिए हलवाई और बावर्ची भारत भर से बुलाए गए थे. मीठे की भी इतनी वैराइटी की लग रहा था कि किसी शादी में नहीं बल्कि किसी मेले में आए हैं. खास मेहमानों के लिए भी अरोड़ा जी ने खास इंतजाम किये थे. 'जाम से जाम' ठकराने और टंगड़ी कबाब खाने का हिसाब किताब एक अलग ही जगह था. चूंकि अरोड़ा जी ठेठ पंजाबी थे और अगर पंजाबी वेडिंग में गाना बजाना न हो तो फिर शादी में मजा नहीं आता.
अरोड़ा जी ने अपनी इकलौती बिटिया की शादी में 'महंगे वाले' डीजे का प्रबंध तो किया ही. साथ ही उन्होंने डांस के लिए रशियन महिलाओं का एक पूरा ग्रुप बुलवाया. अरोड़ा जी 80 हजार कमाने वाले आदमी हैं, मगर जैसी शादी हुई देखकर लग रहा था कि शादी में 1. 5 या 2 करोड़ तो खर्च हुए ही होंगे. अरोड़ा जी की बिटिया की शादी में जाने के एक दिन बाद ही गुप्ता जी की लड़की की शादी में जाना हुआ.
गुप्ता जी हैसियत में अरोड़ा जी से कम हैं. मगर उन्होंने भी जो इंतजाम किया देखने वाले देखते रह गए. आए हुए मेहमानों को कोई शिकायत न हो गुप्ता जी ने भी बारीक से बारीक बातों का ख्याल रखा और फर्स्ट क्लास शादी की. दोनों ही शादियां कैसे इतनी आलीशान हुई जब मैंने इसकी पड़ताल की तो पता चला कि अरोड़ा जी और गुप्ता जी, दोनों ही लोगों ने बैंक से लोन लिया, अपने -अपने दोस्तों से पैसे उधर लिए. एफडी तोड़ी, शेयर्स बेचे और ऐसा बहुत कुछ किया जिसके बल पर ये अपनी नाक बचा सकते थे. वैसे भी शादी में ये देखा जाता है कि कौन कितना और कैसे खर्च कर रहा है और अपनी शादी को यादगार बना रहा है.
अब ईशा अंबानी की शादी में मैं गया तो नहीं. मगर जितनी शादी टीवी पर आई और जितना ट्विटर और इंस्टाग्राम पर मैंने उसे देखा. लग यही रहा है कि यहां मुकेश अंबानी जी ने 'गुजराती बुद्धि' का प्रचुर मात्रा में इस्तेमाल किया और शादी में उतना खर्च नहीं किया जितने की उम्मीद की जा रही थी. कहना गलत नहीं है कि उनकी इस अदा ने मुझ समेत उन तमाम भारतीयों के दिल तोड़कर चूर-चूर किये हैं जिन्हें लग रहा था कि चूंकि अंबानी के घर शादी है तो देवराज इंद्र भी वर-वधू को आशीर्वाद देने धरती पर बुलाए जाएंगे.
वो अंबानी हैं. समझ रहे हैं. मतलब वो कोई अरोड़ा जी, शर्मा जी. गुप्ता जी, अंसारी साहब, सिद्दीकी साहब नहीं हैं. वो अंबानी हैं, मुकेश धीरुभाई अंबानी वो शख्स जो अमीर अगर मोटर साइकिल होते तो वो बुलेट नहीं बल्कि हर्ले होता. अंबानी का ऑरा ऐसा है कि अगर इन्हें अमीरों की रोल्स रॉयस या एस्टन मार्टिन कहा जाए तो भी कहीं से अतिश्योक्ति न होगा.
अंबानी जी की इकलौती बिटिया है ईशा. कहीं पढ़ा कि इस शादी में 750 करोड़ के आस पास खर्च हुआ है. अगर इसे सच मानें तो ये कहना बिल्कुल ठीक है कि 750 करोड़ खर्च करके अंबानी साहब ने कोई कद्दू में तीर नहीं मारा है. 2018 में अंबानी की रोज होने वाली इनकम 300 करोड़ रु. है. इस हिसाब से उन्होंने बिटिया की शादी में जो पैसा खर्च किया वो 2. 5 दिनों कमा लेंगे. या कमा ही चुके होंगे. कल्पना करिए. एक तरफ इस देश का आम आदमी है जो अपनी बेटी की शादी को यादगार बनाने के लिए बैंक से लोन लेता है. दोस्तों के पास जाता है, उनसे पैसे उधार लेता है. एफडी तुड़वाता है. अपने शेयर्स बेचता है दूसरी तरफ अंबानी हैं जिन्होंने इकलौती बिटिया की शादी में 2. 5 दिन की कमाई लुटाई, और जैसा उनका स्वाभाव है वो उन्हें वापस मिल ही गया है.
बहुत उम्मीदें थी इस शादी से. मगर जैसी शादी अंबानी ने की उन्होंने अपने 'गुजराती एटीट्यूड' का न सिर्फ परिचय दिया बल्कि खर्च में कमी करते हुए इसे अमली जामा भी पहनाया. आज देश में विकास की लहर कुछ इस हद तक है कि, देश का आम आदमी भी अपने बच्चों की शादी में डांस के लिए शाहरुख, सलमान और गाने के लिए बादशाह से लेकर हनी सिंह तक को बुला रहा है. ऐसे में हमें यकीन था कि जब अंबानी की बिटिया पराई होकर ससुराल जाएगी तो शकीरा से लेकर बियोंसे और निकी मीनाज से लेकर जस्टिन बीबर तक सब तालियां बटोरेंगे मगर जो निकला उससे दिल के अरमां आंसुओं में बह गए.
क्यों किया अंबानी ने ऐसा ये सवाल आज जितना महत्वपूर्ण है भविष्य में भी रहेगा. कुल मिलकर अंबानी ने इकलौती बिटिया की शादी अच्छी की. हीरो हीरोइन भी आए. हिलेरी क्लिंटन भी आईं मगर वो न जाने क्यों मुझे वो मजा नहीं आया जो मुझे अरोड़ा जी और फिर उसके बाद गुप्ता जी की लड़की की शादी में आया था.
पहले मैंने सिर्फ सुना था मगर अब देख भी लिया कि बात जब शादियों और उसपर किये जाने वाले खर्च की होती है तो फिर पंजाबियों का किसी से दूर-दूर तक कोई मुकाबला नहीं है. अगर अंबानी ने थोड़ा और तबीयत से खर्च किया होता तो शायद मेरा ये मिथक टूट जाता, मगर अब जबकि अंबानी ऐसा नहीं कर पाए तो बस इतना ही कि शादी तो ठीक थी मगर वो ऐसा बहुत कुछ कर सकते थे जो इतिहास में दर्ज होता और लोग उसे सालों साल क्या, कई दशकों या शायद शताब्दियों तक याद रखते.
| मुकेश अंबानी ने अपनी इकलौती बेटी ईशा अंबानी की शादी की है जिस तरह की ये शादी है उसे देखकर यही कहा जा सकता है कि अगर अंबानी थोड़ा और पैसा खर्च करते तो इस शादी में और मजा आता. यहीं दिल्ली में हमारे घर के बगल में अरोड़ा जी रहते हैं. करीब उनसठ साल के अरोड़ा जी पंजाबी हैं और एक निजी बैंक में ठीक ठाक पोजीशन पर हैं. हर महीने तकरीबन अस्सी हजार रुपए की सैलरी उनके बैंक अकाउंट में आती है. उनकी इकलौती बेटी की शादी थी. अरोड़ा जी का इंतजाम ऐसा था कि क्या कहने. जिसने भी देखा बिना तारीफ के नहीं रह सका. ग्रेटर नॉएडा के एक फार्म हाउस में हुई इस शादी में अरोड़ा जी ये उस कहावत को चरितार्थ कर दिया कि 'भले ही गांव में, बीघे के बीघे बिक जाएं मगर बारातियों का स्वागत केवल पान पराग से होगा. ' पंडाल, टेंट, फूल-पत्ती, चाट-पकोड़ी, खाना पीना सब क्लास और खाने के तो कहने ही क्या. करीबियों की मानें तो अरोड़ा जी ने बेटी की शादी में खाना बनाने के लिए हलवाई और बावर्ची भारत भर से बुलाए गए थे. मीठे की भी इतनी वैराइटी की लग रहा था कि किसी शादी में नहीं बल्कि किसी मेले में आए हैं. खास मेहमानों के लिए भी अरोड़ा जी ने खास इंतजाम किये थे. 'जाम से जाम' ठकराने और टंगड़ी कबाब खाने का हिसाब किताब एक अलग ही जगह था. चूंकि अरोड़ा जी ठेठ पंजाबी थे और अगर पंजाबी वेडिंग में गाना बजाना न हो तो फिर शादी में मजा नहीं आता. अरोड़ा जी ने अपनी इकलौती बिटिया की शादी में 'महंगे वाले' डीजे का प्रबंध तो किया ही. साथ ही उन्होंने डांस के लिए रशियन महिलाओं का एक पूरा ग्रुप बुलवाया. अरोड़ा जी अस्सी हजार कमाने वाले आदमी हैं, मगर जैसी शादी हुई देखकर लग रहा था कि शादी में एक. पाँच या दो करोड़ तो खर्च हुए ही होंगे. अरोड़ा जी की बिटिया की शादी में जाने के एक दिन बाद ही गुप्ता जी की लड़की की शादी में जाना हुआ. गुप्ता जी हैसियत में अरोड़ा जी से कम हैं. मगर उन्होंने भी जो इंतजाम किया देखने वाले देखते रह गए. आए हुए मेहमानों को कोई शिकायत न हो गुप्ता जी ने भी बारीक से बारीक बातों का ख्याल रखा और फर्स्ट क्लास शादी की. दोनों ही शादियां कैसे इतनी आलीशान हुई जब मैंने इसकी पड़ताल की तो पता चला कि अरोड़ा जी और गुप्ता जी, दोनों ही लोगों ने बैंक से लोन लिया, अपने -अपने दोस्तों से पैसे उधर लिए. एफडी तोड़ी, शेयर्स बेचे और ऐसा बहुत कुछ किया जिसके बल पर ये अपनी नाक बचा सकते थे. वैसे भी शादी में ये देखा जाता है कि कौन कितना और कैसे खर्च कर रहा है और अपनी शादी को यादगार बना रहा है. अब ईशा अंबानी की शादी में मैं गया तो नहीं. मगर जितनी शादी टीवी पर आई और जितना ट्विटर और इंस्टाग्राम पर मैंने उसे देखा. लग यही रहा है कि यहां मुकेश अंबानी जी ने 'गुजराती बुद्धि' का प्रचुर मात्रा में इस्तेमाल किया और शादी में उतना खर्च नहीं किया जितने की उम्मीद की जा रही थी. कहना गलत नहीं है कि उनकी इस अदा ने मुझ समेत उन तमाम भारतीयों के दिल तोड़कर चूर-चूर किये हैं जिन्हें लग रहा था कि चूंकि अंबानी के घर शादी है तो देवराज इंद्र भी वर-वधू को आशीर्वाद देने धरती पर बुलाए जाएंगे. वो अंबानी हैं. समझ रहे हैं. मतलब वो कोई अरोड़ा जी, शर्मा जी. गुप्ता जी, अंसारी साहब, सिद्दीकी साहब नहीं हैं. वो अंबानी हैं, मुकेश धीरुभाई अंबानी वो शख्स जो अमीर अगर मोटर साइकिल होते तो वो बुलेट नहीं बल्कि हर्ले होता. अंबानी का ऑरा ऐसा है कि अगर इन्हें अमीरों की रोल्स रॉयस या एस्टन मार्टिन कहा जाए तो भी कहीं से अतिश्योक्ति न होगा. अंबानी जी की इकलौती बिटिया है ईशा. कहीं पढ़ा कि इस शादी में सात सौ पचास करोड़ के आस पास खर्च हुआ है. अगर इसे सच मानें तो ये कहना बिल्कुल ठीक है कि सात सौ पचास करोड़ खर्च करके अंबानी साहब ने कोई कद्दू में तीर नहीं मारा है. दो हज़ार अट्ठारह में अंबानी की रोज होने वाली इनकम तीन सौ करोड़ रु. है. इस हिसाब से उन्होंने बिटिया की शादी में जो पैसा खर्च किया वो दो. पाँच दिनों कमा लेंगे. या कमा ही चुके होंगे. कल्पना करिए. एक तरफ इस देश का आम आदमी है जो अपनी बेटी की शादी को यादगार बनाने के लिए बैंक से लोन लेता है. दोस्तों के पास जाता है, उनसे पैसे उधार लेता है. एफडी तुड़वाता है. अपने शेयर्स बेचता है दूसरी तरफ अंबानी हैं जिन्होंने इकलौती बिटिया की शादी में दो. पाँच दिन की कमाई लुटाई, और जैसा उनका स्वाभाव है वो उन्हें वापस मिल ही गया है. बहुत उम्मीदें थी इस शादी से. मगर जैसी शादी अंबानी ने की उन्होंने अपने 'गुजराती एटीट्यूड' का न सिर्फ परिचय दिया बल्कि खर्च में कमी करते हुए इसे अमली जामा भी पहनाया. आज देश में विकास की लहर कुछ इस हद तक है कि, देश का आम आदमी भी अपने बच्चों की शादी में डांस के लिए शाहरुख, सलमान और गाने के लिए बादशाह से लेकर हनी सिंह तक को बुला रहा है. ऐसे में हमें यकीन था कि जब अंबानी की बिटिया पराई होकर ससुराल जाएगी तो शकीरा से लेकर बियोंसे और निकी मीनाज से लेकर जस्टिन बीबर तक सब तालियां बटोरेंगे मगर जो निकला उससे दिल के अरमां आंसुओं में बह गए. क्यों किया अंबानी ने ऐसा ये सवाल आज जितना महत्वपूर्ण है भविष्य में भी रहेगा. कुल मिलकर अंबानी ने इकलौती बिटिया की शादी अच्छी की. हीरो हीरोइन भी आए. हिलेरी क्लिंटन भी आईं मगर वो न जाने क्यों मुझे वो मजा नहीं आया जो मुझे अरोड़ा जी और फिर उसके बाद गुप्ता जी की लड़की की शादी में आया था. पहले मैंने सिर्फ सुना था मगर अब देख भी लिया कि बात जब शादियों और उसपर किये जाने वाले खर्च की होती है तो फिर पंजाबियों का किसी से दूर-दूर तक कोई मुकाबला नहीं है. अगर अंबानी ने थोड़ा और तबीयत से खर्च किया होता तो शायद मेरा ये मिथक टूट जाता, मगर अब जबकि अंबानी ऐसा नहीं कर पाए तो बस इतना ही कि शादी तो ठीक थी मगर वो ऐसा बहुत कुछ कर सकते थे जो इतिहास में दर्ज होता और लोग उसे सालों साल क्या, कई दशकों या शायद शताब्दियों तक याद रखते. |
सेबी ने पूंजी बाजार का सफलतापूर्वक आधुनिकिकरण किया है और हमारी अर्थव्यवस्था के इस महत्वपूर्ण क्षेत्र को दूनिया की अहम परिपाटी से जोड़ा है। यह गर्व की बात है कि भारतीय शेयर बाजार तकनीक और दैनिक व्यापार के संदर्भ में आज की तारीख में दूनिया के अच्छे बाजारों में शामिल है। यह काफी हद तक सेबी की साहसिक कोशिशों का नतीजा है। शेयर बाजारों में निवेशकों के हितों की रक्षा सेबी का मूल धर्म रहा है। इस बात से हमें संतोष मिलता है कि पिछले 25 वर्षों में भारतीय शेयर बाजार में कई महत्वूपूर्ण सुधार हुए हैं।
शेयर पत्रों के शीघ्र नकदीकरण से शेयर प्रमाण पत्रों के चोरी हो जाने या उसमें घपले की समस्या खत्म हो गई है। भारत दुनिया के उन प्रथम देशों में शामिल है जहां विशाल स्क्रिन आधारित ट्रेडिंग होती है जिसके अद्यतन आकंड़े देशभर में निवेशकों को लगातार मिलते रहते हैं। कम्प्यूटरिकृत ट्रेडिंग की वजह से शेयरों के भाव बढ़ाने और इसमें छल-कपट की आशंका कम हो गई है।
आवश्यक सूचनाओं की उपलब्धता की वजह से आज निवेशक पहले से कहीं ज्यादा सशक्त हुए हैं। आईपीओ का जारी होना एक महत्वपूर्ण सुधार है जिसके उद्देश्य खुदरा निवेशकों की रक्षा है। प्रमोटरों द्वारा आईपीओ के जरिए शेयरों की ब्रिकी की ये नई विधि काफी सफल रही है। हाल में बाजार में निवेश बढाने के लिए खुदरा निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं जिनमें राजीव गांधी इक्विटी बचत योजना भी शामिल हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि सरकार के इन कदमों से खुदरा निवेशक पूंजी बाजार का रूख करेंगे, वित्तीय मध्यस्थता बढेगी हमारी वित्तीय व्यवस्था विस्तार लेगी और वित्तीय संपत्ति के पक्ष में बचतों का बंटवारा सकारात्मक रूप से प्रभावित होगा।
भारतीय अर्थव्यवस्था में पिछले दशक में जो उच्च विकास दर देखी गई उसके पीछे बचत और निवेश दर की अधिकता कारण रही। वर्ष 2000-01 में सकल घेरलू बचत जीडीपी के 23.7 फीसदी से बढकर वर्ष 2007-08 में 36.8 फीसदी तक पहुंची लेकिन वर्ष 2011-12 में यह घटकर 30.8 फीसदी पर आ गई जिसे हमें वापस पहले के स्तर पर लाना है। जब पूंजी बाजार के काम-काज में प्रभावी मध्यस्थता रहेगी तब बचत और निवेश की ऊची दरें काफी उत्पादक होंगी।
मैं पिछले 25 वर्षों के दौरान सेबी के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करता हूं लेकिन मैं यह उम्मीद करने का साहस करता हूं कि बेहतरी आना अभी बाकी है मैं सेबी अध्यक्ष श्री सिन्हा और उनके सभी सहयोगियों सहित उन लोगों को भी जो किसी न किसी रूप में इस उत्पादक संस्था के साथ जुड़े रहे हों, को शुभकामनाएं देता हूं।
| सेबी ने पूंजी बाजार का सफलतापूर्वक आधुनिकिकरण किया है और हमारी अर्थव्यवस्था के इस महत्वपूर्ण क्षेत्र को दूनिया की अहम परिपाटी से जोड़ा है। यह गर्व की बात है कि भारतीय शेयर बाजार तकनीक और दैनिक व्यापार के संदर्भ में आज की तारीख में दूनिया के अच्छे बाजारों में शामिल है। यह काफी हद तक सेबी की साहसिक कोशिशों का नतीजा है। शेयर बाजारों में निवेशकों के हितों की रक्षा सेबी का मूल धर्म रहा है। इस बात से हमें संतोष मिलता है कि पिछले पच्चीस वर्षों में भारतीय शेयर बाजार में कई महत्वूपूर्ण सुधार हुए हैं। शेयर पत्रों के शीघ्र नकदीकरण से शेयर प्रमाण पत्रों के चोरी हो जाने या उसमें घपले की समस्या खत्म हो गई है। भारत दुनिया के उन प्रथम देशों में शामिल है जहां विशाल स्क्रिन आधारित ट्रेडिंग होती है जिसके अद्यतन आकंड़े देशभर में निवेशकों को लगातार मिलते रहते हैं। कम्प्यूटरिकृत ट्रेडिंग की वजह से शेयरों के भाव बढ़ाने और इसमें छल-कपट की आशंका कम हो गई है। आवश्यक सूचनाओं की उपलब्धता की वजह से आज निवेशक पहले से कहीं ज्यादा सशक्त हुए हैं। आईपीओ का जारी होना एक महत्वपूर्ण सुधार है जिसके उद्देश्य खुदरा निवेशकों की रक्षा है। प्रमोटरों द्वारा आईपीओ के जरिए शेयरों की ब्रिकी की ये नई विधि काफी सफल रही है। हाल में बाजार में निवेश बढाने के लिए खुदरा निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं जिनमें राजीव गांधी इक्विटी बचत योजना भी शामिल हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि सरकार के इन कदमों से खुदरा निवेशक पूंजी बाजार का रूख करेंगे, वित्तीय मध्यस्थता बढेगी हमारी वित्तीय व्यवस्था विस्तार लेगी और वित्तीय संपत्ति के पक्ष में बचतों का बंटवारा सकारात्मक रूप से प्रभावित होगा। भारतीय अर्थव्यवस्था में पिछले दशक में जो उच्च विकास दर देखी गई उसके पीछे बचत और निवेश दर की अधिकता कारण रही। वर्ष दो हज़ार-एक में सकल घेरलू बचत जीडीपी के तेईस.सात फीसदी से बढकर वर्ष दो हज़ार सात-आठ में छत्तीस.आठ फीसदी तक पहुंची लेकिन वर्ष दो हज़ार ग्यारह-बारह में यह घटकर तीस.आठ फीसदी पर आ गई जिसे हमें वापस पहले के स्तर पर लाना है। जब पूंजी बाजार के काम-काज में प्रभावी मध्यस्थता रहेगी तब बचत और निवेश की ऊची दरें काफी उत्पादक होंगी। मैं पिछले पच्चीस वर्षों के दौरान सेबी के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करता हूं लेकिन मैं यह उम्मीद करने का साहस करता हूं कि बेहतरी आना अभी बाकी है मैं सेबी अध्यक्ष श्री सिन्हा और उनके सभी सहयोगियों सहित उन लोगों को भी जो किसी न किसी रूप में इस उत्पादक संस्था के साथ जुड़े रहे हों, को शुभकामनाएं देता हूं। |
सवाई माधोपुर मानटाउन थाना क्षेत्र में शुक्रवार देर रात गाय की टक्कर से बाइक सवार की मौत हो गई। हादसे में गाय ने भी दम तोड़ दिया। युवक देर रात सवाई माधोपुर से अपने गांव जोलन्दा जा रहा था। तभी अचानक सड़क पर आई एक गाय ने उसे टक्कर मार दी जिससे उसकी मौत हो गई।
मानटाउन थाना एएसआई हरिलाल ने बताया कि शुक्रवार देर रात करीब 2. 30 बजे राजेन्द्र (34) पुत्र शंभुदयाल निवासी पुरा जोलन्दा बाइक से अपने गांव जोलन्दा जा रहा था। तभी चकचैनपुरा के पास अचानक उसकी बाइक के सामने एक गाय आ गई। बाइक की स्पीड ज्यादा होने के कारण गाय व बाइक की जोरदार भिड़ंत हो गई जिससे मौके पर गाय की मौत हो गई जबकि राजेन्द्र गंभीर रूप से घायल हो गया। इसकी सूचना करीब 3 बजे किसी व्यक्ति ने मानटाउन थाना पुलिस को दी। सूचना मिलने पर मानटाउन थाना पुलिस मौके पर पहुंची तथा उसे जिला अस्पताल लेकर आई। वहां उसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। शव का शुक्रवार सुबह पोस्टमार्टम करवा गया। राजेन्द्र अपने गांव में ही रहकर खेती बाड़ी करता था। उसके दो छोटे बच्चे हैं। राजेन्द्र की मौत के बाद अनाथ हो गए हैं। राजेन्द्र की मौत की सूचना मिलने पर परिवार में कोहराम मच गया है। गांव में जवान मौत के बाद मातम छाया हुआ है।
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| सवाई माधोपुर मानटाउन थाना क्षेत्र में शुक्रवार देर रात गाय की टक्कर से बाइक सवार की मौत हो गई। हादसे में गाय ने भी दम तोड़ दिया। युवक देर रात सवाई माधोपुर से अपने गांव जोलन्दा जा रहा था। तभी अचानक सड़क पर आई एक गाय ने उसे टक्कर मार दी जिससे उसकी मौत हो गई। मानटाउन थाना एएसआई हरिलाल ने बताया कि शुक्रवार देर रात करीब दो. तीस बजे राजेन्द्र पुत्र शंभुदयाल निवासी पुरा जोलन्दा बाइक से अपने गांव जोलन्दा जा रहा था। तभी चकचैनपुरा के पास अचानक उसकी बाइक के सामने एक गाय आ गई। बाइक की स्पीड ज्यादा होने के कारण गाय व बाइक की जोरदार भिड़ंत हो गई जिससे मौके पर गाय की मौत हो गई जबकि राजेन्द्र गंभीर रूप से घायल हो गया। इसकी सूचना करीब तीन बजे किसी व्यक्ति ने मानटाउन थाना पुलिस को दी। सूचना मिलने पर मानटाउन थाना पुलिस मौके पर पहुंची तथा उसे जिला अस्पताल लेकर आई। वहां उसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। शव का शुक्रवार सुबह पोस्टमार्टम करवा गया। राजेन्द्र अपने गांव में ही रहकर खेती बाड़ी करता था। उसके दो छोटे बच्चे हैं। राजेन्द्र की मौत के बाद अनाथ हो गए हैं। राजेन्द्र की मौत की सूचना मिलने पर परिवार में कोहराम मच गया है। गांव में जवान मौत के बाद मातम छाया हुआ है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
मेलबर्न, 20 मार्च (आईएएनएस)। न्यूजीलैंड के पूर्व कप्तान स्टीफन फ्लेमिंग ने बिग बैश लीग (बीबीएल) फ्रेंचाइजी मेलबर्न स्टार्स के कोच पद से इस्तीफा दे दिया है।
क्रिकइंफो की रिपोर्ट के अनुसार, फ्लेमिंग पिछले चार सीजन से मेलबर्न स्टार्स टीम के साथ जुड़े हुए थे। उनके रहते टीम दो बार फाइनल में पहुंचने में कामयाब हो पाई है। इस सीजन के फाइनल में मेलबर्न स्टार्स को मेलबर्न रेनेगेड्स के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।
फ्लेमिंग हालांकि इंटरनेशनल टैलेंट एडवाइजर के रूप में मेलबर्न स्टार्स टीम के साथ जुड़े रहेंगे।
| मेलबर्न, बीस मार्च । न्यूजीलैंड के पूर्व कप्तान स्टीफन फ्लेमिंग ने बिग बैश लीग फ्रेंचाइजी मेलबर्न स्टार्स के कोच पद से इस्तीफा दे दिया है। क्रिकइंफो की रिपोर्ट के अनुसार, फ्लेमिंग पिछले चार सीजन से मेलबर्न स्टार्स टीम के साथ जुड़े हुए थे। उनके रहते टीम दो बार फाइनल में पहुंचने में कामयाब हो पाई है। इस सीजन के फाइनल में मेलबर्न स्टार्स को मेलबर्न रेनेगेड्स के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। फ्लेमिंग हालांकि इंटरनेशनल टैलेंट एडवाइजर के रूप में मेलबर्न स्टार्स टीम के साथ जुड़े रहेंगे। |
मंथन किया जाएगा।
उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद, श्री बदरीनाथ- केदारनाथ मंदिर समिति,
गुरुद्वारा हेमकुंड साहिब, पुलिस महानिरीक्षक सहित सभी जिलाधिकारियों,
विभाग, स्वास्थ्य, विद्युत, खाद्यान्न, संचार, परिवहन, उरेडा, पंचायत राज,
रहेंगे।
विशेष कार्याधिकारी यात्रा प्रशासन संगठन एके श्रीवास्तव ने बताया कि नगर आयुक्त ऋषिकेश को चारधाम यात्रा बैठक की तैयारियों के लिए गढ़वाल आयुक्त ने निर्देश जारी किए गए हैं। बदरीनाथ धाम के कपाट आठ, गंगोत्री और यमुनोत्री के तीन मई को खुलेंगे।
| मंथन किया जाएगा। उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद, श्री बदरीनाथ- केदारनाथ मंदिर समिति, गुरुद्वारा हेमकुंड साहिब, पुलिस महानिरीक्षक सहित सभी जिलाधिकारियों, विभाग, स्वास्थ्य, विद्युत, खाद्यान्न, संचार, परिवहन, उरेडा, पंचायत राज, रहेंगे। विशेष कार्याधिकारी यात्रा प्रशासन संगठन एके श्रीवास्तव ने बताया कि नगर आयुक्त ऋषिकेश को चारधाम यात्रा बैठक की तैयारियों के लिए गढ़वाल आयुक्त ने निर्देश जारी किए गए हैं। बदरीनाथ धाम के कपाट आठ, गंगोत्री और यमुनोत्री के तीन मई को खुलेंगे। |
RANCHI : रिम्स में मरीजों की अब बेहतर तरीके से देखभाल हो सकेगी। इसके लिए हर वार्ड में एक-एक मैनेजर और अटेंडेंट तैनात किए जाएंगे। ये न सिर्फ मरीजों का केयर करेंगे, बल्कि उनकी जरूरतों से जुड़ी जानकारी हॉस्पिटल मैनेजमेंट तक पहुंचाएंगे। मरीजों की काउंसलिंग के साथ वार्ड की व्यवस्था भी इन्हीं के हवाले होगी। वार्डो में मैनेजर और अटेंडेंट की तैनाती को लेकर तैयार प्रस्ताव को रिम्स गवर्निग बॉडी की मीटिंग में रखा जाएगा। यहां से मंजूरी के बाद नए सिस्टम को लागू कर दिया जाएगा।
हॉस्पिटल के इनडोर में पहले से ही वार्ड अटेंडेंट मौजूद है। लेकिन उनका फिलहाल कोई रोल नहीं होता है। ऐसे में न्यू सिस्टम के तहत अब वार्डो में दो स्टाफ तैनात किए जाएंगे। इनमें एक स्टाफ वार्ड अटेंडेंट के तौर पर काम करेगा, जबकि दूसरा स्टाफ मरीजों का देखभाल करेगा। वार्ड में मरीजों को होने वाली दिक्कतों को ये दोनों स्टाफ दूर करेंगे।
इनडोर में इलाजरत मरीजों को कई बार टेस्ट कराने के लिए काफी मशक्कत करनी होती है। मरीज के परिजन जानकारी के अभाव में सैंपल लेकर इधर-उधर भटकते रहते हैं। इसके अलावा टाइम से टेस्ट नहीं होने पर इलाज में भी देरी हो जाती है। वहीं, टेस्ट के लिए सेंटर की जानकारी नहीं होने से उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना होता है, लेकिन अब ऐसी नौबत नहीं आएगी। वार्ड में तैनात स्टाफ की जिम्मेवारी होगी कि वे मरीज अथवा उनके परिजन को टेस्ट कराने के लिए प्रॉपर लैब ले जाएं। इसके अलावा टेस्ट के लिए वार्ड से सैंपल कलेक्ट करके लैब में पहुंचाने की भी ड्यूटी उनकी ही होगी।
रिम्स में इलाज के लिए हर दिन 1200 मरीज इनडोर में एडमिट रहते है। इनमें कई मरीजों का लंबे समय तक इलाज चलता है। लेकिन, कई बार मरीजों का कई कई दिनों तक बेडशीट नहीं बदला जाता है। अब ये सिस्टम बदलेगा। वार्ड में मरीजों के हाइजीन का ख्याल भी स्टाफ रखेंगे। इनकी ड्यूटी होगी कि हर दिन मरीज के बेड की बेडशीट बदली जाए।
| RANCHI : रिम्स में मरीजों की अब बेहतर तरीके से देखभाल हो सकेगी। इसके लिए हर वार्ड में एक-एक मैनेजर और अटेंडेंट तैनात किए जाएंगे। ये न सिर्फ मरीजों का केयर करेंगे, बल्कि उनकी जरूरतों से जुड़ी जानकारी हॉस्पिटल मैनेजमेंट तक पहुंचाएंगे। मरीजों की काउंसलिंग के साथ वार्ड की व्यवस्था भी इन्हीं के हवाले होगी। वार्डो में मैनेजर और अटेंडेंट की तैनाती को लेकर तैयार प्रस्ताव को रिम्स गवर्निग बॉडी की मीटिंग में रखा जाएगा। यहां से मंजूरी के बाद नए सिस्टम को लागू कर दिया जाएगा। हॉस्पिटल के इनडोर में पहले से ही वार्ड अटेंडेंट मौजूद है। लेकिन उनका फिलहाल कोई रोल नहीं होता है। ऐसे में न्यू सिस्टम के तहत अब वार्डो में दो स्टाफ तैनात किए जाएंगे। इनमें एक स्टाफ वार्ड अटेंडेंट के तौर पर काम करेगा, जबकि दूसरा स्टाफ मरीजों का देखभाल करेगा। वार्ड में मरीजों को होने वाली दिक्कतों को ये दोनों स्टाफ दूर करेंगे। इनडोर में इलाजरत मरीजों को कई बार टेस्ट कराने के लिए काफी मशक्कत करनी होती है। मरीज के परिजन जानकारी के अभाव में सैंपल लेकर इधर-उधर भटकते रहते हैं। इसके अलावा टाइम से टेस्ट नहीं होने पर इलाज में भी देरी हो जाती है। वहीं, टेस्ट के लिए सेंटर की जानकारी नहीं होने से उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना होता है, लेकिन अब ऐसी नौबत नहीं आएगी। वार्ड में तैनात स्टाफ की जिम्मेवारी होगी कि वे मरीज अथवा उनके परिजन को टेस्ट कराने के लिए प्रॉपर लैब ले जाएं। इसके अलावा टेस्ट के लिए वार्ड से सैंपल कलेक्ट करके लैब में पहुंचाने की भी ड्यूटी उनकी ही होगी। रिम्स में इलाज के लिए हर दिन एक हज़ार दो सौ मरीज इनडोर में एडमिट रहते है। इनमें कई मरीजों का लंबे समय तक इलाज चलता है। लेकिन, कई बार मरीजों का कई कई दिनों तक बेडशीट नहीं बदला जाता है। अब ये सिस्टम बदलेगा। वार्ड में मरीजों के हाइजीन का ख्याल भी स्टाफ रखेंगे। इनकी ड्यूटी होगी कि हर दिन मरीज के बेड की बेडशीट बदली जाए। |
पाइरेसी वह गतिविधि है जिससे समुद्री डाकू विकसित होते हैं। अपने मूल अर्थ में, एक समुद्री डाकू एक अपराधी था जो अपने धन को रखने के लिए ऊंचे समुद्रों पर जहाजों में सवार हो जाता था। उदाहरण के लिएः "पायरेसी स्पेनिश क्राउन की मुख्य चिंताओं में से एक थी", "वायसराय ने अपने तटों के पास विकसित होने वाले पाइरेसी के खिलाफ लड़ने के लिए महान प्रयासों को समर्पित किया", "साम्राज्य ने पायरेसी का समर्थन किया, जिसने इसे बढ़ाने की अनुमति दी एक अवैध मार्ग के माध्यम से खजाने " ।
सदियों पहले पायरेसी की दुनिया में एक जगह थी, जहां यह केंद्रित था और जहां यह दिन का क्रम था। हम कैरेबियन का जिक्र कर रहे हैं। और यह है कि इस समुद्र के पानी में पाए जाने वाले समुद्री डाकू जहाजों पर हमला करने और उनके ताबूतों को भरने के लिए आदर्श परिदृश्य हैं। क्यों? क्योंकि नई दुनिया से निकलने वाली नौकाओं का एक महत्वपूर्ण हस्तांतरण अन्य लेखों के अलावा सभी प्रकार की कीमती धातुओं से भरा हुआ था, और जो यूरोप में चली गई।
यह जानना महत्वपूर्ण है कि इस प्रकार के समुद्री डाकू के भीतर भी कोर्सेर थे। ये पूरी तरह से स्वतंत्र समुद्री डाकू थे, जिन्हें निजी नौकाओं के चालक दल का हिस्सा बनने के लिए काम पर रखा गया था और इसलिए बाकी के साथ दुश्मन देशों के जहाजों पर हमला कर सकते थे।
वर्तमान में, समुद्री डकैती के रूप में समुद्री डकैती की धारणा और जिसे हम समझते हैं। यह माना जाता है कि समुद्री डकैती में किसी उत्पाद को झूठा बनाना, अवैध प्रतियों का व्यवसायीकरण करना शामिल है। यह बौद्धिक कार्यों, जैसे फिल्में, संगीत डिस्क आदि का व्यवसायीकरण (या प्रसार) भी हो सकता है। दूसरी ओर, समुद्री डाकू, विशेषण है जो इन प्रतियों पर लागू होता हैः "पायरेसी संगीत उद्योग को नष्ट कर रही है", "मेटालिका रॉक बैंड में से एक थी जिसने पायरेसी का सबसे अधिक विरोध किया था", "मेरे घर में हम पायरेसी का समर्थन नहीं करते हैंः हम केवल मूल डीवीडी खरीदते हैं । "
यह कहा जा सकता है कि पायरेसी, इसके वर्तमान अर्थ में, कानून के द्वारा संरक्षित किए गए कार्यों के निर्माता द्वारा समर्थन नहीं किए गए उपयोग से कॉपीराइट का उल्लंघन है ।
स्पेन उन देशों में से एक है जहां पर अधिक चोरी होती है और जहां इसलिए, अधिक न्याय और विभिन्न सरकारें इसे समाप्त करने के लिए उपाय करने की कोशिश कर रही हैं। विशेष रूप से, 2014 में तथाकथित डिजिटल पायरेसी के आंकड़े बहुत अधिक रहे हैंः 4, 455 मिलियन डिजिटल सामग्री। इसका मतलब यह है कि उन बारह महीनों में डिजिटल सामग्री तक केवल 40% पहुंच कानूनी थी।
किताबें, फिल्में, रिकॉर्ड एल्बम, वीडियो गेम और यहां तक कि टेलीविजन श्रृंखला ऐसे उत्पाद हैं जो पाइरेसी के क्षेत्र में सबसे अधिक मांग में हैं। और उन पर कार्रवाई कर रहे हैं। विशेष रूप से, पाइरेसी से बचने में सक्षम होने के लिए दोनों वेबसाइटों को बंद कर रहे हैं और बहुत अधिक मजबूत जुर्माना लगा रहे हैं।
इंटरनेट की विशेषताओं के कारण, पायरेसी क्या है, इसे परिभाषित करना और यह निर्धारित करना कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है, बहुत मुश्किल है। कुछ दृष्टिकोणों के अनुसार, जो कोई भी संबंधित अधिकारों के लिए भुगतान किए बिना कार्य को डाउनलोड करता है, वह पायरेसी में आ रहा है। दूसरी ओर, अन्य बिंदु, यह सुनिश्चित करते हैं कि उपयोगकर्ता जो केवल एक उत्पाद डाउनलोड करता है और इससे लाभ नहीं लेता है, उसकी चोरी में कोई जिम्मेदारी नहीं है।
| पाइरेसी वह गतिविधि है जिससे समुद्री डाकू विकसित होते हैं। अपने मूल अर्थ में, एक समुद्री डाकू एक अपराधी था जो अपने धन को रखने के लिए ऊंचे समुद्रों पर जहाजों में सवार हो जाता था। उदाहरण के लिएः "पायरेसी स्पेनिश क्राउन की मुख्य चिंताओं में से एक थी", "वायसराय ने अपने तटों के पास विकसित होने वाले पाइरेसी के खिलाफ लड़ने के लिए महान प्रयासों को समर्पित किया", "साम्राज्य ने पायरेसी का समर्थन किया, जिसने इसे बढ़ाने की अनुमति दी एक अवैध मार्ग के माध्यम से खजाने " । सदियों पहले पायरेसी की दुनिया में एक जगह थी, जहां यह केंद्रित था और जहां यह दिन का क्रम था। हम कैरेबियन का जिक्र कर रहे हैं। और यह है कि इस समुद्र के पानी में पाए जाने वाले समुद्री डाकू जहाजों पर हमला करने और उनके ताबूतों को भरने के लिए आदर्श परिदृश्य हैं। क्यों? क्योंकि नई दुनिया से निकलने वाली नौकाओं का एक महत्वपूर्ण हस्तांतरण अन्य लेखों के अलावा सभी प्रकार की कीमती धातुओं से भरा हुआ था, और जो यूरोप में चली गई। यह जानना महत्वपूर्ण है कि इस प्रकार के समुद्री डाकू के भीतर भी कोर्सेर थे। ये पूरी तरह से स्वतंत्र समुद्री डाकू थे, जिन्हें निजी नौकाओं के चालक दल का हिस्सा बनने के लिए काम पर रखा गया था और इसलिए बाकी के साथ दुश्मन देशों के जहाजों पर हमला कर सकते थे। वर्तमान में, समुद्री डकैती के रूप में समुद्री डकैती की धारणा और जिसे हम समझते हैं। यह माना जाता है कि समुद्री डकैती में किसी उत्पाद को झूठा बनाना, अवैध प्रतियों का व्यवसायीकरण करना शामिल है। यह बौद्धिक कार्यों, जैसे फिल्में, संगीत डिस्क आदि का व्यवसायीकरण भी हो सकता है। दूसरी ओर, समुद्री डाकू, विशेषण है जो इन प्रतियों पर लागू होता हैः "पायरेसी संगीत उद्योग को नष्ट कर रही है", "मेटालिका रॉक बैंड में से एक थी जिसने पायरेसी का सबसे अधिक विरोध किया था", "मेरे घर में हम पायरेसी का समर्थन नहीं करते हैंः हम केवल मूल डीवीडी खरीदते हैं । " यह कहा जा सकता है कि पायरेसी, इसके वर्तमान अर्थ में, कानून के द्वारा संरक्षित किए गए कार्यों के निर्माता द्वारा समर्थन नहीं किए गए उपयोग से कॉपीराइट का उल्लंघन है । स्पेन उन देशों में से एक है जहां पर अधिक चोरी होती है और जहां इसलिए, अधिक न्याय और विभिन्न सरकारें इसे समाप्त करने के लिए उपाय करने की कोशिश कर रही हैं। विशेष रूप से, दो हज़ार चौदह में तथाकथित डिजिटल पायरेसी के आंकड़े बहुत अधिक रहे हैंः चार, चार सौ पचपन मिलियन डिजिटल सामग्री। इसका मतलब यह है कि उन बारह महीनों में डिजिटल सामग्री तक केवल चालीस% पहुंच कानूनी थी। किताबें, फिल्में, रिकॉर्ड एल्बम, वीडियो गेम और यहां तक कि टेलीविजन श्रृंखला ऐसे उत्पाद हैं जो पाइरेसी के क्षेत्र में सबसे अधिक मांग में हैं। और उन पर कार्रवाई कर रहे हैं। विशेष रूप से, पाइरेसी से बचने में सक्षम होने के लिए दोनों वेबसाइटों को बंद कर रहे हैं और बहुत अधिक मजबूत जुर्माना लगा रहे हैं। इंटरनेट की विशेषताओं के कारण, पायरेसी क्या है, इसे परिभाषित करना और यह निर्धारित करना कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है, बहुत मुश्किल है। कुछ दृष्टिकोणों के अनुसार, जो कोई भी संबंधित अधिकारों के लिए भुगतान किए बिना कार्य को डाउनलोड करता है, वह पायरेसी में आ रहा है। दूसरी ओर, अन्य बिंदु, यह सुनिश्चित करते हैं कि उपयोगकर्ता जो केवल एक उत्पाद डाउनलोड करता है और इससे लाभ नहीं लेता है, उसकी चोरी में कोई जिम्मेदारी नहीं है। |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
विकीहाउ एक "विकी" है जिसका मतलब होता है कि यहाँ एक आर्टिकल कई सहायक लेखकों द्वारा लिखा गया है। इस आर्टिकल को पूरा करने में और इसकी गुणवत्ता को सुधारने में समय समय पर, 131 लोगों ने और कुछ गुमनाम लोगों ने कार्य किया।
विकीहाउ एक "विकी" है जिसका मतलब होता है कि यहाँ एक आर्टिकल कई सहायक लेखकों द्वारा लिखा गया है। इस आर्टिकल को पूरा करने में और इसकी गुणवत्ता को सुधारने में समय समय पर, 131 लोगों ने और कुछ गुमनाम लोगों ने कार्य किया।
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क्या आप अपने शिक्षक को खुश करना चाहते हैं? आप में से हर कोई अपने स्कूल के दिनों में ऐसा करना चाहता होगा। आप के सर्वश्रेष्ठ छात्र बनने के पीछे जो भी कारण हो, उस के लिए ऐसे बहुत सारे तरीके हैं, जिन से आप खुद को बेहतर बना सकें। एक अच्छा छात्र बनना मतलब, कक्षा में अच्छी श्रेणी हासिल करना ही नहीं, इस के साथ-साथ एक अच्छा इंसान बनना और अपने शिक्षक को दर्शाना कि आप अपनी कक्षा को गंभीरता से ले रहे हैं।
विधि 1 का 3:
1अपने मस्तिष्क को और अपने शरीर को, सीखने के लिए तैयार करेंः यदि आप का शरीर सीखने के लिए तैयार रहेगा, तो आप हर चीज़ अच्छे से सीखकर स्कूल में अच्छा समय बिता पाएँगे! अपने शरीर को तैयार करने के लिए बहुत सारे तरीके मौजूद है। इन का अभ्यास करेंः
- अच्छी नींद लें। यदि आप चाहते हैं कि आप का दिमाग़ सही तरह से काम करे, तो इस के लिए आप को अपनी नींद पूरी करने की ज़रूरत है। आप को सारा दिन चौकन्ना रहना होगा। यदि आप की आँखें लंच के बाद खुद-ब-खुद बंद होने लगें, तो इस का अर्थ यही निकलता है कि आप की नींद पूरी नहीं हुई है। अधिकांश लोगों के लिए, 8 घंटे की नींद की ज़रूरत होती है।
- यदि आप सारा दिन सिर्फ़ जंक फूड खाते हैं, तो आप का शरीर सही तरीके से काम नहीं कर पाएगा। यदि आप सर्वश्रेष्ठ छात्र बनना चाहते हैं, तो आप बन सकते हैं, और ऐसा करने में, हरी सब्जियाँ, घर का बना खाना और फल आप को सहायता भी प्रदान करेंगे।
- भरपूर मात्रा में पानी पिया करें। आप के दिमाग़ को अच्छी तरह से काम करने के लिए पानी की ज़रूरत होती है। आप का शरीर भी अच्छी तरह काम करने के लिए पानी चाहता है। दिनभर में बहुत सारा पानी पिएँ, लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि कुछ लोगों को अन्य लोगों की तुलना में ज़्यादा पानी की ज़रूरत होती है। यदि आप के मूत्र का रंग गाढ़ा है, तो इस का यही अर्थ समझें कि आप को ज़्यादा पानी पीने की ज़रूरत है, और वहीं यदि इस का रंग साफ है, तो इस का अर्थ यह अतिरिक्त पानी है।
2जो आप के लिए काम करे, उसी तरीके से सीखेंः हर कोई अपने-अपने तरीकों से सीखता है; इसे ही सीखने का तरीका कहा जाता है।[१] X रिसर्च सोर्स एक ऐसे तरीके की तलाश करें, जो आप के काम आए और फिर उसी तरीके से सीखने की कोशिश करें। इस में कोई शक नहीं कि आप अपने घर पर ही सब से अच्छे से पढ़ाई कर सकते हैं, लेकिन अपने शिक्षक से बात कर के आप उन्हें कुछ ऐसे तरीकों का उपयोग करने के लिए मना सकते हैं, जो हर किसी के काम आए।
- उदाहरण के लिए, आप ने शायद कभी गौर किया होगा, कि आप के लिए चार्ट्स या पिक्चर्स को याद रखना कितना आसान रहता है। इस का मतलब यह है, कि आप शायद दृश्यों के माध्यम से अच्छी तरह पढ़ पाते हैं, तो आप को अपनी पढ़ाई में ज़्यादा से ज़्यादा दृश्यों या चित्रों का प्रयोग करना चाहिए। उदाहरण के लिए, आप जिस भी चीज़ को याद करना चाहते हैं, उसे छोटे-छोटे भागों में एक चार्ट पर बना लें।
- हो सकता है कि आप म्यूज़िक सुनते हुए अच्छी तरह से पढ़ाई कर पाते हैं या फिर आप के शिक्षक के द्वारा बोर्ड पर लिखी गई बातें आप याद ना रख पाते हों लेकिन उन के द्वारा कही गई बातों को याद रखना आप के लिए आसान लगता हो, इस का यही अर्थ निकलता है कि आप सुनकर सीखने वाले विद्यार्थी हैं और आप किसी बात को सुनकर ज़्यादा अच्छे से सीख सकते हैं। उदाहरण के लिए आप अपने शिक्षक की बातों को रिकॉर्ड कर सकते हैं, ताकि होमवर्क करते वक़्त आप इन्हें सुनकर कुछ बेहतर कर पाएँ।
- हो सकता है किसी क्लास के वक़्त आप को ऐसा महसूस हो, कि आप उस पर ध्यान देना चाहते हैं, लेकिन अभी आप को सच में खड़े हो जाना चाहिए या फिर यहाँ वहाँ घूमना शुरू कर देना चाहिए। हो सकता है आप कमरे में घूम-घूम कर पढ़ाई करते हों। तो इस का अर्थ यही निकलता है, कि आप गति के साथ सीखना पसंद करते हैं, जिस का मतलब आप किसी चीज़ को तब और भी अच्छे से सीख पाते हैं, जब आप का शरीर गति में होता है। इस के लिए जब आप के शिक्षक आप को पढ़ाएँ तो आप अपने हाथ में मिट्टी के टुकड़ों के साथ खेल करते रहें, इस तरह से आप का शरीर गति में रहेगा।
3ध्यान देंः आप को कक्षा में अपनी श्रेणी को सुधारने के लिए और भी ज़्यादा सीखने के लिए, शिक्षक के द्वारा कही जाने वाली बातों पर ध्यान देना चाहिए। यदि आप विचलित हो जाते हैं, तो आप कुछ महत्वपूर्ण जानकारी को छोड़ देंगे और बाद में किस बात को सुनें और किस पर ध्यान लगाएँ यह समझ पाना, आप के लिए और भी कठिन हो जाएगा।
- यदि आप को अपने शिक्षक की बातों में ध्यान लगाने में परेशानी हो रही है, तो कक्षा में सबसे आगे बैठने और कक्षा में ज़्यादा शामिल रहने की कोशिश करें। जब आप के शिक्षक कुछ बहुत ही दिलचस्प बात बताते हैं, और आप उस बारे में और भी जानकारी पाना चाहते हैं, तो अपना हाथ उठाएँ और उन से सवाल करें।
4नोट्स बनाना सीखेंः नोट्स बनाना (और "अच्छे" नोट्स बनाना) थोड़ा सा कठिन हो सकता है, लेकिन इस के ज़रिए आप को पढ़ाई करना और भी आसान लगने लगेगा, जिस का अर्थ आप की श्रेणी और बेहतर हो जाएगी और आप के परीक्षा के परिणाम में भी सुधार आएगा। ध्यान रखें, आप को आप के शिक्षक के द्वारा बोली गई हर एक बात को लिखने की ज़रूरत नहीं है। सिर्फ़ ऐसी कुछ महत्वपूर्ण बातों को ही लिखें, जिन्हें बाद में याद रख सकने में आप को तकलीफ़ हो।
5समय पर और अच्छी तरह से अपना होमवर्क करेंः भले ही आप को अपने होमवर्क में अच्छी ग्रेड नहीं मिलती, लेकिन इसे समय पर और अच्छी तरह से पूरा कर के आप को अपनी ग्रेड को सुधारने में मदद ज़रूर मिलेगी। और आप अपने होमवर्क को जितना अच्छा से कर सकें, करें। जब आप को कुछ समझ ना आ रहा हो, तो किसी से मदद माँगें! आप के शिक्षक ही ट्यूटर की तरह आप को मदद कर सकते हैं या फिर अगले दिन कक्षा में उन के पास जाकर पूछें।
- अपने होमवर्क को पूरा करने के लिए पर्याप्त समय दें। इस का यह अर्थ भी हो सकता है, कि टीवी कम देखें और अपने दोस्तों के साथ कम समय बिताएँ।
- होमवर्क करने के लिए अच्छा माहौल मिलना, आप को इसे पूरा करने में मदद करेगा। किसी ऐसी शांत जगह पर जाएँ, जहाँ पर आप को कोई भी विचलित ना कर पाए। यदि आप किसी लाइब्रेरी जा सकते हैं, तो यह और भी बेहतर स्थान होगा। यदि आप के घर में बहुत शोरगुल हो रहा है और आप कहीं बाहर नहीं जा सकते हैं, तो घर की छत पर जाएँ या फिर बाथरूम में जाकर होमवर्क करें।
6सीखने के लिए अलग-अलग तरीकों को ढूँढेंः कक्षा में ना पढ़ाई गई चीज़ों की पहले से ही जानकारी, आप को आगे के लिए तो तैयार करेगी ही, साथ ही आप के शिक्षक को भी प्रभावित करेगी। कुछ दिलचस्प तरीकों के साथ में की गई पढ़ाई आप को ज़्यादा समय तक याद रहती है। तो अपने सारे विषयों को पढ़ने के लिए ऐसे ही कुछ तरीकों को खोजें, जिन से आप अपना ध्यान और भी ज़्यादा केंद्रित कर के पढ़ाई कर सकें। और इस तरह से आप अपनी कक्षा में और भी सफलता प्राप्त कर पाएँगे।
- उदाहरण के लिए, यदि आप भारतीय इतिहास के बारे में पढ़ रहे हैं, तो इस विषय पर ऑनलाइन मौजूद डॉक्युमेंट्स को देख कर आप इस से और भी ज़्यादा सीख सकते हैं।
- आप किसी भी विषय के बारे में अपने आसपास मौजूद लाइब्रेरी से किताबें लेकर भी पढ़ाई कर सकते हैं, लेकिन आप ऑनलाइन जाकर और भी ज़्यादा जानकारी पा सकते हैं। हालाँकि, Wikipedia हर समय ही सही नहीं होती, लेकिन फिर भी इस पर से अच्छी जानकारी प्राप्त हो जाती है। आप यूट्यूब पर वीडियो देख कर भी जानकारी पा सकते हैं।
- जब आप का स्कूल बंद हो, तब भी कुछ ना कुछ सीखे। गर्मी की छुट्टियों में, सप्ताहांत में भी पढ़ाई करते रहें और अगले साल की पढ़ाई की सामग्री उपलब्ध होने के फ़ौरन बाद ही पढ़ाई करना शुरू कर दें। जैसे गर्मी की छुट्टी में, पहले से की हुई पढ़ाई को कुछ समय के लिए दोहराने से और आने वाले सेशन की पढ़ाई करने से, जैसे कि आप पहले से ही बहुत कुछ जानकारी पा चुके हैं तो, आप स्कूल के शुरू होते ही आश्वस्त महसूस करेंगे।
7जल्दी पढ़ना शुरू करेंः परीक्षा में अच्छे अंक पाने का सब से अच्छा तरीका है, कि आप परीक्षा के लिए जितना भी जल्दी हो सके पढ़ाई शुरू कर दें। निश्चित रूप से इसे आख़िरी रात के लिए ना छोड़ दें। दो या तीन हफ्ते पहले से पढ़ाई की शुरुआत कर देना आप के लिए बेहतर होगा।
- परीक्षा में आने वाले संभावित प्रश्नों को लिख लें और इम्पोर्टेन्ट पॉइंट्स के नोट्स बना लें। परीक्षा की सुबह थोड़ा जल्दी उठने की कोशिश करें और पढ़ाई के दौरान आपके द्वारा बनाए गए नोट्स को एक बार ध्यान से पढ़ लें। इन नोट्स को आखिर में एक बार पढ़ने से आप सभी जरूरी पॉइंट्स को रिवाइज़ कर सकते हैं। परीक्षा जितनी कठिन होगी, आपको उतनी ही जल्दी पढ़ाई शुरू कर देनी चाहिए। दो या तीन सप्ताह आमतौर पर एक अच्छा स्टार्टिंग पॉइंट होता है।
विधि 2 का 3:
1लोगों को अच्छा महसूस कराएँः अच्छा छात्र होना, अच्छी ग्रेड पाने से भी ज़्यादा कुछ है। आप को एक अच्छा इंसान बनने के लिए हमेशा कुछ ना कुछ करते रहना चाहिए। आप एक बुली (bully) या कक्षा का एक बिगड़ा हुआ छात्र तो नहीं बनना चाहेंगे, और यह आप को सर्वश्रेष्ठ छात्र भी नहीं बना देगा। लोगों के साथ अच्छा व्यवहार करें। किसी को भी परेशान ना करें और ना ही उन्हें कुछ ऐसा कहें जिस से उन्हें दुख पहुँचे।
2हर किसी की सहायता करेंः जब भी आप किसी की मदद कर सकें, तो ऐसा कर के एक अच्छे इंसान बनें। यदि आप को कुछ करते आता है या फिर आप को किसी चीज़ को करने का बेहतर तरीका पता है, तो लोगों को भी समझाएँ। ऐसा करते वक़्त खुद को उन से बेहतर या स्मार्ट ना दिखाएँ, सिर्फ़ अच्छे और मित्रता के भाव से समझाएँ। आप और भी बहुत सारी चीज़ें कर सकते हैं, जैसे किसी भारी सामान को उठाते वक़्त उन की मदद करें।
- उदाहरण के लिए, यदि कोई कुछ दिन के लिए बाहर गया है, तो उस के वापस आने के बाद उसे अपने नोट्स दें।
3लोगों का सम्मान करें, भले ही वे आप के साथ ग़लत व्यवहार करेंः जब लोग आप के साथ बुरा व्यवहार करें, तब भी आप उन के प्रति सम्मान दिखाएँ। उन पर चिल्लाएँ नहीं और ना ही उन को शारीरिक कष्ट दें। उन की ओर ज़्यादा ध्यान ना दें और उन से भी उसी तरह का बर्ताव रखें, जिस तरह का, आप अन्य लोगों के साथ रखते हैं।
- लोगों के प्रति सम्मान दिखाएँ। भले ही उन के विचार आप से कुछ अलग हों, लेकिन फिर भी उन का सम्मान करें। लोगों को उन के अलग तरह के होने के कारण उन्हें बुरा महसूस ना कराएँ, उन्हें उन के जैसे रहने दें, हर एक इंसान के अपने अलग विचार होते हैं।
4शांत रहेंः जब आप कक्षा में हों, तो जितना ज़्यादा हो सके शांत रहें। यहाँ-वहाँ भागकर लोगों को तंग ना करें। स्कूल की परेशानियों को ले कर तनाव में ना आए। यह आप के लिए सही नहीं है, और इस के कारण आप के अन्य लोगों के साथ संबंध खराब हो सकते हैं।
- हल्की-हल्की साँसें लेकर, खुद को शांत रखने में मदद करें। बस एक ही बात याद रखें कि हर एक चीज़ ठीक हो जाएगी। और आप इसे कर सकते हैं!
- अच्छी ग्रेड के बारे में सोचना बंद कर दें। आप को अपना सारा ध्यान सीखने पर केंद्रित करना चाहिए, आप की ग्रेड खुद-ब-खुद ठीक हो जाएगी। याद रखें कि ग्रेड से ज़्यादा ज्ञान मायने रखता है।
5चीज़ों को हर किसी के लिए मजेदार बना देंः जब भी आप कक्षा में हों तो उत्साही और सकारात्मक बने रहें। सीखने का उत्साह हर किसी को सीखने के लिए और भी प्रेरित करता है। जब तक आप अपने मन किसी चीज़ को सीखने की इच्छा जाहिर नहीं करेंगे, तब तक आप कुछ भी नहीं सीख पाएँगे।
- जैसे कि, आप की कक्षा में ग्रहों के बारे में सिखाया जा रहा है, तो अपने मनपसंद ग्रह की तस्वीर कक्षा में लेकर जाएँ, और वहाँ मौजूद लोगों से भी ऐसा ही करने का कहें।
6वास्तविक बने रहें! सब से ज़रूरी है, कि आप जैसे भी हैं, वैसे ही बने रहें। यदि आप किसी और की तरह बर्ताव कर रहे हैं, तो कभी भी एक अच्छा इंसान नहीं बन सकते। जो भी चीज़ें आप को खुश करे वही करें। अपनी पसंद की चीज़ों को बाँटें। ऐसे लोगों के साथ दोस्ती करें, जो आप को अपने लिए अच्छा महसूस कराते हो। दूसरे लोग क्या सोचते हैं, उस की चिंता ना करें। सच्चाई यही है, आज से कुछ सालों बाद आप को इन में से किसी एक के नाम भी याद नहीं रह जाएँगे। यदि उन को ऐसा नहीं लगता कि आप एक अच्छे व्यक्ति हैं, तो फिर तो ये आप को बिल्कुल भी याद नहीं रख पाएँगे। आप को कुछ याद रहेगा तो वो यही कि, आप को जो कुछ भी खुशी दे सकता था, आप वो नही कर पाए।
विधि 3 का 3:
1शिष्ट बनेंः यदि आप अपने शिक्षक को खुश करना चाहते हैं, तो शिष्टता के साथ ही उस की शुरुआत करें। विशेष रूप से जब अन्य छात्र अशिष्ट हों, तो आप उन सब से अलग दिखेंगे और बहुत ही जल्दी अपने शिक्षकों की नज़र में आएँगे। आप कुछ इस तरह की चीज़ें कर सकते हैंः
- विध्वंशक ना बनें। जब आप के शिक्षक कक्षा में मौजूद हों और कुछ बोल रहे हों, तो अन्य लोगों को नोट्स देकर, उन के साथ बातें कर के या फिर मज़ाक कर के उन्हें परेशान ना करें।
- हर चीज़ समय पर (या उस से पहले) करें और उनकी एक भी क्लास ना छोड़ें।
- उन से बात करते वक़्त सभ्य रहें। उन्हें "मेडम (mam) या सर (sir)" कह कर पुकारें और हर बात में कृपया और धन्यवाद जैसे शब्दों का प्रयोग करें। इस तरह के शब्दों का प्रयोग करते वक़्त गंभीरता दिखाएँ नहीं तो उन को ऐसा लगेगा कि आप उन का मज़ाक बना रहे हैं।
2सवाल करेंः जब छात्र अपने शिक्षक से प्रश्न करते हैं, तो उन्हें अच्छा लगता है। इस के पीछे के कुछ कारण भी हैं। सब से पहले, इस से उन्हें यह महसूस होगा कि आप उन की बातों पर ध्यान दे रहे हैं। दूसरी ओर, इस से उन्हें ऐसा लगेगा, कि आप को उन की बातों में दिलचस्पी है और आप मज़े से उस विषय के बारे में सुन रहे हैं। हर किसी स्मार्ट होना और मददगार होना अच्छा लगता है। जब आप के पास कोई सवाल हो, तो उन से सवाल करें और देखें कैसे आप के शिक्षक आप को पसंद करने लगते हैं।
- उदाहरण के लिए, यदि आप के शिक्षक केमिस्ट्री के एवोगेड्रो (Avogadro's) नंबर की बात कर रहे हैं, तो उन से पूछें कि इन संख्याओं को किस तरह से याद कर सकते हैं।
- उन से कुछ बेमतलब के सवाल ना करें। यदि आप के पास पूछने लायक कोई भी सवाल ना हो, तो ज़रूरी नहीं है कि आप कुछ भी फालतू के प्रश्न करने लगें। आख़िर में आप अपने शिक्षक को परेशान कर देंगे और उन्हें लगने लगेगा कि आप ये सब सिर्फ़ उन का ध्यान आकर्षित करने के लिए कर रहे हैं।
3मदद के लिए पूछेंः आप को ऐसा लग सकता है, कि आप के शिक्षक से मदद माँगने पर वे गुस्सा हो जाएँगे, और इस तरह से आप बेवकूफ़ साबित होंगे। ऐसा बिल्कुल भी नहीं है, आप यदि बेवकूफ़ ना लगने के डर से सवाल पूछना ही छोड़ देंगे तो आप कभी भी आगे नहीं बढ़ पाएँगे। मदद के लिए पूछकर, आप अपने शिक्षक की नज़रों में स्मार्ट लगने लगेंगे और इस से उन्हें खुशी ही महसूस होगी। जब आप सवाल करेंगे, तो आप के शिक्षक को यह बात समझ आएगी कि आप अच्छी तरह से मेहनत करेंगे और उन की पढ़ाई हुई बातों पर और भी ध्यान देने लगेंगे। यदि आप आगे आकर उन से मदद माँगेंगे, तो इस से उन्हें गर्व ही महसूस होगा।
- उदाहरण के लिए, यदि कुछ ही हफ्तों में आप की गणित की परीक्षा आने वाली है, और आप को किसी सवाल को हल करने में समस्या हो रही है, तो अपने शिक्षक के पास में जाकर उसे हल करने में मदद माँगें। और जब तक आप को अच्छे से समझ ना आ जाए, तब तक उन से पूछते रहें।
- कुछ इस तरह से बोलें, कि " सर, मुझे यह सवाल हल करने में परेशानी हो रही है। क्या आप मुझे लंच में मिल कर इसे अलग तरीके से हल करना सिखा सकते हैं?"
4एक मददगार छात्र बनेंः एक ऐसे छात्र बनें जो हर समय सिर्फ़ किसी ना किसी उलझन में ही ना बने रहे, बल्कि कभी-कभी दूसरों की मदद भी करने को तैयार रहे। इस का तात्पर्य एक ऐसा छात्र बनने से है जो किसी सवाल को हल करने में अन्य छात्रों की मदद कर सके। उदाहरण के लिएः
- हर समय (असभ्य हुए बिना) कक्षा के नियमों का पालन करने की याद दिलाएँ।
- यदि झगड़ा चल रहा हो, तो जल्दी से किसी शिक्षक को लेकर आएँ या फिर झगड़ा बंद कराएँ, या फिर परिस्थिति के अनुसार जो सही समझ आए वही करें।
- अपने शिक्षक के पेपर्स, कुछ सामान ले जाकर या फिर किसी छात्र के सवाल में उन की मदद कर के या आप को जो भी उचित लगे, कर के उन की मदद करें।
- किसी समस्या का समाधान निकालने के लिए अपने सहपाठियों की मदद करें।
5अपने काम में हमेशा शीर्ष पर रहेंः अपना होमवर्क समय पर करें। परीक्षा के कुछ हफ्ते पहले कुछ गाइड ले कर आएँ, और किसी से मदद के लिए पूछें। नोट्स लेकर आएँ। जब आप के शिक्षक आप की इस कड़ी मेहनत को देखेंगे, तो भले ही आप को बहुत अच्छे अंक ना मिलें, लेकिन फिर भी वे आप को पसंद करेंगे।
- शर्माएँ नहीं। जब भी आप के शिक्षक, कक्षा में कोई सवाल करें, तो इस अवसर का लाभ उठाकर, सब से पहले सवाल का जवाब दें, भले ही आप को उस का सही जवाब ना मालूम हो, लेकिन फिर भी जवाब दें। आप के शिक्षक आप के आत्मविश्वास को देखेंगे और इस तरह से आप शीर्ष के छात्र बनने की तरफ अपने कदम आगे बढ़ा पाएँगे।
- परीक्षा के समय खुद को शांत रखें। बेचैन होने से आप याद किए गए पाठ भूल सकते हैं। रात को पूरी नींद लें और परीक्षा के पहले अच्छा नाश्ता करें।
- सलीके से रहें। अपने होमवर्क को सलीके से करें, अपने फोल्डर को सलीके से रखें। इस तरह से आप को अपनी चीज़ें सही जगह पर व्यवस्थित रखने में मदद मिलेगी।
- जब आप घर वापस आएँ, तो कक्षा में किए गए हर एक कार्य पर नज़र डालें। इस तरह से आप को कक्षा में किए गए हर एक कार्य का अवलोकन करने में मदद होगी।
- यदि संभव हो, तो अगले दिन कक्षा में पढ़ाए जाने वाले पाठ को भी रात में ही पढ़ लें। इस तरह से आप को कक्षा में उस पाठ पर ध्यान केंद्रित करने में मदद होगी।
- हर दिन स्कूल से वापस आकर, थोड़ा पढ़ाई ज़रूर करें, ताकि परीक्षा के समय भी आप को रात भर पढ़ाई करने की बजाय, हर रोज़ जितनी ही पढ़ाई करनी पड़े।
- कक्षा में बताए गई सब से ज़रूरी बातों को, कक्षा के ख़त्म होने के बाद एक बार और दोहरा लें, इस तरह से आप ज़्यादा समय तक इन बातों को याद रख पाएँगे।
- आप जो भी पाना चाहते थे, उसे पाने के बाद - जैसे, परीक्षा में सब से ज़्यादा अंक पाना - अपने इस परिश्रम के लिए खुद को पुरस्कृत करना ना भूलें।
- केंद्रित रहें और ऐसे लोगों की ओर ध्यान ना दें, जो आप का मज़ाक बनाते हों। यदि आप स्कूल में कुछ अच्छा करना चाहते हैं, तो इस के लिए आप को शर्मिंदा होने की ज़रूरत नहीं है।
- सच में मददगार छात्र होने में और अति-उत्साही छात्र होने में बहुत फ़र्क है। अन्य लोगों को भी अपने शिक्षक की मदद करने का मौका दें।
- खुद को काम के बोझ के नीचे ना दबा दें। जीवन में सिर्फ़ स्कूल ही मायने नहीं रखता! ये बात ना भूलें कि आप एक इंसान हैं।
- यदि आप नकल कर रहे हैं, तो आप के पकड़े जाने की पूरी उम्मीद है, और यदि आप के शिक्षक ने आप को नकल करते हुए देख लिया, तो वो आप के लिए अपने विचारों को बदल लेंगे।
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| विकीहाउ एक "विकी" है जिसका मतलब होता है कि यहाँ एक आर्टिकल कई सहायक लेखकों द्वारा लिखा गया है। इस आर्टिकल को पूरा करने में और इसकी गुणवत्ता को सुधारने में समय समय पर, एक सौ इकतीस लोगों ने और कुछ गुमनाम लोगों ने कार्य किया। विकीहाउ एक "विकी" है जिसका मतलब होता है कि यहाँ एक आर्टिकल कई सहायक लेखकों द्वारा लिखा गया है। इस आर्टिकल को पूरा करने में और इसकी गुणवत्ता को सुधारने में समय समय पर, एक सौ इकतीस लोगों ने और कुछ गुमनाम लोगों ने कार्य किया। यह आर्टिकल चौदह,नौ सौ तिरेसठ बार देखा गया है। क्या आप अपने शिक्षक को खुश करना चाहते हैं? आप में से हर कोई अपने स्कूल के दिनों में ऐसा करना चाहता होगा। आप के सर्वश्रेष्ठ छात्र बनने के पीछे जो भी कारण हो, उस के लिए ऐसे बहुत सारे तरीके हैं, जिन से आप खुद को बेहतर बना सकें। एक अच्छा छात्र बनना मतलब, कक्षा में अच्छी श्रेणी हासिल करना ही नहीं, इस के साथ-साथ एक अच्छा इंसान बनना और अपने शिक्षक को दर्शाना कि आप अपनी कक्षा को गंभीरता से ले रहे हैं। विधि एक का तीन: एकअपने मस्तिष्क को और अपने शरीर को, सीखने के लिए तैयार करेंः यदि आप का शरीर सीखने के लिए तैयार रहेगा, तो आप हर चीज़ अच्छे से सीखकर स्कूल में अच्छा समय बिता पाएँगे! अपने शरीर को तैयार करने के लिए बहुत सारे तरीके मौजूद है। इन का अभ्यास करेंः - अच्छी नींद लें। यदि आप चाहते हैं कि आप का दिमाग़ सही तरह से काम करे, तो इस के लिए आप को अपनी नींद पूरी करने की ज़रूरत है। आप को सारा दिन चौकन्ना रहना होगा। यदि आप की आँखें लंच के बाद खुद-ब-खुद बंद होने लगें, तो इस का अर्थ यही निकलता है कि आप की नींद पूरी नहीं हुई है। अधिकांश लोगों के लिए, आठ घंटाटे की नींद की ज़रूरत होती है। - यदि आप सारा दिन सिर्फ़ जंक फूड खाते हैं, तो आप का शरीर सही तरीके से काम नहीं कर पाएगा। यदि आप सर्वश्रेष्ठ छात्र बनना चाहते हैं, तो आप बन सकते हैं, और ऐसा करने में, हरी सब्जियाँ, घर का बना खाना और फल आप को सहायता भी प्रदान करेंगे। - भरपूर मात्रा में पानी पिया करें। आप के दिमाग़ को अच्छी तरह से काम करने के लिए पानी की ज़रूरत होती है। आप का शरीर भी अच्छी तरह काम करने के लिए पानी चाहता है। दिनभर में बहुत सारा पानी पिएँ, लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि कुछ लोगों को अन्य लोगों की तुलना में ज़्यादा पानी की ज़रूरत होती है। यदि आप के मूत्र का रंग गाढ़ा है, तो इस का यही अर्थ समझें कि आप को ज़्यादा पानी पीने की ज़रूरत है, और वहीं यदि इस का रंग साफ है, तो इस का अर्थ यह अतिरिक्त पानी है। दोजो आप के लिए काम करे, उसी तरीके से सीखेंः हर कोई अपने-अपने तरीकों से सीखता है; इसे ही सीखने का तरीका कहा जाता है।[एक] X रिसर्च सोर्स एक ऐसे तरीके की तलाश करें, जो आप के काम आए और फिर उसी तरीके से सीखने की कोशिश करें। इस में कोई शक नहीं कि आप अपने घर पर ही सब से अच्छे से पढ़ाई कर सकते हैं, लेकिन अपने शिक्षक से बात कर के आप उन्हें कुछ ऐसे तरीकों का उपयोग करने के लिए मना सकते हैं, जो हर किसी के काम आए। - उदाहरण के लिए, आप ने शायद कभी गौर किया होगा, कि आप के लिए चार्ट्स या पिक्चर्स को याद रखना कितना आसान रहता है। इस का मतलब यह है, कि आप शायद दृश्यों के माध्यम से अच्छी तरह पढ़ पाते हैं, तो आप को अपनी पढ़ाई में ज़्यादा से ज़्यादा दृश्यों या चित्रों का प्रयोग करना चाहिए। उदाहरण के लिए, आप जिस भी चीज़ को याद करना चाहते हैं, उसे छोटे-छोटे भागों में एक चार्ट पर बना लें। - हो सकता है कि आप म्यूज़िक सुनते हुए अच्छी तरह से पढ़ाई कर पाते हैं या फिर आप के शिक्षक के द्वारा बोर्ड पर लिखी गई बातें आप याद ना रख पाते हों लेकिन उन के द्वारा कही गई बातों को याद रखना आप के लिए आसान लगता हो, इस का यही अर्थ निकलता है कि आप सुनकर सीखने वाले विद्यार्थी हैं और आप किसी बात को सुनकर ज़्यादा अच्छे से सीख सकते हैं। उदाहरण के लिए आप अपने शिक्षक की बातों को रिकॉर्ड कर सकते हैं, ताकि होमवर्क करते वक़्त आप इन्हें सुनकर कुछ बेहतर कर पाएँ। - हो सकता है किसी क्लास के वक़्त आप को ऐसा महसूस हो, कि आप उस पर ध्यान देना चाहते हैं, लेकिन अभी आप को सच में खड़े हो जाना चाहिए या फिर यहाँ वहाँ घूमना शुरू कर देना चाहिए। हो सकता है आप कमरे में घूम-घूम कर पढ़ाई करते हों। तो इस का अर्थ यही निकलता है, कि आप गति के साथ सीखना पसंद करते हैं, जिस का मतलब आप किसी चीज़ को तब और भी अच्छे से सीख पाते हैं, जब आप का शरीर गति में होता है। इस के लिए जब आप के शिक्षक आप को पढ़ाएँ तो आप अपने हाथ में मिट्टी के टुकड़ों के साथ खेल करते रहें, इस तरह से आप का शरीर गति में रहेगा। तीनध्यान देंः आप को कक्षा में अपनी श्रेणी को सुधारने के लिए और भी ज़्यादा सीखने के लिए, शिक्षक के द्वारा कही जाने वाली बातों पर ध्यान देना चाहिए। यदि आप विचलित हो जाते हैं, तो आप कुछ महत्वपूर्ण जानकारी को छोड़ देंगे और बाद में किस बात को सुनें और किस पर ध्यान लगाएँ यह समझ पाना, आप के लिए और भी कठिन हो जाएगा। - यदि आप को अपने शिक्षक की बातों में ध्यान लगाने में परेशानी हो रही है, तो कक्षा में सबसे आगे बैठने और कक्षा में ज़्यादा शामिल रहने की कोशिश करें। जब आप के शिक्षक कुछ बहुत ही दिलचस्प बात बताते हैं, और आप उस बारे में और भी जानकारी पाना चाहते हैं, तो अपना हाथ उठाएँ और उन से सवाल करें। चारनोट्स बनाना सीखेंः नोट्स बनाना थोड़ा सा कठिन हो सकता है, लेकिन इस के ज़रिए आप को पढ़ाई करना और भी आसान लगने लगेगा, जिस का अर्थ आप की श्रेणी और बेहतर हो जाएगी और आप के परीक्षा के परिणाम में भी सुधार आएगा। ध्यान रखें, आप को आप के शिक्षक के द्वारा बोली गई हर एक बात को लिखने की ज़रूरत नहीं है। सिर्फ़ ऐसी कुछ महत्वपूर्ण बातों को ही लिखें, जिन्हें बाद में याद रख सकने में आप को तकलीफ़ हो। पाँचसमय पर और अच्छी तरह से अपना होमवर्क करेंः भले ही आप को अपने होमवर्क में अच्छी ग्रेड नहीं मिलती, लेकिन इसे समय पर और अच्छी तरह से पूरा कर के आप को अपनी ग्रेड को सुधारने में मदद ज़रूर मिलेगी। और आप अपने होमवर्क को जितना अच्छा से कर सकें, करें। जब आप को कुछ समझ ना आ रहा हो, तो किसी से मदद माँगें! आप के शिक्षक ही ट्यूटर की तरह आप को मदद कर सकते हैं या फिर अगले दिन कक्षा में उन के पास जाकर पूछें। - अपने होमवर्क को पूरा करने के लिए पर्याप्त समय दें। इस का यह अर्थ भी हो सकता है, कि टीवी कम देखें और अपने दोस्तों के साथ कम समय बिताएँ। - होमवर्क करने के लिए अच्छा माहौल मिलना, आप को इसे पूरा करने में मदद करेगा। किसी ऐसी शांत जगह पर जाएँ, जहाँ पर आप को कोई भी विचलित ना कर पाए। यदि आप किसी लाइब्रेरी जा सकते हैं, तो यह और भी बेहतर स्थान होगा। यदि आप के घर में बहुत शोरगुल हो रहा है और आप कहीं बाहर नहीं जा सकते हैं, तो घर की छत पर जाएँ या फिर बाथरूम में जाकर होमवर्क करें। छःसीखने के लिए अलग-अलग तरीकों को ढूँढेंः कक्षा में ना पढ़ाई गई चीज़ों की पहले से ही जानकारी, आप को आगे के लिए तो तैयार करेगी ही, साथ ही आप के शिक्षक को भी प्रभावित करेगी। कुछ दिलचस्प तरीकों के साथ में की गई पढ़ाई आप को ज़्यादा समय तक याद रहती है। तो अपने सारे विषयों को पढ़ने के लिए ऐसे ही कुछ तरीकों को खोजें, जिन से आप अपना ध्यान और भी ज़्यादा केंद्रित कर के पढ़ाई कर सकें। और इस तरह से आप अपनी कक्षा में और भी सफलता प्राप्त कर पाएँगे। - उदाहरण के लिए, यदि आप भारतीय इतिहास के बारे में पढ़ रहे हैं, तो इस विषय पर ऑनलाइन मौजूद डॉक्युमेंट्स को देख कर आप इस से और भी ज़्यादा सीख सकते हैं। - आप किसी भी विषय के बारे में अपने आसपास मौजूद लाइब्रेरी से किताबें लेकर भी पढ़ाई कर सकते हैं, लेकिन आप ऑनलाइन जाकर और भी ज़्यादा जानकारी पा सकते हैं। हालाँकि, Wikipedia हर समय ही सही नहीं होती, लेकिन फिर भी इस पर से अच्छी जानकारी प्राप्त हो जाती है। आप यूट्यूब पर वीडियो देख कर भी जानकारी पा सकते हैं। - जब आप का स्कूल बंद हो, तब भी कुछ ना कुछ सीखे। गर्मी की छुट्टियों में, सप्ताहांत में भी पढ़ाई करते रहें और अगले साल की पढ़ाई की सामग्री उपलब्ध होने के फ़ौरन बाद ही पढ़ाई करना शुरू कर दें। जैसे गर्मी की छुट्टी में, पहले से की हुई पढ़ाई को कुछ समय के लिए दोहराने से और आने वाले सेशन की पढ़ाई करने से, जैसे कि आप पहले से ही बहुत कुछ जानकारी पा चुके हैं तो, आप स्कूल के शुरू होते ही आश्वस्त महसूस करेंगे। सातजल्दी पढ़ना शुरू करेंः परीक्षा में अच्छे अंक पाने का सब से अच्छा तरीका है, कि आप परीक्षा के लिए जितना भी जल्दी हो सके पढ़ाई शुरू कर दें। निश्चित रूप से इसे आख़िरी रात के लिए ना छोड़ दें। दो या तीन हफ्ते पहले से पढ़ाई की शुरुआत कर देना आप के लिए बेहतर होगा। - परीक्षा में आने वाले संभावित प्रश्नों को लिख लें और इम्पोर्टेन्ट पॉइंट्स के नोट्स बना लें। परीक्षा की सुबह थोड़ा जल्दी उठने की कोशिश करें और पढ़ाई के दौरान आपके द्वारा बनाए गए नोट्स को एक बार ध्यान से पढ़ लें। इन नोट्स को आखिर में एक बार पढ़ने से आप सभी जरूरी पॉइंट्स को रिवाइज़ कर सकते हैं। परीक्षा जितनी कठिन होगी, आपको उतनी ही जल्दी पढ़ाई शुरू कर देनी चाहिए। दो या तीन सप्ताह आमतौर पर एक अच्छा स्टार्टिंग पॉइंट होता है। विधि दो का तीन: एकलोगों को अच्छा महसूस कराएँः अच्छा छात्र होना, अच्छी ग्रेड पाने से भी ज़्यादा कुछ है। आप को एक अच्छा इंसान बनने के लिए हमेशा कुछ ना कुछ करते रहना चाहिए। आप एक बुली या कक्षा का एक बिगड़ा हुआ छात्र तो नहीं बनना चाहेंगे, और यह आप को सर्वश्रेष्ठ छात्र भी नहीं बना देगा। लोगों के साथ अच्छा व्यवहार करें। किसी को भी परेशान ना करें और ना ही उन्हें कुछ ऐसा कहें जिस से उन्हें दुख पहुँचे। दोहर किसी की सहायता करेंः जब भी आप किसी की मदद कर सकें, तो ऐसा कर के एक अच्छे इंसान बनें। यदि आप को कुछ करते आता है या फिर आप को किसी चीज़ को करने का बेहतर तरीका पता है, तो लोगों को भी समझाएँ। ऐसा करते वक़्त खुद को उन से बेहतर या स्मार्ट ना दिखाएँ, सिर्फ़ अच्छे और मित्रता के भाव से समझाएँ। आप और भी बहुत सारी चीज़ें कर सकते हैं, जैसे किसी भारी सामान को उठाते वक़्त उन की मदद करें। - उदाहरण के लिए, यदि कोई कुछ दिन के लिए बाहर गया है, तो उस के वापस आने के बाद उसे अपने नोट्स दें। तीनलोगों का सम्मान करें, भले ही वे आप के साथ ग़लत व्यवहार करेंः जब लोग आप के साथ बुरा व्यवहार करें, तब भी आप उन के प्रति सम्मान दिखाएँ। उन पर चिल्लाएँ नहीं और ना ही उन को शारीरिक कष्ट दें। उन की ओर ज़्यादा ध्यान ना दें और उन से भी उसी तरह का बर्ताव रखें, जिस तरह का, आप अन्य लोगों के साथ रखते हैं। - लोगों के प्रति सम्मान दिखाएँ। भले ही उन के विचार आप से कुछ अलग हों, लेकिन फिर भी उन का सम्मान करें। लोगों को उन के अलग तरह के होने के कारण उन्हें बुरा महसूस ना कराएँ, उन्हें उन के जैसे रहने दें, हर एक इंसान के अपने अलग विचार होते हैं। चारशांत रहेंः जब आप कक्षा में हों, तो जितना ज़्यादा हो सके शांत रहें। यहाँ-वहाँ भागकर लोगों को तंग ना करें। स्कूल की परेशानियों को ले कर तनाव में ना आए। यह आप के लिए सही नहीं है, और इस के कारण आप के अन्य लोगों के साथ संबंध खराब हो सकते हैं। - हल्की-हल्की साँसें लेकर, खुद को शांत रखने में मदद करें। बस एक ही बात याद रखें कि हर एक चीज़ ठीक हो जाएगी। और आप इसे कर सकते हैं! - अच्छी ग्रेड के बारे में सोचना बंद कर दें। आप को अपना सारा ध्यान सीखने पर केंद्रित करना चाहिए, आप की ग्रेड खुद-ब-खुद ठीक हो जाएगी। याद रखें कि ग्रेड से ज़्यादा ज्ञान मायने रखता है। पाँचचीज़ों को हर किसी के लिए मजेदार बना देंः जब भी आप कक्षा में हों तो उत्साही और सकारात्मक बने रहें। सीखने का उत्साह हर किसी को सीखने के लिए और भी प्रेरित करता है। जब तक आप अपने मन किसी चीज़ को सीखने की इच्छा जाहिर नहीं करेंगे, तब तक आप कुछ भी नहीं सीख पाएँगे। - जैसे कि, आप की कक्षा में ग्रहों के बारे में सिखाया जा रहा है, तो अपने मनपसंद ग्रह की तस्वीर कक्षा में लेकर जाएँ, और वहाँ मौजूद लोगों से भी ऐसा ही करने का कहें। छःवास्तविक बने रहें! सब से ज़रूरी है, कि आप जैसे भी हैं, वैसे ही बने रहें। यदि आप किसी और की तरह बर्ताव कर रहे हैं, तो कभी भी एक अच्छा इंसान नहीं बन सकते। जो भी चीज़ें आप को खुश करे वही करें। अपनी पसंद की चीज़ों को बाँटें। ऐसे लोगों के साथ दोस्ती करें, जो आप को अपने लिए अच्छा महसूस कराते हो। दूसरे लोग क्या सोचते हैं, उस की चिंता ना करें। सच्चाई यही है, आज से कुछ सालों बाद आप को इन में से किसी एक के नाम भी याद नहीं रह जाएँगे। यदि उन को ऐसा नहीं लगता कि आप एक अच्छे व्यक्ति हैं, तो फिर तो ये आप को बिल्कुल भी याद नहीं रख पाएँगे। आप को कुछ याद रहेगा तो वो यही कि, आप को जो कुछ भी खुशी दे सकता था, आप वो नही कर पाए। विधि तीन का तीन: एकशिष्ट बनेंः यदि आप अपने शिक्षक को खुश करना चाहते हैं, तो शिष्टता के साथ ही उस की शुरुआत करें। विशेष रूप से जब अन्य छात्र अशिष्ट हों, तो आप उन सब से अलग दिखेंगे और बहुत ही जल्दी अपने शिक्षकों की नज़र में आएँगे। आप कुछ इस तरह की चीज़ें कर सकते हैंः - विध्वंशक ना बनें। जब आप के शिक्षक कक्षा में मौजूद हों और कुछ बोल रहे हों, तो अन्य लोगों को नोट्स देकर, उन के साथ बातें कर के या फिर मज़ाक कर के उन्हें परेशान ना करें। - हर चीज़ समय पर करें और उनकी एक भी क्लास ना छोड़ें। - उन से बात करते वक़्त सभ्य रहें। उन्हें "मेडम या सर " कह कर पुकारें और हर बात में कृपया और धन्यवाद जैसे शब्दों का प्रयोग करें। इस तरह के शब्दों का प्रयोग करते वक़्त गंभीरता दिखाएँ नहीं तो उन को ऐसा लगेगा कि आप उन का मज़ाक बना रहे हैं। दोसवाल करेंः जब छात्र अपने शिक्षक से प्रश्न करते हैं, तो उन्हें अच्छा लगता है। इस के पीछे के कुछ कारण भी हैं। सब से पहले, इस से उन्हें यह महसूस होगा कि आप उन की बातों पर ध्यान दे रहे हैं। दूसरी ओर, इस से उन्हें ऐसा लगेगा, कि आप को उन की बातों में दिलचस्पी है और आप मज़े से उस विषय के बारे में सुन रहे हैं। हर किसी स्मार्ट होना और मददगार होना अच्छा लगता है। जब आप के पास कोई सवाल हो, तो उन से सवाल करें और देखें कैसे आप के शिक्षक आप को पसंद करने लगते हैं। - उदाहरण के लिए, यदि आप के शिक्षक केमिस्ट्री के एवोगेड्रो नंबर की बात कर रहे हैं, तो उन से पूछें कि इन संख्याओं को किस तरह से याद कर सकते हैं। - उन से कुछ बेमतलब के सवाल ना करें। यदि आप के पास पूछने लायक कोई भी सवाल ना हो, तो ज़रूरी नहीं है कि आप कुछ भी फालतू के प्रश्न करने लगें। आख़िर में आप अपने शिक्षक को परेशान कर देंगे और उन्हें लगने लगेगा कि आप ये सब सिर्फ़ उन का ध्यान आकर्षित करने के लिए कर रहे हैं। तीनमदद के लिए पूछेंः आप को ऐसा लग सकता है, कि आप के शिक्षक से मदद माँगने पर वे गुस्सा हो जाएँगे, और इस तरह से आप बेवकूफ़ साबित होंगे। ऐसा बिल्कुल भी नहीं है, आप यदि बेवकूफ़ ना लगने के डर से सवाल पूछना ही छोड़ देंगे तो आप कभी भी आगे नहीं बढ़ पाएँगे। मदद के लिए पूछकर, आप अपने शिक्षक की नज़रों में स्मार्ट लगने लगेंगे और इस से उन्हें खुशी ही महसूस होगी। जब आप सवाल करेंगे, तो आप के शिक्षक को यह बात समझ आएगी कि आप अच्छी तरह से मेहनत करेंगे और उन की पढ़ाई हुई बातों पर और भी ध्यान देने लगेंगे। यदि आप आगे आकर उन से मदद माँगेंगे, तो इस से उन्हें गर्व ही महसूस होगा। - उदाहरण के लिए, यदि कुछ ही हफ्तों में आप की गणित की परीक्षा आने वाली है, और आप को किसी सवाल को हल करने में समस्या हो रही है, तो अपने शिक्षक के पास में जाकर उसे हल करने में मदद माँगें। और जब तक आप को अच्छे से समझ ना आ जाए, तब तक उन से पूछते रहें। - कुछ इस तरह से बोलें, कि " सर, मुझे यह सवाल हल करने में परेशानी हो रही है। क्या आप मुझे लंच में मिल कर इसे अलग तरीके से हल करना सिखा सकते हैं?" चारएक मददगार छात्र बनेंः एक ऐसे छात्र बनें जो हर समय सिर्फ़ किसी ना किसी उलझन में ही ना बने रहे, बल्कि कभी-कभी दूसरों की मदद भी करने को तैयार रहे। इस का तात्पर्य एक ऐसा छात्र बनने से है जो किसी सवाल को हल करने में अन्य छात्रों की मदद कर सके। उदाहरण के लिएः - हर समय कक्षा के नियमों का पालन करने की याद दिलाएँ। - यदि झगड़ा चल रहा हो, तो जल्दी से किसी शिक्षक को लेकर आएँ या फिर झगड़ा बंद कराएँ, या फिर परिस्थिति के अनुसार जो सही समझ आए वही करें। - अपने शिक्षक के पेपर्स, कुछ सामान ले जाकर या फिर किसी छात्र के सवाल में उन की मदद कर के या आप को जो भी उचित लगे, कर के उन की मदद करें। - किसी समस्या का समाधान निकालने के लिए अपने सहपाठियों की मदद करें। पाँचअपने काम में हमेशा शीर्ष पर रहेंः अपना होमवर्क समय पर करें। परीक्षा के कुछ हफ्ते पहले कुछ गाइड ले कर आएँ, और किसी से मदद के लिए पूछें। नोट्स लेकर आएँ। जब आप के शिक्षक आप की इस कड़ी मेहनत को देखेंगे, तो भले ही आप को बहुत अच्छे अंक ना मिलें, लेकिन फिर भी वे आप को पसंद करेंगे। - शर्माएँ नहीं। जब भी आप के शिक्षक, कक्षा में कोई सवाल करें, तो इस अवसर का लाभ उठाकर, सब से पहले सवाल का जवाब दें, भले ही आप को उस का सही जवाब ना मालूम हो, लेकिन फिर भी जवाब दें। आप के शिक्षक आप के आत्मविश्वास को देखेंगे और इस तरह से आप शीर्ष के छात्र बनने की तरफ अपने कदम आगे बढ़ा पाएँगे। - परीक्षा के समय खुद को शांत रखें। बेचैन होने से आप याद किए गए पाठ भूल सकते हैं। रात को पूरी नींद लें और परीक्षा के पहले अच्छा नाश्ता करें। - सलीके से रहें। अपने होमवर्क को सलीके से करें, अपने फोल्डर को सलीके से रखें। इस तरह से आप को अपनी चीज़ें सही जगह पर व्यवस्थित रखने में मदद मिलेगी। - जब आप घर वापस आएँ, तो कक्षा में किए गए हर एक कार्य पर नज़र डालें। इस तरह से आप को कक्षा में किए गए हर एक कार्य का अवलोकन करने में मदद होगी। - यदि संभव हो, तो अगले दिन कक्षा में पढ़ाए जाने वाले पाठ को भी रात में ही पढ़ लें। इस तरह से आप को कक्षा में उस पाठ पर ध्यान केंद्रित करने में मदद होगी। - हर दिन स्कूल से वापस आकर, थोड़ा पढ़ाई ज़रूर करें, ताकि परीक्षा के समय भी आप को रात भर पढ़ाई करने की बजाय, हर रोज़ जितनी ही पढ़ाई करनी पड़े। - कक्षा में बताए गई सब से ज़रूरी बातों को, कक्षा के ख़त्म होने के बाद एक बार और दोहरा लें, इस तरह से आप ज़्यादा समय तक इन बातों को याद रख पाएँगे। - आप जो भी पाना चाहते थे, उसे पाने के बाद - जैसे, परीक्षा में सब से ज़्यादा अंक पाना - अपने इस परिश्रम के लिए खुद को पुरस्कृत करना ना भूलें। - केंद्रित रहें और ऐसे लोगों की ओर ध्यान ना दें, जो आप का मज़ाक बनाते हों। यदि आप स्कूल में कुछ अच्छा करना चाहते हैं, तो इस के लिए आप को शर्मिंदा होने की ज़रूरत नहीं है। - सच में मददगार छात्र होने में और अति-उत्साही छात्र होने में बहुत फ़र्क है। अन्य लोगों को भी अपने शिक्षक की मदद करने का मौका दें। - खुद को काम के बोझ के नीचे ना दबा दें। जीवन में सिर्फ़ स्कूल ही मायने नहीं रखता! ये बात ना भूलें कि आप एक इंसान हैं। - यदि आप नकल कर रहे हैं, तो आप के पकड़े जाने की पूरी उम्मीद है, और यदि आप के शिक्षक ने आप को नकल करते हुए देख लिया, तो वो आप के लिए अपने विचारों को बदल लेंगे। सभी लेखकों को यह पृष्ठ बनाने के लिए धन्यवाद दें जो चौदह,नौ सौ तिरेसठ बार पढ़ा गया है। |
जगदलपुर, (ब्यूरो छत्तीसगढ़)। स्कूलों में जाति पमाण-पत्र बनाने का काम पूरा न होने के कारण आरक्षित वर्ग के विद्यार्थियों को भटकना पड़ रहा है। विद्यार्थियों के परिजन भी पमाण-पत्र के लिए आवश्यक अभिलेख जूटाने मशक्कत करते हुए पटवारी के कार्यालय से लेकर तहसील और कलेक्टेट के चक्कर लगाते दिखाई दे रहे है। 3 साल पहले शुरु हुई अनुसूचित जाति जनजाति तथा अन्य आरक्षित विद्यार्थियों को आय, निवास और जाति पमाण पत्र बनाकर देने की योजना इस बार पूरे पदेश में लागू हुई है तथा इन पमाण पत्रों के लिए विशेष शिविर लगाये जाने की योजना भी केवल घोषणा बनक रह गयी है। इस काम में सबसे बड़ी बाधा राजस्व अमले का असहयोग करना है जाति, आय व निवास बनाने का जिम्मा संबंधित स्कूल के पाचार्य व पधान अध्यापकों को सौपा गया है लेकिन इन्हें भी पटवारियों के पीछे घूमना पड़ रहा है। राजस्व अधिकारियों का सहयोग न मिलने से इसका खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। पिछले दिनों जिलाध्यक्ष कार्यालय में हुई एक बैठक में अपैल तक जाति पमाण-पत्र उपलब्ध करवाये जाने का निर्देश दिया गया था। जिसके पहले चरण में 12वीं और दूसरे चरण में 10वीं के विद्यार्थियों को पमाण-पत्र दिया जाना था तथा इसके अलावा 9वीं से 12वीं तक अध्ययनरत आरक्षित वर्ग के सभी विद्यार्थियों को आय, जाति और निवास पमाण-पत्र बनवाकर संबंधित स्कूल की ओर से उन्हें दिया जाना था। जिससे उन्हें आगे की पढ़ाई व अन्य कार्य के लिए पमाण-पत्र के अभाव में वंचित न होना पडेक्व। इसकी जिम्मेदारी आदिवासी विकास विभाग को सौपी गयी थी। इसके तहत दिसंबर 2011 तक सभी विद्यार्थियें को छानबीन समिति से सत्यापन करवाने के बाद पमाण-पत्र दिया जाना था। सभी बीईओ के माध्यम से विद्यार्थियों से आवश्यक अभिलेखों के साथ इसे तहसील और वहां से अनुविभागीय अधिकारी को भेजा जाएगा।
| जगदलपुर, । स्कूलों में जाति पमाण-पत्र बनाने का काम पूरा न होने के कारण आरक्षित वर्ग के विद्यार्थियों को भटकना पड़ रहा है। विद्यार्थियों के परिजन भी पमाण-पत्र के लिए आवश्यक अभिलेख जूटाने मशक्कत करते हुए पटवारी के कार्यालय से लेकर तहसील और कलेक्टेट के चक्कर लगाते दिखाई दे रहे है। तीन साल पहले शुरु हुई अनुसूचित जाति जनजाति तथा अन्य आरक्षित विद्यार्थियों को आय, निवास और जाति पमाण पत्र बनाकर देने की योजना इस बार पूरे पदेश में लागू हुई है तथा इन पमाण पत्रों के लिए विशेष शिविर लगाये जाने की योजना भी केवल घोषणा बनक रह गयी है। इस काम में सबसे बड़ी बाधा राजस्व अमले का असहयोग करना है जाति, आय व निवास बनाने का जिम्मा संबंधित स्कूल के पाचार्य व पधान अध्यापकों को सौपा गया है लेकिन इन्हें भी पटवारियों के पीछे घूमना पड़ रहा है। राजस्व अधिकारियों का सहयोग न मिलने से इसका खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। पिछले दिनों जिलाध्यक्ष कार्यालय में हुई एक बैठक में अपैल तक जाति पमाण-पत्र उपलब्ध करवाये जाने का निर्देश दिया गया था। जिसके पहले चरण में बारहवीं और दूसरे चरण में दसवीं के विद्यार्थियों को पमाण-पत्र दिया जाना था तथा इसके अलावा नौवीं से बारहवीं तक अध्ययनरत आरक्षित वर्ग के सभी विद्यार्थियों को आय, जाति और निवास पमाण-पत्र बनवाकर संबंधित स्कूल की ओर से उन्हें दिया जाना था। जिससे उन्हें आगे की पढ़ाई व अन्य कार्य के लिए पमाण-पत्र के अभाव में वंचित न होना पडेक्व। इसकी जिम्मेदारी आदिवासी विकास विभाग को सौपी गयी थी। इसके तहत दिसंबर दो हज़ार ग्यारह तक सभी विद्यार्थियें को छानबीन समिति से सत्यापन करवाने के बाद पमाण-पत्र दिया जाना था। सभी बीईओ के माध्यम से विद्यार्थियों से आवश्यक अभिलेखों के साथ इसे तहसील और वहां से अनुविभागीय अधिकारी को भेजा जाएगा। |
Vice Presidential Polls: वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने रविवार को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ को उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए एनडीए के उम्मीदवार के रूप में नामित किए जाने पर बधाई दी। उम्मीदवार के लिए समर्थन का संकेत देते हुए, वाईएसआरसीपी सांसद विजयसाई रेड्डी ने विश्वास व्यक्त किया कि धनखड़ के नेतृत्व में, राज्यसभा और देश नई ऊंचाइयों को छुएगा। उन्होंने प्रख्यात वकील, पूर्व सांसद और राज्यपाल के रूप में धनखड़ की प्रशंसा की।
विशेष रूप से, वाईएस जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व में वाईएसआरसीपी ने पहले ही 18 जुलाई को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में राष्ट्रवादी जनतांत्रिक गठबंधन की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को समर्थन दिया है।
उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए, भाजपा ने वेंकैया नायडू की जगह पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ को मैदान में उतारा है। चुनाव 6 अगस्त को होंगे। धनखड़ के नाम को शनिवार को दिल्ली में भाजपा की संसदीय बोर्ड की बैठक में अंतिम रूप दिया गया, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित अन्य नेता और मंत्री शामिल हुए।
एनडीए के VP उम्मीदवार के रूप में धनखड़ के नाम की घोषणा करते हुए, नड्डा ने उन्हें "किसान पुत्र कहा, जिन्होंने "लोगों का राज्यपाल" बनने का रास्ता बनाया। राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र के रहने वाले धनखड़ उपराष्ट्रपति के उच्च पद पर पहुंचने वाले राज्य के दूसरे नेता होंगे। बता दें कि नीतीश कुमार ने NDA के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जगदीप धनखड़ को जद (यू) के समर्थन की घोषणा की। उपाध्यक्ष के रूप में धनखड़ का चुनाव लगभग निश्चित है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पास लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों वाले निर्वाचक मंडल में बहुमत है।
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- कौन हैं Jagdeep Dhankhar जिन्हें BJP ने बनाया है उपराष्ट्रपति उम्मीदवार?
| Vice Presidential Polls: वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने रविवार को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ को उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए एनडीए के उम्मीदवार के रूप में नामित किए जाने पर बधाई दी। उम्मीदवार के लिए समर्थन का संकेत देते हुए, वाईएसआरसीपी सांसद विजयसाई रेड्डी ने विश्वास व्यक्त किया कि धनखड़ के नेतृत्व में, राज्यसभा और देश नई ऊंचाइयों को छुएगा। उन्होंने प्रख्यात वकील, पूर्व सांसद और राज्यपाल के रूप में धनखड़ की प्रशंसा की। विशेष रूप से, वाईएस जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व में वाईएसआरसीपी ने पहले ही अट्ठारह जुलाई को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में राष्ट्रवादी जनतांत्रिक गठबंधन की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को समर्थन दिया है। उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए, भाजपा ने वेंकैया नायडू की जगह पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ को मैदान में उतारा है। चुनाव छः अगस्त को होंगे। धनखड़ के नाम को शनिवार को दिल्ली में भाजपा की संसदीय बोर्ड की बैठक में अंतिम रूप दिया गया, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित अन्य नेता और मंत्री शामिल हुए। एनडीए के VP उम्मीदवार के रूप में धनखड़ के नाम की घोषणा करते हुए, नड्डा ने उन्हें "किसान पुत्र कहा, जिन्होंने "लोगों का राज्यपाल" बनने का रास्ता बनाया। राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र के रहने वाले धनखड़ उपराष्ट्रपति के उच्च पद पर पहुंचने वाले राज्य के दूसरे नेता होंगे। बता दें कि नीतीश कुमार ने NDA के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जगदीप धनखड़ को जद के समर्थन की घोषणा की। उपाध्यक्ष के रूप में धनखड़ का चुनाव लगभग निश्चित है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी के पास लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों वाले निर्वाचक मंडल में बहुमत है। यह भी पढ़ेंः - कौन हैं Jagdeep Dhankhar जिन्हें BJP ने बनाया है उपराष्ट्रपति उम्मीदवार? |
Vlasyoids कुत्तों में एक बहुत ही लगातार एक्टोपेरासाइट है , यानी, जानवरों की त्वचा की सतह पर एक कीट जीवित है। इसे एक टिक-सूखे, पूह, कोझीड भी कहा जाता है, क्योंकि यह ऊन में होता है और कुत्ते के कणों और त्वचा की सतह परत (एपिडर्मिस) की सतह परत के तराजू पर फ़ीड करता है। Trichognotosis नामक एक खतरनाक बीमारी का कारण बनता है।
यदि कुत्तों में सूखने वाले हैं, तो लक्षण निम्नानुसार हैंः
- खुजली - कुत्ते लगातार कुछ दिनों के लिए खुजली है;
- छोटे सफेद चलने वाले अनाज के ऊन में उपस्थिति, डैंड्रफ़ के समान;
- सुस्त और tousled, जैसे कि यह एक समान रूप से कट बाल थे;
- गंजापन को पूरा करने के लिए बालों के झड़ने - पूंछ के आधार पर, अक्सर थूथन और पंजे की भीतरी सतह पर;
- alopecia की साइट पर सूजन, झुर्रियों, भूरे रंग के scabbed या scabbed त्वचा;
- वजन में कमी;
- बेचैन व्यवहार;
- ध्यान में कमी आई;
- चरित्र का परिवर्तन - कुत्ता अवज्ञाकारी और घबरा जाता है।
फ्लीस , पतंग और सूखने वाले जानवरों की कुछ संक्रामक बीमारियों के कारक एजेंट होते हैं। इसके अलावा, कुत्तों में सूखने वाले रिबन कीड़े (ककड़ी टैपवार्म) के मध्यवर्ती मेजबान होते हैं।
यदि आप जानते हैं कि एक विंप की तरह कैसे दिखना है तो पालतू जानवर को सुरक्षित करना बहुत आसान है।
Vlacoed पंख 1-2 मिमी लंबाई के बिना एक चपटा शरीर (1-2 मिमी लंबाई) है, एक फ्लैट चतुर्भुज सिर जो छाती से व्यापक है। पेट सिर और छाती संयुक्त से अधिक लंबा है।
उनके जीवन के लिए महिला बनावट ने लगभग 60 अंडे (नाइट) रखे, जो बालों की जड़ से जुड़ी हुई हैं। लगभग 2 सप्ताह के बाद, लार्वा वयस्क कीड़ों के समान दिखता है। तीन लाइनों के बाद (2-3 सप्ताह के बाद) लार्वा एक वयस्क में बदल जाता है।
जब एक कुत्ते में अनियंत्रण का पता चला, उपचार जल्द से जल्द शुरू किया जाना चाहिए। कुत्ता पूरी तरह से गंजा उड़ सकता है, और उसकी त्वचा दर्द और खुजली होगी। नतीजतन, खरोंच और abrasions हैं, जिसके माध्यम से संक्रमण हो सकता है और त्वचा रोग या एक्जिमा विकसित हो सकता है। जानवर वजन कम करता है और कमजोर हो जाता है, यह रोग को बढ़ा देता है, एनीमिया होता है।
सूखे का उपचार अपेक्षाकृत जटिल है, क्योंकि अधिकांश दवाएं परजीवी और लार्वा के अंडों को प्रभावित नहीं करती हैं, बल्कि केवल वयस्क कीड़ों को नष्ट करती हैं। इसलिए, उपचार के दौरान भी, कुत्ता फिर से संक्रमित हो सकता है। दवा को विकास के प्रत्येक चरण (नाइट, लार्वा, वयस्क) में सूखे को नष्ट करना चाहिए। वज़न के आधार पर दवा और उसकी खुराक को सही ढंग से उठाएं, साथ ही उपचार के परिणाम को नियंत्रित करने से पशुचिकित्सा में मदद मिलेगी।
इससे पहले कि आप गमी से छुटकारा पाएं, ध्यान से दवा के निर्देशों को पढ़ें और सावधानी पूर्वक उपाय पढ़ें। उनमें से कुछ यहां दिए गए हैंः
- स्प्रे का प्रयोग करें। शैम्पू का उपयोग करते समय, आपको एक बार फिर जानवर को स्नान करना होगा, और इसकी अनुशंसा नहीं की जाती है। बूंद केंद्रित हैं, इसका मतलब है कि एक और जहरीला समाधान, और ऊन से पाउडर डाला जाएगा।
- चुनी गई दवा के खुराक का निरीक्षण करना बहुत महत्वपूर्ण हैः यदि आप कम लेते हैं - इससे मदद नहीं मिलेगी, और यदि आप खुराक से अधिक हो जाते हैं - पालतू जानवर को जहर करना संभव है।
- कुत्ते की आंखों, मुंह और नाक में दवा नहीं आनी चाहिए, क्योंकि यह श्लेष्म झिल्ली की जलन पैदा कर सकती है।
कुत्तों में Vlsoedy हर जगह और साल के किसी भी समय पाए जाते हैं। यह बीमार जानवरों के साथ या बिस्तर, कॉम्ब्स, तौलिए और अन्य देखभाल वस्तुओं के संपर्क से संक्रमित हो सकता है। पिल्ले मां से संक्रमित हैं।
ट्राइडक्टक्टोसिस को रोकने के लिए यह आवश्यक हैः
- स्वच्छता के बुनियादी नियमों का निरीक्षण करें।
- नियमित रूप से पालतू जानवर का निरीक्षण करें।
- विशेष तैयारी के साथ जानवर और इसके निवास (कूड़े, बूथ, पिंजरे) के नियमित उपचार का पालन करें।
- उपयोग का मतलब है कि कीड़े को पीछे हटानाः वर्मवुड पत्तियों या खरीदे गए कीटनाशकों के सूखे पाउडर (एयरोसोल, कॉलर, कीटनाशक कॉम्ब्स)। उन्हें ऊन पर लगाया जाना चाहिए, बैग में कूड़े के नीचे रखा जाना चाहिए।
- प्रभावित और भटक गए जानवरों के संपर्क से बचें।
| Vlasyoids कुत्तों में एक बहुत ही लगातार एक्टोपेरासाइट है , यानी, जानवरों की त्वचा की सतह पर एक कीट जीवित है। इसे एक टिक-सूखे, पूह, कोझीड भी कहा जाता है, क्योंकि यह ऊन में होता है और कुत्ते के कणों और त्वचा की सतह परत की सतह परत के तराजू पर फ़ीड करता है। Trichognotosis नामक एक खतरनाक बीमारी का कारण बनता है। यदि कुत्तों में सूखने वाले हैं, तो लक्षण निम्नानुसार हैंः - खुजली - कुत्ते लगातार कुछ दिनों के लिए खुजली है; - छोटे सफेद चलने वाले अनाज के ऊन में उपस्थिति, डैंड्रफ़ के समान; - सुस्त और tousled, जैसे कि यह एक समान रूप से कट बाल थे; - गंजापन को पूरा करने के लिए बालों के झड़ने - पूंछ के आधार पर, अक्सर थूथन और पंजे की भीतरी सतह पर; - alopecia की साइट पर सूजन, झुर्रियों, भूरे रंग के scabbed या scabbed त्वचा; - वजन में कमी; - बेचैन व्यवहार; - ध्यान में कमी आई; - चरित्र का परिवर्तन - कुत्ता अवज्ञाकारी और घबरा जाता है। फ्लीस , पतंग और सूखने वाले जानवरों की कुछ संक्रामक बीमारियों के कारक एजेंट होते हैं। इसके अलावा, कुत्तों में सूखने वाले रिबन कीड़े के मध्यवर्ती मेजबान होते हैं। यदि आप जानते हैं कि एक विंप की तरह कैसे दिखना है तो पालतू जानवर को सुरक्षित करना बहुत आसान है। Vlacoed पंख एक-दो मिमी लंबाई के बिना एक चपटा शरीर है, एक फ्लैट चतुर्भुज सिर जो छाती से व्यापक है। पेट सिर और छाती संयुक्त से अधिक लंबा है। उनके जीवन के लिए महिला बनावट ने लगभग साठ अंडे रखे, जो बालों की जड़ से जुड़ी हुई हैं। लगभग दो सप्ताह के बाद, लार्वा वयस्क कीड़ों के समान दिखता है। तीन लाइनों के बाद लार्वा एक वयस्क में बदल जाता है। जब एक कुत्ते में अनियंत्रण का पता चला, उपचार जल्द से जल्द शुरू किया जाना चाहिए। कुत्ता पूरी तरह से गंजा उड़ सकता है, और उसकी त्वचा दर्द और खुजली होगी। नतीजतन, खरोंच और abrasions हैं, जिसके माध्यम से संक्रमण हो सकता है और त्वचा रोग या एक्जिमा विकसित हो सकता है। जानवर वजन कम करता है और कमजोर हो जाता है, यह रोग को बढ़ा देता है, एनीमिया होता है। सूखे का उपचार अपेक्षाकृत जटिल है, क्योंकि अधिकांश दवाएं परजीवी और लार्वा के अंडों को प्रभावित नहीं करती हैं, बल्कि केवल वयस्क कीड़ों को नष्ट करती हैं। इसलिए, उपचार के दौरान भी, कुत्ता फिर से संक्रमित हो सकता है। दवा को विकास के प्रत्येक चरण में सूखे को नष्ट करना चाहिए। वज़न के आधार पर दवा और उसकी खुराक को सही ढंग से उठाएं, साथ ही उपचार के परिणाम को नियंत्रित करने से पशुचिकित्सा में मदद मिलेगी। इससे पहले कि आप गमी से छुटकारा पाएं, ध्यान से दवा के निर्देशों को पढ़ें और सावधानी पूर्वक उपाय पढ़ें। उनमें से कुछ यहां दिए गए हैंः - स्प्रे का प्रयोग करें। शैम्पू का उपयोग करते समय, आपको एक बार फिर जानवर को स्नान करना होगा, और इसकी अनुशंसा नहीं की जाती है। बूंद केंद्रित हैं, इसका मतलब है कि एक और जहरीला समाधान, और ऊन से पाउडर डाला जाएगा। - चुनी गई दवा के खुराक का निरीक्षण करना बहुत महत्वपूर्ण हैः यदि आप कम लेते हैं - इससे मदद नहीं मिलेगी, और यदि आप खुराक से अधिक हो जाते हैं - पालतू जानवर को जहर करना संभव है। - कुत्ते की आंखों, मुंह और नाक में दवा नहीं आनी चाहिए, क्योंकि यह श्लेष्म झिल्ली की जलन पैदा कर सकती है। कुत्तों में Vlsoedy हर जगह और साल के किसी भी समय पाए जाते हैं। यह बीमार जानवरों के साथ या बिस्तर, कॉम्ब्स, तौलिए और अन्य देखभाल वस्तुओं के संपर्क से संक्रमित हो सकता है। पिल्ले मां से संक्रमित हैं। ट्राइडक्टक्टोसिस को रोकने के लिए यह आवश्यक हैः - स्वच्छता के बुनियादी नियमों का निरीक्षण करें। - नियमित रूप से पालतू जानवर का निरीक्षण करें। - विशेष तैयारी के साथ जानवर और इसके निवास के नियमित उपचार का पालन करें। - उपयोग का मतलब है कि कीड़े को पीछे हटानाः वर्मवुड पत्तियों या खरीदे गए कीटनाशकों के सूखे पाउडर । उन्हें ऊन पर लगाया जाना चाहिए, बैग में कूड़े के नीचे रखा जाना चाहिए। - प्रभावित और भटक गए जानवरों के संपर्क से बचें। |
कंगना रणौत के रियलिटी शो 'लॉकअप' की चर्चा दिन ब दिन बढ़ती जा रही है। शो में प्रिंस नरूला ने बतौर चैलेंजर धमाकेदार एंट्री की और उन्होंने आते ही कंगना रणौत की जेल में बवाल मचाना शुरू कर दिया है। प्रिंस नरूला ने आते ही जेल में दूसरे कंटेस्टेंट से पंगा लेना शुरू कर दिया है। लेकिन इसी बीच खेल-खेल में आजमा फल्लाह ने प्रिंस नरूला को नोरा फतेही के नाम का ताना मार दिया, जिससे प्रिंस नरूला भड़क गए। इस दौरान उन्होंने जेल में जमकर बवाल मचाया। इस मौके का वीडियो भी सामने आया है।
दरअसल, 'लॉकअप' का एक प्रोमो सामने आया है, जिसमें जेल में मौजूद सभी कैदी एक टास्क करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि सभी कैदी लकड़ी से पेटी बना रहे हैं। इस दौरान कई कंटेस्टेंट अपनी पेटी तैयार भी कर लेते हैं लेकिन अचानक प्रिंस नरूला सभी की पेटी को तोड़ने लगते हैं, जिस वजह से उनकी और करणवीर बोहरा की धक्का-मुक्की हो जाती है। ये बवाल धीरे-धीरे सभी कंटेस्टेंट्स के बीच फैल जाता है। इसी बीच आजमा फल्लाह, प्रिंस नरूला को नोरा फतेही के नाम का ताना मारती हैं।
आजमा फल्लाह ने लकड़ी का एक टुकड़ा हाथ में घूमाते हुए प्रिंस नरूला के लिए कहा, 'नोरा फतेही ने भाव नहीं दिया। ' आजमा फल्लाह की ये बात सुनकर प्रिंस काफी ज्यादा भड़क जाते हैं और कहते हैं, 'बेटा अगर तू फिर से पर्सनल पर गई तो बहुत बुरा होगा। मैं शादीशुदा आदमी हूं। ' इतना ही नहीं, गुस्साए प्रिंस नरूला आजमा फल्लाह का सामान भी फेंकने के लिए आगे बढ़ जाते हैं। वह आजमा फल्लाह का सूटकेस उठाकर बाहर ले आते हैं और कहते हैं, 'सारा सामान उठाकर बाहर फेंक दूंगा मैं। '
प्रिंस नरूला और युविका चौधरी ने साल 2018 में शादी की थी। दोनों एक साथ 'बिग बॉस' के सीजन 9 में नजर आए थे। इस शो में ही प्रिंस ने युविका से अपने प्यार का इजहार किया था। हालांकि, युविका के एविक्शन के बाद शो में नोरा ने बतौर वाइल्डकार्ड कंटेस्टेंट के रूप में एंट्री की थी। शो में नोरा और प्रिंस की केमिस्ट्री देखने को मिली थी। दोनों की डेटिंग की बात भी सामने आई थी।
| कंगना रणौत के रियलिटी शो 'लॉकअप' की चर्चा दिन ब दिन बढ़ती जा रही है। शो में प्रिंस नरूला ने बतौर चैलेंजर धमाकेदार एंट्री की और उन्होंने आते ही कंगना रणौत की जेल में बवाल मचाना शुरू कर दिया है। प्रिंस नरूला ने आते ही जेल में दूसरे कंटेस्टेंट से पंगा लेना शुरू कर दिया है। लेकिन इसी बीच खेल-खेल में आजमा फल्लाह ने प्रिंस नरूला को नोरा फतेही के नाम का ताना मार दिया, जिससे प्रिंस नरूला भड़क गए। इस दौरान उन्होंने जेल में जमकर बवाल मचाया। इस मौके का वीडियो भी सामने आया है। दरअसल, 'लॉकअप' का एक प्रोमो सामने आया है, जिसमें जेल में मौजूद सभी कैदी एक टास्क करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि सभी कैदी लकड़ी से पेटी बना रहे हैं। इस दौरान कई कंटेस्टेंट अपनी पेटी तैयार भी कर लेते हैं लेकिन अचानक प्रिंस नरूला सभी की पेटी को तोड़ने लगते हैं, जिस वजह से उनकी और करणवीर बोहरा की धक्का-मुक्की हो जाती है। ये बवाल धीरे-धीरे सभी कंटेस्टेंट्स के बीच फैल जाता है। इसी बीच आजमा फल्लाह, प्रिंस नरूला को नोरा फतेही के नाम का ताना मारती हैं। आजमा फल्लाह ने लकड़ी का एक टुकड़ा हाथ में घूमाते हुए प्रिंस नरूला के लिए कहा, 'नोरा फतेही ने भाव नहीं दिया। ' आजमा फल्लाह की ये बात सुनकर प्रिंस काफी ज्यादा भड़क जाते हैं और कहते हैं, 'बेटा अगर तू फिर से पर्सनल पर गई तो बहुत बुरा होगा। मैं शादीशुदा आदमी हूं। ' इतना ही नहीं, गुस्साए प्रिंस नरूला आजमा फल्लाह का सामान भी फेंकने के लिए आगे बढ़ जाते हैं। वह आजमा फल्लाह का सूटकेस उठाकर बाहर ले आते हैं और कहते हैं, 'सारा सामान उठाकर बाहर फेंक दूंगा मैं। ' प्रिंस नरूला और युविका चौधरी ने साल दो हज़ार अट्ठारह में शादी की थी। दोनों एक साथ 'बिग बॉस' के सीजन नौ में नजर आए थे। इस शो में ही प्रिंस ने युविका से अपने प्यार का इजहार किया था। हालांकि, युविका के एविक्शन के बाद शो में नोरा ने बतौर वाइल्डकार्ड कंटेस्टेंट के रूप में एंट्री की थी। शो में नोरा और प्रिंस की केमिस्ट्री देखने को मिली थी। दोनों की डेटिंग की बात भी सामने आई थी। |
बॉलीवुड के प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक फिल्मफेयर अवॉर्ड्स एक बार फिर लौट रहे हैं। इस साल यह अवॉर्ड शो 23 मार्च 2019 को मुंबई के जियो गार्डन में आयोजित किया जाएगा। हमेशा की तरह इस बार के 64वें विमल फिल्मफेयर अवॉर्ड 2019 में भी एंटरटेनमेंट का फुलऑन डोज देखने को मिलेगा। रणवीर सिंह को इस बार के फिल्मफेयर अवॉर्ड्स का शोस्टॉपर बनाया गया है।
सोमवार को मीडिया के सामने की फिल्मफेयर अवॉर्ड्स 2019 घोषणा की गई। इस दौरान रणवीर सिंह, फिल्मफेयर के एडिटर जितेश पिल्लई, विमल ग्रुप के मार्केटिंग हेड अनिल वर्मा, वायकॉम 18 से नीना एलावुर जयपुरिया और वर्ल्ड वाइड मीडिया के सीईओ दीपक लांबा मौजूद रहे।
| बॉलीवुड के प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक फिल्मफेयर अवॉर्ड्स एक बार फिर लौट रहे हैं। इस साल यह अवॉर्ड शो तेईस मार्च दो हज़ार उन्नीस को मुंबई के जियो गार्डन में आयोजित किया जाएगा। हमेशा की तरह इस बार के चौंसठवें विमल फिल्मफेयर अवॉर्ड दो हज़ार उन्नीस में भी एंटरटेनमेंट का फुलऑन डोज देखने को मिलेगा। रणवीर सिंह को इस बार के फिल्मफेयर अवॉर्ड्स का शोस्टॉपर बनाया गया है। सोमवार को मीडिया के सामने की फिल्मफेयर अवॉर्ड्स दो हज़ार उन्नीस घोषणा की गई। इस दौरान रणवीर सिंह, फिल्मफेयर के एडिटर जितेश पिल्लई, विमल ग्रुप के मार्केटिंग हेड अनिल वर्मा, वायकॉम अट्ठारह से नीना एलावुर जयपुरिया और वर्ल्ड वाइड मीडिया के सीईओ दीपक लांबा मौजूद रहे। |
Salaar 2 के रिलीज से पहले जगपति बाबू ने खोल डाला सबसे बड़ा राज, ऐसा होगा सीक्वल?
कृति खरबंदा ने बॉयफ्रेंड पुलकित सम्राट के जन्मदिन पर शेयर किया ख़ास पोस्ट, फैन्स संग साझा की रोमांटिक तस्व�..
अंजू की जुदाई बर्दाश्त नहीं कर पाया नसरुल्ला, पाकिस्तान की सीमा पार कर जल्द आएगा हिंदुस्तान!
| Salaar दो के रिलीज से पहले जगपति बाबू ने खोल डाला सबसे बड़ा राज, ऐसा होगा सीक्वल? कृति खरबंदा ने बॉयफ्रेंड पुलकित सम्राट के जन्मदिन पर शेयर किया ख़ास पोस्ट, फैन्स संग साझा की रोमांटिक तस्व�.. अंजू की जुदाई बर्दाश्त नहीं कर पाया नसरुल्ला, पाकिस्तान की सीमा पार कर जल्द आएगा हिंदुस्तान! |
बारां, 28 नवम्बर।
पाॅपुलर फ्रंट आॅफ इंडिया के राश्ट्रीय अभियान स्वस्थ नागरिक स्वस्थ राश्ट्र के तहत सोमवार को जिला इकाई द्वारा सुबह मेला ग्राउंड में योग षिविर व स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि डाॅ. बृजेष गोयल ने कहा कि संयमित जीवन षैली अपनाना चाहिए एवं समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण करवाना चाहिए। एक स्वस्थ नागरिक ही राश्ट्र के विष्वास में प्रभावषाली भूमिका निभा सकता है। उन्होंने जिला अस्पताल द्वारा दी जा रही विभिन्न योजनाओं के बारे भी बताया तथा इसका लाभ उठाने का आह्वान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता समाज सेवी एवं वरिश्ठ नागरिक रषीद अब्बा ने की। जिला कार्यकारिणी सदस्य षाहिद दुर्रानी ने फ्रंट के विभिन्न सामाजिक कार्यों एवं अभियान तथा इमाम असलम ने साफ-सफाई से रहने पर जोर दिया। इससे पूर्व जिलाध्यक्ष षकील अहमद ने अतिथियों का स्वागत किया। प्रोग्राम कन्विनर अख्तर हुसैन ने बताया कि 15 से 30 नवम्बर तक षिविर लगाए जा रहे हैं। षिविर में विषेशज्ञ नासिर अंसारी ने सभी प्रतिभागियों से योग व आसन कराए और साथ ही हेल्थ व फिटनेस के टिप्स दिए।
बारां, 28 नवम्बर।
| बारां, अट्ठाईस नवम्बर। पाॅपुलर फ्रंट आॅफ इंडिया के राश्ट्रीय अभियान स्वस्थ नागरिक स्वस्थ राश्ट्र के तहत सोमवार को जिला इकाई द्वारा सुबह मेला ग्राउंड में योग षिविर व स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि डाॅ. बृजेष गोयल ने कहा कि संयमित जीवन षैली अपनाना चाहिए एवं समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण करवाना चाहिए। एक स्वस्थ नागरिक ही राश्ट्र के विष्वास में प्रभावषाली भूमिका निभा सकता है। उन्होंने जिला अस्पताल द्वारा दी जा रही विभिन्न योजनाओं के बारे भी बताया तथा इसका लाभ उठाने का आह्वान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता समाज सेवी एवं वरिश्ठ नागरिक रषीद अब्बा ने की। जिला कार्यकारिणी सदस्य षाहिद दुर्रानी ने फ्रंट के विभिन्न सामाजिक कार्यों एवं अभियान तथा इमाम असलम ने साफ-सफाई से रहने पर जोर दिया। इससे पूर्व जिलाध्यक्ष षकील अहमद ने अतिथियों का स्वागत किया। प्रोग्राम कन्विनर अख्तर हुसैन ने बताया कि पंद्रह से तीस नवम्बर तक षिविर लगाए जा रहे हैं। षिविर में विषेशज्ञ नासिर अंसारी ने सभी प्रतिभागियों से योग व आसन कराए और साथ ही हेल्थ व फिटनेस के टिप्स दिए। बारां, अट्ठाईस नवम्बर। |
सिविल सर्जन ने विधायक को तीन निजी अस्पतालों व अन्य नर्सिंग होम का करीब 11 करोड़ रुपये बकाया होने की जानकारी दी. इससे विधायक ने सिविल सर्जन से एक-दो दिनों में अन्य निजी अस्पतालों व नर्सिंग होम की बकाया राशि की जानकारी उपलब्ध कराने को है. सिविल सर्जन कार्यालय के कर्मचारी आयुष्मान में निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के बकाया की सूची तैयार करने में जुट गये हैं.
विधायक के अनुसार सरकार ने कम आय वाले परिवार को बेहतर चिकित्सा व्यवस्था देने के लिए आयुष्मान योजना शुरू की है, जिसका लाभ गरीबों को समय पर मिलना ही चाहिए. सिविल सर्जन ने विधायक को बताया कि निजी अस्पतालों की बकाया राशि भुगतान को लेकर मुख्यालय में पत्र भेजा गया है. बागबेड़ा के पंसस सुनील गुप्ता द्वारा सिविल सर्जन के समक्ष कॉलोनी की मोतीझारी देवी व अशोक शर्मा का निजी अस्पतालों में आयुष्मान से ऑपरेशन नहीं होने का मुद्दा उठाया गया था.
सिविल सर्जन डॉ. जुझार माझी ने कहा आयुष्मान से इलाज की रकम बकाया होने में निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम की भी लापरवाही है. किसी ने भी बकाया रकम का क्लेम राज्य सरकार की प्रावधान के अनुरुप नहीं किया. इससे भी आयुष्मान के भुगतान में कई बार विलंब हुआ है. सिविल सर्जन ने दावा किया कि आयुष्मान से निजी अस्पताल एवं नर्सिंग होम में इलाज पूरी तरह से बंद नहीं है. निजी अस्पताल व नर्सिंग होम कम खर्च वाला इलाज कर रहे हैं. बतौर सीएस ब्रह्मानंद, मेडिट्रिना व मर्सी अस्पताल का ज्यादा बकाया है लेकिन मर्सी अस्पताल अभी मरीजों को भर्ती कर रहा है.
| सिविल सर्जन ने विधायक को तीन निजी अस्पतालों व अन्य नर्सिंग होम का करीब ग्यारह करोड़ रुपये बकाया होने की जानकारी दी. इससे विधायक ने सिविल सर्जन से एक-दो दिनों में अन्य निजी अस्पतालों व नर्सिंग होम की बकाया राशि की जानकारी उपलब्ध कराने को है. सिविल सर्जन कार्यालय के कर्मचारी आयुष्मान में निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के बकाया की सूची तैयार करने में जुट गये हैं. विधायक के अनुसार सरकार ने कम आय वाले परिवार को बेहतर चिकित्सा व्यवस्था देने के लिए आयुष्मान योजना शुरू की है, जिसका लाभ गरीबों को समय पर मिलना ही चाहिए. सिविल सर्जन ने विधायक को बताया कि निजी अस्पतालों की बकाया राशि भुगतान को लेकर मुख्यालय में पत्र भेजा गया है. बागबेड़ा के पंसस सुनील गुप्ता द्वारा सिविल सर्जन के समक्ष कॉलोनी की मोतीझारी देवी व अशोक शर्मा का निजी अस्पतालों में आयुष्मान से ऑपरेशन नहीं होने का मुद्दा उठाया गया था. सिविल सर्जन डॉ. जुझार माझी ने कहा आयुष्मान से इलाज की रकम बकाया होने में निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम की भी लापरवाही है. किसी ने भी बकाया रकम का क्लेम राज्य सरकार की प्रावधान के अनुरुप नहीं किया. इससे भी आयुष्मान के भुगतान में कई बार विलंब हुआ है. सिविल सर्जन ने दावा किया कि आयुष्मान से निजी अस्पताल एवं नर्सिंग होम में इलाज पूरी तरह से बंद नहीं है. निजी अस्पताल व नर्सिंग होम कम खर्च वाला इलाज कर रहे हैं. बतौर सीएस ब्रह्मानंद, मेडिट्रिना व मर्सी अस्पताल का ज्यादा बकाया है लेकिन मर्सी अस्पताल अभी मरीजों को भर्ती कर रहा है. |
औरैया। समेकित बाल संरक्षण योजना के अंतर्गत जनपद में कोविड-19 के अंतर्गत प्रवासी मजदूरों के बालकों का सर्वे कराया जाए तथा उन्हें फॉस्टर केयर आदि योजनाओं से लाभान्वित किया जाए। भट्टे पर कार्य कर रहे बालकों का चिन्हीकरण करते हुये उन्हें बाल श्रम उन्मूलन के अंतर्गत मुक्त कराने हेतु निर्देशित किया। उक्त निर्देश जिलाधिकारी द्वारा "बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ" योजना एवं समेकित बाल संरक्षण योजना की कलेक्ट्रेट सभागार में आहूत की गयी जिला टास्क फोर्स की बैठक में संबंधित अधिकारियों को दिए। बैठक में "बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ" योजनान्तर्गत वर्ष 2020-21 में भारत सरकार द्वारा अनुमोदित कार्ययोजना के क्रियान्वयन हेतु विस्तृत चर्चा की गयी।
जिला प्रोबेशन अधिकारी आवेश कुमार सिंह ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना की वार्षिक कार्य योजना प्रस्तुत की। जिस पर जिलाधिकारी द्वारा संबंधित विभाग के अधिकारियों से सामंजस्य एवं सुझाव प्राप्त कर मासिक कार्य योजना बनाकर बनाकर प्रस्तुत किये जाने के निर्देश दिए गये। साथ ही प्रत्येक ब्लाक की चुनिन्दा ग्राम पंचायतों में वाल पेंटिंग की प्रतियोगिता का आयोजन किया जाये। जिसमें अच्छा कार्य करने वाले बच्चों के बीच जिला स्तरीय वाल पेंटिंग प्रतियोगिता आयोजित कराई जाये और प्रतियोगिता में अव्वल आने वाले बच्चों को सम्मानित किया जाये। उन्होंने सीएमओ को निर्देश दिये कि आशाओ के माध्यम से घर घर जाकर पम्पलेट देकर प्रचार प्रसार कराया जाये।
जिलाधिकारी ने बैठक में कोविड-19 की गाईडलाइन को दृष्टिगत रखते हुए योजना के क्रियान्वयन पर दिशा-निर्देश प्रदान किये गये, जिसके अन्तर्गत जिला चिकित्सालय एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर जन्म लेने वाली बालिकाओं के माता-पिता को कन्या गौरव सम्मान पत्र, बेबी केयर किट एवं कपड़े आदि का वितरण कर सम्मनित किये जाने एवं जन्म लेने वाली बालिकाओं के नाम से वृक्षारोपण कराये जाने के निर्देश प्रदान किये गये।
इसके अतिरिक्त योजना के प्रचार-प्रसार हेतु ओवरहेड टैंको एवं सार्वजनिक स्थानों पर वाल पेंटिंग कराये जाने, आंगनबाड़ी केन्द्रों पर गु्ड्डा-गुड्डी बोर्ड लगवाये जाने, पम्पलेट छपवाये जाने हेतु निमयानुसार कार्यवाही किये जाने के निर्देश दिये गये। प्रचार सामग्री में कोविड-19 से सुरक्षा हेतु जानकारी अंकित किये जाने के भी निर्देश प्रदान किये गये। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी बृज किशोर पाठक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अर्चना श्रीवास्तव सहित जिला टास्क फोर्स के सभी अधिकारी उपस्थित रहे।
| औरैया। समेकित बाल संरक्षण योजना के अंतर्गत जनपद में कोविड-उन्नीस के अंतर्गत प्रवासी मजदूरों के बालकों का सर्वे कराया जाए तथा उन्हें फॉस्टर केयर आदि योजनाओं से लाभान्वित किया जाए। भट्टे पर कार्य कर रहे बालकों का चिन्हीकरण करते हुये उन्हें बाल श्रम उन्मूलन के अंतर्गत मुक्त कराने हेतु निर्देशित किया। उक्त निर्देश जिलाधिकारी द्वारा "बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ" योजना एवं समेकित बाल संरक्षण योजना की कलेक्ट्रेट सभागार में आहूत की गयी जिला टास्क फोर्स की बैठक में संबंधित अधिकारियों को दिए। बैठक में "बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ" योजनान्तर्गत वर्ष दो हज़ार बीस-इक्कीस में भारत सरकार द्वारा अनुमोदित कार्ययोजना के क्रियान्वयन हेतु विस्तृत चर्चा की गयी। जिला प्रोबेशन अधिकारी आवेश कुमार सिंह ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना की वार्षिक कार्य योजना प्रस्तुत की। जिस पर जिलाधिकारी द्वारा संबंधित विभाग के अधिकारियों से सामंजस्य एवं सुझाव प्राप्त कर मासिक कार्य योजना बनाकर बनाकर प्रस्तुत किये जाने के निर्देश दिए गये। साथ ही प्रत्येक ब्लाक की चुनिन्दा ग्राम पंचायतों में वाल पेंटिंग की प्रतियोगिता का आयोजन किया जाये। जिसमें अच्छा कार्य करने वाले बच्चों के बीच जिला स्तरीय वाल पेंटिंग प्रतियोगिता आयोजित कराई जाये और प्रतियोगिता में अव्वल आने वाले बच्चों को सम्मानित किया जाये। उन्होंने सीएमओ को निर्देश दिये कि आशाओ के माध्यम से घर घर जाकर पम्पलेट देकर प्रचार प्रसार कराया जाये। जिलाधिकारी ने बैठक में कोविड-उन्नीस की गाईडलाइन को दृष्टिगत रखते हुए योजना के क्रियान्वयन पर दिशा-निर्देश प्रदान किये गये, जिसके अन्तर्गत जिला चिकित्सालय एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर जन्म लेने वाली बालिकाओं के माता-पिता को कन्या गौरव सम्मान पत्र, बेबी केयर किट एवं कपड़े आदि का वितरण कर सम्मनित किये जाने एवं जन्म लेने वाली बालिकाओं के नाम से वृक्षारोपण कराये जाने के निर्देश प्रदान किये गये। इसके अतिरिक्त योजना के प्रचार-प्रसार हेतु ओवरहेड टैंको एवं सार्वजनिक स्थानों पर वाल पेंटिंग कराये जाने, आंगनबाड़ी केन्द्रों पर गु्ड्डा-गुड्डी बोर्ड लगवाये जाने, पम्पलेट छपवाये जाने हेतु निमयानुसार कार्यवाही किये जाने के निर्देश दिये गये। प्रचार सामग्री में कोविड-उन्नीस से सुरक्षा हेतु जानकारी अंकित किये जाने के भी निर्देश प्रदान किये गये। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी बृज किशोर पाठक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अर्चना श्रीवास्तव सहित जिला टास्क फोर्स के सभी अधिकारी उपस्थित रहे। |
९०३६. सहस्रगुरिगत पूजा - म० शुभचन्द्र । पत्र स० १२७ । मा० ५३ × ४ इश्व । भाषासंस्कृत । विषय-पूजा । र०काल X । ले० काल सं० १७५१ ज्येष्ठ बुदी १२ । पू । वेष्टन सं० ७८३ । प्राप्ति स्थान - भ० दि० जैन मन्दिर अजमेर ।
विशेष - आ० कल्याणकीर्ति के शिष्य पं० कबीरदास के पठनार्थ गुटका लिखा गया था।
६०३७. प्रतिसं० २ । पत्र सं० ५२ । ले०काल स० १६६८ । पूर्ण वेष्टन सं० ६ । प्राप्ति स्थान - दि० जैन पचायती मन्दिर डीग ।
विशेष - मानसिंह जी के शासन काल में भामेर में प्रतिलिपि हुई थी। बाई किसना ने कजिका व्रतोद्यापन में चढाई थी ।
६०३८. सहस्रगुरिगत पूजा- x पत्रस० ११-७२ । प्रा० १० X ६ इव । भाषा संस्कृत । विषय- पूजा । २० काल X । ले० काल X । भपूर्ण । वेष्टनस० ३२० । प्राप्ति स्थान - दि० जैन मन्दिर अभिनन्दन स्वामी बूंदी ।
९०३६. सहस्रगुरणी पूजा - खङ्गसेन पत्र सं० १७ । मा० १२४४ इश्व । भाषा - हिन्दी । विषय - पूजा । २० काल X । ले० काल म० १७२८ । पूर्ण । वेष्टन स० २४६ । प्राप्ति स्थान - दि० जैन मन्दिर लश्कर जयपुर ।
विशेष - प्रशस्ति अच्छी दी हुई है।
६०४०. सहस्रनाम पूजा - धर्मचन्द्रमुनि- X । पत्र स० ५० । ग्रा० १२X६३ इच। भाषा संस्कृत । विषय - पूजा । २० काल x । ले०काल स० १८६१ चैन मुदी ३ ।। वेष्टन स० १२५ । प्राप्ति स्थान - दि० जैन तेरहपथी मन्दिर दौसर ।
विशेष - सवाई माधोपुर में प्रतिलिपि की गई थी ।
६०४१. सहस्रनाम पूजा - धर्मभूषरग । पत्रस० ८५ । [अ० ११ × ६ भाषा-सस्कृत । विषय - पूजा । ले०काल X । पूर्ण । वेष्टन स० ७२ । प्राप्ति स्थान दि० जैन छोटा मन्दिर बयाना ।
६०४२. सहस्रनाम पूजा - चैनसुख । पत्र म०३६ श्रा० १३६३ इश्व भाषा - हिन्दी । । - विषय - पूजा । र० काल X । ले०काल स० १९६३ पूर्ण वेष्टन०५५८ प्राप्ति स्थान - दि० जैन
मन्दिर लश्कर, जयपुर ।
६०४३ सार्द्ध द्वयद्वीप पूजा - विष्णुभूषरण पत्र म० ११६ । ०] १२९५३ इव । भाषासंस्कृत । विषय - पूजा । र०काल X I ले०काल स० १९६१ । पूर्ण । वेष्टनम० ५७६ । प्राप्ति स्थान दि० जैन मंदिर लश्कर, जयपुर ।
६०४४. सार्द्ध द्वयद्वीप पूजा - शुमचन्द्र । पत्र स० १३० । प्रा० १०X५ इश्व । भाषासंस्कृत । विषय पूजा । र०काल x । ले०काल स० १८६८ सावन मुदी १ । पूर्ण । वेष्टन सं० ५४ । प्राप्ति स्थान - भ० दि० जैन मन्दिर अजमेर ।
६०४५. प्रति सं० २ । पत्रसं० १३ । प्रा० १० x ५३इ । ले० काल X 1 पूर्ण वेष्टन सं० १८६ । प्राप्ति स्थान - भ० दि० जैन मन्दिर अजमेर ।
६०४६. प्रतिसं० ३ । पत्रस० ३०० । प्रा० ६३४६ इन्च । ले०काल X 1 पूर्ण । वेष्टन म० ३८५ । प्राप्ति स्थान - दि० जैन मन्दिर बरसली कोटा | नौ हज़ार छत्तीस. सहस्रगुरिगत पूजा - मशून्य शुभचन्द्र । पत्र सशून्य एक सौ सत्ताईस । माशून्य तिरेपन × चार इश्व । भाषासंस्कृत । विषय-पूजा । रशून्यकाल X । लेशून्य काल संशून्य एक हज़ार सात सौ इक्यावन ज्येष्ठ बुदी बारह । पू । वेष्टन संशून्य सात सौ तिरासी । प्राप्ति स्थान - भशून्य दिशून्य जैन मन्दिर अजमेर । विशेष - आशून्य कल्याणकीर्ति के शिष्य पंशून्य कबीरदास के पठनार्थ गुटका लिखा गया था। छः हज़ार सैंतीस. प्रतिसंशून्य दो । पत्र संशून्य बावन । लेशून्यकाल सशून्य एक हज़ार छः सौ अड़सठ । पूर्ण वेष्टन संशून्य छः । प्राप्ति स्थान - दिशून्य जैन पचायती मन्दिर डीग । विशेष - मानसिंह जी के शासन काल में भामेर में प्रतिलिपि हुई थी। बाई किसना ने कजिका व्रतोद्यापन में चढाई थी । छः हज़ार अड़तीस. सहस्रगुरिगत पूजा- x पत्रसशून्य ग्यारह-बहत्तर । प्राशून्य दस X छः इव । भाषा संस्कृत । विषय- पूजा । बीस काल X । लेशून्य काल X । भपूर्ण । वेष्टनसशून्य तीन सौ बीस । प्राप्ति स्थान - दिशून्य जैन मन्दिर अभिनन्दन स्वामी बूंदी । नौ हज़ार छत्तीस. सहस्रगुरणी पूजा - खङ्गसेन पत्र संशून्य सत्रह । माशून्य एक हज़ार दो सौ चौंतालीस इश्व । भाषा - हिन्दी । विषय - पूजा । बीस काल X । लेशून्य काल मशून्य एक हज़ार सात सौ अट्ठाईस । पूर्ण । वेष्टन सशून्य दो सौ छियालीस । प्राप्ति स्थान - दिशून्य जैन मन्दिर लश्कर जयपुर । विशेष - प्रशस्ति अच्छी दी हुई है। छः हज़ार चालीस. सहस्रनाम पूजा - धर्मचन्द्रमुनि- X । पत्र सशून्य पचास । ग्राशून्य बारहXतिरेसठ इच। भाषा संस्कृत । विषय - पूजा । बीस काल x । लेशून्यकाल सशून्य एक हज़ार आठ सौ इकसठ चैन मुदी तीन ।। वेष्टन सशून्य एक सौ पच्चीस । प्राप्ति स्थान - दिशून्य जैन तेरहपथी मन्दिर दौसर । विशेष - सवाई माधोपुर में प्रतिलिपि की गई थी । छः हज़ार इकतालीस. सहस्रनाम पूजा - धर्मभूषरग । पत्रसशून्य पचासी । [अशून्य ग्यारह × छः भाषा-सस्कृत । विषय - पूजा । लेशून्यकाल X । पूर्ण । वेष्टन सशून्य बहत्तर । प्राप्ति स्थान दिशून्य जैन छोटा मन्दिर बयाना । छः हज़ार बयालीस. सहस्रनाम पूजा - चैनसुख । पत्र मछत्तीस श्राशून्य एक हज़ार तीन सौ तिरेसठ इश्व भाषा - हिन्दी । । - विषय - पूजा । रशून्य काल X । लेशून्यकाल सशून्य एक हज़ार नौ सौ तिरेसठ पूर्ण वेष्टनपाँच सौ अट्ठावन प्राप्ति स्थान - दिशून्य जैन मन्दिर लश्कर, जयपुर । छः हज़ार तैंतालीस सार्द्ध द्वयद्वीप पूजा - विष्णुभूषरण पत्र मशून्य एक सौ सोलह । शून्य] बारह हज़ार नौ सौ तिरेपन इव । भाषासंस्कृत । विषय - पूजा । रशून्यकाल X I लेशून्यकाल सशून्य एक हज़ार नौ सौ इकसठ । पूर्ण । वेष्टनमशून्य पाँच सौ छिहत्तर । प्राप्ति स्थान दिशून्य जैन मंदिर लश्कर, जयपुर । छः हज़ार चौंतालीस. सार्द्ध द्वयद्वीप पूजा - शुमचन्द्र । पत्र सशून्य एक सौ तीस । प्राशून्य दसXपाँच इश्व । भाषासंस्कृत । विषय पूजा । रशून्यकाल x । लेशून्यकाल सशून्य एक हज़ार आठ सौ अड़सठ सावन मुदी एक । पूर्ण । वेष्टन संशून्य चौवन । प्राप्ति स्थान - भशून्य दिशून्य जैन मन्दिर अजमेर । छः हज़ार पैंतालीस. प्रति संशून्य दो । पत्रसंशून्य तेरह । प्राशून्य दस x तिरेपनइ । लेशून्य काल X एक पूर्ण वेष्टन संशून्य एक सौ छियासी । प्राप्ति स्थान - भशून्य दिशून्य जैन मन्दिर अजमेर । छः हज़ार छियालीस. प्रतिसंशून्य तीन । पत्रसशून्य तीन सौ । प्राशून्य छः हज़ार तीन सौ छियालीस इन्च । लेशून्यकाल X एक पूर्ण । वेष्टन मशून्य तीन सौ पचासी । प्राप्ति स्थान - दिशून्य जैन मन्दिर बरसली कोटा |
Abdominal Bloating: कई बार कुछ खाने के बाद आपका पेट फूलने लगता है. इससे काफी दिक्कत महसूस होती है और आप लंबे समय तक परेशान रहते हैं. जानें किन वजहों से होती है ब्लोटिंग की प्रॉब्लम.
- जल्दी-जल्दी खाने की आदत आपको नुकसान पहुंचाती है.
- कार्बोनेटेड ड्रिंक न पिएं.
- ग्लूटेन से एलर्जी है तो ऐसी चीजें न खाएं.
नई दिल्लीः कई बार कुछ खाने के बाद आपका पेट फूलने लगता है. इससे काफी दिक्कत महसूस होती है और आप लंबे समय तक परेशान रहते हैं. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ऐसा कई वजहों से होता है और इसे ठीक करने के लिए आपको अपनी खानपान की आदतों को बदलना होगा. जानें किन कारणों से होती है ब्लोटिंग (Abdominal Bloating) की प्रॉब्लम.
जल्दी-जल्दी खाने की आदत आपको नुकसान पहुंचाती है. ऐसे में कई बार खाने के साथ आप एयर ले लेते हैं और ये हवा फेफड़ों में न जाकर Oesophagus में चली जाती है और फिर पेट में जाती है. इससे ब्लोटिंग की समस्या हो सकती है. आराम से बैठकर अच्छी तरह से चबाकर खाना खाएं.
खाने के साथ कोक या कोई भी कार्बोनेटेड ड्रिंक पीने की आदत भी आपको नुकसान पहुंचाती है. कार्बोनेटेड ड्रिंक्स में कार्बन डाइऑक्साइड होता है जिससे ब्लोटिंग की समस्या होती है. आर्टिफिशियल स्वीटनर्स से भी पेट फूलने की प्रॉब्लम होती है क्योंकि, इन चीजों का डाइजेशन आसानी से नहीं होता. भरपूर मात्रा में पानी पिएं. इसके अलावा ब्लैक, ग्रीन और हर्बल टी पीने से भी डाइजेशन अच्छा होगा.
महिलाओं में पीरियड की वजह से भी पेट फूलने की समस्या हो सकती है. पीरियड शुरू होने से ठीक पहले और पीरियड के दौरान Bloating की प्रॉब्लम होती है. इस दौरान बहुत ज्यादा नमक, प्रोसेस्ड शुगर और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें न खाएं. इसके बदले पौटेशियम से भरपूर चीजों, शकरकंद, पालक, केला, एवोकाडो और टमाटर को डाइट में शामिल करें.
लैक्टोज इंटॉलरेंस की वजह से भी पेट फूलने की समस्या हो सकती है. अगर आपको डेयरी प्रोडक्ट से एलर्जी है तो ऐसी चीजों से परहेज करें.
Irritable bowel syndrome की स्थिति में भी कब्ज, डायरिया, ब्लोटिंग और पेट दर्द की समस्या होती है. ऐसे में प्याज और लहसुन जैसी चीजें न खाएं क्योंकि, इससे आपकी परेशानी बढ़ सकती है. थोड़े-थोड़े अंतराल पर कम मात्रा में खाना खाएं. Peppermint Tea और प्रोबायोटिक सप्लीमेंट से आपको फायदा मिलेगा.
हाई फ्रुक्टोज फूड खाने से भी पेट फूलने की समस्या हो सकती है. ज्यादातर फ्रुक्टोज से एलर्जी की वजह से ऐसा होता है. हाई फुक्टोज वाली चीजें जैसे पीयर्स, चेरीज, पीचेज, सेब, प्लम और खरबूज न खाएं. शहद, आइसक्रीम और चॉकलेट जैसी चीजों में भी फ्रुक्टोज की मात्रा ज्यादा होती है.
ये एक Auto-Immune कंडीशन है. इस स्थिति में जब आप ग्लूटेन वाली चीजें खाते हैं तो आपका इम्यून सिस्टम अपने ही टिशूज पर अटैक करता है. ये Small Intestine को डैमेज करता है जिससे आंत पोषक तत्वों को एब्जॉर्व नहीं कर पाती. इससे गैस और ब्लोटिंग की समस्या हो सकती है. अगर आपको ग्लूटेन से एलर्जी है तो ग्लूटेन वाली चीजें न खाएं. इसके लक्षणों को कम करने के लिए अदरक वाली चाय पिएं.
कुछ दवाइयों की वजह से भी आपको ब्लोटिंग की समस्या हो सकती है. Laxatives, antacids, antibiotics, antidepressants, statins और type 2 Diabetes की दवाइयों की वजह से आपको पेट फूलने की समस्या हो सकती है. मल्टीविटामिन में शुगर और ऐसे इनग्रेडिएंट्स होते हैं, जो कुछ लोग डाइजेस्ट नहीं कर पाते. इससे गैस और Bloating हो सकती है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. इसे अपनाने से पहले चिकित्सीय सलाह जरूर लें. ZEE NEWS इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
| Abdominal Bloating: कई बार कुछ खाने के बाद आपका पेट फूलने लगता है. इससे काफी दिक्कत महसूस होती है और आप लंबे समय तक परेशान रहते हैं. जानें किन वजहों से होती है ब्लोटिंग की प्रॉब्लम. - जल्दी-जल्दी खाने की आदत आपको नुकसान पहुंचाती है. - कार्बोनेटेड ड्रिंक न पिएं. - ग्लूटेन से एलर्जी है तो ऐसी चीजें न खाएं. नई दिल्लीः कई बार कुछ खाने के बाद आपका पेट फूलने लगता है. इससे काफी दिक्कत महसूस होती है और आप लंबे समय तक परेशान रहते हैं. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ऐसा कई वजहों से होता है और इसे ठीक करने के लिए आपको अपनी खानपान की आदतों को बदलना होगा. जानें किन कारणों से होती है ब्लोटिंग की प्रॉब्लम. जल्दी-जल्दी खाने की आदत आपको नुकसान पहुंचाती है. ऐसे में कई बार खाने के साथ आप एयर ले लेते हैं और ये हवा फेफड़ों में न जाकर Oesophagus में चली जाती है और फिर पेट में जाती है. इससे ब्लोटिंग की समस्या हो सकती है. आराम से बैठकर अच्छी तरह से चबाकर खाना खाएं. खाने के साथ कोक या कोई भी कार्बोनेटेड ड्रिंक पीने की आदत भी आपको नुकसान पहुंचाती है. कार्बोनेटेड ड्रिंक्स में कार्बन डाइऑक्साइड होता है जिससे ब्लोटिंग की समस्या होती है. आर्टिफिशियल स्वीटनर्स से भी पेट फूलने की प्रॉब्लम होती है क्योंकि, इन चीजों का डाइजेशन आसानी से नहीं होता. भरपूर मात्रा में पानी पिएं. इसके अलावा ब्लैक, ग्रीन और हर्बल टी पीने से भी डाइजेशन अच्छा होगा. महिलाओं में पीरियड की वजह से भी पेट फूलने की समस्या हो सकती है. पीरियड शुरू होने से ठीक पहले और पीरियड के दौरान Bloating की प्रॉब्लम होती है. इस दौरान बहुत ज्यादा नमक, प्रोसेस्ड शुगर और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें न खाएं. इसके बदले पौटेशियम से भरपूर चीजों, शकरकंद, पालक, केला, एवोकाडो और टमाटर को डाइट में शामिल करें. लैक्टोज इंटॉलरेंस की वजह से भी पेट फूलने की समस्या हो सकती है. अगर आपको डेयरी प्रोडक्ट से एलर्जी है तो ऐसी चीजों से परहेज करें. Irritable bowel syndrome की स्थिति में भी कब्ज, डायरिया, ब्लोटिंग और पेट दर्द की समस्या होती है. ऐसे में प्याज और लहसुन जैसी चीजें न खाएं क्योंकि, इससे आपकी परेशानी बढ़ सकती है. थोड़े-थोड़े अंतराल पर कम मात्रा में खाना खाएं. Peppermint Tea और प्रोबायोटिक सप्लीमेंट से आपको फायदा मिलेगा. हाई फ्रुक्टोज फूड खाने से भी पेट फूलने की समस्या हो सकती है. ज्यादातर फ्रुक्टोज से एलर्जी की वजह से ऐसा होता है. हाई फुक्टोज वाली चीजें जैसे पीयर्स, चेरीज, पीचेज, सेब, प्लम और खरबूज न खाएं. शहद, आइसक्रीम और चॉकलेट जैसी चीजों में भी फ्रुक्टोज की मात्रा ज्यादा होती है. ये एक Auto-Immune कंडीशन है. इस स्थिति में जब आप ग्लूटेन वाली चीजें खाते हैं तो आपका इम्यून सिस्टम अपने ही टिशूज पर अटैक करता है. ये Small Intestine को डैमेज करता है जिससे आंत पोषक तत्वों को एब्जॉर्व नहीं कर पाती. इससे गैस और ब्लोटिंग की समस्या हो सकती है. अगर आपको ग्लूटेन से एलर्जी है तो ग्लूटेन वाली चीजें न खाएं. इसके लक्षणों को कम करने के लिए अदरक वाली चाय पिएं. कुछ दवाइयों की वजह से भी आपको ब्लोटिंग की समस्या हो सकती है. Laxatives, antacids, antibiotics, antidepressants, statins और type दो Diabetes की दवाइयों की वजह से आपको पेट फूलने की समस्या हो सकती है. मल्टीविटामिन में शुगर और ऐसे इनग्रेडिएंट्स होते हैं, जो कुछ लोग डाइजेस्ट नहीं कर पाते. इससे गैस और Bloating हो सकती है. |
हिंदी टीवी जगत में नजर शो में मोनालिसा डायन का किरदार निभा रही है. इस शो में उनके किरदार को दर्शकों द्वारा बहुत पंसद किया जा रहा है. जिसका कारण उनका जानदार अभिनय है. मोनालिसा अपनी सुन्दर अंदाओं के साथ-साथ बेहतरीन एक्टिंग के लिए भी जानी जाती है. उन्होंने भोजपुरी सिनेमा में बहुत ही लंबे समय तक काम किया है. फिलहाल वह टीवी सीरियल में नजर आ रही हैं. मोनालिसा जितनी पॉपुलर उसकी खास वजह यह भी है कि वह सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. अपनी खूबसूरत फोटो इंटरनेट पर शेयर करती रहती हैं.
फैंस को दीवाना बनाने के लिए एक बार फिर मोनालिसा ने इंटरनेट पर सुन्दर फोटो शेयर किया है इस फोटो में वह काफी खूबसूरत लग रही हैं, फैन्स इस फोटो को देखकर तारीफ कर रहे हैं. फोटो में वह कार में पोज करती नजर आ रही है. मोनालिसा के क्यूट लुक को देखकर फैंस फोटो की जमकर तारीफ कर रहे है. मोनालिसा की फैन फॉलोइंग भी बहुत अधिक है. जब भी वह कोई फोटो वीडियो शेयर करती हैं,लाइक्स और कमेंट की बारिश होने लगती है.
अगर बात करें मोनालिसा के करियर की तो काफी लंबे समय से मोनालिसा भोजपुरी सिनेमा में काम कर रही हैं कई फिल्में और गाने आज भी बहुत पसंद किए जाते हैं. भोजपुरी सिनेमा के कई स्टार के साथ काम किया है. फिलहाल वह स्टार प्लस के सीरियल नजर में डायन की भूमिका में नजर आ रही हैं. फैन्स इस किरदार को बहुत पसंद कर रहे हैं. जिसके बाद सोशल मीडिया पर अपनी सुन्दर फोटो वीडियो से वायरल होती रहती है.
| हिंदी टीवी जगत में नजर शो में मोनालिसा डायन का किरदार निभा रही है. इस शो में उनके किरदार को दर्शकों द्वारा बहुत पंसद किया जा रहा है. जिसका कारण उनका जानदार अभिनय है. मोनालिसा अपनी सुन्दर अंदाओं के साथ-साथ बेहतरीन एक्टिंग के लिए भी जानी जाती है. उन्होंने भोजपुरी सिनेमा में बहुत ही लंबे समय तक काम किया है. फिलहाल वह टीवी सीरियल में नजर आ रही हैं. मोनालिसा जितनी पॉपुलर उसकी खास वजह यह भी है कि वह सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. अपनी खूबसूरत फोटो इंटरनेट पर शेयर करती रहती हैं. फैंस को दीवाना बनाने के लिए एक बार फिर मोनालिसा ने इंटरनेट पर सुन्दर फोटो शेयर किया है इस फोटो में वह काफी खूबसूरत लग रही हैं, फैन्स इस फोटो को देखकर तारीफ कर रहे हैं. फोटो में वह कार में पोज करती नजर आ रही है. मोनालिसा के क्यूट लुक को देखकर फैंस फोटो की जमकर तारीफ कर रहे है. मोनालिसा की फैन फॉलोइंग भी बहुत अधिक है. जब भी वह कोई फोटो वीडियो शेयर करती हैं,लाइक्स और कमेंट की बारिश होने लगती है. अगर बात करें मोनालिसा के करियर की तो काफी लंबे समय से मोनालिसा भोजपुरी सिनेमा में काम कर रही हैं कई फिल्में और गाने आज भी बहुत पसंद किए जाते हैं. भोजपुरी सिनेमा के कई स्टार के साथ काम किया है. फिलहाल वह स्टार प्लस के सीरियल नजर में डायन की भूमिका में नजर आ रही हैं. फैन्स इस किरदार को बहुत पसंद कर रहे हैं. जिसके बाद सोशल मीडिया पर अपनी सुन्दर फोटो वीडियो से वायरल होती रहती है. |
सामान्य चर्म का ऊतलोचन (आरेख ) अधिचम, 2 सूचर्म, 3 अवधार्म बसा 4 वपाल ग्रंथि, 5 लोमकूप (मशिका) 6
चर्मरोग चिकि
(1) आधारीय या अकुरक परत (2) काटल परत, (3) कणमय परत, ( 4 ) स्वच्छ परत, (5) श्रृंगी परत । हथेली और तलवे पर ये परते अधिक स्पष्ट है, चेहरे, वक्ष और हाथ-पैर की आकोचनी सतहो (जहां ये अग मुड़ते हैं, वहा की सतह, ( flexor sturfaces ) ) पर स्वच्छ परत अनुपस्थित होती है, लेकिन इन क्षेत्रो मे ऋणमय परत कोशिकाओं की इकहरी कतार से बनी होती है, जो कहीं-कहीं टूटी भी होती है।
अधिचर्म मे नर्व-सिराए (nerve endings) अनेक होती हैं, लेकिन रक्तवाही कुंभियां एक भी नहीं, कोशिकाओं का पोषण अतराकोशिकीय झिरियों से बहकर आती लसीका (lymph) द्वारा होता है ।
आधारीय या अंकुरक परत (straum basale or germinativum ) अधिचर्म की सबसे भीतरी (गहरी) परत है और सीधे सुचर्म पर टिकी होती है। यह बल्लाकार कोशिकाओं की इकहरी परत से बनी होती हैं, इन कोशिकाओं के बीच झिरीनुमा स्थान (अवकाश) अंतराकोशिकीय सेतु कहलाता है। बड़े-बड़े गोल या अडाकार नाभिक अधिकांशनः इन कोशिकाओं के ऊपरी भाग में ही दिखते है, जो खोमातिन (chromatin) से काफी समृद्ध होते हैं और इससे गाढ़ा रंगे होते है Į यही कारण है कि वे ऊपरी परत की कोशिका- नाभिकों की तुलना में अधिक काले नजर आते है है
अकुरक परत में बल्लाकार कोशिकाओं के अतिरिक्त कहीं-कहीं पर एक विशेष प्रकार की विशाखनरत (दुमाकार या वृक्षाकार, dendritue ) कोशिकाओं मे भी होती है, जिनका नाभिक नन्हा व काला होता है और प्राटोप्लाज्म ( आदिरूप, आदिद्रव्य) बहुत हल्का होता है। इन कोशिकाओं के मुख्य कार्य बल्लाकार कोशिकाओं के ही स्तर पर होते है, लेकिन इनकी बहुसंख्य शाखाएं पड़ोसी कोशिकाओं को जकड़े रहती हैं और ऊपरी परत में कोशिकाओं के बीच-बीच बिंधी रहती हैं ।
कार्य की दृष्टि से अकुरक परत की कोशिकाओं में दो विशेषताएं है । एक तो वे परिचर्म के मुख्य अकुरनशील तत्त्व- एधक (carnbrium) है जिनसे अधिचर्म की सभी ऊपरी परतो की कोशिकाएं बनती ( पनपती) है। आधारीय झिल्ली पर उदग्र खड़ी बल्लाकार कोशिकाओं का विभाजन सूत्रण (mutosis) से होता है। (सूत्रण या सूत्री विभाजन (mitotic division) कोशिका का सामान्य विभाजन, जिसमे राज्यकाय (chromosomes) का लबाई के सहारे टूटना, उनकं जोडे बनना तथा सतान-कोशिकाओं में जोड़ो का समान संख्या में वितरित होना आदि चरण आते है। -अनु.)। दूसरे, अकुरक परत की कोशिकाओं के प्रोटोप्लाज्म में विभिन्न आकार वाली भूरी गुलिकाओं के रूप में एक वर्णक मैलानिन उपस्थित 16 : चर्मरोग चिकित्सा
रहता है अब य माना जाता कि उणक बनने का काम सिर्फ आधारीय परत का दुमाकार कशिकाआ म हाला जो सही मायने म मलानो-काशिकाए (melanocytes) है। अदाज लगाया गया है कि InIII क्षेत्र में आसतन 1155 मलानो-कोशिकार होती है। यह भी निर्धारित किया गया है कि काली चमडी मे मेलानो-कोशिकाओं की संख्या गोरी चमडी से अधिक नहीं होती और त्वचा पर गाढ रंग के धब्बे वाले स्थान पर मेलानी कोशिकाओं की संख्या आस-पास की त्वचा की तुलना में 286 से 145 प्रतिशत ही होती है। इसीलिये अब सर्वमान्य हे कि त्वचा की वर्णकता मेलानो-कोशिकाओं की संख्या पर नहीं, उनकी कार्य क्षमता पर निर्भर करती है। मेलानिन मेलानो-कोशिका के सीतोप्लाज्म (cytoplasm --- कोशिकाद्रव्य) में तीरांजीन (tyrosine ) के आक्सीकरण से प्राप्त उत्पादों के बहुलकन से बनता है, पूरी प्रक्रिया तीराजीनाज ( tyrosinase) नामक खमीर ( ferment) के प्रभाव में चलती है, जिसकी सक्रियता ताम्र-आयनो की उपस्थिति पर निर्भर करती है। अतर्सावी ग्रंथियों का कार्य भी वर्णक बनने की क्रिया पर सक्रिय प्रभाव डालता है। अनुकपी नर्वो (sympathetic nerves) का क्षोभ ( या उद्दीपन, stimulation) वर्णक वनने की क्रिया को दमित करता है, लेकिन परावैगनी किरणे, आयनक विकिरण और कुछ रासायनिक द्रव्य इसे प्रोत्साहित करते है। विटामिन, विशेषकर विटामिन C, वर्णक के बनने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते है ।
कांटल परत (stratum spinosum) अकुरक परत पर होती है, इसकी मोटाई में कोशिकाओं की 5 से 10 कतारे होती है, जो परत के गहरे भागो मे घन्वत (cuboid) होती हैं, पर ऊपर कणमय परत की ओर चपटी होती जाती है । काटल परत की कोशिकाए काटो की तरह उभरी होती हैं और अंकुरक परत की कोशिकाओं के समान ही अतराकोशिकीय सेतुओं से जुड़ी होती है, वे एक-दूसरी को प्रोटोप्लाज्मिक प्रवर्धो द्वारा छूती रहती है। इन कोशिकाओं के नाभिक गॉल व बड़े होते है और उनमें एक या दो केद्रिकाए (जर्मन डॉक्टर Th Langhan, 1839-1915 के नाम ज्ञात कोशिकाए) दिखायी जा सकती हैं (स्वर्ण-रंजित करने पर ) । इनके नाभिक मुश्किल से रंजित होते हैं और इनसे अनेक विशाखित प्रवर्ध निकलते है, जो अन्य कोशिकाओं के बीच फैले रहते है। इन कोशिकाओं में वर्णक नहीं होता, और ये हमेशा अकुरक परत से ऊपर स्थित होती हैं । लागहान-कोशिकाओ की प्रकृति अभी जात नही हुई है। कुछ विशेषज्ञ इन्हें नर्व-मूल का मानते हैं, कुछ इन्हे 'प्रवासी' श्वेतकोशिका (leucocytes) कहते है, कुछ मध्यस्रवामूल (mesenchyma origin) का कहते है और कुछ इन्हं वर्णकहीन दुमाकार कोशिकाए मानते है । ( मध्यस्रवा भ्रूण-पिड के प्राथमिक कोटर मे अगो व ऊतको के अधिक
चर्मरोग चिकित्सा 17 | सामान्य चर्म का ऊतलोचन अधिचम, दो सूचर्म, तीन अवधार्म बसा चार वपाल ग्रंथि, पाँच लोमकूप छः चर्मरोग चिकि आधारीय या अकुरक परत काटल परत, कणमय परत, स्वच्छ परत, श्रृंगी परत । हथेली और तलवे पर ये परते अधिक स्पष्ट है, चेहरे, वक्ष और हाथ-पैर की आकोचनी सतहो ) पर स्वच्छ परत अनुपस्थित होती है, लेकिन इन क्षेत्रो मे ऋणमय परत कोशिकाओं की इकहरी कतार से बनी होती है, जो कहीं-कहीं टूटी भी होती है। अधिचर्म मे नर्व-सिराए अनेक होती हैं, लेकिन रक्तवाही कुंभियां एक भी नहीं, कोशिकाओं का पोषण अतराकोशिकीय झिरियों से बहकर आती लसीका द्वारा होता है । आधारीय या अंकुरक परत अधिचर्म की सबसे भीतरी परत है और सीधे सुचर्म पर टिकी होती है। यह बल्लाकार कोशिकाओं की इकहरी परत से बनी होती हैं, इन कोशिकाओं के बीच झिरीनुमा स्थान अंतराकोशिकीय सेतु कहलाता है। बड़े-बड़े गोल या अडाकार नाभिक अधिकांशनः इन कोशिकाओं के ऊपरी भाग में ही दिखते है, जो खोमातिन से काफी समृद्ध होते हैं और इससे गाढ़ा रंगे होते है Į यही कारण है कि वे ऊपरी परत की कोशिका- नाभिकों की तुलना में अधिक काले नजर आते है है अकुरक परत में बल्लाकार कोशिकाओं के अतिरिक्त कहीं-कहीं पर एक विशेष प्रकार की विशाखनरत कोशिकाओं मे भी होती है, जिनका नाभिक नन्हा व काला होता है और प्राटोप्लाज्म बहुत हल्का होता है। इन कोशिकाओं के मुख्य कार्य बल्लाकार कोशिकाओं के ही स्तर पर होते है, लेकिन इनकी बहुसंख्य शाखाएं पड़ोसी कोशिकाओं को जकड़े रहती हैं और ऊपरी परत में कोशिकाओं के बीच-बीच बिंधी रहती हैं । कार्य की दृष्टि से अकुरक परत की कोशिकाओं में दो विशेषताएं है । एक तो वे परिचर्म के मुख्य अकुरनशील तत्त्व- एधक है जिनसे अधिचर्म की सभी ऊपरी परतो की कोशिकाएं बनती है। आधारीय झिल्ली पर उदग्र खड़ी बल्लाकार कोशिकाओं का विभाजन सूत्रण से होता है। कोशिका का सामान्य विभाजन, जिसमे राज्यकाय का लबाई के सहारे टूटना, उनकं जोडे बनना तथा सतान-कोशिकाओं में जोड़ो का समान संख्या में वितरित होना आदि चरण आते है। -अनु.)। दूसरे, अकुरक परत की कोशिकाओं के प्रोटोप्लाज्म में विभिन्न आकार वाली भूरी गुलिकाओं के रूप में एक वर्णक मैलानिन उपस्थित सोलह : चर्मरोग चिकित्सा रहता है अब य माना जाता कि उणक बनने का काम सिर्फ आधारीय परत का दुमाकार कशिकाआ म हाला जो सही मायने म मलानो-काशिकाए है। अदाज लगाया गया है कि InIII क्षेत्र में आसतन एक हज़ार एक सौ पचपन मलानो-कोशिकार होती है। यह भी निर्धारित किया गया है कि काली चमडी मे मेलानो-कोशिकाओं की संख्या गोरी चमडी से अधिक नहीं होती और त्वचा पर गाढ रंग के धब्बे वाले स्थान पर मेलानी कोशिकाओं की संख्या आस-पास की त्वचा की तुलना में दो सौ छियासी से एक सौ पैंतालीस प्रतिशत ही होती है। इसीलिये अब सर्वमान्य हे कि त्वचा की वर्णकता मेलानो-कोशिकाओं की संख्या पर नहीं, उनकी कार्य क्षमता पर निर्भर करती है। मेलानिन मेलानो-कोशिका के सीतोप्लाज्म में तीरांजीन के आक्सीकरण से प्राप्त उत्पादों के बहुलकन से बनता है, पूरी प्रक्रिया तीराजीनाज नामक खमीर के प्रभाव में चलती है, जिसकी सक्रियता ताम्र-आयनो की उपस्थिति पर निर्भर करती है। अतर्सावी ग्रंथियों का कार्य भी वर्णक बनने की क्रिया पर सक्रिय प्रभाव डालता है। अनुकपी नर्वो का क्षोभ वर्णक वनने की क्रिया को दमित करता है, लेकिन परावैगनी किरणे, आयनक विकिरण और कुछ रासायनिक द्रव्य इसे प्रोत्साहित करते है। विटामिन, विशेषकर विटामिन C, वर्णक के बनने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते है । कांटल परत अकुरक परत पर होती है, इसकी मोटाई में कोशिकाओं की पाँच से दस कतारे होती है, जो परत के गहरे भागो मे घन्वत होती हैं, पर ऊपर कणमय परत की ओर चपटी होती जाती है । काटल परत की कोशिकाए काटो की तरह उभरी होती हैं और अंकुरक परत की कोशिकाओं के समान ही अतराकोशिकीय सेतुओं से जुड़ी होती है, वे एक-दूसरी को प्रोटोप्लाज्मिक प्रवर्धो द्वारा छूती रहती है। इन कोशिकाओं के नाभिक गॉल व बड़े होते है और उनमें एक या दो केद्रिकाए दिखायी जा सकती हैं । इनके नाभिक मुश्किल से रंजित होते हैं और इनसे अनेक विशाखित प्रवर्ध निकलते है, जो अन्य कोशिकाओं के बीच फैले रहते है। इन कोशिकाओं में वर्णक नहीं होता, और ये हमेशा अकुरक परत से ऊपर स्थित होती हैं । लागहान-कोशिकाओ की प्रकृति अभी जात नही हुई है। कुछ विशेषज्ञ इन्हें नर्व-मूल का मानते हैं, कुछ इन्हे 'प्रवासी' श्वेतकोशिका कहते है, कुछ मध्यस्रवामूल का कहते है और कुछ इन्हं वर्णकहीन दुमाकार कोशिकाए मानते है । ( मध्यस्रवा भ्रूण-पिड के प्राथमिक कोटर मे अगो व ऊतको के अधिक चर्मरोग चिकित्सा सत्रह |
Income Tax Last Date 2022: अगर आप अर्जक हैं तो आपको किसी भी हाल में अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल (Income Tax Return File )करना चाहिए। वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए आईटीआर दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2022 है।
यहां एक बात ध्यान देने वाली है कि रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख भी अलग-अलग कैटेगरी के टैक्सपेयर्स के लिए ही है । उस स्थिति में, आपको उन करदाताओं की श्रेणी में रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि याद रखने की आवश्यकता है जिनसे आप संबंधित हैं।
ऐसा इसलिए है क्योंकि अगर आप समय पर अपना टैक्स रिटर्न दाखिल नहीं करते हैं, तो आपको भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है। भुगतान करने के लिए, हालांकि, कभी-कभी सरकार करदाताओं को राहत प्रदान करने के लिए आईटीआई दाखिल करने की तारीख एक या दो बार बढ़ाने का फैसला करती है।
। वेतनभोगी लोगों के लिए आईटीआर दाखिल करने की आखिरी तारीख हर साल 31 जुलाई है।
2. यदि आप एक एचयूएफ (हिंदू अविभाजित परिवार) श्रेणी के करदाता हैं, तो आपके लिए अपना आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई होगी।
3. उन सभी करदाताओं के लिए जिन्हें अपने खातों का ऑडिट करने की आवश्यकता है, आयकर दाखिल करने की अंतिम तिथि अक्टूबर 2022 होगी। इसमें व्यक्तिगत करदाता, साझेदारी संगठनों के भागीदार, कंपनियां और अन्य प्रकार के संगठन शामिल हैं। इस श्रेणी के करदाताओं को आयकर रिटर्न दाखिल करने से पहले एक चार्टर्ड एकाउंटेंट द्वारा अपने खातों का ऑडिट करवाना आवश्यक है।
4. आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 92ई के तहत, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यवहार करने वाले किसी भी प्रकार के व्यवसाय के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 30 नवंबर 2022 होगी।
यदि आप समय पर अपना आईटीआर रिटर्न दाखिल नहीं करते हैं तो क्या होगा?
यदि आप अपने आयकर रिटर्न की नियत तारीख तक अपना रिटर्न दाखिल नहीं करते हैं, तो आपको कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, आपको जुर्माना और ब्याज के साथ देर से रिटर्न दाखिल करने का अवसर मिलता है। वित्तीय वर्ष 2017-18 तक आईटीआर रिटर्न देर से दाखिल करने पर किसी तरह के जुर्माने का प्रावधान नहीं था, लेकिन फिर वित्त मंत्रालय ने नियमों में बदलाव करते हुए निर्धारित समय में रिटर्न नहीं भरने वालों पर जुर्माना लगाना शुरू कर दिया.
आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 139 (4) के तहत, करदाता समय सीमा के बाद विलंब शुल्क के साथ अपना रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। ऐसे मामलों में, व्यक्तिगत करदाताओं को इस साल 31 जुलाई, 2022 के बाद रिटर्न दाखिल करने पर 5,000 रुपये का जुर्माना देना होगा। अगर किसी वित्तीय वर्ष में करदाता की आय 5 लाख रुपये से कम है तो उसे 1000 रुपये की लेट फीस देनी होगी।
इसके अलावा, यदि करदाता या करदाता की कोई कर देयता है, यदि आईटीआर का भुगतान देर से किया जाता है, तो उसे आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 234ए के तहत कर बकाया पर ब्याज भी देना होगा। इसकी गणना समय सीमा के बाद पहले दिन से रिटर्न दाखिल करने के दिन तक की जाएगी। हालांकि, अगर करदाता की कोई कर देनदारी नहीं है, तो आपको कोई ब्याज नहीं देना होगा।
| Income Tax Last Date दो हज़ार बाईस: अगर आप अर्जक हैं तो आपको किसी भी हाल में अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना चाहिए। वित्तीय वर्ष दो हज़ार इक्कीस-बाईस के लिए आईटीआर दाखिल करने की अंतिम तिथि इकतीस जुलाई दो हज़ार बाईस है। यहां एक बात ध्यान देने वाली है कि रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख भी अलग-अलग कैटेगरी के टैक्सपेयर्स के लिए ही है । उस स्थिति में, आपको उन करदाताओं की श्रेणी में रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि याद रखने की आवश्यकता है जिनसे आप संबंधित हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि अगर आप समय पर अपना टैक्स रिटर्न दाखिल नहीं करते हैं, तो आपको भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है। भुगतान करने के लिए, हालांकि, कभी-कभी सरकार करदाताओं को राहत प्रदान करने के लिए आईटीआई दाखिल करने की तारीख एक या दो बार बढ़ाने का फैसला करती है। । वेतनभोगी लोगों के लिए आईटीआर दाखिल करने की आखिरी तारीख हर साल इकतीस जुलाई है। दो. यदि आप एक एचयूएफ श्रेणी के करदाता हैं, तो आपके लिए अपना आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि इकतीस जुलाई होगी। तीन. उन सभी करदाताओं के लिए जिन्हें अपने खातों का ऑडिट करने की आवश्यकता है, आयकर दाखिल करने की अंतिम तिथि अक्टूबर दो हज़ार बाईस होगी। इसमें व्यक्तिगत करदाता, साझेदारी संगठनों के भागीदार, कंपनियां और अन्य प्रकार के संगठन शामिल हैं। इस श्रेणी के करदाताओं को आयकर रिटर्न दाखिल करने से पहले एक चार्टर्ड एकाउंटेंट द्वारा अपने खातों का ऑडिट करवाना आवश्यक है। चार. आयकर अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ इकसठ की धारा बानवेई के तहत, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यवहार करने वाले किसी भी प्रकार के व्यवसाय के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि तीस नवंबर दो हज़ार बाईस होगी। यदि आप समय पर अपना आईटीआर रिटर्न दाखिल नहीं करते हैं तो क्या होगा? यदि आप अपने आयकर रिटर्न की नियत तारीख तक अपना रिटर्न दाखिल नहीं करते हैं, तो आपको कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, आपको जुर्माना और ब्याज के साथ देर से रिटर्न दाखिल करने का अवसर मिलता है। वित्तीय वर्ष दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह तक आईटीआर रिटर्न देर से दाखिल करने पर किसी तरह के जुर्माने का प्रावधान नहीं था, लेकिन फिर वित्त मंत्रालय ने नियमों में बदलाव करते हुए निर्धारित समय में रिटर्न नहीं भरने वालों पर जुर्माना लगाना शुरू कर दिया. आयकर अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ इकसठ की धारा एक सौ उनतालीस के तहत, करदाता समय सीमा के बाद विलंब शुल्क के साथ अपना रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। ऐसे मामलों में, व्यक्तिगत करदाताओं को इस साल इकतीस जुलाई, दो हज़ार बाईस के बाद रिटर्न दाखिल करने पर पाँच,शून्य रुपयापये का जुर्माना देना होगा। अगर किसी वित्तीय वर्ष में करदाता की आय पाँच लाख रुपये से कम है तो उसे एक हज़ार रुपयापये की लेट फीस देनी होगी। इसके अलावा, यदि करदाता या करदाता की कोई कर देयता है, यदि आईटीआर का भुगतान देर से किया जाता है, तो उसे आयकर अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ इकसठ की धारा दो सौ चौंतीसए के तहत कर बकाया पर ब्याज भी देना होगा। इसकी गणना समय सीमा के बाद पहले दिन से रिटर्न दाखिल करने के दिन तक की जाएगी। हालांकि, अगर करदाता की कोई कर देनदारी नहीं है, तो आपको कोई ब्याज नहीं देना होगा। |
वाराहे पुराण
वराह जी कहने लगे कि वह गोरेमुख पहिले जन्म में भृगु था और उसी के वंश में पैदा हुआ मारकण्डेय मुनि था ।४। तुम पुत्रों से बोधित किये हो कि सुगति को प्राप्त करो ये जो पहिले कहा गया था उमी से मारकण्डेय ने गोरेमुख को वोधित किया ।।५।। गोरेमुख ने सव जन्म स्मरण किये और स्मरण कर जो कृत्य किया उसको संक्षेप से कहता हूँ तू सुन ।।६।। इस प्रकार श्राद्ध विधान से वारह वर्षों तक पितरों का यजन किया। फिर हरि का स्तोत्र पढने लगा ।।७।। तीनों लोकों में विख्यात प्रभास नाम का जो तीर्थ है उसमें देत्यान्तक देव की स्तुति करने लगा ॥८॥ गोरे सुख कहने लगा अथ दशावतार स्तोत्रम् शत्रुओं के घमंड दूर करने के वालों को कल्याण स्वरूप को, नारायण को, ब्रह्मन् वेताओं में श्रेष्ठ को सूर्य चन्द्र अश्विनी कुमार की मूर्ति वाले को, आद्य को, पुरातन को, दैत्य हर को, तथा हरि को हमेशा नमस्कार करता हूँ ।।६।। जिसने वेदों के विनाश काल में पुरातन मात्स्यवपु धारण किया है, और आद्य सुर शत्रु को मारा है उसकी में स्तुति करता हूं । १०॥ तथा समुद्र मयते ममय जिसने कच्छुये का रूप धर मंदराचल को धारण किया है, भलाई हेतु प्राप्त हुये पुराण पुरुष मेरी रक्षा करें ॥ ११ ॥ जिस महा वराह ने रसातल में जाकर पृथ्वी का उद्धार किया तथा हिरण्याक्ष असुर को मारा वह यज्ञावतार मेरी रक्षा करें जिन योगिराज ने भयंकर करालमुख वाला नृसिंह अवतार युग युग में धारण किया है, वही सुवर्ण समान कान्ति वाले, भक्त प्रह्लद को बचाने वाले तथा हिरंयकशिपु दैत्य को मारने वाले नृसिंह भगवान् मेरी रक्षा करें ।।१३।। जिस अप्रमेय ने वावनावतार से ब्रह्मचारी का वेश धारण कर राजा बलि का यज्ञ विध्वंस किया और वलि मे लं पूर्वक तीन पैर पृथ्वी मांग तीनों लोक नापे वही योगालक हमारी रक्षा करें ।।१४।। जिसने इक्कीस वार पृथ्वी को जीतकर कश्यप के | वाराहे पुराण वराह जी कहने लगे कि वह गोरेमुख पहिले जन्म में भृगु था और उसी के वंश में पैदा हुआ मारकण्डेय मुनि था ।चार। तुम पुत्रों से बोधित किये हो कि सुगति को प्राप्त करो ये जो पहिले कहा गया था उमी से मारकण्डेय ने गोरेमुख को वोधित किया ।।पाँच।। गोरेमुख ने सव जन्म स्मरण किये और स्मरण कर जो कृत्य किया उसको संक्षेप से कहता हूँ तू सुन ।।छः।। इस प्रकार श्राद्ध विधान से वारह वर्षों तक पितरों का यजन किया। फिर हरि का स्तोत्र पढने लगा ।।सात।। तीनों लोकों में विख्यात प्रभास नाम का जो तीर्थ है उसमें देत्यान्तक देव की स्तुति करने लगा ॥आठ॥ गोरे सुख कहने लगा अथ दशावतार स्तोत्रम् शत्रुओं के घमंड दूर करने के वालों को कल्याण स्वरूप को, नारायण को, ब्रह्मन् वेताओं में श्रेष्ठ को सूर्य चन्द्र अश्विनी कुमार की मूर्ति वाले को, आद्य को, पुरातन को, दैत्य हर को, तथा हरि को हमेशा नमस्कार करता हूँ ।।छः।। जिसने वेदों के विनाश काल में पुरातन मात्स्यवपु धारण किया है, और आद्य सुर शत्रु को मारा है उसकी में स्तुति करता हूं । दस॥ तथा समुद्र मयते ममय जिसने कच्छुये का रूप धर मंदराचल को धारण किया है, भलाई हेतु प्राप्त हुये पुराण पुरुष मेरी रक्षा करें ॥ ग्यारह ॥ जिस महा वराह ने रसातल में जाकर पृथ्वी का उद्धार किया तथा हिरण्याक्ष असुर को मारा वह यज्ञावतार मेरी रक्षा करें जिन योगिराज ने भयंकर करालमुख वाला नृसिंह अवतार युग युग में धारण किया है, वही सुवर्ण समान कान्ति वाले, भक्त प्रह्लद को बचाने वाले तथा हिरंयकशिपु दैत्य को मारने वाले नृसिंह भगवान् मेरी रक्षा करें ।।तेरह।। जिस अप्रमेय ने वावनावतार से ब्रह्मचारी का वेश धारण कर राजा बलि का यज्ञ विध्वंस किया और वलि मे लं पूर्वक तीन पैर पृथ्वी मांग तीनों लोक नापे वही योगालक हमारी रक्षा करें ।।चौदह।। जिसने इक्कीस वार पृथ्वी को जीतकर कश्यप के |
यस्मिन्प्रतिष्ठितो भास्वान्मेधीभूता स्वयं ध्रुवं।
धु्रवेच सर्वज्योतिषि ज्योतिः ष्वम्भोभूचो द्विजः।
मेघेषु सङ्गता वृष्टिर्वृष्टेः मृष्टेश्च पोषणम्।
आप्यायन च सर्वेषां देवादीनां महामुने।
ततश्चाज्याहुतिद्वारा पोषितास्ते हर्विर्भुजः।
वृष्टेः कारणातां यांति भूतानां स्थितये पुनः।
एवमेतत्पद विष्णोस्तृतीयममलात्मकाम्।
आधारभूत लोकानां त्रयाणं वृष्टिकारणम्।
ततः प्रभवति ब्रह्मन्सर्वपापहरा सरित्।
गङ्गा देवाङ्गनामनुले निपिजरा।
वामपादाम्बुर्जागुश्ठान खस्रौतोविनिर्गताम्।
विष्णोविभर्ति या भक्त्या शिरसाहर्निशं धु्रव।
हे द्विज! उसी विष्णु पद में सबके आश्रयभूत अत्यंत तेजस्वी धु्रव की स्थिति है और धु्रव में सब नक्षत्र स्थित है। नक्षत्रों मंे मेघ तथा मेघों में वृष्टि आश्रय लिए हुए है। इसी दृष्टि के द्वारा सृष्टि का पोषण होता है तथा वही सब देवता मनुष्यादि प्राणियों को पुष्ट करती है। फिर देवादि प्राणियों से उत्पन्न दूध, घी आदि की आहुतियों से तृप्त हुए अग्नि ही प्राणियों का पालन करने के लिए पुनः वृष्टि कारक होते हैं।
इसी प्रकार भगवान विष्णु का तीसरा लोक ही तीनों लोकों का आधार भूत तथा वर्षा आदि करने वाला है। हे ब्रह्मण! इसी विष्णुपद से देवांगनाओं अङ्गराय के मिश्रण से पांडु वर्ण की सी होकर सब पापों को नष्ट करने वाली सरिता गंगाजी प्रकट हुई है। भगवान विष्णु के बाएं चरण कमल अंगुष्ठ नखरूपी स्रोत से निर्गत उन गंगाजी को धु्रव अजर्निशि अपने शिर पर धारण किए रहता है।
तिष्ठन्ति बीचिमालाभिरुह्यमानजटा जले।
वार्योधः संततैर्यस्यां प्लावितं शशिमंडलम्।
भर्योऽधिकतरां कांति वहत्वेतदुह क्षये।
मेरुपृष्ठे पतत्पुज्चैर्निष्क्रांता शशिमंडलात्।
जगतः पाननार्थाय प्रयाति च चतुर्दिशम्।
सीमा चालकनन्दा यस्याः सर्वोऽपि दक्षिणाम्।
मधिकं शतम्।
शम्भोर्जटाकलाच्च विरिष्क्रांतास्थिशर्कराः।
प्लावयित दिवं निन्ये या पापान्सगरात्मजान्।
फिर उनके जल में स्थित हुए, प्राणायाम परायण सप्तर्षि उनकी तरंगों से जटाओं के कम्पित होते हुए भी पापों का मर्दन करने वाले को जपते रहते हैं और जिनकी गहन जल राशि से आप्लावित हुआ चंद्र मंडल क्षीण होने के पश्चात अधिक कांतिवान हो जाता है, वे गंगाजी उस चंद्रमंडल से निकल कर मेरे पर्वत पर गिरती हुई जगत को पवित्र करने के लिए चारों दिशाओं को गमन करती है। चार दिशाओं में जाती हुई एक ही गंगाजी चार धाराओं के रूप में होकर सीता, अलकनंदा चक्षु और भद्र कही जाती है, जिनकी अलकनंदा नामक दक्षिणीय धारों को शिवजी ने सौ वर्ष से भी अधिक समय तक अपने मस्तक पर प्रीति सहित धारण किया था, जिसने उन शिवजी की जटाओं से निकल कर पाप कर्मा सगर पुत्रों की हड्डियों चूरत को आप्लावित कर उन्हें स्वर्ग प्राप्त करा दिया था।
| यस्मिन्प्रतिष्ठितो भास्वान्मेधीभूता स्वयं ध्रुवं। धु्रवेच सर्वज्योतिषि ज्योतिः ष्वम्भोभूचो द्विजः। मेघेषु सङ्गता वृष्टिर्वृष्टेः मृष्टेश्च पोषणम्। आप्यायन च सर्वेषां देवादीनां महामुने। ततश्चाज्याहुतिद्वारा पोषितास्ते हर्विर्भुजः। वृष्टेः कारणातां यांति भूतानां स्थितये पुनः। एवमेतत्पद विष्णोस्तृतीयममलात्मकाम्। आधारभूत लोकानां त्रयाणं वृष्टिकारणम्। ततः प्रभवति ब्रह्मन्सर्वपापहरा सरित्। गङ्गा देवाङ्गनामनुले निपिजरा। वामपादाम्बुर्जागुश्ठान खस्रौतोविनिर्गताम्। विष्णोविभर्ति या भक्त्या शिरसाहर्निशं धु्रव। हे द्विज! उसी विष्णु पद में सबके आश्रयभूत अत्यंत तेजस्वी धु्रव की स्थिति है और धु्रव में सब नक्षत्र स्थित है। नक्षत्रों मंे मेघ तथा मेघों में वृष्टि आश्रय लिए हुए है। इसी दृष्टि के द्वारा सृष्टि का पोषण होता है तथा वही सब देवता मनुष्यादि प्राणियों को पुष्ट करती है। फिर देवादि प्राणियों से उत्पन्न दूध, घी आदि की आहुतियों से तृप्त हुए अग्नि ही प्राणियों का पालन करने के लिए पुनः वृष्टि कारक होते हैं। इसी प्रकार भगवान विष्णु का तीसरा लोक ही तीनों लोकों का आधार भूत तथा वर्षा आदि करने वाला है। हे ब्रह्मण! इसी विष्णुपद से देवांगनाओं अङ्गराय के मिश्रण से पांडु वर्ण की सी होकर सब पापों को नष्ट करने वाली सरिता गंगाजी प्रकट हुई है। भगवान विष्णु के बाएं चरण कमल अंगुष्ठ नखरूपी स्रोत से निर्गत उन गंगाजी को धु्रव अजर्निशि अपने शिर पर धारण किए रहता है। तिष्ठन्ति बीचिमालाभिरुह्यमानजटा जले। वार्योधः संततैर्यस्यां प्लावितं शशिमंडलम्। भर्योऽधिकतरां कांति वहत्वेतदुह क्षये। मेरुपृष्ठे पतत्पुज्चैर्निष्क्रांता शशिमंडलात्। जगतः पाननार्थाय प्रयाति च चतुर्दिशम्। सीमा चालकनन्दा यस्याः सर्वोऽपि दक्षिणाम्। मधिकं शतम्। शम्भोर्जटाकलाच्च विरिष्क्रांतास्थिशर्कराः। प्लावयित दिवं निन्ये या पापान्सगरात्मजान्। फिर उनके जल में स्थित हुए, प्राणायाम परायण सप्तर्षि उनकी तरंगों से जटाओं के कम्पित होते हुए भी पापों का मर्दन करने वाले को जपते रहते हैं और जिनकी गहन जल राशि से आप्लावित हुआ चंद्र मंडल क्षीण होने के पश्चात अधिक कांतिवान हो जाता है, वे गंगाजी उस चंद्रमंडल से निकल कर मेरे पर्वत पर गिरती हुई जगत को पवित्र करने के लिए चारों दिशाओं को गमन करती है। चार दिशाओं में जाती हुई एक ही गंगाजी चार धाराओं के रूप में होकर सीता, अलकनंदा चक्षु और भद्र कही जाती है, जिनकी अलकनंदा नामक दक्षिणीय धारों को शिवजी ने सौ वर्ष से भी अधिक समय तक अपने मस्तक पर प्रीति सहित धारण किया था, जिसने उन शिवजी की जटाओं से निकल कर पाप कर्मा सगर पुत्रों की हड्डियों चूरत को आप्लावित कर उन्हें स्वर्ग प्राप्त करा दिया था। |
नई दिल्ली। भारत में लोग पेट्रोल-डीजल की कीमतों (Prices Of Petrol-Diesel) में लगी आग से परेशान हैं. कई राज्यों में इसकी कीमत सौ के पार हो गई है. इस बीच सोशल मीडिया (Social Media) पर एक पेट्रोल स्टेशन की तस्वीर सामने आई है. इसमें देख सकते हैं कि कैसे यहां लाखों कीड़ों ने (Millions Insects Cover Petrol Station) कब्ज़ा जमा लिया है।
आज के समय में दुनिया के कई देशों के सामने जो सबसे बड़ी समस्या है, वो है तेल की बड़ी कीमत (Price Of Petrol Diesel). कच्चे तेल की कीमत में आई उछाल के बाद कई देशों में तेल के दाम बढ़े हैं. हालांकि, कई देशों में पेट्रोल-डीजल के अलावा गैस से भी गाड़ी चलाई जाती है. इस बीच इंटरनेट पर एक वीडियो तेजी से वायरल (Petrol Pump Viral Video) हो रहा है. इसमें देख सकते हैं कि एक पेट्रोल पंप पर लाखों कीड़ों ने कब्ज़ा कर लिया है. वीडियो ने लोगों को हैरत में डाल दिया है.
जानकारी के मुताबिक़, ये वीडियो मिशिगन का है. यहां एक पेट्रोल स्टेशन पर लाखों कीड़ों ने कब्ज़ा कर लिया है. हालत ऐसी है कि कोई यहां से गैस तक ले नहीं पा रहा है. स्टेशन में गैस, पेट्रोल सब मौजूद है. लेकिन कीड़े किसी को भी पास आने नहीं दे रहे. पूरे स्टेशन पर उनका कब्ज़ा है. अगर कोई स्टेशन पर पेट्रोल लेने जा रहा है तो कीड़े उनपर अटैक कर दे रहे हैं.
टिकटोक पर 4 जुलाई को इस पेट्रोल स्टेशन का वीडियो शेयर किया गया. इसमें देखा गया कि कैसे पूरे स्टेशन पर कीड़ों ने कब्ज़ा कर लिया है. वहां पैर रखने तक की जगह नहीं है. साथ ही एक शख्स अपने बच्चे के साथ जब वहां गया, तो कीड़ों ने अटैक कर दिया. बच्चे के हाथ-पैर पर कीड़े बैठे थे. पुरे स्टेशन पर कीड़े फैले नजर आ रहे हैं.
वीडियो देख कई लोगों ने इसपर कमेंट किया. एक शख्स ने लिखा कि आज तक उसने इतने कीड़े कभी नहीं देखे. कैसे कोई यहां जा भी सकता है? अभी तक वीडियो को 50 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है. भारत में टिकटोक बैन है, ऐसे में इसकी तस्वीरें शेयर की जा रही हैं. कई लोगों को इसकी फोटोज ही डरवानी लग रही है. Share:
| नई दिल्ली। भारत में लोग पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगी आग से परेशान हैं. कई राज्यों में इसकी कीमत सौ के पार हो गई है. इस बीच सोशल मीडिया पर एक पेट्रोल स्टेशन की तस्वीर सामने आई है. इसमें देख सकते हैं कि कैसे यहां लाखों कीड़ों ने कब्ज़ा जमा लिया है। आज के समय में दुनिया के कई देशों के सामने जो सबसे बड़ी समस्या है, वो है तेल की बड़ी कीमत . कच्चे तेल की कीमत में आई उछाल के बाद कई देशों में तेल के दाम बढ़े हैं. हालांकि, कई देशों में पेट्रोल-डीजल के अलावा गैस से भी गाड़ी चलाई जाती है. इस बीच इंटरनेट पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. इसमें देख सकते हैं कि एक पेट्रोल पंप पर लाखों कीड़ों ने कब्ज़ा कर लिया है. वीडियो ने लोगों को हैरत में डाल दिया है. जानकारी के मुताबिक़, ये वीडियो मिशिगन का है. यहां एक पेट्रोल स्टेशन पर लाखों कीड़ों ने कब्ज़ा कर लिया है. हालत ऐसी है कि कोई यहां से गैस तक ले नहीं पा रहा है. स्टेशन में गैस, पेट्रोल सब मौजूद है. लेकिन कीड़े किसी को भी पास आने नहीं दे रहे. पूरे स्टेशन पर उनका कब्ज़ा है. अगर कोई स्टेशन पर पेट्रोल लेने जा रहा है तो कीड़े उनपर अटैक कर दे रहे हैं. टिकटोक पर चार जुलाई को इस पेट्रोल स्टेशन का वीडियो शेयर किया गया. इसमें देखा गया कि कैसे पूरे स्टेशन पर कीड़ों ने कब्ज़ा कर लिया है. वहां पैर रखने तक की जगह नहीं है. साथ ही एक शख्स अपने बच्चे के साथ जब वहां गया, तो कीड़ों ने अटैक कर दिया. बच्चे के हाथ-पैर पर कीड़े बैठे थे. पुरे स्टेशन पर कीड़े फैले नजर आ रहे हैं. वीडियो देख कई लोगों ने इसपर कमेंट किया. एक शख्स ने लिखा कि आज तक उसने इतने कीड़े कभी नहीं देखे. कैसे कोई यहां जा भी सकता है? अभी तक वीडियो को पचास लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है. भारत में टिकटोक बैन है, ऐसे में इसकी तस्वीरें शेयर की जा रही हैं. कई लोगों को इसकी फोटोज ही डरवानी लग रही है. Share: |
पटना : लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद गायब तेजस्वी यादव ने ट्वीट किया है, तेजस्वी यादव ने कहा है कि वो गायब नहीं है बल्कि अपने घुटने का इलाज करा रहे है और उनकी लड़ाई जारी रहेगी.
तेजस्वी ने ट्वीट किया है कि 'दोस्तों! मैं पिछले कुछ हफ्तों से लिगामेंट और एसीएल इंजरी का इलाज कराने में व्यस्त था. हालांकि मैं राजनीतिक विरोधियों और मीडिया के एक धड़े की मसालेदार कहानियों को देखकर मजा ले रहा हूं. 'उन्होंने ताबड़तोड़ चार ट्वीट किए.
Friends! For last few weeks I was busy undergoing treatment for my long delayed ligament & ACL injury. However, I'm amused to see political opponents as well as a section of media cooking up spicy stories.
तेजस्वी ने ट्वीट कर कहा है कि आरजेडी अपनी स्थापना के समय से ही गरीबों के संघर्ष का केंद्र रही है और यह स्थान हम केवल एक चुनावी हार के कारण नहीं गंवाएंगे. गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के परिणामों की घोषणा के बाद से ही तेजस्वी कहां थे, यह पता नहीं चल रहा था.
As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future.
| पटना : लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद गायब तेजस्वी यादव ने ट्वीट किया है, तेजस्वी यादव ने कहा है कि वो गायब नहीं है बल्कि अपने घुटने का इलाज करा रहे है और उनकी लड़ाई जारी रहेगी. तेजस्वी ने ट्वीट किया है कि 'दोस्तों! मैं पिछले कुछ हफ्तों से लिगामेंट और एसीएल इंजरी का इलाज कराने में व्यस्त था. हालांकि मैं राजनीतिक विरोधियों और मीडिया के एक धड़े की मसालेदार कहानियों को देखकर मजा ले रहा हूं. 'उन्होंने ताबड़तोड़ चार ट्वीट किए. Friends! For last few weeks I was busy undergoing treatment for my long delayed ligament & ACL injury. However, I'm amused to see political opponents as well as a section of media cooking up spicy stories. तेजस्वी ने ट्वीट कर कहा है कि आरजेडी अपनी स्थापना के समय से ही गरीबों के संघर्ष का केंद्र रही है और यह स्थान हम केवल एक चुनावी हार के कारण नहीं गंवाएंगे. गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के परिणामों की घोषणा के बाद से ही तेजस्वी कहां थे, यह पता नहीं चल रहा था. As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future. |
दलित दस्तक मासिक पत्रिका और वेबसाइट के लिए एक काबिल एवं अनुभवी पत्रकार/एक्टिविस्ट की जरूरत है। आवेदन करने वाले का दलित/पिछड़े एवं वंचित तबके के मुद्दे से जुड़ाव होना सबसे पहली शर्त है। वेब और इलेक्ट्रानिक माध्यम में अनुभव वालों को प्राथमिकता दी जाएगी। वेतनमानः सम्मानजनक।
| दलित दस्तक मासिक पत्रिका और वेबसाइट के लिए एक काबिल एवं अनुभवी पत्रकार/एक्टिविस्ट की जरूरत है। आवेदन करने वाले का दलित/पिछड़े एवं वंचित तबके के मुद्दे से जुड़ाव होना सबसे पहली शर्त है। वेब और इलेक्ट्रानिक माध्यम में अनुभव वालों को प्राथमिकता दी जाएगी। वेतनमानः सम्मानजनक। |
अगर आप फीचर को अपने फोन में यूज़ करना चाहते हैं तो आपको इसका बीटा वर्जन डाउनलोड करना होगा. मगर ध्यान रहे कि beta version में बग हो सकते हैं, और अब देखना ये है कि विंडोज़ फोन में आने के बाद ये कब एंड्रॉयड और iOS के लिए भी पेश किया जाता है.
उत्तर रेलवे ने काम के दौरान कर्मचारियों के व्हॉट्सऐप चैटिंग पर रोक लगा दी है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रेलवे ने आए दिन हो रहे रेल हादसों पर अंकुश लगाने के लिए इस नियम को लागू किया है. इसके लिए सर्कुलर जारी किया गया है. यह सर्कुलर उत्तर रेलवे की दिल्ली डिविजन ने जारी किया है.
अभी ये नियम उत्तर रेलवे ने लागू किया है. मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि जल्द ही देशभर के सभी रेलवे जोन इस नियम को लागू करेंगे. इस नियम के बाद अब उत्तर रेलवे जोन में काम करने वाले ट्रेन गार्ड, स्टेशन मास्टर, टिकट कलेक्टर, प्वाइंटमैन, गेटमैन, गैंगमैन व्हॉट्सऐप नहीं चलाएंगे.
रेलवे ने चेतावनी दी है कि इस नियम के लागू होने के बाद भी अगर कोई रेलवे अधिकारी या कर्मचारी व्हाट्सएप पर चैट करता हुए देखा गया को उस पर सख्त कार्रवाई होगी.
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सनी देओल की हीरोइन को जब ज्यादा पढ़ी-लिखी होना पड़ा भारी, एक्ट्रेस ने खूब सुने थे ताने, बोलीं- इंडस्ट्री में. .
| अगर आप फीचर को अपने फोन में यूज़ करना चाहते हैं तो आपको इसका बीटा वर्जन डाउनलोड करना होगा. मगर ध्यान रहे कि beta version में बग हो सकते हैं, और अब देखना ये है कि विंडोज़ फोन में आने के बाद ये कब एंड्रॉयड और iOS के लिए भी पेश किया जाता है. उत्तर रेलवे ने काम के दौरान कर्मचारियों के व्हॉट्सऐप चैटिंग पर रोक लगा दी है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रेलवे ने आए दिन हो रहे रेल हादसों पर अंकुश लगाने के लिए इस नियम को लागू किया है. इसके लिए सर्कुलर जारी किया गया है. यह सर्कुलर उत्तर रेलवे की दिल्ली डिविजन ने जारी किया है. अभी ये नियम उत्तर रेलवे ने लागू किया है. मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि जल्द ही देशभर के सभी रेलवे जोन इस नियम को लागू करेंगे. इस नियम के बाद अब उत्तर रेलवे जोन में काम करने वाले ट्रेन गार्ड, स्टेशन मास्टर, टिकट कलेक्टर, प्वाइंटमैन, गेटमैन, गैंगमैन व्हॉट्सऐप नहीं चलाएंगे. रेलवे ने चेतावनी दी है कि इस नियम के लागू होने के बाद भी अगर कोई रेलवे अधिकारी या कर्मचारी व्हाट्सएप पर चैट करता हुए देखा गया को उस पर सख्त कार्रवाई होगी. . सनी देओल की हीरोइन को जब ज्यादा पढ़ी-लिखी होना पड़ा भारी, एक्ट्रेस ने खूब सुने थे ताने, बोलीं- इंडस्ट्री में. . |
Okinawa Discount Offers ओकिनावा ने अपने इलेक्ट्रिक स्कूटरों पर वैलेंटाइन-डे डिस्काउंट ऑफर दिया है। इस ऑफर के तहत हजारों रुपये बचाने का मौका मिलता है। ये ऑफर चुनिदा मॉडल्स पर हैं। तो चलिए इसके बारे में जानते हैं। (फाइल फोटो)
नई दिल्ली, ऑटो डेस्क। अगर आप इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने की सोच रहे हैं तो आज खरीदारी करने पर आप हजारों रुपये बचा सकते हैं। इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी ओकिनावा (Okinawa) अपने चुनिंदा स्कूटरों पर वैलेंटाइन-डे ऑफर (Valentine's day Offer) लेकर आई है। इस ऑफर के तहत ग्राहक इलेक्ट्रिक स्कूटरों की खरीद पर कुल 12,500 रुपये बचा सकते हैं।
यह ऑफर लिमिटेड टाइम के लिए दिया जा रहा है। ग्राहक इस ऑफर का लाभ 15 फरवरी तक उठाया जा सकता है। वहीं, इस ऑफर के तहत PraisePro, Okhi-90, Okinawa R 30 लाइट और iPraise+ जैसे मॉडलों को शामिल किया गया है।
वैलेंटाइन-डे ऑफर के अलावा, कंपनी पहले से अपने स्कूटरों पर एक्स्टेंडेड वारंटी ऑफर भी दे रही है। एक्सटेंडेड वारंटी 2 साल तक लागू होगा और यह उन मॉडल्स पर लागू होगा जिसकी शुरुआती कीमत 2287 से लेकर 5494 रुपये तक है। यह वारंटी नए ग्राहकों और उन सभी ग्राहकों के लिए वैध होगी जिन्होंने पिछले 3 सालों के दौरान ओकिनावा की व्हीकल्स को खरीदा है।
जानकारी के लिए बता दें कि भारत में ओकिनावा के इलेक्ट्रिक स्कूटरों की जबरदस्त मांग है। जनवरी 2023 में कंपनी ने 4,238 यूनिट्स की बिक्री की है। कंपनी के सबसे लेटेस्ट स्कूटरों में इलेक्ट्रिक स्कूटर Okhi 90 है, जिसकी शुरूआती कीमत 1,21,866 लाख रूपये (एक्स-शोरूम) है। इसकी टॉप स्पीड 90 किमी प्रतिघंटा है। इस स्कूटर में एक एलईडी इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर दिया गया है, जो गति, रेंज, बैटरी चार्ज आदि जैसे जरूरी रीडआउट की पेशकश करेगा।
Okhi 90 स्कूटर में 3800-वाट के मोटर लगे हुए हैं और इसके साथ यह इलेक्ट्रिक स्कूटर 0 से 90 किमी प्रति घंटे की रफ्तार महज 10 सेकेंड में पकड़ सकता है। रेंज की बात करें तो, OKHI-90 एक बार चार्ज करने पर 160 किमी तक जा सकता है।
| Okinawa Discount Offers ओकिनावा ने अपने इलेक्ट्रिक स्कूटरों पर वैलेंटाइन-डे डिस्काउंट ऑफर दिया है। इस ऑफर के तहत हजारों रुपये बचाने का मौका मिलता है। ये ऑफर चुनिदा मॉडल्स पर हैं। तो चलिए इसके बारे में जानते हैं। नई दिल्ली, ऑटो डेस्क। अगर आप इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने की सोच रहे हैं तो आज खरीदारी करने पर आप हजारों रुपये बचा सकते हैं। इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी ओकिनावा अपने चुनिंदा स्कूटरों पर वैलेंटाइन-डे ऑफर लेकर आई है। इस ऑफर के तहत ग्राहक इलेक्ट्रिक स्कूटरों की खरीद पर कुल बारह,पाँच सौ रुपयापये बचा सकते हैं। यह ऑफर लिमिटेड टाइम के लिए दिया जा रहा है। ग्राहक इस ऑफर का लाभ पंद्रह फरवरी तक उठाया जा सकता है। वहीं, इस ऑफर के तहत PraisePro, Okhi-नब्बे, Okinawa R तीस लाइट और iPraise+ जैसे मॉडलों को शामिल किया गया है। वैलेंटाइन-डे ऑफर के अलावा, कंपनी पहले से अपने स्कूटरों पर एक्स्टेंडेड वारंटी ऑफर भी दे रही है। एक्सटेंडेड वारंटी दो साल तक लागू होगा और यह उन मॉडल्स पर लागू होगा जिसकी शुरुआती कीमत दो हज़ार दो सौ सत्तासी से लेकर पाँच हज़ार चार सौ चौरानवे रुपयापये तक है। यह वारंटी नए ग्राहकों और उन सभी ग्राहकों के लिए वैध होगी जिन्होंने पिछले तीन सालों के दौरान ओकिनावा की व्हीकल्स को खरीदा है। जानकारी के लिए बता दें कि भारत में ओकिनावा के इलेक्ट्रिक स्कूटरों की जबरदस्त मांग है। जनवरी दो हज़ार तेईस में कंपनी ने चार,दो सौ अड़तीस यूनिट्स की बिक्री की है। कंपनी के सबसे लेटेस्ट स्कूटरों में इलेक्ट्रिक स्कूटर Okhi नब्बे है, जिसकी शुरूआती कीमत एक,इक्कीस,आठ सौ छयासठ लाख रूपये है। इसकी टॉप स्पीड नब्बे किमी प्रतिघंटा है। इस स्कूटर में एक एलईडी इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर दिया गया है, जो गति, रेंज, बैटरी चार्ज आदि जैसे जरूरी रीडआउट की पेशकश करेगा। Okhi नब्बे स्कूटर में तीन हज़ार आठ सौ-वाट के मोटर लगे हुए हैं और इसके साथ यह इलेक्ट्रिक स्कूटर शून्य से नब्बे किमी प्रति घंटे की रफ्तार महज दस सेकेंड में पकड़ सकता है। रेंज की बात करें तो, OKHI-नब्बे एक बार चार्ज करने पर एक सौ साठ किमी तक जा सकता है। |
ऊर्जा आर्थिक विकास का एक मुख्य चालक है और सरकार का ध्यान ऊर्जा न्याय और जलवायु न्याय जैसे दो उद्देश्यों को पूरा करने के लिए भारत के ऊर्जा क्षेत्र मे एक गुणात्मक परिवर्तन लाना है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इस क्षेत्र में "सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन" यानि रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म लाने का प्रयास किया है। सरकार ने अन्वेषण और उत्पादन, रिफाइनरी, विपणन, प्राकृतिक गैस और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्रों में दूरगामी प्रभावों को लाने के लिए कई सुधारों और कार्यों को पूरा किया है।
पिछले एक साल में देश में अन्वेषण और उत्पादन की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कई नई पहल की शुरूआत की गई है। पेट्रोलियम और हाइड्रोकार्बन क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने नीति सुधारों की एक श्रृंखला की शुरूआत की है। कुछ उल्लेखनीय नीतिगत सुधार निम्नलिखित हैंः
i. हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन एंड लाइसेंसिंग पॉलिसी (एचईएलपी)/ ओपन एक्रीज लाइसेंसिंग पॉलिसी (ओएएलपी)- आसान व्यवसाय के सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए यह उत्पाद साझाकरण अनुबंध यानि प्रोडक्शन शेयरिंग कॉन्ट्रेक्ट (पीएससी) से राजस्व साझाकरण अनुबंध यानि रेवेन्यू शेयरिंग कॉन्ट्रेक्ट (आरएससी) की दिशा में बढ़ने का एक आदर्श बदलाव है। यह परंपरागत और गैर परंपरागत हाइड्रोकार्बन संसाधनों की खोज और उत्पादन के लिए एकल लाइसेंस प्रदान करता है; मूल्य निर्धारण और विपणन स्वतंत्रता; ऑफशोर ब्लॉकों के लिए अधिशुल्कों की दर में कमी, ओपन एक्यूज लाइसेंसिंग पॉलिसी जिसका मतलब औपचारिक बोली दौर की प्रतीक्षा किए बिना अन्वेषण ब्लॉक का चयन करने का विकल्प है। खुली एकड़ लाइसेंसिंग नीति जिसका अर्थ औपचारिक बोली दौर की प्रतीक्षा किए बिना अन्वेषण ब्लॉक का चयन करने का विकल्प है। खुली एकड़ लाइसेंसिंग नीति, जिसका मतलब औपचारिक बोली की प्रतीक्षा किए बिना अन्वेषण ब्लॉकों का चयन करने का विकल्प होता है। पसंद की अभिव्यक्ति पूरे वर्ष भर जमा की जा सकती है और बोली की प्रक्रिया प्रत्येक 6 महीने में होती है।
ओएएलपी निविदा बोली के प्रथम दौर के अंतर्गत, 59,282 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल वाले 55 खंडों को 1 अक्टूबर, 2018 को आवंटित किया गया। ओएएलपी निविदा बोली के दुसरे दौर के अंतर्गत 14 ब्लॉकों का पेशकश किया गया गया है।
ii. तेल और गैस की प्राप्ति के उन्नत विधियों को बढ़ावा और प्रोत्साहन देने के लिए नीति ढांचा- सरकार ने वित्तीय सुधार के माध्यम से उन्नत रिकवरी (ईआर)/ बेहतर रिकवरी (आईआर)/ अपरंपरागत हाइड्रोकार्बन (यूएचसी) उत्पादन तरीकों/ वित्तीय प्रोत्साहनों के माध्यम से तकनीकों को अपनाने और प्रोत्साहित करने के लिए नीतिगत ढांचे को, साथ ही मौजूदा क्षेत्रों की उत्पादकता में सुधार लाने और घरेलू हाइड्रोकार्बन के उत्पादन को बढ़ाने के लिए एक विकसित पारिस्थितिक तंत्र बनाने की मंजूरी दे दी है।
यह नीति इसके सभी ईआर क्षमताओं, ईआर तकनीकों का मूल्यांकन करता है, ईआर परियोजनाओं में शामिल लागत को कम करता है और इसके आर्थिक महत्व को व्यवहारिक बनाता है।
iii. डिसक्वर्ड स्मॉल फील्ड पॉलिसी (डीएसएफ), राउंड I और II- राष्ट्रीय तेल कंपनियों (एनओसी) की अनौपचारिक खोजों को जल्दी से औपचारिक बनाने के लिए, मंत्रिमंडल ने सितंबर, 2015 में डिसक्वर्ड स्मॉल फील्ड पॉलिसी (डीएसएफ) के अंतर्गत 69 सीमांत क्षेत्रों के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इन अनुबंधित क्षेत्रों को रेवन्यू शेयरिंग मॉडल की नई व्यवस्था के अंतर्गत प्रदान किया गया है। अनुबंधों के वितरण का उद्देश्य तेल और गैस के उत्पादन क्षेत्र का तेजी से विकास और सुविधा प्रदान करना है।
डिसक्वर्ड स्मॉल फील्ड पॉलिसी (डीएसएफ) के अंतर्गत 25 मई 2016 को पहली निविदा-प्रक्रिया शुरू की गई थी, जिसके द्वारा अंतरराष्ट्रीय बोली-प्रक्रिया के लिए ओएनजीसी और ओआईएल के 46 अनुबंधित क्षेत्रों में 67 डिसक्वर्ड स्मॉल फील्डों की पेशकश की गई। मार्च, 2017 में 43 डिसक्वर्ड स्मॉल फील्डों के लिए 20 कंपनियों के साथ कुल 30 अनुबंधों पर हस्ताक्षर किया गया। यह उम्मीद की जा रही है कि 15 वर्षों की अवधि में इस जगह पर 40 एमएमटी की मात्रा का हाइड्रोकार्बन और 22.0 बीसीएम मात्रा का गैस को मुद्रीकृत कर लिया जाएगा। मंत्रिमंडल ने 7 फरवरी, 2018 को डिसक्वर्ड स्मॉल फील्ड पॉलिसी निविदा राउंड- II को मंजूरी दी, जो कि 14.10.2015 को अधिसूचित किए गए डिसक्वर्ड स्मॉल फील्ड पॉलिसी का विस्तार है। डीएसएफ- II के अंतर्गत, निविदा के लिए 59 डिसक्वर्ड स्मॉल फील्ड/ अनौपचारिक खोजों को रखा गया है, जहां पर 194.65 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) तेल और तेल समकक्ष गैस के होने का अनुमान किया गया है।
डीएसएफ पॉलिसी के अंतर्गत दूसरी बोली-प्रक्रिया की शुरूआत 9 अगस्त, 2018 को की गई जिसमें 25 नए अनुबंध क्षेत्रों में 59 खोजों को शामिल किया गया।
iv. गैर-मूल्यांकन क्षेत्रों के लिए नेशनल सिस्मिक प्रोग्राम- सरकार ने सम्पूर्ण अनौपचारिक क्षेत्रों के लिए 2 डी सिस्मिक सर्वे कार्यक्रम का आयोजन किया है। नेशनल सिस्मिक प्रोग्राम की शुरूआत 12 अक्टूबर, 2016 को की गई। इस कार्यक्रम के अंतर्गत, सरकार ने 48,243 लाइन किलो मीटर (एलकेएम) के डेटा अधिग्रहण, प्रसंस्करण और प्रस्तुतीकरण (एपीआई) के लिए 2 डी सिस्मिक सर्वे को आयोजित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इस परियोजना की अनुमानित लागत 2932.99 करोड़ रुपया है और इस परियोजना को 2019-20 तक पूरा करने का प्रस्ताव है।
31 अक्टूबर, 2018 तक, नेशनल सिस्मिक प्रोग्राम के 2 डी सिस्मिक डाटा अधिग्रहण के अंतर्गत 48,243 एलकेएम में 28485 एलकेएम के सतह की कवरेज प्राप्त कर ली गई है।
v. प्रोडक्शन शेयरिंग अनुबंधों के काम को सुव्यवस्थित करने के लिए नीतिगत ढांचा- इस नीति के अंतर्गत, सरकार ने एनईआर में परिचालन ब्लॉकों के लिए अन्वेषण की अवधि में 2 वर्ष का विस्तार और मूल्यांकन अवधि में 1 वर्ष के विस्तार की अनुमति दी है, इसके अलावा एनईआर में भविष्य में उत्पादित प्राकृतिक गैसों के मूल्य निर्धारण की स्वतंत्रता और विपणन की अनुमति; प्री-एनईएलपी एक्सप्लोरेशन ब्लॉक में रॉयल्टी और सेस सहित वैधानिक लेवीस को साझा करने और संभावित प्रभाव के साथ वसूल करने योग्य लागत; आयकर, प्री-एनईएलपी डिस्कवर्ड क्षेत्रों के के अंतर्गत आने वाले परिचालित ब्लॉकों में आयकर की 1961 की धारा 42 के तहत लाभ प्रदान करना शामिल है।
vi. हाइड्रोकार्बन संसाधनों का पुनर्मूल्यांकन- देश में हाइड्रोकार्बन संसाधन क्षमता का आकलन एक बहु संगठन दल (एमओटी) किया है जिसमें ओएनजीसी, ओआईएल और डीजीएच के प्रतिनिधि शामिल हैं। देश के 26 तलछटी घाटीयों में संभावित पारंपरिक हाइड्रोकार्बन संसाधन की मात्रा 41.87 बिलियन टन (तेल और तेल के समान गैस) हैं, जोकि पहले की 28.08 बिलियन टन के अनुमानों की तुलना में लगभग 49% ज्यादा है।
vii. मौजूदा प्रोडक्शन शेयरिंग अनुबंध (पीएससी), कोल बेड मीथेन (सीबीएम) अनुबंध और नामांकित फिल्ड्स के अंगर्गत अपरंपरागत हाइड्रोकार्बन की खोज और उपयोग के लिए नीतिगत ढांचा- सरकार ने मौजूदा क्षेत्रफल में अपरंपरागत हाइड्रोकार्बन की संभावना को प्राप्त करने के लिए लाइसेंस/ पट्टे वाले मौजूदा ठेकेदारों को प्रोत्साहित करने की नीति को मंजूरी दी है। इस नीति के अंतर्गत, पारंपरिक या गैरपरंपरिक हाइड्रोकार्बन के खोज और उपयोग के लिए पीएससी के तहत 72,027 वर्ग किमी क्षेत्र और सीबीएम अनुबंध के तहत 5269 वर्ग किमी क्षेत्र को रखा गया है।
पूरे देश में ईंधन/ फीडस्टॉक के रूप में प्राकृतिक गैस के उपयोग को बढ़ावा देने और गैस आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने के लिए अतिरिक्त 13500 किलोमीटर लंबी गैस पाइपलाइन के निर्माण का काम, गैस ग्रिड को पूरा करने के लिए चल रहा है। प्रमुख निर्माणाधीन गैस पाइपलाइन परियोजनाओं की स्थिति निम्नलिखित हैः
i. प्रधान मंत्री उर्जा गंगा परियोजना (जगदीशपुर - हल्दिया और बोकारो - धमरा पाइपलाइन परियोजना (जेएचबीडीपीएल): 12,940 करोड़ रुपये की लागत से 2655 किमी पाइपलाइन परियोजना को निष्पादित किया जा रहा है, जिसमें भारत सरकार का 40% पूंजी अनुदान (यानी 5,176 करोड़ रुपये) शामिल है और इस परियोजना को प्रगतिशील रूप से दिसंबर 2020 तक पूरा करना है। जेएचबीडीपीएल के माध्यम से पांच राज्यों, अर्थात् उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के ऊर्जा की आवश्यकताओं की पूर्ति की जाएगी। जेएचबीडीपीएल परियोजना का प्रथम भाग (770 किलोमीटर) की के निर्माण का कार्य प्रगतिशील अवस्था में है और इसे जल्द ही शुरू करने की उम्मीद है। वाराणसी शहर गैस वितरण नेटवर्क को गैस की आपूर्ति करने के लिए वाराणसी तक पाइपलाइन के एक खंड को चालु कर दिया गया है। संतुलित खंड (पश्चिम बंगाल को छोड़कर) के लिए आगे की पाइपलाइन का प्रबंधन और उसे बिछाने का काम भी शुरू कर दिया गया है और उसका निर्माण प्रगति पर है।
ii. बरौनी से गुवाहाटी पाइपलाइनः गैस ग्रिड का विस्तार उत्तर-पूर्व तक करने के लिए, बरौनी से गुवाहाटी तक जेएचबीडीपीएल परियोजना के अभिन्न अंग के रूप में 729 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के निर्माण की अनुमति दी गई है। यह पाइपलाइन बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और असम से होकर गुजरेगी। पाइपों की खरीद और बिछाने का काम के लिए निविदाएं हो रही है। इस परियोजना को दिसंबर 2021 तक शुरू किया जाएगा।
iii. उत्तर पूर्व क्षेत्र (एनईआर) गैस ग्रिडः उत्तर-पूर्व के प्रत्येक राज्यों और सिक्किम में गैस ग्रिड का विस्तारित करने के लिए, 10.08.2018 को तेल और गैस की पांच केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (सीपीएसयू) यानी आईओसीएल, ओएनजीसी गेल, ओआईएल और एनआरएल ने मिलकर इंद्रधनुष गैस ग्रिड लिमिटेड नामक एक संयुक्त उद्यम कंपनी (जेवीसी) का गठन किया है। यह जेवीसी उत्तर-पूर्व के सभी राज्यों अर्थात असम, सिक्किम, मिजोरम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, नागालैंड और मेघालय में 1656 किलोमीटर लंबी एनईआर गैस ग्रिड को चरणबद्ध रूप से विकसित करेगा, जिसकी कुल लागत लगभग 9265 करोड़ रूपया है। उत्तर-पूर्व गैस पाइपलाइन ग्रिड के विकास के लिए पीएनजीआरबी ने दिनांक 14.09.2018 को आईजीजीएल को अस्थायी प्राधिकरण जारी किया है। अपना निर्माण पूरा होने जाने के बाद, एनईआर ग्रिड इस क्षेत्र में निर्बाध रूप से प्राकृतिक गैस की उपलब्धता सुनिश्चित कर सकेगा और इस क्षेत्र के औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने में मदद करेगा।
iv. कोच्चि- कुट्टानद- बैंगलोर- मैंगलोर पाइपलाइन (फेज II): गेल, 5150 करोड़ रुपये की लागत से केरल और तमिलनाडु राज्य में 872 किमी लंबी पाइपलाइन को विकसित कर रहा है। केरल राज्य में निर्माण का कार्य प्रगतिशील अवस्था में है और 2019 के मध्य तक इसके पूरा हो जाने की उम्मीद है। इसके अलावा, तमिलनाडु राज्य को जोड़ने के लिए भी पाइपलाइन बिछाने का काम शुरू किया गया है और कार्य प्रगति पर है।
v. एन्नौर- थिरुवेल्लूर- बेंगलुरु- पुडुचेरी- नागापतिनम- मदुरै- तुतीकोरन पाइपलाइन (ईटीबीपीएनएमटीपीएल): इंडियन ऑयल 4497 करोड़ रुपये की लागत से 1385 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन को विकसित कर रहा है। यह पाइपलाइन तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक राज्यों से होकर गुजरेगी। इस पाइपलाइन के खंड (एन्नौर-मनाली और रामानंद-तुतीकोरन) पर काम प्रगति पर है। इसके अलावा, पाइपलाइन के शेष खंडों के लिए पाइप बिछाने का काम शुरू करने की प्रक्रिया चल रही है।
vi. गैस ग्रिड को पूरा करने के लिए अन्य गैस पाइपलाइन परियोजनाओं के कार्यान्वयन का काम विभिन्न चरणों में चल रहा हैं और इसका निष्पादन चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है।
बड़े स्तर पर प्राकृतिक गैस जनमानस को उपलब्ध कराने के लिए, सरकार ने पूरे देश में सिटी गैस वितरण (सीजीडी) नेटवर्क को विस्तार पर गहन रूप से जोर दिया है। सीजीडी नेटवर्क घरों, औद्योगिक और वाणिज्यिक इकाइयों में साफ ईंधन (यानी पीएनजी) की आपूर्ति के साथ-साथ वाहनों के लिए परिवहन ईंधन (यानी सीएनजी) प्रदान करना सुनिश्चित करता है। 2017 तक, देश में केवल 11 प्रतिशत क्षेत्र के 96 भौगोलिक क्षेत्रों में में कुल आबादी का मात्र 19 प्रतिशत आबादी की पहुंच सीजीडी तक थी। सीजीडी क्षेत्र में विकास के लिए, अप्रैल, 2018 में 86 भौगोलिक क्षेत्रों (जीएएस) के लिए 9वें सीजीडी बोली-प्रक्रिया को शुरू किया गया, जिसके अंतर्गत देश के 22 राज्य और केन्द्र शासित प्रदेशों के 174 जिलों को शामिल किया गया था। सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की 38 इकाइयों ने इसमें हिस्सा लिया और सभी 86 भौगोलिक क्षेत्रों के लिए कुल 406 निविदाएं जमा कीं गई। अब तक, सीजीडी नेटवर्क के विकास के लिए 84 सफल बोलीदाताओं को भौगोलिक क्षेत्र आवंटित किए जा चुके हैं। माननीय प्रधानमंत्री ने 22 नवंबर 2018 को 61 नए अधिकृत भौगोलिक क्षेत्रों में सीजीडी परियोजनाओं के विकास के लिए आधारशिला रखी है, जिसमें 17 राज्यों/ केंद्रशासित प्रदेशों के 129 जिलों को शामिल किया गया है और साथ ही उन्होंने 50 भौगोलिक क्षेत्रों के लिए सीजीडी निविदा के अगले दौर (10वें) को भी शुरू किया। 10वें दौर के समापन के साथ ही, इस सीजीडी नेटवर्क के कवरेज का विस्तार देश की आबादी का लगभग 70 प्रतिशत तथा 50 प्रतिशत से अधिक क्षेत्रों में हो जाएगा। इस सीजीडी कवरेज के विकास के माध्यम से गैस मूल्य श्रृंखला में 1,20,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश को आकर्षित किए जाने की संभावना है, तथा आने वाले वर्षों में लगभग 3 लाख रोजगारों का सृजन किया जा सकेगा।
देश में गैस की बढ़ती मांगों को पूरा करने के लिए, वैश्विक गैस बाजारों से विभिन्न इकाइयां तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) आयात कर रही है। मौजूदा चार (4) एलएनजी टर्मिनलों के माध्यम से एलएनजी का आयात किया जा रहा है, जिसमें लगभग 26.3 एमएमटीपीए (~ 95 एमएमएससीएमडी) पुनः गैसीकरण की क्षमता है।
कुल क्षमता (एमएमटीपीए)
(* नेम प्लेट क्षमता 5 एमएमटीपीए है लेकिन ब्रेकवाटर की अनुपस्थिति में इस टर्मिनल की क्षमता केवल 1.3 एमएमटीपीए की है)
माननीय प्रधानमंत्री ने 30 सितंबर, 2018 को जीएसपीसी एलएनजी लिमिटेड द्वारा विकसित किया गया मुंद्रा एलएनजी परियोजना का उद्घाटन किया। इस टर्मिनल में 5 एमएमटीपीए एलएनजी को संभाल सकने की क्षमता है। इसके अतरिक्त, वर्तमान समय में 5 एमएमटीपीए क्षमता वाले दो नए एलएनजी टर्मिनल, एन्नौर (तमिलनाडु) और धामरा (ओडिशा) में विकसित किए जा रहे हैं।
3. विपणन (मार्केटिंग)
i. प्रधान मंत्री उज्जवला योजना (पीएमयुवाई)
देश भर में बीपीएल परिवारों को खाना पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन एलपीजी प्रदान करने के लिए, सरकार ने गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों से संबद्ध महिलाओं के बीच कुल 5 करोड़ मुफ्त एलपीजी कनेक्शन का वितरण करने के लिए "प्रधान मंत्री उज्ज्वला योजना" (पीएमयूवाई) की शुरूआत की गई, जिसे बाद में 12,800 करोड़ रुपये बजट आवंटन के साथ 8 करोड़ तक बढ़ा दिया गया।
इस योजना के लाभार्थियों की पहचान सामाजिक आर्थिक जाति जनगणना (एसईसीसी) की सूची के माध्यम से किया जाता है और अगर उनका नाम इस एसईसीसी सूची में नहीं है, तो लाभार्थियों को वर्गों अर्थात एससी/ एसटी परिवारों, प्रधान मंत्री आवास योजना (पीएमएवाई, ग्रामीण)), अंत्योदय अन्न योजना (एएई), जंगल में रहने वालों, सबसे पिछड़ा वर्ग (एमबीसी), चाय और पूर्व चाय बागान जनजाति और द्वीप/ नदी द्वीपों में रहने वाले लोग के माध्यम से की जाती है।
पहले 5 करोड़ कनेक्शन को प्रदान करने का शुरूआती लक्ष्य मार्च, 2019 था लेकिन इसे पहले ही प्राप्त कर लिया गया। इस योजना के अंतर्गत, 05.12.2018 को 5.83 करोड़ से ज्यादा कनेक्शन बांटे जा चुके हैं। पीएमयूवाई के लागु होने के परिणामस्वरूप सामान्य रूप से सामान्य और पूर्वी राज्यों में एलपीजी कवरेज में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने सरकार के इन प्रयासों की सराहना की है और इसक कदम को डब्ल्यूएचओ देश की महिलाओं द्वारा घर के अंदर झेले जाने वाले स्वास्थ्य प्रदूषण को खत्म करने में एक निर्णायक कदम करार दिया है।
ii. पहल (पीएएचएएल)
सरकार ने, सुशासन के लिए एक उपाय के रूप में, पहल के माध्यम से एलपीजी उपभोक्ताओं को सब्सिडी वितरण करने की एक अच्छी लक्षित प्रणाली को लागु किया है। सरकार के इस कदम का उद्देश्य सब्सिडी के कटौती में कमी लाने वाले दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर सब्सिडी को तर्कसंगत बनाना था, उन्हें सब्सिडी प्रदान करना नहीं था।
दिनांक 06.12.2018 तक, 23.08 करोड़ से अधिक एलपीजी उपभोक्ता पहल योजना में शामिल हो चुके हैं। पहल योजना का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल कर लिया गया है कि यह सबसे बड़ी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर स्कीम है।
अब तक, 96,625 करोड़ रुपये से अधिक की रकम उपभोक्ताओं के बैंक खातों में स्थानांतरित करवा दिए गए हैं।
पहल योजना ने काल्पनिक खातों, अपवर्त्य खातों और निष्क्रिय खातों की पहचान करने में मदद की है। इससे द्वारा सब्सिडी वाले एलपीजी को वाणिज्यिक उद्देश्यों की पूर्ति करने से रोकने में मदद मिली है। पहल योजना के कार्यान्वयन के कारण अबतक अनुमानित रूप से लगभग 50,000 करोड़ रुपये की बचत हुई है।
क्यू एंड क्यू (गुणवत्ता और मात्रा) के माध्यम से ईंधन के प्रति ग्राहक का आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए और लेनदेन में धोखाधड़ी का मौका कम करने के लिए, इस मंत्रालय ने ओएमसी को लक्ष्य दिया है कि जहां तक संभव हो सके देश भर में सभी आरओ को स्वचालित किया जाए। दिनांक 01.11.2018 तक, देश भर के 40354 आरओ यानि 70 प्रतिशत आरओ स्वचालित किए जा चुके हैं।
खुदरा दुकानों में डिजिटल भुगतान की आधारभूत संरचना में एक महत्वपूर्ण विस्तार हुआ है। दिनांक 20.11.2018 तक, देश भर के 53717 (98 प्रतिशत) पेट्रोल पंपों पर 100876 पीओएस टर्मिनलों और 92408 ई-वॉलेटों की सुविधा प्रदान कर दी गई है, भीम यूपीआई के साथ 52959 रिटेल आउटलेटों को सक्षम बना दिया गया है। सभी एलपीजी वितरकों और सिटी गैस वितरण कंपनियों को भीम यूपीआई के साथ सक्षम कर दिया गया है।
तेल विपणन कंपनियों द्वारा खुदरा आउटलेट नेटवर्क (पेट्रोल पंप) का विस्तार किया जा रहा है जिसका उद्देश्य मुख्य रूप से ग्राहकों के ईंधन की बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा करना और उभरते बाजारों जैसे राजमार्गों, कृषि क्षेत्रों और औद्योगिक केंद्रों में सुविधाओं को प्रदान करना है। खुदरा आउटलेट नेटवर्क का विस्तार ग्रामीण, दूरस्थ और दूरदराज के इलाकों में किया जा रहा है जिससे कि ग्रामीण कृषि मांग तक उत्पाद की पहुंच, गुणवत्ता और सही मूल्य को सुनिश्चित किया जा सके और इसकी पहुंच दूरदराज इलाकों में रहने वाले लोगों तक बनाया जा सके। इसके अलावा, खुदरा आउटलेट नेटवर्क के विस्तार से रोजगार के अवसर पैदा होने की भी उम्मीद है।
25 नवंबर, 2018 को तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) द्वारा 55652 स्थानों पर पेट्रोल पंप की स्थापना के लिए 30 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के संभावित उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित करने के लिए विज्ञापन जारी किए हैं। पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के कारण लागु आदर्श आचार संहिता हटाए जाने के बाद ये विज्ञापन जारी किए जाएंगे।
यह पहली बार है कि अधिक पारदर्शिता लाने के लिए एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा कम्प्यूटरीकृत "ड्रा ऑफ लॉट्स"/ "बिड ओपनिंग" का आयोजन किया जाएगा। सभी खुदरा दुकानों का निर्माण ऑटोमेशन सहित नवीनतम तकनीकों के साथ किया जाएगा।
देश की कुल 23 रिफाइनरियों में से 18 का संचालन सार्वजनिक क्षेत्र में हैं जबकि 3 निजी क्षेत्र में हैं और दो संयुक्त उद्यम के रूप में हैं जिसकी कुल परिष्कृत क्षमता 247.566 एमएमटीपीए हैं। 247.566 एमएमटी के शुद्धिकरण क्षमता में से सार्वजनिक क्षेत्र की क्षमता142.066 एमएमटीपीए है जबकि संयुक्त उद्यम की क्षमता17.30 एमएमटीपीए और शेष 88.2 क्षमता एमएमटीपी निजी क्षेत्र में है। देश न केवल घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आत्मनिर्भर है बल्कि पर्याप्त मात्रा में पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात भी करता है।
i. देश में बीएस- IV और बीएस- VI ईंधन की शुरूआतः
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने दिनांक 19.01.2015 यह आदेश जारी किया कि पूरे देश में दिनांक 01.04.2017 से चरणबद्ध रूप में से बीएस- IV ऑटो ईंधन के इस्तेमाल को कार्यान्वयन किया जाएगा। जिसके बाद, 01.04.2017 से पूरे देश में बीएस- IV ऑटो ईंधन को लागू कर दिया गया है।
यह भी निर्णय लिया गया है कि देश में बीएस- IV ईंधन मानकों से सीधे बीएस- VI ईंधन मानकों की ओर छलांग लगाया जाएगा और बीएस- VI वाले मानक को देश में 01.04.2020 से लागू किया जाएगा।
दिल्ली में प्रदूषण के स्तर की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में 01.04.20118 से बीएस- VI की आपूर्ति शुरू कर दी है।
वर्ष 2018-19 में इथेनॉल आपूर्ति के लिए, सरकार ने इथेनॉल उत्पादन के लिए उपयोग की जाने वाली कच्ची सामग्री को आधार बनाकर इथेनॉल खरीद के लिए लाभकारी मूल्य का निर्धारण किया हैः
बी- हैवी शीरा/ आंशिक गन्ना के रस से 52.43 रू. प्रति लीटर।
मिलों के लिए इथेनॉल की कीमत, जो इथेनॉल के उत्पादन के लिए 100 प्रतिशत गन्ना का रस डालेगी लेकिन जिससे चीनी का उत्पादन नहीं होगा, प्रति लीटर 59.19 रुपये प्रति लीटर तय किया गया है। यह कीमत ओएमसी द्वारा उन चीनी मिलों को भुगतान किया जाएगी जो इथेनॉल के उत्पादन के लिए 100 प्रतिशत गन्ना के रस का उपयोग करेगा लेकिन चीनी का उत्पादन नहीं करेगा। अगर कोई चीनी मिल बी- हैवी शीरा और गन्ना के रस के संयोजन से इथेनॉल पैदा करती है, तो उसे ओएमसी द्वारा बी- हैवी शीरा के माध्यम से प्राप्त इथेनॉल के मूल्य जितना प्रदान किया जाएगा।
इसके अलावा, सरकार ने क्षतिग्रस्त अनाजों से भी इथेनॉल उत्पादन की अनुमति दी है। इस मार्ग को प्रोत्साहित करने के लिए ओएमसी अलग मूल्य निर्धारण की पेशकश कर रहे हैं जो कि 47.13 रू. प्रति लीटर है।
पिछले आपूर्ति वर्ष 2017-18 में, पेट्रोल के साथ इथेनॉल की मिश्रित मात्रा 149.54 करोड़ लीटर थी और मिश्रण का औसत प्रतिशत 4.19 था जो कि ईबीपी कार्यक्रम के इतिहास में सबसे अधिक था।
1951 में हुए इंडस्ट्रीज (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट में संशोधन के बाद, केंद्र सरकार को इथेनॉल के उत्पादन, गतिविधि और भंडारण पर नियंत्रण मिल गया, ईबीपी कार्यक्रम के कार्यान्वयन को सुचारू रूप से चलाने और बाधाओं को समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार नियमित रूप से राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों के साथ बातचीत कर रही है। अब तक, नौ राज्यों ने संशोधित प्रावधानों को लागू कर दिया है।
ईबीपी कार्यक्रम के लिए प्रयुक्त विकृत इथेनॉल पर जीएसटी को कम करने का प्रस्ताव वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग द्वारा दिया गया था। इस प्रस्ताव के आधार पर, सरकार ने ईबीपी कार्यक्रम के लिए प्रयुक्त इथेनॉल पर जीएसटी की दर को 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया है।
इथेनॉल उत्पादन क्षमता में वृद्धि और विकास को बढ़ावा देने के लिए खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग ने चीनी मिलों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए एक योजना की शुरू की है। इस योजना का लक्ष्य ब्याज अनुदान मार्ग के माध्यम से 1,332 करोड़ रुपये अर्जित करना है। इस योजना के अंतर्गत, 6139.08 करोड़ रुपये के 114 प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई है, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि इथेनॉल आसवन क्षमता में प्रतिवर्ष 200 करोड़ लीटर की बढ़ोत्तरी होगी। आगे बढ़ते हुए, 21.09.2018 को प्रधान मंत्री के पीएस की बैठक में " व्यवसाय करने में सुविधा और चीनी के आसवन से संबंधित समय में और कमी " करने हेतु लिए गए निर्णय के अनुसार, एमओपी एंड एनजी ने इस परियोजना के विकास की निगरानी के लिए एक प्रारूप को तैयार, बाधाओं की पहचान और इसके आसवनों के साथ इसे साझा करने का काम किया है। इस संदर्भ में, परियोजना प्रस्तावकों के साथ 10.10.2018 और 13.11.2018 को संयुक्त बैठकों का आयोजन किया गया था। इसके अलावा, एमओपी एंड एनजी ने कर्नाटक, यूपी, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड राज्य सरकारों को दिनांक 16.10.2018 को योजना के कार्यान्वयन हेतु वित्तीय सहायता की सुविधा प्रदान करने के लिए के पत्र लिखा है।
तेल विपणन कंपनियों द्वारा मई-अक्टूबर, 2018 की अवधि के लिए 8.14 करोड़ लीटर बायोडीजल की आपूर्ति के लिए खरीद आदेश जारी किए गए हैं, तीन महीने के विस्तार के प्रावधान के साथ।
दिनांक 30.10.2018 तक, ओएमसी ने 7.97 करोड़ लीटर बायोडीजल प्राप्त किया है।
इथेनॉल उत्पादन के वैकल्पिक मार्ग अर्थात द्वितीय पीढ़ी (2जी) के मार्ग खोलने के लिए, तेल विपणन कंपनियां 10,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ 12 2जी जैव-रिफाइनरियों की स्थापना करने की प्रक्रिया में लगी हुई है।
कुछ 2जी बायो-इथेनॉल संयंत्रों की विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट तेल पीएसयू द्वारा (डीएफआर) तैयार की गई है। तेल पीएसयू में से एक नुमालिगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड ने फिनलैंड के मैसर्स चेम्पोलिस ओई और नीदरलैंड के मैसर्स फोर्टम 3 बीवी के साथ मिलकर जून, 2018 में असम बायो-रिफाइनरी प्राइवेट लिमिटेड नामक एक संयुक्त उद्यम बनाया है। बारगढ़, ओडिशा में, बीपीसीएल द्वारा प्रस्तावित, 2जी इथेनॉल परियोजना का समारोह, 10.10.2018 को आयोजित किया गया।
सरकार ने दिनांक 8.6.2018 को जैव ईंधन 2018 के लिए एक राष्ट्रीय नीति को अधिसूचित किया है, जिससे माध्यम से देश के जैव ईंधन कार्यक्रम को बढ़ावा मिलेगा।
इस पॉलिसी की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैः
प्रत्येक श्रेणी के लिए उचित वित्तीय और वित्त संबंधित प्रोत्साहनों के विस्तार को सक्षम बनाने के लिए जैव ईंधनों का वर्गीकरण "मूल जैव ईंधन" - पहली पीढ़ी (1 जी) के जैव इथेनॉल और बायोडीजल तथा "उन्नत जैव ईंधन" - दूसरी पीढ़ी (2 जी) के इथेनॉल, बायो-सीएनजी इत्यादि के रूप में।
इथेनॉल उत्पादन के लिए कच्चे माल के दायरे में विस्तार करते हुए गन्ना का रस, चीनी बीट, मिठा ज्वार, स्टॉर्च युक्त सामग्री जैसे मकई, कसावा, गेहूं, क्षतिग्रस्त अनाज जैसे सड़ा हुआ चावल, सड़ा हुआ आलू, मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त चीनी के इस्तेमाल की अनुमति देकर।
यह नीति, राष्ट्रीय जैव ईंधन समन्वय समिति की मंजूरी के बाद पेट्रोल के साथ मिश्रण करने हेतु इथेनॉल के उत्पादन के लिए बचे हुए अनाज के प्रयोग करने की अनुमति देती है।
यह नीति, उन्नत जैव ईंधन पर जोर देने के साथ ही, 6 साल की अवधि के दौरान 2जी इथेनॉल बायो रिफाइनरियों के लिए 5000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त कर प्रोत्साहन वित्त पोषण योजना के बारे में बताता है, जो कि 1जी जैव ईंधन की तुलना में उच्च खरीद मूल्य है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने दिनांक 9.5.2018 को अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के सदस्य के रूप में खुद को एक प्रौद्योगिकी सहयोग कार्यक्रम (टीसीपी), उन्नत मोटर ईंधन (एएमएफ) को शामिल किया। ईंधन दक्षता में सुधार करने और जीएचजी उत्सर्जन को कम करने पर ज्यादा ध्यान देने के साथ ही उन्नत मोटर ईंधन/ वैकल्पिक ईंधन के विकास हेतु आर एंड डी में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए यह एक अंतर्राष्ट्रीय मंच है।
मंत्रालय ने वहन योग्य परिवहन के सतत वैकल्पिक उपायों (सैटैट पहल) के लिेए संपीड़ित बायो गैस (सीबीजी) के उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देने के लिए भुवनेश्वर, चंडीगढ़ और लखनऊ में रोड शो को आयोजित करके का फैसला किया।
जिसके अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र के तेल विपणन कंपनियों आईओसीएल, बीपीसीएल और एचपीसीएल द्वारा दिनांक 17.11.2018 को चंडीगढ़ में प्रथन रोड शो का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में, भावी उद्यमियों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं, पंजाब ऊर्जा विकास एजेंसी (पीईडीए) के प्रतिनिधियों, हरियाणा नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (हरदा), वित्तीय संस्थानों, फिक्की, सीआईआई, एसोचैम के प्रतिनिधियों के साथ ओएमसी के लिए इच्छुक डीलरों/ वितरकों और अधिकारियों ने भाग लिया। रोड शो में, प्रतिभागियों को एसएटीएटी पहल के बारे में सूचित किया गया और उद्यमियों को ओएमसी के लिए सीबीजी संयंत्र स्थापित करने और सीबीजी की आपूर्ति करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
फरवरी 2018 में, ओवीएल, आईओसीएल और बीपीआरएल के एक भारतीय संघ ने अबू धाबी के अपतटीय निचले जाकम तेल क्षेत्र के 10 प्रतिशत भाग को प्रापत करने का अनुमोदन प्राप्त कर लिया।
30 मार्च 2018 को अमेरिका से पहला दीर्घकालिक एलएनजी कार्गो दाभोल पहुंचा।
अप्रैल 2018 में, आईओसीएल ने ओमान के मुखाइजना तेल क्षेत्र में 17 प्रतिशत की हिस्सेदारी प्राप्त कर ली।
रूस से पहले दीर्घकालिक अवधि का एलएनजी कार्गो 4 जून 2018 को दाहेज पहुंचा।
जून 2018 में, सऊदी अरामको और एडीएनओसी ने एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए किया, जिसमें महाराष्ट्र के रत्नागिरी में रत्नागिरी रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (आरआरपीसीएल) द्वारा उन्नत किए गए एकीकृत रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल्स कॉम्प्लेक्स को संयुक्त रूप से विकसित और निर्माण करने की बात की गई।
भारत और अमेरिका ने 17 अप्रैल 2018 को मंत्री स्तर की ऊर्जा वार्ता करते हुए सामरिक ऊर्जा भागीदारी प्रक्रिया की शुरूआत की।
7 अप्रैल 2018 को नई दिल्ली में भारत और नेपाल के प्रधानमंत्रियों ने लाइव स्ट्रीमिंग के माध्यम से मोतीहारी से अमलेखागंज तक भारत-नेपाल पेट्रोलियम उत्पादों के पाइपलाइन की शुरूआत की।
कोलम्बो में एलएनजी टर्मिनल को स्थापित करने के लिए अप्रैल, 2018 में पेट्रोनेट एलएनजी ऑफ इंडिया, श्रीलंका बंदरगाह प्राधिकरण और एक जापानी कंपनी के बीच त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया।
मंगलौर एसपीआर फैसिलिटी में 5.86 मिलियन बैरल कच्चे तेल को भरने के लिए 10 फरवरी 2018 को आईएसपीआरएल और एडीएनओसी (संयुक्त अरब अमीरात) ने तेल संग्रहण और प्रबंधन के लिए एक परिभाषित समझौते पर हस्ताक्षर किया।
18 सितंबर, 2018 को, भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन का उद्घाटन भारत और बांग्लादेश के प्रधानमंत्रियों ने किया।
12 नवंबर, 2018 को, पादुर एसपीआर में एडीएनओसी की भागीदारी की संभावना तलाशने के लिए आईएसपीआरएल और एडीएनओसी के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया।
iii. प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन/ बैठकेंः
भारत में, 16 वीं अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा फोरम (आईईएफ) की मंत्रिस्तरीय बैठक का आयोजन नई दिल्ली में 10-12 अप्रैल 2018 तक किया गया।
13 अक्टूबर 2018 को, इंटरनेशनल थिंक टैंक (आईटीटी) की दूसरी बैठक का आयोजन इंडियन ऑयल और गैस क्षेत्रों के लिए भविष्य में उत्पन्न होने वाली चुनौतियों और उनको आगे बढ़ने के तरीके पर चर्चा करने के लिए की गई थी।
भारत-ओपेक ऊर्जा वार्ता की तीसरी बैठक का आयोजन 17 अक्टूबर 2018 को किया गया।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री ने नई दिल्ली में 14 से 16 अक्टूबर 2018 तक सीईआरएवीक द्वारा आयोजित किए गए दूसरे वार्षिक भारत ऊर्जा फोरम का उद्घाटन किया।
पीपीपी मॉडल के निर्माण और निर्माण के लिए प्रस्तावित फेज- II सामरिक पेट्रोलियम रिजर्व फैसलिटी्ज को अंतिम रूप देने के लिए, अक्टूबर, 2018 में आईएसपीआरएल द्वारा नई दिल्ली, सिंगापुर और लंदन में रोड शो का आयोजन किया गया।
i. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्वच्छता कार्य योजना (एसएपी) 2017-18 के लिए स्वच्छ भारत राष्ट्रीय पुरस्कार, 02 अक्टूबर, 2018 को गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित स्वच्छ भारत राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह में प्राप्त किया। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एसएपी 2017- 18 के लिए 335.68 करोड़ रूपये आवंटित किए और शीर्ष स्तर के समीक्षा बैठकों के माध्यम से निरंतर निगरानी कर रही है, तेल और गैस सीपीएसई सहित पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने लगभग 402 करोड़ रुपये के व्यय आंकड़ा को प्राप्त किया है, जो लगभग 120 प्रतिशत की उपलब्धि दिखाता है।
ii. महात्मा गांधी के 150 वें जन्म दिवस समारोह की शुरूआत करने हेतु अग्रदूत के रूप में, एमओपीएनजी ने 15 सितंबर से 2 अक्टूबर, 2018 तक स्वच्छता ही सेवा 2018 (एसएचएस) का अवलोकन किया। एमओपीएनजी ने स्वच्छता ही सेवा अभियान का नेतृत्व किया। मंत्रालय ने स्वच्छता के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए कई पहल की है जिसमें रैलियां/ वाकथॉन / साइक्लोथन का आयोजन तथा कई स्थानों पर श्रमदान का आयोजन, प्लास्टिक मुक्त क्षेत्र बनाने के लिए आम जनता में जूट बैग का वितरण; पर्यटक स्थलों पर सफाई अभियान का आयोजन; स्कूलों, सार्वजनिक स्थानों में शौचालयों का निर्माण, स्वच्छता और स्वच्छता उत्पादों का वितरण, स्वास्थ्य वार्ता और स्वास्थ्य शिविरों को आयोजित करना शामिल है।
| ऊर्जा आर्थिक विकास का एक मुख्य चालक है और सरकार का ध्यान ऊर्जा न्याय और जलवायु न्याय जैसे दो उद्देश्यों को पूरा करने के लिए भारत के ऊर्जा क्षेत्र मे एक गुणात्मक परिवर्तन लाना है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इस क्षेत्र में "सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन" यानि रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म लाने का प्रयास किया है। सरकार ने अन्वेषण और उत्पादन, रिफाइनरी, विपणन, प्राकृतिक गैस और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्रों में दूरगामी प्रभावों को लाने के लिए कई सुधारों और कार्यों को पूरा किया है। पिछले एक साल में देश में अन्वेषण और उत्पादन की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कई नई पहल की शुरूआत की गई है। पेट्रोलियम और हाइड्रोकार्बन क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने नीति सुधारों की एक श्रृंखला की शुरूआत की है। कुछ उल्लेखनीय नीतिगत सुधार निम्नलिखित हैंः i. हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन एंड लाइसेंसिंग पॉलिसी / ओपन एक्रीज लाइसेंसिंग पॉलिसी - आसान व्यवसाय के सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए यह उत्पाद साझाकरण अनुबंध यानि प्रोडक्शन शेयरिंग कॉन्ट्रेक्ट से राजस्व साझाकरण अनुबंध यानि रेवेन्यू शेयरिंग कॉन्ट्रेक्ट की दिशा में बढ़ने का एक आदर्श बदलाव है। यह परंपरागत और गैर परंपरागत हाइड्रोकार्बन संसाधनों की खोज और उत्पादन के लिए एकल लाइसेंस प्रदान करता है; मूल्य निर्धारण और विपणन स्वतंत्रता; ऑफशोर ब्लॉकों के लिए अधिशुल्कों की दर में कमी, ओपन एक्यूज लाइसेंसिंग पॉलिसी जिसका मतलब औपचारिक बोली दौर की प्रतीक्षा किए बिना अन्वेषण ब्लॉक का चयन करने का विकल्प है। खुली एकड़ लाइसेंसिंग नीति जिसका अर्थ औपचारिक बोली दौर की प्रतीक्षा किए बिना अन्वेषण ब्लॉक का चयन करने का विकल्प है। खुली एकड़ लाइसेंसिंग नीति, जिसका मतलब औपचारिक बोली की प्रतीक्षा किए बिना अन्वेषण ब्लॉकों का चयन करने का विकल्प होता है। पसंद की अभिव्यक्ति पूरे वर्ष भर जमा की जा सकती है और बोली की प्रक्रिया प्रत्येक छः महीने में होती है। ओएएलपी निविदा बोली के प्रथम दौर के अंतर्गत, उनसठ,दो सौ बयासी वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल वाले पचपन खंडों को एक अक्टूबर, दो हज़ार अट्ठारह को आवंटित किया गया। ओएएलपी निविदा बोली के दुसरे दौर के अंतर्गत चौदह ब्लॉकों का पेशकश किया गया गया है। ii. तेल और गैस की प्राप्ति के उन्नत विधियों को बढ़ावा और प्रोत्साहन देने के लिए नीति ढांचा- सरकार ने वित्तीय सुधार के माध्यम से उन्नत रिकवरी / बेहतर रिकवरी / अपरंपरागत हाइड्रोकार्बन उत्पादन तरीकों/ वित्तीय प्रोत्साहनों के माध्यम से तकनीकों को अपनाने और प्रोत्साहित करने के लिए नीतिगत ढांचे को, साथ ही मौजूदा क्षेत्रों की उत्पादकता में सुधार लाने और घरेलू हाइड्रोकार्बन के उत्पादन को बढ़ाने के लिए एक विकसित पारिस्थितिक तंत्र बनाने की मंजूरी दे दी है। यह नीति इसके सभी ईआर क्षमताओं, ईआर तकनीकों का मूल्यांकन करता है, ईआर परियोजनाओं में शामिल लागत को कम करता है और इसके आर्थिक महत्व को व्यवहारिक बनाता है। iii. डिसक्वर्ड स्मॉल फील्ड पॉलिसी , राउंड I और II- राष्ट्रीय तेल कंपनियों की अनौपचारिक खोजों को जल्दी से औपचारिक बनाने के लिए, मंत्रिमंडल ने सितंबर, दो हज़ार पंद्रह में डिसक्वर्ड स्मॉल फील्ड पॉलिसी के अंतर्गत उनहत्तर सीमांत क्षेत्रों के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इन अनुबंधित क्षेत्रों को रेवन्यू शेयरिंग मॉडल की नई व्यवस्था के अंतर्गत प्रदान किया गया है। अनुबंधों के वितरण का उद्देश्य तेल और गैस के उत्पादन क्षेत्र का तेजी से विकास और सुविधा प्रदान करना है। डिसक्वर्ड स्मॉल फील्ड पॉलिसी के अंतर्गत पच्चीस मई दो हज़ार सोलह को पहली निविदा-प्रक्रिया शुरू की गई थी, जिसके द्वारा अंतरराष्ट्रीय बोली-प्रक्रिया के लिए ओएनजीसी और ओआईएल के छियालीस अनुबंधित क्षेत्रों में सरसठ डिसक्वर्ड स्मॉल फील्डों की पेशकश की गई। मार्च, दो हज़ार सत्रह में तैंतालीस डिसक्वर्ड स्मॉल फील्डों के लिए बीस कंपनियों के साथ कुल तीस अनुबंधों पर हस्ताक्षर किया गया। यह उम्मीद की जा रही है कि पंद्रह वर्षों की अवधि में इस जगह पर चालीस एमएमटी की मात्रा का हाइड्रोकार्बन और बाईस.शून्य बीसीएम मात्रा का गैस को मुद्रीकृत कर लिया जाएगा। मंत्रिमंडल ने सात फरवरी, दो हज़ार अट्ठारह को डिसक्वर्ड स्मॉल फील्ड पॉलिसी निविदा राउंड- II को मंजूरी दी, जो कि चौदह.दस.दो हज़ार पंद्रह को अधिसूचित किए गए डिसक्वर्ड स्मॉल फील्ड पॉलिसी का विस्तार है। डीएसएफ- II के अंतर्गत, निविदा के लिए उनसठ डिसक्वर्ड स्मॉल फील्ड/ अनौपचारिक खोजों को रखा गया है, जहां पर एक सौ चौरानवे.पैंसठ मिलियन मीट्रिक टन तेल और तेल समकक्ष गैस के होने का अनुमान किया गया है। डीएसएफ पॉलिसी के अंतर्गत दूसरी बोली-प्रक्रिया की शुरूआत नौ अगस्त, दो हज़ार अट्ठारह को की गई जिसमें पच्चीस नए अनुबंध क्षेत्रों में उनसठ खोजों को शामिल किया गया। iv. गैर-मूल्यांकन क्षेत्रों के लिए नेशनल सिस्मिक प्रोग्राम- सरकार ने सम्पूर्ण अनौपचारिक क्षेत्रों के लिए दो डी सिस्मिक सर्वे कार्यक्रम का आयोजन किया है। नेशनल सिस्मिक प्रोग्राम की शुरूआत बारह अक्टूबर, दो हज़ार सोलह को की गई। इस कार्यक्रम के अंतर्गत, सरकार ने अड़तालीस,दो सौ तैंतालीस लाइन किलो मीटर के डेटा अधिग्रहण, प्रसंस्करण और प्रस्तुतीकरण के लिए दो डी सिस्मिक सर्वे को आयोजित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इस परियोजना की अनुमानित लागत दो हज़ार नौ सौ बत्तीस.निन्यानवे करोड़ रुपया है और इस परियोजना को दो हज़ार उन्नीस-बीस तक पूरा करने का प्रस्ताव है। इकतीस अक्टूबर, दो हज़ार अट्ठारह तक, नेशनल सिस्मिक प्रोग्राम के दो डी सिस्मिक डाटा अधिग्रहण के अंतर्गत अड़तालीस,दो सौ तैंतालीस एलकेएम में अट्ठाईस हज़ार चार सौ पचासी एलकेएम के सतह की कवरेज प्राप्त कर ली गई है। v. प्रोडक्शन शेयरिंग अनुबंधों के काम को सुव्यवस्थित करने के लिए नीतिगत ढांचा- इस नीति के अंतर्गत, सरकार ने एनईआर में परिचालन ब्लॉकों के लिए अन्वेषण की अवधि में दो वर्ष का विस्तार और मूल्यांकन अवधि में एक वर्ष के विस्तार की अनुमति दी है, इसके अलावा एनईआर में भविष्य में उत्पादित प्राकृतिक गैसों के मूल्य निर्धारण की स्वतंत्रता और विपणन की अनुमति; प्री-एनईएलपी एक्सप्लोरेशन ब्लॉक में रॉयल्टी और सेस सहित वैधानिक लेवीस को साझा करने और संभावित प्रभाव के साथ वसूल करने योग्य लागत; आयकर, प्री-एनईएलपी डिस्कवर्ड क्षेत्रों के के अंतर्गत आने वाले परिचालित ब्लॉकों में आयकर की एक हज़ार नौ सौ इकसठ की धारा बयालीस के तहत लाभ प्रदान करना शामिल है। vi. हाइड्रोकार्बन संसाधनों का पुनर्मूल्यांकन- देश में हाइड्रोकार्बन संसाधन क्षमता का आकलन एक बहु संगठन दल किया है जिसमें ओएनजीसी, ओआईएल और डीजीएच के प्रतिनिधि शामिल हैं। देश के छब्बीस तलछटी घाटीयों में संभावित पारंपरिक हाइड्रोकार्बन संसाधन की मात्रा इकतालीस.सत्तासी बिलियन टन हैं, जोकि पहले की अट्ठाईस.आठ बिलियन टन के अनुमानों की तुलना में लगभग उनचास% ज्यादा है। vii. मौजूदा प्रोडक्शन शेयरिंग अनुबंध , कोल बेड मीथेन अनुबंध और नामांकित फिल्ड्स के अंगर्गत अपरंपरागत हाइड्रोकार्बन की खोज और उपयोग के लिए नीतिगत ढांचा- सरकार ने मौजूदा क्षेत्रफल में अपरंपरागत हाइड्रोकार्बन की संभावना को प्राप्त करने के लिए लाइसेंस/ पट्टे वाले मौजूदा ठेकेदारों को प्रोत्साहित करने की नीति को मंजूरी दी है। इस नीति के अंतर्गत, पारंपरिक या गैरपरंपरिक हाइड्रोकार्बन के खोज और उपयोग के लिए पीएससी के तहत बहत्तर,सत्ताईस वर्ग किमी क्षेत्र और सीबीएम अनुबंध के तहत पाँच हज़ार दो सौ उनहत्तर वर्ग किमी क्षेत्र को रखा गया है। पूरे देश में ईंधन/ फीडस्टॉक के रूप में प्राकृतिक गैस के उपयोग को बढ़ावा देने और गैस आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने के लिए अतिरिक्त तेरह हज़ार पाँच सौ किलोग्राममीटर लंबी गैस पाइपलाइन के निर्माण का काम, गैस ग्रिड को पूरा करने के लिए चल रहा है। प्रमुख निर्माणाधीन गैस पाइपलाइन परियोजनाओं की स्थिति निम्नलिखित हैः i. प्रधान मंत्री उर्जा गंगा परियोजना : बारह,नौ सौ चालीस करोड़ रुपये की लागत से दो हज़ार छः सौ पचपन किमी पाइपलाइन परियोजना को निष्पादित किया जा रहा है, जिसमें भारत सरकार का चालीस% पूंजी अनुदान शामिल है और इस परियोजना को प्रगतिशील रूप से दिसंबर दो हज़ार बीस तक पूरा करना है। जेएचबीडीपीएल के माध्यम से पांच राज्यों, अर्थात् उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के ऊर्जा की आवश्यकताओं की पूर्ति की जाएगी। जेएचबीडीपीएल परियोजना का प्रथम भाग की के निर्माण का कार्य प्रगतिशील अवस्था में है और इसे जल्द ही शुरू करने की उम्मीद है। वाराणसी शहर गैस वितरण नेटवर्क को गैस की आपूर्ति करने के लिए वाराणसी तक पाइपलाइन के एक खंड को चालु कर दिया गया है। संतुलित खंड के लिए आगे की पाइपलाइन का प्रबंधन और उसे बिछाने का काम भी शुरू कर दिया गया है और उसका निर्माण प्रगति पर है। ii. बरौनी से गुवाहाटी पाइपलाइनः गैस ग्रिड का विस्तार उत्तर-पूर्व तक करने के लिए, बरौनी से गुवाहाटी तक जेएचबीडीपीएल परियोजना के अभिन्न अंग के रूप में सात सौ उनतीस किलोग्राममीटर लंबी पाइपलाइन के निर्माण की अनुमति दी गई है। यह पाइपलाइन बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और असम से होकर गुजरेगी। पाइपों की खरीद और बिछाने का काम के लिए निविदाएं हो रही है। इस परियोजना को दिसंबर दो हज़ार इक्कीस तक शुरू किया जाएगा। iii. उत्तर पूर्व क्षेत्र गैस ग्रिडः उत्तर-पूर्व के प्रत्येक राज्यों और सिक्किम में गैस ग्रिड का विस्तारित करने के लिए, दस.आठ.दो हज़ार अट्ठारह को तेल और गैस की पांच केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों यानी आईओसीएल, ओएनजीसी गेल, ओआईएल और एनआरएल ने मिलकर इंद्रधनुष गैस ग्रिड लिमिटेड नामक एक संयुक्त उद्यम कंपनी का गठन किया है। यह जेवीसी उत्तर-पूर्व के सभी राज्यों अर्थात असम, सिक्किम, मिजोरम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, नागालैंड और मेघालय में एक हज़ार छः सौ छप्पन किलोग्राममीटर लंबी एनईआर गैस ग्रिड को चरणबद्ध रूप से विकसित करेगा, जिसकी कुल लागत लगभग नौ हज़ार दो सौ पैंसठ करोड़ रूपया है। उत्तर-पूर्व गैस पाइपलाइन ग्रिड के विकास के लिए पीएनजीआरबी ने दिनांक चौदह.नौ.दो हज़ार अट्ठारह को आईजीजीएल को अस्थायी प्राधिकरण जारी किया है। अपना निर्माण पूरा होने जाने के बाद, एनईआर ग्रिड इस क्षेत्र में निर्बाध रूप से प्राकृतिक गैस की उपलब्धता सुनिश्चित कर सकेगा और इस क्षेत्र के औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने में मदद करेगा। iv. कोच्चि- कुट्टानद- बैंगलोर- मैंगलोर पाइपलाइन : गेल, पाँच हज़ार एक सौ पचास करोड़ रुपये की लागत से केरल और तमिलनाडु राज्य में आठ सौ बहत्तर किमी लंबी पाइपलाइन को विकसित कर रहा है। केरल राज्य में निर्माण का कार्य प्रगतिशील अवस्था में है और दो हज़ार उन्नीस के मध्य तक इसके पूरा हो जाने की उम्मीद है। इसके अलावा, तमिलनाडु राज्य को जोड़ने के लिए भी पाइपलाइन बिछाने का काम शुरू किया गया है और कार्य प्रगति पर है। v. एन्नौर- थिरुवेल्लूर- बेंगलुरु- पुडुचेरी- नागापतिनम- मदुरै- तुतीकोरन पाइपलाइन : इंडियन ऑयल चार हज़ार चार सौ सत्तानवे करोड़ रुपये की लागत से एक हज़ार तीन सौ पचासी किलोग्राममीटर लंबी पाइपलाइन को विकसित कर रहा है। यह पाइपलाइन तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक राज्यों से होकर गुजरेगी। इस पाइपलाइन के खंड पर काम प्रगति पर है। इसके अलावा, पाइपलाइन के शेष खंडों के लिए पाइप बिछाने का काम शुरू करने की प्रक्रिया चल रही है। vi. गैस ग्रिड को पूरा करने के लिए अन्य गैस पाइपलाइन परियोजनाओं के कार्यान्वयन का काम विभिन्न चरणों में चल रहा हैं और इसका निष्पादन चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। बड़े स्तर पर प्राकृतिक गैस जनमानस को उपलब्ध कराने के लिए, सरकार ने पूरे देश में सिटी गैस वितरण नेटवर्क को विस्तार पर गहन रूप से जोर दिया है। सीजीडी नेटवर्क घरों, औद्योगिक और वाणिज्यिक इकाइयों में साफ ईंधन की आपूर्ति के साथ-साथ वाहनों के लिए परिवहन ईंधन प्रदान करना सुनिश्चित करता है। दो हज़ार सत्रह तक, देश में केवल ग्यारह प्रतिशत क्षेत्र के छियानवे भौगोलिक क्षेत्रों में में कुल आबादी का मात्र उन्नीस प्रतिशत आबादी की पहुंच सीजीडी तक थी। सीजीडी क्षेत्र में विकास के लिए, अप्रैल, दो हज़ार अट्ठारह में छियासी भौगोलिक क्षेत्रों के लिए नौवें सीजीडी बोली-प्रक्रिया को शुरू किया गया, जिसके अंतर्गत देश के बाईस राज्य और केन्द्र शासित प्रदेशों के एक सौ चौहत्तर जिलों को शामिल किया गया था। सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की अड़तीस इकाइयों ने इसमें हिस्सा लिया और सभी छियासी भौगोलिक क्षेत्रों के लिए कुल चार सौ छः निविदाएं जमा कीं गई। अब तक, सीजीडी नेटवर्क के विकास के लिए चौरासी सफल बोलीदाताओं को भौगोलिक क्षेत्र आवंटित किए जा चुके हैं। माननीय प्रधानमंत्री ने बाईस नवंबर दो हज़ार अट्ठारह को इकसठ नए अधिकृत भौगोलिक क्षेत्रों में सीजीडी परियोजनाओं के विकास के लिए आधारशिला रखी है, जिसमें सत्रह राज्यों/ केंद्रशासित प्रदेशों के एक सौ उनतीस जिलों को शामिल किया गया है और साथ ही उन्होंने पचास भौगोलिक क्षेत्रों के लिए सीजीडी निविदा के अगले दौर को भी शुरू किया। दसवें दौर के समापन के साथ ही, इस सीजीडी नेटवर्क के कवरेज का विस्तार देश की आबादी का लगभग सत्तर प्रतिशत तथा पचास प्रतिशत से अधिक क्षेत्रों में हो जाएगा। इस सीजीडी कवरेज के विकास के माध्यम से गैस मूल्य श्रृंखला में एक,बीस,शून्य करोड़ रुपये से अधिक के निवेश को आकर्षित किए जाने की संभावना है, तथा आने वाले वर्षों में लगभग तीन लाख रोजगारों का सृजन किया जा सकेगा। देश में गैस की बढ़ती मांगों को पूरा करने के लिए, वैश्विक गैस बाजारों से विभिन्न इकाइयां तरल प्राकृतिक गैस आयात कर रही है। मौजूदा चार एलएनजी टर्मिनलों के माध्यम से एलएनजी का आयात किया जा रहा है, जिसमें लगभग छब्बीस.तीन एमएमटीपीए पुनः गैसीकरण की क्षमता है। कुल क्षमता माननीय प्रधानमंत्री ने तीस सितंबर, दो हज़ार अट्ठारह को जीएसपीसी एलएनजी लिमिटेड द्वारा विकसित किया गया मुंद्रा एलएनजी परियोजना का उद्घाटन किया। इस टर्मिनल में पाँच एमएमटीपीए एलएनजी को संभाल सकने की क्षमता है। इसके अतरिक्त, वर्तमान समय में पाँच एमएमटीपीए क्षमता वाले दो नए एलएनजी टर्मिनल, एन्नौर और धामरा में विकसित किए जा रहे हैं। तीन. विपणन i. प्रधान मंत्री उज्जवला योजना देश भर में बीपीएल परिवारों को खाना पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन एलपीजी प्रदान करने के लिए, सरकार ने गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों से संबद्ध महिलाओं के बीच कुल पाँच करोड़ मुफ्त एलपीजी कनेक्शन का वितरण करने के लिए "प्रधान मंत्री उज्ज्वला योजना" की शुरूआत की गई, जिसे बाद में बारह,आठ सौ करोड़ रुपये बजट आवंटन के साथ आठ करोड़ तक बढ़ा दिया गया। इस योजना के लाभार्थियों की पहचान सामाजिक आर्थिक जाति जनगणना की सूची के माध्यम से किया जाता है और अगर उनका नाम इस एसईसीसी सूची में नहीं है, तो लाभार्थियों को वर्गों अर्थात एससी/ एसटी परिवारों, प्रधान मंत्री आवास योजना ), अंत्योदय अन्न योजना , जंगल में रहने वालों, सबसे पिछड़ा वर्ग , चाय और पूर्व चाय बागान जनजाति और द्वीप/ नदी द्वीपों में रहने वाले लोग के माध्यम से की जाती है। पहले पाँच करोड़ कनेक्शन को प्रदान करने का शुरूआती लक्ष्य मार्च, दो हज़ार उन्नीस था लेकिन इसे पहले ही प्राप्त कर लिया गया। इस योजना के अंतर्गत, पाँच.बारह.दो हज़ार अट्ठारह को पाँच.तिरासी करोड़ से ज्यादा कनेक्शन बांटे जा चुके हैं। पीएमयूवाई के लागु होने के परिणामस्वरूप सामान्य रूप से सामान्य और पूर्वी राज्यों में एलपीजी कवरेज में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सरकार के इन प्रयासों की सराहना की है और इसक कदम को डब्ल्यूएचओ देश की महिलाओं द्वारा घर के अंदर झेले जाने वाले स्वास्थ्य प्रदूषण को खत्म करने में एक निर्णायक कदम करार दिया है। ii. पहल सरकार ने, सुशासन के लिए एक उपाय के रूप में, पहल के माध्यम से एलपीजी उपभोक्ताओं को सब्सिडी वितरण करने की एक अच्छी लक्षित प्रणाली को लागु किया है। सरकार के इस कदम का उद्देश्य सब्सिडी के कटौती में कमी लाने वाले दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर सब्सिडी को तर्कसंगत बनाना था, उन्हें सब्सिडी प्रदान करना नहीं था। दिनांक छः.बारह.दो हज़ार अट्ठारह तक, तेईस.आठ करोड़ से अधिक एलपीजी उपभोक्ता पहल योजना में शामिल हो चुके हैं। पहल योजना का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल कर लिया गया है कि यह सबसे बड़ी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर स्कीम है। अब तक, छियानवे,छः सौ पच्चीस करोड़ रुपये से अधिक की रकम उपभोक्ताओं के बैंक खातों में स्थानांतरित करवा दिए गए हैं। पहल योजना ने काल्पनिक खातों, अपवर्त्य खातों और निष्क्रिय खातों की पहचान करने में मदद की है। इससे द्वारा सब्सिडी वाले एलपीजी को वाणिज्यिक उद्देश्यों की पूर्ति करने से रोकने में मदद मिली है। पहल योजना के कार्यान्वयन के कारण अबतक अनुमानित रूप से लगभग पचास,शून्य करोड़ रुपये की बचत हुई है। क्यू एंड क्यू के माध्यम से ईंधन के प्रति ग्राहक का आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए और लेनदेन में धोखाधड़ी का मौका कम करने के लिए, इस मंत्रालय ने ओएमसी को लक्ष्य दिया है कि जहां तक संभव हो सके देश भर में सभी आरओ को स्वचालित किया जाए। दिनांक एक.ग्यारह.दो हज़ार अट्ठारह तक, देश भर के चालीस हज़ार तीन सौ चौवन आरओ यानि सत्तर प्रतिशत आरओ स्वचालित किए जा चुके हैं। खुदरा दुकानों में डिजिटल भुगतान की आधारभूत संरचना में एक महत्वपूर्ण विस्तार हुआ है। दिनांक बीस.ग्यारह.दो हज़ार अट्ठारह तक, देश भर के तिरेपन हज़ार सात सौ सत्रह पेट्रोल पंपों पर एक लाख आठ सौ छिहत्तर पीओएस टर्मिनलों और बानवे हज़ार चार सौ आठ ई-वॉलेटों की सुविधा प्रदान कर दी गई है, भीम यूपीआई के साथ बावन हज़ार नौ सौ उनसठ रिटेल आउटलेटों को सक्षम बना दिया गया है। सभी एलपीजी वितरकों और सिटी गैस वितरण कंपनियों को भीम यूपीआई के साथ सक्षम कर दिया गया है। तेल विपणन कंपनियों द्वारा खुदरा आउटलेट नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है जिसका उद्देश्य मुख्य रूप से ग्राहकों के ईंधन की बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा करना और उभरते बाजारों जैसे राजमार्गों, कृषि क्षेत्रों और औद्योगिक केंद्रों में सुविधाओं को प्रदान करना है। खुदरा आउटलेट नेटवर्क का विस्तार ग्रामीण, दूरस्थ और दूरदराज के इलाकों में किया जा रहा है जिससे कि ग्रामीण कृषि मांग तक उत्पाद की पहुंच, गुणवत्ता और सही मूल्य को सुनिश्चित किया जा सके और इसकी पहुंच दूरदराज इलाकों में रहने वाले लोगों तक बनाया जा सके। इसके अलावा, खुदरा आउटलेट नेटवर्क के विस्तार से रोजगार के अवसर पैदा होने की भी उम्मीद है। पच्चीस नवंबर, दो हज़ार अट्ठारह को तेल विपणन कंपनियों द्वारा पचपन हज़ार छः सौ बावन स्थानों पर पेट्रोल पंप की स्थापना के लिए तीस राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के संभावित उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित करने के लिए विज्ञापन जारी किए हैं। पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के कारण लागु आदर्श आचार संहिता हटाए जाने के बाद ये विज्ञापन जारी किए जाएंगे। यह पहली बार है कि अधिक पारदर्शिता लाने के लिए एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा कम्प्यूटरीकृत "ड्रा ऑफ लॉट्स"/ "बिड ओपनिंग" का आयोजन किया जाएगा। सभी खुदरा दुकानों का निर्माण ऑटोमेशन सहित नवीनतम तकनीकों के साथ किया जाएगा। देश की कुल तेईस रिफाइनरियों में से अट्ठारह का संचालन सार्वजनिक क्षेत्र में हैं जबकि तीन निजी क्षेत्र में हैं और दो संयुक्त उद्यम के रूप में हैं जिसकी कुल परिष्कृत क्षमता दो सौ सैंतालीस.पाँच सौ छयासठ एमएमटीपीए हैं। दो सौ सैंतालीस.पाँच सौ छयासठ एमएमटी के शुद्धिकरण क्षमता में से सार्वजनिक क्षेत्र की क्षमताएक सौ बयालीस.छयासठ एमएमटीपीए है जबकि संयुक्त उद्यम की क्षमतासत्रह.तीस एमएमटीपीए और शेष अठासी.दो क्षमता एमएमटीपी निजी क्षेत्र में है। देश न केवल घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आत्मनिर्भर है बल्कि पर्याप्त मात्रा में पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात भी करता है। i. देश में बीएस- IV और बीएस- VI ईंधन की शुरूआतः पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने दिनांक उन्नीस.एक.दो हज़ार पंद्रह यह आदेश जारी किया कि पूरे देश में दिनांक एक.चार.दो हज़ार सत्रह से चरणबद्ध रूप में से बीएस- IV ऑटो ईंधन के इस्तेमाल को कार्यान्वयन किया जाएगा। जिसके बाद, एक.चार.दो हज़ार सत्रह से पूरे देश में बीएस- IV ऑटो ईंधन को लागू कर दिया गया है। यह भी निर्णय लिया गया है कि देश में बीएस- IV ईंधन मानकों से सीधे बीएस- VI ईंधन मानकों की ओर छलांग लगाया जाएगा और बीएस- VI वाले मानक को देश में एक.चार.दो हज़ार बीस से लागू किया जाएगा। दिल्ली में प्रदूषण के स्तर की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में एक.चार.बीस हज़ार एक सौ अट्ठारह से बीएस- VI की आपूर्ति शुरू कर दी है। वर्ष दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस में इथेनॉल आपूर्ति के लिए, सरकार ने इथेनॉल उत्पादन के लिए उपयोग की जाने वाली कच्ची सामग्री को आधार बनाकर इथेनॉल खरीद के लिए लाभकारी मूल्य का निर्धारण किया हैः बी- हैवी शीरा/ आंशिक गन्ना के रस से बावन.तैंतालीस रू. प्रति लीटर। मिलों के लिए इथेनॉल की कीमत, जो इथेनॉल के उत्पादन के लिए एक सौ प्रतिशत गन्ना का रस डालेगी लेकिन जिससे चीनी का उत्पादन नहीं होगा, प्रति लीटर उनसठ दशमलव उन्नीस रुपयापये प्रति लीटर तय किया गया है। यह कीमत ओएमसी द्वारा उन चीनी मिलों को भुगतान किया जाएगी जो इथेनॉल के उत्पादन के लिए एक सौ प्रतिशत गन्ना के रस का उपयोग करेगा लेकिन चीनी का उत्पादन नहीं करेगा। अगर कोई चीनी मिल बी- हैवी शीरा और गन्ना के रस के संयोजन से इथेनॉल पैदा करती है, तो उसे ओएमसी द्वारा बी- हैवी शीरा के माध्यम से प्राप्त इथेनॉल के मूल्य जितना प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा, सरकार ने क्षतिग्रस्त अनाजों से भी इथेनॉल उत्पादन की अनुमति दी है। इस मार्ग को प्रोत्साहित करने के लिए ओएमसी अलग मूल्य निर्धारण की पेशकश कर रहे हैं जो कि सैंतालीस.तेरह रू. प्रति लीटर है। पिछले आपूर्ति वर्ष दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह में, पेट्रोल के साथ इथेनॉल की मिश्रित मात्रा एक सौ उनचास.चौवन करोड़ लीटर थी और मिश्रण का औसत प्रतिशत चार.उन्नीस था जो कि ईबीपी कार्यक्रम के इतिहास में सबसे अधिक था। एक हज़ार नौ सौ इक्यावन में हुए इंडस्ट्रीज एक्ट में संशोधन के बाद, केंद्र सरकार को इथेनॉल के उत्पादन, गतिविधि और भंडारण पर नियंत्रण मिल गया, ईबीपी कार्यक्रम के कार्यान्वयन को सुचारू रूप से चलाने और बाधाओं को समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार नियमित रूप से राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों के साथ बातचीत कर रही है। अब तक, नौ राज्यों ने संशोधित प्रावधानों को लागू कर दिया है। ईबीपी कार्यक्रम के लिए प्रयुक्त विकृत इथेनॉल पर जीएसटी को कम करने का प्रस्ताव वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग द्वारा दिया गया था। इस प्रस्ताव के आधार पर, सरकार ने ईबीपी कार्यक्रम के लिए प्रयुक्त इथेनॉल पर जीएसटी की दर को अट्ठारह प्रतिशत से घटाकर पाँच प्रतिशत कर दिया है। इथेनॉल उत्पादन क्षमता में वृद्धि और विकास को बढ़ावा देने के लिए खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग ने चीनी मिलों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए एक योजना की शुरू की है। इस योजना का लक्ष्य ब्याज अनुदान मार्ग के माध्यम से एक,तीन सौ बत्तीस करोड़ रुपये अर्जित करना है। इस योजना के अंतर्गत, छः हज़ार एक सौ उनतालीस.आठ करोड़ रुपये के एक सौ चौदह प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई है, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि इथेनॉल आसवन क्षमता में प्रतिवर्ष दो सौ करोड़ लीटर की बढ़ोत्तरी होगी। आगे बढ़ते हुए, इक्कीस.नौ.दो हज़ार अट्ठारह को प्रधान मंत्री के पीएस की बैठक में " व्यवसाय करने में सुविधा और चीनी के आसवन से संबंधित समय में और कमी " करने हेतु लिए गए निर्णय के अनुसार, एमओपी एंड एनजी ने इस परियोजना के विकास की निगरानी के लिए एक प्रारूप को तैयार, बाधाओं की पहचान और इसके आसवनों के साथ इसे साझा करने का काम किया है। इस संदर्भ में, परियोजना प्रस्तावकों के साथ दस.दस.दो हज़ार अट्ठारह और तेरह.ग्यारह.दो हज़ार अट्ठारह को संयुक्त बैठकों का आयोजन किया गया था। इसके अलावा, एमओपी एंड एनजी ने कर्नाटक, यूपी, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड राज्य सरकारों को दिनांक सोलह.दस.दो हज़ार अट्ठारह को योजना के कार्यान्वयन हेतु वित्तीय सहायता की सुविधा प्रदान करने के लिए के पत्र लिखा है। तेल विपणन कंपनियों द्वारा मई-अक्टूबर, दो हज़ार अट्ठारह की अवधि के लिए आठ.चौदह करोड़ लीटर बायोडीजल की आपूर्ति के लिए खरीद आदेश जारी किए गए हैं, तीन महीने के विस्तार के प्रावधान के साथ। दिनांक तीस.दस.दो हज़ार अट्ठारह तक, ओएमसी ने सात.सत्तानवे करोड़ लीटर बायोडीजल प्राप्त किया है। इथेनॉल उत्पादन के वैकल्पिक मार्ग अर्थात द्वितीय पीढ़ी के मार्ग खोलने के लिए, तेल विपणन कंपनियां दस,शून्य करोड़ रुपये के निवेश के साथ बारह दोजी जैव-रिफाइनरियों की स्थापना करने की प्रक्रिया में लगी हुई है। कुछ दोजी बायो-इथेनॉल संयंत्रों की विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट तेल पीएसयू द्वारा तैयार की गई है। तेल पीएसयू में से एक नुमालिगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड ने फिनलैंड के मैसर्स चेम्पोलिस ओई और नीदरलैंड के मैसर्स फोर्टम तीन बीवी के साथ मिलकर जून, दो हज़ार अट्ठारह में असम बायो-रिफाइनरी प्राइवेट लिमिटेड नामक एक संयुक्त उद्यम बनाया है। बारगढ़, ओडिशा में, बीपीसीएल द्वारा प्रस्तावित, दोजी इथेनॉल परियोजना का समारोह, दस.दस.दो हज़ार अट्ठारह को आयोजित किया गया। सरकार ने दिनांक आठ.छः.दो हज़ार अट्ठारह को जैव ईंधन दो हज़ार अट्ठारह के लिए एक राष्ट्रीय नीति को अधिसूचित किया है, जिससे माध्यम से देश के जैव ईंधन कार्यक्रम को बढ़ावा मिलेगा। इस पॉलिसी की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैः प्रत्येक श्रेणी के लिए उचित वित्तीय और वित्त संबंधित प्रोत्साहनों के विस्तार को सक्षम बनाने के लिए जैव ईंधनों का वर्गीकरण "मूल जैव ईंधन" - पहली पीढ़ी के जैव इथेनॉल और बायोडीजल तथा "उन्नत जैव ईंधन" - दूसरी पीढ़ी के इथेनॉल, बायो-सीएनजी इत्यादि के रूप में। इथेनॉल उत्पादन के लिए कच्चे माल के दायरे में विस्तार करते हुए गन्ना का रस, चीनी बीट, मिठा ज्वार, स्टॉर्च युक्त सामग्री जैसे मकई, कसावा, गेहूं, क्षतिग्रस्त अनाज जैसे सड़ा हुआ चावल, सड़ा हुआ आलू, मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त चीनी के इस्तेमाल की अनुमति देकर। यह नीति, राष्ट्रीय जैव ईंधन समन्वय समिति की मंजूरी के बाद पेट्रोल के साथ मिश्रण करने हेतु इथेनॉल के उत्पादन के लिए बचे हुए अनाज के प्रयोग करने की अनुमति देती है। यह नीति, उन्नत जैव ईंधन पर जोर देने के साथ ही, छः साल की अवधि के दौरान दोजी इथेनॉल बायो रिफाइनरियों के लिए पाँच हज़ार करोड़ रुपये के अतिरिक्त कर प्रोत्साहन वित्त पोषण योजना के बारे में बताता है, जो कि एकजी जैव ईंधन की तुलना में उच्च खरीद मूल्य है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने दिनांक नौ.पाँच.दो हज़ार अट्ठारह को अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के सदस्य के रूप में खुद को एक प्रौद्योगिकी सहयोग कार्यक्रम , उन्नत मोटर ईंधन को शामिल किया। ईंधन दक्षता में सुधार करने और जीएचजी उत्सर्जन को कम करने पर ज्यादा ध्यान देने के साथ ही उन्नत मोटर ईंधन/ वैकल्पिक ईंधन के विकास हेतु आर एंड डी में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए यह एक अंतर्राष्ट्रीय मंच है। मंत्रालय ने वहन योग्य परिवहन के सतत वैकल्पिक उपायों के लिेए संपीड़ित बायो गैस के उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देने के लिए भुवनेश्वर, चंडीगढ़ और लखनऊ में रोड शो को आयोजित करके का फैसला किया। जिसके अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र के तेल विपणन कंपनियों आईओसीएल, बीपीसीएल और एचपीसीएल द्वारा दिनांक सत्रह.ग्यारह.दो हज़ार अट्ठारह को चंडीगढ़ में प्रथन रोड शो का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में, भावी उद्यमियों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं, पंजाब ऊर्जा विकास एजेंसी के प्रतिनिधियों, हरियाणा नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी , वित्तीय संस्थानों, फिक्की, सीआईआई, एसोचैम के प्रतिनिधियों के साथ ओएमसी के लिए इच्छुक डीलरों/ वितरकों और अधिकारियों ने भाग लिया। रोड शो में, प्रतिभागियों को एसएटीएटी पहल के बारे में सूचित किया गया और उद्यमियों को ओएमसी के लिए सीबीजी संयंत्र स्थापित करने और सीबीजी की आपूर्ति करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। फरवरी दो हज़ार अट्ठारह में, ओवीएल, आईओसीएल और बीपीआरएल के एक भारतीय संघ ने अबू धाबी के अपतटीय निचले जाकम तेल क्षेत्र के दस प्रतिशत भाग को प्रापत करने का अनुमोदन प्राप्त कर लिया। तीस मार्च दो हज़ार अट्ठारह को अमेरिका से पहला दीर्घकालिक एलएनजी कार्गो दाभोल पहुंचा। अप्रैल दो हज़ार अट्ठारह में, आईओसीएल ने ओमान के मुखाइजना तेल क्षेत्र में सत्रह प्रतिशत की हिस्सेदारी प्राप्त कर ली। रूस से पहले दीर्घकालिक अवधि का एलएनजी कार्गो चार जून दो हज़ार अट्ठारह को दाहेज पहुंचा। जून दो हज़ार अट्ठारह में, सऊदी अरामको और एडीएनओसी ने एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए किया, जिसमें महाराष्ट्र के रत्नागिरी में रत्नागिरी रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड द्वारा उन्नत किए गए एकीकृत रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल्स कॉम्प्लेक्स को संयुक्त रूप से विकसित और निर्माण करने की बात की गई। भारत और अमेरिका ने सत्रह अप्रैल दो हज़ार अट्ठारह को मंत्री स्तर की ऊर्जा वार्ता करते हुए सामरिक ऊर्जा भागीदारी प्रक्रिया की शुरूआत की। सात अप्रैल दो हज़ार अट्ठारह को नई दिल्ली में भारत और नेपाल के प्रधानमंत्रियों ने लाइव स्ट्रीमिंग के माध्यम से मोतीहारी से अमलेखागंज तक भारत-नेपाल पेट्रोलियम उत्पादों के पाइपलाइन की शुरूआत की। कोलम्बो में एलएनजी टर्मिनल को स्थापित करने के लिए अप्रैल, दो हज़ार अट्ठारह में पेट्रोनेट एलएनजी ऑफ इंडिया, श्रीलंका बंदरगाह प्राधिकरण और एक जापानी कंपनी के बीच त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया। मंगलौर एसपीआर फैसिलिटी में पाँच.छियासी मिलियन बैरल कच्चे तेल को भरने के लिए दस फरवरी दो हज़ार अट्ठारह को आईएसपीआरएल और एडीएनओसी ने तेल संग्रहण और प्रबंधन के लिए एक परिभाषित समझौते पर हस्ताक्षर किया। अट्ठारह सितंबर, दो हज़ार अट्ठारह को, भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन का उद्घाटन भारत और बांग्लादेश के प्रधानमंत्रियों ने किया। बारह नवंबर, दो हज़ार अट्ठारह को, पादुर एसपीआर में एडीएनओसी की भागीदारी की संभावना तलाशने के लिए आईएसपीआरएल और एडीएनओसी के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया। iii. प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन/ बैठकेंः भारत में, सोलह वीं अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा फोरम की मंत्रिस्तरीय बैठक का आयोजन नई दिल्ली में दस-बारह अप्रैल दो हज़ार अट्ठारह तक किया गया। तेरह अक्टूबर दो हज़ार अट्ठारह को, इंटरनेशनल थिंक टैंक की दूसरी बैठक का आयोजन इंडियन ऑयल और गैस क्षेत्रों के लिए भविष्य में उत्पन्न होने वाली चुनौतियों और उनको आगे बढ़ने के तरीके पर चर्चा करने के लिए की गई थी। भारत-ओपेक ऊर्जा वार्ता की तीसरी बैठक का आयोजन सत्रह अक्टूबर दो हज़ार अट्ठारह को किया गया। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री ने नई दिल्ली में चौदह से सोलह अक्टूबर दो हज़ार अट्ठारह तक सीईआरएवीक द्वारा आयोजित किए गए दूसरे वार्षिक भारत ऊर्जा फोरम का उद्घाटन किया। पीपीपी मॉडल के निर्माण और निर्माण के लिए प्रस्तावित फेज- II सामरिक पेट्रोलियम रिजर्व फैसलिटी्ज को अंतिम रूप देने के लिए, अक्टूबर, दो हज़ार अट्ठारह में आईएसपीआरएल द्वारा नई दिल्ली, सिंगापुर और लंदन में रोड शो का आयोजन किया गया। i. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्वच्छता कार्य योजना दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह के लिए स्वच्छ भारत राष्ट्रीय पुरस्कार, दो अक्टूबर, दो हज़ार अट्ठारह को गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित स्वच्छ भारत राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह में प्राप्त किया। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एसएपी दो हज़ार सत्रह- अट्ठारह के लिए तीन सौ पैंतीस.अड़सठ करोड़ रूपये आवंटित किए और शीर्ष स्तर के समीक्षा बैठकों के माध्यम से निरंतर निगरानी कर रही है, तेल और गैस सीपीएसई सहित पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने लगभग चार सौ दो करोड़ रुपये के व्यय आंकड़ा को प्राप्त किया है, जो लगभग एक सौ बीस प्रतिशत की उपलब्धि दिखाता है। ii. महात्मा गांधी के एक सौ पचास वें जन्म दिवस समारोह की शुरूआत करने हेतु अग्रदूत के रूप में, एमओपीएनजी ने पंद्रह सितंबर से दो अक्टूबर, दो हज़ार अट्ठारह तक स्वच्छता ही सेवा दो हज़ार अट्ठारह का अवलोकन किया। एमओपीएनजी ने स्वच्छता ही सेवा अभियान का नेतृत्व किया। मंत्रालय ने स्वच्छता के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए कई पहल की है जिसमें रैलियां/ वाकथॉन / साइक्लोथन का आयोजन तथा कई स्थानों पर श्रमदान का आयोजन, प्लास्टिक मुक्त क्षेत्र बनाने के लिए आम जनता में जूट बैग का वितरण; पर्यटक स्थलों पर सफाई अभियान का आयोजन; स्कूलों, सार्वजनिक स्थानों में शौचालयों का निर्माण, स्वच्छता और स्वच्छता उत्पादों का वितरण, स्वास्थ्य वार्ता और स्वास्थ्य शिविरों को आयोजित करना शामिल है। |
जामा मस्जिद थाने के एसएचओ अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे तो उन्होंने पाया कि एक घायल व्यक्ति को अस्पताल ले जाया गया है, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, पूछताछ करने पर पता चला कि तीन व्यक्ति पैदल आए थे और कबूतर मार्केट में अपनी दुकान पर बैठे इमरान को तीन गोलियां मारी।
अधिकारी ने कहा, हमलावरों को पकड़ने के लिए कई टीमों का गठन किया गया है। आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। (आईएएनएस)
| जामा मस्जिद थाने के एसएचओ अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे तो उन्होंने पाया कि एक घायल व्यक्ति को अस्पताल ले जाया गया है, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, पूछताछ करने पर पता चला कि तीन व्यक्ति पैदल आए थे और कबूतर मार्केट में अपनी दुकान पर बैठे इमरान को तीन गोलियां मारी। अधिकारी ने कहा, हमलावरों को पकड़ने के लिए कई टीमों का गठन किया गया है। आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। |
भारतीय क्रिकेट बोर्ड भी कोरोना कहर खिलाफ लड़ाई में हाथ मिलाया हैं। सभी सार्वजनिक जगह पर मास्क पहनने के लिए जागरुक किया है,इस उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए इस विड़ियो को बनाया गया है।
भारतीय कप्तान कोहली ने वीडियो में कहा,'भारतीय टीम का सदस्य होना गर्व की बात है, लेकिन हम आज एक बड़ी टीम 'टीम मास्क फोर्स' बना रहे हैं. ' तेंदुलकर ने कहा ,'कम ऑन इंडिया. मास्क बनाइए और मास्क फोर्स का हिस्सा बनिए. 20 सेकेंड तक हाथ धोइए और सामाजिक दूरी बनाए रखिए।
रोहित शर्मा ने कहा,'मास्क फोर्स का हिस्सा बनना आसान है. घर पर बैठकर मास्क बनाइए, जैसे मैंने अपने लिए बनाया है. ' इस वीडियो में बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली, स्मृति मंधाना, हरभजन सिंह, हरमनप्रीत कौर, वीरेंद्र सहवाग, राहुल द्रविड़ और मिताली राज के भी संदेश हैं. बोर्ड ने इससे पहले पीएम केयर्स फंड में 51 करोड़ रुपये का योगदान दिया था।
| भारतीय क्रिकेट बोर्ड भी कोरोना कहर खिलाफ लड़ाई में हाथ मिलाया हैं। सभी सार्वजनिक जगह पर मास्क पहनने के लिए जागरुक किया है,इस उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए इस विड़ियो को बनाया गया है। भारतीय कप्तान कोहली ने वीडियो में कहा,'भारतीय टीम का सदस्य होना गर्व की बात है, लेकिन हम आज एक बड़ी टीम 'टीम मास्क फोर्स' बना रहे हैं. ' तेंदुलकर ने कहा ,'कम ऑन इंडिया. मास्क बनाइए और मास्क फोर्स का हिस्सा बनिए. बीस सेकेंड तक हाथ धोइए और सामाजिक दूरी बनाए रखिए। रोहित शर्मा ने कहा,'मास्क फोर्स का हिस्सा बनना आसान है. घर पर बैठकर मास्क बनाइए, जैसे मैंने अपने लिए बनाया है. ' इस वीडियो में बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली, स्मृति मंधाना, हरभजन सिंह, हरमनप्रीत कौर, वीरेंद्र सहवाग, राहुल द्रविड़ और मिताली राज के भी संदेश हैं. बोर्ड ने इससे पहले पीएम केयर्स फंड में इक्यावन करोड़ रुपये का योगदान दिया था। |
कमलेश कुमार शुक्ला
KUMAR SHUKLA
शशि गौतम
मौ0 आफताब
१९७, ब्लाक बी, जैतपुर विस्तार, बदरपुर, नई दिल्ली ११००४४
JAITPUR EXTN.
BADARPUR, N. D.-44
२७४/७ जी ब्लाक
जैतपुर विस्तार पार्ट -II, नई
274/7, BLOCKG, JAITPUR EXTN-2, N.DELHI
॥ - राज्य दलों के अभ्यर्थी
जी ब्लाक जैतपुर
विस्तार पार्ट -II,
बदरपुर नई दिल्ली
BLOCK-G, JAITPUR EXTN.-II, NEW DELHI
के १३ जैतपुर विस्तार, बदरपुर, नई
K-13, JAITPUR
EXT., BADARPUR,
राष्ट्रीय लोक दल
हैंड पम्प | कमलेश कुमार शुक्ला KUMAR SHUKLA शशि गौतम मौशून्य आफताब एक सौ सत्तानवे, ब्लाक बी, जैतपुर विस्तार, बदरपुर, नई दिल्ली एक लाख दस हज़ार चौंतालीस JAITPUR EXTN. BADARPUR, N. D.-चौंतालीस दो सौ चौहत्तर/सात जी ब्लाक जैतपुर विस्तार पार्ट -II, नई दो सौ चौहत्तर/सात, BLOCKG, JAITPUR EXTN-दो, N.DELHI ॥ - राज्य दलों के अभ्यर्थी जी ब्लाक जैतपुर विस्तार पार्ट -II, बदरपुर नई दिल्ली BLOCK-G, JAITPUR EXTN.-II, NEW DELHI के तेरह जैतपुर विस्तार, बदरपुर, नई K-तेरह, JAITPUR EXT., BADARPUR, राष्ट्रीय लोक दल हैंड पम्प |
Amitabh Bachchan To Guide you on Google Maps : गूगल मैप (Google Maps) पर बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) जल्द ही आपको रास्ता बताते हुए सुनाई दे सकते हैं. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो गूगल ने अमिताभ बच्चन को उनकी आवाज गूगल मैप के ऐप को रिकॉर्ड करने के लिए संपर्क किया है.
हालांकि अभी तक उनकी ओर से इस बारे में किसी भी तरह के कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर किये जाने की खबर नहीं आयी है. बता दें कि अमिताभ बच्चन न सिर्फ सबसे बड़े बॉलीवुड अभिनेता के तौर पर जाने जाते हैं, बल्कि उनकी पहचान एक बहुत अच्छे वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में भी है. उन्होंने अब तक कई फिल्मों और शो में अपनी आवाज का जादू बिखेरा है.
बहरहाल, इस रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि गूगल मैप के ऐप में आवाज देने के लिए सीनिर बच्चन को भारी भरकम रकम का ऑफर किया गया है. अगर अमिताभ बच्चन इस ऑफर को स्वीकार करते हैं तो रिकॉर्डिंग उनके घर पर ही की जाएगी. ऐसे में गूगल मैप यूजर्स को अब इंतजार होगा उस पल का, जब अमिताभ बच्चन उनकी यात्रा के साथी और गाइड के रूप में उन्हें सही रास्ता दिखाएंगे.
फिलहाल, गूगल मैप में जो अभी आप आवाज सुन रहे हैं वो करेन जैकबसन (Karen Jacobsen) की है, जो कि एक महिला हैं. करेन न्यू यॉर्क की एक फेमस एंटरटेनर हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अमिताभ बच्चन की आवाज सिर्फ हिंदी के लिए रहेगी, जबकि अंग्रेजी के लिए करेन जैकबसन (Karen Jacobsen) की ही आवाज रहेगी. वैसे बताते चलें कि गूगल (Google) पहले ही साल 2018 में बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान के साथ कर चुका है.
| Amitabh Bachchan To Guide you on Google Maps : गूगल मैप पर बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन जल्द ही आपको रास्ता बताते हुए सुनाई दे सकते हैं. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो गूगल ने अमिताभ बच्चन को उनकी आवाज गूगल मैप के ऐप को रिकॉर्ड करने के लिए संपर्क किया है. हालांकि अभी तक उनकी ओर से इस बारे में किसी भी तरह के कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर किये जाने की खबर नहीं आयी है. बता दें कि अमिताभ बच्चन न सिर्फ सबसे बड़े बॉलीवुड अभिनेता के तौर पर जाने जाते हैं, बल्कि उनकी पहचान एक बहुत अच्छे वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में भी है. उन्होंने अब तक कई फिल्मों और शो में अपनी आवाज का जादू बिखेरा है. बहरहाल, इस रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि गूगल मैप के ऐप में आवाज देने के लिए सीनिर बच्चन को भारी भरकम रकम का ऑफर किया गया है. अगर अमिताभ बच्चन इस ऑफर को स्वीकार करते हैं तो रिकॉर्डिंग उनके घर पर ही की जाएगी. ऐसे में गूगल मैप यूजर्स को अब इंतजार होगा उस पल का, जब अमिताभ बच्चन उनकी यात्रा के साथी और गाइड के रूप में उन्हें सही रास्ता दिखाएंगे. फिलहाल, गूगल मैप में जो अभी आप आवाज सुन रहे हैं वो करेन जैकबसन की है, जो कि एक महिला हैं. करेन न्यू यॉर्क की एक फेमस एंटरटेनर हैं. मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अमिताभ बच्चन की आवाज सिर्फ हिंदी के लिए रहेगी, जबकि अंग्रेजी के लिए करेन जैकबसन की ही आवाज रहेगी. वैसे बताते चलें कि गूगल पहले ही साल दो हज़ार अट्ठारह में बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान के साथ कर चुका है. |
मेष- आज ऑफिस में शांतिपूर्ण माहौल बना रहेगा। व्यापार में थोड़ी सी लापरवाही करना भारी पड़ सकता है। छात्रों को सफल होने के लिए कई मौके मिलेंगे। युवा अपने लक्ष्य के बजाय दूसरी चीजों पर ज्यादा ध्यान देंगे। परिवार के साथ हंसी-खुशी के पल बिताएंगे।
वृषभ- आज नया काम शुरू करने के लिए स्थितियां आपके पक्ष में रहेंगी। कार्यक्षेत्र में मेहनत के मुताबिक फल न मिलने से मन उदास रहेगा। छात्रों की शिक्षा के क्षेत्र में कोई बाधा उत्पन्न हो सकती है। पारिवारिक मामलों में टांग अड़ाना मुश्किल में डाल देगा। सेहत का ध्यान रखें।
मिथुन- आज ऑफिस के किसी काम से बाहर जाना पड़ सकता है। व्यापार में मुनाफे के योग बन रहे हैं। छात्रों के लिए अच्छा समय आने की भी संभावना है। युवा रुके हुए कामों को निपटाने की कोशिश करेंगे। परिवार की सहमति के बिना कोई भी कदम न उठाएं।
कर्क- आज कार्यक्षेत्र में अपने काम की गोपनीयता बनाएं रखना ही बेहतर होगा। बिजनेस के लेन-देन के मामले में बहुत ही सावधानी बरतने की जरूरत है। छात्रों को प्रतियोगी परीक्षा में सकारात्मक समाचार मिलेंगे। घर में किसी महत्पूर्ण काम को लेकर भाग-दौड़ लगी रहेगी।
सिंह- आज कार्यक्षेत्र में काम में मदद करने के लिए विरोधी भी हाथ मिलाते हुए नजर आएंगे। व्यापार में नए लोगों से संपर्क बढ़ना काम को आगे ले जाने में सहायक होगा। युवा अपनी मेहनत पर विश्वास रखें और प्रयास करते रहें। पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाने में सफल होंगे।
कन्या- आज कार्यक्षेत्र में सब काम सही से कर लेंगे, प्रशंसा मिलेगी। नया बिजनेस शुरू करने का विचार बना सकते हैं। युवाओं को करियर के रास्ते में थोड़ी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है। घर की साज-सज्जा में धन खर्च होगा। सेहत से खिलवाड़ करना सही नहीं है।
तुला- आज नए लोगों के संपर्क की वजह से आपका प्रमोशन होने की संभावना है। बिजनेस में कर्मचारियों के साथ बढ़िया ताल-मेल बना रहेगा। युवाओं को अपनी मेहनत का परिणाम अवश्य मिलेगा। परिवार की किसी छोटी सी बात को मन पर लगा कर बैठ जाएंगे।
वृश्चिक- आज ऑफिस में अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में सक्षम होंगे। बिजनेस में किसी काम को लेकर आना-कानी करते हुए नजर आएंगे। छात्र भविष्य में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए अभी से मेहनत शुरू कर देंगे। परिवार वालों का सहयोग हिम्मत बनकर काम करेगा।
धनु- आज प्राइवेट नौकरी कर रहे लोग अपने काम से खुश रहेंगे। सांझेदारी वाले बिजनेस में बहुत ही संभल कर काम करने की जरूरत है। टेक्निकल पढ़ाई कर रहे छात्रों के परिणाम अनुकूल रहेंगे। परिवार के साथ किसी फंक्शन में जाने का मौका मिलेगा।
मकर- आज व्यवसाय की विपरीत परिस्थितियों में भी खुश रहने की कोशिश करेंगे। ऑफिस में किसी की नकारात्मक बातों को एक कान से सुनकर दूसरे कान से निकाल दें। युवा वर्ग अपने करियर पर ध्यान देंगे। परिवार के साथ समय बिताकर मानसिक तनाव में सुकून मिलेगा।
कुम्भ- आज व्यापार में भविष्य संबंधी योजनाओं को लागू करने के बारे में विचार करेंगे। कार्यस्थल पर कोई भी विचार सबके सामने रखने से पहले सोच लें। छात्र पढ़ाई की टेंशन लेने की बजाय उसकी तैयारी करें। परिवार के सामने अपनी परेशानियों को जाहिर करेंगे।
मीन- आज बड़ी मुश्किलों के बाद व्यापार में मंदी ऊपर चढ़ती हुई नजर आएगी। सरकारी नौकरी कर रहे लोग मौज-मस्ती में अपना समय बिताएंगे। छात्र शिक्षा में अच्छे फल प्राप्त करने के लिए अनुभवी की सलाह लेंगे। काम और परिवार में सही से तालमेल बनाने में सक्षम रहेंगे।
| मेष- आज ऑफिस में शांतिपूर्ण माहौल बना रहेगा। व्यापार में थोड़ी सी लापरवाही करना भारी पड़ सकता है। छात्रों को सफल होने के लिए कई मौके मिलेंगे। युवा अपने लक्ष्य के बजाय दूसरी चीजों पर ज्यादा ध्यान देंगे। परिवार के साथ हंसी-खुशी के पल बिताएंगे। वृषभ- आज नया काम शुरू करने के लिए स्थितियां आपके पक्ष में रहेंगी। कार्यक्षेत्र में मेहनत के मुताबिक फल न मिलने से मन उदास रहेगा। छात्रों की शिक्षा के क्षेत्र में कोई बाधा उत्पन्न हो सकती है। पारिवारिक मामलों में टांग अड़ाना मुश्किल में डाल देगा। सेहत का ध्यान रखें। मिथुन- आज ऑफिस के किसी काम से बाहर जाना पड़ सकता है। व्यापार में मुनाफे के योग बन रहे हैं। छात्रों के लिए अच्छा समय आने की भी संभावना है। युवा रुके हुए कामों को निपटाने की कोशिश करेंगे। परिवार की सहमति के बिना कोई भी कदम न उठाएं। कर्क- आज कार्यक्षेत्र में अपने काम की गोपनीयता बनाएं रखना ही बेहतर होगा। बिजनेस के लेन-देन के मामले में बहुत ही सावधानी बरतने की जरूरत है। छात्रों को प्रतियोगी परीक्षा में सकारात्मक समाचार मिलेंगे। घर में किसी महत्पूर्ण काम को लेकर भाग-दौड़ लगी रहेगी। सिंह- आज कार्यक्षेत्र में काम में मदद करने के लिए विरोधी भी हाथ मिलाते हुए नजर आएंगे। व्यापार में नए लोगों से संपर्क बढ़ना काम को आगे ले जाने में सहायक होगा। युवा अपनी मेहनत पर विश्वास रखें और प्रयास करते रहें। पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाने में सफल होंगे। कन्या- आज कार्यक्षेत्र में सब काम सही से कर लेंगे, प्रशंसा मिलेगी। नया बिजनेस शुरू करने का विचार बना सकते हैं। युवाओं को करियर के रास्ते में थोड़ी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है। घर की साज-सज्जा में धन खर्च होगा। सेहत से खिलवाड़ करना सही नहीं है। तुला- आज नए लोगों के संपर्क की वजह से आपका प्रमोशन होने की संभावना है। बिजनेस में कर्मचारियों के साथ बढ़िया ताल-मेल बना रहेगा। युवाओं को अपनी मेहनत का परिणाम अवश्य मिलेगा। परिवार की किसी छोटी सी बात को मन पर लगा कर बैठ जाएंगे। वृश्चिक- आज ऑफिस में अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में सक्षम होंगे। बिजनेस में किसी काम को लेकर आना-कानी करते हुए नजर आएंगे। छात्र भविष्य में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए अभी से मेहनत शुरू कर देंगे। परिवार वालों का सहयोग हिम्मत बनकर काम करेगा। धनु- आज प्राइवेट नौकरी कर रहे लोग अपने काम से खुश रहेंगे। सांझेदारी वाले बिजनेस में बहुत ही संभल कर काम करने की जरूरत है। टेक्निकल पढ़ाई कर रहे छात्रों के परिणाम अनुकूल रहेंगे। परिवार के साथ किसी फंक्शन में जाने का मौका मिलेगा। मकर- आज व्यवसाय की विपरीत परिस्थितियों में भी खुश रहने की कोशिश करेंगे। ऑफिस में किसी की नकारात्मक बातों को एक कान से सुनकर दूसरे कान से निकाल दें। युवा वर्ग अपने करियर पर ध्यान देंगे। परिवार के साथ समय बिताकर मानसिक तनाव में सुकून मिलेगा। कुम्भ- आज व्यापार में भविष्य संबंधी योजनाओं को लागू करने के बारे में विचार करेंगे। कार्यस्थल पर कोई भी विचार सबके सामने रखने से पहले सोच लें। छात्र पढ़ाई की टेंशन लेने की बजाय उसकी तैयारी करें। परिवार के सामने अपनी परेशानियों को जाहिर करेंगे। मीन- आज बड़ी मुश्किलों के बाद व्यापार में मंदी ऊपर चढ़ती हुई नजर आएगी। सरकारी नौकरी कर रहे लोग मौज-मस्ती में अपना समय बिताएंगे। छात्र शिक्षा में अच्छे फल प्राप्त करने के लिए अनुभवी की सलाह लेंगे। काम और परिवार में सही से तालमेल बनाने में सक्षम रहेंगे। |
नजरबंद - अभी भी एक छात्र है या एक डॉक्टर है? प्रशिक्षु और वह है क्या अधिकार की जिम्मेदारी क्या है?
दवा में, वहाँ एक प्रशिक्षु के रूप में एक ऐसी बात है। यह शब्द डॉक्टरों के बारे में विशिष्ट व्यक्ति-विषयक रूस पंथ टीवी श्रृंखला के रिलीज होने के बाद हम में से कई के लिए परिचित हो गया है। लेकिन एक बात - शब्द की अनुमानित भावना को पता है, और काफी एक और - अवधारणा को अच्छी तरह से समझने के लिए। ऐसा करने के लायक है।
तो, इससे पहले कि आप शब्द 'प्रशिक्षु' बाहर बनाने के लिए, आप विषय से थोड़ा दूर की जरूरत है। बहरहाल, बहुत दूर। हम इस तरह के एक परिभाषा के साथ शुरू करना चाहिए इंटर्नशिप के रूप में। यह शब्द युवा पेशेवरों, जो मुश्किल से चिकित्सा विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि के प्राथमिक और जरूरी स्नातकोत्तर विशेषज्ञता में नामित है। वह आमतौर पर व्यवसायों में से एक के लिए चला जाता है। थेरेपी, रतिजरोग, शल्य चिकित्सा, traumatology - एक स्नातक किसी भी दिशा चुन सकते हैं। और इस विशेषज्ञता के बाद एक छात्र एक अनिवार्य राज्य परीक्षा किराए आयोजित किया जाता है। तो यह स्वास्थ्य देखभाल की सुविधा (जैसे, एक शहर के अस्पताल) को भेजा जाता है। आपको लगता है कि एक इंटर्नशिप पता होना चाहिए - एक अनिवार्य कदम है कि प्रत्येक संभावित चिकित्सक एक पूर्ण चिकित्सा शिक्षा और प्रशिक्षण की प्राप्ति के लिए रास्ते पर पेशेवर गुजरना होगा। और जब छात्र यह पूरा करता है, वह एक विशेष प्रमाण पत्र और डिप्लोमा जारी किया जाता है। यह सब एक अधिकारी ने इस तथ्य की पुष्टि है कि आदमी दस्तावेज है - एक चिकित्सा विशेषज्ञ और वह वास्तव में इंटर्नशिप खत्म कर दिया।
तो, प्रशिक्षु - है, वास्तव में, अब एक छात्र है, लेकिन अभी भी नहीं एक डॉक्टर। वैसे भी, कि एक पेशेवर वातावरण में माना जाता है। केवल इंटर्नशिप में प्रशिक्षण के एक वर्ष के बाद, वे पूर्ण डॉक्टरों कहा जा सकता है।
नजरबंद - उच्च चिकित्सा शिक्षा के साथ एक व्यक्ति है, और यह अनुभव के बिना ले जा सकते हैं। इसके अलावा, यह एक अधिकारी कर्मचारी के रूप में पंजीकृत है। अधिक प्रशिक्षु जरूरी विभाग के किसी भी सिर (जहां वह स्वीकार कर लिया गया है), या व्यक्ति कि प्रमुख चिकित्सक की जगह करने के लिए अधीनस्थ। युवा चिकित्सक के लिए उच्च मांगों को देता है। उन्होंने कहा कि रूस के कानूनों और सभी कृत्यों कि गतिविधि चिकित्सा संस्थानों द्वारा किए गए विनियमित पता होना चाहिए। नजरबंद - एक डॉक्टर, युवा यद्यपि, तो वह सभी तरीकों और प्राथमिक चिकित्सा के नियमों को पता होना चाहिए।
यह भी उपस्थित चिकित्सक के सभी कार्य करता है, लेकिन हमेशा की देखरेख में एक अत्यंत योग्य विशेषज्ञ। सभी मामलों में उनके कार्यों के लिए ज़िम्मेदार है। इससे पहले कि आप चिकित्सा के एक पाठ्यक्रम असाइन करते हैं, रोगी अपने पर्यवेक्षक को अपने नोट्स के साथ एक कार्ड और निर्धारित दवा पेश करना होगा। अपने कार्यों के बारे में वह निश्चित रूप से रिपोर्ट करेंगे।
तो, अंतरराष्ट्रीय क्या है - यह स्पष्ट है, और वे क्या भी, नियमों का पालन करना होगा। अब उनकी क्षमताओं। डॉक्टर-प्रशिक्षु रोगी के बारे में उनकी निदान एक सर्वेक्षण की स्थापना और संचालन का अधिकार है। उपचार और प्रक्रियाओं भी दिलाई जा सकता है लेकिन, जैसा कि ऊपर उल्लेख किया है, केवल सब लिखा पर्यवेक्षक की जाँच के बाद।
उन्होंने अपने मरीज की जाँच करें और उसे जांच करने के लिए हर दिन के लिए बाध्य। पूर्ण अधिकार कुछ नेतृत्व कि निदान और उपचार प्रक्रिया में सुधार कर सकते की पेशकश करने के लिए। बैठकों, सम्मेलनों में भाग लेने के साहित्य और किसी भी अन्य डेटा का उपयोग करें, आवंटित समय में आराम - इन सभी युवा डॉक्टर भी कर सकते हैं। सामान्य तौर पर, हम निष्कर्ष निकाल सकते है कि अपनी गतिविधियों को केवल एक वर्ष के लिए एक उच्च कुशल चिकित्सक की तरह जगह ले, - अध्ययन के रूप में।
और अंत में, कि बारे में कुछ शब्द, क्या वित्तीय सहायता भरोसा कर सकते हैं पर "नहीं डॉक्टर, लेकिन नहीं छात्रों है। " मजदूरी वे प्राप्त है, लेकिन, ज़ाहिर है, इसकी मात्रा विशेषज्ञ डॉक्टरों की तुलना में काफी कम है। लेकिन इस समझा जा सकता हैः वास्तव में, युवा लोगों को सिर्फ सीख रहे हैं। लेकिन प्रशिक्षु के अधिकार से 6 महीने के बाद भुगतान वार्षिक छुट्टी पर जाने के लिए। यह नियोक्ता (यानी एक अस्पताल या क्लिनिक) वित्तपोषण। संचित अनुभव, विशेषज्ञता और नेतृत्व विश्वास के साथ - और इंटर्नशिप के सफल समापन के बाद भी आप एक ही स्थान में रह सकते हैं।
| नजरबंद - अभी भी एक छात्र है या एक डॉक्टर है? प्रशिक्षु और वह है क्या अधिकार की जिम्मेदारी क्या है? दवा में, वहाँ एक प्रशिक्षु के रूप में एक ऐसी बात है। यह शब्द डॉक्टरों के बारे में विशिष्ट व्यक्ति-विषयक रूस पंथ टीवी श्रृंखला के रिलीज होने के बाद हम में से कई के लिए परिचित हो गया है। लेकिन एक बात - शब्द की अनुमानित भावना को पता है, और काफी एक और - अवधारणा को अच्छी तरह से समझने के लिए। ऐसा करने के लायक है। तो, इससे पहले कि आप शब्द 'प्रशिक्षु' बाहर बनाने के लिए, आप विषय से थोड़ा दूर की जरूरत है। बहरहाल, बहुत दूर। हम इस तरह के एक परिभाषा के साथ शुरू करना चाहिए इंटर्नशिप के रूप में। यह शब्द युवा पेशेवरों, जो मुश्किल से चिकित्सा विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि के प्राथमिक और जरूरी स्नातकोत्तर विशेषज्ञता में नामित है। वह आमतौर पर व्यवसायों में से एक के लिए चला जाता है। थेरेपी, रतिजरोग, शल्य चिकित्सा, traumatology - एक स्नातक किसी भी दिशा चुन सकते हैं। और इस विशेषज्ञता के बाद एक छात्र एक अनिवार्य राज्य परीक्षा किराए आयोजित किया जाता है। तो यह स्वास्थ्य देखभाल की सुविधा को भेजा जाता है। आपको लगता है कि एक इंटर्नशिप पता होना चाहिए - एक अनिवार्य कदम है कि प्रत्येक संभावित चिकित्सक एक पूर्ण चिकित्सा शिक्षा और प्रशिक्षण की प्राप्ति के लिए रास्ते पर पेशेवर गुजरना होगा। और जब छात्र यह पूरा करता है, वह एक विशेष प्रमाण पत्र और डिप्लोमा जारी किया जाता है। यह सब एक अधिकारी ने इस तथ्य की पुष्टि है कि आदमी दस्तावेज है - एक चिकित्सा विशेषज्ञ और वह वास्तव में इंटर्नशिप खत्म कर दिया। तो, प्रशिक्षु - है, वास्तव में, अब एक छात्र है, लेकिन अभी भी नहीं एक डॉक्टर। वैसे भी, कि एक पेशेवर वातावरण में माना जाता है। केवल इंटर्नशिप में प्रशिक्षण के एक वर्ष के बाद, वे पूर्ण डॉक्टरों कहा जा सकता है। नजरबंद - उच्च चिकित्सा शिक्षा के साथ एक व्यक्ति है, और यह अनुभव के बिना ले जा सकते हैं। इसके अलावा, यह एक अधिकारी कर्मचारी के रूप में पंजीकृत है। अधिक प्रशिक्षु जरूरी विभाग के किसी भी सिर , या व्यक्ति कि प्रमुख चिकित्सक की जगह करने के लिए अधीनस्थ। युवा चिकित्सक के लिए उच्च मांगों को देता है। उन्होंने कहा कि रूस के कानूनों और सभी कृत्यों कि गतिविधि चिकित्सा संस्थानों द्वारा किए गए विनियमित पता होना चाहिए। नजरबंद - एक डॉक्टर, युवा यद्यपि, तो वह सभी तरीकों और प्राथमिक चिकित्सा के नियमों को पता होना चाहिए। यह भी उपस्थित चिकित्सक के सभी कार्य करता है, लेकिन हमेशा की देखरेख में एक अत्यंत योग्य विशेषज्ञ। सभी मामलों में उनके कार्यों के लिए ज़िम्मेदार है। इससे पहले कि आप चिकित्सा के एक पाठ्यक्रम असाइन करते हैं, रोगी अपने पर्यवेक्षक को अपने नोट्स के साथ एक कार्ड और निर्धारित दवा पेश करना होगा। अपने कार्यों के बारे में वह निश्चित रूप से रिपोर्ट करेंगे। तो, अंतरराष्ट्रीय क्या है - यह स्पष्ट है, और वे क्या भी, नियमों का पालन करना होगा। अब उनकी क्षमताओं। डॉक्टर-प्रशिक्षु रोगी के बारे में उनकी निदान एक सर्वेक्षण की स्थापना और संचालन का अधिकार है। उपचार और प्रक्रियाओं भी दिलाई जा सकता है लेकिन, जैसा कि ऊपर उल्लेख किया है, केवल सब लिखा पर्यवेक्षक की जाँच के बाद। उन्होंने अपने मरीज की जाँच करें और उसे जांच करने के लिए हर दिन के लिए बाध्य। पूर्ण अधिकार कुछ नेतृत्व कि निदान और उपचार प्रक्रिया में सुधार कर सकते की पेशकश करने के लिए। बैठकों, सम्मेलनों में भाग लेने के साहित्य और किसी भी अन्य डेटा का उपयोग करें, आवंटित समय में आराम - इन सभी युवा डॉक्टर भी कर सकते हैं। सामान्य तौर पर, हम निष्कर्ष निकाल सकते है कि अपनी गतिविधियों को केवल एक वर्ष के लिए एक उच्च कुशल चिकित्सक की तरह जगह ले, - अध्ययन के रूप में। और अंत में, कि बारे में कुछ शब्द, क्या वित्तीय सहायता भरोसा कर सकते हैं पर "नहीं डॉक्टर, लेकिन नहीं छात्रों है। " मजदूरी वे प्राप्त है, लेकिन, ज़ाहिर है, इसकी मात्रा विशेषज्ञ डॉक्टरों की तुलना में काफी कम है। लेकिन इस समझा जा सकता हैः वास्तव में, युवा लोगों को सिर्फ सीख रहे हैं। लेकिन प्रशिक्षु के अधिकार से छः महीने के बाद भुगतान वार्षिक छुट्टी पर जाने के लिए। यह नियोक्ता वित्तपोषण। संचित अनुभव, विशेषज्ञता और नेतृत्व विश्वास के साथ - और इंटर्नशिप के सफल समापन के बाद भी आप एक ही स्थान में रह सकते हैं। |
मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स जिले में भारी मात्रा में विस्फोटक और डेटोनेटर के साथ छह लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एक गाड़ी में विस्फोटक होने के बारे में गुप्त सूचना मिलने के बाद पुलिस ने बुधवार रात इलाके में अभियान चलाया। इस दौरान लाडरिमबाई पुलिस चौकी इलाके के कोंगोंग में असम के पंजीकरण नंबर वाली एक गाड़ी को रोका गया।
सहायक पुलिस महानिरीक्षक जी के इंगराई ने बताया कि कार से दस पेटी में 250 किलोग्राम विस्फोटक (2,000 जिलेटिन छड़ें), 1000 डेटोनेटर बरामद किए गए। गाड़ी में सवार दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों से सूचना मिलने के बाद खलीहरियट में चार और लोगों को पकड़ा गया। वहां पर छापेमारी के दौरान करीब 1275 किलोग्राम विस्फोटक (10,200 जिलेटिन छड़ें), 5000 डेटोनेटर बरामद किए गए।
इंगराई ने बताया,'अभियान के दौरान कुल मिलाकर 1525 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री बरामद की गयी। ' उन्होंने बताया कि विस्फोटक कानून तथा अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। मामले में आगे छानबीन की जा रही है।
| मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स जिले में भारी मात्रा में विस्फोटक और डेटोनेटर के साथ छह लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एक गाड़ी में विस्फोटक होने के बारे में गुप्त सूचना मिलने के बाद पुलिस ने बुधवार रात इलाके में अभियान चलाया। इस दौरान लाडरिमबाई पुलिस चौकी इलाके के कोंगोंग में असम के पंजीकरण नंबर वाली एक गाड़ी को रोका गया। सहायक पुलिस महानिरीक्षक जी के इंगराई ने बताया कि कार से दस पेटी में दो सौ पचास किलोग्रामग्राम विस्फोटक , एक हज़ार डेटोनेटर बरामद किए गए। गाड़ी में सवार दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों से सूचना मिलने के बाद खलीहरियट में चार और लोगों को पकड़ा गया। वहां पर छापेमारी के दौरान करीब एक हज़ार दो सौ पचहत्तर किलोग्रामग्राम विस्फोटक , पाँच हज़ार डेटोनेटर बरामद किए गए। इंगराई ने बताया,'अभियान के दौरान कुल मिलाकर एक हज़ार पाँच सौ पच्चीस किलोग्रामग्राम विस्फोटक सामग्री बरामद की गयी। ' उन्होंने बताया कि विस्फोटक कानून तथा अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। मामले में आगे छानबीन की जा रही है। |
बैतूल, ऑनलाइन डेस्क। वैसे तो आपने कई शादियां देखी होंगी और इसका लुत्फ भी उठाया होगा, लेकिन आपको एक ऐसी शादी के बारे में बताएंगे। जो अपने अनोखे अंदाज के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है। दरअसल, मध्य प्रदेश के बैतूल शहर में वकील दर्शन बुंदेले और टीचर राजश्री अहिरे की शादी संपन्न हुई।
इस शादी की सबसे अनोखी बात ये रही कि दूल्हा और दुल्हन ने स्टेज पर ही संविधान की प्रस्तावना को पढ़कर शादी की। हालांकि, इस शादी में न तो मंडप लगाया गया था और न ही पंडित और रस्में अदा की गई। बल्कि दूल्हा और दुल्हन ने संविधान की प्रस्तावना को पढ़कर एक-दूसरे के साथ शादी की कस्में खाई। दर्शन और राजश्री का कहना है कि प्रेम विवाह के लिए परिवार को मनाना उनके लिए चुनौती थी, लेकिन दोनों की खुशी के लिए परिवार मान गए।
बता दें कि शादी के दौरान दूल्हा और दुल्हन ने संविधान की प्रस्तावना पढ़ने के बाद एक दूसरे को वरमाला भी पहनाई। समारोह में मौजूद दूल्हा और दुल्हन के इस अनोखे अंदाज में हुई शादी को देख वहां मौजूद हर किसी ने उनकी तारीफ की।
बताते चलें कि वकील दर्शन बुंदेले और टीचर राजश्री अहिरे के बीच काफी साल से प्रेम प्रसंग चल रहा था। हरदा के एक्सीलेंस स्कूल में हायर सेकंडरी क्लास की शिक्षिका राजश्री से 12 वर्ष पहले दर्शन की कॉलेज में दोस्ती हुई थी। इसके बाद दोनों मिलकर सामाजिक कार्य करने लगे। 12 साल बाद दर्शन और राजश्री ने विवाह करने का फैसला लिया। दर्शन बुंदेले और राजश्री अहिरे दोनों ही अलग जाति से आते हैं। उन दोनों ने अपने रिश्ते को शादी में बदलने का निर्णय लिया। दोनों ने समाज में एक सकारात्मक संदेश देने के लिए संविधान की प्रस्तावना के साथ शादी की।
| बैतूल, ऑनलाइन डेस्क। वैसे तो आपने कई शादियां देखी होंगी और इसका लुत्फ भी उठाया होगा, लेकिन आपको एक ऐसी शादी के बारे में बताएंगे। जो अपने अनोखे अंदाज के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है। दरअसल, मध्य प्रदेश के बैतूल शहर में वकील दर्शन बुंदेले और टीचर राजश्री अहिरे की शादी संपन्न हुई। इस शादी की सबसे अनोखी बात ये रही कि दूल्हा और दुल्हन ने स्टेज पर ही संविधान की प्रस्तावना को पढ़कर शादी की। हालांकि, इस शादी में न तो मंडप लगाया गया था और न ही पंडित और रस्में अदा की गई। बल्कि दूल्हा और दुल्हन ने संविधान की प्रस्तावना को पढ़कर एक-दूसरे के साथ शादी की कस्में खाई। दर्शन और राजश्री का कहना है कि प्रेम विवाह के लिए परिवार को मनाना उनके लिए चुनौती थी, लेकिन दोनों की खुशी के लिए परिवार मान गए। बता दें कि शादी के दौरान दूल्हा और दुल्हन ने संविधान की प्रस्तावना पढ़ने के बाद एक दूसरे को वरमाला भी पहनाई। समारोह में मौजूद दूल्हा और दुल्हन के इस अनोखे अंदाज में हुई शादी को देख वहां मौजूद हर किसी ने उनकी तारीफ की। बताते चलें कि वकील दर्शन बुंदेले और टीचर राजश्री अहिरे के बीच काफी साल से प्रेम प्रसंग चल रहा था। हरदा के एक्सीलेंस स्कूल में हायर सेकंडरी क्लास की शिक्षिका राजश्री से बारह वर्ष पहले दर्शन की कॉलेज में दोस्ती हुई थी। इसके बाद दोनों मिलकर सामाजिक कार्य करने लगे। बारह साल बाद दर्शन और राजश्री ने विवाह करने का फैसला लिया। दर्शन बुंदेले और राजश्री अहिरे दोनों ही अलग जाति से आते हैं। उन दोनों ने अपने रिश्ते को शादी में बदलने का निर्णय लिया। दोनों ने समाज में एक सकारात्मक संदेश देने के लिए संविधान की प्रस्तावना के साथ शादी की। |
Nose Contouring Tricks अगर आप अपनी नाक को शॉर्प और पतला दिखाना चाहती हैं तो आपको मेकअप के कुछ टिप्स एंड ट्रिक्स के बारे में पता होना चाहिए। तो आइए बिना देर किए जानते हैं इसके बारे में।
नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। Nose Contouring Tricks: पतली और शॉर्प नोज आपको और ज्यादा खूबसूरत दिखाती है। शॉर्प नोज़ पाने के लिए तो आजकल महिलाएं सर्जरी का भी सहारा ले रही हैं लेकिन ये ऑप्शन महंगा होने की वजह से हर किसी के लिए पॉसिबल नहीं। लेकिए एक और ऑप्शन है जिससे आप पा सकती हैं पतली और नुकीली नाक। मेकअप. . . जी हां, मेकअप के कुछ टिप्स एंड ट्रिक्स अपनाकर आप आसानी से नाक को शार्प कर सकती हैं। तो जान लें यहां इसके बारे में।
नाक को पतला और शॉर्प दिखाने के लिए अपने स्किन टोन से एक या दो शेड हल्का शाइनी हाइलाइटर लगाएं। फिर हाइलाइटर को धीरे से ऊपर से नीचे की ओर एक पतली लाइन में नाक के आगे के हिस्से पर लगाएं। हाइलाइटर बहुत चौड़ा न हो, क्योंकि इससे लुक इन्हैंस होने की जगह खराब हो सकता है। आप हाइलाइटर की जगह ऑफ-व्हाइट या न्यूड आईशैडो का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
यदि आप अपनी नाक की नोक को थोड़ा नुकीला और हल्का सा ऊपर उठाने की सोच रही हैं तो मैट ब्रॉन्जर या स्किन टोन वाले आईशैडो का इस्तेमाल करें। इसके लिए नाक की वी शेप और नोक पर ब्राउन ब्रॉन्जर लगाएं। इसके बाद सॉफ्ट स्पंज या ब्रश का इस्तेमाल कर ब्लेंड कर नोक को डार्क कर लें।
कंटूरिंग के लिए एंगल्ड ब्रश का इस्तेमाल करते हुए अपनी ब्रो बोन से लेकर नाक की नोक तक लाइट सी कंटूर लाइन बनाएं। नाक की नोक तक लाइन बनाने के बाद नाक के कर्व के हिसाब से ही आगे की लाइन बनाएं और फिर लास्ट में लाइन को राउंड-राउंड ब्लेंड करें। कंटूर को अच्छे से ब्लेंड करने के लिए एक क्रीम कंटूर चुनें।
नाक पर कंटूरिंग करने के बाद ट्रांसलूसेंट सेटिंग पाउडर से मेकअप को सेट करना न भूलें।
दूसरा नोज़ कंटूरिंग के बाद हैवी आई मेकअप अवॉयड करें क्योंकि यह आपकी नाक को मोटा दिखाता है। इसकी बजाय आंखों पर न्यूड और लाइट मेकअप करें। स्किन टोन से मैच करता हुआ आईशैडो शेड चुनें।
| Nose Contouring Tricks अगर आप अपनी नाक को शॉर्प और पतला दिखाना चाहती हैं तो आपको मेकअप के कुछ टिप्स एंड ट्रिक्स के बारे में पता होना चाहिए। तो आइए बिना देर किए जानते हैं इसके बारे में। नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। Nose Contouring Tricks: पतली और शॉर्प नोज आपको और ज्यादा खूबसूरत दिखाती है। शॉर्प नोज़ पाने के लिए तो आजकल महिलाएं सर्जरी का भी सहारा ले रही हैं लेकिन ये ऑप्शन महंगा होने की वजह से हर किसी के लिए पॉसिबल नहीं। लेकिए एक और ऑप्शन है जिससे आप पा सकती हैं पतली और नुकीली नाक। मेकअप. . . जी हां, मेकअप के कुछ टिप्स एंड ट्रिक्स अपनाकर आप आसानी से नाक को शार्प कर सकती हैं। तो जान लें यहां इसके बारे में। नाक को पतला और शॉर्प दिखाने के लिए अपने स्किन टोन से एक या दो शेड हल्का शाइनी हाइलाइटर लगाएं। फिर हाइलाइटर को धीरे से ऊपर से नीचे की ओर एक पतली लाइन में नाक के आगे के हिस्से पर लगाएं। हाइलाइटर बहुत चौड़ा न हो, क्योंकि इससे लुक इन्हैंस होने की जगह खराब हो सकता है। आप हाइलाइटर की जगह ऑफ-व्हाइट या न्यूड आईशैडो का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यदि आप अपनी नाक की नोक को थोड़ा नुकीला और हल्का सा ऊपर उठाने की सोच रही हैं तो मैट ब्रॉन्जर या स्किन टोन वाले आईशैडो का इस्तेमाल करें। इसके लिए नाक की वी शेप और नोक पर ब्राउन ब्रॉन्जर लगाएं। इसके बाद सॉफ्ट स्पंज या ब्रश का इस्तेमाल कर ब्लेंड कर नोक को डार्क कर लें। कंटूरिंग के लिए एंगल्ड ब्रश का इस्तेमाल करते हुए अपनी ब्रो बोन से लेकर नाक की नोक तक लाइट सी कंटूर लाइन बनाएं। नाक की नोक तक लाइन बनाने के बाद नाक के कर्व के हिसाब से ही आगे की लाइन बनाएं और फिर लास्ट में लाइन को राउंड-राउंड ब्लेंड करें। कंटूर को अच्छे से ब्लेंड करने के लिए एक क्रीम कंटूर चुनें। नाक पर कंटूरिंग करने के बाद ट्रांसलूसेंट सेटिंग पाउडर से मेकअप को सेट करना न भूलें। दूसरा नोज़ कंटूरिंग के बाद हैवी आई मेकअप अवॉयड करें क्योंकि यह आपकी नाक को मोटा दिखाता है। इसकी बजाय आंखों पर न्यूड और लाइट मेकअप करें। स्किन टोन से मैच करता हुआ आईशैडो शेड चुनें। |
VPN फीचर हुआ अपडेटः
माइक्रोसॉफ्ट का कहना है कि विंडोज 11 में अपडेटेड VPN कंपनी ने कहा कि सिक्योरिटी के लिए वीपीएन फीचर को अपडेट किया गया है। इसके लिए टास्कबार में एक छोटा शील्ड आइकन मौजूद होगा। इसे कस्टमाइज भी किया जा सकता है। साथ ही जो पीसी विंडोज 11 पर काम करते हैं वो प्लूटोन सिक्योरिटी के साथ आते हैं। इससे सिस्टम पर मैलवेयर और साइबर अटैक का खतरा कम हो जाता है।
पुराने Laptop को नया बना देगा ये Update!
स्टार्ट मेन्यू में रियल-टाइम अलर्टः
विंडोज 11 के नए अपडेट के साथ यूजर्स को सिस्टम के स्टार्ट मेन्यू में रियल टाइम अलर्ट मिलेंगे। इससे यूजर्स की निजी डिटेल्स और फाइल्स सेफ रखी जा सकती हैं। कंपनी ने कहा है कि आने वाले समय में कई और सिक्योरिटी फीचर्स दिए जाएंगे।
पेंट ऐप के लिए डार्क मोड को किया जा रहा टेस्टः
कुछ फीचर्स की टेस्टिंग अभी भी चल रही है। पेंट ऐप में डार्क मोड को उपलब्ध कराया जाएगा। हालांकि, इस फीचर को कब तक उपलब्ध कराया जाएगा, इसकी जानकारी अभी नहीं दी गई है।
वॉल्यूम मिक्सरः
इस फीचर के जरिए यूजर्स पीसी की वॉल्यूम को खुद से एडजस्ट कर पाएंगे। इसे इंसाइडर प्रीव्यू वर्जन रोलआउट के तहत पेश किया गया था। फिलहाल इसकी टेस्टिंग की जा रही है।
| VPN फीचर हुआ अपडेटः माइक्रोसॉफ्ट का कहना है कि विंडोज ग्यारह में अपडेटेड VPN कंपनी ने कहा कि सिक्योरिटी के लिए वीपीएन फीचर को अपडेट किया गया है। इसके लिए टास्कबार में एक छोटा शील्ड आइकन मौजूद होगा। इसे कस्टमाइज भी किया जा सकता है। साथ ही जो पीसी विंडोज ग्यारह पर काम करते हैं वो प्लूटोन सिक्योरिटी के साथ आते हैं। इससे सिस्टम पर मैलवेयर और साइबर अटैक का खतरा कम हो जाता है। पुराने Laptop को नया बना देगा ये Update! स्टार्ट मेन्यू में रियल-टाइम अलर्टः विंडोज ग्यारह के नए अपडेट के साथ यूजर्स को सिस्टम के स्टार्ट मेन्यू में रियल टाइम अलर्ट मिलेंगे। इससे यूजर्स की निजी डिटेल्स और फाइल्स सेफ रखी जा सकती हैं। कंपनी ने कहा है कि आने वाले समय में कई और सिक्योरिटी फीचर्स दिए जाएंगे। पेंट ऐप के लिए डार्क मोड को किया जा रहा टेस्टः कुछ फीचर्स की टेस्टिंग अभी भी चल रही है। पेंट ऐप में डार्क मोड को उपलब्ध कराया जाएगा। हालांकि, इस फीचर को कब तक उपलब्ध कराया जाएगा, इसकी जानकारी अभी नहीं दी गई है। वॉल्यूम मिक्सरः इस फीचर के जरिए यूजर्स पीसी की वॉल्यूम को खुद से एडजस्ट कर पाएंगे। इसे इंसाइडर प्रीव्यू वर्जन रोलआउट के तहत पेश किया गया था। फिलहाल इसकी टेस्टिंग की जा रही है। |
श्रीलंका में बाढ़ और भूस्खलन से मृतकों की संख्या बढ़कर 91 हो गई है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के हवाले से बताया, "विदेश मंत्रालय ने देश के कई हिस्सों में बाढ़ से बचाव एवं राहत कार्यों के लिए आपातकाल रिस्पांस इकाई को सक्रिय कर दिया है। "
कोलंबोः श्रीलंका में बाढ़ और भूस्खलन से मरने वालों की संख्या बढ़कर 100 हो गई है, जबकि 99 लोग लापता हैं। आपदा प्रबंधन केंद्र की ओर से शनिवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से लगभग 12,000 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है, जबकि 14 जिलों में 2,00,000 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।
डीएमसी प्रवक्ता प्रदीप कोडिपिल्ली ने एफे न्यूज को बताया, "कलानिया नदी का जलस्तर अब भी बढ़ रहा है, इसलिए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। " भारत की ओर से मानवीय सहायता लिए रवाना किया गया पहला जहाज शनिवार को कोलंबो पहुंच गया, जबकि दूसरा जहाज रविवार को पहुंचेगा।
श्रीलंका में गुरुवार से हो रही भारी बारिश की वजह से कालू, केलानी, गिन, निवाला और अट्टानागलू नदियों में जलस्तर बढ़ गया है, जिससे यहां बाढ़ आ गई है। बाढ़ से सात जिले बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। सर्वाधिक बुरी तरह प्रभावित जिला कलूतारा है, जहां 38 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 80 लापता हैं। मौसम विभाग ने आगामी दिनों में और बारिश होने की चेतावनी जारी की है।
| श्रीलंका में बाढ़ और भूस्खलन से मृतकों की संख्या बढ़कर इक्यानवे हो गई है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के हवाले से बताया, "विदेश मंत्रालय ने देश के कई हिस्सों में बाढ़ से बचाव एवं राहत कार्यों के लिए आपातकाल रिस्पांस इकाई को सक्रिय कर दिया है। " कोलंबोः श्रीलंका में बाढ़ और भूस्खलन से मरने वालों की संख्या बढ़कर एक सौ हो गई है, जबकि निन्यानवे लोग लापता हैं। आपदा प्रबंधन केंद्र की ओर से शनिवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से लगभग बारह,शून्य लोगों को सुरक्षित निकाला गया है, जबकि चौदह जिलों में दो,शून्य,शून्य से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। डीएमसी प्रवक्ता प्रदीप कोडिपिल्ली ने एफे न्यूज को बताया, "कलानिया नदी का जलस्तर अब भी बढ़ रहा है, इसलिए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। " भारत की ओर से मानवीय सहायता लिए रवाना किया गया पहला जहाज शनिवार को कोलंबो पहुंच गया, जबकि दूसरा जहाज रविवार को पहुंचेगा। श्रीलंका में गुरुवार से हो रही भारी बारिश की वजह से कालू, केलानी, गिन, निवाला और अट्टानागलू नदियों में जलस्तर बढ़ गया है, जिससे यहां बाढ़ आ गई है। बाढ़ से सात जिले बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। सर्वाधिक बुरी तरह प्रभावित जिला कलूतारा है, जहां अड़तीस लोगों की मौत हो गई है, जबकि अस्सी लापता हैं। मौसम विभाग ने आगामी दिनों में और बारिश होने की चेतावनी जारी की है। |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
यदि वह गाँव पहुँच गयी तो उसने अपना काम शुरू कर दिया होगा । लोगों के चिŸा से उसने भय के भूत को निकाल दिया होगा ।
"अरे ! वह ऐसा नहीं कर सकती। जरा अपनी बुिद्ध ज्यादा चलाती है।" रमजान बोला।
रमजान के मुँह से पहली बार अंकल शब्द सुनकर विश्वनाथ त्यागी को लगा, यह लड़का मेरे बहुत नजदीक आ गया है।
सभी उठ पड़े और दो मिनट में ही साढ़ियों से चढ़ कर लोहे का दरवाजा पार करते हुए चौक में पहुँच गए। चौक में महाराजा के चबूतरे पर एक बूढ़े सज्जन बैठे थे।
रमजान उनके सामने पहुँचा।
सेठ रामदास ने उसे अपने बड़े भाई नारायणदास से मिलाया- "भाई साहब यह वही रमजान है, इसके कारण हम उस मूर्ती तक पहुँच पाये हैं।
आगे-आगे त्यागी, उनके पीछे सेठ रामदास और उनके पीछे रमजान चल पड़ा। दक्षिण पश्चिम दिशा वाले खण्डहरों के चबूतरे की खुदाई हो चुकी थी और वहाँ सीड़ियाँ दिखने लगी। वे सब सीढ़ियों से उतर कर तल घर में जा पहुँचे।
सामने, शंकर जी की मानव कद में बनी पत्थर की मूर्ति दिख रही थी। जिसे तराश कर आगे और पीछे के हिस्से अलग अलग बनाकर जोड़े गये थे। रमजान बड़ी देर तक मूर्ति की बनावट का निरीक्षण करता रहा। उसके बाद उसकी दृष्टि मूर्ती की आसन पर गई। सहसा रमजान को मूर्ति के सामने वाले पत्थर पर कुछ लिखा हुआ दिखा। वह अपना रूमाल निकाल कर रगड़ रगड़ कर उस जगह को साफ करने लगा।
पृष्ठ खुले इतिहास के, जीवन हो खुशहाल।
आँख मिला कर आँख में देख लीजिये भाल।।
इसी समय तलघर में किसी और के आने की आहट मिली । सभी का ध्यान उस ओर चला गया ।
रमजान चौंका। वहाँ चन्द्राबती शान्ति के साथ खडी थी ।
यह देखकर रमजान का स्वर ऊँचा हो गया । बोला - "चन्दा तुम यहाँ कैसे ?
" मैंने !"रमजान ने आश्चर्य प्रकट किया ।
यह सुनकर चन्द्रावती को उस पर दया आ गई और उसने प्रश्न भरी निगाह से रमजान की ओर देखा ।
इन शब्दों का अर्थ गुनते हुए वह भी मूर्ति से हट कर खडा हो गया ।
| यदि वह गाँव पहुँच गयी तो उसने अपना काम शुरू कर दिया होगा । लोगों के चिŸा से उसने भय के भूत को निकाल दिया होगा । "अरे ! वह ऐसा नहीं कर सकती। जरा अपनी बुिद्ध ज्यादा चलाती है।" रमजान बोला। रमजान के मुँह से पहली बार अंकल शब्द सुनकर विश्वनाथ त्यागी को लगा, यह लड़का मेरे बहुत नजदीक आ गया है। सभी उठ पड़े और दो मिनट में ही साढ़ियों से चढ़ कर लोहे का दरवाजा पार करते हुए चौक में पहुँच गए। चौक में महाराजा के चबूतरे पर एक बूढ़े सज्जन बैठे थे। रमजान उनके सामने पहुँचा। सेठ रामदास ने उसे अपने बड़े भाई नारायणदास से मिलाया- "भाई साहब यह वही रमजान है, इसके कारण हम उस मूर्ती तक पहुँच पाये हैं। आगे-आगे त्यागी, उनके पीछे सेठ रामदास और उनके पीछे रमजान चल पड़ा। दक्षिण पश्चिम दिशा वाले खण्डहरों के चबूतरे की खुदाई हो चुकी थी और वहाँ सीड़ियाँ दिखने लगी। वे सब सीढ़ियों से उतर कर तल घर में जा पहुँचे। सामने, शंकर जी की मानव कद में बनी पत्थर की मूर्ति दिख रही थी। जिसे तराश कर आगे और पीछे के हिस्से अलग अलग बनाकर जोड़े गये थे। रमजान बड़ी देर तक मूर्ति की बनावट का निरीक्षण करता रहा। उसके बाद उसकी दृष्टि मूर्ती की आसन पर गई। सहसा रमजान को मूर्ति के सामने वाले पत्थर पर कुछ लिखा हुआ दिखा। वह अपना रूमाल निकाल कर रगड़ रगड़ कर उस जगह को साफ करने लगा। पृष्ठ खुले इतिहास के, जीवन हो खुशहाल। आँख मिला कर आँख में देख लीजिये भाल।। इसी समय तलघर में किसी और के आने की आहट मिली । सभी का ध्यान उस ओर चला गया । रमजान चौंका। वहाँ चन्द्राबती शान्ति के साथ खडी थी । यह देखकर रमजान का स्वर ऊँचा हो गया । बोला - "चन्दा तुम यहाँ कैसे ? " मैंने !"रमजान ने आश्चर्य प्रकट किया । यह सुनकर चन्द्रावती को उस पर दया आ गई और उसने प्रश्न भरी निगाह से रमजान की ओर देखा । इन शब्दों का अर्थ गुनते हुए वह भी मूर्ति से हट कर खडा हो गया । |
Adityapur (Sanjeev Mehta) : अपर नगर आयुक्त नगर निगम आदित्यपुर को पत्र लिखकर वरिष्ठ नागरिकों ने क्षेत्र के विभिन्न जगहों पर रखे डस्टबिन का रखरखाव प्रॉपर तरीके से करने की मांग की है. पत्र में कहा गया है कि कचरा कलेक्शन के लिए रखे गए डस्ट बिन के नीचे और अगल बगल के जमीन को कम से कम छह इंच उपर करते हुए स्थान को पक्का करवाएं. चूंकि नगर निगम द्वारा डोर टू डोर कचरा कलेक्शन अभियान नियमित रूप से चलाया तो जा रहा है किंतु समय निर्धारित नहीं होने से सारे लोग कचरा वाहन के बजाय डस्टबिन में ही डालते हैं. उन्होंने यह भी लिखा है कि स्वच्छता अभियान के तहत नगर निगम का यह एकमात्र कचरा निष्पादन और नालों की सफाई अभियान प्रशंसनीय है.
अभी बरसात के महीने में कचरा डस्टबिन के नीचे और अगल बगल कचरा गिरने से मच्छरों का जन्मस्थली बन गया है जिससे अनेकों बीमारियां फैलने की संभावना बढ़ गयी है. और इस वजह से डस्टबिन के पास तक जाना भी असंभव सा हो गया है. इसलिए नगर निगम के गलियों और सड़कों को स्वच्छ बनाए रखने के उद्देश्य के लिए यह जरूरी है कि डस्टबिन के नीचे और अगल बगल जमीन को छह इंच ऊपर करते हुए पक्का किया जाय. पत्र लिखने वालों में वरिष्ठ नागरिक संघ आदित्यपुर के अध्यक्ष रविन्द्र नाथ चौबे, महासचिव रामचन्द्र पासवान शामिल हैं. पत्र की प्रतिलिपि सिटी मैनेजर सह नोडल अधिकारी अजय कुमार को भी सौंपी गई है.
| Adityapur : अपर नगर आयुक्त नगर निगम आदित्यपुर को पत्र लिखकर वरिष्ठ नागरिकों ने क्षेत्र के विभिन्न जगहों पर रखे डस्टबिन का रखरखाव प्रॉपर तरीके से करने की मांग की है. पत्र में कहा गया है कि कचरा कलेक्शन के लिए रखे गए डस्ट बिन के नीचे और अगल बगल के जमीन को कम से कम छह इंच उपर करते हुए स्थान को पक्का करवाएं. चूंकि नगर निगम द्वारा डोर टू डोर कचरा कलेक्शन अभियान नियमित रूप से चलाया तो जा रहा है किंतु समय निर्धारित नहीं होने से सारे लोग कचरा वाहन के बजाय डस्टबिन में ही डालते हैं. उन्होंने यह भी लिखा है कि स्वच्छता अभियान के तहत नगर निगम का यह एकमात्र कचरा निष्पादन और नालों की सफाई अभियान प्रशंसनीय है. अभी बरसात के महीने में कचरा डस्टबिन के नीचे और अगल बगल कचरा गिरने से मच्छरों का जन्मस्थली बन गया है जिससे अनेकों बीमारियां फैलने की संभावना बढ़ गयी है. और इस वजह से डस्टबिन के पास तक जाना भी असंभव सा हो गया है. इसलिए नगर निगम के गलियों और सड़कों को स्वच्छ बनाए रखने के उद्देश्य के लिए यह जरूरी है कि डस्टबिन के नीचे और अगल बगल जमीन को छह इंच ऊपर करते हुए पक्का किया जाय. पत्र लिखने वालों में वरिष्ठ नागरिक संघ आदित्यपुर के अध्यक्ष रविन्द्र नाथ चौबे, महासचिव रामचन्द्र पासवान शामिल हैं. पत्र की प्रतिलिपि सिटी मैनेजर सह नोडल अधिकारी अजय कुमार को भी सौंपी गई है. |
लखनऊ, 30 जून (आईएएनएस)। लोकसभा चुनाव के बाद सुस्त पड़ी कांग्रेस में जान फूंकने के लिए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने एक बार फिर से योगी सरकार पर हमला बोला है।
प्रियंका ने इस ट्वीट के साथ एक अखबार पर छपी खबर को भी साझा किया है, जिसमें लिखा है कि अनुदेशकों का मानदेय घटकर सात हजार रुपये हुआ।
उल्लेखनीय है कि सरकारी जूनियर स्कूलों में तैनात तकरीबन 30 हजार अनुदेशकों का मानदेय घटाने का सरकार ने फैसला किया है, जिसके बाद उन्हें 8,470 रुपये की जगह अब सिर्फ 7,000 रुपये ही दिए जाएंगे। बेसिक शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार ने 7,000 रुपये का मानदेय अप्रैल और मई माह के लिए जारी किया है।
| लखनऊ, तीस जून । लोकसभा चुनाव के बाद सुस्त पड़ी कांग्रेस में जान फूंकने के लिए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने एक बार फिर से योगी सरकार पर हमला बोला है। प्रियंका ने इस ट्वीट के साथ एक अखबार पर छपी खबर को भी साझा किया है, जिसमें लिखा है कि अनुदेशकों का मानदेय घटकर सात हजार रुपये हुआ। उल्लेखनीय है कि सरकारी जूनियर स्कूलों में तैनात तकरीबन तीस हजार अनुदेशकों का मानदेय घटाने का सरकार ने फैसला किया है, जिसके बाद उन्हें आठ,चार सौ सत्तर रुपयापये की जगह अब सिर्फ सात,शून्य रुपयापये ही दिए जाएंगे। बेसिक शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार ने सात,शून्य रुपयापये का मानदेय अप्रैल और मई माह के लिए जारी किया है। |
रही थीं। पुरा एक वर्ष हो गया था उसे गये हुए।
भविष्य की सम्भावनाएँ!
बने या मैं हम दोनों ही तो एक दुसरे के पूरक हैं।
और अजय के आने का समय भी समाप्त होता जा रहा था।
अब उसके मन में तरह तरह की आशंकाएँ घर करने लगीं।
आखिर अजय क्यों नहीं आया! अभी तीन दिन पहले तो सब ठीक था।
पहले कामों में से होगा फिर ऐसा क्या हुआ होगा?
बाद अजय का विवाह तय हुआ है अपने मंत्री जी की बेटी से,
जी जरूर..." और यह कहकर वहीं अचेत हो गयी।
होली ऐसा भी रंग दिखायेगी कभी गीता ने सोचा न था।
नश्तर की तरह चुभ रही थीं।
| रही थीं। पुरा एक वर्ष हो गया था उसे गये हुए। भविष्य की सम्भावनाएँ! बने या मैं हम दोनों ही तो एक दुसरे के पूरक हैं। और अजय के आने का समय भी समाप्त होता जा रहा था। अब उसके मन में तरह तरह की आशंकाएँ घर करने लगीं। आखिर अजय क्यों नहीं आया! अभी तीन दिन पहले तो सब ठीक था। पहले कामों में से होगा फिर ऐसा क्या हुआ होगा? बाद अजय का विवाह तय हुआ है अपने मंत्री जी की बेटी से, जी जरूर..." और यह कहकर वहीं अचेत हो गयी। होली ऐसा भी रंग दिखायेगी कभी गीता ने सोचा न था। नश्तर की तरह चुभ रही थीं। |
मुंबई से दिल्ली के लिए आ रहे स्पाइस जेट में सवार यात्री को विमान के एक खिड़की का कांच टूटा दिखाई दिया, जिस पर सेलो टेप लगा हुआ था। जिस पर यात्री ने ट्वीट कर स्पाइसजेट की लापरवाही को उजागर किया है। जिस पर स्पाइसजेट ने अपनी सफाई पेश किया है।
पीएम मोदी ने कहा, धर्मशाला में ग्लोबल इन्वेस्टर समिट। ये कल्पना नहीं, सच्चाई है, अभूतपूर्व है, अद्भुत है। यह हिमाचल प्रदेश का एक स्टेटमेंट है, पूरे देश को, पूरी दुनिया को कि हम भी अब कमर कस चुके हैं। आज हिमाचल कह रहा है- Yes, We Have Arrived।
बेंच ने कहा, "हमें इस याचिका पर सुनवाई करने की कोई वजह नहीं दिखाई देती। इसलिए यह याचिका खारिज की जाती है। हालांकि, याचिकाकर्ता सामाजिक अधिकारिता मंत्रालय के समक्ष याचिका दे सकती हैं।
तिरुचिरापल्ली के पास एक इंजीनियरिंग के छात्र ने अपने कॉलेज के हॉस्टल वार्डन की कथित तौर पर हत्या कर दी है। बताया जा रहा कि युवक के अनुपस्थित रहने की शिकायत वार्डेन द्वारा युवक के माता- पिता से कर दी गई थी।
कराची में सिंधी हिंदू लड़की नम्रता चंदानी की कथित हत्या के मामले में नया खुलासा हुआ है। हिंदू मेडिकल छात्रा की अंतिम शव परीक्षण रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि उसकी हत्या करने से पहले उसके साथ बलात्कार किया गया था।
सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक आपत्तिजनक तस्वीर पोस्ट करने के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया। आरोपी की पहचान 20 वर्षीय राजा उर्फ जावेद के तौर पर हुई है। वह कबाड़ी का काम करता है।
दिल्ली में प्रदूषण की गंभीर स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। यमुना नदी के उपरी सतह पर झागनुमा सफेद लेयर दोबारा नजर आने लगी है। हवाओं की गति बढ़ने से दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में कमी आई है लेकिन अभी भी स्थिति गंभीर ही बनी हुई है, भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक अगले 3-4 दिन में प्रदूषण में और कमी आएगी।
राष्ट्रीय एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया के निजीकरण का कर्मचारी संघों ने विरोध करने का फैसला लिया है। ऐसा इसलिए क्योंकि कर्मचारियों को उनके वेतन और पेंशन के भुगतान सहित विभिन्न मुद्दों पर अभी भी स्पष्टता नहीं है।
अगले साल के शुरुआत में सरकार केन्द्रीय कर्मचारियों के न्यूनतम वेतन को बढ़ाने पर फैसला ले सकती है। इस फैसले से लगभग 50 लाख कर्मचारी को फायदा होगा। पिछले साल महंगाई भत्ते और ट्रांसपोर्ट अलाउंस में बढ़ोतरी हुई थी।
श्रीनगर. जम्मू कश्मीर में बुधवार को इस मौसम की पहली बर्फबारी हुई। कुछ देर बाद ही हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी बर्फबारी हुई। श्रीनगर हवाई अड्डे पर बर्फबारी के कारण अब तक दो उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। गांदरबल जिले के सोनमर्ग और बारामूला जिले के गुलमर्ग में भी बर्फबारी देखी गई। स्थानीय मौसम विज्ञान विभाग के अधिकारियों ने मुताबिक यह सीजन की पहली बर्फबारी हुई है। कुपवाड़ा में 50 मिमी बारिश हुई जबकि गुलमर्ग में 4 इंच और द्रास में 2 इंच बर्फ जम गई।
| मुंबई से दिल्ली के लिए आ रहे स्पाइस जेट में सवार यात्री को विमान के एक खिड़की का कांच टूटा दिखाई दिया, जिस पर सेलो टेप लगा हुआ था। जिस पर यात्री ने ट्वीट कर स्पाइसजेट की लापरवाही को उजागर किया है। जिस पर स्पाइसजेट ने अपनी सफाई पेश किया है। पीएम मोदी ने कहा, धर्मशाला में ग्लोबल इन्वेस्टर समिट। ये कल्पना नहीं, सच्चाई है, अभूतपूर्व है, अद्भुत है। यह हिमाचल प्रदेश का एक स्टेटमेंट है, पूरे देश को, पूरी दुनिया को कि हम भी अब कमर कस चुके हैं। आज हिमाचल कह रहा है- Yes, We Have Arrived। बेंच ने कहा, "हमें इस याचिका पर सुनवाई करने की कोई वजह नहीं दिखाई देती। इसलिए यह याचिका खारिज की जाती है। हालांकि, याचिकाकर्ता सामाजिक अधिकारिता मंत्रालय के समक्ष याचिका दे सकती हैं। तिरुचिरापल्ली के पास एक इंजीनियरिंग के छात्र ने अपने कॉलेज के हॉस्टल वार्डन की कथित तौर पर हत्या कर दी है। बताया जा रहा कि युवक के अनुपस्थित रहने की शिकायत वार्डेन द्वारा युवक के माता- पिता से कर दी गई थी। कराची में सिंधी हिंदू लड़की नम्रता चंदानी की कथित हत्या के मामले में नया खुलासा हुआ है। हिंदू मेडिकल छात्रा की अंतिम शव परीक्षण रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि उसकी हत्या करने से पहले उसके साथ बलात्कार किया गया था। सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक आपत्तिजनक तस्वीर पोस्ट करने के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया। आरोपी की पहचान बीस वर्षीय राजा उर्फ जावेद के तौर पर हुई है। वह कबाड़ी का काम करता है। दिल्ली में प्रदूषण की गंभीर स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। यमुना नदी के उपरी सतह पर झागनुमा सफेद लेयर दोबारा नजर आने लगी है। हवाओं की गति बढ़ने से दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में कमी आई है लेकिन अभी भी स्थिति गंभीर ही बनी हुई है, भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक अगले तीन-चार दिन में प्रदूषण में और कमी आएगी। राष्ट्रीय एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया के निजीकरण का कर्मचारी संघों ने विरोध करने का फैसला लिया है। ऐसा इसलिए क्योंकि कर्मचारियों को उनके वेतन और पेंशन के भुगतान सहित विभिन्न मुद्दों पर अभी भी स्पष्टता नहीं है। अगले साल के शुरुआत में सरकार केन्द्रीय कर्मचारियों के न्यूनतम वेतन को बढ़ाने पर फैसला ले सकती है। इस फैसले से लगभग पचास लाख कर्मचारी को फायदा होगा। पिछले साल महंगाई भत्ते और ट्रांसपोर्ट अलाउंस में बढ़ोतरी हुई थी। श्रीनगर. जम्मू कश्मीर में बुधवार को इस मौसम की पहली बर्फबारी हुई। कुछ देर बाद ही हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी बर्फबारी हुई। श्रीनगर हवाई अड्डे पर बर्फबारी के कारण अब तक दो उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। गांदरबल जिले के सोनमर्ग और बारामूला जिले के गुलमर्ग में भी बर्फबारी देखी गई। स्थानीय मौसम विज्ञान विभाग के अधिकारियों ने मुताबिक यह सीजन की पहली बर्फबारी हुई है। कुपवाड़ा में पचास मिमी बारिश हुई जबकि गुलमर्ग में चार इंच और द्रास में दो इंच बर्फ जम गई। |
आज बॉलिवुड के सबसे बेहतरीन ऐक्टर्स में एक कहे जाने वाले संजीव कुमार का जन्मदिन है। संजीव कुमार का असली नाम हरिभाई जरीवाला था। संजीव कुमार का देहांत केवल 47 साल की कम उम्र में हो गया था।
आज बॉलिवुड के सबसे बेहतरीन ऐक्टर्स में एक कहे जाने वाले संजीव कुमार का जन्मदिन है। संजीव कुमार का असली नाम हरिभाई जरीवाला था। संजीव कुमार का देहांत केवल 47 साल की कम उम्र में हो गया था। आज अगर वह जिंदा होते तो 80 साल के होते। उन्होंने फिल्मों में कई यादगार किरदार निभाए थे। आज भी लोग उन्हें 'शोले' के ठाकुर बल्देव सिंह के नाम से याद करते हैं।
संजीव कुमार ने फिल्मों में गंभीर रोल से लेकर कॉमिडी रोल्स भी निभाए थे। उन्होंने मौसम, इतनी सी बात, त्रिशूल, मनचली, अनामिका, बीवी ओ बीवी, अंगूर, पति पत्नी और वो, खिलौना जैसी कई मशहूर फिल्मों में काम किया। अक्सर खुद की उम्र से बड़े किरदार निभाने वाले संजीव कुमार को सबसे ज्यादा शोले के ठाकुर के किरदार के लिए याद किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि संजीव कुमार पहले इस रोल को नहीं करना चाहते थे।
दरअसल जब संजीव कुमार को यह फिल्म ऑफर की गई थी तो वह ठाकुर का नहीं बल्कि गब्बर सिंह का किरदार निभाना चाहते थे। इसी तरह आपको यह जानकर भी हैरानी होगी कुछ रिपोर्ट्स में ऐसा भी कहा गया था कि इस फिल्म में वीरू का किरदार निभाने वाले धर्मेंद्र भी वीरू का नहीं बल्कि ठाकुर का किरदार निभाना चाहते थे।
संजीव कुमार एक समय पर हेमा मालिनी से शादी करना चाहते थे। उन्होंने हेमा से अपने प्यार का इजहार भी किया था लेकिन उन्होंने धर्मेंद्र से शादी कर ली। इस तरह संजीव कुमार जिंदगी भर कुंवारे ही रहे। संजीव कुमार को फिल्म दस्तक और कोशिश में बेहतरीन अदाकारी के लिए 2 बार नैशनल अवॉर्ड से भी नवाजा गया था। 6 नवंबर 1985 को संजीव कुमार का हार्ट अटैक के कारण निधन हो गया लेकिन आज भी लोग उनके शोले के डायलॉग्स को याद करते हैं।
| आज बॉलिवुड के सबसे बेहतरीन ऐक्टर्स में एक कहे जाने वाले संजीव कुमार का जन्मदिन है। संजीव कुमार का असली नाम हरिभाई जरीवाला था। संजीव कुमार का देहांत केवल सैंतालीस साल की कम उम्र में हो गया था। आज बॉलिवुड के सबसे बेहतरीन ऐक्टर्स में एक कहे जाने वाले संजीव कुमार का जन्मदिन है। संजीव कुमार का असली नाम हरिभाई जरीवाला था। संजीव कुमार का देहांत केवल सैंतालीस साल की कम उम्र में हो गया था। आज अगर वह जिंदा होते तो अस्सी साल के होते। उन्होंने फिल्मों में कई यादगार किरदार निभाए थे। आज भी लोग उन्हें 'शोले' के ठाकुर बल्देव सिंह के नाम से याद करते हैं। संजीव कुमार ने फिल्मों में गंभीर रोल से लेकर कॉमिडी रोल्स भी निभाए थे। उन्होंने मौसम, इतनी सी बात, त्रिशूल, मनचली, अनामिका, बीवी ओ बीवी, अंगूर, पति पत्नी और वो, खिलौना जैसी कई मशहूर फिल्मों में काम किया। अक्सर खुद की उम्र से बड़े किरदार निभाने वाले संजीव कुमार को सबसे ज्यादा शोले के ठाकुर के किरदार के लिए याद किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि संजीव कुमार पहले इस रोल को नहीं करना चाहते थे। दरअसल जब संजीव कुमार को यह फिल्म ऑफर की गई थी तो वह ठाकुर का नहीं बल्कि गब्बर सिंह का किरदार निभाना चाहते थे। इसी तरह आपको यह जानकर भी हैरानी होगी कुछ रिपोर्ट्स में ऐसा भी कहा गया था कि इस फिल्म में वीरू का किरदार निभाने वाले धर्मेंद्र भी वीरू का नहीं बल्कि ठाकुर का किरदार निभाना चाहते थे। संजीव कुमार एक समय पर हेमा मालिनी से शादी करना चाहते थे। उन्होंने हेमा से अपने प्यार का इजहार भी किया था लेकिन उन्होंने धर्मेंद्र से शादी कर ली। इस तरह संजीव कुमार जिंदगी भर कुंवारे ही रहे। संजीव कुमार को फिल्म दस्तक और कोशिश में बेहतरीन अदाकारी के लिए दो बार नैशनल अवॉर्ड से भी नवाजा गया था। छः नवंबर एक हज़ार नौ सौ पचासी को संजीव कुमार का हार्ट अटैक के कारण निधन हो गया लेकिन आज भी लोग उनके शोले के डायलॉग्स को याद करते हैं। |
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दिल्ली में हो रहे जी20 शिखर सम्मेलन को लेकर विदेशी मेहमानों का आना शुरू हो गया है। 8 सितंबर को यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक दिल्ली पहुंचे। इस दौरान उन्होंने भारत की सराहना की और कहा कि जी-20 के लिए भारत इस वक्त सही देश है। उन्होंने कहा कि इस दौरान कई अहम मुद्दों पर हम चर्चा करेंगे।
स्टोरी में आगे पढ़ेंः
मालूम हो कि ऋषि सुनक के भारत आने पर उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण तथा पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने उनका स्वागत किया। वहीं न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए उन्होंने बताया कि जी-20 सम्मेलन से अलग वो भारत में कहां-कहां घूमने जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत वापस आकर मुझे बहुत खुशी हुई है। यहां मुझे अधिक प्यार मिला है। सुनक ने कहा कि मैं मंदिर भी जाऊंगा। आस्था से मुझे शक्ति मिलती है। अपनी पत्नी का जिक्र करते हुए ब्रिटेन पीएम ने कहा कि मेरी पत्नी अक्षता बेंगलुरु से है, हमारी शादी बेंगलुरु में हुई। हमने साथ में काफी समय बिताया है। हम दिल्ली में पसंदीदा रेस्टोरेंट जाएंगे। उन्होंने कहा कि निजी तौर पर मेरा भारत आना खास है।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने हिंदू धर्म से अपने जुड़ाव पर कहा, "मुझे गर्व है कि मैं हिंदू हूं और इसी तरह मेरा पालन-पोषण हुआ है। मैं ऐसा ही हूं। मुझे उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों तक मेरे यहां रहने के दौरान मैं किसी मंदिर के दर्शन कर सकूंगा।"
सुनक ने कहा, "अभी रक्षा बंधन था जिसमें मेरी बहनों ने मुझे राखी बांधी, मेरे पास दूसरे दिन ठीक से जन्माष्टमी मनाने का समय नहीं था लेकिन उम्मीद है जैसा कि मैंने कहा कि हम अगर किसी मंदिर जाएं तो मैं इसकी भरपाई कर सकूंगा। मेरा मानना है कि आस्था एक ऐसी चीज है जो हर उस व्यक्ति की मदद करती है जो अपने जीवन में आस्था रखता है।"
भारत से निजी तौर पर अपने कनेक्शन को लेकर सुनक ने कहा, "भारत वापस आना मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से अविश्वसनीय रूप से विशेष है। यह एक ऐसा देश है जिससे मैं बहुत प्यार करता हूं, एक ऐसा देश जहां से मेरा परिवार रहता है। लेकिन मैं इस भूमिका में यूके का प्रतिनिधित्व करने, भारत के साथ घनिष्ठ संबंध बनाने के तरीके खोजने और यह सुनिश्चित करने में भूमिका निभाने के लिए आया हूं कि भारत में एक अविश्वसनीय रूप से सफल जी20 हो।"
इससे अलग उन्होंने कहा कि इस यात्रा में मोदी जी और मैं, दोनों हमारे दोनों देशों के बीच एक व्यापक और महत्वाकांक्षी व्यापार समझौते को होते देखने के इच्छुक हैं। हम दोनों सोचते हैं कि हमारे बीच एक अच्छी डील होना बाकी है। लेकिन इस तरह के व्यापार सौदों में हमेशा समय लगता है। फिलहाल हमने काफी प्रगति की है लेकिन अभी भी कड़ी मेहनत बाकी है।
| Quick links: दिल्ली में हो रहे जीबीस शिखर सम्मेलन को लेकर विदेशी मेहमानों का आना शुरू हो गया है। आठ सितंबर को यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक दिल्ली पहुंचे। इस दौरान उन्होंने भारत की सराहना की और कहा कि जी-बीस के लिए भारत इस वक्त सही देश है। उन्होंने कहा कि इस दौरान कई अहम मुद्दों पर हम चर्चा करेंगे। स्टोरी में आगे पढ़ेंः मालूम हो कि ऋषि सुनक के भारत आने पर उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण तथा पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने उनका स्वागत किया। वहीं न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए उन्होंने बताया कि जी-बीस सम्मेलन से अलग वो भारत में कहां-कहां घूमने जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत वापस आकर मुझे बहुत खुशी हुई है। यहां मुझे अधिक प्यार मिला है। सुनक ने कहा कि मैं मंदिर भी जाऊंगा। आस्था से मुझे शक्ति मिलती है। अपनी पत्नी का जिक्र करते हुए ब्रिटेन पीएम ने कहा कि मेरी पत्नी अक्षता बेंगलुरु से है, हमारी शादी बेंगलुरु में हुई। हमने साथ में काफी समय बिताया है। हम दिल्ली में पसंदीदा रेस्टोरेंट जाएंगे। उन्होंने कहा कि निजी तौर पर मेरा भारत आना खास है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने हिंदू धर्म से अपने जुड़ाव पर कहा, "मुझे गर्व है कि मैं हिंदू हूं और इसी तरह मेरा पालन-पोषण हुआ है। मैं ऐसा ही हूं। मुझे उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों तक मेरे यहां रहने के दौरान मैं किसी मंदिर के दर्शन कर सकूंगा।" सुनक ने कहा, "अभी रक्षा बंधन था जिसमें मेरी बहनों ने मुझे राखी बांधी, मेरे पास दूसरे दिन ठीक से जन्माष्टमी मनाने का समय नहीं था लेकिन उम्मीद है जैसा कि मैंने कहा कि हम अगर किसी मंदिर जाएं तो मैं इसकी भरपाई कर सकूंगा। मेरा मानना है कि आस्था एक ऐसी चीज है जो हर उस व्यक्ति की मदद करती है जो अपने जीवन में आस्था रखता है।" भारत से निजी तौर पर अपने कनेक्शन को लेकर सुनक ने कहा, "भारत वापस आना मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से अविश्वसनीय रूप से विशेष है। यह एक ऐसा देश है जिससे मैं बहुत प्यार करता हूं, एक ऐसा देश जहां से मेरा परिवार रहता है। लेकिन मैं इस भूमिका में यूके का प्रतिनिधित्व करने, भारत के साथ घनिष्ठ संबंध बनाने के तरीके खोजने और यह सुनिश्चित करने में भूमिका निभाने के लिए आया हूं कि भारत में एक अविश्वसनीय रूप से सफल जीबीस हो।" इससे अलग उन्होंने कहा कि इस यात्रा में मोदी जी और मैं, दोनों हमारे दोनों देशों के बीच एक व्यापक और महत्वाकांक्षी व्यापार समझौते को होते देखने के इच्छुक हैं। हम दोनों सोचते हैं कि हमारे बीच एक अच्छी डील होना बाकी है। लेकिन इस तरह के व्यापार सौदों में हमेशा समय लगता है। फिलहाल हमने काफी प्रगति की है लेकिन अभी भी कड़ी मेहनत बाकी है। |
रायपुर,रोहित बर्मन। प्रदेश में लगातार कोरोना केस के साथ मरने वालों के आकड़े में लगातार बढ़ोत्तरी होती जा रही है. जिसके खतरे को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार भी अलर्ट मोड में आ गई है. वहीं ब्रिटेन से 2 लोगों के कोरोना सक्रमित आने के बाद स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कोरोना के नए स्ट्रेन के मरीजों को अलग से आइसोलेट किया जाएगा. सांथ ही बताया कि ऐसे संक्रमित लोगों के लिए एम्स ने 350 बेड रिजर्व कर लिए है जिसको लेकर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान रायपुर से बातचीत हो गई है.
वहीं स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार का फर्ज भी बनता है कि UK के साथ-साथ और भी कई देश है जहां से भारत में यात्री आ रहे है ऐसे में केंद्र सरकार राज्य सरकार को भी इसकी जानकारी उपलब्ध कराए जिससे की बाहर से भारत आए लोगों की जांच करने में आसानी होगी.
| रायपुर,रोहित बर्मन। प्रदेश में लगातार कोरोना केस के साथ मरने वालों के आकड़े में लगातार बढ़ोत्तरी होती जा रही है. जिसके खतरे को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार भी अलर्ट मोड में आ गई है. वहीं ब्रिटेन से दो लोगों के कोरोना सक्रमित आने के बाद स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कोरोना के नए स्ट्रेन के मरीजों को अलग से आइसोलेट किया जाएगा. सांथ ही बताया कि ऐसे संक्रमित लोगों के लिए एम्स ने तीन सौ पचास बेड रिजर्व कर लिए है जिसको लेकर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान रायपुर से बातचीत हो गई है. वहीं स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार का फर्ज भी बनता है कि UK के साथ-साथ और भी कई देश है जहां से भारत में यात्री आ रहे है ऐसे में केंद्र सरकार राज्य सरकार को भी इसकी जानकारी उपलब्ध कराए जिससे की बाहर से भारत आए लोगों की जांच करने में आसानी होगी. |
नई दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मात्र १२ वीं पास हैं और उनकी कालेज की डिग्री फर्जी है। यह कहना दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल लिये परेशानी का सबब बन गया है। अरविंद केजरीवाल के खिलाफ असम की एक स्थानीय कोर्ट ने गिरफ्तारी का बेलेबल वारंट जारी किया है। पिछली सुनवाई में अदालत में पेश नहीं होने की वजह से केजरीवाल के खिलाफ यह वारंट जारी हुआ है। अरविंद के खिलाफ यह वारंट ऐसे वक्त में जारी हुआ है, जबकि वे और उनकी पार्टी दिल्ली में एमसीडी चुनाव को लेकर कैम्पेन में जुटी हुई है।
मानहानि के तहत दायर ये केस नरेंद्र मोदी की एजुकेशनल क्वालिफिकेशन को लेकर किए केजरीवाल के कमेंट को लेकर दर्ज किया गया है। ये केस बीजेपी लीडर सूर्या रोंगफर ने दायर किया है। पिछले साल दिसंबर में केजरीवाल ने ट्वीट करके यह दावा किया था कि पीएम सिर्फ 12वीं क्लास तक पढ़ें हैं और उनकी कॉलेज की डिग्री फेक है। अरविंद केजरीवाल ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) को लिखी चिट्ठी के जरिये प्रधानमंत्री की शैक्षणिक योग्यता पर सवाल उठाए और आयोग से पीएम की शिक्षा से जुड़ी जानकारी सावर्जनिक करने की मांग की थी. रोंगफर का कहना है कि यह कमेंट आधारहीन और भ्रम फैलाने वाला है.
केजरीवाल ने एमसीडी चुनाव में अपनी व्यस्तताओं का हवाला देते हुए पेशी के लिए और वक्त देने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने उनकी मांग को खारिज कर दिया. अब कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 8 मई को होगी.
| नई दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मात्र बारह वीं पास हैं और उनकी कालेज की डिग्री फर्जी है। यह कहना दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल लिये परेशानी का सबब बन गया है। अरविंद केजरीवाल के खिलाफ असम की एक स्थानीय कोर्ट ने गिरफ्तारी का बेलेबल वारंट जारी किया है। पिछली सुनवाई में अदालत में पेश नहीं होने की वजह से केजरीवाल के खिलाफ यह वारंट जारी हुआ है। अरविंद के खिलाफ यह वारंट ऐसे वक्त में जारी हुआ है, जबकि वे और उनकी पार्टी दिल्ली में एमसीडी चुनाव को लेकर कैम्पेन में जुटी हुई है। मानहानि के तहत दायर ये केस नरेंद्र मोदी की एजुकेशनल क्वालिफिकेशन को लेकर किए केजरीवाल के कमेंट को लेकर दर्ज किया गया है। ये केस बीजेपी लीडर सूर्या रोंगफर ने दायर किया है। पिछले साल दिसंबर में केजरीवाल ने ट्वीट करके यह दावा किया था कि पीएम सिर्फ बारहवीं क्लास तक पढ़ें हैं और उनकी कॉलेज की डिग्री फेक है। अरविंद केजरीवाल ने केंद्रीय सूचना आयोग को लिखी चिट्ठी के जरिये प्रधानमंत्री की शैक्षणिक योग्यता पर सवाल उठाए और आयोग से पीएम की शिक्षा से जुड़ी जानकारी सावर्जनिक करने की मांग की थी. रोंगफर का कहना है कि यह कमेंट आधारहीन और भ्रम फैलाने वाला है. केजरीवाल ने एमसीडी चुनाव में अपनी व्यस्तताओं का हवाला देते हुए पेशी के लिए और वक्त देने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने उनकी मांग को खारिज कर दिया. अब कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई आठ मई को होगी. |
यू मुंबा और पटना पाइरेट्स के बीच इस का प्रसारण रविवार को शाम 7. 30 बजे से स्टार नेटवर्क पर किया जाएगा।
प्रो कबड्डी लीग के सातवें सीजन में 16 अगस्त को पहला मैच यू मुंबा और पटना पाइरेट्स के बीच खेला जाना है। यह मैच अहमदाबाद के एका एरिना बाय ट्रांसस्टेडिया में भारतीय समय के अनुसार शाम 7. 30 बजे से खेला जाएगा।
अंकतालिका में क्या है स्थितिः अंकतालिका पर नजर डालें, तो यू मुंबई 7 में से 3 मैच जीतकर 8वें, जबकि पटना पाइरेट्स 7 में से 4 मैच हारकर 10वें पायदान पर मौजूद है। दोनों ही टीमें अपनी स्थिति को सुधारने के लिए ये मुकाबला जीतना चाहेंगी।
किन खिलाड़ियों पर रहेंगी निगाहेंः पटना की तरफ से प्रदीप नरवाल, मोहम्मद इस्माइल मगशूदलू और सुरेंद्र नाडा पर फैंस की निगाहें रहेंगी। वहीं मुंबई की तरफ से सुरेंद्र नाडा, रोहित बालियान, फजल अत्राचली और संदीप नरवाल कभी भी मैच का पासा पलट सकते हैं।
कहां देख सकते हैं यू मुंबा बनाम पटना पाइरेट्स मैच?
यू मुंबा और पटना पाइरेट्स के बीच इस का प्रसारण रविवार को शाम 7. 30 बजे से स्टार नेटवर्क पर किया जाएगा, जबकि मैच की लाइव स्ट्रीमिंग हॉटस्टार पर की जाएगी। मैच से जुड़ी खबरों और लाइव अपडेट के लिए lokmatnews. in पर विजिट करें।
पटना पाइरेट्सः
रेडरः आशीष, जैंग कुन ली, मोहम्मद इस्माइल मगशूदलू महाली, मोहित, नवीन, प्रदीप नरवाल, पूरण सिंह, राजीवरसिंह प्रताप राव चव्हाण।
डिफेंडरः महेंद्र चौधरी, नीरज कुमार, जयदीप, सुरेंद्र नाडा, बिंटू नरवाल, जवाहर डागर।
ऑलराउंडरः हादी ओशटोरक, रवींद्र, साहिल मन्न, विकास जागलान।
यू मंबाः
रेडरः अभिषेक सिंह, अर्जुन डेसवाल, अथुल एमएस, डोंग जेंग ली, गौरव कुमार, नवनीत, रोहित बालियान, विनोद कुमार।
डिफेंडरः राजागुरु सुब्रमण्यम, हर्ष वर्धन, अनिल, हरेंद्र सिंह, योंग चेंग कू, फजल अत्राचली, सुरेंद्र सिंह।
ऑलराउंडरः अजिंक्य रोहिदास कापरे, मोहित बालियान, संदीप नरवाल।
| यू मुंबा और पटना पाइरेट्स के बीच इस का प्रसारण रविवार को शाम सात. तीस बजे से स्टार नेटवर्क पर किया जाएगा। प्रो कबड्डी लीग के सातवें सीजन में सोलह अगस्त को पहला मैच यू मुंबा और पटना पाइरेट्स के बीच खेला जाना है। यह मैच अहमदाबाद के एका एरिना बाय ट्रांसस्टेडिया में भारतीय समय के अनुसार शाम सात. तीस बजे से खेला जाएगा। अंकतालिका में क्या है स्थितिः अंकतालिका पर नजर डालें, तो यू मुंबई सात में से तीन मैच जीतकर आठवें, जबकि पटना पाइरेट्स सात में से चार मैच हारकर दसवें पायदान पर मौजूद है। दोनों ही टीमें अपनी स्थिति को सुधारने के लिए ये मुकाबला जीतना चाहेंगी। किन खिलाड़ियों पर रहेंगी निगाहेंः पटना की तरफ से प्रदीप नरवाल, मोहम्मद इस्माइल मगशूदलू और सुरेंद्र नाडा पर फैंस की निगाहें रहेंगी। वहीं मुंबई की तरफ से सुरेंद्र नाडा, रोहित बालियान, फजल अत्राचली और संदीप नरवाल कभी भी मैच का पासा पलट सकते हैं। कहां देख सकते हैं यू मुंबा बनाम पटना पाइरेट्स मैच? यू मुंबा और पटना पाइरेट्स के बीच इस का प्रसारण रविवार को शाम सात. तीस बजे से स्टार नेटवर्क पर किया जाएगा, जबकि मैच की लाइव स्ट्रीमिंग हॉटस्टार पर की जाएगी। मैच से जुड़ी खबरों और लाइव अपडेट के लिए lokmatnews. in पर विजिट करें। पटना पाइरेट्सः रेडरः आशीष, जैंग कुन ली, मोहम्मद इस्माइल मगशूदलू महाली, मोहित, नवीन, प्रदीप नरवाल, पूरण सिंह, राजीवरसिंह प्रताप राव चव्हाण। डिफेंडरः महेंद्र चौधरी, नीरज कुमार, जयदीप, सुरेंद्र नाडा, बिंटू नरवाल, जवाहर डागर। ऑलराउंडरः हादी ओशटोरक, रवींद्र, साहिल मन्न, विकास जागलान। यू मंबाः रेडरः अभिषेक सिंह, अर्जुन डेसवाल, अथुल एमएस, डोंग जेंग ली, गौरव कुमार, नवनीत, रोहित बालियान, विनोद कुमार। डिफेंडरः राजागुरु सुब्रमण्यम, हर्ष वर्धन, अनिल, हरेंद्र सिंह, योंग चेंग कू, फजल अत्राचली, सुरेंद्र सिंह। ऑलराउंडरः अजिंक्य रोहिदास कापरे, मोहित बालियान, संदीप नरवाल। |
RBI पर आने वाले दिनों में ब्याज दरों को और बढ़ाने का दबाव बढ़ जाएगा. अप्रैल में खाने-पीने के सामानों में भी काफी तेजी आई है.
भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) अप्रैल में महंगाई दर के 8 साल के उच्चतम स्तर 7.79 फीसदी पर पहुंचने के बाद चालू वित्त वर्ष में रेपो रेट (Repo Rate) में एक फीसदी की बढ़ोतरी कर सकता है. रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने यह संभावना जताई है. क्रिसिल की रिसर्च यूनिट ने कहा कि चालू वित्त वर्ष के लिए एवरेज कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित मुद्रास्फीति बढ़कर 6.3 फीसदी पर पहुंच सकती है, जो केंद्रीय बैंक के संतोषजनक स्तर 6 फीसदी से अधिक है. रिजर्व बैंक ने इस महीने की शुरुआत में बढ़ती मुद्रास्फीति को नियंत्रण में करने के लिए रेपो रेट को 0.4 फीसदी बढ़ाकर 4.40 फीसदी कर दिया था.
अगस्त, 2018 के बाद पहली बार रेपो रेट को बढ़ाया गया है. अब महंगाई में तेजी से बढ़ोतरी के चलते रेपो रेट में और इजाफा हो सकता है. ऐसे में आपके लोन की ईएमआई और बढ़ जाएगी.
क्रिसिल ने कहा, वित्त वर्ष 2022-23 में मुद्रास्फीति व्यापक हो सकती है. इससे खाद्य वस्तुओं, ईंधन और मुख्य क्षेत्रों में महंगाई बढ़ेगी. इसलिए संभावना है कि रिजर्व बैंक चालू वित्त वर्ष में रेपो रेट में 0.75 से 1 प्रतिशत की और बढ़ोतरी करे.
खुदरा महंगाई दर 8 साल के नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है. अप्रैल में खुदरा महंगाई दर (Retail inflation) 7.79 प्रतिशत पर पहुंच गई है. खुदरा महंगाई का ये स्तर मई 2014 के बाद का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है. मई 2014 में खुदरा महंगाई दर 8.33 प्रतिशत तक पहुंच गई थी. ये लगातार चौथा महीना है जब खुदरा महंगाई दर रिजर्व बैंक की तय सीमा से भी ऊपर पहुंच गया है.
वित्त मंत्रालय ने अपनी एक रिपोर्ट में साफ किया है कि मौजूदा वित्त वर्ष में महंगाई दर में बढ़त जारी रहेगी, हालांकि रिजर्व बैंक और सरकार के कदम इस बढ़त की अवधि को कुछ कम कर सकते हैं. रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि सरकार आम लोगों पर महंगाई का असर कम करने के लिए सभी संभव उपाय करेगी.
वहीं 4 मई की रिजर्व बैंक की पॉलिसी समीक्षा में रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांता दास ने भी कहा था कि अप्रैल में महंगाई दर बढ़ेगी. ऐसे में महंगाई दर में उछाल का अनुमान पहले से ही था, हालांकि अप्रैल में महंगाई दर में तेजी अनुमानों से भी तेज रही है.
इस महीने की शुरुआत में आरबीआई के रेपो रेट में बढ़ोतरी के बाद बैंक ने लोन की दरें बढ़ा दी हैं. अधिकतर बैंक ने ब्याज दरों में इजाफा कर दिया है. इससे ग्राहकों पर लोन का बोझ बढ़ गया.
| RBI पर आने वाले दिनों में ब्याज दरों को और बढ़ाने का दबाव बढ़ जाएगा. अप्रैल में खाने-पीने के सामानों में भी काफी तेजी आई है. भारतीय रिजर्व बैंक अप्रैल में महंगाई दर के आठ साल के उच्चतम स्तर सात.उन्यासी फीसदी पर पहुंचने के बाद चालू वित्त वर्ष में रेपो रेट में एक फीसदी की बढ़ोतरी कर सकता है. रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने यह संभावना जताई है. क्रिसिल की रिसर्च यूनिट ने कहा कि चालू वित्त वर्ष के लिए एवरेज कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स आधारित मुद्रास्फीति बढ़कर छः.तीन फीसदी पर पहुंच सकती है, जो केंद्रीय बैंक के संतोषजनक स्तर छः फीसदी से अधिक है. रिजर्व बैंक ने इस महीने की शुरुआत में बढ़ती मुद्रास्फीति को नियंत्रण में करने के लिए रेपो रेट को शून्य.चार फीसदी बढ़ाकर चार.चालीस फीसदी कर दिया था. अगस्त, दो हज़ार अट्ठारह के बाद पहली बार रेपो रेट को बढ़ाया गया है. अब महंगाई में तेजी से बढ़ोतरी के चलते रेपो रेट में और इजाफा हो सकता है. ऐसे में आपके लोन की ईएमआई और बढ़ जाएगी. क्रिसिल ने कहा, वित्त वर्ष दो हज़ार बाईस-तेईस में मुद्रास्फीति व्यापक हो सकती है. इससे खाद्य वस्तुओं, ईंधन और मुख्य क्षेत्रों में महंगाई बढ़ेगी. इसलिए संभावना है कि रिजर्व बैंक चालू वित्त वर्ष में रेपो रेट में शून्य.पचहत्तर से एक प्रतिशत की और बढ़ोतरी करे. खुदरा महंगाई दर आठ साल के नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है. अप्रैल में खुदरा महंगाई दर सात.उन्यासी प्रतिशत पर पहुंच गई है. खुदरा महंगाई का ये स्तर मई दो हज़ार चौदह के बाद का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है. मई दो हज़ार चौदह में खुदरा महंगाई दर आठ.तैंतीस प्रतिशत तक पहुंच गई थी. ये लगातार चौथा महीना है जब खुदरा महंगाई दर रिजर्व बैंक की तय सीमा से भी ऊपर पहुंच गया है. वित्त मंत्रालय ने अपनी एक रिपोर्ट में साफ किया है कि मौजूदा वित्त वर्ष में महंगाई दर में बढ़त जारी रहेगी, हालांकि रिजर्व बैंक और सरकार के कदम इस बढ़त की अवधि को कुछ कम कर सकते हैं. रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि सरकार आम लोगों पर महंगाई का असर कम करने के लिए सभी संभव उपाय करेगी. वहीं चार मई की रिजर्व बैंक की पॉलिसी समीक्षा में रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांता दास ने भी कहा था कि अप्रैल में महंगाई दर बढ़ेगी. ऐसे में महंगाई दर में उछाल का अनुमान पहले से ही था, हालांकि अप्रैल में महंगाई दर में तेजी अनुमानों से भी तेज रही है. इस महीने की शुरुआत में आरबीआई के रेपो रेट में बढ़ोतरी के बाद बैंक ने लोन की दरें बढ़ा दी हैं. अधिकतर बैंक ने ब्याज दरों में इजाफा कर दिया है. इससे ग्राहकों पर लोन का बोझ बढ़ गया. |
बहुत पहले नहीं, शब्द "दचा" शहर के बाहर स्थित एक साधारण उद्यान को दर्शाता है। धीरे-धीरे, डच को पारिवारिक अवकाश के लिए एक शोर शहर से दूर जगह के रूप में माना जाना शुरू किया। इसलिए, ऐसे स्थान को डिजाइन करने के लिए बगीचे के औजारों को संग्रहित करने के लिए एक छोटा सा घर बनाने के लिए पर्याप्त नहीं है। तेजी से, विभिन्न क्षेत्रों में बहुत सारे विभाजित होते हैं, जिनमें एक महत्वपूर्ण स्थान है, जिसमें घर के बगल में एक हरा मनोरंजन क्षेत्र है। और अब पता लगाएं कि घर के सामने बगीचे को अपने हाथों से कैसे सजाने के लिए।
विभिन्न सामग्रियों का उपयोग करनाः पत्थरों, रेत, कंकड़, साथ ही शुष्क शाखाएं, स्टंप, मॉस, आप विभिन्न रचनाओं को बना सकते हैं। और यदि पास पानी है, तो एक छोटा सा मानव निर्मित झरना बहुत अच्छा और उचित लगेगा। इस तरह की रचनाओं को साइट के समग्र लेआउट में स्वाभाविक रूप से फिट होना चाहिए, इसे ओवरपेन्ड नहीं करना चाहिए।
आप देश की साजिश कैसे सजाने सकते हैं?
देश के घर के बरामदे को एक सुरुचिपूर्ण पेर्गोला से सजाया जा सकता है, और घर के सामने आप एक हरे रंग के लॉन के साथ गुलाब के बगीचे को तोड़ सकते हैं। यदि साइट पर कोई कुआं है, तो आप उस पर एक सुंदर छत बना सकते हैं, जो घर और आउटबिल्डिंग के आर्किटेक्चर के साथ जरूरी है। ऑटोमोटिव टायर से बने फूलों की जगह, विला क्षेत्र में असामान्य लगती हैं। लेकिन टायर सिर्फ एक-दूसरे पर नहीं खड़े होते हैं, लेकिन बाहर चिकनी तरफ बाहर निकलते हैं। यदि आप इस तरह के फूलदान के लिए ठोस आधार भी बनाते हैं, तो यह बहुत ही मूल और टिकाऊ होगा, जो भी बहुत महत्वपूर्ण है।
विला को सजाने के लिए एक और विकल्प एक "हल्का" अल्पाइन स्लाइड है । इसे बनाने के लिए, आपको बड़ी पत्थरों, सबसे अच्छे, क्रूर या ग्रेनाइट और अपनी साइट से जमीन की आवश्यकता है। रोलर कोस्टर का रूप आपके विवेकानुसार, पत्थर और मिट्टी में किसी भी हो सकता है, जो टायरों के साथ ढेर होते हैं। ऐसी पहाड़ी में जड़ी-बूटियों के पौधे और फूलों के लिए, मिट्टी पर्याप्त होगी, और यदि आप इसे झाड़ियों के साथ सजाने की योजना बना रहे हैं, तो आपको जमीन से अतिरिक्त आधार बनाना होगा।
अपने आप द्वारा किए गए पेर्गोलस के अपने मेहमानों की गली पर तत्काल प्रभाव डालें। आप सामान्य बाड़ के बजाय ऐसे पेर्गोलस स्थापित कर सकते हैं, गुलाब, आईवी या अंगूर उन पर चीरते हैं। और आप इस प्रकार घर के रास्ते को सजाने के लिए, बाकी के लिए बेंच के पेर्गोलस के किनारों को सेट कर सकते हैं।
यहां बताया गया है कि आप अपने बगीचे को कैसे सजाने सकते हैंः एक "जीवित" मूर्तिकला स्थापित करें। इसे बनाने के लिए आपको स्टील के तार के साथ स्टॉक करना होगा, बहुत उथले स्टील जाल, लॉन घास के बीज और अंडरसाइज्ड फूल, स्ट्रॉ और साधारण पृथ्वी। तार से भविष्य की मूर्ति का आकार बनता हैः एक कुत्ता, एक भालू या कोई अन्य आपके विवेकाधिकार पर। मोल्ड एक साथ वेल्डेड है। मिट्टी को भूसे और गीले से मिश्रित किया जाता है। भविष्य की मूर्ति को ग्रिड में लपेटा जाता है और धीरे-धीरे पृथ्वी के मिश्रण से ढका होता है, जिसमें पौधों के बीज बोए जाते हैं। तो यह एक असामान्य पौधे मूर्तिकला बाहर निकलता है।
फूलों के साथ बगीचे की साजिश को कैसे सजाने के लिए?
साजिश को सजाने के लिए आप खूबसूरत फूलों के बिस्तर तोड़ सकते हैं। और यदि आप चाहते हैं कि आपकी डच साइट अपने पड़ोसियों से अनुकूल रूप से अलग हो, तो आप इसे असामान्य फूल बिस्तरों से सजा सकते हैं। इन उद्देश्यों के लिए, पुरानी बाल्टी, पानी के डिब्बे, पैन, और यहां तक कि पहने हुए जूते भी करेंगे। यह सब साइट के चारों ओर खूबसूरती से व्यवस्थित किया जा सकता है, जमीन और पौधे के पैनियों, पेटूनिया, नास्टर्टियम और अन्य अंडरसाइज्ड फूलों को भरें। और आपके सभी मेहमान इस तरह के विशेष फूल बिस्तर से प्रसन्न होंगे।
बगीचे के क्षेत्र के लिए मूल गहने प्लास्टिक की बोतलों से बना सकते हैं। यह फूलों के साथ फूलों के बिस्तरों और फूलों के बर्तनों के रूप में, उदाहरण के लिए, गिनी सूअरों के रूप में curbs। और प्लास्टिक की बोतलों से भी इकट्ठे विदेशी हथेलियों को स्थापित करना संभव है। जितनी संभव हो उतनी बोतलों को जमा करने के बाद, आप बगीचे गैज़बो के रूप में एक असली कृति बना सकते हैं। प्रयोग करें, और अपने पड़ोसियों और मेहमानों को आश्चर्यचकित करें कोई सीमा नहीं होगी!
| बहुत पहले नहीं, शब्द "दचा" शहर के बाहर स्थित एक साधारण उद्यान को दर्शाता है। धीरे-धीरे, डच को पारिवारिक अवकाश के लिए एक शोर शहर से दूर जगह के रूप में माना जाना शुरू किया। इसलिए, ऐसे स्थान को डिजाइन करने के लिए बगीचे के औजारों को संग्रहित करने के लिए एक छोटा सा घर बनाने के लिए पर्याप्त नहीं है। तेजी से, विभिन्न क्षेत्रों में बहुत सारे विभाजित होते हैं, जिनमें एक महत्वपूर्ण स्थान है, जिसमें घर के बगल में एक हरा मनोरंजन क्षेत्र है। और अब पता लगाएं कि घर के सामने बगीचे को अपने हाथों से कैसे सजाने के लिए। विभिन्न सामग्रियों का उपयोग करनाः पत्थरों, रेत, कंकड़, साथ ही शुष्क शाखाएं, स्टंप, मॉस, आप विभिन्न रचनाओं को बना सकते हैं। और यदि पास पानी है, तो एक छोटा सा मानव निर्मित झरना बहुत अच्छा और उचित लगेगा। इस तरह की रचनाओं को साइट के समग्र लेआउट में स्वाभाविक रूप से फिट होना चाहिए, इसे ओवरपेन्ड नहीं करना चाहिए। आप देश की साजिश कैसे सजाने सकते हैं? देश के घर के बरामदे को एक सुरुचिपूर्ण पेर्गोला से सजाया जा सकता है, और घर के सामने आप एक हरे रंग के लॉन के साथ गुलाब के बगीचे को तोड़ सकते हैं। यदि साइट पर कोई कुआं है, तो आप उस पर एक सुंदर छत बना सकते हैं, जो घर और आउटबिल्डिंग के आर्किटेक्चर के साथ जरूरी है। ऑटोमोटिव टायर से बने फूलों की जगह, विला क्षेत्र में असामान्य लगती हैं। लेकिन टायर सिर्फ एक-दूसरे पर नहीं खड़े होते हैं, लेकिन बाहर चिकनी तरफ बाहर निकलते हैं। यदि आप इस तरह के फूलदान के लिए ठोस आधार भी बनाते हैं, तो यह बहुत ही मूल और टिकाऊ होगा, जो भी बहुत महत्वपूर्ण है। विला को सजाने के लिए एक और विकल्प एक "हल्का" अल्पाइन स्लाइड है । इसे बनाने के लिए, आपको बड़ी पत्थरों, सबसे अच्छे, क्रूर या ग्रेनाइट और अपनी साइट से जमीन की आवश्यकता है। रोलर कोस्टर का रूप आपके विवेकानुसार, पत्थर और मिट्टी में किसी भी हो सकता है, जो टायरों के साथ ढेर होते हैं। ऐसी पहाड़ी में जड़ी-बूटियों के पौधे और फूलों के लिए, मिट्टी पर्याप्त होगी, और यदि आप इसे झाड़ियों के साथ सजाने की योजना बना रहे हैं, तो आपको जमीन से अतिरिक्त आधार बनाना होगा। अपने आप द्वारा किए गए पेर्गोलस के अपने मेहमानों की गली पर तत्काल प्रभाव डालें। आप सामान्य बाड़ के बजाय ऐसे पेर्गोलस स्थापित कर सकते हैं, गुलाब, आईवी या अंगूर उन पर चीरते हैं। और आप इस प्रकार घर के रास्ते को सजाने के लिए, बाकी के लिए बेंच के पेर्गोलस के किनारों को सेट कर सकते हैं। यहां बताया गया है कि आप अपने बगीचे को कैसे सजाने सकते हैंः एक "जीवित" मूर्तिकला स्थापित करें। इसे बनाने के लिए आपको स्टील के तार के साथ स्टॉक करना होगा, बहुत उथले स्टील जाल, लॉन घास के बीज और अंडरसाइज्ड फूल, स्ट्रॉ और साधारण पृथ्वी। तार से भविष्य की मूर्ति का आकार बनता हैः एक कुत्ता, एक भालू या कोई अन्य आपके विवेकाधिकार पर। मोल्ड एक साथ वेल्डेड है। मिट्टी को भूसे और गीले से मिश्रित किया जाता है। भविष्य की मूर्ति को ग्रिड में लपेटा जाता है और धीरे-धीरे पृथ्वी के मिश्रण से ढका होता है, जिसमें पौधों के बीज बोए जाते हैं। तो यह एक असामान्य पौधे मूर्तिकला बाहर निकलता है। फूलों के साथ बगीचे की साजिश को कैसे सजाने के लिए? साजिश को सजाने के लिए आप खूबसूरत फूलों के बिस्तर तोड़ सकते हैं। और यदि आप चाहते हैं कि आपकी डच साइट अपने पड़ोसियों से अनुकूल रूप से अलग हो, तो आप इसे असामान्य फूल बिस्तरों से सजा सकते हैं। इन उद्देश्यों के लिए, पुरानी बाल्टी, पानी के डिब्बे, पैन, और यहां तक कि पहने हुए जूते भी करेंगे। यह सब साइट के चारों ओर खूबसूरती से व्यवस्थित किया जा सकता है, जमीन और पौधे के पैनियों, पेटूनिया, नास्टर्टियम और अन्य अंडरसाइज्ड फूलों को भरें। और आपके सभी मेहमान इस तरह के विशेष फूल बिस्तर से प्रसन्न होंगे। बगीचे के क्षेत्र के लिए मूल गहने प्लास्टिक की बोतलों से बना सकते हैं। यह फूलों के साथ फूलों के बिस्तरों और फूलों के बर्तनों के रूप में, उदाहरण के लिए, गिनी सूअरों के रूप में curbs। और प्लास्टिक की बोतलों से भी इकट्ठे विदेशी हथेलियों को स्थापित करना संभव है। जितनी संभव हो उतनी बोतलों को जमा करने के बाद, आप बगीचे गैज़बो के रूप में एक असली कृति बना सकते हैं। प्रयोग करें, और अपने पड़ोसियों और मेहमानों को आश्चर्यचकित करें कोई सीमा नहीं होगी! |
पालीगंजः पटना से सटे पालीगंज में सोमवार दोपहर बाद हुए वज्रपात से 13 वर्षीय करण कुमार की मौत हो गई। मृतक की पहचान करकट बिगहा निवासी करीमन राम का नाती के रूप में हुई है। मिली जानकारी के मुताबिक करण गांव के बाहर अपने साथियों के साथ खेल रहा था। इसबीच अचानक मौसम खराब हो गया और बिजली की तड़तड़ाहट के साथ वर्षा होने लगी। साथियों के सात करण घर की ओर भागा। इस दौरान वज्रपात हुआ और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि दुल्हिन बाजार के भागा बिगहा निवासी अनिल राम का बेटा करण अपने नाना के घर करकट बिगहा में रहकर पढ़ाई करता था। घटना के बाद गांव में मातम पसर गया है।
| पालीगंजः पटना से सटे पालीगंज में सोमवार दोपहर बाद हुए वज्रपात से तेरह वर्षीय करण कुमार की मौत हो गई। मृतक की पहचान करकट बिगहा निवासी करीमन राम का नाती के रूप में हुई है। मिली जानकारी के मुताबिक करण गांव के बाहर अपने साथियों के साथ खेल रहा था। इसबीच अचानक मौसम खराब हो गया और बिजली की तड़तड़ाहट के साथ वर्षा होने लगी। साथियों के सात करण घर की ओर भागा। इस दौरान वज्रपात हुआ और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि दुल्हिन बाजार के भागा बिगहा निवासी अनिल राम का बेटा करण अपने नाना के घर करकट बिगहा में रहकर पढ़ाई करता था। घटना के बाद गांव में मातम पसर गया है। |
आदर्श डिफेंस अकादमी बिलासपुर में गुरुवार को पुलिस लिखित परीक्षा प्रशिक्षण ले रहे अभ्यॢथयों के लिए विदाई समारोह का आयोजन किया गया। अकादमी में प्रदेश के विभिन्न जिलों कांगड़ा हमीरपुर मंडी शिमला कुल्लू व सोलन से अभ्यॢथयों ने इस प्रशिक्षण सत्र में भाग लिया। यह बैच गत पहली जनवरी से शुरू किया गया था। कोरोना के समय में भी शिक्षकों के द्वारा ऑनलाइन कक्षाएं अभ्यॢथयों के लिए उपलब्ध करवाई गई। जिसमें प्रतिदिन 50 विद्याॢथयों ने भाग लिया। दिन में कक्षाएं न लगा पाने वाले अभ्यॢथयों के लिए सायंकालीन कक्षाएं भी अकादमी द्वारा उपलब्ध करवाई गई।
अकादमी के निदेशक सेवानिवृत्त सूबेदार मेजर ज्ञान चंद ने बताया कि आदर्श अकादमी से अभी तक कुल 230 प्रशिक्षुओं का चयन हो चुका है। जोकि भारतीय सेना व अन्य विभागों में उच्च पदों पर कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि अकादमी की स्थापना अपने सहयोगी विजय कुमार के साथ मिलकर 16 अगस्त 2015 को की गई थी। अब जिसमें प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उधर, प्रशिक्षुओं के इस चयन का श्रेय उन्होंने अकादमी के प्रशिक्षकों अनीता कुमारी, क्षमा शर्मा, सुभाष शर्मा व रजनीकांत को दिया।
| आदर्श डिफेंस अकादमी बिलासपुर में गुरुवार को पुलिस लिखित परीक्षा प्रशिक्षण ले रहे अभ्यॢथयों के लिए विदाई समारोह का आयोजन किया गया। अकादमी में प्रदेश के विभिन्न जिलों कांगड़ा हमीरपुर मंडी शिमला कुल्लू व सोलन से अभ्यॢथयों ने इस प्रशिक्षण सत्र में भाग लिया। यह बैच गत पहली जनवरी से शुरू किया गया था। कोरोना के समय में भी शिक्षकों के द्वारा ऑनलाइन कक्षाएं अभ्यॢथयों के लिए उपलब्ध करवाई गई। जिसमें प्रतिदिन पचास विद्याॢथयों ने भाग लिया। दिन में कक्षाएं न लगा पाने वाले अभ्यॢथयों के लिए सायंकालीन कक्षाएं भी अकादमी द्वारा उपलब्ध करवाई गई। अकादमी के निदेशक सेवानिवृत्त सूबेदार मेजर ज्ञान चंद ने बताया कि आदर्श अकादमी से अभी तक कुल दो सौ तीस प्रशिक्षुओं का चयन हो चुका है। जोकि भारतीय सेना व अन्य विभागों में उच्च पदों पर कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि अकादमी की स्थापना अपने सहयोगी विजय कुमार के साथ मिलकर सोलह अगस्त दो हज़ार पंद्रह को की गई थी। अब जिसमें प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उधर, प्रशिक्षुओं के इस चयन का श्रेय उन्होंने अकादमी के प्रशिक्षकों अनीता कुमारी, क्षमा शर्मा, सुभाष शर्मा व रजनीकांत को दिया। |
दूध की पैदाइश होती है, वह विशेष कर धनियामेही व्यवहृत हो जाती है । इस देशके करोड़ों लोगोंको तो दूध मिलता ही नहीं। उनके लिये तो मलाई के बिनाका दूध या छाछ भी महान वस्तु हो सकती
हमारे देश में अन्य खाद्य द्रव्यों की अपेक्षा धीका महत्व अधिक समझा जाता है । यहांतक कि "ऋणं कृत्वा घृतं पिबेत्" जैसी कहावतें बन गया हैं । सामान्य जनता में अकेला घी ही आहार की मुख्य चीज होने की छापसी गिर गयी है । जीवनतत्वों के रूप में की उपयोगिता बारे में इन्कार नहीं किया जा सकता; लेकिन घी कोई अनिवार्य चीज नहीं । अथवा अन्य तरह से कहा जा सकता है कि घी तथा छाछ आदि दूध की बनावटोमेका नत्रज इन दोनोमेसे पसंद करना हो तो घी को छोड़ने की सलाह दी जा सकती है । शरीरका बनना अटकेगा नहीं; जब कि नत्रजके बिना तो शरीर की वृद्धि ही अटक जायगी । याने दूध की कीमत उसमें से मिलनेवाली मलाईपर जितनी अवलंबित है उससे अधिक उसमेंके नत्रजं, ळवणद्रव्य आदिके कारण समझनी चाहिये । मलाई हटाये दूध में या छाछमें नत्रज और लवणद्रव्य जैसे के वैसे पूरे प्रमाण में मौजूद रहते हैं । इसलिये हमारे बच्चोंको मलाई के बिनाका भी दूध या छाछ मिले ऐसा प्रचार करने की विशेष जरूरत है । हरेक शाला में दूध या छाछ बाटनेके व्यवस्थित कार्यक्रम रखे जाने चाहिये ।
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खाद्यद्रव्योंको हजम करनेवाले, मलमूत्रको बाहर निकालनेवाले, खून तथा प्राणवायुको सारे शरीर में पहुँचानेवाले, आदि हरेक प्रकार के अवयवोंकी बनावटमें लवणद्रव्य एक अंग के रूप में होते हैं जिससे शरीर की प्रत्येक क्रिया - स्थूल या सूक्ष्म के साथ उनका घनिष्ट संबंध होता है। लवणद्रव्यों की इस प्रकारकी सर्वत्र व्याप्त होने के कारण कहीं भी उनका अभाव हो तो तुरंत तंदुरुस्ती में विकार आये बिना नहीं रह सकता ।
प्रकृतियोंने जैसे अपने अम्लताप्रधान और लवणप्रधान ऐसे दो स्वतंत्र भाग कर लिये हैं ऐसा प्रतीत होता है । कंदमूल, पत्ते और ये लवणप्रधान बनाये और सभी दानें अम्लता प्रधान बनाये। हमारे खाद्यद्रव्योंका वडा हिस्सा गेहूं, चावल, बाजरा, दाल तिलहन आदि दाने होने की वजह से हमारा आहार अम्लताप्रधान हो जाता है। शरीर में जाय अिसलिये हमें फल और सब्जी खाना' अधिक
आवश्यक हो गया है ।
प्रकृतिने दोनोंमें भी खाद्यद्रव्योंका साफ साफ विभाजन कर रखा । जो कुछ मामूली लवणद्रव्य दानों में होते हैं. उनका बड़ा हिस्सा दानों की ऊपरी सतहमें होता है । चावलको कूटनेमें या गेहूंका मैदा बनानेमें दानेकी यह ऊपरी सतह निकल जाती है, फलतः हम लवणद्रव्योंसे वचित हो जाते हैं ।
दानों में स्थित इस लवणद्रव्य का महत्व समझ लेना नितान्त : आवश्यक है । पत्तोंकी तुलना में दानोंमें लवणद्रव्य कम होते हैं सही लेकिन पत्तों (सब्जी) के लवणद्रव्य शरीर में कम घुल पाते हैं जब कि ··· दानों के लवणद्रव्य ज्यादा घुल सकते हैं । दानेकी पैदाइशमें ही प्रकृतिने १. इस प्रकारकी तब्दीली की होती है । सिवा दाने ही हमारे भोजनका बडा हिस्सा होता है इसलिये दानोंमेंसे ही लवणद्रव्योंकी आवश्यकताका 1. बडा हिस्सा मिलाना सरल होता है। हम आगे चलकर देखेंगे कि दानोंकी ऊपरी सतहमें ही अनुकूल नत्रज और बहुतसे जीवनतत्व भी
केंद्रित हुए रहते हैं। इससे दानोंके ऊपरी हिस्सोका पूरा उपयोगः कर लेना कितना महत्वपूर्ण है यह स्पष्ट होता है ।
A खाद्य द्रव्योंका इतना मोटासा वर्गिकरण भी ख्यालमै रहे तो, अम्लता तथा लवणता प्रमाण में रखने में काफी सरलता होगी। किसी मा प्रकारके बुखार में शरीर में अम्लता बढ़ जाती है इसलिये बुखारके समयमें लवण प्रधान चीजें जैसे सब्जी, फल तथा पानी लेना चाहिये; मांस तथा दाने-गेहूं, दाल आदि-अम्लता प्रधान चीजें छोडना चाहिये ।
शरीरमे करीव २० जातिके लवणद्रव्य पाये जाते हैं । आहारमेंसे वे सभी लवणद्रव्य मिलें और योग्य प्रमाण में मिलें तो भी तंदुरुस्ती कायम रह सकती है यह, साफ बात है । लेकिन प्रत्यक्ष व्यवहारको दृष्टि से इन सारे लवणद्रव्योंका विचार करना जरूरी नहीं है । कॅलशियम ( चूना ) फॉस्फरस, लोह, और आयोडिन ये लवणद्रव्य यदि पूरे प्रमाण में आहार में से मिलते रहें तो वाकांके आपसे आप मिल जाते हैं ऐसा माना जा सकता है । इन चार लवणद्रव्योंकी कमी के कारण होनेवाले रोगोंका निदान शक्य हुआ है। बाकीके लवणद्रव्योंकी कमांके परिणाम के विषय में अभी .कुछ तय नहीं हो पाया है । हमें फॉस्फरस तथा आयोडिनको कमीका भी विचार करना अनावश्यक है। क्योंकि जिस आहारमेंसे हमें कॅल्शियम मिलता है उसीमेंसे फॉस्फरस मिल जाता है, ऐसा माना जा सकता है। सब्जी और फलोंमेंसे आवश्यक आयोडिंन मिल जाता है । इन दोनों लवणद्रव्योकी कमी प्रादेशिक कारणोंसे हुआ करती है ।
इसप्रकार हमें कमीकी दृष्टिसे कॅलशियम और लोहेकाही विचार करना होगा। आजकल बाजार में जो तैयार दवायें मिलती हैं उनमें लवणद्रव्यों में से ये दो दवाएं ही विषेश करके हुआ करती. हे
(४) दो महत्वपूर्ण लवणद्रव्य
१. कॅलशियम - सारे लवणद्रव्यों में कॅलशियम सबसे महत्वपूर्ण कवणद्रव्य है। शरीर के सारे अंगोंसे और उनकी सारी क्रियाओं के साथ
इसका सीधा संबंध है । ' शरीरके सारे लवणद्रव्योंमें सबसे ज्यादा प्रमाण कॅलशियमका है । हड्डियों में भी बड़ा हिस्सा कॅलशियमका ही है। इसी कारण जिनकी हड्डियाँ बना, करती हैं जैसे बढ़ने वाले बच्चों को तथा जिनके शरीरसे बच्चोंका शरीर बनता है उन माताओको कलशियमकी : काफी जरूरत होती है।
कॅलशियमका इतना अधिक महत्व होने के कारण ही यदि आहारमें कॅलशियम की कमी हो तो भाँति भाँतिक रोग हो जाते हैं। इस कमीका असर बढ़ते बच्चों में साफ साफ दिखाई देती है। कॅलशियम की कमी के परिणाम के विषय में डॉ० एक्रॉइड अपनी किताब में इंग्लैंडके आरोग्य विभाग के डॉक्टरका मत लिखते हैंः
" आहारकी कमीका असर तुरंत दीख सके ऐसी बचपनकी बढ़ती उम्र दरमियान यदि कॅलशियम की कमी रह जाती है तो सारे हड्डियों के ढाँचेका ही विकास व्यंगवाला हो जाता है । यह तो तुरंत और स्पष्ट दीखनेवाली बात हुई। किन्तु इसके अलावा कितने ही नुक्स खडे हो जाते हैं । अमुक प्रमाणमें कॅलशियम हो तो ही शरीर के अवयवोंको संकोच और विकसन होते रहता है । आहारमे कॅलशियम की कमी हो - तो खून कॅलशियम के प्रमाण कमी होकर अवयवोंके संकोच और विकसनकी शक्ति घट जाती है। ऐसा होनेसे अन्नको पचानेवाले, मलोत्सर्ग करनेवाले, खूनको बहता रखनेवाले, श्वासोच्छ्वास करनेवाले आदि अनको अवयव अपने अपने कार्य ठीक नहीं कर पाते। ऐसा भी माननेके "लिये आधार है कि कॅलशियमका प्रमाण घट जाने से कोयले के रूप में व्यवहृत होती शक्कर शरीरमें अच्छी तरह घुल नहीं पाती, और शकरका कोयलेके रूप में उपयोग होना भी बंद हो जाता है । शरीरमे फॉस्फरसका उपयोग भी कॅलशियमके कारण ही होता है 1 गलेमेकी प्राणग्रंथी ( थाईरॉईड ग्लँड्) कॅलशियम के कारण ही ठीकसे काम दे सकती है । याने कॅलशियमकी कमी हो तो फॉस्फरसका उपयोग न होगा और
प्राणग्रंथी भी अपना काम ठीकसे नहीं कर सकेगी और कॅलशियमकी मददसे ही शरीरके कोष खाद्यद्रव्योंमेंसे पोषण चूस सकते हैं। सारांश शरीरकी ऐसी एक भी क्रिया नहीं है जो कि कॅलशियम की कमी के कारण न बिगडे । इस तरह आहारमें एक ही व्यकी कमी के कारण शरीरमें कितना वडा सर्वव्यापी और कायमी असर हो सकता है !"
कॅलशियमके महत्वके विषय में अधिक कहने की जरूरत न होनी 4 चाहिये लेकिन हमारे आहारमें कॅलशियम की कमी सर्व सामान्य वाचत हो चुकी है ।
२. लोह -मनुष्य के सारे शरीर में मिलाकर कुल ३ ग्राम से भी कम लोह होता है लेकिन शरीर की दृष्टि से उसका महत्व उसके प्रमाण के हिसाब से कहीं अधिक है। लोह का वडा हिस्सा खून में मिला हुआ रहता है । खनका लाल रंग इसी लोइ के बदौलत होता है शरीर में लोह की कमी होनेपर उसका लाल रंग कम हो जाता है और आदमी फीका दिखाई देने लगता है; इसे ही हम पांडुरोग कहेत हैं । कॅलशियम की तरह लोह भी शरीरके हरेक कोषका अंग होकर रहता है और कोपोंकी अन्य क्रियाओं के साथ उसका घनिष्ट संबंध भी होता है ।
हम पहले देख चुके हैं कि लोह ही फेफडों में से प्राणवायुको सारे शरीरमें पहुंचाता है और सारे शरीर के कार्बन वायुको फेफड़ों से बाहर निकालता है। इस दृष्टि से कहा जा सकता है कि लोह ही मनुष्यको जीवित रखता है। उसकी कमी के हिसाब से ही शरीर कम ताकत समझा जायगा यह साफ बात है ।
लोहकी कमी के कारण होनेवाला पांडुरोग सर्वव्यापी सार्वत्रिक है । छोटे बच्चोंमें प्रायः ५० फी सदी बच्चोंको पांडुरोग होता है, क्योंकि एक साल तक बच्चों को केवल दूधपर ही रखनेकी लोगोंमें आदइसी हो गयी है । दूधमें लोह नहींके समान है याने दूधसेही पोषण पानेवाले बच्चोंको
लोह बिलकुल नहीं मिटता । बालकके जन्म के समय उसके शरीर में छः माह तक चल सके इतना लोह होता है । इसलिये आहार शास्त्री कहते हैं कि छः महिनेके बाद बाटकको अकेले दूधपर न रखकर अनाज खिलाना शुरू कर देना चाहिये । हमारे यहाँ छः महीने के बाद जो अन्न प्राशन विधि किया जाता है सो इस दृष्टि से संयुक्तिक ही है । इतनी छोटी उम्र में अनाज इजम न होनेका डर रखनेकी कोई जरूरत नहीं है।
इररोज थोडासा खून शरीरके अवयवोंके अंदर नष्ट हो जाता है और मैलके रूपमें बाहर निकल जाता है । इस खूनके साथही थोडासा लोभी बाहर निकल जाता है । यह कमी रोजानाके आहारमेंसे मिलानी होती है ।..
आंहारमेंसे रोजानांक घिसाईके जितना लोह शरीरको देना यह हुई सामान्य बात । मलेरिया तथा कृमि रोग ( Hook Worm ) जैसे रोगोंमें लोहका असामान्य प्रमाणमे नाश होता है । मलेरिया के मच्छरके जंतु खूनके कणों में घुसकर वहाँ बढने लगते हैं। उनके बढ़ने के कारण रक्त-कण फट जाते हैं और इसप्रकार बहुतसा रक्त नष्ट हो जाता है । ' बारबारके मलेरियाके बुखार में उपरोक्त कारण से पांडुरोग हो जाता कृमि रोगमें उसके सैंकडों जंतु आँतों में पड़े रहते हैं और खून चूसते रहते हैं । ऐसे अवसरोपर आहारमेंसे लोइ मिलाना कठिन हो जाता है, क्योंकि lon हा जात रोगके कारण हुई कमी केले आहार में से पूरण नहीं हो सकती । इसीलिये तो दवाके जरिये लोह लेना अच्छा समझा गया है । क्योंकि दवाके जरिये ही अच्छे प्रमाण में लोह लेना शक्य होता है ।
· पुरुषों के प्रमाणमे त्रियों की लोहकी जरूरत असामान्य होती है। क्योंकि उन्हें अपने शरीरमेंसे ही बच्चोंको लोह पहुंचाना होता है। इसलिये पुरुषोंकी अपेक्षा स्त्रियोको पांडुरोग होनेका संभव अधिक होता है। उसमें भी मलेरिया या कृमि रोग हुआ हो तो पूछनाही क्या ? | दूध की पैदाइश होती है, वह विशेष कर धनियामेही व्यवहृत हो जाती है । इस देशके करोड़ों लोगोंको तो दूध मिलता ही नहीं। उनके लिये तो मलाई के बिनाका दूध या छाछ भी महान वस्तु हो सकती हमारे देश में अन्य खाद्य द्रव्यों की अपेक्षा धीका महत्व अधिक समझा जाता है । यहांतक कि "ऋणं कृत्वा घृतं पिबेत्" जैसी कहावतें बन गया हैं । सामान्य जनता में अकेला घी ही आहार की मुख्य चीज होने की छापसी गिर गयी है । जीवनतत्वों के रूप में की उपयोगिता बारे में इन्कार नहीं किया जा सकता; लेकिन घी कोई अनिवार्य चीज नहीं । अथवा अन्य तरह से कहा जा सकता है कि घी तथा छाछ आदि दूध की बनावटोमेका नत्रज इन दोनोमेसे पसंद करना हो तो घी को छोड़ने की सलाह दी जा सकती है । शरीरका बनना अटकेगा नहीं; जब कि नत्रजके बिना तो शरीर की वृद्धि ही अटक जायगी । याने दूध की कीमत उसमें से मिलनेवाली मलाईपर जितनी अवलंबित है उससे अधिक उसमेंके नत्रजं, ळवणद्रव्य आदिके कारण समझनी चाहिये । मलाई हटाये दूध में या छाछमें नत्रज और लवणद्रव्य जैसे के वैसे पूरे प्रमाण में मौजूद रहते हैं । इसलिये हमारे बच्चोंको मलाई के बिनाका भी दूध या छाछ मिले ऐसा प्रचार करने की विशेष जरूरत है । हरेक शाला में दूध या छाछ बाटनेके व्यवस्थित कार्यक्रम रखे जाने चाहिये । i, खाद्यद्रव्योंको हजम करनेवाले, मलमूत्रको बाहर निकालनेवाले, खून तथा प्राणवायुको सारे शरीर में पहुँचानेवाले, आदि हरेक प्रकार के अवयवोंकी बनावटमें लवणद्रव्य एक अंग के रूप में होते हैं जिससे शरीर की प्रत्येक क्रिया - स्थूल या सूक्ष्म के साथ उनका घनिष्ट संबंध होता है। लवणद्रव्यों की इस प्रकारकी सर्वत्र व्याप्त होने के कारण कहीं भी उनका अभाव हो तो तुरंत तंदुरुस्ती में विकार आये बिना नहीं रह सकता । प्रकृतियोंने जैसे अपने अम्लताप्रधान और लवणप्रधान ऐसे दो स्वतंत्र भाग कर लिये हैं ऐसा प्रतीत होता है । कंदमूल, पत्ते और ये लवणप्रधान बनाये और सभी दानें अम्लता प्रधान बनाये। हमारे खाद्यद्रव्योंका वडा हिस्सा गेहूं, चावल, बाजरा, दाल तिलहन आदि दाने होने की वजह से हमारा आहार अम्लताप्रधान हो जाता है। शरीर में जाय अिसलिये हमें फल और सब्जी खाना' अधिक आवश्यक हो गया है । प्रकृतिने दोनोंमें भी खाद्यद्रव्योंका साफ साफ विभाजन कर रखा । जो कुछ मामूली लवणद्रव्य दानों में होते हैं. उनका बड़ा हिस्सा दानों की ऊपरी सतहमें होता है । चावलको कूटनेमें या गेहूंका मैदा बनानेमें दानेकी यह ऊपरी सतह निकल जाती है, फलतः हम लवणद्रव्योंसे वचित हो जाते हैं । दानों में स्थित इस लवणद्रव्य का महत्व समझ लेना नितान्त : आवश्यक है । पत्तोंकी तुलना में दानोंमें लवणद्रव्य कम होते हैं सही लेकिन पत्तों के लवणद्रव्य शरीर में कम घुल पाते हैं जब कि ··· दानों के लवणद्रव्य ज्यादा घुल सकते हैं । दानेकी पैदाइशमें ही प्रकृतिने एक. इस प्रकारकी तब्दीली की होती है । सिवा दाने ही हमारे भोजनका बडा हिस्सा होता है इसलिये दानोंमेंसे ही लवणद्रव्योंकी आवश्यकताका एक. बडा हिस्सा मिलाना सरल होता है। हम आगे चलकर देखेंगे कि दानोंकी ऊपरी सतहमें ही अनुकूल नत्रज और बहुतसे जीवनतत्व भी केंद्रित हुए रहते हैं। इससे दानोंके ऊपरी हिस्सोका पूरा उपयोगः कर लेना कितना महत्वपूर्ण है यह स्पष्ट होता है । A खाद्य द्रव्योंका इतना मोटासा वर्गिकरण भी ख्यालमै रहे तो, अम्लता तथा लवणता प्रमाण में रखने में काफी सरलता होगी। किसी मा प्रकारके बुखार में शरीर में अम्लता बढ़ जाती है इसलिये बुखारके समयमें लवण प्रधान चीजें जैसे सब्जी, फल तथा पानी लेना चाहिये; मांस तथा दाने-गेहूं, दाल आदि-अम्लता प्रधान चीजें छोडना चाहिये । शरीरमे करीव बीस जातिके लवणद्रव्य पाये जाते हैं । आहारमेंसे वे सभी लवणद्रव्य मिलें और योग्य प्रमाण में मिलें तो भी तंदुरुस्ती कायम रह सकती है यह, साफ बात है । लेकिन प्रत्यक्ष व्यवहारको दृष्टि से इन सारे लवणद्रव्योंका विचार करना जरूरी नहीं है । कॅलशियम फॉस्फरस, लोह, और आयोडिन ये लवणद्रव्य यदि पूरे प्रमाण में आहार में से मिलते रहें तो वाकांके आपसे आप मिल जाते हैं ऐसा माना जा सकता है । इन चार लवणद्रव्योंकी कमी के कारण होनेवाले रोगोंका निदान शक्य हुआ है। बाकीके लवणद्रव्योंकी कमांके परिणाम के विषय में अभी .कुछ तय नहीं हो पाया है । हमें फॉस्फरस तथा आयोडिनको कमीका भी विचार करना अनावश्यक है। क्योंकि जिस आहारमेंसे हमें कॅल्शियम मिलता है उसीमेंसे फॉस्फरस मिल जाता है, ऐसा माना जा सकता है। सब्जी और फलोंमेंसे आवश्यक आयोडिंन मिल जाता है । इन दोनों लवणद्रव्योकी कमी प्रादेशिक कारणोंसे हुआ करती है । इसप्रकार हमें कमीकी दृष्टिसे कॅलशियम और लोहेकाही विचार करना होगा। आजकल बाजार में जो तैयार दवायें मिलती हैं उनमें लवणद्रव्यों में से ये दो दवाएं ही विषेश करके हुआ करती. हे दो महत्वपूर्ण लवणद्रव्य एक. कॅलशियम - सारे लवणद्रव्यों में कॅलशियम सबसे महत्वपूर्ण कवणद्रव्य है। शरीर के सारे अंगोंसे और उनकी सारी क्रियाओं के साथ इसका सीधा संबंध है । ' शरीरके सारे लवणद्रव्योंमें सबसे ज्यादा प्रमाण कॅलशियमका है । हड्डियों में भी बड़ा हिस्सा कॅलशियमका ही है। इसी कारण जिनकी हड्डियाँ बना, करती हैं जैसे बढ़ने वाले बच्चों को तथा जिनके शरीरसे बच्चोंका शरीर बनता है उन माताओको कलशियमकी : काफी जरूरत होती है। कॅलशियमका इतना अधिक महत्व होने के कारण ही यदि आहारमें कॅलशियम की कमी हो तो भाँति भाँतिक रोग हो जाते हैं। इस कमीका असर बढ़ते बच्चों में साफ साफ दिखाई देती है। कॅलशियम की कमी के परिणाम के विषय में डॉशून्य एक्रॉइड अपनी किताब में इंग्लैंडके आरोग्य विभाग के डॉक्टरका मत लिखते हैंः " आहारकी कमीका असर तुरंत दीख सके ऐसी बचपनकी बढ़ती उम्र दरमियान यदि कॅलशियम की कमी रह जाती है तो सारे हड्डियों के ढाँचेका ही विकास व्यंगवाला हो जाता है । यह तो तुरंत और स्पष्ट दीखनेवाली बात हुई। किन्तु इसके अलावा कितने ही नुक्स खडे हो जाते हैं । अमुक प्रमाणमें कॅलशियम हो तो ही शरीर के अवयवोंको संकोच और विकसन होते रहता है । आहारमे कॅलशियम की कमी हो - तो खून कॅलशियम के प्रमाण कमी होकर अवयवोंके संकोच और विकसनकी शक्ति घट जाती है। ऐसा होनेसे अन्नको पचानेवाले, मलोत्सर्ग करनेवाले, खूनको बहता रखनेवाले, श्वासोच्छ्वास करनेवाले आदि अनको अवयव अपने अपने कार्य ठीक नहीं कर पाते। ऐसा भी माननेके "लिये आधार है कि कॅलशियमका प्रमाण घट जाने से कोयले के रूप में व्यवहृत होती शक्कर शरीरमें अच्छी तरह घुल नहीं पाती, और शकरका कोयलेके रूप में उपयोग होना भी बंद हो जाता है । शरीरमे फॉस्फरसका उपयोग भी कॅलशियमके कारण ही होता है एक गलेमेकी प्राणग्रंथी कॅलशियम के कारण ही ठीकसे काम दे सकती है । याने कॅलशियमकी कमी हो तो फॉस्फरसका उपयोग न होगा और प्राणग्रंथी भी अपना काम ठीकसे नहीं कर सकेगी और कॅलशियमकी मददसे ही शरीरके कोष खाद्यद्रव्योंमेंसे पोषण चूस सकते हैं। सारांश शरीरकी ऐसी एक भी क्रिया नहीं है जो कि कॅलशियम की कमी के कारण न बिगडे । इस तरह आहारमें एक ही व्यकी कमी के कारण शरीरमें कितना वडा सर्वव्यापी और कायमी असर हो सकता है !" कॅलशियमके महत्वके विषय में अधिक कहने की जरूरत न होनी चार चाहिये लेकिन हमारे आहारमें कॅलशियम की कमी सर्व सामान्य वाचत हो चुकी है । दो. लोह -मनुष्य के सारे शरीर में मिलाकर कुल तीन ग्राम से भी कम लोह होता है लेकिन शरीर की दृष्टि से उसका महत्व उसके प्रमाण के हिसाब से कहीं अधिक है। लोह का वडा हिस्सा खून में मिला हुआ रहता है । खनका लाल रंग इसी लोइ के बदौलत होता है शरीर में लोह की कमी होनेपर उसका लाल रंग कम हो जाता है और आदमी फीका दिखाई देने लगता है; इसे ही हम पांडुरोग कहेत हैं । कॅलशियम की तरह लोह भी शरीरके हरेक कोषका अंग होकर रहता है और कोपोंकी अन्य क्रियाओं के साथ उसका घनिष्ट संबंध भी होता है । हम पहले देख चुके हैं कि लोह ही फेफडों में से प्राणवायुको सारे शरीरमें पहुंचाता है और सारे शरीर के कार्बन वायुको फेफड़ों से बाहर निकालता है। इस दृष्टि से कहा जा सकता है कि लोह ही मनुष्यको जीवित रखता है। उसकी कमी के हिसाब से ही शरीर कम ताकत समझा जायगा यह साफ बात है । लोहकी कमी के कारण होनेवाला पांडुरोग सर्वव्यापी सार्वत्रिक है । छोटे बच्चोंमें प्रायः पचास फी सदी बच्चोंको पांडुरोग होता है, क्योंकि एक साल तक बच्चों को केवल दूधपर ही रखनेकी लोगोंमें आदइसी हो गयी है । दूधमें लोह नहींके समान है याने दूधसेही पोषण पानेवाले बच्चोंको लोह बिलकुल नहीं मिटता । बालकके जन्म के समय उसके शरीर में छः माह तक चल सके इतना लोह होता है । इसलिये आहार शास्त्री कहते हैं कि छः महिनेके बाद बाटकको अकेले दूधपर न रखकर अनाज खिलाना शुरू कर देना चाहिये । हमारे यहाँ छः महीने के बाद जो अन्न प्राशन विधि किया जाता है सो इस दृष्टि से संयुक्तिक ही है । इतनी छोटी उम्र में अनाज इजम न होनेका डर रखनेकी कोई जरूरत नहीं है। इररोज थोडासा खून शरीरके अवयवोंके अंदर नष्ट हो जाता है और मैलके रूपमें बाहर निकल जाता है । इस खूनके साथही थोडासा लोभी बाहर निकल जाता है । यह कमी रोजानाके आहारमेंसे मिलानी होती है ।.. आंहारमेंसे रोजानांक घिसाईके जितना लोह शरीरको देना यह हुई सामान्य बात । मलेरिया तथा कृमि रोग जैसे रोगोंमें लोहका असामान्य प्रमाणमे नाश होता है । मलेरिया के मच्छरके जंतु खूनके कणों में घुसकर वहाँ बढने लगते हैं। उनके बढ़ने के कारण रक्त-कण फट जाते हैं और इसप्रकार बहुतसा रक्त नष्ट हो जाता है । ' बारबारके मलेरियाके बुखार में उपरोक्त कारण से पांडुरोग हो जाता कृमि रोगमें उसके सैंकडों जंतु आँतों में पड़े रहते हैं और खून चूसते रहते हैं । ऐसे अवसरोपर आहारमेंसे लोइ मिलाना कठिन हो जाता है, क्योंकि lon हा जात रोगके कारण हुई कमी केले आहार में से पूरण नहीं हो सकती । इसीलिये तो दवाके जरिये लोह लेना अच्छा समझा गया है । क्योंकि दवाके जरिये ही अच्छे प्रमाण में लोह लेना शक्य होता है । · पुरुषों के प्रमाणमे त्रियों की लोहकी जरूरत असामान्य होती है। क्योंकि उन्हें अपने शरीरमेंसे ही बच्चोंको लोह पहुंचाना होता है। इसलिये पुरुषोंकी अपेक्षा स्त्रियोको पांडुरोग होनेका संभव अधिक होता है। उसमें भी मलेरिया या कृमि रोग हुआ हो तो पूछनाही क्या ? |
दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के खिलाफ कथित शराब धोखाधड़ी मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा लाए गए मामले में अदालत ने राहत देने से इनकार कर दिया है. सिसोदिया की जमानत पर सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें 17 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया. गौरतलब है कि ईडी द्वारा आज दर्ज मामले में, सिसोदिया अपनी न्यायिक हिरासत समाप्त होने के बाद राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश हुए।
इससे पहले कोर्ट ने मनीष सिसोदिया को भी सीबीआई द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार के एक मामले में 17 अप्रैल तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। ऐसे में उनका 17 अप्रैल से पहले जेल से छूटना मुश्किल होगा।
| दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के खिलाफ कथित शराब धोखाधड़ी मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा लाए गए मामले में अदालत ने राहत देने से इनकार कर दिया है. सिसोदिया की जमानत पर सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें सत्रह अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया. गौरतलब है कि ईडी द्वारा आज दर्ज मामले में, सिसोदिया अपनी न्यायिक हिरासत समाप्त होने के बाद राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश हुए। इससे पहले कोर्ट ने मनीष सिसोदिया को भी सीबीआई द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार के एक मामले में सत्रह अप्रैल तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। ऐसे में उनका सत्रह अप्रैल से पहले जेल से छूटना मुश्किल होगा। |
कहें. अगर खुद अच्छी जगह हुए तो हमदर्दी दिखायें, मिगरेट देकर कृतार्थ करें, हर हरकत से यह जतायें कि वेचारे को कब-कब मिलती होगी। दूसरी तरफ माहित्य में युग प्रवर्तक का डका बजे-यह विडम्बना अब सही नही जाती ।"
"सिनेरियो और डॉयलाग में भी सुनते हैं कि काफी मिल जाता है ?" मैंने सान्त्वना देने के भाव में कहा । हमारे दाहिनी ओर जगह-जगह पडती छोटीछोटी गलियों की पीली रेत, ढंकी ढालू सड़कों के पार रेत का हाशिया और समुद्र दिखाई देते थे। बायी ओर पार्क का कोना था । यहाँ पर बने इस कॉम का मतलब मेरी समझ में कभी नहीं आया। उस पर रोमन अक्षरों में आई० एन० आर० एम० और ऊपर से चढाई हुई माला । सामने का वही खपरैल वाला बेंगलेनुमा मकान पहले पडा, फिर हरियाली की वाढ और बच्चो के खेलने के झूले इत्यादि । अपना फ्लैट अभी दिखाई नहीं देता था। मैंने अनुमान लगाया, सामने के गैस के खम्भे से मेरी खिड़की और भीतर की ओर की बाल्कनी जरूर दीखती होगी। वहीं से मैं भी तो सड़क का यह हिस्मा देख लेती हूँ । कही कोई देख न ले । लेकिन इतनी दूर से पहचान थोडे ही पायेगा ? फिर भी अक्का का क्या है, साड़ी के रग या चाल से ही पहचान लें । यो हो सेलने के लिए सडक पर पड़ा एक खाली सिगरेट का डब्बा उठाने के बहाने में जरा एको और उदय के दाहिनी ओर आड़ करके इस तरह चलने लगी कि हमारे यहाँ से कोई देखे तो वे ही दीखें । इस वार देखा, वे मुझसे दो-चार अंगुल छोटे ही है ।
"मिलता होगा ।" बे लापरवाही से मेरी बात के जवाब में बोले "डायरेक्टर, प्रोड्यूमर, स्टोरी- राइटर, प्रमुख हीरोअर्थात् एक ही व्यक्ति और पार्टनर-डिस्ट्रीब्यूटर के बीच मे हीरोइन को लेकर कुछ झगडा हो गया है, सो फिल्म तीन-चार हजार फीट बनी पड़ी है। मैं पण्डित चोखेलाल के साथ सिनेरियो ओर डायलॉग में सहायक हूँ, मासिक वेतन पर । वे आधी तनख्वाह दिये जा रहे हैं। कहानी किमी दूसरे प्रोड्यूसर को भिडा देंगे तो बाकी तनख्वाह भी दे देंगे। जायें भाड़ मे । मुझे तो मोह सिर्फ यह है कि कहानी मेरी है । चोखेलाल ने अपने साथ इसी शर्त पर मुझे छ. महीने के लिए नौकर रक्खा था कि कहानी में दे दूं, लेकिन जायेगी उनके नाम से । उधर प्रोड्यूसर तेज़ था । वह फिल्म में कोई ऐसी जगह नहीं रखना चाहता था, जहां उसका नाम न जाय । सो यूं सौदा तय हुआ। मालूम नही, चोसेलाल ने मेरी कहानी को अपने नाम से देकर और प्रोड्यूमर का नाम जाने देकर कितने लिये ।" जैसे यह सचमुच कोई मजाक है, इस तरह वे खुलकर हंस पड़े - "कहिए, है न बबइया खेल ?"
उनके हँसने के दर्द ने मुझे छुआ । आड़ से ज़रा-सा झाँक कर देखा । मेरी खिड़की का आधा पर्दा हवा से गुब्बारे की तरह बाहर की तरफ़ फूला था । भीतर की वाल्कनी में अलगनी पर साड़ी और तौलिया झूल रहे थे । अक्का को पापाजी वाले कमरे से निकल कर अपने में जाते मैंने स्पष्ट देखा। मैं उदय की आड़ में न होती तो देख ही लेतीं। हमारे ऊपर की वाल्कनी में कापड़िया के यहाँ छोटे-छोटे गमले लटके हैं, वहीं उनकी लड़की माला फ्रॉक पहने नंगी नंगी टाँगे दिखाती रेलिंग पर लटकी थी। यह जब देखो, तब यहीं लटकी रहती है । इतनी बड़ी हो गई, अपने को वच्ची ही समझती है। हमेशा फ्रॉक लटकाये रहेगी । कम से कम एक दुपट्टा ही डाल ले सामने । तो, जनाव में ऐंठ चाहे जितनी हो, हैं काफ़ी कष्ट में ! मैंने इस दुःखद प्रसंग को मोड़ देने के किए कहा : "आपकी बहन तो काफ़ी खाती-पीती लगती..
उन्होंने फिर एक गहरी साँस ली : "वहन से ही माँगना होता तो घर ही क्या बुरे थे ? रूखी-सूखी खाते ही थे । वह बेचारी तो । वह वेचारी तो बुला-चुला कर रह जाती है । अब उससे सम्बन्ध सिर्फ़ फ़ोन का ही रखता हूँ वह भी जब कभी इधर आ जाती है तो।" मुझे लगा ; जैसे वे अपने फ़ोन करने को सफ़ाई दे रहे हैं । पास लम्बी-सी चमकती लाल-सफ़ेद गाड़ी तैरती चली गई और वे उसे देर तक गौर से देखते रहे । एक बात की ओर ध्यान गया : वे हर गाड़ी को बड़ी ही हसरत भरी निगाहों से देखते थे, और पीछे से आने वाली हर गाड़ी पर चौंक उठते थे जैसे उनको परिचित गाड़ी गई हो । मुझसे मजाक किये बिना नहीं रहा गया : "बहन की गाड़ी पहचान रहे हैं क्या ?"
"नहीं, देख रहा हूँ कि कौन-सा मॉडल लूँ ! ' जान-बूझकर इतनी देर का अवसाद हटाने के लिए खिलखिला पड़े । फिर एकदम सुस्त हो गए और दूर सागर के पास उड़ती चीलों को देखकर बोले- "हमलोग भी सच कैसे खयाली पुलाव पकाने लगते हैं कभी-कभी । जव बम्बई आया था तो पता है, क्या सोचा करता था ?"
"क्या ?" अब इधर हवा चलने लगी थी । पल्ले को कमर में खोंसते हुए मैंने पूछा - ( माला को देखकर मुझे अपने कपड़े ठीक करने की याद होआई) ।
"ऊँची-ऊँची शानदार विल्डिंगें देखकर मैं सोचा करता था कि यहाँ ज़रूर कुछ ऐसा नाटकीय हो जाएगा कि थोड़े दिनों में एक विल्डिंग मेरे भी पास होगी । हो सकता है, किसी करोड़पति की इकलौती बेटी की गाड़ी से टकरा जाऊँ, वह मुझे हसताल में ले जाए, सेवा शुश्रूषा करे और फिर मुग्ध हो जाए, या
हो सकता है उसे किन्हीं गुण्डों के चंगुल से बचाकर उसके बाप से मेरा परिचय हो जाय। कुछ नही, तो किसी दिन मेरे नाम कोई लॉटरी ही खुल जाय । आप कुछ कहिए, ये बातें सोचने में आता वड़ा मजा है। लेकिन यहां आकर स्टेशन पर जब सामान ढोया तो सारे सपने हवा हो गए।"
"सामान ढोया ?" मैं सचमुच इस तरह चौको जैसे मेरे पाँव के नीचे अंगारा आ गया हो । मैंने उन्हें फिर गौर से देखा ।
"जी हां, और करता क्या ?" वे फिर अपने में खोई-खोई उसी विषाक्त मुस्कान मे डूबी मुद्रा में बोले । फिर अचानक जैसे सचेत हो गए। "खैर, छोड़िए ये सब बातें । हम लोग भी क्या ले बैठे? असल मे तब तक आप से परिचय नहीं हुआ था न, वर्ना आप से जाकर भिक्षा मांग लेते-"भिक्षा देहि... उस सुजाता ने खीर खिलाई थी, आप एकाध कप चाय तो पिला हो देती..."
दोनो जोर से खिलखिलाकर हँस पडे। मैंने भी साथ दिया, लेकिन मन सहानुभूति से भर उठा। बुद्ध और सुजाता की कल्पना के रोमास मे अवचेतन मन गुदगुदा उठा। मैंने अपनत्व भरकर कहा - "नहीं, ऐसा नहीं है। मैं तो बहुत ही शुरू से आपकी प्रशसिका रही हूँ ।"
"प्रशंसक बहुत लोग है। और इस दिशा में में अपने साथियों की अपेक्षा शायद कुछ अधिक ही सौभाग्यशाली रहा हूँ । लेकिन अपने देश में तो प्रशंसा और पूजा करने वाले देवता को लोग पत्थर का मानकर चलते हैं। उनके खयाल से न तो उसके हृदय में कोई भाव उठते है और न उसे खाने कपड़े की ज़रूरत महसूस होती है ।" सामने दौडती मोटर साइकिल के नम्बर पर निगाह गडाकर उन्होंने कहा - "कभी -कभी तो सचमुच, मन मे आता है कि एक लम्बा मा गेरुआ चोगा मिलवाकर साधु हो जाऊँ । धार्मिक लोग मूर्ख होते हैं और उन्हें बहकाने लायक लटके मुझे आते है। थोडे लोक और चौपाइयां और याद कर लूंगा। जरूरत गैर-जरूरत कोट कर दिया। कम-से-कम कुछ चेले बनेंगे, खाने-पीने और सेवा का आराम हो गया, समझिए । और कही कोई पति रुष्टा मेठानी आ गई, तच तो कहना ही क्या है । दो-चार साहित्यिको को वैसे ही पाठ लूंगा । कहूँगा ~लो बच्चा, खाओ, और दण्ड पेलो। क्यों साहित्य-वाहित्य मे जिन्दगी खराव करते हो ? यहाँ किसी को इसकी ज़रूरत नहीं है । न तुम्हारा साहित्य विगडी तकदीर सुधारता है, न पुत्र होने का आश्वासन देता है, ब्लैक-मार्केटियर का परलोक सुधारने का भी कोई नुम्बा तुम्हारे पास नहीं है । फिर आखिर करता क्या है यह ?" अपनी इस कल्पना पर उन्हें बच्चों की तरह खूब हँसी अ | कहें. अगर खुद अच्छी जगह हुए तो हमदर्दी दिखायें, मिगरेट देकर कृतार्थ करें, हर हरकत से यह जतायें कि वेचारे को कब-कब मिलती होगी। दूसरी तरफ माहित्य में युग प्रवर्तक का डका बजे-यह विडम्बना अब सही नही जाती ।" "सिनेरियो और डॉयलाग में भी सुनते हैं कि काफी मिल जाता है ?" मैंने सान्त्वना देने के भाव में कहा । हमारे दाहिनी ओर जगह-जगह पडती छोटीछोटी गलियों की पीली रेत, ढंकी ढालू सड़कों के पार रेत का हाशिया और समुद्र दिखाई देते थे। बायी ओर पार्क का कोना था । यहाँ पर बने इस कॉम का मतलब मेरी समझ में कभी नहीं आया। उस पर रोमन अक्षरों में आईशून्य एनशून्य आरशून्य एमशून्य और ऊपर से चढाई हुई माला । सामने का वही खपरैल वाला बेंगलेनुमा मकान पहले पडा, फिर हरियाली की वाढ और बच्चो के खेलने के झूले इत्यादि । अपना फ्लैट अभी दिखाई नहीं देता था। मैंने अनुमान लगाया, सामने के गैस के खम्भे से मेरी खिड़की और भीतर की ओर की बाल्कनी जरूर दीखती होगी। वहीं से मैं भी तो सड़क का यह हिस्मा देख लेती हूँ । कही कोई देख न ले । लेकिन इतनी दूर से पहचान थोडे ही पायेगा ? फिर भी अक्का का क्या है, साड़ी के रग या चाल से ही पहचान लें । यो हो सेलने के लिए सडक पर पड़ा एक खाली सिगरेट का डब्बा उठाने के बहाने में जरा एको और उदय के दाहिनी ओर आड़ करके इस तरह चलने लगी कि हमारे यहाँ से कोई देखे तो वे ही दीखें । इस वार देखा, वे मुझसे दो-चार अंगुल छोटे ही है । "मिलता होगा ।" बे लापरवाही से मेरी बात के जवाब में बोले "डायरेक्टर, प्रोड्यूमर, स्टोरी- राइटर, प्रमुख हीरोअर्थात् एक ही व्यक्ति और पार्टनर-डिस्ट्रीब्यूटर के बीच मे हीरोइन को लेकर कुछ झगडा हो गया है, सो फिल्म तीन-चार हजार फीट बनी पड़ी है। मैं पण्डित चोखेलाल के साथ सिनेरियो ओर डायलॉग में सहायक हूँ, मासिक वेतन पर । वे आधी तनख्वाह दिये जा रहे हैं। कहानी किमी दूसरे प्रोड्यूसर को भिडा देंगे तो बाकी तनख्वाह भी दे देंगे। जायें भाड़ मे । मुझे तो मोह सिर्फ यह है कि कहानी मेरी है । चोखेलाल ने अपने साथ इसी शर्त पर मुझे छ. महीने के लिए नौकर रक्खा था कि कहानी में दे दूं, लेकिन जायेगी उनके नाम से । उधर प्रोड्यूसर तेज़ था । वह फिल्म में कोई ऐसी जगह नहीं रखना चाहता था, जहां उसका नाम न जाय । सो यूं सौदा तय हुआ। मालूम नही, चोसेलाल ने मेरी कहानी को अपने नाम से देकर और प्रोड्यूमर का नाम जाने देकर कितने लिये ।" जैसे यह सचमुच कोई मजाक है, इस तरह वे खुलकर हंस पड़े - "कहिए, है न बबइया खेल ?" उनके हँसने के दर्द ने मुझे छुआ । आड़ से ज़रा-सा झाँक कर देखा । मेरी खिड़की का आधा पर्दा हवा से गुब्बारे की तरह बाहर की तरफ़ फूला था । भीतर की वाल्कनी में अलगनी पर साड़ी और तौलिया झूल रहे थे । अक्का को पापाजी वाले कमरे से निकल कर अपने में जाते मैंने स्पष्ट देखा। मैं उदय की आड़ में न होती तो देख ही लेतीं। हमारे ऊपर की वाल्कनी में कापड़िया के यहाँ छोटे-छोटे गमले लटके हैं, वहीं उनकी लड़की माला फ्रॉक पहने नंगी नंगी टाँगे दिखाती रेलिंग पर लटकी थी। यह जब देखो, तब यहीं लटकी रहती है । इतनी बड़ी हो गई, अपने को वच्ची ही समझती है। हमेशा फ्रॉक लटकाये रहेगी । कम से कम एक दुपट्टा ही डाल ले सामने । तो, जनाव में ऐंठ चाहे जितनी हो, हैं काफ़ी कष्ट में ! मैंने इस दुःखद प्रसंग को मोड़ देने के किए कहा : "आपकी बहन तो काफ़ी खाती-पीती लगती.. उन्होंने फिर एक गहरी साँस ली : "वहन से ही माँगना होता तो घर ही क्या बुरे थे ? रूखी-सूखी खाते ही थे । वह बेचारी तो । वह वेचारी तो बुला-चुला कर रह जाती है । अब उससे सम्बन्ध सिर्फ़ फ़ोन का ही रखता हूँ वह भी जब कभी इधर आ जाती है तो।" मुझे लगा ; जैसे वे अपने फ़ोन करने को सफ़ाई दे रहे हैं । पास लम्बी-सी चमकती लाल-सफ़ेद गाड़ी तैरती चली गई और वे उसे देर तक गौर से देखते रहे । एक बात की ओर ध्यान गया : वे हर गाड़ी को बड़ी ही हसरत भरी निगाहों से देखते थे, और पीछे से आने वाली हर गाड़ी पर चौंक उठते थे जैसे उनको परिचित गाड़ी गई हो । मुझसे मजाक किये बिना नहीं रहा गया : "बहन की गाड़ी पहचान रहे हैं क्या ?" "नहीं, देख रहा हूँ कि कौन-सा मॉडल लूँ ! ' जान-बूझकर इतनी देर का अवसाद हटाने के लिए खिलखिला पड़े । फिर एकदम सुस्त हो गए और दूर सागर के पास उड़ती चीलों को देखकर बोले- "हमलोग भी सच कैसे खयाली पुलाव पकाने लगते हैं कभी-कभी । जव बम्बई आया था तो पता है, क्या सोचा करता था ?" "क्या ?" अब इधर हवा चलने लगी थी । पल्ले को कमर में खोंसते हुए मैंने पूछा - । "ऊँची-ऊँची शानदार विल्डिंगें देखकर मैं सोचा करता था कि यहाँ ज़रूर कुछ ऐसा नाटकीय हो जाएगा कि थोड़े दिनों में एक विल्डिंग मेरे भी पास होगी । हो सकता है, किसी करोड़पति की इकलौती बेटी की गाड़ी से टकरा जाऊँ, वह मुझे हसताल में ले जाए, सेवा शुश्रूषा करे और फिर मुग्ध हो जाए, या हो सकता है उसे किन्हीं गुण्डों के चंगुल से बचाकर उसके बाप से मेरा परिचय हो जाय। कुछ नही, तो किसी दिन मेरे नाम कोई लॉटरी ही खुल जाय । आप कुछ कहिए, ये बातें सोचने में आता वड़ा मजा है। लेकिन यहां आकर स्टेशन पर जब सामान ढोया तो सारे सपने हवा हो गए।" "सामान ढोया ?" मैं सचमुच इस तरह चौको जैसे मेरे पाँव के नीचे अंगारा आ गया हो । मैंने उन्हें फिर गौर से देखा । "जी हां, और करता क्या ?" वे फिर अपने में खोई-खोई उसी विषाक्त मुस्कान मे डूबी मुद्रा में बोले । फिर अचानक जैसे सचेत हो गए। "खैर, छोड़िए ये सब बातें । हम लोग भी क्या ले बैठे? असल मे तब तक आप से परिचय नहीं हुआ था न, वर्ना आप से जाकर भिक्षा मांग लेते-"भिक्षा देहि... उस सुजाता ने खीर खिलाई थी, आप एकाध कप चाय तो पिला हो देती..." दोनो जोर से खिलखिलाकर हँस पडे। मैंने भी साथ दिया, लेकिन मन सहानुभूति से भर उठा। बुद्ध और सुजाता की कल्पना के रोमास मे अवचेतन मन गुदगुदा उठा। मैंने अपनत्व भरकर कहा - "नहीं, ऐसा नहीं है। मैं तो बहुत ही शुरू से आपकी प्रशसिका रही हूँ ।" "प्रशंसक बहुत लोग है। और इस दिशा में में अपने साथियों की अपेक्षा शायद कुछ अधिक ही सौभाग्यशाली रहा हूँ । लेकिन अपने देश में तो प्रशंसा और पूजा करने वाले देवता को लोग पत्थर का मानकर चलते हैं। उनके खयाल से न तो उसके हृदय में कोई भाव उठते है और न उसे खाने कपड़े की ज़रूरत महसूस होती है ।" सामने दौडती मोटर साइकिल के नम्बर पर निगाह गडाकर उन्होंने कहा - "कभी -कभी तो सचमुच, मन मे आता है कि एक लम्बा मा गेरुआ चोगा मिलवाकर साधु हो जाऊँ । धार्मिक लोग मूर्ख होते हैं और उन्हें बहकाने लायक लटके मुझे आते है। थोडे लोक और चौपाइयां और याद कर लूंगा। जरूरत गैर-जरूरत कोट कर दिया। कम-से-कम कुछ चेले बनेंगे, खाने-पीने और सेवा का आराम हो गया, समझिए । और कही कोई पति रुष्टा मेठानी आ गई, तच तो कहना ही क्या है । दो-चार साहित्यिको को वैसे ही पाठ लूंगा । कहूँगा ~लो बच्चा, खाओ, और दण्ड पेलो। क्यों साहित्य-वाहित्य मे जिन्दगी खराव करते हो ? यहाँ किसी को इसकी ज़रूरत नहीं है । न तुम्हारा साहित्य विगडी तकदीर सुधारता है, न पुत्र होने का आश्वासन देता है, ब्लैक-मार्केटियर का परलोक सुधारने का भी कोई नुम्बा तुम्हारे पास नहीं है । फिर आखिर करता क्या है यह ?" अपनी इस कल्पना पर उन्हें बच्चों की तरह खूब हँसी अ |
नोएडा। जनपद के थाना सेक्टर-20 की बैरक में रहने वाले एक उपनिरीक्षक के कोविड-19 संक्रमित पाए जाने के बाद थाने में तैनात दर्जनभर पुलिसकर्मियों को क्वारंटाइन में रखा गया है। संक्रमित उपनिरीक्षक की ड्यूटी पुलिस रिस्पांस व्हीकल (पीआरवी) पर है।
पुलिस उपायुक्त (यातायात) राजेश एस. ने बताया कि (पीआरवी) पर तैनात उपनिरीक्षक कोविड-19 से संक्रमित पाए गए हैं। उनकी ड्यूटी कोरोना संक्रमित जोन सेक्टर-8, 9, 10 क्षेत्र में थी। वे थाना सेक्टर-20 के बैरक में रहते थे। उनके साथ जितने भी पुलिसकर्मी बैरक में रहते थे, उन्हें क्वारंटाइन में रखा गया है।
उन्होंने बताया कि बैरक व थाने को जिला प्रशासन द्वारा सैनेटाइज किया जा रहा है। थाना सेक्टर-20 के बैरक में रहने वाले उपनिरीक्षक के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने से थाने में तैनात पुलिसकर्मी अतिरिक्त सावधानी बरत रहे हैं। (भाषा)
| नोएडा। जनपद के थाना सेक्टर-बीस की बैरक में रहने वाले एक उपनिरीक्षक के कोविड-उन्नीस संक्रमित पाए जाने के बाद थाने में तैनात दर्जनभर पुलिसकर्मियों को क्वारंटाइन में रखा गया है। संक्रमित उपनिरीक्षक की ड्यूटी पुलिस रिस्पांस व्हीकल पर है। पुलिस उपायुक्त राजेश एस. ने बताया कि पर तैनात उपनिरीक्षक कोविड-उन्नीस से संक्रमित पाए गए हैं। उनकी ड्यूटी कोरोना संक्रमित जोन सेक्टर-आठ, नौ, दस क्षेत्र में थी। वे थाना सेक्टर-बीस के बैरक में रहते थे। उनके साथ जितने भी पुलिसकर्मी बैरक में रहते थे, उन्हें क्वारंटाइन में रखा गया है। उन्होंने बताया कि बैरक व थाने को जिला प्रशासन द्वारा सैनेटाइज किया जा रहा है। थाना सेक्टर-बीस के बैरक में रहने वाले उपनिरीक्षक के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने से थाने में तैनात पुलिसकर्मी अतिरिक्त सावधानी बरत रहे हैं। |
वाराणसी। ग्राम्य विकास मिनिस्ट्रियल एसोसिएशन कार्यकारिणी के चुनाव में शनिवार को विजय प्रताप सिंह को अध्यक्ष व संगीता सिंह को निर्विरोध महामंत्री चुना गया। इसके पूर्व एसोसिएशन की बैठक शनिवार को विकास भवन सभागार में प्रांतीय अध्यक्ष शशिकांत श्रीवास्तव की अध्यक्षता में हुई। जिलाध्यक्ष संतोष कुमार ने पुरानी कार्यकारिणी को भंग करते हुए प्रांतीय अध्यक्ष के नेतृत्व में निर्वाचन का प्रस्ताव रखा। प्रांतीय अध्यक्ष की अनुमति के बाद अध्यक्ष के लिए विजय प्रताप सिंह व मनीष कुमार चौधरी ने नामांकन किया। वहीं चुनाव में विजय प्रताप सिंह को 16 व मनीष चौधरी को सात वोट मिले। नवनिर्वाचित अध्यक्ष को अन्य पदाधिकारी व कार्यकारिणी चुनने की जिम्मेदारी दी गई। इस दौरान शैलेंद्र विक्रम सिंह प्रांतीय उपाध्यक्ष, आशुतोष श्रीवास्तव प्रांतीय कोषाध्यक्ष आदि पदाधिकारी मौजूद रहे।
| वाराणसी। ग्राम्य विकास मिनिस्ट्रियल एसोसिएशन कार्यकारिणी के चुनाव में शनिवार को विजय प्रताप सिंह को अध्यक्ष व संगीता सिंह को निर्विरोध महामंत्री चुना गया। इसके पूर्व एसोसिएशन की बैठक शनिवार को विकास भवन सभागार में प्रांतीय अध्यक्ष शशिकांत श्रीवास्तव की अध्यक्षता में हुई। जिलाध्यक्ष संतोष कुमार ने पुरानी कार्यकारिणी को भंग करते हुए प्रांतीय अध्यक्ष के नेतृत्व में निर्वाचन का प्रस्ताव रखा। प्रांतीय अध्यक्ष की अनुमति के बाद अध्यक्ष के लिए विजय प्रताप सिंह व मनीष कुमार चौधरी ने नामांकन किया। वहीं चुनाव में विजय प्रताप सिंह को सोलह व मनीष चौधरी को सात वोट मिले। नवनिर्वाचित अध्यक्ष को अन्य पदाधिकारी व कार्यकारिणी चुनने की जिम्मेदारी दी गई। इस दौरान शैलेंद्र विक्रम सिंह प्रांतीय उपाध्यक्ष, आशुतोष श्रीवास्तव प्रांतीय कोषाध्यक्ष आदि पदाधिकारी मौजूद रहे। |
भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ आंदोलन करने वाले पहलवानों को ट्रायल में छूट का मामला लगातार तेजी पकड़ रहा है। विनेश फोगाट ने रविवार को सोशल मीडिया पर यह साबित करने के लिए बिना तारीख वाला एक पत्र साझा किया कि प्रदर्शन कर रहे छह पहलवानों ने एशियाई खेलों के ट्रायल्स में छूट देने की मांग नहीं की थी और केवल उन्होंने तैयारी के लिए अगस्त तक समय मांगा था।
विनेश ने इस पत्र की फोटो साझा की, जिसमें उनके सहित छह पहलवानों का जिक्र है, जिन्होंने ट्रायल्स से पहले ट्रेनिंग के लिए कुछ अतिरिक्त समय मांगा था। आईओए के पैनल ने प्रदर्शनकारी इन छह पहलवानों को छूट देते हुए केवल एक मुकाबले का ट्रायल कराने का फैसला किया था, लेकिन कई स्थापित और उभरते हुए पहलवानों ने इसकी आलोचना करते हुए प्रत्येक के लिए निष्पक्ष ट्रायल्स की मांग की थी। विनेश ने हालांकि यह नहीं कहा कि वे पूरे ट्रायल्स में हिस्सा लेने के इच्छुक हैं जैसे कि सभी अन्य पहलवान ले रहे हैं।
खेल मंत्री अनुराग ठाकुर को लिखी इस बिना तारीख वाले पत्र में लिखा है कि निवेदन है कि विरोध प्रदर्शन में शामिल होने वाले कुछ पहलवानों को एशियाई खेल 2023 और विश्व चैम्पियनशिप 2023 के ट्रायल्स की तैयारी के लिए कुछ समय की आवश्यकता है।
हम आंदोलित पहलवानों ने ट्रायल्स को सिर्फ़ आगे बढ़ाने के लिए चिट्ठी लिखी थी, क्योंकि पिछले 6 महीने से आंदोलन में शामिल होने के कारण हम प्रैक्टिस नहीं कर पाए.
| भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ आंदोलन करने वाले पहलवानों को ट्रायल में छूट का मामला लगातार तेजी पकड़ रहा है। विनेश फोगाट ने रविवार को सोशल मीडिया पर यह साबित करने के लिए बिना तारीख वाला एक पत्र साझा किया कि प्रदर्शन कर रहे छह पहलवानों ने एशियाई खेलों के ट्रायल्स में छूट देने की मांग नहीं की थी और केवल उन्होंने तैयारी के लिए अगस्त तक समय मांगा था। विनेश ने इस पत्र की फोटो साझा की, जिसमें उनके सहित छह पहलवानों का जिक्र है, जिन्होंने ट्रायल्स से पहले ट्रेनिंग के लिए कुछ अतिरिक्त समय मांगा था। आईओए के पैनल ने प्रदर्शनकारी इन छह पहलवानों को छूट देते हुए केवल एक मुकाबले का ट्रायल कराने का फैसला किया था, लेकिन कई स्थापित और उभरते हुए पहलवानों ने इसकी आलोचना करते हुए प्रत्येक के लिए निष्पक्ष ट्रायल्स की मांग की थी। विनेश ने हालांकि यह नहीं कहा कि वे पूरे ट्रायल्स में हिस्सा लेने के इच्छुक हैं जैसे कि सभी अन्य पहलवान ले रहे हैं। खेल मंत्री अनुराग ठाकुर को लिखी इस बिना तारीख वाले पत्र में लिखा है कि निवेदन है कि विरोध प्रदर्शन में शामिल होने वाले कुछ पहलवानों को एशियाई खेल दो हज़ार तेईस और विश्व चैम्पियनशिप दो हज़ार तेईस के ट्रायल्स की तैयारी के लिए कुछ समय की आवश्यकता है। हम आंदोलित पहलवानों ने ट्रायल्स को सिर्फ़ आगे बढ़ाने के लिए चिट्ठी लिखी थी, क्योंकि पिछले छः महीने से आंदोलन में शामिल होने के कारण हम प्रैक्टिस नहीं कर पाए. |
सिक ताप और दुर्गति श्रादि का वर्णन करना चाहिए और उसके कार्यस्वरूप में शरीर के उपस्करण ( वेष, भूपा, स्नान, भोजन घाटि ) का त्याग दिखाना चाहिए । जिस मनुष्य का टैन्य दिखाना हो, उसके वर्णन में पहले पूर्वोक कारणों में से एक या अनेक का वर्णन इस प्रकार करना चाहिए, जिससे उस (न्य ) की स्वाभाविकता श्रोता को हृदयगम हो जाय । सुननेवाला उस टैन्य को बनावटी न समझे वह यह समझे कि 'दन्य' उत्पन्न होने के पुष्कल कारण मौजूद है। इसके बाद उस दीनता के कार्यों का वर्णन होना चाहिए ।
उदाहरण -
'हतकेन मया वनान्तरे वनजाती महमा विवासिता
अधुना मम कुत्र मा सती पतितस्येव परा मरस्वती ।
सीता का परित्याग करने के याद दुःखित हृदय राम के यह टैन्य पूर्ण उद्गार है। वह कहते हैं कि मेरे जैसे 'हतक' क्षुद्र पातकी ने उस कमलनयनी को 'सहसा ' ( विनाविचारे ही ) वनवास दे दिया । छात्र वह सती मुझे कहाँ मिल सकती है ? मुझसे वह उसी प्रकार दूर हो गई, जैसे पतित पुरुष से वेदविद्या दूर हो जाती है । 'सहसा ' कहने से मालूम होता है कि राम इस समय सीता को निर्दोष समझ रहे है और उस निरपराधिनी को विना विचारे घोरतम दण्ड दे डालने के कारण अपने को अप राधी और पातकी समझ रहे हैं। कमलनयनी कहने से सीता की सुकुमारता, भोलापन और सौंदर्यातिशय प्रतीत होता है। उसके ये गुण इस समय राम के हृदय में रह-रहकर शल्य की तरह मर्मान्तिक वेदना पैदा कर रहे हैं। ऐमी भोली, सुन्दर सुकुमारी को विना किसी अपराध के 'वनान्तर' घोर निर्जन वन में छोड़ देना कितना कठोर दण्ढ है । और वह भी उसी के प्राणाधार के द्वारा, जिनके लिये उसने कैसी-कैसी घोर यातनाएँ सहीं !!! इस पद्य के तीसरे चरण ( अव वह सती मुझे कहाँ मिल सकती है ) से राम के हृदय की उरकण्ठा और साथ ही निराशा प्रतीत होती है। ये सब राम की दीनता के कारण हैं और अपने को पतित की उपमा देना एव अव्र पातकी बताना उस दैन्य के कार्य है । मन में ढैन्य उत्पन्न होने पर मनुष्य अपने को दोन, द्दीन, नीच, पतित समझने लगता है।
'रत्यायासमनस्तापक्षुत्पिपासादिसम्भवा । ग्लानिर्निष्प्राणता कम्पकार्यानुत्साहतादित् ।' परिश्रम, दुःख, भूख, प्यास श्रादि के कारण उत्पन्न हुई विशेष निर्बलता का नाम ग्लानि है । इससे देह का काँपना किसी काम में उत्साह न होना आदि होते हैं । 'तत्त्वज्ञानाऽऽपढीदेनिंर्वेदः स्वावमाननम् । दैन्यचिन्तामुनि शामवैवर्योच्कारीतादित् ।'
तत्वज्ञान ( भात्मज्ञान श्रथवा विषयों की नश्वरता के ज्ञान ) के कारण अथवा पति और ईर्ष्या यादि के कारण उत्पन्न हुई उस चित्तवृत्ति को 'निर्वेद' कहते है, जिसमें मनुष्य स्वय = अपने-चाप अपना अपमान करने लगता है। इस निर्वेद के कारण दैन्य, चिन्ता, चाँसू बहाना, दीर्घ निश्वास और विवर्णता ( चेहरे का रंग उतर जाना ) यादि कार्य उत्पन्न होने हैं। जैसे'मृत्कुम्मवालुकारन्ध्रपिधानरचनार्थिना । दक्षिणावर्तशोय हन्त चूर्णांतो मया ॥
अपने पूर्व-जीवन को विषय-सुखों की साधना में नष्ट हुआ देखकर किसी निर्विरण पुरष की यह कि है। मिट्टी के घड़े के छेद को बंद करने के लिये मैंने अपना | सिक ताप और दुर्गति श्रादि का वर्णन करना चाहिए और उसके कार्यस्वरूप में शरीर के उपस्करण का त्याग दिखाना चाहिए । जिस मनुष्य का टैन्य दिखाना हो, उसके वर्णन में पहले पूर्वोक कारणों में से एक या अनेक का वर्णन इस प्रकार करना चाहिए, जिससे उस की स्वाभाविकता श्रोता को हृदयगम हो जाय । सुननेवाला उस टैन्य को बनावटी न समझे वह यह समझे कि 'दन्य' उत्पन्न होने के पुष्कल कारण मौजूद है। इसके बाद उस दीनता के कार्यों का वर्णन होना चाहिए । उदाहरण - 'हतकेन मया वनान्तरे वनजाती महमा विवासिता अधुना मम कुत्र मा सती पतितस्येव परा मरस्वती । सीता का परित्याग करने के याद दुःखित हृदय राम के यह टैन्य पूर्ण उद्गार है। वह कहते हैं कि मेरे जैसे 'हतक' क्षुद्र पातकी ने उस कमलनयनी को 'सहसा ' वनवास दे दिया । छात्र वह सती मुझे कहाँ मिल सकती है ? मुझसे वह उसी प्रकार दूर हो गई, जैसे पतित पुरुष से वेदविद्या दूर हो जाती है । 'सहसा ' कहने से मालूम होता है कि राम इस समय सीता को निर्दोष समझ रहे है और उस निरपराधिनी को विना विचारे घोरतम दण्ड दे डालने के कारण अपने को अप राधी और पातकी समझ रहे हैं। कमलनयनी कहने से सीता की सुकुमारता, भोलापन और सौंदर्यातिशय प्रतीत होता है। उसके ये गुण इस समय राम के हृदय में रह-रहकर शल्य की तरह मर्मान्तिक वेदना पैदा कर रहे हैं। ऐमी भोली, सुन्दर सुकुमारी को विना किसी अपराध के 'वनान्तर' घोर निर्जन वन में छोड़ देना कितना कठोर दण्ढ है । और वह भी उसी के प्राणाधार के द्वारा, जिनके लिये उसने कैसी-कैसी घोर यातनाएँ सहीं !!! इस पद्य के तीसरे चरण से राम के हृदय की उरकण्ठा और साथ ही निराशा प्रतीत होती है। ये सब राम की दीनता के कारण हैं और अपने को पतित की उपमा देना एव अव्र पातकी बताना उस दैन्य के कार्य है । मन में ढैन्य उत्पन्न होने पर मनुष्य अपने को दोन, द्दीन, नीच, पतित समझने लगता है। 'रत्यायासमनस्तापक्षुत्पिपासादिसम्भवा । ग्लानिर्निष्प्राणता कम्पकार्यानुत्साहतादित् ।' परिश्रम, दुःख, भूख, प्यास श्रादि के कारण उत्पन्न हुई विशेष निर्बलता का नाम ग्लानि है । इससे देह का काँपना किसी काम में उत्साह न होना आदि होते हैं । 'तत्त्वज्ञानाऽऽपढीदेनिंर्वेदः स्वावमाननम् । दैन्यचिन्तामुनि शामवैवर्योच्कारीतादित् ।' तत्वज्ञान के कारण अथवा पति और ईर्ष्या यादि के कारण उत्पन्न हुई उस चित्तवृत्ति को 'निर्वेद' कहते है, जिसमें मनुष्य स्वय = अपने-चाप अपना अपमान करने लगता है। इस निर्वेद के कारण दैन्य, चिन्ता, चाँसू बहाना, दीर्घ निश्वास और विवर्णता यादि कार्य उत्पन्न होने हैं। जैसे'मृत्कुम्मवालुकारन्ध्रपिधानरचनार्थिना । दक्षिणावर्तशोय हन्त चूर्णांतो मया ॥ अपने पूर्व-जीवन को विषय-सुखों की साधना में नष्ट हुआ देखकर किसी निर्विरण पुरष की यह कि है। मिट्टी के घड़े के छेद को बंद करने के लिये मैंने अपना |
मैं मर जाऊंगा. . . तो क्या तुम भी मर जाओगी? पति के इस सवाल पर पत्नी ने जहर खा लिया। उसे जहर खाता देख पति ने भी जहर खा लिया। दोनों को हालत बिगड़ने पर परिजन बबेरू सीएचसी ले गए। वहां से डॉक्टरों ने उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
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| मैं मर जाऊंगा. . . तो क्या तुम भी मर जाओगी? पति के इस सवाल पर पत्नी ने जहर खा लिया। उसे जहर खाता देख पति ने भी जहर खा लिया। दोनों को हालत बिगड़ने पर परिजन बबेरू सीएचसी ले गए। वहां से डॉक्टरों ने उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi. |
अबु ताहेर बेपारी करीब दो साल पहले धोखे का आरोप लगाते हुए कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। सोमवार को वह फिर से कांग्रेस में शामिल हो गए। बेपारी असम में पंचायत चुनावों से पहले कांग्रेस में लौटे हैं। बेपारी ने लोगों से उन्हें माफ करने का अनुरोध किया।
बेपारी ने कहा भाजपा में शामिल होकर उन्होंने जो गलती की थी, अब उसे सही करने का वक्त है। बेपारी अल्पसंख्यक समुदाय से प्रतिष्ठित नेता हैं। उन्होंने सोमवार को असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद रिपुन बोरा की मौजूदगी में कांग्रेस में शामिल हुए। धुबरी जिले के बेलगुरी एचएस स्कूल प्लेग्राउंड में एक रैली के दौरान बेपारी कांग्रेस में शामिल हुए।
बेपारी दो बार 2006 और 2011 में गोलाकगंज विधानसभा सीट से चुनाव जीत चुके हैं। 2016 में विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने भाजपा से हाथ मिलाया था। उन्हें भाजपा से टिकट मिलने की उम्मीद थी लेकिन पार्टी ने अश्वनी रॉय सरकार को गोलाकजंग से टिकट दे दिया। उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी उम्मीदवार कांग्रेस के अबुदस सोबाहान अली सरकार को 6,391 वोटों से हराया था।
बेपारी ने कहा, देश में सिर्फ कांग्रेस ही उम्मीद है क्योंकि लोग भाजपा के नेतृत्व वाली केन्द्र व असम सरकार से निराश हैं। इस वजह से मैं कांग्रेस में लौटा हूं क्योंकि असम में कोई अन्य विकल्प नहीं है। इस मौके पर रिपुन बोरा ने नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार और सर्वानंद सोनोवाल के नेतृत्व वाली असम सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि दोनों सरकारों ने अच्छे दिन के नाम पर लोगों को ठगा है।
बोरा ने कहा कि मोदी सरकार सिर्फ पूूंजीपतियों के लिए है। कांग्रेस के शासन के दौरान आम लोगों के कल्याण के लिए 133 से ज्यादा योजनाएं थी जबकि मोदी शासन में मेक इन इंडिया और स्टार्ट अप्स जैसी योजनाएं अडानी और अंबानी की मल्टीनेशनल्स को डेवलप करने के लिए लॉन्च की गई। बोरा ने वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की उनकी हालिया पॉपुलेशन बिल की पहल के लिए आलोचना की।
| अबु ताहेर बेपारी करीब दो साल पहले धोखे का आरोप लगाते हुए कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। सोमवार को वह फिर से कांग्रेस में शामिल हो गए। बेपारी असम में पंचायत चुनावों से पहले कांग्रेस में लौटे हैं। बेपारी ने लोगों से उन्हें माफ करने का अनुरोध किया। बेपारी ने कहा भाजपा में शामिल होकर उन्होंने जो गलती की थी, अब उसे सही करने का वक्त है। बेपारी अल्पसंख्यक समुदाय से प्रतिष्ठित नेता हैं। उन्होंने सोमवार को असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद रिपुन बोरा की मौजूदगी में कांग्रेस में शामिल हुए। धुबरी जिले के बेलगुरी एचएस स्कूल प्लेग्राउंड में एक रैली के दौरान बेपारी कांग्रेस में शामिल हुए। बेपारी दो बार दो हज़ार छः और दो हज़ार ग्यारह में गोलाकगंज विधानसभा सीट से चुनाव जीत चुके हैं। दो हज़ार सोलह में विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने भाजपा से हाथ मिलाया था। उन्हें भाजपा से टिकट मिलने की उम्मीद थी लेकिन पार्टी ने अश्वनी रॉय सरकार को गोलाकजंग से टिकट दे दिया। उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी उम्मीदवार कांग्रेस के अबुदस सोबाहान अली सरकार को छः,तीन सौ इक्यानवे वोटों से हराया था। बेपारी ने कहा, देश में सिर्फ कांग्रेस ही उम्मीद है क्योंकि लोग भाजपा के नेतृत्व वाली केन्द्र व असम सरकार से निराश हैं। इस वजह से मैं कांग्रेस में लौटा हूं क्योंकि असम में कोई अन्य विकल्प नहीं है। इस मौके पर रिपुन बोरा ने नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार और सर्वानंद सोनोवाल के नेतृत्व वाली असम सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि दोनों सरकारों ने अच्छे दिन के नाम पर लोगों को ठगा है। बोरा ने कहा कि मोदी सरकार सिर्फ पूूंजीपतियों के लिए है। कांग्रेस के शासन के दौरान आम लोगों के कल्याण के लिए एक सौ तैंतीस से ज्यादा योजनाएं थी जबकि मोदी शासन में मेक इन इंडिया और स्टार्ट अप्स जैसी योजनाएं अडानी और अंबानी की मल्टीनेशनल्स को डेवलप करने के लिए लॉन्च की गई। बोरा ने वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की उनकी हालिया पॉपुलेशन बिल की पहल के लिए आलोचना की। |
प्रोफेसरः तो अगर यह उन्हें प्रदान किया जाये तो यह कहीं अधिक बेहतर होगा। छात्रों को बस इसमे योगदान करना होगा और इसे समृद्ध और बेहतर बनाना होगा।
नितिन कुरियनः मुझे लगता है कि योगदान से अधिक समय संपादन लेगा। बेस कंटैंट का वास्तविक संपादन कर अंतिम नोट्स को प्राप्त करना अधिकतम समय और प्रयास लेगा। तो यदि आप मुझसे एक छात्र के रूप में मेरे सभी नोट्स को रिपॉजिटरी में अपलोड करने के लिए कहते हैं, तो इसमें बहुत समय नहीं लगेगा लेकिन अगर आप मुझे बैठ कर संपादित करने और यह देखने के लिए कहते है कि क्या सामग्री अंतिम नोट्स मे जानी चाहिए तो इसमे अधिक समय लगेगा।
सिद्धार्थ मटूरीः यह फिर से प्रशासक की मौजूदगी पर निर्भर करेगा। यदि स्कूल प्रशासक प्रदान करता है, तो छात्रों के लिए समय कम लगेगा। यदि छात्र अपने स्वयं के इन्फ्रा को बनाए रख रहे हैं और खुद या को शिक्षक इस सिस्टम में एक प्रशासक की भूमिका में हैं तो उन्हें इस प्रक्रिया में अधिक समय निवेश करना पड़ेगा। और मेरे हिसाब से अधिकतम समय संपादन और समीक्षा भाग मे लगेगा।
नितिन कुरियनः हाँ! समीक्षा आदि बहुत समय लेगा।
प्रोफेसरः ठीक है! तो मुझे लगता है कि आपको एक रिपॉजिटरी चाहिए जो एक ऐसी प्रणाली पर हो जो स्कूल के पास है या एक ऐसी एडहॉक प्रणाली है जिसे छात्रों ने संयुक्त रूप से विकसित किया हो जहां वह शिक्षण सामग्री प्रदान कर सके तथा पढ़ भी सकें। यही आपके लिए शुरुआती बिंदु है। इस स्तर पर मैं आपसे चाहूँगा की आप लिख ले कि ऐसी कौन सी विशेषताएँ हैं जो इसमे से उजागर हो रही है। आप कैसे इस बात का वर्णन करेंगे की इस रिपॉजिटरी मे ये चीजें हैं जो हमें चाहिए। इसके लिए आपको विशेषताएँ तय करनी होंगी।
मान लीजिए कि आप एक रिपॉजिटरी की तलाश कर रहे हैं, तो इसमें क्या-क्या विशेषताएं या फ़ीचर होनी चाहिए? यदि आप सारी विशेषताओं को लिख कर समायोजित कर सकते है तो इसका निर्माण करना आपके लिए आसान होगा। यदि कोई विशेषता या फ़ीचर इनमे नहीं है तो आप उसका निर्माण कर सकते हैं। यदि है तो आप उसमें कुछ अच्छे बदलाव खोज सकते हैं। इस पूरी प्रक्रिया को पूर्ण करने का यही हमारा अगला कदम होगा।
सिद्धार्थ मटूरीः और वो होगा, बेसिक क्लाउड इंफ्रा ।
नितिन कुरियनः हाँ! बेसिक क्लाउड इंफ्रा।
(स्लाइड समय देखेंः 32:14 )
| प्रोफेसरः तो अगर यह उन्हें प्रदान किया जाये तो यह कहीं अधिक बेहतर होगा। छात्रों को बस इसमे योगदान करना होगा और इसे समृद्ध और बेहतर बनाना होगा। नितिन कुरियनः मुझे लगता है कि योगदान से अधिक समय संपादन लेगा। बेस कंटैंट का वास्तविक संपादन कर अंतिम नोट्स को प्राप्त करना अधिकतम समय और प्रयास लेगा। तो यदि आप मुझसे एक छात्र के रूप में मेरे सभी नोट्स को रिपॉजिटरी में अपलोड करने के लिए कहते हैं, तो इसमें बहुत समय नहीं लगेगा लेकिन अगर आप मुझे बैठ कर संपादित करने और यह देखने के लिए कहते है कि क्या सामग्री अंतिम नोट्स मे जानी चाहिए तो इसमे अधिक समय लगेगा। सिद्धार्थ मटूरीः यह फिर से प्रशासक की मौजूदगी पर निर्भर करेगा। यदि स्कूल प्रशासक प्रदान करता है, तो छात्रों के लिए समय कम लगेगा। यदि छात्र अपने स्वयं के इन्फ्रा को बनाए रख रहे हैं और खुद या को शिक्षक इस सिस्टम में एक प्रशासक की भूमिका में हैं तो उन्हें इस प्रक्रिया में अधिक समय निवेश करना पड़ेगा। और मेरे हिसाब से अधिकतम समय संपादन और समीक्षा भाग मे लगेगा। नितिन कुरियनः हाँ! समीक्षा आदि बहुत समय लेगा। प्रोफेसरः ठीक है! तो मुझे लगता है कि आपको एक रिपॉजिटरी चाहिए जो एक ऐसी प्रणाली पर हो जो स्कूल के पास है या एक ऐसी एडहॉक प्रणाली है जिसे छात्रों ने संयुक्त रूप से विकसित किया हो जहां वह शिक्षण सामग्री प्रदान कर सके तथा पढ़ भी सकें। यही आपके लिए शुरुआती बिंदु है। इस स्तर पर मैं आपसे चाहूँगा की आप लिख ले कि ऐसी कौन सी विशेषताएँ हैं जो इसमे से उजागर हो रही है। आप कैसे इस बात का वर्णन करेंगे की इस रिपॉजिटरी मे ये चीजें हैं जो हमें चाहिए। इसके लिए आपको विशेषताएँ तय करनी होंगी। मान लीजिए कि आप एक रिपॉजिटरी की तलाश कर रहे हैं, तो इसमें क्या-क्या विशेषताएं या फ़ीचर होनी चाहिए? यदि आप सारी विशेषताओं को लिख कर समायोजित कर सकते है तो इसका निर्माण करना आपके लिए आसान होगा। यदि कोई विशेषता या फ़ीचर इनमे नहीं है तो आप उसका निर्माण कर सकते हैं। यदि है तो आप उसमें कुछ अच्छे बदलाव खोज सकते हैं। इस पूरी प्रक्रिया को पूर्ण करने का यही हमारा अगला कदम होगा। सिद्धार्थ मटूरीः और वो होगा, बेसिक क्लाउड इंफ्रा । नितिन कुरियनः हाँ! बेसिक क्लाउड इंफ्रा। |
बिहार में बिजली के दाम में बढ़ोतरी करने के प्रस्ताव पर 5 अगस्त को सुनवाई होगी। राज्य की बिजली कंपनियों ने नुकसान की भरपाई के लिए बिजली की दरों में बढ़ोतरी की मांग की है।
बिहार में बिजली उपभोक्ताओं को महंगाई का झटका लग सकता है। बिजली दरों में बढ़ोतरी के प्रसत्वा पर 5 अगस्त को सुनवाई की जाएगी। बिहार विद्युत विनियामाक आयोग ने मार्च 2022 में बिजली दरों में बढ़ोतरी नहीं की थी। आयोग के इस फैसले के खिलाफ राज्य की बिजली कंपनियों ने रिव्यू पिटीशन दायर किया, जिसे आयोग ने मंजूर कर लिया। अब आयोग बिजली कंपनी और ग्राहकों का पक्ष सुनकर इस प्रस्ताव पर सुनवाई करेगा। सुनवाई की तारीख 5 अगस्त तय की गई है।
बताया जा रहा है कि कोरोना काल में बिजली बिल वसूली में कमी आने से कंपनियों को खासा नुकसान उठाना पड़ा। नवंबर 2021 में बिजली कंपनियों ने विनियामक आयोग को बिजली दरों में 9. 90 फीसदी की बढ़ोतरी की मांग की थी। हालांकि, आयोग ने आम जनता के हित में फैसला लेते हुए मार्च 2022 में इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। राज्य में मौजूदा साल में बिजली के दाम में बढ़ोतरी नहीं हुई। इस प्रस्ताव की दरें 31 मार्च 2023 तक लागू है।
अब साउथ बिहार, नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन और बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने रिव्यू पिटीशन दायर किया है। इसमें कंपनियों ने मांग की है कि उन्हें 15 फीसदी की जगह 19. 50 फीसदी लॉस की मंजूरी दी जाए। आयोग ने अपने फैसले में वित्त वर्ष 2022-23 में 15 फीसदी लॉस की मंजूरी दी थी। इससे ज्यादा का नुकसान कंपनी को खुद ही उठाना पड़ेगा। अब बिजली कंपनियों ने इसकी सीमा 15 से बढ़ाकर 19. 50 फीसदी करने की मांग की है। अगर ये प्रस्ताव मंजूर होता है, तो इसका सीधा असर आम आदमी पर पड़ेगा। बिजली के दाम में करीब 10 फीसदी तक बढ़ोतरी होने की आशंका है।
बिहार में अभी शहरी घरेलू उपभोक्ताओं को 100 यूनिट तक 6. 10 रुपये प्रति यूनिट की दर से पैसा लिया जाता है, हालांकि इस पर सरकार 1. 83 रुपये का अनुदान भी देती है। वहीं 101 से 200 यूनिट तक 6. 95 रुपये और 200 यूनिट से ऊपर 8. 05 रुपये प्रति यूनिट रेट है। ग्रामीण इलाकों में रहने वाले घरेलू उपभोक्ताओं को 50 यूनिट तक 6. 10 रुपये, 51 से 100 यूनिट तक 6. 40 रुपये और 100 यूनिट से ज्यादा होने पर 6. 70 रुपये वसूले जाते हैं। हालांकि, इस पर करीब साढ़े तीन रुपये प्रति यूनिट की दर से अनुदान मिलता है।
| बिहार में बिजली के दाम में बढ़ोतरी करने के प्रस्ताव पर पाँच अगस्त को सुनवाई होगी। राज्य की बिजली कंपनियों ने नुकसान की भरपाई के लिए बिजली की दरों में बढ़ोतरी की मांग की है। बिहार में बिजली उपभोक्ताओं को महंगाई का झटका लग सकता है। बिजली दरों में बढ़ोतरी के प्रसत्वा पर पाँच अगस्त को सुनवाई की जाएगी। बिहार विद्युत विनियामाक आयोग ने मार्च दो हज़ार बाईस में बिजली दरों में बढ़ोतरी नहीं की थी। आयोग के इस फैसले के खिलाफ राज्य की बिजली कंपनियों ने रिव्यू पिटीशन दायर किया, जिसे आयोग ने मंजूर कर लिया। अब आयोग बिजली कंपनी और ग्राहकों का पक्ष सुनकर इस प्रस्ताव पर सुनवाई करेगा। सुनवाई की तारीख पाँच अगस्त तय की गई है। बताया जा रहा है कि कोरोना काल में बिजली बिल वसूली में कमी आने से कंपनियों को खासा नुकसान उठाना पड़ा। नवंबर दो हज़ार इक्कीस में बिजली कंपनियों ने विनियामक आयोग को बिजली दरों में नौ. नब्बे फीसदी की बढ़ोतरी की मांग की थी। हालांकि, आयोग ने आम जनता के हित में फैसला लेते हुए मार्च दो हज़ार बाईस में इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। राज्य में मौजूदा साल में बिजली के दाम में बढ़ोतरी नहीं हुई। इस प्रस्ताव की दरें इकतीस मार्च दो हज़ार तेईस तक लागू है। अब साउथ बिहार, नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन और बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने रिव्यू पिटीशन दायर किया है। इसमें कंपनियों ने मांग की है कि उन्हें पंद्रह फीसदी की जगह उन्नीस. पचास फीसदी लॉस की मंजूरी दी जाए। आयोग ने अपने फैसले में वित्त वर्ष दो हज़ार बाईस-तेईस में पंद्रह फीसदी लॉस की मंजूरी दी थी। इससे ज्यादा का नुकसान कंपनी को खुद ही उठाना पड़ेगा। अब बिजली कंपनियों ने इसकी सीमा पंद्रह से बढ़ाकर उन्नीस. पचास फीसदी करने की मांग की है। अगर ये प्रस्ताव मंजूर होता है, तो इसका सीधा असर आम आदमी पर पड़ेगा। बिजली के दाम में करीब दस फीसदी तक बढ़ोतरी होने की आशंका है। बिहार में अभी शहरी घरेलू उपभोक्ताओं को एक सौ यूनिट तक छः. दस रुपयापये प्रति यूनिट की दर से पैसा लिया जाता है, हालांकि इस पर सरकार एक. तिरासी रुपयापये का अनुदान भी देती है। वहीं एक सौ एक से दो सौ यूनिट तक छः. पचानवे रुपयापये और दो सौ यूनिट से ऊपर आठ. पाँच रुपयापये प्रति यूनिट रेट है। ग्रामीण इलाकों में रहने वाले घरेलू उपभोक्ताओं को पचास यूनिट तक छः. दस रुपयापये, इक्यावन से एक सौ यूनिट तक छः. चालीस रुपयापये और एक सौ यूनिट से ज्यादा होने पर छः. सत्तर रुपयापये वसूले जाते हैं। हालांकि, इस पर करीब साढ़े तीन रुपये प्रति यूनिट की दर से अनुदान मिलता है। |
लोकसभा सांसद चिराग पासवान ने अपने दिवंगत पिता रामविलास पासवान को आवंटित बंगला बुधवार को खाली कर दिया। इससे पहले उन्हें पिछले साल जारी किए गए एक निष्कासन आदेश को अमल में लाने के लिए एक सरकारी टीम यहां भेजी गई थी। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के तहत आने वाले संपदा निदेशालय की एक टीम के वहां पर पहुंचने के तुरंत बाद लुटियंस दिल्ली में जनपथ स्थित बंगले से फर्नीचर और घरेलू सामान ले जाया गया।
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
| लोकसभा सांसद चिराग पासवान ने अपने दिवंगत पिता रामविलास पासवान को आवंटित बंगला बुधवार को खाली कर दिया। इससे पहले उन्हें पिछले साल जारी किए गए एक निष्कासन आदेश को अमल में लाने के लिए एक सरकारी टीम यहां भेजी गई थी। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के तहत आने वाले संपदा निदेशालय की एक टीम के वहां पर पहुंचने के तुरंत बाद लुटियंस दिल्ली में जनपथ स्थित बंगले से फर्नीचर और घरेलू सामान ले जाया गया। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi. |
बॉलीवुड डेस्क, मुंबई. बॉलीवुड एक्ट्रेस जरीन खान अपने बोल्ड और सेक्सी लुक के लिए जानी जाती हैं. अक्सर इंटरनेट पर जरीन खान का बोल्ड लुक वायरल रहता हैं. एक बार फिर सोशल मीडिया पर जरीन खान का सेक्सी वीडियो इंटरनेट पर काफी तेजी से वायरल हो रहा हैं. वायरल वीडियो में जरीन खान गोल्डन गाउन में नजर आ रही हैं. उनके सेक्सी लुक को फैंस काफी पसंद कर रहे हैं.
जरीन खान ने गोल्डन गाउन के साथ रेड कलर की लिपस्टिक कैरी की हुई हैं. रेड कलर की लिपस्टिक में जरीन खान गजब की सेक्सी और बोल्ड लग रही हैं. उनके इस बोल्ड और हॉट लुक को फैंस काफी पसंद कर रहे हैं. खुले बालों और स्मोकि आईं में जरीन खान बेहद ही खूबसूरत लग रही हैं. उनके फैंस उनके इस हॉट लुक को काफी पसंद कर रहे हैं. ऐसा पहली बार हुआ है जब जरीन खान का सेक्सी वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुआ हो,
जरीन खान के करियर की बात करें तो जरीन खान ने सलमान खान के साथ फिल्म वीर से बॉलीवुड में डेब्यू किया था. फिल्म वीर में वह सलमान खान के साथ मुख्य किरदार में नजर आईं थीं. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर विफल हुई थी, लेकिन जरीन खान को काफी पहचान मिली थी. जरीन खान के लिए कहा जाता है कि वह बॉलीवुड एक्ट्रेस कैटरीना कैफ की तरह नजर आती हैं. फिल्म वीर में उनके कैटरीना कैफ की हमशक्ल के तौर पर देखा गया था.
जरीन खान इसके बाद कई फिल्मों में नजर आईं है लेकिन उनकी फिल्म सिल्वर स्क्रीन पर दर्शको का दिल जीतने में कामयाब नहीं हो पाईं थी. आखिरी बार जरीन खान हेड स्टोरी 3 में नजर आईं थी. जरीन खान सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. अक्सर इंटरनेट पर जरीन खान का सेक्सी और बोल्ड लुक वायरल रहता हैं. जरीन खान का इंस्टाग्राम उनकी सेक्सी फोटो और वीडियो से भरा हुआ हैं. जरीन खान अक्सर इंस्टाग्राम अपनी सेक्सी फोटो और वीडियो शेयर कर फैंस को इंप्रेस करती रहती हैं.
| बॉलीवुड डेस्क, मुंबई. बॉलीवुड एक्ट्रेस जरीन खान अपने बोल्ड और सेक्सी लुक के लिए जानी जाती हैं. अक्सर इंटरनेट पर जरीन खान का बोल्ड लुक वायरल रहता हैं. एक बार फिर सोशल मीडिया पर जरीन खान का सेक्सी वीडियो इंटरनेट पर काफी तेजी से वायरल हो रहा हैं. वायरल वीडियो में जरीन खान गोल्डन गाउन में नजर आ रही हैं. उनके सेक्सी लुक को फैंस काफी पसंद कर रहे हैं. जरीन खान ने गोल्डन गाउन के साथ रेड कलर की लिपस्टिक कैरी की हुई हैं. रेड कलर की लिपस्टिक में जरीन खान गजब की सेक्सी और बोल्ड लग रही हैं. उनके इस बोल्ड और हॉट लुक को फैंस काफी पसंद कर रहे हैं. खुले बालों और स्मोकि आईं में जरीन खान बेहद ही खूबसूरत लग रही हैं. उनके फैंस उनके इस हॉट लुक को काफी पसंद कर रहे हैं. ऐसा पहली बार हुआ है जब जरीन खान का सेक्सी वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुआ हो, जरीन खान के करियर की बात करें तो जरीन खान ने सलमान खान के साथ फिल्म वीर से बॉलीवुड में डेब्यू किया था. फिल्म वीर में वह सलमान खान के साथ मुख्य किरदार में नजर आईं थीं. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर विफल हुई थी, लेकिन जरीन खान को काफी पहचान मिली थी. जरीन खान के लिए कहा जाता है कि वह बॉलीवुड एक्ट्रेस कैटरीना कैफ की तरह नजर आती हैं. फिल्म वीर में उनके कैटरीना कैफ की हमशक्ल के तौर पर देखा गया था. जरीन खान इसके बाद कई फिल्मों में नजर आईं है लेकिन उनकी फिल्म सिल्वर स्क्रीन पर दर्शको का दिल जीतने में कामयाब नहीं हो पाईं थी. आखिरी बार जरीन खान हेड स्टोरी तीन में नजर आईं थी. जरीन खान सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. अक्सर इंटरनेट पर जरीन खान का सेक्सी और बोल्ड लुक वायरल रहता हैं. जरीन खान का इंस्टाग्राम उनकी सेक्सी फोटो और वीडियो से भरा हुआ हैं. जरीन खान अक्सर इंस्टाग्राम अपनी सेक्सी फोटो और वीडियो शेयर कर फैंस को इंप्रेस करती रहती हैं. |
लखनऊ। महराजगंज जिले के कोल्हुई थाना क्षेत्र में रविवार को शादी के दौरान बवाल हो गया. मौलवी जब शादी करवा रहा था तो दूल्हा कुछ उर्दू शब्दों के उच्चारण में फंस गया। इससे लोगों को शक हुआ।
पूछताछ शुरू हुई तो दूल्हे की पोल खुल गई। वह दूसरे धर्म से निकला था। इस पर हंगामा शुरू हो गया। लोगों ने दूल्हे को पीटना शुरू कर दिया। भागने के प्रयास में घरवालों ने बारात में से कुछ को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया।
| लखनऊ। महराजगंज जिले के कोल्हुई थाना क्षेत्र में रविवार को शादी के दौरान बवाल हो गया. मौलवी जब शादी करवा रहा था तो दूल्हा कुछ उर्दू शब्दों के उच्चारण में फंस गया। इससे लोगों को शक हुआ। पूछताछ शुरू हुई तो दूल्हे की पोल खुल गई। वह दूसरे धर्म से निकला था। इस पर हंगामा शुरू हो गया। लोगों ने दूल्हे को पीटना शुरू कर दिया। भागने के प्रयास में घरवालों ने बारात में से कुछ को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। |
श्वर्गकी सीढ़ी ।.
निडरता के अन्दर है, पहले जिसमें निडरपन हो इसमें ये सब गुण आ सकते हैं। इससे दैवी सम्पत्ति छब्बीस लक्ष खोमें निडरताको पहला नम्बर दिया है। इसलिये, हर एक, हरिजनको अपना धर्म पालने में हमेशा निडर रहना चाहिये । बिना निडर हुए, कोई ईश्वरके सामने नहीं जा सकता और न उसको मोक्ष हो सकता । इसलिये किसीसे न डरनेको भगवानने दैवी सम्पत्तिका पहला लक्षण माना है। सब हरिअनको यह गुण प्राप्त करनेकी खास चेष्टा करनी चाहिये । निडरता दैवी सम्पत्तिकी नीच है, इसलिये जब नीव मजबूत होगी तब इमारत टिक सकेगी। जब नीवका ही ठिकाना न होगा तब ऊपरकी सब छाजन निकम्मी हो जायगी। इसलिये ऐसा कीजिये कि नीव मजबूत हो ।
हम अपनी आत्माका बल नहीं जानते इससे डरा करते हैं।
भाइयो ! दैवी- सम्पत्तिका मूल पाया अभय है यह बात सच है पर यह अभयपन कब आता है यह आपको मालूम है ? और इस समय जो हममें अभयपन नहीं है इसका कारण आप जानते हैं ? अगर ये दो मूल बातें हमारी समझ में आ जायँ तो हम भासानी से निडर हो सकते हैं। इसलिये यह भेद समझने की कोशिश करनी चाहिये। इसके लिये महात्मा लोग कहते हैं कि हमने अपने मालिकको नहीं पहचाना है इससे इमको डर हुआ करता है, हमने अनन्त ब्रम्हाण्डके नाथकी शरण नहीं ली है इससे हम मेंडकोंसे डरा करते हैं, और हम असली वस्तुको नहीं पहचानते इससे हजारों तरहको माहककी दहशत रखते हैं। अगर हमारी समझमे भाजाय, कि हम
डर मिटानेका उत्तम और सहज उपाय ।
कौन हैं, हमारा मालिक कौन है और जिन चीजसे हम डरा करते हैं उनका वलं कितना है- इन सब विषयोंको भगर हम ठीक ठीक समझ लें- तो फिर किसी चीजसे हमें डरन हो। क्योंकि हम मात्मा है, हम परमात्माके अंश है, हम ईश्वरके बालक हैं, सर्वशक्तिमान महान परमात्मामें जितने गुण तथा जितनी शक्तियाँ हैं वे सय गुण तथा वे सब शक्तियाँ हमारी औकातके अन्दाजसे हममें भी हैं और ये सब देवी गुण तथा अलौकिक शक्तियां जगतकी और सब चीजोंसे' हजार गुनी श्रेष्ठ हैं। जगतकी सब चीजोपर राज्य करने के लिये परम कृपालु परमात्माने हमें यहाँ भेजा है, कुछ चीजोंने डरकर रोया करने के लिये हमे यहाँ नहीं भेजा है। इसलिये हमें बेडर होकर इस संसार में रहना चाहिये औरं सय वस्तुऑको प्रभुके नामसँ, प्रभुके लिये हमें अपने अधिकार में रखना चाहिये । इसके बदलें छोटी छोटी वस्तुओंसे डरा करना हमारी कितनी बड़ी नालायकी है ? हे भगवान ! ऐसी कमजोरीसे, ऐसी अज्ञानताले और ऐसी पोलसे हमें छुड़ाने की कृपा कर, कृपा कर ।"
डर मिटाने का सबसे उत्तम और सहज उपाय ।
अगर इस प्रकार आप अपनी ओत्माका बल न समझ सकें और उसके अनुसारन चल सके तो एक दूसरा विचार कीजिये । वह यह कि हमारा मालिक कौन है ?- हमारा मालिक अनन्तः ब्रह्माण्डका. नाथ' है ।'- हमारा मालिक, चंद्र-सूर्यको बनाने वाला है; हमारा मालिक, आकाश पातालकी सारी हको. कत आमनेवाला है;" हमाराः मालिकः रती, रतीका हिसाब, करनेवाला तथा बदलाः देनेवालाः हैः हमारा मालिक सब६ | श्वर्गकी सीढ़ी ।. निडरता के अन्दर है, पहले जिसमें निडरपन हो इसमें ये सब गुण आ सकते हैं। इससे दैवी सम्पत्ति छब्बीस लक्ष खोमें निडरताको पहला नम्बर दिया है। इसलिये, हर एक, हरिजनको अपना धर्म पालने में हमेशा निडर रहना चाहिये । बिना निडर हुए, कोई ईश्वरके सामने नहीं जा सकता और न उसको मोक्ष हो सकता । इसलिये किसीसे न डरनेको भगवानने दैवी सम्पत्तिका पहला लक्षण माना है। सब हरिअनको यह गुण प्राप्त करनेकी खास चेष्टा करनी चाहिये । निडरता दैवी सम्पत्तिकी नीच है, इसलिये जब नीव मजबूत होगी तब इमारत टिक सकेगी। जब नीवका ही ठिकाना न होगा तब ऊपरकी सब छाजन निकम्मी हो जायगी। इसलिये ऐसा कीजिये कि नीव मजबूत हो । हम अपनी आत्माका बल नहीं जानते इससे डरा करते हैं। भाइयो ! दैवी- सम्पत्तिका मूल पाया अभय है यह बात सच है पर यह अभयपन कब आता है यह आपको मालूम है ? और इस समय जो हममें अभयपन नहीं है इसका कारण आप जानते हैं ? अगर ये दो मूल बातें हमारी समझ में आ जायँ तो हम भासानी से निडर हो सकते हैं। इसलिये यह भेद समझने की कोशिश करनी चाहिये। इसके लिये महात्मा लोग कहते हैं कि हमने अपने मालिकको नहीं पहचाना है इससे इमको डर हुआ करता है, हमने अनन्त ब्रम्हाण्डके नाथकी शरण नहीं ली है इससे हम मेंडकोंसे डरा करते हैं, और हम असली वस्तुको नहीं पहचानते इससे हजारों तरहको माहककी दहशत रखते हैं। अगर हमारी समझमे भाजाय, कि हम डर मिटानेका उत्तम और सहज उपाय । कौन हैं, हमारा मालिक कौन है और जिन चीजसे हम डरा करते हैं उनका वलं कितना है- इन सब विषयोंको भगर हम ठीक ठीक समझ लें- तो फिर किसी चीजसे हमें डरन हो। क्योंकि हम मात्मा है, हम परमात्माके अंश है, हम ईश्वरके बालक हैं, सर्वशक्तिमान महान परमात्मामें जितने गुण तथा जितनी शक्तियाँ हैं वे सय गुण तथा वे सब शक्तियाँ हमारी औकातके अन्दाजसे हममें भी हैं और ये सब देवी गुण तथा अलौकिक शक्तियां जगतकी और सब चीजोंसे' हजार गुनी श्रेष्ठ हैं। जगतकी सब चीजोपर राज्य करने के लिये परम कृपालु परमात्माने हमें यहाँ भेजा है, कुछ चीजोंने डरकर रोया करने के लिये हमे यहाँ नहीं भेजा है। इसलिये हमें बेडर होकर इस संसार में रहना चाहिये औरं सय वस्तुऑको प्रभुके नामसँ, प्रभुके लिये हमें अपने अधिकार में रखना चाहिये । इसके बदलें छोटी छोटी वस्तुओंसे डरा करना हमारी कितनी बड़ी नालायकी है ? हे भगवान ! ऐसी कमजोरीसे, ऐसी अज्ञानताले और ऐसी पोलसे हमें छुड़ाने की कृपा कर, कृपा कर ।" डर मिटाने का सबसे उत्तम और सहज उपाय । अगर इस प्रकार आप अपनी ओत्माका बल न समझ सकें और उसके अनुसारन चल सके तो एक दूसरा विचार कीजिये । वह यह कि हमारा मालिक कौन है ?- हमारा मालिक अनन्तः ब्रह्माण्डका. नाथ' है ।'- हमारा मालिक, चंद्र-सूर्यको बनाने वाला है; हमारा मालिक, आकाश पातालकी सारी हको. कत आमनेवाला है;" हमाराः मालिकः रती, रतीका हिसाब, करनेवाला तथा बदलाः देनेवालाः हैः हमारा मालिक सबछः |
एक्ट्रेस चित्रांगदा सिंह अपनी एक्टिंग से ज्यादा अपनी बोल्डनेस के लिए जानी जाती हैं।
चित्रांगदा सोशल मीडिया के जरिए अक्सर ग्लैमर का तड़का लगाती रहती हैं।
ऐसे में उन्होंने अपने ग्लैमरस फोटोशूट की तस्वीरें शेयर कर तहलका मचा दिया है।
हालिया पोस्ट में चित्रांगदा येलो थाई-हाई स्लिट ड्रेस में बेहद हॉट लग रही हैं।
न्यूड मेकअप और मैसी हेयर के साथ उन्होंने इस लुक को पूरा किया है।
चित्रांगदा सोशल मीडिया फ्रेंडली हैं। उनकी इंस्टा पर जबरदस्त फैन फॉलोइंग है।
| एक्ट्रेस चित्रांगदा सिंह अपनी एक्टिंग से ज्यादा अपनी बोल्डनेस के लिए जानी जाती हैं। चित्रांगदा सोशल मीडिया के जरिए अक्सर ग्लैमर का तड़का लगाती रहती हैं। ऐसे में उन्होंने अपने ग्लैमरस फोटोशूट की तस्वीरें शेयर कर तहलका मचा दिया है। हालिया पोस्ट में चित्रांगदा येलो थाई-हाई स्लिट ड्रेस में बेहद हॉट लग रही हैं। न्यूड मेकअप और मैसी हेयर के साथ उन्होंने इस लुक को पूरा किया है। चित्रांगदा सोशल मीडिया फ्रेंडली हैं। उनकी इंस्टा पर जबरदस्त फैन फॉलोइंग है। |
भारत सरकार पर मुसलमानों को सताने के झूठे आरोप लगाने वाले पाकिस्तान के पीएम इमरान खान को अपने देश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार दिखाई नहीं दे रहे। पाकिस्तान में हिंदुओं का जीना दूभर हो गया। हिंदू मंदिरों और जमीनों पर स्थानीय मुसलमानों ने कब्जा कर लिया है या फिर उन्हें भ्रष्ट और अशुद्ध कर दिया है।
ऐसी ही एक खबर पाकिस्तान के दक्षिण-पूर्वी सिंध से आई है। खबर के मुताबिक, इस घटना को मुहम्मद इस्माइल नाम के एक शख्स ने अंजाम दिया। स्थानीय थाने में शिकायतकर्ता अशोक कुमार की तहरीर के मुताबिक कि बादिन जिले में अस्थायी मंदिर में रखी मूर्तियों को तोड़ दिया गया और आरोपी धमकी देते हुए घटनास्थल से फरार हो गये। बादिन पुलिस के प्रवक्ता ने कहा कि मुहम्मद इस्माइल को गिरफ्तार कर लिया गया।
पाकिस्तान का सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समुदाय होने के बावजूद हिंदुओं को अक्सर भेदभाव और धमकियों का सामना करना पड़ता है। इस्लामी कट्टरपंथी हिंदू समुदाय के लोगों को आसानी से निशाना बनाते हैं। बीते कुछ सालों में वहां दर्जनों मंदिरों में तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आयी हैं। हाल ही में एक कट्टरपंथी ग्रुप ने इस्लामाबाद में एक हिंदू मंदिर के निर्माण कार्य को अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए रुकवा दिया था। वहीं, हिंदू लड़कियां भी इन कट्टरपंथियों के निशाने पर रहती हैं और पिछले कुछ महीनों में पाकिस्तान में जबरन धर्म-परिवर्तन और निकाह की कई घटनाएं सामने आई हैं। .
| भारत सरकार पर मुसलमानों को सताने के झूठे आरोप लगाने वाले पाकिस्तान के पीएम इमरान खान को अपने देश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार दिखाई नहीं दे रहे। पाकिस्तान में हिंदुओं का जीना दूभर हो गया। हिंदू मंदिरों और जमीनों पर स्थानीय मुसलमानों ने कब्जा कर लिया है या फिर उन्हें भ्रष्ट और अशुद्ध कर दिया है। ऐसी ही एक खबर पाकिस्तान के दक्षिण-पूर्वी सिंध से आई है। खबर के मुताबिक, इस घटना को मुहम्मद इस्माइल नाम के एक शख्स ने अंजाम दिया। स्थानीय थाने में शिकायतकर्ता अशोक कुमार की तहरीर के मुताबिक कि बादिन जिले में अस्थायी मंदिर में रखी मूर्तियों को तोड़ दिया गया और आरोपी धमकी देते हुए घटनास्थल से फरार हो गये। बादिन पुलिस के प्रवक्ता ने कहा कि मुहम्मद इस्माइल को गिरफ्तार कर लिया गया। पाकिस्तान का सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समुदाय होने के बावजूद हिंदुओं को अक्सर भेदभाव और धमकियों का सामना करना पड़ता है। इस्लामी कट्टरपंथी हिंदू समुदाय के लोगों को आसानी से निशाना बनाते हैं। बीते कुछ सालों में वहां दर्जनों मंदिरों में तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आयी हैं। हाल ही में एक कट्टरपंथी ग्रुप ने इस्लामाबाद में एक हिंदू मंदिर के निर्माण कार्य को अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए रुकवा दिया था। वहीं, हिंदू लड़कियां भी इन कट्टरपंथियों के निशाने पर रहती हैं और पिछले कुछ महीनों में पाकिस्तान में जबरन धर्म-परिवर्तन और निकाह की कई घटनाएं सामने आई हैं। . |
नई दिल्ली/अनिल सागर। पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी तो वह भारतीय जनता पार्टी को भी पछाड़ देगी। यह सच है, क्योंकि आम आदमी पार्टी इकलौती ऐसा राजनीतिक दल होगा जो अपने गठन के दस साल से पहले ही दो सूबों में सत्ता हासिल कर ले। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता व पंजाब के सहप्रभारी राघव चड्ढा ने यह दावा किया है कि अब भाजपा को सीधे चुनौती देने वाली पार्टी आम आदमी पार्टी ही है।
राघव चड्ढा बताते हैं कि ये बदलाव का चुनाव था, जमे हुए सियासतदानों अकाली, कांग्रेस को जनता ने खदेड़ा है और भगवंत मान की अगुवाई में अरविंद केजरीवाल सरकार मॉडल को स्वीकारा है। करीबन सवा साल पहले पंजाब के सहप्रभारी बनकर पहुंचे राघव चड्ढा ने दिल्ली के विकास और अकाली, कांग्रेस के प्रति पंजाब के मतदाताओं की नाराजगी को महसूस किया और इसे आप की ओर मोडऩे में जुट गए। वह मानते हैं कि आप को अभी दस साल भी नहीं हुए और दो सूबों में सरकार बनने जा रही है।
आप नेता राघव चड्ढा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि कल तक आम आदमी पार्टी को दिल्ली की पार्टी बताते थे आज वह राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी ताकत बनकर उभरी है। अब भाजपा के लिए आप प्रमुख चुनौती बनने जा रही है। एग्जिट पोल के मुताबिक परिणाम आते हैं तो आम आदमी पार्टी देश की ऐसी इकलौती पार्टी होगी। दरअसल जनसंघ के बाद 1980 में जब भाजपा का गठन हुआ तो जिन राज्यों में जनसंघ की सरकारें थीं वहां उसे हार का मुंह का देखना पड़ा।
वर्ष 1980 के विधानसभा चुनाव में मध्य प्रदेश उसे 60 सीटें मिली जबकि कांग्रेस ने 246 जीतीं। इसके बाद राजस्थान में 1990 में भाजपा नेता भैंरो सिंह शेखावत ने गठबंधन सरकार बनाई और इसी तरह गुजरात में भी भाजपा 1990 में गठबंधन के साथ आई लेकिन बहुमत 1995 में केशूभाई पटेल के नेतृत्व में मिला। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि आम आदमी पार्टी आज भी पंजाब में दूसरे नंबर की पार्टी है और अब सत्ता मिली तो तय है कि वह राष्ट्रीय दर्जा हासिल करने की दौड़ में भी तेजी से बढ़ रही है।
लोकसभा में दो प्रतिशत सीटें, अलग-अलग राज्यों जीती हों जो कि 2014 के मुताबिक 11 होती हैं। या लोकसभा अथवा विधानसभा में छह प्रतिशत वोट चार राज्यों में मिले हों और चार लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की हो। व चार राज्यों में बतौर राज्य पार्टी के तौर पर पंजीकृत हो।
| नई दिल्ली/अनिल सागर। पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी तो वह भारतीय जनता पार्टी को भी पछाड़ देगी। यह सच है, क्योंकि आम आदमी पार्टी इकलौती ऐसा राजनीतिक दल होगा जो अपने गठन के दस साल से पहले ही दो सूबों में सत्ता हासिल कर ले। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता व पंजाब के सहप्रभारी राघव चड्ढा ने यह दावा किया है कि अब भाजपा को सीधे चुनौती देने वाली पार्टी आम आदमी पार्टी ही है। राघव चड्ढा बताते हैं कि ये बदलाव का चुनाव था, जमे हुए सियासतदानों अकाली, कांग्रेस को जनता ने खदेड़ा है और भगवंत मान की अगुवाई में अरविंद केजरीवाल सरकार मॉडल को स्वीकारा है। करीबन सवा साल पहले पंजाब के सहप्रभारी बनकर पहुंचे राघव चड्ढा ने दिल्ली के विकास और अकाली, कांग्रेस के प्रति पंजाब के मतदाताओं की नाराजगी को महसूस किया और इसे आप की ओर मोडऩे में जुट गए। वह मानते हैं कि आप को अभी दस साल भी नहीं हुए और दो सूबों में सरकार बनने जा रही है। आप नेता राघव चड्ढा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि कल तक आम आदमी पार्टी को दिल्ली की पार्टी बताते थे आज वह राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी ताकत बनकर उभरी है। अब भाजपा के लिए आप प्रमुख चुनौती बनने जा रही है। एग्जिट पोल के मुताबिक परिणाम आते हैं तो आम आदमी पार्टी देश की ऐसी इकलौती पार्टी होगी। दरअसल जनसंघ के बाद एक हज़ार नौ सौ अस्सी में जब भाजपा का गठन हुआ तो जिन राज्यों में जनसंघ की सरकारें थीं वहां उसे हार का मुंह का देखना पड़ा। वर्ष एक हज़ार नौ सौ अस्सी के विधानसभा चुनाव में मध्य प्रदेश उसे साठ सीटें मिली जबकि कांग्रेस ने दो सौ छियालीस जीतीं। इसके बाद राजस्थान में एक हज़ार नौ सौ नब्बे में भाजपा नेता भैंरो सिंह शेखावत ने गठबंधन सरकार बनाई और इसी तरह गुजरात में भी भाजपा एक हज़ार नौ सौ नब्बे में गठबंधन के साथ आई लेकिन बहुमत एक हज़ार नौ सौ पचानवे में केशूभाई पटेल के नेतृत्व में मिला। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि आम आदमी पार्टी आज भी पंजाब में दूसरे नंबर की पार्टी है और अब सत्ता मिली तो तय है कि वह राष्ट्रीय दर्जा हासिल करने की दौड़ में भी तेजी से बढ़ रही है। लोकसभा में दो प्रतिशत सीटें, अलग-अलग राज्यों जीती हों जो कि दो हज़ार चौदह के मुताबिक ग्यारह होती हैं। या लोकसभा अथवा विधानसभा में छह प्रतिशत वोट चार राज्यों में मिले हों और चार लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की हो। व चार राज्यों में बतौर राज्य पार्टी के तौर पर पंजीकृत हो। |
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