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(५०) बेनी प्रवीन वाजपेयी
ये लखनऊ के रहने वाले कान्य कुब्ज ब्राह्मण थे। इन्हें लखनऊ के बादशाह गाजीउद्दीन हैदर के दीवान ललन जी एवं बिठूर के महाराज नानाराव जी का आश्रय प्राप्त था । कहा जाता है कि भड़ौआ लिखने वाले देनी चदीजन से इनका एक बार विवाद हुआ था। इनकी कविताओं से प्रभावित होकर उन्होंने इन्हे "प्रवीन" की उपाधि दे दी थी। इन्हें कोई संतान नहीं थी । जीवन के अतिम दिनों में रोग ग्रस्त होकर सपत्नीक अर्बुद चले गये। वहीं इनका देहान्त हुआ ।
बेनी प्रवीन जी की तीन रचनाओ - १. शृंगार भूषण, २. नवरस तरंग और ३. नानाराव प्रकाश - का उल्लेख मिलता है। किन्तु इनमें केवल "नवरस तरग" उपलब्ध है। इसकी रचना सन् १८१७ में ललन जी की आज्ञा से हुई । ग्रंथ में नायिका भेद, रसभेद और भाव-भेद का निरूपण हुआ है। इस युग के अन्य ग्रंथों की भाँति इसमे भी शृंगार रस की प्रधानता है। बेनी प्रवीन आचार्य होने के साथ भावुक कवि थे । नायिका भेद के अन्तर्गत इन्होंने प्रेम-क्रीड़ा सम्बन्धी अनेक सरस कल्पनाएँ को हैं। भाषा प्रवाह पूर्ण कोमल पदावली से युक्त है ।
उदाहरणार्थ इनके दो सवैये देखिए ---
मालिनि ह्व हरवा गुहि देत, चुरी पहिनावें बने चुरिहेरी, नायन ह्वै निरुवारत केस, हमेस करें बने जोगिन फेरी । बेनी प्रवीन बनाय बिरी, बरईनि बने रहें राधिका केरी, नन्द किशोर सदा बृषभानु की, पौरि पै बैठि बिकै बनिचेरी । १. भोरहिं न्योति गई तो तुम्हें, वह गोकुल गाँव की ग्वालिनि गोरी, आधिक राति लो बेनी प्रवीन, कहा ढिग राखि करी बरजोरी । आवे हँसी मोहि देखत लालन, भाल में दीन्ह महाउर बोरी, एते बड़े ब्रजमंडल मैं, न मिली कहूँ माँगेहु रंचक रोरी ।। (५१) चेतन
इनकी एक रचना "लघु पिंगल" नाम से उपलब्ध है। पुस्तक में कुल ४६ पृष्ठ हैं और रचना काल सन् १८२० का है । पुस्तक में ४२ छंदों और ३५ राग रागिनियो के लक्षण और उदाहरण दिये गये है। उदाहरणों में उपदेश और वैराग्य की प्रवृत्ति अधिक है। पुस्तक के प्रारम्भ में चैत्यवन्दन नाम का
१. मिश्र बन्धु विनोद ( खण्ड-२), १०८३६-४१ | बेनी प्रवीन वाजपेयी ये लखनऊ के रहने वाले कान्य कुब्ज ब्राह्मण थे। इन्हें लखनऊ के बादशाह गाजीउद्दीन हैदर के दीवान ललन जी एवं बिठूर के महाराज नानाराव जी का आश्रय प्राप्त था । कहा जाता है कि भड़ौआ लिखने वाले देनी चदीजन से इनका एक बार विवाद हुआ था। इनकी कविताओं से प्रभावित होकर उन्होंने इन्हे "प्रवीन" की उपाधि दे दी थी। इन्हें कोई संतान नहीं थी । जीवन के अतिम दिनों में रोग ग्रस्त होकर सपत्नीक अर्बुद चले गये। वहीं इनका देहान्त हुआ । बेनी प्रवीन जी की तीन रचनाओ - एक. शृंगार भूषण, दो. नवरस तरंग और तीन. नानाराव प्रकाश - का उल्लेख मिलता है। किन्तु इनमें केवल "नवरस तरग" उपलब्ध है। इसकी रचना सन् एक हज़ार आठ सौ सत्रह में ललन जी की आज्ञा से हुई । ग्रंथ में नायिका भेद, रसभेद और भाव-भेद का निरूपण हुआ है। इस युग के अन्य ग्रंथों की भाँति इसमे भी शृंगार रस की प्रधानता है। बेनी प्रवीन आचार्य होने के साथ भावुक कवि थे । नायिका भेद के अन्तर्गत इन्होंने प्रेम-क्रीड़ा सम्बन्धी अनेक सरस कल्पनाएँ को हैं। भाषा प्रवाह पूर्ण कोमल पदावली से युक्त है । उदाहरणार्थ इनके दो सवैये देखिए --- मालिनि ह्व हरवा गुहि देत, चुरी पहिनावें बने चुरिहेरी, नायन ह्वै निरुवारत केस, हमेस करें बने जोगिन फेरी । बेनी प्रवीन बनाय बिरी, बरईनि बने रहें राधिका केरी, नन्द किशोर सदा बृषभानु की, पौरि पै बैठि बिकै बनिचेरी । एक. भोरहिं न्योति गई तो तुम्हें, वह गोकुल गाँव की ग्वालिनि गोरी, आधिक राति लो बेनी प्रवीन, कहा ढिग राखि करी बरजोरी । आवे हँसी मोहि देखत लालन, भाल में दीन्ह महाउर बोरी, एते बड़े ब्रजमंडल मैं, न मिली कहूँ माँगेहु रंचक रोरी ।। चेतन इनकी एक रचना "लघु पिंगल" नाम से उपलब्ध है। पुस्तक में कुल छियालीस पृष्ठ हैं और रचना काल सन् एक हज़ार आठ सौ बीस का है । पुस्तक में बयालीस छंदों और पैंतीस राग रागिनियो के लक्षण और उदाहरण दिये गये है। उदाहरणों में उपदेश और वैराग्य की प्रवृत्ति अधिक है। पुस्तक के प्रारम्भ में चैत्यवन्दन नाम का एक. मिश्र बन्धु विनोद , दस हज़ार आठ सौ छत्तीस-इकतालीस |
भारतीय ओलंपिक संघ ने पहलवानों के बृजभूषण शरण सिंह के विरूद्ध यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए समिति गठित की. विरोध कर रहे पहलवानों ने शुक्रवार को भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) से भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह के विरूद्ध यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए जांच समिति के गठन की मांग की थी. जिसके कारण शुक्रवार शाम भारतीय ओलंपिक संघ ने पहलवानों की मांगों पर चर्चा के लिए कार्यकारी परिषद की आपात बैठक बुलाई थी. मीटिंग में बड़ा निर्णय हुआ है. IOA ने WFI प्रमुख के विरूद्ध यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए सात सदस्यीय समिति का गठन किया है. सात सदस्यीय समिति के सदस्य मैरी कॉम, डोला बनर्जी, अलकनंदा अशोक, योगेश्वर दत्त, सहदेव यादव सहित अन्य हैं.
इससे एक दिन पहले पहलवानों ने इस खेल प्रशासक के विरूद्ध कई एफआईआर दर्ज कराने की धमकी दी थी. आईओए अध्यक्ष पीटी उषा को लिखे पत्र में पहलवानों ने डब्ल्यूएफआई की ओर से (कोष में) वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाने के अतिरिक्त दावा किया कि राष्ट्रीय शिविर में कोच और खेल विज्ञान स्टाफ 'बिल्कुल अक्षम' हैं.
इस पत्र पर पांच पहलवानों के हस्ताक्षर हैं जिसमें तोक्यो ओलंपिक के पदक विजेता रवि दहिया और बजरंग पूनिया भी शामिल हैं. रियो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता साक्षी मलिक और विश्व चैंपियनशिप के पदक विजेता विनेश फोगाट और दीपक पूनिया ने भी इस पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं.
| भारतीय ओलंपिक संघ ने पहलवानों के बृजभूषण शरण सिंह के विरूद्ध यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए समिति गठित की. विरोध कर रहे पहलवानों ने शुक्रवार को भारतीय ओलंपिक संघ से भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह के विरूद्ध यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए जांच समिति के गठन की मांग की थी. जिसके कारण शुक्रवार शाम भारतीय ओलंपिक संघ ने पहलवानों की मांगों पर चर्चा के लिए कार्यकारी परिषद की आपात बैठक बुलाई थी. मीटिंग में बड़ा निर्णय हुआ है. IOA ने WFI प्रमुख के विरूद्ध यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए सात सदस्यीय समिति का गठन किया है. सात सदस्यीय समिति के सदस्य मैरी कॉम, डोला बनर्जी, अलकनंदा अशोक, योगेश्वर दत्त, सहदेव यादव सहित अन्य हैं. इससे एक दिन पहले पहलवानों ने इस खेल प्रशासक के विरूद्ध कई एफआईआर दर्ज कराने की धमकी दी थी. आईओए अध्यक्ष पीटी उषा को लिखे पत्र में पहलवानों ने डब्ल्यूएफआई की ओर से वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाने के अतिरिक्त दावा किया कि राष्ट्रीय शिविर में कोच और खेल विज्ञान स्टाफ 'बिल्कुल अक्षम' हैं. इस पत्र पर पांच पहलवानों के हस्ताक्षर हैं जिसमें तोक्यो ओलंपिक के पदक विजेता रवि दहिया और बजरंग पूनिया भी शामिल हैं. रियो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता साक्षी मलिक और विश्व चैंपियनशिप के पदक विजेता विनेश फोगाट और दीपक पूनिया ने भी इस पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं. |
देवरिया में खामपार पुलिस ने उत्तर प्रदेश से बिहार शराब ले जा तस्कर को गिरफ्तार कर लिया। मंगलवार को मुखबिर ने वाहन से शराब बिहार ले जाने की जानकारी दी। थानाध्यक्ष दीपक कुमार ने पुलिस बल के साथ बिहार जाने वाले रास्ते पर निगरानी बढ़ा दी। श्रीरामपुर मठिया गांव के नजदीक नीले रंग का टेंपो लोडर आता दिखाई दिया। पुलिस टीम ने जब रुकने का इशारा किया तो चालक भागने की फिराक में था। सतर्क पुलिस टीम ने चालक को पकड़ लिया।
विक्रम लोडर से रॉयल स्टेज 36 बोतल प्रत्येक 750 एमएल, रॉयल स्टेज 18 बोतल प्रत्येक 376 एमएल, ऑफिसर च्वॉयस ट्रेटा पैक फ्रूटी 81 पैक प्रत्येक 180 एमएल और 8 पीएम ट्रेटा पैक फ्रूटी 187 पीस प्रत्येक 180 एमएल अंग्रेजी शराब बरामद हुआ।
थानाध्यक्ष दीपक कुमार ने बताया कि वह क्षेत्र में गश्त पर थे। तभी विक्रम लोडर नम्बर बीआर 31 पीए 7062 आते हुए दिखाई दिया। वाहन रोककर तलाशी लेने पर उसमें से अंग्रेज़ी शराब की खेप बरामद हुई। शराब लदे वाहन के साथ बिहार के छपरा जिला के थाना सोनपुर के ग्राम पहलेजा शाहपुर दियरा निवासी सन्तोष कुमार पुत्र सुदेश राय को गिरफ्तार किया गया है। उसके विरूद्ध आबकारी अधिनियम में मुकदमा दर्ज कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। जहां से न्यायालय ने जेल भेज दिया।
थानाध्यक्ष खामपार दीपक कुमार, एसआई अविनाश मौर्य,हेड कांस्टेबल राजू प्रसाद,कांस्टेबल अजय कुमार ,राम सागर गुप्ता,शिवेंद्र चौधरी और राम नाथ चौहान शामिल रहे।
पुलिस अधीक्षक संकल्प शर्मा ने कहा कि शासन द्वारा नशे के विरूद्ध चलाए जा रहे अभियान के क्रम में जिले के लार और खामपार थानाक्षेत्र में दो बड़ी कार्रवाई की है। इसमें हरियाणा निर्मित 13 लाख रूपए कीमत की शराब बरामद किया है। इसमें एक ट्रक और भार वाहक वाहन को भी जब्त किया गया है। साथ ही दो तस्करों को गिरफ्तार किया गया है।
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| देवरिया में खामपार पुलिस ने उत्तर प्रदेश से बिहार शराब ले जा तस्कर को गिरफ्तार कर लिया। मंगलवार को मुखबिर ने वाहन से शराब बिहार ले जाने की जानकारी दी। थानाध्यक्ष दीपक कुमार ने पुलिस बल के साथ बिहार जाने वाले रास्ते पर निगरानी बढ़ा दी। श्रीरामपुर मठिया गांव के नजदीक नीले रंग का टेंपो लोडर आता दिखाई दिया। पुलिस टीम ने जब रुकने का इशारा किया तो चालक भागने की फिराक में था। सतर्क पुलिस टीम ने चालक को पकड़ लिया। विक्रम लोडर से रॉयल स्टेज छत्तीस बोतल प्रत्येक सात सौ पचास एमएल, रॉयल स्टेज अट्ठारह बोतल प्रत्येक तीन सौ छिहत्तर एमएल, ऑफिसर च्वॉयस ट्रेटा पैक फ्रूटी इक्यासी पैक प्रत्येक एक सौ अस्सी एमएल और आठ पीएम ट्रेटा पैक फ्रूटी एक सौ सत्तासी पीस प्रत्येक एक सौ अस्सी एमएल अंग्रेजी शराब बरामद हुआ। थानाध्यक्ष दीपक कुमार ने बताया कि वह क्षेत्र में गश्त पर थे। तभी विक्रम लोडर नम्बर बीआर इकतीस पीए सात हज़ार बासठ आते हुए दिखाई दिया। वाहन रोककर तलाशी लेने पर उसमें से अंग्रेज़ी शराब की खेप बरामद हुई। शराब लदे वाहन के साथ बिहार के छपरा जिला के थाना सोनपुर के ग्राम पहलेजा शाहपुर दियरा निवासी सन्तोष कुमार पुत्र सुदेश राय को गिरफ्तार किया गया है। उसके विरूद्ध आबकारी अधिनियम में मुकदमा दर्ज कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। जहां से न्यायालय ने जेल भेज दिया। थानाध्यक्ष खामपार दीपक कुमार, एसआई अविनाश मौर्य,हेड कांस्टेबल राजू प्रसाद,कांस्टेबल अजय कुमार ,राम सागर गुप्ता,शिवेंद्र चौधरी और राम नाथ चौहान शामिल रहे। पुलिस अधीक्षक संकल्प शर्मा ने कहा कि शासन द्वारा नशे के विरूद्ध चलाए जा रहे अभियान के क्रम में जिले के लार और खामपार थानाक्षेत्र में दो बड़ी कार्रवाई की है। इसमें हरियाणा निर्मित तेरह लाख रूपए कीमत की शराब बरामद किया है। इसमें एक ट्रक और भार वाहक वाहन को भी जब्त किया गया है। साथ ही दो तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
मादा प्रजनन प्रणाली का माइक्रोफ़्लोरा बहुत ही महत्वपूर्ण हैअस्थिर है यह विभिन्न प्रकार की दवाओं, रोगों, न्यून प्रतिरक्षा और घनिष्ठ स्वच्छता के तुच्छ गैर-अवलोकन द्वारा परेशान किया जा सकता है। कुछ साल पहले, विशेषज्ञों ने अप्रचलित दवाओं को पुनर्स्थापित करने के लिए नियुक्त किया। अब नवीनतम दवा दिखाई गई - "लैक्टोनॉर्म" इस संरचना के इस्तेमाल पर निर्देश लेख में आपके ध्यान में प्रस्तुत किया जाएगा। आप दवा का उपयोग करने की सुविधाओं के बारे में सीखेंगे। इसके अलावा उल्लेखनीय है कि किस प्रकार की समीक्षा और कीमतें दवा है।
उपयोग के लिए निर्देश (एनोटेशन), समीक्षादवा कैप्सूल के रूप होने की रिपोर्ट है संरचना एक जिलेटिन शेल में पैक होती है, जो योनि श्लेष्म के प्रभाव में घुल जाती है। दवा का सक्रिय पदार्थ लाभकारी बैक्टीरिया का एक जटिल है इसलिए, एक कैप्सूल में लगभग एक सौ मिलियन लैक्टोबैसिली होती है, जो सामान्य रूप से योनि में मौजूद होनी चाहिए।
तो, "लैक्टोनॉर्म" - कैप्सूल उपयोग के लिए निर्देश प्रत्येक पैकेज से जुड़े होते हैं। औषधि एक गत्ते का डिब्बा, जो दवा के व्यापार नाम और योनि गोलियों की राशि को निर्दिष्ट में बंद है।
"लैक्टोनॉर्म" की रचना के बारे में टिप्पणी क्या करती है? उपयोग के लिए निर्देश, चिकित्सा पेशेवरों द्वारा दवा का विवरण, यह सूचित करता है कि संरचना योनि के माइक्रोफ्लोरा को पुनर्स्थापित करती है। इसलिए, कैप्सूल के उपयोग के संकेत निम्नलिखित स्थितियां हैंः
उपयोग के लिए दवा "लैक्टोनॉर्म" निर्देश के बारे में सूचित करता है कि यह न केवल उपचार के लिए, बल्कि रोकथाम के लिए भी प्रयोग किया जाता है। यह ध्यान देने योग्य है कि इस मामले में एक अलग योजना चुनी जाती है।
इसका उपयोग करने के लिए प्रतिबंधों के बारे में क्या कहा गया हैप्रयोग के लिए "लैक्टोनॉर्म" निर्देश तैयार करना? टिप्पणियां बताती हैं कि दवाएं महिलाओं के लिए निर्धारित नहीं हैं जो जिलेटिन कैप्सूल के प्रति अतिसंवेदनशील हैं।
इसके अलावा संरचना का इस्तेमाल तब भी नहीं किया जाता है जबवल्वोवैजिना कैंडिडिआसिस सीधे शब्दों में कहें, छलनी, छिपी और तीव्र, इलाज के लिए एक सीधा contraindication है। इस स्थिति में दवा का उपयोग करते समय, एक जटिलता को उकसाया जा सकता है।
उपयोग के लिए "लैक्टोनॉर्म" निर्देशों की संरचना के बारे मेंरिपोर्ट करती है कि गर्भावस्था और बाद में स्तनपान के दौरान दवा का उपयोग किया जा सकता है हालांकि इस अवधि के दौरान सबसे ज्यादा दवाओं को मनाया जाने वाला है।
यह संरचना स्थानीय रूप से संचालित होती है और नहींप्रणालीगत परिसंचरण में अवशोषित इसलिए, दवा भविष्य की मां और उसके बच्चे को नुकसान नहीं पहुंचा सकती इसके विपरीत, कई चिकित्सक प्राकृतिक तरीके से प्रसव से पहले उपयोग के लिए यह उपाय सुझाते हैं।
पैकेज खोलें और दो के साथ कैप्सूल लेंउंगलियों। एक आरामदायक मुद्रा ले लो और दवा को योनि में डालना। उंगली संरचना को जहां तक संभव हो, धक्का दे। उसके बाद, आप अपना सामान्य व्यवसाय शुरू कर सकते हैं।
दवा खुली नहीं जा सकने से पहलेखोल। यह जिलेटिन कैप्सूल स्वतंत्र रूप से घुलता है और अतिरिक्त उपचार की आवश्यकता नहीं है। यदि आवश्यक हो, तो आप इस तरह के दवाओं के प्रशासन के लिए एक अतिरिक्त applicator का उपयोग कर सकते हैं। चिकित्सक से इस डिवाइस के बारे में पूछें और इसके प्रयोग की विधि को निर्दिष्ट करें।
आपको पता चला कि यह दवा की रिपोर्ट करता हैउपयोग के लिए लैक्टोनॉर्म निर्देश संरचना की कीमत उस क्षेत्र पर निर्भर करती है जिसमें इसे खरीदा जाता है। दवा की औसत लागत 400 रूबल है। इस राशि के लिए आप 14 कैप्सूल की मात्रा में एक दवा पैकेज खरीद सकते हैं।
कभी-कभी फार्मेसी श्रृंखलाएं छूट प्रदान करती हैं। इस मामले में, आप 350 रूबल के लिए एक रचना खरीद सकते हैं। यह इस दवा का बहुत अच्छा मूल्य है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि यह संरचनाबहुत उपयोगकर्ता के अनुकूल है अन्य योनि गोलियों और suppositories के विपरीत, यह दवा योनि से बाहर नहीं निकलती, इसलिए, अंडरवियर साफ रहता है दवा मिनटों के एक मामले में घुलती है यही कारण है कि रोगी को क्षैतिज स्थिति में अतिरिक्त रहने की आवश्यकता नहीं है।
डॉक्टरों की रिपोर्ट है कि इस दवाइसी तरह के योगों की तुलना में 10 गुना अधिक लैक्टोबैसिलि होता है। चिकित्सक अक्सर योनि संक्रमण के दीर्घकालिक उपचार के बाद इस दवा का सुझाव देते हैं। इस प्रकार की रोकथाम में माइक्रोफ्लोरा के परिवर्तन से जुड़े जटिलताओं के विकास से बचने की अनुमति मिलती है। दवा वितरण से पहले प्रयोग किया जाता है। यह योनि के पौधों को पुनर्स्थापित करने और गर्भ के किसी भी संक्रमण से बचने में मदद करता है।
स्त्री रोग विशेषज्ञों की रिपोर्ट है कि यहदवा एक विशिष्ट विशेषता है जिस पर विचार किया जाना चाहिए। यह मासिक धर्म के बाद इस्तेमाल किया जाना चाहिए रक्तस्राव के दौरान संरचना का उपयोग करने के लिए कोई चिकित्सा प्रभाव नहीं होगा। दवा सुरक्षित है और उन सभी महिलाओं द्वारा इस्तेमाल किया जा सकता है जो यौन संबंध रखते हैं।
| मादा प्रजनन प्रणाली का माइक्रोफ़्लोरा बहुत ही महत्वपूर्ण हैअस्थिर है यह विभिन्न प्रकार की दवाओं, रोगों, न्यून प्रतिरक्षा और घनिष्ठ स्वच्छता के तुच्छ गैर-अवलोकन द्वारा परेशान किया जा सकता है। कुछ साल पहले, विशेषज्ञों ने अप्रचलित दवाओं को पुनर्स्थापित करने के लिए नियुक्त किया। अब नवीनतम दवा दिखाई गई - "लैक्टोनॉर्म" इस संरचना के इस्तेमाल पर निर्देश लेख में आपके ध्यान में प्रस्तुत किया जाएगा। आप दवा का उपयोग करने की सुविधाओं के बारे में सीखेंगे। इसके अलावा उल्लेखनीय है कि किस प्रकार की समीक्षा और कीमतें दवा है। उपयोग के लिए निर्देश , समीक्षादवा कैप्सूल के रूप होने की रिपोर्ट है संरचना एक जिलेटिन शेल में पैक होती है, जो योनि श्लेष्म के प्रभाव में घुल जाती है। दवा का सक्रिय पदार्थ लाभकारी बैक्टीरिया का एक जटिल है इसलिए, एक कैप्सूल में लगभग एक सौ मिलियन लैक्टोबैसिली होती है, जो सामान्य रूप से योनि में मौजूद होनी चाहिए। तो, "लैक्टोनॉर्म" - कैप्सूल उपयोग के लिए निर्देश प्रत्येक पैकेज से जुड़े होते हैं। औषधि एक गत्ते का डिब्बा, जो दवा के व्यापार नाम और योनि गोलियों की राशि को निर्दिष्ट में बंद है। "लैक्टोनॉर्म" की रचना के बारे में टिप्पणी क्या करती है? उपयोग के लिए निर्देश, चिकित्सा पेशेवरों द्वारा दवा का विवरण, यह सूचित करता है कि संरचना योनि के माइक्रोफ्लोरा को पुनर्स्थापित करती है। इसलिए, कैप्सूल के उपयोग के संकेत निम्नलिखित स्थितियां हैंः उपयोग के लिए दवा "लैक्टोनॉर्म" निर्देश के बारे में सूचित करता है कि यह न केवल उपचार के लिए, बल्कि रोकथाम के लिए भी प्रयोग किया जाता है। यह ध्यान देने योग्य है कि इस मामले में एक अलग योजना चुनी जाती है। इसका उपयोग करने के लिए प्रतिबंधों के बारे में क्या कहा गया हैप्रयोग के लिए "लैक्टोनॉर्म" निर्देश तैयार करना? टिप्पणियां बताती हैं कि दवाएं महिलाओं के लिए निर्धारित नहीं हैं जो जिलेटिन कैप्सूल के प्रति अतिसंवेदनशील हैं। इसके अलावा संरचना का इस्तेमाल तब भी नहीं किया जाता है जबवल्वोवैजिना कैंडिडिआसिस सीधे शब्दों में कहें, छलनी, छिपी और तीव्र, इलाज के लिए एक सीधा contraindication है। इस स्थिति में दवा का उपयोग करते समय, एक जटिलता को उकसाया जा सकता है। उपयोग के लिए "लैक्टोनॉर्म" निर्देशों की संरचना के बारे मेंरिपोर्ट करती है कि गर्भावस्था और बाद में स्तनपान के दौरान दवा का उपयोग किया जा सकता है हालांकि इस अवधि के दौरान सबसे ज्यादा दवाओं को मनाया जाने वाला है। यह संरचना स्थानीय रूप से संचालित होती है और नहींप्रणालीगत परिसंचरण में अवशोषित इसलिए, दवा भविष्य की मां और उसके बच्चे को नुकसान नहीं पहुंचा सकती इसके विपरीत, कई चिकित्सक प्राकृतिक तरीके से प्रसव से पहले उपयोग के लिए यह उपाय सुझाते हैं। पैकेज खोलें और दो के साथ कैप्सूल लेंउंगलियों। एक आरामदायक मुद्रा ले लो और दवा को योनि में डालना। उंगली संरचना को जहां तक संभव हो, धक्का दे। उसके बाद, आप अपना सामान्य व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। दवा खुली नहीं जा सकने से पहलेखोल। यह जिलेटिन कैप्सूल स्वतंत्र रूप से घुलता है और अतिरिक्त उपचार की आवश्यकता नहीं है। यदि आवश्यक हो, तो आप इस तरह के दवाओं के प्रशासन के लिए एक अतिरिक्त applicator का उपयोग कर सकते हैं। चिकित्सक से इस डिवाइस के बारे में पूछें और इसके प्रयोग की विधि को निर्दिष्ट करें। आपको पता चला कि यह दवा की रिपोर्ट करता हैउपयोग के लिए लैक्टोनॉर्म निर्देश संरचना की कीमत उस क्षेत्र पर निर्भर करती है जिसमें इसे खरीदा जाता है। दवा की औसत लागत चार सौ रूबल है। इस राशि के लिए आप चौदह कैप्सूल की मात्रा में एक दवा पैकेज खरीद सकते हैं। कभी-कभी फार्मेसी श्रृंखलाएं छूट प्रदान करती हैं। इस मामले में, आप तीन सौ पचास रूबल के लिए एक रचना खरीद सकते हैं। यह इस दवा का बहुत अच्छा मूल्य है। उपभोक्ताओं का कहना है कि यह संरचनाबहुत उपयोगकर्ता के अनुकूल है अन्य योनि गोलियों और suppositories के विपरीत, यह दवा योनि से बाहर नहीं निकलती, इसलिए, अंडरवियर साफ रहता है दवा मिनटों के एक मामले में घुलती है यही कारण है कि रोगी को क्षैतिज स्थिति में अतिरिक्त रहने की आवश्यकता नहीं है। डॉक्टरों की रिपोर्ट है कि इस दवाइसी तरह के योगों की तुलना में दस गुना अधिक लैक्टोबैसिलि होता है। चिकित्सक अक्सर योनि संक्रमण के दीर्घकालिक उपचार के बाद इस दवा का सुझाव देते हैं। इस प्रकार की रोकथाम में माइक्रोफ्लोरा के परिवर्तन से जुड़े जटिलताओं के विकास से बचने की अनुमति मिलती है। दवा वितरण से पहले प्रयोग किया जाता है। यह योनि के पौधों को पुनर्स्थापित करने और गर्भ के किसी भी संक्रमण से बचने में मदद करता है। स्त्री रोग विशेषज्ञों की रिपोर्ट है कि यहदवा एक विशिष्ट विशेषता है जिस पर विचार किया जाना चाहिए। यह मासिक धर्म के बाद इस्तेमाल किया जाना चाहिए रक्तस्राव के दौरान संरचना का उपयोग करने के लिए कोई चिकित्सा प्रभाव नहीं होगा। दवा सुरक्षित है और उन सभी महिलाओं द्वारा इस्तेमाल किया जा सकता है जो यौन संबंध रखते हैं। |
चंबा। अपनी मांगों को लेकर कामगारों ने रविवार को मजदूर संघ के जिला अध्यक्ष जय सिंह की अगुवाई में उपायुक्त आवास के बाहर धरना प्रदर्शन किया। करीब आधा घंटे तक धरने पर डटे मजदूरों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। इस मौके पर वे उपायुक्त से मिले। उन्होंने उपायुक्त को बताया कि जिले में जो भी काम ठेकेदार के माध्यम से हो रहे हैं, उसमें स्थानीय युवकों की जगह प्रवासियों को लगाया जा रहा है। इसके अलावा ईपीएफ के नाम पर भी युवाओं से धोखा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कई युवकों को दो-दो साल से ईपीएफ नहीं दिया जा रहा है। इसके अलावा कार्य के दौरान कोई चोटिल हो जाता है तो उसे मेडिकल सहायता भी नहीं दी जा रही है, जबकि उनकी दैनिक मजदूरी काट ली जाती है। उन्होंने कहा कि ठेकेदार मनमानी कर रहे हैं। वे मर्जी से मजदूरों को काम पर रख रहे हैं और मनमर्जी से निकाल रहे हैं। इसके अलावा मासिक मानदेय भी समय पर नहीं दिया जाता है। उन्होंने कहा कि कई बार दो-दो माह बाद मानदेय मिलता है। कामगार रोशन, आकाश, अमन, चीकू, विकास, शिवम, सुरेंद्र, सोनिया, परमेश अनूप और ज्योति ने बताया कि वे ठेकेदारी प्रथा से काफी तंग आ चुके हैं। उन्होंने कहा कि ठेकेदार उनकी मजबूरियों का फायदा उठाकर उनका शोषण कर रहे हैं। इसके चलते उन्होंने ठेकेदारी प्रथा को बंद करने की अपील की है। उधर, उपायुक्त संदीप कदम ने मजदूरों को जल्द मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया है।
| चंबा। अपनी मांगों को लेकर कामगारों ने रविवार को मजदूर संघ के जिला अध्यक्ष जय सिंह की अगुवाई में उपायुक्त आवास के बाहर धरना प्रदर्शन किया। करीब आधा घंटे तक धरने पर डटे मजदूरों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। इस मौके पर वे उपायुक्त से मिले। उन्होंने उपायुक्त को बताया कि जिले में जो भी काम ठेकेदार के माध्यम से हो रहे हैं, उसमें स्थानीय युवकों की जगह प्रवासियों को लगाया जा रहा है। इसके अलावा ईपीएफ के नाम पर भी युवाओं से धोखा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कई युवकों को दो-दो साल से ईपीएफ नहीं दिया जा रहा है। इसके अलावा कार्य के दौरान कोई चोटिल हो जाता है तो उसे मेडिकल सहायता भी नहीं दी जा रही है, जबकि उनकी दैनिक मजदूरी काट ली जाती है। उन्होंने कहा कि ठेकेदार मनमानी कर रहे हैं। वे मर्जी से मजदूरों को काम पर रख रहे हैं और मनमर्जी से निकाल रहे हैं। इसके अलावा मासिक मानदेय भी समय पर नहीं दिया जाता है। उन्होंने कहा कि कई बार दो-दो माह बाद मानदेय मिलता है। कामगार रोशन, आकाश, अमन, चीकू, विकास, शिवम, सुरेंद्र, सोनिया, परमेश अनूप और ज्योति ने बताया कि वे ठेकेदारी प्रथा से काफी तंग आ चुके हैं। उन्होंने कहा कि ठेकेदार उनकी मजबूरियों का फायदा उठाकर उनका शोषण कर रहे हैं। इसके चलते उन्होंने ठेकेदारी प्रथा को बंद करने की अपील की है। उधर, उपायुक्त संदीप कदम ने मजदूरों को जल्द मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया है। |
रूसी प्रीस्कूलर के व्यक्तित्व का गठन -एक बहुआयामी और कठिन प्रक्रिया। इस उम्र में हर दिन एक बच्चा अपने लिए नई घटना खोलता है, उसके आस-पास की दुनिया से परिचित हो जाता है, प्रकृति के अनुरूप रहने के लिए सीखता है। ज्ञान की इच्छा अधिकतम गतिविधि की ओर ले जाती है, जो स्वयं के आसपास होने वाली सभी घटनाओं से गुज़रती है। बच्चा लगातार विकास के लिए तैयार है, इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि इस अवधि में, उसके बगल में, एक वयस्क सलाहकार था। बच्चों के लिए एक शिक्षक मुख्य भूमिका मॉडल, नए ज्ञान का स्रोत, एक डिफेंडर और एक दोस्त है।
200 9 में, शिक्षा मंत्रालय औररूसी संघ के, पूर्व संघीय शिक्षा के बुनियादी कार्यक्रमों के लिए नए संघीय मानकों को पेश किया गया था। प्रीस्कूलर के लिए सामग्री और नैदानिक तरीकों को इस दस्तावेज़ में परिभाषित किया गया है।
एक आम के गठन पर विशेष ध्यान दिया जाता हैसंस्कृति, व्यक्तिगत गुणों का विकास, बौद्धिक और शारीरिक विकास। स्वास्थ्य के संरक्षण और प्रचार, भविष्य के छात्रों के मानसिक विकास में कमियों में सुधार के आकलन के लिए निदान किया जाता है। किंडरगार्टन में किए गए निगरानी का उद्देश्य पूर्वस्कूली शिक्षा की गुणवत्ता का विश्लेषण करना, नए तरीकों और डॉव के काम के रूपों की खोज करना है।
विशेषताओं का एक सेट औरगुण, धन्यवाद जो करने के लिए प्री-स्कूल शिक्षा के स्तर है कि उम्र विशेषताओं से मेल खाती है करने के लिए बच्चे को के व्यापक विकास के द्वारा की गारंटी है। बुनियादी और प्रायोगिक अनुसंधान के एकीकरण, preschoolers के लिए विशेष नैदानिक तकनीकों GEF प्रत्येक बच्चे के विकास पर नियंत्रण रख सकते। मनोवैज्ञानिक विश्वास है कि विकास के इस स्तर पर निर्धारित ज्ञान, कौशल, कौशल का योग है कि कक्षा में बच्चे में एम्बेडेड रहे हैं, और व्यक्तिगत और बौद्धिक गुणों का एक सेट का गठन द्वारा नहीं प्राप्त करने के लिए कर रहे हैं।
गेमिंग के नैदानिक तरीकोंप्रीस्कूल बच्चों को 4-5 साल की उम्र के बच्चों के दृश्य और प्रभावी सोच के मनोविज्ञानज्ञों को निर्देशित किया जाता है। निचली पंक्ति कागज पर स्पष्ट रूप से और थोड़े समय में खींचे गए आंकड़ों को काटना है। छह समान वर्गों में, विभिन्न ज्यामितीय आंकड़े चित्रित किए गए हैं। परीक्षण के दौरान बच्चे को एक पूर्ण तस्वीर नहीं मिलती है, लेकिन व्यक्तिगत वर्ग। प्रयोगकर्ता पहले छः वर्गों में एक शीट काटता है, फिर वैकल्पिक रूप से बच्चे के टुकड़े, एक असाइनमेंट, कैंची देता है। इस तरह के निदान के परिणामों का मूल्यांकन करने के लिए, कार्य की सटीकता, कार्य पर बिताए गए समय को ध्यान में रखा जाता है।
उस कार्य के साथ मुकाबला करने वाले बच्चे द्वारा 10 अंक प्राप्त किए जाते हैं3 मिनट के लिए। नमूने के समोच्च के साथ आंकड़े स्पष्ट रूप से काटा जाना चाहिए। मामले के साथ सामना करने के लिए बच्चे को 7 मिनट नहीं होने के मामले में अंक (0-1) की न्यूनतम संख्या, इसके अलावा, मूल और नक्काशीदार आकृति के बीच गंभीर अंतर हैं।
विशेष नैदानिक तरीकों का निर्माण किया गया हैप्रीस्कूलर के लिए डॉव, ध्यान की मात्रा निर्धारित करने की इजाजत देता है। शीट बिंदीदार है, तो कार्यक्षेत्र आठ समान वर्गों में काटा जाता है, वे ढेर होते हैं ताकि प्रति शीट की संख्या लगातार बढ़ जाती है। शिक्षक (या मनोविज्ञानी) 1-2 सेकंड के खींचे गए अंक वाले बच्चे कार्ड दिखाता है। तब खाली कोशिकाओं में बच्चा आकृति में देखे गए अंकों की संख्या को पुनः उत्पन्न करता है। दिखाए गए कार्डों के बीच देखभाल करने वाले ने कार्य को करने के लिए, उसे देखे गए चित्र को याद रखने के लिए बच्चे को 15 सेकंड दिए। इस तरह के प्रीस्कूलर के लिए नैदानिक तकनीक दस-बिंदु पैमाने पर इंगित करती है। यदि बच्चा आवंटित समय अंतराल के भीतर सफलतापूर्वक 6 या अधिक अंक के साथ प्रतिलिपि बनाता है, तो उसे 10 अंक मिलते हैं। स्मृति 1-3 अंक से पुनर्प्राप्त होने पर एक बच्चे को 3 से अधिक अंक प्राप्त नहीं होते हैं, यह अपर्याप्त रूप से गठित स्मृति को इंगित करता है, ध्यान केंद्रित करने में असमर्थता।
मानसिक विकास के नैदानिक तरीकोंप्रीस्कूल बच्चे कुछ स्मृति प्रक्रियाओं के अध्ययन पर केंद्रित हैंः संरक्षण, याद, प्रजनन। आप स्वैच्छिक ध्यान निर्धारित करने के लिए प्रीस्कूलर की स्मृति स्थिति का आकलन करने के लिए इस एल्गोरिदम का उपयोग कर सकते हैं। शिक्षक दस शब्दों का नाम देता है, बच्चा सुनता है, किसी भी क्रम में उन्हें पुनः उत्पन्न करने की कोशिश करता है। प्रीस्कूल बच्चों के लिए इस तरह के डायग्नोस्टिक तरीके 3-4 रीडिंग मानते हैं, फिर एक किंडरगार्टन के छात्र द्वारा शब्दों की पुनरावृत्ति होती है। प्रयोग एक घंटे बाद दोहराया जाता है, फिर दो, विशेष जर्नल में बच्चे द्वारा उच्चारण शब्दों की संख्या तय करना। उदाहरण के लिए, आप शब्दों का उपयोग कर सकते हैं जंगल, बिल्ली, सपना, स्टंप, दिन, सुबह, रात, भाई, बहन, मशरूम।
गिनती से पता चलता है कि स्वस्थ बच्चों मेंउच्च बौद्धिक विकास धीरे-धीरे सही शब्दों की संख्या में वृद्धि करता है, और स्मृति और चेतना विकार वाले बच्चे अंततः शब्दों को भूल जाते हैं। पूर्वस्कूली बच्चों के लिए इस तरह के नैदानिक तरीकों से ग्राफ के निर्माण का सुझाव मिलता है, जो पूर्वस्कूली बच्चों के विकास का स्तर निर्धारित करता है।
| रूसी प्रीस्कूलर के व्यक्तित्व का गठन -एक बहुआयामी और कठिन प्रक्रिया। इस उम्र में हर दिन एक बच्चा अपने लिए नई घटना खोलता है, उसके आस-पास की दुनिया से परिचित हो जाता है, प्रकृति के अनुरूप रहने के लिए सीखता है। ज्ञान की इच्छा अधिकतम गतिविधि की ओर ले जाती है, जो स्वयं के आसपास होने वाली सभी घटनाओं से गुज़रती है। बच्चा लगातार विकास के लिए तैयार है, इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि इस अवधि में, उसके बगल में, एक वयस्क सलाहकार था। बच्चों के लिए एक शिक्षक मुख्य भूमिका मॉडल, नए ज्ञान का स्रोत, एक डिफेंडर और एक दोस्त है। दो सौ नौ में, शिक्षा मंत्रालय औररूसी संघ के, पूर्व संघीय शिक्षा के बुनियादी कार्यक्रमों के लिए नए संघीय मानकों को पेश किया गया था। प्रीस्कूलर के लिए सामग्री और नैदानिक तरीकों को इस दस्तावेज़ में परिभाषित किया गया है। एक आम के गठन पर विशेष ध्यान दिया जाता हैसंस्कृति, व्यक्तिगत गुणों का विकास, बौद्धिक और शारीरिक विकास। स्वास्थ्य के संरक्षण और प्रचार, भविष्य के छात्रों के मानसिक विकास में कमियों में सुधार के आकलन के लिए निदान किया जाता है। किंडरगार्टन में किए गए निगरानी का उद्देश्य पूर्वस्कूली शिक्षा की गुणवत्ता का विश्लेषण करना, नए तरीकों और डॉव के काम के रूपों की खोज करना है। विशेषताओं का एक सेट औरगुण, धन्यवाद जो करने के लिए प्री-स्कूल शिक्षा के स्तर है कि उम्र विशेषताओं से मेल खाती है करने के लिए बच्चे को के व्यापक विकास के द्वारा की गारंटी है। बुनियादी और प्रायोगिक अनुसंधान के एकीकरण, preschoolers के लिए विशेष नैदानिक तकनीकों GEF प्रत्येक बच्चे के विकास पर नियंत्रण रख सकते। मनोवैज्ञानिक विश्वास है कि विकास के इस स्तर पर निर्धारित ज्ञान, कौशल, कौशल का योग है कि कक्षा में बच्चे में एम्बेडेड रहे हैं, और व्यक्तिगत और बौद्धिक गुणों का एक सेट का गठन द्वारा नहीं प्राप्त करने के लिए कर रहे हैं। गेमिंग के नैदानिक तरीकोंप्रीस्कूल बच्चों को चार-पाँच साल की उम्र के बच्चों के दृश्य और प्रभावी सोच के मनोविज्ञानज्ञों को निर्देशित किया जाता है। निचली पंक्ति कागज पर स्पष्ट रूप से और थोड़े समय में खींचे गए आंकड़ों को काटना है। छह समान वर्गों में, विभिन्न ज्यामितीय आंकड़े चित्रित किए गए हैं। परीक्षण के दौरान बच्चे को एक पूर्ण तस्वीर नहीं मिलती है, लेकिन व्यक्तिगत वर्ग। प्रयोगकर्ता पहले छः वर्गों में एक शीट काटता है, फिर वैकल्पिक रूप से बच्चे के टुकड़े, एक असाइनमेंट, कैंची देता है। इस तरह के निदान के परिणामों का मूल्यांकन करने के लिए, कार्य की सटीकता, कार्य पर बिताए गए समय को ध्यान में रखा जाता है। उस कार्य के साथ मुकाबला करने वाले बच्चे द्वारा दस अंक प्राप्त किए जाते हैंतीन मिनट के लिए। नमूने के समोच्च के साथ आंकड़े स्पष्ट रूप से काटा जाना चाहिए। मामले के साथ सामना करने के लिए बच्चे को सात मिनट नहीं होने के मामले में अंक की न्यूनतम संख्या, इसके अलावा, मूल और नक्काशीदार आकृति के बीच गंभीर अंतर हैं। विशेष नैदानिक तरीकों का निर्माण किया गया हैप्रीस्कूलर के लिए डॉव, ध्यान की मात्रा निर्धारित करने की इजाजत देता है। शीट बिंदीदार है, तो कार्यक्षेत्र आठ समान वर्गों में काटा जाता है, वे ढेर होते हैं ताकि प्रति शीट की संख्या लगातार बढ़ जाती है। शिक्षक एक-दो सेकंड के खींचे गए अंक वाले बच्चे कार्ड दिखाता है। तब खाली कोशिकाओं में बच्चा आकृति में देखे गए अंकों की संख्या को पुनः उत्पन्न करता है। दिखाए गए कार्डों के बीच देखभाल करने वाले ने कार्य को करने के लिए, उसे देखे गए चित्र को याद रखने के लिए बच्चे को पंद्रह सेकंड दिए। इस तरह के प्रीस्कूलर के लिए नैदानिक तकनीक दस-बिंदु पैमाने पर इंगित करती है। यदि बच्चा आवंटित समय अंतराल के भीतर सफलतापूर्वक छः या अधिक अंक के साथ प्रतिलिपि बनाता है, तो उसे दस अंक मिलते हैं। स्मृति एक-तीन अंक से पुनर्प्राप्त होने पर एक बच्चे को तीन से अधिक अंक प्राप्त नहीं होते हैं, यह अपर्याप्त रूप से गठित स्मृति को इंगित करता है, ध्यान केंद्रित करने में असमर्थता। मानसिक विकास के नैदानिक तरीकोंप्रीस्कूल बच्चे कुछ स्मृति प्रक्रियाओं के अध्ययन पर केंद्रित हैंः संरक्षण, याद, प्रजनन। आप स्वैच्छिक ध्यान निर्धारित करने के लिए प्रीस्कूलर की स्मृति स्थिति का आकलन करने के लिए इस एल्गोरिदम का उपयोग कर सकते हैं। शिक्षक दस शब्दों का नाम देता है, बच्चा सुनता है, किसी भी क्रम में उन्हें पुनः उत्पन्न करने की कोशिश करता है। प्रीस्कूल बच्चों के लिए इस तरह के डायग्नोस्टिक तरीके तीन-चार रीडिंग मानते हैं, फिर एक किंडरगार्टन के छात्र द्वारा शब्दों की पुनरावृत्ति होती है। प्रयोग एक घंटे बाद दोहराया जाता है, फिर दो, विशेष जर्नल में बच्चे द्वारा उच्चारण शब्दों की संख्या तय करना। उदाहरण के लिए, आप शब्दों का उपयोग कर सकते हैं जंगल, बिल्ली, सपना, स्टंप, दिन, सुबह, रात, भाई, बहन, मशरूम। गिनती से पता चलता है कि स्वस्थ बच्चों मेंउच्च बौद्धिक विकास धीरे-धीरे सही शब्दों की संख्या में वृद्धि करता है, और स्मृति और चेतना विकार वाले बच्चे अंततः शब्दों को भूल जाते हैं। पूर्वस्कूली बच्चों के लिए इस तरह के नैदानिक तरीकों से ग्राफ के निर्माण का सुझाव मिलता है, जो पूर्वस्कूली बच्चों के विकास का स्तर निर्धारित करता है। |
ह्यूस्टनः अमेरिका में भारतीय मूल की एक अनुसंधानकर्ता की जॉगिंग करते हुए हत्या कर दी गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने घटना के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि शर्मिष्ठा सेन (43) टेक्सास के प्लानो शहर में रहती थीं। बीती एक अगस्त को शहर के चिशोल्म ट्रेल पार्क के पास जॉगिंग करते समय उन पर अचानक से हमला किया गया और उनकी हत्या कर दी गई।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, लीगेसी ड्राइव और मार्चमैन वे के पास क्रीक इलाके में एक राहगीर ने उनके शव को देखा। शर्मिष्ठा फार्मासिस्ट और अनुसंधानकर्ता थीं जो कैंसर रोगियों के लिए काम करती थीं। उनके दो बेटे हैं। इस मामले में एक संदिग्ध को लूटपाट के आरोपों में गिरफ्तार कर लिया गया है। खबर के अनुसार उसकी पहचान 29 वर्षीय बकारी एबियोना मोनक्रीफ के तौर पर की गयी है। एथलीट रहीं शर्मिष्ठा हर सुबह चिशोल्म ट्रेल में दौड़ लगाती थीं।
शर्मिष्ठा के परिवार ने बताया कि वह एक उदार महिला थीं और उन्हें दूसरों की मदद करना अच्छा लगता था। परिजनों ने कहा कि वह शनिवार को भी रोज की तरह जॉगिंग के लिए बाहर गई थीं लेकिन फिर कभी वापस नहीं आ सकीं। शनिवार की सुबह करीब 7 बजे पुलिस को एक राहगीर ने रास्ते में शर्मिष्ठा का शव पड़े होने की जानकारी दी थी। वहीं, गिरफ्तार शख्स के बारे में बात करते हुए पुलिस ने कहा कि उन्हें बकारी एबियोना मोनक्रीफ पर शर्मिष्ठा की लूटपाट के दौरान हत्या करने का शक है, लेकिन उन्हें इसे साबित भी करना होगा। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
| ह्यूस्टनः अमेरिका में भारतीय मूल की एक अनुसंधानकर्ता की जॉगिंग करते हुए हत्या कर दी गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने घटना के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि शर्मिष्ठा सेन टेक्सास के प्लानो शहर में रहती थीं। बीती एक अगस्त को शहर के चिशोल्म ट्रेल पार्क के पास जॉगिंग करते समय उन पर अचानक से हमला किया गया और उनकी हत्या कर दी गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लीगेसी ड्राइव और मार्चमैन वे के पास क्रीक इलाके में एक राहगीर ने उनके शव को देखा। शर्मिष्ठा फार्मासिस्ट और अनुसंधानकर्ता थीं जो कैंसर रोगियों के लिए काम करती थीं। उनके दो बेटे हैं। इस मामले में एक संदिग्ध को लूटपाट के आरोपों में गिरफ्तार कर लिया गया है। खबर के अनुसार उसकी पहचान उनतीस वर्षीय बकारी एबियोना मोनक्रीफ के तौर पर की गयी है। एथलीट रहीं शर्मिष्ठा हर सुबह चिशोल्म ट्रेल में दौड़ लगाती थीं। शर्मिष्ठा के परिवार ने बताया कि वह एक उदार महिला थीं और उन्हें दूसरों की मदद करना अच्छा लगता था। परिजनों ने कहा कि वह शनिवार को भी रोज की तरह जॉगिंग के लिए बाहर गई थीं लेकिन फिर कभी वापस नहीं आ सकीं। शनिवार की सुबह करीब सात बजे पुलिस को एक राहगीर ने रास्ते में शर्मिष्ठा का शव पड़े होने की जानकारी दी थी। वहीं, गिरफ्तार शख्स के बारे में बात करते हुए पुलिस ने कहा कि उन्हें बकारी एबियोना मोनक्रीफ पर शर्मिष्ठा की लूटपाट के दौरान हत्या करने का शक है, लेकिन उन्हें इसे साबित भी करना होगा। पुलिस मामले की जांच कर रही है। |
Lohri 2023 Vastu Tips: लोहड़ी का त्यौहार पौष महीने के अंतिम दिन सूर्यास्त के बाद मनाया जाता है। इस वर्ष आज यानी 14 जनवरी, 2023 के दिन ये मनाया जा रहा है। लोहड़ी का शुभ मुहूर्त 5:45 पी. एम से 10:48 पी. एम तक ही रहेगा। लोहड़ी से जुड़ी परम्पराओं एवं रीति रिवाजों के अनुसार यह ज्ञात होता है, कि प्राचीन समय में दक्ष प्रजापति की पुत्री सती के योगाग्नि दहन की याद में यह पवित्र अग्नि जलायी जाती है।
What should I do in Lohri at home: वास्तु विज्ञान के नियम के अनुसार अगर अग्नि को घर में ही जलाकर इस त्यौहार को मनाना चाहते हैं तो इसे घर के आग्नेय कोण यानि कि पूर्वी दक्षिणी कोने में जलाएं। अगर आप इस त्यौहार को सामूहिक रूप से किसी खुले स्थान पर मनाना चाहते हैं तो लकड़ियों को जलाने के लिये उस स्थान के आग्नेय कोण अर्थात पूर्वी दक्षिणी कोने में स्थापित करना चाहिए। जो भी व्यक्ति उस अग्नि को जलाये उसे अग्नि जलाते समय अपना मुख पूर्व दिशा की तरफ ही रखकर अग्नि को प्रचंड करना चाहिए। अग्नि जलने के बाद उसमें मुंगफली, रेवड़ी, मक्की, तिल, गुड़, गज्जक, इत्यादि नई फसलों व उनसे बने उत्पादों को देव आत्माओं को समर्पित करने के भाव से अग्नि में डाला जाता है क्योंकि हमारे धार्मिक ग्रंथों में अग्नि को देव आत्माओं का मुख भी कहा गया है। हम जो भी देवआत्माओं को भोग लगाना चाहते हैं वह सिर्फ अग्नि के माध्यम से ही उन तक पहुंचता है।
What should we do on Lohri: जब लकड़ियां पूरी तरह से जल जाती हैं तो सभी उपस्थित व्यक्ति उस अग्नि की तीन बार परिक्रमा करते हैं। सभी खाने की वस्तुओं को प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। अग्नि समाप्त होने के बाद कुछ अधजली लकड़ी को जाते समय घर ले जाते हैं क्योंकि माना जाता है कि वह लकड़ी घर की पश्चिम दिशा में रखने से घर पर दुष्ट आत्माओं का प्रभाव नहीं होता।
Lohri shagun: लोहड़ी कर त्यौहार अधिकतर उत्तर भारत में मनाया जाता है क्योंकि इस दिन नई फसल की पूजा की जाती है तथा उनकी फसल मौसम के नकारात्मक प्रभाव से बची रहे इसके लिये प्रार्थना भी की जाती है।
Lohri katha: लोहड़ी के इतिहास में एक और कथा भी पाई जाती हैः यह कथा तब की है जब भारत और पाकिस्तान एक ही थे। पाकिस्तान के संदल बार इलाके में एक ऐसा नायक जिसका नाम था दुल्ला भट्टी जो कि जाति से राजपूत था। दुल्ला भटटी मुगल शासक अकबर के समय में पंजाब में रहता था। उस समय में संदल बार इलाके में एक जगह पर लड़कियों को गुलामी के लिए बलपूर्वक अमीर लोगो को बेचा जाता था। जिसे दुल्ला भटटी ने एक योजना के तहत आजाद करवाया और हिन्दु लड़कों से उनका विवाह भी करवाया। जिस कारण वह पंजाब में एक नायक के रूप में मशहूर हो गया। इसी कारण उस महान घटना के कारण पंजाब के इलाके से यह एक त्यौहार मे रूप में मनाया जाता है। इसी ही कारण लोहड़ी के गीतों में दुल्ला भटटी का जिक्र किया जाता है। दुल्ला भटटी की वंशावली जो कि भट्टी राजपूत हैं।
LLB. , Graduate Gemologist GIA (Gemological Institute of America), Astrology, Numerology and Vastu (SSM)
| Lohri दो हज़ार तेईस Vastu Tips: लोहड़ी का त्यौहार पौष महीने के अंतिम दिन सूर्यास्त के बाद मनाया जाता है। इस वर्ष आज यानी चौदह जनवरी, दो हज़ार तेईस के दिन ये मनाया जा रहा है। लोहड़ी का शुभ मुहूर्त पाँच:पैंतालीस पी. एम से दस:अड़तालीस पी. एम तक ही रहेगा। लोहड़ी से जुड़ी परम्पराओं एवं रीति रिवाजों के अनुसार यह ज्ञात होता है, कि प्राचीन समय में दक्ष प्रजापति की पुत्री सती के योगाग्नि दहन की याद में यह पवित्र अग्नि जलायी जाती है। What should I do in Lohri at home: वास्तु विज्ञान के नियम के अनुसार अगर अग्नि को घर में ही जलाकर इस त्यौहार को मनाना चाहते हैं तो इसे घर के आग्नेय कोण यानि कि पूर्वी दक्षिणी कोने में जलाएं। अगर आप इस त्यौहार को सामूहिक रूप से किसी खुले स्थान पर मनाना चाहते हैं तो लकड़ियों को जलाने के लिये उस स्थान के आग्नेय कोण अर्थात पूर्वी दक्षिणी कोने में स्थापित करना चाहिए। जो भी व्यक्ति उस अग्नि को जलाये उसे अग्नि जलाते समय अपना मुख पूर्व दिशा की तरफ ही रखकर अग्नि को प्रचंड करना चाहिए। अग्नि जलने के बाद उसमें मुंगफली, रेवड़ी, मक्की, तिल, गुड़, गज्जक, इत्यादि नई फसलों व उनसे बने उत्पादों को देव आत्माओं को समर्पित करने के भाव से अग्नि में डाला जाता है क्योंकि हमारे धार्मिक ग्रंथों में अग्नि को देव आत्माओं का मुख भी कहा गया है। हम जो भी देवआत्माओं को भोग लगाना चाहते हैं वह सिर्फ अग्नि के माध्यम से ही उन तक पहुंचता है। What should we do on Lohri: जब लकड़ियां पूरी तरह से जल जाती हैं तो सभी उपस्थित व्यक्ति उस अग्नि की तीन बार परिक्रमा करते हैं। सभी खाने की वस्तुओं को प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। अग्नि समाप्त होने के बाद कुछ अधजली लकड़ी को जाते समय घर ले जाते हैं क्योंकि माना जाता है कि वह लकड़ी घर की पश्चिम दिशा में रखने से घर पर दुष्ट आत्माओं का प्रभाव नहीं होता। Lohri shagun: लोहड़ी कर त्यौहार अधिकतर उत्तर भारत में मनाया जाता है क्योंकि इस दिन नई फसल की पूजा की जाती है तथा उनकी फसल मौसम के नकारात्मक प्रभाव से बची रहे इसके लिये प्रार्थना भी की जाती है। Lohri katha: लोहड़ी के इतिहास में एक और कथा भी पाई जाती हैः यह कथा तब की है जब भारत और पाकिस्तान एक ही थे। पाकिस्तान के संदल बार इलाके में एक ऐसा नायक जिसका नाम था दुल्ला भट्टी जो कि जाति से राजपूत था। दुल्ला भटटी मुगल शासक अकबर के समय में पंजाब में रहता था। उस समय में संदल बार इलाके में एक जगह पर लड़कियों को गुलामी के लिए बलपूर्वक अमीर लोगो को बेचा जाता था। जिसे दुल्ला भटटी ने एक योजना के तहत आजाद करवाया और हिन्दु लड़कों से उनका विवाह भी करवाया। जिस कारण वह पंजाब में एक नायक के रूप में मशहूर हो गया। इसी कारण उस महान घटना के कारण पंजाब के इलाके से यह एक त्यौहार मे रूप में मनाया जाता है। इसी ही कारण लोहड़ी के गीतों में दुल्ला भटटी का जिक्र किया जाता है। दुल्ला भटटी की वंशावली जो कि भट्टी राजपूत हैं। LLB. , Graduate Gemologist GIA , Astrology, Numerology and Vastu |
प्रकृति के संसाधनों को चाक चौबंद बनाने में प्रशासनिक अमला गंभीर नहीं है। तालाब और पोखरों को संवारने के लिए भले ही सरकार अच्छा-खासा बजट पेश कर रही हो लेकिन विभागीय जिम्मेदार इन्हें संवारने को लेकर बिल्कुल सजग नहीं है। जिले भर के अधिकांश तालाब और पोखरों में जहां 60 फीसदी से भी ज्यादा तालाबों का अस्तित्व मिटा दिया गया है। वहीं बचे-कुचे तालाबों की देखरेख में भी यह जिम्मेदार हीलाहवाली करने पर अमादा है।
बीघापुर क्षेत्र के बारासगवर में सुखते तालाबों से आम जन का काम तो किसी तरह से चल रहा है लेकिन बेजुमान इस दयनीय व्यवस्था में पिसते दिख रहे है। प्रशासन की गैरजिम्मेदाराना रवैए से तालाबों से उड़ती धूल इन प्यासों मवेशियों को मुंड चिढ़ाने का काम रही है। जो आसमान से बरसती आग की तपिश में झुलस रहे है। जिससे राहत पाने के लिए उन्हें पानी की दो बूंद भी नसीब नहीं हो रही है। इसके साथ ही किसानों का हाल भी कुछ ज्यादा ठीक नहीं है। सम्पन किसान किसी तरह से अपने इंजन में डीजल तेल डलवाकर फसल तैयार कर रहे है। तो कम खेती वाले गरीब किसान सिंचाई न होने की मार से बर्बादी झेल रहे है। यह सब इसलिए क्योंकि सुविधा के नाम पर यहां मौजूद तालाब भी उन्हें धोखा देने का काम कर रहे है। क्षेत्र में ऐसे 80 फीसदी तालाब है जो हर किसी के लिए असुविधाजनक साबित हो रहे है। बीघापुर के टेढ़ा, ददई खेड़ा, सगवर, बारा हरदो, झगरपुर, भरथीपुर, देऊराहार, बयगुलाल खेड़ा, अलीपुर, निहाली खेड़ा समेत आधा सैकड़ा से अधिक गांवो के तालाब दरकती जमीन और झाड़ियों में समाकर अपन अस्तित्व खो चुके है।
| प्रकृति के संसाधनों को चाक चौबंद बनाने में प्रशासनिक अमला गंभीर नहीं है। तालाब और पोखरों को संवारने के लिए भले ही सरकार अच्छा-खासा बजट पेश कर रही हो लेकिन विभागीय जिम्मेदार इन्हें संवारने को लेकर बिल्कुल सजग नहीं है। जिले भर के अधिकांश तालाब और पोखरों में जहां साठ फीसदी से भी ज्यादा तालाबों का अस्तित्व मिटा दिया गया है। वहीं बचे-कुचे तालाबों की देखरेख में भी यह जिम्मेदार हीलाहवाली करने पर अमादा है। बीघापुर क्षेत्र के बारासगवर में सुखते तालाबों से आम जन का काम तो किसी तरह से चल रहा है लेकिन बेजुमान इस दयनीय व्यवस्था में पिसते दिख रहे है। प्रशासन की गैरजिम्मेदाराना रवैए से तालाबों से उड़ती धूल इन प्यासों मवेशियों को मुंड चिढ़ाने का काम रही है। जो आसमान से बरसती आग की तपिश में झुलस रहे है। जिससे राहत पाने के लिए उन्हें पानी की दो बूंद भी नसीब नहीं हो रही है। इसके साथ ही किसानों का हाल भी कुछ ज्यादा ठीक नहीं है। सम्पन किसान किसी तरह से अपने इंजन में डीजल तेल डलवाकर फसल तैयार कर रहे है। तो कम खेती वाले गरीब किसान सिंचाई न होने की मार से बर्बादी झेल रहे है। यह सब इसलिए क्योंकि सुविधा के नाम पर यहां मौजूद तालाब भी उन्हें धोखा देने का काम कर रहे है। क्षेत्र में ऐसे अस्सी फीसदी तालाब है जो हर किसी के लिए असुविधाजनक साबित हो रहे है। बीघापुर के टेढ़ा, ददई खेड़ा, सगवर, बारा हरदो, झगरपुर, भरथीपुर, देऊराहार, बयगुलाल खेड़ा, अलीपुर, निहाली खेड़ा समेत आधा सैकड़ा से अधिक गांवो के तालाब दरकती जमीन और झाड़ियों में समाकर अपन अस्तित्व खो चुके है। |
ये सभी बेस्ट क्वालिटी वाली जॉर्जेट साड़ी हैं। इस लिस्ट में आपको कई शानदार और अट्रैक्टिव जॉर्जेट साड़ी की रेंज दी जा रही है। ये किफायती और फैशनेबल हैं।
KARAGIRI Women's Woven Georgette Georgette Saree :
क्यों खरीदेंः
SIRIL Women's Bandhani Printed & Embroidery Work Saree :
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Disclaimer : NBT के पत्रकारों ने इस आर्टिकल को नहीं लिखा है। आर्टिकल लिखे जाने तक ये प्रोडक्ट्स Amazon पर उपलब्ध हैं।
| ये सभी बेस्ट क्वालिटी वाली जॉर्जेट साड़ी हैं। इस लिस्ट में आपको कई शानदार और अट्रैक्टिव जॉर्जेट साड़ी की रेंज दी जा रही है। ये किफायती और फैशनेबल हैं। KARAGIRI Women's Woven Georgette Georgette Saree : क्यों खरीदेंः SIRIL Women's Bandhani Printed & Embroidery Work Saree : क्यों खरीदेंः Shiv Textiles Women's Pure Georgette Saree With Blouse Piece: क्यों खरीदेंः Fashion Day Women's Georgette Moti Work Saree : क्यों खरीदेंः SIRIL Women's Georgette Floral Printed Saree with Blouse Piece: क्यों खरीदेंः नोट : Amazon Store से सस्ते सामानों की शॉपिंग करने के लिए यहां क्लिक करें। Disclaimer : NBT के पत्रकारों ने इस आर्टिकल को नहीं लिखा है। आर्टिकल लिखे जाने तक ये प्रोडक्ट्स Amazon पर उपलब्ध हैं। |
बिलासपुरः कोरोना कर्फ्यू की संख्त बंदिशों में घुमारवीं थाना के अंतर्गत एक व्यक्ति को रेस्टोरेंट से शराब खरीदना महंगा पड़ा। इस व्यक्ति द्वारा नियमों की अवहेलना तो की। लेकिन पुलिस की नजरों से नहीं बच पाया। बताया जा रहा है कि घुमारवीं बस स्टैंड के समीप एक रेस्टोरेंट से एक व्यक्ति ने शराब की एक बोतल खरीदी। लेकिन पुलिस टीम ने इस व्यक्ति को दबोच लिया। वहीं, यह व्यक्ति रेस्टोंरेंट से ली गई शराब की बोतल को किसी अन्य व्यक्ति को बेच रहा था। जिससे चलते पुलिस द्वारा इस व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
वहीं, शराब की बोतल भी बरामद की है। उधर, घुमारवीं थाना के तहत ही पुलिस ने पैट्रोलिंग के दौरान दकड़ीचौक पर तीन बोतल और एक हाफ देसी शराब का बरामद किया है। बता दें कि कोरोना कर्फ्यू के दौरान शराब पर पाबंदी लगाई है। लेकिन उसके बावजूद भी लोग नियमों की अवहेलना कर रहे हैं। नियमों की अवहेलना करने वाले लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। उधर, इस बारे में एसपी बिलासपुर दिवाकर शर्मा ने बताया कि पुलिस मामले की छानबीन में जुटी हुई है। उन्होंने कहा कि नियमों की अवहेलना सहन नहीं होगी।
| बिलासपुरः कोरोना कर्फ्यू की संख्त बंदिशों में घुमारवीं थाना के अंतर्गत एक व्यक्ति को रेस्टोरेंट से शराब खरीदना महंगा पड़ा। इस व्यक्ति द्वारा नियमों की अवहेलना तो की। लेकिन पुलिस की नजरों से नहीं बच पाया। बताया जा रहा है कि घुमारवीं बस स्टैंड के समीप एक रेस्टोरेंट से एक व्यक्ति ने शराब की एक बोतल खरीदी। लेकिन पुलिस टीम ने इस व्यक्ति को दबोच लिया। वहीं, यह व्यक्ति रेस्टोंरेंट से ली गई शराब की बोतल को किसी अन्य व्यक्ति को बेच रहा था। जिससे चलते पुलिस द्वारा इस व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की गई है। वहीं, शराब की बोतल भी बरामद की है। उधर, घुमारवीं थाना के तहत ही पुलिस ने पैट्रोलिंग के दौरान दकड़ीचौक पर तीन बोतल और एक हाफ देसी शराब का बरामद किया है। बता दें कि कोरोना कर्फ्यू के दौरान शराब पर पाबंदी लगाई है। लेकिन उसके बावजूद भी लोग नियमों की अवहेलना कर रहे हैं। नियमों की अवहेलना करने वाले लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। उधर, इस बारे में एसपी बिलासपुर दिवाकर शर्मा ने बताया कि पुलिस मामले की छानबीन में जुटी हुई है। उन्होंने कहा कि नियमों की अवहेलना सहन नहीं होगी। |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
दुनिया रहस्यों से भरी हुई है जब किसी रहस्य को सुलझाने की कोशिश की जाती है तो वह और भी ज्यादा उलझ जाते हैं। आज दुनिया में जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे और निगरानी कैमरे लगाए जाते हैं इन कैमरों में अक्सर कुछ ऐसी तस्वीरें कैद हो जाती हैं जिन्हें समझ पाना बहुत मुश्किल होता है। कई बार इन तस्वीरों में कुछ ऐसी आकृतियां दिखाई देती है जो किसी और दुनिया की लगती हैं। आज हम आपको पांच ऐसी तस्वीरों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें आज तक समझा नहीं जा सका है।
यह एक रहस्यमयी जीव है जिसको केवल सीसीटीवी कैमरों में दिखा गया है। यह जीव रात के वक्त निकलता है इस जीव की 2 लंबी और भयानक टांगे हैं जिनकी सहायता से ये धीमे-धीमे चलता है। इस जीव को अमेरिका के अलग-अलग राज्यों में देखा गया है। ऐसे ही एक जीव का जिक्र अमेरिका में रहने वाले आदिवासी लोगो की कहानियों में भी आता है। अमेरिका में रहने वाले ये आदिवासी लोग इस जीव की मूर्तियां बनाकर अपने घरों के बाहर लगाते हैं।
कई बार बादलों में इस तरह की आकृति दिखाई देती है जिन्हें देखकर कोई भी डर सकता है ये आकृतियां बिल्कुल असली लगती हैं।
ज़ोंबी को एक काल्पनिक माना जाता है। हमारे दिमाग में ज़ोंबी को लेकर एक ही ख्याल आता है, एक जीव जो लोगों को मारकर खाता है। ज़ोंबी को देखे जाने की घटनाएं अमेरिका में अक्सर होती रहती है। यह तस्वीर जंगल में लगे एक निगरानी कैमरे द्वारा खींची गई थी इस तस्वीर में दिखाई दे रही आकृति बहुत ही रहस्यमयी है।
यह तस्वीर जापान में खींची गई थी जब कुछ दोस्त एक सुनसान रास्ते से अपनी कार में जा रहे थे तब उन्हें सड़क के किनारे ये अजीब सा जीव दिखाई दिया। उन्होंने इसकी तस्वीर खींची और कार को वापस मोड़ कर वहां से भाग गए।
| दुनिया रहस्यों से भरी हुई है जब किसी रहस्य को सुलझाने की कोशिश की जाती है तो वह और भी ज्यादा उलझ जाते हैं। आज दुनिया में जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे और निगरानी कैमरे लगाए जाते हैं इन कैमरों में अक्सर कुछ ऐसी तस्वीरें कैद हो जाती हैं जिन्हें समझ पाना बहुत मुश्किल होता है। कई बार इन तस्वीरों में कुछ ऐसी आकृतियां दिखाई देती है जो किसी और दुनिया की लगती हैं। आज हम आपको पांच ऐसी तस्वीरों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें आज तक समझा नहीं जा सका है। यह एक रहस्यमयी जीव है जिसको केवल सीसीटीवी कैमरों में दिखा गया है। यह जीव रात के वक्त निकलता है इस जीव की दो लंबी और भयानक टांगे हैं जिनकी सहायता से ये धीमे-धीमे चलता है। इस जीव को अमेरिका के अलग-अलग राज्यों में देखा गया है। ऐसे ही एक जीव का जिक्र अमेरिका में रहने वाले आदिवासी लोगो की कहानियों में भी आता है। अमेरिका में रहने वाले ये आदिवासी लोग इस जीव की मूर्तियां बनाकर अपने घरों के बाहर लगाते हैं। कई बार बादलों में इस तरह की आकृति दिखाई देती है जिन्हें देखकर कोई भी डर सकता है ये आकृतियां बिल्कुल असली लगती हैं। ज़ोंबी को एक काल्पनिक माना जाता है। हमारे दिमाग में ज़ोंबी को लेकर एक ही ख्याल आता है, एक जीव जो लोगों को मारकर खाता है। ज़ोंबी को देखे जाने की घटनाएं अमेरिका में अक्सर होती रहती है। यह तस्वीर जंगल में लगे एक निगरानी कैमरे द्वारा खींची गई थी इस तस्वीर में दिखाई दे रही आकृति बहुत ही रहस्यमयी है। यह तस्वीर जापान में खींची गई थी जब कुछ दोस्त एक सुनसान रास्ते से अपनी कार में जा रहे थे तब उन्हें सड़क के किनारे ये अजीब सा जीव दिखाई दिया। उन्होंने इसकी तस्वीर खींची और कार को वापस मोड़ कर वहां से भाग गए। |
प्रधानमंत्री मोदी के स्वच्छ भारत अभियान को आगे बढ़ाने में झारखंड राज्य ने अपना झंडा गाड़ दिया है. आपको बता दे कि स्वच्छता एप के इस्तेमाल के मामले में पूरे देश में झारखंड राज्य पहले स्थान पर है. केंद्रीय शहरी एवं आवास मंत्रालय द्वारा 26 नवंबर को अॉल इंडिया स्वच्छता स्कोर कार्ड जारी किया गया, जिसमें झारखंड प्रथम स्थान पर है. वही अन्य राज्यों में छत्तीसगढ़ दूसरे, महाराष्ट्र तीसरे, गुजरात चौथे व राजस्थान पांचवें स्थान पर है.
गौरतलब है कि केंद्रीय शहरी एवं आवास मंत्रालय द्वारा जारी स्कोर कार्ड के अनुसार टॉप पांच एक्टिव राज्यों में झारखंड पहले स्थान पर है. जहां 10 प्रतिशत कंप्लेन भेजे जा रहे हैं. लेकिन कंप्लेन पर 93 प्रतिशत का समाधान कर लिया जा रहा है. झारखंड के 97 प्रतिशत शहरों का अपना एप है. और झारखंड में इसका समाधान दर 95 फीसदी है. जबकि, अन्य राज्य इन मामलों में काफी पीछे हैं. वहीं, केंद्र सरकार द्वारा देश भर के टॉप पांच शहरों की सूची भी जारी की गयी है, जिसमें धनबाद पांचवें स्थान पर ,मंदसौर पहले, नीमच दूसरे, कानपुर तीसरे, सिंगरौली चौथे स्थान पर है. धनबाद में स्वच्छता एप के कुल 11826 यूजर हैं, जो निगम की कार्यकलापों से संतुष्ट हैं.
आपको बता दे कि स्वच्छता एप मोबाइल और वेब प्लेटफॉर्म में शिकायत समाधान के लिए बनाया गया है. देश के 4041 शहरों के लिए यह एप है, जिसकी मॉनीटरिंग केंद्र सरकार द्वारा की जाती है. कोई भी नागरिक इस एप में कचरा, गंदगी की तसवीर अपलोड कर सकता है. जिसके बाद निगम या निकाय के कर्मचारी 24 घंटे में उस जगह से कचरा उठा लेते हैं. साथ ही यूजर को सूचना देते हैं कि उस जगह से गंदगी हटा ली गयी है. स्मार्ट फोन यूजर ही इस एप का इस्तेमाल कर सकते हैं. एप में शिकायतकर्ता को तसवीर के साथ लैंडमार्क बताना होगा.
क्या मणिशंकर पर कार्रवाई गुजरात थामने की कोशिश है ?
| प्रधानमंत्री मोदी के स्वच्छ भारत अभियान को आगे बढ़ाने में झारखंड राज्य ने अपना झंडा गाड़ दिया है. आपको बता दे कि स्वच्छता एप के इस्तेमाल के मामले में पूरे देश में झारखंड राज्य पहले स्थान पर है. केंद्रीय शहरी एवं आवास मंत्रालय द्वारा छब्बीस नवंबर को अॉल इंडिया स्वच्छता स्कोर कार्ड जारी किया गया, जिसमें झारखंड प्रथम स्थान पर है. वही अन्य राज्यों में छत्तीसगढ़ दूसरे, महाराष्ट्र तीसरे, गुजरात चौथे व राजस्थान पांचवें स्थान पर है. गौरतलब है कि केंद्रीय शहरी एवं आवास मंत्रालय द्वारा जारी स्कोर कार्ड के अनुसार टॉप पांच एक्टिव राज्यों में झारखंड पहले स्थान पर है. जहां दस प्रतिशत कंप्लेन भेजे जा रहे हैं. लेकिन कंप्लेन पर तिरानवे प्रतिशत का समाधान कर लिया जा रहा है. झारखंड के सत्तानवे प्रतिशत शहरों का अपना एप है. और झारखंड में इसका समाधान दर पचानवे फीसदी है. जबकि, अन्य राज्य इन मामलों में काफी पीछे हैं. वहीं, केंद्र सरकार द्वारा देश भर के टॉप पांच शहरों की सूची भी जारी की गयी है, जिसमें धनबाद पांचवें स्थान पर ,मंदसौर पहले, नीमच दूसरे, कानपुर तीसरे, सिंगरौली चौथे स्थान पर है. धनबाद में स्वच्छता एप के कुल ग्यारह हज़ार आठ सौ छब्बीस यूजर हैं, जो निगम की कार्यकलापों से संतुष्ट हैं. आपको बता दे कि स्वच्छता एप मोबाइल और वेब प्लेटफॉर्म में शिकायत समाधान के लिए बनाया गया है. देश के चार हज़ार इकतालीस शहरों के लिए यह एप है, जिसकी मॉनीटरिंग केंद्र सरकार द्वारा की जाती है. कोई भी नागरिक इस एप में कचरा, गंदगी की तसवीर अपलोड कर सकता है. जिसके बाद निगम या निकाय के कर्मचारी चौबीस घंटाटे में उस जगह से कचरा उठा लेते हैं. साथ ही यूजर को सूचना देते हैं कि उस जगह से गंदगी हटा ली गयी है. स्मार्ट फोन यूजर ही इस एप का इस्तेमाल कर सकते हैं. एप में शिकायतकर्ता को तसवीर के साथ लैंडमार्क बताना होगा. क्या मणिशंकर पर कार्रवाई गुजरात थामने की कोशिश है ? |
बाड़मेर जिले के सेड़वा थानान्तर्गत ओगाल गांव में रविवार रात को स्विफ्ट कार व ट्रैक्टर के बीच जोरदार भिड़ंत हो गई। हादसे में ट्रैक्टर सवार पिता व पुत्र घायल हो गए। घायल को सेड़वा अस्पताल में भर्ती करवाया गया। वहीं, कार में आग लग गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचे कर वाहनों को सड़क से हटाया।
पुलिस के अनुसार ओगाला गांव जा रहे ट्रेक्टर व स्विफ्ट के बीच जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ट्रैक्टर के परखच्चे उड़ गए और ट्रेक्टर सवार दूर जाकर गिरे। वहीं कार का आगे हिस्सा पिचक गया। कार ड्राइवर हादसे के बाद वहां से भाग गया। कुछ देर बाद कार की बैटरी में आग लगने से कार जलकर कबाड़ हो गई।
आग की लपटें देखकर आसपास के लोगों ने कार पर पानी व रेत डालकर आग बुझाने का प्रयास किया। आग बुझने से पहले ही कार जलकर राख हो गई। ट्रैक्टर में सवार पिता व बेटे घायल हो गए। घायल सवाराम पुत्र पूनमाराम, चतराराम पुत्र सवाराम को सेड़वा में भर्ती करवाया गया।
सुबह दोनों को डिस्चार्ज कर दिया गया। पुलिस के अनुसार पिता व बेटा सामाजिक कार्यक्रम से अपने घर बोरला जाटाण गांव जा रहे थे। इस दौरान हादसा हुआ है। पुलिस को अभी तक किसी की तरफ से कोई रिपोर्ट नहीं मिली है।
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| बाड़मेर जिले के सेड़वा थानान्तर्गत ओगाल गांव में रविवार रात को स्विफ्ट कार व ट्रैक्टर के बीच जोरदार भिड़ंत हो गई। हादसे में ट्रैक्टर सवार पिता व पुत्र घायल हो गए। घायल को सेड़वा अस्पताल में भर्ती करवाया गया। वहीं, कार में आग लग गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचे कर वाहनों को सड़क से हटाया। पुलिस के अनुसार ओगाला गांव जा रहे ट्रेक्टर व स्विफ्ट के बीच जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ट्रैक्टर के परखच्चे उड़ गए और ट्रेक्टर सवार दूर जाकर गिरे। वहीं कार का आगे हिस्सा पिचक गया। कार ड्राइवर हादसे के बाद वहां से भाग गया। कुछ देर बाद कार की बैटरी में आग लगने से कार जलकर कबाड़ हो गई। आग की लपटें देखकर आसपास के लोगों ने कार पर पानी व रेत डालकर आग बुझाने का प्रयास किया। आग बुझने से पहले ही कार जलकर राख हो गई। ट्रैक्टर में सवार पिता व बेटे घायल हो गए। घायल सवाराम पुत्र पूनमाराम, चतराराम पुत्र सवाराम को सेड़वा में भर्ती करवाया गया। सुबह दोनों को डिस्चार्ज कर दिया गया। पुलिस के अनुसार पिता व बेटा सामाजिक कार्यक्रम से अपने घर बोरला जाटाण गांव जा रहे थे। इस दौरान हादसा हुआ है। पुलिस को अभी तक किसी की तरफ से कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
Bihar Politics: बिहार में इन दिनों सियासी पारा चढ़ा हुआ है. तेजस्वी यादव पर चार्जशीट दायर होने के बाद बीजेपी राज्य सरकार पर लगातार हमलावर है.
पटनाःBihar Politics: बिहार में इन दिनों सियासी पारा चढ़ा हुआ है. तेजस्वी यादव पर चार्जशीट दायर होने के बाद बीजेपी राज्य सरकार पर लगातार हमलावर है. इसी कड़ी में बीजेपी के द्वारा आगामी 13 जुलाई को विधानसभा मार्च है.इस पर बीजेपी एमएलसी शाहनवाज हुसैन ने कहा कि अभी से माहौल बन गया है, बिहार सरकार डर गई है. शिक्षकों को गिरफ्तार कर रही है उनकी पिटाई कर रही है, मैं शिक्षक पुत्र हूं, हमारी पत्नी शिक्षिका है इसलिए मुझे और ज्यादा दर्द हो रहा है. यह लाठी गोली की सरकार कब से हो रही है. इसके अलावा उन्होंने कहा कि 2025 में मुख्यमंत्री वही बनेगा जिसके छाती पर कमल खिलेगा.
शाहनवाज हुसैन ने कहा कि राजद का असर नीतीश कुमार की सरकार पर पूरी तरह हावी. लाठी में तेल पिला पिला कर शिक्षकों को पीटा जा रहा यह कहीं से भी स्वीकार नहीं है. विधान परिषद और विधानसभा में पूरी ताकत से इस मुद्दे को उठाया गया है. शिक्षकों के साथ बीजेपी पूरी चट्टान की तरह खड़ी है. शिक्षकों के लिए बीजेपी लाठी खाने के लिए पटना में तैयार है. महागठबंधन में सिरफुटउअल चल रहा है. एक दूसरे पर शक कर रहे हैं हर कोई पूछ रहा है तुम बीजेपी से तो नहीं मिले हुए हो किसी से सांठगांठ तो नहीं है. महागठबंधन के लोग आपस में शक कर रहे हैं ,सीएम खुद जवाब दे रहे हैं.
महागठबंधन में फूट है. बिहार में सरकार बचाने की कोशिश चल रही है. राजद के नेता आराम कर रहे हैं. लालू जी की किडनी ट्रांसप्लांट हुई है उनको अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए. हमारा मतभेद हो सकता है लेकिन हम कहेंगे लालू यादव सेहतमंद हो हम कामना कर रहे हैं. लेकिन लोग उन्हें रोड पर घूमने के लिए बोल रहे हैं. विपक्षी एकता की बैठक में बिहार में जो लिट्टी चोखा खाए थे उसका रिएक्शन बंगाल में दिख रहा है. बंगाल में कांग्रेस और कम्युनिस्ट को पीटा जा रहा है, बीजेपी तो बंगाल में लड़ ही रही है. जैसे बिहार में लिट्टी चोखा खाए थे, बेंगलुरु में जाएंगे इडली डोसा खाएंगे. हर लोग सदन में एक दूसरे के संपर्क में रहता है. हम लोग जोड़ तोड़ कर सरकार नहीं बनाएंगे. नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हम लोग एकजुट होकर लड़ेंगे बीजेपी में कोई सिरफुटाऊल नहीं है.
| Bihar Politics: बिहार में इन दिनों सियासी पारा चढ़ा हुआ है. तेजस्वी यादव पर चार्जशीट दायर होने के बाद बीजेपी राज्य सरकार पर लगातार हमलावर है. पटनाःBihar Politics: बिहार में इन दिनों सियासी पारा चढ़ा हुआ है. तेजस्वी यादव पर चार्जशीट दायर होने के बाद बीजेपी राज्य सरकार पर लगातार हमलावर है. इसी कड़ी में बीजेपी के द्वारा आगामी तेरह जुलाई को विधानसभा मार्च है.इस पर बीजेपी एमएलसी शाहनवाज हुसैन ने कहा कि अभी से माहौल बन गया है, बिहार सरकार डर गई है. शिक्षकों को गिरफ्तार कर रही है उनकी पिटाई कर रही है, मैं शिक्षक पुत्र हूं, हमारी पत्नी शिक्षिका है इसलिए मुझे और ज्यादा दर्द हो रहा है. यह लाठी गोली की सरकार कब से हो रही है. इसके अलावा उन्होंने कहा कि दो हज़ार पच्चीस में मुख्यमंत्री वही बनेगा जिसके छाती पर कमल खिलेगा. शाहनवाज हुसैन ने कहा कि राजद का असर नीतीश कुमार की सरकार पर पूरी तरह हावी. लाठी में तेल पिला पिला कर शिक्षकों को पीटा जा रहा यह कहीं से भी स्वीकार नहीं है. विधान परिषद और विधानसभा में पूरी ताकत से इस मुद्दे को उठाया गया है. शिक्षकों के साथ बीजेपी पूरी चट्टान की तरह खड़ी है. शिक्षकों के लिए बीजेपी लाठी खाने के लिए पटना में तैयार है. महागठबंधन में सिरफुटउअल चल रहा है. एक दूसरे पर शक कर रहे हैं हर कोई पूछ रहा है तुम बीजेपी से तो नहीं मिले हुए हो किसी से सांठगांठ तो नहीं है. महागठबंधन के लोग आपस में शक कर रहे हैं ,सीएम खुद जवाब दे रहे हैं. महागठबंधन में फूट है. बिहार में सरकार बचाने की कोशिश चल रही है. राजद के नेता आराम कर रहे हैं. लालू जी की किडनी ट्रांसप्लांट हुई है उनको अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए. हमारा मतभेद हो सकता है लेकिन हम कहेंगे लालू यादव सेहतमंद हो हम कामना कर रहे हैं. लेकिन लोग उन्हें रोड पर घूमने के लिए बोल रहे हैं. विपक्षी एकता की बैठक में बिहार में जो लिट्टी चोखा खाए थे उसका रिएक्शन बंगाल में दिख रहा है. बंगाल में कांग्रेस और कम्युनिस्ट को पीटा जा रहा है, बीजेपी तो बंगाल में लड़ ही रही है. जैसे बिहार में लिट्टी चोखा खाए थे, बेंगलुरु में जाएंगे इडली डोसा खाएंगे. हर लोग सदन में एक दूसरे के संपर्क में रहता है. हम लोग जोड़ तोड़ कर सरकार नहीं बनाएंगे. नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हम लोग एकजुट होकर लड़ेंगे बीजेपी में कोई सिरफुटाऊल नहीं है. |
चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच रविवार को आईपीएल 2021 के दूसरे चरण का नौवां मुकाबला खेला जाएगा। यह टूर्नामेंट का 38वां मैच होगा। दूसरे चरण में लगातार दो मैच में जीत हासिल करने के बाद चेन्नई सुपर किंग्स की टीम इस समय अंक तालिका में दूसरे स्थान पर है और प्लेऑफ राउंड में तकरीबन अपनी जगह पक्की करने से वो केवल एक जीत दूर है। वहीं चौथे पायदान पर काबिज कोलकाता नाइट राइडर्स इस मैच में जीत दर्ज करके टॉप फोर में अपनी जगह पुख्ता करने की कोशिश करेगी। क्योंकि टॉप फोर की आखिरी दो जगह को हासिल करने के लिए मुकाबला कड़ा हो गया है और बात प्वाइंट्स के साथ-साथ नेट रन रेट पर भी जा टिकी है। ऐसे में चेन्नई और केकेआर के बीच का मुकाबला बेहद रोचक होने वाला है क्योंकि ये जंग विजय रथ पर सवार दो टीमों और प्वांइट्स टेबल पर काबिज चौथे और दूसरे पायदान की टीमों के बीच है।
एमएस धोनी की कप्तानी वाली चेन्नई का प्रदर्शन साल 2020 के निराशाजनक प्रदर्शन से बेहद अलग है। पहले चरण की जीत की लय को उसने दूसरे चरण में भी जारी रखा है। दूसरे चरण में पहले धोनी के धुरंधरों ने डिफेंडिंग चैंपियन मुंबई को 20 रन से मात दी। उसके बाद विराट कोहली की आसीबी को 6 विकेट के अंतर से रौंद दिया। ऐसे में अब उसकी भिड़ंत ऐसी टीम के साथ है जिसने धमाकेदार अंदाज में दूसरे चरण के अपने दोनों मैच जीते हैं। पहले मैच में केकेआर ने आरसीबी को 9 विकेट के अंतर से करारी मात दी थी। इसके बाद मुंबई इंडियन्स को भी 7 विकेट से पटखनी देने में सफल रही। ऐसे में एक बात तो तय है कि रविवार को खेला जाने वाला मुकाबला एकतरफा तो कतई नहीं होगा।
दोनों टीमों के बीच आंकड़ों की बात करें तो चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच आईपीएल में अबतक कुल 24 मुकाबले हुए हैं जिसमें से 15 बार बाजी धोनी के धुरंधरों के हाथ लगी है जबकि कोलकाता के नाइट राइडर्स केवल 8 बार जीत का स्वाद चख सके। वहीं एक मैच का कोई नतीजा नहीं निकला। यूएई में दोनों टीमों के बीच अबतक 2 बार भिड़ंत हुई है जिसमें एक-एक बार बाजी दोनों टीमों के हाथ लगी है। मौजूदा सीजन में भी दोनों टीमों के बीच पहले चरण में एक मैच खेला जा चुका है और वो मुकाबला चेन्नई के खाते में गया था।
चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच मैच के बारे में आप जो भी जानना चाहते हैं।
कब खेला जाएगा चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच आईपीएल 2021 के दूसरे चरण का मैच? (When CSK vs KKR match to be played? )
चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच आईपीएल 2021 के दूसरे चरण का मैच रविवार यानी 26 सितंबर, 2021 को खेला जाएगा।
कहां खेला जाएगा चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच आईपीएल 2021 के दूसरे चरण का मैच? (Where CSK vs KKR Match to be played? )
चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच आईपीएल 2021 के दूसरे चरण का मैच अबूधाबी के शेख जायद क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाएगा।
कितने बजे शुरू होगा चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच आईपीएल 2021 के दूसरे चरण का मैच? (CSK vs KKR match timing)
चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच आईपीएल 2021 के दूसरे चरण का मैच भारतीय समयानुसार दोपहर 3 बजकर 30 मिनट पर शुरू होगा। टॉस दोपहर 3 बजे होगा।
किस चैनल पर चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच आईपीएल 2021 के दूसरे चरण के मैच का प्रसारण होगा? (Which channel will telecast Chennai Super Kings vs Kolkata Knight Riders match in India? )
चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच आईपीएल 2021 के दूसरे चरण के मैच का प्रसारण स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क (Star Sports 1, Star Sports 2 और Star Sports 3) पर होगा।
चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच मैच की लाइव स्ट्रीमिंग कहां देख सकते हैं? (live streaming of the Chennai Super Kings vs Kolkata Knight Riders? )
चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच आईपीएल 2021 के दूसरे चरण के मैच की लाइव स्ट्रीमिंग आप Disney+ Hotstar पर देख सकते हैं। मैच से जुड़ी अहम जानकारियां और लाइव ब्लॉग आप टाइम्स नाउ नवभारत पर हासिल कर सकते हैं।
| चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच रविवार को आईपीएल दो हज़ार इक्कीस के दूसरे चरण का नौवां मुकाबला खेला जाएगा। यह टूर्नामेंट का अड़तीसवां मैच होगा। दूसरे चरण में लगातार दो मैच में जीत हासिल करने के बाद चेन्नई सुपर किंग्स की टीम इस समय अंक तालिका में दूसरे स्थान पर है और प्लेऑफ राउंड में तकरीबन अपनी जगह पक्की करने से वो केवल एक जीत दूर है। वहीं चौथे पायदान पर काबिज कोलकाता नाइट राइडर्स इस मैच में जीत दर्ज करके टॉप फोर में अपनी जगह पुख्ता करने की कोशिश करेगी। क्योंकि टॉप फोर की आखिरी दो जगह को हासिल करने के लिए मुकाबला कड़ा हो गया है और बात प्वाइंट्स के साथ-साथ नेट रन रेट पर भी जा टिकी है। ऐसे में चेन्नई और केकेआर के बीच का मुकाबला बेहद रोचक होने वाला है क्योंकि ये जंग विजय रथ पर सवार दो टीमों और प्वांइट्स टेबल पर काबिज चौथे और दूसरे पायदान की टीमों के बीच है। एमएस धोनी की कप्तानी वाली चेन्नई का प्रदर्शन साल दो हज़ार बीस के निराशाजनक प्रदर्शन से बेहद अलग है। पहले चरण की जीत की लय को उसने दूसरे चरण में भी जारी रखा है। दूसरे चरण में पहले धोनी के धुरंधरों ने डिफेंडिंग चैंपियन मुंबई को बीस रन से मात दी। उसके बाद विराट कोहली की आसीबी को छः विकेट के अंतर से रौंद दिया। ऐसे में अब उसकी भिड़ंत ऐसी टीम के साथ है जिसने धमाकेदार अंदाज में दूसरे चरण के अपने दोनों मैच जीते हैं। पहले मैच में केकेआर ने आरसीबी को नौ विकेट के अंतर से करारी मात दी थी। इसके बाद मुंबई इंडियन्स को भी सात विकेट से पटखनी देने में सफल रही। ऐसे में एक बात तो तय है कि रविवार को खेला जाने वाला मुकाबला एकतरफा तो कतई नहीं होगा। दोनों टीमों के बीच आंकड़ों की बात करें तो चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच आईपीएल में अबतक कुल चौबीस मुकाबले हुए हैं जिसमें से पंद्रह बार बाजी धोनी के धुरंधरों के हाथ लगी है जबकि कोलकाता के नाइट राइडर्स केवल आठ बार जीत का स्वाद चख सके। वहीं एक मैच का कोई नतीजा नहीं निकला। यूएई में दोनों टीमों के बीच अबतक दो बार भिड़ंत हुई है जिसमें एक-एक बार बाजी दोनों टीमों के हाथ लगी है। मौजूदा सीजन में भी दोनों टीमों के बीच पहले चरण में एक मैच खेला जा चुका है और वो मुकाबला चेन्नई के खाते में गया था। चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच मैच के बारे में आप जो भी जानना चाहते हैं। कब खेला जाएगा चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच आईपीएल दो हज़ार इक्कीस के दूसरे चरण का मैच? चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच आईपीएल दो हज़ार इक्कीस के दूसरे चरण का मैच रविवार यानी छब्बीस सितंबर, दो हज़ार इक्कीस को खेला जाएगा। कहां खेला जाएगा चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच आईपीएल दो हज़ार इक्कीस के दूसरे चरण का मैच? चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच आईपीएल दो हज़ार इक्कीस के दूसरे चरण का मैच अबूधाबी के शेख जायद क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाएगा। कितने बजे शुरू होगा चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच आईपीएल दो हज़ार इक्कीस के दूसरे चरण का मैच? चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच आईपीएल दो हज़ार इक्कीस के दूसरे चरण का मैच भारतीय समयानुसार दोपहर तीन बजकर तीस मिनट पर शुरू होगा। टॉस दोपहर तीन बजे होगा। किस चैनल पर चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच आईपीएल दो हज़ार इक्कीस के दूसरे चरण के मैच का प्रसारण होगा? चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच आईपीएल दो हज़ार इक्कीस के दूसरे चरण के मैच का प्रसारण स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क पर होगा। चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच मैच की लाइव स्ट्रीमिंग कहां देख सकते हैं? चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच आईपीएल दो हज़ार इक्कीस के दूसरे चरण के मैच की लाइव स्ट्रीमिंग आप Disney+ Hotstar पर देख सकते हैं। मैच से जुड़ी अहम जानकारियां और लाइव ब्लॉग आप टाइम्स नाउ नवभारत पर हासिल कर सकते हैं। |
द न्यू यॉर्क टाइम्स की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, अमेज़ॅन का हैदराबाद परिसर, जो दुनिया में अब तक का सबसे बड़ा है, अभी भी 8,000 कर्मचारियों को समायोजित करने की क्षमता है। इस 15-मंजिला परिसर में - तीन अमीनिटी फ़्लोर और 12 ऑफिस फ़्लोर - जो पिछले साल खुले थे, में 15,000 कर्मचारियों को समायोजित करने की क्षमता है और वर्तमान में यह 7,000 कर्मचारियों का घर है, रिपोर्ट में मंगलवार को कहा गया है कि इस कार्यालय में मुख्य रूप से टेक टीमों में कार्यबल मुख्य रूप से शामिल हैं सेवाओं को नया करने के लिए मशीन लर्निंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट का उपयोग करना।
9. 7 एकड़ में फैला, हैदराबाद परिसर दुनिया भर के अपने अन्य कार्यालयों की तुलना में ऑनलाइन रिटेल दिग्गजों में सबसे बड़ा है। पेराई प्रतियोगिता की चिंताओं को लेकर अमेजन को समय-समय पर देश के खुदरा उद्योग समूहों के विरोध का भी सामना करना पड़ा है, जिसका कहना है कि हैदराबाद कार्यालय का कुल निर्मित क्षेत्र 68 एकड़ में फैला होगा - लगभग 65 फुटबॉल मैदान।
परिसर में एफिल टॉवर की तुलना में 2. 5 गुना अधिक स्टील है, जिसे वजन द्वारा मापा जाता है, अमेज़ॅन ने पहले एक ब्लॉग पोस्ट में कहा था। कन्फेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) जो सात करोड़ व्यापारियों का प्रतिनिधित्व करने का दावा करता है और 40,000 से अधिक ट्रेड एसोसिएशनों ने अमेजन और फ्लिपकार्ट द्वारा डीप डिस्काउंटिंग और अनुचित साधनों के रूप में वर्णित विरोध का विरोध किया है, जिसका असर ऑफलाइन व्यापारियों पर पड़ा है। इस महीने बेंगलुरु में अमेज़न फार्मेसी शुरू करने की घोषणा के बाद अमेज़न को भी आलोचना का सामना करना पड़ा। ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD), जो देश भर में 850,000 से अधिक सदस्यों का प्रतिनिधित्व करने का दावा करता है, ने मांग की कि सरकार को तुरंत इन "अवैध ऑनलाइन फार्मेसियों" को रोकना चाहिए। खुदरा विक्रेताओं को महामारी के दौरान सामना करना पड़ा, अमेज़ॅन ने अपनी सेवाओं की मांग में तेज वृद्धि देखी।
| द न्यू यॉर्क टाइम्स की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, अमेज़ॅन का हैदराबाद परिसर, जो दुनिया में अब तक का सबसे बड़ा है, अभी भी आठ,शून्य कर्मचारियों को समायोजित करने की क्षमता है। इस पंद्रह-मंजिला परिसर में - तीन अमीनिटी फ़्लोर और बारह ऑफिस फ़्लोर - जो पिछले साल खुले थे, में पंद्रह,शून्य कर्मचारियों को समायोजित करने की क्षमता है और वर्तमान में यह सात,शून्य कर्मचारियों का घर है, रिपोर्ट में मंगलवार को कहा गया है कि इस कार्यालय में मुख्य रूप से टेक टीमों में कार्यबल मुख्य रूप से शामिल हैं सेवाओं को नया करने के लिए मशीन लर्निंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट का उपयोग करना। नौ. सात एकड़ में फैला, हैदराबाद परिसर दुनिया भर के अपने अन्य कार्यालयों की तुलना में ऑनलाइन रिटेल दिग्गजों में सबसे बड़ा है। पेराई प्रतियोगिता की चिंताओं को लेकर अमेजन को समय-समय पर देश के खुदरा उद्योग समूहों के विरोध का भी सामना करना पड़ा है, जिसका कहना है कि हैदराबाद कार्यालय का कुल निर्मित क्षेत्र अड़सठ एकड़ में फैला होगा - लगभग पैंसठ फुटबॉल मैदान। परिसर में एफिल टॉवर की तुलना में दो. पाँच गुना अधिक स्टील है, जिसे वजन द्वारा मापा जाता है, अमेज़ॅन ने पहले एक ब्लॉग पोस्ट में कहा था। कन्फेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स जो सात करोड़ व्यापारियों का प्रतिनिधित्व करने का दावा करता है और चालीस,शून्य से अधिक ट्रेड एसोसिएशनों ने अमेजन और फ्लिपकार्ट द्वारा डीप डिस्काउंटिंग और अनुचित साधनों के रूप में वर्णित विरोध का विरोध किया है, जिसका असर ऑफलाइन व्यापारियों पर पड़ा है। इस महीने बेंगलुरु में अमेज़न फार्मेसी शुरू करने की घोषणा के बाद अमेज़न को भी आलोचना का सामना करना पड़ा। ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स , जो देश भर में आठ सौ पचास,शून्य से अधिक सदस्यों का प्रतिनिधित्व करने का दावा करता है, ने मांग की कि सरकार को तुरंत इन "अवैध ऑनलाइन फार्मेसियों" को रोकना चाहिए। खुदरा विक्रेताओं को महामारी के दौरान सामना करना पड़ा, अमेज़ॅन ने अपनी सेवाओं की मांग में तेज वृद्धि देखी। |
उत्तराखंड की वादियों में घूमने आए मुजफ्फरनगर के पर्यटकों की कार टिहरी उत्तरकाशी मार्ग पर करीब दो सौ मीटर गहरी खाई में गिर गई। हादसे में दंपती की मौत हो गई, जबकि तीन पर्यटक घायल हो गए। कार में पांच लोग सवार थे। हादसा सोमवार रात टिहरी-उत्तरकाशी मार्ग पर डोबरा-जाख उप्पु सिराई गांव के पास हुआ। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
पुलिस के मुताबकि कार सवार सभी लोग मसूरी और धनोल्टी की ओर जा रहे थे। मृतकों की शिनाख्त अजय सिंघल पुत्र टेकचंद, कम्बलवालाबाग, मोनिका सिंघल पत्नी अजय सिंघल मुजफ्फरनगर के रूप में हुई है। वहीं, चालक प्रमोदपाल पुत्र ओमप्रकाश, शौर्य सिंघल पुत्र अजय सिंघल, सूर्याशं सिंगल पुत्र दीपक सिंघल घायल हुए हैं।
लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
| उत्तराखंड की वादियों में घूमने आए मुजफ्फरनगर के पर्यटकों की कार टिहरी उत्तरकाशी मार्ग पर करीब दो सौ मीटर गहरी खाई में गिर गई। हादसे में दंपती की मौत हो गई, जबकि तीन पर्यटक घायल हो गए। कार में पांच लोग सवार थे। हादसा सोमवार रात टिहरी-उत्तरकाशी मार्ग पर डोबरा-जाख उप्पु सिराई गांव के पास हुआ। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस के मुताबकि कार सवार सभी लोग मसूरी और धनोल्टी की ओर जा रहे थे। मृतकों की शिनाख्त अजय सिंघल पुत्र टेकचंद, कम्बलवालाबाग, मोनिका सिंघल पत्नी अजय सिंघल मुजफ्फरनगर के रूप में हुई है। वहीं, चालक प्रमोदपाल पुत्र ओमप्रकाश, शौर्य सिंघल पुत्र अजय सिंघल, सूर्याशं सिंगल पुत्र दीपक सिंघल घायल हुए हैं। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड। |
मंडी - देश के हर बच्चे को शिक्षा के अधिकार के तहत शिक्षा हासिल करने का अधिकार मिला है, मगर आज भी लाखों बच्चे इस अधिकार से वंचित हैं। इससे विपरीत जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर की दूरी पर माता धुआं देवी के आंचल में स्थित कोटमोरस स्कूल के अध्यापकों व जमा दो स्कूल के प्रधानाचार्य धर्मपाल सरोच की मेहनत व प्रेरणा से दस साल की मीना आखिर स्कूल पहुंच ही गई। धर्मपाल सरोच ने बताया कि उत्तर प्रदेश के जिला बदायूं के घुमंतू मजदूर माता-पिता की 10 वर्षीय बेटी मीना को राजकीय प्राथमिक पाठशाला कोटमोरस में शनिवार को प्रवेश दिलाया गया। मीना जो अब तक शिक्षा से वंचित थी, शनिवार को स्कूल में बैठकर खुश है। उन्होंने बताया कि मीना ने जब अपने जीवन में हिंदी, गणित व अंग्रेजी का पहला पाठ पढ़ा, तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने कहा कि सबसे हैरानीजनक बात यह है कि मीना को अभी अक्षरों का ज्ञान नहीं है, मगर उसने सामने नोटिस बोर्ड व चार्ट को देख कर हिंदी और अंग्रेजी में जो वर्णमाला लिखी, उसकी हैंड राइटिंग में गजब का संतुलन व सफाई थी। ऐसे में लगता है कि शिक्षा के अधिकार के तहत सब पढ़ें, सब बढ़ें व बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा यहां पर जल्द साकार होने वाला है। धर्मपाल सरोच ने बताया कि मीना को कापी आदि पहले ही दिन दे दी गई जबकि अन्य किताबें व वर्दी भी दे दी जाएगी, ताकि वह अन्य बच्चों की तरह स्कूल में पढ़ाई कर सके।
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| मंडी - देश के हर बच्चे को शिक्षा के अधिकार के तहत शिक्षा हासिल करने का अधिकार मिला है, मगर आज भी लाखों बच्चे इस अधिकार से वंचित हैं। इससे विपरीत जिला मुख्यालय से पंद्रह किलोग्राममीटर की दूरी पर माता धुआं देवी के आंचल में स्थित कोटमोरस स्कूल के अध्यापकों व जमा दो स्कूल के प्रधानाचार्य धर्मपाल सरोच की मेहनत व प्रेरणा से दस साल की मीना आखिर स्कूल पहुंच ही गई। धर्मपाल सरोच ने बताया कि उत्तर प्रदेश के जिला बदायूं के घुमंतू मजदूर माता-पिता की दस वर्षीय बेटी मीना को राजकीय प्राथमिक पाठशाला कोटमोरस में शनिवार को प्रवेश दिलाया गया। मीना जो अब तक शिक्षा से वंचित थी, शनिवार को स्कूल में बैठकर खुश है। उन्होंने बताया कि मीना ने जब अपने जीवन में हिंदी, गणित व अंग्रेजी का पहला पाठ पढ़ा, तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने कहा कि सबसे हैरानीजनक बात यह है कि मीना को अभी अक्षरों का ज्ञान नहीं है, मगर उसने सामने नोटिस बोर्ड व चार्ट को देख कर हिंदी और अंग्रेजी में जो वर्णमाला लिखी, उसकी हैंड राइटिंग में गजब का संतुलन व सफाई थी। ऐसे में लगता है कि शिक्षा के अधिकार के तहत सब पढ़ें, सब बढ़ें व बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा यहां पर जल्द साकार होने वाला है। धर्मपाल सरोच ने बताया कि मीना को कापी आदि पहले ही दिन दे दी गई जबकि अन्य किताबें व वर्दी भी दे दी जाएगी, ताकि वह अन्य बच्चों की तरह स्कूल में पढ़ाई कर सके। अपना सही जीवनसंगी चुनिए। केवल भारत मैट्रिमोनी पर- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन! |
नई दिल्ली, 10 जनवरी (आईएएनएस)। दिल्ली टीचर्स एसोसिएशन (डीटीए) ने राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि भारत सरकार के राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में चेयरमैन, वाइस चेयरमैन तथा सदस्यों के पिछले दस महीने से खाली पड़े पदों पर जल्द नियुक्ति की जाए।
दिल्ली टीचर्स एसोसिएशन के प्रभारी प्रोफेसर हंसराज सुमन ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की स्थापना संविधान के तहत एक संवैधानिक संस्था के रूप में है। इसमें एक चेयरमैन, एक वाइस चेयरमैन तथा तीन सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है तथा इनका कार्यकाल 3 वषों का होता है। अनुसूचित जाति से जुड़े लोगों के हितों की रक्षा के लिए संवैधानिक निकाय राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में पिछले दस महीने से चेयरमैन, वाइस चेयरमैन का पद खाली पड़ा हुआ है।
प्रोफेसर सुमन ने बताया है कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में पिछले दस महीने से चेयरमैन, वाइस चेयरमैन व सदस्यों की नियुक्ति न होने से आयोग में दलितों के खिलाफ अत्याचार से संबंधित शिकायतों का अंबार लगा हुआ है। प्रोफेसर सुमन की जानकारी के मुताबिक पूरे देश से हर रोज 80 से 100 शिकायतें आयोग में आती है। इस समय आयोग के समक्ष लगभग 40,000 शिकायतें लंबित है।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षकों, कर्मचारियों एवं छात्रों के साथ जातीय भेदभाव की घटनाओं में इजाफा हो रहा है। आयोग में दौलतराम कॉलेज, दयालसिंह कॉलेज, स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज, महाराजा अग्रसेन कॉलेज, गार्गी कॉलेज, आर्यभट्ट कॉलेज, भारती कॉलेज के अलावा बहुत से कॉलेजों के मामले हैं जिनका निपटारा नहीं हुआ है।
राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में उनसे मांग की गई है कि वे जल्द से जल्द किसी सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश, सेवानिवृत्त कुलपति या गैर राजनीतिक योग्य व्यक्ति को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का चेयरमैन, वाइस चांसलर और तीन अन्य सदस्यों की नियुक्ति की जाए। आयोग के सदस्यों की नियुक्ति करते समय उसकी पृष्ठभूमि देखी जाए वह राजनीतिक दल से न हो वरना उनके अनुसार ही कार्य करेंगे।
| नई दिल्ली, दस जनवरी । दिल्ली टीचर्स एसोसिएशन ने राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि भारत सरकार के राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में चेयरमैन, वाइस चेयरमैन तथा सदस्यों के पिछले दस महीने से खाली पड़े पदों पर जल्द नियुक्ति की जाए। दिल्ली टीचर्स एसोसिएशन के प्रभारी प्रोफेसर हंसराज सुमन ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की स्थापना संविधान के तहत एक संवैधानिक संस्था के रूप में है। इसमें एक चेयरमैन, एक वाइस चेयरमैन तथा तीन सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है तथा इनका कार्यकाल तीन वषों का होता है। अनुसूचित जाति से जुड़े लोगों के हितों की रक्षा के लिए संवैधानिक निकाय राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में पिछले दस महीने से चेयरमैन, वाइस चेयरमैन का पद खाली पड़ा हुआ है। प्रोफेसर सुमन ने बताया है कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में पिछले दस महीने से चेयरमैन, वाइस चेयरमैन व सदस्यों की नियुक्ति न होने से आयोग में दलितों के खिलाफ अत्याचार से संबंधित शिकायतों का अंबार लगा हुआ है। प्रोफेसर सुमन की जानकारी के मुताबिक पूरे देश से हर रोज अस्सी से एक सौ शिकायतें आयोग में आती है। इस समय आयोग के समक्ष लगभग चालीस,शून्य शिकायतें लंबित है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षकों, कर्मचारियों एवं छात्रों के साथ जातीय भेदभाव की घटनाओं में इजाफा हो रहा है। आयोग में दौलतराम कॉलेज, दयालसिंह कॉलेज, स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज, महाराजा अग्रसेन कॉलेज, गार्गी कॉलेज, आर्यभट्ट कॉलेज, भारती कॉलेज के अलावा बहुत से कॉलेजों के मामले हैं जिनका निपटारा नहीं हुआ है। राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में उनसे मांग की गई है कि वे जल्द से जल्द किसी सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश, सेवानिवृत्त कुलपति या गैर राजनीतिक योग्य व्यक्ति को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का चेयरमैन, वाइस चांसलर और तीन अन्य सदस्यों की नियुक्ति की जाए। आयोग के सदस्यों की नियुक्ति करते समय उसकी पृष्ठभूमि देखी जाए वह राजनीतिक दल से न हो वरना उनके अनुसार ही कार्य करेंगे। |
अमरावती/प्रतिनिधि दि. ११ - महाविकास आघाडी सरकार ने किसानों की लूट करते हुए बीमा कंपनियों को मालामाल किया है. महाविकास आघाडी सरकार के खिलाफ भाजपा किसान मोर्चा की ओर से आज जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में अर्धनग्न आंदोलन किया गया. वहीं किसानों के विविध मांगों को लेकर जिलाधिकारी को निवेदन दिया गया.
निवेदन में बताया गया है कि राज्य में महाविकास आघाडी सरकार किसानों की लूट कर रही है और बीमा कंपनियों को मालामाल बना रही है. खरीफ 2019 में देवेंद्र फडणवीस सरकार ने फसल बीमा कंपनियों के साथ समझौता किया था. इस दौरान 85 लाख किसानों को 5795 करोड रुपयों का लाभ मिला था, लेकिन 2020 में खरीफ में उध्दव ठाकरे सरकार ने बीमा नियमों में बदलाव किये. जिसके बाद केवल 743 करोड रुपए फसल बीमा नुकसान मुआवजे के तौर पर किसानों को दिया गया है. वहीं बीमा कंपनियों को 4234 करोड रुपयों का मुनाफा मिला है. ठाकरे सरकार ने किसानों के साथ धोखाधडी की है. भाजपा किसान मोर्चा ने अपनी मुख्य मांगे भी रखी. जिसमें प्रधानमंत्री फसल बीमा अंतर्गत 90 फीसदी जोखीम स्तर स्वीकारा जाए, मुख्य उत्पादन निकालते समय 7 वर्षों में मिलने वाले बेहतर 5 उत्पादनों का औसत निकाला जाता है. जिससे मुख्य उत्पादन कम होता है. इसलिए उत्पादन का ही निकष रखा जाए, आपदा के दौरान बुआई, बीमे के लिए सूचना देने की अवधि 10 दी की जाए, मौसम पर आधारित फल बीमा योजना के सभी बदले गए निकषों को रद्द किया जाए, इस वर्ष किसानों को पुराने निकषों के तहत ही बीमें की भरपाई दी जाए आदि मांगे की गई. निवेदन सौंपते समय शेखर भातकुले, नरेश बर्वे, सुधीर बेलसरे, अभिजित लांडे, विठ्ठल गोले, जितेश भुजबल, मनीष चुटके मौजूद थे.
| अमरावती/प्रतिनिधि दि. ग्यारह - महाविकास आघाडी सरकार ने किसानों की लूट करते हुए बीमा कंपनियों को मालामाल किया है. महाविकास आघाडी सरकार के खिलाफ भाजपा किसान मोर्चा की ओर से आज जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में अर्धनग्न आंदोलन किया गया. वहीं किसानों के विविध मांगों को लेकर जिलाधिकारी को निवेदन दिया गया. निवेदन में बताया गया है कि राज्य में महाविकास आघाडी सरकार किसानों की लूट कर रही है और बीमा कंपनियों को मालामाल बना रही है. खरीफ दो हज़ार उन्नीस में देवेंद्र फडणवीस सरकार ने फसल बीमा कंपनियों के साथ समझौता किया था. इस दौरान पचासी लाख किसानों को पाँच हज़ार सात सौ पचानवे करोड रुपयों का लाभ मिला था, लेकिन दो हज़ार बीस में खरीफ में उध्दव ठाकरे सरकार ने बीमा नियमों में बदलाव किये. जिसके बाद केवल सात सौ तैंतालीस करोड रुपए फसल बीमा नुकसान मुआवजे के तौर पर किसानों को दिया गया है. वहीं बीमा कंपनियों को चार हज़ार दो सौ चौंतीस करोड रुपयों का मुनाफा मिला है. ठाकरे सरकार ने किसानों के साथ धोखाधडी की है. भाजपा किसान मोर्चा ने अपनी मुख्य मांगे भी रखी. जिसमें प्रधानमंत्री फसल बीमा अंतर्गत नब्बे फीसदी जोखीम स्तर स्वीकारा जाए, मुख्य उत्पादन निकालते समय सात वर्षों में मिलने वाले बेहतर पाँच उत्पादनों का औसत निकाला जाता है. जिससे मुख्य उत्पादन कम होता है. इसलिए उत्पादन का ही निकष रखा जाए, आपदा के दौरान बुआई, बीमे के लिए सूचना देने की अवधि दस दी की जाए, मौसम पर आधारित फल बीमा योजना के सभी बदले गए निकषों को रद्द किया जाए, इस वर्ष किसानों को पुराने निकषों के तहत ही बीमें की भरपाई दी जाए आदि मांगे की गई. निवेदन सौंपते समय शेखर भातकुले, नरेश बर्वे, सुधीर बेलसरे, अभिजित लांडे, विठ्ठल गोले, जितेश भुजबल, मनीष चुटके मौजूद थे. |
त्रिपड़ी के आनंद नगर-बी इलाके में एक किशोर ने हाथ पकड़ने से रोकने पर प्रिंसिपल को चाकू से गोद दिया। प्रिंसिपल को गंभीर हालत में सरकारी राजिंदरा अस्पताल में भर्ती कराया गया। फिलहाल पीड़िता की हालत खतरे से बाहर है।
मामले के जांच अधिकारी थाना त्रिपड़ी के एएसआई जतिंदर कुमार ने बताया कि त्रिपड़ी के आनंद नगर-बी स्थित संत इंदर दास पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल रेखा रानी (45) घर पर भी बच्चों को पढ़ाती हैं। जश्नदीप (18) अपने छोटे भाई को उनके यहां ट्यूशन छोड़ने और लाने जाया करता था। जश्नदीप भी पहले उनके पास ट्यूशन पढ़ता था।
सोमवार सुबह करीब 11 बजे मौका पाकर जश्नदीप ने प्रिंसिपल का हाथ पकड़ लिया। जब टीचर ने उसको डांटा तो जश्नदीप ने टीचर पर चाकू से सिर और पेट पर चार वार किए। हमले में प्रिंसिपल गंभीर रूप से घायल हो गईं। उन्हें गंभीर हालत में सरकारी राजिंदरा अस्पताल में दाखिल कराया गया। फिलहाल उनकी हालत खतरे से बाहर है। उधर, वारदात के बाद से आरोपी फरार है। पुलिस ने उसके खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। आरोपी की तलाश में छापामारी की जा रही है।
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| त्रिपड़ी के आनंद नगर-बी इलाके में एक किशोर ने हाथ पकड़ने से रोकने पर प्रिंसिपल को चाकू से गोद दिया। प्रिंसिपल को गंभीर हालत में सरकारी राजिंदरा अस्पताल में भर्ती कराया गया। फिलहाल पीड़िता की हालत खतरे से बाहर है। मामले के जांच अधिकारी थाना त्रिपड़ी के एएसआई जतिंदर कुमार ने बताया कि त्रिपड़ी के आनंद नगर-बी स्थित संत इंदर दास पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल रेखा रानी घर पर भी बच्चों को पढ़ाती हैं। जश्नदीप अपने छोटे भाई को उनके यहां ट्यूशन छोड़ने और लाने जाया करता था। जश्नदीप भी पहले उनके पास ट्यूशन पढ़ता था। सोमवार सुबह करीब ग्यारह बजे मौका पाकर जश्नदीप ने प्रिंसिपल का हाथ पकड़ लिया। जब टीचर ने उसको डांटा तो जश्नदीप ने टीचर पर चाकू से सिर और पेट पर चार वार किए। हमले में प्रिंसिपल गंभीर रूप से घायल हो गईं। उन्हें गंभीर हालत में सरकारी राजिंदरा अस्पताल में दाखिल कराया गया। फिलहाल उनकी हालत खतरे से बाहर है। उधर, वारदात के बाद से आरोपी फरार है। पुलिस ने उसके खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। आरोपी की तलाश में छापामारी की जा रही है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen. |
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दर असल करीना कपूर को इस मुद्दे पर बोलना इसलिए पड़ा क्योंकि करीना इधर काफी दिनों से किसी अवार्ड फंक्शन में पर्फार्म करती नहीं दिखीं और जब भी वह फिल्म के इतर किसी आयोजन में दिखायी पड़ी तो ज्यादातर वह सैफ के साथ साड़ी में लिपटी हुईं नजर आयीं।
जिसकी वजह से लोगों ने दबी जुबान में कहना शुरू कर दिया कि करीना शायद अभी गर्भवती हैं इसलिए ही वह ऐसे लोगों के सामने आ रही हैं। जब मीडिया में इस बात का हल्ला मचने लगा तब करीना को इस बारे में सफाई देनी पड़ी।
करीना ने कहा कि वह अवार्ड फंक्शन में स्टेज पर तभी डांस करती हैं जब उन्हें मन मुताबिक पैसे मिलते हैं। इधर काफी दिनों से उन्हें जो ऑफर मिले वह उन्हें पसंद नहीं आये इस कारण डांस करते नजर नहींआयीं।
गौरतलब 16 अक्टूबर 2012 के करीना ने सैफ के साथ रजिस्टर्ड मैरज की थी। करीना सैफ की दूसरी पत्नी हैं। सैफ को अपनी पहली पत्नी अमृता सिंह से दो बच्चे हैं जिनका नाम सारा और इब्राहिम हैं। जो करीना को छोटी अम्मी कहकर पुकारते हैं। करीना फिलहाल उन्हीं बच्चों की परवरिश में सैफ को मदद कर रही हैं।
| Don't Miss! दर असल करीना कपूर को इस मुद्दे पर बोलना इसलिए पड़ा क्योंकि करीना इधर काफी दिनों से किसी अवार्ड फंक्शन में पर्फार्म करती नहीं दिखीं और जब भी वह फिल्म के इतर किसी आयोजन में दिखायी पड़ी तो ज्यादातर वह सैफ के साथ साड़ी में लिपटी हुईं नजर आयीं। जिसकी वजह से लोगों ने दबी जुबान में कहना शुरू कर दिया कि करीना शायद अभी गर्भवती हैं इसलिए ही वह ऐसे लोगों के सामने आ रही हैं। जब मीडिया में इस बात का हल्ला मचने लगा तब करीना को इस बारे में सफाई देनी पड़ी। करीना ने कहा कि वह अवार्ड फंक्शन में स्टेज पर तभी डांस करती हैं जब उन्हें मन मुताबिक पैसे मिलते हैं। इधर काफी दिनों से उन्हें जो ऑफर मिले वह उन्हें पसंद नहीं आये इस कारण डांस करते नजर नहींआयीं। गौरतलब सोलह अक्टूबर दो हज़ार बारह के करीना ने सैफ के साथ रजिस्टर्ड मैरज की थी। करीना सैफ की दूसरी पत्नी हैं। सैफ को अपनी पहली पत्नी अमृता सिंह से दो बच्चे हैं जिनका नाम सारा और इब्राहिम हैं। जो करीना को छोटी अम्मी कहकर पुकारते हैं। करीना फिलहाल उन्हीं बच्चों की परवरिश में सैफ को मदद कर रही हैं। |
10 लाख रुपए लेकर तस्करों को भगाने के मामले में बरलूट के तत्कालीन थानाधिकारी सीमा जाखड़, कॉन्स्टेबल सुरेश विश्नोई, हनुमान विश्नोई और ओम प्रकाश विश्नोई को बर्खास्त कर दिया गया है। डीएसपी मदन सिंह चौहान की जांच में चारों दोषी पाए गए। रिपोर्ट के बाद चारों को पद से हटा दिया गया।
सिरोही एसपी धर्मेंद्र सिंह ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि चारों को नौकरी से हटाया गया है। पहले एसपी धर्मेंद्र सिंह ने चारों को निलंबित किया था। मामले की पूरी जांच डीएसपी मदन सिंह चौहान को सौंपी थी। उप निरीक्षक सीमा जाखड़ पर कार्रवाई के लिए संबंधित फाइल जोधपुर IG नवज्योति गोगोई को भेजी गई थी। गोगोई ने शुक्रवार को उप निरीक्षक सीमा जाखड़ को बर्खास्त करने का आदेश दिया।
सीमा जाखड़ ने तीनों सहयोगियों के साथ मिलकर डोडा तस्करों से साठ-गांठ की थी। 14 नवंबर को उन्हें भगाने के लिए 10 लाख रुपए में सौदा तय किया।
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| दस लाख रुपए लेकर तस्करों को भगाने के मामले में बरलूट के तत्कालीन थानाधिकारी सीमा जाखड़, कॉन्स्टेबल सुरेश विश्नोई, हनुमान विश्नोई और ओम प्रकाश विश्नोई को बर्खास्त कर दिया गया है। डीएसपी मदन सिंह चौहान की जांच में चारों दोषी पाए गए। रिपोर्ट के बाद चारों को पद से हटा दिया गया। सिरोही एसपी धर्मेंद्र सिंह ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि चारों को नौकरी से हटाया गया है। पहले एसपी धर्मेंद्र सिंह ने चारों को निलंबित किया था। मामले की पूरी जांच डीएसपी मदन सिंह चौहान को सौंपी थी। उप निरीक्षक सीमा जाखड़ पर कार्रवाई के लिए संबंधित फाइल जोधपुर IG नवज्योति गोगोई को भेजी गई थी। गोगोई ने शुक्रवार को उप निरीक्षक सीमा जाखड़ को बर्खास्त करने का आदेश दिया। सीमा जाखड़ ने तीनों सहयोगियों के साथ मिलकर डोडा तस्करों से साठ-गांठ की थी। चौदह नवंबर को उन्हें भगाने के लिए दस लाख रुपए में सौदा तय किया। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
आलिया भट्ट और रणबीर कपूर की शादी की खबरों से बॉलीवुड गुलजार है। ऐसी चर्चा है कि दोनों इसी महीने शादी के पवित्र बंधन में बंध जाएंगे। ये अलग बात है कि कपल ने शादी की तारीख का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है। रणबीर-आलिया ने अपनी शादी की खबर पर चुप्पी साध रखी है। इसी बीच हम आपको उन चीजों के बारे में बताएंगे, जिससे संकेत मिलता है कि दोनों इसी महीने सात फेरे लेंगे।
ऐसा कहा जाता है कि जब कोई कलाकार सेलिब्रिटी डिजाइनर मनीष मल्होत्रा के घर या ऑफिस के आसपास दिखे, तो समझ जाइए कि शादी की तैयारियां चल रही हैं। कुछ दिनों पहले ही रणबीर की मां और दिग्गज अभिनेत्री नीतू कपूर को मनीष के स्टोर के बाहर स्पॉट किया गया था। इससे फैंस कयास लगा रहे हैं कि वह शादी की शॉपिंग कर रही थीं। बहुत संभव है कि उन्होंने शादी के सिलसिले में मनीष से मुलाकात की।
प्रमुख साड़ी डिजाइनर बीना कन्नन ने हाल ही में आलिया और रणबीर के साथ एक अपनी एक तस्वीर पोस्ट की थी। उनकी यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी है। फैंस इस तस्वीर को शेयर करते हुए अलग-अलग तरह की बातें कर रहे हैं। लोगों का मानना है कि रणबीर-आलिया साड़ी की खरीदारी के लिए डिजाइनर बीना के पास पहुंचे। इससे अफवाहों को बल मिलता है कि दोनों जल्द दूल्हा-दुल्हन बन जाएंगे।
आलिया और रणबीर दोनों के लिए 'ब्रह्मास्त्र' एक ड्रीम प्रोजेक्ट है। उन्होंने पांच साल बाद इस फिल्म की शूटिंग समाप्त की है। उन्होंने वाराणसी में फिल्म का आखिरी शेड्यूल पूरा किया। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में पहले बताया गया था कि रणबीर-आलिया 'ब्रह्मास्त्र' की शूटिंग के बाद शादी रचा लेंगे। 'ब्रह्मास्त्र' रणबीर और आलिया के लिए खास फिल्म है, क्योंकि 2017 में इसी फिल्म के सेट पर दोनों के बीच प्यार पनपा था। दोनों 2017 से रिलेशनशिप में हैं।
कुछ दिन पहले जब फोटोग्राफर ने नीतू से पूछा कि उनकी बहू कब आ रही है, तो अभिनेत्री की प्रतिक्रिया देखने लायक थी। पहले तो वह शादी की खबर पर अनजान बनने की कोशिश की, फिर उनके चेहरे पर हल्की मुस्कान नजर आई। उन्होंने इशारा करते हुए बताया कि जब भगवान की इच्छा होगा, तब उनकी बहू घर आएगी। वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि नीतू की खुशी छिपाए नहीं छिप रही।
न्यूजबाइट्स प्लस (फैक्ट)
| आलिया भट्ट और रणबीर कपूर की शादी की खबरों से बॉलीवुड गुलजार है। ऐसी चर्चा है कि दोनों इसी महीने शादी के पवित्र बंधन में बंध जाएंगे। ये अलग बात है कि कपल ने शादी की तारीख का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है। रणबीर-आलिया ने अपनी शादी की खबर पर चुप्पी साध रखी है। इसी बीच हम आपको उन चीजों के बारे में बताएंगे, जिससे संकेत मिलता है कि दोनों इसी महीने सात फेरे लेंगे। ऐसा कहा जाता है कि जब कोई कलाकार सेलिब्रिटी डिजाइनर मनीष मल्होत्रा के घर या ऑफिस के आसपास दिखे, तो समझ जाइए कि शादी की तैयारियां चल रही हैं। कुछ दिनों पहले ही रणबीर की मां और दिग्गज अभिनेत्री नीतू कपूर को मनीष के स्टोर के बाहर स्पॉट किया गया था। इससे फैंस कयास लगा रहे हैं कि वह शादी की शॉपिंग कर रही थीं। बहुत संभव है कि उन्होंने शादी के सिलसिले में मनीष से मुलाकात की। प्रमुख साड़ी डिजाइनर बीना कन्नन ने हाल ही में आलिया और रणबीर के साथ एक अपनी एक तस्वीर पोस्ट की थी। उनकी यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी है। फैंस इस तस्वीर को शेयर करते हुए अलग-अलग तरह की बातें कर रहे हैं। लोगों का मानना है कि रणबीर-आलिया साड़ी की खरीदारी के लिए डिजाइनर बीना के पास पहुंचे। इससे अफवाहों को बल मिलता है कि दोनों जल्द दूल्हा-दुल्हन बन जाएंगे। आलिया और रणबीर दोनों के लिए 'ब्रह्मास्त्र' एक ड्रीम प्रोजेक्ट है। उन्होंने पांच साल बाद इस फिल्म की शूटिंग समाप्त की है। उन्होंने वाराणसी में फिल्म का आखिरी शेड्यूल पूरा किया। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में पहले बताया गया था कि रणबीर-आलिया 'ब्रह्मास्त्र' की शूटिंग के बाद शादी रचा लेंगे। 'ब्रह्मास्त्र' रणबीर और आलिया के लिए खास फिल्म है, क्योंकि दो हज़ार सत्रह में इसी फिल्म के सेट पर दोनों के बीच प्यार पनपा था। दोनों दो हज़ार सत्रह से रिलेशनशिप में हैं। कुछ दिन पहले जब फोटोग्राफर ने नीतू से पूछा कि उनकी बहू कब आ रही है, तो अभिनेत्री की प्रतिक्रिया देखने लायक थी। पहले तो वह शादी की खबर पर अनजान बनने की कोशिश की, फिर उनके चेहरे पर हल्की मुस्कान नजर आई। उन्होंने इशारा करते हुए बताया कि जब भगवान की इच्छा होगा, तब उनकी बहू घर आएगी। वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि नीतू की खुशी छिपाए नहीं छिप रही। न्यूजबाइट्स प्लस |
कृषि सुधार विधेयक 2020 के समर्थन और विरोध में दिए जा रहे तर्कों के बीच किसानों का भविष्य उलझ कर रह गया है। सरकार इस बिल को जहां ऐतिहासिक और किसान हितैषी बता रही है तो वहीं विपक्ष इसे किसान विरोधी बता कर इसका विरोध कर रहा है। हालांकि इस राजनीतिक उठापटक से दूर किसान आज भी देश का पेट भरने की चिंता में लगा हुआ है। इतना ही नहीं न्यूनतम समर्थन मूल्य के दांव पेंच के बीच उसे फ़सल का वाजिब दाम मिलने और जमाखोरों से छुटकारा पाने की जहां चिंता है तो वहीं सूखा और बाढ़ से भी अपनी फसल को बचाने की जद्दोजहद कर रहा है।
इस समय देश के विभिन्न हिस्सों में भयंकर बारिश और बाढ़ से कई समस्याएं उत्पन्न हो गई है। खासकर खेती-किसानी एवं पशु पालन बहुत अधिक प्रभावित हो रही है। लाखों हेक्टेयर जमीन पानी से अब भी लबालब है। गुजरात, असम, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश समेत बिहार के 19 जिलों के लगभग एक करोड़ से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। वर्ष 1987 में बिहार में आई बाढ़ की त्रासदी ने लाखों लोगों की जिंदगी को प्रभावित किया था। हालांकि इससे सीख लेते हुए लोगों ने अपने घरों को ऊंचा तो कर लिया, लेकिन किसे पता था कि इस वर्ष के बाढ़ में उनका खेत-खलिहान जलमग्न हो जायेगा। हजारों परिवारों के घरों में पानी घुस गया। खुद के रहने-सहने के लिए लोग दूसरे पर आश्रित हो गए हैं। न तो खेतों में हल चलाने की जगह बची और न ही उसमें मज़दूरी करने वालों के लिए काम। परिणामस्वरूप पलायन करने वाले श्रमिकों की तादाद भी बढ़ गई है। सारी फसलें डूब चुकी हैं। किसानों की चिंता यह भी है कि पशुओं के लिए चारा कहां से आएगी? बाढ़ प्रभावित लोगों के अनुसार सरकारी योजना का लाभ भी समान रूप से नहीं मिल रहा है।
इस संबंध में बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर ज़िला प्रशासन ने बाढ़ पर एक विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया है, जिसमें कहा गया है कि इस वर्ष जून और जुलाई महीने में 469 मिली मीटर सामान्य से लगभग दोगुनी 894 मिली मीटर बारिश हुई है। जिससे भयंकर बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इस प्रलयंकारी बाढ़ से एक ओर जहां सामान्य जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया तो वहीं खेतों में खड़ी फसलें भी डूब गईं। जिले के जलीलनगर गांव के किसान अमरनाथ कुमार कहते हैं कि पहले बाढ़ आती थी तो किसानों में खुशियां छा जाती थीं। क्योंकि बाढ़ के पानी से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ जाती थी। यही कारण है कि बाढ़ समाप्त होते हीं फसलें लहलहा उठती थीं। लेकिन बदलते समय के साथ यही बाढ़ विनाशकारी साबित होती जा रही है। इंसान और मवेशियों के हताहत होने के साथ साथ बड़ी संख्या में फसलें भी तबाह होने लगी हैं।
वास्तव में इंसानों ने पहले से अधिक विकास जरूर किया है, परंतु बाढ़ से निपटने की तैयारी के मामले में हमारी व्यवस्था बिलकुल फेल होती जा रही है। इस बार की बाढ़ ने तो आर्थिक, सामाजिक और शारीरिक रूप से अधिक नुकसान पहुँचाया है। पहले से ही कोरोना ने आर्थिक रूप से कमर तोड़ रखी थी और अब बाढ़ की विभीषिका ने इस नुकसान को और भी बढ़ा दिया है। स्थानीय निवासी रघुवीर ठाकुर कहते हैं कि पहले जब बरसात आती थी, तो वह नदियों के द्वारा पहाड़ों से भारी मात्रा में खनिज व नई मिट्टी (गाद) लेकर आती थी। जिससे खेतों में हरियाली छा जाती थी। खनिज पदार्थ कृषि के लिए सोना है और कृषकों के लिए खजाना। बाढ़ तो कुछ दिनों तक रहती थी लेकिन यह खनिज रूपी ख़ज़ाना भूमि की उर्वरता को बढ़ाकर सालों-साल लोगों को अपेक्षाकृत लाभ पहुंचाती थी। लेकिन अब यही नदियां प्रलयंकारी बाढ़ के साथ हाहाकार मचा देती हैं। फसलें पूरी तरह से चौपट हो जाती हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता नीरज कहते हैं कि बाढ़ आने की वजह भारी बारिश ही नहीं बल्कि जल संधारण क्षमता में रूकावट पैदा होना भी है। ऐसा माना जाता है कि मौसम संबंधित तत्व, बादल फटना, गाद का संचय, मानव निर्मित अवरोध और वनों की अंधाधुंध कटाई आदि कारणों से भी बाढ़ की समस्या गंभीर होती जा रही है। दूसरी ओर विकास के नाम पर तेज़ी से किये जा रहे अवैध निर्माण कार्यों ने भी इस समस्या को और गहरा बना दिया है। जिसका सबसे अधिक ख़ामियाज़ा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। इसका एक उदाहरण मुज़फ़्फ़रपुर के पारू ब्लाक स्थित चौर के बीचों बीच रामपुर चौक से बसंतपुर जाने वाली सड़क है, जिसे विकास और सुगम आवागमन के नाम पर ऊंचा कर दिया गया, इससे पानी निकलने का रास्ता बाधित हो गया। ऐसे में बाढ़ के समय क्या परिस्थिति होती होगी इसका अंदाज़ा लगाया जा सकता है।
सरकार की ओर से बाढ़ राहत से जुड़ी जानकारियां देते हुए कृषि सलाहकार दिलीप कुमार कहते हैं कि राज्य सरकार की ओर से फसल क्षति होने पर किसानों को लाभ दिए जाने का प्रावधान है। जिसमें फसल बीमा के साथ साथ विभिन्न आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। वहीं चांदकेवारी पंचायत की मुखिया गुड़िया देवी बताती है कि राज्य सरकार बाढ़ पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद के तौर पर बैंक खाते में तत्काल 6000 रुपए उपलब्ध करा रही है। लेकिन किसानों के लिए यह सहायता अस्थाई है। जिसका तात्कालिक लाभ तो मिल जाता है लेकिन यह दूरगामी उपाय नहीं है।
बाढ़ के स्थाई समाधान के लिए सरकारी स्तर पर बेहतर पहल करने की जरूरत है। लाखों का अनुदान बांटने से अच्छा है कि बाढ़ की त्रासदी से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन विभाग के अलावा सरकारें भी पूरी गंभीरता से किसानों के विकास पर नए तरीके से सोचे। बाढ़ के कारण उन्हें वर्षों की कमाई गंवानी पड़ती है। ऐसे में सरकारी स्तर पर किसानों की क्षति पूर्ति के सही आंकलन करके उन्हें उचित लाभ पहुंचाने की ज़रूरत है। बीमा केवल खेत का ही नहीं बल्कि किसानों का भी होना चाहिए, ताकि किसान के परिवारों को विपरीत परिस्थितियों में कुछ सहारा मिल सके। जबतक हमारे किसान-श्रमिकों के हितों की रक्षा नहीं की जाएगी, तब तक भारत आर्थिक व सामाजिक रूप से सशक्त नहीं हो सकता है। समय की मांग है कि इस वक्त किसानों को अध्यादेश से नहीं बल्कि बाढ़ की विभीषिका से बचाने की ज़रूरत है।
| कृषि सुधार विधेयक दो हज़ार बीस के समर्थन और विरोध में दिए जा रहे तर्कों के बीच किसानों का भविष्य उलझ कर रह गया है। सरकार इस बिल को जहां ऐतिहासिक और किसान हितैषी बता रही है तो वहीं विपक्ष इसे किसान विरोधी बता कर इसका विरोध कर रहा है। हालांकि इस राजनीतिक उठापटक से दूर किसान आज भी देश का पेट भरने की चिंता में लगा हुआ है। इतना ही नहीं न्यूनतम समर्थन मूल्य के दांव पेंच के बीच उसे फ़सल का वाजिब दाम मिलने और जमाखोरों से छुटकारा पाने की जहां चिंता है तो वहीं सूखा और बाढ़ से भी अपनी फसल को बचाने की जद्दोजहद कर रहा है। इस समय देश के विभिन्न हिस्सों में भयंकर बारिश और बाढ़ से कई समस्याएं उत्पन्न हो गई है। खासकर खेती-किसानी एवं पशु पालन बहुत अधिक प्रभावित हो रही है। लाखों हेक्टेयर जमीन पानी से अब भी लबालब है। गुजरात, असम, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश समेत बिहार के उन्नीस जिलों के लगभग एक करोड़ से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। वर्ष एक हज़ार नौ सौ सत्तासी में बिहार में आई बाढ़ की त्रासदी ने लाखों लोगों की जिंदगी को प्रभावित किया था। हालांकि इससे सीख लेते हुए लोगों ने अपने घरों को ऊंचा तो कर लिया, लेकिन किसे पता था कि इस वर्ष के बाढ़ में उनका खेत-खलिहान जलमग्न हो जायेगा। हजारों परिवारों के घरों में पानी घुस गया। खुद के रहने-सहने के लिए लोग दूसरे पर आश्रित हो गए हैं। न तो खेतों में हल चलाने की जगह बची और न ही उसमें मज़दूरी करने वालों के लिए काम। परिणामस्वरूप पलायन करने वाले श्रमिकों की तादाद भी बढ़ गई है। सारी फसलें डूब चुकी हैं। किसानों की चिंता यह भी है कि पशुओं के लिए चारा कहां से आएगी? बाढ़ प्रभावित लोगों के अनुसार सरकारी योजना का लाभ भी समान रूप से नहीं मिल रहा है। इस संबंध में बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर ज़िला प्रशासन ने बाढ़ पर एक विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया है, जिसमें कहा गया है कि इस वर्ष जून और जुलाई महीने में चार सौ उनहत्तर मिली मीटर सामान्य से लगभग दोगुनी आठ सौ चौरानवे मिली मीटर बारिश हुई है। जिससे भयंकर बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इस प्रलयंकारी बाढ़ से एक ओर जहां सामान्य जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया तो वहीं खेतों में खड़ी फसलें भी डूब गईं। जिले के जलीलनगर गांव के किसान अमरनाथ कुमार कहते हैं कि पहले बाढ़ आती थी तो किसानों में खुशियां छा जाती थीं। क्योंकि बाढ़ के पानी से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ जाती थी। यही कारण है कि बाढ़ समाप्त होते हीं फसलें लहलहा उठती थीं। लेकिन बदलते समय के साथ यही बाढ़ विनाशकारी साबित होती जा रही है। इंसान और मवेशियों के हताहत होने के साथ साथ बड़ी संख्या में फसलें भी तबाह होने लगी हैं। वास्तव में इंसानों ने पहले से अधिक विकास जरूर किया है, परंतु बाढ़ से निपटने की तैयारी के मामले में हमारी व्यवस्था बिलकुल फेल होती जा रही है। इस बार की बाढ़ ने तो आर्थिक, सामाजिक और शारीरिक रूप से अधिक नुकसान पहुँचाया है। पहले से ही कोरोना ने आर्थिक रूप से कमर तोड़ रखी थी और अब बाढ़ की विभीषिका ने इस नुकसान को और भी बढ़ा दिया है। स्थानीय निवासी रघुवीर ठाकुर कहते हैं कि पहले जब बरसात आती थी, तो वह नदियों के द्वारा पहाड़ों से भारी मात्रा में खनिज व नई मिट्टी लेकर आती थी। जिससे खेतों में हरियाली छा जाती थी। खनिज पदार्थ कृषि के लिए सोना है और कृषकों के लिए खजाना। बाढ़ तो कुछ दिनों तक रहती थी लेकिन यह खनिज रूपी ख़ज़ाना भूमि की उर्वरता को बढ़ाकर सालों-साल लोगों को अपेक्षाकृत लाभ पहुंचाती थी। लेकिन अब यही नदियां प्रलयंकारी बाढ़ के साथ हाहाकार मचा देती हैं। फसलें पूरी तरह से चौपट हो जाती हैं। सामाजिक कार्यकर्ता नीरज कहते हैं कि बाढ़ आने की वजह भारी बारिश ही नहीं बल्कि जल संधारण क्षमता में रूकावट पैदा होना भी है। ऐसा माना जाता है कि मौसम संबंधित तत्व, बादल फटना, गाद का संचय, मानव निर्मित अवरोध और वनों की अंधाधुंध कटाई आदि कारणों से भी बाढ़ की समस्या गंभीर होती जा रही है। दूसरी ओर विकास के नाम पर तेज़ी से किये जा रहे अवैध निर्माण कार्यों ने भी इस समस्या को और गहरा बना दिया है। जिसका सबसे अधिक ख़ामियाज़ा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। इसका एक उदाहरण मुज़फ़्फ़रपुर के पारू ब्लाक स्थित चौर के बीचों बीच रामपुर चौक से बसंतपुर जाने वाली सड़क है, जिसे विकास और सुगम आवागमन के नाम पर ऊंचा कर दिया गया, इससे पानी निकलने का रास्ता बाधित हो गया। ऐसे में बाढ़ के समय क्या परिस्थिति होती होगी इसका अंदाज़ा लगाया जा सकता है। सरकार की ओर से बाढ़ राहत से जुड़ी जानकारियां देते हुए कृषि सलाहकार दिलीप कुमार कहते हैं कि राज्य सरकार की ओर से फसल क्षति होने पर किसानों को लाभ दिए जाने का प्रावधान है। जिसमें फसल बीमा के साथ साथ विभिन्न आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। वहीं चांदकेवारी पंचायत की मुखिया गुड़िया देवी बताती है कि राज्य सरकार बाढ़ पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद के तौर पर बैंक खाते में तत्काल छः हज़ार रुपयापए उपलब्ध करा रही है। लेकिन किसानों के लिए यह सहायता अस्थाई है। जिसका तात्कालिक लाभ तो मिल जाता है लेकिन यह दूरगामी उपाय नहीं है। बाढ़ के स्थाई समाधान के लिए सरकारी स्तर पर बेहतर पहल करने की जरूरत है। लाखों का अनुदान बांटने से अच्छा है कि बाढ़ की त्रासदी से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन विभाग के अलावा सरकारें भी पूरी गंभीरता से किसानों के विकास पर नए तरीके से सोचे। बाढ़ के कारण उन्हें वर्षों की कमाई गंवानी पड़ती है। ऐसे में सरकारी स्तर पर किसानों की क्षति पूर्ति के सही आंकलन करके उन्हें उचित लाभ पहुंचाने की ज़रूरत है। बीमा केवल खेत का ही नहीं बल्कि किसानों का भी होना चाहिए, ताकि किसान के परिवारों को विपरीत परिस्थितियों में कुछ सहारा मिल सके। जबतक हमारे किसान-श्रमिकों के हितों की रक्षा नहीं की जाएगी, तब तक भारत आर्थिक व सामाजिक रूप से सशक्त नहीं हो सकता है। समय की मांग है कि इस वक्त किसानों को अध्यादेश से नहीं बल्कि बाढ़ की विभीषिका से बचाने की ज़रूरत है। |
ALLAHABAD: बढ़ते अपराध और लंबित मामलों को देखते हुए आज न्याय को गति देने की जरूरत है। इसके लिए न्याय प्रक्रिया में सभी अधिवक्ता अपना सहयोग दें। जिससे की सभी को न्याय जल्द मिले। मेरा प्रयास यही होगा कि अधिवक्ताओं की समस्याओं को दूर किया जाए। उक्त बातें ट्यूजडे को सिटी पहुंचे नवनियुक्त महाधिवक्ता विजय बहादुर सिंह ने अपने आवास पर अधिवक्ताओं से कहीं। इस दौरान हाईकोर्ट के अधिवक्ता सुरेश बहादुर सिंह व संजय मिश्रा के नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में अधिवक्ताओं ने महाधिवक्ता का जोरदार वेलकम किया। इस मौके पर संजय पाठक, निदेश प्रताप श्रवण पाण्डेय, लाल विजय सिंह, केपी सिंह, उदय प्रताप सिंह, रवि प्रकाश श्रीवास्तव योगेन्द्र परिहार सहित सैकड़ों की संख्या अधिवक्तागण मौजूद थे।
अपने आवास पर मीडिया से बातचीत के दौरान महाधिवक्ता विजय बहादुर सिंह ने बताया कि स्टेट गवर्नमेंट ने हाईकोर्ट के आसपास खाली पड़ी करोड़ों की जमीन कोर्ट को देने का निर्णय लिया है। हाईकोर्ट के आस-पास वाहनों से जाम की समस्या को लेकर आम पब्लिक परेशान है। वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था कर इस समस्या को जल्द ही दूर किया जाएगा। अधिवक्ताओं की पेंशन, मकान की व्यवस्था, चैंबर आदि प्रमुख समस्याओं का निदान जल्द ही किया जाएगा।
| ALLAHABAD: बढ़ते अपराध और लंबित मामलों को देखते हुए आज न्याय को गति देने की जरूरत है। इसके लिए न्याय प्रक्रिया में सभी अधिवक्ता अपना सहयोग दें। जिससे की सभी को न्याय जल्द मिले। मेरा प्रयास यही होगा कि अधिवक्ताओं की समस्याओं को दूर किया जाए। उक्त बातें ट्यूजडे को सिटी पहुंचे नवनियुक्त महाधिवक्ता विजय बहादुर सिंह ने अपने आवास पर अधिवक्ताओं से कहीं। इस दौरान हाईकोर्ट के अधिवक्ता सुरेश बहादुर सिंह व संजय मिश्रा के नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में अधिवक्ताओं ने महाधिवक्ता का जोरदार वेलकम किया। इस मौके पर संजय पाठक, निदेश प्रताप श्रवण पाण्डेय, लाल विजय सिंह, केपी सिंह, उदय प्रताप सिंह, रवि प्रकाश श्रीवास्तव योगेन्द्र परिहार सहित सैकड़ों की संख्या अधिवक्तागण मौजूद थे। अपने आवास पर मीडिया से बातचीत के दौरान महाधिवक्ता विजय बहादुर सिंह ने बताया कि स्टेट गवर्नमेंट ने हाईकोर्ट के आसपास खाली पड़ी करोड़ों की जमीन कोर्ट को देने का निर्णय लिया है। हाईकोर्ट के आस-पास वाहनों से जाम की समस्या को लेकर आम पब्लिक परेशान है। वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था कर इस समस्या को जल्द ही दूर किया जाएगा। अधिवक्ताओं की पेंशन, मकान की व्यवस्था, चैंबर आदि प्रमुख समस्याओं का निदान जल्द ही किया जाएगा। |
छत्तीसगढ़ भाजपा का मिशन-2023 शुरू हो गया है। संगठन को मजबूत करने और भूपेश सरकार को आक्रमक रूप से घेरने शीर्ष नेतृत्व ने महत्वपूर्ण पदों पर बदलाव कर दिए। अब प्रदेश संगठन में बदलाव हुए हैं।
छत्तीसगढ़ भाजपा का मिशन-2023 शुरू हो गया है। संगठन को मजबूत करने और भूपेश सरकार को आक्रमक रूप से घेरने शीर्ष नेतृत्व ने महत्वपूर्ण पदों पर बदलाव कर दिए। अब प्रदेश संगठन में बदलाव हुए हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव ने रविवार देर शाम कार्यकारिणी में बदलाव कर दिया। अधिकांश पुराने नेताओं को साइड लगा दिया गया है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाला फैसला प्रदेश कोषाध्यक्ष रहे गौरीशंकर अग्रवाल को हटाकर लिया गया है। भाजपा ने प्रदेश युवा मोर्चा में आदिवासी कार्ड खेलते हुए रवि भगत को भारतीय जनता युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। टीम में नए चेहरों को मौका मिला है। जातिगत और क्षेत्रीय संतुलन के साथ छत्तीसगढ़ियावाद को सबसे ज्यादा महत्व दिया गया है।
बता दें कि छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव को देखते हुए बदलाव जारी है। 3 दिन पहले छत्तीसगढ़ भाजपा प्रदेश प्रभारी डी पुरंदेश्वरी को बदलकर ओम माथुर को जिम्मेदारी दी गई। इससे पहले छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष को बदला गया। अरुण साव को जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष के तौर पर नारायण चंदेल को कमान सौंपी गई है। अब छत्तीसगढ़ भाजपा में पूरी टीम को नए सिरे से गढ़ा गया है। छत्तीसगढ़ में मिशन 2023 की लड़ाई और संगठन को मजबूत करने यह बदलाव हुए हैं। अरुण साव ने प्रदेश पदाधिकारियों, भाजपा मीडिया टीम, सोशल मीडिया टीम, आईटी संयोजक, प्रदेश प्रवक्ता, मोर्चा और प्रकोष्ठों के अध्यक्ष बदल दिए हैं। नए संभागीय प्रभारियों की भी घोषणा की गई है। भाजपा के प्रदेश स्तरीय टीम में 60 प्लस वालों और डॉ. रमन सिंह खेमे के कई नेताओं की छुट्टी कर दी गई है। इस बदलाव के बाद अब जिला संगठनों में बदलाव होंगे। 26 जिलों के अध्यक्षों और जिला महामंत्रियों को बदलने की तैयारी है।
भाजपा ने प्रदेश उपाध्यक्ष के लिए शिवरतन शर्मा, निर्मल सिन्हा, मधुसूदन यादव, लखनलाल देवांगन, भूपेन्द्र सवन्नी, सरला कोसरिया, उदेश्वरी पैकरा और लक्ष्मी वर्मा को जिम्मा सौंपी है। प्रदेश महामंत्री के लिए केदार कश्यप, विजय शर्मा, ओपी चौधरी को चुना गया है। प्रदेश महामंत्री संगठन की जिम्मेदारी पवन साय को दी गई है। प्रदेश मंत्री के लिए प्रबल प्रताप सिंह जूदेव, अवधेश चंदेल, जगदीश रोहरा, परमेश्वर राजवाड़े, ओजस्वी मांडवी, किशोर महानंद, श्याम बाई साहू, महेश जैन को चुना गया है।
छत्तीसगढ़ भाजपा प्रवक्ता के लिए अजय चंद्राकर मुख्य प्रवक्ता, राजेश मूणत, कृष्णमूर्ति बांधी, रंजना साहू, अनुराग सिंह देव, नीलू शर्मा, संदीप शर्मा, केदारनाथ गुप्ता, देवलाल ठाकुर, दीपक म्हस्के, अमित साहू और नलनिश ठोकने को जिम्मेदारी दी गई है। रायपुर में नंदन जैन को छत्तीसगढ़ बीजेपी का प्रदेश कोषाध्यक्ष बनाया गया है। भाजपा ने संभागीय प्रभारी भी बनाए हैं। संतोष पांडे को बस्तर का संभागीय प्रभारी, भूपेंद्र सवन्नी को दुर्ग संभागीय प्रभारी, किरण देव को बिलासपुर संभागीय प्रभारी, संजय श्रीवास्तव को सरगुजा संभागीय प्रभारी और सौरव सिंह को रायपुर का संभागीय प्रभारी बनाया गया है।
भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष रवि भगत को बनाया गया है। प्रदेश महिला मोर्चा की जिम्मेदारी शालिनी राजपूत को दी गई है। प्रदेश अध्यक्ष किसान मोर्चा का जिम्मा पवन कुमार साहू को मिला है। प्रदेश अध्यक्ष पिछड़ा वर्ग मोर्चा की कमान भरतलाल वर्मा को दी गई है। प्रदेश अध्यक्ष अजजा मोर्चा का अध्यक्ष विकास मरकाम को बनाया गया है। प्रदेश अध्यक्ष अजा मोर्चा की कमान नवीन मार्कंडेय को सौंपी गई है। प्रदेश अध्यक्ष अल्पसंख्यक मोर्चा का जिम्मा शकील अहमद को सौंपा गया है।
| छत्तीसगढ़ भाजपा का मिशन-दो हज़ार तेईस शुरू हो गया है। संगठन को मजबूत करने और भूपेश सरकार को आक्रमक रूप से घेरने शीर्ष नेतृत्व ने महत्वपूर्ण पदों पर बदलाव कर दिए। अब प्रदेश संगठन में बदलाव हुए हैं। छत्तीसगढ़ भाजपा का मिशन-दो हज़ार तेईस शुरू हो गया है। संगठन को मजबूत करने और भूपेश सरकार को आक्रमक रूप से घेरने शीर्ष नेतृत्व ने महत्वपूर्ण पदों पर बदलाव कर दिए। अब प्रदेश संगठन में बदलाव हुए हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव ने रविवार देर शाम कार्यकारिणी में बदलाव कर दिया। अधिकांश पुराने नेताओं को साइड लगा दिया गया है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाला फैसला प्रदेश कोषाध्यक्ष रहे गौरीशंकर अग्रवाल को हटाकर लिया गया है। भाजपा ने प्रदेश युवा मोर्चा में आदिवासी कार्ड खेलते हुए रवि भगत को भारतीय जनता युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। टीम में नए चेहरों को मौका मिला है। जातिगत और क्षेत्रीय संतुलन के साथ छत्तीसगढ़ियावाद को सबसे ज्यादा महत्व दिया गया है। बता दें कि छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव को देखते हुए बदलाव जारी है। तीन दिन पहले छत्तीसगढ़ भाजपा प्रदेश प्रभारी डी पुरंदेश्वरी को बदलकर ओम माथुर को जिम्मेदारी दी गई। इससे पहले छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष को बदला गया। अरुण साव को जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष के तौर पर नारायण चंदेल को कमान सौंपी गई है। अब छत्तीसगढ़ भाजपा में पूरी टीम को नए सिरे से गढ़ा गया है। छत्तीसगढ़ में मिशन दो हज़ार तेईस की लड़ाई और संगठन को मजबूत करने यह बदलाव हुए हैं। अरुण साव ने प्रदेश पदाधिकारियों, भाजपा मीडिया टीम, सोशल मीडिया टीम, आईटी संयोजक, प्रदेश प्रवक्ता, मोर्चा और प्रकोष्ठों के अध्यक्ष बदल दिए हैं। नए संभागीय प्रभारियों की भी घोषणा की गई है। भाजपा के प्रदेश स्तरीय टीम में साठ प्लस वालों और डॉ. रमन सिंह खेमे के कई नेताओं की छुट्टी कर दी गई है। इस बदलाव के बाद अब जिला संगठनों में बदलाव होंगे। छब्बीस जिलों के अध्यक्षों और जिला महामंत्रियों को बदलने की तैयारी है। भाजपा ने प्रदेश उपाध्यक्ष के लिए शिवरतन शर्मा, निर्मल सिन्हा, मधुसूदन यादव, लखनलाल देवांगन, भूपेन्द्र सवन्नी, सरला कोसरिया, उदेश्वरी पैकरा और लक्ष्मी वर्मा को जिम्मा सौंपी है। प्रदेश महामंत्री के लिए केदार कश्यप, विजय शर्मा, ओपी चौधरी को चुना गया है। प्रदेश महामंत्री संगठन की जिम्मेदारी पवन साय को दी गई है। प्रदेश मंत्री के लिए प्रबल प्रताप सिंह जूदेव, अवधेश चंदेल, जगदीश रोहरा, परमेश्वर राजवाड़े, ओजस्वी मांडवी, किशोर महानंद, श्याम बाई साहू, महेश जैन को चुना गया है। छत्तीसगढ़ भाजपा प्रवक्ता के लिए अजय चंद्राकर मुख्य प्रवक्ता, राजेश मूणत, कृष्णमूर्ति बांधी, रंजना साहू, अनुराग सिंह देव, नीलू शर्मा, संदीप शर्मा, केदारनाथ गुप्ता, देवलाल ठाकुर, दीपक म्हस्के, अमित साहू और नलनिश ठोकने को जिम्मेदारी दी गई है। रायपुर में नंदन जैन को छत्तीसगढ़ बीजेपी का प्रदेश कोषाध्यक्ष बनाया गया है। भाजपा ने संभागीय प्रभारी भी बनाए हैं। संतोष पांडे को बस्तर का संभागीय प्रभारी, भूपेंद्र सवन्नी को दुर्ग संभागीय प्रभारी, किरण देव को बिलासपुर संभागीय प्रभारी, संजय श्रीवास्तव को सरगुजा संभागीय प्रभारी और सौरव सिंह को रायपुर का संभागीय प्रभारी बनाया गया है। भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष रवि भगत को बनाया गया है। प्रदेश महिला मोर्चा की जिम्मेदारी शालिनी राजपूत को दी गई है। प्रदेश अध्यक्ष किसान मोर्चा का जिम्मा पवन कुमार साहू को मिला है। प्रदेश अध्यक्ष पिछड़ा वर्ग मोर्चा की कमान भरतलाल वर्मा को दी गई है। प्रदेश अध्यक्ष अजजा मोर्चा का अध्यक्ष विकास मरकाम को बनाया गया है। प्रदेश अध्यक्ष अजा मोर्चा की कमान नवीन मार्कंडेय को सौंपी गई है। प्रदेश अध्यक्ष अल्पसंख्यक मोर्चा का जिम्मा शकील अहमद को सौंपा गया है। |
कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्री शरद पवार ने आज झांसी में रानी लक्ष्मीबाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय स्थापित किए जाने की घोषणा की। मंत्री महोदय ने बताया कि संसद ने पिछले सप्ताह रानी लक्ष्मीबाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय विधेयक-2012 पारित किया था। विश्वविद्यालय के कार्य क्षेत्र की सीमा बुंदेलखण्ड क्षेत्र में होगी, जिसके तहत उत्तरप्रदेश के सात और मध्यप्रदेश के छह जिले आएंगे। आरंभ में दो महाविद्यालय झांसी में स्थापित किए जाएंगे, जबकि बाद में दो अन्य महाविद्यालय मध्यप्रदेश में खोले जाएंगे। उत्तरप्रदेश में कृषि एवं बागवानी तथा वन महाविद्यालय स्थापित किए जाएंगे, जबकि पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान तथा मत्स्यकी कॉलेज की स्थापना मध्यप्रदेश में की जाएगी।
विश्वविद्यालय की स्थापना का मुख्य उद्देश्य कृषि और संबंधित विज्ञानों की विभिन्न शाखाओं में शिक्षा प्रदान करना, कृषि क्षेत्र में शोध कार्य करना तथा बुंदेलखण्ड क्षेत्र में विस्तारित शिक्षा के कार्यक्रम लागू करना और राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय शैक्षणिक संस्थानों के साथ संपर्कों को बढ़ाना है।
श्री पवार ने ¬राष्ट्रीय कृषि शोध संस्थान के वार्षिक कृषि मेला-पूसा कृषि मेला का भी उद्घाटन किया। इसमें कृषि वैज्ञानिकों के अलावा बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया। ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री प्रदीप जैन 'आदित्य' ने भी समारोह को सम्बोधित किया।
इस आयोजन के फोटो pib.nic.in पर उपलब्ध हैं।
| कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्री शरद पवार ने आज झांसी में रानी लक्ष्मीबाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय स्थापित किए जाने की घोषणा की। मंत्री महोदय ने बताया कि संसद ने पिछले सप्ताह रानी लक्ष्मीबाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय विधेयक-दो हज़ार बारह पारित किया था। विश्वविद्यालय के कार्य क्षेत्र की सीमा बुंदेलखण्ड क्षेत्र में होगी, जिसके तहत उत्तरप्रदेश के सात और मध्यप्रदेश के छह जिले आएंगे। आरंभ में दो महाविद्यालय झांसी में स्थापित किए जाएंगे, जबकि बाद में दो अन्य महाविद्यालय मध्यप्रदेश में खोले जाएंगे। उत्तरप्रदेश में कृषि एवं बागवानी तथा वन महाविद्यालय स्थापित किए जाएंगे, जबकि पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान तथा मत्स्यकी कॉलेज की स्थापना मध्यप्रदेश में की जाएगी। विश्वविद्यालय की स्थापना का मुख्य उद्देश्य कृषि और संबंधित विज्ञानों की विभिन्न शाखाओं में शिक्षा प्रदान करना, कृषि क्षेत्र में शोध कार्य करना तथा बुंदेलखण्ड क्षेत्र में विस्तारित शिक्षा के कार्यक्रम लागू करना और राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय शैक्षणिक संस्थानों के साथ संपर्कों को बढ़ाना है। श्री पवार ने ¬राष्ट्रीय कृषि शोध संस्थान के वार्षिक कृषि मेला-पूसा कृषि मेला का भी उद्घाटन किया। इसमें कृषि वैज्ञानिकों के अलावा बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया। ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री प्रदीप जैन 'आदित्य' ने भी समारोह को सम्बोधित किया। इस आयोजन के फोटो pib.nic.in पर उपलब्ध हैं। |
अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट जल्द शादी के बंधन में बंधेंगे.
शादी से पहले अनंत और राधिका ने तिरुमाला मंदिर में पूजा-अर्चना की.
अनंत अंबानी और राधिका ने केरल में 'गुरुवायुर मंदिर' के दर्शन भी किए.
अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट की 19 जनवरी 2023 को सगाई हुई थी.
दोनों की सगाई का आयोजन अंबानी परिवार ने मुंबई स्थित घर 'एंटीलिया' में किया था.
सगाई से पहले 29 दिसंबर 2022 को अनंत और राधिका का श्रीनाथजी मंदिर में रोका हुआ था.
परिवार में अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट की शादी की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं.
अनंत अंबनी और राधिका मर्चेंट एक दूसरे को कई वर्षों से जानते हैं.
Next: आम्रपाली दुबे कमाई में बॉलीवुड से पीछे नहीं, करोड़ों में है संपत्ति!
| अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट जल्द शादी के बंधन में बंधेंगे. शादी से पहले अनंत और राधिका ने तिरुमाला मंदिर में पूजा-अर्चना की. अनंत अंबानी और राधिका ने केरल में 'गुरुवायुर मंदिर' के दर्शन भी किए. अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट की उन्नीस जनवरी दो हज़ार तेईस को सगाई हुई थी. दोनों की सगाई का आयोजन अंबानी परिवार ने मुंबई स्थित घर 'एंटीलिया' में किया था. सगाई से पहले उनतीस दिसंबर दो हज़ार बाईस को अनंत और राधिका का श्रीनाथजी मंदिर में रोका हुआ था. परिवार में अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट की शादी की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं. अनंत अंबनी और राधिका मर्चेंट एक दूसरे को कई वर्षों से जानते हैं. Next: आम्रपाली दुबे कमाई में बॉलीवुड से पीछे नहीं, करोड़ों में है संपत्ति! |
ऊपर जो ३० प्रकृतिक उदयस्थान के दो प्रकार बतलाये हैं उसमे से यदि जिसने भाषा पर्याप्ति को भी प्राप्त कर लिया और उद्योत का भी उदय है, उसको ३१ प्रकृतिक उदयस्थान होता है। यहाँ यश कीर्ति और अयश कीर्ति तथा दोनो स्वरो के विकल्प से चार भङ्ग होते है। इस प्रकार पर्याप्त द्वीन्द्रिय के सब उदयस्थानों के कुल भङ्ग २० होते हैं ।
दीन्द्रिय पर्याप्त जीवस्थान में भी एकेन्द्रिय के समान २,८८,८६, ८० और ७८ प्रकृतिक, ये पाँच सत्तास्थान होते है । पहले जो छह उदयस्थानो के २० भङ्ग बतलाये है उनमे से २१ प्रकृतिक उदयस्थान के दो भाग तथा २६ प्रकृतिक उदयस्थान के दो भङ्ग, इन चार भागो मे से प्रत्येक भङ्ग मे पाँच-पांच सत्तास्थान होते है क्योकि ७८ प्रकृतियो की सत्ता वाले जो अग्निकायिक और वायुकायिक जीव पर्याप्त द्वीन्द्रियों में उत्पन्न होते हैं, उनके कुछ काल तक ७८ प्रकृतियों की मत्ता संभव है तथा उस काल मे द्वीन्द्रियों के क्रमश २१ और २६ प्रकृतिक उदयस्थान ही होते है। इसीलिये इन दो उदयस्थानो के चार भागो में से प्रत्येक भाग में उक्त पाँच मनास्थान कहे हैं तथा इन चार भङ्गो के अतिरिक्त जो शेष १६ भङ्ग रह जाते है, उनमें से किसी मे भी ७८ प्रकृतिक सत्तास्थान न होने से प्रत्येक में चार-चार सत्तास्थान होते है। क्योकि अग्निकायिक और वायुकाविक जीवो के सिवाय शेष जीन शरीर पर्याप्ति से पर्याप्त होने के पश्चात् नियम से मनुष्यगति और मनुष्यानुर्सीका वध करते हैं, जिससे उनके ७८ कृतिक सत्तास्थान नहीं पाया जाता है ।
पर्याप्त दीन्द्रिय जीवो की तरह मीन्द्रिय और चतुरिन्द्रिय पर्याप्त जीवो को भी यादि स्थानों और उनके जी को जानना चाहिये । इतनी विशेषता जानना चाहिये कि उदयस्थानी मे दोन्द्रिय के स्थान पर द्रिय और चतुरिन्द्रिय का उत्लेस कर दिया जाये ।
अब क्रमप्राप्त असज्ञी पर्याप्त जीवस्थान मे बधादि स्थानो और उनके भङ्गो का निर्देश करते है। इसके लिये गाथाओ मे निर्देश किया है - 'छच्छप्पणग' 'असन्नी य' अर्थात् असज्ञी पचेन्द्रिय पर्याप्त जीवस्थान के छह बधस्थान हैं, छह उदयस्थान है और पाँच सत्तास्थान है । जिनका विवेचन यह है कि असज्ञी पचेन्द्रिय पर्याप्त जीव मनुष्यगति और तिर्यंचगति के योग्य प्रकृतियो का बध करते ही है, किन्तु नरकगति और देवगति के योग्य प्रकृतियो का भी बध कर सकते हैं । इसलिये इनके २३, २५, २६, २८, २६ और ३० प्रकृतिक ये छह बधस्थान होते है और तदनुसार १३९२६ भङ्ग होते है ।
उदयस्थानो की अपेक्षा विचार करने पर यहाँ २१, २६, २८, २९, ३० और ३१ प्रकृतिक, ये छह उदयस्थान है । इनमे से २१ प्रकृतिक उदयस्थान मे तैजस, कार्मण, अगुरुलघु, स्थिर, अस्थिर, शुभ, अशुभ, वर्णचतुष्क, निर्माण, तिर्यंचगति, तिर्यचानुपूर्वी, पचेन्द्रिय जाति, त्रस, बादर, पर्याप्त सुभग और दुर्भाग मे से कोई एक, आदेय और अनादेय मे से कोई एक तथा यश कीर्ति और अयश कीर्ति मे से एक, इन २१ प्रकृतियो का उदय होता है । यह २१ प्रकृतिक उदयस्थान अपान्तरालगति मे ही पाया जाता है तथा सुभग आदि तीन युगलो मे से प्रत्येक प्रकृति के विकल्प से ८ भङ्ग प्राप्त होते हैं ।
अनन्तर जब यह जीव शरीर को ग्रहण कर लेता है तब औदारिक शरीर, औदारिक अगोपाग, छह सस्थानों में से कोई एक संस्थान, छह सहननो मे से कोई एक सहनन, उपघात और प्रत्येक इन छह प्रकृतियो का उदय होने लगता है । किन्तु यहाँ आनुपूर्वी नामकर्म का उदय नही होता है । अतएव उक्त २१ प्रकृतिक उदयस्थान मे छह प्रकृतियों को मिलाने और तिर्यंचानुपूर्वी को कम करने पर २६ प्रकृतिक उदयस्थान होता है । यहाँ छह सस्थान और छह सहननो
की अपेक्षा सुभगत्रिक की अपेक्षा से पूर्वोक्त ८ भङ्गो मे दो बार छह से गुणित कर देने पर ६x६x६=२८८ भङ्ग प्राप्त होते हैं ।
अनतर इसके शरीर पर्याप्ति से पर्याप्त हो जाने पर पराघात तथा प्रशस्त विहायोगति और अप्रशस्त विहायोगति मे से किसी एक का उदय और होने लगता है । अत २६ प्रकृतिक उदयस्थान में इन दो प्रकृतियो को और मिला देने पर २८ प्रकृतिक उदयस्थान होता है । यहाँ दोनो विहायोगतियों के विकल्प की अपेक्षा भङ्गो के विकल्प पूर्वोक्त २८८ को दो से गुणा कर देने पर 2८८४२ = ५७६ हो जाते हैं । २६ प्रकृतिक उदयस्थान दो प्रकार से होता है - एक तो जिसने आन-प्राण पर्याप्ति को पूर्ण कर लिया है उसके उद्योत के बिना केवल उच्छ्वास के उदय से प्राप्त होता है और दूसरा शरीर पर्याप्ति के पूर्ण होने पर उद्योत प्रकृति के उदय से प्राप्त होता है। इन दोनो स्थानो में से प्रत्येक स्थान मे ५७६ भाग होते हैं । अत २९ प्रकृतिक उदयस्थान वः कुल ५७६ ×२ = ११५२ भङ्ग हुए ।
३० प्रकृतिक उदयस्थान भी दो प्रकार से प्राप्त होता है। एक तो जिसने भाषा पर्याप्ति को पूर्ण कर लिया उसके उद्योत के विना सुस्वर और दुस्वर प्रकृतियों में से किसी एक प्रकृति के उदय से प्राप्त होता है और दूसरा जिसने श्वासोच्छ्वास पर्याप्ति को पूर्ण कर लिया, उसके उद्योत का उदय हो जाने पर होता है। इनमें से पहले प्रकार के स्थान के पूर्वोक्त ५७६ भगो को स्वरद्विक मे गुणित करने पर १९५२ भङ्ग प्राप्त होते हैं तथा दूसरे प्रकार के स्थान में ५७६ भग ही होते हैं । सपकार ३० प्रकृतिक उदयस्थान के कुल भग ११५२+५७६= १७२८ होते हैं।
अनन्तर जिसने भाषा पर्याप्ति को भी पूर्ण कर लिया और उद्योत प्रकृति का भी उदय है उसके ३१ प्रकृतिक उदयस्थान होता है ।
यहाँ कुल भग ११५२ होते है । इस प्रकार असज्ञी पचेन्द्रिय पर्याप्त जीवस्थान के सब उदयस्थानो के कुल ४९०४ भङ्ग होते है ।
असज्ञी पचेन्द्रिय पर्याप्त जीवस्थान मे ९२,८८,८६, ८० और ७८ प्रकृतिक ये पाच सत्तास्थान होते है । इनमे से २१ प्रकृतिक उदयस्थान के ८ भङ्ग तथा २६ प्रकृतिक उदयस्थान के २८८ भङ्ग, इनमें से प्रत्येक भङ्ग मे पूर्वोक्त पाँच-पाँच सत्तास्थान होते है । क्योकि ७८ प्रकृतियो की सत्ता वाले जो अग्निकायिक और वायुकायिक जीव हैं वे यदि असज्ञी पचेन्द्रिय पर्याप्तको मे उत्पन्न होते है तो उनके २१ और २६ प्रकृतिक उदयस्थान रहते हुए ७८ प्रकृतिक सत्तास्थान पाया जाना सभव है । किन्तु इनके अतिरिक्त शेष उदयस्थानो और उनके भङ्गो मे ७८ के बिना शेष चार-चार सत्तास्थान ही होते है ।
इस प्रकार से अभी तक तेरह जीवस्थानो के नामकर्म के बधादि स्थानो और उनके भङ्गो का विचार किया गया । अब शेप रहे चौदहवें सज्ञी पचेन्द्रिय पर्याप्त जीवस्थान के बधादि स्थानो व भङ्गो का निर्देश करते हैं । इस जीवस्थान के बधादि स्थानों के लिये गाथा मे सकेत किया गया है - 'अट्ठदसग ति सन्नी य' अर्थात् सज्ञी पचेन्द्रिय पर्याप्त जीवस्थान मे आठ बधस्थान, आठ उदयस्थान और दस सत्तास्थान है । जिनका स्पष्टीकरण नीचे किया जाता है ।
नाम कर्म के २३, २५ २६, २८ २९, ३०, ३१ और १ प्रकृतिक, ये आठ बधस्थान बतलाये हैं । ये आठो बधस्थान सज्ञी पचेन्द्रिय पर्याप्त जीवो के होते है और उनके १३९४५ भङ्ग सभव हैं। क्योकि इनके चारो गति सम्बन्धी प्रकृतियो का बध सम्भव है, इसीलिये २३ प्रकृतिक आदि बधस्थान इनके कहे हैं । तीर्थंकर नाम और आहारकचतुष्क का भी इनके बध होता है इसीलिये ३१ प्रकृतिक बधस्थान कहा है । इस जीवस्थान मे उपशम और क्षपक दोनो श्रेणियाँ पाई जाती हैं इसीलिये १ प्रकृतिक बधस्थान भी कहा है ।
उदयस्थानो की अपेक्षा विचार करने पर और २०, ६ और प्रकृ तिक ये तीन उदयस्थान केवली सम्वन्धी हैं और २४ प्रकृतिक उदयस्थान एकेन्द्रियो को होता है अत इस जीवस्थान मे २०, २४, ६ और ८ प्रकृतिक, इन चार उदयस्थानो को छोडकर शेप यह जीवस्थान वारहवें गुणस्थान तक ही पाया जाता है । २१, २५, २६, २७, २८, २३ ३०, ३१ प्रकृतिक ये आठ उदयस्थान पाये जाते है। इन आठ उदयस्थानों के कुल भग ७६७१ होते है । क्योंकि १२ उदयस्थानों के कुल भग ७७६१ हैं सो उनमे से १२० भग कम हो जाते हैं, क्योकि उन भगो का संबंध सज्ञी पवेन्द्रिय पर्याप्त जीव से नही है ।
नामकर्म के सत्तास्थान १२ हैं, उनमे से 8 और ८ प्रकृतिक सत्तास्थान केवली के पाये जाते है, जत वे दोनो मज्ञी पचेन्द्रिय जीवस्थान मे सभव नहीं होने से उनके अतिरिक्त ६३, ६२, ८६, ८८, ८६,८०, ७ ७५, ७६ और ७५ प्रकृतिक, ये दन सत्तास्थान पाये जाते हैं । २१ और २६ प्रकृतिक उदयस्थानों के क्रमश और २८८ भगो मे से तो प्रत्येक भग मे १२,८८,८६,८०और ७६ प्रकृतिक, ये पांच-पांच सत्तास्थान ही पाये जाते है ।
गो० रमाड गाथा ६०९ मे नामकर्म के ८३, ६२, ९१, २०,८८८८, ८२,८७,७८, २७, ४० और प्रकृतिक ये १३ मत्तास्थान तलाये है । इन 1 सीपजीवस्थान १० और प्रकृतिक सत्तास्वान को छोडकर नास्थान बतलाये १ -- दमणवपरिहोणमव्वय
चत ॥
ताम्र और दिम्बिर मन्थो नाम के निम्नलिमित नताराना पनि ३६८और शनि और बारी के मतास्थानों में प्रतियों में मिलता है । देवनार ६२५ प्रति तथा दिगम्बर २०२० प्रतिपत्तास्थान बना हू ।
इस प्रकार चौदह जीवस्थानों में बधादि स्थानो और उनके भगो का विचार किया गया । अब उनके परस्पर सवेध का विचार करते हैं । सूक्ष्म एकेन्द्रिय अपर्याप्त जीवो के २३ प्रकृतिक बधस्थान मे २१ प्रकृतिक उदयस्थान के रहते ६२,८८,८६, ८० और ७८ प्रकृतिक, ये पाच सत्तास्थान होते हैं । इसी प्रकार २४ प्रकृतिक उदयस्थान मे भी पाच सत्तास्थान होते हैं । कुल मिलाकर दोनो उदयस्थानो के १० सत्तास्थान हुए । इसी प्रकार २५, २६, २६ और ३० प्रकृतियो का बध करने वाले उक्त जीवो के दो-दो उदयस्थानो की अपेक्षा दस-दस सत्तास्थान होते हैं । जो कुल मिलाकर ५० हुए । इसी प्रकार बादर एकेन्द्रिय अपर्याप्त आदि अन्य छह अपर्याप्तो के ५० -५० सत्तास्थान जानना किन्तु सर्वत्र अपने-अपने दो-दो उदयस्थान कहना चाहिये ।
सूक्ष्म एकेन्द्रिय पर्याप्त के २३, २५, २६, २६ और ३० प्रकृतिक, ये पाच बधस्थान होते है और एक-एक बधस्थान मे २१, २४, २५ और २६ प्रकृतिक, ये चार उदयस्थान होते है । अत' पाच को चार से गुणित करने पर २० हुए तथा प्रत्येक उदयस्थान मे पाच-पाच सत्तास्थान होते है अतः २० को ५ से गुणा करने पर १०० सत्तास्थान सूक्ष्म एकेन्द्रिय पर्याप्त जीवस्थान में होते है ।
बादर एकेन्द्रिय पर्याप्त के भी पूर्वोक्त २३, २५, २६, २६ और ३० प्रकृतिक, पाच बधस्थान होते है और एक-एक बघस्थान मे २१, २४, २५, २६ और २७ प्रकृतिक, ये पाच-पाच उदयस्थान होते है, अत· ५ को ५ से गुणा करने पर २५ हुए । इनमे से अन्तिम पाच उदयस्थानो मे ७८ के बिना चार-चार सत्तास्थान होते है, जिनके कुल भग २० हुए और शेप २० उदयस्थानो मे पाच-पाच सत्तास्थान होते है, जिनके कुल भग १०० हुए । इस प्रकार यहाँ कुल भग १२० होते हैं ।
दीन्द्रिय पर्याप्त के २३, २५, २६, २७ और ३० प्रकृतिक, ये पाच
वधस्थान होते है और प्रत्येक वधस्थान मे २१, २६, २८, २९, ३० और ३१ प्रकृतिक, ये छह उदयस्थान होते हैं। इनमें से २१ और २६ प्रकृतिक उदयस्थानो मे पाच-पाच सत्तास्थान है तथा शेप चार उदयस्थानो मे ७८ प्रकृतिक सत्तास्थान के सिवाय चार-चार सत्तास्थान हैं । ये कुल मिलाकर २६ सत्तास्थान हुए। इस प्रकार पाच वधस्थानो के १३० भग हुए ।
द्वीन्द्रिय पर्याप्त की तरह त्रीन्द्रिय और चतुरिन्द्रिय पर्याप्त के वधस्थान आदि जानना चाहिये तथा उनके भी १३०, १३० भङ्ग होते हैं ।
असज्ञी पचेन्द्रिय पर्याप्त जीवस्थान में भी २३, २५, २६, २६ और ३० प्रकृतिक, इन पाच वधस्थानों में से प्रत्येक वधस्थान मे विकलेन्द्रियो की तरह छब्बीस भङ्ग होते हैं जिनका योग १३० है । परन्तु २८ प्रकृतिक वधस्थान मे ३० और ३१ प्रकृतिक ये दो उदयस्थान ही होते हैं । जत यहा प्रत्येक उदयस्थान मे ९२,८८ और ८६ प्रकृतिक ये तीन-तीन सत्तास्थान होते है । इनके कुल ६ भङ्ग हुए । यहा तीन सत्तास्थान होने का कारण यह है कि २८ प्रकृतिक वधस्थान देवगति और नरकगति के योग्य प्रकृतियो का वध पर्याप्त के ही होता है। इसी प्रकार जसज्ञी पचेन्द्रिय पर्याप्त जीवस्थान मे १३०+६=१३६ भङ्ग होते है ।
सभी पचेन्द्रिय पर्याप्त के २३ प्रकृतिक वधस्थान में जैसे जमज्ञी पचेन्द्रिय पर्याप्त के २६ सत्तास्थान वतलाये, वैसे यहां भी जानना
टावतियधराना पुनस्तपा एवोदयस्पाने, तद्यथा- विशदेकविदा प्रत्येक नोणि प्रोणि सत्तास्थानानि तथथा- द्विनवति नष्टाशोपित नष्टविहिं देवगनियोग्य नायाग्यावा ततस्तस्या उभ्यमानापानवदन वैश्चिचतुष्टयादि बध्यते इत्यशीति-अष्टसप्त/ - सप्ततिश प्रकरण टोका, पृ० २०५ | ऊपर जो तीस प्रकृतिक उदयस्थान के दो प्रकार बतलाये हैं उसमे से यदि जिसने भाषा पर्याप्ति को भी प्राप्त कर लिया और उद्योत का भी उदय है, उसको इकतीस प्रकृतिक उदयस्थान होता है। यहाँ यश कीर्ति और अयश कीर्ति तथा दोनो स्वरो के विकल्प से चार भङ्ग होते है। इस प्रकार पर्याप्त द्वीन्द्रिय के सब उदयस्थानों के कुल भङ्ग बीस होते हैं । दीन्द्रिय पर्याप्त जीवस्थान में भी एकेन्द्रिय के समान दो,अठासी,छियासी, अस्सी और अठहत्तर प्रकृतिक, ये पाँच सत्तास्थान होते है । पहले जो छह उदयस्थानो के बीस भङ्ग बतलाये है उनमे से इक्कीस प्रकृतिक उदयस्थान के दो भाग तथा छब्बीस प्रकृतिक उदयस्थान के दो भङ्ग, इन चार भागो मे से प्रत्येक भङ्ग मे पाँच-पांच सत्तास्थान होते है क्योकि अठहत्तर प्रकृतियो की सत्ता वाले जो अग्निकायिक और वायुकायिक जीव पर्याप्त द्वीन्द्रियों में उत्पन्न होते हैं, उनके कुछ काल तक अठहत्तर प्रकृतियों की मत्ता संभव है तथा उस काल मे द्वीन्द्रियों के क्रमश इक्कीस और छब्बीस प्रकृतिक उदयस्थान ही होते है। इसीलिये इन दो उदयस्थानो के चार भागो में से प्रत्येक भाग में उक्त पाँच मनास्थान कहे हैं तथा इन चार भङ्गो के अतिरिक्त जो शेष सोलह भङ्ग रह जाते है, उनमें से किसी मे भी अठहत्तर प्रकृतिक सत्तास्थान न होने से प्रत्येक में चार-चार सत्तास्थान होते है। क्योकि अग्निकायिक और वायुकाविक जीवो के सिवाय शेष जीन शरीर पर्याप्ति से पर्याप्त होने के पश्चात् नियम से मनुष्यगति और मनुष्यानुर्सीका वध करते हैं, जिससे उनके अठहत्तर कृतिक सत्तास्थान नहीं पाया जाता है । पर्याप्त दीन्द्रिय जीवो की तरह मीन्द्रिय और चतुरिन्द्रिय पर्याप्त जीवो को भी यादि स्थानों और उनके जी को जानना चाहिये । इतनी विशेषता जानना चाहिये कि उदयस्थानी मे दोन्द्रिय के स्थान पर द्रिय और चतुरिन्द्रिय का उत्लेस कर दिया जाये । अब क्रमप्राप्त असज्ञी पर्याप्त जीवस्थान मे बधादि स्थानो और उनके भङ्गो का निर्देश करते है। इसके लिये गाथाओ मे निर्देश किया है - 'छच्छप्पणग' 'असन्नी य' अर्थात् असज्ञी पचेन्द्रिय पर्याप्त जीवस्थान के छह बधस्थान हैं, छह उदयस्थान है और पाँच सत्तास्थान है । जिनका विवेचन यह है कि असज्ञी पचेन्द्रिय पर्याप्त जीव मनुष्यगति और तिर्यंचगति के योग्य प्रकृतियो का बध करते ही है, किन्तु नरकगति और देवगति के योग्य प्रकृतियो का भी बध कर सकते हैं । इसलिये इनके तेईस, पच्चीस, छब्बीस, अट्ठाईस, छब्बीस और तीस प्रकृतिक ये छह बधस्थान होते है और तदनुसार तेरह हज़ार नौ सौ छब्बीस भङ्ग होते है । उदयस्थानो की अपेक्षा विचार करने पर यहाँ इक्कीस, छब्बीस, अट्ठाईस, उनतीस, तीस और इकतीस प्रकृतिक, ये छह उदयस्थान है । इनमे से इक्कीस प्रकृतिक उदयस्थान मे तैजस, कार्मण, अगुरुलघु, स्थिर, अस्थिर, शुभ, अशुभ, वर्णचतुष्क, निर्माण, तिर्यंचगति, तिर्यचानुपूर्वी, पचेन्द्रिय जाति, त्रस, बादर, पर्याप्त सुभग और दुर्भाग मे से कोई एक, आदेय और अनादेय मे से कोई एक तथा यश कीर्ति और अयश कीर्ति मे से एक, इन इक्कीस प्रकृतियो का उदय होता है । यह इक्कीस प्रकृतिक उदयस्थान अपान्तरालगति मे ही पाया जाता है तथा सुभग आदि तीन युगलो मे से प्रत्येक प्रकृति के विकल्प से आठ भङ्ग प्राप्त होते हैं । अनन्तर जब यह जीव शरीर को ग्रहण कर लेता है तब औदारिक शरीर, औदारिक अगोपाग, छह सस्थानों में से कोई एक संस्थान, छह सहननो मे से कोई एक सहनन, उपघात और प्रत्येक इन छह प्रकृतियो का उदय होने लगता है । किन्तु यहाँ आनुपूर्वी नामकर्म का उदय नही होता है । अतएव उक्त इक्कीस प्रकृतिक उदयस्थान मे छह प्रकृतियों को मिलाने और तिर्यंचानुपूर्वी को कम करने पर छब्बीस प्रकृतिक उदयस्थान होता है । यहाँ छह सस्थान और छह सहननो की अपेक्षा सुभगत्रिक की अपेक्षा से पूर्वोक्त आठ भङ्गो मे दो बार छह से गुणित कर देने पर छःxछःxछः=दो सौ अठासी भङ्ग प्राप्त होते हैं । अनतर इसके शरीर पर्याप्ति से पर्याप्त हो जाने पर पराघात तथा प्रशस्त विहायोगति और अप्रशस्त विहायोगति मे से किसी एक का उदय और होने लगता है । अत छब्बीस प्रकृतिक उदयस्थान में इन दो प्रकृतियो को और मिला देने पर अट्ठाईस प्रकृतिक उदयस्थान होता है । यहाँ दोनो विहायोगतियों के विकल्प की अपेक्षा भङ्गो के विकल्प पूर्वोक्त दो सौ अठासी को दो से गुणा कर देने पर अट्ठाईस हज़ार आठ सौ बयालीस = पाँच सौ छिहत्तर हो जाते हैं । छब्बीस प्रकृतिक उदयस्थान दो प्रकार से होता है - एक तो जिसने आन-प्राण पर्याप्ति को पूर्ण कर लिया है उसके उद्योत के बिना केवल उच्छ्वास के उदय से प्राप्त होता है और दूसरा शरीर पर्याप्ति के पूर्ण होने पर उद्योत प्रकृति के उदय से प्राप्त होता है। इन दोनो स्थानो में से प्रत्येक स्थान मे पाँच सौ छिहत्तर भाग होते हैं । अत उनतीस प्रकृतिक उदयस्थान वः कुल पाँच सौ छिहत्तर ×दो = एक हज़ार एक सौ बावन भङ्ग हुए । तीस प्रकृतिक उदयस्थान भी दो प्रकार से प्राप्त होता है। एक तो जिसने भाषा पर्याप्ति को पूर्ण कर लिया उसके उद्योत के विना सुस्वर और दुस्वर प्रकृतियों में से किसी एक प्रकृति के उदय से प्राप्त होता है और दूसरा जिसने श्वासोच्छ्वास पर्याप्ति को पूर्ण कर लिया, उसके उद्योत का उदय हो जाने पर होता है। इनमें से पहले प्रकार के स्थान के पूर्वोक्त पाँच सौ छिहत्तर भगो को स्वरद्विक मे गुणित करने पर एक हज़ार नौ सौ बावन भङ्ग प्राप्त होते हैं तथा दूसरे प्रकार के स्थान में पाँच सौ छिहत्तर भग ही होते हैं । सपकार तीस प्रकृतिक उदयस्थान के कुल भग एक हज़ार एक सौ बावन+पाँच सौ छिहत्तर= एक हज़ार सात सौ अट्ठाईस होते हैं। अनन्तर जिसने भाषा पर्याप्ति को भी पूर्ण कर लिया और उद्योत प्रकृति का भी उदय है उसके इकतीस प्रकृतिक उदयस्थान होता है । यहाँ कुल भग एक हज़ार एक सौ बावन होते है । इस प्रकार असज्ञी पचेन्द्रिय पर्याप्त जीवस्थान के सब उदयस्थानो के कुल चार हज़ार नौ सौ चार भङ्ग होते है । असज्ञी पचेन्द्रिय पर्याप्त जीवस्थान मे बानवे,अठासी,छियासी, अस्सी और अठहत्तर प्रकृतिक ये पाच सत्तास्थान होते है । इनमे से इक्कीस प्रकृतिक उदयस्थान के आठ भङ्ग तथा छब्बीस प्रकृतिक उदयस्थान के दो सौ अठासी भङ्ग, इनमें से प्रत्येक भङ्ग मे पूर्वोक्त पाँच-पाँच सत्तास्थान होते है । क्योकि अठहत्तर प्रकृतियो की सत्ता वाले जो अग्निकायिक और वायुकायिक जीव हैं वे यदि असज्ञी पचेन्द्रिय पर्याप्तको मे उत्पन्न होते है तो उनके इक्कीस और छब्बीस प्रकृतिक उदयस्थान रहते हुए अठहत्तर प्रकृतिक सत्तास्थान पाया जाना सभव है । किन्तु इनके अतिरिक्त शेष उदयस्थानो और उनके भङ्गो मे अठहत्तर के बिना शेष चार-चार सत्तास्थान ही होते है । इस प्रकार से अभी तक तेरह जीवस्थानो के नामकर्म के बधादि स्थानो और उनके भङ्गो का विचार किया गया । अब शेप रहे चौदहवें सज्ञी पचेन्द्रिय पर्याप्त जीवस्थान के बधादि स्थानो व भङ्गो का निर्देश करते हैं । इस जीवस्थान के बधादि स्थानों के लिये गाथा मे सकेत किया गया है - 'अट्ठदसग ति सन्नी य' अर्थात् सज्ञी पचेन्द्रिय पर्याप्त जीवस्थान मे आठ बधस्थान, आठ उदयस्थान और दस सत्तास्थान है । जिनका स्पष्टीकरण नीचे किया जाता है । नाम कर्म के तेईस, पच्चीस छब्बीस, अट्ठाईस उनतीस, तीस, इकतीस और एक प्रकृतिक, ये आठ बधस्थान बतलाये हैं । ये आठो बधस्थान सज्ञी पचेन्द्रिय पर्याप्त जीवो के होते है और उनके तेरह हज़ार नौ सौ पैंतालीस भङ्ग सभव हैं। क्योकि इनके चारो गति सम्बन्धी प्रकृतियो का बध सम्भव है, इसीलिये तेईस प्रकृतिक आदि बधस्थान इनके कहे हैं । तीर्थंकर नाम और आहारकचतुष्क का भी इनके बध होता है इसीलिये इकतीस प्रकृतिक बधस्थान कहा है । इस जीवस्थान मे उपशम और क्षपक दोनो श्रेणियाँ पाई जाती हैं इसीलिये एक प्रकृतिक बधस्थान भी कहा है । उदयस्थानो की अपेक्षा विचार करने पर और बीस, छः और प्रकृ तिक ये तीन उदयस्थान केवली सम्वन्धी हैं और चौबीस प्रकृतिक उदयस्थान एकेन्द्रियो को होता है अत इस जीवस्थान मे बीस, चौबीस, छः और आठ प्रकृतिक, इन चार उदयस्थानो को छोडकर शेप यह जीवस्थान वारहवें गुणस्थान तक ही पाया जाता है । इक्कीस, पच्चीस, छब्बीस, सत्ताईस, अट्ठाईस, तेईस तीस, इकतीस प्रकृतिक ये आठ उदयस्थान पाये जाते है। इन आठ उदयस्थानों के कुल भग सात हज़ार छः सौ इकहत्तर होते है । क्योंकि बारह उदयस्थानों के कुल भग सात हज़ार सात सौ इकसठ हैं सो उनमे से एक सौ बीस भग कम हो जाते हैं, क्योकि उन भगो का संबंध सज्ञी पवेन्द्रिय पर्याप्त जीव से नही है । नामकर्म के सत्तास्थान बारह हैं, उनमे से आठ और आठ प्रकृतिक सत्तास्थान केवली के पाये जाते है, जत वे दोनो मज्ञी पचेन्द्रिय जीवस्थान मे सभव नहीं होने से उनके अतिरिक्त तिरेसठ, बासठ, छियासी, अठासी, छियासी,अस्सी, सात पचहत्तर, छिहत्तर और पचहत्तर प्रकृतिक, ये दन सत्तास्थान पाये जाते हैं । इक्कीस और छब्बीस प्रकृतिक उदयस्थानों के क्रमश और दो सौ अठासी भगो मे से तो प्रत्येक भग मे बारह,अठासी,छियासी,अस्सीऔर छिहत्तर प्रकृतिक, ये पांच-पांच सत्तास्थान ही पाये जाते है । गोशून्य रमाड गाथा छः सौ नौ मे नामकर्म के तिरासी, बासठ, इक्यानवे, बीस,आठ हज़ार आठ सौ अठासी, बयासी,सत्तासी,अठहत्तर, सत्ताईस, चालीस और प्रकृतिक ये तेरह मत्तास्थान तलाये है । इन एक सीपजीवस्थान दस और प्रकृतिक सत्तास्वान को छोडकर नास्थान बतलाये एक -- दमणवपरिहोणमव्वय चत ॥ ताम्र और दिम्बिर मन्थो नाम के निम्नलिमित नताराना पनि तीन सौ अड़सठऔर शनि और बारी के मतास्थानों में प्रतियों में मिलता है । देवनार छः सौ पच्चीस प्रति तथा दिगम्बर दो हज़ार बीस प्रतिपत्तास्थान बना हू । इस प्रकार चौदह जीवस्थानों में बधादि स्थानो और उनके भगो का विचार किया गया । अब उनके परस्पर सवेध का विचार करते हैं । सूक्ष्म एकेन्द्रिय अपर्याप्त जीवो के तेईस प्रकृतिक बधस्थान मे इक्कीस प्रकृतिक उदयस्थान के रहते बासठ,अठासी,छियासी, अस्सी और अठहत्तर प्रकृतिक, ये पाच सत्तास्थान होते हैं । इसी प्रकार चौबीस प्रकृतिक उदयस्थान मे भी पाच सत्तास्थान होते हैं । कुल मिलाकर दोनो उदयस्थानो के दस सत्तास्थान हुए । इसी प्रकार पच्चीस, छब्बीस, छब्बीस और तीस प्रकृतियो का बध करने वाले उक्त जीवो के दो-दो उदयस्थानो की अपेक्षा दस-दस सत्तास्थान होते हैं । जो कुल मिलाकर पचास हुए । इसी प्रकार बादर एकेन्द्रिय अपर्याप्त आदि अन्य छह अपर्याप्तो के पचास -पचास सत्तास्थान जानना किन्तु सर्वत्र अपने-अपने दो-दो उदयस्थान कहना चाहिये । सूक्ष्म एकेन्द्रिय पर्याप्त के तेईस, पच्चीस, छब्बीस, छब्बीस और तीस प्रकृतिक, ये पाच बधस्थान होते है और एक-एक बधस्थान मे इक्कीस, चौबीस, पच्चीस और छब्बीस प्रकृतिक, ये चार उदयस्थान होते है । अत' पाच को चार से गुणित करने पर बीस हुए तथा प्रत्येक उदयस्थान मे पाच-पाच सत्तास्थान होते है अतः बीस को पाँच से गुणा करने पर एक सौ सत्तास्थान सूक्ष्म एकेन्द्रिय पर्याप्त जीवस्थान में होते है । बादर एकेन्द्रिय पर्याप्त के भी पूर्वोक्त तेईस, पच्चीस, छब्बीस, छब्बीस और तीस प्रकृतिक, पाच बधस्थान होते है और एक-एक बघस्थान मे इक्कीस, चौबीस, पच्चीस, छब्बीस और सत्ताईस प्रकृतिक, ये पाच-पाच उदयस्थान होते है, अत· पाँच को पाँच से गुणा करने पर पच्चीस हुए । इनमे से अन्तिम पाच उदयस्थानो मे अठहत्तर के बिना चार-चार सत्तास्थान होते है, जिनके कुल भग बीस हुए और शेप बीस उदयस्थानो मे पाच-पाच सत्तास्थान होते है, जिनके कुल भग एक सौ हुए । इस प्रकार यहाँ कुल भग एक सौ बीस होते हैं । दीन्द्रिय पर्याप्त के तेईस, पच्चीस, छब्बीस, सत्ताईस और तीस प्रकृतिक, ये पाच वधस्थान होते है और प्रत्येक वधस्थान मे इक्कीस, छब्बीस, अट्ठाईस, उनतीस, तीस और इकतीस प्रकृतिक, ये छह उदयस्थान होते हैं। इनमें से इक्कीस और छब्बीस प्रकृतिक उदयस्थानो मे पाच-पाच सत्तास्थान है तथा शेप चार उदयस्थानो मे अठहत्तर प्रकृतिक सत्तास्थान के सिवाय चार-चार सत्तास्थान हैं । ये कुल मिलाकर छब्बीस सत्तास्थान हुए। इस प्रकार पाच वधस्थानो के एक सौ तीस भग हुए । द्वीन्द्रिय पर्याप्त की तरह त्रीन्द्रिय और चतुरिन्द्रिय पर्याप्त के वधस्थान आदि जानना चाहिये तथा उनके भी एक सौ तीस, एक सौ तीस भङ्ग होते हैं । असज्ञी पचेन्द्रिय पर्याप्त जीवस्थान में भी तेईस, पच्चीस, छब्बीस, छब्बीस और तीस प्रकृतिक, इन पाच वधस्थानों में से प्रत्येक वधस्थान मे विकलेन्द्रियो की तरह छब्बीस भङ्ग होते हैं जिनका योग एक सौ तीस है । परन्तु अट्ठाईस प्रकृतिक वधस्थान मे तीस और इकतीस प्रकृतिक ये दो उदयस्थान ही होते हैं । जत यहा प्रत्येक उदयस्थान मे बानवे,अठासी और छियासी प्रकृतिक ये तीन-तीन सत्तास्थान होते है । इनके कुल छः भङ्ग हुए । यहा तीन सत्तास्थान होने का कारण यह है कि अट्ठाईस प्रकृतिक वधस्थान देवगति और नरकगति के योग्य प्रकृतियो का वध पर्याप्त के ही होता है। इसी प्रकार जसज्ञी पचेन्द्रिय पर्याप्त जीवस्थान मे एक सौ तीस+छः=एक सौ छत्तीस भङ्ग होते है । सभी पचेन्द्रिय पर्याप्त के तेईस प्रकृतिक वधस्थान में जैसे जमज्ञी पचेन्द्रिय पर्याप्त के छब्बीस सत्तास्थान वतलाये, वैसे यहां भी जानना टावतियधराना पुनस्तपा एवोदयस्पाने, तद्यथा- विशदेकविदा प्रत्येक नोणि प्रोणि सत्तास्थानानि तथथा- द्विनवति नष्टाशोपित नष्टविहिं देवगनियोग्य नायाग्यावा ततस्तस्या उभ्यमानापानवदन वैश्चिचतुष्टयादि बध्यते इत्यशीति-अष्टसप्त/ - सप्ततिश प्रकरण टोका, पृशून्य दो सौ पाँच |
MP/CG Corona Mockdrill पूरे देश में आज कोरोना से निपटने की तैयारियों के जायजे के लिए मॉकड्रिल की जाएगी। आपको बता दें देश के साथ - साथ एमपी - सीजी में भी कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे इन राज्यों में भी आज मॉकड्रिल की जाएगी। आपको बता दें बीते 24 घंटों में MP में 32 तो सीजी में नए मरीज सामने आए हैं।
आपको बता दें एमी में इसे लेकर तैयारियां हो चुकी हैं। आज की मॉकड्रिल में पता चलेगा कि कोरोना की स्थिति से निपटने के लिए हम कितने तैयार हैं।आज देशभर के अस्पतालों में मॉक ड्रिल होने वाली है। जिसमें ऑक्सीजन, बेड-वेंटिलेटर समेत स्वास्थ्य सुविधाओं की पड़ताल होगी। आज और कल होने वाली इस मॉक ड्रिल से तैयारियों की समीक्षा बैठक होगी। जिसमें आज स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी जेपी अस्पताल जाएंगे। तो वहीं चिकित्सा शिक्षा मंत्री मंत्री विश्वास सारंग हमीदिया अस्पताल जाकर मॉकड्रिल का निरीक्षण करेंगे। आपको बता दें केंद्र सरकार के निर्देश पर देशभर में मॉकड्रिल की जा रही है।
आपको बता दें जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा केस राजधानी भोपाल में मिले हैं। जहां 9 नए संक्रमित सामने आए हैं। तो वहीं इंदौर में 6, जबलपुर में 5, नर्मदापुरम में 3, ग्वालियर, पन्ना, सतना, रायसेन में 2-2, दतिया, खंडवा और उज्जैन में 1-1 नए मरीज मिले हैं। बीते दिन प्रदेशभर से 582 सैंपलों की जांच की गई। जिसके बाद प्रदेश में एक्टिव केसों की संख्या 170 हो गई है।
छत्तीसगढ़ की बात करें तो यहां एमपी की तरह यहां भी कोरोना ने रफ्तार पकड़ी है। बीते 24 घंटे में 52 नए कोरोना मरीज मिले हैं। जिसमें रायपुर में सबसे अधिक 15 कोरोना, बिलासपुर में 12, राजनांदगांव में 10, धमतरी, सरगुजा, गौरेला, महासमुंद में 1-1 केस मिले हैं। तो वहीं कोरबा में 3, दंतेवाड़ा में 4, सूरजपुर और बलरामपुर में 2-2 संक्रमित सामने आए हैं। बीते दिन सीजी में 979 सैंपलों की जांच की गई। प्रदेश में कोरोना पॉजिटिविटी दर 5.31 प्रतिशत चल रहा है।
| MP/CG Corona Mockdrill पूरे देश में आज कोरोना से निपटने की तैयारियों के जायजे के लिए मॉकड्रिल की जाएगी। आपको बता दें देश के साथ - साथ एमपी - सीजी में भी कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे इन राज्यों में भी आज मॉकड्रिल की जाएगी। आपको बता दें बीते चौबीस घंटाटों में MP में बत्तीस तो सीजी में नए मरीज सामने आए हैं। आपको बता दें एमी में इसे लेकर तैयारियां हो चुकी हैं। आज की मॉकड्रिल में पता चलेगा कि कोरोना की स्थिति से निपटने के लिए हम कितने तैयार हैं।आज देशभर के अस्पतालों में मॉक ड्रिल होने वाली है। जिसमें ऑक्सीजन, बेड-वेंटिलेटर समेत स्वास्थ्य सुविधाओं की पड़ताल होगी। आज और कल होने वाली इस मॉक ड्रिल से तैयारियों की समीक्षा बैठक होगी। जिसमें आज स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी जेपी अस्पताल जाएंगे। तो वहीं चिकित्सा शिक्षा मंत्री मंत्री विश्वास सारंग हमीदिया अस्पताल जाकर मॉकड्रिल का निरीक्षण करेंगे। आपको बता दें केंद्र सरकार के निर्देश पर देशभर में मॉकड्रिल की जा रही है। आपको बता दें जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा केस राजधानी भोपाल में मिले हैं। जहां नौ नए संक्रमित सामने आए हैं। तो वहीं इंदौर में छः, जबलपुर में पाँच, नर्मदापुरम में तीन, ग्वालियर, पन्ना, सतना, रायसेन में दो-दो, दतिया, खंडवा और उज्जैन में एक-एक नए मरीज मिले हैं। बीते दिन प्रदेशभर से पाँच सौ बयासी सैंपलों की जांच की गई। जिसके बाद प्रदेश में एक्टिव केसों की संख्या एक सौ सत्तर हो गई है। छत्तीसगढ़ की बात करें तो यहां एमपी की तरह यहां भी कोरोना ने रफ्तार पकड़ी है। बीते चौबीस घंटाटे में बावन नए कोरोना मरीज मिले हैं। जिसमें रायपुर में सबसे अधिक पंद्रह कोरोना, बिलासपुर में बारह, राजनांदगांव में दस, धमतरी, सरगुजा, गौरेला, महासमुंद में एक-एक केस मिले हैं। तो वहीं कोरबा में तीन, दंतेवाड़ा में चार, सूरजपुर और बलरामपुर में दो-दो संक्रमित सामने आए हैं। बीते दिन सीजी में नौ सौ उन्यासी सैंपलों की जांच की गई। प्रदेश में कोरोना पॉजिटिविटी दर पाँच.इकतीस प्रतिशत चल रहा है। |
Yamaha MT15 :- की ये न्यू बाइक फिर हुई सस्ती, शानदार फीचर्स के साथ लेगी एंट्री जाने इसकी कीमतयामाहा की ये न्यू बाइक Yamaha MT15 फिर हुई सस्ती, शानदार फीचर्स के साथ लेगी एंट्री जाने इसकी कीमत जी हाँ, यामाहा ने फिर अपनी मार्केट में अपनी पहचान फिर एक बार बना ली है। ये दमदार मोटरसाइकिल MT15 का नया वर्जन मार्केट में 11 अप्रैल को लॉन्च हुई है। इस बाइक को देश के युवाओ यामाहा MT15 का जबरदस्त लुक हर किसी को पसंद आ रहा है। आइये हम आपको इसकी डिटेल्स के बारे में बताते है।
यामाहा MT 15 ये न्यू बाइक डीलरशिप स्तर पर शानदार लुक वाली V2. 0 बाइक के साथ बुक हो चुकी है। Yamaha MT15 की सीट हाइट 810mm है। रियर ब्रेक लाइट एलईडी है। और सभी इंडिकेटर LED लाइट में मिलते हैं। पीछे की तरफ आपको 220mm का डिस्क ब्रेक मिलता है। बाइक की लंबाई 2015 मिमी, ऊंचाई 1070 मिमी और ग्राउंड क्लीयरेंस 170 मिमी है। Yamaha MT15 को बेहद ही जबरदस्त डिजाईन दिया गया है।
यामाहा की इस नई बाइक में आपको शानदर फीचर्स के बारे में बताते है की इसमें आपको 4 खूबसूरत कलर ऑप्शन सियान स्टॉर्म, रेसिंग ब्लू, आइस फ्लू-वर्मिलियन और मैटेलिक ब्लैक में नजर आई है। इस बाइक में आपको फीचर्स बाइक में ब्लूटूथ कनेक्टिविटी स्क्रीन, एलईडी हेडलैंप और सिंगल-चैनल एबीएस का तगड़ा फीचर दिया गया है।
इस बाइक में आपको सुपर माईलेज उसमें आपको 50 का माइलेज दिया गया है। बात करें इसके माइलेज की तो यह 50-55 किमी/लीटर मिलता है और इस बाइक का वजन 141 हजार होगा तो यदि आपको भी ऐसी बाइक खरीदना तो तो इस आर्टिकल को ध्यान पूर्वक पढ़े।
| Yamaha MTपंद्रह :- की ये न्यू बाइक फिर हुई सस्ती, शानदार फीचर्स के साथ लेगी एंट्री जाने इसकी कीमतयामाहा की ये न्यू बाइक Yamaha MTपंद्रह फिर हुई सस्ती, शानदार फीचर्स के साथ लेगी एंट्री जाने इसकी कीमत जी हाँ, यामाहा ने फिर अपनी मार्केट में अपनी पहचान फिर एक बार बना ली है। ये दमदार मोटरसाइकिल MTपंद्रह का नया वर्जन मार्केट में ग्यारह अप्रैल को लॉन्च हुई है। इस बाइक को देश के युवाओ यामाहा MTपंद्रह का जबरदस्त लुक हर किसी को पसंद आ रहा है। आइये हम आपको इसकी डिटेल्स के बारे में बताते है। यामाहा MT पंद्रह ये न्यू बाइक डीलरशिप स्तर पर शानदार लुक वाली Vदो. शून्य बाइक के साथ बुक हो चुकी है। Yamaha MTपंद्रह की सीट हाइट आठ सौ दस मिलीमीटर है। रियर ब्रेक लाइट एलईडी है। और सभी इंडिकेटर LED लाइट में मिलते हैं। पीछे की तरफ आपको दो सौ बीस मिलीमीटर का डिस्क ब्रेक मिलता है। बाइक की लंबाई दो हज़ार पंद्रह मिमी, ऊंचाई एक हज़ार सत्तर मिमी और ग्राउंड क्लीयरेंस एक सौ सत्तर मिमी है। Yamaha MTपंद्रह को बेहद ही जबरदस्त डिजाईन दिया गया है। यामाहा की इस नई बाइक में आपको शानदर फीचर्स के बारे में बताते है की इसमें आपको चार खूबसूरत कलर ऑप्शन सियान स्टॉर्म, रेसिंग ब्लू, आइस फ्लू-वर्मिलियन और मैटेलिक ब्लैक में नजर आई है। इस बाइक में आपको फीचर्स बाइक में ब्लूटूथ कनेक्टिविटी स्क्रीन, एलईडी हेडलैंप और सिंगल-चैनल एबीएस का तगड़ा फीचर दिया गया है। इस बाइक में आपको सुपर माईलेज उसमें आपको पचास का माइलेज दिया गया है। बात करें इसके माइलेज की तो यह पचास-पचपन किमी/लीटर मिलता है और इस बाइक का वजन एक सौ इकतालीस हजार होगा तो यदि आपको भी ऐसी बाइक खरीदना तो तो इस आर्टिकल को ध्यान पूर्वक पढ़े। |
जो व्यक्ति धर्म करते हुए भी दुःखी दिखाई देते हैं, उन्होंने पूर्वभव में शुभ कार्य नहीं किये थे अतः अपने उपार्जित अशुभकर्म के उदय से वे इस भव में दुःख पा रहे हैं, किन्तु यहां सदाचार पालन करके जो शुभ कर्मबन्ध कर रहे हैं वह व्यर्थ न जायगा, उसका सुखदायक फल भविष्य में अवश्य मिलेगा।
जो व्यक्ति पाप दुराचार करते हुए भी सुख पा रहे हैं, वह अपने पूर्व भव मे बोये हुए पुण्यकर्म के बीज का फल यहां पर भोग रहे हैं। परन्तु इस समय अशुभ बोज बो रहे हैं इस कारण अगले भव में इस दुराचार का दुःख भोगेंगे 1
जो दीन दरिद्री भिखारी कुछ धर्मसाधन नहीं कर रहे हैं वे पूर्व भव का संचित अशुभ कर्म का फल यहां भोग रहे हैं और यहां भी कुछ शुभकर्म नहीं कर रहे हैं, इसलिये अगले भव में भी कुछ सुख सामग्री न पा सकेंगे ।
सारांश यह है कि जो जैसा करता है वैसा फल पाता है ।
एक वन में एक साधु तपस्या करता था, उसको अपने भोजन करने के समय देवों द्वारा स्वादिष्ट भोजन पहुंच जाते थे, उन भोजनों को करके वह फिर अपनी तपस्या में लग जाता था ।
उसी वन मे एक गड़रिया दूसरों की भेड़ें चराया करता था वह प्रतिदिन देवों द्वारा आये साधु के लिये स्वादिष्ट भोजन को देखा करता था । एक दिन उसने विचार किया कि मैं भी यदि घरवार छोड़ कर इस वन में साधु वनकर बैठ जाऊ तो मुझे भी ऐसे स्वादिष्ट भोजन प्रतिदिन खाने को मिलेगे। मै दिन भर परिश्रम करके ज्वार बाजरे की रोटियां खा कर पेट भरता हूँ। यह सोच कर वह अपना घरवार छोड़कर, साधु बनकर उसी वन में आ बैठा ।
जब उसके भोजन का समय हुआ तो देव उसके सामने ज्वार बाजरे की रोटी खाने के लिये ले आये। अपने सामने ज्वार बाजरे की रोटियां देखकर उस गड़रिया साधु का मन जल भुन गया । उसने क्रुद्ध स्वर में कहा कि देखो, देव भी पक्षपात करते हैं, किसी साधु को स्वादिष्ट भोजन खिलाते हैं और किसी को रूखी सूखी ज्वार बाजरे की रोटियां देते हैं ।
उसी समय आकाशवाणी हुई कि 'जो जैसा त्याग करता है वह वैसा ही फल पाता है । वह साधु राजपाट छोड़कर, स्वादिष्ट भोजन त्याग कर साधु बना था इसलिये उसको स्वादिष्ट भोजन मिलते तू ज्वार बाजरे की रोटियां छोड़कर साधु वना था सो तुझे ज्वार वाजरे की रोटियां मिल रही हैं।'
इस कलियुग में अधिकतर व्यक्ति हिंसा, अनीति, अन्याय, असत्य भाषण, चोरी, व्यभिचार, विश्वासघात पाप कार्य करते हैं अतः अधिकतर जनता दुःखी देखी जाती है, बढ़वारी (वरकत) नहीं दिखाई देती ।
जैसी करनी वैसी भरनी । As you sow, so shall you reap. | जो व्यक्ति धर्म करते हुए भी दुःखी दिखाई देते हैं, उन्होंने पूर्वभव में शुभ कार्य नहीं किये थे अतः अपने उपार्जित अशुभकर्म के उदय से वे इस भव में दुःख पा रहे हैं, किन्तु यहां सदाचार पालन करके जो शुभ कर्मबन्ध कर रहे हैं वह व्यर्थ न जायगा, उसका सुखदायक फल भविष्य में अवश्य मिलेगा। जो व्यक्ति पाप दुराचार करते हुए भी सुख पा रहे हैं, वह अपने पूर्व भव मे बोये हुए पुण्यकर्म के बीज का फल यहां पर भोग रहे हैं। परन्तु इस समय अशुभ बोज बो रहे हैं इस कारण अगले भव में इस दुराचार का दुःख भोगेंगे एक जो दीन दरिद्री भिखारी कुछ धर्मसाधन नहीं कर रहे हैं वे पूर्व भव का संचित अशुभ कर्म का फल यहां भोग रहे हैं और यहां भी कुछ शुभकर्म नहीं कर रहे हैं, इसलिये अगले भव में भी कुछ सुख सामग्री न पा सकेंगे । सारांश यह है कि जो जैसा करता है वैसा फल पाता है । एक वन में एक साधु तपस्या करता था, उसको अपने भोजन करने के समय देवों द्वारा स्वादिष्ट भोजन पहुंच जाते थे, उन भोजनों को करके वह फिर अपनी तपस्या में लग जाता था । उसी वन मे एक गड़रिया दूसरों की भेड़ें चराया करता था वह प्रतिदिन देवों द्वारा आये साधु के लिये स्वादिष्ट भोजन को देखा करता था । एक दिन उसने विचार किया कि मैं भी यदि घरवार छोड़ कर इस वन में साधु वनकर बैठ जाऊ तो मुझे भी ऐसे स्वादिष्ट भोजन प्रतिदिन खाने को मिलेगे। मै दिन भर परिश्रम करके ज्वार बाजरे की रोटियां खा कर पेट भरता हूँ। यह सोच कर वह अपना घरवार छोड़कर, साधु बनकर उसी वन में आ बैठा । जब उसके भोजन का समय हुआ तो देव उसके सामने ज्वार बाजरे की रोटी खाने के लिये ले आये। अपने सामने ज्वार बाजरे की रोटियां देखकर उस गड़रिया साधु का मन जल भुन गया । उसने क्रुद्ध स्वर में कहा कि देखो, देव भी पक्षपात करते हैं, किसी साधु को स्वादिष्ट भोजन खिलाते हैं और किसी को रूखी सूखी ज्वार बाजरे की रोटियां देते हैं । उसी समय आकाशवाणी हुई कि 'जो जैसा त्याग करता है वह वैसा ही फल पाता है । वह साधु राजपाट छोड़कर, स्वादिष्ट भोजन त्याग कर साधु बना था इसलिये उसको स्वादिष्ट भोजन मिलते तू ज्वार बाजरे की रोटियां छोड़कर साधु वना था सो तुझे ज्वार वाजरे की रोटियां मिल रही हैं।' इस कलियुग में अधिकतर व्यक्ति हिंसा, अनीति, अन्याय, असत्य भाषण, चोरी, व्यभिचार, विश्वासघात पाप कार्य करते हैं अतः अधिकतर जनता दुःखी देखी जाती है, बढ़वारी नहीं दिखाई देती । जैसी करनी वैसी भरनी । As you sow, so shall you reap. |
अमरावती/दि. 22 - कचरा गाडी पलटने से घायल एक सफाई कर्मचारी की नागपुर के अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई. मृतक मिलींद अशोक वाघमारे (30, खोलापुरी गेट) है. पुलिस ने आकस्मिक मौत का मामला दर्ज किया है.
मिलींद वाघमारे यह महानगरपालिका के कचरा गाडी पर काम करता था. 23 फरवरी को मलींद डेंटल कॉलेज से कचरा गाडी एमएच 27/एए 5788 पर बैठकर जयस्तंभ चौक की ओर से जा रहा था. तभी जयस्तंभ चौक पर अचानक गाडी का नियंत्रण छूट जाने से पुलिया के पास कचरे से भरी गाडी पलट गई. जिसमें मिलींद के सिर व सीने पर गंभीर चोट आई थी. जिसके चलते सहकर्मियों ने उसे जिला अस्पताल में भरती किया. हालत नाजुक होने से उसे नागपुर रेफर किया गया था. इस दौरान इलाज में उसने दम तोड दिया. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
| अमरावती/दि. बाईस - कचरा गाडी पलटने से घायल एक सफाई कर्मचारी की नागपुर के अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई. मृतक मिलींद अशोक वाघमारे है. पुलिस ने आकस्मिक मौत का मामला दर्ज किया है. मिलींद वाघमारे यह महानगरपालिका के कचरा गाडी पर काम करता था. तेईस फरवरी को मलींद डेंटल कॉलेज से कचरा गाडी एमएच सत्ताईस/एए पाँच हज़ार सात सौ अठासी पर बैठकर जयस्तंभ चौक की ओर से जा रहा था. तभी जयस्तंभ चौक पर अचानक गाडी का नियंत्रण छूट जाने से पुलिया के पास कचरे से भरी गाडी पलट गई. जिसमें मिलींद के सिर व सीने पर गंभीर चोट आई थी. जिसके चलते सहकर्मियों ने उसे जिला अस्पताल में भरती किया. हालत नाजुक होने से उसे नागपुर रेफर किया गया था. इस दौरान इलाज में उसने दम तोड दिया. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. |
सीएम शिवराज सिंह चौहान ने सुरक्षाकर्मी को दो थप्पड़ जड़ते हुए उसे धक्का देकर अपने रास्ते से हटा दिया।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के नेता शिवराज सिंह चौहान द्वारा अपने ऑन ड्यूटी सुरक्षाकर्मी को थप्पड़ मारने का कथित वीडियो वायरल हो रहा है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान चुनावी रैली के लिए सरदारपुरा गए हुए थे उसी दौरान उन्होंने अपने सुरक्षाकर्मी को जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। घटना कैमरे में कैद हो गई। वीडियो में आप देख सकते हैं कि सरदारपुरा में चुनाव रैली के दौरान शिवराज ने गनमैन को तड़ातड़ दो थप्पड़ जड़ते हुए उसे धक्का देकर अपने रास्ते से हटा दिया। इस वीडियो के वायरल होने के बाद प्रदेश की राजनीति में यह बात चर्चा का विषय बना हुआ है। यह घटना रविवार 14 जनवरी की है।
मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रमुख प्रवक्ता केके मिश्रा ने मुख्यमंत्री के खिलाफ धारा-332 और 353 के तहत मुकदमा दर्ज किए जाने की मांग की है। केके मिश्रा का कहना है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी सरकारी ड्यूटी कर रहे एक कर्मचारी को थप्पड़ मारा है, जो कि कानूनन अपराध है। उन्होंने एक वाक्या का उदारहण देते हुए कहा कि दो दिन पहले ही इंदौर की एक अदालत ने 12 साल पुराने मामले में एक शख्य को दो साल कैद की सजा दी है। साथ में आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। उस व्यक्ति ने 12 साल पहले ड्यूटी पर तैनात एक पुलिस सब इंस्पेक्टर को थप्पड़ जड़ा था। इन्होंने मुख्यमंत्री के खिलाफ सख्त से सख्त से सजा की मांग की जाए।
| सीएम शिवराज सिंह चौहान ने सुरक्षाकर्मी को दो थप्पड़ जड़ते हुए उसे धक्का देकर अपने रास्ते से हटा दिया। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के नेता शिवराज सिंह चौहान द्वारा अपने ऑन ड्यूटी सुरक्षाकर्मी को थप्पड़ मारने का कथित वीडियो वायरल हो रहा है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान चुनावी रैली के लिए सरदारपुरा गए हुए थे उसी दौरान उन्होंने अपने सुरक्षाकर्मी को जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। घटना कैमरे में कैद हो गई। वीडियो में आप देख सकते हैं कि सरदारपुरा में चुनाव रैली के दौरान शिवराज ने गनमैन को तड़ातड़ दो थप्पड़ जड़ते हुए उसे धक्का देकर अपने रास्ते से हटा दिया। इस वीडियो के वायरल होने के बाद प्रदेश की राजनीति में यह बात चर्चा का विषय बना हुआ है। यह घटना रविवार चौदह जनवरी की है। मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रमुख प्रवक्ता केके मिश्रा ने मुख्यमंत्री के खिलाफ धारा-तीन सौ बत्तीस और तीन सौ तिरेपन के तहत मुकदमा दर्ज किए जाने की मांग की है। केके मिश्रा का कहना है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी सरकारी ड्यूटी कर रहे एक कर्मचारी को थप्पड़ मारा है, जो कि कानूनन अपराध है। उन्होंने एक वाक्या का उदारहण देते हुए कहा कि दो दिन पहले ही इंदौर की एक अदालत ने बारह साल पुराने मामले में एक शख्य को दो साल कैद की सजा दी है। साथ में आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। उस व्यक्ति ने बारह साल पहले ड्यूटी पर तैनात एक पुलिस सब इंस्पेक्टर को थप्पड़ जड़ा था। इन्होंने मुख्यमंत्री के खिलाफ सख्त से सख्त से सजा की मांग की जाए। |
जेएनएन, फतेहगढ़ साहिब। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी के हत्यारे बेअंत सिंह के बेटे सर्बजीत सिंह खालसा रविवार को बहुजन पार्टी में शामिल हो गए।
सर्बजीत सिंह ने सरहिंद में बहुजन समाज पार्टी की बैठक में बसपा के राज्य संयोजक प्रकाश भारती, राज्य प्रभारी प्रकाश जंडाली व महासचिव हरभजन सिंह के अलावा सीनियर नेताओं की उपस्थिति में बसपा में शामिल होने का एलान किया है। दलित समाज से संबंधित सर्बजीत सिंह ने कहा कि बसपा सही मायने में देश में दलित समाज की अगुवाई कर रही है।
इसी वर्ष भदौड़ सीट से शिरोमणि अकाली दल अमृतसर के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा था और हारे थे। बेअंत सिंह की मौत के बाद सर्बजीत सिंह की माता बिमल कौर खालसा सियासत में शामिल हो रोपड़ लोकसभा सीट से चुनाव लड़ विजयी हुई थीं।
| जेएनएन, फतेहगढ़ साहिब। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी के हत्यारे बेअंत सिंह के बेटे सर्बजीत सिंह खालसा रविवार को बहुजन पार्टी में शामिल हो गए। सर्बजीत सिंह ने सरहिंद में बहुजन समाज पार्टी की बैठक में बसपा के राज्य संयोजक प्रकाश भारती, राज्य प्रभारी प्रकाश जंडाली व महासचिव हरभजन सिंह के अलावा सीनियर नेताओं की उपस्थिति में बसपा में शामिल होने का एलान किया है। दलित समाज से संबंधित सर्बजीत सिंह ने कहा कि बसपा सही मायने में देश में दलित समाज की अगुवाई कर रही है। इसी वर्ष भदौड़ सीट से शिरोमणि अकाली दल अमृतसर के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा था और हारे थे। बेअंत सिंह की मौत के बाद सर्बजीत सिंह की माता बिमल कौर खालसा सियासत में शामिल हो रोपड़ लोकसभा सीट से चुनाव लड़ विजयी हुई थीं। |
Lok Sabha Election 2019 हिमाचल में अब तक हुए 16 लोकसभा चुनावों में से प्रदेश में आठ बार कांग्रेस ने चारों सीटों पर जीत हासिल की है।
शिमला, रविंद्र शर्मा। संसदीय चुनाव में हिमाचल में कांग्रेस का ही दबदबा रहा है। अब तक आठ बार कांग्रेस प्रदेश की सभी चारों सीटें जीत चुकी है, जबकि तीन बार चारों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा है। 1951 से पांचवीं लोकसभा तक हिमाचल में कांग्रेस की तूती बोलती थी। 1977 में विपक्षी दलों के संयुक्त मोर्चा भारतीय लोकदल ने पहली बार कांग्रेस को चारों खाने चित कर दिया था। 1977 के आम चुनाव में पूरे देश की तर्ज पर हिमाचल में भी इमरजेंसी ने कांग्रेसी दुर्ग की दीवारें हिलाकर रख दी थीं। कांग्रेस के बड़े-बड़े दिग्गज धराशायी हो गए थे।
अब तक हुए 16 लोकसभा चुनावों में से प्रदेश में आठ बार कांग्रेस ने चारों सीटों पर जीत हासिल की है। सिर्फ तीन बार कांग्रेस ने चारों सीटें हारी हैं। 1977, 1999 और 2014 के लोकसभा चुनाव में चारों सीटों पर कांग्रेस के प्रत्याशी हारे हैं, जबकि पांच लोकसभा चुनाव में भाजपा व कांग्रेस के मिले-जुले प्रत्याशी ही जीतते रहे हैं।
शिमला के रिज मैदान से हिमाचल को पूर्ण राज्य की घोषणा की थी। इसके कुछ माह बाद देश की पांचवीं लोकसभा के लिए चुनाव हुए और इसी दौरान हिमाचल को पहली बार चार संसदीय क्षेत्र मिले, जो आज भी यथावत हैं। इस दौरान महासू सीट को समाप्त कर शिमला आरक्षित लोकसभा क्षेत्र बनाया गया।
1989 में भाजपा ने तीन सीटें जीतने के साथ खाता खोला था। इसमें केवल शिमला आरक्षित सीट पर ही कांग्रेस के केडी सुल्तानपुरी जीते थे। मंडी संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस के पंडित सुखराम शर्मा को भाजपा के महेश्वर सिंह ने हराया। कांगड़ा में शांता कुमार ने कांग्रेस की चंद्रेश कुमारी व हमीरपुर से प्रेम कुमार धूमल ने कांग्रेस के नारायण चंद पराशर को पराजित किया था।
आजादी के बाद 1951 में हुए पहले आम चुनाव से लेकर 1967 में चौथे लोकसभा चुनाव तक हिमाचल के संसदीय क्षेत्र घटते-बढ़ते रहे। पहली बार यहां मंडी-महासू व चंबा-सिरमौर दो संसदीय सीटें थी, तब हिमाचल चीफ कमीश्नरी हुआ करता था। उस समय प्रदेश में कांगड़ा, ऊना, हमीरपुर, कुल्लू, लाहुल-स्पीति के अलावा सोलन का नालागढ़ हिमाचल का हिस्सा नहीं था, शिमला का कुछ इलाका भी पंजाब में शामिल था, जबकि बिलासपुर जिला अलग से केंद्र शासित था। 1957 के आम चुनाव में महासू व मंडी को अलग-अलग संसदीय सीट, जबकि चंबा को तीसरा लोकसभा क्षेत्र बनाया गया। इस दौरान भी महासू दो सदस्यीय हलका रहा, जहां से यशवंत सिंह परमार व कांग्रेस के ही नेकराम निर्वाचित हुए थे। 1972 के आम चुनाव में फिर से हिमाचल की संसदीय सीटों का नक्शा बदल गया। इस दौरान प्रदेश में सिरमौर को पहली बार आरक्षित सीट घोषित किया गया।
| Lok Sabha Election दो हज़ार उन्नीस हिमाचल में अब तक हुए सोलह लोकसभा चुनावों में से प्रदेश में आठ बार कांग्रेस ने चारों सीटों पर जीत हासिल की है। शिमला, रविंद्र शर्मा। संसदीय चुनाव में हिमाचल में कांग्रेस का ही दबदबा रहा है। अब तक आठ बार कांग्रेस प्रदेश की सभी चारों सीटें जीत चुकी है, जबकि तीन बार चारों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा है। एक हज़ार नौ सौ इक्यावन से पांचवीं लोकसभा तक हिमाचल में कांग्रेस की तूती बोलती थी। एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर में विपक्षी दलों के संयुक्त मोर्चा भारतीय लोकदल ने पहली बार कांग्रेस को चारों खाने चित कर दिया था। एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर के आम चुनाव में पूरे देश की तर्ज पर हिमाचल में भी इमरजेंसी ने कांग्रेसी दुर्ग की दीवारें हिलाकर रख दी थीं। कांग्रेस के बड़े-बड़े दिग्गज धराशायी हो गए थे। अब तक हुए सोलह लोकसभा चुनावों में से प्रदेश में आठ बार कांग्रेस ने चारों सीटों पर जीत हासिल की है। सिर्फ तीन बार कांग्रेस ने चारों सीटें हारी हैं। एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर, एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे और दो हज़ार चौदह के लोकसभा चुनाव में चारों सीटों पर कांग्रेस के प्रत्याशी हारे हैं, जबकि पांच लोकसभा चुनाव में भाजपा व कांग्रेस के मिले-जुले प्रत्याशी ही जीतते रहे हैं। शिमला के रिज मैदान से हिमाचल को पूर्ण राज्य की घोषणा की थी। इसके कुछ माह बाद देश की पांचवीं लोकसभा के लिए चुनाव हुए और इसी दौरान हिमाचल को पहली बार चार संसदीय क्षेत्र मिले, जो आज भी यथावत हैं। इस दौरान महासू सीट को समाप्त कर शिमला आरक्षित लोकसभा क्षेत्र बनाया गया। एक हज़ार नौ सौ नवासी में भाजपा ने तीन सीटें जीतने के साथ खाता खोला था। इसमें केवल शिमला आरक्षित सीट पर ही कांग्रेस के केडी सुल्तानपुरी जीते थे। मंडी संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस के पंडित सुखराम शर्मा को भाजपा के महेश्वर सिंह ने हराया। कांगड़ा में शांता कुमार ने कांग्रेस की चंद्रेश कुमारी व हमीरपुर से प्रेम कुमार धूमल ने कांग्रेस के नारायण चंद पराशर को पराजित किया था। आजादी के बाद एक हज़ार नौ सौ इक्यावन में हुए पहले आम चुनाव से लेकर एक हज़ार नौ सौ सरसठ में चौथे लोकसभा चुनाव तक हिमाचल के संसदीय क्षेत्र घटते-बढ़ते रहे। पहली बार यहां मंडी-महासू व चंबा-सिरमौर दो संसदीय सीटें थी, तब हिमाचल चीफ कमीश्नरी हुआ करता था। उस समय प्रदेश में कांगड़ा, ऊना, हमीरपुर, कुल्लू, लाहुल-स्पीति के अलावा सोलन का नालागढ़ हिमाचल का हिस्सा नहीं था, शिमला का कुछ इलाका भी पंजाब में शामिल था, जबकि बिलासपुर जिला अलग से केंद्र शासित था। एक हज़ार नौ सौ सत्तावन के आम चुनाव में महासू व मंडी को अलग-अलग संसदीय सीट, जबकि चंबा को तीसरा लोकसभा क्षेत्र बनाया गया। इस दौरान भी महासू दो सदस्यीय हलका रहा, जहां से यशवंत सिंह परमार व कांग्रेस के ही नेकराम निर्वाचित हुए थे। एक हज़ार नौ सौ बहत्तर के आम चुनाव में फिर से हिमाचल की संसदीय सीटों का नक्शा बदल गया। इस दौरान प्रदेश में सिरमौर को पहली बार आरक्षित सीट घोषित किया गया। |
नई दिल्ली : शुगर यानी डायबिटीज आजकल घर की बीमारी हो गई है। यह लाइफ स्टाइल डिजीज है जिसको खानपान से भी कण्ट्रोल किया जा सकता है। जानते हैं देसी टिप्स जिनको आजमाकर शुगर को कण्ट्रोल किया जा सकता हैः
- अन्न का पांच भाग, काले चने दो भाग और गेहूं एक भाग लेकर पीसकर उसका आटे का सेवन करना चाहिए।
नया अन्न, अधिक खाना, अधिक सोना, दही का अधिक सेवन इस रोग की उत्पत्ति में कारण हैं। इसलिए इनसे बचना चाहिए।
- भोजन के बाद जल नहीं पीना चाहिए। जल और सत्तू का प्रयोग इस रोग में हितकर है। हल्दी इस रोग में विशेष रूप से हितकारी है।
- हरीतकी प्रमेह का नाश करती है। शिलाजीत का सेवन करने से व्यक्ति प्रमेह के उपद्रवों से शीघ्र ग्रसित नहीं होता।
आंवला और हल्दी चूर्ण का नित्य प्रयोग इस रोग में विशेष लाभकारी है।
- रोगी अगर स्थूल है, तो संशोधन यानी वमन विरेचन के प्रयोग से और अगर उस का रोगी दुबला है तो उसके शरीर में वृद्धि करने वाले द्रव्यों के प्रयोग से उसकी चिकित्सा करनी चाहिए।
- जब शरीर में मल संचित होते रहते हैं, वे उपेक्षित होकर चिरकाल तक शरीर में पड़े रहते हैं, तो विभिन्न रोगों के साथ-साथ प्रमेह रोग की उत्पत्ति होती है। इसलिए शरीर का शोधन करने से इससे बचा जा सकता है।
- फल और सब्जियों का भी भरपूर सेवन करना चाहिए। ध्यान रहे कि उन फलों का सवेन कदापि न करें, जिनमें शर्करा की मात्रा अधिक होती है।
- विजयसार की लकड़ी का चूर्ण 200 ग्राम की मात्रा में लेकर एक घड़े में पानी में भिगो दें। अगले दिन पीने के लिए उस पानी का प्रयोग करें। यह पानी और लकड़ी रोजाना बदलनी चाहिए। तभी अच्छे लाभ मिलते हैं।
- आयुर्वेद के ग्रंथों में गुग्गुल, वंग, भस्म, असवादि गण, मुठककादि गण के द्रव्यों का प्रयोग भी इस रोग के लिए निर्दिष्ट है जिसका प्रयोग चिकित्सक की देखरेख में करना चाहिए।
| नई दिल्ली : शुगर यानी डायबिटीज आजकल घर की बीमारी हो गई है। यह लाइफ स्टाइल डिजीज है जिसको खानपान से भी कण्ट्रोल किया जा सकता है। जानते हैं देसी टिप्स जिनको आजमाकर शुगर को कण्ट्रोल किया जा सकता हैः - अन्न का पांच भाग, काले चने दो भाग और गेहूं एक भाग लेकर पीसकर उसका आटे का सेवन करना चाहिए। नया अन्न, अधिक खाना, अधिक सोना, दही का अधिक सेवन इस रोग की उत्पत्ति में कारण हैं। इसलिए इनसे बचना चाहिए। - भोजन के बाद जल नहीं पीना चाहिए। जल और सत्तू का प्रयोग इस रोग में हितकर है। हल्दी इस रोग में विशेष रूप से हितकारी है। - हरीतकी प्रमेह का नाश करती है। शिलाजीत का सेवन करने से व्यक्ति प्रमेह के उपद्रवों से शीघ्र ग्रसित नहीं होता। आंवला और हल्दी चूर्ण का नित्य प्रयोग इस रोग में विशेष लाभकारी है। - रोगी अगर स्थूल है, तो संशोधन यानी वमन विरेचन के प्रयोग से और अगर उस का रोगी दुबला है तो उसके शरीर में वृद्धि करने वाले द्रव्यों के प्रयोग से उसकी चिकित्सा करनी चाहिए। - जब शरीर में मल संचित होते रहते हैं, वे उपेक्षित होकर चिरकाल तक शरीर में पड़े रहते हैं, तो विभिन्न रोगों के साथ-साथ प्रमेह रोग की उत्पत्ति होती है। इसलिए शरीर का शोधन करने से इससे बचा जा सकता है। - फल और सब्जियों का भी भरपूर सेवन करना चाहिए। ध्यान रहे कि उन फलों का सवेन कदापि न करें, जिनमें शर्करा की मात्रा अधिक होती है। - विजयसार की लकड़ी का चूर्ण दो सौ ग्राम की मात्रा में लेकर एक घड़े में पानी में भिगो दें। अगले दिन पीने के लिए उस पानी का प्रयोग करें। यह पानी और लकड़ी रोजाना बदलनी चाहिए। तभी अच्छे लाभ मिलते हैं। - आयुर्वेद के ग्रंथों में गुग्गुल, वंग, भस्म, असवादि गण, मुठककादि गण के द्रव्यों का प्रयोग भी इस रोग के लिए निर्दिष्ट है जिसका प्रयोग चिकित्सक की देखरेख में करना चाहिए। |
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
गैसों का कण मॉडलः गैसों के कणों के बीच की औसत दूरी अपेक्षाकृत अधिक होती है। गैस (Gas) पदार्थ की तीन अवस्थाओं में से एक अवस्था का नाम है (अन्य दो अवस्थाएँ हैं - ठोस तथा द्रव)। गैस अवस्था में पदार्थ का न तो निश्चित आकार होता है न नियत आयतन। ये जिस बर्तन में रखे जाते हैं उसी का आकार और पूरा आयतन ग्रहण कर लेते हैं। जीवधारियों के लिये दो गैसे मुख्य हैं, आक्सीजन गैस जिसके द्वारा जीवधारी जीवित रहता है, दूसरी जिसे जीवधारी अपने शरीर से छोड़ते हैं, उसका नाम कार्बन डाई आक्साइड है। इनके अलावा अन्य गैसों का भी बहु-प्रयोग होता है, जैसे खाना पकाने वाली रसोई गैस। पानी दो गैसों से मिलकर बनता है, आक्सीजन और हाइड्रोजन। . वायुशय (swim bladder, gas bladder) एक भीतरी गैस-भरा अंग होता है जिसके प्रयोग से हड्डीदार मछलियाँ अपने उत्प्लावन (बोयेंसी) पर नियंत्रण रखती हैं। इसके प्रयोग से वह बिना सक्रीय रूप से तैरे किसी मनचाही गहराई पर स्थाई रूप से ठहर सकती हैं। इसके विपरीत उपास्थिदार मछलियाँ वायुशय-रहित होती हैं और अगर वे न तैरें तो धीरे-धीरे नीचे जाती चली जाती हैं (हालांकि कुछ के शरीर में चर्बी के भंडार होते हैं जो उन्हें कुछ हद तक डूबने से बचाते हैं)। वायुशय के दो अन्य लाभ भी हैं। प्रथम, इसकी उपस्थिति से मछली का संहति-केन्द्र उसके आयतन-केन्द्र से नीचे होता है, जिस से उस के शरीर को स्थायित्व मिलता है। दूसरा, वायुशय में हवा खिसकाने से मछली ध्वनियाँ उत्पन्न कर सकती है, जिसे वह अपनी जाति की अन्य मछलियों से संचार के लिए प्रयोग कर सकती हैं। .
गैस और वायुशय आम में एक बात है (यूनियनपीडिया में): आयतन।
सभी पदार्थ स्थान (त्रि-बीमीय स्थान) घेरते हैं। इसी त्रि-बीमीय स्थान की मात्रा की माप को आयतन कहते हैं। एक-बीमीय आकृतियाँ (जैसे रेखा) एवं द्वि-बीमीय आकृतियाँ (जैसे त्रिभुज, चतुर्भुज, वर्ग आदि) का आयतन शून्य होता है। .
गैस 21 संबंध है और वायुशय 10 है। वे आम 1 में है, समानता सूचकांक 3.23% है = 1 / (21 + 10)।
यह लेख गैस और वायुशय के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
| शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। गैसों का कण मॉडलः गैसों के कणों के बीच की औसत दूरी अपेक्षाकृत अधिक होती है। गैस पदार्थ की तीन अवस्थाओं में से एक अवस्था का नाम है । गैस अवस्था में पदार्थ का न तो निश्चित आकार होता है न नियत आयतन। ये जिस बर्तन में रखे जाते हैं उसी का आकार और पूरा आयतन ग्रहण कर लेते हैं। जीवधारियों के लिये दो गैसे मुख्य हैं, आक्सीजन गैस जिसके द्वारा जीवधारी जीवित रहता है, दूसरी जिसे जीवधारी अपने शरीर से छोड़ते हैं, उसका नाम कार्बन डाई आक्साइड है। इनके अलावा अन्य गैसों का भी बहु-प्रयोग होता है, जैसे खाना पकाने वाली रसोई गैस। पानी दो गैसों से मिलकर बनता है, आक्सीजन और हाइड्रोजन। . वायुशय एक भीतरी गैस-भरा अंग होता है जिसके प्रयोग से हड्डीदार मछलियाँ अपने उत्प्लावन पर नियंत्रण रखती हैं। इसके प्रयोग से वह बिना सक्रीय रूप से तैरे किसी मनचाही गहराई पर स्थाई रूप से ठहर सकती हैं। इसके विपरीत उपास्थिदार मछलियाँ वायुशय-रहित होती हैं और अगर वे न तैरें तो धीरे-धीरे नीचे जाती चली जाती हैं । वायुशय के दो अन्य लाभ भी हैं। प्रथम, इसकी उपस्थिति से मछली का संहति-केन्द्र उसके आयतन-केन्द्र से नीचे होता है, जिस से उस के शरीर को स्थायित्व मिलता है। दूसरा, वायुशय में हवा खिसकाने से मछली ध्वनियाँ उत्पन्न कर सकती है, जिसे वह अपनी जाति की अन्य मछलियों से संचार के लिए प्रयोग कर सकती हैं। . गैस और वायुशय आम में एक बात है : आयतन। सभी पदार्थ स्थान घेरते हैं। इसी त्रि-बीमीय स्थान की मात्रा की माप को आयतन कहते हैं। एक-बीमीय आकृतियाँ एवं द्वि-बीमीय आकृतियाँ का आयतन शून्य होता है। . गैस इक्कीस संबंध है और वायुशय दस है। वे आम एक में है, समानता सूचकांक तीन.तेईस% है = एक / । यह लेख गैस और वायुशय के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः |
पर्यावरण एवं वन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जयराम रमेश ने आज लोक सभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी कि विश्व बैंक की सहायता प्राप्त निम्नलिखित दो परियोजनाओं का उद्देश्य मुख्यतया प्रदूषण मुक्त पर्यावरण में वृध्दि करना है ।
ओजान क्षयकारी पदार्थों (ओडीएस) को फेज आउट करने के लिए मांट्रियल प्रोटोकॉल फेज-आउट कार्यक्रम है । यह कार्यक्रम जोकि लगभग 186 मिलियन अमेरिकी डॉलर की वित्तीय सहायता से 1994 में शुरू किया गया था, 5 से अधिक उप-कार्यक्रमों (ओडीएस-1 से ओ डी एस-5) में विभाजित हो गया, दिसम्बर 2011 तक वित्तीय समाप्ति हेतु निर्धारित किया गया है ।
चिलर एनर्जी एफिसिएंसी प्रोजेक्ट वर्ष 2009 में 7.3 मिलियन अमेरिकी डॉलर (ग्लोबल एनवायरनमेंट फसिलिटी से 6.3 मिलियन अमेरिकी डॉलर और मांट्रियल प्रोटोकाल के अंतर्गत 1 मिलियन अमेरिकी डॉलर) के साथ अनुमोदित की गई थी । परियोजना का उद्देश्य वाणिज्यिक इमारतों और औद्योगिक अवस्थापनाओं में प्रयुक्त 370 सीएफसी-आधारित अपर्याप्त चिलर्स को बदलने को बढावा देना है ।
(Release ID :5779)
| पर्यावरण एवं वन राज्य मंत्री श्री जयराम रमेश ने आज लोक सभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी कि विश्व बैंक की सहायता प्राप्त निम्नलिखित दो परियोजनाओं का उद्देश्य मुख्यतया प्रदूषण मुक्त पर्यावरण में वृध्दि करना है । ओजान क्षयकारी पदार्थों को फेज आउट करने के लिए मांट्रियल प्रोटोकॉल फेज-आउट कार्यक्रम है । यह कार्यक्रम जोकि लगभग एक सौ छियासी मिलियन अमेरिकी डॉलर की वित्तीय सहायता से एक हज़ार नौ सौ चौरानवे में शुरू किया गया था, पाँच से अधिक उप-कार्यक्रमों में विभाजित हो गया, दिसम्बर दो हज़ार ग्यारह तक वित्तीय समाप्ति हेतु निर्धारित किया गया है । चिलर एनर्जी एफिसिएंसी प्रोजेक्ट वर्ष दो हज़ार नौ में सात.तीन मिलियन अमेरिकी डॉलर के साथ अनुमोदित की गई थी । परियोजना का उद्देश्य वाणिज्यिक इमारतों और औद्योगिक अवस्थापनाओं में प्रयुक्त तीन सौ सत्तर सीएफसी-आधारित अपर्याप्त चिलर्स को बदलने को बढावा देना है । |
एक मिडलक्लास लड़की ने देश की नंबर-1 बिजनेस वुमन बनने का सपना देखा। लाखों की नौकरी ठुकराकर अपना काम शुरू करने के लिए दिनरात मेहनत की। पहले बिजनेस के लिए लोन नहीं मिला, दूसरा 5 साल में बंद करना पड़ा, लेकिन उसने हार नहीं मानी। उसे खुद पर भरोसा था, वो देश की महिलाओं के लिए रोल मॉडल बनना चाहती थी। वो चाहती थी कि उसे देखकर देश की बेटियों का हौसला बढ़े और वे भी सफल बिजनेस वुमन बनें। देर से ही सही, उसकी मेहनत रंग लाई और 'शुगर कॉस्मेटिक्स' ब्रांड लॉन्च करके वह देश की तेजी से उभरती बिजनेस वुमन बन गई।
हम बात कर रहे हैं 'शार्क टैंक इंडिया' शो की पॉपुलर बिजनेस टाइकून विनीता सिंह की, जिन्हें देखकर लाखों महिलाएं बिजनेस वुमन बनने के सपने देखने लगी हैं। आइए, जानते हैं विनीता की कामयाबी की कहानी, उन्हीं की जुबानीः
मैंने खुली आंखों से सपना देखा और अपने सपने को खुद साकार किया। सपना बड़ा था इसलिए संघर्ष भी बड़ा था, लेकिन आज पलटकर देखती हूं तो खुशी होती है। दिन-रात अपने सपनों का पीछा करना और उन्हें हासिल कर लेने तक हार न मानना, यही कामयाबी का एकमात्र मूलमंत्र है। आज मेरे साथ 2500 महिलाएं काम कर रही हैं। मैंने बचपन में सपना देखा कि ऐसा बिजनेस करूंगी, जिसमें प्रोडक्ट बनाने वाली भी महिलाएं हों और खरीदने वाली भी। मैं चाहती थी ऐसा काम किया जाए कि लगे ही नहीं काम कर रहे हैं, काम करने में इतना मजा आए कि वह बोझ न लगे। आज 'शुगर कॉस्मेटिक्स' के माध्यम से हम यही कर रहे हैं। हमने 2015 में यह ब्रांड लॉन्च किया और अभी इसका टर्नओवर करीब 500 करोड़ रुपए है। इस साल हमारा टर्नओवर का टारगेट 700 करोड़ रुपए है।
मेरा ब्रांड बहुत जल्दी पॉपुलर हो गया, लेकिन लोग मुझे पर्सनली नहीं जानते थे। पॉपुलर शो 'शार्क टैंक इंडिया' में आने के बाद लोग मुझे जानने लगे। शार्क टैंक में आने की वजह ही यही थी कि मेरे जैसी उन तमाम लड़कियों का हौसला बढ़े जो अपने दम पर आगे बढ़ने के सपने देखती हैं। मैं ऐसी महिलाओं के काम आ सकूं जो अपने बिजनेस को आगे बढ़ाना चाहती हैं। मैं लोगों को अपने फेलियर की कहानी इसलिए सुनाती हूं ताकि उनका हौसला न टूटे। उन्हें ये पता चल सके कि बड़े सपने देखने के लिए संघर्ष भी बड़ा करना पड़ता है। जब मैंने शार्क टैंक शो के लिए 'हां' कहा तो मुझे अंदाजा नहीं था कि ये इतना हिट होगा। भारतीय दर्शकों के लिए ये एक नया कांसेप्ट था, लेकिन लोगों ने इसे बहुत पसंद किया। इससे ये पता चलता है कि भारतीय युवा बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हैं जो हम सब के लिए गर्व की बात है।
'शार्क टैंक इंडिया' शो के बाद लोग जब भी मुझे देखते हैं तो बिजनेस के बारे में बात करते हैं, लड़कियां मेरे साथ सेल्फी लेती हैं और कहती हैं, 'आप हमारी रोल मॉडल हैं। ' इस शो ने मुझे लाखों दर्शकों को मोटिवेट करने का मौका दिया। हमारे टाइम में अपने रोल मॉडल से ऐसे फेस टू फेस मिलने का मौका नहीं मिलता था। आज की लड़कियों के पास टैलेंट भी है और एक्सपोजर भी। उनके पास मेरे अलावा भी बिजनेस वुमन फाल्गुनी नायर, गजल अलघ, नमिता थापर जैसी कई रोल मॉडल हैं, जिन्हें देखकर वो हिम्मत जुटा सकती हैं।
पहले बिजनेस वुमन को फंडिंग आसानी से नहीं मिलती थी, लेकिन अब उनके पास कई विकल्प हैं। अगले 10 साल में भारतीय लड़कियां कमाल कर दिखाएंगी, इसका मुझे पूरा यकीन है। मिडिल क्लास फैमिली से आकर यदि मैं बिजनेस वुमन बन सकती हूं तो कोई भी लड़की बन सकती है। पेरेंट्स को अपनी बेटियों को आगे बढ़ने से रोकना नहीं चाहिए। कल को आपकी बेटी कितना आगे बढ़ जाए इसके बारे में आप सोच भी नहीं सकते।
मेरे माता-पिता मेडिकल साइंटिस्ट हैं इसलिए मेरी परवरिश दिल्ली के एम्स कैंपस में हुई। मेरा जन्म मेरे ननिहाल यानी गुजरात में हुआ। जन्म के बाद दो-तीन साल तक मैं गुजरात में रही, फिर दिल्ली आ गई। मुझे मैथ्स पसंद था, इसलिए मैंने डिसाइड किया कि मुझे इंजीनियर बनना है। मैंने आईआईटी के लिए तैयारी की और मेरा उसमें एडमिशन भी हो गया। 2005 में मैंने आईआईटी चेन्नई से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की। आईआईटी में जाकर मुझे बहुत एक्सपोजर मिला। उस दौरान मैंने कई किताबें पढ़ीं। तब एहसास हुआ कि यदि दुनिया बदलनी है तो मुझे अपना बिजनेस शुरू करना होगा। उससे ही सोसाइटी में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। 17 साल की उम्र में मैंने तय कर लिया था कि नौकरी नहीं, अपना बिजनेस करूंगी। मैं खुशनसीब हूं कि मुझे बहुत छोटी उम्र में ये पता चल गया कि मुझे लाइफ में करना क्या है। कई लोगों को ये क्लियरिटी बहुत देर से मिलती है।
आप कितना चल सकते हैं इससे यह तय होता है कि आप कहां पहुंच सकते हैं। डेस्टिनेशन पर पहुंचने से ज्यादा सफर से प्यार होना चाहिए। आईआईटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने जब मैं चेन्नई जा रही थी, तो फ्लाइट में मेरी प्रोफेसर झुनझुनवाला से मुलाकात हुई। मैं उन्हें अपने फ्यूचर प्लान के बारे में बता रही है। तब उन्होंने बताया कि यदि तुम सच में कोई शानदार काम करना चाहती हो, दुनिया बदलना चाहती हो, तो तुम्हें अपना बिजनेस शुरू करना चाहिए। उनका कहना था कि यदि आप किसी चीज के पीछे अपना पूरा जीवन लगा रहे हो तो आपको क्लियर होना चाहिए कि आप उसी चीज के लिए बने हो। मन में थोड़ा सा भी डाउट नहीं होना चाहिए।
आईआईटी की पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो-तीन बिजनेस के बारे में सोचना भी शुरू कर दिया। मैं ये समझ चुकी थी कि सिर्फ इंजीनियरिंग करना काफी नहीं, कोई वर्ल्डक्लास कंपनी शुरू करके ही बड़ा बदलाव किया जा सकता है। तब मैं सोचती थी कि वेस्ट (बेकार पड़ी चीजों) से ऐसे प्रोडक्ट्स तैयार किए जाएं जो बहुत फायदेमंद हों और उनकी मैनुफैक्चरिंग से कई लोगों को रोजगार भी मिल सके। सपने तो बहुत बड़े थे, लेकिन शुरुआत कहां से की जाए ये नहीं मालूम था। मन में डर भी था कि एक मिडलक्लास लड़की को इतने बड़े सपने देखने चाहिए या नहीं।
मैं इस बात में बहुत यकीन करती हूं कि किसी चीज को पूरी शिद्दत से चाहो तो वो मिलती जरूर है। फ्लाइट में प्रोफेसर झुनझुनवाला से हुई बातचीत का मुझ पर इस कदर असर हुआ कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान ही मैंने रिचर्ड ब्रानसन, स्टीव जॉब्स, हॉवर्ड शुल्ज जैसे दुनिया के कई बड़े बिजनेस टाइकून के बारे में लिखी गई न जाने कितनी किताबें पढ़ डाली। मैं जितना पढ़ती थी, मेरी राह मुझे उतनी क्लियर नजर आती। मुझे ये पता था कि ये राह आसान नहीं है। कुछ बड़ा करना है तो चैलेंजेज भी बड़े ही होंगे, लेकिन मैं वो रिस्क लेने के लिए तैयार थी। इंजीनियरिंग के चार सालों में मैंने खूब किताबें पढ़ीं, इन किताबों ने मुझे मेरे उन सभी सवालों के जवाब दिए जो मैं अपनी जिंदगी से चाहती थी। मुझे समझ आया कि मेरे जीवन का मकसद क्या है। यदि हम क्लियर हैं कि हमें लाइफ में करना क्या है, तो फिर कितने ही बड़े सपने क्यों न हों वो जरूर पूरे होते हैं। छोटे सपनों के पीछे इसलिए भागा जाए कि वहां मुश्किलें कम होंगी, ये मेरी सोच नहीं थी।
मैंने पहली किताब स्टारबक्स के फाउंडर हॉवर्ड शुल्ज की लाइफ पर पढ़ी। इस किताब ने मेरी सोच बदल दी। इसमें उनके स्टारबक्स को खरीदने से लेकर उसे आगे बढ़ाने की पूरी जर्नी थी। वो जिस तरह बिजनेस को लेकर सोचते थे उसने मुझे बहुत प्रभावित किया। कॉफी को लेकर उनके पैशन ने ही उन्हें इस बिजनेस को आगे बढ़ाने का हौसला दिया। उनकी सोच से मैं बहुत प्रभावित हुई और मैंने फैसला किया कि मैं भी ऐसा ही बिजनेस शुरू करूंगी जहां लोग अपने पैशन को फॉलो करें और खुशी-खुशी काम करें।
मैं अपने पेरेंट्स की इकलौती संतान हूं। मम्मी-पापा दोनों वर्किंग थे इसलिए मेरी देखभाल या तो हमारे साथ रहने वाली हेल्प करती थी या मुझे एम्स के 'डे केयर' में रखा जाता था। डे केयर में मुझे अपने हमउम्र बच्चों के साथ रहना अच्छा लगता था। मैं हमेशा सोचती कि काश, मेरा कोई भाई या बहन होती। मेरी मां गुजराती हैं और पापा जाट, लेकिन उनकी लव मैरिज नहीं हुई। दोनों की शादी की कहानी बड़ी दिलचस्प है। मम्मी-पापा दोनों पीएचडी थे और दोनों की उम्र तीस से ज्यादा हो चुकी थी। दोनों को सही लाइफ पार्टनर की तलाश थी। फिर जब कॉमन फ्रेंड के जरिए उनकी मुलाकात हुई तो दोनों ने शादी के लिए 'हां' कर दी।
पापा कहते थे, जो भी काम करो वो इतना अच्छा करो कि दुनिया में तुम जैसा कोई न कर सके। उनका कहना था कि तुम यदि इंजीनियरिंग करना चाहती हो तो आईआईटी से ही करो। पापा ने कभी किसी चीज के लिए फोर्स नहीं किया, लेकिन मैं जानती थी कि उनकी मुझसे बहुत उम्मीदें हैं। मेरे पापा ने पांच साल की उम्र से पहले ही अपने पेरेंट्स को खो दिया। उनका बचपन गरीबी में बीता, पढ़ाई स्कॉलरशिप से हुई, इसलिए उनके लिए पढ़ाई ही कामयाबी का पासपोर्ट था।
एम्स कैम्पस में ही मेरी बेस्ट फ्रेंड नव्या रहती थी। हम दोनों 'दिल्ली पब्लिक स्कूल' में पढ़ते थे। वो मुझसे एक क्लास आगे थी और मेरे लिए बड़ी बहन या यूं कह लें रोल मॉडल जैसी थी। वो पढ़ाई में अच्छी थी और स्कूल में काफी पॉपुलर भी। मैं भी उसके जैसा बनना चाहती थी। उसने भी आईआईटी की तैयारी की, लेकिन उसका सिलेक्शन नहीं हो पाया। वो चाहती थी कि उसका सिलेक्शन नहीं हुआ, तो कम से कम मेरा जरूर हो जाए। वो मुझे पढ़ाई में बहुत हेल्प करती और लापरवाही करने पर डांट भी देती। तब तक मैं क्लियर नहीं थी कि मुझे लाइफ में करना क्या है इसलिए फोकस नहीं कर पाती थी। मैं लकी हूं जो मुझे बचपन में ऐसी फ्रेंड मिली जो हर मायने में मुझसे बेहतर है। मेरे पास बेंच मार्क था कि मुझे उसके जैसा बनना है।
मैं बचपन से इन्ट्रोवर्ट थी और अभी भी हूं। मैं जल्दी फ्रेंड्स नहीं बना पाती। मेरे थोड़े से फ्रेंड्स हैं जिनके साथ मैं सबकुछ शेयर कर सकती हूं। मुझे दौड़ना, बेडमिंटन खेलना, वर्कआउट करना पसंद है, खाली समय में मैं इन्हीं सब में बीजी रहती हूं। मुझे बचपन से बेडमिंटन खेलना पसंद है। मैं स्कूल मेंपार्टिसिपेट करती थी, लेकिन पढ़ाई की खातिर मुझे अपना पैशन छोड़ना पड़ा। पापा ने कहा, यदि तुम्हें आईआईटी की तैयारी करनी है तो बहुत पढ़ाई करनी होगी। बैडमिंटन खेलना छोड़ने पर मैं बहुत दुखी हुई थी।
आईआईटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग करने के बाद मैं आंत्रप्रेन्योरशिप में एमबीए करने आईआईएम अहमदाबाद चली गई। वहां मुझे प्रोफेसर हांडा से आन्त्रप्रेन्योरशिप की बारीकियां सीखने का मौका मिला। प्रोफेसर हांडा आज भी मेरे मेंटर हैं। आईआईएम से पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स को जितनी बड़ी सैलरी मिलती है, उसे छोड़कर कोई बिजनेस का रिस्क नहीं लेना चाहता। प्रोफेसर हांडा पहले ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने आईआईएम में आन्त्रप्रेन्योरशिप को इंट्रोड्यूस किया। उनका मानना है कि आईआईएम के स्टूडेंट्स को भी आंत्रप्रेन्योरशिप का एक्सपोजर मिलना चाहिए।
एमबीए के बाद मुझे इंडस बैंक से जॉब का ऑफर मिला था, लेकिन मैंने जॉब नहीं किया। मैं अपना बिजनेस करना चाहती थी। उस समय बड़े कॉलेज से पढ़ाई करने के बाद ज्यादातर लोग नौकरी करना पसंद करते थे। बिजनेस के लिए आसानी से लोन नहीं मिलता था। यदि फैमिली बिजनेस न हो तो लोग बिजनेस का जोखिम नहीं उठाते।
हमारे जैसे मिडलक्लास लोग जिनके पेरेंट्स नौकरी करते थे, वो बिजनेस का रिस्क लेने से डरते थे। लेकिन मैं अपनी जिद पर अड़ी रही। हां, पढ़ाई के दौरान मैंने ड्यूश बैंक, एस्कॉर्ट और आईटीसी के लिए इंटर्नशिप की थी। ड्यूश बैंक में बॉस ने मुझे जॉब करने के लिए बहुत फोर्स किया। उन्होंने मुझसे पूछा कि तुम्हें क्या चाहिए। मैंने कहा कि मैं एक महीना लंदन और एक महीना न्यूयॉर्क में जॉब करना चाहती हूं, उन्होंने मुझे दोनों जगहों पर काम करने का मौका दिया।
मैंने एक महीने न्यूयॉर्क के वॉल स्ट्रीट और एक महीने लंदन के सेंट्रल बैंक में काम किया। उस दौरान भी मेरे दिमाग में अपना बिजनेस शुरू करने की धुन सवार थी। गाड़ी से जाने के पैसे नहीं होते थे इसलिए शाम में काम खत्म होने के बाद मैं लॉन्ग वॉक पर निकल जाती। वहां के मार्केट के चक्कर लगाती कि कौन से ब्रांड पॉपुलर हैं, मार्केट में क्या नया हो रहा है। खरीददार क्या चाहते हैं। इंडिया दस साल बाद कहां होगा, ये जानने के लिए विदेशों की सैर जरूरी है। एक बार में सब कुछ पता नहीं चलता, लेकिन काफी क्लियरिटी मिल जाती है।
उस समय यानी 2007 में मैंने सोचा कि 'विक्टोरिया सीक्रेट' जैसा लॉन्जरी ब्रांड इंडिया में लॉन्च करूंगी। उस समय विदेशों में फैंसी लॉन्जरी ब्रांड आ चुके थे, लेकिन इंडिया में महिलाओं के पास ऐसे खूबसूरत विकल्प नहीं थे। तब हमारे देश में काली थैली में छुपाकर लॉन्जरी प्रोडक्ट्स बेचे जाते थे। 32, 34, 36 साइज से ज्यादा इस बारे में महिलाओं को जानकारी नहीं थी।
मैं और मेरे को-फाउंडर देवाशीष और विशाल भूषण, जो मेरे आईआईएम के बैच मेट थे, हमने ब्रांड का नाम 'Carress' बुक कर लिया। बिजनेस प्लान भी बना लिया। कितना पैसा चाहिए उसका हिसाब भी लगा लिया, लेकिन उस समय हमारे पास अपना बिजनेस शुरू करने के लिए एक करोड़ रुपए नहीं थे। हम पैसे का अरेंजमेंट करने के लिए 10-15 इन्वेस्टर से मिले, तो वे हम पर हंसने लगे। उन्होंने कहा कि तुम्हारे पास कोई एक्सपीरियंस नहीं है, हम तुम्हें पैसे नहीं दे सकते। पैसे मिले नहीं तो हमारा पहला बिजनेस शुरू होने से पहले ही बंद हो गया। हमने नौकरी छोड़ दी थी और बिजनेस भी शुरू नहीं हो पाया, तो हम काफी निराश हो गए।
हम जो भी बिजनेस प्लान बना रहे थे उसमें पैसे की जरूरत थी इसलिए हमने सोचा सर्विस बिजनेस शुरू करते हैं, जिसमें पैसे लगाने की जरूरत न पड़े। हमने एचआर के लोगों को जो भी सर्विसेस चाहिए, जैसे हायरिंग, बैकग्राउंड वेरिफिकेशन, वो सब कुछ प्रोवाइड करने का बिजनेस शुरू किया। बिजनेस के शुरुआती दिनों में काफी संघर्ष करना पड़ा। इस बिजनेस में कमाई बहुत कम थी इसलिए एक-एक कर सारे को-फाउंडर ने कंपनी छोड़ दी।
पांच साल बीत गए, लेकिन बिजनेस में कोई ग्रोथ नहीं नजर आ रही थी। स्टाफ का खर्च निकालना मुश्किल हो रहा था। मुंबई जैसे शहर में अकेले अपने दम पर 10 से 25 हजार में गुजारा करना आसान नहीं था। तब पूरे महीने ये चिंता होती थी कि पहली तारीख को स्टाफ की सैलरी का जुगाड़ कैसे होगा। जेब में पैसे हों या न हों, लेकिन स्टाफ को समय पर सैलरी देनी ही थी।
सेल्स के लिए जब मैं कई कंपनियों को पिच करने जाती, तो मुझे देखकर उन्हें लगता कि हम इतनी कम उम्र के लोगों पर कैसे विश्वास कर सकते हैं, इन्हें बिजनेस का क्या अनुभव है। क्लाइंट का विश्वास जीतने के लिए कई बार मैं बालों को हल्का सफेद करके भी जाती, ताकि मेरी मैच्योरिटी देखकर बिजनेस मिल सके। उस समय तक यंग वुमन के लिए सेल्स और मार्केटिंग का काम मुश्किल था। कई लोग फीमेल है तो सिर्फ टाइमपास के लिए मीटिंग रख लेते, कई लोगों के साथ सेफ महसूस नहीं होता था।
हम ये समझ चुके थे कि इस बिजनेस में कोई फ्यूचर नहीं है, लेकिन अपने बिजनेस को बंद करने का फैसला इतना आसान नहीं होता। उस वक्त मैं बुरी तरह टूट गई थी। रिचर्ड ब्रानसन, स्टीव जॉब्स, हॉवर्ड शुल्ज की जिन किताबों को पढ़कर मैंने बिजनेस करने का सपना देखा था, मैं उसे टूटते हुए देख रही थी। मन में ये सवाल उठने लगे कि क्या मैं इनके जैसे नहीं बन सकती? क्या मैं काबिल नहीं हूं? क्या मैंने अपने लिए गलत सपना देखा? क्या मैं बिजनेस के लिए नहीं बनी हूं? पेरेंट्स को कैसे फेस करूंगी? मैं आसानी से बैंकर बन सकती थी, क्या इतने सालों की मेहनत बेकार हो गई?
उस समय इंडिया में महिलाओं के लिए 'वुमन रोल मॉडल' बहुत कम थीं। किरण मजूमदार जैसे एकाध नाम ही कामयाबी के शिखर पर थे। मन में ये ख्याल भी आते कि क्या हमारा देश अभी महिला बिजनेस वुमन को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है? लगने लगा था कि या तो मैं बिजनेस के लिए फिट नहीं हूं या फिर वुमन आन्त्रप्रेन्योरशिप के लिए इंडियन मार्केट में अभी जगह नहीं है।
पेरेंट्स के बताए रास्ते पर चलकर गलती होने पर उन्हें जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, लेकिन अपने फैसले के लिए किसे दोषी मानती? आप जब सबसे लड़कर कोई रास्ता चुनते हैं और कामयाब नहीं हो पाते, तो आपका कॉन्फिडेंस बुरी तरह टूट जाता है, मेरे साथ भी यही हुआ। लेकिन इतना सब होने के बाद भी मन ये मानने को तैयार नहीं था कि हार मान लेनी चाहिए। मैं नौकरी करने को तैयार नहीं थी। मुझे अब भी उम्मीद थी कि कुछ और ट्राई किया जा सकता है।
मैं और कौशिक मुखर्जी आईआईएम अहमदाबाद से एक साथ थे। कौशिक ने कदम-कदम पर मेरा साथ दिया। 2011 में हमने शादी कर ली। 2012 में हमें अपना बिजनेस बंद करना पड़ा। 2012 में ही हमने एक ई-कॉमर्स कंपनी शुरू की। उस कंपनी को चलाते हुए ही हमें 'शुगर कॉस्मेटिक्स' का आइडिया आया। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए हम लाखों महिलाओं की पसंद-नापसंद, उनकी जरूरतों को समझ रहे थे। हम महिलाओं को सबक्रिप्शन फॉर्म देते और उन्हें अपना फीडबैक देने के लिए कहते। इस तरह हमारे पास लाखों महिलाओं का फीडबैक आ चुका था।
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के लिए रिसर्च करने के दौरान हमारे पास कई महिलाओं के फीडबैक आते। ज्यादातर महिलाओं की एक जैसी फरमाइश रहती, जैसे- मैं वर्किंग वुमन हूं या कॉलेज गर्ल हूं, मुझे ऐसी लिपस्टिक चाहिए जो लंबे समय तक होंठों पर टिकी रहे, मेरे डार्क कॉम्लेक्शन पर अच्छी लगे और भारत के मौसम के हिसाब से भी ठीक हो।
हम महिलाओं की डिमांड ब्रांड्स तक पहुंचाते और पूछते कि आप ऐसे प्रोडक्ट्स क्यों नहीं बनाते। उनसे हमें संतुष्टि वाले जवाब न मिलते। हम समझ चुके थे कि ये आज की इंडियन वुमन की जरूरतों को नहीं समझ पा रहे हैं। वो अब भी ऐसे मेकअप प्रोडक्ट्स बना रहे थे जिन्हें महिलाएं पार्टी, शादी या त्योहारों पर लगा सकें। महिलाओं के डेली मेकअप की जरूरतें पूरी नहीं हो रही थी।
इस बार हम नया बिजनेस शुरू करने के लिए काफी डरे हुए थे, फिर भी हिम्मत जुटाकर मैंने और कौशिक ने मिलकर 2015 में अपना नया कॉस्मेटिक ब्रांड 'शुगर' लॉन्च किया। खास बात ये है कि हमने सिर्फ 4 लिपस्टिक शेड से इस ब्रांड की शुरुआत की। लिपस्टिक के ये 4 शेड आज की ग्लोबल इंडियन वुमन की पसंद को ध्यान में रखकर बनाए गए थे। इन्हें बनाने में हमने अपनी पूरी रिसर्च लगा दी। हमारी मेहनत रंग लाई। ब्राइट पिंक, न्यूड, बेरी और रेड- ये चारों लिपस्टिक शेड्स महिलाओं को इतने पसंद आए कि बहुत कम समय में 'शुगर' कॉस्मेटिक ब्रांड पॉपुलर हो गया। इस बार हमें एक करोड़ का लोन भी मिला और कामयाबी भी। बहुत जल्द हमने लोन चुका लिया और कंपनी की ग्रोथ भी लगातार बढ़ने लगी।
यदि आपको क्लाइंट की जरूरतों के बारे में अच्छी जानकारी है, आपकी रिसर्च सही है, तो आपका बिजनेस हिट होगा ही। इस समय हमारे साथ ढाई हजार महिलाएं काम रही हैं और हमारा इस साल का बिजनेस टर्नओवर का टारगेट 700 करोड़ रुपए है। बहुत जल्द मैं 'शुगर' को इंडिया की नंबर 1 कॉस्मेटिक कंपनी के रूप में देखना चाहती हूं।
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| एक मिडलक्लास लड़की ने देश की नंबर-एक बिजनेस वुमन बनने का सपना देखा। लाखों की नौकरी ठुकराकर अपना काम शुरू करने के लिए दिनरात मेहनत की। पहले बिजनेस के लिए लोन नहीं मिला, दूसरा पाँच साल में बंद करना पड़ा, लेकिन उसने हार नहीं मानी। उसे खुद पर भरोसा था, वो देश की महिलाओं के लिए रोल मॉडल बनना चाहती थी। वो चाहती थी कि उसे देखकर देश की बेटियों का हौसला बढ़े और वे भी सफल बिजनेस वुमन बनें। देर से ही सही, उसकी मेहनत रंग लाई और 'शुगर कॉस्मेटिक्स' ब्रांड लॉन्च करके वह देश की तेजी से उभरती बिजनेस वुमन बन गई। हम बात कर रहे हैं 'शार्क टैंक इंडिया' शो की पॉपुलर बिजनेस टाइकून विनीता सिंह की, जिन्हें देखकर लाखों महिलाएं बिजनेस वुमन बनने के सपने देखने लगी हैं। आइए, जानते हैं विनीता की कामयाबी की कहानी, उन्हीं की जुबानीः मैंने खुली आंखों से सपना देखा और अपने सपने को खुद साकार किया। सपना बड़ा था इसलिए संघर्ष भी बड़ा था, लेकिन आज पलटकर देखती हूं तो खुशी होती है। दिन-रात अपने सपनों का पीछा करना और उन्हें हासिल कर लेने तक हार न मानना, यही कामयाबी का एकमात्र मूलमंत्र है। आज मेरे साथ दो हज़ार पाँच सौ महिलाएं काम कर रही हैं। मैंने बचपन में सपना देखा कि ऐसा बिजनेस करूंगी, जिसमें प्रोडक्ट बनाने वाली भी महिलाएं हों और खरीदने वाली भी। मैं चाहती थी ऐसा काम किया जाए कि लगे ही नहीं काम कर रहे हैं, काम करने में इतना मजा आए कि वह बोझ न लगे। आज 'शुगर कॉस्मेटिक्स' के माध्यम से हम यही कर रहे हैं। हमने दो हज़ार पंद्रह में यह ब्रांड लॉन्च किया और अभी इसका टर्नओवर करीब पाँच सौ करोड़ रुपए है। इस साल हमारा टर्नओवर का टारगेट सात सौ करोड़ रुपए है। मेरा ब्रांड बहुत जल्दी पॉपुलर हो गया, लेकिन लोग मुझे पर्सनली नहीं जानते थे। पॉपुलर शो 'शार्क टैंक इंडिया' में आने के बाद लोग मुझे जानने लगे। शार्क टैंक में आने की वजह ही यही थी कि मेरे जैसी उन तमाम लड़कियों का हौसला बढ़े जो अपने दम पर आगे बढ़ने के सपने देखती हैं। मैं ऐसी महिलाओं के काम आ सकूं जो अपने बिजनेस को आगे बढ़ाना चाहती हैं। मैं लोगों को अपने फेलियर की कहानी इसलिए सुनाती हूं ताकि उनका हौसला न टूटे। उन्हें ये पता चल सके कि बड़े सपने देखने के लिए संघर्ष भी बड़ा करना पड़ता है। जब मैंने शार्क टैंक शो के लिए 'हां' कहा तो मुझे अंदाजा नहीं था कि ये इतना हिट होगा। भारतीय दर्शकों के लिए ये एक नया कांसेप्ट था, लेकिन लोगों ने इसे बहुत पसंद किया। इससे ये पता चलता है कि भारतीय युवा बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हैं जो हम सब के लिए गर्व की बात है। 'शार्क टैंक इंडिया' शो के बाद लोग जब भी मुझे देखते हैं तो बिजनेस के बारे में बात करते हैं, लड़कियां मेरे साथ सेल्फी लेती हैं और कहती हैं, 'आप हमारी रोल मॉडल हैं। ' इस शो ने मुझे लाखों दर्शकों को मोटिवेट करने का मौका दिया। हमारे टाइम में अपने रोल मॉडल से ऐसे फेस टू फेस मिलने का मौका नहीं मिलता था। आज की लड़कियों के पास टैलेंट भी है और एक्सपोजर भी। उनके पास मेरे अलावा भी बिजनेस वुमन फाल्गुनी नायर, गजल अलघ, नमिता थापर जैसी कई रोल मॉडल हैं, जिन्हें देखकर वो हिम्मत जुटा सकती हैं। पहले बिजनेस वुमन को फंडिंग आसानी से नहीं मिलती थी, लेकिन अब उनके पास कई विकल्प हैं। अगले दस साल में भारतीय लड़कियां कमाल कर दिखाएंगी, इसका मुझे पूरा यकीन है। मिडिल क्लास फैमिली से आकर यदि मैं बिजनेस वुमन बन सकती हूं तो कोई भी लड़की बन सकती है। पेरेंट्स को अपनी बेटियों को आगे बढ़ने से रोकना नहीं चाहिए। कल को आपकी बेटी कितना आगे बढ़ जाए इसके बारे में आप सोच भी नहीं सकते। मेरे माता-पिता मेडिकल साइंटिस्ट हैं इसलिए मेरी परवरिश दिल्ली के एम्स कैंपस में हुई। मेरा जन्म मेरे ननिहाल यानी गुजरात में हुआ। जन्म के बाद दो-तीन साल तक मैं गुजरात में रही, फिर दिल्ली आ गई। मुझे मैथ्स पसंद था, इसलिए मैंने डिसाइड किया कि मुझे इंजीनियर बनना है। मैंने आईआईटी के लिए तैयारी की और मेरा उसमें एडमिशन भी हो गया। दो हज़ार पाँच में मैंने आईआईटी चेन्नई से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की। आईआईटी में जाकर मुझे बहुत एक्सपोजर मिला। उस दौरान मैंने कई किताबें पढ़ीं। तब एहसास हुआ कि यदि दुनिया बदलनी है तो मुझे अपना बिजनेस शुरू करना होगा। उससे ही सोसाइटी में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। सत्रह साल की उम्र में मैंने तय कर लिया था कि नौकरी नहीं, अपना बिजनेस करूंगी। मैं खुशनसीब हूं कि मुझे बहुत छोटी उम्र में ये पता चल गया कि मुझे लाइफ में करना क्या है। कई लोगों को ये क्लियरिटी बहुत देर से मिलती है। आप कितना चल सकते हैं इससे यह तय होता है कि आप कहां पहुंच सकते हैं। डेस्टिनेशन पर पहुंचने से ज्यादा सफर से प्यार होना चाहिए। आईआईटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने जब मैं चेन्नई जा रही थी, तो फ्लाइट में मेरी प्रोफेसर झुनझुनवाला से मुलाकात हुई। मैं उन्हें अपने फ्यूचर प्लान के बारे में बता रही है। तब उन्होंने बताया कि यदि तुम सच में कोई शानदार काम करना चाहती हो, दुनिया बदलना चाहती हो, तो तुम्हें अपना बिजनेस शुरू करना चाहिए। उनका कहना था कि यदि आप किसी चीज के पीछे अपना पूरा जीवन लगा रहे हो तो आपको क्लियर होना चाहिए कि आप उसी चीज के लिए बने हो। मन में थोड़ा सा भी डाउट नहीं होना चाहिए। आईआईटी की पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो-तीन बिजनेस के बारे में सोचना भी शुरू कर दिया। मैं ये समझ चुकी थी कि सिर्फ इंजीनियरिंग करना काफी नहीं, कोई वर्ल्डक्लास कंपनी शुरू करके ही बड़ा बदलाव किया जा सकता है। तब मैं सोचती थी कि वेस्ट से ऐसे प्रोडक्ट्स तैयार किए जाएं जो बहुत फायदेमंद हों और उनकी मैनुफैक्चरिंग से कई लोगों को रोजगार भी मिल सके। सपने तो बहुत बड़े थे, लेकिन शुरुआत कहां से की जाए ये नहीं मालूम था। मन में डर भी था कि एक मिडलक्लास लड़की को इतने बड़े सपने देखने चाहिए या नहीं। मैं इस बात में बहुत यकीन करती हूं कि किसी चीज को पूरी शिद्दत से चाहो तो वो मिलती जरूर है। फ्लाइट में प्रोफेसर झुनझुनवाला से हुई बातचीत का मुझ पर इस कदर असर हुआ कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान ही मैंने रिचर्ड ब्रानसन, स्टीव जॉब्स, हॉवर्ड शुल्ज जैसे दुनिया के कई बड़े बिजनेस टाइकून के बारे में लिखी गई न जाने कितनी किताबें पढ़ डाली। मैं जितना पढ़ती थी, मेरी राह मुझे उतनी क्लियर नजर आती। मुझे ये पता था कि ये राह आसान नहीं है। कुछ बड़ा करना है तो चैलेंजेज भी बड़े ही होंगे, लेकिन मैं वो रिस्क लेने के लिए तैयार थी। इंजीनियरिंग के चार सालों में मैंने खूब किताबें पढ़ीं, इन किताबों ने मुझे मेरे उन सभी सवालों के जवाब दिए जो मैं अपनी जिंदगी से चाहती थी। मुझे समझ आया कि मेरे जीवन का मकसद क्या है। यदि हम क्लियर हैं कि हमें लाइफ में करना क्या है, तो फिर कितने ही बड़े सपने क्यों न हों वो जरूर पूरे होते हैं। छोटे सपनों के पीछे इसलिए भागा जाए कि वहां मुश्किलें कम होंगी, ये मेरी सोच नहीं थी। मैंने पहली किताब स्टारबक्स के फाउंडर हॉवर्ड शुल्ज की लाइफ पर पढ़ी। इस किताब ने मेरी सोच बदल दी। इसमें उनके स्टारबक्स को खरीदने से लेकर उसे आगे बढ़ाने की पूरी जर्नी थी। वो जिस तरह बिजनेस को लेकर सोचते थे उसने मुझे बहुत प्रभावित किया। कॉफी को लेकर उनके पैशन ने ही उन्हें इस बिजनेस को आगे बढ़ाने का हौसला दिया। उनकी सोच से मैं बहुत प्रभावित हुई और मैंने फैसला किया कि मैं भी ऐसा ही बिजनेस शुरू करूंगी जहां लोग अपने पैशन को फॉलो करें और खुशी-खुशी काम करें। मैं अपने पेरेंट्स की इकलौती संतान हूं। मम्मी-पापा दोनों वर्किंग थे इसलिए मेरी देखभाल या तो हमारे साथ रहने वाली हेल्प करती थी या मुझे एम्स के 'डे केयर' में रखा जाता था। डे केयर में मुझे अपने हमउम्र बच्चों के साथ रहना अच्छा लगता था। मैं हमेशा सोचती कि काश, मेरा कोई भाई या बहन होती। मेरी मां गुजराती हैं और पापा जाट, लेकिन उनकी लव मैरिज नहीं हुई। दोनों की शादी की कहानी बड़ी दिलचस्प है। मम्मी-पापा दोनों पीएचडी थे और दोनों की उम्र तीस से ज्यादा हो चुकी थी। दोनों को सही लाइफ पार्टनर की तलाश थी। फिर जब कॉमन फ्रेंड के जरिए उनकी मुलाकात हुई तो दोनों ने शादी के लिए 'हां' कर दी। पापा कहते थे, जो भी काम करो वो इतना अच्छा करो कि दुनिया में तुम जैसा कोई न कर सके। उनका कहना था कि तुम यदि इंजीनियरिंग करना चाहती हो तो आईआईटी से ही करो। पापा ने कभी किसी चीज के लिए फोर्स नहीं किया, लेकिन मैं जानती थी कि उनकी मुझसे बहुत उम्मीदें हैं। मेरे पापा ने पांच साल की उम्र से पहले ही अपने पेरेंट्स को खो दिया। उनका बचपन गरीबी में बीता, पढ़ाई स्कॉलरशिप से हुई, इसलिए उनके लिए पढ़ाई ही कामयाबी का पासपोर्ट था। एम्स कैम्पस में ही मेरी बेस्ट फ्रेंड नव्या रहती थी। हम दोनों 'दिल्ली पब्लिक स्कूल' में पढ़ते थे। वो मुझसे एक क्लास आगे थी और मेरे लिए बड़ी बहन या यूं कह लें रोल मॉडल जैसी थी। वो पढ़ाई में अच्छी थी और स्कूल में काफी पॉपुलर भी। मैं भी उसके जैसा बनना चाहती थी। उसने भी आईआईटी की तैयारी की, लेकिन उसका सिलेक्शन नहीं हो पाया। वो चाहती थी कि उसका सिलेक्शन नहीं हुआ, तो कम से कम मेरा जरूर हो जाए। वो मुझे पढ़ाई में बहुत हेल्प करती और लापरवाही करने पर डांट भी देती। तब तक मैं क्लियर नहीं थी कि मुझे लाइफ में करना क्या है इसलिए फोकस नहीं कर पाती थी। मैं लकी हूं जो मुझे बचपन में ऐसी फ्रेंड मिली जो हर मायने में मुझसे बेहतर है। मेरे पास बेंच मार्क था कि मुझे उसके जैसा बनना है। मैं बचपन से इन्ट्रोवर्ट थी और अभी भी हूं। मैं जल्दी फ्रेंड्स नहीं बना पाती। मेरे थोड़े से फ्रेंड्स हैं जिनके साथ मैं सबकुछ शेयर कर सकती हूं। मुझे दौड़ना, बेडमिंटन खेलना, वर्कआउट करना पसंद है, खाली समय में मैं इन्हीं सब में बीजी रहती हूं। मुझे बचपन से बेडमिंटन खेलना पसंद है। मैं स्कूल मेंपार्टिसिपेट करती थी, लेकिन पढ़ाई की खातिर मुझे अपना पैशन छोड़ना पड़ा। पापा ने कहा, यदि तुम्हें आईआईटी की तैयारी करनी है तो बहुत पढ़ाई करनी होगी। बैडमिंटन खेलना छोड़ने पर मैं बहुत दुखी हुई थी। आईआईटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग करने के बाद मैं आंत्रप्रेन्योरशिप में एमबीए करने आईआईएम अहमदाबाद चली गई। वहां मुझे प्रोफेसर हांडा से आन्त्रप्रेन्योरशिप की बारीकियां सीखने का मौका मिला। प्रोफेसर हांडा आज भी मेरे मेंटर हैं। आईआईएम से पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स को जितनी बड़ी सैलरी मिलती है, उसे छोड़कर कोई बिजनेस का रिस्क नहीं लेना चाहता। प्रोफेसर हांडा पहले ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने आईआईएम में आन्त्रप्रेन्योरशिप को इंट्रोड्यूस किया। उनका मानना है कि आईआईएम के स्टूडेंट्स को भी आंत्रप्रेन्योरशिप का एक्सपोजर मिलना चाहिए। एमबीए के बाद मुझे इंडस बैंक से जॉब का ऑफर मिला था, लेकिन मैंने जॉब नहीं किया। मैं अपना बिजनेस करना चाहती थी। उस समय बड़े कॉलेज से पढ़ाई करने के बाद ज्यादातर लोग नौकरी करना पसंद करते थे। बिजनेस के लिए आसानी से लोन नहीं मिलता था। यदि फैमिली बिजनेस न हो तो लोग बिजनेस का जोखिम नहीं उठाते। हमारे जैसे मिडलक्लास लोग जिनके पेरेंट्स नौकरी करते थे, वो बिजनेस का रिस्क लेने से डरते थे। लेकिन मैं अपनी जिद पर अड़ी रही। हां, पढ़ाई के दौरान मैंने ड्यूश बैंक, एस्कॉर्ट और आईटीसी के लिए इंटर्नशिप की थी। ड्यूश बैंक में बॉस ने मुझे जॉब करने के लिए बहुत फोर्स किया। उन्होंने मुझसे पूछा कि तुम्हें क्या चाहिए। मैंने कहा कि मैं एक महीना लंदन और एक महीना न्यूयॉर्क में जॉब करना चाहती हूं, उन्होंने मुझे दोनों जगहों पर काम करने का मौका दिया। मैंने एक महीने न्यूयॉर्क के वॉल स्ट्रीट और एक महीने लंदन के सेंट्रल बैंक में काम किया। उस दौरान भी मेरे दिमाग में अपना बिजनेस शुरू करने की धुन सवार थी। गाड़ी से जाने के पैसे नहीं होते थे इसलिए शाम में काम खत्म होने के बाद मैं लॉन्ग वॉक पर निकल जाती। वहां के मार्केट के चक्कर लगाती कि कौन से ब्रांड पॉपुलर हैं, मार्केट में क्या नया हो रहा है। खरीददार क्या चाहते हैं। इंडिया दस साल बाद कहां होगा, ये जानने के लिए विदेशों की सैर जरूरी है। एक बार में सब कुछ पता नहीं चलता, लेकिन काफी क्लियरिटी मिल जाती है। उस समय यानी दो हज़ार सात में मैंने सोचा कि 'विक्टोरिया सीक्रेट' जैसा लॉन्जरी ब्रांड इंडिया में लॉन्च करूंगी। उस समय विदेशों में फैंसी लॉन्जरी ब्रांड आ चुके थे, लेकिन इंडिया में महिलाओं के पास ऐसे खूबसूरत विकल्प नहीं थे। तब हमारे देश में काली थैली में छुपाकर लॉन्जरी प्रोडक्ट्स बेचे जाते थे। बत्तीस, चौंतीस, छत्तीस साइज से ज्यादा इस बारे में महिलाओं को जानकारी नहीं थी। मैं और मेरे को-फाउंडर देवाशीष और विशाल भूषण, जो मेरे आईआईएम के बैच मेट थे, हमने ब्रांड का नाम 'Carress' बुक कर लिया। बिजनेस प्लान भी बना लिया। कितना पैसा चाहिए उसका हिसाब भी लगा लिया, लेकिन उस समय हमारे पास अपना बिजनेस शुरू करने के लिए एक करोड़ रुपए नहीं थे। हम पैसे का अरेंजमेंट करने के लिए दस-पंद्रह इन्वेस्टर से मिले, तो वे हम पर हंसने लगे। उन्होंने कहा कि तुम्हारे पास कोई एक्सपीरियंस नहीं है, हम तुम्हें पैसे नहीं दे सकते। पैसे मिले नहीं तो हमारा पहला बिजनेस शुरू होने से पहले ही बंद हो गया। हमने नौकरी छोड़ दी थी और बिजनेस भी शुरू नहीं हो पाया, तो हम काफी निराश हो गए। हम जो भी बिजनेस प्लान बना रहे थे उसमें पैसे की जरूरत थी इसलिए हमने सोचा सर्विस बिजनेस शुरू करते हैं, जिसमें पैसे लगाने की जरूरत न पड़े। हमने एचआर के लोगों को जो भी सर्विसेस चाहिए, जैसे हायरिंग, बैकग्राउंड वेरिफिकेशन, वो सब कुछ प्रोवाइड करने का बिजनेस शुरू किया। बिजनेस के शुरुआती दिनों में काफी संघर्ष करना पड़ा। इस बिजनेस में कमाई बहुत कम थी इसलिए एक-एक कर सारे को-फाउंडर ने कंपनी छोड़ दी। पांच साल बीत गए, लेकिन बिजनेस में कोई ग्रोथ नहीं नजर आ रही थी। स्टाफ का खर्च निकालना मुश्किल हो रहा था। मुंबई जैसे शहर में अकेले अपने दम पर दस से पच्चीस हजार में गुजारा करना आसान नहीं था। तब पूरे महीने ये चिंता होती थी कि पहली तारीख को स्टाफ की सैलरी का जुगाड़ कैसे होगा। जेब में पैसे हों या न हों, लेकिन स्टाफ को समय पर सैलरी देनी ही थी। सेल्स के लिए जब मैं कई कंपनियों को पिच करने जाती, तो मुझे देखकर उन्हें लगता कि हम इतनी कम उम्र के लोगों पर कैसे विश्वास कर सकते हैं, इन्हें बिजनेस का क्या अनुभव है। क्लाइंट का विश्वास जीतने के लिए कई बार मैं बालों को हल्का सफेद करके भी जाती, ताकि मेरी मैच्योरिटी देखकर बिजनेस मिल सके। उस समय तक यंग वुमन के लिए सेल्स और मार्केटिंग का काम मुश्किल था। कई लोग फीमेल है तो सिर्फ टाइमपास के लिए मीटिंग रख लेते, कई लोगों के साथ सेफ महसूस नहीं होता था। हम ये समझ चुके थे कि इस बिजनेस में कोई फ्यूचर नहीं है, लेकिन अपने बिजनेस को बंद करने का फैसला इतना आसान नहीं होता। उस वक्त मैं बुरी तरह टूट गई थी। रिचर्ड ब्रानसन, स्टीव जॉब्स, हॉवर्ड शुल्ज की जिन किताबों को पढ़कर मैंने बिजनेस करने का सपना देखा था, मैं उसे टूटते हुए देख रही थी। मन में ये सवाल उठने लगे कि क्या मैं इनके जैसे नहीं बन सकती? क्या मैं काबिल नहीं हूं? क्या मैंने अपने लिए गलत सपना देखा? क्या मैं बिजनेस के लिए नहीं बनी हूं? पेरेंट्स को कैसे फेस करूंगी? मैं आसानी से बैंकर बन सकती थी, क्या इतने सालों की मेहनत बेकार हो गई? उस समय इंडिया में महिलाओं के लिए 'वुमन रोल मॉडल' बहुत कम थीं। किरण मजूमदार जैसे एकाध नाम ही कामयाबी के शिखर पर थे। मन में ये ख्याल भी आते कि क्या हमारा देश अभी महिला बिजनेस वुमन को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है? लगने लगा था कि या तो मैं बिजनेस के लिए फिट नहीं हूं या फिर वुमन आन्त्रप्रेन्योरशिप के लिए इंडियन मार्केट में अभी जगह नहीं है। पेरेंट्स के बताए रास्ते पर चलकर गलती होने पर उन्हें जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, लेकिन अपने फैसले के लिए किसे दोषी मानती? आप जब सबसे लड़कर कोई रास्ता चुनते हैं और कामयाब नहीं हो पाते, तो आपका कॉन्फिडेंस बुरी तरह टूट जाता है, मेरे साथ भी यही हुआ। लेकिन इतना सब होने के बाद भी मन ये मानने को तैयार नहीं था कि हार मान लेनी चाहिए। मैं नौकरी करने को तैयार नहीं थी। मुझे अब भी उम्मीद थी कि कुछ और ट्राई किया जा सकता है। मैं और कौशिक मुखर्जी आईआईएम अहमदाबाद से एक साथ थे। कौशिक ने कदम-कदम पर मेरा साथ दिया। दो हज़ार ग्यारह में हमने शादी कर ली। दो हज़ार बारह में हमें अपना बिजनेस बंद करना पड़ा। दो हज़ार बारह में ही हमने एक ई-कॉमर्स कंपनी शुरू की। उस कंपनी को चलाते हुए ही हमें 'शुगर कॉस्मेटिक्स' का आइडिया आया। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए हम लाखों महिलाओं की पसंद-नापसंद, उनकी जरूरतों को समझ रहे थे। हम महिलाओं को सबक्रिप्शन फॉर्म देते और उन्हें अपना फीडबैक देने के लिए कहते। इस तरह हमारे पास लाखों महिलाओं का फीडबैक आ चुका था। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के लिए रिसर्च करने के दौरान हमारे पास कई महिलाओं के फीडबैक आते। ज्यादातर महिलाओं की एक जैसी फरमाइश रहती, जैसे- मैं वर्किंग वुमन हूं या कॉलेज गर्ल हूं, मुझे ऐसी लिपस्टिक चाहिए जो लंबे समय तक होंठों पर टिकी रहे, मेरे डार्क कॉम्लेक्शन पर अच्छी लगे और भारत के मौसम के हिसाब से भी ठीक हो। हम महिलाओं की डिमांड ब्रांड्स तक पहुंचाते और पूछते कि आप ऐसे प्रोडक्ट्स क्यों नहीं बनाते। उनसे हमें संतुष्टि वाले जवाब न मिलते। हम समझ चुके थे कि ये आज की इंडियन वुमन की जरूरतों को नहीं समझ पा रहे हैं। वो अब भी ऐसे मेकअप प्रोडक्ट्स बना रहे थे जिन्हें महिलाएं पार्टी, शादी या त्योहारों पर लगा सकें। महिलाओं के डेली मेकअप की जरूरतें पूरी नहीं हो रही थी। इस बार हम नया बिजनेस शुरू करने के लिए काफी डरे हुए थे, फिर भी हिम्मत जुटाकर मैंने और कौशिक ने मिलकर दो हज़ार पंद्रह में अपना नया कॉस्मेटिक ब्रांड 'शुगर' लॉन्च किया। खास बात ये है कि हमने सिर्फ चार लिपस्टिक शेड से इस ब्रांड की शुरुआत की। लिपस्टिक के ये चार शेड आज की ग्लोबल इंडियन वुमन की पसंद को ध्यान में रखकर बनाए गए थे। इन्हें बनाने में हमने अपनी पूरी रिसर्च लगा दी। हमारी मेहनत रंग लाई। ब्राइट पिंक, न्यूड, बेरी और रेड- ये चारों लिपस्टिक शेड्स महिलाओं को इतने पसंद आए कि बहुत कम समय में 'शुगर' कॉस्मेटिक ब्रांड पॉपुलर हो गया। इस बार हमें एक करोड़ का लोन भी मिला और कामयाबी भी। बहुत जल्द हमने लोन चुका लिया और कंपनी की ग्रोथ भी लगातार बढ़ने लगी। यदि आपको क्लाइंट की जरूरतों के बारे में अच्छी जानकारी है, आपकी रिसर्च सही है, तो आपका बिजनेस हिट होगा ही। इस समय हमारे साथ ढाई हजार महिलाएं काम रही हैं और हमारा इस साल का बिजनेस टर्नओवर का टारगेट सात सौ करोड़ रुपए है। बहुत जल्द मैं 'शुगर' को इंडिया की नंबर एक कॉस्मेटिक कंपनी के रूप में देखना चाहती हूं। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
डच भाषा (डचः Nederlands उच्चारणः नेडेर्लाण्ड्स) नीदरलैंड देश की मुख्यभाषा और राजभाषा है। यह हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिवार की जर्मैनी शाखा में आती है। क्योंकि ये एक निम्न जर्मनिक भाषा है, इसलिये ये अंग्रेज़ी से काफ़ी मेल खाती है। इसकी लिपि रोमन लिपि है। नीदरलैंड के अतिरिक्त यह बेल्जियम के उत्तरी आधे भाग में, फ्रांस के नार्ड जिले के ऊपरी हिस्से में तथा यूरोप के बाहर डच न्यूगिनी आदि क्षेत्रों में बोली जाती है। संयुक्त राज्य अमरीका तथा कनाडा में रहनेवाले डच नागरिकों की भी यह मातृभाषा है। दक्षिण अफ्रिकी यूनियन राज्य में भी बहुत से डच मूल के नागरिक रहते हैं और उनकी भाषा भी डच भाषा से बहुलांश में मिलती-जुलती है, यद्यपि अब वह एक स्वतंत्र भाषा के रूप में विकसित हो गई है। . बहुसंस्कृतिवाद, बहु जातीय संस्कृति की स्वीकृति देना या बढ़ावा देना होता है, एक विशिष्ट स्थान के जनसांख्यिकीय बनावट पर यह लागू होती है, आमतौर पर यह स्कूलों, व्यापारों, पड़ोस, शहरों या राष्ट्रों जैसे संगठनात्मक स्तर पर होते हैं। इस संदर्भ में, बहुसंस्कृतिवादी, केन्द्र के रूप में कोई विशेष जातीय, धार्मिक समूह और/ या सांस्कृतिक समुदाय को बढ़ावा देने के बिना विशिष्ट जातीय और धार्मिक समूहों के लिए विस्तारित न्यायसम्मत मूल्य स्थिति की वकालत करते हैं। बहुसंस्कृतिवाद की नीति अक्सर आत्मसातकरण और सामाजिक एकीकरण अवधारणाओं के साथ विपरीत होती है। .
डच भाषा और बहुसंस्कृतिवाद आम में 2 बातें हैं (यूनियनपीडिया में): नीदरलैण्ड, कनाडा।
नीदरलैण्ड नीदरलैंड युरोप महाद्वीप का एक प्रमुख देश है। यह उत्तरी-पूर्वी यूरोप में स्थित है। इसकी उत्तरी तथा पश्चिमी सीमा पर उत्तरी समुद्र स्थित है, दक्षिण में बेल्जियम एवं पूर्व में जर्मनी है। नीदरलैंड की राजधानी एम्सटर्डम है। "द हेग" को प्रशासनिक राजधानी का दर्जा दिया जाता है। नीदरलैंड को अक्सर हॉलैंड के नाम संबोधित किया जाता है एवं सामान्यतः नीदरलैंड के निवासियों तथा इसकी भाषा दोनों के लिए डच शब्द का उपयोग किया जाता है। .
कोई विवरण नहीं।
डच भाषा 14 संबंध है और बहुसंस्कृतिवाद 47 है। वे आम 2 में है, समानता सूचकांक 3.28% है = 2 / (14 + 47)।
यह लेख डच भाषा और बहुसंस्कृतिवाद के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
| शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। डच भाषा नीदरलैंड देश की मुख्यभाषा और राजभाषा है। यह हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिवार की जर्मैनी शाखा में आती है। क्योंकि ये एक निम्न जर्मनिक भाषा है, इसलिये ये अंग्रेज़ी से काफ़ी मेल खाती है। इसकी लिपि रोमन लिपि है। नीदरलैंड के अतिरिक्त यह बेल्जियम के उत्तरी आधे भाग में, फ्रांस के नार्ड जिले के ऊपरी हिस्से में तथा यूरोप के बाहर डच न्यूगिनी आदि क्षेत्रों में बोली जाती है। संयुक्त राज्य अमरीका तथा कनाडा में रहनेवाले डच नागरिकों की भी यह मातृभाषा है। दक्षिण अफ्रिकी यूनियन राज्य में भी बहुत से डच मूल के नागरिक रहते हैं और उनकी भाषा भी डच भाषा से बहुलांश में मिलती-जुलती है, यद्यपि अब वह एक स्वतंत्र भाषा के रूप में विकसित हो गई है। . बहुसंस्कृतिवाद, बहु जातीय संस्कृति की स्वीकृति देना या बढ़ावा देना होता है, एक विशिष्ट स्थान के जनसांख्यिकीय बनावट पर यह लागू होती है, आमतौर पर यह स्कूलों, व्यापारों, पड़ोस, शहरों या राष्ट्रों जैसे संगठनात्मक स्तर पर होते हैं। इस संदर्भ में, बहुसंस्कृतिवादी, केन्द्र के रूप में कोई विशेष जातीय, धार्मिक समूह और/ या सांस्कृतिक समुदाय को बढ़ावा देने के बिना विशिष्ट जातीय और धार्मिक समूहों के लिए विस्तारित न्यायसम्मत मूल्य स्थिति की वकालत करते हैं। बहुसंस्कृतिवाद की नीति अक्सर आत्मसातकरण और सामाजिक एकीकरण अवधारणाओं के साथ विपरीत होती है। . डच भाषा और बहुसंस्कृतिवाद आम में दो बातें हैं : नीदरलैण्ड, कनाडा। नीदरलैण्ड नीदरलैंड युरोप महाद्वीप का एक प्रमुख देश है। यह उत्तरी-पूर्वी यूरोप में स्थित है। इसकी उत्तरी तथा पश्चिमी सीमा पर उत्तरी समुद्र स्थित है, दक्षिण में बेल्जियम एवं पूर्व में जर्मनी है। नीदरलैंड की राजधानी एम्सटर्डम है। "द हेग" को प्रशासनिक राजधानी का दर्जा दिया जाता है। नीदरलैंड को अक्सर हॉलैंड के नाम संबोधित किया जाता है एवं सामान्यतः नीदरलैंड के निवासियों तथा इसकी भाषा दोनों के लिए डच शब्द का उपयोग किया जाता है। . कोई विवरण नहीं। डच भाषा चौदह संबंध है और बहुसंस्कृतिवाद सैंतालीस है। वे आम दो में है, समानता सूचकांक तीन.अट्ठाईस% है = दो / । यह लेख डच भाषा और बहुसंस्कृतिवाद के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः |
कहे और सारे विश्व में वह गूंज उठे । मात्र भौतिक साधनों से हमने सम्पूर्ण जगत् को एक बना डाला है। इसलिए स्वभावतः ही आनेवाले धर्म को विश्वव्यापी होना पड़ेगा ।
भविष्य के धार्मिक आदर्शों को सम्पूर्ण धर्मों में जो कुछ भी सुन्दर और महत्त्वपूर्ण है, उन सबों को समेटकर चलना पड़ेगा और साथ ही भावविकास के लिए अनन्त क्षेत्र प्रदान करना होगा । अतीत में जो कुछ भी सुन्दर रहा है, उसे जीवित रखना होगा, साथ ही वर्तमान के भण्डार को और भी समृद्ध बनाने के लिए भविष्य का विकासद्वार भी खुला रखना होगा । धर्म को ग्रहणशील होना चाहिए, और ईश्वर सम्बन्धी अपने आदर्शों में भिन्नता के कारण एक दूसरे का तिरस्कार नहीं करना चाहिए । मैंने अपने जीवन में ऐसे अनेक महापुरुषों को देखा है, जो ईश्वर में एकदम विश्वास नहीं करते थं, अर्थात् हमारे और तुम्हारे ईश्वर में । किन्तु वे लोग ईश्वर को हमारी अपेक्षा अधिक अच्छो त्तरह समझते हैं । ईश्वर सम्बन्धी सभी सिद्धान्त सगुण, निर्गुण, अनन्त, नैतिक नियम अथवा आदर्श मानव धर्म की परिभाषा को समा लेनेवाले चाहिए । और जब धर्म इतने उदार बन जायेंगे, तब उनकी कल्याणकारिणी शक्ति शतगुणी अधिक हो जायगी । धर्मों में अद्भुत शक्ति है; पर इनकी संकीर्णताओं के कारण इनसे कल्याण की अपेक्षा अधिक हानि ही हुई है ।
यहाँ तक कि आज भी हम बहुत से सम्प्रदाय और समाज पाते हैं, जो प्रायः समान आदर्श के अनुगामी होते हुए भी परस्पर लड़ रहे हैं । इसका कारण यह है कि एक समुदाय आदर्शों को दूसरे के समान हूबहू प्रतिपादित नहीं करना चाहता । अतः धर्म के उदार होने की नितान्त आवश्यकता है । धार्मिक विचारों को | कहे और सारे विश्व में वह गूंज उठे । मात्र भौतिक साधनों से हमने सम्पूर्ण जगत् को एक बना डाला है। इसलिए स्वभावतः ही आनेवाले धर्म को विश्वव्यापी होना पड़ेगा । भविष्य के धार्मिक आदर्शों को सम्पूर्ण धर्मों में जो कुछ भी सुन्दर और महत्त्वपूर्ण है, उन सबों को समेटकर चलना पड़ेगा और साथ ही भावविकास के लिए अनन्त क्षेत्र प्रदान करना होगा । अतीत में जो कुछ भी सुन्दर रहा है, उसे जीवित रखना होगा, साथ ही वर्तमान के भण्डार को और भी समृद्ध बनाने के लिए भविष्य का विकासद्वार भी खुला रखना होगा । धर्म को ग्रहणशील होना चाहिए, और ईश्वर सम्बन्धी अपने आदर्शों में भिन्नता के कारण एक दूसरे का तिरस्कार नहीं करना चाहिए । मैंने अपने जीवन में ऐसे अनेक महापुरुषों को देखा है, जो ईश्वर में एकदम विश्वास नहीं करते थं, अर्थात् हमारे और तुम्हारे ईश्वर में । किन्तु वे लोग ईश्वर को हमारी अपेक्षा अधिक अच्छो त्तरह समझते हैं । ईश्वर सम्बन्धी सभी सिद्धान्त सगुण, निर्गुण, अनन्त, नैतिक नियम अथवा आदर्श मानव धर्म की परिभाषा को समा लेनेवाले चाहिए । और जब धर्म इतने उदार बन जायेंगे, तब उनकी कल्याणकारिणी शक्ति शतगुणी अधिक हो जायगी । धर्मों में अद्भुत शक्ति है; पर इनकी संकीर्णताओं के कारण इनसे कल्याण की अपेक्षा अधिक हानि ही हुई है । यहाँ तक कि आज भी हम बहुत से सम्प्रदाय और समाज पाते हैं, जो प्रायः समान आदर्श के अनुगामी होते हुए भी परस्पर लड़ रहे हैं । इसका कारण यह है कि एक समुदाय आदर्शों को दूसरे के समान हूबहू प्रतिपादित नहीं करना चाहता । अतः धर्म के उदार होने की नितान्त आवश्यकता है । धार्मिक विचारों को |
तुर्की में घातक भूकंप से मरने वालों की संख्या 23,000 से अधिक हो गई है. (फोटोः PTI)
अंकाराः तुर्की और उसके पड़ोसी देश सीरिया में 6 फरवरी, 2023 को 7. 8 की तीव्रता से आए विनाशकारी भूकंप ने जमकर तबाही मचाई है. अब तक दोनों देशों में मौतों का आंकड़ा 24,000 के पार चला गया है, जबकि हजारों की संख्या में लोग घायल हुए हैं. इस तबाही के बीच भारत से NDRF की टीमें भी तुर्की और सीरिया में रेस्क्यू के लिए पहुंची हैं और मलबों में दबे लोगों को बाहर निकाल रही है. एनडीआरएफ के जवानों ने एक 6 साल की बच्ची का रेस्क्यू करने के बाद एक 8 साल भी बच्ची को भी मलबे से सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता पाई है. आश्चर्य की बात यह है कि बच्ची 4 दिन बाद मलबे से जिंदा निकली है.
PTI की रिपोर्ट के अनुसार, एनडीआरएफ की टीम तुर्की सेना के जवानों के साथ गाजियांटेप प्रांत के नूरदगी शहर में अपना बचाव अभियान चला रही है. टीम ने इस इलाके में मलबे से करीब 13 शव निकाले हैं. बल का बचाव अभियान सात फरवरी से तुर्की के प्रभावित इलाकों में जारी है. बता दें कि भारत ने 6 फरवरी के विनाशकारी भूकंप के बाद तुर्की और सीरिया को सहायता प्रदान करने के लिए "ऑपरेशन दोस्त" शुरू किया.
#WATCH । India's NDRF & Turkish Army rescue an 8-year-old girl who was stuck alive under rubble of a building flattened by the massive earthquake in Nurdagi, Gaziantep in Turkey.
So far 24,000 people are dead in Turkey & Syria earthquakes that led to devastation.
तुर्की और सीरिया में 24 साल बाद सबसे घातक भूकंप आया है. इससे पहले 1999 में उत्तर-पश्चिम तुर्की में भूकंप से तबाही हुई थी, जिसमें 17,000 लोग मारे गए थे. 2023 के भूकंप से हजारों इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा है. हताहतों की संख्या अभी और बढ़ने की आशंका है, क्योंकि बचावकर्मी अब भी प्रभावित इलाकों में मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं. इसके बाद भी तुर्की में रह-रहकर भूकंप के झटके महसूस किए जा रहे थे. भूकंप आने के बाद अब तक 100 से अधिक आफ्टरशॉक आ चुके थे.
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| तुर्की में घातक भूकंप से मरने वालों की संख्या तेईस,शून्य से अधिक हो गई है. अंकाराः तुर्की और उसके पड़ोसी देश सीरिया में छः फरवरी, दो हज़ार तेईस को सात. आठ की तीव्रता से आए विनाशकारी भूकंप ने जमकर तबाही मचाई है. अब तक दोनों देशों में मौतों का आंकड़ा चौबीस,शून्य के पार चला गया है, जबकि हजारों की संख्या में लोग घायल हुए हैं. इस तबाही के बीच भारत से NDRF की टीमें भी तुर्की और सीरिया में रेस्क्यू के लिए पहुंची हैं और मलबों में दबे लोगों को बाहर निकाल रही है. एनडीआरएफ के जवानों ने एक छः साल की बच्ची का रेस्क्यू करने के बाद एक आठ साल भी बच्ची को भी मलबे से सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता पाई है. आश्चर्य की बात यह है कि बच्ची चार दिन बाद मलबे से जिंदा निकली है. PTI की रिपोर्ट के अनुसार, एनडीआरएफ की टीम तुर्की सेना के जवानों के साथ गाजियांटेप प्रांत के नूरदगी शहर में अपना बचाव अभियान चला रही है. टीम ने इस इलाके में मलबे से करीब तेरह शव निकाले हैं. बल का बचाव अभियान सात फरवरी से तुर्की के प्रभावित इलाकों में जारी है. बता दें कि भारत ने छः फरवरी के विनाशकारी भूकंप के बाद तुर्की और सीरिया को सहायता प्रदान करने के लिए "ऑपरेशन दोस्त" शुरू किया. #WATCH । India's NDRF & Turkish Army rescue an आठ-year-old girl who was stuck alive under rubble of a building flattened by the massive earthquake in Nurdagi, Gaziantep in Turkey. So far चौबीस,शून्य people are dead in Turkey & Syria earthquakes that led to devastation. तुर्की और सीरिया में चौबीस साल बाद सबसे घातक भूकंप आया है. इससे पहले एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में उत्तर-पश्चिम तुर्की में भूकंप से तबाही हुई थी, जिसमें सत्रह,शून्य लोग मारे गए थे. दो हज़ार तेईस के भूकंप से हजारों इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा है. हताहतों की संख्या अभी और बढ़ने की आशंका है, क्योंकि बचावकर्मी अब भी प्रभावित इलाकों में मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं. इसके बाद भी तुर्की में रह-रहकर भूकंप के झटके महसूस किए जा रहे थे. भूकंप आने के बाद अब तक एक सौ से अधिक आफ्टरशॉक आ चुके थे. . |
नयी दिल्ली, तीन जून प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) सोसाइटी की एक बैठक की अध्यक्षता करेंगे।
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से जारी एक बयान में कहा गया मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से इस कार्यक्रम में शिरकत करेंगे।
सीएसआईआर सोसाइटी विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग का हिस्सा है।
पीएमओ ने कहा कि इसकी गतिविधियां देशभर की 37 प्रयोगशालाओं और 39 आउटरीच केंद्रों तक फैली हैं। सोसाइटी के सदस्यों में नामचीन वैज्ञानिक, उद्योगपति और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। इनकी बैठक सालाना होती है।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
| नयी दिल्ली, तीन जून प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद सोसाइटी की एक बैठक की अध्यक्षता करेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से इस कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। सीएसआईआर सोसाइटी विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग का हिस्सा है। पीएमओ ने कहा कि इसकी गतिविधियां देशभर की सैंतीस प्रयोगशालाओं और उनतालीस आउटरीच केंद्रों तक फैली हैं। सोसाइटी के सदस्यों में नामचीन वैज्ञानिक, उद्योगपति और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। इनकी बैठक सालाना होती है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है। |
आदेश के अनुसार अजय मिश्रा, प्रीतिंदर सिंह और रमित शर्मा को क्रमशः गाजियाबाद, आगरा तथा प्रयागराज का पुलिस आयुक्त नियुक्त किया गया है।
लखनऊः उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद, आगरा और प्रयागराज में तीन नये कमिश्नरेट में सोमवार को पुलिस आयुक्तों की नियुक्ति कर दी गयी। सोमवार रात जारी एक शासकीय आदेश में यह जानकारी दी गयी। आदेश के अनुसार अजय मिश्रा, प्रीतिंदर सिंह और रमित शर्मा को क्रमशः गाजियाबाद, आगरा तथा प्रयागराज का पुलिस आयुक्त नियुक्त किया गया है।
उधर, यूपी सरकार ने आधी रात गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) के पुलिस आयुक्त आलोक सिंह समेत वाराणसी, आगरा, गाजियाबाद, अयोध्या, मथुरा, लखनऊ, बहराइच और प्रयागराज सहित विभिन्न जिलों से 16 भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारियों का तबादला कर दिया।
आदेश के अनुसार आलोक सिंह का तबादला लखनऊ स्थित पुलिस महानिदेशक कार्यालय में अपर पुलिस महानिदेशक के रूप में किया गया है। उनकी जगह लखनऊ परिक्षेत्र में पुलिस महानिरीक्षक के रूप में पदस्थ लक्ष्मी सिंह को नोएडा का नया पुलिस आयुक्त नियुक्त किया गया है। इसी तरह अशोक मुथा जैन को वाराणसी का नया पुलिस आयुक्त नियुक्त किया गया है।
वहीं पुलिस आयुक्तालय प्रणाली लागू होने के 3 दिन बाद नवगठित प्रयागराज समेत 3 पुलिस आयुक्तालय के पुलिस आयुक्तों के नाम की घोषणा हुई। बरेली रेंज के IG रमित शर्मा को प्रयागराज का पहला पुलिस कमिश्नर,चंद्रप्रकाश को IG रेंज प्रयागराज और SSP प्रयागराज शैलेश कुमार पांडे को SSP मथुरा बनाया गया।
| आदेश के अनुसार अजय मिश्रा, प्रीतिंदर सिंह और रमित शर्मा को क्रमशः गाजियाबाद, आगरा तथा प्रयागराज का पुलिस आयुक्त नियुक्त किया गया है। लखनऊः उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद, आगरा और प्रयागराज में तीन नये कमिश्नरेट में सोमवार को पुलिस आयुक्तों की नियुक्ति कर दी गयी। सोमवार रात जारी एक शासकीय आदेश में यह जानकारी दी गयी। आदेश के अनुसार अजय मिश्रा, प्रीतिंदर सिंह और रमित शर्मा को क्रमशः गाजियाबाद, आगरा तथा प्रयागराज का पुलिस आयुक्त नियुक्त किया गया है। उधर, यूपी सरकार ने आधी रात गौतमबुद्ध नगर के पुलिस आयुक्त आलोक सिंह समेत वाराणसी, आगरा, गाजियाबाद, अयोध्या, मथुरा, लखनऊ, बहराइच और प्रयागराज सहित विभिन्न जिलों से सोलह भारतीय पुलिस सेवा अधिकारियों का तबादला कर दिया। आदेश के अनुसार आलोक सिंह का तबादला लखनऊ स्थित पुलिस महानिदेशक कार्यालय में अपर पुलिस महानिदेशक के रूप में किया गया है। उनकी जगह लखनऊ परिक्षेत्र में पुलिस महानिरीक्षक के रूप में पदस्थ लक्ष्मी सिंह को नोएडा का नया पुलिस आयुक्त नियुक्त किया गया है। इसी तरह अशोक मुथा जैन को वाराणसी का नया पुलिस आयुक्त नियुक्त किया गया है। वहीं पुलिस आयुक्तालय प्रणाली लागू होने के तीन दिन बाद नवगठित प्रयागराज समेत तीन पुलिस आयुक्तालय के पुलिस आयुक्तों के नाम की घोषणा हुई। बरेली रेंज के IG रमित शर्मा को प्रयागराज का पहला पुलिस कमिश्नर,चंद्रप्रकाश को IG रेंज प्रयागराज और SSP प्रयागराज शैलेश कुमार पांडे को SSP मथुरा बनाया गया। |
हरियाणा का बजट सत्र बुधवार को राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय के अभिभाषण के साथ शुरू हो गया है। सरकार का यह तीसरा बजट सत्र है। राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय पहली बार हरियाणा विधानसभा में अपना अभिभाषण पढ़ा। उन्होंने सबसे पहले शहीदों को नमन किया और स्वतंत्रता सेनानियों का जिक्र भी किया।राज्यपाल ने 14 वीं विधानसभा के तीसरे बजट सत्र में सभी का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि हरियाणा विधानसभा में यह मेरा पहला संबोधन है। उन्होंने कहा कि आजादी के 75वें साल को हम आजादी का अमृत महोत्सव के तौर पर मना रहे हैं। मेरी सरकार आजादी के पहले स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीदों की याद में अंबाला में 'आजादी की पहली लड़ाई का शहीद स्मारक' का निर्माण करा रही है। केंद्र सरकार ने श्री गुरु तेग बहादुर जी का 400 वां प्रकाश पर्व और श्री गुरु गोविंद सिंह जी के साहिबजादा जोरावर सिंह जी और फतेह सिंह जी के जन्म 26 दिसंबर को 'वीर बाल दिवस' के रूप में मनाने का फैसला किया फैसला है।राम मंदिर का भी किया जिक्रराज्यपाल ने अपने संबोधन में राम मंदिर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भव्य श्री राम मंदिर के निर्माण से करोड़ों लोगों की आस्था को मजबूती मिली है। कोरोना योद्धाओं और स्वास्थ्य तंत्र की मदद से कोरोना जैसी बीमारी पर नियंत्रण पाने में भी सफल रहे हैं। मेरी सरकार ने सुशासन से सेवा के भाव को अपनाते हुए पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय दर्शन पर सबका साथ-सबका विकास, सबका विश्वास-सबका प्रयास और हरियाणा एक और हरियाणवी एक के मूलमंत्र पर काम किया है। सरकार ने क्षेत्रवाद और भाई भतीजावाद से ऊपर उठकर हर वर्ग का समुचित विकास किया। नीति आयोग के एसडीजी इंडिया इंडेक्स 2020-2021 में हरियाणा देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। हरियाणा की लाल डोरा मुक्त करने की योजना को केंद्र सरकार ने स्वामित्व योजना के रूप में लागू किया है। उन्होंने आगे कहा कि 'मेरा पानी-मेरी विरासत' योजना का भी केंद्र की टीम अध्ययन कर रही है। 'शासन कम- सुशासन ज्यादा' को सुनिश्चित करने के लिए कृषि उद्योग, स्वास्थ्य, शिक्षा हर क्षेत्र में ई-गवर्नेंस की नई-नई पहल अपनाई गई है। ई-गवर्नेंस का यह अभियान अब परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) तक पहुंचा है। केवल पीपीपी के जरिए ही लोगों को सरकारी सेवाओं और योजनाओं का लाभ घर बैठे मिलेगा। लाभार्थियों तक पेंशन, सब्सिडी, वित्तीय सहायता जल्द मिलेगी। प्रशासन की जवाबदेही तय करने के लिए ऑटो अपील सॉफ्टवेयर लागू किया गया है और इसमें 570 सेवाओं को जोड़ने का काम जारी। ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी 43 विभागों के 214 कॉडर में लागू की गई है।
| हरियाणा का बजट सत्र बुधवार को राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय के अभिभाषण के साथ शुरू हो गया है। सरकार का यह तीसरा बजट सत्र है। राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय पहली बार हरियाणा विधानसभा में अपना अभिभाषण पढ़ा। उन्होंने सबसे पहले शहीदों को नमन किया और स्वतंत्रता सेनानियों का जिक्र भी किया।राज्यपाल ने चौदह वीं विधानसभा के तीसरे बजट सत्र में सभी का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि हरियाणा विधानसभा में यह मेरा पहला संबोधन है। उन्होंने कहा कि आजादी के पचहत्तरवें साल को हम आजादी का अमृत महोत्सव के तौर पर मना रहे हैं। मेरी सरकार आजादी के पहले स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीदों की याद में अंबाला में 'आजादी की पहली लड़ाई का शहीद स्मारक' का निर्माण करा रही है। केंद्र सरकार ने श्री गुरु तेग बहादुर जी का चार सौ वां प्रकाश पर्व और श्री गुरु गोविंद सिंह जी के साहिबजादा जोरावर सिंह जी और फतेह सिंह जी के जन्म छब्बीस दिसंबर को 'वीर बाल दिवस' के रूप में मनाने का फैसला किया फैसला है।राम मंदिर का भी किया जिक्रराज्यपाल ने अपने संबोधन में राम मंदिर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भव्य श्री राम मंदिर के निर्माण से करोड़ों लोगों की आस्था को मजबूती मिली है। कोरोना योद्धाओं और स्वास्थ्य तंत्र की मदद से कोरोना जैसी बीमारी पर नियंत्रण पाने में भी सफल रहे हैं। मेरी सरकार ने सुशासन से सेवा के भाव को अपनाते हुए पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय दर्शन पर सबका साथ-सबका विकास, सबका विश्वास-सबका प्रयास और हरियाणा एक और हरियाणवी एक के मूलमंत्र पर काम किया है। सरकार ने क्षेत्रवाद और भाई भतीजावाद से ऊपर उठकर हर वर्ग का समुचित विकास किया। नीति आयोग के एसडीजी इंडिया इंडेक्स दो हज़ार बीस-दो हज़ार इक्कीस में हरियाणा देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। हरियाणा की लाल डोरा मुक्त करने की योजना को केंद्र सरकार ने स्वामित्व योजना के रूप में लागू किया है। उन्होंने आगे कहा कि 'मेरा पानी-मेरी विरासत' योजना का भी केंद्र की टीम अध्ययन कर रही है। 'शासन कम- सुशासन ज्यादा' को सुनिश्चित करने के लिए कृषि उद्योग, स्वास्थ्य, शिक्षा हर क्षेत्र में ई-गवर्नेंस की नई-नई पहल अपनाई गई है। ई-गवर्नेंस का यह अभियान अब परिवार पहचान पत्र तक पहुंचा है। केवल पीपीपी के जरिए ही लोगों को सरकारी सेवाओं और योजनाओं का लाभ घर बैठे मिलेगा। लाभार्थियों तक पेंशन, सब्सिडी, वित्तीय सहायता जल्द मिलेगी। प्रशासन की जवाबदेही तय करने के लिए ऑटो अपील सॉफ्टवेयर लागू किया गया है और इसमें पाँच सौ सत्तर सेवाओं को जोड़ने का काम जारी। ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी तैंतालीस विभागों के दो सौ चौदह कॉडर में लागू की गई है। |
जिला परिषद कैडर के कर्मचारियों ने जिला मुख्यालय सोलन में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। राज्य कार्यकारिणी के आह्वान पर मंगलवार को घोषित सामूहिक अवकाश के तहत कर्मचारी यूनियन के सभी पदाधिकारी व सदस्य बीडीओ कार्यालय में एकत्रित हुए और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। इस दौरान कर्मचारियों ने प्रदेश सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को 15 दिनों के भीतर नहीं माना गया तो यह आंदोलन और उग्र होगा, जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी। कर्मचारियों ने बीडीओ के माध्यम से सरकार को ज्ञापन भी सौंपा। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार द्वारा छठे वेतन आयोग के लाभ से केवल जिला परिषद कैडर कर्मचारियों को ही वंचित रखा जा रहा है, जोकि सही नहीं है। आंदोलनरत कर्मचारियों ने प्रदेश सरकार से एक बार फिर मांग की कि उनकी जायज मांगों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। पिछले काफी समय से जिला परिषद काडर कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर पूर्व भाजपा सरकार व वर्तमान कांग्रेस सरकार से मिलते रहे हैं। लेकिन उन्हें आश्वासनों के अलावा अभी तक कुछ नहीं मिला है।
कर्मचारियों की मुख्य मांग है कि उन्हें सर्वप्रथम विभाग में सम्मिलित किया जाए ताकि छठे वेतन आयोग में निहित सभी लाभ प्रदेश के हजारों कर्मचारियों को मिल सकें। बता दें कि पिछले वर्ष भी जून माह में भी जिला परिषद कैडर कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया था और प्रदेशभर में करीब 10-12 दिन का अनशन व आंदोलन किया था। उस दौरान तत्कालीन सरकार से मिले आश्वासनों के बाद यह आंदोलन खत्म किया गया था। जिला परिषद कर्मचारी महासंघ सोलन के अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा कि गत वर्ष किए गए आंदोलन में कर्मचारियों को कांग्रेस का पूरा साथ मिला था और कांग्रेस के कई नेताओं, विधायकों ने आंदोलन का समर्थन कर इसमें शामिल भी हुए थे। इस दौरान उन्हें यह भी आश्वासन दिया गया था कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनते ही उनकी मांगों को पूरा कर दिया जाएगा, लेकिन कांग्रेस सरकार को गठित हुए छह माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी उनकी सुध नहीं ली जा रही है।
कंडाघाट। विकास खंड कंडाघाट के अंतर्गत कार्यरत पंचायत सचिव, तकनीकी सहायक और दो कनिष्ठ अभियंताओं जिला परिषद काडर कार्यकारिणी सदस्य ने सुलक्षणा जसवाल जिला परिषद कर्मचारी व अधिकारी महासंघ की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को एक ज्ञापन भेजा है। ज्ञापन खंड विकास अधिकारी कंडाघाट के माध्यम से भेजा गया है। ज्ञापन के माध्यम से इन कर्मचारियों एंव अधिकारियों ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि जिला परिषद कर्मियों को पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास विभाग में मर्ज किया जाए और छठे वेतनमान के लाभ भी दिए जाएं। ज्ञापन के माध्यम से लिखा गया है कि उचित वेतन और भत्ते भी सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है। मांगों पर ध्यान न देने की सूरत में कठोर पग उठाने की चेतावनी दी है।
| जिला परिषद कैडर के कर्मचारियों ने जिला मुख्यालय सोलन में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। राज्य कार्यकारिणी के आह्वान पर मंगलवार को घोषित सामूहिक अवकाश के तहत कर्मचारी यूनियन के सभी पदाधिकारी व सदस्य बीडीओ कार्यालय में एकत्रित हुए और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। इस दौरान कर्मचारियों ने प्रदेश सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को पंद्रह दिनों के भीतर नहीं माना गया तो यह आंदोलन और उग्र होगा, जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी। कर्मचारियों ने बीडीओ के माध्यम से सरकार को ज्ञापन भी सौंपा। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार द्वारा छठे वेतन आयोग के लाभ से केवल जिला परिषद कैडर कर्मचारियों को ही वंचित रखा जा रहा है, जोकि सही नहीं है। आंदोलनरत कर्मचारियों ने प्रदेश सरकार से एक बार फिर मांग की कि उनकी जायज मांगों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। पिछले काफी समय से जिला परिषद काडर कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर पूर्व भाजपा सरकार व वर्तमान कांग्रेस सरकार से मिलते रहे हैं। लेकिन उन्हें आश्वासनों के अलावा अभी तक कुछ नहीं मिला है। कर्मचारियों की मुख्य मांग है कि उन्हें सर्वप्रथम विभाग में सम्मिलित किया जाए ताकि छठे वेतन आयोग में निहित सभी लाभ प्रदेश के हजारों कर्मचारियों को मिल सकें। बता दें कि पिछले वर्ष भी जून माह में भी जिला परिषद कैडर कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया था और प्रदेशभर में करीब दस-बारह दिन का अनशन व आंदोलन किया था। उस दौरान तत्कालीन सरकार से मिले आश्वासनों के बाद यह आंदोलन खत्म किया गया था। जिला परिषद कर्मचारी महासंघ सोलन के अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा कि गत वर्ष किए गए आंदोलन में कर्मचारियों को कांग्रेस का पूरा साथ मिला था और कांग्रेस के कई नेताओं, विधायकों ने आंदोलन का समर्थन कर इसमें शामिल भी हुए थे। इस दौरान उन्हें यह भी आश्वासन दिया गया था कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनते ही उनकी मांगों को पूरा कर दिया जाएगा, लेकिन कांग्रेस सरकार को गठित हुए छह माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी उनकी सुध नहीं ली जा रही है। कंडाघाट। विकास खंड कंडाघाट के अंतर्गत कार्यरत पंचायत सचिव, तकनीकी सहायक और दो कनिष्ठ अभियंताओं जिला परिषद काडर कार्यकारिणी सदस्य ने सुलक्षणा जसवाल जिला परिषद कर्मचारी व अधिकारी महासंघ की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को एक ज्ञापन भेजा है। ज्ञापन खंड विकास अधिकारी कंडाघाट के माध्यम से भेजा गया है। ज्ञापन के माध्यम से इन कर्मचारियों एंव अधिकारियों ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि जिला परिषद कर्मियों को पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास विभाग में मर्ज किया जाए और छठे वेतनमान के लाभ भी दिए जाएं। ज्ञापन के माध्यम से लिखा गया है कि उचित वेतन और भत्ते भी सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है। मांगों पर ध्यान न देने की सूरत में कठोर पग उठाने की चेतावनी दी है। |
- #NagpurPregnant Man: 36 साल से प्रेग्नेंट था शख्स, डॉक्टर ने ट्यूमर समझ किया ऑपरेशन, लेकिन निकले जुड़वा बच्चे!
बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया के कप्तान पैट कमिंस द्वारा टॉस जीतने के साथ हो चुकी है जहां पर उन्होंने पहले बैटिंग करने का फैसला किया है। इसके बाद भारत के कप्तान रोहित शर्मा ने जैसे ही बताया आज दो खिलाड़ियों का टेस्ट डेब्यू होने जा रहा है तो पक्का हो गया कि सूर्यकुमार यादव को टेस्ट कैप मिलने जा रही है। टॉस से पहले ही यादव और केएस भरत को टीम में देखा जा सकता था। टी20 क्रिकेट के बेताज बादशाह सूर्या को सफेद जर्सी में लाल गेंद का सामना करते देखने के लिए भारतीय फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। यादव ने इस साल की शुरुआत में मुंबई के लिए रणजी ट्रॉफी का मुकाबला खेलने के दौरान संकेत दिए थे कि वे टेस्ट मैचों के बेहद करीब है।
ये एक बहुत बड़ी टीम और सीरीज में यादव का डेब्यू है। वे अपने लिए इससे बड़ा मंच नहीं मांग सकते थे। यादव ने अपने फर्स्ट क्लास करियर में 79 मुकाबले खेले हैं और 44. 75 के औसत के साथ 14 शतक लगाकर 5549 रन बनाए हैं। केवल यही एक फॉर्मेट ऐसा है जहां यादव का स्ट्राइक रेट 100 से कम है। एक समय हालांकि माना जा रहा था कि शुभमन गिल की क्लास और प्रचंड फॉर्म यादव के डेब्यू में रोड़ा बनेगी पर गिल को अभी इंतजार करना होगा। ये सूर्यकुमार के लिए बहुत बड़ा अवसर है जिसको उन्हें किसी भी हाल में भुनाना होगा क्योंकि गिल ज्यादा समय तक बाहर इंतजार नहीं कर सकते।
मैच की शुरुआत से पहले वो नजारा देखने लायक था जब पूर्व हेड कोच रवि शास्त्री ने सूर्या को टेस्ट कैप प्रदान की। इस दौरान शास्त्री लंबी स्पीच देते नजर आए और सूर्या को नर्वस होकर सुनते हुए देखा जा सकता था। टेस्ट मैच कैप हासिल करना किसी भी खिलाड़ी का सपना होता है। इस वीडियो को आप यहां पर देख सकते हैं। जैसे ही भारतीय टीम नागपुर पहुंची थी सूर्यकुमार ने सोशल मीडिया पर सफेद जर्सी में अपनी फोटो पोस्ट करके खुशी जाहिर की थी। टीम प्रबंधन ने उन पर भरोसा करके दिखाया है कि वे उन्हें महज एक टी20 स्टार नहीं समझना चाहते।
सूर्या ने मार्च 14, 2021 के बाद टी20 इंटरनेशनल डेब्यू करने के बाद जुलाई 18, 2021 में वनडे में भी डेब्यू कर लिया था। टेस्ट के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ा लेकिन आज ये भी हो गया है। हालांकि यादव की इस बात के लिए काफी आलोचना हुई थी कि वे वनडे में टी20 जैसा नहीं खेल पाते। उनको थोड़ा एडजस्ट करने में समय लग रहा है। वनडे में उनका औसत 20 मैच खेलने के बाद भी 30 से नीच है जो उनके 46. 50 के टी20 इंटरनेशनल औसत की तुलना में बहुत ही कम है। ऐसे में टेस्ट मैच में निश्चित तौर पर यादव की बल्लेबाजी पर नजरें रहेंगी।
सबसे बड़ा आकर्षण होगा सूर्या के शॉट सिलेक्शन को देखना। क्या वे 360 डिग्री पर टेस्ट मैच में भी शॉट लगाएंगे या परंपरागत अंदाज में बने रहेंगे। उन्होंने टी20 में पिछले साल इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के खिलाफ शतक लगाया और फिर इस साल श्रीलंका के खिलाफ तीन अंकों की पारी खेली। ऐसा भी नहीं है भारत ने सिर्फ ये सिलेक्शन टी20 फॉर्म के आधार पर कर दिया क्योंकि पिच को देखकर भी ये फैसला हुआ है। सूर्यकुमार स्पिन पर बेहतरीन स्वीप लगा सकते हैं और वे पंत की गैर मौजूदगी में उस आक्रामक बल्लेबाज की कमी पूरी कर सकते हैं जिसकी कमी भारतीय टीम महसूस कर रही है।
ये पिच ऐसी है जहां पर बहुत ज्यादा स्कोर नहीं होने जा रहे हैं ऐसे में काउंटर अटैक करने के लिए सूर्या का होना जरूरी है जहां वे 100 से ऊपर के स्ट्राइक रेट के साथ बैटिंग करके लो-स्कोरिंग मुकाबले में निर्णायक पारियों को अंजाम दे सके।
| - #NagpurPregnant Man: छत्तीस साल से प्रेग्नेंट था शख्स, डॉक्टर ने ट्यूमर समझ किया ऑपरेशन, लेकिन निकले जुड़वा बच्चे! बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया के कप्तान पैट कमिंस द्वारा टॉस जीतने के साथ हो चुकी है जहां पर उन्होंने पहले बैटिंग करने का फैसला किया है। इसके बाद भारत के कप्तान रोहित शर्मा ने जैसे ही बताया आज दो खिलाड़ियों का टेस्ट डेब्यू होने जा रहा है तो पक्का हो गया कि सूर्यकुमार यादव को टेस्ट कैप मिलने जा रही है। टॉस से पहले ही यादव और केएस भरत को टीम में देखा जा सकता था। टीबीस क्रिकेट के बेताज बादशाह सूर्या को सफेद जर्सी में लाल गेंद का सामना करते देखने के लिए भारतीय फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। यादव ने इस साल की शुरुआत में मुंबई के लिए रणजी ट्रॉफी का मुकाबला खेलने के दौरान संकेत दिए थे कि वे टेस्ट मैचों के बेहद करीब है। ये एक बहुत बड़ी टीम और सीरीज में यादव का डेब्यू है। वे अपने लिए इससे बड़ा मंच नहीं मांग सकते थे। यादव ने अपने फर्स्ट क्लास करियर में उन्यासी मुकाबले खेले हैं और चौंतालीस. पचहत्तर के औसत के साथ चौदह शतक लगाकर पाँच हज़ार पाँच सौ उनचास रन बनाए हैं। केवल यही एक फॉर्मेट ऐसा है जहां यादव का स्ट्राइक रेट एक सौ से कम है। एक समय हालांकि माना जा रहा था कि शुभमन गिल की क्लास और प्रचंड फॉर्म यादव के डेब्यू में रोड़ा बनेगी पर गिल को अभी इंतजार करना होगा। ये सूर्यकुमार के लिए बहुत बड़ा अवसर है जिसको उन्हें किसी भी हाल में भुनाना होगा क्योंकि गिल ज्यादा समय तक बाहर इंतजार नहीं कर सकते। मैच की शुरुआत से पहले वो नजारा देखने लायक था जब पूर्व हेड कोच रवि शास्त्री ने सूर्या को टेस्ट कैप प्रदान की। इस दौरान शास्त्री लंबी स्पीच देते नजर आए और सूर्या को नर्वस होकर सुनते हुए देखा जा सकता था। टेस्ट मैच कैप हासिल करना किसी भी खिलाड़ी का सपना होता है। इस वीडियो को आप यहां पर देख सकते हैं। जैसे ही भारतीय टीम नागपुर पहुंची थी सूर्यकुमार ने सोशल मीडिया पर सफेद जर्सी में अपनी फोटो पोस्ट करके खुशी जाहिर की थी। टीम प्रबंधन ने उन पर भरोसा करके दिखाया है कि वे उन्हें महज एक टीबीस स्टार नहीं समझना चाहते। सूर्या ने मार्च चौदह, दो हज़ार इक्कीस के बाद टीबीस इंटरनेशनल डेब्यू करने के बाद जुलाई अट्ठारह, दो हज़ार इक्कीस में वनडे में भी डेब्यू कर लिया था। टेस्ट के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ा लेकिन आज ये भी हो गया है। हालांकि यादव की इस बात के लिए काफी आलोचना हुई थी कि वे वनडे में टीबीस जैसा नहीं खेल पाते। उनको थोड़ा एडजस्ट करने में समय लग रहा है। वनडे में उनका औसत बीस मैच खेलने के बाद भी तीस से नीच है जो उनके छियालीस. पचास के टीबीस इंटरनेशनल औसत की तुलना में बहुत ही कम है। ऐसे में टेस्ट मैच में निश्चित तौर पर यादव की बल्लेबाजी पर नजरें रहेंगी। सबसे बड़ा आकर्षण होगा सूर्या के शॉट सिलेक्शन को देखना। क्या वे तीन सौ साठ डिग्री पर टेस्ट मैच में भी शॉट लगाएंगे या परंपरागत अंदाज में बने रहेंगे। उन्होंने टीबीस में पिछले साल इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के खिलाफ शतक लगाया और फिर इस साल श्रीलंका के खिलाफ तीन अंकों की पारी खेली। ऐसा भी नहीं है भारत ने सिर्फ ये सिलेक्शन टीबीस फॉर्म के आधार पर कर दिया क्योंकि पिच को देखकर भी ये फैसला हुआ है। सूर्यकुमार स्पिन पर बेहतरीन स्वीप लगा सकते हैं और वे पंत की गैर मौजूदगी में उस आक्रामक बल्लेबाज की कमी पूरी कर सकते हैं जिसकी कमी भारतीय टीम महसूस कर रही है। ये पिच ऐसी है जहां पर बहुत ज्यादा स्कोर नहीं होने जा रहे हैं ऐसे में काउंटर अटैक करने के लिए सूर्या का होना जरूरी है जहां वे एक सौ से ऊपर के स्ट्राइक रेट के साथ बैटिंग करके लो-स्कोरिंग मुकाबले में निर्णायक पारियों को अंजाम दे सके। |
दिल्ली में 41. 6 डिग्री सेल्सियस के साथ शुक्रवार का दिन बीते 10 वर्षों में सबसे गर्म रहा है। साथ ही यह इस सीजन का सबसे अधिक पारा रहा है। इससे पहले 2012 में 37 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान रहा था। भीषण गर्मी के बीच दिल्ली के अमूमन सभी मानक केंद्रों पर गंभीर स्तर की लू दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए गंभीर स्तर की लू चलने की संभावना जताई है। साथ ही लोगों से बेवजह धूप में निकलने से बचने की सलाह भी दी है।
मौसम विभाग के मुताबिक, शुक्रवार को अधिकतम तापमान सामान्य से सात अधिक 41. 6 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान सामान्य के बराबर 19. 7 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। सुबह से ही सूरज के तेवर तल्ख रहे और दिनभर गर्म हवाओं की वजह से लोग गर्मी को लेकर परेशान रहे। घरों से बाहर निकले लोगों ने सूरज की तपिश से बचने के लिए पेय पदार्थों से लेकर छाव का सहारा लिया। शाम पांच बजे तक भी चिलचिलाती धूप की चुभन महसूस की गई। बीते 24 घंटे में हवा में नमी का स्तर 14 से 67 फीसदी रहा।
पश्चिम उत्तर प्रदेश में अभी से आसमान से आग बरसनी शुरु हो गई है। दिन का पारा चढ़ने के साथ-साथ लू के थपेड़ों ने लोगों को घरों से निकलना मुश्किल कर दिया है। गर्मी के तेवर तल्ख होने से सीजन में पहली बार दिन का तापमान 40. 2 डिग्री रिकॉर्ड किया गया है, जो इस सीजन में सबसे अधिक है। अप्रैल के प्रथम सप्ताह में ही तापमान रिकॉर्ड तोड़ रहा है और गर्मी में शहरवासी हलकान हो रहे है। मौसम वेधशाला पर दिन का अधिकतम तापमान 40. 2 डिग्री व न्यूनतम तापमान 18. 0 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
सूरज के तीखे तेवरों के साथ ही अब गर्म हवाओं ने भी अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। सुबह से ही चिलचिलाती धूप शुरू हो जाती है। दो-तीन दिन से अधिकतम तापमान फिर बढ़ने लगा है। शुक्रवार को हरियाणा के हिसार शहर का अधिकतम तापमान 43. 2 डिग्री सेल्सियस रहा। पिछले 11 सालों में 8 अप्रैल कभी भी इतना अधिक तापमान नहीं रहा। बुधवार को अधिकतम तापमान 41. 0 डिग्री दर्ज किया गया था, लेकिन यह गुरुवार को बढ़कर 41. 8 डिग्री पर आ गया।
रात का तापमान 16. 0 डिग्री पर बना हुआ है। हालांकि पिछले 6 दिन से अधिकतम तापमान 40 डिग्री से 42 डिग्री के आसपास ही रहा है। केवल तीन अप्रैल को ही 42. 2 डिग्री तापमान दर्ज हुआ था। तीखी धूप और लू की वजह से दिन में शहर के पार्कों में सन्नाटा पसरा रहता है।
उत्तराखंड में कई इलाकों में जंगलों में लगी आग से वातावरण में बढ़ी गर्मी के कारण बर्फ पिघलने और हिमस्खलन का खतरा बढ़ गया है। इस बीच मौसम विभाग ने नौ तारीख से लेकर 12 तारीख तक पर्वतीय जिलों में तापमान के सामान्य से बहुत अधिक रहने की आशंका जताते हुए रेड अलर्ट जारी किया है। बढ़ते पारे की वजह से फसलों और सब्जियों को भी भारी नुकसान हो सकता है। विभाग ने एडवाइजरी भी जारी की है।
मौसम विभाग के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक बिक्रम सिंह ने बताया कि नौ, 10, 11 और 12 अप्रैल को उत्तरकाशी, टिहरी, चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, बागेश्वर, नैनीताल और चंपावत में सामान्य से बहुत ज्यादा तापमान रहने का अनुमान है। इस दौरान इन जिलों में कुछ स्थानों पर वनाग्नि की घटनाएं भी बढ़ सकती हैं। फसलों और सब्जियों पर भी गर्मी असर दिखेगा। वहीं उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिलों में उच्च हिमालयी क्षेत्रों (3500 मीटर से ज्यादा) वाले इलाकों में बर्फ पिघलने से हिमस्खलन होने का भी खतरा है। विभाग ने किसानों को तेज धूप से फसल को झुलसने से बचाने के लिए नियमित तौर पर सिंचाई करने के निर्देश दिए हैं।
| दिल्ली में इकतालीस. छः डिग्री सेल्सियस के साथ शुक्रवार का दिन बीते दस वर्षों में सबसे गर्म रहा है। साथ ही यह इस सीजन का सबसे अधिक पारा रहा है। इससे पहले दो हज़ार बारह में सैंतीस डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान रहा था। भीषण गर्मी के बीच दिल्ली के अमूमन सभी मानक केंद्रों पर गंभीर स्तर की लू दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने अगले चौबीस घंटाटे के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए गंभीर स्तर की लू चलने की संभावना जताई है। साथ ही लोगों से बेवजह धूप में निकलने से बचने की सलाह भी दी है। मौसम विभाग के मुताबिक, शुक्रवार को अधिकतम तापमान सामान्य से सात अधिक इकतालीस. छः डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान सामान्य के बराबर उन्नीस. सात डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। सुबह से ही सूरज के तेवर तल्ख रहे और दिनभर गर्म हवाओं की वजह से लोग गर्मी को लेकर परेशान रहे। घरों से बाहर निकले लोगों ने सूरज की तपिश से बचने के लिए पेय पदार्थों से लेकर छाव का सहारा लिया। शाम पांच बजे तक भी चिलचिलाती धूप की चुभन महसूस की गई। बीते चौबीस घंटाटे में हवा में नमी का स्तर चौदह से सरसठ फीसदी रहा। पश्चिम उत्तर प्रदेश में अभी से आसमान से आग बरसनी शुरु हो गई है। दिन का पारा चढ़ने के साथ-साथ लू के थपेड़ों ने लोगों को घरों से निकलना मुश्किल कर दिया है। गर्मी के तेवर तल्ख होने से सीजन में पहली बार दिन का तापमान चालीस. दो डिग्री रिकॉर्ड किया गया है, जो इस सीजन में सबसे अधिक है। अप्रैल के प्रथम सप्ताह में ही तापमान रिकॉर्ड तोड़ रहा है और गर्मी में शहरवासी हलकान हो रहे है। मौसम वेधशाला पर दिन का अधिकतम तापमान चालीस. दो डिग्री व न्यूनतम तापमान अट्ठारह. शून्य डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। सूरज के तीखे तेवरों के साथ ही अब गर्म हवाओं ने भी अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। सुबह से ही चिलचिलाती धूप शुरू हो जाती है। दो-तीन दिन से अधिकतम तापमान फिर बढ़ने लगा है। शुक्रवार को हरियाणा के हिसार शहर का अधिकतम तापमान तैंतालीस. दो डिग्री सेल्सियस रहा। पिछले ग्यारह सालों में आठ अप्रैल कभी भी इतना अधिक तापमान नहीं रहा। बुधवार को अधिकतम तापमान इकतालीस. शून्य डिग्री दर्ज किया गया था, लेकिन यह गुरुवार को बढ़कर इकतालीस. आठ डिग्री पर आ गया। रात का तापमान सोलह. शून्य डिग्री पर बना हुआ है। हालांकि पिछले छः दिन से अधिकतम तापमान चालीस डिग्री से बयालीस डिग्री के आसपास ही रहा है। केवल तीन अप्रैल को ही बयालीस. दो डिग्री तापमान दर्ज हुआ था। तीखी धूप और लू की वजह से दिन में शहर के पार्कों में सन्नाटा पसरा रहता है। उत्तराखंड में कई इलाकों में जंगलों में लगी आग से वातावरण में बढ़ी गर्मी के कारण बर्फ पिघलने और हिमस्खलन का खतरा बढ़ गया है। इस बीच मौसम विभाग ने नौ तारीख से लेकर बारह तारीख तक पर्वतीय जिलों में तापमान के सामान्य से बहुत अधिक रहने की आशंका जताते हुए रेड अलर्ट जारी किया है। बढ़ते पारे की वजह से फसलों और सब्जियों को भी भारी नुकसान हो सकता है। विभाग ने एडवाइजरी भी जारी की है। मौसम विभाग के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक बिक्रम सिंह ने बताया कि नौ, दस, ग्यारह और बारह अप्रैल को उत्तरकाशी, टिहरी, चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, बागेश्वर, नैनीताल और चंपावत में सामान्य से बहुत ज्यादा तापमान रहने का अनुमान है। इस दौरान इन जिलों में कुछ स्थानों पर वनाग्नि की घटनाएं भी बढ़ सकती हैं। फसलों और सब्जियों पर भी गर्मी असर दिखेगा। वहीं उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिलों में उच्च हिमालयी क्षेत्रों वाले इलाकों में बर्फ पिघलने से हिमस्खलन होने का भी खतरा है। विभाग ने किसानों को तेज धूप से फसल को झुलसने से बचाने के लिए नियमित तौर पर सिंचाई करने के निर्देश दिए हैं। |
जौनपुर। समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष डॉ. अवधनाथ पाल के नेतृत्व के चलते सपा प्रत्याशी उषा श्रवण जायसवाल के समर्थन में निर्दल प्रत्याशी मालती मौर्या ने अपना नांमाकन पत्र वापस ले लिया। वहीं मालती ने कहा कि उषा जायसवाल सपा की प्रत्याशी बनाई गई हैं। हमने भी चुनाव लड़ने के लिए आवेदन किया था लेकिन टिकट हमारी बहन उषा को मिल गया है। मैंने सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश के निर्णय को स्वीकार करते हुए अपना नामांकन वापस लिया है। इसी क्रम में मालती के पति जगदीश प्रसाद मौर्य गप्पू ने कहा कि सपा का हर निर्णय हमारे लिए सर्वमान्य है। पार्टी से बड़ा हमारे लिए कुछ नहीं है। इस बार 20 साल के भ्रष्टाचार से नगर पालिका को मुक्त कराने का काम करेंगे। इस अवसर पर हिसामुद्दीन शाह, राजेन्द्र टाइगर, राहुल त्रिपाठी, श्रवण जायसवाल, जगदीश प्रसाद मौर्या गप्पू, राजेश यादव, जेपी यादव, डॉ. जंग बहादुर यादव, अजय मौर्या, अनिल दूबे, संतोष मौर्या, अमन मौर्या सहित तमाम लोग उपस्थित रहे।
| जौनपुर। समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष डॉ. अवधनाथ पाल के नेतृत्व के चलते सपा प्रत्याशी उषा श्रवण जायसवाल के समर्थन में निर्दल प्रत्याशी मालती मौर्या ने अपना नांमाकन पत्र वापस ले लिया। वहीं मालती ने कहा कि उषा जायसवाल सपा की प्रत्याशी बनाई गई हैं। हमने भी चुनाव लड़ने के लिए आवेदन किया था लेकिन टिकट हमारी बहन उषा को मिल गया है। मैंने सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश के निर्णय को स्वीकार करते हुए अपना नामांकन वापस लिया है। इसी क्रम में मालती के पति जगदीश प्रसाद मौर्य गप्पू ने कहा कि सपा का हर निर्णय हमारे लिए सर्वमान्य है। पार्टी से बड़ा हमारे लिए कुछ नहीं है। इस बार बीस साल के भ्रष्टाचार से नगर पालिका को मुक्त कराने का काम करेंगे। इस अवसर पर हिसामुद्दीन शाह, राजेन्द्र टाइगर, राहुल त्रिपाठी, श्रवण जायसवाल, जगदीश प्रसाद मौर्या गप्पू, राजेश यादव, जेपी यादव, डॉ. जंग बहादुर यादव, अजय मौर्या, अनिल दूबे, संतोष मौर्या, अमन मौर्या सहित तमाम लोग उपस्थित रहे। |
तपेदिक (टीबी) के इस खतरे के खिलाफ एक लड़ाई चल रही है, और अगर कोई राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, मेघालय के प्रबंध निदेशक, रामकुमार एस के अनुसार जाता है, तो COVID-19 महामारी के प्रबंधन से सीखे गए सबक ने राज्य मशीनरी को इसके खिलाफ अपने प्रयासों को तेज करने में सक्षम बनाया है। रोग।
एनएचएम के प्रबंध निदेशक एनएचएम, मेघालय के तहत राज्य टीबी सेल द्वारा आयोजित एक प्रेस मीट में बोल रहे थे, जिसका उद्देश्य राज्य सरकार द्वारा 'टीबी हारेगा देश जीतेगा' पहल के तहत चल रहे तपेदिक उन्मूलन प्रयासों के बारे में अपडेट साझा करना था।
गुरुवार को सभा को संबोधित करते हुए, रामकुमार एस ने कहा, "राज्य की रूपरेखा को देखते हुए, टीबी बीमारियों के कारण होने वाली मौतों के शीर्ष कारणों में से एक है। हाल के समय में, आशा कार्यकर्ताओं के उत्कृष्ट सामुदायिक कार्य और समेकित प्रयासों से, राज्य मलेरिया के खतरे को लगभग समाप्त करने में सफल रहा है। टीबी के लिए भी इसी तरह का प्रयास किया जा रहा है। COVID-19 महामारी के प्रबंधन के सबक ने हमें टीबी के खिलाफ अपने प्रयासों को तेज करने में सक्षम बनाया है। मसलन, अब हर स्वास्थ्य केंद्र में टीबी की जांच और जांच की क्षमता है. अब हम मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से टीबी सूचनाओं को आसान बनाते हुए प्रौद्योगिकी का बेहतर लाभ उठाने में सक्षम हैं। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि फार्मेसियां स्वास्थ्य विशेषज्ञों के उचित नुस्खे के बिना मरीजों को दवाएं जारी नहीं कर रही हैं। "
मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मीडिया को टीबी के बारे में जनता को शिक्षित करने में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए और संदेश को सामुदायिक स्तर पर ले जाना चाहिए।
बैठक में दो महत्वपूर्ण आयामों की खोज की गई - टीबी उन्मूलन की दिशा में मेघालय के प्रयासों की वर्तमान स्थिति, विशेष रूप से महामारी के बाद के माहौल में, और टीबी के खिलाफ एक जन आंदोलन को उत्प्रेरित करने के प्रयास।
इस अवसर पर बोलते हुए, राज्य टीबी अधिकारी डॉ एम मावरी ने सभा को पिछले कुछ महीनों में राज्य भर में लोगों में टीबी के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए शुरू की गई विभिन्न पहलों के बारे में जानकारी दी।
"आधुनिक परीक्षण उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए गहन प्रयास किए गए हैं। महामारी को प्रभावित करने वाली सेवा वितरण और टीबी अधिसूचनाओं के बावजूद, यह सुनिश्चित करने के लिए नवीन शमन रणनीतियों को तैनात किया गया था कि सूचनाएं पूर्व-महामारी के स्तर पर वापस आ जाएं। कार्यक्रम ने मेघालय में 2021 में 4,189 टीबी मामलों को अधिसूचित किया। 2022 की पहली तिमाही में, लगभग 1,075 रोगियों को उपचार के लिए अधिसूचित और नामांकित किया गया है, "डॉ मावरी ने कहा।
टीबी से उत्पन्न गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती का संज्ञान लेते हुए, जो हर साल 26 लाख से अधिक भारतीयों को प्रभावित करता है, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने डब्ल्यूएचओ के सतत विकास लक्ष्यों से पांच साल पहले भारत के टीबी उन्मूलन लक्ष्य को 2025 तक आगे बढ़ाया था।
प्रेस मीट देश के राष्ट्रीय टीबी प्रसार सर्वेक्षण के जारी होने के ठीक तीन महीने बाद आता है, जिसमें संकेत दिया गया था कि लगभग 64 प्रतिशत भारतीयों ने टीबी के लिए पेशेवर देखभाल की तलाश नहीं की थी, यह दर्शाता है कि टीबी कार्यक्रमों के लिए जागरूकता का निर्माण एक महत्वपूर्ण उद्देश्य बना हुआ है। .
जागरूकता पैदा करने और स्वास्थ्य सेवाओं की अंतिम मील डिलीवरी सुनिश्चित करने के प्रयासों पर, डॉ मावरी ने कहा, "पिछले कुछ महीनों में, टीबी कार्यक्रम संभावित टीबी मामलों की जांच करने की कोशिश कर रहा है। टीबी के मामलों के रूप में पहचाने जाने के बाद, उन्हें तुरंत टीबी उपचार के लिए नामांकित किया जा रहा है। टीबी को खत्म करने के लिए चल रही विभिन्न पहलों में फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के सहयोग से एक्टिव केस फाइंडिंग (एसीएफ) शामिल हैं; परीक्षण के लिए पहचाने गए संभावित टीबी व्यक्ति से गुणवत्ता वाले थूक का संग्रह; जनजातीय समुदायों के भीतर विश्वास नेताओं, पारंपरिक चिकित्सकों, आदिवासी युवाओं, आदिवासी नेताओं और सामुदायिक प्रभावकों जैसे विशिष्ट सामुदायिक समूहों के लिए नियमित रूप से विभिन्न प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना।
पूरे मेघालय में, जन आंदोलन या टीबी के खिलाफ लोगों के आंदोलन की भावना आकार ले रही है। यह बीमारी को खत्म करने के लिए राज्य के निरंतर प्रयास का समर्थन करने के लिए जीवन के सभी क्षेत्रों के लोगों को एक साथ ला रहा है।
बैठक में सभी प्रतिभागियों ने अपने गांव, जिले या राज्य से टीबी को खत्म करने का संकल्प लिया।
| तपेदिक के इस खतरे के खिलाफ एक लड़ाई चल रही है, और अगर कोई राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, मेघालय के प्रबंध निदेशक, रामकुमार एस के अनुसार जाता है, तो COVID-उन्नीस महामारी के प्रबंधन से सीखे गए सबक ने राज्य मशीनरी को इसके खिलाफ अपने प्रयासों को तेज करने में सक्षम बनाया है। रोग। एनएचएम के प्रबंध निदेशक एनएचएम, मेघालय के तहत राज्य टीबी सेल द्वारा आयोजित एक प्रेस मीट में बोल रहे थे, जिसका उद्देश्य राज्य सरकार द्वारा 'टीबी हारेगा देश जीतेगा' पहल के तहत चल रहे तपेदिक उन्मूलन प्रयासों के बारे में अपडेट साझा करना था। गुरुवार को सभा को संबोधित करते हुए, रामकुमार एस ने कहा, "राज्य की रूपरेखा को देखते हुए, टीबी बीमारियों के कारण होने वाली मौतों के शीर्ष कारणों में से एक है। हाल के समय में, आशा कार्यकर्ताओं के उत्कृष्ट सामुदायिक कार्य और समेकित प्रयासों से, राज्य मलेरिया के खतरे को लगभग समाप्त करने में सफल रहा है। टीबी के लिए भी इसी तरह का प्रयास किया जा रहा है। COVID-उन्नीस महामारी के प्रबंधन के सबक ने हमें टीबी के खिलाफ अपने प्रयासों को तेज करने में सक्षम बनाया है। मसलन, अब हर स्वास्थ्य केंद्र में टीबी की जांच और जांच की क्षमता है. अब हम मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से टीबी सूचनाओं को आसान बनाते हुए प्रौद्योगिकी का बेहतर लाभ उठाने में सक्षम हैं। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि फार्मेसियां स्वास्थ्य विशेषज्ञों के उचित नुस्खे के बिना मरीजों को दवाएं जारी नहीं कर रही हैं। " मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मीडिया को टीबी के बारे में जनता को शिक्षित करने में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए और संदेश को सामुदायिक स्तर पर ले जाना चाहिए। बैठक में दो महत्वपूर्ण आयामों की खोज की गई - टीबी उन्मूलन की दिशा में मेघालय के प्रयासों की वर्तमान स्थिति, विशेष रूप से महामारी के बाद के माहौल में, और टीबी के खिलाफ एक जन आंदोलन को उत्प्रेरित करने के प्रयास। इस अवसर पर बोलते हुए, राज्य टीबी अधिकारी डॉ एम मावरी ने सभा को पिछले कुछ महीनों में राज्य भर में लोगों में टीबी के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए शुरू की गई विभिन्न पहलों के बारे में जानकारी दी। "आधुनिक परीक्षण उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए गहन प्रयास किए गए हैं। महामारी को प्रभावित करने वाली सेवा वितरण और टीबी अधिसूचनाओं के बावजूद, यह सुनिश्चित करने के लिए नवीन शमन रणनीतियों को तैनात किया गया था कि सूचनाएं पूर्व-महामारी के स्तर पर वापस आ जाएं। कार्यक्रम ने मेघालय में दो हज़ार इक्कीस में चार,एक सौ नवासी टीबी मामलों को अधिसूचित किया। दो हज़ार बाईस की पहली तिमाही में, लगभग एक,पचहत्तर रोगियों को उपचार के लिए अधिसूचित और नामांकित किया गया है, "डॉ मावरी ने कहा। टीबी से उत्पन्न गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती का संज्ञान लेते हुए, जो हर साल छब्बीस लाख से अधिक भारतीयों को प्रभावित करता है, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने डब्ल्यूएचओ के सतत विकास लक्ष्यों से पांच साल पहले भारत के टीबी उन्मूलन लक्ष्य को दो हज़ार पच्चीस तक आगे बढ़ाया था। प्रेस मीट देश के राष्ट्रीय टीबी प्रसार सर्वेक्षण के जारी होने के ठीक तीन महीने बाद आता है, जिसमें संकेत दिया गया था कि लगभग चौंसठ प्रतिशत भारतीयों ने टीबी के लिए पेशेवर देखभाल की तलाश नहीं की थी, यह दर्शाता है कि टीबी कार्यक्रमों के लिए जागरूकता का निर्माण एक महत्वपूर्ण उद्देश्य बना हुआ है। . जागरूकता पैदा करने और स्वास्थ्य सेवाओं की अंतिम मील डिलीवरी सुनिश्चित करने के प्रयासों पर, डॉ मावरी ने कहा, "पिछले कुछ महीनों में, टीबी कार्यक्रम संभावित टीबी मामलों की जांच करने की कोशिश कर रहा है। टीबी के मामलों के रूप में पहचाने जाने के बाद, उन्हें तुरंत टीबी उपचार के लिए नामांकित किया जा रहा है। टीबी को खत्म करने के लिए चल रही विभिन्न पहलों में फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के सहयोग से एक्टिव केस फाइंडिंग शामिल हैं; परीक्षण के लिए पहचाने गए संभावित टीबी व्यक्ति से गुणवत्ता वाले थूक का संग्रह; जनजातीय समुदायों के भीतर विश्वास नेताओं, पारंपरिक चिकित्सकों, आदिवासी युवाओं, आदिवासी नेताओं और सामुदायिक प्रभावकों जैसे विशिष्ट सामुदायिक समूहों के लिए नियमित रूप से विभिन्न प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना। पूरे मेघालय में, जन आंदोलन या टीबी के खिलाफ लोगों के आंदोलन की भावना आकार ले रही है। यह बीमारी को खत्म करने के लिए राज्य के निरंतर प्रयास का समर्थन करने के लिए जीवन के सभी क्षेत्रों के लोगों को एक साथ ला रहा है। बैठक में सभी प्रतिभागियों ने अपने गांव, जिले या राज्य से टीबी को खत्म करने का संकल्प लिया। |
इंदौर. शहर के एक कलाकार ने ऑयल पेंटिंग के जरीए अनोखा गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम किया है. अनमोल माथुर नामक कलाकार ने दुनिया के पहले फ्लुइड डिजिटल आर्टिस्ट का दर्जा हासिल किया है. हालांकि ये उनकी उपलब्धियों में तीसरा बड़ा रिकॉर्ड है और उन्होंने इस तरह के कई रिकॉर्ड्स अपने नाम किए है.
पढ़ाई की उम्र में रंग और ब्रश को थामकर चलना बहुत लोग करते थे, लेकिन बचपन से ही पेंटिंग में काम करना एक चुनौती बन गया. अनमोल माथुर वो नाम है जो कला को अलग-अलग तरीके से उकेरना जानते हैं और उस पर काम भी करते हैं. उन्हें हाल में यूटा अमेरिका में 1 मिलियन ग्रेवस्टोन फोटो का खिताब मिला है और ये उनकी उपलब्धियों में तीसरा बड़ा रिकॉर्ड है. ये सभी भारतीय लोगों के लिए भी बहुत गर्व का क्षण है, क्योंकि वह इनमें से एक हिस्सा बनने वाले एकमात्र भारतीय हैं.
अनमोल को हाल ही में दुनिया के पहले फ्लुइड डिजिटल आर्टिस्ट का दर्जा प्राप्त हुआ है. उनकी बचपन से चित्रकारी के प्रति लगन के कारण ही आज यह मुकाम हासिल हुआ है. 12 साल की उम्र से पेंटिंग कर रहे अनमोल को शुरुआत से ही कला का शौक था मगर जब पिता की मृत्यु हुई और वित्तीय समस्याएं आई तो कला उनके लिए जिंदगी बन गई. कई बार पढ़ाई छूटी, लेकिन कला ने हमेशा हौसला बनाए रखा.
रेडिसन होटल से पेंटिंग की प्रदर्शनी में शुरुआत करने से पहले अनमोल ने स्कैच से कागज पर पेंटिंग की फिर कॉमिक बुक से इंस्पायर होकर काम करना शुरू किया. एब्सट्रैक्ट और कलर के साथ अलग-अलग चीजों का इस्तेमाल करके पेंटिंग में आए. चीजों को अलग तरीके से देखना और उसमें कला को खोजना एक अच्छे कलाकार की निशानी होती हैं और कुछ ऐसा ही कर दिखाया अनमोल माथुर ने.
अनमोल को ऑयल पेंटिंग के जरीए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड भी मिल चुका है. इसके साथ ही तरल डिजिटल कला में दुनिया के पहले कलाकार भी हैं. अपनी कला से बहुत से देश को भारतीय संस्कृति में दिखाया है. उन्हें इंदौर मेयर द्वारा इंदौर स्मार्ट सिटी पेंटिंग अवॉर्ड और कर्णावती यूनिवर्सिटी एजुकेशन अवॉर्ड जैसे भी कई अवॉर्ड्स मिल चुके है.
अनमोल ने चंडीगढ़ में एल्युमिनियम फॉयल से कला बनाई तो कहीं शैम्पू के साथ पेंटिंग बनाई. उनकी कला को मिस्र में भी पसंद किया और कई देशों में अपनी पेंटिंग से जिंदगी को एक नया रास्ता दिया. वे कहते हैं कि हर फील्ड में नए अवसर ही असली रास्ता है और कला एक तपस्या है जिसे सालों देना पड़ता है. भविष्य में सभी एक रचनात्मक तरीके से काम करें तो मंजिल सबको मिलेगी.
पढ़ाई की उम्र में रंग और ब्रश को थामकर चलना बहुत लोग करते थे, लेकिन बचपन से ही पेंटिंग में काम करना एक चुनौती बन गया. अनमोल माथुर वो नाम है जो कला को अलग-अलग तरीके से उकेरना जानते हैं और उस पर काम भी करते हैं. उन्हें हाल में यूटा अमेरिका में 1 मिलियन ग्रेवस्टोन फोटो का खिताब मिला है और ये उनकी उपलब्धियों में तीसरा बड़ा रिकॉर्ड है. ये सभी भारतीय लोगों के लिए भी बहुत गर्व का क्षण है, क्योंकि वह इनमें से एक हिस्सा बनने वाले एकमात्र भारतीय हैं.
| इंदौर. शहर के एक कलाकार ने ऑयल पेंटिंग के जरीए अनोखा गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम किया है. अनमोल माथुर नामक कलाकार ने दुनिया के पहले फ्लुइड डिजिटल आर्टिस्ट का दर्जा हासिल किया है. हालांकि ये उनकी उपलब्धियों में तीसरा बड़ा रिकॉर्ड है और उन्होंने इस तरह के कई रिकॉर्ड्स अपने नाम किए है. पढ़ाई की उम्र में रंग और ब्रश को थामकर चलना बहुत लोग करते थे, लेकिन बचपन से ही पेंटिंग में काम करना एक चुनौती बन गया. अनमोल माथुर वो नाम है जो कला को अलग-अलग तरीके से उकेरना जानते हैं और उस पर काम भी करते हैं. उन्हें हाल में यूटा अमेरिका में एक मिलियन ग्रेवस्टोन फोटो का खिताब मिला है और ये उनकी उपलब्धियों में तीसरा बड़ा रिकॉर्ड है. ये सभी भारतीय लोगों के लिए भी बहुत गर्व का क्षण है, क्योंकि वह इनमें से एक हिस्सा बनने वाले एकमात्र भारतीय हैं. अनमोल को हाल ही में दुनिया के पहले फ्लुइड डिजिटल आर्टिस्ट का दर्जा प्राप्त हुआ है. उनकी बचपन से चित्रकारी के प्रति लगन के कारण ही आज यह मुकाम हासिल हुआ है. बारह साल की उम्र से पेंटिंग कर रहे अनमोल को शुरुआत से ही कला का शौक था मगर जब पिता की मृत्यु हुई और वित्तीय समस्याएं आई तो कला उनके लिए जिंदगी बन गई. कई बार पढ़ाई छूटी, लेकिन कला ने हमेशा हौसला बनाए रखा. रेडिसन होटल से पेंटिंग की प्रदर्शनी में शुरुआत करने से पहले अनमोल ने स्कैच से कागज पर पेंटिंग की फिर कॉमिक बुक से इंस्पायर होकर काम करना शुरू किया. एब्सट्रैक्ट और कलर के साथ अलग-अलग चीजों का इस्तेमाल करके पेंटिंग में आए. चीजों को अलग तरीके से देखना और उसमें कला को खोजना एक अच्छे कलाकार की निशानी होती हैं और कुछ ऐसा ही कर दिखाया अनमोल माथुर ने. अनमोल को ऑयल पेंटिंग के जरीए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड भी मिल चुका है. इसके साथ ही तरल डिजिटल कला में दुनिया के पहले कलाकार भी हैं. अपनी कला से बहुत से देश को भारतीय संस्कृति में दिखाया है. उन्हें इंदौर मेयर द्वारा इंदौर स्मार्ट सिटी पेंटिंग अवॉर्ड और कर्णावती यूनिवर्सिटी एजुकेशन अवॉर्ड जैसे भी कई अवॉर्ड्स मिल चुके है. अनमोल ने चंडीगढ़ में एल्युमिनियम फॉयल से कला बनाई तो कहीं शैम्पू के साथ पेंटिंग बनाई. उनकी कला को मिस्र में भी पसंद किया और कई देशों में अपनी पेंटिंग से जिंदगी को एक नया रास्ता दिया. वे कहते हैं कि हर फील्ड में नए अवसर ही असली रास्ता है और कला एक तपस्या है जिसे सालों देना पड़ता है. भविष्य में सभी एक रचनात्मक तरीके से काम करें तो मंजिल सबको मिलेगी. पढ़ाई की उम्र में रंग और ब्रश को थामकर चलना बहुत लोग करते थे, लेकिन बचपन से ही पेंटिंग में काम करना एक चुनौती बन गया. अनमोल माथुर वो नाम है जो कला को अलग-अलग तरीके से उकेरना जानते हैं और उस पर काम भी करते हैं. उन्हें हाल में यूटा अमेरिका में एक मिलियन ग्रेवस्टोन फोटो का खिताब मिला है और ये उनकी उपलब्धियों में तीसरा बड़ा रिकॉर्ड है. ये सभी भारतीय लोगों के लिए भी बहुत गर्व का क्षण है, क्योंकि वह इनमें से एक हिस्सा बनने वाले एकमात्र भारतीय हैं. |
हाल ही में शराब निर्माता कंपनियों ने वैश्विक बाज़ारों से एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल (Extra Neutral Alchohol- ENA) के आयात करने और इसे लागत-प्रभावी बनाने के लिये नीति आयोग से आयात शुल्क में कमी करने की मांग की है।
- एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल मादक पेय बनाने हेतु प्राथमिक कच्चा माल है।
- यह खाद्य-श्रेणी का एक रंगहीन अल्कोहल है जिसमें कोई अशुद्धि नहीं होती है।
- यह गंधहीन और स्वादहीन होता है तथा आमतौर पर इसमें 95% से अधिक अल्कोहल की मात्रा होती है।
इसके स्रोतः
- इसे विभिन्न स्रोतों जैसे- शीरा और अनाज से प्राप्त किया जाता है।
- अल्कोहल युक्त मादक पेय पदार्थों के उत्पादन में इसका उपयोग किया जाता है।
- इसके अलावा एक अच्छा विलायक होने के कारण इसका उपयोग सौंदर्य प्रसाधन और व्यक्तिगत देखभाल के उत्पादों जैसे- इत्र, हेयर स्प्रे तथा साथ-ही-साथ फार्मास्यूटिकल उत्पादों जैसे- एंटीसेप्टिक्स, ड्रग्स, सिरप, मेडिकेटेड स्प्रे आदि के निर्माण में एक आवश्यक घटक के रूप में किया जाता है।
- भारत में ENA बाजार वर्ष 2018 में 2.9 बिलियन लीटर की मात्रा में था।
स्वस्थ मृदा के महत्व पर ध्यान केंद्रित करने और मृदा संसाधनों के स्थायी प्रबंधन हेतु जागरूकता फैलाने के लिये प्रतिवर्ष 5 दिसंबर को विश्व मृदा दिवस (World Soil Day) मनाया जाता है।
- वर्ष 2019 के लिये इसकी थीम - 'मृदा का कटाव बंद करो, हमारे भविष्य को बचाओ' (Stop Soil Erosion, Save Our Future) है।
- संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (Food and Agriculture Organization- FAO) ने जून 2013 में विश्व मृदा दिवस का समर्थन किया था।
- संयुक्त राष्ट्र महासभा के 68वें सम्मलेन में इसे आधिकारिक रूप से स्वीकार किया गया तथा दिसंबर 2013 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 5 दिसंबर को विश्व मृदा दिवस घोषित किया तथा 5 दिसंबर, 2014 को पहला आधिकारिक विश्व मृदा दिवस मनाया गया।
मुंबई सेंट्रल रेलवे स्टेशन को भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (Food Safety and Standards Authority of India- FSSAI) द्वारा देश के पहले 'ईट राइट स्टेशन' (Eat Right Station) के रुप में प्रमाणित किया गया है।
- 'ईट राइट स्टेशन' अभियान FSSAI द्वारा वर्ष 2018 में चलाए गए 'ईट राइट इंडिया' अभियान का एक हिस्सा है।
- 'ईट राइट इंडिया' दो स्तंभों 'स्वस्थ खाओ और सुरक्षित खाओ' पर आधारित है।
- 'ईट राइट स्टेशन' अभियान का उद्देश्य स्वस्थ आहार मुहैया कराते हुए लोगों का अच्छा स्वास्थ्य सुनिश्चित करना है।
चयन का आधारः
- इस स्टेशन का चयन खाद्य सुरक्षा एवं स्वच्छता के अनुपालन, स्वस्थ आहार की उपलब्धता, ढुलाई एवं खुदरा बिक्री केंद्रों पर खाद्य पदार्थों की बेहतर निगरानी, खाद्य अपशिष्ट के प्रबंधन, स्थानीय एवं सीज़नल खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने और खाद्य सुरक्षा तथा स्वस्थ आहार के बारे में जागरूकता बढ़ाने के आधार पर किया गया है।
- FSSAI केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) के तहत कार्यरत एक स्वायत्त एवं सांविधिक निकाय है।
- केंद्र सरकार ने खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण का गठन किया।
- FSSAI मानव उपभोग के लिये पौष्टिक खाद्य पदार्थों के उत्पादन, भंडारण, वितरण, बिक्री और आयात की सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित करने का काम करता है।
| हाल ही में शराब निर्माता कंपनियों ने वैश्विक बाज़ारों से एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल के आयात करने और इसे लागत-प्रभावी बनाने के लिये नीति आयोग से आयात शुल्क में कमी करने की मांग की है। - एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल मादक पेय बनाने हेतु प्राथमिक कच्चा माल है। - यह खाद्य-श्रेणी का एक रंगहीन अल्कोहल है जिसमें कोई अशुद्धि नहीं होती है। - यह गंधहीन और स्वादहीन होता है तथा आमतौर पर इसमें पचानवे% से अधिक अल्कोहल की मात्रा होती है। इसके स्रोतः - इसे विभिन्न स्रोतों जैसे- शीरा और अनाज से प्राप्त किया जाता है। - अल्कोहल युक्त मादक पेय पदार्थों के उत्पादन में इसका उपयोग किया जाता है। - इसके अलावा एक अच्छा विलायक होने के कारण इसका उपयोग सौंदर्य प्रसाधन और व्यक्तिगत देखभाल के उत्पादों जैसे- इत्र, हेयर स्प्रे तथा साथ-ही-साथ फार्मास्यूटिकल उत्पादों जैसे- एंटीसेप्टिक्स, ड्रग्स, सिरप, मेडिकेटेड स्प्रे आदि के निर्माण में एक आवश्यक घटक के रूप में किया जाता है। - भारत में ENA बाजार वर्ष दो हज़ार अट्ठारह में दो.नौ बिलियन लीटर की मात्रा में था। स्वस्थ मृदा के महत्व पर ध्यान केंद्रित करने और मृदा संसाधनों के स्थायी प्रबंधन हेतु जागरूकता फैलाने के लिये प्रतिवर्ष पाँच दिसंबर को विश्व मृदा दिवस मनाया जाता है। - वर्ष दो हज़ार उन्नीस के लिये इसकी थीम - 'मृदा का कटाव बंद करो, हमारे भविष्य को बचाओ' है। - संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन ने जून दो हज़ार तेरह में विश्व मृदा दिवस का समर्थन किया था। - संयुक्त राष्ट्र महासभा के अड़सठवें सम्मलेन में इसे आधिकारिक रूप से स्वीकार किया गया तथा दिसंबर दो हज़ार तेरह में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने पाँच दिसंबर को विश्व मृदा दिवस घोषित किया तथा पाँच दिसंबर, दो हज़ार चौदह को पहला आधिकारिक विश्व मृदा दिवस मनाया गया। मुंबई सेंट्रल रेलवे स्टेशन को भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण द्वारा देश के पहले 'ईट राइट स्टेशन' के रुप में प्रमाणित किया गया है। - 'ईट राइट स्टेशन' अभियान FSSAI द्वारा वर्ष दो हज़ार अट्ठारह में चलाए गए 'ईट राइट इंडिया' अभियान का एक हिस्सा है। - 'ईट राइट इंडिया' दो स्तंभों 'स्वस्थ खाओ और सुरक्षित खाओ' पर आधारित है। - 'ईट राइट स्टेशन' अभियान का उद्देश्य स्वस्थ आहार मुहैया कराते हुए लोगों का अच्छा स्वास्थ्य सुनिश्चित करना है। चयन का आधारः - इस स्टेशन का चयन खाद्य सुरक्षा एवं स्वच्छता के अनुपालन, स्वस्थ आहार की उपलब्धता, ढुलाई एवं खुदरा बिक्री केंद्रों पर खाद्य पदार्थों की बेहतर निगरानी, खाद्य अपशिष्ट के प्रबंधन, स्थानीय एवं सीज़नल खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने और खाद्य सुरक्षा तथा स्वस्थ आहार के बारे में जागरूकता बढ़ाने के आधार पर किया गया है। - FSSAI केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत कार्यरत एक स्वायत्त एवं सांविधिक निकाय है। - केंद्र सरकार ने खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, दो हज़ार छः के तहत भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण का गठन किया। - FSSAI मानव उपभोग के लिये पौष्टिक खाद्य पदार्थों के उत्पादन, भंडारण, वितरण, बिक्री और आयात की सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित करने का काम करता है। |
Patna:मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को चुनावी साल की बड़ी सौगात दी। उन्होंने 15000 करोड़ रुपए की योजनाओं का तोहफा दिया। उन्होंने 747 पुलों और 59 हजार किलोमीटर लंबी सड़कों का उद्घाटन व शिलान्यास किया। नीतीश ने कहा- 2005 से पहले बिहार में ग्रामीण सड़कों की क्या स्थिति थी। गांव में न के बराबर सड़क थी। 2006 तक सिर्फ 835 किलोमीटर सड़क बना था। आज कुछ लोग जो मन में आता है बोलते रहते हैं।
नीतीश ने कहा कि हमारा लक्ष्य सभी गांव और टोला को पक्की सड़क से जोड़ना है। सात निश्चय योजना के तहत टोलों को भी सड़क से जोड़ा जा रहा है। इसके लिए राज्य सरकार को कई जगह से कर्ज लेना पड़ा।
182 अधूरी परियोजनाओं को समय से पूरा करने के संबंध में नीतीश ने ग्रामीण कार्य विभाग के सचिव से कहा कि सेक्रेटरी साहेब सुनिए काम अक्टूबर तक पूरा हो जाएगा न जी। मंत्री ने जवाब देने की कोशिश की तो नीतीश ने रोक दिया। उन्होंने कहा कि मंत्री जी आपको समय कहां मिलेगा। सितंबर में चुनाव की घोषणा हो जाएगी। काम तो सेक्रेटरी और इंजीनियर को पूरा करना है।
मुख्यमंत्री ने विभाग के सचिव और इंजीनियरों से कहा कि आप लोग आज जिन योजनाओं का शिलान्यास करा रहे हैं उन्हें समय पर पूरा कीजिएगा। नीतीश ने कहा कि सड़क बनाने के साथ ही उसका मेंटेनेंस भी जरूरी है। नई सड़क बनती है तो लोगों को अच्छा लगता है, लेकिन तीन-चार साल में वह टूट जाती है तो दुख होता है। जो विभाग सड़क बना रहा है उसके मेंटेनेंस की जिम्मेदारी भी उसी की है।
| Patna:मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को चुनावी साल की बड़ी सौगात दी। उन्होंने पंद्रह हज़ार करोड़ रुपए की योजनाओं का तोहफा दिया। उन्होंने सात सौ सैंतालीस पुलों और उनसठ हजार किलोमीटर लंबी सड़कों का उद्घाटन व शिलान्यास किया। नीतीश ने कहा- दो हज़ार पाँच से पहले बिहार में ग्रामीण सड़कों की क्या स्थिति थी। गांव में न के बराबर सड़क थी। दो हज़ार छः तक सिर्फ आठ सौ पैंतीस किलोग्राममीटर सड़क बना था। आज कुछ लोग जो मन में आता है बोलते रहते हैं। नीतीश ने कहा कि हमारा लक्ष्य सभी गांव और टोला को पक्की सड़क से जोड़ना है। सात निश्चय योजना के तहत टोलों को भी सड़क से जोड़ा जा रहा है। इसके लिए राज्य सरकार को कई जगह से कर्ज लेना पड़ा। एक सौ बयासी अधूरी परियोजनाओं को समय से पूरा करने के संबंध में नीतीश ने ग्रामीण कार्य विभाग के सचिव से कहा कि सेक्रेटरी साहेब सुनिए काम अक्टूबर तक पूरा हो जाएगा न जी। मंत्री ने जवाब देने की कोशिश की तो नीतीश ने रोक दिया। उन्होंने कहा कि मंत्री जी आपको समय कहां मिलेगा। सितंबर में चुनाव की घोषणा हो जाएगी। काम तो सेक्रेटरी और इंजीनियर को पूरा करना है। मुख्यमंत्री ने विभाग के सचिव और इंजीनियरों से कहा कि आप लोग आज जिन योजनाओं का शिलान्यास करा रहे हैं उन्हें समय पर पूरा कीजिएगा। नीतीश ने कहा कि सड़क बनाने के साथ ही उसका मेंटेनेंस भी जरूरी है। नई सड़क बनती है तो लोगों को अच्छा लगता है, लेकिन तीन-चार साल में वह टूट जाती है तो दुख होता है। जो विभाग सड़क बना रहा है उसके मेंटेनेंस की जिम्मेदारी भी उसी की है। |
दोनों दलों के मतभेद का एक अन्य महत्त्वपूर्ण विषय था लार्ड सभा के सुधार का के सुधार प्रश्न । लाई सभा अधिकांश में अनुदार मनोवृत्ति की थी और उदार दल प्रस्तावों का विरोध किया करती थी। इस कारण उदार दल वाले उसके अधिकारों को इतना कम कर देना चाहते थे किं वह कामन्स सभा द्वारा पारित विधेयकों की हत्या न कर सके, पर अनुदार दल लार्ड सभा के अधिकारों के ह्रास का विरोधी था । समयसमय पर पारस्परिक मतभेद के अन्य प्रश्न भी उठ खड़े होते थे, पर ऊपर लिखे तीनचार विषयों में दोनों दलों में काफी लम्बा संघर्ष रहा । परन्तु १६२२ ई० तक व्यापारिक नीति के प्रश्न को छोड़कर अन्य सब हल हो गये। मताधिकार लगभग सभी वयस्क नागरिकों को मिल गया । लार्ड सभा का आवश्यक सुधार ९६१९ ई० में हो गया को १६२२ ई० में स्वराज्य दे दिया गया ।
इस प्रकार यद्यपि उदार और अनुदार दलों में विस्तार की और सामयिक बातों को लेकर मतभेद रहा करता था, परन्तु देश के आर्थिक और राजनैतिक ढाँचे के विषय में दोनों में मतैक्य था। दोनों ही दल व्यक्तिगत सम्पत्ति, पूँजीवादी व्यवस्था, और संविधान की मौलिक, बातों पर सहमत थे। दोनों की कार्यप्रणाली भी एक ही थी, अर्थात् वैधानिक रीति से संविधान के अन्तर्गत ही कार्य करना । दोनों ही दलों का नेतृत्व उच्च वर्गीय लोगों ( Aristocratic classes ) के हाथ में था । इस काल की राजनीति वास्तव में एक फुटबाल के खेल की तरह थी । खिलाड़ियों के दोनों पक्ष एक दूसरे को हराने का प्रयत्न करते थे, पर खेल के नियम दोनों ही को समान रूप से मान्य थे और आपस में शत्रुता या मनोमालिन्य न होकर सौहार्द्रपूर्ण माव रहता था। प्रोफेसर लास्की ने लिखा है कि "१६८६ से राज्य की बागडोर वास्तव में एक ही दल के हाथ में रही है । निःसन्देह यह दल दो पक्षों में विभक्त रहा है। उनमें परिवर्तन की गति और दिशा के सम्बन्ध में पारस्परिक मतभेद रहा है, पर परिवर्तन सम्बन्धी मौलिक सिद्धान्तों के विषय में उनमें कभी कोई महत्त्वपूर्ण मतमेद न था । " १
मजदूर दल का उदय और स्थिति परिवर्तन - पर बीसवीं शताब्दी प्रारम्भ में ब्रिटेन में एक नये दल का प्रादुर्भाव हुआ जिसके कारण ऊपर वर्णित स्थिति बड़ा परिवर्तन हो गया। यह दल था मजदूर दल । यह दुल एक नई विचारधार और एपदे हैष्टिकोण को लेकर आगे बढ़ा अर्थात् समाजवादी । समाजवादी नी के कार्यान्वित होने के लिए देश के आर्थिक और सामाजिक ढाँचे में आमूल परिवर्तः
की आवश्यकता होती । अतः इस नये दल और पहले दलों में मौलिक संघ
उत्पन्न हुआ जिनमें पारस्परिक समझौते के लिए कोई स्थान न था ।
* Laski, Parliamentary Government in England, p. | दोनों दलों के मतभेद का एक अन्य महत्त्वपूर्ण विषय था लार्ड सभा के सुधार का के सुधार प्रश्न । लाई सभा अधिकांश में अनुदार मनोवृत्ति की थी और उदार दल प्रस्तावों का विरोध किया करती थी। इस कारण उदार दल वाले उसके अधिकारों को इतना कम कर देना चाहते थे किं वह कामन्स सभा द्वारा पारित विधेयकों की हत्या न कर सके, पर अनुदार दल लार्ड सभा के अधिकारों के ह्रास का विरोधी था । समयसमय पर पारस्परिक मतभेद के अन्य प्रश्न भी उठ खड़े होते थे, पर ऊपर लिखे तीनचार विषयों में दोनों दलों में काफी लम्बा संघर्ष रहा । परन्तु एक हज़ार छः सौ बाईस ईशून्य तक व्यापारिक नीति के प्रश्न को छोड़कर अन्य सब हल हो गये। मताधिकार लगभग सभी वयस्क नागरिकों को मिल गया । लार्ड सभा का आवश्यक सुधार नौ हज़ार छः सौ उन्नीस ईशून्य में हो गया को एक हज़ार छः सौ बाईस ईशून्य में स्वराज्य दे दिया गया । इस प्रकार यद्यपि उदार और अनुदार दलों में विस्तार की और सामयिक बातों को लेकर मतभेद रहा करता था, परन्तु देश के आर्थिक और राजनैतिक ढाँचे के विषय में दोनों में मतैक्य था। दोनों ही दल व्यक्तिगत सम्पत्ति, पूँजीवादी व्यवस्था, और संविधान की मौलिक, बातों पर सहमत थे। दोनों की कार्यप्रणाली भी एक ही थी, अर्थात् वैधानिक रीति से संविधान के अन्तर्गत ही कार्य करना । दोनों ही दलों का नेतृत्व उच्च वर्गीय लोगों के हाथ में था । इस काल की राजनीति वास्तव में एक फुटबाल के खेल की तरह थी । खिलाड़ियों के दोनों पक्ष एक दूसरे को हराने का प्रयत्न करते थे, पर खेल के नियम दोनों ही को समान रूप से मान्य थे और आपस में शत्रुता या मनोमालिन्य न होकर सौहार्द्रपूर्ण माव रहता था। प्रोफेसर लास्की ने लिखा है कि "एक हज़ार छः सौ छियासी से राज्य की बागडोर वास्तव में एक ही दल के हाथ में रही है । निःसन्देह यह दल दो पक्षों में विभक्त रहा है। उनमें परिवर्तन की गति और दिशा के सम्बन्ध में पारस्परिक मतभेद रहा है, पर परिवर्तन सम्बन्धी मौलिक सिद्धान्तों के विषय में उनमें कभी कोई महत्त्वपूर्ण मतमेद न था । " एक मजदूर दल का उदय और स्थिति परिवर्तन - पर बीसवीं शताब्दी प्रारम्भ में ब्रिटेन में एक नये दल का प्रादुर्भाव हुआ जिसके कारण ऊपर वर्णित स्थिति बड़ा परिवर्तन हो गया। यह दल था मजदूर दल । यह दुल एक नई विचारधार और एपदे हैष्टिकोण को लेकर आगे बढ़ा अर्थात् समाजवादी । समाजवादी नी के कार्यान्वित होने के लिए देश के आर्थिक और सामाजिक ढाँचे में आमूल परिवर्तः की आवश्यकता होती । अतः इस नये दल और पहले दलों में मौलिक संघ उत्पन्न हुआ जिनमें पारस्परिक समझौते के लिए कोई स्थान न था । * Laski, Parliamentary Government in England, p. |
कालान्यापपिष्ट व व्यापकानुपलम्भ होनेसे कार्यत्व हेतुकी बुद्धिम निमित्तिकता साध्यकी सिद्धिने प्रशक्तता बताते हुए उक्त शोका समाधान -- श्रब उक्त शकाओं के समाधान में ग्रन्थकार कहते हैं कि कोई कर्मभूभृत का भेदनहार नहीं है पोर ईश्वर कर्मसे सदा मछूता है भोर यह जगत उस बुद्धिमानके द्वारा बनाया गया है। ये सब बातें मजसकी हैं, क्योंकि शाकारके इस पक्षमे कि शरीर इद्रिय आदिक बुद्धिम निमित्तक होते हैं, इस पक्षमें व्यापकानुपलम्भसे बाघित होता है और जब उनका कार्यत्वहेतु प्रमाणवाधित हो गया तो प्रमाणु बाघित हेतुको अपना अभिमत सिद्ध करनेके लिए पेश करना कालात्ययापदिष्ट दोषसे दूषित कहलाता है। व्यापारम्भका क्या अर्थ है ? सो सुनो । व्यापकका अनुपलम्भ हो याने ऐसा मन्त्रय व्यतिरक नहीं बनता कि जब जब ईश्वर है तव तब शरीर मादिक बनते हैं, जब ऐमा नहीं है तव शरीर आादिक नहीं बनते या शरीर आदिक नही बन रहे उस समय ईश्वर नहीं है, इसलिए कोई अन्वय व्यतिरेक सम्बन्ध नहीं सिद्ध होता है । शरीर श्रादिक बुद्धिमनिमित्तक नही है क्योकि उस बुद्धिमान से शरीर आदिकका मन्वय व्यतिरेक सम्बन्ध नहीं पाया जाता । जहाँ जिसके अन्य व्यतिरेकका प्रभाव है यहाँ उस एक प्रभुका कार्य न कहलायगा। जैसे घडा, खपरियाँ, सकोरा आदिक कार्यो मे जो कि जुलाहा आदिकके साथ अन्वय व्यतिरेक सम्बन्ध नहीं है, तो यह कहा जा सकता है कि ये घट सकोरा श्रादिक कार्य जुलाहा श्रादिक के निमित्त से नहीं होते। सारांश यह है कि जुलाहाके होनेपर घडा बन जाय प्रोर जुलाहाके न होनेपर घड़ा न बने ऐमा सम्बन्ध तो नहीं देखा गया । तब यह कह सकता कि घडा कार्य जुलाहाके निमित्त से नहीं होता, ऐसे ही प्रकृतमे भी घटा लीजिए । एक बुद्धिमान ईदवरके सांथे मन्वय व्यतिरेक सम्बन्ध नहीं पाया जाता है शरीर इद्रिय श्रादिकमे। इस कारण ये सब शरीरादिक लोग बुद्धिमान निमित्तक नहीं है इस तरह व्यापानुपलम्भ नहीं पाया जा रहा है। यदि शरीर वगैरह ईश्वर द्वारा किए गए होते तो उसके साथ भन्वय व्यतिरेक पाया जाना चाहिए। जो भी शरीरादिकका कारण होगा उसके साथ इसका ग्रन्वय व्यतिरेकं पाया जाता है। जैसे घट सकोरां प्रादिकके साथ कुम्हारका मन्वय तिरेक पाया जाता है, तब कह सकते हैं कि परमाणु आदिक कुम्हारके कारणसे बने हुए हैं। कुम्हारने बनाया कुम्हारकी चेष्टा हुई वहाँ घडा बन गया। जहां कुम्हारकी चेष्टा नहीं है वहाँ घडा नहीं बनता। तो कार्यका जिसके साथ प्रन्वय व्यतिरेक सम्बध हो वही कारण कहा जा सकता है। पर एक महेश्वरका शरीर इन्द्रिय धादिके साथ कार्य कारण सम्बन्ध नहीं हैं व्यापकानुग्लम्भमें कोई बाधक प्रमाण नहीं मिलता । व्यापकानुपलम्भ नामक हेतु प्रसिद्ध भी नहीं है, क्योकि शरीर आदिकका ईश्वरके साथ व्यतिरेकका न पाया जाना प्रवाण सिद्ध हो रहा है । वह कैसे ? सो सुनो ! व्यतिरेक दो प्रकार के होते है काल व्यतिरेक मोर देश व्यतिरेक । काल व्यतिरेकका तो भाव यह है ऐसा कोई कह सकता हो कि जब ईश्वर है, जब शरीर मादिक बन रहे हैं नोर
जिस समय ईपवरका प्रभाव है उस समय शरीर माटिक नहीं बन रहे तब तो कहे सकते थे कि इसका कि पाया जा रहा पर ऐसी बात है तो नहीं । ईश्वर को सनातन शाश्वत वर्तमान माना गया है। उसका कभी भी प्रभाव नहीं हो सकता । यहाँ पासव्यतिरेक सम्भय नही है। दूसरा व्यतिरेक है देश हरेक देश भाव यह है कि कोई यदि ऐसा महसके फिजिम जगह ईश्वर है उम जगह शरीर मादिक बन जाता है और जिस जगह ईश्वर नहीं है वहाँ मेराटिक नहीं बन पाते हैं। ऐसा देवा व्यतिरे भी सम्भव नहीं है, क्योंकि ईदवर तो विभु है, सयंत्र
है। उसका किसी एक क्षेत्र में प्रभाव नहीं कहा जा सकता। इस कारण उनका देश व्यतिरेक भी नहीं कहा जा सकता है । यो व्यतिरेका प्रभाव पाया जाने काय त्व हेतु एक ईदवरकी सृष्टि को सिद्ध करने में समर्थ नहीं है।
कार्यत्व हेतुका सिमृक्षानिमित्तिकता के साथ भी व्यतिरेकानुपलम्म होनेसे प्रनिष्ट प्रसग- यदि यह वह कि घरीर धादिक कार्य कहीं बनना
है, पूछ बनता है, कुछ नहीं बनता है. इसी माघार पर तो व्यतिरेमानुपलब्धि ही जा रही है सो सुनो । महेश्वर सो सामान है सो उसके साथ व्यतिरेकानुपलब्धि है तो बना रहे लेकिन महेश्वरकी सृष्टि करने की इच्दा निमित्त मानी गई है । तो जब ईश्वरकी इच्छा होती है तो कार्य घनता है भोर इच्छा न हो तब वह कार्य म बना, इस तरह सृष्टि करने की इच्छा के साथ अन्वय व्यतिरेक मन जाना है मोर बहो निमित्त कहलाता है । सब हमारा कहे गये मूल अनुमानमे कोई दोष नहीं माता । यदि ऐसा कोई बहे तो उसके समाधान में कहते हैं कि वह बात भी सत्य है । पच्छा वे बतलायें जरा कि ईश्वर को जो इच्छा हुई है उसको इच्छा नित्य है मा मनित्य ? वह विकल्पसे मतिरिक्त मौर कुछ तो कहा नहीं जा सकता। या कहो नित्य है महेश्वरको तरह सदा काल रहता है या कहो मनित्य है । कभी रहता है कभी नहीं रहता है तो इन दो विकल्पोंमेसे यदि यह विमला लेंगे कि महेश्वर की इच्छा नित्य है तो यहाँ भी व्यतिरेक सिद्ध नहीं हो सकता। जैसे ईश्वर सदाकाल , निध्य है, उसके साथ शरीर मादिक कार्योंका पतिरेक नहीं बनता। इसी तरह ईश्वरको इच्छा भी निम्य है सदाकाल है, इस कारण उस इच्छा के साथ ही दारीर मादिकका व्यति रेक नहीं बन सकता, क्योकि अब तो सृष्टिको इच्छा भी सदाकाल रहेगी । यहाँ साकार कहता है कि ईश्वरकी इच्छा यद्यपि नित्य है, लेकिन वह भसवंगत है याने सब जगह व्यापक नहीं रहती। उससे व्यतिरेक सिद्ध हो जाता है। ईदवरको इच्छा सदाकाल सो रही, मगर जिस जगह नहीं है उस जगह कार्य नहीं हो रहे, जिस जगह इच्छा पहुच गई वहाँ कार्य होने लगा। इसके समाधान में कहते हैं कि देखिये । जहाँ ईश्वरको इच्छा है मौजूद है वहाँ व्यतिरेक न बन पायेगा, इतना तो मानना हो पडेगा। मन सोचिये दूसरा पहलू । जहाँ ईश्वरकी इच्छा नहीं है, दूसरे देशमे जहाँ
ईश्वर की सृष्टि करने की इच्छा मौजूद नहीं है वहाँ ईश्वरकी इच्छाका हमेशा प्रभाव बना रहने से फिर शरीरादिक कार्योंकी उत्पत्ति न हो सकेगा औौरु अगर होगी तो
की इच्छाको नित्य मानना पड़ेगा । ईश्वरवादी तो ईश्वर की तरह ईश्वरकी इच्छाको भी सदाकाल ही मानते । तो ईश्वरको इच्छा यदि नित्य है तो उसके साथ भी व्यतिरेक नहीं बन सकता । यदि वह कहे कि ईश्वरकी इच्छा अनित्य है तो प्रनित्य के मायने यह ही तो हुआ कि किसी दिन हुई। तो जिस दिन वह हुई उपसे पहिले तो वह इच्छा थी नहीं । तो यह ही बतायें कि केवल इच्छा कैसे उत्पन्न हो गई ? यदि कहें कि उससे पहिले अन्य इच्छा थी इस इच्छाके कोरगा यह नई इच्छा बन गई । तब तो श्रनवम्था दोष आायता । वह पूर्वकी इच्छा भी और पूर्वकी इच्छाके कारण बनी। वह उसमे पहिलेकी इच्छा से बनी । तो यो दूसरे तीसरे आदिक इच्छा को उत्पन्न करने मे ही महेश्वर लगा रहेगा तव शरीरादिक कार्य कभी उत्पन्न हो ही न सकेंगे ।
विश्वको सिसृक्षानिमित्तिक मान्नेपर भी अनवस्थादि दोषोका प्रसंग यदि शङ्काकार यह कहे कि प्रकृति शरीर प्रादिक कार्यो उत्पत्ति महेश्वर के सृष्टि करने की इच्छा उत्पन्न होती है । और वह इच्छा भी उसके पहिले जो सृष्टिकी इच्छा हुई थी वह होती है। इस तरह मनादिमे सृष्टि करने की इच्छाको सतति बन जाती है। और जर्दा सतति है वहाँ अनवस्था दोष नही होता, ज्योकि सभी घटनाश्रोमे कार्य कारणका जो समान है वह अनादिरूपसे सिद्ध है। जैसे बीज और प्रफुरका अनादि सतान हैं । बीज पहिले अकुरमे हुआ वह प्रकुर पहिले वीजसे हुआ, वह बीज पहिले ' अंकुरसे हुआ, इस तरह अनादि परम्परा बन जाती है । वहाँ अनवस्था दोष नहीं पाता। इस तरह सिसृक्षा याने सृष्टि करने की इच्छा ही पूर्व पूर्व सिवृक्षासे उत्पन्न होती रहती है इसलिए उनमे अनादि ससति सिद्ध है, अनवस्था दोष नहीं प्राता । ऐसा कहने वाले शङ्खाकारके यहाँ यह अनिष्टापत्तिाती है कि फिए तो एक साथ नाना देशोमे शरीरादिक कार्यों का उत्पाद सम्भव न होगा । जहाँ जिस कार्यकी उत्पत्ति के लिए महेश्वरकी सृष्टि करने की इच्छा हुई हो उस ही देश मे उस कार्य की उत्पत्ति बन सकेगी। ऐसा नहीं कहा जा सकता कि जितने देशमे जितने कार्य उत्पन्न होने वाले
उतने ही सिमृक्षाश्रोमे ईश्वर एक साथ उत्पन्न हो जाय और जिससे यह बात सिद्ध की जा सके कि सभी देशोमे कार्य की उत्पत्ति सम्भव हो सकती है। ऐसा क्यो नही कहा जा सकता कि एक साथ अनेक इच्छाओोकी उत्पत्तिका विरोध है। जैसे हम मार सभी लोगोके एक समय मे एक इच्छा उत्पन्न होती है, अभेक हच्छायें तो नहीं होती, कोई यदि यह कहे कि एक ही महेश्वरकी सिसृक्षा एक साथ नाना देशो में कार्य के उत्पन्न करने वाली समर्थ हो जायगी, एक ही सिसृझसे सारे देशकी मिया उत्पन्न हो जायगी तो यह भी बात युक्त नहीं बनती, क्योकि कम से अनेक शरीरादिक फायोकी उत्पति | कालान्यापपिष्ट व व्यापकानुपलम्भ होनेसे कार्यत्व हेतुकी बुद्धिम निमित्तिकता साध्यकी सिद्धिने प्रशक्तता बताते हुए उक्त शोका समाधान -- श्रब उक्त शकाओं के समाधान में ग्रन्थकार कहते हैं कि कोई कर्मभूभृत का भेदनहार नहीं है पोर ईश्वर कर्मसे सदा मछूता है भोर यह जगत उस बुद्धिमानके द्वारा बनाया गया है। ये सब बातें मजसकी हैं, क्योंकि शाकारके इस पक्षमे कि शरीर इद्रिय आदिक बुद्धिम निमित्तक होते हैं, इस पक्षमें व्यापकानुपलम्भसे बाघित होता है और जब उनका कार्यत्वहेतु प्रमाणवाधित हो गया तो प्रमाणु बाघित हेतुको अपना अभिमत सिद्ध करनेके लिए पेश करना कालात्ययापदिष्ट दोषसे दूषित कहलाता है। व्यापारम्भका क्या अर्थ है ? सो सुनो । व्यापकका अनुपलम्भ हो याने ऐसा मन्त्रय व्यतिरक नहीं बनता कि जब जब ईश्वर है तव तब शरीर मादिक बनते हैं, जब ऐमा नहीं है तव शरीर आादिक नहीं बनते या शरीर आदिक नही बन रहे उस समय ईश्वर नहीं है, इसलिए कोई अन्वय व्यतिरेक सम्बन्ध नहीं सिद्ध होता है । शरीर श्रादिक बुद्धिमनिमित्तक नही है क्योकि उस बुद्धिमान से शरीर आदिकका मन्वय व्यतिरेक सम्बन्ध नहीं पाया जाता । जहाँ जिसके अन्य व्यतिरेकका प्रभाव है यहाँ उस एक प्रभुका कार्य न कहलायगा। जैसे घडा, खपरियाँ, सकोरा आदिक कार्यो मे जो कि जुलाहा आदिकके साथ अन्वय व्यतिरेक सम्बन्ध नहीं है, तो यह कहा जा सकता है कि ये घट सकोरा श्रादिक कार्य जुलाहा श्रादिक के निमित्त से नहीं होते। सारांश यह है कि जुलाहाके होनेपर घडा बन जाय प्रोर जुलाहाके न होनेपर घड़ा न बने ऐमा सम्बन्ध तो नहीं देखा गया । तब यह कह सकता कि घडा कार्य जुलाहाके निमित्त से नहीं होता, ऐसे ही प्रकृतमे भी घटा लीजिए । एक बुद्धिमान ईदवरके सांथे मन्वय व्यतिरेक सम्बन्ध नहीं पाया जाता है शरीर इद्रिय श्रादिकमे। इस कारण ये सब शरीरादिक लोग बुद्धिमान निमित्तक नहीं है इस तरह व्यापानुपलम्भ नहीं पाया जा रहा है। यदि शरीर वगैरह ईश्वर द्वारा किए गए होते तो उसके साथ भन्वय व्यतिरेक पाया जाना चाहिए। जो भी शरीरादिकका कारण होगा उसके साथ इसका ग्रन्वय व्यतिरेकं पाया जाता है। जैसे घट सकोरां प्रादिकके साथ कुम्हारका मन्वय तिरेक पाया जाता है, तब कह सकते हैं कि परमाणु आदिक कुम्हारके कारणसे बने हुए हैं। कुम्हारने बनाया कुम्हारकी चेष्टा हुई वहाँ घडा बन गया। जहां कुम्हारकी चेष्टा नहीं है वहाँ घडा नहीं बनता। तो कार्यका जिसके साथ प्रन्वय व्यतिरेक सम्बध हो वही कारण कहा जा सकता है। पर एक महेश्वरका शरीर इन्द्रिय धादिके साथ कार्य कारण सम्बन्ध नहीं हैं व्यापकानुग्लम्भमें कोई बाधक प्रमाण नहीं मिलता । व्यापकानुपलम्भ नामक हेतु प्रसिद्ध भी नहीं है, क्योकि शरीर आदिकका ईश्वरके साथ व्यतिरेकका न पाया जाना प्रवाण सिद्ध हो रहा है । वह कैसे ? सो सुनो ! व्यतिरेक दो प्रकार के होते है काल व्यतिरेक मोर देश व्यतिरेक । काल व्यतिरेकका तो भाव यह है ऐसा कोई कह सकता हो कि जब ईश्वर है, जब शरीर मादिक बन रहे हैं नोर जिस समय ईपवरका प्रभाव है उस समय शरीर माटिक नहीं बन रहे तब तो कहे सकते थे कि इसका कि पाया जा रहा पर ऐसी बात है तो नहीं । ईश्वर को सनातन शाश्वत वर्तमान माना गया है। उसका कभी भी प्रभाव नहीं हो सकता । यहाँ पासव्यतिरेक सम्भय नही है। दूसरा व्यतिरेक है देश हरेक देश भाव यह है कि कोई यदि ऐसा महसके फिजिम जगह ईश्वर है उम जगह शरीर मादिक बन जाता है और जिस जगह ईश्वर नहीं है वहाँ मेराटिक नहीं बन पाते हैं। ऐसा देवा व्यतिरे भी सम्भव नहीं है, क्योंकि ईदवर तो विभु है, सयंत्र है। उसका किसी एक क्षेत्र में प्रभाव नहीं कहा जा सकता। इस कारण उनका देश व्यतिरेक भी नहीं कहा जा सकता है । यो व्यतिरेका प्रभाव पाया जाने काय त्व हेतु एक ईदवरकी सृष्टि को सिद्ध करने में समर्थ नहीं है। कार्यत्व हेतुका सिमृक्षानिमित्तिकता के साथ भी व्यतिरेकानुपलम्म होनेसे प्रनिष्ट प्रसग- यदि यह वह कि घरीर धादिक कार्य कहीं बनना है, पूछ बनता है, कुछ नहीं बनता है. इसी माघार पर तो व्यतिरेमानुपलब्धि ही जा रही है सो सुनो । महेश्वर सो सामान है सो उसके साथ व्यतिरेकानुपलब्धि है तो बना रहे लेकिन महेश्वरकी सृष्टि करने की इच्दा निमित्त मानी गई है । तो जब ईश्वरकी इच्छा होती है तो कार्य घनता है भोर इच्छा न हो तब वह कार्य म बना, इस तरह सृष्टि करने की इच्छा के साथ अन्वय व्यतिरेक मन जाना है मोर बहो निमित्त कहलाता है । सब हमारा कहे गये मूल अनुमानमे कोई दोष नहीं माता । यदि ऐसा कोई बहे तो उसके समाधान में कहते हैं कि वह बात भी सत्य है । पच्छा वे बतलायें जरा कि ईश्वर को जो इच्छा हुई है उसको इच्छा नित्य है मा मनित्य ? वह विकल्पसे मतिरिक्त मौर कुछ तो कहा नहीं जा सकता। या कहो नित्य है महेश्वरको तरह सदा काल रहता है या कहो मनित्य है । कभी रहता है कभी नहीं रहता है तो इन दो विकल्पोंमेसे यदि यह विमला लेंगे कि महेश्वर की इच्छा नित्य है तो यहाँ भी व्यतिरेक सिद्ध नहीं हो सकता। जैसे ईश्वर सदाकाल , निध्य है, उसके साथ शरीर मादिक कार्योंका पतिरेक नहीं बनता। इसी तरह ईश्वरको इच्छा भी निम्य है सदाकाल है, इस कारण उस इच्छा के साथ ही दारीर मादिकका व्यति रेक नहीं बन सकता, क्योकि अब तो सृष्टिको इच्छा भी सदाकाल रहेगी । यहाँ साकार कहता है कि ईश्वरकी इच्छा यद्यपि नित्य है, लेकिन वह भसवंगत है याने सब जगह व्यापक नहीं रहती। उससे व्यतिरेक सिद्ध हो जाता है। ईदवरको इच्छा सदाकाल सो रही, मगर जिस जगह नहीं है उस जगह कार्य नहीं हो रहे, जिस जगह इच्छा पहुच गई वहाँ कार्य होने लगा। इसके समाधान में कहते हैं कि देखिये । जहाँ ईश्वरको इच्छा है मौजूद है वहाँ व्यतिरेक न बन पायेगा, इतना तो मानना हो पडेगा। मन सोचिये दूसरा पहलू । जहाँ ईश्वरकी इच्छा नहीं है, दूसरे देशमे जहाँ ईश्वर की सृष्टि करने की इच्छा मौजूद नहीं है वहाँ ईश्वरकी इच्छाका हमेशा प्रभाव बना रहने से फिर शरीरादिक कार्योंकी उत्पत्ति न हो सकेगा औौरु अगर होगी तो की इच्छाको नित्य मानना पड़ेगा । ईश्वरवादी तो ईश्वर की तरह ईश्वरकी इच्छाको भी सदाकाल ही मानते । तो ईश्वरको इच्छा यदि नित्य है तो उसके साथ भी व्यतिरेक नहीं बन सकता । यदि वह कहे कि ईश्वरकी इच्छा अनित्य है तो प्रनित्य के मायने यह ही तो हुआ कि किसी दिन हुई। तो जिस दिन वह हुई उपसे पहिले तो वह इच्छा थी नहीं । तो यह ही बतायें कि केवल इच्छा कैसे उत्पन्न हो गई ? यदि कहें कि उससे पहिले अन्य इच्छा थी इस इच्छाके कोरगा यह नई इच्छा बन गई । तब तो श्रनवम्था दोष आायता । वह पूर्वकी इच्छा भी और पूर्वकी इच्छाके कारण बनी। वह उसमे पहिलेकी इच्छा से बनी । तो यो दूसरे तीसरे आदिक इच्छा को उत्पन्न करने मे ही महेश्वर लगा रहेगा तव शरीरादिक कार्य कभी उत्पन्न हो ही न सकेंगे । विश्वको सिसृक्षानिमित्तिक मान्नेपर भी अनवस्थादि दोषोका प्रसंग यदि शङ्काकार यह कहे कि प्रकृति शरीर प्रादिक कार्यो उत्पत्ति महेश्वर के सृष्टि करने की इच्छा उत्पन्न होती है । और वह इच्छा भी उसके पहिले जो सृष्टिकी इच्छा हुई थी वह होती है। इस तरह मनादिमे सृष्टि करने की इच्छाको सतति बन जाती है। और जर्दा सतति है वहाँ अनवस्था दोष नही होता, ज्योकि सभी घटनाश्रोमे कार्य कारणका जो समान है वह अनादिरूपसे सिद्ध है। जैसे बीज और प्रफुरका अनादि सतान हैं । बीज पहिले अकुरमे हुआ वह प्रकुर पहिले वीजसे हुआ, वह बीज पहिले ' अंकुरसे हुआ, इस तरह अनादि परम्परा बन जाती है । वहाँ अनवस्था दोष नहीं पाता। इस तरह सिसृक्षा याने सृष्टि करने की इच्छा ही पूर्व पूर्व सिवृक्षासे उत्पन्न होती रहती है इसलिए उनमे अनादि ससति सिद्ध है, अनवस्था दोष नहीं प्राता । ऐसा कहने वाले शङ्खाकारके यहाँ यह अनिष्टापत्तिाती है कि फिए तो एक साथ नाना देशोमे शरीरादिक कार्यों का उत्पाद सम्भव न होगा । जहाँ जिस कार्यकी उत्पत्ति के लिए महेश्वरकी सृष्टि करने की इच्छा हुई हो उस ही देश मे उस कार्य की उत्पत्ति बन सकेगी। ऐसा नहीं कहा जा सकता कि जितने देशमे जितने कार्य उत्पन्न होने वाले उतने ही सिमृक्षाश्रोमे ईश्वर एक साथ उत्पन्न हो जाय और जिससे यह बात सिद्ध की जा सके कि सभी देशोमे कार्य की उत्पत्ति सम्भव हो सकती है। ऐसा क्यो नही कहा जा सकता कि एक साथ अनेक इच्छाओोकी उत्पत्तिका विरोध है। जैसे हम मार सभी लोगोके एक समय मे एक इच्छा उत्पन्न होती है, अभेक हच्छायें तो नहीं होती, कोई यदि यह कहे कि एक ही महेश्वरकी सिसृक्षा एक साथ नाना देशो में कार्य के उत्पन्न करने वाली समर्थ हो जायगी, एक ही सिसृझसे सारे देशकी मिया उत्पन्न हो जायगी तो यह भी बात युक्त नहीं बनती, क्योकि कम से अनेक शरीरादिक फायोकी उत्पति |
८४ । उपेन्द्रनाथ अश्क
उसने भिभकते हुए प्रश्न किया तो उन्होने कहा कि प्रकाशक तो दयानतदार मिलते नही, फिर कोई संग्रह छपवाये भी तो कैसे और क्यों ?
अन्त मे एक बजे के लगभग हुनर साहब ने अपनी एक कहानी सुनानी शुरू की जो उन्होने हाल ही मे लिखी थी। तब चेतन के बड़े भाई जम्हाइयाँ लेने लगे । दिल-ही- दिल मे अपने इस प्रसाहित्यिक भाई को उसकी अरसिकता पर कोसते हुए चेतन ने हुनर साहब से स्वयं अपनी आरम्भिक कोशिशों का जिक्र किया और सकुचाते हुए अपने दो- एक शेर भी सुनाये और कहा कि कहानी लिखने मे उसकी रुचि अधिक है ।
"तुम कही लाहौर होते !" हुनर साहब ने चेतन का उत्साह बढाते हुए कहा, "ऐसी प्रतिभा है तुममे कि कुछ ही दिनों में चमक उठते ।"
भाई साहब की जम्हाइयाँ उत्तरोत्तर बढ रही थी, इसलिए चेतन ने छुट्टी ली और मन-ही-मन हुनर साहब को अपना गुरु मान लिया और निश्चय कर लिया कि जैसे भी हो वह लाहौर जा कर ही दम लेगा । जालन्धर मे तो उसकी प्रतिभा का अंकुर सूख कर रह जायगा । लाहौर में यदि अनुकूल जलवायु मिल गया तो न जाने वह महान् विटप बन
घर श्रा कर उसने सब से पहले उन पण्डित दीनबन्धु को चिट्ठी लिखी कि वह लाहौर अवश्य जायगा । विवाह का जुआ वह अपने गले मे नही डालना चाहता । उसने लिखा कि वह उन्हें धोखा नही देना चाहता । । उसकी आकांक्षाएँ बडी है। उसके रोजगार का भी कोई भरोसा नही । उनको या उनकी लड़की को व्यर्थ का कष्ट होगा। और उसने यह भी लिख दिया कि वे अब उसके पिता के पास 'जेजो' जाने का कष्ट न करे । मन-ही-मन उसने यह फैसला भी कर लिया कि दूसरे दिन सुबह ही वह चिट्ठी डाल देगा । | चौरासी । उपेन्द्रनाथ अश्क उसने भिभकते हुए प्रश्न किया तो उन्होने कहा कि प्रकाशक तो दयानतदार मिलते नही, फिर कोई संग्रह छपवाये भी तो कैसे और क्यों ? अन्त मे एक बजे के लगभग हुनर साहब ने अपनी एक कहानी सुनानी शुरू की जो उन्होने हाल ही मे लिखी थी। तब चेतन के बड़े भाई जम्हाइयाँ लेने लगे । दिल-ही- दिल मे अपने इस प्रसाहित्यिक भाई को उसकी अरसिकता पर कोसते हुए चेतन ने हुनर साहब से स्वयं अपनी आरम्भिक कोशिशों का जिक्र किया और सकुचाते हुए अपने दो- एक शेर भी सुनाये और कहा कि कहानी लिखने मे उसकी रुचि अधिक है । "तुम कही लाहौर होते !" हुनर साहब ने चेतन का उत्साह बढाते हुए कहा, "ऐसी प्रतिभा है तुममे कि कुछ ही दिनों में चमक उठते ।" भाई साहब की जम्हाइयाँ उत्तरोत्तर बढ रही थी, इसलिए चेतन ने छुट्टी ली और मन-ही-मन हुनर साहब को अपना गुरु मान लिया और निश्चय कर लिया कि जैसे भी हो वह लाहौर जा कर ही दम लेगा । जालन्धर मे तो उसकी प्रतिभा का अंकुर सूख कर रह जायगा । लाहौर में यदि अनुकूल जलवायु मिल गया तो न जाने वह महान् विटप बन घर श्रा कर उसने सब से पहले उन पण्डित दीनबन्धु को चिट्ठी लिखी कि वह लाहौर अवश्य जायगा । विवाह का जुआ वह अपने गले मे नही डालना चाहता । उसने लिखा कि वह उन्हें धोखा नही देना चाहता । । उसकी आकांक्षाएँ बडी है। उसके रोजगार का भी कोई भरोसा नही । उनको या उनकी लड़की को व्यर्थ का कष्ट होगा। और उसने यह भी लिख दिया कि वे अब उसके पिता के पास 'जेजो' जाने का कष्ट न करे । मन-ही-मन उसने यह फैसला भी कर लिया कि दूसरे दिन सुबह ही वह चिट्ठी डाल देगा । |
रूसी गजप्रोम ने फिनिश कंपनी गैसम के खिलाफ मुकदमा जीता, जिसने रूबल में ईंधन के लिए भुगतान करने से इनकार कर दिया। फैसला स्टॉकहोम में सुनाया गया।
इसकी सूचना Gazprom कंपनी की प्रेस सेवा ने अपने टेलीग्राम चैनल में दी।
चूंकि अनुबंध में टेक-या-पे क्लॉज शामिल था, फिन्स ने 30 मिलियन यूरो का कर्ज जमा किया। देर से भुगतान पर उन्हें ब्याज भी देना होगा। उसी समय, रूबल में भुगतान करने के लिए अमित्र देशों के संक्रमण पर पुतिन का फरमान अदालत में बल के रूप में योग्य था।
- "गज़प्रोम" की प्रेस सेवा ने कहा।
इसका मतलब यह है कि फिन्स द्वारा रूसी संघ की मुद्रा पर स्विच करने से इनकार करने के कारण रूसी कंपनी द्वारा गैस पंपिंग का निलंबन, अदालत के अनुसार, एक वैध और वैध निर्णय था। और फ़िनिश पक्ष को राष्ट्रपति के डिक्री को और अधिक गंभीरता से लेना चाहिए था।
लेकिन उसी समय, स्टॉकहोम ट्रिब्यूनल ने मांग की कि फ़िनलैंड में उपभोक्ताओं को ईंधन की आपूर्ति फिर से शुरू करने के लिए पार्टियां बातचीत जारी रखें।
23 मार्च को, रूस के राष्ट्रपति ने कई यूरोपीय राज्यों और अन्य अमित्र देशों के लिए रूबल में संक्रमण पर डिक्री की घोषणा की। यह उनके द्वारा लगाए गए रूसी-विरोधी प्रतिबंधों की प्रतिक्रिया थी, जिसने डॉलर और यूरो में बस्तियों को छोड़ना संभव बना दिया, जो नई शर्तों के तहत भुगतान का एक अविश्वसनीय साधन बन गए हैं।
- इस्तेमाल की गई तस्वीरेंः
| रूसी गजप्रोम ने फिनिश कंपनी गैसम के खिलाफ मुकदमा जीता, जिसने रूबल में ईंधन के लिए भुगतान करने से इनकार कर दिया। फैसला स्टॉकहोम में सुनाया गया। इसकी सूचना Gazprom कंपनी की प्रेस सेवा ने अपने टेलीग्राम चैनल में दी। चूंकि अनुबंध में टेक-या-पे क्लॉज शामिल था, फिन्स ने तीस मिलियन यूरो का कर्ज जमा किया। देर से भुगतान पर उन्हें ब्याज भी देना होगा। उसी समय, रूबल में भुगतान करने के लिए अमित्र देशों के संक्रमण पर पुतिन का फरमान अदालत में बल के रूप में योग्य था। - "गज़प्रोम" की प्रेस सेवा ने कहा। इसका मतलब यह है कि फिन्स द्वारा रूसी संघ की मुद्रा पर स्विच करने से इनकार करने के कारण रूसी कंपनी द्वारा गैस पंपिंग का निलंबन, अदालत के अनुसार, एक वैध और वैध निर्णय था। और फ़िनिश पक्ष को राष्ट्रपति के डिक्री को और अधिक गंभीरता से लेना चाहिए था। लेकिन उसी समय, स्टॉकहोम ट्रिब्यूनल ने मांग की कि फ़िनलैंड में उपभोक्ताओं को ईंधन की आपूर्ति फिर से शुरू करने के लिए पार्टियां बातचीत जारी रखें। तेईस मार्च को, रूस के राष्ट्रपति ने कई यूरोपीय राज्यों और अन्य अमित्र देशों के लिए रूबल में संक्रमण पर डिक्री की घोषणा की। यह उनके द्वारा लगाए गए रूसी-विरोधी प्रतिबंधों की प्रतिक्रिया थी, जिसने डॉलर और यूरो में बस्तियों को छोड़ना संभव बना दिया, जो नई शर्तों के तहत भुगतान का एक अविश्वसनीय साधन बन गए हैं। - इस्तेमाल की गई तस्वीरेंः |
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क्या आपके बाल तेजी से सफेद हो रहे हैं? ऐसे में आप अपने सफेद होते बालों के लिए काले तिल का इस्तेमाल (black sesame seeds for grey hair in hindi) कर सकते हैं। कैसे, जानते हैं।
Gajar Ka Halwa: सर्दियों के मौसम में अगर आपने गाजर का हलवा नहीं खाया तो क्या खाया? अगर आपको भी ये हलवा बनाने की तलब लगी है तो झटपट इसकी रेसिपी देख लें।
| What not to use for oily skin: ऑयली स्किन बाकी स्किन की तुलना में ज्यादा सेंसिटिव होती है। ऐसे में कुछ चीजों का ऐसी स्किन पर इस्तेमाल करना, एक्ने और स्किन की दूसरी समस्याओं का कारण बन सकता है। कौन सा फल कब खाना चाहिएः प्रकृति ने हमें खाने के लिए कई प्रकार के फल दिए हैं। बस इन्हें खाने का सही समय जान कर हम अपने आप को सेहतमंद बना सकते हैं। करी पत्ते में प्रोटीन और विटामिन सहित ऐसे कई तत्व पाए जाते हैं जो बालों की ग्रोथ को बढ़ाकर उसे मजबूत बनाते हैं। शायद ही कोई घर हो जहां छिपकली ने अपना डेरा नहीं जमाया हो, ऐसे में अगर आप भी उनके आंतक से परेशान हैं तो इन कुछ घरेलू उपायों की मदद से उन्हें अपने घर से भगा सकते हैं। क्या सूप स्टार्टर है या आपको इसे खाने के अंत में लेना चाहिए? आइए, जानते हैं सूप पीने का सही समय क्या है और इसे पीने से शरीर को कौन से फायदे होते हैं। आज कल लोगों में स्ट्रेस और एंग्जायटी बड़ी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में इन योगासनों को करना आपको रिलैक्स महसूस करने में मदद कर सकता है। आज हम आपके लिए लेकर आए हैं ऐसे ट्रिक्स और टिप्स जिसे अपनाकर आप घर पर आसानी से दही जमा सकते हैं। आइए जानते हैं। युवाओं में डायबिटीज की समस्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में इन बाबा रामदेव के ये टिप्स आपके काम आ सकते हैं। कैसे, जानते हैं। हाई बीपी के लक्षणः हाई बीपी की समस्या, सिर्फ सांस लेने और दिल की धड़कन में गड़बड़ी से जुड़ी नहीं होती। बल्कि, कुछ ऐसे लक्षण भी होते हैं जिन्हें लोग नजरअंदाज कर देते हैं। अदरक और शहद के फायदेः अदरक का जिंजरोल एक कमाल की चीज है। तो, शहद कई बीमारियों का रामबाण इलाज। ऐसे में इन दोनों का मिश्रण क्या कर सकता है। जानते हैं। पति पत्नी का रिश्ता बहुत ही नाजुक होता है। इस रिश्ते की भी अपनी कुछ मर्यादा होती है जो पति को कभी नहीं लांघनी चाहिए। एक मॉडल का कहना है कि वह इतनी खूबसूरत है कि लोग उसे हर जगह परेशान करते है। बेवजह उसे घूरते है और फ्लर्ट करते हैं। लोगों की इन हरकतों से वह इतनी परेशान हो गई है कि उसने इससे छुटकारा पाने के लिए ऐसी योजना बनाई है। यूरिक एसिड में दहीः दही के आमतौर पर दो प्रकार हैं। एक लो फैट और एक फुल फैट। ऐसे में किस प्रकार का दही यूरिक एसिड में फायदेमंद है या नुकसानदेह, जानते हैं। अगर आपको भी बागवानी का शौक है, लेकिन आपके पास जगह कम है तो अपने घर की बालकनी को इन टिप्स की मदद से कर सकती हैं गुलज़ार। जिस पिज्जा और केक को आप मजे से खाते हैं असल में ये ट्रांस फैट का घर हैं जो कि आपके शरीर को नुकसान पहुंचाने का काम करते हैं। Dry cough remedy: ड्राई कफ की समस्या में अक्सर लोग लंबे समय तक परेशान रहते हैं। ऐसे में चाय में इन चीजों को मिला कर पीना कफ कम करने में मदद कर सकता है। Happy Birthday Salman Khan: बॉलीवुड के सुपरस्टार और लोगों के भाई जान सलमान खान सत्तावन साल के हो गए हैं। आइए, जानते हैं फिटनेस, लाइफस्टाइल और फैमिली से जुड़ी उनकी खास बातें जो हर किसी को सीखनी चाहिए। क्या आपके बाल तेजी से सफेद हो रहे हैं? ऐसे में आप अपने सफेद होते बालों के लिए काले तिल का इस्तेमाल कर सकते हैं। कैसे, जानते हैं। Gajar Ka Halwa: सर्दियों के मौसम में अगर आपने गाजर का हलवा नहीं खाया तो क्या खाया? अगर आपको भी ये हलवा बनाने की तलब लगी है तो झटपट इसकी रेसिपी देख लें। |
पाकिस्तान में इमरान ख़ान का बतौर प्रधानमंत्री आज आख़िरी दिन है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आज पाकिस्तान की संसद में इमरान सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा चल रही है, जिसके पास होने में शायद ही किसी को कोई संदेह हो। अपनी सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव से पहली रात यानी शुक्रवार की रात इमरान ख़ान ने एक बार फिर अपने देश को संबोधित किया और अपने पक्ष में जनता की गोलबंदी की कोशिश की। इस दौरान इमरान ने दो-तीन बार भारत की तारीफ़ की। हालांकि इसमें भी उन्होंने सच और झूठ का घालमेल किया, ताकि उनका हित सध सके। उनका मकसद हल हो सके। फिर भी उन्होंने की तो भारत की तारीफ़ ही। इसपर विपक्ष की नेता ने उन्हें भारत चले जाने की सलाह दी। ये बिल्कुल हमारे देश की तरह ही हुआ। हालांकि हमारे यहां बिना पाकिस्तान की तारीफ़ किए भी पाकिस्तान भेजने की धमकी दी जाती है। कुछ भी हो भारत और पाकिस्तान एक-दूसरे के राजनेताओं के बहुत काम आते हैं। चाहे अपनी कुर्सी बचानी हो या दूसरे की खींचनी हो।
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| पाकिस्तान में इमरान ख़ान का बतौर प्रधानमंत्री आज आख़िरी दिन है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आज पाकिस्तान की संसद में इमरान सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा चल रही है, जिसके पास होने में शायद ही किसी को कोई संदेह हो। अपनी सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव से पहली रात यानी शुक्रवार की रात इमरान ख़ान ने एक बार फिर अपने देश को संबोधित किया और अपने पक्ष में जनता की गोलबंदी की कोशिश की। इस दौरान इमरान ने दो-तीन बार भारत की तारीफ़ की। हालांकि इसमें भी उन्होंने सच और झूठ का घालमेल किया, ताकि उनका हित सध सके। उनका मकसद हल हो सके। फिर भी उन्होंने की तो भारत की तारीफ़ ही। इसपर विपक्ष की नेता ने उन्हें भारत चले जाने की सलाह दी। ये बिल्कुल हमारे देश की तरह ही हुआ। हालांकि हमारे यहां बिना पाकिस्तान की तारीफ़ किए भी पाकिस्तान भेजने की धमकी दी जाती है। कुछ भी हो भारत और पाकिस्तान एक-दूसरे के राजनेताओं के बहुत काम आते हैं। चाहे अपनी कुर्सी बचानी हो या दूसरे की खींचनी हो। अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें। |
चंद्रपुर : लगभग 20 दिनों से एक बाघने सिंदेवाही के शिवनी जंगल में हड़कंप मचा रखा है. इस बीच बाघ ने 3 महिलाओं की जान ले ली है. पिछले 2 दिनों से वन विभाग ने इस खूंखार बाघ की पुष्टि कर उसे बेहोश करने की मुहिम शुरू की है.
सुबह से ही सिंदेवाही से 4 किमीकी दूरी पर अंतरगांव के आंबोली जंगल में बाघ को पकड़ने की कोशिश चल रही है. वन विभाग विशेषज्ञ, अधिकारी और कर्मचारी भी इस अभियान में सहभागी हुए है. इस घटना से परिसर के नागरिक काफ़ी डरे हुए हैं.
| चंद्रपुर : लगभग बीस दिनों से एक बाघने सिंदेवाही के शिवनी जंगल में हड़कंप मचा रखा है. इस बीच बाघ ने तीन महिलाओं की जान ले ली है. पिछले दो दिनों से वन विभाग ने इस खूंखार बाघ की पुष्टि कर उसे बेहोश करने की मुहिम शुरू की है. सुबह से ही सिंदेवाही से चार किमीकी दूरी पर अंतरगांव के आंबोली जंगल में बाघ को पकड़ने की कोशिश चल रही है. वन विभाग विशेषज्ञ, अधिकारी और कर्मचारी भी इस अभियान में सहभागी हुए है. इस घटना से परिसर के नागरिक काफ़ी डरे हुए हैं. |
बॉलीवुड एक्टर ऋतिक रोशन और कंगना रनौत के झगड़े ने अब कानूनी रूप ले लिया है। खबरों के अनुसार दोनों ने एक दूसरे को कानूनी नोटिस भेज माफी मांगने को कहा है। पहले ऋतिक ने कंगना को नोटिस भेजा। इसमें उन्होंने कहा कि कंगना ने उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया है। इसलिए वह प्रेस कांफ्रेंस बुलाकर माफी मांगे। इस पर कंगना ने भी पलटवार करते हुए ऋतिक को नोटिस भेज दिया।
| बॉलीवुड एक्टर ऋतिक रोशन और कंगना रनौत के झगड़े ने अब कानूनी रूप ले लिया है। खबरों के अनुसार दोनों ने एक दूसरे को कानूनी नोटिस भेज माफी मांगने को कहा है। पहले ऋतिक ने कंगना को नोटिस भेजा। इसमें उन्होंने कहा कि कंगना ने उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया है। इसलिए वह प्रेस कांफ्रेंस बुलाकर माफी मांगे। इस पर कंगना ने भी पलटवार करते हुए ऋतिक को नोटिस भेज दिया। |
उम्र कैद की सजा में 14 साल से ज्यादा की कैद काट चुके कैदियों ने रिहाई के लिए मंगलवार को दीवानी कचहरी की हवालात में हंगामा कर दिया। ये बंदी सेंट्रल जेल में भूख हड़ताल कर रहे हैं। पेशी के दौरान इनकेहंगामे का पता चलने पर थाना हरीपर्वत से पुलिस पहुंची। कैदियों ने इंस्पेक्टर को ज्ञापन दिया। इसकेबाद हंगामा शांत हो गया।
कैदियों में अछनेरा के दशरथ उर्फ जस्सो और मैनपुरी केकुरावली के नेत्रपाल ने पुलिस से कहा कि सेंट्रल जेल में 2060 बंदी हैं। इनमें से 400 बंदी 14 साल से अधिक की कैद की सजा काट चुके हैं। इनकी रिहाई की जानी चाहिए। कैदियों के अच्छे आचरण के आधार पर भी उन्हें नहीं छोड़ा जा रहा हैै।
उनकी रिहाई के लिए ही तीन दिन से भूख हड़ताल चल रही है। उधर हंगामा का पता चलने पर हरीपर्वत थाना से इंस्पेक्टर पहुंचे। कैदियों ने शासन - प्रशासन के नाम ज्ञापन उन्हें सौंपा। उधर जेल सूत्रों ने बताया कि शासन ने भूख हड़ताल पर रिपोर्ट मांग ली है। जेल प्रशासन का कहना है कि तीन चार कैदी ही हंगामा कर रहे हैं।
| उम्र कैद की सजा में चौदह साल से ज्यादा की कैद काट चुके कैदियों ने रिहाई के लिए मंगलवार को दीवानी कचहरी की हवालात में हंगामा कर दिया। ये बंदी सेंट्रल जेल में भूख हड़ताल कर रहे हैं। पेशी के दौरान इनकेहंगामे का पता चलने पर थाना हरीपर्वत से पुलिस पहुंची। कैदियों ने इंस्पेक्टर को ज्ञापन दिया। इसकेबाद हंगामा शांत हो गया। कैदियों में अछनेरा के दशरथ उर्फ जस्सो और मैनपुरी केकुरावली के नेत्रपाल ने पुलिस से कहा कि सेंट्रल जेल में दो हज़ार साठ बंदी हैं। इनमें से चार सौ बंदी चौदह साल से अधिक की कैद की सजा काट चुके हैं। इनकी रिहाई की जानी चाहिए। कैदियों के अच्छे आचरण के आधार पर भी उन्हें नहीं छोड़ा जा रहा हैै। उनकी रिहाई के लिए ही तीन दिन से भूख हड़ताल चल रही है। उधर हंगामा का पता चलने पर हरीपर्वत थाना से इंस्पेक्टर पहुंचे। कैदियों ने शासन - प्रशासन के नाम ज्ञापन उन्हें सौंपा। उधर जेल सूत्रों ने बताया कि शासन ने भूख हड़ताल पर रिपोर्ट मांग ली है। जेल प्रशासन का कहना है कि तीन चार कैदी ही हंगामा कर रहे हैं। |
शिमला - बागबानों से फल मंडियों में अवैध तरीके से हो रही अवैध वसूली को रोकने के लिए एपीएमसी के चेयरमैन व सचिव ने स्वयं फील्ड में मोर्चा संभाल लिया है। एपीएमसी के चेयरमैन व सचिव स्वयं मंडियों में उतर कर व्यवस्थाओं का मुआयना कर रहे हैं, ताकि फल मंडियों में चल रहे गोरखधंधे और बागबानों से हो रही अवैध वसूली पर नकेल कसी जा सके। फल मंडियों में अवैध वसूली को रोकने के लिए एपीएमसी ने कमेटी भी गठित की गई है, जो रोजाना फल मंडियों का औचक निरीक्षण कर फल मंडियों में चल रही व्यवस्थाओं को जांच रहे हैं। हालांकि अभी तक फल मंडियों में अवैध वसूली का मामला प्रकाश में नहीं आया है, मगर रोहड़ू, नारकंडा फल मंडियों से बागबानों से अवैध वसूली के मामले प्रकाश में आ चुके हैं। शिमला-किन्नौर फल मंडी (एपीएमसी) के चेयरमैन नरेश शर्मा ने बताया कि अवैध वसूली को रोकने के लिए हर तरह से नजर रखी जा रही है। हालांकि शिकायतें आ रही हैं, मगर अभी तक किसी भी बागबान ने अवैध वसूली की रसीद नहीं दी है। उन्होंने कहा कि फल मंडियों में यदि बागबानों से अवैध वसूली हो रही है और उनके पास उसकी रसीद है, तो वह एपीएमसी को रसीद दें, ताकि एपीएमसी अवैध वसूली करने वाले आढ़तियों पर कार्रवाई कर सके। इसमें उन्हें जुर्माना लगाने सहित उनका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।
एपीएमसी के चेयरमैन नरेश शर्मा का कहना है कि उनके पास बागबानों से अवैध वसूली की शिकायत आई है, मगर अभी तक किसी भी बागबान ने उन्हें अवैध वसूली की रसीद (कागजात) नहीं दी है। उन्होंने बागबानों से आग्रह किया है कि अगर फल मंडियों में उनसे किसी भी तरह की अवैध वसूली होती है और उनके पास उसकी रसीद है तो वह एपीएमसी को रसीद देकर अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते है। जिस पर सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
| शिमला - बागबानों से फल मंडियों में अवैध तरीके से हो रही अवैध वसूली को रोकने के लिए एपीएमसी के चेयरमैन व सचिव ने स्वयं फील्ड में मोर्चा संभाल लिया है। एपीएमसी के चेयरमैन व सचिव स्वयं मंडियों में उतर कर व्यवस्थाओं का मुआयना कर रहे हैं, ताकि फल मंडियों में चल रहे गोरखधंधे और बागबानों से हो रही अवैध वसूली पर नकेल कसी जा सके। फल मंडियों में अवैध वसूली को रोकने के लिए एपीएमसी ने कमेटी भी गठित की गई है, जो रोजाना फल मंडियों का औचक निरीक्षण कर फल मंडियों में चल रही व्यवस्थाओं को जांच रहे हैं। हालांकि अभी तक फल मंडियों में अवैध वसूली का मामला प्रकाश में नहीं आया है, मगर रोहड़ू, नारकंडा फल मंडियों से बागबानों से अवैध वसूली के मामले प्रकाश में आ चुके हैं। शिमला-किन्नौर फल मंडी के चेयरमैन नरेश शर्मा ने बताया कि अवैध वसूली को रोकने के लिए हर तरह से नजर रखी जा रही है। हालांकि शिकायतें आ रही हैं, मगर अभी तक किसी भी बागबान ने अवैध वसूली की रसीद नहीं दी है। उन्होंने कहा कि फल मंडियों में यदि बागबानों से अवैध वसूली हो रही है और उनके पास उसकी रसीद है, तो वह एपीएमसी को रसीद दें, ताकि एपीएमसी अवैध वसूली करने वाले आढ़तियों पर कार्रवाई कर सके। इसमें उन्हें जुर्माना लगाने सहित उनका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है। एपीएमसी के चेयरमैन नरेश शर्मा का कहना है कि उनके पास बागबानों से अवैध वसूली की शिकायत आई है, मगर अभी तक किसी भी बागबान ने उन्हें अवैध वसूली की रसीद नहीं दी है। उन्होंने बागबानों से आग्रह किया है कि अगर फल मंडियों में उनसे किसी भी तरह की अवैध वसूली होती है और उनके पास उसकी रसीद है तो वह एपीएमसी को रसीद देकर अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते है। जिस पर सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। |
24 फरवरी को प्रयागराज में हुए शूटआउट में शामिल शूटरों की मदद करने वाले अतीक के बहनोई डॉक्ट अखलाक को शासन ने सस्पेंड कर दिया है। अखलाक ने बमबाज गुड्डू मुस्लिम को भी अपने घर में पनाह दी थी।
मेरठ के अब्दुल्लापुर सरकारी अस्पताल में तैनात माफिया डॉन अतीक अहमद के बहनोई डा. अखलाक अहमद को निलंबित कर दिया गया है। उनकी बर्खास्तगी की तैयारी है। अखलाक को बीती दो अप्रैल को एसटीएफ ने मेरठ के नौचंदी इलाके से गिरफ्तार किया था। उस पर उमेश पाल के हत्यारों को पनाह और आर्थिक मदद देने का आरोप है। एसटीएफ का यह भी कहना है कि वह अतीक की काली कमाई का वित्तीय प्रबंधन भी करता था।
डा. अखलाक अहमद पुत्र चौधरी अलाउद्दीन निवासी एचएन-52, चश्मे वाली गली भवानी नगर थाना नौचंदी मेरठ को गिरफ्तारी के बाद एसटीएफ प्रयागराज ले गई थी। उस पर हत्या, आपराधिक षडयंत्र और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम जैसे गंभीर अपराध दर्ज किए गए थे। फिलहाल वह नैनी जेल में न्यायिक हिरासत में है।
अखलाक की गिरफ्तारी के बाद महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य द्वारा शासन को उनके निलंबन का प्रस्ताव भेजा गया था। मंगलवार को इस संबंध में शासन के विशेष सचिव धीरेंद्र सिंह सचान ने आदेश जारी कर दिया। अखलाक की गिरफ्तारी के बाद एसटीएफ ने उसकी संलिप्तता के पर्याप्त सुबूत होने का दावा किया था। आरोप है कि अतीक का शूटर गुड्डू मुस्लिम गत पांच मार्च को डा. अखलाक के घर ठहरा था। अगले दिन उसे विदा करने के साथ ही एक लाख रुपये दिए जाने की भी बात कही गई थी। गंभीर आरोपों के चलते अखलाक को सरकारी सेवा से बर्खास्त किए जाने की तैयारी है।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा, डा. अखलाक की पत्नी और माफिया अतीक अहमद की बहन आयशा नूरी भी बीते दिनों सुर्खियों में आई थी। जब वह अतीक अहमद को साबरमती जेल से प्रयागराज लाए जाने के दौरान लगातार पुलिस वैन का पीछा कर रही थीं।
अनैतिक कार्यों में लिप्त होकर सरकार की छवि खराब करने वालों को कतई बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
उमेश पाल की हत्या करने के बाद बमबाज गुड्डू मुस्लिम मेरठ पहुंचा था। माफिया अतीक अहमद के बहनोई डॉ. अखलाक ने गुड्डू मुस्लिम को अपने घर में पनाह दी थी। जांच-पड़ताल में पता चला था कि उमेश पाल की हत्या के बाद तीसरे दिन बमबाज मेरठ पहुंचा था। बमबाज गुड्डू यहां करीब 18 घंटे तक रहा था। एसटीएफ को अखलाक के घर की सीसीटीवी फुटेज हाथ लगी तो शिकंजा कस दिया।
अतीक का बहनोई अखलाक पेशे से डॉक्टर है। अखलाक ने जिला अस्पताल में लंबा समय बिताया और वर्तमान में भावनपुर सीएचसी में तैनात था। डॉ. अखलाक पर्दे के पीछे से अतीक गैंग की मदद कर रहा था। इसकी जानकारी जब पुलिस को तो धूमनगंज थाना प्रभारी राजेश मौर्या और चौकी इंचार्ज प्रीत पांडेय ने मेरठ एसटीएफ की मदद से उसे गिरफ्तार कर लिया था।
| चौबीस फरवरी को प्रयागराज में हुए शूटआउट में शामिल शूटरों की मदद करने वाले अतीक के बहनोई डॉक्ट अखलाक को शासन ने सस्पेंड कर दिया है। अखलाक ने बमबाज गुड्डू मुस्लिम को भी अपने घर में पनाह दी थी। मेरठ के अब्दुल्लापुर सरकारी अस्पताल में तैनात माफिया डॉन अतीक अहमद के बहनोई डा. अखलाक अहमद को निलंबित कर दिया गया है। उनकी बर्खास्तगी की तैयारी है। अखलाक को बीती दो अप्रैल को एसटीएफ ने मेरठ के नौचंदी इलाके से गिरफ्तार किया था। उस पर उमेश पाल के हत्यारों को पनाह और आर्थिक मदद देने का आरोप है। एसटीएफ का यह भी कहना है कि वह अतीक की काली कमाई का वित्तीय प्रबंधन भी करता था। डा. अखलाक अहमद पुत्र चौधरी अलाउद्दीन निवासी एचएन-बावन, चश्मे वाली गली भवानी नगर थाना नौचंदी मेरठ को गिरफ्तारी के बाद एसटीएफ प्रयागराज ले गई थी। उस पर हत्या, आपराधिक षडयंत्र और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम जैसे गंभीर अपराध दर्ज किए गए थे। फिलहाल वह नैनी जेल में न्यायिक हिरासत में है। अखलाक की गिरफ्तारी के बाद महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य द्वारा शासन को उनके निलंबन का प्रस्ताव भेजा गया था। मंगलवार को इस संबंध में शासन के विशेष सचिव धीरेंद्र सिंह सचान ने आदेश जारी कर दिया। अखलाक की गिरफ्तारी के बाद एसटीएफ ने उसकी संलिप्तता के पर्याप्त सुबूत होने का दावा किया था। आरोप है कि अतीक का शूटर गुड्डू मुस्लिम गत पांच मार्च को डा. अखलाक के घर ठहरा था। अगले दिन उसे विदा करने के साथ ही एक लाख रुपये दिए जाने की भी बात कही गई थी। गंभीर आरोपों के चलते अखलाक को सरकारी सेवा से बर्खास्त किए जाने की तैयारी है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा, डा. अखलाक की पत्नी और माफिया अतीक अहमद की बहन आयशा नूरी भी बीते दिनों सुर्खियों में आई थी। जब वह अतीक अहमद को साबरमती जेल से प्रयागराज लाए जाने के दौरान लगातार पुलिस वैन का पीछा कर रही थीं। अनैतिक कार्यों में लिप्त होकर सरकार की छवि खराब करने वालों को कतई बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उमेश पाल की हत्या करने के बाद बमबाज गुड्डू मुस्लिम मेरठ पहुंचा था। माफिया अतीक अहमद के बहनोई डॉ. अखलाक ने गुड्डू मुस्लिम को अपने घर में पनाह दी थी। जांच-पड़ताल में पता चला था कि उमेश पाल की हत्या के बाद तीसरे दिन बमबाज मेरठ पहुंचा था। बमबाज गुड्डू यहां करीब अट्ठारह घंटाटे तक रहा था। एसटीएफ को अखलाक के घर की सीसीटीवी फुटेज हाथ लगी तो शिकंजा कस दिया। अतीक का बहनोई अखलाक पेशे से डॉक्टर है। अखलाक ने जिला अस्पताल में लंबा समय बिताया और वर्तमान में भावनपुर सीएचसी में तैनात था। डॉ. अखलाक पर्दे के पीछे से अतीक गैंग की मदद कर रहा था। इसकी जानकारी जब पुलिस को तो धूमनगंज थाना प्रभारी राजेश मौर्या और चौकी इंचार्ज प्रीत पांडेय ने मेरठ एसटीएफ की मदद से उसे गिरफ्तार कर लिया था। |
बॉलीवुड की 'फैशन डीवा' एक्ट्रेस सोनम कपूर अपने अलग फैशन स्टाइल के लिए जानी जाती हैं। लेकिन कई बार वो इसकी वजह से ट्रोल भी हो जाती हैं। सोनम कपूर सोशल मीडिया काफी एक्टिव रहती हैं और अक्सर अपने फैंस के साथ सीधे संवाद भी करती हैं। हाल ही में उन्होंने अपनी एक पोस्ट में कोविड-19 वैक्सीन को लेकर एक ऐसा सवाल पूछ डाला कि सोनम कपूर ट्रोलर्स के निशाने पर आ गईं। अब उन्हें सोशल मीडिया यूजर्स जमकर ट्रोल कर रहे हैं।
सोनम कपूर ने अपने इंस्टाग्राम पर स्टोरी शेयर की और उसमें सवाल पूछते हुए लिखा, 'क्या कोई मुझे समझा सकता है कि हमारे ग्रैंडपेरेंट्स और माता-पिता भारत में कैसे वैक्सीन लगवा सकते हैं और ये कब उपलब्ध है? मैं बहुत कंफ्यूज हूं? हर किसी से अलग चीज सुनने को मिल रही है। मैं वास्तव में उनके लिए ये चाहती हूं। ' इसी स्टोरी को एक्ट्रेस ने ट्विटर पर भी शेयर किया। अब उन्हें ट्विटर पर जमकर ट्रोल किया जा रहा है।
यूजर्स ने एक्ट्रेस को ट्रोल करते हुए लिखा, 'आपके फोन में गूगल नहीं है क्या? ' तो वहीं अन्य एक यूजर ने लिखा, 'अपने कॉमन सेंस का इस्तेमाल करिए और ऑफिशियल वेबसाइट पर देखिए। ' एक और यूजर ने लिखा, 'अखबार पढ़िए और न्यूज देखिए, हर वक्त सरकार को कोसने से अच्छा है कि उनके प्लान देखिए। मुझे यकीन है कि आपके आई फोन में गूगल ऐप होगी। '
सोनम कपूर के वर्क फ्रंट की बात करें तो एक्ट्रेस ने 39 दिन में अपनी अपकमिंग फिल्म 'ब्लाइंड' की शूटिंग पूरी कर ली है। ये फिल्म साल के अंत में रिलीज होगी। इस एक्शन-थ्रिलर फिल्म का निर्देशन शोम मखीजा ने किया है। तो वहीं दिसंबर माह में रिलीज हुई फिल्म 'एके वर्सेज एके' में सोनम कपूर पिता और अभिनेता अनिल कपूर के साथ नजर आई थीं। इस फिल्म में अभिनेत्री का कैमियो रोल था।
बता दें कि कोरोना के वैक्सीन के दूसरे चरण में 1 मार्च से 60 साल और इससे ज्यादा की उम्र के लोगों का वैक्सीनेशन शुरू किया जाएगा। इसके बारे में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बुधवार को जानकारी दी थी। इसके पहले कोरोना वैक्सीन का पहला चरण शुरू हो चुका है। तो वहीं अभी तक कोरोना वायरस का खतरा टला नहीं है। हर दिन नए केस सामने आ रहे हैं और ऐसे में सभी को मास्क पहनने की सलाह दी जा रही है। बता दें कि भारत में पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस के 16,738 नए मामले सामने आने के बाद देश में संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 1,10,46,914 हो गई है।
| बॉलीवुड की 'फैशन डीवा' एक्ट्रेस सोनम कपूर अपने अलग फैशन स्टाइल के लिए जानी जाती हैं। लेकिन कई बार वो इसकी वजह से ट्रोल भी हो जाती हैं। सोनम कपूर सोशल मीडिया काफी एक्टिव रहती हैं और अक्सर अपने फैंस के साथ सीधे संवाद भी करती हैं। हाल ही में उन्होंने अपनी एक पोस्ट में कोविड-उन्नीस वैक्सीन को लेकर एक ऐसा सवाल पूछ डाला कि सोनम कपूर ट्रोलर्स के निशाने पर आ गईं। अब उन्हें सोशल मीडिया यूजर्स जमकर ट्रोल कर रहे हैं। सोनम कपूर ने अपने इंस्टाग्राम पर स्टोरी शेयर की और उसमें सवाल पूछते हुए लिखा, 'क्या कोई मुझे समझा सकता है कि हमारे ग्रैंडपेरेंट्स और माता-पिता भारत में कैसे वैक्सीन लगवा सकते हैं और ये कब उपलब्ध है? मैं बहुत कंफ्यूज हूं? हर किसी से अलग चीज सुनने को मिल रही है। मैं वास्तव में उनके लिए ये चाहती हूं। ' इसी स्टोरी को एक्ट्रेस ने ट्विटर पर भी शेयर किया। अब उन्हें ट्विटर पर जमकर ट्रोल किया जा रहा है। यूजर्स ने एक्ट्रेस को ट्रोल करते हुए लिखा, 'आपके फोन में गूगल नहीं है क्या? ' तो वहीं अन्य एक यूजर ने लिखा, 'अपने कॉमन सेंस का इस्तेमाल करिए और ऑफिशियल वेबसाइट पर देखिए। ' एक और यूजर ने लिखा, 'अखबार पढ़िए और न्यूज देखिए, हर वक्त सरकार को कोसने से अच्छा है कि उनके प्लान देखिए। मुझे यकीन है कि आपके आई फोन में गूगल ऐप होगी। ' सोनम कपूर के वर्क फ्रंट की बात करें तो एक्ट्रेस ने उनतालीस दिन में अपनी अपकमिंग फिल्म 'ब्लाइंड' की शूटिंग पूरी कर ली है। ये फिल्म साल के अंत में रिलीज होगी। इस एक्शन-थ्रिलर फिल्म का निर्देशन शोम मखीजा ने किया है। तो वहीं दिसंबर माह में रिलीज हुई फिल्म 'एके वर्सेज एके' में सोनम कपूर पिता और अभिनेता अनिल कपूर के साथ नजर आई थीं। इस फिल्म में अभिनेत्री का कैमियो रोल था। बता दें कि कोरोना के वैक्सीन के दूसरे चरण में एक मार्च से साठ साल और इससे ज्यादा की उम्र के लोगों का वैक्सीनेशन शुरू किया जाएगा। इसके बारे में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बुधवार को जानकारी दी थी। इसके पहले कोरोना वैक्सीन का पहला चरण शुरू हो चुका है। तो वहीं अभी तक कोरोना वायरस का खतरा टला नहीं है। हर दिन नए केस सामने आ रहे हैं और ऐसे में सभी को मास्क पहनने की सलाह दी जा रही है। बता दें कि भारत में पिछले चौबीस घंटाटे में कोरोना वायरस के सोलह,सात सौ अड़तीस नए मामले सामने आने के बाद देश में संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर एक,दस,छियालीस,नौ सौ चौदह हो गई है। |
लोकसभा चुनाव होने तक चंडीगढ़ में पार्षद अपने एरिया के कम्युनिटी सेंटर में नहीं जा सकेंगे। नगर निगम ने उनके कमरों को अपने अधीन कर लिया है। ऐसे में अब पार्षद कमरे में बैठक नहीं कर सकेंगे। कम्युनिटी सेंटर के रूम के बाहर लगी पार्षदों की नेम प्लेट को भी हटा दिया है। कम्युनिटी सेंटर के किसी भी भाग में राजनीतिक गतिविधियां नहीं हो सकेंगी और न ही किसी प्रकार के पोस्टर बैनर रखे जा सकेंगे।
मैनेजमेंट ऑफ कम्युनिटी सेंटर बायलॉज 2018 के अनुसार और चुनाव आचार संहिता के अनुसार कोई भी चुनावी गतिविधि यहां नहीं हो सकती है। यदि ऐसा हुआ तो संबंधित बीएंडआर विंग के एक्सईएन जिम्मेदार होंगे। कम्युनिटी सेंटरों में राजनीतिक गतिविधियां होने पर नगर निगम कमिश्नर केके यादव ने सख्ती दिखाई है। उन्होंने एडिशनल कमिश्नर तिलक राज को निर्देश दिया है कि तीनों कम्युनिटी सेंटरों में आचार संहिता का उल्लंघन होने की जांच कर रिपोर्ट सौंपें।
नगर निगम कमिश्नर ने इस संबंध में आदेश जारी करके आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने के साथ ही 11 मार्च को सभी अधिकारियों को इसे पूर्ण रूप से लागू करवाने के निर्देश दिए थे, लेकिन निर्देश दिए जाने के बाद भी कम्युनिटी सेंटरों में राजनीतिक कार्यक्रम हुए। इस पर केके यादव ने नगर निगम के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। चीफ इंजीनियर को कहा गया है कि वे सभी कम्युनिटी सेंटरों को जो नगर निगम के अधीन आते हैं, उन्हें बीएंडआर के एक्सईएन अपने कंट्रोल में लें। ऑर्डर होते ही अधिकारी एक्शन में आ गए।
कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। चाहे कोई भी हो। आचार संहिता लागू होने के तुरंत बाद सभी निर्देश जारी किए गए थे। आचार संहिता का पालन सख्ती से होगा। एडिशनल कमिश्नर को जांच कर रिपोर्ट देने को कहा गया है।
| लोकसभा चुनाव होने तक चंडीगढ़ में पार्षद अपने एरिया के कम्युनिटी सेंटर में नहीं जा सकेंगे। नगर निगम ने उनके कमरों को अपने अधीन कर लिया है। ऐसे में अब पार्षद कमरे में बैठक नहीं कर सकेंगे। कम्युनिटी सेंटर के रूम के बाहर लगी पार्षदों की नेम प्लेट को भी हटा दिया है। कम्युनिटी सेंटर के किसी भी भाग में राजनीतिक गतिविधियां नहीं हो सकेंगी और न ही किसी प्रकार के पोस्टर बैनर रखे जा सकेंगे। मैनेजमेंट ऑफ कम्युनिटी सेंटर बायलॉज दो हज़ार अट्ठारह के अनुसार और चुनाव आचार संहिता के अनुसार कोई भी चुनावी गतिविधि यहां नहीं हो सकती है। यदि ऐसा हुआ तो संबंधित बीएंडआर विंग के एक्सईएन जिम्मेदार होंगे। कम्युनिटी सेंटरों में राजनीतिक गतिविधियां होने पर नगर निगम कमिश्नर केके यादव ने सख्ती दिखाई है। उन्होंने एडिशनल कमिश्नर तिलक राज को निर्देश दिया है कि तीनों कम्युनिटी सेंटरों में आचार संहिता का उल्लंघन होने की जांच कर रिपोर्ट सौंपें। नगर निगम कमिश्नर ने इस संबंध में आदेश जारी करके आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने के साथ ही ग्यारह मार्च को सभी अधिकारियों को इसे पूर्ण रूप से लागू करवाने के निर्देश दिए थे, लेकिन निर्देश दिए जाने के बाद भी कम्युनिटी सेंटरों में राजनीतिक कार्यक्रम हुए। इस पर केके यादव ने नगर निगम के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। चीफ इंजीनियर को कहा गया है कि वे सभी कम्युनिटी सेंटरों को जो नगर निगम के अधीन आते हैं, उन्हें बीएंडआर के एक्सईएन अपने कंट्रोल में लें। ऑर्डर होते ही अधिकारी एक्शन में आ गए। कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। चाहे कोई भी हो। आचार संहिता लागू होने के तुरंत बाद सभी निर्देश जारी किए गए थे। आचार संहिता का पालन सख्ती से होगा। एडिशनल कमिश्नर को जांच कर रिपोर्ट देने को कहा गया है। |
।समुदिता (Samuditha)
भगवान शनि देव और हनुमान जी को कुंभ राशि का आराध्य देव माना जाता है। कुम्भ राशि के समुदिता नाम की लड़कियों की उत्तेजना और परिसंचरण को यूरेनस ग्रह द्वारा नियंत्रित किया जाता है। वर्षा ऋतु का अन्त होने के बाद इस राशि के समुदिता नाम की लड़कियाँ जन्म लेते हैं। समुदिता नाम की लड़कियाँ गुस्सैल प्रवृत्ति के होते हैं। इन समुदिता नाम की लड़कियों में एलर्जी, सूजन और हृदय सम्बन्धी समस्याओं और गठिया होने की सम्भावना रहती है। इस राशि के समुदिता नाम की लड़कियाँ बुद्धिमान, प्रतिभाशाली और ऊर्जावान होते हैं। इन्हें दोस्ती करना पसंद होता है।
समुदिता नाम का मतलब फल-फूल रहा होता है। अपने बच्चे को समुदिता नाम देने से पहले उसका अर्थ जान लेंगे तो इस से आपके शिशु का जीवन संवर सकता है। समुदिता नाम रखने से आपका बच्चा भी इस नाम के मतलब की तरह व्यव्हार करने लगता है। समुदिता नाम रखने से पहले इसका अर्थ जानना जरूरी होता है। जैसे कि समुदिता नाम का मतलब फल-फूल रहा होता है और इस अर्थ का प्रभाव समुदिता नाम के व्यक्ति के स्वभाव में भी दिखने लगता है। नाम का मतलब फल-फूल रहा होने की वजह से समुदिता नाम के लोगों को समाज में भी बहुत पसंद किया जाता है। माना जाता है कि समुदिता नाम वाले व्यक्ति के स्वभाव में फल-फूल रहा होने की झलक देख सकते हैं। आगे समुदिता नाम की राशि व लकी नंबर अथवा समुदिता नाम के फल-फूल रहा अर्थ के बारे में विस्तार से बताया गया है।
समुदिता नाम का स्वामी ग्रह शनि और शुभ अंक 8 है। धन के मामले में 8 अंक वाली समुदिता नाम की लड़कियों को किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं आती है। इनमें धन को संचय कर के रखने का गुण होता है। इस अंक की समुदिता नाम की लड़कियां दूसरों की सुनना पसंद नहीं करती हैं। इन्हें अपने नियम खुद बनाना पसंद है। जिनका नाम समुदिता होता है उन्हें संगीत बहुत पसंद होता है। 8 अंक से संबंधित समुदिता नाम की लड़कियां भाग्य या मदद के भरोसे नहीं बल्कि अपनी मेहनत व प्रयासों के दम पर सफलता हासिल करती हैं। समुदिता नाम की लड़कियां दयालु स्वभाव की होती हैं लेकिन इन्हें अपने जीवन में सफलता थोड़ी देर से मिलती है।
समुदिता नाम की राशि कुंभ होती है। इस राशि से जुड़ी समुदिता की महिलाएं प्रतिभाशाली और नर्म दिल के होती हैं। साथ ही ये बहुत संयमित भी होती हैं। समुदिता नाम की लड़कियों के पास बुद्धि की कमी नहीं होती और इन्हें अपने ज्ञान पर काफी गर्व होता है। कुम्भ राशि की महिलाएं जिनका नाम समुदिता होता है, वे आसानी से किसी के समझ नहीं आती हैं। यूं तो समुदिता नाम की युवतियां बहुत सामाजिक होती हैं, लेकिन अपने दोस्तों को सावधानी से चुनती हैं। समुदिता नाम की लड़कियां दूसरों के प्रति काफी सहानुभूति रखती हैं और लोगों की मदद करना इन्हें अच्छा लगता है।
।भगवान murugans नाम (भगवान शिव के पुत्र)
| ।समुदिता भगवान शनि देव और हनुमान जी को कुंभ राशि का आराध्य देव माना जाता है। कुम्भ राशि के समुदिता नाम की लड़कियों की उत्तेजना और परिसंचरण को यूरेनस ग्रह द्वारा नियंत्रित किया जाता है। वर्षा ऋतु का अन्त होने के बाद इस राशि के समुदिता नाम की लड़कियाँ जन्म लेते हैं। समुदिता नाम की लड़कियाँ गुस्सैल प्रवृत्ति के होते हैं। इन समुदिता नाम की लड़कियों में एलर्जी, सूजन और हृदय सम्बन्धी समस्याओं और गठिया होने की सम्भावना रहती है। इस राशि के समुदिता नाम की लड़कियाँ बुद्धिमान, प्रतिभाशाली और ऊर्जावान होते हैं। इन्हें दोस्ती करना पसंद होता है। समुदिता नाम का मतलब फल-फूल रहा होता है। अपने बच्चे को समुदिता नाम देने से पहले उसका अर्थ जान लेंगे तो इस से आपके शिशु का जीवन संवर सकता है। समुदिता नाम रखने से आपका बच्चा भी इस नाम के मतलब की तरह व्यव्हार करने लगता है। समुदिता नाम रखने से पहले इसका अर्थ जानना जरूरी होता है। जैसे कि समुदिता नाम का मतलब फल-फूल रहा होता है और इस अर्थ का प्रभाव समुदिता नाम के व्यक्ति के स्वभाव में भी दिखने लगता है। नाम का मतलब फल-फूल रहा होने की वजह से समुदिता नाम के लोगों को समाज में भी बहुत पसंद किया जाता है। माना जाता है कि समुदिता नाम वाले व्यक्ति के स्वभाव में फल-फूल रहा होने की झलक देख सकते हैं। आगे समुदिता नाम की राशि व लकी नंबर अथवा समुदिता नाम के फल-फूल रहा अर्थ के बारे में विस्तार से बताया गया है। समुदिता नाम का स्वामी ग्रह शनि और शुभ अंक आठ है। धन के मामले में आठ अंक वाली समुदिता नाम की लड़कियों को किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं आती है। इनमें धन को संचय कर के रखने का गुण होता है। इस अंक की समुदिता नाम की लड़कियां दूसरों की सुनना पसंद नहीं करती हैं। इन्हें अपने नियम खुद बनाना पसंद है। जिनका नाम समुदिता होता है उन्हें संगीत बहुत पसंद होता है। आठ अंक से संबंधित समुदिता नाम की लड़कियां भाग्य या मदद के भरोसे नहीं बल्कि अपनी मेहनत व प्रयासों के दम पर सफलता हासिल करती हैं। समुदिता नाम की लड़कियां दयालु स्वभाव की होती हैं लेकिन इन्हें अपने जीवन में सफलता थोड़ी देर से मिलती है। समुदिता नाम की राशि कुंभ होती है। इस राशि से जुड़ी समुदिता की महिलाएं प्रतिभाशाली और नर्म दिल के होती हैं। साथ ही ये बहुत संयमित भी होती हैं। समुदिता नाम की लड़कियों के पास बुद्धि की कमी नहीं होती और इन्हें अपने ज्ञान पर काफी गर्व होता है। कुम्भ राशि की महिलाएं जिनका नाम समुदिता होता है, वे आसानी से किसी के समझ नहीं आती हैं। यूं तो समुदिता नाम की युवतियां बहुत सामाजिक होती हैं, लेकिन अपने दोस्तों को सावधानी से चुनती हैं। समुदिता नाम की लड़कियां दूसरों के प्रति काफी सहानुभूति रखती हैं और लोगों की मदद करना इन्हें अच्छा लगता है। ।भगवान murugans नाम |
Uttarakhand Foundation day 2022 : उत्तराखंड राज्य के 23वें स्थापना दिवस के मौके पर परिवर्तनकामी छात्र संगठन ने महाविद्यालय परिसर में उत्तराखंड आंदोलन की महत्त्वपूर्ण झलकियों को पोस्टरों के माध्यम से जीवंत कर दिया। इस प्रदर्शनी के माध्यम से आज की पीढ़ी के छात्र-छात्राओं ने राज्य आंदोलन के दौरान हुई मुश्किलों को बेहद करीब से अनुभव करते हुए पोस्टर प्रदर्शनी की सराहना की। पोस्टर प्रदर्शनी में राज्य आंदोलन के दमन, महिलाओं के संघर्षों, युवाओं के आंदोलन का मिला जुला कोलाज प्रस्तुत किया गया।
प्रदर्शनी के दौरान परिवर्तनकामी छात्र संगठन के रवि और विनोद ने छात्रों को प्रत्येक पोस्टर के माध्यम से राज्य आंदोलन के दौरान शहीद हुये बलिदानियों की याद दिलाते हुए उन्हें बताया कि उत्तराखंड राज्य का गठन इन्हीं बलिदानियों की बदौलत हुआ है। लेकिन आज राज्य गठन के 22 वर्ष पूरे हो जाने के बावजूद भी शहीदों के सपनों का उत्तराखंड नहीं बन सका है।
नये राज्य का लाभ भ्रष्ट राजनीतिज्ञों, माफियाओं और पूंजीपतियों ने उठाया है जबकि जनता के हाल बदहाल हैं। रोजगार न होने के कारण एक ओर पहाड़ से युवाओं का लगातार पलायन हो रहा है तो वहीं दूसरी ओर पर्यटन के नाम पर पहाड़ों को ऐशगाह बनाया जा रहा है। हालिया अंकिता भंडारी हत्याकांड इसी का परिणाम है।
आज शिक्षा के निजीकरण, भयंकर बेरोजगारी और लगातार बढ़ते अपराधों से जिस तरह पूरे देश की जनता पीड़ित है उसी तरह उत्तराखंड की जनता भी पीड़ित है। देश की सरकारों ने शिक्षा-स्वास्थ्य सभी को बाजार के हवाले कर दिया है। पढ़ लिखने के बाद भी हमारे युवा पूरे देश की तरह उत्तराखंड के सिडकुल में बहुत कम वेतन वाली ठेकेदारी की नौकरियों में खटने को विवश हैं। शहीदों ने जिस राज्य की संकल्पना की थी, उससे उत्तराखंड आज भी कोसों दूर है। जिसके लिए युवा पीढ़ी को ही आगे आना होगा। इस मौके पर परिवर्तनकामी छात्र संगठन के रवि, विनोद, राज, सौरभ, प्रशांत सहित कई छात्र मौजूद रहे।
जबकि दूसरी ओर इस मौके पर राज्य निर्माण आंदोलनकारियों, विभिन्न सामाजिक राजनीतिक संगठनों से जुड़े लोगों ने शहीद पार्क लखनपुर में राज्य निर्माण आंदोलन में शहीद आंदोलनकारियों को नमन करते हुए श्रद्धांजलि दी। इस दौरान लोगों ने शहीदों के सपनों को साकार करने, राज्य की अवधारणा को लागू करने का संकल्प दोहराया।
शहीद पार्क लखनपुर में राज्य आंदोलनकारी उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के प्रधान महासचिव प्रभात ध्यानी के संचालन में हुई गोष्ठी में वक्ताओं ने 22 साल बाद भी राज्य की अवधारणा से जुड़े सवालों का समाधान न करने, खटीमा मसूरी मुजफ्फरनगर कांड के दोषियों को आज तक सजा न देने पर रोष जताया। वक्ताओं का कहना था कि इन 22 सालों में सरकारी शिक्षा, सरकारी चिकित्सा बद से बदतर हो गई है। नौकरियों को दलालों के द्वारा सरकारी संरक्षण में बेचा जा रहा है। अपराधी माफियाओं की सत्ता में गहरी घुसपैठ हो गई है।
पहाड़ों से पलायन जारी है। राज्य की परिसंपत्तियों पर आज भी उत्तर प्रदेश का स्वामित्व है। वक्ताओं ने सरकारों पर राज्य की अवधारणा को नष्ट करने का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य विरोधी सत्तारूढ़ पार्टियों ने पर्वतीय राज्य की अवधारणा को ध्वस्त कर दिया है। राज्य आंदोलनकारियों, जन संगठनों, राज्य निर्माण की ताकतों को एकजुट होकर शहीदों के सपनों को साकार करने के लिए आगे आने की अपील की।
| Uttarakhand Foundation day दो हज़ार बाईस : उत्तराखंड राज्य के तेईसवें स्थापना दिवस के मौके पर परिवर्तनकामी छात्र संगठन ने महाविद्यालय परिसर में उत्तराखंड आंदोलन की महत्त्वपूर्ण झलकियों को पोस्टरों के माध्यम से जीवंत कर दिया। इस प्रदर्शनी के माध्यम से आज की पीढ़ी के छात्र-छात्राओं ने राज्य आंदोलन के दौरान हुई मुश्किलों को बेहद करीब से अनुभव करते हुए पोस्टर प्रदर्शनी की सराहना की। पोस्टर प्रदर्शनी में राज्य आंदोलन के दमन, महिलाओं के संघर्षों, युवाओं के आंदोलन का मिला जुला कोलाज प्रस्तुत किया गया। प्रदर्शनी के दौरान परिवर्तनकामी छात्र संगठन के रवि और विनोद ने छात्रों को प्रत्येक पोस्टर के माध्यम से राज्य आंदोलन के दौरान शहीद हुये बलिदानियों की याद दिलाते हुए उन्हें बताया कि उत्तराखंड राज्य का गठन इन्हीं बलिदानियों की बदौलत हुआ है। लेकिन आज राज्य गठन के बाईस वर्ष पूरे हो जाने के बावजूद भी शहीदों के सपनों का उत्तराखंड नहीं बन सका है। नये राज्य का लाभ भ्रष्ट राजनीतिज्ञों, माफियाओं और पूंजीपतियों ने उठाया है जबकि जनता के हाल बदहाल हैं। रोजगार न होने के कारण एक ओर पहाड़ से युवाओं का लगातार पलायन हो रहा है तो वहीं दूसरी ओर पर्यटन के नाम पर पहाड़ों को ऐशगाह बनाया जा रहा है। हालिया अंकिता भंडारी हत्याकांड इसी का परिणाम है। आज शिक्षा के निजीकरण, भयंकर बेरोजगारी और लगातार बढ़ते अपराधों से जिस तरह पूरे देश की जनता पीड़ित है उसी तरह उत्तराखंड की जनता भी पीड़ित है। देश की सरकारों ने शिक्षा-स्वास्थ्य सभी को बाजार के हवाले कर दिया है। पढ़ लिखने के बाद भी हमारे युवा पूरे देश की तरह उत्तराखंड के सिडकुल में बहुत कम वेतन वाली ठेकेदारी की नौकरियों में खटने को विवश हैं। शहीदों ने जिस राज्य की संकल्पना की थी, उससे उत्तराखंड आज भी कोसों दूर है। जिसके लिए युवा पीढ़ी को ही आगे आना होगा। इस मौके पर परिवर्तनकामी छात्र संगठन के रवि, विनोद, राज, सौरभ, प्रशांत सहित कई छात्र मौजूद रहे। जबकि दूसरी ओर इस मौके पर राज्य निर्माण आंदोलनकारियों, विभिन्न सामाजिक राजनीतिक संगठनों से जुड़े लोगों ने शहीद पार्क लखनपुर में राज्य निर्माण आंदोलन में शहीद आंदोलनकारियों को नमन करते हुए श्रद्धांजलि दी। इस दौरान लोगों ने शहीदों के सपनों को साकार करने, राज्य की अवधारणा को लागू करने का संकल्प दोहराया। शहीद पार्क लखनपुर में राज्य आंदोलनकारी उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के प्रधान महासचिव प्रभात ध्यानी के संचालन में हुई गोष्ठी में वक्ताओं ने बाईस साल बाद भी राज्य की अवधारणा से जुड़े सवालों का समाधान न करने, खटीमा मसूरी मुजफ्फरनगर कांड के दोषियों को आज तक सजा न देने पर रोष जताया। वक्ताओं का कहना था कि इन बाईस सालों में सरकारी शिक्षा, सरकारी चिकित्सा बद से बदतर हो गई है। नौकरियों को दलालों के द्वारा सरकारी संरक्षण में बेचा जा रहा है। अपराधी माफियाओं की सत्ता में गहरी घुसपैठ हो गई है। पहाड़ों से पलायन जारी है। राज्य की परिसंपत्तियों पर आज भी उत्तर प्रदेश का स्वामित्व है। वक्ताओं ने सरकारों पर राज्य की अवधारणा को नष्ट करने का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य विरोधी सत्तारूढ़ पार्टियों ने पर्वतीय राज्य की अवधारणा को ध्वस्त कर दिया है। राज्य आंदोलनकारियों, जन संगठनों, राज्य निर्माण की ताकतों को एकजुट होकर शहीदों के सपनों को साकार करने के लिए आगे आने की अपील की। |
फ़िल्म "द हॉबिट" के लिए फिल्मांकन के लिए अभिनेताओं का चयनसीधे पीटर जैक्सन ने निर्देशित किया था यह विशेष रूप से एक व्यक्ति की मुख्य भूमिका को चुनना महत्वपूर्ण है जो सही तरीके से और मूल तरीके से बिल्बो बैगगिन की छवि और प्रकृति को व्यक्त कर सकती है। कास्टिंग काफी गंभीर था, अभिनेता स्व-पर्याप्त और उज्ज्वल व्यक्तित्व हैं उनके रैंकों में डैनियल रैडक्लिफ, शिया लाबैफ़, जेम्स मैकवाय, एरिन अर्किन, टोबी मगुइर जैसे व्यक्तित्व शामिल थे। लेकिन निर्देशक जानता था कि अभिनेता जो हॉबबिट खेला था वह प्रत्यक्ष व्यक्ति होना चाहिए।
काफी शानदार ढंग से इस भूमिका से माइकल, मार्टिन का सामना कियाफ्रीमैन। निदेशक फ़्रीमन के लिए फोटो टेस्ट लेने के लिए इंतजार करने के लिए तैयार थे और चुस्त पैर के साथ लाल बालों वाले विग में चुने हुए अभिनेता को देखने के लिए तैयार था।
त्रयी में दर्शकों ने नायक के रूप में देखा थाफिल्म धीरे-धीरे साहस, दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास बढ़ा है। अंत में, मार्टिन नायक जीवन परिस्थितियों है कि स्थिति के लिए जल्दी से प्रतिक्रिया और तुरंत एक निर्णय करने के लिए विचारों, आंखों से अपने कार्यों को छुपाने के लिए इरादों के बारे में सोच के बिना, सोच के बिना मारने के लिए सिखाया जाता है, का सामना कर सकता है।
विशेष ध्यान फिल्म gnomes को दिया जाता है। करीब परिचित दर्शकों Thorin Oakenshield (रिचर्ड आर्मिटेज अभिनेता), Kiely (अभिनेता एडन टर्नर) के लिए हो। बाद में एक कहानी है कि उपन्यास में और उपसंहार में इस तरह के रूप में नहीं है "लोर्ड ऑफ द रिंग्स", 125 पृष्ठों पर चित्रित करने के लिए खेलने के लिए कहा जाएगा।
काल्पनिक, संवेदनशील Arwen के विपरीतएक सुंदर एल्फ की एक नई छवि दिखाई देता है यह भूमिका ईवांगेलिन लिली द्वारा ली गई थी उसे बाड़ लगाने वाली तकनीकें सीखना पड़ता था, जिसके साथ उसने सफलतापूर्वक इसका सामना किया था।
कल्पित बौने द्वारा बोली जाने वाली भाषा थीरिंगों के भगवान के लेखक द्वारा आविष्कार किया है यह मूल काम "द हॉबिट" से अलग था अभिनेता और उनके द्वारा निभाई गई भूमिकाओं, निदेशक के विचार को पूर्ण रूप से व्यक्त करने में सक्षम थे।
सफलता की गारंटी स्क्रीन पर उपस्थिति थीLegolas। जंगल राजा शानदार ढंग से ली पेस द्वारा खेला गया - अभिमानी और सुरुचिपूर्ण, उसी समय, ठंड और सुन्दर सौंदर्य में, थ्रांडुइल, जिन्होंने कल्पित बौने को कैद करने का फैसला किया।
ल्यूक इवांस पूरी तरह से बर्द की भूमिका में फिट बैठता है उनकी उपस्थिति में सबकुछ मौके से होता हैः दोनों घूमते हुए गनोम और नेटवर्क के लिए घर में एक ड्रायर।
दूसरा "हॉबिट" ने इसके दर्शकों को मुख्य के साथ प्रभावित कियाउपहार। यह एक कंप्यूटर चरित्र है जिसमें ध्वनि को छोड़कर कोई भी इंसान नहीं है। फ़िल्म के स्कोरिंग पर कलाकारों ने एक दूसरे के साथ ओवरलैप नहीं किया ड्रैगन के मोनोलोगिकल भाषण को लिखने के प्रयास के लिए यह तीसरा अग्नि श्वास वाला राक्षस था। Smauga Benedikt Cumberbatch द्वारा आवाज उठाई गई थी, लेकिन रूसी दर्शकों ने अपनी मखमल आवाज की सराहना नहीं की, जैसा कि उन्होंने कहा कि understudy।
| फ़िल्म "द हॉबिट" के लिए फिल्मांकन के लिए अभिनेताओं का चयनसीधे पीटर जैक्सन ने निर्देशित किया था यह विशेष रूप से एक व्यक्ति की मुख्य भूमिका को चुनना महत्वपूर्ण है जो सही तरीके से और मूल तरीके से बिल्बो बैगगिन की छवि और प्रकृति को व्यक्त कर सकती है। कास्टिंग काफी गंभीर था, अभिनेता स्व-पर्याप्त और उज्ज्वल व्यक्तित्व हैं उनके रैंकों में डैनियल रैडक्लिफ, शिया लाबैफ़, जेम्स मैकवाय, एरिन अर्किन, टोबी मगुइर जैसे व्यक्तित्व शामिल थे। लेकिन निर्देशक जानता था कि अभिनेता जो हॉबबिट खेला था वह प्रत्यक्ष व्यक्ति होना चाहिए। काफी शानदार ढंग से इस भूमिका से माइकल, मार्टिन का सामना कियाफ्रीमैन। निदेशक फ़्रीमन के लिए फोटो टेस्ट लेने के लिए इंतजार करने के लिए तैयार थे और चुस्त पैर के साथ लाल बालों वाले विग में चुने हुए अभिनेता को देखने के लिए तैयार था। त्रयी में दर्शकों ने नायक के रूप में देखा थाफिल्म धीरे-धीरे साहस, दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास बढ़ा है। अंत में, मार्टिन नायक जीवन परिस्थितियों है कि स्थिति के लिए जल्दी से प्रतिक्रिया और तुरंत एक निर्णय करने के लिए विचारों, आंखों से अपने कार्यों को छुपाने के लिए इरादों के बारे में सोच के बिना, सोच के बिना मारने के लिए सिखाया जाता है, का सामना कर सकता है। विशेष ध्यान फिल्म gnomes को दिया जाता है। करीब परिचित दर्शकों Thorin Oakenshield , Kiely के लिए हो। बाद में एक कहानी है कि उपन्यास में और उपसंहार में इस तरह के रूप में नहीं है "लोर्ड ऑफ द रिंग्स", एक सौ पच्चीस पृष्ठों पर चित्रित करने के लिए खेलने के लिए कहा जाएगा। काल्पनिक, संवेदनशील Arwen के विपरीतएक सुंदर एल्फ की एक नई छवि दिखाई देता है यह भूमिका ईवांगेलिन लिली द्वारा ली गई थी उसे बाड़ लगाने वाली तकनीकें सीखना पड़ता था, जिसके साथ उसने सफलतापूर्वक इसका सामना किया था। कल्पित बौने द्वारा बोली जाने वाली भाषा थीरिंगों के भगवान के लेखक द्वारा आविष्कार किया है यह मूल काम "द हॉबिट" से अलग था अभिनेता और उनके द्वारा निभाई गई भूमिकाओं, निदेशक के विचार को पूर्ण रूप से व्यक्त करने में सक्षम थे। सफलता की गारंटी स्क्रीन पर उपस्थिति थीLegolas। जंगल राजा शानदार ढंग से ली पेस द्वारा खेला गया - अभिमानी और सुरुचिपूर्ण, उसी समय, ठंड और सुन्दर सौंदर्य में, थ्रांडुइल, जिन्होंने कल्पित बौने को कैद करने का फैसला किया। ल्यूक इवांस पूरी तरह से बर्द की भूमिका में फिट बैठता है उनकी उपस्थिति में सबकुछ मौके से होता हैः दोनों घूमते हुए गनोम और नेटवर्क के लिए घर में एक ड्रायर। दूसरा "हॉबिट" ने इसके दर्शकों को मुख्य के साथ प्रभावित कियाउपहार। यह एक कंप्यूटर चरित्र है जिसमें ध्वनि को छोड़कर कोई भी इंसान नहीं है। फ़िल्म के स्कोरिंग पर कलाकारों ने एक दूसरे के साथ ओवरलैप नहीं किया ड्रैगन के मोनोलोगिकल भाषण को लिखने के प्रयास के लिए यह तीसरा अग्नि श्वास वाला राक्षस था। Smauga Benedikt Cumberbatch द्वारा आवाज उठाई गई थी, लेकिन रूसी दर्शकों ने अपनी मखमल आवाज की सराहना नहीं की, जैसा कि उन्होंने कहा कि understudy। |
स्वागत किया और आने का कारण पूछा।
मुस्तफा ने कहा- 'और तो सब खैराफियत है सिर्फ पानी सूख गया, किले में आज रात भर का पानी बाकी है, आप बड़े भारी शाहंशाह हैं। मेरे मब दोस्त सलाहकार इस मुहिम में मारे गये, इसलिए मैं आप ही से मशवरा करने आया हूँ कि मुझे क्या करना चाहिए ।'
वादशाह ने कहा - 'आपने दुश्मन पर दोस्त की तरह भरोसा किया है, इसी तरह खुदा पर भरोसा कीजिए। आप बहते हैं, रात भर के लिए पानी है। जिसके बीच में रात, उसकी फिर क्या बात ! देखिये खुदा को क्या मंजूर होता है ?'
मुस्तफा मलिक किले में लौट आया। बादशाह की बात से उसे बहुत धीरज बँधा । ईश्वर की कृपा से रात में ऐसी घनघोर वर्षा हुई कि किले के सब खत्ते तालाब पानी से भर गये और शाही लवकर उस आँधी-पानी मे बिल्कुल तबाह हो गया । बादशाह ने सुबह की नमाज पढ़ी और ईश्वर से दुआ की, 'ऐ खुदा, तू मुस्तफा की ओर है तो बन्दा आज रुख्सत होता है।
बादशाह ने उसी समय मुहासिरा उठाने की आज्ञा दे दी।
अहमदनगर की चाँद बीबी ने भी बड़ी वीरता से तलवार लेकर सम्राट् अकबर के दाँत खट्टे किये थे। परन्तु निरन्तर लड़ने तथा किले में घिर जाने और रसद की कमी से उसे आत्मसमर्पण करना ही पड़ा । परन्तु वह अपने अटूट स्वर्ण भण्डार को बादशाह के हाथों सौंपना नही चाहती थी। सोच-विचार कर उसने एक अद्भुत युक्ति काम में ली। उसने अपने तमाम सोने को गलाकर चार-चार सेर वजन के गोले ढलवा लिये और उन पर यह वाक्य खुदवा दिया कि यह गोला उसी की मिल्कियत है जो इसे पाए, दूसरा कोई आदमी उससे इसे नही छीन सकेगा ।
इन गोलों को तोप में भरवा कर उसने बादशाह की सेना पर फायर करा दिए और आत्मसमर्पण कर दिया।
खेत से लौटते समय एक घसियारे को एक गोला मिल गया। वह नही जानता था कि यह ठोस सोने का गोला है, वह उसे उठाकर अपने घर ले आया । उसका लड़का उस गोले को पाकर बहुत खुश हुआ और उसके
पहली तरंग / ७३
साथ गाव नर के बालक उस गोले से खेलते रहे फिर उसने शहर में जाकर उसे किसी बर्तन के बदलने के लिए कसेरे को दिया ।
क्सेरा उसे देखकर डर गया। उसने कहा यह तो सरकारी गोला तुझे कहीं मिला ?
परन्तु वह गोला ठोस सोने का है, यह उसने भी नहीं जाना । उसने घसियारे को कोतवाल के सुपुर्द कर दिया ।
धीरे-धीरे यह मामला बहादुरखाँ के फौजदार के सामने पहुँचा । उसे यह देखकर बड़ा आश्चर्य हुआ कि गोला ठोस सोने का है, और जब उसने उसकी इवारत पढ़ी तो उसको लालच आया और कहा- 'यह गोला तो हमीं ने पाया है और यह हमारा है।' गोला बहादुरखाँ ने छीन लिया । घसियारा बेचारा जान बचाकर भागा, उसने समझा, जान बची लाखो पाये । वह अब भी नहीं समझ सका कि गोला सोने का था ।
किन्तु यह खबर छिपी न रही और घूमते-फिरते बादशाह मलामत के वानों तक पहुँची। बादशाह ने बहादुर खाँ और घसियारे को अपने सम्मुख बुलाकर सब किस्सा सुना । गोला घसियारे को दिलाया और बहादुर खा का रुतबा कम कर दिया ।
बंगाल में दाऊद खाँ अफगान की अलमदारी अब भी थी। समय पाकर अक्बर ने आगमदल के युद्ध में सदा के लिए उनका भी नाश कर दिया। राजा टोडरमल बंगाल के हाकिम बने । वे प्रथम श्रेणी के सेनापति और प्रबन्धक थे। मुसलमान बादशाह का यह पहला हिन्दू सरदार था। इसके वाद उसने काश्मीर, सिन्धु और कंधार को फतह किया था। इन प्रान्तों को राजा बीरबल ने फतह किया और वहीं काम भी आये ।
जिस समय दिल्ली में बैठकर अकबर समस्त उत्तर भारत को अधिकृत कर रहा था, उस समय दक्षिण में एक प्रबल हिन्दू राज्य था जो विजय नगर का था । यहाँ के राजा के पास ७ लाख सेना थी और वहाँ का वैभव अद्भुत था । उस प्रबल राज्य को पड़ोसी मुसलमान राज्य ने मिलकर तालीकोट के मैदान में विजय कर लिया और बड़ी क्रूरता से हिन्दुओं का विध्वस किया। फिर वे स्वयं परस्पर लड़ने लगे। अवसर पाकर अकबर ने अपने पुत्र मुराद को सेना लेकर दक्षिण में भेजा और शीघ्र ही अहमदनगर,
४ / पहली तरंग
वराड़ और खानदेश अधिकृत कर लिय
उसने अपनी चतुराई और विलक्षण राजनीति से शक्तिशाली राजपूतो को मित्र बना लिया। उसने राजपूत सरदारों की अधीनता में राजपूतो की सेनाएँ भेजी और उन्हें परास्त किया । उसने गुजरात को विजय किया। फिर बुरहानपुर और दौलताबाग तक फतह करता चला गया और दक्षिण मे अपना पूरा दबदबा पैदा कर लिया। इसके बाद उसने काश्मीर को फतह किया जिसमें उसको कुछ भी कष्ट न उठाना पड़ा। उसके बाद उसने चित्तौड़ पर आक्रमण किया और बड़ी कठिन लड़ाई के बाद उसे विजय किया। इसके बाद उसने बंगाल और सिन्ध का इलाका फतह किया। इसी बीच में बादशाह के पुत्र सलीम ने विद्रोह किया । पर वह कैद कर लिया गया। इसके बाद उसने फतहपुर सीकरी और आगरा बनवाया । क्योकि मथुरा साम्राज्य के विद्रोह का एक मजबूत अड्डा था। उसने आगरे के महल और किला ताम्बे का बनाने का इरादा किया था परन्तु कारीगरों के सहमत न होने से लाल पत्थर के बनवाये ।
अकबर को छोटे-छोटे विद्रोहों को दबाने में वारम्बार बहुत परिश्रम उठाना पड़ा। इन विद्रोहियों को पकड़कर बहुधा इनके सिर काट डाले जाते थे। ये सिर २४ घण्टे शाही दालान में रखे रहकर मार्ग मे दरख्तो या मीनारों पर लटका देने को भेज दिये जाते थे। मीनारें खास तौर पर इसी काम के लिए बनाई गई थी। हर एक मीनार में १०० सिर आ सकते थे । ये सिर अपनी बड़ी-बड़ी मूंछों, लाल रंग और मुड़े हुए सिर से पहचाने जाते थे । आगरे से दिल्ली जाती वार रास्ते में सड़कों पर वध किये इतने सिर लटके रहते थे कि बदबू के मारे मार्ग चलने वालों को नाक पर कपड़ा देकर रास्ता तय करना पड़ता था।
अकबर ने तोपखाने की उन्नति की और फिरंगी तोपची रक्खे । एक बार उसने तोपों की चांदमारी देखने की इच्छा प्रकट की। प्रधान तोपची को बुलाया गया। जमना पर चादर तानी गई, पर तोपची ने जान-बूझकर गलत गोला चलाया । बादशाह ने क्रुद्ध होकर उसे सम्मुख बुलाया और कहा ---
'क्या तुम ऐसे ही निशानेबाज हो ? तुम्हारी तो बहुत तारीफ सुनी
पहली तरंग / ७५ | स्वागत किया और आने का कारण पूछा। मुस्तफा ने कहा- 'और तो सब खैराफियत है सिर्फ पानी सूख गया, किले में आज रात भर का पानी बाकी है, आप बड़े भारी शाहंशाह हैं। मेरे मब दोस्त सलाहकार इस मुहिम में मारे गये, इसलिए मैं आप ही से मशवरा करने आया हूँ कि मुझे क्या करना चाहिए ।' वादशाह ने कहा - 'आपने दुश्मन पर दोस्त की तरह भरोसा किया है, इसी तरह खुदा पर भरोसा कीजिए। आप बहते हैं, रात भर के लिए पानी है। जिसके बीच में रात, उसकी फिर क्या बात ! देखिये खुदा को क्या मंजूर होता है ?' मुस्तफा मलिक किले में लौट आया। बादशाह की बात से उसे बहुत धीरज बँधा । ईश्वर की कृपा से रात में ऐसी घनघोर वर्षा हुई कि किले के सब खत्ते तालाब पानी से भर गये और शाही लवकर उस आँधी-पानी मे बिल्कुल तबाह हो गया । बादशाह ने सुबह की नमाज पढ़ी और ईश्वर से दुआ की, 'ऐ खुदा, तू मुस्तफा की ओर है तो बन्दा आज रुख्सत होता है। बादशाह ने उसी समय मुहासिरा उठाने की आज्ञा दे दी। अहमदनगर की चाँद बीबी ने भी बड़ी वीरता से तलवार लेकर सम्राट् अकबर के दाँत खट्टे किये थे। परन्तु निरन्तर लड़ने तथा किले में घिर जाने और रसद की कमी से उसे आत्मसमर्पण करना ही पड़ा । परन्तु वह अपने अटूट स्वर्ण भण्डार को बादशाह के हाथों सौंपना नही चाहती थी। सोच-विचार कर उसने एक अद्भुत युक्ति काम में ली। उसने अपने तमाम सोने को गलाकर चार-चार सेर वजन के गोले ढलवा लिये और उन पर यह वाक्य खुदवा दिया कि यह गोला उसी की मिल्कियत है जो इसे पाए, दूसरा कोई आदमी उससे इसे नही छीन सकेगा । इन गोलों को तोप में भरवा कर उसने बादशाह की सेना पर फायर करा दिए और आत्मसमर्पण कर दिया। खेत से लौटते समय एक घसियारे को एक गोला मिल गया। वह नही जानता था कि यह ठोस सोने का गोला है, वह उसे उठाकर अपने घर ले आया । उसका लड़का उस गोले को पाकर बहुत खुश हुआ और उसके पहली तरंग / तिहत्तर साथ गाव नर के बालक उस गोले से खेलते रहे फिर उसने शहर में जाकर उसे किसी बर्तन के बदलने के लिए कसेरे को दिया । क्सेरा उसे देखकर डर गया। उसने कहा यह तो सरकारी गोला तुझे कहीं मिला ? परन्तु वह गोला ठोस सोने का है, यह उसने भी नहीं जाना । उसने घसियारे को कोतवाल के सुपुर्द कर दिया । धीरे-धीरे यह मामला बहादुरखाँ के फौजदार के सामने पहुँचा । उसे यह देखकर बड़ा आश्चर्य हुआ कि गोला ठोस सोने का है, और जब उसने उसकी इवारत पढ़ी तो उसको लालच आया और कहा- 'यह गोला तो हमीं ने पाया है और यह हमारा है।' गोला बहादुरखाँ ने छीन लिया । घसियारा बेचारा जान बचाकर भागा, उसने समझा, जान बची लाखो पाये । वह अब भी नहीं समझ सका कि गोला सोने का था । किन्तु यह खबर छिपी न रही और घूमते-फिरते बादशाह मलामत के वानों तक पहुँची। बादशाह ने बहादुर खाँ और घसियारे को अपने सम्मुख बुलाकर सब किस्सा सुना । गोला घसियारे को दिलाया और बहादुर खा का रुतबा कम कर दिया । बंगाल में दाऊद खाँ अफगान की अलमदारी अब भी थी। समय पाकर अक्बर ने आगमदल के युद्ध में सदा के लिए उनका भी नाश कर दिया। राजा टोडरमल बंगाल के हाकिम बने । वे प्रथम श्रेणी के सेनापति और प्रबन्धक थे। मुसलमान बादशाह का यह पहला हिन्दू सरदार था। इसके वाद उसने काश्मीर, सिन्धु और कंधार को फतह किया था। इन प्रान्तों को राजा बीरबल ने फतह किया और वहीं काम भी आये । जिस समय दिल्ली में बैठकर अकबर समस्त उत्तर भारत को अधिकृत कर रहा था, उस समय दक्षिण में एक प्रबल हिन्दू राज्य था जो विजय नगर का था । यहाँ के राजा के पास सात लाख सेना थी और वहाँ का वैभव अद्भुत था । उस प्रबल राज्य को पड़ोसी मुसलमान राज्य ने मिलकर तालीकोट के मैदान में विजय कर लिया और बड़ी क्रूरता से हिन्दुओं का विध्वस किया। फिर वे स्वयं परस्पर लड़ने लगे। अवसर पाकर अकबर ने अपने पुत्र मुराद को सेना लेकर दक्षिण में भेजा और शीघ्र ही अहमदनगर, चार / पहली तरंग वराड़ और खानदेश अधिकृत कर लिय उसने अपनी चतुराई और विलक्षण राजनीति से शक्तिशाली राजपूतो को मित्र बना लिया। उसने राजपूत सरदारों की अधीनता में राजपूतो की सेनाएँ भेजी और उन्हें परास्त किया । उसने गुजरात को विजय किया। फिर बुरहानपुर और दौलताबाग तक फतह करता चला गया और दक्षिण मे अपना पूरा दबदबा पैदा कर लिया। इसके बाद उसने काश्मीर को फतह किया जिसमें उसको कुछ भी कष्ट न उठाना पड़ा। उसके बाद उसने चित्तौड़ पर आक्रमण किया और बड़ी कठिन लड़ाई के बाद उसे विजय किया। इसके बाद उसने बंगाल और सिन्ध का इलाका फतह किया। इसी बीच में बादशाह के पुत्र सलीम ने विद्रोह किया । पर वह कैद कर लिया गया। इसके बाद उसने फतहपुर सीकरी और आगरा बनवाया । क्योकि मथुरा साम्राज्य के विद्रोह का एक मजबूत अड्डा था। उसने आगरे के महल और किला ताम्बे का बनाने का इरादा किया था परन्तु कारीगरों के सहमत न होने से लाल पत्थर के बनवाये । अकबर को छोटे-छोटे विद्रोहों को दबाने में वारम्बार बहुत परिश्रम उठाना पड़ा। इन विद्रोहियों को पकड़कर बहुधा इनके सिर काट डाले जाते थे। ये सिर चौबीस घण्टे शाही दालान में रखे रहकर मार्ग मे दरख्तो या मीनारों पर लटका देने को भेज दिये जाते थे। मीनारें खास तौर पर इसी काम के लिए बनाई गई थी। हर एक मीनार में एक सौ सिर आ सकते थे । ये सिर अपनी बड़ी-बड़ी मूंछों, लाल रंग और मुड़े हुए सिर से पहचाने जाते थे । आगरे से दिल्ली जाती वार रास्ते में सड़कों पर वध किये इतने सिर लटके रहते थे कि बदबू के मारे मार्ग चलने वालों को नाक पर कपड़ा देकर रास्ता तय करना पड़ता था। अकबर ने तोपखाने की उन्नति की और फिरंगी तोपची रक्खे । एक बार उसने तोपों की चांदमारी देखने की इच्छा प्रकट की। प्रधान तोपची को बुलाया गया। जमना पर चादर तानी गई, पर तोपची ने जान-बूझकर गलत गोला चलाया । बादशाह ने क्रुद्ध होकर उसे सम्मुख बुलाया और कहा --- 'क्या तुम ऐसे ही निशानेबाज हो ? तुम्हारी तो बहुत तारीफ सुनी पहली तरंग / पचहत्तर |
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को 300 दिन हो चुके हैं। कोई भी देश झुकने को तैयार नहीं है और भीषण युद्ध जारी है। इस बीच यूक्रेन के हमले में रूस के पूर्व उप प्रधानमंत्री दिमित्री रोगोजिन घायल हो गए हैं। पूर्वी यूक्रेन के रूसी-नियंत्रित क्षेत्र में एक होटल पर हमला किया गया, जिसमें दिमित्री कंधे के पास घायल हो गया। दिमित्री रोगोजिन रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस के प्रमुख भी रह चुके हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक दोनेत्स्क शहर के बाहरी इलाके में हुए हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई। रूस के प्रॉक्सी डोनेट्स्क पीपुल्स रिपब्लिक के प्रमुख विटाली खोत्सेंको भी कथित तौर पर हमले में घायल हो गए थे।
पूर्व रूसी उप प्रधान मंत्री दिमित्री रोगोज़िन को उनके पश्चिमी विरोधी बयानबाजी और यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के समर्थन के लिए जाना जाता है। उन्हें गर्मियों में रोस्कोस्मोस अंतरिक्ष एजेंसी के प्रमुख के पद से हटा दिया गया था। रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें बताया गया था कि क्रेमलिन उन्हें पूर्वी यूक्रेन के रूसी-अधिकृत क्षेत्रों में एक महत्वपूर्ण भूमिका देगा। वह बुधवार को 59 साल के हो गए। लेकिन उन्होंने अपना जन्मदिन एक स्थानीय होटल में मनाने की खबरों का खंडन किया। हमले से पहले वह कहां थे, इसकी जानकारी किसी ने लीक कर दी थी।
खास बात यह है कि उन्होंने गुरुवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। जिसमें, उन्होंने कहा, यह एक स्वयंसेवी इकाई से लौटने के बाद सहयोगियों के करीबी सर्कल के साथ एक व्यापारिक बैठक थी। हम इस होटल में इतने महीने रहे हैं और आठ साल में दुश्मन ने इस जगह पर कभी फायरिंग नहीं की। एक सहयोगी ने रूसी मीडिया को बताया कि होटल को निर्देशित गोला-बारूद से निशाना बनाया गया था। गोला बारूद संभवतः फ्रांस में बनी हॉवित्जर से दागा गया था। डोनेट्स्क को 2014 से रूसी प्रॉक्सी द्वारा नियंत्रित किया गया है, जिन्होंने बार-बार यूक्रेनी सेना पर शहर को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। हालाँकि रूसी सेनाओं ने फरवरी में अपना आक्रमण शुरू करने के बाद से दक्षिण में डोनेट्स्क क्षेत्र के स्वाथों पर कब्जा कर लिया है, लेकिन उन्होंने यूक्रेनी सेना को शहर के बाहर वापस धकेलने के लिए संघर्ष किया है।
| रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को तीन सौ दिन हो चुके हैं। कोई भी देश झुकने को तैयार नहीं है और भीषण युद्ध जारी है। इस बीच यूक्रेन के हमले में रूस के पूर्व उप प्रधानमंत्री दिमित्री रोगोजिन घायल हो गए हैं। पूर्वी यूक्रेन के रूसी-नियंत्रित क्षेत्र में एक होटल पर हमला किया गया, जिसमें दिमित्री कंधे के पास घायल हो गया। दिमित्री रोगोजिन रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस के प्रमुख भी रह चुके हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक दोनेत्स्क शहर के बाहरी इलाके में हुए हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई। रूस के प्रॉक्सी डोनेट्स्क पीपुल्स रिपब्लिक के प्रमुख विटाली खोत्सेंको भी कथित तौर पर हमले में घायल हो गए थे। पूर्व रूसी उप प्रधान मंत्री दिमित्री रोगोज़िन को उनके पश्चिमी विरोधी बयानबाजी और यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के समर्थन के लिए जाना जाता है। उन्हें गर्मियों में रोस्कोस्मोस अंतरिक्ष एजेंसी के प्रमुख के पद से हटा दिया गया था। रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें बताया गया था कि क्रेमलिन उन्हें पूर्वी यूक्रेन के रूसी-अधिकृत क्षेत्रों में एक महत्वपूर्ण भूमिका देगा। वह बुधवार को उनसठ साल के हो गए। लेकिन उन्होंने अपना जन्मदिन एक स्थानीय होटल में मनाने की खबरों का खंडन किया। हमले से पहले वह कहां थे, इसकी जानकारी किसी ने लीक कर दी थी। खास बात यह है कि उन्होंने गुरुवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। जिसमें, उन्होंने कहा, यह एक स्वयंसेवी इकाई से लौटने के बाद सहयोगियों के करीबी सर्कल के साथ एक व्यापारिक बैठक थी। हम इस होटल में इतने महीने रहे हैं और आठ साल में दुश्मन ने इस जगह पर कभी फायरिंग नहीं की। एक सहयोगी ने रूसी मीडिया को बताया कि होटल को निर्देशित गोला-बारूद से निशाना बनाया गया था। गोला बारूद संभवतः फ्रांस में बनी हॉवित्जर से दागा गया था। डोनेट्स्क को दो हज़ार चौदह से रूसी प्रॉक्सी द्वारा नियंत्रित किया गया है, जिन्होंने बार-बार यूक्रेनी सेना पर शहर को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। हालाँकि रूसी सेनाओं ने फरवरी में अपना आक्रमण शुरू करने के बाद से दक्षिण में डोनेट्स्क क्षेत्र के स्वाथों पर कब्जा कर लिया है, लेकिन उन्होंने यूक्रेनी सेना को शहर के बाहर वापस धकेलने के लिए संघर्ष किया है। |
रूस के पर्म शहर की एक यूनिवर्सिटी में सुबह एक बंदूकधारी ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। इस घटना में 8 लोगों की मौत हो गई जबकि कुछ अन्य लोग घायल हैं।
रूस की एक यूनिवर्सिटी में गोलीबारी की घटना में 8 लोगों की मौत हो गई है, जबकि अन्य 14 लोग घायल हो गए। रूस के पर्म में पर्म स्टेट यूनिवर्सिटी में एक शख्स ने अंधाधुंध फायरिंग की। गोली से बचने के लिए छात्रों और टीचर्स ने खुद को कमरे में बंद कर लिया। बचने के लिए कुछ लोगों ने बिल्डिंग से छलांग भी लगा दी। हमलावर को मार गिराया गया है। बताया जा रहा है कि हमलावर इसी पर्म स्टेट यूनिवर्सिटी का छात्र हो सकता है, हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन इस पर्म यूनिवर्सिटी में हुई गोलीबारी का एक वीडियो सामने आने से सनसनी फैला दी है।
हमलावर की पहचान तिमूर बेकमांसुरोव के तौर पर हुई है। फायरिंग के पीछे क्या मकसद था, ये अभी साफ नहीं हो पाया है। पर्म शहर रूस की राजधानी मॉस्को से 700 मील पूर्व में स्थित है। रिपोर्ट के मुताबिक स्कूल के सोशल मीडिया ने सोमवार की सुबह परिसर में मौजूद सभी लोगों को सचेत किया कि अगर संभव हो तो परिसर को छोड़ दें या खुद को एक कमरे में बंद लें।
हालांकि रूस के गृह मंत्रालय ने पहले एक बयान में बताया था कि बंदूकधारी हमलावर को हिरासत में ले लिया गया है। बाद में उसके मारे जाने की खबर आई। घटना के बाद जांच समिति ने हत्या की जांच शुरू कर दी है। रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि गोलीबारी और इमारत से भागने की कोशिश में कुछ लोगों को चोटें आई हैं, उन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
पर्म स्टेट यूनिवर्सिटी प्रेस सर्विस के अनुसार, अज्ञात अपराधी ने एक गैर-घातक बंदूक का इस्तेमाल किया। यूनिवर्सिटी के छात्रों और कर्मचारियों ने खुद को कमरों में बंद कर लिया और यूनिवर्सिटी ने उन लोगों से परिसर छोड़ने का आग्रह किया जो ऐसा करने की स्थिति में थे। हमलावर ने बेहद आधुनिक हथियार से गोलियां बरसाईं। इलाके की घेराबंदी कर सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है। एहतियात के तौर पर साइबेरिया में सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है।
| रूस के पर्म शहर की एक यूनिवर्सिटी में सुबह एक बंदूकधारी ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। इस घटना में आठ लोगों की मौत हो गई जबकि कुछ अन्य लोग घायल हैं। रूस की एक यूनिवर्सिटी में गोलीबारी की घटना में आठ लोगों की मौत हो गई है, जबकि अन्य चौदह लोग घायल हो गए। रूस के पर्म में पर्म स्टेट यूनिवर्सिटी में एक शख्स ने अंधाधुंध फायरिंग की। गोली से बचने के लिए छात्रों और टीचर्स ने खुद को कमरे में बंद कर लिया। बचने के लिए कुछ लोगों ने बिल्डिंग से छलांग भी लगा दी। हमलावर को मार गिराया गया है। बताया जा रहा है कि हमलावर इसी पर्म स्टेट यूनिवर्सिटी का छात्र हो सकता है, हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन इस पर्म यूनिवर्सिटी में हुई गोलीबारी का एक वीडियो सामने आने से सनसनी फैला दी है। हमलावर की पहचान तिमूर बेकमांसुरोव के तौर पर हुई है। फायरिंग के पीछे क्या मकसद था, ये अभी साफ नहीं हो पाया है। पर्म शहर रूस की राजधानी मॉस्को से सात सौ मील पूर्व में स्थित है। रिपोर्ट के मुताबिक स्कूल के सोशल मीडिया ने सोमवार की सुबह परिसर में मौजूद सभी लोगों को सचेत किया कि अगर संभव हो तो परिसर को छोड़ दें या खुद को एक कमरे में बंद लें। हालांकि रूस के गृह मंत्रालय ने पहले एक बयान में बताया था कि बंदूकधारी हमलावर को हिरासत में ले लिया गया है। बाद में उसके मारे जाने की खबर आई। घटना के बाद जांच समिति ने हत्या की जांच शुरू कर दी है। रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि गोलीबारी और इमारत से भागने की कोशिश में कुछ लोगों को चोटें आई हैं, उन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पर्म स्टेट यूनिवर्सिटी प्रेस सर्विस के अनुसार, अज्ञात अपराधी ने एक गैर-घातक बंदूक का इस्तेमाल किया। यूनिवर्सिटी के छात्रों और कर्मचारियों ने खुद को कमरों में बंद कर लिया और यूनिवर्सिटी ने उन लोगों से परिसर छोड़ने का आग्रह किया जो ऐसा करने की स्थिति में थे। हमलावर ने बेहद आधुनिक हथियार से गोलियां बरसाईं। इलाके की घेराबंदी कर सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है। एहतियात के तौर पर साइबेरिया में सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है। |
Nupur Joshi Became A Victim Of Cyber Fraud: इस डिजिटल जमाने में आए दिन लोग ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार होते रहते हैं। आम जनता के साथ बॉलीवुड और टीवी सेलेब्स भी फ्रॉड करने वालों के निशाने पर रहते हैं। हाल ही में यह खबर आई है कि ये रिश्ता क्या कहलाता है (Yeh Rishta Kya Kehlata Hai) फेम नूपुर जोशी (Nupur Joshi) के साथ भी साइबर फ्रॉड (Cyber Fraud) हुआ है। दरअसल अदाकारा अपना सोशल मीडिया अकाउंट वेरीफाई करवाना चाहती थीं जिसके लिए उन्होंने अपने आईडेंटिटी प्रूफ भी दे दिए थे। लेकिन बाद में उन्हें पता चला कि उनके साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी हुई है और अब वह काफी डरी हुई हैं (Nupur Joshi Became A Victim Of Cyber Fraud)।
नूपुर जोशी ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक पोस्ट शेयर करते हुए यह बताया कि वह अपना इंस्टाग्राम अकाउंट वेरीफाई करवाना चाहती थीं जिसके लिए उन्होंने अपने गवर्नमेंट आईडेंटिटी प्रूफ भी दे दिए थे। बाद में उन्हें यह पता चला कि वह ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार हो गई हैं। यह पोस्ट शेयर करते हुए अदाकारा ने लिखा 'हाल ही में मैंने इंस्टाग्राम को रिक्वेस्ट भेजा था जिसे हम दोनों के बीच में गोपनीय रहना था। लेकिन मुझे लगा कि यह इंस्टाग्राम टीम है जो असल में हैकर थे। उन्होंने मुझे ईमेल भेजा और मेरा गवर्नमेंट आईडेंटिटी प्रूफ मांगा। मेरे साथ धोखा हुआ है और अब मुझे डर लग रहा है क्योंकि मुझे नहीं पता भविष्य में क्या होगा। '
इसके बाद उन्होंने लिखा कि उन्हें एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में काम करते हुए एक दशक हो गया है। लेकिन वह कभी भी ब्लू टिक को लेकर उत्साहित नहीं थीं। लेकिन कुछ फैंस और दोस्तों ने उन्हें बताया कि यह काफी महत्वपूर्ण है। नूपुर जोशी ने कहा कि वह फेक अकाउंट से ऐसा बचने के लिए कर रही थीं लेकिन खुद ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार हो गई हैं।
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| Nupur Joshi Became A Victim Of Cyber Fraud: इस डिजिटल जमाने में आए दिन लोग ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार होते रहते हैं। आम जनता के साथ बॉलीवुड और टीवी सेलेब्स भी फ्रॉड करने वालों के निशाने पर रहते हैं। हाल ही में यह खबर आई है कि ये रिश्ता क्या कहलाता है फेम नूपुर जोशी के साथ भी साइबर फ्रॉड हुआ है। दरअसल अदाकारा अपना सोशल मीडिया अकाउंट वेरीफाई करवाना चाहती थीं जिसके लिए उन्होंने अपने आईडेंटिटी प्रूफ भी दे दिए थे। लेकिन बाद में उन्हें पता चला कि उनके साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी हुई है और अब वह काफी डरी हुई हैं । नूपुर जोशी ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक पोस्ट शेयर करते हुए यह बताया कि वह अपना इंस्टाग्राम अकाउंट वेरीफाई करवाना चाहती थीं जिसके लिए उन्होंने अपने गवर्नमेंट आईडेंटिटी प्रूफ भी दे दिए थे। बाद में उन्हें यह पता चला कि वह ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार हो गई हैं। यह पोस्ट शेयर करते हुए अदाकारा ने लिखा 'हाल ही में मैंने इंस्टाग्राम को रिक्वेस्ट भेजा था जिसे हम दोनों के बीच में गोपनीय रहना था। लेकिन मुझे लगा कि यह इंस्टाग्राम टीम है जो असल में हैकर थे। उन्होंने मुझे ईमेल भेजा और मेरा गवर्नमेंट आईडेंटिटी प्रूफ मांगा। मेरे साथ धोखा हुआ है और अब मुझे डर लग रहा है क्योंकि मुझे नहीं पता भविष्य में क्या होगा। ' इसके बाद उन्होंने लिखा कि उन्हें एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में काम करते हुए एक दशक हो गया है। लेकिन वह कभी भी ब्लू टिक को लेकर उत्साहित नहीं थीं। लेकिन कुछ फैंस और दोस्तों ने उन्हें बताया कि यह काफी महत्वपूर्ण है। नूपुर जोशी ने कहा कि वह फेक अकाउंट से ऐसा बचने के लिए कर रही थीं लेकिन खुद ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार हो गई हैं। Times Now Navbharat पर पढ़ें Entertainment News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें । |
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भारत सरकार, त्रिपुरा और साबिर कुमार देबबर्मा के नेतृत्व में नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (एनएलएफटी-एसडी) के बीच आज एक (10 अगस्त, 2019) समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
एनएलएफटी पर 1997 से गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत प्रतिबंध लगा हुआ है, यह संगठन अंतरराष्ट्रीय सीमापार स्थित अपने शिविरों से हिंसा फैलाने जैसी गतिविधियों में शामिल रहा है। एनएलएफटी वर्ष 2005 से 2015 की अवधि के दौरान 317 उग्रवादी घटनाओं को अंजाम देते हुए हिंसक कार्रवाई की, जिसमें 28 सुरक्षा बलों और 62 नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी। एनएलएफटी के साथ 2015 में प्रारंभ हुई शांति वार्ता के बाद से इस संगठन ने 2016 के बाद कोई हिंसक कार्रवाई नहीं की है।
एनएलएफटी (एसडी) हिंसा के मार्ग को छोड़ने, मुख्यधारा में शामिल होने और भारत के संविधान का पालन करने के लिए सहमत हो गया है। संगठन ने अपने 88 सदस्यों के हथियार सहित आत्मसमर्पण करने पर भी सहमति जताई है। आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों को गृह मंत्रालय की आत्मसमर्पण-सह-पुनर्वास योजना, 2018 के अनुसार आत्मसमर्पण लाभ दिया जाएगा। त्रिपुरा राज्य सरकार आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों को आवास, भर्ती और शिक्षा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद करेगी। भारत सरकार त्रिपुरा के आदिवासी क्षेत्रों के आर्थिक विकास के संबंध में त्रिपुरा सरकार के प्रस्तावों पर भी विचार करेगी।
समझौता ज्ञापन पर गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव (पूर्वोत्तर) श्री सत्येंद्र गर्ग, त्रिपुरा के अपर मुख्य सचिव (गृह) श्री कुमार आलोक और एनएलएफटी (एसडी) के साबिर कुमार देबबर्मा और श्री काजल देबबर्मा ने हस्ताक्षर किए।
समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के पश्चात, एनएलएफटी के प्रतिनिधियों ने बाद नई दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह से भेंट की।
| भारत सरकार, त्रिपुरा और साबिर कुमार देबबर्मा के नेतृत्व में नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा के बीच आज एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। एनएलएफटी पर एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे से गैरकानूनी गतिविधि अधिनियम के तहत प्रतिबंध लगा हुआ है, यह संगठन अंतरराष्ट्रीय सीमापार स्थित अपने शिविरों से हिंसा फैलाने जैसी गतिविधियों में शामिल रहा है। एनएलएफटी वर्ष दो हज़ार पाँच से दो हज़ार पंद्रह की अवधि के दौरान तीन सौ सत्रह उग्रवादी घटनाओं को अंजाम देते हुए हिंसक कार्रवाई की, जिसमें अट्ठाईस सुरक्षा बलों और बासठ नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी। एनएलएफटी के साथ दो हज़ार पंद्रह में प्रारंभ हुई शांति वार्ता के बाद से इस संगठन ने दो हज़ार सोलह के बाद कोई हिंसक कार्रवाई नहीं की है। एनएलएफटी हिंसा के मार्ग को छोड़ने, मुख्यधारा में शामिल होने और भारत के संविधान का पालन करने के लिए सहमत हो गया है। संगठन ने अपने अठासी सदस्यों के हथियार सहित आत्मसमर्पण करने पर भी सहमति जताई है। आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों को गृह मंत्रालय की आत्मसमर्पण-सह-पुनर्वास योजना, दो हज़ार अट्ठारह के अनुसार आत्मसमर्पण लाभ दिया जाएगा। त्रिपुरा राज्य सरकार आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों को आवास, भर्ती और शिक्षा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद करेगी। भारत सरकार त्रिपुरा के आदिवासी क्षेत्रों के आर्थिक विकास के संबंध में त्रिपुरा सरकार के प्रस्तावों पर भी विचार करेगी। समझौता ज्ञापन पर गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री सत्येंद्र गर्ग, त्रिपुरा के अपर मुख्य सचिव श्री कुमार आलोक और एनएलएफटी के साबिर कुमार देबबर्मा और श्री काजल देबबर्मा ने हस्ताक्षर किए। समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के पश्चात, एनएलएफटी के प्रतिनिधियों ने बाद नई दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह से भेंट की। |
35.2.2. आईआईडीएल का बोर्ड या इस संबंध में अधिकृत आईआईडीएल के बोर्ड की कोई भी समिति अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति के आदेश और प्रतिभागी द्वारा दायर अपील पर विचार करने के बाद, अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति के आदेश से सहमत होगी या पारित किसी भी आदेश पर ऐसी अवधि के लिए और ऐसे नियम एवं शर्तों पर रोक लगा देगी जैसा कि आईआईडीआईएल या आईआईडीआईएल के बोर्ड की समीति, जैसा भी मामला हो, उचित समझे।
35.3. अपील पर विचार
आधारों को बताते हुए निदेशक मंडल के साथ एक नोट और अपील का ज्ञापन दाखिल करके अपील दायर की जा सकती है और इसमें मांगी गई राहत, यदि कोई हो, का भी उल्लेख होना चाहिए।
35.3.1. अपील की सुनवाई आईआईडीआईएल के बोर्ड या आईआईडीआईएल के बोर्ड द्वारा नियुक्त समिति द्वारा की जाएगी जिसे सुनवाई की शक्ति प्रत्यायोजित की गई है। ऐसी सुनवाई में, अपीलकर्ता स्वयं उपस्थित हो सकता है या निदेशक मंडल की पूर्व अनुमति से अधिवक्ताओं, वकीलों, अधिवक्ताओं और अन्य प्रतिनिधियों के माध्यम से प्रतिनिधित्व कर सकता है।
35.3.2. आईआईडीआईएल के बोर्ड या आईआईडीआईएल के बोर्ड द्वारा नियुक्त समिति को दी गई अपील के निपटान की समय सीमा ऐसी अपील करने की तारीख से या आईआईडीआईएल के बोर्ड द्वारा तय किए गए अन्य विस्तारित समय की तारीख से दो महीने तक होगी।
35.4.1. अपील से संबंधित अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति और आईआईडीआईएल के बोर्ड के रिकॉर्ड की एक प्रति प्राधिकरण से अनुरोध प्राप्त होने पर उसे प्रस्तुत की जाएगी।
35.5. तीसरे पक्ष के दावे
35.5.1. तीसरे पक्ष के दावों से निपटने का तरीका रू किसी लाभार्थी स्वामी / ग्राहक द्वारा आईआईडीआईएल में धारित किसी भी प्रतिभूति के संबंध में किसी व्यक्ति द्वारा किए गए किसी भी दावे की स्थिति में, उस प्रतिभागी द्वारा लिखित रूप में प्राप्त किया जा रहा है जिसके माध्यम से उस लाभार्थी स्वामी द्वारा प्रतिभूतियां रखी गई हैं / ग्राहक, या तो सीधे दावेदार से या प्रतिभागी के माध्यम से, प्रतिभागी तत्काल आईआईडीआईएल और इस तरह के दावे के लाभार्थी मालिक / ग्राहक को सूचित करेगा।
बशर्ते कि, आईआईडीआईएल ऐसे दावे के संबंध में किसी सक्षम न्यायालय, न्यायाधिकरण या प्राधिकरण के उचित आदेश या निर्देश के अभाव में ऐसे दावे या नोटिस पर कार्रवाई नहीं करेगा।
बशर्ते कि आईआईडीआईएल इस तरह के दावे या नोटिस की प्राप्ति पर, यदि वह ऐसा उचित समझे, तो संबंधित लाभार्थी मालिक/ग्राहक को आईआईडीआईएल या संबंधित लाभार्थी मालिक / ग्राहक पक्ष में आईआईडीआईएल की एक शर्त के रूप में एक उपयुक्त क्षतिपूर्ति निष्पादित करने का निर्देश दे सकता है जिसमें लाभार्थी मालिक/ग्राहक को विवादित प्रतिभूतियों के साथ कारोबार करने की अनुमति दी जा सकती है।
35.5.2. जहां ऐसा दावा आईआईडीआईएल द्वारा सीधे प्राप्त किया जाता है, आईआईडीआईएल ऐसे दावे के प्रतिभागी को तुरंत सूचित करेगा और पूर्वोक्त सभी कार्रवाईयां करेगा।
अध्याय 36ः अस्वीकरण और क्षतिपूर्ति
36.1.1. जहां लागू कानूनों या इन उप-नियमों या परिचालन निर्देशों या उसके अनुसरण में निष्पादित समझौतों के प्रावधानों के अनुपालन में चूक या गलती या त्रुटि के किसी भी कार्य के कारण किसी पार्टी या व्यक्ति को कोई नुकसान या क्षति होती है या किसी भी प्रतिभागी, जारीकर्ता, आरटीए, क्लीयरिंग सदस्य या क्लीयरिंग निगम या उनके कर्मचारियों, नौकरों या एजेंटों की ओर से लापरवाही या धोखाधडी के कारण हानि होती है, और यदि आईआईडीआईएल को इस प्रकार के पक्ष या व्यक्ति को इस प्रकार से हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति करनी है तो आईआईडीआईएल इस प्रकार से क्षतिपूर्ति की राशि को चूक करने वाले प्रतिभागी, जारीकर्ता, आरटीए, क्लीयरिंग सदस्य या क्लीयरिंग कॉर्पोरेशन से वसूल करेगा।
जहां किसी पक्ष या व्यक्ति को बुलियन एक्सचेंज विनियम, आईएफएससीए अधिनियम, उसके तहत बनाए गए नियमों, विनियमों और किसी भी अन्य सहित लागू कानूनों, उप-नियम और / या बुलियन ऑपरेटिंग निर्देश या इन उपनियमों और/या बुलियन संचालन निर्देशों या उनके अनुसार किए गए अनुबंधों के उलंघन के कारण क्षति हुई है या किसी ग्राहक द्वारा की गई लापरवाही या धोखाधडी के कारण हानि हुई है और यदि आईआईडीआईएल को इस प्रकार के | पैंतीस.दो.दो. आईआईडीएल का बोर्ड या इस संबंध में अधिकृत आईआईडीएल के बोर्ड की कोई भी समिति अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति के आदेश और प्रतिभागी द्वारा दायर अपील पर विचार करने के बाद, अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति के आदेश से सहमत होगी या पारित किसी भी आदेश पर ऐसी अवधि के लिए और ऐसे नियम एवं शर्तों पर रोक लगा देगी जैसा कि आईआईडीआईएल या आईआईडीआईएल के बोर्ड की समीति, जैसा भी मामला हो, उचित समझे। पैंतीस.तीन. अपील पर विचार आधारों को बताते हुए निदेशक मंडल के साथ एक नोट और अपील का ज्ञापन दाखिल करके अपील दायर की जा सकती है और इसमें मांगी गई राहत, यदि कोई हो, का भी उल्लेख होना चाहिए। पैंतीस.तीन.एक. अपील की सुनवाई आईआईडीआईएल के बोर्ड या आईआईडीआईएल के बोर्ड द्वारा नियुक्त समिति द्वारा की जाएगी जिसे सुनवाई की शक्ति प्रत्यायोजित की गई है। ऐसी सुनवाई में, अपीलकर्ता स्वयं उपस्थित हो सकता है या निदेशक मंडल की पूर्व अनुमति से अधिवक्ताओं, वकीलों, अधिवक्ताओं और अन्य प्रतिनिधियों के माध्यम से प्रतिनिधित्व कर सकता है। पैंतीस.तीन.दो. आईआईडीआईएल के बोर्ड या आईआईडीआईएल के बोर्ड द्वारा नियुक्त समिति को दी गई अपील के निपटान की समय सीमा ऐसी अपील करने की तारीख से या आईआईडीआईएल के बोर्ड द्वारा तय किए गए अन्य विस्तारित समय की तारीख से दो महीने तक होगी। पैंतीस.चार.एक. अपील से संबंधित अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति और आईआईडीआईएल के बोर्ड के रिकॉर्ड की एक प्रति प्राधिकरण से अनुरोध प्राप्त होने पर उसे प्रस्तुत की जाएगी। पैंतीस.पाँच. तीसरे पक्ष के दावे पैंतीस.पाँच.एक. तीसरे पक्ष के दावों से निपटने का तरीका रू किसी लाभार्थी स्वामी / ग्राहक द्वारा आईआईडीआईएल में धारित किसी भी प्रतिभूति के संबंध में किसी व्यक्ति द्वारा किए गए किसी भी दावे की स्थिति में, उस प्रतिभागी द्वारा लिखित रूप में प्राप्त किया जा रहा है जिसके माध्यम से उस लाभार्थी स्वामी द्वारा प्रतिभूतियां रखी गई हैं / ग्राहक, या तो सीधे दावेदार से या प्रतिभागी के माध्यम से, प्रतिभागी तत्काल आईआईडीआईएल और इस तरह के दावे के लाभार्थी मालिक / ग्राहक को सूचित करेगा। बशर्ते कि, आईआईडीआईएल ऐसे दावे के संबंध में किसी सक्षम न्यायालय, न्यायाधिकरण या प्राधिकरण के उचित आदेश या निर्देश के अभाव में ऐसे दावे या नोटिस पर कार्रवाई नहीं करेगा। बशर्ते कि आईआईडीआईएल इस तरह के दावे या नोटिस की प्राप्ति पर, यदि वह ऐसा उचित समझे, तो संबंधित लाभार्थी मालिक/ग्राहक को आईआईडीआईएल या संबंधित लाभार्थी मालिक / ग्राहक पक्ष में आईआईडीआईएल की एक शर्त के रूप में एक उपयुक्त क्षतिपूर्ति निष्पादित करने का निर्देश दे सकता है जिसमें लाभार्थी मालिक/ग्राहक को विवादित प्रतिभूतियों के साथ कारोबार करने की अनुमति दी जा सकती है। पैंतीस.पाँच.दो. जहां ऐसा दावा आईआईडीआईएल द्वारा सीधे प्राप्त किया जाता है, आईआईडीआईएल ऐसे दावे के प्रतिभागी को तुरंत सूचित करेगा और पूर्वोक्त सभी कार्रवाईयां करेगा। अध्याय छत्तीसः अस्वीकरण और क्षतिपूर्ति छत्तीस.एक.एक. जहां लागू कानूनों या इन उप-नियमों या परिचालन निर्देशों या उसके अनुसरण में निष्पादित समझौतों के प्रावधानों के अनुपालन में चूक या गलती या त्रुटि के किसी भी कार्य के कारण किसी पार्टी या व्यक्ति को कोई नुकसान या क्षति होती है या किसी भी प्रतिभागी, जारीकर्ता, आरटीए, क्लीयरिंग सदस्य या क्लीयरिंग निगम या उनके कर्मचारियों, नौकरों या एजेंटों की ओर से लापरवाही या धोखाधडी के कारण हानि होती है, और यदि आईआईडीआईएल को इस प्रकार के पक्ष या व्यक्ति को इस प्रकार से हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति करनी है तो आईआईडीआईएल इस प्रकार से क्षतिपूर्ति की राशि को चूक करने वाले प्रतिभागी, जारीकर्ता, आरटीए, क्लीयरिंग सदस्य या क्लीयरिंग कॉर्पोरेशन से वसूल करेगा। जहां किसी पक्ष या व्यक्ति को बुलियन एक्सचेंज विनियम, आईएफएससीए अधिनियम, उसके तहत बनाए गए नियमों, विनियमों और किसी भी अन्य सहित लागू कानूनों, उप-नियम और / या बुलियन ऑपरेटिंग निर्देश या इन उपनियमों और/या बुलियन संचालन निर्देशों या उनके अनुसार किए गए अनुबंधों के उलंघन के कारण क्षति हुई है या किसी ग्राहक द्वारा की गई लापरवाही या धोखाधडी के कारण हानि हुई है और यदि आईआईडीआईएल को इस प्रकार के |
नयी दिल्ली। केंद्रीय बजट 1 फरवरी को पेश किया जाएगा। इससे दो दिन पहले 29 जनवरी से संसद का बजट सत्र शुरू होगा। संसदीय मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीपीए) ने संसद के बजट सत्र की तारीख फाइनल कर दी है, जो कि 29 जनवरी से 15 फरवरी तक चलेगा। केंद्रीय बजट 1 फरवरी को पेश किया जाएगा, जबकि बजट सत्र का दूसरा भाग 8 मार्च से 8 अप्रैल तक होगा।
राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद 29 जनवरी को संसद के दोनों सदनों को संबोधित करेंगे। सभी कोरोना प्रोटोकॉल लागू होंगे और दोनों सदन 4 घंटे तक कार्य करेंगे। बुधवार को प्रधानमंत्री आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी का नेतृत्व करेंगे। इसके बाद कल सुबह 10. 35 बजे पूर्ण मंत्रिमंडल की बैठक होगी। संभावना जताई गई है कि कृषि सुधारों के खिलाफ किसानों के विरोध के बीच संसद का आगामी सत्र काफी हंगामे वाला हो सकता है। इससे पहले सरकार ने सरकार ने पिछले साल कोरोना महामारी के मद्देनजर शीतकालीन सत्र आयोजित न करने का फैसला किया था।
मॉनसून सत्र के दौरान दोनों सदनों को अलग-अलग समय पर बुलाया गया था, ताकि सोशल डिस्टेंसिंग बरकरार रहे। सत्र में प्रश्नकाल भी नहीं रखा गया था, जिसमें संसद के सदस्य सरकार से प्रश्न पूछते। प्रत्येक बेंच के सामने और सदस्यों की साइड में फाइबर ग्लास शील्ड्स लगाई गई थी। साथ ही कोरोना के किसी भी संभावित संक्रमण से बचने के लिए स्टैंडिंग-अप के दौरान बोलने की अनुमति नहीं थी।
बजट से पहले भारत का राजकोषीय घाटा चालू वित्त वर्ष में नवंबर तक बढ़ कर 10. 75 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। ये सालाना बजट अनुमान का करीब 135. 1 फीसदी है। यानी भारत का राजकोषीय घाटा अप्रैल-नवंबर के दौरान बजटीय अनुमान के 135. 1 फीसदी पर पहुंच गया। पिछले साल नवंबर तक देश का राजकोषीय घाटा बजट के अनुमान का 114. 8 फीसदी पर था।
| नयी दिल्ली। केंद्रीय बजट एक फरवरी को पेश किया जाएगा। इससे दो दिन पहले उनतीस जनवरी से संसद का बजट सत्र शुरू होगा। संसदीय मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने संसद के बजट सत्र की तारीख फाइनल कर दी है, जो कि उनतीस जनवरी से पंद्रह फरवरी तक चलेगा। केंद्रीय बजट एक फरवरी को पेश किया जाएगा, जबकि बजट सत्र का दूसरा भाग आठ मार्च से आठ अप्रैल तक होगा। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद उनतीस जनवरी को संसद के दोनों सदनों को संबोधित करेंगे। सभी कोरोना प्रोटोकॉल लागू होंगे और दोनों सदन चार घंटाटे तक कार्य करेंगे। बुधवार को प्रधानमंत्री आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी का नेतृत्व करेंगे। इसके बाद कल सुबह दस. पैंतीस बजे पूर्ण मंत्रिमंडल की बैठक होगी। संभावना जताई गई है कि कृषि सुधारों के खिलाफ किसानों के विरोध के बीच संसद का आगामी सत्र काफी हंगामे वाला हो सकता है। इससे पहले सरकार ने सरकार ने पिछले साल कोरोना महामारी के मद्देनजर शीतकालीन सत्र आयोजित न करने का फैसला किया था। मॉनसून सत्र के दौरान दोनों सदनों को अलग-अलग समय पर बुलाया गया था, ताकि सोशल डिस्टेंसिंग बरकरार रहे। सत्र में प्रश्नकाल भी नहीं रखा गया था, जिसमें संसद के सदस्य सरकार से प्रश्न पूछते। प्रत्येक बेंच के सामने और सदस्यों की साइड में फाइबर ग्लास शील्ड्स लगाई गई थी। साथ ही कोरोना के किसी भी संभावित संक्रमण से बचने के लिए स्टैंडिंग-अप के दौरान बोलने की अनुमति नहीं थी। बजट से पहले भारत का राजकोषीय घाटा चालू वित्त वर्ष में नवंबर तक बढ़ कर दस. पचहत्तर लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। ये सालाना बजट अनुमान का करीब एक सौ पैंतीस. एक फीसदी है। यानी भारत का राजकोषीय घाटा अप्रैल-नवंबर के दौरान बजटीय अनुमान के एक सौ पैंतीस. एक फीसदी पर पहुंच गया। पिछले साल नवंबर तक देश का राजकोषीय घाटा बजट के अनुमान का एक सौ चौदह. आठ फीसदी पर था। |
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के छठे और आखिरी चरण में गुरुवार को 84. 24% फीसदी मतदान हुआ है। दोपहर तीन बजे तक 74 पर्सेंट से ज्यादा वोटिंग हुई थी। ईस्ट मिदनापुर जिले में रिकॉर्ड 75. 19 पर्सेंट वोटिंग हुई। वहीं, कूच बिहार में 72. 31 पर्सेंट मतदान हुआ।
बता दें कि आजादी के बाद यह पहला मौका है, जब कूच बिहार जिले में सीमावर्ती बस्तियों के 9,776 निवासियों को अपने मताधिकार का उपयोग करने का अवसर मिला है। ऐसा पिछले साल इन बस्तियों के भारतीय क्षेत्र में औपचारिक विलय के बाद संभव हुआ। अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने वालों में 103 साल के असगर अली भी शामिल हैं। वह अपने परिवार की तीन पीढ़ियों के साथ वोट डालने आए। सभी ने पहली बार वोट डाले।
चुनाव आयोग के अधिकारी कूचबिहार जिले में बारिश की संभावना से चिंतित थे क्योंकि इससे मतदान प्रतिशत और चुनाव कर्मियों के कार्य पर असर पड़ सकता है। बहरहाल, दोपहर तक बारिश नहीं हुई। बता दें कि सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक 25 निर्वाचन क्षेत्रों के 6,774 मतदान केंद्रों पर हो रहे मतदान में 58 लाख से अधिक मतदाताओं को अपने मताधिकार का उपयोग कर अपने प्रतिनिधियों को चुनने का मौका मिला है। इस चरण के चुनाव के लिए 18 महिलाओं समेत कुल 170 उम्मीदवार चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। चुनाव आयोग ने शांतिपूर्ण ढंग से चुनाव सुनिश्चित कराने के लिए केंद्रीय फोर्सेज की 361 कंपनियां तैनात की हैं। इनकी मदद के लिए 12000 राज्य पुलिस के जवान लगाए गए।
पूर्वी मिदनापुर जिले में मोयना विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक मतदान केंद्र को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने बूथ संख्या 236 के पास हथियारों के साथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के जुटने की शिकायत दर्ज कराई। तृणमूल कांग्रेस ने कांग्रेस पर इसी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बूथ संख्या 14, 107 और 249 में बूथ जाम करने का भी आरोप लगाया। मोयना निर्वाचन क्षेत्र में गोबरा के अंतर्गत आने वाले बूथ संख्या 231 के पास मतदाताओं को भोजन देने के आरोप में सुरक्षा कर्मियों ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने बताया कि तृणमूल कांग्रेस एवं कांग्रेस से जुड़े कार्यकर्ताओं के दो समूह मतदाताओं को भोजन दे रहे थे। सुरक्षाकर्मियों ने उनका पीछा किया, उनमें अधिकतर भागने में सफल रहे लेकिन पांच को पकड़ लिया गया।
सीपीएम ने दावा किया कि नंदीग्राम के कम से कम 52 मतदान केंद्रों में चुनाव एजेंट को नियुक्त नहीं किया गया है जिस पर तृणमूल के सांसद सुवेंदु अधिकारी ने चुटकी लेते हुए कहा, "इसके लिए हमें दोषी नहीं ठहराया जा सकता। " कूचबिहार जिला में नाटाबाड़ी विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल और सीपीएम की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई है। इस क्षेत्र से तृणमूल के जिला अध्यक्ष रवींद्रनाथ घोष और सीपीएम के पूर्व विधायक तमसेर अली एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। घोष ने नाटाबाड़ी के देवचराय में केंद्रीय बलों की मनमानी का भी आरोप लगाया।
| पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के छठे और आखिरी चरण में गुरुवार को चौरासी. चौबीस% फीसदी मतदान हुआ है। दोपहर तीन बजे तक चौहत्तर पर्सेंट से ज्यादा वोटिंग हुई थी। ईस्ट मिदनापुर जिले में रिकॉर्ड पचहत्तर. उन्नीस पर्सेंट वोटिंग हुई। वहीं, कूच बिहार में बहत्तर. इकतीस पर्सेंट मतदान हुआ। बता दें कि आजादी के बाद यह पहला मौका है, जब कूच बिहार जिले में सीमावर्ती बस्तियों के नौ,सात सौ छिहत्तर निवासियों को अपने मताधिकार का उपयोग करने का अवसर मिला है। ऐसा पिछले साल इन बस्तियों के भारतीय क्षेत्र में औपचारिक विलय के बाद संभव हुआ। अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने वालों में एक सौ तीन साल के असगर अली भी शामिल हैं। वह अपने परिवार की तीन पीढ़ियों के साथ वोट डालने आए। सभी ने पहली बार वोट डाले। चुनाव आयोग के अधिकारी कूचबिहार जिले में बारिश की संभावना से चिंतित थे क्योंकि इससे मतदान प्रतिशत और चुनाव कर्मियों के कार्य पर असर पड़ सकता है। बहरहाल, दोपहर तक बारिश नहीं हुई। बता दें कि सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक पच्चीस निर्वाचन क्षेत्रों के छः,सात सौ चौहत्तर मतदान केंद्रों पर हो रहे मतदान में अट्ठावन लाख से अधिक मतदाताओं को अपने मताधिकार का उपयोग कर अपने प्रतिनिधियों को चुनने का मौका मिला है। इस चरण के चुनाव के लिए अट्ठारह महिलाओं समेत कुल एक सौ सत्तर उम्मीदवार चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। चुनाव आयोग ने शांतिपूर्ण ढंग से चुनाव सुनिश्चित कराने के लिए केंद्रीय फोर्सेज की तीन सौ इकसठ कंपनियां तैनात की हैं। इनकी मदद के लिए बारह हज़ार राज्य पुलिस के जवान लगाए गए। पूर्वी मिदनापुर जिले में मोयना विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक मतदान केंद्र को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने बूथ संख्या दो सौ छत्तीस के पास हथियारों के साथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के जुटने की शिकायत दर्ज कराई। तृणमूल कांग्रेस ने कांग्रेस पर इसी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बूथ संख्या चौदह, एक सौ सात और दो सौ उनचास में बूथ जाम करने का भी आरोप लगाया। मोयना निर्वाचन क्षेत्र में गोबरा के अंतर्गत आने वाले बूथ संख्या दो सौ इकतीस के पास मतदाताओं को भोजन देने के आरोप में सुरक्षा कर्मियों ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने बताया कि तृणमूल कांग्रेस एवं कांग्रेस से जुड़े कार्यकर्ताओं के दो समूह मतदाताओं को भोजन दे रहे थे। सुरक्षाकर्मियों ने उनका पीछा किया, उनमें अधिकतर भागने में सफल रहे लेकिन पांच को पकड़ लिया गया। सीपीएम ने दावा किया कि नंदीग्राम के कम से कम बावन मतदान केंद्रों में चुनाव एजेंट को नियुक्त नहीं किया गया है जिस पर तृणमूल के सांसद सुवेंदु अधिकारी ने चुटकी लेते हुए कहा, "इसके लिए हमें दोषी नहीं ठहराया जा सकता। " कूचबिहार जिला में नाटाबाड़ी विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल और सीपीएम की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई है। इस क्षेत्र से तृणमूल के जिला अध्यक्ष रवींद्रनाथ घोष और सीपीएम के पूर्व विधायक तमसेर अली एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। घोष ने नाटाबाड़ी के देवचराय में केंद्रीय बलों की मनमानी का भी आरोप लगाया। |
ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। हिंदू ईको सिस्टम संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष व दिल्ली के पूर्व विधायक कपिल मिश्रा ने शनिवार को पड़ाव स्थित एक होटल में समर्थ हिंदू व समग्र हिंदुत्व विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कांग्रेस व राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अब देश को क्या राहुल गांधी समझाएंगे कि हिंदू क्या है, हिंदुत्व क्या है। संगोष्ठी में कार्यक्रम के संयोजक हरी सिंह धनगर, अधिवक्ता वीरेंद्र पाल, भानूप्रताप सिंह चौहान, सुमंत भट्टाचार्य ने अपने विचार व्यक्त किए।
कपिल मिश्रा ने सभा में भाग लेने से पहले पड़ाव स्थित भगवान वाल्मीकि मंदिर में पूजा-अर्चना की। मंदिर में पूजा-अर्चना करने वाले रमेश वाल्मीकि को अंगवस्त्र पहनाकर सम्मानित किया। पूर्व विधायक ने सभा में हिंदू व हिंदुत्व का मतलब समझाते हुए कहा कि ऋषि-मुनियों द्वारा किया हवन-पूजन हिंदू है। राम-लक्ष्मण द्वारा धनुष वाण लेकर यज्ञ की, की गई रक्षा हिंदुत्व है। उन्होंने कहा कि श्रीराम, रावण को पराजित करने के लिए अयोध्या व राजा जनक की प्रतापी सेना बुला सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। भगवान राम ने आम लोगों को संगठित कर सेना तैयार कर राक्षसों का अंत किया। उन्होंने बताया कि हमारा एक मात्र उद्देश्य हिंदू को समर्थ बनाना है। इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। हिंदुओं को विधिक सहायता से लेकर आर्थिक सहायता तक उपलब्ध कराई जा रही है। कपिल मिश्रा ने कहा कि आजादी से पहले देश का विभाजन करने से पहले रचि साजिश के तहत एक बार फिर षड्यंत्र रचे जा रहे हैं। दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगे इसी की एक कड़ी हैं। कपिल मिश्रा ने कहा कि कम्युनिस्ट इस्लाम कट्टरपंथ से घातक हैं। कार्यक्रम में सामाजिक कमल, बृजराज सिंह, शिवराज सिंह, हरेंद्र सिंह, सुशील सिंह, दीपेंद्र सिंह, मोनू राणा, सत्येंद्र शर्मा, रोहित श्रीवास्तव व मयंक पुरोहित मौजूद थे।
कपिल मिश्रा ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि कुछ लोगों को दर्द हो रहा है कि चाय वाला कैसे प्रधानमंत्री बन गया। अभी तो गाय वाला भी इस देश का प्रधानमंत्री बनेगा। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि हमारे हर धार्मिक स्थल का जीर्णोद्धार व मुक्त कराने का संकल्प हर हिंदू को रोज लेना चाहिए।
| ग्वालियर । हिंदू ईको सिस्टम संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष व दिल्ली के पूर्व विधायक कपिल मिश्रा ने शनिवार को पड़ाव स्थित एक होटल में समर्थ हिंदू व समग्र हिंदुत्व विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कांग्रेस व राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अब देश को क्या राहुल गांधी समझाएंगे कि हिंदू क्या है, हिंदुत्व क्या है। संगोष्ठी में कार्यक्रम के संयोजक हरी सिंह धनगर, अधिवक्ता वीरेंद्र पाल, भानूप्रताप सिंह चौहान, सुमंत भट्टाचार्य ने अपने विचार व्यक्त किए। कपिल मिश्रा ने सभा में भाग लेने से पहले पड़ाव स्थित भगवान वाल्मीकि मंदिर में पूजा-अर्चना की। मंदिर में पूजा-अर्चना करने वाले रमेश वाल्मीकि को अंगवस्त्र पहनाकर सम्मानित किया। पूर्व विधायक ने सभा में हिंदू व हिंदुत्व का मतलब समझाते हुए कहा कि ऋषि-मुनियों द्वारा किया हवन-पूजन हिंदू है। राम-लक्ष्मण द्वारा धनुष वाण लेकर यज्ञ की, की गई रक्षा हिंदुत्व है। उन्होंने कहा कि श्रीराम, रावण को पराजित करने के लिए अयोध्या व राजा जनक की प्रतापी सेना बुला सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। भगवान राम ने आम लोगों को संगठित कर सेना तैयार कर राक्षसों का अंत किया। उन्होंने बताया कि हमारा एक मात्र उद्देश्य हिंदू को समर्थ बनाना है। इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। हिंदुओं को विधिक सहायता से लेकर आर्थिक सहायता तक उपलब्ध कराई जा रही है। कपिल मिश्रा ने कहा कि आजादी से पहले देश का विभाजन करने से पहले रचि साजिश के तहत एक बार फिर षड्यंत्र रचे जा रहे हैं। दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगे इसी की एक कड़ी हैं। कपिल मिश्रा ने कहा कि कम्युनिस्ट इस्लाम कट्टरपंथ से घातक हैं। कार्यक्रम में सामाजिक कमल, बृजराज सिंह, शिवराज सिंह, हरेंद्र सिंह, सुशील सिंह, दीपेंद्र सिंह, मोनू राणा, सत्येंद्र शर्मा, रोहित श्रीवास्तव व मयंक पुरोहित मौजूद थे। कपिल मिश्रा ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि कुछ लोगों को दर्द हो रहा है कि चाय वाला कैसे प्रधानमंत्री बन गया। अभी तो गाय वाला भी इस देश का प्रधानमंत्री बनेगा। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि हमारे हर धार्मिक स्थल का जीर्णोद्धार व मुक्त कराने का संकल्प हर हिंदू को रोज लेना चाहिए। |
खोड़ा के आजाद विहार में सोमवार को सनी का पोस्टमार्टम के बाद कॉलोनी में शव पहुंचने पर लोगों ने हंगामा किया। नाराज लोग यहां से शव लेकर लेबर चौक पहुंचे और प्रदर्शन किया। उसके बाद गुस्साए परिजनों ने आरोपियों के घर पर भी तोड़फोड़ करने की कोशिश की, पुलिस ने इन सभी को समझा बुझाकर शांत किया।
सोमवार की सुबह सनी के शव का पोस्टमार्टम दिल्ली के लालबहादुर शास्त्री अस्पताल में हुआ। इसके बाद दोपहर लगभग एक बजे शव उसके घर पहुंचा। सुबह से ही आसपास की दुकानें बंद थीं। परिजनों की मांग है कि तीनों आरोपी किशोरों को गिरफ्तार किया जाए और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। किसी तरह के हंगामे से निपटने के लिए गली में पीसीआर और पुलिस की टीम तैनात थी। शव के घर पहुंचने के बाद मां और बहन के आंखों से आंसू थम ही नहीं रहे थे।
खोड़ा के आजाद विहार में रविवार दोपहर 12 साल के सनी का शव कमरे में दरवाजे से सटा हुआ मिला था। दरवाजे के कुंडे में चुन्नी से फंदा लगा शव पड़ा हुआ था। घटना के समय घर में कोई नहीं था। परिजनों ने पड़ोसी तीन किशोरों पर हत्या करने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। पूरा विवाद एक कलाई घड़ी को लेकर हुआ बताया जा रहा है।
रविवार को घटना के बाद से ही आरोपी तीनों नाबालिगों के परिजन घर छोड़कर चले गए हैं। एक आरोपी के परिजनों से पीड़ित परिवार ने मारपीट भी की थी। सोमवार को पीड़ित परिवार और उसके सगे संबंधी किसी तरह का हंगामा न करें, इसको लेकर पुलिस तैनात रही। फिर भी गुस्साए परिजनों ने आरोपियों के घरों को निशाना बनाया और तोड़फोड़ करने की कोशिश की। पुलिस ने उनको रोक दिया।
| खोड़ा के आजाद विहार में सोमवार को सनी का पोस्टमार्टम के बाद कॉलोनी में शव पहुंचने पर लोगों ने हंगामा किया। नाराज लोग यहां से शव लेकर लेबर चौक पहुंचे और प्रदर्शन किया। उसके बाद गुस्साए परिजनों ने आरोपियों के घर पर भी तोड़फोड़ करने की कोशिश की, पुलिस ने इन सभी को समझा बुझाकर शांत किया। सोमवार की सुबह सनी के शव का पोस्टमार्टम दिल्ली के लालबहादुर शास्त्री अस्पताल में हुआ। इसके बाद दोपहर लगभग एक बजे शव उसके घर पहुंचा। सुबह से ही आसपास की दुकानें बंद थीं। परिजनों की मांग है कि तीनों आरोपी किशोरों को गिरफ्तार किया जाए और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। किसी तरह के हंगामे से निपटने के लिए गली में पीसीआर और पुलिस की टीम तैनात थी। शव के घर पहुंचने के बाद मां और बहन के आंखों से आंसू थम ही नहीं रहे थे। खोड़ा के आजाद विहार में रविवार दोपहर बारह साल के सनी का शव कमरे में दरवाजे से सटा हुआ मिला था। दरवाजे के कुंडे में चुन्नी से फंदा लगा शव पड़ा हुआ था। घटना के समय घर में कोई नहीं था। परिजनों ने पड़ोसी तीन किशोरों पर हत्या करने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। पूरा विवाद एक कलाई घड़ी को लेकर हुआ बताया जा रहा है। रविवार को घटना के बाद से ही आरोपी तीनों नाबालिगों के परिजन घर छोड़कर चले गए हैं। एक आरोपी के परिजनों से पीड़ित परिवार ने मारपीट भी की थी। सोमवार को पीड़ित परिवार और उसके सगे संबंधी किसी तरह का हंगामा न करें, इसको लेकर पुलिस तैनात रही। फिर भी गुस्साए परिजनों ने आरोपियों के घरों को निशाना बनाया और तोड़फोड़ करने की कोशिश की। पुलिस ने उनको रोक दिया। |
शिवपुरी। सर्व ब्राह्मण समाज शिवपुरी के जिला अध्यक्ष महेश शर्मा सिरसोद कमल उपाध्याय कार्यकारी अध्यक्ष श्रीमती विजयलक्ष्मी राम लखन मुंडोतिया महिला जिला अध्यक्ष एवं जिला सचिव श्री केदार जैमिनी जी एवं मीडिया प्रभारी उत्कर्ष भार्गव ने बताया कि आज सर्व ब्राह्मण समाज जिला शिवपुरी की नवीन कार्यकारिणी एवं प्रतिभा सम्मान तथा ब्राह्मण समाज पत्रकार सम्मान समारोह का आयोजन किया जा रहा है।
जिसमें मुख्य अतिथि माननीय पूर्व मंत्री मध्यप्रदेश शासन गिर्राज दंडोतिया तथा अरविंद वाजपेई एसडीएम शिवपुरी एवं दीपक पांडे जिला शिक्षा अधिकारी शिवपुरी राम जी व्यास प्रदेश संयोजक सर्व ब्राह्मण समाज बाला प्रसाद जैमिनी राजेंद्र पिपलोदा जी अधिकारी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा जिला अध्यक्ष शिवपुरी के आतिथ्य में कार्यक्रम संपन्न होगा कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सर्व ब्राह्मण समाज ने अपील की है।
जिसमें डॉ. ए. एल . शर्मा डॉक्टर एस . के . पौराणिक, पी . के . दुबे राम लखन मुंडोतिया, अरुण भार्गव, राम प्रकाश शर्मा ,अमरदीप शर्मा,अरुण शर्मा राय , अरविंद समाधिया ,रामवीर शर्मा शर्मा सरपंच, अरविंद शर्मा एडवोकेट, धर्मेंद्र भारद्वाज डेड़री बृजेश बमरा, संजय समाधिया, आकाश उपाध्याय,दीपक बगौदा, शिवकुमार समाधिया, गिर्राज शर्मा, अमन दुबे, अंकित दातरे, रवि पाराशर , दिनेश भारद्वाज ,डॉ अशोक पाराशर, मनोज भार्गव ,प्रमोद कटारे, जितेंद्र मुंडोतिया, परमानंद शर्मा ,नीलेश शर्मा ,राकेश भार्गव ,वीरेंद्र शर्मा ,विनय शर्मा ,बृजेश शर्मा दुलारा, श्रीमती सुषमा पांडे ,श्रीमती मीना दुबे, श्रीमती रुकमणी दुबे ,श्रीमती रमा भारद्वाज, श्रीमती वंदना पाराशर ,श्रीमती निधि पाराशर ,श्रीमती ज्योति वर्धन शर्मा ,श्रीमती सिया मुद्गल, श्रीमती अनीता वशिष्ठ, श्रीमती हेमा शर्मा ,श्रीमती वर्षा शर्मा, श्रीमती मंजू शर्मा ,श्रीमती रिचा त्रिवेदी , श्रीमती कविता दुबे, श्रीमती सरोज शर्मा, श्रीमती रानी शर्मा ,श्रीमती शशि शर्मा ,श्रीमती मनीषा उपाध्याय, श्रीमती ज्योति पाराशर ,श्रीमती ज्योति समाधिया, श्रीमती बसंती कान्हूआ ,श्रीमती नंदनी शुक्ला ,श्रीमती भव्य ज्योति जैमिनी, श्रीमती गिरिजा भारद्वाज डेड़री, श्रीमती बबीता शर्मा ,श्रीमती नीतू शर्मा ,श्रीमती भावना वशिष्ठ, एवं समाज के सभी गणमान्य लोग उपस्थित होंगे ।
| शिवपुरी। सर्व ब्राह्मण समाज शिवपुरी के जिला अध्यक्ष महेश शर्मा सिरसोद कमल उपाध्याय कार्यकारी अध्यक्ष श्रीमती विजयलक्ष्मी राम लखन मुंडोतिया महिला जिला अध्यक्ष एवं जिला सचिव श्री केदार जैमिनी जी एवं मीडिया प्रभारी उत्कर्ष भार्गव ने बताया कि आज सर्व ब्राह्मण समाज जिला शिवपुरी की नवीन कार्यकारिणी एवं प्रतिभा सम्मान तथा ब्राह्मण समाज पत्रकार सम्मान समारोह का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें मुख्य अतिथि माननीय पूर्व मंत्री मध्यप्रदेश शासन गिर्राज दंडोतिया तथा अरविंद वाजपेई एसडीएम शिवपुरी एवं दीपक पांडे जिला शिक्षा अधिकारी शिवपुरी राम जी व्यास प्रदेश संयोजक सर्व ब्राह्मण समाज बाला प्रसाद जैमिनी राजेंद्र पिपलोदा जी अधिकारी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा जिला अध्यक्ष शिवपुरी के आतिथ्य में कार्यक्रम संपन्न होगा कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सर्व ब्राह्मण समाज ने अपील की है। जिसमें डॉ. ए. एल . शर्मा डॉक्टर एस . के . पौराणिक, पी . के . दुबे राम लखन मुंडोतिया, अरुण भार्गव, राम प्रकाश शर्मा ,अमरदीप शर्मा,अरुण शर्मा राय , अरविंद समाधिया ,रामवीर शर्मा शर्मा सरपंच, अरविंद शर्मा एडवोकेट, धर्मेंद्र भारद्वाज डेड़री बृजेश बमरा, संजय समाधिया, आकाश उपाध्याय,दीपक बगौदा, शिवकुमार समाधिया, गिर्राज शर्मा, अमन दुबे, अंकित दातरे, रवि पाराशर , दिनेश भारद्वाज ,डॉ अशोक पाराशर, मनोज भार्गव ,प्रमोद कटारे, जितेंद्र मुंडोतिया, परमानंद शर्मा ,नीलेश शर्मा ,राकेश भार्गव ,वीरेंद्र शर्मा ,विनय शर्मा ,बृजेश शर्मा दुलारा, श्रीमती सुषमा पांडे ,श्रीमती मीना दुबे, श्रीमती रुकमणी दुबे ,श्रीमती रमा भारद्वाज, श्रीमती वंदना पाराशर ,श्रीमती निधि पाराशर ,श्रीमती ज्योति वर्धन शर्मा ,श्रीमती सिया मुद्गल, श्रीमती अनीता वशिष्ठ, श्रीमती हेमा शर्मा ,श्रीमती वर्षा शर्मा, श्रीमती मंजू शर्मा ,श्रीमती रिचा त्रिवेदी , श्रीमती कविता दुबे, श्रीमती सरोज शर्मा, श्रीमती रानी शर्मा ,श्रीमती शशि शर्मा ,श्रीमती मनीषा उपाध्याय, श्रीमती ज्योति पाराशर ,श्रीमती ज्योति समाधिया, श्रीमती बसंती कान्हूआ ,श्रीमती नंदनी शुक्ला ,श्रीमती भव्य ज्योति जैमिनी, श्रीमती गिरिजा भारद्वाज डेड़री, श्रीमती बबीता शर्मा ,श्रीमती नीतू शर्मा ,श्रीमती भावना वशिष्ठ, एवं समाज के सभी गणमान्य लोग उपस्थित होंगे । |
आयर्लंण्ड को स्वतन्त्र पार्लमेण्ट देवी । इस तरह उसूल की दृष्टि से तो आयलॅण्ड, ब्रिटिश बाबशाह के अधीन, इंग्लैण्ड से आजाद होगया, लेकिन आयरिश पार्लमेण्ट वही पुरानी और ज़मींदारों की संकीर्ण संस्था रही, जिसमें केवल प्रोटेस्टेण्ट शामिल थे और जो कंथलिक लोगों पर पहले दबाव डालते रहे थे । कॅथलिक लोगों पर अभीतक अनेक प्रकार की बन्दिशें थीं। हाँ, फ़र्क़ सिर्फ़ इतना जरूर होगया था कि अब कैथलिक और प्रोटेस्टेण्टेण्ट एक-दूसरे के ज्यादा नजदीक आते जाते थे। इस पार्लमेण्ट के नेता हेनरी ग्रेटेन, जो स्वयं प्रोटस्टेण्ट थे, यह चाहते थे कि कैथलिक लोगों पर जो बन्दिशें है, वे हटा दी जायँ; लेकिन इस बात में उनको बहुत कम कामयाबी हासिल हुई ।
इसी दरमियान फ्रान्स में क्रान्ति होगई, और आयर्लंण्ड को उससे बहुत आशायें बँध गई । आश्चर्य तो यह है कि इस क्रान्ति का स्वागत कॅथलिक और प्रोटेस्टेण्ट दोनों ने किया, जो अब धीरे-धीरे एक-दूसरे के बहुत नजदीक होते जाते थे । 'संयुक्त आयरिश' ( United Irishmen ) नाम की एक संस्था खुली, जिसका उद्देश यह था कि कैथलिक और प्रोटेस्टेण्टों में मेल-जोल पैदा कराया जाय और कैथलिक लोगों को आजादी दिलाई जाय । सरकार ने इस 'यूनाइटेड आयरिशमेन' नाम की संस्था को पसन्द नहीं किया और यह दबा दी गई । इसलिए हस्बमामूल होनेवाली अनिवार्य क्रान्ति १७९८ ई० में फिर भड़क उठी। यह क्रान्ति पहले की क्रान्तियों की तरह अलस्टर और देश के दूसरे हिस्सों के दरमियान की मजहबी लड़ाई नहीं थी। यह एक राष्ट्रीय क्रान्ति या बग़ाबत थी, जिसमें कैथलिक और प्रोटेस्टेण्ट दोनों शामिल थे । इस क्रान्ति को भी अंग्रेजों ने दबा दिया और इसके वीर पुरुष उल्फ टोन को, विद्रोही होने के अपराध में, फांसी पर लटका दिया गया ।
इस तरह अब यह स्पष्ट था कि आयलॅण्ड में एक स्वतन्त्र पार्लमेण्ट बना देने से आयरिश लोगों की स्थिति में कोई फ़र्क़ नहीं आया था। अंग्रेजी पार्लमेण्ट भी उस समय एक संकीर्ण और दूषित संस्था थी, जिसमें रिश्वत देकर लोगों का चुनाव हुआ करता था और जिसकी बागडोर जमींदारों का एक छोटा-सा गुट और चन्द बडे-बडे व्यापारी अपनी मुट्ठी में रखते थे। आयरिश पार्लमेण्ट में भी यही सब दोष पाये जाते थे । इसके अलावा उसमें खास खराबी यह थी कि वह पार्लमेण्ट कॅथलिक देश में क़ायम होते हुए भी मुट्ठीभर प्रोटेस्टेण्टों के हाथ में थी। ब्रिटिश सरकार ने यह निश्चय किया कि आयरिश पार्लमेण्ट को खत्म कर दिया जाय और आयलैण्ड को ब्रिटेन से मिला दिया जाय । आयलैण्ड में इस प्रस्ताव का जोरों से विरोध किया गया, लेकिन डबलिन की पार्लमेण्ट के मेम्बरों ने बहुत बडी बडी रक़में रिश्वत लेकर अपने ही बोट से अपनी पार्लमेण्ट को खत्म कर दिया । सन् १८०० ई० में "ऐक्ट आफ यूनियन"
(Act of Union) पास हुआ और इस तरह ग्रेटन की चन्द दिनों की पार्लमेण्ट का खात्मा हो गया। उसकी जगह पर अब चुने जाकर कुछ आयरिश सदस्य ब्रिटिश पार्लमेण्ट में लन्दन, जाने लगे ।
इस दूषित आयरिश पार्लमेण्ट के खात्मे से शायद बहुत बड़ा नुकसान नहीं हुआ, सिवा इसके कि यह मुमकिन था कि कुछ दिन के बाद यह पार्लमेण्ट बेहतर हो जाती । लेकिन यूनियन ऐक्ट ने एक बहुत बड़ा नुकसान पहुँचाया और शायद यही नुक़सान पहुँचाने के लिए वह बनाया भी गया था। प्रोटेस्टेण्ट और कैथलिकों के दरमियान उत्तर और दक्षिण में मेल-जोल की जो प्रवृत्ति चल रही थी वह ख़त्म होगई । प्रोटेस्टेण्ट अलस्टर ने बाक़ी आयलॅण्ड से मुँह मोड़कर अपना रुख दूसरी तरफ़ कर लिया और ये दोनों हिस्से एक-दूसरे से अलग होकर अपने-अपने रास्ते पर चल पडे। इन दोनों में एक दूसरा फ़र्क़ और पैदा होगया। अलस्टर ने इंग्लैण्ड के ढंग पर आधुनिक व्यवसाय को अपना लिया। आयलैंण्ड के बाक़ी हिस्से में खेती का ही जोर रहा; लेकिन खेती भी इस प्रदेश में तरक़्क़ी नहीं कर सकी, क्योंकि कृषि-सम्बन्धी क़ानून दूषित थे । आयरिश जनता दूसरे देशों में जाकर बराबर बस रही थी, इसलिए उत्तर तो व्यावसायिक हो गया लेकिन दक्षिण और पूर्व और ख़ास तौर से पश्चिम व्यावसायिक दृष्टि से पिछड़ और मध्य युग के जैसे ही बने रहे ।
'ऐक्ट आफ यूनियन' के खिलाफ़ भी बगावत हुई। तेजस्वी नौजवान राबर्ट इम्मेट इस क्षणिक बलवे का नेता था, और इसने अपने अनेक पूर्वज देशवासियों के समान फाँसी के तख्ते पर प्राण दिये ।
आयरिश सदस्य ब्रिटिश पार्लमेण्ट के 'हाउस आफ कामन्स' यानी साधारण सभा में जाते थे, लेकिन कोई कैथलिक नहीं जा सकता था। कैथलिक लोगों को न तो आयलॅण्ड और न इंग्लैण्ड में पार्लमेण्ट के सदस्य बनने का हक़ था। ये बन्दिशें १८२९ ई० से टूटीं और तबसे ही कैथलिक लोग ब्रिटिश पार्लमेण्ट में बैठने के अधिकारी समझे गये । डैनियल ओ कॉनेल नाम के आयरिश नेता ने ये बन्दिशें तुड़वाई थीं, इसलिए उसे 'लिबरेटर' यानी 'उद्धारक' की पदवी दी गई। धीरे-धीरे एक दूसरी भी तब्दीली हुई । वोट देने का हक़ ज्यादा लोगों को दिया गया। चूंकि आयर्लेण्ड इंग्लैण्ड से मिला दिया गया था, इसलिए इन देशों पर एक ही क़ानून लागू था। इस कारण १८३२ ई० का मशहूर 'रिफार्म बिल' आयलैंण्ड और इंग्लैण्ड दोनों पर लागू हुआ और इसी प्रकार बाद का मताधिकार यानी राय देने का क़ानून भी। इस तरह ब्रिटिश कामन्स सभा में आयरिश सदस्य का रूप बदलने लगा। जमींदारों के प्रतिनिधि से बदलकर वह कैथलिक किसानों और आयरिश राष्ट्रीयता का प्रतिनिधि होगया ।
गरीबी के कारण, जमींदारों से पीड़ित और लगान से दबे हुए आयलैण्ड के किसानों का मुख्य भोजन आलू ही था । ये लोग क़रीब-करीब सिर्फ़ आलू ही खाकर जिन्दगी बसर करते थे और आजकल के हिन्दुस्तानी किसानों की तरह इनके पास भी संचय का अभाव था । इनके पास कुछ भी नहीं बचता था। जिससे संकट के समय ये सहारा पा सकें । ये लोग जिन्दगी और मौत की सीमा पर अपनी जिन्दगी गुजारते थे और इनमें प्रतिरोध की कोई ताक़त बाक़ी नहीं बची थी। १८६४ ई० में आलू की फ़सल नष्ट होगई, जिसके कारण इस देश में जबरदस्त अकाल पड़ गया । लेकिन अकाल के होते हुए भी जमींदारों ने लगान वसूल किया और जो न दे सके उन किसानों को खेतों से बेदखल कर दिया। आयरिश लोगों की बहुत बड़ी तादाद अपनी मातृभूमि छोड़कर अमेरिका चली गई, और आयर्लंण्ड क़रीब-करीब उजड़ गया । बहुत से खेत बेजुते पडे रहे और चरागाह बन गये ।
जोते और बोये जा सकनेवाले खेतों का भेडों के लिए चरागाह बनते रहने का यह सिलसिला आयर्लेण्ड में क़रीब सौ बरस से ज्यादा वक्त तक जारी रहा और अभी हम लोगों के जमाने तक चलता रहा है। इसकी खास वजह यह थी कि इंग्लैंण्ड में ऊनी कपडों के कारखानें बढ़ रहे थे। जितनी ज्यादा मशीनें काम में आती थीं, उत्पत्ति उतनी ही बढ़ती थी और ऊन की उतनी ही ज्यादा जरूरत पड़ती थी। इसलिए आयर्लंण्ड के जमींदारों को खेतों की बनिस्बत, जिनमें किसान काम करते थे, चरागाहों से ज्यादा मुनाफा था जिनमें कि भेड़ें चरती थीं । चरागाहों में बहुत कम आदमियों की जरूरत पड़ती है। इनमें तो सिर्फ़ चन्द मजदूरों से, जो भेडों की निगरानी कर सकें, काम चल जाता है। इसलिए खेती करनेवाले मजदूर जमींदारों के लिए बेकार होगये और उन्होंने अपने यहांसे किसानों को निकाल दिया। इस तरह आयर्लंण्ड में, जिसकी आबादी बहुत कम थी, हमेशा बहुत-से फाजिल और बेरोजगार लोग पाये जाते थे । इस कारण आबादी के घटने का सिलसिला भी जारी रहा। आयलॅण्ड बस 'व्यवसायी' इंग्लैण्ड को कच्चा माल पहुँचाने का एक क्षेत्र बन गया। खेतों के चरागाह बनने का पुराना सिलसिला अब उलट गया है और हल को अब फिर अपना पुराना स्थान मिल रहा है। आश्चर्य तो यह है कि यह स्थिति उस व्यापारिक युद्ध का नतीजा है, जो पारसाल १९३२ ई० से इंग्लैण्ड और आयर्लंण्ड के दरमियान जारी है।
उन्नीसवीं सदी के ज्यादातर हिस्से में खेती की समस्या, अनुपस्थित यानी दूर रहनेवाले ताल्लुक़दारों के शिकार दुःखी किसानों की दुर्दशा, आयर्लेण्ड की मुख्य समस्या रही है। अस्त्रीर में ब्रिटिश सरकार ने यह निश्चय किया कि अनिवार्य तरीक़े से सब जमींदारियाँ खरीद कर और किसानों में बाँटकर जमींदारों को बिलकुल | आयर्लंण्ड को स्वतन्त्र पार्लमेण्ट देवी । इस तरह उसूल की दृष्टि से तो आयलॅण्ड, ब्रिटिश बाबशाह के अधीन, इंग्लैण्ड से आजाद होगया, लेकिन आयरिश पार्लमेण्ट वही पुरानी और ज़मींदारों की संकीर्ण संस्था रही, जिसमें केवल प्रोटेस्टेण्ट शामिल थे और जो कंथलिक लोगों पर पहले दबाव डालते रहे थे । कॅथलिक लोगों पर अभीतक अनेक प्रकार की बन्दिशें थीं। हाँ, फ़र्क़ सिर्फ़ इतना जरूर होगया था कि अब कैथलिक और प्रोटेस्टेण्टेण्ट एक-दूसरे के ज्यादा नजदीक आते जाते थे। इस पार्लमेण्ट के नेता हेनरी ग्रेटेन, जो स्वयं प्रोटस्टेण्ट थे, यह चाहते थे कि कैथलिक लोगों पर जो बन्दिशें है, वे हटा दी जायँ; लेकिन इस बात में उनको बहुत कम कामयाबी हासिल हुई । इसी दरमियान फ्रान्स में क्रान्ति होगई, और आयर्लंण्ड को उससे बहुत आशायें बँध गई । आश्चर्य तो यह है कि इस क्रान्ति का स्वागत कॅथलिक और प्रोटेस्टेण्ट दोनों ने किया, जो अब धीरे-धीरे एक-दूसरे के बहुत नजदीक होते जाते थे । 'संयुक्त आयरिश' नाम की एक संस्था खुली, जिसका उद्देश यह था कि कैथलिक और प्रोटेस्टेण्टों में मेल-जोल पैदा कराया जाय और कैथलिक लोगों को आजादी दिलाई जाय । सरकार ने इस 'यूनाइटेड आयरिशमेन' नाम की संस्था को पसन्द नहीं किया और यह दबा दी गई । इसलिए हस्बमामूल होनेवाली अनिवार्य क्रान्ति एक हज़ार सात सौ अट्ठानवे ईशून्य में फिर भड़क उठी। यह क्रान्ति पहले की क्रान्तियों की तरह अलस्टर और देश के दूसरे हिस्सों के दरमियान की मजहबी लड़ाई नहीं थी। यह एक राष्ट्रीय क्रान्ति या बग़ाबत थी, जिसमें कैथलिक और प्रोटेस्टेण्ट दोनों शामिल थे । इस क्रान्ति को भी अंग्रेजों ने दबा दिया और इसके वीर पुरुष उल्फ टोन को, विद्रोही होने के अपराध में, फांसी पर लटका दिया गया । इस तरह अब यह स्पष्ट था कि आयलॅण्ड में एक स्वतन्त्र पार्लमेण्ट बना देने से आयरिश लोगों की स्थिति में कोई फ़र्क़ नहीं आया था। अंग्रेजी पार्लमेण्ट भी उस समय एक संकीर्ण और दूषित संस्था थी, जिसमें रिश्वत देकर लोगों का चुनाव हुआ करता था और जिसकी बागडोर जमींदारों का एक छोटा-सा गुट और चन्द बडे-बडे व्यापारी अपनी मुट्ठी में रखते थे। आयरिश पार्लमेण्ट में भी यही सब दोष पाये जाते थे । इसके अलावा उसमें खास खराबी यह थी कि वह पार्लमेण्ट कॅथलिक देश में क़ायम होते हुए भी मुट्ठीभर प्रोटेस्टेण्टों के हाथ में थी। ब्रिटिश सरकार ने यह निश्चय किया कि आयरिश पार्लमेण्ट को खत्म कर दिया जाय और आयलैण्ड को ब्रिटेन से मिला दिया जाय । आयलैण्ड में इस प्रस्ताव का जोरों से विरोध किया गया, लेकिन डबलिन की पार्लमेण्ट के मेम्बरों ने बहुत बडी बडी रक़में रिश्वत लेकर अपने ही बोट से अपनी पार्लमेण्ट को खत्म कर दिया । सन् एक हज़ार आठ सौ ईशून्य में "ऐक्ट आफ यूनियन" पास हुआ और इस तरह ग्रेटन की चन्द दिनों की पार्लमेण्ट का खात्मा हो गया। उसकी जगह पर अब चुने जाकर कुछ आयरिश सदस्य ब्रिटिश पार्लमेण्ट में लन्दन, जाने लगे । इस दूषित आयरिश पार्लमेण्ट के खात्मे से शायद बहुत बड़ा नुकसान नहीं हुआ, सिवा इसके कि यह मुमकिन था कि कुछ दिन के बाद यह पार्लमेण्ट बेहतर हो जाती । लेकिन यूनियन ऐक्ट ने एक बहुत बड़ा नुकसान पहुँचाया और शायद यही नुक़सान पहुँचाने के लिए वह बनाया भी गया था। प्रोटेस्टेण्ट और कैथलिकों के दरमियान उत्तर और दक्षिण में मेल-जोल की जो प्रवृत्ति चल रही थी वह ख़त्म होगई । प्रोटेस्टेण्ट अलस्टर ने बाक़ी आयलॅण्ड से मुँह मोड़कर अपना रुख दूसरी तरफ़ कर लिया और ये दोनों हिस्से एक-दूसरे से अलग होकर अपने-अपने रास्ते पर चल पडे। इन दोनों में एक दूसरा फ़र्क़ और पैदा होगया। अलस्टर ने इंग्लैण्ड के ढंग पर आधुनिक व्यवसाय को अपना लिया। आयलैंण्ड के बाक़ी हिस्से में खेती का ही जोर रहा; लेकिन खेती भी इस प्रदेश में तरक़्क़ी नहीं कर सकी, क्योंकि कृषि-सम्बन्धी क़ानून दूषित थे । आयरिश जनता दूसरे देशों में जाकर बराबर बस रही थी, इसलिए उत्तर तो व्यावसायिक हो गया लेकिन दक्षिण और पूर्व और ख़ास तौर से पश्चिम व्यावसायिक दृष्टि से पिछड़ और मध्य युग के जैसे ही बने रहे । 'ऐक्ट आफ यूनियन' के खिलाफ़ भी बगावत हुई। तेजस्वी नौजवान राबर्ट इम्मेट इस क्षणिक बलवे का नेता था, और इसने अपने अनेक पूर्वज देशवासियों के समान फाँसी के तख्ते पर प्राण दिये । आयरिश सदस्य ब्रिटिश पार्लमेण्ट के 'हाउस आफ कामन्स' यानी साधारण सभा में जाते थे, लेकिन कोई कैथलिक नहीं जा सकता था। कैथलिक लोगों को न तो आयलॅण्ड और न इंग्लैण्ड में पार्लमेण्ट के सदस्य बनने का हक़ था। ये बन्दिशें एक हज़ार आठ सौ उनतीस ईशून्य से टूटीं और तबसे ही कैथलिक लोग ब्रिटिश पार्लमेण्ट में बैठने के अधिकारी समझे गये । डैनियल ओ कॉनेल नाम के आयरिश नेता ने ये बन्दिशें तुड़वाई थीं, इसलिए उसे 'लिबरेटर' यानी 'उद्धारक' की पदवी दी गई। धीरे-धीरे एक दूसरी भी तब्दीली हुई । वोट देने का हक़ ज्यादा लोगों को दिया गया। चूंकि आयर्लेण्ड इंग्लैण्ड से मिला दिया गया था, इसलिए इन देशों पर एक ही क़ानून लागू था। इस कारण एक हज़ार आठ सौ बत्तीस ईशून्य का मशहूर 'रिफार्म बिल' आयलैंण्ड और इंग्लैण्ड दोनों पर लागू हुआ और इसी प्रकार बाद का मताधिकार यानी राय देने का क़ानून भी। इस तरह ब्रिटिश कामन्स सभा में आयरिश सदस्य का रूप बदलने लगा। जमींदारों के प्रतिनिधि से बदलकर वह कैथलिक किसानों और आयरिश राष्ट्रीयता का प्रतिनिधि होगया । गरीबी के कारण, जमींदारों से पीड़ित और लगान से दबे हुए आयलैण्ड के किसानों का मुख्य भोजन आलू ही था । ये लोग क़रीब-करीब सिर्फ़ आलू ही खाकर जिन्दगी बसर करते थे और आजकल के हिन्दुस्तानी किसानों की तरह इनके पास भी संचय का अभाव था । इनके पास कुछ भी नहीं बचता था। जिससे संकट के समय ये सहारा पा सकें । ये लोग जिन्दगी और मौत की सीमा पर अपनी जिन्दगी गुजारते थे और इनमें प्रतिरोध की कोई ताक़त बाक़ी नहीं बची थी। एक हज़ार आठ सौ चौंसठ ईशून्य में आलू की फ़सल नष्ट होगई, जिसके कारण इस देश में जबरदस्त अकाल पड़ गया । लेकिन अकाल के होते हुए भी जमींदारों ने लगान वसूल किया और जो न दे सके उन किसानों को खेतों से बेदखल कर दिया। आयरिश लोगों की बहुत बड़ी तादाद अपनी मातृभूमि छोड़कर अमेरिका चली गई, और आयर्लंण्ड क़रीब-करीब उजड़ गया । बहुत से खेत बेजुते पडे रहे और चरागाह बन गये । जोते और बोये जा सकनेवाले खेतों का भेडों के लिए चरागाह बनते रहने का यह सिलसिला आयर्लेण्ड में क़रीब सौ बरस से ज्यादा वक्त तक जारी रहा और अभी हम लोगों के जमाने तक चलता रहा है। इसकी खास वजह यह थी कि इंग्लैंण्ड में ऊनी कपडों के कारखानें बढ़ रहे थे। जितनी ज्यादा मशीनें काम में आती थीं, उत्पत्ति उतनी ही बढ़ती थी और ऊन की उतनी ही ज्यादा जरूरत पड़ती थी। इसलिए आयर्लंण्ड के जमींदारों को खेतों की बनिस्बत, जिनमें किसान काम करते थे, चरागाहों से ज्यादा मुनाफा था जिनमें कि भेड़ें चरती थीं । चरागाहों में बहुत कम आदमियों की जरूरत पड़ती है। इनमें तो सिर्फ़ चन्द मजदूरों से, जो भेडों की निगरानी कर सकें, काम चल जाता है। इसलिए खेती करनेवाले मजदूर जमींदारों के लिए बेकार होगये और उन्होंने अपने यहांसे किसानों को निकाल दिया। इस तरह आयर्लंण्ड में, जिसकी आबादी बहुत कम थी, हमेशा बहुत-से फाजिल और बेरोजगार लोग पाये जाते थे । इस कारण आबादी के घटने का सिलसिला भी जारी रहा। आयलॅण्ड बस 'व्यवसायी' इंग्लैण्ड को कच्चा माल पहुँचाने का एक क्षेत्र बन गया। खेतों के चरागाह बनने का पुराना सिलसिला अब उलट गया है और हल को अब फिर अपना पुराना स्थान मिल रहा है। आश्चर्य तो यह है कि यह स्थिति उस व्यापारिक युद्ध का नतीजा है, जो पारसाल एक हज़ार नौ सौ बत्तीस ईशून्य से इंग्लैण्ड और आयर्लंण्ड के दरमियान जारी है। उन्नीसवीं सदी के ज्यादातर हिस्से में खेती की समस्या, अनुपस्थित यानी दूर रहनेवाले ताल्लुक़दारों के शिकार दुःखी किसानों की दुर्दशा, आयर्लेण्ड की मुख्य समस्या रही है। अस्त्रीर में ब्रिटिश सरकार ने यह निश्चय किया कि अनिवार्य तरीक़े से सब जमींदारियाँ खरीद कर और किसानों में बाँटकर जमींदारों को बिलकुल |
जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। बरगी बांध के पुल घाट में नर्मदा में डूबने से मां-बेटे की दर्दनाक मौत हो गई। एक घंटे के अंतराल में दोनों के शव नर्मदा से बाहर निकाले गए। बांध के नीचे बने पुल घाट में महिला अपने बेटे को लेकर कपड़े धोने व स्नान करने गई थी। महिला घाट पर कपड़े धो रही थी तभी उसका बेटा स्नान करने लगा। स्नान के दौरान वह गहराई में चला गया। बेटे को बचाने के लिए महिला ने नर्मदा में छलांग लगा दी थी। बरगी थाना प्रभारी रीतेश पांडेय ने बताया कि बरगी नगर निवासी श्याम लाल पटेल की बेटी क्रांति पटेल 35 वर्ष अपने भाई बल्लू पटेल, बेटे मोहित 9 वर्ष के साथ बरगी बांध के पुल घाट में कपड़े धोने व स्नान करने गई थी। उस समय उसका बड़ा बेटा मोहन घर पर था। क्रांति घाट पर बैठकर कपड़े धोने लगी, तभी मोहित सीढ़ियों पर बैठकर स्नान करने लगा। सीढ़ी पर जमी काई के कारण मोहित फिलसकर गहरे पानी में चला गया। तभी क्रांति की नजर उस पर पड़ी। क्रांति को तैरना नहीं आता था, परंतु बेटे की जान जोखिम में देख उसने पुल घाट से नर्मदा में छलांग लगा दी। क्रांति बीते मंगलवार को ससुराल से मायके आई थी। उसकी शादी पिपरिया खुर्द निवासी लक्ष्मण पटेल से हुई थी। क्रांति के पिता की बरगी नगर में साइकिल रिपेयरिंग की दुकान है।
घाट पर गांव के तमाम लोग स्नान करने व कपड़े धोने पहुंचे थे। बरगी नगर में पानी की समस्या के कारण तमाम लोग पुल घाट पर स्नान करने व कपड़े धोने के लिए रोजाना पहुंचते हैं। मां-बेटे को डूबता देख घाट पर मौजूद लोग चीखने पुकारने लगे। आवाज सुनकर क्रांति का भाई बल्लू वहां पहुंचा लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। देखते ही देखते मां-बेटा गहरे पानी में डूबकर लोगों की आंखों से ओझल हो गए। कुछ देर बाद पुलिस मौके पर पहुंची और गोताखोरों की मदद से दोनों की तलाश शुरू की गई।
पुल घाट से पानी में उतरे गोताखोरों को सबसे पहले क्रांति का शव मिला। जिसके एक घंटे बाद करीब 100 मीटर दूर मोहित का शव पाया गया। दोनों शवों को देखकर स्वजन व तमाम ग्रामीण रोने बिलखने लगे। पुलिस ने बताया कि बांध के पास पानी तेजी से आगे बढ़ता है। इसके चलते मां बेटा तेज बहाव में फंसकर जान गंवा बैठे। दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।
| जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। बरगी बांध के पुल घाट में नर्मदा में डूबने से मां-बेटे की दर्दनाक मौत हो गई। एक घंटे के अंतराल में दोनों के शव नर्मदा से बाहर निकाले गए। बांध के नीचे बने पुल घाट में महिला अपने बेटे को लेकर कपड़े धोने व स्नान करने गई थी। महिला घाट पर कपड़े धो रही थी तभी उसका बेटा स्नान करने लगा। स्नान के दौरान वह गहराई में चला गया। बेटे को बचाने के लिए महिला ने नर्मदा में छलांग लगा दी थी। बरगी थाना प्रभारी रीतेश पांडेय ने बताया कि बरगी नगर निवासी श्याम लाल पटेल की बेटी क्रांति पटेल पैंतीस वर्ष अपने भाई बल्लू पटेल, बेटे मोहित नौ वर्ष के साथ बरगी बांध के पुल घाट में कपड़े धोने व स्नान करने गई थी। उस समय उसका बड़ा बेटा मोहन घर पर था। क्रांति घाट पर बैठकर कपड़े धोने लगी, तभी मोहित सीढ़ियों पर बैठकर स्नान करने लगा। सीढ़ी पर जमी काई के कारण मोहित फिलसकर गहरे पानी में चला गया। तभी क्रांति की नजर उस पर पड़ी। क्रांति को तैरना नहीं आता था, परंतु बेटे की जान जोखिम में देख उसने पुल घाट से नर्मदा में छलांग लगा दी। क्रांति बीते मंगलवार को ससुराल से मायके आई थी। उसकी शादी पिपरिया खुर्द निवासी लक्ष्मण पटेल से हुई थी। क्रांति के पिता की बरगी नगर में साइकिल रिपेयरिंग की दुकान है। घाट पर गांव के तमाम लोग स्नान करने व कपड़े धोने पहुंचे थे। बरगी नगर में पानी की समस्या के कारण तमाम लोग पुल घाट पर स्नान करने व कपड़े धोने के लिए रोजाना पहुंचते हैं। मां-बेटे को डूबता देख घाट पर मौजूद लोग चीखने पुकारने लगे। आवाज सुनकर क्रांति का भाई बल्लू वहां पहुंचा लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। देखते ही देखते मां-बेटा गहरे पानी में डूबकर लोगों की आंखों से ओझल हो गए। कुछ देर बाद पुलिस मौके पर पहुंची और गोताखोरों की मदद से दोनों की तलाश शुरू की गई। पुल घाट से पानी में उतरे गोताखोरों को सबसे पहले क्रांति का शव मिला। जिसके एक घंटे बाद करीब एक सौ मीटर दूर मोहित का शव पाया गया। दोनों शवों को देखकर स्वजन व तमाम ग्रामीण रोने बिलखने लगे। पुलिस ने बताया कि बांध के पास पानी तेजी से आगे बढ़ता है। इसके चलते मां बेटा तेज बहाव में फंसकर जान गंवा बैठे। दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। |
विराट कोहली (Virat Kohli) दुनिया में सबसे ज्यादा फैन फॉलोइंग वाले क्रिकेटर हैं। क्रिकेट मैदान पर कई सारे रिकार्ड्स बनाने वाले कोहली का जलवा मैदान से बाहर भी रहता है। कमाई के मामले में, नेट वर्थ के मामले और तमाम चीजों में कोहली काफी आगे रहते हैं। कोहली के करोड़ों फैंस हैं। उनके एक ऐसे फैन (Kohli Fan) का वीडियो वायरल हो रहा है, जो आर्टिस्ट है और अपनी कला से उन्होंने कोहली की पेंटिंग (Virat Kohli Painting) बनाई।
वायरल वीडियो में आप देख सकते हो कि फैन कैसे एक रंग से कोहली की पेंटिंग बना रहा है। पहले शख्स लाल रंग को सफेद पेपर पर डाल देता है। इसके बाद वह अपने एक हाथ से उस रंग को फैलाकर अपनी कला दिखाता है। धीरे धीरे वह इसे कोहली की शक्ल में बदल देता है। वह अपनी उँगलियों के सहारे बारीकी से आँख, कान, नाक आदि बनाकर कोहली की खूबसूरत पेंटिंग बना रहा है। सोशल मीडिया पर ये वीडियो वायरल हुआ।
विराट कोहली अभी अपनी पत्नी अनुष्का शर्मा और बच्ची वामिका के साथ हॉलिडे पर हैं। वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल के बाद टीम इंडिया को 1 महीना का गैप मिला है। अब भारतीय टीम की अगली सीरीज वेस्टइंडीज के साथ है। टीम वेस्टइंडीज का दौरान करेंगे, यहाँ सबसे पहले 12 जुलाई से टेस्ट सीरीज शुरू होगी। अभी स्क्वॉड का ऐलान नहीं हुआ है।
| विराट कोहली दुनिया में सबसे ज्यादा फैन फॉलोइंग वाले क्रिकेटर हैं। क्रिकेट मैदान पर कई सारे रिकार्ड्स बनाने वाले कोहली का जलवा मैदान से बाहर भी रहता है। कमाई के मामले में, नेट वर्थ के मामले और तमाम चीजों में कोहली काफी आगे रहते हैं। कोहली के करोड़ों फैंस हैं। उनके एक ऐसे फैन का वीडियो वायरल हो रहा है, जो आर्टिस्ट है और अपनी कला से उन्होंने कोहली की पेंटिंग बनाई। वायरल वीडियो में आप देख सकते हो कि फैन कैसे एक रंग से कोहली की पेंटिंग बना रहा है। पहले शख्स लाल रंग को सफेद पेपर पर डाल देता है। इसके बाद वह अपने एक हाथ से उस रंग को फैलाकर अपनी कला दिखाता है। धीरे धीरे वह इसे कोहली की शक्ल में बदल देता है। वह अपनी उँगलियों के सहारे बारीकी से आँख, कान, नाक आदि बनाकर कोहली की खूबसूरत पेंटिंग बना रहा है। सोशल मीडिया पर ये वीडियो वायरल हुआ। विराट कोहली अभी अपनी पत्नी अनुष्का शर्मा और बच्ची वामिका के साथ हॉलिडे पर हैं। वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल के बाद टीम इंडिया को एक महीना का गैप मिला है। अब भारतीय टीम की अगली सीरीज वेस्टइंडीज के साथ है। टीम वेस्टइंडीज का दौरान करेंगे, यहाँ सबसे पहले बारह जुलाई से टेस्ट सीरीज शुरू होगी। अभी स्क्वॉड का ऐलान नहीं हुआ है। |
फतेहपुर सीकरी से भाजपा सांसद बाबू लाल ने मंगलवार फिर से मुस्लिम समुदाय के खिलाफ अपने बयान को दोहराया है। वीएचपी नेता अरुण माहौर की हत्या के विरोध में रविवार को आयोजित की गई श्रद्धांजलि सभा में बाबू लाल ने मुस्लिम समुदाय को ललकारते हुए भड़काऊ बयान दिया था। माहौर की हत्या कथित तौर पर कुछ मुस्लिम युवकों द्वारा कर दी गई थी।
बाबू लाल ने कहा कि अन्य समुदाय के लोग कुछ भी करें और हम लोग चुप बैठे रहें? साथ ही बाबू लाल ने पूछा कि जब लोग हिंदुओं को गोलियों से मार रहे हैं, ऐसे में इकट्ठा होना समाज के लिए गलत है? अगर हम इन लोगों से बदला नहीं ले सकते हैं तो क्या इन लोगों की पूजा करनी चाहिए?
सभा में बाबू लाल ने मुस्लिमों को लड़ने के लिए खुली चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि हमारा इम्तहान लेने की कोशिश न करो। हम हमारे समुदाय का अपमान सहन नहीं करेंगे। हम किसी भी कीमत पर अशांति नहीं चाहते, लेकिन अगर तुम हिंदूओं को परखना चाहते हो तो किसी दिन तारीख तय कर लो और आ जाओ। बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री राम शंकर कथेरिया भी शामिल थे, उन्होंने भीड़ को संबोधित करते हुए कहा था कि इससे पहले ही हम अपना दूसरा सदस्य खो दें, हमें जंग छेड़नी होगी।
कथेरिया ने कहा था कि हमें अपने आपको शक्तिशाली बनाना होगा। हमें जंग छेड़नी होगी। अगर हमने जंग नहीं छेड़ी तो आज हमने अरुण खोया है, कल हम किसी अन्य को खो देंगे। दूसरा जाने से पहले ये हत्यारें ही चले जाएं। इस प्रकार की ताकत हमें दिखानी होगी। साथ की कथेरिया ने माहौर के हत्यारों के लिए फांसी की सजा की मांग करते हुए कहा कि प्रशासन यह सोचता है कि मैं मंत्री बन गया तो मेरे हाथ बंध गए। वो ऐसा गलत सोचते हैं।
| फतेहपुर सीकरी से भाजपा सांसद बाबू लाल ने मंगलवार फिर से मुस्लिम समुदाय के खिलाफ अपने बयान को दोहराया है। वीएचपी नेता अरुण माहौर की हत्या के विरोध में रविवार को आयोजित की गई श्रद्धांजलि सभा में बाबू लाल ने मुस्लिम समुदाय को ललकारते हुए भड़काऊ बयान दिया था। माहौर की हत्या कथित तौर पर कुछ मुस्लिम युवकों द्वारा कर दी गई थी। बाबू लाल ने कहा कि अन्य समुदाय के लोग कुछ भी करें और हम लोग चुप बैठे रहें? साथ ही बाबू लाल ने पूछा कि जब लोग हिंदुओं को गोलियों से मार रहे हैं, ऐसे में इकट्ठा होना समाज के लिए गलत है? अगर हम इन लोगों से बदला नहीं ले सकते हैं तो क्या इन लोगों की पूजा करनी चाहिए? सभा में बाबू लाल ने मुस्लिमों को लड़ने के लिए खुली चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि हमारा इम्तहान लेने की कोशिश न करो। हम हमारे समुदाय का अपमान सहन नहीं करेंगे। हम किसी भी कीमत पर अशांति नहीं चाहते, लेकिन अगर तुम हिंदूओं को परखना चाहते हो तो किसी दिन तारीख तय कर लो और आ जाओ। बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री राम शंकर कथेरिया भी शामिल थे, उन्होंने भीड़ को संबोधित करते हुए कहा था कि इससे पहले ही हम अपना दूसरा सदस्य खो दें, हमें जंग छेड़नी होगी। कथेरिया ने कहा था कि हमें अपने आपको शक्तिशाली बनाना होगा। हमें जंग छेड़नी होगी। अगर हमने जंग नहीं छेड़ी तो आज हमने अरुण खोया है, कल हम किसी अन्य को खो देंगे। दूसरा जाने से पहले ये हत्यारें ही चले जाएं। इस प्रकार की ताकत हमें दिखानी होगी। साथ की कथेरिया ने माहौर के हत्यारों के लिए फांसी की सजा की मांग करते हुए कहा कि प्रशासन यह सोचता है कि मैं मंत्री बन गया तो मेरे हाथ बंध गए। वो ऐसा गलत सोचते हैं। |
अमरावती/प्रतिनिधि दि. 22 - स्थानीय बडनेरा रोड पर स्थित धन्वन्तरी मल्टी स्पेशालीटी हॉस्पिटल में पिछले माह जागतिक नेत्रदिन निमित्त मोतियाबिंद की लगभग हजार के करीब जांच व ऑपरेशन नेत्रतज्ञ डॉ. रचना महल्ले, डॉ. मृदुला मलिये, डॉ. अनूप चांडक, प्रियंका भंसाली की टीम ने किया. इस अवसर पर आज अस्पताल के सभागृह में निःशुल्क चश्मा वितरण कार्यक्रम विकास पुरूष पूर्व विधायक डॉ. सुनील देशमुख के हस्ते हुआ.
इस अवसर पर संस्था अध्यक्ष डॉ. उल्हास संगई ने डॉ. सुनील देशमुख का संस्था की ओर से शाल व श्रीफल देकर सत्कार किया. संस्था के संचालक प्रा. अशोक ठाकरे ने प्रास्ताविक किया. प्रास्ताविक में ठाकरे ने संस्था का अब तक सफर व अब तक का लेखा-जोखा सभागृह में सभी के सामने रखा. संस्था के अध्यक्ष डॉ. उल्हास संगई ने संस्था में आज तक 10 हजार आंखों की जांच की तथा 1 हजार निःशुल्क मोतियाबिंदू ऑपरेशन किये तथा पिछले महिने में नेत्र शिबिर लेकर 75 शल्यक्रियापूर्ण की. उन्हें आज चश्मा वितरित किया गया. इस अवसर पर डॉ. संगई ने कहा कि, आज हमें भव्य ऐसे अत्याधुनिक वॉर्ड की आवश्यकता है. आगामी वर्ष संस्था का स्वर्ण महोत्सवी वर्ष रहने से संस्था द्वारा भव्य मल्टीस्पेशालीटी हॉस्पिटल निर्माण करने का मानस सभी संचालकोें ने व्यक्त किया. इस अवसर पर डॉ. सुनील देशमुख ने धन्वन्तरी हॉस्पिटल के पिछले अनेक वर्षों से शुरू कार्य तथा आज खडे किये गये हॉस्पिटल के संबंध में अपने विचार रखे. इस अवसर पर डॉ. सुनील देशमुख, डॉ. उल्हास संगई, मगन बांठिया, जेसीआई अरोमा की अध्यक्षा जयश्री लोहिया के हस्ते संस्था के परिसर में पौधा रोपन किया गया. कार्यक्रम का आभार प्रदर्शन अरूण बांबल ने किया. कार्यक्रम में संस्था के संचालकों को संजय वानखडे, प्रकाश कालबांडे, डॉ. अनिल रोहणकर, भैय्यासाहब ठाकरे, डॉ. राजेंद्र चिम, डॉ. वैशाली ठाकरे, राजेश गोयनका, मयूर झंवर, भागवतराव खेडे तथा प्रशासकीय अधिकारी डॉ. साक्षी जितुरकर, संस्था के अन्य विभाग के सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत खंडारे आदि उपस्थित थे.
| अमरावती/प्रतिनिधि दि. बाईस - स्थानीय बडनेरा रोड पर स्थित धन्वन्तरी मल्टी स्पेशालीटी हॉस्पिटल में पिछले माह जागतिक नेत्रदिन निमित्त मोतियाबिंद की लगभग हजार के करीब जांच व ऑपरेशन नेत्रतज्ञ डॉ. रचना महल्ले, डॉ. मृदुला मलिये, डॉ. अनूप चांडक, प्रियंका भंसाली की टीम ने किया. इस अवसर पर आज अस्पताल के सभागृह में निःशुल्क चश्मा वितरण कार्यक्रम विकास पुरूष पूर्व विधायक डॉ. सुनील देशमुख के हस्ते हुआ. इस अवसर पर संस्था अध्यक्ष डॉ. उल्हास संगई ने डॉ. सुनील देशमुख का संस्था की ओर से शाल व श्रीफल देकर सत्कार किया. संस्था के संचालक प्रा. अशोक ठाकरे ने प्रास्ताविक किया. प्रास्ताविक में ठाकरे ने संस्था का अब तक सफर व अब तक का लेखा-जोखा सभागृह में सभी के सामने रखा. संस्था के अध्यक्ष डॉ. उल्हास संगई ने संस्था में आज तक दस हजार आंखों की जांच की तथा एक हजार निःशुल्क मोतियाबिंदू ऑपरेशन किये तथा पिछले महिने में नेत्र शिबिर लेकर पचहत्तर शल्यक्रियापूर्ण की. उन्हें आज चश्मा वितरित किया गया. इस अवसर पर डॉ. संगई ने कहा कि, आज हमें भव्य ऐसे अत्याधुनिक वॉर्ड की आवश्यकता है. आगामी वर्ष संस्था का स्वर्ण महोत्सवी वर्ष रहने से संस्था द्वारा भव्य मल्टीस्पेशालीटी हॉस्पिटल निर्माण करने का मानस सभी संचालकोें ने व्यक्त किया. इस अवसर पर डॉ. सुनील देशमुख ने धन्वन्तरी हॉस्पिटल के पिछले अनेक वर्षों से शुरू कार्य तथा आज खडे किये गये हॉस्पिटल के संबंध में अपने विचार रखे. इस अवसर पर डॉ. सुनील देशमुख, डॉ. उल्हास संगई, मगन बांठिया, जेसीआई अरोमा की अध्यक्षा जयश्री लोहिया के हस्ते संस्था के परिसर में पौधा रोपन किया गया. कार्यक्रम का आभार प्रदर्शन अरूण बांबल ने किया. कार्यक्रम में संस्था के संचालकों को संजय वानखडे, प्रकाश कालबांडे, डॉ. अनिल रोहणकर, भैय्यासाहब ठाकरे, डॉ. राजेंद्र चिम, डॉ. वैशाली ठाकरे, राजेश गोयनका, मयूर झंवर, भागवतराव खेडे तथा प्रशासकीय अधिकारी डॉ. साक्षी जितुरकर, संस्था के अन्य विभाग के सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत खंडारे आदि उपस्थित थे. |
'हिन्दुस्तान आपके द्वार कार्यक्रम में बिजली निगम की टेबल पर 50 के करीब लोगों की समस्याएं सुनी गई। कुछ का मौके पर निस्तारण हुआ तो कुछ के आवेदन लेकर निस्तारण के आश्वासन दिए गए। अधिशासी अभियंता विद्युत नगर वितरण खण्ड प्रथम नवनीत प्रजापति के निर्देशन में सभी की समस्याओं को अधिकारियों ने सुना। शिविर में एसडीओ रुस्तमपुर प्रद्युम्म सिंह, अवर अभियंता शिवम चौधरी, लाइनमैन बृजकिशोर राय, श्रीराम यादव, मुनीब, बृजेश गौंड, संविदा कर्मी श्रीप्रकाश, कृष्ण कुमार और सुनील मौजूद थे। लोगों ने मीटर रीडिंग से अधिक बिल आने, बिल न मिलने, नगा तार हटाने, क्षतिग्रस्त पोल बदलने और मीटर के तेज चलने की समस्याएं रखीं। कुछ लोगों के बिल में सुधार भी कराया गया।
नवल्स स्कूल जाने वाली रोड के मोड पर बिजली का पोल झुक गया है। कभी भी हादसा हो सकता है, इसकी शिकायत दी। इसके अलावा मकानों से सट कर जाने वाले बिजली के नंगे तार बदलने के लिए आवेदन किया। मेरे घर के सामने लगे पोल से सट कर गए बिजली केबिल को हटाने के लिए उचित स्थान पर बिजली का केबिल लगाने की अपील की।
दो माह पहले मीटर नो-डिस्पे में आ गया। तब से मनमाना बिल भेज रहे हैं। मै आनलाइन भुगतान भी कर रहा लेकिन समाधान नहीं हो रहा है। शिकायत के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई। हिन्दुस्तान के कार्यक्रम में भी अधिकारियों को समस्या बताई लिखित आवेदन लेकर आश्वस्त किया किया मीटर बदला जाएगा।
मेरे मकान पर अदालत में विवाद चल रहा। उस मकान पर बिजली निगम ने एक और बिजली कनेक्शन दे दिया। और अदालत में चल रहे विवाद जानकारी पहले ही बिजली अधिकारियों को पत्र के जरिए अवगत करा दिया था। उन्होंने लिखित आवेदन लेकर जांच कराने की आश्वासन दिया।
कॉलोनी से नंगे बिजली के तार हटाने की मांग अधिकारियों के समक्ष रखा। तमाम क्षेत्रों में केबिल वाले तार लगाए जा चुके हैं लेकिन यहां नंगे तार लोगों के मकान से सट कर लगे हैं जिससे करेंट आने का खतरा बना रहता है। अधिशासी अभियंता ने लिखित शिकायत लेकर कहा कि बदला जाएगा।
| 'हिन्दुस्तान आपके द्वार कार्यक्रम में बिजली निगम की टेबल पर पचास के करीब लोगों की समस्याएं सुनी गई। कुछ का मौके पर निस्तारण हुआ तो कुछ के आवेदन लेकर निस्तारण के आश्वासन दिए गए। अधिशासी अभियंता विद्युत नगर वितरण खण्ड प्रथम नवनीत प्रजापति के निर्देशन में सभी की समस्याओं को अधिकारियों ने सुना। शिविर में एसडीओ रुस्तमपुर प्रद्युम्म सिंह, अवर अभियंता शिवम चौधरी, लाइनमैन बृजकिशोर राय, श्रीराम यादव, मुनीब, बृजेश गौंड, संविदा कर्मी श्रीप्रकाश, कृष्ण कुमार और सुनील मौजूद थे। लोगों ने मीटर रीडिंग से अधिक बिल आने, बिल न मिलने, नगा तार हटाने, क्षतिग्रस्त पोल बदलने और मीटर के तेज चलने की समस्याएं रखीं। कुछ लोगों के बिल में सुधार भी कराया गया। नवल्स स्कूल जाने वाली रोड के मोड पर बिजली का पोल झुक गया है। कभी भी हादसा हो सकता है, इसकी शिकायत दी। इसके अलावा मकानों से सट कर जाने वाले बिजली के नंगे तार बदलने के लिए आवेदन किया। मेरे घर के सामने लगे पोल से सट कर गए बिजली केबिल को हटाने के लिए उचित स्थान पर बिजली का केबिल लगाने की अपील की। दो माह पहले मीटर नो-डिस्पे में आ गया। तब से मनमाना बिल भेज रहे हैं। मै आनलाइन भुगतान भी कर रहा लेकिन समाधान नहीं हो रहा है। शिकायत के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई। हिन्दुस्तान के कार्यक्रम में भी अधिकारियों को समस्या बताई लिखित आवेदन लेकर आश्वस्त किया किया मीटर बदला जाएगा। मेरे मकान पर अदालत में विवाद चल रहा। उस मकान पर बिजली निगम ने एक और बिजली कनेक्शन दे दिया। और अदालत में चल रहे विवाद जानकारी पहले ही बिजली अधिकारियों को पत्र के जरिए अवगत करा दिया था। उन्होंने लिखित आवेदन लेकर जांच कराने की आश्वासन दिया। कॉलोनी से नंगे बिजली के तार हटाने की मांग अधिकारियों के समक्ष रखा। तमाम क्षेत्रों में केबिल वाले तार लगाए जा चुके हैं लेकिन यहां नंगे तार लोगों के मकान से सट कर लगे हैं जिससे करेंट आने का खतरा बना रहता है। अधिशासी अभियंता ने लिखित शिकायत लेकर कहा कि बदला जाएगा। |
लोकाशाह ने मूर्तिपूजा के पक्ष में दी जाने वाली युक्तियो का तो सफलतापूर्वक खडन किया ही था, किन्तु उस समय के यतियों में व्याप्त भयकर शिथिलाचार एव अनागमिक प्रगाओं पर भी भरपूर प्रहार किया था । ऐसी ही १४ बातो का वर्णन लूँका ना सहिमा ५८ बोल विवरण के प्रत में किया गया जैसे - ईक्षा लेार नाम फिराना, वासक्षेप डालना, ग्रघोल करना, ज्योतिपप्रयोग, औषवि बनाकर देना, मुखवस्त्रिका कानो में पिराने के लिये छेद बढाना, उठावना करना, प्रतिमा की प्रतिष्ठा करना, झूला करना, ओघा फेरना, देवद्रव्य रखना, पर्युषण पर्व का प्रतिक्रमण चौथ को करना, यादि ।
प्रचार-प्रसार - अहमदाबाद उस समय व्यापार का एवं आवागमन का केन्द्र या ताययात्री भी वहा होकर जाया करते थे, अत वहा पर मनुष्यों का आवागमन प्राय बना ही रहता था । लोकाशाह की कीर्ति उस समय दिग्दिगतव्यपिनी हो रही थी । अत जो भी श्रावक अहमदाबाद आते वे लोकाशाह के प्रवचन सुनने (अावश, कुतूहलवश अथवा ईर्ष्यावश भी) अवश्य आते और जो भी एक वार उनका उपदेश सुन लेते वे उनके ही हो जात । एक वार अरह्तबाडा सूरत आदि स्थानो के चार बड़े २ मघ शत्रु जय की यात्रा को जाते हुए अहमदाबाद आये और कुतूहलवश लोकाशाह के पास उपदेश श्रवण को चले गये । लोकाशाह की अमोध युक्तियो एव प्रमाणो से प्रभावित होकर उन्होंने अपनी यात्रा त्याग दी और लोकाशाह की धमयात्रा में शामिल हो गये ।" अब तक लोकाशाह ने किसी का दीक्षा नही दी थी न स्वय ने ही ली थी । अब लोकाशाह के उपदेशो से प्रेरित होकर भाणाजी, जगमालजी, सर्वाजी, दयालजी आदि ४५ व्यक्तियो ने लोकाशाह से प्रार्थना की हमें दीक्षा लेकर प्रचार करने की अनुमति दीजिये । लोकाशाह ने कहा - मै तो स्वय ग्रहस्थ हू, यदि आपको दीक्षा लेनी है तो किसी शुद्धाचारी के पास दीक्षा लो । आखिर ज्ञानजी ऋषि के पास उनकी दीक्षा हुई 13
लोकाशाह की दीक्षा लोकाशाह की दीक्षा के विषय मे विद्वानों से गहरा मतभेद है। अधिकाश विद्वानो का मत है कि उन्होंने स्वय ने दीक्षा नहीं ली, किन्तु तपागच्छीय यति कातिविजयजी, स्वामी मरिगलालजी म०, शास्त्रोद्धारक पूज्यश्री प्रमोलकऋषिजी म० का मत है कि उन्होंने दीक्षा लो थो । मरुघरकेसरी श्रीमिश्रीमलजी म० को शाह जी की दीक्षा का उल्लेख कल्याणजी भगाली जैलसमेर वालो के संस्कृतमय पट्ठे से, जयतारण के गुजराती उपाश्रय के भडार से प्राप्त पुराने पन्नो से, एव ज्ञानसागरजी यति द्वारा रचित धर्मपरीक्षा नाटक मे मिला है । तदनुसार उन्होंने स० १५३८ की मगसर सुदि ५ का दीक्षा ली ।
बलिदान - दीक्षा के उपरात उनका प्रचार और अधिक बढ़ गया। उनके दिन दुगुने रात चौगुने बढते हुए प्रचंड प्रताप से प्रतिक्रियावादियो का सिंहासन डोल उठा। उनके मस्तिष्क का संतुलन समाप्त हो गया । उनके हृदय मे ईर्ष्याप की अग्नि भभक उठी । उन्होंने पड्यंत्र रचकर तेले के पारने पर उन्हे विपमिश्रित आहार बहरा दिया । विप का आभास होने पर भी उन्होंने ममता बनाय रखी और सथारेपूर्वक स० १५४६ मे स्वर्गवासी हुए । ४
अहिंसा के अवतार, सत्य के पुजारी, ज्ञान के देवता, क्राति के युगसृष्टा धर्मप्राण श्री लोकाशाह धर्म के दीवानो द्वारा अविश्वास की बलिवेदी पर बलिदान कर दिये गये । प्रत्येक महामानव की - चाहे ईसा हो या सुकरात मीरा हो या गावी प्रतिक्रियावादी लोग ऐसी ही गति किया करते हैं। किन्तु इससे उनका उद्देश्य पूरा नहीं होता ।
१ दया धर्मों थयो बहु लोग । एहविमिल्यो भाणा नो सयोग ।
- लो० गच्छोय यति भानुचद्रकृत दयारधर्म चौपाई 'पट्टावलीपराग' से इस घटना का वर्णन यो है - 'तेणे समय मारवाडयो एक सघ से जानी जात्राइ जाई तेमा आठ सघ सुखि छे, भाषा भीटा जगमाल सखा प्रमुख ते पाटण आव्या ते लोकाशाहनो नवीन धर्मप्रबोध साभलवा आव्या, तेणे प्रबोध दई सिद्धात ओलखाच्यो तेणे पोसाली धर्म, देहरो प्रतिमापुजा नुकी, साध थया ।
'धर्मवीर लोकाशाह ( म० के० श्री मिश्रीमलजी म०) पृष्ठ ५८
धर्म लोकाशाह | लोकाशाह ने मूर्तिपूजा के पक्ष में दी जाने वाली युक्तियो का तो सफलतापूर्वक खडन किया ही था, किन्तु उस समय के यतियों में व्याप्त भयकर शिथिलाचार एव अनागमिक प्रगाओं पर भी भरपूर प्रहार किया था । ऐसी ही चौदह बातो का वर्णन लूँका ना सहिमा अट्ठावन बोल विवरण के प्रत में किया गया जैसे - ईक्षा लेार नाम फिराना, वासक्षेप डालना, ग्रघोल करना, ज्योतिपप्रयोग, औषवि बनाकर देना, मुखवस्त्रिका कानो में पिराने के लिये छेद बढाना, उठावना करना, प्रतिमा की प्रतिष्ठा करना, झूला करना, ओघा फेरना, देवद्रव्य रखना, पर्युषण पर्व का प्रतिक्रमण चौथ को करना, यादि । प्रचार-प्रसार - अहमदाबाद उस समय व्यापार का एवं आवागमन का केन्द्र या ताययात्री भी वहा होकर जाया करते थे, अत वहा पर मनुष्यों का आवागमन प्राय बना ही रहता था । लोकाशाह की कीर्ति उस समय दिग्दिगतव्यपिनी हो रही थी । अत जो भी श्रावक अहमदाबाद आते वे लोकाशाह के प्रवचन सुनने अवश्य आते और जो भी एक वार उनका उपदेश सुन लेते वे उनके ही हो जात । एक वार अरह्तबाडा सूरत आदि स्थानो के चार बड़े दो मघ शत्रु जय की यात्रा को जाते हुए अहमदाबाद आये और कुतूहलवश लोकाशाह के पास उपदेश श्रवण को चले गये । लोकाशाह की अमोध युक्तियो एव प्रमाणो से प्रभावित होकर उन्होंने अपनी यात्रा त्याग दी और लोकाशाह की धमयात्रा में शामिल हो गये ।" अब तक लोकाशाह ने किसी का दीक्षा नही दी थी न स्वय ने ही ली थी । अब लोकाशाह के उपदेशो से प्रेरित होकर भाणाजी, जगमालजी, सर्वाजी, दयालजी आदि पैंतालीस व्यक्तियो ने लोकाशाह से प्रार्थना की हमें दीक्षा लेकर प्रचार करने की अनुमति दीजिये । लोकाशाह ने कहा - मै तो स्वय ग्रहस्थ हू, यदि आपको दीक्षा लेनी है तो किसी शुद्धाचारी के पास दीक्षा लो । आखिर ज्ञानजी ऋषि के पास उनकी दीक्षा हुई तेरह लोकाशाह की दीक्षा लोकाशाह की दीक्षा के विषय मे विद्वानों से गहरा मतभेद है। अधिकाश विद्वानो का मत है कि उन्होंने स्वय ने दीक्षा नहीं ली, किन्तु तपागच्छीय यति कातिविजयजी, स्वामी मरिगलालजी मशून्य, शास्त्रोद्धारक पूज्यश्री प्रमोलकऋषिजी मशून्य का मत है कि उन्होंने दीक्षा लो थो । मरुघरकेसरी श्रीमिश्रीमलजी मशून्य को शाह जी की दीक्षा का उल्लेख कल्याणजी भगाली जैलसमेर वालो के संस्कृतमय पट्ठे से, जयतारण के गुजराती उपाश्रय के भडार से प्राप्त पुराने पन्नो से, एव ज्ञानसागरजी यति द्वारा रचित धर्मपरीक्षा नाटक मे मिला है । तदनुसार उन्होंने सशून्य एक हज़ार पाँच सौ अड़तीस की मगसर सुदि पाँच का दीक्षा ली । बलिदान - दीक्षा के उपरात उनका प्रचार और अधिक बढ़ गया। उनके दिन दुगुने रात चौगुने बढते हुए प्रचंड प्रताप से प्रतिक्रियावादियो का सिंहासन डोल उठा। उनके मस्तिष्क का संतुलन समाप्त हो गया । उनके हृदय मे ईर्ष्याप की अग्नि भभक उठी । उन्होंने पड्यंत्र रचकर तेले के पारने पर उन्हे विपमिश्रित आहार बहरा दिया । विप का आभास होने पर भी उन्होंने ममता बनाय रखी और सथारेपूर्वक सशून्य एक हज़ार पाँच सौ छियालीस मे स्वर्गवासी हुए । चार अहिंसा के अवतार, सत्य के पुजारी, ज्ञान के देवता, क्राति के युगसृष्टा धर्मप्राण श्री लोकाशाह धर्म के दीवानो द्वारा अविश्वास की बलिवेदी पर बलिदान कर दिये गये । प्रत्येक महामानव की - चाहे ईसा हो या सुकरात मीरा हो या गावी प्रतिक्रियावादी लोग ऐसी ही गति किया करते हैं। किन्तु इससे उनका उद्देश्य पूरा नहीं होता । एक दया धर्मों थयो बहु लोग । एहविमिल्यो भाणा नो सयोग । - लोशून्य गच्छोय यति भानुचद्रकृत दयारधर्म चौपाई 'पट्टावलीपराग' से इस घटना का वर्णन यो है - 'तेणे समय मारवाडयो एक सघ से जानी जात्राइ जाई तेमा आठ सघ सुखि छे, भाषा भीटा जगमाल सखा प्रमुख ते पाटण आव्या ते लोकाशाहनो नवीन धर्मप्रबोध साभलवा आव्या, तेणे प्रबोध दई सिद्धात ओलखाच्यो तेणे पोसाली धर्म, देहरो प्रतिमापुजा नुकी, साध थया । 'धर्मवीर लोकाशाह पृष्ठ अट्ठावन धर्म लोकाशाह |
बॉलीवुड एक्ट्रेस अथिया शेट्टी का पिंक लहंगा ब्राइडल परफेक्ट लहंगा हैं।
अथिया शेट्टी का ये व्हाइट लहंगा की किसी भी ब्राइडल की खूबसूरती पर चार चांद लगाने के लिए काफी हैं।
अथिया शेट्टी का ये लहंगा वेडिंग फंक्शन पर ब्राइडल को कैरी करने के लिए बेहतरीन हैं।
एक्ट्रेस का ये चार्मिंग लहंगा किसी भी ब्राइडल को फंक्शन पर पहनने के लिए शानदार हो सकता हैं।
एक्ट्रेस जल्द ही क्रिकेटर केएल राहुल के साथ शादी के बंधन में बंधने वाली हैं।
| बॉलीवुड एक्ट्रेस अथिया शेट्टी का पिंक लहंगा ब्राइडल परफेक्ट लहंगा हैं। अथिया शेट्टी का ये व्हाइट लहंगा की किसी भी ब्राइडल की खूबसूरती पर चार चांद लगाने के लिए काफी हैं। अथिया शेट्टी का ये लहंगा वेडिंग फंक्शन पर ब्राइडल को कैरी करने के लिए बेहतरीन हैं। एक्ट्रेस का ये चार्मिंग लहंगा किसी भी ब्राइडल को फंक्शन पर पहनने के लिए शानदार हो सकता हैं। एक्ट्रेस जल्द ही क्रिकेटर केएल राहुल के साथ शादी के बंधन में बंधने वाली हैं। |
अंडे तो हमारे आहार का जरूरी हिस्सा हैं, लेकिन इसके बारे में कई ऐसी बातें हैं जिनसे हम अनजान हैं. जानिये कुछ ऐसी ही बातें जो शायद आपने पहले कभी न सुनी हों.
1-अंडे की ताजगी की पहचान के लिए उसे नमक मिले ठंडे पानी में रखें. अगर वह अंडा डूब जाता है तो मान लीजिये कि वह ताजा है और अगर वह तैरता रहता है, तो समझ जाइये कि वह अंडा पुराना हो चुका है.
2-उबले अंडों को आसानी से सफाई के साथ छीलने के लिए उन्हें उबलने के बाद पाँच मिनट के लिए ठंडे पानी में डाल दें. थोड़ी देर बाद उन अंडों को छीलेंगे तो वे आसानी से छिल जाएंगे.
3-क्या आप इस बात का यकीन करेंगे कि अंडे के छिलके में 17 हजार छोटे-छोटे रोम छिद्र होते हैं. जी नंगी आंखों से इन रोम छिद्रों को देख पाना संभव नहीं हो पाता. तो नेकिन अगर आप आर्वधक लैंस की सहायता से देखेंगे तो आप इन छिद्रों को महसूस कर पाएंगे.
4-अंडों में पाये जाने वाले पोषक तत्वों के कारण वे बुजुर्गों के लिए भी काफी सेहतमंद माने जाते हैं. बच्चे और युवा भी अंडे का सेवन कर सकते हैं. कुल मिलाकर कहा जाए तो अंडा पूरे परिवार के लिए उपयोगी और स्वास्थ्यवर्धक होता है.
5-अंडों में ओमेगा थ्री फैटी एसिड होता है. इसे हैल्थी फैट कहा जाता है. यह तत्व हमारे दिल और रक्तवाहिनियों के लिए बेहद फायदेमंद होता है. अंडे के पीले हिस्से में वसा बहुत अधिक होती हे, इसलिए कई डॉक्टर इसका सेवन न करने की सलाह देते हैं. हालांकि वैज्ञानिक मानते हैं कि अगर सीमित मात्रा में अंडे के पीले हिस्से का सेवन किया जाए तो यह दिल को नुकसान नहीं पहुंचााता.
| अंडे तो हमारे आहार का जरूरी हिस्सा हैं, लेकिन इसके बारे में कई ऐसी बातें हैं जिनसे हम अनजान हैं. जानिये कुछ ऐसी ही बातें जो शायद आपने पहले कभी न सुनी हों. एक-अंडे की ताजगी की पहचान के लिए उसे नमक मिले ठंडे पानी में रखें. अगर वह अंडा डूब जाता है तो मान लीजिये कि वह ताजा है और अगर वह तैरता रहता है, तो समझ जाइये कि वह अंडा पुराना हो चुका है. दो-उबले अंडों को आसानी से सफाई के साथ छीलने के लिए उन्हें उबलने के बाद पाँच मिनट के लिए ठंडे पानी में डाल दें. थोड़ी देर बाद उन अंडों को छीलेंगे तो वे आसानी से छिल जाएंगे. तीन-क्या आप इस बात का यकीन करेंगे कि अंडे के छिलके में सत्रह हजार छोटे-छोटे रोम छिद्र होते हैं. जी नंगी आंखों से इन रोम छिद्रों को देख पाना संभव नहीं हो पाता. तो नेकिन अगर आप आर्वधक लैंस की सहायता से देखेंगे तो आप इन छिद्रों को महसूस कर पाएंगे. चार-अंडों में पाये जाने वाले पोषक तत्वों के कारण वे बुजुर्गों के लिए भी काफी सेहतमंद माने जाते हैं. बच्चे और युवा भी अंडे का सेवन कर सकते हैं. कुल मिलाकर कहा जाए तो अंडा पूरे परिवार के लिए उपयोगी और स्वास्थ्यवर्धक होता है. पाँच-अंडों में ओमेगा थ्री फैटी एसिड होता है. इसे हैल्थी फैट कहा जाता है. यह तत्व हमारे दिल और रक्तवाहिनियों के लिए बेहद फायदेमंद होता है. अंडे के पीले हिस्से में वसा बहुत अधिक होती हे, इसलिए कई डॉक्टर इसका सेवन न करने की सलाह देते हैं. हालांकि वैज्ञानिक मानते हैं कि अगर सीमित मात्रा में अंडे के पीले हिस्से का सेवन किया जाए तो यह दिल को नुकसान नहीं पहुंचााता. |
शिमला (हैडली): राष्ट्रीय पैंशन योजना कर्मचारी संघ कर्नाटक के एक प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को बेंगलुरु में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह से भेंट की। प्रतिनिधिमंडल की अध्यक्षता संघ के अध्यक्ष शांताराम तेजा न की। इस मौके पर संघ ने हिमाचल प्रदेश में पुरानी पैंशन योजना की बहाली के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया, साथ ही उम्मीद जताई कि कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार के गठन के बाद अब यहां भी जल्द ही पुरानी पैंशन योजना बहाल होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल में पुरानी पैंशन योजना को बहाल करने से लगभग 1. 36 लाख कर्मचारियों को लाभ हुआ है। उन्होंने राज्य की विकास यात्रा में कर्मचारियों के महत्वपूर्ण योगदान को स्वीकार किया और उनकी सामाजिक सुरक्षा के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने कर्मचारियों और पैंशनर्ज दोनों को 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता दिया है। उन्होंने राज्य की वित्तीय स्थिति में सुधार होने पर कर्मचारियों को अतिरिक्त लाभ प्रदान करने का आश्वासन दिया।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने पर सिद्धारमैया को बधाई दी है। सीएम सुखविंदर सिंह भी शनिवार को बेंगलुरु में आयोजित उनके शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए। उन्होंने उम्मीद जताई कि सीएम सिद्धारमैया के दूरदर्शी और सक्षम नेतृत्व में कर्नाटक राज्य विकास के नए आयाम स्थापित करेगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी गरीब और शोषित वर्गों का विशेष ध्यान रखने के साथ समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।
| शिमला : राष्ट्रीय पैंशन योजना कर्मचारी संघ कर्नाटक के एक प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को बेंगलुरु में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह से भेंट की। प्रतिनिधिमंडल की अध्यक्षता संघ के अध्यक्ष शांताराम तेजा न की। इस मौके पर संघ ने हिमाचल प्रदेश में पुरानी पैंशन योजना की बहाली के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया, साथ ही उम्मीद जताई कि कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार के गठन के बाद अब यहां भी जल्द ही पुरानी पैंशन योजना बहाल होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल में पुरानी पैंशन योजना को बहाल करने से लगभग एक. छत्तीस लाख कर्मचारियों को लाभ हुआ है। उन्होंने राज्य की विकास यात्रा में कर्मचारियों के महत्वपूर्ण योगदान को स्वीकार किया और उनकी सामाजिक सुरक्षा के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने कर्मचारियों और पैंशनर्ज दोनों को तीन प्रतिशत महंगाई भत्ता दिया है। उन्होंने राज्य की वित्तीय स्थिति में सुधार होने पर कर्मचारियों को अतिरिक्त लाभ प्रदान करने का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने पर सिद्धारमैया को बधाई दी है। सीएम सुखविंदर सिंह भी शनिवार को बेंगलुरु में आयोजित उनके शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए। उन्होंने उम्मीद जताई कि सीएम सिद्धारमैया के दूरदर्शी और सक्षम नेतृत्व में कर्नाटक राज्य विकास के नए आयाम स्थापित करेगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी गरीब और शोषित वर्गों का विशेष ध्यान रखने के साथ समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। |
पत्नी के घर से निकलते ही ताहिदुल ने दूसरी शादी की तैयारी शुरू कर दी। सिलीगुड़ी महकमा के फांसीदेवा प्रखंड निवासी एक युवती से उसका निकाह तय भी हो गया। यह खबर ताहिदुल की पहली पत्नी को भी लग गई।
सिलीगुड़ी, जागरण संवाददाता। दूसरी शादी करने के चक्कर में सेना के एक जवान को जेल की हवा खानी पड़ गई। वह तो बारात लेकर होनेवाले ससुराल भी पहुंंच चुका था। जलपाईगुड़ी पुलिस ने ऐन वक्त पर उसे गिरफ्तार कर लिया। देश की सीमा पर तैनात एक जवान को दूसरी शादी करने के आरोप में न्यू जलपाईगुड़ी थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उसका नाम मोहम्मद ताहिदुल बताया गया है। शुक्रवार को उसे जलपाईगुड़ी अदालत में पेश किया गया। जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक भारतीय सेना का जवान मोहम्मद ताहिदुल अपने परिवार के साथ शहर से सटे न्यू जलपाईगुड़ी थाना अंतर्गत फूलबाड़ी-1 नंबर ग्राम पंचायत के कामरांगागुड़ी इलाके में रहता है। दो वर्ष पहले आमबाड़ी के माचागंज निवासी एक रिश्तेदार की बेटी के साथ उसने निकाह किया। आरोप है कि निकाह के बाद से ही ससुराल में युवती पर शारीरिक और मानसिक अत्याचार होने लगा। बल्कि उसे जान से मारने तक की भी कोशिश की गई। तंग आकर महिला बीते अगस्त महीने में ससुराल से अपने मायके आ गई। उसके घर से निकलते ही ताहिदुल ने दूसरी शादी की तैयारी शुरू कर दी। सिलीगुड़ी महकमा के फांसीदेवा प्रखंड निवासी एक युवती से उसका निकाह तय भी हो गया। यह खबर ताहिदुल की पहली पत्नी को भी लग गई।
जानकारी मिलते ही वह न्यू जलपाईगुड़ी थाना पहुंची और ताहिदुल के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने छानबीन शुरू की तो पता चला कि शुक्रवार को ताहिदुल का निकाह होना है। ताहिदुल बारात लेकर पहुंच भी चुका है। इसके बाद न्यू जलपाईगुड़ी थाने की टीम ने फांसीदेवा थाना पुलिस की सहायता से बीते गुरुवार की रात ही ताहिदुल की तलाश में उसके भावी ससुराल पहुंची। पहली पत्नी से कानूनन तलाक लिए बगैर दूसरी शादी करने के आरोप में उसे गिरफ्तार कर लिया।
| पत्नी के घर से निकलते ही ताहिदुल ने दूसरी शादी की तैयारी शुरू कर दी। सिलीगुड़ी महकमा के फांसीदेवा प्रखंड निवासी एक युवती से उसका निकाह तय भी हो गया। यह खबर ताहिदुल की पहली पत्नी को भी लग गई। सिलीगुड़ी, जागरण संवाददाता। दूसरी शादी करने के चक्कर में सेना के एक जवान को जेल की हवा खानी पड़ गई। वह तो बारात लेकर होनेवाले ससुराल भी पहुंंच चुका था। जलपाईगुड़ी पुलिस ने ऐन वक्त पर उसे गिरफ्तार कर लिया। देश की सीमा पर तैनात एक जवान को दूसरी शादी करने के आरोप में न्यू जलपाईगुड़ी थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उसका नाम मोहम्मद ताहिदुल बताया गया है। शुक्रवार को उसे जलपाईगुड़ी अदालत में पेश किया गया। जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक भारतीय सेना का जवान मोहम्मद ताहिदुल अपने परिवार के साथ शहर से सटे न्यू जलपाईगुड़ी थाना अंतर्गत फूलबाड़ी-एक नंबर ग्राम पंचायत के कामरांगागुड़ी इलाके में रहता है। दो वर्ष पहले आमबाड़ी के माचागंज निवासी एक रिश्तेदार की बेटी के साथ उसने निकाह किया। आरोप है कि निकाह के बाद से ही ससुराल में युवती पर शारीरिक और मानसिक अत्याचार होने लगा। बल्कि उसे जान से मारने तक की भी कोशिश की गई। तंग आकर महिला बीते अगस्त महीने में ससुराल से अपने मायके आ गई। उसके घर से निकलते ही ताहिदुल ने दूसरी शादी की तैयारी शुरू कर दी। सिलीगुड़ी महकमा के फांसीदेवा प्रखंड निवासी एक युवती से उसका निकाह तय भी हो गया। यह खबर ताहिदुल की पहली पत्नी को भी लग गई। जानकारी मिलते ही वह न्यू जलपाईगुड़ी थाना पहुंची और ताहिदुल के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने छानबीन शुरू की तो पता चला कि शुक्रवार को ताहिदुल का निकाह होना है। ताहिदुल बारात लेकर पहुंच भी चुका है। इसके बाद न्यू जलपाईगुड़ी थाने की टीम ने फांसीदेवा थाना पुलिस की सहायता से बीते गुरुवार की रात ही ताहिदुल की तलाश में उसके भावी ससुराल पहुंची। पहली पत्नी से कानूनन तलाक लिए बगैर दूसरी शादी करने के आरोप में उसे गिरफ्तार कर लिया। |
स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूज़ः एक तरफ जहा भारत सरकार कोरोना की तीसरी लहर से लड़ाई करने के लिए पूरी तरीके से तैयारियां कर रही है। वहीं उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के हिमाऊपुर में झोलाछाप डॉक्टर वेफिकर अपना क्लीनिक चला रही है। सूत्रों के मुताबिक झोलाछाप डॉक्टर की लापरवाही से 3 दिन में दो मौत हुई है। इधर फिरोजाबाद में डेंगू का प्रकोष्ठ से कई बच्चों की जाने भी जा चुकी है। इस विषय पर कई बार जिलाधिकारी चंद्र विजय सिंह ने स्वास्थ्य विभाग की टीम बनाकर झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई के कड़े निर्देश दिए हैं। नई आबादी में रहने वाले अजय कुमार की पत्नी मुन्नी को बुखार आने से इलाज के लिए झोलाछाप डॉक्टर के पास ले जाने के बाद झोलाछाप डॉक्टर द्वारा उपचार चलते समय मुन्नी की हालत बिगड़ती चली गई और कुछ देर बाद मुन्नी देवी की मौत हो गई। इस से झोलाछाप डॉक्टर घबरा के मुन्नी देवी की परिजनों से किसी तरह बचते हुए के मृतक के शव को छोड़कर उहासे भाग निकला।
| स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूज़ः एक तरफ जहा भारत सरकार कोरोना की तीसरी लहर से लड़ाई करने के लिए पूरी तरीके से तैयारियां कर रही है। वहीं उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के हिमाऊपुर में झोलाछाप डॉक्टर वेफिकर अपना क्लीनिक चला रही है। सूत्रों के मुताबिक झोलाछाप डॉक्टर की लापरवाही से तीन दिन में दो मौत हुई है। इधर फिरोजाबाद में डेंगू का प्रकोष्ठ से कई बच्चों की जाने भी जा चुकी है। इस विषय पर कई बार जिलाधिकारी चंद्र विजय सिंह ने स्वास्थ्य विभाग की टीम बनाकर झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई के कड़े निर्देश दिए हैं। नई आबादी में रहने वाले अजय कुमार की पत्नी मुन्नी को बुखार आने से इलाज के लिए झोलाछाप डॉक्टर के पास ले जाने के बाद झोलाछाप डॉक्टर द्वारा उपचार चलते समय मुन्नी की हालत बिगड़ती चली गई और कुछ देर बाद मुन्नी देवी की मौत हो गई। इस से झोलाछाप डॉक्टर घबरा के मुन्नी देवी की परिजनों से किसी तरह बचते हुए के मृतक के शव को छोड़कर उहासे भाग निकला। |
बॉलीवुड एक्ट्रेस Malaika Arora न सिर्फ अपने प्रोफेशनल लाइफ बल्कि पर्सनल लाइफ के चलते भी अक्सर सुखियों में रहती हैं। एक्ट्रेस को अक्सर एक से बढ़ कर एक ओउत्फिट्स में स्पॉट किया जाता है। न सिर्फ एक्टिंग बल्कि फैशन के लिए भी एक्ट्रेस जानी जाती हैं। 50 की उम्र में भी एक्ट्रेस की फिटनेस देखते ही बनती है। मलाइका का नाम बॉलीवुड की फिटेस्ट एक्ट्रेस की लिस्ट में शुमार है। हाल ही में एक्ट्रेस फिल्मस्तान स्टूडियो में स्पॉट हुई हैं, जहां एक्ट्रेस ने गोल्डन गाउन कैरी किया था। एक्ट्रेस का यह लुक देखते ही बन रहा था। साइड स्लीट गाउन में एक्ट्रेस बेहद ही हॉट लग रही थी। अधिक जानकारी के लिए वीडियो जरूर देखें।
| बॉलीवुड एक्ट्रेस Malaika Arora न सिर्फ अपने प्रोफेशनल लाइफ बल्कि पर्सनल लाइफ के चलते भी अक्सर सुखियों में रहती हैं। एक्ट्रेस को अक्सर एक से बढ़ कर एक ओउत्फिट्स में स्पॉट किया जाता है। न सिर्फ एक्टिंग बल्कि फैशन के लिए भी एक्ट्रेस जानी जाती हैं। पचास की उम्र में भी एक्ट्रेस की फिटनेस देखते ही बनती है। मलाइका का नाम बॉलीवुड की फिटेस्ट एक्ट्रेस की लिस्ट में शुमार है। हाल ही में एक्ट्रेस फिल्मस्तान स्टूडियो में स्पॉट हुई हैं, जहां एक्ट्रेस ने गोल्डन गाउन कैरी किया था। एक्ट्रेस का यह लुक देखते ही बन रहा था। साइड स्लीट गाउन में एक्ट्रेस बेहद ही हॉट लग रही थी। अधिक जानकारी के लिए वीडियो जरूर देखें। |
नरेंद्र मोदी और जो बाइडेन ने ज्वाइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान खुलकर पाकिस्तान की धरती से भारत में हो रही आतंकी घटनाएं और वहां चल रहे लश्कर और हिजबुल जैसे संगठनों के कैम्प पर अपनी बात कही.
Anju in Pakistan: Seema Haider के बाद अब अंजू का मामला चर्चा में, 'प्यार की खातिर' पहुंची पाकिस्तान?
श्रापित है ये श्मशान घाट, यहां एक दिन न जले शव... तो गांव में हो जाएगी किसी की मौत!
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10. आप यदि जीवन में एक बार जलियांवाला बाग नहीं गये हैं तो असल में आप भारतीय नहीं हैं. जीवन में एक बार हर भारतीय को यहाँ जरूर जाना चाहिए.
तो इस प्रकार के आप इन तस्वीरों को देखकर भी जलियांवाला बाग हत्याकांड के दर्द को महसूस कर सकते हैं. अंग्रेज किस तरह से भारतियों पर अत्याचार कर रहे थे, यह घटना इसका एक उदाहरण है.
| दस. आप यदि जीवन में एक बार जलियांवाला बाग नहीं गये हैं तो असल में आप भारतीय नहीं हैं. जीवन में एक बार हर भारतीय को यहाँ जरूर जाना चाहिए. तो इस प्रकार के आप इन तस्वीरों को देखकर भी जलियांवाला बाग हत्याकांड के दर्द को महसूस कर सकते हैं. अंग्रेज किस तरह से भारतियों पर अत्याचार कर रहे थे, यह घटना इसका एक उदाहरण है. |
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