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- धूम 3 ने कमाए 500 करोड़, आमिर अपसेट?
लेकिन उसके सामने एसीपी जय दीक्षित (अभिषेक बच्चन) और अली (उदय चोपड़ा) दीवार बन कर खड़े हो जाते हैं. इन तीनों के बीच चूहा-बिल्ली का खेल चलता रहता है और अंत में जीत जय दीक्षित की होती है. और बस कहानी खत्म!
| - धूम तीन ने कमाए पाँच सौ करोड़, आमिर अपसेट? लेकिन उसके सामने एसीपी जय दीक्षित और अली दीवार बन कर खड़े हो जाते हैं. इन तीनों के बीच चूहा-बिल्ली का खेल चलता रहता है और अंत में जीत जय दीक्षित की होती है. और बस कहानी खत्म! |
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हाल ही में समाचार माध्यम के एक हिस्से में ऐसी रिपोर्ट आई हैं, जिनमें दावा किया गया है कि भारतीय रेलवे ने ट्रेन में यात्रा करने वाले बच्चों के लिए टिकट बुकिंग के संबंध में नियम बदल दिया है। इन रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अब एक से चार साल की उम्र के बच्चों को ट्रेन में सफर करने के लिए टिकट लेना होगा।.
ये समाचार सामग्री और मीडिया रिपोर्ट भ्रामक हैं। यह सूचित किया जाता है कि भारतीय रेलवे ने ट्रेन में यात्रा करने वाले बच्चों के लिए टिकटों की बुकिंग के संबंध में कोई बदलाव नहीं किया है। यात्रियों की मांग पर उन्हें टिकट खरीदने और अपने 5 साल से कम उम्र के बच्चे के लिए बर्थ बुक करने का विकल्प दिया गया है। और अगर वे अलग बर्थ नहीं चाहते हैं, तो यह सुविधा निशुल्क है, जैसे पहले हुआ करती थी।
रेल मंत्रालय के दिनांक 06.03.2020 के एक परिपत्र में कहा गया है कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों को मुफ्त में ले जाया जाएगा। हालांकि, अलग बर्थ या सीट (कुर्सी कार में) नहीं दी जाएगी। इसलिए किसी भी टिकट की खरीद की आवश्यकता नहीं है, बशर्ते अलग बर्थ की मांग नहीं की जाए। तथापि, यदि 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए स्वैच्छिक आधार पर बर्थ/सीट की मांग की जाती है तो पूर्ण वयस्क किराया वसूल किया जाएगा।
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| Posted On: हाल ही में समाचार माध्यम के एक हिस्से में ऐसी रिपोर्ट आई हैं, जिनमें दावा किया गया है कि भारतीय रेलवे ने ट्रेन में यात्रा करने वाले बच्चों के लिए टिकट बुकिंग के संबंध में नियम बदल दिया है। इन रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अब एक से चार साल की उम्र के बच्चों को ट्रेन में सफर करने के लिए टिकट लेना होगा।. ये समाचार सामग्री और मीडिया रिपोर्ट भ्रामक हैं। यह सूचित किया जाता है कि भारतीय रेलवे ने ट्रेन में यात्रा करने वाले बच्चों के लिए टिकटों की बुकिंग के संबंध में कोई बदलाव नहीं किया है। यात्रियों की मांग पर उन्हें टिकट खरीदने और अपने पाँच साल से कम उम्र के बच्चे के लिए बर्थ बुक करने का विकल्प दिया गया है। और अगर वे अलग बर्थ नहीं चाहते हैं, तो यह सुविधा निशुल्क है, जैसे पहले हुआ करती थी। रेल मंत्रालय के दिनांक छः.तीन.दो हज़ार बीस के एक परिपत्र में कहा गया है कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों को मुफ्त में ले जाया जाएगा। हालांकि, अलग बर्थ या सीट नहीं दी जाएगी। इसलिए किसी भी टिकट की खरीद की आवश्यकता नहीं है, बशर्ते अलग बर्थ की मांग नहीं की जाए। तथापि, यदि पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए स्वैच्छिक आधार पर बर्थ/सीट की मांग की जाती है तो पूर्ण वयस्क किराया वसूल किया जाएगा। Read this release in: |
सर्वधन्विधैर्यभञ्जकत्वे शरीरसंरक्षणार्थपापमाचरतां मूढत्वे, स्वस्य वर्णनीयराजगुणकथनाशक्तत्वे च वाच्य एवोपस्कारकत्वात् । अत एव व्यङ्गन्चार्थस्य वाच्यपरिकरत्वात् परिकर इति नामास्यालङ्कारस्य । केचित्तु - निष्प्रयोजनविशेष - णोपादानेऽपुष्टार्थत्वदोषतयोक्तत्वात् सप्रयोजनत्वं विशेषणस्य दोषाभावमात्रं न कश्चिदलङ्कारः । एकनिष्ठतादृशाने कविशेषणोपन्यासे परं वैचित्र्यविशेषात्परिकर इत्यलङ्कारमध्ये परिगणित इत्याहुः । वस्तुतस्त्वनेकविशेषणोपन्यास एव परिक इति न नियमः । श्लेषयमकादिष्वपुष्टार्थदोषाभावेन तत्रैकस्यापि विशेषणस्य साभिप्रायस्य विन्यासे विच्छित्तिविशेषसद्भावात् परिकरत्वोपपत्तेः । यथा वाअतियजेत निजां यदि देवतामुभयतश्च्यवते जुषतेऽप्यघम् । क्षितिभृतैव सदैवतका वयं वनवताऽनवता किमहिद्रुहा ।।
वाच्यार्थ के, शरीर की रक्षा के लिए पाप करते लोग मूर्खत्वरूप वाच्यार्थ के तथा कवि राजा के गुण कहने में अशक्तत्वरूप वाच्यार्थ के उपस्कारक हो गये हैं । ( भाव यह है, तत्तत् विशेग्य जिसके लिए साभिप्राय विशेषण का प्रयोग किया गया है, स्वयं वाच्यार्थं के उपस्कारक होने के कारण तत्तत् विशेषण तथा उनसे व्यंजित व्यंग्यार्थ भी उसके अंग ( उपस्कारक ) बन जाते हैं । )
इसीलिए इस अलंकार का नाम परिकर है, क्योंकि यहाँ व्यंग्यार्थ वाच्यार्थ का परिकर (पोषक ) पाया जाता है। कुछ विद्वान् इले अलग से अलंकार नहीं मानते, उनका कहना है कि काव्य में निष्प्रयोजन विशेषण का प्रयोग तो होना ही नहीं चाहिए, क्योंकि निष्प्रयोजन विशेषण होने पर वहाँ अपुष्टार्थत्व दोष होगा, अतः सप्रयोजन ( साभिप्राय) विशेषण का होना अलंकार न होकर दोषाभावमात्र है। यदि परिकर कहीं होगा तो वहीं हो सकता है, जहाँ एक ही विशेष्य के लिए अनेक साभिप्राय विशेषणों का प्रयोग हो, क्योंकि ऐसे प्रयोग में विशेष चारुता पाई जाती है। इसलिए अनेक साभिप्राय विशेषणों के एक ही विशेष्य के लिए किए गये प्रयोग को ही अलंकारों में गिना गया है । ग्रन्थकार को यह मत अभिमत नहीं । वे कहते हैं कि ऐसा कोई नियम नहीं है कि अनेक साभिप्राय विशेषणों के प्रयोग में ही परिकर माना जाय। हम देखते हैं कि श्लेष, यमक आदि में अपुष्टार्थदोष के अभाव के कारण जहाँ एक भी विशेषण का साभिप्राय प्रयोग हो, वहाँ चमत्कार विशेष के कारण परिकरत्व की उपपत्ति होती है।
टिप्पणी - जगन्नाथ पंडितराज उक्त पूर्वपक्ष को मानते हैं। वे परिकर में अनेक विशेषणों का साभिप्रायत्व होना आवश्यक मानते हैं। इसका संकेत उनकी निम्न परिभाषा में 'विशेषणानां' पद का बहुवचन है ।
'विशेषणानां साभिप्रायत्वं परिकरः ।। ( रसगंगाधर पृ० ५१७)
साथ ही वे दीक्षित के इस मत का भी खण्डन करते हैं कि जहाँ इलेषयमकादि के कारण एक साभिप्राय विशेषण भी पाया जाता हो, वहाँ परिकर मानना ही होगा । (दे० वही पृ० ५१९-५२१) जैसे निम्न पद्य मेंकृष्ण नन्दादि गोपों से कह रहे हैंः - 'जो व्यक्ति अपने निजी देवता को छोड़कर अन्य देवता की पूजा करता है, वह दोनों लोकों से पतित होता है तथा पाप का भागी | सर्वधन्विधैर्यभञ्जकत्वे शरीरसंरक्षणार्थपापमाचरतां मूढत्वे, स्वस्य वर्णनीयराजगुणकथनाशक्तत्वे च वाच्य एवोपस्कारकत्वात् । अत एव व्यङ्गन्चार्थस्य वाच्यपरिकरत्वात् परिकर इति नामास्यालङ्कारस्य । केचित्तु - निष्प्रयोजनविशेष - णोपादानेऽपुष्टार्थत्वदोषतयोक्तत्वात् सप्रयोजनत्वं विशेषणस्य दोषाभावमात्रं न कश्चिदलङ्कारः । एकनिष्ठतादृशाने कविशेषणोपन्यासे परं वैचित्र्यविशेषात्परिकर इत्यलङ्कारमध्ये परिगणित इत्याहुः । वस्तुतस्त्वनेकविशेषणोपन्यास एव परिक इति न नियमः । श्लेषयमकादिष्वपुष्टार्थदोषाभावेन तत्रैकस्यापि विशेषणस्य साभिप्रायस्य विन्यासे विच्छित्तिविशेषसद्भावात् परिकरत्वोपपत्तेः । यथा वाअतियजेत निजां यदि देवतामुभयतश्च्यवते जुषतेऽप्यघम् । क्षितिभृतैव सदैवतका वयं वनवताऽनवता किमहिद्रुहा ।। वाच्यार्थ के, शरीर की रक्षा के लिए पाप करते लोग मूर्खत्वरूप वाच्यार्थ के तथा कवि राजा के गुण कहने में अशक्तत्वरूप वाच्यार्थ के उपस्कारक हो गये हैं । बन जाते हैं । ) इसीलिए इस अलंकार का नाम परिकर है, क्योंकि यहाँ व्यंग्यार्थ वाच्यार्थ का परिकर पाया जाता है। कुछ विद्वान् इले अलग से अलंकार नहीं मानते, उनका कहना है कि काव्य में निष्प्रयोजन विशेषण का प्रयोग तो होना ही नहीं चाहिए, क्योंकि निष्प्रयोजन विशेषण होने पर वहाँ अपुष्टार्थत्व दोष होगा, अतः सप्रयोजन विशेषण का होना अलंकार न होकर दोषाभावमात्र है। यदि परिकर कहीं होगा तो वहीं हो सकता है, जहाँ एक ही विशेष्य के लिए अनेक साभिप्राय विशेषणों का प्रयोग हो, क्योंकि ऐसे प्रयोग में विशेष चारुता पाई जाती है। इसलिए अनेक साभिप्राय विशेषणों के एक ही विशेष्य के लिए किए गये प्रयोग को ही अलंकारों में गिना गया है । ग्रन्थकार को यह मत अभिमत नहीं । वे कहते हैं कि ऐसा कोई नियम नहीं है कि अनेक साभिप्राय विशेषणों के प्रयोग में ही परिकर माना जाय। हम देखते हैं कि श्लेष, यमक आदि में अपुष्टार्थदोष के अभाव के कारण जहाँ एक भी विशेषण का साभिप्राय प्रयोग हो, वहाँ चमत्कार विशेष के कारण परिकरत्व की उपपत्ति होती है। टिप्पणी - जगन्नाथ पंडितराज उक्त पूर्वपक्ष को मानते हैं। वे परिकर में अनेक विशेषणों का साभिप्रायत्व होना आवश्यक मानते हैं। इसका संकेत उनकी निम्न परिभाषा में 'विशेषणानां' पद का बहुवचन है । 'विशेषणानां साभिप्रायत्वं परिकरः ।। साथ ही वे दीक्षित के इस मत का भी खण्डन करते हैं कि जहाँ इलेषयमकादि के कारण एक साभिप्राय विशेषण भी पाया जाता हो, वहाँ परिकर मानना ही होगा । जैसे निम्न पद्य मेंकृष्ण नन्दादि गोपों से कह रहे हैंः - 'जो व्यक्ति अपने निजी देवता को छोड़कर अन्य देवता की पूजा करता है, वह दोनों लोकों से पतित होता है तथा पाप का भागी |
कहूँ क्या ? मैं तो कुछ निश्चय नहीं कर सका । दूध मेरे बापका नहीं था । दूध था मंगला गऊका, और उसे दुहा था श्यामा ग्वालिनने । बस, उस दूधपर जैसे मेरा अधिकार है वैसे ही बिलावका भी । इसी कारण मैं उसपर क्रोध नहीं कर सकता । तथापि बहुत दिनोंसे एक प्रथा चली आती है कि बिल्ली दूध पी जाय तो लोग उसे मारने दौड़ते हैं । चिरकालसे चली आई इस चालको न मानकर मैं मनुष्यकुलमें कलंक भी नहीं बनना चाहता । क्या जानें, यह बिलाव अपनी मण्डलीमें जाकर चिदानन्द चतुर्वेदीको कायर कहने लगे; इस कारण मर्दोंके योग्य काम ही करना चाहिए। यह निश्चय कर, बहुत खोजनेपर पाई हुई एक टूटी लकड़ी ले, गर्वके साथ मैं उस बिलावको मारने झपटा।
बिलाव चिदानन्दको पहचानता था; लकड़ी देखकर वह कुछ विशेष भयभीत नहीं हुआ । केवल मेरी ओर देखकर एक जम्हाई लेकर जरा हट बैठा । बिलावने फिर कहा - ' म्याऊँ ।' उस समय भंग भगवतीकी कृपा से मुझे दिव्य कान मिल गये । तब बिलावका प्रश्न समझ कर लकड़ी रखकर मैं फिर पलँगपर आकर लेट रहा ।
बिलाव कह रहा था कि " मारपीट क्यों करते हो ? जरा स्थिर होकर हुका पीते-पीते विचार तो करो । संसारके सब रस, दूध, दही, मक्खन, मलाई, मोहनभोग, मांस, मछली आदि पदार्थ क्या तुम्हारे ही लिए हैं ? क्या हमारा उनपर कुछ भी अधिकार नहीं है ? तुम मनुष्य हो, हम बिलाव हैं; पर हममें तुममें अन्तर क्या ? तुम्हारे भूख प्यास है, हमारे भी है । तुम खाते हो, हम कोई आपत्ति नहीं करते; तो फिर हमारे कुछ खा-पी लेनेपर तुम किस शास्त्र के अनुसार लाठी लेकर मारने दौड़ते हो ? तुमको हम लोगोंसे कुछ उपदेश ग्रहण करना चाहिए । मेरी समझ में विज्ञ चौपायोंसे सीखे विना तुम्हारा ज्ञान बढ़ नहीं सकता। तुम्हारे विद्यालयों को देखने से जान पड़ता है कि इतने दिनोंके बाद तुम मेरे इस सिद्धान्तको मानने लगे हो ।
देखो, पलंगपर लेटनेवाले आदमी, धर्म क्या है ? परम धर्म है । यह दूध पीनेसे मेरा परम उपकार हुआ
परोपकार करना ही है। तुम्हारे दूध से
यह परोपकार हुआ - अतएव तुम इस परमधर्मके भागी हुए । मैंने चोरी
की या जो चाहे किया, किन्तु तुमको स्मरण रहे कि मैं ही तुम्हारे इस धर्मसंचयका मूल कारण हूँ । इस लिए मुझे मारनेका इरादा छोड़कर तुमको मेरी बढ़ाई करनी चाहिए । मैं तुम्हारे धर्मका सहायक हूँ ।
देखो, मैं चोर हूँ सही, किन्तु सोचो तो, मैं क्या शौकसे चोरी करता ? खानेको मिले तो कौन चोरी करेगा ? देखो जो बड़े भारी साधु-सज्जन ईमानदार समझे जाते हैं, जो चोरके नामसे काँप उठते हैं, वे चोरोंसे भी बढ़कर अधार्मिक हैं। उन्हें चोरी करनेकी जरूरत नहीं, इसीसे वे चोरी नहीं करते। किन्तु उनके पास आवश्यकता से अधिक धन होनेपर भी वे चोरकी तरफ आँख उठाकर नहीं देखते । इसीसे चोर चोरी करता है I अधर्म चोर नहीं करता, चोर जो चोरी करता है उस अधर्मका भागी धनी सूम है । चोर दोपी है, चोरको दण्ड होता है; किन्तु चोरीकी जड़ जो कृपण है, उसे क्यों नहीं दण्ड दिया जाना ?
" मैं एक दीवार से दूसरी दीवारपर म्याऊँ - म्याऊँ करता फिरता हूँ; तो भी कोई एक टुकड़ा रोटी मुझे नहीं देता । लोग आगेका बचा हुआ अन्न कुत्तोंको दे देते हैं, नालियों में फेंक देते हैं; मगर हम लोगोंको बुलाकर नहीं देते । तुम्हारा तो पेट भरा है, तुम हमारी भूखका कष्ट कैसे जान सकने हो ? हाय ! गरीवसे सहानुभूति दिखाने में क्या कुछ तुम्हारा गौरव घट जायगा ? इसमें सन्देह नहीं कि मुझ सरीखे दरिद्रकी व्यथा में व्यथित होना लजाकी बात है। जो लोग कभी अंधे अपाहिजको मुट्ठी भर अन्न नहीं देते, उन्हें भी यदि किसी राजा या सेट-- साहूकारपर कोई संकट आपड़े तो रातभर नींद नहीं आती । इस प्रकार पराई व्यथा में व्यथित होनेके लिए सब राजी होंगे । लेकिन मुझ सरीखे साधारण आदमीके दुखमें दुखी - छी ! कौन होगा ? देखो, यदि अमुक महामहोपाध्याय या तर्कचूडामणि अथवा न्यायालङ्कार तुम्हारा दूध पी जाते, तो क्या तुम लाटी लेकर उन्हें भी मारने दौड़ते ? नहीं, उलटे हाथ जोड़कर कहते कि "क्या और थोड़ा सा ले आऊँ ? " फिर प्रभो, मेरे लिए यह लाटी क्यों ? तुम कहोगे कि ये बड़े बड़े पंडित हैं-- मान्य हैं । अच्छा, पण्डिन या मान्य होनेके कारण क्या उनको हमसे अधिक भूख लगती है ? यह बात तो नहीं है । जिगे जरूरत नहीं उसे देनेका मनुष्य जातिको रोग है । गरीब मुफलिसको कोई नहीं देता। जो खानेके लिए आग्रह करनेसे नहीं नहीं करें, उनके लिए तो जबर्दस्ती
चौबेका चिट्ठा८२
भोजनका प्रबन्ध करो, और जो भूखसे व्याकुल होकर बिना बुलाये ही तुम्हारा अन्न खा जायँ उन्हें चोर कहकर दण्ड दो ! - छी-छी !
'देखो, हमारी दशा देखो, हम घर-घर, डगर- डगर, दीवार-दीवार, और आँगन - आँगन म्याऊँ म्याऊँ करते और दीन दृष्टिसे चारों तरफ देखते फिरते हैं, कोई हमको रोटीका टुकड़ा नहीं फेंक देता। हाँ, अगर कोई बिलाव तुम्हारे यहाँ पलाऊ हो जाता है, तो उसकी चैनसे गुजरने लगती है । वह वैसा ही हृष्टपुष्ट तो जाता है जैसे किसी बुड्डेके घर रहनेवाला उसकी जवान स्त्रीका भाई, अथवा मूर्ख मोटेमल रईसके पास रहनेवाला शतरञ्ज ताश वगैरहका खिलाड़ी मुसाहब । उन बिलाओंकी दुम फूल उठती है, शरीरमें रोऐं भरे रहते हैं। उनके रूपकी छटा देखकर बहुत से बिलाव कवि हो उठते हैं ।
" और हमारी दशा दुखो, भोजन न मिलनेके कारण पेट पीठमें लग गया है, हड्डियाँ देख पड़ती हैं, जीभ बाहर निकल रही है, पूँछ गिरी पड़ती है । निरन्तर भूखके मारे पुकारा करते हैं 'म्याऊँ ? ' ( अर्थात् मैं आऊँ ? ) खानेको नहीं मिला--'म्याऊँ ?' भैया, हमारा काला चमड़ा देखकर हमसे घृणा न करो । इस पृथ्वी के पदार्थोंपर हमारा भी कुछ अधिकार है । खानेको दो, नहीं तो चोरी करेंगे । हमारे काले चमड़े, सूखे मुख, क्षीण और करुणापूर्ण म्याउँ-- म्याऊँ शब्दको सुनकर क्या तुमको दुःख नहीं होता ? दया नहीं आती ? चोरके लिए दण्ड है, तो क्या निर्दयी निठुरके लिए दण्ड नहीं है ? दरिद्र पुरुष यदि अपने लिए आहार जुटावे तो उसके लिए दण्ड है, फिर धनी आदमी कृपणता करे तो उसको दण्ड देने की व्यवस्था क्यों नहीं ? तुम चिदानन्द, दूरदर्शी और समझदार हो, क्यों कि भंग भवानीके अनन्य उपासक हो । तुमको भी क्या यह बतलाना पड़ेगा कि रईसोंके दोपसे ही गरीब चोरी करते हैं ? पाँच सौ गरीबों को वंचित कर उनका भोजन अपने यहाँ बापके मालकी तरह रख लेनेका धनियोंको क्या अधिकार है ? और यदि रईस या धनी ऐसा करता है तो फिर वह भोजन दरिद्रोंको बाँट क्यों नहीं देता ? अगर वह नहीं देता, तो दरिद्र लोग जरूर ही उसमें से चुराकर खायँगे । क्यों कि भूखों मरनेके लिए इस पृथ्वीपर कोई नहीं आया।" बिलाव के वाक्य मुझे असह्य हो उठे। मैंने कहा - "ठहरो ठहरो, बिलाव पण्डित, तुम्हारी बातें भारी बोलशेविउमसे भरी हैं ! इनसे समाज में उलट८३
पलट हो जायगा ! जिसकी जितनी क्षमता है वह उतना धनसञ्चय न कर सकेगा, या चोरोंके उत्पातसे सुखपूर्वक उसका उपभोग न कर सकेगा, तो फिर कोई धनसञ्चयकी चेष्टा ही न करेगा । और इससे समाजकी आर्थिक उन्नति में या धनवृद्धिमें बाधा पड़ेगी ।
बिलावने कहा - "आर्थिक उन्नति या धनवृद्धि न होगी तो हमको क्या ? समाजकी धनवृद्धिका अर्थ हुआ धनीके धनकी वृद्धि । अच्छा, धनीका धन नहीं बढ़ा तो उससे दरिद्रकी क्या हानि हुई ? "
मैंने समझाकर कहा - "सामाजिक धनवृद्धि के सिवा समाजकी उन्नति नहीं हो सकती ।"
बिलावने क्रोध करके कहा - " मुझे अगर खानेको न मिले तो फिर मैं तुम्हारी समाजकी उन्नति लेकर क्या करूँगा ? "
बिलावको समझाना कठिन हो गया । जो विचारक या नैयायिक होता है उसको कभी, कोई भी, कुछ भी नहीं समझा सकता । यह बिलाव विचारक तो है ही, तार्किक भी बड़ा प्रबल है । इसीसे उसे मेरी बात न समझनेका अधिकार है। तब मैंने क्रोध न करके कहा- " हो सकता है कि समाजकी उन्नति में गरीबका कुछ स्वार्थ न हो, लेकिन धनियोंका तो उसमें विशेष स्वार्थ है । अतएव चोरको दण्ड देना कर्तव्य है । "
तब फिर बिलावरामने कहा - "आप चोरको फाँसी दीजिए, इसमें भी हमको आपत्ति नहीं; किन्तु उसके साथ ही एक और नियम बनाइए । अर्थात् जो विचारक चोरको सजा दे, वह पहले तीन दिन तक भूखा रहे । इसपर अगर विचारकको चोरी करके खानेकी इच्छा न हो तो वह खुशीसे चोरको फाँसीपर चढ़वा दे । तुमने मुझे मारनेके लिए लाठी तानी थी, तुम आजसे तीन दिन तक लंघन करो । इन तीन दिनों में अगर तुम रसिकबाबूकी रसोईमें न पकड़े जाओ तो मुझे जी भरके मार लेना, में चूँ नहीं करूँगा ।
चतुर लोगोंकी राय यह है कि यदि विचारमें हार जाय तो गंभीर भावसे उपदेश करने लग जाना चाहिए। मैं इसी प्रथाके अनुसार कहने लगा-" देखो बिलाव, तुम्हारी ये बातें बिल्कुल नीतिविरुद्ध हैं; इनकी चर्चा करने में भी पाप है। तुम इन सब संसारकी चिन्ताओं को छोड़ कर धर्म-कर्ममें मन लगाओ । तुम अगर चाहो तो मैं तुमको 'न्यूमेन' और 'पार्कर' के ग्रन्थ
चौबेका चिट्ठादे सकता हूँ। और चिदानन्द चतुर्वेदीका चिट्ठा पढ़नेसे भी तुम्हारा बहुत कुछ उपकार हो सकता है। और कुछ हो या न हो, भंग-भवानीकी असीम महिमा अच्छी तरह तुम्हारी समझ में आ जायगी। अब तुम अपने भवनको सिधारो । श्यामा ग्वालिनने कल कुछ ' खोया' देनेके लिए कहा है। सबेरे जलपान के समय आना । हम तुम दोनोंका साझा रहा । आज किसीकी हाँड़ी न चाटना । अगर बहुत भूख लगे तो फिर आ जाना, थोड़ीसी भंगकी गोली दे दूँगा ।
बिलावने कहा -" भंगकी मुझे जरूरत नहीं। रही हाँड़ीपर हाथ सफा करने की बात, सो इसका विचार भूख लगनेपर उसीके अनुसार किया
जायगा ।
बिलाव विदा हो गया । उस समय यह सोचकर मुझे बड़ा ही आनन्द हुआ कि आज मैं एक पतित आत्माको अन्धकारसे प्रकाशमें ले आया !
यही सोचता हूँ कि अगर पृथ्वीपर ढेंकी न होती, चिड़ियोंकी तरह खलिहान में बैठकर धान खाता ? या, कान और पूँछ हिलाकर गजेन्द्रगामिनी गऊकी तरह मड़ाई में मुँह डालता ? निश्चय, यह तो मैं न कर सकता, नौजवान काला काला नंगा धड़ंगा किसान आकर मेरी पसलियों में डंडा मारता और मैं दुम दबाकर सींग हिलाकर जान बचाकर चट पट वहाँसे भागता । किन्तु आर्य-सभ्यताकी अनन्त महिमाके कारण यह भय नहीं है । ढेंकी है, धान कुटकर चावल होते हैं। मैं इस परोपकारनियत ढेंकीको आर्यसभ्यताका एक विशेष फल समझता हूँ । इसके आगे आर्योंके साहित्य और दर्शनको मैं कुछ नहीं समझता । रामायण, कुमारसम्भव, पाणिनिका व्याकरण और पतञ्जलिका भाग्य, इनमें से कोई भी धानको चावल नहीं कर सकता। ढेंकी ही आर्य-सभ्यताका मुख उज्ज्वल करनेवाला पुत्र, श्राद्धका अधिकारी है, नित्य पिण्डदान करता है। क्या जहाँ धान कूटे जाते हैं, केवल वहीं ? समाजमें, साहित्य में, धर्मसंस्कार में राजसभा में-कहाँ नहीं ढेंकी आर्य सभ्यताका मुख उज्ज्वल करनेवाला पुत्र - श्राद्धका अधिकारीहै ? कहाँ नहीं वह नित्य पिण्डदान करता ? दुःख केवल इतना ही है कि इतनेपर भी आर्यसभ्यताकी मुक्ति नहीं हुईं, आज भी वह 'भूत' रूपसे बनी हुई है । आशा है कोई ढेंकी शीघ्र ही उसकी 'गया' करेगी ।
ढेंकीके इस अपरिमित माहात्म्यका कारण खोजने के लिए मुझे बड़ी उत्सुकता हुई । यह बीसवीं शताब्दी है, वैज्ञानिक समय है, कारणका अनुसन्धान करना ही पड़ता है। ढेंकी में कहाँसे यह कार्यदक्षता आई ? उसमें यह परोपकारबुद्धि कैसे आई ? इस Public Spirit ( सार्वजनिक सेवा के लिए उत्साह) का कारण क्या है ? हमारे शास्त्र कहते हैं कि 'नावस्तुना वस्तुसिद्धिः । अ-वस्तुसे वस्तुकी सिद्धि नहीं होती । यह कार्यदक्षता - पब्लिक स्पिरिट - बिना कारणके नहीं है। कारणका पता लगाने के लिए मैं वहाँ गया, जहाँ की में धान कुटते थे ।
देखा, ढेंकी गढ़ेमें गिरती है। बूँदभर भी मदिरा नहीं पी, तथापि बारबार गढ़में गिरती है, उठती है, फिर गिरती है; दम भरका विश्राम नहीं है । मैंने सोचा कि बार बार गढ़में गिरना ही क्या इसके इतने माहात्म्यका कारण है ? ढेंकीके यह परोपकारबुद्धि क्या गढ़में गिरनेहीसे है ? इसमें इतनी Public Spirit क्या बार बार गिरने-पड़नेहीसे पैदा हुई है ? नहीं, यह कभी हो नहीं सकता। क्यों कि हमारे अमुक रईस भी तो दोवख्ता कलवरियाकी नाली में पड़े रहते हैं, किन्तु कहाँ, उनमें तो कुछ Public Spirit नहीं है । कलवरिया के बाहर तो उनके हाथों कुछ भी परोपकार होता नहीं देख पड़ता । और भी - छिपानेकी क्या जरूरत है ? - मैं, श्रीचिदानन्द शर्मा, खुद एक दिन गढ़में गिर पड़ा या । लेकिन अंगूरी रसके सेवनसे मुझे उस लोककी प्राप्ति नहीं हुई, उसका कारण कुछ और ही था । गोपांगना-कुलकलंकिनी श्यामा ग्वालिनने एक दिन अपनी गऊ मंगलाको खोल दिया । खोलते ही वह पूँछ उठाकर सींग झुकाकर दौड़ी । कह नहीं सकता क्या सोचकर मंगला दौड़ी; स्त्रीजाति और गोजातिके दिलका हाल कौन बता सकता है ! किन्तु मुझको देख पड़ा कि मैं ही उसके दोनों सींगोंका निशाना हूँ । तब मैं कमरमें फेंट कस कर दर्पके साथ सिरपर पैर रखकर सरपट भागा, पीछे पीछे वह घड़े घड़े भरके थनोंवाली भयानक राक्षसी थी । मैं भी जितना दौड़ता था, वह भी उतनी ही दौड़ती थी । फल यह हुआ कि मैं एक जगह औचट चपेट खाकर, लुढ़कते लुढ़कते एकदम विवर-लोक में दाखिल हो गया । " बिखरे केशकलाप साँस हू कढै न मुखसौं ।
मेरे हृदयाकाश में Public Spirit रूपी पूर्णचन्द्रका उदय क्यों नहीं हुआ ? हुआ तो जरूर था । उस समय मैंने सिद्धान्त किया कि अगर पृथ्वीपर एक भी गऊ न रहे, और नारियल, ताड़, खजूर आदि पेड़ोंसे दूध निकला करे, तो इस दुग्धपोष्य हिन्दूजातिका विशेष उपकार हो । ये लोग सींगकी चपेटसे बे-खटके हो कर दूध पिया करें । उस दिन उस गढ़ेमें गिरनेके कारण मेरी परहितकामना इतनी प्रबल हो उठी कि मैंने दूसरे समय श्यामा ग्वालिनसे कहा - " अयि दधि-दुग्ध-क्षीर-नवनीतपरिवेष्टिते गोपकन्ये ! तुम अपनी गऊ भैंसोंको बेच डालो, और खुद भूसी खली खाया करो। तुम खुद बहुतसे दुधमुँहोंको पाल सकोगी। मगर किसीको लतियाना नहीं।" इसके जवाब में श्यामाने झाडू उठाई और लाचार मुझे भी उस दिन परहितव्रत त्याग करना पड़ा।
अब आप ही बताइए, परहितकामना, देशभक्ति, ' सार्वजनिक सेवा के लिए उत्साह ' अर्थात् Public Spirit और खासकर कार्यदक्षता, ये सब बातें गढ़में गिरनेसे होती हैं या नहीं? अगर नहीं होतीं, तो ढेंकीके यह कार्यनिपुणता, यह महाबल कहाँसे आया ? मैं इसी कूट तर्ककी मीमांसा के लिए सन्देहके साथ सोच विचार कर रहा था, इसी समय मधुर कंठसे किसीने कहा"क्यों जी, मुँह बाये क्या सोच रहे हो ? तुमने क्या कभी ढेंकी नहीं देखी ?"
आँख उठाकर देखा, कामिनी और दामिनी दो बहनें ढेंकीपर धमाधम उचक रही हैं। अब तक उधर देखनेकी फुर्सत ही नहीं मिली थी । एक अंधा आदमी हाथी देखने गया और वहाँ उसने केवल हाथीकी सूँड़ ही देख पाई । मैं भी ढेंकी देखने गया, मगर अब तक केवल टेंकीकी सूँड़ देख रहा था । पीछेकी तरफ दो श्रीमतियोंके श्रीचरण ढेंकीकी पीठपर धमाधम पड़ रहे थेयह देखकर भी मैंने नहीं देखा था । देखते ही जैसे किसीने मेरी आँखोंपरका टोप उतार लिया ।
मुझमें दिव्य ज्ञानका उदय हो आया, आया, कार्य-कारण सम्बन्धकी परम्परा मेरे आँखों के आगे दुपहरिया के प्रखर प्रकाश में प्रकट हो आई । यही तो ढेंकीका बल है ! यही तो ढंकीके माहात्म्यका मूल कारण है ! यही रमणीपादपद्म धमाधम पीठपर पड़ रहा है, और ढेंकी धान कूट कर चावल निकाल रही है ! उठती है, पड़ती है, ढक ढक कच कच करती है, मगर चरणकी चोटसे काम करना ही पड़ता है ! न जाने कितना परोपकार कर डालती है ! हाय ढेंकी ! उन पैरों में ऐसा क्या गुण है कि उनको अपनी पीठपर पाकर तू करोड़ों मनुष्योंको अन्न देती है ? और देवताओंको भोग अलगसे । आओ सुन्दरियोंके श्रीचरणो, तुम अच्छी तरह ढेंकीकी पीठपर ताण्डव नृत्य करो, मैं कृतज्ञता-पाश में बँधकर तुमको - हाय ! क्या करूँ ? -' डायमण्ड कट' की झाँझें पहनाऊँ !
और भाई ढेंकीवृन्द ! मैं तुम्हारी विद्या बुद्धि सब समझ गया । जब पीठ पर रमणीपादपद्म उर्फ औरतोंकी लातें पड़ती हैं, तभी तुम धान कूटते हो, नहीं तो केवल काठ हो, जड़ हो, गढ़ेमें सिर डालकर पूँछ उठा कर पड़े रहते हो । तुम्हारी विद्या है केवल गढ़में पड़ा रहना, तुमको आनन्द है केवल मुँहभर चावल पानेमें, और तुम्हारा पुरस्कार है केवल वे ही रंगीन
चौबेका चिट्ठाऔर कोमल श्रीचरण । और सुन पड़ता है, तुम लोगों में एक विशेष गुण घरमें रह कर क्या तुम बीच बीचमें ' मगर ' हो जाते हो ? और भाई ढेंकी, और एक बात पूछता हूँ । सुना है, बीच बीच में तुम्हें स्वर्ग में भी जाना होता है। सचमुच क्या वहाँ जाकर भी धान कूटने पड़ते हैं ? देवता लोग अमृत पीते हैं, कल्पवृक्षपर चढ़ते हैं, अप्सराओं के साथ क्रीड़ा करते है, मेघकी सवारीपर हवा खाने निकलते हैं, रति और कामदेव के साथ लुकी लुकइया ' खेलते हैं - तुम क्या तब तक केवल ' घिचिर घिचिर करके धान ही कूटती रहती हो ? धन्य है भाई तुम्हारा साहस !
ढेंकी ने कुछ उत्तर न दिया, केवल धान कूटती रही । मैं खफा होकर चहाँसे चला गया । कहाँ ? अपने ' आनन्द -कुटीर ' में । आप जानते हैं, आनन्द-कुटीर क्या है ? स्वर्गीय रसिक बाबू इस समय धान कूटने चले गये हैं । नन्दो नाइन एक खंडहर हाता छोड़ कर स्वर्गको सिधार गई है । उसका कोई उत्तराधिकारी उसके वियोगकी व्यथा सहनेके लिए पृथ्वीपर मौजूद नहीं है । उस हातेकी ऐसी हालत है कि और किसीने उसपर नेकनीयतीकी नजर नहीं डाली, लाचार मैंने ही उसमें अपना आनन्द - कुटीर बना डाला । वह केवल श्रीचिदानन्दका कुटीर नहीं है, साक्षात् सच्चिदानन्दका मन्दिर है। मैं वहीं चारपाईपर लेट कर भंगका गोला गलेके नीचे उतार गया - एकदम सटसे पेटके भीतर ! तबियत तर हुई । थोड़ी देर के बाद समाधि लगने लगी - आँखें बंद होते ही ज्ञाननेत्र खुल गये । मैंने देखा, यह सारा संसार ढेंकीशाला है । बड़ी बड़ी इमारतें, बैठकखाने, राजमहल सब ढेंकीशाला हैं - उनमें बड़ी बड़ी ढेकियाँ गढ़में मुँह डाले खड़ी या पड़ी हुई हैं । कहीं जमीदाररूपी ढेंकी प्रजाके हृदयपिण्डको गढ़ेमें कूटकर उससे नये निर्ख-रूपी चावल निकाल सुखसे पका कर अन्नभोजन कर रहे हैं । कहीं आईन बनानेवाले ढेंकीरूपसे मिनिट रिपोर्टकी राशिको गढ़ेमें कूटकर उससे निकालते हैं नये नये आईन-कानून । विचारकरूप ढेंकी उन्हीं आईनोंको गढ़े में पीस कर निकालते हैं मोहताज़ी, जेलखाना, धनीके घनका अन्त और भले मानसका प्राणान्त । बाबूरूप ढेंकी, बोतलके गढ़े में पिता के धनको कूटकर, निकालते हैं पिलही और तिल्ली । बाबुओंकी ढेंकियाँ, एकादशी आदि व्रतोंके
* बंगालियों में ढेंकी नारदका वाहन प्रसिद्ध है।
ढेकी ।
गढ़में सारी आमदनी कूटकर, निकालती हैं अनाहार ! सबसे अधिक भयानक यह देखा कि लेखकरूपी ढेंकी, साक्षात् माता सरस्वतीके सिरको छापेके गढ़में कूटकर, निकालते हैं स्कूल-बुक्स, उपन्यास और टका-सेरकी हिन्दी कवितायें !
देखते देखते देखा कि मैं भी एक भारी ढेंकी हूँ । आनन्द-कुटीरमें लंबा लंबा लेटा हुआ नशेके गढ़में मनोवेदनारूप धान कूट कर चिट्ठारूपी चावल निकाल रहा हूँ । मन-ही-मन मुझे अहंकार हुआ, ऐसे चावल तो और किसीके नहीं निकलते । तब इच्छा हुई कि ये चावल तो मनुष्यलोकके लायक नहीं हैं, मैं स्वर्ग में जाकर धान कुटूंगा। उसी समय मनोरथके रथपर चढ़कर स्वर्ग पहुँचा । मैंने स्वर्ग में जाकर देवराज पुरन्दरको प्रणाम करके कहा- "हे देवेन्द्र ! हे पुरन्दर ! मैं श्रीचिदानन्द ढेंकी हूँ, स्वर्गमें धान कूटूंगा।" इन्द्र ने कहा - "हर्ज क्या है ? क्या कुछ पुरस्कार भी चाहिए ?" मैंने कहा - "उर्वशी, मेनका, रंभा । "
इन्द्रने कहा - " उर्वशी या मेनका नहीं मिलेगी । और तीसरा नाम जो तुमने लिया ( रंभा ), वह तो मनुष्यलोक में - कलकत्ते में ही पैसेकी आठ आठके हिसाबसे मिल सकती हैं।"
मैं बड़ा मुँहफट हूँ, मैंने कहा--" क्या देवताजी केला ? वह तो आजकल मनुष्योंको मिलता ही नहीं, देवोंके ही काम आता है।"
सन्तुष्ट होकर इन्द्रने मुझे एक सेर अमृत और एक घंटेके लिए उर्वशीका गाना बखशिस किया। इतनेमें सचेत होकर मैंने देखा, पास ही एक मटकीमें सेर भर दूध रक्खा हुआ है, और श्यामा खड़ी हुई चिल्ला रही है -- ' नशाखोर, बेहया, पेटू' इत्यादि इत्यादि । मैंने उर्वशीसे कहा - 'बाईजी, एक घंटा हो गया, अब बन्द करो ।' | कहूँ क्या ? मैं तो कुछ निश्चय नहीं कर सका । दूध मेरे बापका नहीं था । दूध था मंगला गऊका, और उसे दुहा था श्यामा ग्वालिनने । बस, उस दूधपर जैसे मेरा अधिकार है वैसे ही बिलावका भी । इसी कारण मैं उसपर क्रोध नहीं कर सकता । तथापि बहुत दिनोंसे एक प्रथा चली आती है कि बिल्ली दूध पी जाय तो लोग उसे मारने दौड़ते हैं । चिरकालसे चली आई इस चालको न मानकर मैं मनुष्यकुलमें कलंक भी नहीं बनना चाहता । क्या जानें, यह बिलाव अपनी मण्डलीमें जाकर चिदानन्द चतुर्वेदीको कायर कहने लगे; इस कारण मर्दोंके योग्य काम ही करना चाहिए। यह निश्चय कर, बहुत खोजनेपर पाई हुई एक टूटी लकड़ी ले, गर्वके साथ मैं उस बिलावको मारने झपटा। बिलाव चिदानन्दको पहचानता था; लकड़ी देखकर वह कुछ विशेष भयभीत नहीं हुआ । केवल मेरी ओर देखकर एक जम्हाई लेकर जरा हट बैठा । बिलावने फिर कहा - ' म्याऊँ ।' उस समय भंग भगवतीकी कृपा से मुझे दिव्य कान मिल गये । तब बिलावका प्रश्न समझ कर लकड़ी रखकर मैं फिर पलँगपर आकर लेट रहा । बिलाव कह रहा था कि " मारपीट क्यों करते हो ? जरा स्थिर होकर हुका पीते-पीते विचार तो करो । संसारके सब रस, दूध, दही, मक्खन, मलाई, मोहनभोग, मांस, मछली आदि पदार्थ क्या तुम्हारे ही लिए हैं ? क्या हमारा उनपर कुछ भी अधिकार नहीं है ? तुम मनुष्य हो, हम बिलाव हैं; पर हममें तुममें अन्तर क्या ? तुम्हारे भूख प्यास है, हमारे भी है । तुम खाते हो, हम कोई आपत्ति नहीं करते; तो फिर हमारे कुछ खा-पी लेनेपर तुम किस शास्त्र के अनुसार लाठी लेकर मारने दौड़ते हो ? तुमको हम लोगोंसे कुछ उपदेश ग्रहण करना चाहिए । मेरी समझ में विज्ञ चौपायोंसे सीखे विना तुम्हारा ज्ञान बढ़ नहीं सकता। तुम्हारे विद्यालयों को देखने से जान पड़ता है कि इतने दिनोंके बाद तुम मेरे इस सिद्धान्तको मानने लगे हो । देखो, पलंगपर लेटनेवाले आदमी, धर्म क्या है ? परम धर्म है । यह दूध पीनेसे मेरा परम उपकार हुआ परोपकार करना ही है। तुम्हारे दूध से यह परोपकार हुआ - अतएव तुम इस परमधर्मके भागी हुए । मैंने चोरी की या जो चाहे किया, किन्तु तुमको स्मरण रहे कि मैं ही तुम्हारे इस धर्मसंचयका मूल कारण हूँ । इस लिए मुझे मारनेका इरादा छोड़कर तुमको मेरी बढ़ाई करनी चाहिए । मैं तुम्हारे धर्मका सहायक हूँ । देखो, मैं चोर हूँ सही, किन्तु सोचो तो, मैं क्या शौकसे चोरी करता ? खानेको मिले तो कौन चोरी करेगा ? देखो जो बड़े भारी साधु-सज्जन ईमानदार समझे जाते हैं, जो चोरके नामसे काँप उठते हैं, वे चोरोंसे भी बढ़कर अधार्मिक हैं। उन्हें चोरी करनेकी जरूरत नहीं, इसीसे वे चोरी नहीं करते। किन्तु उनके पास आवश्यकता से अधिक धन होनेपर भी वे चोरकी तरफ आँख उठाकर नहीं देखते । इसीसे चोर चोरी करता है I अधर्म चोर नहीं करता, चोर जो चोरी करता है उस अधर्मका भागी धनी सूम है । चोर दोपी है, चोरको दण्ड होता है; किन्तु चोरीकी जड़ जो कृपण है, उसे क्यों नहीं दण्ड दिया जाना ? " मैं एक दीवार से दूसरी दीवारपर म्याऊँ - म्याऊँ करता फिरता हूँ; तो भी कोई एक टुकड़ा रोटी मुझे नहीं देता । लोग आगेका बचा हुआ अन्न कुत्तोंको दे देते हैं, नालियों में फेंक देते हैं; मगर हम लोगोंको बुलाकर नहीं देते । तुम्हारा तो पेट भरा है, तुम हमारी भूखका कष्ट कैसे जान सकने हो ? हाय ! गरीवसे सहानुभूति दिखाने में क्या कुछ तुम्हारा गौरव घट जायगा ? इसमें सन्देह नहीं कि मुझ सरीखे दरिद्रकी व्यथा में व्यथित होना लजाकी बात है। जो लोग कभी अंधे अपाहिजको मुट्ठी भर अन्न नहीं देते, उन्हें भी यदि किसी राजा या सेट-- साहूकारपर कोई संकट आपड़े तो रातभर नींद नहीं आती । इस प्रकार पराई व्यथा में व्यथित होनेके लिए सब राजी होंगे । लेकिन मुझ सरीखे साधारण आदमीके दुखमें दुखी - छी ! कौन होगा ? देखो, यदि अमुक महामहोपाध्याय या तर्कचूडामणि अथवा न्यायालङ्कार तुम्हारा दूध पी जाते, तो क्या तुम लाटी लेकर उन्हें भी मारने दौड़ते ? नहीं, उलटे हाथ जोड़कर कहते कि "क्या और थोड़ा सा ले आऊँ ? " फिर प्रभो, मेरे लिए यह लाटी क्यों ? तुम कहोगे कि ये बड़े बड़े पंडित हैं-- मान्य हैं । अच्छा, पण्डिन या मान्य होनेके कारण क्या उनको हमसे अधिक भूख लगती है ? यह बात तो नहीं है । जिगे जरूरत नहीं उसे देनेका मनुष्य जातिको रोग है । गरीब मुफलिसको कोई नहीं देता। जो खानेके लिए आग्रह करनेसे नहीं नहीं करें, उनके लिए तो जबर्दस्ती चौबेका चिट्ठाबयासी भोजनका प्रबन्ध करो, और जो भूखसे व्याकुल होकर बिना बुलाये ही तुम्हारा अन्न खा जायँ उन्हें चोर कहकर दण्ड दो ! - छी-छी ! 'देखो, हमारी दशा देखो, हम घर-घर, डगर- डगर, दीवार-दीवार, और आँगन - आँगन म्याऊँ म्याऊँ करते और दीन दृष्टिसे चारों तरफ देखते फिरते हैं, कोई हमको रोटीका टुकड़ा नहीं फेंक देता। हाँ, अगर कोई बिलाव तुम्हारे यहाँ पलाऊ हो जाता है, तो उसकी चैनसे गुजरने लगती है । वह वैसा ही हृष्टपुष्ट तो जाता है जैसे किसी बुड्डेके घर रहनेवाला उसकी जवान स्त्रीका भाई, अथवा मूर्ख मोटेमल रईसके पास रहनेवाला शतरञ्ज ताश वगैरहका खिलाड़ी मुसाहब । उन बिलाओंकी दुम फूल उठती है, शरीरमें रोऐं भरे रहते हैं। उनके रूपकी छटा देखकर बहुत से बिलाव कवि हो उठते हैं । " और हमारी दशा दुखो, भोजन न मिलनेके कारण पेट पीठमें लग गया है, हड्डियाँ देख पड़ती हैं, जीभ बाहर निकल रही है, पूँछ गिरी पड़ती है । निरन्तर भूखके मारे पुकारा करते हैं 'म्याऊँ ? ' खानेको नहीं मिला--'म्याऊँ ?' भैया, हमारा काला चमड़ा देखकर हमसे घृणा न करो । इस पृथ्वी के पदार्थोंपर हमारा भी कुछ अधिकार है । खानेको दो, नहीं तो चोरी करेंगे । हमारे काले चमड़े, सूखे मुख, क्षीण और करुणापूर्ण म्याउँ-- म्याऊँ शब्दको सुनकर क्या तुमको दुःख नहीं होता ? दया नहीं आती ? चोरके लिए दण्ड है, तो क्या निर्दयी निठुरके लिए दण्ड नहीं है ? दरिद्र पुरुष यदि अपने लिए आहार जुटावे तो उसके लिए दण्ड है, फिर धनी आदमी कृपणता करे तो उसको दण्ड देने की व्यवस्था क्यों नहीं ? तुम चिदानन्द, दूरदर्शी और समझदार हो, क्यों कि भंग भवानीके अनन्य उपासक हो । तुमको भी क्या यह बतलाना पड़ेगा कि रईसोंके दोपसे ही गरीब चोरी करते हैं ? पाँच सौ गरीबों को वंचित कर उनका भोजन अपने यहाँ बापके मालकी तरह रख लेनेका धनियोंको क्या अधिकार है ? और यदि रईस या धनी ऐसा करता है तो फिर वह भोजन दरिद्रोंको बाँट क्यों नहीं देता ? अगर वह नहीं देता, तो दरिद्र लोग जरूर ही उसमें से चुराकर खायँगे । क्यों कि भूखों मरनेके लिए इस पृथ्वीपर कोई नहीं आया।" बिलाव के वाक्य मुझे असह्य हो उठे। मैंने कहा - "ठहरो ठहरो, बिलाव पण्डित, तुम्हारी बातें भारी बोलशेविउमसे भरी हैं ! इनसे समाज में उलटतिरासी पलट हो जायगा ! जिसकी जितनी क्षमता है वह उतना धनसञ्चय न कर सकेगा, या चोरोंके उत्पातसे सुखपूर्वक उसका उपभोग न कर सकेगा, तो फिर कोई धनसञ्चयकी चेष्टा ही न करेगा । और इससे समाजकी आर्थिक उन्नति में या धनवृद्धिमें बाधा पड़ेगी । बिलावने कहा - "आर्थिक उन्नति या धनवृद्धि न होगी तो हमको क्या ? समाजकी धनवृद्धिका अर्थ हुआ धनीके धनकी वृद्धि । अच्छा, धनीका धन नहीं बढ़ा तो उससे दरिद्रकी क्या हानि हुई ? " मैंने समझाकर कहा - "सामाजिक धनवृद्धि के सिवा समाजकी उन्नति नहीं हो सकती ।" बिलावने क्रोध करके कहा - " मुझे अगर खानेको न मिले तो फिर मैं तुम्हारी समाजकी उन्नति लेकर क्या करूँगा ? " बिलावको समझाना कठिन हो गया । जो विचारक या नैयायिक होता है उसको कभी, कोई भी, कुछ भी नहीं समझा सकता । यह बिलाव विचारक तो है ही, तार्किक भी बड़ा प्रबल है । इसीसे उसे मेरी बात न समझनेका अधिकार है। तब मैंने क्रोध न करके कहा- " हो सकता है कि समाजकी उन्नति में गरीबका कुछ स्वार्थ न हो, लेकिन धनियोंका तो उसमें विशेष स्वार्थ है । अतएव चोरको दण्ड देना कर्तव्य है । " तब फिर बिलावरामने कहा - "आप चोरको फाँसी दीजिए, इसमें भी हमको आपत्ति नहीं; किन्तु उसके साथ ही एक और नियम बनाइए । अर्थात् जो विचारक चोरको सजा दे, वह पहले तीन दिन तक भूखा रहे । इसपर अगर विचारकको चोरी करके खानेकी इच्छा न हो तो वह खुशीसे चोरको फाँसीपर चढ़वा दे । तुमने मुझे मारनेके लिए लाठी तानी थी, तुम आजसे तीन दिन तक लंघन करो । इन तीन दिनों में अगर तुम रसिकबाबूकी रसोईमें न पकड़े जाओ तो मुझे जी भरके मार लेना, में चूँ नहीं करूँगा । चतुर लोगोंकी राय यह है कि यदि विचारमें हार जाय तो गंभीर भावसे उपदेश करने लग जाना चाहिए। मैं इसी प्रथाके अनुसार कहने लगा-" देखो बिलाव, तुम्हारी ये बातें बिल्कुल नीतिविरुद्ध हैं; इनकी चर्चा करने में भी पाप है। तुम इन सब संसारकी चिन्ताओं को छोड़ कर धर्म-कर्ममें मन लगाओ । तुम अगर चाहो तो मैं तुमको 'न्यूमेन' और 'पार्कर' के ग्रन्थ चौबेका चिट्ठादे सकता हूँ। और चिदानन्द चतुर्वेदीका चिट्ठा पढ़नेसे भी तुम्हारा बहुत कुछ उपकार हो सकता है। और कुछ हो या न हो, भंग-भवानीकी असीम महिमा अच्छी तरह तुम्हारी समझ में आ जायगी। अब तुम अपने भवनको सिधारो । श्यामा ग्वालिनने कल कुछ ' खोया' देनेके लिए कहा है। सबेरे जलपान के समय आना । हम तुम दोनोंका साझा रहा । आज किसीकी हाँड़ी न चाटना । अगर बहुत भूख लगे तो फिर आ जाना, थोड़ीसी भंगकी गोली दे दूँगा । बिलावने कहा -" भंगकी मुझे जरूरत नहीं। रही हाँड़ीपर हाथ सफा करने की बात, सो इसका विचार भूख लगनेपर उसीके अनुसार किया जायगा । बिलाव विदा हो गया । उस समय यह सोचकर मुझे बड़ा ही आनन्द हुआ कि आज मैं एक पतित आत्माको अन्धकारसे प्रकाशमें ले आया ! यही सोचता हूँ कि अगर पृथ्वीपर ढेंकी न होती, चिड़ियोंकी तरह खलिहान में बैठकर धान खाता ? या, कान और पूँछ हिलाकर गजेन्द्रगामिनी गऊकी तरह मड़ाई में मुँह डालता ? निश्चय, यह तो मैं न कर सकता, नौजवान काला काला नंगा धड़ंगा किसान आकर मेरी पसलियों में डंडा मारता और मैं दुम दबाकर सींग हिलाकर जान बचाकर चट पट वहाँसे भागता । किन्तु आर्य-सभ्यताकी अनन्त महिमाके कारण यह भय नहीं है । ढेंकी है, धान कुटकर चावल होते हैं। मैं इस परोपकारनियत ढेंकीको आर्यसभ्यताका एक विशेष फल समझता हूँ । इसके आगे आर्योंके साहित्य और दर्शनको मैं कुछ नहीं समझता । रामायण, कुमारसम्भव, पाणिनिका व्याकरण और पतञ्जलिका भाग्य, इनमें से कोई भी धानको चावल नहीं कर सकता। ढेंकी ही आर्य-सभ्यताका मुख उज्ज्वल करनेवाला पुत्र, श्राद्धका अधिकारी है, नित्य पिण्डदान करता है। क्या जहाँ धान कूटे जाते हैं, केवल वहीं ? समाजमें, साहित्य में, धर्मसंस्कार में राजसभा में-कहाँ नहीं ढेंकी आर्य सभ्यताका मुख उज्ज्वल करनेवाला पुत्र - श्राद्धका अधिकारीहै ? कहाँ नहीं वह नित्य पिण्डदान करता ? दुःख केवल इतना ही है कि इतनेपर भी आर्यसभ्यताकी मुक्ति नहीं हुईं, आज भी वह 'भूत' रूपसे बनी हुई है । आशा है कोई ढेंकी शीघ्र ही उसकी 'गया' करेगी । ढेंकीके इस अपरिमित माहात्म्यका कारण खोजने के लिए मुझे बड़ी उत्सुकता हुई । यह बीसवीं शताब्दी है, वैज्ञानिक समय है, कारणका अनुसन्धान करना ही पड़ता है। ढेंकी में कहाँसे यह कार्यदक्षता आई ? उसमें यह परोपकारबुद्धि कैसे आई ? इस Public Spirit का कारण क्या है ? हमारे शास्त्र कहते हैं कि 'नावस्तुना वस्तुसिद्धिः । अ-वस्तुसे वस्तुकी सिद्धि नहीं होती । यह कार्यदक्षता - पब्लिक स्पिरिट - बिना कारणके नहीं है। कारणका पता लगाने के लिए मैं वहाँ गया, जहाँ की में धान कुटते थे । देखा, ढेंकी गढ़ेमें गिरती है। बूँदभर भी मदिरा नहीं पी, तथापि बारबार गढ़में गिरती है, उठती है, फिर गिरती है; दम भरका विश्राम नहीं है । मैंने सोचा कि बार बार गढ़में गिरना ही क्या इसके इतने माहात्म्यका कारण है ? ढेंकीके यह परोपकारबुद्धि क्या गढ़में गिरनेहीसे है ? इसमें इतनी Public Spirit क्या बार बार गिरने-पड़नेहीसे पैदा हुई है ? नहीं, यह कभी हो नहीं सकता। क्यों कि हमारे अमुक रईस भी तो दोवख्ता कलवरियाकी नाली में पड़े रहते हैं, किन्तु कहाँ, उनमें तो कुछ Public Spirit नहीं है । कलवरिया के बाहर तो उनके हाथों कुछ भी परोपकार होता नहीं देख पड़ता । और भी - छिपानेकी क्या जरूरत है ? - मैं, श्रीचिदानन्द शर्मा, खुद एक दिन गढ़में गिर पड़ा या । लेकिन अंगूरी रसके सेवनसे मुझे उस लोककी प्राप्ति नहीं हुई, उसका कारण कुछ और ही था । गोपांगना-कुलकलंकिनी श्यामा ग्वालिनने एक दिन अपनी गऊ मंगलाको खोल दिया । खोलते ही वह पूँछ उठाकर सींग झुकाकर दौड़ी । कह नहीं सकता क्या सोचकर मंगला दौड़ी; स्त्रीजाति और गोजातिके दिलका हाल कौन बता सकता है ! किन्तु मुझको देख पड़ा कि मैं ही उसके दोनों सींगोंका निशाना हूँ । तब मैं कमरमें फेंट कस कर दर्पके साथ सिरपर पैर रखकर सरपट भागा, पीछे पीछे वह घड़े घड़े भरके थनोंवाली भयानक राक्षसी थी । मैं भी जितना दौड़ता था, वह भी उतनी ही दौड़ती थी । फल यह हुआ कि मैं एक जगह औचट चपेट खाकर, लुढ़कते लुढ़कते एकदम विवर-लोक में दाखिल हो गया । " बिखरे केशकलाप साँस हू कढै न मुखसौं । मेरे हृदयाकाश में Public Spirit रूपी पूर्णचन्द्रका उदय क्यों नहीं हुआ ? हुआ तो जरूर था । उस समय मैंने सिद्धान्त किया कि अगर पृथ्वीपर एक भी गऊ न रहे, और नारियल, ताड़, खजूर आदि पेड़ोंसे दूध निकला करे, तो इस दुग्धपोष्य हिन्दूजातिका विशेष उपकार हो । ये लोग सींगकी चपेटसे बे-खटके हो कर दूध पिया करें । उस दिन उस गढ़ेमें गिरनेके कारण मेरी परहितकामना इतनी प्रबल हो उठी कि मैंने दूसरे समय श्यामा ग्वालिनसे कहा - " अयि दधि-दुग्ध-क्षीर-नवनीतपरिवेष्टिते गोपकन्ये ! तुम अपनी गऊ भैंसोंको बेच डालो, और खुद भूसी खली खाया करो। तुम खुद बहुतसे दुधमुँहोंको पाल सकोगी। मगर किसीको लतियाना नहीं।" इसके जवाब में श्यामाने झाडू उठाई और लाचार मुझे भी उस दिन परहितव्रत त्याग करना पड़ा। अब आप ही बताइए, परहितकामना, देशभक्ति, ' सार्वजनिक सेवा के लिए उत्साह ' अर्थात् Public Spirit और खासकर कार्यदक्षता, ये सब बातें गढ़में गिरनेसे होती हैं या नहीं? अगर नहीं होतीं, तो ढेंकीके यह कार्यनिपुणता, यह महाबल कहाँसे आया ? मैं इसी कूट तर्ककी मीमांसा के लिए सन्देहके साथ सोच विचार कर रहा था, इसी समय मधुर कंठसे किसीने कहा"क्यों जी, मुँह बाये क्या सोच रहे हो ? तुमने क्या कभी ढेंकी नहीं देखी ?" आँख उठाकर देखा, कामिनी और दामिनी दो बहनें ढेंकीपर धमाधम उचक रही हैं। अब तक उधर देखनेकी फुर्सत ही नहीं मिली थी । एक अंधा आदमी हाथी देखने गया और वहाँ उसने केवल हाथीकी सूँड़ ही देख पाई । मैं भी ढेंकी देखने गया, मगर अब तक केवल टेंकीकी सूँड़ देख रहा था । पीछेकी तरफ दो श्रीमतियोंके श्रीचरण ढेंकीकी पीठपर धमाधम पड़ रहे थेयह देखकर भी मैंने नहीं देखा था । देखते ही जैसे किसीने मेरी आँखोंपरका टोप उतार लिया । मुझमें दिव्य ज्ञानका उदय हो आया, आया, कार्य-कारण सम्बन्धकी परम्परा मेरे आँखों के आगे दुपहरिया के प्रखर प्रकाश में प्रकट हो आई । यही तो ढेंकीका बल है ! यही तो ढंकीके माहात्म्यका मूल कारण है ! यही रमणीपादपद्म धमाधम पीठपर पड़ रहा है, और ढेंकी धान कूट कर चावल निकाल रही है ! उठती है, पड़ती है, ढक ढक कच कच करती है, मगर चरणकी चोटसे काम करना ही पड़ता है ! न जाने कितना परोपकार कर डालती है ! हाय ढेंकी ! उन पैरों में ऐसा क्या गुण है कि उनको अपनी पीठपर पाकर तू करोड़ों मनुष्योंको अन्न देती है ? और देवताओंको भोग अलगसे । आओ सुन्दरियोंके श्रीचरणो, तुम अच्छी तरह ढेंकीकी पीठपर ताण्डव नृत्य करो, मैं कृतज्ञता-पाश में बँधकर तुमको - हाय ! क्या करूँ ? -' डायमण्ड कट' की झाँझें पहनाऊँ ! और भाई ढेंकीवृन्द ! मैं तुम्हारी विद्या बुद्धि सब समझ गया । जब पीठ पर रमणीपादपद्म उर्फ औरतोंकी लातें पड़ती हैं, तभी तुम धान कूटते हो, नहीं तो केवल काठ हो, जड़ हो, गढ़ेमें सिर डालकर पूँछ उठा कर पड़े रहते हो । तुम्हारी विद्या है केवल गढ़में पड़ा रहना, तुमको आनन्द है केवल मुँहभर चावल पानेमें, और तुम्हारा पुरस्कार है केवल वे ही रंगीन चौबेका चिट्ठाऔर कोमल श्रीचरण । और सुन पड़ता है, तुम लोगों में एक विशेष गुण घरमें रह कर क्या तुम बीच बीचमें ' मगर ' हो जाते हो ? और भाई ढेंकी, और एक बात पूछता हूँ । सुना है, बीच बीच में तुम्हें स्वर्ग में भी जाना होता है। सचमुच क्या वहाँ जाकर भी धान कूटने पड़ते हैं ? देवता लोग अमृत पीते हैं, कल्पवृक्षपर चढ़ते हैं, अप्सराओं के साथ क्रीड़ा करते है, मेघकी सवारीपर हवा खाने निकलते हैं, रति और कामदेव के साथ लुकी लुकइया ' खेलते हैं - तुम क्या तब तक केवल ' घिचिर घिचिर करके धान ही कूटती रहती हो ? धन्य है भाई तुम्हारा साहस ! ढेंकी ने कुछ उत्तर न दिया, केवल धान कूटती रही । मैं खफा होकर चहाँसे चला गया । कहाँ ? अपने ' आनन्द -कुटीर ' में । आप जानते हैं, आनन्द-कुटीर क्या है ? स्वर्गीय रसिक बाबू इस समय धान कूटने चले गये हैं । नन्दो नाइन एक खंडहर हाता छोड़ कर स्वर्गको सिधार गई है । उसका कोई उत्तराधिकारी उसके वियोगकी व्यथा सहनेके लिए पृथ्वीपर मौजूद नहीं है । उस हातेकी ऐसी हालत है कि और किसीने उसपर नेकनीयतीकी नजर नहीं डाली, लाचार मैंने ही उसमें अपना आनन्द - कुटीर बना डाला । वह केवल श्रीचिदानन्दका कुटीर नहीं है, साक्षात् सच्चिदानन्दका मन्दिर है। मैं वहीं चारपाईपर लेट कर भंगका गोला गलेके नीचे उतार गया - एकदम सटसे पेटके भीतर ! तबियत तर हुई । थोड़ी देर के बाद समाधि लगने लगी - आँखें बंद होते ही ज्ञाननेत्र खुल गये । मैंने देखा, यह सारा संसार ढेंकीशाला है । बड़ी बड़ी इमारतें, बैठकखाने, राजमहल सब ढेंकीशाला हैं - उनमें बड़ी बड़ी ढेकियाँ गढ़में मुँह डाले खड़ी या पड़ी हुई हैं । कहीं जमीदाररूपी ढेंकी प्रजाके हृदयपिण्डको गढ़ेमें कूटकर उससे नये निर्ख-रूपी चावल निकाल सुखसे पका कर अन्नभोजन कर रहे हैं । कहीं आईन बनानेवाले ढेंकीरूपसे मिनिट रिपोर्टकी राशिको गढ़ेमें कूटकर उससे निकालते हैं नये नये आईन-कानून । विचारकरूप ढेंकी उन्हीं आईनोंको गढ़े में पीस कर निकालते हैं मोहताज़ी, जेलखाना, धनीके घनका अन्त और भले मानसका प्राणान्त । बाबूरूप ढेंकी, बोतलके गढ़े में पिता के धनको कूटकर, निकालते हैं पिलही और तिल्ली । बाबुओंकी ढेंकियाँ, एकादशी आदि व्रतोंके * बंगालियों में ढेंकी नारदका वाहन प्रसिद्ध है। ढेकी । गढ़में सारी आमदनी कूटकर, निकालती हैं अनाहार ! सबसे अधिक भयानक यह देखा कि लेखकरूपी ढेंकी, साक्षात् माता सरस्वतीके सिरको छापेके गढ़में कूटकर, निकालते हैं स्कूल-बुक्स, उपन्यास और टका-सेरकी हिन्दी कवितायें ! देखते देखते देखा कि मैं भी एक भारी ढेंकी हूँ । आनन्द-कुटीरमें लंबा लंबा लेटा हुआ नशेके गढ़में मनोवेदनारूप धान कूट कर चिट्ठारूपी चावल निकाल रहा हूँ । मन-ही-मन मुझे अहंकार हुआ, ऐसे चावल तो और किसीके नहीं निकलते । तब इच्छा हुई कि ये चावल तो मनुष्यलोकके लायक नहीं हैं, मैं स्वर्ग में जाकर धान कुटूंगा। उसी समय मनोरथके रथपर चढ़कर स्वर्ग पहुँचा । मैंने स्वर्ग में जाकर देवराज पुरन्दरको प्रणाम करके कहा- "हे देवेन्द्र ! हे पुरन्दर ! मैं श्रीचिदानन्द ढेंकी हूँ, स्वर्गमें धान कूटूंगा।" इन्द्र ने कहा - "हर्ज क्या है ? क्या कुछ पुरस्कार भी चाहिए ?" मैंने कहा - "उर्वशी, मेनका, रंभा । " इन्द्रने कहा - " उर्वशी या मेनका नहीं मिलेगी । और तीसरा नाम जो तुमने लिया , वह तो मनुष्यलोक में - कलकत्ते में ही पैसेकी आठ आठके हिसाबसे मिल सकती हैं।" मैं बड़ा मुँहफट हूँ, मैंने कहा--" क्या देवताजी केला ? वह तो आजकल मनुष्योंको मिलता ही नहीं, देवोंके ही काम आता है।" सन्तुष्ट होकर इन्द्रने मुझे एक सेर अमृत और एक घंटेके लिए उर्वशीका गाना बखशिस किया। इतनेमें सचेत होकर मैंने देखा, पास ही एक मटकीमें सेर भर दूध रक्खा हुआ है, और श्यामा खड़ी हुई चिल्ला रही है -- ' नशाखोर, बेहया, पेटू' इत्यादि इत्यादि । मैंने उर्वशीसे कहा - 'बाईजी, एक घंटा हो गया, अब बन्द करो ।' |
यदि आप कोशिश करते हैं, तो किसी भी स्कूल केश विन्यासआप सुंदर और असाधारण बना सकते हैं। यहां तक कि स्कूल में पिगटेल भी विभिन्न तरीकों से plaited किया जा सकता है। असामान्य बुनाई सुरुचिपूर्ण और साफ दिखता है। इस तरह के हेयर स्टाइल लड़कियों के साथ अपने अध्ययन और रोजमर्रा के खेल में हस्तक्षेप नहीं करते हैं। इसके अलावा, ब्रेडेड हेयर बालों को पूरे दिन पूरी तरह से रहने की अनुमति देंगे।
सुंदर और साफ हेयर स्टाइल बनाने के लिए सीखना,हर दिन, स्कूल में एक बेटी इकट्ठा करते हुए, आप बहुत सारी ऊर्जा बचा सकते हैं। आपको केवल एक कंघी, कुछ गम, अदृश्य, और सबसे महत्वपूर्ण रूप से एक इच्छा और कुछ खाली समय तैयार करना है।
स्कूल की हेयर स्टाइल अलग-अलग समूहों में विभाजित होती है जैसे कि लड़की की उम्र, उसके तारों की लंबाई और उनकी मात्रा।
स्कूल के हेयर स्टाइल की बुनियादी विशेषताएंः
- मुख्य सिद्धांत, जिसे निर्देशित किया जाना चाहिए,निष्पादन की गति है। यही कारण है कि स्कूल में हेयर स्टाइल करना संभव हैः पिगेटेल, पूंछ, harnesses और भी बहुत कुछ - स्वतंत्र रूप से, बहुत अधिक समय बिताने के बिना, जो सुबह और इतनी पर्याप्त नहीं है।
- ऐसे हेयर स्टाइल करने के लिए जरूरी है कि बाल हस्तक्षेप न करें और नाखुश न दिखें।
- सही बुनाई का चयन, आपको चेहरे, भौतिक, साथ ही बालों की संरचना के आकार पर निर्माण करने की आवश्यकता है।
लड़कियों के लिए हेयर स्टाइल लेना, यह विचार करना आवश्यक है,कि बच्चों के बाल कमजोर और पतले हैं। लापरवाह हैंडलिंग के साथ, उन्हें नुकसान पहुंचाना बहुत आसान है। स्कूल में ब्राइडिंग ब्राइड को विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती हैः यदि आप बहुत मजबूत हैं, तो आपको तारों के तनाव की निगरानी करने की आवश्यकता है, बच्चा असहज हो जाएगा, और बालों को छोड़ दिया जाएगा।
समान रूप से महत्वपूर्ण सामान का उपयोग किया जाता है।काम में। बुरी तरह से पॉलिश किए गए अदृश्य हेयरपिन, हेयरपिन, हेयरपिन बालों को बहुत नुकसान पहुंचा सकते हैं, और बहुत तंग लोचदार बैंड के उपयोग से वे बाहर गिर सकते हैं।
और हालांकि एक धारणा है कि लड़के आसान होते हैं, क्योंकि उनके पास अपने बालों को काटने के लिए पर्याप्त है, और बाल कटवाने के लिए तैयार है, लेकिन फिर भी लड़कियों के लिए भी कई विकल्प हैं जो प्रदर्शन करने के लिए बहुत सरल हैं।
छात्रा के लिए एक केश विन्यास कैसे चुनें?
दो पूरी तरह से समान लोग नहीं होते हैं, समान हैंऔर केशविन्यास। आप कोई भी स्टाइल कर सकते हैं, लेकिन एक ही समय में अद्वितीय और अनुपयोगी बने रहेंगे। स्कूल में सुंदर पिगेट्स बुनाई, आपको उन लोगों को चुनने की ज़रूरत है जो चेहरे से बालों को पूरी तरह से हटाते हैं और पूरे दिन संशोधनों की आवश्यकता नहीं होती है।
उपयुक्त बुनाई का चयन करते समय आपको कई विशेषताओं पर विचार करना होगाः
- पसंद मुख्य रूप से भौतिक से प्रभावित होती हैसंकेतक। बहुत कुछ ऊंचाई, वजन, चेहरे के आकार आदि पर निर्भर करता है। पूर्ण लड़कियों रसीला और चमकदार केशविन्यास नहीं जाएंगे, और कुछ मामलों में ऊंची छात्राओं को उच्च केशविन्यास छोड़ना बेहतर है।
- जब स्कूल के लिए एक केश विन्यास चुनना बहुत महत्वपूर्ण हैआराम पर विचार करें। यदि ब्रैड्स को खराब तरीके से तय किया जाता है, तो अंत में वे विघटित हो जाएंगे और हस्तक्षेप करेंगे। असफल रूप से तय किए गए हेयरपिन, अदृश्य हेयरपिन और अन्य हेयरपिन कुचल सकते हैं, जो बच्चे को भी परेशान करेंगे।
- सजा बाल, आपको अनुपात की भावना दिखाने की आवश्यकता है। अत्यधिक चमक अन्य बच्चों को गतिविधियों से विचलित कर सकती है। सजावट के साथ बस्ट बेस्वाद दिखती है, सुंदर नहीं।
- स्कूल में पिगटेल को अच्छी तरह से ठीक करने की आवश्यकता है। यह वह है जो पूरे दिन के लिए छात्रा को साफ-सुथरा दिखने की अनुमति देगा।
इस तरह की बुनाई को "स्पाइक" भी कहा जाता है। फ्रेंच बुनाई ब्रैड्स में सबसे आसान है जिसे बहुत जल्दी बनाया जा सकता है। यह केश लंबे कर्ल और मध्यम लंबाई के बाल दोनों के लिए एकदम सही है।
फ्रांसीसी ब्रैड्स के आधार पर, लड़कियों के लिए बहुत सुंदर केशविन्यास प्राप्त किए जाते हैं। आज तक, फ्रांसीसी ब्रैड्स (स्कूल में) छोटी और किशोर उम्र की लड़कियों के बीच काफी मांग है।
ग्रीक ब्रैड्स के साथ सुंदर केश विन्यास करेंगेछात्रा उज्ज्वल और अद्वितीय। यह न केवल रोजमर्रा की जिंदगी के लिए उपयुक्त है। यह एक स्कूल पार्टी के लिए एक उत्कृष्ट विकल्प होगा, और यदि आप अपने बालों में फूल या रिबन बुनाई करते हैं, तो आपको प्रोम के लिए एक सौम्य और रोमांटिक केश मिल जाएगा।
ग्रीक बुनाई फ्रेंच के समान है, इसकीअंतर यह है कि यह विपरीत दिशा में बुना जाता है। लड़कियों को हर दिन स्कूल जाने के लिए इस तरह के पिगेट एक उत्कृष्ट विकल्प हैं, क्योंकि इस मौसम में बुनाई बहुत फैशनेबल है।
सबसे अधिक बार, ग्रीक ब्रैड सिर के चारों ओर बुनाई करते हैंया ओर। इसे करने के लिए, आपको कर्ल के रंग में एक रबर बैंड की आवश्यकता होगी, छोटे केकड़ों या हेयरपिनों की एक जोड़ी। सबसे पहले, बालों को सावधानी से कंघी किया जाना चाहिए और ताज पर तीन छोटे किस्में द्वारा अलग किया जाना चाहिए। उसके बाद, ब्रैड को एक सर्कल में बुना जाता है, बाहर से कर्ल को पकड़ता है। एक गोलाकार ब्रैड को बांधते हुए, टिप को रबर बैंड के साथ बांधा जाता है और बुनाई के नीचे छिपाया जाता है। केकड़ों या स्टडों को ठीक करने की आवश्यकता की शुरुआत और अंत।
Scythe रचनात्मकता के लिए एक बहुत बड़ा क्षेत्र है। लेकिन बुनाई को सुंदर बनाने के लिए, आपको एक रहस्य जानने की जरूरत हैः यदि गांठों को कसने के लिए बहुत तंग नहीं है तो केश अधिक चमकदार निकलेंगे। उन्हें मुक्त छोड़ दिया जाना चाहिए और इसके अलावा साइड स्ट्रैड्स को खींचना चाहिए।
"मछली पूंछ"
स्कूली उम्र की लड़की के लिए एक उपयुक्त केश विन्यास चुनना, आप इस बुनाई को "फिशटेल" के रूप में रोक सकते हैं। यह केश विन्यास फैशनेबल है, और उसे बहुत सारी लड़कियों से प्यार है।
"फिशटेल" हर रोज के लिए एकदम सही हैजीवन और किसी भी बाल पर बहुत अच्छा लगता हैः घुंघराले और सीधे, पतले और मोटे। यह हेयरस्टाइल एक करीब से देखने लायक है और बड़ी उम्र की लड़कियां जो पहले से ही अपने बालों को डाई करती हैं। इस तरह की बुनाई अनुकूलता पर जोर देती है, जो इंद्रधनुषी किस्में का प्रभाव पैदा करेगी।
एक ब्रैड बनाने के लिए, आपको एक विशिष्ट एल्गोरिथ्म का पालन करना चाहिएः
- बुनाई से पहले आपको कर्ल को कंघी और नम करने की आवश्यकता है;
- फिर आपको मंदिरों से दो किस्में लेनी चाहिए, उन्हें सिर के पीछे लाएं और उन्हें पार करें;
- फिर अगली स्ट्रैंड को एक तरफ ले जाएं, जबकि बुनाई को पकड़ते हुए, इसे शीर्ष स्ट्रैंड के ऊपर से पार किया जाता है और दूसरी तरफ नए कर्ल पर कब्जा करता है;
- इस प्रकार बुनाई जारी रहना चाहिए;
- ब्रैड के अंत में एक रबर बैंड या एक सुंदर बैरेट के साथ तय किया जाना चाहिए।
एक सुंदर केश बनाने के लिए, आप कर सकते हैंएक रिबन की तरह एक गौण का उपयोग करें। आप इसे एक सिलाई की दुकान में खरीद सकते हैं, वहां आप किसी भी चौड़ाई का रिबन और सबसे मूल छाया उठा सकते हैं। यह गौण लंबा होना चाहिए (बालों के छोर तक पहुंचना), सबसे इष्टतम चौड़ाई - डेढ़ सेंटीमीटर तक।
रिबन के साथ बुनाई के लाभः
- रिबन अच्छी तरह से ब्रैड को ठीक करता है और केश लंबे समय तक अपने मूल रूप को बनाए रखेगा;
- रिबन के उपयोग के साथ बुनाई के कई संस्करण हैं;
- सर्दियों में, रिबन का उपयोग करके हर दिन स्कूल में पिगटेल प्रासंगिक हैं (टोपी के नीचे भी, केश अपने आकार को बनाए रखेंगे);
- रिबन के साथ ब्रैड्स का मुख्य ट्रम्प कार्ड मौलिकता है, क्योंकि वे आज इतने आम नहीं हैं।
फ्लैगेला, ज़ाहिर है, प्रदर्शन में उतना जटिल नहीं हैब्रैड्स, लेकिन वे काफी मूल और शानदार दिखते हैं। उन्होंने बहुत पहले ही अपनी लोकप्रियता हासिल नहीं की थी, लेकिन जल्दी से अलग-अलग उम्र की लड़कियों और लड़कियों के साथ प्यार हो गया।
कई बुनाई हैंः केश "बंडल", एक या दो किस्में, छोटे फ्लैजेला, जो ढीले बालों पर बने होते हैं, आदि से बने होते हैं। बंडलों का महान लाभ यह है कि उन्हें अपनी रचना के लिए किसी स्टाइलिंग उपकरण की आवश्यकता नहीं होती है, और निर्माण प्रक्रिया स्वयं दस से अधिक नहीं होगी। मिनट।
ब्रैड बनाना इतना आसान नहीं हैऔर मुश्किलः आपको सिर के पीछे पूंछ को कसने की जरूरत है और सावधानी से कंघी करें। इसके अलावा, सभी बालों को दो भागों में विभाजित किया जाता है और एक ही समय में उन्हें अपनी धुरी के चारों ओर घुमाया जाता है। दो कसकर मुड़ किस्में बाहर आने के बाद, उन्हें एक साथ मुड़ जाना चाहिए। टिप एक लोचदार बैंड के साथ तय की गई है। यह हार्नेस के आधार पर स्कूल के लिए हल्के ब्रैड्स बनाता है।
स्कूल की छुट्टियों के लिए, हार्नेस से बालों को कपड़ा के फूलों और सुंदर हेयरपिन से सजाया जा सकता है। इस तरह के केश विन्यास के साथ, लड़की निश्चित रूप से स्कूल में चमक जाएगी।
आज कई प्रकार हैंbraids, स्कूल के लिए braids, जिनमें से फोटो ऊपर प्रस्तुत किए गए हैं, यह स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करते हैं। यहां तक कि अगर लड़की की बाल लंबे नहीं हैं, तो ब्रैड्स की विविधता के कारण, वह हर दिन पूरी तरह से अलग हो सकती है।
अपने बालों को और अधिक मूल बनाने की अनुमति देगाविभिन्न प्रकार की प्रौद्योगिकी का संयोजन। एक केश शैली में, एक साधारण फ्रांसीसी ब्रैड जिसके चारों ओर बुनाई के साथ संयोजन में एक साथ बहुत अच्छा लगेगा। इस मामले में, मुख्य जोर "रिवर्स" बेनी होगा।
संयुक्त में भी बुनाई के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, मेंजिसमें बालों से फूल निकले हों। रसीला ब्रैड्स को एक पतले बेनी से सजाया जा सकता है, जिसे "साँप" के रूप में पंक्तिबद्ध किया जाता है। विभिन्न प्रकार की बुनाई को मिलाकर, मुख्य बात यह ज़्यादा नहीं है। 2-3 से अधिक तकनीकों को संयोजित करना सबसे अच्छा है, अन्यथा स्टाइल लापरवाह दिखाई देगा।
| यदि आप कोशिश करते हैं, तो किसी भी स्कूल केश विन्यासआप सुंदर और असाधारण बना सकते हैं। यहां तक कि स्कूल में पिगटेल भी विभिन्न तरीकों से plaited किया जा सकता है। असामान्य बुनाई सुरुचिपूर्ण और साफ दिखता है। इस तरह के हेयर स्टाइल लड़कियों के साथ अपने अध्ययन और रोजमर्रा के खेल में हस्तक्षेप नहीं करते हैं। इसके अलावा, ब्रेडेड हेयर बालों को पूरे दिन पूरी तरह से रहने की अनुमति देंगे। सुंदर और साफ हेयर स्टाइल बनाने के लिए सीखना,हर दिन, स्कूल में एक बेटी इकट्ठा करते हुए, आप बहुत सारी ऊर्जा बचा सकते हैं। आपको केवल एक कंघी, कुछ गम, अदृश्य, और सबसे महत्वपूर्ण रूप से एक इच्छा और कुछ खाली समय तैयार करना है। स्कूल की हेयर स्टाइल अलग-अलग समूहों में विभाजित होती है जैसे कि लड़की की उम्र, उसके तारों की लंबाई और उनकी मात्रा। स्कूल के हेयर स्टाइल की बुनियादी विशेषताएंः - मुख्य सिद्धांत, जिसे निर्देशित किया जाना चाहिए,निष्पादन की गति है। यही कारण है कि स्कूल में हेयर स्टाइल करना संभव हैः पिगेटेल, पूंछ, harnesses और भी बहुत कुछ - स्वतंत्र रूप से, बहुत अधिक समय बिताने के बिना, जो सुबह और इतनी पर्याप्त नहीं है। - ऐसे हेयर स्टाइल करने के लिए जरूरी है कि बाल हस्तक्षेप न करें और नाखुश न दिखें। - सही बुनाई का चयन, आपको चेहरे, भौतिक, साथ ही बालों की संरचना के आकार पर निर्माण करने की आवश्यकता है। लड़कियों के लिए हेयर स्टाइल लेना, यह विचार करना आवश्यक है,कि बच्चों के बाल कमजोर और पतले हैं। लापरवाह हैंडलिंग के साथ, उन्हें नुकसान पहुंचाना बहुत आसान है। स्कूल में ब्राइडिंग ब्राइड को विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती हैः यदि आप बहुत मजबूत हैं, तो आपको तारों के तनाव की निगरानी करने की आवश्यकता है, बच्चा असहज हो जाएगा, और बालों को छोड़ दिया जाएगा। समान रूप से महत्वपूर्ण सामान का उपयोग किया जाता है।काम में। बुरी तरह से पॉलिश किए गए अदृश्य हेयरपिन, हेयरपिन, हेयरपिन बालों को बहुत नुकसान पहुंचा सकते हैं, और बहुत तंग लोचदार बैंड के उपयोग से वे बाहर गिर सकते हैं। और हालांकि एक धारणा है कि लड़के आसान होते हैं, क्योंकि उनके पास अपने बालों को काटने के लिए पर्याप्त है, और बाल कटवाने के लिए तैयार है, लेकिन फिर भी लड़कियों के लिए भी कई विकल्प हैं जो प्रदर्शन करने के लिए बहुत सरल हैं। छात्रा के लिए एक केश विन्यास कैसे चुनें? दो पूरी तरह से समान लोग नहीं होते हैं, समान हैंऔर केशविन्यास। आप कोई भी स्टाइल कर सकते हैं, लेकिन एक ही समय में अद्वितीय और अनुपयोगी बने रहेंगे। स्कूल में सुंदर पिगेट्स बुनाई, आपको उन लोगों को चुनने की ज़रूरत है जो चेहरे से बालों को पूरी तरह से हटाते हैं और पूरे दिन संशोधनों की आवश्यकता नहीं होती है। उपयुक्त बुनाई का चयन करते समय आपको कई विशेषताओं पर विचार करना होगाः - पसंद मुख्य रूप से भौतिक से प्रभावित होती हैसंकेतक। बहुत कुछ ऊंचाई, वजन, चेहरे के आकार आदि पर निर्भर करता है। पूर्ण लड़कियों रसीला और चमकदार केशविन्यास नहीं जाएंगे, और कुछ मामलों में ऊंची छात्राओं को उच्च केशविन्यास छोड़ना बेहतर है। - जब स्कूल के लिए एक केश विन्यास चुनना बहुत महत्वपूर्ण हैआराम पर विचार करें। यदि ब्रैड्स को खराब तरीके से तय किया जाता है, तो अंत में वे विघटित हो जाएंगे और हस्तक्षेप करेंगे। असफल रूप से तय किए गए हेयरपिन, अदृश्य हेयरपिन और अन्य हेयरपिन कुचल सकते हैं, जो बच्चे को भी परेशान करेंगे। - सजा बाल, आपको अनुपात की भावना दिखाने की आवश्यकता है। अत्यधिक चमक अन्य बच्चों को गतिविधियों से विचलित कर सकती है। सजावट के साथ बस्ट बेस्वाद दिखती है, सुंदर नहीं। - स्कूल में पिगटेल को अच्छी तरह से ठीक करने की आवश्यकता है। यह वह है जो पूरे दिन के लिए छात्रा को साफ-सुथरा दिखने की अनुमति देगा। इस तरह की बुनाई को "स्पाइक" भी कहा जाता है। फ्रेंच बुनाई ब्रैड्स में सबसे आसान है जिसे बहुत जल्दी बनाया जा सकता है। यह केश लंबे कर्ल और मध्यम लंबाई के बाल दोनों के लिए एकदम सही है। फ्रांसीसी ब्रैड्स के आधार पर, लड़कियों के लिए बहुत सुंदर केशविन्यास प्राप्त किए जाते हैं। आज तक, फ्रांसीसी ब्रैड्स छोटी और किशोर उम्र की लड़कियों के बीच काफी मांग है। ग्रीक ब्रैड्स के साथ सुंदर केश विन्यास करेंगेछात्रा उज्ज्वल और अद्वितीय। यह न केवल रोजमर्रा की जिंदगी के लिए उपयुक्त है। यह एक स्कूल पार्टी के लिए एक उत्कृष्ट विकल्प होगा, और यदि आप अपने बालों में फूल या रिबन बुनाई करते हैं, तो आपको प्रोम के लिए एक सौम्य और रोमांटिक केश मिल जाएगा। ग्रीक बुनाई फ्रेंच के समान है, इसकीअंतर यह है कि यह विपरीत दिशा में बुना जाता है। लड़कियों को हर दिन स्कूल जाने के लिए इस तरह के पिगेट एक उत्कृष्ट विकल्प हैं, क्योंकि इस मौसम में बुनाई बहुत फैशनेबल है। सबसे अधिक बार, ग्रीक ब्रैड सिर के चारों ओर बुनाई करते हैंया ओर। इसे करने के लिए, आपको कर्ल के रंग में एक रबर बैंड की आवश्यकता होगी, छोटे केकड़ों या हेयरपिनों की एक जोड़ी। सबसे पहले, बालों को सावधानी से कंघी किया जाना चाहिए और ताज पर तीन छोटे किस्में द्वारा अलग किया जाना चाहिए। उसके बाद, ब्रैड को एक सर्कल में बुना जाता है, बाहर से कर्ल को पकड़ता है। एक गोलाकार ब्रैड को बांधते हुए, टिप को रबर बैंड के साथ बांधा जाता है और बुनाई के नीचे छिपाया जाता है। केकड़ों या स्टडों को ठीक करने की आवश्यकता की शुरुआत और अंत। Scythe रचनात्मकता के लिए एक बहुत बड़ा क्षेत्र है। लेकिन बुनाई को सुंदर बनाने के लिए, आपको एक रहस्य जानने की जरूरत हैः यदि गांठों को कसने के लिए बहुत तंग नहीं है तो केश अधिक चमकदार निकलेंगे। उन्हें मुक्त छोड़ दिया जाना चाहिए और इसके अलावा साइड स्ट्रैड्स को खींचना चाहिए। "मछली पूंछ" स्कूली उम्र की लड़की के लिए एक उपयुक्त केश विन्यास चुनना, आप इस बुनाई को "फिशटेल" के रूप में रोक सकते हैं। यह केश विन्यास फैशनेबल है, और उसे बहुत सारी लड़कियों से प्यार है। "फिशटेल" हर रोज के लिए एकदम सही हैजीवन और किसी भी बाल पर बहुत अच्छा लगता हैः घुंघराले और सीधे, पतले और मोटे। यह हेयरस्टाइल एक करीब से देखने लायक है और बड़ी उम्र की लड़कियां जो पहले से ही अपने बालों को डाई करती हैं। इस तरह की बुनाई अनुकूलता पर जोर देती है, जो इंद्रधनुषी किस्में का प्रभाव पैदा करेगी। एक ब्रैड बनाने के लिए, आपको एक विशिष्ट एल्गोरिथ्म का पालन करना चाहिएः - बुनाई से पहले आपको कर्ल को कंघी और नम करने की आवश्यकता है; - फिर आपको मंदिरों से दो किस्में लेनी चाहिए, उन्हें सिर के पीछे लाएं और उन्हें पार करें; - फिर अगली स्ट्रैंड को एक तरफ ले जाएं, जबकि बुनाई को पकड़ते हुए, इसे शीर्ष स्ट्रैंड के ऊपर से पार किया जाता है और दूसरी तरफ नए कर्ल पर कब्जा करता है; - इस प्रकार बुनाई जारी रहना चाहिए; - ब्रैड के अंत में एक रबर बैंड या एक सुंदर बैरेट के साथ तय किया जाना चाहिए। एक सुंदर केश बनाने के लिए, आप कर सकते हैंएक रिबन की तरह एक गौण का उपयोग करें। आप इसे एक सिलाई की दुकान में खरीद सकते हैं, वहां आप किसी भी चौड़ाई का रिबन और सबसे मूल छाया उठा सकते हैं। यह गौण लंबा होना चाहिए , सबसे इष्टतम चौड़ाई - डेढ़ सेंटीमीटर तक। रिबन के साथ बुनाई के लाभः - रिबन अच्छी तरह से ब्रैड को ठीक करता है और केश लंबे समय तक अपने मूल रूप को बनाए रखेगा; - रिबन के उपयोग के साथ बुनाई के कई संस्करण हैं; - सर्दियों में, रिबन का उपयोग करके हर दिन स्कूल में पिगटेल प्रासंगिक हैं ; - रिबन के साथ ब्रैड्स का मुख्य ट्रम्प कार्ड मौलिकता है, क्योंकि वे आज इतने आम नहीं हैं। फ्लैगेला, ज़ाहिर है, प्रदर्शन में उतना जटिल नहीं हैब्रैड्स, लेकिन वे काफी मूल और शानदार दिखते हैं। उन्होंने बहुत पहले ही अपनी लोकप्रियता हासिल नहीं की थी, लेकिन जल्दी से अलग-अलग उम्र की लड़कियों और लड़कियों के साथ प्यार हो गया। कई बुनाई हैंः केश "बंडल", एक या दो किस्में, छोटे फ्लैजेला, जो ढीले बालों पर बने होते हैं, आदि से बने होते हैं। बंडलों का महान लाभ यह है कि उन्हें अपनी रचना के लिए किसी स्टाइलिंग उपकरण की आवश्यकता नहीं होती है, और निर्माण प्रक्रिया स्वयं दस से अधिक नहीं होगी। मिनट। ब्रैड बनाना इतना आसान नहीं हैऔर मुश्किलः आपको सिर के पीछे पूंछ को कसने की जरूरत है और सावधानी से कंघी करें। इसके अलावा, सभी बालों को दो भागों में विभाजित किया जाता है और एक ही समय में उन्हें अपनी धुरी के चारों ओर घुमाया जाता है। दो कसकर मुड़ किस्में बाहर आने के बाद, उन्हें एक साथ मुड़ जाना चाहिए। टिप एक लोचदार बैंड के साथ तय की गई है। यह हार्नेस के आधार पर स्कूल के लिए हल्के ब्रैड्स बनाता है। स्कूल की छुट्टियों के लिए, हार्नेस से बालों को कपड़ा के फूलों और सुंदर हेयरपिन से सजाया जा सकता है। इस तरह के केश विन्यास के साथ, लड़की निश्चित रूप से स्कूल में चमक जाएगी। आज कई प्रकार हैंbraids, स्कूल के लिए braids, जिनमें से फोटो ऊपर प्रस्तुत किए गए हैं, यह स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करते हैं। यहां तक कि अगर लड़की की बाल लंबे नहीं हैं, तो ब्रैड्स की विविधता के कारण, वह हर दिन पूरी तरह से अलग हो सकती है। अपने बालों को और अधिक मूल बनाने की अनुमति देगाविभिन्न प्रकार की प्रौद्योगिकी का संयोजन। एक केश शैली में, एक साधारण फ्रांसीसी ब्रैड जिसके चारों ओर बुनाई के साथ संयोजन में एक साथ बहुत अच्छा लगेगा। इस मामले में, मुख्य जोर "रिवर्स" बेनी होगा। संयुक्त में भी बुनाई के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, मेंजिसमें बालों से फूल निकले हों। रसीला ब्रैड्स को एक पतले बेनी से सजाया जा सकता है, जिसे "साँप" के रूप में पंक्तिबद्ध किया जाता है। विभिन्न प्रकार की बुनाई को मिलाकर, मुख्य बात यह ज़्यादा नहीं है। दो-तीन से अधिक तकनीकों को संयोजित करना सबसे अच्छा है, अन्यथा स्टाइल लापरवाह दिखाई देगा। |
पाकिस्तान के तेज़ गेंदबाज मोहम्मद आमिर ने 19 जुलाई को टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा कर सभी को हैरत में डाल दिया था। बात चौकाने वाली तो है ही। आखिर आमिर की उम्र अभी मात्र 27 साल है और इतनी कम उम्र में संन्यास लेने की बात किसी के भी पल्ले नहीं पड़ी। अभी उनका टेस्ट लेना किसी को हजम ही नहीं हुआ कि आमिर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लाईक कर विवादों की चपेट में आ गए हैं।
मुद्दा तब गर्माया जब तेज गेंदबाज ने इस ट्वीट को लाइक किया, हालांकि बाद में उन्होंने इसको डिसलाइक भी कर दिया। मगर तब तक काफी देर हो चुकी थी और इसका स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल चुका था।
इसको लेकर आमिर को सोशल मीडिया पर काफी बुरा-भला सुनने को मिल रहा है। आपको बता दें, आमिर स्पॉट फिक्सिंग के मामले में पांच साल का बैन झेलकर हाल ही में पाकिस्तान क्रिकेट टीम में वापसी की थी। वह अपने करियर के अच्छे मुकाम पर हैं।
सोशल मीडिया पर अभी भी मामले पर भड़काऊ पोस्ट किए जा रहे हैं। इस दौरान ऐसी खबरें भी फैल रही हैं कि आमिर ब्रटिश पासपोर्ट हासिल करके इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में खेलने की महत्वाकांक्षा रखते हैं।
आमिर ने 27 साल की उम्र में टेस्ट से संन्यास की घोषणा कर दी। उनके फैसले पर सवाल दिग्गज खिलाड़ियोंं वसीम अकरम और शोएब अख्तर ने सवाल उठाए।
शोएब अख्तर ने आमिर के इस फैसले पर उन्हें यह भी कहा कि जब उनके देश को उनके खेल की जरूरत है तब वह उनका साथ छोड़ रहे हैं। जबकि पीसीबी ने उनके बुरे वक्त में उनका साथ दिया था।
आमिर ने विश्व कप में पाकिस्तान के लिए बेहतरीन गेंदबाजी की। जहां उन्होंने टूर्नामेंट में टीम के सेमीफाइनल में बाहर होने के बावजूद आमिर ने 8 मैचों में 17 विकेट लिए थे, टेस्ट में उनका फॉर्म उतना अच्छा नहीं रहा, जितना शायद उनके अनुभव और गुणवत्ता के साथ होना चाहिए था ।
कुल मिलाकर, उन्होंने पाकिस्तान के लिए 36 टेस्ट मैचों में 30 से ऊपर की औसत से 119 विकेट लिए। एक समय पर, उन्हें संभावित रूप से अच्छा होने की उम्मीद थी जो ऑल-टाइम वसीम अकरम के सबसे बड़े बाएं हाथ के तेज गेंदबाज थे।
| पाकिस्तान के तेज़ गेंदबाज मोहम्मद आमिर ने उन्नीस जुलाई को टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा कर सभी को हैरत में डाल दिया था। बात चौकाने वाली तो है ही। आखिर आमिर की उम्र अभी मात्र सत्ताईस साल है और इतनी कम उम्र में संन्यास लेने की बात किसी के भी पल्ले नहीं पड़ी। अभी उनका टेस्ट लेना किसी को हजम ही नहीं हुआ कि आमिर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लाईक कर विवादों की चपेट में आ गए हैं। मुद्दा तब गर्माया जब तेज गेंदबाज ने इस ट्वीट को लाइक किया, हालांकि बाद में उन्होंने इसको डिसलाइक भी कर दिया। मगर तब तक काफी देर हो चुकी थी और इसका स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल चुका था। इसको लेकर आमिर को सोशल मीडिया पर काफी बुरा-भला सुनने को मिल रहा है। आपको बता दें, आमिर स्पॉट फिक्सिंग के मामले में पांच साल का बैन झेलकर हाल ही में पाकिस्तान क्रिकेट टीम में वापसी की थी। वह अपने करियर के अच्छे मुकाम पर हैं। सोशल मीडिया पर अभी भी मामले पर भड़काऊ पोस्ट किए जा रहे हैं। इस दौरान ऐसी खबरें भी फैल रही हैं कि आमिर ब्रटिश पासपोर्ट हासिल करके इंडियन प्रीमियर लीग में खेलने की महत्वाकांक्षा रखते हैं। आमिर ने सत्ताईस साल की उम्र में टेस्ट से संन्यास की घोषणा कर दी। उनके फैसले पर सवाल दिग्गज खिलाड़ियोंं वसीम अकरम और शोएब अख्तर ने सवाल उठाए। शोएब अख्तर ने आमिर के इस फैसले पर उन्हें यह भी कहा कि जब उनके देश को उनके खेल की जरूरत है तब वह उनका साथ छोड़ रहे हैं। जबकि पीसीबी ने उनके बुरे वक्त में उनका साथ दिया था। आमिर ने विश्व कप में पाकिस्तान के लिए बेहतरीन गेंदबाजी की। जहां उन्होंने टूर्नामेंट में टीम के सेमीफाइनल में बाहर होने के बावजूद आमिर ने आठ मैचों में सत्रह विकेट लिए थे, टेस्ट में उनका फॉर्म उतना अच्छा नहीं रहा, जितना शायद उनके अनुभव और गुणवत्ता के साथ होना चाहिए था । कुल मिलाकर, उन्होंने पाकिस्तान के लिए छत्तीस टेस्ट मैचों में तीस से ऊपर की औसत से एक सौ उन्नीस विकेट लिए। एक समय पर, उन्हें संभावित रूप से अच्छा होने की उम्मीद थी जो ऑल-टाइम वसीम अकरम के सबसे बड़े बाएं हाथ के तेज गेंदबाज थे। |
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ठाणे विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र (ठाणे विधानसभा मतदारसंघ) पश्चिमी भारत के महाराष्ट्र राज्य के 288 विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों में एक हैं। .
9 संबंधोंः ठाणे (लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र), पश्चिमी भारत, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी, महाराष्ट्र, राजन विचारे, शिवसेना, जनता पार्टी, विधान सभा।
ठाणे (लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र)
ठाणे लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र भारत के महाराष्ट्र राज्य का एक लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र है। .
पश्चिमी भारत क्षेत्र में भारत के महाराष्ट्र, गोआ और गुजरात राज्य तथा दादरा एवं नगर हवेली एवं दमन एवं दीव केन्द्र शासित प्रदेश आते हैं। यह क्षेत्र उच्चस्तरीय औद्योगिक तथा आवासित है।.
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, अधिकतर कांग्रेस के नाम से प्रख्यात, भारत के दो प्रमुख राजनैतिक दलों में से एक हैं, जिन में अन्य भारतीय जनता पार्टी हैं। कांग्रेस की स्थापना ब्रिटिश राज में २८ दिसंबर १८८५ में हुई थी; इसके संस्थापकों में ए ओ ह्यूम (थियिसोफिकल सोसाइटी के प्रमुख सदस्य), दादा भाई नौरोजी और दिनशा वाचा शामिल थे। १९वी सदी के आखिर में और शुरूआती से लेकर मध्य २०वी सदी में, कांग्रेस भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में, अपने १.५ करोड़ से अधिक सदस्यों और ७ करोड़ से अधिक प्रतिभागियों के साथ, ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विरोध में एक केन्द्रीय भागीदार बनी। १९४७ में आजादी के बाद, कांग्रेस भारत की प्रमुख राजनीतिक पार्टी बन गई। आज़ादी से लेकर २०१६ तक, १६ आम चुनावों में से, कांग्रेस ने ६ में पूर्ण बहुमत जीता हैं और ४ में सत्तारूढ़ गठबंधन का नेतृत्व किया; अतः, कुल ४९ वर्षों तक वह केन्द्र सरकार का हिस्सा रही। भारत में, कांग्रेस के सात प्रधानमंत्री रह चुके हैं; पहले जवाहरलाल नेहरू (१९४७-१९६५) थे और हाल ही में मनमोहन सिंह (२००४-२०१४) थे। २०१४ के आम चुनाव में, कांग्रेस ने आज़ादी से अब तक का सबसे ख़राब आम चुनावी प्रदर्शन किया और ५४३ सदस्यीय लोक सभा में केवल ४४ सीट जीती। तब से लेकर अब तक कोंग्रेस कई विवादों में घिरी हुई है, कोंग्रेस द्वारा भारतीय आर्मी का मनोबल गिराने का देश में विरोध किया जा रहा है । http://www.allianceofdemocrats.org/index.php?option.
भारतीय जनता पार्टी (संक्षेप में, भाजपा) भारत के दो प्रमुख राजनीतिक दलों में से एक हैं, जिसमें दूसरा दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस है। यह राष्ट्रीय संसद और राज्य विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व के मामले में देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है और प्राथमिक सदस्यता के मामले में यह दुनिया का सबसे बड़ा दल है।.
महाराष्ट्र भारत का एक राज्य है जो भारत के दक्षिण मध्य में स्थित है। इसकी गिनती भारत के सबसे धनी राज्यों में की जाती है। इसकी राजधानी मुंबई है जो भारत का सबसे बड़ा शहर और देश की आर्थिक राजधानी के रूप में भी जानी जाती है। और यहाँ का पुणे शहर भी भारत के बड़े महानगरों में गिना जाता है। यहाँ का पुणे शहर भारत का छठवाँ सबसे बड़ा शहर है। महाराष्ट्र की जनसंख्या सन २०११ में ११,२३,७२,९७२ थी, विश्व में सिर्फ़ ग्यारह ऐसे देश हैं जिनकी जनसंख्या महाराष्ट्र से ज़्यादा है। इस राज्य का निर्माण १ मई, १९६० को मराठी भाषी लोगों की माँग पर की गयी थी। यहां मराठी ज्यादा बोली जाती है। मुबई अहमदनगर पुणे, औरंगाबाद, कोल्हापूर, नाशिक नागपुर ठाणे शिर्डी-अहमदनगर आैर महाराष्ट्र के अन्य मुख्य शहर हैं। .
राजन विचारे भारत की सोलहवीं लोक सभा के सांसद हैं। २०१४ के चुनावों में वे महाराष्ट्र के ठाणे से निर्वाचित हुए। वे शिवसेना से संबद्ध हैं। .
शिवसेना भारत का एक राष्ट्रीय राजनैतिक दल है जो मुख्य रूप से महाराष्ट्र प्रान्त में सक्रिय है। इसकी स्थापना १९ जून १९६६ को एक प्रमुख राजनीतिक कार्टूनिस्ट बाळासाहेब ठाकरे ने की थी। वर्तमान समय में इस दल के लोक सभा में 18, राज्य सभा में ४ और महाराष्ट्र विधान सभा में 63 निर्वाचित सदस्य हैं। इस दल का प्रतीक चिन्ह (लोगो) बाघ है। पूरे देश में शिव सेना को एक कट्टर हिन्दू राष्ट्रवादी दल के रूप में जाना जाता है। शिवसेना के मध्यप्रदेश में कुशाग्र शर्मा एक मुख्य हिंदुवादी राजनितीज्ञ है। पिछले कुछ दशकों से मुंबई की महानगरपालिका पर शिवसेना का ही राज है। .
प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लागू आपातकाल (1975-1976) के बाद जनसंघ सहित भारत के प्रमुख राजनैतिक दलों का विलय कर के एक नए दल जनता पार्टी का गठन किया गया। जनता पार्टी ने 1977 से 1980 तक भारत सरकार का नेतृत्व किया। आंतरिक मतभेदों के कारण जनता पार्टी 1980 में टूट गयी। सम्प्रति डॉ सुब्रमणियन स्वामी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। .
विधान सभा या वैधानिक सभा जिसे भारत के विभिन्न राज्यों में निचला सदन(द्विसदनीय राज्यों में) या सोल हाउस (एक सदनीय राज्यों में) भी कहा जाता है। दिल्ली व पुडुचेरी नामक दो केंद्र शासित राज्यों में भी इसी नाम का प्रयोग निचले सदन के लिए किया जाता है। 7 द्विसदनीय राज्यों में ऊपरी सदन को विधान परिषद कहा जाता है। विधान सभा के सदस्य राज्यों के लोगों के प्रत्यक्ष प्रतिनिधि होते हैं क्योंकि उन्हें किसी एक राज्य के 18 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के नागरिकों द्वारा सीधे तौर पर चुना जाता है। इसके अधिकतम आकार को भारत के संविधान के द्वारा निर्धारित किया गया है जिसमें 500 से अधिक व् 60 से कम सदस्य नहीं हो सकते। हालाँकि विधान सभा का आकार 60 सदस्यों से कम हो सकता है संसद के एक अधिनियम के द्वाराः जैसे गोवा, सिक्किम, मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी। कुछ राज्यों में राज्यपाल 1 सदस्य को अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त कर सकता है, उदा० ऐंग्लो इंडियन समुदाय अगर उसे लगता है कि सदन में अल्पसंख्यकों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। राज्यपाल के द्वारा चुने गए या नियुक्त को विधान सभा सदस्य या MLA कहा जाता है। प्रत्येक विधान सभा का कार्यकाल पाँच वर्षों का होता है जिसके बाद पुनः चुनाव होता है। आपातकाल के दौरान, इसके सत्र को बढ़ाया जा सकता है या इसे भंग किया जा सकता है। विधान सभा का एक सत्र वैसे तो पाँच वर्षों का होता है पर लेकिन मुख्यमंत्री के अनुरोध पर राज्यपाल द्वारा इसे पाँच साल से पहले भी भंग किया जा सकता है। विधानसभा का सत्र आपातकाल के दौरान बढ़ाया जा सकता है लेकिन एक समय में केवल छः महीनों के लिए। विधान सभा को बहुमत प्राप्त या गठबंधन सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाने पर भी भंग किया जा सकता है। .
| ठाणे विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र पश्चिमी भारत के महाराष्ट्र राज्य के दो सौ अठासी विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों में एक हैं। . नौ संबंधोंः ठाणे , पश्चिमी भारत, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी, महाराष्ट्र, राजन विचारे, शिवसेना, जनता पार्टी, विधान सभा। ठाणे ठाणे लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र भारत के महाराष्ट्र राज्य का एक लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र है। . पश्चिमी भारत क्षेत्र में भारत के महाराष्ट्र, गोआ और गुजरात राज्य तथा दादरा एवं नगर हवेली एवं दमन एवं दीव केन्द्र शासित प्रदेश आते हैं। यह क्षेत्र उच्चस्तरीय औद्योगिक तथा आवासित है।. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, अधिकतर कांग्रेस के नाम से प्रख्यात, भारत के दो प्रमुख राजनैतिक दलों में से एक हैं, जिन में अन्य भारतीय जनता पार्टी हैं। कांग्रेस की स्थापना ब्रिटिश राज में अट्ठाईस दिसंबर एक हज़ार आठ सौ पचासी में हुई थी; इसके संस्थापकों में ए ओ ह्यूम , दादा भाई नौरोजी और दिनशा वाचा शामिल थे। उन्नीसवी सदी के आखिर में और शुरूआती से लेकर मध्य बीसवी सदी में, कांग्रेस भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में, अपने एक.पाँच करोड़ से अधिक सदस्यों और सात करोड़ से अधिक प्रतिभागियों के साथ, ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विरोध में एक केन्द्रीय भागीदार बनी। एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में आजादी के बाद, कांग्रेस भारत की प्रमुख राजनीतिक पार्टी बन गई। आज़ादी से लेकर दो हज़ार सोलह तक, सोलह आम चुनावों में से, कांग्रेस ने छः में पूर्ण बहुमत जीता हैं और चार में सत्तारूढ़ गठबंधन का नेतृत्व किया; अतः, कुल उनचास वर्षों तक वह केन्द्र सरकार का हिस्सा रही। भारत में, कांग्रेस के सात प्रधानमंत्री रह चुके हैं; पहले जवाहरलाल नेहरू थे और हाल ही में मनमोहन सिंह थे। दो हज़ार चौदह के आम चुनाव में, कांग्रेस ने आज़ादी से अब तक का सबसे ख़राब आम चुनावी प्रदर्शन किया और पाँच सौ तैंतालीस सदस्यीय लोक सभा में केवल चौंतालीस सीट जीती। तब से लेकर अब तक कोंग्रेस कई विवादों में घिरी हुई है, कोंग्रेस द्वारा भारतीय आर्मी का मनोबल गिराने का देश में विरोध किया जा रहा है । http://www.allianceofdemocrats.org/index.php?option. भारतीय जनता पार्टी भारत के दो प्रमुख राजनीतिक दलों में से एक हैं, जिसमें दूसरा दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस है। यह राष्ट्रीय संसद और राज्य विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व के मामले में देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है और प्राथमिक सदस्यता के मामले में यह दुनिया का सबसे बड़ा दल है।. महाराष्ट्र भारत का एक राज्य है जो भारत के दक्षिण मध्य में स्थित है। इसकी गिनती भारत के सबसे धनी राज्यों में की जाती है। इसकी राजधानी मुंबई है जो भारत का सबसे बड़ा शहर और देश की आर्थिक राजधानी के रूप में भी जानी जाती है। और यहाँ का पुणे शहर भी भारत के बड़े महानगरों में गिना जाता है। यहाँ का पुणे शहर भारत का छठवाँ सबसे बड़ा शहर है। महाराष्ट्र की जनसंख्या सन दो हज़ार ग्यारह में ग्यारह,तेईस,बहत्तर,नौ सौ बहत्तर थी, विश्व में सिर्फ़ ग्यारह ऐसे देश हैं जिनकी जनसंख्या महाराष्ट्र से ज़्यादा है। इस राज्य का निर्माण एक मई, एक हज़ार नौ सौ साठ को मराठी भाषी लोगों की माँग पर की गयी थी। यहां मराठी ज्यादा बोली जाती है। मुबई अहमदनगर पुणे, औरंगाबाद, कोल्हापूर, नाशिक नागपुर ठाणे शिर्डी-अहमदनगर आैर महाराष्ट्र के अन्य मुख्य शहर हैं। . राजन विचारे भारत की सोलहवीं लोक सभा के सांसद हैं। दो हज़ार चौदह के चुनावों में वे महाराष्ट्र के ठाणे से निर्वाचित हुए। वे शिवसेना से संबद्ध हैं। . शिवसेना भारत का एक राष्ट्रीय राजनैतिक दल है जो मुख्य रूप से महाराष्ट्र प्रान्त में सक्रिय है। इसकी स्थापना उन्नीस जून एक हज़ार नौ सौ छयासठ को एक प्रमुख राजनीतिक कार्टूनिस्ट बाळासाहेब ठाकरे ने की थी। वर्तमान समय में इस दल के लोक सभा में अट्ठारह, राज्य सभा में चार और महाराष्ट्र विधान सभा में तिरेसठ निर्वाचित सदस्य हैं। इस दल का प्रतीक चिन्ह बाघ है। पूरे देश में शिव सेना को एक कट्टर हिन्दू राष्ट्रवादी दल के रूप में जाना जाता है। शिवसेना के मध्यप्रदेश में कुशाग्र शर्मा एक मुख्य हिंदुवादी राजनितीज्ञ है। पिछले कुछ दशकों से मुंबई की महानगरपालिका पर शिवसेना का ही राज है। . प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लागू आपातकाल के बाद जनसंघ सहित भारत के प्रमुख राजनैतिक दलों का विलय कर के एक नए दल जनता पार्टी का गठन किया गया। जनता पार्टी ने एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर से एक हज़ार नौ सौ अस्सी तक भारत सरकार का नेतृत्व किया। आंतरिक मतभेदों के कारण जनता पार्टी एक हज़ार नौ सौ अस्सी में टूट गयी। सम्प्रति डॉ सुब्रमणियन स्वामी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। . विधान सभा या वैधानिक सभा जिसे भारत के विभिन्न राज्यों में निचला सदन या सोल हाउस भी कहा जाता है। दिल्ली व पुडुचेरी नामक दो केंद्र शासित राज्यों में भी इसी नाम का प्रयोग निचले सदन के लिए किया जाता है। सात द्विसदनीय राज्यों में ऊपरी सदन को विधान परिषद कहा जाता है। विधान सभा के सदस्य राज्यों के लोगों के प्रत्यक्ष प्रतिनिधि होते हैं क्योंकि उन्हें किसी एक राज्य के अट्ठारह वर्ष से अधिक आयु वर्ग के नागरिकों द्वारा सीधे तौर पर चुना जाता है। इसके अधिकतम आकार को भारत के संविधान के द्वारा निर्धारित किया गया है जिसमें पाँच सौ से अधिक व् साठ से कम सदस्य नहीं हो सकते। हालाँकि विधान सभा का आकार साठ सदस्यों से कम हो सकता है संसद के एक अधिनियम के द्वाराः जैसे गोवा, सिक्किम, मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी। कुछ राज्यों में राज्यपाल एक सदस्य को अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त कर सकता है, उदाशून्य ऐंग्लो इंडियन समुदाय अगर उसे लगता है कि सदन में अल्पसंख्यकों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। राज्यपाल के द्वारा चुने गए या नियुक्त को विधान सभा सदस्य या MLA कहा जाता है। प्रत्येक विधान सभा का कार्यकाल पाँच वर्षों का होता है जिसके बाद पुनः चुनाव होता है। आपातकाल के दौरान, इसके सत्र को बढ़ाया जा सकता है या इसे भंग किया जा सकता है। विधान सभा का एक सत्र वैसे तो पाँच वर्षों का होता है पर लेकिन मुख्यमंत्री के अनुरोध पर राज्यपाल द्वारा इसे पाँच साल से पहले भी भंग किया जा सकता है। विधानसभा का सत्र आपातकाल के दौरान बढ़ाया जा सकता है लेकिन एक समय में केवल छः महीनों के लिए। विधान सभा को बहुमत प्राप्त या गठबंधन सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाने पर भी भंग किया जा सकता है। . |
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कोरोना महामारी के चलते चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच भारतीय जनता पार्टी ने केजरीवाल सरकार को आड़े हाथों लिया है. बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी मंगलवार को कहा कि विज्ञापनों में अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सभी को दिल्ली में वैक्सीनेशन किया जाएगा. लेकिन ना ही कोई ग्लोबल टेंडर किया गया और ना ही कोई और व्यवस्था वैक्सीन के लेकर की गई है. अगर उन्होंने ऐसा किया तो उन्हें टेंडर की कॉपी दिखानी चाहिए.
उन्होंने आगे कहा- इसके लिए अगर 500 करोड़ रुपये की आवश्यकता है, लेकिन इन्होंने कभी 9 करोड़ दिए, कभी 10 करोड़ दिए. जबकि केंद्र सरकार ने इनको पिछले साल 1,116 करोड़ रुपये और इस वर्ष 1,120 करोड़ रुपये दिए हैं.
| राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कोरोना महामारी के चलते चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच भारतीय जनता पार्टी ने केजरीवाल सरकार को आड़े हाथों लिया है. बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी मंगलवार को कहा कि विज्ञापनों में अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सभी को दिल्ली में वैक्सीनेशन किया जाएगा. लेकिन ना ही कोई ग्लोबल टेंडर किया गया और ना ही कोई और व्यवस्था वैक्सीन के लेकर की गई है. अगर उन्होंने ऐसा किया तो उन्हें टेंडर की कॉपी दिखानी चाहिए. उन्होंने आगे कहा- इसके लिए अगर पाँच सौ करोड़ रुपये की आवश्यकता है, लेकिन इन्होंने कभी नौ करोड़ दिए, कभी दस करोड़ दिए. जबकि केंद्र सरकार ने इनको पिछले साल एक,एक सौ सोलह करोड़ रुपये और इस वर्ष एक,एक सौ बीस करोड़ रुपये दिए हैं. |
भोपाल, देश के साथ ही मध्यप्रदेश में भी आज कोरोना वैक्सीनेशन का कार्य प्रारंभ होगा और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान यहां हमीदिया अस्पताल में वैक्सीनेशन कार्यक्रम में शामिल होंगे।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार चौहान ने लगभग सवा दस बजे हमीदिया अस्पताल पहुंचकर वैक्सीनेशन कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसके बाद वे विमान से रीवा के लिए रवाना होंगे।
चौहान अब सिंगरौली जिले के वैक्सीनेशन कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे, हालाकि सिंगरौली और शहडोल जिले के प्रवास के दौरान शेष कार्यक्रम यथावत रहेंगे।
सूत्रों ने कहा कि भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर समेत सभी 52 जिलों में आज प्रधानमंत्री के वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए संबोधन के साथ वैक्सीनेशन कार्य शुरू हो रहा है।
प्रथम चरण में राज्य में स्वास्थ्य कर्मचारियों और सफाई कर्मचारियों को कोरोना वैक्सीन लगायी जाएगी। पहले चरण में चार लाख से अधिक लोगों को वैक्सीन दी जाएगी।
| भोपाल, देश के साथ ही मध्यप्रदेश में भी आज कोरोना वैक्सीनेशन का कार्य प्रारंभ होगा और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान यहां हमीदिया अस्पताल में वैक्सीनेशन कार्यक्रम में शामिल होंगे। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार चौहान ने लगभग सवा दस बजे हमीदिया अस्पताल पहुंचकर वैक्सीनेशन कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसके बाद वे विमान से रीवा के लिए रवाना होंगे। चौहान अब सिंगरौली जिले के वैक्सीनेशन कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे, हालाकि सिंगरौली और शहडोल जिले के प्रवास के दौरान शेष कार्यक्रम यथावत रहेंगे। सूत्रों ने कहा कि भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर समेत सभी बावन जिलों में आज प्रधानमंत्री के वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए संबोधन के साथ वैक्सीनेशन कार्य शुरू हो रहा है। प्रथम चरण में राज्य में स्वास्थ्य कर्मचारियों और सफाई कर्मचारियों को कोरोना वैक्सीन लगायी जाएगी। पहले चरण में चार लाख से अधिक लोगों को वैक्सीन दी जाएगी। |
नई दिल्ली। कोरोना महामारी की दूसरी लहर को देखते हुए गुजरात सरकार ने छात्र-छात्राओं को बड़ी राहत दी है। कोविड के खतरे के मद्देनजर राज्य सरकार ने 12वीं की परीक्षा रद्द का फैसला किया है।
गुजरात सरकार ने बुधवार को 12वीं की परीक्षा रद्द करने का आदेश जारी किया। इससे पहले गुजरात कैबिनेट की बैठक हुई, जिसमें परीक्षा को रद्द करने पर आम सहमति बनी। कैबिनेट बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि कोरोना की दूसरी लहर को देखते हुए हालात अभी भी ऐसे नहीं हैं कि बच्चों की सेहत को खतरे में डालने का जोखिम उठाया जा सके।
बता दें कि गुजरात के अलवा मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने भी 12वीं की परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया है। इससे पहले कल यानी मंगलवार को सीबीएसई बोर्ड एग्जाम कैंसिल करने का फैसला लेते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी यही कहा था कि छात्रों का स्वास्थ्य हमारी पहली प्राथमिकता है।
लखनऊ। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी (ISI) के लिए भारतीय सेना की जासूसी करने वाले एक युवक शैलेश कुमार उर्फ शैलेंद्र सिंह चौहान को आतंक निरोधक दस्ता (ATS) ने मंगलवार को लखनऊ से गिरफ्तार किया है। वह मूल रूप से उप्र के कासगंज जिले के पटियाली थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले जिनौल गांव का रहने वाला है।
आरोपी भारतीय सेना की गोपनीय सूचनाएं व्हाट्सएप और फेसबुक के माध्यम से ISI को साझा कर रहा था। खुलासा होने के बाद कासगंज जिले की पुलिस भी सक्रिय हो गई। पुलिस आरोपी शैलेश कुमार उर्फ शैलेंद्र सिंह चौहान के घर पहुंचकर जांच में जुट गई है। एसपी सौरभ दीक्षित ने सीओ पटियाली को इस मामले में जानकारी जुटाने के निर्देश दिए हैं। ATS ने आरोपी के खिलाफ आईटी एक्ट की धाराओं एवं विधि विरुद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम की धाराओं में मामला दर्ज किया है।
आरोपी शैलेश पूर्व में 8-9 माह तक अरुणांचल प्रदेश में भारतीय सेना में अस्थायी श्रमिक के रूप में कार्य कर चुका है। वहां रहने के दौरान उसके पास सेना की महत्वपूर्ण जानकारियां थीं। वह सेना में किसी पद पर कार्यरत नहीं है, लेकिन वह स्वयं के भारतीय सेना में तैनात होना बताता है।
सोशल मीडिया पर भी शैलेश चौहान के नाम से उसकी प्रोफाइल बनी हुई है। उस पर भारतीय सेना की यूनिफॉर्म पहने हुए उसकी फोटो लगी है। शैलेश पहले ISI हैंडलर हरलीन कौर नाम की महिला के संपर्क में आया। उससे मैसेंजर पर बात हुई। उसके बाद वह ISI हैंडलर प्रीती के संपर्क में आया। उसकी ऑडियो कॉल के माध्यम से बात होने लगी। शैलेश ने प्रीती को भी अपना परिचय सेना के जवान के रूप में दिया। निजी बातचीत के दौरान प्रीती ने उसे ISI के लिए काम करने की बात कही।
इसके बदले अच्छी रकम देने का लालच दिया। लालच में आकर शैलेश ने प्रीती को सेना से जुड़े महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की लोकेशन, सेना की गाड़ियों के मूवमेंट के फोटो भेजे। यही फोटो उसने हरलीन कौर को भी भेजे। शैलेश को फोन पे पर अप्रैल 2023 से रुपये मिलने लगे। एसपी सौरभ दीक्षित ने बताया कि इस मामले की जानकारी कराई जा रही है। पटियाली सीओ को पूरी जांच पड़ताल का जिम्मा सौंपा है।
| नई दिल्ली। कोरोना महामारी की दूसरी लहर को देखते हुए गुजरात सरकार ने छात्र-छात्राओं को बड़ी राहत दी है। कोविड के खतरे के मद्देनजर राज्य सरकार ने बारहवीं की परीक्षा रद्द का फैसला किया है। गुजरात सरकार ने बुधवार को बारहवीं की परीक्षा रद्द करने का आदेश जारी किया। इससे पहले गुजरात कैबिनेट की बैठक हुई, जिसमें परीक्षा को रद्द करने पर आम सहमति बनी। कैबिनेट बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि कोरोना की दूसरी लहर को देखते हुए हालात अभी भी ऐसे नहीं हैं कि बच्चों की सेहत को खतरे में डालने का जोखिम उठाया जा सके। बता दें कि गुजरात के अलवा मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने भी बारहवीं की परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया है। इससे पहले कल यानी मंगलवार को सीबीएसई बोर्ड एग्जाम कैंसिल करने का फैसला लेते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी यही कहा था कि छात्रों का स्वास्थ्य हमारी पहली प्राथमिकता है। लखनऊ। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के लिए भारतीय सेना की जासूसी करने वाले एक युवक शैलेश कुमार उर्फ शैलेंद्र सिंह चौहान को आतंक निरोधक दस्ता ने मंगलवार को लखनऊ से गिरफ्तार किया है। वह मूल रूप से उप्र के कासगंज जिले के पटियाली थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले जिनौल गांव का रहने वाला है। आरोपी भारतीय सेना की गोपनीय सूचनाएं व्हाट्सएप और फेसबुक के माध्यम से ISI को साझा कर रहा था। खुलासा होने के बाद कासगंज जिले की पुलिस भी सक्रिय हो गई। पुलिस आरोपी शैलेश कुमार उर्फ शैलेंद्र सिंह चौहान के घर पहुंचकर जांच में जुट गई है। एसपी सौरभ दीक्षित ने सीओ पटियाली को इस मामले में जानकारी जुटाने के निर्देश दिए हैं। ATS ने आरोपी के खिलाफ आईटी एक्ट की धाराओं एवं विधि विरुद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम की धाराओं में मामला दर्ज किया है। आरोपी शैलेश पूर्व में आठ-नौ माह तक अरुणांचल प्रदेश में भारतीय सेना में अस्थायी श्रमिक के रूप में कार्य कर चुका है। वहां रहने के दौरान उसके पास सेना की महत्वपूर्ण जानकारियां थीं। वह सेना में किसी पद पर कार्यरत नहीं है, लेकिन वह स्वयं के भारतीय सेना में तैनात होना बताता है। सोशल मीडिया पर भी शैलेश चौहान के नाम से उसकी प्रोफाइल बनी हुई है। उस पर भारतीय सेना की यूनिफॉर्म पहने हुए उसकी फोटो लगी है। शैलेश पहले ISI हैंडलर हरलीन कौर नाम की महिला के संपर्क में आया। उससे मैसेंजर पर बात हुई। उसके बाद वह ISI हैंडलर प्रीती के संपर्क में आया। उसकी ऑडियो कॉल के माध्यम से बात होने लगी। शैलेश ने प्रीती को भी अपना परिचय सेना के जवान के रूप में दिया। निजी बातचीत के दौरान प्रीती ने उसे ISI के लिए काम करने की बात कही। इसके बदले अच्छी रकम देने का लालच दिया। लालच में आकर शैलेश ने प्रीती को सेना से जुड़े महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की लोकेशन, सेना की गाड़ियों के मूवमेंट के फोटो भेजे। यही फोटो उसने हरलीन कौर को भी भेजे। शैलेश को फोन पे पर अप्रैल दो हज़ार तेईस से रुपये मिलने लगे। एसपी सौरभ दीक्षित ने बताया कि इस मामले की जानकारी कराई जा रही है। पटियाली सीओ को पूरी जांच पड़ताल का जिम्मा सौंपा है। |
राजधानी का अधिकतम तापमान शुक्रवार को 21. 1 डिग्री रहा। वहीं न्यूनतम तापमान महज 8. 2 डिग्री रहा। अब न्यूनतम तापमान में और कमी आने की संभावना है। शनिवार को न्यूनतम तापमान महज 6 डिग्री पर सिमट सकता है। राजधानी में बीते गुरुवार से ही ठंडी तेज हवाएं चल रही है। पहाड़ों की बर्फ से टकराकर हवाएं सीधे यहां पहुंच रही हैं।
| राजधानी का अधिकतम तापमान शुक्रवार को इक्कीस. एक डिग्री रहा। वहीं न्यूनतम तापमान महज आठ. दो डिग्री रहा। अब न्यूनतम तापमान में और कमी आने की संभावना है। शनिवार को न्यूनतम तापमान महज छः डिग्री पर सिमट सकता है। राजधानी में बीते गुरुवार से ही ठंडी तेज हवाएं चल रही है। पहाड़ों की बर्फ से टकराकर हवाएं सीधे यहां पहुंच रही हैं। |
सस्टेनेबल एनर्जी डेज (6-8 अप्रैल) पर डा. अनिल प्रकाश जोशी बता रहे हैं कि ये समय है कि हम अंतराष्ट्रीय स्तर पर सतत ऊर्जा व जीवनशैली स्तर पर बातचीत कर एक नई व न्यायोचित बहस को जन्म दें।
डा. अनिल प्रकाश जोशी। आज दुनिया मे ऐसा कोई भी कार्य नहीं है जिसमे ऊर्जा की सीधी खपत न होती हो। ऊर्जा रहित समाज की कल्पना का मतलब हर तरह की हलचलों का शून्य हो जाना है इसमें कोई भी अतिश्योक्ति नहीं। किसी भी देश की पहचान व प्रगति उसकी जीवनशैली के स्तर से जुड़ी है। दुनिया के बड़े शहर व बाजारों का आधार ऊर्जा ही है। अमेरिका को दुनिया में सबसे ज्यादा विकसित देश मानने के पीछे वहां जुटाई हुई सुविधाएं ही हैं और सुविधाएं बिना ऊर्जा के नहीं जुटाई जा सकतीं। चीन या अन्य कोई देश के बढ़ते बाजार भी ऊर्जा खपत से ही चलते हैं और यही कारण है कि पिछले 200 वर्ष में दुनिया में ऊर्जा खपत बड़ी चर्चाओं का विषय भी रहा है। आज ऊर्जा किसी भी देश की आर्थिकी के विकास का आधार है। वे देश जो अपनी बढ़त नहीं बना पाए उनका सबसे बड़ा कारण उनके पास ऊर्जा या तकनीक विकल्प का ही बड़ा अभाव रहा है।
दुनिया में आज सबसे बड़ा ऊर्जा का आधार कोयला ही माना गया है। वो चाहे कोई भी देश, दुनिया में जहां किसी ना किसी रूप में कोयले को ऊर्जा के रूप में ना देखा जाता है। यह बात दूसरी है कि 3-4 बड़े देशों में जहां कोयले की खपत अत्यधिक है और भारत उनमें से एक है इसके पीछे सबसे बडा कारण अन्य विकल्पों का अभाव माना गया है। आज तक ऊर्जा के अन्य विकल्प कोयले की बराबरी नहीं कर पाए हैं और यही कारण है कि आज भी दुनिया में कोयले की सबसे ज्यादा खपत होती है। आंकड़ा सामने है कि दुनिया में आज भी लगभग 84 फीसदी कोयले का उपयोग उर्जा के लिए किया जाता है। उसी तरह अमेरिका में 11. 34 फीसदी, चाइना में 54. 3 फीसदी और भारत भी उनमें से एक ऐसा देश है जहां कोयले की खपत ज्यादा होती रही है। अपने देश में भी विकल्प का अभाव रहा है और उसके पीछे वैकल्पिक ऊर्जा की तकनीकी का बहुत बड़ा योगदान माना जाता है।
आज भारत में ऊर्जा के लिए लगभग 18. 5 लाख टन कोयला प्रतिदिन उपयोग में लाया जाता है यही कारण है कि कोयला ही उर्जा का केन्द्र रहा है। बहुत से लोगों को यह पता नहीं होगा लेकिन यह सत्य है कि ब्रिटिशर ने जब देश में राज किया तो उनकी पहली नजर भारत से कोयले का निर्यात करना था। भारत के उत्तरी क्षेत्र में कोयले की बहुतायत रही है उसमें झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश व बंगाल के कुछ हिस्से जहां कोयला पाया जाता है। करोड़ों वर्ष पहले एक बड़े लावे ने इन क्षेत्रों में जितने भी वन थे उनको पाट दिया था और वही बाद में कोयला बना था। कोलोनियल एरा में ब्रिटिशर्स ने एक बड़े व्यापार के रूप में ईस्ट इंडिया कंपनी को खड़ा किया था। ईस्ट इंडिया कंपनी का बड़ा आधार भारत से कोयले का निर्यात करना था। दुनिया मेंं फ्रांस और इंगलैण्ड ये दो देश ऐसे थे जो सबसे ज्यादा कोयले पर आधारित उर्जा को भोगते थें। भारत के पास वर्तमान में ऊर्जा का कोई विकल्प भी नहीं है और इतनी बड़ी जनसंख्या की उर्जा की आवश्यकताओं की पूर्ती करनी है इसलिए कोयला ही बड़ा आधार है। कोयले की खपत के नियंत्रण की बात अंतराष्ट्रीय स्तर पर बार बार उठी है। ग्लास्गो की बैठक ही सबसे बड़ा उदाहरण है जहां पर भारत वन व पर्यावरण मंत्री की विवशता इस रूप में साफ दिखाई देती थी कि वे कोयले की खपत को लेकर इसलिए समझौता नहीं कर सकते क्योंकि आज भी अपने देश में 70 प्रतिशत उर्जा का आधार कोयला ही है।
ऐसा नहीं है कि पिछले कुछ समय से भारत अन्य विकल्पों को लेकर गंभीर नहीं है। भारत ने अपने देश में चाहे सोलर एनर्जी हो या फिर पवन ऊर्जा इन दोनों को लेकर पहल की है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी आवश्यकता को समझते हुए सोलर ऊर्जा पर ज्यादा से ज्यादा निवेश करके उसको व्यापक बनाने में अति गंभीरता दिखाई है। यह सही भी है कि भारत जैसा ट्रोपिकल देश जहां सौर ऊर्जा हमेशा से किसी ना किसी रूप में उपलब्ध है यह आने वाले समय में ऊर्जा का एक बड़ा आधार बन सकता है। और यही कारण है कि आज भारत की सौर उर्जा क्षमता 45 हजार मेगावाट है और वर्ष 2030 तक 450 गेगा वाट सोलर आधारित उर्जा का उत्पादन करेगा और गत एक दशक में इस ओर प्रगति भी हुई है। इसी तरह पवन उर्जा की संभावना को भी समझा गया है। आज भी हम 10 प्रतिशत हम पवन से उर्जा को साधते हैं।
दुनिया भर में भी सोलर के उपयोग को लेकर चीन ने भी बढ़त कर ली है। एक आंकलन के अनुसार चीन 130 गीगावाट (13 हजार करोड़ किलोवाट) सौर उर्जा तैयार कर रहा है। उनका यही तर्क है कि अभी हम कोयले पर निर्भर रहेंगें और आने वाले समय में धीरे धीरे अन्य वैकल्पिक ऊर्जाओं की तरफ जायेंगें। यह भी स्वीकारना होगा और अंतराष्ट्रीय स्तर की बैठकों में खासतौर से तब जब भारत जैसे देश पर कोयले की खपत जैसे बड़े सवाल पैदा हों ऐसे में शायद बहस की दिशा ऊर्जा की खपत की दृष्टि में यह होनी चाहिए कि देश की वर्तमान जीवनशैली कैसी है? दुनिया में कई तरह के ग्रोथ इंडैक्स हैं, लेकिन आज शायद गलोबल जीवनशैली इंडैक्स की भी उतनी ही बड़ी आवश्यकता है। यह इंडैक्स ये तय करेगा कि कौन देश किस स्तर की जीवनशैली जी रहा है और उसके लिए वो कितनी ऊर्जा को उपयोग में ला रहा है और उनकी इसके लिये प्रति व्प्यक्ति ऊर्जा खपत क्या है।
पिछड़े व विकासशील देशों में जीवनशैली निचले स्तर पर होंगी। समानता व नैतिकता की दृष्टि से यह आवश्यक हो जाता है कि एक न्यूनतम जीवनशैली का अधिकार इस दुनिया में सबको है। इसके आधार पर ही कोयला ऊर्जा के उपयोग के अधिकार तय किए जाने चाहिए। विकसित देश जिनका हायर इंडैक्स होगा वे अपने कोयले की खपत पर नियंत्रण लगायें या विकल्पों पर ज्यादा जोर दे। विकासशील व पिछड़े देशों को कोयले की खपत को लेकर स्वतंत्रता होनी चाहिए ताकि वे भी न्यूनतम जीवनशैली स्तर पर पहुंच पाये। जीवनशैली पर आधारित कोयले की खपत तय होगी तो निश्चित रूप से अमेरिका, आस्ट्रेलिया जैसे बड़े देश का नैतिक दायित्व होगा कि वो अपने कोयले की खपत पर तो अंकुश लगाए पर अन्य अविकसित देशो को न्यूनतम जीवनशैली तक पहंचने के लिए कोल ऊर्जा पर छूट दे।
विकसित देश अपनी विलासी जीवनशैली को अन्य विकल्पों पर डालने के लिए समर्थ हैं इसलिए उनकी ज्यादा विज्ञान खोज विकल्प तलाश सकती है। , यूरोप ने ही लंबे समय से यह भी तय किया कि वे अपने ऊर्जा के आधार कोयले से मुक्त होकर प्राकृतिक गैस में कर रहे हैं। उन्होंने कोयले की खपत पर नियंत्रण लगाकर प्राकृतिक गैस का उपयोग किया। यह यूरोप का एक महत्वपूर्ण कदम रहा। वहां ऊर्जा दामो में निश्चित इजाफा हुआ पर फिर भी उनकी जीवन शैली ऊंची बनी हुई है।
ये समय है कि हमें अंतराष्ट्रीय स्तर पर एक सतत ऊर्जा व जीवनशैली स्तर पर बातचीत कर एक नई व न्यायोचित बहस को जन्म दें। तब ही हम सतत ऊर्जा के अंतरराष्ट्रीय आयाम खड़े कर सकेंगे। अपने देश मे ऊर्जा स्रोतों की नई नई खोजें इसी दिशा को बल देने का काम कर रही है। खासतौर से सौर ऊर्जा में हम तेजी से बढ़त बनाए हुए हैं। इससे जहां देश ऊर्जा स्थिर होगा वही दुनिया कर लिए उदाहरण भी बनेगा।
(लेखक पद्म भूषण से सम्मानित प्रख्यात पर्यावरण कार्यकर्ता हैं)
| सस्टेनेबल एनर्जी डेज पर डा. अनिल प्रकाश जोशी बता रहे हैं कि ये समय है कि हम अंतराष्ट्रीय स्तर पर सतत ऊर्जा व जीवनशैली स्तर पर बातचीत कर एक नई व न्यायोचित बहस को जन्म दें। डा. अनिल प्रकाश जोशी। आज दुनिया मे ऐसा कोई भी कार्य नहीं है जिसमे ऊर्जा की सीधी खपत न होती हो। ऊर्जा रहित समाज की कल्पना का मतलब हर तरह की हलचलों का शून्य हो जाना है इसमें कोई भी अतिश्योक्ति नहीं। किसी भी देश की पहचान व प्रगति उसकी जीवनशैली के स्तर से जुड़ी है। दुनिया के बड़े शहर व बाजारों का आधार ऊर्जा ही है। अमेरिका को दुनिया में सबसे ज्यादा विकसित देश मानने के पीछे वहां जुटाई हुई सुविधाएं ही हैं और सुविधाएं बिना ऊर्जा के नहीं जुटाई जा सकतीं। चीन या अन्य कोई देश के बढ़ते बाजार भी ऊर्जा खपत से ही चलते हैं और यही कारण है कि पिछले दो सौ वर्ष में दुनिया में ऊर्जा खपत बड़ी चर्चाओं का विषय भी रहा है। आज ऊर्जा किसी भी देश की आर्थिकी के विकास का आधार है। वे देश जो अपनी बढ़त नहीं बना पाए उनका सबसे बड़ा कारण उनके पास ऊर्जा या तकनीक विकल्प का ही बड़ा अभाव रहा है। दुनिया में आज सबसे बड़ा ऊर्जा का आधार कोयला ही माना गया है। वो चाहे कोई भी देश, दुनिया में जहां किसी ना किसी रूप में कोयले को ऊर्जा के रूप में ना देखा जाता है। यह बात दूसरी है कि तीन-चार बड़े देशों में जहां कोयले की खपत अत्यधिक है और भारत उनमें से एक है इसके पीछे सबसे बडा कारण अन्य विकल्पों का अभाव माना गया है। आज तक ऊर्जा के अन्य विकल्प कोयले की बराबरी नहीं कर पाए हैं और यही कारण है कि आज भी दुनिया में कोयले की सबसे ज्यादा खपत होती है। आंकड़ा सामने है कि दुनिया में आज भी लगभग चौरासी फीसदी कोयले का उपयोग उर्जा के लिए किया जाता है। उसी तरह अमेरिका में ग्यारह. चौंतीस फीसदी, चाइना में चौवन. तीन फीसदी और भारत भी उनमें से एक ऐसा देश है जहां कोयले की खपत ज्यादा होती रही है। अपने देश में भी विकल्प का अभाव रहा है और उसके पीछे वैकल्पिक ऊर्जा की तकनीकी का बहुत बड़ा योगदान माना जाता है। आज भारत में ऊर्जा के लिए लगभग अट्ठारह. पाँच लाख टन कोयला प्रतिदिन उपयोग में लाया जाता है यही कारण है कि कोयला ही उर्जा का केन्द्र रहा है। बहुत से लोगों को यह पता नहीं होगा लेकिन यह सत्य है कि ब्रिटिशर ने जब देश में राज किया तो उनकी पहली नजर भारत से कोयले का निर्यात करना था। भारत के उत्तरी क्षेत्र में कोयले की बहुतायत रही है उसमें झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश व बंगाल के कुछ हिस्से जहां कोयला पाया जाता है। करोड़ों वर्ष पहले एक बड़े लावे ने इन क्षेत्रों में जितने भी वन थे उनको पाट दिया था और वही बाद में कोयला बना था। कोलोनियल एरा में ब्रिटिशर्स ने एक बड़े व्यापार के रूप में ईस्ट इंडिया कंपनी को खड़ा किया था। ईस्ट इंडिया कंपनी का बड़ा आधार भारत से कोयले का निर्यात करना था। दुनिया मेंं फ्रांस और इंगलैण्ड ये दो देश ऐसे थे जो सबसे ज्यादा कोयले पर आधारित उर्जा को भोगते थें। भारत के पास वर्तमान में ऊर्जा का कोई विकल्प भी नहीं है और इतनी बड़ी जनसंख्या की उर्जा की आवश्यकताओं की पूर्ती करनी है इसलिए कोयला ही बड़ा आधार है। कोयले की खपत के नियंत्रण की बात अंतराष्ट्रीय स्तर पर बार बार उठी है। ग्लास्गो की बैठक ही सबसे बड़ा उदाहरण है जहां पर भारत वन व पर्यावरण मंत्री की विवशता इस रूप में साफ दिखाई देती थी कि वे कोयले की खपत को लेकर इसलिए समझौता नहीं कर सकते क्योंकि आज भी अपने देश में सत्तर प्रतिशत उर्जा का आधार कोयला ही है। ऐसा नहीं है कि पिछले कुछ समय से भारत अन्य विकल्पों को लेकर गंभीर नहीं है। भारत ने अपने देश में चाहे सोलर एनर्जी हो या फिर पवन ऊर्जा इन दोनों को लेकर पहल की है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी आवश्यकता को समझते हुए सोलर ऊर्जा पर ज्यादा से ज्यादा निवेश करके उसको व्यापक बनाने में अति गंभीरता दिखाई है। यह सही भी है कि भारत जैसा ट्रोपिकल देश जहां सौर ऊर्जा हमेशा से किसी ना किसी रूप में उपलब्ध है यह आने वाले समय में ऊर्जा का एक बड़ा आधार बन सकता है। और यही कारण है कि आज भारत की सौर उर्जा क्षमता पैंतालीस हजार मेगावाट है और वर्ष दो हज़ार तीस तक चार सौ पचास गेगा वाट सोलर आधारित उर्जा का उत्पादन करेगा और गत एक दशक में इस ओर प्रगति भी हुई है। इसी तरह पवन उर्जा की संभावना को भी समझा गया है। आज भी हम दस प्रतिशत हम पवन से उर्जा को साधते हैं। दुनिया भर में भी सोलर के उपयोग को लेकर चीन ने भी बढ़त कर ली है। एक आंकलन के अनुसार चीन एक सौ तीस गीगावाट सौर उर्जा तैयार कर रहा है। उनका यही तर्क है कि अभी हम कोयले पर निर्भर रहेंगें और आने वाले समय में धीरे धीरे अन्य वैकल्पिक ऊर्जाओं की तरफ जायेंगें। यह भी स्वीकारना होगा और अंतराष्ट्रीय स्तर की बैठकों में खासतौर से तब जब भारत जैसे देश पर कोयले की खपत जैसे बड़े सवाल पैदा हों ऐसे में शायद बहस की दिशा ऊर्जा की खपत की दृष्टि में यह होनी चाहिए कि देश की वर्तमान जीवनशैली कैसी है? दुनिया में कई तरह के ग्रोथ इंडैक्स हैं, लेकिन आज शायद गलोबल जीवनशैली इंडैक्स की भी उतनी ही बड़ी आवश्यकता है। यह इंडैक्स ये तय करेगा कि कौन देश किस स्तर की जीवनशैली जी रहा है और उसके लिए वो कितनी ऊर्जा को उपयोग में ला रहा है और उनकी इसके लिये प्रति व्प्यक्ति ऊर्जा खपत क्या है। पिछड़े व विकासशील देशों में जीवनशैली निचले स्तर पर होंगी। समानता व नैतिकता की दृष्टि से यह आवश्यक हो जाता है कि एक न्यूनतम जीवनशैली का अधिकार इस दुनिया में सबको है। इसके आधार पर ही कोयला ऊर्जा के उपयोग के अधिकार तय किए जाने चाहिए। विकसित देश जिनका हायर इंडैक्स होगा वे अपने कोयले की खपत पर नियंत्रण लगायें या विकल्पों पर ज्यादा जोर दे। विकासशील व पिछड़े देशों को कोयले की खपत को लेकर स्वतंत्रता होनी चाहिए ताकि वे भी न्यूनतम जीवनशैली स्तर पर पहुंच पाये। जीवनशैली पर आधारित कोयले की खपत तय होगी तो निश्चित रूप से अमेरिका, आस्ट्रेलिया जैसे बड़े देश का नैतिक दायित्व होगा कि वो अपने कोयले की खपत पर तो अंकुश लगाए पर अन्य अविकसित देशो को न्यूनतम जीवनशैली तक पहंचने के लिए कोल ऊर्जा पर छूट दे। विकसित देश अपनी विलासी जीवनशैली को अन्य विकल्पों पर डालने के लिए समर्थ हैं इसलिए उनकी ज्यादा विज्ञान खोज विकल्प तलाश सकती है। , यूरोप ने ही लंबे समय से यह भी तय किया कि वे अपने ऊर्जा के आधार कोयले से मुक्त होकर प्राकृतिक गैस में कर रहे हैं। उन्होंने कोयले की खपत पर नियंत्रण लगाकर प्राकृतिक गैस का उपयोग किया। यह यूरोप का एक महत्वपूर्ण कदम रहा। वहां ऊर्जा दामो में निश्चित इजाफा हुआ पर फिर भी उनकी जीवन शैली ऊंची बनी हुई है। ये समय है कि हमें अंतराष्ट्रीय स्तर पर एक सतत ऊर्जा व जीवनशैली स्तर पर बातचीत कर एक नई व न्यायोचित बहस को जन्म दें। तब ही हम सतत ऊर्जा के अंतरराष्ट्रीय आयाम खड़े कर सकेंगे। अपने देश मे ऊर्जा स्रोतों की नई नई खोजें इसी दिशा को बल देने का काम कर रही है। खासतौर से सौर ऊर्जा में हम तेजी से बढ़त बनाए हुए हैं। इससे जहां देश ऊर्जा स्थिर होगा वही दुनिया कर लिए उदाहरण भी बनेगा। |
सुबाथू - कुपवाड़ा के नौगाम सेक्टर में शहीद तारा बहादुर रोका का शनिवार को सैन्य व राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। करीब 12 बजे शहीद की पार्थिव देह सैन्य वाहन में सुबाथू के रामबाग लाई गई।
धर्मशाला - 'दिव्य हिमाचल फुटबाल लीग-2017' को रविवार को अपना पहला चैंपियन मिल जाएगा। पुलिस ग्राउंड में रविवार को शाम चार बजे से हमीरपुर हीरोज और सोलन पैंथर्स के बीच फाइनल मुकाबला खेला जाएगा।
| सुबाथू - कुपवाड़ा के नौगाम सेक्टर में शहीद तारा बहादुर रोका का शनिवार को सैन्य व राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। करीब बारह बजे शहीद की पार्थिव देह सैन्य वाहन में सुबाथू के रामबाग लाई गई। धर्मशाला - 'दिव्य हिमाचल फुटबाल लीग-दो हज़ार सत्रह' को रविवार को अपना पहला चैंपियन मिल जाएगा। पुलिस ग्राउंड में रविवार को शाम चार बजे से हमीरपुर हीरोज और सोलन पैंथर्स के बीच फाइनल मुकाबला खेला जाएगा। |
गालीबाज भव्या रॉय और श्रीकांत त्यागी की गलती एक मगर सजा में अंतर, पुरुष को जेल महिला को बेल?
श्रीकांत त्यागी (Shrikant Tyagi) अभी जेल में सजा काट रहा है मगर नोएडा की गालीबाज महिला भव्या रॉय (Bhaavya Roy) को 4 दिनों बाद ही जमानत मिल गई है. यह सही है पहले गलती करो फिर मासूम की शक्ल बनाकर महिला होने का फायद उठाओ और जेल से छूट जाओ.
वह स्त्री है कुछ भी कर सकती है, ऊपर से अगर वह अमीर वकील हो तब तो पूछो ही मत. . . हम बात कर रहे हैं नोएडा की गालीबाज महिला भव्या रॉय (Bhavya Roy) की. जिसने कुछ दिनों पहले सोसाइटी के सिक्योरिटी गार्ड अनूप कुमार को गंदी-गंदी गालियां देते हुए, धक्का-मुक्की की थी. उसने बिहारी बोलकर गार्ड के मन को आहत किया था. जिसके बाद महिला को गिरफ्तार कर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था. अब खबर आ रही है कि लोकल अदालत ने महिला को 4 दिनों बाद ही जमानत दे दी है. यह सही है पहले गलती करो फिर मासूम की शक्ल बनाकर महिला होने का फायद उठाओ और जेल से छूट जाओ.
अगर गार्ड की जगह पर कोई अमीर होता तो शायद महिला इतनी जल्दी अपनी सजी से मुक्त नहीं होती. कम से कस जिस तरह उसने सबके सामने गार्ड को दुत्कारा था उसी तरह सबके सामने अपनी गलती का एससास कर उससे माफी मांगती. . . वायरल वीडियो देखने के बाद लोगों ने भव्या रॉय को फीमेल श्रीकांत त्यागी कहना शुरु कर दिया.
जबकि इसी तरह की हरकत ग्रैंड ओमेक्स सोसायटी में श्रीकांत त्यागी ने की थी. उसने भी सोसायटी में रहने वाली एक महिला के साथ 5 अगस्त को बदसलूकी की थी और उसे धमकी दी थी. जिसके बाद उसके घर बाहर बने अतिक्रमण पर बुल्डोजर चलवा गया और उस पर गैंगस्टर एक्ट लगाकर 14 दिनों के लिए जेल भेज दिया गया. इसके बाद त्यागी ने अपनी जमानत के लिए दो बार कोर्ट में अर्जी लगाई थी, लेकिन दोनों ही बार अदालत ने उसकी अर्जी खारिज कर दी. त्यागी का साल 2007 का एक मामला खोजा गया और फिर उसे जेल में डाल दिया गया. उसने अपनी जान का खतरा बताया है. त्यागी समाज के लोगों ने उसे छुड़ाने के लिए महापंचायत बुलाई लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ, क्योंकि सोसायटी के लोग पीड़ित महिला के साथ हैं, त्यागी के नहीं. इस तरह त्यागी अभी भी जेल में बंद है.
भव्या रॉय और श्रीकांत त्यागी गाली देना दोनों के लिए अनुचित तो फिर सजा में अंतर क्यों?
दोनों ने अपनी-अपनी सोसायटी में गालीगलौज किया और मारपीट की कोशिश की. दोनों ने गलती की. मगर महिला का जमानत मिल गई और पुरुष अभी भी जेल में है. महिला के खिलाफ सोसायटी ने कोई कार्रवाई नहीं की तो पुरुष की सोसायटी ने माफ नहीं किया. महिला को 4 दिन में जेल से छूट गई और पुरुष अभी जेल में ही है. पुरुष पर गैंगेस्टर एक्ट लगा मगर महिला बेचारी बन गई. महिला आजाद होकर अब घूम रही है तो पुरुष अपनी जान की सुरक्षा के लिए गुहार लगा रहा है. . . गाली देकर जब दोनों ने गलती की थी फिर सजा में इतना अंतर क्यों? गाली देकर पुरुष के बराबरी करने के बाद अचानक से महिला भव्या रॉय खुद को यूं पेश कर रही है जैसे विक्टिम वही है.
हमारे कहने का मतलब यह है कि भव्या रॉय को इतनी आसानी से जमानत नहीं मिलती चाहिए थी. उसने जो गलती की वह कहीं से भी सही नहीं थी. पहले गलती करो फिर महिला होने पर सजा में कमी की गुंजाइश करो, ऐसा कैसे चलेगा भव्या दीदी? जब हर चीज में बराबरी का हक चाहिए तो सजा में क्यों नहीं?
| गालीबाज भव्या रॉय और श्रीकांत त्यागी की गलती एक मगर सजा में अंतर, पुरुष को जेल महिला को बेल? श्रीकांत त्यागी अभी जेल में सजा काट रहा है मगर नोएडा की गालीबाज महिला भव्या रॉय को चार दिनों बाद ही जमानत मिल गई है. यह सही है पहले गलती करो फिर मासूम की शक्ल बनाकर महिला होने का फायद उठाओ और जेल से छूट जाओ. वह स्त्री है कुछ भी कर सकती है, ऊपर से अगर वह अमीर वकील हो तब तो पूछो ही मत. . . हम बात कर रहे हैं नोएडा की गालीबाज महिला भव्या रॉय की. जिसने कुछ दिनों पहले सोसाइटी के सिक्योरिटी गार्ड अनूप कुमार को गंदी-गंदी गालियां देते हुए, धक्का-मुक्की की थी. उसने बिहारी बोलकर गार्ड के मन को आहत किया था. जिसके बाद महिला को गिरफ्तार कर चौदह दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था. अब खबर आ रही है कि लोकल अदालत ने महिला को चार दिनों बाद ही जमानत दे दी है. यह सही है पहले गलती करो फिर मासूम की शक्ल बनाकर महिला होने का फायद उठाओ और जेल से छूट जाओ. अगर गार्ड की जगह पर कोई अमीर होता तो शायद महिला इतनी जल्दी अपनी सजी से मुक्त नहीं होती. कम से कस जिस तरह उसने सबके सामने गार्ड को दुत्कारा था उसी तरह सबके सामने अपनी गलती का एससास कर उससे माफी मांगती. . . वायरल वीडियो देखने के बाद लोगों ने भव्या रॉय को फीमेल श्रीकांत त्यागी कहना शुरु कर दिया. जबकि इसी तरह की हरकत ग्रैंड ओमेक्स सोसायटी में श्रीकांत त्यागी ने की थी. उसने भी सोसायटी में रहने वाली एक महिला के साथ पाँच अगस्त को बदसलूकी की थी और उसे धमकी दी थी. जिसके बाद उसके घर बाहर बने अतिक्रमण पर बुल्डोजर चलवा गया और उस पर गैंगस्टर एक्ट लगाकर चौदह दिनों के लिए जेल भेज दिया गया. इसके बाद त्यागी ने अपनी जमानत के लिए दो बार कोर्ट में अर्जी लगाई थी, लेकिन दोनों ही बार अदालत ने उसकी अर्जी खारिज कर दी. त्यागी का साल दो हज़ार सात का एक मामला खोजा गया और फिर उसे जेल में डाल दिया गया. उसने अपनी जान का खतरा बताया है. त्यागी समाज के लोगों ने उसे छुड़ाने के लिए महापंचायत बुलाई लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ, क्योंकि सोसायटी के लोग पीड़ित महिला के साथ हैं, त्यागी के नहीं. इस तरह त्यागी अभी भी जेल में बंद है. भव्या रॉय और श्रीकांत त्यागी गाली देना दोनों के लिए अनुचित तो फिर सजा में अंतर क्यों? दोनों ने अपनी-अपनी सोसायटी में गालीगलौज किया और मारपीट की कोशिश की. दोनों ने गलती की. मगर महिला का जमानत मिल गई और पुरुष अभी भी जेल में है. महिला के खिलाफ सोसायटी ने कोई कार्रवाई नहीं की तो पुरुष की सोसायटी ने माफ नहीं किया. महिला को चार दिन में जेल से छूट गई और पुरुष अभी जेल में ही है. पुरुष पर गैंगेस्टर एक्ट लगा मगर महिला बेचारी बन गई. महिला आजाद होकर अब घूम रही है तो पुरुष अपनी जान की सुरक्षा के लिए गुहार लगा रहा है. . . गाली देकर जब दोनों ने गलती की थी फिर सजा में इतना अंतर क्यों? गाली देकर पुरुष के बराबरी करने के बाद अचानक से महिला भव्या रॉय खुद को यूं पेश कर रही है जैसे विक्टिम वही है. हमारे कहने का मतलब यह है कि भव्या रॉय को इतनी आसानी से जमानत नहीं मिलती चाहिए थी. उसने जो गलती की वह कहीं से भी सही नहीं थी. पहले गलती करो फिर महिला होने पर सजा में कमी की गुंजाइश करो, ऐसा कैसे चलेगा भव्या दीदी? जब हर चीज में बराबरी का हक चाहिए तो सजा में क्यों नहीं? |
मुंबई, (एजेंसी)। मुंबई में मोबाइल सेवा देने वाली कंपनी यूनिनॉर पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का असर दिखने लगा है। मोबाइल सेवा देने वाली कंपनी यूनिनॉर ने अपनी सेवाएं बंद कर दी हैं। इसके चलते आधी रात से यूनिनॉर के ग्राहकों के मोबाइल से नेटवर्प गायब है। मुंबई में यूनिनॉर के करीब 18 लाख ग्राहक हैं। जिनके मोबाइल फोन ने काम करना बंद कर दिया है। यूनिनॉर को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अपनी सेवाएं बंद करनी पड़ीं। सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2012 में यूनिनॉर के 22 लाइसेंस रद्द कर दिए थे। यूनिनॉर में सबसे बड़ी स्टॉक होल्डर कंपनी टेलीनॉर है। टेलीनॉर ने नवंबर 2012 में टेलीविंग्स नाम की नई कंपनी बनाकर 2जी नीलामी में हिस्सा लिया और टेलीविंग्स ने 6 सर्किल के लाइसेंस हासिल कर लिए। अब यूनिनॉर की कोशिश है कि वो अपनी सेवाओं को टेलीविंग्स कम्युनिकेशन को ट्रांसफर कर दे। लेकिन इसमें वक्त लगेगा तब तक सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया कि यूनिनॉर को तत्काल अपनी सेवाएं बंद करनी पड़ेंगी। अदालत ने कंपनी को मोहलत देने से भी इंकार कर दिया था। लिहाजा देर रात से मुंबई में यूनिनॉर के ग्राहक मुसीबत में फंस गए हैं। यूनिनॉर के मोबाइल काम नहीं कर रहे है। जिससे यूनिनॉर उपभोक्ताओं को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।
| मुंबई, । मुंबई में मोबाइल सेवा देने वाली कंपनी यूनिनॉर पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का असर दिखने लगा है। मोबाइल सेवा देने वाली कंपनी यूनिनॉर ने अपनी सेवाएं बंद कर दी हैं। इसके चलते आधी रात से यूनिनॉर के ग्राहकों के मोबाइल से नेटवर्प गायब है। मुंबई में यूनिनॉर के करीब अट्ठारह लाख ग्राहक हैं। जिनके मोबाइल फोन ने काम करना बंद कर दिया है। यूनिनॉर को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अपनी सेवाएं बंद करनी पड़ीं। सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी दो हज़ार बारह में यूनिनॉर के बाईस लाइसेंस रद्द कर दिए थे। यूनिनॉर में सबसे बड़ी स्टॉक होल्डर कंपनी टेलीनॉर है। टेलीनॉर ने नवंबर दो हज़ार बारह में टेलीविंग्स नाम की नई कंपनी बनाकर दोजी नीलामी में हिस्सा लिया और टेलीविंग्स ने छः सर्किल के लाइसेंस हासिल कर लिए। अब यूनिनॉर की कोशिश है कि वो अपनी सेवाओं को टेलीविंग्स कम्युनिकेशन को ट्रांसफर कर दे। लेकिन इसमें वक्त लगेगा तब तक सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया कि यूनिनॉर को तत्काल अपनी सेवाएं बंद करनी पड़ेंगी। अदालत ने कंपनी को मोहलत देने से भी इंकार कर दिया था। लिहाजा देर रात से मुंबई में यूनिनॉर के ग्राहक मुसीबत में फंस गए हैं। यूनिनॉर के मोबाइल काम नहीं कर रहे है। जिससे यूनिनॉर उपभोक्ताओं को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। |
मधेपुरा में शराबी पति ने महिला की हत्या कर दी। मामला सदर अनुमंडल के मुरलीगंज थाना क्षेत्र के काशीपुर वार्ड एक का है। बीती रात करीब 2 बजे एक शराबी पति ने पत्नी के सिर पर बांस से वार कर दिया और बाहर से कमरे का दरवाजा लगाकर फरार हो गया।
मृतका काशीपुर वार्ड - 1 निवासी संजय मलिक की 35 वर्षीय पत्नी किरण देवी है। स्थानीय लोगों ने बताया कि रात संजय अपने घर शराब के नशे में पहुंचा था। घर के बाकी सदस्य सो चुके थे। संजय ने सावधानी से बाकी कमरों को बाहर से बंद कर दिया और अपने कमरे में गया। जहां उसकी पत्नी से बहस हुई और वह उसके सिर पर बांस से वार कर दिया। इसके बाद उसकी पत्नी जमीन पर गिर गयी और वह कमरे को बाहर से लगा कर फरार हो गया।
बताया जाता है कि संजय शराब पीने के आरोप में 15 दिन पहले ही जेल से बाहर आया है। घटना की जानकारी पाते ही मुरलीगंज थानाध्यक्ष राजकिशोर मंडल अपने पुलिस वाल के साथ मौके पर पहुंचकर शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम हेतु मधेपुरा भेज दिया गया है।
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| मधेपुरा में शराबी पति ने महिला की हत्या कर दी। मामला सदर अनुमंडल के मुरलीगंज थाना क्षेत्र के काशीपुर वार्ड एक का है। बीती रात करीब दो बजे एक शराबी पति ने पत्नी के सिर पर बांस से वार कर दिया और बाहर से कमरे का दरवाजा लगाकर फरार हो गया। मृतका काशीपुर वार्ड - एक निवासी संजय मलिक की पैंतीस वर्षीय पत्नी किरण देवी है। स्थानीय लोगों ने बताया कि रात संजय अपने घर शराब के नशे में पहुंचा था। घर के बाकी सदस्य सो चुके थे। संजय ने सावधानी से बाकी कमरों को बाहर से बंद कर दिया और अपने कमरे में गया। जहां उसकी पत्नी से बहस हुई और वह उसके सिर पर बांस से वार कर दिया। इसके बाद उसकी पत्नी जमीन पर गिर गयी और वह कमरे को बाहर से लगा कर फरार हो गया। बताया जाता है कि संजय शराब पीने के आरोप में पंद्रह दिन पहले ही जेल से बाहर आया है। घटना की जानकारी पाते ही मुरलीगंज थानाध्यक्ष राजकिशोर मंडल अपने पुलिस वाल के साथ मौके पर पहुंचकर शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम हेतु मधेपुरा भेज दिया गया है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
पाकिस्तान के राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने कहा कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ धर्मगुरुओं का फ़तवा पैग़ामे पाकिस्तान इस्लामी मार्गदर्शन की आत्मा के अनुरूप है जिस पर अमल करके चरमपंथ पर नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी और दुनिया के सामने इस्लामी शिक्षाओं के साथ ही पाकिस्तानी समाज की भी अच्छी तसवीर स्थापित होगी।
इस्लामाबाद में राष्ट्रपति भवन में फ़तवे से संबंधित एक समारोह में राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने कहा कि इस्लाम की मूल शिक्षाओं के अनुसार चरमपंथ, रक्तपात और आत्मघाती हमले धरती पर गड़बड़ी पैदा करने की गतिविधियों के दायरे में आते हैं जो निश्चित रूप से नाजायज़ और हराम हैं। उन्होंने कहा कि ख़ुशी है कि धर्गगुरुओं के इस फ़तवे को सरकारी संस्थानों का समर्थन हासिल है। राष्ट्रपति ने कहा कि समाज के अन्य वर्गों की राय को भी इसमें शामिल करने की ज़रूरत है ताकि हर वर्ग इसके विस्तार में भूमिका निभाए।
पाकिस्तान के गृह मंत्री अहसन एक़बाल ने कहा कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ धर्मगुरुओं का फ़तवा हमें एकजुट करने के लिए एक प्लेटफ़ार्म उपलब्ध कराएगा और विकास तथा कल्याण के लिए हमें एकजुट होकर ही आगे बढ़ने की ज़रूरत है।
पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ ने कहा कि पैग़म्बरे इस्लाम की शिक्षाओं की मांग यह है कि पाकिस्तान के सभी निवासी आतंकवाद के ख़िलाफ़ एकजुट हो जाएं।
ज्ञात रहे कि पाकिस्तान के 800 से अधिक शीया सुन्नी धर्मगुरुओं ने एक संयुक्त बयान जारी करके आतंकी हमलों को हराम घोषित किया है।
| पाकिस्तान के राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने कहा कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ धर्मगुरुओं का फ़तवा पैग़ामे पाकिस्तान इस्लामी मार्गदर्शन की आत्मा के अनुरूप है जिस पर अमल करके चरमपंथ पर नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी और दुनिया के सामने इस्लामी शिक्षाओं के साथ ही पाकिस्तानी समाज की भी अच्छी तसवीर स्थापित होगी। इस्लामाबाद में राष्ट्रपति भवन में फ़तवे से संबंधित एक समारोह में राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने कहा कि इस्लाम की मूल शिक्षाओं के अनुसार चरमपंथ, रक्तपात और आत्मघाती हमले धरती पर गड़बड़ी पैदा करने की गतिविधियों के दायरे में आते हैं जो निश्चित रूप से नाजायज़ और हराम हैं। उन्होंने कहा कि ख़ुशी है कि धर्गगुरुओं के इस फ़तवे को सरकारी संस्थानों का समर्थन हासिल है। राष्ट्रपति ने कहा कि समाज के अन्य वर्गों की राय को भी इसमें शामिल करने की ज़रूरत है ताकि हर वर्ग इसके विस्तार में भूमिका निभाए। पाकिस्तान के गृह मंत्री अहसन एक़बाल ने कहा कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ धर्मगुरुओं का फ़तवा हमें एकजुट करने के लिए एक प्लेटफ़ार्म उपलब्ध कराएगा और विकास तथा कल्याण के लिए हमें एकजुट होकर ही आगे बढ़ने की ज़रूरत है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ ने कहा कि पैग़म्बरे इस्लाम की शिक्षाओं की मांग यह है कि पाकिस्तान के सभी निवासी आतंकवाद के ख़िलाफ़ एकजुट हो जाएं। ज्ञात रहे कि पाकिस्तान के आठ सौ से अधिक शीया सुन्नी धर्मगुरुओं ने एक संयुक्त बयान जारी करके आतंकी हमलों को हराम घोषित किया है। |
भरतपुर। गुरु हरिकिशन एकेडमी में शुक्रवार को एक महिला को किसी जहरीले कीड़े ने काट लिया। जिसके बाद महिला को गंभीर हालत में आरबीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जानकारी के अनुसार कुम्हेर गेट निवासी अमरदीप घना जाटौली स्थित हरिकिशन एकेडमी में इन्चार्ज के पद पर कार्यरत है। शुक्रवार को वह अपने विद्यालय के वाॅशरूम में गई थी। जहां उसे किसी जहरीले कीड़े ने काट लिया। जब तक वह उसे देखती, तब तक वह जहरीला कीड़ा भाग चुका था। महिला को लगा, जैसे उसे किसी सांप ने काट लिया है। महिला के शोर मचाने पर विद्यालय स्टाफ ने महिला का प्राथमिक उपचार कर उसे इलाज के लिए जिला आरबीएम अस्पताल में भर्ती कराया। जहं उसका इलाज जारी है।
आरएसएस प्रमुख ने कहा, 'कुछ ताकतें भारत के गौरव को कम कर रही हैं'
| भरतपुर। गुरु हरिकिशन एकेडमी में शुक्रवार को एक महिला को किसी जहरीले कीड़े ने काट लिया। जिसके बाद महिला को गंभीर हालत में आरबीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जानकारी के अनुसार कुम्हेर गेट निवासी अमरदीप घना जाटौली स्थित हरिकिशन एकेडमी में इन्चार्ज के पद पर कार्यरत है। शुक्रवार को वह अपने विद्यालय के वाॅशरूम में गई थी। जहां उसे किसी जहरीले कीड़े ने काट लिया। जब तक वह उसे देखती, तब तक वह जहरीला कीड़ा भाग चुका था। महिला को लगा, जैसे उसे किसी सांप ने काट लिया है। महिला के शोर मचाने पर विद्यालय स्टाफ ने महिला का प्राथमिक उपचार कर उसे इलाज के लिए जिला आरबीएम अस्पताल में भर्ती कराया। जहं उसका इलाज जारी है। आरएसएस प्रमुख ने कहा, 'कुछ ताकतें भारत के गौरव को कम कर रही हैं' |
निष्कण :299
२०- आज के उपन्यासों का कधीपक्थन शिल्प समृद्ध हो गया है। प्रारम्भिक उपन्यामी पाउपन्यासकार के दृष्टि से प्रभावित थ और आज के दिन्तु दृष्टिकोण की प्रधानता के कारण प्रारम्भिक उपन्यासों है क्योधन अतिरंजित, उस्तामाजिक तथा जव्यवहारिक थे । समस्त पात्र एक में करते थे जो उपन्यासकार का स्वरथा । उसलिए वह खलता था । बाज के उपन्यासों में उपन्यासकार का दृष्टिकोण पान में केन्द्रित
हो गया है। इस विचारक atter में भी लात्मकता तथा सौन्दर्य अक्षुण्ण रहता है। बाबा टैसरनाथ : १९५४ः में बट गांधी जी की आलोचना कर रहा है। परन्त यह इतनी भावात्मक तथा सरस है कि इसन - शिल्प पर आघात नहीं होता। न पात्रों के स्तर के अकल होते हैं। इसीलिए उपन्यासों में लोकभाषा का भी प्रयोग हुआ है। गढ़कुंडार : १६२८ : मंसी की रानी लक्ष्मीबाई : १६४६ : मेलाजांचल : १६५४ः आदिकोश - शिल्प में लौकमाणा के कारण अभिनव सौन्दर्य दृष्टिगत होता है। किन्तु यहां यह भी आशंका रहती है कि कहीं लोकमाषाओं के कारण उपन्यास के कथोपकथन म्युजियम न बन जाय इन उपन्यासों में इनका प्रयोग कम हुआ है। `मैलांच इनकी : १९५४ः afte हुआ है। किन्तु यह भाषा ऐसी है जो दुरुह नहीं है। इसी कारण स्थान की स्वाभाविकता समाप्त नहीं हुई है। इसके अतिरिक्त
१चौरीचौरा कांड से गांधी जी बड़े दुखी हुए तौर उन्होंने सत्याग्रह तथा असहयोग की उस व्यापक लड़ाई को बिल्कुल स्थगित कर दिया। स्वयंसेवक के जुलस, सरकारविरोधी समाएं, दमन-वानों के खिलाफ संघर्ष
*आन्दौलन एकदम ठप हो गया ।
"जनसंग्राम के प्रति महात्माजी का यह खिलवाड़ देश के लिए बहुत बड़ी दुर्घटना थी। गांधीजी के खास साथी जेल के अन्दर बन्द थे । यह समाचार पाकर है दःख के मारे वे पागल हो उठे।
ब्रा उपतों के शिल्प से भिन्न होता है । प्रारंभिक उपन्यासों से । प्रारंभिम प्रसंगों की हाम हाथ की ध्वनि अथवा उपदेशाल्पकता से पूर्ण था। यह भावानुकूल तथा प्रसंगानुकूल हो गया है। एक उपन्यास के कधपन में एक ही भाषा का प्रयोग होते हुए भी एकरसता, तथा एक स्वरता नहीं दृष्टिगत होती उसमें विभिन्नता है। मनोरमा : १९२४ : तथा मंगल प्रभात : १६२६ः से कथोपकथन से पूर्ण थे परन्तु उनमें कृमिता दृष्टिगत होती कविपूर्ण है परन्तु अशावहारिक
अस्सामाविक नहीं
होते हैं।
वधोपकथन - शिल्प का निरन्तर विकास होता है। नदी
प्रस्तुतोवरण मैं नवीनता है। कंल १६२६ः में गाला की मां की जीवनी में लिखित संवादलते हैं। परन्तु इसमें रेखा कापी पर लिस्कर भुवन को देती है। भवन भी इसका उत्तर देता है। यह लिखित संवाद की पद्धति सन्दर तथा मौलिक है। artuper - शिल्प आज इतना सशक्त हो गया है कि इसके द्वारा क्यानक का वास होता है। पत्रिका प्रकाशक नहीं रह गया है प्रत्युत जटिल मानव के जटिल व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति का एकमात्र साधन है । देश-वाल तथा वातावरण की प्रतीति में इसका योगदान उल्लेखनीय है ।
२२ क्यानक तथा बरि-शिल्प को मांति ही कथोपकथन - शिल्प मौलिक है । इमे देखकर ऐसा अनुभव नहीं होता कि उपन्यासकारों ने इसका अनुवाद अथवा भाणानुवाद किया है । उपन्यासकार पाश्चात्य उपन्याती के पक्थन शिल्प से परिचितथे उसी से प्रेरणा ग्रहण की किन्तु इसका विकास उपन्यास की कथा तथा पात्रों के माध्यम हुवा है। इसी कारण इसमें स्वतः प्रवर्तित प्रवाह और गति है।
१- अज्ञेय : नदी द्वीप : १९५९ दिल्ली, पृ० १५६-१६० | निष्कण :दो सौ निन्यानवे बीस- आज के उपन्यासों का कधीपक्थन शिल्प समृद्ध हो गया है। प्रारम्भिक उपन्यामी पाउपन्यासकार के दृष्टि से प्रभावित थ और आज के दिन्तु दृष्टिकोण की प्रधानता के कारण प्रारम्भिक उपन्यासों है क्योधन अतिरंजित, उस्तामाजिक तथा जव्यवहारिक थे । समस्त पात्र एक में करते थे जो उपन्यासकार का स्वरथा । उसलिए वह खलता था । बाज के उपन्यासों में उपन्यासकार का दृष्टिकोण पान में केन्द्रित हो गया है। इस विचारक atter में भी लात्मकता तथा सौन्दर्य अक्षुण्ण रहता है। बाबा टैसरनाथ : एक हज़ार नौ सौ चौवनः में बट गांधी जी की आलोचना कर रहा है। परन्त यह इतनी भावात्मक तथा सरस है कि इसन - शिल्प पर आघात नहीं होता। न पात्रों के स्तर के अकल होते हैं। इसीलिए उपन्यासों में लोकभाषा का भी प्रयोग हुआ है। गढ़कुंडार : एक हज़ार छः सौ अट्ठाईस : मंसी की रानी लक्ष्मीबाई : एक हज़ार छः सौ छियालीस : मेलाजांचल : एक हज़ार छः सौ चौवनः आदिकोश - शिल्प में लौकमाणा के कारण अभिनव सौन्दर्य दृष्टिगत होता है। किन्तु यहां यह भी आशंका रहती है कि कहीं लोकमाषाओं के कारण उपन्यास के कथोपकथन म्युजियम न बन जाय इन उपन्यासों में इनका प्रयोग कम हुआ है। `मैलांच इनकी : एक हज़ार नौ सौ चौवनः afte हुआ है। किन्तु यह भाषा ऐसी है जो दुरुह नहीं है। इसी कारण स्थान की स्वाभाविकता समाप्त नहीं हुई है। इसके अतिरिक्त एकचौरीचौरा कांड से गांधी जी बड़े दुखी हुए तौर उन्होंने सत्याग्रह तथा असहयोग की उस व्यापक लड़ाई को बिल्कुल स्थगित कर दिया। स्वयंसेवक के जुलस, सरकारविरोधी समाएं, दमन-वानों के खिलाफ संघर्ष *आन्दौलन एकदम ठप हो गया । "जनसंग्राम के प्रति महात्माजी का यह खिलवाड़ देश के लिए बहुत बड़ी दुर्घटना थी। गांधीजी के खास साथी जेल के अन्दर बन्द थे । यह समाचार पाकर है दःख के मारे वे पागल हो उठे। ब्रा उपतों के शिल्प से भिन्न होता है । प्रारंभिक उपन्यासों से । प्रारंभिम प्रसंगों की हाम हाथ की ध्वनि अथवा उपदेशाल्पकता से पूर्ण था। यह भावानुकूल तथा प्रसंगानुकूल हो गया है। एक उपन्यास के कधपन में एक ही भाषा का प्रयोग होते हुए भी एकरसता, तथा एक स्वरता नहीं दृष्टिगत होती उसमें विभिन्नता है। मनोरमा : एक हज़ार नौ सौ चौबीस : तथा मंगल प्रभात : एक हज़ार छः सौ छब्बीसः से कथोपकथन से पूर्ण थे परन्तु उनमें कृमिता दृष्टिगत होती कविपूर्ण है परन्तु अशावहारिक अस्सामाविक नहीं होते हैं। वधोपकथन - शिल्प का निरन्तर विकास होता है। नदी प्रस्तुतोवरण मैं नवीनता है। कंल एक हज़ार छः सौ छब्बीसः में गाला की मां की जीवनी में लिखित संवादलते हैं। परन्तु इसमें रेखा कापी पर लिस्कर भुवन को देती है। भवन भी इसका उत्तर देता है। यह लिखित संवाद की पद्धति सन्दर तथा मौलिक है। artuper - शिल्प आज इतना सशक्त हो गया है कि इसके द्वारा क्यानक का वास होता है। पत्रिका प्रकाशक नहीं रह गया है प्रत्युत जटिल मानव के जटिल व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति का एकमात्र साधन है । देश-वाल तथा वातावरण की प्रतीति में इसका योगदान उल्लेखनीय है । बाईस क्यानक तथा बरि-शिल्प को मांति ही कथोपकथन - शिल्प मौलिक है । इमे देखकर ऐसा अनुभव नहीं होता कि उपन्यासकारों ने इसका अनुवाद अथवा भाणानुवाद किया है । उपन्यासकार पाश्चात्य उपन्याती के पक्थन शिल्प से परिचितथे उसी से प्रेरणा ग्रहण की किन्तु इसका विकास उपन्यास की कथा तथा पात्रों के माध्यम हुवा है। इसी कारण इसमें स्वतः प्रवर्तित प्रवाह और गति है। एक- अज्ञेय : नदी द्वीप : एक हज़ार नौ सौ उनसठ दिल्ली, पृशून्य एक सौ छप्पन-एक सौ साठ |
राधा वेंबू (अंग्रेज़ीः Radha Vembu) सॉफ्टवेयर प्रॉडक्ट्स बनाने वाली कंपनी 'जोहो' की डायरेक्टर हैं।
- राधा वेंबू सबसे अमीर सेल्फ मेड महिलाओं में एक हैं। हुरुन की अमीर सेल्फमेड महिलाओं की वर्ष 2020 की सूची में वे 60वें नंबर पर रहीं।
- मद्रास उच्च न्यायालय में स्टेनोग्राफर सम्बामूर्ति वेम्बू की बेटी राधा वेंबू को 'अदृश्य' सेल्फ मेड बिलेनियर भी कहा जाता है, क्योंकि वे मीडिया से दूर रहती हैं।
- सन 1997 में आईआईटी मद्रास से ग्रेजुएशन के बाद राधा वेंबू ने 2007 में बड़े भाई श्रीधर वेम्बू की कंपनी 'जोहो कॉरपोरेशन' जॉइन की थी।
- राधा वेम्बू जोहो के 45 से अधिक प्रोडक्ट और प्रोजेक्ट देख रही हैं। जोहो के छह करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं।
| राधा वेंबू सॉफ्टवेयर प्रॉडक्ट्स बनाने वाली कंपनी 'जोहो' की डायरेक्टर हैं। - राधा वेंबू सबसे अमीर सेल्फ मेड महिलाओं में एक हैं। हुरुन की अमीर सेल्फमेड महिलाओं की वर्ष दो हज़ार बीस की सूची में वे साठवें नंबर पर रहीं। - मद्रास उच्च न्यायालय में स्टेनोग्राफर सम्बामूर्ति वेम्बू की बेटी राधा वेंबू को 'अदृश्य' सेल्फ मेड बिलेनियर भी कहा जाता है, क्योंकि वे मीडिया से दूर रहती हैं। - सन एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे में आईआईटी मद्रास से ग्रेजुएशन के बाद राधा वेंबू ने दो हज़ार सात में बड़े भाई श्रीधर वेम्बू की कंपनी 'जोहो कॉरपोरेशन' जॉइन की थी। - राधा वेम्बू जोहो के पैंतालीस से अधिक प्रोडक्ट और प्रोजेक्ट देख रही हैं। जोहो के छह करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं। |
बलिया में बुधवार रात मऊ के एक गांव से बारात आई थी। शादी की तैयारियां पूरे जोर शोर से चल रही थी कि अचानक जयमाल से पहले दूल्हे के मोबाइल पर एक ऐसा संदेश आया कि उसके होश उड़ गए और शादी टूट गई।
बलिया के कोतवाली क्षेत्र के डेहरी गांव में बुधवार की रात बारात आई थी। हर तरफ शादी की धूमधाम थी। बारातियों का स्वागत कर चल रहा था। नाश्ते के बाद जयमाल की तैयारी चल रही थी कि तभी अचानक दूल्हे के मोबाइल एक मैसेज आता है। इस मैसेज को देखकर दूल्हे के होश उड़ गए।
यह मैसेज किसी और का नहीं बल्कि दूल्हन का था। इस मैसेज को पढ़कर दूल्हा घबरा गया। उसने तुरंत अपने भाई और पिता को मैसेज दिखाया। दूल्हन के मैसेज में लिखा था कि जिस लड़की से तुम शादी कर रहे हो, वह लेखपाल है और उसकी कोर्ट में शादी हो चुकी है। यह बात जंगल में आग लगने की तरह चारों तरफ फैल गई।
इसके बाद लड़की के पिता ने अपनी पुत्री से पूछताछ की। लड़की ने अपने पिता को बताया कि बगल गांव के लड़के साथ उसने कोर्ट में शादी की है। इसी बीच किसी ने इसकी सूचना पुलिस को दे दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घराती व बाराती दोनों के साथ पंचायत की। इस पर शादी टूट गई और बारात बिना दुल्हन के वापस लौट गई।
वहीं, दूसरी ओर बेटी के इस कृत्य से पिता बेहद आहत हुआ। इसके बाद पिता के आदेश पर लड़की उनका आशीर्वाद लेकर घर से चली गई। ग्रामीणों की माने तो लड़की कुछ माह पूर्व लेखपाल के पद पर चयनित हुई थी और माधोपुर गांव के लड़के के साथ उसने कोर्ट में शादी कर लिया था। लेकिन इसकी जानकारी लड़की के माता-पिता और भाई को नहीं थी।
| बलिया में बुधवार रात मऊ के एक गांव से बारात आई थी। शादी की तैयारियां पूरे जोर शोर से चल रही थी कि अचानक जयमाल से पहले दूल्हे के मोबाइल पर एक ऐसा संदेश आया कि उसके होश उड़ गए और शादी टूट गई। बलिया के कोतवाली क्षेत्र के डेहरी गांव में बुधवार की रात बारात आई थी। हर तरफ शादी की धूमधाम थी। बारातियों का स्वागत कर चल रहा था। नाश्ते के बाद जयमाल की तैयारी चल रही थी कि तभी अचानक दूल्हे के मोबाइल एक मैसेज आता है। इस मैसेज को देखकर दूल्हे के होश उड़ गए। यह मैसेज किसी और का नहीं बल्कि दूल्हन का था। इस मैसेज को पढ़कर दूल्हा घबरा गया। उसने तुरंत अपने भाई और पिता को मैसेज दिखाया। दूल्हन के मैसेज में लिखा था कि जिस लड़की से तुम शादी कर रहे हो, वह लेखपाल है और उसकी कोर्ट में शादी हो चुकी है। यह बात जंगल में आग लगने की तरह चारों तरफ फैल गई। इसके बाद लड़की के पिता ने अपनी पुत्री से पूछताछ की। लड़की ने अपने पिता को बताया कि बगल गांव के लड़के साथ उसने कोर्ट में शादी की है। इसी बीच किसी ने इसकी सूचना पुलिस को दे दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घराती व बाराती दोनों के साथ पंचायत की। इस पर शादी टूट गई और बारात बिना दुल्हन के वापस लौट गई। वहीं, दूसरी ओर बेटी के इस कृत्य से पिता बेहद आहत हुआ। इसके बाद पिता के आदेश पर लड़की उनका आशीर्वाद लेकर घर से चली गई। ग्रामीणों की माने तो लड़की कुछ माह पूर्व लेखपाल के पद पर चयनित हुई थी और माधोपुर गांव के लड़के के साथ उसने कोर्ट में शादी कर लिया था। लेकिन इसकी जानकारी लड़की के माता-पिता और भाई को नहीं थी। |
- सिंधिया के शिवपुरी प्रवास को यादगार बनाने के लिए उनके समर्थक जुटे हुए हैं।
- शनिवार को सिंधिया का रोड शो है, इसे भव्य बनाने के लिए पीले चावल बांटे जा रहे हैं।
- शिवपुरी नगर में ज्योतिरादित्य सिंधिया प्रवेश के साथ ही विशाल रैली निकाली जाएगी।
शिवपुरीः भारतीय जनता पार्टी के नेता और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया शनिवार को शिवपुरी आ रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, समर्थक इस दौरान उनका भव्य स्वागत करने की तैयारी कर रहे हैं। सिंधिया के इस प्रवास को यादगार बनाने के लिए उनके समर्थक जुटे हुए हैं। केंद्रीय मंत्री के समर्थकों ने बताया है कि शनिवार को सिंधिया का रोड शो है, इसे भव्य बनाने के लिए पीले चावल बांटे जा रहे हैं और उन्हें रोड शो के लिए आमंत्रित कर रहे हैं।
इस दौरान मध्य प्रदेश सरकार के पीडब्ल्यूडी राज्यमंत्री सुरेश राठखेड़ा सहित अन्य सिंधिया समर्थक नेताओं ने शुक्रवार को बाजार में निकल कर लोगों को पीले चावल दिए और सिंधिया के रोड शो में आने की अपील की। बताया गया है कि मंत्री बनने के बाद वे पहली बार शिवपुरी आ रहे हैं। इस दौरान शिवपुरी नगर में प्रवेश के साथ ही विशाल रैली निकाली जाएगी। इसी जुलूस में भीड़ जुटाने के लिए बाजार में दुकानदारों को और घरों में भी आमंत्रण के लिए पीले चावल पीडब्ल्यूडी राज्य मंत्री सुरेश राठखेड़ा खुद बांट रहे हैं। इसके अलावा शिवपुरी नगर को दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है।
सिंधिया के स्वागत के लिए बैनर एवं पोस्टर लगाए गए हैं। शहर के विभिन्न चौराहों और रास्तों को बैनर पोस्टर से पाट दिया गया है। आमजन को पीले चावल बांट रहे राज्यमंत्री सुरेश राठखेड़ा ने कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया हमारे परिवार के मुखिया हैं और हम उनके ऐतिहासिक स्वागत की तैयारी में हैं। लोगों को आमंत्रित करने के लिए अपने साथियों सहित पीले चावल बांट रहे हैं। इस दौरान सिंधिया समर्थक नेता राकेश गुप्ता, केशव सिंह तोमर, सिद्धार्थ लढ़ा, हरवीर रघुवंशी, मुन्नालाल कुशवाह, नीरज तोमर, सहित अन्य नेता इस मौके पर मौजूद रहे।
| - सिंधिया के शिवपुरी प्रवास को यादगार बनाने के लिए उनके समर्थक जुटे हुए हैं। - शनिवार को सिंधिया का रोड शो है, इसे भव्य बनाने के लिए पीले चावल बांटे जा रहे हैं। - शिवपुरी नगर में ज्योतिरादित्य सिंधिया प्रवेश के साथ ही विशाल रैली निकाली जाएगी। शिवपुरीः भारतीय जनता पार्टी के नेता और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया शनिवार को शिवपुरी आ रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, समर्थक इस दौरान उनका भव्य स्वागत करने की तैयारी कर रहे हैं। सिंधिया के इस प्रवास को यादगार बनाने के लिए उनके समर्थक जुटे हुए हैं। केंद्रीय मंत्री के समर्थकों ने बताया है कि शनिवार को सिंधिया का रोड शो है, इसे भव्य बनाने के लिए पीले चावल बांटे जा रहे हैं और उन्हें रोड शो के लिए आमंत्रित कर रहे हैं। इस दौरान मध्य प्रदेश सरकार के पीडब्ल्यूडी राज्यमंत्री सुरेश राठखेड़ा सहित अन्य सिंधिया समर्थक नेताओं ने शुक्रवार को बाजार में निकल कर लोगों को पीले चावल दिए और सिंधिया के रोड शो में आने की अपील की। बताया गया है कि मंत्री बनने के बाद वे पहली बार शिवपुरी आ रहे हैं। इस दौरान शिवपुरी नगर में प्रवेश के साथ ही विशाल रैली निकाली जाएगी। इसी जुलूस में भीड़ जुटाने के लिए बाजार में दुकानदारों को और घरों में भी आमंत्रण के लिए पीले चावल पीडब्ल्यूडी राज्य मंत्री सुरेश राठखेड़ा खुद बांट रहे हैं। इसके अलावा शिवपुरी नगर को दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है। सिंधिया के स्वागत के लिए बैनर एवं पोस्टर लगाए गए हैं। शहर के विभिन्न चौराहों और रास्तों को बैनर पोस्टर से पाट दिया गया है। आमजन को पीले चावल बांट रहे राज्यमंत्री सुरेश राठखेड़ा ने कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया हमारे परिवार के मुखिया हैं और हम उनके ऐतिहासिक स्वागत की तैयारी में हैं। लोगों को आमंत्रित करने के लिए अपने साथियों सहित पीले चावल बांट रहे हैं। इस दौरान सिंधिया समर्थक नेता राकेश गुप्ता, केशव सिंह तोमर, सिद्धार्थ लढ़ा, हरवीर रघुवंशी, मुन्नालाल कुशवाह, नीरज तोमर, सहित अन्य नेता इस मौके पर मौजूद रहे। |
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Jiah Khan Background: बॉलीवुड की उभरती हुई एक्ट्रेस जिया खान ने महानायक अमिताभ बच्चन की फिल्म 'निशब्द' से फिल्मों में डेब्यू किया था जिसके बाद उन्होंने एक के बाद एक कई हिट फिल्में दीं। लेकिन बेहद ही कम समय में इंडस्ट्री में अपनी खास पहचान बनाने वाली एक्ट्रेस की किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था। दरअसल, मजह 25 साल की उम्र में फिल्म जगत के जाने माने चेहरों की लिस्ट में शामिल हो चुकीं जिया की अचानक मौत ने पूरी इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया था।
3 जून 2013 की वो सुबह जब Jiah Khan मुंबई स्थित अपने जुहू अपार्टमेंट में मृत पाई गई थीं। एक्ट्रेस की मौत की खबर ने न सिर्फ उनके फैंस बल्कि पूरी बॉलीवुड इंडस्ट्री को भी हिलाकर रख दिया था। दरअसल, बेहद ही कम समय में जिया सक्सेस के उस मुकाम पर पहुंच चुकी थीं जहां पहुंचना हर किसी के लिए इतना आसान नहीं होता है और ऐसे में अचानक एक्ट्रेस की सुसाइड की खबर ने हर किसी को हैरत में डाल दिया था।
अपने करियर के पीक पर पहुंच चुकीं Jiah Khan की डेथ एक मिस्ट्री रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस समय उन्होंने खुदकुशी की थी उस समय वह एक्टर आदित्य पंचोली के बेटे और अभिनेता सूरज पंचोली को डेट कर रही थीं। इस बात का जिक्र उनकी 6 पन्नों के लेटर में भी था जिसे एक्ट्रेस की मौत के बाद मुंबई पुलिस ने उनके घर से कथित तौर पर जब्त किया था।
Jiah Khan ने 3 जून 2013 को अपने जुहू अपार्टमेंट में सुसाइड किया था और उनकी लाश सुबह 10:45 पर उनके रूम से मिली थी। शुरुआती जांच में पुलिस ने इसे आत्महत्या का मामला बताया था लेकिन जैसे-जैसे केस की जांच अगे बढ़ी, वैसे-वैसे इस मामले में एक के बाद एक कई शॉकिंग खुलासे होते गए। जांच के दौरान जिया के रूम से 6 पन्नों का लेटर भी बरामद हुआ जिसमें उन्होंने एक्टर सूरज पंचोली संग अपने रिश्ते के कई राज खोले थे।
निशब्द स्टार के कथित लेटर के मुताबिक, Sooraj Pancholi पर उन्होंने कई तरह के गंभीर आरोप लगाए थे। लेटर में लिखा हुआ था कि उनका रिलेशनशिप शारीरिक अत्याचार, मेंटल एब्यूज और फिजिकल टॉर्चर से गुजर रहा था। इस मामले में पुलिस ने सूरज पंचोली समेत कई लोगों से पूछताछ भी की थी। पूछताछ के दौरान जिया की मां ने बताया था कि उनकी बेटी काफी समय से डिप्रेशन से जूझ रही थीं।
Jiah Khan के लेटर के बेसिस पर एक्टर सूरज पंचोली को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। एक्टर को सेक्शन 306 के तहत अरेस्ट किया गया था जिसके बाद सूरज की तरफ से जमानत अर्जी दाखिल की गई और उन्हें रिहा कर दिया था, लेकिन 50 हजार का जुर्माना और एक्टर का पासपोर्ट जब्त किया गया था जिसके बाद 2 जुलाई को कोर्ट ने सुनवाई में कहा था कि सूरज, जिया की सुसाइड केस में आरोपी नहीं हैं।
हालांकि, इस बीच Jiah Khan सुसाइड केस एक बार फिर से चर्चा में बना हुआ है। दरअसल मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है और आज यानी 28 अप्रैल को कोर्ट अपना फाइनल जजमेंट देने वाला है।
यह भी पढ़ें... Ananya Panday ने पापा चंकी के लिए खरीदा पहला पास्ता आर्ट!
| Quick links: Jiah Khan Background: बॉलीवुड की उभरती हुई एक्ट्रेस जिया खान ने महानायक अमिताभ बच्चन की फिल्म 'निशब्द' से फिल्मों में डेब्यू किया था जिसके बाद उन्होंने एक के बाद एक कई हिट फिल्में दीं। लेकिन बेहद ही कम समय में इंडस्ट्री में अपनी खास पहचान बनाने वाली एक्ट्रेस की किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था। दरअसल, मजह पच्चीस साल की उम्र में फिल्म जगत के जाने माने चेहरों की लिस्ट में शामिल हो चुकीं जिया की अचानक मौत ने पूरी इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया था। तीन जून दो हज़ार तेरह की वो सुबह जब Jiah Khan मुंबई स्थित अपने जुहू अपार्टमेंट में मृत पाई गई थीं। एक्ट्रेस की मौत की खबर ने न सिर्फ उनके फैंस बल्कि पूरी बॉलीवुड इंडस्ट्री को भी हिलाकर रख दिया था। दरअसल, बेहद ही कम समय में जिया सक्सेस के उस मुकाम पर पहुंच चुकी थीं जहां पहुंचना हर किसी के लिए इतना आसान नहीं होता है और ऐसे में अचानक एक्ट्रेस की सुसाइड की खबर ने हर किसी को हैरत में डाल दिया था। अपने करियर के पीक पर पहुंच चुकीं Jiah Khan की डेथ एक मिस्ट्री रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस समय उन्होंने खुदकुशी की थी उस समय वह एक्टर आदित्य पंचोली के बेटे और अभिनेता सूरज पंचोली को डेट कर रही थीं। इस बात का जिक्र उनकी छः पन्नों के लेटर में भी था जिसे एक्ट्रेस की मौत के बाद मुंबई पुलिस ने उनके घर से कथित तौर पर जब्त किया था। Jiah Khan ने तीन जून दो हज़ार तेरह को अपने जुहू अपार्टमेंट में सुसाइड किया था और उनकी लाश सुबह दस:पैंतालीस पर उनके रूम से मिली थी। शुरुआती जांच में पुलिस ने इसे आत्महत्या का मामला बताया था लेकिन जैसे-जैसे केस की जांच अगे बढ़ी, वैसे-वैसे इस मामले में एक के बाद एक कई शॉकिंग खुलासे होते गए। जांच के दौरान जिया के रूम से छः पन्नों का लेटर भी बरामद हुआ जिसमें उन्होंने एक्टर सूरज पंचोली संग अपने रिश्ते के कई राज खोले थे। निशब्द स्टार के कथित लेटर के मुताबिक, Sooraj Pancholi पर उन्होंने कई तरह के गंभीर आरोप लगाए थे। लेटर में लिखा हुआ था कि उनका रिलेशनशिप शारीरिक अत्याचार, मेंटल एब्यूज और फिजिकल टॉर्चर से गुजर रहा था। इस मामले में पुलिस ने सूरज पंचोली समेत कई लोगों से पूछताछ भी की थी। पूछताछ के दौरान जिया की मां ने बताया था कि उनकी बेटी काफी समय से डिप्रेशन से जूझ रही थीं। Jiah Khan के लेटर के बेसिस पर एक्टर सूरज पंचोली को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। एक्टर को सेक्शन तीन सौ छः के तहत अरेस्ट किया गया था जिसके बाद सूरज की तरफ से जमानत अर्जी दाखिल की गई और उन्हें रिहा कर दिया था, लेकिन पचास हजार का जुर्माना और एक्टर का पासपोर्ट जब्त किया गया था जिसके बाद दो जुलाई को कोर्ट ने सुनवाई में कहा था कि सूरज, जिया की सुसाइड केस में आरोपी नहीं हैं। हालांकि, इस बीच Jiah Khan सुसाइड केस एक बार फिर से चर्चा में बना हुआ है। दरअसल मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है और आज यानी अट्ठाईस अप्रैल को कोर्ट अपना फाइनल जजमेंट देने वाला है। यह भी पढ़ें... Ananya Panday ने पापा चंकी के लिए खरीदा पहला पास्ता आर्ट! |
बेतियाः सत्ता को साधन समझने वाले राजनेता पूरी तरह सत्ता से बाहर हो चुके हैं वह किसी भी प्रकार चुनाव जीतकर सत्ता पर काबिज होने का प्रयास कर रहे हैं उनका यह सपना पूरा होने वाला नहीं है । उक्त बातें भाजपा के विधान पार्षद सह विधान परिषद के मुख्य सचेतक रजनीश कुमार सिंह ने बेतिया में चनपटिया विधायक के निवास पर पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि भाजपा द्वारा पूरे बिहार में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर जनसंवाद का कार्यक्रम चलाया जा रहा है इसके तहत मैं बेतिया विधानसभा के क्षेत्रों में घूम घूम कर जनसंवाद का कार्यक्रम चला रहा हूं और बिहार में 2017 से एनडीए सरकार द्वारा किए गए विकास कार्यों से जन-जन को अवगत करा रहा हूं। उन्होंने कहा कि जन संवाद के दौरान एनडीए सरकार के पक्ष में भारी उत्साह देख रहा हूं। उन्होंने कहा कि बिहार में एनडीए बनाम नन की तर्ज पर जीत पक्की है और अगले 5 सालों में बिहार का स्वर्णिम इतिहास बनेगा । उक्त बैठक में भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेणु देवी, चनपटिया विधायक प्रकाश राय, मीडिया प्रभारी साधु गुप्ता, शिवेंद्र शिबू, त्रिलोकी झा समेत दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित रहे । ।
| बेतियाः सत्ता को साधन समझने वाले राजनेता पूरी तरह सत्ता से बाहर हो चुके हैं वह किसी भी प्रकार चुनाव जीतकर सत्ता पर काबिज होने का प्रयास कर रहे हैं उनका यह सपना पूरा होने वाला नहीं है । उक्त बातें भाजपा के विधान पार्षद सह विधान परिषद के मुख्य सचेतक रजनीश कुमार सिंह ने बेतिया में चनपटिया विधायक के निवास पर पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि भाजपा द्वारा पूरे बिहार में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर जनसंवाद का कार्यक्रम चलाया जा रहा है इसके तहत मैं बेतिया विधानसभा के क्षेत्रों में घूम घूम कर जनसंवाद का कार्यक्रम चला रहा हूं और बिहार में दो हज़ार सत्रह से एनडीए सरकार द्वारा किए गए विकास कार्यों से जन-जन को अवगत करा रहा हूं। उन्होंने कहा कि जन संवाद के दौरान एनडीए सरकार के पक्ष में भारी उत्साह देख रहा हूं। उन्होंने कहा कि बिहार में एनडीए बनाम नन की तर्ज पर जीत पक्की है और अगले पाँच सालों में बिहार का स्वर्णिम इतिहास बनेगा । उक्त बैठक में भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेणु देवी, चनपटिया विधायक प्रकाश राय, मीडिया प्रभारी साधु गुप्ता, शिवेंद्र शिबू, त्रिलोकी झा समेत दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित रहे । । |
दिल्ली के पीरागढ़ी इलाके में गुरुवार की सुबह एक फैक्ट्री में आग लग गई और जोरदार धमाके के चलते बिल्डिंग का कुछ हिस्सा ध्वस्त हो गया।
वीडियो डेस्क। दिल्ली के पीरागढ़ी इलाके में गुरुवार की सुबह एक फैक्ट्री में आग लग गई और जोरदार धमाके के चलते बिल्डिंग का कुछ हिस्सा ध्वस्त हो गया। इसके चलते फैक्ट्री में मौजूद लोगों समेत कई दमकलकर्मी भी फंस गए। तड़के आग की सूचना मिलने पर दमकलकर्मी बचाव के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान एक जोर का धमाका हुआ और बिल्डिंग ही धराशायी हो गई। तड़के आग की सूचना मिलने पर दमकलकर्मी बचाव के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान एक जोर का धमाका हुआ और बिल्डिंग का हिस्सा गिराबिल्डिंग के मलबे में कितने लोग फंसे हैं, इसको लेकर अभी कोई जानकारी सामने नहीं आई है। फिलहाल बचाव कार्य जारी है। बचाव कार्य में कुल 35 दमकलकर्मी जुटे हुए हैं। सुबह 4 बजकर 23 मिनट पर दमकलकर्मियों को आग लगने की सूचना मिली थी।
| दिल्ली के पीरागढ़ी इलाके में गुरुवार की सुबह एक फैक्ट्री में आग लग गई और जोरदार धमाके के चलते बिल्डिंग का कुछ हिस्सा ध्वस्त हो गया। वीडियो डेस्क। दिल्ली के पीरागढ़ी इलाके में गुरुवार की सुबह एक फैक्ट्री में आग लग गई और जोरदार धमाके के चलते बिल्डिंग का कुछ हिस्सा ध्वस्त हो गया। इसके चलते फैक्ट्री में मौजूद लोगों समेत कई दमकलकर्मी भी फंस गए। तड़के आग की सूचना मिलने पर दमकलकर्मी बचाव के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान एक जोर का धमाका हुआ और बिल्डिंग ही धराशायी हो गई। तड़के आग की सूचना मिलने पर दमकलकर्मी बचाव के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान एक जोर का धमाका हुआ और बिल्डिंग का हिस्सा गिराबिल्डिंग के मलबे में कितने लोग फंसे हैं, इसको लेकर अभी कोई जानकारी सामने नहीं आई है। फिलहाल बचाव कार्य जारी है। बचाव कार्य में कुल पैंतीस दमकलकर्मी जुटे हुए हैं। सुबह चार बजकर तेईस मिनट पर दमकलकर्मियों को आग लगने की सूचना मिली थी। |
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि जैसा सपना भारत के लिए देखते हैं वैसा ही अपने पड़ोसी मुल्कों के लिए भी देखते हैं. उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान अपनी सरजमीं से आतंकवाद पूरी तरह खत्म कर ले तो दोनों देशों के संबंध बेहतर हो सकते हैं.
उन्होंने कहा कि एक-दूसरे से लड़ने के बजाय भारत और पाकिस्तान को मिलकर गरीबी के खिलाफ लड़ना चाहिए. लेकिन भारत आतंकवाद के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेंगा. यह तभी रुक सकता है, जब आतंकवाद को दिया जाने वाला हर प्रकार का समर्थन बंद किया जाए, फिर चाहे वह सरकार प्रायोजित आतंकवाद हो या दूसरी तरह का आतंकवाद.
| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि जैसा सपना भारत के लिए देखते हैं वैसा ही अपने पड़ोसी मुल्कों के लिए भी देखते हैं. उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान अपनी सरजमीं से आतंकवाद पूरी तरह खत्म कर ले तो दोनों देशों के संबंध बेहतर हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि एक-दूसरे से लड़ने के बजाय भारत और पाकिस्तान को मिलकर गरीबी के खिलाफ लड़ना चाहिए. लेकिन भारत आतंकवाद के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेंगा. यह तभी रुक सकता है, जब आतंकवाद को दिया जाने वाला हर प्रकार का समर्थन बंद किया जाए, फिर चाहे वह सरकार प्रायोजित आतंकवाद हो या दूसरी तरह का आतंकवाद. |
एक्टर रणवीर सिंह (Ranveer Singh) बीते दिनों 'अबू धाबी गेम्स 2022' का भाग बने थे। इस बीच अभिनेता ने कुछ शानदार तस्वीरें शेयर कर अपने फैंस को अपडेट कर दिया था। वहीं अब अभिनेता ने एक वीडियो साझा कर फैंस का दिल भी जीत लिया है। इस क्लिप में अभिनेता एनबीए स्टार जियानिस एंटेटोकोनम्पो (Giannis Antetokounmpo) को अपने गाने ततड़-ततड़ (Tatad Tatad Song) का सिग्नेचर स्टेप सिखाते हुए दिखाई दे रहे है।
रणवीर सिंह के जरिए साझा किए गए वीडियो (Ranveer Singh Video) में वो व्हाइट टीशर्ट के ऊपर ग्रीन और येलो कलर की जैकेट पहने दिखाई दे रहे है। बता दें कि साथ ही उन्होंने ब्लू डेनिम जींस पहनी हुई है, जिसपर पिंक कलर का ग्राफिक प्रिंट है। वहीं रणवीर सिंह ने पिंक शूज के साथ अपने लुक को कम्पलीट कर रखा है। दूसरी तरफ जियानिस बेज कलर की ग्राफिक प्रिंट वाली टीशर्ट के साथ ब्लैक जींस पहने दिखाई दे रहे है, साथ ही उन्होंने कंधे पर ब्लैक कलर का बैग कैरी कर रखा है।
वीडियो में रणवीर सिंह फुल एनर्जी के साथ जियानिस एंटेटोकोनम्पो को अपनी मूवी 'गोलियों की रासलीला रामलीला' के पॉपुलर गाने ततड़-ततड़ का सिग्नेचर स्टेप सिखाते हुए दिखाई दे रहे है। वहीं, जियानिस भी इसे बखूबी कॉपी करते देखे जा सकते हैं। इस क्लिप को साझा करते हुए रणवीर सिंह ने कैप्शन में लिखा है,'ग्रीक फ्रीक अपने ततड़-ततड़ को प्राप्त कर रहा है! ' एक्टर का पोस्ट सामने आते ही सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और अबतक इसे इंस्टाग्राम वर्ल्ड में 7 लाख 62 हजार से ज्यादा लाइक्स मिल गया है।
| एक्टर रणवीर सिंह बीते दिनों 'अबू धाबी गेम्स दो हज़ार बाईस' का भाग बने थे। इस बीच अभिनेता ने कुछ शानदार तस्वीरें शेयर कर अपने फैंस को अपडेट कर दिया था। वहीं अब अभिनेता ने एक वीडियो साझा कर फैंस का दिल भी जीत लिया है। इस क्लिप में अभिनेता एनबीए स्टार जियानिस एंटेटोकोनम्पो को अपने गाने ततड़-ततड़ का सिग्नेचर स्टेप सिखाते हुए दिखाई दे रहे है। रणवीर सिंह के जरिए साझा किए गए वीडियो में वो व्हाइट टीशर्ट के ऊपर ग्रीन और येलो कलर की जैकेट पहने दिखाई दे रहे है। बता दें कि साथ ही उन्होंने ब्लू डेनिम जींस पहनी हुई है, जिसपर पिंक कलर का ग्राफिक प्रिंट है। वहीं रणवीर सिंह ने पिंक शूज के साथ अपने लुक को कम्पलीट कर रखा है। दूसरी तरफ जियानिस बेज कलर की ग्राफिक प्रिंट वाली टीशर्ट के साथ ब्लैक जींस पहने दिखाई दे रहे है, साथ ही उन्होंने कंधे पर ब्लैक कलर का बैग कैरी कर रखा है। वीडियो में रणवीर सिंह फुल एनर्जी के साथ जियानिस एंटेटोकोनम्पो को अपनी मूवी 'गोलियों की रासलीला रामलीला' के पॉपुलर गाने ततड़-ततड़ का सिग्नेचर स्टेप सिखाते हुए दिखाई दे रहे है। वहीं, जियानिस भी इसे बखूबी कॉपी करते देखे जा सकते हैं। इस क्लिप को साझा करते हुए रणवीर सिंह ने कैप्शन में लिखा है,'ग्रीक फ्रीक अपने ततड़-ततड़ को प्राप्त कर रहा है! ' एक्टर का पोस्ट सामने आते ही सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और अबतक इसे इंस्टाग्राम वर्ल्ड में सात लाख बासठ हजार से ज्यादा लाइक्स मिल गया है। |
जी हां हाल ही में लंदन में एक बेहद चौकाने वाला मामला सामने आया है। यहां रहने वाली सारा दान्बुरी की 19 साल की बेटी ऐमी को कैंसर की बीमारी थी। ऐमी हॉस्िपटल में एडमिट थी और रुक-रुक कर सांसे ले रही थी। ऐसे में बेटी की अंतिम सांसे देखकर मां सारा दान्बुरी ने उसके साथ सेल्फी लेने का प्लान किया क्यों कि ऐमी लगातार मुस्कुराए जा रही थीं। जिसकी वजह से वह अपनी बेटी की मुस्कान को हमेशा के लिए कैमरे में कैद करना चाहती थीं। ऐसे में जैसे ही सारा दान्बुरी ने बेटी के साथ सेल्फी क्िलक की तो देखा वहां पर कोई और मौजूद था। वह उसे देखकर हैरान हो गई क्योंकि वह कोई और नहीं बल्कि उनकी बेटी को लेने आए फरिश्ते थे।
यहां भी क्िलक करेंः जींस पहनने से लेकर च्युइंगम तक सबकुछ बैन, ऐसी हैं ये 10 जगहेंबेटी ने दम तोड़ दियावहीं इस सेल्फी के बाद उनकी बेटी ने दम तोड़ दिया। बेटी की मौत से दुखी सारा का कहना है कि वह दुखी तो हैं लेकिन उन्हें सुकून भी है कि फरिश्ते उनकी बेटी की देखभाल करेंगे। फरिश्ता बेटी के काफी करीब बैठा था। सारा दान्बुरी ने लोगों को इसकी फोटो भी दिखाई। वहीं मां सारा दान्बुरी के इस दावे और तस्वीर को देखकर हर कोई हैरान है। यह मामला सोशल मीडिया पर भी काफी तेजी से वायरल हो रहा है। अब तक बड़ी संख्या में लोग इसे देख चुके हैं। वहीं लोगों का कहना है कि अभी तक यह बातें सिर्फ कहानियों में होती थी लेकिन अब तो हकीकत में सामने आ रही है।
| जी हां हाल ही में लंदन में एक बेहद चौकाने वाला मामला सामने आया है। यहां रहने वाली सारा दान्बुरी की उन्नीस साल की बेटी ऐमी को कैंसर की बीमारी थी। ऐमी हॉस्िपटल में एडमिट थी और रुक-रुक कर सांसे ले रही थी। ऐसे में बेटी की अंतिम सांसे देखकर मां सारा दान्बुरी ने उसके साथ सेल्फी लेने का प्लान किया क्यों कि ऐमी लगातार मुस्कुराए जा रही थीं। जिसकी वजह से वह अपनी बेटी की मुस्कान को हमेशा के लिए कैमरे में कैद करना चाहती थीं। ऐसे में जैसे ही सारा दान्बुरी ने बेटी के साथ सेल्फी क्िलक की तो देखा वहां पर कोई और मौजूद था। वह उसे देखकर हैरान हो गई क्योंकि वह कोई और नहीं बल्कि उनकी बेटी को लेने आए फरिश्ते थे। यहां भी क्िलक करेंः जींस पहनने से लेकर च्युइंगम तक सबकुछ बैन, ऐसी हैं ये दस जगहेंबेटी ने दम तोड़ दियावहीं इस सेल्फी के बाद उनकी बेटी ने दम तोड़ दिया। बेटी की मौत से दुखी सारा का कहना है कि वह दुखी तो हैं लेकिन उन्हें सुकून भी है कि फरिश्ते उनकी बेटी की देखभाल करेंगे। फरिश्ता बेटी के काफी करीब बैठा था। सारा दान्बुरी ने लोगों को इसकी फोटो भी दिखाई। वहीं मां सारा दान्बुरी के इस दावे और तस्वीर को देखकर हर कोई हैरान है। यह मामला सोशल मीडिया पर भी काफी तेजी से वायरल हो रहा है। अब तक बड़ी संख्या में लोग इसे देख चुके हैं। वहीं लोगों का कहना है कि अभी तक यह बातें सिर्फ कहानियों में होती थी लेकिन अब तो हकीकत में सामने आ रही है। |
सोशलः क्यों हंस रहे हैं पाकिस्तानी उच्चायुक्त पर लोग?
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के मुताबिक़, ब्रिटेन में हुई एक घटना पर लंदन में तैनात पाकिस्तानी उच्चायुक्त को व्यक्तिगत तौर पर जवाब देने के लिए कहा गया है.
लेकिन वह क्या घटना है जिसके कारण यह नौबत आई है? ऐसे सवाल अब भी कई लोग सोशल मीडिया और अन्य जगहों पर पूछ रहे हैं.
इस सिलसिले में पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को एक प्रेस रिलीज़ भी जारी की जिसमें कहा गया कि लंदन में तैनात पाकिस्तानी उच्चायुक्त साहिबज़ादा अहमद ख़ान के साथ एक कार्यक्रम में हुई घटना के बाद विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने उच्चायुक्त से जवाब देने को कहा है.
हालांकि, इस पूरी प्रेस रिलीज़ में यह साफ़ नहीं है कि उन्हें किस वजह से तलब किया गया है. विदेश मंत्रालय की ओर से जारी प्रेस रिलीज़ में सिर्फ़ इतना इशारा किया गया है, "हमें इस घटना की ख़बर इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया के ज़रिए मिली है. "
विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने बीबीसी को बताया है कि उच्चायुक्त को एक वीडियो के आधार पर तलब किया गया है जो लंदन में एक फ़िल्म पुरस्कार समारोह का है जिसमें उच्चायुक्त साहिबज़ादा मौजूद थे.
गुरुवार को विदेश मंत्रालय की हुई प्रेस ब्रीफ़िंग में प्रवक्ता मोहम्मद फ़ैसल ने कहा कि ब्रिटेन में पाकिस्तानी उच्चायुक्त के एक कार्यक्रम की घटना का विदेश मंत्री ने सख़्त नोटिस लिया है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी उच्चायुक्त को बुलाकर उनसे लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है.
इसके बाद सोशल मीडिया पर काफ़ी चर्चाएं गर्म हैं. पत्रकार असद हाशमी ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा, "ब्रिटेन में तैनात पाकिस्तानी उच्चायुक्त को लंदन में हुए एक कार्यक्रम की घटना के बाद इस्लामाबाद तलब किया गया है, लेकिन आज के अख़बार उस घटना के बारे में न ही बता रहे हैं और न ही घटना के वीडियो का लिंक दे रहे हैं. "
इस ट्वीट के जवाब में एक और पत्रकार नादिर हसन ने 11 सितंबर की घटना का वीडियो शेयर किया जो कि पाकिस्तानी उच्चायुक्त साहिबज़ादा अहमद ख़ान ने लंदन में हुए समारोह में भाषण दिया था.
तक़रीबन चार मिनट के वीडियो में उच्चायुक्त स्टेज पर खड़े होकर मेहमानों का स्वागत करते हुए देखे जा सकते हैं. वह पाकिस्तान के मशहूर फ़िल्म स्टार्स से बात कर रहे हैं और उनकी ज़बान लड़खड़ा रही है.
जब वह स्टेज पर बोलते हैं तो उनका उच्चारण ख़राब हो जाता है और स्टेज पर खड़े दूसरे फ़िल्म स्टार्स उनकी बातों से थोड़ी दूरी बनाते दिखते हैं.
वह वीडियो में पूछते हैं, "फ़रहान को बुला लूं? पाकिस्तानी राजदूत महविश को बुला लूं? ज़ोर से तालियां बजाइये. "
वह इसी दौरान स्टेज पर प्रसिद्ध अभिनेता जावेद शेख़ से पूछते हैं कि वह क्या डाइट लेते हैं.
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| सोशलः क्यों हंस रहे हैं पाकिस्तानी उच्चायुक्त पर लोग? पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के मुताबिक़, ब्रिटेन में हुई एक घटना पर लंदन में तैनात पाकिस्तानी उच्चायुक्त को व्यक्तिगत तौर पर जवाब देने के लिए कहा गया है. लेकिन वह क्या घटना है जिसके कारण यह नौबत आई है? ऐसे सवाल अब भी कई लोग सोशल मीडिया और अन्य जगहों पर पूछ रहे हैं. इस सिलसिले में पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को एक प्रेस रिलीज़ भी जारी की जिसमें कहा गया कि लंदन में तैनात पाकिस्तानी उच्चायुक्त साहिबज़ादा अहमद ख़ान के साथ एक कार्यक्रम में हुई घटना के बाद विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने उच्चायुक्त से जवाब देने को कहा है. हालांकि, इस पूरी प्रेस रिलीज़ में यह साफ़ नहीं है कि उन्हें किस वजह से तलब किया गया है. विदेश मंत्रालय की ओर से जारी प्रेस रिलीज़ में सिर्फ़ इतना इशारा किया गया है, "हमें इस घटना की ख़बर इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया के ज़रिए मिली है. " विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने बीबीसी को बताया है कि उच्चायुक्त को एक वीडियो के आधार पर तलब किया गया है जो लंदन में एक फ़िल्म पुरस्कार समारोह का है जिसमें उच्चायुक्त साहिबज़ादा मौजूद थे. गुरुवार को विदेश मंत्रालय की हुई प्रेस ब्रीफ़िंग में प्रवक्ता मोहम्मद फ़ैसल ने कहा कि ब्रिटेन में पाकिस्तानी उच्चायुक्त के एक कार्यक्रम की घटना का विदेश मंत्री ने सख़्त नोटिस लिया है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी उच्चायुक्त को बुलाकर उनसे लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है. इसके बाद सोशल मीडिया पर काफ़ी चर्चाएं गर्म हैं. पत्रकार असद हाशमी ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा, "ब्रिटेन में तैनात पाकिस्तानी उच्चायुक्त को लंदन में हुए एक कार्यक्रम की घटना के बाद इस्लामाबाद तलब किया गया है, लेकिन आज के अख़बार उस घटना के बारे में न ही बता रहे हैं और न ही घटना के वीडियो का लिंक दे रहे हैं. " इस ट्वीट के जवाब में एक और पत्रकार नादिर हसन ने ग्यारह सितंबर की घटना का वीडियो शेयर किया जो कि पाकिस्तानी उच्चायुक्त साहिबज़ादा अहमद ख़ान ने लंदन में हुए समारोह में भाषण दिया था. तक़रीबन चार मिनट के वीडियो में उच्चायुक्त स्टेज पर खड़े होकर मेहमानों का स्वागत करते हुए देखे जा सकते हैं. वह पाकिस्तान के मशहूर फ़िल्म स्टार्स से बात कर रहे हैं और उनकी ज़बान लड़खड़ा रही है. जब वह स्टेज पर बोलते हैं तो उनका उच्चारण ख़राब हो जाता है और स्टेज पर खड़े दूसरे फ़िल्म स्टार्स उनकी बातों से थोड़ी दूरी बनाते दिखते हैं. वह वीडियो में पूछते हैं, "फ़रहान को बुला लूं? पाकिस्तानी राजदूत महविश को बुला लूं? ज़ोर से तालियां बजाइये. " वह इसी दौरान स्टेज पर प्रसिद्ध अभिनेता जावेद शेख़ से पूछते हैं कि वह क्या डाइट लेते हैं. |
18 को कानपुर में होगा सम्मेलनप्रदेश कांग्रेस के संगठन सचिव अनिल यादव ने बताया कि सम्मेलन के मंडलवार कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया जा चुका है। सम्मेलन का अगला पड़ाव 18 जून को कानपुर होगा। 19 जून को वाराणसी, 21 जून को सहारनपुर, 22 जून को बरेली, 25 जून को अयोध्या, 26 जून को देवीपाटन मंडल में कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। जुलाई के पहले सप्ताह तक सभी 18 मंडलों में सम्मेलन हो जाएंगे। इसके बाद जिलावार सम्मेलन किए जाएंगे। कांग्रेस के प्रदेश सचिव मुकेश धनगर ने कहा कि अति पिछड़े समाज को भाजपा ने सिर्फ इस्तेमाल किया। भागीदारी के नाम पर भाजपा ने सिर्फ अपने एजेंटों को पद दिया।
- लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए जातीय जनगणना जरूरी है।
- आरक्षण की 50 फीसदी की सीमा को तत्काल हटाया जाए।
- आबादी के अनुपात में ओबीसी को आरक्षण दिया जाए।
- अतिपिछड़े समाज की हिस्सेदारी सुनिश्चित की जाए।
| अट्ठारह को कानपुर में होगा सम्मेलनप्रदेश कांग्रेस के संगठन सचिव अनिल यादव ने बताया कि सम्मेलन के मंडलवार कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया जा चुका है। सम्मेलन का अगला पड़ाव अट्ठारह जून को कानपुर होगा। उन्नीस जून को वाराणसी, इक्कीस जून को सहारनपुर, बाईस जून को बरेली, पच्चीस जून को अयोध्या, छब्बीस जून को देवीपाटन मंडल में कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। जुलाई के पहले सप्ताह तक सभी अट्ठारह मंडलों में सम्मेलन हो जाएंगे। इसके बाद जिलावार सम्मेलन किए जाएंगे। कांग्रेस के प्रदेश सचिव मुकेश धनगर ने कहा कि अति पिछड़े समाज को भाजपा ने सिर्फ इस्तेमाल किया। भागीदारी के नाम पर भाजपा ने सिर्फ अपने एजेंटों को पद दिया। - लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए जातीय जनगणना जरूरी है। - आरक्षण की पचास फीसदी की सीमा को तत्काल हटाया जाए। - आबादी के अनुपात में ओबीसी को आरक्षण दिया जाए। - अतिपिछड़े समाज की हिस्सेदारी सुनिश्चित की जाए। |
उत्तर प्रदेश के नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने आज हरदोई में कांग्रेस अध्यक्ष नेता राहुल गांधी के धारा 370 को लेकर किए गए ट्वीट पर राहुल गांधी पर बड़ा सियासी हमला बोलते हुए कहा कि अब उनकी बात को कोई सीरियसली नहीं लेता है और जहां से वह 15 साल सांसद रहे वहां की ही जनता ने उन्हें नकार दिया। नगर विकास मंत्री आजम खान के सवाल पर जवाब देने से बचते जरूर नजर आए।
हरदोई में एक कार्यक्रम में शामिल होने आए प्रदेश के नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने राहुल गांधी के धारा 370 को लेकर किए गए ट्वीट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा- हिंदुस्तान की जन आकांक्षाओं के अनुरूप काम हुआ है और इसके लिए प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को जितनी बधाई दी जाए.
वह कम है डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान का प्रतिफल है और यह जो बोल रहे हैं जनता ने इनको इनके क्षेत्र में नकार दिया है 15 साल जिस क्षेत्र में यह स्वयं सांसद रहे वहां इनकी हैसियत नहीं थी कि इस चुनाव में जीत पाए तो इनकी बात का क्या महत्व है. अब इनकी बात को कोई सीरयस नहीं लेता है।
हिंदुस्तान की जन आकांक्षाओं के अनुरूप काम हुआ है इसके लिए प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को जितनी बधाई दी जाए वह कम है डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान का प्रतिफलन हुआ है.
सवाल_जम्मू कश्मीर में जमीन खरीदने में जो छूट मिल गई है क्या आपको लगता है कि आप लोगों को सरकार को कोई वहां जमीन खरीदनी चाहिए?
| उत्तर प्रदेश के नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने आज हरदोई में कांग्रेस अध्यक्ष नेता राहुल गांधी के धारा तीन सौ सत्तर को लेकर किए गए ट्वीट पर राहुल गांधी पर बड़ा सियासी हमला बोलते हुए कहा कि अब उनकी बात को कोई सीरियसली नहीं लेता है और जहां से वह पंद्रह साल सांसद रहे वहां की ही जनता ने उन्हें नकार दिया। नगर विकास मंत्री आजम खान के सवाल पर जवाब देने से बचते जरूर नजर आए। हरदोई में एक कार्यक्रम में शामिल होने आए प्रदेश के नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने राहुल गांधी के धारा तीन सौ सत्तर को लेकर किए गए ट्वीट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा- हिंदुस्तान की जन आकांक्षाओं के अनुरूप काम हुआ है और इसके लिए प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को जितनी बधाई दी जाए. वह कम है डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान का प्रतिफल है और यह जो बोल रहे हैं जनता ने इनको इनके क्षेत्र में नकार दिया है पंद्रह साल जिस क्षेत्र में यह स्वयं सांसद रहे वहां इनकी हैसियत नहीं थी कि इस चुनाव में जीत पाए तो इनकी बात का क्या महत्व है. अब इनकी बात को कोई सीरयस नहीं लेता है। हिंदुस्तान की जन आकांक्षाओं के अनुरूप काम हुआ है इसके लिए प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को जितनी बधाई दी जाए वह कम है डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान का प्रतिफलन हुआ है. सवाल_जम्मू कश्मीर में जमीन खरीदने में जो छूट मिल गई है क्या आपको लगता है कि आप लोगों को सरकार को कोई वहां जमीन खरीदनी चाहिए? |
किस राज्य ने 1.25 करोड़ प्रवासी श्रमिकों को रोजगार देने के लिए एक मेगा रोजगार योजना शुरू की है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 जून, 2020 को एक 125दिवसीय अभियान की शुरूआत की है। इसके तहत उत्तर प्रदेश राज्य में प्रवासी और दैनिक मजदूरी करने वाले लोगों को रोज़गार प्रदान करेगा। इस अभियान को आत्म निर्भर उत्तर प्रदेश रोज़गार अभियान नाम दिया गया है। योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से यह अभियान शुरू किया गया है। यह भी घोषणा की गई है कि राज्य में आत्म निर्भर भारत पहल के तहत 5000 टूल किट भी वितरित किए जाएंगे।
| किस राज्य ने एक.पच्चीस करोड़ प्रवासी श्रमिकों को रोजगार देने के लिए एक मेगा रोजगार योजना शुरू की है? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छब्बीस जून, दो हज़ार बीस को एक एक सौ पच्चीसदिवसीय अभियान की शुरूआत की है। इसके तहत उत्तर प्रदेश राज्य में प्रवासी और दैनिक मजदूरी करने वाले लोगों को रोज़गार प्रदान करेगा। इस अभियान को आत्म निर्भर उत्तर प्रदेश रोज़गार अभियान नाम दिया गया है। योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से यह अभियान शुरू किया गया है। यह भी घोषणा की गई है कि राज्य में आत्म निर्भर भारत पहल के तहत पाँच हज़ार टूल किट भी वितरित किए जाएंगे। |
इंडिया न्यूज, पटना :
Poisonous Liquor Case in Bihar राज्य में पूर्ण शराब बंदी है लेकिन कुछ लोग मोटा पैसा कमाने के चक्कर में लोगों की जिंदगी को खतरे में डालते हुए अवैध रूप से शराब बनाने में जुटे हुए हैं। यह शराब कितनी जहरीली है इस बात का अंदाजा इसी बात से लग सकता हैं कि कुछ दिनों से जहरीली शराब पीने से मरने वालों की संख्या 40 से अधिक हो चुकी है। प्रदेश में इस तरह के मामले सामने आने पर विपक्ष ने नीतीश सरकार को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की। अब इस मामले में राज्य सरकार भी सख्ती से काम कर रही है। मुख्यमंत्री खुद एक्टिव मोड में आ चुके हैं।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 16 नवंबर को इस संबंध में विचार-विमर्श के लिए उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है। माना जा रहा है कि बैठक में सीएम शराब माफियाओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई का ऐलान कर सकते हैं। इस बीच राज्य के कई जिलों में शराब कारोबारियों के खिलाफ पुलिस के कड़े तेवर देखने को मिल रहे हैं।
मढ़ौरा पुलिस ने रविवार को शराब माफिया के खिलाफ बड़ी करवाई करते हुए पांच चिन्हित गावों में छापेमारी की। इस दौरान पुलिस ने अलग-अलग स्थानों से करीब 280 लीटर अवैध देसी शराब बरामद किया है जबकि सैकड़ों लीटर अर्द्ध निर्मित देसी शराब को जमीन पर बहाकर नष्ट कर दिया। पुलिस ने इस दौरान अलग-अलग स्थानों से तीन शराब कारोबारी को गिरफ्तार भी किया है।
| इंडिया न्यूज, पटना : Poisonous Liquor Case in Bihar राज्य में पूर्ण शराब बंदी है लेकिन कुछ लोग मोटा पैसा कमाने के चक्कर में लोगों की जिंदगी को खतरे में डालते हुए अवैध रूप से शराब बनाने में जुटे हुए हैं। यह शराब कितनी जहरीली है इस बात का अंदाजा इसी बात से लग सकता हैं कि कुछ दिनों से जहरीली शराब पीने से मरने वालों की संख्या चालीस से अधिक हो चुकी है। प्रदेश में इस तरह के मामले सामने आने पर विपक्ष ने नीतीश सरकार को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की। अब इस मामले में राज्य सरकार भी सख्ती से काम कर रही है। मुख्यमंत्री खुद एक्टिव मोड में आ चुके हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोलह नवंबर को इस संबंध में विचार-विमर्श के लिए उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है। माना जा रहा है कि बैठक में सीएम शराब माफियाओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई का ऐलान कर सकते हैं। इस बीच राज्य के कई जिलों में शराब कारोबारियों के खिलाफ पुलिस के कड़े तेवर देखने को मिल रहे हैं। मढ़ौरा पुलिस ने रविवार को शराब माफिया के खिलाफ बड़ी करवाई करते हुए पांच चिन्हित गावों में छापेमारी की। इस दौरान पुलिस ने अलग-अलग स्थानों से करीब दो सौ अस्सी लीटरटर अवैध देसी शराब बरामद किया है जबकि सैकड़ों लीटर अर्द्ध निर्मित देसी शराब को जमीन पर बहाकर नष्ट कर दिया। पुलिस ने इस दौरान अलग-अलग स्थानों से तीन शराब कारोबारी को गिरफ्तार भी किया है। |
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
दुष्चक्र (virtuous circle या vicious circle) एक ऐसा काल्पनिक या आभासी चक्र है जिसमें एक बार घुस जाने पर बाहर निकलना सम्भव नहीं होता। इस चक्र में एक तरह का धनात्मक पुनर्भरण (पॉजिटिव फीडबैक) काम करता है जो घटनाओं एवं उनके परिणामों को इस चक्र के अन्दर बने रहने के लिये बाध्य करता है। समाज में, अर्थतंत्र, मनोविज्ञान आदि में दुष्चक्र यत्र-तत्र देखने को मिलता है। . हारा हाची बू (腹八分) एक जापानी कहावत और नारा है जिसका अर्थ है "दस में से आठ भाग भरना"। यह जापान के कई क्षेत्रों में, विशेषकर ओकिनावा, में खाना खाने से सम्बंधित एक प्रथा है जिसके अनुसार किसी भी व्यक्ति को भोजन करते हुए केवल उतना ही खाना चाहिए जिसमें उसे लगे के उसका पेट 80% भर चुका है। यानि उतना कभी नहीं खाना चाहिए के पूरी तृप्ति हो जाये। काफ़ी अध्ययन के बाद पाया गया है के ओकिनावा के लोगों में मोटापा, मधुमेह और इनसे सम्बंधित हृदय रोग लगभग न के बराबर देखे जाते हैं। ओकिनावा के 29% लोग 100 साल की उम्र से ज़्यादा जीतें हैं जो पश्चिमी देशों का चार गुना है। इस स्वास्थ्य का श्रेय "हारा हाची बू" और ओकिनावा की अन्य सेहत सुरक्षित रखने वाली प्रथाओं को दिया जाता है। .
दुष्चक्र और हारा हाची बू आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)।
दुष्चक्र 6 संबंध है और हारा हाची बू 6 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (6 + 6)।
यह लेख दुष्चक्र और हारा हाची बू के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
| शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। दुष्चक्र एक ऐसा काल्पनिक या आभासी चक्र है जिसमें एक बार घुस जाने पर बाहर निकलना सम्भव नहीं होता। इस चक्र में एक तरह का धनात्मक पुनर्भरण काम करता है जो घटनाओं एवं उनके परिणामों को इस चक्र के अन्दर बने रहने के लिये बाध्य करता है। समाज में, अर्थतंत्र, मनोविज्ञान आदि में दुष्चक्र यत्र-तत्र देखने को मिलता है। . हारा हाची बू एक जापानी कहावत और नारा है जिसका अर्थ है "दस में से आठ भाग भरना"। यह जापान के कई क्षेत्रों में, विशेषकर ओकिनावा, में खाना खाने से सम्बंधित एक प्रथा है जिसके अनुसार किसी भी व्यक्ति को भोजन करते हुए केवल उतना ही खाना चाहिए जिसमें उसे लगे के उसका पेट अस्सी% भर चुका है। यानि उतना कभी नहीं खाना चाहिए के पूरी तृप्ति हो जाये। काफ़ी अध्ययन के बाद पाया गया है के ओकिनावा के लोगों में मोटापा, मधुमेह और इनसे सम्बंधित हृदय रोग लगभग न के बराबर देखे जाते हैं। ओकिनावा के उनतीस% लोग एक सौ साल की उम्र से ज़्यादा जीतें हैं जो पश्चिमी देशों का चार गुना है। इस स्वास्थ्य का श्रेय "हारा हाची बू" और ओकिनावा की अन्य सेहत सुरक्षित रखने वाली प्रथाओं को दिया जाता है। . दुष्चक्र और हारा हाची बू आम में शून्य बातें हैं । दुष्चक्र छः संबंध है और हारा हाची बू छः है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख दुष्चक्र और हारा हाची बू के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः |
है मौसम प्यार का थोड़ा प्यार कर लो,
करते हो मोहब्बत अगर तो बाँहों में हमे भर लो,
चलो मेरे संग सपनो की दुनिया में घूम लो,
रोज़ हम चूमा करते हैं आज तुम हमें चूम लो।
आज बारिश में तेरे साथ नहाना है,
सपना मेरा ये कितना सुहाना है,
बारिश की बुँदे जो गिरे तेरे होठों पे,
उन्हें अपने होठों से उठाना हैं।
दिल अब बस तुझे ही चाहता है,
तेरी यादों में ये खो जाता है,
लग गयी है इस में इश्क की आग ऐसी.
के तेरे होंठो को चुमने को दिल चाहता है.
क्या होंठ थे आपके इतने गुलाबी पहले।
हर रोज तुझे प्यार करूँ,
हर रोज तुझे याद करूँ,
हर रोज तुझे मिस करूँ,
और आज के दिन तुझे में किश करूँ।
और एक आप थे जिसने हर किस को मिस किया।
ना आप कुछ करना ना हम कुछ करेंगे,
आप भी चुप रहना हम भी चुप रहेंगे,
एक दूजे को हम अपनी बाहों में भरेंगे,
फिर एक प्यारी सी किश करेंगे।
तभी तो सूरज में आग हैं।
चुम लूँ तेरे होठों को दिल की ये ख्वाहिश है,
बात ये मेरी नहीं दिल की फरमाइश हैं।
आज कर लो मुझे Kiss. .
क्यूँकि कर रहा हूँ, मैं तुझे बहुत Miss. .
जब उनके होंठों की सुर्खिया हमारे होंठों के साथ होगी।
काश मेरे होठ तेरे होठों को छू जाये,
देखूं जहाँ बस तेरे ही चेहरा नजर आये,
हो जाये हमारा रिश्ता कुछ ऐसा,
होंठों के साथ हमारा दिल भी जुड़ जाये।
बस तुम उसी शिद्दत से मुझे किस करती रहना।
तेरे होठों को चूमा तो एहसास हुआ,
की एक पानी ही जरूरी नहीं प्यास बुझाने के लिए।
एक तमन्ना थी जो हसरत बन गई,
कभी दोस्ती थी अब मोहब्बत बन गई,
कुछ इस तरह शामिल हुए तुम जिंदगी में कि,
तुझे सोचते रहना मेरी आदत बन गई!
मुझे बाँहों में बिखर जाने दो,
अपनी मुश्कब्र साँसों से महक जाने दो,
दिल मचलता है और साँसे रूकती है,
अब अपने होठों को मुझे छू लेने दो।
वो सबसे हंसीं ईनाम हैं ये।
मेरे प्यार का अफसाना भी है,
इसमें प्यार का खजाना भी है,
इसलिए चाहते है आपसे एक किश मांगना,
और आज तो मांगने का बहाना भी है।
एक बार हाँ कहो. तुम्हें दुनिया से चुरा लूँगा।
हद से ज्यादा तेरे करीब आने को जी करता है,
तेरे होठों को होठों से छू जाने को जी करता है,
तुम हो मेरे बेताब दिल की धड़कन,
तुम्हें अपना बनाने को जी करता है।
सिर्फ एक बार चूमा था मेहबूब के होंठों को .
लोगो ने बस्ती से निकाल दिया शराब पीने के इल्ज़ाम मे. .
हर रोज तुझे प्यार करूँ,
हर रोज तुझे याद करूँ,
हर रोज तुझे मिस करूँ,
और आज के दिन तुझे में किश करूँ।
मोहब्बत के रंग में डूबी शाम हो,
एक नई शुरुआत का पैगाम हो,
मिले तेरे होठ मेरे होठों से ऐसे,
जैसे मेरे होठ तेरे और तेरे होठ मेरे नाम हो।
और मांगे तो गुनाहगार है हम।
होंठों के साथ हमारे दिल भी जुड़ जाए।
जब आती है याद तुम्हारी,
तो करके आँखें बंद,
तुम्हे मिस कर लेते है,
मुलाकात रोज हो नहीं पाती इसलिए,
ख्यालों में ही तुम्हे किस कर लेते है।
Happy Kiss Day.
आज हर एक पल खूबसूरत हैं,
दिल में सिर्फ तेरी ही सूरत हैं,
दुनिया से ज्यादा मुझे तेरी जरूरत हैं।
ना जाने कब वो हसीन रात होगी,
जब उनकी निगाहें हमारी निगाहों के साथ होंगी,
बैठे है हम उस रात के इंतजार में,
जब उनके होठों की सुर्खियां हमारे होठों के साथ होगी।
दिल अब बस तुझे ही चाहता है,
तेरी यादों में ये खो जाता है,
लग गयी है इस में इश्क की आग ऐसी,
के तेरे होंठो को चुमने को दिल चाहता है।
मेरे होठों से तेरे होंठों को गीला कर दूँ,
तेरे होठों को मैं और भी रसीला कर दूँ,
तू इस कदर प्यार कर और प्यार की इन्तहा हो जाये,
तेरे होठों को चूस कर तुझे और जोशीला कर दूँ।
कभी दूर ना जाना तुम,
मैं तुम्हें बहुत मिस करूंगा,
अगर तुम दूर गई तो,
तेरी यादों को ही किस करूंगा।
आप भी हमे एक किस तो करो।
होठों से तुम्हें आज छु लू इस तरह,
और डूब के प्यार के नशे में तुमसे इजहार कर लूं,
सिमट जाओ आज की तेरी बाँहों में सनम,
और सारी हसरतें आज पूरी कर लूं।
होती नही मोहब्बत सूरत से,
मोहब्बत तो दिल से होती है,
सूरत उनकी खुद ही प्यारी लगती है,
कद्र जिनकी दिल में होती है।
मैंने कहा तीखी मिर्ची हो तूम,
वो होंठ चूम कर बोली और अब?
लड़का कहता है ये क्या किया?
होठों के साथ हमारा दिल भी जुड़ जाए।
चलो संग मिलकर प्यार की गलियां धूम लेते है,
प्यार का इजहार तो कर लिया,
अब एक दुसरे को चूम लेते हैं।
मैं उनका गुरूर भी कुछ ऐसे तोड़ दिया,
आँखों को चूमा और होठों को छोड़ दिया।
और आज तो मांगने का बहाना भी है।
तुम हसीन हो गुलाब जैसी हो,
बहुत नाजुक हो ख्वाब जैसी हो,
होंठों से लगाकर पी जाऊं तुम्हें,
सर से पाँव तक शराब जैसी हो।
| है मौसम प्यार का थोड़ा प्यार कर लो, करते हो मोहब्बत अगर तो बाँहों में हमे भर लो, चलो मेरे संग सपनो की दुनिया में घूम लो, रोज़ हम चूमा करते हैं आज तुम हमें चूम लो। आज बारिश में तेरे साथ नहाना है, सपना मेरा ये कितना सुहाना है, बारिश की बुँदे जो गिरे तेरे होठों पे, उन्हें अपने होठों से उठाना हैं। दिल अब बस तुझे ही चाहता है, तेरी यादों में ये खो जाता है, लग गयी है इस में इश्क की आग ऐसी. के तेरे होंठो को चुमने को दिल चाहता है. क्या होंठ थे आपके इतने गुलाबी पहले। हर रोज तुझे प्यार करूँ, हर रोज तुझे याद करूँ, हर रोज तुझे मिस करूँ, और आज के दिन तुझे में किश करूँ। और एक आप थे जिसने हर किस को मिस किया। ना आप कुछ करना ना हम कुछ करेंगे, आप भी चुप रहना हम भी चुप रहेंगे, एक दूजे को हम अपनी बाहों में भरेंगे, फिर एक प्यारी सी किश करेंगे। तभी तो सूरज में आग हैं। चुम लूँ तेरे होठों को दिल की ये ख्वाहिश है, बात ये मेरी नहीं दिल की फरमाइश हैं। आज कर लो मुझे Kiss. . क्यूँकि कर रहा हूँ, मैं तुझे बहुत Miss. . जब उनके होंठों की सुर्खिया हमारे होंठों के साथ होगी। काश मेरे होठ तेरे होठों को छू जाये, देखूं जहाँ बस तेरे ही चेहरा नजर आये, हो जाये हमारा रिश्ता कुछ ऐसा, होंठों के साथ हमारा दिल भी जुड़ जाये। बस तुम उसी शिद्दत से मुझे किस करती रहना। तेरे होठों को चूमा तो एहसास हुआ, की एक पानी ही जरूरी नहीं प्यास बुझाने के लिए। एक तमन्ना थी जो हसरत बन गई, कभी दोस्ती थी अब मोहब्बत बन गई, कुछ इस तरह शामिल हुए तुम जिंदगी में कि, तुझे सोचते रहना मेरी आदत बन गई! मुझे बाँहों में बिखर जाने दो, अपनी मुश्कब्र साँसों से महक जाने दो, दिल मचलता है और साँसे रूकती है, अब अपने होठों को मुझे छू लेने दो। वो सबसे हंसीं ईनाम हैं ये। मेरे प्यार का अफसाना भी है, इसमें प्यार का खजाना भी है, इसलिए चाहते है आपसे एक किश मांगना, और आज तो मांगने का बहाना भी है। एक बार हाँ कहो. तुम्हें दुनिया से चुरा लूँगा। हद से ज्यादा तेरे करीब आने को जी करता है, तेरे होठों को होठों से छू जाने को जी करता है, तुम हो मेरे बेताब दिल की धड़कन, तुम्हें अपना बनाने को जी करता है। सिर्फ एक बार चूमा था मेहबूब के होंठों को . लोगो ने बस्ती से निकाल दिया शराब पीने के इल्ज़ाम मे. . हर रोज तुझे प्यार करूँ, हर रोज तुझे याद करूँ, हर रोज तुझे मिस करूँ, और आज के दिन तुझे में किश करूँ। मोहब्बत के रंग में डूबी शाम हो, एक नई शुरुआत का पैगाम हो, मिले तेरे होठ मेरे होठों से ऐसे, जैसे मेरे होठ तेरे और तेरे होठ मेरे नाम हो। और मांगे तो गुनाहगार है हम। होंठों के साथ हमारे दिल भी जुड़ जाए। जब आती है याद तुम्हारी, तो करके आँखें बंद, तुम्हे मिस कर लेते है, मुलाकात रोज हो नहीं पाती इसलिए, ख्यालों में ही तुम्हे किस कर लेते है। Happy Kiss Day. आज हर एक पल खूबसूरत हैं, दिल में सिर्फ तेरी ही सूरत हैं, दुनिया से ज्यादा मुझे तेरी जरूरत हैं। ना जाने कब वो हसीन रात होगी, जब उनकी निगाहें हमारी निगाहों के साथ होंगी, बैठे है हम उस रात के इंतजार में, जब उनके होठों की सुर्खियां हमारे होठों के साथ होगी। दिल अब बस तुझे ही चाहता है, तेरी यादों में ये खो जाता है, लग गयी है इस में इश्क की आग ऐसी, के तेरे होंठो को चुमने को दिल चाहता है। मेरे होठों से तेरे होंठों को गीला कर दूँ, तेरे होठों को मैं और भी रसीला कर दूँ, तू इस कदर प्यार कर और प्यार की इन्तहा हो जाये, तेरे होठों को चूस कर तुझे और जोशीला कर दूँ। कभी दूर ना जाना तुम, मैं तुम्हें बहुत मिस करूंगा, अगर तुम दूर गई तो, तेरी यादों को ही किस करूंगा। आप भी हमे एक किस तो करो। होठों से तुम्हें आज छु लू इस तरह, और डूब के प्यार के नशे में तुमसे इजहार कर लूं, सिमट जाओ आज की तेरी बाँहों में सनम, और सारी हसरतें आज पूरी कर लूं। होती नही मोहब्बत सूरत से, मोहब्बत तो दिल से होती है, सूरत उनकी खुद ही प्यारी लगती है, कद्र जिनकी दिल में होती है। मैंने कहा तीखी मिर्ची हो तूम, वो होंठ चूम कर बोली और अब? लड़का कहता है ये क्या किया? होठों के साथ हमारा दिल भी जुड़ जाए। चलो संग मिलकर प्यार की गलियां धूम लेते है, प्यार का इजहार तो कर लिया, अब एक दुसरे को चूम लेते हैं। मैं उनका गुरूर भी कुछ ऐसे तोड़ दिया, आँखों को चूमा और होठों को छोड़ दिया। और आज तो मांगने का बहाना भी है। तुम हसीन हो गुलाब जैसी हो, बहुत नाजुक हो ख्वाब जैसी हो, होंठों से लगाकर पी जाऊं तुम्हें, सर से पाँव तक शराब जैसी हो। |
प्रतीकात्मक फोटो.
कोलकाता. भारतीय जनता पार्टी (BJP) और संघ (RSS) ने पश्चिम बंगाल (West Bengal) में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) को लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर निशाना साधा है. संघ और भाजपा ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस राज्य के लोगों को राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) के बारे में गलत जानकारी देकर डरा रही है.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने कहा कि वह लोगों के डर को दूर करने के लिए राज्य में अभियान चलाएंगे. इसके बाद नागरिकता (संशोधन) विधेयक पर आम राय बनाई जाएगी. उन्होंने कहा कि भगवा संगठन पश्चिम बंगाल (West Bengal) में घर-घर अभियान चलाएंगे, जिससे एनआरसी को लेकर लोगों के डर को दूर किया जाएगा.
टीएमसी का नाम लिये बगैर प्रदेश में संघ के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि राजनीतिक दलों को अगर असम (Assam) में अंतिम एनआरसी सूची में हिंदुओं के नाम हटाने की चिंता है तो उन्हें संसद में इस विधेयक का विरोध करने के बजाए इसका समर्थन करना चाहिए. प्रदेश भाजपा (BJP) के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, "एनआरसी और नागरिकता (संशोधन) विधेयक को लेकर हम जल्द ही घर-घर जाकर जागरुकता अभियान शुरू करेंगे.
हम आम जनता को बताएंगे कि क्यों अवैध बांग्लादेशी मुसलमान घुसपैठियों को निकालने के लिये एनआरसी जरूरी है. हम पहले नागरिकता (संशोधन) विधेयक लागू करेंगे, जिससे पड़ोसी देशों से आने वाले हिंदू शरणार्थियों (Hindu Refugees) को नागरिकता दी जा सके. उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी सिर्फ आतंक पैदा कर रही है, जिससे लोगों में डर बैठाया जा सके. हम इसका जवाब देंगे. "
राज्य में एनआरसी लागू होने की आशंका के बीच लोग सरकारी व नगर निगम (Municipal Corporation) के दफ्तरों में जन्म प्रमाण-पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेजों के लिये लंबी कतार लगा रहे हैं. भाजपा शासित असम में अंतिम राष्ट्रीय नागरिक पंजी में लाखों बंगालियों के नाम कथित तौर पर शामिल ना किये जाने के बाद लोगों में डर है.
टीएमसी सरकार ने आश्वासन दिया है कि वह पश्चिम बंगाल (West Bengal) में एनआरसी की इजाजत नहीं देगी. विधेयक को लेकर टीएमसी के विरोध के संदर्भ में संघ के पश्चिम बंगाल सचिव जिशनू बसु ने कहा कि कुछ राजनीतिक दल अपने निहित स्वार्थों को साधने के लिये लोगों के बीच डर पैदा कर रहे हैं.
बसु ने कहा, "अगर वे (TMC) हिंदुओं को लेकर चिंतित हैं तो नागरिकता (संशोधन) विधेयक का विरोध क्यों कर रहे हैं? उन्हें इसका समर्थन करना चाहिए. हम स्पष्ट रूप से कहना चाहते हैं कि यह विधेयक जल्द ही संसद में पारित होगा, जिससे हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता दी जा सके. जो लोग चाहते हैं कि हिंदुओं को नगरिकता नहीं मिले वे इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं. हम लोगों को एनआरसी और नागरिकता (संशोधन) विधेयक के बारे में अभियान चलाकर सूचित करेंगे. "
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सनी देओल की हीरोइन को जब ज्यादा पढ़ी-लिखी होना पड़ा भारी, एक्ट्रेस ने खूब सुने थे ताने, बोलीं- इंडस्ट्री में. .
| प्रतीकात्मक फोटो. कोलकाता. भारतीय जनता पार्टी और संघ ने पश्चिम बंगाल में राष्ट्रीय नागरिक पंजी को लेकर तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधा है. संघ और भाजपा ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस राज्य के लोगों को राष्ट्रीय नागरिक पंजी के बारे में गलत जानकारी देकर डरा रही है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने कहा कि वह लोगों के डर को दूर करने के लिए राज्य में अभियान चलाएंगे. इसके बाद नागरिकता विधेयक पर आम राय बनाई जाएगी. उन्होंने कहा कि भगवा संगठन पश्चिम बंगाल में घर-घर अभियान चलाएंगे, जिससे एनआरसी को लेकर लोगों के डर को दूर किया जाएगा. टीएमसी का नाम लिये बगैर प्रदेश में संघ के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि राजनीतिक दलों को अगर असम में अंतिम एनआरसी सूची में हिंदुओं के नाम हटाने की चिंता है तो उन्हें संसद में इस विधेयक का विरोध करने के बजाए इसका समर्थन करना चाहिए. प्रदेश भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, "एनआरसी और नागरिकता विधेयक को लेकर हम जल्द ही घर-घर जाकर जागरुकता अभियान शुरू करेंगे. हम आम जनता को बताएंगे कि क्यों अवैध बांग्लादेशी मुसलमान घुसपैठियों को निकालने के लिये एनआरसी जरूरी है. हम पहले नागरिकता विधेयक लागू करेंगे, जिससे पड़ोसी देशों से आने वाले हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता दी जा सके. उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी सिर्फ आतंक पैदा कर रही है, जिससे लोगों में डर बैठाया जा सके. हम इसका जवाब देंगे. " राज्य में एनआरसी लागू होने की आशंका के बीच लोग सरकारी व नगर निगम के दफ्तरों में जन्म प्रमाण-पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेजों के लिये लंबी कतार लगा रहे हैं. भाजपा शासित असम में अंतिम राष्ट्रीय नागरिक पंजी में लाखों बंगालियों के नाम कथित तौर पर शामिल ना किये जाने के बाद लोगों में डर है. टीएमसी सरकार ने आश्वासन दिया है कि वह पश्चिम बंगाल में एनआरसी की इजाजत नहीं देगी. विधेयक को लेकर टीएमसी के विरोध के संदर्भ में संघ के पश्चिम बंगाल सचिव जिशनू बसु ने कहा कि कुछ राजनीतिक दल अपने निहित स्वार्थों को साधने के लिये लोगों के बीच डर पैदा कर रहे हैं. बसु ने कहा, "अगर वे हिंदुओं को लेकर चिंतित हैं तो नागरिकता विधेयक का विरोध क्यों कर रहे हैं? उन्हें इसका समर्थन करना चाहिए. हम स्पष्ट रूप से कहना चाहते हैं कि यह विधेयक जल्द ही संसद में पारित होगा, जिससे हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता दी जा सके. जो लोग चाहते हैं कि हिंदुओं को नगरिकता नहीं मिले वे इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं. हम लोगों को एनआरसी और नागरिकता विधेयक के बारे में अभियान चलाकर सूचित करेंगे. " . सनी देओल की हीरोइन को जब ज्यादा पढ़ी-लिखी होना पड़ा भारी, एक्ट्रेस ने खूब सुने थे ताने, बोलीं- इंडस्ट्री में. . |
वजन घटाने के विशेषज्ञों के रूप में, लोग आमतौर पर नहीं पूछते कि वे वजन कैसे कम कर सकते हैं... वे इसके बजाय कहते हैं, "आप क्या खाते हैं? क्या आपने कभी कुछ भी बुरा खाया है"? आपका पसंदीदा धोखा खाना क्या है? "
और यह फिर से हुआ जब हम कैलिफ़ोर्निया में आईडीईए सम्मेलन में उपस्थित थे। हमारी बात के बाद, किसी ने पूछा... क्या "धोखा दिन" ठीक है? ईमानदार होने के लिए, हम "धोखा" भोजन के बारे में बात करने के प्रशंसकों नहीं हैं... शायद यह सिर्फ अर्थशास्त्र है, लेकिन हम इसे एक छेड़छाड़ कहते हैं।
धोखा बुरा मतलब है। आप खाना खा रहे हैं, खाने के कोने में छिपा रहे हैं, हो सकता है कि इसे अपने डेस्क में अपने सहकर्मियों से छुपाएं ताकि आप इसे खराब कर सकें जैसे कि आप बुरे हैं।
फ्लिप पक्ष पर, स्पंज का तात्पर्य है कि आप भोजन का आनंद लेते हैं, फिर आप बिना किसी चिंता के कहां वापस आते हैं।
हमारे 90/10 नियम में हम जो अनुशंसा करते हैं उसके 10% भाग का हिस्सा हैं (समय के 9 0% साफ खाते हैं और अन्य 10% छोड़कर रीन्स को छोड़ने के लिए छोड़ दें)। यदि आप गणित करते हैं, तो यह हर हफ्ते कुछ भोजन के लिए आता है। शायद आप अपने पति या दोस्तों के साथ जाने के लिए इसका इस्तेमाल करें। या काम पर दोपहर के भोजन के लिए बैठक।
बस अपने सप्ताह में उस छेड़छाड़ की योजना बनाएं जैसे कि आप किसी और चीज की योजना बनायेंगे। योजना सफलता की कुंजी है!
हमें जो खाना है उसका आनंद लेने की ज़रूरत है।
इसके साथ, यहां हमारे पसंदीदा 'splurges' हैंः
क्रिस के लिएः क्रिस्टी इतालवी रोटी और अच्छे जैतून का तेल के साथ पिज्जा या घर का बना Lasagna। पिज्जा बनाने से पिज्जा थोड़ा आसान है, लेकिन वे दोनों "splurge" खाद्य पदार्थों के समान क्षेत्र में हैं।
करा के लिएः घर का बना सॉस और मीटबॉल और जैतून का तेल के साथ महान इतालवी रोटी के साथ शराब और पास्ता।
एला के लिएः ठीक है, वह अभी तक काफी नहीं मिला है, लेकिन हम निश्चित रूप से वापस रिपोर्ट करेंगे।
तो आपका पसंदीदा स्पंज भोजन क्या है?
क्या "धोखा दिन" ठीक है?
वजन घटाने के विशेषज्ञों के रूप में, लोग आमतौर पर नहीं पूछते कि वे वजन कैसे कम कर सकते हैं... वे इसके बजाय कहते हैं, "आप क्या खाते हैं? क्या आपने कभी कुछ भी बुरा खाया है"? आपका पसंदीदा धोखा खाना क्या है? "
| वजन घटाने के विशेषज्ञों के रूप में, लोग आमतौर पर नहीं पूछते कि वे वजन कैसे कम कर सकते हैं... वे इसके बजाय कहते हैं, "आप क्या खाते हैं? क्या आपने कभी कुछ भी बुरा खाया है"? आपका पसंदीदा धोखा खाना क्या है? " और यह फिर से हुआ जब हम कैलिफ़ोर्निया में आईडीईए सम्मेलन में उपस्थित थे। हमारी बात के बाद, किसी ने पूछा... क्या "धोखा दिन" ठीक है? ईमानदार होने के लिए, हम "धोखा" भोजन के बारे में बात करने के प्रशंसकों नहीं हैं... शायद यह सिर्फ अर्थशास्त्र है, लेकिन हम इसे एक छेड़छाड़ कहते हैं। धोखा बुरा मतलब है। आप खाना खा रहे हैं, खाने के कोने में छिपा रहे हैं, हो सकता है कि इसे अपने डेस्क में अपने सहकर्मियों से छुपाएं ताकि आप इसे खराब कर सकें जैसे कि आप बुरे हैं। फ्लिप पक्ष पर, स्पंज का तात्पर्य है कि आप भोजन का आनंद लेते हैं, फिर आप बिना किसी चिंता के कहां वापस आते हैं। हमारे नब्बे/दस नियम में हम जो अनुशंसा करते हैं उसके दस% भाग का हिस्सा हैं । यदि आप गणित करते हैं, तो यह हर हफ्ते कुछ भोजन के लिए आता है। शायद आप अपने पति या दोस्तों के साथ जाने के लिए इसका इस्तेमाल करें। या काम पर दोपहर के भोजन के लिए बैठक। बस अपने सप्ताह में उस छेड़छाड़ की योजना बनाएं जैसे कि आप किसी और चीज की योजना बनायेंगे। योजना सफलता की कुंजी है! हमें जो खाना है उसका आनंद लेने की ज़रूरत है। इसके साथ, यहां हमारे पसंदीदा 'splurges' हैंः क्रिस के लिएः क्रिस्टी इतालवी रोटी और अच्छे जैतून का तेल के साथ पिज्जा या घर का बना Lasagna। पिज्जा बनाने से पिज्जा थोड़ा आसान है, लेकिन वे दोनों "splurge" खाद्य पदार्थों के समान क्षेत्र में हैं। करा के लिएः घर का बना सॉस और मीटबॉल और जैतून का तेल के साथ महान इतालवी रोटी के साथ शराब और पास्ता। एला के लिएः ठीक है, वह अभी तक काफी नहीं मिला है, लेकिन हम निश्चित रूप से वापस रिपोर्ट करेंगे। तो आपका पसंदीदा स्पंज भोजन क्या है? क्या "धोखा दिन" ठीक है? वजन घटाने के विशेषज्ञों के रूप में, लोग आमतौर पर नहीं पूछते कि वे वजन कैसे कम कर सकते हैं... वे इसके बजाय कहते हैं, "आप क्या खाते हैं? क्या आपने कभी कुछ भी बुरा खाया है"? आपका पसंदीदा धोखा खाना क्या है? " |
कहा जा रहा है कि सलमान खान (Salman Khan) को उनकी नई पार्टनर मिल गई है। सलमान, पूजा हेगड़े (Pooja Hegde) को डेट कर रहे हैं। दोनों 'किसी का भाई किसी की जान' (Kisi Ka Bhai Kisi Ki Jaan) में दिखेंगे।
बॉलीवुड के 'दबंग' एक्टर सलमान खान (Salman Khan) अपनी प्रोफेशनल लाइफ के साथ ही साथ अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर भी खबरों में रहते हैं। सलमान खान अक्सर अलग अलग वजहों से चर्चा में रहते हैं, जिन में से एक उनकी लव लाइफ भी है। सलमान का नाम कई एक्ट्रेसेस के साथ जुड़ा है लेकिन कभी बात शादी तक नहीं पहुंची। इस बीच अब कहा जा रहा है कि सलमान को उनकी नई पार्टनर मिल गई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक सलमान खान, अभिनेत्री पूजा हेगड़े (Pooja Hegde) को डेट कर रहे हैं। बता दें कि दोनों इन दिनों फिल्म 'किसी का भाई किसी की जान' (Kisi Ka Bhai Kisi Ki Jaan) में साथ काम कर रहे हैं।
उमैर संधू के एक ट्वीट ने पूरे बॉलीवुड और सिनेमा लवर्स को हैरान कर दिया है। उमैर का कहना है कि सलमान खान और पूजा हेगड़े रिलेशनशिप में हैं। उमैर ने अपने ट्वीट में लिखा, 'ब्रेकिंग न्यूज- टाउन में नया कपल आया है. . . , मेगा स्टार सलमान खान को पूजा हेगड़े से प्यार हो गया है। सलमान के प्रोडक्शन हाउस ने पूजा को अगली 2 फिल्मों के लिए भी साइन कर लिया है। ये दोनों साथ में आजकल खूब वक्त बिता रहे हैं। इस बात को सलमान के करीबी ने कंफर्म किया है। '
बात सलमान खान की करें तो उनका बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड काफी तगड़ा है। 300 करोड़ के क्लब में 4 फिल्में सिर्फ सलमान खान की हैं, हालांकि उनके हालिया रिलीज अंतिम और उसके पहले राधे कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई थी। वहीं बात सलमान खान की करें तो 'दबंग' खान की अपकमिंग फिल्मों के खाते में किक 2, किसी का भाई किसी की जान, सूरज बड़जात्या संग फिल्म, और नो एंट्री का सीक्वल शामिल है। वहीं शाहरुख खान की पठान में भी सलमान खान का कैमियो होगा। याद दिला दें कि टाइगर 3 से सभी को काफी उम्मीदें हैं और कहा जा रहा है कि ये फिल्म नए रिकॉर्ड बनाएगी।
भले की पूजा हेगड़े हिंदी सिनेमा में अपनी बड़ी पहचान न बनाई पाई हो लेकिन साउथ सिनेमा का वो एक अच्छा नाम हैं। पूजा हेगड़े ने बॉलीवुड में ऋतिक के साथ मोहनजोदाड़ो से डेब्यू किया था, जो फ्लॉप साबित हुई थी। इसके बाद वो हाउसफुल 4 में नजर आईं। वहीं उनकी फिल्म राधे श्याम और बीस्ट भी पैन इंडिया रही। पूजा इन दिनों सलमान खान के साथ किसी का भाई किसी की जान और रणवीर सिंह के साथ सर्कस को लेकर चर्चा में हैं।
| कहा जा रहा है कि सलमान खान को उनकी नई पार्टनर मिल गई है। सलमान, पूजा हेगड़े को डेट कर रहे हैं। दोनों 'किसी का भाई किसी की जान' में दिखेंगे। बॉलीवुड के 'दबंग' एक्टर सलमान खान अपनी प्रोफेशनल लाइफ के साथ ही साथ अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर भी खबरों में रहते हैं। सलमान खान अक्सर अलग अलग वजहों से चर्चा में रहते हैं, जिन में से एक उनकी लव लाइफ भी है। सलमान का नाम कई एक्ट्रेसेस के साथ जुड़ा है लेकिन कभी बात शादी तक नहीं पहुंची। इस बीच अब कहा जा रहा है कि सलमान को उनकी नई पार्टनर मिल गई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक सलमान खान, अभिनेत्री पूजा हेगड़े को डेट कर रहे हैं। बता दें कि दोनों इन दिनों फिल्म 'किसी का भाई किसी की जान' में साथ काम कर रहे हैं। उमैर संधू के एक ट्वीट ने पूरे बॉलीवुड और सिनेमा लवर्स को हैरान कर दिया है। उमैर का कहना है कि सलमान खान और पूजा हेगड़े रिलेशनशिप में हैं। उमैर ने अपने ट्वीट में लिखा, 'ब्रेकिंग न्यूज- टाउन में नया कपल आया है. . . , मेगा स्टार सलमान खान को पूजा हेगड़े से प्यार हो गया है। सलमान के प्रोडक्शन हाउस ने पूजा को अगली दो फिल्मों के लिए भी साइन कर लिया है। ये दोनों साथ में आजकल खूब वक्त बिता रहे हैं। इस बात को सलमान के करीबी ने कंफर्म किया है। ' बात सलमान खान की करें तो उनका बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड काफी तगड़ा है। तीन सौ करोड़ के क्लब में चार फिल्में सिर्फ सलमान खान की हैं, हालांकि उनके हालिया रिलीज अंतिम और उसके पहले राधे कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई थी। वहीं बात सलमान खान की करें तो 'दबंग' खान की अपकमिंग फिल्मों के खाते में किक दो, किसी का भाई किसी की जान, सूरज बड़जात्या संग फिल्म, और नो एंट्री का सीक्वल शामिल है। वहीं शाहरुख खान की पठान में भी सलमान खान का कैमियो होगा। याद दिला दें कि टाइगर तीन से सभी को काफी उम्मीदें हैं और कहा जा रहा है कि ये फिल्म नए रिकॉर्ड बनाएगी। भले की पूजा हेगड़े हिंदी सिनेमा में अपनी बड़ी पहचान न बनाई पाई हो लेकिन साउथ सिनेमा का वो एक अच्छा नाम हैं। पूजा हेगड़े ने बॉलीवुड में ऋतिक के साथ मोहनजोदाड़ो से डेब्यू किया था, जो फ्लॉप साबित हुई थी। इसके बाद वो हाउसफुल चार में नजर आईं। वहीं उनकी फिल्म राधे श्याम और बीस्ट भी पैन इंडिया रही। पूजा इन दिनों सलमान खान के साथ किसी का भाई किसी की जान और रणवीर सिंह के साथ सर्कस को लेकर चर्चा में हैं। |
कोरोना वायरस के खतरे के बीच केंद्रीय वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के निर्देश पर इंदिरा गांधी नेशनल फॉरेस्ट एकेडमी में ट्रेनी आईएफ़एस अफसरों की ट्रेनिंग नए सिरे से शुरू कर दी गई है ।
जबकि कोरोना वायरस से संक्रमित तीनों अफसरों का दून अस्पताल में इलाज कराया गया। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद तीनों ट्रेनी आईएफ़एस अफसर एकेडमी लौट आए हैं । एडिशनल डायरेक्टर एसके अवस्थी ने बताया कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के निर्देश पर अब सभी ट्रेनी आईएफ़एस अफसरों की ट्रेनिंग दोबारा शुरू कर दी गई है ।
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| कोरोना वायरस के खतरे के बीच केंद्रीय वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के निर्देश पर इंदिरा गांधी नेशनल फॉरेस्ट एकेडमी में ट्रेनी आईएफ़एस अफसरों की ट्रेनिंग नए सिरे से शुरू कर दी गई है । जबकि कोरोना वायरस से संक्रमित तीनों अफसरों का दून अस्पताल में इलाज कराया गया। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद तीनों ट्रेनी आईएफ़एस अफसर एकेडमी लौट आए हैं । एडिशनल डायरेक्टर एसके अवस्थी ने बताया कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के निर्देश पर अब सभी ट्रेनी आईएफ़एस अफसरों की ट्रेनिंग दोबारा शुरू कर दी गई है । Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi. |
अन्तर्यामी की प्रतिष्ठा स्वयं हो जाती है । हृदय कावा एवं कैलाश के समान पवित्र हो जाता है ? ।
कर्मकाण्ड, मक्के जाना, हज्ज करना या नमाज पढने में उठना बैठना सव बेकार है । यदि हृदय और शरीर का साम्य नहीं, यदि शुद्ध हृदय से निरन्तर परमसत्ता का ध्यान नहीं किया जाता तो परमेश्वर की अनुकम्पा प्राप्त नहीं हो सकती । निरे कर्मकाण्ड मे रन व्यक्ति खरीदार की भाँति है जो किसी मूल्य पर कर्ता को क्रय नहीं कर सकते, अर्थात् उसे प्राप्त नहीं कर सकते ।
ज्ञान ध्यान, जप तप, संयम नियम सबका महत्व प्रेम के सम्मुख तुच्छ है संसार में वही व्यक्ति श्रेष्ठ है जो प्रेम का प्रतिपालन करता है 3 । प्रेम का स्थान सर्वोच्च है, यदि सच्चा प्रेम हो सके । प्रेम की भावना गंगा के समान पवित्र है जिसकी प्राप्ति से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं ४ ।
सूफी सदैव हृदय शुद्धि या कल्ब के परिमार्जन का ध्यान रखते हैं और भावना को तर्क की अपेक्षा श्रेष्ठ समझते हैं । वे सारे कर्मकाण्ड, कर्तव्य, भावना या बुद्धि विलास को त्यागकर हृदय में निरन्तर उसका ध्यान किया करते हैं । हृदय में वसी मूर्ति को वे कणकण में व्याप्त देखते हैं। हृदय और नैन की मूर्ति में कोई अन्तर नहीं होता है। सर्वत्र उसी की छवि देखकर साधक की प्रेम भावना उद्दीप्त हुआ करती है। उसकी प्रेम की पीर बढती रहती
१. दया नहीं तो मन है काकर, प्रेमनगर की मग है सार । ढया प्रेम जय हिये समाई, मन थापन काबा होइ जाई । दया प्रेम जेहि हिय बसे, सो काबा कैलास । अन्तरजामी चाप रब, करे इीए पर बास । शेख रहीम प्रेमरस ।
२. मक्के गये हज्ज वर आये, क्पटी मन फिर सगे लाये । मक्के और मदीने जावै, खरीदार रव का ना पावै ।
ज्ञान ध्यान महिम सबै, जप तप सजम नेम । मान सो उम जगत जन, जो प्रतिपारे प्रेम ।
४. ऊचा बैठक प्रेम का, जो रहीम सत सो पायें मशय नहीं, जाग पाप सत्र
शेख रडीम प्रेमरस ।
उसमान चित्रावली पृ० २३६ ।
होय ।
धोय ।।
शेस रहीम प्रेमरस ।
५. जब एक मूरति हिए समानी, दूसर कहा
बिलोकै ज्ञानी ।
जो मन बीच नैन मो सोई बहा लगे भ्ल दूसर कोई ॥
नूरमुहम्मद धनुराग बांसुरी पृ० १३४ / | अन्तर्यामी की प्रतिष्ठा स्वयं हो जाती है । हृदय कावा एवं कैलाश के समान पवित्र हो जाता है ? । कर्मकाण्ड, मक्के जाना, हज्ज करना या नमाज पढने में उठना बैठना सव बेकार है । यदि हृदय और शरीर का साम्य नहीं, यदि शुद्ध हृदय से निरन्तर परमसत्ता का ध्यान नहीं किया जाता तो परमेश्वर की अनुकम्पा प्राप्त नहीं हो सकती । निरे कर्मकाण्ड मे रन व्यक्ति खरीदार की भाँति है जो किसी मूल्य पर कर्ता को क्रय नहीं कर सकते, अर्थात् उसे प्राप्त नहीं कर सकते । ज्ञान ध्यान, जप तप, संयम नियम सबका महत्व प्रेम के सम्मुख तुच्छ है संसार में वही व्यक्ति श्रेष्ठ है जो प्रेम का प्रतिपालन करता है तीन । प्रेम का स्थान सर्वोच्च है, यदि सच्चा प्रेम हो सके । प्रेम की भावना गंगा के समान पवित्र है जिसकी प्राप्ति से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं चार । सूफी सदैव हृदय शुद्धि या कल्ब के परिमार्जन का ध्यान रखते हैं और भावना को तर्क की अपेक्षा श्रेष्ठ समझते हैं । वे सारे कर्मकाण्ड, कर्तव्य, भावना या बुद्धि विलास को त्यागकर हृदय में निरन्तर उसका ध्यान किया करते हैं । हृदय में वसी मूर्ति को वे कणकण में व्याप्त देखते हैं। हृदय और नैन की मूर्ति में कोई अन्तर नहीं होता है। सर्वत्र उसी की छवि देखकर साधक की प्रेम भावना उद्दीप्त हुआ करती है। उसकी प्रेम की पीर बढती रहती एक. दया नहीं तो मन है काकर, प्रेमनगर की मग है सार । ढया प्रेम जय हिये समाई, मन थापन काबा होइ जाई । दया प्रेम जेहि हिय बसे, सो काबा कैलास । अन्तरजामी चाप रब, करे इीए पर बास । शेख रहीम प्रेमरस । दो. मक्के गये हज्ज वर आये, क्पटी मन फिर सगे लाये । मक्के और मदीने जावै, खरीदार रव का ना पावै । ज्ञान ध्यान महिम सबै, जप तप सजम नेम । मान सो उम जगत जन, जो प्रतिपारे प्रेम । चार. ऊचा बैठक प्रेम का, जो रहीम सत सो पायें मशय नहीं, जाग पाप सत्र शेख रडीम प्रेमरस । उसमान चित्रावली पृशून्य दो सौ छत्तीस । होय । धोय ।। शेस रहीम प्रेमरस । पाँच. जब एक मूरति हिए समानी, दूसर कहा बिलोकै ज्ञानी । जो मन बीच नैन मो सोई बहा लगे भ्ल दूसर कोई ॥ नूरमुहम्मद धनुराग बांसुरी पृशून्य एक सौ चौंतीस / |
नई दिल्लीः देश में फेस्टिव सीजन की शुरुआत हो गई है। ऐसे में देश की ई-कॉमर्स कंपनियों ने भी अपनी-अपनी सेल का संचलान कर रही है। जिसमें Meesho, Amazon और Flipkart में सेल की शुरुआत इसी हफ्ते से हो रही है। ऐसे में ग्राहकों की बल्ले-बल्ले हो गई है। कंपनी कई प्रोडक्ट पर बंपर डिस्कांउट ऑफर कर रही है। जिसमें आप भी Oppo Reno 8 सीरीज पर बंपर डिस्काउंट के साथ सस्ते में खरीद सकते हैं, ये ऑफर Flipkart Sale में है। तो चलिए आप को इसके बारे में बताते हैं।
Flipkart की Big Billion Days सेल 23 सितंबर 2022 से चल रही है। इस सेल्स का फायदा उठाकर आप कई हैंडसेट को सस्ते में खरीद सकते हैं। Oppo ने भी अपने हैंडसेट पर मिलने वाले ऑफर्स से पर्दा उठा दिया है। अगर आप सस्ते में नया फोन खरीदना चाहते हैं, तो ओपो रेनो 8 और रेनो 8 प्रो पर डिस्काउंट हासिल कर सकते हैं।
आप को बता दें कि कंपनी के लेटेस्ट फोन्स पर आकर्षक डिस्काउंट मिल रहा है। सेल में Oppo Reno 8 सीरीज सस्ते में खरीदने का मौका रहेगा। इस सीरीज में दो स्मार्टफोन आते हैं। इसके अलावा F19 Pro Plus, Reno 7 Pro पर भी ऑफर मिल रहा है। आइए जानते हैं सेल में मिलने वाले ऑफर्स की डिटेल्स।
Oppo Reno 8 Pro 5G पर ग्राहको को कंपनी आकर्षक डिस्काउंट दे रही है। हैंडसेट Flipkart पर सेल में 45,999 रुपये में मिल रहा है। डिस्काउंट के बाद आप इसे 42,999 रुपये में खरीद सकते हैं। इस पर 4000 रुपये का डिस्काउंट एक्सचेंज ऑफर पर मिल रहा है। वही कंपनी ने स्मार्टफोन में MediaTek Dimensity 8100 MAX प्रोसेसर दिया गया है। इसमें 50MP का ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप मिलता है। कंपनी ने इसमें ग्लास बैक पैनल का इस्तेमाल किया है।
ओप्पो नो हाल ही इसे लॉन्च किया है। Oppo Reno 8 5G लेटेस्ट मॉडल की कीमत 38,999 रुपये है। Flipkart Sale में स्मार्टफोन 29,999 रुपये की कीमत पर मिलेगा। बैंक ऑफर्स के बाद इस स्मार्टफोन की कीमत और भी कम हो जाती है। सभी डिस्काउंट्स के बाद आप इसे 26,749 रुपये खरीद सकते हैं। वही यह हैंडसेट अपर मिड रेंज सेगमेंट में आता है। स्मार्टफोन MediaTek Dimensity 1300 प्रोसेसर और 50MP ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप के साथ आता है।
ओपो का यह फोन 25,990 रुपये की कीमत पर आता है और Flipkart Sale में 17,990 रुपये में आप इसे खरीद सकते हैं। इसके अलावा हैंडसेट पर 10 परसेंट का डिस्काउंट Axis बैंक, ICICI Bank और दूसरे ऑप्शन में मिल रहा है। इसे आप 15,990 रुपये की शुरुआती कीमत पर खरीद सकेंगे।
| नई दिल्लीः देश में फेस्टिव सीजन की शुरुआत हो गई है। ऐसे में देश की ई-कॉमर्स कंपनियों ने भी अपनी-अपनी सेल का संचलान कर रही है। जिसमें Meesho, Amazon और Flipkart में सेल की शुरुआत इसी हफ्ते से हो रही है। ऐसे में ग्राहकों की बल्ले-बल्ले हो गई है। कंपनी कई प्रोडक्ट पर बंपर डिस्कांउट ऑफर कर रही है। जिसमें आप भी Oppo Reno आठ सीरीज पर बंपर डिस्काउंट के साथ सस्ते में खरीद सकते हैं, ये ऑफर Flipkart Sale में है। तो चलिए आप को इसके बारे में बताते हैं। Flipkart की Big Billion Days सेल तेईस सितंबर दो हज़ार बाईस से चल रही है। इस सेल्स का फायदा उठाकर आप कई हैंडसेट को सस्ते में खरीद सकते हैं। Oppo ने भी अपने हैंडसेट पर मिलने वाले ऑफर्स से पर्दा उठा दिया है। अगर आप सस्ते में नया फोन खरीदना चाहते हैं, तो ओपो रेनो आठ और रेनो आठ प्रो पर डिस्काउंट हासिल कर सकते हैं। आप को बता दें कि कंपनी के लेटेस्ट फोन्स पर आकर्षक डिस्काउंट मिल रहा है। सेल में Oppo Reno आठ सीरीज सस्ते में खरीदने का मौका रहेगा। इस सीरीज में दो स्मार्टफोन आते हैं। इसके अलावा Fउन्नीस Pro Plus, Reno सात Pro पर भी ऑफर मिल रहा है। आइए जानते हैं सेल में मिलने वाले ऑफर्स की डिटेल्स। Oppo Reno आठ Pro पाँचG पर ग्राहको को कंपनी आकर्षक डिस्काउंट दे रही है। हैंडसेट Flipkart पर सेल में पैंतालीस,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये में मिल रहा है। डिस्काउंट के बाद आप इसे बयालीस,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये में खरीद सकते हैं। इस पर चार हज़ार रुपयापये का डिस्काउंट एक्सचेंज ऑफर पर मिल रहा है। वही कंपनी ने स्मार्टफोन में MediaTek Dimensity आठ हज़ार एक सौ MAX प्रोसेसर दिया गया है। इसमें पचासMP का ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप मिलता है। कंपनी ने इसमें ग्लास बैक पैनल का इस्तेमाल किया है। ओप्पो नो हाल ही इसे लॉन्च किया है। Oppo Reno आठ पाँचG लेटेस्ट मॉडल की कीमत अड़तीस,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये है। Flipkart Sale में स्मार्टफोन उनतीस,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये की कीमत पर मिलेगा। बैंक ऑफर्स के बाद इस स्मार्टफोन की कीमत और भी कम हो जाती है। सभी डिस्काउंट्स के बाद आप इसे छब्बीस,सात सौ उनचास रुपयापये खरीद सकते हैं। वही यह हैंडसेट अपर मिड रेंज सेगमेंट में आता है। स्मार्टफोन MediaTek Dimensity एक हज़ार तीन सौ प्रोसेसर और पचासMP ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप के साथ आता है। ओपो का यह फोन पच्चीस,नौ सौ नब्बे रुपयापये की कीमत पर आता है और Flipkart Sale में सत्रह,नौ सौ नब्बे रुपयापये में आप इसे खरीद सकते हैं। इसके अलावा हैंडसेट पर दस परसेंट का डिस्काउंट Axis बैंक, ICICI Bank और दूसरे ऑप्शन में मिल रहा है। इसे आप पंद्रह,नौ सौ नब्बे रुपयापये की शुरुआती कीमत पर खरीद सकेंगे। |
राजस्थान रॉयल्स और पंजाब किंग्स के बीच खेले जा रहे पहले मुकाबले में राजस्थान के कप्तान संजू सैमसन ने टॉस जीतकर फील्डिंग करने का फैसला किया। जहां, पहले बल्लेबाजी करने उतरी KL Rahul की कप्तानी वाली टीम ने धुंआधार बल्लेबाजी की खासकर कैप्टन राहुल शतक की ओर आगे बढ़ रहे थे और वह 91 के स्कोर पर थे, कि तभी राहुल तेवतिया ने एक हैरान करने वाला कैच पकड़ा और राहुल शतक से चूक गए।
राजस्थान रॉयल्स के गेंदबाजों की पिटाई करते हुए केएल राहुल (Kl Rahul) ने तूफानी पारी खेली। उन्होंने 50 गेंदों पर 91 रनों की पारी खेली। राहुल अपने शतक की ओर आगे बढ़ रहे थे और ऐसा लग रहा था कि वह अपने आईपीएल करियर का तीसरा शतक बनाएंगे, मगर इससे पहले डेब्यू मैच खेल रहे चेतन सकारिया मैच में ट्विस्ट लेकर आए।
उनकी गेंद पर राहुल ने मिडविकेट की तरफ से बाउंड्री की तरफ हवा में खेला और राहुल तेवतिया ने कमाल का कैच पकड़ा। तेवतिया ने पहले बाउंड्री के अंदर कैच पकड़ा और हवा में गेंद उछाली, क्योंकि वह बाउंड्री के उस पार चले गए, लेकिन तुरंत वापस आकर उन्होंने फिर से कैच को बाउंड्री के अंदर ही पकड़ा और इस तरह केएल की पारी 91 रन पर ही समाप्त हो गई। उन्होंने अपनी पारी में 5 छक्के व 7 चौके लगाए।
| राजस्थान रॉयल्स और पंजाब किंग्स के बीच खेले जा रहे पहले मुकाबले में राजस्थान के कप्तान संजू सैमसन ने टॉस जीतकर फील्डिंग करने का फैसला किया। जहां, पहले बल्लेबाजी करने उतरी KL Rahul की कप्तानी वाली टीम ने धुंआधार बल्लेबाजी की खासकर कैप्टन राहुल शतक की ओर आगे बढ़ रहे थे और वह इक्यानवे के स्कोर पर थे, कि तभी राहुल तेवतिया ने एक हैरान करने वाला कैच पकड़ा और राहुल शतक से चूक गए। राजस्थान रॉयल्स के गेंदबाजों की पिटाई करते हुए केएल राहुल ने तूफानी पारी खेली। उन्होंने पचास गेंदों पर इक्यानवे रनों की पारी खेली। राहुल अपने शतक की ओर आगे बढ़ रहे थे और ऐसा लग रहा था कि वह अपने आईपीएल करियर का तीसरा शतक बनाएंगे, मगर इससे पहले डेब्यू मैच खेल रहे चेतन सकारिया मैच में ट्विस्ट लेकर आए। उनकी गेंद पर राहुल ने मिडविकेट की तरफ से बाउंड्री की तरफ हवा में खेला और राहुल तेवतिया ने कमाल का कैच पकड़ा। तेवतिया ने पहले बाउंड्री के अंदर कैच पकड़ा और हवा में गेंद उछाली, क्योंकि वह बाउंड्री के उस पार चले गए, लेकिन तुरंत वापस आकर उन्होंने फिर से कैच को बाउंड्री के अंदर ही पकड़ा और इस तरह केएल की पारी इक्यानवे रन पर ही समाप्त हो गई। उन्होंने अपनी पारी में पाँच छक्के व सात चौके लगाए। |
By: Inextlive । Updated Date: Wed, 25 Sep 2013 11:20:26 (IST)
Bareilly : बरेली क्लब की मैनेजिंग कमेटी के मेंबर्स के इलेक्शन में ट्यूजडे को वोट कास्ट किए गए. इस कमेटी के लिए टोटल 19 कैंडीडेट मैदान में थे. इलेक्शन के बाद 15 लोगों को इलेक्ट किया गया. इससे पहले एनुअल जनरल मीटिंग में क्लब से जुड़े इंपॉर्टेंट इश्यूज पर चर्चा की गई. इसके अलावा क्लब की एक्टिविटीज के बारे में भी चर्चा हुई. दोपहर बाद इलेक्शन की नोटिफिकेशन के बाद क्लब के मेंबर्स की ओर से वोटिंग हुई. क्लब के तीन सौ से भी ज्यादा लोगों ने अपने वोटिंग राइट का इस्तेमाल किया. इस दौरान बरेली क्लब के मेंबर्स और उनकी फैमिली के लोग मौजूद रहे. दोपहर करीब तीन बजे मैनेजिंग कमेटी के इलेक्टेड मेंबर्स के नाम अनाउंस किए गए. चुने गए टोटल 15 मेंबर्स में से 9 डिफेंस से हैं और सिविल पर्सन की संख्या 6 है. आर्मी से 7 और एअरफोर्स से 2 लोगों को इलेक्ट किया गया है. क्लब के सेक्रेटरी आरपी सिंह ने बताया कि इलेक्टेड मेंबर्स ने ब्रिगेडियर अनिल शर्मा को चेयरमैन चुना गया.
2. Kuwar Tushar Chandra (Advocate)
| By: Inextlive । Updated Date: Wed, पच्चीस सितंबर दो हज़ार तेरह ग्यारह:बीस:छब्बीस Bareilly : बरेली क्लब की मैनेजिंग कमेटी के मेंबर्स के इलेक्शन में ट्यूजडे को वोट कास्ट किए गए. इस कमेटी के लिए टोटल उन्नीस कैंडीडेट मैदान में थे. इलेक्शन के बाद पंद्रह लोगों को इलेक्ट किया गया. इससे पहले एनुअल जनरल मीटिंग में क्लब से जुड़े इंपॉर्टेंट इश्यूज पर चर्चा की गई. इसके अलावा क्लब की एक्टिविटीज के बारे में भी चर्चा हुई. दोपहर बाद इलेक्शन की नोटिफिकेशन के बाद क्लब के मेंबर्स की ओर से वोटिंग हुई. क्लब के तीन सौ से भी ज्यादा लोगों ने अपने वोटिंग राइट का इस्तेमाल किया. इस दौरान बरेली क्लब के मेंबर्स और उनकी फैमिली के लोग मौजूद रहे. दोपहर करीब तीन बजे मैनेजिंग कमेटी के इलेक्टेड मेंबर्स के नाम अनाउंस किए गए. चुने गए टोटल पंद्रह मेंबर्स में से नौ डिफेंस से हैं और सिविल पर्सन की संख्या छः है. आर्मी से सात और एअरफोर्स से दो लोगों को इलेक्ट किया गया है. क्लब के सेक्रेटरी आरपी सिंह ने बताया कि इलेक्टेड मेंबर्स ने ब्रिगेडियर अनिल शर्मा को चेयरमैन चुना गया. दो. Kuwar Tushar Chandra |
विपक्ष के हमलों से परेशान पाकिस्तान के वज़ीर-ए-आज़म इमरान ख़ान को सीनेट के चुनावों में भी झटका लगा है। इमरान की पार्टी तहरीक़-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) के उम्मीदवार और वित्त मंत्री अब्दुल हफ़ीज़ शेख़ इसलामाबाद सीट से चुनाव हार गए हैं। शेख़ को साबिक (पूर्व) वज़ीर-ए-आज़म यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने मात दी है।
इमरान ख़ान के लिए यह बड़ा झटका इसलिए है क्योंकि नेशनल एसेंबली में बहुमत होने के बाद भी उनके उम्मीदवार को हार मिली है। पीटीआई के 9 सदस्यों ने चुनाव में क्रॉस वोटिंग की है। गिलानी को 169 वोट मिले जबकि शेख़ को 164 वोट मिले हैं।
विपक्ष और सरकार के बीच झगड़ा बढ़ने के बाद पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने ओपन बैलेट से चुनाव कराने का आदेश दिया था। 48 सीटों के लिए हुए चुनाव में पीटीआई को 18, पीपीपी को 8 और पीएमएल (एन) को 5 सीटें मिली हैं। हालांकि पीटीआई को सबसे ज़्यादा सीटें मिली हैं लेकिन इसके बाद भी इसलामाबाद की हार के बाद विपक्ष ने इमरान से पद से इस्तीफ़ा देने के लिए कहा है।
इस सीट पर हार मिलने के बाद इमरान ख़ान सरकार ने कहा है कि वह नेशनल एसेंबली में वोट ऑफ़ कॉन्फिन्डेन्स (अविश्वास मत) का सामना करेगी। चुनाव नतीजों के बाद इमरान सरकार के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा कि उनकी नज़र में यह दिन पाकिस्तान की जम्हूरियत के लिए अफ़सोसनाक दिन है। उन्होंने कहा कि अविश्वास मत से पता चल जाएगा कि कौन कहां खड़ा है। उनका इशारा क्रॉस वोटिंग की ओर था।
दूसरी ओर, जीत के बाद यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने कहा कि यह जम्हूरियत की जीत है। उन्होंने इसलामाबाद सीट पर मिली जीत का श्रेय पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) को दिया। पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) के चेयरमैन बिलावल भुट्टो ज़रदारी ने कहा कि जम्हूरियत सबसे अच्छा बदला है।
गिलानी को लंदन में इलाज करा रहे पूर्व वज़ीर-ए-आज़म नवाज़ शरीफ़ और उनकी बेटी मरियम नवाज़ ने बधाई दी है।
बिलावल ने ट्वीट कर कहा कि इमरान ने वादा किया था कि अगर वह इसलामाबाद की सीनेट सीट हार जाते हैं तो वह एसेंबली को भंग कर देंगे, अब उन्हें कौन रोक रहा है।
पीडीएम अधिकांश विपक्षी दलों का गठबंधन है और बीते कई महीनों से इमरान सरकार के ख़िलाफ़ देश भर में रैलियां कर रहा है। इस गठबंधन में जमीअत उलेमा-ए-इसलाम के अलावा पीपीपी, पीएमएल (एन), पश्तून तहफ्फुज़ मूवमेंट, बलूचिस्तान नेशनल पार्टी (मेंगल) सहित कई सियासी जमात शामिल हैं। पीडीएम की गुजरांवाला, पेशावर, मुल्तान और लाहौर की रैलियों में काफी भीड़ जुटी थी।
अगर इमरान ख़ान विश्वास मत हार जाते हैं तो सरकार का गिरना तय है। पाकिस्तान में पीडीएम इतना ताक़तवर है कि अब आर्मी चीफ़ जनरल क़मर जावेद बाजवा भी सरकार को नहीं बचा सकते। विपक्ष लगातार बाजवा पर भी हमले करता रहा है और उन पर इमरान को जबरन जिताने का आरोप लगाता रहा है।
इमरान सरकार के विश्वास मत हारने पर पाकिस्तान में फिर से चुनाव होंगे और ऐसे हालात में क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान के लिए पीटीआई को फिर से जीत दिलाना बेहद मुश्किल होगा और इसका कारण पीडीएम का काफी मजबूत होना है।
| विपक्ष के हमलों से परेशान पाकिस्तान के वज़ीर-ए-आज़म इमरान ख़ान को सीनेट के चुनावों में भी झटका लगा है। इमरान की पार्टी तहरीक़-ए-इंसाफ़ के उम्मीदवार और वित्त मंत्री अब्दुल हफ़ीज़ शेख़ इसलामाबाद सीट से चुनाव हार गए हैं। शेख़ को साबिक वज़ीर-ए-आज़म यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने मात दी है। इमरान ख़ान के लिए यह बड़ा झटका इसलिए है क्योंकि नेशनल एसेंबली में बहुमत होने के बाद भी उनके उम्मीदवार को हार मिली है। पीटीआई के नौ सदस्यों ने चुनाव में क्रॉस वोटिंग की है। गिलानी को एक सौ उनहत्तर वोट मिले जबकि शेख़ को एक सौ चौंसठ वोट मिले हैं। विपक्ष और सरकार के बीच झगड़ा बढ़ने के बाद पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने ओपन बैलेट से चुनाव कराने का आदेश दिया था। अड़तालीस सीटों के लिए हुए चुनाव में पीटीआई को अट्ठारह, पीपीपी को आठ और पीएमएल को पाँच सीटें मिली हैं। हालांकि पीटीआई को सबसे ज़्यादा सीटें मिली हैं लेकिन इसके बाद भी इसलामाबाद की हार के बाद विपक्ष ने इमरान से पद से इस्तीफ़ा देने के लिए कहा है। इस सीट पर हार मिलने के बाद इमरान ख़ान सरकार ने कहा है कि वह नेशनल एसेंबली में वोट ऑफ़ कॉन्फिन्डेन्स का सामना करेगी। चुनाव नतीजों के बाद इमरान सरकार के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा कि उनकी नज़र में यह दिन पाकिस्तान की जम्हूरियत के लिए अफ़सोसनाक दिन है। उन्होंने कहा कि अविश्वास मत से पता चल जाएगा कि कौन कहां खड़ा है। उनका इशारा क्रॉस वोटिंग की ओर था। दूसरी ओर, जीत के बाद यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने कहा कि यह जम्हूरियत की जीत है। उन्होंने इसलामाबाद सीट पर मिली जीत का श्रेय पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट को दिया। पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो ज़रदारी ने कहा कि जम्हूरियत सबसे अच्छा बदला है। गिलानी को लंदन में इलाज करा रहे पूर्व वज़ीर-ए-आज़म नवाज़ शरीफ़ और उनकी बेटी मरियम नवाज़ ने बधाई दी है। बिलावल ने ट्वीट कर कहा कि इमरान ने वादा किया था कि अगर वह इसलामाबाद की सीनेट सीट हार जाते हैं तो वह एसेंबली को भंग कर देंगे, अब उन्हें कौन रोक रहा है। पीडीएम अधिकांश विपक्षी दलों का गठबंधन है और बीते कई महीनों से इमरान सरकार के ख़िलाफ़ देश भर में रैलियां कर रहा है। इस गठबंधन में जमीअत उलेमा-ए-इसलाम के अलावा पीपीपी, पीएमएल , पश्तून तहफ्फुज़ मूवमेंट, बलूचिस्तान नेशनल पार्टी सहित कई सियासी जमात शामिल हैं। पीडीएम की गुजरांवाला, पेशावर, मुल्तान और लाहौर की रैलियों में काफी भीड़ जुटी थी। अगर इमरान ख़ान विश्वास मत हार जाते हैं तो सरकार का गिरना तय है। पाकिस्तान में पीडीएम इतना ताक़तवर है कि अब आर्मी चीफ़ जनरल क़मर जावेद बाजवा भी सरकार को नहीं बचा सकते। विपक्ष लगातार बाजवा पर भी हमले करता रहा है और उन पर इमरान को जबरन जिताने का आरोप लगाता रहा है। इमरान सरकार के विश्वास मत हारने पर पाकिस्तान में फिर से चुनाव होंगे और ऐसे हालात में क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान के लिए पीटीआई को फिर से जीत दिलाना बेहद मुश्किल होगा और इसका कारण पीडीएम का काफी मजबूत होना है। |
नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कंपनी के हवाई परिचालक प्रमाणन (एओसी) को इस सप्ताह पुनः अनुमोदित किया जा सकता है।
अधिकारी ने बताया कि इस एयरलाइन को जालान कलरॉक गठजोड़ के स्वामित्व के तहत फिर खड़ा किया जा रहा है। कंपनी ने तीन साल से अधिक समय पहले उड़ान भरना बंद कर दिया था।
एयरलाइन के एक प्रवक्ता ने कहा कि वह शेष प्रमाणित उड़ानों का संचालन करेगी। हालांकि, उन्होंने एओपी के पुनःअनुमोदन पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
| नागर विमानन महानिदेशालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कंपनी के हवाई परिचालक प्रमाणन को इस सप्ताह पुनः अनुमोदित किया जा सकता है। अधिकारी ने बताया कि इस एयरलाइन को जालान कलरॉक गठजोड़ के स्वामित्व के तहत फिर खड़ा किया जा रहा है। कंपनी ने तीन साल से अधिक समय पहले उड़ान भरना बंद कर दिया था। एयरलाइन के एक प्रवक्ता ने कहा कि वह शेष प्रमाणित उड़ानों का संचालन करेगी। हालांकि, उन्होंने एओपी के पुनःअनुमोदन पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। |
वाह ! सरिता जी जन मानस को बहुत थोड़ी पंक्तियों मे संदेश देती आपकी रचना अति सुन्दर ।
सोच सही है! कर्तव्य करना है!
| वाह ! सरिता जी जन मानस को बहुत थोड़ी पंक्तियों मे संदेश देती आपकी रचना अति सुन्दर । सोच सही है! कर्तव्य करना है! |
मौसम बदलते ही अब डबल स्पीड के साथ कोरोना लौट रहा है। जिले में पिछले 3 दिन से तो लगातार 90 से ज्यादा रोगी मिल रहे हैं। बुधवार को भी 99 नए रोगी सामने आए। जिले में पिछले महीने 31 दिन में जहां 1529 रोगी मिले थे, वहीं इस महीने 25 दिन में ही 1493 संक्रमित मिल चुके हैं। शादियों और नगरीय निकाय चुनाव के दौरान अगर सावधानी नहीं रखी तो संक्रमण ज्यादा फैलने का खतरा है।
इधऱ, 11 दिन संघर्ष करने के बाद बयाना के 51 वर्षीय इलेक्ट्रिकल व्यवसायी ने और 55 वर्षीय पूर्व महिला पार्षद ने बुधवार को जयपुर में दम तोड़ दिया। शुरुआती दौर में हॉट स्पॉट रह चुके इस कस्बे में एक सप्ताह के दौरान 4 और पिछले 24 घंटे में 2 मौत हो चुकी हैं। बयाना निवासी न्यायिक कर्मचारी सत्यप्रकाश गुप्ता ने बताया कि उनके ताऊ के पुत्र को तेज बुखार और सांस में तकलीफ होने पर जयपुर के आरयूएचएस हॉस्पिटल में धनतेरस वाले दिन भर्ती कराया गया था।
कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने के कारण उन्हें आईसीयू में रखा गया। बीच में तबीयत सुधरी और रिपोर्ट भी नेगेटिव आ गई। लेकिन, फेंफड़ों में संक्रमण होने की वजह से उनका निधन हो गया। इनसे पहले पार्षद प्रमोद पिक्कू और पूर्व सरपंच का पंचायत सहायक बेटा भी कोरोना की वजह से दम तोड़ चुके हैं। बीसीएमओ कार्यालय के ब्लॉक हेल्थ सुपरवाइजर मानसिंह मीना ने बताया कि बयाना में अब तक 332 पॉजिटिव केस आए हैं। इनमें से 303 लोग रिकवर हो चुके हैं। फिलहाल 24 मरीज एक्टिव हैं।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक भरतपुर जिले में इस समय 379 एक्टिव हैं। जबकि संक्रमितों का आंकड़ा बढ़कर 7363 तक पहुंच गया है। हालांकि कोरोना को हराकर रिकवर होने के बाद घर लौटने वालों की संख्या भी अच्छी खासी है। अब तक 6882 लोग स्वस्थ हो चुके हैं। इनमें 79 लोग तो बुधवार को ही घर लौटे हैं।
पूर्व सीएमएचओ डॉ. कप्तान सिंह भी पॉजिटिव हो गए हैं। अब तक आरबीएम और जनाना अस्पताल के 64 डॉक्टर्स एवं अन्य चिकित्साकर्मी संक्रमित हो चुके हैं। इनमें 9 जने तो अभी भी पॉजिटिव हैं। सर्वाधिक दूसरे चरण में सर्वाधिक 11 चिकित्साकर्मी नवंबर में संक्रमित हुए हैं।
अक्टूबर में 08, सितंबर में 07, अगस्त में 09, जुलाई में 07, जून में 18 और मई में 04 चिकित्साकर्मी पॉजिटिव हुए थे। चिकित्साकर्मियों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज प्रिंसीपल डा. रजत श्रीवास्तव ने 5 अक्टूबर से बायो मेट्रिक्स उपस्थिति फेस मास्क हटाकर करने के आदेश दिए थे। इसके बाद से चिकित्साकर्मियों के पॉजिटिव होने की संख्या बढ रही है।
प्रशासन और हेल्थ डिपार्टमेंट एक ही बात कह रहा है कि कोरोना से बचना है तो मास्क जरूर लगाओ, लेकिन लोग मान ही नहीं रहे। कोरोना का टीका आने तक हमें एक ही बात याद रखनी है कि मास्क ही वैक्सीन है और दूरी भी उतनी ही जरूरी है।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
| मौसम बदलते ही अब डबल स्पीड के साथ कोरोना लौट रहा है। जिले में पिछले तीन दिन से तो लगातार नब्बे से ज्यादा रोगी मिल रहे हैं। बुधवार को भी निन्यानवे नए रोगी सामने आए। जिले में पिछले महीने इकतीस दिन में जहां एक हज़ार पाँच सौ उनतीस रोगी मिले थे, वहीं इस महीने पच्चीस दिन में ही एक हज़ार चार सौ तिरानवे संक्रमित मिल चुके हैं। शादियों और नगरीय निकाय चुनाव के दौरान अगर सावधानी नहीं रखी तो संक्रमण ज्यादा फैलने का खतरा है। इधऱ, ग्यारह दिन संघर्ष करने के बाद बयाना के इक्यावन वर्षीय इलेक्ट्रिकल व्यवसायी ने और पचपन वर्षीय पूर्व महिला पार्षद ने बुधवार को जयपुर में दम तोड़ दिया। शुरुआती दौर में हॉट स्पॉट रह चुके इस कस्बे में एक सप्ताह के दौरान चार और पिछले चौबीस घंटाटे में दो मौत हो चुकी हैं। बयाना निवासी न्यायिक कर्मचारी सत्यप्रकाश गुप्ता ने बताया कि उनके ताऊ के पुत्र को तेज बुखार और सांस में तकलीफ होने पर जयपुर के आरयूएचएस हॉस्पिटल में धनतेरस वाले दिन भर्ती कराया गया था। कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने के कारण उन्हें आईसीयू में रखा गया। बीच में तबीयत सुधरी और रिपोर्ट भी नेगेटिव आ गई। लेकिन, फेंफड़ों में संक्रमण होने की वजह से उनका निधन हो गया। इनसे पहले पार्षद प्रमोद पिक्कू और पूर्व सरपंच का पंचायत सहायक बेटा भी कोरोना की वजह से दम तोड़ चुके हैं। बीसीएमओ कार्यालय के ब्लॉक हेल्थ सुपरवाइजर मानसिंह मीना ने बताया कि बयाना में अब तक तीन सौ बत्तीस पॉजिटिव केस आए हैं। इनमें से तीन सौ तीन लोग रिकवर हो चुके हैं। फिलहाल चौबीस मरीज एक्टिव हैं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक भरतपुर जिले में इस समय तीन सौ उन्यासी एक्टिव हैं। जबकि संक्रमितों का आंकड़ा बढ़कर सात हज़ार तीन सौ तिरेसठ तक पहुंच गया है। हालांकि कोरोना को हराकर रिकवर होने के बाद घर लौटने वालों की संख्या भी अच्छी खासी है। अब तक छः हज़ार आठ सौ बयासी लोग स्वस्थ हो चुके हैं। इनमें उन्यासी लोग तो बुधवार को ही घर लौटे हैं। पूर्व सीएमएचओ डॉ. कप्तान सिंह भी पॉजिटिव हो गए हैं। अब तक आरबीएम और जनाना अस्पताल के चौंसठ डॉक्टर्स एवं अन्य चिकित्साकर्मी संक्रमित हो चुके हैं। इनमें नौ जने तो अभी भी पॉजिटिव हैं। सर्वाधिक दूसरे चरण में सर्वाधिक ग्यारह चिकित्साकर्मी नवंबर में संक्रमित हुए हैं। अक्टूबर में आठ, सितंबर में सात, अगस्त में नौ, जुलाई में सात, जून में अट्ठारह और मई में चार चिकित्साकर्मी पॉजिटिव हुए थे। चिकित्साकर्मियों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज प्रिंसीपल डा. रजत श्रीवास्तव ने पाँच अक्टूबर से बायो मेट्रिक्स उपस्थिति फेस मास्क हटाकर करने के आदेश दिए थे। इसके बाद से चिकित्साकर्मियों के पॉजिटिव होने की संख्या बढ रही है। प्रशासन और हेल्थ डिपार्टमेंट एक ही बात कह रहा है कि कोरोना से बचना है तो मास्क जरूर लगाओ, लेकिन लोग मान ही नहीं रहे। कोरोना का टीका आने तक हमें एक ही बात याद रखनी है कि मास्क ही वैक्सीन है और दूरी भी उतनी ही जरूरी है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
अगर आप प्री-वेडिंग शूट के लिए बेस्ट ड्रेस की तलाश में हैं तो फ्लोरल लहंगा भी ट्राई कर सकती हैं। इस तरह की ड्रेस के लिए आप एक्ट्रेस संजना सांघी के लुक से भी इंस्पिरेशन ले सकती हैं।
एक्ट्रेस संजना सांघी ने इस तस्वीर में पेस्टल ब्लू कलर का लहंगा पहना हुआ है। इस लहंगे पर रेड फ्लोरल प्रिंट है। यह लहंगा बहुत प्यारा है।
इस लहंगे के साथ मैरून रंग का ब्लाउज पेयर किया गया है। स्ट्रैपी ब्लाउज एक्ट्रेस को स्टाइलिश लुक देने का काम कर रहा है। इस ब्लाउज की नेकलाइन प्लंजिंग है।
लहंगे के साथ शीयर दुपट्टा पेयर किया हुआ है। दुपट्टे को एक कंधे पर रखकर एक्ट्रेस खूबसूरत पोज देती नजर आ रही हैं. एक्सेसरीज की बात करें तो उन्होंने चोकर-बीडेड नेकलेस कैरी किया है।
इसके अलावा एक्ट्रेस ने अपने बालों को खुला रखा हुआ है. लहराती केश दिया। सूक्ष्म म्यूट ग्लैम मेकअप किया। आप भी इस लुक को रीक्रिएट कर सकती हैं।
| अगर आप प्री-वेडिंग शूट के लिए बेस्ट ड्रेस की तलाश में हैं तो फ्लोरल लहंगा भी ट्राई कर सकती हैं। इस तरह की ड्रेस के लिए आप एक्ट्रेस संजना सांघी के लुक से भी इंस्पिरेशन ले सकती हैं। एक्ट्रेस संजना सांघी ने इस तस्वीर में पेस्टल ब्लू कलर का लहंगा पहना हुआ है। इस लहंगे पर रेड फ्लोरल प्रिंट है। यह लहंगा बहुत प्यारा है। इस लहंगे के साथ मैरून रंग का ब्लाउज पेयर किया गया है। स्ट्रैपी ब्लाउज एक्ट्रेस को स्टाइलिश लुक देने का काम कर रहा है। इस ब्लाउज की नेकलाइन प्लंजिंग है। लहंगे के साथ शीयर दुपट्टा पेयर किया हुआ है। दुपट्टे को एक कंधे पर रखकर एक्ट्रेस खूबसूरत पोज देती नजर आ रही हैं. एक्सेसरीज की बात करें तो उन्होंने चोकर-बीडेड नेकलेस कैरी किया है। इसके अलावा एक्ट्रेस ने अपने बालों को खुला रखा हुआ है. लहराती केश दिया। सूक्ष्म म्यूट ग्लैम मेकअप किया। आप भी इस लुक को रीक्रिएट कर सकती हैं। |
अहमदाबाद के विजय क्रॉस रोड में स्थित विजय शेल्बी अस्पताल की शुरुआत शेल्बी लिमिटेड के संस्थापक और सीएमडी डॉ विक्रम शाह ने 1994 में की थी. यह 22 बेड की सुविधा प्रदान करने वाला एक मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल है.
ऑनलाइन अप्वाइंटमेंट बुकिंग, वीडियो कंसल्टेशन, होम केयर सर्विसेज और इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर की सुविधा भी अस्पताल की वेबसाइट पर मौजूद हैं.
जॉइंट रिप्लेसमेंट, ऑर्थोपेडिक्स, पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक, डेंटल केयर, आईवीएफ, ईएनटी, जनरल सर्जरी, ऑन्कोसर्जरी, यूरोलॉजी, ऑब्सटेट्रिक्स, गायनोकोलॉजी, डर्मेटोलॉजी, प्लास्टिक सर्जरी, कॉस्मेटिक सर्जरी और स्पाइन सर्जरी के क्षेत्रों में असपताल विशेषज्ञता प्रदान करता है.
विजय शेल्बी अस्पताल कीमोथेरेपी, डायलिसिस, स्वास्थ्य जांच और स्पाइन क्लिनिक की सुविधा भी रोगियों को प्रदान करता है. अस्पताल द्वारा प्रदान की जाने वाली डायग्नोस्टिक सर्विसेज में टीएमटी, इकोकार्डियोग्राफी, यूएसजी, पाथ लैब और रेडियो इमेजिंग शामिल हैं.
अस्पताल ट्रॉमा सेंटर, एक फुल-फ्लेज्ड आईवीएफ लैब और आईसीयू की सर्विसेज प्रदान करने के साथ 24x7 आपातकालीन सेवाएं भी प्रदान करता है.
| अहमदाबाद के विजय क्रॉस रोड में स्थित विजय शेल्बी अस्पताल की शुरुआत शेल्बी लिमिटेड के संस्थापक और सीएमडी डॉ विक्रम शाह ने एक हज़ार नौ सौ चौरानवे में की थी. यह बाईस बेड की सुविधा प्रदान करने वाला एक मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल है. ऑनलाइन अप्वाइंटमेंट बुकिंग, वीडियो कंसल्टेशन, होम केयर सर्विसेज और इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर की सुविधा भी अस्पताल की वेबसाइट पर मौजूद हैं. जॉइंट रिप्लेसमेंट, ऑर्थोपेडिक्स, पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक, डेंटल केयर, आईवीएफ, ईएनटी, जनरल सर्जरी, ऑन्कोसर्जरी, यूरोलॉजी, ऑब्सटेट्रिक्स, गायनोकोलॉजी, डर्मेटोलॉजी, प्लास्टिक सर्जरी, कॉस्मेटिक सर्जरी और स्पाइन सर्जरी के क्षेत्रों में असपताल विशेषज्ञता प्रदान करता है. विजय शेल्बी अस्पताल कीमोथेरेपी, डायलिसिस, स्वास्थ्य जांच और स्पाइन क्लिनिक की सुविधा भी रोगियों को प्रदान करता है. अस्पताल द्वारा प्रदान की जाने वाली डायग्नोस्टिक सर्विसेज में टीएमटी, इकोकार्डियोग्राफी, यूएसजी, पाथ लैब और रेडियो इमेजिंग शामिल हैं. अस्पताल ट्रॉमा सेंटर, एक फुल-फ्लेज्ड आईवीएफ लैब और आईसीयू की सर्विसेज प्रदान करने के साथ चौबीसxसात आपातकालीन सेवाएं भी प्रदान करता है. |
अष्ट मंगल
वसन्तसेना - हाय, में जी गई, मैं जी गई ।
चाण्डाल - चलो, हम राजा को यह समाचार कह दें । ( जाते हैं । ) सोलहवाँ दृश्य
( धूता, रोहसेन, मैत्रेय और रदनिका । चिता प्रज्वलित है । ) धूता - पुत्र, मुझे छोड़ दे । विघ्न मत डाल, मैं आर्यपुत्र का भ्रमंगल सुनने से प्रथम ही अग्नि- प्रवेश करूंगी । (चिता की ओर बढ़ती है । ) रोहसेन - माँ, मुझे छोड़कर मत जाओ । ( दौड़ कर पकड़ लेता है । ) शक्लिक ~ आर्य, जल्दी चलिए ।
धूता - रदनिके, बालक को पकड़ ।
रदनिका - (रोती हुई) आप ही इसे सम्हालिए धूता - आर्य मंत्रेय, आप ही इसे पकड़ लें ।
मैत्रेय -- (रोकर) जी, सिद्धि के लिए ब्राह्मण को आगे कीजिए । आपसे प्रथम में अग्नि-प्रवेश करूंगा ।
धूता - हाय, दोनों मेरी बात नहीं मानते । ( पुत्र को गले लगाकर ) पुत्र, हम लोगों को तिलोदक देने को तू जीवित रह । हाय; आर्यपुत्र अव तेरी रक्षा न करेंगे ।
चारुदत्त - (तेजी से पहुँचकर ) मैं ही पुत्र की रक्षा करूंगा । धूता - अरे, आर्यपुत्र हैं । मेरा भाग्य ! मेरा सौभाग्य !
बालक - पिताजी, मुझे गोद में ले लो । मां, देखो पिताजी ने मुझे गोद में ले लिया । आ
चारुदत्त - प्रिये, पति के जीवित रहते अग्निप्रवेश ? यह कसा कठोर व्रत ?
मैत्रय - मेरी आँाँखें यह क्या देख रही हैं । मित्र, जय हो, जय हो । (लिंग करता है । ) .
रदनिका - प्रार्य, प्रणाम करती हूँ । ( चरणों पर गिरती है । ) चारुदत्त - रदनिके उठ । ( उठाता है । )
घता - ( वसन्तसेना से ) देखो वहिन, भाग्य के खेल । वसन्तसेना - श्रव तो सुख ही सुख है ।
( परस्परलिंगन करती हैं । ) शक्लिक - भाग्य से ग्रार्य, सव सुहृद वच गये । चारुदत्त - आपकी कृपा 1
शविलक - प्रायें, वसन्तसेने, राजा चारुदत्त आपको वधू बनाते हैं । ( घूंघंट खींचता है । )
वसन्तसेना -- कृतार्थ हुई ।
शक्लिक - प्रायें, इस भिक्षु का क्या हो ।
• चारुदत्त - इन्हें पृथ्वी के सारे विहारों का कुलपति वना दिया जाय । भिक्षु - ठीक है ।
शक्लिक - स्थावरक का क्या हो ?
चारुदत्त - इसे दासत्व से मुक्त कर दो। वे दोनों चाण्डाल अपने कुल के चौवरी वन जायें और चन्दनक को प्रधान सेनापति बना दो। शविलक- जैसी आज्ञा । किन्तु राजा का साला ?
चारुदत्त - वह जैसा था, वैसा ही रहे ?
शक्लिक - तो श्रव और क्या करूँ ?
चारुदत्त - मेरे चरित्र का कलंक दूर हो गया और मैंने शरणागत की रक्षा कर ली । मित्र आर्यक पृथ्वी के राजा हो गये । प्रिया वसन्तसेना मुझे मिल गई । श्रव और शेष क्या रह गया । ( सव जाते हैं । )
( ईसा की छठी शताब्दी ) अभिज्ञान शाकुन्तल
कालिदास की गणना संसार के सर्वश्रेष्ठ कवियों और नाटककारों में की जाती है । पाश्चात्त्य पण्डित भी उनके प्रशंसक हैं । सर विलियम जोन्स उन्हें शेक्सपियर के समकक्ष मानते हैं । जर्मन कवि गेटे शकुन्तला पर मुग्ध हैं। प्राचीन भारतीय कवियों ने भी कालिदास की उपमा, भाषामाधुर्य और चरित्र चित्रण की भूरि-भूरि प्रशंसा की है । बाणभट्ट कहते हैं कि जब कालिदास की सूक्तियाँ निकलती हैं तो उन्हें पढ़ कर उनसे, मधु-रस से मंजरियों के समान किसे प्रसन्नता नहीं होती । प्रसिद्ध है कि सब काव्यों में श्रेष्ठ शकुन्तला नाटक है । उसमें भी चतुर्थ
1-Wilt thou the bloom of springtide, the fruit of the year that doth wither?
Wilt thou what charms and pleases? Wilt thous what fills and keeps fed?
Wilt thou the earth and the heaven in one name mingle together?
I name Sakuntala, thee, and so is every thing said.
२ - निर्गतासु नवा कस्य कालिदासस्य सूक्तिपु
प्रीतिर्मधुरसासु मञ्जरीष्विव जायते ।।
अंक तथा चौथे अंक में भी चार श्लोक मनोहर हैं । कालिदास का ठीक समय अभी निर्धारित नहीं है । ई० पू० प्रथम शती का मानते हैं । कोई ई० की तीसरी चौथी शती का कहते हैं। कुछ लोगों का मत है कि मेघदूत और कुमारसम्भव आदि काव्यों के कर्ता कालिदास और अभिज्ञानशाकुन्तल के कर्ता कालिदास भिन्न व्यक्ति हैं। कहा जाता है कि वह विक्रमादित्य के सभापण्डित थे । पर विक्रमादित्य कौन हैं तथा उनका काल क्या है ? इस पर अभी मतभेद है। कुछ लोग इन्हें उज्जयिनी का कहते हैं, कुछ काश्मीर का, कुछ बंगाली इन्हें वंगदेश का निवासी बताते हैं ।
हमारा मत है कि कालिदास उज्जयिनी के ही निवासी थे । तथा हूणों का पराभव करने वाले यशोधर्मन् विक्रमादित्य के समकालीन और उन्हीं के प्रति थे । यशोधर्मन् ही को उनकी हूण विजय पर मालव जनों ने विक्रमादित्य की उपाधि दी थी, तथा पुरातन मालव सम्वत् को विक्रम सम्वत् कहकर प्रचलित किया था। कालिदास का नाम मातृगुप्त या । हूणपति मिहिंगल को परास्त कर यशोधर्मन् ने मातृगुप्त को काश्मीर का शासक बनाकर भेजा था । यह काल ई० की छठी शती ही ठहरता है ।
कालिदास के कुमारसम्भव और रघुवंश महाकाव्य, ऋतुसंहार और मेघदूत खण्डकाव्य और मालविकाग्निमित्र, विक्रमोर्वशी तथा अभिज्ञानशाकुन्तल नाटक बहुत प्रसिद्ध हैं। अभिज्ञानशाकुन्तल के वंगला, देवनागरी, काश्मीरी और दाक्षिणात्य चार संस्करण उपलब्ध हैं, जिनमें परस्पर बहुत अन्तर है ।
शाकुन्तल का वास्तविक नाम अभिज्ञानशाकुन्तल है । यह सात अंकका नाटक है। यह महाभारत पर आधारित कालिदास की
१ - काव्येषु नाटकं रम्यं तत्र रम्या शकुन्तला तत्रापि च चतुर्थोऽङ्कस्तत्र श्लोकचतुष्टयम् ।। | अष्ट मंगल वसन्तसेना - हाय, में जी गई, मैं जी गई । चाण्डाल - चलो, हम राजा को यह समाचार कह दें । सोलहवाँ दृश्य धूता - पुत्र, मुझे छोड़ दे । विघ्न मत डाल, मैं आर्यपुत्र का भ्रमंगल सुनने से प्रथम ही अग्नि- प्रवेश करूंगी । रोहसेन - माँ, मुझे छोड़कर मत जाओ । शक्लिक ~ आर्य, जल्दी चलिए । धूता - रदनिके, बालक को पकड़ । रदनिका - आप ही इसे सम्हालिए धूता - आर्य मंत्रेय, आप ही इसे पकड़ लें । मैत्रेय -- जी, सिद्धि के लिए ब्राह्मण को आगे कीजिए । आपसे प्रथम में अग्नि-प्रवेश करूंगा । धूता - हाय, दोनों मेरी बात नहीं मानते । पुत्र, हम लोगों को तिलोदक देने को तू जीवित रह । हाय; आर्यपुत्र अव तेरी रक्षा न करेंगे । चारुदत्त - मैं ही पुत्र की रक्षा करूंगा । धूता - अरे, आर्यपुत्र हैं । मेरा भाग्य ! मेरा सौभाग्य ! बालक - पिताजी, मुझे गोद में ले लो । मां, देखो पिताजी ने मुझे गोद में ले लिया । आ चारुदत्त - प्रिये, पति के जीवित रहते अग्निप्रवेश ? यह कसा कठोर व्रत ? मैत्रय - मेरी आँाँखें यह क्या देख रही हैं । मित्र, जय हो, जय हो । . रदनिका - प्रार्य, प्रणाम करती हूँ । चारुदत्त - रदनिके उठ । घता - देखो वहिन, भाग्य के खेल । वसन्तसेना - श्रव तो सुख ही सुख है । शक्लिक - भाग्य से ग्रार्य, सव सुहृद वच गये । चारुदत्त - आपकी कृपा एक शविलक - प्रायें, वसन्तसेने, राजा चारुदत्त आपको वधू बनाते हैं । वसन्तसेना -- कृतार्थ हुई । शक्लिक - प्रायें, इस भिक्षु का क्या हो । • चारुदत्त - इन्हें पृथ्वी के सारे विहारों का कुलपति वना दिया जाय । भिक्षु - ठीक है । शक्लिक - स्थावरक का क्या हो ? चारुदत्त - इसे दासत्व से मुक्त कर दो। वे दोनों चाण्डाल अपने कुल के चौवरी वन जायें और चन्दनक को प्रधान सेनापति बना दो। शविलक- जैसी आज्ञा । किन्तु राजा का साला ? चारुदत्त - वह जैसा था, वैसा ही रहे ? शक्लिक - तो श्रव और क्या करूँ ? चारुदत्त - मेरे चरित्र का कलंक दूर हो गया और मैंने शरणागत की रक्षा कर ली । मित्र आर्यक पृथ्वी के राजा हो गये । प्रिया वसन्तसेना मुझे मिल गई । श्रव और शेष क्या रह गया । अभिज्ञान शाकुन्तल कालिदास की गणना संसार के सर्वश्रेष्ठ कवियों और नाटककारों में की जाती है । पाश्चात्त्य पण्डित भी उनके प्रशंसक हैं । सर विलियम जोन्स उन्हें शेक्सपियर के समकक्ष मानते हैं । जर्मन कवि गेटे शकुन्तला पर मुग्ध हैं। प्राचीन भारतीय कवियों ने भी कालिदास की उपमा, भाषामाधुर्य और चरित्र चित्रण की भूरि-भूरि प्रशंसा की है । बाणभट्ट कहते हैं कि जब कालिदास की सूक्तियाँ निकलती हैं तो उन्हें पढ़ कर उनसे, मधु-रस से मंजरियों के समान किसे प्रसन्नता नहीं होती । प्रसिद्ध है कि सब काव्यों में श्रेष्ठ शकुन्तला नाटक है । उसमें भी चतुर्थ एक-Wilt thou the bloom of springtide, the fruit of the year that doth wither? Wilt thou what charms and pleases? Wilt thous what fills and keeps fed? Wilt thou the earth and the heaven in one name mingle together? I name Sakuntala, thee, and so is every thing said. दो - निर्गतासु नवा कस्य कालिदासस्य सूक्तिपु प्रीतिर्मधुरसासु मञ्जरीष्विव जायते ।। अंक तथा चौथे अंक में भी चार श्लोक मनोहर हैं । कालिदास का ठीक समय अभी निर्धारित नहीं है । ईशून्य पूशून्य प्रथम शती का मानते हैं । कोई ईशून्य की तीसरी चौथी शती का कहते हैं। कुछ लोगों का मत है कि मेघदूत और कुमारसम्भव आदि काव्यों के कर्ता कालिदास और अभिज्ञानशाकुन्तल के कर्ता कालिदास भिन्न व्यक्ति हैं। कहा जाता है कि वह विक्रमादित्य के सभापण्डित थे । पर विक्रमादित्य कौन हैं तथा उनका काल क्या है ? इस पर अभी मतभेद है। कुछ लोग इन्हें उज्जयिनी का कहते हैं, कुछ काश्मीर का, कुछ बंगाली इन्हें वंगदेश का निवासी बताते हैं । हमारा मत है कि कालिदास उज्जयिनी के ही निवासी थे । तथा हूणों का पराभव करने वाले यशोधर्मन् विक्रमादित्य के समकालीन और उन्हीं के प्रति थे । यशोधर्मन् ही को उनकी हूण विजय पर मालव जनों ने विक्रमादित्य की उपाधि दी थी, तथा पुरातन मालव सम्वत् को विक्रम सम्वत् कहकर प्रचलित किया था। कालिदास का नाम मातृगुप्त या । हूणपति मिहिंगल को परास्त कर यशोधर्मन् ने मातृगुप्त को काश्मीर का शासक बनाकर भेजा था । यह काल ईशून्य की छठी शती ही ठहरता है । कालिदास के कुमारसम्भव और रघुवंश महाकाव्य, ऋतुसंहार और मेघदूत खण्डकाव्य और मालविकाग्निमित्र, विक्रमोर्वशी तथा अभिज्ञानशाकुन्तल नाटक बहुत प्रसिद्ध हैं। अभिज्ञानशाकुन्तल के वंगला, देवनागरी, काश्मीरी और दाक्षिणात्य चार संस्करण उपलब्ध हैं, जिनमें परस्पर बहुत अन्तर है । शाकुन्तल का वास्तविक नाम अभिज्ञानशाकुन्तल है । यह सात अंकका नाटक है। यह महाभारत पर आधारित कालिदास की एक - काव्येषु नाटकं रम्यं तत्र रम्या शकुन्तला तत्रापि च चतुर्थोऽङ्कस्तत्र श्लोकचतुष्टयम् ।। |
Delhi Election 2020: दिल्ली में भले एग्जिट पोल में आम आदमी पार्टी तीसरी बार सरकार बनाने जा रही है। लेकिन एक चुनाव ऐसा भी रहा है जब आम आदमी पार्टी के सभी प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी।
Delhi Election 2020: दिल्ली विधानसभा चुनाव में 70 विधानसभा सीटों पर मतदान हो चुका है। इसके नतीजे 11 फरवरी को आ जाएंगे। एग्जिट पोल में अरविंद केजरीवाल को सबसे ज्यादा सीटों पर जीत मिलती हुई दिख रही है। लेकिन एक समय ऐसा भी था जब अरविंद केजरीवाल के 434 प्रत्याशियों मे से 414 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी।
अरविंद केजरीवाल की आप पार्टी 2012 में बनी थी। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2014 में भी अपनी किस्मत आजमाने की कोशिश की। अरविंद केजरीवाल ने अपने 434 उम्मीदवार उस चुनाव में उतारे थे। इतनी भारी संख्या में उम्मीदवार उतारने का उनका लक्ष्य बस इतना था कि आप पार्टी को चुनाव आयोग के द्वारा राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल जाए।
इस लक्ष्य को कुछ हद तक आप सरकार ने पूरा भी किया था। पंजाब से चार सीटों को जीतकर उसे पंजाब में स्टेट पार्टी का दर्जा मिल गया था। आप पार्टी ने देशभर में कुल वोटों का 2 प्रतिशत जुटाने में कामयाब रही थी। लेकिन इस चुनाव में आप पार्टी के 414 उम्मीदवारों की जमानत जब्त कर ली गई थी। आप पार्टी का उस चुनाव में हारना तय था। लेकिन फिर भी अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में 32. 9 प्रतिशत वोट जुटा लिए थे। दिल्ली में अरविंद केजरीवाल को कोई सीट नहीं मिल पाई थी।
कोई भी प्रत्याशी अगर चुनाव लड़ना चाहता है तो उसे चुनाव आयोग के पास एक निश्चित राशि जमा करनी होती है। जो जमानत राशि कहलाती है। लोकसभा चुनाव में हर प्रत्याशी को जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 34(1)(a) के अन्तर्गत 25 हजार रुपये की जमानत राशि जमा करवानी होती है। जब कोई भी उम्मीदवार कुल वोटों का 1/6 प्रतिशत भी मत नहीं जुटा पाता है तो चुनाव आयोग उसकी जमानत राशि जब्त कर लेता है।
| Delhi Election दो हज़ार बीस: दिल्ली में भले एग्जिट पोल में आम आदमी पार्टी तीसरी बार सरकार बनाने जा रही है। लेकिन एक चुनाव ऐसा भी रहा है जब आम आदमी पार्टी के सभी प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी। Delhi Election दो हज़ार बीस: दिल्ली विधानसभा चुनाव में सत्तर विधानसभा सीटों पर मतदान हो चुका है। इसके नतीजे ग्यारह फरवरी को आ जाएंगे। एग्जिट पोल में अरविंद केजरीवाल को सबसे ज्यादा सीटों पर जीत मिलती हुई दिख रही है। लेकिन एक समय ऐसा भी था जब अरविंद केजरीवाल के चार सौ चौंतीस प्रत्याशियों मे से चार सौ चौदह प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी। अरविंद केजरीवाल की आप पार्टी दो हज़ार बारह में बनी थी। उन्होंने लोकसभा चुनाव दो हज़ार चौदह में भी अपनी किस्मत आजमाने की कोशिश की। अरविंद केजरीवाल ने अपने चार सौ चौंतीस उम्मीदवार उस चुनाव में उतारे थे। इतनी भारी संख्या में उम्मीदवार उतारने का उनका लक्ष्य बस इतना था कि आप पार्टी को चुनाव आयोग के द्वारा राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल जाए। इस लक्ष्य को कुछ हद तक आप सरकार ने पूरा भी किया था। पंजाब से चार सीटों को जीतकर उसे पंजाब में स्टेट पार्टी का दर्जा मिल गया था। आप पार्टी ने देशभर में कुल वोटों का दो प्रतिशत जुटाने में कामयाब रही थी। लेकिन इस चुनाव में आप पार्टी के चार सौ चौदह उम्मीदवारों की जमानत जब्त कर ली गई थी। आप पार्टी का उस चुनाव में हारना तय था। लेकिन फिर भी अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में बत्तीस. नौ प्रतिशत वोट जुटा लिए थे। दिल्ली में अरविंद केजरीवाल को कोई सीट नहीं मिल पाई थी। कोई भी प्रत्याशी अगर चुनाव लड़ना चाहता है तो उसे चुनाव आयोग के पास एक निश्चित राशि जमा करनी होती है। जो जमानत राशि कहलाती है। लोकसभा चुनाव में हर प्रत्याशी को जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा चौंतीस के अन्तर्गत पच्चीस हजार रुपये की जमानत राशि जमा करवानी होती है। जब कोई भी उम्मीदवार कुल वोटों का एक/छः प्रतिशत भी मत नहीं जुटा पाता है तो चुनाव आयोग उसकी जमानत राशि जब्त कर लेता है। |
भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) से जुड़े किसानों ने शनिवार को गेंहू पर पांच सौ रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिए जाने समेत अन्य मांगो को लेकर हरियाणा के सभी जिलों में धरना देकर टोल फ्री करवा दिए। किसानों ने तीन घंटे तक टोल फ्री करवाए रखे और धरना प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) से जुड़े किसानों ने शनिवार को गेंहू पर पांच सौ रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिए जाने समेत अन्य मांगो को लेकर हरियाणा के सभी जिलों में धरना देकर टोल फ्री करवा दिए। किसानों ने तीन घंटे तक टोल फ्री करवाए रखे और धरना प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
बहादुरगढ़। गेहूं पर 500 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने और टोल प्लाजा से 15 किलोमीटर के दायरे में आने वाले वाहनों को फ्री करने की मांग को लेकर किसानों ने शनिवार छारा टोल को पर्ची मुक्त कर दिया। करीब तीन घंटे तक टोल फ्री रहा। इस दौरान किसानों ने अधिकारियों को एक ज्ञापन भी दिया।
दरअसल, तीन घंटे के लिए टोल फ्री करने की कॉल की गई थी। बहादुरगढ़ इलाके में छारा, रोहद और आसौदा-मांडोठी के बीच टोल प्लाजा हैं। सुबह करीब दस बजे ही चढूनी गुट के चिंटू प्रधान सहित काफी किसान व ग्रामीण छारा टोल पर जुटने शुरू हो गए। किसानों की बढ़ती संख्या को देखते हुए टोल कर्मचारी खुद ही अपने बूथों से पीछे हट गए। इसके बाद किसानों ने वहां धरना शुरू कर दिया और दोपहर एक बजे तक जमे रहे। जब किसान गए तो टोल पर शुल्क वसूली शुरू हो सकी। पुलिस को भी राहत मिली। तीन घंटे तक टोल फ्री रहने के चलते वाहन चालक भी बेरोक-टोक निकले। उधर, रोहद व केएमपी-आसौदा टोल पर स्थिति सामान्य रही। वहां शुल्क वसूला गया। हालांकि दोपहर तक यहां भी पुलिस सुरक्षा की दृष्टि से तैनात रही।
यमुनानगर जिले के मिलक माजरा स्थित टोल प्लाजा पर किसानों ने तीन घंटे तक धरना प्रदर्शन किया। शनिवार सुबह दस बजे के करीब भारतीय किसान यूनियन से जुड़े जिले भर के सैंकड़ो किसान जिला प्रधान संजू गुंदियाना के नेतृत्व में पंचकूला-देहरादून नेशनल हाईवे पर गांव मिलक माजरा के नजदीक स्थित टोल प्लाजा पर एकत्रित हो गए और धरना प्रदर्शन करने लगे। इस दौरान किसानों ने तीन घंटे तक धरना प्रदर्शन किया और टोल को फ्री रखा।
घरौंडा। पूर्व नियोजित कार्यक्रम के तहत भाकियू ने एनएच-44 पर स्थित बसताड़ा टोल प्लाजा को तीन घंटे के लिए टोल मुक्त कर दिया। किसानों ने टोल पर एकत्रित होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और किसानों की मांगों को तुरंत प्रभाव से माने जाने की मांग की। किसानों ने चेताया कि अभी आंदोलन की शुरूआत है। यदि सरकार किसान हित में फैसले नहीं लेती है तो आंदोलन आगे बढ़ा दिया जाएगा। टोल पर किसानों के प्रदर्शन की सूचना के बाद पुलिस अधिकारी व कर्मचारी मौके पर पहुंच गए।
भारतीय किसान यूनियन गेहूं पर 500 रुपए प्रति क्विंटल बोनस, 15 किलोमीटर तक के क्षेत्र को टोल फ्री किए जाने और बिना फास्टैग वाली गाडिय़ों की पहले की तरह पर्ची काटे जाने की मांग कर रहा है। जिसको लेकर भाकियू के नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने सोशल मीडिया के माध्यम से नौ अप्रैल को हरियाणा के टोल फ्री करवाकर प्रदर्शन करने की चेतावनी दी थी। जिसके बाद आज शनिवार को भाकियू के जिला अध्यक्ष अजय सिंह राणा के नेतृत्व में किसान बसताड़ा टोल प्लाजा पर पहुंच गए। जहां किसानों ने तीन घंटे के लिए टोल फ्री करवाया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
| भारतीय किसान यूनियन से जुड़े किसानों ने शनिवार को गेंहू पर पांच सौ रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिए जाने समेत अन्य मांगो को लेकर हरियाणा के सभी जिलों में धरना देकर टोल फ्री करवा दिए। किसानों ने तीन घंटे तक टोल फ्री करवाए रखे और धरना प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। भारतीय किसान यूनियन से जुड़े किसानों ने शनिवार को गेंहू पर पांच सौ रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिए जाने समेत अन्य मांगो को लेकर हरियाणा के सभी जिलों में धरना देकर टोल फ्री करवा दिए। किसानों ने तीन घंटे तक टोल फ्री करवाए रखे और धरना प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। बहादुरगढ़। गेहूं पर पाँच सौ रुपयापये प्रति क्विंटल बोनस देने और टोल प्लाजा से पंद्रह किलोग्राममीटर के दायरे में आने वाले वाहनों को फ्री करने की मांग को लेकर किसानों ने शनिवार छारा टोल को पर्ची मुक्त कर दिया। करीब तीन घंटे तक टोल फ्री रहा। इस दौरान किसानों ने अधिकारियों को एक ज्ञापन भी दिया। दरअसल, तीन घंटे के लिए टोल फ्री करने की कॉल की गई थी। बहादुरगढ़ इलाके में छारा, रोहद और आसौदा-मांडोठी के बीच टोल प्लाजा हैं। सुबह करीब दस बजे ही चढूनी गुट के चिंटू प्रधान सहित काफी किसान व ग्रामीण छारा टोल पर जुटने शुरू हो गए। किसानों की बढ़ती संख्या को देखते हुए टोल कर्मचारी खुद ही अपने बूथों से पीछे हट गए। इसके बाद किसानों ने वहां धरना शुरू कर दिया और दोपहर एक बजे तक जमे रहे। जब किसान गए तो टोल पर शुल्क वसूली शुरू हो सकी। पुलिस को भी राहत मिली। तीन घंटे तक टोल फ्री रहने के चलते वाहन चालक भी बेरोक-टोक निकले। उधर, रोहद व केएमपी-आसौदा टोल पर स्थिति सामान्य रही। वहां शुल्क वसूला गया। हालांकि दोपहर तक यहां भी पुलिस सुरक्षा की दृष्टि से तैनात रही। यमुनानगर जिले के मिलक माजरा स्थित टोल प्लाजा पर किसानों ने तीन घंटे तक धरना प्रदर्शन किया। शनिवार सुबह दस बजे के करीब भारतीय किसान यूनियन से जुड़े जिले भर के सैंकड़ो किसान जिला प्रधान संजू गुंदियाना के नेतृत्व में पंचकूला-देहरादून नेशनल हाईवे पर गांव मिलक माजरा के नजदीक स्थित टोल प्लाजा पर एकत्रित हो गए और धरना प्रदर्शन करने लगे। इस दौरान किसानों ने तीन घंटे तक धरना प्रदर्शन किया और टोल को फ्री रखा। घरौंडा। पूर्व नियोजित कार्यक्रम के तहत भाकियू ने एनएच-चौंतालीस पर स्थित बसताड़ा टोल प्लाजा को तीन घंटे के लिए टोल मुक्त कर दिया। किसानों ने टोल पर एकत्रित होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और किसानों की मांगों को तुरंत प्रभाव से माने जाने की मांग की। किसानों ने चेताया कि अभी आंदोलन की शुरूआत है। यदि सरकार किसान हित में फैसले नहीं लेती है तो आंदोलन आगे बढ़ा दिया जाएगा। टोल पर किसानों के प्रदर्शन की सूचना के बाद पुलिस अधिकारी व कर्मचारी मौके पर पहुंच गए। भारतीय किसान यूनियन गेहूं पर पाँच सौ रुपयापए प्रति क्विंटल बोनस, पंद्रह किलोग्राममीटर तक के क्षेत्र को टोल फ्री किए जाने और बिना फास्टैग वाली गाडिय़ों की पहले की तरह पर्ची काटे जाने की मांग कर रहा है। जिसको लेकर भाकियू के नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने सोशल मीडिया के माध्यम से नौ अप्रैल को हरियाणा के टोल फ्री करवाकर प्रदर्शन करने की चेतावनी दी थी। जिसके बाद आज शनिवार को भाकियू के जिला अध्यक्ष अजय सिंह राणा के नेतृत्व में किसान बसताड़ा टोल प्लाजा पर पहुंच गए। जहां किसानों ने तीन घंटे के लिए टोल फ्री करवाया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। |
दो प्यार करने वालों को मिलने के लिए कभी किसी बहाने की जरूरत नहीं पड़ती। मगर जब आपको उनसे मिलने के लिए वजह ढूंढनी पड़े तो समझ लीजिए आपके रिश्ते के बीच कुछ नहीं नहीं चल रहा है।
कई बार प्यार रिश्ते में अचानकर से ऐसे मोड़ आ जाते हैं कि आप सामने वाले से दूर होने लगते हैं। ऐसा लगता है जैसे सब खत्म हो गया हो। लाख कोशिश करने के बाद भी आप दोनों के बीच प्यार नहीं बच पाता। ऐसे में रिश्ते को जबरदस्ती खींचने का कोई मतलब नहीं बचता।
आपकी सोच आपको सही इशारा दे रही होती है। इसे दूर करने के लिए हम आपको कुछ ऐसे संकेत बताने जा रहे हैं जिससे आप जान पाएंगे कि रिश्ते में प्यार बचा हिया या नहीं। अगर इन संकेतों में से आधे भी संकेत आपके रिश्ते में हैं, तो आपको चौकन्ने हो जाना चाहिए।
पहले जब आप अपने पार्टनर से मिलते थे तो कितनी एक्साइटमेंट होती थी। भावनाएं हों या शारीरिक जुड़ाव, हर चीज में उत्साह होता है। लेकिन अगर यह उत्साह बिलकुल ही खत्म हो गया है तो यह एक बुरा संकेत है।
दो प्यार करने वालों को मिलने के लिए कभी किसी बहाने की जरूरत नहीं पड़ती। मगर जब आपको उनसे मिलने के लिए वजह ढूंढनी पड़े तो समझ लीजिए आपके रिश्ते के बीच कुछ नहीं नहीं चल रहा है।
उत्साह की कमी के कारण रिश्ते में बोरियत आना लाजमी है। लेकिन अगर आप दोनों को अकेले में से बिताने का मौका मिले, फिर भी आप दोनों एक दूसरे की कंपनी को एन्जॉय नहीं कर पाते हैं, तो समझ जाएं कि रिश्ता अंतिम मोड़ पर है।
प्यार का रिश्ता विश्वास और ईमानदारी पर टिका होता है। इन दोनों में से एक भी डगमगाया तो पूरी प्यार की इमारत तबाह समझो। विश्वास की कमी के कारण आपका रिश्ता खोखला हो गया है। और बिना विश्वास के कोई भी रिश्ता अधिक समय तक नहीं चलता है।
पार्टनर की कोई बात नहीं पसंद इसलिए हर बात पर झगड़ा होता है। कई बार हम बिना मतलब के भी झगड़ा करते हैं। मगर उसे सुलझाने के लिए पार्टनर से बात करने तक का मन नहीं करता है। यह साफ दर्शाता है कि ना आपको उनकी जरूरत है और ना ही रिश्ते में कुछ ठीक करना चाहते हैं।
| दो प्यार करने वालों को मिलने के लिए कभी किसी बहाने की जरूरत नहीं पड़ती। मगर जब आपको उनसे मिलने के लिए वजह ढूंढनी पड़े तो समझ लीजिए आपके रिश्ते के बीच कुछ नहीं नहीं चल रहा है। कई बार प्यार रिश्ते में अचानकर से ऐसे मोड़ आ जाते हैं कि आप सामने वाले से दूर होने लगते हैं। ऐसा लगता है जैसे सब खत्म हो गया हो। लाख कोशिश करने के बाद भी आप दोनों के बीच प्यार नहीं बच पाता। ऐसे में रिश्ते को जबरदस्ती खींचने का कोई मतलब नहीं बचता। आपकी सोच आपको सही इशारा दे रही होती है। इसे दूर करने के लिए हम आपको कुछ ऐसे संकेत बताने जा रहे हैं जिससे आप जान पाएंगे कि रिश्ते में प्यार बचा हिया या नहीं। अगर इन संकेतों में से आधे भी संकेत आपके रिश्ते में हैं, तो आपको चौकन्ने हो जाना चाहिए। पहले जब आप अपने पार्टनर से मिलते थे तो कितनी एक्साइटमेंट होती थी। भावनाएं हों या शारीरिक जुड़ाव, हर चीज में उत्साह होता है। लेकिन अगर यह उत्साह बिलकुल ही खत्म हो गया है तो यह एक बुरा संकेत है। दो प्यार करने वालों को मिलने के लिए कभी किसी बहाने की जरूरत नहीं पड़ती। मगर जब आपको उनसे मिलने के लिए वजह ढूंढनी पड़े तो समझ लीजिए आपके रिश्ते के बीच कुछ नहीं नहीं चल रहा है। उत्साह की कमी के कारण रिश्ते में बोरियत आना लाजमी है। लेकिन अगर आप दोनों को अकेले में से बिताने का मौका मिले, फिर भी आप दोनों एक दूसरे की कंपनी को एन्जॉय नहीं कर पाते हैं, तो समझ जाएं कि रिश्ता अंतिम मोड़ पर है। प्यार का रिश्ता विश्वास और ईमानदारी पर टिका होता है। इन दोनों में से एक भी डगमगाया तो पूरी प्यार की इमारत तबाह समझो। विश्वास की कमी के कारण आपका रिश्ता खोखला हो गया है। और बिना विश्वास के कोई भी रिश्ता अधिक समय तक नहीं चलता है। पार्टनर की कोई बात नहीं पसंद इसलिए हर बात पर झगड़ा होता है। कई बार हम बिना मतलब के भी झगड़ा करते हैं। मगर उसे सुलझाने के लिए पार्टनर से बात करने तक का मन नहीं करता है। यह साफ दर्शाता है कि ना आपको उनकी जरूरत है और ना ही रिश्ते में कुछ ठीक करना चाहते हैं। |
नई दिल्ली : दिल्ली में पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने आज आम आदमी पार्टी में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर बड़ा खुलासा किया। इस दौरान उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सतेंद्र जैन से 2 करोड़ रूपए लिए। यह राशि सतेंद्र जैन के एक रिश्तेदार की डील करवाने के एवज में ली गई थी। दरअसल डील 50 करोड़ की की जाना थी। कपिल मिश्रा ने आज टैंकर घोटाले को लेकर खुलासा करने से पहले मीडिया द्वारा किए जाने वाले सवालों का जवाब दिया।
अपना खुलासा करने पहुंचे कपिल मिश्रा को पत्रकारों ने घेर लिया। मीडियाकर्मियों में कपिल मिश्रा से चर्चा करने के लिए होड़ लगी रही। कपिल मिश्रा ने कहा कि महात्मा गांधी की समाधि पर आकर बहुत ऊर्जा मिलती है। हम इस पार्टी को छोड़कर नहीं जाऐंगे। हां पार्टी में कुछ गंदगी आ गई है तो उसकी सफाई करने की शुरूआत बापू की समाधि से करेंगे। यह कार्यकर्ताओं की पार्टी है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी मैं नहीं छोड़ूंगा मुझे पार्टी से कोई नहीं निकाल सकता।
उन्होंने कहा कि किसी चीज को छुपाने के लिए क्या सीएम केजरीवाल को झूठ बोलना पड़ गया। टैंकर घोटाले को लेकर पूर्व मंत्री शीला दीक्षित पर एक रिपोर्ट तैयार की थी जब मैं मंत्री बना था। मगर तब से अब तक इस मामले में क्या हुआ। एंटी करप्शन ब्यूरो को पत्र लिखने के बाद मैं सीएम अरविंद केजरीवाल से मिलने पहुंचा। मैंने पहले इस बारे में जानकारी दी फिर मुझे हटाया गया। उन्होंने कहा कि मैं उपराज्यपाल से मिल चुका हूं।
उन्हें वह जानकारी दी जो मैंने आंखों से देखी। उन्होंने कहा कि करोड़ों रूपए की फंडिंग के मामले पंजाब से आए, राज्य सरकार के मामले आए, मनी लाॅन्ड्रिंग के केस को लेकर हमें यही लगा कि यदि सीएम अरविंद केजरीवाल के ध्यान में यह बात आएगी तो वे उस पर कार्रवाई करेंगे उसे ठीक करेंगे मगर ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि परसों मैंने अपनी आंखों से देखा है कि सत्येंद्र जैन ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को 2 करोड़ रूपए नकद दिए।
जब मैंने सवाल किए तो उन्होंने कहा कि राजनीति में कुछ बातें होती है जो उसी वक्त नहीं बताई जाती हैं। मैंने बाद में एंटीकरप्शन डिपार्टमेंट को जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मेरा सवाल यह है कि आखिर यह राशि कहां से आई। उन्होंने कहा कि मनी लाॅन्ड्रिंग, ब्लैक मनी के मामले में सतेंद्र जैन को लेकर जो जानकारियां सामने आई हैं वह सभी जानते हैं। मैंने सतेंद्र जैन द्वारा असंगत तरह से रिश्तेदार को पदासीन करने को लेकर सवाल किए थे।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2004 से ही मैं आप के आंदोलन से जुड़ा था। काॅमनवेल्थ घोटाले मामले में, जेसिका लाल हत्याकांड के मामले में मैंने विरोध किया। मैं इंडिया अगेंस्ट करप्शन का संस्थापक सदस्य हूं। मैंने अपनी आंखों से देखा है कि सतेंद्र जैन ने सीएम अरविंद केजरीवाल को 2 करोड़ रूपए दिए थे। उन्होंने कहा कि वे सीबीआई को भी इस मामले में जानकारी देंगे। उन्होंने कहा कि सतेंद्र जैन से जुड़े भ्रष्टाचार सभी के सामने आने जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि सीएम केजरीवाल के रिश्तेदार की डील सतेंद्र जैन ने 50 करोड़ रूपए में करवाई।
इससे पहले कपिल मिश्रा ने राज्य के उपराज्यपाल से भेंट की थी, जिसके बाद मीडिया द्वारा किए गए सवालों पर उन्होंने कहा था कि आम आदमी पार्टी हमने खुद बनाई है। हम जैसे कई कार्यकर्ताओं ने इसे बनाया है। मैं काॅमनवेल्थ घोटाले के खिलाफ आप की ओर से विरोध में खड़ा हुआ था। हम सच बोलेंगे। उन्होंने कहा कि मैं अकेला मंत्री हूं जो बेदाग है, जिस पर भ्रष्टाचार का कोई मामला नहीं चल रहा। जिसने अपने रिश्तेदार को कोई पद नहीं दिया। मुझे यदि प्राण भी देना पड़े तो भी पीछे नहीं हटूगा।
उपराज्यपाल अनिल बैजल से मिलने के बाद उन्होंने मीडिया के सवालों को लेकर कहा कि जब हम भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस में होने वाले भ्रष्टाचार के खिलाफ थे तो फिर अब हम हमारी पार्टी में होने वाले भ्रष्टाचार को लेकर कैसे चुप बैठेंगे। उन्होंने दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल से भेंट करने के बाद ट्विटर पर ट्विट भी किया, जिसमें उन्होंने पार्टी के सदस्यों की ओर संकेत करते हुए कहा कि उन्होंने गलत तरह से पैसा लिया। वे इसके गवाह हैं। ऐसे में वे खामोश कैसे रहते। उन्होंने ट्विटर पर लिखा था कि आम आदमी पार्टी के नेताओं और विधायकों को सीएम अरविंद केजरीवाल फोन कर रहे हैं। मैं पत्रकारों से जो चर्चा करने वाला हूं उसके पूर्व किसी बड़ी साजिश की तैयारी की जा रही है। मगर हम न तो रूकेंगे और न ही झुकेंगे।
कपिल मिश्रा ने दावा किया और लिखा कि उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भ्रष्टाचार को लेकर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा कहा गया है कि उनकी भेंट सीएम केजरीवाल से नहीं हुई तो फिर मुख्यमंत्री आवास के सीसीटीवी फुटेज जांचे जाना चाहिए। दूसरी ओर आज रविवार को आम आदमी पार्टी के नेताओं की बैठक राज्य के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास पर हुई। हालांकि यह साफ नहीं हो पाया कि बैठक में क्या कहा गया।
| नई दिल्ली : दिल्ली में पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने आज आम आदमी पार्टी में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर बड़ा खुलासा किया। इस दौरान उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सतेंद्र जैन से दो करोड़ रूपए लिए। यह राशि सतेंद्र जैन के एक रिश्तेदार की डील करवाने के एवज में ली गई थी। दरअसल डील पचास करोड़ की की जाना थी। कपिल मिश्रा ने आज टैंकर घोटाले को लेकर खुलासा करने से पहले मीडिया द्वारा किए जाने वाले सवालों का जवाब दिया। अपना खुलासा करने पहुंचे कपिल मिश्रा को पत्रकारों ने घेर लिया। मीडियाकर्मियों में कपिल मिश्रा से चर्चा करने के लिए होड़ लगी रही। कपिल मिश्रा ने कहा कि महात्मा गांधी की समाधि पर आकर बहुत ऊर्जा मिलती है। हम इस पार्टी को छोड़कर नहीं जाऐंगे। हां पार्टी में कुछ गंदगी आ गई है तो उसकी सफाई करने की शुरूआत बापू की समाधि से करेंगे। यह कार्यकर्ताओं की पार्टी है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी मैं नहीं छोड़ूंगा मुझे पार्टी से कोई नहीं निकाल सकता। उन्होंने कहा कि किसी चीज को छुपाने के लिए क्या सीएम केजरीवाल को झूठ बोलना पड़ गया। टैंकर घोटाले को लेकर पूर्व मंत्री शीला दीक्षित पर एक रिपोर्ट तैयार की थी जब मैं मंत्री बना था। मगर तब से अब तक इस मामले में क्या हुआ। एंटी करप्शन ब्यूरो को पत्र लिखने के बाद मैं सीएम अरविंद केजरीवाल से मिलने पहुंचा। मैंने पहले इस बारे में जानकारी दी फिर मुझे हटाया गया। उन्होंने कहा कि मैं उपराज्यपाल से मिल चुका हूं। उन्हें वह जानकारी दी जो मैंने आंखों से देखी। उन्होंने कहा कि करोड़ों रूपए की फंडिंग के मामले पंजाब से आए, राज्य सरकार के मामले आए, मनी लाॅन्ड्रिंग के केस को लेकर हमें यही लगा कि यदि सीएम अरविंद केजरीवाल के ध्यान में यह बात आएगी तो वे उस पर कार्रवाई करेंगे उसे ठीक करेंगे मगर ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि परसों मैंने अपनी आंखों से देखा है कि सत्येंद्र जैन ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को दो करोड़ रूपए नकद दिए। जब मैंने सवाल किए तो उन्होंने कहा कि राजनीति में कुछ बातें होती है जो उसी वक्त नहीं बताई जाती हैं। मैंने बाद में एंटीकरप्शन डिपार्टमेंट को जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मेरा सवाल यह है कि आखिर यह राशि कहां से आई। उन्होंने कहा कि मनी लाॅन्ड्रिंग, ब्लैक मनी के मामले में सतेंद्र जैन को लेकर जो जानकारियां सामने आई हैं वह सभी जानते हैं। मैंने सतेंद्र जैन द्वारा असंगत तरह से रिश्तेदार को पदासीन करने को लेकर सवाल किए थे। उन्होंने कहा कि वर्ष दो हज़ार चार से ही मैं आप के आंदोलन से जुड़ा था। काॅमनवेल्थ घोटाले मामले में, जेसिका लाल हत्याकांड के मामले में मैंने विरोध किया। मैं इंडिया अगेंस्ट करप्शन का संस्थापक सदस्य हूं। मैंने अपनी आंखों से देखा है कि सतेंद्र जैन ने सीएम अरविंद केजरीवाल को दो करोड़ रूपए दिए थे। उन्होंने कहा कि वे सीबीआई को भी इस मामले में जानकारी देंगे। उन्होंने कहा कि सतेंद्र जैन से जुड़े भ्रष्टाचार सभी के सामने आने जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि सीएम केजरीवाल के रिश्तेदार की डील सतेंद्र जैन ने पचास करोड़ रूपए में करवाई। इससे पहले कपिल मिश्रा ने राज्य के उपराज्यपाल से भेंट की थी, जिसके बाद मीडिया द्वारा किए गए सवालों पर उन्होंने कहा था कि आम आदमी पार्टी हमने खुद बनाई है। हम जैसे कई कार्यकर्ताओं ने इसे बनाया है। मैं काॅमनवेल्थ घोटाले के खिलाफ आप की ओर से विरोध में खड़ा हुआ था। हम सच बोलेंगे। उन्होंने कहा कि मैं अकेला मंत्री हूं जो बेदाग है, जिस पर भ्रष्टाचार का कोई मामला नहीं चल रहा। जिसने अपने रिश्तेदार को कोई पद नहीं दिया। मुझे यदि प्राण भी देना पड़े तो भी पीछे नहीं हटूगा। उपराज्यपाल अनिल बैजल से मिलने के बाद उन्होंने मीडिया के सवालों को लेकर कहा कि जब हम भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस में होने वाले भ्रष्टाचार के खिलाफ थे तो फिर अब हम हमारी पार्टी में होने वाले भ्रष्टाचार को लेकर कैसे चुप बैठेंगे। उन्होंने दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल से भेंट करने के बाद ट्विटर पर ट्विट भी किया, जिसमें उन्होंने पार्टी के सदस्यों की ओर संकेत करते हुए कहा कि उन्होंने गलत तरह से पैसा लिया। वे इसके गवाह हैं। ऐसे में वे खामोश कैसे रहते। उन्होंने ट्विटर पर लिखा था कि आम आदमी पार्टी के नेताओं और विधायकों को सीएम अरविंद केजरीवाल फोन कर रहे हैं। मैं पत्रकारों से जो चर्चा करने वाला हूं उसके पूर्व किसी बड़ी साजिश की तैयारी की जा रही है। मगर हम न तो रूकेंगे और न ही झुकेंगे। कपिल मिश्रा ने दावा किया और लिखा कि उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भ्रष्टाचार को लेकर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा कहा गया है कि उनकी भेंट सीएम केजरीवाल से नहीं हुई तो फिर मुख्यमंत्री आवास के सीसीटीवी फुटेज जांचे जाना चाहिए। दूसरी ओर आज रविवार को आम आदमी पार्टी के नेताओं की बैठक राज्य के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास पर हुई। हालांकि यह साफ नहीं हो पाया कि बैठक में क्या कहा गया। |
अलीगढ़ कान्फ्रेंस में मुस्लिम नेताओं ने फिर पुरानी साम्प्रदायिक जहनियत का प्रदर्शन किया । २८ दिसम्बर, १९५५ को प्रधान मन्त्री श्री नेहरू ने कालीकट में एक सार्वजनिक सभा मे कहा--- "मुझे बताया गया है कि मालावार मे मुस्लिम लीग के वंशज अभी मौजूद है। यह आश्चर्य की बात है कि लोग जैसा बदनाम सगठन, जिसने भारत की आजादी के मार्ग में रोड़े अटकाए और भारतवासियों को अपार कष्ट दिए, पुनः मालाबार में अपना कृष्ण मुख चमका रहा है ।" यह और भी अधिक आश्चर्य की बात है कि केरल मे १९६० के निर्वाचनों में कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के साथ समझौता किया । पंजाब में अकाली दल ने फिर अपना सर उठा लिया है । अकाली नेता मास्टर तारासिह के अनुसार सिक्खो की दृष्टि में धर्म और राजनीति अभिन्न है। इधर सिक्खों ने भी पंजाब में पंजाबी सूवे की मांग की थी क्योकि "पंजाबी सूबे के बनने से न तो किसी सम्प्रदाय को किसी अन्य सम्प्रदाय के अधीन रहना पड़ेगा और इससे भाषा की समस्या भी हल हो जाएगी ।"2
भारत में न तो ससदीय लोकतन्त्र सफल होगा और न धर्मनिरपेक्ष आदर्श प्राप्त किया जा सकेगा, यदि साम्प्रदायिक तत्त्वो को पूर्ण स्वतन्त्रता दे दी जाएगी और साम्प्रदायिक दल इसी प्रकार देश के राजनीतिक वातावरण को दूषित करते रहेंगे और 'हिन्दू राष्ट्र' जैसे पुराने और सिरफिरे विचारों का प्रचार करते रहेगें । साम्प्रदायिक दल औचित्य का अतिक्रमण करते है और विचार स्वातन्त्र्य का नाश करते है। ऐसे दल एक नागरिक और दूसरे नागरिक के बीच द्वेषपूर्ण विभेद मानते है; और वे असहिष्णु, कात्मक और उद्दण्ड होते हैं, वे देश की एकता और स्थिरता का नाश करते है । यदि भारतीयों को उन्नतिशील और लोकतन्त्रात्मक राष्ट्र के रूप में सगठित करना है तो हमे अपने साम्प्रदायिक विचारों पर पुनर्विचार करना ही होगा । हमारे राष्ट्र मे सभी विश्वासों और सभी धर्मो के व्यक्ति निवास करते हैं और लोकतन्त्र मनुष्यों में भेद नही करता । सभी नागरिकों के समान अधिकार है और समान विशेषाधिकार है ।
बहुदल पद्धति पद्धति ( The Multiple Party System ) -- चूकि भारत में कई साम्प्रदायिक दल है और सशक्त एव संगठित विरोधी दल का प्रभाव है, इसलिए अनेको राजनीतिक दलों की मानो बाढ़ सी आ गई है। केवल लोक सभा में ही अनेको राजनीतिक दल है । इसके अतिरिक्त बहुत से निर्दल सदस्य भी है। भारत एक विशाल देश है, जिसमे विभिन्न लोग निवास करते हैं, जिनकी अलग भाषा हे और जिन्हें अपनीअपनी संस्कृतियो पर अभिमान है। ऐसे देश में इतने अधिक राजनीतिक दलों और समुदायों का उद्भव भविष्य के लिए कष्टकारी होगा क्योकि इससे लोगों में प्रान्तीय और क्षेत्रीय भावना का जोर होगा और पृथकतावादी हितो को प्रोत्साहन मिलेगा । ऐसी स्थिति में राष्ट्रीय मतैक्य समाप्त हो जाएगा। इसके अतिरिक्त बहुसख्यक दलो
I. The Tribune, Ambala Cantt., December 20, 1955, p. 10. 2. ११ फरवरी, १९५६ को अकाली कान्फेस के अमृतसर अधिवेशन के अवसर पर मास्टर तारासिंह ने जो अध्यक्ष पद से भाषण दिया था, उसे देखिये । | अलीगढ़ कान्फ्रेंस में मुस्लिम नेताओं ने फिर पुरानी साम्प्रदायिक जहनियत का प्रदर्शन किया । अट्ठाईस दिसम्बर, एक हज़ार नौ सौ पचपन को प्रधान मन्त्री श्री नेहरू ने कालीकट में एक सार्वजनिक सभा मे कहा--- "मुझे बताया गया है कि मालावार मे मुस्लिम लीग के वंशज अभी मौजूद है। यह आश्चर्य की बात है कि लोग जैसा बदनाम सगठन, जिसने भारत की आजादी के मार्ग में रोड़े अटकाए और भारतवासियों को अपार कष्ट दिए, पुनः मालाबार में अपना कृष्ण मुख चमका रहा है ।" यह और भी अधिक आश्चर्य की बात है कि केरल मे एक हज़ार नौ सौ साठ के निर्वाचनों में कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के साथ समझौता किया । पंजाब में अकाली दल ने फिर अपना सर उठा लिया है । अकाली नेता मास्टर तारासिह के अनुसार सिक्खो की दृष्टि में धर्म और राजनीति अभिन्न है। इधर सिक्खों ने भी पंजाब में पंजाबी सूवे की मांग की थी क्योकि "पंजाबी सूबे के बनने से न तो किसी सम्प्रदाय को किसी अन्य सम्प्रदाय के अधीन रहना पड़ेगा और इससे भाषा की समस्या भी हल हो जाएगी ।"दो भारत में न तो ससदीय लोकतन्त्र सफल होगा और न धर्मनिरपेक्ष आदर्श प्राप्त किया जा सकेगा, यदि साम्प्रदायिक तत्त्वो को पूर्ण स्वतन्त्रता दे दी जाएगी और साम्प्रदायिक दल इसी प्रकार देश के राजनीतिक वातावरण को दूषित करते रहेंगे और 'हिन्दू राष्ट्र' जैसे पुराने और सिरफिरे विचारों का प्रचार करते रहेगें । साम्प्रदायिक दल औचित्य का अतिक्रमण करते है और विचार स्वातन्त्र्य का नाश करते है। ऐसे दल एक नागरिक और दूसरे नागरिक के बीच द्वेषपूर्ण विभेद मानते है; और वे असहिष्णु, कात्मक और उद्दण्ड होते हैं, वे देश की एकता और स्थिरता का नाश करते है । यदि भारतीयों को उन्नतिशील और लोकतन्त्रात्मक राष्ट्र के रूप में सगठित करना है तो हमे अपने साम्प्रदायिक विचारों पर पुनर्विचार करना ही होगा । हमारे राष्ट्र मे सभी विश्वासों और सभी धर्मो के व्यक्ति निवास करते हैं और लोकतन्त्र मनुष्यों में भेद नही करता । सभी नागरिकों के समान अधिकार है और समान विशेषाधिकार है । बहुदल पद्धति पद्धति -- चूकि भारत में कई साम्प्रदायिक दल है और सशक्त एव संगठित विरोधी दल का प्रभाव है, इसलिए अनेको राजनीतिक दलों की मानो बाढ़ सी आ गई है। केवल लोक सभा में ही अनेको राजनीतिक दल है । इसके अतिरिक्त बहुत से निर्दल सदस्य भी है। भारत एक विशाल देश है, जिसमे विभिन्न लोग निवास करते हैं, जिनकी अलग भाषा हे और जिन्हें अपनीअपनी संस्कृतियो पर अभिमान है। ऐसे देश में इतने अधिक राजनीतिक दलों और समुदायों का उद्भव भविष्य के लिए कष्टकारी होगा क्योकि इससे लोगों में प्रान्तीय और क्षेत्रीय भावना का जोर होगा और पृथकतावादी हितो को प्रोत्साहन मिलेगा । ऐसी स्थिति में राष्ट्रीय मतैक्य समाप्त हो जाएगा। इसके अतिरिक्त बहुसख्यक दलो I. The Tribune, Ambala Cantt., December बीस, एक हज़ार नौ सौ पचपन, p. दस. दो. ग्यारह फरवरी, एक हज़ार नौ सौ छप्पन को अकाली कान्फेस के अमृतसर अधिवेशन के अवसर पर मास्टर तारासिंह ने जो अध्यक्ष पद से भाषण दिया था, उसे देखिये । |
बिक्री के मुनाफे वित्तीय प्रबंधक पता चलता है कि?
बस यह सुनिश्चित उत्पादन लाभ के लिए पर्याप्त नहीं है। ऐसा नहीं है कि इसे बेचने के लिए जरूरी है कि स्पष्ट है। बिक्री प्रक्रिया (कार्यान्वयन) उत्पादन की तुलना में लगभग अधिक कठिन हो सकता है, लेकिन इसके महत्व को शायद ही overestimated जा सकता है। यह स्पष्ट है कि क्रियान्वयन की प्रक्रिया की प्रभावशीलता सावधान ध्यान देने की आवश्यकता। व्यापार के संचालन के कई अन्य पहलुओं की तरह, विपणन गतिविधियों मार्जिन मापा जा सकता है। इस मामले में, यह आंकड़ा है कि बिक्री पर लाभ कहा जाता है के लिए समझ में आता है।
इस अनुपात से पता चलता है कि आय का कितना प्रतिशत लाभ लेता है। यदि वहाँ जानकारी सूचकांक गणना एक पूरे के रूप उद्यम पर और अलग-अलग उत्पादों के लिए दोनों बनाया जा सकता है। कुल बिक्री पर लाभ से ऊपर का आधार है, आय की राशि के लिए लाभ का अनुपात प्राप्त किया। राजस्व का निर्धारण किया दर हमेशा एक ही कोई समस्या नहीं है, उसके साथ लगभग कभी नहीं रहा है। लेकिन लाभ अनुपात के साथ यह और अधिक जटिल है, क्योंकि यह कई तरीकों से बड़ी संख्या द्वारा निर्धारित किया जा सकता है, खाते में कुछ कारकों लेने और दूसरों पर विचार नहीं। और अधिक विस्तार में इस समय करते हैं।
कई मार्जिन शुद्ध आय के आधार पर गणना कर रहे हैं। इस मामले में यह भी ऐसा ही करने के लिए, और इस मूल्य का उपयोग करना संभव है। गणना लाभ मार्जिन, लाभ की हिस्सेदारी से पता चलता खाते में कारकों की संख्या सबसे अधिक के प्रभाव लेने। ये मूल्य निर्धारण, लागत प्रबंधन नीति, विशेष रूप से कर, शुल्क ऋण पूंजी, और दूसरों के लिए शामिल हैं। इस गणना के साथ समस्या यह है कि शुद्ध लाभ कारक है कि उत्पादन और उत्पादों की बिक्री, कि अन्य आय और व्यय से है, से संबंधित नहीं हैं पर निर्भर करता है। इसके अलावा, के लिए करों और शुल्कों को छोड़कर ऋण पूंजी स्थिति में अन्य कंपनियों के स्तर के साथ गणना की मूल्य की तुलना है कि वे कर लगाया जाता है या अन्यथा एक अलग पूंजी की संरचना करने के लिए अनुमति नहीं है।
इसके बाद के संस्करण के कारण लो कर-पूर्व लाभ आंकड़ा या के उपयोग के द्वारा प्राप्त किया जा सकता की बिक्री से लाभ। के आधार पर गणना कर-पूर्व लाभ बिक्री के मार्जिन कराधान के अलावा अन्य कारकों के प्रभाव में उत्पादन और बिक्री की दक्षता में पता चलता है और आप अलग अलग कर स्थिति वाले संगठन तुलना करने के लिए अनुमति देता है। हालांकि, इस मामले में, लाभ अभी भी कंपनी है, जो कुछ हद तक है विकृत जानकारी बुनियादी उत्पादन के बारे में है की अन्य गतिविधियों के प्रभाव का सामना कर रहा है। अन्य गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण आंकड़े अगर यह बिक्री से लाभ की गणना करने के लिए सलाह दी जाती है। टैक्स और अन्य गतिविधियों को छोड़कर, की बिक्री की लाभप्रदता किसी दिए गए मूल्य निर्धारण और लागत नीतियों की प्रभावशीलता को दर्शाता है। गणना डाटा दर सबसे आसान विभिन्न कंपनियों के बीच तुलना करने के लिए जिस तरह से की मदद से, के रूप में खाते में केवल सर्वाधिक महत्वपूर्ण कारकों में ले लिया।
आप विश्लेषण के सबसे अक्सर इस्तेमाल किया तरीकों में से एक देख सकते हैं अन्य कंपनियों के लिए परिभाषित समान गुणांक के साथ कंपनियों के प्रदर्शन की तुलना करने के लिए है। इसके अलावा इस तरह की तुलना से इस्तेमाल किया जा सकता है और औसत मूल्यों के साथ तुलना की। हालांकि, सबसे अधिक इस्तेमाल किया क्षैतिज विश्लेषण, कई अवधियों के लिए उद्यम के प्रदर्शन के बीच तुलना में होते हैं जो। संकेतक में परिवर्तन द्वारा निर्धारित और रुझान है कि हम विभिन्न प्रबंधन के फैसले की प्रभावशीलता का आकलन करने के लिए अनुमति की पहचान कर रहे हैं।
यह ध्यान देने योग्य है कि लगभग लाभप्रदता के सभी संकेतक बारीकी से interrelated रहे हैं और एक दूसरे को प्रभावित लायक है। इस प्रकार, बिक्री क्षमता पर विशेष रूप से मजबूत प्रभाव की लाभप्रदता इक्विटी की (किफ़ायती हैं) और संपत्ति। अनुसंधान के एक विशेष प्रकार का है, जो कारक विश्लेषण कहा जाता है का उपयोग करके प्रभाव आप कर सकते हैं के स्तर का आकलन करें।
| बिक्री के मुनाफे वित्तीय प्रबंधक पता चलता है कि? बस यह सुनिश्चित उत्पादन लाभ के लिए पर्याप्त नहीं है। ऐसा नहीं है कि इसे बेचने के लिए जरूरी है कि स्पष्ट है। बिक्री प्रक्रिया उत्पादन की तुलना में लगभग अधिक कठिन हो सकता है, लेकिन इसके महत्व को शायद ही overestimated जा सकता है। यह स्पष्ट है कि क्रियान्वयन की प्रक्रिया की प्रभावशीलता सावधान ध्यान देने की आवश्यकता। व्यापार के संचालन के कई अन्य पहलुओं की तरह, विपणन गतिविधियों मार्जिन मापा जा सकता है। इस मामले में, यह आंकड़ा है कि बिक्री पर लाभ कहा जाता है के लिए समझ में आता है। इस अनुपात से पता चलता है कि आय का कितना प्रतिशत लाभ लेता है। यदि वहाँ जानकारी सूचकांक गणना एक पूरे के रूप उद्यम पर और अलग-अलग उत्पादों के लिए दोनों बनाया जा सकता है। कुल बिक्री पर लाभ से ऊपर का आधार है, आय की राशि के लिए लाभ का अनुपात प्राप्त किया। राजस्व का निर्धारण किया दर हमेशा एक ही कोई समस्या नहीं है, उसके साथ लगभग कभी नहीं रहा है। लेकिन लाभ अनुपात के साथ यह और अधिक जटिल है, क्योंकि यह कई तरीकों से बड़ी संख्या द्वारा निर्धारित किया जा सकता है, खाते में कुछ कारकों लेने और दूसरों पर विचार नहीं। और अधिक विस्तार में इस समय करते हैं। कई मार्जिन शुद्ध आय के आधार पर गणना कर रहे हैं। इस मामले में यह भी ऐसा ही करने के लिए, और इस मूल्य का उपयोग करना संभव है। गणना लाभ मार्जिन, लाभ की हिस्सेदारी से पता चलता खाते में कारकों की संख्या सबसे अधिक के प्रभाव लेने। ये मूल्य निर्धारण, लागत प्रबंधन नीति, विशेष रूप से कर, शुल्क ऋण पूंजी, और दूसरों के लिए शामिल हैं। इस गणना के साथ समस्या यह है कि शुद्ध लाभ कारक है कि उत्पादन और उत्पादों की बिक्री, कि अन्य आय और व्यय से है, से संबंधित नहीं हैं पर निर्भर करता है। इसके अलावा, के लिए करों और शुल्कों को छोड़कर ऋण पूंजी स्थिति में अन्य कंपनियों के स्तर के साथ गणना की मूल्य की तुलना है कि वे कर लगाया जाता है या अन्यथा एक अलग पूंजी की संरचना करने के लिए अनुमति नहीं है। इसके बाद के संस्करण के कारण लो कर-पूर्व लाभ आंकड़ा या के उपयोग के द्वारा प्राप्त किया जा सकता की बिक्री से लाभ। के आधार पर गणना कर-पूर्व लाभ बिक्री के मार्जिन कराधान के अलावा अन्य कारकों के प्रभाव में उत्पादन और बिक्री की दक्षता में पता चलता है और आप अलग अलग कर स्थिति वाले संगठन तुलना करने के लिए अनुमति देता है। हालांकि, इस मामले में, लाभ अभी भी कंपनी है, जो कुछ हद तक है विकृत जानकारी बुनियादी उत्पादन के बारे में है की अन्य गतिविधियों के प्रभाव का सामना कर रहा है। अन्य गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण आंकड़े अगर यह बिक्री से लाभ की गणना करने के लिए सलाह दी जाती है। टैक्स और अन्य गतिविधियों को छोड़कर, की बिक्री की लाभप्रदता किसी दिए गए मूल्य निर्धारण और लागत नीतियों की प्रभावशीलता को दर्शाता है। गणना डाटा दर सबसे आसान विभिन्न कंपनियों के बीच तुलना करने के लिए जिस तरह से की मदद से, के रूप में खाते में केवल सर्वाधिक महत्वपूर्ण कारकों में ले लिया। आप विश्लेषण के सबसे अक्सर इस्तेमाल किया तरीकों में से एक देख सकते हैं अन्य कंपनियों के लिए परिभाषित समान गुणांक के साथ कंपनियों के प्रदर्शन की तुलना करने के लिए है। इसके अलावा इस तरह की तुलना से इस्तेमाल किया जा सकता है और औसत मूल्यों के साथ तुलना की। हालांकि, सबसे अधिक इस्तेमाल किया क्षैतिज विश्लेषण, कई अवधियों के लिए उद्यम के प्रदर्शन के बीच तुलना में होते हैं जो। संकेतक में परिवर्तन द्वारा निर्धारित और रुझान है कि हम विभिन्न प्रबंधन के फैसले की प्रभावशीलता का आकलन करने के लिए अनुमति की पहचान कर रहे हैं। यह ध्यान देने योग्य है कि लगभग लाभप्रदता के सभी संकेतक बारीकी से interrelated रहे हैं और एक दूसरे को प्रभावित लायक है। इस प्रकार, बिक्री क्षमता पर विशेष रूप से मजबूत प्रभाव की लाभप्रदता इक्विटी की और संपत्ति। अनुसंधान के एक विशेष प्रकार का है, जो कारक विश्लेषण कहा जाता है का उपयोग करके प्रभाव आप कर सकते हैं के स्तर का आकलन करें। |
वॉशिंगटन/इस्लामाबाद, (भाषा)। अमेरिका ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की राजधानी क्वेटा तक ड्रोन हमलों की इजाजत देने के लिए मेजबान देश पर दबाव बढ़ा दिया है। अमेरिका को संदेह है कि तालिबान के शीर्ष नेतृत्व ने क्वेटा या इसके आसपास के इलाकों में अपना "िकाना बना रखा है लेकिन पाक इसे सिरे से खारिज करता है। `वॉशिंगटन पोस्ट' की एक रिपोर्ट में आज कहा गया कि पाकिस्तान पर यह ताजा अमेरिकी दबाव ऐसे समय में आया है जब शीर्ष अमेरिकी और नाटो कमांडर अफ-पाक युद्ध के सिलसिले में ड्रोन हमले का दायरा बढ़ाना चाह रहे हैं। अखबार ने कहा कि यूं तो पाकिस्तान ने अमेरिकी गुजारिश को "gकरा दिया लेकिन वह क्वेटा में सीआईए की मौजूदगी का दायरा बढ़ाने पर सहमत है। गौरतलब है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई क्वेटा में तालिबान के आला कमांडरों को तलाशने और उन्हें सलाखों के पीछे डालने के लिए कंधे से कंधे मिलाकर काम कर रहे हैं। अखबार के मुताबिक, पाकिस्तान की ओर से प्रस्ताव खारिज किए जाने के बाद भी अमेरिका उसके साथ कबायली इलाकों से इतर पाकिस्तान के अंदरूनी इलाकों में ड्रोन हमलों का दायरा बढ़ाने के सिलसिले में बातचीत कर रहा है।
| वॉशिंगटन/इस्लामाबाद, । अमेरिका ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की राजधानी क्वेटा तक ड्रोन हमलों की इजाजत देने के लिए मेजबान देश पर दबाव बढ़ा दिया है। अमेरिका को संदेह है कि तालिबान के शीर्ष नेतृत्व ने क्वेटा या इसके आसपास के इलाकों में अपना "िकाना बना रखा है लेकिन पाक इसे सिरे से खारिज करता है। `वॉशिंगटन पोस्ट' की एक रिपोर्ट में आज कहा गया कि पाकिस्तान पर यह ताजा अमेरिकी दबाव ऐसे समय में आया है जब शीर्ष अमेरिकी और नाटो कमांडर अफ-पाक युद्ध के सिलसिले में ड्रोन हमले का दायरा बढ़ाना चाह रहे हैं। अखबार ने कहा कि यूं तो पाकिस्तान ने अमेरिकी गुजारिश को "gकरा दिया लेकिन वह क्वेटा में सीआईए की मौजूदगी का दायरा बढ़ाने पर सहमत है। गौरतलब है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई क्वेटा में तालिबान के आला कमांडरों को तलाशने और उन्हें सलाखों के पीछे डालने के लिए कंधे से कंधे मिलाकर काम कर रहे हैं। अखबार के मुताबिक, पाकिस्तान की ओर से प्रस्ताव खारिज किए जाने के बाद भी अमेरिका उसके साथ कबायली इलाकों से इतर पाकिस्तान के अंदरूनी इलाकों में ड्रोन हमलों का दायरा बढ़ाने के सिलसिले में बातचीत कर रहा है। |
दिनांक22032021 संध्या एक हज़ार नौ सौ बजे मुख्य समाचार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की विश्व जल दिवस के अवसर पर कैच द रेन अभियान की शुरूआत कहाजल संरक्षण और जल प्रबंधन बेहद महत्वपूर्ण
अदिवासी जमीन के हस्तांतरण के मामले को लेकर विधानसभा में जोरदार हंगामा कृषि कानून पर चर्चा के फैसले का भाजपा विधायकों ने किया विरोध
कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए राज्यभर में बढ़ाई गई सतर्कता टीकाकरण में तेजी मास्क पहनने के लिए चलाया जा रहा जागरूकता कार्यक्रम
राजधानी रांची समेत राज्यभर में तापमान में बढ़ोत्तरी चौबीस मार्च से फिर बदल सकता है मौसम आंशिक बादल के साथ हल्की बारिश के आसार
कोविड19 महामारी के खिलाफ देश एकजुट होकर लड़ रहा है
आप भी हमारे साथ सुरक्षा और बचाव के तीन आसान एहतियाती उपायों का संकल्प लें
मास्क पहनें
दो गज की दूरी है जरूरी सुरक्षित दूरी बनाए रखें
हाथ और मुंह साफ रखें
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व जल दिवस के अवसर पर आज वर्षा जल संचयन के जल शक्ति अभियानकैच द रेन का वर्चुअल माध्यम से शुभारंभ किया
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण और जल प्रबंधन आने वाली पीढियों के लिए महत्वपूर्ण है
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री की उपस्थिति में जल शक्ति मंत्री और मध्य प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों के बीच केनबेतवा नदी संपर्क परियोजना लागू करने संबंधी समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए गये
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह परियोजना श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी का सपना था
विश्व जल दिवस पर आज राज्यभर में कई कार्यक्रम आयोजित किये गये
गोड्डा जिले में ग्रामीण विकास ट्रस्ट की ओर से जल जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें एक सौ से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए
इस दौरान जल संरक्षण पर एक डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई
गढ़वा जिले में विश्व जल दिवस के मौके पर कई कार्यक्रम आयोजित किये गये
इसमें जल की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुये जल संरक्षण पर जोर दिया गया
और जानकारी दे रहे हैं हमारे संवाददाता अदिवासी जमीन के हस्तांतरण के मामले पर आज विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सदस्यों ने जोरदार हंगामा किया
ध्यानाकर्षण काल में खिजरी विधायक राजेश कच्छप ने एचइसी द्वारा विस्थापितों की जमीन बेचे जाने की समीक्षा के लिए विधानसभा की कमिटी बनाने की मांग की
इस मांग पर पक्ष विपक्ष के सदस्यों के बीच जोरदार बहस हुई
इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के अधिकतर विधायक अध्यक्ष के आसन के सामने पहुंच गये
हंगामे को देखते हुए अध्यक्ष को विधानसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी
दूसरी ओर राज्य सरकार द्वारा कृषि बिल पर चर्चा कराये जाने की बात को लेकर सुबह से ही विपक्ष द्वारा इसका विरोध किया जाता रहा
कृषि बिल पर चर्चा के विरोध में कई भाजपा विधायक आज काले वस्त्र में विधानसभा पहुंचे थे
पाँच लोकसभा से मंजूरी मिलने के बाद आज बीमा संशोधन विधेयक दो हज़ार इक्कीस को संसद ने पारित कर दिया
राज्यसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है
इस विधेयक में एक हज़ार नौ सौ अड़तीस के बीमा अधिनियम को संशोधित करने की व्यवस्था है जिससे भारतीय बीमा कम्पनियों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा वर्तमान उनचास प्रतिशत से बढ़ कर चौहत्तर प्रतिशत हो जाएगी
इसमें बीमा कम्पनियों के स्वामित्व और नियंत्रण पर लगी पाबंदियों को हटाने का भी प्रावधान है
विधेयक पर चर्चा के उत्तर में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने कहा कि बीमा क्षेत्र को बड़े और दीर्घकालिक निवेश की आवश्यकता होती है क्योंकि यह एक पूंजी प्रधान क्षेत्र है
उन्होंने कहा कि वर्ष दो हज़ार पंद्रह में निवेश की अधिकतम सीमा बढ़ा कर उनचास प्रतिशत करने से पिछले पाँच वर्षों में छब्बीस हजार करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हुआ और प्रबंधन की परिसम्पत्तियों में छिहत्तर प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई
उन्होंने कहा कि सरकार सभी लोगों को बीमा के दायरे में लाने को प्रतिबद्ध है और संसाधनों के बढ़ने से बीमा कराने वालों की संख्या भी बढ़ेगी
भारतीय जीवन बीमा निगम के निजीकरण के विपक्ष के आरोपों का खंडन करते हुए श्रीमती सीतारामन ने कहा कि इस विधेयक का केवल एलआईसी से लेना देना नहीं है बल्कि यह समूचे बीमा क्षेत्र से संबंधित है
श्रीमती सीतारामन ने कहा कि विधेयक को कई हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श के बाद लाया गया है और इसमें बीमा कराने वालों के हितों की रक्षा के सभी आवश्यक प्रावधान किए गए हैं
उन्होंने कहा कि विधेयक से सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कम्पनियों में काम करने वाले सत्रह लाख कर्मचारियों के अलावा निजी क्षेत्र के चौबिस लाख कर्मचारियों के हितों की भी रक्षा होगी
आजसू पार्टी के गंगा नारायण भाजपा में शामिल हो गये हैं
आज रांची स्थित पार्टी के प्रदेश कार्यालय में भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी विधायक रणधीर सिंह नारायण दास और प्रदेश महामंत्री आदित्य साहू की मौजूदगी में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की
गंगा नारयण मधुपुर उपचुनाव में भाजपा के उम्मीदवार हो सकते हैं
हालांकि इसकी अधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है
झारखंड में कोरोना टीकाकरण की गति तेज करने के लिए पंचायत स्तर पर शुरू किये गये विशेष अभियान में सफलता मिल रही है
अभियान के दूसरे दिन एक लाख तैंतालीस हजार पांच सौ पचहत्तर लोगों को पहला टीका लगाया गया
वहीं तीन हजार सात सौ इकहत्तर लोगों को टीका का दूसरा डोज दिया गया
पहले दिन की तर्ज पर दूसरे दिन भी टीका लेने में बुजुर्ग सबसे आगे रहे
कल एक दिन में कुल एक लाख चौदह हजार पांच सौ चौंतीस बुजुर्गों ने टीके की पहली डोज ली
केंद्र ने टीकाकरण पर तकनीकी परामर्श समूह एनटीएजीआई और कोविड टीकाकरण पर राष्ट्रीय विशेषज्ञ दल एनईजीवीएसी की सिफारिश के आधार पर राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को टीकाकरण के दौरान कोविशील्ड की दो खुराकों के बीच का अंतराल चार से बढ़ाकर आठ सप्ताह करने के बारे में लिखा है
दो खुराकों के बीच के अंतराल को बढ़ाने का यह फैसला सिर्फ कोविशील्ड टीके पर लागू होगा
यह कोवैक्सीन पर लागू नहीं होगा
वैज्ञानिक प्रमाणों के सामने आने के बाद कोविशील्ड की एनटीएजीआई और एनईजीवीएसी की 20वीं बैठक में दो खुराकों के बीच का अंतराल बढ़ाने का फैसला किया गया
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि सरकार ने दोनों विशेषज्ञ समूह की सिफारिशें मान ली हैं
देश में अब तक चार करोड पचास लाख पैंसठ हजार से अधिक लोगों को कोविड का टीका लगाया गया है
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि कल चार लाख बासठ हजार लोगों का टीकाकरण किया गया
इसी दौरान इक्कीस हजार से अधिक रोगियों के ठीक होने के साथ देश में स्वस्थ होने की दर पचानवे दशमलव सातपांच प्रतिशत हो गई है
मंत्रालय ने बताया है कि एक करोड़ ग्यारह लाख से अधिक रोगी अब तक ठीक हो चुके हैं
कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रभाव के मद्देनजर राज्यभर में विशेष सतर्कता बरती जा रही है
प्रशासनिक पदाधिकारी लोगों को मास्क का इस्तेमाल और सामाजिक दूरी का पालन करने की हिदायत दे रहे हैं
सिमडेगा जिले में उपायुक्त सुशांत गौरव ने आज कई क्षेत्रों में लोगों के बीच मास्क का वितरण किया और इसके नियमित उपयोग का आग्रह किया
हमारे संवाददाता ने बताया कि सिमडेगा जिले में कुल संकमितों की संख्या दो हजार इकहत्तर है
हालांकि इनमें से दो हजार एकसठ संक्रमित स्वस्थ हो चुके हैं
चार संक्रमितों का इलाज अभी चल रहा है और इस वैश्विक महामारी से जिले में अबतक छह लोगों की मौत हुई है
जिले में कोरोना वैक्सीनेशन का काम भी लगातार जारी है
चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र से पुलिस ने अंतर्राज्यीय गिरोह के दो अफीम तस्करों को गिरफ्तार किया है
इन तस्करों के पास से दो किलो अफीम भी बरामद की गई है
इधर लावालौंग थाना क्षेत्र से ही पुलिस ने पंद्रह पीस डेटोनेटर के साथ एक अन्य युवक को गिरफ्तार किया है
एसडीपीओ ने बताया कि पूरे मामले की गहनता से जांच की जा रही है
राजधानी रांची समेत राज्यभर में आज मौसम साफ रहा
अगले दो दिनों तक मौसम में किसी प्रकार के परिवर्तन की संभावना नहीं है
इस दौरान तापमान में चार डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोत्तरी हो सकती है
मौसम विभाग ने अपने पूर्वानुमान में बताया है कि चौबीस मार्च से मौसम के फिर करवट लेने के आसार हैं
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार चौबीस मार्च को आसमान में आंशिक बादल छायेंगे और हल्के दर्जे की बारिश भी हो सकती है
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्य समिति सदस्य भैया अभिमन्यु प्रसाद ने हजारीबाग जिले के बहोरनपुर में खुदाई के दौरान मिली दो बहुमूल्य मूर्तियों की चोरी की घटना पर चिंता जताई है
हजारीबाग में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने सरकार से इस घटना की सीबीआई जांच कराने की मांग की
67वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दो हज़ार उन्नीस की आज घोषणा कर दी गई
हिंदी की सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार फिल्म छिछोरे को दिया गया है
सर्वश्रेष्ठ बंगाली फिल्म के लिए फिल्म गुमनामी को चुना गया है
कंगना रणौत को पंगा और मनिकर्णिका फिल्मों के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला है
सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार दो अभिनेताओंमनोज बाजपेयी और धनुष को दिया जाएगा
बी प्राक को तेरी मिट्टी गीत के लिए सर्वश्रेष्ठ गायक का पुरस्कार प्रदान किया जाएगा
फिल्म महर्षि के लिए राजू सुंदरम को सर्वश्रेष्ठ नृत्य निर्देशन पुरस्कार मिला है
समाप्त | दिनांकदो करोड़ बीस लाख बत्तीस हज़ार इक्कीस संध्या एक हज़ार नौ सौ बजे मुख्य समाचार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की विश्व जल दिवस के अवसर पर कैच द रेन अभियान की शुरूआत कहाजल संरक्षण और जल प्रबंधन बेहद महत्वपूर्ण अदिवासी जमीन के हस्तांतरण के मामले को लेकर विधानसभा में जोरदार हंगामा कृषि कानून पर चर्चा के फैसले का भाजपा विधायकों ने किया विरोध कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए राज्यभर में बढ़ाई गई सतर्कता टीकाकरण में तेजी मास्क पहनने के लिए चलाया जा रहा जागरूकता कार्यक्रम राजधानी रांची समेत राज्यभर में तापमान में बढ़ोत्तरी चौबीस मार्च से फिर बदल सकता है मौसम आंशिक बादल के साथ हल्की बारिश के आसार कोविडउन्नीस महामारी के खिलाफ देश एकजुट होकर लड़ रहा है आप भी हमारे साथ सुरक्षा और बचाव के तीन आसान एहतियाती उपायों का संकल्प लें मास्क पहनें दो गज की दूरी है जरूरी सुरक्षित दूरी बनाए रखें हाथ और मुंह साफ रखें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व जल दिवस के अवसर पर आज वर्षा जल संचयन के जल शक्ति अभियानकैच द रेन का वर्चुअल माध्यम से शुभारंभ किया इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण और जल प्रबंधन आने वाली पीढियों के लिए महत्वपूर्ण है कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री की उपस्थिति में जल शक्ति मंत्री और मध्य प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों के बीच केनबेतवा नदी संपर्क परियोजना लागू करने संबंधी समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए गये इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह परियोजना श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी का सपना था विश्व जल दिवस पर आज राज्यभर में कई कार्यक्रम आयोजित किये गये गोड्डा जिले में ग्रामीण विकास ट्रस्ट की ओर से जल जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें एक सौ से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए इस दौरान जल संरक्षण पर एक डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई गढ़वा जिले में विश्व जल दिवस के मौके पर कई कार्यक्रम आयोजित किये गये इसमें जल की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुये जल संरक्षण पर जोर दिया गया और जानकारी दे रहे हैं हमारे संवाददाता अदिवासी जमीन के हस्तांतरण के मामले पर आज विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सदस्यों ने जोरदार हंगामा किया ध्यानाकर्षण काल में खिजरी विधायक राजेश कच्छप ने एचइसी द्वारा विस्थापितों की जमीन बेचे जाने की समीक्षा के लिए विधानसभा की कमिटी बनाने की मांग की इस मांग पर पक्ष विपक्ष के सदस्यों के बीच जोरदार बहस हुई इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के अधिकतर विधायक अध्यक्ष के आसन के सामने पहुंच गये हंगामे को देखते हुए अध्यक्ष को विधानसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी दूसरी ओर राज्य सरकार द्वारा कृषि बिल पर चर्चा कराये जाने की बात को लेकर सुबह से ही विपक्ष द्वारा इसका विरोध किया जाता रहा कृषि बिल पर चर्चा के विरोध में कई भाजपा विधायक आज काले वस्त्र में विधानसभा पहुंचे थे पाँच लोकसभा से मंजूरी मिलने के बाद आज बीमा संशोधन विधेयक दो हज़ार इक्कीस को संसद ने पारित कर दिया राज्यसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है इस विधेयक में एक हज़ार नौ सौ अड़तीस के बीमा अधिनियम को संशोधित करने की व्यवस्था है जिससे भारतीय बीमा कम्पनियों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा वर्तमान उनचास प्रतिशत से बढ़ कर चौहत्तर प्रतिशत हो जाएगी इसमें बीमा कम्पनियों के स्वामित्व और नियंत्रण पर लगी पाबंदियों को हटाने का भी प्रावधान है विधेयक पर चर्चा के उत्तर में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने कहा कि बीमा क्षेत्र को बड़े और दीर्घकालिक निवेश की आवश्यकता होती है क्योंकि यह एक पूंजी प्रधान क्षेत्र है उन्होंने कहा कि वर्ष दो हज़ार पंद्रह में निवेश की अधिकतम सीमा बढ़ा कर उनचास प्रतिशत करने से पिछले पाँच वर्षों में छब्बीस हजार करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हुआ और प्रबंधन की परिसम्पत्तियों में छिहत्तर प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई उन्होंने कहा कि सरकार सभी लोगों को बीमा के दायरे में लाने को प्रतिबद्ध है और संसाधनों के बढ़ने से बीमा कराने वालों की संख्या भी बढ़ेगी भारतीय जीवन बीमा निगम के निजीकरण के विपक्ष के आरोपों का खंडन करते हुए श्रीमती सीतारामन ने कहा कि इस विधेयक का केवल एलआईसी से लेना देना नहीं है बल्कि यह समूचे बीमा क्षेत्र से संबंधित है श्रीमती सीतारामन ने कहा कि विधेयक को कई हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श के बाद लाया गया है और इसमें बीमा कराने वालों के हितों की रक्षा के सभी आवश्यक प्रावधान किए गए हैं उन्होंने कहा कि विधेयक से सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कम्पनियों में काम करने वाले सत्रह लाख कर्मचारियों के अलावा निजी क्षेत्र के चौबिस लाख कर्मचारियों के हितों की भी रक्षा होगी आजसू पार्टी के गंगा नारायण भाजपा में शामिल हो गये हैं आज रांची स्थित पार्टी के प्रदेश कार्यालय में भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी विधायक रणधीर सिंह नारायण दास और प्रदेश महामंत्री आदित्य साहू की मौजूदगी में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की गंगा नारयण मधुपुर उपचुनाव में भाजपा के उम्मीदवार हो सकते हैं हालांकि इसकी अधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है झारखंड में कोरोना टीकाकरण की गति तेज करने के लिए पंचायत स्तर पर शुरू किये गये विशेष अभियान में सफलता मिल रही है अभियान के दूसरे दिन एक लाख तैंतालीस हजार पांच सौ पचहत्तर लोगों को पहला टीका लगाया गया वहीं तीन हजार सात सौ इकहत्तर लोगों को टीका का दूसरा डोज दिया गया पहले दिन की तर्ज पर दूसरे दिन भी टीका लेने में बुजुर्ग सबसे आगे रहे कल एक दिन में कुल एक लाख चौदह हजार पांच सौ चौंतीस बुजुर्गों ने टीके की पहली डोज ली केंद्र ने टीकाकरण पर तकनीकी परामर्श समूह एनटीएजीआई और कोविड टीकाकरण पर राष्ट्रीय विशेषज्ञ दल एनईजीवीएसी की सिफारिश के आधार पर राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को टीकाकरण के दौरान कोविशील्ड की दो खुराकों के बीच का अंतराल चार से बढ़ाकर आठ सप्ताह करने के बारे में लिखा है दो खुराकों के बीच के अंतराल को बढ़ाने का यह फैसला सिर्फ कोविशील्ड टीके पर लागू होगा यह कोवैक्सीन पर लागू नहीं होगा वैज्ञानिक प्रमाणों के सामने आने के बाद कोविशील्ड की एनटीएजीआई और एनईजीवीएसी की बीसवीं बैठक में दो खुराकों के बीच का अंतराल बढ़ाने का फैसला किया गया केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि सरकार ने दोनों विशेषज्ञ समूह की सिफारिशें मान ली हैं देश में अब तक चार करोड पचास लाख पैंसठ हजार से अधिक लोगों को कोविड का टीका लगाया गया है केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि कल चार लाख बासठ हजार लोगों का टीकाकरण किया गया इसी दौरान इक्कीस हजार से अधिक रोगियों के ठीक होने के साथ देश में स्वस्थ होने की दर पचानवे दशमलव सातपांच प्रतिशत हो गई है मंत्रालय ने बताया है कि एक करोड़ ग्यारह लाख से अधिक रोगी अब तक ठीक हो चुके हैं कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रभाव के मद्देनजर राज्यभर में विशेष सतर्कता बरती जा रही है प्रशासनिक पदाधिकारी लोगों को मास्क का इस्तेमाल और सामाजिक दूरी का पालन करने की हिदायत दे रहे हैं सिमडेगा जिले में उपायुक्त सुशांत गौरव ने आज कई क्षेत्रों में लोगों के बीच मास्क का वितरण किया और इसके नियमित उपयोग का आग्रह किया हमारे संवाददाता ने बताया कि सिमडेगा जिले में कुल संकमितों की संख्या दो हजार इकहत्तर है हालांकि इनमें से दो हजार एकसठ संक्रमित स्वस्थ हो चुके हैं चार संक्रमितों का इलाज अभी चल रहा है और इस वैश्विक महामारी से जिले में अबतक छह लोगों की मौत हुई है जिले में कोरोना वैक्सीनेशन का काम भी लगातार जारी है चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र से पुलिस ने अंतर्राज्यीय गिरोह के दो अफीम तस्करों को गिरफ्तार किया है इन तस्करों के पास से दो किलो अफीम भी बरामद की गई है इधर लावालौंग थाना क्षेत्र से ही पुलिस ने पंद्रह पीस डेटोनेटर के साथ एक अन्य युवक को गिरफ्तार किया है एसडीपीओ ने बताया कि पूरे मामले की गहनता से जांच की जा रही है राजधानी रांची समेत राज्यभर में आज मौसम साफ रहा अगले दो दिनों तक मौसम में किसी प्रकार के परिवर्तन की संभावना नहीं है इस दौरान तापमान में चार डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोत्तरी हो सकती है मौसम विभाग ने अपने पूर्वानुमान में बताया है कि चौबीस मार्च से मौसम के फिर करवट लेने के आसार हैं मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार चौबीस मार्च को आसमान में आंशिक बादल छायेंगे और हल्के दर्जे की बारिश भी हो सकती है भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्य समिति सदस्य भैया अभिमन्यु प्रसाद ने हजारीबाग जिले के बहोरनपुर में खुदाई के दौरान मिली दो बहुमूल्य मूर्तियों की चोरी की घटना पर चिंता जताई है हजारीबाग में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने सरकार से इस घटना की सीबीआई जांच कराने की मांग की सरसठवें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दो हज़ार उन्नीस की आज घोषणा कर दी गई हिंदी की सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार फिल्म छिछोरे को दिया गया है सर्वश्रेष्ठ बंगाली फिल्म के लिए फिल्म गुमनामी को चुना गया है कंगना रणौत को पंगा और मनिकर्णिका फिल्मों के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला है सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार दो अभिनेताओंमनोज बाजपेयी और धनुष को दिया जाएगा बी प्राक को तेरी मिट्टी गीत के लिए सर्वश्रेष्ठ गायक का पुरस्कार प्रदान किया जाएगा फिल्म महर्षि के लिए राजू सुंदरम को सर्वश्रेष्ठ नृत्य निर्देशन पुरस्कार मिला है समाप्त |
ऐसे मिलेगी हर जानकारी (Photo Credit: dna india)
New Delhi:
पेंशन हमेशा से लोगों के लिए एक सहारा का काम करती है. रिटायरमेंट के बाद सभी पेंशनर्स को PPO नंबर मिलता है. यह नंबर 12 संख्या का होता है. ये 12 नंबर आपको पेंशन से जुड़ी जानकारियां प्राप्त करने में मदद मिलेगी. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (Employees Provident Fund Organisation) के देशभर में लाखों खाताधारक (Account Holder) और पेंशनर्स (Pensioners) हैं. रिटायरमेंट के बाद एक मुश्त रकम का लोग फायदा उठाते हैं. रिटायर हुए कर्मचारी की पेंशन से जुड़ी सही समस्या को दूर करने के लिए EPFO ने पेंशन पोर्टल (Pension Portal) खोल रखा है. इस पोर्टल पर पेंशनर्स को कई तरह की सुविधाएं मिलती है. ईपीएफओ के पोर्टल पर मिलने वाली सभी जानकारी के बारे में चलिए बताते हैं.
आपको बता दें ईपीएफओ के पेंशन पोर्टल के जरिए आपको जीवन प्रमाण पत्र (Life Certificate) की सभी जानकारी मिलती है. आप साल भर में कभी भी इस पोर्टल पर जाकर अपने लाइफ सर्टिफिकेट को सम्बिट कर सकते हैं. इसमें आपको epfo की जानकारी मिल जाएगी.
रिटायरमेंट के बाद सभी पेंशनर्स को PPO का नंबर मिलता है. इस नंबर के जरिए आप अपने पेंशन अकाउंट के पासबुक को चेक कर सकते हैं. इस नंबर की मादा से आप अपना पेंशन दूसरे खाते से दूसरे खाते में पंहुचा सकते हैं.
इस पोर्टल के जरिए आपको सभी तरह के पेंशन स्टेटस की जानकारी मिलती है. अब घर बैठे आपको सभी जानकारी मिल जाएगी. पेंशन के लिए आप आपको अब लंबी लंबी लाइन में लगाना नहीं पड़ेगा.
| ऐसे मिलेगी हर जानकारी New Delhi: पेंशन हमेशा से लोगों के लिए एक सहारा का काम करती है. रिटायरमेंट के बाद सभी पेंशनर्स को PPO नंबर मिलता है. यह नंबर बारह संख्या का होता है. ये बारह नंबर आपको पेंशन से जुड़ी जानकारियां प्राप्त करने में मदद मिलेगी. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के देशभर में लाखों खाताधारक और पेंशनर्स हैं. रिटायरमेंट के बाद एक मुश्त रकम का लोग फायदा उठाते हैं. रिटायर हुए कर्मचारी की पेंशन से जुड़ी सही समस्या को दूर करने के लिए EPFO ने पेंशन पोर्टल खोल रखा है. इस पोर्टल पर पेंशनर्स को कई तरह की सुविधाएं मिलती है. ईपीएफओ के पोर्टल पर मिलने वाली सभी जानकारी के बारे में चलिए बताते हैं. आपको बता दें ईपीएफओ के पेंशन पोर्टल के जरिए आपको जीवन प्रमाण पत्र की सभी जानकारी मिलती है. आप साल भर में कभी भी इस पोर्टल पर जाकर अपने लाइफ सर्टिफिकेट को सम्बिट कर सकते हैं. इसमें आपको epfo की जानकारी मिल जाएगी. रिटायरमेंट के बाद सभी पेंशनर्स को PPO का नंबर मिलता है. इस नंबर के जरिए आप अपने पेंशन अकाउंट के पासबुक को चेक कर सकते हैं. इस नंबर की मादा से आप अपना पेंशन दूसरे खाते से दूसरे खाते में पंहुचा सकते हैं. इस पोर्टल के जरिए आपको सभी तरह के पेंशन स्टेटस की जानकारी मिलती है. अब घर बैठे आपको सभी जानकारी मिल जाएगी. पेंशन के लिए आप आपको अब लंबी लंबी लाइन में लगाना नहीं पड़ेगा. |
प्रिलिम्स के लियेः
मेन्स के लियेः
चर्चा में क्यों?
हाल ही में संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने विश्व खाद्य मूल्य सूचकांक (FPI) जारी किया है, जो कि जुलाई 2011 के बाद से उच्चतम स्तर पर है।
- खाद्य आपूर्ति और कीमतें, चरम मौसमी घटनाओं, खराब आपूर्ति शृंखला, श्रमिकों की कमी और बढ़ती लागत के कारण दबाव में है।
- खाद्य और ईंधन में एक साथ वृद्धिः
- जैव-ईंधन संबंध के कारण पेट्रोलियम और कृषि-वस्तुओं की कीमतों में एक साथ बढ़ोतरी हो रही है।
- जब कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो गन्ने या मक्का से इथेनॉल को पेट्रोल के साथ मिलाना या बायोडीज़ल उत्पादन के लिये ताड़ या सोयाबीन के तेल का अधिक उपयोग किया जाता है।
- इसी तरह कपास पेट्रोकेमिकल्स-आधारित सिंथेटिक फाइबर की तुलना में अपेक्षाकृत सस्ती हो जाती है।
- इसके अलावा चूँकि मकई मुख्य रूप से एक पशु चारा है और इथेनॉल के लिये इसके प्रयोग से पशुधन में उपयोग हेतु गेहूँ सहित अन्य अनाजों का प्रतिस्थापन होता है।
- इसके परिणामस्वरूप खाद्यान्नों की कीमतों में भी वृद्धि होती है।
- चीनी के साथ भी ऐसा ही होता है, जब चीनी मिलें शराब में किण्वन के लिये गन्ने के अनुपात को बढ़ाती हैं।
- लेकिन यह केवल जैव-ईंधन का प्रभाव ही नहीं है, बड़ी कीमतों में वृद्धि का सकारात्मक भावना के निर्माण के माध्यम से अन्य कृषि उत्पादों पर भी प्रभाव पड़ता है।
- आर्थिक गतिविधि और प्रोत्साहनः
- बाज़ार की सकारात्मक भावना दो कारकों से जुड़ी हैः
- महामारी के घटते मामलों और बढ़ती टीकाकरण दरों के बीच दुनिया भर में आर्थिक गतिविधियों के पुनरुद्धार के साथ मांग पूर्ववर्ती स्तर पर लौट रही है।
- दूसरा कारण, अमेरिकी फेडरल रिज़र्व और अन्य वैश्विक केंद्रीय बैंकों द्वारा उपयोग की जाने वाली तरलता है, जिसने कोविड-19 से हुई आर्थिक क्षति को सीमित किया है।
- यह सारा पैसा, नीति-प्रेरित अति-निम्न वैश्विक ब्याज़ दरों के साथ, शेयर बाज़ारों और स्टार्टअप निवेश के माध्यम से बाज़ार में पहुँच जाता है।
- हालाँकि चूँकि आपूर्ति शृंखलाओं की बहाली, मांग की रिकवरी के साथ संतुलित नहीं है- शिपिंग कंटेनरों/जहाज़ों और मज़दूरों की कमी अभी तक पूरी तरह से अपने पूर्वर्ती स्तर पर नहीं लौटी है - कुल मिलाकर इस सब का परिणाम मुद्रास्फीति के रूप में सामने आया है।
- बाज़ार की सकारात्मक भावना दो कारकों से जुड़ी हैः
- किसानों पर प्रभावः
- कपास और सोयाबीन जैसे कुछ उत्पाद सरकार के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से काफी अधिक कीमतों पर बिक रहे हैं।
- दूसरी ओर किसानों को ईंधन एवं उर्वरकों के लिये अधिक भुगतान करने हेतु मज़बूर किया जा रहा है, क्योंकि उनकी अंतर्राष्ट्रीय कीमतें बढ़ गई हैं।
- उर्वरकः
- उर्वरकों की स्थिति और भी बदतर है, डी-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) वर्तमान में भारत में 800 अमेरिकी डॉलर प्रति टन की दर से आयात किया जा रहा है, जिसमें लागत और समुद्री भाड़ा भी शामिल है। 'म्यूरेट ऑफ पोटाश' (MOP) कम-से-कम 450 अमेरिकी डॉलर प्रति टन पर उपलब्ध है।
- यह वर्ष 2007-08 के विश्व खाद्य संकट के दौरान प्रचलित कीमतों के करीब हैं।
- DAP और MOP गैर-यूरिया उर्वरक हैं।
- उर्वरकों के साथ, उनके मध्यवर्ती और कच्चे माल जैसे- रॉक फॉस्फेट, सल्फर, फॉस्फोरिक एसिड तथा अमोनिया की कीमतें भी डिमांड-पुल (उच्च फसल रोपण से) और कॉस्ट-शॉक (तेल और गैस से) के संयोजन के कारण आसमान छू गई हैं।
- उर्वरकों की स्थिति और भी बदतर है, डी-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) वर्तमान में भारत में 800 अमेरिकी डॉलर प्रति टन की दर से आयात किया जा रहा है, जिसमें लागत और समुद्री भाड़ा भी शामिल है। 'म्यूरेट ऑफ पोटाश' (MOP) कम-से-कम 450 अमेरिकी डॉलर प्रति टन पर उपलब्ध है।
खाद्य मूल्य सूचकांकः
- इसे वर्ष 1996 में वैश्विक कृषि वस्तु बाज़ार के विकास की निगरानी में मदद के लिये सार्वजनिक रूप से पेश किया गया था।
- FAO फूड प्राइस इंडेक्स (FFPI) खाद्य वस्तुओं की टोकरी के अंतर्राष्ट्रीय मूल्यों में मासिक बदलाव का एक मापक है।
- यह अनाज, तिलहन, डेयरी उत्पाद, मांस और चीनी की टोकरी के मूल्यों में हुए परिवर्तनों को मापता है।
- इसका आधार वर्ष 2014-16 है।
| प्रिलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? हाल ही में संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन ने विश्व खाद्य मूल्य सूचकांक जारी किया है, जो कि जुलाई दो हज़ार ग्यारह के बाद से उच्चतम स्तर पर है। - खाद्य आपूर्ति और कीमतें, चरम मौसमी घटनाओं, खराब आपूर्ति शृंखला, श्रमिकों की कमी और बढ़ती लागत के कारण दबाव में है। - खाद्य और ईंधन में एक साथ वृद्धिः - जैव-ईंधन संबंध के कारण पेट्रोलियम और कृषि-वस्तुओं की कीमतों में एक साथ बढ़ोतरी हो रही है। - जब कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो गन्ने या मक्का से इथेनॉल को पेट्रोल के साथ मिलाना या बायोडीज़ल उत्पादन के लिये ताड़ या सोयाबीन के तेल का अधिक उपयोग किया जाता है। - इसी तरह कपास पेट्रोकेमिकल्स-आधारित सिंथेटिक फाइबर की तुलना में अपेक्षाकृत सस्ती हो जाती है। - इसके अलावा चूँकि मकई मुख्य रूप से एक पशु चारा है और इथेनॉल के लिये इसके प्रयोग से पशुधन में उपयोग हेतु गेहूँ सहित अन्य अनाजों का प्रतिस्थापन होता है। - इसके परिणामस्वरूप खाद्यान्नों की कीमतों में भी वृद्धि होती है। - चीनी के साथ भी ऐसा ही होता है, जब चीनी मिलें शराब में किण्वन के लिये गन्ने के अनुपात को बढ़ाती हैं। - लेकिन यह केवल जैव-ईंधन का प्रभाव ही नहीं है, बड़ी कीमतों में वृद्धि का सकारात्मक भावना के निर्माण के माध्यम से अन्य कृषि उत्पादों पर भी प्रभाव पड़ता है। - आर्थिक गतिविधि और प्रोत्साहनः - बाज़ार की सकारात्मक भावना दो कारकों से जुड़ी हैः - महामारी के घटते मामलों और बढ़ती टीकाकरण दरों के बीच दुनिया भर में आर्थिक गतिविधियों के पुनरुद्धार के साथ मांग पूर्ववर्ती स्तर पर लौट रही है। - दूसरा कारण, अमेरिकी फेडरल रिज़र्व और अन्य वैश्विक केंद्रीय बैंकों द्वारा उपयोग की जाने वाली तरलता है, जिसने कोविड-उन्नीस से हुई आर्थिक क्षति को सीमित किया है। - यह सारा पैसा, नीति-प्रेरित अति-निम्न वैश्विक ब्याज़ दरों के साथ, शेयर बाज़ारों और स्टार्टअप निवेश के माध्यम से बाज़ार में पहुँच जाता है। - हालाँकि चूँकि आपूर्ति शृंखलाओं की बहाली, मांग की रिकवरी के साथ संतुलित नहीं है- शिपिंग कंटेनरों/जहाज़ों और मज़दूरों की कमी अभी तक पूरी तरह से अपने पूर्वर्ती स्तर पर नहीं लौटी है - कुल मिलाकर इस सब का परिणाम मुद्रास्फीति के रूप में सामने आया है। - बाज़ार की सकारात्मक भावना दो कारकों से जुड़ी हैः - किसानों पर प्रभावः - कपास और सोयाबीन जैसे कुछ उत्पाद सरकार के न्यूनतम समर्थन मूल्य से काफी अधिक कीमतों पर बिक रहे हैं। - दूसरी ओर किसानों को ईंधन एवं उर्वरकों के लिये अधिक भुगतान करने हेतु मज़बूर किया जा रहा है, क्योंकि उनकी अंतर्राष्ट्रीय कीमतें बढ़ गई हैं। - उर्वरकः - उर्वरकों की स्थिति और भी बदतर है, डी-अमोनियम फॉस्फेट वर्तमान में भारत में आठ सौ अमेरिकी डॉलर प्रति टन की दर से आयात किया जा रहा है, जिसमें लागत और समुद्री भाड़ा भी शामिल है। 'म्यूरेट ऑफ पोटाश' कम-से-कम चार सौ पचास अमेरिकी डॉलर प्रति टन पर उपलब्ध है। - यह वर्ष दो हज़ार सात-आठ के विश्व खाद्य संकट के दौरान प्रचलित कीमतों के करीब हैं। - DAP और MOP गैर-यूरिया उर्वरक हैं। - उर्वरकों के साथ, उनके मध्यवर्ती और कच्चे माल जैसे- रॉक फॉस्फेट, सल्फर, फॉस्फोरिक एसिड तथा अमोनिया की कीमतें भी डिमांड-पुल और कॉस्ट-शॉक के संयोजन के कारण आसमान छू गई हैं। - उर्वरकों की स्थिति और भी बदतर है, डी-अमोनियम फॉस्फेट वर्तमान में भारत में आठ सौ अमेरिकी डॉलर प्रति टन की दर से आयात किया जा रहा है, जिसमें लागत और समुद्री भाड़ा भी शामिल है। 'म्यूरेट ऑफ पोटाश' कम-से-कम चार सौ पचास अमेरिकी डॉलर प्रति टन पर उपलब्ध है। खाद्य मूल्य सूचकांकः - इसे वर्ष एक हज़ार नौ सौ छियानवे में वैश्विक कृषि वस्तु बाज़ार के विकास की निगरानी में मदद के लिये सार्वजनिक रूप से पेश किया गया था। - FAO फूड प्राइस इंडेक्स खाद्य वस्तुओं की टोकरी के अंतर्राष्ट्रीय मूल्यों में मासिक बदलाव का एक मापक है। - यह अनाज, तिलहन, डेयरी उत्पाद, मांस और चीनी की टोकरी के मूल्यों में हुए परिवर्तनों को मापता है। - इसका आधार वर्ष दो हज़ार चौदह-सोलह है। |
बहुत खूब आदरणीय समर साहब ! ग़ज़ब ! मतले पर तो जैसे आपने जान लुटा दी हैं. इस ग़ज़ल का भाव, कहन, शिल्प और प्रस्तुति,, सब अद्भुत.. अद्भुत.. !! .. हृदय से शुभकामनाएँ, भाईजी.
पंचचामर छन्द जिसमें जयशंकर प्रसाद ने 'हिमाद्रि तुंग शृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती..' की रचना की है वह शुद्ध लघु-गुरु की आठ जोड़ा आवृतियों में निबद्ध है, शब्द-कलों का सहारा नहीं लिया जाता है. इसी छन्द की 'लघु-गुरु' की आवृतियों का आधा यानी चार जोड़ा आवृति होने पर प्रमाणिका छन्द कहलाता है.
| बहुत खूब आदरणीय समर साहब ! ग़ज़ब ! मतले पर तो जैसे आपने जान लुटा दी हैं. इस ग़ज़ल का भाव, कहन, शिल्प और प्रस्तुति,, सब अद्भुत.. अद्भुत.. !! .. हृदय से शुभकामनाएँ, भाईजी. पंचचामर छन्द जिसमें जयशंकर प्रसाद ने 'हिमाद्रि तुंग शृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती..' की रचना की है वह शुद्ध लघु-गुरु की आठ जोड़ा आवृतियों में निबद्ध है, शब्द-कलों का सहारा नहीं लिया जाता है. इसी छन्द की 'लघु-गुरु' की आवृतियों का आधा यानी चार जोड़ा आवृति होने पर प्रमाणिका छन्द कहलाता है. |
है कि मेरेसे जो मिलने आते हैं उनको ६ तारीख से १३ तारीखतक वक्त न दें। नहीं मिलना चाहता हूं, इसका मतलब यह नहीं है कि मैं बीमार हूं या शौक करता हूं। वह तो कई महीने से बात चल रही है । मैं सेवाग्राम जा नहीं सकता हूं। इसलिए वे लोग सेवाग्रामसे यहां आ रहे हैं । कलसे कस्तुरवा ट्रस्टकी बैठक शुरू होती है, उसके बाद चर्खा- संघ, फिर नई तालीम, पीछे ग्राम-उद्योगसंघकी बैठक होगी। इन दिनोंमें चार बैठक हो जायंगी । अच्छी तरहसे हो सकें तो इसमें वक्त तो जायगा । तो इनको वक्त दूं या मिलनेवालोंको वक्त दूं ? तो मैंने कह दिया कि मेहरबानी करके इन दिनोंमें वक्त न मांगे। हां, वाद मिल सकते हैं। मैं यहां अपना काम नहीं करूंगा ऐसी बात नहीं है। बाहर आते हैं तो कितना चाहते हैं; क्योंकि मैं तो सूखा जानवर सा बन गया हूं । जब घर रहता है तब कहते हैं कि देखने के लिए तो चले जाएं। बाहर आते हैं तो कहते हैं कि सूखा जानवरको तो देख लें, लेकिन समझ लें कि थोड़े दिन घर के भीतर बैठा हुआ है। तो इतना मैंने कह दिया।
भी एक बात आपको और कह देनी चाहिए । कह तो चुका हूं । बातें भी चल रही हैं कि कपड़ोंपर जो अंकुश है, कंट्रोल है, वह छूट जायगा । खुराकपर है वह भी छूट जायगा -- कल छूट जायगा, ऐसी बात थोड़ी है । लेकिन प्रवाह चल गया है तो कहते हैं कि तुमने अच्छा किया । सब जगहसे खताते हैं कि अंकुश छूट जाय तो अच्छा है। तब मुझे कहना चाहिए कि अंकुश छूट जाता है तब हमारा कुछ फर्ज नहीं है, ऐसी बात नहीं है । जब छूट जाता है तो जो इस बारेमें व्यापार करते हैं उनका पहला फर्ज हो जाता है। मैं घनश्यामदासको भी कहूंगा कि आप ज्यादा कपड़े क्यों नहीं पैदा करते ? वह कह सकते हैं कि मैं तो एक मजदूरी कर लेता हूं । जो हुकम होता है वे कपड़े हम बनाते हैं, जो दाम होता है वह दाम ले लेते हैं, लेकिन जब संकुश उठ जाता तब घनश्यामदास क्या करें, दूसरे मित्र लोग क्या करें ? छूट मिल गई तो लोगोंको लूटना है ? तब तो मेरी हजामत होनेवाली है । ऐसा हो गया है कि लोग कहते हैं कि यह मैंने हटाया । हकूमतमें मेरे भाई-वंद हैं, मेरे दोस्त हैं, उनको कहा तो छूट गया, ऐसी बात थोड़ी है। मैंने तो हिंदुस्तान की खिदमत की है। मैं कितना भी बड़ा होऊं, कितना | है कि मेरेसे जो मिलने आते हैं उनको छः तारीख से तेरह तारीखतक वक्त न दें। नहीं मिलना चाहता हूं, इसका मतलब यह नहीं है कि मैं बीमार हूं या शौक करता हूं। वह तो कई महीने से बात चल रही है । मैं सेवाग्राम जा नहीं सकता हूं। इसलिए वे लोग सेवाग्रामसे यहां आ रहे हैं । कलसे कस्तुरवा ट्रस्टकी बैठक शुरू होती है, उसके बाद चर्खा- संघ, फिर नई तालीम, पीछे ग्राम-उद्योगसंघकी बैठक होगी। इन दिनोंमें चार बैठक हो जायंगी । अच्छी तरहसे हो सकें तो इसमें वक्त तो जायगा । तो इनको वक्त दूं या मिलनेवालोंको वक्त दूं ? तो मैंने कह दिया कि मेहरबानी करके इन दिनोंमें वक्त न मांगे। हां, वाद मिल सकते हैं। मैं यहां अपना काम नहीं करूंगा ऐसी बात नहीं है। बाहर आते हैं तो कितना चाहते हैं; क्योंकि मैं तो सूखा जानवर सा बन गया हूं । जब घर रहता है तब कहते हैं कि देखने के लिए तो चले जाएं। बाहर आते हैं तो कहते हैं कि सूखा जानवरको तो देख लें, लेकिन समझ लें कि थोड़े दिन घर के भीतर बैठा हुआ है। तो इतना मैंने कह दिया। भी एक बात आपको और कह देनी चाहिए । कह तो चुका हूं । बातें भी चल रही हैं कि कपड़ोंपर जो अंकुश है, कंट्रोल है, वह छूट जायगा । खुराकपर है वह भी छूट जायगा -- कल छूट जायगा, ऐसी बात थोड़ी है । लेकिन प्रवाह चल गया है तो कहते हैं कि तुमने अच्छा किया । सब जगहसे खताते हैं कि अंकुश छूट जाय तो अच्छा है। तब मुझे कहना चाहिए कि अंकुश छूट जाता है तब हमारा कुछ फर्ज नहीं है, ऐसी बात नहीं है । जब छूट जाता है तो जो इस बारेमें व्यापार करते हैं उनका पहला फर्ज हो जाता है। मैं घनश्यामदासको भी कहूंगा कि आप ज्यादा कपड़े क्यों नहीं पैदा करते ? वह कह सकते हैं कि मैं तो एक मजदूरी कर लेता हूं । जो हुकम होता है वे कपड़े हम बनाते हैं, जो दाम होता है वह दाम ले लेते हैं, लेकिन जब संकुश उठ जाता तब घनश्यामदास क्या करें, दूसरे मित्र लोग क्या करें ? छूट मिल गई तो लोगोंको लूटना है ? तब तो मेरी हजामत होनेवाली है । ऐसा हो गया है कि लोग कहते हैं कि यह मैंने हटाया । हकूमतमें मेरे भाई-वंद हैं, मेरे दोस्त हैं, उनको कहा तो छूट गया, ऐसी बात थोड़ी है। मैंने तो हिंदुस्तान की खिदमत की है। मैं कितना भी बड़ा होऊं, कितना |
यंगूनः म्यांमार में कोरोना महामारी के बीच रविवार को हुए आम चुनाव में मतदाताओं में जबर्दस्त उत्साह देखा गया। यहां पर कमजोर विपक्ष के कारण आंग सान सू की के नेतृत्व वाली नेशनल लीग ऑफ डेमोक्रेसी (एनएलडी) की दोबारा सत्ता में वापसी की राह आसान दिखाई दे रही है। चुनाव के दौरान पोलिंग स्टेशन पर भीड़ दिखाई दी, लेकिन मतदाताओं में कोरोना को लेकर सजगता देखी गई। यहां पर मास्क लगाने और शारीरिक दूरी बनाए रखने की अनिवार्यता की गई थी। कहीं-कहीं मतदाता पूरी सावधानी के साथ फेस शील्ड पहनकर भी वोट देने के लिए आए।
एक पोलिंग स्टेशन पर मतदान की व्यवस्था देख रहे सरकारी अधिकारी जॉ विन का कहना था कि उम्मीद नहीं थी कि लोगों में वोट डालने के लिए इतना उत्साह देखने को मिलेगा। जनता अब वास्तविक लोकतंत्र चाहती है।
एक वोटर ने कहा, आंग सान सू की का पिछला कार्यकाल अच्छा रहा है, लेकिन 2008 में सेना द्वारा अपने लिए 25 फीसद सीटों के आरक्षण का नियम बना देने से कई लोकतांत्रिक निर्णय लेने में दिक्कतें आ रही हैं।
म्यांमार में पांच दशक तक सेना का शासन होने के बाद 2005 में नोबेल पुरस्कार विजेता आंग सान सू की के नेतृत्व में एनएलडी की सरकार बनी थी। इस बार फिर उनकी पार्टी का मुख्य मुकाबला यूनियन ऑफ सोलिडेरिटी डेवलपमेंट पार्टी से है। इस दल को सेना का समर्थन रहता है। मतदान के दौरान माहौल दोबारा आंग सान सू की के पक्ष में ही देखने को मिला है।
वहीं, दूसरी ओर सत्तारूढ़ पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (NLD) को भरोसा है कि इन चुनावों में जीत उसी की होगी, हालांकि पार्टी के एक नेता का यह भी मानना है कि वह पांच साल पहले हुए 2015 की बंपर जीत को दोहरा नहीं पाएंगे। 2015 के आम चुनाव में नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी ने केंद्रीय संसद के दोनों सदनों की 498 सीटों के लिए हुए चुनाव में 390 सीटें जीतीं थीं।
| यंगूनः म्यांमार में कोरोना महामारी के बीच रविवार को हुए आम चुनाव में मतदाताओं में जबर्दस्त उत्साह देखा गया। यहां पर कमजोर विपक्ष के कारण आंग सान सू की के नेतृत्व वाली नेशनल लीग ऑफ डेमोक्रेसी की दोबारा सत्ता में वापसी की राह आसान दिखाई दे रही है। चुनाव के दौरान पोलिंग स्टेशन पर भीड़ दिखाई दी, लेकिन मतदाताओं में कोरोना को लेकर सजगता देखी गई। यहां पर मास्क लगाने और शारीरिक दूरी बनाए रखने की अनिवार्यता की गई थी। कहीं-कहीं मतदाता पूरी सावधानी के साथ फेस शील्ड पहनकर भी वोट देने के लिए आए। एक पोलिंग स्टेशन पर मतदान की व्यवस्था देख रहे सरकारी अधिकारी जॉ विन का कहना था कि उम्मीद नहीं थी कि लोगों में वोट डालने के लिए इतना उत्साह देखने को मिलेगा। जनता अब वास्तविक लोकतंत्र चाहती है। एक वोटर ने कहा, आंग सान सू की का पिछला कार्यकाल अच्छा रहा है, लेकिन दो हज़ार आठ में सेना द्वारा अपने लिए पच्चीस फीसद सीटों के आरक्षण का नियम बना देने से कई लोकतांत्रिक निर्णय लेने में दिक्कतें आ रही हैं। म्यांमार में पांच दशक तक सेना का शासन होने के बाद दो हज़ार पाँच में नोबेल पुरस्कार विजेता आंग सान सू की के नेतृत्व में एनएलडी की सरकार बनी थी। इस बार फिर उनकी पार्टी का मुख्य मुकाबला यूनियन ऑफ सोलिडेरिटी डेवलपमेंट पार्टी से है। इस दल को सेना का समर्थन रहता है। मतदान के दौरान माहौल दोबारा आंग सान सू की के पक्ष में ही देखने को मिला है। वहीं, दूसरी ओर सत्तारूढ़ पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी को भरोसा है कि इन चुनावों में जीत उसी की होगी, हालांकि पार्टी के एक नेता का यह भी मानना है कि वह पांच साल पहले हुए दो हज़ार पंद्रह की बंपर जीत को दोहरा नहीं पाएंगे। दो हज़ार पंद्रह के आम चुनाव में नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी ने केंद्रीय संसद के दोनों सदनों की चार सौ अट्ठानवे सीटों के लिए हुए चुनाव में तीन सौ नब्बे सीटें जीतीं थीं। |
गोरखपुर,20सितंबरः गोरखपुर के सांसद रवि किशन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान से केंद्रीय विद्यालय को दूसरे जगह स्थानांतरित न करने की मांग की है। वर्तमान समय में केंद्रीय विद्यालय को उसके स्थान से स्थानातंरित कर उनौला में ले जाने की कवायद की जा रही है। इससे लगभग हजार छात्रों व उनके अभिभावकों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। सांसद ने इन छात्र-छात्राओं को समस्याओं का सामना न करना पड़े इसके लिए यह मांग की है। उन्होंने इसे यथास्थान रहने देने की मांग की है।
रवि किशन ने केन्द्रीय शिक्षा मंत्री से मांग करते हुए कहा कि मेरे लोकसभा क्षेत्र में केंद्रीय विद्यालय नंबर दो एफसीआई को यहां से दूर घने जंगलों में स्थानांतरित किया जा रहा है। विद्यालय में लगभग दो हजार से अधिक छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इसमें गरीब वर्ग ज्यादातर छात्र हैं जो विद्यालय के नजदीक ही निवास करते हैं। विद्यालय आवागमन के लिए उनके पास कोई साधन भी नहीं है। ऐसे में केंद्रीय विद्यालय को मूल स्थान से घने जंगलों में बसे ग्रामीण अंचल में ले जाना उचित नहीं है। छात्रों को लगभग बीस किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी भी तय करनी पड़ेगी।
इस आकस्मिक निर्णय से छात्र व उनके अभिवावक काफी परेशान हैं। नियमानुसार भी इस विद्यालय में पांच किमी दूरी के छात्र-छात्राओं का ही दाखिला लिया जाता है। ऐसे में विद्यालय के कही और स्थानांतरित होने पर कई समस्याओं का सामना छात्र-छात्राओं व उनके अभिभावक को करना पड़ेगा।
सांसद ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री को अवगत कराते हुए बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पांच वर्ष पूर्व ही इस संस्थान को यहीं पर संचालित कराने का आश्वासन दिया था। तब इस हेतु फर्टिलाइजर कैम्पस में ही पांच एकड़ जमीन प्रस्तावित हुई। जिसकी पैमाइश भी हो चुकी है। अतः केंद्रीय विद्यालय को यथावत रहना ही आमजन के लिए उपयोगी है,फायदेमंद है। इसलिए इसे यथास्थान रहने देने की आप से निवेदन करता हूं।
| गोरखपुर,बीससितंबरः गोरखपुर के सांसद रवि किशन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान से केंद्रीय विद्यालय को दूसरे जगह स्थानांतरित न करने की मांग की है। वर्तमान समय में केंद्रीय विद्यालय को उसके स्थान से स्थानातंरित कर उनौला में ले जाने की कवायद की जा रही है। इससे लगभग हजार छात्रों व उनके अभिभावकों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। सांसद ने इन छात्र-छात्राओं को समस्याओं का सामना न करना पड़े इसके लिए यह मांग की है। उन्होंने इसे यथास्थान रहने देने की मांग की है। रवि किशन ने केन्द्रीय शिक्षा मंत्री से मांग करते हुए कहा कि मेरे लोकसभा क्षेत्र में केंद्रीय विद्यालय नंबर दो एफसीआई को यहां से दूर घने जंगलों में स्थानांतरित किया जा रहा है। विद्यालय में लगभग दो हजार से अधिक छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इसमें गरीब वर्ग ज्यादातर छात्र हैं जो विद्यालय के नजदीक ही निवास करते हैं। विद्यालय आवागमन के लिए उनके पास कोई साधन भी नहीं है। ऐसे में केंद्रीय विद्यालय को मूल स्थान से घने जंगलों में बसे ग्रामीण अंचल में ले जाना उचित नहीं है। छात्रों को लगभग बीस किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी भी तय करनी पड़ेगी। इस आकस्मिक निर्णय से छात्र व उनके अभिवावक काफी परेशान हैं। नियमानुसार भी इस विद्यालय में पांच किमी दूरी के छात्र-छात्राओं का ही दाखिला लिया जाता है। ऐसे में विद्यालय के कही और स्थानांतरित होने पर कई समस्याओं का सामना छात्र-छात्राओं व उनके अभिभावक को करना पड़ेगा। सांसद ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री को अवगत कराते हुए बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पांच वर्ष पूर्व ही इस संस्थान को यहीं पर संचालित कराने का आश्वासन दिया था। तब इस हेतु फर्टिलाइजर कैम्पस में ही पांच एकड़ जमीन प्रस्तावित हुई। जिसकी पैमाइश भी हो चुकी है। अतः केंद्रीय विद्यालय को यथावत रहना ही आमजन के लिए उपयोगी है,फायदेमंद है। इसलिए इसे यथास्थान रहने देने की आप से निवेदन करता हूं। |
यहां पर आपको 3 women shoes तक का कॉम्बो मिल रहा है। इनमें से कुछ शूज ऑफिस कैजुअल और ऑफिस वेयर के लिए भी बेस्ट हैं। ये स्टाइलिश और अट्रैक्टिव कलर्स में भी मौजूद है। आइए इनके बारे में आपको पूरी जानकारी देते हैं।
TYING Women's Sneaker :
Asian Women's Casual Shoes :
Birde Multicolor Mesh & Canvas Casual :
ASIAN Multicolor Walking Shoes :
Shoefly Women's Sports Running Shoes :
नोट : फैशन स्टोर से अन्य सामानों की शॉपिंग करने के लिए यहां क्लिक करें।
Disclaimer : NBT के पत्रकारों ने इस आर्टिकल को नहीं लिखा है। आर्टिकल लिखे जाने तक ये प्रोडक्ट्स Amazon पर उपलब्ध है।
| यहां पर आपको तीन women shoes तक का कॉम्बो मिल रहा है। इनमें से कुछ शूज ऑफिस कैजुअल और ऑफिस वेयर के लिए भी बेस्ट हैं। ये स्टाइलिश और अट्रैक्टिव कलर्स में भी मौजूद है। आइए इनके बारे में आपको पूरी जानकारी देते हैं। TYING Women's Sneaker : Asian Women's Casual Shoes : Birde Multicolor Mesh & Canvas Casual : ASIAN Multicolor Walking Shoes : Shoefly Women's Sports Running Shoes : नोट : फैशन स्टोर से अन्य सामानों की शॉपिंग करने के लिए यहां क्लिक करें। Disclaimer : NBT के पत्रकारों ने इस आर्टिकल को नहीं लिखा है। आर्टिकल लिखे जाने तक ये प्रोडक्ट्स Amazon पर उपलब्ध है। |
कश्मीरी पंडित कर्मचारी की छोटी बच्चियों की भी वीडियो सोशल मीडिया में वायल हो रही है। एक बच्ची ने पीएम मोदी के गुहार लगाई कि-मोदी जी हम आपकी मन की बात सुनते हैं। अब आप हमारी भी बात सुन लो।
करीब एक मिनट से अधिक के इस वीडियो में बच्ची कह रही है कि मैं एक कश्मीरी पीएम पैकेज कर्मचारी की बेटी हूं। कश्मीर में लक्षित हत्याएं बहुत बढ़ गई हैं। कश्मीरी पंडितों को पहले भी यहां से भगाया गया था। अब दोबारा ऐसा न हो, इसके लिए कर्मचारियों का स्थानांतरण कश्मीर से बाहर कहीं करवा दीजिए। हमें अनाथ होने से बचा लीजिए। हम अपने माता-पिता को नहीं खोना चाहते।
इस मार्मिक अपील में उस बच्ची का कहना है कि वो अनाथ नहीं होना चाहती। उसके पिता का कहीं भी ट्रांसफर कर दो लेकिन कश्मीर से बाहर निकाल लो। हाथ जोड़कर वो बच्ची कह रही है प्लीज हमारा ट्रांसफर कश्मीर से बाहर कराइए। मैं पीएम पैकेज कर्मचारी की बेटी हूं। यहां पर टारगेट किलिंबग बढ़ गई है। मैंने सुना है कि पहले भी हमें भगाया है। हमारा ट्रांसफर कहीं करा दीजिए। अगर हमारे लिए कुछ करेंगे तो भी टारगेट किलिंग नहीं रुकेगी। हम अनाथ नहीं होना चाहती। मैं अपने पैरेंट्स को नहीं खोना चाहती हूं। कोई भी बच्चा अपने पैरेंट्स को नहीं खोना चाहता।
बच्ची आगे कहती है कि आप किसी तरह से हमें यहां से बाहर निकाल दीजिए। ट्रांसफर करा दीजिए। जम्मू भेजवा दीजिए या कहीं और। वो कहीं भी रह लेंगे। प्लीज मेरी समझिए,हमारी मदद करिए। बता दें कि हाल के दिनों में टारगेट किलिंग की संख्या में इजाफा हुआ है। जानकार कहते हैं कि सुरक्षा बलों की सटीक रणनीति के आगे आतंकी नेटवर्क कमजोर हो चुका है। लिहाजा वो साफ्ट टारगेट पर निशाना साध रहे हैं। इस तरह की हत्याओं के जरिए वो आम लोगों के मन में खौफ पैदा करना चाहते हैं। इसके साथ ही इस तरह की घटनाओं से विपक्षी दल भी अपना राजनीतिक मकसद साधते हैं। जब कभी भी कश्मीर में इस तरह की घटना होती है तो केंद्र सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया जाता है। वहीं, बडगाम जिले की शेखपोरा पंडित कॉलोनी, श्रीनगर के इंदिरा नगर आदि इलाकों में कश्मीरी पंडितों का प्रदर्शन जारी है। कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की एक ही मांग है कि उन्हें घाटी से बाहर स्थानांतरित किया जाए।
लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
| कश्मीरी पंडित कर्मचारी की छोटी बच्चियों की भी वीडियो सोशल मीडिया में वायल हो रही है। एक बच्ची ने पीएम मोदी के गुहार लगाई कि-मोदी जी हम आपकी मन की बात सुनते हैं। अब आप हमारी भी बात सुन लो। करीब एक मिनट से अधिक के इस वीडियो में बच्ची कह रही है कि मैं एक कश्मीरी पीएम पैकेज कर्मचारी की बेटी हूं। कश्मीर में लक्षित हत्याएं बहुत बढ़ गई हैं। कश्मीरी पंडितों को पहले भी यहां से भगाया गया था। अब दोबारा ऐसा न हो, इसके लिए कर्मचारियों का स्थानांतरण कश्मीर से बाहर कहीं करवा दीजिए। हमें अनाथ होने से बचा लीजिए। हम अपने माता-पिता को नहीं खोना चाहते। इस मार्मिक अपील में उस बच्ची का कहना है कि वो अनाथ नहीं होना चाहती। उसके पिता का कहीं भी ट्रांसफर कर दो लेकिन कश्मीर से बाहर निकाल लो। हाथ जोड़कर वो बच्ची कह रही है प्लीज हमारा ट्रांसफर कश्मीर से बाहर कराइए। मैं पीएम पैकेज कर्मचारी की बेटी हूं। यहां पर टारगेट किलिंबग बढ़ गई है। मैंने सुना है कि पहले भी हमें भगाया है। हमारा ट्रांसफर कहीं करा दीजिए। अगर हमारे लिए कुछ करेंगे तो भी टारगेट किलिंग नहीं रुकेगी। हम अनाथ नहीं होना चाहती। मैं अपने पैरेंट्स को नहीं खोना चाहती हूं। कोई भी बच्चा अपने पैरेंट्स को नहीं खोना चाहता। बच्ची आगे कहती है कि आप किसी तरह से हमें यहां से बाहर निकाल दीजिए। ट्रांसफर करा दीजिए। जम्मू भेजवा दीजिए या कहीं और। वो कहीं भी रह लेंगे। प्लीज मेरी समझिए,हमारी मदद करिए। बता दें कि हाल के दिनों में टारगेट किलिंग की संख्या में इजाफा हुआ है। जानकार कहते हैं कि सुरक्षा बलों की सटीक रणनीति के आगे आतंकी नेटवर्क कमजोर हो चुका है। लिहाजा वो साफ्ट टारगेट पर निशाना साध रहे हैं। इस तरह की हत्याओं के जरिए वो आम लोगों के मन में खौफ पैदा करना चाहते हैं। इसके साथ ही इस तरह की घटनाओं से विपक्षी दल भी अपना राजनीतिक मकसद साधते हैं। जब कभी भी कश्मीर में इस तरह की घटना होती है तो केंद्र सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया जाता है। वहीं, बडगाम जिले की शेखपोरा पंडित कॉलोनी, श्रीनगर के इंदिरा नगर आदि इलाकों में कश्मीरी पंडितों का प्रदर्शन जारी है। कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की एक ही मांग है कि उन्हें घाटी से बाहर स्थानांतरित किया जाए। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड। |
चर्चा में क्यों?
30 जुलाई, 2022 को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एचएसआईआईडीसी) का पुनः डिज़ाइन किया गया लोगो और वेबसाइट लॉन्च किया।
- इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार नागरिकों के जीवन को सुविधाजनक बनाने, आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और हरियाणा को ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में काम कर रही है।
- उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा कि एचएसआईआईडीसी की यह नई पहचान अभिनव, आधुनिक और पेशेवर है। एचएसआईआईडीसी उन उद्यमियों को सेवाएँ प्रदान करेगा, जो व्यवसायों को विकसित और विस्तार करना चाहते हैं।
- एचएसआईआईडीसी की नई वेबसाइट और ब्रांड पहचान इसकी मार्केट लीडिंग पोजीशन को बेहतर ढंग से दर्शाती है और ग्राहकों के लिये सेवाओं के व्यापक चक्र को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करती है। डिजिटल और भौतिक माध्यमों पर सुगमता से कार्य करने के लिये डिज़ाइन किया गया नया लोगो प्रेरणा, नवाचार और उद्यमिता की भावना पैदा करता है।
- एचएसआईआईडीसी के नए लोगो में तितली का रूपक एक कोकून में रहने की प्रक्रिया से गुज़रने की तरह एक विचार से एक सफल व्यवसाय में परिवर्तन का प्रतीक है। चार पंख उद्योग 0 को प्रदर्शित करते हैं। इस प्रकार यह लोगो दर्शाता है कि कैसे एचएसआईआईडीसी कंपनियों को व्यवसाय की बाधाओं को दूर करने में मदद करता है।
- नव-डिज़ाइन वेबसाइट में सहज उपयोगकर्त्ता अनुभव प्रदान करने के लिये लेआउट तैयार किया गया है। यह वेबसाइट एचएसआईआईडीसी द्वारा दी जाने वाली सेवाओं पर भी प्रकाश डालती है और पुनर्परिभाषित दृष्टिकोण की एक झलक दर्शाती है।
- एचएसआईआईडीसी हरियाणा में औद्योगिक बुनियादी ढाँचे के विकास के लिये हरियाणा सरकार की नोडल एजेंसी है। निगम ने 6 औद्योगिक मॉडल टाउनशिप (मानेसर, फरीदाबाद, बावल, रोहतक, सोहना और खरखौदा) विकसित किये हैं। इसके अलावा, 28 इंडस्ट्रियल एस्टेट और थीम पार्क (राई, साहा और बड़ी में फूड पार्क, आईएमटी मानेसर और राई में प्रौद्योगिकी पार्क व बहादुरगढ़ में फुटवियर पार्क) भी स्थापित किये गए हैं, जहाँ 16000 से अधिक इकाइयाँ काम कर रही हैं।
- औद्योगिक बुनियादी ढाँचे के विकास में 55 वर्षों की बेजोड़ विशेषज्ञता के साथ एचएसआईआईडीसी ने कई प्रमुख परियोजनाओं की योजना बनाई है, जिसमें ग्लोबल सिटी गुरुग्राम में 1080 एकड़ से अधिक क्षेत्र में मिक्सड लैंड यूज़ डेवलपमेंट और नांगल चौधरी ज़िला महेंद्रगढ़ में 886 एकड़ से अधिक क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स पार्क विकसित करना शामिल हैं।
| चर्चा में क्यों? तीस जुलाई, दो हज़ार बाईस को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड का पुनः डिज़ाइन किया गया लोगो और वेबसाइट लॉन्च किया। - इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार नागरिकों के जीवन को सुविधाजनक बनाने, आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और हरियाणा को ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में काम कर रही है। - उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा कि एचएसआईआईडीसी की यह नई पहचान अभिनव, आधुनिक और पेशेवर है। एचएसआईआईडीसी उन उद्यमियों को सेवाएँ प्रदान करेगा, जो व्यवसायों को विकसित और विस्तार करना चाहते हैं। - एचएसआईआईडीसी की नई वेबसाइट और ब्रांड पहचान इसकी मार्केट लीडिंग पोजीशन को बेहतर ढंग से दर्शाती है और ग्राहकों के लिये सेवाओं के व्यापक चक्र को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करती है। डिजिटल और भौतिक माध्यमों पर सुगमता से कार्य करने के लिये डिज़ाइन किया गया नया लोगो प्रेरणा, नवाचार और उद्यमिता की भावना पैदा करता है। - एचएसआईआईडीसी के नए लोगो में तितली का रूपक एक कोकून में रहने की प्रक्रिया से गुज़रने की तरह एक विचार से एक सफल व्यवसाय में परिवर्तन का प्रतीक है। चार पंख उद्योग शून्य को प्रदर्शित करते हैं। इस प्रकार यह लोगो दर्शाता है कि कैसे एचएसआईआईडीसी कंपनियों को व्यवसाय की बाधाओं को दूर करने में मदद करता है। - नव-डिज़ाइन वेबसाइट में सहज उपयोगकर्त्ता अनुभव प्रदान करने के लिये लेआउट तैयार किया गया है। यह वेबसाइट एचएसआईआईडीसी द्वारा दी जाने वाली सेवाओं पर भी प्रकाश डालती है और पुनर्परिभाषित दृष्टिकोण की एक झलक दर्शाती है। - एचएसआईआईडीसी हरियाणा में औद्योगिक बुनियादी ढाँचे के विकास के लिये हरियाणा सरकार की नोडल एजेंसी है। निगम ने छः औद्योगिक मॉडल टाउनशिप विकसित किये हैं। इसके अलावा, अट्ठाईस इंडस्ट्रियल एस्टेट और थीम पार्क भी स्थापित किये गए हैं, जहाँ सोलह हज़ार से अधिक इकाइयाँ काम कर रही हैं। - औद्योगिक बुनियादी ढाँचे के विकास में पचपन वर्षों की बेजोड़ विशेषज्ञता के साथ एचएसआईआईडीसी ने कई प्रमुख परियोजनाओं की योजना बनाई है, जिसमें ग्लोबल सिटी गुरुग्राम में एक हज़ार अस्सी एकड़ से अधिक क्षेत्र में मिक्सड लैंड यूज़ डेवलपमेंट और नांगल चौधरी ज़िला महेंद्रगढ़ में आठ सौ छियासी एकड़ से अधिक क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स पार्क विकसित करना शामिल हैं। |
५९६ आधुनिक हिन्दी साहित्य मे आलोचना का विकास
तुलना में इनके जीवन की भी कोई बात छूटी नही है । दोनो कवियो के काव्य के रस, काल, मात्रा, छन्द, आश्रयदाता पुरस्कार प्राप्ति, इष्टदेव, आकार-प्रकार, लोक-प्रियता, व्रजभाषा का प्रयोग आदि विषयो की भी तुलना की है। इनकी तुलना में जीवन की आन्तरिक भावनाओ के विश्लेषण तथा इनके युग की परिस्थितियों के निर्देश के स्थान पर केवल जीवन की साधारण बातो का उल्लेख किया गया है । इस प्रकार मिश्र जी की आलोचना में शर्मा जी से अधिक प्रौढता है ।
वे भी शर्मा जी की भाति कवियो मे भाव साम्य को अनिवार्य मानते है । वे मानते कि ससार के महान् से महान कवियों ने भी अपने पूर्ववर्ती कवियो के भावो को अपनाया है। वे उसी कवि को चोर कहते है, जो किसी कवि के भाव को ग्रहण करके उसे सुन्दर बनाने की अपेक्षा बिगाड देता है । वे तीन प्रकार का भाव सादृश्य मानते है, सौन्दर्य - सुधार, सौन्दर्य - रक्षा तथा सौन्दर्य - सहार तथा इनमें से अन्तिम को ही बुरा समझते है । वे शृगार रस का वर्णन बुरा नही मानते तथा उसके महत्त्व का विशेष प्रतिपादन करते है, किन्तु अपने न्युग की नैतिकता के कारण उन्होने भी परकीया की अपेक्षा स्वकीया के प्रेम को ही उचित समझा है।
लाला भगवान दोनःदीन जी प्राचीन परिपाटी के आलोचक थे, जिन्होने प्राचीन साहित्य के सिद्धान्तो के आधार पर साहित्यालोचन किया है। इनकी आलोचना मे पाश्चात्य तत्त्वो का समावेश नही है। द्विवेदी जी, शर्मा जी तथा मिश्र जी की भाति यह भी अपने युग की परिस्थितियो के द्वारा निर्मित है तथा इनकी आलोचना शैली भी परम्परागत तथा सामयिक का मिश्रित रूप है । पुरानी टीका परम्परा में इन्होने केशव-कौमुदी, प्रिया-प्रकाश, बिहारी-बोधनी, मानस की टीका, दोहावली, छत्रसाल दशक आदि टीकाए लिखी है तथा सूर-पच - रत्न, केशव-पच - रत्न, तुलसी पच- रत्न, ठाकुर - उसक, अन्योक्ति-कल्पद्रुम, विरहविलास, स्नेह सागर, सूक्ति-सरोवर आदि ग्रन्थो का सम्पादन किया है। इन ग्रन्थो मे से कुछ की भूमिका में इनकी व्यावहारिक आलोचना के दर्शन होते है। सैद्धान्तिक आलोचना के क्षेत्र में इन्होने लक्षण -ग्रन्थ लिखे तथा व्यावहारिक के क्षेत्र में टीकाए तथा भूमिकाए । किन्तु दोनो प्रकार की आलोचना में इनका दृष्टिकोण प्राचीन तथा परम्परागत ही है। आलोचक होने के लिए जिस विस्तृत ज्ञान तथा विद्वत्ता की आवश्यकता है, वे इनमे पूर्ण मात्रा में विद्यमान थे । इसीलिए तुलनात्मक विवेचन मे ये उर्दू, फारसी आदि का भी आघार लेते थे ।
इन्होने टीकाओ के मूल पाठ देकर फिर उसके अर्थ तथा भावार्थ परम्परागत शैली मे दिए है तथा स्थान-स्थान पर छन्दो तथा अलकारो का निरूपण करके तुलनात्मक विचार तथा टिप्पणिया दी है। यही इनकी आलोचनाओ की सीमा है। इनमे कही कही एक-एक
·१ देखिए 'देव और बिहारी ( स० १९९५) पृ० १०२ । २ देखिए वही, पृ० ८१
व्यावहारिक आलोचना,
शब्द का विचार तथा उसके प्रयोग का निरीक्षण तथा पाठातर का ध्यान रखा गया है। इस प्रकार इनकी टीका पद्धति मे व्याख्या के बीज तो है ही पर पाठ्य-सुधार सम्बन्धी आलोचना के प्रारम्भिक रूप के भी दर्शन होते है। इसी प्रकार 'बिहारी बोधनी' मे बिहारी की भाषा मे बुन्देलखण्डी शब्दो के प्रयोग पर भी विचार किया गया है । इस शैली मे बीच-बीच में किसी एक विषय को पकड़ कर, उसका विवेचन कर देने की स्वतन्त्रता है। इसीलिए बिहारी के दोहो के सौन्दर्य को स्पष्ट करते हुए ज्योतिष आदि की व्याख्या भी की गई है। वे कवि के सम्बन्ध में कुछ निश्चय करने से पूर्व उसकी कृति का निरीक्षण करते है। कवि की जीवनी के सम्बन्ध में विचार करते हुए वे ऐसे तथ्य कि बिहारी बुन्देलखड मे रहते थे या कही से आकर बसे थे आदि का भी विचार करते है तथा उनके प्रयुक्त बुन्देलखण्डी शब्दों के आधार पर इसका निर्णय करते है। उनकी व्यावहारिक आलोचना मे शास्त्रीय मानदण्डो के आधार पर तुलना द्वारा निर्णय दिया गया है। वे बिहारी को इसलिए सर्वश्रेष्ठ शृगारी कवि मानते है कि वे प्रत्येक प्रकार की घटना को शृगार मे घटा सकते है । इसीलिए वे इनको देव से बडा कवि मानते है । इन टीकाओ मे भी वे अपने निजी विचार देते चलते है, जैसे कवितावली में उन्होने यह विचार प्रकट किया है कि तुलसीदास को प्रत्येक पुस्तक किसी न किसी प्रकार के मनुष्यो के लिए लिखी गई है, जैसे रामचरित - मानस साहित्यिको, हरिभक्तो तथा प्रथम श्रेणी के मनुष्यों के लिए, विनयपत्रिका तथा गीतावली गायको के लिए तथा 'राम लला नहछू' स्त्रियो के द्वारा गाए जाने के लिए तथा कवितावली भाटो के लिए लिखी गई है। इस प्रकार की बात उन्होंने रुचि तथा अनुमान पर ही कही है तथा इसमे कोई तर्क नही है । तुलसी ने अपना काव्य इस प्रकार के पाठको के लिए पृथक्-पृथक् उद्देश्य से लिखा होगा, यह अनुमान ही भ्रान्तिपूर्ण है ।
इसी प्रकार 'केशव-कौमुदी' मे निर्णयात्मक आलोचना के अनुसार उन्होने केशव को कवि, भक्त और आचार्य सिद्ध किया है । आचार्यत्व सिद्ध करने के लिए उन्होने यह प्रमाण दिया है कि आचार्यत्व के प्रदर्शन के लिए ही उन्होने बहुत से छन्दो का प्रयोग किया है। वे केशव के काव्य की कठिनाई का कारण उनका पाडित्य मानते है । केशव के सम्बन्ध मे उनका मत इस दोहे के द्वारा प्रकट किया गया है । यह दोहा उनकी 'केशव-कौमुदी' मे सिद्धान्त वाक्य के रूप में प्रकाशित हुआ है
"सूर सोई जिन बाचियो केसव तुलसी सूर सूर सोई जिन बाचियो केसव तुलसी सूर । "
इसी प्रकार 'सूर-सग्रह' मे उन्होने सूर की भाषा का विवेचन करके उनको भक्ति तथा गीति-काव्य का महाकवि माना है। इसमे भी उन्होने अपने स्वतन्त्र विचारों का प्रतिपादन किया है जैसे कि सूर ने कृष्ण चरित का विषय गाने की कामना से चुना है।
'सूर- पचरत्न', 'दोहावली' तथा 'अन्योक्ति कल्पद्रुम' की भूमिकाए विस्तृत है। सूर-पच-रत्न मे भक्ति-काव्य, ब्रज-भाषा, सूर- साहित्य, सूर की शैली आदि विषयो का सरल तथा परिचयात्मक शैली में विवेचन किया गया है ।
दीन जो ने मिश्रवन्धुओं द्वारा प्रारम्भ किए हुए देव और बिहारी के वाद-विवाद मे भाग लिया तया अपनी 'विहारी और देव' पुस्तक मे देव की कविता में वे ही दोप बताए, जो दोप विहारी में मिश्रवन्धुओं ने निकाले थे । टीकाकार होने के कारण उन्होंने मिश्रवन्धुओं के अर्थों का भी खडन किया है तथा पाठो का भी मुवार किया है।' इम पुस्तक का उद्देश्य ही मिश्रवन्धुओ के बिहारी में दिखाए ढोपो का निराकरण करना है उन्होंने विहारी की अपेक्षा देव में भी दोप दिखाए है। उन्होंने देव द्वारा तोडे-मरोडे शब्दो की सूची देकर यह मिद्ध किया है कि शब्दों के तोडने के दोप से बिहारी मुक्त हैं। इसी प्रकार उन्होंने देव के भावापहरण के भी उदाहरण दिए है तथा यह बताया है कि देव मे भी बिहारी की भाति भावापहरण के ढोप है। देव पर इन्होंने उमी पद्धति मे ढोपारोपण किया है, जिससे मिश्रवन्धुओ ने बिहारी पर दीप लगाए थे। इनकी डम तुलनात्मक विवेचना में भी मिश्रवन्धु तथा कृष्णविहारी मिश्र जी की सी त्रुटिया है। इसमें भी इन्ही की भाति पक्षपात, तुलना, निर्णय, रुचि का आधार, दोषारोपण, अपने पक्ष का समर्थन, नटस्थता तथा गम्भीरता का अभाव है। इन आलोचनाओ मे इन आलोचको ने केवल अपने पक्ष का समर्थन वकीलो की भाति झूठ मच बोल कर किया है। दूसरे पक्ष के प्रति सहृदयता तथा उदारता का व्यवहार नही किया है। दीन जी ने अवश्य देव के उन ही पदों का विवेचन किया है, जिनमे कुछ विशेष त्रुटिया थी, किन्तु वे भी बिहारी को निश्चित ही देव से श्रेष्ठ मानते हैं। वे देव को बिहारी का टीकाकार बताते है । यह निश्चित ही पक्षपान है ।
इस प्रकार दीन जी की व्यावहारिक आलोचना में शास्त्रीय मानदण्डी के आधार पर तुलना तथा निर्णय की पद्धतियों का प्रयोग मिलता है। इनके निर्णयों में तर्क की अपेक्षा चि का व्यवहार अधिक मिलता है। इसलिए इनके निर्णय सर्वथा निप्पक्ष नहीं है। इनकी तुलना में भी जिम तटम्यता की आवश्यकता होती है, वह नहीं मिलती। इन तुलनाकारो का लक्ष्य निष्पक्ष-विवेचन नहीं, वरनु एक कवि के ऊपर दूसरे की श्रेष्ठना थोपना है । इन्होंने टीकाओं के द्वारा व्याख्यात्मक शैली का प्रयोग किया है। इन टीकाओं में प्राय समी टीका-पद्धति के गुण-डोप वर्त्तमान है । पाठ-गोधन तथा अर्थ- विवेचन की परवर्ती काल में होने वाली आलोचनाओ की ये टीकाए प्रारम्भिक रूप कही जा सकती हैं। केशव, विहारी, तुलमी आदि के काव्य का समुचित नया विवेकसम्मत पाठ उपलब्ध करने के कारण इनका विशेष महत्व है। इसी प्रकार इनके द्वारा इन कवियों के अर्थों के मौन्दर्य के अतिरिक्त अलकार, रम आदि का परिचय भी कराया गया है, जिससे इनके काव्य की जानकारी वढी है। इस प्रारम्भिक युग में यह भी कोई कम महत्व की बात नहीं है।
१ "नही महाराज । यह अर्थ तो नहीं है। ठीक अर्थ है 'चेपी जानी बछडे मे दूध पिलाए लेती हैं।" विहारी और देव ( मन् १९२६) पृ० ५३ व ५५ ।
२ देखिए वही, पृ० १७-१८ ।
रामचन्द्र शुक्लःशुक्ल जी की व्यावहारिक आलोचनाए प्राय भूमिकाओ के रूप मे लिखी गई है। इतिहास के अतिरिक्त उन्होने सूर, तुलसी तथा जायसी पर पृथक् व्यावहारिक आलोचनाए लिखी हैं । इनकी आलोचना-पद्धति परम्परागत आलोचना की शैलियो से पृथक् है । इन्होने एक नवीन आलोचना के युगानुकूल स्वरूप को जन्म दिया । इनकी आलोचना की सबसे बडी विशेषता यह है कि इनके आलोचना के मानदण्ड पूर्णतया शास्त्रीय तथा परम्परागत ही नही है तथा इनकी निजी प्रतिभा, मौलिक सूझ तथा गम्भीर चिन्तन के परिणाम स्वरूप इनके द्वारा स्थापित हुए है । ये हिन्दी के प्रथम आलोचक है, जिन्होंने हिन्दी की व्यावहारिक आलोचना को हिन्दी के रचनात्मक साहित्य पर आधारित किया है। उनकी व्यावहारिक आलोचना भारतीय तथा पाश्चात्य विचारो के आधार पर प्रतिष्ठित होने पर भी अपनी मौलिकताओ से समृद्ध है । वे हिन्दी की एक विशिष्ट शैली के जन्मदाता है, जो उनकी व्यक्तिगत सत्ता तथा विशिष्टता से अकित है । इनकी प्रतिभा का सब से बडा गुण उनकी मौलिकता तथा गम्भीर चिन्तन शक्ति है, जिसके कारण इनकी आलोचना पद्धति केवल रूढ ही नही रह गई है । वह प्रत्येक कवि की आलोचना के साथ बदलती जाती है तथा उसका स्वरूप निर्माण, पाश्चात्य, भारतीय, युगानुकूल तथा शाश्वत, सभी प्रकार के तत्त्वो से हुआ है। इन्होने आलोचना के आधार स्वरूप, जो मानदण्ड हिन्दी के रचनात्मक-साहित्य के आधार पर बनाए है, यद्यपि उनमे उनकी नवीनता, स्वतन्त्रता, चिन्तन, निजी दृष्टिकोण तथा मौलिक सूझ के दर्शन होते है, तथापि उन पर उनकी विशिष्ट रुचि की छाप भी विद्यमान है। उनकी आलोचना का स्तर पिछले आलोचको की परिचयात्मक, प्रशसात्मक, गुणदोष-विवेचन वाली पद्धतियो की आलोचना से विशेष रूप मे ऊचा है। उनकी सी गम्भीर विवेचन, विश्लेषण तथा चिन्तन की शक्ति हिन्दी मालोचना मे पहली बार दिखाई पड़ी।
उनकी सूर, तुलसी, जायसी की व्यावहारिक आलोचना निगमन शैली की होने के कारण, उनके मानदण्ड अधिकाश मे इन कवियो के रचनात्मक साहित्य के आधार पर ही निर्मित हुए है, किन्तु फिर भी उनके निजी विचार, आदर्श, रुचि, सस्कार, दृष्टिकोण, प्रकृति तथा बाह्य और आन्तरिक प्रभावो का भी प्रभाव उनके निर्माण के मूल मे है । हिन्दी मे पहली बार शुक्ल जी ने निगमन-शैली से किसी कवि की आलोचना मे, उसी के साहित्य के आधार पर मानदण्डो का निर्माण किया। किन्तु इन प्रयोगो मे पूर्ण तटस्थता, निष्पक्षता तथा वस्तुपरकता का अभाव है। इस प्रकार अपनी रुचि तथा आदर्श के अनुकूल उन्होने जो सिद्धान्त, प्रतिमान तथा मानदण्ड स्थापित किए, उनकी व्यावहारिक आलोचना प्राय उन पर ही आधारित है तथा नवीन और प्राचीन कवियो के काव्य का विवेचन उन्ही के आधार पर किया गया है। कभी-कभी उनकी रुचि का प्रदर्शन प्रत्यक्ष रूप में भी हो जाता है। वहा उनकी आलोचना विवेचनात्मक न होकर निर्णयात्मक रूप धारण कर लेती
इनके निर्मित मानदण्डी में लोकधर्म अथवा लोकादर्शवाद का सिद्धान्त विशेष महत्व का है, जिसका निर्माण उन्होंने तुलमी के काव्य के आधार पर किया है । वे उस काव्य को श्रेष्ठ समझते है, जिसका विषय व्यक्तिगत-कन्याण की लय में न रख कर अघिकाबिक लोक-कल्याण को सामने रखना है। उनके विचार से उसी काव्य का विषय सुन्दर हैं, जिनमें लोक-पक्ष का अधिकाधिक चित्रण हो । वे उसी काव्य, समाज, धर्म तथा साहित्य को श्रेष्ठ मानते हैं, जिसमे लोक में अधिकाधिक व्यक्तियों का कल्याण हो । उनका यह सिद्धान्न नुलनी के काव्य तथा भक्ति के आदर्श पर निर्मित है । वे उनके सिद्धान्त को कि "आप आपु कह नव भो, अपने कह कोड कोड
तुलनी मत्र कह जो मला मुजन मराहिय मोड । "
का ही माहित्य की आलोचना में प्रयोग करते है। वे तुलसी के समान गृह-धर्म, कुल-धर्म, समाज-धर्म में लोक-वर्म अथवा विश्व-धर्म की भावना को श्रेष्ठ मानने है। उनका विचार है कि जैसे विश्व - धर्म का पालन करने वाले पूर्ण-युम्प या पुरुषोत्तम है वैसे ही लोक-चर्म का लय मामने रत्र कर काव्य करने वाला कवि महान् है ।
उनका विचार है कि जिस काव्य का विषय जिनने ही विस्तृत नया विविध लोकपक्ष को लेकर चलेगा, वह काव्य उतना ही प्रभावशाली तथा महत्त्वपूर्ण होगा। वे मानते है कि जो काव्य जीवन के जिनने अधिक से अधिक अगी को लेकर चलेगा, वह उतना ही श्रेष्ठ होगा । इसीलिए उन्होंने निर्गुण-भक्त तथा रम्यवादी कवियों को सगुण-भक्त कवियो में अधिक महत्व नहीं दिया है । लोकसेवा के महन्त्र का प्रभाव उन पर कढाचिन् तुलमी के अतिरिक्त गावीवादी विचारधारा से भी मिला है। उन्होंने काव्य की दृष्टि में तुलसी की श्रेष्ठता भी इसी आधार पर स्थापित की है। वे तुलमी को इसलिए भी श्रेष्ठ कवि मानते है कि उनके काव्य में राम का वह आदर्श है, जो लोक-रक्षक तथा लोक-ग्जक ढोनी वाला है। वे सूर को तुलमी मे इसीलिए श्रेष्ठ नहीं मानने कि उनके कृष्ण मे लोक रजक स्वरूप को व्यंजना लोक-रक्षक रूप से अधिक है। नूर के काव्य में जीवन की विविधता न होने के कारण भी उनका काव्य तुलमी ने श्रेष्ठ नहीं माना गया है। उनकी यह भूल है कि वे किसी एक कवि के काव्य के सिद्धान्नी का प्रयोग, दूसरे कवि के काव्य नया सिद्धान्तो के पवने के लिए करते हैं। यदि उन्हें आगमनात्मक प्रणाली के आधार पर ही मूल्याकन करना था, तो सूर के काव्य का विवेचन पुष्टिमार्गीय सिद्धान्तों के आधार पर ही होना चाहिए था । एक कवि के काव्य के द्वारा गृहीन सिद्धान्नी का दूसरे पर आरोप करने से, उम काव्य की आत्मा प्रकट नहीं होनी । काव्यालांचन के लिए या तो चिरन्र्तन तथा न्यायी निद्धानो का प्रयोग होना चाहिए अथवा किसी कवि के काव्य के द्वारा प्राप्त सिद्धान्ती का आधार, केवल उसके काव्य की आलोचना के लिए ही होना चाहिए ।
इसके अतिरिक्त वे यह भी मानते है कि वह कवि श्रेष्ठ है, जिसका भक्ति का आदर्श श्रेष्ठ है। वे प्रेम-लक्षणा भक्ति से श्रद्धा-समन्वित भक्ति की श्रेष्ठ मानने है नया इसलिए उस काव्य की श्रेष्ठ समझने है, जो श्रद्धा-समन्त्रिन-भक्ति की अभिव्यजना करना है । प्रेम-भक्ति का आदर्श लोकपक्ष मे रहित होना है, इसलिए वे उसे उत्तम नही | पाँच सौ छियानवे आधुनिक हिन्दी साहित्य मे आलोचना का विकास तुलना में इनके जीवन की भी कोई बात छूटी नही है । दोनो कवियो के काव्य के रस, काल, मात्रा, छन्द, आश्रयदाता पुरस्कार प्राप्ति, इष्टदेव, आकार-प्रकार, लोक-प्रियता, व्रजभाषा का प्रयोग आदि विषयो की भी तुलना की है। इनकी तुलना में जीवन की आन्तरिक भावनाओ के विश्लेषण तथा इनके युग की परिस्थितियों के निर्देश के स्थान पर केवल जीवन की साधारण बातो का उल्लेख किया गया है । इस प्रकार मिश्र जी की आलोचना में शर्मा जी से अधिक प्रौढता है । वे भी शर्मा जी की भाति कवियो मे भाव साम्य को अनिवार्य मानते है । वे मानते कि ससार के महान् से महान कवियों ने भी अपने पूर्ववर्ती कवियो के भावो को अपनाया है। वे उसी कवि को चोर कहते है, जो किसी कवि के भाव को ग्रहण करके उसे सुन्दर बनाने की अपेक्षा बिगाड देता है । वे तीन प्रकार का भाव सादृश्य मानते है, सौन्दर्य - सुधार, सौन्दर्य - रक्षा तथा सौन्दर्य - सहार तथा इनमें से अन्तिम को ही बुरा समझते है । वे शृगार रस का वर्णन बुरा नही मानते तथा उसके महत्त्व का विशेष प्रतिपादन करते है, किन्तु अपने न्युग की नैतिकता के कारण उन्होने भी परकीया की अपेक्षा स्वकीया के प्रेम को ही उचित समझा है। लाला भगवान दोनःदीन जी प्राचीन परिपाटी के आलोचक थे, जिन्होने प्राचीन साहित्य के सिद्धान्तो के आधार पर साहित्यालोचन किया है। इनकी आलोचना मे पाश्चात्य तत्त्वो का समावेश नही है। द्विवेदी जी, शर्मा जी तथा मिश्र जी की भाति यह भी अपने युग की परिस्थितियो के द्वारा निर्मित है तथा इनकी आलोचना शैली भी परम्परागत तथा सामयिक का मिश्रित रूप है । पुरानी टीका परम्परा में इन्होने केशव-कौमुदी, प्रिया-प्रकाश, बिहारी-बोधनी, मानस की टीका, दोहावली, छत्रसाल दशक आदि टीकाए लिखी है तथा सूर-पच - रत्न, केशव-पच - रत्न, तुलसी पच- रत्न, ठाकुर - उसक, अन्योक्ति-कल्पद्रुम, विरहविलास, स्नेह सागर, सूक्ति-सरोवर आदि ग्रन्थो का सम्पादन किया है। इन ग्रन्थो मे से कुछ की भूमिका में इनकी व्यावहारिक आलोचना के दर्शन होते है। सैद्धान्तिक आलोचना के क्षेत्र में इन्होने लक्षण -ग्रन्थ लिखे तथा व्यावहारिक के क्षेत्र में टीकाए तथा भूमिकाए । किन्तु दोनो प्रकार की आलोचना में इनका दृष्टिकोण प्राचीन तथा परम्परागत ही है। आलोचक होने के लिए जिस विस्तृत ज्ञान तथा विद्वत्ता की आवश्यकता है, वे इनमे पूर्ण मात्रा में विद्यमान थे । इसीलिए तुलनात्मक विवेचन मे ये उर्दू, फारसी आदि का भी आघार लेते थे । इन्होने टीकाओ के मूल पाठ देकर फिर उसके अर्थ तथा भावार्थ परम्परागत शैली मे दिए है तथा स्थान-स्थान पर छन्दो तथा अलकारो का निरूपण करके तुलनात्मक विचार तथा टिप्पणिया दी है। यही इनकी आलोचनाओ की सीमा है। इनमे कही कही एक-एक ·एक देखिए 'देव और बिहारी पृशून्य एक सौ दो । दो देखिए वही, पृशून्य इक्यासी व्यावहारिक आलोचना, शब्द का विचार तथा उसके प्रयोग का निरीक्षण तथा पाठातर का ध्यान रखा गया है। इस प्रकार इनकी टीका पद्धति मे व्याख्या के बीज तो है ही पर पाठ्य-सुधार सम्बन्धी आलोचना के प्रारम्भिक रूप के भी दर्शन होते है। इसी प्रकार 'बिहारी बोधनी' मे बिहारी की भाषा मे बुन्देलखण्डी शब्दो के प्रयोग पर भी विचार किया गया है । इस शैली मे बीच-बीच में किसी एक विषय को पकड़ कर, उसका विवेचन कर देने की स्वतन्त्रता है। इसीलिए बिहारी के दोहो के सौन्दर्य को स्पष्ट करते हुए ज्योतिष आदि की व्याख्या भी की गई है। वे कवि के सम्बन्ध में कुछ निश्चय करने से पूर्व उसकी कृति का निरीक्षण करते है। कवि की जीवनी के सम्बन्ध में विचार करते हुए वे ऐसे तथ्य कि बिहारी बुन्देलखड मे रहते थे या कही से आकर बसे थे आदि का भी विचार करते है तथा उनके प्रयुक्त बुन्देलखण्डी शब्दों के आधार पर इसका निर्णय करते है। उनकी व्यावहारिक आलोचना मे शास्त्रीय मानदण्डो के आधार पर तुलना द्वारा निर्णय दिया गया है। वे बिहारी को इसलिए सर्वश्रेष्ठ शृगारी कवि मानते है कि वे प्रत्येक प्रकार की घटना को शृगार मे घटा सकते है । इसीलिए वे इनको देव से बडा कवि मानते है । इन टीकाओ मे भी वे अपने निजी विचार देते चलते है, जैसे कवितावली में उन्होने यह विचार प्रकट किया है कि तुलसीदास को प्रत्येक पुस्तक किसी न किसी प्रकार के मनुष्यो के लिए लिखी गई है, जैसे रामचरित - मानस साहित्यिको, हरिभक्तो तथा प्रथम श्रेणी के मनुष्यों के लिए, विनयपत्रिका तथा गीतावली गायको के लिए तथा 'राम लला नहछू' स्त्रियो के द्वारा गाए जाने के लिए तथा कवितावली भाटो के लिए लिखी गई है। इस प्रकार की बात उन्होंने रुचि तथा अनुमान पर ही कही है तथा इसमे कोई तर्क नही है । तुलसी ने अपना काव्य इस प्रकार के पाठको के लिए पृथक्-पृथक् उद्देश्य से लिखा होगा, यह अनुमान ही भ्रान्तिपूर्ण है । इसी प्रकार 'केशव-कौमुदी' मे निर्णयात्मक आलोचना के अनुसार उन्होने केशव को कवि, भक्त और आचार्य सिद्ध किया है । आचार्यत्व सिद्ध करने के लिए उन्होने यह प्रमाण दिया है कि आचार्यत्व के प्रदर्शन के लिए ही उन्होने बहुत से छन्दो का प्रयोग किया है। वे केशव के काव्य की कठिनाई का कारण उनका पाडित्य मानते है । केशव के सम्बन्ध मे उनका मत इस दोहे के द्वारा प्रकट किया गया है । यह दोहा उनकी 'केशव-कौमुदी' मे सिद्धान्त वाक्य के रूप में प्रकाशित हुआ है "सूर सोई जिन बाचियो केसव तुलसी सूर सूर सोई जिन बाचियो केसव तुलसी सूर । " इसी प्रकार 'सूर-सग्रह' मे उन्होने सूर की भाषा का विवेचन करके उनको भक्ति तथा गीति-काव्य का महाकवि माना है। इसमे भी उन्होने अपने स्वतन्त्र विचारों का प्रतिपादन किया है जैसे कि सूर ने कृष्ण चरित का विषय गाने की कामना से चुना है। 'सूर- पचरत्न', 'दोहावली' तथा 'अन्योक्ति कल्पद्रुम' की भूमिकाए विस्तृत है। सूर-पच-रत्न मे भक्ति-काव्य, ब्रज-भाषा, सूर- साहित्य, सूर की शैली आदि विषयो का सरल तथा परिचयात्मक शैली में विवेचन किया गया है । दीन जो ने मिश्रवन्धुओं द्वारा प्रारम्भ किए हुए देव और बिहारी के वाद-विवाद मे भाग लिया तया अपनी 'विहारी और देव' पुस्तक मे देव की कविता में वे ही दोप बताए, जो दोप विहारी में मिश्रवन्धुओं ने निकाले थे । टीकाकार होने के कारण उन्होंने मिश्रवन्धुओं के अर्थों का भी खडन किया है तथा पाठो का भी मुवार किया है।' इम पुस्तक का उद्देश्य ही मिश्रवन्धुओ के बिहारी में दिखाए ढोपो का निराकरण करना है उन्होंने विहारी की अपेक्षा देव में भी दोप दिखाए है। उन्होंने देव द्वारा तोडे-मरोडे शब्दो की सूची देकर यह मिद्ध किया है कि शब्दों के तोडने के दोप से बिहारी मुक्त हैं। इसी प्रकार उन्होंने देव के भावापहरण के भी उदाहरण दिए है तथा यह बताया है कि देव मे भी बिहारी की भाति भावापहरण के ढोप है। देव पर इन्होंने उमी पद्धति मे ढोपारोपण किया है, जिससे मिश्रवन्धुओ ने बिहारी पर दीप लगाए थे। इनकी डम तुलनात्मक विवेचना में भी मिश्रवन्धु तथा कृष्णविहारी मिश्र जी की सी त्रुटिया है। इसमें भी इन्ही की भाति पक्षपात, तुलना, निर्णय, रुचि का आधार, दोषारोपण, अपने पक्ष का समर्थन, नटस्थता तथा गम्भीरता का अभाव है। इन आलोचनाओ मे इन आलोचको ने केवल अपने पक्ष का समर्थन वकीलो की भाति झूठ मच बोल कर किया है। दूसरे पक्ष के प्रति सहृदयता तथा उदारता का व्यवहार नही किया है। दीन जी ने अवश्य देव के उन ही पदों का विवेचन किया है, जिनमे कुछ विशेष त्रुटिया थी, किन्तु वे भी बिहारी को निश्चित ही देव से श्रेष्ठ मानते हैं। वे देव को बिहारी का टीकाकार बताते है । यह निश्चित ही पक्षपान है । इस प्रकार दीन जी की व्यावहारिक आलोचना में शास्त्रीय मानदण्डी के आधार पर तुलना तथा निर्णय की पद्धतियों का प्रयोग मिलता है। इनके निर्णयों में तर्क की अपेक्षा चि का व्यवहार अधिक मिलता है। इसलिए इनके निर्णय सर्वथा निप्पक्ष नहीं है। इनकी तुलना में भी जिम तटम्यता की आवश्यकता होती है, वह नहीं मिलती। इन तुलनाकारो का लक्ष्य निष्पक्ष-विवेचन नहीं, वरनु एक कवि के ऊपर दूसरे की श्रेष्ठना थोपना है । इन्होंने टीकाओं के द्वारा व्याख्यात्मक शैली का प्रयोग किया है। इन टीकाओं में प्राय समी टीका-पद्धति के गुण-डोप वर्त्तमान है । पाठ-गोधन तथा अर्थ- विवेचन की परवर्ती काल में होने वाली आलोचनाओ की ये टीकाए प्रारम्भिक रूप कही जा सकती हैं। केशव, विहारी, तुलमी आदि के काव्य का समुचित नया विवेकसम्मत पाठ उपलब्ध करने के कारण इनका विशेष महत्व है। इसी प्रकार इनके द्वारा इन कवियों के अर्थों के मौन्दर्य के अतिरिक्त अलकार, रम आदि का परिचय भी कराया गया है, जिससे इनके काव्य की जानकारी वढी है। इस प्रारम्भिक युग में यह भी कोई कम महत्व की बात नहीं है। एक "नही महाराज । यह अर्थ तो नहीं है। ठीक अर्थ है 'चेपी जानी बछडे मे दूध पिलाए लेती हैं।" विहारी और देव पृशून्य तिरेपन व पचपन । दो देखिए वही, पृशून्य सत्रह-अट्ठारह । रामचन्द्र शुक्लःशुक्ल जी की व्यावहारिक आलोचनाए प्राय भूमिकाओ के रूप मे लिखी गई है। इतिहास के अतिरिक्त उन्होने सूर, तुलसी तथा जायसी पर पृथक् व्यावहारिक आलोचनाए लिखी हैं । इनकी आलोचना-पद्धति परम्परागत आलोचना की शैलियो से पृथक् है । इन्होने एक नवीन आलोचना के युगानुकूल स्वरूप को जन्म दिया । इनकी आलोचना की सबसे बडी विशेषता यह है कि इनके आलोचना के मानदण्ड पूर्णतया शास्त्रीय तथा परम्परागत ही नही है तथा इनकी निजी प्रतिभा, मौलिक सूझ तथा गम्भीर चिन्तन के परिणाम स्वरूप इनके द्वारा स्थापित हुए है । ये हिन्दी के प्रथम आलोचक है, जिन्होंने हिन्दी की व्यावहारिक आलोचना को हिन्दी के रचनात्मक साहित्य पर आधारित किया है। उनकी व्यावहारिक आलोचना भारतीय तथा पाश्चात्य विचारो के आधार पर प्रतिष्ठित होने पर भी अपनी मौलिकताओ से समृद्ध है । वे हिन्दी की एक विशिष्ट शैली के जन्मदाता है, जो उनकी व्यक्तिगत सत्ता तथा विशिष्टता से अकित है । इनकी प्रतिभा का सब से बडा गुण उनकी मौलिकता तथा गम्भीर चिन्तन शक्ति है, जिसके कारण इनकी आलोचना पद्धति केवल रूढ ही नही रह गई है । वह प्रत्येक कवि की आलोचना के साथ बदलती जाती है तथा उसका स्वरूप निर्माण, पाश्चात्य, भारतीय, युगानुकूल तथा शाश्वत, सभी प्रकार के तत्त्वो से हुआ है। इन्होने आलोचना के आधार स्वरूप, जो मानदण्ड हिन्दी के रचनात्मक-साहित्य के आधार पर बनाए है, यद्यपि उनमे उनकी नवीनता, स्वतन्त्रता, चिन्तन, निजी दृष्टिकोण तथा मौलिक सूझ के दर्शन होते है, तथापि उन पर उनकी विशिष्ट रुचि की छाप भी विद्यमान है। उनकी आलोचना का स्तर पिछले आलोचको की परिचयात्मक, प्रशसात्मक, गुणदोष-विवेचन वाली पद्धतियो की आलोचना से विशेष रूप मे ऊचा है। उनकी सी गम्भीर विवेचन, विश्लेषण तथा चिन्तन की शक्ति हिन्दी मालोचना मे पहली बार दिखाई पड़ी। उनकी सूर, तुलसी, जायसी की व्यावहारिक आलोचना निगमन शैली की होने के कारण, उनके मानदण्ड अधिकाश मे इन कवियो के रचनात्मक साहित्य के आधार पर ही निर्मित हुए है, किन्तु फिर भी उनके निजी विचार, आदर्श, रुचि, सस्कार, दृष्टिकोण, प्रकृति तथा बाह्य और आन्तरिक प्रभावो का भी प्रभाव उनके निर्माण के मूल मे है । हिन्दी मे पहली बार शुक्ल जी ने निगमन-शैली से किसी कवि की आलोचना मे, उसी के साहित्य के आधार पर मानदण्डो का निर्माण किया। किन्तु इन प्रयोगो मे पूर्ण तटस्थता, निष्पक्षता तथा वस्तुपरकता का अभाव है। इस प्रकार अपनी रुचि तथा आदर्श के अनुकूल उन्होने जो सिद्धान्त, प्रतिमान तथा मानदण्ड स्थापित किए, उनकी व्यावहारिक आलोचना प्राय उन पर ही आधारित है तथा नवीन और प्राचीन कवियो के काव्य का विवेचन उन्ही के आधार पर किया गया है। कभी-कभी उनकी रुचि का प्रदर्शन प्रत्यक्ष रूप में भी हो जाता है। वहा उनकी आलोचना विवेचनात्मक न होकर निर्णयात्मक रूप धारण कर लेती इनके निर्मित मानदण्डी में लोकधर्म अथवा लोकादर्शवाद का सिद्धान्त विशेष महत्व का है, जिसका निर्माण उन्होंने तुलमी के काव्य के आधार पर किया है । वे उस काव्य को श्रेष्ठ समझते है, जिसका विषय व्यक्तिगत-कन्याण की लय में न रख कर अघिकाबिक लोक-कल्याण को सामने रखना है। उनके विचार से उसी काव्य का विषय सुन्दर हैं, जिनमें लोक-पक्ष का अधिकाधिक चित्रण हो । वे उसी काव्य, समाज, धर्म तथा साहित्य को श्रेष्ठ मानते हैं, जिसमे लोक में अधिकाधिक व्यक्तियों का कल्याण हो । उनका यह सिद्धान्न नुलनी के काव्य तथा भक्ति के आदर्श पर निर्मित है । वे उनके सिद्धान्त को कि "आप आपु कह नव भो, अपने कह कोड कोड तुलनी मत्र कह जो मला मुजन मराहिय मोड । " का ही माहित्य की आलोचना में प्रयोग करते है। वे तुलसी के समान गृह-धर्म, कुल-धर्म, समाज-धर्म में लोक-वर्म अथवा विश्व-धर्म की भावना को श्रेष्ठ मानने है। उनका विचार है कि जैसे विश्व - धर्म का पालन करने वाले पूर्ण-युम्प या पुरुषोत्तम है वैसे ही लोक-चर्म का लय मामने रत्र कर काव्य करने वाला कवि महान् है । उनका विचार है कि जिस काव्य का विषय जिनने ही विस्तृत नया विविध लोकपक्ष को लेकर चलेगा, वह काव्य उतना ही प्रभावशाली तथा महत्त्वपूर्ण होगा। वे मानते है कि जो काव्य जीवन के जिनने अधिक से अधिक अगी को लेकर चलेगा, वह उतना ही श्रेष्ठ होगा । इसीलिए उन्होंने निर्गुण-भक्त तथा रम्यवादी कवियों को सगुण-भक्त कवियो में अधिक महत्व नहीं दिया है । लोकसेवा के महन्त्र का प्रभाव उन पर कढाचिन् तुलमी के अतिरिक्त गावीवादी विचारधारा से भी मिला है। उन्होंने काव्य की दृष्टि में तुलसी की श्रेष्ठता भी इसी आधार पर स्थापित की है। वे तुलमी को इसलिए भी श्रेष्ठ कवि मानते है कि उनके काव्य में राम का वह आदर्श है, जो लोक-रक्षक तथा लोक-ग्जक ढोनी वाला है। वे सूर को तुलमी मे इसीलिए श्रेष्ठ नहीं मानने कि उनके कृष्ण मे लोक रजक स्वरूप को व्यंजना लोक-रक्षक रूप से अधिक है। नूर के काव्य में जीवन की विविधता न होने के कारण भी उनका काव्य तुलमी ने श्रेष्ठ नहीं माना गया है। उनकी यह भूल है कि वे किसी एक कवि के काव्य के सिद्धान्नी का प्रयोग, दूसरे कवि के काव्य नया सिद्धान्तो के पवने के लिए करते हैं। यदि उन्हें आगमनात्मक प्रणाली के आधार पर ही मूल्याकन करना था, तो सूर के काव्य का विवेचन पुष्टिमार्गीय सिद्धान्तों के आधार पर ही होना चाहिए था । एक कवि के काव्य के द्वारा गृहीन सिद्धान्नी का दूसरे पर आरोप करने से, उम काव्य की आत्मा प्रकट नहीं होनी । काव्यालांचन के लिए या तो चिरन्र्तन तथा न्यायी निद्धानो का प्रयोग होना चाहिए अथवा किसी कवि के काव्य के द्वारा प्राप्त सिद्धान्ती का आधार, केवल उसके काव्य की आलोचना के लिए ही होना चाहिए । इसके अतिरिक्त वे यह भी मानते है कि वह कवि श्रेष्ठ है, जिसका भक्ति का आदर्श श्रेष्ठ है। वे प्रेम-लक्षणा भक्ति से श्रद्धा-समन्वित भक्ति की श्रेष्ठ मानने है नया इसलिए उस काव्य की श्रेष्ठ समझने है, जो श्रद्धा-समन्त्रिन-भक्ति की अभिव्यजना करना है । प्रेम-भक्ति का आदर्श लोकपक्ष मे रहित होना है, इसलिए वे उसे उत्तम नही |
दिवाली के आसपास त्योहारी सीजन में बहुत लोग वाहन खरीदते हैं. इस दौरान वाहन निर्माता कंपनियों की बिक्री भी बढ़ जाती है. पूरे साल के दौरान सबसे ज्यादा वाहनों की बिक्री और खरीदारी, त्योहारी सीजन में ही होती है. हालांकि, वाहन खरीदने का मतलब बड़ी राशि खर्च करना होता है. अगर आप कोई बेहतर 100cc या 125cc मोटरसाइकिल/स्कूटर खरीदते हैं, तो आपको कम से कम 50000 रुपये तो खर्च करने ही पड़ेंगे. ऐसे में बहुत से लोग होते हैं, जो थोड़ा-थोड़ा पैसा जोड़ते हैं और फिर वाहन खरीदते हैं.
अब रुद्रपुर से एक वीडियो सामने आया है, जहां एक शख्स ने 50 हजार रुपये के सिस्के जमा किए और टीवीएस के शोरूम पर जुपिटर स्कूटर खरीदने पहुंच गया. शख्स ने टीवीएस जुपिटर के लिए 50 हजार रुपये का भुगतान सिस्कों में किया और बची हुई रकम की EMI बनवा ली. वीडियो में दिखाई दे रही है कि सिस्से टेबल पर सजे हुए हैं और एक शख्स उन्हें गिन रहा है जबकि एक अन्य शख्स टेबल के दूसरी ओर बैठा हुआ है.
TVS जुपिटर की कीमत 63,511 रुपये से 70,511 रुपये (एक्स-शोरूम) के बीच है. यह चार वेरिएंट्स- स्टैंडर्ड, जेडएक्स, जेडएक्स डिस्क और क्लासिक में आता है. इसमें 109. 7 सीसी सिंगल सिलेंडर 4 स्ट्रोक सीवीटीआई फ्यूल इंजेक्टेड इंजन है, जो 7. 4 पीएस मैक्सिमम पावर और 8. 4 एनएम पीक टॉर्क जनरेट करता है. इसमें सीवीटी ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन मिलता है.
टीवीएस जुपिटर में टेलीस्कोपिक हाइड्रॉलिक फ्रंट सस्पेंशन और 3-स्टेप एडजस्टेबल टाइप कॉइल स्प्रिंग रियर सस्पेंशन मिलती है, जो हाइड्रॉलिक डैम्पर के साथ आती है. इसमें फ्रंट और रियर, दोनों तरफ 130 मिलीमीटर ड्रम ब्रेक्स स्टैंडर्ड आते हैं जबकि डिस्क वेरिएंट में डिस्क ब्रेक का ऑप्शन भी मिलता है. बाजार में टीवीएस जुपिटर बीएस6 का मुकाबला होंडा एक्टिवा 6जी और हीरो माएस्ट्रो एज 125 से रहता है.
| दिवाली के आसपास त्योहारी सीजन में बहुत लोग वाहन खरीदते हैं. इस दौरान वाहन निर्माता कंपनियों की बिक्री भी बढ़ जाती है. पूरे साल के दौरान सबसे ज्यादा वाहनों की बिक्री और खरीदारी, त्योहारी सीजन में ही होती है. हालांकि, वाहन खरीदने का मतलब बड़ी राशि खर्च करना होता है. अगर आप कोई बेहतर एक सौcc या एक सौ पच्चीसcc मोटरसाइकिल/स्कूटर खरीदते हैं, तो आपको कम से कम पचास हज़ार रुपयापये तो खर्च करने ही पड़ेंगे. ऐसे में बहुत से लोग होते हैं, जो थोड़ा-थोड़ा पैसा जोड़ते हैं और फिर वाहन खरीदते हैं. अब रुद्रपुर से एक वीडियो सामने आया है, जहां एक शख्स ने पचास हजार रुपये के सिस्के जमा किए और टीवीएस के शोरूम पर जुपिटर स्कूटर खरीदने पहुंच गया. शख्स ने टीवीएस जुपिटर के लिए पचास हजार रुपये का भुगतान सिस्कों में किया और बची हुई रकम की EMI बनवा ली. वीडियो में दिखाई दे रही है कि सिस्से टेबल पर सजे हुए हैं और एक शख्स उन्हें गिन रहा है जबकि एक अन्य शख्स टेबल के दूसरी ओर बैठा हुआ है. TVS जुपिटर की कीमत तिरेसठ,पाँच सौ ग्यारह रुपयापये से सत्तर,पाँच सौ ग्यारह रुपयापये के बीच है. यह चार वेरिएंट्स- स्टैंडर्ड, जेडएक्स, जेडएक्स डिस्क और क्लासिक में आता है. इसमें एक सौ नौ. सात सीसी सिंगल सिलेंडर चार स्ट्रोक सीवीटीआई फ्यूल इंजेक्टेड इंजन है, जो सात. चार पीएस मैक्सिमम पावर और आठ. चार एनएम पीक टॉर्क जनरेट करता है. इसमें सीवीटी ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन मिलता है. टीवीएस जुपिटर में टेलीस्कोपिक हाइड्रॉलिक फ्रंट सस्पेंशन और तीन-स्टेप एडजस्टेबल टाइप कॉइल स्प्रिंग रियर सस्पेंशन मिलती है, जो हाइड्रॉलिक डैम्पर के साथ आती है. इसमें फ्रंट और रियर, दोनों तरफ एक सौ तीस मिलीमीटर ड्रम ब्रेक्स स्टैंडर्ड आते हैं जबकि डिस्क वेरिएंट में डिस्क ब्रेक का ऑप्शन भी मिलता है. बाजार में टीवीएस जुपिटर बीएसछः का मुकाबला होंडा एक्टिवा छःजी और हीरो माएस्ट्रो एज एक सौ पच्चीस से रहता है. |
शान्तिदायी पिवार ।
का कष्ट नहीं दे सकते । कष्ट का कारण अपना वह मन है जिसमें यह झूठी भावना झूठी कल्पना और झूठा विश्वास समाया हुआ है कि भूत भी इस लोक की कोई वस्तु हैं। तुमारा सारा ज्ञान और सारी विद्या व्यर्थ है यदि तुम्हारे मन में भूतों पर अब तक विश्वास है। जिसके हृदय में भूत है उसे सच्ची शान्ति नहीं मिल सकती ।
जो किसी अदृश्य लोक में भूतों का होना स्वीकार करते हूँ उनसे भी हम निश्चित रूप में कहते हैं कि अब तक किसी ने भूतों को नहीं देखा । झाड़ी रही, ठूठा वृक्ष रहा, कोई जानवर रहा, पर यह निश्चय है कि जिसे तुमने देखा भूत नहीं था। भूतों से डरनेवाले यदि साहस करके अपने भूतों के निकट चले जायें तो सारा भेद खुल जाय । सच्चे और निर्भर मनुष्य कभी भूत नहीं देखते। जिसके हृदय में भूत है उसमें आत्मवल नहीं श्री सकता । यदि हृदय में शान्ति और आनन्द का अनुभव करते हुए जीवनमुक्त होना चाहते हो तो हर प्रकार के भूतों को हृदय से निकाल दो। भूतों के निकल जाने से हृदय में अपने सच्चे स्वरूप का प्रकाश होगा ।
भय, ज्ञान और अन्धविश्वास अनेक प्रकार के भूतों की रचना करते हैं। बहुत से अज्ञानी इन भूतों को देवता भी कहते हैं इन्हीं की पूजा भी करते हैं । अज्ञानियों के देवता वही हैं जो उन्हें डरा सकते हैं या जिनसे वह डरते हैं । दुःख पड़ने पर या दुःखों से बचने के लिये पूजा होती है । इन अज्ञानियों के देवता' सताते हैं, बदला लेते हैं भय दिखालाते हैं, दोजख में डालते हैं. और यदि इनकी पूजा न दो तो क्रोध भी कर बैठते हैं ज्ञानियों और
मुक्त जोगों के हृदय से ऐसे भूत देवता, और ईश्वर का भाव निकल जाता है। और जब अन्धविश्वास का परदा हृदय से हट जाता है तो अपनी आत्मा का सच्चा स्वरूप चमक उठता है । इस यात्मदेव के प्रकाश में शान्ति की हवा चलती और आनन्द की वृद्धि होती है।
जो पूजा न पानेपर क्रोध करता और भय दिखलाता है, वह ईश्वर और देवता कैसा है ?/ अज्ञान हृदय में भय की मात्रा अधिक रहती है । यही भय, अन्धविश्वास और झूठी कल्पना के भीतर ऐसे देवताओं, ऐसे ईश्वर और भूतों की सृष्टि करता है। जिसके हृदय में इस प्रकार के भय लगे हुए हैं वह मुक्त नहीं वद्ध है। हृदय में जब तक भय है तबतक स्वतन्त्रता और मुक्ति कहाँ ? सच्ची स्वतन्त्रता और सच्ची मुक्ति के साथ ही सच्ची शान्ति और सच्चा आनन्द है।
भूतों के माननेवाले जिस तरह से भूतों को देखते हैं, जिस अन्ध विश्वास से भूतों द्वारा उनको अनेक विपत्तियों का सामना करना पड़ता है, उसी अन्धविश्वास और झूठी कल्पना से कभी कभी उनके ऋष्ट छूट भी जाते हैं और बिपत्तियाँ टल जाती हैं। पर यह सत्य है कि भूत कोई वस्तु नहीं, उनका अस्तित्व कहीं नहीं है उनके तमाम किस्से गलत हैं। अपनी आत्मा ही अपने विश्वास के अनुसार अनेक रूप धारण करती है । श्रज्ञान पूर्ण, विपरीत, झूठे और अन्धविश्वास से यही भूक कष्ट पहुँचाती और मनुष्य के स्वभाव को डरपोक बना देती है । | शान्तिदायी पिवार । का कष्ट नहीं दे सकते । कष्ट का कारण अपना वह मन है जिसमें यह झूठी भावना झूठी कल्पना और झूठा विश्वास समाया हुआ है कि भूत भी इस लोक की कोई वस्तु हैं। तुमारा सारा ज्ञान और सारी विद्या व्यर्थ है यदि तुम्हारे मन में भूतों पर अब तक विश्वास है। जिसके हृदय में भूत है उसे सच्ची शान्ति नहीं मिल सकती । जो किसी अदृश्य लोक में भूतों का होना स्वीकार करते हूँ उनसे भी हम निश्चित रूप में कहते हैं कि अब तक किसी ने भूतों को नहीं देखा । झाड़ी रही, ठूठा वृक्ष रहा, कोई जानवर रहा, पर यह निश्चय है कि जिसे तुमने देखा भूत नहीं था। भूतों से डरनेवाले यदि साहस करके अपने भूतों के निकट चले जायें तो सारा भेद खुल जाय । सच्चे और निर्भर मनुष्य कभी भूत नहीं देखते। जिसके हृदय में भूत है उसमें आत्मवल नहीं श्री सकता । यदि हृदय में शान्ति और आनन्द का अनुभव करते हुए जीवनमुक्त होना चाहते हो तो हर प्रकार के भूतों को हृदय से निकाल दो। भूतों के निकल जाने से हृदय में अपने सच्चे स्वरूप का प्रकाश होगा । भय, ज्ञान और अन्धविश्वास अनेक प्रकार के भूतों की रचना करते हैं। बहुत से अज्ञानी इन भूतों को देवता भी कहते हैं इन्हीं की पूजा भी करते हैं । अज्ञानियों के देवता वही हैं जो उन्हें डरा सकते हैं या जिनसे वह डरते हैं । दुःख पड़ने पर या दुःखों से बचने के लिये पूजा होती है । इन अज्ञानियों के देवता' सताते हैं, बदला लेते हैं भय दिखालाते हैं, दोजख में डालते हैं. और यदि इनकी पूजा न दो तो क्रोध भी कर बैठते हैं ज्ञानियों और मुक्त जोगों के हृदय से ऐसे भूत देवता, और ईश्वर का भाव निकल जाता है। और जब अन्धविश्वास का परदा हृदय से हट जाता है तो अपनी आत्मा का सच्चा स्वरूप चमक उठता है । इस यात्मदेव के प्रकाश में शान्ति की हवा चलती और आनन्द की वृद्धि होती है। जो पूजा न पानेपर क्रोध करता और भय दिखलाता है, वह ईश्वर और देवता कैसा है ?/ अज्ञान हृदय में भय की मात्रा अधिक रहती है । यही भय, अन्धविश्वास और झूठी कल्पना के भीतर ऐसे देवताओं, ऐसे ईश्वर और भूतों की सृष्टि करता है। जिसके हृदय में इस प्रकार के भय लगे हुए हैं वह मुक्त नहीं वद्ध है। हृदय में जब तक भय है तबतक स्वतन्त्रता और मुक्ति कहाँ ? सच्ची स्वतन्त्रता और सच्ची मुक्ति के साथ ही सच्ची शान्ति और सच्चा आनन्द है। भूतों के माननेवाले जिस तरह से भूतों को देखते हैं, जिस अन्ध विश्वास से भूतों द्वारा उनको अनेक विपत्तियों का सामना करना पड़ता है, उसी अन्धविश्वास और झूठी कल्पना से कभी कभी उनके ऋष्ट छूट भी जाते हैं और बिपत्तियाँ टल जाती हैं। पर यह सत्य है कि भूत कोई वस्तु नहीं, उनका अस्तित्व कहीं नहीं है उनके तमाम किस्से गलत हैं। अपनी आत्मा ही अपने विश्वास के अनुसार अनेक रूप धारण करती है । श्रज्ञान पूर्ण, विपरीत, झूठे और अन्धविश्वास से यही भूक कष्ट पहुँचाती और मनुष्य के स्वभाव को डरपोक बना देती है । |
सुप्रिया सुले ने कैबिनेट मंत्री बनाने के दावे को लेकर कहा, 'ये प्रधानमंत्री जी का बड़प्पन है कि उन्होंने ऐसा सुझाव दिया। मैं उनकी आभारी हूं उन्होंने कहा, लेकिन वो हो नहीं पाया। '
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख शरद पवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साथ मिलकर काम करने का प्रस्ताव दिया था। साथ ही साथ बेटी सुप्रिया सुले को कैबिनेट में मंत्री बनाने का वादा किया था, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया था। यह दावा खुद पवार ने किया, जिसके बाद उनकी बेटी सुप्रिया सुले का बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री का बड़प्पन है कि उन्होंने ऐसा सुझाव दिया।
समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रिया सुले ने कैबिनेट मंत्री बनाने के दावे को लेकर कहा, 'ये प्रधानमंत्री जी का बड़प्पन है कि उन्होंने ऐसा सुझाव दिया। मैं उनकी आभारी हूं उन्होंने कहा, लेकिन वो हो नहीं पाया। '
अजीत पवार पर नेता सुप्रिया सुले ने कहा, 'वह बीजेपी में शामिल नहीं हुए थे। यह हमारी पार्टी और परिवार का आंतरिक मामला है। वह हमेशा मेरे बड़े भाई और पार्टी के वरिष्ठ नेता बने रहेंगे। '
आपको बता दें कि शरद पवार ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें 'साथ मिलकर' काम करने का प्रस्ताव दिया था लेकिन उन्होंने उसे ठुकरा दिया। पवार ने ऐसी खबरों को खारिज कर दिया कि मोदी सरकार ने उन्हें देश का राष्ट्रपति बनाने का प्रस्ताव दिया। उन्होंने कहा था कि मोदी के नेतृत्व वाली कैबिनेट में सुप्रिया (सुले) को मंत्री बनाने का एक प्रस्ताव जरूर मिला था। सुप्रिया सुले पवार की बेटी हैं और पुणे जिला में बारामती से लोकसभा सदस्य हैं।
पवार ने कहा था कि उन्होंने मोदी को साफ कर दिया कि उनके लिए प्रधानमंत्री के साथ मिलकर काम करना संभव नहीं है। पवार ने सोमवार को एक मराठी टीवी चैनल को साक्षात्कार में यह बातें कही थी। महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर चल रहे घटनाक्रम के बीच पवार ने पिछले महीने दिल्ली में मोदी से मुलाकात की थी। मोदी कई मौके पर पवार की तारीफ कर चुके हैं।
पिछले दिनों मोदी ने कहा था कि संसदीय नियमों का पालन कैसे किया जाता है इस बारे में सभी दलों को एनसीपी से सीखना चाहिए। पवार ने कहा कि 28 नवंबर को जब उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो उस समय अजित पवार को शपथ नहीं दिलाने का फैसला 'सोच समझकर' लिया गया।
| सुप्रिया सुले ने कैबिनेट मंत्री बनाने के दावे को लेकर कहा, 'ये प्रधानमंत्री जी का बड़प्पन है कि उन्होंने ऐसा सुझाव दिया। मैं उनकी आभारी हूं उन्होंने कहा, लेकिन वो हो नहीं पाया। ' राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साथ मिलकर काम करने का प्रस्ताव दिया था। साथ ही साथ बेटी सुप्रिया सुले को कैबिनेट में मंत्री बनाने का वादा किया था, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया था। यह दावा खुद पवार ने किया, जिसके बाद उनकी बेटी सुप्रिया सुले का बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री का बड़प्पन है कि उन्होंने ऐसा सुझाव दिया। समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रिया सुले ने कैबिनेट मंत्री बनाने के दावे को लेकर कहा, 'ये प्रधानमंत्री जी का बड़प्पन है कि उन्होंने ऐसा सुझाव दिया। मैं उनकी आभारी हूं उन्होंने कहा, लेकिन वो हो नहीं पाया। ' अजीत पवार पर नेता सुप्रिया सुले ने कहा, 'वह बीजेपी में शामिल नहीं हुए थे। यह हमारी पार्टी और परिवार का आंतरिक मामला है। वह हमेशा मेरे बड़े भाई और पार्टी के वरिष्ठ नेता बने रहेंगे। ' आपको बता दें कि शरद पवार ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें 'साथ मिलकर' काम करने का प्रस्ताव दिया था लेकिन उन्होंने उसे ठुकरा दिया। पवार ने ऐसी खबरों को खारिज कर दिया कि मोदी सरकार ने उन्हें देश का राष्ट्रपति बनाने का प्रस्ताव दिया। उन्होंने कहा था कि मोदी के नेतृत्व वाली कैबिनेट में सुप्रिया को मंत्री बनाने का एक प्रस्ताव जरूर मिला था। सुप्रिया सुले पवार की बेटी हैं और पुणे जिला में बारामती से लोकसभा सदस्य हैं। पवार ने कहा था कि उन्होंने मोदी को साफ कर दिया कि उनके लिए प्रधानमंत्री के साथ मिलकर काम करना संभव नहीं है। पवार ने सोमवार को एक मराठी टीवी चैनल को साक्षात्कार में यह बातें कही थी। महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर चल रहे घटनाक्रम के बीच पवार ने पिछले महीने दिल्ली में मोदी से मुलाकात की थी। मोदी कई मौके पर पवार की तारीफ कर चुके हैं। पिछले दिनों मोदी ने कहा था कि संसदीय नियमों का पालन कैसे किया जाता है इस बारे में सभी दलों को एनसीपी से सीखना चाहिए। पवार ने कहा कि अट्ठाईस नवंबर को जब उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो उस समय अजित पवार को शपथ नहीं दिलाने का फैसला 'सोच समझकर' लिया गया। |
आज भारतीय सेना दिवस ( Indian Army Day)है। सीमा पर तैनात और हमारे लिए देश के दुश्मनों का सामना करने वाले हमारे सैनिकों के सम्मान में इंडियन आर्मी डे हर साल 15 जनवरी (15 January) को मनाया जाता है। पाकिस्तान से सटे लाइन ऑफ कंट्रोल (Line of Control) और चीन से सटी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (Line of Actual Control) सीमा पर हमेशा से भारतीय सैनिक दिन-रात तैनात रहते हैं।
फील्ड मार्शल केएम करियप्पा (Field Marshal KM Cariappa) ने 1949 में पहले भारतीय आर्मी चीफ (Indian Army Chief) के तौर पर जनरल फ्रांसिस बुचर से भारतीय सेना की कमान संभालने की जिम्मेदारी ली। इस घटना की आज 71वीं एनिवर्सरी है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अनिल कपूर, सुशांत सिंह राजपुत और ऋचा चड्ढा सहित कई फिल्मी सितारों ने भारतीय सेना को इंडियन आर्मी डे की शुभकामनाएं दी हैं और उन्हें सलाम किया है।
सुशांत सिंह राजपूत ने इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर कर लिखा,'हर भारतीय को हर छह महीने में कम से कम एक दिन भारतीय सैन्य बलों (Indian Armed Forces)के साथ बिताएं और उन नायकों (Heroes)से बहुत कुछ सीखें और जितना संभव हो सकता है उनका सम्मान करें।
यहां देखें हिंदी रश का लेटेस्ट वीडियो....
#OurVeteran #OurPride Veterans Day is commemorated on 14 January to acknowledge the selfless devotion and sacrifice by Veterans of all the Services, and to highlight the exceptional service by Field Marshal K. M Cariappa, the first Indian Commander-in-Chief of the #IndianArmy. General Bipin Rawat #COAS congratulates #Veterans and their families on this occasion. Our Veterans remain the most inspiring asset for citizens and in the Nation building.
| आज भारतीय सेना दिवस है। सीमा पर तैनात और हमारे लिए देश के दुश्मनों का सामना करने वाले हमारे सैनिकों के सम्मान में इंडियन आर्मी डे हर साल पंद्रह जनवरी को मनाया जाता है। पाकिस्तान से सटे लाइन ऑफ कंट्रोल और चीन से सटी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल सीमा पर हमेशा से भारतीय सैनिक दिन-रात तैनात रहते हैं। फील्ड मार्शल केएम करियप्पा ने एक हज़ार नौ सौ उनचास में पहले भारतीय आर्मी चीफ के तौर पर जनरल फ्रांसिस बुचर से भारतीय सेना की कमान संभालने की जिम्मेदारी ली। इस घटना की आज इकहत्तरवीं एनिवर्सरी है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अनिल कपूर, सुशांत सिंह राजपुत और ऋचा चड्ढा सहित कई फिल्मी सितारों ने भारतीय सेना को इंडियन आर्मी डे की शुभकामनाएं दी हैं और उन्हें सलाम किया है। सुशांत सिंह राजपूत ने इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर कर लिखा,'हर भारतीय को हर छह महीने में कम से कम एक दिन भारतीय सैन्य बलों के साथ बिताएं और उन नायकों से बहुत कुछ सीखें और जितना संभव हो सकता है उनका सम्मान करें। यहां देखें हिंदी रश का लेटेस्ट वीडियो.... #OurVeteran #OurPride Veterans Day is commemorated on चौदह जनवरीuary to acknowledge the selfless devotion and sacrifice by Veterans of all the Services, and to highlight the exceptional service by Field Marshal K. M Cariappa, the first Indian Commander-in-Chief of the #IndianArmy. General Bipin Rawat #COAS congratulates #Veterans and their families on this occasion. Our Veterans remain the most inspiring asset for citizens and in the Nation building. |
मुंबई, 28 दिसंबर (वार्ता) सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविज़न पर प्रसारित होने वाले शो 'श्रीमद रामायण' की टीम ने भगवान राम की जन्मस्थली अयोध्या की तीर्थयात्रा शुरू की, जो उनकी रचनात्मक यात्रा में एक महत्वपूर्ण पल है।
सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविज़न के बिज़नेस हेड, नीरज व्यास ने बताया,अयोध्या की हमारी यात्रा भगवान राम की कहानी को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। हम आज की दुनिया में उनकी प्रासंगिकता पर ज़ोर देते हुए, उनके कालातीत आदर्शों और शिक्षाओं को प्रस्तुत करने के लिए समर्पित हैं।
स्वास्तिक प्रोडक्शंस के संस्थापक और 'श्रीमद रामायण' के निर्माता, सिद्धार्थ कुमार तिवारी ने बताया,अयोध्या की हमारी यात्रा से हमारे शो में वास्तविक गहराई आएगी, और इस तरह यह यात्रा इस प्रतिष्ठित शहर की ऐतिहासिक अनुगूंज से भर गई है, जिससे 'श्रीमद रामायण' की कहानी भी विकसित होगी।
मर्यादा पुरूषोत्तम प्रभु श्री राम का किरदार निभा रहे सुजय रेउ ने बताया,अयोध्या की तीर्थयात्रा परिवर्तनकारी रही है। इसने भगवान राम को लेकर मेरी समझ और निरूपण को बढ़ाया है, और उनके किरदार को अधिक निष्ठा और गहराई से निभाने की मेरी प्रतिबद्धता को और भी मजबूत किया है।
माता सीता की भूमिका निभाने वाली प्राची बंसल ने कहा,अयोध्या को प्रत्यक्ष तौर पर अनुभव करना दिव्य अनुभूति थी। इस तरह से मैं माता सीता की शक्ति और शोभा को समझने के करीब पहुंची हूं।
लक्ष्मण का किरदार निभा रहे, बसंत भट्ट ने बताया ,अयोध्या के जीवंत एहसास ने मुझे लक्ष्मण की भक्ति और निष्ठा को लेकर एक नया दृष्टिकोण दिया। यह अनुभव मेरी भूमिका के लिए मार्गदर्शक रहा है।भगवान हनुमान का किरदार निभा रहे निर्भय वाधवा ने कहा,अयोध्या की आध्यात्मिक ऊर्जा स्फूर्तिदायक थी। इसने मुझे हनुमान की अटूट भक्ति और समर्पण की विशालता का एहसास कराया।
'श्रीमद रामायण' का प्रीमियर 01 जनवरी, 2024 को रात 9 बजे सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविज़न पर होगा।
| मुंबई, अट्ठाईस दिसंबर सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविज़न पर प्रसारित होने वाले शो 'श्रीमद रामायण' की टीम ने भगवान राम की जन्मस्थली अयोध्या की तीर्थयात्रा शुरू की, जो उनकी रचनात्मक यात्रा में एक महत्वपूर्ण पल है। सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविज़न के बिज़नेस हेड, नीरज व्यास ने बताया,अयोध्या की हमारी यात्रा भगवान राम की कहानी को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। हम आज की दुनिया में उनकी प्रासंगिकता पर ज़ोर देते हुए, उनके कालातीत आदर्शों और शिक्षाओं को प्रस्तुत करने के लिए समर्पित हैं। स्वास्तिक प्रोडक्शंस के संस्थापक और 'श्रीमद रामायण' के निर्माता, सिद्धार्थ कुमार तिवारी ने बताया,अयोध्या की हमारी यात्रा से हमारे शो में वास्तविक गहराई आएगी, और इस तरह यह यात्रा इस प्रतिष्ठित शहर की ऐतिहासिक अनुगूंज से भर गई है, जिससे 'श्रीमद रामायण' की कहानी भी विकसित होगी। मर्यादा पुरूषोत्तम प्रभु श्री राम का किरदार निभा रहे सुजय रेउ ने बताया,अयोध्या की तीर्थयात्रा परिवर्तनकारी रही है। इसने भगवान राम को लेकर मेरी समझ और निरूपण को बढ़ाया है, और उनके किरदार को अधिक निष्ठा और गहराई से निभाने की मेरी प्रतिबद्धता को और भी मजबूत किया है। माता सीता की भूमिका निभाने वाली प्राची बंसल ने कहा,अयोध्या को प्रत्यक्ष तौर पर अनुभव करना दिव्य अनुभूति थी। इस तरह से मैं माता सीता की शक्ति और शोभा को समझने के करीब पहुंची हूं। लक्ष्मण का किरदार निभा रहे, बसंत भट्ट ने बताया ,अयोध्या के जीवंत एहसास ने मुझे लक्ष्मण की भक्ति और निष्ठा को लेकर एक नया दृष्टिकोण दिया। यह अनुभव मेरी भूमिका के लिए मार्गदर्शक रहा है।भगवान हनुमान का किरदार निभा रहे निर्भय वाधवा ने कहा,अयोध्या की आध्यात्मिक ऊर्जा स्फूर्तिदायक थी। इसने मुझे हनुमान की अटूट भक्ति और समर्पण की विशालता का एहसास कराया। 'श्रीमद रामायण' का प्रीमियर एक जनवरी, दो हज़ार चौबीस को रात नौ बजे सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविज़न पर होगा। |
Maharashtra: मामला महाराष्ट्र के परभणी तहसील के उखलद गांव का है। घटना बीते शनिवार की बताई जा रही है, जहां तीन युवक बाइक पर सवार होकर जा रहे थे। पहले तो कुछ ग्रामीण लोगों ने उन्हें रोका और फिर भीड़ इकट्ठा हो गई।
Pakistan: सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) की एक रैली के दौरान मौलवी ने सबके सामने पूर्व पीएम इमरान खान पैगंबर जैसा बताया था। साथ ही इमरान खान को ईमानदार शख्स भी बताया। इसके बाद वहां मौजूद लोगों की भीड़ आक्रोशित हो गई। इसके बाद लोगों की भीड़ ने ईशनिंदा का आरोप लगाते हुए मौलाना निगार को पीटना शुरू कर दिया। और तब तक पिटाई करते रहे। जबतक उसकी जान नहीं चले गई।
Haryana: हरियाणा (Haryana) की एक घटना जो 1 जनवरी की पूर्व संध्या पर घटी है उसपर ऐसे मीडिया संस्थान और राजनेता चुप हैं और इस मामले में उनकी तरफ से ना तो कोई खबर प्रकाशित की गई है ना ही ऐसे नेताओं के बयान ही सामने आए हैं। इसको लेकर दावा किया जा रहा है कि एक नाबालिग लड़का जो कि दलित जाति का था एक मुस्लिम लड़की के परिवार वालों ने उसे मौत के घाट उतार दिया। रवि नाम के इस लड़के की उम्र 16 वर्ष थी, जो उसके परिवार के द्वारा जारी आधार कार्ड के अनुसार देखा जा सकता है।
संस्था ने अपनी जांच रिपोर्ट महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, गृह मंत्री अनिल देशमुख और पुलिस महानिदेशक संजीव जायसवाल को भी भेजी है। जनाटे ने कहा कि जांच में पाया गया कि साधुओं पर हमला दो बार में हुआ।
भाजपा के नेशनल सेक्रेटरी सुनील देवधर ने आईएएनएस से घटना के पीछे वामपंथियों का हाथ बताया है।
इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्री भी बेहद एक्टिव हो गए हैं। गृहमंत्रालय की तरफ से इस पूरे मामले पर रिपोर्ट मांगी गई है।
महाराष्ट्र के पालघर में दो साधु समेत तीन लोगों की हुई मॉब लिंचिंग के मामले में एफआईआर दर्ज कर 110 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
| Maharashtra: मामला महाराष्ट्र के परभणी तहसील के उखलद गांव का है। घटना बीते शनिवार की बताई जा रही है, जहां तीन युवक बाइक पर सवार होकर जा रहे थे। पहले तो कुछ ग्रामीण लोगों ने उन्हें रोका और फिर भीड़ इकट्ठा हो गई। Pakistan: सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ की एक रैली के दौरान मौलवी ने सबके सामने पूर्व पीएम इमरान खान पैगंबर जैसा बताया था। साथ ही इमरान खान को ईमानदार शख्स भी बताया। इसके बाद वहां मौजूद लोगों की भीड़ आक्रोशित हो गई। इसके बाद लोगों की भीड़ ने ईशनिंदा का आरोप लगाते हुए मौलाना निगार को पीटना शुरू कर दिया। और तब तक पिटाई करते रहे। जबतक उसकी जान नहीं चले गई। Haryana: हरियाणा की एक घटना जो एक जनवरी की पूर्व संध्या पर घटी है उसपर ऐसे मीडिया संस्थान और राजनेता चुप हैं और इस मामले में उनकी तरफ से ना तो कोई खबर प्रकाशित की गई है ना ही ऐसे नेताओं के बयान ही सामने आए हैं। इसको लेकर दावा किया जा रहा है कि एक नाबालिग लड़का जो कि दलित जाति का था एक मुस्लिम लड़की के परिवार वालों ने उसे मौत के घाट उतार दिया। रवि नाम के इस लड़के की उम्र सोलह वर्ष थी, जो उसके परिवार के द्वारा जारी आधार कार्ड के अनुसार देखा जा सकता है। संस्था ने अपनी जांच रिपोर्ट महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, गृह मंत्री अनिल देशमुख और पुलिस महानिदेशक संजीव जायसवाल को भी भेजी है। जनाटे ने कहा कि जांच में पाया गया कि साधुओं पर हमला दो बार में हुआ। भाजपा के नेशनल सेक्रेटरी सुनील देवधर ने आईएएनएस से घटना के पीछे वामपंथियों का हाथ बताया है। इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्री भी बेहद एक्टिव हो गए हैं। गृहमंत्रालय की तरफ से इस पूरे मामले पर रिपोर्ट मांगी गई है। महाराष्ट्र के पालघर में दो साधु समेत तीन लोगों की हुई मॉब लिंचिंग के मामले में एफआईआर दर्ज कर एक सौ दस लोगों को गिरफ्तार किया गया है। |
उसको कंजो आंखों को शुष्क चमक में, उसके मुरझाये हुए चेहरे में मां को यह व्यथा दिखायी दे रही थी, उसके स्वर में इस व्यथा की गूंज सुनायी दे रही थी। मां उसे दिलासा देना चाहती थी ।
"लेकिन वहन, रास्ता तो तुमने देख लिया है..
इतना ही काफ़ी नहीं है। हमें आगे बढ़ने का तरीक़ा भी मालूम होना चाहिये ! " तत्याना ने वात काटते हुए बहुत धोरे से कहा । श्रच्छा लो तुम्हारा विस्तर तैयार हो गया !
वह चूल्हे के पास जाकर चुपचाप खड़ी हो गयी - गंभोर, निश्चल, विचारों में खोयी हुई। मां वही कपड़े पहने पहने लेट गयी । थकन के मारे उसके शरीर में इतनी पीड़ा हो रही थी कि उसके मुंह से एक हल्की सो कराह निकल गयी । तत्याना ने लैम्प बुझा दिया और जब झोंपड़ी में अंधेरा छा गया, तो वह बहुत ही मंद सपाट स्वर में बोलने लगी । ऐसा प्रतीत होता था कि उसका स्वर अंधकार की निष्प्रभ मुखाकृति पर से कुछ पोंछे ले रहा है ।
"तुम भी प्रार्थना नहीं करतीं। मैं भी ईश्वर में विश्वास नहीं रखती। चमत्कारों को भी नहीं मानती । "
मां ने करवट बदली। खिड़की में से प्रभेद्य अंधकार उसे घूर घूरकर देख रहा था और हल्की-हल्की श्रावाजें, क्षीण से क्षण निस्तब्धता में रेंगती हुई भा रही थीं। उसने भयमीत स्वर में प्रायः बिल्कुल कान में चुपके से तत्याना का उत्तर दिया :
"जहां तक ईश्वर का सवाल है मैं ठीक से नहीं कह सकती । पर ईसा मसीह पर मेरा विश्वास है... मुझे उनके इन शब्दों पर विश्वास है : 'अपने पड़ोसी को अपनी ही तरह प्यार करो !' में इस बात में यक़ीन रखती हूं !
तत्याना चुप रही । आतिशदान की काली पृष्ठभूमि पर मां को उसकी तनी हुई प्रकृति की धुंधली रूपरेखा दिखायी दे रही थी। वह निश्चल खड़ी थी । मां ने उदास होकर अपनी आंखें मूंद लीं ।
सहसा उसने तत्याना को कठोर स्वर में कहते सुना :
"अपने बच्चों की मौत के लिए मैं ईश्वर या मनुष्य दोनों में से किसी को भी माफ़ नहीं कर सकती । कभी नहीं ! .. | उसको कंजो आंखों को शुष्क चमक में, उसके मुरझाये हुए चेहरे में मां को यह व्यथा दिखायी दे रही थी, उसके स्वर में इस व्यथा की गूंज सुनायी दे रही थी। मां उसे दिलासा देना चाहती थी । "लेकिन वहन, रास्ता तो तुमने देख लिया है.. इतना ही काफ़ी नहीं है। हमें आगे बढ़ने का तरीक़ा भी मालूम होना चाहिये ! " तत्याना ने वात काटते हुए बहुत धोरे से कहा । श्रच्छा लो तुम्हारा विस्तर तैयार हो गया ! वह चूल्हे के पास जाकर चुपचाप खड़ी हो गयी - गंभोर, निश्चल, विचारों में खोयी हुई। मां वही कपड़े पहने पहने लेट गयी । थकन के मारे उसके शरीर में इतनी पीड़ा हो रही थी कि उसके मुंह से एक हल्की सो कराह निकल गयी । तत्याना ने लैम्प बुझा दिया और जब झोंपड़ी में अंधेरा छा गया, तो वह बहुत ही मंद सपाट स्वर में बोलने लगी । ऐसा प्रतीत होता था कि उसका स्वर अंधकार की निष्प्रभ मुखाकृति पर से कुछ पोंछे ले रहा है । "तुम भी प्रार्थना नहीं करतीं। मैं भी ईश्वर में विश्वास नहीं रखती। चमत्कारों को भी नहीं मानती । " मां ने करवट बदली। खिड़की में से प्रभेद्य अंधकार उसे घूर घूरकर देख रहा था और हल्की-हल्की श्रावाजें, क्षीण से क्षण निस्तब्धता में रेंगती हुई भा रही थीं। उसने भयमीत स्वर में प्रायः बिल्कुल कान में चुपके से तत्याना का उत्तर दिया : "जहां तक ईश्वर का सवाल है मैं ठीक से नहीं कह सकती । पर ईसा मसीह पर मेरा विश्वास है... मुझे उनके इन शब्दों पर विश्वास है : 'अपने पड़ोसी को अपनी ही तरह प्यार करो !' में इस बात में यक़ीन रखती हूं ! तत्याना चुप रही । आतिशदान की काली पृष्ठभूमि पर मां को उसकी तनी हुई प्रकृति की धुंधली रूपरेखा दिखायी दे रही थी। वह निश्चल खड़ी थी । मां ने उदास होकर अपनी आंखें मूंद लीं । सहसा उसने तत्याना को कठोर स्वर में कहते सुना : "अपने बच्चों की मौत के लिए मैं ईश्वर या मनुष्य दोनों में से किसी को भी माफ़ नहीं कर सकती । कभी नहीं ! .. |
8 फरवरी 2015 को इंदिरापुरम, ग़ाज़ियाबाद में Saroj Singh की काव्यकृति 'तुम तो आकाश हो' का विमोचन हुआ। इस किताब का लोकार्पण हिंदी की मूर्धन्य कथाकार मैत्रेयी पुष्पा, दुनिया इन दिनों के प्रधान संपादक सुधीर सक्सेना, कवि सिद्धेश्वर सिंह, संस्कृत की प्राध्यापिका हीरावती सिंह तथा लेखक और साइक्लिस्ट राकेश कुमार सिंह ने किया।
'तुम तो आकाश हो' की कविताओं के आलोक में समकालीन स्त्री लेखन पर टिप्पणी करते हुए मैत्रेयी पुष्पा ने कहा कि इस समय का स्त्री लेखन काफी बेबाक हुआ है। लिखने के ख़तरे कम हुए हैं। फेसबुक जैसे नवमंचों ने इस ख़तरे को और कम तो किया ही है, साथ ही लिखने, छपने औैर पाठक तक पहुँचने की प्रक्रिया आसान भी किया है।
सरोज सिंह ने अपनी कुछ कविताओं के पाठ के साथ-साथ अपने रचनाकर्म की शुरुआत और रचना को गंभीरता से लेने की कहानी को संक्षेप में उपस्थित श्रोताओं के समक्ष रखा। संदीप सिंह 'साहिल' ने संग्रह की कुछ रचनाओं का प्रभावी पाठ किया। किताब पर राकेश कुमार सिंह, हीरावती सिंह, सिद्धेश्वर सिंह और सुधीर सक्सेना के अपने विचार रखे। धन्यवाद ज्ञापन सीआईएसएफ के सीनियर कमांडेंट पी. पी. सिंह ने और संचालन कवयित्री इंदु सिंह ने किया।
| आठ फरवरी दो हज़ार पंद्रह को इंदिरापुरम, ग़ाज़ियाबाद में Saroj Singh की काव्यकृति 'तुम तो आकाश हो' का विमोचन हुआ। इस किताब का लोकार्पण हिंदी की मूर्धन्य कथाकार मैत्रेयी पुष्पा, दुनिया इन दिनों के प्रधान संपादक सुधीर सक्सेना, कवि सिद्धेश्वर सिंह, संस्कृत की प्राध्यापिका हीरावती सिंह तथा लेखक और साइक्लिस्ट राकेश कुमार सिंह ने किया। 'तुम तो आकाश हो' की कविताओं के आलोक में समकालीन स्त्री लेखन पर टिप्पणी करते हुए मैत्रेयी पुष्पा ने कहा कि इस समय का स्त्री लेखन काफी बेबाक हुआ है। लिखने के ख़तरे कम हुए हैं। फेसबुक जैसे नवमंचों ने इस ख़तरे को और कम तो किया ही है, साथ ही लिखने, छपने औैर पाठक तक पहुँचने की प्रक्रिया आसान भी किया है। सरोज सिंह ने अपनी कुछ कविताओं के पाठ के साथ-साथ अपने रचनाकर्म की शुरुआत और रचना को गंभीरता से लेने की कहानी को संक्षेप में उपस्थित श्रोताओं के समक्ष रखा। संदीप सिंह 'साहिल' ने संग्रह की कुछ रचनाओं का प्रभावी पाठ किया। किताब पर राकेश कुमार सिंह, हीरावती सिंह, सिद्धेश्वर सिंह और सुधीर सक्सेना के अपने विचार रखे। धन्यवाद ज्ञापन सीआईएसएफ के सीनियर कमांडेंट पी. पी. सिंह ने और संचालन कवयित्री इंदु सिंह ने किया। |
" एक नई दुनिया "
विजया की जिंदगी अचानक एक अप्रत्याशित मोड़ पर आकर रुक गई।
पति की दिवंगत आत्मा की शांति के लिए मृत्यु संस्कार की सभी रस्में रिश्तेदारों की मदद से पूर्ण हुईं।
रिश्तेदार जाने लगे। भाई भाभी , जेठ जिठानी विदाई के वक्त अफसोस जताते चले गए।
"केदार तुझे छोड़ कर चला गया। अब तू कैसे जीयेगी।तेरी पहाड़ सी जिंदगी कैसे कटेगी।"
संबल देने की जगह सहानुभूति के लब्जों में भविष्य की आशंकाओं जता चले गए।
बेचारी का तमगा पहना दिया। हौसला नहीं दिया । किसी ने ये नहीं कहा" हम हैं ना विजया घबराने की कोई बात नहीं है।तू अपना और बेटी का ख्याल रख जैसे केदार के रहते रखती थी" ।
एक माह बाद घर से निकली। पड़ौसी सहानुभूति से घूरते नजर आए ।दबी जुबान से कहते" बेचारी का क्या होगा"।
विजया इस बैचारगी के माहौल से खिन्न थी। काश!कोई तो हो जो उसे हिम्मत दिलाये कहे विजया जीवन एक संघर्ष है । ये संग्राम हिम्मत से लड़ना है। एक मां के रूप में परीक्षा की घड़ियां आई हैं ।चुनौती का सामना कर हिम्मत रख।
आखिर कोई उसे हिम्मत क्यों नहीं देता । देखते ही क्यों सब निर्जीव चेहरे बना बेटी को अनाथ की तरह देखते हैं।
वह जितना गम से बाहर आना चाहती थी परिवेश उसे दर्द में धकेल देता। वह इस माहौल से बेटी को एक नई दुनिया में ले जाना चाहती थी।जहाँ उसे बैचारगी का सामना न करना पड़े। बेटी को एक सशक्त मां और खुशनुमा माहौल मिल सके ।उसने तय किया इस शहर को छोड़ कहीं दूर एक छोटी सी नई दुनिया बसायेगी।
बेटी ने पूछा माँ ! शहर क्यों छोड़ रहे हैं।
बेटे इस शहर में सदा तुम्हारे पापा की याद सतायेगी । पापा के मित्र, रिश्तेदार सभी पापा की याद दिलाते रहेंगे । हमें भावनात्मक रूप से कमजोर करते रहेंगे।
दूसरे शहर में हम लोगों के लिए और लोग हमारे लिए अंजान होगें। वहां कोई हमारे कल को नहीं कुरेदेगा।लोग हमें हमारे आज में स्वीकार कर लेगें ।एक बारगी बेटी को अपने दोस्तों से बिछड़ने का दुख हुआ था किंतु दूसरे ही पल बेटी ने माँ का हाथ पकड़ कहा "ठीक है मैं वहाँ नये दोस्त बना लूंगी।
विजया का संबंध पापा ने अपने सहकर्मी के अध्यापक बेटे केदार से कर दिया।दोनों की धूमधाम से शादी हो गई ।
दो साल बाद बेटी अनन्या आ गई ।वह स्कूल जाने लगी।विजया ने हिंदी से एम ए कर लिया । अध्यापन के अवसर मिलने लगे । वह सही समय का इंतजार करने लगी ।
उसे पुणे के स्कूल में वार्डन की जगह मिल गई । कैम्पस में घर मिल गया।
वह एक नई दुनिया के लिए निकल पड़ी । एक नई सशक्त मां बेटी का हाथ थामे चल पड़ी ।।
| " एक नई दुनिया " विजया की जिंदगी अचानक एक अप्रत्याशित मोड़ पर आकर रुक गई। पति की दिवंगत आत्मा की शांति के लिए मृत्यु संस्कार की सभी रस्में रिश्तेदारों की मदद से पूर्ण हुईं। रिश्तेदार जाने लगे। भाई भाभी , जेठ जिठानी विदाई के वक्त अफसोस जताते चले गए। "केदार तुझे छोड़ कर चला गया। अब तू कैसे जीयेगी।तेरी पहाड़ सी जिंदगी कैसे कटेगी।" संबल देने की जगह सहानुभूति के लब्जों में भविष्य की आशंकाओं जता चले गए। बेचारी का तमगा पहना दिया। हौसला नहीं दिया । किसी ने ये नहीं कहा" हम हैं ना विजया घबराने की कोई बात नहीं है।तू अपना और बेटी का ख्याल रख जैसे केदार के रहते रखती थी" । एक माह बाद घर से निकली। पड़ौसी सहानुभूति से घूरते नजर आए ।दबी जुबान से कहते" बेचारी का क्या होगा"। विजया इस बैचारगी के माहौल से खिन्न थी। काश!कोई तो हो जो उसे हिम्मत दिलाये कहे विजया जीवन एक संघर्ष है । ये संग्राम हिम्मत से लड़ना है। एक मां के रूप में परीक्षा की घड़ियां आई हैं ।चुनौती का सामना कर हिम्मत रख। आखिर कोई उसे हिम्मत क्यों नहीं देता । देखते ही क्यों सब निर्जीव चेहरे बना बेटी को अनाथ की तरह देखते हैं। वह जितना गम से बाहर आना चाहती थी परिवेश उसे दर्द में धकेल देता। वह इस माहौल से बेटी को एक नई दुनिया में ले जाना चाहती थी।जहाँ उसे बैचारगी का सामना न करना पड़े। बेटी को एक सशक्त मां और खुशनुमा माहौल मिल सके ।उसने तय किया इस शहर को छोड़ कहीं दूर एक छोटी सी नई दुनिया बसायेगी। बेटी ने पूछा माँ ! शहर क्यों छोड़ रहे हैं। बेटे इस शहर में सदा तुम्हारे पापा की याद सतायेगी । पापा के मित्र, रिश्तेदार सभी पापा की याद दिलाते रहेंगे । हमें भावनात्मक रूप से कमजोर करते रहेंगे। दूसरे शहर में हम लोगों के लिए और लोग हमारे लिए अंजान होगें। वहां कोई हमारे कल को नहीं कुरेदेगा।लोग हमें हमारे आज में स्वीकार कर लेगें ।एक बारगी बेटी को अपने दोस्तों से बिछड़ने का दुख हुआ था किंतु दूसरे ही पल बेटी ने माँ का हाथ पकड़ कहा "ठीक है मैं वहाँ नये दोस्त बना लूंगी। विजया का संबंध पापा ने अपने सहकर्मी के अध्यापक बेटे केदार से कर दिया।दोनों की धूमधाम से शादी हो गई । दो साल बाद बेटी अनन्या आ गई ।वह स्कूल जाने लगी।विजया ने हिंदी से एम ए कर लिया । अध्यापन के अवसर मिलने लगे । वह सही समय का इंतजार करने लगी । उसे पुणे के स्कूल में वार्डन की जगह मिल गई । कैम्पस में घर मिल गया। वह एक नई दुनिया के लिए निकल पड़ी । एक नई सशक्त मां बेटी का हाथ थामे चल पड़ी ।। |
किसी भी एंड्रायड स्मार्टफोन का सही से इस्तेमाल तभी होता है। जब आप समय-समय पर एप्स और ओएस को अपडेट करते रहें। हालांकि ओएस को एक बार ही अपडेट करना होता है लेकिन एप्स समय-समय पर अपडेशन देते रहते हैं। ऐसे में सबसे जरूरी है कि नोटिफिकेशन में आने वाले एप्स अपडेशन को एवॉयड करने के बजाए जो जरूरी एप्स हैं, उन्हें अपडेट कर दिया जाए।
एंड्रायड स्मार्टफोन की स्पीड बढ़ाने का दूसरा तरीका फोन को रिसेट करना है। यानी कि हैंडसेट को अगर बैकअप रिसेट कर दिया जाए तो स्पीड में काफी अंतर पड़ सकता है। बेसिकली यह फोन को इंटरनली नया बना देता है। इसके लिए आपको सेटिंग ऑप्शन में जाकर बैकअप एंड रिसेट पर क्िलक करना होता है। यहां आपको याद रखना होगा कि फोन रिसेट करने के बाद हैंडसेट में सेव पूरा डाटा एड़ जाएगा तो ऐसे में अपने डाटा को एक्टरनल मेमोरी में सेव करके रख लें।
एंड्रायड यूजर्स को डिवाइस यूज करते समय-समय पर इंटरनल मेमोरी को साफ करते रहना चाहिए। यानी कि जब आप सेटिंग ऑप्शन में स्टोरेज पर क्िलक करेंगे तो आपको इंटरनल मेमोरी और एक्सटरनल मेमोरी में सेव एप्स और डाटा आदि शो करेगा। ऐसे में अपनी जरूरत के हिसाब से म्यूजिक, वीडियो आदि को डिलीट कर दें। यहीं नहीं अगर आप अपने मैसेजिंग एप डाटा को भी डिलीट करना चाहते हैं, तो आसानी से कर सकते हैं। इसके अलावा कैश डाटा को हमेशा डिलीट करते रहे।
एंड्रायड डिवाइस में कई एप्स ऐसे होते हैं, जिनका हम इस्तेमाल तो नहीं करते लेकिन यह डिवाइस में पड़े रहते हैं और फालतू जगह घेरे रहते हैं। ऐसे में आपको चाहिए कि इन अनयूजफुल एप्स को तुरंत ही अनइंस्टॉल कर दें। डिवाइस में जितने जरूरी एप्स पड़े होंगे फोन उतना ही अच्छा चलेगा। हालांकि अगर आप चाहें तो कुछ एप्स को एसडी कार्ड यानी एक्सटरनल मेमोरी में भी मूव करा सकते हैं जिससे कि इंटरनल मेमोरी में जगह खाली हो जाएगी।
अगर आप अपने पुराने या नए एंड्रायड फ़ोन की परफॉरमेंस सुधारना चाहते हैं तो इसका एक तरीका है। जो फ़ोन सॉफ्टवेयर डेवलपर है। सबसे पहले फ़ोन की सेटिंग्स में जाइए, उसके बाद 'अबाउट फ़ोन' के विकल्प को चुनिए। उसके बाद फ़ोन के बिल्ड नंबर को बार-बार टैप कीजिए। कई बार टैप करने पर फ़ोन आपको बताएगा कि आप डेवलपर हैं। उसके बाद वापस सेटिंग मेन्यू पर जाइए। उसके बाद आपके पास डेवलपर ऑप्शन नाम का एक विकल्प आएगा। यहां जाकर आप मेन्यू ऑप्शन में तीन बदलाव ला रहे हैं। इन तीन में विंडो एनिमेशन स्केल, ट्रांजिशन एनीमेशन स्केल और एनिमेटर ड्यूरेशन स्केल। इन तीनों को बदल कर 1. 0 से 0. 5 कर देना है. ऐसा करने में सिर्फ दो-चार मिनट लगते हैं। ये सब करने के बाद फ़ोन को एक बार री-स्टार्ट कर दीजिए और देखिए उसकी रफ़्तार पहले से बेहतर हो गई होगी।
| किसी भी एंड्रायड स्मार्टफोन का सही से इस्तेमाल तभी होता है। जब आप समय-समय पर एप्स और ओएस को अपडेट करते रहें। हालांकि ओएस को एक बार ही अपडेट करना होता है लेकिन एप्स समय-समय पर अपडेशन देते रहते हैं। ऐसे में सबसे जरूरी है कि नोटिफिकेशन में आने वाले एप्स अपडेशन को एवॉयड करने के बजाए जो जरूरी एप्स हैं, उन्हें अपडेट कर दिया जाए। एंड्रायड स्मार्टफोन की स्पीड बढ़ाने का दूसरा तरीका फोन को रिसेट करना है। यानी कि हैंडसेट को अगर बैकअप रिसेट कर दिया जाए तो स्पीड में काफी अंतर पड़ सकता है। बेसिकली यह फोन को इंटरनली नया बना देता है। इसके लिए आपको सेटिंग ऑप्शन में जाकर बैकअप एंड रिसेट पर क्िलक करना होता है। यहां आपको याद रखना होगा कि फोन रिसेट करने के बाद हैंडसेट में सेव पूरा डाटा एड़ जाएगा तो ऐसे में अपने डाटा को एक्टरनल मेमोरी में सेव करके रख लें। एंड्रायड यूजर्स को डिवाइस यूज करते समय-समय पर इंटरनल मेमोरी को साफ करते रहना चाहिए। यानी कि जब आप सेटिंग ऑप्शन में स्टोरेज पर क्िलक करेंगे तो आपको इंटरनल मेमोरी और एक्सटरनल मेमोरी में सेव एप्स और डाटा आदि शो करेगा। ऐसे में अपनी जरूरत के हिसाब से म्यूजिक, वीडियो आदि को डिलीट कर दें। यहीं नहीं अगर आप अपने मैसेजिंग एप डाटा को भी डिलीट करना चाहते हैं, तो आसानी से कर सकते हैं। इसके अलावा कैश डाटा को हमेशा डिलीट करते रहे। एंड्रायड डिवाइस में कई एप्स ऐसे होते हैं, जिनका हम इस्तेमाल तो नहीं करते लेकिन यह डिवाइस में पड़े रहते हैं और फालतू जगह घेरे रहते हैं। ऐसे में आपको चाहिए कि इन अनयूजफुल एप्स को तुरंत ही अनइंस्टॉल कर दें। डिवाइस में जितने जरूरी एप्स पड़े होंगे फोन उतना ही अच्छा चलेगा। हालांकि अगर आप चाहें तो कुछ एप्स को एसडी कार्ड यानी एक्सटरनल मेमोरी में भी मूव करा सकते हैं जिससे कि इंटरनल मेमोरी में जगह खाली हो जाएगी। अगर आप अपने पुराने या नए एंड्रायड फ़ोन की परफॉरमेंस सुधारना चाहते हैं तो इसका एक तरीका है। जो फ़ोन सॉफ्टवेयर डेवलपर है। सबसे पहले फ़ोन की सेटिंग्स में जाइए, उसके बाद 'अबाउट फ़ोन' के विकल्प को चुनिए। उसके बाद फ़ोन के बिल्ड नंबर को बार-बार टैप कीजिए। कई बार टैप करने पर फ़ोन आपको बताएगा कि आप डेवलपर हैं। उसके बाद वापस सेटिंग मेन्यू पर जाइए। उसके बाद आपके पास डेवलपर ऑप्शन नाम का एक विकल्प आएगा। यहां जाकर आप मेन्यू ऑप्शन में तीन बदलाव ला रहे हैं। इन तीन में विंडो एनिमेशन स्केल, ट्रांजिशन एनीमेशन स्केल और एनिमेटर ड्यूरेशन स्केल। इन तीनों को बदल कर एक. शून्य से शून्य. पाँच कर देना है. ऐसा करने में सिर्फ दो-चार मिनट लगते हैं। ये सब करने के बाद फ़ोन को एक बार री-स्टार्ट कर दीजिए और देखिए उसकी रफ़्तार पहले से बेहतर हो गई होगी। |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
टैक्सियों के साथ हाल की समस्याओं के कारण, आंतरिक मामलों के मंत्रालय ने 12 नियमों के साथ एक दृश्य तैयार किया, जिसका टैक्सी चालकों को पालन करना होगा। 81 प्रांतीय गवर्नरशिप को भेजे गए ये दृश्य विदेशी भाषाओं में भी डिज़ाइन किए गए थे ताकि हमारे देश में रहने वाले विदेशी और आने वाले पर्यटक इन्हें समझ सकें।
तस्वीरें टैक्सी स्टैंडों, टैक्सी प्रतीक्षा क्षेत्रों और अन्य स्थानों पर लगाई जाएंगी जहां यात्री उन्हें पूरे देश में देख सकें, और टैक्सियों में उपयुक्त क्षेत्रों (सीट के पीछे की जेब आदि) में जहां यात्री उन्हें देख सकें; इसे संबंधित संस्थानों की आधिकारिक वेबसाइट और सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किया जाएगा।
टैक्सी चालकों को 12 नियमों की याद दिलाने वाले इन दृश्यों के साथ, मंत्रालय का लक्ष्य जागरूकता, निवारण और निरीक्षण की प्रभावशीलता को बढ़ाना है।
| टैक्सियों के साथ हाल की समस्याओं के कारण, आंतरिक मामलों के मंत्रालय ने बारह नियमों के साथ एक दृश्य तैयार किया, जिसका टैक्सी चालकों को पालन करना होगा। इक्यासी प्रांतीय गवर्नरशिप को भेजे गए ये दृश्य विदेशी भाषाओं में भी डिज़ाइन किए गए थे ताकि हमारे देश में रहने वाले विदेशी और आने वाले पर्यटक इन्हें समझ सकें। तस्वीरें टैक्सी स्टैंडों, टैक्सी प्रतीक्षा क्षेत्रों और अन्य स्थानों पर लगाई जाएंगी जहां यात्री उन्हें पूरे देश में देख सकें, और टैक्सियों में उपयुक्त क्षेत्रों में जहां यात्री उन्हें देख सकें; इसे संबंधित संस्थानों की आधिकारिक वेबसाइट और सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किया जाएगा। टैक्सी चालकों को बारह नियमों की याद दिलाने वाले इन दृश्यों के साथ, मंत्रालय का लक्ष्य जागरूकता, निवारण और निरीक्षण की प्रभावशीलता को बढ़ाना है। |
मुंबई : बिग बॉस (Bigg Boss)में इस हफ्ते का वीकेंड का वार काफी मजेदार रहा. शो के होस्ट सलमान खान (Salman Khan) ने भी कंटेस्टेंट (contestant) के साथ खूब मस्ती की. लेकिन इन सभी के बीच घर का माहौल उस वक्त खराब हो गया जब विकास गुप्ता (Vikas Gupta) को घर से बेघर (Homeless)होना पड़ा. बता दें कि इस हफ्ते चार राहुल वेद्या,निक्की तंबोली,देवोलीना और विकास नोमिनेटिड हुए थे. जिसमें से सबसे कम वोट विकास गुप्ता को मिले और उन्हें घर से बेघर होना पड़ा.
बता दें कि विकास ने पिछले महीने ही घर में चेलैंजर के रूप में एंट्री ली थी. तभी से वो सुर्खियों में छाए हुए थे. इससे पहले भी विकास दो बार घर से बाहर जा चुके हैं. एक बार जब घर में हो रहे झगड़े के बीच विकास ने अर्शी खान को पूल में धक्का दे दिया था.
तो बिग बॉस ने सजा के तौर पर उन्हें घर से बेघर कर दिया था. फिर फैन की भारी डिमांड पर उनकी वापसी हुई. फिर कुछ दिन बाद विकास अपनी बीमारी की वजह से घर से बाहर गए थे. और कुछ दिन बाद वापस लौटे थे. लेकिन घर में वापस आकर विकास फैन्स पर अपना जादू नहीं चला पाए और इस हफ्ते उन्हें शो को अलविदा कहना पड़ा.
हालांकि बिग बॉस ने विकास को अपने आप को बचाना का एक और मौका दिया था. लेकिन विकास ने उससे साफ इनकार कर दिया. दरअसल विकास ने जब शो में एंट्री की थी तो उन्हें एक जोकर कार्ड मिला था. जिसका इस्तेमाल वो खुद को बचाने के लिए कभी भी एक बार शो में कर सकते थे. और सलमान ने उन्हें ये मौका अब दिया. लेकिन विकास ने खुद को ना बचाकर देवोलीना का बचाया. सलमान खान वे इस बात पर विकास की खूब तारीफ की.
फिलहाल 'बिग बॉस 14 अब अपने फिनाले के करीब के पहुंच गया है और सभी कंटेस्टेंट दर्शकों का दिल और ट्रॉफी हासिल करने के लिए पूरी मेहनत कर रहे हैं. ऐसे में ये देखना दिलचस्प होगा कि इस बार बिग बॉस 14 की ट्रॉफी कौन अपने नाम करता है.
| मुंबई : बिग बॉस में इस हफ्ते का वीकेंड का वार काफी मजेदार रहा. शो के होस्ट सलमान खान ने भी कंटेस्टेंट के साथ खूब मस्ती की. लेकिन इन सभी के बीच घर का माहौल उस वक्त खराब हो गया जब विकास गुप्ता को घर से बेघर होना पड़ा. बता दें कि इस हफ्ते चार राहुल वेद्या,निक्की तंबोली,देवोलीना और विकास नोमिनेटिड हुए थे. जिसमें से सबसे कम वोट विकास गुप्ता को मिले और उन्हें घर से बेघर होना पड़ा. बता दें कि विकास ने पिछले महीने ही घर में चेलैंजर के रूप में एंट्री ली थी. तभी से वो सुर्खियों में छाए हुए थे. इससे पहले भी विकास दो बार घर से बाहर जा चुके हैं. एक बार जब घर में हो रहे झगड़े के बीच विकास ने अर्शी खान को पूल में धक्का दे दिया था. तो बिग बॉस ने सजा के तौर पर उन्हें घर से बेघर कर दिया था. फिर फैन की भारी डिमांड पर उनकी वापसी हुई. फिर कुछ दिन बाद विकास अपनी बीमारी की वजह से घर से बाहर गए थे. और कुछ दिन बाद वापस लौटे थे. लेकिन घर में वापस आकर विकास फैन्स पर अपना जादू नहीं चला पाए और इस हफ्ते उन्हें शो को अलविदा कहना पड़ा. हालांकि बिग बॉस ने विकास को अपने आप को बचाना का एक और मौका दिया था. लेकिन विकास ने उससे साफ इनकार कर दिया. दरअसल विकास ने जब शो में एंट्री की थी तो उन्हें एक जोकर कार्ड मिला था. जिसका इस्तेमाल वो खुद को बचाने के लिए कभी भी एक बार शो में कर सकते थे. और सलमान ने उन्हें ये मौका अब दिया. लेकिन विकास ने खुद को ना बचाकर देवोलीना का बचाया. सलमान खान वे इस बात पर विकास की खूब तारीफ की. फिलहाल 'बिग बॉस चौदह अब अपने फिनाले के करीब के पहुंच गया है और सभी कंटेस्टेंट दर्शकों का दिल और ट्रॉफी हासिल करने के लिए पूरी मेहनत कर रहे हैं. ऐसे में ये देखना दिलचस्प होगा कि इस बार बिग बॉस चौदह की ट्रॉफी कौन अपने नाम करता है. |
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सैकड़ों वर्षों से ओडिशा अपने उत्तम रेशम, विशेष रूप से रेशम की तुसर किस्म के लिए जाना जाता है। यह रेशम हजारों आदिवासी लोगों और विशेषकर महिलाओं को आजीविका प्रदान करता है। लेकिन राज्य में रेशम के बुनकर रेशम के धागे के लिए पूरी तरह से पश्चिम बंगाल, झारखंड और कर्नाटक जैसे राज्यों पर निर्भर थे जिससे रेशम के कपड़े की लागत बढ़ गई थी।
खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने कटक जिले के चौद्वार में ओडिशा का पहला टसर सिल्क यार्न उत्पादन केंद्र स्थापित करने के लिए एक ऐतिहासिक पहल की है। यह रेशम धागा उत्पादन केंद्र टसर रेशम के धागे की स्थानीय उपलब्धता सुनिश्चित करेगा, स्थानीय रोजगार पैदा करेगा और रेशम उत्पादन लागत को कम करेगा। टसर रेशम की बेहतरीन किस्मों में से एक है और इसका खुरदरापन और बुनाई इसे बाकी किस्मों से अलग करती है। रेशम धागा उत्पादन केंद्र का उद्घाटन शुक्रवार को केवीआईसी के अध्यक्ष श्री विनय कुमार सक्सेना ने किया।
यह केंद्र बहुत महत्व रखता है क्योंकि रेशम ओडिशा में कुल खादी कपड़े के उत्पादन का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा है। यह रेशम धागा उत्पादन केंद्र 34 महिलाओं सहित 50 कारीगरों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार पैदा करेगा, साथ ही कोकून की खेती में लगे 300 से अधिक आदिवासी किसानों को आजीविका सहायता प्रदान करेगा। इससे राज्य में बुनकरों और रीलरों के लिए अप्रत्यक्ष रोजगार भी पैदा होगा। प्रत्येक किलो कच्चे रेशम का उत्पादन 11 कारीगरों के लिए रोजगार पैदा करता है, जिनमें से 6 महिलाएं हैं।
इस मौके पर श्री सक्सेना ने कहा, "रेशम भारत की कालातीत विरासत है जो हमारी संस्कृति और परंपरा का अभिन्न अंग है। यह भारतीय कपड़ा उद्योग, विशेष रूप से खादी का एक प्रमुख घटक भी है। इस रेशम धागा उत्पादन केंद्र के चालू होने से रेशम के धागे का उत्पादन स्थानीय स्तर पर होगा और इस प्रकार रेशम उत्पादन की लागत में कमी आएगी। इससे ओडिशा के प्रसिद्ध टसर सिल्क की बिक्री को बढ़ावा मिलेगा और सिल्क के पारंपरिक शिल्प को मजबूती मिलेगी।"
75 लाख रुपये की लागत से स्थापित रेशम धागा उत्पादन केंद्र सालाना 94 लाख रुपये मूल्य के 200 किलोग्राम रेशम के धागे का उत्पादन करने में सक्षम है। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए इस इकाई की उत्पादन क्षमता को धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा। यह रेशम यार्न उत्पादन केंद्र रेशम रीलिंग मशीन, री-रीलिंग मशीन, कताई मशीन और अन्य जैसी उन्नत मशीनरी से लैस है।
| Posted On: सैकड़ों वर्षों से ओडिशा अपने उत्तम रेशम, विशेष रूप से रेशम की तुसर किस्म के लिए जाना जाता है। यह रेशम हजारों आदिवासी लोगों और विशेषकर महिलाओं को आजीविका प्रदान करता है। लेकिन राज्य में रेशम के बुनकर रेशम के धागे के लिए पूरी तरह से पश्चिम बंगाल, झारखंड और कर्नाटक जैसे राज्यों पर निर्भर थे जिससे रेशम के कपड़े की लागत बढ़ गई थी। खादी और ग्रामोद्योग आयोग ने कटक जिले के चौद्वार में ओडिशा का पहला टसर सिल्क यार्न उत्पादन केंद्र स्थापित करने के लिए एक ऐतिहासिक पहल की है। यह रेशम धागा उत्पादन केंद्र टसर रेशम के धागे की स्थानीय उपलब्धता सुनिश्चित करेगा, स्थानीय रोजगार पैदा करेगा और रेशम उत्पादन लागत को कम करेगा। टसर रेशम की बेहतरीन किस्मों में से एक है और इसका खुरदरापन और बुनाई इसे बाकी किस्मों से अलग करती है। रेशम धागा उत्पादन केंद्र का उद्घाटन शुक्रवार को केवीआईसी के अध्यक्ष श्री विनय कुमार सक्सेना ने किया। यह केंद्र बहुत महत्व रखता है क्योंकि रेशम ओडिशा में कुल खादी कपड़े के उत्पादन का लगभग पचहत्तर प्रतिशत हिस्सा है। यह रेशम धागा उत्पादन केंद्र चौंतीस महिलाओं सहित पचास कारीगरों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार पैदा करेगा, साथ ही कोकून की खेती में लगे तीन सौ से अधिक आदिवासी किसानों को आजीविका सहायता प्रदान करेगा। इससे राज्य में बुनकरों और रीलरों के लिए अप्रत्यक्ष रोजगार भी पैदा होगा। प्रत्येक किलो कच्चे रेशम का उत्पादन ग्यारह कारीगरों के लिए रोजगार पैदा करता है, जिनमें से छः महिलाएं हैं। इस मौके पर श्री सक्सेना ने कहा, "रेशम भारत की कालातीत विरासत है जो हमारी संस्कृति और परंपरा का अभिन्न अंग है। यह भारतीय कपड़ा उद्योग, विशेष रूप से खादी का एक प्रमुख घटक भी है। इस रेशम धागा उत्पादन केंद्र के चालू होने से रेशम के धागे का उत्पादन स्थानीय स्तर पर होगा और इस प्रकार रेशम उत्पादन की लागत में कमी आएगी। इससे ओडिशा के प्रसिद्ध टसर सिल्क की बिक्री को बढ़ावा मिलेगा और सिल्क के पारंपरिक शिल्प को मजबूती मिलेगी।" पचहत्तर लाख रुपये की लागत से स्थापित रेशम धागा उत्पादन केंद्र सालाना चौरानवे लाख रुपये मूल्य के दो सौ किलोग्रामग्राम रेशम के धागे का उत्पादन करने में सक्षम है। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए इस इकाई की उत्पादन क्षमता को धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा। यह रेशम यार्न उत्पादन केंद्र रेशम रीलिंग मशीन, री-रीलिंग मशीन, कताई मशीन और अन्य जैसी उन्नत मशीनरी से लैस है। |
RANCHI : राजधानी रांची में शनिवार की रात डेढ़ घंटे के अंदर तीन पेट्रोल पंपों पर हुई लूट के विरोध में पेट्रोल पंप एसोसिएशन की ओर से सोमवार को पेट्रोल पंप बंद रखने की वजह से लोग पेट्रोल के लिए एक पेट्रोल पंस से दूसरे पेट्रोल पंप पर भटकते रहे। इस दौरान कुछ इलाकों में सौ रुपए लीटर पेट्रोल बेचे जाने की बात सामने आई। इसके अलावा जैप के डोरंडा स्थित खुखरी पेट्रोल पंप पर भी पेट्रोल लेने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। हालांकि, शाम चार बजे के बाद अधिकांश पेट्रोल पंप पर पेट्रोल-डीजल मिलने लगे थे।
गौरतलब है कि खुखरी पेट्रोल पंच का संचालन जैप वन करती है। ऐसे में पेट्रोल पंप एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने जैप वन के अधिकारियों से आग्रह किया था कि सोमवार को वे भी पेट्रोल पंप को बंद रखें, पर उन्होंने कहा कि सरकार का आदेश है कि हर हाल में पेट्रोल पंप खुला रहना चाहिए। यही वजह रही कि सोमवार को खुखरी पेट्रोल पंप पर बंद का असर नहीं रहा।
खुखरी पेट्रोल पंप पर पेट्रोल के लिए लोगों की भीड़ को देखते हुए जैप वन के जवानों ने मोर्चा संभाल लिया था। पुलिस को देखकर कुछ लोग परेशान हो गए, लेकिन जब उन्हें बताया गया कि पेट्रोल लेने में लोगों को सहूलियत हो, इसलिए जवान तैनात हैं, तब उन्होंने राहत की सांस ली।
डीजीपी राजीव कुमार ने सोमवार की शाम चार बजे पेट्रोल पंप एसोसिएशन के मेंबर्स के साथ मीटिंग की। इस बैठक में डीजीपी ने पेट्रोल पंप की सिक्योरिटी के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का भरोसा एसोसिएशन को दिया।
| RANCHI : राजधानी रांची में शनिवार की रात डेढ़ घंटे के अंदर तीन पेट्रोल पंपों पर हुई लूट के विरोध में पेट्रोल पंप एसोसिएशन की ओर से सोमवार को पेट्रोल पंप बंद रखने की वजह से लोग पेट्रोल के लिए एक पेट्रोल पंस से दूसरे पेट्रोल पंप पर भटकते रहे। इस दौरान कुछ इलाकों में सौ रुपए लीटर पेट्रोल बेचे जाने की बात सामने आई। इसके अलावा जैप के डोरंडा स्थित खुखरी पेट्रोल पंप पर भी पेट्रोल लेने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। हालांकि, शाम चार बजे के बाद अधिकांश पेट्रोल पंप पर पेट्रोल-डीजल मिलने लगे थे। गौरतलब है कि खुखरी पेट्रोल पंच का संचालन जैप वन करती है। ऐसे में पेट्रोल पंप एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने जैप वन के अधिकारियों से आग्रह किया था कि सोमवार को वे भी पेट्रोल पंप को बंद रखें, पर उन्होंने कहा कि सरकार का आदेश है कि हर हाल में पेट्रोल पंप खुला रहना चाहिए। यही वजह रही कि सोमवार को खुखरी पेट्रोल पंप पर बंद का असर नहीं रहा। खुखरी पेट्रोल पंप पर पेट्रोल के लिए लोगों की भीड़ को देखते हुए जैप वन के जवानों ने मोर्चा संभाल लिया था। पुलिस को देखकर कुछ लोग परेशान हो गए, लेकिन जब उन्हें बताया गया कि पेट्रोल लेने में लोगों को सहूलियत हो, इसलिए जवान तैनात हैं, तब उन्होंने राहत की सांस ली। डीजीपी राजीव कुमार ने सोमवार की शाम चार बजे पेट्रोल पंप एसोसिएशन के मेंबर्स के साथ मीटिंग की। इस बैठक में डीजीपी ने पेट्रोल पंप की सिक्योरिटी के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का भरोसा एसोसिएशन को दिया। |
हो जाय प्रति दूर एक दो के ही सत्सङ्ग सहित किसी बनस्थलीमे पहुँच । सत्सङ्ग ध्यान प्रेमीका होना चाहिये ।
सबसे विकट रोग तो यह है कि यह समझ रखा है कि लोग मुझे जानते है । लोग जानते है नही मुझे, किन्तु दिमाग ऐसा ही घसड फसड बना रहा है । देख - क्या तू चैतन्य स्वभावमात्र है उस तू को जानता ही कौन है और जो जानता है उसके लिये एक द्रव्य सामान्य है । तू थोडे हो है, इस तेरेका कोई नाम ही नहीं। अपने निर्नाम अमूर्त शुद्ध चैतन्यस्वभावमय परमात्मदेवकी भक्ति कर । जगत्मे जो होता है उसके विकल्पसे तो पूरा कभी भी नही पडेगा ।
ओ दिव्यतेजोमय, अब तो ज्योतिर्लीन हो । देख सुखी होना है, शान्त होना है तुम्हे ! हा, तो वत, साहस कर, परद्रव्य तो पर ही हैं, अब भी अलग है, वियोग होनेपर लोक साधारणकी दृष्टि से भी अलग है उनका उपयोग छोड विकल्प छोड । हिम्मत कर और कर तो पूरी हिम्मत कर । पूज्यपाद का आदेश मान - "सर्वेन्द्रियाणि सयम्य स्तिमितेनान्तरात्मना । यत्क्षण पश्यतो भाति तत्तत्त्व परमात्मन ।
ॐ निर्नाम शुद्ध चिदस्मि ।
(१) ससारका कारण शरीर है, शरीरका अभाव होनेपर ससारका प्रभाव होता है । (२) शरीरका कारण कर्म है, कर्मका अभाव होनेपर शरीरका भव होता है । (३) कर्मका कारण भाव ( राग, द्वेष, मोह) है, प्रसू भावका अभाव होनेपर कर्मका प्रभाव हो जाता है । (४) व्यवसान ( मिथ्यात्व, ज्ञान, प्रविरति व योग) सूवभावका कारण है, अध्यवसाका अभाव होने पर आसवभावका अभाव हो जाता है । ( ५ ) प्रात्मतत्त्व व अनात्मतत्त्वमे एकत्वका प्राशय हो जाना श्रध्यवसानका कारण है, आत्मतत्त्व व अनात्मतस्त्रमे एका आशय न रहे तो अध्यवसान भी नहीं रह सकता ।
उक्त बातोका मर्म समझकर वह उपाय करना चाहिये जिसन समार | हो जाय प्रति दूर एक दो के ही सत्सङ्ग सहित किसी बनस्थलीमे पहुँच । सत्सङ्ग ध्यान प्रेमीका होना चाहिये । सबसे विकट रोग तो यह है कि यह समझ रखा है कि लोग मुझे जानते है । लोग जानते है नही मुझे, किन्तु दिमाग ऐसा ही घसड फसड बना रहा है । देख - क्या तू चैतन्य स्वभावमात्र है उस तू को जानता ही कौन है और जो जानता है उसके लिये एक द्रव्य सामान्य है । तू थोडे हो है, इस तेरेका कोई नाम ही नहीं। अपने निर्नाम अमूर्त शुद्ध चैतन्यस्वभावमय परमात्मदेवकी भक्ति कर । जगत्मे जो होता है उसके विकल्पसे तो पूरा कभी भी नही पडेगा । ओ दिव्यतेजोमय, अब तो ज्योतिर्लीन हो । देख सुखी होना है, शान्त होना है तुम्हे ! हा, तो वत, साहस कर, परद्रव्य तो पर ही हैं, अब भी अलग है, वियोग होनेपर लोक साधारणकी दृष्टि से भी अलग है उनका उपयोग छोड विकल्प छोड । हिम्मत कर और कर तो पूरी हिम्मत कर । पूज्यपाद का आदेश मान - "सर्वेन्द्रियाणि सयम्य स्तिमितेनान्तरात्मना । यत्क्षण पश्यतो भाति तत्तत्त्व परमात्मन । ॐ निर्नाम शुद्ध चिदस्मि । ससारका कारण शरीर है, शरीरका अभाव होनेपर ससारका प्रभाव होता है । शरीरका कारण कर्म है, कर्मका अभाव होनेपर शरीरका भव होता है । कर्मका कारण भाव है, प्रसू भावका अभाव होनेपर कर्मका प्रभाव हो जाता है । व्यवसान सूवभावका कारण है, अध्यवसाका अभाव होने पर आसवभावका अभाव हो जाता है । प्रात्मतत्त्व व अनात्मतत्त्वमे एकत्वका प्राशय हो जाना श्रध्यवसानका कारण है, आत्मतत्त्व व अनात्मतस्त्रमे एका आशय न रहे तो अध्यवसान भी नहीं रह सकता । उक्त बातोका मर्म समझकर वह उपाय करना चाहिये जिसन समार |
देश में पेट्रोल व डीजल की कीमतों एक बार फिर बढ़ोतरी हुई है। आज 02 अप्रैल को पेट्रोल (Petrol) और डीजल (Diesel) दोनों ही ईंधनों के दामों (Fuel Price) में 80-80 पैसे प्रति लीटर का इजाफा किया गया है। बता दें कि 31 मार्च को भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 80-80 पैसे प्रति लीटर का उछाल आया था। पेट्रोल और डीजल के दामों में पिछले 12 में 10वीं बार पेट्रोल-डीजल महंगा हुआ है। भारतीय पेट्रोलियम विपणन कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) के ताजा अपडेट के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 102. 61 रूपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 93. 87 रुपये प्रति लीटर हो गई है।
मध्य प्रदेश के बालाघाट में पेट्रोल के दाम 117. 40 रूपये प्रति लीटर जबकि डीजल का रेट 100. 42 रूपये प्रति लीटर पहुंच गया है। देश के चारों महानगरों की अगर तुलना करें तो मुंबई में पेट्रोल-डीजल सबसे अधिक महंगा है। मुंबई में पेट्रोल के दाम 117. 57 रूपये प्रति लीटर जबकि डीजल का रेट 101. 79 रूपये प्रति लीटर पहुंच गए है। बता दें कि स्थानीय करों के आधार पर राज्यों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें अलग-अलग होती हैं।
बता दें कि 22 मार्च से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने शुरू हुए हैं। तब से अब तक 24 मार्च और 1 अप्रैल यानी कुल दो दिन छोड़कर हर रोज कीमतों में उछाल आ रहा है। 2 अप्रैल की बढ़ोतरी को मिलाकर कुल 10 दिनों में पेट्रोल 7 रुपये 20 पैसे महंगा हो गया है। बता दें कि 22 मार्च से 2 अप्रैल तक यानी कुल 12 दिन में 10 बार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ें हैं।
किस दिन कितने बढ़े दाम?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल (Crude Oil) की कीमत के आधार पर पेट्रोल और डीजल की कीमत प्रतिदिन अपडेट की जाती है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियां कीमतों की समीक्षा के बाद रोज पेट्रोल (Petrol) और डीजल (Diesel) के दाम तय करती हैं। आप एक SMS के जरिए रोज अपने शहर में पेट्रोल-डीजल की कीमत जान सकते हैं। इसके लिए इंडियन ऑयल (IOCL) के ग्राहकों को RSP कोड लिखकर 9224992249 नंबर पर भेजना होगा।
| देश में पेट्रोल व डीजल की कीमतों एक बार फिर बढ़ोतरी हुई है। आज दो अप्रैल को पेट्रोल और डीजल दोनों ही ईंधनों के दामों में अस्सी-अस्सी पैसे प्रति लीटर का इजाफा किया गया है। बता दें कि इकतीस मार्च को भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अस्सी-अस्सी पैसे प्रति लीटर का उछाल आया था। पेट्रोल और डीजल के दामों में पिछले बारह में दसवीं बार पेट्रोल-डीजल महंगा हुआ है। भारतीय पेट्रोलियम विपणन कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के ताजा अपडेट के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की कीमत एक सौ दो. इकसठ रूपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत तिरानवे. सत्तासी रुपयापये प्रति लीटर हो गई है। मध्य प्रदेश के बालाघाट में पेट्रोल के दाम एक सौ सत्रह. चालीस रूपये प्रति लीटर जबकि डीजल का रेट एक सौ. बयालीस रूपये प्रति लीटर पहुंच गया है। देश के चारों महानगरों की अगर तुलना करें तो मुंबई में पेट्रोल-डीजल सबसे अधिक महंगा है। मुंबई में पेट्रोल के दाम एक सौ सत्रह. सत्तावन रूपये प्रति लीटर जबकि डीजल का रेट एक सौ एक. उन्यासी रूपये प्रति लीटर पहुंच गए है। बता दें कि स्थानीय करों के आधार पर राज्यों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें अलग-अलग होती हैं। बता दें कि बाईस मार्च से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने शुरू हुए हैं। तब से अब तक चौबीस मार्च और एक अप्रैल यानी कुल दो दिन छोड़कर हर रोज कीमतों में उछाल आ रहा है। दो अप्रैल की बढ़ोतरी को मिलाकर कुल दस दिनों में पेट्रोल सात रुपयापये बीस पैसे महंगा हो गया है। बता दें कि बाईस मार्च से दो अप्रैल तक यानी कुल बारह दिन में दस बार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ें हैं। किस दिन कितने बढ़े दाम? अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत के आधार पर पेट्रोल और डीजल की कीमत प्रतिदिन अपडेट की जाती है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियां कीमतों की समीक्षा के बाद रोज पेट्रोल और डीजल के दाम तय करती हैं। आप एक SMS के जरिए रोज अपने शहर में पेट्रोल-डीजल की कीमत जान सकते हैं। इसके लिए इंडियन ऑयल के ग्राहकों को RSP कोड लिखकर नौ दो दो चार नौ नौ दो दो चार नौ नंबर पर भेजना होगा। |
रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से आज यहां उनके निवास कार्यालय में बस्तर के नगरनार क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों और ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों ने मुलाकात की. उन्होंने नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NMDC) और नगरनार स्टील प्लांट के डी-मर्जर और विनिवेश को रोकने के संबंध में मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा. इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार राजेश तिवारी भी उपस्थित थे.
इस प्रतिनिधि मण्डल ने मुख्यमंत्री से कहा कि केन्द्र सरकार के नगरनार स्टील प्लांट के डी मर्जर और विनिवेश के निर्णय से बस्तर अंचल के लोगों में असंतोष है। उन्होंने बस्तर और नगरनार क्षेत्र के लोगों की इन भावनाओं को केन्द्र सरकार तक पहुंचाने का आग्रह मुख्यमंत्री से किया। मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधि मण्डल को आश्वासन दिया कि प्रधानमंत्री तथा केन्द्रीय इस्पात और केन्द्रीय खनन मंत्री तक इस क्षेत्र के लोगों की बात पहुंचाने का प्रयास करेंगे। इस विषय में विशेषज्ञों से अध्ययन कराकर उनकी राय भी ली जाएगी।
| रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से आज यहां उनके निवास कार्यालय में बस्तर के नगरनार क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों और ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों ने मुलाकात की. उन्होंने नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन और नगरनार स्टील प्लांट के डी-मर्जर और विनिवेश को रोकने के संबंध में मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा. इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार राजेश तिवारी भी उपस्थित थे. इस प्रतिनिधि मण्डल ने मुख्यमंत्री से कहा कि केन्द्र सरकार के नगरनार स्टील प्लांट के डी मर्जर और विनिवेश के निर्णय से बस्तर अंचल के लोगों में असंतोष है। उन्होंने बस्तर और नगरनार क्षेत्र के लोगों की इन भावनाओं को केन्द्र सरकार तक पहुंचाने का आग्रह मुख्यमंत्री से किया। मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधि मण्डल को आश्वासन दिया कि प्रधानमंत्री तथा केन्द्रीय इस्पात और केन्द्रीय खनन मंत्री तक इस क्षेत्र के लोगों की बात पहुंचाने का प्रयास करेंगे। इस विषय में विशेषज्ञों से अध्ययन कराकर उनकी राय भी ली जाएगी। |
कजान, सात जुलाई। फीफा वर्ल्ड कप 2018 के दूसरे क्वार्टर फाइनल मुकाबले में बेल्जियम ने ब्राजील को 2-1 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बना लिया। ब्राजील के मिडफील्डर फर्नाडिन्हो ने 13वें मिनट में आत्मघाती गोल करके बेल्जियम को 1-0 की बढ़त दिलाई। केविन डे ब्रूने ने 31वें मिनट में बेल्जियम के लिए दूसरा गोल किया। वहीं मैच के 76वें मिनट में रेनाटो अगस्टो ने ब्राजील के लिए एकमात्र गोल किया।
- बेल्जियम ने ब्राजील को 2-1 से हराकर फीफा वर्ल्ड कप 2018 के सेमीफाइनल में जगह बना ली है।
- एक्सट्रा टाइम में दोनों टीमें कोई गोल नहीं कर पाईं और बेल्जियम ने यह मैच 2-1 से अपने नाम कर लिया।
- दूसरे हाफ का 45 मिनट का खेल खत्म होने के बाद 5 मिनट का इंजुरी टाइम जोड़ा गया।
- दूसरे हाफ का खेल शुरू।
- मैच के 41वें मिनट में बेल्जियम को कॉर्नर मिला, लेकिन उसके खिलाड़ी कोई फायदा नहीं।
- आत्मघाती गोल के बाद ब्राजील की टीम वापसी से प्रयास में जुटी।
- मैच के 13वें मिनट में ब्राजील के खिलाड़ी फर्नांडिन्हो ने किया आत्मघाती गोल। बेल्जियम की टीम को मिली 1-0 की बढ़त।
- शुरुआती 10 मिनट का खेल खत्म होने के बाद ब्राजील और बेल्जियम की टीमें नहीं कर पाईं कोई गोल।
- ब्राजील और बेल्जियम के बीच फीफा वर्ल्ड कप 2018 का दूसरा क्वार्टर फाइनल मैच शुरू।
- फीफा वर्ल्ड कप 2018 के दूसरे क्वार्टर फाइनल से पहले ब्राजील और बेल्जियम की टीम राष्ट्रगान के लिए ग्राउंड पर पहुंचीं।
- ब्राजील और बेल्जियम की टीमें इस मैच में 5वीं बार आमने-सामने हैं। इससे पहले हुए 4 में से 3 मुकाबलों में ब्राजील और 1 में बेल्जियम ने बाजी मारी है। दोनों टीमों ने एक-दूसरे के खिलाफ आखिरी बार 2002 विश्व कप में मैच खेला था। तब ब्राजील ने 2-0 से जीत हासिल कर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई थी। विश्व कप में बेल्जियम का दक्षिण अमेरिकी टीमों के खिलाफ प्रदर्शन खराब रहा है। उसकी 7 बार दक्षिण अमेरिकी टीमों से भिड़ंत हुई है, जिनमें से वह 2 जीत पाई, 4 हारी और एक ड्रॉ कराया।
- ब्राजील के खिलाफ बेल्जियम के लिए जीत आसान नहीं होगा, क्योंकि बेल्जियम की टीम पिछले दो बड़े टूर्नामेंटों फीफा विश्व कप 2014 और यूईएएफ यूरो 2016 में क्वार्टर फाइनल से ही बाहर हुई है।
- इस मैच में बेल्जियम की टीम पर बहुत ज्यादा दबाव होगा, क्योंकि साल 2002 के विश्वकप में ब्राजील ने बेल्जियम को 2-0 से हराकर टूर्नामेंट से बाहर किया था। ऐसे में बेल्जियम की टीम ब्राजील से उस हार का बदला लेने के इरादे से उतरेगी।
- सबसे ज्यादा पांच बार खिताब जीतने वाली ब्राजील की टीम अपने छठे खिताब की ओर एक और कदम बढ़ाने की कोशिश करेगी तो वहीं तीसरी बार सेमीफाइनल में पहुंचना चाहेगा।
- ब्राजील और बेल्जियम के बीच यह मैच भारतीय समय के अनुसार रात 11. 30 बजे से कजान एरीना स्टेडियम में खेला जाएगा।
- फीफा वर्ल्ड कप 2018 का दूसरे क्वार्टर फाइनल मुकाबले में ब्राजील की टीम का सामना बेल्जियम से हो रहा है।
- गोलकीपर्सः एलिसन, एंडरसन, कैसियो।
- डिफेंडर्सः डैनिलो, फैगनर, मार्सेलो, फिलिपे लुईस, थियागो सिल्वा, मारक्यून्हो, मिरांडा, पेडरो गेरोमल।
- मिडफील्डरर्सः कैसेमिरो, फर्नांडिन्हो, पाउलिन्हो, फ्रेड, रेनाटो अगस्टो, फिलिपो काउटिन्हो, विलियम, डगलस कोस्टा।
- फॉर्वर्ड्सः नेमार, तायसन, ग्रैबियल जीजस, रॉबर्टो फिरमिनो।
| कजान, सात जुलाई। फीफा वर्ल्ड कप दो हज़ार अट्ठारह के दूसरे क्वार्टर फाइनल मुकाबले में बेल्जियम ने ब्राजील को दो-एक से हराकर सेमीफाइनल में जगह बना लिया। ब्राजील के मिडफील्डर फर्नाडिन्हो ने तेरहवें मिनट में आत्मघाती गोल करके बेल्जियम को एक-शून्य की बढ़त दिलाई। केविन डे ब्रूने ने इकतीसवें मिनट में बेल्जियम के लिए दूसरा गोल किया। वहीं मैच के छिहत्तरवें मिनट में रेनाटो अगस्टो ने ब्राजील के लिए एकमात्र गोल किया। - बेल्जियम ने ब्राजील को दो-एक से हराकर फीफा वर्ल्ड कप दो हज़ार अट्ठारह के सेमीफाइनल में जगह बना ली है। - एक्सट्रा टाइम में दोनों टीमें कोई गोल नहीं कर पाईं और बेल्जियम ने यह मैच दो-एक से अपने नाम कर लिया। - दूसरे हाफ का पैंतालीस मिनट का खेल खत्म होने के बाद पाँच मिनट का इंजुरी टाइम जोड़ा गया। - दूसरे हाफ का खेल शुरू। - मैच के इकतालीसवें मिनट में बेल्जियम को कॉर्नर मिला, लेकिन उसके खिलाड़ी कोई फायदा नहीं। - आत्मघाती गोल के बाद ब्राजील की टीम वापसी से प्रयास में जुटी। - मैच के तेरहवें मिनट में ब्राजील के खिलाड़ी फर्नांडिन्हो ने किया आत्मघाती गोल। बेल्जियम की टीम को मिली एक-शून्य की बढ़त। - शुरुआती दस मिनट का खेल खत्म होने के बाद ब्राजील और बेल्जियम की टीमें नहीं कर पाईं कोई गोल। - ब्राजील और बेल्जियम के बीच फीफा वर्ल्ड कप दो हज़ार अट्ठारह का दूसरा क्वार्टर फाइनल मैच शुरू। - फीफा वर्ल्ड कप दो हज़ार अट्ठारह के दूसरे क्वार्टर फाइनल से पहले ब्राजील और बेल्जियम की टीम राष्ट्रगान के लिए ग्राउंड पर पहुंचीं। - ब्राजील और बेल्जियम की टीमें इस मैच में पाँचवीं बार आमने-सामने हैं। इससे पहले हुए चार में से तीन मुकाबलों में ब्राजील और एक में बेल्जियम ने बाजी मारी है। दोनों टीमों ने एक-दूसरे के खिलाफ आखिरी बार दो हज़ार दो विश्व कप में मैच खेला था। तब ब्राजील ने दो-शून्य से जीत हासिल कर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई थी। विश्व कप में बेल्जियम का दक्षिण अमेरिकी टीमों के खिलाफ प्रदर्शन खराब रहा है। उसकी सात बार दक्षिण अमेरिकी टीमों से भिड़ंत हुई है, जिनमें से वह दो जीत पाई, चार हारी और एक ड्रॉ कराया। - ब्राजील के खिलाफ बेल्जियम के लिए जीत आसान नहीं होगा, क्योंकि बेल्जियम की टीम पिछले दो बड़े टूर्नामेंटों फीफा विश्व कप दो हज़ार चौदह और यूईएएफ यूरो दो हज़ार सोलह में क्वार्टर फाइनल से ही बाहर हुई है। - इस मैच में बेल्जियम की टीम पर बहुत ज्यादा दबाव होगा, क्योंकि साल दो हज़ार दो के विश्वकप में ब्राजील ने बेल्जियम को दो-शून्य से हराकर टूर्नामेंट से बाहर किया था। ऐसे में बेल्जियम की टीम ब्राजील से उस हार का बदला लेने के इरादे से उतरेगी। - सबसे ज्यादा पांच बार खिताब जीतने वाली ब्राजील की टीम अपने छठे खिताब की ओर एक और कदम बढ़ाने की कोशिश करेगी तो वहीं तीसरी बार सेमीफाइनल में पहुंचना चाहेगा। - ब्राजील और बेल्जियम के बीच यह मैच भारतीय समय के अनुसार रात ग्यारह. तीस बजे से कजान एरीना स्टेडियम में खेला जाएगा। - फीफा वर्ल्ड कप दो हज़ार अट्ठारह का दूसरे क्वार्टर फाइनल मुकाबले में ब्राजील की टीम का सामना बेल्जियम से हो रहा है। - गोलकीपर्सः एलिसन, एंडरसन, कैसियो। - डिफेंडर्सः डैनिलो, फैगनर, मार्सेलो, फिलिपे लुईस, थियागो सिल्वा, मारक्यून्हो, मिरांडा, पेडरो गेरोमल। - मिडफील्डरर्सः कैसेमिरो, फर्नांडिन्हो, पाउलिन्हो, फ्रेड, रेनाटो अगस्टो, फिलिपो काउटिन्हो, विलियम, डगलस कोस्टा। - फॉर्वर्ड्सः नेमार, तायसन, ग्रैबियल जीजस, रॉबर्टो फिरमिनो। |
लोकसभा चुनाव 2019 के लिए भारतीय जनता पार्टी ने ओडिशा लोकसभा और विधानसभा उम्मीदवारों की एक और लिस्ट जारी कर दी है। ओडिशा में लोकसभा की 3 सीटों पर उम्मीदवार और विधानसभा के लिए 11 उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा है।
लोकसभा चुनाव 2019 के लिए भारतीय जनता पार्टी ने ओडिशा लोकसभा और विधानसभा उम्मीदवारों की एक और लिस्ट जारी कर दी है।
ओडिशा में लोकसभा की 3 सीटों पर उम्मीदवार और विधानसभा के लिए 11 उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा है। पार्टी ने ओडिशा की लोकसभा सीट पर मयूरभंज से इश्वेश्वर टूडू, भंद्रक से अभिमन्यू सेठी और जजपुर से अमिया मलिक को चुनावी मैदान में उतारा है।
वहीं विधानसभा के लिए आनंदपुर से आलोक सेठी, रैरंगपुर से नाबा चरण मांझी, मोरादा से क्रोशना, नीलगिरी से सुकंतला नायक, अथामलिक से भागीरथी, बांकी से सुभरांशू शेखर, पतकारू से बिजया मोहपात्रा, पुरी से जयंता, भुवनेश्वर उत्तरी से अपराजीता को चुनावी मैदान में उतारा है।
| लोकसभा चुनाव दो हज़ार उन्नीस के लिए भारतीय जनता पार्टी ने ओडिशा लोकसभा और विधानसभा उम्मीदवारों की एक और लिस्ट जारी कर दी है। ओडिशा में लोकसभा की तीन सीटों पर उम्मीदवार और विधानसभा के लिए ग्यारह उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा है। लोकसभा चुनाव दो हज़ार उन्नीस के लिए भारतीय जनता पार्टी ने ओडिशा लोकसभा और विधानसभा उम्मीदवारों की एक और लिस्ट जारी कर दी है। ओडिशा में लोकसभा की तीन सीटों पर उम्मीदवार और विधानसभा के लिए ग्यारह उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा है। पार्टी ने ओडिशा की लोकसभा सीट पर मयूरभंज से इश्वेश्वर टूडू, भंद्रक से अभिमन्यू सेठी और जजपुर से अमिया मलिक को चुनावी मैदान में उतारा है। वहीं विधानसभा के लिए आनंदपुर से आलोक सेठी, रैरंगपुर से नाबा चरण मांझी, मोरादा से क्रोशना, नीलगिरी से सुकंतला नायक, अथामलिक से भागीरथी, बांकी से सुभरांशू शेखर, पतकारू से बिजया मोहपात्रा, पुरी से जयंता, भुवनेश्वर उत्तरी से अपराजीता को चुनावी मैदान में उतारा है। |
लेनिनग्राद क्षेत्र को ठंडा करके विशेषता हैजलवायु। इसलिए, रूस के प्रजनकों ने लेनिनग्राद क्षेत्र के लिए ऐसी सेब किस्मों को पार करके व्युत्पन्न किया, जो ठंढ प्रतिरोधी हैं, फल की तेज़ी से परिपक्वता, बीमारियों और कीटों के खिलाफ आत्म-सुरक्षा की क्षमता।
एक खूबसूरत मादा नाम "एलीता" के साथ ऐप्पल पेड़ भीइस क्षेत्र में बढ़ने के लिए उपयुक्त है। लेनिनग्राद क्षेत्र के लिए इस सेब किस्म से बड़े फलों की फसल विकास के पांचवें वर्ष के लिए एकत्र की जा सकती है। सेब हरे-पीले होते हैं, और जब परिपक्व होते हैं तो वे लाल रंग का टिंट प्राप्त करते हैं। स्वाद रसदार, मीठे-खट्टे, पीले मांस के साथ, जनवरी तक संग्रहीत है।
"एंटी", "सुखद", "तारांकन"। लेनिनग्राद क्षेत्र के लिए ये समान सेब किस्मों ने खुद को साबित कर दिया है। स्वादिष्ट खट्टे-मीठे फलों के साथ शीतकालीन पेड़ जो सड़ांध नहीं करते हैं और वसंत तक अच्छी तरह से संरक्षित होते हैं। रोगों का खुलासा नहीं किया जाता है और अच्छी फसल पैदा होती है।
लेनिनग्राद क्षेत्र के लिए सेब के पेड़ों की शरद ऋतु की किस्में - "ऑक्सिस" और "चुने गए"। सितंबर में गाए गए बड़े फलों के साथ मध्यम ऊंचाई के पेड़ और जनवरी तक संग्रहित।
वे विशेष रूप से इस क्षेत्र के बागानियों के लिए पार हो जाते हैं और सर्दियों के धीरज के लिए परीक्षण करते हैं और उत्तरी उद्यानों की आवश्यकताओं को पूरा करते हैं।
"Baltika"। सभी ठंढ प्रतिरोधी किस्मों में सबसे मजबूतउत्तर-पश्चिम के लिए सेब के पेड़। प्रजनन वृक्ष 5 साल तक पहुंचता है और फिर हर साल पैदा होता है। सितंबर तक पके हुए सेब, लेकिन कुछ महीनों में संग्रहित।
वसंत मिठाई सेब। पेड़ नियमित रूप से फलों की नियमित फसल के साथ सर्दी है, जो अप्रैल तक रखा जाता है। सेब एक नारंगी पट्टी, रसदार के साथ छोटे, गोल, हल्के, कभी-कभी पीले होते हैं।
सुगंधित सेब। घने ताज के साथ एक मजबूत पेड़, लंबा। फल बड़े पसलियों के साथ बड़े, oblong हैं। उन्हें अगस्त के अंत तक एकत्र किया जा सकता है।
"इज़ोरा" और "श्रम"। सेब के पेड़ की इन किस्मों में सबसे बड़ा फल होता है। एक रसदार पीले मांस के साथ हल्के पीले सेब सितंबर तक पके हुए होते हैं और मार्च के मध्य तक संग्रहीत होते हैं।
एक बिछाने सेब। उत्तर-पश्चिम के लिए एक उपयुक्त प्रकार का सेब का पेड़। इस क्षेत्र में, ठंडे क्षेत्र के बावजूद इसकी उच्च उपज मनाई जाती है। हरी छील की सतह पर बिंदुओं के साथ फल बड़े होते हैं। अन्य किस्मों से जुलाई तक काफी घने लुगदी और शेल्फ जीवन अलग-अलग होते हैं।
"लेनिनग्राद", "नेवा," लैविक की यादें। " सर्दी कठोरता और उपज के लिए पेड़ों के समान प्रकार।
| लेनिनग्राद क्षेत्र को ठंडा करके विशेषता हैजलवायु। इसलिए, रूस के प्रजनकों ने लेनिनग्राद क्षेत्र के लिए ऐसी सेब किस्मों को पार करके व्युत्पन्न किया, जो ठंढ प्रतिरोधी हैं, फल की तेज़ी से परिपक्वता, बीमारियों और कीटों के खिलाफ आत्म-सुरक्षा की क्षमता। एक खूबसूरत मादा नाम "एलीता" के साथ ऐप्पल पेड़ भीइस क्षेत्र में बढ़ने के लिए उपयुक्त है। लेनिनग्राद क्षेत्र के लिए इस सेब किस्म से बड़े फलों की फसल विकास के पांचवें वर्ष के लिए एकत्र की जा सकती है। सेब हरे-पीले होते हैं, और जब परिपक्व होते हैं तो वे लाल रंग का टिंट प्राप्त करते हैं। स्वाद रसदार, मीठे-खट्टे, पीले मांस के साथ, जनवरी तक संग्रहीत है। "एंटी", "सुखद", "तारांकन"। लेनिनग्राद क्षेत्र के लिए ये समान सेब किस्मों ने खुद को साबित कर दिया है। स्वादिष्ट खट्टे-मीठे फलों के साथ शीतकालीन पेड़ जो सड़ांध नहीं करते हैं और वसंत तक अच्छी तरह से संरक्षित होते हैं। रोगों का खुलासा नहीं किया जाता है और अच्छी फसल पैदा होती है। लेनिनग्राद क्षेत्र के लिए सेब के पेड़ों की शरद ऋतु की किस्में - "ऑक्सिस" और "चुने गए"। सितंबर में गाए गए बड़े फलों के साथ मध्यम ऊंचाई के पेड़ और जनवरी तक संग्रहित। वे विशेष रूप से इस क्षेत्र के बागानियों के लिए पार हो जाते हैं और सर्दियों के धीरज के लिए परीक्षण करते हैं और उत्तरी उद्यानों की आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। "Baltika"। सभी ठंढ प्रतिरोधी किस्मों में सबसे मजबूतउत्तर-पश्चिम के लिए सेब के पेड़। प्रजनन वृक्ष पाँच साल तक पहुंचता है और फिर हर साल पैदा होता है। सितंबर तक पके हुए सेब, लेकिन कुछ महीनों में संग्रहित। वसंत मिठाई सेब। पेड़ नियमित रूप से फलों की नियमित फसल के साथ सर्दी है, जो अप्रैल तक रखा जाता है। सेब एक नारंगी पट्टी, रसदार के साथ छोटे, गोल, हल्के, कभी-कभी पीले होते हैं। सुगंधित सेब। घने ताज के साथ एक मजबूत पेड़, लंबा। फल बड़े पसलियों के साथ बड़े, oblong हैं। उन्हें अगस्त के अंत तक एकत्र किया जा सकता है। "इज़ोरा" और "श्रम"। सेब के पेड़ की इन किस्मों में सबसे बड़ा फल होता है। एक रसदार पीले मांस के साथ हल्के पीले सेब सितंबर तक पके हुए होते हैं और मार्च के मध्य तक संग्रहीत होते हैं। एक बिछाने सेब। उत्तर-पश्चिम के लिए एक उपयुक्त प्रकार का सेब का पेड़। इस क्षेत्र में, ठंडे क्षेत्र के बावजूद इसकी उच्च उपज मनाई जाती है। हरी छील की सतह पर बिंदुओं के साथ फल बड़े होते हैं। अन्य किस्मों से जुलाई तक काफी घने लुगदी और शेल्फ जीवन अलग-अलग होते हैं। "लेनिनग्राद", "नेवा," लैविक की यादें। " सर्दी कठोरता और उपज के लिए पेड़ों के समान प्रकार। |
गरली-ब्लॉक खंड परागपुर के अंतर्गत गांव पूली के अशोक कुमार व सतपाल भाटिया ने कबाड़ के जुगाड़ से बनाकर तैयार की बैबी मिनी हल की शानदार सफलता के बाद अब मोटर साइकिल के इंजन से ही दो सीटर हवाई जहाज बनाने की खोज ढूंढ निकाली है। मसलन पेशे से वोल्वो बस चालक अशोक कुमार व गांव नक्की के मोटर मेकेनिंग सतपाल भाटिया का यह जुगाड़ से बना जहाज बहुत जल्द आसमान पर उड़ता नजर आएंगे । इनका दावा है कि यह जहाज कम ईंधन की खपत में कांगड़ा या शिमला तक उड़ान भर पाएगा , जबकि इस जहाज को लैंड करने के लिए ज्यादा बडे ट्रैक की जरूरत भी नहीं होगी। जी हां! इस दौरान उक्त दोनों द्वारा बजाज चेतक स्कूटर के इजन से तैयार किया गया 40 किलोग्राम वजनी बेबी मिनी हल इन दिनों जिला कांगड़ा के किसानो को मील का पत्थर साबित हुआ है बल्कि हिमाचल भर के किसान व प्रदेश सरकार ऐग्रीकल्चर विभाग भी इस अधुनिक मशीनी औजार को खरीदने की डिमांड करने लगे है। उक्त बेबी मिनी हल के खोजी अशोक कुमार व सतपाल भाटिया ने गरली में पत्रकारों को बताया कि कबाड़ से लिए गए बजाज चेतक स्कूटर इंजन व उसी के अन्य पुर्जों से तैयार किया गए इस बेबी मिनी हल की खासियत यह है कि यह एक लीटर पेट्रोल से एक कनाल भूमि की बिजाई कर सकता है । अशोक कुमार व सतपाल भाटिया ने कहा कि 16 हजार रुपए की लागत से बने इस आधुनिक जुगाड़ हल को नो प्रोफेट नो लोस पर ही किसानो को बेचा जा रहा है इन्होने कहा कि बिगत जून महीने की बात करे तो ऐसे 11 बेबी मिनी हल बनाकर हमीरपुर, कांगड़ा, गड, परागपुर व गांव पुली के किसानो को बेचे जा चुके हैं ।
| गरली-ब्लॉक खंड परागपुर के अंतर्गत गांव पूली के अशोक कुमार व सतपाल भाटिया ने कबाड़ के जुगाड़ से बनाकर तैयार की बैबी मिनी हल की शानदार सफलता के बाद अब मोटर साइकिल के इंजन से ही दो सीटर हवाई जहाज बनाने की खोज ढूंढ निकाली है। मसलन पेशे से वोल्वो बस चालक अशोक कुमार व गांव नक्की के मोटर मेकेनिंग सतपाल भाटिया का यह जुगाड़ से बना जहाज बहुत जल्द आसमान पर उड़ता नजर आएंगे । इनका दावा है कि यह जहाज कम ईंधन की खपत में कांगड़ा या शिमला तक उड़ान भर पाएगा , जबकि इस जहाज को लैंड करने के लिए ज्यादा बडे ट्रैक की जरूरत भी नहीं होगी। जी हां! इस दौरान उक्त दोनों द्वारा बजाज चेतक स्कूटर के इजन से तैयार किया गया चालीस किलोग्रामग्राम वजनी बेबी मिनी हल इन दिनों जिला कांगड़ा के किसानो को मील का पत्थर साबित हुआ है बल्कि हिमाचल भर के किसान व प्रदेश सरकार ऐग्रीकल्चर विभाग भी इस अधुनिक मशीनी औजार को खरीदने की डिमांड करने लगे है। उक्त बेबी मिनी हल के खोजी अशोक कुमार व सतपाल भाटिया ने गरली में पत्रकारों को बताया कि कबाड़ से लिए गए बजाज चेतक स्कूटर इंजन व उसी के अन्य पुर्जों से तैयार किया गए इस बेबी मिनी हल की खासियत यह है कि यह एक लीटर पेट्रोल से एक कनाल भूमि की बिजाई कर सकता है । अशोक कुमार व सतपाल भाटिया ने कहा कि सोलह हजार रुपए की लागत से बने इस आधुनिक जुगाड़ हल को नो प्रोफेट नो लोस पर ही किसानो को बेचा जा रहा है इन्होने कहा कि बिगत जून महीने की बात करे तो ऐसे ग्यारह बेबी मिनी हल बनाकर हमीरपुर, कांगड़ा, गड, परागपुर व गांव पुली के किसानो को बेचे जा चुके हैं । |
मथुरा के दो थानों के मालखाने में रखी 581 किलो चरस कहां गई... पुलिस ने कोर्ट में कहा- चूहे चट कर गए!
युवा दिलों में धड़कनें फिर लौटेगी Hero Karizma, जानें क्या है लॉन्च डेट?
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| मथुरा के दो थानों के मालखाने में रखी पाँच सौ इक्यासी किलो चरस कहां गई... पुलिस ने कोर्ट में कहा- चूहे चट कर गए! युवा दिलों में धड़कनें फिर लौटेगी Hero Karizma, जानें क्या है लॉन्च डेट? B. A. G Convergence Pvt. Ltd. दो हज़ार बाईस : All Rights Reserved. |
सबसे पहले, रूस में राज्य रक्षा आदेश के कार्यान्वयन की प्रगति की आधिकारिक जानकारी। इस तथ्य के बावजूद कि यह जानकारी एक महीने से अधिक समय पहले प्रकाशित हुई थी (अभी तक कोई नया डेटा नहीं है), हम रक्षा उद्यमों द्वारा राज्य से आदेशों के कार्यान्वयन के संदर्भ में प्रवृत्ति के बारे में निष्कर्ष निकाल सकते हैं।
GOZ द्वारा प्रदर्शन किए गए 4% की घोषणा के बाद पहले ही दिन के 40 के बाद, उप रक्षा मंत्री यूरी बोरिसोव ने सवाल उठाया कि देश में ऐसे उद्यम हैं जिनके बकाया में वृद्धि जारी है। उदाहरण के लिए, अमूर शिपबिल्डिंग प्लांट, जो पिछले साल, राज्य रक्षा आदेश के हिस्से के रूप में, 20380 परियोजना के दो शवों को सौंपने वाला था, लेकिन कुछ गलत हो गया . . . ऐसा लगता है कि नेतृत्व नया है, और वित्त पोषण कम नहीं हुआ है, और समय सीमा फिर से चले गए।
रिया नोवोस्ती यूरी बोरिसोव के एक बयान का हवाला दियाः
अब प्लांट में चार ठेके लागू किए जा रहे हैं। ये एक्सएनयूएमएक्स प्रोजेक्ट की कोरवेट हैं। पिछले साल दो शवों का वितरण किया जाना था। इसलिए, हम संयंत्र के नए प्रबंधन से निपटेंगे, क्योंकि वे स्थिति को ठीक करने की योजना बनाते हैं। हमें उम्मीद है कि इस साल पहली कार्वेट सौंप दी जाएगी। हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि बाकी के पूरा होने पर काम को कितनी अच्छी तरह और व्यवस्थित रूप से व्यवस्थित किया जाए। आदेशों का भविष्य इस पर निर्भर करता है। हम पहले ही इस बारे में बोल चुके हैं और इसे छिपाएंगे नहीं, अगर अमूर शिपबिल्डिंग प्लांट शेड्यूल में प्रवेश करता है, तो हम और ऑर्डर देंगे। हमारे पास अतिरिक्त आदेश देने की योजना है।
अर्थात्, रक्षा मंत्रालय एक अत्यंत स्पष्ट भाषा में बोलता हैः समय पर राज्य रक्षा आदेश की योजनाओं को पूरा करने और "टैरिफ" को पार किए बिना, उद्यम सैन्य उपकरणों के निर्माण के लिए आदेश प्राप्त करना जारी रखेगा। और यह पैसा है, और नौकरियों, और सामाजिक गारंटी, और करों के लिए क्षेत्रीय और नगरपालिका बजट। यदि टूटना जारी रहता है, तो इस तरह के उद्यम की प्रभावशीलता के बारे में सवाल का जवाब असमान होगा - दोनों उद्यम और उसके कार्यबल के लिए आने वाले सभी परिणामों के साथ, जो बंधक बन जाता है, इसे हल्के ढंग से रखने के लिए, उद्यम के प्रबंधन द्वारा हमेशा स्पष्ट कार्रवाई नहीं।
देश के रक्षा मंत्रालय के साथ एक अनुबंध के तहत उद्यम अक्सर अपने दायित्वों को पूरा करने में असमर्थ होने के कारणों में से एक क्या है? एंटरप्राइज़ प्रबंधकों द्वारा सबसे अधिक बार बताए गए कारणों में से एक यह दिखता हैः लेकिन आप क्या चाहते थे अगर रूस के खिलाफ प्रतिबंध लगाए गए थे और हम उन घटकों को खरीदने के अवसर से वंचित हैं जिन्हें हम विदेशी बाजार के कई खंडों में रुचि रखते हैं।
यह याद रखने योग्य है कि 2011 में, GOZ की बिक्री का प्रतिशत मुश्किल से 90% तक पहुंच गया। 2013 द्वारा, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की प्रक्रिया में व्यक्तिगत हस्तक्षेप के बाद, बार 93% तक बढ़ गया है। एक तरफ 90-93 प्रतिशत - एक बहुत। लेकिन दूसरी ओर, यह बताता है कि अगर बिना समय पर 7-10% GOZH को पूरा नहीं किया गया तो अरबों बजट फंडों को बिना किसी प्रतिबंध के हवा में निलंबित कर दिया गया।
इसी समय, उद्यमों की प्रबंधन प्रणाली ने सब कुछ और सभी के बारे में शिकायत की, जिसमें कहा गया कि अधिकांश कर्मचारी सेवानिवृत्त हो गए थे, अब मशीन टूल्स और अन्य उपकरणों के अत्यधिक पहनने, या राज्य से किसी भी अतिरिक्त सब्सिडी की अनुपस्थिति। इसी समय, उपर्युक्त प्रबंधन प्रणाली की रचना से एक दुर्लभ व्यक्ति ने खुद को अनुबंध निष्पादन योजनाओं की विफलता के मुख्य कारणों में से एक के रूप में उद्धृत किया। एक दुर्लभ "प्रभावी प्रबंधक" ने श्रमिकों के लिए प्रोत्साहन की एक प्रणाली के लिए, उन्हीं श्रमिकों और इंजीनियरिंग कर्मियों को प्रशिक्षित करने के लिए, उपकरण को अपग्रेड करने के लिए एक उद्यम द्वारा अर्जित उचित धनराशि का निर्देश दिया।
जब प्राथमिक और माध्यमिक व्यावसायिक शिक्षा के शैक्षणिक संस्थानों से GOZ प्रणाली में लगे उद्यमों के प्रबंधन के लिए प्रारंभिक पूछताछ प्राप्त की गई थी, ताकि छात्रों को व्यावहारिक काम करने का अवसर मिले, तो कई उद्यमों के "प्रभावी प्रबंधकों" का काफी प्रतिशत (और ये खाली शब्द नहीं हैं, लेकिन वास्तविकता लगभग पूरे सोवियत काल के बाद) ने अपने हाथों को लहराया। केवल एक ही तर्क हैः हमारी अपनी समस्याएँ पर्याप्त हैं, और यहाँ हम अभी भी "आपके" काम सिखा रहे हैं। कुछ साल पहले भी ऐसी ही कल्पना करना कठिन था, जैसे कि 30-35।
और सामान्य तौर पर, एक दिलचस्प फिल्म . . . समय पर व्यवधान के लिए एक तर्क के रूप में कर्मियों की कमी को कॉल करने के लिए इस तरह की प्रतिक्रिया के बाद यह कैसे संभव है? इस मामले में यह उद्यम कहां से आता है? और राज्य संरचनाएं केवल अपने हाथों को सिकोड़ते हुए कहती हैंः ठीक है, हम छात्रों को अभ्यास करने का अवसर प्रदान करने के लिए सिर्फ एक निजी व्यापारी को नहीं ले सकते हैं और उपकृत कर सकते हैं . . . लेकिन यह एक ही राज्य के रक्षा आदेश के साथ समस्याओं के वास्तविक कारणों में से एक हैः एक उद्यम राज्य के आदेश को पूरा करने का उपक्रम करता है, लेकिन यह राज्य के संबंधित हितों को ध्यान में नहीं रखता है - यहां तक कि योग्य श्रमिकों और इंजीनियरिंग कर्मियों के समान प्रशिक्षण के लिए भी; और राज्य भी खुद से पूछने के लिए तैयार नहीं है। जब तक, तब डिब्रीडिंग शुरू हो जाती है . . . जब निधियों का कुछ हिस्सा पहले से ही तय हो चुका होता है, तो यह स्पष्ट नहीं होता है कि कहां, और यह पाया जाना चाहिए और वापस लौटना चाहिए, लेकिन क्या आप इसे वापस करेंगे, जब कानून के अनुसार, "संपत्ति के जब्त होने के सवाल के साथ" सब कुछ इतना सरल नहीं है।
2013 वर्ष के लिए एक ही उद्यम की रिपोर्ट सेः उत्पादन श्रमिकों - 46, बर्खास्त किए गए उत्पादन श्रमिकों - 61। कुल स्वीकृत - 93, निकाल दिया - 103। प्रवृत्ति।
आज, यह कंपनी जानकारी प्राप्त करती है कि "आदेश हैं - कोई स्पेयर पार्ट्स नहीं हैं। " और फिर से एक ही तर्कः प्रतिबंधों, आपूर्तिकर्ताओं का नुकसान।
इस मामले में, हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि ऐसे उद्यमों का प्रबंधन, शुरू में आपूर्तिकर्ताओं की उपस्थिति के साथ समस्याओं के बारे में जानना, अभी भी रक्षा मंत्रालय के साथ कुछ कार्यों के निष्पादन के लिए कई अनुबंधों पर हस्ताक्षर करता है। ठीक है, कम से कम पहले इसे "वासिलिवेस्चीना" और "सेर्डीयुवोस्किना" के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता था, और अब किससे? . . और यह इतने सारे उद्यमों में है, एक तरह से या राज्य रक्षा आदेश के कार्यान्वयन के साथ जुड़ा हुआ है।
और फिर भी, हमें उम्मीद है कि हाल के वर्षों में पहली बार 2016 के अंत तक, राज्य रक्षा आदेश का कार्यान्वयन 100% होगा। इसके अलावा, हमारे देश में काफी कुछ उद्यम हैं, जिनके प्रबंधन को अपनी जिम्मेदारी का बोध है, और जो हर संभव प्रयास करने के लिए तैयार हैं ताकि उनकी प्रतिष्ठा का हनन न हो।
| सबसे पहले, रूस में राज्य रक्षा आदेश के कार्यान्वयन की प्रगति की आधिकारिक जानकारी। इस तथ्य के बावजूद कि यह जानकारी एक महीने से अधिक समय पहले प्रकाशित हुई थी , हम रक्षा उद्यमों द्वारा राज्य से आदेशों के कार्यान्वयन के संदर्भ में प्रवृत्ति के बारे में निष्कर्ष निकाल सकते हैं। GOZ द्वारा प्रदर्शन किए गए चार% की घोषणा के बाद पहले ही दिन के चालीस के बाद, उप रक्षा मंत्री यूरी बोरिसोव ने सवाल उठाया कि देश में ऐसे उद्यम हैं जिनके बकाया में वृद्धि जारी है। उदाहरण के लिए, अमूर शिपबिल्डिंग प्लांट, जो पिछले साल, राज्य रक्षा आदेश के हिस्से के रूप में, बीस हज़ार तीन सौ अस्सी परियोजना के दो शवों को सौंपने वाला था, लेकिन कुछ गलत हो गया . . . ऐसा लगता है कि नेतृत्व नया है, और वित्त पोषण कम नहीं हुआ है, और समय सीमा फिर से चले गए। रिया नोवोस्ती यूरी बोरिसोव के एक बयान का हवाला दियाः अब प्लांट में चार ठेके लागू किए जा रहे हैं। ये एक्सएनयूएमएक्स प्रोजेक्ट की कोरवेट हैं। पिछले साल दो शवों का वितरण किया जाना था। इसलिए, हम संयंत्र के नए प्रबंधन से निपटेंगे, क्योंकि वे स्थिति को ठीक करने की योजना बनाते हैं। हमें उम्मीद है कि इस साल पहली कार्वेट सौंप दी जाएगी। हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि बाकी के पूरा होने पर काम को कितनी अच्छी तरह और व्यवस्थित रूप से व्यवस्थित किया जाए। आदेशों का भविष्य इस पर निर्भर करता है। हम पहले ही इस बारे में बोल चुके हैं और इसे छिपाएंगे नहीं, अगर अमूर शिपबिल्डिंग प्लांट शेड्यूल में प्रवेश करता है, तो हम और ऑर्डर देंगे। हमारे पास अतिरिक्त आदेश देने की योजना है। अर्थात्, रक्षा मंत्रालय एक अत्यंत स्पष्ट भाषा में बोलता हैः समय पर राज्य रक्षा आदेश की योजनाओं को पूरा करने और "टैरिफ" को पार किए बिना, उद्यम सैन्य उपकरणों के निर्माण के लिए आदेश प्राप्त करना जारी रखेगा। और यह पैसा है, और नौकरियों, और सामाजिक गारंटी, और करों के लिए क्षेत्रीय और नगरपालिका बजट। यदि टूटना जारी रहता है, तो इस तरह के उद्यम की प्रभावशीलता के बारे में सवाल का जवाब असमान होगा - दोनों उद्यम और उसके कार्यबल के लिए आने वाले सभी परिणामों के साथ, जो बंधक बन जाता है, इसे हल्के ढंग से रखने के लिए, उद्यम के प्रबंधन द्वारा हमेशा स्पष्ट कार्रवाई नहीं। देश के रक्षा मंत्रालय के साथ एक अनुबंध के तहत उद्यम अक्सर अपने दायित्वों को पूरा करने में असमर्थ होने के कारणों में से एक क्या है? एंटरप्राइज़ प्रबंधकों द्वारा सबसे अधिक बार बताए गए कारणों में से एक यह दिखता हैः लेकिन आप क्या चाहते थे अगर रूस के खिलाफ प्रतिबंध लगाए गए थे और हम उन घटकों को खरीदने के अवसर से वंचित हैं जिन्हें हम विदेशी बाजार के कई खंडों में रुचि रखते हैं। यह याद रखने योग्य है कि दो हज़ार ग्यारह में, GOZ की बिक्री का प्रतिशत मुश्किल से नब्बे% तक पहुंच गया। दो हज़ार तेरह द्वारा, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की प्रक्रिया में व्यक्तिगत हस्तक्षेप के बाद, बार तिरानवे% तक बढ़ गया है। एक तरफ नब्बे-तिरानवे प्रतिशत - एक बहुत। लेकिन दूसरी ओर, यह बताता है कि अगर बिना समय पर सात-दस% GOZH को पूरा नहीं किया गया तो अरबों बजट फंडों को बिना किसी प्रतिबंध के हवा में निलंबित कर दिया गया। इसी समय, उद्यमों की प्रबंधन प्रणाली ने सब कुछ और सभी के बारे में शिकायत की, जिसमें कहा गया कि अधिकांश कर्मचारी सेवानिवृत्त हो गए थे, अब मशीन टूल्स और अन्य उपकरणों के अत्यधिक पहनने, या राज्य से किसी भी अतिरिक्त सब्सिडी की अनुपस्थिति। इसी समय, उपर्युक्त प्रबंधन प्रणाली की रचना से एक दुर्लभ व्यक्ति ने खुद को अनुबंध निष्पादन योजनाओं की विफलता के मुख्य कारणों में से एक के रूप में उद्धृत किया। एक दुर्लभ "प्रभावी प्रबंधक" ने श्रमिकों के लिए प्रोत्साहन की एक प्रणाली के लिए, उन्हीं श्रमिकों और इंजीनियरिंग कर्मियों को प्रशिक्षित करने के लिए, उपकरण को अपग्रेड करने के लिए एक उद्यम द्वारा अर्जित उचित धनराशि का निर्देश दिया। जब प्राथमिक और माध्यमिक व्यावसायिक शिक्षा के शैक्षणिक संस्थानों से GOZ प्रणाली में लगे उद्यमों के प्रबंधन के लिए प्रारंभिक पूछताछ प्राप्त की गई थी, ताकि छात्रों को व्यावहारिक काम करने का अवसर मिले, तो कई उद्यमों के "प्रभावी प्रबंधकों" का काफी प्रतिशत ने अपने हाथों को लहराया। केवल एक ही तर्क हैः हमारी अपनी समस्याएँ पर्याप्त हैं, और यहाँ हम अभी भी "आपके" काम सिखा रहे हैं। कुछ साल पहले भी ऐसी ही कल्पना करना कठिन था, जैसे कि तीस-पैंतीस। और सामान्य तौर पर, एक दिलचस्प फिल्म . . . समय पर व्यवधान के लिए एक तर्क के रूप में कर्मियों की कमी को कॉल करने के लिए इस तरह की प्रतिक्रिया के बाद यह कैसे संभव है? इस मामले में यह उद्यम कहां से आता है? और राज्य संरचनाएं केवल अपने हाथों को सिकोड़ते हुए कहती हैंः ठीक है, हम छात्रों को अभ्यास करने का अवसर प्रदान करने के लिए सिर्फ एक निजी व्यापारी को नहीं ले सकते हैं और उपकृत कर सकते हैं . . . लेकिन यह एक ही राज्य के रक्षा आदेश के साथ समस्याओं के वास्तविक कारणों में से एक हैः एक उद्यम राज्य के आदेश को पूरा करने का उपक्रम करता है, लेकिन यह राज्य के संबंधित हितों को ध्यान में नहीं रखता है - यहां तक कि योग्य श्रमिकों और इंजीनियरिंग कर्मियों के समान प्रशिक्षण के लिए भी; और राज्य भी खुद से पूछने के लिए तैयार नहीं है। जब तक, तब डिब्रीडिंग शुरू हो जाती है . . . जब निधियों का कुछ हिस्सा पहले से ही तय हो चुका होता है, तो यह स्पष्ट नहीं होता है कि कहां, और यह पाया जाना चाहिए और वापस लौटना चाहिए, लेकिन क्या आप इसे वापस करेंगे, जब कानून के अनुसार, "संपत्ति के जब्त होने के सवाल के साथ" सब कुछ इतना सरल नहीं है। दो हज़ार तेरह वर्ष के लिए एक ही उद्यम की रिपोर्ट सेः उत्पादन श्रमिकों - छियालीस, बर्खास्त किए गए उत्पादन श्रमिकों - इकसठ। कुल स्वीकृत - तिरानवे, निकाल दिया - एक सौ तीन। प्रवृत्ति। आज, यह कंपनी जानकारी प्राप्त करती है कि "आदेश हैं - कोई स्पेयर पार्ट्स नहीं हैं। " और फिर से एक ही तर्कः प्रतिबंधों, आपूर्तिकर्ताओं का नुकसान। इस मामले में, हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि ऐसे उद्यमों का प्रबंधन, शुरू में आपूर्तिकर्ताओं की उपस्थिति के साथ समस्याओं के बारे में जानना, अभी भी रक्षा मंत्रालय के साथ कुछ कार्यों के निष्पादन के लिए कई अनुबंधों पर हस्ताक्षर करता है। ठीक है, कम से कम पहले इसे "वासिलिवेस्चीना" और "सेर्डीयुवोस्किना" के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता था, और अब किससे? . . और यह इतने सारे उद्यमों में है, एक तरह से या राज्य रक्षा आदेश के कार्यान्वयन के साथ जुड़ा हुआ है। और फिर भी, हमें उम्मीद है कि हाल के वर्षों में पहली बार दो हज़ार सोलह के अंत तक, राज्य रक्षा आदेश का कार्यान्वयन एक सौ% होगा। इसके अलावा, हमारे देश में काफी कुछ उद्यम हैं, जिनके प्रबंधन को अपनी जिम्मेदारी का बोध है, और जो हर संभव प्रयास करने के लिए तैयार हैं ताकि उनकी प्रतिष्ठा का हनन न हो। |
एमपी में 42 दिन बाद कोरोना की पॉजिटिविटी रेट 11 फीसदी पहुंच गया है। इसके साथ ही रिकवरी रेट भी बढ़ा है। सीएम ने कहा कि अस्पतालों में अब बेड की कोई दिक्कत नहीं है। शिवराज ने कहा कि सरकार ब्लैक फंगस के मरीजों के इलाज की व्यवस्था सरकार कर रही है।
भोपाल एमपी के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को कहा कि ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में 'किल कोरोना' अभियान को मिल रहे जन-सहयोग से कोविड-19 संक्रमण की कड़ी तोड़ने में सफलता मिल रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में कोरोना वायरस से संक्रमण की दर जो 24 प्रतिशत तक पहुंच गई थी, वह घट कर आज 10. 68 प्रतिशत रह गई है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के कुछ जिलों में तो कोरोना वायरस से संक्रमण की दर पांच प्रतिशत से भी कम रह गई है। चौहान ने बताया कि रविवार को कोरोना वायरस से संक्रमित 7,106 नये मरीज मिले हैं। करीब 12,345 मरीज स्वस्थ्य हुए हैं। मरीजों के ठीक होने की दर आज 86. 10 प्रतिशत रही है।
कोरोना कर्फ्यू तोड़ने की सजा, एक हजार बार लिखो भगवान राम का नाम सीएम ने कहा कि इसके अलावा, कोविड-19 का इलाज करवा रहे या ठीक हुए कुछ व्यक्तियों में हो रहे दुर्लभ म्यूकरमाइकोसिस यानी 'ब्लैक फंगस' संक्रमण के उपचार के लिए कम से कम 24,000 एम्फोटेरिसिन बी-50 एमजी इंजेक्शन प्रदेश को आवंटित करने हेतु केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री से अनुरोध किया गया है।
छह महीने से नहीं मिला था वेतन, ड्यूटी पर तैनात सिपाही ने खुद को मारी गोली चौहान ने कहा कि प्रदेश के 52 जिलों में कुल 354 कोविड-19 मरीज देखभाल केंद्र प्रारंभ किए जा चुके हैं, जिनमें हल्के लक्षण वाले रोगियों को रखा जा रहा है। इनमें वर्तमान में कुल 21,988 बिस्तर हैं जिनमें से 3,240 बिस्तरों पर ऑक्सीजन की व्यवस्था की जा चुकी हैं। बिस्तरों की संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अब तक कुल 22,404 संस्थागत पृथक-वास केंद्र बनाए जा चुके हैं, जिसमें 2,69,309 से अधिक बिस्तर स्थापित किए गए हैं। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित सभी कोविड-19 मरीज देखभाल केंद्रों और संस्थागत पृथकवास केंद्रों में रहने वाले शतप्रतिशत मरीजों को मेडिकल किट और स्वास्थ्य निर्देशिका प्रदान किए जा रहे हैं।
चौहान ने बताया कि प्रदेश के 313 विकासखंडों में और 50,546 ग्रामों में संकट प्रबंधन समूहों का गठन किया जा चुका है। शहरी क्षेत्र में 407 स्थानीय निकायों और 7,568 वार्ड में वार्ड स्तरीय संकट प्रबंधन समिति का गठन किया जा चुका है। पोर्टल पर अपडेशन का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिलों में भाप केंद्रों की व्यवस्था भी की गई है और 46 जिलों में 2,158 भाप केंद्र क्रियाशील है।
| एमपी में बयालीस दिन बाद कोरोना की पॉजिटिविटी रेट ग्यारह फीसदी पहुंच गया है। इसके साथ ही रिकवरी रेट भी बढ़ा है। सीएम ने कहा कि अस्पतालों में अब बेड की कोई दिक्कत नहीं है। शिवराज ने कहा कि सरकार ब्लैक फंगस के मरीजों के इलाज की व्यवस्था सरकार कर रही है। भोपाल एमपी के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को कहा कि ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में 'किल कोरोना' अभियान को मिल रहे जन-सहयोग से कोविड-उन्नीस संक्रमण की कड़ी तोड़ने में सफलता मिल रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में कोरोना वायरस से संक्रमण की दर जो चौबीस प्रतिशत तक पहुंच गई थी, वह घट कर आज दस. अड़सठ प्रतिशत रह गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कुछ जिलों में तो कोरोना वायरस से संक्रमण की दर पांच प्रतिशत से भी कम रह गई है। चौहान ने बताया कि रविवार को कोरोना वायरस से संक्रमित सात,एक सौ छः नये मरीज मिले हैं। करीब बारह,तीन सौ पैंतालीस मरीज स्वस्थ्य हुए हैं। मरीजों के ठीक होने की दर आज छियासी. दस प्रतिशत रही है। कोरोना कर्फ्यू तोड़ने की सजा, एक हजार बार लिखो भगवान राम का नाम सीएम ने कहा कि इसके अलावा, कोविड-उन्नीस का इलाज करवा रहे या ठीक हुए कुछ व्यक्तियों में हो रहे दुर्लभ म्यूकरमाइकोसिस यानी 'ब्लैक फंगस' संक्रमण के उपचार के लिए कम से कम चौबीस,शून्य एम्फोटेरिसिन बी-पचास एमजी इंजेक्शन प्रदेश को आवंटित करने हेतु केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री से अनुरोध किया गया है। छह महीने से नहीं मिला था वेतन, ड्यूटी पर तैनात सिपाही ने खुद को मारी गोली चौहान ने कहा कि प्रदेश के बावन जिलों में कुल तीन सौ चौवन कोविड-उन्नीस मरीज देखभाल केंद्र प्रारंभ किए जा चुके हैं, जिनमें हल्के लक्षण वाले रोगियों को रखा जा रहा है। इनमें वर्तमान में कुल इक्कीस,नौ सौ अठासी बिस्तर हैं जिनमें से तीन,दो सौ चालीस बिस्तरों पर ऑक्सीजन की व्यवस्था की जा चुकी हैं। बिस्तरों की संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अब तक कुल बाईस,चार सौ चार संस्थागत पृथक-वास केंद्र बनाए जा चुके हैं, जिसमें दो,उनहत्तर,तीन सौ नौ से अधिक बिस्तर स्थापित किए गए हैं। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित सभी कोविड-उन्नीस मरीज देखभाल केंद्रों और संस्थागत पृथकवास केंद्रों में रहने वाले शतप्रतिशत मरीजों को मेडिकल किट और स्वास्थ्य निर्देशिका प्रदान किए जा रहे हैं। चौहान ने बताया कि प्रदेश के तीन सौ तेरह विकासखंडों में और पचास,पाँच सौ छियालीस ग्रामों में संकट प्रबंधन समूहों का गठन किया जा चुका है। शहरी क्षेत्र में चार सौ सात स्थानीय निकायों और सात,पाँच सौ अड़सठ वार्ड में वार्ड स्तरीय संकट प्रबंधन समिति का गठन किया जा चुका है। पोर्टल पर अपडेशन का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिलों में भाप केंद्रों की व्यवस्था भी की गई है और छियालीस जिलों में दो,एक सौ अट्ठावन भाप केंद्र क्रियाशील है। |
वीके सिंह का कहना है कि अगली एयर स्ट्राइक में विपक्षियों को हवाई जहाज के नीचे बांध कर ले जाएं ताकि वे एयर स्ट्राइक को अपनी आंखों से देख सकें।
पूर्व सेनाध्यक्ष और वर्तमान केंद्रीय मंत्री वीके सिंह ने एयर स्ट्राइक को लेकर विपक्ष पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि विपक्षियों को अगली बार हवाई जहाज के नीचे बांध कर ले जाएं ताकि वे एयर स्ट्राइक को अपनी आंखों से देख सकें। इससे पहले भी वीके सिंह विपक्ष को करारा जवाब दे चुके हैं।
यूनियन मिनिस्टर वीके सिंह ने कहा है कि "अगली बार जब भारत कुछ करे तो मुझे लगता है कि विपक्षी जो ये प्रश्न उठाते हैं, उनको हवाई जहाज के नीचे बांध कर ले जाएं। जब बम चले तो वहां से टारगेट देख लें, उसके बाद उनको वहां पर उतार दें। उसके बाद वो गिन लें और वापस आजाएं। "
वीके सिंह पहले भी विपक्ष को खरी-खोटी सुना चुके हैं। उन्होंने कहा था कि देश के लोग चाहते हैं कि आतंकवाद से मुकाबला करने के लिए भारत इजरायल का अनुसरण करे। लेकिन ऐसा विपक्ष के चलते नहीं हो सकता। उन्होंने यह भी कहा कि इजरायल का विपक्ष अपनी सेना पर संदेह नहीं करता और उसे अपमानित करने का प्रयास नहीं करता।
| वीके सिंह का कहना है कि अगली एयर स्ट्राइक में विपक्षियों को हवाई जहाज के नीचे बांध कर ले जाएं ताकि वे एयर स्ट्राइक को अपनी आंखों से देख सकें। पूर्व सेनाध्यक्ष और वर्तमान केंद्रीय मंत्री वीके सिंह ने एयर स्ट्राइक को लेकर विपक्ष पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि विपक्षियों को अगली बार हवाई जहाज के नीचे बांध कर ले जाएं ताकि वे एयर स्ट्राइक को अपनी आंखों से देख सकें। इससे पहले भी वीके सिंह विपक्ष को करारा जवाब दे चुके हैं। यूनियन मिनिस्टर वीके सिंह ने कहा है कि "अगली बार जब भारत कुछ करे तो मुझे लगता है कि विपक्षी जो ये प्रश्न उठाते हैं, उनको हवाई जहाज के नीचे बांध कर ले जाएं। जब बम चले तो वहां से टारगेट देख लें, उसके बाद उनको वहां पर उतार दें। उसके बाद वो गिन लें और वापस आजाएं। " वीके सिंह पहले भी विपक्ष को खरी-खोटी सुना चुके हैं। उन्होंने कहा था कि देश के लोग चाहते हैं कि आतंकवाद से मुकाबला करने के लिए भारत इजरायल का अनुसरण करे। लेकिन ऐसा विपक्ष के चलते नहीं हो सकता। उन्होंने यह भी कहा कि इजरायल का विपक्ष अपनी सेना पर संदेह नहीं करता और उसे अपमानित करने का प्रयास नहीं करता। |
अब्दुल्लाह चतला (1956 - 3 नम्वर 1996) तुर्की सरकार की खुफ़िया पुलिस के लिए काम करने वाला दण्डित अपराधी और छापा-मार लड़ाकों से लड़ने के लिए भाड़े का हत्यारा था। 1970 के दशक में वह ग्रे वुल्व्ज़ नामक संगठन का नेतृत्व करता था जो नैश्नलिस्ट मूवमेंट पार्टी की युवा शाखा थी। सुसुरलुक कार दुर्घटना में उसकी मौत जिसमें कई तुर्की के अधिकारी मारे गए थे यह दिखाती है कि संगठित अपराध से राज्य किस हद तक जुड़ा है। Martin A. Lee,, Le Monde diplomatique, March 1997 अब्दुल्लाह राज्य के लिए मुडभेड़ करने वाला बन चुका था जिसे कुर्दिस्तान वरकर्स पार्टी और आर्मीनियाई संघर्श दल असाला के संदिग्ध सद्स्यों को मार डालने के का आदेश प्राप्त था। .
1 संबंधः तुर्की।
तुर्की (तुर्क भाषाः Türkiye उच्चारणः तुर्किया) यूरेशिया में स्थित एक देश है। इसकी राजधानी अंकारा है। इसकी मुख्य- और राजभाषा तुर्की भाषा है। ये दुनिया का अकेला मुस्लिम बहुमत वाला देश है जो कि धर्मनिर्पेक्ष है। ये एक लोकतान्त्रिक गणराज्य है। इसके एशियाई हिस्से को अनातोलिया और यूरोपीय हिस्से को थ्रेस कहते हैं। स्थितिः 39 डिग्री उत्तरी अक्षांश तथा 36 डिग्री पूर्वी देशान्तर। इसका कुछ भाग यूरोप में तथा अधिकांश भाग एशिया में पड़ता है अतः इसे यूरोप एवं एशिया के बीच का 'पुल' कहा जाता है। इजीयन सागर (Aegean sea) के पतले जलखंड के बीच में आ जाने से इस पुल के दो भाग हो जाते हैं, जिन्हें साधारणतया यूरोपीय टर्की तथा एशियाई टर्की कहते हैं। टर्की के ये दोनों भाग बॉसपोरस के जलडमरूमध्य, मारमारा सागर तथा डारडनेल्ज द्वारा एक दूसरे से अलग होते हैं। टर्की गणतंत्र का कुल क्षेत्रफल 2,96,185 वर्ग मील है जिसमें यूरोपीय टर्की (पूर्वी थ्रैस) का क्षेत्रफल 9,068 वर्ग मील तथा एशियाई टर्की (ऐनाटोलिआ) का क्षेत्रफल 2,87,117 वर्ग मील है। इसके अंतर्गत 451 दलदली स्थल तथा 3,256 खारे पानी की झीलें हैं। पूर्व में रूस और ईरान, दक्षिण की ओर इराक, सीरिया तथा भूमध्यसागर, पश्चिम में ग्रीस और बुल्गारिया और उत्तर में कालासागर इसकी राजनीतिक सीमा निर्धारित करते हैं। यूरोपीय टर्की - त्रिभुजाकर प्रायद्वीपी प्रदेश है जिसका शीर्षक पूर्व में बॉसपोरस के मुहाने पर है। उसके उत्तर तथा दक्षिण दोनों ओर पर्वतश्रेणियाँ फैली हुई हैं। मध्य में निचला मैदान मिलता है जिसमें होकर मारीत्सा और इरजिन नदियाँ बहती हैं। इसी भाग से होकर इस्तैस्म्यूल का संबंध पश्चिमी देशों से है। एशियाई टर्की - इसको हम तीन प्राकृतिक भागों में विभाजित कर सकते हैंः 1.
| अब्दुल्लाह चतला तुर्की सरकार की खुफ़िया पुलिस के लिए काम करने वाला दण्डित अपराधी और छापा-मार लड़ाकों से लड़ने के लिए भाड़े का हत्यारा था। एक हज़ार नौ सौ सत्तर के दशक में वह ग्रे वुल्व्ज़ नामक संगठन का नेतृत्व करता था जो नैश्नलिस्ट मूवमेंट पार्टी की युवा शाखा थी। सुसुरलुक कार दुर्घटना में उसकी मौत जिसमें कई तुर्की के अधिकारी मारे गए थे यह दिखाती है कि संगठित अपराध से राज्य किस हद तक जुड़ा है। Martin A. Lee,, Le Monde diplomatique, March एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे अब्दुल्लाह राज्य के लिए मुडभेड़ करने वाला बन चुका था जिसे कुर्दिस्तान वरकर्स पार्टी और आर्मीनियाई संघर्श दल असाला के संदिग्ध सद्स्यों को मार डालने के का आदेश प्राप्त था। . एक संबंधः तुर्की। तुर्की यूरेशिया में स्थित एक देश है। इसकी राजधानी अंकारा है। इसकी मुख्य- और राजभाषा तुर्की भाषा है। ये दुनिया का अकेला मुस्लिम बहुमत वाला देश है जो कि धर्मनिर्पेक्ष है। ये एक लोकतान्त्रिक गणराज्य है। इसके एशियाई हिस्से को अनातोलिया और यूरोपीय हिस्से को थ्रेस कहते हैं। स्थितिः उनतालीस डिग्री उत्तरी अक्षांश तथा छत्तीस डिग्री पूर्वी देशान्तर। इसका कुछ भाग यूरोप में तथा अधिकांश भाग एशिया में पड़ता है अतः इसे यूरोप एवं एशिया के बीच का 'पुल' कहा जाता है। इजीयन सागर के पतले जलखंड के बीच में आ जाने से इस पुल के दो भाग हो जाते हैं, जिन्हें साधारणतया यूरोपीय टर्की तथा एशियाई टर्की कहते हैं। टर्की के ये दोनों भाग बॉसपोरस के जलडमरूमध्य, मारमारा सागर तथा डारडनेल्ज द्वारा एक दूसरे से अलग होते हैं। टर्की गणतंत्र का कुल क्षेत्रफल दो,छियानवे,एक सौ पचासी वर्ग मील है जिसमें यूरोपीय टर्की का क्षेत्रफल नौ,अड़सठ वर्ग मील तथा एशियाई टर्की का क्षेत्रफल दो,सत्तासी,एक सौ सत्रह वर्ग मील है। इसके अंतर्गत चार सौ इक्यावन दलदली स्थल तथा तीन,दो सौ छप्पन खारे पानी की झीलें हैं। पूर्व में रूस और ईरान, दक्षिण की ओर इराक, सीरिया तथा भूमध्यसागर, पश्चिम में ग्रीस और बुल्गारिया और उत्तर में कालासागर इसकी राजनीतिक सीमा निर्धारित करते हैं। यूरोपीय टर्की - त्रिभुजाकर प्रायद्वीपी प्रदेश है जिसका शीर्षक पूर्व में बॉसपोरस के मुहाने पर है। उसके उत्तर तथा दक्षिण दोनों ओर पर्वतश्रेणियाँ फैली हुई हैं। मध्य में निचला मैदान मिलता है जिसमें होकर मारीत्सा और इरजिन नदियाँ बहती हैं। इसी भाग से होकर इस्तैस्म्यूल का संबंध पश्चिमी देशों से है। एशियाई टर्की - इसको हम तीन प्राकृतिक भागों में विभाजित कर सकते हैंः एक. |
सबगुरु न्यूज. उदयपुर। उदयपुर संभाग के बांसवाड़ा स्थित गोविन्द गुरु जनजाति विश्वविद्यालय में इसी सत्र से एमबीए सहित विभिन्न नए पाठ्यक्रम शुरू होंगे।
विश्वविद्यालय की अकादमिक काउंसिल (विद्या परिषद) की शुक्रवार को हुई बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय किए गए। कुलपति प्रो. कैलाश सोडानी की अध्यक्षता में हुई बैठक में उन्होंने कहा कि इस अंचल के युवाओं को रोजगार की आवश्यकताओं को देखते हुए कम समय के ऐसे चुनिंदा पाठ्यक्रमों को प्रारंभ किया जा रहा है जिससे वे कॉलेज की पढ़ाई करते ही अपनी रुचि के अनुरूप रोजगार चयन कर आजीविका अर्जित कर सकें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की मंशा है कि इसी सत्र से अध्ययन-अध्यापन कार्य प्रारंभ हो इस दृष्टि से इन पाठ्यक्रमों के लिए 1 अगस्त से ही ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे।
-सत्र 2017-18 से दो वर्षीय एमबीए पाठ्यक्रम प्रारंभ करने का निर्णय किया गया। यह एमबीए पाठ्यक्रम हिन्दी एवं अंग्रेजी माध्यम में होगा। इसके प्रथम व तृतीय सेमेस्टर का शुल्क 22 हजार 500 होगा। इसी तरह, द्वितीय व चतुर्थ सेमेस्टर का शुल्क 17 हजार 500 रहेगा। इस पाठ्यक्रम में किसी भी संकाय से स्नातक उत्तीर्ण विद्यार्थी जिनके न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक हैं, प्रवेश ले सकेंगे।
-दो वर्षीय एमएससी योगा तथा एमएड पाठ्यक्रम महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के पाठ्यक्रम और शुल्क के अनुरूप संचालित किया जाएगा।
-विश्वविद्यालय के अधिकारिता में आने वाले बांसवाड़ा, डूंगरपुर व प्रतापगढ़ जिलों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए एमए एजुकेशन प्रारम्भ करते हुए मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय उदयपुर के पाठ्यक्रम और शुल्क को स्वीकार करने का अनुमोदन किया गया।
-पीजी डिप्लोमा इन ट्यूरिज्म एण्ड होटल मैनेजमेंट तथा डिप्लोमा इन जर्नलिज्म का संचालन किया जाएगा। हिन्दी एवं अंग्रेजी माध्यम के यह दोनों पाठ्यक्रम एक वर्षीय होंगे तथा दोनों ही मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय उदयपुर के पाठ्यक्रम को स्वीकार करते हुए संचालित होंगे।
-डिप्लोमा इन फार्मेसी दो वर्षीय पाठ्यक्रम मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय उदयपुर के पाठ्यक्रम के अनुरूप नेशनल फार्मेसी कॉन्सिल से अनुमति प्राप्त होने पर संचालित करने का निर्णय किया गया।
-तीन वर्षीय बैचलर ऑफ ट्यूरिज्म मैनेजमेंट (बीटीएम) पाठ्यक्रम मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय उदयपुर के पाठ्यक्रम के अनुरूप सम्बद्ध महाविद्यालयों में संचालित किया जाएगा।
-बैचलर इन होटल एण्ड ट्यूरिज्म मैनेजमेंट राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय जयपुर के पाठ्यक्रम अनुरूप संचालित करने का अनुमोदन किया गया।
-दो वर्षीय मास्टर ऑफ ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट (एमएचआरएम) तथा मास्टर ऑफ इंटरनेशनल बिजनेस (एमआईबी) को संचालित करने का निर्णय आगामी बैठक तक विचाराधीन रखा गया।
-बैठक में बीसीए का पाठ्यक्रम राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर तथा बीए, बीएड व बीएससी बीएड (इंटीग्रेटेड) का पाठ्यक्रम महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय अजमेर के समान रखने का भी अनुमोदन किया गया।
विश्वविद्यालय में गेस्ट फेकल्टी के लिए प्रति कालांश मानदेय 500 रुपए एवं प्रतिमाह 25000 अधिकतम की सीमा में रखने के साथ ही विशेष वार्ता के लिए विषय विशेषज्ञ को आमंत्रित कर यूजीसी के मापदण्डानुसार 90 मिनट के लिए 1500 रुपए भुगतान का निर्णय किया गया। विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित की जाने वाली सत्र 2017-18 की समस्त परीक्षाओं के प्रश्न पत्र निर्माण से मूल्यांकन और परिणाम तक का समस्त कार्य विश्वविद्यालय द्वारा ही करवाये जाने का निर्णय किया गया।
-बैठक में विश्वविद्यालय के कुलसचिव सोहनलाल कठात, उच्च शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि व कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. डी. के. जैन, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के प्रतिनिधि व सहायक निदेशक कमलेश शर्मा, मीरा कन्या महाविद्यालय की डॉ. गायत्री स्वर्णकार, सुखाड़िया विश्वविद्यालय के प्रबंध अध्ययन संकाय के चेयरमैन डॉ. अनिल कोठारी, सुखाड़िया विश्वविद्यालय पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष डॉ. कुंजन आचार्य, पेसिफिक विश्वविद्यालय की एसोसियेट प्रोफेसर डॉ. मधु मुर्डिया, बीवीबी शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के डॉ. गुलाबधर द्विवेदी आदि सदस्यों ने विचार व्यक्त किए। इस मौके पर विश्वविद्यालय के अकादमिक प्रभारी डॉ. सर्वजीत दुबे, डॉ. नरेन्द्र पानेरी, डॉ. राकेश डामोर आदि मौजूद थे।
| सबगुरु न्यूज. उदयपुर। उदयपुर संभाग के बांसवाड़ा स्थित गोविन्द गुरु जनजाति विश्वविद्यालय में इसी सत्र से एमबीए सहित विभिन्न नए पाठ्यक्रम शुरू होंगे। विश्वविद्यालय की अकादमिक काउंसिल की शुक्रवार को हुई बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय किए गए। कुलपति प्रो. कैलाश सोडानी की अध्यक्षता में हुई बैठक में उन्होंने कहा कि इस अंचल के युवाओं को रोजगार की आवश्यकताओं को देखते हुए कम समय के ऐसे चुनिंदा पाठ्यक्रमों को प्रारंभ किया जा रहा है जिससे वे कॉलेज की पढ़ाई करते ही अपनी रुचि के अनुरूप रोजगार चयन कर आजीविका अर्जित कर सकें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की मंशा है कि इसी सत्र से अध्ययन-अध्यापन कार्य प्रारंभ हो इस दृष्टि से इन पाठ्यक्रमों के लिए एक अगस्त से ही ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे। -सत्र दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह से दो वर्षीय एमबीए पाठ्यक्रम प्रारंभ करने का निर्णय किया गया। यह एमबीए पाठ्यक्रम हिन्दी एवं अंग्रेजी माध्यम में होगा। इसके प्रथम व तृतीय सेमेस्टर का शुल्क बाईस हजार पाँच सौ होगा। इसी तरह, द्वितीय व चतुर्थ सेमेस्टर का शुल्क सत्रह हजार पाँच सौ रहेगा। इस पाठ्यक्रम में किसी भी संकाय से स्नातक उत्तीर्ण विद्यार्थी जिनके न्यूनतम पचास प्रतिशत अंक हैं, प्रवेश ले सकेंगे। -दो वर्षीय एमएससी योगा तथा एमएड पाठ्यक्रम महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के पाठ्यक्रम और शुल्क के अनुरूप संचालित किया जाएगा। -विश्वविद्यालय के अधिकारिता में आने वाले बांसवाड़ा, डूंगरपुर व प्रतापगढ़ जिलों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए एमए एजुकेशन प्रारम्भ करते हुए मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय उदयपुर के पाठ्यक्रम और शुल्क को स्वीकार करने का अनुमोदन किया गया। -पीजी डिप्लोमा इन ट्यूरिज्म एण्ड होटल मैनेजमेंट तथा डिप्लोमा इन जर्नलिज्म का संचालन किया जाएगा। हिन्दी एवं अंग्रेजी माध्यम के यह दोनों पाठ्यक्रम एक वर्षीय होंगे तथा दोनों ही मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय उदयपुर के पाठ्यक्रम को स्वीकार करते हुए संचालित होंगे। -डिप्लोमा इन फार्मेसी दो वर्षीय पाठ्यक्रम मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय उदयपुर के पाठ्यक्रम के अनुरूप नेशनल फार्मेसी कॉन्सिल से अनुमति प्राप्त होने पर संचालित करने का निर्णय किया गया। -तीन वर्षीय बैचलर ऑफ ट्यूरिज्म मैनेजमेंट पाठ्यक्रम मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय उदयपुर के पाठ्यक्रम के अनुरूप सम्बद्ध महाविद्यालयों में संचालित किया जाएगा। -बैचलर इन होटल एण्ड ट्यूरिज्म मैनेजमेंट राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय जयपुर के पाठ्यक्रम अनुरूप संचालित करने का अनुमोदन किया गया। -दो वर्षीय मास्टर ऑफ ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट तथा मास्टर ऑफ इंटरनेशनल बिजनेस को संचालित करने का निर्णय आगामी बैठक तक विचाराधीन रखा गया। -बैठक में बीसीए का पाठ्यक्रम राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर तथा बीए, बीएड व बीएससी बीएड का पाठ्यक्रम महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय अजमेर के समान रखने का भी अनुमोदन किया गया। विश्वविद्यालय में गेस्ट फेकल्टी के लिए प्रति कालांश मानदेय पाँच सौ रुपयापए एवं प्रतिमाह पच्चीस हज़ार अधिकतम की सीमा में रखने के साथ ही विशेष वार्ता के लिए विषय विशेषज्ञ को आमंत्रित कर यूजीसी के मापदण्डानुसार नब्बे मिनट के लिए एक हज़ार पाँच सौ रुपयापए भुगतान का निर्णय किया गया। विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित की जाने वाली सत्र दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह की समस्त परीक्षाओं के प्रश्न पत्र निर्माण से मूल्यांकन और परिणाम तक का समस्त कार्य विश्वविद्यालय द्वारा ही करवाये जाने का निर्णय किया गया। -बैठक में विश्वविद्यालय के कुलसचिव सोहनलाल कठात, उच्च शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि व कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. डी. के. जैन, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के प्रतिनिधि व सहायक निदेशक कमलेश शर्मा, मीरा कन्या महाविद्यालय की डॉ. गायत्री स्वर्णकार, सुखाड़िया विश्वविद्यालय के प्रबंध अध्ययन संकाय के चेयरमैन डॉ. अनिल कोठारी, सुखाड़िया विश्वविद्यालय पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष डॉ. कुंजन आचार्य, पेसिफिक विश्वविद्यालय की एसोसियेट प्रोफेसर डॉ. मधु मुर्डिया, बीवीबी शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के डॉ. गुलाबधर द्विवेदी आदि सदस्यों ने विचार व्यक्त किए। इस मौके पर विश्वविद्यालय के अकादमिक प्रभारी डॉ. सर्वजीत दुबे, डॉ. नरेन्द्र पानेरी, डॉ. राकेश डामोर आदि मौजूद थे। |
Topchachi : तोपचांची (Topchachi) तोपचांची प्रखंड के दो पंचायत में शनिवार 22 अक्टूबर को आपकी योजना आपकी सरकार आपके द्वार का शिविर लगाया गया. हरिहरपुर एवं प्रधानखंता पंचायत के शिविर में ग्रामीणों का हुजूम उमड़ पड़ा. दोनों ही पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास योजना, मनरेगा, 15वीं वित्त आयोग, भू राजस्व विभाग, स्वास्थ्य विभाग, कल्याण विभाग, कृषि विभाग, समाजिक सुरक्षा पेंशन, बिजली विभाग, शिक्षा विभाग, जेएसएलपीस, आपुर्ति विभाग, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, वन विभाग, समाज कल्याण विभाग, पशुपालन विभाग आदि का कांउटर लगाया गया.
हरिहरपुर पंचायत में शिविर का उद्घाटन डीआरडीओ डायरेक्टर मोहम्मद मुमताज अली, तोपचांची प्रमुख आनंद महतो, विधायक प्रतिनिधि जगदीश चौधरी, हरिहरपुर मुखिया ने संयुक्त रूप से दीप जला कर किया. प्रधानखंता पंचायत में प्रखंड विकास पदाधिकारी राजेश एक्का, मुखिया सरीता देवी ने दीप प्रज्ज्वलित किया. कार्यक्रम शुभारंभ के बाद लाभुकों के बीच परिसंपत्तियों का वितरण किया गया. इस दौरान दोनों ही पंचायतों में ग्रामीणों का हुजूम उमड़ पड़ा. आवासव पेंशन से संबंधित ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए.
| Topchachi : तोपचांची तोपचांची प्रखंड के दो पंचायत में शनिवार बाईस अक्टूबर को आपकी योजना आपकी सरकार आपके द्वार का शिविर लगाया गया. हरिहरपुर एवं प्रधानखंता पंचायत के शिविर में ग्रामीणों का हुजूम उमड़ पड़ा. दोनों ही पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास योजना, मनरेगा, पंद्रहवीं वित्त आयोग, भू राजस्व विभाग, स्वास्थ्य विभाग, कल्याण विभाग, कृषि विभाग, समाजिक सुरक्षा पेंशन, बिजली विभाग, शिक्षा विभाग, जेएसएलपीस, आपुर्ति विभाग, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, वन विभाग, समाज कल्याण विभाग, पशुपालन विभाग आदि का कांउटर लगाया गया. हरिहरपुर पंचायत में शिविर का उद्घाटन डीआरडीओ डायरेक्टर मोहम्मद मुमताज अली, तोपचांची प्रमुख आनंद महतो, विधायक प्रतिनिधि जगदीश चौधरी, हरिहरपुर मुखिया ने संयुक्त रूप से दीप जला कर किया. प्रधानखंता पंचायत में प्रखंड विकास पदाधिकारी राजेश एक्का, मुखिया सरीता देवी ने दीप प्रज्ज्वलित किया. कार्यक्रम शुभारंभ के बाद लाभुकों के बीच परिसंपत्तियों का वितरण किया गया. इस दौरान दोनों ही पंचायतों में ग्रामीणों का हुजूम उमड़ पड़ा. आवासव पेंशन से संबंधित ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए. |
आईपीएल 2023 का 16वां सीजन चल रहा है। हाल में पंजाब और राजस्थान के बीच मुकाबला हुआ।
मैच में राजस्थान को हार का सामना करना पड़ा। वहीं स्पिनर युजवेंद्र चहल ने अपनी गेंदबाजी से इतिहास रच दिया।
चहल पंजाब के खिलाफ 4 ओवर की गेंदबाजी की और 50 रन देकर 1 विकेट लेने में सफल रहे।
1 विकेट लेते ही चहल ने लसिथ मलिंगा का रिकॉर्ड तोड़ डाला।
मलिंगा ने आईपीएल में कुल 170 विकेट अपने करियर में लिए थे।
वही, अब चहल के नाम आईपीएल में 171 विकेट दर्ज हो गए हैं।
इस लिस्ट में पहले नंबर पर ड्वेन ब्रावो आते हैं, जिन्होंने आईपीएल में कुल 183 विकेट चटकाए हैं।
| आईपीएल दो हज़ार तेईस का सोलहवां सीजन चल रहा है। हाल में पंजाब और राजस्थान के बीच मुकाबला हुआ। मैच में राजस्थान को हार का सामना करना पड़ा। वहीं स्पिनर युजवेंद्र चहल ने अपनी गेंदबाजी से इतिहास रच दिया। चहल पंजाब के खिलाफ चार ओवर की गेंदबाजी की और पचास रन देकर एक विकेट लेने में सफल रहे। एक विकेट लेते ही चहल ने लसिथ मलिंगा का रिकॉर्ड तोड़ डाला। मलिंगा ने आईपीएल में कुल एक सौ सत्तर विकेट अपने करियर में लिए थे। वही, अब चहल के नाम आईपीएल में एक सौ इकहत्तर विकेट दर्ज हो गए हैं। इस लिस्ट में पहले नंबर पर ड्वेन ब्रावो आते हैं, जिन्होंने आईपीएल में कुल एक सौ तिरासी विकेट चटकाए हैं। |
लखनऊ। प्रदेश सरकार ने नाबार्ड वित्त पोषित आरआईडीएफ योजना के अन्तर्गत स्वीकृत विभिन्न जनपदों के कुल 48 पुलों के चालू कार्यों के लिए 83. 31 करोड़ की धनराशि जारी कर दी है। इस सम्बन्ध में शासनादेश जारी कर दिया है।
शासनादेश में प्रमुख अभियन्ता (विकास) एवं विभागाध्यक्ष, लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिये गये हैं कि यह धनराशि केवल निर्धारित परियोजनाओं पर ही मानक एवं विशिष्टियों के अनुरूप खर्च की जाए। इसका उपयोग अन्य किसी प्रयोजन के लिये नहीं किया जायेगा। यह भी निर्देश दिये गये हैं कि नाबार्ड योजना के अन्तर्गत निर्माणाधीन सेतुओं की गुणवत्ता, निर्माण की प्रगति की नियमित समीक्षा कर निर्धारित समयान्तर्गत पूर्ण किया जाय तथा समीक्षा रिपोर्ट नियमित रूप से उपलब्ध करायी जाय।
इन 48 पुलों के सेतु अंश, लोक निर्माण अंश में जारी धनराशि के सापेक्ष अलग-अलग वित्तीय प्रगति सहित वास्तविक भौतिक प्रगति तथा उपयोगिता प्रमाण पत्र एवं उनके स्थलीय फोटोग्राफ शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिये गये हैं।
इन निर्माणाधीन पुलों में बरेली, सिद्धार्थनगर, कानपुर देहात, मुजफ्फरनगर, अमेठी, अयोध्या, मैनपुरी, अलीगढ़, अमरोहा, मुरादाबाद, उन्नाव, हाथरस, औरैया,कानपुर नगर, महाराजगंज व श्रावस्ती में एक-एक तथा बस्ती, प्रतापगढ़, शामली, अम्बेडकर नगर, बहराइच, सहारनपुर, बिजनौर, बलिया व लखीमपुर खीरी में दो-दो, बाराबंकी में तीन, बिजनौर में चार और देवरिया में सात हैं।
| लखनऊ। प्रदेश सरकार ने नाबार्ड वित्त पोषित आरआईडीएफ योजना के अन्तर्गत स्वीकृत विभिन्न जनपदों के कुल अड़तालीस पुलों के चालू कार्यों के लिए तिरासी. इकतीस करोड़ की धनराशि जारी कर दी है। इस सम्बन्ध में शासनादेश जारी कर दिया है। शासनादेश में प्रमुख अभियन्ता एवं विभागाध्यक्ष, लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिये गये हैं कि यह धनराशि केवल निर्धारित परियोजनाओं पर ही मानक एवं विशिष्टियों के अनुरूप खर्च की जाए। इसका उपयोग अन्य किसी प्रयोजन के लिये नहीं किया जायेगा। यह भी निर्देश दिये गये हैं कि नाबार्ड योजना के अन्तर्गत निर्माणाधीन सेतुओं की गुणवत्ता, निर्माण की प्रगति की नियमित समीक्षा कर निर्धारित समयान्तर्गत पूर्ण किया जाय तथा समीक्षा रिपोर्ट नियमित रूप से उपलब्ध करायी जाय। इन अड़तालीस पुलों के सेतु अंश, लोक निर्माण अंश में जारी धनराशि के सापेक्ष अलग-अलग वित्तीय प्रगति सहित वास्तविक भौतिक प्रगति तथा उपयोगिता प्रमाण पत्र एवं उनके स्थलीय फोटोग्राफ शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिये गये हैं। इन निर्माणाधीन पुलों में बरेली, सिद्धार्थनगर, कानपुर देहात, मुजफ्फरनगर, अमेठी, अयोध्या, मैनपुरी, अलीगढ़, अमरोहा, मुरादाबाद, उन्नाव, हाथरस, औरैया,कानपुर नगर, महाराजगंज व श्रावस्ती में एक-एक तथा बस्ती, प्रतापगढ़, शामली, अम्बेडकर नगर, बहराइच, सहारनपुर, बिजनौर, बलिया व लखीमपुर खीरी में दो-दो, बाराबंकी में तीन, बिजनौर में चार और देवरिया में सात हैं। |
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