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रिजवी के जेल जाने पर नरसिंहानन्द ने छोड़ा अन्न-जल. . कोर्ट ने जमानत के लिए तय की शनिवार की तारीख. . हरिद्वारः जितेंद्र नारायण त्यागी उर्फ वसीम रिजवी के जेल जाने से नाराज नरसिंहानंद ने अपने साथियों के साथ हर की पैड़ी के पास सर्वानंद घाट पर अनशन शुरू कर दिया है। पुलिस ने जितेंद्र नारायण त्यागी को कोर्ट में पेश किया था, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। गिरफ्तारी से नाराज नरसिंहानंद ने सत्याग्रह का ऐलान करते हुए चेतावनी दी है कि जितेंद्र नारायण त्यागी के जेल से रिहा होने तक वह अन्न-जल ग्रहण नहीं करेंगे। गौरतलब है कि हरिद्वार में अपने विवादित पुस्तक का विमोचन करने और पैगंबर साहब पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के बाद ही वसीम रिजवी ने इस्लाम धर्म छोड़कर सनातन धर्म अपना लिया था। गाजियाबाद के डासना मंदिर के महंत यती नरसिंहानंद ने ही वसीम रिजवी को नया नाम जितेंद्र नारायण त्यागी दिया था। भड़काऊ भाषण देने के मामले में हरिद्वार पुलिस ने गुरुवार शाम यति नरसिंहानंद के साथ हरिद्वार आने के दौरान नारसन बॉर्डर से जितेंद्र नारायण त्यागी उर्फ वसीम रिजवी को गिरफ्तार किया था। कोर्ट में पेश करने के बाद उसे जेल भेज दिया गया है।
रिजवी के जेल जाने पर नरसिंहानन्द ने छोड़ा अन्न-जल. . कोर्ट ने जमानत के लिए तय की शनिवार की तारीख. . हरिद्वारः जितेंद्र नारायण त्यागी उर्फ वसीम रिजवी के जेल जाने से नाराज नरसिंहानंद ने अपने साथियों के साथ हर की पैड़ी के पास सर्वानंद घाट पर अनशन शुरू कर दिया है। पुलिस ने जितेंद्र नारायण त्यागी को कोर्ट में पेश किया था, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। गिरफ्तारी से नाराज नरसिंहानंद ने सत्याग्रह का ऐलान करते हुए चेतावनी दी है कि जितेंद्र नारायण त्यागी के जेल से रिहा होने तक वह अन्न-जल ग्रहण नहीं करेंगे। गौरतलब है कि हरिद्वार में अपने विवादित पुस्तक का विमोचन करने और पैगंबर साहब पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के बाद ही वसीम रिजवी ने इस्लाम धर्म छोड़कर सनातन धर्म अपना लिया था। गाजियाबाद के डासना मंदिर के महंत यती नरसिंहानंद ने ही वसीम रिजवी को नया नाम जितेंद्र नारायण त्यागी दिया था। भड़काऊ भाषण देने के मामले में हरिद्वार पुलिस ने गुरुवार शाम यति नरसिंहानंद के साथ हरिद्वार आने के दौरान नारसन बॉर्डर से जितेंद्र नारायण त्यागी उर्फ वसीम रिजवी को गिरफ्तार किया था। कोर्ट में पेश करने के बाद उसे जेल भेज दिया गया है।
भोपाल, 24 मार्च मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश में कोरोना वायरस के मामले बढ़ने पर चिंता व्यक्त करते हुए लोगों से महामारी के खिलाफ सरकार के जागरुकता अभियान को सफल बनाने की बुधवार को अपील की। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के धर्मगुरुओं, राजनीतिक दलों, विभिन्न संगठनों और मीडिया कर्मियों को पत्र लिखकर कोरोना वायरस के खिलाफ जन-जागरूकता बढ़ाने के अभियान में सहयोग देना का आग्रह किया। प्रदेश के जनसंपर्क अधिकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री चौहान ने प्रदेश में कोरोना वायरस की स्थिति की समीक्षा बैठक में कहा कि संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए यदि अन्य आवश्यक कदम उठाने होंगे, तो वे उठाए जाएंगे। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि बुधवार को प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमण के करीब 1700 नए मामले सामने आए हैं। इंदौर में इनकी संख्या 450 और भोपाल में 385 है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी स्थानों विशेष रूप से इंदौर और भोपाल, इन दोनों नगरों में आवश्यक सावधानियां अपनानी होंगी। इसबीच, प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने बुधवार को यहां सरकारी हमीदिया अस्पताल का दौरा किया और कोविड-19 केन्द्र की व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने बताया कि इस केन्द्र में वर्तमान में 390 बिस्तर उपलब्ध हैं और जल्द ही 120 और बिस्तरों की व्यवस्था की जा रही है तथा आने वाले दिनों में 400 और बिस्तर उपलब्ध कराये जायेंगे। प्रदेश में चल रहे टीकाकरण अभियान पर सारंग ने कहा कि लोगों को टीके की 26 लाख खुराकें दी जा चुकी हैं और एक अप्रैल से 45 वर्ष से अधिक आयु के सभी व्यक्तियों को टीका लगाने का अभियान शुरु होगा। उन्होंने लोगों से अपने और अपने परिवार की सुरक्षा के लिये मास्क लगाने का आग्रह किया और अन्य लोगों को इस मुद्दे पर जागरुक करने की भी अपील की। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
भोपाल, चौबीस मार्च मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश में कोरोना वायरस के मामले बढ़ने पर चिंता व्यक्त करते हुए लोगों से महामारी के खिलाफ सरकार के जागरुकता अभियान को सफल बनाने की बुधवार को अपील की। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के धर्मगुरुओं, राजनीतिक दलों, विभिन्न संगठनों और मीडिया कर्मियों को पत्र लिखकर कोरोना वायरस के खिलाफ जन-जागरूकता बढ़ाने के अभियान में सहयोग देना का आग्रह किया। प्रदेश के जनसंपर्क अधिकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री चौहान ने प्रदेश में कोरोना वायरस की स्थिति की समीक्षा बैठक में कहा कि संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए यदि अन्य आवश्यक कदम उठाने होंगे, तो वे उठाए जाएंगे। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि बुधवार को प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमण के करीब एक हज़ार सात सौ नए मामले सामने आए हैं। इंदौर में इनकी संख्या चार सौ पचास और भोपाल में तीन सौ पचासी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी स्थानों विशेष रूप से इंदौर और भोपाल, इन दोनों नगरों में आवश्यक सावधानियां अपनानी होंगी। इसबीच, प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने बुधवार को यहां सरकारी हमीदिया अस्पताल का दौरा किया और कोविड-उन्नीस केन्द्र की व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने बताया कि इस केन्द्र में वर्तमान में तीन सौ नब्बे बिस्तर उपलब्ध हैं और जल्द ही एक सौ बीस और बिस्तरों की व्यवस्था की जा रही है तथा आने वाले दिनों में चार सौ और बिस्तर उपलब्ध कराये जायेंगे। प्रदेश में चल रहे टीकाकरण अभियान पर सारंग ने कहा कि लोगों को टीके की छब्बीस लाख खुराकें दी जा चुकी हैं और एक अप्रैल से पैंतालीस वर्ष से अधिक आयु के सभी व्यक्तियों को टीका लगाने का अभियान शुरु होगा। उन्होंने लोगों से अपने और अपने परिवार की सुरक्षा के लिये मास्क लगाने का आग्रह किया और अन्य लोगों को इस मुद्दे पर जागरुक करने की भी अपील की। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
१२ । साहित्य परिषय बहानी ही सिगर (Lessure) है। लोरंजन के लिए महानी बढ़ने की प्रवृति आदिम बाल लति होती है। प्रायोन काल को महाडियों में देवी घटनायें और संयोग भर ये आज महानी मावति बन गई है। महानी वा आगार सीमित होने से वारण मानव जीवन का सम्पूर्ण वित्रण उसम राम्भव नहीं होगा। मनुष्य जीवन बीएसपना एक पगएर अनुभूति अपवा जगनु दृश्य कर बहार अपनी बहानी लिखता है । कहानी की परिभाषा यहाँ कुछ बहानी की परिभाषायें प्रस्तुत की जा रही है-एडसर एलन पो- A short story is a narrative short enough to be read in a single sitting written to make an impression on the reader excluding all that does not forword that impr Cssion complete & final in itself अर्थात छोटो कहानी एक ऐसा आस्थान है जो इतना छोटा है कि एक बठर म पढ़ा जा सके और ओ पाठक पर एक हो प्रभाव उपकरने के लिए लिया गया हो। उसमें ऐसी बातों म त्याग दिया जाता है जो उसको प्रभावोत्पाहता मे बाघर हों। वह स्वत पूर्ण होती है।" इसन - 'A short story must contain one & only one info rmative idea & that the idea must be worked out to its logical conclusions with absolute singleness of aim & directness of method' अर्थात लघु क्या मे केवल एक ही मूल भाव होता है। उस मूलभाव का विकास ताकि नियों के साथ लक्ष्य को एक निष्ठता से सरल स्वाभाविक गति से किया जाना चाहिए ।" उस कहानी के आकार के सम्बध में केवल इतनी हो बडी होनी चाहिए कि सरलता से एक बठक में समाप्त हो जाय। एलोरी सेगेविक ( Ellory sedgewick ) A short story is just like a horse race It is the start and finish which count most अर्थात् लघु कथा घुडदौड के समान है, जिसका आदि और अन्त महत्वपूर्ण होता है । प्रेमचन्द - कहानी एक रचना है जिसमे जीवन के किसी अग या किसी मनोभाव को प्रदर्शित करना ही लेखक का उद्देश्य रहता है। उसके चरित्र, उसको पाली, उसका कथा वि यास सब उसको पुष्टि करते हैं । गमला है जिसमे एक ही पौधे का माधुय अपने समुद्रत रूप मे दृष्टिगोचर होता है ।"
बारह । साहित्य परिषय बहानी ही सिगर है। लोरंजन के लिए महानी बढ़ने की प्रवृति आदिम बाल लति होती है। प्रायोन काल को महाडियों में देवी घटनायें और संयोग भर ये आज महानी मावति बन गई है। महानी वा आगार सीमित होने से वारण मानव जीवन का सम्पूर्ण वित्रण उसम राम्भव नहीं होगा। मनुष्य जीवन बीएसपना एक पगएर अनुभूति अपवा जगनु दृश्य कर बहार अपनी बहानी लिखता है । कहानी की परिभाषा यहाँ कुछ बहानी की परिभाषायें प्रस्तुत की जा रही है-एडसर एलन पो- A short story is a narrative short enough to be read in a single sitting written to make an impression on the reader excluding all that does not forword that impr Cssion complete & final in itself अर्थात छोटो कहानी एक ऐसा आस्थान है जो इतना छोटा है कि एक बठर म पढ़ा जा सके और ओ पाठक पर एक हो प्रभाव उपकरने के लिए लिया गया हो। उसमें ऐसी बातों म त्याग दिया जाता है जो उसको प्रभावोत्पाहता मे बाघर हों। वह स्वत पूर्ण होती है।" इसन - 'A short story must contain one & only one info rmative idea & that the idea must be worked out to its logical conclusions with absolute singleness of aim & directness of method' अर्थात लघु क्या मे केवल एक ही मूल भाव होता है। उस मूलभाव का विकास ताकि नियों के साथ लक्ष्य को एक निष्ठता से सरल स्वाभाविक गति से किया जाना चाहिए ।" उस कहानी के आकार के सम्बध में केवल इतनी हो बडी होनी चाहिए कि सरलता से एक बठक में समाप्त हो जाय। एलोरी सेगेविक A short story is just like a horse race It is the start and finish which count most अर्थात् लघु कथा घुडदौड के समान है, जिसका आदि और अन्त महत्वपूर्ण होता है । प्रेमचन्द - कहानी एक रचना है जिसमे जीवन के किसी अग या किसी मनोभाव को प्रदर्शित करना ही लेखक का उद्देश्य रहता है। उसके चरित्र, उसको पाली, उसका कथा वि यास सब उसको पुष्टि करते हैं । गमला है जिसमे एक ही पौधे का माधुय अपने समुद्रत रूप मे दृष्टिगोचर होता है ।"
उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग की वेबसाइट पर मशहूर शायर अकबर इलाहाबादी, नूह नारवी, तेग इलाहाबादी, शबनम नकवी और राशिद इलाहाबादी के नाम में 'इलाहाबादी' की जगह 'प्रयागराज' लिखा पाया गया था. आयोग का कहना है कि वेबसाइट को हैकर्स ने निशाना बनाकर इस तरह की छेड़छाड़ की. फेडरेशन ऑफ रेज़िडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन और फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन द्वारा नवंबर के अंत में ओपीडी सेवाओं को रोकने के साथ यह विरोध बीते 17 दिसंबर से लगातार जारी है. इससे दिल्ली में केंद्र द्वारा संचालित तीन अस्पतालों- सफ़दरजंग, आरएमएल और लेडी हार्डिंग अस्पतालों के साथ ही दिल्ली सरकार के कुछ अस्पतालों में मरीज़ों का इलाज प्रभावित हुआ है. सिख धार्मिक प्रतीकों के कथित अपमान को लेकर पंजाब में बीते दिनों दो लोगों की भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई. जनभावनाएं लिंचिंग की इन घटनाओं के समर्थन में खड़ी नज़र आती हैं और मुख्यधारा के राजनीतिक दल व सिख स्कॉलर्स उन भावनाओं को आहत करना नहीं चाहते. हरिद्वार में हुई तथाकथित धर्म संसद में कही गई अधिकांश बातें भारतीय क़ानूनों की धारा के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आती हैं, लेकिन अब तक इसे लेकर की गई उत्तराखंड पुलिस की कार्रवाई दिखाती है कि वह क़ानून या संविधान नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ पार्टी के लिए काम कर रही है. सेना की गोलीबारी में 14 लोगों की मौत के बाद बढ़े तनाव के मद्देनज़र केंद्र ने दशकों से नगालैंड में लागू विवादास्पद आफ़स्पा हटाने की संभावना पर गौर करने के लिए भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त विवेक जोशी की अगुवाई ने पांच सदस्यीय समिति गठित की है, जो 45 दिन में अपनी रिपोर्ट देगी. सुप्रीम कोर्ट के 76 वकीलों ने मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना को पत्र लिखकर दिल्ली और हरिद्वार में हुए हालिया कार्यक्रमों में मुस्लिम समाज के ख़िलाफ़ भड़काऊ बयान देने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई के लिए निर्देश देने की मांग की है. भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने उडुपी में हुए एक कार्यक्रम में कहा था कि हिंदू धर्म छोड़कर गए लोगों का वापस इसी धर्म में परिवर्तन टीपू जयंती पर होना चाहिए और यह 'घर वापसी' हिंदुओं की ज़िम्मेदारी है. सूर्या ने यह भी कहा था कि पाकिस्तान के मुस्लिमों का हिंदू धर्म में परिवर्तन कराना चाहिए. पाकिस्तान अखंड भारत के विचार में शामिल है. चंपावत ज़िले के सुखीढांग के एक सरकारी स्कूल की दलित रसोइए द्वारा बनाए गए मध्याह्न भोजन को कथित उच्च जाति के छात्रों द्वारा खाने से इनकार के बाद महिला को काम से हटा दिया गया था. शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने महिला को हटाने की वजह नियुक्ति में प्रक्रियागत चूक को बताया था. रायपुर में 25-26 दिसंबर को आयोजित दो दिवसीय 'धर्म संसद' में 20 हिंदू धर्मगुरुओं ने शिरकत की थी. इस दौरान 'सनातनी हिंदुओं से हथियार उठाने की' अपील की गई और 'हिंदू राष्ट्र की स्थापना के लिए तैयार रहने' को भी कहा गया. भारत में ओमीक्रॉन स्वरूप के एक दिन में सर्वाधिक 156 मामले सामने आए हैं और इसी के साथ देश में कोरोना वायरस के इस नए स्वरूप से संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 578 हो गई है. वहीं, विश्व में अब तक संक्रमण के 27. 99 करोड़ से अधिक मामले सामने आए हैं और 54 लाख से ज़्यादा लोग अब तक दम तोड़ चुके हैं. ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित कोंकणी लेखक दामोदर मौउजो के पास वह क्षमता है जो उन्हें तात्कालिक बात से आगे देखने का मौक़ा देती है, जिसने उन्हें इस बात के लिए भी प्रेरित किया है कि वह ताउम्र महज़ कलम और कागज़ तक अपने को सीमित न रखें बल्कि सामाजिक-राजनीतिक तौर पर अहम मुद्दों पर भी बोलें, यहां तक कि समाज में पनप रहे दक्षिणपंथी विचारों, उनकी डरावनी हरकत के बारे में भी मौन न रहें. सीजेआई के तौर पर जस्टिस रंजन गोगोई के कार्यकाल में तीन गुनाह हुए थे. रिटायर होने के बाद उन्होंने इसमें एक चौथा भी जोड़ दिया. पिछले दिनों आई उनकी किताब का मक़सद इन सभी का बचाव करना है, लेकिन हर मामले में यह ख़राब ही साबित हुआ है. मध्य प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि अगर अभिनेत्री सनी लियोनी और संगीतकार साकिब तोशी ने उनके नए गीत 'मधुबन में राधिका नाचे' को लेकर माफ़ी नहीं मांगी तो उनके ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की जाएगी. एम्स के वरिष्ठ महामारी रोग विशेषज्ञ व वयस्कों और बच्चों पर कोवैक्सीन टीके के परीक्षणों के प्रधान जांचकर्ता डॉक्टर संजय के. राय ने कहा कि किशोरों के वैक्सीनेशन के निर्णय पर अमल से पहले बच्चों का टीकाकरण शुरू कर चुके देशों के आंकड़ों का विश्लेषण करना चाहिए. पेगासस प्रोजेक्ट के तहत द वायर सहित 17 अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने जुलाई में बताया था कि विपक्षी नेताओं, सरकार से असहमति जताने वालों और सरकारी अधिकारियों को संभवतः पेगासस के ज़रिये निशाना बनाया गया.
उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग की वेबसाइट पर मशहूर शायर अकबर इलाहाबादी, नूह नारवी, तेग इलाहाबादी, शबनम नकवी और राशिद इलाहाबादी के नाम में 'इलाहाबादी' की जगह 'प्रयागराज' लिखा पाया गया था. आयोग का कहना है कि वेबसाइट को हैकर्स ने निशाना बनाकर इस तरह की छेड़छाड़ की. फेडरेशन ऑफ रेज़िडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन और फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन द्वारा नवंबर के अंत में ओपीडी सेवाओं को रोकने के साथ यह विरोध बीते सत्रह दिसंबर से लगातार जारी है. इससे दिल्ली में केंद्र द्वारा संचालित तीन अस्पतालों- सफ़दरजंग, आरएमएल और लेडी हार्डिंग अस्पतालों के साथ ही दिल्ली सरकार के कुछ अस्पतालों में मरीज़ों का इलाज प्रभावित हुआ है. सिख धार्मिक प्रतीकों के कथित अपमान को लेकर पंजाब में बीते दिनों दो लोगों की भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई. जनभावनाएं लिंचिंग की इन घटनाओं के समर्थन में खड़ी नज़र आती हैं और मुख्यधारा के राजनीतिक दल व सिख स्कॉलर्स उन भावनाओं को आहत करना नहीं चाहते. हरिद्वार में हुई तथाकथित धर्म संसद में कही गई अधिकांश बातें भारतीय क़ानूनों की धारा के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आती हैं, लेकिन अब तक इसे लेकर की गई उत्तराखंड पुलिस की कार्रवाई दिखाती है कि वह क़ानून या संविधान नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ पार्टी के लिए काम कर रही है. सेना की गोलीबारी में चौदह लोगों की मौत के बाद बढ़े तनाव के मद्देनज़र केंद्र ने दशकों से नगालैंड में लागू विवादास्पद आफ़स्पा हटाने की संभावना पर गौर करने के लिए भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त विवेक जोशी की अगुवाई ने पांच सदस्यीय समिति गठित की है, जो पैंतालीस दिन में अपनी रिपोर्ट देगी. सुप्रीम कोर्ट के छिहत्तर वकीलों ने मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना को पत्र लिखकर दिल्ली और हरिद्वार में हुए हालिया कार्यक्रमों में मुस्लिम समाज के ख़िलाफ़ भड़काऊ बयान देने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई के लिए निर्देश देने की मांग की है. भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने उडुपी में हुए एक कार्यक्रम में कहा था कि हिंदू धर्म छोड़कर गए लोगों का वापस इसी धर्म में परिवर्तन टीपू जयंती पर होना चाहिए और यह 'घर वापसी' हिंदुओं की ज़िम्मेदारी है. सूर्या ने यह भी कहा था कि पाकिस्तान के मुस्लिमों का हिंदू धर्म में परिवर्तन कराना चाहिए. पाकिस्तान अखंड भारत के विचार में शामिल है. चंपावत ज़िले के सुखीढांग के एक सरकारी स्कूल की दलित रसोइए द्वारा बनाए गए मध्याह्न भोजन को कथित उच्च जाति के छात्रों द्वारा खाने से इनकार के बाद महिला को काम से हटा दिया गया था. शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने महिला को हटाने की वजह नियुक्ति में प्रक्रियागत चूक को बताया था. रायपुर में पच्चीस-छब्बीस दिसंबर को आयोजित दो दिवसीय 'धर्म संसद' में बीस हिंदू धर्मगुरुओं ने शिरकत की थी. इस दौरान 'सनातनी हिंदुओं से हथियार उठाने की' अपील की गई और 'हिंदू राष्ट्र की स्थापना के लिए तैयार रहने' को भी कहा गया. भारत में ओमीक्रॉन स्वरूप के एक दिन में सर्वाधिक एक सौ छप्पन मामले सामने आए हैं और इसी के साथ देश में कोरोना वायरस के इस नए स्वरूप से संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर पाँच सौ अठहत्तर हो गई है. वहीं, विश्व में अब तक संक्रमण के सत्ताईस. निन्यानवे करोड़ से अधिक मामले सामने आए हैं और चौवन लाख से ज़्यादा लोग अब तक दम तोड़ चुके हैं. ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित कोंकणी लेखक दामोदर मौउजो के पास वह क्षमता है जो उन्हें तात्कालिक बात से आगे देखने का मौक़ा देती है, जिसने उन्हें इस बात के लिए भी प्रेरित किया है कि वह ताउम्र महज़ कलम और कागज़ तक अपने को सीमित न रखें बल्कि सामाजिक-राजनीतिक तौर पर अहम मुद्दों पर भी बोलें, यहां तक कि समाज में पनप रहे दक्षिणपंथी विचारों, उनकी डरावनी हरकत के बारे में भी मौन न रहें. सीजेआई के तौर पर जस्टिस रंजन गोगोई के कार्यकाल में तीन गुनाह हुए थे. रिटायर होने के बाद उन्होंने इसमें एक चौथा भी जोड़ दिया. पिछले दिनों आई उनकी किताब का मक़सद इन सभी का बचाव करना है, लेकिन हर मामले में यह ख़राब ही साबित हुआ है. मध्य प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि अगर अभिनेत्री सनी लियोनी और संगीतकार साकिब तोशी ने उनके नए गीत 'मधुबन में राधिका नाचे' को लेकर माफ़ी नहीं मांगी तो उनके ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की जाएगी. एम्स के वरिष्ठ महामारी रोग विशेषज्ञ व वयस्कों और बच्चों पर कोवैक्सीन टीके के परीक्षणों के प्रधान जांचकर्ता डॉक्टर संजय के. राय ने कहा कि किशोरों के वैक्सीनेशन के निर्णय पर अमल से पहले बच्चों का टीकाकरण शुरू कर चुके देशों के आंकड़ों का विश्लेषण करना चाहिए. पेगासस प्रोजेक्ट के तहत द वायर सहित सत्रह अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने जुलाई में बताया था कि विपक्षी नेताओं, सरकार से असहमति जताने वालों और सरकारी अधिकारियों को संभवतः पेगासस के ज़रिये निशाना बनाया गया.
अपादान और अधिकरण - ये छः कारक माने गये हैं । 'सम्बन्ध' और 'सम्बोधन' को मिलाकर कुछ लोग आठ कारक मानते हैं । इन आठ कारकोंको द्योतन करनेके लिये संस्कृत में सात विभक्तियाँ मानी गयी हैं । कर्ता और सम्बोधनके लिये प्रथमा, कर्मके लिये द्वितीया, करणके लिये तृतीया, सम्प्रदानके लिये चतुर्थी, अपादानके लिये पञ्चमी, सम्बन्धके लिये षष्ठी और अधिकरणके लिये सप्तमी विभक्तिका प्रयोग होता है । सम्बोधनको स्वतन्त्र विभक्ति माननेसे आठ विभक्तियाँ हो जाती हैं । कर्मवाच्यकी क्रियाओं के साथ कर्ता के लिये तृतीया और कर्मके लिये प्रथमा विभक्तिका प्रयोग होता है, जैसा कि आगे उदाहरणोंसे स्पष्ट होगा। अब नीचे विभक्तियोंके चिह्नोंका तथा भिन्न-भिन्न विभक्तियों में शब्दों के रूप किस प्रकार बदल जाते हैं - इसका विचार किया जायगा । प्रथमा विभक्तिमें शब्दोंके पीछे कोई विभक्ति-चिह्न नहीं लगाया जाता । केवल अकारान्त पुल्लिङ्ग शब्दोंके एकवचन में पदान्तके 'अ' को प्रायः 'उ' कर दिया गया है - जैसे रामु, लखनु इत्यादि । राजापुरकी अयोध्याकाण्डकी प्रतिमें इस नियमका विशेषरूपसे पालन किया गया है - यद्यपि वहाँ भी कई शब्द ऐसे मिलते हैं, जिनमें इस नियमका उल्लङ्घन भी किया गया है । अयोध्या के बालकाण्डमें भी अंशतः इस नियमका पालन हुआ है। शेष काण्डोंकी जो प्राचीनतम प्रतियाँ उपलब्ध हुई हैं, उनमें इस नियमका बहुत कम पालन हुआ है । राजापुरकी प्रतिके देखनेसे ही यह नियम ध्यान में आया और इसी प्रकार के अन्य नियमोंका भी उसमें बहुत अंशोंमें पालन हुआ है; इसीलिये उसे उपलब्ध प्रतियों में सबसे अधिक प्रामाणिक मानना पड़ता है और इसीलिये हमने और और काण्डों में भी यथासम्भव इन्हीं नियमोंका अनुसरण करने की चेष्टा की है । अस्तु, प्रथमा विभक्ति के ऊपर वचनके प्रकरण में बहुवचन में कहाँ-कहाँ क्या परिवर्तन होता है, यह बताया जा चुका है - देखिये नियम १ - ५। द्वितीया विभक्ति एकवचनमें भी प्रथमाके एकवचनकी भाँति अकारान्त पुल्लिङ्ग शब्दोंके पदान्तके अकारको 'उ' कर दिया गया है ।
अपादान और अधिकरण - ये छः कारक माने गये हैं । 'सम्बन्ध' और 'सम्बोधन' को मिलाकर कुछ लोग आठ कारक मानते हैं । इन आठ कारकोंको द्योतन करनेके लिये संस्कृत में सात विभक्तियाँ मानी गयी हैं । कर्ता और सम्बोधनके लिये प्रथमा, कर्मके लिये द्वितीया, करणके लिये तृतीया, सम्प्रदानके लिये चतुर्थी, अपादानके लिये पञ्चमी, सम्बन्धके लिये षष्ठी और अधिकरणके लिये सप्तमी विभक्तिका प्रयोग होता है । सम्बोधनको स्वतन्त्र विभक्ति माननेसे आठ विभक्तियाँ हो जाती हैं । कर्मवाच्यकी क्रियाओं के साथ कर्ता के लिये तृतीया और कर्मके लिये प्रथमा विभक्तिका प्रयोग होता है, जैसा कि आगे उदाहरणोंसे स्पष्ट होगा। अब नीचे विभक्तियोंके चिह्नोंका तथा भिन्न-भिन्न विभक्तियों में शब्दों के रूप किस प्रकार बदल जाते हैं - इसका विचार किया जायगा । प्रथमा विभक्तिमें शब्दोंके पीछे कोई विभक्ति-चिह्न नहीं लगाया जाता । केवल अकारान्त पुल्लिङ्ग शब्दोंके एकवचन में पदान्तके 'अ' को प्रायः 'उ' कर दिया गया है - जैसे रामु, लखनु इत्यादि । राजापुरकी अयोध्याकाण्डकी प्रतिमें इस नियमका विशेषरूपसे पालन किया गया है - यद्यपि वहाँ भी कई शब्द ऐसे मिलते हैं, जिनमें इस नियमका उल्लङ्घन भी किया गया है । अयोध्या के बालकाण्डमें भी अंशतः इस नियमका पालन हुआ है। शेष काण्डोंकी जो प्राचीनतम प्रतियाँ उपलब्ध हुई हैं, उनमें इस नियमका बहुत कम पालन हुआ है । राजापुरकी प्रतिके देखनेसे ही यह नियम ध्यान में आया और इसी प्रकार के अन्य नियमोंका भी उसमें बहुत अंशोंमें पालन हुआ है; इसीलिये उसे उपलब्ध प्रतियों में सबसे अधिक प्रामाणिक मानना पड़ता है और इसीलिये हमने और और काण्डों में भी यथासम्भव इन्हीं नियमोंका अनुसरण करने की चेष्टा की है । अस्तु, प्रथमा विभक्ति के ऊपर वचनके प्रकरण में बहुवचन में कहाँ-कहाँ क्या परिवर्तन होता है, यह बताया जा चुका है - देखिये नियम एक - पाँच। द्वितीया विभक्ति एकवचनमें भी प्रथमाके एकवचनकी भाँति अकारान्त पुल्लिङ्ग शब्दोंके पदान्तके अकारको 'उ' कर दिया गया है ।
नोरा फतेही का सोशल मीडिया में एक वीडियो इन दिनों जमकर वायरल हो रहा है। वायरल हो रहा वीडियो हालांकि है तो पुराना। लेकिन नोरा अपने इस डांस से लोगों का जमकर दिल जीत रही हैं। वायरल हो रहे वीडियो को सोशल मीडिया एकाउंट नोरा फतेही राॅक्स द्वारा शेयर किया गया है। जिसमें एक्ट्रेस करीना कपूर के गाने फेविकोल पर दबाकर डांस करती हुई नजर आ रही हैं। एक्ट्रेस नोरा पहले तो धीरे-धीरे डांस करती हैं, लेकिन एकाएक वह काफी शानदार डांस मूवी करने लगती हैं। नोरा ने करीना के गाने में जितना भी डांस किया वह काफी कमाल का था। वैसे भी नोरा फतेही शानदार डांस मूव के लिए जानी जाती हैं। उनके डांस मूव भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी करोड़ों दीवाने हैं। नोरा के डांस मूव करीना कपूर के पति सैफ अली खान भी दीवाने हैं। जिसका बीते दिनों करीना ने खुद अपने चैट शो व्हाॅट वांट वूमेन में की थी। शो में करीना ने नोरा से ढेर सारी बातें की थी। इस दौरान नोरा ने करीना के बेटे तैमूर की जमकर तारीफ की थी। साथ ही उन्होंने शादी करने की भी तैमूर से इच्छा जताई थी। जिस पर करीना ने कहा था कि वह अभी तो 4 साल का हैं। तो नोरा ने कहा कि मैं इंतजार कर लूगी। नोरा का यह बयान काफी सुर्खियों में रहा। नोरा की पाॅपुलरटी किसी से छिपी नहीं हैं। वह आए दिन सोशल मीडिया में एक्टिव रहती हैं। जहां वीडियो एवं फोटोज शेयर करती रहती हैं। सभी उनकी तस्वीरों एवं वीडियो को खूब पसंद करते हैं। खबरों की माने तो नोरा अजय देवगन की फिल्म भुज द प्राइड आॅफ इंडिया में जल्द नजर आने वाली हैं।
नोरा फतेही का सोशल मीडिया में एक वीडियो इन दिनों जमकर वायरल हो रहा है। वायरल हो रहा वीडियो हालांकि है तो पुराना। लेकिन नोरा अपने इस डांस से लोगों का जमकर दिल जीत रही हैं। वायरल हो रहे वीडियो को सोशल मीडिया एकाउंट नोरा फतेही राॅक्स द्वारा शेयर किया गया है। जिसमें एक्ट्रेस करीना कपूर के गाने फेविकोल पर दबाकर डांस करती हुई नजर आ रही हैं। एक्ट्रेस नोरा पहले तो धीरे-धीरे डांस करती हैं, लेकिन एकाएक वह काफी शानदार डांस मूवी करने लगती हैं। नोरा ने करीना के गाने में जितना भी डांस किया वह काफी कमाल का था। वैसे भी नोरा फतेही शानदार डांस मूव के लिए जानी जाती हैं। उनके डांस मूव भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी करोड़ों दीवाने हैं। नोरा के डांस मूव करीना कपूर के पति सैफ अली खान भी दीवाने हैं। जिसका बीते दिनों करीना ने खुद अपने चैट शो व्हाॅट वांट वूमेन में की थी। शो में करीना ने नोरा से ढेर सारी बातें की थी। इस दौरान नोरा ने करीना के बेटे तैमूर की जमकर तारीफ की थी। साथ ही उन्होंने शादी करने की भी तैमूर से इच्छा जताई थी। जिस पर करीना ने कहा था कि वह अभी तो चार साल का हैं। तो नोरा ने कहा कि मैं इंतजार कर लूगी। नोरा का यह बयान काफी सुर्खियों में रहा। नोरा की पाॅपुलरटी किसी से छिपी नहीं हैं। वह आए दिन सोशल मीडिया में एक्टिव रहती हैं। जहां वीडियो एवं फोटोज शेयर करती रहती हैं। सभी उनकी तस्वीरों एवं वीडियो को खूब पसंद करते हैं। खबरों की माने तो नोरा अजय देवगन की फिल्म भुज द प्राइड आॅफ इंडिया में जल्द नजर आने वाली हैं।
नासिर हाकिम,महासमुंद. यहां से पार्टनरशिप में अस्पताल चलाने के नाम पर 91 लाख रुपए से अधिक की धोखाधड़ी करने का मामला सामने आया है. रायपुर निवासी शीला शर्मा ने अर्पिता हॉस्पिटल सरायपाली के संचालक सत्येंद्र प्रधान के खिलाफ सरायपाली थाने में शिकायत की है. जिसके बाद पुलिस ने सत्येंद्र प्रधान के खिलाफ 420 के तहत मामला दर्ज कर जांच में जुट गई है. मामला महासमुंद के सरायपाली थाना का है. पुलिस के मुताबिक थाने में लिखित शिकायत में शीला शर्मा ने बताया कि भागीदारी फर्म के अनुबंध 6 जुलाई 2016 के तहत जुलाई 2016 में मेमर्स अर्पिता हॉस्पिटल सरायपाली के नाम पर पार्टनरशिप फर्म पंजीकृत कराया गया था. आरोपी सत्येन्द्र प्रधान द्वारा उक्त अर्पिता हॉस्पिटल सरायपाली को एकल स्वामित्व के तहत पंजीयन कराकर संचालित किया जा रहा था. साथ ही सत्येन्द्र प्रधान के द्वारा पार्टनरशिप डीड निस्पादित कराकर अर्पिता हॉस्पिटल सरायपाली के नाम पर कुल 91 लाख 67 हजार 675 रूपये धोखाधड़ी की है. पार्टनरशिप डीड होने के बावजूद आरोपी ने अस्पताल एकल स्वामित्व में संचालन जारी रखा है. जिसकी शिकायत अब सरायपाली थाने में की गई है. मामले में पुलिस ने प्रथम दृष्या जांच करते हुए बैंक स्टेटमेंट और कागजों की जांच के बाद संचालय सत्येन्द्र प्रधान के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और मामले कि विवेचना शुरू कर दी है. जांच के दौरान पुलिस आगे आरोपी पर धारा बढ़ने के साथ आरोपियों की संख्या भी बढ़ने की बात कर रही है. फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है.
नासिर हाकिम,महासमुंद. यहां से पार्टनरशिप में अस्पताल चलाने के नाम पर इक्यानवे लाख रुपए से अधिक की धोखाधड़ी करने का मामला सामने आया है. रायपुर निवासी शीला शर्मा ने अर्पिता हॉस्पिटल सरायपाली के संचालक सत्येंद्र प्रधान के खिलाफ सरायपाली थाने में शिकायत की है. जिसके बाद पुलिस ने सत्येंद्र प्रधान के खिलाफ चार सौ बीस के तहत मामला दर्ज कर जांच में जुट गई है. मामला महासमुंद के सरायपाली थाना का है. पुलिस के मुताबिक थाने में लिखित शिकायत में शीला शर्मा ने बताया कि भागीदारी फर्म के अनुबंध छः जुलाई दो हज़ार सोलह के तहत जुलाई दो हज़ार सोलह में मेमर्स अर्पिता हॉस्पिटल सरायपाली के नाम पर पार्टनरशिप फर्म पंजीकृत कराया गया था. आरोपी सत्येन्द्र प्रधान द्वारा उक्त अर्पिता हॉस्पिटल सरायपाली को एकल स्वामित्व के तहत पंजीयन कराकर संचालित किया जा रहा था. साथ ही सत्येन्द्र प्रधान के द्वारा पार्टनरशिप डीड निस्पादित कराकर अर्पिता हॉस्पिटल सरायपाली के नाम पर कुल इक्यानवे लाख सरसठ हजार छः सौ पचहत्तर रूपये धोखाधड़ी की है. पार्टनरशिप डीड होने के बावजूद आरोपी ने अस्पताल एकल स्वामित्व में संचालन जारी रखा है. जिसकी शिकायत अब सरायपाली थाने में की गई है. मामले में पुलिस ने प्रथम दृष्या जांच करते हुए बैंक स्टेटमेंट और कागजों की जांच के बाद संचालय सत्येन्द्र प्रधान के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और मामले कि विवेचना शुरू कर दी है. जांच के दौरान पुलिस आगे आरोपी पर धारा बढ़ने के साथ आरोपियों की संख्या भी बढ़ने की बात कर रही है. फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है.
१४६ । बिसाऊ दिग्दर्शन को घमशाला वाला स्थान ) पर यह लीला होती रही है । इससे ज्ञात होता है कि उक्त रामलीला अनुमानत १५० वर्ष पूर्व से नगर म मचित होती भारती है तथा संस्थापित संवत् १९३६ वि सही प्रतीत होता है । एक यह प्रसग भी विचारणीय है । १८५७ ई के स्वतंत्रता संघप अग्रेजो से पराजित होकर बहुत से नातिकारी भूमिगत होगए थे। उस सम् एक ऋतिकारी ने प्राकर पश्चिमी द्वार के बाहर एक ऊँचे स्थान पर साधुमे अपना डेरा जमाया था । वह स्थान भाज 'तपसो जो के डेरे' के नाम प्रसिद्ध है। हो सकता है, उस समय किसी तिवारी की पत्नी साध्वी के व मे यहां आकर रही हो । उस समय देश मे सगठन को आवश्यकता घम के प्रति आस्था जागृत करके हो देशप्रेम की लहर उठाई जा सकती थी यदि जमना का बिसाऊ वस्बे म पधारना सन् १८५८ ई के लगभग माने तो लीला का प्रारम्भ १२७ वर्ष पूर्व ठहरता है । यह लीला सारे भारत मे होने वाली लोलाप्रो से अनोखी है। वतम मे यह आसोज शुक्ला १ से १५ पूर्णिमा तक ( पन्द्रह दिन तक ) चलती गढ के पास वाले मैदान के उत्तरी भाग मे लकडी की बनी हुई अयोध्या दक्षिणी भाग मे लकी रखी जाती है । बीच के भाग मे पचवटी रखी ज है । दशकों के लिए सेठ साहूकारो को भोर से दुकानों के सामने जाते हैं और सुरक्षा हेतु चारो ओर रस्से वा वे जाते हैं । मैदान में पान छिडकाव किया जाता है। ऊपर ब धनवार बा घी जाती है। उत्तर वर्दा की ओर दो दरवाजे बा घे जाते है । दरवाजो के परदी पर रामायण चौपाइया लिखी होती हैं । रामलीला का स्थाई कार्यालय सेठ जे के सिंहानिया की हवेल स्थापित है, जहां उसका सारा सामान पड़ा रहता है तथा स्वरूपो का बर शृगार वहा पर ही किया जाता है । वहा से पूरण तैयारी करके स्वरूप गाजेबाजे के साथ लोलास्थल पर जु सिंहानिया की हवेली भव रामलीला को हवली के नाम से प्रसिद्ध है । लौला के प्रमुख पात्र वानरो एव राक्षसों की पोशाकें रामलील हवेली मे दजियों को बठा बर विशेष प्रकार से सिलवाई जाती है । स्वरूपा की पोशाक हर वप नई सिलवाई जाती हैं। पाशाको का नि निम्न प्रकार से है -
एक सौ छियालीस । बिसाऊ दिग्दर्शन को घमशाला वाला स्थान ) पर यह लीला होती रही है । इससे ज्ञात होता है कि उक्त रामलीला अनुमानत एक सौ पचास वर्ष पूर्व से नगर म मचित होती भारती है तथा संस्थापित संवत् एक हज़ार नौ सौ छत्तीस वि सही प्रतीत होता है । एक यह प्रसग भी विचारणीय है । एक हज़ार आठ सौ सत्तावन ई के स्वतंत्रता संघप अग्रेजो से पराजित होकर बहुत से नातिकारी भूमिगत होगए थे। उस सम् एक ऋतिकारी ने प्राकर पश्चिमी द्वार के बाहर एक ऊँचे स्थान पर साधुमे अपना डेरा जमाया था । वह स्थान भाज 'तपसो जो के डेरे' के नाम प्रसिद्ध है। हो सकता है, उस समय किसी तिवारी की पत्नी साध्वी के व मे यहां आकर रही हो । उस समय देश मे सगठन को आवश्यकता घम के प्रति आस्था जागृत करके हो देशप्रेम की लहर उठाई जा सकती थी यदि जमना का बिसाऊ वस्बे म पधारना सन् एक हज़ार आठ सौ अट्ठावन ई के लगभग माने तो लीला का प्रारम्भ एक सौ सत्ताईस वर्ष पूर्व ठहरता है । यह लीला सारे भारत मे होने वाली लोलाप्रो से अनोखी है। वतम मे यह आसोज शुक्ला एक से पंद्रह पूर्णिमा तक चलती गढ के पास वाले मैदान के उत्तरी भाग मे लकडी की बनी हुई अयोध्या दक्षिणी भाग मे लकी रखी जाती है । बीच के भाग मे पचवटी रखी ज है । दशकों के लिए सेठ साहूकारो को भोर से दुकानों के सामने जाते हैं और सुरक्षा हेतु चारो ओर रस्से वा वे जाते हैं । मैदान में पान छिडकाव किया जाता है। ऊपर ब धनवार बा घी जाती है। उत्तर वर्दा की ओर दो दरवाजे बा घे जाते है । दरवाजो के परदी पर रामायण चौपाइया लिखी होती हैं । रामलीला का स्थाई कार्यालय सेठ जे के सिंहानिया की हवेल स्थापित है, जहां उसका सारा सामान पड़ा रहता है तथा स्वरूपो का बर शृगार वहा पर ही किया जाता है । वहा से पूरण तैयारी करके स्वरूप गाजेबाजे के साथ लोलास्थल पर जु सिंहानिया की हवेली भव रामलीला को हवली के नाम से प्रसिद्ध है । लौला के प्रमुख पात्र वानरो एव राक्षसों की पोशाकें रामलील हवेली मे दजियों को बठा बर विशेष प्रकार से सिलवाई जाती है । स्वरूपा की पोशाक हर वप नई सिलवाई जाती हैं। पाशाको का नि निम्न प्रकार से है -
राजिया के सोरटे समर सियाल सुभाव, गलियारा गाहिड करै । इसड़ा तो उमराय, रोटो मुहँगा राजिया ॥७९॥ जो युद्ध के समय तो गीदड की तरह भागे और गलियो मे अपनी शूरवीरता प्रकट करे हे राजिया । ऐसे उमराव तो रोटियो मे भी मँहगे है । कही न मांनै काय, जुगती अरगजुगती जगत । स्यारां नै सुख पाय, रहणाँ चुप हुय राजिया ॥८॥ जब कोई उचित और अनुचित बात की ओर ध्यान भी न दे तो हे राजिया । बुद्धिमान मनुष्य को चुप होकर हो सुख प्राप्त करना उचित है । पाटा पीड़ उपाव, तन लागा तरवारियां । बहै जीब रा घाव, रती न प्रोषध राजिया ॥८१॥ हे राजिया । शरीर पर तलवारो के घावो को मल्हम पट्टी करके अच्छा किया जा सकता है, परन्तु वचनो द्वारा लगे घावो की ससार मे कोई दवा ही नहीं है । नहचै रहो निशंक, मत कोजे चल विचल मन । ऐ विधना रा प्रक, राई घंटे न राजिया ॥८२।। हमेशा बिल्कुल निशक हो कर रहो। अपने मन को विच लित न होने दो, क्योकि हे राजिया । जो अक ब्रह्मा ने लिख दिये है वे तो एक तिल भर घट-बढ़ नहीं सकते है । १ लोह तरणी तरवार न लागू, जीभ तरणी तरवार जिसी ।
राजिया के सोरटे समर सियाल सुभाव, गलियारा गाहिड करै । इसड़ा तो उमराय, रोटो मुहँगा राजिया ॥उन्यासी॥ जो युद्ध के समय तो गीदड की तरह भागे और गलियो मे अपनी शूरवीरता प्रकट करे हे राजिया । ऐसे उमराव तो रोटियो मे भी मँहगे है । कही न मांनै काय, जुगती अरगजुगती जगत । स्यारां नै सुख पाय, रहणाँ चुप हुय राजिया ॥आठ॥ जब कोई उचित और अनुचित बात की ओर ध्यान भी न दे तो हे राजिया । बुद्धिमान मनुष्य को चुप होकर हो सुख प्राप्त करना उचित है । पाटा पीड़ उपाव, तन लागा तरवारियां । बहै जीब रा घाव, रती न प्रोषध राजिया ॥इक्यासी॥ हे राजिया । शरीर पर तलवारो के घावो को मल्हम पट्टी करके अच्छा किया जा सकता है, परन्तु वचनो द्वारा लगे घावो की ससार मे कोई दवा ही नहीं है । नहचै रहो निशंक, मत कोजे चल विचल मन । ऐ विधना रा प्रक, राई घंटे न राजिया ॥बयासी।। हमेशा बिल्कुल निशक हो कर रहो। अपने मन को विच लित न होने दो, क्योकि हे राजिया । जो अक ब्रह्मा ने लिख दिये है वे तो एक तिल भर घट-बढ़ नहीं सकते है । एक लोह तरणी तरवार न लागू, जीभ तरणी तरवार जिसी ।
राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को बीते दिनों IRCTC मामले में जमानत मिली लेकिन अभी भी उनकी मुश्किलें बरकरार है. फिलहाल लालू यादव रांची के रिम्स अस्पताल में इलाज़रत है और झारखण्ड हाईकोर्ट से चारा घोटाले में फिलहाल उन्हें कोई राहत मिलती नज़र नही आ रही है. इधर लोकसभा चुनाव भी करीब आ गया है और हर चुनावों में एक्टिव रहने वाले लालू की कमी भी उनकी पार्टी को खल रही है. यह ट्वीट लालू यादव का एक इशारा है जो उन्होंने अपनी सजा और आने वाले लोकसभा के मद्देनज़र किया है. इस ट्वीट के साथ लालू यादव ने एक मैगज़ीन का कवर फोटो भी शेयर किया है जो किसी बुक स्टाल पर नज़र आ रही है. आउटलुक की कवर पेज पर लालू यादव को किंगमेकर बताते हुए उनकी फोटो छपी है और उसपे सवाल के रूप में लिखा है Absentee Kingmaker? तो दोस्तों, हर ख़बरों और उनसे जुड़े अपडेट के लिए हमारे साथ जुड़े रहिये क्यूंकि हम रखते है ख़बरों पर पैनी नज़र, और हाँ बिहारी न्यूज़ का youtube channel रूबरू बिहार को subscribe करना न भूले. लिंक नीचे दिया गया है.
राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को बीते दिनों IRCTC मामले में जमानत मिली लेकिन अभी भी उनकी मुश्किलें बरकरार है. फिलहाल लालू यादव रांची के रिम्स अस्पताल में इलाज़रत है और झारखण्ड हाईकोर्ट से चारा घोटाले में फिलहाल उन्हें कोई राहत मिलती नज़र नही आ रही है. इधर लोकसभा चुनाव भी करीब आ गया है और हर चुनावों में एक्टिव रहने वाले लालू की कमी भी उनकी पार्टी को खल रही है. यह ट्वीट लालू यादव का एक इशारा है जो उन्होंने अपनी सजा और आने वाले लोकसभा के मद्देनज़र किया है. इस ट्वीट के साथ लालू यादव ने एक मैगज़ीन का कवर फोटो भी शेयर किया है जो किसी बुक स्टाल पर नज़र आ रही है. आउटलुक की कवर पेज पर लालू यादव को किंगमेकर बताते हुए उनकी फोटो छपी है और उसपे सवाल के रूप में लिखा है Absentee Kingmaker? तो दोस्तों, हर ख़बरों और उनसे जुड़े अपडेट के लिए हमारे साथ जुड़े रहिये क्यूंकि हम रखते है ख़बरों पर पैनी नज़र, और हाँ बिहारी न्यूज़ का youtube channel रूबरू बिहार को subscribe करना न भूले. लिंक नीचे दिया गया है.
पोस्ट ऑफिस (Post Office) का इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक (IPPB) अकाउंट काफी फायदेमंद है. ये एक डिजिटल अकाउंट है. इस अकाउंट को अब आप अपने मोबाइल फोन की मदद से घर बैठे डिजिटल रूप से सेविंग अकाउंट खोल सकते हैं. आईपीपीबी के सभी खाताधारक इस ऐप की मदद से बेहद आसानी से बेसिक ट्रांजैक्शन कर सकते हैं. इस बैंक ऐप के माध्यम से ग्राहक बैंक की सभी सेवाओं के निकट में आ गए हैं. अगर आप दिनभर व्यस्त रहते हैं और पोस्ट ऑफिस जाने का समय नहीं निकाल पा रहे हैं तो घर बैठे आईपीपीबी की ऐप डाउनलोड कर उससे डिजिटल सेविंग अकाउंट खुलवा सकते हैं. कौन-कौन खुलवा सकता है खाता? अगर आप आईपीपीबी (IPPB) में खाता खुलवाना चाहते हैं तो आपकी उम्र 18 साल से अधिक होनी चाहिए. आपको बता दें कि डिजिटल सेविंग अकाउंट 1 साल के लिए वैध होता है. खाता खोलने के 1 साल के अंदर आपको खाते के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण को पूरा करना होगा. जिसके बाद आप के खाते को रेगुलर सेविंग में तब्दील कर दिया जाएगा. अकाउंट कैसे खोलें? अपना सेविंग अकाउंट खोलने के लिए आपको सबसे पहले अपने मोबाइल फोन में आईपीपीबी के मोबाइल बैंकिंग ऐप को डाउनलोड करना होगा. यह ऐप गूगल प्लेस्टोर पर आसानी से मिल जाएगा. डाउनलोड होने के बाद मोबाइल एप को खोलिए. उसके बाद Open Account पर क्लिक करिए. उसके बाद आपसे आधार कार्ड नंबर और पैन कार्ड नंबर मांगा जाएगा. दोनों नंबर ऐप में भरने के बाद आपके लिंक्ड मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी आएगा. उसके बाद आपको ओटीपी को दर्ज करना पड़ेगा. इस स्टेप के बाद ऐप आपसे आप की मां का नाम , शैक्षणिक योग्यता , पता और नॉमिनी आदि की डिटेल दर्ज करने को कहेगी. यह डिटेल भरने के बाद आपको सबमिट के ऑप्शन पर क्लिक करना होगा. यह प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही आपका खाता ओपन हो जाएगा अब आप इस बैंक खाते को इस्तेमाल कर सकते हैं. IPPB अकाउंट के जरिए कई सर्विस का इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे यूपीआई पेमेंट भी संभव है. वहीं, पोस्ट ऑफिस में अगर आपने पीपीएफ, आरडी, सुकन्या समृद्धि योजान में निवेश किया है तो इसके हर महीने जमा करने वाले किस्त आप इस अकाउंट के जरिए जमा कर सकते हैं.
पोस्ट ऑफिस का इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक अकाउंट काफी फायदेमंद है. ये एक डिजिटल अकाउंट है. इस अकाउंट को अब आप अपने मोबाइल फोन की मदद से घर बैठे डिजिटल रूप से सेविंग अकाउंट खोल सकते हैं. आईपीपीबी के सभी खाताधारक इस ऐप की मदद से बेहद आसानी से बेसिक ट्रांजैक्शन कर सकते हैं. इस बैंक ऐप के माध्यम से ग्राहक बैंक की सभी सेवाओं के निकट में आ गए हैं. अगर आप दिनभर व्यस्त रहते हैं और पोस्ट ऑफिस जाने का समय नहीं निकाल पा रहे हैं तो घर बैठे आईपीपीबी की ऐप डाउनलोड कर उससे डिजिटल सेविंग अकाउंट खुलवा सकते हैं. कौन-कौन खुलवा सकता है खाता? अगर आप आईपीपीबी में खाता खुलवाना चाहते हैं तो आपकी उम्र अट्ठारह साल से अधिक होनी चाहिए. आपको बता दें कि डिजिटल सेविंग अकाउंट एक साल के लिए वैध होता है. खाता खोलने के एक साल के अंदर आपको खाते के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण को पूरा करना होगा. जिसके बाद आप के खाते को रेगुलर सेविंग में तब्दील कर दिया जाएगा. अकाउंट कैसे खोलें? अपना सेविंग अकाउंट खोलने के लिए आपको सबसे पहले अपने मोबाइल फोन में आईपीपीबी के मोबाइल बैंकिंग ऐप को डाउनलोड करना होगा. यह ऐप गूगल प्लेस्टोर पर आसानी से मिल जाएगा. डाउनलोड होने के बाद मोबाइल एप को खोलिए. उसके बाद Open Account पर क्लिक करिए. उसके बाद आपसे आधार कार्ड नंबर और पैन कार्ड नंबर मांगा जाएगा. दोनों नंबर ऐप में भरने के बाद आपके लिंक्ड मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी आएगा. उसके बाद आपको ओटीपी को दर्ज करना पड़ेगा. इस स्टेप के बाद ऐप आपसे आप की मां का नाम , शैक्षणिक योग्यता , पता और नॉमिनी आदि की डिटेल दर्ज करने को कहेगी. यह डिटेल भरने के बाद आपको सबमिट के ऑप्शन पर क्लिक करना होगा. यह प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही आपका खाता ओपन हो जाएगा अब आप इस बैंक खाते को इस्तेमाल कर सकते हैं. IPPB अकाउंट के जरिए कई सर्विस का इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे यूपीआई पेमेंट भी संभव है. वहीं, पोस्ट ऑफिस में अगर आपने पीपीएफ, आरडी, सुकन्या समृद्धि योजान में निवेश किया है तो इसके हर महीने जमा करने वाले किस्त आप इस अकाउंट के जरिए जमा कर सकते हैं.
उरई (जालौन)। हड़ताल के दौरान अधिकारियों के रवैये से शिक्षक नेता खफा हैं। ठकुराई गुट के वरिष्ठ नेता लाल सिंह चौहान, राजकीय माध्यमिक विद्यालय शिक्षक संघ के प्रांतीय नेता सुंदर लाल यादव का कहना था कि सिटी मजिस्ट्रेट रजनीश चंद्र, डीआईओएस विधि नारायण जिस तरह से शिक्षकों से बर्ताव कर रहे थे, उसे देखकर बसपा शासन की याद आ गई। चेतनारायण गुट के वरिष्ठ नेता गिरेंद्र सिंह, मंडलीय मंत्री देवेंद्र कुलश्रेष्ठ, वित्तविहीन शिक्षक महासभा के प्रांतीय महामंत्री अशोक राठौर ने हड़ताल पर बैठे शिक्षकों के साथ अधिकारियों के व्यवहार को बसपाई कार्यकर्ता जैसे व्यवहार बताया। इनका कहना था कि हम जेल तो जा सकते हैं, लेकिन लोकतंत्र में अपनी आवाज उठाने, धरना देने के अधिकार को रोकने वालों को बर्दाश्त नहीं करेंगे।
उरई । हड़ताल के दौरान अधिकारियों के रवैये से शिक्षक नेता खफा हैं। ठकुराई गुट के वरिष्ठ नेता लाल सिंह चौहान, राजकीय माध्यमिक विद्यालय शिक्षक संघ के प्रांतीय नेता सुंदर लाल यादव का कहना था कि सिटी मजिस्ट्रेट रजनीश चंद्र, डीआईओएस विधि नारायण जिस तरह से शिक्षकों से बर्ताव कर रहे थे, उसे देखकर बसपा शासन की याद आ गई। चेतनारायण गुट के वरिष्ठ नेता गिरेंद्र सिंह, मंडलीय मंत्री देवेंद्र कुलश्रेष्ठ, वित्तविहीन शिक्षक महासभा के प्रांतीय महामंत्री अशोक राठौर ने हड़ताल पर बैठे शिक्षकों के साथ अधिकारियों के व्यवहार को बसपाई कार्यकर्ता जैसे व्यवहार बताया। इनका कहना था कि हम जेल तो जा सकते हैं, लेकिन लोकतंत्र में अपनी आवाज उठाने, धरना देने के अधिकार को रोकने वालों को बर्दाश्त नहीं करेंगे।
फतेहाबाद। रणजीत सिंह हत्याकांड मामले में आज कोर्ट सजा का सुनाएगी। इसलिए डेरा चीफ गुरमीत समेत सभी 5 दोषियों के लिए आज का दिन अहम है। मामले को लेकर पिछले एक घंटे से कोर्ट में सुनवाई चल रही है। इस मामले में कोर्ट किसी भी वक्त फैसला सुना सकती है। यहां बता दें कि मामले में सजा को लेकर हो रही बहस में गुरमीत के अलावा बाकी 4 दोषियों को कोर्ट में पेश किया जा चुका है, जबकि डेरा प्रमुख गुरमीत को रोहतक की सुनारिया जेल से वीडियो कॉफ्रेंस के माध्यम से पेश किया गया है। यहां बता दें कि उस समय के डेरा प्रमुख रंजीत सिंह की हत्या जुलाई 2002 मे गोली मारकर की गई थी। विदित हो कि बीते 8 अक्टूबर को ही उक्त मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने गुरमीत ङ्क्षसह समेत उस समय के डेरा चीफ कृष्ण लाल, अवतार सिंह, सबदिल और जसबीर को दोषी कारार दिया था। इसके बाद सजा का फैसला बीते 12 अक्टूबर को होना था लेकिन कोर्ट ने आगे 18 अक्टूबर की तारीख दे दी थी, इसलिए सजा पर फैसला आज होगा।
फतेहाबाद। रणजीत सिंह हत्याकांड मामले में आज कोर्ट सजा का सुनाएगी। इसलिए डेरा चीफ गुरमीत समेत सभी पाँच दोषियों के लिए आज का दिन अहम है। मामले को लेकर पिछले एक घंटे से कोर्ट में सुनवाई चल रही है। इस मामले में कोर्ट किसी भी वक्त फैसला सुना सकती है। यहां बता दें कि मामले में सजा को लेकर हो रही बहस में गुरमीत के अलावा बाकी चार दोषियों को कोर्ट में पेश किया जा चुका है, जबकि डेरा प्रमुख गुरमीत को रोहतक की सुनारिया जेल से वीडियो कॉफ्रेंस के माध्यम से पेश किया गया है। यहां बता दें कि उस समय के डेरा प्रमुख रंजीत सिंह की हत्या जुलाई दो हज़ार दो मे गोली मारकर की गई थी। विदित हो कि बीते आठ अक्टूबर को ही उक्त मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने गुरमीत ङ्क्षसह समेत उस समय के डेरा चीफ कृष्ण लाल, अवतार सिंह, सबदिल और जसबीर को दोषी कारार दिया था। इसके बाद सजा का फैसला बीते बारह अक्टूबर को होना था लेकिन कोर्ट ने आगे अट्ठारह अक्टूबर की तारीख दे दी थी, इसलिए सजा पर फैसला आज होगा।
ऋतिक रोशन करेंगे शाहरुख खान के साथ 'करन-अर्जुन 2' लेकिन रखी है एक शर्त !! चलिए हम उम्मीद करेंगे ऋतिक आपके पापा जल्द ही 'करन-अर्जुन 2' की स्क्रिप्ट लिखें, जिसमें आपका और शाहरुख का रोल बराबर दमदार हो। ताकि हम आप दोनों को एक बार फिर से बड़ी स्क्रीन पर साथ देख पायें। वैसे आपको बता दें कि आखिरी बार यह दोनों कलाकार साल 2001 में आयी करन जौहर की 'कभी खुशी कभी गम' में एक साथ दिखे थे। इस फिल्म में इन दोनों ने भाईयों का किरदार निभाया था। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
ऋतिक रोशन करेंगे शाहरुख खान के साथ 'करन-अर्जुन दो' लेकिन रखी है एक शर्त !! चलिए हम उम्मीद करेंगे ऋतिक आपके पापा जल्द ही 'करन-अर्जुन दो' की स्क्रिप्ट लिखें, जिसमें आपका और शाहरुख का रोल बराबर दमदार हो। ताकि हम आप दोनों को एक बार फिर से बड़ी स्क्रीन पर साथ देख पायें। वैसे आपको बता दें कि आखिरी बार यह दोनों कलाकार साल दो हज़ार एक में आयी करन जौहर की 'कभी खुशी कभी गम' में एक साथ दिखे थे। इस फिल्म में इन दोनों ने भाईयों का किरदार निभाया था। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
भारत में क्रिकेट को लोग कितना पसंद करते है ये सभी जानते हैं और इसका एक नमूना 12 फरवरी को वाराणसी में भी देखा गया, जहां पर बच्चे धोती और कुर्ते में क्रिकेट खेलते हुए नज़र आए। ये सभी बच्चे सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविधालय के छात्र थे। इस विश्वविधालय में खेले गए टूर्नामेंट में 5 टीमों ने हिस्सा लिया और इस टूर्नामेंट की खास बात ये रही कि सभी मैचों की कमेंट्री संस्कृत भाषा में की गई, जो वहां पर मौजूद सभी लोगो को पसंद भी आई। इस टूर्नामेंट का उद्देशय सभी को यह बताना था कि अर्थशास्त्र की शिक्षा लेने वाले विधार्थी वो सभी खेल व काम कर सकतें हैं जो बाकी के सभी लोग करते हैं। ऐसा क्रिकेट टूर्नामेंट भारत में पहली बार देखा गया है और ये लोगों को काफी पसंद भी आया। इस टूर्नामेंट के सभी नियम भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के थे।
भारत में क्रिकेट को लोग कितना पसंद करते है ये सभी जानते हैं और इसका एक नमूना बारह फरवरी को वाराणसी में भी देखा गया, जहां पर बच्चे धोती और कुर्ते में क्रिकेट खेलते हुए नज़र आए। ये सभी बच्चे सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविधालय के छात्र थे। इस विश्वविधालय में खेले गए टूर्नामेंट में पाँच टीमों ने हिस्सा लिया और इस टूर्नामेंट की खास बात ये रही कि सभी मैचों की कमेंट्री संस्कृत भाषा में की गई, जो वहां पर मौजूद सभी लोगो को पसंद भी आई। इस टूर्नामेंट का उद्देशय सभी को यह बताना था कि अर्थशास्त्र की शिक्षा लेने वाले विधार्थी वो सभी खेल व काम कर सकतें हैं जो बाकी के सभी लोग करते हैं। ऐसा क्रिकेट टूर्नामेंट भारत में पहली बार देखा गया है और ये लोगों को काफी पसंद भी आया। इस टूर्नामेंट के सभी नियम भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के थे।
भुवनेश्वर ने कुछ कविताएँ अंग्रेजी में लिखी थी. बाद में जिनका हिंदी अनुवाद शमशेर बहादुर सिंह ने किया. दोनों शताब्दी कवि-लेखकों की यह जुगलबंदी प्रस्तुत है- जानकी पुल. कान में रुथ के. खुल सीसामा! खुल सीसामा! धन था. तो क्या वह बीमार हो गया था? झूठ बोलता ही है.
भुवनेश्वर ने कुछ कविताएँ अंग्रेजी में लिखी थी. बाद में जिनका हिंदी अनुवाद शमशेर बहादुर सिंह ने किया. दोनों शताब्दी कवि-लेखकों की यह जुगलबंदी प्रस्तुत है- जानकी पुल. कान में रुथ के. खुल सीसामा! खुल सीसामा! धन था. तो क्या वह बीमार हो गया था? झूठ बोलता ही है.
- 1 hr ago Viral Video: बंद कमरे में लड़कियों ने की ऐसी हरकत, वीडियो देख भड़के यूजर्स, बोले- 'पढ़ने लिखने की उम्र में...' Don't Miss! Bigg Boss 16: फिनाले से पहले इस कंटेस्टेंट ने मारी बाजी, कमाए सबसे अधिक करोड़ों, जानिए कौन? Sumbul Touqeer Khan:बिग बॅास 16 में खेल अपने आखिरी पड़ाव पर चल रहा है। ऐसे में घर के अंदर 9 कंटेस्टेंट बचे हुए हैं। इस सप्ताह भी कोई एक कंटेस्टेंट शो से बाहर जाने वाला है। बिग बॅास 16 में एम सी स्टैन और सुंबुल तौकीर खान को सबसे कम एक्टिव कंटेस्टेंटस बताया गया है। हर बार दोनों को इसे लेकर घर के भीतर और बाहर आरोप सहने पड़े हैं। वहीं अब सुंबुल तौकीर खान को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। मिली जानकारी अनुसार सुंबुल तौकीर खान ने बिग बॅास से तगड़ी कमाई कर ली है। सुंबुल तौकीर खान की शो में सबसे अधिक फीस लेने वाली कंटेस्टेंट के तौर पर एंट्री हुई थी। वहीं अब शो में 100 दिन से अधिक टिक कर सुंबुल तौकीर खान ने करोड़ों की कमाई कर ली है। बिग बॅास 16 में अब्दु रोजिक, साजिद खान शो से बाहर हो गए हैं। घर के भीतर शिव ठाकरे, टीना दत्ता, निमृत कौर, शालीन भनोट, प्रियंका चाहर चौधरी, एम सी स्टैन, अर्चना गौतम और सौंदर्या बचे हुए हैं। हाल ही में सामने आयी एक रिपोर्ट अनुसार बिग बॅास 16 के सभी कंटेस्टेंट के मुकाबले सबसे अधिक फीस सुंबुल तौकीर खान को दी गई है। बिग बॅास ने सुंबुल तौकीर खान को करोड़पति बना दिया है। एक वेबसाइट की रिपोर्ट अनुसार बिग बॅास 16 की सबसे कम उम्र की कंटेस्टेंट सुंबुल तौकीर खान शो में सबसे ज्यादा अधिक फीस लेने वाली कंटेस्टेंट हैं। सुंबुल और अब्दु रोजित एक ही उम्र के कंटेस्टेंट रहे हैं। अब्दु रोजिक तो शो से बाहर अपने काम के कारण चले गए हैं। सुंबुल शो में रहकर कमाई पर कमाई बटोरती जा रही हैं। रिपोर्ट अनुसार सुंबुल को हर वीक के लिए 9 लाख की फीस दी गई है। ऐसे में अभी तक सुंबुल तौकीर खान ने 1.68 करोड़ की कमाई कर चुकी हैं। टीना दत्ता ने शो से अभी तक 1 करोड़ के करीब की कमाई अपनी झोली में रखी है।
- एक hr ago Viral Video: बंद कमरे में लड़कियों ने की ऐसी हरकत, वीडियो देख भड़के यूजर्स, बोले- 'पढ़ने लिखने की उम्र में...' Don't Miss! Bigg Boss सोलह: फिनाले से पहले इस कंटेस्टेंट ने मारी बाजी, कमाए सबसे अधिक करोड़ों, जानिए कौन? Sumbul Touqeer Khan:बिग बॅास सोलह में खेल अपने आखिरी पड़ाव पर चल रहा है। ऐसे में घर के अंदर नौ कंटेस्टेंट बचे हुए हैं। इस सप्ताह भी कोई एक कंटेस्टेंट शो से बाहर जाने वाला है। बिग बॅास सोलह में एम सी स्टैन और सुंबुल तौकीर खान को सबसे कम एक्टिव कंटेस्टेंटस बताया गया है। हर बार दोनों को इसे लेकर घर के भीतर और बाहर आरोप सहने पड़े हैं। वहीं अब सुंबुल तौकीर खान को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। मिली जानकारी अनुसार सुंबुल तौकीर खान ने बिग बॅास से तगड़ी कमाई कर ली है। सुंबुल तौकीर खान की शो में सबसे अधिक फीस लेने वाली कंटेस्टेंट के तौर पर एंट्री हुई थी। वहीं अब शो में एक सौ दिन से अधिक टिक कर सुंबुल तौकीर खान ने करोड़ों की कमाई कर ली है। बिग बॅास सोलह में अब्दु रोजिक, साजिद खान शो से बाहर हो गए हैं। घर के भीतर शिव ठाकरे, टीना दत्ता, निमृत कौर, शालीन भनोट, प्रियंका चाहर चौधरी, एम सी स्टैन, अर्चना गौतम और सौंदर्या बचे हुए हैं। हाल ही में सामने आयी एक रिपोर्ट अनुसार बिग बॅास सोलह के सभी कंटेस्टेंट के मुकाबले सबसे अधिक फीस सुंबुल तौकीर खान को दी गई है। बिग बॅास ने सुंबुल तौकीर खान को करोड़पति बना दिया है। एक वेबसाइट की रिपोर्ट अनुसार बिग बॅास सोलह की सबसे कम उम्र की कंटेस्टेंट सुंबुल तौकीर खान शो में सबसे ज्यादा अधिक फीस लेने वाली कंटेस्टेंट हैं। सुंबुल और अब्दु रोजित एक ही उम्र के कंटेस्टेंट रहे हैं। अब्दु रोजिक तो शो से बाहर अपने काम के कारण चले गए हैं। सुंबुल शो में रहकर कमाई पर कमाई बटोरती जा रही हैं। रिपोर्ट अनुसार सुंबुल को हर वीक के लिए नौ लाख की फीस दी गई है। ऐसे में अभी तक सुंबुल तौकीर खान ने एक.अड़सठ करोड़ की कमाई कर चुकी हैं। टीना दत्ता ने शो से अभी तक एक करोड़ के करीब की कमाई अपनी झोली में रखी है।
Mirzapur : उत्तर प्रदेश में कई सारे प्रसिद्ध धार्मिक और दार्शनिक स्थल हैं। प्रदेश में कई जगहें तो इतनी खूबसूरत और अद्भुत हैं, वहां का नजारा किसी विदेशी दृश्यों की याद दिलाता है। मिर्जापुर जिले में आपको ऐसे ही दार्शनिक स्थल घूमने को मिल सकते हैं। भगवान शिव की नगरी वाराणसी बाबा काशी विश्वनाथ धाम के लिए प्रसिद्ध है। भोलेनाथ के दर्शन के लिए हर साल लाखों श्रद्धालु काशी विश्वनाथ मंदिर जाते हैं। सावन का महीना आने वाला है। इस पूरे महीने में बाबा भोलेनाथ की पूजा अर्चना होती है और लोग उपवास करते हैं व भगवान शिव के मंदिर व शिवालयों के दर्शन के लिए जाते हैं। वाराणसी में शिवजी के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक काशी विश्वनाथ जी विद्यमान हैं। उनके दर्शन के लिए जाएं तो पड़ोसी जिले मिर्जापुर की भी इस बार सैर करें। मिर्जापुर में प्रसिद्ध विंध्याचल माता का मंदिर भी है। यहां कई खूबसूरत स्थल हैं तो आपका मन मोह लेंगे। चलिए जानते हैं मिर्जापुर के पर्यटन स्थलों के बारे में। मिर्जापुर मंदिरों और झरनों के लिए प्रसिद्ध है। मिर्जापुर के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में विंध्याचल माता का मंदिर आता है। माता विंध्यवासिनी मंदिर के दर्शन के लिए लाखों भक्त हर साल यहां आते हैं। नवरात्रि के दिनों में यहां बहुत अधिक भीड़ रहती है। विंध्यवासिनी मंदिर को माता सती के प्रसिद्ध शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। विंध्याचल माता के मंदिर दर्शन के लिए जाएं तो पास में ही काली खोह मंदिर के दर्शन के लिए भी जा सकते हैं। विंध्य की पहाड़ियों पर स्थित यह मंदिर माता काली को समर्पित है। धार्मिक महत्व के साथ ही यह स्थल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण भी प्रसिद्ध है। वाराणसी के रास्ते आसानी से यहां पहुंच सकते हैं। मिर्जापुर में धार्मिक स्थलों के साथ ही ऐतिहासिक रूप से भी महत्वपूर्ण हैं। जिले में प्रसिद्ध चुनार का किला मौजूद है। किले के पास पवित्र गंगा नहीं बहती है। यह किला काफी पुराना है और ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। इतिहास प्रेमियों को यह जगह जरूर पसंद आएगी। मिर्जापुर जिले में बहुत ही खूबसूरत झरने और नदियां हैं। विंडम वाटरफॉल जिसे व्यंधाम जलप्रपात भी कहते हैं, यहां के सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है। यहां पिकनिक मनाने के लिए लोग जाते हैं। चट्टानों से बहती नदियां और खूबसूरत जलप्रपात आपको मग्न मुग्ध कर देगा। इसके अलावा जिले में सिद्धनाथ की दरी नाम की जगह भी है, यहां भी बहुत सुंदर झरना बहता है। इन दोनों झरनों के दृश्य देखने के बाद आप उत्तर या दक्षिण भारत के झरने भूल जाएंगे।
Mirzapur : उत्तर प्रदेश में कई सारे प्रसिद्ध धार्मिक और दार्शनिक स्थल हैं। प्रदेश में कई जगहें तो इतनी खूबसूरत और अद्भुत हैं, वहां का नजारा किसी विदेशी दृश्यों की याद दिलाता है। मिर्जापुर जिले में आपको ऐसे ही दार्शनिक स्थल घूमने को मिल सकते हैं। भगवान शिव की नगरी वाराणसी बाबा काशी विश्वनाथ धाम के लिए प्रसिद्ध है। भोलेनाथ के दर्शन के लिए हर साल लाखों श्रद्धालु काशी विश्वनाथ मंदिर जाते हैं। सावन का महीना आने वाला है। इस पूरे महीने में बाबा भोलेनाथ की पूजा अर्चना होती है और लोग उपवास करते हैं व भगवान शिव के मंदिर व शिवालयों के दर्शन के लिए जाते हैं। वाराणसी में शिवजी के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक काशी विश्वनाथ जी विद्यमान हैं। उनके दर्शन के लिए जाएं तो पड़ोसी जिले मिर्जापुर की भी इस बार सैर करें। मिर्जापुर में प्रसिद्ध विंध्याचल माता का मंदिर भी है। यहां कई खूबसूरत स्थल हैं तो आपका मन मोह लेंगे। चलिए जानते हैं मिर्जापुर के पर्यटन स्थलों के बारे में। मिर्जापुर मंदिरों और झरनों के लिए प्रसिद्ध है। मिर्जापुर के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में विंध्याचल माता का मंदिर आता है। माता विंध्यवासिनी मंदिर के दर्शन के लिए लाखों भक्त हर साल यहां आते हैं। नवरात्रि के दिनों में यहां बहुत अधिक भीड़ रहती है। विंध्यवासिनी मंदिर को माता सती के प्रसिद्ध शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। विंध्याचल माता के मंदिर दर्शन के लिए जाएं तो पास में ही काली खोह मंदिर के दर्शन के लिए भी जा सकते हैं। विंध्य की पहाड़ियों पर स्थित यह मंदिर माता काली को समर्पित है। धार्मिक महत्व के साथ ही यह स्थल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण भी प्रसिद्ध है। वाराणसी के रास्ते आसानी से यहां पहुंच सकते हैं। मिर्जापुर में धार्मिक स्थलों के साथ ही ऐतिहासिक रूप से भी महत्वपूर्ण हैं। जिले में प्रसिद्ध चुनार का किला मौजूद है। किले के पास पवित्र गंगा नहीं बहती है। यह किला काफी पुराना है और ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। इतिहास प्रेमियों को यह जगह जरूर पसंद आएगी। मिर्जापुर जिले में बहुत ही खूबसूरत झरने और नदियां हैं। विंडम वाटरफॉल जिसे व्यंधाम जलप्रपात भी कहते हैं, यहां के सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है। यहां पिकनिक मनाने के लिए लोग जाते हैं। चट्टानों से बहती नदियां और खूबसूरत जलप्रपात आपको मग्न मुग्ध कर देगा। इसके अलावा जिले में सिद्धनाथ की दरी नाम की जगह भी है, यहां भी बहुत सुंदर झरना बहता है। इन दोनों झरनों के दृश्य देखने के बाद आप उत्तर या दक्षिण भारत के झरने भूल जाएंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज केंद्रीय कैबिनेट की बैठक होने जा रही है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी मंत्री 10:30 बजे इसमें शामिल होंगे। इस बैठक में केंद्र सरकार द्वारा कुछ बड़े फैसले लिए जाने की संभावना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ-साथ इस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी शामिल होंगी। इस बैठक में देश के मौजूदा आर्थिक हालात को लेकर कुछ बड़े फैसले होने की संभावना है। साथ ही कैबिनेट कुछ अहम और बड़े प्रोजेक्ट को मंजूरी दे सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज केंद्रीय कैबिनेट की बैठक होने जा रही है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी मंत्री दस:तीस बजे इसमें शामिल होंगे। इस बैठक में केंद्र सरकार द्वारा कुछ बड़े फैसले लिए जाने की संभावना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ-साथ इस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी शामिल होंगी। इस बैठक में देश के मौजूदा आर्थिक हालात को लेकर कुछ बड़े फैसले होने की संभावना है। साथ ही कैबिनेट कुछ अहम और बड़े प्रोजेक्ट को मंजूरी दे सकता है।
गुजरात में सौराष्ट्र क्षेत्र के अमरेली जिले में शनिवार सुबह 3. 2 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए। हालांकि, भूकंप से जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है। भूकंप विज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईएसआर) ने अपने ताजा अपडेट में बताया कि भूकंप सुबह सात बजकर 51 मिनट पर आया और इसका केंद्र अमरेली शहर से 43 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिणपूर्व में जमीन की 3. 2 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। अमरेली, अहमदाबाद से करीब 240 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। गौरतलब है कि गुजरात के कच्छ जिले में 30 जनवरी को 4. 2 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें हजारों लोगों की जान गई थी।
गुजरात में सौराष्ट्र क्षेत्र के अमरेली जिले में शनिवार सुबह तीन. दो तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए। हालांकि, भूकंप से जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है। भूकंप विज्ञान अनुसंधान संस्थान ने अपने ताजा अपडेट में बताया कि भूकंप सुबह सात बजकर इक्यावन मिनट पर आया और इसका केंद्र अमरेली शहर से तैंतालीस किलोग्राममीटर दक्षिण-दक्षिणपूर्व में जमीन की तीन. दो किलोग्राममीटर की गहराई में स्थित था। अमरेली, अहमदाबाद से करीब दो सौ चालीस किलोग्राममीटर की दूरी पर स्थित है। गौरतलब है कि गुजरात के कच्छ जिले में तीस जनवरी को चार. दो तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें हजारों लोगों की जान गई थी।
यूपी बोर्ड के 100 साल पुराने अधिनियम में संशोधन के बाद नये स्कूलों को जारी की जाएगी मान्यता। प्रयागराज : यूपी बोर्ड के 100 साल पुराने अधिनियम में संशोधन के बाद नये स्कूलों को मान्यता जारी की जाएगी। संशोधन नहीं होने की वजह से ही सभी शर्तें पूरी करने एवं आवश्यक संसाधन होने के बावजूद पिछले साल 100 से अधिक नये स्कूलों को हाईस्कूलों को मान्यता नहीं दी जा सकी थी। शासन के निर्देश पर माध्यमिक शिक्षा निदेशक विनय कुमार पांडेय ने 24 अगस्त 2020 को चार कमेटियां गठित करते हुए इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 में संशोधन का प्रस्ताव मांगा था। लेकिन अब तक संशोधन नहीं हो सका है। नये स्कूलों की मान्यता को लेकर हाईकोर्ट ने मंजू अवस्थी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार के मामले में 6 नवंबर 2012 को निर्देश दिए थे। हालांकि उसके बाद से अफसर आदेश की अनदेखी करते हुए नये स्कूलों को मान्यता देते आ रहे थे। सूत्रों के अनुसार पिछले साल शासन इसे लेकर गंभीर हो गया, यही कारण है कि नये स्कूलों को मान्यता नहीं दी गई। पहले से संचालित जिन स्कूलों ने अतिरिक्त विषय, कक्षा या 12वीं की मान्यता के लिए आवेदन किया था सिर्फ उन्हें मान्यता दी गई थी। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट का संशोधित कार्यक्रम एक-दो दिन में जारी होने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार बोर्ड ने संशोधित टाइम टेबल तैयार कर शासन को भेज दिया है। अगले सप्ताह किसी भी जारी हो सकता है।
यूपी बोर्ड के एक सौ साल पुराने अधिनियम में संशोधन के बाद नये स्कूलों को जारी की जाएगी मान्यता। प्रयागराज : यूपी बोर्ड के एक सौ साल पुराने अधिनियम में संशोधन के बाद नये स्कूलों को मान्यता जारी की जाएगी। संशोधन नहीं होने की वजह से ही सभी शर्तें पूरी करने एवं आवश्यक संसाधन होने के बावजूद पिछले साल एक सौ से अधिक नये स्कूलों को हाईस्कूलों को मान्यता नहीं दी जा सकी थी। शासन के निर्देश पर माध्यमिक शिक्षा निदेशक विनय कुमार पांडेय ने चौबीस अगस्त दो हज़ार बीस को चार कमेटियां गठित करते हुए इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम एक हज़ार नौ सौ इक्कीस में संशोधन का प्रस्ताव मांगा था। लेकिन अब तक संशोधन नहीं हो सका है। नये स्कूलों की मान्यता को लेकर हाईकोर्ट ने मंजू अवस्थी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार के मामले में छः नवंबर दो हज़ार बारह को निर्देश दिए थे। हालांकि उसके बाद से अफसर आदेश की अनदेखी करते हुए नये स्कूलों को मान्यता देते आ रहे थे। सूत्रों के अनुसार पिछले साल शासन इसे लेकर गंभीर हो गया, यही कारण है कि नये स्कूलों को मान्यता नहीं दी गई। पहले से संचालित जिन स्कूलों ने अतिरिक्त विषय, कक्षा या बारहवीं की मान्यता के लिए आवेदन किया था सिर्फ उन्हें मान्यता दी गई थी। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट का संशोधित कार्यक्रम एक-दो दिन में जारी होने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार बोर्ड ने संशोधित टाइम टेबल तैयार कर शासन को भेज दिया है। अगले सप्ताह किसी भी जारी हो सकता है।
26/11 मुंबई हमले में मोस्ट वान्टेड आतंकी हाफिज सईद की जमात-उद-दावा और फलाह-ए-इंसानियत संगठन पर पाकिस्तान ने लगाया प्रतिबंध. इससे पहले बैन को लेकर पाकिस्तान ने की थी झूठी बयानबाजी- जमात पर बैन की जगह सिर्फ निगरानी सूचि में डाला था. Pakistan has finally banned terror group Jamaat-ud-Dawa (JuD) and Falah-e-Insaniat Foundation (FiF), led by Hafiz Saeed. Before this, Pakistan had put JuD and FIF on the watch list. The move comes after many turnarounds by Pakistan on the issue. Watch Video to keep tabs on other news.
छब्बीस/ग्यारह मुंबई हमले में मोस्ट वान्टेड आतंकी हाफिज सईद की जमात-उद-दावा और फलाह-ए-इंसानियत संगठन पर पाकिस्तान ने लगाया प्रतिबंध. इससे पहले बैन को लेकर पाकिस्तान ने की थी झूठी बयानबाजी- जमात पर बैन की जगह सिर्फ निगरानी सूचि में डाला था. Pakistan has finally banned terror group Jamaat-ud-Dawa and Falah-e-Insaniat Foundation , led by Hafiz Saeed. Before this, Pakistan had put JuD and FIF on the watch list. The move comes after many turnarounds by Pakistan on the issue. Watch Video to keep tabs on other news.
Jhund Trailer : आवारा बच्चों को गली-गली से चुनकर नेशनल फुटबॉल टीम बनाने निकले अमिताभ बच्चन, क्या उनकी ये टीम दिखा पाएगी 'चक दे इंडिया' जैसा दम? अमिताभ बच्चन की फिल्म झुंड का ट्रेलर रिलीज हो गया है. इस फिल्म का फैंस काफी समय से इंतजार कर रहे थे और अब फिल्म का ट्रेलर रिलीज हो गया है जिससे फैंस और एक्साइटेड हो गए हैं. अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) की मोस्ट अवेटेड फिल्म झुंड (Jhund) का ट्रेलर रिलीज हो गया है. इस फिल्म में अमिताभ बच्चन एक स्पोर्ट्स कोच का किरदार निभा रहे हैं जो कुछ बच्चों के साथ एक टीम बनाते हैं. ये एक बायोग्राफिकल स्पोर्ट्स ड्रामा है जो सोशल वर्कर विजय बर्से पर आधारित है. विजय, स्लम एरिया के बच्चों की फुटबॉल टीम बनाते हैं. फिल्म में बिग बी के अलावा आकाष तोषर, रिंकू राजगुरु लीड रोल में हैं. दोनों सुपरहिट मराठी फिल्म सैराट के स्टार्स हैं जिसे नागराज मंजुले ने डायरेक्ट किया था और उन्होंने ही झुंड को डायरेक्ट किया है. बता दें कि इस फिल्म के जरिए अमिताभ बच्चन का डायरेक्टर नागराज पोपटराव मुंजुले का पहला कोलैब्रेशन है. फिल्म 2 मार्च को रिलीज होगी. इसके साथ ही इस फिल्म के जरिए नागराज का बतौर डायरेक्टर बॉलीवुड डेब्यू कर रहे हैं. बता दें कि नागराज इस फिल्म को डायरेक्ट करने के अलावा वह फिल्म के एक गाने लफड़ा जाला में थिरकते नजर आए हैं. वैसे बता दें कि ये पहली बार नहीं जब वह किसी फिल्म के गाने में नजर आए हैं. इससे पहले वह सैराट के पॉपुलर गाने जिंगाट में भी नजर आए थे. फिल्म झुंड की बात करें तो इसकी रिलीज 3 साल में कई बार पोस्टपोन हुई है. फिल्म पहले सितंबर 2019 में रिलीज होने वाली थी. लेकिन तबसे फिल्म कई बार पोस्टपोन हो गई. खबरें तो ये भी आई थी कि कोविड के बढ़ते मामलों को देखते हुए मेकर्स फिल्म को अब ओटीटी पर रिलीज करने का प्लान बना रहे हैं. हिंदुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू के दौरान नागराज ने कहा था कि वह अपनी फिल्म को थिएटर में रिलीज करना चाहते हैं. उन्होंने कहा था, ये फिल्म काफी समय से पोस्टपोन हो रही है. मैं खुद चाहता हूं कि फिल्म थिएटर में रिलीज होगी. मैंने इसके लिए काफी स्ट्रगल किया है. फिल्म की पूरी टीम ने भी मुझे पूरा सपोर्ट किया और अब हम फिल्म के थिएटर रिलीज का इंतजार कर रहे हैं. फिल्म को भूषण कुमार, कृष्ण कुमार, सविता राज, राज हीरेमत, नागराज पोपटराव, गार्गी कुलकर्णी, मीनू अरोड़ा और संदीप सिंह प्रोड्यूस कर रहे हैं.
Jhund Trailer : आवारा बच्चों को गली-गली से चुनकर नेशनल फुटबॉल टीम बनाने निकले अमिताभ बच्चन, क्या उनकी ये टीम दिखा पाएगी 'चक दे इंडिया' जैसा दम? अमिताभ बच्चन की फिल्म झुंड का ट्रेलर रिलीज हो गया है. इस फिल्म का फैंस काफी समय से इंतजार कर रहे थे और अब फिल्म का ट्रेलर रिलीज हो गया है जिससे फैंस और एक्साइटेड हो गए हैं. अमिताभ बच्चन की मोस्ट अवेटेड फिल्म झुंड का ट्रेलर रिलीज हो गया है. इस फिल्म में अमिताभ बच्चन एक स्पोर्ट्स कोच का किरदार निभा रहे हैं जो कुछ बच्चों के साथ एक टीम बनाते हैं. ये एक बायोग्राफिकल स्पोर्ट्स ड्रामा है जो सोशल वर्कर विजय बर्से पर आधारित है. विजय, स्लम एरिया के बच्चों की फुटबॉल टीम बनाते हैं. फिल्म में बिग बी के अलावा आकाष तोषर, रिंकू राजगुरु लीड रोल में हैं. दोनों सुपरहिट मराठी फिल्म सैराट के स्टार्स हैं जिसे नागराज मंजुले ने डायरेक्ट किया था और उन्होंने ही झुंड को डायरेक्ट किया है. बता दें कि इस फिल्म के जरिए अमिताभ बच्चन का डायरेक्टर नागराज पोपटराव मुंजुले का पहला कोलैब्रेशन है. फिल्म दो मार्च को रिलीज होगी. इसके साथ ही इस फिल्म के जरिए नागराज का बतौर डायरेक्टर बॉलीवुड डेब्यू कर रहे हैं. बता दें कि नागराज इस फिल्म को डायरेक्ट करने के अलावा वह फिल्म के एक गाने लफड़ा जाला में थिरकते नजर आए हैं. वैसे बता दें कि ये पहली बार नहीं जब वह किसी फिल्म के गाने में नजर आए हैं. इससे पहले वह सैराट के पॉपुलर गाने जिंगाट में भी नजर आए थे. फिल्म झुंड की बात करें तो इसकी रिलीज तीन साल में कई बार पोस्टपोन हुई है. फिल्म पहले सितंबर दो हज़ार उन्नीस में रिलीज होने वाली थी. लेकिन तबसे फिल्म कई बार पोस्टपोन हो गई. खबरें तो ये भी आई थी कि कोविड के बढ़ते मामलों को देखते हुए मेकर्स फिल्म को अब ओटीटी पर रिलीज करने का प्लान बना रहे हैं. हिंदुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू के दौरान नागराज ने कहा था कि वह अपनी फिल्म को थिएटर में रिलीज करना चाहते हैं. उन्होंने कहा था, ये फिल्म काफी समय से पोस्टपोन हो रही है. मैं खुद चाहता हूं कि फिल्म थिएटर में रिलीज होगी. मैंने इसके लिए काफी स्ट्रगल किया है. फिल्म की पूरी टीम ने भी मुझे पूरा सपोर्ट किया और अब हम फिल्म के थिएटर रिलीज का इंतजार कर रहे हैं. फिल्म को भूषण कुमार, कृष्ण कुमार, सविता राज, राज हीरेमत, नागराज पोपटराव, गार्गी कुलकर्णी, मीनू अरोड़ा और संदीप सिंह प्रोड्यूस कर रहे हैं.
यह श्रादत कमी-कमी ८ या १० वर्ष तक के बच्चों में बनी ह है। ऐसी स्थिति में बालक को इसके लिये लत्रित नहीं करना पाई। बालक का आत्मविश्वास बढ़ाने से तथा उसे इस श्रादव को के लिये प्रोत्साहित करने से यह आदत छूट जाती है। जिन लड़को में आत्मसम्मान का मात्र या जाता है, वे अपनी प्रवन अपनो शारीरिक क्रियाओं के कार संयम करने की शक्ति प्रकर है। इस प्रसंग में डाक्टर डगलस, ए० राम महाराय का मॉवलेम् ऑव् एव्हरी डे चाइल्ड" नामक पुस्तक में दिया हुआ नि आठ वर्ष के अच्छे घर के एक बालक को विस्तर में पेशाब करने की श्रादत थी। उसका इलाज एक योग्य डाक्टर करते थे। उन्होंने ह श्रादत को छुड़ाने के लिये सभी प्रकार की चिकित्सा की, पर तो भो यह आदत छूटती नहीं थी। डाक्टर ने उसकी शारीरिक चिकित्सा की; दंड द्वारा भी उसकी चिकित्सा की गई, पर किसी तरह यह आदत न गई । डाक्टर के पास कोई उपाय शेष नहीं था। इसी बीच में उसके एक युक्ति सोची। एक रोज जब वह बालक से मिलने गया तो उस बालक की दिनचर्या की सभी बातों के बारे में प्रश्न किये पर उठ बिस्तर पर पेशाब करने के बारे में कोई प्रश्न नहीं किया । चन्द्र जब डाक्टर जाने लगे तो स्वयं बालक ने डाक्टर सादव से कहाआपने बिस्तर में पेशाब करने के बारे में तो कुछ नहीं पूछा, तो डाक्ट ने सहज भाव से कहा- इसके बारे में पूछना क्या है ? जो बालक अपनी कक्षा में इतना ऊँचा रहता है और जो इतने नामवरी के काम कर सकता है वह जब निश्चय कर लेगा उस श्रादत को अवश्य छेड़े सकेगा। ऐसा करते हुए वह और दूसरे विषयों पर फिर बातचीत करने लगा । डाक्टर के इस प्रकार के कहने का बालक पर विलक्षण प्रभाव हुआ। उस दिन से बालक का विस्तर पर पेशार करना चूर गया। अब उसे पेशान जब लगती तो यह जग जाता और उठ कर पेशाब करता । यहाँ हमें यह ध्यान में रखना आवश्यक है कि किसी बीमारी के ने के लिये व्यक्ति के अचेतन मन की सहायता लेना आवश्यक है। उसकी सहायता प्राप्त करने के लिये चिकित्सक को मरीज के साथ अहंकार को छोड़ कर प्रेम भाव के साथ बर्ताव करना चाहिये । अब 4 तक डाक्टर यह कहता है कि मैं तुम्हारे अमुक रोग को हुड़ा हूँगा तथ तक वह किसी प्रकार भी मरीज को पूरी तरह अच्छा करने में सफल नहीं हो सकता । किसी भी व्यक्ति के सुधार में वास्तव में उस व्यक्ति का मोतरी मन ही काम करता है चाहे वद बुरी आदत का सुधार हो अथवा किसी रोग का सुधार बिना श्रचेतन मन की सहायता के किसी भी बुरी श्रादत से मनुष्य न स्वयं मुक्त हो सकता है और न कोई दूसरा व्यक्ति उसे मुक्त कर सकता है। बिस्तर में पेशाव करनेवाले व्यक्ति के विषय में भी यही सिद्धान्त लागू होता है। हमें सदा उसे प्रोत्साहित करते रहना चाहिये कि वह पेशाम के समय जाग जाय। जिस समय हमारा संदेश उसके प्रचेतन मन तक पहुँच जाता है तो हमारा काम बन जाता है। बालक के श्रात्मविश्वास को तथा आत्मभिमान को कभी भी कम न होने देना चाहिये । बालक के चरित्र गठन का यह सबसे बड़ा मौलिक सिद्धान्त है श्री चन्द्रकान्ता कोचर के निम्नलिखित विचार जो शिक्षक के नवम्बर १९४५ के अंक में प्रकाशित हुए हैं इस प्रसङ्ग में उल्लेखनीय हैंःयदि बालक को स्वच्छ नियम और श्रादते सिखाने में अधिक कठोरता की जायगी, तो चालक न केवल मूत्र ध्याग करने में इड करेगा; बल्कि अन्य दूसरी कठिनाइयाँ भी उपस्थित होने की सम्भावना हो सकती है। दाल दो में एक बालक की स्थिति मनोवैज्ञानिकों के समक्ष प्रस्तुत की गयी है। बालक तीन वर्ष का स्वस्थ और प्रसन्नचित्त
यह श्रादत कमी-कमी आठ या दस वर्ष तक के बच्चों में बनी ह है। ऐसी स्थिति में बालक को इसके लिये लत्रित नहीं करना पाई। बालक का आत्मविश्वास बढ़ाने से तथा उसे इस श्रादव को के लिये प्रोत्साहित करने से यह आदत छूट जाती है। जिन लड़को में आत्मसम्मान का मात्र या जाता है, वे अपनी प्रवन अपनो शारीरिक क्रियाओं के कार संयम करने की शक्ति प्रकर है। इस प्रसंग में डाक्टर डगलस, एशून्य राम महाराय का मॉवलेम् ऑव् एव्हरी डे चाइल्ड" नामक पुस्तक में दिया हुआ नि आठ वर्ष के अच्छे घर के एक बालक को विस्तर में पेशाब करने की श्रादत थी। उसका इलाज एक योग्य डाक्टर करते थे। उन्होंने ह श्रादत को छुड़ाने के लिये सभी प्रकार की चिकित्सा की, पर तो भो यह आदत छूटती नहीं थी। डाक्टर ने उसकी शारीरिक चिकित्सा की; दंड द्वारा भी उसकी चिकित्सा की गई, पर किसी तरह यह आदत न गई । डाक्टर के पास कोई उपाय शेष नहीं था। इसी बीच में उसके एक युक्ति सोची। एक रोज जब वह बालक से मिलने गया तो उस बालक की दिनचर्या की सभी बातों के बारे में प्रश्न किये पर उठ बिस्तर पर पेशाब करने के बारे में कोई प्रश्न नहीं किया । चन्द्र जब डाक्टर जाने लगे तो स्वयं बालक ने डाक्टर सादव से कहाआपने बिस्तर में पेशाब करने के बारे में तो कुछ नहीं पूछा, तो डाक्ट ने सहज भाव से कहा- इसके बारे में पूछना क्या है ? जो बालक अपनी कक्षा में इतना ऊँचा रहता है और जो इतने नामवरी के काम कर सकता है वह जब निश्चय कर लेगा उस श्रादत को अवश्य छेड़े सकेगा। ऐसा करते हुए वह और दूसरे विषयों पर फिर बातचीत करने लगा । डाक्टर के इस प्रकार के कहने का बालक पर विलक्षण प्रभाव हुआ। उस दिन से बालक का विस्तर पर पेशार करना चूर गया। अब उसे पेशान जब लगती तो यह जग जाता और उठ कर पेशाब करता । यहाँ हमें यह ध्यान में रखना आवश्यक है कि किसी बीमारी के ने के लिये व्यक्ति के अचेतन मन की सहायता लेना आवश्यक है। उसकी सहायता प्राप्त करने के लिये चिकित्सक को मरीज के साथ अहंकार को छोड़ कर प्रेम भाव के साथ बर्ताव करना चाहिये । अब चार तक डाक्टर यह कहता है कि मैं तुम्हारे अमुक रोग को हुड़ा हूँगा तथ तक वह किसी प्रकार भी मरीज को पूरी तरह अच्छा करने में सफल नहीं हो सकता । किसी भी व्यक्ति के सुधार में वास्तव में उस व्यक्ति का मोतरी मन ही काम करता है चाहे वद बुरी आदत का सुधार हो अथवा किसी रोग का सुधार बिना श्रचेतन मन की सहायता के किसी भी बुरी श्रादत से मनुष्य न स्वयं मुक्त हो सकता है और न कोई दूसरा व्यक्ति उसे मुक्त कर सकता है। बिस्तर में पेशाव करनेवाले व्यक्ति के विषय में भी यही सिद्धान्त लागू होता है। हमें सदा उसे प्रोत्साहित करते रहना चाहिये कि वह पेशाम के समय जाग जाय। जिस समय हमारा संदेश उसके प्रचेतन मन तक पहुँच जाता है तो हमारा काम बन जाता है। बालक के श्रात्मविश्वास को तथा आत्मभिमान को कभी भी कम न होने देना चाहिये । बालक के चरित्र गठन का यह सबसे बड़ा मौलिक सिद्धान्त है श्री चन्द्रकान्ता कोचर के निम्नलिखित विचार जो शिक्षक के नवम्बर एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस के अंक में प्रकाशित हुए हैं इस प्रसङ्ग में उल्लेखनीय हैंःयदि बालक को स्वच्छ नियम और श्रादते सिखाने में अधिक कठोरता की जायगी, तो चालक न केवल मूत्र ध्याग करने में इड करेगा; बल्कि अन्य दूसरी कठिनाइयाँ भी उपस्थित होने की सम्भावना हो सकती है। दाल दो में एक बालक की स्थिति मनोवैज्ञानिकों के समक्ष प्रस्तुत की गयी है। बालक तीन वर्ष का स्वस्थ और प्रसन्नचित्त
चर्चा में क्यों? 20 अप्रैल, 2023 को हरियाणा सरकार ने पिछले 20 वर्ष या उससे अधिक समय से किराये या पट्टे के माध्यम से व्यक्तिगत या निजी संस्था के कब्जे वाली सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों और प्राधिकरणों की संपत्तियों (दुकानों/मकानों) को बेचने के लिये 'हरियाणा किराये पर सरकारी संपत्ति निपटान नीति 2023' को अधिसूचित की है। - मुख्य सचिव संजीव कौशल ने यह जानकारी देते हुए बताया कि यह नीति 100 वर्ग गज प्रति लाभार्थी/प्रति भूखंड तक की ऐसी सभी संपत्तियों पर लागू होगी, जो 01 जून, 2001 से पहले पट्टे या किराए पर दी गई थी। - मुख्य सचिव ने बताया कि यह एक 'वन टाइम पालिसी'है जिसके अंतर्गत आने वाले लोगों को नीति की अधिसूचना जारी होने के 3 महीने के भीतर आवेदन करना होगा। - यह नीति पर्यटन, परिवहन और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभागों की भूमि पर लागू नहीं होगी। इसके अलावा, यह नीति शामलात भूमि, पंचायत भूमि, पंचायत समिति एवं ज़िला परिषद भूमि पर भी लागू नहीं होगी। - विशिष्ट विभागीय अधिनियमों और वैधानिक नियमों के अर्थात् हरियाणा विस्थापित संपत्ति (प्रबंधन और निपटान) नियम 2011, हरियाणा पंचायती राज अधिनियम 1994, हरियाणा पंचायती राज नियम 1995, हरियाणा ग्राम शामलात भूमि (विनियमन) अधिनियम 1961, हरियाणा ग्राम ग्राम शामलात (विनियमन) नियम 1964 और विस्थापित संपत्ति (प्रबंधन और निपटान) अधिनियम 2008 के तहत शासित होने वाली भूमि को भी इस नीति से बाहर रखा जाएगा। - इस नीति में वे संपत्तियाँ शामिल होंगी, जिनका स्वामित्व या प्रबंधन सरकारी संस्था द्वारा किया जाता है और जो किराए या पट्टे का पैसा अथवा लाइसेंस शुल्क या तहबाजारी शुल्क के आधार पर खाली ज़मीन, दुकान (दुकानों) जिसका अलग-अलग तल (यदि कोई हो) मकान और उसका अलग-अलग तल (यदि कोई हो) उद्योग और खाली भूमि के लिये सरकारी संस्था को देय या प्राप्य है। - ऐसी संपत्तियों के मामले में, जिनसे सरकारी संस्थाएँ वार्षिक कलेक्टर रेट मूल्य का 8 प्रतिशत और उससे अधिक का किराया पट्टा प्राप्त कर रही हैं, तो सक्षम प्राधिकारी को वह संपत्ति बेचने की अनुमति नहीं होगी। - जिस संपत्ति पर किसी व्यत्ति का 20 वर्ष से अधिक लेकिन 25 वर्ष से कम की अवधि के लिये कब्जा है, उससे सर्कल रेट का 80 प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा। - 30 वर्ष या उससे अधिक लेकिन 35 वर्ष से कम की अवधि तक कब्जे वाले लोगों से सर्किल रेट का 75 प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा। - इसके अलावा, 35 वर्ष या उससे अधिक लेकिन 40 वर्ष से कम की अवधि तक कब्जे वाले लोगों को सर्किल रेट का 65 प्रतिशत भुगतान करना होगा। - 40 वर्ष या उससे अधिक लेकिन 45 वर्ष से कम की अवधि के लिये कब्जा रखने वालों से सर्कल रेट का 60 प्रतिशत और 45 वर्ष या उससे अधिक लेकिन 50 वर्ष से कम की अवधि के लिये सर्कल रेट का 55 प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा। - जिनके पास 50 वर्ष या उससे अधिक की अवधि के लिये कब्जा है, उनसे सर्कल रेट का 50 प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा। - नीति की निगरानी एवं क्रियान्वयन शहरी स्थानीय निकाय विभाग द्वारा इसके लिये तैयार किये गए पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा। चर्चा में क्यों? 20 अप्रैल, 2023 को हरियाणा स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के निदेशक ओ पी सिंह ने बताया कि हरियाणा में क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (सीसीटीएनएस) को सफलतापूर्वक मेघराज क्लाउड में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। - स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो निदेशक ओ पी सिंह आईपीएस ने बताया कि सीसीटीएनएस एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है जो आपराधिक न्याय प्रणाली के विभिन्न भागों को एक पोर्टल पर लाता है, जिससे सूचनाओं का आदान प्रदान करने, डेटा विश्लेषण और अपराध की रोकथाम की जाती है। - मेघराज क्लाउड एक स्केलेबल और फ्लेक्सिबल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदान करता है जो सीसीटीएनएस पर डेटा और उपयोगकर्त्ताओं की बढ़ती मात्रा को सँभाल सकता है, पीक पीरियड्स के दौरान भी सुचारू संचालन सुनिश्चित करता है। - क्लाउड-आधारित आर्किटेक्चर की सहायता से उपलब्ध सूचनाएँ एक ही प्लेटफार्म पर आसानी व तेजी से उपलब्ध रहेंगी। - मेघराज क्लाउड डेटा एंक्रिप्शन, मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और नियमित सुरक्षा ऑडिट सहित अत्याधुनिक सुरक्षा उपाय प्रदान करता है, जिससे गोपनीयता, अखंडता और आपराधिक रिकॉर्ड, जाँच और मुकदमों से संबंधित महत्त्वपूर्ण जानकारी की उपलब्धता सुनिश्चित होती है। - मेघराज क्लाउड की मापनीयता और लचीलापन भी उपयोगकर्त्ताओं के कुशल संचालन को सक्षम बनाता है। यह क्लाउड-आधारित आर्किटेक्चर अन्य ऍप्लिकेशंस के उपयोग के साथ आसान एकीकरण की अनुमति देता है, जिससे विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों को आपस में पारस्परिक डेटा विनिमय और कार्य करने की सुविधा मिलती है। - प्रदेश पुलिस द्वारा मेघराज में स्थानांतरण करने का निर्णय लेने का कारण इसकी कम लागत भी है। मेघराज क्लाउड के उपयोग से हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और रखरखाव में निवेश की आवश्यकता समाप्त हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप राज्य सरकार की लागत में बचत होती है। - क्लाउड का पे-एज-यू-गो प्राइसिंग मॉडल कम लागत प्रबंधन और संसाधन के उपयोग की अनुमति देता है, जिससे लंबे समय में लागत बचत होती है। इस प्रोजेक्ट के लिये पुणे की कंपनी से अनुबंध किया गया है। - मेघराज क्लाउड के कंप्यूटिंग संसाधन और डेटा केंद्र के सर्वोत्तम सिस्टम प्रदर्शन, सीसीटीएनएस की आसान उपलब्धता सुनिश्चित करते हैं। यह प्रदेश पुलिस को वास्तविक समय में महत्त्वपूर्ण जानकारी तक पहुँचने में सक्षम बनाता है, जिससे अपराधों पर त्वरित प्रतिक्रिया होती है। - मेघराज क्लाउड डिजास्टर रिकवरी तंत्र प्रदान करता है, जिससे अप्रत्याशित घटनाओं के मामले में भी डेटा की उपलब्धता सुनिश्चित होती है। यह सीसीटीएनएस प्रणाली की सुविधा किसी भी व्यवधान से जल्दी उबरने और नागरिकों को निर्बाध सेवाएँ सुनिश्चित करने में मदद मिलती है। - विदित है कि आम नागरिकों के लिये सीसीटीएनएस पर शिकायतों को ऑनलाइन रजिस्टर करवाने, अपराध व् अपराधियों की जानकारी लेने, रोज़गार, किरायेदार, नौकर आदि के सत्यापन करने, पुलिस से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के ऑप्शन उपलब्ध रहते हैं। - मेघराज क्लाउड को सीसीटीएनएस के हस्तांतरण के साथ, प्रदेश पुलिस उन्नत तकनीकों और क्लाउड-आधारित बुनियादी ढाँचे का लाभ उठा सकती है। विदित है कि सीसीटीएनएस प्रणाली से थाने के रजिस्टर पर हाथ से लिखने का काम कम होता है और सभी कार्य हिन्दी व अन्य भाषाओं में होता है।इसके अलावा विभिन्न ज़िलों से फॉरेंसिक साइंस और फिंगर प्रिंट ब्यूरो इत्यादि से जानकारी प्राप्त करने में आसानी रहती है। - प्रदेश पुलिस ने सभी थानों में 10 एमबीपीएस की इंटरनेट स्पीड देने का निर्णय लिया गया है।सीसीटीएनएस प्रणाली जेल, अभियोजन विभाग, कोर्ट व फॉरेंसिक विभाग के साथ इंटीग्रेटेड है। - प्रदेश में सीसीटीएनएस में क्राइम डेटा को नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के स्टैंडर्ड पर अपडेट करने की जिम्मेदारी स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो पर है।'एक राज्य एक डेटा'के आधार पर काम किया जा रहा है। वर्तमान में वर्ष 2022 तक तकरीबन 50 हजार अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है और उसका डेटा भी स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा अपलोड कर दिया गया है। - इसके अतिरिक्त आईसीजेएससे समन्वित होने के कारण प्रदेश पुलिस को लावारिस वाहनों व वांछित अपराधियों का डाटा मैच करने में कई केसों में सफलता मिली है। चर्चा में क्यों? 19 अप्रैल, 2023 को ई-गवर्नेंस से सुशासन की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ाते हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 3 नई पहलें आरंभ की हैं। इनमें 'प्रो-एक्टिव दिव्यांग पेंशन सेवा', 'ताऊ से पूछो' व्हाट्सएप बॉट और पीडब्ल्यूडी (बीएंडआर) विश्राम गृहों की ऑनलाइन रूम बुकिंग के लिये 'पोर्टल'शामिल हैं। - मुख्यमंत्री ने पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि ये तीन आईटी पहल निश्चित रूप से राज्य सरकार के पेपरलैस और पारदर्शी शासन के दृष्टिकोण में मील का पत्थर साबित होंगी। इन पहलों से लाभार्थी डिजिटल रूप रूप से और अधिक सशत्त बनेंगे। - प्रो-एक्टिव दिव्यांग पेंशन सेवा दिव्यांग व्यत्तियों (पीडब्ल्यूडी) को ऑटोमेटेड पेंशन का लाभ देने के लिये शुरू किया गया है। - परिवार सूचना डेटा कोश में 60 प्रतिशत से अधिक दिव्यांग के रूप में सत्यापित दिव्यांगों के प्रासंगिक डेटा को हर महीने हरियाणा परिवार पहचान प्राधिकरण द्वारा प्रमाणित किया जाएगा। - सत्यापन के बाद पात्र पाए गए ऐसे सभी दिव्यांगों का डेटा योजना द्वारा निर्धारित पात्रता मानदंड के अनुसार सेवा विभाग के साथ साझा किया जाएगा। सेवा विभाग के ज़िला अधिकारी पेंशन शुरू करने के लिये इन नागरिकों की सहमति लेने के लिये उनके पास जाएंगे। सहमति प्रदान करने वाले सभी दिव्यांगों की अगले महीने से पेंशन शुरू कर दी जाएगी। - हरियाणा परिवार पहचान प्राधिकरण द्वारा निर्मित वेब बेस्ड चौट बॉट सॉल्यूशन के साथ-साथ 'ताऊ से पूछो'व्हाट्सएप बॉट नागरिकों के प्रश्नों का तुरंत जवाब देगा। - यह सबके लिये आसानी से सुलभ होगा और नागरिक अपने घर बैठे सरलता से व्हाट्सएप पर संवाद कर सकेंगे। - इस इंटीग्रेटेड डिजीटल प्लेटफॉर्म में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग जैसी तकनीकों को जोड़ा गया है। - इस प्लेटफॉर्म से नागरिकों के साथ-साथ सरकार का समय भी बचेगा। प्राप्त प्रश्नों का विश्लेषणात्मक अध्ययन निश्चित रूप से शिकायतों के निवारण की प्रक्रिया में सहायक सिद्ध होगा। - नागरिक विभिन्न डेटा फील्ड की स्थिति के साथ-साथ आय, विवाह, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, राशन कार्ड, जाति, पेंशन और शिकायतों जैसी सेवाओं के बारे में प्रश्न पूछ सकते हैं। - एकीकृत ताऊ और व्हाट्सएप बॉट परिवार पहचान संख्या से संबंधित प्रासंगिक प्रश्नों का उत्तर देगा। परिवार द्वारा आवेदन प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज, पात्रता, सरकारी नियमों और विभिन्न कार्यक्रमों के लाभों पर सलाह लेने के लिये एकीकृत ताऊ से पूछो व व्हाट्सएप बॉट के साथ संवाद किया जा सकता है। - लोक निर्माण विभाग (भवन एवं सड़क) के विश्राम गृहों में कमरों की बुकिंग के लिये विकसित पोर्टल से विश्राम गृहों में सरकारी अधिकारियों के साथ-साथ निजी लोग भी कमरों की ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं। - इस पोर्टल के माध्यम से अब आवेदक कमरे की उपलब्धता देख सकते हैं, कमरा बुक कर सकते हैं, बुकिंग राशि का ऑनलाइन भुगतान कर सकते हैं, बुकिंग रद्द कर सकते हैं। इसके लिये आवेदक को बुकिंग के समय ही पूरी राशि का भुगतान ऑनलाइन करना होगा। - पोर्टल के साथ आई.डी.बी.आई. बैंक की भुगतान गेटवे सेवाओं को जोड़ा गया है। चेक-इन करने के 24 घंटे के अंदर बुकिंग रद्द करने पर बुकिंग राशि की 20 प्रतिशत राशि की कटौती होगी। जबकि चेक-इन करने के 24 घंटे से कम समय पर बुकिंग रद्द करने पर कोई रिफंड नहीं दिया जाएगा। - इस पोर्टल के माध्यम से अब प्राइवेट व्यत्ति भी इन रेस्ट हाउस में ऑनलाइन कमरा बुक करवा सकते हैं। इनके लिये कुछ शर्तें रखी गई हैं, जिनमें बुकिंग के 15 दिन पहले खाली कमरों के 25 प्रतिशत कमरे बुक करवा सकते हैं। - बुकिंग के 7 दिन पहले तक खाली कमरों के 50 प्रतिशत कमरे बुक करवा सकते हैं और बुकिंग के 3 दिन पहले तक खाली कमरों के 75 प्रतिशत कमरे बुक करवा सकते हैं। लेकिन बुकिंग की तारीख से 3 दिन पहले प्राइवेट लोगों के लिये कमरों की बुकिंग नहीं की जाएगी।
चर्चा में क्यों? बीस अप्रैल, दो हज़ार तेईस को हरियाणा सरकार ने पिछले बीस वर्ष या उससे अधिक समय से किराये या पट्टे के माध्यम से व्यक्तिगत या निजी संस्था के कब्जे वाली सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों और प्राधिकरणों की संपत्तियों को बेचने के लिये 'हरियाणा किराये पर सरकारी संपत्ति निपटान नीति दो हज़ार तेईस' को अधिसूचित की है। - मुख्य सचिव संजीव कौशल ने यह जानकारी देते हुए बताया कि यह नीति एक सौ वर्ग गज प्रति लाभार्थी/प्रति भूखंड तक की ऐसी सभी संपत्तियों पर लागू होगी, जो एक जून, दो हज़ार एक से पहले पट्टे या किराए पर दी गई थी। - मुख्य सचिव ने बताया कि यह एक 'वन टाइम पालिसी'है जिसके अंतर्गत आने वाले लोगों को नीति की अधिसूचना जारी होने के तीन महीने के भीतर आवेदन करना होगा। - यह नीति पर्यटन, परिवहन और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभागों की भूमि पर लागू नहीं होगी। इसके अलावा, यह नीति शामलात भूमि, पंचायत भूमि, पंचायत समिति एवं ज़िला परिषद भूमि पर भी लागू नहीं होगी। - विशिष्ट विभागीय अधिनियमों और वैधानिक नियमों के अर्थात् हरियाणा विस्थापित संपत्ति नियम दो हज़ार ग्यारह, हरियाणा पंचायती राज अधिनियम एक हज़ार नौ सौ चौरानवे, हरियाणा पंचायती राज नियम एक हज़ार नौ सौ पचानवे, हरियाणा ग्राम शामलात भूमि अधिनियम एक हज़ार नौ सौ इकसठ, हरियाणा ग्राम ग्राम शामलात नियम एक हज़ार नौ सौ चौंसठ और विस्थापित संपत्ति अधिनियम दो हज़ार आठ के तहत शासित होने वाली भूमि को भी इस नीति से बाहर रखा जाएगा। - इस नीति में वे संपत्तियाँ शामिल होंगी, जिनका स्वामित्व या प्रबंधन सरकारी संस्था द्वारा किया जाता है और जो किराए या पट्टे का पैसा अथवा लाइसेंस शुल्क या तहबाजारी शुल्क के आधार पर खाली ज़मीन, दुकान जिसका अलग-अलग तल मकान और उसका अलग-अलग तल उद्योग और खाली भूमि के लिये सरकारी संस्था को देय या प्राप्य है। - ऐसी संपत्तियों के मामले में, जिनसे सरकारी संस्थाएँ वार्षिक कलेक्टर रेट मूल्य का आठ प्रतिशत और उससे अधिक का किराया पट्टा प्राप्त कर रही हैं, तो सक्षम प्राधिकारी को वह संपत्ति बेचने की अनुमति नहीं होगी। - जिस संपत्ति पर किसी व्यत्ति का बीस वर्ष से अधिक लेकिन पच्चीस वर्ष से कम की अवधि के लिये कब्जा है, उससे सर्कल रेट का अस्सी प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा। - तीस वर्ष या उससे अधिक लेकिन पैंतीस वर्ष से कम की अवधि तक कब्जे वाले लोगों से सर्किल रेट का पचहत्तर प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा। - इसके अलावा, पैंतीस वर्ष या उससे अधिक लेकिन चालीस वर्ष से कम की अवधि तक कब्जे वाले लोगों को सर्किल रेट का पैंसठ प्रतिशत भुगतान करना होगा। - चालीस वर्ष या उससे अधिक लेकिन पैंतालीस वर्ष से कम की अवधि के लिये कब्जा रखने वालों से सर्कल रेट का साठ प्रतिशत और पैंतालीस वर्ष या उससे अधिक लेकिन पचास वर्ष से कम की अवधि के लिये सर्कल रेट का पचपन प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा। - जिनके पास पचास वर्ष या उससे अधिक की अवधि के लिये कब्जा है, उनसे सर्कल रेट का पचास प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा। - नीति की निगरानी एवं क्रियान्वयन शहरी स्थानीय निकाय विभाग द्वारा इसके लिये तैयार किये गए पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा। चर्चा में क्यों? बीस अप्रैल, दो हज़ार तेईस को हरियाणा स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के निदेशक ओ पी सिंह ने बताया कि हरियाणा में क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स को सफलतापूर्वक मेघराज क्लाउड में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। - स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो निदेशक ओ पी सिंह आईपीएस ने बताया कि सीसीटीएनएस एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है जो आपराधिक न्याय प्रणाली के विभिन्न भागों को एक पोर्टल पर लाता है, जिससे सूचनाओं का आदान प्रदान करने, डेटा विश्लेषण और अपराध की रोकथाम की जाती है। - मेघराज क्लाउड एक स्केलेबल और फ्लेक्सिबल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदान करता है जो सीसीटीएनएस पर डेटा और उपयोगकर्त्ताओं की बढ़ती मात्रा को सँभाल सकता है, पीक पीरियड्स के दौरान भी सुचारू संचालन सुनिश्चित करता है। - क्लाउड-आधारित आर्किटेक्चर की सहायता से उपलब्ध सूचनाएँ एक ही प्लेटफार्म पर आसानी व तेजी से उपलब्ध रहेंगी। - मेघराज क्लाउड डेटा एंक्रिप्शन, मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और नियमित सुरक्षा ऑडिट सहित अत्याधुनिक सुरक्षा उपाय प्रदान करता है, जिससे गोपनीयता, अखंडता और आपराधिक रिकॉर्ड, जाँच और मुकदमों से संबंधित महत्त्वपूर्ण जानकारी की उपलब्धता सुनिश्चित होती है। - मेघराज क्लाउड की मापनीयता और लचीलापन भी उपयोगकर्त्ताओं के कुशल संचालन को सक्षम बनाता है। यह क्लाउड-आधारित आर्किटेक्चर अन्य ऍप्लिकेशंस के उपयोग के साथ आसान एकीकरण की अनुमति देता है, जिससे विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों को आपस में पारस्परिक डेटा विनिमय और कार्य करने की सुविधा मिलती है। - प्रदेश पुलिस द्वारा मेघराज में स्थानांतरण करने का निर्णय लेने का कारण इसकी कम लागत भी है। मेघराज क्लाउड के उपयोग से हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और रखरखाव में निवेश की आवश्यकता समाप्त हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप राज्य सरकार की लागत में बचत होती है। - क्लाउड का पे-एज-यू-गो प्राइसिंग मॉडल कम लागत प्रबंधन और संसाधन के उपयोग की अनुमति देता है, जिससे लंबे समय में लागत बचत होती है। इस प्रोजेक्ट के लिये पुणे की कंपनी से अनुबंध किया गया है। - मेघराज क्लाउड के कंप्यूटिंग संसाधन और डेटा केंद्र के सर्वोत्तम सिस्टम प्रदर्शन, सीसीटीएनएस की आसान उपलब्धता सुनिश्चित करते हैं। यह प्रदेश पुलिस को वास्तविक समय में महत्त्वपूर्ण जानकारी तक पहुँचने में सक्षम बनाता है, जिससे अपराधों पर त्वरित प्रतिक्रिया होती है। - मेघराज क्लाउड डिजास्टर रिकवरी तंत्र प्रदान करता है, जिससे अप्रत्याशित घटनाओं के मामले में भी डेटा की उपलब्धता सुनिश्चित होती है। यह सीसीटीएनएस प्रणाली की सुविधा किसी भी व्यवधान से जल्दी उबरने और नागरिकों को निर्बाध सेवाएँ सुनिश्चित करने में मदद मिलती है। - विदित है कि आम नागरिकों के लिये सीसीटीएनएस पर शिकायतों को ऑनलाइन रजिस्टर करवाने, अपराध व् अपराधियों की जानकारी लेने, रोज़गार, किरायेदार, नौकर आदि के सत्यापन करने, पुलिस से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के ऑप्शन उपलब्ध रहते हैं। - मेघराज क्लाउड को सीसीटीएनएस के हस्तांतरण के साथ, प्रदेश पुलिस उन्नत तकनीकों और क्लाउड-आधारित बुनियादी ढाँचे का लाभ उठा सकती है। विदित है कि सीसीटीएनएस प्रणाली से थाने के रजिस्टर पर हाथ से लिखने का काम कम होता है और सभी कार्य हिन्दी व अन्य भाषाओं में होता है।इसके अलावा विभिन्न ज़िलों से फॉरेंसिक साइंस और फिंगर प्रिंट ब्यूरो इत्यादि से जानकारी प्राप्त करने में आसानी रहती है। - प्रदेश पुलिस ने सभी थानों में दस एमबीपीएस की इंटरनेट स्पीड देने का निर्णय लिया गया है।सीसीटीएनएस प्रणाली जेल, अभियोजन विभाग, कोर्ट व फॉरेंसिक विभाग के साथ इंटीग्रेटेड है। - प्रदेश में सीसीटीएनएस में क्राइम डेटा को नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के स्टैंडर्ड पर अपडेट करने की जिम्मेदारी स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो पर है।'एक राज्य एक डेटा'के आधार पर काम किया जा रहा है। वर्तमान में वर्ष दो हज़ार बाईस तक तकरीबन पचास हजार अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है और उसका डेटा भी स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा अपलोड कर दिया गया है। - इसके अतिरिक्त आईसीजेएससे समन्वित होने के कारण प्रदेश पुलिस को लावारिस वाहनों व वांछित अपराधियों का डाटा मैच करने में कई केसों में सफलता मिली है। चर्चा में क्यों? उन्नीस अप्रैल, दो हज़ार तेईस को ई-गवर्नेंस से सुशासन की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ाते हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने तीन नई पहलें आरंभ की हैं। इनमें 'प्रो-एक्टिव दिव्यांग पेंशन सेवा', 'ताऊ से पूछो' व्हाट्सएप बॉट और पीडब्ल्यूडी विश्राम गृहों की ऑनलाइन रूम बुकिंग के लिये 'पोर्टल'शामिल हैं। - मुख्यमंत्री ने पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि ये तीन आईटी पहल निश्चित रूप से राज्य सरकार के पेपरलैस और पारदर्शी शासन के दृष्टिकोण में मील का पत्थर साबित होंगी। इन पहलों से लाभार्थी डिजिटल रूप रूप से और अधिक सशत्त बनेंगे। - प्रो-एक्टिव दिव्यांग पेंशन सेवा दिव्यांग व्यत्तियों को ऑटोमेटेड पेंशन का लाभ देने के लिये शुरू किया गया है। - परिवार सूचना डेटा कोश में साठ प्रतिशत से अधिक दिव्यांग के रूप में सत्यापित दिव्यांगों के प्रासंगिक डेटा को हर महीने हरियाणा परिवार पहचान प्राधिकरण द्वारा प्रमाणित किया जाएगा। - सत्यापन के बाद पात्र पाए गए ऐसे सभी दिव्यांगों का डेटा योजना द्वारा निर्धारित पात्रता मानदंड के अनुसार सेवा विभाग के साथ साझा किया जाएगा। सेवा विभाग के ज़िला अधिकारी पेंशन शुरू करने के लिये इन नागरिकों की सहमति लेने के लिये उनके पास जाएंगे। सहमति प्रदान करने वाले सभी दिव्यांगों की अगले महीने से पेंशन शुरू कर दी जाएगी। - हरियाणा परिवार पहचान प्राधिकरण द्वारा निर्मित वेब बेस्ड चौट बॉट सॉल्यूशन के साथ-साथ 'ताऊ से पूछो'व्हाट्सएप बॉट नागरिकों के प्रश्नों का तुरंत जवाब देगा। - यह सबके लिये आसानी से सुलभ होगा और नागरिक अपने घर बैठे सरलता से व्हाट्सएप पर संवाद कर सकेंगे। - इस इंटीग्रेटेड डिजीटल प्लेटफॉर्म में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग जैसी तकनीकों को जोड़ा गया है। - इस प्लेटफॉर्म से नागरिकों के साथ-साथ सरकार का समय भी बचेगा। प्राप्त प्रश्नों का विश्लेषणात्मक अध्ययन निश्चित रूप से शिकायतों के निवारण की प्रक्रिया में सहायक सिद्ध होगा। - नागरिक विभिन्न डेटा फील्ड की स्थिति के साथ-साथ आय, विवाह, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, राशन कार्ड, जाति, पेंशन और शिकायतों जैसी सेवाओं के बारे में प्रश्न पूछ सकते हैं। - एकीकृत ताऊ और व्हाट्सएप बॉट परिवार पहचान संख्या से संबंधित प्रासंगिक प्रश्नों का उत्तर देगा। परिवार द्वारा आवेदन प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज, पात्रता, सरकारी नियमों और विभिन्न कार्यक्रमों के लाभों पर सलाह लेने के लिये एकीकृत ताऊ से पूछो व व्हाट्सएप बॉट के साथ संवाद किया जा सकता है। - लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृहों में कमरों की बुकिंग के लिये विकसित पोर्टल से विश्राम गृहों में सरकारी अधिकारियों के साथ-साथ निजी लोग भी कमरों की ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं। - इस पोर्टल के माध्यम से अब आवेदक कमरे की उपलब्धता देख सकते हैं, कमरा बुक कर सकते हैं, बुकिंग राशि का ऑनलाइन भुगतान कर सकते हैं, बुकिंग रद्द कर सकते हैं। इसके लिये आवेदक को बुकिंग के समय ही पूरी राशि का भुगतान ऑनलाइन करना होगा। - पोर्टल के साथ आई.डी.बी.आई. बैंक की भुगतान गेटवे सेवाओं को जोड़ा गया है। चेक-इन करने के चौबीस घंटाटे के अंदर बुकिंग रद्द करने पर बुकिंग राशि की बीस प्रतिशत राशि की कटौती होगी। जबकि चेक-इन करने के चौबीस घंटाटे से कम समय पर बुकिंग रद्द करने पर कोई रिफंड नहीं दिया जाएगा। - इस पोर्टल के माध्यम से अब प्राइवेट व्यत्ति भी इन रेस्ट हाउस में ऑनलाइन कमरा बुक करवा सकते हैं। इनके लिये कुछ शर्तें रखी गई हैं, जिनमें बुकिंग के पंद्रह दिन पहले खाली कमरों के पच्चीस प्रतिशत कमरे बुक करवा सकते हैं। - बुकिंग के सात दिन पहले तक खाली कमरों के पचास प्रतिशत कमरे बुक करवा सकते हैं और बुकिंग के तीन दिन पहले तक खाली कमरों के पचहत्तर प्रतिशत कमरे बुक करवा सकते हैं। लेकिन बुकिंग की तारीख से तीन दिन पहले प्राइवेट लोगों के लिये कमरों की बुकिंग नहीं की जाएगी।
विज्ञान, प्रौद्योगिकी और विकास 29.5.4 सिक्के का दूसरा पहलू परमाणु नामिक जहां एक ओर असीमित ऊर्जा का स्रोत हो सकते हैं, वहां दूसरी ओर जड़ व चेतन अस्तित्व मात्र के लिए एक ख़तरा भी बन सकते हैं। - दोनों के मानव आज भी उन दो दर्दनाक दिनों की याद कर पछताता है जब अगस्त 1945 की 6 और 9 तारीख को दो परमाणु बम, जिन्हें "नन्हा बालक" और "मोटा आदमी" की संज्ञा दी गई थी, जापान में हिरोशिमा व नागासाकी पर अमरीका द्वारा गिराए गए थे। पलक झपकते ही दोनों शहर धूल में मिल गए। कुछ क्षणों में ही लाखों व्यक्ति या तो मौत की नींद सो गए या बुरी तरह घायल हो गए। मानवता के विरुद्ध इस दुर्वान्त व अक्षम्य अपराध का उस दुर्घटना में जीवित बच रहे हज़ारों व्यक्ति अभी भी मूल्य चुका रहे हैं। वे न केवल स्वयं इसके कारण दुःख झेल रहे हैं वरन् प्रायः वे ऐसे अबोध शिशुओं को भी जन्म देते हैं जो विकलांग अथवा मानसिक रूप से अक्षम होते हैं। छतरी नुमा बादल की वह दुर्दान्त छाया जो इन दो नगरों पर छाई थी, आज भी हमें आंतकित करती है। पहले बम बनने के बाद, बमों के निर्माण का सिलसिला शुरू हो गया। बम बनाने में शीघ्र ही रूस ने अमरीका का अनुसरण किया और दोनों देशों में एक से एक ख़तरनाक शस्त्रास्त्रों के निर्माण की होड़ सी लग गई। संगलन पर आधारित हाइड्रोजन बम, अन्तर महाद्वीपीय मिसाइल (जिनमें से प्रत्येक में अनेक बम होते है) और न्यूट्रॉन बम भी परमाणु शस्त्रागार में शामिल किए गए। अनुमान है कि समस्त संसार में आज 50,000 से भी अधिक परमाणु हथियार है । पृथ्वी पर बनी विशेष खत्तियों में रेलगाड़ियों, ट्रकों या बसों में, पानी पर चलते जहाजों या पनडुब्बियों में या आसमान में उड़ते बमवर्षकों में रखे ये हथियार समस्त संसार को क्षण भर में नष्ट-भ्रष्ट कर सकते हैं। हाल ही में संयुक्त राज्य अमरीका द्वारा चलाये गए स्टार वार्स कार्यक्रम (star wars programme) की वजह से इन हथियारों के अन्तरिक्ष में पहुँचने का अंदेशा भी बढ़ गया है । और देखिये कि इसके बदले में हम क्या कुछ खोते हैं । संसार भर में प्रति वर्ष हथियार बनाने में दस खरब डॉलर (अर्थात् 150 खरब रुपये से भी अधिक) खर्च किये जाते हैं। केवल अमरीका ही इस राशि का एक तिहाई हिस्सा खर्च करता है। लेकिन इस खर्च का अधिकांश भाग हम जैसे विकासशील देशों को वहन करना पड़ता है। वह ऐसे कि अमरीका और रूस आपसी शीतयुद्ध के कारण, अपने अड्डे बनाने के लिए ऐसे देशों की ओर देखते है जो उनका पक्ष लें। इससे क्षेत्रीय मतभेद और युद्ध आरम्भ हो जाते हैं। आज तो लगभग सभी देश कुछ बड़े शस्त्र विक्रेताओं से शस्त्रास्त्र खरीद कर अपने हथियार जुटाने में लगे हुए हैं। अगर यह धन हथियारों पर खर्च न किया जाता तो उससे संसार की समस्त जनसंख्या के लिए भोजन और कपड़ा जुटाया जा सकता था। उनके दड़बों को उपयुक्त घरों में बदला जा सकता था, और निरक्षरता को मिटाया जा सकता था । हथियारों की यह होड़ सभी देशों के लिए आर्थिक समस्या उत्पन्न करती है, क्योंकि यह खर्चा अनुत्पादक है। संसार की समस्त मानव जाति इस बात से चिन्तित और क्षुब्ध है कि इससे उसका अस्तित्व ख़तरे में है और उसे इसके कारण एक दिन कठिम आर्थिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। सिर्फ़ पिछले 3-4 वर्षों में आशा की एक किरण दिखाई दी है। सोवियत रूस और अमरीका अपनी कुछ परमाणु मिसाइलों को समाप्त करने के लिए राजी हो गए है। बड़े पैमाने पर परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए बातचीत चल रही है। सन् 1986 में भारत और सोवियत रूस ने यह आवाज़ उठाई कि परमाणु शस्त्रों से रहित अहिंसात्मक संसार की स्थापना की जाए। ऐसे विध्वंसक अस्त्रों के रहते हुए, हरेक देश को अपने झगड़े आपसी बातचीतं द्वारा निबटा लेने होंगे। और ऐसा करते हुए एक दूसरे पर विश्वास और धैर्य रखना होगा। चित्र 29.10: परमाणु मिसाइल, शांतिदूत पेडुकी (dove) में बदलते हुए - मानव की परमाणु निरस्त्रीकरण और शांति की इच्छा का घोतक । बायोटेक्नॉलॉजी एक ऐसी उभरती हुई प्रौद्योगिकी है जो हमें आशा दिलाती है कि यदि इसका सही प्रयोग
विज्ञान, प्रौद्योगिकी और विकास उनतीस.पाँच.चार सिक्के का दूसरा पहलू परमाणु नामिक जहां एक ओर असीमित ऊर्जा का स्रोत हो सकते हैं, वहां दूसरी ओर जड़ व चेतन अस्तित्व मात्र के लिए एक ख़तरा भी बन सकते हैं। - दोनों के मानव आज भी उन दो दर्दनाक दिनों की याद कर पछताता है जब अगस्त एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस की छः और नौ तारीख को दो परमाणु बम, जिन्हें "नन्हा बालक" और "मोटा आदमी" की संज्ञा दी गई थी, जापान में हिरोशिमा व नागासाकी पर अमरीका द्वारा गिराए गए थे। पलक झपकते ही दोनों शहर धूल में मिल गए। कुछ क्षणों में ही लाखों व्यक्ति या तो मौत की नींद सो गए या बुरी तरह घायल हो गए। मानवता के विरुद्ध इस दुर्वान्त व अक्षम्य अपराध का उस दुर्घटना में जीवित बच रहे हज़ारों व्यक्ति अभी भी मूल्य चुका रहे हैं। वे न केवल स्वयं इसके कारण दुःख झेल रहे हैं वरन् प्रायः वे ऐसे अबोध शिशुओं को भी जन्म देते हैं जो विकलांग अथवा मानसिक रूप से अक्षम होते हैं। छतरी नुमा बादल की वह दुर्दान्त छाया जो इन दो नगरों पर छाई थी, आज भी हमें आंतकित करती है। पहले बम बनने के बाद, बमों के निर्माण का सिलसिला शुरू हो गया। बम बनाने में शीघ्र ही रूस ने अमरीका का अनुसरण किया और दोनों देशों में एक से एक ख़तरनाक शस्त्रास्त्रों के निर्माण की होड़ सी लग गई। संगलन पर आधारित हाइड्रोजन बम, अन्तर महाद्वीपीय मिसाइल और न्यूट्रॉन बम भी परमाणु शस्त्रागार में शामिल किए गए। अनुमान है कि समस्त संसार में आज पचास,शून्य से भी अधिक परमाणु हथियार है । पृथ्वी पर बनी विशेष खत्तियों में रेलगाड़ियों, ट्रकों या बसों में, पानी पर चलते जहाजों या पनडुब्बियों में या आसमान में उड़ते बमवर्षकों में रखे ये हथियार समस्त संसार को क्षण भर में नष्ट-भ्रष्ट कर सकते हैं। हाल ही में संयुक्त राज्य अमरीका द्वारा चलाये गए स्टार वार्स कार्यक्रम की वजह से इन हथियारों के अन्तरिक्ष में पहुँचने का अंदेशा भी बढ़ गया है । और देखिये कि इसके बदले में हम क्या कुछ खोते हैं । संसार भर में प्रति वर्ष हथियार बनाने में दस खरब डॉलर खर्च किये जाते हैं। केवल अमरीका ही इस राशि का एक तिहाई हिस्सा खर्च करता है। लेकिन इस खर्च का अधिकांश भाग हम जैसे विकासशील देशों को वहन करना पड़ता है। वह ऐसे कि अमरीका और रूस आपसी शीतयुद्ध के कारण, अपने अड्डे बनाने के लिए ऐसे देशों की ओर देखते है जो उनका पक्ष लें। इससे क्षेत्रीय मतभेद और युद्ध आरम्भ हो जाते हैं। आज तो लगभग सभी देश कुछ बड़े शस्त्र विक्रेताओं से शस्त्रास्त्र खरीद कर अपने हथियार जुटाने में लगे हुए हैं। अगर यह धन हथियारों पर खर्च न किया जाता तो उससे संसार की समस्त जनसंख्या के लिए भोजन और कपड़ा जुटाया जा सकता था। उनके दड़बों को उपयुक्त घरों में बदला जा सकता था, और निरक्षरता को मिटाया जा सकता था । हथियारों की यह होड़ सभी देशों के लिए आर्थिक समस्या उत्पन्न करती है, क्योंकि यह खर्चा अनुत्पादक है। संसार की समस्त मानव जाति इस बात से चिन्तित और क्षुब्ध है कि इससे उसका अस्तित्व ख़तरे में है और उसे इसके कारण एक दिन कठिम आर्थिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। सिर्फ़ पिछले तीन-चार वर्षों में आशा की एक किरण दिखाई दी है। सोवियत रूस और अमरीका अपनी कुछ परमाणु मिसाइलों को समाप्त करने के लिए राजी हो गए है। बड़े पैमाने पर परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए बातचीत चल रही है। सन् एक हज़ार नौ सौ छियासी में भारत और सोवियत रूस ने यह आवाज़ उठाई कि परमाणु शस्त्रों से रहित अहिंसात्मक संसार की स्थापना की जाए। ऐसे विध्वंसक अस्त्रों के रहते हुए, हरेक देश को अपने झगड़े आपसी बातचीतं द्वारा निबटा लेने होंगे। और ऐसा करते हुए एक दूसरे पर विश्वास और धैर्य रखना होगा। चित्र उनतीस.दस: परमाणु मिसाइल, शांतिदूत पेडुकी में बदलते हुए - मानव की परमाणु निरस्त्रीकरण और शांति की इच्छा का घोतक । बायोटेक्नॉलॉजी एक ऐसी उभरती हुई प्रौद्योगिकी है जो हमें आशा दिलाती है कि यदि इसका सही प्रयोग
दीपिका और रणवीर सिंह की शादी से पहले इन दोनों के रिसेप्शन कार्ड ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है। कार्ड के वायरल होते ही इन दोनों की रिसेप्शन तारीख भी सामने आ गई हैं। शादी की तरह ही यह दोनों 2 बार रिसेप्शन दे रहे हैं। इस बीच इन दोनों के रिसेप्शन से जुड़ी ताजा जानकारी सामने आई है। शादी के बाद दीपिका-रणवीर पहला रिसेप्शन बैंगलुरु में 21 नवंबर को देंगे। तो वहीं दूसरा रिसेप्शन मुंबई में 28 नवंबर को रखा गया है। दीपिका बैंगलुरु की रहने वाली हैं इस वजह से पहला रिसेप्शन वहीं दिया जाएगा। इस रिसेप्शन में परिवार के साथ कुछ करीबी दोस्तों शामिल होंगे। जबकि मुंबई में रखी गई ग्रैंड पार्टी में बॉलीवुड की दिग्गज हस्तियां इस पॉवर कपल को शुभकामनाएं देने पहुंचेंगी। रिसेप्शन कार्ड के मुताबिक होटल ग्रैंड हयात में मुंबई में रिसेप्शन दिया जाएगा। वहीं इस रिसेप्शन में 3000 लोगों के शरीक होने की बात कही जा रही है। इन दोनों रिसेप्शन में सबसे ज्यादा अहम मुंबई में होने वाली पार्टी होगी। बॉलीवुड लाइफ की रिपोर्ट के मुताबिक दीपिका और रणवीर ने वेडिंग रिसेप्शन में शामिल होने वाले मेहमानों के सामने एक शर्त रखी है। रिपोर्ट के मुताबिक दीपिका और रणवीर ने पार्टी में शामिल होने वाले सभी मेहमानों से निवेदन किया है वह गिफ्ट के तौर एनजीओ को डोनेशन दे सकते हैं। इस एनजीओ का नाम द लिव लव लाइफ फाउंडेशन है। दीपिका इस फाउंडेशन से जुड़ी हुई हैं। यहां तक कि इस फाउंडेशन की वेबसाइट पर दीपिका की कुछ तस्वीरें भी हैं। दीपिका और रणवीर की शादी को लेकर #deepveerkishaadi ट्रेंड कर रहा है। सोशल मीडिया पर शादी में शामिल होने वाले बारातियों ने कुछ तस्वीरें भी पोस्ट की है। इन तस्वीरों में वह सजे-धजे और हाथ में ढोल पकड़े नजर आ रहे हैं। इसके साथ ही लेक कोमो में जिस विला में शादी हो रही है उसकी तस्वीरें भी लोगों को खूब आकर्षित कर रही हैं।
दीपिका और रणवीर सिंह की शादी से पहले इन दोनों के रिसेप्शन कार्ड ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है। कार्ड के वायरल होते ही इन दोनों की रिसेप्शन तारीख भी सामने आ गई हैं। शादी की तरह ही यह दोनों दो बार रिसेप्शन दे रहे हैं। इस बीच इन दोनों के रिसेप्शन से जुड़ी ताजा जानकारी सामने आई है। शादी के बाद दीपिका-रणवीर पहला रिसेप्शन बैंगलुरु में इक्कीस नवंबर को देंगे। तो वहीं दूसरा रिसेप्शन मुंबई में अट्ठाईस नवंबर को रखा गया है। दीपिका बैंगलुरु की रहने वाली हैं इस वजह से पहला रिसेप्शन वहीं दिया जाएगा। इस रिसेप्शन में परिवार के साथ कुछ करीबी दोस्तों शामिल होंगे। जबकि मुंबई में रखी गई ग्रैंड पार्टी में बॉलीवुड की दिग्गज हस्तियां इस पॉवर कपल को शुभकामनाएं देने पहुंचेंगी। रिसेप्शन कार्ड के मुताबिक होटल ग्रैंड हयात में मुंबई में रिसेप्शन दिया जाएगा। वहीं इस रिसेप्शन में तीन हज़ार लोगों के शरीक होने की बात कही जा रही है। इन दोनों रिसेप्शन में सबसे ज्यादा अहम मुंबई में होने वाली पार्टी होगी। बॉलीवुड लाइफ की रिपोर्ट के मुताबिक दीपिका और रणवीर ने वेडिंग रिसेप्शन में शामिल होने वाले मेहमानों के सामने एक शर्त रखी है। रिपोर्ट के मुताबिक दीपिका और रणवीर ने पार्टी में शामिल होने वाले सभी मेहमानों से निवेदन किया है वह गिफ्ट के तौर एनजीओ को डोनेशन दे सकते हैं। इस एनजीओ का नाम द लिव लव लाइफ फाउंडेशन है। दीपिका इस फाउंडेशन से जुड़ी हुई हैं। यहां तक कि इस फाउंडेशन की वेबसाइट पर दीपिका की कुछ तस्वीरें भी हैं। दीपिका और रणवीर की शादी को लेकर #deepveerkishaadi ट्रेंड कर रहा है। सोशल मीडिया पर शादी में शामिल होने वाले बारातियों ने कुछ तस्वीरें भी पोस्ट की है। इन तस्वीरों में वह सजे-धजे और हाथ में ढोल पकड़े नजर आ रहे हैं। इसके साथ ही लेक कोमो में जिस विला में शादी हो रही है उसकी तस्वीरें भी लोगों को खूब आकर्षित कर रही हैं।
डीएनए अणु - गुणसूत्र संरचना में स्थित है। एक गुणसूत्र एक भी दो स्ट्रैंड से मिलकर अणु होते हैं। डीएनए के दोहराव - एक से दूसरे अणु से धागे की आत्म प्रजनन के बाद सूचना के हस्तांतरण है। यह दोनों डीएनए और आरएनए में निहित है। यह लेख डीएनए प्रतिकृति प्रक्रिया पर चर्चा। ऐसा नहीं है कि अणु में मुड़ यार्न जाना जाता है। हालांकि, जब डीएनए प्रतिकृति की प्रक्रिया शुरू होती है, वे dispiralized, फिर अलग कदम है, और प्रत्येक नई प्रतिलिपि पर संश्लेषित होता है। पूरा होने पर दो पूरी तरह से समान अणु, एक माता पिता और एक बच्चे धागा है, जिनमें से प्रत्येक देखते हैं। इस संश्लेषण अर्द्ध रूढ़िवादी कहा जाता है। डीएनए अणु ले जाया जाता है, एक भी गुणसूत्रबिंदु में रहते हुए, और अंत में केवल वितरित हो जाते हैं जब इस गुणसूत्रबिंदु विभाजन प्रक्रिया शुरू होती है। अन्य प्रकार विरोहक संश्लेषण कहा जाता है। उन्होंने कहा कि, पिछले के विपरीत, वह किसी भी कोशिका चरण से संबद्ध नहीं है, लेकिन डीएनए की क्षति की स्थिति में शुरू होता है। वे भी व्यापक रहे हैं, तो प्रकृति, सेल अंत में मर जाता है। हालांकि, अगर क्षति स्थानीय है, तो आप उन्हें बहाल कर सकते हैं। समस्या के आधार पर बहाल या एक ही बार में डीएनए के दो किस्में अलग किया जाना है। यह, के रूप में यह कहा जाता है, अनिर्धारित संश्लेषण में लंबा समय लग नहीं करता है और ऊर्जा का एक बहुत आवश्यकता नहीं है। लेकिन जब वहाँ डीएनए के एक दोहराव है, तो ऊर्जा, सामग्री का एक बहुत खर्च, अपनी घड़ी की लंबाई फैला हुआ था। दोहराव तीन अवधियों में विभाजित किया गया हैः - दीक्षा; - बढ़ाव; - समाप्ति। हमें डीएनए प्रतिकृति के अनुक्रम पर विचार करें। मानव डीएनए में - आधार जोड़े के लाखों लोगों की कुछ दसियों (जानवरों वे केवल एक सौ नौ)। डीएनए दोहराव कई स्थानों में निम्नलिखित कारणों के लिए श्रृंखला शुरू होता है। एक ही समय शाही सेना में प्रतिलेखन होता है के आसपास, लेकिन डीएनए के संश्लेषण में चयनित स्थानों में से कुछ में निलंबित कर दिया है। इसलिए, पदार्थ की पर्याप्त मात्रा से पहले इस तरह के एक प्रक्रिया के क्रम जीन अभिव्यक्ति और सेलुलर गतिविधि है कि टूट नहीं किया गया समर्थन करने के लिए कोशिकाओं की कोशिका द्रव्य में जम जाता है। इसे देखते हुए, इस प्रक्रिया को जितना जल्दी संभव हो जाने चाहिए। इस अवधि के दौरान प्रसारण किया जाता है, और प्रतिलेखन आयोजित नहीं है। अध्ययनों से पता चला है कि डीएनए दोहराव कई हजार अंक में एक बार होता है है - एक विशिष्ट न्यूक्लियोटाइड अनुक्रम के साथ छोटे क्षेत्रों। वे विशेष सर्जक प्रोटीन, जो बारी में डीएनए प्रतिकृति के अन्य एंजाइमों से जुड़े हुए है द्वारा शामिल हो गए हैं। डीएनए टुकड़ा जो संश्लेषित एक replicon कहा जाता है। यह शुरू से ही शुरू होता है और समाप्त होता है जब एंजाइम प्रतिकृति समाप्त हो जाता है। Replicon स्वायत्त है, और यह भी अपने स्वयं के सॉफ्टवेयर की पूरी प्रक्रिया आपूर्ति करती है। प्रक्रिया सभी बिंदुओं से एक ही बार में शुरू नहीं हो सकता है, कहीं न कहीं यह पहले शुरू होता है, कहीं न कहीं - बाद में; यह एक या दो विपरीत दिशाओं में जगह ले सकते हैं। घटनाओं निम्न क्रम जब छवि में जगह लेः - प्रतिकृति कांटे; - शाही सेना प्राइमर। यह हिस्सा एक प्रक्रिया है जिसमें कट यार्न में डीएनए डिऑक्सीराइबोन्यूक्लिक तंतु संश्लेषित कर रहे हैं प्रस्तुत करता है। इस प्रकार प्रतिकृति के तथाकथित आंख के रूप में प्लग। प्रक्रिया कार्यों के एक नंबर से पहले किया जाता हैः - एक nucleosome में हिस्टोन के सिलसिले से जारी - इस तरह के एक डीएनए प्रतिकृति मेथिलिकरण, एसिटिलीकरण, और फास्फारिलीकरण के रूप में एंजाइमों रासायनिक प्रतिक्रियाओं है कि प्रोटीन में परिणाम उनके सकारात्मक चार्ज कि उनकी रिहाई की सुविधा खो उत्पादन; - despiralization - तनाव मुक्त है, जो धागे की आगे मुक्ति के लिए आवश्यक है; - डीएनए strands के बीच हाइड्रोजन बांड को तोड़ने; - अणु के विभिन्न पक्षों में अपने विचलन; - निर्धारण एसएसबी प्रोटीन का उपयोग कर से होने वाली। संश्लेषण एक एंजाइम डीएनए पोलीमरेज़ बुलाया जाता है। हालांकि, अपने ही वह नहीं कर सकते हैं शुरू करने के लिए है, तो अन्य एंजाइमों करते हैं - आरएनए पोलीमरेज़, जो भी शाही सेना प्राइमरों कहा जाता है। वे पर डिऑक्सीराइबोन्यूक्लिक के समानांतर किस्में में संश्लेषित कर रहे हैं संपूरकता के सिद्धांत। इस प्रकार, दोनों सिरों, दो प्राइमरों के आरएनए संश्लेषण की दीक्षा और डीएनए strands फाड़ चला गया। इस अवधि में न्यूक्लियोटाइड अलावा और 3 'शाही सेना प्राइमर, पहले ही उल्लेख किया डीएनए पोलीमरेज़ किया जाता है जो के अंत से शुरू होता है। यह पहली बार दूसरा, तीसरा न्यूक्लियोटाइड, और इतने पर जोड़ा जाता है। नई धागा आधार माता पिता श्रृंखला से जुड़े हैं हाइड्रोजन बांड द्वारा। माना जाता है कि यार्न के संश्लेषण 5 में है '- 3'। यह कहाँ प्रतिकृति कांटा के पक्ष में होता है संश्लेषण लगातार और एक ही समय लंबा पर होता है। इसलिए, इस सूत्र प्रमुख या प्रमुख कहा जाता है। वह प्राइमर नहीं रह बनाई है आरएनए। हालांकि, माता-पिता के विपरीत किनारा पर डीएनए न्यूक्लियोटाइड आरएनए प्राइमर शामिल होने के लिए जारी है, और डिऑक्सीराइबोन्यूक्लिक श्रृंखला प्रतिकृति कांटा से विपरीत दिशा में संश्लेषित होता है। इस मामले में, यह देरी या चल कहा जाता है। ठंड कतरा संश्लेषण टुकड़े में होता है जिसमें संश्लेषण के एक छोर भाग है कि एक ही शाही सेना प्राइमर का उपयोग करने के पास किसी अन्य स्थान पर शुरू होता है पर। इस प्रकार, वहाँ दो देरी श्रृंखला टुकड़ा डीएनए और आरएनए शामिल हो गए हैं कर रहे हैं। वे Okazaki टुकड़े कहा जाता है। तब सब कुछ दोहराया है। तब पक्षों के लिए हेलिक्स, हाइड्रोजन फट संचार धागे की एक और बारी spliced, अग्रणी ठंड टुकड़ा आरएनए प्राइमर, जिस निम्नलिखित संश्लेषित पर लम्बे श्रृंखला - Okazaki टुकड़ा। इसके बाद, एक देरी भूग्रस्त शाही सेना में प्राइमरों नष्ट कर रहे हैं और डीएनए टुकड़े से एक में शामिल हो गए हैं। तो यह सर्किट एक ही समय में जगह लेता हैः - Okazaki टुकड़े के संश्लेषण; - आरएनए प्राइमरों के विनाश; - एक भी सर्किट में मिले। प्रक्रिया के रूप में लंबे समय से जारी है दो प्रतिकृति कांटा को पूरा नहीं करते के रूप में, या उनमें से एक अणु के समाप्त हो जाएगा। बैठक के बाद कांटे डीएनए बेटी किस्में एंजाइम द्वारा शामिल हो गए हैं। मामले में, अगर प्लग अणु के अंत में ले जाया जाता है, डीएनए दोहराव विशेष एंजाइमों का उपयोग कर समाप्त। इस प्रक्रिया में, एक महत्वपूर्ण भूमिका प्रतिकृति के नियंत्रण (या सुधार) को सौंपा गया है। संश्लेषण न्यूक्लियोटाइड सभी चार प्रकार के प्राप्त करता है, और डीएनए पोलीमरेज़ जोड़ी द्वारा जांच उन है कि आवश्यक हैं का चयन करता है रखने के लिए। वांछित न्यूक्लियोटाइड हाइड्रोजन बांड के साथ-साथ टेम्पलेट डीएनए किनारा पर समान न्यूक्लियोटाइड बनाने में सक्षम हो सकते हैं। इसके अलावा, चीनी फॉस्फेट रीढ़ के बीच दो अड्डों में तीन छल्ले के लिए इसी एक निश्चित लगातार दूरी होनी चाहिए। न्यूक्लियोटाइड इन आवश्यकताओं को पूरा नहीं करता है, कनेक्शन घटित नहीं होगा। नियंत्रण किया जाता से पहले यह सर्किट में और बाद में न्यूक्लियोटाइड चालू करने से पहले शामिल किया गया है है। उसके बाद, रीढ़ की हड्डी saharofosfata के लिए कनेक्शन। डीएनए प्रतिकृति की व्यवस्था, सटीकता के उच्च प्रतिशत के बावजूद हमेशा तंतु, जो ज्यादातर कहा जाता है में गड़बड़ी है "जीन म्यूटेशन। " एक हजार आधार जोड़े के बारे में, वहाँ एक गलती है कि दोहराव कहा जाता konvariantnaya है। यह अलग कारणों से होता है। उदाहरण के लिए, साइटोसिन के न्यूक्लियोटाइड deamination, दोनों के संश्लेषण में उत्परिवर्तजन की उपस्थिति के अधिक या बहुत कम मात्रा में। कुछ मामलों में, त्रुटि मरम्मत की प्रक्रिया द्वारा किया जा सकता में अन्य सुधार असंभव हो जाता है। क्षति प्रभावित हैं नींद अंतरिक्ष, एक त्रुटि गंभीर परिणाम जब वहाँ डीएनए प्रतिकृति प्रक्रिया नहीं होगी। एक जीन के nucleotide अनुक्रम संभोग त्रुटि के साथ हो सकता है। तो फिर यह मामला नहीं है, और एक नकारात्मक परिणाम सेल की मौत, और पूरे जीव के साथ मरने के हो सकता है। यह भी है कि मन में वहन किया जाना चाहिए जीन म्यूटेशन उत्परिवर्तनीय परिवर्तनशीलता, जो plasticity के जीन पूल में आता है पर आधारित हैं। समय संश्लेषण के भीतर या तुरंत बाद यह मेथिलिकरण चेन होता है पर। यह माना जाता है कि इस प्रक्रिया के लिए आवश्यक है एक व्यक्ति गुणसूत्रों फार्म और जीन प्रतिलेखन को विनियमित करने के लिए। इस प्रक्रिया में डीएनए के बैक्टीरिया एंजाइमों काटने के खिलाफ अपनी सुरक्षा कार्य करता है।
डीएनए अणु - गुणसूत्र संरचना में स्थित है। एक गुणसूत्र एक भी दो स्ट्रैंड से मिलकर अणु होते हैं। डीएनए के दोहराव - एक से दूसरे अणु से धागे की आत्म प्रजनन के बाद सूचना के हस्तांतरण है। यह दोनों डीएनए और आरएनए में निहित है। यह लेख डीएनए प्रतिकृति प्रक्रिया पर चर्चा। ऐसा नहीं है कि अणु में मुड़ यार्न जाना जाता है। हालांकि, जब डीएनए प्रतिकृति की प्रक्रिया शुरू होती है, वे dispiralized, फिर अलग कदम है, और प्रत्येक नई प्रतिलिपि पर संश्लेषित होता है। पूरा होने पर दो पूरी तरह से समान अणु, एक माता पिता और एक बच्चे धागा है, जिनमें से प्रत्येक देखते हैं। इस संश्लेषण अर्द्ध रूढ़िवादी कहा जाता है। डीएनए अणु ले जाया जाता है, एक भी गुणसूत्रबिंदु में रहते हुए, और अंत में केवल वितरित हो जाते हैं जब इस गुणसूत्रबिंदु विभाजन प्रक्रिया शुरू होती है। अन्य प्रकार विरोहक संश्लेषण कहा जाता है। उन्होंने कहा कि, पिछले के विपरीत, वह किसी भी कोशिका चरण से संबद्ध नहीं है, लेकिन डीएनए की क्षति की स्थिति में शुरू होता है। वे भी व्यापक रहे हैं, तो प्रकृति, सेल अंत में मर जाता है। हालांकि, अगर क्षति स्थानीय है, तो आप उन्हें बहाल कर सकते हैं। समस्या के आधार पर बहाल या एक ही बार में डीएनए के दो किस्में अलग किया जाना है। यह, के रूप में यह कहा जाता है, अनिर्धारित संश्लेषण में लंबा समय लग नहीं करता है और ऊर्जा का एक बहुत आवश्यकता नहीं है। लेकिन जब वहाँ डीएनए के एक दोहराव है, तो ऊर्जा, सामग्री का एक बहुत खर्च, अपनी घड़ी की लंबाई फैला हुआ था। दोहराव तीन अवधियों में विभाजित किया गया हैः - दीक्षा; - बढ़ाव; - समाप्ति। हमें डीएनए प्रतिकृति के अनुक्रम पर विचार करें। मानव डीएनए में - आधार जोड़े के लाखों लोगों की कुछ दसियों । डीएनए दोहराव कई स्थानों में निम्नलिखित कारणों के लिए श्रृंखला शुरू होता है। एक ही समय शाही सेना में प्रतिलेखन होता है के आसपास, लेकिन डीएनए के संश्लेषण में चयनित स्थानों में से कुछ में निलंबित कर दिया है। इसलिए, पदार्थ की पर्याप्त मात्रा से पहले इस तरह के एक प्रक्रिया के क्रम जीन अभिव्यक्ति और सेलुलर गतिविधि है कि टूट नहीं किया गया समर्थन करने के लिए कोशिकाओं की कोशिका द्रव्य में जम जाता है। इसे देखते हुए, इस प्रक्रिया को जितना जल्दी संभव हो जाने चाहिए। इस अवधि के दौरान प्रसारण किया जाता है, और प्रतिलेखन आयोजित नहीं है। अध्ययनों से पता चला है कि डीएनए दोहराव कई हजार अंक में एक बार होता है है - एक विशिष्ट न्यूक्लियोटाइड अनुक्रम के साथ छोटे क्षेत्रों। वे विशेष सर्जक प्रोटीन, जो बारी में डीएनए प्रतिकृति के अन्य एंजाइमों से जुड़े हुए है द्वारा शामिल हो गए हैं। डीएनए टुकड़ा जो संश्लेषित एक replicon कहा जाता है। यह शुरू से ही शुरू होता है और समाप्त होता है जब एंजाइम प्रतिकृति समाप्त हो जाता है। Replicon स्वायत्त है, और यह भी अपने स्वयं के सॉफ्टवेयर की पूरी प्रक्रिया आपूर्ति करती है। प्रक्रिया सभी बिंदुओं से एक ही बार में शुरू नहीं हो सकता है, कहीं न कहीं यह पहले शुरू होता है, कहीं न कहीं - बाद में; यह एक या दो विपरीत दिशाओं में जगह ले सकते हैं। घटनाओं निम्न क्रम जब छवि में जगह लेः - प्रतिकृति कांटे; - शाही सेना प्राइमर। यह हिस्सा एक प्रक्रिया है जिसमें कट यार्न में डीएनए डिऑक्सीराइबोन्यूक्लिक तंतु संश्लेषित कर रहे हैं प्रस्तुत करता है। इस प्रकार प्रतिकृति के तथाकथित आंख के रूप में प्लग। प्रक्रिया कार्यों के एक नंबर से पहले किया जाता हैः - एक nucleosome में हिस्टोन के सिलसिले से जारी - इस तरह के एक डीएनए प्रतिकृति मेथिलिकरण, एसिटिलीकरण, और फास्फारिलीकरण के रूप में एंजाइमों रासायनिक प्रतिक्रियाओं है कि प्रोटीन में परिणाम उनके सकारात्मक चार्ज कि उनकी रिहाई की सुविधा खो उत्पादन; - despiralization - तनाव मुक्त है, जो धागे की आगे मुक्ति के लिए आवश्यक है; - डीएनए strands के बीच हाइड्रोजन बांड को तोड़ने; - अणु के विभिन्न पक्षों में अपने विचलन; - निर्धारण एसएसबी प्रोटीन का उपयोग कर से होने वाली। संश्लेषण एक एंजाइम डीएनए पोलीमरेज़ बुलाया जाता है। हालांकि, अपने ही वह नहीं कर सकते हैं शुरू करने के लिए है, तो अन्य एंजाइमों करते हैं - आरएनए पोलीमरेज़, जो भी शाही सेना प्राइमरों कहा जाता है। वे पर डिऑक्सीराइबोन्यूक्लिक के समानांतर किस्में में संश्लेषित कर रहे हैं संपूरकता के सिद्धांत। इस प्रकार, दोनों सिरों, दो प्राइमरों के आरएनए संश्लेषण की दीक्षा और डीएनए strands फाड़ चला गया। इस अवधि में न्यूक्लियोटाइड अलावा और तीन 'शाही सेना प्राइमर, पहले ही उल्लेख किया डीएनए पोलीमरेज़ किया जाता है जो के अंत से शुरू होता है। यह पहली बार दूसरा, तीसरा न्यूक्लियोटाइड, और इतने पर जोड़ा जाता है। नई धागा आधार माता पिता श्रृंखला से जुड़े हैं हाइड्रोजन बांड द्वारा। माना जाता है कि यार्न के संश्लेषण पाँच में है '- तीन'। यह कहाँ प्रतिकृति कांटा के पक्ष में होता है संश्लेषण लगातार और एक ही समय लंबा पर होता है। इसलिए, इस सूत्र प्रमुख या प्रमुख कहा जाता है। वह प्राइमर नहीं रह बनाई है आरएनए। हालांकि, माता-पिता के विपरीत किनारा पर डीएनए न्यूक्लियोटाइड आरएनए प्राइमर शामिल होने के लिए जारी है, और डिऑक्सीराइबोन्यूक्लिक श्रृंखला प्रतिकृति कांटा से विपरीत दिशा में संश्लेषित होता है। इस मामले में, यह देरी या चल कहा जाता है। ठंड कतरा संश्लेषण टुकड़े में होता है जिसमें संश्लेषण के एक छोर भाग है कि एक ही शाही सेना प्राइमर का उपयोग करने के पास किसी अन्य स्थान पर शुरू होता है पर। इस प्रकार, वहाँ दो देरी श्रृंखला टुकड़ा डीएनए और आरएनए शामिल हो गए हैं कर रहे हैं। वे Okazaki टुकड़े कहा जाता है। तब सब कुछ दोहराया है। तब पक्षों के लिए हेलिक्स, हाइड्रोजन फट संचार धागे की एक और बारी spliced, अग्रणी ठंड टुकड़ा आरएनए प्राइमर, जिस निम्नलिखित संश्लेषित पर लम्बे श्रृंखला - Okazaki टुकड़ा। इसके बाद, एक देरी भूग्रस्त शाही सेना में प्राइमरों नष्ट कर रहे हैं और डीएनए टुकड़े से एक में शामिल हो गए हैं। तो यह सर्किट एक ही समय में जगह लेता हैः - Okazaki टुकड़े के संश्लेषण; - आरएनए प्राइमरों के विनाश; - एक भी सर्किट में मिले। प्रक्रिया के रूप में लंबे समय से जारी है दो प्रतिकृति कांटा को पूरा नहीं करते के रूप में, या उनमें से एक अणु के समाप्त हो जाएगा। बैठक के बाद कांटे डीएनए बेटी किस्में एंजाइम द्वारा शामिल हो गए हैं। मामले में, अगर प्लग अणु के अंत में ले जाया जाता है, डीएनए दोहराव विशेष एंजाइमों का उपयोग कर समाप्त। इस प्रक्रिया में, एक महत्वपूर्ण भूमिका प्रतिकृति के नियंत्रण को सौंपा गया है। संश्लेषण न्यूक्लियोटाइड सभी चार प्रकार के प्राप्त करता है, और डीएनए पोलीमरेज़ जोड़ी द्वारा जांच उन है कि आवश्यक हैं का चयन करता है रखने के लिए। वांछित न्यूक्लियोटाइड हाइड्रोजन बांड के साथ-साथ टेम्पलेट डीएनए किनारा पर समान न्यूक्लियोटाइड बनाने में सक्षम हो सकते हैं। इसके अलावा, चीनी फॉस्फेट रीढ़ के बीच दो अड्डों में तीन छल्ले के लिए इसी एक निश्चित लगातार दूरी होनी चाहिए। न्यूक्लियोटाइड इन आवश्यकताओं को पूरा नहीं करता है, कनेक्शन घटित नहीं होगा। नियंत्रण किया जाता से पहले यह सर्किट में और बाद में न्यूक्लियोटाइड चालू करने से पहले शामिल किया गया है है। उसके बाद, रीढ़ की हड्डी saharofosfata के लिए कनेक्शन। डीएनए प्रतिकृति की व्यवस्था, सटीकता के उच्च प्रतिशत के बावजूद हमेशा तंतु, जो ज्यादातर कहा जाता है में गड़बड़ी है "जीन म्यूटेशन। " एक हजार आधार जोड़े के बारे में, वहाँ एक गलती है कि दोहराव कहा जाता konvariantnaya है। यह अलग कारणों से होता है। उदाहरण के लिए, साइटोसिन के न्यूक्लियोटाइड deamination, दोनों के संश्लेषण में उत्परिवर्तजन की उपस्थिति के अधिक या बहुत कम मात्रा में। कुछ मामलों में, त्रुटि मरम्मत की प्रक्रिया द्वारा किया जा सकता में अन्य सुधार असंभव हो जाता है। क्षति प्रभावित हैं नींद अंतरिक्ष, एक त्रुटि गंभीर परिणाम जब वहाँ डीएनए प्रतिकृति प्रक्रिया नहीं होगी। एक जीन के nucleotide अनुक्रम संभोग त्रुटि के साथ हो सकता है। तो फिर यह मामला नहीं है, और एक नकारात्मक परिणाम सेल की मौत, और पूरे जीव के साथ मरने के हो सकता है। यह भी है कि मन में वहन किया जाना चाहिए जीन म्यूटेशन उत्परिवर्तनीय परिवर्तनशीलता, जो plasticity के जीन पूल में आता है पर आधारित हैं। समय संश्लेषण के भीतर या तुरंत बाद यह मेथिलिकरण चेन होता है पर। यह माना जाता है कि इस प्रक्रिया के लिए आवश्यक है एक व्यक्ति गुणसूत्रों फार्म और जीन प्रतिलेखन को विनियमित करने के लिए। इस प्रक्रिया में डीएनए के बैक्टीरिया एंजाइमों काटने के खिलाफ अपनी सुरक्षा कार्य करता है।
Lakhimpur Kheri Case: सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार (19 जनवरी) को लखीमपुर खीरी केस के आरोपी और केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी (Ajay MishrTeni) के बेटे आशीष मिश्रा 'मोनू' (Ashish Mishra) की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया। जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेके माहेश्वरी की बेंच ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की और कहा 'केस के ट्रायल में 5 साल का वक्त लग सकता है, ऐसे में अभियुक्त को अनिश्चित काल के लिए कैद में नहीं रखा जा सकता है। किसी को अनिश्चितकालीन कारावास नहीं होना चाहिए...'। सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी पर पीड़ितों की तरफ से पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे (Dushyant Dave) ने कहा कि यही तर्क सभी अभियुक्तों पर लागू होना चाहिए, जिनमें साल 2020 के दिल्ली दंगों के जेल में बंद आरोपी भी शामिल हैं। दवे ने कहा कि कानून तो सबके लिए बराबर होना चाहिए, दिल्ली दंगों के अभियुक्त तो अभी भी जेल में सड़ रहे हैं। 'बार एंड बेंच' की एक रिपोर्ट के मुताबिक आशीष मिश्रा (मोनू) की पैरवी कर रहे सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी (Mukul Rohatgi) ने कहा कि घटना के वक्त मिश्रा कार में मौजूद नहीं थे। कॉल रिकॉर्ड से पता लगा था कि हादसे के वक्त आशीष मिश्रा घटनास्थल से 4 किलोमीटर दूर थे। यह कोई मर्डर का केस नहीं है, बल्कि ऐसा मामला है जब भीड़ हिंसक हो गई और कुछ लोगों की हत्या कर दी। हमारे भी लोग मारे गए और कुछ किसानों की भी जान गई। न तो गोली चली है न ही गोली से घाव के निशान मिले हैं। मुकुल रोहतगी (Mukul Rohatgi) ने तर्क दिया कि आशीष मिश्रा का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। वे 1 साल से ज्यादा समय से हिरासत में हैं। ट्रायल कोर्ट में हमारे खिलाफ कुल 208 गवाह हैं और अगर प्राथमिकता पर सुनवाई नहीं लगी तो 5 साल लग सकते हैं। रोहतगी ने कहा कि एक एफआईआर में 200 और एक में 198 गवाह हैं। इस तरह तो 400 गवाहों से पूछताछ में 7-8 साल का वक्त लग जाएगा। SC ने यूपी सरकार से पूछा- क्या सबूतों से छेड़छाड़ की? सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से पेश एडिशनल एडवोकेट जनरल (AAG) गरिमा प्रसाद से पूछा कि क्या आशीष मिश्रा ने सबूतों से छेड़छाड़ का प्रयास किया? इस पर गरिमा प्रसाद ने कहा कि नहीं ऐसा तो अभी तक नहीं हुआ है। कोर्ट ने पूछा कि फिर आपकी क्या राय है? इस पर गरिमा प्रसाद ने कहा कि ये बहुत गंभीर अपराध है और सोसाइटी पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ेगा...। उधर, पीड़ितों की तरफ से पेश सीनियर एडवोकेट दुष्यंत दवे (Dushyant Dave) ने कहा कि अगर आशीष मिश्रा को जमानत मिलती है तो इससे बहुत बुरा संदेश जाएगा। हमें नहीं ध्यान आ रहा है कि अभी तक किसी अन्य मर्डर का ट्रायल 5 साल से पहले पूरा हुआ हो। उनकी इस टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 'आप ऐसा नहीं कह सकते हैं कि कोर्ट चुपचाप देखता है और यह भी नहीं कर सकते हैं कि अभी तक अगर कोई काम नहीं हुआ है तो इसका मतलब सुप्रीम कोर्ट के पास ताकत नहीं है...'।
Lakhimpur Kheri Case: सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को लखीमपुर खीरी केस के आरोपी और केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा 'मोनू' की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया। जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेके माहेश्वरी की बेंच ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की और कहा 'केस के ट्रायल में पाँच साल का वक्त लग सकता है, ऐसे में अभियुक्त को अनिश्चित काल के लिए कैद में नहीं रखा जा सकता है। किसी को अनिश्चितकालीन कारावास नहीं होना चाहिए...'। सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी पर पीड़ितों की तरफ से पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि यही तर्क सभी अभियुक्तों पर लागू होना चाहिए, जिनमें साल दो हज़ार बीस के दिल्ली दंगों के जेल में बंद आरोपी भी शामिल हैं। दवे ने कहा कि कानून तो सबके लिए बराबर होना चाहिए, दिल्ली दंगों के अभियुक्त तो अभी भी जेल में सड़ रहे हैं। 'बार एंड बेंच' की एक रिपोर्ट के मुताबिक आशीष मिश्रा की पैरवी कर रहे सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने कहा कि घटना के वक्त मिश्रा कार में मौजूद नहीं थे। कॉल रिकॉर्ड से पता लगा था कि हादसे के वक्त आशीष मिश्रा घटनास्थल से चार किलोग्राममीटर दूर थे। यह कोई मर्डर का केस नहीं है, बल्कि ऐसा मामला है जब भीड़ हिंसक हो गई और कुछ लोगों की हत्या कर दी। हमारे भी लोग मारे गए और कुछ किसानों की भी जान गई। न तो गोली चली है न ही गोली से घाव के निशान मिले हैं। मुकुल रोहतगी ने तर्क दिया कि आशीष मिश्रा का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। वे एक साल से ज्यादा समय से हिरासत में हैं। ट्रायल कोर्ट में हमारे खिलाफ कुल दो सौ आठ गवाह हैं और अगर प्राथमिकता पर सुनवाई नहीं लगी तो पाँच साल लग सकते हैं। रोहतगी ने कहा कि एक एफआईआर में दो सौ और एक में एक सौ अट्ठानवे गवाह हैं। इस तरह तो चार सौ गवाहों से पूछताछ में सात-आठ साल का वक्त लग जाएगा। SC ने यूपी सरकार से पूछा- क्या सबूतों से छेड़छाड़ की? सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से पेश एडिशनल एडवोकेट जनरल गरिमा प्रसाद से पूछा कि क्या आशीष मिश्रा ने सबूतों से छेड़छाड़ का प्रयास किया? इस पर गरिमा प्रसाद ने कहा कि नहीं ऐसा तो अभी तक नहीं हुआ है। कोर्ट ने पूछा कि फिर आपकी क्या राय है? इस पर गरिमा प्रसाद ने कहा कि ये बहुत गंभीर अपराध है और सोसाइटी पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ेगा...। उधर, पीड़ितों की तरफ से पेश सीनियर एडवोकेट दुष्यंत दवे ने कहा कि अगर आशीष मिश्रा को जमानत मिलती है तो इससे बहुत बुरा संदेश जाएगा। हमें नहीं ध्यान आ रहा है कि अभी तक किसी अन्य मर्डर का ट्रायल पाँच साल से पहले पूरा हुआ हो। उनकी इस टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 'आप ऐसा नहीं कह सकते हैं कि कोर्ट चुपचाप देखता है और यह भी नहीं कर सकते हैं कि अभी तक अगर कोई काम नहीं हुआ है तो इसका मतलब सुप्रीम कोर्ट के पास ताकत नहीं है...'।
सरोज मे दिया हुआ सम्वत् अधिक से अधिक कवि का अन्तिम जीवन काल हो सकता यह उसका जन्म-काल कदापि नही है । (४५) केहरी कवि, सम्वत् १६१० मे उ० । महाराजा रतन सिंह के यहाँ थे । कविता मे महा चतुर थे । सरोज मे केहरी कवि का एक कवित्त उद्धृत है, जो दिग्विजय-भूपरण से लिया गया है । इस कवित्त के चतुर्थ चरण मे रतन नाम आया है रतन सहारे भट भेदै रवि मडल कौं, मंडल घरीक नट कुन्डल सो ह्वै रह्यो सरोजकार ने अपने उद्धरण मे न जाने क्यो 'रतन' के स्थान पर 'समर' पाठ कर दिया है । सरोज का यह उल्लेख उक्त छद मे आये रतन के आधार पर ही है, इसमे सदेह नही । वुन्देलवैभव मे केहरी कवि को ओरछा निवासी कहा गया है, इन्हें तत्कालीन ओरछा नरेश रामशाह का आश्रित एव दरवारी कवि कहा गया है । इनका जन्मकाल सम्वत् १६२० एव कविता काल सम्वत् १६६० वि० दिया गया है । इनकी कविता के उदाहरण मे सरोज मे उदाहृत कवित्त ही उद्धृत किया गया है । सभवत. इस कवित्त मे राम शाह के भाई उन रतन सिंह की प्रशसा है, जिनका गुरणगान महाकवि केशव ने रतनवावनी मे किया है । ग्रियर्सन ( ७० ) और विनोद ( १६१ ) के अनुसार उक्त कवित्त मे प्रशसित रतन सिंह सम्भवत बुरहानपुर जिला नीमार के राव रतन है जो १५७६ ई० मे हुये । केहरी नामक एक कवि ने पटियाला नरेश पृथ्वीपाल सिंह के श्राश्रय मे सम्वत् १८६० वि० मे भूप-भूपरण नामक ग्रन्थ की रचना की । (४६) कृष्ण सिंह विसेन राजा- भिनगा जिले वहिरायच, स० १९०६ मे उ० । यह राजा, काव्य बहुत निपुरग थे और इस रियासत मे सदैव कवि कोविद लोगो का मान होता था । भैया जगत सिंह इसी वश मे बडे नामी कवि हो गये है और शिव कवि इत्यादि इन्ही के यहा रहे । अब भी भैया लोग खुद कवि है और काव्य की चर्चा बहुत है, जैसा बुन्देलखड और बघेल खड के रईस अपना काल काव्यविनोद मे व्यतीत करते हैं, वैसे ही इस रियासत के भाई वन्धु है । सवत् १९०६ कवि का उपस्थिति काल ही है, जन्म काल नही । विनोद मे (२३१७) इनके एक ग्रन्थ गंगाष्टक का उल्लेख है । इनका पूरा नाम कृष्णदत्त सिंह था । इनके पितामह का नाम शिवसिंह ( रचनाकाल स० १८५०-७५) और पिता का नाम सर्वजीत सिंह था । ३ शिवदीन कवि विलग्रामो ने इनके नाम पर कृष्णदत्त रासा नामक ग्रंथ रचा था। इसमे इनके और अवध के नवाब के नाजिम महमूद अली खां के बीच स० १६०१ मे हुए युद्ध का वर्णन है। (१) बुन्देल वैभव भाग २, पृष्ठ २८३ (२) सोज रिपोर्ट १६०३।११७ (३) यही अथ, कवि सख्या ८२३, सोज रि० १९२३/३६० (४) यही प्रथ, कवि सख्या ८५७
सरोज मे दिया हुआ सम्वत् अधिक से अधिक कवि का अन्तिम जीवन काल हो सकता यह उसका जन्म-काल कदापि नही है । केहरी कवि, सम्वत् एक हज़ार छः सौ दस मे उशून्य । महाराजा रतन सिंह के यहाँ थे । कविता मे महा चतुर थे । सरोज मे केहरी कवि का एक कवित्त उद्धृत है, जो दिग्विजय-भूपरण से लिया गया है । इस कवित्त के चतुर्थ चरण मे रतन नाम आया है रतन सहारे भट भेदै रवि मडल कौं, मंडल घरीक नट कुन्डल सो ह्वै रह्यो सरोजकार ने अपने उद्धरण मे न जाने क्यो 'रतन' के स्थान पर 'समर' पाठ कर दिया है । सरोज का यह उल्लेख उक्त छद मे आये रतन के आधार पर ही है, इसमे सदेह नही । वुन्देलवैभव मे केहरी कवि को ओरछा निवासी कहा गया है, इन्हें तत्कालीन ओरछा नरेश रामशाह का आश्रित एव दरवारी कवि कहा गया है । इनका जन्मकाल सम्वत् एक हज़ार छः सौ बीस एव कविता काल सम्वत् एक हज़ार छः सौ साठ विशून्य दिया गया है । इनकी कविता के उदाहरण मे सरोज मे उदाहृत कवित्त ही उद्धृत किया गया है । सभवत. इस कवित्त मे राम शाह के भाई उन रतन सिंह की प्रशसा है, जिनका गुरणगान महाकवि केशव ने रतनवावनी मे किया है । ग्रियर्सन और विनोद के अनुसार उक्त कवित्त मे प्रशसित रतन सिंह सम्भवत बुरहानपुर जिला नीमार के राव रतन है जो एक हज़ार पाँच सौ छिहत्तर ईशून्य मे हुये । केहरी नामक एक कवि ने पटियाला नरेश पृथ्वीपाल सिंह के श्राश्रय मे सम्वत् एक हज़ार आठ सौ साठ विशून्य मे भूप-भूपरण नामक ग्रन्थ की रचना की । कृष्ण सिंह विसेन राजा- भिनगा जिले वहिरायच, सशून्य एक हज़ार नौ सौ छः मे उशून्य । यह राजा, काव्य बहुत निपुरग थे और इस रियासत मे सदैव कवि कोविद लोगो का मान होता था । भैया जगत सिंह इसी वश मे बडे नामी कवि हो गये है और शिव कवि इत्यादि इन्ही के यहा रहे । अब भी भैया लोग खुद कवि है और काव्य की चर्चा बहुत है, जैसा बुन्देलखड और बघेल खड के रईस अपना काल काव्यविनोद मे व्यतीत करते हैं, वैसे ही इस रियासत के भाई वन्धु है । सवत् एक हज़ार नौ सौ छः कवि का उपस्थिति काल ही है, जन्म काल नही । विनोद मे इनके एक ग्रन्थ गंगाष्टक का उल्लेख है । इनका पूरा नाम कृष्णदत्त सिंह था । इनके पितामह का नाम शिवसिंह और पिता का नाम सर्वजीत सिंह था । तीन शिवदीन कवि विलग्रामो ने इनके नाम पर कृष्णदत्त रासा नामक ग्रंथ रचा था। इसमे इनके और अवध के नवाब के नाजिम महमूद अली खां के बीच सशून्य एक हज़ार छः सौ एक मे हुए युद्ध का वर्णन है। बुन्देल वैभव भाग दो, पृष्ठ दो सौ तिरासी सोज रिपोर्ट एक हज़ार छः सौ तीन।एक सौ सत्रह यही अथ, कवि सख्या आठ सौ तेईस, सोज रिशून्य एक हज़ार नौ सौ तेईस/तीन सौ साठ यही प्रथ, कवि सख्या आठ सौ सत्तावन
संसारसे वैराग्य और भगवान् में प्रेम होनेका उपाय २९१ किये बिना साधन होना सुगम नहीं है और साधन करनेसे भगवान् की प्राप्ति होती है । भगवान् कहते हैं - असंयतात्मना योगो दुष्प्राप इति मे मतिः । शक्योऽवाप्तुमुपायतः ॥ 'जिसका मन वशमें किया हुआ नहीं है, ऐसे पुरुषद्वारा योग ( भगवत् प्राप्ति ) दुष्प्राप्य है और वश में किये हुए मनवाले प्रयत्नशील पुरुषद्वारा साधनसे उसका प्राप्त होना सहज है - यह मेरा मत है ।" तथा भगवान्ने आगे सब साधनोंमें श्रद्धापूर्वक भगवान्के भजन-चिन्तनरूप भक्तिके साधनको ही श्रेष्ठ बतलाया है - योगिनामपि सर्वेषां सद्गतेनान्तरात्मना । श्रद्धावान् भजते यो मां स मे युक्ततमो मतः ॥ 'सम्पूर्ण योगियों में भी जो श्रद्धावान् योगी मुझमें लगे हुए अन्तरात्मासे मुझको निरन्तर भजता है, वह योगी मुझे परम श्रेष्ठ मान्य है । ' अथवा एकान्त में बैठकर सम्पूर्ण कामनाओंको त्यागकर मनसे इन्द्रियोंको वशमें करके और संसारसे उपराम होकर मनको परमात्मामें लगा देना चाहिये । परमात्माकी प्राप्तिका यह भी एक उत्तम प्रकार है । भगवान्ने स्वयं गीता में बतलाया हैCC-0 Kashmir Research Institute. Digitized by eGangotri
संसारसे वैराग्य और भगवान् में प्रेम होनेका उपाय दो सौ इक्यानवे किये बिना साधन होना सुगम नहीं है और साधन करनेसे भगवान् की प्राप्ति होती है । भगवान् कहते हैं - असंयतात्मना योगो दुष्प्राप इति मे मतिः । शक्योऽवाप्तुमुपायतः ॥ 'जिसका मन वशमें किया हुआ नहीं है, ऐसे पुरुषद्वारा योग दुष्प्राप्य है और वश में किये हुए मनवाले प्रयत्नशील पुरुषद्वारा साधनसे उसका प्राप्त होना सहज है - यह मेरा मत है ।" तथा भगवान्ने आगे सब साधनोंमें श्रद्धापूर्वक भगवान्के भजन-चिन्तनरूप भक्तिके साधनको ही श्रेष्ठ बतलाया है - योगिनामपि सर्वेषां सद्गतेनान्तरात्मना । श्रद्धावान् भजते यो मां स मे युक्ततमो मतः ॥ 'सम्पूर्ण योगियों में भी जो श्रद्धावान् योगी मुझमें लगे हुए अन्तरात्मासे मुझको निरन्तर भजता है, वह योगी मुझे परम श्रेष्ठ मान्य है । ' अथवा एकान्त में बैठकर सम्पूर्ण कामनाओंको त्यागकर मनसे इन्द्रियोंको वशमें करके और संसारसे उपराम होकर मनको परमात्मामें लगा देना चाहिये । परमात्माकी प्राप्तिका यह भी एक उत्तम प्रकार है । भगवान्ने स्वयं गीता में बतलाया हैCC-शून्य Kashmir Research Institute. Digitized by eGangotri
सावन सोमवार के व्रत में भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा की जाती है। प्राचीन शास्त्रों के अनुसार सोमवार के व्रत तीन तरह के होते हैं। सोमवार, सोलह सोमवार और सोम प्रदोष। सोमवार व्रत की विधि सभी व्रतों में समान होती है। इस व्रत को सावन माह में आरंभ करना शुभ माना जाता है। सावन सोमवार व्रत सूर्योदय से प्रारंभ कर तीसरे पहर तक किया जाता है। शिव पूजा के बाद सोमवार व्रत की कथा सुननी आवश्यक है। व्रत करने वाले को दिन में एक बार भोजन करना चाहिए। सावन सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में सोकर उठें। पूरे घर की सफाई कर स्नानादि से निवृत्त हो जाएं। गंगा जल या पवित्र जल पूरे घर में छिड़कें। घर में ही किसी पवित्र स्थान पर भगवान शिव की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। 'मम क्षेमस्थैर्यविजयारोग्यैश्वर्याभिवृद्धयर्थं सोमव्रतं करिष्ये' 'ध्यायेन्नित्यंमहेशं रजतगिरिनिभं चारुचंद्रावतंसं रत्नाकल्पोज्ज्वलांग परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्। ध्यान के पश्चात 'ॐ नमः शिवाय' से शिवजी का तथा 'ॐ शिवायै नमः' से पार्वतीजी का षोडशोपचार पूजन करें। पूजन के पश्चात व्रत कथा सुनें। तत्पश्चात आरती कर प्रसाद वितरण करें। इसकें बाद भोजन या फलाहार ग्रहण करें। श्रावण मास के सोमवार को करने से भगवान शिव और माता पार्वती संयुक्त रूप से प्रसन्न होकर मनोवांछित फल प्राप्ति का आशीष देते हैं। इस व्रत से सुख, सफलता, सादगी, संयम, सच्चरित्रता, स्नेह और सौभाग्य का वरदान मिलता है। भगवान शिव हर विपरीत परिस्थिति में भक्त का सहारा बनते हैं। इस उपवास से तरक्की के रास्ते खुलते हैं और आशुतोष भगवान शिव की पूर्णतः कृपा मिलती है।
सावन सोमवार के व्रत में भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा की जाती है। प्राचीन शास्त्रों के अनुसार सोमवार के व्रत तीन तरह के होते हैं। सोमवार, सोलह सोमवार और सोम प्रदोष। सोमवार व्रत की विधि सभी व्रतों में समान होती है। इस व्रत को सावन माह में आरंभ करना शुभ माना जाता है। सावन सोमवार व्रत सूर्योदय से प्रारंभ कर तीसरे पहर तक किया जाता है। शिव पूजा के बाद सोमवार व्रत की कथा सुननी आवश्यक है। व्रत करने वाले को दिन में एक बार भोजन करना चाहिए। सावन सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में सोकर उठें। पूरे घर की सफाई कर स्नानादि से निवृत्त हो जाएं। गंगा जल या पवित्र जल पूरे घर में छिड़कें। घर में ही किसी पवित्र स्थान पर भगवान शिव की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। 'मम क्षेमस्थैर्यविजयारोग्यैश्वर्याभिवृद्धयर्थं सोमव्रतं करिष्ये' 'ध्यायेन्नित्यंमहेशं रजतगिरिनिभं चारुचंद्रावतंसं रत्नाकल्पोज्ज्वलांग परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्। ध्यान के पश्चात 'ॐ नमः शिवाय' से शिवजी का तथा 'ॐ शिवायै नमः' से पार्वतीजी का षोडशोपचार पूजन करें। पूजन के पश्चात व्रत कथा सुनें। तत्पश्चात आरती कर प्रसाद वितरण करें। इसकें बाद भोजन या फलाहार ग्रहण करें। श्रावण मास के सोमवार को करने से भगवान शिव और माता पार्वती संयुक्त रूप से प्रसन्न होकर मनोवांछित फल प्राप्ति का आशीष देते हैं। इस व्रत से सुख, सफलता, सादगी, संयम, सच्चरित्रता, स्नेह और सौभाग्य का वरदान मिलता है। भगवान शिव हर विपरीत परिस्थिति में भक्त का सहारा बनते हैं। इस उपवास से तरक्की के रास्ते खुलते हैं और आशुतोष भगवान शिव की पूर्णतः कृपा मिलती है।
नालागढ़ उपमंडल के डाडी कानियां में एक करियाना की दुकान में आग लगने से 20 हजार रुपये का नुकसान हो गया है। इस आग से फ्रीज व अन्य सामान जलकर राख हो गया है। आग लगने का कारण शार्ट सर्किट बताया जा रहा है। फायर बिग्रेड की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया और करीब डेढ लाख की संपत्ति को जलने से बचा लिया। जानकारी के अनुसार फायर बिग्रेड नालागढ़ को सूचना मिली कि नालागढ़ बद्दी एनएच मार्ग पर स्थित डाडी कानिया में करियाना की दुकान चलाने वाले दुकानदार अखिलेश की दुकान में रविवार दोपहर करीब 3 बजे अचानक आग लग गई। सूचना मिलते ही दुकानदार अखिलेश दुकान पर आया और उसने फायर ब्रिगेड को सूचित किया। फायर बिग्रेड के फायर आफिसर जयपाल के अलावा फायर मैन अमरचंद, प्रवीण, तेज सिंह व चालक अमर चंद मौके पर पहुंचे और आग पर कड़ी मशक्कत के बाद काबू पाया। फायर आफिसर जयपाल ने बताया कि आग शार्ट सर्किट से पहले फ्रीज में लगी और उसके बाद दुकान में फैल गई। बीस हजार का नुकसान हुआ है। लेकिन समय रहते आग पर काबू पाया गया। फायर ब्रिगेड ने करीब डेढ़ लाख की संपत्ति को जलने से बचाया।
नालागढ़ उपमंडल के डाडी कानियां में एक करियाना की दुकान में आग लगने से बीस हजार रुपये का नुकसान हो गया है। इस आग से फ्रीज व अन्य सामान जलकर राख हो गया है। आग लगने का कारण शार्ट सर्किट बताया जा रहा है। फायर बिग्रेड की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया और करीब डेढ लाख की संपत्ति को जलने से बचा लिया। जानकारी के अनुसार फायर बिग्रेड नालागढ़ को सूचना मिली कि नालागढ़ बद्दी एनएच मार्ग पर स्थित डाडी कानिया में करियाना की दुकान चलाने वाले दुकानदार अखिलेश की दुकान में रविवार दोपहर करीब तीन बजे अचानक आग लग गई। सूचना मिलते ही दुकानदार अखिलेश दुकान पर आया और उसने फायर ब्रिगेड को सूचित किया। फायर बिग्रेड के फायर आफिसर जयपाल के अलावा फायर मैन अमरचंद, प्रवीण, तेज सिंह व चालक अमर चंद मौके पर पहुंचे और आग पर कड़ी मशक्कत के बाद काबू पाया। फायर आफिसर जयपाल ने बताया कि आग शार्ट सर्किट से पहले फ्रीज में लगी और उसके बाद दुकान में फैल गई। बीस हजार का नुकसान हुआ है। लेकिन समय रहते आग पर काबू पाया गया। फायर ब्रिगेड ने करीब डेढ़ लाख की संपत्ति को जलने से बचाया।
राजस्थान (Rajasthan) के झालावाड (Jhalawar) जिले में कार से स्कूटी की टक्कर हो गई. भिड़ंत इतनी तेज थी कि कार भी सामने से बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई और स्कूल दो टुकड़ों में बंट गई. घटना में घायल स्कूटी सवार तीन छात्रों को इलाज के लिए अस्पतालों में एडमिट कराया गया है. वहीं, टक्कर होने के बाद कार चालक मौके से भाग निकला. पुलिस ने दोनों वाहनों को कब्जे में ले लिया है और कार चालक की तलाश कर रही है. दरसअल, शुक्रवार-शनिवार की दरमियाना रात जिले के झालरापाटन स्थित गिन्दोर रोड पर देर रात तेज तेज रफ्तार कार चला रहे युवक ने स्कूटी सवार तीन छात्रों को टक्कर मार दी. हादसा इतना जोरदार था कि स्कूटी सवार तीन छात्र उछल कर दूरी पर जा गिरे और स्कूटी दो टुकड़ों में बंट गई. साथ ही कार भी बुरी तरह से डैमेज हो गई. घटना की जानकारी मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने गंभीर घायल तीनों छात्रों के इलाज के लिए जिला अस्पताल भिजवाया था. क्रिस नाम के छात्र की हालत गंभीर होने के कारण उसे बेहतर इलाज के लिए कोटा रेफर किया गया है. वहीं दोनों घायलों का झालावाड़ के ही अस्पताल में इलाज जारी है. पुलिस का कहना है कि कार चालक मौके से भाग निकाल था. दोनों वाहनों के सड़क से हटवा कर थाने पहुंचाया गया है. पुलिस ने मामला दर्ज कर कार चालक की तलाश शुरू कर दी है. पुलिस के मुताबिक स्कूटी सवार क्रिस पुत्र राजेश शारदा जो कि कक्षा 11 वीं का छात्र है घायल हुआ है. उसके साथ स्कूटी पर सवार आदित्य पुत्र कृष्ण कुमार और अभिनंदन पुत्र मानव जैन गंभीर घायल हुए हैं. पुलिस ने आगे बताया कि तीनों ही स्कूटी से सवार होकर झालावाड के होटल में खाना खाने आए थे. फिर खाना खाकर वापस अपने घर झालरापाटन लौट रहे थे. तभी रास्ते में यह हादसा हो गया.
राजस्थान के झालावाड जिले में कार से स्कूटी की टक्कर हो गई. भिड़ंत इतनी तेज थी कि कार भी सामने से बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई और स्कूल दो टुकड़ों में बंट गई. घटना में घायल स्कूटी सवार तीन छात्रों को इलाज के लिए अस्पतालों में एडमिट कराया गया है. वहीं, टक्कर होने के बाद कार चालक मौके से भाग निकला. पुलिस ने दोनों वाहनों को कब्जे में ले लिया है और कार चालक की तलाश कर रही है. दरसअल, शुक्रवार-शनिवार की दरमियाना रात जिले के झालरापाटन स्थित गिन्दोर रोड पर देर रात तेज तेज रफ्तार कार चला रहे युवक ने स्कूटी सवार तीन छात्रों को टक्कर मार दी. हादसा इतना जोरदार था कि स्कूटी सवार तीन छात्र उछल कर दूरी पर जा गिरे और स्कूटी दो टुकड़ों में बंट गई. साथ ही कार भी बुरी तरह से डैमेज हो गई. घटना की जानकारी मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने गंभीर घायल तीनों छात्रों के इलाज के लिए जिला अस्पताल भिजवाया था. क्रिस नाम के छात्र की हालत गंभीर होने के कारण उसे बेहतर इलाज के लिए कोटा रेफर किया गया है. वहीं दोनों घायलों का झालावाड़ के ही अस्पताल में इलाज जारी है. पुलिस का कहना है कि कार चालक मौके से भाग निकाल था. दोनों वाहनों के सड़क से हटवा कर थाने पहुंचाया गया है. पुलिस ने मामला दर्ज कर कार चालक की तलाश शुरू कर दी है. पुलिस के मुताबिक स्कूटी सवार क्रिस पुत्र राजेश शारदा जो कि कक्षा ग्यारह वीं का छात्र है घायल हुआ है. उसके साथ स्कूटी पर सवार आदित्य पुत्र कृष्ण कुमार और अभिनंदन पुत्र मानव जैन गंभीर घायल हुए हैं. पुलिस ने आगे बताया कि तीनों ही स्कूटी से सवार होकर झालावाड के होटल में खाना खाने आए थे. फिर खाना खाकर वापस अपने घर झालरापाटन लौट रहे थे. तभी रास्ते में यह हादसा हो गया.
IPL 2023: मुंबई इंडियंस के खिलाफ चल रहे मैच में राजस्थान रॉयल्स के युवा बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल (Yashasvi Jaiswal) ने शानदार शतक जड़कर सनसनी मचा दी। इतना ही नहीं, इस मैच में सेंचुरी के अलावा भी उन्होंने कई और रिकॉर्ड्स अपने नाम कर लिए हैं। आईपीएल के 1000वें मैच में युवा बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल ने 18वें ओवर में अपना शतक पूरा कर लिया। यशस्वी ने 62 गेंदों पर 124 रनों की तूफानी पारी खेली और इस दौरान 16 चौके और 8 छक्के लगाए। 21 वर्षीय युवा बल्लेबाज ने मुंबई इंडियंस के सभी गेंदबाजों के छक्के छुड़ा दिए। जायसवाल कैश-रिच लीग में शतक लगाने वाले चौथे सबसे युवा बल्लेबाज बन गए हैं। इस लिस्ट में राजस्थान रॉयल्स का यह ओपनर केवल मनीष पांडे, ऋषभ पंत और देवदत्त पडिक्कल से पीछे रह गया है। मनीष पांडे ने 19 साल 253 दिन की उम्र में शतक लगाया था, ऋषभ पंत ने 20 साल 218 दिन और देवदत्त पडिक्कल ने 20 साल 289 दिन की उम्र में शतक लगाकर कीर्तिमान हासिल किया था। यशस्वी के पास एक अनकैप्ड खिलाड़ी के रूप में आईपीएल में सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर बनाने का रिकॉर्ड भी दर्ज हो गया है। जायसवाल टी20 लीग में शतक लगाने वाले पांचवें अनकैप्ड भारतीय बल्लेबाज बन गए हैं। न्यूजीलैंड के दिग्गज बल्लेबाज ब्रेंडन मैकुलम (2008 में 158*) के बाद जायसवाल आईपीएल मैच में सर्वोच्च स्कोर दर्ज करने वाले दूसरे बल्लेबाज बन गए हैं, जहां किसी अन्य टीम के साथी ने 20 से अधिक रन नहीं बनाए। जायसवाल की 62 गेंदों में 124 रनों की शानदार पारी ने आरआर को आईपीएल में एमआई के खिलाफ अपने सबसे अधिक स्कोर तक भी पहुंचाया। जायसवाल ने आईपीएल में एक राजस्थान रॉयल्स बल्लेबाज के रूप में भी सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर दर्ज किया है। भारतीय बल्लेबाज ने टी20 टूर्नामेंट में बड़ी उपलब्धि हासिल करने के लिए जोस बटलर (64 गेंदों में 124 vs SRH) को पीछे छोड़ दिया है।
IPL दो हज़ार तेईस: मुंबई इंडियंस के खिलाफ चल रहे मैच में राजस्थान रॉयल्स के युवा बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल ने शानदार शतक जड़कर सनसनी मचा दी। इतना ही नहीं, इस मैच में सेंचुरी के अलावा भी उन्होंने कई और रिकॉर्ड्स अपने नाम कर लिए हैं। आईपीएल के एक हज़ारवें मैच में युवा बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल ने अट्ठारहवें ओवर में अपना शतक पूरा कर लिया। यशस्वी ने बासठ गेंदों पर एक सौ चौबीस रनों की तूफानी पारी खेली और इस दौरान सोलह चौके और आठ छक्के लगाए। इक्कीस वर्षीय युवा बल्लेबाज ने मुंबई इंडियंस के सभी गेंदबाजों के छक्के छुड़ा दिए। जायसवाल कैश-रिच लीग में शतक लगाने वाले चौथे सबसे युवा बल्लेबाज बन गए हैं। इस लिस्ट में राजस्थान रॉयल्स का यह ओपनर केवल मनीष पांडे, ऋषभ पंत और देवदत्त पडिक्कल से पीछे रह गया है। मनीष पांडे ने उन्नीस साल दो सौ तिरेपन दिन की उम्र में शतक लगाया था, ऋषभ पंत ने बीस साल दो सौ अट्ठारह दिन और देवदत्त पडिक्कल ने बीस साल दो सौ नवासी दिन की उम्र में शतक लगाकर कीर्तिमान हासिल किया था। यशस्वी के पास एक अनकैप्ड खिलाड़ी के रूप में आईपीएल में सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर बनाने का रिकॉर्ड भी दर्ज हो गया है। जायसवाल टीबीस लीटरग में शतक लगाने वाले पांचवें अनकैप्ड भारतीय बल्लेबाज बन गए हैं। न्यूजीलैंड के दिग्गज बल्लेबाज ब्रेंडन मैकुलम के बाद जायसवाल आईपीएल मैच में सर्वोच्च स्कोर दर्ज करने वाले दूसरे बल्लेबाज बन गए हैं, जहां किसी अन्य टीम के साथी ने बीस से अधिक रन नहीं बनाए। जायसवाल की बासठ गेंदों में एक सौ चौबीस रनों की शानदार पारी ने आरआर को आईपीएल में एमआई के खिलाफ अपने सबसे अधिक स्कोर तक भी पहुंचाया। जायसवाल ने आईपीएल में एक राजस्थान रॉयल्स बल्लेबाज के रूप में भी सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर दर्ज किया है। भारतीय बल्लेबाज ने टीबीस टूर्नामेंट में बड़ी उपलब्धि हासिल करने के लिए जोस बटलर को पीछे छोड़ दिया है।
नई दिल्ली : आर्थिक तंगी झेल रहे नॉर्थ एमसीडी को इस साल प्रॉपर्टी टैक्स से अच्छी आय हुई है। नॉर्थ एमसीडी से मिली जानकारी के मुताबिक इस वर्ष प्रॉपर्टी टैक्स कलेक्शन में बकायदा 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा 41 हजार नए प्रॉपर्टी टैक्स पेयर्स ने भी इस साल टैक्स जमा कराया है। नॉर्थ एमसीडी ने आंकड़ा जारी कर बताया है कि इस साल 666 करोड़ रुपये बतौर प्रॉपर्टी टैक्स वसूला है। जोकि पिछले साल की तुलना में 111 करोड़ अधिक है। वहीं, साउथ एमसीडी ने भी 800 करोड़ रुपये का प्रॉपटी टैक्स वसूला है। साउथ एमसीडी ने मुताबिक 800 करोड़ के लक्ष्य रखा गया था जिसे पूरा कर लिया गया है। नॉर्थ एमसीडी अडिश्नल कमिश्नर बीएम मिश्रा ने बताया कि वर्ष 2004 से प्रॉपर्टी टैक्स बकायेदारों के लिए आम माफी योजना शुरू की गई थी। इसके तहत बकाया प्रॉपर्टी टैक्स पर सौ फीसद ब्याज और जुर्माने को माफ किया गया था। इस योजना के तहत निगम 156. 85 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। वहीं पहली बार आम माफी योजना को ऑनलाइन भी उपलब्ध कराया गया था, जिससे घर बैठे लोगों ने दो करोड़ 70 लाख रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स जमा किया है। इसके अलावा सरकारी संपत्तियों से इस वर्ष 107. 59 करोड़ रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स प्राप्त हुआ है। प्रॉपर्टी टैक्स जमा कराने के लिए नॉर्थ एमसीडी एरिया के विभिन्न वार्डों में 900 कैंप लगाए थे। इनकी बकायदा समीक्षा भी की गई और साप्ताहिक बैठकें भी उनके स्तर पर आयोजित की गईं। प्रॉपर्टी टैक्स का भुगतान न करने पर 944 प्रॉपर्टी और 1902 बैंक खाते कुर्क किए गए। यूपिक प्रणाली शुरू की गई थी। जनता के साथ व्यापक सहभागिताएं जागरूकता और शिकायत निवारण के परिणामस्वरूप ही संपत्ति कर की अधिक वसूली हो सकी। इसके अलावा नॉर्थ एमसीडी के ट्रांसफर ड्यूटी में भी इजाफा हुआ है। 2016-17 में ट्रांसफर ड्यूटी से 355 करोड़ रुपये मिले थे। जबकि 2017-18 में निगम को 391. 68 करोड़ रुपये मिले। इस वित्तीय वर्ष में 31 दिसंबर 2018 तक निगम को 508. 70 करोड़ रुपये मिल चुके हैं।
नई दिल्ली : आर्थिक तंगी झेल रहे नॉर्थ एमसीडी को इस साल प्रॉपर्टी टैक्स से अच्छी आय हुई है। नॉर्थ एमसीडी से मिली जानकारी के मुताबिक इस वर्ष प्रॉपर्टी टैक्स कलेक्शन में बकायदा बीस प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा इकतालीस हजार नए प्रॉपर्टी टैक्स पेयर्स ने भी इस साल टैक्स जमा कराया है। नॉर्थ एमसीडी ने आंकड़ा जारी कर बताया है कि इस साल छः सौ छयासठ करोड़ रुपये बतौर प्रॉपर्टी टैक्स वसूला है। जोकि पिछले साल की तुलना में एक सौ ग्यारह करोड़ अधिक है। वहीं, साउथ एमसीडी ने भी आठ सौ करोड़ रुपये का प्रॉपटी टैक्स वसूला है। साउथ एमसीडी ने मुताबिक आठ सौ करोड़ के लक्ष्य रखा गया था जिसे पूरा कर लिया गया है। नॉर्थ एमसीडी अडिश्नल कमिश्नर बीएम मिश्रा ने बताया कि वर्ष दो हज़ार चार से प्रॉपर्टी टैक्स बकायेदारों के लिए आम माफी योजना शुरू की गई थी। इसके तहत बकाया प्रॉपर्टी टैक्स पर सौ फीसद ब्याज और जुर्माने को माफ किया गया था। इस योजना के तहत निगम एक सौ छप्पन. पचासी करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। वहीं पहली बार आम माफी योजना को ऑनलाइन भी उपलब्ध कराया गया था, जिससे घर बैठे लोगों ने दो करोड़ सत्तर लाख रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स जमा किया है। इसके अलावा सरकारी संपत्तियों से इस वर्ष एक सौ सात. उनसठ करोड़ रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स प्राप्त हुआ है। प्रॉपर्टी टैक्स जमा कराने के लिए नॉर्थ एमसीडी एरिया के विभिन्न वार्डों में नौ सौ कैंप लगाए थे। इनकी बकायदा समीक्षा भी की गई और साप्ताहिक बैठकें भी उनके स्तर पर आयोजित की गईं। प्रॉपर्टी टैक्स का भुगतान न करने पर नौ सौ चौंतालीस प्रॉपर्टी और एक हज़ार नौ सौ दो बैंक खाते कुर्क किए गए। यूपिक प्रणाली शुरू की गई थी। जनता के साथ व्यापक सहभागिताएं जागरूकता और शिकायत निवारण के परिणामस्वरूप ही संपत्ति कर की अधिक वसूली हो सकी। इसके अलावा नॉर्थ एमसीडी के ट्रांसफर ड्यूटी में भी इजाफा हुआ है। दो हज़ार सोलह-सत्रह में ट्रांसफर ड्यूटी से तीन सौ पचपन करोड़ रुपये मिले थे। जबकि दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह में निगम को तीन सौ इक्यानवे. अड़सठ करोड़ रुपये मिले। इस वित्तीय वर्ष में इकतीस दिसंबर दो हज़ार अट्ठारह तक निगम को पाँच सौ आठ. सत्तर करोड़ रुपये मिल चुके हैं।
देश के 13 राज्यों में आज (10 मई) मौसम गड़बड़ रहेगा। मौसम विभान ने इन राज्यों में धूल भरी आंधी और तेज हवाएं चलने का अनुमान लगाया है। इंडियन मीट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट (आईएमडी) का कहना है कि गुरुवार को पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम, मेघालय, नागालैंज, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, झारखंड और बिहार में आंधी-तूफान आएगा। वहीं, तमिलनाडु, कर्नाटक के कुछ हिस्सों और केरल में तेज बारिश होगी। उत्तर प्रदेश में बुधवार देर शाम आई आंधी और तूफान में मृतकों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है जबकि 27 लोग घायल हुए हैं। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वह पीड़ितों की हरसंभव मदद करें। मौसम विभाग ने हालांकि 12 से 14 मई तक फिर तूफान आने की चेतावनी जारी की है। उप्र के आगरा क्षेत्र में बुधवार को आई आंधी, बारिश और तूफान में कुल 16 लोगों की मौत होने की पुष्टि राज्य सरकार की ओर से की गई। राज्य सरकार ने बताया कि फिरोजाबाद में दो, मथुरा में तीन, इटावा मे चार, आगरा में दो अलीगढ़ में तीन ओर कानपुर देहात तथा हाथरस में एक-एक शख्स की मौत हुई है। राज्य सरकार के मुताबिक, आंधी-तूफान् में 27 लोग अलग-अलग शहरों में घायल हुए हैं। इस दौरान 37 मवेशियों की मौत हुई है।
देश के तेरह राज्यों में आज मौसम गड़बड़ रहेगा। मौसम विभान ने इन राज्यों में धूल भरी आंधी और तेज हवाएं चलने का अनुमान लगाया है। इंडियन मीट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट का कहना है कि गुरुवार को पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम, मेघालय, नागालैंज, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, झारखंड और बिहार में आंधी-तूफान आएगा। वहीं, तमिलनाडु, कर्नाटक के कुछ हिस्सों और केरल में तेज बारिश होगी। उत्तर प्रदेश में बुधवार देर शाम आई आंधी और तूफान में मृतकों की संख्या बढ़कर सोलह हो गई है जबकि सत्ताईस लोग घायल हुए हैं। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वह पीड़ितों की हरसंभव मदद करें। मौसम विभाग ने हालांकि बारह से चौदह मई तक फिर तूफान आने की चेतावनी जारी की है। उप्र के आगरा क्षेत्र में बुधवार को आई आंधी, बारिश और तूफान में कुल सोलह लोगों की मौत होने की पुष्टि राज्य सरकार की ओर से की गई। राज्य सरकार ने बताया कि फिरोजाबाद में दो, मथुरा में तीन, इटावा मे चार, आगरा में दो अलीगढ़ में तीन ओर कानपुर देहात तथा हाथरस में एक-एक शख्स की मौत हुई है। राज्य सरकार के मुताबिक, आंधी-तूफान् में सत्ताईस लोग अलग-अलग शहरों में घायल हुए हैं। इस दौरान सैंतीस मवेशियों की मौत हुई है।
Budget 2021: करीब 1,261 किलोमीटर लंबे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए अधिग्रहण की अंतिम कड़ी में जल्द ही 250 किलोमीटर के लिए भी टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इस प्रोजेक्ट पर लगभग 1 लाख करोड़ रुपये की लागत आ रही है। Budget 2021 वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में बजट पेश किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह संसद भवन में मौजूद रहे। वहीं लोकसभा में बजट पास हो गया है। बजट में हर वर्ग और हर सेक्टरों का ध्यान रखा गया है। वहीं इस बजट से राष्ट्रीय राजधानी को भी फायदा मिला है। क्योंकि अब किसी भी राज्य से राजधानी में आने के लिए अब सिर्फ 13 घंटे ही लगेंगे। क्योंकि आज के बजट में घोषणा की गई कि करीब 1,261 किलोमीटर लंबे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए अधिग्रहण की अंतिम कड़ी में जल्द ही 250 किलोमीटर के लिए भी टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इस प्रोजेक्ट पर लगभग 1 लाख करोड़ रुपये की लागत आ रही है। दरअसल, 8 लेन के इस एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य इंजीनियरिंग, प्रोक्यूरमेंट और कंस्ट्रक्शन रूट के जरिये किया जा रहा है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के मुताबिक, दिल्ली-एक्सप्रेस-वे 6 राज्यों हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र और दिल्ली से होकर गुजरेगा। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे बनने से जयपुर, कोटा, चितौड़गढ़, इंदौर, उज्जैन, भोपाल, अहमदाबाद और वडोदरा की कनेक्टिविटी आसान हो जाएगी। 1,261 किलोमीटर लंबे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे इस एक्सप्रेस-वे के पूरा होने पर दोनों शहरों के बीच की दूरी 150 किमी कम हो जाएगी और यात्रा का समय भी 24 घंटे से घटकर 13 घंटे रह जाएगा। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे 2023-24 तक बनकर तैयार हो सकता है। क्योंकि जिस रफ्तार से निर्माण कार्य चल रहा है उसी रफ्तार से बिना किसी दिक्कत के चलता रहा तो अपने तय समय पर ये एक्सप्रेसवे बनकर तैयार हो जाएगा। इस एक्सप्रेस-वे के अस्तित्व में आते ही दिल्ली से मुंबई के बीच का सफर सिर्फ 13 घंटे का हो जाएगी। फिलहाल राजधानी जैसी ट्रेन से भी दिल्ली से मुंबई तक का सफर तय करने में 15 घंटे का समय लगता है। ऐसे में लोग सड़क मार्ग से ही 13 घंटे में दिल्ली-मुंबई की यात्रा की जा सकेगी। फिलहाल सड़क मार्ग के जरिये दिल्ली-मुंबई जाने में 24 घंटे का समय लगता है। अब दिल्ली मेट्रो बनाने में लाइट और नियो नाम की दो नई तकनीकियों को इस्तेमाल किया जाएगा। दरअसल, पिछले साल दिसंबर में ही नियो मेट्रो को लॉन्च किया था। केंद्रीय शहरी मंत्रालय के मुताबिक, यह देश के उन शहरों के लिए लाया गया है, जहां पर 20 लाख तक की जनसंख्या है। दरअसल, रबर टायर पर चलने वाली 3 कोच वाली इस मेट्रो की लागत परंपरागत मेट्रो के निर्माण लागत से 40 फीसदी तक कम है। ऐसे में माना जा रहा है कि दिल्ली मेट्रो के चौथे फेज में नियो मेट्रो का इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं, दिल्ली से सटे शहरों मसलन, नोएडा-ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद में मेट्रो विस्तार में नियो मेट्रो का इस्तेमाल किया सकता है।
Budget दो हज़ार इक्कीस: करीब एक,दो सौ इकसठ किलोग्राममीटर लंबे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए अधिग्रहण की अंतिम कड़ी में जल्द ही दो सौ पचास किलोग्राममीटर के लिए भी टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इस प्रोजेक्ट पर लगभग एक लाख करोड़ रुपये की लागत आ रही है। Budget दो हज़ार इक्कीस वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में बजट पेश किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह संसद भवन में मौजूद रहे। वहीं लोकसभा में बजट पास हो गया है। बजट में हर वर्ग और हर सेक्टरों का ध्यान रखा गया है। वहीं इस बजट से राष्ट्रीय राजधानी को भी फायदा मिला है। क्योंकि अब किसी भी राज्य से राजधानी में आने के लिए अब सिर्फ तेरह घंटाटे ही लगेंगे। क्योंकि आज के बजट में घोषणा की गई कि करीब एक,दो सौ इकसठ किलोग्राममीटर लंबे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए अधिग्रहण की अंतिम कड़ी में जल्द ही दो सौ पचास किलोग्राममीटर के लिए भी टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इस प्रोजेक्ट पर लगभग एक लाख करोड़ रुपये की लागत आ रही है। दरअसल, आठ लेन के इस एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य इंजीनियरिंग, प्रोक्यूरमेंट और कंस्ट्रक्शन रूट के जरिये किया जा रहा है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के मुताबिक, दिल्ली-एक्सप्रेस-वे छः राज्यों हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र और दिल्ली से होकर गुजरेगा। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे बनने से जयपुर, कोटा, चितौड़गढ़, इंदौर, उज्जैन, भोपाल, अहमदाबाद और वडोदरा की कनेक्टिविटी आसान हो जाएगी। एक,दो सौ इकसठ किलोग्राममीटर लंबे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे इस एक्सप्रेस-वे के पूरा होने पर दोनों शहरों के बीच की दूरी एक सौ पचास किमी कम हो जाएगी और यात्रा का समय भी चौबीस घंटाटे से घटकर तेरह घंटाटे रह जाएगा। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे दो हज़ार तेईस-चौबीस तक बनकर तैयार हो सकता है। क्योंकि जिस रफ्तार से निर्माण कार्य चल रहा है उसी रफ्तार से बिना किसी दिक्कत के चलता रहा तो अपने तय समय पर ये एक्सप्रेसवे बनकर तैयार हो जाएगा। इस एक्सप्रेस-वे के अस्तित्व में आते ही दिल्ली से मुंबई के बीच का सफर सिर्फ तेरह घंटाटे का हो जाएगी। फिलहाल राजधानी जैसी ट्रेन से भी दिल्ली से मुंबई तक का सफर तय करने में पंद्रह घंटाटे का समय लगता है। ऐसे में लोग सड़क मार्ग से ही तेरह घंटाटे में दिल्ली-मुंबई की यात्रा की जा सकेगी। फिलहाल सड़क मार्ग के जरिये दिल्ली-मुंबई जाने में चौबीस घंटाटे का समय लगता है। अब दिल्ली मेट्रो बनाने में लाइट और नियो नाम की दो नई तकनीकियों को इस्तेमाल किया जाएगा। दरअसल, पिछले साल दिसंबर में ही नियो मेट्रो को लॉन्च किया था। केंद्रीय शहरी मंत्रालय के मुताबिक, यह देश के उन शहरों के लिए लाया गया है, जहां पर बीस लाख तक की जनसंख्या है। दरअसल, रबर टायर पर चलने वाली तीन कोच वाली इस मेट्रो की लागत परंपरागत मेट्रो के निर्माण लागत से चालीस फीसदी तक कम है। ऐसे में माना जा रहा है कि दिल्ली मेट्रो के चौथे फेज में नियो मेट्रो का इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं, दिल्ली से सटे शहरों मसलन, नोएडा-ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद में मेट्रो विस्तार में नियो मेट्रो का इस्तेमाल किया सकता है।
Magic Cube Mission : Free Fire Max में दिवाली के खास अवसर पर खिलाड़ियों को डेवेलपर ने Light Fest सीरीज प्रदान की है। ये सीरीज गेम अंदर 7 अक्टूबर से 22 अक्टूबर तक के लिए मौजूद है। हर दिन गेम के अंदर अलग-अलग इवेंट जोड़े जाते हैं। इन इवेंट में हिस्सा लेकर कस्टम बंडल, लैजेंड्री गन स्किन, पेट्स और अन्य कॉस्मेटिक आइटम मिल रहे हैं। हर दिन इस सीरीज में मैजिक क्यूब मिशन जोड़ा जाता है। इस समय गेम के अंदर 10 मैजिक क्यूब मिशन जोड़ा है और गेमर्स को मुफ्त में 10x क्यूब फ्रेग्मेंट मिल रहा है। इस आर्टिकल में हम मैजिक क्यूब मिशन पर नजर डालने वाले हैं। गरेना के शेड्यूल अनुसार इन-गेम 10 मैजिक क्यूब मिशन गेम के भीतर 23 अक्टूबर 2022 को जोड़ा गया था और ये इवेंट 24 अक्टूबर 2022 तक चलने वाला है। इस इवेंट में भाग लेकर गेमर्स फ्री में क्यूब फ्रेग्मेंट कलेक्ट कर सकते हैं। गेमर्स के पास 10x क्यूब फ्रेग्मेंट कलेक्ट करने का खास मौका है। नीचे मिशन की जानकारी दी गई हैः गेमर्स इवेंट में मौजूद मिशन को पूरा करके 10x क्यूब फ्रेग्मेंट को कलेक्ट कर सकते हैं। गेमर्स इवेंट में जाकर मिशन पूरा करें और आखिरी मिशन से कुल 100x मैजिक क्यूब कलेक्ट करके मैजिक क्यूब बडंल में जा सकते हैं और मुफ्त में ऑउटफिट को प्राप्त कर सकते हैं। Free Fire Max में 10x मैजिक क्यूब को कैसे कलेक्ट करें? गेमर्स यहां पर दी गई डिटेल्स को फॉलो करके इवेंट से मैजिक क्यूब बडंल को आसानी से कलेक्ट कर सकते हैंः स्टेप 1: खिलाड़ियों को सबसे पहले Free Fire Max गेम को चालू करना होगा। उसके बाद में खिलाड़ियों को राइट साइड में कैलेंडर बटन के विकल्प दिख जाएगा। इस बटन पर टच करके अंदर जाए। स्टेप 2: उसके बाद में प्लेयर्स के स्क्रीन पर इवेंट का बटन दिख जाएगा। राइट साइड में Light Fest वाले टैब पर क्लिक करें। स्टेप 3: गेमर्स को लेफ्ट साइड में BOOYAH IN BR वाले बटन पर टच करना होगा। उसके बाद में राइट साइड मौजदू मिशन पूरा हो गया होगा तो क्लैम वाले बटन पर टच करके मैजिक क्यूब को कलेक्ट कर सकते हैं।
Magic Cube Mission : Free Fire Max में दिवाली के खास अवसर पर खिलाड़ियों को डेवेलपर ने Light Fest सीरीज प्रदान की है। ये सीरीज गेम अंदर सात अक्टूबर से बाईस अक्टूबर तक के लिए मौजूद है। हर दिन गेम के अंदर अलग-अलग इवेंट जोड़े जाते हैं। इन इवेंट में हिस्सा लेकर कस्टम बंडल, लैजेंड्री गन स्किन, पेट्स और अन्य कॉस्मेटिक आइटम मिल रहे हैं। हर दिन इस सीरीज में मैजिक क्यूब मिशन जोड़ा जाता है। इस समय गेम के अंदर दस मैजिक क्यूब मिशन जोड़ा है और गेमर्स को मुफ्त में दसx क्यूब फ्रेग्मेंट मिल रहा है। इस आर्टिकल में हम मैजिक क्यूब मिशन पर नजर डालने वाले हैं। गरेना के शेड्यूल अनुसार इन-गेम दस मैजिक क्यूब मिशन गेम के भीतर तेईस अक्टूबर दो हज़ार बाईस को जोड़ा गया था और ये इवेंट चौबीस अक्टूबर दो हज़ार बाईस तक चलने वाला है। इस इवेंट में भाग लेकर गेमर्स फ्री में क्यूब फ्रेग्मेंट कलेक्ट कर सकते हैं। गेमर्स के पास दसx क्यूब फ्रेग्मेंट कलेक्ट करने का खास मौका है। नीचे मिशन की जानकारी दी गई हैः गेमर्स इवेंट में मौजूद मिशन को पूरा करके दसx क्यूब फ्रेग्मेंट को कलेक्ट कर सकते हैं। गेमर्स इवेंट में जाकर मिशन पूरा करें और आखिरी मिशन से कुल एक सौx मैजिक क्यूब कलेक्ट करके मैजिक क्यूब बडंल में जा सकते हैं और मुफ्त में ऑउटफिट को प्राप्त कर सकते हैं। Free Fire Max में दसx मैजिक क्यूब को कैसे कलेक्ट करें? गेमर्स यहां पर दी गई डिटेल्स को फॉलो करके इवेंट से मैजिक क्यूब बडंल को आसानी से कलेक्ट कर सकते हैंः स्टेप एक: खिलाड़ियों को सबसे पहले Free Fire Max गेम को चालू करना होगा। उसके बाद में खिलाड़ियों को राइट साइड में कैलेंडर बटन के विकल्प दिख जाएगा। इस बटन पर टच करके अंदर जाए। स्टेप दो: उसके बाद में प्लेयर्स के स्क्रीन पर इवेंट का बटन दिख जाएगा। राइट साइड में Light Fest वाले टैब पर क्लिक करें। स्टेप तीन: गेमर्स को लेफ्ट साइड में BOOYAH IN BR वाले बटन पर टच करना होगा। उसके बाद में राइट साइड मौजदू मिशन पूरा हो गया होगा तो क्लैम वाले बटन पर टच करके मैजिक क्यूब को कलेक्ट कर सकते हैं।
दस हजार वार्षिक घर बैठे देगे - कम्पनी वालो का यह प्रस्ताव उन्हे बम्बई खीच ले गया । 'हस' और 'जागरण' तो वन्द नहीं करने पड़ेंगे । रोजी-रोटी का जमेला तो मिट जायेगा । फिल्मों के जरिये जनता तक तो पहुंचेंगे । तनी हाय-हाय तो नहीं लगी रहेगी । न्ही उम्मीदो के साथ जुलाई १९३४ के शुरू में त्रेगचद बरवई पहुचे । फिल्म के लिए पहली कहानी उन्होंने ती कौन सी ? सोचो.. 'मिल मजदूर' । उन दिनो बेकारी और भदी सूब फैल रही पी मजदुरी और मिल मालिको मे सघर्ष तेज हो गया था। प्रेमचद फिल्म के जरिने देश के कोने-कोने मे आने विचार फैला देना चाहते थे। सर्वहारा उनकी नमन मे नेपाल पा शरेन्टर हिन्दी कही जानता था साधी । २ न के
दस हजार वार्षिक घर बैठे देगे - कम्पनी वालो का यह प्रस्ताव उन्हे बम्बई खीच ले गया । 'हस' और 'जागरण' तो वन्द नहीं करने पड़ेंगे । रोजी-रोटी का जमेला तो मिट जायेगा । फिल्मों के जरिये जनता तक तो पहुंचेंगे । तनी हाय-हाय तो नहीं लगी रहेगी । न्ही उम्मीदो के साथ जुलाई एक हज़ार नौ सौ चौंतीस के शुरू में त्रेगचद बरवई पहुचे । फिल्म के लिए पहली कहानी उन्होंने ती कौन सी ? सोचो.. 'मिल मजदूर' । उन दिनो बेकारी और भदी सूब फैल रही पी मजदुरी और मिल मालिको मे सघर्ष तेज हो गया था। प्रेमचद फिल्म के जरिने देश के कोने-कोने मे आने विचार फैला देना चाहते थे। सर्वहारा उनकी नमन मे नेपाल पा शरेन्टर हिन्दी कही जानता था साधी । दो न के
इंटरनेट डेस्क। देशवासी बैंकों में अपने दो हजार रुपए के नोट बदलवाने में लगे हुए हैं। लोगों के पास 30 सितंबर तक अपने नोट बदलवाने का मौका होगा। भारतीय रिजर्व बैंक की गाइडलाइन के अनुसार, लोगों के पास बिना किसी दस्तावेज के 2000 रुपए के 10 नोट एक बार में बदलवाने का मौका होगा। अगर आप ज्यादा नोट बैंक में बदलवाना चाहते हैं तो आपको पैन कार्ड का उपयोग करना होगा। आज हम आपको जानकारी देने जा रहे हैं कि कितने नोट जमा करवाने के लिए पैन कार्ड डिटेल्स भी देनी होगी। बैंक खाते में पचास हजार रुपए से अधिक मूल्य के 2000 रुपए के नोट जमा कराने पर बैंक में पैन कार्ड की डिटेल्स देनी होगी। इनकम टैक्स कानून के नियम के अनुसार, 114बी के मुताबिक बैंक खाते या पोस्ट ऑफिस के माध्यम से एक दिन में पचास हजार रुपए से ज्यादा की नकदी जमा करवाने के लिए व्यक्ति को पैन कार्ड की डिटेल देनी होती है। इस हिसाब से 2000 रुपए के 25 या इससे अधिक नोट अपने खाते में में जमा करवाने के लिए पैन कार्ड की डिटेल देनी होगी। Copyright @ 2023 Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.
इंटरनेट डेस्क। देशवासी बैंकों में अपने दो हजार रुपए के नोट बदलवाने में लगे हुए हैं। लोगों के पास तीस सितंबर तक अपने नोट बदलवाने का मौका होगा। भारतीय रिजर्व बैंक की गाइडलाइन के अनुसार, लोगों के पास बिना किसी दस्तावेज के दो हज़ार रुपयापए के दस नोट एक बार में बदलवाने का मौका होगा। अगर आप ज्यादा नोट बैंक में बदलवाना चाहते हैं तो आपको पैन कार्ड का उपयोग करना होगा। आज हम आपको जानकारी देने जा रहे हैं कि कितने नोट जमा करवाने के लिए पैन कार्ड डिटेल्स भी देनी होगी। बैंक खाते में पचास हजार रुपए से अधिक मूल्य के दो हज़ार रुपयापए के नोट जमा कराने पर बैंक में पैन कार्ड की डिटेल्स देनी होगी। इनकम टैक्स कानून के नियम के अनुसार, एक सौ चौदहबी के मुताबिक बैंक खाते या पोस्ट ऑफिस के माध्यम से एक दिन में पचास हजार रुपए से ज्यादा की नकदी जमा करवाने के लिए व्यक्ति को पैन कार्ड की डिटेल देनी होती है। इस हिसाब से दो हज़ार रुपयापए के पच्चीस या इससे अधिक नोट अपने खाते में में जमा करवाने के लिए पैन कार्ड की डिटेल देनी होगी। Copyright @ दो हज़ार तेईस Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.
संवाद न्यूज एजेंसी, मोगा (पंजाब) अभिनेता सोनू सूद ने वीडियो पोस्ट कर मोगा विधायक का आभार जताया। बॉलीवुड कलाकार सोनू सूद की मां के नाम पर मोगा में दशहरा ग्राउंड रोड का नाम किए जाने पर सूद ने मोगा के विधायक डॉ. हरजोत कमल का आभार व्यक्त किया है। एक वीडियो पोस्ट कर सूद ने कहा कि वे मोगा आएंगे और विधायक के साथ सेल्फी लेंगे। पिछले दिनों विधायक डॉ. कमल ने मोगा में दशहरा ग्राउंड रोड का नाम अदाकार सोनू सूद की माता प्रोफेसर सरोज सूद के नाम पर रखा था। इस पर सोनू सूद ने विधायक का दिल से आभार व्यक्त करते वीडियो अपलोड किया है। इसमें उन्होंने कहा है कि विधायक ने सड़क का नाम उनकी माता के नाम पर रखकर उन्हें बहुत बड़ी खुशी दी है। प्रोफेसर सरोज सूद मोगा में शिक्षा के क्षेत्र में एक नामी हस्ती थी, इसलिए उनके नाम पर सड़क का नाम रखकर विधायक और मोगा वासियों ने उनकी माता को एक प्रकार की श्रद्धांजलि भी भेंट की है। सोनू ने कहा है कि उन्हें विदेशों से फोन आ रहे हैं और बधाईयां मिल रहीं है। वह इसका पूरा श्रेय विधायक डा. हरजोत और मोगा वासियों को देते हैं। दरअसल मोगा स्थित अभिनेता सोनू सूद के पैतृक निवास के पास उनकी मां स्वर्गीय प्रो. सरोज सूद के नाम पर रोड का शुभारंभ किया गया था। मोगा विधायक डॉ. हरजोत कमल और अभिनेता सोनू सूद की बहन मालविका सूद सच्चर व बहनोई गौतम सच्चर ने इस सड़क का शुभारंभ किया। विधायक डॉ. हरजोत कमल ने कहा कि प्रो. सरोज सूद खुद में एक संस्था थीं। उनके बहुत से विद्यार्थी उन्हें आज भी प्यार करते हैं और याद करते हैं। प्रो. सरोज सूद ने हमेशा ही अपने विद्यार्थियों को एक अच्छा इंसान बनने का गुर सिखाया था। साथ ही अपने बेटे को भी लोगों की मदद करने की सीख दी थी और आज अपनी मां के आशीर्वाद से सोनू सूद शोहरत की ऊंचाइयों पर हैं। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
संवाद न्यूज एजेंसी, मोगा अभिनेता सोनू सूद ने वीडियो पोस्ट कर मोगा विधायक का आभार जताया। बॉलीवुड कलाकार सोनू सूद की मां के नाम पर मोगा में दशहरा ग्राउंड रोड का नाम किए जाने पर सूद ने मोगा के विधायक डॉ. हरजोत कमल का आभार व्यक्त किया है। एक वीडियो पोस्ट कर सूद ने कहा कि वे मोगा आएंगे और विधायक के साथ सेल्फी लेंगे। पिछले दिनों विधायक डॉ. कमल ने मोगा में दशहरा ग्राउंड रोड का नाम अदाकार सोनू सूद की माता प्रोफेसर सरोज सूद के नाम पर रखा था। इस पर सोनू सूद ने विधायक का दिल से आभार व्यक्त करते वीडियो अपलोड किया है। इसमें उन्होंने कहा है कि विधायक ने सड़क का नाम उनकी माता के नाम पर रखकर उन्हें बहुत बड़ी खुशी दी है। प्रोफेसर सरोज सूद मोगा में शिक्षा के क्षेत्र में एक नामी हस्ती थी, इसलिए उनके नाम पर सड़क का नाम रखकर विधायक और मोगा वासियों ने उनकी माता को एक प्रकार की श्रद्धांजलि भी भेंट की है। सोनू ने कहा है कि उन्हें विदेशों से फोन आ रहे हैं और बधाईयां मिल रहीं है। वह इसका पूरा श्रेय विधायक डा. हरजोत और मोगा वासियों को देते हैं। दरअसल मोगा स्थित अभिनेता सोनू सूद के पैतृक निवास के पास उनकी मां स्वर्गीय प्रो. सरोज सूद के नाम पर रोड का शुभारंभ किया गया था। मोगा विधायक डॉ. हरजोत कमल और अभिनेता सोनू सूद की बहन मालविका सूद सच्चर व बहनोई गौतम सच्चर ने इस सड़क का शुभारंभ किया। विधायक डॉ. हरजोत कमल ने कहा कि प्रो. सरोज सूद खुद में एक संस्था थीं। उनके बहुत से विद्यार्थी उन्हें आज भी प्यार करते हैं और याद करते हैं। प्रो. सरोज सूद ने हमेशा ही अपने विद्यार्थियों को एक अच्छा इंसान बनने का गुर सिखाया था। साथ ही अपने बेटे को भी लोगों की मदद करने की सीख दी थी और आज अपनी मां के आशीर्वाद से सोनू सूद शोहरत की ऊंचाइयों पर हैं। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
हिंदुस्तान की रविवार को ऑस्ट्रेलिया के विरूद्ध तीसरे व अंतिम टी20 मैच में वास्तविक अग्निपरीक्षा होगी. बता दें कि यह मुकाबला रोमांचक होने की उम्मीद है क्योंकि जहां हिंदुस्तान को सीरीज बराबर रखने के लिए यह मैच जीतना महत्वपूर्ण हैं, वहीं ऑस्ट्रेलिया सीरीज पर कब्जे के लिए इस मैच को जीतना चाहेगा. यहां बता दें कि ऑस्ट्रेलिया ने ब्रिस्बेन में वर्षा से प्रभावित पहला टी20 मैच 4 रनों से जीतकर सीरीज में बढ़त बनाई थी. वहीं इसके बाद मेलबर्न में दूसरे मैच में इंडियन गेंदबाजों ने जोरदार प्रदर्शन किया था, लेकिन बारिश ने उसकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया था. विराट कोहली की टीम को सीरीज को बराबर करने के लिए यह मैच जीतना ही होगा. अतिथि टीम इस मैच के लिए युजवेंद्र चहल को प्लेइंग इलेवन में शामिल करना चाहेगी लेकिन इसके लिए उसे खलील अहमद को बाहर बिठाना होगा. गौरतलब है कि आॅस्ट्रेलिया ने इस मैच की गंभीरता को देखते हुए अनुभवी मिचेल स्टार्क को चोटिल बिली स्टेनलेक की स्थान टीम में शामिल किया हैं. ऑस्ट्रेलिया ने दूसरे मैच में चोटिल स्टेनलेक की स्थान नाथन कोल्टर नाइल को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया था. मेजबान टीम द्वारा तीसरे मैच में कोल्टर नाइल की स्थान स्टार्क को शामिल किया जा सकता हैं. वैसे स्टार्क ने अपने घर में पिछला इंटरनेशनल टी20 मैच फरवरी 2014 में खेला था. हिंदुस्तान का टी-20 में शानदार अभियान जुलाई 2017 के बाद से चला आ रहा है. इसके बाद से उसने जो 27 टी20 अंतर्राष्ट्रीय मैच खेले उनमें से 20 में उसे जीत मिली. यही नहीं अगस्त 2017 से हिंदुस्तान लगातार नौ टी20 श्रृंखलाओं में अजेय रहा है. इनमें ऑस्ट्रेलिया के विरूद्ध अक्टूबर 2017 में दो मैचों की ड्रा श्रृंखला भी शामिल है. टीमेंः रोहित शर्मा, शिखर धवन, विराट कोहली कप्तान, केएल राहुल, रिषभ पंत, दिनेश कार्तिक, कृणाल पांड्या, भुवनेश्वर कुमार, कुलदीप यादव, जसप्रीत बुमराह, खलील अहमद/युजवेंद्र चहल. ऑस्ट्रेलिया : एरोन फिंच कप्तान, डार्सी शॉर्ट, क्रिस लिन, ग्लेन मैक्सवेल, मार्कस स्टोइनिस, बेन मैक्डरमोट, एलेक्स कैरी, नाथन कोल्टर-नाइल/मिचेल स्टार्क, एंड्रयू टाई, एडम जाम्पा, जेसन बेहरेनड्रॉर्फ.
हिंदुस्तान की रविवार को ऑस्ट्रेलिया के विरूद्ध तीसरे व अंतिम टीबीस मैच में वास्तविक अग्निपरीक्षा होगी. बता दें कि यह मुकाबला रोमांचक होने की उम्मीद है क्योंकि जहां हिंदुस्तान को सीरीज बराबर रखने के लिए यह मैच जीतना महत्वपूर्ण हैं, वहीं ऑस्ट्रेलिया सीरीज पर कब्जे के लिए इस मैच को जीतना चाहेगा. यहां बता दें कि ऑस्ट्रेलिया ने ब्रिस्बेन में वर्षा से प्रभावित पहला टीबीस मैच चार रनों से जीतकर सीरीज में बढ़त बनाई थी. वहीं इसके बाद मेलबर्न में दूसरे मैच में इंडियन गेंदबाजों ने जोरदार प्रदर्शन किया था, लेकिन बारिश ने उसकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया था. विराट कोहली की टीम को सीरीज को बराबर करने के लिए यह मैच जीतना ही होगा. अतिथि टीम इस मैच के लिए युजवेंद्र चहल को प्लेइंग इलेवन में शामिल करना चाहेगी लेकिन इसके लिए उसे खलील अहमद को बाहर बिठाना होगा. गौरतलब है कि आॅस्ट्रेलिया ने इस मैच की गंभीरता को देखते हुए अनुभवी मिचेल स्टार्क को चोटिल बिली स्टेनलेक की स्थान टीम में शामिल किया हैं. ऑस्ट्रेलिया ने दूसरे मैच में चोटिल स्टेनलेक की स्थान नाथन कोल्टर नाइल को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया था. मेजबान टीम द्वारा तीसरे मैच में कोल्टर नाइल की स्थान स्टार्क को शामिल किया जा सकता हैं. वैसे स्टार्क ने अपने घर में पिछला इंटरनेशनल टीबीस मैच फरवरी दो हज़ार चौदह में खेला था. हिंदुस्तान का टी-बीस में शानदार अभियान जुलाई दो हज़ार सत्रह के बाद से चला आ रहा है. इसके बाद से उसने जो सत्ताईस टीबीस अंतर्राष्ट्रीय मैच खेले उनमें से बीस में उसे जीत मिली. यही नहीं अगस्त दो हज़ार सत्रह से हिंदुस्तान लगातार नौ टीबीस श्रृंखलाओं में अजेय रहा है. इनमें ऑस्ट्रेलिया के विरूद्ध अक्टूबर दो हज़ार सत्रह में दो मैचों की ड्रा श्रृंखला भी शामिल है. टीमेंः रोहित शर्मा, शिखर धवन, विराट कोहली कप्तान, केएल राहुल, रिषभ पंत, दिनेश कार्तिक, कृणाल पांड्या, भुवनेश्वर कुमार, कुलदीप यादव, जसप्रीत बुमराह, खलील अहमद/युजवेंद्र चहल. ऑस्ट्रेलिया : एरोन फिंच कप्तान, डार्सी शॉर्ट, क्रिस लिन, ग्लेन मैक्सवेल, मार्कस स्टोइनिस, बेन मैक्डरमोट, एलेक्स कैरी, नाथन कोल्टर-नाइल/मिचेल स्टार्क, एंड्रयू टाई, एडम जाम्पा, जेसन बेहरेनड्रॉर्फ.
MP Election 2023 एक BJP नेता का कहना है कि इस चुनाव को कांग्रेस और राहुल गांधी धर्म और राजनीति के आधार पर लड़वाना चाहते हैं जो हम होने नहीं देंगे। भारतीय जनता पार्टी सिर्फ और सिर्फ विकास और सुशासन के मुद्दे पर चुनाव लड़ेगी। धनंजय प्रताप सिंह, भोपालः 21वीं सदी के मध्य प्रदेश में अब तक चार विधानसभा चुनाव हुए। तीन में कांग्रेस हारी, तो चौथे में अल्पमत की कांग्रेस सरकार बनी। अब पांचवां चुनाव सामने है लेकिन कोई लहर या मुद्दा दिखाई नहीं दे रहा है। 2003 के चुनाव में सड़क, पानी, बिजली और दलित एजेंडा जैसे मुद्दों पर जनता ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार को उखाड़ फेंका था। 2008 के चुनाव में कांग्रेस गुटबाजी के चलते हारी। 2013 में कांग्रेस नेतृत्व वाली केंद्र की तत्कालीन यूपीए सरकार के सत्ता विरोधी रुझान और देश में मोदी लहर के चलते कांग्रेस को प्रदेश की सत्ता से बाहर रहना पड़ा। 2018 में तस्वीर बदली और भाजपा को सत्ता विरोधी रुझान व कांग्रेस के किसान कर्जमाफी के नारे ने चुनाव हरा दिया। 2023 के विधानसभा चुनाव की तस्वीर पिछले चार चुनावों से अलग रहने की संभावना है। इस बार कोई लहर या बिजली, सड़क, पानी जैसे मुद्दे नहीं हैं, जो चुनावी तस्वीर बन रही है उसमें कमल नाथ के 15 महीने बनाम शिवराज के 18 साल पर ही मतदाताओं की मुहर लगेगी। 2003 में जिन मुद्दों पर कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा, सरकार बदलने वाले वे सारे मुद्दे खत्म हो गए हैं। उन दिनों की तुलना में चमचमाते राष्ट्रीय राजमार्ग के साथ प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम हुआ है। सिंचाई क्षमता सात से बढ़कर 45 लाख हेक्टेयर हो गई। बिजली 24 घंटे मिल रही है। जलजीवन मिशन से पेयजल संकट में कमी आई है। लाड़ली लक्ष्मी, लाड़ली बहना, संबल जैसी सामाजिक परिवर्तन की योजनाएं लोगों के जीवनस्तर में बदलाव ला रही हैं। भाजपा के लिए 2008 का चुनाव बेहद चुनौतीपूर्ण था। शिवराज सिंह चौहान की लोकप्रियता दांव पर थी, उमा भारती की भारतीय जनशक्ति पार्टी भी मैदान में थी। कांग्रेस की हार का कारण गुटबाजी बनी। 2013 के चुनाव में कांग्रेस को अपनी ही यूपीए गठबंधन की केंद्र सरकार की एंटी इनकंबेंसी का प्रदेश में सामना करना पड़ा। देश में मोदी लहर थी। पदोन्नति में आरक्षण और एससी-एसटी एट्रोसिटी एक्ट का मुद्दा गरमाया हुआ था। यही वजह रही कि भाजपा 2018 के चुनाव में बहुमत नहीं ला पाई थी। इस चुनाव को कांग्रेस और राहुल गांधी धर्म और राजनीति के आधार पर लड़वाना चाहते हैं, जो हम होने नहीं देंगे। भाजपा सरकार के 18 वर्ष के कार्यकाल में जो विकास हुआ है, भारतीय जनता पार्टी सिर्फ और सिर्फ उसी विकास एवं सुशासन के मुद्दे पर चुनाव लड़ेगी। हम जीतेंगे।
MP Election दो हज़ार तेईस एक BJP नेता का कहना है कि इस चुनाव को कांग्रेस और राहुल गांधी धर्म और राजनीति के आधार पर लड़वाना चाहते हैं जो हम होने नहीं देंगे। भारतीय जनता पार्टी सिर्फ और सिर्फ विकास और सुशासन के मुद्दे पर चुनाव लड़ेगी। धनंजय प्रताप सिंह, भोपालः इक्कीसवीं सदी के मध्य प्रदेश में अब तक चार विधानसभा चुनाव हुए। तीन में कांग्रेस हारी, तो चौथे में अल्पमत की कांग्रेस सरकार बनी। अब पांचवां चुनाव सामने है लेकिन कोई लहर या मुद्दा दिखाई नहीं दे रहा है। दो हज़ार तीन के चुनाव में सड़क, पानी, बिजली और दलित एजेंडा जैसे मुद्दों पर जनता ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार को उखाड़ फेंका था। दो हज़ार आठ के चुनाव में कांग्रेस गुटबाजी के चलते हारी। दो हज़ार तेरह में कांग्रेस नेतृत्व वाली केंद्र की तत्कालीन यूपीए सरकार के सत्ता विरोधी रुझान और देश में मोदी लहर के चलते कांग्रेस को प्रदेश की सत्ता से बाहर रहना पड़ा। दो हज़ार अट्ठारह में तस्वीर बदली और भाजपा को सत्ता विरोधी रुझान व कांग्रेस के किसान कर्जमाफी के नारे ने चुनाव हरा दिया। दो हज़ार तेईस के विधानसभा चुनाव की तस्वीर पिछले चार चुनावों से अलग रहने की संभावना है। इस बार कोई लहर या बिजली, सड़क, पानी जैसे मुद्दे नहीं हैं, जो चुनावी तस्वीर बन रही है उसमें कमल नाथ के पंद्रह महीने बनाम शिवराज के अट्ठारह साल पर ही मतदाताओं की मुहर लगेगी। दो हज़ार तीन में जिन मुद्दों पर कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा, सरकार बदलने वाले वे सारे मुद्दे खत्म हो गए हैं। उन दिनों की तुलना में चमचमाते राष्ट्रीय राजमार्ग के साथ प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम हुआ है। सिंचाई क्षमता सात से बढ़कर पैंतालीस लाख हेक्टेयर हो गई। बिजली चौबीस घंटाटे मिल रही है। जलजीवन मिशन से पेयजल संकट में कमी आई है। लाड़ली लक्ष्मी, लाड़ली बहना, संबल जैसी सामाजिक परिवर्तन की योजनाएं लोगों के जीवनस्तर में बदलाव ला रही हैं। भाजपा के लिए दो हज़ार आठ का चुनाव बेहद चुनौतीपूर्ण था। शिवराज सिंह चौहान की लोकप्रियता दांव पर थी, उमा भारती की भारतीय जनशक्ति पार्टी भी मैदान में थी। कांग्रेस की हार का कारण गुटबाजी बनी। दो हज़ार तेरह के चुनाव में कांग्रेस को अपनी ही यूपीए गठबंधन की केंद्र सरकार की एंटी इनकंबेंसी का प्रदेश में सामना करना पड़ा। देश में मोदी लहर थी। पदोन्नति में आरक्षण और एससी-एसटी एट्रोसिटी एक्ट का मुद्दा गरमाया हुआ था। यही वजह रही कि भाजपा दो हज़ार अट्ठारह के चुनाव में बहुमत नहीं ला पाई थी। इस चुनाव को कांग्रेस और राहुल गांधी धर्म और राजनीति के आधार पर लड़वाना चाहते हैं, जो हम होने नहीं देंगे। भाजपा सरकार के अट्ठारह वर्ष के कार्यकाल में जो विकास हुआ है, भारतीय जनता पार्टी सिर्फ और सिर्फ उसी विकास एवं सुशासन के मुद्दे पर चुनाव लड़ेगी। हम जीतेंगे।
समाजसेवी विशाल पाठक ने बड़वाह की एक और शासकीय शाला को गोद लेने लिया है। न्यायालय परिसर के समीप स्थित शासकीय प्राथमिक माध्यमिक शाला क्रमांक 3 जिसे कोर्ट वाली स्कूल भी कहा जाता है। इसके जीर्णोद्धार के लिए समाजसेवी पाठक आगे आए है। निजी स्कूल की तर्ज पर इस स्कूल में भी नवीन निर्माण के साथ इसे शिक्षा के लिए सर्वसुविधा युक्त बनाया जाएगा। ताकि सरकारी शाला में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को निजी शाला में पढ़ने का आभास हो। बुधवार शाम करीब 6 बजे इस शाला के जीर्णोद्धार का भूमिपूजन हुआ। इस दौरान समाजसेवी पाठक और उनके पिता अशोक पाठक समेत पूर्व सांसद कृष्णमुरारी मोघे, जितेंद्र आर्य, लादूराम साहू, वरिष्ठ अभिभाषक जीएस गावशिंदे, महिला मोर्चा नगर मंडल अध्यक्ष विमला चौधरी मंचासीन रहे। इस दौरान पाठक ने कहा कि शिक्षा से ही राष्ट्र का निर्माण होता है। इसलिए यह प्रयास कर रहे है कि शिक्षा के क्षेत्र में कुछ काम कर सके। बड़वाह में तीन स्कूल गोद लिए है। टावरबेड़ी की ईजीएस शाला का पूर्णतःनवीनीकरण कर उसे निजी स्कूल की भांति सर्वसुविधा युक्त सज्जित कर चुके है। आज दूसरा स्कूल का भूमिपूजन करने के लिए सबके साथ उपस्थित हुए है। लेकिन जरूरी नहीं की इन्फ्रास्ट्रक्चर से शिक्षा अच्छी हो। इसके बाद यह दायित्व शिक्षकों का रहेगा। जो अपनी बेहतर शिक्षा के माध्यम से छात्रों के भविष्य का निर्माण करे। शाम करीब 7 बजे उपस्थित अतिथियों ने भूमिपूजन किया। इस दौरान कुदाली चलाकर कार्य का शुभारंभ किया। इस दौरान नगर मंडल अध्यक्ष चन्द्रपाल सिंह तोमर, जसबीर भाटिया, सन खंडेलवाल, पार्षद रजनी भंडारी, रवि एरन, संजय मुथा, प्रभात उपाध्याय, राजेश पाल उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. परेश विजयवर्गीय ने किया। पूर्व सांसद कृष्णमुरारी मोघे ने कहा कि पैसे तो सरकार लगा रही है। स्कूलों में इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलेप करने के लिए सरकार प्रयास कर रही है। लेकिन सवाल पैसा लगाने का नहीं भावना का होता है। गांव में अच्छे स्कूल बनाए जा रहे है। लेकिन सरकारी काम असरकारी नहीं होता है। जब तक उसमे समाज की भागीदारी न हो। इस दौरान सुरेंद्र पंडया ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में बहुत कार्य करने की आवश्यकता है। आज के समय में शिक्षा बहुत कठिन हो गई है। मोघे ऐसी प्रेरणा हमें भी दे, जैसी उन्होंने विशाल पाठक को दी। ताकि हम अच्छे कार्य कर सके। समाजसेवी एवं उद्योगपति विशाल पाठक मूलतः बड़वाह के समीप ग्राम सिरलाय के निवासी होकर वर्तमान में इंदौर के रहते है। अपने पिता अशोक पाठक की प्रेरणा से उन्होंने टावरबेड़ी की शासकीय शाला की कायाकल्प का संकल्प जनवरी 2023 में लिया था। मात्र तीन महीने में यह संकल्प पूर्ण भी हो गया। करीब 18 लाख की मरम्मत, रंगरोगन, फर्नीचर, झूले, टीवी, उद्यान से शाला की सूरत अब बदल गई है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
समाजसेवी विशाल पाठक ने बड़वाह की एक और शासकीय शाला को गोद लेने लिया है। न्यायालय परिसर के समीप स्थित शासकीय प्राथमिक माध्यमिक शाला क्रमांक तीन जिसे कोर्ट वाली स्कूल भी कहा जाता है। इसके जीर्णोद्धार के लिए समाजसेवी पाठक आगे आए है। निजी स्कूल की तर्ज पर इस स्कूल में भी नवीन निर्माण के साथ इसे शिक्षा के लिए सर्वसुविधा युक्त बनाया जाएगा। ताकि सरकारी शाला में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को निजी शाला में पढ़ने का आभास हो। बुधवार शाम करीब छः बजे इस शाला के जीर्णोद्धार का भूमिपूजन हुआ। इस दौरान समाजसेवी पाठक और उनके पिता अशोक पाठक समेत पूर्व सांसद कृष्णमुरारी मोघे, जितेंद्र आर्य, लादूराम साहू, वरिष्ठ अभिभाषक जीएस गावशिंदे, महिला मोर्चा नगर मंडल अध्यक्ष विमला चौधरी मंचासीन रहे। इस दौरान पाठक ने कहा कि शिक्षा से ही राष्ट्र का निर्माण होता है। इसलिए यह प्रयास कर रहे है कि शिक्षा के क्षेत्र में कुछ काम कर सके। बड़वाह में तीन स्कूल गोद लिए है। टावरबेड़ी की ईजीएस शाला का पूर्णतःनवीनीकरण कर उसे निजी स्कूल की भांति सर्वसुविधा युक्त सज्जित कर चुके है। आज दूसरा स्कूल का भूमिपूजन करने के लिए सबके साथ उपस्थित हुए है। लेकिन जरूरी नहीं की इन्फ्रास्ट्रक्चर से शिक्षा अच्छी हो। इसके बाद यह दायित्व शिक्षकों का रहेगा। जो अपनी बेहतर शिक्षा के माध्यम से छात्रों के भविष्य का निर्माण करे। शाम करीब सात बजे उपस्थित अतिथियों ने भूमिपूजन किया। इस दौरान कुदाली चलाकर कार्य का शुभारंभ किया। इस दौरान नगर मंडल अध्यक्ष चन्द्रपाल सिंह तोमर, जसबीर भाटिया, सन खंडेलवाल, पार्षद रजनी भंडारी, रवि एरन, संजय मुथा, प्रभात उपाध्याय, राजेश पाल उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. परेश विजयवर्गीय ने किया। पूर्व सांसद कृष्णमुरारी मोघे ने कहा कि पैसे तो सरकार लगा रही है। स्कूलों में इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलेप करने के लिए सरकार प्रयास कर रही है। लेकिन सवाल पैसा लगाने का नहीं भावना का होता है। गांव में अच्छे स्कूल बनाए जा रहे है। लेकिन सरकारी काम असरकारी नहीं होता है। जब तक उसमे समाज की भागीदारी न हो। इस दौरान सुरेंद्र पंडया ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में बहुत कार्य करने की आवश्यकता है। आज के समय में शिक्षा बहुत कठिन हो गई है। मोघे ऐसी प्रेरणा हमें भी दे, जैसी उन्होंने विशाल पाठक को दी। ताकि हम अच्छे कार्य कर सके। समाजसेवी एवं उद्योगपति विशाल पाठक मूलतः बड़वाह के समीप ग्राम सिरलाय के निवासी होकर वर्तमान में इंदौर के रहते है। अपने पिता अशोक पाठक की प्रेरणा से उन्होंने टावरबेड़ी की शासकीय शाला की कायाकल्प का संकल्प जनवरी दो हज़ार तेईस में लिया था। मात्र तीन महीने में यह संकल्प पूर्ण भी हो गया। करीब अट्ठारह लाख की मरम्मत, रंगरोगन, फर्नीचर, झूले, टीवी, उद्यान से शाला की सूरत अब बदल गई है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
• सप्तम उस्मा अब विचार यह करना है कि यह किसे है? जब किसी पुरुप को सुख प्राप्त हो और उसके सुखको देख कर इसे सम्पाप हो तथा यह उस सुखका नाश चाहे, सब इसी का नाम ईर्ष्या है। यह बड़ा ही दूषित स्वभाव है, क्योंकि इससे भगवान् की माझा का विरोध होता है। और यह बड़ी मूर्खता की बात है कि अपने को कोई काम न होनेपर भी दूसरे की हानि चाहे । यह तो हृदय की मलिनता का ही सक्षम है। किन्तु पवितुम्हें किसी का सुख देखकर सन्ताप तो न हो, केवल वैसा होने की इच्छा ही हो तो इसे अमिषापा कहते हैं। यह अमिलापा पदि धर्मकार्यों में दो दो निसन्दह सुखका कारण है और यदि भोगों के निमिध हो तो यह भी अशुभ ही है। इस विषय में महापुरुप ने कहा है कि जिज्ञासु को ईर्ष्या करनी उचित नहीं, किन्तु ऐसी अवस्था में यह भी अच्छी है जब किसी साविकी पुरुष को शुभ कर्मों में प्रवृत्त होते देखे अवषा किसी में विशेष समारता का माय दिखायी दे और मन में ऐसी इच्छा हो कि किसी प्रकार में भी पैसा ही हो बाऊँ। ऐसी स्थिति में यदि वह पुरुप निर्धन भी हो तो भी अपनी साविकीमा के कारण मनवान् की माता का फर्म माप्त कर लेता है। इसी प्रकार यदि कोई धनवान् पुरुष अपने मन के द्वारा तरह-तरह के भोग भोगता हो और उसे देखकर किसी अनहीन व्यक्ति की यह इच्छा हो कि यदि मेरे पास मन होता हो में भी इसी प्रकार भोग मोगता, तच ऐसा विचार करनेपर मी एसी के समान पाप का भागी होता है। वात्पर्य यह है कि किसी की सम्पधि और सुख को देखकर ही उससे म्लानि करना उचित नहीं। परन्तु यदि कोई अधर्मी राया अवमा दुराचारी पनिक हो तो उसके मोगमनित सुख में गोपटष्टि होना उचित ही है, क्योंकि ससकी सामर्थ्य का नाश होने से उसके पार्यो का भी अन्त हो खाणमा । इसकी पहचान इस प्रकार हो सकती है कि जब वह
• सप्तम उस्मा अब विचार यह करना है कि यह किसे है? जब किसी पुरुप को सुख प्राप्त हो और उसके सुखको देख कर इसे सम्पाप हो तथा यह उस सुखका नाश चाहे, सब इसी का नाम ईर्ष्या है। यह बड़ा ही दूषित स्वभाव है, क्योंकि इससे भगवान् की माझा का विरोध होता है। और यह बड़ी मूर्खता की बात है कि अपने को कोई काम न होनेपर भी दूसरे की हानि चाहे । यह तो हृदय की मलिनता का ही सक्षम है। किन्तु पवितुम्हें किसी का सुख देखकर सन्ताप तो न हो, केवल वैसा होने की इच्छा ही हो तो इसे अमिषापा कहते हैं। यह अमिलापा पदि धर्मकार्यों में दो दो निसन्दह सुखका कारण है और यदि भोगों के निमिध हो तो यह भी अशुभ ही है। इस विषय में महापुरुप ने कहा है कि जिज्ञासु को ईर्ष्या करनी उचित नहीं, किन्तु ऐसी अवस्था में यह भी अच्छी है जब किसी साविकी पुरुष को शुभ कर्मों में प्रवृत्त होते देखे अवषा किसी में विशेष समारता का माय दिखायी दे और मन में ऐसी इच्छा हो कि किसी प्रकार में भी पैसा ही हो बाऊँ। ऐसी स्थिति में यदि वह पुरुप निर्धन भी हो तो भी अपनी साविकीमा के कारण मनवान् की माता का फर्म माप्त कर लेता है। इसी प्रकार यदि कोई धनवान् पुरुष अपने मन के द्वारा तरह-तरह के भोग भोगता हो और उसे देखकर किसी अनहीन व्यक्ति की यह इच्छा हो कि यदि मेरे पास मन होता हो में भी इसी प्रकार भोग मोगता, तच ऐसा विचार करनेपर मी एसी के समान पाप का भागी होता है। वात्पर्य यह है कि किसी की सम्पधि और सुख को देखकर ही उससे म्लानि करना उचित नहीं। परन्तु यदि कोई अधर्मी राया अवमा दुराचारी पनिक हो तो उसके मोगमनित सुख में गोपटष्टि होना उचित ही है, क्योंकि ससकी सामर्थ्य का नाश होने से उसके पार्यो का भी अन्त हो खाणमा । इसकी पहचान इस प्रकार हो सकती है कि जब वह
अभिजीत बिचुकले हरदम कुछ न कुछ ऐसा करते रहते हैं जिससे कि बिग बॉस के घर का माहौल खराब हो जाता है. शो के होस्ट सलमान खान इस वीकेंड के वार में सबकी क्लास लगाते हुए दिखाई देने वाले हैं. टीवी रियलिटी चर्चित शो बिग बॉस 15 का ये सीजन इतने वीकेंड्स के बाद भी सुर्खियों में बना हुआ है. बिग बॉस 15 ऐसे तो इसमें बनने वाले नए लव कपल्स के लिए मशहूर है लेकिन शो में विवादित माहौल भी अक्सर देखने को मिल ही जाता है. ऐसा ही एक माहौल बना अभिजीत बिचकुले (Abhijeet Bichukale) और देवोलीना भट्टाचार्य (Devoleena Bhattacharjee) को लेकर जब अभिजीत ने Devoleena से बिग बॉस 15 के सेट पर उनसे किस मांगा. इस सीजन किसी ने भी किसी भी टास्क को गंभीरता से नहीं लिया और हर टास्क को रद्द करा दिया है. घर के सदस्यों की इस हरकत से परेशान होकर शो के होस्ट सलमान खान इस वीकेंड के वार में सबकी क्लास लगाते हुए दिखाई देने वाले हैं. खास तौर से अभिजीत बिचकुले की क्लास सलमान खान लेते हुए दिखाई देने वाले हैं. अभिजीत बिचुकले हरदम कुछ न कुछ ऐसा करते रहते हैं जिससे कि बिग बॉस के घर का माहौल खराब हो जाता है. कल तो उन्होंने हद भी पार कर दी. आपको बता दें बिग बॉस 15 के हाल ही में बीते नवीनतम एपिसोड में अभिजीत ने देवोलीना के साथ बातचीत करते हुए उसके साथ छेड़खानी की थी. जैसा कि उन्होंने मौसम के बारे में बात की, पूर्व ने उसे पश्चिमी कपड़े पहनने के लिए कहा और साथ ही शाहरुख खान के लोकप्रिय दृश्य का अभिनय भी कर के भी दिखाया. सोशल मीडिया पर दिखाए गए प्रोमो में सलमान बिग बॉस कंटेस्टेंट्स से कहते हैं कि टास्क रद्द कराने में सभी कंटेस्टेंट्स ने PhD. कर ली है. सभी कंटेस्टेंट्स किसी न किसी तरीके से टास्क को रद्द करने में लगे रहते हैं. अभिजीत बिचुकले हरदम कुछ न कुछ ऐसा करते रहते हैं जिससे कि बिग बॉस के घर का माहौल खराब हो जाता है. शो के होस्ट सलमान खान इस वीकेंड के वार में सबकी क्लास लगाते हुए दिखाई देने वाले हैं.
अभिजीत बिचुकले हरदम कुछ न कुछ ऐसा करते रहते हैं जिससे कि बिग बॉस के घर का माहौल खराब हो जाता है. शो के होस्ट सलमान खान इस वीकेंड के वार में सबकी क्लास लगाते हुए दिखाई देने वाले हैं. टीवी रियलिटी चर्चित शो बिग बॉस पंद्रह का ये सीजन इतने वीकेंड्स के बाद भी सुर्खियों में बना हुआ है. बिग बॉस पंद्रह ऐसे तो इसमें बनने वाले नए लव कपल्स के लिए मशहूर है लेकिन शो में विवादित माहौल भी अक्सर देखने को मिल ही जाता है. ऐसा ही एक माहौल बना अभिजीत बिचकुले और देवोलीना भट्टाचार्य को लेकर जब अभिजीत ने Devoleena से बिग बॉस पंद्रह के सेट पर उनसे किस मांगा. इस सीजन किसी ने भी किसी भी टास्क को गंभीरता से नहीं लिया और हर टास्क को रद्द करा दिया है. घर के सदस्यों की इस हरकत से परेशान होकर शो के होस्ट सलमान खान इस वीकेंड के वार में सबकी क्लास लगाते हुए दिखाई देने वाले हैं. खास तौर से अभिजीत बिचकुले की क्लास सलमान खान लेते हुए दिखाई देने वाले हैं. अभिजीत बिचुकले हरदम कुछ न कुछ ऐसा करते रहते हैं जिससे कि बिग बॉस के घर का माहौल खराब हो जाता है. कल तो उन्होंने हद भी पार कर दी. आपको बता दें बिग बॉस पंद्रह के हाल ही में बीते नवीनतम एपिसोड में अभिजीत ने देवोलीना के साथ बातचीत करते हुए उसके साथ छेड़खानी की थी. जैसा कि उन्होंने मौसम के बारे में बात की, पूर्व ने उसे पश्चिमी कपड़े पहनने के लिए कहा और साथ ही शाहरुख खान के लोकप्रिय दृश्य का अभिनय भी कर के भी दिखाया. सोशल मीडिया पर दिखाए गए प्रोमो में सलमान बिग बॉस कंटेस्टेंट्स से कहते हैं कि टास्क रद्द कराने में सभी कंटेस्टेंट्स ने PhD. कर ली है. सभी कंटेस्टेंट्स किसी न किसी तरीके से टास्क को रद्द करने में लगे रहते हैं. अभिजीत बिचुकले हरदम कुछ न कुछ ऐसा करते रहते हैं जिससे कि बिग बॉस के घर का माहौल खराब हो जाता है. शो के होस्ट सलमान खान इस वीकेंड के वार में सबकी क्लास लगाते हुए दिखाई देने वाले हैं.
Gwalior Drinking Water Problem News: दीपक सविता, ग्वालियर नईदुनिया। गर्मी में जहां अन्य शहराें में पेयजल संकट की स्थिति बन रही है, वहीं ग्वालियर में अब तक ऐसी काेई समस्या नहीं है। यहां पानी ताे पर्याप्त है, लेकिन ड्रिस्ट्रीब्यूशन की गड़बड़ाई व्यवस्था काे सुधारना अफसराें के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। इस समस्या के निराकरण के लिए अफसर भी लगातार प्रयास में जुटे हुए हैं। अब गर्मी के प्रकाेप काे देखते हुए पानी की बर्बादी राेकना जरूरी हाे गया है, इसलिए मंत्रियाें काे भी कमान संभालना पड़ रही है। जिससे ड्रिस्ट्रीब्यूशन व्यवस्था काे सुधारा जा सके। साथ ही हर घर तक नियमित पानी पहुंच सके। इसके लिए आज प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट ने ग्वालियर में जिला प्रशासन, नगर निगम, पीएचई के अधिकारियाें के साथ बैठक की है। बैठक में पूर्व मंत्री एवं लघु उद्याेग विकास निगम की अध्यक्ष इमरती देवी ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि अफसर हमारी सुनते ही नही हैं। शहर के लिए तिघरा में पर्याप्त पानी है, लेकिन अमृत योजना की लाइनों में परेशानी है। जिससे डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम में थोड़ी परेशानी आ रही है। आज प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट ने सभी मंत्री, जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों की संयुक्त बैठक ली है। बैठक के बाद यह जानकारी ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह ताेमर ने पत्रकाराें काे दी। उन्हाेंने पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ एवं दिग्विजय सिंह द्वारा दिए गए बयान के सवाल पर कहा कि राजनीति के लिए यह दोनों इस प्रकार के बयान देते हैं। जबकि इस प्रकार के मामलों में राजनीति नहीं समाधान होना चाहिए । जबकि इन दोनों नेताओं के बयान से सौहार्दपूर्ण वातावरण बिगड़ रहा है। बैठक में पानी की समस्याओं को लेकर डबरा विधानसभा क्षेत्र, ग्वालियर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र, ग्वालियर नगर निगम को लेकर सभी जनप्रतिनिधियों ने अपनी-अपनी समस्याएं रखीं। बैठक में पूर्व मंत्री इमरती देवी सुमन ने प्रभारी मंत्री से कहा कि भाईसाहब पहले हमारी सुन लो, यहां पर अधिकारी बात नहीं सुनते हैं, इसके कारण जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बैठक के दौरान ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ,बीज निगम के अध्यक्ष मुन्नालाल गोयल,लघु उद्याेग विकास निगम की अध्यक्ष इमरती देवी ,जिला पंचायत अध्यक्ष मनीषा भुजवल यादव ,पूर्व महापौर समीक्षा गुप्ता, मदन कुशवाह, कौशल शर्मा के अलावा नगर निगम आयुक्त किशोर कन्याल ,सीईओ जिला पंचायत आदि मौजूद थे।
Gwalior Drinking Water Problem News: दीपक सविता, ग्वालियर नईदुनिया। गर्मी में जहां अन्य शहराें में पेयजल संकट की स्थिति बन रही है, वहीं ग्वालियर में अब तक ऐसी काेई समस्या नहीं है। यहां पानी ताे पर्याप्त है, लेकिन ड्रिस्ट्रीब्यूशन की गड़बड़ाई व्यवस्था काे सुधारना अफसराें के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। इस समस्या के निराकरण के लिए अफसर भी लगातार प्रयास में जुटे हुए हैं। अब गर्मी के प्रकाेप काे देखते हुए पानी की बर्बादी राेकना जरूरी हाे गया है, इसलिए मंत्रियाें काे भी कमान संभालना पड़ रही है। जिससे ड्रिस्ट्रीब्यूशन व्यवस्था काे सुधारा जा सके। साथ ही हर घर तक नियमित पानी पहुंच सके। इसके लिए आज प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट ने ग्वालियर में जिला प्रशासन, नगर निगम, पीएचई के अधिकारियाें के साथ बैठक की है। बैठक में पूर्व मंत्री एवं लघु उद्याेग विकास निगम की अध्यक्ष इमरती देवी ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि अफसर हमारी सुनते ही नही हैं। शहर के लिए तिघरा में पर्याप्त पानी है, लेकिन अमृत योजना की लाइनों में परेशानी है। जिससे डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम में थोड़ी परेशानी आ रही है। आज प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट ने सभी मंत्री, जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों की संयुक्त बैठक ली है। बैठक के बाद यह जानकारी ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह ताेमर ने पत्रकाराें काे दी। उन्हाेंने पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ एवं दिग्विजय सिंह द्वारा दिए गए बयान के सवाल पर कहा कि राजनीति के लिए यह दोनों इस प्रकार के बयान देते हैं। जबकि इस प्रकार के मामलों में राजनीति नहीं समाधान होना चाहिए । जबकि इन दोनों नेताओं के बयान से सौहार्दपूर्ण वातावरण बिगड़ रहा है। बैठक में पानी की समस्याओं को लेकर डबरा विधानसभा क्षेत्र, ग्वालियर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र, ग्वालियर नगर निगम को लेकर सभी जनप्रतिनिधियों ने अपनी-अपनी समस्याएं रखीं। बैठक में पूर्व मंत्री इमरती देवी सुमन ने प्रभारी मंत्री से कहा कि भाईसाहब पहले हमारी सुन लो, यहां पर अधिकारी बात नहीं सुनते हैं, इसके कारण जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बैठक के दौरान ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ,बीज निगम के अध्यक्ष मुन्नालाल गोयल,लघु उद्याेग विकास निगम की अध्यक्ष इमरती देवी ,जिला पंचायत अध्यक्ष मनीषा भुजवल यादव ,पूर्व महापौर समीक्षा गुप्ता, मदन कुशवाह, कौशल शर्मा के अलावा नगर निगम आयुक्त किशोर कन्याल ,सीईओ जिला पंचायत आदि मौजूद थे।
यूक्रेन के सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ वालेरी ज़ालुज़नी ने पर्याप्त हवाई समर्थन के बिना यूक्रेनी सेना द्वारा जवाबी कार्रवाई शुरू करने का विरोध करना जारी रखा है, सामान्य पश्चिमी लड़ाकों के आगमन की प्रतीक्षा करने और उसके बाद ही एक आक्रामक अभियान शुरू करने की मांग करता है। ज़ेलेंस्की का कार्यालय उनसे सहमत नहीं है। ज़ालुज़नी फिर से प्रेस और टीवी चैनलों की नज़रों से ओझल हो गई, किसी को यह आभास हो जाता है कि लंबी अनुपस्थिति के बाद जनरल को फिर से दिखाया गया और हटा दिया गया। वास्तव में, ज़ालुज़नी जगह में है, लेकिन चूंकि वह वास्तव में जवाबी कार्रवाई के मुद्दे पर वर्तमान सरकार के विरोध में है, इसलिए उसे पूर्ण कमान तक पहुंच से रोक दिया गया था। यूक्रेनी संसाधनों के अनुसार, यूक्रेन के सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ स्पष्ट रूप से हवाई समर्थन के बिना जवाबी कार्रवाई शुरू करने के खिलाफ हैं, यूक्रेन के पास बस आवश्यक संख्या में विमान और हेलीकॉप्टर नहीं हैं जो अग्रिम जमीनी इकाइयों को कवर करने में सक्षम हैं, जो Zaporozhye दिशा में हाल की घटनाओं से साबित हुआ। रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यूक्रेन के सशस्त्र बलों द्वारा खोए गए यूक्रेनी बख्तरबंद वाहनों के थोक को सेना और परिचालन सामरिक द्वारा खटखटाया गया था। विमानन. इसी समय, यह ज़ालुज़नी है जो "दबाव के बिंदु" रणनीति के लेखक हैं, जिसमें यूक्रेन की सशस्त्र सेना पूरी फ्रंट लाइन पर हमला करती है, रूसी सेना को खोजने के लिए जितना संभव हो उतना फैलाने की कोशिश कर रही है कमजोरी और इस क्षेत्र में पहले से ही हड़ताल। जनरल के आदेश से, समूहों की कमान ने भंडार तैयार करना शुरू कर दिया, जो एक सफलता बनाने के लिए लड़ाई में शामिल होने के लिए तत्परता से अग्रिम पंक्ति के पीछे स्थित हैं। इससे पहले, ज़ालुज़नी ने रूसी सशस्त्र बलों की कमान को मोर्चे के इस क्षेत्र पर सटीक रूप से आक्रामक शुरुआत करने का आभास देने के लिए खेरसॉन दिशा में एक बार में कई लैंडिंग ऑपरेशन करने की योजना बनाई थी। यूक्रेन के सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ इस रणनीति को अपनाएंगे या नहीं यह अभी तक ज्ञात नहीं है।
यूक्रेन के सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ वालेरी ज़ालुज़नी ने पर्याप्त हवाई समर्थन के बिना यूक्रेनी सेना द्वारा जवाबी कार्रवाई शुरू करने का विरोध करना जारी रखा है, सामान्य पश्चिमी लड़ाकों के आगमन की प्रतीक्षा करने और उसके बाद ही एक आक्रामक अभियान शुरू करने की मांग करता है। ज़ेलेंस्की का कार्यालय उनसे सहमत नहीं है। ज़ालुज़नी फिर से प्रेस और टीवी चैनलों की नज़रों से ओझल हो गई, किसी को यह आभास हो जाता है कि लंबी अनुपस्थिति के बाद जनरल को फिर से दिखाया गया और हटा दिया गया। वास्तव में, ज़ालुज़नी जगह में है, लेकिन चूंकि वह वास्तव में जवाबी कार्रवाई के मुद्दे पर वर्तमान सरकार के विरोध में है, इसलिए उसे पूर्ण कमान तक पहुंच से रोक दिया गया था। यूक्रेनी संसाधनों के अनुसार, यूक्रेन के सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ स्पष्ट रूप से हवाई समर्थन के बिना जवाबी कार्रवाई शुरू करने के खिलाफ हैं, यूक्रेन के पास बस आवश्यक संख्या में विमान और हेलीकॉप्टर नहीं हैं जो अग्रिम जमीनी इकाइयों को कवर करने में सक्षम हैं, जो Zaporozhye दिशा में हाल की घटनाओं से साबित हुआ। रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यूक्रेन के सशस्त्र बलों द्वारा खोए गए यूक्रेनी बख्तरबंद वाहनों के थोक को सेना और परिचालन सामरिक द्वारा खटखटाया गया था। विमानन. इसी समय, यह ज़ालुज़नी है जो "दबाव के बिंदु" रणनीति के लेखक हैं, जिसमें यूक्रेन की सशस्त्र सेना पूरी फ्रंट लाइन पर हमला करती है, रूसी सेना को खोजने के लिए जितना संभव हो उतना फैलाने की कोशिश कर रही है कमजोरी और इस क्षेत्र में पहले से ही हड़ताल। जनरल के आदेश से, समूहों की कमान ने भंडार तैयार करना शुरू कर दिया, जो एक सफलता बनाने के लिए लड़ाई में शामिल होने के लिए तत्परता से अग्रिम पंक्ति के पीछे स्थित हैं। इससे पहले, ज़ालुज़नी ने रूसी सशस्त्र बलों की कमान को मोर्चे के इस क्षेत्र पर सटीक रूप से आक्रामक शुरुआत करने का आभास देने के लिए खेरसॉन दिशा में एक बार में कई लैंडिंग ऑपरेशन करने की योजना बनाई थी। यूक्रेन के सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ इस रणनीति को अपनाएंगे या नहीं यह अभी तक ज्ञात नहीं है।
Ranchi: धनबाद जिला के पूर्व जिला शिक्षा अधीक्षक बांके बिहारी सिंह पर छह साल पुराने मामले में कार्रवाई की गयी है. उन्हें शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. उन पर यह कार्रवाई विभागीय जांच के बाद आयी रिपोर्ट के आधार पर की गयी है. साथ ही शिक्षा मंत्री ने उन पर विभागीय कार्रवाई करने को भी कहा है. धनबाद के पूर्व जिला शिक्षा अधीक्षक रहे बांके बिहारी सिंह वर्तमान में जामताड़ा जिला में जिला शिक्षा पदाधिकारी के रूप में कार्यरत हैं. जहां से उन्हें हटाया गया है. शिक्षा मंत्री ने छह साल पुराने मामले में जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की है. जानकारी के मुताबिक धनबाद में जिला शिक्षा अधीक्षक के पद पर रहते हुए बांके बिहारी सिंह ने वर्ष 2013-14 में बगैर टेंडर के ही 144 स्कूलों में चापाकल के लिए बोरिंग कराया था. झारखंड अराजपत्रित प्रारंभिक शिक्षा संघ के महासचिव राम नारायण सिंह ने इन स्कूलों में चापाकल लगाने में घोटाले का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की थी. बांके बिहारी सिंह ने बिना टेंडर के प्रत्येक स्कूलों में 200 फीट के स्थान पर 100 फीट की बोरिंग करायी थी. जबकि उनके द्वारा भुगतान 200 फीट का किया गया था. प्रत्येक स्कूल में 55 सौ रुपये से लेकर 24,000 रुपये तक अधिक का भुगतान किया गया था. ऐसा नहीं है कि बांके बिहारी सिंह पर चापाकल बोरिंग घोटाला एकमात्र आरोप है. उन पर धनबाद में डीएसई रहते हुए शिक्षक नियुक्ति में गड़बड़ी करने का भी आरोप है. वर्ष 2015-16 में जब बांके बिहारी धनबाद के जिला शिक्षा अधीक्षक थे, उनके कार्यकाल में कई फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी. बांके बिहारी सिंह वर्ष 2018 में पूर्वी सिंहभूम जिले में भी जिला शिक्षा अधीक्षक रह चुके हैं. तब उनके इस घोटाले की जांच विभाग के संयुक्त सचिव देवेंद्र भूषण सिंह की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमिटी ने की थी.
Ranchi: धनबाद जिला के पूर्व जिला शिक्षा अधीक्षक बांके बिहारी सिंह पर छह साल पुराने मामले में कार्रवाई की गयी है. उन्हें शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. उन पर यह कार्रवाई विभागीय जांच के बाद आयी रिपोर्ट के आधार पर की गयी है. साथ ही शिक्षा मंत्री ने उन पर विभागीय कार्रवाई करने को भी कहा है. धनबाद के पूर्व जिला शिक्षा अधीक्षक रहे बांके बिहारी सिंह वर्तमान में जामताड़ा जिला में जिला शिक्षा पदाधिकारी के रूप में कार्यरत हैं. जहां से उन्हें हटाया गया है. शिक्षा मंत्री ने छह साल पुराने मामले में जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की है. जानकारी के मुताबिक धनबाद में जिला शिक्षा अधीक्षक के पद पर रहते हुए बांके बिहारी सिंह ने वर्ष दो हज़ार तेरह-चौदह में बगैर टेंडर के ही एक सौ चौंतालीस स्कूलों में चापाकल के लिए बोरिंग कराया था. झारखंड अराजपत्रित प्रारंभिक शिक्षा संघ के महासचिव राम नारायण सिंह ने इन स्कूलों में चापाकल लगाने में घोटाले का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की थी. बांके बिहारी सिंह ने बिना टेंडर के प्रत्येक स्कूलों में दो सौ फीट के स्थान पर एक सौ फीट की बोरिंग करायी थी. जबकि उनके द्वारा भुगतान दो सौ फीट का किया गया था. प्रत्येक स्कूल में पचपन सौ रुपये से लेकर चौबीस,शून्य रुपयापये तक अधिक का भुगतान किया गया था. ऐसा नहीं है कि बांके बिहारी सिंह पर चापाकल बोरिंग घोटाला एकमात्र आरोप है. उन पर धनबाद में डीएसई रहते हुए शिक्षक नियुक्ति में गड़बड़ी करने का भी आरोप है. वर्ष दो हज़ार पंद्रह-सोलह में जब बांके बिहारी धनबाद के जिला शिक्षा अधीक्षक थे, उनके कार्यकाल में कई फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी. बांके बिहारी सिंह वर्ष दो हज़ार अट्ठारह में पूर्वी सिंहभूम जिले में भी जिला शिक्षा अधीक्षक रह चुके हैं. तब उनके इस घोटाले की जांच विभाग के संयुक्त सचिव देवेंद्र भूषण सिंह की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमिटी ने की थी.
तालिबान के एक अधिकारी ने इस अप्रत्याशित निर्णय की पुष्टि की है. इस फैसले के बाद संभावित अंतरराष्ट्रीय दानदाताओं से मान्यता हासिल करने के तालिबान के प्रयासों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है. तालिबान ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है जब अफगानिस्तान बदतर मानवीय संकट से गुजर रहा है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने तालिबान के नेताओं से स्कूल खोलने और महिलाओं को सार्वजनिक स्थानों पर जाने का उनका अधिकार प्रदान करने का आग्रह किया है. सहायता संगठनों ने कहा कि इस कदम ने अफगानिस्तान के भविष्य के बारे में अनिश्चितता को बढ़ा दिया है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय तालिबानी नेताओं से जल्द ही स्कूल खोलने और महिलाओं को उनके सार्वजनिक अधिकारों से वंचित नहीं करने का आग्रह करता रहा है. इस सप्ताह की शुरुआत में मंत्रालय द्वारा जारी बयान में "सभी छात्रों" से स्कूल आने का अनुरोध किया गया था. तालिबान नीत प्रशासन में बाह्य संबंध अधिकारी वहीदुल्लाह हाशमी ने एसोसिएटेड प्रेस से कहा कि लड़कियों के उच्च शिक्षा वाले स्कूलों में आने पर रोक संबंधी फैसला मंगलवार रात को सामने आया. हाशमी ने कहा, "लड़कियों के लिए स्कूल बंद रहने संबंधी फैसले की जानकारी तालिबान नेतृत्व द्वारा हमे देर रात दी गई. हम यह नहीं कहते कि स्कूल हमेशा के लिए बंद रहेंगे. " उन्होंने कहा, " नेतृत्व ने यह फैसला नहीं किया है कि लड़कियों को कब और किस तरह से दोबारा स्कूल जाने की अनुमति दी जाएगी. "
तालिबान के एक अधिकारी ने इस अप्रत्याशित निर्णय की पुष्टि की है. इस फैसले के बाद संभावित अंतरराष्ट्रीय दानदाताओं से मान्यता हासिल करने के तालिबान के प्रयासों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है. तालिबान ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है जब अफगानिस्तान बदतर मानवीय संकट से गुजर रहा है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने तालिबान के नेताओं से स्कूल खोलने और महिलाओं को सार्वजनिक स्थानों पर जाने का उनका अधिकार प्रदान करने का आग्रह किया है. सहायता संगठनों ने कहा कि इस कदम ने अफगानिस्तान के भविष्य के बारे में अनिश्चितता को बढ़ा दिया है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय तालिबानी नेताओं से जल्द ही स्कूल खोलने और महिलाओं को उनके सार्वजनिक अधिकारों से वंचित नहीं करने का आग्रह करता रहा है. इस सप्ताह की शुरुआत में मंत्रालय द्वारा जारी बयान में "सभी छात्रों" से स्कूल आने का अनुरोध किया गया था. तालिबान नीत प्रशासन में बाह्य संबंध अधिकारी वहीदुल्लाह हाशमी ने एसोसिएटेड प्रेस से कहा कि लड़कियों के उच्च शिक्षा वाले स्कूलों में आने पर रोक संबंधी फैसला मंगलवार रात को सामने आया. हाशमी ने कहा, "लड़कियों के लिए स्कूल बंद रहने संबंधी फैसले की जानकारी तालिबान नेतृत्व द्वारा हमे देर रात दी गई. हम यह नहीं कहते कि स्कूल हमेशा के लिए बंद रहेंगे. " उन्होंने कहा, " नेतृत्व ने यह फैसला नहीं किया है कि लड़कियों को कब और किस तरह से दोबारा स्कूल जाने की अनुमति दी जाएगी. "
VIDEO: गर्मियों का मौसम आ गया है। इस मौसम में आम की बहार आ जाती है। आम काफी लोगो का पसंदीदा फल होता है। आम के चाहने वाले कई लोग हैं। गर्मी में आम खाने का जो मजा है उसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। आम के कई वेरिएंट मार्केट में अवेलेबल हैं। कोई हाई ब्रीड आम है तो कोई लोकल। अगर सच कहा जाए तो जो स्वाद देसी आम का है, वो हाई ब्रीड का नहीं होता। देसी आम की मिठास और उसका स्वाद जुबान पर चढ़ जाता है। खासकर जो आम अपने आप पके, उसके स्वाद का तो कोई जोड़ ही नहीं होता। आज के समय में कई दुकानदार चूने से आम को पका देते हैं और फिर बेचते हैं। इन आमों का टेस्ट भी खराब होता है साथ ही ये हेल्थ के लिए भी ठीक नहीं होते। लेकिन आज हम आपको काले आम VIDEO) को दिखाने जा रहे हैं। आम जब कच्चा होता है तब उसका रंग हरा होता है। जब ये पकता है तब इसका रंग पीला, नारंगी या फिर लाल हो जाता है। लेकिन इन दिनों सोशल मीडिया पर काले आम का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें एक शख्स काले रंग के आम में चीरा लगाकर उसे काटता नजर आया। बाहर से काले इस आम को जब काटा गया तो इसके अंदर से पका हुआ पीला गूदा नजर आया। देखने से ही ये आम रसदार नजर आ रहा है। वीडियो देखने के बाद कई लोगों ने कमेंट में लिखा कि उन्होंने पहली बार काला आम देखा है। ऐसा आम सच में होता है क्या? इसका जवाब भी वीडियो के कमेंट में मिल गया। कुछ लोगों ने इसे पेंट किया आम बताया। लेकिन कई लोगों ने इसपर रिसर्च की जिससे ये पता चला कि काले आम सच में होते हैं। जमैका में ये आम बेहद कॉमन हैं। इसे Blackie Mango भी कहा जाता है। चूँकि इसका रंग काला है, इस वजह से आम को ऐसा नाम मिला है।
VIDEO: गर्मियों का मौसम आ गया है। इस मौसम में आम की बहार आ जाती है। आम काफी लोगो का पसंदीदा फल होता है। आम के चाहने वाले कई लोग हैं। गर्मी में आम खाने का जो मजा है उसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। आम के कई वेरिएंट मार्केट में अवेलेबल हैं। कोई हाई ब्रीड आम है तो कोई लोकल। अगर सच कहा जाए तो जो स्वाद देसी आम का है, वो हाई ब्रीड का नहीं होता। देसी आम की मिठास और उसका स्वाद जुबान पर चढ़ जाता है। खासकर जो आम अपने आप पके, उसके स्वाद का तो कोई जोड़ ही नहीं होता। आज के समय में कई दुकानदार चूने से आम को पका देते हैं और फिर बेचते हैं। इन आमों का टेस्ट भी खराब होता है साथ ही ये हेल्थ के लिए भी ठीक नहीं होते। लेकिन आज हम आपको काले आम VIDEO) को दिखाने जा रहे हैं। आम जब कच्चा होता है तब उसका रंग हरा होता है। जब ये पकता है तब इसका रंग पीला, नारंगी या फिर लाल हो जाता है। लेकिन इन दिनों सोशल मीडिया पर काले आम का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें एक शख्स काले रंग के आम में चीरा लगाकर उसे काटता नजर आया। बाहर से काले इस आम को जब काटा गया तो इसके अंदर से पका हुआ पीला गूदा नजर आया। देखने से ही ये आम रसदार नजर आ रहा है। वीडियो देखने के बाद कई लोगों ने कमेंट में लिखा कि उन्होंने पहली बार काला आम देखा है। ऐसा आम सच में होता है क्या? इसका जवाब भी वीडियो के कमेंट में मिल गया। कुछ लोगों ने इसे पेंट किया आम बताया। लेकिन कई लोगों ने इसपर रिसर्च की जिससे ये पता चला कि काले आम सच में होते हैं। जमैका में ये आम बेहद कॉमन हैं। इसे Blackie Mango भी कहा जाता है। चूँकि इसका रंग काला है, इस वजह से आम को ऐसा नाम मिला है।
Don't Miss! सुपरस्टार ऋषि कपूर हाल ही में अपना इलाज करवाकर न्यूयॉर्क से वापस आए हैं और काफी शानदार तरीके से फैंस ने उनका भारत में स्वागत किया है। इस समय खबर आ रही है कि उनका स्वागत करने के लिए रणबीर कपूर ने एक वेलकम पार्टी रखी थी जिसको उन्होने आलिया भट्ट के साथ मिलकर प्लान किया था। इस समय आलिया भट्ट की कुछ तस्वीरे वायरल हो रहीं हैं जो कि उस फंक्शन में पहुंचने के पहले की हैं। Baaghi 3- टाइगर श्रॉफ की बागी 3 में ऐसा होगा क्लाइमैक्स- सारे सुपरहीरोज को देंगे टक्कर! आलिया भट्ट ने अपने बॉयफ्रेंड रणबीर कपूर और पूरे परिवार के साथ मिलकर धूमधाम से ऋषि कपूर का स्वागत किया है। आलिया भट्ट इस तस्वीर में पीले रंग के कपड़ों में नजर आ रहीं हैं। आलिया भट्ट इससे पहले भी ऋषि कपूर से मिलने के लिए न्यूयॉर्क जा चुकी हैं। नीतू कपूर ने एक गुब्बारे की तस्वीर साझा की है जिसमें लिखा है.. वेलकम होम डैड। उनकी गैरमौजूदगी में उनके फैंस ने उनके लिए काफी दुआएं की थी और अपने सुपरस्टार के जल्दी ही स्वस्थ होने की कामना की थी। अभिनेता ने आते ही एक ट्वीट करते हुए लिखा.. 'घर वापसी 11 महीने 11 दिन बाद, आप सभी का शुक्रिया।' ऋषि कपूर कुछ समय के बाद ही फिल्मों में बिजी होने वाले हैं क्योंकि उन्होने न्यूयॉर्क में ही कई फिल्में साइन कर लीं थीं।
Don't Miss! सुपरस्टार ऋषि कपूर हाल ही में अपना इलाज करवाकर न्यूयॉर्क से वापस आए हैं और काफी शानदार तरीके से फैंस ने उनका भारत में स्वागत किया है। इस समय खबर आ रही है कि उनका स्वागत करने के लिए रणबीर कपूर ने एक वेलकम पार्टी रखी थी जिसको उन्होने आलिया भट्ट के साथ मिलकर प्लान किया था। इस समय आलिया भट्ट की कुछ तस्वीरे वायरल हो रहीं हैं जो कि उस फंक्शन में पहुंचने के पहले की हैं। Baaghi तीन- टाइगर श्रॉफ की बागी तीन में ऐसा होगा क्लाइमैक्स- सारे सुपरहीरोज को देंगे टक्कर! आलिया भट्ट ने अपने बॉयफ्रेंड रणबीर कपूर और पूरे परिवार के साथ मिलकर धूमधाम से ऋषि कपूर का स्वागत किया है। आलिया भट्ट इस तस्वीर में पीले रंग के कपड़ों में नजर आ रहीं हैं। आलिया भट्ट इससे पहले भी ऋषि कपूर से मिलने के लिए न्यूयॉर्क जा चुकी हैं। नीतू कपूर ने एक गुब्बारे की तस्वीर साझा की है जिसमें लिखा है.. वेलकम होम डैड। उनकी गैरमौजूदगी में उनके फैंस ने उनके लिए काफी दुआएं की थी और अपने सुपरस्टार के जल्दी ही स्वस्थ होने की कामना की थी। अभिनेता ने आते ही एक ट्वीट करते हुए लिखा.. 'घर वापसी ग्यारह महीने ग्यारह दिन बाद, आप सभी का शुक्रिया।' ऋषि कपूर कुछ समय के बाद ही फिल्मों में बिजी होने वाले हैं क्योंकि उन्होने न्यूयॉर्क में ही कई फिल्में साइन कर लीं थीं।
गोरखपुर (ब्यूरो)। न ब्लैक स्पॉट की त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई हुई और न आप तक रिपोर्ट पहुंची। इससे स्पष्ट है कि गोरखपुर के अफसर आपकी नहीं सुनते। हालांकि, इस दौरान हादसों का दौर जारी रहा। जिला प्रशासन की इस खानापूर्ति भरी बैठक के साथ पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई अफसरों की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। ट्रैफिक विभाग, आरटीओ, पीडब्ल्यूडी विभाग और एनएचएआई को मिलकर ब्लैक स्पॉट्स को खत्म करने का जिम्मा था। डीएम कृष्णा करुणेश के साथ एआरटीए की बैठक भी हुई। डीएम ने जिम्मेदारों को निर्देश देते हुए कहा था कि नौसड़, बोक्टा, दाना-पानी, भीटी रावत, कसरौल, कसिहार बगहागीर मंदिर, मरचाहे कुटी, रावतगंज, फुटहवा ईनार, निबिहवा ढाला और चौमुखी ब्लैक स्पॉट पर 10 दिनों के अंदर 12 ब्लैक स्पॉट की सुधारात्मक कार्यवाही करके रिपोर्ट सौंपें, लेकिन इस तय समय तक अभी तक कोई सुधारात्मक कार्यवाही नहीं की जा सकी है और ना तो जिम्मेदार रिपोर्ट सौंप सके हैं। निबियहवा ढाला मार्ग पर ट्रैफिक का दबाव ज्यादा है। यहां पर आए दिन दुर्घटनाएं होती है। इस मार्ग पर न तो ब्रेकर है और न ही सफेद पट्टी बना है। कहीं भी सांकेतिक बोर्ड भी दिखाई पड़ा। दोनों तरफ से आने वाले वाहन की गति अधिक होने के कारण दुर्घटनाएं होती है। फुटहवा इनार रोड पर गोरखपुर से देवरिया तक आने जाने वाली की संख्या अधिक होती है। इस मार्ग पर वाहनों का दबाव अधिक है। इसी का नतीजा है कि यहां पर ज्यादा तरह दुर्घटनाएं होती है। इसलिए इसे ब्लैक स्पॉट चिन्हित कर सुधारात्मक कार्यवाही की जानी थी लेकिन अभी तक यहां कुछ भी नहीं हुआ है। हाइवे से तेज गति से भारी वाहन नीचे उतरते हैं। भारी वाहन उतरने की जगह पर ही रोग क्रॉस करने का कट है। इसके कारण हादसे होते हैं। गोरखपुर से लखनऊ की ओर जाने वाले वाहन एवं लखनऊ की तरफ से कुशीनगर एवं बिहार जाने वाले वाहन आपस में एक दूसरे को क्रॉस पार करते हैं, इसकी वजह से दुर्घटना होती है। बोक्टा एरिया छोटा बाजार का एरिया है। जहां ग्रामीण क्षेत्र के लोग पैदल एवं साइकिल से आते हैं। सड़क पार करने में अक्सर हादसे हो जाते हैं। कसरौल एरिया ग्रामीण क्षेत्र है। साइकिल से चलने वाले एवं सड़क पार करने वाले अक्सर हादसे के शिकार होते हैं। गोरखपुर शहर से लखनऊ जाने वाले वाहन एवं सोनौली की तरफ से आने वाले भारी वाहन दोनों एक ही साइड में लेफ्ट लेन में लखनऊ जाने के लिए मिलते हैं। दोनों तरफ से आने वाले वाहन गति अधिक होने के कारण हादसे का शिकार होते हैं। नौसड़ एरिया काफी भीड़-भाड़ वाला क्षेत्र है। भारी वाहन का आवागमन अधिक रहता है, इससे हादसे होते हैं। क्या होता है ब्लैक स्पॉट? सड़क पर जिस जगह बार-बार हादसे होते हैं, उन्हें ब्लैक स्पॉट कहा जाता है। शासन की ओर से किसी सड़क, हाईवे, एक्सप्रेस वे पर अगर एक ही जगह तीन साल में पांच सड़क हादसे हो जाएं। इसके अलावा किसी जगह पर तीन साल में दस मौत हो जाएं तो उसे ब्लैक स्पॉट घोषित कर दिया जाता है। हादसे के आस-पास का 500 मीटर का एरिया ब्लैक स्पॉट माना जाता है। जिले के 12 ब्लैक स्पॉट पर संकेतक लगाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बोर्ड बनाने का ऑर्डर दे दिया गया है। साथ ही सड़कों को भी दुरुस्त किया जा रहा है। जल्द ही ब्लैक स्पॉट का सुधारात्मक कार्य पूरा कर ली जाएगी। ब्लैक स्पॉट पर क्या कमियां हैं उसकी रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। विभाग की ओर से सुधारात्मक कार्य किए जा रहे हैं। जल्द ही रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। जिले के जो 12 ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए हैं, अभी उसकी रिपोर्ट नहीं मिली है। लेटलतीफी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जांच कर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
गोरखपुर । न ब्लैक स्पॉट की त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई हुई और न आप तक रिपोर्ट पहुंची। इससे स्पष्ट है कि गोरखपुर के अफसर आपकी नहीं सुनते। हालांकि, इस दौरान हादसों का दौर जारी रहा। जिला प्रशासन की इस खानापूर्ति भरी बैठक के साथ पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई अफसरों की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। ट्रैफिक विभाग, आरटीओ, पीडब्ल्यूडी विभाग और एनएचएआई को मिलकर ब्लैक स्पॉट्स को खत्म करने का जिम्मा था। डीएम कृष्णा करुणेश के साथ एआरटीए की बैठक भी हुई। डीएम ने जिम्मेदारों को निर्देश देते हुए कहा था कि नौसड़, बोक्टा, दाना-पानी, भीटी रावत, कसरौल, कसिहार बगहागीर मंदिर, मरचाहे कुटी, रावतगंज, फुटहवा ईनार, निबिहवा ढाला और चौमुखी ब्लैक स्पॉट पर दस दिनों के अंदर बारह ब्लैक स्पॉट की सुधारात्मक कार्यवाही करके रिपोर्ट सौंपें, लेकिन इस तय समय तक अभी तक कोई सुधारात्मक कार्यवाही नहीं की जा सकी है और ना तो जिम्मेदार रिपोर्ट सौंप सके हैं। निबियहवा ढाला मार्ग पर ट्रैफिक का दबाव ज्यादा है। यहां पर आए दिन दुर्घटनाएं होती है। इस मार्ग पर न तो ब्रेकर है और न ही सफेद पट्टी बना है। कहीं भी सांकेतिक बोर्ड भी दिखाई पड़ा। दोनों तरफ से आने वाले वाहन की गति अधिक होने के कारण दुर्घटनाएं होती है। फुटहवा इनार रोड पर गोरखपुर से देवरिया तक आने जाने वाली की संख्या अधिक होती है। इस मार्ग पर वाहनों का दबाव अधिक है। इसी का नतीजा है कि यहां पर ज्यादा तरह दुर्घटनाएं होती है। इसलिए इसे ब्लैक स्पॉट चिन्हित कर सुधारात्मक कार्यवाही की जानी थी लेकिन अभी तक यहां कुछ भी नहीं हुआ है। हाइवे से तेज गति से भारी वाहन नीचे उतरते हैं। भारी वाहन उतरने की जगह पर ही रोग क्रॉस करने का कट है। इसके कारण हादसे होते हैं। गोरखपुर से लखनऊ की ओर जाने वाले वाहन एवं लखनऊ की तरफ से कुशीनगर एवं बिहार जाने वाले वाहन आपस में एक दूसरे को क्रॉस पार करते हैं, इसकी वजह से दुर्घटना होती है। बोक्टा एरिया छोटा बाजार का एरिया है। जहां ग्रामीण क्षेत्र के लोग पैदल एवं साइकिल से आते हैं। सड़क पार करने में अक्सर हादसे हो जाते हैं। कसरौल एरिया ग्रामीण क्षेत्र है। साइकिल से चलने वाले एवं सड़क पार करने वाले अक्सर हादसे के शिकार होते हैं। गोरखपुर शहर से लखनऊ जाने वाले वाहन एवं सोनौली की तरफ से आने वाले भारी वाहन दोनों एक ही साइड में लेफ्ट लेन में लखनऊ जाने के लिए मिलते हैं। दोनों तरफ से आने वाले वाहन गति अधिक होने के कारण हादसे का शिकार होते हैं। नौसड़ एरिया काफी भीड़-भाड़ वाला क्षेत्र है। भारी वाहन का आवागमन अधिक रहता है, इससे हादसे होते हैं। क्या होता है ब्लैक स्पॉट? सड़क पर जिस जगह बार-बार हादसे होते हैं, उन्हें ब्लैक स्पॉट कहा जाता है। शासन की ओर से किसी सड़क, हाईवे, एक्सप्रेस वे पर अगर एक ही जगह तीन साल में पांच सड़क हादसे हो जाएं। इसके अलावा किसी जगह पर तीन साल में दस मौत हो जाएं तो उसे ब्लैक स्पॉट घोषित कर दिया जाता है। हादसे के आस-पास का पाँच सौ मीटर का एरिया ब्लैक स्पॉट माना जाता है। जिले के बारह ब्लैक स्पॉट पर संकेतक लगाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बोर्ड बनाने का ऑर्डर दे दिया गया है। साथ ही सड़कों को भी दुरुस्त किया जा रहा है। जल्द ही ब्लैक स्पॉट का सुधारात्मक कार्य पूरा कर ली जाएगी। ब्लैक स्पॉट पर क्या कमियां हैं उसकी रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। विभाग की ओर से सुधारात्मक कार्य किए जा रहे हैं। जल्द ही रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। जिले के जो बारह ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए हैं, अभी उसकी रिपोर्ट नहीं मिली है। लेटलतीफी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जांच कर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
14 जनवरी 1949 को उदयपुर की एक सार्वजनिक सभा में सरदार वल्लभ भाई पटेल ने जयपुर, बीकानेर, जोधपुर, जैसलमेर रियासतों के सैद्धांतिक रूप से विलय की घोषणा की. इस घोषणा को मूर्त रूप देने के लिए सरदार वल्लभ भाई पटेल ने जयपुर में 30 मार्च 1949 को एक समारोह में वृहद् राजस्थान का उद्घाटन किया इसलिए राजस्थान दिवस हर वर्ष तीस मार्च को मनाया जाता है. आज़ादी के वक्त राजस्थान में कुल 22 रियासतें थी. वर्तमान राजस्थान में तत्कालीन 19 देसी रियासतों में राजाओं का शासन हुआ करता था जबकि तीन रियासतों (नीमराना, लव और कुशालगढ़ ) में चीफ़शिप थी. यहां के अजमेर मेरवाड़ा प्रांत पर ब्रिटिश शासकों का राज था इसलिए यह स्वतः ही स्वतंत्र भारत में शामिल हो जाती. तत्कालीन रियासतों के विलय की प्रक्रिया 18 मार्च 1948 से एक नवंबर 1956 तक चली. इस प्रक्रिया को सात चरणों में पूरा किया गया था. एमपी के कितने गांव किए गए शामिल? भारत सरकार ने अफ़ज़ल अली के नेतृत्व में गठित राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफ़ारिश पर ब्रिटिश शासित अजमेर मेरवाड़ा प्रांत का 1 नवंबर 1956 को राजस्थान में विलय कर लिया. इस दौरान ही मध्यप्रदेश की मंदसौर तहसील के गांव सुनेलटप्पा को भी राजस्थान में शामिल किया गया. जबकि, राजस्थान के झालावाड़ ज़िले के गांव सिरोंज को मध्यप्रदेश में शामिल किया गया. भारत सरकार की गठित राव समिति की सिफ़ारिशों के आधार पर 7 सितंबर 1949 को जयपुर को राजस्थान राज्य की राजधानी बनाया गया. तत्कालीन मेवाड़, मारवाड़, जयपुर, बूंदी, कोटा भरतपुर और अलवर पहले बड़ी रियासतें हुआ करती थीं. यहां चौहान, राठौड़, गहलोत और परमार वंशों का राज था. यहं कई बड़ी जंग हुईं और मुग़लों और बाहरी आक्रमणों ने यहां के इतिहास को शौर्य गाथाओं से भर दिया. राजस्थान, पृथ्वी राज चौहाण, महाराणा प्रताप, राणा सांगा, राणा कुंभा जैसे शूरवीरों के इतिहास को सहेजे हुए है. देश-दुनिया में राजस्थान को वीरों की धरती से ही पहचाना जाता है. हल्दी घाटी का युद्ध, चित्तौड़, खानवा, तराइन, रणथंभौर के युद्ध राजस्थान की धरती पर ही हुए. वर्तमान समय में भारतीय सेना में राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र (सीकर, झुंझुनू और चूरू) से बड़ी संख्या में युवा हैं. देश सेवा के लिए राजस्थान के शेखावाटी से सर्वाधिक युवा सेना में जाते हैं. राजस्थान का पुराना नाम क्या? आजादी से पहले राजस्थान को 'राजपूताना' के नाम से जाना जाता था. इतिहासकारों का मानना है कि जार्ज थॉमस ने साल 1800 ईसा में 'राजपूताना' नाम दिया था. इतिहासकारों का दावा है कि कर्नल जेम्स टॉड ने इस राज्य का नाम राजस्थान रखा. स्थानीय साहित्यिक भाषा में राजाओं के निवास प्रांत को राजस्थान ही कहा जाता था. राजस्थान का ही संस्कृत रूप राजस्थान बना, जिसका अर्थ है राजाओं का स्थान. रियासतों के विलय के बाद जब एकीकृत राज्यों के नाम दिए गए तब राजस्थान नाम को ही स्वीकृति दी गई. साल 1954 में आई सत्येन बोस फ़िल्म 'जागृति' के एक गीत में भी इस जगह के लिए राजपूताना शब्द का इस्तेमाल किया गया है. गीत में कहा गया है, "ये है अपना राजपूताना नाज़ इसे तलवारों पे, इसने सारा जीवन काटा बरछी तीर कटारों पे. . . . " राजस्थान के सबसे बड़े विश्वविद्यालय का शुरुआती नाम राजपूताना विश्वविद्यालय था, वर्तमान में यह राजस्थान विश्वविद्यालय है. राजस्थान में सबसे प्रसिद्ध चीज़ कौन सी? राजस्थान ख़ूबसूरत गहनों और रत्नों के लिए प्रसिद्ध है. यहां कई तरह की पेंटिंग शैलियां हैं. मेवाड़, कोटा, बूंदी, मारवाड़, बीकानेर और जयपुर शैलियां लघु चित्रकला शैलियां हैं. साथ ही राजस्थान की बनी मिठाइयां भी विश्वविख्यात हैं. राज्य का घेवर बहुत प्रसिद्ध है. राजस्थान का सबसे बड़ा ज़िला कौन सा है? क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य है और राजस्थान का सबसे ज़िला जैसलमेर है. जैसलमेर का क्षेत्रफल 38,401 किलोमीटर है. पाकिस्तान सीमा से जैसलमेर की सर्वाधिक सीमा लगती है, इस कारण राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज़ से भी यह अहम ज़िला है. ख़ास बात है कि क्षेत्रफल में बड़ा लेकिन आबादी के मुताब़िक जैसलमेर प्रदेश का सबसे छोटा ज़िला है, ज़िले में 6,69,619 आबादी निवास करती है. जैसलमेर का संभागीय मुख्यालय जोधपुर है. जैसलमेर में तनोट माता का मंदिर और रेत के टीलों को देखने के लिए देश और विदेश से सैलानी आते हैं. पाकिस्तान से विस्थापित कई हिंदू परिवार जैसलमेर के अलग-अलग इलाक़ों में रहते हैं. राजस्थान का सबसे छोटा ज़िला कौन? मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश राज्यों की सीमा से सटा राजस्थान का धौलपुर 3,034 किलोमीटर क्षेत्र में बसा सबसे छोटा ज़िला है. चंबल नदी के किनारे बसे धौलपुर की आबादी क़रीब 12 लाख है जो उत्तर प्रदेश के आगरा और मध्य प्रदेश के ग्वालियर से जुड़ता है. धौलपुर में पत्थर की खानों से निकला लाल पत्थर विश्वभर में प्रसिद्ध है. इसलिए इस ज़िले को रेड स्टोन सिटी के नाम से भी जाना जाता है. देश की कई ईमारतों में धौलपुर का ही पत्थर लगा हुआ है. राज्य में सबसे कम लिंगानुपात वाला ज़िला भी धौलपुर है. 2011 की जनगणना के मुताबिक़ यहां लिंगानुपात 846 है. धौलपुर में देश की सबसे बड़ी बारूद फ़ैक्ट्री है और यहां से बीहड़ों के कुख्यात कई डकैतों की कहानियां भी जुड़ी हैं. राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का घर (पैलेस) भी धौलपुर ज़िले में है. राजस्थान का सबसे पुराना गांव कौन? अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सटे जैसलमेर ज़िले में कुलधरा गांव सबसे पुराना गांव है. माना जाता है कि यह गांव 200 साल से वीरान है. इस गांव के लोग रातों रात गांव छोड़ कर चले गए, फिर कभी नहीं लौटे, और न ही कुलधरा गांव फिर कभी बसा. लोग गांव छोड़ कर क्यों गए इसके पीछे तत्कालीन जैसलमेर रियासत के दीवान सालिम सिंह से जुड़ी एक कहानी प्रचलित है. इस गांव को देखने के लिए हज़ारों पर्यटक पहुंचते हैं. वर्तमान में कुलधरा गांव पुरातत्व विभाग की देखरेख में है. राजस्थान का राजकीय पक्षी कौन है? राजस्थान का प्रसिद्ध और राज्य पक्षी गोडावण है. इसे अंग्रेज़ी भाषा में 'ग्रेट इंडियन बस्टर्ड' कहा जाता है. साल 1981 में गोडावण को राज्य पक्षी घोषित किया गया था. यह पक्षी शुतुर्मुर्ग की तरह दिखता है. लंबी गर्दन और लंबी टांगों वाले इस पक्षी की लंबाई लगभग एक मीटर होती है. इसके शरीर का रंग भूरा होता है, पंखों पर काले, भूरे और सिलेटी रंग के निशान होते हैं. जैसलमेर, बांरा और अजमेर में ये सर्वाधिक देखा जाता है. उड़ने वाले पक्षियों में गोडावण सबसे भारी होता है. गोडावण की संख्या बेहद कम बची है, यह विलुप्त होने के कग़ार पर है. राजस्थान का सबसे ठंड़ा ज़िला कौन सा है? गर्मियों के दिनों में राजस्थान के जोधपुर का फ़लौदी अपने अधिकतम तापमान को लेकर देश भर में ख़ूब सुर्खियों में रहता है. 19 मई 2016 को मौसम विभाग ने यहां अधिकतम तापमान 51 डिग्री रिकॉर्ड किया था. यहां गर्मी ही नहीं बल्क़ि ठंडे शहर की बात करें तो माउंट आबू सबसे ठंड़ा रहता है, जो अरावली पर्वतमाला में बसा एक ख़ूबसूरत शहर है. बीती सर्दियों में यहां तापमान माइनस 6 डिग्री तक पहुंच गया था. सिरोही ज़िले में माउंट आबू को गर्मियों की राजधानी भी कहा जाता है. गर्मियों में जब राज्य के कई इलाक़ों में तापमान 45 डिग्री पहुंच जाता है, जब माउंट आबू में औसत तापमान 34 डिग्री के क़रीब रहता है. माउंट आबू की सबसे ऊंची चोटी गुरु शिखर समुद्र तल से 1722 मीटर ऊंचाई पर है. देश विदेश से पर्यटक माउंट आबू की ख़ूबसूरती देखने पहुंचते हैं. सिरोही गुजरात से भी सटा हुआ है इसलिए गुजरात से भी बड़ी संख्या में माउंट आबू आते हैं. राजस्थान का राजकीय वृक्ष कौन सा है? खेजड़ी, यह राजस्थान का राजकीय वृक्ष है. खेजड़ी को राजस्थान का कल्प वृक्ष भी कहते हैं. इसका साइंटिफिक नाम 'प्रोसेसिप-सिनेरेरिया' है. खेजड़ी वृक्ष की आयु पांच हज़ार साल मानी जाती है. राज्य के शेखावाटी और नागौर में अधिक संख्या में खेजड़ी के वृक्ष मिलते हैं. 12 सितंबर 1978 से 12 सितंबर को खेजड़ी दिवस मनाने की शुरुआत हुई. अमृतादेवी विश्नोई ने 363 लोगों के साथ जोधपुर के खेजड़ली गांव में खेजड़ी वृक्ष को बचाने के लिए अपना बलिदान दिया. खेजड़ी में हरी फली आती हैं, इन्हें सांगरी कहते हैं. सांगरी की सब्जी बनाई जाती है. सूखी फली और पत्तियां पशुओं के चारे में काम आता है. राजस्थान का सबसे बड़ा शहर कौन? राजस्थान की राजधानी जयपुर सबसे बड़ा शहर है. जयपुर छोटी काशी और गुलाबी नगरी (पिंक सिटी) के नाम से भी पहचान रखता है. यह शहर तीन ओर से अरावली पर्वतमाला से घिरा हुआ है. जयपुर शहर की आबादी 35 लाख से ज़्यादा है और यह शहर 484 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है. जनसंख्या के आधार पर जोधपुर और क्षेत्रफल के आधार पर कोटा दूसरे नंबर पर आते हैं. जयपुर की स्थापना 1727 में महाराजा जयसिंह ने की थी. जयपुर में धातु, संगमरमर, कपड़े की छपाई, हस्तकला, रत्न व आभूषण का आयात-निर्यात होता है. सांभर झील का नाम तो आपने सुना ही होगा. राजस्थान में खारे पानी की सबसे बड़ी झील है. देश को मिलने वाले नमक़ में सांभर का बड़ा योगदान है. यह जयपुर शहर से क़रीब 80 किलोमीटर दूर है. इसका क्षेत्रफल लगभग 190 से 230 वर्ग किलोमीटर है. राज्य में कुल छह ज़िलों में खारे पानी की झीलें हैं. जयपुर में सांभर, बाड़मेर में पचपदरा झील, जोधपुर में फ़लौदी झील, नागौर में डीडवाना झील, बीकानेर में लूणकरणसर झील और जैसलमेर में कावोद झील. राज्य के उदयपुर ज़िले को झीलों की नगरी कहा जाता है. राज्य में सबसे ज़्यादा झीलें उदयपुर में ही हैं. उदयपुर की फतेहसागर झील, जयसमंद और पिछौला झील हैं. उदयपुर की झीलें मानव निर्मित झीले हैं. सिरोही ज़िले के माउंट आबू में नक्की झील और अजमेर की पुष्कर झील भी मीठे पानी की झील हैं. राजस्थान का प्रशासनिक ढांचा क्या है? राजस्थान सात संभाग में बंटा हुआ है, जिसमें फिलहाल 33 ज़िले हैं. (19 नए ज़िले और तीन नए संभाग बनाने की घोषणा हाल ही में की गई है. ) राजस्थान में 200 विधानसभा सीटें हैं. राज्य 25 लोकसभा सांसद चुनकर देश की संसद में भेजता है और दस राज्यसभा सांसद सीटें हैं. राज्य में दस नगर निगम, 34 नगर परिषद, 173 नगर पालिकाएं हैं. राज्य में 33 ज़िला परिषद, 352 पंचायत समितियां और 11,304 ग्राम पंचायतें हैं. राज्य में 305 उपखंड, 369 तहसील, 186 उप-तहसील, 10,833 पटवार मंडल, 47, 229 गांव, तीन विकास प्राधिकरण (जयपुर, जोधपुर और अजमेर) हैं.
चौदह जनवरी एक हज़ार नौ सौ उनचास को उदयपुर की एक सार्वजनिक सभा में सरदार वल्लभ भाई पटेल ने जयपुर, बीकानेर, जोधपुर, जैसलमेर रियासतों के सैद्धांतिक रूप से विलय की घोषणा की. इस घोषणा को मूर्त रूप देने के लिए सरदार वल्लभ भाई पटेल ने जयपुर में तीस मार्च एक हज़ार नौ सौ उनचास को एक समारोह में वृहद् राजस्थान का उद्घाटन किया इसलिए राजस्थान दिवस हर वर्ष तीस मार्च को मनाया जाता है. आज़ादी के वक्त राजस्थान में कुल बाईस रियासतें थी. वर्तमान राजस्थान में तत्कालीन उन्नीस देसी रियासतों में राजाओं का शासन हुआ करता था जबकि तीन रियासतों में चीफ़शिप थी. यहां के अजमेर मेरवाड़ा प्रांत पर ब्रिटिश शासकों का राज था इसलिए यह स्वतः ही स्वतंत्र भारत में शामिल हो जाती. तत्कालीन रियासतों के विलय की प्रक्रिया अट्ठारह मार्च एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस से एक नवंबर एक हज़ार नौ सौ छप्पन तक चली. इस प्रक्रिया को सात चरणों में पूरा किया गया था. एमपी के कितने गांव किए गए शामिल? भारत सरकार ने अफ़ज़ल अली के नेतृत्व में गठित राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफ़ारिश पर ब्रिटिश शासित अजमेर मेरवाड़ा प्रांत का एक नवंबर एक हज़ार नौ सौ छप्पन को राजस्थान में विलय कर लिया. इस दौरान ही मध्यप्रदेश की मंदसौर तहसील के गांव सुनेलटप्पा को भी राजस्थान में शामिल किया गया. जबकि, राजस्थान के झालावाड़ ज़िले के गांव सिरोंज को मध्यप्रदेश में शामिल किया गया. भारत सरकार की गठित राव समिति की सिफ़ारिशों के आधार पर सात सितंबर एक हज़ार नौ सौ उनचास को जयपुर को राजस्थान राज्य की राजधानी बनाया गया. तत्कालीन मेवाड़, मारवाड़, जयपुर, बूंदी, कोटा भरतपुर और अलवर पहले बड़ी रियासतें हुआ करती थीं. यहां चौहान, राठौड़, गहलोत और परमार वंशों का राज था. यहं कई बड़ी जंग हुईं और मुग़लों और बाहरी आक्रमणों ने यहां के इतिहास को शौर्य गाथाओं से भर दिया. राजस्थान, पृथ्वी राज चौहाण, महाराणा प्रताप, राणा सांगा, राणा कुंभा जैसे शूरवीरों के इतिहास को सहेजे हुए है. देश-दुनिया में राजस्थान को वीरों की धरती से ही पहचाना जाता है. हल्दी घाटी का युद्ध, चित्तौड़, खानवा, तराइन, रणथंभौर के युद्ध राजस्थान की धरती पर ही हुए. वर्तमान समय में भारतीय सेना में राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र से बड़ी संख्या में युवा हैं. देश सेवा के लिए राजस्थान के शेखावाटी से सर्वाधिक युवा सेना में जाते हैं. राजस्थान का पुराना नाम क्या? आजादी से पहले राजस्थान को 'राजपूताना' के नाम से जाना जाता था. इतिहासकारों का मानना है कि जार्ज थॉमस ने साल एक हज़ार आठ सौ ईसा में 'राजपूताना' नाम दिया था. इतिहासकारों का दावा है कि कर्नल जेम्स टॉड ने इस राज्य का नाम राजस्थान रखा. स्थानीय साहित्यिक भाषा में राजाओं के निवास प्रांत को राजस्थान ही कहा जाता था. राजस्थान का ही संस्कृत रूप राजस्थान बना, जिसका अर्थ है राजाओं का स्थान. रियासतों के विलय के बाद जब एकीकृत राज्यों के नाम दिए गए तब राजस्थान नाम को ही स्वीकृति दी गई. साल एक हज़ार नौ सौ चौवन में आई सत्येन बोस फ़िल्म 'जागृति' के एक गीत में भी इस जगह के लिए राजपूताना शब्द का इस्तेमाल किया गया है. गीत में कहा गया है, "ये है अपना राजपूताना नाज़ इसे तलवारों पे, इसने सारा जीवन काटा बरछी तीर कटारों पे. . . . " राजस्थान के सबसे बड़े विश्वविद्यालय का शुरुआती नाम राजपूताना विश्वविद्यालय था, वर्तमान में यह राजस्थान विश्वविद्यालय है. राजस्थान में सबसे प्रसिद्ध चीज़ कौन सी? राजस्थान ख़ूबसूरत गहनों और रत्नों के लिए प्रसिद्ध है. यहां कई तरह की पेंटिंग शैलियां हैं. मेवाड़, कोटा, बूंदी, मारवाड़, बीकानेर और जयपुर शैलियां लघु चित्रकला शैलियां हैं. साथ ही राजस्थान की बनी मिठाइयां भी विश्वविख्यात हैं. राज्य का घेवर बहुत प्रसिद्ध है. राजस्थान का सबसे बड़ा ज़िला कौन सा है? क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य है और राजस्थान का सबसे ज़िला जैसलमेर है. जैसलमेर का क्षेत्रफल अड़तीस,चार सौ एक किलोग्राममीटर है. पाकिस्तान सीमा से जैसलमेर की सर्वाधिक सीमा लगती है, इस कारण राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज़ से भी यह अहम ज़िला है. ख़ास बात है कि क्षेत्रफल में बड़ा लेकिन आबादी के मुताब़िक जैसलमेर प्रदेश का सबसे छोटा ज़िला है, ज़िले में छः,उनहत्तर,छः सौ उन्नीस आबादी निवास करती है. जैसलमेर का संभागीय मुख्यालय जोधपुर है. जैसलमेर में तनोट माता का मंदिर और रेत के टीलों को देखने के लिए देश और विदेश से सैलानी आते हैं. पाकिस्तान से विस्थापित कई हिंदू परिवार जैसलमेर के अलग-अलग इलाक़ों में रहते हैं. राजस्थान का सबसे छोटा ज़िला कौन? मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश राज्यों की सीमा से सटा राजस्थान का धौलपुर तीन,चौंतीस किलोग्राममीटर क्षेत्र में बसा सबसे छोटा ज़िला है. चंबल नदी के किनारे बसे धौलपुर की आबादी क़रीब बारह लाख है जो उत्तर प्रदेश के आगरा और मध्य प्रदेश के ग्वालियर से जुड़ता है. धौलपुर में पत्थर की खानों से निकला लाल पत्थर विश्वभर में प्रसिद्ध है. इसलिए इस ज़िले को रेड स्टोन सिटी के नाम से भी जाना जाता है. देश की कई ईमारतों में धौलपुर का ही पत्थर लगा हुआ है. राज्य में सबसे कम लिंगानुपात वाला ज़िला भी धौलपुर है. दो हज़ार ग्यारह की जनगणना के मुताबिक़ यहां लिंगानुपात आठ सौ छियालीस है. धौलपुर में देश की सबसे बड़ी बारूद फ़ैक्ट्री है और यहां से बीहड़ों के कुख्यात कई डकैतों की कहानियां भी जुड़ी हैं. राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का घर भी धौलपुर ज़िले में है. राजस्थान का सबसे पुराना गांव कौन? अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सटे जैसलमेर ज़िले में कुलधरा गांव सबसे पुराना गांव है. माना जाता है कि यह गांव दो सौ साल से वीरान है. इस गांव के लोग रातों रात गांव छोड़ कर चले गए, फिर कभी नहीं लौटे, और न ही कुलधरा गांव फिर कभी बसा. लोग गांव छोड़ कर क्यों गए इसके पीछे तत्कालीन जैसलमेर रियासत के दीवान सालिम सिंह से जुड़ी एक कहानी प्रचलित है. इस गांव को देखने के लिए हज़ारों पर्यटक पहुंचते हैं. वर्तमान में कुलधरा गांव पुरातत्व विभाग की देखरेख में है. राजस्थान का राजकीय पक्षी कौन है? राजस्थान का प्रसिद्ध और राज्य पक्षी गोडावण है. इसे अंग्रेज़ी भाषा में 'ग्रेट इंडियन बस्टर्ड' कहा जाता है. साल एक हज़ार नौ सौ इक्यासी में गोडावण को राज्य पक्षी घोषित किया गया था. यह पक्षी शुतुर्मुर्ग की तरह दिखता है. लंबी गर्दन और लंबी टांगों वाले इस पक्षी की लंबाई लगभग एक मीटर होती है. इसके शरीर का रंग भूरा होता है, पंखों पर काले, भूरे और सिलेटी रंग के निशान होते हैं. जैसलमेर, बांरा और अजमेर में ये सर्वाधिक देखा जाता है. उड़ने वाले पक्षियों में गोडावण सबसे भारी होता है. गोडावण की संख्या बेहद कम बची है, यह विलुप्त होने के कग़ार पर है. राजस्थान का सबसे ठंड़ा ज़िला कौन सा है? गर्मियों के दिनों में राजस्थान के जोधपुर का फ़लौदी अपने अधिकतम तापमान को लेकर देश भर में ख़ूब सुर्खियों में रहता है. उन्नीस मई दो हज़ार सोलह को मौसम विभाग ने यहां अधिकतम तापमान इक्यावन डिग्री रिकॉर्ड किया था. यहां गर्मी ही नहीं बल्क़ि ठंडे शहर की बात करें तो माउंट आबू सबसे ठंड़ा रहता है, जो अरावली पर्वतमाला में बसा एक ख़ूबसूरत शहर है. बीती सर्दियों में यहां तापमान माइनस छः डिग्री तक पहुंच गया था. सिरोही ज़िले में माउंट आबू को गर्मियों की राजधानी भी कहा जाता है. गर्मियों में जब राज्य के कई इलाक़ों में तापमान पैंतालीस डिग्री पहुंच जाता है, जब माउंट आबू में औसत तापमान चौंतीस डिग्री के क़रीब रहता है. माउंट आबू की सबसे ऊंची चोटी गुरु शिखर समुद्र तल से एक हज़ार सात सौ बाईस मीटर ऊंचाई पर है. देश विदेश से पर्यटक माउंट आबू की ख़ूबसूरती देखने पहुंचते हैं. सिरोही गुजरात से भी सटा हुआ है इसलिए गुजरात से भी बड़ी संख्या में माउंट आबू आते हैं. राजस्थान का राजकीय वृक्ष कौन सा है? खेजड़ी, यह राजस्थान का राजकीय वृक्ष है. खेजड़ी को राजस्थान का कल्प वृक्ष भी कहते हैं. इसका साइंटिफिक नाम 'प्रोसेसिप-सिनेरेरिया' है. खेजड़ी वृक्ष की आयु पांच हज़ार साल मानी जाती है. राज्य के शेखावाटी और नागौर में अधिक संख्या में खेजड़ी के वृक्ष मिलते हैं. बारह सितंबर एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर से बारह सितंबर को खेजड़ी दिवस मनाने की शुरुआत हुई. अमृतादेवी विश्नोई ने तीन सौ तिरेसठ लोगों के साथ जोधपुर के खेजड़ली गांव में खेजड़ी वृक्ष को बचाने के लिए अपना बलिदान दिया. खेजड़ी में हरी फली आती हैं, इन्हें सांगरी कहते हैं. सांगरी की सब्जी बनाई जाती है. सूखी फली और पत्तियां पशुओं के चारे में काम आता है. राजस्थान का सबसे बड़ा शहर कौन? राजस्थान की राजधानी जयपुर सबसे बड़ा शहर है. जयपुर छोटी काशी और गुलाबी नगरी के नाम से भी पहचान रखता है. यह शहर तीन ओर से अरावली पर्वतमाला से घिरा हुआ है. जयपुर शहर की आबादी पैंतीस लाख से ज़्यादा है और यह शहर चार सौ चौरासी वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है. जनसंख्या के आधार पर जोधपुर और क्षेत्रफल के आधार पर कोटा दूसरे नंबर पर आते हैं. जयपुर की स्थापना एक हज़ार सात सौ सत्ताईस में महाराजा जयसिंह ने की थी. जयपुर में धातु, संगमरमर, कपड़े की छपाई, हस्तकला, रत्न व आभूषण का आयात-निर्यात होता है. सांभर झील का नाम तो आपने सुना ही होगा. राजस्थान में खारे पानी की सबसे बड़ी झील है. देश को मिलने वाले नमक़ में सांभर का बड़ा योगदान है. यह जयपुर शहर से क़रीब अस्सी किलोग्राममीटर दूर है. इसका क्षेत्रफल लगभग एक सौ नब्बे से दो सौ तीस वर्ग किलोमीटर है. राज्य में कुल छह ज़िलों में खारे पानी की झीलें हैं. जयपुर में सांभर, बाड़मेर में पचपदरा झील, जोधपुर में फ़लौदी झील, नागौर में डीडवाना झील, बीकानेर में लूणकरणसर झील और जैसलमेर में कावोद झील. राज्य के उदयपुर ज़िले को झीलों की नगरी कहा जाता है. राज्य में सबसे ज़्यादा झीलें उदयपुर में ही हैं. उदयपुर की फतेहसागर झील, जयसमंद और पिछौला झील हैं. उदयपुर की झीलें मानव निर्मित झीले हैं. सिरोही ज़िले के माउंट आबू में नक्की झील और अजमेर की पुष्कर झील भी मीठे पानी की झील हैं. राजस्थान का प्रशासनिक ढांचा क्या है? राजस्थान सात संभाग में बंटा हुआ है, जिसमें फिलहाल तैंतीस ज़िले हैं. राजस्थान में दो सौ विधानसभा सीटें हैं. राज्य पच्चीस लोकसभा सांसद चुनकर देश की संसद में भेजता है और दस राज्यसभा सांसद सीटें हैं. राज्य में दस नगर निगम, चौंतीस नगर परिषद, एक सौ तिहत्तर नगर पालिकाएं हैं. राज्य में तैंतीस ज़िला परिषद, तीन सौ बावन पंचायत समितियां और ग्यारह,तीन सौ चार ग्राम पंचायतें हैं. राज्य में तीन सौ पाँच उपखंड, तीन सौ उनहत्तर तहसील, एक सौ छियासी उप-तहसील, दस,आठ सौ तैंतीस पटवार मंडल, सैंतालीस, दो सौ उनतीस गांव, तीन विकास प्राधिकरण हैं.
भोपाल। लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने आज मध्य प्रदेश की 12 सीटों के लिए उम्मीदवारों की एक और सूची जारी कर दी है। लोकसभा सीटों के उम्मीदवारों के अलावा कांग्रेस ने छिंदवाड़ा विधानसभा सीट के लिए होने वाले उप चुनाव के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ को उम्मीदवार घोषित कर दिया है। खास बात यह है कि सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की उम्मीदवारी की घोषणा इस सूची में भी नही की गई है। यही नही पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष राजेन्द्र सिंह को भी सतना से टिकिट नही दिया गया है। कांग्रेस ने प्रदेश की जिन 12 सीटों पर उम्मीदवारों का नाम का ऐलान किया है उनमें सागर, दमोह, सतना, रीवा, सीधी, जबलपुर, मंडला, छिंदवाड़ा, देवास, उज्जैन, खरगोन, खंडवा सीट पर प्रत्याशी घोषित कर दिए गए हैं। जबकि गुना, ग्वालियर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, सीट को अब भी होल्ड पर रखा गया है। यह भी दिलचस्प तथ्य है कि कांग्रेस ने जिन आठ सीटों को होल्ड पर रखा है, उनमें लगभग सीटें सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रभाव वाली हैं। इन सीटों पर उम्मीदवार चयन को लेकर सांसद सिंधिया और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह अपने-अपने समर्थक उम्मीदवार को घोषित कराने के लिए जोर लगा रहे हैं। कांग्रेस की केन्द्रीय चुनाव समिति द्वारा जारी सूची में छिंदवाड़ा से नकुल नाथ, सागर से प्रभु सिंह ठाकुर, दमोह से प्रताप सिंह लोधी, सतना से राजाराम त्रिपाठी, सीधी से अजय सिंह राहुल, जबलपुर से विवेक तंखा, मंडला से कमल मरावी, खण्डवा से अरुण यादव, उज्जैन से बाबूलाल मालवीय, खरगोन से गोविन्द मुजाल्दा, रीवा से सिद्धार्थ तिवारी, देवास से प्रह्लाद टिपानिया को टिकट मिला है। गुना, ग्वालियर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, भिंड मुरैना पर अब भी संशय बरकरार है।
भोपाल। लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने आज मध्य प्रदेश की बारह सीटों के लिए उम्मीदवारों की एक और सूची जारी कर दी है। लोकसभा सीटों के उम्मीदवारों के अलावा कांग्रेस ने छिंदवाड़ा विधानसभा सीट के लिए होने वाले उप चुनाव के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ को उम्मीदवार घोषित कर दिया है। खास बात यह है कि सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की उम्मीदवारी की घोषणा इस सूची में भी नही की गई है। यही नही पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष राजेन्द्र सिंह को भी सतना से टिकिट नही दिया गया है। कांग्रेस ने प्रदेश की जिन बारह सीटों पर उम्मीदवारों का नाम का ऐलान किया है उनमें सागर, दमोह, सतना, रीवा, सीधी, जबलपुर, मंडला, छिंदवाड़ा, देवास, उज्जैन, खरगोन, खंडवा सीट पर प्रत्याशी घोषित कर दिए गए हैं। जबकि गुना, ग्वालियर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, सीट को अब भी होल्ड पर रखा गया है। यह भी दिलचस्प तथ्य है कि कांग्रेस ने जिन आठ सीटों को होल्ड पर रखा है, उनमें लगभग सीटें सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रभाव वाली हैं। इन सीटों पर उम्मीदवार चयन को लेकर सांसद सिंधिया और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह अपने-अपने समर्थक उम्मीदवार को घोषित कराने के लिए जोर लगा रहे हैं। कांग्रेस की केन्द्रीय चुनाव समिति द्वारा जारी सूची में छिंदवाड़ा से नकुल नाथ, सागर से प्रभु सिंह ठाकुर, दमोह से प्रताप सिंह लोधी, सतना से राजाराम त्रिपाठी, सीधी से अजय सिंह राहुल, जबलपुर से विवेक तंखा, मंडला से कमल मरावी, खण्डवा से अरुण यादव, उज्जैन से बाबूलाल मालवीय, खरगोन से गोविन्द मुजाल्दा, रीवा से सिद्धार्थ तिवारी, देवास से प्रह्लाद टिपानिया को टिकट मिला है। गुना, ग्वालियर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, भिंड मुरैना पर अब भी संशय बरकरार है।
शर्माए भालू, ये डरपोक लड़ाकू सिपाही जो व्हेल का शिकार करते हैं । लेकिन क्वीकेग को देखो । वह सबका सभापति वना, उनके बीच में क्यों बैठ गया ? मौके की बात है । लेकिन वह ऐसा चुप और शीतल बैठा है जैसे वर्फ की नोकीली चट्टान । वह किस जाति का है मैं कुछ कह नहीं सकता । उसका बड़े से बड़ा प्रशंसक भी उसकी इस बात में प्रशंसा नहीं कर सकता कि वह नाश्ते की मेज पर अपनी व लेकर बैठा है और बिना किसी औपचारिकता के उसका वहां इस्तेमाल कर रहा है और बहुत-सी खोपड़ियों के भय-शंका के बीच बोटी के टुकडों को उसकी नोक से अपनी ओर खींच रहा है । किन्तु उस कार्य को वह बहुत शान्तिपूर्वक कर रहा है और हरेक यह जानता है कि बहुतों की मान्यता में, जो कार्य शान्तिपूर्वक किया जाता है उसमें विनम्रता की भावना रहती है । क्वीकेग की प्रत्येक विलक्षणता का हम यहां कहां तक वर्णन करेंगे कि कैसे उसने गरम काफी पी और कैसे गरम 'रोल' खाए और कैसे एकाग्र होकर वह मांस की वोटी चबाता रहा ? ऐसा कम ही देखने में आता है। बहुत कुछ निवट जाने पर और नाश्ता समाप्त होने पर वह नौरों की ही भांति पब्लिक-रूम में आ गया, अपना वही हंसिए की शक्ल का पाइप सुलगाया, अपने भोजन को पचाता रहा और तम्बाकू का धुआं उड़ाता रहा तथा कभी न दूर करने वाले टोप को निरन्तर पहने रहा । तभी मैं थोड़ा टहलने के लिए बाहर चला उस अनोखे व्यक्ति क्त्रीकेग को पहली बार देखने पर जो आश्चर्य मुझ हुआ था कि कैसे वह सरल और सभ्य समाज और नगर में घूमता होगा व न्यू बेडफोर्ड की सड़क पर पहली बार, सुबह की धूप में टहलने पर दूर हो गया डॉक' के पास की सड़कों पर टहलते समय किसी भी बन्दरगाह में भांग जलपोत के ठहरने का घाट जो समुद्र के किनारे बना होता है ।
शर्माए भालू, ये डरपोक लड़ाकू सिपाही जो व्हेल का शिकार करते हैं । लेकिन क्वीकेग को देखो । वह सबका सभापति वना, उनके बीच में क्यों बैठ गया ? मौके की बात है । लेकिन वह ऐसा चुप और शीतल बैठा है जैसे वर्फ की नोकीली चट्टान । वह किस जाति का है मैं कुछ कह नहीं सकता । उसका बड़े से बड़ा प्रशंसक भी उसकी इस बात में प्रशंसा नहीं कर सकता कि वह नाश्ते की मेज पर अपनी व लेकर बैठा है और बिना किसी औपचारिकता के उसका वहां इस्तेमाल कर रहा है और बहुत-सी खोपड़ियों के भय-शंका के बीच बोटी के टुकडों को उसकी नोक से अपनी ओर खींच रहा है । किन्तु उस कार्य को वह बहुत शान्तिपूर्वक कर रहा है और हरेक यह जानता है कि बहुतों की मान्यता में, जो कार्य शान्तिपूर्वक किया जाता है उसमें विनम्रता की भावना रहती है । क्वीकेग की प्रत्येक विलक्षणता का हम यहां कहां तक वर्णन करेंगे कि कैसे उसने गरम काफी पी और कैसे गरम 'रोल' खाए और कैसे एकाग्र होकर वह मांस की वोटी चबाता रहा ? ऐसा कम ही देखने में आता है। बहुत कुछ निवट जाने पर और नाश्ता समाप्त होने पर वह नौरों की ही भांति पब्लिक-रूम में आ गया, अपना वही हंसिए की शक्ल का पाइप सुलगाया, अपने भोजन को पचाता रहा और तम्बाकू का धुआं उड़ाता रहा तथा कभी न दूर करने वाले टोप को निरन्तर पहने रहा । तभी मैं थोड़ा टहलने के लिए बाहर चला उस अनोखे व्यक्ति क्त्रीकेग को पहली बार देखने पर जो आश्चर्य मुझ हुआ था कि कैसे वह सरल और सभ्य समाज और नगर में घूमता होगा व न्यू बेडफोर्ड की सड़क पर पहली बार, सुबह की धूप में टहलने पर दूर हो गया डॉक' के पास की सड़कों पर टहलते समय किसी भी बन्दरगाह में भांग जलपोत के ठहरने का घाट जो समुद्र के किनारे बना होता है ।
मलयालम सिनेमा के जाने माने अभिनेता मोहम्मद की आगामी फिल्म 'हलाल लव स्टोरी' का दूसरा लुक पोस्टर सोशल मीडिया पर लॉन्च किया गया है। इसके साथ ही स्टार-स्टड पोस्टर में सभी मुख्य पात्रों को अलग-अलग भावनाओं को चित्रित करते हुए दिखाया गया है। वहीं पोस्टर में अभिनेता इंद्रजीत, शराफुद्दीन, सौबिन, जोजू जॉर्ज, ग्रेस एंटनी और कुछ अन्य सहायक कलाकार दिखाए गए हैं। इसके साथ ही फिल्म में एक विस्तारित कैमियो निभा रही अभिनेत्री पार्वती भी पोस्टर में नजर आ रही हैं। इसके साथ ही नाइजीरिया से लोकप्रिय और समीक्षकों द्वारा प्रशंसित फिल्म सुदानी के निर्देशक, ज़कारिया मुहम्मद 'हलाल लव स्टोरी' के लिए मेगाफोन का निर्माण कर रहे हैं। खबरों के अनुसार , फिल्म हलाल शब्द के अर्थ को सरल तरीके से दर्शकों को समझाती है। इसके साथ ही मार्क्स हलाल लव स्टोरी 'नाइजीरिया से नाइजीरिया सूडानी' के दूसरे संयुक्त उद्यम डुओ, निर्देशक ज़कारिया मोहम्मद और लेखक मुशिन परारी को चिह्नित करती है। वहीं तकनीकी दल में सिनेमैटोग्राफी के लिए अजय मेनन और संपादन के लिए सायजु श्रीधरन मौजूद हैं। इसके साथ ही संगीत बिजिबल और शाहबास अमन द्वारा है। हलाल लव स्टोरी आशिक अबू, जेसना आशिम और हर्षद अली द्वारा नियंत्रित है। वहीं कुछ राजनीतिक संवादों के साथ एक कॉमेडी एंटरटेनर बनने की कोशिश में मौजूद है। 'हलाल लव स्टोरी' 27 मार्च को बड़े पर्दे पर हिट होने की उम्मीद है, एक विशु रिलीज के रूप में है।
मलयालम सिनेमा के जाने माने अभिनेता मोहम्मद की आगामी फिल्म 'हलाल लव स्टोरी' का दूसरा लुक पोस्टर सोशल मीडिया पर लॉन्च किया गया है। इसके साथ ही स्टार-स्टड पोस्टर में सभी मुख्य पात्रों को अलग-अलग भावनाओं को चित्रित करते हुए दिखाया गया है। वहीं पोस्टर में अभिनेता इंद्रजीत, शराफुद्दीन, सौबिन, जोजू जॉर्ज, ग्रेस एंटनी और कुछ अन्य सहायक कलाकार दिखाए गए हैं। इसके साथ ही फिल्म में एक विस्तारित कैमियो निभा रही अभिनेत्री पार्वती भी पोस्टर में नजर आ रही हैं। इसके साथ ही नाइजीरिया से लोकप्रिय और समीक्षकों द्वारा प्रशंसित फिल्म सुदानी के निर्देशक, ज़कारिया मुहम्मद 'हलाल लव स्टोरी' के लिए मेगाफोन का निर्माण कर रहे हैं। खबरों के अनुसार , फिल्म हलाल शब्द के अर्थ को सरल तरीके से दर्शकों को समझाती है। इसके साथ ही मार्क्स हलाल लव स्टोरी 'नाइजीरिया से नाइजीरिया सूडानी' के दूसरे संयुक्त उद्यम डुओ, निर्देशक ज़कारिया मोहम्मद और लेखक मुशिन परारी को चिह्नित करती है। वहीं तकनीकी दल में सिनेमैटोग्राफी के लिए अजय मेनन और संपादन के लिए सायजु श्रीधरन मौजूद हैं। इसके साथ ही संगीत बिजिबल और शाहबास अमन द्वारा है। हलाल लव स्टोरी आशिक अबू, जेसना आशिम और हर्षद अली द्वारा नियंत्रित है। वहीं कुछ राजनीतिक संवादों के साथ एक कॉमेडी एंटरटेनर बनने की कोशिश में मौजूद है। 'हलाल लव स्टोरी' सत्ताईस मार्च को बड़े पर्दे पर हिट होने की उम्मीद है, एक विशु रिलीज के रूप में है।
Donkeys In Pakistan: पाकिस्तान में गधों की संख्या काफी बढ़ रही है। एक साल में ही देश में गधों की संख्या में इजाफा हुआ है। ऐसे में मन में यह सवाल आना लाज़िमी है कि क्या इन गधों से देश को फायदा भी होता है? आइए जानते हैं। पाकिस्तान (Pakistan) में सिर्फ महंगाई ही नहीं बढ़ रही, एक और चीज़ भी है जो बढ़ रही है। और वो है गधों की संख्या। पाकिस्तान में बड़ी संख्या में गधे पाए जाते हैं और यह आज से नहीं, काफी समय से है। पर पिछले कुछ समय में पाकिस्तान में गधों की संख्या में तेज़ी से इजाफा हुआ है। हाल ही में आई एक रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान में पिछले एक साल में तेज़ी से गधे बढ़े हैं। आज के इस समय में पाकिस्तान में कई लोगों के पास गधे पाए जाते हैं और इसे काफी सामान्य भी माना जाता है।
Donkeys In Pakistan: पाकिस्तान में गधों की संख्या काफी बढ़ रही है। एक साल में ही देश में गधों की संख्या में इजाफा हुआ है। ऐसे में मन में यह सवाल आना लाज़िमी है कि क्या इन गधों से देश को फायदा भी होता है? आइए जानते हैं। पाकिस्तान में सिर्फ महंगाई ही नहीं बढ़ रही, एक और चीज़ भी है जो बढ़ रही है। और वो है गधों की संख्या। पाकिस्तान में बड़ी संख्या में गधे पाए जाते हैं और यह आज से नहीं, काफी समय से है। पर पिछले कुछ समय में पाकिस्तान में गधों की संख्या में तेज़ी से इजाफा हुआ है। हाल ही में आई एक रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान में पिछले एक साल में तेज़ी से गधे बढ़े हैं। आज के इस समय में पाकिस्तान में कई लोगों के पास गधे पाए जाते हैं और इसे काफी सामान्य भी माना जाता है।
Shukra Gochar 2023: 30 मई की शाम 7 बजकर 40 मिनट पर शुक्र कर्क राशि में प्रवेश करेंगे और 6 जुलाई को पूरा दिन पार कर भोर 4 बजकर 5 मिनट तक कर्क राशि में ही गोचर करते रहेंगे। उसके बाद सिंह राशि में प्रवेश कर जाएंगे भारतीय ज्योतिष के अनुसार शुक्र एक जलीय ग्रह है। अंग्रेजी में इसे वीनस कहते हैं और आकाश में पांच सितारों का समूह शुक्र ग्रह का प्रतीक माना जाता है, जिसे पंचकोण सितारा भी कहते हैं। शुक्र के इस गोचर से विभिन्न राशि वालों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ेगा। आइए आचार्य इंदु प्रकाश से जानते हैं शुक्र के इस गोचर से सभी राशियों पर क्या प्रभाव होगा साथ ही जानिए शुक्र उनकी जन्मपत्रिका में किस स्थान पर गोचर करेगा और उस स्थिति में क्या उपाय करने चाहिए। शुक्र आपके चौथे स्थान पर गोचर करेंगे। यह स्थान भूमि, भवन और वाहन का होता है। लिहाजा 6 जुलाई तक आपको भूमि, भवन और वाहन से संबंधित सुख की प्राप्ति होगी। आपको अपनी मेहनत का फल जरूर मिलेगा। इस दौरान मस्तमौला लोगों से आपकी दोस्ती बढ़ेगी। साथ ही 6 जुलाई तक आपको एकस्ट्रा मैरिटल रिलेशन के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता है। लिहाजा शुक्र के शुभ फल सुनिश्चित करने के लिए और अशुभ फलों से बचने के लिए गोचर के दौरान घर के मन्दिर में कपूर का दीपक जलाएं। शुक्र आपके तीसरे स्थान पर गोचर करेंगे। जन्मपत्रिका के तीसरे स्थान का सम्बन्ध हमारे पराक्रम, भाई-बहन तथा यश से है। शुक्र के इस गोचर से आपको अपने भाई-बहनों का सहयोग मिलेगा। दूसरों के सामने आप अपनी बात को बेहतर ढंग से रख पाएंगे। साथ ही आपको अपने माता-पिता से भी सुख की प्राप्ति होगी। उनसे आपको अपने हर कार्य में सहयोग प्राप्त होगा। अगर आप 6 जुलाई तक किसी धार्मिक स्थल की यात्रा पर जाते हैं, तो इससे आपको अच्छा फील होगा और आप नई चीजों पर काम कर पाएंगे। लिहाजा शुक्र के शुभ फलों को और भी शुभ बनाने के लिए घर की अपनी से रिश्ते में बड़ी महिलाओं के रोज पैर छूकर आशीर्वाद लें और प्रत्येक महिला का सम्मान करें। शुक्र आपके दूसरे स्थान पर गोचर करेंगे। जन्मपत्रिका के दूसरे स्थान का सम्बन्ध हमारे धन तथा स्वभाव से है। शुक्र के इस गोचर से आपको धन लाभ होगा। आपकी आमदनी में बढ़ोतरी होगी और सांसारिक सुख पाने में आपको आसानी होगी। अब से 6 जुलाई तक उन लोगों को बहुत अधिक फायदा होगा, जो पशुपालन या कच्ची मिट्टी के काम से जुड़े हुए हैं, जैसे कुम्हार वगैरह। आपको इस दौरान सन्तान सुख का भी आनन्द मिलेगा। अतः शुक्र के शुभ फल सुनिश्चित करने के लिए 6 जुलाई तक गोचर के मन्दिर में गाय के घी का दीपक जलाएं और भगवान का आशीर्वाद लें। शुक्र आपके पहले स्थान, यानी लग्न स्थान पर गोचर करेंगे। जन्मपत्रिका में लग्न यानि पहले स्थान का सम्बन्ध हमारे शरीर तथा मुख से है। शुक्र के इस गोचर से परिस्थियां लगभग आपके अनुकुल बनी रहेंगी। आपको नौकरी में उचित पद प्राप्त होगा। साथ ही वाहन आदि का सुख भी आपको मिलेगा। अगर आप अपने लिये जीवनसाथी की तलाश में हैं, तो आपके लिए जल्द ही बेहतर रिश्ते आयेंगे। हालांकि अब से 6 जुलाई तक आपको अपने जीवनसाथी के स्वास्थ्य का ख्याल जरूर रखना चाहिए। लिहाजा शुक्र की अशुभ स्थिति से बचने के लिए और शुभ फल सुनिश्चित करने के लिए 6 जुलाई तक भोजन में गुड़ खाना अवॉयड करें। साथ ही जीवनसाथी की अच्छी सेहत के लिए मन्दिर में सतनाज का दान करें। शुक्र आपके बारहवें स्थान पर गोचर करेंगे। जन्मपत्रिका के बारहवें स्थान का सम्बन्ध आपके व्यय तथा शय्या सुख से है। शुक्र के इस गोचर से आपको शैय्या सुख पाने के लिए कोशिशें जारी रखनी होंगी। साथ ही आपको अपने जीवनसाथी के स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखने की जरूरत है। 6 जुलाई तक आपको अपने कार्यों के लिए खुद ही कदम उठाना पड़ेगा। किसी और से ज्यादा उम्मीदें लगाकर न रखें। इस बीच आपको धन लाभ भी होगा, लेकिन आपको अपने खर्चों पर कंट्रोल करके रखना चाहिए। साथ ही शुभ स्थिति सुनिश्चित करने के लिए और अशुभ फलों से बचने के लिए घर की महिला एक नीला फूल लेकर अपने हाथों से घर से दूर किसी विरानी जगह में दबा दें। इससे आपकी जो भी परेशानियां होगी, वो जल्द ही दूर होंगी। शुक्र आपके ग्यारहवें स्थान पर गोचर करेंगे। जन्मपत्रिका के ग्यारहवें स्थान का सम्बन्ध हमारे आय तथा इच्छाओं की पूर्ति से होता है। शुक्र के इस गोचर से आप चतुर होंगे। हालांकि आपको अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए मेहनत जारी रखनी होगी, मेहनत रंग जरूर लायेगी। इसके अलावा 6 जुलाई तक आप अपने विचारों पर काबू पाने में असफल होंगे। एक काम को लेकर बार-बार आपके विचारों में बदलाव आते रहेंगे। आप दूसरों से छिपकर काम करने की भी कोशिश करेंगे। शुक्र के अशुभ फलों से बचने के लिये और शुभ फल सुनिश्चित करने के लिए मन्दिर में ज्योत के लिये रूई का दान करें। इससे आपको शुभ फलों की प्राप्ति होगी। शुक्र आपके दसवें स्थान पर गोचर करेंगे। जन्मपत्रिका के दसवें स्थान का सम्बन्ध हमारे करियर, राज्य तथा पिता से होता है। शुक्र के इस गोचर से आपको अपने करियर में सफलता मिलेगी। आप जो चाहेंगे, वो पूरा होगा। 6 जुलाई तक आपके साथ-साथ आपके पिता की भी तरक्की सुनिश्चित होगी। आपको अपने जीवनसाथी से पूरा सुख मिलेगा और उनका स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। धर्म-कर्म के कार्यों में आपकी रुचि बढ़ेगी। साथ ही आपको वाहन आदि का सुख भी प्राप्त होगा और आपको किसी प्रकार का भय नहीं होगा। लिहाजा शुक्र के शुभ फल सुनिश्चित करने के लिए और अशुभ फलों से बचने के लिए शुक्रवार के दिन मन्दिर में दही का दान करें। शुक्र आपके नवें स्थान पर गोचर करेंगे। जन्मपत्रिका के नौवें स्थान का सम्बन्ध हमारे भाग्य से होता है। शुक्र के इस गोचर से आपको अपने भाग्य का पूरा सहयोग मिलेगा। आपके मनचाहे कार्य पूरे होंगे। साथ ही आपकी बौद्धिक क्षमता में बढ़ोतरी होगी। बुजुर्गों को धन लाभ होगा। 6 जुलाई तक किसी तीर्थ यात्रा पर जाना आपके लिये शुभ फल देने वाला होगा। हालांकि आपको अपनी बेहतरी के लिए मेहनत जारी रखनी होगी। साथ ही संतान से सुख पाने के लिए भी आपको कोशिश करनी होगी। शुक्र के अशुभ फलों से बचने के लिए और शुभ फल सुनिश्चित करने के लिए इस दौरान घर के बाहर जमीन में थोड़ा-सा शहद दबाएं। इससे आपके शुभ फल सुनिश्चित होंगे। शुक्र आपके आठवें स्थान पर गोचर करेंगे। जन्मपत्रिका के आठवें स्थान सम्बन्ध हमरे आयु से है। शुक्र के इस गोचर से 6 जुलाई तक आपका स्वास्थ्य बेहतर रहेगा, लेकिन आपको अपने खाने-पीने को लेकर सतर्क रहना होगा। इसके अलावा शुक्र के इस गोचर के प्रभाव से आप किसी से किया हुआ वायदा जरूर पूरा करेंगे और अपनी बात का मान रखने में सफल होंगे। हालांकि 6 जुलाई तक आपको अपने जीवनसाथी की सेहत का ख्याल रखना चाहिए और दूसरों के लड़ाई-झगड़ों में पड़ने से बचने की कोशिश करनी चाहिए। साथ ही इस दौरान किसी से भी कोई चीज़ उधार लेना अवॉयड करें। अतः शुक्र की अशुभ स्थिति से बचने के लिए और शुभ फल सुनिश्चित करने के लिए मन्दिर में ज्वार का दान करें । साथ ही अपने ईष्ट देव के सामने रोज सिर झुकाएं। इससे आपके शत्रु कमजोर पड़ेंगे। शुक्र आपके सातवें स्थान पर गोचर करेंगे। जन्मपत्रिका के सातवें स्थान का सम्बन्ध हमारे जीवनसाथी से है। शुक्र के इस गोचर से आपके और आपके जीवनसाथी के बीच तालमेल बना रहेगा और रिश्तों में मजबूती आएगी। इस बीच आपको परिवार का पूरा सुख मिलेगा। साथ ही धन लाभ भी होगा। संतान के साथ भी रिश्ते बेहतर होंगे। 6 जुलाई तक के बीच आपको बिजनेस या किसी अन्य काम से संबंधित महत्वपूर्ण यात्राएं भी करनी पड़ सकती है। लिहाजा शुक्र के शुभ फल सुनिश्चित करने के लिए 6 जुलाई तक पड़ने वाले किसी भी शुक्रवार के दिन मन्दिर में किसी एक कांसे का बर्तन दान करें। शुक्र आपके छठे स्थान पर गोचर करेंगे। जन्मपत्रिका के छठे स्थान का सम्बन्ध हमारे मित्र, शत्रु तथा स्वास्थ्य से है। शुक्र के इस गोचर से आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। आपको अपने मित्रों से पूरा सहयोग मिलेगा। इस बीच आपके कुछ नये मित्र भी बन सकते हैं, लेकिन इस मामले में थोड़ा सावधान रहने की जरूरत है। इसके अलावा आपकी सांसारिक स्थिति अच्छी रहेगी और आपके भाईयों की तरक्की भी सुनिश्चित होगी। शुक्र के शुभ फल सुनिश्चित करने के लिए और अशुभ फलों से बचने के लिए घर की महिला अपने बालों में सोने या गोल्डन कलर का हेयर क्लिप लगाकर रखें। इससे आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। शुक्र आपके पांचवें स्थान पर गोचर करेंगे। जन्मपत्रिका के पांचवे स्थान का सम्बन्ध हमारे संतान, बुद्धि, विवेक और रोमांस से है शुक्र के इस गोचर से आपको सब तरह का सुख प्राप्त होगा। गुरु के सहयोग से आप जीवन में तरक्की करेंगे। आपकी लव लाइफ अच्छी रहेगी। साथ ही धर्म के प्रति आपकी आस्था बढ़ेगी और परिवार में प्यार बना रहेगा। इस दौरान आपको अलग-अलग सौन्दर्य प्रसाधनों को इकट्ठा करके रखने की इच्छा होगी। शुक्र के अशुभ फलों से बचने के लिए और शुभ फल सुनिश्चित करने के लिए गाय को उबले हुए आलू, ठंडा करके खिलाएं। साथ ही माता की सेवा करें। इससे आपकी तरक्की ही तरक्की होगी।
Shukra Gochar दो हज़ार तेईस: तीस मई की शाम सात बजकर चालीस मिनट पर शुक्र कर्क राशि में प्रवेश करेंगे और छः जुलाई को पूरा दिन पार कर भोर चार बजकर पाँच मिनट तक कर्क राशि में ही गोचर करते रहेंगे। उसके बाद सिंह राशि में प्रवेश कर जाएंगे भारतीय ज्योतिष के अनुसार शुक्र एक जलीय ग्रह है। अंग्रेजी में इसे वीनस कहते हैं और आकाश में पांच सितारों का समूह शुक्र ग्रह का प्रतीक माना जाता है, जिसे पंचकोण सितारा भी कहते हैं। शुक्र के इस गोचर से विभिन्न राशि वालों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ेगा। आइए आचार्य इंदु प्रकाश से जानते हैं शुक्र के इस गोचर से सभी राशियों पर क्या प्रभाव होगा साथ ही जानिए शुक्र उनकी जन्मपत्रिका में किस स्थान पर गोचर करेगा और उस स्थिति में क्या उपाय करने चाहिए। शुक्र आपके चौथे स्थान पर गोचर करेंगे। यह स्थान भूमि, भवन और वाहन का होता है। लिहाजा छः जुलाई तक आपको भूमि, भवन और वाहन से संबंधित सुख की प्राप्ति होगी। आपको अपनी मेहनत का फल जरूर मिलेगा। इस दौरान मस्तमौला लोगों से आपकी दोस्ती बढ़ेगी। साथ ही छः जुलाई तक आपको एकस्ट्रा मैरिटल रिलेशन के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता है। लिहाजा शुक्र के शुभ फल सुनिश्चित करने के लिए और अशुभ फलों से बचने के लिए गोचर के दौरान घर के मन्दिर में कपूर का दीपक जलाएं। शुक्र आपके तीसरे स्थान पर गोचर करेंगे। जन्मपत्रिका के तीसरे स्थान का सम्बन्ध हमारे पराक्रम, भाई-बहन तथा यश से है। शुक्र के इस गोचर से आपको अपने भाई-बहनों का सहयोग मिलेगा। दूसरों के सामने आप अपनी बात को बेहतर ढंग से रख पाएंगे। साथ ही आपको अपने माता-पिता से भी सुख की प्राप्ति होगी। उनसे आपको अपने हर कार्य में सहयोग प्राप्त होगा। अगर आप छः जुलाई तक किसी धार्मिक स्थल की यात्रा पर जाते हैं, तो इससे आपको अच्छा फील होगा और आप नई चीजों पर काम कर पाएंगे। लिहाजा शुक्र के शुभ फलों को और भी शुभ बनाने के लिए घर की अपनी से रिश्ते में बड़ी महिलाओं के रोज पैर छूकर आशीर्वाद लें और प्रत्येक महिला का सम्मान करें। शुक्र आपके दूसरे स्थान पर गोचर करेंगे। जन्मपत्रिका के दूसरे स्थान का सम्बन्ध हमारे धन तथा स्वभाव से है। शुक्र के इस गोचर से आपको धन लाभ होगा। आपकी आमदनी में बढ़ोतरी होगी और सांसारिक सुख पाने में आपको आसानी होगी। अब से छः जुलाई तक उन लोगों को बहुत अधिक फायदा होगा, जो पशुपालन या कच्ची मिट्टी के काम से जुड़े हुए हैं, जैसे कुम्हार वगैरह। आपको इस दौरान सन्तान सुख का भी आनन्द मिलेगा। अतः शुक्र के शुभ फल सुनिश्चित करने के लिए छः जुलाई तक गोचर के मन्दिर में गाय के घी का दीपक जलाएं और भगवान का आशीर्वाद लें। शुक्र आपके पहले स्थान, यानी लग्न स्थान पर गोचर करेंगे। जन्मपत्रिका में लग्न यानि पहले स्थान का सम्बन्ध हमारे शरीर तथा मुख से है। शुक्र के इस गोचर से परिस्थियां लगभग आपके अनुकुल बनी रहेंगी। आपको नौकरी में उचित पद प्राप्त होगा। साथ ही वाहन आदि का सुख भी आपको मिलेगा। अगर आप अपने लिये जीवनसाथी की तलाश में हैं, तो आपके लिए जल्द ही बेहतर रिश्ते आयेंगे। हालांकि अब से छः जुलाई तक आपको अपने जीवनसाथी के स्वास्थ्य का ख्याल जरूर रखना चाहिए। लिहाजा शुक्र की अशुभ स्थिति से बचने के लिए और शुभ फल सुनिश्चित करने के लिए छः जुलाई तक भोजन में गुड़ खाना अवॉयड करें। साथ ही जीवनसाथी की अच्छी सेहत के लिए मन्दिर में सतनाज का दान करें। शुक्र आपके बारहवें स्थान पर गोचर करेंगे। जन्मपत्रिका के बारहवें स्थान का सम्बन्ध आपके व्यय तथा शय्या सुख से है। शुक्र के इस गोचर से आपको शैय्या सुख पाने के लिए कोशिशें जारी रखनी होंगी। साथ ही आपको अपने जीवनसाथी के स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखने की जरूरत है। छः जुलाई तक आपको अपने कार्यों के लिए खुद ही कदम उठाना पड़ेगा। किसी और से ज्यादा उम्मीदें लगाकर न रखें। इस बीच आपको धन लाभ भी होगा, लेकिन आपको अपने खर्चों पर कंट्रोल करके रखना चाहिए। साथ ही शुभ स्थिति सुनिश्चित करने के लिए और अशुभ फलों से बचने के लिए घर की महिला एक नीला फूल लेकर अपने हाथों से घर से दूर किसी विरानी जगह में दबा दें। इससे आपकी जो भी परेशानियां होगी, वो जल्द ही दूर होंगी। शुक्र आपके ग्यारहवें स्थान पर गोचर करेंगे। जन्मपत्रिका के ग्यारहवें स्थान का सम्बन्ध हमारे आय तथा इच्छाओं की पूर्ति से होता है। शुक्र के इस गोचर से आप चतुर होंगे। हालांकि आपको अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए मेहनत जारी रखनी होगी, मेहनत रंग जरूर लायेगी। इसके अलावा छः जुलाई तक आप अपने विचारों पर काबू पाने में असफल होंगे। एक काम को लेकर बार-बार आपके विचारों में बदलाव आते रहेंगे। आप दूसरों से छिपकर काम करने की भी कोशिश करेंगे। शुक्र के अशुभ फलों से बचने के लिये और शुभ फल सुनिश्चित करने के लिए मन्दिर में ज्योत के लिये रूई का दान करें। इससे आपको शुभ फलों की प्राप्ति होगी। शुक्र आपके दसवें स्थान पर गोचर करेंगे। जन्मपत्रिका के दसवें स्थान का सम्बन्ध हमारे करियर, राज्य तथा पिता से होता है। शुक्र के इस गोचर से आपको अपने करियर में सफलता मिलेगी। आप जो चाहेंगे, वो पूरा होगा। छः जुलाई तक आपके साथ-साथ आपके पिता की भी तरक्की सुनिश्चित होगी। आपको अपने जीवनसाथी से पूरा सुख मिलेगा और उनका स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। धर्म-कर्म के कार्यों में आपकी रुचि बढ़ेगी। साथ ही आपको वाहन आदि का सुख भी प्राप्त होगा और आपको किसी प्रकार का भय नहीं होगा। लिहाजा शुक्र के शुभ फल सुनिश्चित करने के लिए और अशुभ फलों से बचने के लिए शुक्रवार के दिन मन्दिर में दही का दान करें। शुक्र आपके नवें स्थान पर गोचर करेंगे। जन्मपत्रिका के नौवें स्थान का सम्बन्ध हमारे भाग्य से होता है। शुक्र के इस गोचर से आपको अपने भाग्य का पूरा सहयोग मिलेगा। आपके मनचाहे कार्य पूरे होंगे। साथ ही आपकी बौद्धिक क्षमता में बढ़ोतरी होगी। बुजुर्गों को धन लाभ होगा। छः जुलाई तक किसी तीर्थ यात्रा पर जाना आपके लिये शुभ फल देने वाला होगा। हालांकि आपको अपनी बेहतरी के लिए मेहनत जारी रखनी होगी। साथ ही संतान से सुख पाने के लिए भी आपको कोशिश करनी होगी। शुक्र के अशुभ फलों से बचने के लिए और शुभ फल सुनिश्चित करने के लिए इस दौरान घर के बाहर जमीन में थोड़ा-सा शहद दबाएं। इससे आपके शुभ फल सुनिश्चित होंगे। शुक्र आपके आठवें स्थान पर गोचर करेंगे। जन्मपत्रिका के आठवें स्थान सम्बन्ध हमरे आयु से है। शुक्र के इस गोचर से छः जुलाई तक आपका स्वास्थ्य बेहतर रहेगा, लेकिन आपको अपने खाने-पीने को लेकर सतर्क रहना होगा। इसके अलावा शुक्र के इस गोचर के प्रभाव से आप किसी से किया हुआ वायदा जरूर पूरा करेंगे और अपनी बात का मान रखने में सफल होंगे। हालांकि छः जुलाई तक आपको अपने जीवनसाथी की सेहत का ख्याल रखना चाहिए और दूसरों के लड़ाई-झगड़ों में पड़ने से बचने की कोशिश करनी चाहिए। साथ ही इस दौरान किसी से भी कोई चीज़ उधार लेना अवॉयड करें। अतः शुक्र की अशुभ स्थिति से बचने के लिए और शुभ फल सुनिश्चित करने के लिए मन्दिर में ज्वार का दान करें । साथ ही अपने ईष्ट देव के सामने रोज सिर झुकाएं। इससे आपके शत्रु कमजोर पड़ेंगे। शुक्र आपके सातवें स्थान पर गोचर करेंगे। जन्मपत्रिका के सातवें स्थान का सम्बन्ध हमारे जीवनसाथी से है। शुक्र के इस गोचर से आपके और आपके जीवनसाथी के बीच तालमेल बना रहेगा और रिश्तों में मजबूती आएगी। इस बीच आपको परिवार का पूरा सुख मिलेगा। साथ ही धन लाभ भी होगा। संतान के साथ भी रिश्ते बेहतर होंगे। छः जुलाई तक के बीच आपको बिजनेस या किसी अन्य काम से संबंधित महत्वपूर्ण यात्राएं भी करनी पड़ सकती है। लिहाजा शुक्र के शुभ फल सुनिश्चित करने के लिए छः जुलाई तक पड़ने वाले किसी भी शुक्रवार के दिन मन्दिर में किसी एक कांसे का बर्तन दान करें। शुक्र आपके छठे स्थान पर गोचर करेंगे। जन्मपत्रिका के छठे स्थान का सम्बन्ध हमारे मित्र, शत्रु तथा स्वास्थ्य से है। शुक्र के इस गोचर से आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। आपको अपने मित्रों से पूरा सहयोग मिलेगा। इस बीच आपके कुछ नये मित्र भी बन सकते हैं, लेकिन इस मामले में थोड़ा सावधान रहने की जरूरत है। इसके अलावा आपकी सांसारिक स्थिति अच्छी रहेगी और आपके भाईयों की तरक्की भी सुनिश्चित होगी। शुक्र के शुभ फल सुनिश्चित करने के लिए और अशुभ फलों से बचने के लिए घर की महिला अपने बालों में सोने या गोल्डन कलर का हेयर क्लिप लगाकर रखें। इससे आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। शुक्र आपके पांचवें स्थान पर गोचर करेंगे। जन्मपत्रिका के पांचवे स्थान का सम्बन्ध हमारे संतान, बुद्धि, विवेक और रोमांस से है शुक्र के इस गोचर से आपको सब तरह का सुख प्राप्त होगा। गुरु के सहयोग से आप जीवन में तरक्की करेंगे। आपकी लव लाइफ अच्छी रहेगी। साथ ही धर्म के प्रति आपकी आस्था बढ़ेगी और परिवार में प्यार बना रहेगा। इस दौरान आपको अलग-अलग सौन्दर्य प्रसाधनों को इकट्ठा करके रखने की इच्छा होगी। शुक्र के अशुभ फलों से बचने के लिए और शुभ फल सुनिश्चित करने के लिए गाय को उबले हुए आलू, ठंडा करके खिलाएं। साथ ही माता की सेवा करें। इससे आपकी तरक्की ही तरक्की होगी।
मध्यप्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम-2010 नागरिक अधिकारों को सशक्त बनाने का अभिनव प्रयास है। यह कानून मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा प्रदेश में किये जा रहे सुशासन के प्रयासों की महत्वपूर्ण कड़ी है। इसके माध्यम से आम जन को चिन्हित सेवाएँ समय-सीमा में प्रदान करने की गारंटी दी गई है। सुशासन की यह देश में अपनी तरह की एक ऐतिहासिक एवं क्रांतिकारी पहल है। यह कानून मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान सरकार की जन-प्रतिबद्धता का स्पष्ट प्रमाण है। अधिनियम के दायरे में अब तक 23 विभाग की 161 सेवाएँ अधिसूचित की जा चुकी हैं। इसमें से 102 सेवा के ऑनलाइन आवेदन लिये जा रहे हैं। प्रदेश में लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अन्तर्गत अब तक प्राप्त 3 करोड़ 44 लाख ऑनलाइन आवेदन में से 3 करोड़ 17 लाख आवेदन का निराकरण कर दिया गया है। अधिनियम में लोक सेवा प्रदान करने में कोताही बरतने वाले अधिकारियों पर अर्थदण्ड लगाने का प्रावधान भी किया गया है। अब तक 274 पदाभिहित अधिकारी पर 13 लाख 82 हजार रुपये से अधिक का जुर्माना किया गया है। जुर्माने में प्राप्त राशि में से 541 आवेदक को 5 लाख 20 हजार की राशि प्रतिकर के रूप में भुगतान की जा चुकी है। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने अधिसूचित सेवाओं को समय-सीमा में नागरिकों को प्रदान करने की कानूनी गारंटी दी है। इसके बाद देश के अन्य 20 से अधिक राज्य जैसे बिहार, पंजाब,उत्तराखण्ड, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, उत्तरप्रदेश, राजस्थान और झारखण्ड आदि ने भी ऐसे कानून बनाये हैं।
मध्यप्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम-दो हज़ार दस नागरिक अधिकारों को सशक्त बनाने का अभिनव प्रयास है। यह कानून मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा प्रदेश में किये जा रहे सुशासन के प्रयासों की महत्वपूर्ण कड़ी है। इसके माध्यम से आम जन को चिन्हित सेवाएँ समय-सीमा में प्रदान करने की गारंटी दी गई है। सुशासन की यह देश में अपनी तरह की एक ऐतिहासिक एवं क्रांतिकारी पहल है। यह कानून मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान सरकार की जन-प्रतिबद्धता का स्पष्ट प्रमाण है। अधिनियम के दायरे में अब तक तेईस विभाग की एक सौ इकसठ सेवाएँ अधिसूचित की जा चुकी हैं। इसमें से एक सौ दो सेवा के ऑनलाइन आवेदन लिये जा रहे हैं। प्रदेश में लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अन्तर्गत अब तक प्राप्त तीन करोड़ चौंतालीस लाख ऑनलाइन आवेदन में से तीन करोड़ सत्रह लाख आवेदन का निराकरण कर दिया गया है। अधिनियम में लोक सेवा प्रदान करने में कोताही बरतने वाले अधिकारियों पर अर्थदण्ड लगाने का प्रावधान भी किया गया है। अब तक दो सौ चौहत्तर पदाभिहित अधिकारी पर तेरह लाख बयासी हजार रुपये से अधिक का जुर्माना किया गया है। जुर्माने में प्राप्त राशि में से पाँच सौ इकतालीस आवेदक को पाँच लाख बीस हजार की राशि प्रतिकर के रूप में भुगतान की जा चुकी है। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने अधिसूचित सेवाओं को समय-सीमा में नागरिकों को प्रदान करने की कानूनी गारंटी दी है। इसके बाद देश के अन्य बीस से अधिक राज्य जैसे बिहार, पंजाब,उत्तराखण्ड, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, उत्तरप्रदेश, राजस्थान और झारखण्ड आदि ने भी ऐसे कानून बनाये हैं।
धर्मशाला - कांगड़ा शहर के समीपवर्ती क्षेत्र की रहस्यमयी तरीके से गायब हुई युवती को पुलिस ने जम्मू के कटड़ा से बरामद किया है। युवती घर से ट्यूशन पढ़ने के लिए गई थी, लेकिन देर रात तक घर वापस नहीं लौटी थी, जिसके बाद परिजनों ने देर शाम पुलिस थाना कांगड़ा में इसकी सूचना दर्ज करवाई। पुलिस ने मामले में तुरंत कार्रवाई करते हुए नाबालिग की तलाश को टीम का गठन कर दिया। टीम ने युवती को मंगलवार सुबह कटड़ा बस स्टैंड से बरामद कर लिया। युवती एक निजी स्कूल में अध्ययनरत है। सोमवार शाम को अपने घर से ट्यूशन पढ़ने के निकली थी। कांगड़ा पुलिस टीम ने जम्मू पुलिस की सहायता से कटड़ा बस स्टैंड पर मंगलवार रात करीब तीन बजे युवती को ढूंढ़ लिया। युवती ने पुलिस को बताया है कि वह वैष्णो देवी के लिए निकली थी। इस दौरान वह किसी की गाड़ी से जम्मू के लिए निकली थी। पुलिस नाबालिग को जम्मू से कांगड़ा वापस ले आई है तथा मामले में दस्तावेज सबंधी कार्रवाई पूरा करने के बाद परिजनों के सुपुर्द कर दिया। उधर, पुलिस अधीक्षक ने बताया कि सोमवार देर रात करीब दस बजे कांगड़ा पुलिस थाना में एक नाबालिग युवती की गुमशुदगी का मामला सामने आया था। इस युवती को कटड़ा बस स्टैंड में ही करीब दस घंटों के अंदर ही पुलिस ने ढूंढ लिया।
धर्मशाला - कांगड़ा शहर के समीपवर्ती क्षेत्र की रहस्यमयी तरीके से गायब हुई युवती को पुलिस ने जम्मू के कटड़ा से बरामद किया है। युवती घर से ट्यूशन पढ़ने के लिए गई थी, लेकिन देर रात तक घर वापस नहीं लौटी थी, जिसके बाद परिजनों ने देर शाम पुलिस थाना कांगड़ा में इसकी सूचना दर्ज करवाई। पुलिस ने मामले में तुरंत कार्रवाई करते हुए नाबालिग की तलाश को टीम का गठन कर दिया। टीम ने युवती को मंगलवार सुबह कटड़ा बस स्टैंड से बरामद कर लिया। युवती एक निजी स्कूल में अध्ययनरत है। सोमवार शाम को अपने घर से ट्यूशन पढ़ने के निकली थी। कांगड़ा पुलिस टीम ने जम्मू पुलिस की सहायता से कटड़ा बस स्टैंड पर मंगलवार रात करीब तीन बजे युवती को ढूंढ़ लिया। युवती ने पुलिस को बताया है कि वह वैष्णो देवी के लिए निकली थी। इस दौरान वह किसी की गाड़ी से जम्मू के लिए निकली थी। पुलिस नाबालिग को जम्मू से कांगड़ा वापस ले आई है तथा मामले में दस्तावेज सबंधी कार्रवाई पूरा करने के बाद परिजनों के सुपुर्द कर दिया। उधर, पुलिस अधीक्षक ने बताया कि सोमवार देर रात करीब दस बजे कांगड़ा पुलिस थाना में एक नाबालिग युवती की गुमशुदगी का मामला सामने आया था। इस युवती को कटड़ा बस स्टैंड में ही करीब दस घंटों के अंदर ही पुलिस ने ढूंढ लिया।
रियो डी जनेरियो। भारत की अदिति अशोक तीसरे दौर में खराब प्रदर्शन के बाद रियो ओलम्पिक की महिला गोल्फ स्पर्धा में 31वें स्थान पर खिसक गई हैं। दूसरे दौर की समाप्ति के बाद अदिति संयुक्त रूप से आठवें स्थान पर थीं लेकिन तीसरे दौर मं 8 ओवर 79 के कार्ड ने उन्हें 23 स्थान नीचे लाकर पटक दिया। 18 साल की अदिति ने दो राउंड में लगातार 3 अंडर 68 का कार्ड खेला था और 36वें होल तक संयुक्त रूप से आठवें स्थान पर थीं। बैक नाइट पर अदिति ने बेहद खराब खेल दिखाया। इस दौरान पांच बोगियों ने उन्हें अनापेक्षित तौर पर नीचे ला दिया। अब अदिति के खाते में तीन दिनों मे 2 ओवर 215 का स्कोर है और शुक्रवार को प्रदर्शन के बाद उनके पदक जीतने की सम्भावना खत्म हो गई है। नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में चोरी की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहां के जंगपुरा इलाके में स्थित शोरूम को चोरों ने निशाना बनाया। दीवार काटकर चोर शोरूम में दाखिल हुए। यहां से सोना, हीरा और जेवरात चोरी करके फरार हो गए। सीसीटीवी की मदद से चोरों की तलाश की जा रही है। जंगपुरा के ज्वेलरी शोरूम में चोरों ने सेंध लगाकर वारदात को अंजाम दे दिया। चोरों ने छत काटकर करीब 25 करोड़ रुपये के जेवरात चोरी कर लिए। जानकारी के अनुसार, दिल्ली के जंगपुरा भोगल इलाके में स्थित शोरूम को चोरों ने निशाना बनाया। दीवार काटकर चोर शोरूम में दाखिल हुए। यहां से 20-25 करोड़ रुपए के सोना, हीरा और जेवरात चोरी करके फरार हो गए। सीसीटीवी की मदद से चोरों की तलाश की जा रही है।
रियो डी जनेरियो। भारत की अदिति अशोक तीसरे दौर में खराब प्रदर्शन के बाद रियो ओलम्पिक की महिला गोल्फ स्पर्धा में इकतीसवें स्थान पर खिसक गई हैं। दूसरे दौर की समाप्ति के बाद अदिति संयुक्त रूप से आठवें स्थान पर थीं लेकिन तीसरे दौर मं आठ ओवर उन्यासी के कार्ड ने उन्हें तेईस स्थान नीचे लाकर पटक दिया। अट्ठारह साल की अदिति ने दो राउंड में लगातार तीन अंडर अड़सठ का कार्ड खेला था और छत्तीसवें होल तक संयुक्त रूप से आठवें स्थान पर थीं। बैक नाइट पर अदिति ने बेहद खराब खेल दिखाया। इस दौरान पांच बोगियों ने उन्हें अनापेक्षित तौर पर नीचे ला दिया। अब अदिति के खाते में तीन दिनों मे दो ओवर दो सौ पंद्रह का स्कोर है और शुक्रवार को प्रदर्शन के बाद उनके पदक जीतने की सम्भावना खत्म हो गई है। नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में चोरी की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहां के जंगपुरा इलाके में स्थित शोरूम को चोरों ने निशाना बनाया। दीवार काटकर चोर शोरूम में दाखिल हुए। यहां से सोना, हीरा और जेवरात चोरी करके फरार हो गए। सीसीटीवी की मदद से चोरों की तलाश की जा रही है। जंगपुरा के ज्वेलरी शोरूम में चोरों ने सेंध लगाकर वारदात को अंजाम दे दिया। चोरों ने छत काटकर करीब पच्चीस करोड़ रुपये के जेवरात चोरी कर लिए। जानकारी के अनुसार, दिल्ली के जंगपुरा भोगल इलाके में स्थित शोरूम को चोरों ने निशाना बनाया। दीवार काटकर चोर शोरूम में दाखिल हुए। यहां से बीस-पच्चीस करोड़ रुपए के सोना, हीरा और जेवरात चोरी करके फरार हो गए। सीसीटीवी की मदद से चोरों की तलाश की जा रही है।
प्रगति अभी भी खड़ी नहीं है, अधिक से अधिकसामाजिक नेटवर्क लोकप्रियता प्राप्त कर रहे हैं। आखिरकार, आप दोस्त बना सकते हैं, मुफ्त में उनके साथ संवाद कर सकते हैं, अपनी तस्वीरों को साझा कर सकते हैं, संगीत सुन सकते हैं, फिल्में देख सकते हैं, खेल खेल सकते हैं और कमा सकते हैं! इसलिए, हम लगातार स्वचालित अलर्ट प्राप्त कर रहे हैंः हमारे दोस्तों, खेल, समाचार आदि के जीवन के बारे में। बहुत से लोग इसे पसंद नहीं करते हैं, कुछ लोग इसे परेशान करते हैं, लेकिन सभी को यह नहीं पता कि "सहपाठियों" में एसएमएस अलर्ट कैसे बंद करें। में शीर्ष मेनू पर ध्यान दें"सहपाठियों"। इसके साथ आप अपने संदेश, अधिसूचनाएं, मेहमानों को देख सकते हैं, दोस्तों और अन्य कुछ भी देख सकते हैं। "अलर्ट" टैब पर जाएं। आप अपनी अधिसूचनाओं की एक सूची देखेंगे। अगर आप अधिसूचना को मिटाना चाहते हैं, तो कर्सर के साथ उस पर होवर करें, ऊपरी दाएं कोने में एक क्रॉस होगा, बाईं माउस बटन के साथ उस पर क्लिक करें। सूची के बाईं ओर एक छोटा पैनल होगा, जिस पर अधिसूचनाओं के संभावित विषय प्रदर्शित होते हैं। इसके साथ, आप श्रेणी के अनुसार अपनी अधिसूचनाएं देख सकते हैं। "सहपाठियों" में अधिसूचनाएं बंद करने के लिएएसएमएस, "मेरी सेटिंग्स" अनुभाग पर जाएं। बाईं ओर, "अधिसूचनाएं" का चयन करें। कॉलम "एसएमएस" में हम अनावश्यक अधिसूचनाओं पर टिक हटा देते हैं। नीचे आपको अधिसूचनाएं प्राप्त होने पर समय अंतराल निर्दिष्ट कर सकते हैं। जैसा कि ऊपर बताया गया था, अगर आपके पास एसएमएस-कॉलम नहीं है, तो आपका मोबाइल ऑपरेटर सोशल नेटवर्क के साथ सहयोग नहीं करता है, और आप इस फ़ंक्शन का किसी भी तरीके से उपयोग नहीं कर सकते हैं। नोटः यदि आपने "सहपाठियों" में अधिसूचनाएं हटा दी हैं, तो यह अभी भी मेल में रहेगी। कभी-कभी जब आप कोई फिल्म देखते हैं या संगीत सुनते हैं"सहपाठियों" में, परेशान दोस्त संदेश से ऊब जाते हैं, और एसएमएस ध्वनि संकेत मामले से परेशान होता है। संदेशों को चुप बनाने के लिए, "संदेश" टैब पर जाएं। इसके बाद, ऐड-ऑन पर क्लिक करें, ये ऊपरी बाएं कोने में लंबवत तीन बिंदुओं को गठबंधन कर रहे हैं। "सूचनाएं" अनुभाग में, "नए संदेशों के बारे में सुनना" अनचेक करें। हमें आशा है कि यह लेख उपयोगी और सूचनात्मक था। सुखद उपयोग!
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विस, नई दिल्ली : तुगलकाबाद विधानसभा के उम्मीदवार विक्रम बिधूड़ी की पदयात्रा में दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी पहुंचे। जनता के बीच मनोज तिवारी ने 'भाजपा है दिल में' और अपना हिट गीत 'रिंकिया के पापा' भी गाकर लोगों को खुश किया। लोगों हरकेश नगर से यह पदयात्रा निकली और जगह-जगह भीड़ ने नेताओं का स्वागत भी किया। दिल्ली प्रदेश मंत्री विक्रम बिधूड़ी ने जनता से बीजेपी के समर्थन में वोट डालने की अपील की। साउथ दिल्ली सांसद रमेश बिधूड़ी भी इस प्रचार यात्रा का हिस्सा बने। बड़ी संख्या में बीजेपी कार्यकर्ता और इलाके के लोग इस पदयात्रा में शामिल हुए। गुरुवार शाम शुरू हुई यह पदयात्रा पुलिस पोस्ट हरकेश नगर से शुरू होकर सब्जी मंडी होते हुए रेलवे लाइन, जे-ब्लॉक पहुंची, जहां लोगों ने जगह-जगह फूल-मालाएं पहनाकर अपने उम्मीदवार का स्वागत किया। इस दौरान विक्रम बिधूड़ी ने कहा कि बीजेपी ही एक ऐसी पार्टी है जो गरीब के उत्थान और क्षेत्र का हर तरह से विकास कर सकती है, ना कि आम आदमी पार्टी जो चुनाव से पहले लोगों से बड़े-बड़े वायदे करती है। उन्होंने कहा, यह पार्टी सिर्फ सत्ता के लालच के लिए उन्हें गुमराह करने का काम करती है। यात्रा खत्म होने के बाद विक्रम बिधूड़ी ने प्रह्लादपुर वॉर्ड में लाल कुआं चुंगी नंबर 2 पर महिलाओं की जनसभा को संबोधित किया। डी-ब्लॉक प्रह्लादपुर में व्यापारी वर्ग के लोगों की जनसभा में भी वो पहुंचे। उन्होंने इलाके के मुद्दों पर भी बात की और भरोसा दिया कि उनकी हर दिक्कत को बीजेपी की सरकार दूर करेगी।
विस, नई दिल्ली : तुगलकाबाद विधानसभा के उम्मीदवार विक्रम बिधूड़ी की पदयात्रा में दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी पहुंचे। जनता के बीच मनोज तिवारी ने 'भाजपा है दिल में' और अपना हिट गीत 'रिंकिया के पापा' भी गाकर लोगों को खुश किया। लोगों हरकेश नगर से यह पदयात्रा निकली और जगह-जगह भीड़ ने नेताओं का स्वागत भी किया। दिल्ली प्रदेश मंत्री विक्रम बिधूड़ी ने जनता से बीजेपी के समर्थन में वोट डालने की अपील की। साउथ दिल्ली सांसद रमेश बिधूड़ी भी इस प्रचार यात्रा का हिस्सा बने। बड़ी संख्या में बीजेपी कार्यकर्ता और इलाके के लोग इस पदयात्रा में शामिल हुए। गुरुवार शाम शुरू हुई यह पदयात्रा पुलिस पोस्ट हरकेश नगर से शुरू होकर सब्जी मंडी होते हुए रेलवे लाइन, जे-ब्लॉक पहुंची, जहां लोगों ने जगह-जगह फूल-मालाएं पहनाकर अपने उम्मीदवार का स्वागत किया। इस दौरान विक्रम बिधूड़ी ने कहा कि बीजेपी ही एक ऐसी पार्टी है जो गरीब के उत्थान और क्षेत्र का हर तरह से विकास कर सकती है, ना कि आम आदमी पार्टी जो चुनाव से पहले लोगों से बड़े-बड़े वायदे करती है। उन्होंने कहा, यह पार्टी सिर्फ सत्ता के लालच के लिए उन्हें गुमराह करने का काम करती है। यात्रा खत्म होने के बाद विक्रम बिधूड़ी ने प्रह्लादपुर वॉर्ड में लाल कुआं चुंगी नंबर दो पर महिलाओं की जनसभा को संबोधित किया। डी-ब्लॉक प्रह्लादपुर में व्यापारी वर्ग के लोगों की जनसभा में भी वो पहुंचे। उन्होंने इलाके के मुद्दों पर भी बात की और भरोसा दिया कि उनकी हर दिक्कत को बीजेपी की सरकार दूर करेगी।
भागलपुर जिले के सुल्तानगंज थाना क्षेत्र के पेन गांव के समीप NH-80 किनारे एक 35 वर्षीय युवक का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। मृतक की पहचान तिलकपुर पश्चिमी टोला निवासी दीपक सिंह के रूप में की गई है। दीपक के शरीर पर कई जगह चोट के निशान हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि दीपक के साथ लाठी डंडे के साथ मारपीट की गई है, जिस वजह से उसकी मौत हुई है। घटना के सम्बन्ध में दीपक के चचेरे भाई अमित सिंह ने बताया कि दीपक पटना में गार्ड का नौकरी करता था। पांच जुलाई को उसके दोस्त विकास की शादी थी, जिसमें बारात नौगछिया के तेतरी गांव जानी थी। इसी शादी समारोह में शामिल होने के लिए वह अपनी पत्नी दीपा और अपने एक 5 वर्षीय पुत्र के साथ 2 दिन पहले ही पटना से गांव तिलकपुर आया था। अमित ने बताया कि दीपक अपने तीन दोस्तों के साथ 1 दिन पूर्व शाहकुंड गया था। रातभर वापस नहीं लौटा तो परिजनों ने उसकी खोजबीन शुरू कर दी, लेकिन उसका कहीं कुछ अता पता नहीं चला। ग्रामीण यह बताते हैं कि संजय उर्फ फुकन, गौरव, चंदन और मुन्नी सिंह शराबी टाइप के लोग हैं। ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि खाने पीने के क्रम में किसी बात पर झगड़ा हो गया होगा, जिसमें मारपीट के दौरान उसकी मौत हो गई। थानाध्यक्ष ने बताया कि दीपक की मां के अनुसार, शाम के 3 बजे दीपक की उसकी माँ से बात हुई थी जिसमें उसने फुकन का नाम लेते हुए कहा था कि अभी वो शाहकुंड में है। जब रात तक दीपक घर नहीं लौटा तब दीपक की मां फुकन के घर जाकर फुकन से दीपक के बारे में पूछा। तभी से फुकन घर से फरार है। उसके साथ दीपक के सभी दोस्त अपने अपने घर से फरार हैं। दीपक का गांव के ही शम्भू के साथ जमीनी विवाद था। एक साल पूर्व उसका शम्भू के साथ मारपीट की घटना हुई थी, जिसमें दीपक का हाथ टूट गया था। लाश मिलने की सूचना मिलते ही सुलतानगंज थाना पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में लेकर जांच पड़ताल शुरू कर दिया। जांच पड़ताल के दौरान दीपक के पास से एक मोबाइल बरामद हुआ, जिस मोबाइल से उनके परिजनों को सूचना दी गई। सूचना मिलने पर परिजन रेफरल अस्पताल सुल्तानगंज पहुंचे। सुल्तानगंज थानाध्यक्ष लाल बहादुर सिंह ने बताया कि गांव के ही संजय कुमार उर्फ फुकन, गौरव, चंदन और मुन्नी सिंह के साथ वह शुक्रवार को सवेरे में शाहकुंड के पहाड़ पर घूमने गया था। शनिवार को पैन गांव के एक हाई स्कूल के गेट के पास उसका शव बरामद हुआ। थानाध्यक्ष ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह poisoning का केस लगता है। साथ ही कहा कि यह हत्या ही है क्यों कि उसके शरीर पर चोट के निशान भी हैं। फिलहाल पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आने का इंतजार है। फिलहाल पुलिस शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भागलपुर भेज दिया है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
भागलपुर जिले के सुल्तानगंज थाना क्षेत्र के पेन गांव के समीप NH-अस्सी किनारे एक पैंतीस वर्षीय युवक का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। मृतक की पहचान तिलकपुर पश्चिमी टोला निवासी दीपक सिंह के रूप में की गई है। दीपक के शरीर पर कई जगह चोट के निशान हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि दीपक के साथ लाठी डंडे के साथ मारपीट की गई है, जिस वजह से उसकी मौत हुई है। घटना के सम्बन्ध में दीपक के चचेरे भाई अमित सिंह ने बताया कि दीपक पटना में गार्ड का नौकरी करता था। पांच जुलाई को उसके दोस्त विकास की शादी थी, जिसमें बारात नौगछिया के तेतरी गांव जानी थी। इसी शादी समारोह में शामिल होने के लिए वह अपनी पत्नी दीपा और अपने एक पाँच वर्षीय पुत्र के साथ दो दिन पहले ही पटना से गांव तिलकपुर आया था। अमित ने बताया कि दीपक अपने तीन दोस्तों के साथ एक दिन पूर्व शाहकुंड गया था। रातभर वापस नहीं लौटा तो परिजनों ने उसकी खोजबीन शुरू कर दी, लेकिन उसका कहीं कुछ अता पता नहीं चला। ग्रामीण यह बताते हैं कि संजय उर्फ फुकन, गौरव, चंदन और मुन्नी सिंह शराबी टाइप के लोग हैं। ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि खाने पीने के क्रम में किसी बात पर झगड़ा हो गया होगा, जिसमें मारपीट के दौरान उसकी मौत हो गई। थानाध्यक्ष ने बताया कि दीपक की मां के अनुसार, शाम के तीन बजे दीपक की उसकी माँ से बात हुई थी जिसमें उसने फुकन का नाम लेते हुए कहा था कि अभी वो शाहकुंड में है। जब रात तक दीपक घर नहीं लौटा तब दीपक की मां फुकन के घर जाकर फुकन से दीपक के बारे में पूछा। तभी से फुकन घर से फरार है। उसके साथ दीपक के सभी दोस्त अपने अपने घर से फरार हैं। दीपक का गांव के ही शम्भू के साथ जमीनी विवाद था। एक साल पूर्व उसका शम्भू के साथ मारपीट की घटना हुई थी, जिसमें दीपक का हाथ टूट गया था। लाश मिलने की सूचना मिलते ही सुलतानगंज थाना पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में लेकर जांच पड़ताल शुरू कर दिया। जांच पड़ताल के दौरान दीपक के पास से एक मोबाइल बरामद हुआ, जिस मोबाइल से उनके परिजनों को सूचना दी गई। सूचना मिलने पर परिजन रेफरल अस्पताल सुल्तानगंज पहुंचे। सुल्तानगंज थानाध्यक्ष लाल बहादुर सिंह ने बताया कि गांव के ही संजय कुमार उर्फ फुकन, गौरव, चंदन और मुन्नी सिंह के साथ वह शुक्रवार को सवेरे में शाहकुंड के पहाड़ पर घूमने गया था। शनिवार को पैन गांव के एक हाई स्कूल के गेट के पास उसका शव बरामद हुआ। थानाध्यक्ष ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह poisoning का केस लगता है। साथ ही कहा कि यह हत्या ही है क्यों कि उसके शरीर पर चोट के निशान भी हैं। फिलहाल पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आने का इंतजार है। फिलहाल पुलिस शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भागलपुर भेज दिया है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
पुलिस की पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसकी पत्नी ने नौकरी लगवाने के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये लिए थे, जिसके चलते कर्जदार उसके घर पर आकर परेशान कर रहे थे। इसी वजह से उसने पत्नी की हत्या कर दी। राजधानी दिल्ली के हर्ष विहार इलाके में एक युवक ने अपनी पत्नी की गला दबाकर हत्या कर दी। आरोपी ने 32 वर्षीय अर्चना की हत्या के बाद खुद ही उसके मायके और पुलिस को फोन कर हत्या की जानकारी दी। सूचना के बाद मौके पर पहुंची हर्ष विहार थाना पुलिस ने योगेश कुमार को शव के पास से ही गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस की शुरुआती जांच में आरोपी ने बताया है कि उसकी पत्नी ने नौकरी लगवाने के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये लिए थे, जिसके चलते कर्जदार उसके घर पर आकर परेशान कर रहे थे। इसी वजह से उसने पत्नी की हत्या कर दी। आरोपी से पूछताछ कर मामले की जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि योगेश दुर्गा मंदिर वाली गली, सुशीला गार्डन में रहता है। दोनों की शादी को सात साल से अधिक का समय हो गया था। रविवार रात को उसने पुलिस को कॉल कर बताया कि उसने अपनी पत्नी की गला दबाकर हत्या कर दी है। पुलिस उसके घर पर पहुंची। जमीन पर अर्चना का शव पड़ा था। उसके गले में चुन्नी का फंदा लगा हुआ था। योगेश भी वहीं मौजूद था। पुलिस पूछताछ के दौरान उसने बताया कि झगड़ा होने के बाद उसने पहले पत्नी का गला दबाया और बाद में चुन्नी से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। आरोपी ने बताया कि उसकी पत्नी ने नौकरी लगवाने के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये ले लिए थे। कर्जदार रोजाना ही घर आकर हंगामा करते थे। हत्या को आत्महत्या में बदलना चाहता था आरोपी : पुलिस को दिए बयान में योगेश ने बताया कि अर्चना की हत्या के बाद वह उसे आत्महत्या का रूप देना चाहता था। उसने हत्या के बाद पहले अर्चना के गले में चुन्नी बांधी और पंखे से लटकाने का प्रयास किया, लेकिन दोनों पंखे मुड़ गए। इसके बाद उसने अर्चना के मायके फोन कर बताया कि उसने आत्महत्या कर ली है। बाद में पता नहीं क्या हुआ कि योगेश ने खुद पुलिस को फोन कर बता दिया कि उसने अपनी पत्नी की हत्या कर दी है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि अर्चना पहले आंगनबाड़ी में नौकरी करती थी। वहां से नौकरी छोड़ने के बाद उसने दुर्गापुरी चौक पर अपनी प्लेसमेंट एजेंसी खोल ली थी, जबकि, योगेश अशोक नगर इलाके में साइबर कैफे चलाता है। परिजनों ने बताया कि अर्चना और योगेश की वर्ष 2015 में शादी हुई थी। शादी के बाद दोनों के यहां कोई बच्चा नहीं हुआ। अभी तीन माह पहले ही अर्चना ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। योगेश भी बहुत खुश था, लेकिन बढ़ते कर्ज के बीच वह तनाव में रहने लगा और उसने पत्नी की हत्या करने की ठान ली।
पुलिस की पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसकी पत्नी ने नौकरी लगवाने के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये लिए थे, जिसके चलते कर्जदार उसके घर पर आकर परेशान कर रहे थे। इसी वजह से उसने पत्नी की हत्या कर दी। राजधानी दिल्ली के हर्ष विहार इलाके में एक युवक ने अपनी पत्नी की गला दबाकर हत्या कर दी। आरोपी ने बत्तीस वर्षीय अर्चना की हत्या के बाद खुद ही उसके मायके और पुलिस को फोन कर हत्या की जानकारी दी। सूचना के बाद मौके पर पहुंची हर्ष विहार थाना पुलिस ने योगेश कुमार को शव के पास से ही गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस की शुरुआती जांच में आरोपी ने बताया है कि उसकी पत्नी ने नौकरी लगवाने के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये लिए थे, जिसके चलते कर्जदार उसके घर पर आकर परेशान कर रहे थे। इसी वजह से उसने पत्नी की हत्या कर दी। आरोपी से पूछताछ कर मामले की जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि योगेश दुर्गा मंदिर वाली गली, सुशीला गार्डन में रहता है। दोनों की शादी को सात साल से अधिक का समय हो गया था। रविवार रात को उसने पुलिस को कॉल कर बताया कि उसने अपनी पत्नी की गला दबाकर हत्या कर दी है। पुलिस उसके घर पर पहुंची। जमीन पर अर्चना का शव पड़ा था। उसके गले में चुन्नी का फंदा लगा हुआ था। योगेश भी वहीं मौजूद था। पुलिस पूछताछ के दौरान उसने बताया कि झगड़ा होने के बाद उसने पहले पत्नी का गला दबाया और बाद में चुन्नी से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। आरोपी ने बताया कि उसकी पत्नी ने नौकरी लगवाने के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये ले लिए थे। कर्जदार रोजाना ही घर आकर हंगामा करते थे। हत्या को आत्महत्या में बदलना चाहता था आरोपी : पुलिस को दिए बयान में योगेश ने बताया कि अर्चना की हत्या के बाद वह उसे आत्महत्या का रूप देना चाहता था। उसने हत्या के बाद पहले अर्चना के गले में चुन्नी बांधी और पंखे से लटकाने का प्रयास किया, लेकिन दोनों पंखे मुड़ गए। इसके बाद उसने अर्चना के मायके फोन कर बताया कि उसने आत्महत्या कर ली है। बाद में पता नहीं क्या हुआ कि योगेश ने खुद पुलिस को फोन कर बता दिया कि उसने अपनी पत्नी की हत्या कर दी है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि अर्चना पहले आंगनबाड़ी में नौकरी करती थी। वहां से नौकरी छोड़ने के बाद उसने दुर्गापुरी चौक पर अपनी प्लेसमेंट एजेंसी खोल ली थी, जबकि, योगेश अशोक नगर इलाके में साइबर कैफे चलाता है। परिजनों ने बताया कि अर्चना और योगेश की वर्ष दो हज़ार पंद्रह में शादी हुई थी। शादी के बाद दोनों के यहां कोई बच्चा नहीं हुआ। अभी तीन माह पहले ही अर्चना ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। योगेश भी बहुत खुश था, लेकिन बढ़ते कर्ज के बीच वह तनाव में रहने लगा और उसने पत्नी की हत्या करने की ठान ली।
Don't Miss! दो सुपरस्टार्स.. और तगड़ी दोस्ती.. एक ही दिन कहा दुनिया को अलविदा! बॉलीवुड स्टार्स विनोद खन्ना और फिरोज़ खान की मृत्यु एक ही दिन हुई है। दोनों सितारे काफी अच्छे दोस्त थे और कई फिल्मों में साथ काम भी किया है। मशहूर फिल्म अभिनेता विनोद खन्ना का गुरुवार (27 अप्रैल) को निधन हो गया। वह 70 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनके यूं चले जाने से बॉलीवुड में काफी गमगीन माहौल है। अमिताभ बच्चन से लेकर ऋषि कपूर सभी ने शोक प्रकट किया है। विनोद खन्ना ने अपने फिल्मी करियर में 140 से ज्यादा फिल्में की हैं। लेकिन उन्हें पहचान मिली फिरोज़ खान की फिल्म 'कुर्बानी' से। इस फिल्म के बाद से फिरोज खान और विनोद खन्ना की दोस्ती काफी गहरी हो गई थी। बॉलीवुड में काफी कम दोस्ती इतने लंबे समय तक चलती है। बहरहाल, फिल्म 'एक थी रानी ऐसी भी' में हेमा मालिनी के साथ विनोद खन्ना की आखिरी फिल्म थी। यह फिल्म 21 अप्रैल को देश भर में रिलीज हुई। Bollywood friends Vinod Khanna- Feroz Khan died on same day. Feroz Khan died on 27th April 2009.
Don't Miss! दो सुपरस्टार्स.. और तगड़ी दोस्ती.. एक ही दिन कहा दुनिया को अलविदा! बॉलीवुड स्टार्स विनोद खन्ना और फिरोज़ खान की मृत्यु एक ही दिन हुई है। दोनों सितारे काफी अच्छे दोस्त थे और कई फिल्मों में साथ काम भी किया है। मशहूर फिल्म अभिनेता विनोद खन्ना का गुरुवार को निधन हो गया। वह सत्तर वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनके यूं चले जाने से बॉलीवुड में काफी गमगीन माहौल है। अमिताभ बच्चन से लेकर ऋषि कपूर सभी ने शोक प्रकट किया है। विनोद खन्ना ने अपने फिल्मी करियर में एक सौ चालीस से ज्यादा फिल्में की हैं। लेकिन उन्हें पहचान मिली फिरोज़ खान की फिल्म 'कुर्बानी' से। इस फिल्म के बाद से फिरोज खान और विनोद खन्ना की दोस्ती काफी गहरी हो गई थी। बॉलीवुड में काफी कम दोस्ती इतने लंबे समय तक चलती है। बहरहाल, फिल्म 'एक थी रानी ऐसी भी' में हेमा मालिनी के साथ विनोद खन्ना की आखिरी फिल्म थी। यह फिल्म इक्कीस अप्रैल को देश भर में रिलीज हुई। Bollywood friends Vinod Khanna- Feroz Khan died on same day. Feroz Khan died on सत्ताईस अप्रैलil दो हज़ार नौ.
सिडनीः ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की टीम इस समय दक्षिण अफ्रीका और भारत के खिलाफ सीरीज खेलने में व्यस्त हैं। इसके बाद न्यूजीलैंड की टीम ऑस्ट्रेलिया में तीन मैचों की वनडे और इतने ही मैचों की टी20 इंटरनेशनल सीरीज खेलने के लिए जाएगी। न्यूजीलैंड की टीम पहले ही ऑस्ट्रेलिया में तीन मैचों की टेस्ट सीरीज खेल चुकी हैं, जिसमें केन विलियमसन के नेतृत्व वाली कीवी टीम को 0-3 का क्लीन स्वीप झेलना पड़ा था। ऑस्ट्रेलियाई टीम बुधवार को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीसरा व अंतिम टी20 इंटरनेशनल मैच खेलेगी। इसके बाद वह 29 फरवरी से तीन मैचों की सीरीज का पहला वनडे मैच खेलेगी। वहीं न्यूजीलैंड की टीम 29 फरवरी से भारत के खिलाफ क्राइस्टचर्च में दूसरा व अंतिम टेस्ट मैच खेलेगी। इस बीच क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी वनडे सीरीज के लिए 14 सदस्यीय टीम की घोषणा कर दी है। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच पहला वनडे सिडनी में 13 मार्च को खेला जाएगा। इसके बाद 15 मार्च को दूसरा वनडे इसी मैदान पर खेला जाएगा। सीरीज का तीसरा व अंतिम वनडे 20 मार्च को ब्लंडस्टोन एरिना में खेला जाएगा। ऑस्ट्रेलियाई टीम में तेज गेंदबाज झाए रिचर्डसन की दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ आगामी वनडे सीरीज के लिए वापसी हुई है। रिचर्डसन ने कंधे की चोट से उबरकर राष्ट्रीय टीम में वापसी की है। तेज गेंदबाज 11 महीनों में पहली बार अंतरराष्ट्रीय मैच खेलते हुए दिख सकते हैं। ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच पहला वनडे शनिवार को खेला जाएगा। हालांकि, झाए रिचर्डसन को न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए ऑस्ट्रेलियाई टीम में शामिल नहीं किया गया है। झाए रिचर्डसन की वापसी ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजी आक्रमण में नई दिशा जोड़ती, जिसमें उच्च दर्जे के तेज गेंदबाज होते। यह बताना जरूरी है कि झाए रिचर्डसन ने कड़ी मेहनत करके राष्ट्रीय टीम में जगह बनाई है। उन्हें कंधे में गंभीर लगी थी, जिसके बाद कड़ी मेहनत के बल पर रिचर्डसन की ऑस्ट्रेलियाई टीम में वापसी हुई। आरोन फिंच (कप्तान), एश्टन आगर, एलेक्स कैरी, पैट कमिंस, जोश हेजलवुड, मार्नस लाबुशेन, मिचेल मार्श, केन रिचर्डसन, स्टीव स्मिथ, डार्सी शॉर्ट, मिचेल स्टार्क, मैथ्यू वेड, डेविड वॉर्नर और एडम जंपा।
सिडनीः ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की टीम इस समय दक्षिण अफ्रीका और भारत के खिलाफ सीरीज खेलने में व्यस्त हैं। इसके बाद न्यूजीलैंड की टीम ऑस्ट्रेलिया में तीन मैचों की वनडे और इतने ही मैचों की टीबीस इंटरनेशनल सीरीज खेलने के लिए जाएगी। न्यूजीलैंड की टीम पहले ही ऑस्ट्रेलिया में तीन मैचों की टेस्ट सीरीज खेल चुकी हैं, जिसमें केन विलियमसन के नेतृत्व वाली कीवी टीम को शून्य-तीन का क्लीन स्वीप झेलना पड़ा था। ऑस्ट्रेलियाई टीम बुधवार को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीसरा व अंतिम टीबीस इंटरनेशनल मैच खेलेगी। इसके बाद वह उनतीस फरवरी से तीन मैचों की सीरीज का पहला वनडे मैच खेलेगी। वहीं न्यूजीलैंड की टीम उनतीस फरवरी से भारत के खिलाफ क्राइस्टचर्च में दूसरा व अंतिम टेस्ट मैच खेलेगी। इस बीच क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी वनडे सीरीज के लिए चौदह सदस्यीय टीम की घोषणा कर दी है। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच पहला वनडे सिडनी में तेरह मार्च को खेला जाएगा। इसके बाद पंद्रह मार्च को दूसरा वनडे इसी मैदान पर खेला जाएगा। सीरीज का तीसरा व अंतिम वनडे बीस मार्च को ब्लंडस्टोन एरिना में खेला जाएगा। ऑस्ट्रेलियाई टीम में तेज गेंदबाज झाए रिचर्डसन की दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ आगामी वनडे सीरीज के लिए वापसी हुई है। रिचर्डसन ने कंधे की चोट से उबरकर राष्ट्रीय टीम में वापसी की है। तेज गेंदबाज ग्यारह महीनों में पहली बार अंतरराष्ट्रीय मैच खेलते हुए दिख सकते हैं। ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच पहला वनडे शनिवार को खेला जाएगा। हालांकि, झाए रिचर्डसन को न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए ऑस्ट्रेलियाई टीम में शामिल नहीं किया गया है। झाए रिचर्डसन की वापसी ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजी आक्रमण में नई दिशा जोड़ती, जिसमें उच्च दर्जे के तेज गेंदबाज होते। यह बताना जरूरी है कि झाए रिचर्डसन ने कड़ी मेहनत करके राष्ट्रीय टीम में जगह बनाई है। उन्हें कंधे में गंभीर लगी थी, जिसके बाद कड़ी मेहनत के बल पर रिचर्डसन की ऑस्ट्रेलियाई टीम में वापसी हुई। आरोन फिंच , एश्टन आगर, एलेक्स कैरी, पैट कमिंस, जोश हेजलवुड, मार्नस लाबुशेन, मिचेल मार्श, केन रिचर्डसन, स्टीव स्मिथ, डार्सी शॉर्ट, मिचेल स्टार्क, मैथ्यू वेड, डेविड वॉर्नर और एडम जंपा।
बेशक, यूरोविज़न थीम का सेना से कोई लेना-देना नहीं है। हालाँकि, इस "क्षेत्र" में जो हो रहा है, वह यह महसूस करना संभव बनाता है कि भू-राजनीति जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में कैसे हस्तक्षेप करती है, कैसे पश्चिम अपने मूल्यों की रक्षा करने की कोशिश कर रहा है, जो इन मूल्यों को साझा करने वालों के बीच भी अधिक से अधिक प्रश्न उठाते हैं। खुद। यूरोविज़न के परिणामों की घोषणा के तुरंत बाद, मतदान में भाग लेने वाले देशों के प्रतिनिधियों ने एकमुश्त धोखाधड़ी की घोषणा करना शुरू कर दिया। इस तरह की धोखाधड़ी का सबसे आम रूप, जैसा कि यह निकला, "सही प्रतिभागी" के लिए वोटों का सामान्य पुनर्लेखन है। रोमानिया के प्रतिनिधियों ने प्रतियोगिता के आयोजकों पर आरोप लगाया कि रोमानियाई पक्ष का आकलन, जिसने मोल्दोवा को 12 अंक दिए, यूक्रेन गए। नतीजतन, यह पता चला कि मोल्दोवा को रोमानिया से "शून्य" प्राप्त हुआ। उसी समय, रोमानियाई टीवी प्रस्तोता, जिसे अपने देश में वोट के परिणाम की घोषणा करनी थी, को "तकनीकी विफलता" का दावा करते हुए हवा में नहीं ले जाया गया। जॉर्जिया और अजरबैजान के प्रतिनिधियों ने प्रतियोगिता के आयोजकों पर बाजीगरी का आरोप लगाया, जो इस साल ट्यूरिन, इटली में आयोजित किया गया था। नतीजतन, यूक्रेनी समूह जीता, हालांकि 5 में से केवल 40 देशों ने इसे जीत दिलाई। लेकिन सारा रहस्य देर-सबेर स्पष्ट हो जाता है। और झूठ का कोई साम्राज्य इस तथ्य को दरकिनार नहीं कर सकता।
बेशक, यूरोविज़न थीम का सेना से कोई लेना-देना नहीं है। हालाँकि, इस "क्षेत्र" में जो हो रहा है, वह यह महसूस करना संभव बनाता है कि भू-राजनीति जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में कैसे हस्तक्षेप करती है, कैसे पश्चिम अपने मूल्यों की रक्षा करने की कोशिश कर रहा है, जो इन मूल्यों को साझा करने वालों के बीच भी अधिक से अधिक प्रश्न उठाते हैं। खुद। यूरोविज़न के परिणामों की घोषणा के तुरंत बाद, मतदान में भाग लेने वाले देशों के प्रतिनिधियों ने एकमुश्त धोखाधड़ी की घोषणा करना शुरू कर दिया। इस तरह की धोखाधड़ी का सबसे आम रूप, जैसा कि यह निकला, "सही प्रतिभागी" के लिए वोटों का सामान्य पुनर्लेखन है। रोमानिया के प्रतिनिधियों ने प्रतियोगिता के आयोजकों पर आरोप लगाया कि रोमानियाई पक्ष का आकलन, जिसने मोल्दोवा को बारह अंक दिए, यूक्रेन गए। नतीजतन, यह पता चला कि मोल्दोवा को रोमानिया से "शून्य" प्राप्त हुआ। उसी समय, रोमानियाई टीवी प्रस्तोता, जिसे अपने देश में वोट के परिणाम की घोषणा करनी थी, को "तकनीकी विफलता" का दावा करते हुए हवा में नहीं ले जाया गया। जॉर्जिया और अजरबैजान के प्रतिनिधियों ने प्रतियोगिता के आयोजकों पर बाजीगरी का आरोप लगाया, जो इस साल ट्यूरिन, इटली में आयोजित किया गया था। नतीजतन, यूक्रेनी समूह जीता, हालांकि पाँच में से केवल चालीस देशों ने इसे जीत दिलाई। लेकिन सारा रहस्य देर-सबेर स्पष्ट हो जाता है। और झूठ का कोई साम्राज्य इस तथ्य को दरकिनार नहीं कर सकता।
नही है, क्योकि आत्मा और अनात्मा के सारे कार्यों की उत्पत्ति होती है - इसी द्वैत की साधना तथा विरह की । विजयी पाण्डव अपने को हिमालय की हिमानी गोद मे विसर्जित कर देते हैं । महाभारत के कठोर कर्म-काण्ड मे विरह-जनित वैराग्य ही प्रधान है, इसमें सन्देह नहीं। यह काव्य वैभव तथा सौन्दर्य - भोग मे ही समाप्त होकर उतना महत्त्व न पाता, जितना विरह के इस विश्राम से पाया है। इस काव्य के सारे कर्मों का अन्त वही पाण्डवो का महाप्रस्थान है। कालिदास ने भी दुष्यन्त और शकुन्तला के मिलन - विरह की गाथा द्वारा इसी सनातन विरह-भावना की स्थापना की है । दुष्यन्त के शाप की बात तो कवि के विरह तत्त्व की मान्यता का मूल मात्र है । वास्तव मे इन्द्रियों की प्रकृति से परे होकर भावो मे विचरण करने वाले प्रेम की चरम परिणित भी विरह में ही होती है। यदि मिलन आत्मा का कल्याण या बन्धन है, तो विरह उसका बन्धन - मोचन, मिलन व्यक्ति की नितान्त एकान्तिक सुख-साधना का सम्बल है, तो विरह व्याप्ति की दृष्टि से विश्व का आश्रय । विरह त्याग से पूर्ण, स्नेह से स्निग्ध और दुख से करुण होता है, मिलन मोह से अपूर्ण, स्नेह से शिथिल तथा सुख से सालस होता है। ऐसा होना भी बहुत स्वाभाविक है, क्योकि सयोग की उन्मत्तता का आकर्षक उन्मेष क्षण भर ही को होता है; किन्तु विरहव्याकुलता की दीप्ति तो एक अमर ज्योति है । मलिक मुहम्मद जायसी के पद्मावत की पद्मावती के प्रेम मे भी इसी विरह-तत्व की प्रधानता है। सारी कथा रूपक के रूप मे जीवात्मा की परमात्मा को पाने की चेष्टा पर ही स्थित है। इसका उल्लेख कवि ने स्वय किया है : तन चित उर मन राजा कीन्हा, हिय सिहल बुधि पदमिनि चीन्हा । गुरू सुवा जेहि पन्थ देखावा, बिन गुरु जगत को निर्गुण पावा । नागमती यह दुनिया धन्धा, बाँचा सोई न एहि चितबन्धा । प्रेम कथा यहि भाँति विचारहु, लेहु बूझि जो बूझ पारहु । पद्मावत को पढ़ने से पता चलता है कि कवि की प्रवृत्ति सूफियोजैसी थी, क्योकि सूफियों के अनुसार ईश्वर की कल्पना तथा भावना बहुत ही सौन्दर्यमयी तथा माधुर्यमयी है । ससार की सभी वस्तुओं मे वे उस अव्यक्त की ही झाँकी पाते हैं, इसी कारण सभी के व्यवहारों मे वे एक कोमलता तथा भावुकता की रक्षा करते हैं, जो ईश्वर के प्रति उनके प्रेम तथा विरह की भावना का एक स्वरूप मात्र है । प्रत्येक वस्तु के एकरङ्गी होने का कारण यही चिर विरह है, क्योंकि सौदर्य की सयोगइच्छा तथा उसकी विरह-व्याकुलता से सभी याकुल हैंः उन्ह बानन्ह अस को जो न मारा, वेधि रहा सगरौ ससारा । स्तु, ससार की यह सारी क्रिया केवल अपने विरह को लेकर चलती है, सब अपने चिर- प्रियतम को पाने के लिए उत्सुक रहते हैं ।
नही है, क्योकि आत्मा और अनात्मा के सारे कार्यों की उत्पत्ति होती है - इसी द्वैत की साधना तथा विरह की । विजयी पाण्डव अपने को हिमालय की हिमानी गोद मे विसर्जित कर देते हैं । महाभारत के कठोर कर्म-काण्ड मे विरह-जनित वैराग्य ही प्रधान है, इसमें सन्देह नहीं। यह काव्य वैभव तथा सौन्दर्य - भोग मे ही समाप्त होकर उतना महत्त्व न पाता, जितना विरह के इस विश्राम से पाया है। इस काव्य के सारे कर्मों का अन्त वही पाण्डवो का महाप्रस्थान है। कालिदास ने भी दुष्यन्त और शकुन्तला के मिलन - विरह की गाथा द्वारा इसी सनातन विरह-भावना की स्थापना की है । दुष्यन्त के शाप की बात तो कवि के विरह तत्त्व की मान्यता का मूल मात्र है । वास्तव मे इन्द्रियों की प्रकृति से परे होकर भावो मे विचरण करने वाले प्रेम की चरम परिणित भी विरह में ही होती है। यदि मिलन आत्मा का कल्याण या बन्धन है, तो विरह उसका बन्धन - मोचन, मिलन व्यक्ति की नितान्त एकान्तिक सुख-साधना का सम्बल है, तो विरह व्याप्ति की दृष्टि से विश्व का आश्रय । विरह त्याग से पूर्ण, स्नेह से स्निग्ध और दुख से करुण होता है, मिलन मोह से अपूर्ण, स्नेह से शिथिल तथा सुख से सालस होता है। ऐसा होना भी बहुत स्वाभाविक है, क्योकि सयोग की उन्मत्तता का आकर्षक उन्मेष क्षण भर ही को होता है; किन्तु विरहव्याकुलता की दीप्ति तो एक अमर ज्योति है । मलिक मुहम्मद जायसी के पद्मावत की पद्मावती के प्रेम मे भी इसी विरह-तत्व की प्रधानता है। सारी कथा रूपक के रूप मे जीवात्मा की परमात्मा को पाने की चेष्टा पर ही स्थित है। इसका उल्लेख कवि ने स्वय किया है : तन चित उर मन राजा कीन्हा, हिय सिहल बुधि पदमिनि चीन्हा । गुरू सुवा जेहि पन्थ देखावा, बिन गुरु जगत को निर्गुण पावा । नागमती यह दुनिया धन्धा, बाँचा सोई न एहि चितबन्धा । प्रेम कथा यहि भाँति विचारहु, लेहु बूझि जो बूझ पारहु । पद्मावत को पढ़ने से पता चलता है कि कवि की प्रवृत्ति सूफियोजैसी थी, क्योकि सूफियों के अनुसार ईश्वर की कल्पना तथा भावना बहुत ही सौन्दर्यमयी तथा माधुर्यमयी है । ससार की सभी वस्तुओं मे वे उस अव्यक्त की ही झाँकी पाते हैं, इसी कारण सभी के व्यवहारों मे वे एक कोमलता तथा भावुकता की रक्षा करते हैं, जो ईश्वर के प्रति उनके प्रेम तथा विरह की भावना का एक स्वरूप मात्र है । प्रत्येक वस्तु के एकरङ्गी होने का कारण यही चिर विरह है, क्योंकि सौदर्य की सयोगइच्छा तथा उसकी विरह-व्याकुलता से सभी याकुल हैंः उन्ह बानन्ह अस को जो न मारा, वेधि रहा सगरौ ससारा । स्तु, ससार की यह सारी क्रिया केवल अपने विरह को लेकर चलती है, सब अपने चिर- प्रियतम को पाने के लिए उत्सुक रहते हैं ।
• स्पष्ट प्रतीत होगा कि उन सबमें जम्बू द्वीप या एशिया का ही सर्वोपरि स्थान है । अन्य महाद्वीपों की अपेक्षाही अधिक बड़ा और फैला हुआ है । उसके गर्भ में हर प्रकार के आर्थिक साधन प्रचुर मात्रा में दबे पड़े हैं। और इसी में गंगा की 'तलहठी जैसी उर्वरा भूमि भी बड़े क्षेत्र में पायी जाती है। अपने इन्हीं आर्थिक साधनों के कारण यह जम्बूद्वीप मानव इतिहास के उषाकाल से ही मनुष्य जाति की प्रमुख लीला भूमि रहा है। इसी के वक्ष पर मानव की अनेक जातियाँ सहस्रों वर्षों से पलती आ रही हैं और संसार के जनसमुदाय का अधिकांश भाग एशिया में ही सर्वदा बसता रहा है। मानव जाति के प्रारम्भिक युगों से ही एशिया में ही प्रबल साम्राज्यों और विशाल राजनैतिक तंत्रों का जन्म हुआ और सहस्रों वर्ष तक इनका अस्तित्व रहा । यह कहना अनुचित न होगा कि सोलहवीं · शताब्दी के आरम्भ तक धन की दृष्टि से, विद्या और विज्ञान की दृष्टि से, नीति श्रौर धर्म की दृष्टि से, राजनीतिक तंत्र और शक्ति की दृष्टि से एशिया ही पृथ्वीमण्डल का केन्द्र था। उन दिनों यूरोप तो उसके एक पार्श्ववर्ती क्षुद्र प्रान्त के समान था । इतिहास की धारा समरकन्द, बुखारा, पाटलिपुत्र या उज्जयिनी के किनारे होकर बहती थी और पृथ्वी भर में इन नगरों की समृद्धि तथा वैभव • से टक्कर लेने वाला कोई नगर न पाया जाता था । इस प्रकार उन दिनों एशिया लक्ष्मी और सरस्वती की क्रीड़ा भूमि था और था पृथ्वी का कुबेरागार । : किन्तु जैसा कहा है सदा किसी का दौरदौरा नहीं रहता, उसका युग-युगान्तर का वैभव भी लुप्त हो गया और वह स्वयं तथा सारा पृथ्वीमण्डल उसके एक छोटे और नगण्य सूखण्ड यूरोप की बाढ़ से प्राप्लावित हो गया । इस युग परि वर्तन का कारण कोलम्बस की यात्रा थी जिसके फलस्वरूप अमरीका जैसे महाद्वीप का पता यूरोपवासियों को चला और साथ ही वास्को डिगामा की वह यात्रा थी जिसमें वह अफ्रीका के महाद्वीप का चक्कर काट कर भारत पहुँचा । - स्मरण रहे कि इन दोनों यात्राओं के पीछे यह प्रेरणा थी कि यूरोप के सागरतट-वासी देश अपना व्यापारिक सम्पर्क पृथ्वीमण्डल के कुबेरागार एशियाई देशों अर्थात् भारत और चीन से स्थापित कर सकें, किन्तु इस प्रयास में उनके हाथ पड़ गये उत्तरी और दक्षिणी अमरीका महाद्वीप, अफ्रीका महाद्वीप और आस्ट्रेलिया महाद्वीम, साथ ही इन महाद्वीपों के सारे सम्पत्ति साधन । इसके
• स्पष्ट प्रतीत होगा कि उन सबमें जम्बू द्वीप या एशिया का ही सर्वोपरि स्थान है । अन्य महाद्वीपों की अपेक्षाही अधिक बड़ा और फैला हुआ है । उसके गर्भ में हर प्रकार के आर्थिक साधन प्रचुर मात्रा में दबे पड़े हैं। और इसी में गंगा की 'तलहठी जैसी उर्वरा भूमि भी बड़े क्षेत्र में पायी जाती है। अपने इन्हीं आर्थिक साधनों के कारण यह जम्बूद्वीप मानव इतिहास के उषाकाल से ही मनुष्य जाति की प्रमुख लीला भूमि रहा है। इसी के वक्ष पर मानव की अनेक जातियाँ सहस्रों वर्षों से पलती आ रही हैं और संसार के जनसमुदाय का अधिकांश भाग एशिया में ही सर्वदा बसता रहा है। मानव जाति के प्रारम्भिक युगों से ही एशिया में ही प्रबल साम्राज्यों और विशाल राजनैतिक तंत्रों का जन्म हुआ और सहस्रों वर्ष तक इनका अस्तित्व रहा । यह कहना अनुचित न होगा कि सोलहवीं · शताब्दी के आरम्भ तक धन की दृष्टि से, विद्या और विज्ञान की दृष्टि से, नीति श्रौर धर्म की दृष्टि से, राजनीतिक तंत्र और शक्ति की दृष्टि से एशिया ही पृथ्वीमण्डल का केन्द्र था। उन दिनों यूरोप तो उसके एक पार्श्ववर्ती क्षुद्र प्रान्त के समान था । इतिहास की धारा समरकन्द, बुखारा, पाटलिपुत्र या उज्जयिनी के किनारे होकर बहती थी और पृथ्वी भर में इन नगरों की समृद्धि तथा वैभव • से टक्कर लेने वाला कोई नगर न पाया जाता था । इस प्रकार उन दिनों एशिया लक्ष्मी और सरस्वती की क्रीड़ा भूमि था और था पृथ्वी का कुबेरागार । : किन्तु जैसा कहा है सदा किसी का दौरदौरा नहीं रहता, उसका युग-युगान्तर का वैभव भी लुप्त हो गया और वह स्वयं तथा सारा पृथ्वीमण्डल उसके एक छोटे और नगण्य सूखण्ड यूरोप की बाढ़ से प्राप्लावित हो गया । इस युग परि वर्तन का कारण कोलम्बस की यात्रा थी जिसके फलस्वरूप अमरीका जैसे महाद्वीप का पता यूरोपवासियों को चला और साथ ही वास्को डिगामा की वह यात्रा थी जिसमें वह अफ्रीका के महाद्वीप का चक्कर काट कर भारत पहुँचा । - स्मरण रहे कि इन दोनों यात्राओं के पीछे यह प्रेरणा थी कि यूरोप के सागरतट-वासी देश अपना व्यापारिक सम्पर्क पृथ्वीमण्डल के कुबेरागार एशियाई देशों अर्थात् भारत और चीन से स्थापित कर सकें, किन्तु इस प्रयास में उनके हाथ पड़ गये उत्तरी और दक्षिणी अमरीका महाद्वीप, अफ्रीका महाद्वीप और आस्ट्रेलिया महाद्वीम, साथ ही इन महाद्वीपों के सारे सम्पत्ति साधन । इसके
मल्लिकार्जुन खड़गे असल में पोडियम में भाषण देने जाने के लिए खड़े थे। कर्नाटक के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के जीत के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो जमकर वायरल किया जा रहा है। इस रैली में हम मंच पर राहुल गाँधी, सोनिया गाँधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता को खड़े देख सकते है। इस वीडियो में सारे नेताओं का अभिवादन करने के बाद हम कांग्रेस नेता सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी को बैठते हुए देख सकते है जबकि उनके बाजु में मल्लिकार्जुन खड़गे खड़े दिखते है। सोशल मीडिया पर इस वीडियो को शेयर करते हुए यूजर का दावा है कि मल्लिकार्जुन खड़गे के कांग्रेस के अध्यक्ष होने के बावजूद उनको कुर्सी पर बैठने के लिए सोनिया गाँधी की अनुमति लेना पड़ता है। यूजर का कहना है कि मल्लिकार्जुन खड़गे को इस तरीके से खड़े रखकर उनका अपमान किया जा रहा है। जाँच की शुरुवात हमने वायरल वीडियो को यूट्यूब और गूगल पर कीवर्ड सर्च कर ढूँढने से शुरू की, जिसके परिणाम से हमें यूट्यूब पर कांग्रेस के चैनल वायरल वीडियो का लंबा वर्शन मिला। इस आयोजन का लाइव स्ट्रीम कांग्रेस ने अपने चैनल से 6 मई 2023 को अपलोड किया था। इस वीडियो के कैप्शन में लिखा गया है कि "जॉइंट मेगा रैली, हुबली, कर्नाटक"। वीडियो में हम 22 मिनट 50 सेकंड के टाइमस्टाम्प पर वायरल वीडियो वाला हिस्सा देख सकते हैं। इस वीडियो के शुरुवात में हम सारें कांग्रेस नेताओं को स्टेज पर आ कर राहुल गाँधी, सोनिया गाँधी और मल्लिकार्जुन खड़गे को अभिनंदन देते है जिसके तुरंत बाद तीनों को एक साथ बैठते हुए देख सकते है। इस दृश्य को आप 1 मिनट 9 सेकंड के टाइमस्टैम्प से देख सकते है। इस वीडियो को ध्यान से देखकर पर हम सोनिया गाँधी को अपना भाषण ख़त्म करने के बाद उनके सीट पर जाकर बैठते हुए देख सकते है, ये हिस्सा आप वायरल वीडियो के टाइमस्टाम्प के पहले देख सकते है। मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गाँधी इसके बाद खड़े होकर सोनिया गाँधी का अभिवादन करते है। इसके थोड़े देर बाद हम खड़गे को सोनिया गाँधी के बैठने के बाद पोडियम की तरफ़ बढ़ते हुए देख सकते है। इस वीडियो में 23 मिनट के टाइमस्टैम्प में देख सकते है कि खड़गे पोडियम के तरफ बढने के लिए खड़े रहते है। इस हिस्से को काटकर सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है। खड़गे असल में सोनिया गाँधी के अनुमति का इंतज़ार नहीं कर रहे थे बल्कि वे पोडियम के तरफ़ जाने के लिए खड़े थे। तथ्यों की जाँच के पश्चात हमने वायरल वीडियो के साथ किये गये दावे को गलत पाया है। वायरल वीडियो अधुरा है जिसका ये मतलब है कि मूल वीडियो के आगे और पीछे के हिस्से को काटकर सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है। मल्लिकार्जुन खड़गे असल में सोनिया गाँधी की इजाज़त का इंतज़ार नहीं कर रहे थे बल्कि वे पोडियम में भाषण देने जाने के लिए खड़े थे।
मल्लिकार्जुन खड़गे असल में पोडियम में भाषण देने जाने के लिए खड़े थे। कर्नाटक के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के जीत के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो जमकर वायरल किया जा रहा है। इस रैली में हम मंच पर राहुल गाँधी, सोनिया गाँधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता को खड़े देख सकते है। इस वीडियो में सारे नेताओं का अभिवादन करने के बाद हम कांग्रेस नेता सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी को बैठते हुए देख सकते है जबकि उनके बाजु में मल्लिकार्जुन खड़गे खड़े दिखते है। सोशल मीडिया पर इस वीडियो को शेयर करते हुए यूजर का दावा है कि मल्लिकार्जुन खड़गे के कांग्रेस के अध्यक्ष होने के बावजूद उनको कुर्सी पर बैठने के लिए सोनिया गाँधी की अनुमति लेना पड़ता है। यूजर का कहना है कि मल्लिकार्जुन खड़गे को इस तरीके से खड़े रखकर उनका अपमान किया जा रहा है। जाँच की शुरुवात हमने वायरल वीडियो को यूट्यूब और गूगल पर कीवर्ड सर्च कर ढूँढने से शुरू की, जिसके परिणाम से हमें यूट्यूब पर कांग्रेस के चैनल वायरल वीडियो का लंबा वर्शन मिला। इस आयोजन का लाइव स्ट्रीम कांग्रेस ने अपने चैनल से छः मई दो हज़ार तेईस को अपलोड किया था। इस वीडियो के कैप्शन में लिखा गया है कि "जॉइंट मेगा रैली, हुबली, कर्नाटक"। वीडियो में हम बाईस मिनट पचास सेकंड के टाइमस्टाम्प पर वायरल वीडियो वाला हिस्सा देख सकते हैं। इस वीडियो के शुरुवात में हम सारें कांग्रेस नेताओं को स्टेज पर आ कर राहुल गाँधी, सोनिया गाँधी और मल्लिकार्जुन खड़गे को अभिनंदन देते है जिसके तुरंत बाद तीनों को एक साथ बैठते हुए देख सकते है। इस दृश्य को आप एक मिनट नौ सेकंड के टाइमस्टैम्प से देख सकते है। इस वीडियो को ध्यान से देखकर पर हम सोनिया गाँधी को अपना भाषण ख़त्म करने के बाद उनके सीट पर जाकर बैठते हुए देख सकते है, ये हिस्सा आप वायरल वीडियो के टाइमस्टाम्प के पहले देख सकते है। मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गाँधी इसके बाद खड़े होकर सोनिया गाँधी का अभिवादन करते है। इसके थोड़े देर बाद हम खड़गे को सोनिया गाँधी के बैठने के बाद पोडियम की तरफ़ बढ़ते हुए देख सकते है। इस वीडियो में तेईस मिनट के टाइमस्टैम्प में देख सकते है कि खड़गे पोडियम के तरफ बढने के लिए खड़े रहते है। इस हिस्से को काटकर सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है। खड़गे असल में सोनिया गाँधी के अनुमति का इंतज़ार नहीं कर रहे थे बल्कि वे पोडियम के तरफ़ जाने के लिए खड़े थे। तथ्यों की जाँच के पश्चात हमने वायरल वीडियो के साथ किये गये दावे को गलत पाया है। वायरल वीडियो अधुरा है जिसका ये मतलब है कि मूल वीडियो के आगे और पीछे के हिस्से को काटकर सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है। मल्लिकार्जुन खड़गे असल में सोनिया गाँधी की इजाज़त का इंतज़ार नहीं कर रहे थे बल्कि वे पोडियम में भाषण देने जाने के लिए खड़े थे।
RGCB पात्र उम्मीदवारों को Junior Research Fellow के पद के लिए 1 रिक्तियों को भरने के लिए Thiruvananthapuram पर आमंत्रित कर रहा है। इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक अधिसूचना की जांच कर सकते हैं और पात्रता मानदंड, आवश्यक दस्तावेज, अंतिम तिथि और चयन प्रक्रिया के बारे में विवरण प्राप्त कर सकते हैं। RGCB Junior Research Fellow भर्ती 2023 से संबंधित आवेदन लिंक नीचे दिया गया है। RGCB Junior Research Fellow भर्ती 2023 के लिए शैक्षिक योग्यता नीचे दी गई है। RGCB भर्ती 2023 शैक्षिक योग्यता है M. Sc. RGCB भर्ती 2023 के लिए Junior Research Fellow के लिए रिक्ति गणना 1 है। आवेदन करने के इच्छुक उम्मीदवार यहां RGCB Junior Research Fellow विवरण देख सकते हैं। उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा / व्यक्तिगत साक्षात्कार / चिकित्सा परीक्षण / वॉकिन साक्षात्कार के आधार पर किया जाएगा। एक बार एक उम्मीदवार का चयन हो जाने के बाद उन्हें RGCB में Junior Research Fellow के रूप में रखा जाएगा। यदि आपको Junior Research Fellow की भूमिका के लिए RGCB में रखा गया है, तो आपका वेतनमान Rs. 31,000 - Rs. 31,000 Per Month होगा। Junior Research Fellow के लिए RGCB 2023 पर नौकरी रिक्ति Thiruvananthapuram पर उपलब्ध है। उम्मीदवार अंतिम तिथि से पहले आधिकारिक वेबसाइट पर RGCB Junior Research Fellow भर्ती 2023 के लिए आवेदन कर सकते हैं। आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार RGCB भर्ती 2023 के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 15/06/2023 है। नियत तारीख के बाद भेजे गए आवेदनों को कंपनी द्वारा स्वीकार नहीं किया जाएगा। How to apply for RGCB Recruitment 2023? चरण 1: पर जाएं आधिकारिक वेबसाइट rgcb. res. in .
RGCB पात्र उम्मीदवारों को Junior Research Fellow के पद के लिए एक रिक्तियों को भरने के लिए Thiruvananthapuram पर आमंत्रित कर रहा है। इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक अधिसूचना की जांच कर सकते हैं और पात्रता मानदंड, आवश्यक दस्तावेज, अंतिम तिथि और चयन प्रक्रिया के बारे में विवरण प्राप्त कर सकते हैं। RGCB Junior Research Fellow भर्ती दो हज़ार तेईस से संबंधित आवेदन लिंक नीचे दिया गया है। RGCB Junior Research Fellow भर्ती दो हज़ार तेईस के लिए शैक्षिक योग्यता नीचे दी गई है। RGCB भर्ती दो हज़ार तेईस शैक्षिक योग्यता है M. Sc. RGCB भर्ती दो हज़ार तेईस के लिए Junior Research Fellow के लिए रिक्ति गणना एक है। आवेदन करने के इच्छुक उम्मीदवार यहां RGCB Junior Research Fellow विवरण देख सकते हैं। उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा / व्यक्तिगत साक्षात्कार / चिकित्सा परीक्षण / वॉकिन साक्षात्कार के आधार पर किया जाएगा। एक बार एक उम्मीदवार का चयन हो जाने के बाद उन्हें RGCB में Junior Research Fellow के रूप में रखा जाएगा। यदि आपको Junior Research Fellow की भूमिका के लिए RGCB में रखा गया है, तो आपका वेतनमान Rs. इकतीस,शून्य - Rs. इकतीस,शून्य Per Month होगा। Junior Research Fellow के लिए RGCB दो हज़ार तेईस पर नौकरी रिक्ति Thiruvananthapuram पर उपलब्ध है। उम्मीदवार अंतिम तिथि से पहले आधिकारिक वेबसाइट पर RGCB Junior Research Fellow भर्ती दो हज़ार तेईस के लिए आवेदन कर सकते हैं। आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार RGCB भर्ती दो हज़ार तेईस के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि पंद्रह जून दो हज़ार तेईस है। नियत तारीख के बाद भेजे गए आवेदनों को कंपनी द्वारा स्वीकार नहीं किया जाएगा। How to apply for RGCB Recruitment दो हज़ार तेईस? चरण एक: पर जाएं आधिकारिक वेबसाइट rgcb. res. in .
इन दिनों बॉलीवुड एक्ट्रेस दीया मिर्ज़ा को सॉइल मीडिया पर काफी निशाने पर लिया जा रहा है. साथ ही उन्हें ट्रोलर्स का भी शिकार होना पड़ रहा है. इसी सबसे बड़ी वजह है. उनका शादी के एक महीने बाद ही मां बनने की खबर की शेयर करना. इसके बाद तो मानों उन पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा. लोगों ने जितना उन्हें बधाई नहीं दी. उससे कहीं गुना ज्यादा तो लोगों ने उन्हें ट्रोल कर दीया. इसलिए आज हम आपको ऐसी ही अन्य अभिनेत्रियों के बारे में बताने जा रहे है. जिन्होंने शादी के तुरंत बाद ही प्रेग्नेंट होने की खबर दी और कुछ महीनों में मां भी बन गई. इस लिस्ट में कई बड़े नाम भी शामिल है. इसमें नेहा नेहा धूपिया (Neha Dhupia), सेलिना जेटली (Celina Jaitly), कोंकणा सेन (Konkona Sen) के नाम भी शामिल है. इस लिस्ट में हालिया दीया मिर्ज़ा की भी एंट्री हुई है. नेहा धूपिया भी अपने बिंदास स्टेटस के लिए जानी जाती है. एक्ट्रेस नेहा धूपिया ने अंगद बेदी से शादी की थी. नेहा ने भी शादी के कुछ दिनों बाद ही अपनी प्रेग्नेंसी की जानकारी सभी को बता दी थी. नेहा ने एक बेटी को जन्म दिया है. जिसका नाम उन्होंने मेहर रखा है. वर्ष 2011 में सेलिना ने शादी की थी. शादी के तुरंत बाद ही इस खूबसूरत एक्ट्रेस ने अपने प्रेगनेंट होने की जानकारी सभी को बता दी थी. अभिनेत्री सेलिना जेटली ने अपने बेबी बंप के साथ खूब फोटोज सोशल मीडिया पर शेयर की थी. भारत के स्टार आल राउंडर हार्दिक पांड्या ने भी जनवरी 2020 में नताशा स्तांकोविक के साथ शादी की थी. इसके कुछ दिनों बाद ही उन्होंने मां बनने की जानकारी दी थी. इसके बाद नताशा स्तांकोविक शादी के 7 महीने बाद ही जुलाई 2020 में एक बेटे की मां बन गई थी. हार्दिक पांड्या के जीवन में सगाई से लेकर पिता बनने की यात्रा कैफ मजेदार रही. बॉलीवुड की बोल्ड और हॉट एक्ट्रेस मलाइका अरोड़ा (Malaika Arora) की छोटी बहन अमृता अरोड़ा (Amrita Arora) भी अपनी शादी से पहले ही प्रेग्नेंट हो चुकी थी. उन्होंने बिजनेस मैन शकील लद्दाक से शादी की है. शकील लद्दाक की वह दूसरी पत्नी है. उनकी पहली पत्नी अमृता की ही अच्छी दोस्त थी. अभिनेत्री दीया मिर्जा ने हाल ही में दूसरी बार वैभव रेखी से शादी की है. शादी के डेढ़ महीने बाद ही दीया ने सोशल मीडिया पर अपने प्रेग्नेंट होने की खबर दे दी थी. दीया ने बीते 15 फरवरी को ही शादी की थी. उन्होंने अपनी बेबी बंप वाली फोटो शेयर की है. इसी के बाद उन्हें ट्रोल किया गया था. अपनी शानदार एक्टिंग के लिए मशहूर एक्ट्रेस कोंकणा सेन के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. कोंकणा सेन अपनी शादी के पहले ही प्रेग्नेंट हो गई थी. अभिनेत्री कोंकणा सेन ने रणवीर शौरी के साथ शादी की थी. अभिनेत्री महिमा चौधरी के जलवे अपने समय में एक तरफा थे. महिमा चौधरी ने वर्ष 2006 में बॉबी मुखर्जी से शादी की थी. महिमा अपनी शादी के पहले ही प्रेग्नेंट हो चुकी थी. उन्होंने अपनी शादी के कुछ दिनों बाद ही खुद के प्रेग्नेंट होने की खबर दे दी थीं.
इन दिनों बॉलीवुड एक्ट्रेस दीया मिर्ज़ा को सॉइल मीडिया पर काफी निशाने पर लिया जा रहा है. साथ ही उन्हें ट्रोलर्स का भी शिकार होना पड़ रहा है. इसी सबसे बड़ी वजह है. उनका शादी के एक महीने बाद ही मां बनने की खबर की शेयर करना. इसके बाद तो मानों उन पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा. लोगों ने जितना उन्हें बधाई नहीं दी. उससे कहीं गुना ज्यादा तो लोगों ने उन्हें ट्रोल कर दीया. इसलिए आज हम आपको ऐसी ही अन्य अभिनेत्रियों के बारे में बताने जा रहे है. जिन्होंने शादी के तुरंत बाद ही प्रेग्नेंट होने की खबर दी और कुछ महीनों में मां भी बन गई. इस लिस्ट में कई बड़े नाम भी शामिल है. इसमें नेहा नेहा धूपिया , सेलिना जेटली , कोंकणा सेन के नाम भी शामिल है. इस लिस्ट में हालिया दीया मिर्ज़ा की भी एंट्री हुई है. नेहा धूपिया भी अपने बिंदास स्टेटस के लिए जानी जाती है. एक्ट्रेस नेहा धूपिया ने अंगद बेदी से शादी की थी. नेहा ने भी शादी के कुछ दिनों बाद ही अपनी प्रेग्नेंसी की जानकारी सभी को बता दी थी. नेहा ने एक बेटी को जन्म दिया है. जिसका नाम उन्होंने मेहर रखा है. वर्ष दो हज़ार ग्यारह में सेलिना ने शादी की थी. शादी के तुरंत बाद ही इस खूबसूरत एक्ट्रेस ने अपने प्रेगनेंट होने की जानकारी सभी को बता दी थी. अभिनेत्री सेलिना जेटली ने अपने बेबी बंप के साथ खूब फोटोज सोशल मीडिया पर शेयर की थी. भारत के स्टार आल राउंडर हार्दिक पांड्या ने भी जनवरी दो हज़ार बीस में नताशा स्तांकोविक के साथ शादी की थी. इसके कुछ दिनों बाद ही उन्होंने मां बनने की जानकारी दी थी. इसके बाद नताशा स्तांकोविक शादी के सात महीने बाद ही जुलाई दो हज़ार बीस में एक बेटे की मां बन गई थी. हार्दिक पांड्या के जीवन में सगाई से लेकर पिता बनने की यात्रा कैफ मजेदार रही. बॉलीवुड की बोल्ड और हॉट एक्ट्रेस मलाइका अरोड़ा की छोटी बहन अमृता अरोड़ा भी अपनी शादी से पहले ही प्रेग्नेंट हो चुकी थी. उन्होंने बिजनेस मैन शकील लद्दाक से शादी की है. शकील लद्दाक की वह दूसरी पत्नी है. उनकी पहली पत्नी अमृता की ही अच्छी दोस्त थी. अभिनेत्री दीया मिर्जा ने हाल ही में दूसरी बार वैभव रेखी से शादी की है. शादी के डेढ़ महीने बाद ही दीया ने सोशल मीडिया पर अपने प्रेग्नेंट होने की खबर दे दी थी. दीया ने बीते पंद्रह फरवरी को ही शादी की थी. उन्होंने अपनी बेबी बंप वाली फोटो शेयर की है. इसी के बाद उन्हें ट्रोल किया गया था. अपनी शानदार एक्टिंग के लिए मशहूर एक्ट्रेस कोंकणा सेन के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. कोंकणा सेन अपनी शादी के पहले ही प्रेग्नेंट हो गई थी. अभिनेत्री कोंकणा सेन ने रणवीर शौरी के साथ शादी की थी. अभिनेत्री महिमा चौधरी के जलवे अपने समय में एक तरफा थे. महिमा चौधरी ने वर्ष दो हज़ार छः में बॉबी मुखर्जी से शादी की थी. महिमा अपनी शादी के पहले ही प्रेग्नेंट हो चुकी थी. उन्होंने अपनी शादी के कुछ दिनों बाद ही खुद के प्रेग्नेंट होने की खबर दे दी थीं.
हो भारत के नागरिक समझे जायेंगे यदि उन्हाने भारत के राजनीतिक या व णिज्यिक प्रतिनिधि के राम आवेदन पत्र देकर अपने को भारत का नागरिक पंजीबद्ध करा लिया है तो उन्हें भारतका नागरिक समझा जायगा । भारतीय नागरिकता क लिये भारत में आधेसी शत अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त प्रार्थी का जन्म, प्रार्थी के मात-पिता का जन्म और संविधान के लागू होने से पूर्व पाच वर्ष तक भारत में अधिवास अवश्यक है । यदि कोई भारतवासी स्वच्छा से किसा अन्य देश की नागरिकता स्वाकार कर ले तो वह तत्काल भारत का नगरकता से वन्चित हो जाता है । भारतीय नागरिकत के संबन्ध में एक बात और उल्लेखनीय है। हमारे यहां संघीय व्यवस्था होते हुए भी अनरिका की भाति दाहरी नागरिकता नहीं है । अमेरिका का नागरिक उस रका, जिसमें वह निवास करता है, तथा संघ दानों का नागरिक बनना आवश्यक होता है। इसके विपरीत भारत के किसी भी भाग का नागरिक समस्त भारत का नागरिक कहल. येगा । मूल अधिकार - संविधान द्वारा नागरिकों का कुछ मूल अधिकार दिये गये है जो निम्नलिखित हैः(अ) समता का अधिकार (आ) स्वतंत्रता का अधिकार (इ) शंषण के विरुद्ध अधिकार (ई) धार्मिक स्वतंत्र का अधिकार (उ) संस्कृति और शिक्षा सन्बन्धी अधिकार (ऊ) सम्पत्तिका अधिकार (ए) संवैधानिक उपचारों के अधिकार लगभग सभी देशों में, जहां लिखित एवं निर्मित विधन प्रचलित है नागरिक के मूल अधिकारों का यथेष्ठ महत्व दिया गया है। इसमें सन्देह नहीं कि भारतीय संविधान में मूल अधिकारों को अन्य देशों की अपेक्षा अधिक
हो भारत के नागरिक समझे जायेंगे यदि उन्हाने भारत के राजनीतिक या व णिज्यिक प्रतिनिधि के राम आवेदन पत्र देकर अपने को भारत का नागरिक पंजीबद्ध करा लिया है तो उन्हें भारतका नागरिक समझा जायगा । भारतीय नागरिकता क लिये भारत में आधेसी शत अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त प्रार्थी का जन्म, प्रार्थी के मात-पिता का जन्म और संविधान के लागू होने से पूर्व पाच वर्ष तक भारत में अधिवास अवश्यक है । यदि कोई भारतवासी स्वच्छा से किसा अन्य देश की नागरिकता स्वाकार कर ले तो वह तत्काल भारत का नगरकता से वन्चित हो जाता है । भारतीय नागरिकत के संबन्ध में एक बात और उल्लेखनीय है। हमारे यहां संघीय व्यवस्था होते हुए भी अनरिका की भाति दाहरी नागरिकता नहीं है । अमेरिका का नागरिक उस रका, जिसमें वह निवास करता है, तथा संघ दानों का नागरिक बनना आवश्यक होता है। इसके विपरीत भारत के किसी भी भाग का नागरिक समस्त भारत का नागरिक कहल. येगा । मूल अधिकार - संविधान द्वारा नागरिकों का कुछ मूल अधिकार दिये गये है जो निम्नलिखित हैः समता का अधिकार स्वतंत्रता का अधिकार शंषण के विरुद्ध अधिकार धार्मिक स्वतंत्र का अधिकार संस्कृति और शिक्षा सन्बन्धी अधिकार सम्पत्तिका अधिकार संवैधानिक उपचारों के अधिकार लगभग सभी देशों में, जहां लिखित एवं निर्मित विधन प्रचलित है नागरिक के मूल अधिकारों का यथेष्ठ महत्व दिया गया है। इसमें सन्देह नहीं कि भारतीय संविधान में मूल अधिकारों को अन्य देशों की अपेक्षा अधिक
अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में भी लोकसभा चुनावों के साथ ही होंगे विधानसभा चुनाव। आंध्र प्रदेश और ओडिशा में लोकसभा चुनाव के साथ होंगे लोकसभा चुनाव। नई दिल्लीः 2019 लोकसभा के लिए चुनाव की तारीखों की घोषणा हो गई है। चुनाव 7 चरणों में होंगे। इसी के साथ आंध्रप्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, ओडिशा के विधानसभा चुनाव भी कराए जाने की घोषणा चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने की। हालांकि सुरक्षा कारणों से जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनावों लोकसभा के साथ नहीं कराया जा रहा है। जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव साथ में न कराए जाने पर पर आयोग ने कहा कि राज्य सरकार और गृह मंत्रालय से इस संबंध में बातचीत करने के बाद यह फैसला लिया गया है। फिलहाल वहां चुनावों को टाल दिया गया है। जबकि चार राज्यों के विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनाव के साथ में होंगे। यूपी की 80 लोक सभा सीटों पर 7 चरण में होगा मतदान. . इस दिन आपके जिले में होगा मतदान. . गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल 18 जून, अरुणाचल प्रदेश विधानसभा का जून के प्रथम सप्ताह, सिक्किम विधानसभा का कार्यकाल 27 मई और ओडिशा विधानसभा का कार्यकाल 11 जून को समाप्त हो रहा है। ओडिशा में बीजू जनता दल की सरकार है। यहां 147 विधानसभा सीट हैं। सिक्किम में 32 विधानसभा सीट हैं। अभी यहां सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट के पवन कुमार चामलिंग मुख्यमंत्री हैं। अरुणाचल प्रदेश में 60 सीट हैं। यहां से भाजपा के पेमा खांडू मुख्यमंत्री हैं। आंध्र प्रदेश में 176 सीट हैं। यहां के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू हैं। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल 87 सीट हैं। यहां राज्यपाल शासन लगा हुआ है।
अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में भी लोकसभा चुनावों के साथ ही होंगे विधानसभा चुनाव। आंध्र प्रदेश और ओडिशा में लोकसभा चुनाव के साथ होंगे लोकसभा चुनाव। नई दिल्लीः दो हज़ार उन्नीस लोकसभा के लिए चुनाव की तारीखों की घोषणा हो गई है। चुनाव सात चरणों में होंगे। इसी के साथ आंध्रप्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, ओडिशा के विधानसभा चुनाव भी कराए जाने की घोषणा चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने की। हालांकि सुरक्षा कारणों से जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनावों लोकसभा के साथ नहीं कराया जा रहा है। जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव साथ में न कराए जाने पर पर आयोग ने कहा कि राज्य सरकार और गृह मंत्रालय से इस संबंध में बातचीत करने के बाद यह फैसला लिया गया है। फिलहाल वहां चुनावों को टाल दिया गया है। जबकि चार राज्यों के विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनाव के साथ में होंगे। यूपी की अस्सी लोक सभा सीटों पर सात चरण में होगा मतदान. . इस दिन आपके जिले में होगा मतदान. . गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल अट्ठारह जून, अरुणाचल प्रदेश विधानसभा का जून के प्रथम सप्ताह, सिक्किम विधानसभा का कार्यकाल सत्ताईस मई और ओडिशा विधानसभा का कार्यकाल ग्यारह जून को समाप्त हो रहा है। ओडिशा में बीजू जनता दल की सरकार है। यहां एक सौ सैंतालीस विधानसभा सीट हैं। सिक्किम में बत्तीस विधानसभा सीट हैं। अभी यहां सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट के पवन कुमार चामलिंग मुख्यमंत्री हैं। अरुणाचल प्रदेश में साठ सीट हैं। यहां से भाजपा के पेमा खांडू मुख्यमंत्री हैं। आंध्र प्रदेश में एक सौ छिहत्तर सीट हैं। यहां के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू हैं। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल सत्तासी सीट हैं। यहां राज्यपाल शासन लगा हुआ है।
परिणामो के आधार पर सर जेम्स जीन्स (Jeans) ने अपना सिद्धात बनाया, जिसका विवरण नीचे दिया जाता है । जोन्स का सिद्धांत - जोन्स ने न्यूटन की तरह यह माना कि आरंभ में द्रव्य बहुत दूर तक, प्राय अनत दूर तक, सम रूप से, फैला हुआ था। जोन्स ने गणित द्वारा यह सोज की कि इस प्रकार विसरे द्रव्य से यदि पिंड बनेंगे तो वितन वडे चड़े और कितनी दूर-दूर पर जीन्स ने पहले इसकी गणना की कि यदि ऐसे माध्यम में लहरें उठें तो उनकी लहर लवाई क्या होगी, लहरें कितनी वडी रहेंगी तो द्रव्य वही सिमट जायगा, वही फट जायगा ; द्रव्य वा घनत्व क्या रहा होगा, तापत्रम क्या रहा होगा, इत्यादि । हवल ( Hubble ) की गणनाओ से यह ज्ञात हूं कि यदि अतरिक्ष वे सब तारो और नीहारिवाओ का द्रव्य पीस कर इस प्रकार बिखेर दिया जाय कि सब जगह घनत्व बरावर हो जाय तो प्रति घन इच १ ग्राम (लगभग १ मागा) वा १० वी भाग द्रव्य होगा । १०" का अर्थ है कि १ की दाहिनी ओर ३२ शून्य लिखे जायें। दूसरे शब्दो में १००० घन गज में लगभग एक अणु द्रव्य होगा । ऐसे द्रव्य पर गणित लगाने से यह परिणाम निकलता है कि जब द्रव्य घनीभूत होगा तो तारो से वही भारी (वरोड, दस करोड गुना भारी ) पिड बनेंगे । इसलिए अनुमान किया जाता है कि आरंभ में तारे न बने होगें, नोहारिकाएँ बनी होगी। नीहारिकाओं के विकास पर पहले विचार किया जा चुका है, इसलिए वे बातें यहाँ दुहराई न जायेंगी । नीहारिकाओ के फोटोग्राफी में गोल और प्राय गोल से लेकर चिपटी गोलाभ तथा धारदार मध्यरेखा वाली नीहारिकाएं सभी मिलती है। केंद्रीय गोल या गोलाभ भाग को घरे हुए जो पदार्थ रहता हूँ उसको मोटाई बहुत कम प्रतीत होती है । इन सब बातों से विश्वास दृढ हो जाता है कि जीन्स की कल्पना के अनुसार हो नीहारिकाओ का जन्म हुआ है। जोन्स का कहना है कि जैसे हमारे वायुमंडल में पवन बहा करता हूँ, उसी प्रकार हमारे सर्वत्र विखरे प्रारंभिक द्रव्य में भी वही धीरे, कही प्रचड वेग से पवन बहता रहा होगा, उसमें आँधी आती रही होगी, ववडर उठते रहे होगे । इसी से पृथक् पृथक् नीहारिकाओं में चक्कर किसी में कम क्सिो में अधिक उत्पन्न होगया होगा । तारो की उत्पत्ति - जोन्स ने अनुमान किया हूं कि वेग बढने पर नोहारिकाओं से जो द्रव्य छटका होगा उसका घनत्व प्राथमिक द्रव्य के घनत्व से १० अरब गुना अधिक रहा होगा, और इसलिए लह्रौ के तरग-दध्य पहले की अपक्षा छोर्ट रहे होगें। गणना से पता चलता है कि ऐसे पदार्थ से जो पिंड बने होगे उनका द्रव्यमान तारो के द्रव्यमान के बराबर रहा होगा। इसलिए अब ज्योतिषियो को धारणा है कि तारे सपिल नीहारिकाओ को भुजाओं में उत्पन्न होते है । वास्तविक नीहारिकाओं की भुजाओं में तारो का पाया जाना इस बात का समर्थन करता है । तारायुग्मों को उत्पत्ति - तारों क जन्म तन तो लाप्लास और जोन्स क सिद्धान्तो में विशेष अंतर नही हूँ । जीन्म ने गणित में अधिक सहायता ली है, लाप्लासने कई बातो को केवल पा पराष्ट्री आश्रित छोट दिया था। परतु सूर्य ने ग्रहों की उत्पति से हुई इन पर जीन्ग मा मत सर्वथा विभिन्न हूँ । जीन्स या महता हूं वि जन्म के बाद तारा सचित होता चला जाता है और जब तक उपकेंद्र तरीके समान धना नहीं हो जाता, तब तर छोटे हो जाने के अतिरिक्त उसमें बोई विशेष परिवर्तन नहीं होता। यदि कुछ पदार्थ छटा भी हूँ तो यह पनीभूत नहीं हो पाता, टोप पैसे से जैसे रवट के गुब्बारे पर गंगोमूत नहीं होती। घनीभूत होने के लिये बहुत प्रथ्य माहिए। तभी आवषंण-शति इतनी हो पाती है गंगकी प्रसरणशको दरा राजे । जब तारे या पनत्व तरी यो समान हो जाता है रान उसमें वे गव विकार उत्पन्न होते है जो घरों में हो गड़ते हैं। जीन्स में गणित के अनुसार यदि तरल पागलपंड धीरे-धीरे नाचने लगतीपट आहति गोलाभ हो जायगी, अर्थात् पिट नारगी की तरह कुछ चिपटा हो जायगा । नाही करेगा चिपटापन उतना ही बड़ेगा, परंतु जब छोटा अक्ष मध्यरेखा के व्याग का मन्तवादशाश हो जायगा (अर्थात् उगना ७/१२ हो जायगा) तो पिड उसके बाद अधिचिपटा नहीं होगा। इमरे बदरे पिड अडावार होने लगेगा। इसकी आवृति यह हो जायगी जिसे गणित में तीन अराम उयो वाला दीर्घवृनाभ (एप्लिॉयट) कहते है । वेग और बढ़ने पर पिड यो लवाई बढ़ती जायगी, यहाँ तक कि लवा अश सब से छोटे ना हो जायगा । इस अवस्था में पिड में हल मचने लगती है। बीच से थोडा हट कर पिंड में बमर-गी बन जाती है, जिससे पिङ तुवामा लगने लगता हूँ। कभी एन सिरा बढ़ना हूँ, क्यो दूमरा, और इन मन आन्दोलनों का परिणाम यह होता है वि पिंड दो सडो में टूट जाता है। विश्याम किया जाता है कि युग्मतारे इसी प्रकार उत्पन्न हुए है। जीन्स ने गणित से सिद्ध किया है वि गैनीय पिढ इस रीति से दो खडा में नही विभक्त हो सकता, केवल तरल पिंड में ही ऐसा विकास हो सकता हूँ । जी० एच० डाविन (Darwin) ने सिद्ध किया है कि विभक्त होने के बाद प्रत्येव पिंड में दूसरे के कारण ज्वार-भाटाएँ उत्पन्न होगी, जिनके कारण ऊर्जा (एनर्जी) का हास होगा और पिडो के बीच की दूरी बगे। विकिरण के कारण सापेक्षवाद के अनुसार पिडो का द्रव्यमान भी घटता है और जीन्स ने सिद्ध किया है कि इस कारण से भी पिंड अधिव दूर होते जायेंगे । फिर, जब-जब कोई दूसरा तारा किसी युग्मतारे के पास से होकर निकल जाता है, तव तव युग्मतारे के सदस्यों की परस्पर दूरी बुद्ध बढ़ जाती है । इस प्रकार धीरे-धीरे उनके बीच में उतनी दूरी उत्पन हो जाती है जितनी बहुधा देखने में आती है । ग्रहों की उत्पति-नीहारिकाओ और तारों की उत्पत्ति पर तो हम विचार कर चुके, अब देखना चाहिए कि ग्रह कैसे उत्पन हुए होगे । ग्रहो की उत्पत्ति न तो प्राथमित्र नीहारिका से हुई होगी, न सूर्य के दो भागों में सहित होने से । नीहारिका से ग्रहो की उत्पत्ति हुई होती तो प्रहु बहुत बड़े होते वस्तुत वे तारे होते । यदि वे सूर्य के खड़ित होने से उत्पन्न हुए होते तो ये सूर्य से बहुत छोटे न होते । युग्मतारो में बडा तारा छोटे के धौगुना तक हो देखने में आया है, परतु सूर्य तो वृहस्पति से १००० गुना अधिक भारी है, बुध से ८० लास गुना भारी हैं। इस लिए ग्रहो की उत्पत्ति किसी दूसरी रीति से हुई होगी। इसके समर्थन में यह भी याद रखने योग्य है कि हमारा सूर्य अपनी धुरी पर बहुत कम वेग से नाचता है । ग्रहो में भी आवेग (मोमॅटम) कम है। इसलिए कोई लक्षण नहीं दिखाई पडता वि ग्रह पूर्वोक्त रीति से सूर्य के खडित होते पर बने है । जीन्त वा विश्वास है कि किसी समय कोई अन्य तारा हमारे सूर्य के पास से होता हुआ निकल गया । उसी के आकर्षण से कुछ द्रव्य, जैसा नीचे विस्तार से समझाया जायगा, सूर्य से नुच गया। इसी द्रव्य से ग्रह बने । ज्वार-भाटा सिद्धात - सूर्य कई अरब वर्षों से अतरिक्ष में चल रहा है। अन्य तारे भी चलते ही रहते हैं। इसलिए असभव नहीं जान पड़ता कि अत्यंत प्राचीन काल में कभी कोई दूसरातारा सूर्य के पास होता हुआ निकल गया हो। जिस प्रकार पृथ्वी के निकट होने के कारण घद्रमा पृथ्वी पर ज्वार-भाटा उत्पन्न करता है, उसी प्रकार इस बाहरी तारे ने सूर्य पर ज्वारभाटा इत्पन किया होग। उस समय हमारे सूर्य के पास पृथ्वी आदि ग्रह न रहे होगे। यदि तारा सूर्य की निज्या (अर्धव्यास) की तिगुनी से अधिक दूरी पर से हो कर निकलता, तो ज्वार-भाटा से उठा पदार्थ फिर बैठ जाता, परंतु वह सूर्य के अधिक निकट से होकर गया होगा। गणित बताता है कि ऐसी अवस्था में ज्वार-भाटा के कारण उठा पदार्थ छटक कर पृथक् हो गया होगा । जीन्स का कहना है कि इसी प्रकार छटके पदार्थ से ग्रह उत्पन्न हुए है। इसका समर्थन इस बात से होता है कि गणित के अनुसार छटवा पदार्थ जब सिमटेगा तब लगभग उतने ही बडे पिंड बनेंगे जितने बड़े ग्रह वस्तुत है। उपग्रहो की उत्पत्ति भी इसी प्रकार हुई होगी, क्योकि ग्रहो के बनते हो उन में सूर्य के कारण ज्वार-भाटा उठा होगा और कुछ पदार्थ छटका होगा। परंतु उपग्रहो के भी उपग्रह इसलिए न बन पाये होगे कि उपग्रहो में द्रव्य कम हूं, वे शीघ्र ठढे हो गये होगे । केवल इतना ही नही हुआ कि ग्रह और उपग्रह बने । अवश्य ही कुछ द्रव्य चूर्ण के रूप में बिसरा रह गया । वह सव द्रव्य धीरे धीरे किसी न किसी ग्रह में जा गिरा। इसका परिणाम गणितानुसार यह होता है कि दीर्घवृत्त में चलने वाले ग्रह प्राय वृत्ताकार मार्गों में चलने लगते है। वर्तमान ग्रह सभी लगभग वृत्ता में हो चलते हैं । पदार्थ आ गिरने के कारण ग्रहो के मार्ग कुछ अधिक बडे भी हो गये होग। समय पावर प्राय सभी पदार्थ ग्रह में या सूर्य में जा गिरा होगा और अतरिक्ष स्वच्छ हो गया होगा। सूर्य के पास अब भी कुछ धूलि-सी है, जो सूर्य के प्रकाश से दीप्तिमान होने के कारण राशिचक्र - प्रकाश (जोडाइऐक्ल लाइट) के रूप में हमें दिखाई पड़ती है । सभव है यह उसी पदार्थ का अवशेष हो जिससे ग्रह बने है । इस पर भी विचार किया गया है कि हमारे मौर जगत् की आयु क्या होगो । जफरीज ( Jeffreys ) ने हिसाब लगाया है कि मोटे हिमाब से ग्रहों को वतमान परिस्थिति में आने में ७ अरब वर्ष लगा होगा। हम पहने देख चुके हैं कि पृथ्वी की आयु भूगम विज्ञान के आधार पर लगभग २ अरव वर्षं है । इसलिए दोना एक दूसरमा समर्थन करते हैं । परंतु अन्य वई बातें
परिणामो के आधार पर सर जेम्स जीन्स ने अपना सिद्धात बनाया, जिसका विवरण नीचे दिया जाता है । जोन्स का सिद्धांत - जोन्स ने न्यूटन की तरह यह माना कि आरंभ में द्रव्य बहुत दूर तक, प्राय अनत दूर तक, सम रूप से, फैला हुआ था। जोन्स ने गणित द्वारा यह सोज की कि इस प्रकार विसरे द्रव्य से यदि पिंड बनेंगे तो वितन वडे चड़े और कितनी दूर-दूर पर जीन्स ने पहले इसकी गणना की कि यदि ऐसे माध्यम में लहरें उठें तो उनकी लहर लवाई क्या होगी, लहरें कितनी वडी रहेंगी तो द्रव्य वही सिमट जायगा, वही फट जायगा ; द्रव्य वा घनत्व क्या रहा होगा, तापत्रम क्या रहा होगा, इत्यादि । हवल की गणनाओ से यह ज्ञात हूं कि यदि अतरिक्ष वे सब तारो और नीहारिवाओ का द्रव्य पीस कर इस प्रकार बिखेर दिया जाय कि सब जगह घनत्व बरावर हो जाय तो प्रति घन इच एक ग्राम वा दस वी भाग द्रव्य होगा । दस" का अर्थ है कि एक की दाहिनी ओर बत्तीस शून्य लिखे जायें। दूसरे शब्दो में एक हज़ार घन गज में लगभग एक अणु द्रव्य होगा । ऐसे द्रव्य पर गणित लगाने से यह परिणाम निकलता है कि जब द्रव्य घनीभूत होगा तो तारो से वही भारी पिड बनेंगे । इसलिए अनुमान किया जाता है कि आरंभ में तारे न बने होगें, नोहारिकाएँ बनी होगी। नीहारिकाओं के विकास पर पहले विचार किया जा चुका है, इसलिए वे बातें यहाँ दुहराई न जायेंगी । नीहारिकाओ के फोटोग्राफी में गोल और प्राय गोल से लेकर चिपटी गोलाभ तथा धारदार मध्यरेखा वाली नीहारिकाएं सभी मिलती है। केंद्रीय गोल या गोलाभ भाग को घरे हुए जो पदार्थ रहता हूँ उसको मोटाई बहुत कम प्रतीत होती है । इन सब बातों से विश्वास दृढ हो जाता है कि जीन्स की कल्पना के अनुसार हो नीहारिकाओ का जन्म हुआ है। जोन्स का कहना है कि जैसे हमारे वायुमंडल में पवन बहा करता हूँ, उसी प्रकार हमारे सर्वत्र विखरे प्रारंभिक द्रव्य में भी वही धीरे, कही प्रचड वेग से पवन बहता रहा होगा, उसमें आँधी आती रही होगी, ववडर उठते रहे होगे । इसी से पृथक् पृथक् नीहारिकाओं में चक्कर किसी में कम क्सिो में अधिक उत्पन्न होगया होगा । तारो की उत्पत्ति - जोन्स ने अनुमान किया हूं कि वेग बढने पर नोहारिकाओं से जो द्रव्य छटका होगा उसका घनत्व प्राथमिक द्रव्य के घनत्व से दस अरब गुना अधिक रहा होगा, और इसलिए लह्रौ के तरग-दध्य पहले की अपक्षा छोर्ट रहे होगें। गणना से पता चलता है कि ऐसे पदार्थ से जो पिंड बने होगे उनका द्रव्यमान तारो के द्रव्यमान के बराबर रहा होगा। इसलिए अब ज्योतिषियो को धारणा है कि तारे सपिल नीहारिकाओ को भुजाओं में उत्पन्न होते है । वास्तविक नीहारिकाओं की भुजाओं में तारो का पाया जाना इस बात का समर्थन करता है । तारायुग्मों को उत्पत्ति - तारों क जन्म तन तो लाप्लास और जोन्स क सिद्धान्तो में विशेष अंतर नही हूँ । जीन्म ने गणित में अधिक सहायता ली है, लाप्लासने कई बातो को केवल पा पराष्ट्री आश्रित छोट दिया था। परतु सूर्य ने ग्रहों की उत्पति से हुई इन पर जीन्ग मा मत सर्वथा विभिन्न हूँ । जीन्स या महता हूं वि जन्म के बाद तारा सचित होता चला जाता है और जब तक उपकेंद्र तरीके समान धना नहीं हो जाता, तब तर छोटे हो जाने के अतिरिक्त उसमें बोई विशेष परिवर्तन नहीं होता। यदि कुछ पदार्थ छटा भी हूँ तो यह पनीभूत नहीं हो पाता, टोप पैसे से जैसे रवट के गुब्बारे पर गंगोमूत नहीं होती। घनीभूत होने के लिये बहुत प्रथ्य माहिए। तभी आवषंण-शति इतनी हो पाती है गंगकी प्रसरणशको दरा राजे । जब तारे या पनत्व तरी यो समान हो जाता है रान उसमें वे गव विकार उत्पन्न होते है जो घरों में हो गड़ते हैं। जीन्स में गणित के अनुसार यदि तरल पागलपंड धीरे-धीरे नाचने लगतीपट आहति गोलाभ हो जायगी, अर्थात् पिट नारगी की तरह कुछ चिपटा हो जायगा । नाही करेगा चिपटापन उतना ही बड़ेगा, परंतु जब छोटा अक्ष मध्यरेखा के व्याग का मन्तवादशाश हो जायगा तो पिड उसके बाद अधिचिपटा नहीं होगा। इमरे बदरे पिड अडावार होने लगेगा। इसकी आवृति यह हो जायगी जिसे गणित में तीन अराम उयो वाला दीर्घवृनाभ कहते है । वेग और बढ़ने पर पिड यो लवाई बढ़ती जायगी, यहाँ तक कि लवा अश सब से छोटे ना हो जायगा । इस अवस्था में पिड में हल मचने लगती है। बीच से थोडा हट कर पिंड में बमर-गी बन जाती है, जिससे पिङ तुवामा लगने लगता हूँ। कभी एन सिरा बढ़ना हूँ, क्यो दूमरा, और इन मन आन्दोलनों का परिणाम यह होता है वि पिंड दो सडो में टूट जाता है। विश्याम किया जाता है कि युग्मतारे इसी प्रकार उत्पन्न हुए है। जीन्स ने गणित से सिद्ध किया है वि गैनीय पिढ इस रीति से दो खडा में नही विभक्त हो सकता, केवल तरल पिंड में ही ऐसा विकास हो सकता हूँ । जीशून्य एचशून्य डाविन ने सिद्ध किया है कि विभक्त होने के बाद प्रत्येव पिंड में दूसरे के कारण ज्वार-भाटाएँ उत्पन्न होगी, जिनके कारण ऊर्जा का हास होगा और पिडो के बीच की दूरी बगे। विकिरण के कारण सापेक्षवाद के अनुसार पिडो का द्रव्यमान भी घटता है और जीन्स ने सिद्ध किया है कि इस कारण से भी पिंड अधिव दूर होते जायेंगे । फिर, जब-जब कोई दूसरा तारा किसी युग्मतारे के पास से होकर निकल जाता है, तव तव युग्मतारे के सदस्यों की परस्पर दूरी बुद्ध बढ़ जाती है । इस प्रकार धीरे-धीरे उनके बीच में उतनी दूरी उत्पन हो जाती है जितनी बहुधा देखने में आती है । ग्रहों की उत्पति-नीहारिकाओ और तारों की उत्पत्ति पर तो हम विचार कर चुके, अब देखना चाहिए कि ग्रह कैसे उत्पन हुए होगे । ग्रहो की उत्पत्ति न तो प्राथमित्र नीहारिका से हुई होगी, न सूर्य के दो भागों में सहित होने से । नीहारिका से ग्रहो की उत्पत्ति हुई होती तो प्रहु बहुत बड़े होते वस्तुत वे तारे होते । यदि वे सूर्य के खड़ित होने से उत्पन्न हुए होते तो ये सूर्य से बहुत छोटे न होते । युग्मतारो में बडा तारा छोटे के धौगुना तक हो देखने में आया है, परतु सूर्य तो वृहस्पति से एक हज़ार गुना अधिक भारी है, बुध से अस्सी लास गुना भारी हैं। इस लिए ग्रहो की उत्पत्ति किसी दूसरी रीति से हुई होगी। इसके समर्थन में यह भी याद रखने योग्य है कि हमारा सूर्य अपनी धुरी पर बहुत कम वेग से नाचता है । ग्रहो में भी आवेग कम है। इसलिए कोई लक्षण नहीं दिखाई पडता वि ग्रह पूर्वोक्त रीति से सूर्य के खडित होते पर बने है । जीन्त वा विश्वास है कि किसी समय कोई अन्य तारा हमारे सूर्य के पास से होता हुआ निकल गया । उसी के आकर्षण से कुछ द्रव्य, जैसा नीचे विस्तार से समझाया जायगा, सूर्य से नुच गया। इसी द्रव्य से ग्रह बने । ज्वार-भाटा सिद्धात - सूर्य कई अरब वर्षों से अतरिक्ष में चल रहा है। अन्य तारे भी चलते ही रहते हैं। इसलिए असभव नहीं जान पड़ता कि अत्यंत प्राचीन काल में कभी कोई दूसरातारा सूर्य के पास होता हुआ निकल गया हो। जिस प्रकार पृथ्वी के निकट होने के कारण घद्रमा पृथ्वी पर ज्वार-भाटा उत्पन्न करता है, उसी प्रकार इस बाहरी तारे ने सूर्य पर ज्वारभाटा इत्पन किया होग। उस समय हमारे सूर्य के पास पृथ्वी आदि ग्रह न रहे होगे। यदि तारा सूर्य की निज्या की तिगुनी से अधिक दूरी पर से हो कर निकलता, तो ज्वार-भाटा से उठा पदार्थ फिर बैठ जाता, परंतु वह सूर्य के अधिक निकट से होकर गया होगा। गणित बताता है कि ऐसी अवस्था में ज्वार-भाटा के कारण उठा पदार्थ छटक कर पृथक् हो गया होगा । जीन्स का कहना है कि इसी प्रकार छटके पदार्थ से ग्रह उत्पन्न हुए है। इसका समर्थन इस बात से होता है कि गणित के अनुसार छटवा पदार्थ जब सिमटेगा तब लगभग उतने ही बडे पिंड बनेंगे जितने बड़े ग्रह वस्तुत है। उपग्रहो की उत्पत्ति भी इसी प्रकार हुई होगी, क्योकि ग्रहो के बनते हो उन में सूर्य के कारण ज्वार-भाटा उठा होगा और कुछ पदार्थ छटका होगा। परंतु उपग्रहो के भी उपग्रह इसलिए न बन पाये होगे कि उपग्रहो में द्रव्य कम हूं, वे शीघ्र ठढे हो गये होगे । केवल इतना ही नही हुआ कि ग्रह और उपग्रह बने । अवश्य ही कुछ द्रव्य चूर्ण के रूप में बिसरा रह गया । वह सव द्रव्य धीरे धीरे किसी न किसी ग्रह में जा गिरा। इसका परिणाम गणितानुसार यह होता है कि दीर्घवृत्त में चलने वाले ग्रह प्राय वृत्ताकार मार्गों में चलने लगते है। वर्तमान ग्रह सभी लगभग वृत्ता में हो चलते हैं । पदार्थ आ गिरने के कारण ग्रहो के मार्ग कुछ अधिक बडे भी हो गये होग। समय पावर प्राय सभी पदार्थ ग्रह में या सूर्य में जा गिरा होगा और अतरिक्ष स्वच्छ हो गया होगा। सूर्य के पास अब भी कुछ धूलि-सी है, जो सूर्य के प्रकाश से दीप्तिमान होने के कारण राशिचक्र - प्रकाश के रूप में हमें दिखाई पड़ती है । सभव है यह उसी पदार्थ का अवशेष हो जिससे ग्रह बने है । इस पर भी विचार किया गया है कि हमारे मौर जगत् की आयु क्या होगो । जफरीज ने हिसाब लगाया है कि मोटे हिमाब से ग्रहों को वतमान परिस्थिति में आने में सात अरब वर्ष लगा होगा। हम पहने देख चुके हैं कि पृथ्वी की आयु भूगम विज्ञान के आधार पर लगभग दो अरव वर्षं है । इसलिए दोना एक दूसरमा समर्थन करते हैं । परंतु अन्य वई बातें
पत्नीः- ये जो तुम रोज फेसबुक पर रोमांटिक शायरियां लिखते हो कि, ये तेरी जुल्फें है जैसे रेशम की डोर, ये किसके लिये लिखते हो ? पतिः- पगली तेरे लिये ही लिखता हूँ, मेरी जानू ! पत्नीः- तो फिर वो ही रेशम की डोर कभी दाल में आ जाती है तो इतना चिल्लाते क्यों हो! एक लड़के की बाइक से स्कूटी वाली लड़की की टक्कर हो गई, भीड़ ने लड़के को बुरी तरह पीटा, एक बैंक कर्मचारी ने अपनी पत्नी को आधी रात को जैसे ही टच किया, पत्नीः- अपने पुराने कपड़े डोनेट करूं क्या? पत्नीः- नहीं जी, दुनिया में बहुत सी गरीब, भूखी प्यासी औरते हैं, कोई भी पहन लेगी। लड़कीः- पारा? ये क्या है?
पत्नीः- ये जो तुम रोज फेसबुक पर रोमांटिक शायरियां लिखते हो कि, ये तेरी जुल्फें है जैसे रेशम की डोर, ये किसके लिये लिखते हो ? पतिः- पगली तेरे लिये ही लिखता हूँ, मेरी जानू ! पत्नीः- तो फिर वो ही रेशम की डोर कभी दाल में आ जाती है तो इतना चिल्लाते क्यों हो! एक लड़के की बाइक से स्कूटी वाली लड़की की टक्कर हो गई, भीड़ ने लड़के को बुरी तरह पीटा, एक बैंक कर्मचारी ने अपनी पत्नी को आधी रात को जैसे ही टच किया, पत्नीः- अपने पुराने कपड़े डोनेट करूं क्या? पत्नीः- नहीं जी, दुनिया में बहुत सी गरीब, भूखी प्यासी औरते हैं, कोई भी पहन लेगी। लड़कीः- पारा? ये क्या है?
ZeptoLab में तैयार किया यह गेम किसी इंजीनियरिंग से कम नहीं है. गेमर के इंट्रेस्ट के हिसाब से इसे Action की श्रंखला में रखा गया है. गेमर अपने हिसाब से फाइटर कार मॉडिफाई करो. फिर उसके बाद आपके सामने वाले कार से आपको लड़ना होगा. उसकी कार को पूरी तरह से क्रश करना होगा. इस क्रश को करने के बाद आपको काफी सारी पॉइंट्स मिलेंगे. जिससे आप अपनी कार को मॉडिफाई करने के लिये वेपन से मॉडिफाई कर सकते है. वैसे यह कार एक बिल्ली के द्वारा ऑपरेट होती है इसलिए इस गेम का नाम कैट के आधार पर रखा है. CATS Crash Arena Turbo Stars गेम की ओवरॉल रेटिंग 4. 6 दी हुई है. इसको इनस्टॉल करने वाले गेम 1 लाख से ऊपर है. इस गेम को खेलने वाले गेमर इसको ओके ओके ही बताते है. CATS Crash Arena Turbo Stars Action गेम को इनस्टॉल कर एडवंचर के साथ जुड़े और कमेंट करके बताये की आपको यह गेम कैसा लगा. आपके फीडबैक लोगो के लिए कारगर साबित हो सकते है. अपनी एयरलाइन बनाये Airport City: Airline Tycoon ! फाइट शुरू करे MARVEL Contest of चैंपियंस ! Top Eleven , बनो एक फुटबॉल मैनेजर !
ZeptoLab में तैयार किया यह गेम किसी इंजीनियरिंग से कम नहीं है. गेमर के इंट्रेस्ट के हिसाब से इसे Action की श्रंखला में रखा गया है. गेमर अपने हिसाब से फाइटर कार मॉडिफाई करो. फिर उसके बाद आपके सामने वाले कार से आपको लड़ना होगा. उसकी कार को पूरी तरह से क्रश करना होगा. इस क्रश को करने के बाद आपको काफी सारी पॉइंट्स मिलेंगे. जिससे आप अपनी कार को मॉडिफाई करने के लिये वेपन से मॉडिफाई कर सकते है. वैसे यह कार एक बिल्ली के द्वारा ऑपरेट होती है इसलिए इस गेम का नाम कैट के आधार पर रखा है. CATS Crash Arena Turbo Stars गेम की ओवरॉल रेटिंग चार. छः दी हुई है. इसको इनस्टॉल करने वाले गेम एक लाख से ऊपर है. इस गेम को खेलने वाले गेमर इसको ओके ओके ही बताते है. CATS Crash Arena Turbo Stars Action गेम को इनस्टॉल कर एडवंचर के साथ जुड़े और कमेंट करके बताये की आपको यह गेम कैसा लगा. आपके फीडबैक लोगो के लिए कारगर साबित हो सकते है. अपनी एयरलाइन बनाये Airport City: Airline Tycoon ! फाइट शुरू करे MARVEL Contest of चैंपियंस ! Top Eleven , बनो एक फुटबॉल मैनेजर !
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के विस्तार को हरी झंडी दे दी है। यह विस्तार वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2025-26 तक तीन वर्षों तक फैला है। इस कदम से PMUYई लाभार्थियों की कुल संख्या 10.35 करोड़ हो जाएगी। यह योजना, "सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास" दृष्टिकोण के अनुरूप, लाभार्थियों को पहला रिफिल और स्टोव मुफ्त प्रदान करना जारी रखती है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) विस्तार का प्राथमिक उद्देश्य क्या है? इस विस्तार का लक्ष्य पात्र परिवारों के लिए स्वच्छ खाना पकाने के ईंधन तक पहुंच को बढ़ाते हुए तीन वर्षों में अतिरिक्त 75 लाख एलपीजी कनेक्शन प्रदान करना है। PMUY उपभोक्ताओं को एलपीजी सिलेंडर के लिए कितनी सब्सिडी सहायता मिलती है और यह महत्वपूर्ण क्यों है? PMUY उपभोक्ताओं को प्रति वर्ष 12 रिफिल तक 200 रुपये प्रति 14.2 किलोग्राम एलपीजी सिलेंडर की लक्षित सब्सिडी मिलती है। PMUY ने महिलाओं और उनकी जीवन स्थितियों पर कैसे सकारात्मक प्रभाव डाला है? PMUY ने महिलाओं को एलपीजी तक आसान पहुंच प्रदान करके, पारंपरिक ईंधन इकट्ठा करने के बोझ को कम करके सशक्त बनाया है। इससे उन्हें सामुदायिक जीवन में अधिक सक्रिय रूप से भाग लेने और आय-सृजन के अवसरों की तलाश करने में सक्षम बनाया गया है। एलपीजी कवरेज का विस्तार करने और सब्सिडी वितरण में सुधार के लिए क्या पहल की गई? एलपीजी कवरेज को बढ़ाने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि सब्सिडी इच्छित लाभार्थियों तक पहुंचे, कोविड-19 महामारी के दौरान पहल, गिव इट अप और मुफ्त रिफिल योजना जैसी पहल लागू की गई थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के विस्तार को हरी झंडी दे दी है। यह विस्तार वित्तीय वर्ष दो हज़ार तेईस-चौबीस से दो हज़ार पच्चीस-छब्बीस तक तीन वर्षों तक फैला है। इस कदम से PMUYई लाभार्थियों की कुल संख्या दस.पैंतीस करोड़ हो जाएगी। यह योजना, "सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास" दृष्टिकोण के अनुरूप, लाभार्थियों को पहला रिफिल और स्टोव मुफ्त प्रदान करना जारी रखती है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना विस्तार का प्राथमिक उद्देश्य क्या है? इस विस्तार का लक्ष्य पात्र परिवारों के लिए स्वच्छ खाना पकाने के ईंधन तक पहुंच को बढ़ाते हुए तीन वर्षों में अतिरिक्त पचहत्तर लाख एलपीजी कनेक्शन प्रदान करना है। PMUY उपभोक्ताओं को एलपीजी सिलेंडर के लिए कितनी सब्सिडी सहायता मिलती है और यह महत्वपूर्ण क्यों है? PMUY उपभोक्ताओं को प्रति वर्ष बारह रिफिल तक दो सौ रुपयापये प्रति चौदह दशमलव दो किलोग्रामग्राम एलपीजी सिलेंडर की लक्षित सब्सिडी मिलती है। PMUY ने महिलाओं और उनकी जीवन स्थितियों पर कैसे सकारात्मक प्रभाव डाला है? PMUY ने महिलाओं को एलपीजी तक आसान पहुंच प्रदान करके, पारंपरिक ईंधन इकट्ठा करने के बोझ को कम करके सशक्त बनाया है। इससे उन्हें सामुदायिक जीवन में अधिक सक्रिय रूप से भाग लेने और आय-सृजन के अवसरों की तलाश करने में सक्षम बनाया गया है। एलपीजी कवरेज का विस्तार करने और सब्सिडी वितरण में सुधार के लिए क्या पहल की गई? एलपीजी कवरेज को बढ़ाने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि सब्सिडी इच्छित लाभार्थियों तक पहुंचे, कोविड-उन्नीस महामारी के दौरान पहल, गिव इट अप और मुफ्त रिफिल योजना जैसी पहल लागू की गई थी।
आचार्य ने अध्यात्मवाद में सत्य, एकता, सहयोग, आडंबरहीनता, दया, अहिंसा, आत्मशांति, धर्म परायणता, निर्भयता, अंतरदर्शन, उत्सर्ग, प्रयश्चित, अनेकता में एकता, सहअस्तित्व, ध्यान, परमानंद, सुचिता, विभेदीकरण, सहनशीलता जैसे अनेकानेक आधारभूत तत्व विद्यमान हैं जो छात्रों को आदर्श नागरिक बनाकर एक स्वस्थ शैक्षिक समाज के सृजन में सहायक है। आचार्य श्री के अध्यात्मवाद में सन्निहित आध्यात्मिक मूल्यों की समाज निर्माण में महती भूमिका है। आचार्य शिक्षा और समाज निर्माण को एक दूसरे का पूरक मानते हैं। आचार्य का संपूर्ण व्यक्तित्व ही विश्व बंधुत्व का सबसे बड़ा संवाहक है। आपके अध्यात्मवाद में शांतिपूर्ण सहअस्तित्व,तदानुभूति सहनशीलता, को विशेष महत्व दिया गया है और यह आधारभूत तत्व ही विश्व बंधुत्व की भावना को उद्दीप्त करते है। आचार्य का अध्यात्मवाद विश्व धर्म, विश्व संस्कृति, विश्व राष्ट्र, विश्व भाषा की संकल्पना के साथ विश्व बंधुत्व की भावना को मूर्त रूप देने का एक सफल प्रयास है। 2.3 अध्ययन से सम्बन्धित लेख, समाचार आदि : राजयोग प्रशिक्षण केन्द्र प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय
आचार्य ने अध्यात्मवाद में सत्य, एकता, सहयोग, आडंबरहीनता, दया, अहिंसा, आत्मशांति, धर्म परायणता, निर्भयता, अंतरदर्शन, उत्सर्ग, प्रयश्चित, अनेकता में एकता, सहअस्तित्व, ध्यान, परमानंद, सुचिता, विभेदीकरण, सहनशीलता जैसे अनेकानेक आधारभूत तत्व विद्यमान हैं जो छात्रों को आदर्श नागरिक बनाकर एक स्वस्थ शैक्षिक समाज के सृजन में सहायक है। आचार्य श्री के अध्यात्मवाद में सन्निहित आध्यात्मिक मूल्यों की समाज निर्माण में महती भूमिका है। आचार्य शिक्षा और समाज निर्माण को एक दूसरे का पूरक मानते हैं। आचार्य का संपूर्ण व्यक्तित्व ही विश्व बंधुत्व का सबसे बड़ा संवाहक है। आपके अध्यात्मवाद में शांतिपूर्ण सहअस्तित्व,तदानुभूति सहनशीलता, को विशेष महत्व दिया गया है और यह आधारभूत तत्व ही विश्व बंधुत्व की भावना को उद्दीप्त करते है। आचार्य का अध्यात्मवाद विश्व धर्म, विश्व संस्कृति, विश्व राष्ट्र, विश्व भाषा की संकल्पना के साथ विश्व बंधुत्व की भावना को मूर्त रूप देने का एक सफल प्रयास है। दो.तीन अध्ययन से सम्बन्धित लेख, समाचार आदि : राजयोग प्रशिक्षण केन्द्र प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि प्रौद्योगिकी का प्रभावी तरीके से इस्तेमाल करने से कैसे चुनौतियों को अवसरों में बदला जा सकता है इसका एक उदाहरण है इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक, जो देश का सबसे बड़ा नेटवर्क है। प्रधानमंत्री ने रविवार को कहा, 'हमारी डाकघर सेवा पर मोबाइल और इंटरनेट के बढ़ते प्रसार की वजह से बंद होने का खतरा था, लाखों लोगों के रोजगार पर संकट था। लेकिन आज प्रौद्योगिकी के कारण ही डाकघर, बैंकिंग सेवा के डिजिटल लेन-देन और होम डिलवरी के केंद्र बन रहे हैं। ' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मानव और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बीच समन्वय और समुचित संतुलन बनाने पर बल देते हुए कहा कि इस बात पर चर्चा नहीं होनी चाहिए कि एआई से खतरा क्या है बल्कि इस बात पर चर्चा होनी चाहिए कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मानवीय मंशा के बीच हम सेतु कैसे बनाएं। प्रधानमंत्री यहां 'बिजिटल नेशन' नामक किताब के विमोचन के अवसर पर बोल रहे थे। इस किताब के लेखक एन. चंद्रशेखरन और रूपा पुरुषोत्तम हैं। मोदी ने कहा, 'इस बात पर चर्चा नहीं होनी चाहिए एआई से खतरा क्या है बल्कि इस बात पर चर्चा होनी चाहिए कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मानवीय मंशा के बीच हम सेतु कैसे बनाएं। ' उन्होंने कहा, 'इस बात पर चर्चा होनी चाहिए कि अपने स्किल को नई मांग के अनुसार कैसे अपग्रेड करें। ' प्रधानमंत्री ने कहा, 'प्रौद्योगिकी जब सेतु बनती है तो हमें पारदर्शिता और लक्षित डिलीवरी का भी समाधान मिलता है। भारत में बिचौलियों और दलालों का क्या रोल था, इससे आप भली-भांति परिचित रहे हैं। ' उन्होंने कहा कि सरकार देश चलाती है और बिचौलिया शासन चलाता है, इसे एक रूल मान लिया गया था, ये इसलिए होता था कि जनता और प्रगति के बीच गैप था और जन्म से लेकर मृत्यु तक प्रमाणन की एक लंबी व्यवस्था थी जिसमें आम लोग पिसते रहते थे। उन्होंने कहा, 'आज जन्म से लेकर जीवन प्रमाण पत्र तक की सैकड़ों सरकारी सेवाएं ऑनलाइन हैं। आज स्वप्रमाणन देश में एक नॉर्म बन रहा है। अब हम सेल्फ एसेसमेंट, सेल्फ डिक्लेरशन और फेसलेस टैक्स एसेसमेंट जैसे सिस्टम की ओर बढ़ रहे हैं। ' उन्होंने कहा, 'इसी तरह गांव-गांव में ऑनलाइन सर्विस डिलीवरी देने वाला कॉमन सर्विस सेंटर नेटवर्क 12 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार दे रहा है। ' उन्होंने कहा, 'इसी प्रौद्योगिकी से आयुष्मान भारत को हेल्थकेयर के कंप्लीट पैकेज के तौर पर हम विकसित कर रहे हैं। ' उन्होंने कहा पहले प्रिवेंटिव हेल्थकेयर पर फोकस होता ही नहीं था, प्राइमरी हेल्थकेयर सिर्फ सिर दर्द और पेट दर्द तक सीमित थे और टर्शियरी हेल्थकेयर पूरी तरह से एक अलग ही ट्रैक पर था। प्रधानमंत्री ने बताया कि अब इसके लिए पूरे देश में डेढ़ लाख हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर तैयार किए जा रहे हैं और इनको टर्शियरी हेल्थकेयर के बेस के तौर पर विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बहुत ही कम समय में अब तक 21 हजार से ज्यादा ऐसे सेंटर तैयार भी हो चुके हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि आप हैरान रह जाएंगे कि इतने कम समय में, इन सेंटर्स पर डेढ़ करोड़ से ज्यादा लोगों को हाइपर टेंशन, सवा करोड़ से ज्यादा डायबिटीज, डेढ़ करोड़ से ज्यादा कैंसर के केस डायग्नोज हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि पहले प्राइमरी हेल्थकेयर सेंटर्स में ये संभव ही नहीं था। अब हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर से ही ये केस आगे रेफर हो पा रहे हैं और टर्शियरी हेल्थकेयर नेटवर्क में वहां के डेटा के आधार पर सीधा और तेज इलाज संभव होने की शुरुआत हुई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि प्रौद्योगिकी का प्रभावी तरीके से इस्तेमाल करने से कैसे चुनौतियों को अवसरों में बदला जा सकता है इसका एक उदाहरण है इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक, जो देश का सबसे बड़ा नेटवर्क है। प्रधानमंत्री ने रविवार को कहा, 'हमारी डाकघर सेवा पर मोबाइल और इंटरनेट के बढ़ते प्रसार की वजह से बंद होने का खतरा था, लाखों लोगों के रोजगार पर संकट था। लेकिन आज प्रौद्योगिकी के कारण ही डाकघर, बैंकिंग सेवा के डिजिटल लेन-देन और होम डिलवरी के केंद्र बन रहे हैं। ' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मानव और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बीच समन्वय और समुचित संतुलन बनाने पर बल देते हुए कहा कि इस बात पर चर्चा नहीं होनी चाहिए कि एआई से खतरा क्या है बल्कि इस बात पर चर्चा होनी चाहिए कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मानवीय मंशा के बीच हम सेतु कैसे बनाएं। प्रधानमंत्री यहां 'बिजिटल नेशन' नामक किताब के विमोचन के अवसर पर बोल रहे थे। इस किताब के लेखक एन. चंद्रशेखरन और रूपा पुरुषोत्तम हैं। मोदी ने कहा, 'इस बात पर चर्चा नहीं होनी चाहिए एआई से खतरा क्या है बल्कि इस बात पर चर्चा होनी चाहिए कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मानवीय मंशा के बीच हम सेतु कैसे बनाएं। ' उन्होंने कहा, 'इस बात पर चर्चा होनी चाहिए कि अपने स्किल को नई मांग के अनुसार कैसे अपग्रेड करें। ' प्रधानमंत्री ने कहा, 'प्रौद्योगिकी जब सेतु बनती है तो हमें पारदर्शिता और लक्षित डिलीवरी का भी समाधान मिलता है। भारत में बिचौलियों और दलालों का क्या रोल था, इससे आप भली-भांति परिचित रहे हैं। ' उन्होंने कहा कि सरकार देश चलाती है और बिचौलिया शासन चलाता है, इसे एक रूल मान लिया गया था, ये इसलिए होता था कि जनता और प्रगति के बीच गैप था और जन्म से लेकर मृत्यु तक प्रमाणन की एक लंबी व्यवस्था थी जिसमें आम लोग पिसते रहते थे। उन्होंने कहा, 'आज जन्म से लेकर जीवन प्रमाण पत्र तक की सैकड़ों सरकारी सेवाएं ऑनलाइन हैं। आज स्वप्रमाणन देश में एक नॉर्म बन रहा है। अब हम सेल्फ एसेसमेंट, सेल्फ डिक्लेरशन और फेसलेस टैक्स एसेसमेंट जैसे सिस्टम की ओर बढ़ रहे हैं। ' उन्होंने कहा, 'इसी तरह गांव-गांव में ऑनलाइन सर्विस डिलीवरी देने वाला कॉमन सर्विस सेंटर नेटवर्क बारह लाख से अधिक युवाओं को रोजगार दे रहा है। ' उन्होंने कहा, 'इसी प्रौद्योगिकी से आयुष्मान भारत को हेल्थकेयर के कंप्लीट पैकेज के तौर पर हम विकसित कर रहे हैं। ' उन्होंने कहा पहले प्रिवेंटिव हेल्थकेयर पर फोकस होता ही नहीं था, प्राइमरी हेल्थकेयर सिर्फ सिर दर्द और पेट दर्द तक सीमित थे और टर्शियरी हेल्थकेयर पूरी तरह से एक अलग ही ट्रैक पर था। प्रधानमंत्री ने बताया कि अब इसके लिए पूरे देश में डेढ़ लाख हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर तैयार किए जा रहे हैं और इनको टर्शियरी हेल्थकेयर के बेस के तौर पर विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बहुत ही कम समय में अब तक इक्कीस हजार से ज्यादा ऐसे सेंटर तैयार भी हो चुके हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि आप हैरान रह जाएंगे कि इतने कम समय में, इन सेंटर्स पर डेढ़ करोड़ से ज्यादा लोगों को हाइपर टेंशन, सवा करोड़ से ज्यादा डायबिटीज, डेढ़ करोड़ से ज्यादा कैंसर के केस डायग्नोज हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि पहले प्राइमरी हेल्थकेयर सेंटर्स में ये संभव ही नहीं था। अब हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर से ही ये केस आगे रेफर हो पा रहे हैं और टर्शियरी हेल्थकेयर नेटवर्क में वहां के डेटा के आधार पर सीधा और तेज इलाज संभव होने की शुरुआत हुई है।
खबर सामने आई है कि दिल्ली पुलिस के एक एएसआई की गाड़ी ने मंगलवार रात द्वारका मोड़ पर एक पीसीआर वैन को टक्कर मार दी। बताया जा रहा है कि यह घटना दोपहर 12:30 बजे हुई। पीसीआर वैन समेत एएसआई की गाड़ी ने 5 अन्य वाहनों को टक्कर मार दी। इस हादसे में एएसआई समेत 4 लोग घायल हो गए हैं। जानकारी के अनुसार दोपहर करीब 12:30 बजे हादसे के वक्त पुलिस एएसआई अपनी निजी कार में मौजूद थे। घटना की जानकारी मिलते ही दिल्ली पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंच गए। आरोपी एएसआई के खिलाफ रेड लाइट पर वाहनों को टक्कर मारने का मामला दर्ज किया गया है। इसके साथ ही पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी एएसआई के रक्त के नमूने भी लिए हैं ताकि खून में अल्कोहल की मात्रा का पता लगाया जा सके. इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि वह गाड़ी चलाते समय नशे में था या नहीं। सभी घायलों का प्राथमिक उपचार कर दिया गया है।
खबर सामने आई है कि दिल्ली पुलिस के एक एएसआई की गाड़ी ने मंगलवार रात द्वारका मोड़ पर एक पीसीआर वैन को टक्कर मार दी। बताया जा रहा है कि यह घटना दोपहर बारह:तीस बजे हुई। पीसीआर वैन समेत एएसआई की गाड़ी ने पाँच अन्य वाहनों को टक्कर मार दी। इस हादसे में एएसआई समेत चार लोग घायल हो गए हैं। जानकारी के अनुसार दोपहर करीब बारह:तीस बजे हादसे के वक्त पुलिस एएसआई अपनी निजी कार में मौजूद थे। घटना की जानकारी मिलते ही दिल्ली पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंच गए। आरोपी एएसआई के खिलाफ रेड लाइट पर वाहनों को टक्कर मारने का मामला दर्ज किया गया है। इसके साथ ही पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी एएसआई के रक्त के नमूने भी लिए हैं ताकि खून में अल्कोहल की मात्रा का पता लगाया जा सके. इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि वह गाड़ी चलाते समय नशे में था या नहीं। सभी घायलों का प्राथमिक उपचार कर दिया गया है।
गणतंत्र की 100वीं वर्षगांठ का जश्न मनाने के लिए "कुम्हुरियेटल GÜÇLÜ100" लेबल को उसके द्वारा उत्पादित ट्रकों और बसों पर लागू करने के साथ, Mercedes-Benz Türk ने युवाओं की शिक्षा के लिए अपने कॉर्पोरेट सामाजिक लाभ कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक जारी रखा है। मर्सिडीज-बेंज तुर्क, जिसने 1967 में अपनी गतिविधियां शुरू करने के बाद से तुर्की के सामाजिक और आर्थिक भविष्य में बहुमूल्य योगदान दिया है, कई वर्षों से युवाओं की शिक्षा के लिए विभिन्न कॉर्पोरेट सामाजिक लाभ कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक जारी रखे हुए है। कंपनी, जिसने गणतंत्र की 100 वीं वर्षगांठ को अपने द्वारा उत्पादित ट्रकों और बसों पर लागू "कुम्हुरियेटल GÜÇLÜ100" लेबल के साथ मनाना शुरू किया, खेल, संस्कृति-कला और टिकाऊ पर्यावरण के क्षेत्र में एक साथ कई कॉर्पोरेट सामाजिक लाभ कार्यक्रम चलाना जारी रखे हुए है। , साथ ही शिक्षा। "समान अवसर" के सिद्धांत के अनुरूप, शिक्षा के क्षेत्र में युवाओं के लिए दीर्घकालिक परियोजनाओं को चलाने वाली कंपनी ने "हमारा ईएमएल, द स्टार ऑफ द फ्यूचर" कार्यक्रम शुरू किया, जिसे मर्सिडीज के सहयोग से चलाया गया -बेंज तुर्क डीलरों और अधिकृत सेवाओं और 2014 में राष्ट्रीय शिक्षा मंत्रालय। कार्यक्रम के दायरे में, जिसमें व्यावसायिक और तकनीकी एनाटोलियन हाई स्कूलों की इलेक्ट्रोमैकेनिकल प्रयोगशालाओं का नवीनीकरण किया जाता है, इसका उद्देश्य मोटर वाहन क्षेत्र के लिए अच्छी तरह से सुसज्जित कर्मियों को प्रशिक्षित करना है, जहां योग्य कर्मियों की कमी है। कार्यक्रम के दायरे में, जहां तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा के छात्र मर्सिडीज-बेंज प्रयोगशालाओं (एमबीएल) में अधिक अनुभव प्राप्त करते हैं, अब तक कुल 32 स्कूलों की प्रयोगशालाओं का नवीनीकरण किया जा चुका है। जबकि 3.000 से अधिक छात्रों ने मर्सिडीज-बेंज प्रयोगशालाओं में प्रशिक्षण प्राप्त किया, 1.300 से अधिक छात्रों ने इंटर्नशिप प्राप्त की और 204 स्नातकों ने मर्सिडीज-बेंज तुर्क डीलरों पर काम करना शुरू किया। एसोसिएशन फॉर सपोर्टिंग कंटेम्परेरी लाइफ (ÇYDD) के साथ 17 प्रांतों में 200 लड़कियों का समर्थन करके मर्सिडीज-बेंज तुर्क ने 2004 में लॉन्च किया गया "एवरी गर्ल इज ए स्टार" कार्यक्रम 2023 में भी मजबूत होता जा रहा है। कार्यक्रम में, जिसे तुर्की में महिलाओं को समान सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के साथ हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ काम करने में सक्षम बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था, 250 महिला छात्र, जिनमें से 1.000 विश्वविद्यालय के छात्र हैं, हर साल मर्सिडीज-बेंज तुर्क से शैक्षिक छात्रवृत्ति प्राप्त करती हैं। . शैक्षिक छात्रवृत्ति के अलावा, छात्र अपने व्यक्तिगत और व्यावसायिक विकास के लिए तैयार किए गए विभिन्न कार्यक्रमों में भी भाग लेते हैं। कंपनी, जिसने 2015 में अक्सराय में "मर्सिडीज-बेंज तुर्क ÇYDD एजुकेशन हाउस" की स्थापना की, जहां ट्रक फैक्ट्री स्थित है, क्षेत्र के बच्चों की शिक्षा का समर्थन करने के लिए, अपने कर्मचारियों के स्वैच्छिक समर्थन के साथ प्रशिक्षण प्रदान करती है जो तुर्की में विभिन्न और प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों से स्नातक। Mercedes-Benz Türk, जो 2018 से Boğaziçi University Foundation के साथ युवा लोगों की शिक्षा के लिए "स्टार्स ऑफ़ इंजीनियरिंग" कार्यक्रम चला रहा है, सफल महिला इंजीनियरिंग छात्रों का समर्थन करके महिला इंजीनियरों के रोजगार में योगदान देता है। शिक्षा के अलावा खेल और एथलीटों को दिए जाने वाले समर्थन के साथ, कंपनी इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण अध्ययन भी करती है। 1996 में तुर्की फुटबॉल राष्ट्रीय टीम के मुख्य प्रायोजक होने के नाते, मर्सिडीज-बेंज तुर्क ने तुर्की में अब तक के सबसे लंबे और सबसे सुसंगत प्रायोजन प्रयासों में से एक को अंजाम दिया है। टर्किश फ़ुटबॉल नेशनल टीम के अलावा, मर्सिडीज़-बेंज़ तुर्क टर्किश हैंडबॉल महिला और पुरुष नेशनल टीम और एमप्यूटी फ़ुटबॉल नेशनल टीम का आधिकारिक परिवहन प्रायोजन भी करती है।
गणतंत्र की एक सौवीं वर्षगांठ का जश्न मनाने के लिए "कुम्हुरियेटल GÜÇLÜएक सौ" लेबल को उसके द्वारा उत्पादित ट्रकों और बसों पर लागू करने के साथ, Mercedes-Benz Türk ने युवाओं की शिक्षा के लिए अपने कॉर्पोरेट सामाजिक लाभ कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक जारी रखा है। मर्सिडीज-बेंज तुर्क, जिसने एक हज़ार नौ सौ सरसठ में अपनी गतिविधियां शुरू करने के बाद से तुर्की के सामाजिक और आर्थिक भविष्य में बहुमूल्य योगदान दिया है, कई वर्षों से युवाओं की शिक्षा के लिए विभिन्न कॉर्पोरेट सामाजिक लाभ कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक जारी रखे हुए है। कंपनी, जिसने गणतंत्र की एक सौ वीं वर्षगांठ को अपने द्वारा उत्पादित ट्रकों और बसों पर लागू "कुम्हुरियेटल GÜÇLÜएक सौ" लेबल के साथ मनाना शुरू किया, खेल, संस्कृति-कला और टिकाऊ पर्यावरण के क्षेत्र में एक साथ कई कॉर्पोरेट सामाजिक लाभ कार्यक्रम चलाना जारी रखे हुए है। , साथ ही शिक्षा। "समान अवसर" के सिद्धांत के अनुरूप, शिक्षा के क्षेत्र में युवाओं के लिए दीर्घकालिक परियोजनाओं को चलाने वाली कंपनी ने "हमारा ईएमएल, द स्टार ऑफ द फ्यूचर" कार्यक्रम शुरू किया, जिसे मर्सिडीज के सहयोग से चलाया गया -बेंज तुर्क डीलरों और अधिकृत सेवाओं और दो हज़ार चौदह में राष्ट्रीय शिक्षा मंत्रालय। कार्यक्रम के दायरे में, जिसमें व्यावसायिक और तकनीकी एनाटोलियन हाई स्कूलों की इलेक्ट्रोमैकेनिकल प्रयोगशालाओं का नवीनीकरण किया जाता है, इसका उद्देश्य मोटर वाहन क्षेत्र के लिए अच्छी तरह से सुसज्जित कर्मियों को प्रशिक्षित करना है, जहां योग्य कर्मियों की कमी है। कार्यक्रम के दायरे में, जहां तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा के छात्र मर्सिडीज-बेंज प्रयोगशालाओं में अधिक अनुभव प्राप्त करते हैं, अब तक कुल बत्तीस स्कूलों की प्रयोगशालाओं का नवीनीकरण किया जा चुका है। जबकि तीन.शून्य से अधिक छात्रों ने मर्सिडीज-बेंज प्रयोगशालाओं में प्रशिक्षण प्राप्त किया, एक.तीन सौ से अधिक छात्रों ने इंटर्नशिप प्राप्त की और दो सौ चार स्नातकों ने मर्सिडीज-बेंज तुर्क डीलरों पर काम करना शुरू किया। एसोसिएशन फॉर सपोर्टिंग कंटेम्परेरी लाइफ के साथ सत्रह प्रांतों में दो सौ लड़कियों का समर्थन करके मर्सिडीज-बेंज तुर्क ने दो हज़ार चार में लॉन्च किया गया "एवरी गर्ल इज ए स्टार" कार्यक्रम दो हज़ार तेईस में भी मजबूत होता जा रहा है। कार्यक्रम में, जिसे तुर्की में महिलाओं को समान सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के साथ हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ काम करने में सक्षम बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था, दो सौ पचास महिला छात्र, जिनमें से एक.शून्य विश्वविद्यालय के छात्र हैं, हर साल मर्सिडीज-बेंज तुर्क से शैक्षिक छात्रवृत्ति प्राप्त करती हैं। . शैक्षिक छात्रवृत्ति के अलावा, छात्र अपने व्यक्तिगत और व्यावसायिक विकास के लिए तैयार किए गए विभिन्न कार्यक्रमों में भी भाग लेते हैं। कंपनी, जिसने दो हज़ार पंद्रह में अक्सराय में "मर्सिडीज-बेंज तुर्क ÇYDD एजुकेशन हाउस" की स्थापना की, जहां ट्रक फैक्ट्री स्थित है, क्षेत्र के बच्चों की शिक्षा का समर्थन करने के लिए, अपने कर्मचारियों के स्वैच्छिक समर्थन के साथ प्रशिक्षण प्रदान करती है जो तुर्की में विभिन्न और प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों से स्नातक। Mercedes-Benz Türk, जो दो हज़ार अट्ठारह से Boğaziçi University Foundation के साथ युवा लोगों की शिक्षा के लिए "स्टार्स ऑफ़ इंजीनियरिंग" कार्यक्रम चला रहा है, सफल महिला इंजीनियरिंग छात्रों का समर्थन करके महिला इंजीनियरों के रोजगार में योगदान देता है। शिक्षा के अलावा खेल और एथलीटों को दिए जाने वाले समर्थन के साथ, कंपनी इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण अध्ययन भी करती है। एक हज़ार नौ सौ छियानवे में तुर्की फुटबॉल राष्ट्रीय टीम के मुख्य प्रायोजक होने के नाते, मर्सिडीज-बेंज तुर्क ने तुर्की में अब तक के सबसे लंबे और सबसे सुसंगत प्रायोजन प्रयासों में से एक को अंजाम दिया है। टर्किश फ़ुटबॉल नेशनल टीम के अलावा, मर्सिडीज़-बेंज़ तुर्क टर्किश हैंडबॉल महिला और पुरुष नेशनल टीम और एमप्यूटी फ़ुटबॉल नेशनल टीम का आधिकारिक परिवहन प्रायोजन भी करती है।
शो 'द कपिल शर्मा' (The Kapil Sharma Show)हर किसी का पसंदीदा शो है. इस शो (The Kapil Sharma Show)के हर किरदार को दर्शक खूब प्यार देते हैं. चाहे वो सपना का किरदार हो या फिर सरला का. लोगों की नजर शो (The Kapil Sharma Show)के हर किरदार पर होती है. इस समय सोशल मीडिया पर एक खबर तेजी से वायरल हो रही है कि शो की सदस्य सरला यानि सुमोना चक्रवर्ती शो को छोड़ रही हैं, जिसपर एक्ट्रेस का रिएक्शन सामने आया.
शो 'द कपिल शर्मा' हर किसी का पसंदीदा शो है. इस शो के हर किरदार को दर्शक खूब प्यार देते हैं. चाहे वो सपना का किरदार हो या फिर सरला का. लोगों की नजर शो के हर किरदार पर होती है. इस समय सोशल मीडिया पर एक खबर तेजी से वायरल हो रही है कि शो की सदस्य सरला यानि सुमोना चक्रवर्ती शो को छोड़ रही हैं, जिसपर एक्ट्रेस का रिएक्शन सामने आया.
स्पेस या अंतरिक्ष में दिलचस्पी रखने वाले हर व्यक्ति के मन में एक सवाल हमेशा रहता है- क्या पृथ्वी के अलावा भी कहीं जीवन मौजूद है? कई स्पेस अभियानों के बाद भी हम अभी तक धरती के बाहर कहीं भी जीवन के निशान नहीं खोज पाए हैं। हालांकि कई बार हम दुनिया के किसी हिस्से में UFO देखे जाने के बारे में सुनते जरूर हैं। मगर अक्सर ये खबरें सच साबित नहीं होती हैं और कई हमेशा रहस्य ही बनी रह जाती हैं। अगर यूनिवर्स को अनंत मान लिया जाए तो हमने अभी तक एक बाल बराबर भी इसकी सतह को खरोंचा नहीं है। इसी बीच नासा की एक वैज्ञानिक ने एलियंस और उनकी मौजूदगी के बारे में कुछ सवालों के जवाब देने का प्रयास किया है। NASA के Instagram पेज पर एक वीडियो में, एस्ट्रोबायोलॉजी एक्सपर्ट डॉ लिंडसे हेज़ कहती हैं कि यह वास्तव में एक दिलचस्प सवाल है- एक ऐसा सवाल जिसे वैज्ञानिक वास्तव में लंबे समय से समझने और विस्तार से जानने की कोशिश कर रहे हैं। फिर भी वे किसी अन्य ग्रह पर जीवन की खोज नहीं कर पाए हैं। वह आगे कहती हैं- मगर नासा धरती से परे जीवन के निशानों की तलाश लगातार कर रहा है। यूएस की स्पेस एजेंसी ने मंगल पर पांच रोवर और चार लैंडर भेजे हैं। इसके अलावा उनके ऑर्बिटर्स बहुत अधिक हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरों से लैस हैं, जो मंगल की सतह को देखते रहते हैं। फिर भी अभी तक मंगल के केवल एक छोटे से हिस्से का ही पता लगाया जा सका है। जितना अधिक वे खोजते हैं, उतना ही वे जीवन के पनपने के लिए अलग अलग वातावरणों के बारे में सीखते हैं। "तो हम अभी तक यह नहीं कह सकते कि एलियंस मौजूद हैं या नहीं," हेज़ ने कहा। हालाँकि, कई यूजर्स ने कहा कि जीवन पृथ्वी के बाहर मौजूद है। बस यह समय का फेर है कि नासा अभी तक इसे ढूंढ नहीं पाया है। "बेशक वे (एलियंस) होते हैं! वे होते हैं! " पोस्ट पर यूजर griffith. david1 ने कमेंट किया। "यदि वे मौजूद हैं, तो हम आशा करते हैं कि वे मिलनसार हों," यूजर sputniksworld ने कमेंट किया। इस इंस्टाग्राम पोस्ट को अब तक 8. 5 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है।
स्पेस या अंतरिक्ष में दिलचस्पी रखने वाले हर व्यक्ति के मन में एक सवाल हमेशा रहता है- क्या पृथ्वी के अलावा भी कहीं जीवन मौजूद है? कई स्पेस अभियानों के बाद भी हम अभी तक धरती के बाहर कहीं भी जीवन के निशान नहीं खोज पाए हैं। हालांकि कई बार हम दुनिया के किसी हिस्से में UFO देखे जाने के बारे में सुनते जरूर हैं। मगर अक्सर ये खबरें सच साबित नहीं होती हैं और कई हमेशा रहस्य ही बनी रह जाती हैं। अगर यूनिवर्स को अनंत मान लिया जाए तो हमने अभी तक एक बाल बराबर भी इसकी सतह को खरोंचा नहीं है। इसी बीच नासा की एक वैज्ञानिक ने एलियंस और उनकी मौजूदगी के बारे में कुछ सवालों के जवाब देने का प्रयास किया है। NASA के Instagram पेज पर एक वीडियो में, एस्ट्रोबायोलॉजी एक्सपर्ट डॉ लिंडसे हेज़ कहती हैं कि यह वास्तव में एक दिलचस्प सवाल है- एक ऐसा सवाल जिसे वैज्ञानिक वास्तव में लंबे समय से समझने और विस्तार से जानने की कोशिश कर रहे हैं। फिर भी वे किसी अन्य ग्रह पर जीवन की खोज नहीं कर पाए हैं। वह आगे कहती हैं- मगर नासा धरती से परे जीवन के निशानों की तलाश लगातार कर रहा है। यूएस की स्पेस एजेंसी ने मंगल पर पांच रोवर और चार लैंडर भेजे हैं। इसके अलावा उनके ऑर्बिटर्स बहुत अधिक हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरों से लैस हैं, जो मंगल की सतह को देखते रहते हैं। फिर भी अभी तक मंगल के केवल एक छोटे से हिस्से का ही पता लगाया जा सका है। जितना अधिक वे खोजते हैं, उतना ही वे जीवन के पनपने के लिए अलग अलग वातावरणों के बारे में सीखते हैं। "तो हम अभी तक यह नहीं कह सकते कि एलियंस मौजूद हैं या नहीं," हेज़ ने कहा। हालाँकि, कई यूजर्स ने कहा कि जीवन पृथ्वी के बाहर मौजूद है। बस यह समय का फेर है कि नासा अभी तक इसे ढूंढ नहीं पाया है। "बेशक वे होते हैं! वे होते हैं! " पोस्ट पर यूजर griffith. davidएक ने कमेंट किया। "यदि वे मौजूद हैं, तो हम आशा करते हैं कि वे मिलनसार हों," यूजर sputniksworld ने कमेंट किया। इस इंस्टाग्राम पोस्ट को अब तक आठ. पाँच लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है।
हिमाचल को देवभूमि के नाम से जाना जाता है। यहां के लोगों में शिव के प्रति गहन आस्था का परिणाम है कि यहां का हर स्थान शिव की किसी न किसी कथा से जुड़ा हुआ है। आज आपको ले चलते हैं शिव के एक ऐसे ही धाम, जो कि जिला चंबा के भट्टियात में कुंजरोटी स्थान पर है, जिसे कुंजर महादेव कहा जाता है। इस स्थान के बारे में बहुत सी दंत कथाएं प्रचलित हैं। कहते हैं कि यदि कुदरत चाहती तो मणिमहेश यहीं पर स्थापित होता। हाथी धार का नामकरण- जब एक बार शिव और पार्वती हिमालय की और जा रहे थे, तो माता पार्वती को एहसास हुआ कि उस मां को भी कितना कष्ट हुआ होगा, जिसके पुत्र का सिर काट कर गणेश को लगाया गया है। माता पार्वती ने शिव से आग्रह किया कि उस सिर कटे हाथी का उद्धार करें। उस समय शिव ने उस हाथी को इसी जगह लाकर स्थापित किया और उसको मोक्ष प्रदान किया। इस जगह पर 'हाथी का उद्धार' हुआ इसलिए इसे 'हाथी धार' के नाम से जाना गया। आज भी उस पहाड़ की शक्ल हू- ब- हू किसी हाथी की तरह नजर आती है। कुंजर महादेव का नाम शिव को हाथियों ने दिया है। कुंजर का अर्थ होता है हाथी। कहते हैं जब हाथी का सिर काट कर गण ले गए, तो हाथियों ने भगवान शिव की घोर तपस्या की। तब देव ऋषि नारद ने हाथियों को बताया कि आपका सिर स्वयं देवों के देव भगवान शिव के पुत्र गणेश को लगाया गया है। यह जान कर हाथी खुश हो गए और इसी जगह पर आ कर उन्होंने भगवान शिव की जय जयकार की और भगवान शिव को हाथियों के देव यानी कुंजर महादेव के नाम से संबोधित किया इसलिए इस स्थान को कुंजर महादेव कहा जाने लगा और इस स्थान का नाम कुंजरोटी हो गया। शिव के चरण हैं यहां- कहते हैं कि एक बार राक्षसों और देवताओं का युद्ध हो रहा था और एक मायावी राक्षस जितनी बार मारा जाता उतनी बार जीवित हो जाता था। भगवान शिव ने अपने त्रिशूल से उसका वध कर दिया। भगवान शिव ने कहा कि यह स्थान कलियुग में बहुत प्रसिद्ध होगा। जो भी यहां आकर स्नान करेगा, उसके सब पाप कट जाएंगे। इस जगह पर मैंने त्रिशूल से डल का निर्माण किया है इसलिए यहां मेरे चरण रहेंगे और मेरा वास कैलाश पर्वत पर होगा, जिसे मणिमहेश कहा जाएगा। तब से यह स्थान भी भगवान शिव के चरणों के कारण पवित्र हुआ और लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र बना। एक अन्य कथा के अनुसार इस रास्ते एक गडरिया भेड़, बकरियां लेकर जाता था। इस जगह पर वो अपनी दराती को तेज करने के लिए पत्थर ढूंढने लगा। तब उसने एक पत्थर पर दराती की धार बनाई और वो धार 6 महीने तक बनी रही। गड़रिए ने सोचा अगली बार वापस जाते हुए मैं उस पत्थर को साथ ही ले जाऊंगा। जब वो वापस आया, तो उसने उसी पत्थर को फिर से ढूंढा और उस पर प्रहार किया जिससे उसमें एक दरार आ गई, वो पत्थर आज भी वैसे ही स्थापित है। तभी आकाशवाणी हुई, हे मूर्ख तूने यह क्या किया। इसका पुण्य और पाप तुझे दोनों भुगतने होंगे। तब वो गडरिया क्षमा मांगने लगा और शिव को देख कर प्रसन्न भी हुआ। उसने कहा कि मुझे पाप से मुक्त कर मोक्ष प्रदान कीजिए। तब भगवान ने उसे रहस्य बताया कि इस कुंड में स्नान करके तुम इस पाप से मुक्त हो सकते हो और मोक्ष की प्राप्त करोगे, पर तुम्हें और तुम्हारी भेड़ बकरियों को यहीं पर पत्थर बनना होगा। कलियुग में कोई भी प्राणी इस कुंड में स्नान कर के पाप से मुक्ति पा सकता है। आज भी कुछ पत्थर उन भेड़, बकरियों के आकार के वहां देखे जा सकते हैं। सब पापों की मुक्ति- कलियुग में मात्र ये ऐसा धाम माना जाता है जो किसी भी प्रकार के पाप से मुक्ति का मार्ग दिखाता है। इसीलिए हर साल लाखों भक्त यहां आकर कुंड में डुबकी लगाते हैं। इस बार 28 अगस्त को प्रसिद्ध मणिमहेश मेले के साथ ही यहां भी लाखों भक्त नतमस्तक होंगे और भगवान शिव के जयकारे लगेंगे। कैसे पहुंचें- यहां पहुंचने का मार्ग बहुत सरल है। चुवाड़ी मुख्यालय से लगभग 20 किमी. दूर सिहुंता, द्रमन मार्ग पर पातका गांव से लगभग डेढ़ किमी. की दूरी पर यह स्थान है। पठानकोट से 70 किमी. दूर और गगल एयरपोर्ट से लगभग 50 किमी. की दूरी पर यह जगह चंबा और कांगड़ा को बांटने वाली हाथी धार पर है। इस धार के एक तरफ जिला चंबा और एक तरफ जिला कांगड़ा है।
हिमाचल को देवभूमि के नाम से जाना जाता है। यहां के लोगों में शिव के प्रति गहन आस्था का परिणाम है कि यहां का हर स्थान शिव की किसी न किसी कथा से जुड़ा हुआ है। आज आपको ले चलते हैं शिव के एक ऐसे ही धाम, जो कि जिला चंबा के भट्टियात में कुंजरोटी स्थान पर है, जिसे कुंजर महादेव कहा जाता है। इस स्थान के बारे में बहुत सी दंत कथाएं प्रचलित हैं। कहते हैं कि यदि कुदरत चाहती तो मणिमहेश यहीं पर स्थापित होता। हाथी धार का नामकरण- जब एक बार शिव और पार्वती हिमालय की और जा रहे थे, तो माता पार्वती को एहसास हुआ कि उस मां को भी कितना कष्ट हुआ होगा, जिसके पुत्र का सिर काट कर गणेश को लगाया गया है। माता पार्वती ने शिव से आग्रह किया कि उस सिर कटे हाथी का उद्धार करें। उस समय शिव ने उस हाथी को इसी जगह लाकर स्थापित किया और उसको मोक्ष प्रदान किया। इस जगह पर 'हाथी का उद्धार' हुआ इसलिए इसे 'हाथी धार' के नाम से जाना गया। आज भी उस पहाड़ की शक्ल हू- ब- हू किसी हाथी की तरह नजर आती है। कुंजर महादेव का नाम शिव को हाथियों ने दिया है। कुंजर का अर्थ होता है हाथी। कहते हैं जब हाथी का सिर काट कर गण ले गए, तो हाथियों ने भगवान शिव की घोर तपस्या की। तब देव ऋषि नारद ने हाथियों को बताया कि आपका सिर स्वयं देवों के देव भगवान शिव के पुत्र गणेश को लगाया गया है। यह जान कर हाथी खुश हो गए और इसी जगह पर आ कर उन्होंने भगवान शिव की जय जयकार की और भगवान शिव को हाथियों के देव यानी कुंजर महादेव के नाम से संबोधित किया इसलिए इस स्थान को कुंजर महादेव कहा जाने लगा और इस स्थान का नाम कुंजरोटी हो गया। शिव के चरण हैं यहां- कहते हैं कि एक बार राक्षसों और देवताओं का युद्ध हो रहा था और एक मायावी राक्षस जितनी बार मारा जाता उतनी बार जीवित हो जाता था। भगवान शिव ने अपने त्रिशूल से उसका वध कर दिया। भगवान शिव ने कहा कि यह स्थान कलियुग में बहुत प्रसिद्ध होगा। जो भी यहां आकर स्नान करेगा, उसके सब पाप कट जाएंगे। इस जगह पर मैंने त्रिशूल से डल का निर्माण किया है इसलिए यहां मेरे चरण रहेंगे और मेरा वास कैलाश पर्वत पर होगा, जिसे मणिमहेश कहा जाएगा। तब से यह स्थान भी भगवान शिव के चरणों के कारण पवित्र हुआ और लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र बना। एक अन्य कथा के अनुसार इस रास्ते एक गडरिया भेड़, बकरियां लेकर जाता था। इस जगह पर वो अपनी दराती को तेज करने के लिए पत्थर ढूंढने लगा। तब उसने एक पत्थर पर दराती की धार बनाई और वो धार छः महीने तक बनी रही। गड़रिए ने सोचा अगली बार वापस जाते हुए मैं उस पत्थर को साथ ही ले जाऊंगा। जब वो वापस आया, तो उसने उसी पत्थर को फिर से ढूंढा और उस पर प्रहार किया जिससे उसमें एक दरार आ गई, वो पत्थर आज भी वैसे ही स्थापित है। तभी आकाशवाणी हुई, हे मूर्ख तूने यह क्या किया। इसका पुण्य और पाप तुझे दोनों भुगतने होंगे। तब वो गडरिया क्षमा मांगने लगा और शिव को देख कर प्रसन्न भी हुआ। उसने कहा कि मुझे पाप से मुक्त कर मोक्ष प्रदान कीजिए। तब भगवान ने उसे रहस्य बताया कि इस कुंड में स्नान करके तुम इस पाप से मुक्त हो सकते हो और मोक्ष की प्राप्त करोगे, पर तुम्हें और तुम्हारी भेड़ बकरियों को यहीं पर पत्थर बनना होगा। कलियुग में कोई भी प्राणी इस कुंड में स्नान कर के पाप से मुक्ति पा सकता है। आज भी कुछ पत्थर उन भेड़, बकरियों के आकार के वहां देखे जा सकते हैं। सब पापों की मुक्ति- कलियुग में मात्र ये ऐसा धाम माना जाता है जो किसी भी प्रकार के पाप से मुक्ति का मार्ग दिखाता है। इसीलिए हर साल लाखों भक्त यहां आकर कुंड में डुबकी लगाते हैं। इस बार अट्ठाईस अगस्त को प्रसिद्ध मणिमहेश मेले के साथ ही यहां भी लाखों भक्त नतमस्तक होंगे और भगवान शिव के जयकारे लगेंगे। कैसे पहुंचें- यहां पहुंचने का मार्ग बहुत सरल है। चुवाड़ी मुख्यालय से लगभग बीस किमी. दूर सिहुंता, द्रमन मार्ग पर पातका गांव से लगभग डेढ़ किमी. की दूरी पर यह स्थान है। पठानकोट से सत्तर किमी. दूर और गगल एयरपोर्ट से लगभग पचास किमी. की दूरी पर यह जगह चंबा और कांगड़ा को बांटने वाली हाथी धार पर है। इस धार के एक तरफ जिला चंबा और एक तरफ जिला कांगड़ा है।
6 हिंग आत कि यातोदारा मात्त दुसरा आराम इन दिन दा यीशु यहूदी लॉकुर्द सभागृह दा होगकु उपदेश माळली कुरतुन; अदिक अल ऊंद मंळसा ईरोन जो ऊम्मा कय देल लकवा ग्रस्त ईरोन. 7 आग नियम इन गुरु अदिक फरीसी यीशु मा दोष हच्चोद मौका अन्द ताक मा ईरोर कि नोळाता आव आराम इन दिन दा आऊक चंगा माळतान का ईला. 8 लेकीन आव आंदुर विचार जानसोन; इदुरसाटी आव वंळगींद कयवाळा मंळसा से अंदुन, "येळ, न्याड्या दा नीदुर." आव यदकु नीदरेदुन. 9 यीशु आंदुर से अंदुन, "ना नीम से ईद केळतीन कि नियम इन अनुसार आराम इन दिन दा येन उचित आद, भलाई माळोद या बुरा माळोद; जीव इक ऊळसोद या अदुर्द नाश माळोद?" 10 आग आव नाकु दी आ सप्पा मुंदुर इक नोळकु आ मंळसा से अंदुन, "तान कय मुंद माळ." आव हांग अच माळदुन, अदिक आऊन कय मात्त वळ्लीद आगेत. 12 आ दिनगोळ दा यीशु पहाळी मा प्रार्थना माळली होदुन, अदिक ईळ्लक तीम परमेश्वर ऊंद प्रार्थना माळतेला ईत्तुन. 13 याग व्हातुर आत रा आव तान चेलागोळी कारूकु आंदुर दा टु हन्नेळ मुंदुर्द चुनाव माळदुन, अदिक आंदरी प्रेरित हिंग हेसुर कोट्टुन; 14 अदिक आंदुर हेसुर हिंग आवः शमौन यार्द हेसुर आव पतरस भी ईटदुन, अदिक आऊन वार्ट अन्द्रियास, अदिक याकूब, अदिक यूहन्ना, अदिक फिलिप्पुस, अदिक बरतुल्मै, 15 अदिक मत्ती, अदिक थोमा, अदिक हलफई नव पार याकूब, अदिक शमौन याऊक द्याश भक्त भी अनतोगोर, 16 अदिक याकूब उन पार यहूदा, अदिक यहूदा इस्करियोती जो आऊक हुळसुसावाळा आदुन. 17 आग यीशु आंदुर सांगुळ ईळुकु चौरस जागा दा निदुरदुन, अदिक आऊन चेलागोळ्द धोळ्द भीळ, अदिक सप्पा यहूदिया, यरूशलेम, अदिक सूर अदिक सैदा अन्द समुद्र अन्द किनारा अन्द हापाळ लॉकुर, 18 जो आऊन उपदेश केळली अदिक तान बिमारगोळ देल चंगा आगोर साटी आऊन हात्ती बंदीदुर, जो अल निदुरकु ईरोर. अदिक अशुध्द आत्मागोळ देल परेशान लॉकुर भी आऊन हात्ती चंगा आगतोगोर. 19 सप्पा मुंदुर आऊक मुट्टोद चाहासोर, यतिकी आऊन दा टु सामर्थ्य होटकु सप्पा मुंदुर इक चंगा माळतोगोद. 20 आग यीशु तान चेलागोळ दी नोळकु अंदुन, "धन्य आईर नीव जो मन देल गरीब आईर, 21 "धन्य आईर नीव जो हस्तकु आईर, "धन्य आईर नीव जो ईग वर्लेतीर, 24 लेकीन नीम मा हाय जो धनवान आईर, यतिकी नीव तान सुख ताकोम कोंडीर. 25 "हाय नीम मा जो ईग संतुष्ट आईर, यतिकी बाद्दा उपासा ईत्तीर, 'हाय नीम मा जो ईग नेगेतीर, 26 हाय नीम मा याग सप्पा मंळसा नीमी भला अनुल, यतिकी आंदुर आप्प-दादागोळ भी ख्वाटा भविष्यवक्तागोळ्द सांगुळ भी हिंग अच माळतोगोर. 27 "लेकीन ना नीव जो केळेतीर नीम से अनतीन कि तान दुश्मनगोळ से प्यार ईटी; जो नीम से नफरत माळतार, आंदुर्द भला माळी. 28 जो नीमी श्राप कोट्टार, आंदरी आशीष कोळी; जो नीम सांगुळ दुर-व्यवहार माळुल, आंदुर साटी प्रार्थना माळी. 29 जो नीन ऊंद गाल्ला मा क्याबरा बडुल रा आऊन दी दुसरा गाल्ला भी तिर्गुस बुळ; अदिक जो नीन कोट कसुल, रा आऊक कुळता ओयोर देल भी रोक्सबाळ. 30 जो यावारा नीन से बेळुल, आऊक कोळ; अदिक जो नीन चीजगोळ कस्तबुळुल, आऊन से बाक वापस बेळबाळ. 31 ✡ ६ः३१ मत्ती ७ः१२ह्यांग नीव चाहासतीर कि लॉकुर नीम सांगुळ व्यवहार माळुल, नीव भी आंदुर सांगुळ हांग अच व्यवहार माळी. 32 "अगर नीव तान प्यार ईटावाळेर्द सांगुळ प्यार ईटी, रा नीम येन बळाई? यतिकी पापी लॉकुर भी तान प्यार ईटावाळेर्द सांगुळ प्यार ईटतार. 33 अगर नीव तान भलाई माळावाळेर्द सांगुळ भलाई माळतीर, रा नीम येन बळाई? यतिकी पापी लॉकुर भी रा हिंग अच माळतार. 34 यार्द हात्ती टु वापस सिक्कोद आशा आद आंदरी नीव उदार कोट्टीर, रा अदुर दा नीम येन बळाई? याट कोटीर आट वापस सिक्कोद आशा देल पापी लॉकुर भी पापी लॉकुरी उदार कोळतार. 35 लेकीन तान दुश्मनगोळ से प्यार ईटी, अदिक आंदुर्द भलाई माळी, अदिक उदार कोटकु वापस सिकोद आशा माळबाळी, अदिक नीम साटी प्रतिफल धोळ्द आदीत अदिक नीव परमप्रधान उन पारगोळ ठहरूसिर, यतिकी आव खुद अच दुष्टगोळ मा उपकार माळतान. 36 ह्यांग नीम स्वर्गीय आप्प दयालु आन, हांग अच नीव भी दयालु बन्सी. 41 नी तान वार्ट उन कण्ण इन तिनका अक येती नोळत्या? येन नी तान कण्ण इन लठ्टा नोळ सकाल? 42 जब नी तान अच कण्ण इन लठ्टा नोळ सकाल, रा तान वार्ट उन से ह्यांग अन सकत्या, "हे वार्ट; थामसेग ना नीन कण्ण दा टु तिनका तेगु कोळतीन?" हे कपटी, पयला तान कण्ण इन लठ्टा तेगु, आग जो तिनका नीन वार्ट उन कण्ण दा आद, अदरी वळ्लीसा तरीका देल नोळकु तेगु सक्या. 43 "यातोदारा वळ्लीद मार्र बेकार काय कोळाल्द अदिक ना यातोदारा बेकार मार्र वळ्लीद काय कोळतद. 44 ✡ ६ः४४ मत्ती १२ः३३हर ऊंद मार्र तान काय देल अर्तकु आगतद; यतिकी लॉकुर मुळ्ल इन झाळीगोळ दा टु अंजीर कोयालुर अदिक ना मईन काय इन मार्र मा टु अंगुर. 45 ✡ ६ः४५ मत्ती १२ः३४वळ्लीद मंळसा तान आत्मा अन्द वळ्लीद भंडार दा टु वळ्लीद मातगोळी का तेगुतान, अदिक बुरा मंळसा तान दिल इन बुरा भंडार दा टु बुरा मातगोळी तेगुतान; यतिकी जो दिल दा तुमकु आद अदा आऊन बाय दा बरतद.
छः हिंग आत कि यातोदारा मात्त दुसरा आराम इन दिन दा यीशु यहूदी लॉकुर्द सभागृह दा होगकु उपदेश माळली कुरतुन; अदिक अल ऊंद मंळसा ईरोन जो ऊम्मा कय देल लकवा ग्रस्त ईरोन. सात आग नियम इन गुरु अदिक फरीसी यीशु मा दोष हच्चोद मौका अन्द ताक मा ईरोर कि नोळाता आव आराम इन दिन दा आऊक चंगा माळतान का ईला. आठ लेकीन आव आंदुर विचार जानसोन; इदुरसाटी आव वंळगींद कयवाळा मंळसा से अंदुन, "येळ, न्याड्या दा नीदुर." आव यदकु नीदरेदुन. नौ यीशु आंदुर से अंदुन, "ना नीम से ईद केळतीन कि नियम इन अनुसार आराम इन दिन दा येन उचित आद, भलाई माळोद या बुरा माळोद; जीव इक ऊळसोद या अदुर्द नाश माळोद?" दस आग आव नाकु दी आ सप्पा मुंदुर इक नोळकु आ मंळसा से अंदुन, "तान कय मुंद माळ." आव हांग अच माळदुन, अदिक आऊन कय मात्त वळ्लीद आगेत. बारह आ दिनगोळ दा यीशु पहाळी मा प्रार्थना माळली होदुन, अदिक ईळ्लक तीम परमेश्वर ऊंद प्रार्थना माळतेला ईत्तुन. तेरह याग व्हातुर आत रा आव तान चेलागोळी कारूकु आंदुर दा टु हन्नेळ मुंदुर्द चुनाव माळदुन, अदिक आंदरी प्रेरित हिंग हेसुर कोट्टुन; चौदह अदिक आंदुर हेसुर हिंग आवः शमौन यार्द हेसुर आव पतरस भी ईटदुन, अदिक आऊन वार्ट अन्द्रियास, अदिक याकूब, अदिक यूहन्ना, अदिक फिलिप्पुस, अदिक बरतुल्मै, पंद्रह अदिक मत्ती, अदिक थोमा, अदिक हलफई नव पार याकूब, अदिक शमौन याऊक द्याश भक्त भी अनतोगोर, सोलह अदिक याकूब उन पार यहूदा, अदिक यहूदा इस्करियोती जो आऊक हुळसुसावाळा आदुन. सत्रह आग यीशु आंदुर सांगुळ ईळुकु चौरस जागा दा निदुरदुन, अदिक आऊन चेलागोळ्द धोळ्द भीळ, अदिक सप्पा यहूदिया, यरूशलेम, अदिक सूर अदिक सैदा अन्द समुद्र अन्द किनारा अन्द हापाळ लॉकुर, अट्ठारह जो आऊन उपदेश केळली अदिक तान बिमारगोळ देल चंगा आगोर साटी आऊन हात्ती बंदीदुर, जो अल निदुरकु ईरोर. अदिक अशुध्द आत्मागोळ देल परेशान लॉकुर भी आऊन हात्ती चंगा आगतोगोर. उन्नीस सप्पा मुंदुर आऊक मुट्टोद चाहासोर, यतिकी आऊन दा टु सामर्थ्य होटकु सप्पा मुंदुर इक चंगा माळतोगोद. बीस आग यीशु तान चेलागोळ दी नोळकु अंदुन, "धन्य आईर नीव जो मन देल गरीब आईर, इक्कीस "धन्य आईर नीव जो हस्तकु आईर, "धन्य आईर नीव जो ईग वर्लेतीर, चौबीस लेकीन नीम मा हाय जो धनवान आईर, यतिकी नीव तान सुख ताकोम कोंडीर. पच्चीस "हाय नीम मा जो ईग संतुष्ट आईर, यतिकी बाद्दा उपासा ईत्तीर, 'हाय नीम मा जो ईग नेगेतीर, छब्बीस हाय नीम मा याग सप्पा मंळसा नीमी भला अनुल, यतिकी आंदुर आप्प-दादागोळ भी ख्वाटा भविष्यवक्तागोळ्द सांगुळ भी हिंग अच माळतोगोर. सत्ताईस "लेकीन ना नीव जो केळेतीर नीम से अनतीन कि तान दुश्मनगोळ से प्यार ईटी; जो नीम से नफरत माळतार, आंदुर्द भला माळी. अट्ठाईस जो नीमी श्राप कोट्टार, आंदरी आशीष कोळी; जो नीम सांगुळ दुर-व्यवहार माळुल, आंदुर साटी प्रार्थना माळी. उनतीस जो नीन ऊंद गाल्ला मा क्याबरा बडुल रा आऊन दी दुसरा गाल्ला भी तिर्गुस बुळ; अदिक जो नीन कोट कसुल, रा आऊक कुळता ओयोर देल भी रोक्सबाळ. तीस जो यावारा नीन से बेळुल, आऊक कोळ; अदिक जो नीन चीजगोळ कस्तबुळुल, आऊन से बाक वापस बेळबाळ. इकतीस ✡ छःःइकतीस मत्ती सातःबारहह्यांग नीव चाहासतीर कि लॉकुर नीम सांगुळ व्यवहार माळुल, नीव भी आंदुर सांगुळ हांग अच व्यवहार माळी. बत्तीस "अगर नीव तान प्यार ईटावाळेर्द सांगुळ प्यार ईटी, रा नीम येन बळाई? यतिकी पापी लॉकुर भी तान प्यार ईटावाळेर्द सांगुळ प्यार ईटतार. तैंतीस अगर नीव तान भलाई माळावाळेर्द सांगुळ भलाई माळतीर, रा नीम येन बळाई? यतिकी पापी लॉकुर भी रा हिंग अच माळतार. चौंतीस यार्द हात्ती टु वापस सिक्कोद आशा आद आंदरी नीव उदार कोट्टीर, रा अदुर दा नीम येन बळाई? याट कोटीर आट वापस सिक्कोद आशा देल पापी लॉकुर भी पापी लॉकुरी उदार कोळतार. पैंतीस लेकीन तान दुश्मनगोळ से प्यार ईटी, अदिक आंदुर्द भलाई माळी, अदिक उदार कोटकु वापस सिकोद आशा माळबाळी, अदिक नीम साटी प्रतिफल धोळ्द आदीत अदिक नीव परमप्रधान उन पारगोळ ठहरूसिर, यतिकी आव खुद अच दुष्टगोळ मा उपकार माळतान. छत्तीस ह्यांग नीम स्वर्गीय आप्प दयालु आन, हांग अच नीव भी दयालु बन्सी. इकतालीस नी तान वार्ट उन कण्ण इन तिनका अक येती नोळत्या? येन नी तान कण्ण इन लठ्टा नोळ सकाल? बयालीस जब नी तान अच कण्ण इन लठ्टा नोळ सकाल, रा तान वार्ट उन से ह्यांग अन सकत्या, "हे वार्ट; थामसेग ना नीन कण्ण दा टु तिनका तेगु कोळतीन?" हे कपटी, पयला तान कण्ण इन लठ्टा तेगु, आग जो तिनका नीन वार्ट उन कण्ण दा आद, अदरी वळ्लीसा तरीका देल नोळकु तेगु सक्या. तैंतालीस "यातोदारा वळ्लीद मार्र बेकार काय कोळाल्द अदिक ना यातोदारा बेकार मार्र वळ्लीद काय कोळतद. चौंतालीस ✡ छःःचौंतालीस मत्ती बारहःतैंतीसहर ऊंद मार्र तान काय देल अर्तकु आगतद; यतिकी लॉकुर मुळ्ल इन झाळीगोळ दा टु अंजीर कोयालुर अदिक ना मईन काय इन मार्र मा टु अंगुर. पैंतालीस ✡ छःःपैंतालीस मत्ती बारहःचौंतीसवळ्लीद मंळसा तान आत्मा अन्द वळ्लीद भंडार दा टु वळ्लीद मातगोळी का तेगुतान, अदिक बुरा मंळसा तान दिल इन बुरा भंडार दा टु बुरा मातगोळी तेगुतान; यतिकी जो दिल दा तुमकु आद अदा आऊन बाय दा बरतद.
कोलकाताः मेट्रो रेलवे की ओर से यात्रियों के लिए एक और इको फ्रेंडली कदम उठाया है। जो यह है कि नोआपाड़ा से कवि सुभाष तक उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर के 24 स्टेशनों पर पावर बैंक रेंटल टावर लगाए गए हैं। मेट्रो रेलवे ने नए साल में 24 मेट्रो स्टेशनों पर अतिरिक्त यात्री सुविधा प्रदान करने के लिए मेट्रो स्टेशनों पर इन टावरों को स्थापित करने के लिए एक निजी कंपनी के साथ दो (02) साल का समझौता किया है। प्रत्येक स्टेशन में दो ऐसे टावर होंगे जो मेट्रो यात्रियों को अपने स्मार्ट फोन चार्ज करने में मदद करेंगे। इन पावर बैंक में किसी भी स्मार्टफोन को चार्ज करने के लिए इन-बिल्ट केबल होगी। भारत की यह पहली मेट्रो है जिसने इस स्मार्ट चार्जिंग सिस्टम को अपनाया है। समझौते के अनुसार, यात्रियों को पावर बैंक किराए पर लेने के लिए कुछ पैसे जमा करने होंगे। मोबाइल फोन चार्ज करने के बाद इन पावर बैंक को किसी भी चार्जिंग स्टेशन पर वापस करना होता है। एक्जीक्यूटिव कंपनी ने एक एप तैयार किया है, जिसकी मदद से आप पावर बैंक को रेंट पर ले सकेंगे।
कोलकाताः मेट्रो रेलवे की ओर से यात्रियों के लिए एक और इको फ्रेंडली कदम उठाया है। जो यह है कि नोआपाड़ा से कवि सुभाष तक उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर के चौबीस स्टेशनों पर पावर बैंक रेंटल टावर लगाए गए हैं। मेट्रो रेलवे ने नए साल में चौबीस मेट्रो स्टेशनों पर अतिरिक्त यात्री सुविधा प्रदान करने के लिए मेट्रो स्टेशनों पर इन टावरों को स्थापित करने के लिए एक निजी कंपनी के साथ दो साल का समझौता किया है। प्रत्येक स्टेशन में दो ऐसे टावर होंगे जो मेट्रो यात्रियों को अपने स्मार्ट फोन चार्ज करने में मदद करेंगे। इन पावर बैंक में किसी भी स्मार्टफोन को चार्ज करने के लिए इन-बिल्ट केबल होगी। भारत की यह पहली मेट्रो है जिसने इस स्मार्ट चार्जिंग सिस्टम को अपनाया है। समझौते के अनुसार, यात्रियों को पावर बैंक किराए पर लेने के लिए कुछ पैसे जमा करने होंगे। मोबाइल फोन चार्ज करने के बाद इन पावर बैंक को किसी भी चार्जिंग स्टेशन पर वापस करना होता है। एक्जीक्यूटिव कंपनी ने एक एप तैयार किया है, जिसकी मदद से आप पावर बैंक को रेंट पर ले सकेंगे।
मंडी - पांच दिवसीय 48वीं ग्रीष्मकालीन फुटबाल प्रतियोगिता मंगलवार को पड्डल मैदान में विधिवत रूप से शुरू हो गई। प्रतियोगिता में देश भर की आठ टीमों के 100 खिलाड़ी दमखम दिखा रहे हैं। स्पर्धा का शुभारंभ उपायुक्त मंडी ऋग्वेद ठाकुर ने किया। उपायुक्त ने कहा कि मुख्यमंत्री खेल विकास योजना के तहत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक बड़ा खेल मैदान विकसित करने के लिए 6. 80 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं। इस अवसर पर अखिल भारतीय ग्रीष्मकालीन फुटबाल प्रतियोगिता के महासचिव राजेंद्र गुप्ता ने बताया कि प्रतियोगिता के पहले दिन ट्राइम्फ मंडी व बीकानेर फुटबाल अकादमी राजस्थान के मैच खेला गया। मुकाबले में ट्राईअंफ मंडी ने बीकानेर को 2-0 से पराजित किया। ट्राइम्फ मंडी की ओर से मैच के 28वें मिनट में मोहित शर्मा ने पहला गोल कर अपनी टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी। उसके बाद मैच के 44वें मिनट पर साहिल थापा ने मंडी के लिए दूसरा गोल किया। वहीं बीकानेर की टीम मैच में एक भी गोल नहीं कर पाई। ट्राईम्फ फुटबाल क्लब मंडी की टीम ने प्रतियोगिता का पहला मैच जीतकर लीग दौर में प्रवेश कर लिया है।
मंडी - पांच दिवसीय अड़तालीसवीं ग्रीष्मकालीन फुटबाल प्रतियोगिता मंगलवार को पड्डल मैदान में विधिवत रूप से शुरू हो गई। प्रतियोगिता में देश भर की आठ टीमों के एक सौ खिलाड़ी दमखम दिखा रहे हैं। स्पर्धा का शुभारंभ उपायुक्त मंडी ऋग्वेद ठाकुर ने किया। उपायुक्त ने कहा कि मुख्यमंत्री खेल विकास योजना के तहत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक बड़ा खेल मैदान विकसित करने के लिए छः. अस्सी करोड़ खर्च किए जा रहे हैं। इस अवसर पर अखिल भारतीय ग्रीष्मकालीन फुटबाल प्रतियोगिता के महासचिव राजेंद्र गुप्ता ने बताया कि प्रतियोगिता के पहले दिन ट्राइम्फ मंडी व बीकानेर फुटबाल अकादमी राजस्थान के मैच खेला गया। मुकाबले में ट्राईअंफ मंडी ने बीकानेर को दो-शून्य से पराजित किया। ट्राइम्फ मंडी की ओर से मैच के अट्ठाईसवें मिनट में मोहित शर्मा ने पहला गोल कर अपनी टीम को एक-शून्य की बढ़त दिला दी। उसके बाद मैच के चौंतालीसवें मिनट पर साहिल थापा ने मंडी के लिए दूसरा गोल किया। वहीं बीकानेर की टीम मैच में एक भी गोल नहीं कर पाई। ट्राईम्फ फुटबाल क्लब मंडी की टीम ने प्रतियोगिता का पहला मैच जीतकर लीग दौर में प्रवेश कर लिया है।
कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बीच देश में लगातार बढ़ते मामले को देखते हुए देश के अधिकतर राज्यों में लॉकडाउन लगा दिया गया था। राजधानी दिल्ली में भी कोरोना के मामले काफी तेजी से बढ़ने लगे थे, हालात इतना बेकाबू हो गया था कि अस्पतालों में मरीजों के लिए बेड नहीं थे और ना ही ऑक्सीजन। हालांकि, इस वक्त दिल्ली में भी कोरोना के मामलों में तेजी से गिरावट आई है लेकिन यहां की जनता ने सरकार से मांग की है कि एक हफ्ते के लिए लॉकडाउन और बढ़ा दिया जाए। दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने पिछले हफ्ते 1 महीने से चल रहे लॉकडाउन को 24 मई की सुबह तक बढ़ा दिया था। अब लोकल सर्किल सर्वे के अनुसार, 68 फीसदी लोग कम से कम एक हफ्ते और लॉकडाउन बढ़ाने के पक्ष में हैं। कोरोना की ताजा स्थिति को देखते हुए दिल्ली के सभी 11 जिलों के करीब 9,000 निवासियों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी। इनमें 69 फीसदी पुरुष थे जबकि 31 फीसदी महिलाएं थीं। इससे पहले 17 मई को खत्म होने वाले लॉकडाउन के दौरान सर्वे में 74 फीसदी लोगों ने प्रतिबंध आगे बढ़ाने की मांग की थी। ताजा सर्वे में प्रतिक्रियाएं देते हुए 10% फीसदी लोगों ने कहा कि लॉकडाउन को तीन हफ्ते के लिए बढ़ाया जाना चाहिए। जबकि 26 फीसदी निवासी 2 हफ्ते और 32 फीसदी 1 हफ्ते लॉकडाउन बढ़ाए जाने के पक्ष में हैं। हालांकि सिर्फ 10 फीसदी लोगों ने ये भी कहा कि लॉकडाउन/कर्फ्यू को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाना चाहिए और सारी पाबंदी भी हटा देनी चाहिए। 22 फीसदी मतदाताओं ने संपूर्ण लॉकडाउन हटाने की बात कहकर केवल नाइट और वीकेंड कर्फ्यू लगाने की बात कही। दिल्ली में 18 अप्रैल से लॉकडाउन लगा है। इन पांच हफ्तों के भीतर दिल्ली में कोरोना संक्रमण के रोजाना मामलों की संख्या 26 हजार से घटकर 3-6 हजार पर आ गई। पॉजिटिविटी रेट भी 36 फीसदी से गिरकर 5-7 फीसदी पर आ गया। रिकवरी रेट बढ़ने के कारण सरकार और प्राइवेट दोनों तरह के अस्पतालों में आईसीयू और वेंटिलेटर बेड की उपलब्धता भी बढ़ गई है। हालांकि, दिल्ली में कोविड से मरने वालों की संख्या रोजाना अभी भी 200-300 के दायरे में है।
कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बीच देश में लगातार बढ़ते मामले को देखते हुए देश के अधिकतर राज्यों में लॉकडाउन लगा दिया गया था। राजधानी दिल्ली में भी कोरोना के मामले काफी तेजी से बढ़ने लगे थे, हालात इतना बेकाबू हो गया था कि अस्पतालों में मरीजों के लिए बेड नहीं थे और ना ही ऑक्सीजन। हालांकि, इस वक्त दिल्ली में भी कोरोना के मामलों में तेजी से गिरावट आई है लेकिन यहां की जनता ने सरकार से मांग की है कि एक हफ्ते के लिए लॉकडाउन और बढ़ा दिया जाए। दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने पिछले हफ्ते एक महीने से चल रहे लॉकडाउन को चौबीस मई की सुबह तक बढ़ा दिया था। अब लोकल सर्किल सर्वे के अनुसार, अड़सठ फीसदी लोग कम से कम एक हफ्ते और लॉकडाउन बढ़ाने के पक्ष में हैं। कोरोना की ताजा स्थिति को देखते हुए दिल्ली के सभी ग्यारह जिलों के करीब नौ,शून्य निवासियों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी। इनमें उनहत्तर फीसदी पुरुष थे जबकि इकतीस फीसदी महिलाएं थीं। इससे पहले सत्रह मई को खत्म होने वाले लॉकडाउन के दौरान सर्वे में चौहत्तर फीसदी लोगों ने प्रतिबंध आगे बढ़ाने की मांग की थी। ताजा सर्वे में प्रतिक्रियाएं देते हुए दस% फीसदी लोगों ने कहा कि लॉकडाउन को तीन हफ्ते के लिए बढ़ाया जाना चाहिए। जबकि छब्बीस फीसदी निवासी दो हफ्ते और बत्तीस फीसदी एक हफ्ते लॉकडाउन बढ़ाए जाने के पक्ष में हैं। हालांकि सिर्फ दस फीसदी लोगों ने ये भी कहा कि लॉकडाउन/कर्फ्यू को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाना चाहिए और सारी पाबंदी भी हटा देनी चाहिए। बाईस फीसदी मतदाताओं ने संपूर्ण लॉकडाउन हटाने की बात कहकर केवल नाइट और वीकेंड कर्फ्यू लगाने की बात कही। दिल्ली में अट्ठारह अप्रैल से लॉकडाउन लगा है। इन पांच हफ्तों के भीतर दिल्ली में कोरोना संक्रमण के रोजाना मामलों की संख्या छब्बीस हजार से घटकर तीन-छः हजार पर आ गई। पॉजिटिविटी रेट भी छत्तीस फीसदी से गिरकर पाँच-सात फीसदी पर आ गया। रिकवरी रेट बढ़ने के कारण सरकार और प्राइवेट दोनों तरह के अस्पतालों में आईसीयू और वेंटिलेटर बेड की उपलब्धता भी बढ़ गई है। हालांकि, दिल्ली में कोविड से मरने वालों की संख्या रोजाना अभी भी दो सौ-तीन सौ के दायरे में है।
जबलपुर,। एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी की केन्द्रीय क्रीड़ा एवं कला परिषद ने 45 वीं अखिल भारतीय विद्युत क्रीड़ा नियंत्रण मण्डल वालीबाल प्रतियोगिता के लिए एमपी पावर की 12 सदस्यीय टीम की घोषणा कर दी है। एमपी पावर की टीम 13 से 15 मार्च तक कोलकाता में आयोजित प्रतियोगिता में भाग लेगी। टीम के सदस्य हैं-अजय उसकवार, प्रशांत सिंह भदौरिया, कमलेश विश्वकर्मा, प्रतीक शर्मा, आदर्श तिवारी, महेश यादव, दीपक साहू (सभी जबलपुर) आयुष शर्मा (बरगी), अभिनव चौकसे (नरसिंहपुर), आरएस द्विवेदी, अभिषेक गौरव सोनी (सभी रीवा), विद्यासागर द्विवेदी (सिलपरा)। टीम के मैनेजर व कोच क्रमशः जबलपुर के रवीन्द्र पणिकर व जीएस राजपूत होंगे। प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए एमपी पावर की टीम आज 11 मार्च को कोलकाता के लिए रवाना होगी। केन्द्रीय क्रीड़ा एवं कला परिषद के महासचिव राजीव गुप्ता ने एमपी पावर टीम को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए अपनी शुभकामनाएं दी हैं।
जबलपुर,। एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी की केन्द्रीय क्रीड़ा एवं कला परिषद ने पैंतालीस वीं अखिल भारतीय विद्युत क्रीड़ा नियंत्रण मण्डल वालीबाल प्रतियोगिता के लिए एमपी पावर की बारह सदस्यीय टीम की घोषणा कर दी है। एमपी पावर की टीम तेरह से पंद्रह मार्च तक कोलकाता में आयोजित प्रतियोगिता में भाग लेगी। टीम के सदस्य हैं-अजय उसकवार, प्रशांत सिंह भदौरिया, कमलेश विश्वकर्मा, प्रतीक शर्मा, आदर्श तिवारी, महेश यादव, दीपक साहू आयुष शर्मा , अभिनव चौकसे , आरएस द्विवेदी, अभिषेक गौरव सोनी , विद्यासागर द्विवेदी । टीम के मैनेजर व कोच क्रमशः जबलपुर के रवीन्द्र पणिकर व जीएस राजपूत होंगे। प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए एमपी पावर की टीम आज ग्यारह मार्च को कोलकाता के लिए रवाना होगी। केन्द्रीय क्रीड़ा एवं कला परिषद के महासचिव राजीव गुप्ता ने एमपी पावर टीम को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए अपनी शुभकामनाएं दी हैं।
भारतीय क्रिकेट टीम न्यूजीलैंड के खिलाफ गुरुवार से शुरू होने वाली दो टेस्ट मैचों की सीरीज में 2-0 से क्लीन स्वीप करने पर भी आइसीसी टेस्ट टीम चैंपियनशिप तालिका में पांचवें स्थान पर ही रहेगी। दुबई। भारतीय क्रिकेट टीम न्यूजीलैंड के खिलाफ गुरुवार से शुरू होने वाली दो टेस्ट मैचों की सीरीज में 2-0 से क्लीन स्वीप करने पर भी आइसीसी टेस्ट टीम चैंपियनशिप तालिका में पांचवें स्थान पर ही रहेगी। दक्षिण अफ्रीका सोमवार को इंग्लैंड से सीरीज 2-0 से जीतकर दूसरी बार टेस्ट चैंपियनशिप तालिका में शीर्ष पर काबिज हो गया है। भारत 104 रेटिंग अंक के साथ पांचवें स्थान पर है और वह दक्षिण अफ्रीका से 16 रेटिंग अंक पीछे है। इंग्लैंड अब 117 रेटिंग अंक के साथ दूसरे, ऑस्ट्रेलिया (116 अंक) तीसरे और पाकिस्तान (109 अंक) चौथे स्थान पर है। भारत के पास फिलहाल अपनी रैंकिंग में सुधार का मौका नहीं है। यदि वह न्यूजीलैंड को 2-0 से हराता है, तो उसके दो रेटिंग अंक बढ़ जाएंगे और उसके कुल अंकों की संख्या 106 हो जाएगी। लेकिन उसकी रैंकिंग वही रहेगी। महेंद्र सिंह धौनी की टीम यदि 1-0 से जीत दर्ज करती है, तो उसका केवल एक रेटिंग अंक बढ़ेगा। यदि भारत सीरीज बराबर करता या न्यूजीलैंड उसे हराने में सफल रहता है तो भारतीय टीम को बड़ा नुकसान होना तय है। लंबे समय बाद राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण के बिना खेल रही भारतीय टीम यदि सीरीज के दोनों मैच गंवा देती है तो फिर वह श्रीलंका के पीछे छठे स्थान पर खिसक जाएगी। कीवी टीम से दोनों मैच गंवाने पर भारत के केवल 97 रेटिंग अंक रह जाएंगे। ऐसी दशा में न्यूजीलैंड के नौ रेटिंग अंक बढ़ जाएंगे, लेकिन वह पहले की तरह आठवें नंबर पर ही रहेगा। यदि रॉस टेलर की अगुआई वाली टीम सीरीज में 1-0 से जीत दर्ज करती है, तो भारत को छह रेटिंग अंक का नुकसान होगा। सीरीज 1-1 या 0-0 से बराबर रहने पर भारत के केवल 101 रेटिंग अंक रह जाएंगे।
भारतीय क्रिकेट टीम न्यूजीलैंड के खिलाफ गुरुवार से शुरू होने वाली दो टेस्ट मैचों की सीरीज में दो-शून्य से क्लीन स्वीप करने पर भी आइसीसी टेस्ट टीम चैंपियनशिप तालिका में पांचवें स्थान पर ही रहेगी। दुबई। भारतीय क्रिकेट टीम न्यूजीलैंड के खिलाफ गुरुवार से शुरू होने वाली दो टेस्ट मैचों की सीरीज में दो-शून्य से क्लीन स्वीप करने पर भी आइसीसी टेस्ट टीम चैंपियनशिप तालिका में पांचवें स्थान पर ही रहेगी। दक्षिण अफ्रीका सोमवार को इंग्लैंड से सीरीज दो-शून्य से जीतकर दूसरी बार टेस्ट चैंपियनशिप तालिका में शीर्ष पर काबिज हो गया है। भारत एक सौ चार रेटिंग अंक के साथ पांचवें स्थान पर है और वह दक्षिण अफ्रीका से सोलह रेटिंग अंक पीछे है। इंग्लैंड अब एक सौ सत्रह रेटिंग अंक के साथ दूसरे, ऑस्ट्रेलिया तीसरे और पाकिस्तान चौथे स्थान पर है। भारत के पास फिलहाल अपनी रैंकिंग में सुधार का मौका नहीं है। यदि वह न्यूजीलैंड को दो-शून्य से हराता है, तो उसके दो रेटिंग अंक बढ़ जाएंगे और उसके कुल अंकों की संख्या एक सौ छः हो जाएगी। लेकिन उसकी रैंकिंग वही रहेगी। महेंद्र सिंह धौनी की टीम यदि एक-शून्य से जीत दर्ज करती है, तो उसका केवल एक रेटिंग अंक बढ़ेगा। यदि भारत सीरीज बराबर करता या न्यूजीलैंड उसे हराने में सफल रहता है तो भारतीय टीम को बड़ा नुकसान होना तय है। लंबे समय बाद राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण के बिना खेल रही भारतीय टीम यदि सीरीज के दोनों मैच गंवा देती है तो फिर वह श्रीलंका के पीछे छठे स्थान पर खिसक जाएगी। कीवी टीम से दोनों मैच गंवाने पर भारत के केवल सत्तानवे रेटिंग अंक रह जाएंगे। ऐसी दशा में न्यूजीलैंड के नौ रेटिंग अंक बढ़ जाएंगे, लेकिन वह पहले की तरह आठवें नंबर पर ही रहेगा। यदि रॉस टेलर की अगुआई वाली टीम सीरीज में एक-शून्य से जीत दर्ज करती है, तो भारत को छह रेटिंग अंक का नुकसान होगा। सीरीज एक-एक या शून्य-शून्य से बराबर रहने पर भारत के केवल एक सौ एक रेटिंग अंक रह जाएंगे।
अगर मैं ही जिम्मेवार हूं तो मैं मुक्त भी हो सकता हूं। अगर दूसरे भी जिम्मेवार है... अगर आप मुझे दुख दे सकते हैं, सुख दे सकते हैं, अगर आप मुझे आनंदित कर सकते हैं और पीड़ित कर सकते हैं तो फिर मेरी मुक्ति का कोई उपाय नहीं है। फिर आपके ऊपर मैं निर्भर हूं। आप मेरी मर्जी पर निर्भर हैं, मैं आपकी मर्जी पर निर्भर हूं। तब तो सारा संसार एक जाल है। उस जाल में से कोई हिस्सा नहीं छूट महावीर कहते हैं, प्रत्येक व्यक्ति कितने ही संसार के बीच में खड़ा हो, अकेला है, टोटली अलोन, एकांतरूपेण, अकेला है। इस अकेलेपन को समझ ले तो संन्यास फलित हो जाता है, वह जहां भी है। इस अकेलेपन के भाव को समझ ले तो संन्यास फलित होता है, चाहे वह कहीं भी हो। अपने को अकेला जानना संन्यास है, अपने को साथियों में जानना संसार है। मित्रों में, परिवार में, समाज में, देश में, बंधा हुआ अंश की तरह जानना संसार है। मुक्त, अलग, टूटा हुआ, अकेला, आणविक, एटामिक, अकेला अपने को जानना संन्यास है। आज इतना ही। पांच मिनट कीर्तन करें।
अगर मैं ही जिम्मेवार हूं तो मैं मुक्त भी हो सकता हूं। अगर दूसरे भी जिम्मेवार है... अगर आप मुझे दुख दे सकते हैं, सुख दे सकते हैं, अगर आप मुझे आनंदित कर सकते हैं और पीड़ित कर सकते हैं तो फिर मेरी मुक्ति का कोई उपाय नहीं है। फिर आपके ऊपर मैं निर्भर हूं। आप मेरी मर्जी पर निर्भर हैं, मैं आपकी मर्जी पर निर्भर हूं। तब तो सारा संसार एक जाल है। उस जाल में से कोई हिस्सा नहीं छूट महावीर कहते हैं, प्रत्येक व्यक्ति कितने ही संसार के बीच में खड़ा हो, अकेला है, टोटली अलोन, एकांतरूपेण, अकेला है। इस अकेलेपन को समझ ले तो संन्यास फलित हो जाता है, वह जहां भी है। इस अकेलेपन के भाव को समझ ले तो संन्यास फलित होता है, चाहे वह कहीं भी हो। अपने को अकेला जानना संन्यास है, अपने को साथियों में जानना संसार है। मित्रों में, परिवार में, समाज में, देश में, बंधा हुआ अंश की तरह जानना संसार है। मुक्त, अलग, टूटा हुआ, अकेला, आणविक, एटामिक, अकेला अपने को जानना संन्यास है। आज इतना ही। पांच मिनट कीर्तन करें।
- 49 min ago मारुति सुजुकी इन्विक्टो रिव्यूः एमपीवी सेगमेंट को मिलेगा नया किंग? Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? बजाज की बहुप्रतीक्षित मोटरसायकिल बजाज सीएस400 अगस्त में भारत में लॉन्च होगी। एक वेबसाइट से बातचीत करते हुए बजाज आॅटो के एमडी ने कंफर्म किया कि बजाज पल्सर की यह नई बाइक अगले महीने लॉन्च हो जाएगी। बजाज पल्सर सीएस 400 को कई बार टेस्टिंग के दौरान कैमरे में कैद किया जा चुका है। इसका मतलब है कि मोटरसायकिल को भारतीय बाज़ार में जल्द ही लॉन्च किया जाएगा। सीएस400 बजाज की सबसे बड़ी डिस्प्लेसमेंट मोटरसायकिल है। बजाज पल्सर सीएस 400 की ताकत के बारे में राजीव ने बताया कि इसमें 375सीसी का सिंगल सिलिंडर लिक्विड कूल्ड इंजन लगा होगा। यह इंजन 35 बीएचपी की ताकत के साथ 33 न्यूटन मीटर का पीक टॉर्क जेनरेट करेगा। यह इंजन 6 स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स से लैस होगा। सीएस400 बजाज के पोर्टफोलियो के लिहाज़ से बहुत ही अहम मोटरसायकिल है। बजाज सीएस400 एक टुअरर बाइक हो सकती है बजाय इसके कि यह केटीएम ड्यूक 390 की तरह हो। लॉन्च होने के बाद बजाज पल्सर सीएस 400 का सीधा कॉम्पटीशन महिंद्रा मोज़ो से होगा और इसकी अनुमानित कीमत 1 लाख 80 हज़ार रुपए के आसपास हो सकती है।
- उनचास मिनट ago मारुति सुजुकी इन्विक्टो रिव्यूः एमपीवी सेगमेंट को मिलेगा नया किंग? Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? बजाज की बहुप्रतीक्षित मोटरसायकिल बजाज सीएसचार सौ अगस्त में भारत में लॉन्च होगी। एक वेबसाइट से बातचीत करते हुए बजाज आॅटो के एमडी ने कंफर्म किया कि बजाज पल्सर की यह नई बाइक अगले महीने लॉन्च हो जाएगी। बजाज पल्सर सीएस चार सौ को कई बार टेस्टिंग के दौरान कैमरे में कैद किया जा चुका है। इसका मतलब है कि मोटरसायकिल को भारतीय बाज़ार में जल्द ही लॉन्च किया जाएगा। सीएसचार सौ बजाज की सबसे बड़ी डिस्प्लेसमेंट मोटरसायकिल है। बजाज पल्सर सीएस चार सौ की ताकत के बारे में राजीव ने बताया कि इसमें तीन सौ पचहत्तरसीसी का सिंगल सिलिंडर लिक्विड कूल्ड इंजन लगा होगा। यह इंजन पैंतीस बीएचपी की ताकत के साथ तैंतीस न्यूटन मीटर का पीक टॉर्क जेनरेट करेगा। यह इंजन छः स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स से लैस होगा। सीएसचार सौ बजाज के पोर्टफोलियो के लिहाज़ से बहुत ही अहम मोटरसायकिल है। बजाज सीएसचार सौ एक टुअरर बाइक हो सकती है बजाय इसके कि यह केटीएम ड्यूक तीन सौ नब्बे की तरह हो। लॉन्च होने के बाद बजाज पल्सर सीएस चार सौ का सीधा कॉम्पटीशन महिंद्रा मोज़ो से होगा और इसकी अनुमानित कीमत एक लाख अस्सी हज़ार रुपए के आसपास हो सकती है।
रादौर, 11 जून (निस) भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष पूर्व मंत्री कर्णदेव कांबोज ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने चौधराहट की लड़ाई के चलते राज्यसभा सीट हारी है। कांग्रेस के पास राज्यसभा सीट जीतने के लिए स्पष्ट बहुमत था, लेकिन आपसी फूट के चलते कांग्रेस स्पष्ट बहुमत के बाद भी सीट हार गई। आने वाले चुनावो में हरियाणा में कांग्रेस दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाएगी। पूर्व मंत्री कांबोज ने राज्यसभा चुनावों में भाजपा उम्मीदवार कृष्ण पंवार व आजाद उम्मीदवार कार्तिकेय शर्मा की जीत पर शनिवार को यह प्रतिक्रिया दी। इस पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने रादौर में लड्डू बांटकर खुशियां मनाई।
रादौर, ग्यारह जून भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष पूर्व मंत्री कर्णदेव कांबोज ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने चौधराहट की लड़ाई के चलते राज्यसभा सीट हारी है। कांग्रेस के पास राज्यसभा सीट जीतने के लिए स्पष्ट बहुमत था, लेकिन आपसी फूट के चलते कांग्रेस स्पष्ट बहुमत के बाद भी सीट हार गई। आने वाले चुनावो में हरियाणा में कांग्रेस दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाएगी। पूर्व मंत्री कांबोज ने राज्यसभा चुनावों में भाजपा उम्मीदवार कृष्ण पंवार व आजाद उम्मीदवार कार्तिकेय शर्मा की जीत पर शनिवार को यह प्रतिक्रिया दी। इस पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने रादौर में लड्डू बांटकर खुशियां मनाई।
मुंबई। ड्रग तस्करी मामले (Drugs Trafficking Case) में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने शुक्रवार को फरार माफिया डॉन दाऊद इब्राहिम (Dawood Ibrahim) के भाई इकबाल कास्कर (Iqbal Kaskar) को कस्टडी में ले लिया। मामले की जांच के दौरान इकबाल कास्कर को आरोपी पाया गया है। बता दें कि इससे पहले नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने बुधवार को इकबाल कास्कर को हिरासत में लिया था। एनसीबी के जोनल निदेशक समीर वानखेड़े ने बताया कि इकबाल कास्कर को प्रोडक्शन रिमांड पर लिया गया था।
मुंबई। ड्रग तस्करी मामले में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने शुक्रवार को फरार माफिया डॉन दाऊद इब्राहिम के भाई इकबाल कास्कर को कस्टडी में ले लिया। मामले की जांच के दौरान इकबाल कास्कर को आरोपी पाया गया है। बता दें कि इससे पहले नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने बुधवार को इकबाल कास्कर को हिरासत में लिया था। एनसीबी के जोनल निदेशक समीर वानखेड़े ने बताया कि इकबाल कास्कर को प्रोडक्शन रिमांड पर लिया गया था।
कोरोना को लेकर सरकार ने दी चेतावनी, 'कोविड की अगली लहर तेजी से पहुंचेगी चरम पर यदि. . . ' केंद्र सरकार ने शुक्रवार को एक चेतावनी जारी करते हुए कहा कि लोग जो दिसंबर और जनवरी में कर रहे थे, अगर वही वे वापस करने लगेंगे तो स्थिति फिर से खराब हो जाएगी। कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर ज्यादातर राज्यों में कमजोर पड़ रही है। संक्रमण के मामले और मौतों की संख्या में लगातार कमी देखी जा रही है। हालांकि केंद्र सरकार ने शुक्रवार को एक चेतावनी जारी करते हुए कहा कि लोग जो दिसंबर और जनवरी में कर रहे थे, अगर वही वे वापस करने लगेंगे तो स्थिति फिर से खराब हो जाएगी। नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) वीके पॉल ने कहा कि अगर हम दिसंबर, जनवरी में जो कर रहे थे, वही फिर से करना शुरू करते हैं तो अगली लहर बहुत तेज होगी और वह बहुत ही जल्द चरम पर पहुंच सकती है। हालांकि यदि हम कोविड के प्रति उचित व्यवहार को बनाए रखते हैं तो लहर छोटी होगी या फिर हो सकता है कि कोई लहर हो ही नहीं। उन्हांनें कहा कि हमें समय खरीदना होगा, जिसमें वैक्सीनेशन सुनिश्चित किया जा सके। डॉ. पॉल ने कहा कि हमने वायरस के एक जगह से दूसरे जगह जाने को मुश्किल बना दिया है। लेकिन हमें यह याद रखना होगा कि जब दूसरी लहर की चरम स्थिति खत्म हो रही है और यदि हम वही सब करना शुरू कर देते हैं जो हम जनवरी में कर रहे थे तो यह वापस आ जाएगा। उन्होंने कहा कि यह गणितीय रूप से भी मान्य है और सामान्य रूप से भी। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में 7 मई से जब कोरोना की दूसरी लहर अपने चरम पर थी तब से संक्रमण के दैनिक मामलों में 68 फीसद की गिरावट दर्ज की गई है। 377 जिलों में पांच फीसद से भी कम पॉजिटिविटी है और सिर्फ 257 जिलों में सौ से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। कई विशेषज्ञों ने भारत में तीसरी लहर की आशंका जताई है। हालांकि इसके समय और प्रभाव का अनुमान नहीं लगाया जा सकता है कि क्योंकि यह पाबंदियों के हटने और वैक्सीनेशन के बढ़ने सहित कई अन्य कारणों पर निर्भर करेगा। यह भी भविष्यवाणी की गई है कि तीसरी लहर बच्चों को ज्यादा प्रभावित कर सकती है। जिसके बाद राज्य सरकारों ने बच्चों के लिए कोविड देखभाल सुविधाओं को बढ़ाने की बात कही है।
कोरोना को लेकर सरकार ने दी चेतावनी, 'कोविड की अगली लहर तेजी से पहुंचेगी चरम पर यदि. . . ' केंद्र सरकार ने शुक्रवार को एक चेतावनी जारी करते हुए कहा कि लोग जो दिसंबर और जनवरी में कर रहे थे, अगर वही वे वापस करने लगेंगे तो स्थिति फिर से खराब हो जाएगी। कोविड-उन्नीस महामारी की दूसरी लहर ज्यादातर राज्यों में कमजोर पड़ रही है। संक्रमण के मामले और मौतों की संख्या में लगातार कमी देखी जा रही है। हालांकि केंद्र सरकार ने शुक्रवार को एक चेतावनी जारी करते हुए कहा कि लोग जो दिसंबर और जनवरी में कर रहे थे, अगर वही वे वापस करने लगेंगे तो स्थिति फिर से खराब हो जाएगी। नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल ने कहा कि अगर हम दिसंबर, जनवरी में जो कर रहे थे, वही फिर से करना शुरू करते हैं तो अगली लहर बहुत तेज होगी और वह बहुत ही जल्द चरम पर पहुंच सकती है। हालांकि यदि हम कोविड के प्रति उचित व्यवहार को बनाए रखते हैं तो लहर छोटी होगी या फिर हो सकता है कि कोई लहर हो ही नहीं। उन्हांनें कहा कि हमें समय खरीदना होगा, जिसमें वैक्सीनेशन सुनिश्चित किया जा सके। डॉ. पॉल ने कहा कि हमने वायरस के एक जगह से दूसरे जगह जाने को मुश्किल बना दिया है। लेकिन हमें यह याद रखना होगा कि जब दूसरी लहर की चरम स्थिति खत्म हो रही है और यदि हम वही सब करना शुरू कर देते हैं जो हम जनवरी में कर रहे थे तो यह वापस आ जाएगा। उन्होंने कहा कि यह गणितीय रूप से भी मान्य है और सामान्य रूप से भी। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में सात मई से जब कोरोना की दूसरी लहर अपने चरम पर थी तब से संक्रमण के दैनिक मामलों में अड़सठ फीसद की गिरावट दर्ज की गई है। तीन सौ सतहत्तर जिलों में पांच फीसद से भी कम पॉजिटिविटी है और सिर्फ दो सौ सत्तावन जिलों में सौ से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। कई विशेषज्ञों ने भारत में तीसरी लहर की आशंका जताई है। हालांकि इसके समय और प्रभाव का अनुमान नहीं लगाया जा सकता है कि क्योंकि यह पाबंदियों के हटने और वैक्सीनेशन के बढ़ने सहित कई अन्य कारणों पर निर्भर करेगा। यह भी भविष्यवाणी की गई है कि तीसरी लहर बच्चों को ज्यादा प्रभावित कर सकती है। जिसके बाद राज्य सरकारों ने बच्चों के लिए कोविड देखभाल सुविधाओं को बढ़ाने की बात कही है।
अमरावती/दि. 23- कोविड संक्रमण काल से पहले अमरावती से जबलपुर और अमरावती से लातुर होते हुए पुणे ट्रेन चलायी जा रही थी. जिसे कोविड संक्रमण के खतरे को देखते हुए अन्य रेलगाडियों के साथ-साथ बंद कर दिया गया था. परंतू कोविड संक्रमण का खतरा टलने के बाद जहां अब सभी रेलगाडियों को पहले की तरह शुरू कर दिया गया है, वही अमरावती से इन दोनों रेलगाडियों का परिचालन अब तक बंद ही रखा गया है. जिसे लेकर क्षेत्र की जनता द्वारा विगत लंबे समय से मांग उठाई जा रही है. परंतू रेल प्रशासन द्वारा जनभावनाओं की लगातार अनदेखी की जा रही है. इस आशय का आरोप लगाते हुए महानगर यात्री संघ द्वारा चेतावनी दी गई कि, यदि आगामी एक माह के भीतर अमरावती से इन दोनों रेलगाडियों को दोबारा शुरू नहीं किया जाता है, तो अगले महिने बडनेरा रेल्वे स्टेशन पर रेल रोको आंदोलन किया जायेगा और पूरा दिन बडनेरा रेल्वे स्टेशन से किसी भी ट्रेन को गुजरने नहीं दिया जायेगा. महानगर यात्री संघ के अध्यक्ष अनिल तरडेजा की अगुआई में आज स्थानीय मॉडल रेल्वे स्टेशन पर जबलपुर व पुणे ट्रेन को दुबारा शुरू किये जाने की मांग को लेकर जबर्दस्त प्रदर्शन किया गया. साथ ही रेल महकमे के वरिष्ठ अधिकारियों के नाम स्टेशन प्रबंधक एम. एम. लोहकरे को ज्ञापन सौंपा गया. इस ज्ञापन में कहा गया कि, कोविड काल से पहले रोजाना चलनेवाली अमरावती-जबलपुर ट्रेन को अमरावती से अच्छी-खासी यात्री संख्या मिला करती थी. जिससे रेल महकमे को काफी आय होती थी और यह ट्रेन फायदे में भी चल रही थी. यही स्थिति अमरावती-पुणे व्हाया लातुर साप्ताहिक ट्रेन के साथ भी थी. जिसमें हमेशा ही अग्रीम आरक्षण हाउसफुल्ल रहा करता था. ऐसे में कोविड का खतरा निपटने के बाद इन दोनोें रेलगाडियों को बंद रखने का औचित्य समझ से परे है. साथ ही हैरतवाली बात यह भी है कि, जबलपुर ट्रेन को इस समय नागपुर तक चलाया जा रहा है. जहां पर यह ट्रेन पूरा दिन रेल्वे यार्ड में खाली खडी रहती है. जबकि नागपुर स्टेशन पर रेल्वे यार्ड में पहले ही काफी रैक खडे रहते है और वहां रेलगाडियों को खडे रखने हेतु जगह की कमी है. ऐसे में बहुत बेहतर रहेगा कि, इस ट्रेन को पहले की तरह अमरावती तक लाया जाये. जिससे रेल्वे को आय के साथ सुविधा भी होगी. इन सबके साथ ही विदर्भ क्षेत्र के नागरिकों, व्यवसायियोें व उद्योजकों के पास पहले की तरह मध्यप्रदेश के महाकौशल क्षेत्र से सीधा संपर्क रखने का जरिया उपलब्ध होगा. जिससे यहां के व्यापार-व्यवसाय को गति मिलेगी. इसी तरह कोविड काल से पहले शुरू रहनेवाली अमरावती-पुणे व्हाया लातुर साप्ताहिक ट्रेन को भी दुबारा जल्द से जल्द शुरू किया जाना चाहिए, ताकि अमरावती शहर सहित जिले के नागरिकों के पास पुणे आने-जाने हेतु पहले की तरह अपना अधिकारपूर्ण साधन उपलब्ध हो सके. इन सबके साथ ही महानगर यात्री संघ ने नया अमरावती रेल्वे स्टेशन से होकर कुछ नई रेलगाडियों को चलाये जाने तथा बडनेरा रेल्वे स्टेशन पर लंबी दूरीवाली कुछ रेलगाडियों को स्टॉपेज दिये जाने के साथ ही अमरावती रेल्वे स्टेशन से नासिक व पुणे के लिए दो नई रेलगाडियों को चलाये जाने की मांग भी रेल प्रशासन से की है और साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि, अगर एक माह के भीतर अमरावती से जबलपुर और अमरावती से लातुर होते हुए पुणे के लिए पहले की तरह ट्रेन शुरू नहीं की जाती है, तो अगले महिने बडनेरा रेल्वे स्टेशन पर पूरा दिन रेल रोको आंदोलन किया जायेगा और उस दिन बडनेरा स्टेशन से होकर किसी भी ट्रेन को गुजरने नहीं दिया जायेगा. ज्ञापन सौंंपते समय महानगर यात्री संघ के अध्यक्ष अनिल तरडेजा, अमरावती चेंबर ऑफ कॉमर्स एन्ड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष विनोद कलंत्री, सचिव सुरेंद्र देशमुख व सहसचिव मनीष करवा, रिटेल किराणा एसो. के अध्यक्ष आत्माराम पुरसवाणी, सागर गुप्ता, दिलीप छुटलाणी, सुधीर बजाज, जयपाल साधवानी, परमानंद शर्मा, नितीन कदम, विजय पिंजाणी, किशोर मोहता, मुकेश हरवाणी, अनुप हरवाणी, तुलसी सेतीया, राजु बुलाणी, प्रदीप हरवाणी, अनुराग तरडेजा, तरूण अरोरा के साथ ही बिझीलैण्ड, सिटीलैण्ड व ड्रीम्जलैण्ड व्यापारी एसो. के पदाधिकारी भी बडी संख्या में उपस्थित थे. इस आंदोलन के दौरान अपनी बेहद संतप्त प्रतिक्रिया देते हुए महानगर यात्री संघ के अध्यक्ष अनिल तरडेजा ने कहा कि, अमरावती रेल्वे स्टेशन का कायाकल्प और यहां से रेल सुविधाओं का विस्तार अमरावती से वास्ता रखनेवाली देश की पूर्व राष्ट्रपती श्रीमती प्रतिभाताई पाटील की मेहरबानी के चलते हुआ था. जिसकी वजह से बरसों-बरस तक उपेक्षित पडा रहनेवाला अमरावती शहर देश के रेल्वे नक्शे पर दिखाई दिया. किसी भी क्षेत्र का विकास करने हेतु वहां पर आवागमन की नई-नई सुविधाएं उपलब्ध करायी जाती है. परंतू अमरावती में उलटी गंगा बहाई जा रही है. नई रेलगाडियां देना तो दूर, बल्कि जो रेलगाडियां पहले से चल रही थी, उन्हें बंद करने का कारनामा रेल महकमे द्वारा किया जा रहा है और हैरत की बात यह है कि, इसे लेकर किसी जनप्रतिनिधि द्वारा कुछ भी नहीं कहा जा रहा. ऐसे में अब आम जनता सडक पर उतरकर अपने अधिकारों की लडाई लडेगी. हम रेल महकमे से गाडियों की भीख नहीं मांग रहे, बल्कि अमरावती-जबलपुर और अमरावती-पुणे व्हाया लातूर ये दो रेलगाडियां हमारा अपना अधिकार है और हम इसे हर हाल में वापिस प्राप्त करेंगे. क्योंकि यह हमारे शहर व जिले के विकास व भविष्य से जुडा मामला है.
अमरावती/दि. तेईस- कोविड संक्रमण काल से पहले अमरावती से जबलपुर और अमरावती से लातुर होते हुए पुणे ट्रेन चलायी जा रही थी. जिसे कोविड संक्रमण के खतरे को देखते हुए अन्य रेलगाडियों के साथ-साथ बंद कर दिया गया था. परंतू कोविड संक्रमण का खतरा टलने के बाद जहां अब सभी रेलगाडियों को पहले की तरह शुरू कर दिया गया है, वही अमरावती से इन दोनों रेलगाडियों का परिचालन अब तक बंद ही रखा गया है. जिसे लेकर क्षेत्र की जनता द्वारा विगत लंबे समय से मांग उठाई जा रही है. परंतू रेल प्रशासन द्वारा जनभावनाओं की लगातार अनदेखी की जा रही है. इस आशय का आरोप लगाते हुए महानगर यात्री संघ द्वारा चेतावनी दी गई कि, यदि आगामी एक माह के भीतर अमरावती से इन दोनों रेलगाडियों को दोबारा शुरू नहीं किया जाता है, तो अगले महिने बडनेरा रेल्वे स्टेशन पर रेल रोको आंदोलन किया जायेगा और पूरा दिन बडनेरा रेल्वे स्टेशन से किसी भी ट्रेन को गुजरने नहीं दिया जायेगा. महानगर यात्री संघ के अध्यक्ष अनिल तरडेजा की अगुआई में आज स्थानीय मॉडल रेल्वे स्टेशन पर जबलपुर व पुणे ट्रेन को दुबारा शुरू किये जाने की मांग को लेकर जबर्दस्त प्रदर्शन किया गया. साथ ही रेल महकमे के वरिष्ठ अधिकारियों के नाम स्टेशन प्रबंधक एम. एम. लोहकरे को ज्ञापन सौंपा गया. इस ज्ञापन में कहा गया कि, कोविड काल से पहले रोजाना चलनेवाली अमरावती-जबलपुर ट्रेन को अमरावती से अच्छी-खासी यात्री संख्या मिला करती थी. जिससे रेल महकमे को काफी आय होती थी और यह ट्रेन फायदे में भी चल रही थी. यही स्थिति अमरावती-पुणे व्हाया लातुर साप्ताहिक ट्रेन के साथ भी थी. जिसमें हमेशा ही अग्रीम आरक्षण हाउसफुल्ल रहा करता था. ऐसे में कोविड का खतरा निपटने के बाद इन दोनोें रेलगाडियों को बंद रखने का औचित्य समझ से परे है. साथ ही हैरतवाली बात यह भी है कि, जबलपुर ट्रेन को इस समय नागपुर तक चलाया जा रहा है. जहां पर यह ट्रेन पूरा दिन रेल्वे यार्ड में खाली खडी रहती है. जबकि नागपुर स्टेशन पर रेल्वे यार्ड में पहले ही काफी रैक खडे रहते है और वहां रेलगाडियों को खडे रखने हेतु जगह की कमी है. ऐसे में बहुत बेहतर रहेगा कि, इस ट्रेन को पहले की तरह अमरावती तक लाया जाये. जिससे रेल्वे को आय के साथ सुविधा भी होगी. इन सबके साथ ही विदर्भ क्षेत्र के नागरिकों, व्यवसायियोें व उद्योजकों के पास पहले की तरह मध्यप्रदेश के महाकौशल क्षेत्र से सीधा संपर्क रखने का जरिया उपलब्ध होगा. जिससे यहां के व्यापार-व्यवसाय को गति मिलेगी. इसी तरह कोविड काल से पहले शुरू रहनेवाली अमरावती-पुणे व्हाया लातुर साप्ताहिक ट्रेन को भी दुबारा जल्द से जल्द शुरू किया जाना चाहिए, ताकि अमरावती शहर सहित जिले के नागरिकों के पास पुणे आने-जाने हेतु पहले की तरह अपना अधिकारपूर्ण साधन उपलब्ध हो सके. इन सबके साथ ही महानगर यात्री संघ ने नया अमरावती रेल्वे स्टेशन से होकर कुछ नई रेलगाडियों को चलाये जाने तथा बडनेरा रेल्वे स्टेशन पर लंबी दूरीवाली कुछ रेलगाडियों को स्टॉपेज दिये जाने के साथ ही अमरावती रेल्वे स्टेशन से नासिक व पुणे के लिए दो नई रेलगाडियों को चलाये जाने की मांग भी रेल प्रशासन से की है और साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि, अगर एक माह के भीतर अमरावती से जबलपुर और अमरावती से लातुर होते हुए पुणे के लिए पहले की तरह ट्रेन शुरू नहीं की जाती है, तो अगले महिने बडनेरा रेल्वे स्टेशन पर पूरा दिन रेल रोको आंदोलन किया जायेगा और उस दिन बडनेरा स्टेशन से होकर किसी भी ट्रेन को गुजरने नहीं दिया जायेगा. ज्ञापन सौंंपते समय महानगर यात्री संघ के अध्यक्ष अनिल तरडेजा, अमरावती चेंबर ऑफ कॉमर्स एन्ड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष विनोद कलंत्री, सचिव सुरेंद्र देशमुख व सहसचिव मनीष करवा, रिटेल किराणा एसो. के अध्यक्ष आत्माराम पुरसवाणी, सागर गुप्ता, दिलीप छुटलाणी, सुधीर बजाज, जयपाल साधवानी, परमानंद शर्मा, नितीन कदम, विजय पिंजाणी, किशोर मोहता, मुकेश हरवाणी, अनुप हरवाणी, तुलसी सेतीया, राजु बुलाणी, प्रदीप हरवाणी, अनुराग तरडेजा, तरूण अरोरा के साथ ही बिझीलैण्ड, सिटीलैण्ड व ड्रीम्जलैण्ड व्यापारी एसो. के पदाधिकारी भी बडी संख्या में उपस्थित थे. इस आंदोलन के दौरान अपनी बेहद संतप्त प्रतिक्रिया देते हुए महानगर यात्री संघ के अध्यक्ष अनिल तरडेजा ने कहा कि, अमरावती रेल्वे स्टेशन का कायाकल्प और यहां से रेल सुविधाओं का विस्तार अमरावती से वास्ता रखनेवाली देश की पूर्व राष्ट्रपती श्रीमती प्रतिभाताई पाटील की मेहरबानी के चलते हुआ था. जिसकी वजह से बरसों-बरस तक उपेक्षित पडा रहनेवाला अमरावती शहर देश के रेल्वे नक्शे पर दिखाई दिया. किसी भी क्षेत्र का विकास करने हेतु वहां पर आवागमन की नई-नई सुविधाएं उपलब्ध करायी जाती है. परंतू अमरावती में उलटी गंगा बहाई जा रही है. नई रेलगाडियां देना तो दूर, बल्कि जो रेलगाडियां पहले से चल रही थी, उन्हें बंद करने का कारनामा रेल महकमे द्वारा किया जा रहा है और हैरत की बात यह है कि, इसे लेकर किसी जनप्रतिनिधि द्वारा कुछ भी नहीं कहा जा रहा. ऐसे में अब आम जनता सडक पर उतरकर अपने अधिकारों की लडाई लडेगी. हम रेल महकमे से गाडियों की भीख नहीं मांग रहे, बल्कि अमरावती-जबलपुर और अमरावती-पुणे व्हाया लातूर ये दो रेलगाडियां हमारा अपना अधिकार है और हम इसे हर हाल में वापिस प्राप्त करेंगे. क्योंकि यह हमारे शहर व जिले के विकास व भविष्य से जुडा मामला है.