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संसद के मानसून सत्र की शुरुआत हो चुकी है और मंगलवार को सत्र का चौथा दिन है। मणिपुर मुद्दे को लेकर दोनों सदनों में विपक्षी सांसद लगातार हंगामा कर रहे हैं। हंगामे की वजह से सदन में कामकाज ठप पड़ा है। अब पीएम मोदी की अध्यक्षता में BJP संसदीय दल की बैठक आज, मंगलवार को होनी है। बैठक में बचे हुए मानसून सत्र की रणनीति पर चर्चा होगी। स्टोरी में आगे पढ़ेंः संसद की कार्यवाही शुरू होने से ठीक पहले सुबह 9.30 बजे संसद भवन में बीजेपी संसदीय दल की बैठक बुलाई गई है। पीएम मोदी बैठक में सत्र के बचे हुए दिनों के लिए रणनीति और सत्र के बाद जनता से संवाद को लेकर पार्टी सांसदों को दिशा-निर्देश देंगे। बैठक में दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा के बीजेपी सांसद मौजूद रहेंगे। बैठक में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ-साथ मोदी सरकार के तमाम मंत्री और सांसद शामिल होंगे। इसके साथ ही बैठक में संसद में जारी गतिरोध और विपक्षी दलों के सवालों पर पलटवार करने की जवाबी रणनीति पर भी चर्चा हो सकती है। मणिपुर मुद्दे को लेकर भी बैठक में चर्चा संभव है। यह भी पढ़ेंः राज्यसभा में आखिर जगदीप धनखड़ को क्यों बोलना पड़ा-'डेरेक आप 'चेयर' को चैलेंज कर रहे हैं' बता दें कि मानसून सत्र की शुरुआत 20 जुलाई से हुई है जो 11 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान 17 बैठकें होंगी। केंद्र सरकार मानसून सत्र में 31 बिल सदन में लाने वाली है। इनमें 21 नए बिल हैं वहीं 10 बिल पहले संसद में किसी एक सदन में पेश हो चुके हैं। उन पर चर्चा होगी। हंगामे की वजह से पिछले चार दिनों में संदन मे कामकाज ठप रहा है।
संसद के मानसून सत्र की शुरुआत हो चुकी है और मंगलवार को सत्र का चौथा दिन है। मणिपुर मुद्दे को लेकर दोनों सदनों में विपक्षी सांसद लगातार हंगामा कर रहे हैं। हंगामे की वजह से सदन में कामकाज ठप पड़ा है। अब पीएम मोदी की अध्यक्षता में BJP संसदीय दल की बैठक आज, मंगलवार को होनी है। बैठक में बचे हुए मानसून सत्र की रणनीति पर चर्चा होगी। स्टोरी में आगे पढ़ेंः संसद की कार्यवाही शुरू होने से ठीक पहले सुबह नौ.तीस बजे संसद भवन में बीजेपी संसदीय दल की बैठक बुलाई गई है। पीएम मोदी बैठक में सत्र के बचे हुए दिनों के लिए रणनीति और सत्र के बाद जनता से संवाद को लेकर पार्टी सांसदों को दिशा-निर्देश देंगे। बैठक में दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा के बीजेपी सांसद मौजूद रहेंगे। बैठक में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ-साथ मोदी सरकार के तमाम मंत्री और सांसद शामिल होंगे। इसके साथ ही बैठक में संसद में जारी गतिरोध और विपक्षी दलों के सवालों पर पलटवार करने की जवाबी रणनीति पर भी चर्चा हो सकती है। मणिपुर मुद्दे को लेकर भी बैठक में चर्चा संभव है। यह भी पढ़ेंः राज्यसभा में आखिर जगदीप धनखड़ को क्यों बोलना पड़ा-'डेरेक आप 'चेयर' को चैलेंज कर रहे हैं' बता दें कि मानसून सत्र की शुरुआत बीस जुलाई से हुई है जो ग्यारह अगस्त तक चलेगा। इस दौरान सत्रह बैठकें होंगी। केंद्र सरकार मानसून सत्र में इकतीस बिल सदन में लाने वाली है। इनमें इक्कीस नए बिल हैं वहीं दस बिल पहले संसद में किसी एक सदन में पेश हो चुके हैं। उन पर चर्चा होगी। हंगामे की वजह से पिछले चार दिनों में संदन मे कामकाज ठप रहा है।
गाजियाबाद में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहां पति ने पत्नी की हत्या करके गर्दन काट दी। इसमें आरोपी के पिता ने भी साथ दिया। इसके बाद शव को बोरे में भरकर स्कूटी से सुनसान इलाके में ले गया। गर्दन को नदी में फेंक दिया, जबकि धड़ को खेत में फेंक दिया। पुलिस और महिला के परिवार वाले को शक न हो इसके लिए पुलिस को झूठी अपहरण की कहानी सुना दी। लेकिन, पुलिस ने जांच शुरू की तो परत दर परत पति की झूठी कहानी खुलती चली गई। पुलिस ने सख्ती की तो पति टूट गया और हत्या की बात कबूल ली। गाजियाबाद में सिद्धार्थ विहार प्रतीक ग्राउंड स्थित टॉवर-सी में आकाश त्यागी रहता है। 26 साल की रिया जैन नोएडा में जॉब करती थी, जहां आकाश भी उसके साथ काम करता था। रिया उज्जैन की रहने वाली थी। दोनों में पहले दोस्ती, फिर प्यार हो गया। मार्च, 2021 में दोनों ने शादी कर ली। बताया जा रहा है कि माता-पिता चाहते थे कि बेटे की शादी में खूब दहेज मिले। इसके लिए वह अमीर घर की लड़की भी ढूंढ रहे थे। मगर, जब बेटे ने लव मैरिज कर ली, तो वे परेशान हो गए। इसके बाद रिया को दहेज लाने के लिए परेशान किया जाने लगा। अक्सर उससे मारपीट भी की जाती थी। 25 जनवरी को पति और सास-ससुर ने धारदार हथियार से गला काटकर रिया की हत्या कर दी। इतनी बेरहमी से कत्ल किया कि गर्दन को धड़ से एकदम अलग कर दिया। इसके बाद शव को एक बोरे में रखा और स्कूटी से गांव शहजादपुर के जंगल के पास गन्ने के खेत में धड़ को डाल दिया। इसके बाद गर्दन को मुरादनगर की गंगनहर में ले जाकर फेंक दिया। बाद में आकाश और उसके परिवार वाले अपने घर लौट आए। 26 जनवरी को आकाश ने यूपी-112 नंबर पर सूचना दी। उसने कहा कि कार सवार कुछ युवक उसकी पत्नी रिया जैन का अपहरण करके ले गए हैं। तर्क दिया कि रिया के भाई ने एक व्यक्ति से कुछ रुपए उधार लिए थे। इसी सिलसिले में कुछ लोग कार से आए। वे रिया को कार में डालकर ले गए और उसके भाई के बारे में पूछ रहे थे। इस पर पुलिस ने जांच करते हुए रिया के मोबाइल की लोकेशन और सीडीआर निकलवाई। पता चला कि रिया का मोबाइल आखिरी बार घर में ही बंद हुआ था। पति आकाश और अन्य परिजनों की लोकेशन दो संदिग्ध स्थानों पर पाई गई, जहां उनके जाने का कोई मतलब नहीं था। पुलिस के शक की सुई गहरा गई। कड़ाई से पूछताछ में आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। इंस्पेक्टर योगेंद्र मलिक ने बताया कि आरोपियों की निशानदेही पर धड़ को शहजादपुर गांव के खेत से बरामद कर लिया है। गर्दन की तलाश जारी है। इस मामले में मृतका के पति आकाश त्यागी, ससुर सुरेश त्यागी और सास ऊषा त्यागी को गिरफ्तार किया गया है। हत्या में प्रयुक्त हथियार बरामद कर लिया गया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
गाजियाबाद में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहां पति ने पत्नी की हत्या करके गर्दन काट दी। इसमें आरोपी के पिता ने भी साथ दिया। इसके बाद शव को बोरे में भरकर स्कूटी से सुनसान इलाके में ले गया। गर्दन को नदी में फेंक दिया, जबकि धड़ को खेत में फेंक दिया। पुलिस और महिला के परिवार वाले को शक न हो इसके लिए पुलिस को झूठी अपहरण की कहानी सुना दी। लेकिन, पुलिस ने जांच शुरू की तो परत दर परत पति की झूठी कहानी खुलती चली गई। पुलिस ने सख्ती की तो पति टूट गया और हत्या की बात कबूल ली। गाजियाबाद में सिद्धार्थ विहार प्रतीक ग्राउंड स्थित टॉवर-सी में आकाश त्यागी रहता है। छब्बीस साल की रिया जैन नोएडा में जॉब करती थी, जहां आकाश भी उसके साथ काम करता था। रिया उज्जैन की रहने वाली थी। दोनों में पहले दोस्ती, फिर प्यार हो गया। मार्च, दो हज़ार इक्कीस में दोनों ने शादी कर ली। बताया जा रहा है कि माता-पिता चाहते थे कि बेटे की शादी में खूब दहेज मिले। इसके लिए वह अमीर घर की लड़की भी ढूंढ रहे थे। मगर, जब बेटे ने लव मैरिज कर ली, तो वे परेशान हो गए। इसके बाद रिया को दहेज लाने के लिए परेशान किया जाने लगा। अक्सर उससे मारपीट भी की जाती थी। पच्चीस जनवरी को पति और सास-ससुर ने धारदार हथियार से गला काटकर रिया की हत्या कर दी। इतनी बेरहमी से कत्ल किया कि गर्दन को धड़ से एकदम अलग कर दिया। इसके बाद शव को एक बोरे में रखा और स्कूटी से गांव शहजादपुर के जंगल के पास गन्ने के खेत में धड़ को डाल दिया। इसके बाद गर्दन को मुरादनगर की गंगनहर में ले जाकर फेंक दिया। बाद में आकाश और उसके परिवार वाले अपने घर लौट आए। छब्बीस जनवरी को आकाश ने यूपी-एक सौ बारह नंबर पर सूचना दी। उसने कहा कि कार सवार कुछ युवक उसकी पत्नी रिया जैन का अपहरण करके ले गए हैं। तर्क दिया कि रिया के भाई ने एक व्यक्ति से कुछ रुपए उधार लिए थे। इसी सिलसिले में कुछ लोग कार से आए। वे रिया को कार में डालकर ले गए और उसके भाई के बारे में पूछ रहे थे। इस पर पुलिस ने जांच करते हुए रिया के मोबाइल की लोकेशन और सीडीआर निकलवाई। पता चला कि रिया का मोबाइल आखिरी बार घर में ही बंद हुआ था। पति आकाश और अन्य परिजनों की लोकेशन दो संदिग्ध स्थानों पर पाई गई, जहां उनके जाने का कोई मतलब नहीं था। पुलिस के शक की सुई गहरा गई। कड़ाई से पूछताछ में आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। इंस्पेक्टर योगेंद्र मलिक ने बताया कि आरोपियों की निशानदेही पर धड़ को शहजादपुर गांव के खेत से बरामद कर लिया है। गर्दन की तलाश जारी है। इस मामले में मृतका के पति आकाश त्यागी, ससुर सुरेश त्यागी और सास ऊषा त्यागी को गिरफ्तार किया गया है। हत्या में प्रयुक्त हथियार बरामद कर लिया गया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
मुंबईः नई दिल्लीः बॉलीवुड की खूबसूरत एक्ट्रेस कटरीना कैफ (Katrina Kaif) इन दिनों अपने परिवार के साथ नए साल की छट्टियां मना रही हैं। इंग्लैंड में कटरीना ने नए साल का जश्न मनाया। नए साल के मौके पर कटरीना ने अपनी बहनों के साथ समंदर में डुबकी लगाई। इसका वीडियो भी कटरीना ने इंस्टाग्राम पर शेयर किया है। कटरीना का ये वीडियो खूब वायरल हो रहा है। कटरीना ने जो वीडियो शेयर किया है उसमें वो इंग्लिश चैनल (English Channel) में जीरो डिग्री टेम्परेचर में डुबकी लगाती हुई नजर आ रही हैं। कैटरीना कैफ 7 भाई बहन हैं, जिसमें 6 बहने और एक भाई है। कटरीना कैफ (Katrina Kaif) बॉलीवुड की पॉपुलर एक्ट्रेसेस में से एक हैं। खबरों के मुताबिक कटरीना की बहन इसाबेल कैफ (Isabell Kaif) भी बॉलीवुड में सूरज पंजोली के साथ अगले साल डेब्यू करने वाली हैं। बात करें, कटरीना की तो हाल ही में वो शाहरुख खान (Shah Rukh Khan) के साथ फिल्म जीरो (Zero) में नजर आई थीं, इस फिल्म में अनुष्का शर्मा (Anushka Sharma) भी लीड रोल में थीं। कटरीना कैफ सलमान के साथ फिल्म 'भारत' में नजर आने वाली हैं। बॉलीवुड की अन्य खबरों के लिए क्लिक करें। Also Read:
मुंबईः नई दिल्लीः बॉलीवुड की खूबसूरत एक्ट्रेस कटरीना कैफ इन दिनों अपने परिवार के साथ नए साल की छट्टियां मना रही हैं। इंग्लैंड में कटरीना ने नए साल का जश्न मनाया। नए साल के मौके पर कटरीना ने अपनी बहनों के साथ समंदर में डुबकी लगाई। इसका वीडियो भी कटरीना ने इंस्टाग्राम पर शेयर किया है। कटरीना का ये वीडियो खूब वायरल हो रहा है। कटरीना ने जो वीडियो शेयर किया है उसमें वो इंग्लिश चैनल में जीरो डिग्री टेम्परेचर में डुबकी लगाती हुई नजर आ रही हैं। कैटरीना कैफ सात भाई बहन हैं, जिसमें छः बहने और एक भाई है। कटरीना कैफ बॉलीवुड की पॉपुलर एक्ट्रेसेस में से एक हैं। खबरों के मुताबिक कटरीना की बहन इसाबेल कैफ भी बॉलीवुड में सूरज पंजोली के साथ अगले साल डेब्यू करने वाली हैं। बात करें, कटरीना की तो हाल ही में वो शाहरुख खान के साथ फिल्म जीरो में नजर आई थीं, इस फिल्म में अनुष्का शर्मा भी लीड रोल में थीं। कटरीना कैफ सलमान के साथ फिल्म 'भारत' में नजर आने वाली हैं। बॉलीवुड की अन्य खबरों के लिए क्लिक करें। Also Read:
राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मामले पर गुरुवार को अपने बयान में कहा था कि, नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ पूरे देश में जो माहौल बना हुआ है, उससे ध्यान हटाने के लिए इस मुद्दे को उठाया जा रहा है। नई दिल्ली। राजस्थान के कोटा जिले में जेके लोन अस्पताल में बच्चों के मरने का सिलसिला जारी है। इसको लेकर राज्य की कांग्रेस सरकार की काफी आलोचना भी हो रही है। बता दें कि कोटा में मरने वाले बच्चों का आंकड़ा 100 के पार जा चुका है। बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने अशोक गहलोत को आईना दिखाते हुए उनकी आलोचना की है। बता दें कि राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मामले पर गुरुवार को अपने बयान में कहा था कि, "नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ पूरे देश में जो माहौल बना हुआ है, उससे ध्यान हटाने के लिए इस मुद्दे को उठाया जा रहा है। मैं पहले ही कह चुका हूं कि इस साल शिशुओं की मौत के आंकड़ों में पिछले कुछ सालों की तुलना में काफी कमी आई है। " उनके इसी बयान पर मायावती ने पलटवार किया है। 2. ऐसे में कांग्रेस का लगभग 100 माओं की कोख उजड़ जाने पर केवल अपनी नाराजगी जताने से काम नहीं चलेगा बल्कि इनको तुरन्त बर्खास्त करके वहाँ अपने सही व्यक्ति को सत्ता में बैठाना चाहिये। तो यह बेहतर होगा। वरना वहाँ और भी माओं की कोख उजड़ सकती है।
राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मामले पर गुरुवार को अपने बयान में कहा था कि, नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ पूरे देश में जो माहौल बना हुआ है, उससे ध्यान हटाने के लिए इस मुद्दे को उठाया जा रहा है। नई दिल्ली। राजस्थान के कोटा जिले में जेके लोन अस्पताल में बच्चों के मरने का सिलसिला जारी है। इसको लेकर राज्य की कांग्रेस सरकार की काफी आलोचना भी हो रही है। बता दें कि कोटा में मरने वाले बच्चों का आंकड़ा एक सौ के पार जा चुका है। बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने अशोक गहलोत को आईना दिखाते हुए उनकी आलोचना की है। बता दें कि राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मामले पर गुरुवार को अपने बयान में कहा था कि, "नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ पूरे देश में जो माहौल बना हुआ है, उससे ध्यान हटाने के लिए इस मुद्दे को उठाया जा रहा है। मैं पहले ही कह चुका हूं कि इस साल शिशुओं की मौत के आंकड़ों में पिछले कुछ सालों की तुलना में काफी कमी आई है। " उनके इसी बयान पर मायावती ने पलटवार किया है। दो. ऐसे में कांग्रेस का लगभग एक सौ माओं की कोख उजड़ जाने पर केवल अपनी नाराजगी जताने से काम नहीं चलेगा बल्कि इनको तुरन्त बर्खास्त करके वहाँ अपने सही व्यक्ति को सत्ता में बैठाना चाहिये। तो यह बेहतर होगा। वरना वहाँ और भी माओं की कोख उजड़ सकती है।
पंजाब नैशनल बैंक धोखाधड़ी मामले में सीबीआई ने मंगलवार को गीतांजलि समूह के उपाध्यक्ष विपुल चितालीया को हिरासत में ले लिया है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि चितालीया को मुंबई हवाई अड्डे पर पकड़ा गया है। पंजाब नेशनल बैंक के साथ हीरा कारोबारी नीरव मोदी की 11,400 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के बाद पीएनबीने स्टॉक एक्सचेंजों को स्पष्टीकरण जारी किया है। अब सभी के सामने सवाल यही है कि इतना बड़ा घोटाला या फर्जीवाड़ा हुआ कैसे। आइए इंडिया टीवी पैसा की टीम आपको बताती है कि यह पीएनबी घोटाला क्या है और कैसे शातिर दिमागों की टोली ने इसे अंजाम दिया। रिलायंस जियो इंफोकॉम लिमिटेड ने एक नया सबमरीन केबल सिस्टम, एशिया-अफ्रीका-यूरोप (AAE-1) लॉन्च किया है, जो फ्रांस से हांगकांग तक 25,000 किलोमीटर लंबा है। ग्लोबल पावर्स ऑफ लग्जरी गुड्स रिपोर्ट में दुनिया के 50 शीर्ष लग्जरी ब्रांड में भारत से गीतांजलि जेम्स, टाइटन व पीसी जूलर्स को शामिल किया गया है।
पंजाब नैशनल बैंक धोखाधड़ी मामले में सीबीआई ने मंगलवार को गीतांजलि समूह के उपाध्यक्ष विपुल चितालीया को हिरासत में ले लिया है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि चितालीया को मुंबई हवाई अड्डे पर पकड़ा गया है। पंजाब नेशनल बैंक के साथ हीरा कारोबारी नीरव मोदी की ग्यारह,चार सौ करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के बाद पीएनबीने स्टॉक एक्सचेंजों को स्पष्टीकरण जारी किया है। अब सभी के सामने सवाल यही है कि इतना बड़ा घोटाला या फर्जीवाड़ा हुआ कैसे। आइए इंडिया टीवी पैसा की टीम आपको बताती है कि यह पीएनबी घोटाला क्या है और कैसे शातिर दिमागों की टोली ने इसे अंजाम दिया। रिलायंस जियो इंफोकॉम लिमिटेड ने एक नया सबमरीन केबल सिस्टम, एशिया-अफ्रीका-यूरोप लॉन्च किया है, जो फ्रांस से हांगकांग तक पच्चीस,शून्य किलोग्राममीटर लंबा है। ग्लोबल पावर्स ऑफ लग्जरी गुड्स रिपोर्ट में दुनिया के पचास शीर्ष लग्जरी ब्रांड में भारत से गीतांजलि जेम्स, टाइटन व पीसी जूलर्स को शामिल किया गया है।
एशिया कप 2022 की शुरुआत होने में चंद ही घंटे बचे हैं। पहला मैच 27 अगस्त को श्रीलंका और अफगानिस्तान के बीच खेला जाएगा। दूसरे दिन 18 अगस्त को भारत और पाकिस्तान के बीच भिड़ंत होगी। वहीं इस मुकाबले से पहले भारतीय टीम के खिलाड़ी जी तोड़ मेहनत करते हुए नजर आ रहे हैं। इस दौरान टीम के बल्लेबाज Rishabh Pant नेट्स प्रैक्टिस में छक्के-चौके के साथ-साथ बल्ला हवा में उड़ाकर शॉट जड़ते हुए नजर आए। इससे जुड़ा एक वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहे है। दरअसल, पाक टीवी ने अपने यूट्यूब चैनल पर ऋषभ पंत के नेट्स प्रैक्टिस सेशन का एक वीडियो शेयर किया है। वीडियो में पंत (Rishabh Pant) भी टीम के अन्य खिलाड़ियों की तरह ही जमकर मेहनत करते हुए नजर आ रहे हैं। अअपनी बल्लेबाजी के दौरान इस विकेटकीपर-बल्लेबाज ने न सिर्फ ढेर सारे छक्के और चौके मारे, बल्कि अपने बल्ले को भी हवा की सैर करवा दी। हुआ कुछ यूं कि पंत और राहुल यॉर्कर के खिलाफ बड़े-बड़े शॉट्स जड़ते हुए नजर आए। इस दौरान पंत ने बिश्नोई की एक गेंद पर बड़ा शॉट लगाने की कोशिश की, लेकिन गेंद को हिट करने के बजाय उन्होंने अपने बल्ले को हवा में उड़ा दिया। उनके इस उड़न-बल्ले की वीडियो कैमरे में कैद हो गई और फिर सोशल मीडिया पर छा गई। पाक टीवी के अलावा भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने भी अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक वीडियो शेयर किया था। जिसमें जडेजा और पंत छक्के जड़ने का अभ्यास कर रहे हैं। दोनो ही बल्लेबाजों ने अभ्यास के दौरान जमकर छक्के जड़े। इस दौरान पंत एक हाथ से छक्का मारने की प्रैक्टिस भी करते दिखे। दूसरी ओर, जडेजा ने गगनचुंबी छक्का मारकर पूर्व कप्तान एमएस को याद दिलाया। यानी ये दोनों बल्लेबाज पाकिस्तान के खिलाफ कहर ढाने के इरादे से ही मैदान पर उतरेंगे।
एशिया कप दो हज़ार बाईस की शुरुआत होने में चंद ही घंटे बचे हैं। पहला मैच सत्ताईस अगस्त को श्रीलंका और अफगानिस्तान के बीच खेला जाएगा। दूसरे दिन अट्ठारह अगस्त को भारत और पाकिस्तान के बीच भिड़ंत होगी। वहीं इस मुकाबले से पहले भारतीय टीम के खिलाड़ी जी तोड़ मेहनत करते हुए नजर आ रहे हैं। इस दौरान टीम के बल्लेबाज Rishabh Pant नेट्स प्रैक्टिस में छक्के-चौके के साथ-साथ बल्ला हवा में उड़ाकर शॉट जड़ते हुए नजर आए। इससे जुड़ा एक वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहे है। दरअसल, पाक टीवी ने अपने यूट्यूब चैनल पर ऋषभ पंत के नेट्स प्रैक्टिस सेशन का एक वीडियो शेयर किया है। वीडियो में पंत भी टीम के अन्य खिलाड़ियों की तरह ही जमकर मेहनत करते हुए नजर आ रहे हैं। अअपनी बल्लेबाजी के दौरान इस विकेटकीपर-बल्लेबाज ने न सिर्फ ढेर सारे छक्के और चौके मारे, बल्कि अपने बल्ले को भी हवा की सैर करवा दी। हुआ कुछ यूं कि पंत और राहुल यॉर्कर के खिलाफ बड़े-बड़े शॉट्स जड़ते हुए नजर आए। इस दौरान पंत ने बिश्नोई की एक गेंद पर बड़ा शॉट लगाने की कोशिश की, लेकिन गेंद को हिट करने के बजाय उन्होंने अपने बल्ले को हवा में उड़ा दिया। उनके इस उड़न-बल्ले की वीडियो कैमरे में कैद हो गई और फिर सोशल मीडिया पर छा गई। पाक टीवी के अलावा भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने भी अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक वीडियो शेयर किया था। जिसमें जडेजा और पंत छक्के जड़ने का अभ्यास कर रहे हैं। दोनो ही बल्लेबाजों ने अभ्यास के दौरान जमकर छक्के जड़े। इस दौरान पंत एक हाथ से छक्का मारने की प्रैक्टिस भी करते दिखे। दूसरी ओर, जडेजा ने गगनचुंबी छक्का मारकर पूर्व कप्तान एमएस को याद दिलाया। यानी ये दोनों बल्लेबाज पाकिस्तान के खिलाफ कहर ढाने के इरादे से ही मैदान पर उतरेंगे।
LPG Price Hike: पिछले एक साल में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में राजधानी दिल्ली में 200 रुपये प्रति सिलेंडर से ज्यादा बढ़ोतरी देखने को मिल चुकी है। ये एक साल में इसकी कीमत 834. 50 रुपये से बढ़कर 1053 रुपये पर आ चुकी है। इस तरह से देखा जाए तो इसकी कीमत में 200 रुपये से भी ज्यादा की बढ़ोतरी सिलेंडर के दाम में आ चुकी है। LPG Cylinder Price Hike: कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के साथ ही हवाई ईंधन की कीमतों में भी इजाफा हुआ है। 1 अप्रैल को जेट फ्यूल यानी एटीएफ के दाम 2 फीसदी से बढ़ाकर 1,12,925 किलोलीटर हो गई है जो कि पहले 1,10, 666 रुपये किलोलीटर पर थी। ये नई दरें 15 अप्रैल 2022 को लागू होंगी। उल्लेखनीय है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए मंगलवार को हुई मतगणना में आम आदमी पार्टी आप ने भारी जीत दर्ज की है। आप ने 70 सदस्यीय विधानसभा में 62 सीटें जीती है, जबकि भाजपा महज आठ सीटें जीत पाई है।
LPG Price Hike: पिछले एक साल में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में राजधानी दिल्ली में दो सौ रुपयापये प्रति सिलेंडर से ज्यादा बढ़ोतरी देखने को मिल चुकी है। ये एक साल में इसकी कीमत आठ सौ चौंतीस. पचास रुपयापये से बढ़कर एक हज़ार तिरेपन रुपयापये पर आ चुकी है। इस तरह से देखा जाए तो इसकी कीमत में दो सौ रुपयापये से भी ज्यादा की बढ़ोतरी सिलेंडर के दाम में आ चुकी है। LPG Cylinder Price Hike: कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के साथ ही हवाई ईंधन की कीमतों में भी इजाफा हुआ है। एक अप्रैल को जेट फ्यूल यानी एटीएफ के दाम दो फीसदी से बढ़ाकर एक,बारह,नौ सौ पच्चीस किलोग्रामलीटर हो गई है जो कि पहले एक,दस, छः सौ छयासठ रुपयापये किलोलीटर पर थी। ये नई दरें पंद्रह अप्रैल दो हज़ार बाईस को लागू होंगी। उल्लेखनीय है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए मंगलवार को हुई मतगणना में आम आदमी पार्टी आप ने भारी जीत दर्ज की है। आप ने सत्तर सदस्यीय विधानसभा में बासठ सीटें जीती है, जबकि भाजपा महज आठ सीटें जीत पाई है।
देवी तंत्र ब्रह्माण्ड की समस्त सिद्धियों की स्वामिनी श्रो ललिताम्बा सिद्धि महायोगी सिद्ध त्रिजटा अघोरी के नाम से पूरा भारतवर्ष परिचित है, उनकी साधनाओं में नित्य नये प्रयोग होते रहते हैं और प्राचीन हस्तलिखित ग्रन्थों का उनके पास अपूर्व खजाना है, जो कि अपने आप में सिद्ध और तुरन्त प्रभाव उत्पन्न करने वाले मन्त्र, तन्त्र और साधनाएं हैं। ललिताम्बा साधना सिद्ध करने को भावना थी क्योंकि यह एक गोपनीय साधना है और अभी तक प्रकाश में नहीं आ सकी, यद्यपि कई तन्त्र ग्रन्थों में इस साधना की विवेचना की गई है और बताया गया है कि यह संसार की अद्वितीय साषना है । नीचे मैं विभिन्न प्रत्थों में इस साधना के बारे में जो कुछ लिखा गया है, उसे स्पष्ट कर रहा हूं १- " गोरक्ष संहिता" में बताया गया है कि ललिताम्बा साधना गोपनीय, महागोपनीय है, इस साधना को भूल करके भी अपने पुत्र या शिष्य को भी नहीं देना चाहिए । २- " शंकरभाष्य" में कहा गया है कि ललिताम्बा सिद्ध करने के बाद साधक पूरे संसार में विजयी होता है और ललिताम्बा यन्त्र धारण करने के बाद वह जिस व्यक्ति से मिलता है, उस पर अपना प्रभाव डाल देता है और विजय प्राप्त करता है । ३-" तम्त्रसार " में बताया गया है कि सौभाग्यशाली साधक ही ललिताम्बा यन्त्र को प्राप्त कर सकते हैं, इसे सिद्ध करने पर उसके शत्रु स्वतः समाप्त हो जाते हैं, और जीवन में उसे किसी प्रकार का कोई भय नहीं रहता । १८ : मन्त्र-तन्त्र-यन्त्र विज्ञान ४-" रसतन्त्र में बताया है कि ललिताम्बा साधना कायाकल्प साधना है, इसके मन्त्र जप से नपुंसक व्यक्ति भी पूर्ण यौवनमय एवं कामदेव के समान सुन्दर बन जाता है, यह बुढ़ापे को समाप्त कर पुनः यौवन प्रदान करने में समर्थ है । ५ - " मन्त्र विज्ञान " ग्रन्थ में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि एक तो ललिताम्बा यन्त्र और • उससे सम्बन्धित मन्त्र गोपनीय और सर्वथा दुर्लभ है, पर यदि किसी को यह प्राप्त हो जाय तो उसे शून्य सिद्धि स्वतः प्राप्त हो जाती है, और साधना सिद्ध होने पर वह वायु में से कोई भी पदार्थ प्राप्त करने में सफल हो जाता है । ६-" विश्वामित्र संहिना में ललिताम्बा साधना की प्रशंसा करते हुए बताया गया है कि गुरु अपनी तेजस्विता से इस यन्त्र को सिद्ध कर अपने शिष्य को प्रदान करें, और जब शिष्य ऐसा यन्त्र धारण कर साधना सम्पन्न करता है तो साधक का तीसरा नेत्र खुल जाता है, और वह एक क्षण में किसी को भी भस्म करने की क्षमता प्राप्त कर लेता है । ७-" व्यास समुच्चय ग्रन्थ में बताया गया है कि हजार काम छोड़ कर के भी साधक को ललिताम्बा साधना सम्पन्न करनी चाहिए, क्योंकि अन्य साधनाएं तो फिर भी प्राप्त हो सकती हैं पर यह साधना तो कई-कई जन्मों के पुण्यों से ही प्राप्त हो सकती है । इसके अलावा भी सैकड़ों ग्रन्थों में ललिताम्बा साधना के बारे में विवरण वर्णन मिलता है और सर्वत्र इसकी प्रशंसा ही की गई है, परन्तु किसी भी ग्रन्थ में इस साधना से सम्बन्धित विधि, ललिताम्बा यन्त्र निर्माण के बारे में कोई प्रामाणिक विधि प्राप्त नहीं हो पाती । ऐसी स्थिति में यह हमारा और हमारी पीढ़ी का सौभाग्य है कि त्रिजटा अघोरी जैसे महायोगी ने इस साधना रहस्य को ढूंढ निकाला, यन्त्र निर्माण करने और इसे सिद्ध करने की प्रक्रिया स्पष्ट की, औौर ललिताम्बा मन्त्र को प्रामाणिकता के साथ स्पष्ट किया । वास्तव में ही यह साधना दिव्य साधना है, एक तरफ जहां ललिताम्बा सिद्ध होने पर धन-धान्य की निरन्तर वर्षा होती रहती है, जीवन में किसी प्रकार का कोई प्रभाव नहीं रहता, वहीं दूसरी ओर उसके शत्रु स्वतः समाप्त होते रहते हैं, और वह त्रिकालदर्शी बन जाता है, किसी के भूत भविष्य को जान लेना उसके लिए कठिन नहीं होता, ललिताम्बा की कृपा से उसका तीसरा नेत्र खुल जाता है और उसमें श्राप देने को और वरदान देने की प्रभुत क्षमता प्रा जाती है । साधना विधि यह साधना केवल तीन दिनों की है और रात्रिकालीन साधना है, साधक अपने स्थान को जल से धो ले फिर पीला ग्रासन बिछा ले और पीली धोती पहिन कर उत्तर की श्रोर मुंह कर बैठ जाय, सामने 'ललिताम्बा महायन्त्र को स्थापित कर दे, जो पूर्णतः चैतन्य मन्त्र सिद्ध एवं प्राण प्रतिष्ठा युक्त हो । इसके बाद अगरबत्ती व दीपक लगा कर "हकीकसे निम्न मन्त्र का २१ बार उच्चारण करे, इस प्रकार नित्य इस महायन्त्र के २१ पाठ करे और तीन दिन तक करे, तीसरे दिन मन्त्र जप सम्पन्न होने के बाद उस यन्त्र को धागे में पिरोकर गले में धारण कर ले या बांह पर बांध ले, ऐसा होने पर उस साधक को यह साधना सिद्ध हो जाती है ।
देवी तंत्र ब्रह्माण्ड की समस्त सिद्धियों की स्वामिनी श्रो ललिताम्बा सिद्धि महायोगी सिद्ध त्रिजटा अघोरी के नाम से पूरा भारतवर्ष परिचित है, उनकी साधनाओं में नित्य नये प्रयोग होते रहते हैं और प्राचीन हस्तलिखित ग्रन्थों का उनके पास अपूर्व खजाना है, जो कि अपने आप में सिद्ध और तुरन्त प्रभाव उत्पन्न करने वाले मन्त्र, तन्त्र और साधनाएं हैं। ललिताम्बा साधना सिद्ध करने को भावना थी क्योंकि यह एक गोपनीय साधना है और अभी तक प्रकाश में नहीं आ सकी, यद्यपि कई तन्त्र ग्रन्थों में इस साधना की विवेचना की गई है और बताया गया है कि यह संसार की अद्वितीय साषना है । नीचे मैं विभिन्न प्रत्थों में इस साधना के बारे में जो कुछ लिखा गया है, उसे स्पष्ट कर रहा हूं एक- " गोरक्ष संहिता" में बताया गया है कि ललिताम्बा साधना गोपनीय, महागोपनीय है, इस साधना को भूल करके भी अपने पुत्र या शिष्य को भी नहीं देना चाहिए । दो- " शंकरभाष्य" में कहा गया है कि ललिताम्बा सिद्ध करने के बाद साधक पूरे संसार में विजयी होता है और ललिताम्बा यन्त्र धारण करने के बाद वह जिस व्यक्ति से मिलता है, उस पर अपना प्रभाव डाल देता है और विजय प्राप्त करता है । तीन-" तम्त्रसार " में बताया गया है कि सौभाग्यशाली साधक ही ललिताम्बा यन्त्र को प्राप्त कर सकते हैं, इसे सिद्ध करने पर उसके शत्रु स्वतः समाप्त हो जाते हैं, और जीवन में उसे किसी प्रकार का कोई भय नहीं रहता । अट्ठारह : मन्त्र-तन्त्र-यन्त्र विज्ञान चार-" रसतन्त्र में बताया है कि ललिताम्बा साधना कायाकल्प साधना है, इसके मन्त्र जप से नपुंसक व्यक्ति भी पूर्ण यौवनमय एवं कामदेव के समान सुन्दर बन जाता है, यह बुढ़ापे को समाप्त कर पुनः यौवन प्रदान करने में समर्थ है । पाँच - " मन्त्र विज्ञान " ग्रन्थ में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि एक तो ललिताम्बा यन्त्र और • उससे सम्बन्धित मन्त्र गोपनीय और सर्वथा दुर्लभ है, पर यदि किसी को यह प्राप्त हो जाय तो उसे शून्य सिद्धि स्वतः प्राप्त हो जाती है, और साधना सिद्ध होने पर वह वायु में से कोई भी पदार्थ प्राप्त करने में सफल हो जाता है । छः-" विश्वामित्र संहिना में ललिताम्बा साधना की प्रशंसा करते हुए बताया गया है कि गुरु अपनी तेजस्विता से इस यन्त्र को सिद्ध कर अपने शिष्य को प्रदान करें, और जब शिष्य ऐसा यन्त्र धारण कर साधना सम्पन्न करता है तो साधक का तीसरा नेत्र खुल जाता है, और वह एक क्षण में किसी को भी भस्म करने की क्षमता प्राप्त कर लेता है । सात-" व्यास समुच्चय ग्रन्थ में बताया गया है कि हजार काम छोड़ कर के भी साधक को ललिताम्बा साधना सम्पन्न करनी चाहिए, क्योंकि अन्य साधनाएं तो फिर भी प्राप्त हो सकती हैं पर यह साधना तो कई-कई जन्मों के पुण्यों से ही प्राप्त हो सकती है । इसके अलावा भी सैकड़ों ग्रन्थों में ललिताम्बा साधना के बारे में विवरण वर्णन मिलता है और सर्वत्र इसकी प्रशंसा ही की गई है, परन्तु किसी भी ग्रन्थ में इस साधना से सम्बन्धित विधि, ललिताम्बा यन्त्र निर्माण के बारे में कोई प्रामाणिक विधि प्राप्त नहीं हो पाती । ऐसी स्थिति में यह हमारा और हमारी पीढ़ी का सौभाग्य है कि त्रिजटा अघोरी जैसे महायोगी ने इस साधना रहस्य को ढूंढ निकाला, यन्त्र निर्माण करने और इसे सिद्ध करने की प्रक्रिया स्पष्ट की, औौर ललिताम्बा मन्त्र को प्रामाणिकता के साथ स्पष्ट किया । वास्तव में ही यह साधना दिव्य साधना है, एक तरफ जहां ललिताम्बा सिद्ध होने पर धन-धान्य की निरन्तर वर्षा होती रहती है, जीवन में किसी प्रकार का कोई प्रभाव नहीं रहता, वहीं दूसरी ओर उसके शत्रु स्वतः समाप्त होते रहते हैं, और वह त्रिकालदर्शी बन जाता है, किसी के भूत भविष्य को जान लेना उसके लिए कठिन नहीं होता, ललिताम्बा की कृपा से उसका तीसरा नेत्र खुल जाता है और उसमें श्राप देने को और वरदान देने की प्रभुत क्षमता प्रा जाती है । साधना विधि यह साधना केवल तीन दिनों की है और रात्रिकालीन साधना है, साधक अपने स्थान को जल से धो ले फिर पीला ग्रासन बिछा ले और पीली धोती पहिन कर उत्तर की श्रोर मुंह कर बैठ जाय, सामने 'ललिताम्बा महायन्त्र को स्थापित कर दे, जो पूर्णतः चैतन्य मन्त्र सिद्ध एवं प्राण प्रतिष्ठा युक्त हो । इसके बाद अगरबत्ती व दीपक लगा कर "हकीकसे निम्न मन्त्र का इक्कीस बार उच्चारण करे, इस प्रकार नित्य इस महायन्त्र के इक्कीस पाठ करे और तीन दिन तक करे, तीसरे दिन मन्त्र जप सम्पन्न होने के बाद उस यन्त्र को धागे में पिरोकर गले में धारण कर ले या बांह पर बांध ले, ऐसा होने पर उस साधक को यह साधना सिद्ध हो जाती है ।
अर्थ - अन्तर करनेके बाद प्रथमसमय में सातकरणोंका एककालमें आरंभ होता है । वहां पहले अन्तरकरनेकी समाप्तितक मोहका दारुलतासमान दोस्थानगतबंध और उदय था वह अब लतासमान एकस्थानगत बन्ध उदय होनेलगा। ऐसे दो करण हुए। पहले मोहका स्थितिबन्ध असंख्यातवर्पका होता था अव संख्यातवर्षका ही होने लगा, पहले चारित्रमोहका परस्पर प्रकृतियोंका जिस तिस जगह संक्रमण होता था अव आनुपूर्वी संकमण होने लगा, पहले संज्वलन लोभका संज्वलन क्रोधादि में संक्रमण होता था अब इसका कही भी संक्रमण नहीं होता, अब नपुंसकवेदकी उपशमक्रियाका प्रारंभ हुआ, पहले बन्ध होनेके बाद एक आवलिकाल वीतजानेपर उदीरणा करनेकी सामर्थ्य थी अब जिसका बंध होता है उसकी बंधसमयसे छह आवलि वीत जानेपर उदीरणा करनेकी सामर्थ्य होती है ॥ २४६ । २४७ ॥ अंतरपढमा कमे एकेक सत्त चदुसु तिय पयडिं । सममुच सामदि णवर्क समऊणावलिदुगं वजं ॥ २४८ ॥ अंतरप्रथमात् क्रमेण एकैकं सप्त चतुर्पु त्रयं प्रकृतिं । समुच्य शमयति नवकं समयोनावलिद्विकं वर्ज्यम् ।। २४८ ।। अर्थ -- अन्तरकरनेके वाद प्रथमसमयसे लेकर क्रमसे एक एक अन्तर्मुहूर्तकालकर तो एक एक सात प्रकृतियोंको और चार अन्तर्मुहूर्तमें क्रमसे तीन तीन तीन तीन प्रकृतियोंको उपशमाता है । वहां समयकम दो आवलिमात्र नवक समयप्रबद्धको नही उपशमाता ॥ २४८ ॥ एय गउंसयवेद इत्थीवेदं तहेव एवं च । सत्तेव णोकसाया कोहादितियं तु पयडीओ ॥ २४९ ।। एकं नपुंसकवेदं स्त्रीवेदं तथैव एकं च । सप्तैव नोकपायाः क्रोधादित्रयं तु प्रकृतयः ॥ २४९ ॥ अर्थ- एक नपुंसकवेद एक स्त्रीवेद उसीतरह सात नोकपाय और तीन क्रोध तीन मान तीन माया तीन लोभ ऐसे क्रमसे उपशम होनेपर इक्कीस प्रकृतियां है ॥ २४९ ॥ अंतरकदपढमादो पडिसमयमसंखगुणविहाणकमे । णुवसामेदि हु संड उवसंतं जाण णव अण्णं ॥ २५० ॥ अंतरकृतप्रथमतः प्रतिसमयमसंख्यगुणविधानक्रमे- । णोपशाम्यति हि पंढं उपशांतं जानीहि नवान्यम् ॥ २५० ॥ अर्थ - अन्तरकरने वाद प्रथमसमयसे लेकर समय २ प्रति नपुंसक वेदका उपशम
अर्थ - अन्तर करनेके बाद प्रथमसमय में सातकरणोंका एककालमें आरंभ होता है । वहां पहले अन्तरकरनेकी समाप्तितक मोहका दारुलतासमान दोस्थानगतबंध और उदय था वह अब लतासमान एकस्थानगत बन्ध उदय होनेलगा। ऐसे दो करण हुए। पहले मोहका स्थितिबन्ध असंख्यातवर्पका होता था अव संख्यातवर्षका ही होने लगा, पहले चारित्रमोहका परस्पर प्रकृतियोंका जिस तिस जगह संक्रमण होता था अव आनुपूर्वी संकमण होने लगा, पहले संज्वलन लोभका संज्वलन क्रोधादि में संक्रमण होता था अब इसका कही भी संक्रमण नहीं होता, अब नपुंसकवेदकी उपशमक्रियाका प्रारंभ हुआ, पहले बन्ध होनेके बाद एक आवलिकाल वीतजानेपर उदीरणा करनेकी सामर्थ्य थी अब जिसका बंध होता है उसकी बंधसमयसे छह आवलि वीत जानेपर उदीरणा करनेकी सामर्थ्य होती है ॥ दो सौ छियालीस । दो सौ सैंतालीस ॥ अंतरपढमा कमे एकेक सत्त चदुसु तिय पयडिं । सममुच सामदि णवर्क समऊणावलिदुगं वजं ॥ दो सौ अड़तालीस ॥ अंतरप्रथमात् क्रमेण एकैकं सप्त चतुर्पु त्रयं प्रकृतिं । समुच्य शमयति नवकं समयोनावलिद्विकं वर्ज्यम् ।। दो सौ अड़तालीस ।। अर्थ -- अन्तरकरनेके वाद प्रथमसमयसे लेकर क्रमसे एक एक अन्तर्मुहूर्तकालकर तो एक एक सात प्रकृतियोंको और चार अन्तर्मुहूर्तमें क्रमसे तीन तीन तीन तीन प्रकृतियोंको उपशमाता है । वहां समयकम दो आवलिमात्र नवक समयप्रबद्धको नही उपशमाता ॥ दो सौ अड़तालीस ॥ एय गउंसयवेद इत्थीवेदं तहेव एवं च । सत्तेव णोकसाया कोहादितियं तु पयडीओ ॥ दो सौ उनचास ।। एकं नपुंसकवेदं स्त्रीवेदं तथैव एकं च । सप्तैव नोकपायाः क्रोधादित्रयं तु प्रकृतयः ॥ दो सौ उनचास ॥ अर्थ- एक नपुंसकवेद एक स्त्रीवेद उसीतरह सात नोकपाय और तीन क्रोध तीन मान तीन माया तीन लोभ ऐसे क्रमसे उपशम होनेपर इक्कीस प्रकृतियां है ॥ दो सौ उनचास ॥ अंतरकदपढमादो पडिसमयमसंखगुणविहाणकमे । णुवसामेदि हु संड उवसंतं जाण णव अण्णं ॥ दो सौ पचास ॥ अंतरकृतप्रथमतः प्रतिसमयमसंख्यगुणविधानक्रमे- । णोपशाम्यति हि पंढं उपशांतं जानीहि नवान्यम् ॥ दो सौ पचास ॥ अर्थ - अन्तरकरने वाद प्रथमसमयसे लेकर समय दो प्रति नपुंसक वेदका उपशम
- फ़िल्टर करें : प्रश्न : उत्तर : हल करने का दृष्टिकोण : - इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के उपयोग के महत्त्व और संभावनाओं को लिखने के साथ उत्तर शुरू कीजिये। - इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने से जुड़ी चुनौतियों की चर्चा कीजिये। - उपयुक्त निष्कर्ष लिखिये। इलेक्ट्रिक वाहन आंतरिक दहन इंजन के बजाय इलेक्ट्रिक मोटर से संचालित होते हैं और इनमें ईंधन टैंक के बजाय बैटरी लगी होती है। सामान्य तौर पर, इलेक्ट्रिक वाहनों की परिचालन लागत कम होती है, क्योंकि इनकी संचालन प्रक्रिया सरल होती है और ये पर्यावरण के लिये भी अनुकूल होते हैं। भारत में, इलेक्ट्रिक वाहन के लिये ईंधन की लागत लगभग 80 पैसे प्रति किलोमीटर है। इसकी तुलना में, आज भारतीय शहरों में 100 रुपए प्रति लीटर से अधिक के पेट्रोल मूल्य के साथ पेट्रोल-संचालित वाहनों पर 7-8 रुपए प्रति किलोमीटर का खर्च आता है। - निजी क्षेत्र ने इलेक्ट्रिक वाहनों की अनिवार्यता का स्वागत किया है। - अमेज़न, स्विगी और ज़ोमैटो जैसी कंपनियाँ अपने डिलीवरी कार्यों के लिये EVs का अधिकाधिक प्रयोग कर रही हैं। - महिंद्रा जैसी कार निर्माता कंपनी की ओला जैसी उपभोक्ता सेवाप्रदाता कंपनी के साथ और टाटा मोटर्स की ब्लू स्मार्ट मोबिलिटी के साथ साझेदारी से अधिकाधिक इलेक्ट्रिक वाहन डिलीवरी और राइड-हेलिंग सेवाओं की सुनिश्चितता होगी। - चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमीः इलेक्ट्रिक वाहनों से संबंधित सर्वाधिक गंभीर चुनौती भारत में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है। - इलेक्ट्रिक वाहन आमतौर पर लिथियम-आधारित बैटरी द्वारा संचालित होते हैं। इन बैटरियों को आमतौर पर प्रत्येक 200-250 किलोमीटर पर चार्ज करने की आवश्यकता होती है। इसलिये चार्जिंग पॉइंट्स के सघन प्रसार की आवश्यकता है। - धीमी चार्जिंग की समस्याः निजी लाइट-ड्यूटी स्लो चार्जर का उपयोग कर घर पर EVs को फुल चार्ज करने में 12 घंटे तक का समय लगता है। घर पर धीमी चार्जिंग की इस तकनीकी समस्या के विकल्प के रूप में देश भर में चुनिंदा चार्जिंग स्टेशन ही उपलब्ध हैं। - भारत जैसे बड़े और घनी आबादी वाले देश के लिये इन चार्जिंग स्टेशनों की संख्या बेहद अपर्याप्त है। - इलेक्ट्रिक वाहन उत्पादन के लिये एक स्थिर नीति का अभावः इलेक्ट्रिक वाहन उत्पादन एक पूँजी गहन क्षेत्र है, जहाँ एकसमानता और लाभ प्राप्ति के लिये दीर्घकालिक योजना की आवश्यकता है। इलेक्ट्रिक वाहन उत्पादन से संबंधित सरकारी नीतियों की अनिश्चितता इस उद्योग में निवेश को हतोत्साहित करती है। - तकनीकी चुनौतियाँः भारत इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन के मामले में तकनीकी रूप से पिछड़ा हुआ है, जबकि बैटरी, सेमीकंडक्टर्स, कंट्रोलर आदि इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के लिये काफी महत्त्वपूर्ण माने जाते हैं। - संबद्ध अवसंरचना समर्थन का अभावः 'एसी बनाम डीसी' चार्जिंग स्टेशनों, ग्रिड स्थिरता और 'रेंज एंग्जायटी' (यह भय कि बैटरी जल्द ही खत्म हो जाएगी) के संबंध में स्पष्टता की कमी कुछ अन्य कारक हैं, जो इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के विकास को बाधित कर रहे हैं। - घरेलू उत्पादन के लिये सामग्री की उपलब्धता में कमीः बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों का सबसे महत्त्वपूर्ण घटक है। भारत में लिथियम और कोबाल्ट का कोई ज्ञात भंडार नहीं है, जो बैटरी उत्पादन के लिये आवश्यक है। भारत लिथियम आयन बैटरी के आयात के लिये जापान और चीन जैसे देशों पर निर्भर है। - कुशल कामगारों की कमीः EVs को लगातार सर्विसिंग की आवश्यकता होती है और सर्विसिंग के लिये उच्च स्तर के कौशल की आवश्यकता होती है। भारत में ऐसे कौशल विकास के लिये समर्पित प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों का अभाव है। - इलेक्ट्रिक वाहन में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ानाः भारतीय बाज़ार को स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के लिये प्रोत्साहन की आवश्यकता है, जो रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टिकोण से भारत के अनुकूल हों। - चूँकि कीमतों को कम करने के लिये स्थानीय अनुसंधान एवं विकास में निवेश आवश्यक है, इसलिये स्थानीय विश्वविद्यालयों और मौजूदा औद्योगिक केंद्रों का सहयोग लेना उपयुक्त होगा। - भारत को यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों के साथ मिलकर कार्य करना चाहिये और इलेक्ट्रिक वाहनों के विकास को सुसंगत बनाना चाहिये। - लोगों को जागरूक करनाः पुराने मानदंडों को तोड़ना और एक नए उपभोक्ता व्यवहार का निर्माण करना हमेशा चुनौतीपूर्ण होता है। इसलिये, भारतीय बाज़ार में व्याप्त आशंकाओं को दूर करने और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिये लोगों को जागरूक और सुग्राही बनाने की आवश्यकता है। - व्यवहार्य बिजली मूल्य निर्धारणः बिजली की मौजूदा कीमतों को देखते हुए 'होम चार्जिंग' भी एक समस्या हो सकता है। बिजली की कीमतों को कम करने के लिये कोयले पर आधारित थर्मल पावर प्लांट के बदले अन्य विकल्प आजमाने होंगे। - इस प्रकार, इलेक्ट्रिक कारों के विकास को सुविधाजनक बनाने के लिये संपूर्ण बिजली उत्पादन परिदृश्य में भी परिवर्तन लाए जाने की आवश्यकता है। - इस संदर्भ में सुखद है कि भारत वर्ष 2025 तक विश्व के सबसे बड़े सौर एवं ऊर्जा भंडारण बाज़ारों में से एक बनने की राह पर है। - क्लोज़्ड-लूप मोबिलिटी इकोसिस्टम का निर्माण करनाः इलेक्ट्रिक आपूर्ति शृंखला के लिये विनिर्माण को सब्सिडी प्रदान करने से निश्चित रूप से भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के विकास परिदृश्य में सुधार होगा। - चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ ही एक सुदृढ़ आपूर्ति शृंखला की स्थापना की भी आवश्यकता होगी।
- फ़िल्टर करें : प्रश्न : उत्तर : हल करने का दृष्टिकोण : - इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग के महत्त्व और संभावनाओं को लिखने के साथ उत्तर शुरू कीजिये। - इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने से जुड़ी चुनौतियों की चर्चा कीजिये। - उपयुक्त निष्कर्ष लिखिये। इलेक्ट्रिक वाहन आंतरिक दहन इंजन के बजाय इलेक्ट्रिक मोटर से संचालित होते हैं और इनमें ईंधन टैंक के बजाय बैटरी लगी होती है। सामान्य तौर पर, इलेक्ट्रिक वाहनों की परिचालन लागत कम होती है, क्योंकि इनकी संचालन प्रक्रिया सरल होती है और ये पर्यावरण के लिये भी अनुकूल होते हैं। भारत में, इलेक्ट्रिक वाहन के लिये ईंधन की लागत लगभग अस्सी पैसे प्रति किलोमीटर है। इसकी तुलना में, आज भारतीय शहरों में एक सौ रुपयापए प्रति लीटर से अधिक के पेट्रोल मूल्य के साथ पेट्रोल-संचालित वाहनों पर सात-आठ रुपयापए प्रति किलोमीटर का खर्च आता है। - निजी क्षेत्र ने इलेक्ट्रिक वाहनों की अनिवार्यता का स्वागत किया है। - अमेज़न, स्विगी और ज़ोमैटो जैसी कंपनियाँ अपने डिलीवरी कार्यों के लिये EVs का अधिकाधिक प्रयोग कर रही हैं। - महिंद्रा जैसी कार निर्माता कंपनी की ओला जैसी उपभोक्ता सेवाप्रदाता कंपनी के साथ और टाटा मोटर्स की ब्लू स्मार्ट मोबिलिटी के साथ साझेदारी से अधिकाधिक इलेक्ट्रिक वाहन डिलीवरी और राइड-हेलिंग सेवाओं की सुनिश्चितता होगी। - चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमीः इलेक्ट्रिक वाहनों से संबंधित सर्वाधिक गंभीर चुनौती भारत में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है। - इलेक्ट्रिक वाहन आमतौर पर लिथियम-आधारित बैटरी द्वारा संचालित होते हैं। इन बैटरियों को आमतौर पर प्रत्येक दो सौ-दो सौ पचास किलोग्राममीटर पर चार्ज करने की आवश्यकता होती है। इसलिये चार्जिंग पॉइंट्स के सघन प्रसार की आवश्यकता है। - धीमी चार्जिंग की समस्याः निजी लाइट-ड्यूटी स्लो चार्जर का उपयोग कर घर पर EVs को फुल चार्ज करने में बारह घंटाटे तक का समय लगता है। घर पर धीमी चार्जिंग की इस तकनीकी समस्या के विकल्प के रूप में देश भर में चुनिंदा चार्जिंग स्टेशन ही उपलब्ध हैं। - भारत जैसे बड़े और घनी आबादी वाले देश के लिये इन चार्जिंग स्टेशनों की संख्या बेहद अपर्याप्त है। - इलेक्ट्रिक वाहन उत्पादन के लिये एक स्थिर नीति का अभावः इलेक्ट्रिक वाहन उत्पादन एक पूँजी गहन क्षेत्र है, जहाँ एकसमानता और लाभ प्राप्ति के लिये दीर्घकालिक योजना की आवश्यकता है। इलेक्ट्रिक वाहन उत्पादन से संबंधित सरकारी नीतियों की अनिश्चितता इस उद्योग में निवेश को हतोत्साहित करती है। - तकनीकी चुनौतियाँः भारत इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन के मामले में तकनीकी रूप से पिछड़ा हुआ है, जबकि बैटरी, सेमीकंडक्टर्स, कंट्रोलर आदि इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के लिये काफी महत्त्वपूर्ण माने जाते हैं। - संबद्ध अवसंरचना समर्थन का अभावः 'एसी बनाम डीसी' चार्जिंग स्टेशनों, ग्रिड स्थिरता और 'रेंज एंग्जायटी' के संबंध में स्पष्टता की कमी कुछ अन्य कारक हैं, जो इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के विकास को बाधित कर रहे हैं। - घरेलू उत्पादन के लिये सामग्री की उपलब्धता में कमीः बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों का सबसे महत्त्वपूर्ण घटक है। भारत में लिथियम और कोबाल्ट का कोई ज्ञात भंडार नहीं है, जो बैटरी उत्पादन के लिये आवश्यक है। भारत लिथियम आयन बैटरी के आयात के लिये जापान और चीन जैसे देशों पर निर्भर है। - कुशल कामगारों की कमीः EVs को लगातार सर्विसिंग की आवश्यकता होती है और सर्विसिंग के लिये उच्च स्तर के कौशल की आवश्यकता होती है। भारत में ऐसे कौशल विकास के लिये समर्पित प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों का अभाव है। - इलेक्ट्रिक वाहन में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ानाः भारतीय बाज़ार को स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के लिये प्रोत्साहन की आवश्यकता है, जो रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टिकोण से भारत के अनुकूल हों। - चूँकि कीमतों को कम करने के लिये स्थानीय अनुसंधान एवं विकास में निवेश आवश्यक है, इसलिये स्थानीय विश्वविद्यालयों और मौजूदा औद्योगिक केंद्रों का सहयोग लेना उपयुक्त होगा। - भारत को यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों के साथ मिलकर कार्य करना चाहिये और इलेक्ट्रिक वाहनों के विकास को सुसंगत बनाना चाहिये। - लोगों को जागरूक करनाः पुराने मानदंडों को तोड़ना और एक नए उपभोक्ता व्यवहार का निर्माण करना हमेशा चुनौतीपूर्ण होता है। इसलिये, भारतीय बाज़ार में व्याप्त आशंकाओं को दूर करने और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिये लोगों को जागरूक और सुग्राही बनाने की आवश्यकता है। - व्यवहार्य बिजली मूल्य निर्धारणः बिजली की मौजूदा कीमतों को देखते हुए 'होम चार्जिंग' भी एक समस्या हो सकता है। बिजली की कीमतों को कम करने के लिये कोयले पर आधारित थर्मल पावर प्लांट के बदले अन्य विकल्प आजमाने होंगे। - इस प्रकार, इलेक्ट्रिक कारों के विकास को सुविधाजनक बनाने के लिये संपूर्ण बिजली उत्पादन परिदृश्य में भी परिवर्तन लाए जाने की आवश्यकता है। - इस संदर्भ में सुखद है कि भारत वर्ष दो हज़ार पच्चीस तक विश्व के सबसे बड़े सौर एवं ऊर्जा भंडारण बाज़ारों में से एक बनने की राह पर है। - क्लोज़्ड-लूप मोबिलिटी इकोसिस्टम का निर्माण करनाः इलेक्ट्रिक आपूर्ति शृंखला के लिये विनिर्माण को सब्सिडी प्रदान करने से निश्चित रूप से भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के विकास परिदृश्य में सुधार होगा। - चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ ही एक सुदृढ़ आपूर्ति शृंखला की स्थापना की भी आवश्यकता होगी।
नामीबिया से लाए जा रहे 8 चीते शनिवार को ग्वालियर पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 72वें जन्मदिन के मौके पर इनमें से तीन चीतों को मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा। चीतों को एक विशेष विमान से लाया गया है। इस विमान पर चीते का मुंह प्रिंट करके लगाया गया है। ग्वालियर के महाराजपुरा हवाई हड्डे पर उतरने के बाद चीतों को भारतीय वायु सेना का चिनूक हेलीकॉप्टर कूनो नेशनल पार्क ले गया। भारत में साल 1952 में चीतों को विलुप्त घोषित कर दिया गया था लेकिन अब एक बार फिर भारत के जंगलों में चीते दिखाई देंगे। कूनो नेशनल पार्क का चयन इसलिए किया गया है क्योंकि यहां पर हरी घास भी है और यहां पर चीते आसानी से शिकार भी कर सकते हैं। हालांकि एक आशंका यह भी है कि भारत की जलवायु चीतों के रहने के लिए कितनी अनुकूल होगी और चीतों का जंगलों में मौजूद तेंदुओं के साथ संघर्ष हो सकता है। दुनिया भर में चीतों की संख्या बहुत कम हो चुकी है और इनका आंकड़ा 7000 से भी कम है। इसमें भी अधिकतर चीते दक्षिण अफ्रीका के सवाना के जंगलों में पाए जाते हैं। माना जा रहा है कि इनके भारत आने के बाद भारत में चीतों की संख्या बढ़ेगी। भारत में अफ्रीकी चीतों को लाए जाने की परियोजना की शुरुआत 2009 में हुई थी और इन्हें पिछले साल नवंबर तक लाया जाना था लेकिन कोरोना महामारी और लॉकडाउन के कारण इस परियोजना को लेकर देर हुई है। प्रोजेक्ट चीता को भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जनवरी 2020 में स्वीकृति दे दी गई थी। मनमोहन सिंह जी की सरकार ने इसे स्वीकृति दी। अप्रैल 2010 में तत्कालीन वन एवं पर्यावरण मंत्री @Jairam_Ramesh जी अफ्रीका के चीता आउट रीच सेंटर गए। 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने प्रोजेक्ट पर रोक लगाई, 2020 में रोक हटी।
नामीबिया से लाए जा रहे आठ चीते शनिवार को ग्वालियर पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने बहत्तरवें जन्मदिन के मौके पर इनमें से तीन चीतों को मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा। चीतों को एक विशेष विमान से लाया गया है। इस विमान पर चीते का मुंह प्रिंट करके लगाया गया है। ग्वालियर के महाराजपुरा हवाई हड्डे पर उतरने के बाद चीतों को भारतीय वायु सेना का चिनूक हेलीकॉप्टर कूनो नेशनल पार्क ले गया। भारत में साल एक हज़ार नौ सौ बावन में चीतों को विलुप्त घोषित कर दिया गया था लेकिन अब एक बार फिर भारत के जंगलों में चीते दिखाई देंगे। कूनो नेशनल पार्क का चयन इसलिए किया गया है क्योंकि यहां पर हरी घास भी है और यहां पर चीते आसानी से शिकार भी कर सकते हैं। हालांकि एक आशंका यह भी है कि भारत की जलवायु चीतों के रहने के लिए कितनी अनुकूल होगी और चीतों का जंगलों में मौजूद तेंदुओं के साथ संघर्ष हो सकता है। दुनिया भर में चीतों की संख्या बहुत कम हो चुकी है और इनका आंकड़ा सात हज़ार से भी कम है। इसमें भी अधिकतर चीते दक्षिण अफ्रीका के सवाना के जंगलों में पाए जाते हैं। माना जा रहा है कि इनके भारत आने के बाद भारत में चीतों की संख्या बढ़ेगी। भारत में अफ्रीकी चीतों को लाए जाने की परियोजना की शुरुआत दो हज़ार नौ में हुई थी और इन्हें पिछले साल नवंबर तक लाया जाना था लेकिन कोरोना महामारी और लॉकडाउन के कारण इस परियोजना को लेकर देर हुई है। प्रोजेक्ट चीता को भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जनवरी दो हज़ार बीस में स्वीकृति दे दी गई थी। मनमोहन सिंह जी की सरकार ने इसे स्वीकृति दी। अप्रैल दो हज़ार दस में तत्कालीन वन एवं पर्यावरण मंत्री @Jairam_Ramesh जी अफ्रीका के चीता आउट रीच सेंटर गए। दो हज़ार तेरह में सुप्रीम कोर्ट ने प्रोजेक्ट पर रोक लगाई, दो हज़ार बीस में रोक हटी।
मेकअप अब सिर्फ अकेजन की चीज नहीं रह गई है। अब ऑफिस और नॉर्मली बाहर जाने पर भी महिलाएं मेकअप यूज करती हैं। एक स्टडी में सामने आया था कि मेकअप करने वाली महिलाएं दूसरों की तुलना में ज्यादा कॉन्फिडेंट महसूस करती हैं। हालांकि, गलत मेकअप इस कॉन्फिडेंस को लूज करने का कारण भी बन सकता है। ऐसे में कुछ सावधानियां रखने की जरूरत है।
मेकअप अब सिर्फ अकेजन की चीज नहीं रह गई है। अब ऑफिस और नॉर्मली बाहर जाने पर भी महिलाएं मेकअप यूज करती हैं। एक स्टडी में सामने आया था कि मेकअप करने वाली महिलाएं दूसरों की तुलना में ज्यादा कॉन्फिडेंट महसूस करती हैं। हालांकि, गलत मेकअप इस कॉन्फिडेंस को लूज करने का कारण भी बन सकता है। ऐसे में कुछ सावधानियां रखने की जरूरत है।
Vodafone-Idea की ओर से उसकी Vodoafone eSIM Service को Apple Watch (GPS+Cellular) के लिए उपलब्ध करा दिया है। यह सेवा वोडाफोन के पोस्टपेड यूजर्स के लिए शुरू कर दी गई है। इसमें इंटरप्राइज पोस्टपेड भी शामिल है। Vodafone eSIM की यह सेवा अभी के लिए मात्र मुंबई, दिल्ली और गुजरात के एप्पल वॉच यूजर्स के लिए ही शुरू की गई है। हालांकि कंपनी का कहना है कि इस सेवा को बाकी जगहों पर भी आने वाले कुछ हफ़्तों में जारी कर दिया जाने वाला है। अब अगर आपके पास Apple Watch का सेलुलर वर्जन है तो आपको बता देते हैं कि आप इस सेवा को अपनी इस वॉच में इस्तेमाल कर सकते हैं, इसके लिए आपको कुछ स्टेप्स को फॉलो करना होगा, जिनके बारे में आप यहाँ विस्तार से जान सकते हैं। आइये शुरू करते हैं और जानते हैं कि आखिर आप कैसे अपनी एप्पल वॉच में वोडाफोन ई-सिम का सेटअप कर सकते हैं। वोडाफोन ई-सिम के लिए आपको क्या चाहिए? इसके लिए आपको सबसे पहले एक एप्पल वॉच की जरूरत होने वाली है, जो सीरीज 3 या उसके ऊपर के किसी वर्जन पर होनी चाहिए, लेकिन इसका (GPS+Cellular) होना भी जरुरी है। इसके अलावा आपको Apple iPhone 6s या उसके ऊपर का कोई वर्जन चाहिए, जो लेटेस्ट iOS वर्जन पर काम कर रहा हो। इसके अलावा आपको एक एक्टिव वोडाफोन पोस्टपेड कनेक्शन की भी जरूरत इसके लिए है। इस बात को भी अआप्को सुनिश्चित करना है कि आप वोडाफोन की वेबसाइट पर अपने आपको इस प्रक्रिया से पहले जाकर रजिस्टर जरुर कर लें। सबसे पहले आपको अपने फोन में एप्पल वॉच एप्प पर जाना होगा, इसके बाद अपनी एप्पल वॉच को इसके साथ आपको पेयर करना होगा। इस प्रोसेस के दौरान ही आपको सेटअप मोबाइल डाटा ऑप्शन पर क्लिक करना होगा। अब आपको यहाँ अपने वोडाफोन पोस्टपेड नंबर को दर्ज करना होगा। इसके बाद अपने पासवर्ड को दर्ज करके आपको लॉग इन पर टैप करना होगा। जब आप लॉग इन कर लेते हैं तो आपको कन्फर्म बटन को दबाकर अपने डिवाइस पेज को सिंक कर लेना है। अपने फोन में कैसे पाएं eSIM? अब अगर आप वोडाफोन के वर्तमान ग्राहक हैं तो आपके लिए यह प्रक्रिया अलग होने है, इसके अलावा अगर आप नए ग्राहक हैं तो आपके लिए यह प्रक्रिया अलग होने वाली है, लेकिन दोनों ही स्थिति में आप अपने फोन में बड़ी आसानी से ई-सिम को प्राप्त कर सकते हैं। आइये अब जानते है कि अगर आप वर्तमान वोडाफोन ग्राहक हैं तो आपको क्या करना होगा, और अगर आप नए ग्राहक हैं तो आपको क्या करना होगा। इसके लिए आपको एक SMS को भेजना होगा, जो इस प्रकार है, आपको अपने अपने मोबाइल फोन में eSIM टाइप करने के बाद अपने ईमेल आईडी को एक स्पेस के बाद दर्ज करके 199 पर भेजना होगा। हालाँकि अगर आपके फोन नंबर के साथ कोई भी ईमेल आईडी रजिस्टर नहीं है तो आपको email लिखकर उसके बाद एक स्पेस देना होगा, और फिर अपनी ईमेल आईडी को दर्ज करना होगा, इस SMS को भी आपको 199 पर सेंड करना है। - अब जब आपकी यह प्रक्रिया पूरी हो जाती है तो आपको एक बार फिर से ऊपर वाली प्रक्रिया को दोहराना होगा। यानी ईमेल वाली प्रक्रिया को आपको एक बार फिर से दोहराना होगा। - हालाँकि अगर आपकी ईमेल आईडी वैलिड है तो आपको 199 से SMS मिलने वाला है। इस SMS पर आपको ESIMY को लिखकर इ-सिम रिक्वेस्ट को कन्फर्म करने के लिए मैसेज भेजना होगा। - जब यह प्रक्रिया पूरी हो जाती है तो आपको बता देते है कि आपको एक और SMS 199 की ओर से मिलने वाला है, जो आपसे कॉल पर बात करने के लिए कहने वाला है, या कॉल पर आपके कंसेंट को लेने वाला है। - जब कॉल पर यह सब प्रक्रिया भी आप पूरी कर लेते हैं आपके ईमेल आईडी पर एक QR कोड भेजा जाता है। - इस QR कोड को आपको स्कैन करना है। एप्पल डिवाइसेसः अब आपको इस बात को सुनिश्चित करना है कि आपका फोन वाई-फाई या मोबाइलडाटा पर कनेक्ट है। - इसके लिए आपको सेटिंग पर जाकर मोबाइल डाटा का चुनाव करें और ऐड डाटा प्लान पर क्लिक करें। - अब मेल पर मिले QR कोड को स्कैन करें। - इसके बाद स्क्रीन पर नजर आ रहे प्रांप्ट को फॉलो करें। - अगर आप वोडाफोन के नए ग्राहक हैं तो आपको आपके नजदीकी वोडाफोन स्टोर पर जाना होगा, और अपनी आइडेंटिटी प्रूफ के साथ अपनी फोटोग्राफ भी यहाँ इ-सिम कनेक्शन के लिए देनी होगी. - अगर आप अपना हैंडसेट अपने साथ ही ले जाते हैं तो आपके लिए ज्यादा अच्छा रहने वाला है, अगर आप ऐसा करते हैं तो जो QR कोड यहाँ निर्मित हो रहा है, उसे आप उसी समय स्कैन कर सकते हैं। - हालाँकि आपके ईमेल पर भेजे गए QR Code को भी आप स्कैन कर सकते हैं, और इसके बाद आपको 2 घंटे के भीतर ही ई-सिम की सुविधा एक्टिवेट नजर आने वाली है।
Vodafone-Idea की ओर से उसकी Vodoafone eSIM Service को Apple Watch के लिए उपलब्ध करा दिया है। यह सेवा वोडाफोन के पोस्टपेड यूजर्स के लिए शुरू कर दी गई है। इसमें इंटरप्राइज पोस्टपेड भी शामिल है। Vodafone eSIM की यह सेवा अभी के लिए मात्र मुंबई, दिल्ली और गुजरात के एप्पल वॉच यूजर्स के लिए ही शुरू की गई है। हालांकि कंपनी का कहना है कि इस सेवा को बाकी जगहों पर भी आने वाले कुछ हफ़्तों में जारी कर दिया जाने वाला है। अब अगर आपके पास Apple Watch का सेलुलर वर्जन है तो आपको बता देते हैं कि आप इस सेवा को अपनी इस वॉच में इस्तेमाल कर सकते हैं, इसके लिए आपको कुछ स्टेप्स को फॉलो करना होगा, जिनके बारे में आप यहाँ विस्तार से जान सकते हैं। आइये शुरू करते हैं और जानते हैं कि आखिर आप कैसे अपनी एप्पल वॉच में वोडाफोन ई-सिम का सेटअप कर सकते हैं। वोडाफोन ई-सिम के लिए आपको क्या चाहिए? इसके लिए आपको सबसे पहले एक एप्पल वॉच की जरूरत होने वाली है, जो सीरीज तीन या उसके ऊपर के किसी वर्जन पर होनी चाहिए, लेकिन इसका होना भी जरुरी है। इसके अलावा आपको Apple iPhone छः सेकंड या उसके ऊपर का कोई वर्जन चाहिए, जो लेटेस्ट iOS वर्जन पर काम कर रहा हो। इसके अलावा आपको एक एक्टिव वोडाफोन पोस्टपेड कनेक्शन की भी जरूरत इसके लिए है। इस बात को भी अआप्को सुनिश्चित करना है कि आप वोडाफोन की वेबसाइट पर अपने आपको इस प्रक्रिया से पहले जाकर रजिस्टर जरुर कर लें। सबसे पहले आपको अपने फोन में एप्पल वॉच एप्प पर जाना होगा, इसके बाद अपनी एप्पल वॉच को इसके साथ आपको पेयर करना होगा। इस प्रोसेस के दौरान ही आपको सेटअप मोबाइल डाटा ऑप्शन पर क्लिक करना होगा। अब आपको यहाँ अपने वोडाफोन पोस्टपेड नंबर को दर्ज करना होगा। इसके बाद अपने पासवर्ड को दर्ज करके आपको लॉग इन पर टैप करना होगा। जब आप लॉग इन कर लेते हैं तो आपको कन्फर्म बटन को दबाकर अपने डिवाइस पेज को सिंक कर लेना है। अपने फोन में कैसे पाएं eSIM? अब अगर आप वोडाफोन के वर्तमान ग्राहक हैं तो आपके लिए यह प्रक्रिया अलग होने है, इसके अलावा अगर आप नए ग्राहक हैं तो आपके लिए यह प्रक्रिया अलग होने वाली है, लेकिन दोनों ही स्थिति में आप अपने फोन में बड़ी आसानी से ई-सिम को प्राप्त कर सकते हैं। आइये अब जानते है कि अगर आप वर्तमान वोडाफोन ग्राहक हैं तो आपको क्या करना होगा, और अगर आप नए ग्राहक हैं तो आपको क्या करना होगा। इसके लिए आपको एक SMS को भेजना होगा, जो इस प्रकार है, आपको अपने अपने मोबाइल फोन में eSIM टाइप करने के बाद अपने ईमेल आईडी को एक स्पेस के बाद दर्ज करके एक सौ निन्यानवे पर भेजना होगा। हालाँकि अगर आपके फोन नंबर के साथ कोई भी ईमेल आईडी रजिस्टर नहीं है तो आपको email लिखकर उसके बाद एक स्पेस देना होगा, और फिर अपनी ईमेल आईडी को दर्ज करना होगा, इस SMS को भी आपको एक सौ निन्यानवे पर सेंड करना है। - अब जब आपकी यह प्रक्रिया पूरी हो जाती है तो आपको एक बार फिर से ऊपर वाली प्रक्रिया को दोहराना होगा। यानी ईमेल वाली प्रक्रिया को आपको एक बार फिर से दोहराना होगा। - हालाँकि अगर आपकी ईमेल आईडी वैलिड है तो आपको एक सौ निन्यानवे से SMS मिलने वाला है। इस SMS पर आपको ESIMY को लिखकर इ-सिम रिक्वेस्ट को कन्फर्म करने के लिए मैसेज भेजना होगा। - जब यह प्रक्रिया पूरी हो जाती है तो आपको बता देते है कि आपको एक और SMS एक सौ निन्यानवे की ओर से मिलने वाला है, जो आपसे कॉल पर बात करने के लिए कहने वाला है, या कॉल पर आपके कंसेंट को लेने वाला है। - जब कॉल पर यह सब प्रक्रिया भी आप पूरी कर लेते हैं आपके ईमेल आईडी पर एक QR कोड भेजा जाता है। - इस QR कोड को आपको स्कैन करना है। एप्पल डिवाइसेसः अब आपको इस बात को सुनिश्चित करना है कि आपका फोन वाई-फाई या मोबाइलडाटा पर कनेक्ट है। - इसके लिए आपको सेटिंग पर जाकर मोबाइल डाटा का चुनाव करें और ऐड डाटा प्लान पर क्लिक करें। - अब मेल पर मिले QR कोड को स्कैन करें। - इसके बाद स्क्रीन पर नजर आ रहे प्रांप्ट को फॉलो करें। - अगर आप वोडाफोन के नए ग्राहक हैं तो आपको आपके नजदीकी वोडाफोन स्टोर पर जाना होगा, और अपनी आइडेंटिटी प्रूफ के साथ अपनी फोटोग्राफ भी यहाँ इ-सिम कनेक्शन के लिए देनी होगी. - अगर आप अपना हैंडसेट अपने साथ ही ले जाते हैं तो आपके लिए ज्यादा अच्छा रहने वाला है, अगर आप ऐसा करते हैं तो जो QR कोड यहाँ निर्मित हो रहा है, उसे आप उसी समय स्कैन कर सकते हैं। - हालाँकि आपके ईमेल पर भेजे गए QR Code को भी आप स्कैन कर सकते हैं, और इसके बाद आपको दो घंटाटे के भीतर ही ई-सिम की सुविधा एक्टिवेट नजर आने वाली है।
4 जिब उननै कब्र की ओड़ निगांह करी, तो देख्या के पत्थर गिरड़या होया सै! यो घणाए बड्ड़ा था। 5 कब्र कै भीत्त्तर जाकै उननै एक जवान ताहीं धोळे लत्ते पहरे होड़ सोळी ओड़ बेठ्ठे देख्या, अर उननै घणी हैरान होई। 8 अर वे लिकड़कै कब्र तै बाहर भाजग्यी; क्यूँके वे काम्बगी अर उनकै घबराट होगी थी; अर उननै किसे तै कुछ न्ही कह्या, क्यूँके वे डरै थी। 9 हफ्तै के पैहल्ड़े दिन सबेर होन्दे यीशु जिन्दा होकै पैहलम-पैहल्या मरियम मगदलीनी ताहीं जिसम्ह तै उसनै सात ओपरी आत्मा काड्डी थी, दिख्या। 10 उसनै जाकै यीशु के साथियाँ ताहीं खबर दी, जो दुख म्ह डूबरे थे, अर रोवै थे। 11 उननै न्यू सुणकै के वो जिन्दा सै, अर मरियम मगदलीनी नै उस ताहीं देख्या सै, उसकी बात का बिश्वास कोनी करा। 12 इसकै बाद यीशु दुसरे रूप म्ह उन म्ह तै दो चेल्यां ताहीं दिख्या, जिब वे गाम कान्ही जावै थे। 13 उननै भी यरुशलेम नगर तै बोहड़कै दुसरयां ताहीं इस बारें म्ह खबर दी, पर उननै उनका भी बिश्वास कोनी करया। 14 पाच्छै यीशु उन ग्यारहां चेल्यां ताहीं भी दिखया, जिब वे खाणा खाण बेठ्ठे थे, अर उनकै अबिश्वास अर मन की कठोरता पै उल्हाणा दिया, क्यूँके जिन नै उसकै जिन्दा होण कै पाच्छै उस ताहीं देख्या था, चेल्यां नै उनका भी बिश्वास कोनी करया था। 19 फेर प्रभु यीशु उनतै बात करण कै पाच्छै सुर्ग पै ठा लिया गया, अर परमेसवर कै सोळी ओड़ बैठग्या।‡ 16:19 (1 पत-3:22) 20 अर उननै लिकड़कै हरेक जगहां प्रचार करया, अर प्रभु उनकै गेल्या काम करदा रहया, अर उन निशान्नी कै जरिये जो गैल-गैल होवै थे, अर साबित करदा रहया के वचन सच्चा सै। आमीन।
चार जिब उननै कब्र की ओड़ निगांह करी, तो देख्या के पत्थर गिरड़या होया सै! यो घणाए बड्ड़ा था। पाँच कब्र कै भीत्त्तर जाकै उननै एक जवान ताहीं धोळे लत्ते पहरे होड़ सोळी ओड़ बेठ्ठे देख्या, अर उननै घणी हैरान होई। आठ अर वे लिकड़कै कब्र तै बाहर भाजग्यी; क्यूँके वे काम्बगी अर उनकै घबराट होगी थी; अर उननै किसे तै कुछ न्ही कह्या, क्यूँके वे डरै थी। नौ हफ्तै के पैहल्ड़े दिन सबेर होन्दे यीशु जिन्दा होकै पैहलम-पैहल्या मरियम मगदलीनी ताहीं जिसम्ह तै उसनै सात ओपरी आत्मा काड्डी थी, दिख्या। दस उसनै जाकै यीशु के साथियाँ ताहीं खबर दी, जो दुख म्ह डूबरे थे, अर रोवै थे। ग्यारह उननै न्यू सुणकै के वो जिन्दा सै, अर मरियम मगदलीनी नै उस ताहीं देख्या सै, उसकी बात का बिश्वास कोनी करा। बारह इसकै बाद यीशु दुसरे रूप म्ह उन म्ह तै दो चेल्यां ताहीं दिख्या, जिब वे गाम कान्ही जावै थे। तेरह उननै भी यरुशलेम नगर तै बोहड़कै दुसरयां ताहीं इस बारें म्ह खबर दी, पर उननै उनका भी बिश्वास कोनी करया। चौदह पाच्छै यीशु उन ग्यारहां चेल्यां ताहीं भी दिखया, जिब वे खाणा खाण बेठ्ठे थे, अर उनकै अबिश्वास अर मन की कठोरता पै उल्हाणा दिया, क्यूँके जिन नै उसकै जिन्दा होण कै पाच्छै उस ताहीं देख्या था, चेल्यां नै उनका भी बिश्वास कोनी करया था। उन्नीस फेर प्रभु यीशु उनतै बात करण कै पाच्छै सुर्ग पै ठा लिया गया, अर परमेसवर कै सोळी ओड़ बैठग्या।‡ सोलह:उन्नीस बीस अर उननै लिकड़कै हरेक जगहां प्रचार करया, अर प्रभु उनकै गेल्या काम करदा रहया, अर उन निशान्नी कै जरिये जो गैल-गैल होवै थे, अर साबित करदा रहया के वचन सच्चा सै। आमीन।
Bhojpuri Actress Akshara Singh Hot Video: भोजपुरी फिल्मों की पॉपुलर एक्ट्रेस अक्षरा सिंह इंटरनेट पर अपने नए गाने के चलते काफी चर्चा में आ गई हैं. अक्षरा का नया गाना रॉकेट जवानी आज यूट्यूब पर रिलीज किया गया जिसे काफी जबरदस्त रिस्पांस मिलता दिखाई दे रहा. गाने में अक्षरा लाल रंग की लहंगा चोली पहनकर अपने बेहद सेक्सी अंदाज में डांस कर रहे हैं. यूट्यूब पर रिलीज किए गए इस गाने में अक्षरा सिंह बेहद खूबसूरत अंदाज में ठुमके लगाती हुई नजर आ रही हैं. के गाने को रिलीज किए हुए 1 घंटे के भीतर ही 50 हजार से ज्यादा व्यूज प्राप्त हो चुके हैं. वीडियो देखने के बाद दर्शक अक्षरा की हॉटनेस की जमकर तारीफ कर रहे हैं तथा उनके वीडियो को लाइक भी कर रहे हैं. देखे अक्षरा सिंह का वीडियो सॉन्ग 'रॉकेट जवानी': आपको बता दें कि अक्षरा इसी तरह से अपनी ग्लैमरस अवतार से दर्शकों का दिल जीत लेती हैं. अक्षरा के गाने और उनकी वीडियो अक्सर हिट होते हैं और उन्हें अक्सर लाखों में व्यूज प्राप्त करते हैं. भोजपुरी फिल्मों और गानों की साथ ही वें अपने सोशल मीडिया पर अपने सेक्सी अंदाज से दर्शकों का दिल जीत लेती हैं.
Bhojpuri Actress Akshara Singh Hot Video: भोजपुरी फिल्मों की पॉपुलर एक्ट्रेस अक्षरा सिंह इंटरनेट पर अपने नए गाने के चलते काफी चर्चा में आ गई हैं. अक्षरा का नया गाना रॉकेट जवानी आज यूट्यूब पर रिलीज किया गया जिसे काफी जबरदस्त रिस्पांस मिलता दिखाई दे रहा. गाने में अक्षरा लाल रंग की लहंगा चोली पहनकर अपने बेहद सेक्सी अंदाज में डांस कर रहे हैं. यूट्यूब पर रिलीज किए गए इस गाने में अक्षरा सिंह बेहद खूबसूरत अंदाज में ठुमके लगाती हुई नजर आ रही हैं. के गाने को रिलीज किए हुए एक घंटाटे के भीतर ही पचास हजार से ज्यादा व्यूज प्राप्त हो चुके हैं. वीडियो देखने के बाद दर्शक अक्षरा की हॉटनेस की जमकर तारीफ कर रहे हैं तथा उनके वीडियो को लाइक भी कर रहे हैं. देखे अक्षरा सिंह का वीडियो सॉन्ग 'रॉकेट जवानी': आपको बता दें कि अक्षरा इसी तरह से अपनी ग्लैमरस अवतार से दर्शकों का दिल जीत लेती हैं. अक्षरा के गाने और उनकी वीडियो अक्सर हिट होते हैं और उन्हें अक्सर लाखों में व्यूज प्राप्त करते हैं. भोजपुरी फिल्मों और गानों की साथ ही वें अपने सोशल मीडिया पर अपने सेक्सी अंदाज से दर्शकों का दिल जीत लेती हैं.
नीना गुप्ता फिल्म और टेलीविजन की जानी-मानी अभिनेत्री हैं। "बधाई हो" फिल्म में अधेड़ उम्र की गर्भवती महिला के चरित्र को करने का हौसला केवल उन जैसी अभिनेत्री ही दिखा सकती है। नीना गुप्ता फिल्मों के चयन को लेकर जितनी निर्भीक हैं उतनी ही वह निजी जिंदगी में भी है। अपनी निजी जिंदगी के रिश्ते को भी उन्होंने कभी छिपाने का प्रयास नहीं किया। बिना शादी बच्चा पैदा करना हो या उम्र के तीसरे पड़ाव पर शादी दोनों ही कारण लोगों को चौंकाने के लिए पर्याप्त थे। आइए जानें ऐसे ही कुछ किस्से नीना गुप्ता की शादी और रिश्ते को लेकर। विवियन रिचर्ड से मिलने के पहले भी नीना गुप्ता के कुछ फिल्मों और टेलीविजन से जुड़े लोगों से रिश्ता था, लेकिन विवियन रिचर्ड से हुई मुलाकात ने सब बदल दिया। 1980 में क्रिकेट की किसी सीरीज के सिलसिले में विवियन रिचर्ड सर भारत आए थे। यहीं पर उनकी मुलाकात नीना गुप्ता से एक पार्टी के दौरान हुई। विवियन उस समय दो बच्चों के पिता थे और अपनी गर्लफ्रेंड के साथ रह रहे थे। नीना गुप्ता विवियन के व्यक्तित्व की तरफ आकर्षित हो गई और उनके प्यार में पड़ गई। इस प्यार का नतीजा था कि 1989 को नीना ने विवियन के बच्चे को जन्म दिया, जिसका नाम रखा मसाबा गुप्ता। नीना ये अच्छी तरह जानती थी कि विवियन उनसे शादी नहीं कर सकते हैं। लेकिन इसके बावजूद उन्होंने बिना शादी बच्चे को पैदा करने का साहसिक फैसला लिया। नीना गुप्ता की बेटी मसाबा गुप्ता के साथ उनका बहुत गहरा रिश्ता है। मसाबा वर्तमान में एक मशहूर फैशन डिजाइनर हैं और अपने पापा के भी बेहद करीब हैं। मसाबा बताती हैं कि वो अपने पापा से मिलने साल में तीन बार जरूर जाती हैं। मां के साथ अपनी जुड़ाव को जाहिर करते हुए कुछ दिनों पहले ही मसाबा ने अपने इंस्टाग्राम पर बचपन की फोटो शेयर की थी जिसमें नीना गुप्ता मसाबा को गोद में ली हुई हैं। नीना गु्प्ता ने कभी शादी नहीं की। उनकी पहली शादी विवेक मेहरा के साथ ही हुई। विवेक मेहरा से 2002 में एक फ्लाइट में नीना गुप्ता की मुलाकात हुई। उस समय नीना 42 साल की थीं। विवेक मेहरा दिल्ली में एक चार्टर्ड एकाउंटेंट हैं। पहले से शादीशुदा विवेक उस समय अपनी पत्नी से अलग रह रहे थे। 2008 में किसी रिश्तेदार की शादी में अमेरिका गए विवेक ने नीना को वहीं पर प्रपोज किया और 15 जुलाई को नीना गुप्ता से शादी कर ली।
नीना गुप्ता फिल्म और टेलीविजन की जानी-मानी अभिनेत्री हैं। "बधाई हो" फिल्म में अधेड़ उम्र की गर्भवती महिला के चरित्र को करने का हौसला केवल उन जैसी अभिनेत्री ही दिखा सकती है। नीना गुप्ता फिल्मों के चयन को लेकर जितनी निर्भीक हैं उतनी ही वह निजी जिंदगी में भी है। अपनी निजी जिंदगी के रिश्ते को भी उन्होंने कभी छिपाने का प्रयास नहीं किया। बिना शादी बच्चा पैदा करना हो या उम्र के तीसरे पड़ाव पर शादी दोनों ही कारण लोगों को चौंकाने के लिए पर्याप्त थे। आइए जानें ऐसे ही कुछ किस्से नीना गुप्ता की शादी और रिश्ते को लेकर। विवियन रिचर्ड से मिलने के पहले भी नीना गुप्ता के कुछ फिल्मों और टेलीविजन से जुड़े लोगों से रिश्ता था, लेकिन विवियन रिचर्ड से हुई मुलाकात ने सब बदल दिया। एक हज़ार नौ सौ अस्सी में क्रिकेट की किसी सीरीज के सिलसिले में विवियन रिचर्ड सर भारत आए थे। यहीं पर उनकी मुलाकात नीना गुप्ता से एक पार्टी के दौरान हुई। विवियन उस समय दो बच्चों के पिता थे और अपनी गर्लफ्रेंड के साथ रह रहे थे। नीना गुप्ता विवियन के व्यक्तित्व की तरफ आकर्षित हो गई और उनके प्यार में पड़ गई। इस प्यार का नतीजा था कि एक हज़ार नौ सौ नवासी को नीना ने विवियन के बच्चे को जन्म दिया, जिसका नाम रखा मसाबा गुप्ता। नीना ये अच्छी तरह जानती थी कि विवियन उनसे शादी नहीं कर सकते हैं। लेकिन इसके बावजूद उन्होंने बिना शादी बच्चे को पैदा करने का साहसिक फैसला लिया। नीना गुप्ता की बेटी मसाबा गुप्ता के साथ उनका बहुत गहरा रिश्ता है। मसाबा वर्तमान में एक मशहूर फैशन डिजाइनर हैं और अपने पापा के भी बेहद करीब हैं। मसाबा बताती हैं कि वो अपने पापा से मिलने साल में तीन बार जरूर जाती हैं। मां के साथ अपनी जुड़ाव को जाहिर करते हुए कुछ दिनों पहले ही मसाबा ने अपने इंस्टाग्राम पर बचपन की फोटो शेयर की थी जिसमें नीना गुप्ता मसाबा को गोद में ली हुई हैं। नीना गु्प्ता ने कभी शादी नहीं की। उनकी पहली शादी विवेक मेहरा के साथ ही हुई। विवेक मेहरा से दो हज़ार दो में एक फ्लाइट में नीना गुप्ता की मुलाकात हुई। उस समय नीना बयालीस साल की थीं। विवेक मेहरा दिल्ली में एक चार्टर्ड एकाउंटेंट हैं। पहले से शादीशुदा विवेक उस समय अपनी पत्नी से अलग रह रहे थे। दो हज़ार आठ में किसी रिश्तेदार की शादी में अमेरिका गए विवेक ने नीना को वहीं पर प्रपोज किया और पंद्रह जुलाई को नीना गुप्ता से शादी कर ली।
देश की धरोहर को देश में वापस लौटाने के क्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपना बड़ा वादा निभाया है। पीएम मोदी मन की बात कार्यक्रम में बीते वर्ष 29 नवंबर को देश के लोगों को मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा कनाडा में मिलने की जानकारी दी थी। इसके बाद से उन्होंने इसको बड़े अभियान के रूप में लिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 29 नवंबर 2020 को अपने कार्यक्रम मन की बात में देश के लोगों को मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा कनाडा में मिलने की जानकारी दी थी। उन्होंने भारतवर्ष के लोगों के लिए गर्व का पल बताते हुए प्रतिमा देश में वापस लाने की बात कही थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 29 नवंबर 2020 को अपने कार्यक्रम मन की बात में देश के लोगों को मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा कनाडा में मिलने की जानकारी दी थी। उन्होंने भारतवर्ष के लोगों के लिए गर्व का पल बताते हुए प्रतिमा देश में वापस लाने की बात कही थी। अब साल भर के भीतर मां अन्नपूर्णा की मूर्ति को वापस पीएम नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में स्थापित भी किया जा रहा है। वाराणसी में एकादशी को 15 नवंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर प्रांगण के रानी भवानी उत्तरी गेट के बगल में मां अन्नपूर्णा की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा करेंगे। मां अन्नपूर्णा की मूर्ति कनाडा के मैकेंजी आर्ट गैलरी, यूनिवर्सिटी आफ रेजिना में रखी गई थी। इस आर्ट गैलरी को 1936 में वकीन नार्मन मैकेंजी की वसीयत के अनुसार बनाया गया था। यहां पर 2019 में विनिपेग में रहने वाली भारतीय मूल की कलाकार दिव्या मेहरा को यहां प्रदर्शनी के लिए बुलाया गया था। जहां उन्होने मूर्ति पर अध्ययन किया और दूतावास को सूचित किया तो पता चला कि वर्ष 1913 में वाराणसी में गंगा किनारे मूर्ति चोरी हुई थी। वर्ष 1913 में वाराणसी से यह प्रतिमा चोरी हुई थी और कनाडा के बिनिपेग म्यूजियम में भारतीय मूल की आर्टिस्ट दिव्या मेहरा की नजर प्रतिमा पर पड़ी और उनके प्रयासों के बाद यह प्रतिमा दूतावास की पहल के बाद भारत सरकार को इसे कनाडा सरकार की पहल पर सौंप दिया गया। चुनार के बलुआ पत्थर से बनी यह मूर्ति 18 वीं सदी की बताई जाती है। जिनके एक हाथ में कटोरा और दूसरे हाथ में चम्मच है। महादेव की नगरी काशी के लोगों को कभी भूखा न सोने देने वाली धन धान्य की देवी मां अन्नपूर्णा की मूर्ति का इंतजार काशी को अब खत्म होने जा रहा है। पौराणिक मान्यता के अनुसार काशी में एक बार भीषण अकाल पड़ा था तो भगवान शिव ने मां अन्नपूर्णा का ध्यान करने के बाद उनसे भिक्षा मांगी थी। तब अन्नपूर्णा ने कहा था कि अब से काशी में कोई भूखा नहीं सोएगा।
देश की धरोहर को देश में वापस लौटाने के क्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपना बड़ा वादा निभाया है। पीएम मोदी मन की बात कार्यक्रम में बीते वर्ष उनतीस नवंबर को देश के लोगों को मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा कनाडा में मिलने की जानकारी दी थी। इसके बाद से उन्होंने इसको बड़े अभियान के रूप में लिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनतीस नवंबर दो हज़ार बीस को अपने कार्यक्रम मन की बात में देश के लोगों को मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा कनाडा में मिलने की जानकारी दी थी। उन्होंने भारतवर्ष के लोगों के लिए गर्व का पल बताते हुए प्रतिमा देश में वापस लाने की बात कही थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनतीस नवंबर दो हज़ार बीस को अपने कार्यक्रम मन की बात में देश के लोगों को मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा कनाडा में मिलने की जानकारी दी थी। उन्होंने भारतवर्ष के लोगों के लिए गर्व का पल बताते हुए प्रतिमा देश में वापस लाने की बात कही थी। अब साल भर के भीतर मां अन्नपूर्णा की मूर्ति को वापस पीएम नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में स्थापित भी किया जा रहा है। वाराणसी में एकादशी को पंद्रह नवंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर प्रांगण के रानी भवानी उत्तरी गेट के बगल में मां अन्नपूर्णा की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा करेंगे। मां अन्नपूर्णा की मूर्ति कनाडा के मैकेंजी आर्ट गैलरी, यूनिवर्सिटी आफ रेजिना में रखी गई थी। इस आर्ट गैलरी को एक हज़ार नौ सौ छत्तीस में वकीन नार्मन मैकेंजी की वसीयत के अनुसार बनाया गया था। यहां पर दो हज़ार उन्नीस में विनिपेग में रहने वाली भारतीय मूल की कलाकार दिव्या मेहरा को यहां प्रदर्शनी के लिए बुलाया गया था। जहां उन्होने मूर्ति पर अध्ययन किया और दूतावास को सूचित किया तो पता चला कि वर्ष एक हज़ार नौ सौ तेरह में वाराणसी में गंगा किनारे मूर्ति चोरी हुई थी। वर्ष एक हज़ार नौ सौ तेरह में वाराणसी से यह प्रतिमा चोरी हुई थी और कनाडा के बिनिपेग म्यूजियम में भारतीय मूल की आर्टिस्ट दिव्या मेहरा की नजर प्रतिमा पर पड़ी और उनके प्रयासों के बाद यह प्रतिमा दूतावास की पहल के बाद भारत सरकार को इसे कनाडा सरकार की पहल पर सौंप दिया गया। चुनार के बलुआ पत्थर से बनी यह मूर्ति अट्ठारह वीं सदी की बताई जाती है। जिनके एक हाथ में कटोरा और दूसरे हाथ में चम्मच है। महादेव की नगरी काशी के लोगों को कभी भूखा न सोने देने वाली धन धान्य की देवी मां अन्नपूर्णा की मूर्ति का इंतजार काशी को अब खत्म होने जा रहा है। पौराणिक मान्यता के अनुसार काशी में एक बार भीषण अकाल पड़ा था तो भगवान शिव ने मां अन्नपूर्णा का ध्यान करने के बाद उनसे भिक्षा मांगी थी। तब अन्नपूर्णा ने कहा था कि अब से काशी में कोई भूखा नहीं सोएगा।
के लिए कहोगे । हे दुःख से भरे हुए चिर- चिंतन के प्रतीक ! और श्रद्धा के वचक ! मानव संतति ग्रह की किरणों की डोरी से भाग्य को बाँध कर लकीर पीटेगी। भला प्रजा श्रद्धा का यह रहस्य न जाने कि 'यह लोक कल्याण भूमि है और इसे मिथ्या मानकों में ही निराश और अपनी बुद्धि से ही भ्रमित होकर सदैत्र थकावट और शिथिलता से भर जाय ।" इतना सुनाकर अभिशाप की यह प्रतिध्वनि शात हो गई - जैसे आकाश के सागर में महामीन छिप गया हो । मनु शान्त होकर श्वास ले रहे थे और सोच रहे थे कि 'आज फिर वही ( काम ) मेरा अदृष्ट बनकर आया जिसने पहले जीवन पर अपनी काली छाया डाली थी। आज उसने भविष्य लिख दिया । यह यातना त तक चलेगी । अब तो कोई उपाय बाकी नहीं है। सरस्वती मधुर नाद करती हुई उस श्यामल घाटी में अप्रमाद भाव से निर्लिप्त बह रही थी । पत्थरों के टुकड़े उपेक्षित से ज्यों के त्यों पड़े थे, जैसे वे निष्ठुर और जड़ विषाद हों । सरस्वती की धारा प्रसन्नता की धारा थी । जिसमें केवल मधुर गान था; कर्म की निरन्तरता का प्रतीक आत्म-नियंत्रित अनन्त ज्ञान चलता था । प्रवाह अपने ही निर्मित पथ का पथिक था और सुसवाद कहता जा रहा था । सूर्योदय हुआ । ( सूर्योदय का सुदर वर्णन ) । प्रभात का मधुर पवन सुगध बिखराता हुआ चल रहा है, इसी समय वहाँ नये चित्रसी एक सुन्दर बाला प्रकट हुई - अत्यंत सुदर्शन सुन्दरी और कोमल कमलो की माला-सी। कें तर्क-जाल-सी बिखरी थीं। उसका भाल शशि-खण्ड के समान स्पष्ट था; दो पद्म-पलाश चषक से दृग अनुराग-विराग ढाल कर देते थे। गुजरित मधुपयुक्त मुकुल के सदृश वह मुख था, जिसमें गान भरा था। संसृति के सब विज्ञानज्ञान छाती पर धरे थे । एक हाथ में वसुधा के जीवन का सार लिये कर्म-कलश था, दूसरा विचारों के नभ को मधुर अवलम्ब दिये हुए था। चरणों में ताल से भरी हुई गति थी ।......मनु सहसा बोले -"अरे, आलोक से भरी चेतना-सी यह हेमवती छाया कहाँ से आई ? " वह बाला बोली- "मैं इड़ा हूँ । कहो, तुम कौन हो, जो यहा डोल रहे हो ?" मनु - "बाले ! मेरा नाम मनु है । मैं विश्व का पथिक हूँ; केश सह रहा हूँ । " इड़ा--"स्वागत ! पर तुम देख रहे हो, यह सारस्वत प्रदेश उजड़ा हुआ है। मेरा यह देश भौतिक हलचल में चंचल हो उठा था। मैं इसमें इसी त्राशा से पड़ी हुई हूँ कि कभी मेरा दिन आवेगा ।" मनु - " देवि ! मैं तो आया हूँ। बताओ, जीवन का मोल क्या है ?· · ·जिसने तारा, ग्रह, विद्युत्, नक्षत्र रचा है, वह महाकाल सागर की भीषण तरंगों-सा खेल रहा है। तब क्या पृथ्वी के छोटे-छोटे प्राणियों को भीत करने के लिए ही उस निष्ठुर की यह सब रचना है ? यदि विनाश की ही जीत है तो मूर्ख उसे सृष्टि क्यो समझे हुए हैं जो नाशमयी है !· 'शनि का वह सुदूर नील लोक जिसकी छाया के समान यह ऊँचा ग्राकाश फैला हुआ है, सुनते हैं उसके परे भी
के लिए कहोगे । हे दुःख से भरे हुए चिर- चिंतन के प्रतीक ! और श्रद्धा के वचक ! मानव संतति ग्रह की किरणों की डोरी से भाग्य को बाँध कर लकीर पीटेगी। भला प्रजा श्रद्धा का यह रहस्य न जाने कि 'यह लोक कल्याण भूमि है और इसे मिथ्या मानकों में ही निराश और अपनी बुद्धि से ही भ्रमित होकर सदैत्र थकावट और शिथिलता से भर जाय ।" इतना सुनाकर अभिशाप की यह प्रतिध्वनि शात हो गई - जैसे आकाश के सागर में महामीन छिप गया हो । मनु शान्त होकर श्वास ले रहे थे और सोच रहे थे कि 'आज फिर वही मेरा अदृष्ट बनकर आया जिसने पहले जीवन पर अपनी काली छाया डाली थी। आज उसने भविष्य लिख दिया । यह यातना त तक चलेगी । अब तो कोई उपाय बाकी नहीं है। सरस्वती मधुर नाद करती हुई उस श्यामल घाटी में अप्रमाद भाव से निर्लिप्त बह रही थी । पत्थरों के टुकड़े उपेक्षित से ज्यों के त्यों पड़े थे, जैसे वे निष्ठुर और जड़ विषाद हों । सरस्वती की धारा प्रसन्नता की धारा थी । जिसमें केवल मधुर गान था; कर्म की निरन्तरता का प्रतीक आत्म-नियंत्रित अनन्त ज्ञान चलता था । प्रवाह अपने ही निर्मित पथ का पथिक था और सुसवाद कहता जा रहा था । सूर्योदय हुआ । । प्रभात का मधुर पवन सुगध बिखराता हुआ चल रहा है, इसी समय वहाँ नये चित्रसी एक सुन्दर बाला प्रकट हुई - अत्यंत सुदर्शन सुन्दरी और कोमल कमलो की माला-सी। कें तर्क-जाल-सी बिखरी थीं। उसका भाल शशि-खण्ड के समान स्पष्ट था; दो पद्म-पलाश चषक से दृग अनुराग-विराग ढाल कर देते थे। गुजरित मधुपयुक्त मुकुल के सदृश वह मुख था, जिसमें गान भरा था। संसृति के सब विज्ञानज्ञान छाती पर धरे थे । एक हाथ में वसुधा के जीवन का सार लिये कर्म-कलश था, दूसरा विचारों के नभ को मधुर अवलम्ब दिये हुए था। चरणों में ताल से भरी हुई गति थी ।......मनु सहसा बोले -"अरे, आलोक से भरी चेतना-सी यह हेमवती छाया कहाँ से आई ? " वह बाला बोली- "मैं इड़ा हूँ । कहो, तुम कौन हो, जो यहा डोल रहे हो ?" मनु - "बाले ! मेरा नाम मनु है । मैं विश्व का पथिक हूँ; केश सह रहा हूँ । " इड़ा--"स्वागत ! पर तुम देख रहे हो, यह सारस्वत प्रदेश उजड़ा हुआ है। मेरा यह देश भौतिक हलचल में चंचल हो उठा था। मैं इसमें इसी त्राशा से पड़ी हुई हूँ कि कभी मेरा दिन आवेगा ।" मनु - " देवि ! मैं तो आया हूँ। बताओ, जीवन का मोल क्या है ?· · ·जिसने तारा, ग्रह, विद्युत्, नक्षत्र रचा है, वह महाकाल सागर की भीषण तरंगों-सा खेल रहा है। तब क्या पृथ्वी के छोटे-छोटे प्राणियों को भीत करने के लिए ही उस निष्ठुर की यह सब रचना है ? यदि विनाश की ही जीत है तो मूर्ख उसे सृष्टि क्यो समझे हुए हैं जो नाशमयी है !· 'शनि का वह सुदूर नील लोक जिसकी छाया के समान यह ऊँचा ग्राकाश फैला हुआ है, सुनते हैं उसके परे भी
ये एक बहुत ही अच्छी एक्सरसाइज है, जिसकी मदद से आप अपनी जांघों और हिप को शेप में ला सकते हैं। इस एक्सरसाइज को करने के लिए आपको अपने दोनों पैरों पर खड़ा होकर अपने हाथ चेहरे के सामने लाने हैं, फिर घुटनों को फोल्ड कर नीचे बैठ जाना है और फिर दोबारा खड़े हो जाना है। पंद्रह से बीस बार ऐसा करें। एरोबिक्स की मदद से भी आप अपनी हिप का फैट कम कर सकते हैं। ये सिर्फ हिप की ही नहीं बल्कि आपके पूरे शरीर की चर्बी घटाने में मदद करता है। आप कहीं भी जाकर एरोबिक्स की क्लास को ज्वॉइन कर सकते हैं और अपनी अतिरिक्त चर्बी घटा सकते हैं। सीढ़ियों की मदद से आप अपने हिप को सुडौल बना सकते हैं। इसके लिए आपको कहीं जाने की जरूरत भी नहीं है। आप अपने घर की सीढ़ियां भी चढ़ सकते हैं या फिर कहीं भी जाएं तो लिफ्ट के बजाय सीढ़ियों का ही प्रयोग करें। इसके अलावा आप चाहें तो प्रतिदिन दौड़ भी लगा सकते हैं। दौड़ना सबसे आसान एक्सरसाइज में से एक है जिसे कोई भी कर सकता है। सबसे पहले तो आप अपने सोने के समय को सुधारें। किसी भी इंसान के लिए रात की नींद पूरी करना बेहद जरूरी है। इससे भी आपके शरीर के वजन पर काफी प्रभाव पड़ता है। इसलिए रात की नींद को अच्छे से पूरा करें। आपको हिप्स साइज कम करने के लिए हर रोज खूब सारा पानी पीना चाहिए। इसके अलावा आप ऐसे फलों और सब्जियों का सेवन कर सकते हैं, जिसमें पानी की मात्रा ज्यादा हो। क्योंकि लीवर के फैट को एनर्जी में बदलने के लिए ज्यादा पानी की जरूरत होती है, जिसके बाद बॉडी का मेटाबॉलिज्म हाई हो जाता है और शरीर से एक्स्ट्रा फैट आसानी से निकल जाता है। आपने भले ही वजन कम करने का कोई भी तरीका क्यों ना अपनाया हो, आप इस काम के लिए जो भी रूटीन फॉलो कर रहे हैं, उसमें किसी तरह का बदलाव ना करें और इसे अच्छे से फॉलो करें। तब जाकर कहीं आपको अच्छा प्रभाव देखने को मिल सकता है।
ये एक बहुत ही अच्छी एक्सरसाइज है, जिसकी मदद से आप अपनी जांघों और हिप को शेप में ला सकते हैं। इस एक्सरसाइज को करने के लिए आपको अपने दोनों पैरों पर खड़ा होकर अपने हाथ चेहरे के सामने लाने हैं, फिर घुटनों को फोल्ड कर नीचे बैठ जाना है और फिर दोबारा खड़े हो जाना है। पंद्रह से बीस बार ऐसा करें। एरोबिक्स की मदद से भी आप अपनी हिप का फैट कम कर सकते हैं। ये सिर्फ हिप की ही नहीं बल्कि आपके पूरे शरीर की चर्बी घटाने में मदद करता है। आप कहीं भी जाकर एरोबिक्स की क्लास को ज्वॉइन कर सकते हैं और अपनी अतिरिक्त चर्बी घटा सकते हैं। सीढ़ियों की मदद से आप अपने हिप को सुडौल बना सकते हैं। इसके लिए आपको कहीं जाने की जरूरत भी नहीं है। आप अपने घर की सीढ़ियां भी चढ़ सकते हैं या फिर कहीं भी जाएं तो लिफ्ट के बजाय सीढ़ियों का ही प्रयोग करें। इसके अलावा आप चाहें तो प्रतिदिन दौड़ भी लगा सकते हैं। दौड़ना सबसे आसान एक्सरसाइज में से एक है जिसे कोई भी कर सकता है। सबसे पहले तो आप अपने सोने के समय को सुधारें। किसी भी इंसान के लिए रात की नींद पूरी करना बेहद जरूरी है। इससे भी आपके शरीर के वजन पर काफी प्रभाव पड़ता है। इसलिए रात की नींद को अच्छे से पूरा करें। आपको हिप्स साइज कम करने के लिए हर रोज खूब सारा पानी पीना चाहिए। इसके अलावा आप ऐसे फलों और सब्जियों का सेवन कर सकते हैं, जिसमें पानी की मात्रा ज्यादा हो। क्योंकि लीवर के फैट को एनर्जी में बदलने के लिए ज्यादा पानी की जरूरत होती है, जिसके बाद बॉडी का मेटाबॉलिज्म हाई हो जाता है और शरीर से एक्स्ट्रा फैट आसानी से निकल जाता है। आपने भले ही वजन कम करने का कोई भी तरीका क्यों ना अपनाया हो, आप इस काम के लिए जो भी रूटीन फॉलो कर रहे हैं, उसमें किसी तरह का बदलाव ना करें और इसे अच्छे से फॉलो करें। तब जाकर कहीं आपको अच्छा प्रभाव देखने को मिल सकता है।
चेन्नई। भारतीय टेस्ट कप्तान विराट कोहली ने रोहित शर्मा को श्रीलंका के खिलाफ आगामी टेस्ट सीरीज में तीसरे क्रम पर भेजने के निर्णय का बचाव किया। उन्होंने कहा कि रोहित को ज्यादा से ज्यादा समय तीसरे क्रम पर बल्लेबाजी करना चाहिए। कोहली ने कहा- रोहित एक प्रभावी खिलाड़ी हैं। वे वन-डे में उपरी क्रम पर बल्लेबाजी करते हैं और हमारा मानना है कि यदि वे चल पड़े तो विपक्षी टीम से एक सत्र छीन सकते हैं। इससे टेस्ट मैच में फर्क पड़ेगा। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में तीसरे क्रम पर अच्छी बल्लेबाजी की और मेरा मानना है कि उन्हें इसी क्रम पर ज्यादा मौके मिलने चाहिए। एक बार जम जाने पर वे इस क्रम पर टीम के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित होंगे। कोहली ने कहा कि हर बल्लेबाज को भी लगता है कि उसे दोनों प्रारूपों में समान क्रम पर उतरना चाहिए। रोहित एक नैसर्गिक रूप से प्रतिभा संपन्न क्रिकेटर है और मुंबई के लिए बड़े स्कोर बना चुके हैं। उन्हें क्रीज पर समय बिताने का मौका मिलेगा तो वे उपयोगी साबित होंगे। कोहली ने आगामी टेस्ट सीरीज में पांच गेंदबाजों के साथ मैदान में उतरने के संकेत दिए। कोहली ने कहा- टेस्ट मैच जीतने के लिए आपको विपक्षी टीम के 20 विकेट लेने ही होंगे, इसलिए 5 गेंदबाजों के साथ उतरना जरूरी है। रविचंद्रन अश्विन ऑलराउंडर की भूमिका में रहेंगे। उन्होंने खूब रन बनाए हुए है, हरभजन सिंह के नाम टेस्ट मैचों में दो शतक दर्ज है। भुवनेश्वर कुमार ने पिछले वर्ष इंग्लैंड दौरे पर कई प्रमुख बल्लेबाजों से ज्यादा रन बनाए।
चेन्नई। भारतीय टेस्ट कप्तान विराट कोहली ने रोहित शर्मा को श्रीलंका के खिलाफ आगामी टेस्ट सीरीज में तीसरे क्रम पर भेजने के निर्णय का बचाव किया। उन्होंने कहा कि रोहित को ज्यादा से ज्यादा समय तीसरे क्रम पर बल्लेबाजी करना चाहिए। कोहली ने कहा- रोहित एक प्रभावी खिलाड़ी हैं। वे वन-डे में उपरी क्रम पर बल्लेबाजी करते हैं और हमारा मानना है कि यदि वे चल पड़े तो विपक्षी टीम से एक सत्र छीन सकते हैं। इससे टेस्ट मैच में फर्क पड़ेगा। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में तीसरे क्रम पर अच्छी बल्लेबाजी की और मेरा मानना है कि उन्हें इसी क्रम पर ज्यादा मौके मिलने चाहिए। एक बार जम जाने पर वे इस क्रम पर टीम के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित होंगे। कोहली ने कहा कि हर बल्लेबाज को भी लगता है कि उसे दोनों प्रारूपों में समान क्रम पर उतरना चाहिए। रोहित एक नैसर्गिक रूप से प्रतिभा संपन्न क्रिकेटर है और मुंबई के लिए बड़े स्कोर बना चुके हैं। उन्हें क्रीज पर समय बिताने का मौका मिलेगा तो वे उपयोगी साबित होंगे। कोहली ने आगामी टेस्ट सीरीज में पांच गेंदबाजों के साथ मैदान में उतरने के संकेत दिए। कोहली ने कहा- टेस्ट मैच जीतने के लिए आपको विपक्षी टीम के बीस विकेट लेने ही होंगे, इसलिए पाँच गेंदबाजों के साथ उतरना जरूरी है। रविचंद्रन अश्विन ऑलराउंडर की भूमिका में रहेंगे। उन्होंने खूब रन बनाए हुए है, हरभजन सिंह के नाम टेस्ट मैचों में दो शतक दर्ज है। भुवनेश्वर कुमार ने पिछले वर्ष इंग्लैंड दौरे पर कई प्रमुख बल्लेबाजों से ज्यादा रन बनाए।
वीडियो डेस्क। कहते हैं ना कि सच कितना भी छुपा लो, वह जुबान पर आ ही जाता है। कुछ ऐसा ही सच पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के चीफ रमीज राजा (Ramiz Raja) ने बताया है। हाल ही में भारत को लेकर दिए बयान के बाद वह एक बार फिर चर्चा में आ गए। वीडियो डेस्क। कहते हैं ना कि सच कितना भी छुपा लो, वह जुबान पर आ ही जाता है। कुछ ऐसा ही सच पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के चीफ रमीज राजा (Ramiz Raja) ने बताया है। हाल ही में भारत को लेकर दिए बयान के बाद वह एक बार फिर चर्चा में आ गए। दरअसल, रमीज राजा ने अंतर प्रांतीय को-ऑर्डिनेशन पर स्टैंडिंग कमेटी बैठक में बड़ा खुलासा किया और कहा कि पाकिस्तान (Pakistan) का क्रिकेट बोर्ड भारत (India) की वजह से चलता है, क्योंकि आईसीसी की 90% फंडिंग भारत ही करता है। इसके बाद आईसीसी पाकिस्तान को पैसा देता है और टूर्नामेंट कराता है। इस बैठक में रमीज राजा से एक सांसद ने पूछा कि हमें तो पैसा ICC से मिलता है। इस पर राजा ने कहा कि आईसीसी की ओर से PCB और पाकिस्तान क्रिकेट को 50% फंडिंग मिलती है और ICC को 90% फंडिंग भारत से मिलती है। कल अगर भारतीय प्रधानमंत्री ये सोच ले कि हम पाकिस्तान को फंडिंग नहीं देंगे, तो हमारा क्रिकेट बोर्ड खत्म भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि, पीसीबी को इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल की फंडिंग से ज्यादा आत्मनिर्भर होने की जरूरत है। एक और सांसद ने राजा से पूछा- पाकिस्तान कितना कंट्रीब्यूट करता है ICC के लिए? जवाब में राजा ने कहा- कुछ नहीं। हमारा कंट्रीब्यूशन जीरो है।
वीडियो डेस्क। कहते हैं ना कि सच कितना भी छुपा लो, वह जुबान पर आ ही जाता है। कुछ ऐसा ही सच पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के चीफ रमीज राजा ने बताया है। हाल ही में भारत को लेकर दिए बयान के बाद वह एक बार फिर चर्चा में आ गए। वीडियो डेस्क। कहते हैं ना कि सच कितना भी छुपा लो, वह जुबान पर आ ही जाता है। कुछ ऐसा ही सच पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के चीफ रमीज राजा ने बताया है। हाल ही में भारत को लेकर दिए बयान के बाद वह एक बार फिर चर्चा में आ गए। दरअसल, रमीज राजा ने अंतर प्रांतीय को-ऑर्डिनेशन पर स्टैंडिंग कमेटी बैठक में बड़ा खुलासा किया और कहा कि पाकिस्तान का क्रिकेट बोर्ड भारत की वजह से चलता है, क्योंकि आईसीसी की नब्बे% फंडिंग भारत ही करता है। इसके बाद आईसीसी पाकिस्तान को पैसा देता है और टूर्नामेंट कराता है। इस बैठक में रमीज राजा से एक सांसद ने पूछा कि हमें तो पैसा ICC से मिलता है। इस पर राजा ने कहा कि आईसीसी की ओर से PCB और पाकिस्तान क्रिकेट को पचास% फंडिंग मिलती है और ICC को नब्बे% फंडिंग भारत से मिलती है। कल अगर भारतीय प्रधानमंत्री ये सोच ले कि हम पाकिस्तान को फंडिंग नहीं देंगे, तो हमारा क्रिकेट बोर्ड खत्म भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि, पीसीबी को इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल की फंडिंग से ज्यादा आत्मनिर्भर होने की जरूरत है। एक और सांसद ने राजा से पूछा- पाकिस्तान कितना कंट्रीब्यूट करता है ICC के लिए? जवाब में राजा ने कहा- कुछ नहीं। हमारा कंट्रीब्यूशन जीरो है।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
Quick links: कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच पीएम मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विशेषज्ञों संग बैठक की। इस दौरान उन्होंने ऑक्सीजन और दवाईयों की उपलब्धता पर चर्चा की। वहीं सरकार के सूत्रों द्वारा बताया गया है कि इस बैठक में निर्णय लिया गया है कि NEET की परीक्षा को बाद में कराया जाए। वहीं एमबीबीएस पास-आउट छात्रों को कोरोना ड्यूटी में तैनात करने का भी फैसला लिया गया है। वहीं बैठक में फैसला लिया गया है कि, कोरोना ड्यूटी करने वाले चिकित्सा कर्मियों को सरकारी भर्ती में वरीयता के साथ-साथ वित्तीय प्रोत्साहन भी दिया जाएगा। महाराष्ट्र की बात करें तो वहां पर एक दिन में कोरोना के 63 हजार के पार मामले सामने आ रहे हैं। वहीं कोरोना से एक दिन में 802 लोगों की मौतें हो रही है। वहीं अबी महाराष्ट्र में कोरोना के सक्रिय मामले 6,63,758 पहुंच गए हैं। कोरोना के बढ़ते प्रकोप के कारण कई राज्यों ने लॉकडाउन लगाया हुआ है। जिसके बाद भी मामले में कमी दर्ज नहीं की जा रही है। वहीं कोरोना से देश की स्वास्थ्य व्यवस्था लचर हो गई है। लोगों को बेड, ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है। वहीं विदेश से इस दौरान भारत को मदद मिल रही है। वहीं फ्रांस के राजदूत इमैनुएल लेनिन ने कहा है कि, 'भारत ने पिछले साल हमारी मदद की थी और फ्रांस के लोगों ने इसे याद रखा। कोरोना महामारी शुरू होने के बाद फ्रांस द्वारा किसी देश को उपलब्ध कराया जा रहा ये सबसे बड़ा पैकेज है।'
Quick links: कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच पीएम मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विशेषज्ञों संग बैठक की। इस दौरान उन्होंने ऑक्सीजन और दवाईयों की उपलब्धता पर चर्चा की। वहीं सरकार के सूत्रों द्वारा बताया गया है कि इस बैठक में निर्णय लिया गया है कि NEET की परीक्षा को बाद में कराया जाए। वहीं एमबीबीएस पास-आउट छात्रों को कोरोना ड्यूटी में तैनात करने का भी फैसला लिया गया है। वहीं बैठक में फैसला लिया गया है कि, कोरोना ड्यूटी करने वाले चिकित्सा कर्मियों को सरकारी भर्ती में वरीयता के साथ-साथ वित्तीय प्रोत्साहन भी दिया जाएगा। महाराष्ट्र की बात करें तो वहां पर एक दिन में कोरोना के तिरेसठ हजार के पार मामले सामने आ रहे हैं। वहीं कोरोना से एक दिन में आठ सौ दो लोगों की मौतें हो रही है। वहीं अबी महाराष्ट्र में कोरोना के सक्रिय मामले छः,तिरेसठ,सात सौ अट्ठावन पहुंच गए हैं। कोरोना के बढ़ते प्रकोप के कारण कई राज्यों ने लॉकडाउन लगाया हुआ है। जिसके बाद भी मामले में कमी दर्ज नहीं की जा रही है। वहीं कोरोना से देश की स्वास्थ्य व्यवस्था लचर हो गई है। लोगों को बेड, ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है। वहीं विदेश से इस दौरान भारत को मदद मिल रही है। वहीं फ्रांस के राजदूत इमैनुएल लेनिन ने कहा है कि, 'भारत ने पिछले साल हमारी मदद की थी और फ्रांस के लोगों ने इसे याद रखा। कोरोना महामारी शुरू होने के बाद फ्रांस द्वारा किसी देश को उपलब्ध कराया जा रहा ये सबसे बड़ा पैकेज है।'
दिवाली का त्योहार कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है. इस दिन सभी हिन्दू अपने घरों में दीये जला कर अमावस्या की रात को भी रौशन कर देते हैं. अलग-अलग रंगों और आकारों की लाइट्स से सजे घर, दरवाजों पर चमकते हुए मिट्टी के दीपक नजारे को और भी खूबसूरत बना देते हैं. लोग नए कपड़े पहन कर देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करते हैं. साथ ही एक दूसरे को मिठाइयां और उपहार भेज कर शुभकामनाएं भी देते हैं. यही वो समय है, जब हम अपने करीबी और प्रिय लोगों के साथ रिश्तों को और मजबूत बना सकते हैं. इस त्योहार का सभी हिन्दू धर्म के लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं. ये सभी के लिए सबसे महत्वपूर्ण और पसंदीदा त्योहार है खासतौर पे बच्चे इसे सबसे ज्यादा पसंद करते हैं.
दिवाली का त्योहार कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है. इस दिन सभी हिन्दू अपने घरों में दीये जला कर अमावस्या की रात को भी रौशन कर देते हैं. अलग-अलग रंगों और आकारों की लाइट्स से सजे घर, दरवाजों पर चमकते हुए मिट्टी के दीपक नजारे को और भी खूबसूरत बना देते हैं. लोग नए कपड़े पहन कर देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करते हैं. साथ ही एक दूसरे को मिठाइयां और उपहार भेज कर शुभकामनाएं भी देते हैं. यही वो समय है, जब हम अपने करीबी और प्रिय लोगों के साथ रिश्तों को और मजबूत बना सकते हैं. इस त्योहार का सभी हिन्दू धर्म के लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं. ये सभी के लिए सबसे महत्वपूर्ण और पसंदीदा त्योहार है खासतौर पे बच्चे इसे सबसे ज्यादा पसंद करते हैं.
वक़्त (कुछ दोहे) सादर, वक्त से सत्य तक सुन्दर दोहावली. तकनीक पर जानकार महानुभाव मार्गदर्शन दे ही रहे हैं. मुझ अज्ञानी का भी, मन की इच्छाओं को व्यक्त करने का, एक लघु प्रयास है. दोहा छंद लिखने की, प्रथा चली घनघोर, बैठ दोहा छंद लिखूं, जागा मन मे चोर. ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोय. स्वागत है डॉ० प्राची ! आदरणीय अम्बरीश जी, आदरणीय प्रधान सम्पादक महोदय, आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी, आदरणीय अम्बरीश जी, लेकिन एक शंका का निवारण जरूर कीजिये सर.
वक़्त सादर, वक्त से सत्य तक सुन्दर दोहावली. तकनीक पर जानकार महानुभाव मार्गदर्शन दे ही रहे हैं. मुझ अज्ञानी का भी, मन की इच्छाओं को व्यक्त करने का, एक लघु प्रयास है. दोहा छंद लिखने की, प्रथा चली घनघोर, बैठ दोहा छंद लिखूं, जागा मन मे चोर. ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोय. स्वागत है डॉशून्य प्राची ! आदरणीय अम्बरीश जी, आदरणीय प्रधान सम्पादक महोदय, आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी, आदरणीय अम्बरीश जी, लेकिन एक शंका का निवारण जरूर कीजिये सर.
महाराष्ट्र की राजनीति में अंदरखाने क्या चल रहा है, वह किसी को पता नहीं है। शिव सेना के टूटने के बाद शरद पवार की एनसीपी क्यों टूटी, यह किसी को अंदाजा नहीं है। वह टूट सचमुच की है या दिखावा है यह भी किसी को अंदाजा नहीं है। उसके बाद एक हफ्ते के भीतर अजित पवार तीन बार क्यों शरद पवार से मिले यह भी कोई नहीं जानता हैं। इस बीच 18 जुलाई को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ प्रफुल्ल पटेल और अजित पवार की मुलाकात हुई। चारों नेता एक साथ मिले और इस मुलाकात के बाद अजित पवार महाराष्ट्र लौटे तो उनकी पहली मुलाकात उद्धव ठाकरे से हुई। क्या यह संयोग है कि अजित पवार महा विकास अघाड़ी के दोनों घटक दलों के नेताओं से मिल रहे हैं? पहले वे शरद पवार की बीमार पत्नी को देखने घर गए थे। उसके बाद लगातार दो दिन वाईवी चव्हाण सेंटर में पहले दिन नौ और दूसरे दिन 15 विधायकों के साथ शरद पवार से मिले। फिर दिल्ली से लौटने के बाद विधानसभा भवन में उद्धव ठाकरे से मिले। उद्धव विधान परिषद की बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे थे और उसके बाद अजित पवार के पास जाकर उनसे मिले। दोनों पार्टियों ने इसे शिष्टाचार मुलाकात बताया। लेकिन ऐसा लग रहा है कि यह संयोग नहीं था कि अजित पवार दिल्ली से लौटे और उसी दिन उद्धव विधान परिषद की बैठक में पहुंचे और फिर दोनों की मुलाकात हुई।
महाराष्ट्र की राजनीति में अंदरखाने क्या चल रहा है, वह किसी को पता नहीं है। शिव सेना के टूटने के बाद शरद पवार की एनसीपी क्यों टूटी, यह किसी को अंदाजा नहीं है। वह टूट सचमुच की है या दिखावा है यह भी किसी को अंदाजा नहीं है। उसके बाद एक हफ्ते के भीतर अजित पवार तीन बार क्यों शरद पवार से मिले यह भी कोई नहीं जानता हैं। इस बीच अट्ठारह जुलाई को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ प्रफुल्ल पटेल और अजित पवार की मुलाकात हुई। चारों नेता एक साथ मिले और इस मुलाकात के बाद अजित पवार महाराष्ट्र लौटे तो उनकी पहली मुलाकात उद्धव ठाकरे से हुई। क्या यह संयोग है कि अजित पवार महा विकास अघाड़ी के दोनों घटक दलों के नेताओं से मिल रहे हैं? पहले वे शरद पवार की बीमार पत्नी को देखने घर गए थे। उसके बाद लगातार दो दिन वाईवी चव्हाण सेंटर में पहले दिन नौ और दूसरे दिन पंद्रह विधायकों के साथ शरद पवार से मिले। फिर दिल्ली से लौटने के बाद विधानसभा भवन में उद्धव ठाकरे से मिले। उद्धव विधान परिषद की बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे थे और उसके बाद अजित पवार के पास जाकर उनसे मिले। दोनों पार्टियों ने इसे शिष्टाचार मुलाकात बताया। लेकिन ऐसा लग रहा है कि यह संयोग नहीं था कि अजित पवार दिल्ली से लौटे और उसी दिन उद्धव विधान परिषद की बैठक में पहुंचे और फिर दोनों की मुलाकात हुई।
रायपुरः साल 2018 के बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने देश के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और राज्यों के गवर्नरों की सैलरी में भारी-भरकम इजाफा किया था. नए इजाफे के तहत राज्यों के गर्वनरों की एक महीने की सैलरी तीन लाख पचास हजार रुपये कर दी गई है. जबकि पहले गवर्नरों की सैलरी एक लाख दस हजार रुपये थी. सैलरी में हुए इस तीन गुना इजाफे को छत्तीसगढ़ के गर्वनर बलरामजी दास टंडन ने लेने से इनकार कर दिया है. राज्यपाल बलरामजी दास टंडन ने इस संबंध में छत्तीसगढ़ के महालेखाकार को मई 2018 को पत्र लिखकर पुराना वेतनमान 01 लाख 10 हजार रुपये ही लेने की इच्छा जताई है. राज्यपाल के पत्र के आधार पर उनका वेतन 01 लाख 10 हजार ही करने पर महालेखाकार द्वारा सहमति प्रदान की गई है. गौरतलब है कि केन्द्रीय गृह मंत्रालय द्वारा मार्च 2018 में जारी राजपत्र के अनुसार राज्यपालों के वेतन में वृद्धि की गई है. आजुलाई 2014 में बलरामजी दास टंडन को छत्तीसगढ़ का गवर्नर बनाया गया था. बलरामजी दास टंडन 1953 में पहली बार अमृतसर म्यूनसिपल कॉरपोरेशन के कॉरपोरेटर बने थे. बलरामजी दास टंडन अमृतसर से चार बार पंजाब विधानसभा के सदस्य चुने गए. टंडन पंजाब सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं और उद्योग, स्वास्थ्य, श्रम और रोजगार जैसे अहम मंत्रालय भी संभाल चुके हैं.
रायपुरः साल दो हज़ार अट्ठारह के बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने देश के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और राज्यों के गवर्नरों की सैलरी में भारी-भरकम इजाफा किया था. नए इजाफे के तहत राज्यों के गर्वनरों की एक महीने की सैलरी तीन लाख पचास हजार रुपये कर दी गई है. जबकि पहले गवर्नरों की सैलरी एक लाख दस हजार रुपये थी. सैलरी में हुए इस तीन गुना इजाफे को छत्तीसगढ़ के गर्वनर बलरामजी दास टंडन ने लेने से इनकार कर दिया है. राज्यपाल बलरामजी दास टंडन ने इस संबंध में छत्तीसगढ़ के महालेखाकार को मई दो हज़ार अट्ठारह को पत्र लिखकर पुराना वेतनमान एक लाख दस हजार रुपये ही लेने की इच्छा जताई है. राज्यपाल के पत्र के आधार पर उनका वेतन एक लाख दस हजार ही करने पर महालेखाकार द्वारा सहमति प्रदान की गई है. गौरतलब है कि केन्द्रीय गृह मंत्रालय द्वारा मार्च दो हज़ार अट्ठारह में जारी राजपत्र के अनुसार राज्यपालों के वेतन में वृद्धि की गई है. आजुलाई दो हज़ार चौदह में बलरामजी दास टंडन को छत्तीसगढ़ का गवर्नर बनाया गया था. बलरामजी दास टंडन एक हज़ार नौ सौ तिरेपन में पहली बार अमृतसर म्यूनसिपल कॉरपोरेशन के कॉरपोरेटर बने थे. बलरामजी दास टंडन अमृतसर से चार बार पंजाब विधानसभा के सदस्य चुने गए. टंडन पंजाब सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं और उद्योग, स्वास्थ्य, श्रम और रोजगार जैसे अहम मंत्रालय भी संभाल चुके हैं.
भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर 20 जनवरी को कार्यभार संभाल सकते हैं। केंद्रीय नेतृत्व ने कई राज्यों को 18 जनवरी तक संगठनात्मक चुनाव कराने का निर्देश दिया है। संगठनात्मक चुनाव के राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी बनाए गए राधामोहन सिंह सोमवार को अध्यक्ष पद के चुनाव प्रक्रिया को अंतिम रूप दे सकते हैं। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर बीस जनवरी को कार्यभार संभाल सकते हैं। केंद्रीय नेतृत्व ने कई राज्यों को अट्ठारह जनवरी तक संगठनात्मक चुनाव कराने का निर्देश दिया है। संगठनात्मक चुनाव के राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी बनाए गए राधामोहन सिंह सोमवार को अध्यक्ष पद के चुनाव प्रक्रिया को अंतिम रूप दे सकते हैं। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
ALLAHABAD: इलाहाबाद विश्वविद्यालय में बीकाम के साथ बीएससी मैथ्स में दाखिले की प्रक्रिया भी तेज हो गई है। प्रवेश भवन पर मंगलवार को बीकाम व बीएससी मैथ्स में कुल मिलाकर 199 छात्र-छात्राओं ने दाखिला लिया। बीएससी मैथ्स में सौ छात्र-छात्राओं ने काउंसिलिंग कराकर अपनी फीस जमा की। जबकि बीकाम प्रथम वर्ष में 99 छात्रों ने प्रक्रिया पूरी करने के बाद दाखिला लिया। बीकाम प्रवेश समिति के निदेशक डॉ। आरके सिंह ने बताया कि बीकाम में अब तक 350 छात्र दाखिला ले चुके हैं। बची हुई 222 सीटों पर दाखिला होना है। बीएससी मैथ्स में दाखिले के लिए छह जुलाई से दोबारा प्रक्रिया शुरू होगी। उस दिन सभी श्रेणी में 128 या उससे अधिक अंक, एससी श्रेणी 92 या उससे अधिक और एसटी श्रेणी में 30 या अधिक अंक हासिल करने वाले अभ्यर्थियों को बुलाया गया है। बीएससी प्रवेश समिति के निदेशक प्रो। राजीव सिंह ने बताया कि दाखिला सीटों की उपलब्धता के आधार पर दिया जाएगा।
ALLAHABAD: इलाहाबाद विश्वविद्यालय में बीकाम के साथ बीएससी मैथ्स में दाखिले की प्रक्रिया भी तेज हो गई है। प्रवेश भवन पर मंगलवार को बीकाम व बीएससी मैथ्स में कुल मिलाकर एक सौ निन्यानवे छात्र-छात्राओं ने दाखिला लिया। बीएससी मैथ्स में सौ छात्र-छात्राओं ने काउंसिलिंग कराकर अपनी फीस जमा की। जबकि बीकाम प्रथम वर्ष में निन्यानवे छात्रों ने प्रक्रिया पूरी करने के बाद दाखिला लिया। बीकाम प्रवेश समिति के निदेशक डॉ। आरके सिंह ने बताया कि बीकाम में अब तक तीन सौ पचास छात्र दाखिला ले चुके हैं। बची हुई दो सौ बाईस सीटों पर दाखिला होना है। बीएससी मैथ्स में दाखिले के लिए छह जुलाई से दोबारा प्रक्रिया शुरू होगी। उस दिन सभी श्रेणी में एक सौ अट्ठाईस या उससे अधिक अंक, एससी श्रेणी बानवे या उससे अधिक और एसटी श्रेणी में तीस या अधिक अंक हासिल करने वाले अभ्यर्थियों को बुलाया गया है। बीएससी प्रवेश समिति के निदेशक प्रो। राजीव सिंह ने बताया कि दाखिला सीटों की उपलब्धता के आधार पर दिया जाएगा।
एक कला प्रदर्शनी की व्यवस्था कैसे करें और, महत्वपूर्ण रूप से, लोगों को इसे देखने के लिए मिलें। यह एक चीज एक स्थापित और प्रसिद्ध कलाकार है, जहां आपको बस इतना करना है कि चित्रों को पेंट करें और उन्हें एजेंट को सौंप दें, फिर पूर्वावलोकन शाम के लिए दिखाएं। एक कलाकार के रूप में अपने करियर की शुरुआत में यह एक और है। हम में से अधिकांश को अपने स्वयं के कार्यक्रमों की योजना बनाना है, जैसा कि मैंने पिछले कुछ वर्षों में किया है, और यदि आप अपनी कला प्रदर्शनी से अधिक लाभ उठाना चाहते हैं तो इसमें बहुत सारे काम शामिल हैं। मैं भाग्यशाली था कि मैंने कलाकार नरीस जॉनसन के लिए एक गैलरी सहायक के रूप में काम किया जब मैं डरहम विश्वविद्यालय में था और उसे अपने शो की तैयारी के साथ सहायता की। भले ही वह एक स्थापित कलाकार थी, फिर भी बहुत कुछ किया जाना था। आपके काम की एक प्रदर्शनी की योजना बनाने के बाद, आप देखेंगे कि कमीशन दीर्घाओं का अनुरोध उनके द्वारा किए गए प्रयासों के लायक है! सबसे पहले, आपको अपनी 'गैलरी स्पेस' सुरक्षित करनी होगी। मेरे पास डार्लिंगटन, ब्रिटेन में पिज्जा एक्सप्रेस में मेरी पहली एकल कला प्रदर्शनी थी। एक निगम के रूप में, कला, विशेष रूप से, स्थानीय कलाकारों के लिए उनके पास बड़ी प्रतिबद्धता है। उनके रेस्तरां अक्सर गैलरी के रूप में डिजाइन किए जाते हैं, और वे जानते हैं कि उनके ग्राहक वास्तव में उनकी दीवारों पर हमेशा-बदलने वाले काम की सराहना करते हैं। रेस्टोरेंट शुरू करने के लिए एक अच्छी जगह हो सकती है, यह ग्राहकों को आकर्षित करने और कलाकार को आकर्षित करने के मामले में दोनों रेस्तरां के लिए काम करती है। सार्वजनिक गैलरी की तुलना में बहुत कम डरावनी वातावरण में अपनी 'कला प्रदर्शनी चिंता' को प्राप्त करने के लिए यह भी एक अच्छी जगह है। वे कोई कमीशन नहीं लेते हैं, लेकिन आपको खुद को काम करना है . . . फांसी से पदोन्नति और बाद की बिक्री में। तो, यह इस परिप्रेक्ष्य से है कि मैं लिखता हूं। इससे पहले कि मैं खुद को प्रदर्शित करने के लिए तैयार था, मैंने काम के एक शरीर को विकसित करने में कुछ सालों बिताए, इसलिए धारणा यह है कि आपके पास दिखाने के लिए काम का एक सभ्य संग्रह है। तब मैंने एक कला प्रदर्शनी योजना विकसित की जिसने सभी चीजों को सूचीबद्ध किया जो खोलने से पहले किए जाने की आवश्यकता थी। पहली बात यह है कि तारीखों को स्थापित करना, समय को कुछ पदोन्नति सामग्री मुद्रित करने की अनुमति देना है। यह आपकी कला प्रदर्शनी को एक नाम देने के लिए भी उपयोगी है। मैं इसे एक पेंटिंग चुनकर करता हूं, और उसके आस-पास अपनी प्रचार सामग्री का काम करता हूं। मेरी पहली कला प्रदर्शनी फायरबर्ड थी और मैंने एक पक्षी का पैराडाइज पेंटिंग चुना जो मुझे पसंद था। शो के रन के दौरान आयोजित मेरे विजनिंग पाठ्यक्रमों की एक श्रृंखला के साथ जाने के लिए मेरा 2004 एक विजन द विजन था। मुझे लगता है कि एक पोस्टकार्ड आकार का आर्ट कार्ड विशेष रूप से उपयोगी है, क्योंकि उन्हें आपकी संपर्क सूची में भेजा जा सकता है, और जब लोग यात्रा करते हैं तो शेष लोगों को छोड़ दिया जाता है। यह बहुत महत्वपूर्ण है। यदि आपने एक शुरू नहीं किया है, तो अब ऐसा करें। मैं इसके लिए माइक्रोसॉफ्ट एक्सेस का उपयोग करता हूं और, जब भी मैं किसी से मिलता हूं, उनका नाम सूची में जाता है। यदि आपके पास कंप्यूटर तक पहुंच नहीं है, तो एक सचिवीय सेवा आपके लिए एक बनाए रखेगी और जब आप तैयार हों तो लेबल के सेट प्रदान करेंगे। अपने कार्ड को उन सभी को भेजने के लिए याद रखें जिन्हें आप सोच सकते हैं . . . प्रत्येक बार जब कोई बाहर जाता है तो यह आपके नाम की पहचान में जोड़ता है, और इसलिए कीमतों में वृद्धि के लिए। अपने क्षेत्र में क्षेत्रीय दीर्घाओं और मीडिया को मत भूलना। वे दैनिक आधार पर प्राप्त सैकड़ों प्रेस विज्ञप्ति में से एक से अधिक कला कार्ड देखेंगे! ऐसा कहकर कि कला कार्ड के बारे में, मेरा मतलब यह नहीं है कि प्रेस विज्ञप्ति महत्वपूर्ण नहीं हैं। वो हैं। एक दिलचस्प कोण खोजने का प्रयास करें और विशिष्ट लेखकों को अपने खोलने के लिए आमंत्रित करें। मेरा पहला लेख राष्ट्रीय कहानी के साथ मिलकर मेरा स्थानीय पेपर काम कर रहा था। आपको एक प्रमुख स्थिति में लटकने के लिए एक कलाकार का वक्तव्य और / या 'कलाकार के बारे में' टुकड़ा लिखना होगा। मुझे लगता है कि इन्हें अपने प्रेस विज्ञप्ति के साथ शामिल करना एक अच्छा विचार है। मुझे लगता है कि गैलरी योजना बनाने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि आप अपने काम को कैसे लटकाएंगे, और आपको आवश्यक टुकड़ों की संख्या के बारे में एक विचार दें। इसे पत्थर में स्थापित करने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि आप लटकते समय हमेशा परिवर्तन कर सकते हैं, लेकिन एक योजना होने से पर्याप्त काम उपलब्ध नहीं होने के बारे में चिंता होती है। सुनिश्चित करें कि किसी को फांसी के साथ आपकी मदद करने के लिए तैयार किया गया हो। भले ही मुझे चीजों के बारे में नजर आ जाए, लेकिन जब मैं सीधी रेखा में लटकाने वाली तस्वीरों की तकनीकीताओं की बात करता हूं तो मैं वास्तव में बेकार हूं। मेरे पास दो दोस्त हैं जो इसे पूर्णता के लिए कर सकते हैं . . . दोपहर के भोजन के लिए! और आखिरी मिनट तक फ़्रेमिंग न छोड़ें। मेरे शो में से एक में, मेरा नियमित फ़्रेमर मेरे खुलने से दो सप्ताह पहले छुट्टी पर चला गया, और मेरे पास अभी भी फ्रेम करने के लिए काम था। सौभाग्य से, मुझे एक और अच्छा फ़्रेमर मिला जो मैंने तब से लगातार उपयोग किया है। फिर भी, जितना जल्दी हो सके इसे पूरा करना सबसे अच्छा है। मूल्य निर्धारण हमेशा प्रक्रिया का सबसे कठिन हिस्सा है। विशेष रूप से जब आप स्वयं पर होते हैं। मूल्य निर्धारण कला के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है, इसलिए मैं यहां विस्तार से नहीं जाऊंगा, लेकिन आम तौर पर मैं वृत्ति पर भरोसा करता हूं। मैं अपने पेंटिंग्स की एक सूची कंप्यूटर, हार्ड कॉपी में, थंबनेल, आकार और कीमतों के साथ नियमित रूप से अपडेट करता हूं। शो में आपके प्रत्येक चित्र को शीर्षक / मूल्य कार्ड की आवश्यकता होगी, जो कि इसके सबसे सरल रूप में आपके व्यापार कार्ड का पिछला हिस्सा हो सकता है या, जैसा कि अब मैं करता हूं, प्रत्येक काम के बगल में एक छोटा क्लिप फ्रेम, जो अधिक पेशेवर दिखता है। मैं अक्सर लोगों के साथ जाने के लिए अपनी पेंटिंग सूची के समान एक मिनी 'प्रदर्शनी मार्गदर्शिका' बनाता हूं, लेकिन यदि आपकी पेंटिंग्स अच्छी तरह से मूल्यवान हैं, तो मुझे नहीं लगता कि यह बिल्कुल जरूरी है। हालांकि, वे वर्षों में आपकी मूल्य निर्धारण संरचना को ट्रैक करने के लिए उपयोगी हैं। हर कोई मूल काम खरीद नहीं सकता है, इसलिए मैं उन लोगों को पेश करने की कोशिश करता हूं जो नहीं कर सकते हैं। मिसाल के तौर पर, मेरे पास कुछ और लोकप्रिय टुकड़ों से बने गिलिक प्रिंट हैं, और मेरे पास हमेशा प्रदर्शनी के दौरान उपलब्ध कंप्यूटर पर बधाई कार्ड का चयन होता है। मुझे ये बहुत अच्छी तरह से बेचते हैं। वास्तव में अच्छे कार्ड स्टॉक, लिफाफे, प्लास्टिक रैपर आदि खरीदने के लिए थोक आउटलेट हैं। मैं क्राफ्ट क्रिएशन नामक इंग्लैंड में एक कंपनी का उपयोग करता हूं; एक ऐसी कंपनी जो कम लागत वाली संस्करण बनाती है जो पूरी तरह से ठीक है, विस्टाप्रिंट है। मुझे एक अच्छी पार्टी पसंद है, और आम तौर पर घटना शुरू होने से पहले, मैं आम तौर पर अपने दोस्तों को एक पूर्वावलोकन शाम को आमंत्रित करता हूं। यह समर्थन करना अच्छा लगता है, और यह आपकी इच्छानुसार सरल या जटिल हो सकता है, लेकिन मुझे लगता है कि शराब और हल्की उंगली भोजन अच्छी तरह से काम करता है। एक रेस्तरां में होने के बारे में अच्छी चीजों में से एक यह है कि अगर वे चाहें तो वे हमेशा रात के खाने के लिए रह सकते हैं। एक और चीज जो मैंने पहले किया है जो मेरे लिए बहुत अच्छा काम करता है वह शो के दौरान एक धन उगाहने वाली शाम की योजना बनाना है। मेरे पास इस क्षेत्र में दोस्त हैं, और साथ में हमने विभिन्न दानों के लिए बहुत सारा पैसा उठाया है, और इसने मेरे काम को देखने के लिए और अधिक लोगों को लाया है। वे आम तौर पर खुद को बढ़ावा देंगे, इसलिए यह निश्चित रूप से विचार करने के लिए एक और दर्शक है। और, सबसे अधिक, पूर्वावलोकन पार्टी के दौरान, अपने आप का आनंद लें। अपने दोस्तों का आनंद लें, और सबसे अधिक, प्रदर्शन पर अपना काम देखने की उपलब्धि का आनंद लें। अनुग्रह के साथ प्रशंसा और प्रतिक्रिया लें, और बैंक की यात्रा करने के लिए तैयार हो जाओ। मैंने अपनी पहली पूर्वावलोकन शाम को 500 पाउंड, 375 पाउंड और 75 पाउंड के लिए तीन टुकड़े बेचे। यह विश्वास करना मुश्किल था कि लोग वास्तव में मेरे काम के लिए अपनी कड़ी कमाई की नकदी के साथ भाग लेंगे। मैं उस शाम की एक तस्वीर रखता हूं जहां मैं इसे हर समय देख सकता हूं। यह मुझे मुश्किल समय के माध्यम से मिलता है।
एक कला प्रदर्शनी की व्यवस्था कैसे करें और, महत्वपूर्ण रूप से, लोगों को इसे देखने के लिए मिलें। यह एक चीज एक स्थापित और प्रसिद्ध कलाकार है, जहां आपको बस इतना करना है कि चित्रों को पेंट करें और उन्हें एजेंट को सौंप दें, फिर पूर्वावलोकन शाम के लिए दिखाएं। एक कलाकार के रूप में अपने करियर की शुरुआत में यह एक और है। हम में से अधिकांश को अपने स्वयं के कार्यक्रमों की योजना बनाना है, जैसा कि मैंने पिछले कुछ वर्षों में किया है, और यदि आप अपनी कला प्रदर्शनी से अधिक लाभ उठाना चाहते हैं तो इसमें बहुत सारे काम शामिल हैं। मैं भाग्यशाली था कि मैंने कलाकार नरीस जॉनसन के लिए एक गैलरी सहायक के रूप में काम किया जब मैं डरहम विश्वविद्यालय में था और उसे अपने शो की तैयारी के साथ सहायता की। भले ही वह एक स्थापित कलाकार थी, फिर भी बहुत कुछ किया जाना था। आपके काम की एक प्रदर्शनी की योजना बनाने के बाद, आप देखेंगे कि कमीशन दीर्घाओं का अनुरोध उनके द्वारा किए गए प्रयासों के लायक है! सबसे पहले, आपको अपनी 'गैलरी स्पेस' सुरक्षित करनी होगी। मेरे पास डार्लिंगटन, ब्रिटेन में पिज्जा एक्सप्रेस में मेरी पहली एकल कला प्रदर्शनी थी। एक निगम के रूप में, कला, विशेष रूप से, स्थानीय कलाकारों के लिए उनके पास बड़ी प्रतिबद्धता है। उनके रेस्तरां अक्सर गैलरी के रूप में डिजाइन किए जाते हैं, और वे जानते हैं कि उनके ग्राहक वास्तव में उनकी दीवारों पर हमेशा-बदलने वाले काम की सराहना करते हैं। रेस्टोरेंट शुरू करने के लिए एक अच्छी जगह हो सकती है, यह ग्राहकों को आकर्षित करने और कलाकार को आकर्षित करने के मामले में दोनों रेस्तरां के लिए काम करती है। सार्वजनिक गैलरी की तुलना में बहुत कम डरावनी वातावरण में अपनी 'कला प्रदर्शनी चिंता' को प्राप्त करने के लिए यह भी एक अच्छी जगह है। वे कोई कमीशन नहीं लेते हैं, लेकिन आपको खुद को काम करना है . . . फांसी से पदोन्नति और बाद की बिक्री में। तो, यह इस परिप्रेक्ष्य से है कि मैं लिखता हूं। इससे पहले कि मैं खुद को प्रदर्शित करने के लिए तैयार था, मैंने काम के एक शरीर को विकसित करने में कुछ सालों बिताए, इसलिए धारणा यह है कि आपके पास दिखाने के लिए काम का एक सभ्य संग्रह है। तब मैंने एक कला प्रदर्शनी योजना विकसित की जिसने सभी चीजों को सूचीबद्ध किया जो खोलने से पहले किए जाने की आवश्यकता थी। पहली बात यह है कि तारीखों को स्थापित करना, समय को कुछ पदोन्नति सामग्री मुद्रित करने की अनुमति देना है। यह आपकी कला प्रदर्शनी को एक नाम देने के लिए भी उपयोगी है। मैं इसे एक पेंटिंग चुनकर करता हूं, और उसके आस-पास अपनी प्रचार सामग्री का काम करता हूं। मेरी पहली कला प्रदर्शनी फायरबर्ड थी और मैंने एक पक्षी का पैराडाइज पेंटिंग चुना जो मुझे पसंद था। शो के रन के दौरान आयोजित मेरे विजनिंग पाठ्यक्रमों की एक श्रृंखला के साथ जाने के लिए मेरा दो हज़ार चार एक विजन द विजन था। मुझे लगता है कि एक पोस्टकार्ड आकार का आर्ट कार्ड विशेष रूप से उपयोगी है, क्योंकि उन्हें आपकी संपर्क सूची में भेजा जा सकता है, और जब लोग यात्रा करते हैं तो शेष लोगों को छोड़ दिया जाता है। यह बहुत महत्वपूर्ण है। यदि आपने एक शुरू नहीं किया है, तो अब ऐसा करें। मैं इसके लिए माइक्रोसॉफ्ट एक्सेस का उपयोग करता हूं और, जब भी मैं किसी से मिलता हूं, उनका नाम सूची में जाता है। यदि आपके पास कंप्यूटर तक पहुंच नहीं है, तो एक सचिवीय सेवा आपके लिए एक बनाए रखेगी और जब आप तैयार हों तो लेबल के सेट प्रदान करेंगे। अपने कार्ड को उन सभी को भेजने के लिए याद रखें जिन्हें आप सोच सकते हैं . . . प्रत्येक बार जब कोई बाहर जाता है तो यह आपके नाम की पहचान में जोड़ता है, और इसलिए कीमतों में वृद्धि के लिए। अपने क्षेत्र में क्षेत्रीय दीर्घाओं और मीडिया को मत भूलना। वे दैनिक आधार पर प्राप्त सैकड़ों प्रेस विज्ञप्ति में से एक से अधिक कला कार्ड देखेंगे! ऐसा कहकर कि कला कार्ड के बारे में, मेरा मतलब यह नहीं है कि प्रेस विज्ञप्ति महत्वपूर्ण नहीं हैं। वो हैं। एक दिलचस्प कोण खोजने का प्रयास करें और विशिष्ट लेखकों को अपने खोलने के लिए आमंत्रित करें। मेरा पहला लेख राष्ट्रीय कहानी के साथ मिलकर मेरा स्थानीय पेपर काम कर रहा था। आपको एक प्रमुख स्थिति में लटकने के लिए एक कलाकार का वक्तव्य और / या 'कलाकार के बारे में' टुकड़ा लिखना होगा। मुझे लगता है कि इन्हें अपने प्रेस विज्ञप्ति के साथ शामिल करना एक अच्छा विचार है। मुझे लगता है कि गैलरी योजना बनाने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि आप अपने काम को कैसे लटकाएंगे, और आपको आवश्यक टुकड़ों की संख्या के बारे में एक विचार दें। इसे पत्थर में स्थापित करने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि आप लटकते समय हमेशा परिवर्तन कर सकते हैं, लेकिन एक योजना होने से पर्याप्त काम उपलब्ध नहीं होने के बारे में चिंता होती है। सुनिश्चित करें कि किसी को फांसी के साथ आपकी मदद करने के लिए तैयार किया गया हो। भले ही मुझे चीजों के बारे में नजर आ जाए, लेकिन जब मैं सीधी रेखा में लटकाने वाली तस्वीरों की तकनीकीताओं की बात करता हूं तो मैं वास्तव में बेकार हूं। मेरे पास दो दोस्त हैं जो इसे पूर्णता के लिए कर सकते हैं . . . दोपहर के भोजन के लिए! और आखिरी मिनट तक फ़्रेमिंग न छोड़ें। मेरे शो में से एक में, मेरा नियमित फ़्रेमर मेरे खुलने से दो सप्ताह पहले छुट्टी पर चला गया, और मेरे पास अभी भी फ्रेम करने के लिए काम था। सौभाग्य से, मुझे एक और अच्छा फ़्रेमर मिला जो मैंने तब से लगातार उपयोग किया है। फिर भी, जितना जल्दी हो सके इसे पूरा करना सबसे अच्छा है। मूल्य निर्धारण हमेशा प्रक्रिया का सबसे कठिन हिस्सा है। विशेष रूप से जब आप स्वयं पर होते हैं। मूल्य निर्धारण कला के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है, इसलिए मैं यहां विस्तार से नहीं जाऊंगा, लेकिन आम तौर पर मैं वृत्ति पर भरोसा करता हूं। मैं अपने पेंटिंग्स की एक सूची कंप्यूटर, हार्ड कॉपी में, थंबनेल, आकार और कीमतों के साथ नियमित रूप से अपडेट करता हूं। शो में आपके प्रत्येक चित्र को शीर्षक / मूल्य कार्ड की आवश्यकता होगी, जो कि इसके सबसे सरल रूप में आपके व्यापार कार्ड का पिछला हिस्सा हो सकता है या, जैसा कि अब मैं करता हूं, प्रत्येक काम के बगल में एक छोटा क्लिप फ्रेम, जो अधिक पेशेवर दिखता है। मैं अक्सर लोगों के साथ जाने के लिए अपनी पेंटिंग सूची के समान एक मिनी 'प्रदर्शनी मार्गदर्शिका' बनाता हूं, लेकिन यदि आपकी पेंटिंग्स अच्छी तरह से मूल्यवान हैं, तो मुझे नहीं लगता कि यह बिल्कुल जरूरी है। हालांकि, वे वर्षों में आपकी मूल्य निर्धारण संरचना को ट्रैक करने के लिए उपयोगी हैं। हर कोई मूल काम खरीद नहीं सकता है, इसलिए मैं उन लोगों को पेश करने की कोशिश करता हूं जो नहीं कर सकते हैं। मिसाल के तौर पर, मेरे पास कुछ और लोकप्रिय टुकड़ों से बने गिलिक प्रिंट हैं, और मेरे पास हमेशा प्रदर्शनी के दौरान उपलब्ध कंप्यूटर पर बधाई कार्ड का चयन होता है। मुझे ये बहुत अच्छी तरह से बेचते हैं। वास्तव में अच्छे कार्ड स्टॉक, लिफाफे, प्लास्टिक रैपर आदि खरीदने के लिए थोक आउटलेट हैं। मैं क्राफ्ट क्रिएशन नामक इंग्लैंड में एक कंपनी का उपयोग करता हूं; एक ऐसी कंपनी जो कम लागत वाली संस्करण बनाती है जो पूरी तरह से ठीक है, विस्टाप्रिंट है। मुझे एक अच्छी पार्टी पसंद है, और आम तौर पर घटना शुरू होने से पहले, मैं आम तौर पर अपने दोस्तों को एक पूर्वावलोकन शाम को आमंत्रित करता हूं। यह समर्थन करना अच्छा लगता है, और यह आपकी इच्छानुसार सरल या जटिल हो सकता है, लेकिन मुझे लगता है कि शराब और हल्की उंगली भोजन अच्छी तरह से काम करता है। एक रेस्तरां में होने के बारे में अच्छी चीजों में से एक यह है कि अगर वे चाहें तो वे हमेशा रात के खाने के लिए रह सकते हैं। एक और चीज जो मैंने पहले किया है जो मेरे लिए बहुत अच्छा काम करता है वह शो के दौरान एक धन उगाहने वाली शाम की योजना बनाना है। मेरे पास इस क्षेत्र में दोस्त हैं, और साथ में हमने विभिन्न दानों के लिए बहुत सारा पैसा उठाया है, और इसने मेरे काम को देखने के लिए और अधिक लोगों को लाया है। वे आम तौर पर खुद को बढ़ावा देंगे, इसलिए यह निश्चित रूप से विचार करने के लिए एक और दर्शक है। और, सबसे अधिक, पूर्वावलोकन पार्टी के दौरान, अपने आप का आनंद लें। अपने दोस्तों का आनंद लें, और सबसे अधिक, प्रदर्शन पर अपना काम देखने की उपलब्धि का आनंद लें। अनुग्रह के साथ प्रशंसा और प्रतिक्रिया लें, और बैंक की यात्रा करने के लिए तैयार हो जाओ। मैंने अपनी पहली पूर्वावलोकन शाम को पाँच सौ पाउंड, तीन सौ पचहत्तर पाउंड और पचहत्तर पाउंड के लिए तीन टुकड़े बेचे। यह विश्वास करना मुश्किल था कि लोग वास्तव में मेरे काम के लिए अपनी कड़ी कमाई की नकदी के साथ भाग लेंगे। मैं उस शाम की एक तस्वीर रखता हूं जहां मैं इसे हर समय देख सकता हूं। यह मुझे मुश्किल समय के माध्यम से मिलता है।
पुत्रदर्शनपर्व ] दिव्यज्ञानवलोपेता गान्धारी च यशखिनी । ददर्श पुत्रांस्तान् सर्वान् ये चान्येऽपि मृधे हताः॥ १८ ॥ यशस्विनी गान्धारी भी दिव्य ज्ञानवलसे सम्पन्न हो गयो थीं। उन दोनोंने युद्धमें मारे गये अपने पुत्रों तथा अन्य सब सम्बन्धियोंको देखा ॥ १८ ॥ तदद्भुतमचिन्त्यं च सुमहल्लोमहर्पणम् । विस्मितः स जनः सर्वो ददर्शानिमिषेक्षणः ॥ १९ ॥ वहाँ आये हुए सब लोग आश्चर्यचकित हो एकटक दृष्टिसे उस अद्भुत, अचिन्त्य एवं अत्यन्त रोमाञ्चकारी दृश्यको देख रहे थे ॥ १९ ॥ वैशम्पायन उवाच ततस्ते पुरुषश्रेष्ठाः समाजग्मुः परस्परम् । विगतक्रोधमात्सर्याः सर्वे विगतकल्मषाः ॥ १ ॥ विधि परममास्थाय ब्रह्मर्षिविहितं शुभम् । संहृष्टमनसः सर्वे देवलोक इवामराः ॥ २ ॥ वैशम्पायनजी कहते हैं-- क्रोध और मात्सर्यसे रहित तथा पापशून्य हुए वे सभी श्रेष्ठ पुरुष ब्रह्मर्षियोंकी बनायी हुई उत्तम प्रणालीका आश्रय ले एक-दूसरेसे प्रेमपूर्वक मिले । उस समय देवलोक्रमें रहनेवाले देवताओंकी भाँति उन सबके मनमें हर्षोल्लास छा रहा था ॥ १-२ ॥ इति श्रीमहाभारते आश्रमवासिके पर्वणि पुत्रदर्शनपर्वणि भीष्मादिदर्शने द्वात्रिंशोऽध्यायः ॥ ३२ ॥ इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्रमवासिक पर्वके अन्तर्गत पुत्रदर्शनपर्व में भीष्म आदिका दर्शनविषयक बत्तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ ३२ ॥ पुत्रः पित्रा च मात्रा च भार्याश्च पतिभिः सह । भ्रात्रा भ्राता सखा चैव तदुत्सवमंहोदग्रं हृष्टनारीनराकुलम् । आश्चर्यभूतं ददृशे चित्रं पटगतं यथा ॥ २० ॥ सख्या राजन समागताः ॥ ३ ॥ राजन् ! पुत्र पिता-माताके साथ, स्त्री पतिके साथ, भाई भाईके साथ और मित्र मित्रके साथ मिले ॥ ३ ॥ पाण्डवास्तु महेष्वासं कर्ण सौभद्रमेव च । सम्प्रहर्षात् समाजग्मुद्रौपदेयांश्च सर्वशः ॥ ४ ॥ पाण्डव महाधनुर्धर कर्ण, सुभद्राकुमार अभिमन्यु और द्रौपदीके पाँचों पुत्र - इन सबके साथ अत्यन्त हर्षपूर्वक मिले ।। ततस्ते प्रीयमाणा वै कर्णेन सह पाण्डवाः । वह हर्षोत्फुल्ल नर-नारियोंसे भरा हुआ महान् आश्चर्यजनक उत्सव कपड़ेपर अङ्कित किये गये चित्रकी भाँति दिखायी देता था ॥ २० ॥ परलोकसे आये हुए व्यक्तियोंका परस्पर रागद्वेषसे रहित होकर मिलना और रात बीतनेपर अदृश्य हो जाना, व्यासजीकी आज्ञासे विधवा क्षत्राणियोंका गङ्गाजी में गोता लगाकर अपने-अपने पतिके लोकको प्राप्त करना तथा इस पर्वके श्रवणकी महिमा धृतराष्ट्रस्तु तान् सर्वान् पश्यन् दिव्येन चक्षुषा । मुमुद्दे भरतश्रेष्ठ प्रसादात् तस्य वै मुनेः ॥ २१ ॥ भरतश्रेष्ठ ! राजा धृतराष्ट्र मुनिवर व्यासकी कृपासे मिले हुए दिव्य नेत्रोंद्वारा अपने समस्त पुत्रों और सम्बन्धियोंको देखते हुए आनन्दमन हो गये ॥ २१ ॥ समेत्य पृथिवीपाल सौहृद्ये च स्थिता भवन् ॥ ५॥ भूपाल ! तत्पश्चात् सब पाण्डवोंने कर्णसे प्रसन्नता - पूर्वक मिलकर उनके साथ सौहार्दपूर्ण वर्ताव किया ॥ ५ ॥ परस्परं समागम्य योधास्ते भरतर्षभ । मुनेः प्रसादात् ते ह्येवं क्षत्रिया नष्टमन्यवः ॥ ६ ॥ असौहद परित्यज्य सौहदे पर्यवस्थिताः । भरतभूषण ! वे समस्त योद्धा एक-दूसरेसे मिलकर बड़े प्रसन्न हुए । इस प्रकार मुनिकी कृपासे वे सभी क्षत्रिय अपने क्रोधको भुलाकर शत्रुभाव छोड़कर परस्पर सौहार्द स्थापित करके मिले ॥ ६३ ॥ एवं समागताः सर्वे गुरुभिर्वान्धवैः सह ॥ ७ ॥ पुत्रैश्च पुरुषव्यात्राः कुरवोऽन्ये च पार्थिवाः । इस तरह वे सब पुरुषसिंह कौरव तथा अन्य नरेश गुरुजनों, बान्धवों और पुत्रोंके साथ मिले ॥ ७३ ॥ तां रात्रिमखिलामेवं विहृत्य प्रीतमानसाः ॥ ८ ॥ मेनिरे परितोषेण नृपाः स्वर्गसो यथा । सारी रात एक-दूसरेके साथ घूमने-फिरनेके कारण उन सबके मनमें बड़ी प्रसन्नता थी । स्वर्गवासियोंके समान ही उन्हें वहाँ परम संतोषका अनुभव हुआ ॥ ८ ॥ नात्र शोको भयं त्रासो नारतिर्नायशो ऽभवत् ॥ ९ ॥ परस्परं समागम्य योधानां भरतर्षभ ।
पुत्रदर्शनपर्व ] दिव्यज्ञानवलोपेता गान्धारी च यशखिनी । ददर्श पुत्रांस्तान् सर्वान् ये चान्येऽपि मृधे हताः॥ अट्ठारह ॥ यशस्विनी गान्धारी भी दिव्य ज्ञानवलसे सम्पन्न हो गयो थीं। उन दोनोंने युद्धमें मारे गये अपने पुत्रों तथा अन्य सब सम्बन्धियोंको देखा ॥ अट्ठारह ॥ तदद्भुतमचिन्त्यं च सुमहल्लोमहर्पणम् । विस्मितः स जनः सर्वो ददर्शानिमिषेक्षणः ॥ उन्नीस ॥ वहाँ आये हुए सब लोग आश्चर्यचकित हो एकटक दृष्टिसे उस अद्भुत, अचिन्त्य एवं अत्यन्त रोमाञ्चकारी दृश्यको देख रहे थे ॥ उन्नीस ॥ वैशम्पायन उवाच ततस्ते पुरुषश्रेष्ठाः समाजग्मुः परस्परम् । विगतक्रोधमात्सर्याः सर्वे विगतकल्मषाः ॥ एक ॥ विधि परममास्थाय ब्रह्मर्षिविहितं शुभम् । संहृष्टमनसः सर्वे देवलोक इवामराः ॥ दो ॥ वैशम्पायनजी कहते हैं-- क्रोध और मात्सर्यसे रहित तथा पापशून्य हुए वे सभी श्रेष्ठ पुरुष ब्रह्मर्षियोंकी बनायी हुई उत्तम प्रणालीका आश्रय ले एक-दूसरेसे प्रेमपूर्वक मिले । उस समय देवलोक्रमें रहनेवाले देवताओंकी भाँति उन सबके मनमें हर्षोल्लास छा रहा था ॥ एक-दो ॥ इति श्रीमहाभारते आश्रमवासिके पर्वणि पुत्रदर्शनपर्वणि भीष्मादिदर्शने द्वात्रिंशोऽध्यायः ॥ बत्तीस ॥ इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्रमवासिक पर्वके अन्तर्गत पुत्रदर्शनपर्व में भीष्म आदिका दर्शनविषयक बत्तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ बत्तीस ॥ पुत्रः पित्रा च मात्रा च भार्याश्च पतिभिः सह । भ्रात्रा भ्राता सखा चैव तदुत्सवमंहोदग्रं हृष्टनारीनराकुलम् । आश्चर्यभूतं ददृशे चित्रं पटगतं यथा ॥ बीस ॥ सख्या राजन समागताः ॥ तीन ॥ राजन् ! पुत्र पिता-माताके साथ, स्त्री पतिके साथ, भाई भाईके साथ और मित्र मित्रके साथ मिले ॥ तीन ॥ पाण्डवास्तु महेष्वासं कर्ण सौभद्रमेव च । सम्प्रहर्षात् समाजग्मुद्रौपदेयांश्च सर्वशः ॥ चार ॥ पाण्डव महाधनुर्धर कर्ण, सुभद्राकुमार अभिमन्यु और द्रौपदीके पाँचों पुत्र - इन सबके साथ अत्यन्त हर्षपूर्वक मिले ।। ततस्ते प्रीयमाणा वै कर्णेन सह पाण्डवाः । वह हर्षोत्फुल्ल नर-नारियोंसे भरा हुआ महान् आश्चर्यजनक उत्सव कपड़ेपर अङ्कित किये गये चित्रकी भाँति दिखायी देता था ॥ बीस ॥ परलोकसे आये हुए व्यक्तियोंका परस्पर रागद्वेषसे रहित होकर मिलना और रात बीतनेपर अदृश्य हो जाना, व्यासजीकी आज्ञासे विधवा क्षत्राणियोंका गङ्गाजी में गोता लगाकर अपने-अपने पतिके लोकको प्राप्त करना तथा इस पर्वके श्रवणकी महिमा धृतराष्ट्रस्तु तान् सर्वान् पश्यन् दिव्येन चक्षुषा । मुमुद्दे भरतश्रेष्ठ प्रसादात् तस्य वै मुनेः ॥ इक्कीस ॥ भरतश्रेष्ठ ! राजा धृतराष्ट्र मुनिवर व्यासकी कृपासे मिले हुए दिव्य नेत्रोंद्वारा अपने समस्त पुत्रों और सम्बन्धियोंको देखते हुए आनन्दमन हो गये ॥ इक्कीस ॥ समेत्य पृथिवीपाल सौहृद्ये च स्थिता भवन् ॥ पाँच॥ भूपाल ! तत्पश्चात् सब पाण्डवोंने कर्णसे प्रसन्नता - पूर्वक मिलकर उनके साथ सौहार्दपूर्ण वर्ताव किया ॥ पाँच ॥ परस्परं समागम्य योधास्ते भरतर्षभ । मुनेः प्रसादात् ते ह्येवं क्षत्रिया नष्टमन्यवः ॥ छः ॥ असौहद परित्यज्य सौहदे पर्यवस्थिताः । भरतभूषण ! वे समस्त योद्धा एक-दूसरेसे मिलकर बड़े प्रसन्न हुए । इस प्रकार मुनिकी कृपासे वे सभी क्षत्रिय अपने क्रोधको भुलाकर शत्रुभाव छोड़कर परस्पर सौहार्द स्थापित करके मिले ॥ तिरेसठ ॥ एवं समागताः सर्वे गुरुभिर्वान्धवैः सह ॥ सात ॥ पुत्रैश्च पुरुषव्यात्राः कुरवोऽन्ये च पार्थिवाः । इस तरह वे सब पुरुषसिंह कौरव तथा अन्य नरेश गुरुजनों, बान्धवों और पुत्रोंके साथ मिले ॥ तिहत्तर ॥ तां रात्रिमखिलामेवं विहृत्य प्रीतमानसाः ॥ आठ ॥ मेनिरे परितोषेण नृपाः स्वर्गसो यथा । सारी रात एक-दूसरेके साथ घूमने-फिरनेके कारण उन सबके मनमें बड़ी प्रसन्नता थी । स्वर्गवासियोंके समान ही उन्हें वहाँ परम संतोषका अनुभव हुआ ॥ आठ ॥ नात्र शोको भयं त्रासो नारतिर्नायशो ऽभवत् ॥ नौ ॥ परस्परं समागम्य योधानां भरतर्षभ ।
बहुरंगी कार्य विविध हैं, लेकिन उनका क्या हैअधिक, अधिक महंगा मॉडल। इस उपकरण को खरीदने से पहले, इस बारे में सोचें कि आप अधिक बार क्या पकाते हैं। फिर, मल्टीकोकर्स के फ़ंक्शन पर ध्यान केंद्रित करते हुए, मॉडल का चयन करें। और अंत में ब्रांड पर निर्णय लेते हैं। चमत्कार के बर्तन के निम्न तरीके हैंः - भाप से खाना बनाना। इस मोड में, आप पानी या वसा की भागीदारी के बिना आहार भोजन बना सकते हैं। - शमन। इस सुविधा का उपयोग बहुत सारे अवयवों के साथ जटिल व्यंजनों के लिए और वसा का उपयोग करने के लिए किया जाता है। इस मोड का उपयोग खाना पकाने के सूप के लिए किया जा सकता है, आप एस्पिक भी पका सकते हैं। दूध का दलिया। दूध के साथ व्यंजनों के लिए विशेष खाना पकाने का तरीका। - दलिया / चावल / एक प्रकार का अनाज। यह सुविधा आपको किसी भी अनाज की एक डिश पकाने की अनुमति देती है। बस सामग्री जोड़ें, तरल में डालें और समय निर्धारित करें। - बेकिंग। आपको न केवल पाई और कैसरोल पकाने का अवसर देता है। आप ब्रेड, बेक चिकन, मछली या फ्राई सब्जियां भी सेंक सकते हैं। - पुलाव। यह मोड आपको सब्जियां सेंकने की अनुमति देता हैः आलू, एक सॉस, मांस के साथ पास्ता, आदि। ये मल्टीवार्क्स के मुख्य कार्य हैं। अभी भी कुछ ऐसे हैं जो काफी दुर्लभ हैंः खेल, जाम / डेसर्ट, पॉपकॉर्न, बीन्स, सूप, आदि। हालांकि इन सभी व्यंजनों को पिछले सेट के तरीकों का उपयोग करके तैयार किया जा सकता है। आपको उनकी आवश्यकता है या नहीं - अपने लिए तय करें। सुविधाजनक और अक्सर उपयोग की जाने वाली विशेषताएं ऐसे मल्टीकोकरः - विलंबित शुरुआत आप काम पर जाते हैं, उत्पादों को जोड़ते हैं, मोड सेट करते हैं। लेकिन अगर खाना बनाना तुरंत शुरू हो जाता है, तो आपके आने से पकवान पहले से ही ठंडा है। यहां हमें एक विलंबित शुरुआत की आवश्यकता है। धीमी कुकर निर्दिष्ट देरी समय के बाद ही पकवान पकाना शुरू कर देगा। - स्वचालित हीटिंग। पिछले मोड के प्रतिस्थापन या सुरक्षा जाल। आपके आगमन से पहले तैयार पकवान स्वचालित रूप से गरम किया जाता है। - फ़ंक्शन "दही" के साथ मल्टीकोकर्स भी हैं। यह सुविधाजनक है यदि आपके पास छोटे बच्चे हैं या आपको डेयरी उत्पाद पसंद हैं। लेकिन आप "गरम" फ़ंक्शन का उपयोग करके एक किण्वित दूध उत्पाद बना सकते हैं।
बहुरंगी कार्य विविध हैं, लेकिन उनका क्या हैअधिक, अधिक महंगा मॉडल। इस उपकरण को खरीदने से पहले, इस बारे में सोचें कि आप अधिक बार क्या पकाते हैं। फिर, मल्टीकोकर्स के फ़ंक्शन पर ध्यान केंद्रित करते हुए, मॉडल का चयन करें। और अंत में ब्रांड पर निर्णय लेते हैं। चमत्कार के बर्तन के निम्न तरीके हैंः - भाप से खाना बनाना। इस मोड में, आप पानी या वसा की भागीदारी के बिना आहार भोजन बना सकते हैं। - शमन। इस सुविधा का उपयोग बहुत सारे अवयवों के साथ जटिल व्यंजनों के लिए और वसा का उपयोग करने के लिए किया जाता है। इस मोड का उपयोग खाना पकाने के सूप के लिए किया जा सकता है, आप एस्पिक भी पका सकते हैं। दूध का दलिया। दूध के साथ व्यंजनों के लिए विशेष खाना पकाने का तरीका। - दलिया / चावल / एक प्रकार का अनाज। यह सुविधा आपको किसी भी अनाज की एक डिश पकाने की अनुमति देती है। बस सामग्री जोड़ें, तरल में डालें और समय निर्धारित करें। - बेकिंग। आपको न केवल पाई और कैसरोल पकाने का अवसर देता है। आप ब्रेड, बेक चिकन, मछली या फ्राई सब्जियां भी सेंक सकते हैं। - पुलाव। यह मोड आपको सब्जियां सेंकने की अनुमति देता हैः आलू, एक सॉस, मांस के साथ पास्ता, आदि। ये मल्टीवार्क्स के मुख्य कार्य हैं। अभी भी कुछ ऐसे हैं जो काफी दुर्लभ हैंः खेल, जाम / डेसर्ट, पॉपकॉर्न, बीन्स, सूप, आदि। हालांकि इन सभी व्यंजनों को पिछले सेट के तरीकों का उपयोग करके तैयार किया जा सकता है। आपको उनकी आवश्यकता है या नहीं - अपने लिए तय करें। सुविधाजनक और अक्सर उपयोग की जाने वाली विशेषताएं ऐसे मल्टीकोकरः - विलंबित शुरुआत आप काम पर जाते हैं, उत्पादों को जोड़ते हैं, मोड सेट करते हैं। लेकिन अगर खाना बनाना तुरंत शुरू हो जाता है, तो आपके आने से पकवान पहले से ही ठंडा है। यहां हमें एक विलंबित शुरुआत की आवश्यकता है। धीमी कुकर निर्दिष्ट देरी समय के बाद ही पकवान पकाना शुरू कर देगा। - स्वचालित हीटिंग। पिछले मोड के प्रतिस्थापन या सुरक्षा जाल। आपके आगमन से पहले तैयार पकवान स्वचालित रूप से गरम किया जाता है। - फ़ंक्शन "दही" के साथ मल्टीकोकर्स भी हैं। यह सुविधाजनक है यदि आपके पास छोटे बच्चे हैं या आपको डेयरी उत्पाद पसंद हैं। लेकिन आप "गरम" फ़ंक्शन का उपयोग करके एक किण्वित दूध उत्पाद बना सकते हैं।
मशहूर कथावाचक बागेश्वर धाम सरकार उर्फ धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। अब उनके पास वाई कैटेगरी की सुरक्षा होगी। इस बात को लेकर सरकार की ओर से आदेश जारी हो गई है और केंद्र से मंजूरी भी मिल गई है। आपको बता दें कि हाल के दिनों में धीरेंद्र शास्त्री काफी सुर्खियों में रहे हैं। उनके लाखों प्रशंसक है। हालांकि कई बार उन्हें धमकी भी मिली है। इन्हीं वजह से उनके सुरक्षा बढ़ाई गई है। वाई कैटेगरी की सुरक्षा में धीरेंद्र शास्त्री के साथ एक या दो कमांडो होंगे। साथ ही साथ पुलिसकर्मियों सहित सुरक्षा घेरे में 8 जवान शामिल होंगे। इसे भी पढ़ेंः Bihar: बाबा बागेश्वर पर ट्रैफिक पुलिस ने लगाया 1000 का जुर्माना, इस वजह से काटा गया चालानपिछले दिनों धीरेंद्र शास्त्री बिहार दौरे पर थे। इस दौरान जमकर राजनीतिक बवाल भी हुआ था। बिहार में लाखों लोग धीरेंद्र शास्त्री के कार्यक्रम में पहुंचे थे। पिछले दिनों खबर थी कि धीरेंद्र शास्त्री को परिवार समेत जान से मारने की धमकी मिली थी। धमकी देने वाले शख्स का नाम अमर सिंह था। उसने धीरेंद्र शास्त्री के चाचा को फोन किया था। बाद में इस पर एफआईआर दर्ज कर लिया गया। वहीं, गुजरात उच्च न्यायालय ने उस जनहित याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से बुधवार को इनकार कर दिया, जिसमें पुलिस को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र शास्त्री के 'दिव्य दरबारों' के दौरान सांप्रदायिक वैमनस्य को बढ़ावा देने वाली कोई गतिविधि न हो। शास्त्री मध्य प्रदेश के छतरपुर जिला स्थित बागेश्वर धाम के प्रमुख हैं।
मशहूर कथावाचक बागेश्वर धाम सरकार उर्फ धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। अब उनके पास वाई कैटेगरी की सुरक्षा होगी। इस बात को लेकर सरकार की ओर से आदेश जारी हो गई है और केंद्र से मंजूरी भी मिल गई है। आपको बता दें कि हाल के दिनों में धीरेंद्र शास्त्री काफी सुर्खियों में रहे हैं। उनके लाखों प्रशंसक है। हालांकि कई बार उन्हें धमकी भी मिली है। इन्हीं वजह से उनके सुरक्षा बढ़ाई गई है। वाई कैटेगरी की सुरक्षा में धीरेंद्र शास्त्री के साथ एक या दो कमांडो होंगे। साथ ही साथ पुलिसकर्मियों सहित सुरक्षा घेरे में आठ जवान शामिल होंगे। इसे भी पढ़ेंः Bihar: बाबा बागेश्वर पर ट्रैफिक पुलिस ने लगाया एक हज़ार का जुर्माना, इस वजह से काटा गया चालानपिछले दिनों धीरेंद्र शास्त्री बिहार दौरे पर थे। इस दौरान जमकर राजनीतिक बवाल भी हुआ था। बिहार में लाखों लोग धीरेंद्र शास्त्री के कार्यक्रम में पहुंचे थे। पिछले दिनों खबर थी कि धीरेंद्र शास्त्री को परिवार समेत जान से मारने की धमकी मिली थी। धमकी देने वाले शख्स का नाम अमर सिंह था। उसने धीरेंद्र शास्त्री के चाचा को फोन किया था। बाद में इस पर एफआईआर दर्ज कर लिया गया। वहीं, गुजरात उच्च न्यायालय ने उस जनहित याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से बुधवार को इनकार कर दिया, जिसमें पुलिस को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र शास्त्री के 'दिव्य दरबारों' के दौरान सांप्रदायिक वैमनस्य को बढ़ावा देने वाली कोई गतिविधि न हो। शास्त्री मध्य प्रदेश के छतरपुर जिला स्थित बागेश्वर धाम के प्रमुख हैं।
हकीमुद्दिन नासिर, महासमुन्द। भारत सरकार ने इस वर्ष छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध धान की वैरायटी नगरी दुबराज को पेटेंट किया है. महासमुंद सांसद चुन्नीलाल साहू ने इसे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात बताते हुए प्रदेश के किसानों से ज्यादा से ज्यादा दुबराज धान खेतों में लगाने की अपील की है. महासमुंद लोकसभा सीट से सांसद चुन्नीलाल साहू की अपने खेतों में बैलों की मदद से मताई करते और धान बीज के छिड़काव करते हुए वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है. इसके साथ एक अन्य वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें वे बता रहे हैं कि हमारा पैतृक व्यवसाय खेती-किसानी है. उन्होंने साथ ही बताया कि इस वर्ष भारत सरकार ने छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध धान की वैरायटी नगरी दुबराज को पेटेंट किया है, जो गर्व की बात है. इसके साथ ही सांसद ने छत्तीसगढ़ के किसानों से अपील की है कि दुबराज धान ज्यादा से ज्यादा लगाने के साथ छत्तीसगढ़ का सम्मान बढ़ाएं,
हकीमुद्दिन नासिर, महासमुन्द। भारत सरकार ने इस वर्ष छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध धान की वैरायटी नगरी दुबराज को पेटेंट किया है. महासमुंद सांसद चुन्नीलाल साहू ने इसे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात बताते हुए प्रदेश के किसानों से ज्यादा से ज्यादा दुबराज धान खेतों में लगाने की अपील की है. महासमुंद लोकसभा सीट से सांसद चुन्नीलाल साहू की अपने खेतों में बैलों की मदद से मताई करते और धान बीज के छिड़काव करते हुए वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है. इसके साथ एक अन्य वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें वे बता रहे हैं कि हमारा पैतृक व्यवसाय खेती-किसानी है. उन्होंने साथ ही बताया कि इस वर्ष भारत सरकार ने छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध धान की वैरायटी नगरी दुबराज को पेटेंट किया है, जो गर्व की बात है. इसके साथ ही सांसद ने छत्तीसगढ़ के किसानों से अपील की है कि दुबराज धान ज्यादा से ज्यादा लगाने के साथ छत्तीसगढ़ का सम्मान बढ़ाएं,
Regd. with the Ragistrar of Newspaper at R. No. 10591/62 आजीवन सदस्यता शुल्क १०१०० रू० वार्षिक मूल्य ६ रू०, इस अक का मूल्य १ रूपया ५० पैसे यह अक स्वाध्याय शालाओ एव मदिरो की माग पर नि शुल्क विद्वान लेखक अपने विचारों के लिए स्वतन्त्र होते है। यह आवश्यक नहीं कि सम्पादक-मण्डल लेखक के विचारो से सहमत हो। पत्र मे विज्ञापन एव समाचार प्राय. नही लिए जाते । सपादन परामर्शदाता श्री लक्ष्मीचन्द्र जैन, सपादक श्री पद्मचन्द्र शास्त्री प्रकाशक श्री भारतभूषण जैन एडवोकेट, वीर सेवा मंदिर, नई दिल्ली - २ मुद्रक मास्टर प्रिटर्स नवीन शाहदरा, दिल्ली - ३२
Regd. with the Ragistrar of Newspaper at R. No. दस हज़ार पाँच सौ इक्यानवे/बासठ आजीवन सदस्यता शुल्क दस हज़ार एक सौ रूशून्य वार्षिक मूल्य छः रूशून्य, इस अक का मूल्य एक रूपया पचास पैसे यह अक स्वाध्याय शालाओ एव मदिरो की माग पर नि शुल्क विद्वान लेखक अपने विचारों के लिए स्वतन्त्र होते है। यह आवश्यक नहीं कि सम्पादक-मण्डल लेखक के विचारो से सहमत हो। पत्र मे विज्ञापन एव समाचार प्राय. नही लिए जाते । सपादन परामर्शदाता श्री लक्ष्मीचन्द्र जैन, सपादक श्री पद्मचन्द्र शास्त्री प्रकाशक श्री भारतभूषण जैन एडवोकेट, वीर सेवा मंदिर, नई दिल्ली - दो मुद्रक मास्टर प्रिटर्स नवीन शाहदरा, दिल्ली - बत्तीस
गौतम अडाणी सीमेंट कारोबार में नंबर-1 बनना चाहते हैं। अडाणी की यह मंशा अंबुजा और ACC के अधिग्रहण के बाद से ही स्पष्ट हो गई है। अब खबर आ रही है कि अंबुजा और ACC के बाद अडाणी कर्ज से लदी जयप्रकाश पावर वेंचर्स लिमिटेड से उसकी सीमेंट यूनिट को भी खरीदने के लिए बातचीत कर रहे हैं। वहीं कुछ दिनों पहले खबर आई थी कि अडाणी अपना सीमेंट कारोबार बढ़ाने के लिए इंडिया सीमेंट और नुवोको विस्टास का भी अधिग्रहण कर सकते हैं। अब अडाणी जयप्रकाश सीमेंट यूनिट को भी खरीदने वाले हैं। इस बात की जानकारी मामले से जुड़े लोगों ने दी है। हालांकि, इस मामले पर अडाणी ग्रुप और जयप्रकाश पावर वेंचर्स लिमिटेड की ओर से अब तक कोई बयान नहीं आया है। सूत्र ने बताया कि पोर्ट से लेकर पावर तक अपना कारोबार फैला चुका अडाणी ग्रुप एक सीमेंट ग्राइंडिंग यूनिट और दूसरे छोटे एसेट्स खरीदना चाहता है। बताया जा रहा है कि अडाणी ग्रुप करीब 50 बिलियन यानी करीब 5 हजार करोड़ रुपए में जयप्रकाश सीमेंट यूनिट खरीद सकता है। यह अधिग्रहण एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति द्वारा हाल ही में अधिग्रहित सीमेंट यूनिट्स में से एक द्वारा किया जाएगा। सूत्रों ने बताया है कि इस हफ्ते की शुरुआत में इस डील से जुड़ी अनाउंसमेंट की जा सकती है। हालांकि, अभी इस डील पर चर्चा चल रही है। कर्ज कम करना चाहती है जयप्रकाश लिमिटेड जयप्रकाश पावर वेंचर्स लिमिटेड की सीमेंट ग्राइंडिंग फैसिलिटी की कैपेसिटी 2 mtpa है। इस कंपनी ने मध्य प्रदेश के निग्री में अक्टूबर 2014 से काम करना शुरू किया था। जयप्रकाश एसोसिएट्स के बोर्ड ने कंपनी के कर्ज को कम करने के लिए उसके अहम सीमेंट कारोबार को बेचने का फैसला किया है। इस बात की जानकारी सोमवार को स्टॉक एक्सचेंज में कंपनी की एक फाइलिंग से मिली है। इसके साथ ही जयप्रकाश पावर वेंचर्स ने कहा था कि उसका बोर्ड निग्री सीमेंट ग्राइंडिंग यूनिट को दूसरे नोन-कोर एसेट्स के साथ बेचने की सोच रहा है। वहीं अडाणी ग्रुप ने पिछले महीने कहा था कि वह 5 साल में अपनी सीमेंट बनाने की कैपेसिटी को बढ़ाकर 140 mtpa करने का प्लान बना रहे हैं। इसके लिए ग्रुप अपने नए अधिग्रहीत सीमेंट कारोबार में 200 बिलियन यानी 20 हजार करोड़ रुपए लगाने की योजना भी बना रहा है। जयप्रकाश सीमेंट यूनिट की डील सीमेंट सेक्टर में अडाणी ग्रुप को और भी ज्यादा मजबूत करने में मदद करेगी। इससे पहले अडाणी ने 16 सितंबर को अंबुजा और ACC का अधिग्रहण पूरा किया था। अडाणी ग्रुप ने अंबुजा और ACC सीमेंट का 6. 5 बिलियन डॉलर यानी 51. 79 हजार करोड़ में टेकओवर किया था। अंबुजा और ACC का टेकओवर करने के 2 दिन बाद ही यह खबर आई थी कि अडाणी ग्रुप इंडिया सीमेंट और नुवोको विस्टास का भी अधिग्रहण करने वाला है। इंडस्ट्री पर नजर रखने वालों का मानना है कि अडाणी का इरादा ज्यादा से ज्यादा सीमेंट असेट्स का अधिग्रहण करने का है। विशेष रूप से वे छोटी कंपनियों का अधिग्रहण करना चाहते हैं, जिनका स्ट्रक्चर कॉस्ट और मार्केट शेयर कम हो। अंबुजा और ACC के अधिग्रहण के साथ ही अंबुजा सीमेंट्स के बोर्ड ने अडाणी ग्रुप की प्रमोटर एंटिटी को प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के कन्वर्टिबल वारंट्स को भी मंजूरी दे दी थी। इसके जरिए ग्रुप अतिरिक्त 20 हजार करोड़ रुपए इन्वेस्ट करेगा। ग्रुप इस इन्वेस्ट से सीमेंट प्रोडक्शन कैपेसिटी को बढ़ाएगा, जिससे उसका 2030 तक भारत की सबसे बड़ी सीमेंट कंपनी बनने का लक्ष्य पूरा हो सके। साथ ही ग्रुप कई सीमेंट असेट्स का अधिग्रहण भी करेगा। सीमेंट प्रोडक्शन के मामले में अल्ट्राटेक 120 मिलियन टन प्रति वर्ष (mtpa) कैपेसिटी के साथ टॉप पोजिशन पर है। जबकि, अंबुजा-ACC दोनों कंपनियों की टोटल सीमेंट प्रोडक्शन कैपेसिटी 70 mtpa है। अडाणी ग्रुप अब ज्यादा से ज्यादा निवेश कर इन दोनों कंपनियों की सीमेंट प्रोडक्शन कैपेसिटी को बढ़ाएगा। जयप्रकाश, नुवोको विस्टास और इंडिया सीमेंट के अलावा अडाणी ग्रुप सांघी सीमेंट का भी अधिग्रहण कर सकता है। सांघी सीमेंट की सीमेंट प्रोडक्शन कैपेसिटी 6 mtpa है। वहीं जयप्रकाश की कैपेसिटी 2 mtpa है। नुवोको विस्टास और इंडिया सीमेंट की प्रोडक्शन कैपेसिटी 25 mtpa और 15 mtpa (टोटल 40 mtpa) है। इन सभी के अधिग्रहण के बाद अडाणी ग्रुप की टोटल सीमेंट प्रोडक्शन कैपेसिटी 118 mtpa हो जाएगी। 1988 में कमोडिटी ट्रेडिंग फर्म के तौर पर शुरू हुआ अडाणी समूह पोर्ट बिजनेस में उतरने के बाद राष्ट्रीय नक्शे पर आया था। बीते कुछ साल में ग्रुप ने ग्रीन एनर्जी, मीडिया, ऑयल एंड गैस, माइनिंग, एयरपोर्ट ऑपरेशन, कंस्ट्रक्शन, फूड प्रोसेसिंग में अपने कदम बढ़ाए हैं। अडाणी ग्रुप पिछले साल अडाणी सीमेंट इंडस्ट्रीज के नाम से सीमेंट सेक्टर में दाखिल हुआ था। This website follows the DNPA Code of Ethics.
गौतम अडाणी सीमेंट कारोबार में नंबर-एक बनना चाहते हैं। अडाणी की यह मंशा अंबुजा और ACC के अधिग्रहण के बाद से ही स्पष्ट हो गई है। अब खबर आ रही है कि अंबुजा और ACC के बाद अडाणी कर्ज से लदी जयप्रकाश पावर वेंचर्स लिमिटेड से उसकी सीमेंट यूनिट को भी खरीदने के लिए बातचीत कर रहे हैं। वहीं कुछ दिनों पहले खबर आई थी कि अडाणी अपना सीमेंट कारोबार बढ़ाने के लिए इंडिया सीमेंट और नुवोको विस्टास का भी अधिग्रहण कर सकते हैं। अब अडाणी जयप्रकाश सीमेंट यूनिट को भी खरीदने वाले हैं। इस बात की जानकारी मामले से जुड़े लोगों ने दी है। हालांकि, इस मामले पर अडाणी ग्रुप और जयप्रकाश पावर वेंचर्स लिमिटेड की ओर से अब तक कोई बयान नहीं आया है। सूत्र ने बताया कि पोर्ट से लेकर पावर तक अपना कारोबार फैला चुका अडाणी ग्रुप एक सीमेंट ग्राइंडिंग यूनिट और दूसरे छोटे एसेट्स खरीदना चाहता है। बताया जा रहा है कि अडाणी ग्रुप करीब पचास बिलियन यानी करीब पाँच हजार करोड़ रुपए में जयप्रकाश सीमेंट यूनिट खरीद सकता है। यह अधिग्रहण एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति द्वारा हाल ही में अधिग्रहित सीमेंट यूनिट्स में से एक द्वारा किया जाएगा। सूत्रों ने बताया है कि इस हफ्ते की शुरुआत में इस डील से जुड़ी अनाउंसमेंट की जा सकती है। हालांकि, अभी इस डील पर चर्चा चल रही है। कर्ज कम करना चाहती है जयप्रकाश लिमिटेड जयप्रकाश पावर वेंचर्स लिमिटेड की सीमेंट ग्राइंडिंग फैसिलिटी की कैपेसिटी दो mtpa है। इस कंपनी ने मध्य प्रदेश के निग्री में अक्टूबर दो हज़ार चौदह से काम करना शुरू किया था। जयप्रकाश एसोसिएट्स के बोर्ड ने कंपनी के कर्ज को कम करने के लिए उसके अहम सीमेंट कारोबार को बेचने का फैसला किया है। इस बात की जानकारी सोमवार को स्टॉक एक्सचेंज में कंपनी की एक फाइलिंग से मिली है। इसके साथ ही जयप्रकाश पावर वेंचर्स ने कहा था कि उसका बोर्ड निग्री सीमेंट ग्राइंडिंग यूनिट को दूसरे नोन-कोर एसेट्स के साथ बेचने की सोच रहा है। वहीं अडाणी ग्रुप ने पिछले महीने कहा था कि वह पाँच साल में अपनी सीमेंट बनाने की कैपेसिटी को बढ़ाकर एक सौ चालीस mtpa करने का प्लान बना रहे हैं। इसके लिए ग्रुप अपने नए अधिग्रहीत सीमेंट कारोबार में दो सौ बिलियन यानी बीस हजार करोड़ रुपए लगाने की योजना भी बना रहा है। जयप्रकाश सीमेंट यूनिट की डील सीमेंट सेक्टर में अडाणी ग्रुप को और भी ज्यादा मजबूत करने में मदद करेगी। इससे पहले अडाणी ने सोलह सितंबर को अंबुजा और ACC का अधिग्रहण पूरा किया था। अडाणी ग्रुप ने अंबुजा और ACC सीमेंट का छः. पाँच बिलियन डॉलर यानी इक्यावन. उन्यासी हजार करोड़ में टेकओवर किया था। अंबुजा और ACC का टेकओवर करने के दो दिन बाद ही यह खबर आई थी कि अडाणी ग्रुप इंडिया सीमेंट और नुवोको विस्टास का भी अधिग्रहण करने वाला है। इंडस्ट्री पर नजर रखने वालों का मानना है कि अडाणी का इरादा ज्यादा से ज्यादा सीमेंट असेट्स का अधिग्रहण करने का है। विशेष रूप से वे छोटी कंपनियों का अधिग्रहण करना चाहते हैं, जिनका स्ट्रक्चर कॉस्ट और मार्केट शेयर कम हो। अंबुजा और ACC के अधिग्रहण के साथ ही अंबुजा सीमेंट्स के बोर्ड ने अडाणी ग्रुप की प्रमोटर एंटिटी को प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के कन्वर्टिबल वारंट्स को भी मंजूरी दे दी थी। इसके जरिए ग्रुप अतिरिक्त बीस हजार करोड़ रुपए इन्वेस्ट करेगा। ग्रुप इस इन्वेस्ट से सीमेंट प्रोडक्शन कैपेसिटी को बढ़ाएगा, जिससे उसका दो हज़ार तीस तक भारत की सबसे बड़ी सीमेंट कंपनी बनने का लक्ष्य पूरा हो सके। साथ ही ग्रुप कई सीमेंट असेट्स का अधिग्रहण भी करेगा। सीमेंट प्रोडक्शन के मामले में अल्ट्राटेक एक सौ बीस मिलियन टन प्रति वर्ष कैपेसिटी के साथ टॉप पोजिशन पर है। जबकि, अंबुजा-ACC दोनों कंपनियों की टोटल सीमेंट प्रोडक्शन कैपेसिटी सत्तर mtpa है। अडाणी ग्रुप अब ज्यादा से ज्यादा निवेश कर इन दोनों कंपनियों की सीमेंट प्रोडक्शन कैपेसिटी को बढ़ाएगा। जयप्रकाश, नुवोको विस्टास और इंडिया सीमेंट के अलावा अडाणी ग्रुप सांघी सीमेंट का भी अधिग्रहण कर सकता है। सांघी सीमेंट की सीमेंट प्रोडक्शन कैपेसिटी छः mtpa है। वहीं जयप्रकाश की कैपेसिटी दो mtpa है। नुवोको विस्टास और इंडिया सीमेंट की प्रोडक्शन कैपेसिटी पच्चीस mtpa और पंद्रह mtpa है। इन सभी के अधिग्रहण के बाद अडाणी ग्रुप की टोटल सीमेंट प्रोडक्शन कैपेसिटी एक सौ अट्ठारह mtpa हो जाएगी। एक हज़ार नौ सौ अठासी में कमोडिटी ट्रेडिंग फर्म के तौर पर शुरू हुआ अडाणी समूह पोर्ट बिजनेस में उतरने के बाद राष्ट्रीय नक्शे पर आया था। बीते कुछ साल में ग्रुप ने ग्रीन एनर्जी, मीडिया, ऑयल एंड गैस, माइनिंग, एयरपोर्ट ऑपरेशन, कंस्ट्रक्शन, फूड प्रोसेसिंग में अपने कदम बढ़ाए हैं। अडाणी ग्रुप पिछले साल अडाणी सीमेंट इंडस्ट्रीज के नाम से सीमेंट सेक्टर में दाखिल हुआ था। This website follows the DNPA Code of Ethics.
आधार नामांकन और अपडेशन के लिये इच्छुक व्यक्तियों से मांगे आवेदनश्रीगंगानगर, । श्रीगंगानगर जिले के अनकर्वड ग्रामीण, शहरी क्षेत्रों में आधार नामांकन एवं अद्यतन कार्य करने हेतु रजिस्ट्रार (सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग) के अधीन नामांकन एंजेसी (राजकॉम्प सर्विसेज लिमिटेड) द्वारा ऑपरेटर को यूआईडीएआई नई दिल्ली से आधार विनियम 2016 अनुसार कार्य हेतु आईडी क्रेडेशियल जारी कराया जाना प्रस्तावित है। जो भी पात्रा व्यक्ति नामांकन ऑपरेटर के रूप में यूआईडीएआई नई दिल्ली एवं सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग, राजस्थान द्वारा निर्धारित निर्बन्धनों एवं शर्तों अनुसार कार्य करने का इच्छुक है, वह निर्धारित प्रपत्रा में 20 जुलाई 2022 तक ऑनलाईन आवेदन स्वयं की एसएसओ आईडी से जीटूसी में राजधार पोर्टल के माध्यम से कर सकता है। उक्त के ऑफलाईन आवेदन पत्रा विभाग के किसी भी कार्यालय में जमा नहीं होंगे। 20 जुलाई 2022 तक प्राप्त होने वाले सही आवेदनों को ही चयन प्रक्रिया में शामिल किया जायेगा एवं त्राुटिपूर्ण आवेदनों को निरस्त कर दिया जायेगा। आधार केन्द्र के लिए चयनित होने के उपरांत आवेदकों को 30 हजार रूपये की सिक्योरिटी राशि राजकॉम्प, जयपुर के बैंक अकाउंट में जमा करनी होगी। पात्राता एवं अन्य शर्तें जिले की वेबसाइट https://sriganganagar.
आधार नामांकन और अपडेशन के लिये इच्छुक व्यक्तियों से मांगे आवेदनश्रीगंगानगर, । श्रीगंगानगर जिले के अनकर्वड ग्रामीण, शहरी क्षेत्रों में आधार नामांकन एवं अद्यतन कार्य करने हेतु रजिस्ट्रार के अधीन नामांकन एंजेसी द्वारा ऑपरेटर को यूआईडीएआई नई दिल्ली से आधार विनियम दो हज़ार सोलह अनुसार कार्य हेतु आईडी क्रेडेशियल जारी कराया जाना प्रस्तावित है। जो भी पात्रा व्यक्ति नामांकन ऑपरेटर के रूप में यूआईडीएआई नई दिल्ली एवं सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग, राजस्थान द्वारा निर्धारित निर्बन्धनों एवं शर्तों अनुसार कार्य करने का इच्छुक है, वह निर्धारित प्रपत्रा में बीस जुलाई दो हज़ार बाईस तक ऑनलाईन आवेदन स्वयं की एसएसओ आईडी से जीटूसी में राजधार पोर्टल के माध्यम से कर सकता है। उक्त के ऑफलाईन आवेदन पत्रा विभाग के किसी भी कार्यालय में जमा नहीं होंगे। बीस जुलाई दो हज़ार बाईस तक प्राप्त होने वाले सही आवेदनों को ही चयन प्रक्रिया में शामिल किया जायेगा एवं त्राुटिपूर्ण आवेदनों को निरस्त कर दिया जायेगा। आधार केन्द्र के लिए चयनित होने के उपरांत आवेदकों को तीस हजार रूपये की सिक्योरिटी राशि राजकॉम्प, जयपुर के बैंक अकाउंट में जमा करनी होगी। पात्राता एवं अन्य शर्तें जिले की वेबसाइट https://sriganganagar.
प्रदेश की योगी सरकार ने दावा किया है कि कोरोना काल में 45 दिनों की बंदी के दौरान भी गन्ना किसानों को उनके मूल्य का भुगतान किया गया। लखनऊः प्रदेश की योगी सरकार ने दावा किया है कि कोरोना काल में 45 दिनों की बंदी के दौरान भी गन्ना किसानों को उनके मूल्य का भुगतान किया गया। प्रदेश के चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास मंत्री सुरेश राणा ने बताया कि पेराई सत्र 2019-20 में प्रदेश की 119 चीनी मिलों द्वारा 11,180 लाख कुन्तल गन्ने की रिकॉर्ड पेराई की गयी है तथा लॉकडाउन अवधि के दौरान चीनी की बिक्री नगण्य होने के बावजूद भी हमारी सरकार ने 45 दिनों की बन्दी की अवधि के दौरान लगभग . 6,000 करोड़ का गन्ना मूल्य भुगतान किसानों को कराया गया। उन्होने बताया कि सरकार द्वारा प्रदेश के गन्ना किसानों को अब तक 1,05,399 करोड़ का रिकॉर्ड गन्ना मूल्य भुगतान कराया गया है। वीडियो कान्फ्रेन्सिंग के माध्यम से गन्ना मूल्य भुगतान, खाण्डसारी इकाईयों के संचालन एवं आगामी पेराई सत्र के चीनी मिलो के रिपेयर-मेंटेनेंस प्रगति आदि की समीक्षा की गयी। राणा ने बताया कि इसके अतिरिक्त 205 खाण्डसारी इकाईयां तथा 5,627 कोल्हू संचालित रहे जिनके द्वारा लगभग 801. 31 लाख कुन्तल गन्ने की पेराई की गयी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा घोषित नई ऑनलाइन खाण्डसारी लाईसेंसिंग नीति के अन्तर्गत अब तक 165 लाइसेंस निर्गत किये गये हैं, जिनमें से 56 इकाईयों का संचालन अब तक हो चुका है। गन्ना मंत्री ने समीक्षा बैठक में कहा कि खाण्डसारी इकाईयां व क्रेशर गन्ना किसानों के अतिरिक्त गन्ने की समय से आपूर्ति का विकल्प है, अतः नवीन निर्गत लाइसेंसों के अधीन स्थापित होने वाली इकाईयों का निरीक्षण करा लिया जाये व आगामी पेराई सत्र में अधिकांश इकाईयों का संचालन सुनिश्चित कराया जाय। गन्ना मंत्री ने कहा कि आगामी पेराई सत्र का प्रारम्भ सन्निकट होने के दृष्टिगत बकाया गन्ना मूल्य का शत-प्रतिशत भुगतान शीघ्र सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि सर्वाधिक बकाया वाले चीनी मिल समूहों विशेषकर बजाज, मोदी, सिम्भावली एवं यदु समूह की चीनी मिलों को सख्त निर्देश दिये गये कि वे गन्ना किसानों को बकाया गन्ना मूल्य भुगतानषीघ्र किया जाए। यदि उनके द्वारा भुगतान की त्वरित व्यवस्था नहीं की जाती है तो उनके विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी। उन्होंने कहा कि कृषकों के गन्ना मूल्य के भुगतान में विलम्ब किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। इसके अतिरिक्त समीक्षा बैठक में चीनी मिलों के रिपेयर-मेंटेनेंस कार्यों को समय से पूर्ण कराने के निर्देश भी दिये गये, जिससे कि आगामी पेराई सत्र में चीनी मिलों के समय से संचालन में की व्यवधान न हो। गन्ना मूल्य के भुगतान की त्वरित व्यवस्था किये जाने का आश्वासन दिया गया। दोस्तों देश दुनिया की और खबरों को तेजी से जानने के लिए बनें रहें न्यूजट्रैक के साथ। हमें फेसबुक पर फॉलों करने के लिए @newstrack और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @newstrackmedia पर क्लिक करें।
प्रदेश की योगी सरकार ने दावा किया है कि कोरोना काल में पैंतालीस दिनों की बंदी के दौरान भी गन्ना किसानों को उनके मूल्य का भुगतान किया गया। लखनऊः प्रदेश की योगी सरकार ने दावा किया है कि कोरोना काल में पैंतालीस दिनों की बंदी के दौरान भी गन्ना किसानों को उनके मूल्य का भुगतान किया गया। प्रदेश के चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास मंत्री सुरेश राणा ने बताया कि पेराई सत्र दो हज़ार उन्नीस-बीस में प्रदेश की एक सौ उन्नीस चीनी मिलों द्वारा ग्यारह,एक सौ अस्सी लाख कुन्तल गन्ने की रिकॉर्ड पेराई की गयी है तथा लॉकडाउन अवधि के दौरान चीनी की बिक्री नगण्य होने के बावजूद भी हमारी सरकार ने पैंतालीस दिनों की बन्दी की अवधि के दौरान लगभग . छः,शून्य करोड़ का गन्ना मूल्य भुगतान किसानों को कराया गया। उन्होने बताया कि सरकार द्वारा प्रदेश के गन्ना किसानों को अब तक एक,पाँच,तीन सौ निन्यानवे करोड़ का रिकॉर्ड गन्ना मूल्य भुगतान कराया गया है। वीडियो कान्फ्रेन्सिंग के माध्यम से गन्ना मूल्य भुगतान, खाण्डसारी इकाईयों के संचालन एवं आगामी पेराई सत्र के चीनी मिलो के रिपेयर-मेंटेनेंस प्रगति आदि की समीक्षा की गयी। राणा ने बताया कि इसके अतिरिक्त दो सौ पाँच खाण्डसारी इकाईयां तथा पाँच,छः सौ सत्ताईस कोल्हू संचालित रहे जिनके द्वारा लगभग आठ सौ एक. इकतीस लाख कुन्तल गन्ने की पेराई की गयी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा घोषित नई ऑनलाइन खाण्डसारी लाईसेंसिंग नीति के अन्तर्गत अब तक एक सौ पैंसठ लाइसेंस निर्गत किये गये हैं, जिनमें से छप्पन इकाईयों का संचालन अब तक हो चुका है। गन्ना मंत्री ने समीक्षा बैठक में कहा कि खाण्डसारी इकाईयां व क्रेशर गन्ना किसानों के अतिरिक्त गन्ने की समय से आपूर्ति का विकल्प है, अतः नवीन निर्गत लाइसेंसों के अधीन स्थापित होने वाली इकाईयों का निरीक्षण करा लिया जाये व आगामी पेराई सत्र में अधिकांश इकाईयों का संचालन सुनिश्चित कराया जाय। गन्ना मंत्री ने कहा कि आगामी पेराई सत्र का प्रारम्भ सन्निकट होने के दृष्टिगत बकाया गन्ना मूल्य का शत-प्रतिशत भुगतान शीघ्र सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि सर्वाधिक बकाया वाले चीनी मिल समूहों विशेषकर बजाज, मोदी, सिम्भावली एवं यदु समूह की चीनी मिलों को सख्त निर्देश दिये गये कि वे गन्ना किसानों को बकाया गन्ना मूल्य भुगतानषीघ्र किया जाए। यदि उनके द्वारा भुगतान की त्वरित व्यवस्था नहीं की जाती है तो उनके विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी। उन्होंने कहा कि कृषकों के गन्ना मूल्य के भुगतान में विलम्ब किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। इसके अतिरिक्त समीक्षा बैठक में चीनी मिलों के रिपेयर-मेंटेनेंस कार्यों को समय से पूर्ण कराने के निर्देश भी दिये गये, जिससे कि आगामी पेराई सत्र में चीनी मिलों के समय से संचालन में की व्यवधान न हो। गन्ना मूल्य के भुगतान की त्वरित व्यवस्था किये जाने का आश्वासन दिया गया। दोस्तों देश दुनिया की और खबरों को तेजी से जानने के लिए बनें रहें न्यूजट्रैक के साथ। हमें फेसबुक पर फॉलों करने के लिए @newstrack और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @newstrackmedia पर क्लिक करें।
बरगी। MP Election 2023: जबलपुर की बरगी विधानसभा सीट अहम सीटों में शुमार है। जिसका अपना सियासी मिजाज है, तो अपने सियासी समीकरण हैं। यहां के सियासी इतिहास की बात करें तो 1998 से लेकर 2013 तक बरगी विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी का कब्जा रहा है। 2003 के पहले यह सीट आदिवासियों के लिए रिजर्व थी। यहां बीजेपी के विधायक फूल सिंह उइके और अनूप सिंह मरावी दो बार चुनाव जीत चुके हैं। उसके बाद यह विधानसभा सीट सामान्य हो गई।जिसके बाद बेलखेड़ा की प्रतिभा सिंह चुनाव मैदान में उतरीं और लगातार 2008 से 2018 तक विधायक रहीं। 2008 और 2013 में बीजेपी के टिकट से चुनाव जीता। लेकिन 2018 में बरगी विधानसभा की सियासी तस्वीर बदली और कांग्रेस के संजय यादव ने प्रतिभा सिंह को हराकर कांग्रेस का परचम लहरा दिया। बरगी विधानसभा का 90 प्रतिशत इलाका ग्रामीण है।10 प्रतिशत क्षेत्र शहरी इलाके से भी जुड़ा हुआ है।बरगी विधानसभा को दो श्रेणी में बांटा जा सकता है।जिसमें नर्मदा किनारे शाहपुरा बेलखेड़ा भेड़ाघाट और जबलपुर से लगा हुआ। कुछ इलाका ग्रामीण होने के बाद भी यहां सभी सुविधाएं हैं। यहां अच्छी खेती भी होती है। साथ ही यहां के लोगों के पास पर्याप्त रोजगार है और खेती के अत्याधुनिक संसाधन भी उपलब्ध हैं। ऐसा कहा जाता है कि इस विधानसभा में आदिवासी वोट बैंक की चाबी जिसके हाथ लगती है वह यहां से जीत जाता है। आज बरगी देश का एक ऐसा ग्रामीण इलाका बन गया है।जहां पर गांव-गांव तक मेट्रो बस सेवा हो गई है। मेट्रो बस सेवा के पहुंचने से वहां के बच्चों को अब हाई स्कूल और कॉलेज आने जाने में सुविधा हो गई है। बीते 5 सालों में विधायक संजय यादव ने यहां के कई इलाकों को तहसील कार्यालय और एसडीएम कार्यालय से भी जोड़ा है। पांच सालों में यहां पीने के शुद्ध पानी को लेकर भी विधायक संजय यादव ने अथक प्रयास किए और कुछ हद तक सफलता भी पाई है। नर्मदा और हिरन नदी से घिरे होने के चलते यहां जमीनों की खरीद फरोख्त भी अच्छी खासी होती है।बरगी विधानसभा क्षेत्र जबलपुर शहर से लगा हुआ है। इसलिए यहां शहर के इन्वेस्टर जमीन में इन्वेस्ट करते हैं। बीते 5 सालों में इस पूरे इलाके का आर्थिक बदलाव जमीनों की बिक्री की वजह से हुआ है। शहर के लोगों ने इस पहाड़ी इलाके में जमीन खरीदना भी शुरू कर दिया। स्थानीय लोगों की मानें तो यहां दो सबसे बड़ी समस्या भी हैं। पहला नर्मदा और हिरन नदी से अवैध रूप से रेत का उत्खनन होना। जिससे की यहां की सड़कें बदहाल स्थिति में पहुंच गई हैं। खराब सड़कों के कारण आए दिन यहां हादसे भी होते हैं। लेकिन जिम्मेदार बेखबर बने हुए हैं। दूसरी सबसे बड़ी समस्या अवैध रूप से शराब की तस्करी होना। जिससे यहां के युवा नशे की लत में जकड़ते जा रहे हैं।वहीं शराब के कारण घरों में विवाद की भी स्थिति उत्पन्न होती हैं। जिससे महिलाएं काफी परेशान हैं। खैर इस बार भी चुनाव संजय यादव और प्रतिभा सिंह के बीच में ही माना जा रहा है। कांग्रेस से संजय यादव दोबारा तैय़ारी में हैं और उन्हें टिकट मिलने का पूरा भरोसा भी है। वहीं बीजेपी इस बार प्रतिभा सिंह की जगह उनके बेटे नीरज सिंह को मैदान में उतारा है। कहना गलत नहीं होगा कि मुकाबला एक बार फिर दिलचस्प होगा। कामयाबी किसे मिलेगी इसके लिए जनप्रतिनिधि इंतजार कर रहे हैं। ये भी पढ़ेंः
बरगी। MP Election दो हज़ार तेईस: जबलपुर की बरगी विधानसभा सीट अहम सीटों में शुमार है। जिसका अपना सियासी मिजाज है, तो अपने सियासी समीकरण हैं। यहां के सियासी इतिहास की बात करें तो एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे से लेकर दो हज़ार तेरह तक बरगी विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी का कब्जा रहा है। दो हज़ार तीन के पहले यह सीट आदिवासियों के लिए रिजर्व थी। यहां बीजेपी के विधायक फूल सिंह उइके और अनूप सिंह मरावी दो बार चुनाव जीत चुके हैं। उसके बाद यह विधानसभा सीट सामान्य हो गई।जिसके बाद बेलखेड़ा की प्रतिभा सिंह चुनाव मैदान में उतरीं और लगातार दो हज़ार आठ से दो हज़ार अट्ठारह तक विधायक रहीं। दो हज़ार आठ और दो हज़ार तेरह में बीजेपी के टिकट से चुनाव जीता। लेकिन दो हज़ार अट्ठारह में बरगी विधानसभा की सियासी तस्वीर बदली और कांग्रेस के संजय यादव ने प्रतिभा सिंह को हराकर कांग्रेस का परचम लहरा दिया। बरगी विधानसभा का नब्बे प्रतिशत इलाका ग्रामीण है।दस प्रतिशत क्षेत्र शहरी इलाके से भी जुड़ा हुआ है।बरगी विधानसभा को दो श्रेणी में बांटा जा सकता है।जिसमें नर्मदा किनारे शाहपुरा बेलखेड़ा भेड़ाघाट और जबलपुर से लगा हुआ। कुछ इलाका ग्रामीण होने के बाद भी यहां सभी सुविधाएं हैं। यहां अच्छी खेती भी होती है। साथ ही यहां के लोगों के पास पर्याप्त रोजगार है और खेती के अत्याधुनिक संसाधन भी उपलब्ध हैं। ऐसा कहा जाता है कि इस विधानसभा में आदिवासी वोट बैंक की चाबी जिसके हाथ लगती है वह यहां से जीत जाता है। आज बरगी देश का एक ऐसा ग्रामीण इलाका बन गया है।जहां पर गांव-गांव तक मेट्रो बस सेवा हो गई है। मेट्रो बस सेवा के पहुंचने से वहां के बच्चों को अब हाई स्कूल और कॉलेज आने जाने में सुविधा हो गई है। बीते पाँच सालों में विधायक संजय यादव ने यहां के कई इलाकों को तहसील कार्यालय और एसडीएम कार्यालय से भी जोड़ा है। पांच सालों में यहां पीने के शुद्ध पानी को लेकर भी विधायक संजय यादव ने अथक प्रयास किए और कुछ हद तक सफलता भी पाई है। नर्मदा और हिरन नदी से घिरे होने के चलते यहां जमीनों की खरीद फरोख्त भी अच्छी खासी होती है।बरगी विधानसभा क्षेत्र जबलपुर शहर से लगा हुआ है। इसलिए यहां शहर के इन्वेस्टर जमीन में इन्वेस्ट करते हैं। बीते पाँच सालों में इस पूरे इलाके का आर्थिक बदलाव जमीनों की बिक्री की वजह से हुआ है। शहर के लोगों ने इस पहाड़ी इलाके में जमीन खरीदना भी शुरू कर दिया। स्थानीय लोगों की मानें तो यहां दो सबसे बड़ी समस्या भी हैं। पहला नर्मदा और हिरन नदी से अवैध रूप से रेत का उत्खनन होना। जिससे की यहां की सड़कें बदहाल स्थिति में पहुंच गई हैं। खराब सड़कों के कारण आए दिन यहां हादसे भी होते हैं। लेकिन जिम्मेदार बेखबर बने हुए हैं। दूसरी सबसे बड़ी समस्या अवैध रूप से शराब की तस्करी होना। जिससे यहां के युवा नशे की लत में जकड़ते जा रहे हैं।वहीं शराब के कारण घरों में विवाद की भी स्थिति उत्पन्न होती हैं। जिससे महिलाएं काफी परेशान हैं। खैर इस बार भी चुनाव संजय यादव और प्रतिभा सिंह के बीच में ही माना जा रहा है। कांग्रेस से संजय यादव दोबारा तैय़ारी में हैं और उन्हें टिकट मिलने का पूरा भरोसा भी है। वहीं बीजेपी इस बार प्रतिभा सिंह की जगह उनके बेटे नीरज सिंह को मैदान में उतारा है। कहना गलत नहीं होगा कि मुकाबला एक बार फिर दिलचस्प होगा। कामयाबी किसे मिलेगी इसके लिए जनप्रतिनिधि इंतजार कर रहे हैं। ये भी पढ़ेंः
वर्तमान में, एप्पल भारत में अपने उत्पादों को विशेष एप्पल प्रीमियम पुर्नविक्रेता स्टोर (एपीआर) के अलावा रिलायंस डिजिटल, क्रोमा जैसे बड़े प्रारूप वाली खुदरा शृंखलाओं, बहु-ब्रांड खुदरा दुकानों और ई-वाणिज्य मंच के जरिये बेचती है। नयी दिल्लीः आईफोन विनिर्माता एप्पल ने मंगलवार को घोषणा की कि वह मुंबई में अधिकारिक तौर पर अपना पहला स्टोर 18 अप्रैल को और दिल्ली में दूसरा स्टोर 20 अप्रैल को खोलेगी। इनकी तस्वीरें सामने आई हैं। वहीं एक रिपोर्ट के मुताबिक, एप्पल ने आसपास कथित तौर पर 22 प्रतिद्वंद्वी ब्रैंड को स्टोर खोलने से रोका है। 'द इकोनॉमिक टाइम्स' के मुताबिक जियो वर्ल्ड ड्राइव मॉल (मुंबई) के एक्सक्लूसिव जोन में ये ब्रैंड न तो जगह ले सकेंगे और न ही विज्ञापन लगा सकेंगे। इनमें माइक्रोसॉफ्ट, एलजी, एमेजॉन, फेसबुक, एचपी, एचटीसी, आईबीएम, इंटेल, लेनोवो, नेस्ट, पैनासोनिक और तोशिबासोनी और गूगल प्रमुख रूप से शामिल हैं। वहीं 22वें प्रतिद्वंदी ब्रांड के तौर पर सैमसंग के नाम का अनुमान लगाया गया है। वर्तमान में, कंपनी भारत में अपने उत्पादों को विशेष एप्पल प्रीमियम पुर्नविक्रेता स्टोर (एपीआर) के अलावा रिलायंस डिजिटल, क्रोमा जैसे बड़े प्रारूप वाली खुदरा श्रृंखलाओं, बहु-ब्रांड खुदरा दुकानों और ई-वाणिज्य मंच के जरिये बेचती है। कंपनी ने कहा, एप्पल ने भारत में ग्राहकों के लिए दो नए खुदरा स्थल खोलने की आज घोषणा की। 18 अप्रैल को मुंबई में एप्पल बीकेसी और 20 अप्रैल को दिल्ली में एप्पल साकेत खोला जाएगा। यह भी उम्मीद की जा रही है कि देश में कंपनी के पहले स्टोर के उद्घाटन के अवसर पर Apple के सीईओ टिम कुक भारत आ सकते हैं। मुंबई में एप्पल का स्टोर मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाले जियो वर्ल्ड ड्राइव मॉल में खुलेगा। एग्रीमेंट के तहत कंपनी के पास 11 साल से अधिक की लीज होगी। एप्पल स्टोर करीब 20,800 वर्ग फुट में है। जिसके लिए वह42 लाख रुपये महीना किराया देगी। इसके अलावा कंपनी शुरुआती 3 सालों के लिए राजस्व का 2 प्रतिशत हिस्सा भी शेयर करेगी।
वर्तमान में, एप्पल भारत में अपने उत्पादों को विशेष एप्पल प्रीमियम पुर्नविक्रेता स्टोर के अलावा रिलायंस डिजिटल, क्रोमा जैसे बड़े प्रारूप वाली खुदरा शृंखलाओं, बहु-ब्रांड खुदरा दुकानों और ई-वाणिज्य मंच के जरिये बेचती है। नयी दिल्लीः आईफोन विनिर्माता एप्पल ने मंगलवार को घोषणा की कि वह मुंबई में अधिकारिक तौर पर अपना पहला स्टोर अट्ठारह अप्रैल को और दिल्ली में दूसरा स्टोर बीस अप्रैल को खोलेगी। इनकी तस्वीरें सामने आई हैं। वहीं एक रिपोर्ट के मुताबिक, एप्पल ने आसपास कथित तौर पर बाईस प्रतिद्वंद्वी ब्रैंड को स्टोर खोलने से रोका है। 'द इकोनॉमिक टाइम्स' के मुताबिक जियो वर्ल्ड ड्राइव मॉल के एक्सक्लूसिव जोन में ये ब्रैंड न तो जगह ले सकेंगे और न ही विज्ञापन लगा सकेंगे। इनमें माइक्रोसॉफ्ट, एलजी, एमेजॉन, फेसबुक, एचपी, एचटीसी, आईबीएम, इंटेल, लेनोवो, नेस्ट, पैनासोनिक और तोशिबासोनी और गूगल प्रमुख रूप से शामिल हैं। वहीं बाईसवें प्रतिद्वंदी ब्रांड के तौर पर सैमसंग के नाम का अनुमान लगाया गया है। वर्तमान में, कंपनी भारत में अपने उत्पादों को विशेष एप्पल प्रीमियम पुर्नविक्रेता स्टोर के अलावा रिलायंस डिजिटल, क्रोमा जैसे बड़े प्रारूप वाली खुदरा श्रृंखलाओं, बहु-ब्रांड खुदरा दुकानों और ई-वाणिज्य मंच के जरिये बेचती है। कंपनी ने कहा, एप्पल ने भारत में ग्राहकों के लिए दो नए खुदरा स्थल खोलने की आज घोषणा की। अट्ठारह अप्रैल को मुंबई में एप्पल बीकेसी और बीस अप्रैल को दिल्ली में एप्पल साकेत खोला जाएगा। यह भी उम्मीद की जा रही है कि देश में कंपनी के पहले स्टोर के उद्घाटन के अवसर पर Apple के सीईओ टिम कुक भारत आ सकते हैं। मुंबई में एप्पल का स्टोर मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाले जियो वर्ल्ड ड्राइव मॉल में खुलेगा। एग्रीमेंट के तहत कंपनी के पास ग्यारह साल से अधिक की लीज होगी। एप्पल स्टोर करीब बीस,आठ सौ वर्ग फुट में है। जिसके लिए वहबयालीस लाख रुपये महीना किराया देगी। इसके अलावा कंपनी शुरुआती तीन सालों के लिए राजस्व का दो प्रतिशत हिस्सा भी शेयर करेगी।
बरेली : अपना डूबे रुपए निकाले के लिए बीडीए अब ओटीएस यानि वन टाइम सेटलमेंट योजना का सहारा लेगा। इससे जहां एक ओर कस्टमर्स को फायदा होगा तो वहीं दूसरी ओर बीडीए को भी अपनी फंसी हुई रकम निकालने में आसानी होगी। बीडीए ने करीब दो माह पहले ओटीएस योजना लागू करने का शासन को प्रस्ताव भेजा था। जिसको शासन की ओर से मंजूरी मिल गई है। अब बीडीए एक सितंबर से योजना के तहत लाभार्थियों से बकाया वसूली करने की मुहीम शुरु करेगा। सितंबर माह में योजना के शुरू होते ही लाभार्थी एक साल तक नॉर्मल ब्याज दर से इंस्टॉलमेंट जमाकर रजिस्ट्री करा सकेंगे। जबकि पहले लोगों को चक्रवृद्धि ब्याज के साथ किश्तों का भुगतान करना पड़ रहा था। वहीं लोगों की हेल्प के लिए बीडीए ऑफिस में एक हेल्प डेस्क भी बनाई जाएगी जिससे योजना संबंधी जानकारी वे आसानी से ले सकें। ओटीएस योजना के शुरु होने पर बकाएदार आवंटियाें को एक साल में बकाया जमा करने के लिए मोहलत भी दी जाएगी। वहीं बची हुई किश्तों को एक मुश्त जमा करने का भी प्रावधान किया गया है। जिसके पूर्ण भुगतान की रसीद भी बीडीए लाभार्थी को देगा। बीडीए में आवास और प्लॉट के लिए करीब 20000 लोग रजिस्टर्ड हैं। इनमें से करीब दस हजार ऐसे लाभार्थी हैं जिन्होंने एक दो किश्तों के बाद कोई भी भुगतान नहीं किया। बीडीए ने ऐसे लाभार्थियों की लिस्ट तैयार की है। अब इन्हें ओटीएस योजना से जोड़ कर वसूली की जाएगी। बीडीए ने करीब 16 साल पहले रामगंगा, पीलीभीत बाईपास, राजेन्द्र नगर और करगैना रोड पर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए आवास बनाए थे। जिनमें शुरुवाती दौर में लोगों ने खूब इंटरेस्ट लिया और रजिस्ट्रेशन कराए। लेकिन आवास में बनने में देरी और दूरी की वजह से कई लोगों ने बीच में आवास की इंस्टॉलमेंट जमा करना बंद कर दिया। जिससे बीडीए को काफी नुकसान हुआ। अब बीडीए ने ओटीएस के तहत लोगों को फिर से जोड़ने की कवायद की है। शासन को ओटीएस योजना की मंजूरी के लिए प्रस्ताव भेजा था, जिसकों मंजूरी दे दी गई है। ब्याज दर सामान्य होने से लाभार्थियों को भी किश्त भुगतान में परेशानी नहीं होगी। एक सितंबर से योजना का लाभ मिलेगा। दिव्या मित्तल, वीसी, बीडीए।
बरेली : अपना डूबे रुपए निकाले के लिए बीडीए अब ओटीएस यानि वन टाइम सेटलमेंट योजना का सहारा लेगा। इससे जहां एक ओर कस्टमर्स को फायदा होगा तो वहीं दूसरी ओर बीडीए को भी अपनी फंसी हुई रकम निकालने में आसानी होगी। बीडीए ने करीब दो माह पहले ओटीएस योजना लागू करने का शासन को प्रस्ताव भेजा था। जिसको शासन की ओर से मंजूरी मिल गई है। अब बीडीए एक सितंबर से योजना के तहत लाभार्थियों से बकाया वसूली करने की मुहीम शुरु करेगा। सितंबर माह में योजना के शुरू होते ही लाभार्थी एक साल तक नॉर्मल ब्याज दर से इंस्टॉलमेंट जमाकर रजिस्ट्री करा सकेंगे। जबकि पहले लोगों को चक्रवृद्धि ब्याज के साथ किश्तों का भुगतान करना पड़ रहा था। वहीं लोगों की हेल्प के लिए बीडीए ऑफिस में एक हेल्प डेस्क भी बनाई जाएगी जिससे योजना संबंधी जानकारी वे आसानी से ले सकें। ओटीएस योजना के शुरु होने पर बकाएदार आवंटियाें को एक साल में बकाया जमा करने के लिए मोहलत भी दी जाएगी। वहीं बची हुई किश्तों को एक मुश्त जमा करने का भी प्रावधान किया गया है। जिसके पूर्ण भुगतान की रसीद भी बीडीए लाभार्थी को देगा। बीडीए में आवास और प्लॉट के लिए करीब बीस हज़ार लोग रजिस्टर्ड हैं। इनमें से करीब दस हजार ऐसे लाभार्थी हैं जिन्होंने एक दो किश्तों के बाद कोई भी भुगतान नहीं किया। बीडीए ने ऐसे लाभार्थियों की लिस्ट तैयार की है। अब इन्हें ओटीएस योजना से जोड़ कर वसूली की जाएगी। बीडीए ने करीब सोलह साल पहले रामगंगा, पीलीभीत बाईपास, राजेन्द्र नगर और करगैना रोड पर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए आवास बनाए थे। जिनमें शुरुवाती दौर में लोगों ने खूब इंटरेस्ट लिया और रजिस्ट्रेशन कराए। लेकिन आवास में बनने में देरी और दूरी की वजह से कई लोगों ने बीच में आवास की इंस्टॉलमेंट जमा करना बंद कर दिया। जिससे बीडीए को काफी नुकसान हुआ। अब बीडीए ने ओटीएस के तहत लोगों को फिर से जोड़ने की कवायद की है। शासन को ओटीएस योजना की मंजूरी के लिए प्रस्ताव भेजा था, जिसकों मंजूरी दे दी गई है। ब्याज दर सामान्य होने से लाभार्थियों को भी किश्त भुगतान में परेशानी नहीं होगी। एक सितंबर से योजना का लाभ मिलेगा। दिव्या मित्तल, वीसी, बीडीए।
- ऑरेलियन मिशेल, टीम्यूटेंट एप प्लैनेट के निर्माता को न्यूयॉर्क में गिरफ्तार किया गया है। - मिशेल पर निवेशकों से 29 लाख डॉलर की धोखाधड़ी करने का आरोप है। अमेरिकी अधिकारियों ने म्यूटेंट एप प्लैनेट एनएफटी परियोजना के पीछे आदमी को गिरफ्तार कर लिया है, जो लोकप्रिय की दस्तक है म्यूटेंट एप यॉट क्लब [MAYC] एनएफटी संग्रह। 24 वर्षीय फ्रांसीसी नागरिक ऑरेलियन मिशेल को उस समय गिरफ्तार किया गया जब वह न्यूयॉर्क के जॉन एफ कैनेडी हवाई अड्डे पर उतरे। एक के अनुसार प्रेस विज्ञप्ति 5 जनवरी को न्यूयॉर्क के पूर्वी जिले के लिए अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय द्वारा, अभियोजकों ने आरोप लगाया है कि मिशेल ने एक "धोखाधड़ी गलीचा पुल" योजना को अंजाम दिया और बाद में निवेशकों को 2.9 मिलियन डॉलर की धोखाधड़ी की। अभियोजकों ने आरोप लगायाः "योजना के हिस्से के रूप में, एनएफटी को उन खरीदारों के लिए विपणन किया गया था, जिन्हें उनके नए अधिग्रहीत एनएफटी की मांग और मूल्य बढ़ाने के लिए कई पुरस्कारों और लाभों का झूठा वादा किया गया था। एनएफटी से बाहर बेचने के बाद, खरीदार "गलीचा खींचे गए" थे क्योंकि वादा किए गए लाभों में से कोई भी प्रदान नहीं किया गया था। अभियोजकों ने आगे आरोप लगाया है कि मिशेल के व्यक्तिगत उपयोग के लिए लाखों मूल्य की क्रिप्टोकरेंसी को डायवर्ट किया गया था। ये Mutant Ape Planet NFTs की बिक्री से आय थे। गिरफ्तारी में गृहभूमि सुरक्षा विभाग और आंतरिक राजस्व सेवा (आईआरएस) सहित संयुक्त राज्य अमेरिका की कई एजेंसियां शामिल थीं। अभियोजकों के अनुसार, ऑरेलियन मिशेल ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उसने समुदाय के डिस्कॉर्ड सर्वर पर गलीचा खींचने की योजना बनाई थी। उसने निम्नलिखित स्वीकारोक्ति करने के लिए एक नकली नाम का इस्तेमाल कियाः होमलैंड सिक्योरिटी एजेंट इवान जे। अरवेलो ने कहा कि डेवलपर्स ने निवेश के समय खरीदारों को कई डिलिवरेबल्स का वादा किया था। इसके अलावा, आंतरिक राजस्व सेवा एजेंट थॉमस फेटोरूसो ने कहा कि मिशेल ने निवेशकों को धोखा दिया, देनदारियों का झूठा प्रतिनिधित्व, स्टेकिंग सुविधाओं के साथ टोकन, और मर्चेंडाइज संग्रह। के आंकड़ों के अनुसार कॉइनस्टैट्स, म्यूटेंट एप प्लैनेट का प्रेस समय में न्यूनतम मूल्य 0.01 ईटीएच था, और कुल मात्रा 568.59 ईटीएच थी। दिलचस्प बात यह है कि पिछले 24 घंटों में परियोजना की ट्रेडिंग वॉल्यूम 4400% से अधिक हो गई है। समुदाय के सदस्यों ने परियोजना को संभाल लिया है। वे कथित तौर पर लेखन के समय इसे वापस जीवन में लाने का प्रयास कर रहे थे।
- ऑरेलियन मिशेल, टीम्यूटेंट एप प्लैनेट के निर्माता को न्यूयॉर्क में गिरफ्तार किया गया है। - मिशेल पर निवेशकों से उनतीस लाख डॉलर की धोखाधड़ी करने का आरोप है। अमेरिकी अधिकारियों ने म्यूटेंट एप प्लैनेट एनएफटी परियोजना के पीछे आदमी को गिरफ्तार कर लिया है, जो लोकप्रिय की दस्तक है म्यूटेंट एप यॉट क्लब [MAYC] एनएफटी संग्रह। चौबीस वर्षीय फ्रांसीसी नागरिक ऑरेलियन मिशेल को उस समय गिरफ्तार किया गया जब वह न्यूयॉर्क के जॉन एफ कैनेडी हवाई अड्डे पर उतरे। एक के अनुसार प्रेस विज्ञप्ति पाँच जनवरी को न्यूयॉर्क के पूर्वी जिले के लिए अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय द्वारा, अभियोजकों ने आरोप लगाया है कि मिशेल ने एक "धोखाधड़ी गलीचा पुल" योजना को अंजाम दिया और बाद में निवेशकों को दो.नौ मिलियन डॉलर की धोखाधड़ी की। अभियोजकों ने आरोप लगायाः "योजना के हिस्से के रूप में, एनएफटी को उन खरीदारों के लिए विपणन किया गया था, जिन्हें उनके नए अधिग्रहीत एनएफटी की मांग और मूल्य बढ़ाने के लिए कई पुरस्कारों और लाभों का झूठा वादा किया गया था। एनएफटी से बाहर बेचने के बाद, खरीदार "गलीचा खींचे गए" थे क्योंकि वादा किए गए लाभों में से कोई भी प्रदान नहीं किया गया था। अभियोजकों ने आगे आरोप लगाया है कि मिशेल के व्यक्तिगत उपयोग के लिए लाखों मूल्य की क्रिप्टोकरेंसी को डायवर्ट किया गया था। ये Mutant Ape Planet NFTs की बिक्री से आय थे। गिरफ्तारी में गृहभूमि सुरक्षा विभाग और आंतरिक राजस्व सेवा सहित संयुक्त राज्य अमेरिका की कई एजेंसियां शामिल थीं। अभियोजकों के अनुसार, ऑरेलियन मिशेल ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उसने समुदाय के डिस्कॉर्ड सर्वर पर गलीचा खींचने की योजना बनाई थी। उसने निम्नलिखित स्वीकारोक्ति करने के लिए एक नकली नाम का इस्तेमाल कियाः होमलैंड सिक्योरिटी एजेंट इवान जे। अरवेलो ने कहा कि डेवलपर्स ने निवेश के समय खरीदारों को कई डिलिवरेबल्स का वादा किया था। इसके अलावा, आंतरिक राजस्व सेवा एजेंट थॉमस फेटोरूसो ने कहा कि मिशेल ने निवेशकों को धोखा दिया, देनदारियों का झूठा प्रतिनिधित्व, स्टेकिंग सुविधाओं के साथ टोकन, और मर्चेंडाइज संग्रह। के आंकड़ों के अनुसार कॉइनस्टैट्स, म्यूटेंट एप प्लैनेट का प्रेस समय में न्यूनतम मूल्य शून्य.एक ईटीएच था, और कुल मात्रा पाँच सौ अड़सठ.उनसठ ईटीएच थी। दिलचस्प बात यह है कि पिछले चौबीस घंटाटों में परियोजना की ट्रेडिंग वॉल्यूम चार हज़ार चार सौ% से अधिक हो गई है। समुदाय के सदस्यों ने परियोजना को संभाल लिया है। वे कथित तौर पर लेखन के समय इसे वापस जीवन में लाने का प्रयास कर रहे थे।
पाकिस्तानी सेना प्रमुख के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने पर अधिवक्ता को गिरफ्तार कर लिया गया ( फोटो- Reuters ) इस्लामाबाद. पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के खिलाफ 'अभद्र और अपमानजनक' टिप्पणी करने के मामले में पाकिस्तान पुलिस ने शुक्रवार को अधिवक्ता ईमान हाजिर मजारी के खिलाफ मामला दर्ज किया. ईमान पूर्व मानवाधिकार कार्यकर्ता और इमरान सरकार में मंत्री रहीं शिरीन मजारी की बेटी हैं. जज एडवोकेट जनरल, जीएचक्यू, के लेफ्टिनेंट कर्नल सैयद हुमायूं इफ्तिखार की अर्जी पर इस्लामाबाद के रमना पुलिस थाने में धारा 505 (नफरती भाषण) और पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 138 के तहत ईमान के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई. प्राथमिकी दर्ज करने की मांग वाली शिकायती अर्जी के अनुसार मजारी ने 21 मई को पाकिस्तानी सेना और उसके प्रमुख जनरल बाजवा के खिलाफ 'अपमानजनक और नफरत भरा' बयान दिया था. इसमें कहा गया है कि उनके आपत्तिजनक बयान बहुत अपमानजनक हैं, जिनकी मंशा पाकिस्तानी सेना में बगावत भड़काने की थी. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मजारी ने अपने बयान से सेना के शीर्ष नेतृत्व को अपमानित किया और इस बयान का मकसद पाकिस्तानी सेना में बगावत और अराजकता को उत्पन्न करना था, जो कि दंडनीय अपराध है. ईमान ने गत 21 मई को अपनी मां की गिरफ्तारी के बाद यह बयान दिया था. ईमान की मां को पंजाब प्रांत की भ्रष्टाचार रोधी विभाग के अधिकारियों ने गिरफ्तार किया था. हालांकि ईमान की मां उसी दिन इस्लामाबाद उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप करने के कारण रिहा कर दी गई थीं. इमरान खान सरकार में कैबिनेट मंत्री रहीं शिरीन (59) अपनी पार्टी की सरकार गिरने के बाद से सेना की आलोचना कर रही हैं. शिरीन की गिरफ्तारी के बारे में पूछने पर उनकी बेटी ईमान ने जनरल बाजवा पर आरोप लगाते हुए कहा था कि उनकी मां को हिरासत में लिए जाने के पीछे सेना की अहम भूमिका है. .
पाकिस्तानी सेना प्रमुख के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने पर अधिवक्ता को गिरफ्तार कर लिया गया इस्लामाबाद. पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के खिलाफ 'अभद्र और अपमानजनक' टिप्पणी करने के मामले में पाकिस्तान पुलिस ने शुक्रवार को अधिवक्ता ईमान हाजिर मजारी के खिलाफ मामला दर्ज किया. ईमान पूर्व मानवाधिकार कार्यकर्ता और इमरान सरकार में मंत्री रहीं शिरीन मजारी की बेटी हैं. जज एडवोकेट जनरल, जीएचक्यू, के लेफ्टिनेंट कर्नल सैयद हुमायूं इफ्तिखार की अर्जी पर इस्लामाबाद के रमना पुलिस थाने में धारा पाँच सौ पाँच और पाकिस्तान दंड संहिता की धारा एक सौ अड़तीस के तहत ईमान के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई. प्राथमिकी दर्ज करने की मांग वाली शिकायती अर्जी के अनुसार मजारी ने इक्कीस मई को पाकिस्तानी सेना और उसके प्रमुख जनरल बाजवा के खिलाफ 'अपमानजनक और नफरत भरा' बयान दिया था. इसमें कहा गया है कि उनके आपत्तिजनक बयान बहुत अपमानजनक हैं, जिनकी मंशा पाकिस्तानी सेना में बगावत भड़काने की थी. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मजारी ने अपने बयान से सेना के शीर्ष नेतृत्व को अपमानित किया और इस बयान का मकसद पाकिस्तानी सेना में बगावत और अराजकता को उत्पन्न करना था, जो कि दंडनीय अपराध है. ईमान ने गत इक्कीस मई को अपनी मां की गिरफ्तारी के बाद यह बयान दिया था. ईमान की मां को पंजाब प्रांत की भ्रष्टाचार रोधी विभाग के अधिकारियों ने गिरफ्तार किया था. हालांकि ईमान की मां उसी दिन इस्लामाबाद उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप करने के कारण रिहा कर दी गई थीं. इमरान खान सरकार में कैबिनेट मंत्री रहीं शिरीन अपनी पार्टी की सरकार गिरने के बाद से सेना की आलोचना कर रही हैं. शिरीन की गिरफ्तारी के बारे में पूछने पर उनकी बेटी ईमान ने जनरल बाजवा पर आरोप लगाते हुए कहा था कि उनकी मां को हिरासत में लिए जाने के पीछे सेना की अहम भूमिका है. .
बलिया जिले के बैरिया विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक सुरेंद्र सिंह ने योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट में मंत्री को लेकर विवादित बयान दिया है। उत्तर प्रदेश में एक बार फिर बीजेपी पार्टी नेताओं के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई है। बलिया जिले के बैरिया विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक सुरेंद्र सिंह ने योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट में मंत्री को लेकर विवादित बयान दिया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, विधायक सुरेंद्र सिंह ने योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर की तुलना कुत्ते से कर दी है। बता दें कि ओमप्रकाश राजभर ने बीते दिनों वाराणसी के बाबतपुर हवाई अड्डे पर सपा नेता शिवपाल यादव से मुलाकत हुई थी। इस दौरान दोनों काफी लंबी बातचीत हुई। जिसके बाद बीजेपी विधायक ने दोनों के हाथ मिलाने पर ये बयान दिया। बीजेपी विधायक सुरेंद्र सिंह इससे पहले भी कई विवादित बयान दे चुके हैं। उन्नाव रेप केस में बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर का बचाव करते हुए सुरेंद्र सिंह ने कहा था कि तीन बच्चों की मां से कौन रेप करेगा। जिसके बाद उनकी काफी किरकिरी हुई थी।
बलिया जिले के बैरिया विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक सुरेंद्र सिंह ने योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट में मंत्री को लेकर विवादित बयान दिया है। उत्तर प्रदेश में एक बार फिर बीजेपी पार्टी नेताओं के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई है। बलिया जिले के बैरिया विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक सुरेंद्र सिंह ने योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट में मंत्री को लेकर विवादित बयान दिया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, विधायक सुरेंद्र सिंह ने योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर की तुलना कुत्ते से कर दी है। बता दें कि ओमप्रकाश राजभर ने बीते दिनों वाराणसी के बाबतपुर हवाई अड्डे पर सपा नेता शिवपाल यादव से मुलाकत हुई थी। इस दौरान दोनों काफी लंबी बातचीत हुई। जिसके बाद बीजेपी विधायक ने दोनों के हाथ मिलाने पर ये बयान दिया। बीजेपी विधायक सुरेंद्र सिंह इससे पहले भी कई विवादित बयान दे चुके हैं। उन्नाव रेप केस में बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर का बचाव करते हुए सुरेंद्र सिंह ने कहा था कि तीन बच्चों की मां से कौन रेप करेगा। जिसके बाद उनकी काफी किरकिरी हुई थी।
स्पष्टतः पुष्ट किया जाय, वही औचित्य उक्ति का जीवित है। जहाँ वक्ता या प्रमाता (घोद्धा ) का वाच्य अत्यधिक शोमाशाली स्वभाव द्वारा याच्छादित हो जाय, उसे भी श्रौचित्य कहते हैं । "" श्रौचित्यको प्रस्थान भेद के रूप में उपस्थित करने वाला क्षेमेन्द्र का मंथ "ऑचित्यविचारचर्चा" है। क्षेमेन्द्र रस को काव्य की आत्मा मानते हैं, पर औचित्य को उसका भी जीवित घोषित करते हैं। इस प्रकार औचित्य रस तथा काव्य दोनों का जीवित माना गया हैः औचित्यस्य चमत्कारकारिणश्चारुचर्यये । रसजीवितभूतस्य विचारं कुरुतेऽधुना ।। (कारिका ३ ) औचित्यं रससिद्धस्य स्थिरं काव्यस्य जीवितम् । (कारिका ५) क्षेमेन्द्र ने यौचित्य के २८ प्रकार माने हैं। इसके अंतर्गत गुण, अलंकार, रस के औचित्य के अतिरिक्त पद, वाक्य कारक, क्रिया, लिंग, वचन आदि के औचित्य का भी संकेत किया गया गया है । क्षेमेन्द्र के औचित्य का दिड्मात्र संकेत करने के लिए हम 'रसौचित्य' का निम्र उदाहरण लेते हैं उद्दामोत्कलिकां विपाण्डुररुचं प्रारब्धजृम्भां क्षणादायास श्वसनोद्गमैर विरलैरातन्वतीमात्मनः । यद्योद्यानलनामिमां समदनां नारीमिवान्यां ध्रुवं पश्यन् कोपविपाटलद्युति मुसं देव्याः करिष्याम्यहम् ।। यह रत्नावली नाटिका में उदयन की क्ति है । एक उद्यानलता को देखते हुए वह कह रहा है - "इस स्यानलता की चटकती कलियाँ इस प्रकार शोभित हो रही है जैसे मदनोन्मत्त कामिनी आलस्य से जँभाई ले रही हो और हवा के भोंके से हिलती यह लता उत्कंठाभरी नायिका की चंचलता के समान शोभा दे रही है। मैं इसे देखने में 2. आसुसेन स्वभावस्य मध्ये येन पोध्यते । प्रकारेण तदौचित्यं उचिनात्यानजीवितम् । यत्र वसुः प्रमातुओं वाच्यं शोभाविशायिना । आच्छायते स्वभावेन सद्प्यौचित्यमुच्यते ॥ क्रोफिजीवितः प्रथम टम्मेव कारिका ५३.५४.
स्पष्टतः पुष्ट किया जाय, वही औचित्य उक्ति का जीवित है। जहाँ वक्ता या प्रमाता का वाच्य अत्यधिक शोमाशाली स्वभाव द्वारा याच्छादित हो जाय, उसे भी श्रौचित्य कहते हैं । "" श्रौचित्यको प्रस्थान भेद के रूप में उपस्थित करने वाला क्षेमेन्द्र का मंथ "ऑचित्यविचारचर्चा" है। क्षेमेन्द्र रस को काव्य की आत्मा मानते हैं, पर औचित्य को उसका भी जीवित घोषित करते हैं। इस प्रकार औचित्य रस तथा काव्य दोनों का जीवित माना गया हैः औचित्यस्य चमत्कारकारिणश्चारुचर्यये । रसजीवितभूतस्य विचारं कुरुतेऽधुना ।। औचित्यं रससिद्धस्य स्थिरं काव्यस्य जीवितम् । क्षेमेन्द्र ने यौचित्य के अट्ठाईस प्रकार माने हैं। इसके अंतर्गत गुण, अलंकार, रस के औचित्य के अतिरिक्त पद, वाक्य कारक, क्रिया, लिंग, वचन आदि के औचित्य का भी संकेत किया गया गया है । क्षेमेन्द्र के औचित्य का दिड्मात्र संकेत करने के लिए हम 'रसौचित्य' का निम्र उदाहरण लेते हैं उद्दामोत्कलिकां विपाण्डुररुचं प्रारब्धजृम्भां क्षणादायास श्वसनोद्गमैर विरलैरातन्वतीमात्मनः । यद्योद्यानलनामिमां समदनां नारीमिवान्यां ध्रुवं पश्यन् कोपविपाटलद्युति मुसं देव्याः करिष्याम्यहम् ।। यह रत्नावली नाटिका में उदयन की क्ति है । एक उद्यानलता को देखते हुए वह कह रहा है - "इस स्यानलता की चटकती कलियाँ इस प्रकार शोभित हो रही है जैसे मदनोन्मत्त कामिनी आलस्य से जँभाई ले रही हो और हवा के भोंके से हिलती यह लता उत्कंठाभरी नायिका की चंचलता के समान शोभा दे रही है। मैं इसे देखने में दो. आसुसेन स्वभावस्य मध्ये येन पोध्यते । प्रकारेण तदौचित्यं उचिनात्यानजीवितम् । यत्र वसुः प्रमातुओं वाच्यं शोभाविशायिना । आच्छायते स्वभावेन सद्प्यौचित्यमुच्यते ॥ क्रोफिजीवितः प्रथम टम्मेव कारिका तिरेपन.चौवन.
GORAKHPUR: पुलिस की सुरक्षा में सेंध लगाकर पहुंचे युवक से पुलिस हलकान रही। थाने पर उसको काबू में करने में पुलिस के पसीने छूट गए। वह बात-बात में पुलिस कर्मचारियों और आगंतुको को गाली देता रहा। उसकी बातों को सुनकर प्रतिक्रिया देने वालों को भी गाली सुननी पड़ी। कार्यक्रम खत्म होने के बाद पुलिस ने उसे थाने से छोड़ दिया। कानूनी औपचारिकता पूरी करके घरवाले उसे अपने साथ ले गए। सोमवार को डीडीयू यूनिवर्सिटी एक संदिग्ध युवक पकड़ा गया। पुलिस ने हिरासत में लेकर उसे कैंट थाना भेज दिया। कैंट थाना पहुंचने के बाद युवक ने हंगामा शुरू कर दिया। इस दौरान सामने आया कि उसकी मानसिक हालत ठीक नहीं है। पुलिस की सूचना पर युवक के परिजन भी पहुंच गए। युवक की पहचान मऊ जिले के हरदिया, सराय लखनसी निवासी रंजीत गुप्ता के रूप में हुई। उसके पिता परमानंद गांव पर किराना की दुकान चलाते हैं। छह भाइयों में चौथे नंबर का रंजीत आईआईटी में प्रवेश के लिए तैयारी कर रहा था। वह तीन बार इंट्रेस एग्जाम दे चुका है। परिजनों ने पुलिस को बताया कि सेलेक्शन न होने से उसकी मानसिक हालत खराब हो गई। पकड़े गए संदिग्ध युवक के मामा केदारनाथ थाने पर पहुंचे। पुलिस को बताया कि वह जूनियर हाई स्कूल में टीचर हैं। शाहपुर एरिया के बशारतपुर मोहल्ले में परिवार के साथ रहते हैं। उनके पिता डॉ। हरिश्चंद यूनिवर्सिटी में केमेस्ट्री डिपार्टमेंट प्रोफेसर थे। केदारनाथ ने बताया कि करीब एक साल से उनके भांजे की मानसिक हालत ठीक नहीं है। उसका उपचार मऊ के डॉक्टर अभिनव श्रीवास्तव के वहां चल रहा था। शनिवार को वह गोरखपुर उपचार कराने आया था। केदारनाथ ने बताया कि 12वीं पास करने के बाद उनका भांजा गोरखपुर में रहा। उसने सिविल लाइंस स्थित एक कोचिंग सेंटर में आईआईटी के लिए तैयारी की। घर की माली हालत खराब होने से उसकी मानसिक हालत खराब हो गई। रविवार की शाम सात बजे उसको चौरीचौरा एक्सप्रेस में बैठाकर रवाना किया गया। लेकिन मऊ जाने के बजाय वह बस पकड़कर घर लौट आया। सोमवार को कई जगहों पर नौकरी तलाशने के बहाने घर से निकल गया। डॉक्टर को दिखाने के लिए उसकी तलाश चल रही थी। वीआईपी सुरक्षा घेरे में पकड़े गए युवक ने पुलिस को हलकान कर दिया। कैंट थाना पर उसने पुलिस वालों को खूब गालियां दी। फरियादियों के साथ भी वह दुर्व्यवहार करता रहा। खाने के लिए उसने बलदेव प्लाजा से चावल मंगाया। लेकिन होमगार्ड बाटी ले लाया। होमगार्ड के चावल न लाने पर उसने खूब खरी खोटी सुनाई। वर्दी उतरवाने की धमकी दी। अधिकांश पुलिस वालों ने उसको पहचान लिया। शनिवार को गोलघर में पुलिस ने पैदल गश्त निकाला था। तब गरीबों को उजाड़ने की बात पर वह पुलिस भिड़ गया। डीआईजी और एसएसपी को हटवाने की धमकी तक दे डाली। इस पर पुलिस ने कुछ देर तक उसको हिरासत में लिया था। मेरे भांजे की मानसिक हालत ठीक नहीं है। जांच के बाद पुलिस ने उसको छोड़ दिया। थाने से उसको मानसिक रोग विशेषज्ञ सीबी मद्धेशिया के पास ले जाया गया। वहां उसका उपचार चल रहा है।
GORAKHPUR: पुलिस की सुरक्षा में सेंध लगाकर पहुंचे युवक से पुलिस हलकान रही। थाने पर उसको काबू में करने में पुलिस के पसीने छूट गए। वह बात-बात में पुलिस कर्मचारियों और आगंतुको को गाली देता रहा। उसकी बातों को सुनकर प्रतिक्रिया देने वालों को भी गाली सुननी पड़ी। कार्यक्रम खत्म होने के बाद पुलिस ने उसे थाने से छोड़ दिया। कानूनी औपचारिकता पूरी करके घरवाले उसे अपने साथ ले गए। सोमवार को डीडीयू यूनिवर्सिटी एक संदिग्ध युवक पकड़ा गया। पुलिस ने हिरासत में लेकर उसे कैंट थाना भेज दिया। कैंट थाना पहुंचने के बाद युवक ने हंगामा शुरू कर दिया। इस दौरान सामने आया कि उसकी मानसिक हालत ठीक नहीं है। पुलिस की सूचना पर युवक के परिजन भी पहुंच गए। युवक की पहचान मऊ जिले के हरदिया, सराय लखनसी निवासी रंजीत गुप्ता के रूप में हुई। उसके पिता परमानंद गांव पर किराना की दुकान चलाते हैं। छह भाइयों में चौथे नंबर का रंजीत आईआईटी में प्रवेश के लिए तैयारी कर रहा था। वह तीन बार इंट्रेस एग्जाम दे चुका है। परिजनों ने पुलिस को बताया कि सेलेक्शन न होने से उसकी मानसिक हालत खराब हो गई। पकड़े गए संदिग्ध युवक के मामा केदारनाथ थाने पर पहुंचे। पुलिस को बताया कि वह जूनियर हाई स्कूल में टीचर हैं। शाहपुर एरिया के बशारतपुर मोहल्ले में परिवार के साथ रहते हैं। उनके पिता डॉ। हरिश्चंद यूनिवर्सिटी में केमेस्ट्री डिपार्टमेंट प्रोफेसर थे। केदारनाथ ने बताया कि करीब एक साल से उनके भांजे की मानसिक हालत ठीक नहीं है। उसका उपचार मऊ के डॉक्टर अभिनव श्रीवास्तव के वहां चल रहा था। शनिवार को वह गोरखपुर उपचार कराने आया था। केदारनाथ ने बताया कि बारहवीं पास करने के बाद उनका भांजा गोरखपुर में रहा। उसने सिविल लाइंस स्थित एक कोचिंग सेंटर में आईआईटी के लिए तैयारी की। घर की माली हालत खराब होने से उसकी मानसिक हालत खराब हो गई। रविवार की शाम सात बजे उसको चौरीचौरा एक्सप्रेस में बैठाकर रवाना किया गया। लेकिन मऊ जाने के बजाय वह बस पकड़कर घर लौट आया। सोमवार को कई जगहों पर नौकरी तलाशने के बहाने घर से निकल गया। डॉक्टर को दिखाने के लिए उसकी तलाश चल रही थी। वीआईपी सुरक्षा घेरे में पकड़े गए युवक ने पुलिस को हलकान कर दिया। कैंट थाना पर उसने पुलिस वालों को खूब गालियां दी। फरियादियों के साथ भी वह दुर्व्यवहार करता रहा। खाने के लिए उसने बलदेव प्लाजा से चावल मंगाया। लेकिन होमगार्ड बाटी ले लाया। होमगार्ड के चावल न लाने पर उसने खूब खरी खोटी सुनाई। वर्दी उतरवाने की धमकी दी। अधिकांश पुलिस वालों ने उसको पहचान लिया। शनिवार को गोलघर में पुलिस ने पैदल गश्त निकाला था। तब गरीबों को उजाड़ने की बात पर वह पुलिस भिड़ गया। डीआईजी और एसएसपी को हटवाने की धमकी तक दे डाली। इस पर पुलिस ने कुछ देर तक उसको हिरासत में लिया था। मेरे भांजे की मानसिक हालत ठीक नहीं है। जांच के बाद पुलिस ने उसको छोड़ दिया। थाने से उसको मानसिक रोग विशेषज्ञ सीबी मद्धेशिया के पास ले जाया गया। वहां उसका उपचार चल रहा है।
कार या बाइक पर अपना नाम, जाति या धर्म आदि लिखवाने (Unauthorised Writing) वाले सावधान हो जाएं, अब ऐसे नाम या स्लोगन लिखी गाड़ियों के खिलाफ मोटर व्हीकल एक्ट (New Motor Vehicles Act) के तहत पुलिस (Rajasthan Police) कानूनी कार्रवाई करेगी. राजस्थान में अपनी कार या बाइक पर अपना नाम, जाति या धर्म आदि लिखवाने (Unauthorised Writing) वाले सावधान हो जाएं, अब ऐसे नाम या स्लोगन लिखी गाड़ियों के खिलाफ मोटर व्हीकल एक्ट (New Motor Vehicles Act) के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. राजधानी जयपुर स्थित पुलिस मुख्यालय (Rajasthan Police) की ओर से मंगलवार को इस दिशा में सभी जिला पुलिस अधीक्षकों और जयपुर, जोधपुर जिला पुलिस उपायुक्तों को आदेश जारी कर दिए हैं. ऐसे वाहन अब सड़क पर चलते दिखे तो यातायात पुलिस उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है. अगली स्लाइड्स में देखें, नाम और जाति गाड़ियों पर लिखवाने का टशन. . . (सभी तस्वीरें इस्टाग्राम से साभार) राजस्थान पुलिस के महानिदेशक कार्यालय की ओर से मंगलवार को इस आदेश जारी किया गया है. पुलिस के आदेश में कहा गया है कि राजस्थान में चलने वाले निजी वाहनों पर स्वयं जाति, संगठनों के पदों का नाम, भूतपूर्व पद, स्वयं का नाम, गांव का नाम इस्तेमाल पर प्रतिबंधित किया गया है. इस आदेश के बाद विभिन्न चिन्ह आदि लिखवाना भी गैरकानूनी होगा. शब्दों या स्लोगनों के इस्तेमाल पर भी जुर्माना लगाया जा सकता है. यह कानून नागरिक अधिकार संस्था के सुझाव के बाद लागू किया गया है. पुलिस अधीक्षक यातायात चूनाराम जाट की ओर से सभी जिलाें में पुलिस अफसरों को यह आदेश भेजा गया है. ऐसा पाए जाने पर अब यातायात पुलिस वाहन चालक पर कानूनी कार्रवाई करते हुए जुर्माना लगा सकती है.
कार या बाइक पर अपना नाम, जाति या धर्म आदि लिखवाने वाले सावधान हो जाएं, अब ऐसे नाम या स्लोगन लिखी गाड़ियों के खिलाफ मोटर व्हीकल एक्ट के तहत पुलिस कानूनी कार्रवाई करेगी. राजस्थान में अपनी कार या बाइक पर अपना नाम, जाति या धर्म आदि लिखवाने वाले सावधान हो जाएं, अब ऐसे नाम या स्लोगन लिखी गाड़ियों के खिलाफ मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. राजधानी जयपुर स्थित पुलिस मुख्यालय की ओर से मंगलवार को इस दिशा में सभी जिला पुलिस अधीक्षकों और जयपुर, जोधपुर जिला पुलिस उपायुक्तों को आदेश जारी कर दिए हैं. ऐसे वाहन अब सड़क पर चलते दिखे तो यातायात पुलिस उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है. अगली स्लाइड्स में देखें, नाम और जाति गाड़ियों पर लिखवाने का टशन. . . राजस्थान पुलिस के महानिदेशक कार्यालय की ओर से मंगलवार को इस आदेश जारी किया गया है. पुलिस के आदेश में कहा गया है कि राजस्थान में चलने वाले निजी वाहनों पर स्वयं जाति, संगठनों के पदों का नाम, भूतपूर्व पद, स्वयं का नाम, गांव का नाम इस्तेमाल पर प्रतिबंधित किया गया है. इस आदेश के बाद विभिन्न चिन्ह आदि लिखवाना भी गैरकानूनी होगा. शब्दों या स्लोगनों के इस्तेमाल पर भी जुर्माना लगाया जा सकता है. यह कानून नागरिक अधिकार संस्था के सुझाव के बाद लागू किया गया है. पुलिस अधीक्षक यातायात चूनाराम जाट की ओर से सभी जिलाें में पुलिस अफसरों को यह आदेश भेजा गया है. ऐसा पाए जाने पर अब यातायात पुलिस वाहन चालक पर कानूनी कार्रवाई करते हुए जुर्माना लगा सकती है.
मायटास सौदे से शुरू हुआ विवाद सत्यम कंप्यूटर्स के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है। घरेलू या विदेशी कंपनी और निजी इक्विटी फर्मों की ओर से जबरिया अधिग्रहण की आशंका के बीच सत्यम कंप्यूटर्स के प्रबंधक और कुछ संस्थागत निवेशक किसी अन्य सॉफ्टवेयर कंपनी के साथ सत्यम के विलय की संभावनाएं तलाश रहे हैं। इसके लिए सत्यम दिल्ली स्थित एचसीएल टेक्नोलॉजिज और बेंगलुरु स्थित माइंड ट्री से बात कर रही है। निवेश बैंक के एक सूत्र ने बताया कि एचसीएल के साथ सत्यम का गैर-नकद (कैशलेस) विलय हो सकता है। उल्लेखनीय है कि सत्यम प्रबंधकों को विवादस्पद मायटास सौदे (जिसे रद्द कर दिया गया) के बाद संस्थागत निवेशकों, खासकर विदेशी निवेशकों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। विवाद की वजह से कंपनी के चार स्वतंत्र निवेशक इस्तीफा तक दे चुके हैं। निवेश बैंक के सूत्रों के मुताबिक, अगर एचसीएल और सत्यम का विलय होता है, तो यह देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी बन सकती है। इस बीच सत्यम के प्रवर्तकों की कंपनी में हिस्सेदारी घटकर करीब 5 फीसदी तक पहुंच गई है, क्योंकि कुछ संस्थागत निवेशकों ने गिरवी रखे गए शेयरों को बेच दिया है। सूत्रों के मुताबिक, सत्यम के विलय का प्रारूप डीएसपी मेरिल लिंच की ओर तैयार किया जा सकता है। निवेशक कंपनी का विलय इसलिए भी करने को इच्छुक हैं, क्योंकि गैर-आईटी कंपनी सत्यम का अधिग्रहण करने की योजना बना रही है। हालांकि इस बारे में एचसीएल की ओर से कोई भी जानकारी देने से इनकार कर दिया गया। सत्यम के अधिकारी का कहना है कि फिलहाल इस बारे में कुछ भी कहना ठीक नहीं होगा। सूत्रों का कहना है कि 10 जनवरी को प्रस्तावित सत्यम की बोर्ड बैठक के बाद इसका फैसला हो सकता है। क्योंकि अभी कंपनी के कुछ निदेशकों का पद खाली है। ऐसे में बैठक में निदेशकों की संख्या तय होने के बाद ही कोई निर्णय लिया जा सकता है। अगर शिव नाडार प्रवर्तित एचसीएल और सत्यम का विलय होता है, तो यह देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी बन सकती है।
मायटास सौदे से शुरू हुआ विवाद सत्यम कंप्यूटर्स के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है। घरेलू या विदेशी कंपनी और निजी इक्विटी फर्मों की ओर से जबरिया अधिग्रहण की आशंका के बीच सत्यम कंप्यूटर्स के प्रबंधक और कुछ संस्थागत निवेशक किसी अन्य सॉफ्टवेयर कंपनी के साथ सत्यम के विलय की संभावनाएं तलाश रहे हैं। इसके लिए सत्यम दिल्ली स्थित एचसीएल टेक्नोलॉजिज और बेंगलुरु स्थित माइंड ट्री से बात कर रही है। निवेश बैंक के एक सूत्र ने बताया कि एचसीएल के साथ सत्यम का गैर-नकद विलय हो सकता है। उल्लेखनीय है कि सत्यम प्रबंधकों को विवादस्पद मायटास सौदे के बाद संस्थागत निवेशकों, खासकर विदेशी निवेशकों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। विवाद की वजह से कंपनी के चार स्वतंत्र निवेशक इस्तीफा तक दे चुके हैं। निवेश बैंक के सूत्रों के मुताबिक, अगर एचसीएल और सत्यम का विलय होता है, तो यह देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी बन सकती है। इस बीच सत्यम के प्रवर्तकों की कंपनी में हिस्सेदारी घटकर करीब पाँच फीसदी तक पहुंच गई है, क्योंकि कुछ संस्थागत निवेशकों ने गिरवी रखे गए शेयरों को बेच दिया है। सूत्रों के मुताबिक, सत्यम के विलय का प्रारूप डीएसपी मेरिल लिंच की ओर तैयार किया जा सकता है। निवेशक कंपनी का विलय इसलिए भी करने को इच्छुक हैं, क्योंकि गैर-आईटी कंपनी सत्यम का अधिग्रहण करने की योजना बना रही है। हालांकि इस बारे में एचसीएल की ओर से कोई भी जानकारी देने से इनकार कर दिया गया। सत्यम के अधिकारी का कहना है कि फिलहाल इस बारे में कुछ भी कहना ठीक नहीं होगा। सूत्रों का कहना है कि दस जनवरी को प्रस्तावित सत्यम की बोर्ड बैठक के बाद इसका फैसला हो सकता है। क्योंकि अभी कंपनी के कुछ निदेशकों का पद खाली है। ऐसे में बैठक में निदेशकों की संख्या तय होने के बाद ही कोई निर्णय लिया जा सकता है। अगर शिव नाडार प्रवर्तित एचसीएल और सत्यम का विलय होता है, तो यह देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी बन सकती है।
मकान मालिक से परेशान शिवपुरी गली नंबर सात में रहने वाले किराएदार मदन लाल ने सोमवार सुबह घर की दूसरी मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। सूचना मिलते ही थाना दरेसी की पुलिस मौके पर पहुंच गई। परिजनों ने मकान मालिक पर परेशान करने के आरोप लगाए हैं। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेसी पार्षद मनी गरेवाल पर भी धमकियां देने के आरोप लगाए। पार्षद मनी गरेवाल ने आरोपों को गलत बताया है। थाना दरेसी की पुलिस मामले की जांच में जुटी है। पुलिस का कहना है कि परिजनों के ब्यान दर्ज करने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। मृतक मदन लाल के बेटे भारत भूषण ने बताया कि कोरोना के कारण उनके पिता का कामधंधा पूरी तरह से ठप था। उसे भी कंपनी की तरफ से तनख्वाह नहीं मिल रही थी। आधी तनख्वाह दे रहे थे। इस कारण घर का खर्च भी पूरी तरह से नहीं चल पा रहा था। मकान मालिक उन पर लगातार दबाव बना रहे थे कि वह किराया दे। उन्होंने किराया धीरे-धीरे देने की बात कही थी लेकिन मकान मालिक लगातार दबाव बना रहा था। भारत भूषण ने आरोप लगाया कि मकान मालिक कुछ कुछ दिन बाद किसी न किसी से धमकियां दिलवाता था। यहां तक की मकान मालिक ने इलाका पार्षद मनी गरेवाल से भी धमकियां दिलवाई थी ताकि मकान खाली करवा सके। इससे परेशान होकर उनके पिता ने आत्महत्या कर ली। कांग्रेसी पार्षद मनी गरेवाल ने आरोपों को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि इलाके के कई लोग उनके पास शिकायत लेकर आते हैं। वह रोजाना कई लोगों के समझौते भी करवाते हैं। मदन लाल और उनके मकान मालिक के बीच छह महीने से विवाद चल रहा था। छह महीने पहले उनके पास मदन लाल, उसका बेटा और कुछ लोग लेकर आए थे। फैसले के दौरान उन्होंने ही छह महीने मांगे थे और कहा था कि घर खाली कर दिया जाएगा। छह महीने से वह दोनों पक्षों को मिले भी नहीं है। उनका इस मामले से कुछ लेना देना नहीं हैं। थाना दरेसी के प्रभारी सब इंस्पेक्टर दविंदर का कहना है कि अभी मदन लाल के परिजनों ने कोई बयान नहीं लिखवाए है। वह कोई बयान लिखवाएंगे तो आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मकान मालिक से परेशान शिवपुरी गली नंबर सात में रहने वाले किराएदार मदन लाल ने सोमवार सुबह घर की दूसरी मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। सूचना मिलते ही थाना दरेसी की पुलिस मौके पर पहुंच गई। परिजनों ने मकान मालिक पर परेशान करने के आरोप लगाए हैं। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेसी पार्षद मनी गरेवाल पर भी धमकियां देने के आरोप लगाए। पार्षद मनी गरेवाल ने आरोपों को गलत बताया है। थाना दरेसी की पुलिस मामले की जांच में जुटी है। पुलिस का कहना है कि परिजनों के ब्यान दर्ज करने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। मृतक मदन लाल के बेटे भारत भूषण ने बताया कि कोरोना के कारण उनके पिता का कामधंधा पूरी तरह से ठप था। उसे भी कंपनी की तरफ से तनख्वाह नहीं मिल रही थी। आधी तनख्वाह दे रहे थे। इस कारण घर का खर्च भी पूरी तरह से नहीं चल पा रहा था। मकान मालिक उन पर लगातार दबाव बना रहे थे कि वह किराया दे। उन्होंने किराया धीरे-धीरे देने की बात कही थी लेकिन मकान मालिक लगातार दबाव बना रहा था। भारत भूषण ने आरोप लगाया कि मकान मालिक कुछ कुछ दिन बाद किसी न किसी से धमकियां दिलवाता था। यहां तक की मकान मालिक ने इलाका पार्षद मनी गरेवाल से भी धमकियां दिलवाई थी ताकि मकान खाली करवा सके। इससे परेशान होकर उनके पिता ने आत्महत्या कर ली। कांग्रेसी पार्षद मनी गरेवाल ने आरोपों को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि इलाके के कई लोग उनके पास शिकायत लेकर आते हैं। वह रोजाना कई लोगों के समझौते भी करवाते हैं। मदन लाल और उनके मकान मालिक के बीच छह महीने से विवाद चल रहा था। छह महीने पहले उनके पास मदन लाल, उसका बेटा और कुछ लोग लेकर आए थे। फैसले के दौरान उन्होंने ही छह महीने मांगे थे और कहा था कि घर खाली कर दिया जाएगा। छह महीने से वह दोनों पक्षों को मिले भी नहीं है। उनका इस मामले से कुछ लेना देना नहीं हैं। थाना दरेसी के प्रभारी सब इंस्पेक्टर दविंदर का कहना है कि अभी मदन लाल के परिजनों ने कोई बयान नहीं लिखवाए है। वह कोई बयान लिखवाएंगे तो आगे की कार्रवाई की जाएगी।
नई दिल्ली. एशिया कप (Asia Cup)के शेड्यूल का आखिरकार ऐलान कर दिया गया है. वनडे फॉर्मेट में इस टूर्नामेंट का आयोजन अगस्त-सितंबर में होगा और पाकिस्तान व श्रीलंका मैचों की मेजबानी करेंगे. टूर्नामेंट के चार मैच पाकिस्तान में होंगे जबकि फाइनल सहित 9 मैच श्रीलंका में आयोजित होंगे. ऐसे में अपने मैचों के लिए श्रीलंका और पाकिस्तान की यात्रा प्लेयर्स के लिए थकान बढ़ाने वाली साबित हो सकती है. इस टूर्नामेंट के जरिये आईसीसी वनडे वर्ल्डकप (ICC World Cup)के पहले एशियाई टीमों को अपनी क्षमता और कमजोर व मजबूत पक्ष को परखने का मौका मिल सकेगा. पाकिस्तान के पूर्व कप्तान सलमान बट (Salman Butt) टूर्नामेंट के शेड्यूल को अजीबोगरीब बताते हुए इसके लिए पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) को आड़े हाथ ले चुके हैं. उन्होंने थकानभरे कार्यक्रम का हवाल देते हुए कहा कि पीसीबी को अपने प्लेयर्स की परवाह ही नहीं है. अब बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) के क्रिकेट ऑपरेशंस चेयरमैन जलाल यूनुस (Jalal Yunus) ने भी टूर्नामेंट के शेड्यूल को लेकर अपनी चिंता का इजहार कर दिया है. उनका मानना है कि एशिया कप के हाइब्रिड मॉडल में अत्यधिक यात्रा करने से खिलाड़ियों पर विपरीत असर पड़ सकता है. क्रिकेट ऑपरेशंस चेयरमैन के रूप में वर्ष 2021 में अकरम खान की जगह लेने वाले जलाल यूनुस ने कहा कि एयर ट्रैवल करना और उड़ानों से दो घंटे पहले एयरपोर्ट पहुंचना खिलाड़ियों को मानसिक तनाव में डाल सकता है. हालांकि उन्होंने यह भी माना, चूंकि अन्य टीमें कार्यक्रम से सहमत है, ऐसे में बांग्लादेश को भी उसी के अनुसार तैयारी करनी होगी. . अपकमिंग 4 बॉलीवुड फिल्में, 2 सुपरस्टार, दांव पर लगे हैं मेकर्स के करोड़ों, क्या चारों पार करेंगी 1000 करोड़ का आंकड़ा? भूलकर भी न करें फोन को 100 प्रतिशत चार्ज! कब बंद करें चार्जिंग? 90 फीसदी लोग अनजान!
नई दिल्ली. एशिया कप के शेड्यूल का आखिरकार ऐलान कर दिया गया है. वनडे फॉर्मेट में इस टूर्नामेंट का आयोजन अगस्त-सितंबर में होगा और पाकिस्तान व श्रीलंका मैचों की मेजबानी करेंगे. टूर्नामेंट के चार मैच पाकिस्तान में होंगे जबकि फाइनल सहित नौ मैच श्रीलंका में आयोजित होंगे. ऐसे में अपने मैचों के लिए श्रीलंका और पाकिस्तान की यात्रा प्लेयर्स के लिए थकान बढ़ाने वाली साबित हो सकती है. इस टूर्नामेंट के जरिये आईसीसी वनडे वर्ल्डकप के पहले एशियाई टीमों को अपनी क्षमता और कमजोर व मजबूत पक्ष को परखने का मौका मिल सकेगा. पाकिस्तान के पूर्व कप्तान सलमान बट टूर्नामेंट के शेड्यूल को अजीबोगरीब बताते हुए इसके लिए पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को आड़े हाथ ले चुके हैं. उन्होंने थकानभरे कार्यक्रम का हवाल देते हुए कहा कि पीसीबी को अपने प्लेयर्स की परवाह ही नहीं है. अब बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के क्रिकेट ऑपरेशंस चेयरमैन जलाल यूनुस ने भी टूर्नामेंट के शेड्यूल को लेकर अपनी चिंता का इजहार कर दिया है. उनका मानना है कि एशिया कप के हाइब्रिड मॉडल में अत्यधिक यात्रा करने से खिलाड़ियों पर विपरीत असर पड़ सकता है. क्रिकेट ऑपरेशंस चेयरमैन के रूप में वर्ष दो हज़ार इक्कीस में अकरम खान की जगह लेने वाले जलाल यूनुस ने कहा कि एयर ट्रैवल करना और उड़ानों से दो घंटे पहले एयरपोर्ट पहुंचना खिलाड़ियों को मानसिक तनाव में डाल सकता है. हालांकि उन्होंने यह भी माना, चूंकि अन्य टीमें कार्यक्रम से सहमत है, ऐसे में बांग्लादेश को भी उसी के अनुसार तैयारी करनी होगी. . अपकमिंग चार बॉलीवुड फिल्में, दो सुपरस्टार, दांव पर लगे हैं मेकर्स के करोड़ों, क्या चारों पार करेंगी एक हज़ार करोड़ का आंकड़ा? भूलकर भी न करें फोन को एक सौ प्रतिशत चार्ज! कब बंद करें चार्जिंग? नब्बे फीसदी लोग अनजान!
आज Vijay Vidrohi एक ज़रूरी सवाल पूछ रहे हैं। वो पूछ रहे हैं कि आख़िर क्यों Rahul Gandhi इतनी विदेशी यात्राएं करते हैं। हाल ही में Rahul Gandhi का वीडियो viral हुआ जिसमें वो एक दोस्त की शादी में Nepal गए थे। वो एक क्लब में दोस्तों के साथ enjoy करते हुए दिखाई दिए। सत्तारूढ़ BJP ने उन्हें इस बात पर निशाना भी बनाया। आज जानेंगे कि कितनी महंगी पड़ गई Gandhi परिवार को ये यात्राएं।
आज Vijay Vidrohi एक ज़रूरी सवाल पूछ रहे हैं। वो पूछ रहे हैं कि आख़िर क्यों Rahul Gandhi इतनी विदेशी यात्राएं करते हैं। हाल ही में Rahul Gandhi का वीडियो viral हुआ जिसमें वो एक दोस्त की शादी में Nepal गए थे। वो एक क्लब में दोस्तों के साथ enjoy करते हुए दिखाई दिए। सत्तारूढ़ BJP ने उन्हें इस बात पर निशाना भी बनाया। आज जानेंगे कि कितनी महंगी पड़ गई Gandhi परिवार को ये यात्राएं।
फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स' को 95वें एकेडमी अवॉर्ड्स की कंटेंशन लिस्ट में शामिल किया गया है। इसकी जानकारी फिल्म के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री और इसके लीड कलाकार अनुपम शेर फैंस के साथ साझा की है। विवेक अग्निहोत्री निर्देशित फिल्म'द कश्मीर फाइल्स' ने अपने कंटेंट के चलते बीते साल काफी सुर्खियां बटोरी थी। वहीं इस साल ये फिल्म अंतर्राष्ट्रीय पटल पर नया अध्याय लिखने के लिए तैयार है। जी हां, बता दें कि इंडियन बॉक्स ऑफिस पर धूम मचाने वाली 'द कश्मीर फाइल्स'अब 95वें ऑस्कर अवॉर्ड्स (Oscars 2023) में अपनी दावेदारी ठोकने जा रही है। दरअसल, फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स' को 95वें एकेडमी अवॉर्ड्स की कंटेंशन लिस्ट में शामिल किया गया है। इसकी जानकारी फिल्म के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री और इसके लीड कलाकार अनुपम शेर फैंस के साथ साझा की है। गौरतलब है कि फिल्म के साथ ही अनुपम भी ऑस्कर के लिए बेस्ट एक्टर कैटेगरी में शॉर्टलिस्ट किए गए हैं। ऐसे में अनुपम खेर ने सोशल मीडिया पर ये खुशी साझा करते हुए लिखा है,'एक फिल्म के रूप में #TheKashmirFiles और #Oscars2023 के लिए #BestFilm और #BestActor की कैटेगरी में मेरा नाम चुने जाने पर बहुत खुशी हुई! छोटी सूची के रूप में भी यह हमारे लिए एक बड़ी जीत है. . . सूची में शामिल अन्य भारतीय फिल्मों को भी बधाई, भारतीय सिनेमा की जय हो'। बता दें कि 'द कश्मीर फाइल्स' के अलावा साउथ की लोकप्रिय फिल्म कांतारा (Kantara) को भी 95वें ऑस्कर अवॉर्ड्स की कंटेंशन लिस्ट में जगह मिली है। इसकी जानकारी फैंस के साथ शेयर करते हुए कांतारा के निर्देशक और लीड एक्टर ऋषभ शेट्टी ने ट्विटर पर लिखा है,हमें यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि 'कांतारा' को 2 ऑस्कर क्वालिफिकेशंस मिली हैं! उन सभी का दिल से शुक्रिया जिन्होंने हमारा साथ दिया। हम आपके सभी समर्थन के साथ इस यात्रा को आगे साझा करने के लिए तत्पर हैं। #Oscars में इसे चमकते देखने के लिए और इंतजार नहीं कर सकता. . . '। गौरतलब है कि साउथ की सुपरहिट फिल्म RRR और भारत की आधिकारिक प्रविष्टि छेलो शो इससे पहले ही कंटेंशन लिस्ट में पहुंच चुकी हैं।
फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स' को पचानवेवें एकेडमी अवॉर्ड्स की कंटेंशन लिस्ट में शामिल किया गया है। इसकी जानकारी फिल्म के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री और इसके लीड कलाकार अनुपम शेर फैंस के साथ साझा की है। विवेक अग्निहोत्री निर्देशित फिल्म'द कश्मीर फाइल्स' ने अपने कंटेंट के चलते बीते साल काफी सुर्खियां बटोरी थी। वहीं इस साल ये फिल्म अंतर्राष्ट्रीय पटल पर नया अध्याय लिखने के लिए तैयार है। जी हां, बता दें कि इंडियन बॉक्स ऑफिस पर धूम मचाने वाली 'द कश्मीर फाइल्स'अब पचानवेवें ऑस्कर अवॉर्ड्स में अपनी दावेदारी ठोकने जा रही है। दरअसल, फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स' को पचानवेवें एकेडमी अवॉर्ड्स की कंटेंशन लिस्ट में शामिल किया गया है। इसकी जानकारी फिल्म के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री और इसके लीड कलाकार अनुपम शेर फैंस के साथ साझा की है। गौरतलब है कि फिल्म के साथ ही अनुपम भी ऑस्कर के लिए बेस्ट एक्टर कैटेगरी में शॉर्टलिस्ट किए गए हैं। ऐसे में अनुपम खेर ने सोशल मीडिया पर ये खुशी साझा करते हुए लिखा है,'एक फिल्म के रूप में #TheKashmirFiles और #Oscarsदो हज़ार तेईस के लिए #BestFilm और #BestActor की कैटेगरी में मेरा नाम चुने जाने पर बहुत खुशी हुई! छोटी सूची के रूप में भी यह हमारे लिए एक बड़ी जीत है. . . सूची में शामिल अन्य भारतीय फिल्मों को भी बधाई, भारतीय सिनेमा की जय हो'। बता दें कि 'द कश्मीर फाइल्स' के अलावा साउथ की लोकप्रिय फिल्म कांतारा को भी पचानवेवें ऑस्कर अवॉर्ड्स की कंटेंशन लिस्ट में जगह मिली है। इसकी जानकारी फैंस के साथ शेयर करते हुए कांतारा के निर्देशक और लीड एक्टर ऋषभ शेट्टी ने ट्विटर पर लिखा है,हमें यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि 'कांतारा' को दो ऑस्कर क्वालिफिकेशंस मिली हैं! उन सभी का दिल से शुक्रिया जिन्होंने हमारा साथ दिया। हम आपके सभी समर्थन के साथ इस यात्रा को आगे साझा करने के लिए तत्पर हैं। #Oscars में इसे चमकते देखने के लिए और इंतजार नहीं कर सकता. . . '। गौरतलब है कि साउथ की सुपरहिट फिल्म RRR और भारत की आधिकारिक प्रविष्टि छेलो शो इससे पहले ही कंटेंशन लिस्ट में पहुंच चुकी हैं।
२. जीवन की तृष्णा ३. सुख प्राप्ति की इच्छा को दूर करो। किन्तु जो महात्त्वाकांक्षी हैं, उन्हीं के समान परिश्रम करो । जिन्हें जीवन की तृष्णा है, उन्हीं के समान प्राणिमात्र के जीवन का सम्मान करो । जो मुख के लिए ही जीवन यापन करते हैं, उन्हीं के समान सुखी रहो। हृदय के भीतर पाप के अंकुर को ढूंढ़ कर उसे बाहर निकाल फेंको। यह अंकुर श्रद्धालु शिष्य के हृदय में भी उसी प्रकार बढता और पनपता है, जैसे कि वासनायुक्त मानव के हृदय में । केवल शूरवीर ही उसे नष्ट कर डालने में सफल होते हैं। दुर्बलों को तो उसके बढ़ने- पनपने, फूलने-फलने और फिर नष्ट होने की राह देखनी होती है।
दो. जीवन की तृष्णा तीन. सुख प्राप्ति की इच्छा को दूर करो। किन्तु जो महात्त्वाकांक्षी हैं, उन्हीं के समान परिश्रम करो । जिन्हें जीवन की तृष्णा है, उन्हीं के समान प्राणिमात्र के जीवन का सम्मान करो । जो मुख के लिए ही जीवन यापन करते हैं, उन्हीं के समान सुखी रहो। हृदय के भीतर पाप के अंकुर को ढूंढ़ कर उसे बाहर निकाल फेंको। यह अंकुर श्रद्धालु शिष्य के हृदय में भी उसी प्रकार बढता और पनपता है, जैसे कि वासनायुक्त मानव के हृदय में । केवल शूरवीर ही उसे नष्ट कर डालने में सफल होते हैं। दुर्बलों को तो उसके बढ़ने- पनपने, फूलने-फलने और फिर नष्ट होने की राह देखनी होती है।
फिल्म 'उमराव जान' के लिए खय्याम साहब को फिल्मफेयर और नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। संगीतकार 2011 में पद्म भूषण जैसे सम्मानों से भी नवाजे जा चुके हैं। मुंबई. 'कभी-कभी' और 'उमराव जान' जैसी फिल्मों के संगीतकार मोहम्मद जहुर खय्याम हाशमी का सोमवार रात निधन हो गया। 92 वर्षीय संगीतकार लंग्स में इन्फेक्शन के चलते पिछले कुछ दिनों से बीमार थे और मुंबई के सुजय अस्पताल के आईसीयू में भर्ती थे। वे पद्म भूषण और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित थे। उनके निधन के बाद बॉलीवुड में शोक की लहर है। खय्याम साहब द्वारा रची गई धुनों में एक खास किस्म का आकर्षण रहा है, जिसने उन्हें संगीत जगत में एक खास मुकाम तक पहुंचाया। 18 फरवरी, 1927 को पंजाब में जन्मे खय्याम साहब ने म्यूजिक कॅरियर की शुरुआत लुधियाना में 1943 में महज 17 साल की उम्र में की थी। 1953 में आई फिल्म 'फुटपाथ' से उन्होंने बॉलीवुड में अपने कॅरियर की शरुआत की थी। खय्याम साहब को 1961 में आई फिल्म 'शोला और शबनम' में संगीत देकर पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने आखिरी खत, कभी-कभी, त्रिशूल, नूरी, बाजार, उमराव जान और यात्रा जैसी फिल्मों में धुनें दीं। ये वो धुनें हैं, जो आज भी लोगों की जुबान पर रहती है। फिल्म 'उमराव जान' के लिए खय्याम साहब को फिल्मफेयर और नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। संगीतकार 2011 में पद्म भूषण जैसे सम्मानों से भी नवाजे जा चुके हैं। इसके अलावा 2007 में संगीत नाटक एकेडमी अवॉर्ड से भी उन्हें सम्मानित किया गया था। बहुत कम लोगों को ये बात पता होगी कि साल 2007 में आई फिल्म 'यात्रा' में खय्याम साहब का संगीत था। फिल्म में रेखा और नाना पाटेकर लीड रोल में थे। भले ही खय्याम साहब इस दुनिया से को अलविदा कह गए हो लेकिन उनकी यादें और गाने लोगों के जहन में हमेशा ही रहेंगे।
फिल्म 'उमराव जान' के लिए खय्याम साहब को फिल्मफेयर और नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। संगीतकार दो हज़ार ग्यारह में पद्म भूषण जैसे सम्मानों से भी नवाजे जा चुके हैं। मुंबई. 'कभी-कभी' और 'उमराव जान' जैसी फिल्मों के संगीतकार मोहम्मद जहुर खय्याम हाशमी का सोमवार रात निधन हो गया। बानवे वर्षीय संगीतकार लंग्स में इन्फेक्शन के चलते पिछले कुछ दिनों से बीमार थे और मुंबई के सुजय अस्पताल के आईसीयू में भर्ती थे। वे पद्म भूषण और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित थे। उनके निधन के बाद बॉलीवुड में शोक की लहर है। खय्याम साहब द्वारा रची गई धुनों में एक खास किस्म का आकर्षण रहा है, जिसने उन्हें संगीत जगत में एक खास मुकाम तक पहुंचाया। अट्ठारह फरवरी, एक हज़ार नौ सौ सत्ताईस को पंजाब में जन्मे खय्याम साहब ने म्यूजिक कॅरियर की शुरुआत लुधियाना में एक हज़ार नौ सौ तैंतालीस में महज सत्रह साल की उम्र में की थी। एक हज़ार नौ सौ तिरेपन में आई फिल्म 'फुटपाथ' से उन्होंने बॉलीवुड में अपने कॅरियर की शरुआत की थी। खय्याम साहब को एक हज़ार नौ सौ इकसठ में आई फिल्म 'शोला और शबनम' में संगीत देकर पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने आखिरी खत, कभी-कभी, त्रिशूल, नूरी, बाजार, उमराव जान और यात्रा जैसी फिल्मों में धुनें दीं। ये वो धुनें हैं, जो आज भी लोगों की जुबान पर रहती है। फिल्म 'उमराव जान' के लिए खय्याम साहब को फिल्मफेयर और नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। संगीतकार दो हज़ार ग्यारह में पद्म भूषण जैसे सम्मानों से भी नवाजे जा चुके हैं। इसके अलावा दो हज़ार सात में संगीत नाटक एकेडमी अवॉर्ड से भी उन्हें सम्मानित किया गया था। बहुत कम लोगों को ये बात पता होगी कि साल दो हज़ार सात में आई फिल्म 'यात्रा' में खय्याम साहब का संगीत था। फिल्म में रेखा और नाना पाटेकर लीड रोल में थे। भले ही खय्याम साहब इस दुनिया से को अलविदा कह गए हो लेकिन उनकी यादें और गाने लोगों के जहन में हमेशा ही रहेंगे।
Manoharpur(Ajay Singh) : मनोहरपुर,आनंदपुर प्रखंड में राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस व विद्यादायनी मां सरस्वती की पूजा धूमधाम से मनाया गया. इस अवसर पर सरकारी व ग़ैरसरकारी प्रतिष्ठानों में तिरंगा झंडा फहराया गया. साथ ही विभिन्न पूजा पंडालों व स्कूलों में माँ सरस्वती की पूजा अर्चना की गई. इस उपलक्ष्य में कई कार्यक्रम आयोजित की गई. गणतंत्र दिवस पर मनोहरपुर फ़ोरेस्ट नाका चौक पर ज़िला उपाध्यक्ष रंजित यादव ने झंडोत्तोलन कर बीर शहीदों को याद किया. साथ ही राष्ट्र की एकता,अखंडता, समृद्धि व प्रगति में युवाओं से राष्ट्रहीत में योगदान देने की अपील की. प्रखंड कार्यालय मनोहरपुर में भी ध्वजारोहण बीडीओ हरि उरांव,आनंदपुर में बीडीओ जयंतजेरोम लकड़ा, मनोहरपुर थाना में पुलिस निरीक्षक फागू होरो, थाना प्रभारी अमित कुमार, मनोहरपुर रेल परिसर में स्टेशन प्रबंधक शैलेंद्र कुमार, रेल सुरक्षा बल थाना में ओसी जोगेंद्र कुमार, मनोहरपुर जीआरपी रेल थाना में थाना प्रभारी अनिल कुमार सिंह, पीडब्लूडी कार्यालय में कार्यपालक अभियंता रघुवंश प्रसाद चौधरी, मनोहरपुर सीएचसी में चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अनिल कुमार, ईश्वर पाठक पल्स टू विद्यालय में प्रधान शिक्षक संध्या सुरीन, संत अगस्तीन कांलेज में प्रिंसिपल नेहरूलाल महतो, संत अगस्तीन हाई स्कूल के प्रधान शिक्षक संजय डूंगडुंग, सरस्वती शिशु विद्या मंदिर मनोहरपुर के प्राचार्य रवींद्र सिंह, चिड़िया मायंस(सेल)के सीजीएम कमल भास्कर समेत विभिन्न सरकारी, ग़ैरसरकारी व विभिन्न राजनीतिक संगठन के प्रमुखों व पदाधिकारीयों ने ध्वजारोहण किया.
Manoharpur : मनोहरपुर,आनंदपुर प्रखंड में राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस व विद्यादायनी मां सरस्वती की पूजा धूमधाम से मनाया गया. इस अवसर पर सरकारी व ग़ैरसरकारी प्रतिष्ठानों में तिरंगा झंडा फहराया गया. साथ ही विभिन्न पूजा पंडालों व स्कूलों में माँ सरस्वती की पूजा अर्चना की गई. इस उपलक्ष्य में कई कार्यक्रम आयोजित की गई. गणतंत्र दिवस पर मनोहरपुर फ़ोरेस्ट नाका चौक पर ज़िला उपाध्यक्ष रंजित यादव ने झंडोत्तोलन कर बीर शहीदों को याद किया. साथ ही राष्ट्र की एकता,अखंडता, समृद्धि व प्रगति में युवाओं से राष्ट्रहीत में योगदान देने की अपील की. प्रखंड कार्यालय मनोहरपुर में भी ध्वजारोहण बीडीओ हरि उरांव,आनंदपुर में बीडीओ जयंतजेरोम लकड़ा, मनोहरपुर थाना में पुलिस निरीक्षक फागू होरो, थाना प्रभारी अमित कुमार, मनोहरपुर रेल परिसर में स्टेशन प्रबंधक शैलेंद्र कुमार, रेल सुरक्षा बल थाना में ओसी जोगेंद्र कुमार, मनोहरपुर जीआरपी रेल थाना में थाना प्रभारी अनिल कुमार सिंह, पीडब्लूडी कार्यालय में कार्यपालक अभियंता रघुवंश प्रसाद चौधरी, मनोहरपुर सीएचसी में चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अनिल कुमार, ईश्वर पाठक पल्स टू विद्यालय में प्रधान शिक्षक संध्या सुरीन, संत अगस्तीन कांलेज में प्रिंसिपल नेहरूलाल महतो, संत अगस्तीन हाई स्कूल के प्रधान शिक्षक संजय डूंगडुंग, सरस्वती शिशु विद्या मंदिर मनोहरपुर के प्राचार्य रवींद्र सिंह, चिड़िया मायंसके सीजीएम कमल भास्कर समेत विभिन्न सरकारी, ग़ैरसरकारी व विभिन्न राजनीतिक संगठन के प्रमुखों व पदाधिकारीयों ने ध्वजारोहण किया.
PATNA : रविवार को चौक थाना क्षेत्र के मंगल तालाव के पास एक प्लास्टिक फैक्ट्री में भीषण आग लग गयी। हालांकि जब आग की लपटें तेज उठने लगी। तब जाकर लोगो को इस आगलगी के बारे में जानकारी मिली। जिसके बाद स्थानीय थाना को इसकी सूचना दी गई। आगलगी की सूचना अग्निशमन विभाग को दी गयी। जिसके बाद मौके पर कई दमकल की गाड़ियां पहुँच कर आग पर नियंत्रण पाने की कोशिश की। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। फिलहाल आज रविवार होने के बजह से फैक्ट्री बन्द थी। इस वजह से आग से किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। शार्ट सर्किट की वजह से फैक्ट्री में आग लगने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल इस आगलगी में क्या कुछ नुकसान हुआ है। इसका आकलन किया जा रहा है।
PATNA : रविवार को चौक थाना क्षेत्र के मंगल तालाव के पास एक प्लास्टिक फैक्ट्री में भीषण आग लग गयी। हालांकि जब आग की लपटें तेज उठने लगी। तब जाकर लोगो को इस आगलगी के बारे में जानकारी मिली। जिसके बाद स्थानीय थाना को इसकी सूचना दी गई। आगलगी की सूचना अग्निशमन विभाग को दी गयी। जिसके बाद मौके पर कई दमकल की गाड़ियां पहुँच कर आग पर नियंत्रण पाने की कोशिश की। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। फिलहाल आज रविवार होने के बजह से फैक्ट्री बन्द थी। इस वजह से आग से किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। शार्ट सर्किट की वजह से फैक्ट्री में आग लगने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल इस आगलगी में क्या कुछ नुकसान हुआ है। इसका आकलन किया जा रहा है।
चर्चा में क्यों? 24 मई, 2022 को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने भेंट-मुलाकात अभियान के दौरान दंतेवाड़ा ज़िले में माँ दंतेश्वरी का दर्शन कर उन्हें डेनेक्स की महिलाओं द्वारा तैयार की गई 11 किमी. लंबी चुनरी ओढ़ाई, जिससे इन महिलाओं का नाम विश्व रिकॉर्ड में दर्ज हो गया। - गौरतलब है कि डेनेक्स (दंतेवाड़ा नेक्स्ट) की 300 महिलाओं ने केवल 7 दिनों में अपने हुनर से 11 किमी. लंबी यह चुनरी तैयार की है। - इससे पहले भी डेनेक्स में काम करने वाली महिलाएँ 8,000 मीटर लंबी चुनरी बनाने का विश्व रिकॉर्ड भी स्थापित कर चुकी हैं। इस चुनरी को 2017 में मध्य प्रदेश के मंदसौर में नर्मदा नदी पर चढ़ाया गया था। - मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर मंदिर में पूजा-अर्चना की और मंदिर परिसर में मावली माता और भैरव जी के दर्शन भी किये। - इस दौरान मंदिर परिसर में पारंपरिक वाद्ययंत्रों की सुमधुर ध्वनि से पूरा वातावरण आध्यात्मिक रंग में रंग गया था। - ज़िला प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि डेनेक्स की महिलाओं ने जो चुनरी बनाई है, उससे उनके हुनर को पूरे देश में जगह मिलेगी और इससे उनके काम की ख्याति दुनिया भर में फैलेगी। - गौरतलब है कि 'दंतेवाड़ा नेक्स्ट' (डेनेक्स) एक कपड़ा निर्माता कंपनी है, जिसे ज़िला प्रशासन ने जनवरी 2021 में शुरू किया था। वर्तमान में ज़िले में इसकी पाँच इकाईयाँ हैं। चर्चा में क्यों? 24 मई, 2022 को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य के सुदूर अंचल दंतेवाड़ा से राज्य के किसानों को बड़ी सौगात देते हुए प्रधानमंत्री फसल बीमा एवं उद्यानिकी फसलों की मौसम आधारित बीमा दावा राशि के वितरण का शुभारंभ किया। - रबी एवं उद्यानिकी फसलों की बीमा योजना के तहत राज्य के 17 ज़िलों के लगभग डेढ़ लाख किसानों को 307 करोड़ 19 लाख रुपए की दावा राशि मिलेगी। - उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ने किसानों को फसल बीमा दावा राशि के भुगतान में विलंब न हो, इसके मद्देनज़र राजधानी रायपुर से इस कार्यक्रम का शुभारंभ करने के बजाय दंतेवाड़ा से ही ऑनलाइन शुभारंभ किया। इससे पूर्व गोधन न्याय योजना की राशि का वितरण उन्होंने सरगुजा संभाग में भेंट-मुलाकात अभियान के दौरान रामानुजगंज से किया था। - मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा के तहत राज्य के 17 ज़िलों के लगभग 1 लाख 45 हज़ार किसानों को 297 करोड़ 9 लाख रुपए तथा उद्यानिकी फसलों के मौसम आधारित बीमा योजना के अंतर्गत 4,747 कृषकों को 10 करोड़ 10 लाख रुपए का भुगतान किया जा रहा है। खरीफ 2021 में राज्य के 3 लाख 97 हज़ार कृषकों को 752 करोड़ रुपए की दावा राशि का भुगतान किया गया है। - कृषि मंत्री रवींद्र चौबे ने कहा कि पूरे देश में छत्तीसगढ़ में किसानों के हित में सबसे अधिक योजनाएँ संचालित की जा रही हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लागू करने और राज्य के किसानों को इसका लाभ दिलाने में छत्तीसगढ़ देश में पहले नंबर पर है। किसानों को रबी फसलों के बीमा दावा का भुगतान के मामले में भी छत्तीसगढ़ देश का अग्रणी राज्य है। - गौरतलब है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना खरीफ 2016 से लागू है। इसके तहत किसानों को खरीफ फसलों धान, मक्का, मूँगफली, सोयाबीन, अरहर, मूंग और उड़द के लिये मात्र 2 प्रतिशत तथा रबी फसलों गेहूँ, चना, राई-सरसों एवं अलसी के लिये 1.5 प्रतिशत प्रीमियम राशि देनी होती है। शेष बीमा प्रीमियम राशि का आधा-आधा हिस्सा राज्यांश एवं केंद्रांश होता है।
चर्चा में क्यों? चौबीस मई, दो हज़ार बाईस को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने भेंट-मुलाकात अभियान के दौरान दंतेवाड़ा ज़िले में माँ दंतेश्वरी का दर्शन कर उन्हें डेनेक्स की महिलाओं द्वारा तैयार की गई ग्यारह किमी. लंबी चुनरी ओढ़ाई, जिससे इन महिलाओं का नाम विश्व रिकॉर्ड में दर्ज हो गया। - गौरतलब है कि डेनेक्स की तीन सौ महिलाओं ने केवल सात दिनों में अपने हुनर से ग्यारह किमी. लंबी यह चुनरी तैयार की है। - इससे पहले भी डेनेक्स में काम करने वाली महिलाएँ आठ,शून्य मीटर लंबी चुनरी बनाने का विश्व रिकॉर्ड भी स्थापित कर चुकी हैं। इस चुनरी को दो हज़ार सत्रह में मध्य प्रदेश के मंदसौर में नर्मदा नदी पर चढ़ाया गया था। - मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर मंदिर में पूजा-अर्चना की और मंदिर परिसर में मावली माता और भैरव जी के दर्शन भी किये। - इस दौरान मंदिर परिसर में पारंपरिक वाद्ययंत्रों की सुमधुर ध्वनि से पूरा वातावरण आध्यात्मिक रंग में रंग गया था। - ज़िला प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि डेनेक्स की महिलाओं ने जो चुनरी बनाई है, उससे उनके हुनर को पूरे देश में जगह मिलेगी और इससे उनके काम की ख्याति दुनिया भर में फैलेगी। - गौरतलब है कि 'दंतेवाड़ा नेक्स्ट' एक कपड़ा निर्माता कंपनी है, जिसे ज़िला प्रशासन ने जनवरी दो हज़ार इक्कीस में शुरू किया था। वर्तमान में ज़िले में इसकी पाँच इकाईयाँ हैं। चर्चा में क्यों? चौबीस मई, दो हज़ार बाईस को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य के सुदूर अंचल दंतेवाड़ा से राज्य के किसानों को बड़ी सौगात देते हुए प्रधानमंत्री फसल बीमा एवं उद्यानिकी फसलों की मौसम आधारित बीमा दावा राशि के वितरण का शुभारंभ किया। - रबी एवं उद्यानिकी फसलों की बीमा योजना के तहत राज्य के सत्रह ज़िलों के लगभग डेढ़ लाख किसानों को तीन सौ सात करोड़ उन्नीस लाख रुपए की दावा राशि मिलेगी। - उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ने किसानों को फसल बीमा दावा राशि के भुगतान में विलंब न हो, इसके मद्देनज़र राजधानी रायपुर से इस कार्यक्रम का शुभारंभ करने के बजाय दंतेवाड़ा से ही ऑनलाइन शुभारंभ किया। इससे पूर्व गोधन न्याय योजना की राशि का वितरण उन्होंने सरगुजा संभाग में भेंट-मुलाकात अभियान के दौरान रामानुजगंज से किया था। - मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा के तहत राज्य के सत्रह ज़िलों के लगभग एक लाख पैंतालीस हज़ार किसानों को दो सौ सत्तानवे करोड़ नौ लाख रुपए तथा उद्यानिकी फसलों के मौसम आधारित बीमा योजना के अंतर्गत चार,सात सौ सैंतालीस कृषकों को दस करोड़ दस लाख रुपए का भुगतान किया जा रहा है। खरीफ दो हज़ार इक्कीस में राज्य के तीन लाख सत्तानवे हज़ार कृषकों को सात सौ बावन करोड़ रुपए की दावा राशि का भुगतान किया गया है। - कृषि मंत्री रवींद्र चौबे ने कहा कि पूरे देश में छत्तीसगढ़ में किसानों के हित में सबसे अधिक योजनाएँ संचालित की जा रही हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लागू करने और राज्य के किसानों को इसका लाभ दिलाने में छत्तीसगढ़ देश में पहले नंबर पर है। किसानों को रबी फसलों के बीमा दावा का भुगतान के मामले में भी छत्तीसगढ़ देश का अग्रणी राज्य है। - गौरतलब है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना खरीफ दो हज़ार सोलह से लागू है। इसके तहत किसानों को खरीफ फसलों धान, मक्का, मूँगफली, सोयाबीन, अरहर, मूंग और उड़द के लिये मात्र दो प्रतिशत तथा रबी फसलों गेहूँ, चना, राई-सरसों एवं अलसी के लिये एक.पाँच प्रतिशत प्रीमियम राशि देनी होती है। शेष बीमा प्रीमियम राशि का आधा-आधा हिस्सा राज्यांश एवं केंद्रांश होता है।
सोनभद्र (उत्तर प्रदेश): खनन से सोनभद्र उत्तर प्रदेश के ख़ज़ाने में सालाना 21,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा का योगदान देता है। यह देश की विकास गाथा में एक अहम भूमिका निभाता है। लेकिन, सवाल है कि बदले में सोनभद्र को क्या मिलता है? इस क्षेत्र की महिलाओं में फ़्लोरोसिस, सिलिकोसिस, कैंसर, टीबी, फेफड़ों की गड़बड़ियां और गर्भपात जैसी बीमारियां आम हैं। यहां का पानी फ़्लोराइड, मरकरी, सिलिका, कैडमियम, आयरन, निकेल और एल्युमीनियम का विनाशकारी अपमिश्रण है। सोनभद्र के नौ कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों से निकलने वाली फ़्लाई ऐश (फ़्लोराइड, आर्सेनिक और फ़ॉस्फोरस मिश्रित पदार्थ) ने 269 गांवों में पानी, हवा और मिट्टी को बेहद ख़तरनाक़ हद तक दूषित कर दिया है। ये गांव लखीमपुर खीरी के बाद क्षेत्रफल के हिसाब से राज्य के दूसरे सबसे बड़े ज़िले के चार विकास खंडों (चोपन, बभनी, दुद्धी और म्योरपुर) में फैले हुए हैं। उन्होंने कहा कि फ़्लाई ऐश ने रिहंद बांध (जिसे गोविंद बल्लभ पंत सागर के रूप में भी जाना जाता है - सोनभद्र पिपरी में भारत की सबसे बड़ी कृत्रिम झील के रूप में भी जाना जाता है) के पानी को दूषित कर दिया है, क्योंकि यह भू-जल और मिट्टी में रिसता रहता है। जगत विश्वकर्मा का आरोप है, "जल निगम ने 60 से ज़्यादा गांवों में फ़्लोराइड हटाने वाले जो संयंत्र लगाये है,उनमें से ज़्यादातर संयंत्र काम ही नहीं कर रहे हैं।" केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए विश्वकर्मा ने बताया कि सोनभद्र यूपी के 22 गंभीर रूप से प्रदूषित क्षेत्रों में से एक है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित इस सिंगरौली इलाक़े के सोनभद्र में उत्तर प्रदेश सरकार के स्वामित्व वाले थर्मल पावर प्लांट, सार्वजनिक क्षेत्र के एनटीपीसी और सिंगरौली बेल्ट में निजी कंपनी एस्सार हर दिन 21,270 मेगावाट बिजली पैदा करने के लिए औसतन 3.26 लाख टन कोयले की खपत करते हैं। जानकारों का मानना है कि सोनभद्र और सिंगरौली के इन बिजली संयंत्रों के इतनी बड़ी मात्रा में कोयले की खपत से हर दिन एक लाख टन से ज़्यादा के फ़्लाई ऐश का उत्पादन होता है,लेकिन इसका उचित निपटान नहीं हो पाता है। नतीजतन, यह हवा, पानी और मिट्टी में जमा होता जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक़, पानी में फ़्लोराइड का स्तर 1.5 पीपीएम या मिलीग्राम/लीटर (पार्ट्स पर मिलियन या मिलीग्राम प्रति लीटर) से ज़्यादा नहीं होना चाहिए। लेकिन, सोनभद्र के कई गांवों में यह स्तर 4 पीपीएम से ऊपर पाया गया है। चोपन प्रखंड की पडराछ पंचायत (ग्राम परिषद) के पटेल नगर की रहने वाली पार्वती देवी को 2003 से कमर (रीढ़ की हड्डी में टेढ़ापन) की समस्या थी, लेकिन वह ख़ुद ही चलकर अपने रोज़-ब-रोज़ का घरेलू काम निपटाती थीं। उन्हें धीरे-धीरे जोड़ों में अकड़न होने लगी और पिछले तीन सालों से बिस्तर पर पड़ी हुई हैं। उनके अंग अब नहीं हिलते-डुलते। 36 साल की पार्वती लगभग एक ज़िंदा लाश बनकर रह गयी हैं, हर चीज़ के लिए वह पूरी तरह से दूसरों पर निर्भर हो गयी हैं। देवी के पति भी फ़्लोरोसिस से पीड़ित हैं।वह 70% तक विकलांग हैं, लेकिन उनका मामला बिस्तर तक सीमित रहने तक ही नहीं हैं। दिहाड़ी मज़दूरों के इस परिवार के पास 10 बीघा (6.19 एकड़) की काफ़ी कम उपजाऊ वाली ज़मीन है, अब तक उनके इलाज पर 3 लाख रुपये ख़र्च हो चुके हैं, लेकिन कोई फ़ायदा नहीं हुआ है। उनके मेडिकल रिकॉर्ड से पता चलता है कि वह पानी से होने वाली बीमारियों से पीड़ित है। अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) से जुड़ी जाति-कुर्मी से आने वाला यह परिवार बेहद ग़रीबी का सामना कर रहा है,लेकिन इस परिवार के पास बहुप्रचारित उस आयुष्मान भारत योजना का कार्ड भी नहीं है, जो प्रति परिवार 5 लाख रुपये का चिकित्सा बीमा देता है। पड़ोस के गांव के 30 साल के रोहन की पांच साल पहले दोनों हाथों और पैरों में विकृति के चलते मौत हो गयी थी। उनके अंग कंगारू की तरह उनकी कोहनी और घुटनों से मुड़े हुए थे। वह 10 साल तक उसी स्थिति में ज़िंदा रहे। उनका बेटा राम प्रताप स्वस्थ और निरोगी था। लेकिन, जैसे ही वह 10 साल का हुआ, उसे भी उसी तरह की परेशानियां पैदा होने लगीं और दो साल पहले उसकी मौत हो गयी। शादी के पांच साल बाद ही रोहन की पत्नी मनकुवर भी उसी स्थिति का शिकार हो गयीं। वह भी बिस्तर पर पड़ी हुई हैं। 21 साल की आरती नौवीं कक्षा तक एकदम दुरुस्त थीं। लेकिन उन्हें धीरे-धीरे दिमाग़ी कमज़ोरी का अहसास होने लगा और वह 10वीं की बोर्ड परीक्षा में बैठ पाने की स्थिति में नहीं थीं। वह अब पूरी तरह से मानसिक बीमारी की चपेट में है। दुद्धी के खुरदरे और पथरीले इलाक़े कुसुमाहा की रहने वाली आरती चुप-चाप रहती हैं, और अगर कोई उनसे बातचीत करना भी चाहता है, तो वह किसी तरह की कोई प्रतिक्रिया नहीं दे पातीं। 38 साल की आरती के पिता तेज प्रताप को जोड़ों में तेज़ दर्द और पैरों और हाथों में अकड़न है। उन्होंने कहा, "जब मैं बैठता हूं, तो मेरे लिए उठ पाना मुश्किल हो जाता है।" उन्होंने आगे बताया कि वह उस पानी में मिले फ़्लोराइड के चलते रोगी बन गये हैं, जिसे वे लंबे समय से पी रहे हैं। उन्होंने कहा कि गांव में नल का पानी है, लेकिन यह नियमित नहीं है। उनकी शिकायत है,"हमें यह हफ़्ते में एक या दो बार दो-तीन घंटे के लिए मिलता है।" प्रताप की 60 साल की मां बसंती देवी पिछले 30 साल से विकलांग हैं। वह किसी तरह दो लोगों और एक छड़ी की मदद से खड़ी हो पाती हैं, लेकिन खड़ी होते हुए हर वह बार दर्द से रो पड़ती हैं। 56 साल के विजय कुमार शर्मा शारीरिक रूप से ठीक थे और कुछ साल पहले तक उनका शरीर हृष्ट-पुष्ट था। लेकिन, पड़वा कुदरी गांव का यह निवासी अब अपने बिस्तर के पास छत से लटकी छड़ी या रस्सी के सहारे की ज़रूरत है,वह अपने पैरों पर खड़ा भी नहीं हो पाते हैं। उनकी मांसपेशियां और हड्डियां अकड़ गयी हैं। उन्हें दो-तीन लोगों की मदद से उठाया जाता है, फिर उन्हें एक अस्थायी कुर्सी जैसे चबूतरे पर बिठा दिया जाता है। यहां उन्हें आराम मिलता है। उन्होंने न्यूज़क्लिक को बताया, "2015 में मुझे अपने दाहिने हाथ में दर्द महसूस होने लगा था। सोनभद्र की सीमा से लगने वाले झारखंड में मेरा इलाज हुआ था। लेकिन,जब आराम नहीं मिला, तो मैं वाराणसी के एक निजी अस्पताल चला गया। वहां के डॉक्टरों ने मुझे बीएचयू (बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के सर सुंदरलाल अस्पताल) में रेफ़र कर दिया। मुझे बताया गया कि पानी के ज़रिये फ़्लोराइड के बहुत ज़्यादा इस्तेमाल से यह स्थिति हो गयी है। पहली बार दर्द महसूस करने के तीन महीने बाद ही मैं लकवाग्रस्त हो गया और तब से बिस्तर तक सीमित हो गया हूं। नल के पानी की आपूर्ति के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि गांव के सभी घरों में पानी का कनेक्शन तो है, लेकिन किसी को भी एक बूंद तक नहीं मिलती। उन्होंने आरोप लगाया, "सरकार की तरफ़ से सिर्फ़ काग़ज़ी मानवता है।" शर्मा के भाई भी आंशिक रूप से लकवाग्रस्त हैं। साल 2018 में उनका दाहिना पैर सुन्न हो गया। हालांकि, उनका दाहिना पैर काम तो कर रहा है, लेकिन यह सूज गया है। वह एक छड़ी की मदद से चल पाते हैं और कहते हैं कि जब वह बैठने या खड़े होने की कोशिश करते है, तो उन्हें बेहद मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। वह पांच संतानों के पिता हैं और पांच भाइयों के बीच उनके पास 14 बीघा (8.67 एकड़) ज़मीन है और इसी ज़मीन की कृषि उपज पर सबके सब निर्भर हैं। उसकी पत्नी भी 2018 से ही विकलांग है। वह ज़मीन पर घुटनों के बल चलती हैं और अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पातीं। उनका आरोप है, "जीवन से बढ़कर और क्या चीज़ है, लेकिन सरकार को कोई मतलब ही नहीं है।" पानी में फ़्लोराइड का यह ख़तरनाक़ मिश्रण सामाजिक समस्या भी पैदा कर रहा है। इस इलाक़े में रहने वाले लोगों का कहना है कि दूसरे गांवों के लोग फ़्लोराइड प्रभावित इन गांवों में अपनी बेटियों की शादी नहीं करना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि उनकी बेटियों को भी यही दूषित पानी पीना होगा, जो आख़िरकार उनकी सेहत को प्रभावित करेगा। उनका कहना है कि सरकार को अपनी 'हर घर नल' योजना को प्रभावी बनाना चाहिए, ताकि ज़िले के सभी प्रभावित गांवों में हर घर में सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति हो सके। उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती की जानी चाहिए, ताकि बीमार लोगों का स्थानीय स्तर पर इलाज किया जा सके। पटेल नगर का निकटतम पीएचसी इस गांव से 19 किमी दूर स्थित है, जबकि चोपन स्थित पीएचसी गांव से 35 किमी दूर है। दुद्धी स्थित पीएचसी गांव से 70 किमी दक्षिण में है। रॉबर्ट्सगंज का ज़िला अस्पताल पहाड़ी गांव से 70 किमी दूर है। यह पूछे जाने पर कि हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में ज़िले की बहुसंख्यक आबादी को प्रभावित करने वाला यह मुद्दा चुनावी मुद्दा क्यों नहीं बन पाया, उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से यह कभी चुनावी मुद्दा नहीं बन पाया। उन्होंने कहा, 'राजनीतिक दल चांद तोड़ लाने का वादा करते हैं। लेकिन,जैसे ही चुनाव ख़त्म हो जाते हैं,फिर तो कुछ होता नहीं।" रॉबर्ट्सगंज के ज़िला अस्पताल के एक डॉक्टर ने इस समस्या को माना और इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि पानी में फ़्लोराइड की मात्रा बहुत ज़्यादा है और यह इस ज़िले में बड़े पैमाने पर विकृति और पक्षाघात का कारण बन रहा है। उन्होंने नाम नहीं छापे जाने की सख़्त शर्त पर बताया, "पीने के पानी में फ़्लोराइड का होना इसलिए नुक़सानदेह है, क्योंकि यह धीरे-धीरे हड्डियों में जमा होता चला जाता है, नतीजतन हडिड्यों और दांतों में फ़्लोरोसिस होना शुरू हो जाता है। डेंटल फ्लोरोसिस का नतीजा शरीर के फीके पड़ जाने और दांतों की विकृति रूप में सामने आता है। जो लोग स्केलेटल फ्लोरोसिस से पीड़ित होते हैं, उन्हें जोड़ों में तेज़ दर्द होता है और अकड़न होती है। उन्होंने बताया, "फ़्लोरोसिस मनोवैज्ञानिक विकारों का भी कारण बनता है। इसलिए, हम लोगों को भू-जल नहीं पीने की सलाह देते हैं।" उन्होंने कहा कि यह दूषित पानी बच्चों के विकास को भी प्रभावित करता है और वह यह आरोप भी लगाते हैं कि "सरकार पिछले कई दशकों से यहां चल रही इस आपदा के बारे में अच्छी तरह से जानती है, लेकिन इसे हल करने की दिशा में बहुत कम काम किया गया है।" सोनभद्र के जिलाधिकारी (DM) टीके शिबू और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ नेम सिंह ने इस सवाल को टाल दिया कि इस बीमारी को ख़त्म करने के लिए प्रशासन ने अब तक क्या-क्या ठोस क़दम उठाये हैं। जहां डीएम ने इस समस्या की गंभीरता को माना और कहा कि ज़िला प्रशासन "स्थिति का कामयाबी के साथ मुक़ाबला करेगा", वहीं सीएमओ ने इस बात का दावा किया कि ज़िले का सरकारी स्वास्थ्य बुनियादी ढांचा इस बीमारी के इलाज के लिए "अच्छी तरह से सुसज्जित" है और "इस समस्या के हल के लिए सभी संभव क़दम उठाये जा रहे हैं।" बिजली संयंत्रों से निकलने वाले फ़्लाई ऐश के निपटान के लिए कई तालाब खोदे गये हैं।,फ़्लाई ऐश को तरल रूप में पाइपलाइनों के ज़रिये इन तालाबों तक लाया जाता है। इन तालाबों के भर जाने के बाद बहने वाला पानी और पाइपलाइनों से होने वाले रिसाव के ज़रिये ये घातक प्रदूषक रिहंद बांध में चले जाते हैं। सोनभद्र के लोगों के लिए रिहंद ही पानी का एकलौता स्रोत है। फ़्लाई ऐश न सिर्फ़ नदी के पानी को ज़हरीला बना रही है, बल्कि भू-जल की गुणवत्ता को भी प्रभावित कर रही है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) की ओर से कई दिशानिर्देशों को जारी किये जाने और लगाये गये जुर्माना लगाये जाने के बावजूद रिहंद में प्रदूषक का निपटान बंद नहीं हुआ है। पानी के साथ मिश्रित फ्लाई ऐश को तालाबों तक लाने वाली पाइपलाइनों में अक्सर रिसाव हो जाता है, जिसके चलते यह आसपास के इलाक़ों में फैल जाती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि "ऐसा सालों से हो रहा है।" जब उन्हें यह बताया गया कि उनकी यह बात रिहंद के पानी में फ़्लोराइड के संदूषण को दिखाने वाले कई निष्कर्षों के उलट है, तो उन्होंने कहा कि ऐसे मामले सिर्फ़ ओबरा से ही सामने आये हैं, जहां रीसर्क्युलेशन सिस्टम में रिसाव के कारण फ़्लाई ऐश रेणु नदी में चली जाती है। बीमार, मुश्किल से चल पाने और बोल पाने में सक्षम और परेशान यहां के स्थानीय लोग अब राज्य की नव निर्वाचित सरकार से उम्मीदें लगा रहे हैं। मगर,सवाल है कि क्या यह सरकार उनकी इस दुर्दशा और इस संकट को गंभीरता से लेगी और कुछ सार्थक करने की दिशा में काम करेगी? अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।
सोनभद्र : खनन से सोनभद्र उत्तर प्रदेश के ख़ज़ाने में सालाना इक्कीस,शून्य करोड़ रुपये से ज़्यादा का योगदान देता है। यह देश की विकास गाथा में एक अहम भूमिका निभाता है। लेकिन, सवाल है कि बदले में सोनभद्र को क्या मिलता है? इस क्षेत्र की महिलाओं में फ़्लोरोसिस, सिलिकोसिस, कैंसर, टीबी, फेफड़ों की गड़बड़ियां और गर्भपात जैसी बीमारियां आम हैं। यहां का पानी फ़्लोराइड, मरकरी, सिलिका, कैडमियम, आयरन, निकेल और एल्युमीनियम का विनाशकारी अपमिश्रण है। सोनभद्र के नौ कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों से निकलने वाली फ़्लाई ऐश ने दो सौ उनहत्तर गांवों में पानी, हवा और मिट्टी को बेहद ख़तरनाक़ हद तक दूषित कर दिया है। ये गांव लखीमपुर खीरी के बाद क्षेत्रफल के हिसाब से राज्य के दूसरे सबसे बड़े ज़िले के चार विकास खंडों में फैले हुए हैं। उन्होंने कहा कि फ़्लाई ऐश ने रिहंद बांध के पानी को दूषित कर दिया है, क्योंकि यह भू-जल और मिट्टी में रिसता रहता है। जगत विश्वकर्मा का आरोप है, "जल निगम ने साठ से ज़्यादा गांवों में फ़्लोराइड हटाने वाले जो संयंत्र लगाये है,उनमें से ज़्यादातर संयंत्र काम ही नहीं कर रहे हैं।" केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए विश्वकर्मा ने बताया कि सोनभद्र यूपी के बाईस गंभीर रूप से प्रदूषित क्षेत्रों में से एक है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित इस सिंगरौली इलाक़े के सोनभद्र में उत्तर प्रदेश सरकार के स्वामित्व वाले थर्मल पावर प्लांट, सार्वजनिक क्षेत्र के एनटीपीसी और सिंगरौली बेल्ट में निजी कंपनी एस्सार हर दिन इक्कीस,दो सौ सत्तर मेगावाट बिजली पैदा करने के लिए औसतन तीन.छब्बीस लाख टन कोयले की खपत करते हैं। जानकारों का मानना है कि सोनभद्र और सिंगरौली के इन बिजली संयंत्रों के इतनी बड़ी मात्रा में कोयले की खपत से हर दिन एक लाख टन से ज़्यादा के फ़्लाई ऐश का उत्पादन होता है,लेकिन इसका उचित निपटान नहीं हो पाता है। नतीजतन, यह हवा, पानी और मिट्टी में जमा होता जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़, पानी में फ़्लोराइड का स्तर एक.पाँच पीपीएम या मिलीग्राम/लीटर से ज़्यादा नहीं होना चाहिए। लेकिन, सोनभद्र के कई गांवों में यह स्तर चार पीपीएम से ऊपर पाया गया है। चोपन प्रखंड की पडराछ पंचायत के पटेल नगर की रहने वाली पार्वती देवी को दो हज़ार तीन से कमर की समस्या थी, लेकिन वह ख़ुद ही चलकर अपने रोज़-ब-रोज़ का घरेलू काम निपटाती थीं। उन्हें धीरे-धीरे जोड़ों में अकड़न होने लगी और पिछले तीन सालों से बिस्तर पर पड़ी हुई हैं। उनके अंग अब नहीं हिलते-डुलते। छत्तीस साल की पार्वती लगभग एक ज़िंदा लाश बनकर रह गयी हैं, हर चीज़ के लिए वह पूरी तरह से दूसरों पर निर्भर हो गयी हैं। देवी के पति भी फ़्लोरोसिस से पीड़ित हैं।वह सत्तर% तक विकलांग हैं, लेकिन उनका मामला बिस्तर तक सीमित रहने तक ही नहीं हैं। दिहाड़ी मज़दूरों के इस परिवार के पास दस बीघा की काफ़ी कम उपजाऊ वाली ज़मीन है, अब तक उनके इलाज पर तीन लाख रुपये ख़र्च हो चुके हैं, लेकिन कोई फ़ायदा नहीं हुआ है। उनके मेडिकल रिकॉर्ड से पता चलता है कि वह पानी से होने वाली बीमारियों से पीड़ित है। अन्य पिछड़े वर्ग से जुड़ी जाति-कुर्मी से आने वाला यह परिवार बेहद ग़रीबी का सामना कर रहा है,लेकिन इस परिवार के पास बहुप्रचारित उस आयुष्मान भारत योजना का कार्ड भी नहीं है, जो प्रति परिवार पाँच लाख रुपये का चिकित्सा बीमा देता है। पड़ोस के गांव के तीस साल के रोहन की पांच साल पहले दोनों हाथों और पैरों में विकृति के चलते मौत हो गयी थी। उनके अंग कंगारू की तरह उनकी कोहनी और घुटनों से मुड़े हुए थे। वह दस साल तक उसी स्थिति में ज़िंदा रहे। उनका बेटा राम प्रताप स्वस्थ और निरोगी था। लेकिन, जैसे ही वह दस साल का हुआ, उसे भी उसी तरह की परेशानियां पैदा होने लगीं और दो साल पहले उसकी मौत हो गयी। शादी के पांच साल बाद ही रोहन की पत्नी मनकुवर भी उसी स्थिति का शिकार हो गयीं। वह भी बिस्तर पर पड़ी हुई हैं। इक्कीस साल की आरती नौवीं कक्षा तक एकदम दुरुस्त थीं। लेकिन उन्हें धीरे-धीरे दिमाग़ी कमज़ोरी का अहसास होने लगा और वह दसवीं की बोर्ड परीक्षा में बैठ पाने की स्थिति में नहीं थीं। वह अब पूरी तरह से मानसिक बीमारी की चपेट में है। दुद्धी के खुरदरे और पथरीले इलाक़े कुसुमाहा की रहने वाली आरती चुप-चाप रहती हैं, और अगर कोई उनसे बातचीत करना भी चाहता है, तो वह किसी तरह की कोई प्रतिक्रिया नहीं दे पातीं। अड़तीस साल की आरती के पिता तेज प्रताप को जोड़ों में तेज़ दर्द और पैरों और हाथों में अकड़न है। उन्होंने कहा, "जब मैं बैठता हूं, तो मेरे लिए उठ पाना मुश्किल हो जाता है।" उन्होंने आगे बताया कि वह उस पानी में मिले फ़्लोराइड के चलते रोगी बन गये हैं, जिसे वे लंबे समय से पी रहे हैं। उन्होंने कहा कि गांव में नल का पानी है, लेकिन यह नियमित नहीं है। उनकी शिकायत है,"हमें यह हफ़्ते में एक या दो बार दो-तीन घंटे के लिए मिलता है।" प्रताप की साठ साल की मां बसंती देवी पिछले तीस साल से विकलांग हैं। वह किसी तरह दो लोगों और एक छड़ी की मदद से खड़ी हो पाती हैं, लेकिन खड़ी होते हुए हर वह बार दर्द से रो पड़ती हैं। छप्पन साल के विजय कुमार शर्मा शारीरिक रूप से ठीक थे और कुछ साल पहले तक उनका शरीर हृष्ट-पुष्ट था। लेकिन, पड़वा कुदरी गांव का यह निवासी अब अपने बिस्तर के पास छत से लटकी छड़ी या रस्सी के सहारे की ज़रूरत है,वह अपने पैरों पर खड़ा भी नहीं हो पाते हैं। उनकी मांसपेशियां और हड्डियां अकड़ गयी हैं। उन्हें दो-तीन लोगों की मदद से उठाया जाता है, फिर उन्हें एक अस्थायी कुर्सी जैसे चबूतरे पर बिठा दिया जाता है। यहां उन्हें आराम मिलता है। उन्होंने न्यूज़क्लिक को बताया, "दो हज़ार पंद्रह में मुझे अपने दाहिने हाथ में दर्द महसूस होने लगा था। सोनभद्र की सीमा से लगने वाले झारखंड में मेरा इलाज हुआ था। लेकिन,जब आराम नहीं मिला, तो मैं वाराणसी के एक निजी अस्पताल चला गया। वहां के डॉक्टरों ने मुझे बीएचयू में रेफ़र कर दिया। मुझे बताया गया कि पानी के ज़रिये फ़्लोराइड के बहुत ज़्यादा इस्तेमाल से यह स्थिति हो गयी है। पहली बार दर्द महसूस करने के तीन महीने बाद ही मैं लकवाग्रस्त हो गया और तब से बिस्तर तक सीमित हो गया हूं। नल के पानी की आपूर्ति के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि गांव के सभी घरों में पानी का कनेक्शन तो है, लेकिन किसी को भी एक बूंद तक नहीं मिलती। उन्होंने आरोप लगाया, "सरकार की तरफ़ से सिर्फ़ काग़ज़ी मानवता है।" शर्मा के भाई भी आंशिक रूप से लकवाग्रस्त हैं। साल दो हज़ार अट्ठारह में उनका दाहिना पैर सुन्न हो गया। हालांकि, उनका दाहिना पैर काम तो कर रहा है, लेकिन यह सूज गया है। वह एक छड़ी की मदद से चल पाते हैं और कहते हैं कि जब वह बैठने या खड़े होने की कोशिश करते है, तो उन्हें बेहद मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। वह पांच संतानों के पिता हैं और पांच भाइयों के बीच उनके पास चौदह बीघा ज़मीन है और इसी ज़मीन की कृषि उपज पर सबके सब निर्भर हैं। उसकी पत्नी भी दो हज़ार अट्ठारह से ही विकलांग है। वह ज़मीन पर घुटनों के बल चलती हैं और अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पातीं। उनका आरोप है, "जीवन से बढ़कर और क्या चीज़ है, लेकिन सरकार को कोई मतलब ही नहीं है।" पानी में फ़्लोराइड का यह ख़तरनाक़ मिश्रण सामाजिक समस्या भी पैदा कर रहा है। इस इलाक़े में रहने वाले लोगों का कहना है कि दूसरे गांवों के लोग फ़्लोराइड प्रभावित इन गांवों में अपनी बेटियों की शादी नहीं करना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि उनकी बेटियों को भी यही दूषित पानी पीना होगा, जो आख़िरकार उनकी सेहत को प्रभावित करेगा। उनका कहना है कि सरकार को अपनी 'हर घर नल' योजना को प्रभावी बनाना चाहिए, ताकि ज़िले के सभी प्रभावित गांवों में हर घर में सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति हो सके। उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती की जानी चाहिए, ताकि बीमार लोगों का स्थानीय स्तर पर इलाज किया जा सके। पटेल नगर का निकटतम पीएचसी इस गांव से उन्नीस किमी दूर स्थित है, जबकि चोपन स्थित पीएचसी गांव से पैंतीस किमी दूर है। दुद्धी स्थित पीएचसी गांव से सत्तर किमी दक्षिण में है। रॉबर्ट्सगंज का ज़िला अस्पताल पहाड़ी गांव से सत्तर किमी दूर है। यह पूछे जाने पर कि हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में ज़िले की बहुसंख्यक आबादी को प्रभावित करने वाला यह मुद्दा चुनावी मुद्दा क्यों नहीं बन पाया, उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से यह कभी चुनावी मुद्दा नहीं बन पाया। उन्होंने कहा, 'राजनीतिक दल चांद तोड़ लाने का वादा करते हैं। लेकिन,जैसे ही चुनाव ख़त्म हो जाते हैं,फिर तो कुछ होता नहीं।" रॉबर्ट्सगंज के ज़िला अस्पताल के एक डॉक्टर ने इस समस्या को माना और इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि पानी में फ़्लोराइड की मात्रा बहुत ज़्यादा है और यह इस ज़िले में बड़े पैमाने पर विकृति और पक्षाघात का कारण बन रहा है। उन्होंने नाम नहीं छापे जाने की सख़्त शर्त पर बताया, "पीने के पानी में फ़्लोराइड का होना इसलिए नुक़सानदेह है, क्योंकि यह धीरे-धीरे हड्डियों में जमा होता चला जाता है, नतीजतन हडिड्यों और दांतों में फ़्लोरोसिस होना शुरू हो जाता है। डेंटल फ्लोरोसिस का नतीजा शरीर के फीके पड़ जाने और दांतों की विकृति रूप में सामने आता है। जो लोग स्केलेटल फ्लोरोसिस से पीड़ित होते हैं, उन्हें जोड़ों में तेज़ दर्द होता है और अकड़न होती है। उन्होंने बताया, "फ़्लोरोसिस मनोवैज्ञानिक विकारों का भी कारण बनता है। इसलिए, हम लोगों को भू-जल नहीं पीने की सलाह देते हैं।" उन्होंने कहा कि यह दूषित पानी बच्चों के विकास को भी प्रभावित करता है और वह यह आरोप भी लगाते हैं कि "सरकार पिछले कई दशकों से यहां चल रही इस आपदा के बारे में अच्छी तरह से जानती है, लेकिन इसे हल करने की दिशा में बहुत कम काम किया गया है।" सोनभद्र के जिलाधिकारी टीके शिबू और मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ नेम सिंह ने इस सवाल को टाल दिया कि इस बीमारी को ख़त्म करने के लिए प्रशासन ने अब तक क्या-क्या ठोस क़दम उठाये हैं। जहां डीएम ने इस समस्या की गंभीरता को माना और कहा कि ज़िला प्रशासन "स्थिति का कामयाबी के साथ मुक़ाबला करेगा", वहीं सीएमओ ने इस बात का दावा किया कि ज़िले का सरकारी स्वास्थ्य बुनियादी ढांचा इस बीमारी के इलाज के लिए "अच्छी तरह से सुसज्जित" है और "इस समस्या के हल के लिए सभी संभव क़दम उठाये जा रहे हैं।" बिजली संयंत्रों से निकलने वाले फ़्लाई ऐश के निपटान के लिए कई तालाब खोदे गये हैं।,फ़्लाई ऐश को तरल रूप में पाइपलाइनों के ज़रिये इन तालाबों तक लाया जाता है। इन तालाबों के भर जाने के बाद बहने वाला पानी और पाइपलाइनों से होने वाले रिसाव के ज़रिये ये घातक प्रदूषक रिहंद बांध में चले जाते हैं। सोनभद्र के लोगों के लिए रिहंद ही पानी का एकलौता स्रोत है। फ़्लाई ऐश न सिर्फ़ नदी के पानी को ज़हरीला बना रही है, बल्कि भू-जल की गुणवत्ता को भी प्रभावित कर रही है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से कई दिशानिर्देशों को जारी किये जाने और लगाये गये जुर्माना लगाये जाने के बावजूद रिहंद में प्रदूषक का निपटान बंद नहीं हुआ है। पानी के साथ मिश्रित फ्लाई ऐश को तालाबों तक लाने वाली पाइपलाइनों में अक्सर रिसाव हो जाता है, जिसके चलते यह आसपास के इलाक़ों में फैल जाती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि "ऐसा सालों से हो रहा है।" जब उन्हें यह बताया गया कि उनकी यह बात रिहंद के पानी में फ़्लोराइड के संदूषण को दिखाने वाले कई निष्कर्षों के उलट है, तो उन्होंने कहा कि ऐसे मामले सिर्फ़ ओबरा से ही सामने आये हैं, जहां रीसर्क्युलेशन सिस्टम में रिसाव के कारण फ़्लाई ऐश रेणु नदी में चली जाती है। बीमार, मुश्किल से चल पाने और बोल पाने में सक्षम और परेशान यहां के स्थानीय लोग अब राज्य की नव निर्वाचित सरकार से उम्मीदें लगा रहे हैं। मगर,सवाल है कि क्या यह सरकार उनकी इस दुर्दशा और इस संकट को गंभीरता से लेगी और कुछ सार्थक करने की दिशा में काम करेगी? अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।
दस्तक टाइम्स एजेन्सी/ सैन फ्रांसिस्कोः गूगल के इंटरनेट सर्च कारोबार का लंबे समय से नेतृत्व कर रहे भारतीय मूल के अमित सिंघल इस महीने के अंत में कंपनी छोड़ेंगे और उनकी जगह जॉन जियानांद्रिया लेंगे जो इस समय गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट में आर्टिफिशिल इंटेलिजेंस (एआई) में काम कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के झांसी में जन्मे 47 वर्षीय सिंघल वर्ष 2000 में गूगल में शामिल हुए थे और वह कई प्रौद्योगिकी परियोजनाओं में शामिल रहे हैं जिनसे गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट का मूर्ति रूप देने और गूगल को दुनिया को सबसे मूल्यवान कंपनियों में से एक बनाने में मदद मिली है। सिंघल ने गूगल प्लस पर अपनी सेवानिवृत्ति के बारे में लिखा है, "26 फरवरी, गूगल में मेरा आखिरी दिन होगा। मेरे संबंध सबसे महत्वपूर्ण चीज हैं जिसे मैंने जीवन में अर्जित किया है। " गूगल में अपने 15 साल के कार्यकाल को एक 'स्वप्न यात्रा' बताते हुए सिंघल ने लिखा है कि वह अपने परिवार के साथ समय बिताना चाहते हैं और अपना कुछ धन दान करना चाहते हैं।
दस्तक टाइम्स एजेन्सी/ सैन फ्रांसिस्कोः गूगल के इंटरनेट सर्च कारोबार का लंबे समय से नेतृत्व कर रहे भारतीय मूल के अमित सिंघल इस महीने के अंत में कंपनी छोड़ेंगे और उनकी जगह जॉन जियानांद्रिया लेंगे जो इस समय गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट में आर्टिफिशिल इंटेलिजेंस में काम कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के झांसी में जन्मे सैंतालीस वर्षीय सिंघल वर्ष दो हज़ार में गूगल में शामिल हुए थे और वह कई प्रौद्योगिकी परियोजनाओं में शामिल रहे हैं जिनसे गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट का मूर्ति रूप देने और गूगल को दुनिया को सबसे मूल्यवान कंपनियों में से एक बनाने में मदद मिली है। सिंघल ने गूगल प्लस पर अपनी सेवानिवृत्ति के बारे में लिखा है, "छब्बीस फरवरी, गूगल में मेरा आखिरी दिन होगा। मेरे संबंध सबसे महत्वपूर्ण चीज हैं जिसे मैंने जीवन में अर्जित किया है। " गूगल में अपने पंद्रह साल के कार्यकाल को एक 'स्वप्न यात्रा' बताते हुए सिंघल ने लिखा है कि वह अपने परिवार के साथ समय बिताना चाहते हैं और अपना कुछ धन दान करना चाहते हैं।
थाना बिसरख पुलिस ने विधानसभा चुनाव के दौरान मतदाताओं को परोसने के लिए ले जाई जा रही 110 पेटी हरियाणा मार्का शराब बरामद किया है। पुलिस ने इस बाबत 3 लोगों को गिरफ्तार किया है। वहीं थाना सेक्टर 39 पुलिस ने भी एक शराब तस्कर को गिरफ्तार कर, उसके पास से 72 पेटी हरियाणा मार्का शराब बरामद किया है। पुलिस आयुक्त आलोक सिंह के मीडिया प्रभारी पंकज कुमार ने बताया कि थाना बिसरख पुलिस ने आज सुबह को एक सूचना के आधार पर श्मशान घाट के पास से मनीष कुमार पुत्र राजकुमार निवासी दिल्ली, मोहित भाटी पुत्र राम सिंह भाटी निवासी सलारपुर कॉलोनी सेक्टर 49, तथा करमजीत सिंह पुत्र जगदीश सिंह निवासी फरीदाबाद जनपद हरियाणा को गिरफ्तार किया है। उन्होंने बताया कि इनके पास से दो लग्जरी कारों में भरकर ले जाई जा रही 110 पेटी हरियाणा मार्का शराब बरामद हुई है। उन्होंने बताया कि इन लोगों ने पूछताछ के दौरान पुलिस को बताया है कि यह हरियाणा से शराब तस्करी करके उत्तर प्रदेश में बेचते हैं। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान पुलिस को पता चला है कि आरोपी शराब की तीव्रता बढ़ाने के लिए उसमें यूरिया का मिश्रण भी करते हैं। उन्होंने बताया कि यह शराब जनपद गाजियाबाद में ले जाई जा रही थी। पुलिस को जांच के दौरान पता चला है कि शराब को किसी व्यक्ति ने वोटरों को बांटने के लिए मंगवाया था। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि किस प्रत्याशी के लिए यह शराब मंगवायी थी। मीडिया प्रभारी ने बताया कि थाना सेक्टर 39 पुलिस ने आज सुबह को हाजीपुर अंडरपास के पास से एक महिंद्रा बोलेरो पिकअप को पकड़ा है। उन्होंने बताया कि इसमें 70 पेटी हरियाणा मार्का शराब रखी थी। उन्होंने बताया कि पुलिस ने शराब तस्करी के आरोप में वाहन चालक धर्मेंद्र को गिरफ्तार किया है। उन्होंने बताया कि पूछताछ के दौरान पुलिस को पता चला है कि यह शराब विधानसभा चुनाव के दौरान मतदाताओं में बांटने के लिए मंगाई गई थी। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
थाना बिसरख पुलिस ने विधानसभा चुनाव के दौरान मतदाताओं को परोसने के लिए ले जाई जा रही एक सौ दस पेटी हरियाणा मार्का शराब बरामद किया है। पुलिस ने इस बाबत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। वहीं थाना सेक्टर उनतालीस पुलिस ने भी एक शराब तस्कर को गिरफ्तार कर, उसके पास से बहत्तर पेटी हरियाणा मार्का शराब बरामद किया है। पुलिस आयुक्त आलोक सिंह के मीडिया प्रभारी पंकज कुमार ने बताया कि थाना बिसरख पुलिस ने आज सुबह को एक सूचना के आधार पर श्मशान घाट के पास से मनीष कुमार पुत्र राजकुमार निवासी दिल्ली, मोहित भाटी पुत्र राम सिंह भाटी निवासी सलारपुर कॉलोनी सेक्टर उनचास, तथा करमजीत सिंह पुत्र जगदीश सिंह निवासी फरीदाबाद जनपद हरियाणा को गिरफ्तार किया है। उन्होंने बताया कि इनके पास से दो लग्जरी कारों में भरकर ले जाई जा रही एक सौ दस पेटी हरियाणा मार्का शराब बरामद हुई है। उन्होंने बताया कि इन लोगों ने पूछताछ के दौरान पुलिस को बताया है कि यह हरियाणा से शराब तस्करी करके उत्तर प्रदेश में बेचते हैं। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान पुलिस को पता चला है कि आरोपी शराब की तीव्रता बढ़ाने के लिए उसमें यूरिया का मिश्रण भी करते हैं। उन्होंने बताया कि यह शराब जनपद गाजियाबाद में ले जाई जा रही थी। पुलिस को जांच के दौरान पता चला है कि शराब को किसी व्यक्ति ने वोटरों को बांटने के लिए मंगवाया था। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि किस प्रत्याशी के लिए यह शराब मंगवायी थी। मीडिया प्रभारी ने बताया कि थाना सेक्टर उनतालीस पुलिस ने आज सुबह को हाजीपुर अंडरपास के पास से एक महिंद्रा बोलेरो पिकअप को पकड़ा है। उन्होंने बताया कि इसमें सत्तर पेटी हरियाणा मार्का शराब रखी थी। उन्होंने बताया कि पुलिस ने शराब तस्करी के आरोप में वाहन चालक धर्मेंद्र को गिरफ्तार किया है। उन्होंने बताया कि पूछताछ के दौरान पुलिस को पता चला है कि यह शराब विधानसभा चुनाव के दौरान मतदाताओं में बांटने के लिए मंगाई गई थी। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
पुरानी कार खरीदनाई कई मायनों में फायदेमंद माना जाता है। वे लोग जिनका बजट कम है और नई कार खरीदने में असमर्थ हैं पुरानी कार खरीदकर अपनी जरुरत को पूरा कर सकते हैं। पुरानी कार खरीदना ऐसे लोगों के लिए भी काफी फायदेमंद माना जाता है जो कि ड्राइव करना सीख रहे हैं या सीखना चाहते हैं। पुरानी कार खरीदने से पहले लोगों के मन में कई तरह के सवाल होते हैं। दरअसल बाजार में ऐसे कई विकल्प मौजूद हैं जिनके जरिए पुरानी कार खरीदी जा सकती है। यही वजह है कि ग्राहक असमंजस की स्थिति में होते हैं। अगर आप भी ऐसे ही असमंजस में हैं तो ग्राहकों की इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए मारूति सुजुकी भी सेकेंड हैंड गाड़ियां बेचती है। Zen Estilo VXI: कंपनी 2008 मॉडल की Zen Estilo VXI सेल कर रही है। पेट्रोल पर चलने वाली यह कार 97,000 रुपये में बिक्री के लिए उपलब्ध है। यह फर्स्ट ऑनर कार है। कार दिल्ली में उपलब्ध है जो कि 43,094 किलोमीटर चल चुकी है। Zen Estilo LXI: कंपनी 2009 मॉडल की Zen Estilo LXI सेल कर रही है। पेट्रोल पर चलने वाली यह कार 80,500 रुपये में बिक्री के लिए उपलब्ध है। यह फर्स्ट ऑनर कार है। कार दिल्ली में उपलब्ध है जो कि 96,122 किलोमीटर चल चुकी है। Zen Estilo VXI: कंपनी 2007 मॉडल की Zen Estilo VXI सेल कर रही है। पेट्रोल पर चलने वाली यह कार 89,000 रुपये में बिक्री के लिए उपलब्ध है। यह फर्स्ट ऑनर कार है। कार दिल्ली में उपलब्ध है जो कि 1,35,402 किलोमीटर चल चुकी है। नोटः गाड़ियों से जुड़ी जो भी जानकारी यहां पर दी गई है वह True Value वेबसाइट पर जानकारी के मुताबिक है। पुरानी कार खरीदते वक्त दस्तावेजों व गाड़ी की कंडीशन की जांच स्वयं करें। वाहन के मालिक से बिना मिले या वाहन की जांच किए ऑनलाइन लेन देन न करें। आप लोगों की जानकारी के लिए बता दें की ये सभी कार दिल्ली सर्किल में बिक्री के लिए उपलब्ध हैं।
पुरानी कार खरीदनाई कई मायनों में फायदेमंद माना जाता है। वे लोग जिनका बजट कम है और नई कार खरीदने में असमर्थ हैं पुरानी कार खरीदकर अपनी जरुरत को पूरा कर सकते हैं। पुरानी कार खरीदना ऐसे लोगों के लिए भी काफी फायदेमंद माना जाता है जो कि ड्राइव करना सीख रहे हैं या सीखना चाहते हैं। पुरानी कार खरीदने से पहले लोगों के मन में कई तरह के सवाल होते हैं। दरअसल बाजार में ऐसे कई विकल्प मौजूद हैं जिनके जरिए पुरानी कार खरीदी जा सकती है। यही वजह है कि ग्राहक असमंजस की स्थिति में होते हैं। अगर आप भी ऐसे ही असमंजस में हैं तो ग्राहकों की इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए मारूति सुजुकी भी सेकेंड हैंड गाड़ियां बेचती है। Zen Estilo VXI: कंपनी दो हज़ार आठ मॉडल की Zen Estilo VXI सेल कर रही है। पेट्रोल पर चलने वाली यह कार सत्तानवे,शून्य रुपयापये में बिक्री के लिए उपलब्ध है। यह फर्स्ट ऑनर कार है। कार दिल्ली में उपलब्ध है जो कि तैंतालीस,चौरानवे किलोग्राममीटर चल चुकी है। Zen Estilo LXI: कंपनी दो हज़ार नौ मॉडल की Zen Estilo LXI सेल कर रही है। पेट्रोल पर चलने वाली यह कार अस्सी,पाँच सौ रुपयापये में बिक्री के लिए उपलब्ध है। यह फर्स्ट ऑनर कार है। कार दिल्ली में उपलब्ध है जो कि छियानवे,एक सौ बाईस किलोग्राममीटर चल चुकी है। Zen Estilo VXI: कंपनी दो हज़ार सात मॉडल की Zen Estilo VXI सेल कर रही है। पेट्रोल पर चलने वाली यह कार नवासी,शून्य रुपयापये में बिक्री के लिए उपलब्ध है। यह फर्स्ट ऑनर कार है। कार दिल्ली में उपलब्ध है जो कि एक,पैंतीस,चार सौ दो किलोग्राममीटर चल चुकी है। नोटः गाड़ियों से जुड़ी जो भी जानकारी यहां पर दी गई है वह True Value वेबसाइट पर जानकारी के मुताबिक है। पुरानी कार खरीदते वक्त दस्तावेजों व गाड़ी की कंडीशन की जांच स्वयं करें। वाहन के मालिक से बिना मिले या वाहन की जांच किए ऑनलाइन लेन देन न करें। आप लोगों की जानकारी के लिए बता दें की ये सभी कार दिल्ली सर्किल में बिक्री के लिए उपलब्ध हैं।
अब राज्य मंत्री रेखा आर्य ने अल्मोड़ा सुरक्षित सीट पर अपना दावा पेश कर दिया है। रेखा आर्य का कहना है कि उन्होंने वर्ष 2014 में भी चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की थी। देहरादून, विकास धूलिया। आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी भाजपा के समक्ष अब एक नई और दिलचस्प चुनौती खड़ी होती नजर आ रही है। यह है प्रदेश सरकार के मंत्रियों द्वारा लोकसभा सीटों पर दावेदारी। हाल ही में वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य ने नैनीताल संसदीय सीट से चुनाव लड़ने की अपनी मंशा सार्वजनिक की और अब राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रेखा आर्य ने अल्मोड़ा सुरक्षित सीट पर अपना दावा पेश कर दिया है। रेखा आर्य का कहना है कि उन्होंने वर्ष 2014 में भी चुनाव लडऩे की इच्छा जाहिर की थी, लेकिन तब पार्टी हाईकमान के कहने पर चुनाव नहीं लड़ा। उत्तराखंड में भाजपा की पैठ खासी गहरी मानी जाती है। पिछले पांच सालों के दौरान भाजपा उत्तराखंड में लगभग अपराजेय स्थिति में रही है। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पांचों सीटों पर बड़े अंतर से जीत दर्ज की। इसके बाद वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 70 सदस्यों वाली विधानसभा में 57 सीटों पर परचम फहराया। पार्टी की जीत का क्रम पिछले साल के आखिर में संपन्न नगर निकाय चुनावों में भी जारी रहा। कुल 84 निकायों के चुनाव में भाजपा ने 34 निकायों में निकाय प्रमुख के पदों पर कब्जा जमाया। इनमें राज्य के सात में से पांच नगर निगम के महापौर पद भी शामिल हैं। दरअसल, पिछले लोकसभा चुनाव के समय से उत्तराखंड में कांग्रेस से दामन झटक भाजपा में शामिल होने वाले नेताओं की संख्या खासी बड़ी रही। इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री सतपाल महाराज ऐन लोकसभा चुनाव के वक्त भाजपा में आए थे। वर्ष 2016 में, जब उत्तराखंड में कांग्रेस सरकार की बागडोर हरीश रावत के हाथों में थी, तब पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के नेतृत्व में पूर्व मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत व अमृता रावत सहित दस विधायकों ने कांग्रेस छोड़ भाजपा की सदस्यता ली। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले तत्कालीन कैबिनेट मंत्री व कांग्रेस के दो बार प्रदेश अध्यक्ष रहे यशपाल आर्य भी भाजपा में शामिल हो गए। इस राजनैतिक ध्रुवीकरण का नतीजा यह रहा कि एक ओर तो कांग्रेस में कद्दावर माने जाने वाले नेताओं की संख्या चुनिंदा रह गई, तो दूसरी तरफ भाजपा में बड़े नेताओं का जमावड़ा लग गया। हालांकि इनमें से अधिकांश वरिष्ठ नेता प्रदेश की मौजूदा भाजपा सरकार का हिस्सा हैं लेकिन इसके बावजूद इन्होंने अब लोकसभा सीटों पर भी अपना दावा पेश कर पार्टी नेतृत्व के समक्ष दिलचस्प चुनौती खड़ी कर दी है। हाल ही में प्रदेश सरकार में वरिष्ठ मंत्री यशपाल आर्य ने नैनीताल संसदीय सीट से लोकसभा चुनाव लडऩे की इच्छा सार्वजनिक की तो अब राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रेखा आर्य ने अल्मोड़ा सुरक्षित सीट से चुनाव मैदान में उतरने के लिए दावा ठोक दिया है। गौरतलब है कि यशपाल आर्य ने नैनीताल के मौजूदा सांसद भगत सिंह कोश्यारी के चुनाव न लडऩे की स्थिति में ही अपनी दावेदारी की बात कही है जबकि अल्मोड़ा में ऐसा नहीं है। अल्मोड़ा संसदीय सीट का प्रतिनिधित्व अजय टम्टा कर रहे हैं, जो उत्तराखंड से मोदी सरकार में एकमात्र मंत्री हैं। ऐसे में रेखा आर्य द्वारा अल्मोड़ा सीट से लोकसभा चुनाव लडऩे की इच्छा जाहिर किए जाने से हालात खासे दिलचस्प बनते नजर आ रहे हैं। रेखा आर्य (बाल विकास एवं महिला सशक्तीकरण राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार) का कहना है कि मैंने वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भी इस सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की थी, लेकिन पार्टी हाईकमान ने अनुमति नहीं दी। अब मैंने पार्टी नेतृत्व को अपनी दावेदारी से अवगत करा दिया है। अंतिम निर्णय पार्टी हाईकमान को ही लेना है। पार्टी जो भी निर्णय लेगी, मुझे स्वीकार होगा। अजय भट्ट (प्रदेश अध्यक्ष भाजपा, उत्तराखंड) का कहना है कि पार्टी के किसी नेता द्वारा चुनाव लड़ने के लिए दावेदारी पेश करना गलत बात नहीं, बल्कि यह तो एक स्वस्थ परंपरा मानी जानी चाहिए। जब तक प्रत्याशी तय नहीं होता, कोई भी दावेदारी कर सकता है। हां, इतना जरूर है कि प्रत्याशी फाइनल हो जाने के बाद सभी लोग उसके लिए कार्य में जुट जाएंगे।
अब राज्य मंत्री रेखा आर्य ने अल्मोड़ा सुरक्षित सीट पर अपना दावा पेश कर दिया है। रेखा आर्य का कहना है कि उन्होंने वर्ष दो हज़ार चौदह में भी चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की थी। देहरादून, विकास धूलिया। आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी भाजपा के समक्ष अब एक नई और दिलचस्प चुनौती खड़ी होती नजर आ रही है। यह है प्रदेश सरकार के मंत्रियों द्वारा लोकसभा सीटों पर दावेदारी। हाल ही में वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य ने नैनीताल संसदीय सीट से चुनाव लड़ने की अपनी मंशा सार्वजनिक की और अब राज्य मंत्री रेखा आर्य ने अल्मोड़ा सुरक्षित सीट पर अपना दावा पेश कर दिया है। रेखा आर्य का कहना है कि उन्होंने वर्ष दो हज़ार चौदह में भी चुनाव लडऩे की इच्छा जाहिर की थी, लेकिन तब पार्टी हाईकमान के कहने पर चुनाव नहीं लड़ा। उत्तराखंड में भाजपा की पैठ खासी गहरी मानी जाती है। पिछले पांच सालों के दौरान भाजपा उत्तराखंड में लगभग अपराजेय स्थिति में रही है। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पांचों सीटों पर बड़े अंतर से जीत दर्ज की। इसके बाद वर्ष दो हज़ार सत्रह के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने सत्तर सदस्यों वाली विधानसभा में सत्तावन सीटों पर परचम फहराया। पार्टी की जीत का क्रम पिछले साल के आखिर में संपन्न नगर निकाय चुनावों में भी जारी रहा। कुल चौरासी निकायों के चुनाव में भाजपा ने चौंतीस निकायों में निकाय प्रमुख के पदों पर कब्जा जमाया। इनमें राज्य के सात में से पांच नगर निगम के महापौर पद भी शामिल हैं। दरअसल, पिछले लोकसभा चुनाव के समय से उत्तराखंड में कांग्रेस से दामन झटक भाजपा में शामिल होने वाले नेताओं की संख्या खासी बड़ी रही। इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री सतपाल महाराज ऐन लोकसभा चुनाव के वक्त भाजपा में आए थे। वर्ष दो हज़ार सोलह में, जब उत्तराखंड में कांग्रेस सरकार की बागडोर हरीश रावत के हाथों में थी, तब पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के नेतृत्व में पूर्व मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत व अमृता रावत सहित दस विधायकों ने कांग्रेस छोड़ भाजपा की सदस्यता ली। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले तत्कालीन कैबिनेट मंत्री व कांग्रेस के दो बार प्रदेश अध्यक्ष रहे यशपाल आर्य भी भाजपा में शामिल हो गए। इस राजनैतिक ध्रुवीकरण का नतीजा यह रहा कि एक ओर तो कांग्रेस में कद्दावर माने जाने वाले नेताओं की संख्या चुनिंदा रह गई, तो दूसरी तरफ भाजपा में बड़े नेताओं का जमावड़ा लग गया। हालांकि इनमें से अधिकांश वरिष्ठ नेता प्रदेश की मौजूदा भाजपा सरकार का हिस्सा हैं लेकिन इसके बावजूद इन्होंने अब लोकसभा सीटों पर भी अपना दावा पेश कर पार्टी नेतृत्व के समक्ष दिलचस्प चुनौती खड़ी कर दी है। हाल ही में प्रदेश सरकार में वरिष्ठ मंत्री यशपाल आर्य ने नैनीताल संसदीय सीट से लोकसभा चुनाव लडऩे की इच्छा सार्वजनिक की तो अब राज्य मंत्री रेखा आर्य ने अल्मोड़ा सुरक्षित सीट से चुनाव मैदान में उतरने के लिए दावा ठोक दिया है। गौरतलब है कि यशपाल आर्य ने नैनीताल के मौजूदा सांसद भगत सिंह कोश्यारी के चुनाव न लडऩे की स्थिति में ही अपनी दावेदारी की बात कही है जबकि अल्मोड़ा में ऐसा नहीं है। अल्मोड़ा संसदीय सीट का प्रतिनिधित्व अजय टम्टा कर रहे हैं, जो उत्तराखंड से मोदी सरकार में एकमात्र मंत्री हैं। ऐसे में रेखा आर्य द्वारा अल्मोड़ा सीट से लोकसभा चुनाव लडऩे की इच्छा जाहिर किए जाने से हालात खासे दिलचस्प बनते नजर आ रहे हैं। रेखा आर्य का कहना है कि मैंने वर्ष दो हज़ार चौदह के लोकसभा चुनाव में भी इस सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की थी, लेकिन पार्टी हाईकमान ने अनुमति नहीं दी। अब मैंने पार्टी नेतृत्व को अपनी दावेदारी से अवगत करा दिया है। अंतिम निर्णय पार्टी हाईकमान को ही लेना है। पार्टी जो भी निर्णय लेगी, मुझे स्वीकार होगा। अजय भट्ट का कहना है कि पार्टी के किसी नेता द्वारा चुनाव लड़ने के लिए दावेदारी पेश करना गलत बात नहीं, बल्कि यह तो एक स्वस्थ परंपरा मानी जानी चाहिए। जब तक प्रत्याशी तय नहीं होता, कोई भी दावेदारी कर सकता है। हां, इतना जरूर है कि प्रत्याशी फाइनल हो जाने के बाद सभी लोग उसके लिए कार्य में जुट जाएंगे।
पिछले साल आए पेटीएम के आईपीओ में इश्यू प्राइस 2150 था, फिलहाल स्टॉक 637 के स्तर पर है.पिछले महीने ही स्टॉक 520 के स्तर पर आ गया था. पेटीएम (Paytm) के शेयर में आई तेज गिरावट शेयर बाजार में आए उतार-चढ़ाव की वजह से देखने को मिली है. हालांकि अगले साल से कंपनी के कारोबार में सुधार के संकेत देखने को मिलने लगेंगे. आज पेटीएम के सीईओ विजय शेखर शर्मा ने ये बात कही. उनके मुताबिक फिलहाल पेटीएम जैसे हाई ग्रोथ स्टॉक्स यानि ऐसे स्टॉक्स जिसमें आगे तेज बढ़त की उम्मीद हो, के लिये दुनिया भर के शेयर बाजार (Stock Market) की स्थितियां फिलहाल अनुकूल नहीं है इसी वजह से पेटीएम शेयर (Paytm Stocks) में तेज गिरावट देखने को मिली है. शेयर फिलहाल 637 के स्तर के करीब है, हालांकि पिछले साल नवंबर में आए आईपीओ में इसका इश्यू प्राइस 2150 था. यानि स्टॉक लिस्टिंग के बाद से 70 प्रतिशत से ज्यादा लुढ़क चुका है. हाल ही में रिजर्व बैंक के द्वारा पेटीएम पेमेंट्स बैंक पर एक्शन के बाद स्टॉक में गिरावट और बढ़ी थी और स्टॉक अपने इश्यू प्राइस के मुकाबले 75 प्रतिशत टूट कर 520 के स्तर पर पहुंच गया था, जो कि इसका साल का नया निचला स्तर है. इस स्तर से स्टॉक में 25 प्रतिशत की रिकवरी देखने को मिली है. हालांकि अभी भी स्टॉक अपने इश्यू प्राइस से 70 प्रतिशत नीचे है. स्टॉक में इस गिरावट को देखते हुए निवेशकों की तरफ से कंपनी के प्रदर्शन को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं. आज स्टॉक में तेज गिरावट पर सीईओ ने कहा कि फिलहाल दुनिया भर के स्टॉक मार्केट में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. इसका सबसे ज्यादा असर हाई ग्रोथ स्टॉक्स में देखने को मिला है. उनके मुताबिक पेटीएम में आई तेज गिरावट इसी उतार-चढ़ाव की नतीजा है. सीईओ ने कहा कि कंपनी के कारोबार में सुधार देखने को मिल रहा है और संभव है कि अगली 6 तिमाही में कंपनी ऑपरेटिंग एबिटडा के स्तर पर ब्रेक-ईवन की स्थिति में पहुंच जाए. कंपनी के शेयरधारकों को लिखे एक पत्र में शर्मा ने कहा कि हम आने वाले समय में अपने नतीजे पेश करने वाले हैं. और हम कारोबार की गति से काफी उत्साहित हैं. कंपनी उम्मीद कर रही है कि ये सुधार आगे भी जारी रहेगा और सितंबर 2023 की तिमाही खत्म होने तक ऑपरेटिंग एबिटडा के ब्रेक ईवन हासिल कर लिये जाएंगे जो अधिकांश जानकारों की अनुमान से काफी पहले होगा. वहीं सीईओ ने कहा कि सबसे अहम बात ये है कि कंपनी ये लक्ष्य अपनी योजनाओं में बिना किसी बदलाव के हासिल करेगी. कंपनी ने एक अन्य जानकारी में कहा कि मार्च 2022 में खत्म हुई तिमाही में पेटीएम की कर्ज बांटने का रफ्तार पिछले साल के मुकाबले 4 गुना बढ़ी है. वहीं कर्ज की मात्रा के हिसाब से एक साल के दौरान बांटे गये कर्ज 5 गुना बढ़कर 3,553 करोड़ रुपये तक पहुंचे हैं.
पिछले साल आए पेटीएम के आईपीओ में इश्यू प्राइस दो हज़ार एक सौ पचास था, फिलहाल स्टॉक छः सौ सैंतीस के स्तर पर है.पिछले महीने ही स्टॉक पाँच सौ बीस के स्तर पर आ गया था. पेटीएम के शेयर में आई तेज गिरावट शेयर बाजार में आए उतार-चढ़ाव की वजह से देखने को मिली है. हालांकि अगले साल से कंपनी के कारोबार में सुधार के संकेत देखने को मिलने लगेंगे. आज पेटीएम के सीईओ विजय शेखर शर्मा ने ये बात कही. उनके मुताबिक फिलहाल पेटीएम जैसे हाई ग्रोथ स्टॉक्स यानि ऐसे स्टॉक्स जिसमें आगे तेज बढ़त की उम्मीद हो, के लिये दुनिया भर के शेयर बाजार की स्थितियां फिलहाल अनुकूल नहीं है इसी वजह से पेटीएम शेयर में तेज गिरावट देखने को मिली है. शेयर फिलहाल छः सौ सैंतीस के स्तर के करीब है, हालांकि पिछले साल नवंबर में आए आईपीओ में इसका इश्यू प्राइस दो हज़ार एक सौ पचास था. यानि स्टॉक लिस्टिंग के बाद से सत्तर प्रतिशत से ज्यादा लुढ़क चुका है. हाल ही में रिजर्व बैंक के द्वारा पेटीएम पेमेंट्स बैंक पर एक्शन के बाद स्टॉक में गिरावट और बढ़ी थी और स्टॉक अपने इश्यू प्राइस के मुकाबले पचहत्तर प्रतिशत टूट कर पाँच सौ बीस के स्तर पर पहुंच गया था, जो कि इसका साल का नया निचला स्तर है. इस स्तर से स्टॉक में पच्चीस प्रतिशत की रिकवरी देखने को मिली है. हालांकि अभी भी स्टॉक अपने इश्यू प्राइस से सत्तर प्रतिशत नीचे है. स्टॉक में इस गिरावट को देखते हुए निवेशकों की तरफ से कंपनी के प्रदर्शन को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं. आज स्टॉक में तेज गिरावट पर सीईओ ने कहा कि फिलहाल दुनिया भर के स्टॉक मार्केट में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. इसका सबसे ज्यादा असर हाई ग्रोथ स्टॉक्स में देखने को मिला है. उनके मुताबिक पेटीएम में आई तेज गिरावट इसी उतार-चढ़ाव की नतीजा है. सीईओ ने कहा कि कंपनी के कारोबार में सुधार देखने को मिल रहा है और संभव है कि अगली छः तिमाही में कंपनी ऑपरेटिंग एबिटडा के स्तर पर ब्रेक-ईवन की स्थिति में पहुंच जाए. कंपनी के शेयरधारकों को लिखे एक पत्र में शर्मा ने कहा कि हम आने वाले समय में अपने नतीजे पेश करने वाले हैं. और हम कारोबार की गति से काफी उत्साहित हैं. कंपनी उम्मीद कर रही है कि ये सुधार आगे भी जारी रहेगा और सितंबर दो हज़ार तेईस की तिमाही खत्म होने तक ऑपरेटिंग एबिटडा के ब्रेक ईवन हासिल कर लिये जाएंगे जो अधिकांश जानकारों की अनुमान से काफी पहले होगा. वहीं सीईओ ने कहा कि सबसे अहम बात ये है कि कंपनी ये लक्ष्य अपनी योजनाओं में बिना किसी बदलाव के हासिल करेगी. कंपनी ने एक अन्य जानकारी में कहा कि मार्च दो हज़ार बाईस में खत्म हुई तिमाही में पेटीएम की कर्ज बांटने का रफ्तार पिछले साल के मुकाबले चार गुना बढ़ी है. वहीं कर्ज की मात्रा के हिसाब से एक साल के दौरान बांटे गये कर्ज पाँच गुना बढ़कर तीन,पाँच सौ तिरेपन करोड़ रुपये तक पहुंचे हैं.
श्रात्मा से अन्य कहा है, परन्तु उन्हे 'न्य हैं' ऐसा वही कह सकता है, जिसे शुद्धात्मा की दृष्टि हुई हो । प्रज्ञानी को तो विकार और आत्मस्वभाव की भिन्नता का भान ही नहीं है, इसलिए वह तो दोनो को एकमेक मानकर विकार का कर्त्ता होता है, विकार उसके लिए आत्मा से अन्य नही रहा ॥१०॥ वीतराग-विज्ञान जून १९८४, पृष्ठ २५ ( १६५) प्रश्न आत्मा मे राग-द्वष होने पर भी 'वे राग-द्वेष में नहीं' ऐसा उसी समय कैसे माना जाय ? राग-द्वेष के अस्तित्व के समय ही राग-द्वेष रहित ज्ञानस्वभाव की श्रद्धा किसप्रकार हो सकती है ? उत्तर - राग-द्वेष तो पर्याय मे हैं, उसीसमय यदि पर्यायदृष्टि को गौण करके स्वभावदृष्टि से देखो तो आत्मा का स्वभाव राग रहित ही है । राग होने पर भी शुद्धात्मा तो राग से रहित है । राग-द्वेष होना तो चारित्रगुण का विकारी परिणमन है और शुद्धात्मा को मानना श्रद्धागुण का तथा शुद्धात्मा को जानना ज्ञानगुण का निर्मल परिणमन है - इस - प्रकार प्रत्येक गुण का परिणमन भिन्न-भिन्न कार्य करता है । चारित्र के परिणमन मे विकारदशा होने पर भी श्रद्धा ज्ञान गुण का परिणमन उसमे न लगकर त्रिकाली शुद्धस्वभाव मे वढे - झुके, श्रद्धा की पर्याय ने विकार रहित सम्पूर्ण शुद्धात्मा को लक्ष करके स्वीकार किया भोर ज्ञान की पर्याय भी चारित्र के विकार का नकार करके स्वभाव का लक्ष करने लगी अर्थात् उसने भी विकाररहित शुद्धात्मा को जाना । इसप्रकार चारित्र की पर्याय मे राग-द्वेष होने पर भी श्रद्धा और ज्ञान स्वलक्ष द्वारा शुद्धात्मा की श्रद्धा और ज्ञान कर सकते हैं ॥११॥ वीतराग-विज्ञान अप्रेल १९८४, पृष्ठ २५ प्रश्न : प्रयोजन क्या ? श्रात्मा और पर का सम्बन्ध नही है - यह समझने का उत्तर - पर के साथ सम्बन्ध नही अर्थात् परलक्ष से जो विकार होता है, वह मेरा स्वरूप नही है - इसप्रकार पर के साथ का सम्बन्ध तोडकर तथा अपनी पर्याय का भी लक्ष छोडकर अभेदस्वभाव की दृष्टि करना - यही प्रयोजन है ॥ १२॥
श्रात्मा से अन्य कहा है, परन्तु उन्हे 'न्य हैं' ऐसा वही कह सकता है, जिसे शुद्धात्मा की दृष्टि हुई हो । प्रज्ञानी को तो विकार और आत्मस्वभाव की भिन्नता का भान ही नहीं है, इसलिए वह तो दोनो को एकमेक मानकर विकार का कर्त्ता होता है, विकार उसके लिए आत्मा से अन्य नही रहा ॥दस॥ वीतराग-विज्ञान जून एक हज़ार नौ सौ चौरासी, पृष्ठ पच्चीस प्रश्न आत्मा मे राग-द्वष होने पर भी 'वे राग-द्वेष में नहीं' ऐसा उसी समय कैसे माना जाय ? राग-द्वेष के अस्तित्व के समय ही राग-द्वेष रहित ज्ञानस्वभाव की श्रद्धा किसप्रकार हो सकती है ? उत्तर - राग-द्वेष तो पर्याय मे हैं, उसीसमय यदि पर्यायदृष्टि को गौण करके स्वभावदृष्टि से देखो तो आत्मा का स्वभाव राग रहित ही है । राग होने पर भी शुद्धात्मा तो राग से रहित है । राग-द्वेष होना तो चारित्रगुण का विकारी परिणमन है और शुद्धात्मा को मानना श्रद्धागुण का तथा शुद्धात्मा को जानना ज्ञानगुण का निर्मल परिणमन है - इस - प्रकार प्रत्येक गुण का परिणमन भिन्न-भिन्न कार्य करता है । चारित्र के परिणमन मे विकारदशा होने पर भी श्रद्धा ज्ञान गुण का परिणमन उसमे न लगकर त्रिकाली शुद्धस्वभाव मे वढे - झुके, श्रद्धा की पर्याय ने विकार रहित सम्पूर्ण शुद्धात्मा को लक्ष करके स्वीकार किया भोर ज्ञान की पर्याय भी चारित्र के विकार का नकार करके स्वभाव का लक्ष करने लगी अर्थात् उसने भी विकाररहित शुद्धात्मा को जाना । इसप्रकार चारित्र की पर्याय मे राग-द्वेष होने पर भी श्रद्धा और ज्ञान स्वलक्ष द्वारा शुद्धात्मा की श्रद्धा और ज्ञान कर सकते हैं ॥ग्यारह॥ वीतराग-विज्ञान अप्रेल एक हज़ार नौ सौ चौरासी, पृष्ठ पच्चीस प्रश्न : प्रयोजन क्या ? श्रात्मा और पर का सम्बन्ध नही है - यह समझने का उत्तर - पर के साथ सम्बन्ध नही अर्थात् परलक्ष से जो विकार होता है, वह मेरा स्वरूप नही है - इसप्रकार पर के साथ का सम्बन्ध तोडकर तथा अपनी पर्याय का भी लक्ष छोडकर अभेदस्वभाव की दृष्टि करना - यही प्रयोजन है ॥ बारह॥
प्यार होने जाने पर इंसान अपने ख्वाबों को किसी और की सोच के साथ साझा करने लगता है जिस समय ये एहसास हमारे मन में आता है हम ये भरोसा करने लग जाते हैं कि यही एक बात है जो सच और बाकी सबकुछ झूठ और बेकार है। लेकिन प्यार करना और एक रिश्ते में रहना कर निभा पाना मुश्किल। इतना मुश्किल की एक वक्त के बाद लोगों को अलग हो जाना ज्यादा आसान लगने लगता है। हम जब किसी इंसान के साथ काफी वक्त तक साथ होते हैं तो ऐसे में हम चाहते हैं कि वह हमें बेहंतहा प्यार करें, हमारी फीलिंग्स की परवाह करें, हमारा और हम उसका ध्यान रखें। जिंदगी से भला और क्या चाहिए। जिस पर हम अपना हक जता सकें। ऐसे में अगर आपका रिलेशन इस मुकाम पर आ गया है कि आप उनसे अलग होन की सोच रही हैं तो बिना वजह और जबरदस्ती किसी भी रिलेशनशिप में बंध न रहे उसे आजाद होने में बेहतरी है।
प्यार होने जाने पर इंसान अपने ख्वाबों को किसी और की सोच के साथ साझा करने लगता है जिस समय ये एहसास हमारे मन में आता है हम ये भरोसा करने लग जाते हैं कि यही एक बात है जो सच और बाकी सबकुछ झूठ और बेकार है। लेकिन प्यार करना और एक रिश्ते में रहना कर निभा पाना मुश्किल। इतना मुश्किल की एक वक्त के बाद लोगों को अलग हो जाना ज्यादा आसान लगने लगता है। हम जब किसी इंसान के साथ काफी वक्त तक साथ होते हैं तो ऐसे में हम चाहते हैं कि वह हमें बेहंतहा प्यार करें, हमारी फीलिंग्स की परवाह करें, हमारा और हम उसका ध्यान रखें। जिंदगी से भला और क्या चाहिए। जिस पर हम अपना हक जता सकें। ऐसे में अगर आपका रिलेशन इस मुकाम पर आ गया है कि आप उनसे अलग होन की सोच रही हैं तो बिना वजह और जबरदस्ती किसी भी रिलेशनशिप में बंध न रहे उसे आजाद होने में बेहतरी है।
श्रीलंका में गंभीर आर्थिक संकट चल रहा है, इसके चलते वहा की जनता भी भड़की हुई है और लोग इतना आक्रोशित हैं की सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे है। कोलंबो के गॉल फेस इलाके में प्रदर्शनकारियों और सरकार के समर्थकों के बीच जोरदार झड़प हुई है। इस झड़प में 9 लोग घायल हुए हैं। श्रीलंका के प्रधान मंत्री महिंदा राजपक्षे ने "किसी भी बलिदान" की आवश्यकता के लिए पेशकश की, यहां तक कि उनके समर्थकों ने प्रधानमंत्री और उनके भाई, राष्ट्रपति की मांग को लेकर प्रदर्शनकारियों के साथ संघर्ष किया, स्वतंत्रता के बाद से देश के सबसे खराब आर्थिक संकट की मान्यता में इस्तीफा दे दिया। स्थानीय टेलीविजन ने सोमवार को कोलंबो में प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास के बाहर प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए तंबुओं में आग लगाते हुए दिखाया। इसी तरह के दृश्य शहर के तटवर्ती सैरगाह के सामने खेले गए जहां राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के इस्तीफे की मांग के लिए नागरिकों ने हफ्तों तक शांतिपूर्वक लाइन लगाई।
श्रीलंका में गंभीर आर्थिक संकट चल रहा है, इसके चलते वहा की जनता भी भड़की हुई है और लोग इतना आक्रोशित हैं की सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे है। कोलंबो के गॉल फेस इलाके में प्रदर्शनकारियों और सरकार के समर्थकों के बीच जोरदार झड़प हुई है। इस झड़प में नौ लोग घायल हुए हैं। श्रीलंका के प्रधान मंत्री महिंदा राजपक्षे ने "किसी भी बलिदान" की आवश्यकता के लिए पेशकश की, यहां तक कि उनके समर्थकों ने प्रधानमंत्री और उनके भाई, राष्ट्रपति की मांग को लेकर प्रदर्शनकारियों के साथ संघर्ष किया, स्वतंत्रता के बाद से देश के सबसे खराब आर्थिक संकट की मान्यता में इस्तीफा दे दिया। स्थानीय टेलीविजन ने सोमवार को कोलंबो में प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास के बाहर प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए तंबुओं में आग लगाते हुए दिखाया। इसी तरह के दृश्य शहर के तटवर्ती सैरगाह के सामने खेले गए जहां राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के इस्तीफे की मांग के लिए नागरिकों ने हफ्तों तक शांतिपूर्वक लाइन लगाई।
Buddhaditya Yoga: सूर्य ग्रह 15 मार्च 2022 को कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में प्रवेश या गोचर कर गए थे और अब 24 मार्च को बुध ग्रह भी कुंभ से निकलकर मीन राशि में प्रवेश कर गए हैं। इसे ग्रहों का राशि परिवर्तन भी कहते हैं। आओ जानते हैं बुध के मीन में प्रवेश से क्या होगा 12 राशियों का शुभ-अशुभ राशिफल। बुध ग्रह का मीन राशि में गोचर : (Budha Grah in Meen Rashi): मेष राशि : यह गोचर आपके जीवन में यात्रा का योग बना रहा है। मित्रों और संबंधियों से अच्छे संबंध बनेंगे। हालांकि भागदौड़ भरा समय रहेगा और खर्च भी बढ़ सकते हैं। नौकरी और व्यापार में सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं। हालांकि आपको इस अवधि के दौरान वाद विवाद से दूर रहना चाहिए। अन्यथा आर्थिक नुकसान हो सकता है। वृषभ राशि : आपके लिए यह गोचर शुभ रहने वाला है। सफलता की रुकावटें समाप्त होगी। नौकरी और व्यापार की दृष्टि से बेहतरीन अवसर है। संतान सुख मिलेगा। हालांकि परिवार के किसी सदस्य की सेहत बिगड़ सकती है। मिथुन राशि : आपके लिए भी यह योग शुभ है। नौकरी में प्रगति और व्यापार में उन्नति होगी। जमीन-जायदाद से जुड़े मामलों का निपटारा होगा। चल या अचल संपत्ति बनाने में कामयाब होंगे। माता पिता की सेहत का ध्यान रखना होगा। कर्क राशि : आपके लिए भी यह गोचर शुभ है। धर्म कर्म के कार्यों में आपकी रूचि बढ़ेगी। लोगों का सहयोग प्राप्त होगा। संतान सुख की प्राप्ति होगी। नौकरी और व्यापार में भी सफलता मिलेगी, बस आप अपनी योजनाओं को गोपनीय बनाए रखें। सिंह राशि : आपके लिए यह गोचर सही नहीं माना जा रहा है। आपको अपनी सेहत का ध्यान रखना होगा। परिवार में किसी से भी वाद विवाद हो सकता है। कोर्ट कचहरी से संबंधित मामलों में सतर्कता रखें। समझौता हो सकता हो तो कर लें। कार्यक्षेत्र में किसी के षड्यंत्र का शिकार हो सकते हैं। कन्या राशि : आपके लिए यह गोचर शुभ है। कार्यक्षेत्र में आपके कार्यों की सराहना होगी। व्यापार में कोई बड़ी डील हो सकती है। शासन और ससुराल पक्ष से सहयोग मिलने की संभावना है। कोई भी निर्णय लेते वक्त सावधानी रखें। तुला राशि : आपकी राशि के लिए यह गोचर मिलेजुले असर वाला रहेगा। आपकी अपनी सेहत का ध्यान रखना होगा और शत्रुओं से सावधान रहना होगा। अपनी योजनाओं को गोपनीय रखें। नौकरी में प्रयास सफल हो सकते हैं और व्यापार में किसी भी प्रकार का जोखिम न उठाएं। वृश्चिक राशि : आपकी राशि के लिए यह गोचर शुभ फल प्रदान करेगा। आपकी आय में बढोतरी होगी। व्यापार में विस्तार करने या नया व्यापार शुरू करने के लिए उचित समय है। सभी के सहयोग मिलेगा। पद प्रतिष्ठा बढ़ेगी। धनु राशि : आपकी राशि के लिए यह गोचर सामान्य फल प्रदान करेगा। मान सम्मान में बढ़ोतरी होगी। हालांकि आपको पारिवारिक कलह से भी झुझना पड़ सकता है। जमीन-जायदाद से जुड़े मामले हल हो सकते हैं और आप नई संपत्ति बनाने में सफल भी हो सकते हैं। यात्रा को टाल दें और आपके किसी सामान की चोरी होने की संभावना है। मकर राशि : यह गोचर आपके लिए शुभ है। अटके कार्य पूर्ण होंगे। व्यापार में उन्नति होगी और नौकरी में आपके द्वारा लिए गए निर्णय और किए गए कार्यों की सराहना होगी। माता पिता की सेहत का ध्यान रखश्रा होगा। कुंभ राशि : आपकी राशि के लिए यह गोचर मिलेजुले असर वाला रहेगा। आपको अपनी सेहत का ध्यान रखना होगा। हालांकि आर्थिक रूप में आप मजबूत हो सकते हैं। वाद विवाद से बचकर रहें। यदि विवादित मामले हैं तो सुलझा लें। मीन राशि : आपकी राशि के लिए यह गोचर शुभ है। भूमि या वाहन की खरीदी हो सकती है। नौकरी में भी सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। परिवार में अच्छा माहौल रहेगा। व्यापार में निवेश कर सकते हैं। ससुराल पक्ष से सहयोग मिलेगा। अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं। इनसे संबंधित किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
Buddhaditya Yoga: सूर्य ग्रह पंद्रह मार्च दो हज़ार बाईस को कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में प्रवेश या गोचर कर गए थे और अब चौबीस मार्च को बुध ग्रह भी कुंभ से निकलकर मीन राशि में प्रवेश कर गए हैं। इसे ग्रहों का राशि परिवर्तन भी कहते हैं। आओ जानते हैं बुध के मीन में प्रवेश से क्या होगा बारह राशियों का शुभ-अशुभ राशिफल। बुध ग्रह का मीन राशि में गोचर : : मेष राशि : यह गोचर आपके जीवन में यात्रा का योग बना रहा है। मित्रों और संबंधियों से अच्छे संबंध बनेंगे। हालांकि भागदौड़ भरा समय रहेगा और खर्च भी बढ़ सकते हैं। नौकरी और व्यापार में सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं। हालांकि आपको इस अवधि के दौरान वाद विवाद से दूर रहना चाहिए। अन्यथा आर्थिक नुकसान हो सकता है। वृषभ राशि : आपके लिए यह गोचर शुभ रहने वाला है। सफलता की रुकावटें समाप्त होगी। नौकरी और व्यापार की दृष्टि से बेहतरीन अवसर है। संतान सुख मिलेगा। हालांकि परिवार के किसी सदस्य की सेहत बिगड़ सकती है। मिथुन राशि : आपके लिए भी यह योग शुभ है। नौकरी में प्रगति और व्यापार में उन्नति होगी। जमीन-जायदाद से जुड़े मामलों का निपटारा होगा। चल या अचल संपत्ति बनाने में कामयाब होंगे। माता पिता की सेहत का ध्यान रखना होगा। कर्क राशि : आपके लिए भी यह गोचर शुभ है। धर्म कर्म के कार्यों में आपकी रूचि बढ़ेगी। लोगों का सहयोग प्राप्त होगा। संतान सुख की प्राप्ति होगी। नौकरी और व्यापार में भी सफलता मिलेगी, बस आप अपनी योजनाओं को गोपनीय बनाए रखें। सिंह राशि : आपके लिए यह गोचर सही नहीं माना जा रहा है। आपको अपनी सेहत का ध्यान रखना होगा। परिवार में किसी से भी वाद विवाद हो सकता है। कोर्ट कचहरी से संबंधित मामलों में सतर्कता रखें। समझौता हो सकता हो तो कर लें। कार्यक्षेत्र में किसी के षड्यंत्र का शिकार हो सकते हैं। कन्या राशि : आपके लिए यह गोचर शुभ है। कार्यक्षेत्र में आपके कार्यों की सराहना होगी। व्यापार में कोई बड़ी डील हो सकती है। शासन और ससुराल पक्ष से सहयोग मिलने की संभावना है। कोई भी निर्णय लेते वक्त सावधानी रखें। तुला राशि : आपकी राशि के लिए यह गोचर मिलेजुले असर वाला रहेगा। आपकी अपनी सेहत का ध्यान रखना होगा और शत्रुओं से सावधान रहना होगा। अपनी योजनाओं को गोपनीय रखें। नौकरी में प्रयास सफल हो सकते हैं और व्यापार में किसी भी प्रकार का जोखिम न उठाएं। वृश्चिक राशि : आपकी राशि के लिए यह गोचर शुभ फल प्रदान करेगा। आपकी आय में बढोतरी होगी। व्यापार में विस्तार करने या नया व्यापार शुरू करने के लिए उचित समय है। सभी के सहयोग मिलेगा। पद प्रतिष्ठा बढ़ेगी। धनु राशि : आपकी राशि के लिए यह गोचर सामान्य फल प्रदान करेगा। मान सम्मान में बढ़ोतरी होगी। हालांकि आपको पारिवारिक कलह से भी झुझना पड़ सकता है। जमीन-जायदाद से जुड़े मामले हल हो सकते हैं और आप नई संपत्ति बनाने में सफल भी हो सकते हैं। यात्रा को टाल दें और आपके किसी सामान की चोरी होने की संभावना है। मकर राशि : यह गोचर आपके लिए शुभ है। अटके कार्य पूर्ण होंगे। व्यापार में उन्नति होगी और नौकरी में आपके द्वारा लिए गए निर्णय और किए गए कार्यों की सराहना होगी। माता पिता की सेहत का ध्यान रखश्रा होगा। कुंभ राशि : आपकी राशि के लिए यह गोचर मिलेजुले असर वाला रहेगा। आपको अपनी सेहत का ध्यान रखना होगा। हालांकि आर्थिक रूप में आप मजबूत हो सकते हैं। वाद विवाद से बचकर रहें। यदि विवादित मामले हैं तो सुलझा लें। मीन राशि : आपकी राशि के लिए यह गोचर शुभ है। भूमि या वाहन की खरीदी हो सकती है। नौकरी में भी सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। परिवार में अच्छा माहौल रहेगा। व्यापार में निवेश कर सकते हैं। ससुराल पक्ष से सहयोग मिलेगा। अस्वीकरण : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं। इनसे संबंधित किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
एक स्टडी में सामने आया है दिल्ली के साउथ एमसीडी एरिया में मच्छरों की तादाद हद से ज्यादा बढ़ी है और यहां के लोग मच्छरों के प्रकोप से परेशान हैं। बता दें कि मच्छरों का घनत्व सबसे अधिक नजफगढ़ जोन के ग्रामीण, कच्ची कॉलोनियों और वेस्ट जोन में है। नजफगढ़ जोन में मच्छरों का घनत्व 9. 8 आदमी/घंटा है, जो समान्य की तुलना में करीब 9 गुना से भी अधिक है।
एक स्टडी में सामने आया है दिल्ली के साउथ एमसीडी एरिया में मच्छरों की तादाद हद से ज्यादा बढ़ी है और यहां के लोग मच्छरों के प्रकोप से परेशान हैं। बता दें कि मच्छरों का घनत्व सबसे अधिक नजफगढ़ जोन के ग्रामीण, कच्ची कॉलोनियों और वेस्ट जोन में है। नजफगढ़ जोन में मच्छरों का घनत्व नौ. आठ आदमी/घंटा है, जो समान्य की तुलना में करीब नौ गुना से भी अधिक है।
कांग्रेस सहित देश के 16 विपक्षी दलों ने कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों के प्रति एकजुटता दिखाते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण के बहिष्कार का फैसला किया है। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने यह जानकारी दी। राष्ट्रपति कोविंद के संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करने के साथ शुक्रवार को बजट सत्र का आगाज होगा। विपक्षी दलों के नेताओं ने एक बयान जारी कर कहा, "किसानों की मांगों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा सरकार अहंकारी, अड़ियल और अलोकतांत्रिक बनी हुई है। सरकार की असंवेदनशीलता से स्तब्ध हम विपक्षी दलों ने तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग दोहराते हुए और किसानों के प्रति एकजुटता प्रकट करते हुए यह फैसला किया है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार किया जाएगा। बयान में कहा गया है कि कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, नेशनल कांफ्रेंस, द्रमुक, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना, सपा, राजद, माकपा, भाकपा, आईयूएमएल, आरएसपी, पीडीपी, एमडीएमके, केरल कांग्रेस(एम) और एआईयूडीएफ ने संयुक्त रूप से यह फैसला किया है। विपक्षी दलों ने एक संयुक्त बयान में कहा, "हम हालात को संभालने के दौरान दिल्ली पुलिस के जवानों के घायल होने को लेकर भी दुख प्रकट करते हैं। लेकिन हमारा मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम में केंद्र सरकार की भूमिका को सामने लाने के लिए निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। " उन्होंने कहा कि नए कृषि कानूनों से भारतीय कृषि क्षेत्र के भविष्य के लिए खतरा पैदा हो गया है।
कांग्रेस सहित देश के सोलह विपक्षी दलों ने कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों के प्रति एकजुटता दिखाते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण के बहिष्कार का फैसला किया है। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने यह जानकारी दी। राष्ट्रपति कोविंद के संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करने के साथ शुक्रवार को बजट सत्र का आगाज होगा। विपक्षी दलों के नेताओं ने एक बयान जारी कर कहा, "किसानों की मांगों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा सरकार अहंकारी, अड़ियल और अलोकतांत्रिक बनी हुई है। सरकार की असंवेदनशीलता से स्तब्ध हम विपक्षी दलों ने तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग दोहराते हुए और किसानों के प्रति एकजुटता प्रकट करते हुए यह फैसला किया है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार किया जाएगा। बयान में कहा गया है कि कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, नेशनल कांफ्रेंस, द्रमुक, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना, सपा, राजद, माकपा, भाकपा, आईयूएमएल, आरएसपी, पीडीपी, एमडीएमके, केरल कांग्रेस और एआईयूडीएफ ने संयुक्त रूप से यह फैसला किया है। विपक्षी दलों ने एक संयुक्त बयान में कहा, "हम हालात को संभालने के दौरान दिल्ली पुलिस के जवानों के घायल होने को लेकर भी दुख प्रकट करते हैं। लेकिन हमारा मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम में केंद्र सरकार की भूमिका को सामने लाने के लिए निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। " उन्होंने कहा कि नए कृषि कानूनों से भारतीय कृषि क्षेत्र के भविष्य के लिए खतरा पैदा हो गया है।
कटक. अंतर्राष्ट्रीय अग्रवाल सम्मेलन की ओडिशा शाखा ने मूर्ख दिवस को अप्रैल कूल दिवस के रूप में मनाया. बताया जाता है कि सम्मेलन के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार मित्तल की प्रेरणा से अप्रैल फूल दिवस को अप्रैल कूल दिवस के रूप में मनाया गया. बताया गया है कि इस बार अंतर्राष्ट्रीय अग्रवाल महिला सम्मेलन, ओडिशा प्रदेश की संस्थापक इकाई अध्यक्ष संतोषी चौधरी ने कुछ नये तरीके से "अप्रैल कूल" दिवस बनाने की सोची और इस दिन पेड़ पौधे लगाकर नई परंपरा शुरू की. एक अप्रैल को ओडिशा में विख्यात उत्कल दिवस भी मनाया जाता है. अंतर्राष्ट्रीय अग्रवाल महिला सम्मेलन की प्रदेश अध्यक्ष संतोषी और सचिव कौशल्या मोड़ा संस्था के अन्य पदाधिकारियों व सदस्यों के साथ मिलकर "गोपाल कृष्ण गोशाला, कटक" 20 पौधे रोपे. इस कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती चौधरी, प्रदेश सचिव श्रीमती कौशल्या मोड़ा व उनके पति भीमसेन लाला, प्रदेश उपाध्यक्ष रंजू अग्रवाल, प्रदेश बेटी बचाओ बेटी बचाओ की संयोजक संतोष अग्रवाल, प्रदेश सहसचिव कांता धनावत और कटक जिला अध्यक्ष आरती अग्रवाल, कटक जिला कोषाध्यक्ष मीना अग्रवाल आदि ने धरती और वातावरण को ठंडा रखने के प्रयास के इस एक कदम में साथ दिया. इस मौके पर भीमसेन लाल और माधव को अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया.
कटक. अंतर्राष्ट्रीय अग्रवाल सम्मेलन की ओडिशा शाखा ने मूर्ख दिवस को अप्रैल कूल दिवस के रूप में मनाया. बताया जाता है कि सम्मेलन के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार मित्तल की प्रेरणा से अप्रैल फूल दिवस को अप्रैल कूल दिवस के रूप में मनाया गया. बताया गया है कि इस बार अंतर्राष्ट्रीय अग्रवाल महिला सम्मेलन, ओडिशा प्रदेश की संस्थापक इकाई अध्यक्ष संतोषी चौधरी ने कुछ नये तरीके से "अप्रैल कूल" दिवस बनाने की सोची और इस दिन पेड़ पौधे लगाकर नई परंपरा शुरू की. एक अप्रैल को ओडिशा में विख्यात उत्कल दिवस भी मनाया जाता है. अंतर्राष्ट्रीय अग्रवाल महिला सम्मेलन की प्रदेश अध्यक्ष संतोषी और सचिव कौशल्या मोड़ा संस्था के अन्य पदाधिकारियों व सदस्यों के साथ मिलकर "गोपाल कृष्ण गोशाला, कटक" बीस पौधे रोपे. इस कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती चौधरी, प्रदेश सचिव श्रीमती कौशल्या मोड़ा व उनके पति भीमसेन लाला, प्रदेश उपाध्यक्ष रंजू अग्रवाल, प्रदेश बेटी बचाओ बेटी बचाओ की संयोजक संतोष अग्रवाल, प्रदेश सहसचिव कांता धनावत और कटक जिला अध्यक्ष आरती अग्रवाल, कटक जिला कोषाध्यक्ष मीना अग्रवाल आदि ने धरती और वातावरण को ठंडा रखने के प्रयास के इस एक कदम में साथ दिया. इस मौके पर भीमसेन लाल और माधव को अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया.
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। अंशु जमसेंपा एक भारतीय पर्वतारोही और दुनिया की पहली महिला है, जिन्होंने सीज़न में माउंट एवरेस्ट के शिखर पर दो बार (केवल ५ दिन के अंदर) चढ़ाई की हैं। यह एक औरत द्वारा सबसे ऊंची शिखर की सबसे तेज डबल चढ़ाई भी है। यह ३२ वर्षीय पर्वतारोही अरुणाचल प्रदेश के पश्चिमी कामेंग जिले के बोम्डीला से हैं। विवाह से पहले वह सोनितपुर जिले के गोहपुर में रहती थी और उनका नाम दीपिका कलिता था। उसके पति, सेरिंग वांग सभी अरुणाचल पर्वतारोहण और साहसिक खेल एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं। उनकी २ बेटियाँ भी हैं। 14 वें दलाई लामा के आशीर्वाद लेने के बाद उन्होंने २ अप्रैल, २०१७ को गुवाहाटी से एवरेस्ट चढ़ाई अभियान शुरू किया था। उन्होंने एवरेस्ट बेस कैंप (१७,६०० फीट) में अनुकूलन के लिए ३८ दिन का समय लिया और ४ अप्रैल को उनकी मुख्य यात्रा शुरू की १६ मई को ९ः१५ बजे, १७ अन्य पर्वतारोहियों के साथ, उन्होंने पहाड़ पर चढ़कर और भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को फहराया। १९ मई को उन्होने एक नेपाली पर्वतारोही फरी शेरपा के साथ दूसरे कठिन दौरे की शुरुआत की। लगभग १० बजे तक उन्होंने लम्बी पैदल यात्रा बिना किसी रुकावट के साथ की और अंत में २१ मई, २०१७ को ७ः४५ बजे शीर्ष पर पहुंची। इतिहास बनाने के लिए (पहली महिला और पहली मां जो दो बार दोहरे चढ़ाई पूरी कर चुकी हैं), अरुणाचल प्रदेश सरकार ने तेंज़िंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार के लिए उनका नाम सुझाया है। अंशु जमसेंपा "सवच्छ भारत अभियान" (२०१२-२०१३) में ब्रांड एम्बेसडर बनी थी। हाल ही में उन्हें पूर्वोत्तर पर्यटन के ब्रांड एम्बेसडर के रूप में चुना गया हैं। . 2004 में नेपाल के इम्जा से (आइलैंड पीक) के 20,305 (6189 मीटर) ऊँचे शिखर पर अपने अंतिम कदम बढ़ाता हुआ पर्वतारोही एक खुली खाई पर्वतारोहण या पहाड़ चढ़ना शब्द का आशय उस खेल, शौक़ अथवा पेशे से है जिसमें पर्वतों पर चढ़ाई, स्कीइंग अथवा सुदूर भ्रमण सम्मिलित हैं। पर्वतारोहण की शुरुआत सदा से अविजित पर्वत शिखरों पर विजय पाने की महत्वाकांक्षा के कारण हुई थी और समय के साथ इसकी 3 विशेषज्ञता वाली शाखाएं बन कर उभरीं हैंः चट्टानों पर चढ़ने की कला, बर्फ से ढके पर्वतों पर चढ़ने की कला और स्कीइंग की कला. अंशु जमसेंपा और पर्वतारोहण आम में एक बात है (यूनियनपीडिया में): एवरेस्ट पर्वत। एवरेस्ट पर्वत (नेपालीःसागरमाथा, संस्कृतः देवगिरि) दुनिया का सबसे ऊँचा पर्वत शिखर है, जिसकी ऊँचाई 8,850 मीटर है। पहले इसे XV के नाम से जाना जाता था। माउंट एवरेस्ट की ऊँचाई उस समय 29,002 फीट या 8,840 मीटर मापी गई। वैज्ञानिक सर्वेक्षणों में कहा जाता है कि इसकी ऊंचाई प्रतिवर्ष 2 से॰मी॰ के हिसाब से बढ़ रही है। नेपाल में इसे स्थानीय लोग सागरमाथा (अर्थात स्वर्ग का शीर्ष) नाम से जानते हैं, जो नाम नेपाल के इतिहासविद बाबुराम आचार्य ने सन् 1930 के दशक में रखा था - आकाश का भाल। तिब्बत में इसे सदियों से चोमोलंगमा अर्थात पर्वतों की रानी के नाम से जाना जाता है। सर्वे ऑफ नेपाल द्वारा प्रकाशित, (1:50,000 के स्केल पर 57 मैप सेट में से 50वां मैप) "फर्स्ट जॉईन्ट इन्सपेक्सन सर्वे सन् 1979-80, नेपाल-चीन सीमा के मुख्य पाठ्य के साथ अटैच" पृष्ठ पर ऊपर की ओर बीच में, लिखा है, सीमा रेखा, की पहचान की गई है जो चीन और नेपाल को अलग करते हैं, जो ठीक शिखर से होकर गुजरता है। यह यहाँ सीमा का काम करता है और चीन-नेपाल सीमा पर मुख्य हिमालयी जलसंभर विभाजित होकर दोनो तरफ बहता है। . अंशु जमसेंपा 3 संबंध है और पर्वतारोहण 44 है। वे आम 1 में है, समानता सूचकांक 2.13% है = 1 / (3 + 44)। यह लेख अंशु जमसेंपा और पर्वतारोहण के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। अंशु जमसेंपा एक भारतीय पर्वतारोही और दुनिया की पहली महिला है, जिन्होंने सीज़न में माउंट एवरेस्ट के शिखर पर दो बार चढ़ाई की हैं। यह एक औरत द्वारा सबसे ऊंची शिखर की सबसे तेज डबल चढ़ाई भी है। यह बत्तीस वर्षीय पर्वतारोही अरुणाचल प्रदेश के पश्चिमी कामेंग जिले के बोम्डीला से हैं। विवाह से पहले वह सोनितपुर जिले के गोहपुर में रहती थी और उनका नाम दीपिका कलिता था। उसके पति, सेरिंग वांग सभी अरुणाचल पर्वतारोहण और साहसिक खेल एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं। उनकी दो बेटियाँ भी हैं। चौदह वें दलाई लामा के आशीर्वाद लेने के बाद उन्होंने दो अप्रैल, दो हज़ार सत्रह को गुवाहाटी से एवरेस्ट चढ़ाई अभियान शुरू किया था। उन्होंने एवरेस्ट बेस कैंप में अनुकूलन के लिए अड़तीस दिन का समय लिया और चार अप्रैल को उनकी मुख्य यात्रा शुरू की सोलह मई को नौःपंद्रह बजे, सत्रह अन्य पर्वतारोहियों के साथ, उन्होंने पहाड़ पर चढ़कर और भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को फहराया। उन्नीस मई को उन्होने एक नेपाली पर्वतारोही फरी शेरपा के साथ दूसरे कठिन दौरे की शुरुआत की। लगभग दस बजे तक उन्होंने लम्बी पैदल यात्रा बिना किसी रुकावट के साथ की और अंत में इक्कीस मई, दो हज़ार सत्रह को सातःपैंतालीस बजे शीर्ष पर पहुंची। इतिहास बनाने के लिए , अरुणाचल प्रदेश सरकार ने तेंज़िंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार के लिए उनका नाम सुझाया है। अंशु जमसेंपा "सवच्छ भारत अभियान" में ब्रांड एम्बेसडर बनी थी। हाल ही में उन्हें पूर्वोत्तर पर्यटन के ब्रांड एम्बेसडर के रूप में चुना गया हैं। . दो हज़ार चार में नेपाल के इम्जा से के बीस,तीन सौ पाँच ऊँचे शिखर पर अपने अंतिम कदम बढ़ाता हुआ पर्वतारोही एक खुली खाई पर्वतारोहण या पहाड़ चढ़ना शब्द का आशय उस खेल, शौक़ अथवा पेशे से है जिसमें पर्वतों पर चढ़ाई, स्कीइंग अथवा सुदूर भ्रमण सम्मिलित हैं। पर्वतारोहण की शुरुआत सदा से अविजित पर्वत शिखरों पर विजय पाने की महत्वाकांक्षा के कारण हुई थी और समय के साथ इसकी तीन विशेषज्ञता वाली शाखाएं बन कर उभरीं हैंः चट्टानों पर चढ़ने की कला, बर्फ से ढके पर्वतों पर चढ़ने की कला और स्कीइंग की कला. अंशु जमसेंपा और पर्वतारोहण आम में एक बात है : एवरेस्ट पर्वत। एवरेस्ट पर्वत दुनिया का सबसे ऊँचा पर्वत शिखर है, जिसकी ऊँचाई आठ,आठ सौ पचास मीटर है। पहले इसे XV के नाम से जाना जाता था। माउंट एवरेस्ट की ऊँचाई उस समय उनतीस,दो फीट या आठ,आठ सौ चालीस मीटर मापी गई। वैज्ञानिक सर्वेक्षणों में कहा जाता है कि इसकी ऊंचाई प्रतिवर्ष दो से॰मी॰ के हिसाब से बढ़ रही है। नेपाल में इसे स्थानीय लोग सागरमाथा नाम से जानते हैं, जो नाम नेपाल के इतिहासविद बाबुराम आचार्य ने सन् एक हज़ार नौ सौ तीस के दशक में रखा था - आकाश का भाल। तिब्बत में इसे सदियों से चोमोलंगमा अर्थात पर्वतों की रानी के नाम से जाना जाता है। सर्वे ऑफ नेपाल द्वारा प्रकाशित, "फर्स्ट जॉईन्ट इन्सपेक्सन सर्वे सन् एक हज़ार नौ सौ उन्यासी-अस्सी, नेपाल-चीन सीमा के मुख्य पाठ्य के साथ अटैच" पृष्ठ पर ऊपर की ओर बीच में, लिखा है, सीमा रेखा, की पहचान की गई है जो चीन और नेपाल को अलग करते हैं, जो ठीक शिखर से होकर गुजरता है। यह यहाँ सीमा का काम करता है और चीन-नेपाल सीमा पर मुख्य हिमालयी जलसंभर विभाजित होकर दोनो तरफ बहता है। . अंशु जमसेंपा तीन संबंध है और पर्वतारोहण चौंतालीस है। वे आम एक में है, समानता सूचकांक दो.तेरह% है = एक / । यह लेख अंशु जमसेंपा और पर्वतारोहण के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
मेड इन चाइना (U/A) सेक्स और गुप्त रोग पर समाज में फैली चुप्पी जैसे महत्वपूर्ण विषय पर पिछले कुछ सालों में कई फिल्में सामने आई हैं। शुभ मंगल सावधान, खानदानी शफाखाना जैसी फिल्मों में इस मुद्दे पर खुलकर चर्चा की गई है। . .
मेड इन चाइना सेक्स और गुप्त रोग पर समाज में फैली चुप्पी जैसे महत्वपूर्ण विषय पर पिछले कुछ सालों में कई फिल्में सामने आई हैं। शुभ मंगल सावधान, खानदानी शफाखाना जैसी फिल्मों में इस मुद्दे पर खुलकर चर्चा की गई है। . .
KANPUR: पुलिस ने नीट और यूपीकैटेट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में पास कराने का ठेका लेने वाले बड़े सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश किया है। गैंग के लोग फर्जी आधार कार्ड और एडमिट कार्ड में फोटो बदलकर वारदात को अंजाम देते थे। गैंग में कई डॉक्टर्स भी शामिल हैं। जो कैंडिडेट की जगह परीक्षा देते थे। एक कैंडिडेट से आठ से दस लाख में सौदा किया जाता था। कई दिनों की मेहनत के बाद पुलिस ने गैंग के 7 मेंबर को गिरफ्तार कर लिया है जबकि मथुरा निवासी गैंग का सरगना उसके कई साथी अभी फरार हैं। एसपी वेस्ट डॉ। अनिल कुमार के मुताबिक गिरोह का सरगना मथुरा निवासी भोलाशंकर है। जिसकी तलाश पुलिस कर रही है। इसकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस को इस गिरोह से जुड़े और ठगों की जानकारी होगी। गिरोह का सरगना कोचिंग से संपर्क कर रईस छात्रों की जानकारी करता था। उनसे दोस्ती बढ़ाकर उन्हें नीट और यूपी कैटेट में शत प्रतिशत सफलता का दावा करता था। इसके बाद शुरू होती थी सौदेबाजी। 8 से 10 लाख के बीच सौदा तय हो जाता था। जिस कैंडिडेट से रुपये लिए जाते थे, उसका फर्जी आधार कार्ड बनवाया जाता था। इसके बाद फर्जी कैंडिडेट के नाम का एडमिट कार्ड बनवाकर परीक्षा दी जाती थी। नीट और यूपीकैटेट की परीक्षा के दौरान डॉ। अवध बिहारी, अमित कुमार जायसवाल और राकेश वर्मा की फोटो लगे फर्जी एडमिट कार्ड सामने आए थे। जिसके बाद से पुलिस इस मामले की पड़ताल में लगी थी। सर्विलांस टीम की मदद ली गई और तीनों से बात करने वाले कुछ लोगों की जानकारी हुई। इसके बाद पुलिस ने कड़ी से कड़ी जोड़कर पूरे गिरोह का खुलासा कर दिया। पकड़े गए लोगों में डॉ। अवध बिहारी जीएसवीएम में एमबीबीएस स्टूडेंट हैं। जबकि डॉ। सचिन कुमार झांसी के राम मनोहर लोहिया में जेआर हैं। धीरेंद्र सिंह की फोटोकॉपी की दुकान है और वो फर्जी आधार कार्ड और एडमिट कार्ड तैयार करता था। पुलिस के मुताबकि डॉ। सचिन कुमार पहले भी फर्जीवाड़े के मामले में जेल जा चुका है।
KANPUR: पुलिस ने नीट और यूपीकैटेट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में पास कराने का ठेका लेने वाले बड़े सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश किया है। गैंग के लोग फर्जी आधार कार्ड और एडमिट कार्ड में फोटो बदलकर वारदात को अंजाम देते थे। गैंग में कई डॉक्टर्स भी शामिल हैं। जो कैंडिडेट की जगह परीक्षा देते थे। एक कैंडिडेट से आठ से दस लाख में सौदा किया जाता था। कई दिनों की मेहनत के बाद पुलिस ने गैंग के सात मेंबर को गिरफ्तार कर लिया है जबकि मथुरा निवासी गैंग का सरगना उसके कई साथी अभी फरार हैं। एसपी वेस्ट डॉ। अनिल कुमार के मुताबिक गिरोह का सरगना मथुरा निवासी भोलाशंकर है। जिसकी तलाश पुलिस कर रही है। इसकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस को इस गिरोह से जुड़े और ठगों की जानकारी होगी। गिरोह का सरगना कोचिंग से संपर्क कर रईस छात्रों की जानकारी करता था। उनसे दोस्ती बढ़ाकर उन्हें नीट और यूपी कैटेट में शत प्रतिशत सफलता का दावा करता था। इसके बाद शुरू होती थी सौदेबाजी। आठ से दस लाख के बीच सौदा तय हो जाता था। जिस कैंडिडेट से रुपये लिए जाते थे, उसका फर्जी आधार कार्ड बनवाया जाता था। इसके बाद फर्जी कैंडिडेट के नाम का एडमिट कार्ड बनवाकर परीक्षा दी जाती थी। नीट और यूपीकैटेट की परीक्षा के दौरान डॉ। अवध बिहारी, अमित कुमार जायसवाल और राकेश वर्मा की फोटो लगे फर्जी एडमिट कार्ड सामने आए थे। जिसके बाद से पुलिस इस मामले की पड़ताल में लगी थी। सर्विलांस टीम की मदद ली गई और तीनों से बात करने वाले कुछ लोगों की जानकारी हुई। इसके बाद पुलिस ने कड़ी से कड़ी जोड़कर पूरे गिरोह का खुलासा कर दिया। पकड़े गए लोगों में डॉ। अवध बिहारी जीएसवीएम में एमबीबीएस स्टूडेंट हैं। जबकि डॉ। सचिन कुमार झांसी के राम मनोहर लोहिया में जेआर हैं। धीरेंद्र सिंह की फोटोकॉपी की दुकान है और वो फर्जी आधार कार्ड और एडमिट कार्ड तैयार करता था। पुलिस के मुताबकि डॉ। सचिन कुमार पहले भी फर्जीवाड़े के मामले में जेल जा चुका है।
रुक्मिणी बेलि की प्रधान पात्री है। उनमें काव्य की नायिका के लिये आवश्यक समस्त गुण विद्यमान है । वे लक्ष्मी का अवतार बतायी गयी है। उनका रूपगुण अनुपमेय है । वे मुग्धा, स्वकीया और वासकसज्जा नायिका है। उनका कृष्ण प्रेम कृष्ण के गुणानुवाद का मनन करके उत्पन्न होता है । उनके प्रेम में अनन्यता है । उनकी सखियां उनको कृष्ण से मिलाने में सहायक होती है । रुक्मिणी के गुणों के उपर्युक्त विश्लेषण से यह स्पष्ट है कि उनका चरित्र रूढ़ और परम्परा नुमोदित है । कवि ने उसमें विकास करने की चेष्टा नहीं की है । कृष्ण - कृष्ण के लौकिक व अलौकिक दोनों रूपों की भलक बेलि में दिखाई पड़ती है लौकिक दृष्टि से वे अत्यन्त प्रभुता सम्पन्न द्वारिकाधीश है जिनके वैभव का कोई पार नहीं है । वे अपने विरोधी राजाओं को परास्त कर अपने प्रेम में अनुरक्त रूक्मिणी का स्वयंबर से हरण कर अपने शौर्य का परिचय देते हैं । रुक्मी के अपराध के लिए उसे मौत के घाट नहीं उतारते वरन् रुक्मिणी के भ्रातृ स्नेह को समझ कर उसे विरूप कर देते है उनका दूसरा पक्ष अलौकिक शक्ति सम्पन्न परमेश्वर का है। उनकी अलक्ष्य शक्ति या कृपा से ही रुक्मिणी का दूत कुंडनपुर में सोता है और द्वारिकापुरी में जागता है। । रुमणी के कटे हुए बाल कृष्ण के हाथ रखने पर पुनः जम जाते हैं। यही नहीं रुक्मिणी अपने सन्देश में उनके पूर्व अवतारों की चर्चा करती हैं तथा उन्हें सर्वशक्तिमान् अन्तर्यामी बताती है । कृष्ण के रूप-बल को देखकर कुंडनपुर के निवासी अपने-अपने भावों के अनुकूल भिन्न-भिन्न रूपों में उनका दर्शन करते है । कृष्ण के लिए भगवत्सत्तासूचक विविध विशेषणों का प्रयोग स्थान-स्थान पर मिलता है। कृष्ण के हृदय में भी समिणी के लिए प्रेम विद्यमान है जो अवसर पाकर रुक्मिणी के प्रेमपत्र से उनकी दुःख कातर अवस्था का अनुभव कर उद्दीप्त हो जाता है । उस अवसर पर उनके शरीर में प्रेम जन्म रोमांच, अत्रु, स्वरभंग, आदि सात्विक अनुभावों का उदय होता है । रुक्मिणी की करुणापूर्ण अवस्था उन्हें असम हो जाती है अतः + बेलि किसन रुक्मिणी छ० १३७ वे तुरन्त रथ में बैठकर कुंदनपुर चल पड़ते हैं । कृष्ण के शौर्य - पराक्रम का अनुमान सभी को है। नगर के नर-नारी उनके आने पर उनके सक्मिणी का पति बनने का अनुमान कर लेते हैं। जरासंपादि उनके आगमन से भयभीत हो जाते हैं । वे युद्ध की आशंका या संभावना होने पर भी अकेले ही कुंडनपुर से चल देते हैं, यह उनके शौर्य का सूचक है । सच्चे वीर अपने शत्रु को कभी अधिक शक्तिशाली नहीं समझते और न दूसरों की शक्ति से मातंकित होते हैं । युद्धभूमि में उनकी सेना जरासंघ की सेना को पराजित कर देती है । रुक्मी के पुनः ललकारने पर वे हंसते हुए उसके शास्त्रात्रों को खंडित कर देते हैं और तलवार से उसका बध करने को प्रस्तुत होते हैं । रुक्मि को क्षमा करने में उनकी उदासत्ता का परिचय मिलता है । रुक्मिणी के आसुओं को देख उन्हें दया आ जाती है यह उनके महत्व का सूचक है । बलराम उनके सहायक व सखा है । उनके सहज मानवीय रूप का दर्शन अभिसार के पूर्व उनकी सत्सुकता और अधीरता में देखा जा सकता है । शय्या और द्वार के मध्य आकुल होकर बारम्बार चक्कर काटना उनके शुद्ध लौकिक रूप का परिचायक है । अन्य चरित्रों का कथा भाग में विशेष महत्व नहीं है । रस और भाव-व्यंजना प्रस्तुत ग्रंथ श्रृंगार प्रधान है। शृंगार में भी संयोग पक्ष का चित्रण ही कवि को अभीष्ट है । वियोग वर्णन का अवसर विवाह के पश्चात् नहीं आता । उनके पूर्वराग जनित वियोग का परिचय रु की प्रतीक्षा में दिखाई पड़ता है । इस वि योग दशा के अंतर्गत रुक्मिणी में अभिलाषा, चिन्ता, स्मरण, गुण कीर्तन और उद्वैग के चित्र मिलते है विरह की शेष पांच दशाओं को न दिखाकर कवि ने सक्मिणी के शील व मर्यादा की रक्षा की हैअभिलाषा- सांभत्ति अनुराग थयो मनि स्यामा, वर प्रापति बन्छी वर हरि गुण मणि, ऊपनी जिका हर हर तिणि वन्दे गवरि हर'। १ बेलि किसन रुक्मिणी छ० २९ चिन्तादेवाले पैसि अम्बिका दरसे घt भाव हित प्रीति घणी । हाथे पूजि किया हाथा लगि, मन वंछित फल रुमणी 1 रहिया हरि सही जाणियौ रुषमणि, कीच न इवड़ी ढील कई । चिन्तातुर चित इभ चितबन्ती, थई छींक तिमधीर थई । स्मृति और गुण कथन से रुका पत्र भरा हुआ है । समय कम और द्वारिका की दूरी का विचार कर वे उद्विगुन हो उठती हैउद्वैगतथापित रहेन हूं सकूं, बकूं तिणि, त्रिया, अनै प्रेम आतुरी । राज दूरि द्वारिका विराजी, दिन नेड्ठ आइची दुरी । संयोग शृंगार के अंतर्गत रति - कीड़ा, रत्यन्त एवं विभिन्न ऋऋतुओं में कृष्ण - रूम के आनंद - बिहार के सरसक चित्रों से बेलि भरपूर है । संयोग श्रृंगार का वर्णन अन्य मंगल काव्यों की अपेक्षा अधिक स्थूल और मांसल है, फिर भी रीतिकालीन कवियों की अश्लीलता उसमें नहीं है । मिलन के पूर्व नायक-नायिका के मनोभावों का चित्रण अत्यन्त उत्कृष्ट है । सक्मिणी की सखियां अत्यन्त कुशल है । वे पहले से ही केलिगृह को सजा रखती है और विवाह के बाद वर-बधुओं को अलग-अलग महलों में कर देती हैं । इरासे नायक-नायिकाओं की मिलनोत्कंठा और संकोच आदि के चित्रण का अवसर कवि को मिल जाता है - निम्नछंद में रुक्मिणी के मिलन- पूर्व के संकोच को कितने अनुपम रूप में प्रस्तुत किया गया हैसंकुड़ित समसमा सन्ध्या समये, रति बंछित रुषमणि रमणि । पथिक बधू द्रिठि पंख पंखिया, कमल पत्र सूरिजि किरण कृष्ण की अधीरता देखिए() पति अति आतुर त्रियामुख पेलण, निसा तणी मुख दीठ निठ । चन्द्र किरणि कुलटा सु निसाचर, द्रवडत अभिसारिका दिठ । १- बैलि किसन सविमणी छन्द १०८ २- वही छन्द ७० ४- वही छन्द ६५ ५- वही छन्द १६२ ६- वही छन्द १६३ सखियों के साथ-साथ जाते हुए समिणी पग-पग पर खड़ी हो जाती है। उनकी लज्जा का चित्र अत्यन्त सुन्दर अवलंबि सखी कर पगि पनि ऊभी, रहती मद बहती रमणि लाज लोह लंगरे लगए, गय जिमि आणी गय गमणि' । पहुंचाती है। कृष्ण से खिसक जाती है। की सखिया अत्यन्त कौशल से उन्हें कृष्ण के कैलिगृह में मणी के मिलन के परवा एक-एक करके धीरे-धीरे सब वहां सुरतान्त मैं नायक-नायिका के रतिलाभ पर कह-कहे भी लगाती कृष्ण, रूत्रिमणी की प्रतीक्षा और मिलनीत्सुकता में शय्या और द्वार के बीच व्याकुल घूमते है । रुम के केलिगृह में जाते ही वे असीम आनन्द में डूबकर रोमांचित हो जाते है। बार-बार देखने पर भी उनकी रूप-तृषा शान्त नहीं होतीदरिद्र जैसे धन को देखता हो । समिणी के कटाव ही दूतो का कार्य करने लगते है, और वे दोनों के मनों को जोड़ते हैं । सुरति की "एकान्तीपयुक्त क्रीड़ा का वर्णन कवि नहीं करता, वह गोप्य है । उसके सुख का संकेत मात्र किया गया है । इस प्रकार कवि ने गार के नगन चित्रों से काव्य को दूषित नहीं होने दिया । सुरतान्त की अवस्था के चित्र कवि ने अवश्य खीचें है । वे बहुत कुछ परम्परानुकूल है । नायिका- इस कृति में नायिका रुक्मिणी का रूप वर्णन दो स्थलों पर विस्तार से मिलता है। एक में उनके यौवनोदय और वयःसन्धि का वर्णन है । पुनः कृष्णमैं मिलन के उद्देश्य से अकालय जाने के पूर्व विमणी के श्रृंगार ( शिख - नख) का अलंकारपूर्ण वर्णन है । अपने अंगों के विकास से रूविमणी को यौवनागम का आभास मिलने लगता है । इस बयः संथि की अवस्था की तुलना स्वप्नावस्था से करके कवि ने उसके स्वरूप और उसकी मयार्थ अनुभूति को व्यजित करने में सफलता पाई है । ८- बैलि किसन रुक्मिणी छन्द १५ १- बेलि किसन रुक्मिणी छन्द १६७ २- वही छन्द १७२ ३- वही छन्द १७९ रुमणी के जो में यौन-विकास के चिन्हों को पवित्र उपमानों की सहायता से व्यक्त करने के कारण वे अधिक परिष्कृत और पूत हो गए हैं। समिणी के कपोलों पर यौवन सूचक लालिमा को कवि उषाकाल की लाली बताता है जिसको देखकर नवोदित उरोज रूपी ऋऋषि संध्यावंदन के लिए जाग उठे हैंःपहिली मुख राग प्रगट प्राची, अरुण कि अक्कणोद अम्बर । थ्यौ पेले किरि जागिया पयोहर, सन्यता वन्दण रिलेसर' । रुक्मिणी अपने विकसित अंगों को माता-पिता के सामने छिपाने की बेष्टा करती है, किन्तु छिपाते हुए भी उन्हें लज्जा आती है। उनके चित्त में भी चंचलता बढ़ गई है। यौवनावस्था की परंपरागत उपमान बसन्त से उपमित कर रुमणी के अंग-प्रत्यंग में बसन्त के लक्षणों को प्रगट किया गया है । इसके लिए बन, कमल-दल, कोकिल, पंख, भ्रमर, मलयाचल, चंदन, मंजरी, अंकुर समीर, चंद्र, ज्योत्स्ना, तारों को पंक्ति, कुमोदिनी, दीपशिखा, अंधकार, रात्रि, ज्वार, पंचबाण, वरुणपास, हाथी का कुंभस्थल, गजमद, सुमेरू गिरि, शिखर, प्रयाग, तट, करभ, कदली खम्भ, कदली का गूदा, पंखुड़ियों पर स्थित जलकण, रत्न - आभा, तारों का प्रकाश, सूर्य, बालचन्द्र हीरा आदि भिन्न वर्गों के उपमान लाए गए है । प्रकृति से गृहीत उपमानों का आधिक्य है । सभी उपमान परम्परागत है । रुका श्रृंगार - वर्णन शिख-नस पद्धति पर हुआ है । श्रृंगार के पूर्व सद्यःस्नाता के वर्णन का भी अवसर कवि ने निकाल लिया है । इसमें उत्प्रे का सहारा लिया गया है । स्नान के बाद श्रृंगार सखियों की सहायता से होता है । इसके अंतर्गत रुक्मिणी के कण्ठ, बाल, नेत्र, मस्तक, भौंह, कुच, मुजा, कलाई, उरस्थल, कटि, चरण नासिका मुझख, दन्त आदि के स्वाभाविक सौन्दर्य एवं उनकी श्रृंगार - विधि को अलंकृत शैली में प्रस्तुत किया गया है । अंगों का वर्णन इसमें सिलसिलेवार नहीं है । इसका कारण कदाचित यह है कि कवि यहां श्रृंगार वर्णन प्रधान रूप से कर रहा है अतः श्रृंगार के क्रम को ध्यान में रखकर ही वर्णन किया गया है। श्रृंगार के पूर्व स्नान १- बैलि० छन्द १६ २- वही छन्द १८ ३- वही छन्द १७ स्वाभाविक है, स्नान के बाद के गले में केवल पवित्री दिखाई देती है । सखियां चोटी फूलों से गूंधती है, मांग संवारती है । तब कानों में कुंडल पहनने और आखों में काजल लगने का वर्णन है । इसके उपरान्त माये में तिलक लगाकर वे कंचुकी धारण करती हैं । पुनः बाजूबंद, गजरे, पहुंची, हार आदि आभूषण भारण करके वे पहने हुए वस्त्र त्याग कर नवीन वस्त्र धारण करती है। करधनी, नूपुर, घुंघरू आदि वस्त्र बदलने के बाद पहनती है और नथ सबसे अंत में । इस प्रकार मुख में पान डाकर हाथ में एक बीड़ा पान लेकर रुक्मिणी जैविकालय जाने की प्रस्तुत होती है । इस वर्णन में कुछ उपमान कवि के पौराणिक और ज्योतिष ज्ञान पर आधारित हैं। नवरतनी पहुंचियों के लिए कवि कल्पना करता है मानो हस्त नक्षत्र को चन्द्रमा ने बेध लिया है । इसी प्रकार रुक्मिणी की कटि पर स्थित करणनी में कवि को सिंह राशि पर समस्त ग्रहों के स्थित हो जाने का आभास मिलता है । नाक की बेर का मोती ऐसा लगता है जैसे शुक्र के मुख में भागवत हो । इन उपमानों से कवि के ज्ञान की व्यापकता का परिचय मात्र मिलता है । यही उपमान-उपमेय के साम्य का आधार ढूढ़ने में बुद्धि का सहारा विशेष रूप से लेना पड़ता है अतः कोई रसात्मक प्रभात इन उपमानों का नहीं पड़ता । रुक्मिणी के श्रृंगार की विशिष्टता यह है कि उसके वस्त्राभूषण अथवा सौन्दर्य प्रसाधन उसके अंर्गों पर ऊपर से लदे नहीं मालूम होते । वे इतने सहज और स्वाभाविक है जैसे उनके अंगों के सहज विकसित रूप हों । उसके आभूषण पुष्प हैं तो पोथर फल, शरीर लता है तो वस्त्र पत्ते । फूल और फल, लता और पत्र एक ३ 1 दूसरे से अविच्छिन्न हैं । नायक कृष्ण के रूप वर्णन की बेष्टा इसमें नहीं हुई है। उनके गुणों का ही बखान मिलता है । ऋतु वर्णन के अंतर्गत उनके विभिन्न तुओं के श्रृंगार और दिनचर्या का वर्णन मिलता है । कुंडनपुर में आने पर वहां के नर-नारी उन्हें भिन्न-भिन्न रूप में देखते है । कामिनिया उन्हें कामदेव, दुर्जन काल, भक्त नारायण, वेदज्ञ वेदार्थ और १- बेलि किसन रुक्मिणी ६० सं० ८४ -९९ योगीश्वर उन्हें योगतत्व कहते है। इसमें तुलसी के "जाके रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखी तिन तैसी का सादृश्य है । इनमें कृष्ण के अलौकिक स्वरूप की और ही इंगित किया गया है । ऋतु - वर्णन बेलि में कृष्ण और रुकी रतिविषयक श्रृंगार भावनाओं को उद्दीप्त करने के लिए ही पृष्ठभूमि के रूप में विभिन्न ऋतुओं का वर्णन किया गया है, बीच बीच में ऋतुओं के सौन्दर्य के स्वतंत्र चित्र भी मिलते हैं। यह वर्णन ग्रीष्म से प्रारंभ होकर बसन्त में समाप्त होता है । कालिदास के ऋतु-संहार में ऋतु - वर्णन ग्रीष्म से प्रारंभ होता है। श्री रामसिंह ठाकुर और सूर्यकरण पारीक ने स्वसंपादित बेलि की भूमिका में इसी आधार पर # बेलिकार के कालिदास से प्रभावित होने की संभावना प्रगट की है । इन वर्णनों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें राजस्थानी ऋतुओं की विशेषताओं का दिग्दर्शन कराया गया है । ग्रीष्मऋतु में नयकोण से आने वाले मरम हवा के थपेड़े जन जीवन में निष्पेष्टता ला देते हैं इसका विदग्धतापूर्ण वर्णन बैलि में मिलता हैनैरन्ति प्रसरि निरघण गिरि नौकर घणी भजे घन पयोधर कोले बाइ किया तरु केरबर, लवली दहन कि लू लहर । वर्षा ऋतु का वर्णन सुन्दर लगता है। राजस्थान के मरू वासियों के जीवन में वर्षा का महत्व अत्यधिक है। वे वर्षा के स्वागत के लिए कितने उत्सुक रहते हैं इसका परिचय वहां की लोक-मान्यताओं वर्षा संबंधी अनुमानों और कल्पनाओं से मिलता है । वर्षा सम्बन्धी ज्योतिष, नवच, बायु परिवर्तन, बादलों का रंग आदि समस्त ज्ञान इस वर्णन के अंतर्गत मिलता है । बसन्त ऋतु के वर्णन को पर्याप्त विस्तार दिया गया है । बसन्त के दस मास गर्भ में रहने के बाद उसके प्रसव के पश्चात् बनस्थिति रूपी माता दूध के रूप में मधु-भरती है। उसके जन्म के अवसर पर आनंद बधाई के दृश्य १- बेलि किसन रुक्मिणी छ०सं० ७६ १- वही, पृ० ९५-९६ (भूमिका मेलि किसन सक्मिणी- हि०ए० )
रुक्मिणी बेलि की प्रधान पात्री है। उनमें काव्य की नायिका के लिये आवश्यक समस्त गुण विद्यमान है । वे लक्ष्मी का अवतार बतायी गयी है। उनका रूपगुण अनुपमेय है । वे मुग्धा, स्वकीया और वासकसज्जा नायिका है। उनका कृष्ण प्रेम कृष्ण के गुणानुवाद का मनन करके उत्पन्न होता है । उनके प्रेम में अनन्यता है । उनकी सखियां उनको कृष्ण से मिलाने में सहायक होती है । रुक्मिणी के गुणों के उपर्युक्त विश्लेषण से यह स्पष्ट है कि उनका चरित्र रूढ़ और परम्परा नुमोदित है । कवि ने उसमें विकास करने की चेष्टा नहीं की है । कृष्ण - कृष्ण के लौकिक व अलौकिक दोनों रूपों की भलक बेलि में दिखाई पड़ती है लौकिक दृष्टि से वे अत्यन्त प्रभुता सम्पन्न द्वारिकाधीश है जिनके वैभव का कोई पार नहीं है । वे अपने विरोधी राजाओं को परास्त कर अपने प्रेम में अनुरक्त रूक्मिणी का स्वयंबर से हरण कर अपने शौर्य का परिचय देते हैं । रुक्मी के अपराध के लिए उसे मौत के घाट नहीं उतारते वरन् रुक्मिणी के भ्रातृ स्नेह को समझ कर उसे विरूप कर देते है उनका दूसरा पक्ष अलौकिक शक्ति सम्पन्न परमेश्वर का है। उनकी अलक्ष्य शक्ति या कृपा से ही रुक्मिणी का दूत कुंडनपुर में सोता है और द्वारिकापुरी में जागता है। । रुमणी के कटे हुए बाल कृष्ण के हाथ रखने पर पुनः जम जाते हैं। यही नहीं रुक्मिणी अपने सन्देश में उनके पूर्व अवतारों की चर्चा करती हैं तथा उन्हें सर्वशक्तिमान् अन्तर्यामी बताती है । कृष्ण के रूप-बल को देखकर कुंडनपुर के निवासी अपने-अपने भावों के अनुकूल भिन्न-भिन्न रूपों में उनका दर्शन करते है । कृष्ण के लिए भगवत्सत्तासूचक विविध विशेषणों का प्रयोग स्थान-स्थान पर मिलता है। कृष्ण के हृदय में भी समिणी के लिए प्रेम विद्यमान है जो अवसर पाकर रुक्मिणी के प्रेमपत्र से उनकी दुःख कातर अवस्था का अनुभव कर उद्दीप्त हो जाता है । उस अवसर पर उनके शरीर में प्रेम जन्म रोमांच, अत्रु, स्वरभंग, आदि सात्विक अनुभावों का उदय होता है । रुक्मिणी की करुणापूर्ण अवस्था उन्हें असम हो जाती है अतः + बेलि किसन रुक्मिणी छशून्य एक सौ सैंतीस वे तुरन्त रथ में बैठकर कुंदनपुर चल पड़ते हैं । कृष्ण के शौर्य - पराक्रम का अनुमान सभी को है। नगर के नर-नारी उनके आने पर उनके सक्मिणी का पति बनने का अनुमान कर लेते हैं। जरासंपादि उनके आगमन से भयभीत हो जाते हैं । वे युद्ध की आशंका या संभावना होने पर भी अकेले ही कुंडनपुर से चल देते हैं, यह उनके शौर्य का सूचक है । सच्चे वीर अपने शत्रु को कभी अधिक शक्तिशाली नहीं समझते और न दूसरों की शक्ति से मातंकित होते हैं । युद्धभूमि में उनकी सेना जरासंघ की सेना को पराजित कर देती है । रुक्मी के पुनः ललकारने पर वे हंसते हुए उसके शास्त्रात्रों को खंडित कर देते हैं और तलवार से उसका बध करने को प्रस्तुत होते हैं । रुक्मि को क्षमा करने में उनकी उदासत्ता का परिचय मिलता है । रुक्मिणी के आसुओं को देख उन्हें दया आ जाती है यह उनके महत्व का सूचक है । बलराम उनके सहायक व सखा है । उनके सहज मानवीय रूप का दर्शन अभिसार के पूर्व उनकी सत्सुकता और अधीरता में देखा जा सकता है । शय्या और द्वार के मध्य आकुल होकर बारम्बार चक्कर काटना उनके शुद्ध लौकिक रूप का परिचायक है । अन्य चरित्रों का कथा भाग में विशेष महत्व नहीं है । रस और भाव-व्यंजना प्रस्तुत ग्रंथ श्रृंगार प्रधान है। शृंगार में भी संयोग पक्ष का चित्रण ही कवि को अभीष्ट है । वियोग वर्णन का अवसर विवाह के पश्चात् नहीं आता । उनके पूर्वराग जनित वियोग का परिचय रु की प्रतीक्षा में दिखाई पड़ता है । इस वि योग दशा के अंतर्गत रुक्मिणी में अभिलाषा, चिन्ता, स्मरण, गुण कीर्तन और उद्वैग के चित्र मिलते है विरह की शेष पांच दशाओं को न दिखाकर कवि ने सक्मिणी के शील व मर्यादा की रक्षा की हैअभिलाषा- सांभत्ति अनुराग थयो मनि स्यामा, वर प्रापति बन्छी वर हरि गुण मणि, ऊपनी जिका हर हर तिणि वन्दे गवरि हर'। एक बेलि किसन रुक्मिणी छशून्य उनतीस चिन्तादेवाले पैसि अम्बिका दरसे घt भाव हित प्रीति घणी । हाथे पूजि किया हाथा लगि, मन वंछित फल रुमणी एक रहिया हरि सही जाणियौ रुषमणि, कीच न इवड़ी ढील कई । चिन्तातुर चित इभ चितबन्ती, थई छींक तिमधीर थई । स्मृति और गुण कथन से रुका पत्र भरा हुआ है । समय कम और द्वारिका की दूरी का विचार कर वे उद्विगुन हो उठती हैउद्वैगतथापित रहेन हूं सकूं, बकूं तिणि, त्रिया, अनै प्रेम आतुरी । राज दूरि द्वारिका विराजी, दिन नेड्ठ आइची दुरी । संयोग शृंगार के अंतर्गत रति - कीड़ा, रत्यन्त एवं विभिन्न ऋऋतुओं में कृष्ण - रूम के आनंद - बिहार के सरसक चित्रों से बेलि भरपूर है । संयोग श्रृंगार का वर्णन अन्य मंगल काव्यों की अपेक्षा अधिक स्थूल और मांसल है, फिर भी रीतिकालीन कवियों की अश्लीलता उसमें नहीं है । मिलन के पूर्व नायक-नायिका के मनोभावों का चित्रण अत्यन्त उत्कृष्ट है । सक्मिणी की सखियां अत्यन्त कुशल है । वे पहले से ही केलिगृह को सजा रखती है और विवाह के बाद वर-बधुओं को अलग-अलग महलों में कर देती हैं । इरासे नायक-नायिकाओं की मिलनोत्कंठा और संकोच आदि के चित्रण का अवसर कवि को मिल जाता है - निम्नछंद में रुक्मिणी के मिलन- पूर्व के संकोच को कितने अनुपम रूप में प्रस्तुत किया गया हैसंकुड़ित समसमा सन्ध्या समये, रति बंछित रुषमणि रमणि । पथिक बधू द्रिठि पंख पंखिया, कमल पत्र सूरिजि किरण कृष्ण की अधीरता देखिए पति अति आतुर त्रियामुख पेलण, निसा तणी मुख दीठ निठ । चन्द्र किरणि कुलटा सु निसाचर, द्रवडत अभिसारिका दिठ । एक- बैलि किसन सविमणी छन्द एक सौ आठ दो- वही छन्द सत्तर चार- वही छन्द पैंसठ पाँच- वही छन्द एक सौ बासठ छः- वही छन्द एक सौ तिरेसठ सखियों के साथ-साथ जाते हुए समिणी पग-पग पर खड़ी हो जाती है। उनकी लज्जा का चित्र अत्यन्त सुन्दर अवलंबि सखी कर पगि पनि ऊभी, रहती मद बहती रमणि लाज लोह लंगरे लगए, गय जिमि आणी गय गमणि' । पहुंचाती है। कृष्ण से खिसक जाती है। की सखिया अत्यन्त कौशल से उन्हें कृष्ण के कैलिगृह में मणी के मिलन के परवा एक-एक करके धीरे-धीरे सब वहां सुरतान्त मैं नायक-नायिका के रतिलाभ पर कह-कहे भी लगाती कृष्ण, रूत्रिमणी की प्रतीक्षा और मिलनीत्सुकता में शय्या और द्वार के बीच व्याकुल घूमते है । रुम के केलिगृह में जाते ही वे असीम आनन्द में डूबकर रोमांचित हो जाते है। बार-बार देखने पर भी उनकी रूप-तृषा शान्त नहीं होतीदरिद्र जैसे धन को देखता हो । समिणी के कटाव ही दूतो का कार्य करने लगते है, और वे दोनों के मनों को जोड़ते हैं । सुरति की "एकान्तीपयुक्त क्रीड़ा का वर्णन कवि नहीं करता, वह गोप्य है । उसके सुख का संकेत मात्र किया गया है । इस प्रकार कवि ने गार के नगन चित्रों से काव्य को दूषित नहीं होने दिया । सुरतान्त की अवस्था के चित्र कवि ने अवश्य खीचें है । वे बहुत कुछ परम्परानुकूल है । नायिका- इस कृति में नायिका रुक्मिणी का रूप वर्णन दो स्थलों पर विस्तार से मिलता है। एक में उनके यौवनोदय और वयःसन्धि का वर्णन है । पुनः कृष्णमैं मिलन के उद्देश्य से अकालय जाने के पूर्व विमणी के श्रृंगार का अलंकारपूर्ण वर्णन है । अपने अंगों के विकास से रूविमणी को यौवनागम का आभास मिलने लगता है । इस बयः संथि की अवस्था की तुलना स्वप्नावस्था से करके कवि ने उसके स्वरूप और उसकी मयार्थ अनुभूति को व्यजित करने में सफलता पाई है । आठ- बैलि किसन रुक्मिणी छन्द पंद्रह एक- बेलि किसन रुक्मिणी छन्द एक सौ सरसठ दो- वही छन्द एक सौ बहत्तर तीन- वही छन्द एक सौ उन्यासी रुपयामणी के जो में यौन-विकास के चिन्हों को पवित्र उपमानों की सहायता से व्यक्त करने के कारण वे अधिक परिष्कृत और पूत हो गए हैं। समिणी के कपोलों पर यौवन सूचक लालिमा को कवि उषाकाल की लाली बताता है जिसको देखकर नवोदित उरोज रूपी ऋऋषि संध्यावंदन के लिए जाग उठे हैंःपहिली मुख राग प्रगट प्राची, अरुण कि अक्कणोद अम्बर । थ्यौ पेले किरि जागिया पयोहर, सन्यता वन्दण रिलेसर' । रुक्मिणी अपने विकसित अंगों को माता-पिता के सामने छिपाने की बेष्टा करती है, किन्तु छिपाते हुए भी उन्हें लज्जा आती है। उनके चित्त में भी चंचलता बढ़ गई है। यौवनावस्था की परंपरागत उपमान बसन्त से उपमित कर रुमणी के अंग-प्रत्यंग में बसन्त के लक्षणों को प्रगट किया गया है । इसके लिए बन, कमल-दल, कोकिल, पंख, भ्रमर, मलयाचल, चंदन, मंजरी, अंकुर समीर, चंद्र, ज्योत्स्ना, तारों को पंक्ति, कुमोदिनी, दीपशिखा, अंधकार, रात्रि, ज्वार, पंचबाण, वरुणपास, हाथी का कुंभस्थल, गजमद, सुमेरू गिरि, शिखर, प्रयाग, तट, करभ, कदली खम्भ, कदली का गूदा, पंखुड़ियों पर स्थित जलकण, रत्न - आभा, तारों का प्रकाश, सूर्य, बालचन्द्र हीरा आदि भिन्न वर्गों के उपमान लाए गए है । प्रकृति से गृहीत उपमानों का आधिक्य है । सभी उपमान परम्परागत है । रुका श्रृंगार - वर्णन शिख-नस पद्धति पर हुआ है । श्रृंगार के पूर्व सद्यःस्नाता के वर्णन का भी अवसर कवि ने निकाल लिया है । इसमें उत्प्रे का सहारा लिया गया है । स्नान के बाद श्रृंगार सखियों की सहायता से होता है । इसके अंतर्गत रुक्मिणी के कण्ठ, बाल, नेत्र, मस्तक, भौंह, कुच, मुजा, कलाई, उरस्थल, कटि, चरण नासिका मुझख, दन्त आदि के स्वाभाविक सौन्दर्य एवं उनकी श्रृंगार - विधि को अलंकृत शैली में प्रस्तुत किया गया है । अंगों का वर्णन इसमें सिलसिलेवार नहीं है । इसका कारण कदाचित यह है कि कवि यहां श्रृंगार वर्णन प्रधान रूप से कर रहा है अतः श्रृंगार के क्रम को ध्यान में रखकर ही वर्णन किया गया है। श्रृंगार के पूर्व स्नान एक- बैलिशून्य छन्द सोलह दो- वही छन्द अट्ठारह तीन- वही छन्द सत्रह स्वाभाविक है, स्नान के बाद के गले में केवल पवित्री दिखाई देती है । सखियां चोटी फूलों से गूंधती है, मांग संवारती है । तब कानों में कुंडल पहनने और आखों में काजल लगने का वर्णन है । इसके उपरान्त माये में तिलक लगाकर वे कंचुकी धारण करती हैं । पुनः बाजूबंद, गजरे, पहुंची, हार आदि आभूषण भारण करके वे पहने हुए वस्त्र त्याग कर नवीन वस्त्र धारण करती है। करधनी, नूपुर, घुंघरू आदि वस्त्र बदलने के बाद पहनती है और नथ सबसे अंत में । इस प्रकार मुख में पान डाकर हाथ में एक बीड़ा पान लेकर रुक्मिणी जैविकालय जाने की प्रस्तुत होती है । इस वर्णन में कुछ उपमान कवि के पौराणिक और ज्योतिष ज्ञान पर आधारित हैं। नवरतनी पहुंचियों के लिए कवि कल्पना करता है मानो हस्त नक्षत्र को चन्द्रमा ने बेध लिया है । इसी प्रकार रुक्मिणी की कटि पर स्थित करणनी में कवि को सिंह राशि पर समस्त ग्रहों के स्थित हो जाने का आभास मिलता है । नाक की बेर का मोती ऐसा लगता है जैसे शुक्र के मुख में भागवत हो । इन उपमानों से कवि के ज्ञान की व्यापकता का परिचय मात्र मिलता है । यही उपमान-उपमेय के साम्य का आधार ढूढ़ने में बुद्धि का सहारा विशेष रूप से लेना पड़ता है अतः कोई रसात्मक प्रभात इन उपमानों का नहीं पड़ता । रुक्मिणी के श्रृंगार की विशिष्टता यह है कि उसके वस्त्राभूषण अथवा सौन्दर्य प्रसाधन उसके अंर्गों पर ऊपर से लदे नहीं मालूम होते । वे इतने सहज और स्वाभाविक है जैसे उनके अंगों के सहज विकसित रूप हों । उसके आभूषण पुष्प हैं तो पोथर फल, शरीर लता है तो वस्त्र पत्ते । फूल और फल, लता और पत्र एक तीन एक दूसरे से अविच्छिन्न हैं । नायक कृष्ण के रूप वर्णन की बेष्टा इसमें नहीं हुई है। उनके गुणों का ही बखान मिलता है । ऋतु वर्णन के अंतर्गत उनके विभिन्न तुओं के श्रृंगार और दिनचर्या का वर्णन मिलता है । कुंडनपुर में आने पर वहां के नर-नारी उन्हें भिन्न-भिन्न रूप में देखते है । कामिनिया उन्हें कामदेव, दुर्जन काल, भक्त नारायण, वेदज्ञ वेदार्थ और एक- बेलि किसन रुक्मिणी साठ संशून्य चौरासी -निन्यानवे योगीश्वर उन्हें योगतत्व कहते है। इसमें तुलसी के "जाके रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखी तिन तैसी का सादृश्य है । इनमें कृष्ण के अलौकिक स्वरूप की और ही इंगित किया गया है । ऋतु - वर्णन बेलि में कृष्ण और रुकी रतिविषयक श्रृंगार भावनाओं को उद्दीप्त करने के लिए ही पृष्ठभूमि के रूप में विभिन्न ऋतुओं का वर्णन किया गया है, बीच बीच में ऋतुओं के सौन्दर्य के स्वतंत्र चित्र भी मिलते हैं। यह वर्णन ग्रीष्म से प्रारंभ होकर बसन्त में समाप्त होता है । कालिदास के ऋतु-संहार में ऋतु - वर्णन ग्रीष्म से प्रारंभ होता है। श्री रामसिंह ठाकुर और सूर्यकरण पारीक ने स्वसंपादित बेलि की भूमिका में इसी आधार पर # बेलिकार के कालिदास से प्रभावित होने की संभावना प्रगट की है । इन वर्णनों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें राजस्थानी ऋतुओं की विशेषताओं का दिग्दर्शन कराया गया है । ग्रीष्मऋतु में नयकोण से आने वाले मरम हवा के थपेड़े जन जीवन में निष्पेष्टता ला देते हैं इसका विदग्धतापूर्ण वर्णन बैलि में मिलता हैनैरन्ति प्रसरि निरघण गिरि नौकर घणी भजे घन पयोधर कोले बाइ किया तरु केरबर, लवली दहन कि लू लहर । वर्षा ऋतु का वर्णन सुन्दर लगता है। राजस्थान के मरू वासियों के जीवन में वर्षा का महत्व अत्यधिक है। वे वर्षा के स्वागत के लिए कितने उत्सुक रहते हैं इसका परिचय वहां की लोक-मान्यताओं वर्षा संबंधी अनुमानों और कल्पनाओं से मिलता है । वर्षा सम्बन्धी ज्योतिष, नवच, बायु परिवर्तन, बादलों का रंग आदि समस्त ज्ञान इस वर्णन के अंतर्गत मिलता है । बसन्त ऋतु के वर्णन को पर्याप्त विस्तार दिया गया है । बसन्त के दस मास गर्भ में रहने के बाद उसके प्रसव के पश्चात् बनस्थिति रूपी माता दूध के रूप में मधु-भरती है। उसके जन्म के अवसर पर आनंद बधाई के दृश्य एक- बेलि किसन रुक्मिणी छशून्यसंशून्य छिहत्तर एक- वही, पृशून्य पचानवे-छियानवे
स्मृति मंधाना और सानिया मिर्जा (फोटो क्रेडिट- आरसीबी ट्विटर) Smriti Mandhana Sania Mirza Interview: आज वीमेंस प्रीमियर लीग में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के सामने दिल्ली कैपिटल्स की टीम होगी. रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर की कप्तान स्मृति मंधाना हैं. जबकि रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर टीम की मेंटर पूर्व टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा हैं. बहरहाल, सोशल मीडिया पर स्मृति मंधाना और सानिया मिर्जा के बीच बातचीत का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने अपने ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट से वीडियो को शेयर किया है. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में स्मृति मंधाना अपनी जर्सी के बारे में बात कर रही हैं, वह बता रही हैं कि विराट कोहली जिस नंबर की जर्सी पहनते हैं, उस जर्सी को पहनने के बाद कैसी फीलिंग्स हैं. 'मेरी फैमली चाहती थी कि क्रिकेट के बदले टेनिस पर फोकस करूं' सानिया मिर्जा के साथ बातचीत में स्मृति मंधाना कह रही हैं कि उसकी फैमली के लोग चाहते थे कि वह क्रिकेट की जगह टेनिस खेलें, इसके लिए फैमली मेंबर्स सानिया मिर्जा का उदाहरण देते थे. उन्होंने कहा कि इस बात में कोई दो राय नहीं कि सानिया मिर्जा ने भारत में लड़कियों के लिए खेलों की दुनिया में नया ट्रेंड सेट किया. सानिया मिर्जा के बाद देश की कई लड़कियां टेनिस में उनकी तरह बनना चाहती हैं. स्मृति मंधाना के मुताबिक, उनकी मां चाहती थी कि वह वीमेंस टेनिस में हाथ आजमाए. उस वक्त मैं 9-10 साल की थी, मेरी मां चाहती थी कि मैं वीमेंस टेनिस की दुनिया में नाम करूं. इसके अलावा फैमली के बाकी लोग भी चाहते थे कि मैं क्रिकेट के बजाय टेनिस पर ध्यान दूं. 'क्रिकेट के लिए मेरा प्यार हमेशा रहा है' स्मृति मंधाना आगे कहती हैं कि क्रिकेट के लिए मेरा प्यार हमेशा रहा है, मुझे इस खेल से बहुत प्यार है. इस वजह से मैंने टेनिस के बजाय क्रिकेट को तवज्जो दिया. मैंने क्रिकेट खेलना जारी रखा. . . इसके बाद सानिया मिर्जा स्मृति मंधाना से रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के लिए खेलने के बारे में पूछती है. जिसके जवाब में स्मृति मंधाना कहती है कि इस टीम से विराट कोहली जैसे ऑल टाइम ग्रेट खिलाड़ियों ने खेला है. इस टीम के लिए खेलना अलग अहसास है. बहरहाल, सोशल मीडिया पर स्मृति मंधाना और सानिया मिर्जा के बीच बातचीत का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. वहीं, फैंस को वीडियो काफी पसंद आ रहा है.
स्मृति मंधाना और सानिया मिर्जा Smriti Mandhana Sania Mirza Interview: आज वीमेंस प्रीमियर लीग में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के सामने दिल्ली कैपिटल्स की टीम होगी. रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर की कप्तान स्मृति मंधाना हैं. जबकि रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर टीम की मेंटर पूर्व टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा हैं. बहरहाल, सोशल मीडिया पर स्मृति मंधाना और सानिया मिर्जा के बीच बातचीत का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने अपने ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट से वीडियो को शेयर किया है. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में स्मृति मंधाना अपनी जर्सी के बारे में बात कर रही हैं, वह बता रही हैं कि विराट कोहली जिस नंबर की जर्सी पहनते हैं, उस जर्सी को पहनने के बाद कैसी फीलिंग्स हैं. 'मेरी फैमली चाहती थी कि क्रिकेट के बदले टेनिस पर फोकस करूं' सानिया मिर्जा के साथ बातचीत में स्मृति मंधाना कह रही हैं कि उसकी फैमली के लोग चाहते थे कि वह क्रिकेट की जगह टेनिस खेलें, इसके लिए फैमली मेंबर्स सानिया मिर्जा का उदाहरण देते थे. उन्होंने कहा कि इस बात में कोई दो राय नहीं कि सानिया मिर्जा ने भारत में लड़कियों के लिए खेलों की दुनिया में नया ट्रेंड सेट किया. सानिया मिर्जा के बाद देश की कई लड़कियां टेनिस में उनकी तरह बनना चाहती हैं. स्मृति मंधाना के मुताबिक, उनकी मां चाहती थी कि वह वीमेंस टेनिस में हाथ आजमाए. उस वक्त मैं नौ-दस साल की थी, मेरी मां चाहती थी कि मैं वीमेंस टेनिस की दुनिया में नाम करूं. इसके अलावा फैमली के बाकी लोग भी चाहते थे कि मैं क्रिकेट के बजाय टेनिस पर ध्यान दूं. 'क्रिकेट के लिए मेरा प्यार हमेशा रहा है' स्मृति मंधाना आगे कहती हैं कि क्रिकेट के लिए मेरा प्यार हमेशा रहा है, मुझे इस खेल से बहुत प्यार है. इस वजह से मैंने टेनिस के बजाय क्रिकेट को तवज्जो दिया. मैंने क्रिकेट खेलना जारी रखा. . . इसके बाद सानिया मिर्जा स्मृति मंधाना से रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के लिए खेलने के बारे में पूछती है. जिसके जवाब में स्मृति मंधाना कहती है कि इस टीम से विराट कोहली जैसे ऑल टाइम ग्रेट खिलाड़ियों ने खेला है. इस टीम के लिए खेलना अलग अहसास है. बहरहाल, सोशल मीडिया पर स्मृति मंधाना और सानिया मिर्जा के बीच बातचीत का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. वहीं, फैंस को वीडियो काफी पसंद आ रहा है.
वेटरन्स के लिए आयोजित 9 होल की प्रतियोगिता में सीतापुर गोल्फ क्लब के डा. आरके टण्डन ने अपना उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुये वेटरन का खिताब अपने नाम कर लिया. वहीं लखनऊ गोल्फ क्लब के कैप्टन एसके द्विवेदी. प्रतियोगिता का शुभारम्भ पुलिस महानिदेशक कारागार आरआर भटनागर ने बैण्ड की मनमोहन धुन पर लाल फीता काटकर किया उसके बाद टी के ऊपर एक लम्बी शाट लगाकर खेल शुरू किया.
वेटरन्स के लिए आयोजित नौ होल की प्रतियोगिता में सीतापुर गोल्फ क्लब के डा. आरके टण्डन ने अपना उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुये वेटरन का खिताब अपने नाम कर लिया. वहीं लखनऊ गोल्फ क्लब के कैप्टन एसके द्विवेदी. प्रतियोगिता का शुभारम्भ पुलिस महानिदेशक कारागार आरआर भटनागर ने बैण्ड की मनमोहन धुन पर लाल फीता काटकर किया उसके बाद टी के ऊपर एक लम्बी शाट लगाकर खेल शुरू किया.
दिग्गज वाहन निर्माता कंपनी महिंद्रा ने पिछले महीने स्कॉर्पियो को एक नये लग्जरी अवतार में स्कॉर्पियो-N के नाम से उतारा था। तभी से इसके पिछले मॉडल को लेकर सवाल सामने आ रहे थे कि इसे कब और कितनी कीमत पर फिर से लॉन्च किया जाएगा? आखिरकार लंबे इंतजार के बाद महिंद्रा ने इन सवालों को विराम देते हुए स्कॉर्पियो क्लासिक को नई कीमतों के साथ लॉन्च कर दिया है। अब ग्राहकों के सामने इस कार के दो नये मॉडल्स होंगे। महिंद्रा की यह दमदार SUV देश में पहली बार साल 2002 में लॉन्च हुई थी। तभी से कंपनी के लिए भारत में यह सबसे सफल कार साबित हुई है। स्कॉर्पियो क्लासिक बाजार में दो नये वेरिएंट S और S11 के साथ बिक्री के लिये उपलब्ध रहेगी। पहली नजर में इसकी ओर ध्यान खींचने के लिये महिंद्रा ने इसमें नई स्कॉर्पियो-N वाली फ्रंट ग्रिल के साथ कंपनी का नया लोगो दिया है, जिससे इसे बिल्कुल नया लुक मिलता है। नई स्कॉर्पियो क्लासिक में पूरी तरह से एल्युमिनियम डिजाइन सेकंड जनरेशन 2. 2 लीटर m-हॉक डीजल इंजन मिलता है। कंपनी का कहना है कि यह इंजन एल्युमिनियम से बना होने की वजह से अब 55 किलोग्राम हल्का है और पुरानी स्कॉर्पियो की तुलना में 14 प्रतिशत अधिक माइलेज देता है। पहले यह इंजन लोअर ट्रिम्स में 120bhp की पावर बनाता था, जो अब स्कॉर्पियो क्लासिक में 130bhp की पावर और 300Nm का टॉर्क बनाएगा। इसमें सिर्फ मैनुअल गियरबॉक्स का विकल्प मिलेगा। क्लासिक में जारी रहेगी सात सीटों वाली व्यवस्था? स्कॉर्पियो क्लासिक में दो तरह की सी्ट व्यस्था का विकल्प उपलब्ध कराया गया है। एक, स्कॉर्पेयो-N की तरह दूसरी पंक्ति में कैप्टन सीट और पीछे तीन यात्रियों वाली फ्रंट फेसिंग सीट। दूसरे विकल्प में पुराने मॉडल के समान ही स्कॉर्पियो की सिग्नेचर सात सीट वाली व्यवस्था (तीसरी पंक्ति में दो साइड सीट) देखने को मिलती है। गौरतलब है कि महिंद्रा ने स्कॉर्पियो-N की सेफ्टी रेटिंग बढ़ाने के लिए तीसरी पंक्ति में फ्रंट फेसिंग सीट दी हैं। किस कीमत पर हुई स्कॉर्पियो क्लासिक की लॉन्चिंग? स्कॉर्पियो क्लासिक अब पांच अलग-अलग रंग विकल्प पर्ल व्हाइट, नेपोली ब्लैक, रेड रेज, डी'सैट सिल्वर और गैलेक्सी ग्रे में उपलब्ध है। महिंद्रा ने स्पेक्स के मामले में स्कॉर्पियो क्लासिक को बिग-डैडी स्कॉर्पियो-N से नीचे रखा है और इसकी कीमतें भी पहले की तुलना में कम हुई हैं। क्लासिक के S वेरिएंट की एक्स शोरूम कीमत 11. 99 लाख रूपये है और S11 की 15. 49 लाख रुपये रखी गई है। कंपनी के अनुसार, इन शुरुआती कीमतों में जल्द इजाफा कर दिया जाएगा।
दिग्गज वाहन निर्माता कंपनी महिंद्रा ने पिछले महीने स्कॉर्पियो को एक नये लग्जरी अवतार में स्कॉर्पियो-N के नाम से उतारा था। तभी से इसके पिछले मॉडल को लेकर सवाल सामने आ रहे थे कि इसे कब और कितनी कीमत पर फिर से लॉन्च किया जाएगा? आखिरकार लंबे इंतजार के बाद महिंद्रा ने इन सवालों को विराम देते हुए स्कॉर्पियो क्लासिक को नई कीमतों के साथ लॉन्च कर दिया है। अब ग्राहकों के सामने इस कार के दो नये मॉडल्स होंगे। महिंद्रा की यह दमदार SUV देश में पहली बार साल दो हज़ार दो में लॉन्च हुई थी। तभी से कंपनी के लिए भारत में यह सबसे सफल कार साबित हुई है। स्कॉर्पियो क्लासिक बाजार में दो नये वेरिएंट S और Sग्यारह के साथ बिक्री के लिये उपलब्ध रहेगी। पहली नजर में इसकी ओर ध्यान खींचने के लिये महिंद्रा ने इसमें नई स्कॉर्पियो-N वाली फ्रंट ग्रिल के साथ कंपनी का नया लोगो दिया है, जिससे इसे बिल्कुल नया लुक मिलता है। नई स्कॉर्पियो क्लासिक में पूरी तरह से एल्युमिनियम डिजाइन सेकंड जनरेशन दो. दो लीटरटर m-हॉक डीजल इंजन मिलता है। कंपनी का कहना है कि यह इंजन एल्युमिनियम से बना होने की वजह से अब पचपन किलोग्रामग्राम हल्का है और पुरानी स्कॉर्पियो की तुलना में चौदह प्रतिशत अधिक माइलेज देता है। पहले यह इंजन लोअर ट्रिम्स में एक सौ बीसbhp की पावर बनाता था, जो अब स्कॉर्पियो क्लासिक में एक सौ तीसbhp की पावर और तीन सौNm का टॉर्क बनाएगा। इसमें सिर्फ मैनुअल गियरबॉक्स का विकल्प मिलेगा। क्लासिक में जारी रहेगी सात सीटों वाली व्यवस्था? स्कॉर्पियो क्लासिक में दो तरह की सी्ट व्यस्था का विकल्प उपलब्ध कराया गया है। एक, स्कॉर्पेयो-N की तरह दूसरी पंक्ति में कैप्टन सीट और पीछे तीन यात्रियों वाली फ्रंट फेसिंग सीट। दूसरे विकल्प में पुराने मॉडल के समान ही स्कॉर्पियो की सिग्नेचर सात सीट वाली व्यवस्था देखने को मिलती है। गौरतलब है कि महिंद्रा ने स्कॉर्पियो-N की सेफ्टी रेटिंग बढ़ाने के लिए तीसरी पंक्ति में फ्रंट फेसिंग सीट दी हैं। किस कीमत पर हुई स्कॉर्पियो क्लासिक की लॉन्चिंग? स्कॉर्पियो क्लासिक अब पांच अलग-अलग रंग विकल्प पर्ल व्हाइट, नेपोली ब्लैक, रेड रेज, डी'सैट सिल्वर और गैलेक्सी ग्रे में उपलब्ध है। महिंद्रा ने स्पेक्स के मामले में स्कॉर्पियो क्लासिक को बिग-डैडी स्कॉर्पियो-N से नीचे रखा है और इसकी कीमतें भी पहले की तुलना में कम हुई हैं। क्लासिक के S वेरिएंट की एक्स शोरूम कीमत ग्यारह. निन्यानवे लाख रूपये है और Sग्यारह की पंद्रह. उनचास लाख रुपये रखी गई है। कंपनी के अनुसार, इन शुरुआती कीमतों में जल्द इजाफा कर दिया जाएगा।
इसी सुस्ती ने तो नहीं दिला दी टीम इंडिया को जीत! भारतीय महिला टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इंग्लैंड को मैच के चौथे और अंतिम दिन 6 विकेट से हरा दिया। जीत के बाद जश्न मनाती टीम इंडिया। इसी सुस्ती ने तो नहीं दिला दी टीम इंडिया को जीत! टीम इंडिया ने जैसे ही जीत के लिए विजयी शॉट खेला तो खिलाड़ियों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया। इसी सुस्ती ने तो नहीं दिला दी टीम इंडिया को जीत! यह टेस्ट मैच भारतीय महिला टीम के लिए काफी फायदेमंद साबित हुआ। इस मैच से भारत के 8 क्रिकेटरों ने टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया। इसी सुस्ती ने तो नहीं दिला दी टीम इंडिया को जीत! भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए एकमात्र टेस्ट मैच के दौरान भारतीय बल्लेबाज शिखा शर्मा के शॉट को नहीं रोक पाने के कारण फील्डर नताली निराश हो गई और काफी देर तक यूं ही मैदान पर पड़ी रही। इसी सुस्ती ने तो नहीं दिला दी टीम इंडिया को जीत! भारत को विजय की ओर बढ़ता देखकर इंग्लैंड की कप्तान कैरलोट एडवर्ड्स भी हताश हो गई, लेकिन वह टीम को हार से बचा नहीं पाई।
इसी सुस्ती ने तो नहीं दिला दी टीम इंडिया को जीत! भारतीय महिला टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इंग्लैंड को मैच के चौथे और अंतिम दिन छः विकेट से हरा दिया। जीत के बाद जश्न मनाती टीम इंडिया। इसी सुस्ती ने तो नहीं दिला दी टीम इंडिया को जीत! टीम इंडिया ने जैसे ही जीत के लिए विजयी शॉट खेला तो खिलाड़ियों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया। इसी सुस्ती ने तो नहीं दिला दी टीम इंडिया को जीत! यह टेस्ट मैच भारतीय महिला टीम के लिए काफी फायदेमंद साबित हुआ। इस मैच से भारत के आठ क्रिकेटरों ने टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया। इसी सुस्ती ने तो नहीं दिला दी टीम इंडिया को जीत! भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए एकमात्र टेस्ट मैच के दौरान भारतीय बल्लेबाज शिखा शर्मा के शॉट को नहीं रोक पाने के कारण फील्डर नताली निराश हो गई और काफी देर तक यूं ही मैदान पर पड़ी रही। इसी सुस्ती ने तो नहीं दिला दी टीम इंडिया को जीत! भारत को विजय की ओर बढ़ता देखकर इंग्लैंड की कप्तान कैरलोट एडवर्ड्स भी हताश हो गई, लेकिन वह टीम को हार से बचा नहीं पाई।
बॉलीवुड की खूबसूरत और नई अदाकारा जाह्नवी कपूर इन दिनों काफी सुर्खियों में चल रही है. एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर अपने जिम लुक को लेकर अक्सर सोशल मीडिया पर छाई हुईं रहती हैं और जिसके चलते एक बार फिर वह एक पब्लिक पलेस पर स्पॉट हुईं हैं. ख़ास बात यह है कि फ़िलहाल तो सोशल मीडिया पर उनकी ये तस्वीर तेज़ी से वायरल हो रही है और फैंस इन्हे काफी पसंद भी कर रहे हैं. ख़ास बात यह रही कि इस दौरान उनका खूबसूरत लुक भी फैंस को देखने को मिला है और इस दौरान उन्होंने अपने हाथ में एक कैरी बैग पकड़ा हुआ था. साथ ही आपको इस बात से भी अवगत करा दें कि इस तस्वीर में जाह्नवी बिना मेकअप के भी बिल्कुल फ्रेश नजर आ रही है. वहीं हेयरस्टाइल भी उनका काफी गजब है जो उनके लुक पर काफी सूट भी कर रहा है. आपको जानकारी के लिए बता दें कि जान्हवी हाल ही में उस समय चर्चा में आई थी, जब बॉलीवुड एक्ट्रेस कैटरीना कैफ ने उन्हें लेकर कहा तरह कि उन्हें जान्हवी की शर्त ड्रेस से काफी परेशानी होती होती है. उनके मुताबिक़, जान्हवी और मैं एक ही जिम में जाते हैं और कई बार उन्हें उनके छोटे कपडे पसंद नहीं आते हैं. वर्कफ़्रंट की बात की जाए तो कैटरीना की भारत हाल ही में रिलीज हुई है और जान्हवी गुंजन सक्सेना की बायोपिक के शूटिंग में बिजी चल रही है.
बॉलीवुड की खूबसूरत और नई अदाकारा जाह्नवी कपूर इन दिनों काफी सुर्खियों में चल रही है. एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर अपने जिम लुक को लेकर अक्सर सोशल मीडिया पर छाई हुईं रहती हैं और जिसके चलते एक बार फिर वह एक पब्लिक पलेस पर स्पॉट हुईं हैं. ख़ास बात यह है कि फ़िलहाल तो सोशल मीडिया पर उनकी ये तस्वीर तेज़ी से वायरल हो रही है और फैंस इन्हे काफी पसंद भी कर रहे हैं. ख़ास बात यह रही कि इस दौरान उनका खूबसूरत लुक भी फैंस को देखने को मिला है और इस दौरान उन्होंने अपने हाथ में एक कैरी बैग पकड़ा हुआ था. साथ ही आपको इस बात से भी अवगत करा दें कि इस तस्वीर में जाह्नवी बिना मेकअप के भी बिल्कुल फ्रेश नजर आ रही है. वहीं हेयरस्टाइल भी उनका काफी गजब है जो उनके लुक पर काफी सूट भी कर रहा है. आपको जानकारी के लिए बता दें कि जान्हवी हाल ही में उस समय चर्चा में आई थी, जब बॉलीवुड एक्ट्रेस कैटरीना कैफ ने उन्हें लेकर कहा तरह कि उन्हें जान्हवी की शर्त ड्रेस से काफी परेशानी होती होती है. उनके मुताबिक़, जान्हवी और मैं एक ही जिम में जाते हैं और कई बार उन्हें उनके छोटे कपडे पसंद नहीं आते हैं. वर्कफ़्रंट की बात की जाए तो कैटरीना की भारत हाल ही में रिलीज हुई है और जान्हवी गुंजन सक्सेना की बायोपिक के शूटिंग में बिजी चल रही है.
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष नैन्सी पेलोसी की हालिया ताइवान यात्रा से चिढ़कर चीन ने ताइवान जलडमरूमध्य में अपना सैन्य अभ्यास शुरू किया है। अभ्यास के तीसरे दिन आज चीन के युद्धक विमानों ने घुसपैठ तेज की। चीन का मानना है कि पेलोसी की यात्रा की अनुमति देकर अमेरिका ने ताइवान पर उसकी संप्रभुता को चुनौती दी है। इधर, ताइवान का कहना है कि उसने शनिवार को ताइवान जलडमरूमध्य के आसपास सैन्य अभ्यास में भाग लेने वाले कई चीनी विमानों और नौसैनिक जहाजों का पता लगाया है, जो उसके खिलाफ संभावित कृत्रिम हमला हो सकता है। ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि कुछ चीनी विमानों और जहाजों ने ताइवान जलडमरूमध्य में संवेदनशील मध्य रेखा को पार कर लिया , जो द्वीप को चीन की मुख्य भूमि से अलग करता है, जबकि सैन्य अभ्यास के पैमाने से ये अटकलबाजी की जाने लगी है कि चीन, ताइवान पर आक्रमण के लिए तैयार हो रहा है। हालांकि, चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने इन खबरों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, "अमेरिका का यह दावा कि चीन ने ताइवान जलडमरूमध्य में यथास्थिति को बदल दिया है, पूरी तरह से अफवाह और बदनाम करने की साजिश का हिस्स है। " नोम पेन्ह में आसियान के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने वाले वांग को यहां आधिकारिक मीडिया में यह कहते हुए उद्धृत किया गया था कि अमेरिका की सामान्य रणनीति यह है कि यह पहले समस्याएं पैदा करेगा, और फिर उनका उपयोग अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए करेगा। उन्होंने कहा, "लेकिन उसका यह तरीका चीन पर काम नहीं करेगा। "
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष नैन्सी पेलोसी की हालिया ताइवान यात्रा से चिढ़कर चीन ने ताइवान जलडमरूमध्य में अपना सैन्य अभ्यास शुरू किया है। अभ्यास के तीसरे दिन आज चीन के युद्धक विमानों ने घुसपैठ तेज की। चीन का मानना है कि पेलोसी की यात्रा की अनुमति देकर अमेरिका ने ताइवान पर उसकी संप्रभुता को चुनौती दी है। इधर, ताइवान का कहना है कि उसने शनिवार को ताइवान जलडमरूमध्य के आसपास सैन्य अभ्यास में भाग लेने वाले कई चीनी विमानों और नौसैनिक जहाजों का पता लगाया है, जो उसके खिलाफ संभावित कृत्रिम हमला हो सकता है। ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि कुछ चीनी विमानों और जहाजों ने ताइवान जलडमरूमध्य में संवेदनशील मध्य रेखा को पार कर लिया , जो द्वीप को चीन की मुख्य भूमि से अलग करता है, जबकि सैन्य अभ्यास के पैमाने से ये अटकलबाजी की जाने लगी है कि चीन, ताइवान पर आक्रमण के लिए तैयार हो रहा है। हालांकि, चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने इन खबरों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, "अमेरिका का यह दावा कि चीन ने ताइवान जलडमरूमध्य में यथास्थिति को बदल दिया है, पूरी तरह से अफवाह और बदनाम करने की साजिश का हिस्स है। " नोम पेन्ह में आसियान के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने वाले वांग को यहां आधिकारिक मीडिया में यह कहते हुए उद्धृत किया गया था कि अमेरिका की सामान्य रणनीति यह है कि यह पहले समस्याएं पैदा करेगा, और फिर उनका उपयोग अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए करेगा। उन्होंने कहा, "लेकिन उसका यह तरीका चीन पर काम नहीं करेगा। "
तो निश्चय ही तुम अत्याचारियों में से हो जाओगे । (107) और यदि अल्लाह तुमको किसी कष्ट में पकड़ ले तो उसके अतिरिक्त कोई नहीं जो उसको दूर कर सके । और यदि वह तुमको कोई भलाई पहुँचाना चाहे तो उसकी कृपा को कोई रोकने वाला नहीं । वह अपनी कृपा अपने बन्दों में से जिसको चाहता है प्रदान करता है और वह क्षमा देने वाला, दयावान है । (108) कहो, ऐ लोगों, तुम्हारे पालनहार की ओर से तुम्हारे पास सत्य आ गया है। जो मार्गदर्शन स्वीकार करेगा, वह अपने ही लिए करेगा और जो भटकेगा तो उसका कष्ट उसी पर आयेगा, और मैं तुम्हारे ऊपर ज़िम्मेदार नहीं हूँ। (109) और तुम इसका अनुसरण करो जो प्रकाशना तुम पर की गई है और धैर्य रखो । यहाँ तक कि अल्लाह निर्णय कर दे और वह सर्वोत्तम निर्णय करने वाला है । अल्लाह के नाम से जो बहुत कृपाशील, अत्यन्त दयावान है । (1) अलिफ़. लाम. रा. यह किताब है जिसकी आयतें पहले दृढ़ की गईं फिर एक सर्वव्यापी सर्वज्ञ हस्ती की ओर से उनकी व्याख्या की गई । ( 2 ) कि तुम अल्लाह के अतिरिक्त किसी और की उपासना न करो। मैं तुमको उसकी ओर से डराने वाला और शुभ सूचना देने वाला हूँ। (3) और यह कि तुम अपने पालनहार से क्षमा चाहो और उसकी ओर पलट आओ, वह तुमको एक अवधि तक अच्छा जीवन व्यतीत कराएगा और प्रत्येक अधिक हकदार को अपनी ओर से अधिक प्रदान करेगा । और यदि तुम फिर जाओ तो मैं तुम्हारे पक्ष में एक बड़े दिन की यातना से डरता हूँ । ( 4 ) तुम सबको अल्लाह की ओर पलटना है और उसको हर चीज़ की सामर्थ्य प्राप्त है । (5) देखो, यह लोग अपने सीनों को लपेटते हैं ताकि उससे छिप जायें । सचेत रहो, जब वह कपड़ों से अपने आप को ढ़ाँकते हैं, अल्लाह जानता है जो कुछ वह छिपाते हैं और जो वह प्रकट करते हैं । वह दिलों तक की बात का जानने वाला है । ( 6 ) और धरती पर कोई चलने वाला ऐसा नहीं जिसकी जीविका अल्लाह के ज़िम्मे न हो । और वह जानता है जहाँ कोई ठहरता है और जहाँ वह सौंपा जाता है। सब कुछ एक स्पष्ट किताब में दर्ज है। (7) और वही है जिसने आकाशों और धरती की छः दिनों में रचना की । और उसका सिंहासन पानी पर था, ताकि तुम्हारी परीक्षा ले कि कौन तुममें अच्छा काम करता है। और यदि तुम कहो कि मरने के बाद तुम लोग उठाये जाओगे तो झुठलाने वाले कहते हैं यह तो खुला हुआ जादू है । (8) और यदि हम कुछ समय तक उनके दण्ड को रोक दें तो कहते हैं कि क्या चीज़ उसको रोके हुए है । सचेत रहो, जिस दिन वह उन पर आ पड़ेगा तो वह उनसे वापस न किया जा सकेगा और उनको घेरेगी वह चीज़ जिसका वह उपहास कर रहे (9) और यदि हम मनुष्य को अपनी कोई कृपा प्रदान करते है फिर उससे उसको वंचित कर देते हैं तो वह निराश और कृतघ्न हो जाता है । ( 10 ) और यदि किसी दुख के बाद जो उसको पहुँचा था, उसको हम उपकृत करते हैं तो वह कहता है कि समस्त विपत्तियाँ मुझसे दूर हो गयीं, वह इतराने वाला और अकड़ने वाला बन जाता है । ( 11 ) परन्तु जो लोग धैर्य रखने वाले और भले कर्म करने वाले हैं, उनके लिए माफ़ी है और बड़ा प्रतिदान है । ( 12 ) कहीं ऐसा न हो कि तुम उस चीज़ का कुछ भाग छोड़ दो जो तुम्हारी ओर वय की गई है । और तुम इस बात पर संकुचित हृदय हो कि वह कहते हैं कि इस पर कोई ख़जाना (कोष) क्यों नहीं उतारा गया या इसके साथ कोई फ़रिश्ता ( देवदूत ) क्यों नहीं आया । तुम तो मात्र डराने वाले हो और अल्लाह हर चीज़ का ज़िम्मेदार है। ( 13 ) क्या वह कहते हैं कि सन्देष्टा ने इस किताब को गढ़ लिया है । कहो, तुम भी ऐसी ही दस सूरह बना कर ले आओ और अल्लाह के अतिरिक्त जिसको बुला सको बुला लो, यदि तुम सच्चे हो । (14) अतः यदि वह तुम्हारा कहा पूरा न कर सकें तो समझ लो कि ये अल्लाह के ज्ञान से उतारा गया है और यह कि उसके अतिरिक्त कोई उपास्य नहीं, फिर क्या तुम आदेश मानते हो । ( 15 ) जो लोग सांसारिक जीवन और उसका सौन्दर्य चाहते हैं, हम उनके
तो निश्चय ही तुम अत्याचारियों में से हो जाओगे । और यदि अल्लाह तुमको किसी कष्ट में पकड़ ले तो उसके अतिरिक्त कोई नहीं जो उसको दूर कर सके । और यदि वह तुमको कोई भलाई पहुँचाना चाहे तो उसकी कृपा को कोई रोकने वाला नहीं । वह अपनी कृपा अपने बन्दों में से जिसको चाहता है प्रदान करता है और वह क्षमा देने वाला, दयावान है । कहो, ऐ लोगों, तुम्हारे पालनहार की ओर से तुम्हारे पास सत्य आ गया है। जो मार्गदर्शन स्वीकार करेगा, वह अपने ही लिए करेगा और जो भटकेगा तो उसका कष्ट उसी पर आयेगा, और मैं तुम्हारे ऊपर ज़िम्मेदार नहीं हूँ। और तुम इसका अनुसरण करो जो प्रकाशना तुम पर की गई है और धैर्य रखो । यहाँ तक कि अल्लाह निर्णय कर दे और वह सर्वोत्तम निर्णय करने वाला है । अल्लाह के नाम से जो बहुत कृपाशील, अत्यन्त दयावान है । अलिफ़. लाम. रा. यह किताब है जिसकी आयतें पहले दृढ़ की गईं फिर एक सर्वव्यापी सर्वज्ञ हस्ती की ओर से उनकी व्याख्या की गई । कि तुम अल्लाह के अतिरिक्त किसी और की उपासना न करो। मैं तुमको उसकी ओर से डराने वाला और शुभ सूचना देने वाला हूँ। और यह कि तुम अपने पालनहार से क्षमा चाहो और उसकी ओर पलट आओ, वह तुमको एक अवधि तक अच्छा जीवन व्यतीत कराएगा और प्रत्येक अधिक हकदार को अपनी ओर से अधिक प्रदान करेगा । और यदि तुम फिर जाओ तो मैं तुम्हारे पक्ष में एक बड़े दिन की यातना से डरता हूँ । तुम सबको अल्लाह की ओर पलटना है और उसको हर चीज़ की सामर्थ्य प्राप्त है । देखो, यह लोग अपने सीनों को लपेटते हैं ताकि उससे छिप जायें । सचेत रहो, जब वह कपड़ों से अपने आप को ढ़ाँकते हैं, अल्लाह जानता है जो कुछ वह छिपाते हैं और जो वह प्रकट करते हैं । वह दिलों तक की बात का जानने वाला है । और धरती पर कोई चलने वाला ऐसा नहीं जिसकी जीविका अल्लाह के ज़िम्मे न हो । और वह जानता है जहाँ कोई ठहरता है और जहाँ वह सौंपा जाता है। सब कुछ एक स्पष्ट किताब में दर्ज है। और वही है जिसने आकाशों और धरती की छः दिनों में रचना की । और उसका सिंहासन पानी पर था, ताकि तुम्हारी परीक्षा ले कि कौन तुममें अच्छा काम करता है। और यदि तुम कहो कि मरने के बाद तुम लोग उठाये जाओगे तो झुठलाने वाले कहते हैं यह तो खुला हुआ जादू है । और यदि हम कुछ समय तक उनके दण्ड को रोक दें तो कहते हैं कि क्या चीज़ उसको रोके हुए है । सचेत रहो, जिस दिन वह उन पर आ पड़ेगा तो वह उनसे वापस न किया जा सकेगा और उनको घेरेगी वह चीज़ जिसका वह उपहास कर रहे और यदि हम मनुष्य को अपनी कोई कृपा प्रदान करते है फिर उससे उसको वंचित कर देते हैं तो वह निराश और कृतघ्न हो जाता है । और यदि किसी दुख के बाद जो उसको पहुँचा था, उसको हम उपकृत करते हैं तो वह कहता है कि समस्त विपत्तियाँ मुझसे दूर हो गयीं, वह इतराने वाला और अकड़ने वाला बन जाता है । परन्तु जो लोग धैर्य रखने वाले और भले कर्म करने वाले हैं, उनके लिए माफ़ी है और बड़ा प्रतिदान है । कहीं ऐसा न हो कि तुम उस चीज़ का कुछ भाग छोड़ दो जो तुम्हारी ओर वय की गई है । और तुम इस बात पर संकुचित हृदय हो कि वह कहते हैं कि इस पर कोई ख़जाना क्यों नहीं उतारा गया या इसके साथ कोई फ़रिश्ता क्यों नहीं आया । तुम तो मात्र डराने वाले हो और अल्लाह हर चीज़ का ज़िम्मेदार है। क्या वह कहते हैं कि सन्देष्टा ने इस किताब को गढ़ लिया है । कहो, तुम भी ऐसी ही दस सूरह बना कर ले आओ और अल्लाह के अतिरिक्त जिसको बुला सको बुला लो, यदि तुम सच्चे हो । अतः यदि वह तुम्हारा कहा पूरा न कर सकें तो समझ लो कि ये अल्लाह के ज्ञान से उतारा गया है और यह कि उसके अतिरिक्त कोई उपास्य नहीं, फिर क्या तुम आदेश मानते हो । जो लोग सांसारिक जीवन और उसका सौन्दर्य चाहते हैं, हम उनके
बॉलीवुड की मशहूर एक्ट्रेस माधुरी दीक्षित आज किसी परिचय की मोहताज़ नहीं है. जैसा की आप लोग जानते है की जहां 60, 70 और 80 के दशक में रेप सीन 'कहानी का अभिन्न हिस्सा' के तौर पर फिल्माए जाते थे, वहीं माधुरी दीक्षित (Madhuri Dixit) से तो एक फिल्म में रेप सीन जबरदस्ती शूट करवाया गया था। इसका खुलासा ऐक्टर अन्नू कपूर ने एक बार अपने रेडियो शो 'सुहाना सफर विद अन्नू कपूर' में किया था। इस खुलासे के बाद ट्विटर पर भी खूब चर्चा हुई थी। अन्नू कपूर (Annu Kapoor) ने बताया था कि एक फिल्म में रंजीत (Ranjeet) के साथ माधुरी दीक्षित का रेप सीन था। माधुरी ने वह सीन करने से इनकार कर दिया। लेकिन डायरेक्टर ने यह कहकर माधुरी से रेप सीन कथित तौर पर जबरदस्ती शूट करवाया कि वह बैक आउट नहीं कर सकतीं। तब डायरेक्टर ने ऐक्ट्रेस से कहा था कि रेप सीन तो होगा। अन्नू कपूर ने बताया था कि माधुरी दीक्षित ने जैसे-तैसे वह सीन पूरा कर लिया। वह बुरी तरह हिल गई थीं और घबराई हुई थीं। जबकि सेट पर मौजूद डायरेक्टर और अन्य क्रू मेंबर्स जोर-जोर से तालियां बजा रहे थे।
बॉलीवुड की मशहूर एक्ट्रेस माधुरी दीक्षित आज किसी परिचय की मोहताज़ नहीं है. जैसा की आप लोग जानते है की जहां साठ, सत्तर और अस्सी के दशक में रेप सीन 'कहानी का अभिन्न हिस्सा' के तौर पर फिल्माए जाते थे, वहीं माधुरी दीक्षित से तो एक फिल्म में रेप सीन जबरदस्ती शूट करवाया गया था। इसका खुलासा ऐक्टर अन्नू कपूर ने एक बार अपने रेडियो शो 'सुहाना सफर विद अन्नू कपूर' में किया था। इस खुलासे के बाद ट्विटर पर भी खूब चर्चा हुई थी। अन्नू कपूर ने बताया था कि एक फिल्म में रंजीत के साथ माधुरी दीक्षित का रेप सीन था। माधुरी ने वह सीन करने से इनकार कर दिया। लेकिन डायरेक्टर ने यह कहकर माधुरी से रेप सीन कथित तौर पर जबरदस्ती शूट करवाया कि वह बैक आउट नहीं कर सकतीं। तब डायरेक्टर ने ऐक्ट्रेस से कहा था कि रेप सीन तो होगा। अन्नू कपूर ने बताया था कि माधुरी दीक्षित ने जैसे-तैसे वह सीन पूरा कर लिया। वह बुरी तरह हिल गई थीं और घबराई हुई थीं। जबकि सेट पर मौजूद डायरेक्टर और अन्य क्रू मेंबर्स जोर-जोर से तालियां बजा रहे थे।
कोविड-19 संकट को काबू करने के लिए लगे लॉकडाउन ने बड़ी तादाद में लोगों की रोजी-रोटी को प्रभावित किया है. करोड़ों लोगों की नौकरियां गई हैं. लाखों लोगों को वेतन कटौतियों का सामना करना पड़ा है. ऐसे में आने वाले दिन उनके लिए और कठिन हो गए हैं. डिजिटल लैंडिंग प्लेटफॉर्म इंडियालैंड्स के मुताबिक इसके एक ताजा सर्वे में शामिल 82 फीसदी लोगों ने कहा है कि उन्हें अपने गुजारे के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है. 94 फीसदी लोगों ने कहा है वे इस संकट का सामना करने के लिए अपने खर्चों में कटौती कर रहे हैं. लगभग 90 फीसदी लोगों ने अपनी बचत और वित्तीय भविष्य की प्रति चिंता जताई. सर्वे में पांच हजार लोगों को शामिल किया गया था. सर्वे के मुताबिक करीब 72 फीसदी लोगों ने कहा कि वह ज्यादा जरूरी खर्चों के लिए पर्सनल लोन से नहीं हिचकेंगे. इलाज, बच्चों की फीस, मकान रिनोवेशन जैसे खर्चों के लिए वे लोन ले सकते हैं. सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक 71 फीसदी लोगों ने पहले ही कर्ज ले रखा है. इनमें से 45 फीसदी लोगों ने ईएमआई रोकने के लिए एप्लीकेशन दिया है. सर्वे में शामिल 70 फीसदी लोगों ने कहा है कि वे फिजूलखर्ची से बचेंगे. चालीस फीसदी लोगों ने कहा कि वे सिर्फ जरूरी चीजों पर ही खर्च करेंगे. सर्वे में शामिल 63 फीसदी लोगों ने कहा कि कपड़ों और एसेसरीज पर खर्च करने करने को वो कम तवज्जो देंगे. जबकि 40 फीसदी कहना था कि जरूरी चीजों पर उनका खर्च 40 फीसदी बढ़ सकता है. 70 फीसदी लोगों ने कहा कि वे यात्रा, मनोरंजन और गाड़ियां खरीदने को कम तवज्जो देंगे. हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि संकट में फंसे लोग पर्सनल लोन न लें. इसके बजाय वे अपने खर्चों में कटौती करें और अगर कहीं अपना इनवेस्टमेंट किया है तो उसे निकाल लें. पर्सनल लोन की ब्याज दरें काफी ज्यादा होती हैं, इससे वे कर्ज के जाल में फंस सकते हैं.
कोविड-उन्नीस संकट को काबू करने के लिए लगे लॉकडाउन ने बड़ी तादाद में लोगों की रोजी-रोटी को प्रभावित किया है. करोड़ों लोगों की नौकरियां गई हैं. लाखों लोगों को वेतन कटौतियों का सामना करना पड़ा है. ऐसे में आने वाले दिन उनके लिए और कठिन हो गए हैं. डिजिटल लैंडिंग प्लेटफॉर्म इंडियालैंड्स के मुताबिक इसके एक ताजा सर्वे में शामिल बयासी फीसदी लोगों ने कहा है कि उन्हें अपने गुजारे के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है. चौरानवे फीसदी लोगों ने कहा है वे इस संकट का सामना करने के लिए अपने खर्चों में कटौती कर रहे हैं. लगभग नब्बे फीसदी लोगों ने अपनी बचत और वित्तीय भविष्य की प्रति चिंता जताई. सर्वे में पांच हजार लोगों को शामिल किया गया था. सर्वे के मुताबिक करीब बहत्तर फीसदी लोगों ने कहा कि वह ज्यादा जरूरी खर्चों के लिए पर्सनल लोन से नहीं हिचकेंगे. इलाज, बच्चों की फीस, मकान रिनोवेशन जैसे खर्चों के लिए वे लोन ले सकते हैं. सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक इकहत्तर फीसदी लोगों ने पहले ही कर्ज ले रखा है. इनमें से पैंतालीस फीसदी लोगों ने ईएमआई रोकने के लिए एप्लीकेशन दिया है. सर्वे में शामिल सत्तर फीसदी लोगों ने कहा है कि वे फिजूलखर्ची से बचेंगे. चालीस फीसदी लोगों ने कहा कि वे सिर्फ जरूरी चीजों पर ही खर्च करेंगे. सर्वे में शामिल तिरेसठ फीसदी लोगों ने कहा कि कपड़ों और एसेसरीज पर खर्च करने करने को वो कम तवज्जो देंगे. जबकि चालीस फीसदी कहना था कि जरूरी चीजों पर उनका खर्च चालीस फीसदी बढ़ सकता है. सत्तर फीसदी लोगों ने कहा कि वे यात्रा, मनोरंजन और गाड़ियां खरीदने को कम तवज्जो देंगे. हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि संकट में फंसे लोग पर्सनल लोन न लें. इसके बजाय वे अपने खर्चों में कटौती करें और अगर कहीं अपना इनवेस्टमेंट किया है तो उसे निकाल लें. पर्सनल लोन की ब्याज दरें काफी ज्यादा होती हैं, इससे वे कर्ज के जाल में फंस सकते हैं.
सरकार और विभाग को समय रहते उचित निर्णय करना चाहिए शीघ्र रोस्टर जारी करते हुए लाडली बहनों के साथ न्याय करना चाहिए। Bhopal News : मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अधूरी शिक्षक भर्ती 2018 को पूर्ण कराने की मांग को लेकर भूख हड़ताल बैठी महिला अभ्यर्थियों का आज दसवां दिन है। इसमें कई जिलों के चयनित शिक्षकों में में ईडब्ल्यूएस कैटेगरी, ओबीसी कैटेगिरी समेत सभी कैटेगिरी के चयनित शिक्षक शामिल हैं। महिला अभ्यर्थियों का साफ कहना है कि अगर न्याय नहीं हुआ, तो आंदोलन जारी रहेगा। जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, उनका आंदोलन जारी रहेगा। बता दें कि लाड़ली बहन रचना व्यास और रक्षा जैन का संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है वह दिन में चिलचिलाती धूप और गर्मी की मार,रात को आंधी-तूफान और बारिश की मार,सब कुछ सहते-सहते आज 23 दिन बीत गए। इन 23 दिनों में कई सारे उतार-चढ़ाव आए सेहत बिगड़ी, तबीयत भी खराब हुई बावजूद इसके हौसलों ने हिम्मत नहीं हारी इसी बीच भूख हड़ताल पर बैठीं रचना व्यास के ससुर का निधन हो गया परिवार में घटी दुर्घटना के बावजूद तीसरे दिन दोबारा भूख हड़ताल पर लौटने को तैयार, महिलाओं के इस जज्बे को सलाम करने को मन करता है। मगर विभाग और सरकार के पत्थर दिल लोग और उनकी सत्ता लोलुपता महिलाओं के कष्टों को समझने की कोशिश भी नहीं कर रहे। गौरतलब है कि सरकार की उदासीनता कहीं लाड़ली बहनों पर भारी न पड़ जाए। ह लाड़ली बहने किसी के घर की बहू-बेटियां हैं, सरकार और विभाग को समय रहते उचित निर्णय करना चाहिए शीघ्र रोस्टर जारी करते हुए लाडली बहनों के साथ न्याय करना चाहिए। वही भारतीय ईडब्ल्यूएस संघ के अध्यक्ष धीरज तिवारी ने शासन- प्रशासन से शीघ्र समस्याओं का निराकरण करने की मांग की। 10वे दिन भूख हड़ताल पर बैठे अभ्यर्थी रक्षा जैन,अजय लखेरा, दीपक शर्मा के साथ सक्रिय सदस्य में संगीता सिंह, धर्मेंद्र बघेल,ऋषभ गुप्ता,उदय चौहान, जुलेखा अंसारी उपस्थित रहे। - शिक्षक भर्ती 2018 में प्रथम एवं द्वितीय काउंसलिंग के रिक्त पदों पर नियोजन प्रक्रिया के शुरू की जाए। - उच्च माध्यमिक शिक्षकों के हिंदी संस्कृत तथा अन्य विषय दिन में पदों की संख्या कम रही पर पदवृद्धि की जाए। - माध्यमिक शिक्षकों के उपेक्षित विषय हिंदी, संस्कृत, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान आदि में पद वृद्धि करते हुए पात्र अभ्यर्थियों के साथ न्याय किया जाए। - प्रवर्ग परिवर्तन, विभाग परिवर्तन आदि से रिक्त हुए पदों को नियोजन प्रक्रिया में सम्मिलित किया जाए। - पद वृद्धि के साथ तृतीय काउंसलिंग काउंसलिंग का रोस्टर, शीघ्र जारी किया जाए। - यदि किसी अभ्यर्थी के द्वारा किसी भी विभाग में एक बार नियुक्ति ले ली गई हो तो उसकी प्रोफाइल लॉक करके नवीन अभ्यर्थियों को अवसर दिया जाए।
सरकार और विभाग को समय रहते उचित निर्णय करना चाहिए शीघ्र रोस्टर जारी करते हुए लाडली बहनों के साथ न्याय करना चाहिए। Bhopal News : मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अधूरी शिक्षक भर्ती दो हज़ार अट्ठारह को पूर्ण कराने की मांग को लेकर भूख हड़ताल बैठी महिला अभ्यर्थियों का आज दसवां दिन है। इसमें कई जिलों के चयनित शिक्षकों में में ईडब्ल्यूएस कैटेगरी, ओबीसी कैटेगिरी समेत सभी कैटेगिरी के चयनित शिक्षक शामिल हैं। महिला अभ्यर्थियों का साफ कहना है कि अगर न्याय नहीं हुआ, तो आंदोलन जारी रहेगा। जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, उनका आंदोलन जारी रहेगा। बता दें कि लाड़ली बहन रचना व्यास और रक्षा जैन का संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है वह दिन में चिलचिलाती धूप और गर्मी की मार,रात को आंधी-तूफान और बारिश की मार,सब कुछ सहते-सहते आज तेईस दिन बीत गए। इन तेईस दिनों में कई सारे उतार-चढ़ाव आए सेहत बिगड़ी, तबीयत भी खराब हुई बावजूद इसके हौसलों ने हिम्मत नहीं हारी इसी बीच भूख हड़ताल पर बैठीं रचना व्यास के ससुर का निधन हो गया परिवार में घटी दुर्घटना के बावजूद तीसरे दिन दोबारा भूख हड़ताल पर लौटने को तैयार, महिलाओं के इस जज्बे को सलाम करने को मन करता है। मगर विभाग और सरकार के पत्थर दिल लोग और उनकी सत्ता लोलुपता महिलाओं के कष्टों को समझने की कोशिश भी नहीं कर रहे। गौरतलब है कि सरकार की उदासीनता कहीं लाड़ली बहनों पर भारी न पड़ जाए। ह लाड़ली बहने किसी के घर की बहू-बेटियां हैं, सरकार और विभाग को समय रहते उचित निर्णय करना चाहिए शीघ्र रोस्टर जारी करते हुए लाडली बहनों के साथ न्याय करना चाहिए। वही भारतीय ईडब्ल्यूएस संघ के अध्यक्ष धीरज तिवारी ने शासन- प्रशासन से शीघ्र समस्याओं का निराकरण करने की मांग की। दसवे दिन भूख हड़ताल पर बैठे अभ्यर्थी रक्षा जैन,अजय लखेरा, दीपक शर्मा के साथ सक्रिय सदस्य में संगीता सिंह, धर्मेंद्र बघेल,ऋषभ गुप्ता,उदय चौहान, जुलेखा अंसारी उपस्थित रहे। - शिक्षक भर्ती दो हज़ार अट्ठारह में प्रथम एवं द्वितीय काउंसलिंग के रिक्त पदों पर नियोजन प्रक्रिया के शुरू की जाए। - उच्च माध्यमिक शिक्षकों के हिंदी संस्कृत तथा अन्य विषय दिन में पदों की संख्या कम रही पर पदवृद्धि की जाए। - माध्यमिक शिक्षकों के उपेक्षित विषय हिंदी, संस्कृत, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान आदि में पद वृद्धि करते हुए पात्र अभ्यर्थियों के साथ न्याय किया जाए। - प्रवर्ग परिवर्तन, विभाग परिवर्तन आदि से रिक्त हुए पदों को नियोजन प्रक्रिया में सम्मिलित किया जाए। - पद वृद्धि के साथ तृतीय काउंसलिंग काउंसलिंग का रोस्टर, शीघ्र जारी किया जाए। - यदि किसी अभ्यर्थी के द्वारा किसी भी विभाग में एक बार नियुक्ति ले ली गई हो तो उसकी प्रोफाइल लॉक करके नवीन अभ्यर्थियों को अवसर दिया जाए।
खाने को रंग और स्वाद देने वाली हल्दी के फायदे से तो हर कोई वाकिफ है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हल्दी से बनने वाली चाय का सेवन स्वास्थ्य के लिए कितना फायदेमंद साबित हो सकता है। माना जाता है कि यह चाय दिनभर तरोताजा रखने के साथ ही कई बीमारियों से राहत देने में मददगार हो सकती है। इस वजह से आज हम आपको इसके फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं तो आइए जानें। सामग्रियांः आधी चम्मच हल्दी, एक कप पानी, एक चुटकी काली मिर्च का पाउडर, शहद (स्वादानुसार) और नींबू के रस की कुछ बूंदें। चाय बनाने का तरीकाः सबसे पहले एक पैन में पानी डालकर गर्म होने के लिए रख दें, फिर पानी के गर्म होते ही उसमें हल्दी और काली मिर्च डालकर उबाला दिलाएं। अब इसे एक कप में छान लें और स्वाद के लिए नींबू का रस और शहद मिलाकर इस स्वास्थ्यवर्धक चाय का आनंद लें। हल्दी की चाय का सबसे बड़ा लाभ तो यह होता है कि इसके सेवन कैंसर जैसी घातक समस्या से भी राहत पाई जा सकती है, क्योंकि इस चाय में एंटी-कैंसर गुण होते हैं जो कैंसर फैलाने वाले कोशिकाओं को पनपने से रोकते हैं। वहीं, इसमें कई तरह के फेनोल्स और फ्लेवोनोइड भी मौजूद होते हैं जो कैंसर का खतरा कम करने में मदद कर सकते हैं। लेकिन कैंसर मरीज डॉक्टर की सलाह के बाद ही इस चाय का सेवन करें। हल्दी की चाय में एंटीइंफ्लेमेट्री गुण होते हैं जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूती देने में सहायता कर सकते हैं। यह गुण सफेद रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में वृद्धि करके शरीर से विषाक्त पदार्थ को बाहर निकालते हैं और इंफेक्शन से बचाते हैं। अगर मौसम बदलने से आप जल्दी बीमार हो जाते हैं या जल्दी संक्रमण के शिकार हो जाते हैं तो रोजाना इस चाय का सेवन करना शुरू कर दीजिए, क्योंकि यह आपकी रोग प्रतिरोधक शक्ति में सुधार करेगी। लिवर को विषाक्त तत्वों से मुक्त करने में हल्दी की चाय का सेवन काफी सहायक सिद्ध हो सकता है, क्योंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट और डिटॉक्सिफिकेशन गुण पाए जाते हैं। हल्दी की चाय में पाए जाने वाले ये गुण मरकरी युक्त खाद्य पदार्थों के सेवन के कारण होने वाली लिवर टॉक्सिक से बचाव में मदद कर सकते हैं। एक शोध के अनुसार हेपाटोप्रोटेक्टिव गुण, जो हल्दी में पाए जाते हैं लिवर से जुड़े जोखिम को कम कर सकते हैं। हल्दी की चाय एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेट्री गुणों से समृद्ध होती है जो स्वस्थ दिल के लिए लाभकारी माने जाते हैं, क्योंकि ये हृदय से जुड़े कई घातक कारकों के खतरे को कम करता है। साथ ही ये हृदय में रक्त संचार में सुधार लाते हैं, जिसकी वजह से ब्लड क्लॉटिंग नहीं होता और शरीर में ब्लड प्रेशर के स्तर को संतुलित बनाए रखने में मदद मिलती है। इसलिए हल्दी की चाय का सेवन हृदय को स्वस्थ रखने में कारगर है।
खाने को रंग और स्वाद देने वाली हल्दी के फायदे से तो हर कोई वाकिफ है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हल्दी से बनने वाली चाय का सेवन स्वास्थ्य के लिए कितना फायदेमंद साबित हो सकता है। माना जाता है कि यह चाय दिनभर तरोताजा रखने के साथ ही कई बीमारियों से राहत देने में मददगार हो सकती है। इस वजह से आज हम आपको इसके फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं तो आइए जानें। सामग्रियांः आधी चम्मच हल्दी, एक कप पानी, एक चुटकी काली मिर्च का पाउडर, शहद और नींबू के रस की कुछ बूंदें। चाय बनाने का तरीकाः सबसे पहले एक पैन में पानी डालकर गर्म होने के लिए रख दें, फिर पानी के गर्म होते ही उसमें हल्दी और काली मिर्च डालकर उबाला दिलाएं। अब इसे एक कप में छान लें और स्वाद के लिए नींबू का रस और शहद मिलाकर इस स्वास्थ्यवर्धक चाय का आनंद लें। हल्दी की चाय का सबसे बड़ा लाभ तो यह होता है कि इसके सेवन कैंसर जैसी घातक समस्या से भी राहत पाई जा सकती है, क्योंकि इस चाय में एंटी-कैंसर गुण होते हैं जो कैंसर फैलाने वाले कोशिकाओं को पनपने से रोकते हैं। वहीं, इसमें कई तरह के फेनोल्स और फ्लेवोनोइड भी मौजूद होते हैं जो कैंसर का खतरा कम करने में मदद कर सकते हैं। लेकिन कैंसर मरीज डॉक्टर की सलाह के बाद ही इस चाय का सेवन करें। हल्दी की चाय में एंटीइंफ्लेमेट्री गुण होते हैं जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूती देने में सहायता कर सकते हैं। यह गुण सफेद रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में वृद्धि करके शरीर से विषाक्त पदार्थ को बाहर निकालते हैं और इंफेक्शन से बचाते हैं। अगर मौसम बदलने से आप जल्दी बीमार हो जाते हैं या जल्दी संक्रमण के शिकार हो जाते हैं तो रोजाना इस चाय का सेवन करना शुरू कर दीजिए, क्योंकि यह आपकी रोग प्रतिरोधक शक्ति में सुधार करेगी। लिवर को विषाक्त तत्वों से मुक्त करने में हल्दी की चाय का सेवन काफी सहायक सिद्ध हो सकता है, क्योंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट और डिटॉक्सिफिकेशन गुण पाए जाते हैं। हल्दी की चाय में पाए जाने वाले ये गुण मरकरी युक्त खाद्य पदार्थों के सेवन के कारण होने वाली लिवर टॉक्सिक से बचाव में मदद कर सकते हैं। एक शोध के अनुसार हेपाटोप्रोटेक्टिव गुण, जो हल्दी में पाए जाते हैं लिवर से जुड़े जोखिम को कम कर सकते हैं। हल्दी की चाय एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेट्री गुणों से समृद्ध होती है जो स्वस्थ दिल के लिए लाभकारी माने जाते हैं, क्योंकि ये हृदय से जुड़े कई घातक कारकों के खतरे को कम करता है। साथ ही ये हृदय में रक्त संचार में सुधार लाते हैं, जिसकी वजह से ब्लड क्लॉटिंग नहीं होता और शरीर में ब्लड प्रेशर के स्तर को संतुलित बनाए रखने में मदद मिलती है। इसलिए हल्दी की चाय का सेवन हृदय को स्वस्थ रखने में कारगर है।
चाहिए । हौप का उद्देश्य तेजी लाने में हैं यदि यह प्राप्त न हो तो उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा है । अनुभवी ऐथलिटों ने यह पाया है कि वे फौर्म का आरम्भ मांस पेशियों में काफी ढिलाई से करते हैं और सेट पोजिशन में शरीर के पूरे मांस पेशियों में तनाव उत्पन्न कर देते हैं । रिवर्स उस शक्ति का भड़काव है जो पैरों, कमर, हाथों, कंधों तथा कलाई में हौप के तेजी के साथ शौट में दिया जाता है । साधारण गलतियाँ : संतुलन न होना - संतुलन आँखों से होता है, संतुलन में पीठ सीधी और चपटे पैर पर खड़े होना । शौट पुट फेंकने के पहिले या फेंकने के समय प्रारम्भिक क्रिया करना जो उसके जाने की दिशा में न हो । वृत्त के पिछले हिस्से में काफी नीचे न होना और ग्लाईड करने के समय नीची न रखना । सिर तथा कंधों की सम्बन्धित अवस्था को ग्लाईड के बीचया उसके बाद बदल देना । वृत्त में चलने के समय पुट्ठों के साथ शाट तथा कंधों को बहुत पीछे न रखना । ग्लाईड के समाप्त होते ही शरीर को ऊपर और बाहर के गति प्रवाह को चलने न देना । ग्लाईड के समय होने पर दाहिने पुट्ठे को सामने घूमने देना । पुट्ठों को पहिले ऊपर तब सामने ड्राइव न करना । फेंकने की क्रिया में अधिक शक्ति के लिये बायां पैर तथा हाथ के झुकाव पर अधिक
चाहिए । हौप का उद्देश्य तेजी लाने में हैं यदि यह प्राप्त न हो तो उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा है । अनुभवी ऐथलिटों ने यह पाया है कि वे फौर्म का आरम्भ मांस पेशियों में काफी ढिलाई से करते हैं और सेट पोजिशन में शरीर के पूरे मांस पेशियों में तनाव उत्पन्न कर देते हैं । रिवर्स उस शक्ति का भड़काव है जो पैरों, कमर, हाथों, कंधों तथा कलाई में हौप के तेजी के साथ शौट में दिया जाता है । साधारण गलतियाँ : संतुलन न होना - संतुलन आँखों से होता है, संतुलन में पीठ सीधी और चपटे पैर पर खड़े होना । शौट पुट फेंकने के पहिले या फेंकने के समय प्रारम्भिक क्रिया करना जो उसके जाने की दिशा में न हो । वृत्त के पिछले हिस्से में काफी नीचे न होना और ग्लाईड करने के समय नीची न रखना । सिर तथा कंधों की सम्बन्धित अवस्था को ग्लाईड के बीचया उसके बाद बदल देना । वृत्त में चलने के समय पुट्ठों के साथ शाट तथा कंधों को बहुत पीछे न रखना । ग्लाईड के समाप्त होते ही शरीर को ऊपर और बाहर के गति प्रवाह को चलने न देना । ग्लाईड के समय होने पर दाहिने पुट्ठे को सामने घूमने देना । पुट्ठों को पहिले ऊपर तब सामने ड्राइव न करना । फेंकने की क्रिया में अधिक शक्ति के लिये बायां पैर तथा हाथ के झुकाव पर अधिक
अमेरिकी थिंक टैंक के एक रिपोट के मुताबिक चीन चीन जल्द ही फ्रांस को पीछे छोड़कर दुनिया का तीसरा सबसे अधिक परमाणु हथियारों वाला देश बन जाएगा। जो भारत के साथ साथ अमेरिका के लिए बड़ा खतरा उत्पन कर सकता हैं। खबर के मुताबिक चीन के परमाणु हथियारों की संख्या पिछले 15 साल में दोगुनी हो गई है। चीन इन हथियारों को और भी ज्यादा आधुनिक बना रहा हैं। परमाणु हथियारों पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था सिप्री की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने ही पिछले साल अपने परमाणु हथियारों के जखीरे में इजाफा किया है। हालांकि चीन दुनिया को अपने परमाणु हथियारों की सही जानकारी नहीं देता हैं। लेकिन सिप्री की रिपोर्ट के मुताबिक चीन के पास करीब 320 परमाणु हथियार हैं। चीन लगातार इसमें इजाफा कर रहा हैं।
अमेरिकी थिंक टैंक के एक रिपोट के मुताबिक चीन चीन जल्द ही फ्रांस को पीछे छोड़कर दुनिया का तीसरा सबसे अधिक परमाणु हथियारों वाला देश बन जाएगा। जो भारत के साथ साथ अमेरिका के लिए बड़ा खतरा उत्पन कर सकता हैं। खबर के मुताबिक चीन के परमाणु हथियारों की संख्या पिछले पंद्रह साल में दोगुनी हो गई है। चीन इन हथियारों को और भी ज्यादा आधुनिक बना रहा हैं। परमाणु हथियारों पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था सिप्री की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने ही पिछले साल अपने परमाणु हथियारों के जखीरे में इजाफा किया है। हालांकि चीन दुनिया को अपने परमाणु हथियारों की सही जानकारी नहीं देता हैं। लेकिन सिप्री की रिपोर्ट के मुताबिक चीन के पास करीब तीन सौ बीस परमाणु हथियार हैं। चीन लगातार इसमें इजाफा कर रहा हैं।
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पंजाब में पादरी किस तरह भोले-भाले लोगों को बहला-फुसला कर चर्च तक ला रहे व उनका पन्थ परिवर्तन कर रहे हैं इसका खुलासा घर वापसी समारोह के दौरान हुआ। अमृतसर जिले के गांव कोहलेवाल में 12 परिवारों ने घर वापसी की। इन परिवारों के लोगों ने बताया कि किस तरह झूठे वायदे व झांसे दे कर पादरी लोगों को बहला-फुसला रहे हैं। अमृतसर जिले के गांव कोहलेवाल में करीब 12 परिवारों की सिख धर्म में वापसी करवाई गई है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के प्रयास से इन परिवारों ने वापसी की। धर्म प्रचार कमेटी के चेयरमैन मनजीत सिंह भोमा ने कहा कि इन परिवारों को लालच देकर मतांतरण करवाया गया था। इन्हें कहा गया था कि इनकी बीमारियां ठीक हो जाएंगी। बच्चों को शिक्षा दिलाई जाएगी और उनका फ्री इलाज करवाया जाएगा जबकि हुआ कुछ भी नहीं। उन्होंने कहा कि दिल्ली कमेटी के प्रधान हरमीत सिंह कालका ने 3 अगस्त को यहां दफ्तर खोला था। इसके पश्चात कमेटी के प्रचारक गांव-गांव जा रहे हैं। इसी दौरान इन परिवारों से मुलाकात हुई और उन्हें अपने सिख धर्म में वापसी करवाई गई। मनजीत सिंह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से अपील की कि जिस तरह से हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों में मतांतरण पर पाबंदी है, ठीक उसी तरह पंजाब में भी पाबंदी लगाई जाए। गांव के करीब एक दर्जन परिवारों ने सिख धर्म में वापसी करने के बाद ईसाई धर्म अपनाने की सारी कहानी बयां की। उन्होंने कहा कि ईसाई धर्म प्रचार गांवों में दौरा कर तरह-तरह के लालच देते हैं। जिनकी आर्थिक हालत ठीक नहीं होती है मतांतरण करने वाले लोग ऐसे परिवारों को ही ज्यादा निशाना बना रहे हैं। उन्हें लालच दिया जा रहा है। इन परिवारों का कहना था कि वह कुछ समय के लिए भटक गए थे। अब वह वापस आ गए हैं और श्री गुरु ग्रंथ साहिब को मानकर ही अपना जीवन व्यतीत करेंगे। महिला रजिंदर कौर ने कहा कि उसके बेटे के गुर्दे फेल हो गए थे। उन्हें कहा गया कि ईसाई धर्म अपनाने के बाद चर्च में जाने से उसकी बीमारी ठीक हो जाएगी। करीब दो साल तक वह चर्च जाते रहे। उन्हें कहा गया कि उनका इलाज वह खुद करेंगे और उसे कोई दवाई भी नहीं देनी है। उन्होंने उनकी बात मानकर दवाई देना भी बंद कर दिया। उन्हें कहा जाता था कि जालंधर में बड़ी चर्च है और वह वहां भी जाने लगे। उनके बेटे को कोई फर्क नहीं पड़ा। नतीजतन उसके 20 वर्षीय बेटे की कुछ ही दिन में मौत हो गई। सर्बजीत कौर का कहना था कि उसका पति शराब पीता था। उसे कहा गया कि शराब छुड़वा देंगे। इतना ही नहीं उनकी बेटियों की शादी करवाई जाएगी और स्कूल में पढ़ाया जाएगा। उनकी दो बेटियां है। घर की हालत ठीक नहीं है। दोनों बेटियां सिर्फ 8वीं तक पढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि वह चर्च में जाती रही, लेकिन फायदा कोई नहीं हुआ। उसका पति शराब लगातार पीता रहता था। उनसे मारपीट भी करता था।
पंजाब में पादरी किस तरह भोले-भाले लोगों को बहला-फुसला कर चर्च तक ला रहे व उनका पन्थ परिवर्तन कर रहे हैं इसका खुलासा घर वापसी समारोह के दौरान हुआ। अमृतसर जिले के गांव कोहलेवाल में बारह परिवारों ने घर वापसी की। इन परिवारों के लोगों ने बताया कि किस तरह झूठे वायदे व झांसे दे कर पादरी लोगों को बहला-फुसला रहे हैं। अमृतसर जिले के गांव कोहलेवाल में करीब बारह परिवारों की सिख धर्म में वापसी करवाई गई है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के प्रयास से इन परिवारों ने वापसी की। धर्म प्रचार कमेटी के चेयरमैन मनजीत सिंह भोमा ने कहा कि इन परिवारों को लालच देकर मतांतरण करवाया गया था। इन्हें कहा गया था कि इनकी बीमारियां ठीक हो जाएंगी। बच्चों को शिक्षा दिलाई जाएगी और उनका फ्री इलाज करवाया जाएगा जबकि हुआ कुछ भी नहीं। उन्होंने कहा कि दिल्ली कमेटी के प्रधान हरमीत सिंह कालका ने तीन अगस्त को यहां दफ्तर खोला था। इसके पश्चात कमेटी के प्रचारक गांव-गांव जा रहे हैं। इसी दौरान इन परिवारों से मुलाकात हुई और उन्हें अपने सिख धर्म में वापसी करवाई गई। मनजीत सिंह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से अपील की कि जिस तरह से हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों में मतांतरण पर पाबंदी है, ठीक उसी तरह पंजाब में भी पाबंदी लगाई जाए। गांव के करीब एक दर्जन परिवारों ने सिख धर्म में वापसी करने के बाद ईसाई धर्म अपनाने की सारी कहानी बयां की। उन्होंने कहा कि ईसाई धर्म प्रचार गांवों में दौरा कर तरह-तरह के लालच देते हैं। जिनकी आर्थिक हालत ठीक नहीं होती है मतांतरण करने वाले लोग ऐसे परिवारों को ही ज्यादा निशाना बना रहे हैं। उन्हें लालच दिया जा रहा है। इन परिवारों का कहना था कि वह कुछ समय के लिए भटक गए थे। अब वह वापस आ गए हैं और श्री गुरु ग्रंथ साहिब को मानकर ही अपना जीवन व्यतीत करेंगे। महिला रजिंदर कौर ने कहा कि उसके बेटे के गुर्दे फेल हो गए थे। उन्हें कहा गया कि ईसाई धर्म अपनाने के बाद चर्च में जाने से उसकी बीमारी ठीक हो जाएगी। करीब दो साल तक वह चर्च जाते रहे। उन्हें कहा गया कि उनका इलाज वह खुद करेंगे और उसे कोई दवाई भी नहीं देनी है। उन्होंने उनकी बात मानकर दवाई देना भी बंद कर दिया। उन्हें कहा जाता था कि जालंधर में बड़ी चर्च है और वह वहां भी जाने लगे। उनके बेटे को कोई फर्क नहीं पड़ा। नतीजतन उसके बीस वर्षीय बेटे की कुछ ही दिन में मौत हो गई। सर्बजीत कौर का कहना था कि उसका पति शराब पीता था। उसे कहा गया कि शराब छुड़वा देंगे। इतना ही नहीं उनकी बेटियों की शादी करवाई जाएगी और स्कूल में पढ़ाया जाएगा। उनकी दो बेटियां है। घर की हालत ठीक नहीं है। दोनों बेटियां सिर्फ आठवीं तक पढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि वह चर्च में जाती रही, लेकिन फायदा कोई नहीं हुआ। उसका पति शराब लगातार पीता रहता था। उनसे मारपीट भी करता था।
- 18 अप्रैल को विश्व के सांस्कृतिक-ऐतिहासिक स्थलों को धरोहरों के रूप में संरक्षित रखने के लिए यूनेस्को द्वारा हर साल विश्व धरोहर दिवस (World Heritage Day) का आयोजन किया जाता है। ट्यूनीशिया में इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ माउंटेंस एंड साइट्स द्वारा आयोजित एक संगोष्ठी में 18 अप्रैल,1982 को विश्व धरोहर दिवस मनाने का सुझाव दिया गया, जिसे कार्यकारी समिति द्वारा मान लिया गया। नवंबर,1983 में यूनेस्को के सम्मेलन के 22वें सत्र में हर साल 18 अप्रैल को वर्ल्ड हेरिटेज डे मनाने का प्रस्ताव पारित कर दिया गया। विश्व धरोहर सांस्कृतिक और प्राकृतिक महत्त्व के वे स्थल होते हैं, जो ऐतिहासिक और पर्यावरण के लिहाज से भी महत्त्वपूर्ण होते हैं। इनका अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व होता और इन्हें बचाए रखने के लिए विशेष प्रयास करने की ज़रूरत होती है। ऐसे स्थलों को आधिकारिक तौर पर संयुक्त राष्ट्र की संस्था 'यूनेस्को' विश्व धरोहर की मान्यता प्रदान करती है। कोई भी स्थल जिसे यूनेस्को समझता है कि यह मानवता के लिए जरूरी है...वहाँ का सांस्कृतिक और भौतिक महत्त्व है, उसे विश्व धरोहर के तौर पर मान्यता दी जाती है। - भारतीय नौसेना ने 13 से 16 अप्रैल तक कैम रण खाड़ी, वियतनाम में वियतनाम पीपुल्स नेवी के साथ द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास (IN-VPN BILAT-EX) के दूसरे संस्करण में हिस्सा लिया। यह अभ्यास दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों में पूर्वी बेड़े के जहाजों की चल रही प्रवासी तैनाती के एक भाग के रूप में किया गया था। इस अभ्यास का पहला संस्करण वियतनाम के डा नांग में पिछले वर्ष 21 से 26 मई तक आयोजित किया गया था। गौरतलब है कि दोनों देशों ने व्हाइट शिपिंग सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं और एक 'सूचना साझाकरण' कार्यक्रम चलाया है। - भारत और डेनमार्क के बीच अपतटीय पवन ऊर्जा तथा नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग पर समझौता हुआ। साथ ही भारत में भारत-डेनमार्क सेंटर ऑफ एक्सिलेंस फॉर रिन्यूअबल एनर्जी की स्थापना पर भी सहमति जताई गई। इस सहयोग समझौते का उद्देश्य अपतटीय पवन ऊर्जा पर विशेष ध्यान देते हुए नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है। सहयोग के क्षेत्रों में अपतटीय पवन परियोजनाओं के प्रबंधन के लिये तकनीकी क्षमता विकसित करना, विंड पवन टर्बाइन, कलपुर्जे और अनुमान लगाना व समय-सारणी बनाना आदि शामिल हैं। भारत-डेनमार्क सेंटर ऑफ एक्सिलेंस नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों के मूल्यांकन का काम करेगा। इसके अतिरिक्त यह केंद्र पवन, सौर, जल-विद्युत और भंडारण तकनीक को आपस में जोड़ने, नवीकरणीय ऊर्जा को उच्च स्तर के पवन ऊर्जा से एकीकृत करने, जाँच और अनुसंधान तथा कौशल विकास व क्षमता निर्माण करने पर भी विशेष ध्यान देगा। - चिकित्सा की परंपरागत पद्धतियों और होम्योपैथी के क्षेत्र में भारत और बोलिविया के बीच सहयोग के लिये समझौता हुआ है। यह समझौता चिकित्सा की परंपरागत पद्धतियों और होम्योपैथी को बढ़ावा देने के लिये दोनों देशों के बीच सहयोग की रूपरेखा तैयार करेगा। इससे बोलिविया में चिकित्सा की परंपरागत पद्धतियों और होम्योपैथी को बढ़ावा देने के साथ-साथ उनका प्रचार-प्रसार होगा तथा बोलिविया में आयुष (आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी) के महत्त्व को बढ़ावा मिलेगा। यह समझौता चिकित्सकों और वैज्ञानिकों को प्रशिक्षण देने तथा सहयोगपूर्ण अनुसंधान के उद्देश्य से विशेषज्ञों के आदान-प्रदान की सुविधा को बढ़ाएगा, जिससे औषधि विकास और चिकित्सा की परंपरागत पद्धतियों में नए अविष्कार किये जा सकेंगे। - इसके अलावा भारत और बोलिविया के बीच भू-विज्ञान और खनिज संसाधनों के क्षेत्र में सहयोग के लिये भी एक समझौते पर दस्तखत किये गए हैं। यह समझौता खनिज संसाधनों के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग के लिये एक संस्थागत तंत्र प्रदान करेगा। समझौता ज्ञापन संसाधनों के बारे में जानकारी के आदान-प्रदान, कानून और नीति, विकास रणनीति के बारे में विचारों का आदान-प्रदान करने के लिये सेमिनारों के आयोजन, दोनों देशों के बीच प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को प्रोत्साहन और मूल्य संवर्द्धन को बढ़ावा देगा, जिससे प्रलेखन और प्रसार आदि का कार्य करने में मदद मिलेगी। - भारत और ब्राज़ील ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के अंतर्गत नवोन्मेष में सहयोग हेतु द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करने के लिये एक समझौते पर हस्ताक्षर किये। इसका उद्देश्य जैव-प्रौद्योगिकी शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान के क्षेत्र में ठोस रणनीतिक योजना तैयार करना है। इस समझौते के तहत सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में जैव औषधि और स्वास्थ्य (विशेषकर जैव आधारित उत्पाद), कृषि प्रजनन अभ्यास, जैव ईंधन और जैव ऊर्जा, नैनो प्रौद्योगिकी एवं जैव यंत्र विन्यास तथा जैव विविधता और वर्गीकरण विज्ञान आदि क्षेत्र शामिल हैं। - संचार क्षेत्र में सहयोग के लिये भारत और कम्बोडिया के बीच समझौता हुआ है। इस समझौते से संचार क्षेत्र में भारत और कम्बोडिया के बीच आपसी समझ और द्विपक्षीय सहयोग को मज़बूत बनाने में मदद मिलेगी। - भारत और दक्षिण कोरिया ने संयुक्त रूप से डाक टिकट जारी करने को लेकर एक समझौते पर हस्ताक्षा किये हैं। इसके तहत भारत के संचार मंत्रालय के अंतर्गत डाक विभाग और दक्षिण कोरिया के विज्ञान तथा आईसीटी (कोरिया डाक) मंत्रालय ने 'कोरिया की रानी - ह्यो ह्वांग-ओक' की थीम पर एक संयुक्त डाक टिकट जारी करने पर सहमति जताई है। इस समझौते के तहत 2019 के अंत तक आपसी सहमति द्वारा तय की गई तिथि को संयुक्त डाक टिकटें जारी की जाएंगी। - लंबे समय से नकदी के संकट से जूझ रही निजी विमानन कंपनी जेट एयरवेज़ ने परिचालन अस्थायी तौर पर स्थगित करने की घोषणा की है। विमानन कंपनी के अनुसार, ऋणदाता बैंकों की ओर से उसे परिचालन में बनाए रखने के लिए ज़रूरी कर्ज़ देने से इनकार करने के बाद यह निर्णय लिया गया है। ज्ञातव्य है कि लगभग ढाई दशक से सेवाएँ दे रही जेट एयरवेज़ को उबारने के लिए बैंकों के समूह ने 400 करोड़ रुपए का आपात कर्ज़ देने से इनकार कर दिया है। इस तरह पिछले एक दशक में किंगफिशर एयरलाइन के बाद कामकाज बंद करने वाली जेट एयरवेज़ दूसरी बड़ी विमानन कंपनी बन गई है। किंगफिशर ने 2012 में कामकाज बंद कर दिया था।
- अट्ठारह अप्रैल को विश्व के सांस्कृतिक-ऐतिहासिक स्थलों को धरोहरों के रूप में संरक्षित रखने के लिए यूनेस्को द्वारा हर साल विश्व धरोहर दिवस का आयोजन किया जाता है। ट्यूनीशिया में इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ माउंटेंस एंड साइट्स द्वारा आयोजित एक संगोष्ठी में अट्ठारह अप्रैल,एक हज़ार नौ सौ बयासी को विश्व धरोहर दिवस मनाने का सुझाव दिया गया, जिसे कार्यकारी समिति द्वारा मान लिया गया। नवंबर,एक हज़ार नौ सौ तिरासी में यूनेस्को के सम्मेलन के बाईसवें सत्र में हर साल अट्ठारह अप्रैल को वर्ल्ड हेरिटेज डे मनाने का प्रस्ताव पारित कर दिया गया। विश्व धरोहर सांस्कृतिक और प्राकृतिक महत्त्व के वे स्थल होते हैं, जो ऐतिहासिक और पर्यावरण के लिहाज से भी महत्त्वपूर्ण होते हैं। इनका अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व होता और इन्हें बचाए रखने के लिए विशेष प्रयास करने की ज़रूरत होती है। ऐसे स्थलों को आधिकारिक तौर पर संयुक्त राष्ट्र की संस्था 'यूनेस्को' विश्व धरोहर की मान्यता प्रदान करती है। कोई भी स्थल जिसे यूनेस्को समझता है कि यह मानवता के लिए जरूरी है...वहाँ का सांस्कृतिक और भौतिक महत्त्व है, उसे विश्व धरोहर के तौर पर मान्यता दी जाती है। - भारतीय नौसेना ने तेरह से सोलह अप्रैल तक कैम रण खाड़ी, वियतनाम में वियतनाम पीपुल्स नेवी के साथ द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास के दूसरे संस्करण में हिस्सा लिया। यह अभ्यास दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों में पूर्वी बेड़े के जहाजों की चल रही प्रवासी तैनाती के एक भाग के रूप में किया गया था। इस अभ्यास का पहला संस्करण वियतनाम के डा नांग में पिछले वर्ष इक्कीस से छब्बीस मई तक आयोजित किया गया था। गौरतलब है कि दोनों देशों ने व्हाइट शिपिंग सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं और एक 'सूचना साझाकरण' कार्यक्रम चलाया है। - भारत और डेनमार्क के बीच अपतटीय पवन ऊर्जा तथा नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग पर समझौता हुआ। साथ ही भारत में भारत-डेनमार्क सेंटर ऑफ एक्सिलेंस फॉर रिन्यूअबल एनर्जी की स्थापना पर भी सहमति जताई गई। इस सहयोग समझौते का उद्देश्य अपतटीय पवन ऊर्जा पर विशेष ध्यान देते हुए नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है। सहयोग के क्षेत्रों में अपतटीय पवन परियोजनाओं के प्रबंधन के लिये तकनीकी क्षमता विकसित करना, विंड पवन टर्बाइन, कलपुर्जे और अनुमान लगाना व समय-सारणी बनाना आदि शामिल हैं। भारत-डेनमार्क सेंटर ऑफ एक्सिलेंस नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों के मूल्यांकन का काम करेगा। इसके अतिरिक्त यह केंद्र पवन, सौर, जल-विद्युत और भंडारण तकनीक को आपस में जोड़ने, नवीकरणीय ऊर्जा को उच्च स्तर के पवन ऊर्जा से एकीकृत करने, जाँच और अनुसंधान तथा कौशल विकास व क्षमता निर्माण करने पर भी विशेष ध्यान देगा। - चिकित्सा की परंपरागत पद्धतियों और होम्योपैथी के क्षेत्र में भारत और बोलिविया के बीच सहयोग के लिये समझौता हुआ है। यह समझौता चिकित्सा की परंपरागत पद्धतियों और होम्योपैथी को बढ़ावा देने के लिये दोनों देशों के बीच सहयोग की रूपरेखा तैयार करेगा। इससे बोलिविया में चिकित्सा की परंपरागत पद्धतियों और होम्योपैथी को बढ़ावा देने के साथ-साथ उनका प्रचार-प्रसार होगा तथा बोलिविया में आयुष के महत्त्व को बढ़ावा मिलेगा। यह समझौता चिकित्सकों और वैज्ञानिकों को प्रशिक्षण देने तथा सहयोगपूर्ण अनुसंधान के उद्देश्य से विशेषज्ञों के आदान-प्रदान की सुविधा को बढ़ाएगा, जिससे औषधि विकास और चिकित्सा की परंपरागत पद्धतियों में नए अविष्कार किये जा सकेंगे। - इसके अलावा भारत और बोलिविया के बीच भू-विज्ञान और खनिज संसाधनों के क्षेत्र में सहयोग के लिये भी एक समझौते पर दस्तखत किये गए हैं। यह समझौता खनिज संसाधनों के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग के लिये एक संस्थागत तंत्र प्रदान करेगा। समझौता ज्ञापन संसाधनों के बारे में जानकारी के आदान-प्रदान, कानून और नीति, विकास रणनीति के बारे में विचारों का आदान-प्रदान करने के लिये सेमिनारों के आयोजन, दोनों देशों के बीच प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को प्रोत्साहन और मूल्य संवर्द्धन को बढ़ावा देगा, जिससे प्रलेखन और प्रसार आदि का कार्य करने में मदद मिलेगी। - भारत और ब्राज़ील ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के अंतर्गत नवोन्मेष में सहयोग हेतु द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करने के लिये एक समझौते पर हस्ताक्षर किये। इसका उद्देश्य जैव-प्रौद्योगिकी शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान के क्षेत्र में ठोस रणनीतिक योजना तैयार करना है। इस समझौते के तहत सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में जैव औषधि और स्वास्थ्य , कृषि प्रजनन अभ्यास, जैव ईंधन और जैव ऊर्जा, नैनो प्रौद्योगिकी एवं जैव यंत्र विन्यास तथा जैव विविधता और वर्गीकरण विज्ञान आदि क्षेत्र शामिल हैं। - संचार क्षेत्र में सहयोग के लिये भारत और कम्बोडिया के बीच समझौता हुआ है। इस समझौते से संचार क्षेत्र में भारत और कम्बोडिया के बीच आपसी समझ और द्विपक्षीय सहयोग को मज़बूत बनाने में मदद मिलेगी। - भारत और दक्षिण कोरिया ने संयुक्त रूप से डाक टिकट जारी करने को लेकर एक समझौते पर हस्ताक्षा किये हैं। इसके तहत भारत के संचार मंत्रालय के अंतर्गत डाक विभाग और दक्षिण कोरिया के विज्ञान तथा आईसीटी मंत्रालय ने 'कोरिया की रानी - ह्यो ह्वांग-ओक' की थीम पर एक संयुक्त डाक टिकट जारी करने पर सहमति जताई है। इस समझौते के तहत दो हज़ार उन्नीस के अंत तक आपसी सहमति द्वारा तय की गई तिथि को संयुक्त डाक टिकटें जारी की जाएंगी। - लंबे समय से नकदी के संकट से जूझ रही निजी विमानन कंपनी जेट एयरवेज़ ने परिचालन अस्थायी तौर पर स्थगित करने की घोषणा की है। विमानन कंपनी के अनुसार, ऋणदाता बैंकों की ओर से उसे परिचालन में बनाए रखने के लिए ज़रूरी कर्ज़ देने से इनकार करने के बाद यह निर्णय लिया गया है। ज्ञातव्य है कि लगभग ढाई दशक से सेवाएँ दे रही जेट एयरवेज़ को उबारने के लिए बैंकों के समूह ने चार सौ करोड़ रुपए का आपात कर्ज़ देने से इनकार कर दिया है। इस तरह पिछले एक दशक में किंगफिशर एयरलाइन के बाद कामकाज बंद करने वाली जेट एयरवेज़ दूसरी बड़ी विमानन कंपनी बन गई है। किंगफिशर ने दो हज़ार बारह में कामकाज बंद कर दिया था।
बीजिंग,(भाषा)। चीन ने आज पूर्वी चीन सागर में विवादित द्वीपों पर संप्रभुत्ता के दावे वाली जापान के प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर सवाल उाते हुए कहा है कि जापान ऐतिहासिक तथ्यों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अनदेखी कर खुद को छल रहा है। योशिहिको नोदा की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया जताते हुए चीन के विदेश विभाग के प्रवक्ता क्विन गांग ने कहा कि क्षेत्र के स्वामित्व का फैसला ऐतिहासिक और कानूनी आधार पर किया जाना चाहिए। नोदा ने चीन के दावों को खारिज करते हुए टिप्पणी की थी कि सेनकाकासू द्वीप जापान का अभिन्न अंग है। चीन इन विवादास्पद द्वीप श्रंखला को दिआओयू नाम से पुकारता है। न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने वाले नोडा ने संवाददाताओं से कहा कि जहां तक सेनकाकासू की बात है , वह इतिहास और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुसार हमारे क्षेत्र का अभिन्न भाग हैं।
बीजिंग,। चीन ने आज पूर्वी चीन सागर में विवादित द्वीपों पर संप्रभुत्ता के दावे वाली जापान के प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर सवाल उाते हुए कहा है कि जापान ऐतिहासिक तथ्यों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अनदेखी कर खुद को छल रहा है। योशिहिको नोदा की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया जताते हुए चीन के विदेश विभाग के प्रवक्ता क्विन गांग ने कहा कि क्षेत्र के स्वामित्व का फैसला ऐतिहासिक और कानूनी आधार पर किया जाना चाहिए। नोदा ने चीन के दावों को खारिज करते हुए टिप्पणी की थी कि सेनकाकासू द्वीप जापान का अभिन्न अंग है। चीन इन विवादास्पद द्वीप श्रंखला को दिआओयू नाम से पुकारता है। न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने वाले नोडा ने संवाददाताओं से कहा कि जहां तक सेनकाकासू की बात है , वह इतिहास और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुसार हमारे क्षेत्र का अभिन्न भाग हैं।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
यूक्रेन को दो और मैकेनाइज्ड डिमाइनिंग कॉम्प्लेक्स MV-4-SCORPION और MV-10-BISON प्राप्त हुए, उपकरण ने निकोलाव क्षेत्र में डिमाइनिंग में शामिल सैपर इकाइयों के साथ सेवा में प्रवेश किया। यह यूक्रेन की राज्य आपातकालीन सेवा की प्रेस सेवा द्वारा सूचित किया गया था। आज तक, यूक्रेन में चार समान खनन परिसर हैं, सभी उपकरणों को धर्मार्थ कार्यक्रमों के हिस्से के रूप में आपूर्ति की गई थी। पहले दो कॉम्प्लेक्स खेरसॉन क्षेत्र में काम करते हैं, दो नए को निकोलेव क्षेत्र में भेजा गया है। यह बताया गया है कि तकनीक "प्रभावी" है, जिससे आप रूसी सैनिकों द्वारा बिछाई गई खानों को नष्ट करते हुए जल्दी और सुरक्षित रूप से खनन कार्य कर सकते हैं। (. . . ) नए उपकरण सैपरों को निकोलेव क्षेत्र के क्षेत्र को तेजी से साफ करने की अनुमति देंगे, दुश्मन ने हमें कई वर्षों तक काम करने के लिए न केवल अनुभव की आवश्यकता है, बल्कि आधुनिक तकनीकी समाधानों का उपयोग भी किया है। - एक बयान में कहा। मैकेनाइज्ड कॉम्प्लेक्स MV-4 और MV-10 का उत्पादन क्रोएशिया में कंपनी "DOK-ING" द्वारा किया जाता है। इलाके की जटिलता के आधार पर, एक परिसर प्रति दिन 4000-5000 वर्ग मीटर खदानों को साफ करना संभव बनाता है। MV-4-SCORPION एक लाइट क्लास रोबोटिक सिस्टम है जिसे विस्फोटक उपकरणों को बेअसर करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। MV-10-BISON एक "हैवी क्लास" कॉम्प्लेक्स है जो पतवार के आगे और पीछे अटैचमेंट ले जाने में सक्षम है। निर्माता के अनुसार, ट्रॉल एंटी-टैंक खानों का सामना कर सकता है। दोनों परिसरों को दूरस्थ रूप से नियंत्रित किया जाता है। इससे पहले, यूक्रेनी सैपरों को एक ब्रिटिश आर्मट्रैक डिमाइनिंग वाहन मिला था जो आधा मीटर तक की गहराई पर खानों को बेअसर करने में सक्षम था। - इस्तेमाल की गई तस्वीरेंः
यूक्रेन को दो और मैकेनाइज्ड डिमाइनिंग कॉम्प्लेक्स MV-चार-SCORPION और MV-दस-BISON प्राप्त हुए, उपकरण ने निकोलाव क्षेत्र में डिमाइनिंग में शामिल सैपर इकाइयों के साथ सेवा में प्रवेश किया। यह यूक्रेन की राज्य आपातकालीन सेवा की प्रेस सेवा द्वारा सूचित किया गया था। आज तक, यूक्रेन में चार समान खनन परिसर हैं, सभी उपकरणों को धर्मार्थ कार्यक्रमों के हिस्से के रूप में आपूर्ति की गई थी। पहले दो कॉम्प्लेक्स खेरसॉन क्षेत्र में काम करते हैं, दो नए को निकोलेव क्षेत्र में भेजा गया है। यह बताया गया है कि तकनीक "प्रभावी" है, जिससे आप रूसी सैनिकों द्वारा बिछाई गई खानों को नष्ट करते हुए जल्दी और सुरक्षित रूप से खनन कार्य कर सकते हैं। नए उपकरण सैपरों को निकोलेव क्षेत्र के क्षेत्र को तेजी से साफ करने की अनुमति देंगे, दुश्मन ने हमें कई वर्षों तक काम करने के लिए न केवल अनुभव की आवश्यकता है, बल्कि आधुनिक तकनीकी समाधानों का उपयोग भी किया है। - एक बयान में कहा। मैकेनाइज्ड कॉम्प्लेक्स MV-चार और MV-दस का उत्पादन क्रोएशिया में कंपनी "DOK-ING" द्वारा किया जाता है। इलाके की जटिलता के आधार पर, एक परिसर प्रति दिन चार हज़ार-पाँच हज़ार वर्ग मीटर खदानों को साफ करना संभव बनाता है। MV-चार-SCORPION एक लाइट क्लास रोबोटिक सिस्टम है जिसे विस्फोटक उपकरणों को बेअसर करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। MV-दस-BISON एक "हैवी क्लास" कॉम्प्लेक्स है जो पतवार के आगे और पीछे अटैचमेंट ले जाने में सक्षम है। निर्माता के अनुसार, ट्रॉल एंटी-टैंक खानों का सामना कर सकता है। दोनों परिसरों को दूरस्थ रूप से नियंत्रित किया जाता है। इससे पहले, यूक्रेनी सैपरों को एक ब्रिटिश आर्मट्रैक डिमाइनिंग वाहन मिला था जो आधा मीटर तक की गहराई पर खानों को बेअसर करने में सक्षम था। - इस्तेमाल की गई तस्वीरेंः
भोपाल। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग मंत्री डॉक्टर प्रभु राम चौधरी ने 74 बंगला कार्यालय से मलेरिया जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। मंत्री ने कहा कि आज निवास कार्यालय से डेंगू एवं मलेरिया जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। वहीं आज भोपाल में रक्तदान अमृत महोत्सव के अंतर्गत भोपाल जिले में रक्तदान शिविर महाअभियान हेतु रक्त केंद्रों की राज्य स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यशाला में डॉक्टर प्रभु राम चौधरी सम्मिलित हुए। इस दौरान अपर मुख्य सचिव मोहम्मद सुलेमान, स्वास्थ्य आयुक्त डॉ. सुदाम खाड़े व एमडी, एनएचएम प्रियंका दास समेत अन्य मौजूद रहे। उधर आज मंत्रालय में मुख्यमंत्री जनसेवा अभियान हेतु गठित मंत्री समूह की बैठक गृह एवं जेल मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा की अध्यक्षता मे मुख्यमंत्री जनसेवा अभियान हेतु गठित मंत्री समूह की बैठक हुई, जिसमें डॉक्टर प्रभु राम चौधरी सहित अन्य मौजूद रहे।
भोपाल। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग मंत्री डॉक्टर प्रभु राम चौधरी ने चौहत्तर बंगला कार्यालय से मलेरिया जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। मंत्री ने कहा कि आज निवास कार्यालय से डेंगू एवं मलेरिया जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। वहीं आज भोपाल में रक्तदान अमृत महोत्सव के अंतर्गत भोपाल जिले में रक्तदान शिविर महाअभियान हेतु रक्त केंद्रों की राज्य स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यशाला में डॉक्टर प्रभु राम चौधरी सम्मिलित हुए। इस दौरान अपर मुख्य सचिव मोहम्मद सुलेमान, स्वास्थ्य आयुक्त डॉ. सुदाम खाड़े व एमडी, एनएचएम प्रियंका दास समेत अन्य मौजूद रहे। उधर आज मंत्रालय में मुख्यमंत्री जनसेवा अभियान हेतु गठित मंत्री समूह की बैठक गृह एवं जेल मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा की अध्यक्षता मे मुख्यमंत्री जनसेवा अभियान हेतु गठित मंत्री समूह की बैठक हुई, जिसमें डॉक्टर प्रभु राम चौधरी सहित अन्य मौजूद रहे।
त्रिवेंद्र सिंह रावत मंत्रिमंडल ने इन सभी उपभोक्ताओं को प्रति कार्ड दो किलो दाल रियायती मूल्य पर देने का निर्णय लिया। देहरादून, जेएनएन। उत्तराखंड में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के गरीबी रेखा से नीचे और ऊपर सभी 23 लाख 80 हजार राशनकार्ड धारकों को बड़ी राहत मिली है। त्रिवेंद्र सिंह रावत मंत्रिमंडल ने इन सभी उपभोक्ताओं को प्रति कार्ड दो किलो दाल रियायती मूल्य पर देने का निर्णय लिया। राशन की दुकानों से हर परिवार को एक-एक किलो अलग-अलग दाल मिलेगी। वहीं सरकारी डिग्री कॉलेजों में कार्यरत गेस्ट फैकल्टी अथवा संविदा शिक्षकों को अलग-अलग मानदेय की व्यवस्था खत्म कर समान मानदेय देने के फैसले को मंजूरी दी गई। संविदा पर कार्यरत सांध्यकालीन और प्रातःकालीन सभी शिक्षकों को 35 हजार रुपये मानदेय मिलेगा। एक अन्य फैसले में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की पुत्री के पुत्र या पुत्री को भी सरकारी नौकरी में आरक्षण देने पर सहमति दी गई। सचिवालय में बुधवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में करीब 12 बिंदुओं पर फैसले लिए गए। अन्य दो बिंदुओं को स्थगित कर दिया गया। सरकार के प्रवक्ता और काबीना मंत्री मदन कौशिक ने मंत्रिमंडल के फैसलों को ब्रीफ किया। उन्होंने बताया कि राज्य में मुख्यमंत्री दालपोषित योजना लागू करने का निर्णय लिया गया है। इस योजना में सभी राशनकार्ड उपभोक्ताओं को चना, मसूर व तुअर में से एक-एक किलो दो दालें मुहैया कराई जाएगी। इसके लिए केंद्र की ओर से दी जाने वाली 15 रुपये की सब्सिडी राज्य के उपभोक्ताओं को मिलेगी। इससे उपभोक्ताओं को प्रति किलो 40 से 42 रुपये की दर से दाल उपलब्ध होगी। केंद्र सरकार नेफेड के माध्यम से राज्य को दालें मुहैया कराएगी। राज्य में 9000 से अधिक राशन की दुकानें हैं। इन दुकानों के माध्यम से सस्ती दालें वितरित की जाएंगी। इस योजना के तहत राज्य को 4600 कुंतल दाल की दरकार होगी। इस योजना से राज्य सरकार पर कोई भी वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। उन्होंने बताया कि सरकारी डिग्री कॉलेजों में कार्यरत 357 गेस्ट फैकल्टी को समान मासिक मानदेय 35 हजार रुपये देने का निर्णय किया गया है। वर्तमान में इन कॉलेजों में 59 सांध्यकालीन गेस्ट फैकल्टी को 15 हजार रुपये मासिक, 263 प्रातःकालीन गेस्ट फैकल्टी को 25 हजार रुपये और गढ़वाल विश्वविद्यालय के केंद्रीय विश्वविद्यालय बनने के बाद वहां से सरकारी कॉलेजों में भेजी गई 35 गेस्ट फैकल्टी को 35 हजार रुपये मानदेय मिल रहा है। मंत्रिमंडल के फैसले से 322 गेस्ट फैकल्टी के मानदेय में इजाफा भी हो गया है। उक्त फैकल्टी को प्रतिमाह 40 पीरियड अनिवार्य रूप से पढ़ाने होंगे। यह टाइम टेबल बनाने की जिम्मेदारी कॉलेज की होगी।
त्रिवेंद्र सिंह रावत मंत्रिमंडल ने इन सभी उपभोक्ताओं को प्रति कार्ड दो किलो दाल रियायती मूल्य पर देने का निर्णय लिया। देहरादून, जेएनएन। उत्तराखंड में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के गरीबी रेखा से नीचे और ऊपर सभी तेईस लाख अस्सी हजार राशनकार्ड धारकों को बड़ी राहत मिली है। त्रिवेंद्र सिंह रावत मंत्रिमंडल ने इन सभी उपभोक्ताओं को प्रति कार्ड दो किलो दाल रियायती मूल्य पर देने का निर्णय लिया। राशन की दुकानों से हर परिवार को एक-एक किलो अलग-अलग दाल मिलेगी। वहीं सरकारी डिग्री कॉलेजों में कार्यरत गेस्ट फैकल्टी अथवा संविदा शिक्षकों को अलग-अलग मानदेय की व्यवस्था खत्म कर समान मानदेय देने के फैसले को मंजूरी दी गई। संविदा पर कार्यरत सांध्यकालीन और प्रातःकालीन सभी शिक्षकों को पैंतीस हजार रुपये मानदेय मिलेगा। एक अन्य फैसले में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की पुत्री के पुत्र या पुत्री को भी सरकारी नौकरी में आरक्षण देने पर सहमति दी गई। सचिवालय में बुधवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में करीब बारह बिंदुओं पर फैसले लिए गए। अन्य दो बिंदुओं को स्थगित कर दिया गया। सरकार के प्रवक्ता और काबीना मंत्री मदन कौशिक ने मंत्रिमंडल के फैसलों को ब्रीफ किया। उन्होंने बताया कि राज्य में मुख्यमंत्री दालपोषित योजना लागू करने का निर्णय लिया गया है। इस योजना में सभी राशनकार्ड उपभोक्ताओं को चना, मसूर व तुअर में से एक-एक किलो दो दालें मुहैया कराई जाएगी। इसके लिए केंद्र की ओर से दी जाने वाली पंद्रह रुपयापये की सब्सिडी राज्य के उपभोक्ताओं को मिलेगी। इससे उपभोक्ताओं को प्रति किलो चालीस से बयालीस रुपयापये की दर से दाल उपलब्ध होगी। केंद्र सरकार नेफेड के माध्यम से राज्य को दालें मुहैया कराएगी। राज्य में नौ हज़ार से अधिक राशन की दुकानें हैं। इन दुकानों के माध्यम से सस्ती दालें वितरित की जाएंगी। इस योजना के तहत राज्य को चार हज़ार छः सौ कुंतल दाल की दरकार होगी। इस योजना से राज्य सरकार पर कोई भी वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। उन्होंने बताया कि सरकारी डिग्री कॉलेजों में कार्यरत तीन सौ सत्तावन गेस्ट फैकल्टी को समान मासिक मानदेय पैंतीस हजार रुपये देने का निर्णय किया गया है। वर्तमान में इन कॉलेजों में उनसठ सांध्यकालीन गेस्ट फैकल्टी को पंद्रह हजार रुपये मासिक, दो सौ तिरेसठ प्रातःकालीन गेस्ट फैकल्टी को पच्चीस हजार रुपये और गढ़वाल विश्वविद्यालय के केंद्रीय विश्वविद्यालय बनने के बाद वहां से सरकारी कॉलेजों में भेजी गई पैंतीस गेस्ट फैकल्टी को पैंतीस हजार रुपये मानदेय मिल रहा है। मंत्रिमंडल के फैसले से तीन सौ बाईस गेस्ट फैकल्टी के मानदेय में इजाफा भी हो गया है। उक्त फैकल्टी को प्रतिमाह चालीस पीरियड अनिवार्य रूप से पढ़ाने होंगे। यह टाइम टेबल बनाने की जिम्मेदारी कॉलेज की होगी।
दूसरा प्रवचन हुकमी हुकमु चलाए राह पउड़ीः 2 हुकमी होवन आकार हुकमी न कहिया जाए। हुकमी होवन जीअ हुकमी मिलै बड़िआई। हुकमी उत्तम नीचु हुकमी लिखि दुख सुख पाई अहि इकना हुकमी बख्शीस इकि हुकमी सदा भवाईअहि। हुकमी अंदर सभु को बाहर हुकुम न कोय। "नानक" हुकमी जे बुझे त हऊ मैं कहे न कोय। पउड़ीः 3 गावै को ताणु होवै किसे ताणु । गावै को दाति जाणै निसाणु ॥ गावै को गुण वड़िआइया चारु। गावै को विदिआ विखम वीचारु ।। गावै को साजि करे तनु खेह । गावै को जीअ लै फिरि देह ।। गावै को जापै दिसे दूरि। गावै को वेखै हादरा हदूरि ।। कथना कथी न आवै तोटि। कथि कथि कथी कोटि कोटि कोटि देदा दे लैदे थकि पाहि। जुगा जुगंतरि खाही खाहि ।। हुकमी हुकमु चलाए राह। "नानक" विगसै बेपरवाह । जीवन को जीने के दो ढंग हैं। एक ढंग है संघर्ष का, एक ढंग है समर्पण का। संघर्ष का अर्थ है, मेरी मर्जी समग्र की मर्जी से अलग। समर्पण का अर्थ है, मैं समग्र का एक अंग हूं। मेरी मर्जी के अलग होने का कोई सवाल नहीं। मैं अगर अलग हूं, संघर्ष स्वाभाविक है। मैं अगर इस विराट के साथ एक हूं, समर्पण स्वाभाविक है। संघर्ष लाएगा तनाव, अशांति, चिंता । समर्पणः शून्यता, शांति, आनंद और अंततः परम ज्ञान । संघर्ष से बढ़ेगा अहंकार, समर्पण से मिटेगा। संसारी वही है जो संघर्ष कर रहा है। धार्मिक वही है जिसने संघर्ष छोड़ा और समर्पण किया। मंदिर, गुरुद्वारे मस्जिद जाने से धर्म का कोई संबंध नहीं। अगर तुम्हारी वृत्ति संघर्ष की है, अगर तुम लड़ रहे हो परमात्मा से, अगर तुम अपनी इच्छा पूरी कराना चाहते हो-चाहे प्रार्थना से ही सही, पूजा से ही सही--अगर तुम्हारी अपनी कोई इच्छा है, तो तुम अधार्मिक हो। जब तुम्हारी अपनी कोई चाह नहीं, जब उसकी चाह ही तुम्हारी चाह है। जहां वह ले जाए वही तुम्हारी मंजिल है, तुम्हारी अलग कोई मंजिल नहीं। जैसा वह चलाए वही तुम्हारी गति है, तुम्हारी अपनी कोई आकांक्षा नहीं । तुम निर्णय लेते ही नहीं। तुम तैरते भी नहीं, तुम तिरते हो... । आकाश में कभी देखें! चील बहुत ऊंचाई पर उठ जाती है। फिर पंख भी नहीं हिलाती। फिर पंखों को फैला देती है और हवा में तिरती है। वैसी ही तिरने की दशा जब तुम्हारी चेतना में आ जाती है, तब समर्पण। तब तुम पंख भी नहीं हिलाते। तब तुम उसकी हवाओं पर तिर जाते हो। तब तुम निर्भार हो जाते हो। क्योंकि भार संघर्ष से पैदा होता है। भार प्रतिरोध से पैदा होता है। जितना तुम लड़ते हो उतना तुम भारी हो जाते हो, जितने भारी होते हो उतने नीचे गिर जाते हो। जितना तुम लड़ते नहीं उतने हल्के हो जाते हो, जितने हल्के होते हो उतने ऊंचे उठ जाते हो। और अगर तुम पूरी तरह संघर्ष छोड़ दो तो तुम्हारी वही ऊंचाई है, जो परमात्मा की। ऊंचाई का एक ही अर्थ है--निर्भार हो जाना। और अहंकार पत्थर की तरह लटका है तुम्हारे गले में जितना तुम लड़ोगे उतना ही अहंकार बढ़ेगा। ऐसा हुआ कि नानक एक गांव के बाहर आ कर ठहरे। वह गांव सूफियों का गांव था। उनका बड़ा केंद्र था। वहां बड़े सूफी थे, गुरु थे। पूरी बस्ती ही सूफियों की थी। खबर मिली सूफियों के गुरु को, तो उसने सुबह ही के सुबह नानक के लिए एक कप में भर कर दूध भेजा। दूध लबालब था। एक बूंद भी और न समा सकती थी। नानक गांव के बाहर ठहरे थे एक कुएं के तट पर। उन्होंने पास की झाड़ी से एक फूल तोड़ कर उस दूध की प्याली में डाल दिया। फूल तिर गया। फूल का वजन क्या! उसने जगह न मांगी। वह सतह पर तिर गया। और प्याली वापस भेज दी। नानक का शिष्य मरदाना बहुत हैरान हुआ कि मामला क्या है? उसने पूछा कि मैं कुछ समझा नहीं। क्या रहस्य है? यह हुआ क्या? तो नानक ने कहा कि सूफियों के गुरु ने खबर भेजी थी कि गांव में बहुत ज्ञानी हैं, अब और जगह नहीं। मैंने खबर वापस भेज दी है कि मेरा कोई भार नहीं है। मैं जगह मांगूंगा ही नहीं, फूल की तरह तिर जाऊंगा। जो निर्भार है वही ज्ञानी है। जिसमें वजन है, अभी अज्ञान है। और जब तुममें वजन होता है तब तुमसे दूसरे को चोट पहुंचती है। जब तुम निर्भार हो जाते हो, तब तुम्हारे जीवन का ढंग ऐसा होता है कि उस ढंग से चोट पहुंचनी असंभव हो जाती है। अहिंसा अपने आप फलती है। प्रेम अपने आप लगता है। कोई प्रेम को लगा नहीं सकता। और न कोई करुणा को आरोपित कर सकता है। अगर तुम निर्भार हो जाओ, तो ये सब घटनाएं अपने से घटती हैं। जैसे आदमी के पीछे छाया चलती है, ऐसे भारी आदमी के पीछे घृणा, हिंसा, वैमनस्य, क्रोध, हत्या चलती है। हलके मनुष्य के पीछे प्रेम, करुणा, दया, प्रार्थना अपने आप चलती है। इसलिए मौलिक सवाल भीतर से अहंकार को गिरा देने का है। कैसे तुम गिराओगे अहंकार को? एक ही उपाय है। वेदों ने उस उपाय को ऋत कहा है। लाओत्से ने उस उपाय को ताओ कहा है। बुद्ध ने धम्म, महावीर ने धर्म, नानक का शब्द है हुकुम, उसकी आज्ञा। उसकी आज्ञा से जो चलने लगा, जो अपनी तरफ से हिलता-डुलता भी नहीं है, जिसका अपना कोई भाव नहीं, कोई चाह नहीं, जो अपने को आरोपित नहीं करना चाहता, वह उसके हुक्म में आ गया। यही धार्मिक आदमी है। और जो उसके हुक्म में आ गया, वह सब पा गया। कुछ पाने को बचता नहीं। क्योंकि उसके हुक्म को मानना, उसके हृदय तक पहुंच जाने का द्वार है। अपने को ही मानना, उससे दूर हटते जाना है। अपने को मानना है कि तुमने परमात्मा की तरफ पीठ कर ली। उसकी आज्ञा को माना कि तुम्हारा मुख परमात्मा की तरफ हो गया। तुम सूरज की तरफ पीठ कर के जीवन भर भागते रहो तो भी अंधेरे में रहोगे। और तुम सूरज की तरफ मुंह इसी क्षण कर लो तो जन्मों-जन्मों का अंधेरा कट जाएगा। परमात्मा के सन्मुख होने का एक ही उपाय है और वह यह है कि तुम अपनी मर्जी छोड़ दो। तुम तैरो मत, बहो। तुम तिरो; वह काफी है। तुम अकारण ही बोझ ले रहे हो। और तुम्हारी सफलताएं-असफलताएं तुम्हारे अहंकार के ही रोग हैं। और तुम्हारी हालत वैसी है, जैसा मैंने सुना है कि एक रथ गुजर रहा था। और एक मक्खी उसके पहिए की कील पर बैठी थी। बड़ी धूल उठती थी। रथ बड़ा था। बारह घोड़े जुते थे। बड़ी भयंकर आवाज, बड़ी धूल उठती थी। उस मक्खी ने आसपास देखा और कहा कि आज मैं बड़ी धूल उड़ा रही हूं। रथ से उड़ रही है धूल। मक्खी कील पर बैठी है, पर सोच रही है, आज मैं बड़ी धूल उड़ा रही हूं। और जब इतनी धूल उड़ा रही हूं तो इतनी ही बड़ी हूं। तुम सफल भी होते हो उसके ही कारण। जो भी तुम पाते हो उसके ही कारण । तुम रथ पर बैठी एक मक्खी से ज्यादा नहीं हो। भूल कर यह मत सोचना कि इतनी धूल मैं उड़ा रहा हूं। धूल है तो उसके रथ की है। यात्रा है तो उसके रथ की है। लेकिन तुम अपने को बीच में मत ले लेना। तुमने सुनी होगी बात उस छिपकली की, कि मित्रों ने उसे निमंत्रित किया था और कहा कि आओ आज थोड़ा जंगल में घूम आएं। उस छिपकली ने कहा कि जाना मुश्किल है। क्योंकि इस छप्पर को कौन सम्हालेगा? छप्पर गिर जाएगा तो जिम्मेवारी मेरे ऊपर होगी। छिपकली सोचती है कि छप्पर को महल के वही सम्हाले हुए है। छिपकली को लगता भी होगा। तुमने सुनी होगी कहानी कि एक बूढ़ी औरत के पास एक मुर्गा था। वह सुबह बांग देता था तभी सूरज उगता था। बूढ़ी अकड़ गई। और उसने गांव में लोगों को खबर कर दी कि मुझसे जरा सोच-समझ कर व्यवहार करना। ढंग और इज्जत से। क्योंकि अगर मैं चली गई अपने मुर्गे को ले कर दूसरे गांव तो याद रखना, सूरज इस गांव में कभी उगेगा ही नहीं। मेरा मुर्गा जब बांग देता है तभी सूरज उगता है। और बात सच ही थी कि रोज ही मुर्गा बांग देता था तभी सूरज उगता था। गांव के लोग हंसे। लोगों ने मजाक उड़ाई कि तू पागल हो गई। तो बूढ़ी नाराजगी में दूसरे गांव चली गई। मुर्गे ने बांग दी और दूसरे गांव में सूरज उगा। तो बूढ़ी ने कहा, अब रोएंगे। अब बैठे होंगे छाती पीटेंगे। न रहा मुर्गा, न उगेगा सूरज। तुम्हारे तर्क भी... बूढ़ी का तर्क भी है तो बहुत साफ। क्योंकि ऐसा कभी नहीं हुआ कि मुर्गे के बांग दिए बिना सूरज उगा हो। लेकिन बात बिल्कुल उलटी है। सूरज उगता है इसलिए मुर्गा बांग देता है। बांग देने के कारण सूरज नहीं उगते । लेकिन बूढ़ी को कौन समझाए? तुमको कौन समझाए? बूढ़ी दूसरे गांव चली गई और उसने देखा कि सूरज अब यहां उग रहा है। और जब यहां उग रहा है तो हर गांव में कैसे उगेगा? तुम अपनी छोटी बुद्धि से छोटे दायरे में सोचते हो। तुम्हारे कारण परमात्मा नहीं है, परमात्मा के कारण तुम हो। यह श्वास तुम्हारे कारण नहीं चल रही है, उसके कारण चल रही है। प्रार्थना भी तुम नहीं करते हो, वही तुम्हारे भीतर प्रार्थना बनता है। इस भाव को ख्याल में ले लें, तो नानक के ये बड़े बहुमूल्य शब्द समझ में आ जाएंगे। एक-एक शब्द कीमती है। "हुक्म से आकार की उत्पत्ति हुई। हुक्म को शब्दों में नहीं कहा जा सकता।" हुक्म का अर्थ ठीक से समझ लेना-- दि कास्मिक ला। वह जो सारे जीवन को चलाने वाला महानियम है, हुक्म का वही अर्थ है। "हुक्म से ही जीवों की उत्पत्ति हुई। हुक्म से बड़ाई मिलती है । " हुकमी होवन जीअ हुकमी मिलै बड़िआई । जब तुम जीतो, तो यह मत सोचना कि मैं जीत रहा हूं। और अगर तुम जीत में ही न सोचोगे कि मैं जीत रहा हूं, तो हार में भी तुम पाओगे कि मैं नहीं हार रहा हूं। वही जीतता है, वही हारता है। उसका ही खेल है। इसलिए हिंदू इस पूरे जगत को लीला कहते हैं । लीला का मतलब है, हारता भी वही, जीतता भी वही। इस हाथ से जीतता है, उस हाथ से हारता है। लेकिन जीतने और हारने वाले बीच में ही सोच लेते हैं; जो उपकरण हैं, जो निमित्त हैं, जो साधन हैं, वे समझ लेते हैं, हम कर्ता हैं। कृष्ण अर्जुन को गीता में कह रहे हैं कि तू व्यर्थ बीच में अपने को मत ले । वही कर रहा है, वही करवा रहा तू युद्ध उसका आयोजन है। जिनको मारना है वह मारेगा। जिनको बचाना है वह बचाएगा । तू यह मत सोच कि तू मारने वाला है और तू बचाने वाला है। कृष्ण पूरी गीता में जो कहते हैं, वही नानक इन शब्दों में कह रहे हैं। हुकमी होवन जीअ हुकमी मिलै बड़िआई । हुकमी उत्तम नीचु... । "वही छोटे-बड़े को पैदा कर रहा है।" यह थोड़ा सोचने जैसा है। अगर वही छोटे-बड़े को पैदा कर रहा है, तो फिर कोई छोटा नहीं कोई बड़ा नहीं। क्योंकि दोनों का बनाने वाला वही है। तुमने एक छोटी सी मूर्ति बनाई, तुमने एक बड़ी मूर्ति बनाई; बनाने वाले तुम ही हो । जब कर्ता एक है, तो कौन छोटा कौन बड़ा? जब दोनों में उसका ही हाथ लगा है लेकिन हम सोचते हैं मैं छोटा, मैं बड़ा, और जीवन भर हम पीड़ा उठाते हैं। और तुम इतने बड़े कभी भी न हो पाओगे कि तुम तृप्त हो जाओ। अगर तुमने रूप को देखा, अपने आकार को देखा, तो तुम कभी इतने बड़े न हो सकोगे कि तृप्त हो जाओ। आकार तो छोटा ही होगा, कितना ही बड़ा क्यों न हो। लेकिन अगर तुमने निराकार के हाथ अपने आकार में देखे, तब तुम तत्क्षण बड़े हो गए। बनाने वाला वही है। एक छोटे से घास को भी वही बनाता है। और दूर आकाश को छूते देवदार के वृक्ष को भी वही बनाता है। अगर दोनों के पीछे उसी का हाथ है, फिर कौन बड़ा कौन छोटा? उसी की हार है, उसी की जीत है। फिर हम सब शतरंज के मोहरे हैं। जीते तो वह, हारे तो वह। बड़ाई मिले तो उसे, बुराई मिले तो उसे। ध्यान रखना, तुमने बहुत बार भक्तों के वचन सुने होंगे, पढ़े होंगे। अनेक भक्त तुमने पाए होंगे; कहते हैं, बड़ाई तेरी, बुराई मेरी। ऊपर से देखने पर बहुत अच्छा लगता है। वे कहते हैं कि जो-जो भला है, तेरा; जो-जो बुरा है, मेरा। लगता है बड़े विनम्र हैं। लेकिन अगर बुराई तुम्हारी तो भलाई उसकी कैसे हो सकेगी? यह विनम्रता झूठी है। यह विनम्रता वास्तविक नहीं है। क्योंकि वास्तविक विनम्रता तो सभी दे देगी, कुछ भी न बचाएगी। तुमने अपने अहंकार के लिए थोड़ा सहारा फिर बचा लिया। और तुम कितना ही ऊपर-ऊपर से कहो कि बड़ाई तेरी और बुराई मेरी, लेकिन जब बुराई मेरी है तो बड़ाई तेरी होगी कैसे? असफलता मेरी और सफलता तेरी? यह बात थोथी है। या तो दोनों मेरे होंगे, या तो दोनों तेरे होंगे। इसलिए झूठी विनम्रता और सच्ची विनम्रता में बड़ा फर्क है। झूठी विनम्रता कहती है कि मैं तो आपके पैरों की धूल हूं, लेकिन हूं जरूर। और जब कोई आदमी कहता है, मैं आपके पैरों की धूल हूं, तब उसकी आंखों में देखना। वह आपसे अपेक्षा कर रहा है कि आप भी कहो कि नहीं-नहीं; आप और कैसे? मैं आपके पैरों की धूल हूं। उसकी आंखों में चाह है। और अगर आप मान लो कि बिल्कुल ठीक कह रहे हैं, यही तो मेरा विचार है; तो वह आदमी सदा के लिए दुश्मन हो जाएगा। और कभी आपको माफ न कर सकेगा। बड़ाई भी उसकी, बुराई भी उसकी । हम बीच में आते ही नहीं हैं। हम तो बांस की पोंगरी हो गए। वह गीत जैसा गाए उसका । इतनी भी अकड़ क्यों अपनी बचा कर रखना कि अगर भूलचूक होगी तो मेरी -- तब तो
दूसरा प्रवचन हुकमी हुकमु चलाए राह पउड़ीः दो हुकमी होवन आकार हुकमी न कहिया जाए। हुकमी होवन जीअ हुकमी मिलै बड़िआई। हुकमी उत्तम नीचु हुकमी लिखि दुख सुख पाई अहि इकना हुकमी बख्शीस इकि हुकमी सदा भवाईअहि। हुकमी अंदर सभु को बाहर हुकुम न कोय। "नानक" हुकमी जे बुझे त हऊ मैं कहे न कोय। पउड़ीः तीन गावै को ताणु होवै किसे ताणु । गावै को दाति जाणै निसाणु ॥ गावै को गुण वड़िआइया चारु। गावै को विदिआ विखम वीचारु ।। गावै को साजि करे तनु खेह । गावै को जीअ लै फिरि देह ।। गावै को जापै दिसे दूरि। गावै को वेखै हादरा हदूरि ।। कथना कथी न आवै तोटि। कथि कथि कथी कोटि कोटि कोटि देदा दे लैदे थकि पाहि। जुगा जुगंतरि खाही खाहि ।। हुकमी हुकमु चलाए राह। "नानक" विगसै बेपरवाह । जीवन को जीने के दो ढंग हैं। एक ढंग है संघर्ष का, एक ढंग है समर्पण का। संघर्ष का अर्थ है, मेरी मर्जी समग्र की मर्जी से अलग। समर्पण का अर्थ है, मैं समग्र का एक अंग हूं। मेरी मर्जी के अलग होने का कोई सवाल नहीं। मैं अगर अलग हूं, संघर्ष स्वाभाविक है। मैं अगर इस विराट के साथ एक हूं, समर्पण स्वाभाविक है। संघर्ष लाएगा तनाव, अशांति, चिंता । समर्पणः शून्यता, शांति, आनंद और अंततः परम ज्ञान । संघर्ष से बढ़ेगा अहंकार, समर्पण से मिटेगा। संसारी वही है जो संघर्ष कर रहा है। धार्मिक वही है जिसने संघर्ष छोड़ा और समर्पण किया। मंदिर, गुरुद्वारे मस्जिद जाने से धर्म का कोई संबंध नहीं। अगर तुम्हारी वृत्ति संघर्ष की है, अगर तुम लड़ रहे हो परमात्मा से, अगर तुम अपनी इच्छा पूरी कराना चाहते हो-चाहे प्रार्थना से ही सही, पूजा से ही सही--अगर तुम्हारी अपनी कोई इच्छा है, तो तुम अधार्मिक हो। जब तुम्हारी अपनी कोई चाह नहीं, जब उसकी चाह ही तुम्हारी चाह है। जहां वह ले जाए वही तुम्हारी मंजिल है, तुम्हारी अलग कोई मंजिल नहीं। जैसा वह चलाए वही तुम्हारी गति है, तुम्हारी अपनी कोई आकांक्षा नहीं । तुम निर्णय लेते ही नहीं। तुम तैरते भी नहीं, तुम तिरते हो... । आकाश में कभी देखें! चील बहुत ऊंचाई पर उठ जाती है। फिर पंख भी नहीं हिलाती। फिर पंखों को फैला देती है और हवा में तिरती है। वैसी ही तिरने की दशा जब तुम्हारी चेतना में आ जाती है, तब समर्पण। तब तुम पंख भी नहीं हिलाते। तब तुम उसकी हवाओं पर तिर जाते हो। तब तुम निर्भार हो जाते हो। क्योंकि भार संघर्ष से पैदा होता है। भार प्रतिरोध से पैदा होता है। जितना तुम लड़ते हो उतना तुम भारी हो जाते हो, जितने भारी होते हो उतने नीचे गिर जाते हो। जितना तुम लड़ते नहीं उतने हल्के हो जाते हो, जितने हल्के होते हो उतने ऊंचे उठ जाते हो। और अगर तुम पूरी तरह संघर्ष छोड़ दो तो तुम्हारी वही ऊंचाई है, जो परमात्मा की। ऊंचाई का एक ही अर्थ है--निर्भार हो जाना। और अहंकार पत्थर की तरह लटका है तुम्हारे गले में जितना तुम लड़ोगे उतना ही अहंकार बढ़ेगा। ऐसा हुआ कि नानक एक गांव के बाहर आ कर ठहरे। वह गांव सूफियों का गांव था। उनका बड़ा केंद्र था। वहां बड़े सूफी थे, गुरु थे। पूरी बस्ती ही सूफियों की थी। खबर मिली सूफियों के गुरु को, तो उसने सुबह ही के सुबह नानक के लिए एक कप में भर कर दूध भेजा। दूध लबालब था। एक बूंद भी और न समा सकती थी। नानक गांव के बाहर ठहरे थे एक कुएं के तट पर। उन्होंने पास की झाड़ी से एक फूल तोड़ कर उस दूध की प्याली में डाल दिया। फूल तिर गया। फूल का वजन क्या! उसने जगह न मांगी। वह सतह पर तिर गया। और प्याली वापस भेज दी। नानक का शिष्य मरदाना बहुत हैरान हुआ कि मामला क्या है? उसने पूछा कि मैं कुछ समझा नहीं। क्या रहस्य है? यह हुआ क्या? तो नानक ने कहा कि सूफियों के गुरु ने खबर भेजी थी कि गांव में बहुत ज्ञानी हैं, अब और जगह नहीं। मैंने खबर वापस भेज दी है कि मेरा कोई भार नहीं है। मैं जगह मांगूंगा ही नहीं, फूल की तरह तिर जाऊंगा। जो निर्भार है वही ज्ञानी है। जिसमें वजन है, अभी अज्ञान है। और जब तुममें वजन होता है तब तुमसे दूसरे को चोट पहुंचती है। जब तुम निर्भार हो जाते हो, तब तुम्हारे जीवन का ढंग ऐसा होता है कि उस ढंग से चोट पहुंचनी असंभव हो जाती है। अहिंसा अपने आप फलती है। प्रेम अपने आप लगता है। कोई प्रेम को लगा नहीं सकता। और न कोई करुणा को आरोपित कर सकता है। अगर तुम निर्भार हो जाओ, तो ये सब घटनाएं अपने से घटती हैं। जैसे आदमी के पीछे छाया चलती है, ऐसे भारी आदमी के पीछे घृणा, हिंसा, वैमनस्य, क्रोध, हत्या चलती है। हलके मनुष्य के पीछे प्रेम, करुणा, दया, प्रार्थना अपने आप चलती है। इसलिए मौलिक सवाल भीतर से अहंकार को गिरा देने का है। कैसे तुम गिराओगे अहंकार को? एक ही उपाय है। वेदों ने उस उपाय को ऋत कहा है। लाओत्से ने उस उपाय को ताओ कहा है। बुद्ध ने धम्म, महावीर ने धर्म, नानक का शब्द है हुकुम, उसकी आज्ञा। उसकी आज्ञा से जो चलने लगा, जो अपनी तरफ से हिलता-डुलता भी नहीं है, जिसका अपना कोई भाव नहीं, कोई चाह नहीं, जो अपने को आरोपित नहीं करना चाहता, वह उसके हुक्म में आ गया। यही धार्मिक आदमी है। और जो उसके हुक्म में आ गया, वह सब पा गया। कुछ पाने को बचता नहीं। क्योंकि उसके हुक्म को मानना, उसके हृदय तक पहुंच जाने का द्वार है। अपने को ही मानना, उससे दूर हटते जाना है। अपने को मानना है कि तुमने परमात्मा की तरफ पीठ कर ली। उसकी आज्ञा को माना कि तुम्हारा मुख परमात्मा की तरफ हो गया। तुम सूरज की तरफ पीठ कर के जीवन भर भागते रहो तो भी अंधेरे में रहोगे। और तुम सूरज की तरफ मुंह इसी क्षण कर लो तो जन्मों-जन्मों का अंधेरा कट जाएगा। परमात्मा के सन्मुख होने का एक ही उपाय है और वह यह है कि तुम अपनी मर्जी छोड़ दो। तुम तैरो मत, बहो। तुम तिरो; वह काफी है। तुम अकारण ही बोझ ले रहे हो। और तुम्हारी सफलताएं-असफलताएं तुम्हारे अहंकार के ही रोग हैं। और तुम्हारी हालत वैसी है, जैसा मैंने सुना है कि एक रथ गुजर रहा था। और एक मक्खी उसके पहिए की कील पर बैठी थी। बड़ी धूल उठती थी। रथ बड़ा था। बारह घोड़े जुते थे। बड़ी भयंकर आवाज, बड़ी धूल उठती थी। उस मक्खी ने आसपास देखा और कहा कि आज मैं बड़ी धूल उड़ा रही हूं। रथ से उड़ रही है धूल। मक्खी कील पर बैठी है, पर सोच रही है, आज मैं बड़ी धूल उड़ा रही हूं। और जब इतनी धूल उड़ा रही हूं तो इतनी ही बड़ी हूं। तुम सफल भी होते हो उसके ही कारण। जो भी तुम पाते हो उसके ही कारण । तुम रथ पर बैठी एक मक्खी से ज्यादा नहीं हो। भूल कर यह मत सोचना कि इतनी धूल मैं उड़ा रहा हूं। धूल है तो उसके रथ की है। यात्रा है तो उसके रथ की है। लेकिन तुम अपने को बीच में मत ले लेना। तुमने सुनी होगी बात उस छिपकली की, कि मित्रों ने उसे निमंत्रित किया था और कहा कि आओ आज थोड़ा जंगल में घूम आएं। उस छिपकली ने कहा कि जाना मुश्किल है। क्योंकि इस छप्पर को कौन सम्हालेगा? छप्पर गिर जाएगा तो जिम्मेवारी मेरे ऊपर होगी। छिपकली सोचती है कि छप्पर को महल के वही सम्हाले हुए है। छिपकली को लगता भी होगा। तुमने सुनी होगी कहानी कि एक बूढ़ी औरत के पास एक मुर्गा था। वह सुबह बांग देता था तभी सूरज उगता था। बूढ़ी अकड़ गई। और उसने गांव में लोगों को खबर कर दी कि मुझसे जरा सोच-समझ कर व्यवहार करना। ढंग और इज्जत से। क्योंकि अगर मैं चली गई अपने मुर्गे को ले कर दूसरे गांव तो याद रखना, सूरज इस गांव में कभी उगेगा ही नहीं। मेरा मुर्गा जब बांग देता है तभी सूरज उगता है। और बात सच ही थी कि रोज ही मुर्गा बांग देता था तभी सूरज उगता था। गांव के लोग हंसे। लोगों ने मजाक उड़ाई कि तू पागल हो गई। तो बूढ़ी नाराजगी में दूसरे गांव चली गई। मुर्गे ने बांग दी और दूसरे गांव में सूरज उगा। तो बूढ़ी ने कहा, अब रोएंगे। अब बैठे होंगे छाती पीटेंगे। न रहा मुर्गा, न उगेगा सूरज। तुम्हारे तर्क भी... बूढ़ी का तर्क भी है तो बहुत साफ। क्योंकि ऐसा कभी नहीं हुआ कि मुर्गे के बांग दिए बिना सूरज उगा हो। लेकिन बात बिल्कुल उलटी है। सूरज उगता है इसलिए मुर्गा बांग देता है। बांग देने के कारण सूरज नहीं उगते । लेकिन बूढ़ी को कौन समझाए? तुमको कौन समझाए? बूढ़ी दूसरे गांव चली गई और उसने देखा कि सूरज अब यहां उग रहा है। और जब यहां उग रहा है तो हर गांव में कैसे उगेगा? तुम अपनी छोटी बुद्धि से छोटे दायरे में सोचते हो। तुम्हारे कारण परमात्मा नहीं है, परमात्मा के कारण तुम हो। यह श्वास तुम्हारे कारण नहीं चल रही है, उसके कारण चल रही है। प्रार्थना भी तुम नहीं करते हो, वही तुम्हारे भीतर प्रार्थना बनता है। इस भाव को ख्याल में ले लें, तो नानक के ये बड़े बहुमूल्य शब्द समझ में आ जाएंगे। एक-एक शब्द कीमती है। "हुक्म से आकार की उत्पत्ति हुई। हुक्म को शब्दों में नहीं कहा जा सकता।" हुक्म का अर्थ ठीक से समझ लेना-- दि कास्मिक ला। वह जो सारे जीवन को चलाने वाला महानियम है, हुक्म का वही अर्थ है। "हुक्म से ही जीवों की उत्पत्ति हुई। हुक्म से बड़ाई मिलती है । " हुकमी होवन जीअ हुकमी मिलै बड़िआई । जब तुम जीतो, तो यह मत सोचना कि मैं जीत रहा हूं। और अगर तुम जीत में ही न सोचोगे कि मैं जीत रहा हूं, तो हार में भी तुम पाओगे कि मैं नहीं हार रहा हूं। वही जीतता है, वही हारता है। उसका ही खेल है। इसलिए हिंदू इस पूरे जगत को लीला कहते हैं । लीला का मतलब है, हारता भी वही, जीतता भी वही। इस हाथ से जीतता है, उस हाथ से हारता है। लेकिन जीतने और हारने वाले बीच में ही सोच लेते हैं; जो उपकरण हैं, जो निमित्त हैं, जो साधन हैं, वे समझ लेते हैं, हम कर्ता हैं। कृष्ण अर्जुन को गीता में कह रहे हैं कि तू व्यर्थ बीच में अपने को मत ले । वही कर रहा है, वही करवा रहा तू युद्ध उसका आयोजन है। जिनको मारना है वह मारेगा। जिनको बचाना है वह बचाएगा । तू यह मत सोच कि तू मारने वाला है और तू बचाने वाला है। कृष्ण पूरी गीता में जो कहते हैं, वही नानक इन शब्दों में कह रहे हैं। हुकमी होवन जीअ हुकमी मिलै बड़िआई । हुकमी उत्तम नीचु... । "वही छोटे-बड़े को पैदा कर रहा है।" यह थोड़ा सोचने जैसा है। अगर वही छोटे-बड़े को पैदा कर रहा है, तो फिर कोई छोटा नहीं कोई बड़ा नहीं। क्योंकि दोनों का बनाने वाला वही है। तुमने एक छोटी सी मूर्ति बनाई, तुमने एक बड़ी मूर्ति बनाई; बनाने वाले तुम ही हो । जब कर्ता एक है, तो कौन छोटा कौन बड़ा? जब दोनों में उसका ही हाथ लगा है लेकिन हम सोचते हैं मैं छोटा, मैं बड़ा, और जीवन भर हम पीड़ा उठाते हैं। और तुम इतने बड़े कभी भी न हो पाओगे कि तुम तृप्त हो जाओ। अगर तुमने रूप को देखा, अपने आकार को देखा, तो तुम कभी इतने बड़े न हो सकोगे कि तृप्त हो जाओ। आकार तो छोटा ही होगा, कितना ही बड़ा क्यों न हो। लेकिन अगर तुमने निराकार के हाथ अपने आकार में देखे, तब तुम तत्क्षण बड़े हो गए। बनाने वाला वही है। एक छोटे से घास को भी वही बनाता है। और दूर आकाश को छूते देवदार के वृक्ष को भी वही बनाता है। अगर दोनों के पीछे उसी का हाथ है, फिर कौन बड़ा कौन छोटा? उसी की हार है, उसी की जीत है। फिर हम सब शतरंज के मोहरे हैं। जीते तो वह, हारे तो वह। बड़ाई मिले तो उसे, बुराई मिले तो उसे। ध्यान रखना, तुमने बहुत बार भक्तों के वचन सुने होंगे, पढ़े होंगे। अनेक भक्त तुमने पाए होंगे; कहते हैं, बड़ाई तेरी, बुराई मेरी। ऊपर से देखने पर बहुत अच्छा लगता है। वे कहते हैं कि जो-जो भला है, तेरा; जो-जो बुरा है, मेरा। लगता है बड़े विनम्र हैं। लेकिन अगर बुराई तुम्हारी तो भलाई उसकी कैसे हो सकेगी? यह विनम्रता झूठी है। यह विनम्रता वास्तविक नहीं है। क्योंकि वास्तविक विनम्रता तो सभी दे देगी, कुछ भी न बचाएगी। तुमने अपने अहंकार के लिए थोड़ा सहारा फिर बचा लिया। और तुम कितना ही ऊपर-ऊपर से कहो कि बड़ाई तेरी और बुराई मेरी, लेकिन जब बुराई मेरी है तो बड़ाई तेरी होगी कैसे? असफलता मेरी और सफलता तेरी? यह बात थोथी है। या तो दोनों मेरे होंगे, या तो दोनों तेरे होंगे। इसलिए झूठी विनम्रता और सच्ची विनम्रता में बड़ा फर्क है। झूठी विनम्रता कहती है कि मैं तो आपके पैरों की धूल हूं, लेकिन हूं जरूर। और जब कोई आदमी कहता है, मैं आपके पैरों की धूल हूं, तब उसकी आंखों में देखना। वह आपसे अपेक्षा कर रहा है कि आप भी कहो कि नहीं-नहीं; आप और कैसे? मैं आपके पैरों की धूल हूं। उसकी आंखों में चाह है। और अगर आप मान लो कि बिल्कुल ठीक कह रहे हैं, यही तो मेरा विचार है; तो वह आदमी सदा के लिए दुश्मन हो जाएगा। और कभी आपको माफ न कर सकेगा। बड़ाई भी उसकी, बुराई भी उसकी । हम बीच में आते ही नहीं हैं। हम तो बांस की पोंगरी हो गए। वह गीत जैसा गाए उसका । इतनी भी अकड़ क्यों अपनी बचा कर रखना कि अगर भूलचूक होगी तो मेरी -- तब तो
दीपिका कक्कड़ और शोएब इब्राहिम अपने फैंस के साथ खूब इंटरैक्ट करते हैं। वे अपनी पर्सनल से लेकर प्रोफेशनल लाइफ तक के बारे में सब फैंस को अपडेट देते रहते हैं। अब एक्टर ने फैंस को गुड न्यूज दी है। शोएब इब्राहिम और दीपिका कक्कड़ टीवी के पॉपुलर कपल हैं। फैंस दोनों की जोड़ी को काफी पसंद करते हैं और अब दोनों ने फैंस को एक गुड न्यूज दी है। इस गुड न्यूज को शेयर करते हुए शोएब ने बताया कि वह काफी समय से उनको इस गुड न्यूज को देने का इंतजार था और अब फाइनली उनको ये मौका मिल गया है। एक वीडियो के जरिए दोनों ने ये बात बताई है। दीपिका भी इस दौरान काफी एक्साइटेड दिखीं। उनके चेहरे पर भी बड़ी स्माइल दिख रही है। अब इससे पहले कि आप कुछ और कयास लगाएं आपको बता दें कि ये जो गुड न्यूज है वो दोनों के घर से रिलेटेड है। दरअसल, शोएब ने अपना खुद का मुंबई में घर खरीद लिया है। शोएब ने वीडियो शेयर किया और कहा, 'मैं आप सभी के साथ एक गुड न्यूज शेयर करना चाहता हूं। मैंने फाइनली अपनी खुद की प्रॉपर्टी खरीद ली है मुंबई में। ' शोएब ने कहा, 'मैं साल 2009 में मुंबई आया था और अब फाइनली 2022 में मैं खुद का घर खरीद पाया हूं। 13 साल का ये सपना अब पूरा हो रहा है। सबसे जरूरी बात ये है कि मैं इसे अपनी के लिए ले रहा हूं। ' दीपिका ने आगे कहा, 'मुंबई में पहली प्रॉपर्टी जो है मेरी वो ये फ्लैट है और जब शोएब की अम्मी और परिवार मुंबई में शिफ्ट हुआ तो हमारे फ्लैट के नीचे वाला फ्लैट किराये के लिए खाली था तो वे लोग वहीं रहने लगे। तबसे लेकर अब तक अम्मी और परिवार वहीं उसी फ्लैट में रह रहा था। ' दोनो ने बताया कि कैसे इससे पहले उसी फ्लैट को मकान मालिक बेचना चाहते थे, लेकिन उस वक्त शोएब के पास इतने पैसे नहीं थे। अब फाइनली शोएब उसी फ्लैट को खरीद रहे हैं। दरअसल, शोएब चाहते थे कि उनका परिवार वहीं उसी फ्लैट में रहे क्योंकि विंग भी चेंज होता तो थोड़े दूर हो जाते हैं। शोएब ने कहा कि अब उनकी बहन भी अच्छा कर रही हैं तो अब ज्यादा जिम्मेदारी नहीं हैं। शोएब ने दीपिका की पॉपुलैरिटी पर भी बात की और कहा, 'सभी को पता है कि दीपिका कितनी फेमस है। वह मुझसे ज्यादा फेमस है और मैं इस बात को खुशी-खुशी मानता हूं और अब मैं गर्व के साथ रह सकता हूं कि मैंने भी अपनी मेहनत से खुद से कुछ किया है। ' दीपिका फिर आगे शोएब को लेकर कहती हैं, 'मुझे शोएब पर गर्व है क्योंकि शोएब काफी मेहनती हैं। उनके अंदर इस बात को लेकर कभी निराशा नहीं होती कि कौन कितना पॉपुलर। वह ये हर बार प्रूफ करते हैं कि उन्हें मुझपर गर्व है क्योंकि आदमियों के लिए ये आसान नहीं होता है। '
दीपिका कक्कड़ और शोएब इब्राहिम अपने फैंस के साथ खूब इंटरैक्ट करते हैं। वे अपनी पर्सनल से लेकर प्रोफेशनल लाइफ तक के बारे में सब फैंस को अपडेट देते रहते हैं। अब एक्टर ने फैंस को गुड न्यूज दी है। शोएब इब्राहिम और दीपिका कक्कड़ टीवी के पॉपुलर कपल हैं। फैंस दोनों की जोड़ी को काफी पसंद करते हैं और अब दोनों ने फैंस को एक गुड न्यूज दी है। इस गुड न्यूज को शेयर करते हुए शोएब ने बताया कि वह काफी समय से उनको इस गुड न्यूज को देने का इंतजार था और अब फाइनली उनको ये मौका मिल गया है। एक वीडियो के जरिए दोनों ने ये बात बताई है। दीपिका भी इस दौरान काफी एक्साइटेड दिखीं। उनके चेहरे पर भी बड़ी स्माइल दिख रही है। अब इससे पहले कि आप कुछ और कयास लगाएं आपको बता दें कि ये जो गुड न्यूज है वो दोनों के घर से रिलेटेड है। दरअसल, शोएब ने अपना खुद का मुंबई में घर खरीद लिया है। शोएब ने वीडियो शेयर किया और कहा, 'मैं आप सभी के साथ एक गुड न्यूज शेयर करना चाहता हूं। मैंने फाइनली अपनी खुद की प्रॉपर्टी खरीद ली है मुंबई में। ' शोएब ने कहा, 'मैं साल दो हज़ार नौ में मुंबई आया था और अब फाइनली दो हज़ार बाईस में मैं खुद का घर खरीद पाया हूं। तेरह साल का ये सपना अब पूरा हो रहा है। सबसे जरूरी बात ये है कि मैं इसे अपनी के लिए ले रहा हूं। ' दीपिका ने आगे कहा, 'मुंबई में पहली प्रॉपर्टी जो है मेरी वो ये फ्लैट है और जब शोएब की अम्मी और परिवार मुंबई में शिफ्ट हुआ तो हमारे फ्लैट के नीचे वाला फ्लैट किराये के लिए खाली था तो वे लोग वहीं रहने लगे। तबसे लेकर अब तक अम्मी और परिवार वहीं उसी फ्लैट में रह रहा था। ' दोनो ने बताया कि कैसे इससे पहले उसी फ्लैट को मकान मालिक बेचना चाहते थे, लेकिन उस वक्त शोएब के पास इतने पैसे नहीं थे। अब फाइनली शोएब उसी फ्लैट को खरीद रहे हैं। दरअसल, शोएब चाहते थे कि उनका परिवार वहीं उसी फ्लैट में रहे क्योंकि विंग भी चेंज होता तो थोड़े दूर हो जाते हैं। शोएब ने कहा कि अब उनकी बहन भी अच्छा कर रही हैं तो अब ज्यादा जिम्मेदारी नहीं हैं। शोएब ने दीपिका की पॉपुलैरिटी पर भी बात की और कहा, 'सभी को पता है कि दीपिका कितनी फेमस है। वह मुझसे ज्यादा फेमस है और मैं इस बात को खुशी-खुशी मानता हूं और अब मैं गर्व के साथ रह सकता हूं कि मैंने भी अपनी मेहनत से खुद से कुछ किया है। ' दीपिका फिर आगे शोएब को लेकर कहती हैं, 'मुझे शोएब पर गर्व है क्योंकि शोएब काफी मेहनती हैं। उनके अंदर इस बात को लेकर कभी निराशा नहीं होती कि कौन कितना पॉपुलर। वह ये हर बार प्रूफ करते हैं कि उन्हें मुझपर गर्व है क्योंकि आदमियों के लिए ये आसान नहीं होता है। '
फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप ने हाल ही में एक साक्षात्कार में कहा कि अभिनेता और संसद सदस्य रवि किशन मारिजुआना का इस्तेमाल करते थे। अब, रवि ने कहा है कि उसे अनुराग से इस तरह के बयान की उम्मीद नहीं थी। रवि ने शनिवार को एएनआई से कहा, 'मुझे अनुराग कश्यप से ऐसे शब्दों की उम्मीद नहीं थी। यह कोई रहस्य नहीं है कि मैं शिव का भक्त हूं इसलिए मैं उनका नाम जपता हूं। मुझे दुःख हुआ कि वह ड्रग्स पर युद्ध के इस मुद्दे पर मेरा समर्थन नहीं करेंगे और कहेंगे कि मैंने धूम्रपान किया और अब मैं सिर्फ इसलिए साफ हूं क्योंकि मैं एक मंत्री हूं, जो मैं नहींः रवि किशन। " अनुराग ने पत्रकार फेय डिसूजा को दिए एक साक्षात्कार में कहा था कि वह बॉलीवुड और भारतीय युवाओं की ड्रग समस्या के खिलाफ संसद में रवि के स्व-धार्मिक रुख से सहमत नहीं हैं। उन्होंने कहा, "रवि किशन ने मेरी आखिरी फिल्म मुक्काबाज़ में अभिनय किया। रवि किशन अपने दिन की शुरुआत जय शिव शंकर, जय बम भोले कहकर करते हैं। जय शिव शंभू अपने समय की सबसे लंबी अवधि के लिए, वह कोई है जिसने मारिजुआना का इस्तेमाल किया है। यह ज़िंदगी है। इसे हर कोई जानता है। पूरी दुनिया जानती है। एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जो यह नहीं जानता है कि रवि किशन धूम्रपान नहीं करता है।
फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप ने हाल ही में एक साक्षात्कार में कहा कि अभिनेता और संसद सदस्य रवि किशन मारिजुआना का इस्तेमाल करते थे। अब, रवि ने कहा है कि उसे अनुराग से इस तरह के बयान की उम्मीद नहीं थी। रवि ने शनिवार को एएनआई से कहा, 'मुझे अनुराग कश्यप से ऐसे शब्दों की उम्मीद नहीं थी। यह कोई रहस्य नहीं है कि मैं शिव का भक्त हूं इसलिए मैं उनका नाम जपता हूं। मुझे दुःख हुआ कि वह ड्रग्स पर युद्ध के इस मुद्दे पर मेरा समर्थन नहीं करेंगे और कहेंगे कि मैंने धूम्रपान किया और अब मैं सिर्फ इसलिए साफ हूं क्योंकि मैं एक मंत्री हूं, जो मैं नहींः रवि किशन। " अनुराग ने पत्रकार फेय डिसूजा को दिए एक साक्षात्कार में कहा था कि वह बॉलीवुड और भारतीय युवाओं की ड्रग समस्या के खिलाफ संसद में रवि के स्व-धार्मिक रुख से सहमत नहीं हैं। उन्होंने कहा, "रवि किशन ने मेरी आखिरी फिल्म मुक्काबाज़ में अभिनय किया। रवि किशन अपने दिन की शुरुआत जय शिव शंकर, जय बम भोले कहकर करते हैं। जय शिव शंभू अपने समय की सबसे लंबी अवधि के लिए, वह कोई है जिसने मारिजुआना का इस्तेमाल किया है। यह ज़िंदगी है। इसे हर कोई जानता है। पूरी दुनिया जानती है। एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जो यह नहीं जानता है कि रवि किशन धूम्रपान नहीं करता है।
सरकार ने सारे प्रयत्न कर लिये, सभी प्रकार के हथकडो का सहारा लिया लेकिन सत्याग्रही झुकने को तैयार नहीं हुए तो ऐसी स्थिति मे सरकार को सद्बुद्धि आयी। गवर्नर जनरल ने बातचीत के लिए सरदार साहब को आमंत्रित किया। इस बातचीत मे गवर्नर ने इस आश्वासन के साथ, कि सरकार योग्य मामलो की जॉच करके बढे हुए लगान को माफ कर देगी, यह मॉग की कि सत्याग्रह बन्द कर दिया जाय और लोग पहले के समान कर देना आरम्भ कर दे। वल्लभ भाई ने गवर्नर की इस मॉग को स्वीकार कर लिया किन्तु साथ ही उन्होने आन्दोलन के दौरान बन्दी बनाये गये लोगो को रिहा करने, सरकारी कर्मचारियो को पुन काम पर लेने, कुर्क किये गये माल और जमीन वापस करने की मॉग की। सरकार ने वल्लभ भाई की सारी बाते मान ली। इस प्रकार सरकार और वल्लभ भाई के मध्य समझौता हो गया। समझौते का स्वागत करते हुए सरदार पटेल ने 11 अगस्त, को बारदोली की जनता के लिए एक वक्तव्य प्रकाशित किया जिसमे उन्होने कहा कि, "ईश्वर की कृपा से हमने जो प्रतिज्ञा की थी उसका पूर्ण रूप से पालन हो चुका है। हम लोगो पर बढाये गये लगान के सबध मे हम जैसी जॉच चाहते थे, सरकार ने उसी प्रकार की जॉच समिति नियुक्त करना स्वीकार कर लिया है। जब्त की हुई जमीने किसानो को वापस मिलेगी। जेल मे बन्द सत्याग्रही छोड दिये जायेगे। पटेल और तलातियो को पुन नौकरी पर रखा जायेगा और जो छोटी-मोटी मॉगे हमने रखी थी, उनकी भी स्वीकृति हो गयी है। प्रकार वल्लभभाई ने बारदोली आन्दोलन मे सफलता प्राप्त की। देश के राष्ट्रीय नेताओ ने इसे अभूतपूर्व सफलता माना। गाँधी जी ने सफलता का श्रेय वल्लभभाई, गर्वनर, सरकारी अधिकारियो तथा विधानसभा के सदस्यों को दिया। उन्होने कहा कि "जिन्होने शुद्ध मन से चाहा कि समझौता हो जाय वे सब इस विजय मे हिस्सेदार है।" गाँधी के अनुसार वल्लभ भाई जैसे नेता के अथक प्रयत्नो से यह विजय मिली है। सरदार पटेल को मान पत्र देते हुए गाँधी जी ने कहा " ऐसा स्वार्थ त्यागी सरदार तुम्हे दूरारा नही मिलेगा। वे मेरे सगे भाई जैसे है किन्तु उन्हे यह प्रमाण पत्र देते हुए मुझे सकोच नही होता।' बाम्बे, क्रानिकल, 12 अगस्त, 1928 मेहरोत्रा, एन०सी०, कपूर, रजना, पूर्वो, पृ० 51 राष्ट्रीय नेताओ मे लाला लाजपतराय, मोतीलाल नेहरू, सुभाष चन्द्र बोस, सरोजनी नायडू, एम० बी कोठारी, मौलाना शौकत अली, विश्वनाथन, राजाराम पाडया, सत्यमूर्ति आदि ने पटेल को अभिनन्दन पत्र भेजे। के०एम० मुशी ने बारदोली की घटना को भारतीय सार्वजनिक जीवन के इतिहास में महत्वपूर्ण विजय बतलाया ।" बारदोली, सूरत एव गुजरात के अन्य हिस्सो मे विजयोत्सव मनाया गया। सरदार पटेल ने आभार प्रकट करते हुए कहा कि "बारदोली के लिए आप लोग मुझे श्रेय देते है लेकिन मै उसका पात्र नही हॅू। कोई असाध्य रोग से पीडित बीमार पलग पर पडा हो, और उसे कोई सन्यासी मिल जाये, जडी बूटी दे दे और उसकी मात्रा घिसकर पिलाने से रोगी स्वस्थ हो जाये ऐसी दशा हिन्दुस्तान के किसान की है। मै तो सिर्फ जडी-बूटी घिसकर पिलाने वाला हॅू जो एक सन्यासी एक सन्यासी ने मुझे दी। श्रेय अगर किसी को है तो उस जडी बूटी देने वाले को है। दूसरे अगर कोई सम्मान के पात्र है तो वे मेरे साथी है। जिन्होने चकित करने वाले अनुशासन का परिचय दिया। समझौते के तहत 18 अक्टूबर 1928 ई० को जॉच समिति की नियुक्ति सरकार ने कर दी। समिति ने 12 अप्रैल, 1929 ई० को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। समिति ने किसानो की शिकायतो को सही माना और लगान वृद्धि की संस्तुति के आधारो को दोषपूर्ण माना । समिति ने पुराने लगान पर 603 प्रतिशत वृद्धि की सिफारिश की । इस प्रकार सरदार पटेल के कुशल सगठन, दृढ निश्चय और जबदस्त प्रशासकीय क्षमता के सामने शक्तिशाली ब्रिटिश सरकार बौनी साबित । पार्लियामेण्टरी बोर्ड के अध्यक्ष सात अप्रैल, 1934 ई० को कांग्रेस ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन वापस ले लिया जिसके परिणामस्वरूप सरकार ने कांग्रेस महासमिति तथा उसकी सभी शाखाओ पर से प्रतिबंध हटा लिया। पटना मे इसी समय कांग्रेस महासमिति ने बैठक कर चुनाव के लिए एक पार्लियामेण्टरी बोर्ड का गठन किया । जिसका अध्यक्ष सरदार वल्लभ भाई पटेल को पारीख, नरहरिं, रारदार पटेल के भाषण (1918 से 1947 तक), अहमदाबाद, 1950, पृ० 160 ७४ मेहरोत्रा, एन०सी०, कपूर, रजना, पूर्वो, पृ० 74 बनाया गया जो अपने स्वर्गवास तक इस पद पर बने रहे। बोर्ड के अन्य सदस्य मोलाना अब्दुल कलाम आजाद, डॉ० राजेन्द्र प्रसाद, डॉ० असारी तथा पडित मदन मोहन मालवीय बनाये गये। अक्टूबर, 1934 ई० के बम्बई अधिवेशन मे इस बोर्ड को विधिवत मान्यता प्रदान कर दी गयी । "1934 ई० के ब्रिटिश सरकार के साम्प्रदायिक निर्णय से बोर्ड के दो सदस्यो डॉ० असारी तथा मदन मोहन मालवीय मे मतभेद पैदा हो गये ।' मालवीय जी का कहना था कि चुनाव के घोषणा पत्र मे इस निर्णय की निन्दा की जावे जबकि डॉ० असारी की इच्छा थी कि कांग्रेस इस सबध मे तटस्थ नीति अपना ले। इस मतभेद के कारण मालवीय जी ने पार्लियामेण्टरी बोर्ड से त्यागपत्र दे दिया। कुछ दिनो बाद डॉ० असारी का भी देहान्त हो गया। अत पार्लियामेण्टरी बोर्ड मे कुल तीन सदस्य सरदार पटेल, मौलाना कलाम आजाद, और राजेन्द्र प्रसाद ही रह गये । काग्रेस पार्लियमेण्टरी बोर्ड ने सरदार पटेल के नेतृत्व मे नवम्बर 1934 ई० मे हुए केन्द्रीय असेम्बली के चुनाव में भाग लिया। "सरदार पटेल के कुशल नेतृत्व मे काग्रेस ने 44 स्थानो पर विजय प्राप्त की। कांग्रेस ने भी झूलाभाई देसाई को असेम्बली में अपना नेता बनाया। कांग्रेस ने कांग्रेस नेशलिस्ट सदस्यो सहित अन्य दलो के साथ मिलकर कई बार सरकार को पराजित भी किया। ब्रिटिश ससद द्वारा पारित गवर्नमेण्ट ऑफ इडिया ऐक्ट 1935 के अनुसार प्रान्तीय धारा राभाओ का चुनाव होना था। इसके लिए 1935 ई० मे मतदाताओ की नयी सूची बनाने का कार्य प्रारम्भ हुआ। सरदार पटेल के निर्देशन में कांग्रेस कार्यकर्ताओ ने मतदाता सूची के निर्माण मे बढ-चढ़ कर हिस्सा लिया । 13 अप्रैल, 1936 ई० को जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता मे सम्पन्न हुए 9वे कांग्रेस के अधिवेशन में प्रान्तीय धारा सभाओ के चुनाव में भाग लेने का निर्णय लिया। जुलाई 1936 ई० मे पार्लियामेण्टरी बोर्ड का पुनर्गठन किया गया । जिसके अध्यक्ष के रूप मे सरदार पटेल तथा सचिव के रूप मे गोविन्द वल्लभ पन्त नियुक्त किये गये। सरदार पटेल की प्रेरणा से प्रान्तीय पार्लियामेण्टरी बोर्डो का भी गठन किया गया। चुनाव के उम्मीदवारो का चयन बडा कठिन कार्य था । "उम्मीदवारों का चयन पहले शास्त्री, आचार्य चन्द्रशेखर राष्ट्र निर्माता रारदार पटेल, दिल्ली 1963, पृ० 65 वही, पृ० 66 तो प्रान्तीय समिति की कार्यकारिणी करती थी परन्तु यदि कोई कार्यकर्ता प्रान्त के निर्णय ,,77 'सन्तुष्ट न हो तो वह उसकी अपील पार्लियामेण्टरी बोर्ड के पास करता था। उम्मीदवारो के चयन मे दो बातो का ध्यान रखा जाता था प्रथम - उम्मीदवार मे कांग्रेस के कार्यक्रमो एव सिद्धान्तो मे निष्ठा हो और द्वितीय उसके सफल होने की सम्भावना हो। पटेल के कुशल नेतृत्व मे अनेक मामलो मे पार्लियामेण्टरी बोर्ड ने सन्तोष जनक हल निकाल लिया पर उम्मीदवारों के चयन के मामले मे उन पर व्यक्तिगत आरोप भी लगाये गये । ऐसे आरोपो से बिना विचलित हुए सरदार पटेल ने अनुशासन बनाये रखने के अपने कर्तव्य को पूरा किया । स्वास्थ्य अच्छा न होते हुए भी सरदार पटेल ने चुनाव मे बढ-चढ़ कर हिस्सा लिया और चुनाव प्रचार मे बहुत सक्रिय रहे । चुनाव प्रचार हेतु उन्होने पजाब, उत्तर पश्चिमी सीमा प्रान्त, महाराष्ट्र, मद्रास सहित अन्य क्षेत्रो का दौरा किया। चुनाव प्रचार मे सरदार पटेल ने कार्यकर्ता से आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होने की अपील की। उन्होने कहा कि "यदि हम अवसर को देखकर नही चलेगे और अपनी महत्वाकाक्षाओ को देश के आगे गौण नही समझेगे, तो हम जीत की बाजी हार जायेगे और इससे हमारी सस्था की अपूर्णनीय बदनामी होगी.. 78 असन्तुष्ट सदस्यों को चेतावनी देते हुए सरदार पटेल ने कहा कि "पार्लियामेण्टरी बोर्ड के अध्यक्ष के नाते अपने अनुभव मे एक दो बाते मेरे सामने आयी। मैने देखा कि जब मे कुछ काग्रेसियो को उम्मीदवारं नही चुना गया तो उन्हें लगा की उनकी उपेक्षा की गयी है। कुछ को ऐसा महसूस होने लगा है कि उम्मीदवार चुने जाने का उनका वश परम्परागत अधिकार है। कुछ यह मानते है कि अगर इस मौके पर उन्हे उम्मीदवार नही चुना गया तो उन्हे कांग्रेस के खिलाफ बलवा करने का अधिकार है। मुझे और आपको चाहिए कि कांग्रेस की ताकत का आधार केवल लोगो की मर्जी पर नही है बल्कि इस बात पर है कि कांग्रेस के तमाम सदस्य और खासतौर पर कार्यकर्ता कांग्रेस के आदेशो और प्रस्तावो को खुशी से स्वीकार करे और उनका पालन करे। यदि हम लोगो मे अनुशासन न हो तो धारा सभाओ मेहरत्रा, एन०सी०, कपूर, रजना, सरदार वल्लभ भाई पटेल व्यक्ति एव विचार, दिल्ली, 1997 पृ० 69 पारीख, नरहरि, सरदार पटेल के भाषण (1918 से 1947 तक), अहमदाबाद, 1950, पृ० 328 एव 329
सरकार ने सारे प्रयत्न कर लिये, सभी प्रकार के हथकडो का सहारा लिया लेकिन सत्याग्रही झुकने को तैयार नहीं हुए तो ऐसी स्थिति मे सरकार को सद्बुद्धि आयी। गवर्नर जनरल ने बातचीत के लिए सरदार साहब को आमंत्रित किया। इस बातचीत मे गवर्नर ने इस आश्वासन के साथ, कि सरकार योग्य मामलो की जॉच करके बढे हुए लगान को माफ कर देगी, यह मॉग की कि सत्याग्रह बन्द कर दिया जाय और लोग पहले के समान कर देना आरम्भ कर दे। वल्लभ भाई ने गवर्नर की इस मॉग को स्वीकार कर लिया किन्तु साथ ही उन्होने आन्दोलन के दौरान बन्दी बनाये गये लोगो को रिहा करने, सरकारी कर्मचारियो को पुन काम पर लेने, कुर्क किये गये माल और जमीन वापस करने की मॉग की। सरकार ने वल्लभ भाई की सारी बाते मान ली। इस प्रकार सरकार और वल्लभ भाई के मध्य समझौता हो गया। समझौते का स्वागत करते हुए सरदार पटेल ने ग्यारह अगस्त, को बारदोली की जनता के लिए एक वक्तव्य प्रकाशित किया जिसमे उन्होने कहा कि, "ईश्वर की कृपा से हमने जो प्रतिज्ञा की थी उसका पूर्ण रूप से पालन हो चुका है। हम लोगो पर बढाये गये लगान के सबध मे हम जैसी जॉच चाहते थे, सरकार ने उसी प्रकार की जॉच समिति नियुक्त करना स्वीकार कर लिया है। जब्त की हुई जमीने किसानो को वापस मिलेगी। जेल मे बन्द सत्याग्रही छोड दिये जायेगे। पटेल और तलातियो को पुन नौकरी पर रखा जायेगा और जो छोटी-मोटी मॉगे हमने रखी थी, उनकी भी स्वीकृति हो गयी है। प्रकार वल्लभभाई ने बारदोली आन्दोलन मे सफलता प्राप्त की। देश के राष्ट्रीय नेताओ ने इसे अभूतपूर्व सफलता माना। गाँधी जी ने सफलता का श्रेय वल्लभभाई, गर्वनर, सरकारी अधिकारियो तथा विधानसभा के सदस्यों को दिया। उन्होने कहा कि "जिन्होने शुद्ध मन से चाहा कि समझौता हो जाय वे सब इस विजय मे हिस्सेदार है।" गाँधी के अनुसार वल्लभ भाई जैसे नेता के अथक प्रयत्नो से यह विजय मिली है। सरदार पटेल को मान पत्र देते हुए गाँधी जी ने कहा " ऐसा स्वार्थ त्यागी सरदार तुम्हे दूरारा नही मिलेगा। वे मेरे सगे भाई जैसे है किन्तु उन्हे यह प्रमाण पत्र देते हुए मुझे सकोच नही होता।' बाम्बे, क्रानिकल, बारह अगस्त, एक हज़ार नौ सौ अट्ठाईस मेहरोत्रा, एनशून्यसीशून्य, कपूर, रजना, पूर्वो, पृशून्य इक्यावन राष्ट्रीय नेताओ मे लाला लाजपतराय, मोतीलाल नेहरू, सुभाष चन्द्र बोस, सरोजनी नायडू, एमशून्य बी कोठारी, मौलाना शौकत अली, विश्वनाथन, राजाराम पाडया, सत्यमूर्ति आदि ने पटेल को अभिनन्दन पत्र भेजे। केशून्यएमशून्य मुशी ने बारदोली की घटना को भारतीय सार्वजनिक जीवन के इतिहास में महत्वपूर्ण विजय बतलाया ।" बारदोली, सूरत एव गुजरात के अन्य हिस्सो मे विजयोत्सव मनाया गया। सरदार पटेल ने आभार प्रकट करते हुए कहा कि "बारदोली के लिए आप लोग मुझे श्रेय देते है लेकिन मै उसका पात्र नही हॅू। कोई असाध्य रोग से पीडित बीमार पलग पर पडा हो, और उसे कोई सन्यासी मिल जाये, जडी बूटी दे दे और उसकी मात्रा घिसकर पिलाने से रोगी स्वस्थ हो जाये ऐसी दशा हिन्दुस्तान के किसान की है। मै तो सिर्फ जडी-बूटी घिसकर पिलाने वाला हॅू जो एक सन्यासी एक सन्यासी ने मुझे दी। श्रेय अगर किसी को है तो उस जडी बूटी देने वाले को है। दूसरे अगर कोई सम्मान के पात्र है तो वे मेरे साथी है। जिन्होने चकित करने वाले अनुशासन का परिचय दिया। समझौते के तहत अट्ठारह अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ अट्ठाईस ईशून्य को जॉच समिति की नियुक्ति सरकार ने कर दी। समिति ने बारह अप्रैल, एक हज़ार नौ सौ उनतीस ईशून्य को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। समिति ने किसानो की शिकायतो को सही माना और लगान वृद्धि की संस्तुति के आधारो को दोषपूर्ण माना । समिति ने पुराने लगान पर छः सौ तीन प्रतिशत वृद्धि की सिफारिश की । इस प्रकार सरदार पटेल के कुशल सगठन, दृढ निश्चय और जबदस्त प्रशासकीय क्षमता के सामने शक्तिशाली ब्रिटिश सरकार बौनी साबित । पार्लियामेण्टरी बोर्ड के अध्यक्ष सात अप्रैल, एक हज़ार नौ सौ चौंतीस ईशून्य को कांग्रेस ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन वापस ले लिया जिसके परिणामस्वरूप सरकार ने कांग्रेस महासमिति तथा उसकी सभी शाखाओ पर से प्रतिबंध हटा लिया। पटना मे इसी समय कांग्रेस महासमिति ने बैठक कर चुनाव के लिए एक पार्लियामेण्टरी बोर्ड का गठन किया । जिसका अध्यक्ष सरदार वल्लभ भाई पटेल को पारीख, नरहरिं, रारदार पटेल के भाषण , अहमदाबाद, एक हज़ार नौ सौ पचास, पृशून्य एक सौ साठ चौहत्तर मेहरोत्रा, एनशून्यसीशून्य, कपूर, रजना, पूर्वो, पृशून्य चौहत्तर बनाया गया जो अपने स्वर्गवास तक इस पद पर बने रहे। बोर्ड के अन्य सदस्य मोलाना अब्दुल कलाम आजाद, डॉशून्य राजेन्द्र प्रसाद, डॉशून्य असारी तथा पडित मदन मोहन मालवीय बनाये गये। अक्टूबर, एक हज़ार नौ सौ चौंतीस ईशून्य के बम्बई अधिवेशन मे इस बोर्ड को विधिवत मान्यता प्रदान कर दी गयी । "एक हज़ार नौ सौ चौंतीस ईशून्य के ब्रिटिश सरकार के साम्प्रदायिक निर्णय से बोर्ड के दो सदस्यो डॉशून्य असारी तथा मदन मोहन मालवीय मे मतभेद पैदा हो गये ।' मालवीय जी का कहना था कि चुनाव के घोषणा पत्र मे इस निर्णय की निन्दा की जावे जबकि डॉशून्य असारी की इच्छा थी कि कांग्रेस इस सबध मे तटस्थ नीति अपना ले। इस मतभेद के कारण मालवीय जी ने पार्लियामेण्टरी बोर्ड से त्यागपत्र दे दिया। कुछ दिनो बाद डॉशून्य असारी का भी देहान्त हो गया। अत पार्लियामेण्टरी बोर्ड मे कुल तीन सदस्य सरदार पटेल, मौलाना कलाम आजाद, और राजेन्द्र प्रसाद ही रह गये । काग्रेस पार्लियमेण्टरी बोर्ड ने सरदार पटेल के नेतृत्व मे नवम्बर एक हज़ार नौ सौ चौंतीस ईशून्य मे हुए केन्द्रीय असेम्बली के चुनाव में भाग लिया। "सरदार पटेल के कुशल नेतृत्व मे काग्रेस ने चौंतालीस स्थानो पर विजय प्राप्त की। कांग्रेस ने भी झूलाभाई देसाई को असेम्बली में अपना नेता बनाया। कांग्रेस ने कांग्रेस नेशलिस्ट सदस्यो सहित अन्य दलो के साथ मिलकर कई बार सरकार को पराजित भी किया। ब्रिटिश ससद द्वारा पारित गवर्नमेण्ट ऑफ इडिया ऐक्ट एक हज़ार नौ सौ पैंतीस के अनुसार प्रान्तीय धारा राभाओ का चुनाव होना था। इसके लिए एक हज़ार नौ सौ पैंतीस ईशून्य मे मतदाताओ की नयी सूची बनाने का कार्य प्रारम्भ हुआ। सरदार पटेल के निर्देशन में कांग्रेस कार्यकर्ताओ ने मतदाता सूची के निर्माण मे बढ-चढ़ कर हिस्सा लिया । तेरह अप्रैल, एक हज़ार नौ सौ छत्तीस ईशून्य को जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता मे सम्पन्न हुए नौवे कांग्रेस के अधिवेशन में प्रान्तीय धारा सभाओ के चुनाव में भाग लेने का निर्णय लिया। जुलाई एक हज़ार नौ सौ छत्तीस ईशून्य मे पार्लियामेण्टरी बोर्ड का पुनर्गठन किया गया । जिसके अध्यक्ष के रूप मे सरदार पटेल तथा सचिव के रूप मे गोविन्द वल्लभ पन्त नियुक्त किये गये। सरदार पटेल की प्रेरणा से प्रान्तीय पार्लियामेण्टरी बोर्डो का भी गठन किया गया। चुनाव के उम्मीदवारो का चयन बडा कठिन कार्य था । "उम्मीदवारों का चयन पहले शास्त्री, आचार्य चन्द्रशेखर राष्ट्र निर्माता रारदार पटेल, दिल्ली एक हज़ार नौ सौ तिरेसठ, पृशून्य पैंसठ वही, पृशून्य छयासठ तो प्रान्तीय समिति की कार्यकारिणी करती थी परन्तु यदि कोई कार्यकर्ता प्रान्त के निर्णय ,,सतहत्तर 'सन्तुष्ट न हो तो वह उसकी अपील पार्लियामेण्टरी बोर्ड के पास करता था। उम्मीदवारो के चयन मे दो बातो का ध्यान रखा जाता था प्रथम - उम्मीदवार मे कांग्रेस के कार्यक्रमो एव सिद्धान्तो मे निष्ठा हो और द्वितीय उसके सफल होने की सम्भावना हो। पटेल के कुशल नेतृत्व मे अनेक मामलो मे पार्लियामेण्टरी बोर्ड ने सन्तोष जनक हल निकाल लिया पर उम्मीदवारों के चयन के मामले मे उन पर व्यक्तिगत आरोप भी लगाये गये । ऐसे आरोपो से बिना विचलित हुए सरदार पटेल ने अनुशासन बनाये रखने के अपने कर्तव्य को पूरा किया । स्वास्थ्य अच्छा न होते हुए भी सरदार पटेल ने चुनाव मे बढ-चढ़ कर हिस्सा लिया और चुनाव प्रचार मे बहुत सक्रिय रहे । चुनाव प्रचार हेतु उन्होने पजाब, उत्तर पश्चिमी सीमा प्रान्त, महाराष्ट्र, मद्रास सहित अन्य क्षेत्रो का दौरा किया। चुनाव प्रचार मे सरदार पटेल ने कार्यकर्ता से आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होने की अपील की। उन्होने कहा कि "यदि हम अवसर को देखकर नही चलेगे और अपनी महत्वाकाक्षाओ को देश के आगे गौण नही समझेगे, तो हम जीत की बाजी हार जायेगे और इससे हमारी सस्था की अपूर्णनीय बदनामी होगी.. अठहत्तर असन्तुष्ट सदस्यों को चेतावनी देते हुए सरदार पटेल ने कहा कि "पार्लियामेण्टरी बोर्ड के अध्यक्ष के नाते अपने अनुभव मे एक दो बाते मेरे सामने आयी। मैने देखा कि जब मे कुछ काग्रेसियो को उम्मीदवारं नही चुना गया तो उन्हें लगा की उनकी उपेक्षा की गयी है। कुछ को ऐसा महसूस होने लगा है कि उम्मीदवार चुने जाने का उनका वश परम्परागत अधिकार है। कुछ यह मानते है कि अगर इस मौके पर उन्हे उम्मीदवार नही चुना गया तो उन्हे कांग्रेस के खिलाफ बलवा करने का अधिकार है। मुझे और आपको चाहिए कि कांग्रेस की ताकत का आधार केवल लोगो की मर्जी पर नही है बल्कि इस बात पर है कि कांग्रेस के तमाम सदस्य और खासतौर पर कार्यकर्ता कांग्रेस के आदेशो और प्रस्तावो को खुशी से स्वीकार करे और उनका पालन करे। यदि हम लोगो मे अनुशासन न हो तो धारा सभाओ मेहरत्रा, एनशून्यसीशून्य, कपूर, रजना, सरदार वल्लभ भाई पटेल व्यक्ति एव विचार, दिल्ली, एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे पृशून्य उनहत्तर पारीख, नरहरि, सरदार पटेल के भाषण , अहमदाबाद, एक हज़ार नौ सौ पचास, पृशून्य तीन सौ अट्ठाईस एव तीन सौ उनतीस
रिडेवः ] विशेषाभावे तदयोगान्, स्वा'नेऽपि कुम्भादौ स्वाप्नजलाहरणाद्यर्थक्रियाकारित्वादेः सस्वाथ । व्यावहारिकस्य तस्य विवक्षायां चात्माश्रयात् । नापि ब्रह्मधोबाध्यत्वत दन्यधीबाध्यत्वाभ्यां भेदः, त्वन्मते रूप्यादेरपि शुक्त्यवच्छिन्नब्रह्मधीबाध्यत्वात् । ब्रह्मव्यध्यस्तस्य प्रातिभासिकस्य क्षणिकत्वादेरपि ब्रहाघोबाध्यत्वाच्च । नापि ब्रह्मप्रमावाध्यत्वतदन्यप्रमाबाध्यत्वाभ्यां भेदः, त्वन्मते ब्रह्मज्ञानस्यैव प्रमात्वात् । नापि प्रमाबाध्यत्वं. भ्रान्तिवाध्यत्वाभ्यां भेदः, भ्रान्तिबाध्यत्वस्य ब्रह्मण्यपि सत्त्वात् । नापि शुद्धब्रह्मभीबाध्यत्वतदन्यधीबाध्यत्वाभ्यां भेदः, शुद्धशब्देन भ्रान्तिदशायामशाताधिष्ठानभूत विशे ध्यमात्रोक्तौ तज्ज्ञानस्याबाधकत्वात् तत्कालाशातेन द्वितीयाभावादिना विशिष्टस्योपभद्वैत सिद्धिः योगाच । नाप्यर्थक्रियाकारित्वाकारित्वाभ्यां विशेषः, स्वाप्नघटादौ स्वाप्नजलाहराअर्थक्रियादर्शनात् । न चार्थक्रयायां व्यावहारिकत्वं विशेषणम्, अन्योन्याश्रयात् स्वाप्नाङ्गनालिङ्गनादौ प्रातिभासिके व्यावहारिक सुखजनके अतिव्याप्तंश्च । नापि ब्रह्मज्ञानवा भ्यत्वतद्भिन्नज्ञानवाध्यत्वाभ्यां विशेषः, त्वन्मते रूप्यादेरपि शुक्त्यवच्छिन्नब्रह्मधोवाध्यत्वाद् ब्रह्मण्यध्यस्तस्य क्षणिकत्वादेरपि प्रातिभासिकस्य ब्रह्मधीबाध्य त्वेनातिप्रसद्गाच्च। नापि ब्रह्मप्रमावाध्यत्वतदन्यप्रमाबाध्यत्वाभ्यां विशेषः, त्वन्मते ब्रह्मज्ञानस्यैव प्रमात्वात् । नापि प्रमाबाध्यत्वभ्रान्तिबाध्यत्वाध्यां विशेषः, भ्यत्वस्य ब्रह्मण्यपि सत्वात् । नापि पारमार्थिर्काविषयधीबाध्यत्वव्यावहारिक विषय- घटादि में भी जलाहरणादिरूप अर्थक्रिया को क्षमता देखी जाती है । अर्थक्रिया ( प्रयोजन ) का व्यावहारिक विशेषण देने पर आत्माश्रय अन्योऽन्याश्रयादि दोष होते हैं, एवं स्वाप्न कामिनी-स्पर्शादि प्रातिभासिक पदार्थों में व्यावहारिकत्व लक्षण की अतिव्यामि भी होती है, क्योंकि वह भी व्यावहारिक सुखरूप अर्थक्रिया का जनक होता है । 'व्यावहारिक पदार्थ ब्रह्म-ज्ञान के द्वारा ही बाधित होते हैं, किन्तु प्रातिभासिक रजतादि पदार्थ ब्रह्म-ज्ञान से भिन्न शुक्ति-ज्ञानादि के द्वारा भी बाघित होते हैं - इस प्रकार भी दोनों में भेद नहीं डाला जा सकता, क्योंकि आप ( अद्वैती ) के मत में शुक्त्यवच्छिन्न ब्रह्मरूप चैतन्य के ज्ञान से ही रजतादि प्रातिभासिक पदार्थों का भी बाघ माना जाता है। ब्रह्म में अध्यस्तक्षणिकत्वादि प्रातिभासिक पदार्थों का भी ब्रह्म-ज्ञान के द्वारा ही वाघ होने के कारण व्यावहारिकत्व का लक्षण उनमें अतिव्याप्त भी हो जाता है । आप ( अद्वेनी ) के मतानुसार ब्रह्म प्रमा और ब्रह्म ज्ञान में कुछ अन्तर नहीं, अतः ब्रह्मप्रमा- बाध्यत्व और ब्रह्म प्रमान्यप्रमा-बाध्यत्व के द्वारा भी व्यावहारिक और प्रातिभासिक का भेद नहीं किया जा सकता । यदि कहा जाय कि ब्रह्म-ज्ञान सर्वथा अबाधित विषयक होने के कारण प्रमा है और 'नेदं रजतम्' - इत्यादि व्यावहारिक बाघ बाघितविषयक होने के कारण भ्रान्तिरूप ही माने जाते हैं, अतः व्यावहारिक प्रपञ्च प्रमा से और प्रातिभासिक पदार्थ भ्रान्ति से बाधित होने के कारण भिन्न भिन्न माने जाते हैं। ! तो ऐसा भी नहीं कह सकते, क्योंकि 'ब्रह्म मिथ्या' - इस प्रकार की भ्रान्ति से ब्रह्म का भी बाघ देखा जाता है। ब्रह्मरूप पारमार्थिक विषय को विषय करने वाली बुद्धि से व्यावहारिक का और शुक्त्यादि व्यावहारिक विषय को विषय करनेवाली बुद्धि से प्रातिभासिक पदार्थों का वाध होने के कारण भी दोनों का भेद नहीं माना जा सकता, क्योंकि
रिडेवः ] विशेषाभावे तदयोगान्, स्वा'नेऽपि कुम्भादौ स्वाप्नजलाहरणाद्यर्थक्रियाकारित्वादेः सस्वाथ । व्यावहारिकस्य तस्य विवक्षायां चात्माश्रयात् । नापि ब्रह्मधोबाध्यत्वत दन्यधीबाध्यत्वाभ्यां भेदः, त्वन्मते रूप्यादेरपि शुक्त्यवच्छिन्नब्रह्मधीबाध्यत्वात् । ब्रह्मव्यध्यस्तस्य प्रातिभासिकस्य क्षणिकत्वादेरपि ब्रहाघोबाध्यत्वाच्च । नापि ब्रह्मप्रमावाध्यत्वतदन्यप्रमाबाध्यत्वाभ्यां भेदः, त्वन्मते ब्रह्मज्ञानस्यैव प्रमात्वात् । नापि प्रमाबाध्यत्वं. भ्रान्तिवाध्यत्वाभ्यां भेदः, भ्रान्तिबाध्यत्वस्य ब्रह्मण्यपि सत्त्वात् । नापि शुद्धब्रह्मभीबाध्यत्वतदन्यधीबाध्यत्वाभ्यां भेदः, शुद्धशब्देन भ्रान्तिदशायामशाताधिष्ठानभूत विशे ध्यमात्रोक्तौ तज्ज्ञानस्याबाधकत्वात् तत्कालाशातेन द्वितीयाभावादिना विशिष्टस्योपभद्वैत सिद्धिः योगाच । नाप्यर्थक्रियाकारित्वाकारित्वाभ्यां विशेषः, स्वाप्नघटादौ स्वाप्नजलाहराअर्थक्रियादर्शनात् । न चार्थक्रयायां व्यावहारिकत्वं विशेषणम्, अन्योन्याश्रयात् स्वाप्नाङ्गनालिङ्गनादौ प्रातिभासिके व्यावहारिक सुखजनके अतिव्याप्तंश्च । नापि ब्रह्मज्ञानवा भ्यत्वतद्भिन्नज्ञानवाध्यत्वाभ्यां विशेषः, त्वन्मते रूप्यादेरपि शुक्त्यवच्छिन्नब्रह्मधोवाध्यत्वाद् ब्रह्मण्यध्यस्तस्य क्षणिकत्वादेरपि प्रातिभासिकस्य ब्रह्मधीबाध्य त्वेनातिप्रसद्गाच्च। नापि ब्रह्मप्रमावाध्यत्वतदन्यप्रमाबाध्यत्वाभ्यां विशेषः, त्वन्मते ब्रह्मज्ञानस्यैव प्रमात्वात् । नापि प्रमाबाध्यत्वभ्रान्तिबाध्यत्वाध्यां विशेषः, भ्यत्वस्य ब्रह्मण्यपि सत्वात् । नापि पारमार्थिर्काविषयधीबाध्यत्वव्यावहारिक विषय- घटादि में भी जलाहरणादिरूप अर्थक्रिया को क्षमता देखी जाती है । अर्थक्रिया का व्यावहारिक विशेषण देने पर आत्माश्रय अन्योऽन्याश्रयादि दोष होते हैं, एवं स्वाप्न कामिनी-स्पर्शादि प्रातिभासिक पदार्थों में व्यावहारिकत्व लक्षण की अतिव्यामि भी होती है, क्योंकि वह भी व्यावहारिक सुखरूप अर्थक्रिया का जनक होता है । 'व्यावहारिक पदार्थ ब्रह्म-ज्ञान के द्वारा ही बाधित होते हैं, किन्तु प्रातिभासिक रजतादि पदार्थ ब्रह्म-ज्ञान से भिन्न शुक्ति-ज्ञानादि के द्वारा भी बाघित होते हैं - इस प्रकार भी दोनों में भेद नहीं डाला जा सकता, क्योंकि आप के मत में शुक्त्यवच्छिन्न ब्रह्मरूप चैतन्य के ज्ञान से ही रजतादि प्रातिभासिक पदार्थों का भी बाघ माना जाता है। ब्रह्म में अध्यस्तक्षणिकत्वादि प्रातिभासिक पदार्थों का भी ब्रह्म-ज्ञान के द्वारा ही वाघ होने के कारण व्यावहारिकत्व का लक्षण उनमें अतिव्याप्त भी हो जाता है । आप के मतानुसार ब्रह्म प्रमा और ब्रह्म ज्ञान में कुछ अन्तर नहीं, अतः ब्रह्मप्रमा- बाध्यत्व और ब्रह्म प्रमान्यप्रमा-बाध्यत्व के द्वारा भी व्यावहारिक और प्रातिभासिक का भेद नहीं किया जा सकता । यदि कहा जाय कि ब्रह्म-ज्ञान सर्वथा अबाधित विषयक होने के कारण प्रमा है और 'नेदं रजतम्' - इत्यादि व्यावहारिक बाघ बाघितविषयक होने के कारण भ्रान्तिरूप ही माने जाते हैं, अतः व्यावहारिक प्रपञ्च प्रमा से और प्रातिभासिक पदार्थ भ्रान्ति से बाधित होने के कारण भिन्न भिन्न माने जाते हैं। ! तो ऐसा भी नहीं कह सकते, क्योंकि 'ब्रह्म मिथ्या' - इस प्रकार की भ्रान्ति से ब्रह्म का भी बाघ देखा जाता है। ब्रह्मरूप पारमार्थिक विषय को विषय करने वाली बुद्धि से व्यावहारिक का और शुक्त्यादि व्यावहारिक विषय को विषय करनेवाली बुद्धि से प्रातिभासिक पदार्थों का वाध होने के कारण भी दोनों का भेद नहीं माना जा सकता, क्योंकि