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बोर्डर रोड विंग्स, बोर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) ने 4 दिसंबर 2021 से 10 दिसंबर के रोजगार समाचार पत्र में मल्टी स्किल्ड वर्कर (पेंटर), मल्टी स्किल्ड वर्कर (वेटर), व्हीकल मैकेनिक और ड्राइवर मेकेनिक के पदों पर भर्ती के लिए एक शॉर्ट नोटिस जारी किया है. BRO Recruitment 2021 Notification: बोर्डर रोड विंग्स, बोर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) ने 4 दिसंबर 2021 से 10 दिसंबर के रोजगार समाचार पत्र में मल्टी स्किल्ड वर्कर (पेंटर), मल्टी स्किल्ड वर्कर (वेटर), व्हीकल मैकेनिक और ड्राइवर मेकेनिक के पदों पर भर्ती के लिए एक शॉर्ट नोटिस जारी किया है. कुल 354 रिक्तियां अधिसूचित की गई हैं, जिनमें से 293 व्हीकल मैकेनिक के लिए, 45 एमटीएस के लिए और 16 ड्राईवर पदों के लिए हैं. बोर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) के ऑफिशियल वेबसाइट bro. gov. in पर विज्ञापन संख्या 02/2021 के खिलाफ सामान्य रिजर्व इंजीनियर फोर्स (बीएसएफ) में रिक्त उक्त पदों के लिए पुरुष उम्मीदवारों के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे, इच्छुक उम्मीदवार अधिसूचना जारी होने के बाद महत्वपूर्ण तिथि, योग्यता, आयु सीमा, चयन प्रक्रिया, आवेदन प्रक्रिया और अन्य विवरण देख सकते हैं. अधिसूचना विवरणः महत्वपूर्ण तिथियाँः आवेदन की अंतिम तिथि - जल्द ही जारी किया जाएगा. BRO रिक्ति विवरण : मल्टी-स्किल्ड वर्कर (वेटर) ड्राईवर मेकेनिकल ट्रांसपोर्ट (OG) BRO एमटीएस, व्हीकल मैकेनिक और ड्राईवर पदों के लिए पात्रता मानदंडः शैक्षणिक और अन्य योग्यताएंः उम्मीदवार नीचे दिए गए पीडीएफ के माध्यम से विवरण की जांच कर सकते हैं. BRO भर्ती 2021 के लिए आवेदन कैसे करें? नोटिफिकेशन जारी होने के बाद उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं. - typesetting industry. Lorem Ipsum the ting and typesetting ver since the 1500s, printing and industry. when an uand scrambled printing it to make a type specimen book. but also the leap typesetting industry. - text of the Lorem Ipsum the ting and typesetting ver since the 1500s, printing and industry. when an uand scrambled printing it to make a type specimen book. but also the leap typesetting industry. - mply dummy text of the typesetting industry. Lorem Ipsum the ting and typesetting ver since the 1500s, printing and industry. when an uand scrambled printing but also the leap typesetting industry.
बोर्डर रोड विंग्स, बोर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन ने चार दिसंबर दो हज़ार इक्कीस से दस दिसंबर के रोजगार समाचार पत्र में मल्टी स्किल्ड वर्कर , मल्टी स्किल्ड वर्कर , व्हीकल मैकेनिक और ड्राइवर मेकेनिक के पदों पर भर्ती के लिए एक शॉर्ट नोटिस जारी किया है. BRO Recruitment दो हज़ार इक्कीस Notification: बोर्डर रोड विंग्स, बोर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन ने चार दिसंबर दो हज़ार इक्कीस से दस दिसंबर के रोजगार समाचार पत्र में मल्टी स्किल्ड वर्कर , मल्टी स्किल्ड वर्कर , व्हीकल मैकेनिक और ड्राइवर मेकेनिक के पदों पर भर्ती के लिए एक शॉर्ट नोटिस जारी किया है. कुल तीन सौ चौवन रिक्तियां अधिसूचित की गई हैं, जिनमें से दो सौ तिरानवे व्हीकल मैकेनिक के लिए, पैंतालीस एमटीएस के लिए और सोलह ड्राईवर पदों के लिए हैं. बोर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन के ऑफिशियल वेबसाइट bro. gov. in पर विज्ञापन संख्या दो/दो हज़ार इक्कीस के खिलाफ सामान्य रिजर्व इंजीनियर फोर्स में रिक्त उक्त पदों के लिए पुरुष उम्मीदवारों के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे, इच्छुक उम्मीदवार अधिसूचना जारी होने के बाद महत्वपूर्ण तिथि, योग्यता, आयु सीमा, चयन प्रक्रिया, आवेदन प्रक्रिया और अन्य विवरण देख सकते हैं. अधिसूचना विवरणः महत्वपूर्ण तिथियाँः आवेदन की अंतिम तिथि - जल्द ही जारी किया जाएगा. BRO रिक्ति विवरण : मल्टी-स्किल्ड वर्कर ड्राईवर मेकेनिकल ट्रांसपोर्ट BRO एमटीएस, व्हीकल मैकेनिक और ड्राईवर पदों के लिए पात्रता मानदंडः शैक्षणिक और अन्य योग्यताएंः उम्मीदवार नीचे दिए गए पीडीएफ के माध्यम से विवरण की जांच कर सकते हैं. BRO भर्ती दो हज़ार इक्कीस के लिए आवेदन कैसे करें? नोटिफिकेशन जारी होने के बाद उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं. - typesetting industry. Lorem Ipsum the ting and typesetting ver since the एक हज़ार पाँच सौ सेकंड, printing and industry. when an uand scrambled printing it to make a type specimen book. but also the leap typesetting industry. - text of the Lorem Ipsum the ting and typesetting ver since the एक हज़ार पाँच सौ सेकंड, printing and industry. when an uand scrambled printing it to make a type specimen book. but also the leap typesetting industry. - mply dummy text of the typesetting industry. Lorem Ipsum the ting and typesetting ver since the एक हज़ार पाँच सौ सेकंड, printing and industry. when an uand scrambled printing but also the leap typesetting industry.
असम के सीएम हिमंत विश्व शर्मा ने रविवार को बोला कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) जल्द ही राष्ट्र में लागू की जाएगी और बहुविवाह प्रथा खत्म हो जाएगी. वह बीजेपी (भाजपा) की तेलंगाना इकाई के अध्यक्ष एवं लोकसभा सदस्य बी। संजय कुमार द्वारा करीमनगर में आयोजित हिंदू एकता यात्रा को संबोधित कर रहे थे. असम के सीएम ने हाल में बोला था कि राज्य गवर्नमेंट ने बहुविवाह प्रथा खत्म करने के लिए कानून लागू करने के वास्ते राज्य विधानसभा की विधायी शक्ति की पड़ताल के लिए चार सदस्यीय एक जानकार समिति गठित की है. तेलंगाना के सीएम के। चंद्रशेखर राव का नाम लिए बगैर शर्मा ने बोला कि तेलंगाना में राजा के शासन की स्थान राम राज्य आने वाला है. उन्होंने बोला कि 'राजा' के पास पांच महीने ही बचे हैं. तेलंगाना में इस वर्ष के अंत में विधानसभा चुनाव होना है. शर्मा ने बोला कि तेलंगाना गवर्नमेंट बार-बार बंडी संजय कुमार को अरैस्ट करती है और वह बाहर आ जाते हैं तथा गवर्नमेंट उन्हें कारागार में रखने में सफल नहीं होगी. शर्मा लोगों से द केरल स्टोरी फिल्म देखने की अपील की. ऑल इण्डिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी पर निशाना साधते हुए शर्मा ने बोला कि नया हिंदुस्तान उनसे नहीं डरता. अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के बारे में उन्होंने बोला कि 10 वर्ष पहले किसी ने इसके बारे में सोचा तक नहीं था और अब यह एक वास्तविकता बन गया है. उन्होंने बोला कि इसी तरह पहले जम्मू और कश्मीर से संविधान के अनुच्छेद-370 को खारिज करने के बारे में किसी ने सोचा नहीं था, लेकिन ऐसा हुआ.
असम के सीएम हिमंत विश्व शर्मा ने रविवार को बोला कि समान नागरिक संहिता जल्द ही राष्ट्र में लागू की जाएगी और बहुविवाह प्रथा खत्म हो जाएगी. वह बीजेपी की तेलंगाना इकाई के अध्यक्ष एवं लोकसभा सदस्य बी। संजय कुमार द्वारा करीमनगर में आयोजित हिंदू एकता यात्रा को संबोधित कर रहे थे. असम के सीएम ने हाल में बोला था कि राज्य गवर्नमेंट ने बहुविवाह प्रथा खत्म करने के लिए कानून लागू करने के वास्ते राज्य विधानसभा की विधायी शक्ति की पड़ताल के लिए चार सदस्यीय एक जानकार समिति गठित की है. तेलंगाना के सीएम के। चंद्रशेखर राव का नाम लिए बगैर शर्मा ने बोला कि तेलंगाना में राजा के शासन की स्थान राम राज्य आने वाला है. उन्होंने बोला कि 'राजा' के पास पांच महीने ही बचे हैं. तेलंगाना में इस वर्ष के अंत में विधानसभा चुनाव होना है. शर्मा ने बोला कि तेलंगाना गवर्नमेंट बार-बार बंडी संजय कुमार को अरैस्ट करती है और वह बाहर आ जाते हैं तथा गवर्नमेंट उन्हें कारागार में रखने में सफल नहीं होगी. शर्मा लोगों से द केरल स्टोरी फिल्म देखने की अपील की. ऑल इण्डिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी पर निशाना साधते हुए शर्मा ने बोला कि नया हिंदुस्तान उनसे नहीं डरता. अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के बारे में उन्होंने बोला कि दस वर्ष पहले किसी ने इसके बारे में सोचा तक नहीं था और अब यह एक वास्तविकता बन गया है. उन्होंने बोला कि इसी तरह पहले जम्मू और कश्मीर से संविधान के अनुच्छेद-तीन सौ सत्तर को खारिज करने के बारे में किसी ने सोचा नहीं था, लेकिन ऐसा हुआ.
तनहुँ, १९ आश्वीन । नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रामचन्द्र पौडेल, प्रतिनिधिसभा चुनाव में अपने ही गृह जिला में टिकट के लिए सर्वसम्मत होने में असमर्थ हुए हैं । सामान्यतः शीर्ष नेता को टिकट के लिए सर्वसम्मत सिफारिस किया जाता है । लेकिन पौडेल को सर्वसम्मत सिफारिस नहीं किया गया है । इसका मतलव है- पौडेल टिकट पाने से बञ्चित भी हो सकते हैं । पार्टी पूर्व उप-सभापति पौडेल तनहुँ क्षेत्र नम्बर १ से चुनावी प्रतिस्पर्धा की तैयारी कर रहे हैं । तनहूं जिला पौडेल का गृह जिला भी है । लेकिन पौडेल को वहां से सर्वसम्मत सिफारिस नहीं किया गया है । समाचार स्रोत का कहना है कि इसमें कांग्रेस नेता गोविन्दराज जोशी का हाथ है । पूर्व सह-महामन्त्री तथा नेता जोशी ने कहा है कि अगर उनको टिकट नहीं मिलेगा तो तनहुँ में 'पौडेल कम्पनी' ध्वस्त किया जाएगा । स्मरणीय है- तनहुं कांग्रेस ने बुधबार क्षेत्र नं. १ से पौडेल सहित केन्द्रीय सदस्य शंखर भण्डारी, गोविन्द भट्टराई, गोविन्दराज जोशी और महिला संघ-सदस्य शशी आचार्य का नाम सिफारिस किया है । इन्ही नामों में से एक व्यक्ति को वहां से टिकट मिलनेवाला है । जोशी समूह का दावा है कि सर्वसम्मत न होने के कारण पौडेल को टिकट नहीं भी मिल सकता है ।
तनहुँ, उन्नीस आश्वीन । नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रामचन्द्र पौडेल, प्रतिनिधिसभा चुनाव में अपने ही गृह जिला में टिकट के लिए सर्वसम्मत होने में असमर्थ हुए हैं । सामान्यतः शीर्ष नेता को टिकट के लिए सर्वसम्मत सिफारिस किया जाता है । लेकिन पौडेल को सर्वसम्मत सिफारिस नहीं किया गया है । इसका मतलव है- पौडेल टिकट पाने से बञ्चित भी हो सकते हैं । पार्टी पूर्व उप-सभापति पौडेल तनहुँ क्षेत्र नम्बर एक से चुनावी प्रतिस्पर्धा की तैयारी कर रहे हैं । तनहूं जिला पौडेल का गृह जिला भी है । लेकिन पौडेल को वहां से सर्वसम्मत सिफारिस नहीं किया गया है । समाचार स्रोत का कहना है कि इसमें कांग्रेस नेता गोविन्दराज जोशी का हाथ है । पूर्व सह-महामन्त्री तथा नेता जोशी ने कहा है कि अगर उनको टिकट नहीं मिलेगा तो तनहुँ में 'पौडेल कम्पनी' ध्वस्त किया जाएगा । स्मरणीय है- तनहुं कांग्रेस ने बुधबार क्षेत्र नं. एक से पौडेल सहित केन्द्रीय सदस्य शंखर भण्डारी, गोविन्द भट्टराई, गोविन्दराज जोशी और महिला संघ-सदस्य शशी आचार्य का नाम सिफारिस किया है । इन्ही नामों में से एक व्यक्ति को वहां से टिकट मिलनेवाला है । जोशी समूह का दावा है कि सर्वसम्मत न होने के कारण पौडेल को टिकट नहीं भी मिल सकता है ।
IBPS RRB Clerk, PO Recruitment 2023: आईबीपीएस ने क्लर्क, पीओ समेत विभिन्न पदों पर निकाली गई भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ा दी है। अब इन 9053 पदों के लिए 28 जून 2023 तक आवेदन किया जा सकता है। IBPS RRB Clerk, PO Recruitment 2023: आईबीपीएस ने क्लर्क, पीओ समेत विभिन्न पदों पर निकाली गई भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ा दी है। अब इन 9053 पदों के लिए 28 जून 2023 तक आवेदन किया जा सकता है। पहले आवेदन की अंतिम तिथि 21 जून थी। इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सिलेक्शन (आईबीपीएस) ने नोटिस जारी कर कहा, 'आईबीपीएस आरआरबी भर्ती 2023 के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाने का निर्णय मणिपुर राज्य की स्थिति की समीक्षा करने और देश के कुछ हिस्सों में आईं प्राकृतिक आपदाओं के कारण लिया गया है। ' वेबसाइट पर आवेदन का लिंक और फीस भुगतान की विंडो 28 जून, 2023 तक खुली रहेगी। इस भर्ती के तहत ऑफिसर असिस्टेंट और ऑफिसर स्केल- 1, 2, 3 के पदों पर भर्तियां की जाएंगी। आईबीपीएस की आधिकारिक वेबसाइट www. ibps. in पर आवेदन किया जा सकता है। योग्यता (पदानुसार) -असिस्टेंट (मल्टीपर्पज) के लिए किसी भी विषय में स्नातक की डिग्री हो। कंप्यूटर पर काम करना आता हो। स्थानीय भाषा का ज्ञान जरूरी है। -स्केल-1 (असिस्टेंट मैनेजर) के लिए किसी भी विषय में स्नातक की डिग्री। कृषि/ बागवानी/ वानिकी/ पशुपालन/ पशु चिकित्सा विज्ञान/ कृषि इंजीनियरिंग/ मछली पालन/ सूचना प्रौद्योगिकी/ प्रबंधन/ कानून/ अर्थशास्त्र या अकाउंटेंसी की डिग्री वालों को वरीयता दी जाएगी। कंप्यूटर और स्थानीय भाषा का ज्ञान हो। -मैनेजर स्केल-2 जनरल बैंकिंग के लिए 50 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातक की डिग्री हो। बैंकिंग/ वित्त/ विपणन/ कृषि/ बागवानी/ वानिकी/ पशुपालन/ पशु चिकित्सा विज्ञान/ सूचना प्रौद्योगिकी/ प्रबंधन/ कानून/ अर्थशास्त्र और अकाउंटेंसी की डिग्री वालों को वरीयता दी जाएगी। दो वर्षों का कार्यानुभव हो। -स्केल-2 आईटी के लिए 50 अंकों के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स/ कम्युनिकेशन/ कंप्यूटर साइंस/ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में स्नातक डिग्री हो। संबंधित क्षेत्र में एक वर्ष का कार्यानुभव हो। -स्केल-2 चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) के लिए इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड ऑफ इंडिया से सीए किया हो। साथ ही संबंधित क्षेत्र में एक वर्ष का कार्यानुभव हो। -स्केल-2 लॉ ऑफिसर के लिए 50 अंकों के साथ कानून की डिग्री हो। दो वर्ष का कार्यानुभव हो। -स्केल-2 ट्रेजरी मैनेजर के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) या फाइनेंस में एमबीए की डिग्री हो। संबंधित क्षेत्र में एक वर्ष का कार्यानुभव हो। -स्केल-2 मार्केटिंग ऑफिसर के लिए मार्केटिंग में एमबीए की डिग्री हो। एक वर्ष का कार्यानुभव हो। -स्केल-2 एग्रीकल्चर ऑफिसर के लिए 50 अंकों के साथ कृषि/ बागवानी/ डेयरी/ पशुपालन/ वानिकी/ पशु चिकित्सा विज्ञान/ में स्नातक की डिग्री हो। संबंधित क्षेत्र में दो वर्ष का कार्यानुभव हो। -स्केल-3 सीनियर मैनेजर के लिए न्यूनतम 50 अंकों के साथ किसी भी विषय में स्नातक की डिग्री हो। बैंकिंग/ वित्त/ विपणन/ कृषि/ बागवानी/ वानिकी/ पशुपालन/ पशु चिकित्सा विज्ञान/ कृषि इंजीनियरिंग/ मछली पालन/ आईटी/ प्रबंधन/ कानून/ अर्थशास्त्र और अकाउंटेंसी में डिग्री/ डिप्लोमा वालों को वरीयता मिलेगी। न्यूनतम पांच वर्षों का कार्यानुभव हो। वेतनमान 56,000 से लेकर 1,45,000 रुपये तक। -न्यूनतम 18 और अधिकतम 40 वर्ष से कम हो। आयु की गणना 01 जून 2023 के आधार पर होगी। -अधिकतम आयु सीमा में एससी/ एसटी को पांच, ओबीसी (एनसीएल) को तीन और दिव्यांगों को 10 वर्ष की छूट प्रदान की जाएगी। -लिखित परीक्षा के जरिए चयन होगा। यह दो चरणों में होगी। प्रारंभिक परीक्षा सभी पदों के लिए होगी। -मुख्य परीक्षा केवल ऑफिसर स्केल-1 और ऑफिसर असिस्टेंट पद के लिए होगी। -परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाएगा। दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद मेडिकल परीक्षण कराना होगा। -सामान्य वर्ग, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस के लिए 850 रुपये। एससी/ एसटी और दिव्यांग वर्ग के अभ्यर्थियों को 175 रुपये देना होगा। -शुल्क का भुगतान डेबिट कार्ड/ क्रेडिट कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग के जरिए किया जा सकता है।
IBPS RRB Clerk, PO Recruitment दो हज़ार तेईस: आईबीपीएस ने क्लर्क, पीओ समेत विभिन्न पदों पर निकाली गई भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ा दी है। अब इन नौ हज़ार तिरेपन पदों के लिए अट्ठाईस जून दो हज़ार तेईस तक आवेदन किया जा सकता है। IBPS RRB Clerk, PO Recruitment दो हज़ार तेईस: आईबीपीएस ने क्लर्क, पीओ समेत विभिन्न पदों पर निकाली गई भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ा दी है। अब इन नौ हज़ार तिरेपन पदों के लिए अट्ठाईस जून दो हज़ार तेईस तक आवेदन किया जा सकता है। पहले आवेदन की अंतिम तिथि इक्कीस जून थी। इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सिलेक्शन ने नोटिस जारी कर कहा, 'आईबीपीएस आरआरबी भर्ती दो हज़ार तेईस के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाने का निर्णय मणिपुर राज्य की स्थिति की समीक्षा करने और देश के कुछ हिस्सों में आईं प्राकृतिक आपदाओं के कारण लिया गया है। ' वेबसाइट पर आवेदन का लिंक और फीस भुगतान की विंडो अट्ठाईस जून, दो हज़ार तेईस तक खुली रहेगी। इस भर्ती के तहत ऑफिसर असिस्टेंट और ऑफिसर स्केल- एक, दो, तीन के पदों पर भर्तियां की जाएंगी। आईबीपीएस की आधिकारिक वेबसाइट www. ibps. in पर आवेदन किया जा सकता है। योग्यता -असिस्टेंट के लिए किसी भी विषय में स्नातक की डिग्री हो। कंप्यूटर पर काम करना आता हो। स्थानीय भाषा का ज्ञान जरूरी है। -स्केल-एक के लिए किसी भी विषय में स्नातक की डिग्री। कृषि/ बागवानी/ वानिकी/ पशुपालन/ पशु चिकित्सा विज्ञान/ कृषि इंजीनियरिंग/ मछली पालन/ सूचना प्रौद्योगिकी/ प्रबंधन/ कानून/ अर्थशास्त्र या अकाउंटेंसी की डिग्री वालों को वरीयता दी जाएगी। कंप्यूटर और स्थानीय भाषा का ज्ञान हो। -मैनेजर स्केल-दो जनरल बैंकिंग के लिए पचास प्रतिशत अंकों के साथ स्नातक की डिग्री हो। बैंकिंग/ वित्त/ विपणन/ कृषि/ बागवानी/ वानिकी/ पशुपालन/ पशु चिकित्सा विज्ञान/ सूचना प्रौद्योगिकी/ प्रबंधन/ कानून/ अर्थशास्त्र और अकाउंटेंसी की डिग्री वालों को वरीयता दी जाएगी। दो वर्षों का कार्यानुभव हो। -स्केल-दो आईटी के लिए पचास अंकों के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स/ कम्युनिकेशन/ कंप्यूटर साइंस/ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में स्नातक डिग्री हो। संबंधित क्षेत्र में एक वर्ष का कार्यानुभव हो। -स्केल-दो चार्टर्ड अकाउंटेंट के लिए इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड ऑफ इंडिया से सीए किया हो। साथ ही संबंधित क्षेत्र में एक वर्ष का कार्यानुभव हो। -स्केल-दो लॉ ऑफिसर के लिए पचास अंकों के साथ कानून की डिग्री हो। दो वर्ष का कार्यानुभव हो। -स्केल-दो ट्रेजरी मैनेजर के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट या फाइनेंस में एमबीए की डिग्री हो। संबंधित क्षेत्र में एक वर्ष का कार्यानुभव हो। -स्केल-दो मार्केटिंग ऑफिसर के लिए मार्केटिंग में एमबीए की डिग्री हो। एक वर्ष का कार्यानुभव हो। -स्केल-दो एग्रीकल्चर ऑफिसर के लिए पचास अंकों के साथ कृषि/ बागवानी/ डेयरी/ पशुपालन/ वानिकी/ पशु चिकित्सा विज्ञान/ में स्नातक की डिग्री हो। संबंधित क्षेत्र में दो वर्ष का कार्यानुभव हो। -स्केल-तीन सीनियर मैनेजर के लिए न्यूनतम पचास अंकों के साथ किसी भी विषय में स्नातक की डिग्री हो। बैंकिंग/ वित्त/ विपणन/ कृषि/ बागवानी/ वानिकी/ पशुपालन/ पशु चिकित्सा विज्ञान/ कृषि इंजीनियरिंग/ मछली पालन/ आईटी/ प्रबंधन/ कानून/ अर्थशास्त्र और अकाउंटेंसी में डिग्री/ डिप्लोमा वालों को वरीयता मिलेगी। न्यूनतम पांच वर्षों का कार्यानुभव हो। वेतनमान छप्पन,शून्य से लेकर एक,पैंतालीस,शून्य रुपयापये तक। -न्यूनतम अट्ठारह और अधिकतम चालीस वर्ष से कम हो। आयु की गणना एक जून दो हज़ार तेईस के आधार पर होगी। -अधिकतम आयु सीमा में एससी/ एसटी को पांच, ओबीसी को तीन और दिव्यांगों को दस वर्ष की छूट प्रदान की जाएगी। -लिखित परीक्षा के जरिए चयन होगा। यह दो चरणों में होगी। प्रारंभिक परीक्षा सभी पदों के लिए होगी। -मुख्य परीक्षा केवल ऑफिसर स्केल-एक और ऑफिसर असिस्टेंट पद के लिए होगी। -परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाएगा। दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद मेडिकल परीक्षण कराना होगा। -सामान्य वर्ग, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस के लिए आठ सौ पचास रुपयापये। एससी/ एसटी और दिव्यांग वर्ग के अभ्यर्थियों को एक सौ पचहत्तर रुपयापये देना होगा। -शुल्क का भुगतान डेबिट कार्ड/ क्रेडिट कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग के जरिए किया जा सकता है।
उर्फी जावेद का नाम आते ही लोगों के जहन में जो पहला ख्याल आता है वो उनके आउटफिट को लेकर होता है। ऐसा कोई दिन नहीं गुजरता है जिस दिन वो सबसे अलग ड्रेसअप नहीं करती हों। रह रोज यही चर्चा में रहता है कि उर्फी आज क्या पहनने वाली हैं। मुंबई. उर्फी जावेद भले ही अपने काम से अभी तक कोई पहचान नहीं बनाई हो। लेकिन अपने कपड़ों की वजह से ग्लैमर इंडस्ट्री में चर्चित चेहरों में शुमार हो गई हैं। उनकी अदाओं पर जहां कुछ लोग फिदा हो जाते हैं, वहीं कुछ ट्रोल करने लगते हैं। पर कहते हैं ना बदनाम हुआ तो क्या नाम तो हुआ ना। ये लाइन उर्फी पर पूरी तरह फिट बैठती है। सोमवार को उर्फी जावेद हमेशा की तरह एक बार फिर से बेहद ही रिवीलिंग आउटफिट में नजर आईं। उर्फी जावेद ने अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया। जिसमें वो अपने नए फोन पर बात करती दिख रही हैं। बाथ टब के पास एक मिरर और फोन रखा है। उन्होंने हाथों में व्हाइट ग्लबस पहन रखा है। इसके साथ ब्लू जींस कैरी कर रखा है। इसके साथ ही उन्होंने सफेद ट्यूब ब्रा पहना है जो बेहद ही रिवीलिंग हैं। उर्फी ने इस वीडियो को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा है,'न्यू फोन हू इज दिस। ' उर्फी के इस आउटफिट को देखकर कुछ लोग उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिए हैं। एक यूजर ने लिखा, 'अब आप उल्लू वेब सीरीज के लिए पूरी तरह तैयार हैं। 'वहीं एक ने लिखा,'वहीं एक ने पूछा अब ये किस ब्रांड के कपड़े हैं मैडम। 'वहीं एक ने लिखा,'दीदी आपके पास कपड़े नहीं हैं तो मेरे से थोड़े ले जाओ। ' वहीं एक यूजर ने ट्रोल करते हुए लिखा,'फ्री में दे दूंगी कपड़े। ' बता दें कि ये पहली बार नहीं हुआ जब उन्हें ट्रोल किया गया है। उर्फी जावेद के अजीबो-गरीब देख के अब बॉलीवुड सेलेब्स भी चकरा गए हैं। सुजैन खान की बहन फराह अली खान ने उर्फी के आउटफिट को घटिया फैशन कहा था। इसके बाद कश्मीरा शाह ने भी उनके फैंशन सेंस को लेकर कमेंट किया था। हालांकि उर्फी ने दोनों को मुंहतोड़ जवाब दिया था। और पढ़ेंः
उर्फी जावेद का नाम आते ही लोगों के जहन में जो पहला ख्याल आता है वो उनके आउटफिट को लेकर होता है। ऐसा कोई दिन नहीं गुजरता है जिस दिन वो सबसे अलग ड्रेसअप नहीं करती हों। रह रोज यही चर्चा में रहता है कि उर्फी आज क्या पहनने वाली हैं। मुंबई. उर्फी जावेद भले ही अपने काम से अभी तक कोई पहचान नहीं बनाई हो। लेकिन अपने कपड़ों की वजह से ग्लैमर इंडस्ट्री में चर्चित चेहरों में शुमार हो गई हैं। उनकी अदाओं पर जहां कुछ लोग फिदा हो जाते हैं, वहीं कुछ ट्रोल करने लगते हैं। पर कहते हैं ना बदनाम हुआ तो क्या नाम तो हुआ ना। ये लाइन उर्फी पर पूरी तरह फिट बैठती है। सोमवार को उर्फी जावेद हमेशा की तरह एक बार फिर से बेहद ही रिवीलिंग आउटफिट में नजर आईं। उर्फी जावेद ने अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया। जिसमें वो अपने नए फोन पर बात करती दिख रही हैं। बाथ टब के पास एक मिरर और फोन रखा है। उन्होंने हाथों में व्हाइट ग्लबस पहन रखा है। इसके साथ ब्लू जींस कैरी कर रखा है। इसके साथ ही उन्होंने सफेद ट्यूब ब्रा पहना है जो बेहद ही रिवीलिंग हैं। उर्फी ने इस वीडियो को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा है,'न्यू फोन हू इज दिस। ' उर्फी के इस आउटफिट को देखकर कुछ लोग उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिए हैं। एक यूजर ने लिखा, 'अब आप उल्लू वेब सीरीज के लिए पूरी तरह तैयार हैं। 'वहीं एक ने लिखा,'वहीं एक ने पूछा अब ये किस ब्रांड के कपड़े हैं मैडम। 'वहीं एक ने लिखा,'दीदी आपके पास कपड़े नहीं हैं तो मेरे से थोड़े ले जाओ। ' वहीं एक यूजर ने ट्रोल करते हुए लिखा,'फ्री में दे दूंगी कपड़े। ' बता दें कि ये पहली बार नहीं हुआ जब उन्हें ट्रोल किया गया है। उर्फी जावेद के अजीबो-गरीब देख के अब बॉलीवुड सेलेब्स भी चकरा गए हैं। सुजैन खान की बहन फराह अली खान ने उर्फी के आउटफिट को घटिया फैशन कहा था। इसके बाद कश्मीरा शाह ने भी उनके फैंशन सेंस को लेकर कमेंट किया था। हालांकि उर्फी ने दोनों को मुंहतोड़ जवाब दिया था। और पढ़ेंः
माँ राणुबाई की परवरिश में दोनों बच्चे पल-बढ़ रहे थे। दिन बीतते गए और देखते ही देखते बड़ा बेटा गंगाधर विवाह योग्य हो गया। एक सुयोग्य वधु ढूँढ़कर उसका विवाह किया गया। लेकिन इससे नारायण के सामने एक समस्या उत्पन्न हो गई। अकसर घर में बड़ों की शादी के बाद छोटों के विवाह की भी चर्चाएँ शुरू होती हैं। नारायण इससे भला कैसे छूटते! बारह साल की उम्र में ही घर में नारायण के विवाह की बातें शुरू हो गईं। बड़े भाई से अब तक नाममंत्र नहीं मिला था और ऊपर से शादी की चर्चाएँ! इससे नारायण मायूस हो गए। शादी की बातों ने जल्द ही इतना ज़ोर पकड़ लिया कि लोग उनके लिए रिश्ते लेकर आने लगे। नारायण ने सोचा, इस तरह संसारी बनने से 'विश्व कल्याण' का उद्देश्य उनसे दूर हो जाएगा। जब प्रार्थना में बल आता है तब जिस चीज़ के लिए आप प्रार्थना कर रहे हैं, वह आपके जीवन की तरफ बढ़नी शुरू होती है। कुदरत की तमाम शक्तियाँ उस चीज़ को आप तक पहुँचाने के कार्य में लग जाती हैं। घटनाएँ उस दिशा में आकार लेने लगती हैं। नारायण के साथ भी यही हुआ। ईश्वर दर्शन की प्यास उनमें इतनी तीव्र हो चुकी थी कि मूर्ति के सामने बैठे हुए वे सहज समाधि की अवस्था में चले गए। उनकी करुणामयी पुकार काम कर गई। समाधि अवस्था में उन्हें भगवान हनुमान ने प्रत्यक्ष दर्शन दिए। उन्होंने हनुमान जी से, अपना शिष्य बनाने की विनती की लेकिन इससे भी कुछ अद्भुत होने जा रहा था। यह एक ऐसी अद्भुत कृपा है, जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते। समाधि में मिला हुआ यह ऐसा अनुभव था, जिसे शब्दों में बताना कठिन है। आज तक जितने भी महापुरुषों को ऐसे अनोखे अनुभव हुए हैं, उन्होंने उनका वर्णन लोकभाषा में करने का प्रयास किया है ताकि सामान्य लोग भी उसकी अनुभूति कर सकें। हनुमान का उन्हें अपने साथ प्रभु राम से मिलवाने ले जाना, ध्यान और समाधि में मिला हुआ सूक्ष्म देह का अनुभव है। कई बार ऐसा होता है कि कोई इंसान गहरी नींद में या गहरे ध्यान में होता है और उसकी सूक्ष्म देह अलग-अलग स्थानों पर भ्रमण करती है, अलग-अलग अनुभव लेती है। इसी अवस्था में नारायण के कुछ क्षण बीत गए। थोड़े समय में ही आस-पास के शोर की वजह से उनकी समाधि अवस्था भंग हुई। "नारायण अचानक कहाँ चला गया", इसी परेशानी में उनके घरवाले और आस-पड़ोस के लोग उन्हें ढूँढ़ते हुए मंदिर आए थे। वहाँ नारायण को सही-सलामत देखकर सभी निश्चिंत हुए। जब माँ ने उन्हें वापस घर चलने के लिए कहा तब वे छलाँग लगाकर पेड़ पर चढ़ गए और रुआँसा मुँह बनाकर बोले, "नहीं! मैं घर नहीं आऊँगा! तुम मेरी शादी करवा दोगी।" लोगों ने जब उन्हें मनाने की कोशिश की तो उन्होंने कुएँ में कूद जाने की धमकी दी। हालाँकि नारायण के लिए कुएँ में कूदना कोई बड़ी बात नहीं थी, वे अकसर पेड़ पर चढ़कर वहाँ से कुएँ में छलाँग लगाते थे। लेकिन उनकी यह धमकी सुनकर सभी तनाव में आ गए। माँ ने कहा, "बेटा, ऐसा मत करो, तुला आईची शपथ आहे. (तुम्हें माँ की कसम है) कुएँ से बाहर आ जाओ, मैं तुम्हारी शादी की बात नहीं करूँगी।" जैसे ही नारायण ने यह सुना, उन्होंने चैन की साँस ली और वे कुएँ से बाहर आकर सबके साथ घर चले गए। माँ से 'शादी की बात न करने का वचन' पाकर, नारायण की बेचैनी को थोड़ी सी राहत मिली। श्रीराम... जय राम... जय जय राम...! विपरीत घटनाओं के बावजूद भी जो अपने इरादे नहीं बदलते, उनके जीवन में चमत्कार होते हैं। ऐसे लोग दुनिया के सामने निष्ठा और विश्वास की मिसाल बन जाते हैं। अर्थ - इस दुनिया में सर्वसुखी (पूर्ण रूप से सुखी-समाधानी) ऐसा कौन है? हे मन, तुम ही यह सोचकर खोज निकालो। आज जो भी तुम भुगत रहे हो, यह तुम्हारे ही पूर्वसंचित कर्म हैं। अर्क - कितनी भी सुख-सुविधाएँ मिलें, मन कभी पूर्णरूप से खुश नहीं होता। एक इच्छा पूरी होने के बाद वह दूसरी इच्छा जगाता है। मन की इच्छाएँ, मन की वृत्तियाँ और उनके द्वारा इंसान से होनेवाले कर्म ही उसके जीवन की स्थिति के लिए ज़िम्मेदार होते हैं। मन इच्छाओं के पूरा होने में खुशियाँ ढूँढ़ता है क्योंकि उसने असली आनंद (स्वबोध) का स्वाद चखा ही नहीं है। जब तक आत्मज्ञान नहीं मिलता, मन के अंदर सुख-दुःख का खेल चलते रहता है। अर्थ - हे मन, रावण के साथ क्या हुआ देखो। उसका साम्राज्य देखते-देखते नष्ट हो गया। इसलिए हे मन, वासना का त्याग जल्द से जल्द करो क्योंकि बलशाली काल सभी का पीछा कर रहा है। अर्क - मन की वासनाएँ इंसान के पतन का कारण बनती हैं। सीताजी को प्राप्त करने की इच्छा रावण का साम्राज्य नष्ट होने और रावण के अंत का कारण बनी। इंसान पृथ्वी पर सीमित समय के लिए होता है। इसलिए जितना जल्दी हो सके, मन के विकारों पर कार्य होना आवश्यक है। जय जय रघुवीर समर्थ..
माँ राणुबाई की परवरिश में दोनों बच्चे पल-बढ़ रहे थे। दिन बीतते गए और देखते ही देखते बड़ा बेटा गंगाधर विवाह योग्य हो गया। एक सुयोग्य वधु ढूँढ़कर उसका विवाह किया गया। लेकिन इससे नारायण के सामने एक समस्या उत्पन्न हो गई। अकसर घर में बड़ों की शादी के बाद छोटों के विवाह की भी चर्चाएँ शुरू होती हैं। नारायण इससे भला कैसे छूटते! बारह साल की उम्र में ही घर में नारायण के विवाह की बातें शुरू हो गईं। बड़े भाई से अब तक नाममंत्र नहीं मिला था और ऊपर से शादी की चर्चाएँ! इससे नारायण मायूस हो गए। शादी की बातों ने जल्द ही इतना ज़ोर पकड़ लिया कि लोग उनके लिए रिश्ते लेकर आने लगे। नारायण ने सोचा, इस तरह संसारी बनने से 'विश्व कल्याण' का उद्देश्य उनसे दूर हो जाएगा। जब प्रार्थना में बल आता है तब जिस चीज़ के लिए आप प्रार्थना कर रहे हैं, वह आपके जीवन की तरफ बढ़नी शुरू होती है। कुदरत की तमाम शक्तियाँ उस चीज़ को आप तक पहुँचाने के कार्य में लग जाती हैं। घटनाएँ उस दिशा में आकार लेने लगती हैं। नारायण के साथ भी यही हुआ। ईश्वर दर्शन की प्यास उनमें इतनी तीव्र हो चुकी थी कि मूर्ति के सामने बैठे हुए वे सहज समाधि की अवस्था में चले गए। उनकी करुणामयी पुकार काम कर गई। समाधि अवस्था में उन्हें भगवान हनुमान ने प्रत्यक्ष दर्शन दिए। उन्होंने हनुमान जी से, अपना शिष्य बनाने की विनती की लेकिन इससे भी कुछ अद्भुत होने जा रहा था। यह एक ऐसी अद्भुत कृपा है, जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते। समाधि में मिला हुआ यह ऐसा अनुभव था, जिसे शब्दों में बताना कठिन है। आज तक जितने भी महापुरुषों को ऐसे अनोखे अनुभव हुए हैं, उन्होंने उनका वर्णन लोकभाषा में करने का प्रयास किया है ताकि सामान्य लोग भी उसकी अनुभूति कर सकें। हनुमान का उन्हें अपने साथ प्रभु राम से मिलवाने ले जाना, ध्यान और समाधि में मिला हुआ सूक्ष्म देह का अनुभव है। कई बार ऐसा होता है कि कोई इंसान गहरी नींद में या गहरे ध्यान में होता है और उसकी सूक्ष्म देह अलग-अलग स्थानों पर भ्रमण करती है, अलग-अलग अनुभव लेती है। इसी अवस्था में नारायण के कुछ क्षण बीत गए। थोड़े समय में ही आस-पास के शोर की वजह से उनकी समाधि अवस्था भंग हुई। "नारायण अचानक कहाँ चला गया", इसी परेशानी में उनके घरवाले और आस-पड़ोस के लोग उन्हें ढूँढ़ते हुए मंदिर आए थे। वहाँ नारायण को सही-सलामत देखकर सभी निश्चिंत हुए। जब माँ ने उन्हें वापस घर चलने के लिए कहा तब वे छलाँग लगाकर पेड़ पर चढ़ गए और रुआँसा मुँह बनाकर बोले, "नहीं! मैं घर नहीं आऊँगा! तुम मेरी शादी करवा दोगी।" लोगों ने जब उन्हें मनाने की कोशिश की तो उन्होंने कुएँ में कूद जाने की धमकी दी। हालाँकि नारायण के लिए कुएँ में कूदना कोई बड़ी बात नहीं थी, वे अकसर पेड़ पर चढ़कर वहाँ से कुएँ में छलाँग लगाते थे। लेकिन उनकी यह धमकी सुनकर सभी तनाव में आ गए। माँ ने कहा, "बेटा, ऐसा मत करो, तुला आईची शपथ आहे. कुएँ से बाहर आ जाओ, मैं तुम्हारी शादी की बात नहीं करूँगी।" जैसे ही नारायण ने यह सुना, उन्होंने चैन की साँस ली और वे कुएँ से बाहर आकर सबके साथ घर चले गए। माँ से 'शादी की बात न करने का वचन' पाकर, नारायण की बेचैनी को थोड़ी सी राहत मिली। श्रीराम... जय राम... जय जय राम...! विपरीत घटनाओं के बावजूद भी जो अपने इरादे नहीं बदलते, उनके जीवन में चमत्कार होते हैं। ऐसे लोग दुनिया के सामने निष्ठा और विश्वास की मिसाल बन जाते हैं। अर्थ - इस दुनिया में सर्वसुखी ऐसा कौन है? हे मन, तुम ही यह सोचकर खोज निकालो। आज जो भी तुम भुगत रहे हो, यह तुम्हारे ही पूर्वसंचित कर्म हैं। अर्क - कितनी भी सुख-सुविधाएँ मिलें, मन कभी पूर्णरूप से खुश नहीं होता। एक इच्छा पूरी होने के बाद वह दूसरी इच्छा जगाता है। मन की इच्छाएँ, मन की वृत्तियाँ और उनके द्वारा इंसान से होनेवाले कर्म ही उसके जीवन की स्थिति के लिए ज़िम्मेदार होते हैं। मन इच्छाओं के पूरा होने में खुशियाँ ढूँढ़ता है क्योंकि उसने असली आनंद का स्वाद चखा ही नहीं है। जब तक आत्मज्ञान नहीं मिलता, मन के अंदर सुख-दुःख का खेल चलते रहता है। अर्थ - हे मन, रावण के साथ क्या हुआ देखो। उसका साम्राज्य देखते-देखते नष्ट हो गया। इसलिए हे मन, वासना का त्याग जल्द से जल्द करो क्योंकि बलशाली काल सभी का पीछा कर रहा है। अर्क - मन की वासनाएँ इंसान के पतन का कारण बनती हैं। सीताजी को प्राप्त करने की इच्छा रावण का साम्राज्य नष्ट होने और रावण के अंत का कारण बनी। इंसान पृथ्वी पर सीमित समय के लिए होता है। इसलिए जितना जल्दी हो सके, मन के विकारों पर कार्य होना आवश्यक है। जय जय रघुवीर समर्थ..
इस आर्टिकल के सहायक लेखक (co-author) हमारी बहुत ही अनुभवी एडिटर और रिसर्चर्स (researchers) टीम से हैं जो इस आर्टिकल में शामिल प्रत्येक जानकारी की सटीकता और व्यापकता की अच्छी तरह से जाँच करते हैं। wikiHow's Content Management Team बहुत ही सावधानी से हमारे एडिटोरियल स्टाफ (editorial staff) द्वारा किये गए कार्य को मॉनिटर करती है ये सुनिश्चित करने के लिए कि सभी आर्टिकल्स में दी गई जानकारी उच्च गुणवत्ता की है कि नहीं। यह आर्टिकल १,२९७ बार देखा गया है। ग्रांड थेफ्ट ऑटो (Grand Theft Auto) 5 में ATM पर लोगों को लूटना कई आसान अपराधों में से एक है जिसे आप कुछ पैसा कमाने के लिए कर सकते हैं। इस छोटे से अपराध से आपको $30-$120 डॉलर तक की कमाई हो जाएगी, जबकि इसके विपरीत राहगीरों को लूटने पर आमतौर पर आपको $10-$20 मिलते हैं। आप एक ATM को एक स्टोर क्लर्क की तरह सीधे नहीं लूट सकते हैं। हालाँकि, आप ATM का यूज़ करने के बाद राहगीरों (pedestrians) को लूट सकते हैं। इससे दस से सैकड़ों डॉलर तक कमाई हो जाएगी। यह विकीहाउ आर्टिकल आपको ग्रांड थेफ्ट ऑटो 5 में ATM को यूज़ करने के बाद राहगीरों को लूटना सिखाता है। {"smallUrl":"https:\/\/www2व्यक्ति को इसे यूज़ करने का इंतज़ार करेंः एकबार आपको एक ATM मिल जाता है, तो कुछ समय तक इंतज़ार करें जबतक कि कोई राहगीर नहीं आता है और ATM को यूज़ नहीं करता है। ATM का यूज़ करते समय राहगीर पर अटैक न करें। उनको काम पूरा करने तक इंतज़ार करें। {"smallUrl":"https:\/\/www4राहगीर को अक्षम (Incapacitate) बनाएँः सबकुछ सुरक्षित होने पर, राहगीर को नीचे की तरफ़ खींच लें जिसने ATM यूज़ किया था। आप या तो उन्हें गोली मार सकते हैं या उन्हें पीट सकते हैं। {"smallUrl":"https:\/\/www6जगह को छोड़ेंः आपके द्वारा राहगीर को मारने के तुरंत बाद ऐम्ब्युलन्स और पुलिस वारदात की जगह पर आने वाली होगी। अपने वाहन के अंदर वापस जाएँ और पकड़े जाने से बचने के लिए ड्राइव करके तुरंत उस जगह से निकल जाएँ। फिर आप अपने अगले ATM पर ड्राइव कर सकते हैं और फिर से अपनी लूट कर सकते हैं। यदि वहाँ कोई गवाह थे, तो आपको पुलिस से छिपना पड़ेगा जबतक कि आपका वांटेड का लेवल नहीं हट जाता है।
इस आर्टिकल के सहायक लेखक हमारी बहुत ही अनुभवी एडिटर और रिसर्चर्स टीम से हैं जो इस आर्टिकल में शामिल प्रत्येक जानकारी की सटीकता और व्यापकता की अच्छी तरह से जाँच करते हैं। wikiHow's Content Management Team बहुत ही सावधानी से हमारे एडिटोरियल स्टाफ द्वारा किये गए कार्य को मॉनिटर करती है ये सुनिश्चित करने के लिए कि सभी आर्टिकल्स में दी गई जानकारी उच्च गुणवत्ता की है कि नहीं। यह आर्टिकल एक,दो सौ सत्तानवे बार देखा गया है। ग्रांड थेफ्ट ऑटो पाँच में ATM पर लोगों को लूटना कई आसान अपराधों में से एक है जिसे आप कुछ पैसा कमाने के लिए कर सकते हैं। इस छोटे से अपराध से आपको तीस डॉलर-एक सौ बीस डॉलर डॉलर तक की कमाई हो जाएगी, जबकि इसके विपरीत राहगीरों को लूटने पर आमतौर पर आपको दस डॉलर-बीस डॉलर मिलते हैं। आप एक ATM को एक स्टोर क्लर्क की तरह सीधे नहीं लूट सकते हैं। हालाँकि, आप ATM का यूज़ करने के बाद राहगीरों को लूट सकते हैं। इससे दस से सैकड़ों डॉलर तक कमाई हो जाएगी। यह विकीहाउ आर्टिकल आपको ग्रांड थेफ्ट ऑटो पाँच में ATM को यूज़ करने के बाद राहगीरों को लूटना सिखाता है। {"smallUrl":"https:\/\/wwwदोव्यक्ति को इसे यूज़ करने का इंतज़ार करेंः एकबार आपको एक ATM मिल जाता है, तो कुछ समय तक इंतज़ार करें जबतक कि कोई राहगीर नहीं आता है और ATM को यूज़ नहीं करता है। ATM का यूज़ करते समय राहगीर पर अटैक न करें। उनको काम पूरा करने तक इंतज़ार करें। {"smallUrl":"https:\/\/wwwचारराहगीर को अक्षम बनाएँः सबकुछ सुरक्षित होने पर, राहगीर को नीचे की तरफ़ खींच लें जिसने ATM यूज़ किया था। आप या तो उन्हें गोली मार सकते हैं या उन्हें पीट सकते हैं। {"smallUrl":"https:\/\/wwwछःजगह को छोड़ेंः आपके द्वारा राहगीर को मारने के तुरंत बाद ऐम्ब्युलन्स और पुलिस वारदात की जगह पर आने वाली होगी। अपने वाहन के अंदर वापस जाएँ और पकड़े जाने से बचने के लिए ड्राइव करके तुरंत उस जगह से निकल जाएँ। फिर आप अपने अगले ATM पर ड्राइव कर सकते हैं और फिर से अपनी लूट कर सकते हैं। यदि वहाँ कोई गवाह थे, तो आपको पुलिस से छिपना पड़ेगा जबतक कि आपका वांटेड का लेवल नहीं हट जाता है।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आने वाले दिनों में राजधानी दिल्ली में 500 जगहों पर तिरंगा झंडा लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज हमारे अंदर देशभक्ति की भावना भरने का काम करता है। केजरीवाल ने गुुरुवार को राजधानी दिल्ली मे 75 जगहों पर 115 फुट का राष्ट्रीय ध्वज फहराते हुए कहा कि दिल्ली में 500 जगहों पर तिरंगा झंडा लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली पूरी दुनिया में ऐसा शहर बनने जा रहा है जहां सबसे अधिक झंडे लगाए जा रहे हैं। आने वाले दिनों मे इसके लिए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दिल्ली का नाम दर्ज होगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली में 500 झंडे इस लिए लगाए जा रहे हैं ताकि यहां के लोग दिन में कम से कम तीन बार राष्ट्रीय ध्वज को देख सकें। उन्होंने कहा कि लोग अपने व्यस्त जिंदगी में कभी-कभी अपने देश और समाज को भूल जाते हैं। ऐसे में दिल्ली में लगे झंडे हमारे अंदर देशभक्ति की भावना भरने का काम करेंगे। social media.
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आने वाले दिनों में राजधानी दिल्ली में पाँच सौ जगहों पर तिरंगा झंडा लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज हमारे अंदर देशभक्ति की भावना भरने का काम करता है। केजरीवाल ने गुुरुवार को राजधानी दिल्ली मे पचहत्तर जगहों पर एक सौ पंद्रह फुट का राष्ट्रीय ध्वज फहराते हुए कहा कि दिल्ली में पाँच सौ जगहों पर तिरंगा झंडा लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली पूरी दुनिया में ऐसा शहर बनने जा रहा है जहां सबसे अधिक झंडे लगाए जा रहे हैं। आने वाले दिनों मे इसके लिए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दिल्ली का नाम दर्ज होगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली में पाँच सौ झंडे इस लिए लगाए जा रहे हैं ताकि यहां के लोग दिन में कम से कम तीन बार राष्ट्रीय ध्वज को देख सकें। उन्होंने कहा कि लोग अपने व्यस्त जिंदगी में कभी-कभी अपने देश और समाज को भूल जाते हैं। ऐसे में दिल्ली में लगे झंडे हमारे अंदर देशभक्ति की भावना भरने का काम करेंगे। social media.
समार्गकी प्राप्ति के लिये कुशील त्याग करना यह चतुर्थ मूलगुण यतलाया है। विवाह बंधन पर विचार । अन्याय अत्याचारका नाश करने के लिये मोक्षमार्गका प्रवृत्ति और घशरक्षा एवं शील पर्म की रक्षा के लिये तथा जिनागम में विवाह यधन एक धार्मिक अग बतलाया है यदि धार्मिक तत्वको समझ कर विवाह किया जाय तो समस्त आपदाओंसे बचकर मोक्ष मार्गकी निकटता अनायाम प्राप्त हो जाती है और अहिंसादि समस्त प्रकारके व्रतोंका पालन स्वाभविकरूपसे स्वयमेत्र हो जाता है । परतु जिस देशमें यह निवाइवधन धार्मिक रूपसे नही होता है वहा पर पैशाचिक अत्याचार खुले रूपसे दिनदहाडे निर्लजता पूर्व बाद चाट कर होते हैं। इतना ही नहीं किंतु ससारकी प्रगति विषयकी ओर प्रवाहित होने लगती है इस प्रकारके जगमें यढे २ उत्पात प्रजाको सहर करने पड़ते हैं, और घोरसे घोर पाप करने पडते है। अगणित हिंसा असरय भ्रूणहला और घडे भयकर सून निनप्रति करने पड़ते हैं। मानव जीवनका बहुनसा भाग पल देव इया मात्सर्य और पिता में अशातिसे क् पूर्वक जाता है, कितने ही सुसके साधन हो परन्तु सुख और सतोष रचमात्र भी प्राप्त नहीं होता है प्राय अधिकतर मानवका जीवन कुश पूर्ण दु समय और भाररूप मालूम पडता है। सब प्रकारके सुखकी अस्वाधन अवस्थामै भी जिस देशमे में क्ष नाहको धार्मिक तत्व बताया गया है वहा पर सतोष पूर्वक सुम प्राप्त होता है । यह बात पाश्चिमात्य और भारतको परि स्थितिसे सबको अनुभवमें आती हैं। प्रेम और परस्पर सुख दु खमें सहयोगिता नहीं पर होती है जदापर विवाहनधन धार्मिरूप में होता है, इसके विपरीत जहावर विवाहको धार्मिन नहीं माना है वहापर प्रेमका नाम निशान नही रहता है, सुखदुखका सहयागिताकी नात तो दूर रहा । व्यभिचारका दूषणावह प्रवृत्ति उसा देशमें मयादा रहित होती है कि जहा पर कि विवाह धार्मिकरूप नहीं है। साठ साठ मत्तर सत्तर वपकी स्त्रिया वहा पर अपने बिनाद बीस पत्रास पर लेता है। चल्कि असी वर्षकी अवस्थामै ३३ वा विवाह ईत्रिका में हुआ है, इससे व्यशिवार और अमानुषो वृत्योंका दृश्य सरको देखकर कप शाता है। कितनी ही लिया मोटरसे लूट जाती हैं और वाहे जिस श्रीमान् और जानकी त्राको कोई भी चाहे जर ले मता है, तलाक दिला पर एक चार नहीं अनेक वार ग्रहण पर सका है और छोड सकता है। अपनी आखोंके सामने व्यभिचार कराने पर भी नहीं रोक सता तय यहा पर पतिपत्नीमें प्रेम कैसे स्थिर और जाउन पयत रह सक्ता है ? और सुख दुबकी सहयोगिता रह सका है? ऐसे जीवनको पशुजीवन कहें तो मा कुछ हानि नहीं। ऐसा forट चारित्रहीन जीवन feet धार्मिरूप नहीं माननेसे ही होता है। निघना और सघनायें जहा पर व्यभिचार बढ़ाने के लिये अपने २ विवाह अनेक करती है यहा पर ब्रहावर्य किस प्रकार उहर सका है। जहा पर प्राणात होने पर भी मनसे परपुरुषकी अभिलाषा नहीं की जाती है वहा पर ही ब्रह्मचर्य व्रत नियमसे स्थिर होता है । जहापर विवाहको धार्मिक माना है चद्दापर ऐसी सुशील स्त्री होती हैं कि अनेक देवागना समान सुन्दर स्त्रिया राज्यके मलो भनको तुच्छ समझकर और अपने शील ( ब्रह्मचर्य ) को उत्तम समझ कर प्राणोंको होमकर शील्की रक्षा करतो हैं । हैं परंतु पाश्चात्य देशमें लोभ और धनके प्रलोभनमें आकर स्त्रिया अपने पतिको मारकर तलाक देकर दश दश पाच पाच पति कर लेती हैं और फिर भी पूरा जीवन नहीं होता है यह सर विवाहको धार्मिक यधन नहीं समझनेका कटुक फल है । हजारों स्त्रियोंने अपने अपूर्व सुलोंको लातमारकर जंगलमें रहकर दुख सहन स्वीकार किया परंतु अपने पतिदेवको छोडकर बडे २ राजा महाराजा और श्रीमन्तोंको तुच्छ माना यह सत्र हको धार्मिक बधन माननेका ही फल है । वास्तव में शीलधर्म उसी देशमें ठीक २ पाया जा सकता है जहापर विवाह धार्मिक कार्य माना जाता है । आज भारतपर्व में भी पश्चिमी वातावरणोंका असर कुशिक्षासे होता जाता है इसीलिये विधवाविवाह नाबिनाह आदिके द्वारा व्यभिचार और पापकी वृद्धि करने में स्वार्थी कामातुर अज्ञानी तन मनसे लगे हुए है, होगको चई २ फायदेके गीत बतलाये जाते हैं परंतु आप्तरगमें भयानक पापको प्रवृत्ति भरी होता है। व्यभिचारकी वृद्धि जैसी आजकल नई रोशनीवाले पुस्पोंसे हो रही है वैसी अन्यसे नहीं। व्यभिचार बढाने के लिये नित्य नई स्कीमें तैयार की जाती हैं। कुत्ताओंमे व्यभिचार कराया जाना और astra ऐसी स्त्रिया घनाई जाती हैं या ऐसे साधन तैयार किये जाते हैं जिनसे व्यभिचार बढे यह शिक्षा और कुझान की महिमा है। ३ जैनसमाजवाद और समाविका पूर्वरंग प्रारभ होगया है और इसके द्वारा व्यभिचार एव पशुजीवनका प्रचार ऐसे ही कुशिक्षितोंके द्वारा हो रहा है। जिनको हिंदू ल माओके आदर्श जीवनका महत्व माद्रुम नहीं है जिससे भारत Far जिनको धर्मका मर्म मालूम नहीं है जो जिनके जिनागमका श्रद्धान नहीं है जिनको पावसे भव सधा नहीं है जिनको और कर्मफलका विश्वास नहीं है जिनको शील्पालन करनेकी नातिसे होनेवाली शुद्धताका ज्ञान नहीं है ऐमेही व्यक्ति पुशिक्षा और दुसगतिमें यहकर व्यभिचार वढानेके लिये विधवाविवाह और धवा विवाद हैं। असल में जिनको वचपन से ही कुशिक्षा प्रमाजस व्यभिचार की इत्सित आदत पड गई है, दूसरोंकी मा बहिनी तरफ लगाकर बचपनसे ही ले घरों को पक
समार्गकी प्राप्ति के लिये कुशील त्याग करना यह चतुर्थ मूलगुण यतलाया है। विवाह बंधन पर विचार । अन्याय अत्याचारका नाश करने के लिये मोक्षमार्गका प्रवृत्ति और घशरक्षा एवं शील पर्म की रक्षा के लिये तथा जिनागम में विवाह यधन एक धार्मिक अग बतलाया है यदि धार्मिक तत्वको समझ कर विवाह किया जाय तो समस्त आपदाओंसे बचकर मोक्ष मार्गकी निकटता अनायाम प्राप्त हो जाती है और अहिंसादि समस्त प्रकारके व्रतोंका पालन स्वाभविकरूपसे स्वयमेत्र हो जाता है । परतु जिस देशमें यह निवाइवधन धार्मिक रूपसे नही होता है वहा पर पैशाचिक अत्याचार खुले रूपसे दिनदहाडे निर्लजता पूर्व बाद चाट कर होते हैं। इतना ही नहीं किंतु ससारकी प्रगति विषयकी ओर प्रवाहित होने लगती है इस प्रकारके जगमें यढे दो उत्पात प्रजाको सहर करने पड़ते हैं, और घोरसे घोर पाप करने पडते है। अगणित हिंसा असरय भ्रूणहला और घडे भयकर सून निनप्रति करने पड़ते हैं। मानव जीवनका बहुनसा भाग पल देव इया मात्सर्य और पिता में अशातिसे क् पूर्वक जाता है, कितने ही सुसके साधन हो परन्तु सुख और सतोष रचमात्र भी प्राप्त नहीं होता है प्राय अधिकतर मानवका जीवन कुश पूर्ण दु समय और भाररूप मालूम पडता है। सब प्रकारके सुखकी अस्वाधन अवस्थामै भी जिस देशमे में क्ष नाहको धार्मिक तत्व बताया गया है वहा पर सतोष पूर्वक सुम प्राप्त होता है । यह बात पाश्चिमात्य और भारतको परि स्थितिसे सबको अनुभवमें आती हैं। प्रेम और परस्पर सुख दु खमें सहयोगिता नहीं पर होती है जदापर विवाहनधन धार्मिरूप में होता है, इसके विपरीत जहावर विवाहको धार्मिन नहीं माना है वहापर प्रेमका नाम निशान नही रहता है, सुखदुखका सहयागिताकी नात तो दूर रहा । व्यभिचारका दूषणावह प्रवृत्ति उसा देशमें मयादा रहित होती है कि जहा पर कि विवाह धार्मिकरूप नहीं है। साठ साठ मत्तर सत्तर वपकी स्त्रिया वहा पर अपने बिनाद बीस पत्रास पर लेता है। चल्कि असी वर्षकी अवस्थामै तैंतीस वा विवाह ईत्रिका में हुआ है, इससे व्यशिवार और अमानुषो वृत्योंका दृश्य सरको देखकर कप शाता है। कितनी ही लिया मोटरसे लूट जाती हैं और वाहे जिस श्रीमान् और जानकी त्राको कोई भी चाहे जर ले मता है, तलाक दिला पर एक चार नहीं अनेक वार ग्रहण पर सका है और छोड सकता है। अपनी आखोंके सामने व्यभिचार कराने पर भी नहीं रोक सता तय यहा पर पतिपत्नीमें प्रेम कैसे स्थिर और जाउन पयत रह सक्ता है ? और सुख दुबकी सहयोगिता रह सका है? ऐसे जीवनको पशुजीवन कहें तो मा कुछ हानि नहीं। ऐसा forट चारित्रहीन जीवन feet धार्मिरूप नहीं माननेसे ही होता है। निघना और सघनायें जहा पर व्यभिचार बढ़ाने के लिये अपने दो विवाह अनेक करती है यहा पर ब्रहावर्य किस प्रकार उहर सका है। जहा पर प्राणात होने पर भी मनसे परपुरुषकी अभिलाषा नहीं की जाती है वहा पर ही ब्रह्मचर्य व्रत नियमसे स्थिर होता है । जहापर विवाहको धार्मिक माना है चद्दापर ऐसी सुशील स्त्री होती हैं कि अनेक देवागना समान सुन्दर स्त्रिया राज्यके मलो भनको तुच्छ समझकर और अपने शील को उत्तम समझ कर प्राणोंको होमकर शील्की रक्षा करतो हैं । हैं परंतु पाश्चात्य देशमें लोभ और धनके प्रलोभनमें आकर स्त्रिया अपने पतिको मारकर तलाक देकर दश दश पाच पाच पति कर लेती हैं और फिर भी पूरा जीवन नहीं होता है यह सर विवाहको धार्मिक यधन नहीं समझनेका कटुक फल है । हजारों स्त्रियोंने अपने अपूर्व सुलोंको लातमारकर जंगलमें रहकर दुख सहन स्वीकार किया परंतु अपने पतिदेवको छोडकर बडे दो राजा महाराजा और श्रीमन्तोंको तुच्छ माना यह सत्र हको धार्मिक बधन माननेका ही फल है । वास्तव में शीलधर्म उसी देशमें ठीक दो पाया जा सकता है जहापर विवाह धार्मिक कार्य माना जाता है । आज भारतपर्व में भी पश्चिमी वातावरणोंका असर कुशिक्षासे होता जाता है इसीलिये विधवाविवाह नाबिनाह आदिके द्वारा व्यभिचार और पापकी वृद्धि करने में स्वार्थी कामातुर अज्ञानी तन मनसे लगे हुए है, होगको चई दो फायदेके गीत बतलाये जाते हैं परंतु आप्तरगमें भयानक पापको प्रवृत्ति भरी होता है। व्यभिचारकी वृद्धि जैसी आजकल नई रोशनीवाले पुस्पोंसे हो रही है वैसी अन्यसे नहीं। व्यभिचार बढाने के लिये नित्य नई स्कीमें तैयार की जाती हैं। कुत्ताओंमे व्यभिचार कराया जाना और astra ऐसी स्त्रिया घनाई जाती हैं या ऐसे साधन तैयार किये जाते हैं जिनसे व्यभिचार बढे यह शिक्षा और कुझान की महिमा है। तीन जैनसमाजवाद और समाविका पूर्वरंग प्रारभ होगया है और इसके द्वारा व्यभिचार एव पशुजीवनका प्रचार ऐसे ही कुशिक्षितोंके द्वारा हो रहा है। जिनको हिंदू ल माओके आदर्श जीवनका महत्व माद्रुम नहीं है जिससे भारत Far जिनको धर्मका मर्म मालूम नहीं है जो जिनके जिनागमका श्रद्धान नहीं है जिनको पावसे भव सधा नहीं है जिनको और कर्मफलका विश्वास नहीं है जिनको शील्पालन करनेकी नातिसे होनेवाली शुद्धताका ज्ञान नहीं है ऐमेही व्यक्ति पुशिक्षा और दुसगतिमें यहकर व्यभिचार वढानेके लिये विधवाविवाह और धवा विवाद हैं। असल में जिनको वचपन से ही कुशिक्षा प्रमाजस व्यभिचार की इत्सित आदत पड गई है, दूसरोंकी मा बहिनी तरफ लगाकर बचपनसे ही ले घरों को पक
सोशल मीडिया के दौर में फिल्मी सितारों को सबसे अधिक ट्रोलर का सामना करना पड़ता है। दरअसल, जहां फैंस सोशल मीडिया के माध्यम से अपने पसंदीदा सितारों के साथ आसानी से बातचीत कर सकते हैं तो वही आलोचना का भी यह कोई मौका नहीं छोड़ते हैं। ऐसे कई सितारे हैं जो आए दिन ट्रोलर्स के निशाने पर रहते हैं। हालांकि कई सितारों को इन सब बातों से कोई खास फर्क नहीं पड़ता तो कुछ सितारे इसे काफी पर्सनली ले लेते हैं जिसकी वजह से डिप्रेशन का भी शिकार हो जाते हैं। बता दे हाल ही में मशहूर सिंगर कुमार सानू की बेटी शैनन ने खुलासा किया कि वह ट्रोलर्स के कारण डिप्रेशन का शिकार हो गई थी। आइए जानते हैं कुमार सानू की बेटी शेनन ने क्या कहा? सबसे पहले तो हम आपको बता दें कि कुमार सानू की तरह उनकी बेटी शेनन भी एक मशहूर सिंगर है। इसके अलावा वह हॉलीवुड फिल्म 'द बिग फिड' में काम कर चुकी है। इतना ही नहीं बल्कि अब वह जल्द ही बॉलीवुड इंडस्ट्री में भी कदम रखने वाली है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि शेनन कुमार सानू की गोद ली हुई बेटी है। दरअसल, शेनन कुमार सानू की दूसरी पत्नी सलोनी की पहली शादी से हुई है। वहीं कुमार सानू की पहली पत्नी का नाम रीता भट्टाचार्य है जिनसे उनके तीन बच्चे, जिको, जस्सी और जान कुमार सानू हैं। हालाँकि साल 1994 में इन दोनों का तलाक हो गया। इसके बाद उन्होंने सलोनी से शादी की और दोनों की दो बेटियां हैं, जिनमें से एक शैनन को गोद लिया है जबकि उनकी दूसरी बेटी का नाम एना है। आगे उन्होंने बताया कि, "भगवान की दया से मेरे पास मेरी फैमिली और दोस्त हैं, जिन्होंने मुझे इस डार्क फेज से बाहर निकलने में मदद की। वो मेरे लिए बहुत बड़ा सबक था। अब मैं इस दौर में हूं कि दूसरों को मदद कर सकती हूं। मैं सबको बताना चाहती हूं कि किसी भी चीज का अंत नहीं है। हमेशा जब आपको सब खत्म लगे, तो याद रखें कि इस टनल के आखिर में एक रोशनी है। मैं इस फेज से गुजर चुकी हूं, मैं समझ सकती हूं कि ये क्या होता है। " बता दें शेनन स्टेज शो भी करती है।
सोशल मीडिया के दौर में फिल्मी सितारों को सबसे अधिक ट्रोलर का सामना करना पड़ता है। दरअसल, जहां फैंस सोशल मीडिया के माध्यम से अपने पसंदीदा सितारों के साथ आसानी से बातचीत कर सकते हैं तो वही आलोचना का भी यह कोई मौका नहीं छोड़ते हैं। ऐसे कई सितारे हैं जो आए दिन ट्रोलर्स के निशाने पर रहते हैं। हालांकि कई सितारों को इन सब बातों से कोई खास फर्क नहीं पड़ता तो कुछ सितारे इसे काफी पर्सनली ले लेते हैं जिसकी वजह से डिप्रेशन का भी शिकार हो जाते हैं। बता दे हाल ही में मशहूर सिंगर कुमार सानू की बेटी शैनन ने खुलासा किया कि वह ट्रोलर्स के कारण डिप्रेशन का शिकार हो गई थी। आइए जानते हैं कुमार सानू की बेटी शेनन ने क्या कहा? सबसे पहले तो हम आपको बता दें कि कुमार सानू की तरह उनकी बेटी शेनन भी एक मशहूर सिंगर है। इसके अलावा वह हॉलीवुड फिल्म 'द बिग फिड' में काम कर चुकी है। इतना ही नहीं बल्कि अब वह जल्द ही बॉलीवुड इंडस्ट्री में भी कदम रखने वाली है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि शेनन कुमार सानू की गोद ली हुई बेटी है। दरअसल, शेनन कुमार सानू की दूसरी पत्नी सलोनी की पहली शादी से हुई है। वहीं कुमार सानू की पहली पत्नी का नाम रीता भट्टाचार्य है जिनसे उनके तीन बच्चे, जिको, जस्सी और जान कुमार सानू हैं। हालाँकि साल एक हज़ार नौ सौ चौरानवे में इन दोनों का तलाक हो गया। इसके बाद उन्होंने सलोनी से शादी की और दोनों की दो बेटियां हैं, जिनमें से एक शैनन को गोद लिया है जबकि उनकी दूसरी बेटी का नाम एना है। आगे उन्होंने बताया कि, "भगवान की दया से मेरे पास मेरी फैमिली और दोस्त हैं, जिन्होंने मुझे इस डार्क फेज से बाहर निकलने में मदद की। वो मेरे लिए बहुत बड़ा सबक था। अब मैं इस दौर में हूं कि दूसरों को मदद कर सकती हूं। मैं सबको बताना चाहती हूं कि किसी भी चीज का अंत नहीं है। हमेशा जब आपको सब खत्म लगे, तो याद रखें कि इस टनल के आखिर में एक रोशनी है। मैं इस फेज से गुजर चुकी हूं, मैं समझ सकती हूं कि ये क्या होता है। " बता दें शेनन स्टेज शो भी करती है।
पंतनगर सिडकुल में जहां चीन और थाईलैंड की कंपनियां भारी निवेश के लिए उत्साहित हैं, वहीं देश की प्रसिद्ध टाटा कंपनी ने यहां स्थित सूमो का प्लांट बंद कर दिया है। इससे करीब 1200 कर्मचारियों पर रोजगार का संकट पैदा हो गया है। उधर, टाटा प्रबंधन का कहना है कि डिमांड कम होने से सूमो का प्लांट फिलहाल बंद करना पड़ रहा है, जबकि कंपनी सूत्रों का कहना है कि टाटा अपना प्लांट अब पूना या गुजरात के सानंद में शिफ्ट करने जा रहा है। बता दें कि 15 अप्रैल को पंतनगर सिडकुल में टाटा कंपनी को केंद्र सरकार से मिलने वाली एक्साइज छूट खत्म हो रही है। इससे कंपनी अब अपना प्लांट कहीं अन्यंत्र शिफ्ट करने की तैयारी में है। वर्ष-2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने ही पंतनगर सिडकुल को अपने ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल करते हुए यहां 500 से अधिक उद्योगों को स्थापित किया था। एनडी तिवारी पंतनगर सिडकुल में टाटा को कंपनी की शर्तों पर लाए थे। इसमें एयरपोर्ट के ही नजदीप विशाल भूखंड में टाटा को जमीन उपलब्ध कराई गई थी। इसके बाद टाटा ने यहां व्यापक स्तर पर उत्पादन किया। अपनी लखटकिया नैनो कार के प्लांट को भी टाटा ने यहां स्थातिप किया था, लेकिन चार साल पहले टाटा ने नैनो के प्लांट को यहां से अन्यत्र शिफ्ट कर दिया। उधर फैक्ट्री सूत्रों का कहना है कि पंतनगर सिडकुल में टाटा ने ट्रकों का उत्पादन भी 50 प्रतिशत कम कर दिया है। इस तरह से लगातार घट रहे टाटा के उत्पादन से यहां काम करने वाले कर्मचारियों को रोजगार छिनने का भय सताने लगा है। टाटा के फैक्ट्री प्रबंधन के मुताबिक वर्तमान में टाटा कंपनी से करीब दस हजार लोग सीधे तौर पर रोजगार से जुड़े हैं, इसमें करीब पांच हजार लोग स्थाई कर्मचारी है और पांच हजार वेंडर कंपनियों से जुड़े हैं, जिनमें सिक्योरिटी, कैंटीन और लेबर कांट्रेक्ट के जरिए भी लोग रोजगार से जुड़े हैं। सूमो प्लांट बंद होने से करीब 1200 कर्मचारी प्रभावित होंगे। फैक्ट्री प्रबंधन का कहना है कि सूमो की डिमांड कम होने के कारण प्लांट को फिलहाल बंद करने का निर्णय कारपोरेट से लिया गया है। डिमांड बढ़ी तो फिर से प्लांट सुचारू किया जा सकता है, जबकि फैक्ट्री के ही सूत्रों का कहना है कि टाटा आरिस कार का प्लांट भी बंद करने की तैयारी में है और इसे धारवाड़ गुजरात में शिफ्ट किया जा सकता है। सूत्रों का यह भी कहना है कि वर्तमान में टाटा के ट्रकों की भी बाजार में डिमांड कम हो गई है, इसलिए पंतनगर सिडकुल के टाटा प्लांट में फिलहाल ट्रकों का उत्पादन भी सीधे तौर 50 प्रतिशत तक घट गया है, इससे भी टाटा से जुड़ी वेंडर कंपनियों के कर्मचारियों में घबराहट है।
पंतनगर सिडकुल में जहां चीन और थाईलैंड की कंपनियां भारी निवेश के लिए उत्साहित हैं, वहीं देश की प्रसिद्ध टाटा कंपनी ने यहां स्थित सूमो का प्लांट बंद कर दिया है। इससे करीब एक हज़ार दो सौ कर्मचारियों पर रोजगार का संकट पैदा हो गया है। उधर, टाटा प्रबंधन का कहना है कि डिमांड कम होने से सूमो का प्लांट फिलहाल बंद करना पड़ रहा है, जबकि कंपनी सूत्रों का कहना है कि टाटा अपना प्लांट अब पूना या गुजरात के सानंद में शिफ्ट करने जा रहा है। बता दें कि पंद्रह अप्रैल को पंतनगर सिडकुल में टाटा कंपनी को केंद्र सरकार से मिलने वाली एक्साइज छूट खत्म हो रही है। इससे कंपनी अब अपना प्लांट कहीं अन्यंत्र शिफ्ट करने की तैयारी में है। वर्ष-दो हज़ार पाँच में तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने ही पंतनगर सिडकुल को अपने ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल करते हुए यहां पाँच सौ से अधिक उद्योगों को स्थापित किया था। एनडी तिवारी पंतनगर सिडकुल में टाटा को कंपनी की शर्तों पर लाए थे। इसमें एयरपोर्ट के ही नजदीप विशाल भूखंड में टाटा को जमीन उपलब्ध कराई गई थी। इसके बाद टाटा ने यहां व्यापक स्तर पर उत्पादन किया। अपनी लखटकिया नैनो कार के प्लांट को भी टाटा ने यहां स्थातिप किया था, लेकिन चार साल पहले टाटा ने नैनो के प्लांट को यहां से अन्यत्र शिफ्ट कर दिया। उधर फैक्ट्री सूत्रों का कहना है कि पंतनगर सिडकुल में टाटा ने ट्रकों का उत्पादन भी पचास प्रतिशत कम कर दिया है। इस तरह से लगातार घट रहे टाटा के उत्पादन से यहां काम करने वाले कर्मचारियों को रोजगार छिनने का भय सताने लगा है। टाटा के फैक्ट्री प्रबंधन के मुताबिक वर्तमान में टाटा कंपनी से करीब दस हजार लोग सीधे तौर पर रोजगार से जुड़े हैं, इसमें करीब पांच हजार लोग स्थाई कर्मचारी है और पांच हजार वेंडर कंपनियों से जुड़े हैं, जिनमें सिक्योरिटी, कैंटीन और लेबर कांट्रेक्ट के जरिए भी लोग रोजगार से जुड़े हैं। सूमो प्लांट बंद होने से करीब एक हज़ार दो सौ कर्मचारी प्रभावित होंगे। फैक्ट्री प्रबंधन का कहना है कि सूमो की डिमांड कम होने के कारण प्लांट को फिलहाल बंद करने का निर्णय कारपोरेट से लिया गया है। डिमांड बढ़ी तो फिर से प्लांट सुचारू किया जा सकता है, जबकि फैक्ट्री के ही सूत्रों का कहना है कि टाटा आरिस कार का प्लांट भी बंद करने की तैयारी में है और इसे धारवाड़ गुजरात में शिफ्ट किया जा सकता है। सूत्रों का यह भी कहना है कि वर्तमान में टाटा के ट्रकों की भी बाजार में डिमांड कम हो गई है, इसलिए पंतनगर सिडकुल के टाटा प्लांट में फिलहाल ट्रकों का उत्पादन भी सीधे तौर पचास प्रतिशत तक घट गया है, इससे भी टाटा से जुड़ी वेंडर कंपनियों के कर्मचारियों में घबराहट है।
जैसा कि आप जानते हैं यह इस ब्लॉग श्रृंखला का पार्ट-3 है और इस भाग में मैं आपको उन करों के बारे में जानकारी देना चाहता था जो भारत के नागरिक होने के कारण आपको देने होते हैं. फिलहाल तो इतना ही बताये देता हूँ कि हर हिन्दुस्तानी अपनी कमाई का करीब 60 प्रतिशत सरकार के हवाले कर देता है. चौंकिए मत परन्तु यही कटु सत्य है. मैं इसके आंकड़े अगले भाग में दूंगा क्योंकि कल अचानक वित्त मंत्री महोदय ने काले धन पर एक श्वेत पत्र (white paper ) संसद में पेश किया जो कहीं से सफ़ेद नहीं लग रहा बल्कि कालिख और झूठ का पुलिंदा कहा जा सकता है. इसमें सरकार ने कोई नयी बात सामने नहीं रखी. बस वही लीपापोती वाला विश्लेषण कि सरकार क्या-क्या कदम उठाने जा रही है और ऐसे कौनसे उपाय किये जाने चाहिए जिस से अर्थ व्यवस्था में ब्लैक मनी (काला धन ) पैदा ना हो सके. ये फ़िज़ूल की बातें तो सरकार एक अरसे से कर रही है जबकि आज तक इस सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है. सबसे आश्चर्यजनक बात तो ये है की सरकार विदेशी बैंकों में जमा काले धन की बात तो स्वीकार कर रही है परन्तु उन खाताधारियों के नाम देने से कतरा रही है जिन्होंने यह पैसा जमा कराया है. जाहिर है ऐसा करने से बहुत से राजनेता और सरकारी आला अफसर बेनकाब हो जायेंगें. जहां तक ब्लेक मनी का सवाल है यह सिर्फ विदेशों तक ही सीमित नहीं है बल्कि देश में भी इसका व्यापक सर्कुलेशन है. इस श्वेत पत्र में भी कहा गया है की तीन तरह से ब्लेक मनी जेनरेट हो रही है. एक तो प्राकृतिक संसाधनों के दोहन (exploitation ) द्वारा , दुसरे व्यापारिक लेनदेनों में, तीसरे रियल इस्टेट (भूमि-भवन आदि) के सौदों में जहां कमाई छुपाने के लिए दो नंबर के धंदे आम बात है. याने सरकार को सब पता है और इनकम टेक्स विभाग भी यह सब पकड़ने में समर्थ है पर राजनितिक इच्छा शक्ति आड़े आ जाती है क्योंकि एक तो भ्रष्टाचार है और दूजे राजनेता, अफसर और बड़े उद्योगपति/व्यापारी तथा कार्पोरेट्स इस में संलिप्त हैं. खुद सी. ए. हूँ इस लिए आपको बताना चाहूँगा की इस देश में पिछले कई दशकों से तथाकथित एंट्रियों, हवाला और प्रोफिट /लास लेन देन का एक पूरा जाल बिछा हुआ है जिस में चार्टर्ड एकाउन्तेंट्स की भी भूमिका होती है. ये लेनदेन बड़ी आसानी से पकडे भी जा सकते हैं पर आय कर विभाग में इतना भ्रष्टाचार है की स्क्रूटनी होने के बावजूद भी ले दे कर मामले रफा दफा हो जाते हैं. जहां तक प्राकृतिक संसाधनों का प्रश्न है यह केवल ब्लेक मनी की बात नहीं है बल्कि राष्ट्र द्रोह की श्रेणी में आते हैं क्योंकि नेता/अफसर मिल कर धोखाघडी से माईनिंग लीज देते हैं क्योंकि अरबों करोड़ रुपये ब्लेक मनी मिलती है. यहाँ ये लोग अवैध खनन करते हुए ये भी नहीं सोचते की इस से पर्यावरण को स्थायी क्षति (permanent damage ) पहुंचेगा. अभी कर्नाटक और गोवा ऐसे नुक्सान की जीती जागती मिसाल है. फिर इसे राष्ट्र द्रोह नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगें. उन गरीब आदिवासियों के बारे में क्या कहेंगें जो सदियों से इन इलाकों में रहते आये हैं और आज इन काला बाजारियों के कारण तबाह हो चुके है. स्पेक्ट्रम भी ऐसा ही संसाधन और ए. राजा ने जो लूट इसे बेचने में मचाई उसकी मिसाल तो दुनिया भर में नहीं मिलती. अभी कल ही आडिटर जनरल की रपोर्ट आई है कि कोयला खदाने (coal Belts ) की नीलामी में एक लाख अस्सी हज़ार करोड़ रुपये को चूना लगाया गया है तो कल्पना कीजीये की कितनी रिश्वतखोरी हुयी होगी. अब ये बिचारे स्विस बैंकों में ऐसा काला धन नहीं जमा कराएं तो कहाँ जाएँ, कहाँ छ्पायें इतना धन. रियल एस्टेट की कहानी तो और भी अजीब है जैसे 'अजब प्रेम की गज़ब कहानी हो' क्योंकि इसमें काला पैसा लगाया भी जाता है और इसी से पैदा भी किया जाता है. स्टाम्प ड्यूटी बचाने के लिए बहुत कम रकम (amount ) पर रजिस्ट्री कराई जाती है और बाकी पैसा दो नंबर याने काला धन होता है. बड़े बड़े राजनेताओं का हजारों करोड़ रुपया इस में लगा हुआ है. कोई आश्चर्य की बात नहीं. मायावती शासनकाल में उत्तर प्रदेश में जितना रियल एस्टेट का कारोबार हुआ शायद पूरी दुनिया में नहीं हुआ. बाकी अंदाजा आप लगाते रहिये. यह सरकारें (central and state ) छोटे-छोटे व्यापारियों, दुकानदारों और कारोबारियों पर तो रोज रोज इनकम टेक्स और सेल टेक्स आदि के नाम पर छापा मारती रहती है जबकि बड़े ताकतवर और रशूक वालों को छूने से भी कतराती है. यह इस देश की जनता के साथ कितनी बड़ी गद्दारी है आप अंदाजा तक नहीं लगा सकते, सर्कार के अनुसार मुश्किल से 400 लाख डालर (भारत की ब्लेक मनी ) विदेशों में जमा है. बाबा रामदेव का आंकड़ा 4200 लाख है और एक स्वयंसेवी वित्तीय संस्था (NGO ) के अनुसार यह राशि 5600 लाख होगी. हालांकि ये सब अनुमानों पर आधारित है परन्तु अगर दृढ इच्छा शक्ति हो तो सच्चाई निश्चय ही पता लग सकती है. फिलहाल तो आप सरकार से ये पूछिए की जितने नाम उनके पास हैं उन सभी खाताधारियों के नाम क्यों नहीं उजागर कर रही. इस श्वेत पत्र की पेज संख्या ६८ पर चिंता जाहिर की गयी है की नाम खोल देने से टेक्स चोरों के मानवाधिकार का उल्लंघन होगा; गोया 120 करोड़ हिन्दुस्तानी जिनसे ये पैसा लूटा गया उनके तो कोई मानवाधिकार हैं ही नहीं. जरा सोचिये मैं क्यों इतना खिलाफ लिख रहा हूँ और कितनी हास्यास्पद दलील है इस महान भारत सरकार की. अगली कड़ी का इंतज़ार करिए. हम आप को बतायेंगें आप कौन-कौन से टेक्स दे कर इस सरकारी दानव का पेट भर रहे है.
जैसा कि आप जानते हैं यह इस ब्लॉग श्रृंखला का पार्ट-तीन है और इस भाग में मैं आपको उन करों के बारे में जानकारी देना चाहता था जो भारत के नागरिक होने के कारण आपको देने होते हैं. फिलहाल तो इतना ही बताये देता हूँ कि हर हिन्दुस्तानी अपनी कमाई का करीब साठ प्रतिशत सरकार के हवाले कर देता है. चौंकिए मत परन्तु यही कटु सत्य है. मैं इसके आंकड़े अगले भाग में दूंगा क्योंकि कल अचानक वित्त मंत्री महोदय ने काले धन पर एक श्वेत पत्र संसद में पेश किया जो कहीं से सफ़ेद नहीं लग रहा बल्कि कालिख और झूठ का पुलिंदा कहा जा सकता है. इसमें सरकार ने कोई नयी बात सामने नहीं रखी. बस वही लीपापोती वाला विश्लेषण कि सरकार क्या-क्या कदम उठाने जा रही है और ऐसे कौनसे उपाय किये जाने चाहिए जिस से अर्थ व्यवस्था में ब्लैक मनी पैदा ना हो सके. ये फ़िज़ूल की बातें तो सरकार एक अरसे से कर रही है जबकि आज तक इस सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है. सबसे आश्चर्यजनक बात तो ये है की सरकार विदेशी बैंकों में जमा काले धन की बात तो स्वीकार कर रही है परन्तु उन खाताधारियों के नाम देने से कतरा रही है जिन्होंने यह पैसा जमा कराया है. जाहिर है ऐसा करने से बहुत से राजनेता और सरकारी आला अफसर बेनकाब हो जायेंगें. जहां तक ब्लेक मनी का सवाल है यह सिर्फ विदेशों तक ही सीमित नहीं है बल्कि देश में भी इसका व्यापक सर्कुलेशन है. इस श्वेत पत्र में भी कहा गया है की तीन तरह से ब्लेक मनी जेनरेट हो रही है. एक तो प्राकृतिक संसाधनों के दोहन द्वारा , दुसरे व्यापारिक लेनदेनों में, तीसरे रियल इस्टेट के सौदों में जहां कमाई छुपाने के लिए दो नंबर के धंदे आम बात है. याने सरकार को सब पता है और इनकम टेक्स विभाग भी यह सब पकड़ने में समर्थ है पर राजनितिक इच्छा शक्ति आड़े आ जाती है क्योंकि एक तो भ्रष्टाचार है और दूजे राजनेता, अफसर और बड़े उद्योगपति/व्यापारी तथा कार्पोरेट्स इस में संलिप्त हैं. खुद सी. ए. हूँ इस लिए आपको बताना चाहूँगा की इस देश में पिछले कई दशकों से तथाकथित एंट्रियों, हवाला और प्रोफिट /लास लेन देन का एक पूरा जाल बिछा हुआ है जिस में चार्टर्ड एकाउन्तेंट्स की भी भूमिका होती है. ये लेनदेन बड़ी आसानी से पकडे भी जा सकते हैं पर आय कर विभाग में इतना भ्रष्टाचार है की स्क्रूटनी होने के बावजूद भी ले दे कर मामले रफा दफा हो जाते हैं. जहां तक प्राकृतिक संसाधनों का प्रश्न है यह केवल ब्लेक मनी की बात नहीं है बल्कि राष्ट्र द्रोह की श्रेणी में आते हैं क्योंकि नेता/अफसर मिल कर धोखाघडी से माईनिंग लीज देते हैं क्योंकि अरबों करोड़ रुपये ब्लेक मनी मिलती है. यहाँ ये लोग अवैध खनन करते हुए ये भी नहीं सोचते की इस से पर्यावरण को स्थायी क्षति पहुंचेगा. अभी कर्नाटक और गोवा ऐसे नुक्सान की जीती जागती मिसाल है. फिर इसे राष्ट्र द्रोह नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगें. उन गरीब आदिवासियों के बारे में क्या कहेंगें जो सदियों से इन इलाकों में रहते आये हैं और आज इन काला बाजारियों के कारण तबाह हो चुके है. स्पेक्ट्रम भी ऐसा ही संसाधन और ए. राजा ने जो लूट इसे बेचने में मचाई उसकी मिसाल तो दुनिया भर में नहीं मिलती. अभी कल ही आडिटर जनरल की रपोर्ट आई है कि कोयला खदाने की नीलामी में एक लाख अस्सी हज़ार करोड़ रुपये को चूना लगाया गया है तो कल्पना कीजीये की कितनी रिश्वतखोरी हुयी होगी. अब ये बिचारे स्विस बैंकों में ऐसा काला धन नहीं जमा कराएं तो कहाँ जाएँ, कहाँ छ्पायें इतना धन. रियल एस्टेट की कहानी तो और भी अजीब है जैसे 'अजब प्रेम की गज़ब कहानी हो' क्योंकि इसमें काला पैसा लगाया भी जाता है और इसी से पैदा भी किया जाता है. स्टाम्प ड्यूटी बचाने के लिए बहुत कम रकम पर रजिस्ट्री कराई जाती है और बाकी पैसा दो नंबर याने काला धन होता है. बड़े बड़े राजनेताओं का हजारों करोड़ रुपया इस में लगा हुआ है. कोई आश्चर्य की बात नहीं. मायावती शासनकाल में उत्तर प्रदेश में जितना रियल एस्टेट का कारोबार हुआ शायद पूरी दुनिया में नहीं हुआ. बाकी अंदाजा आप लगाते रहिये. यह सरकारें छोटे-छोटे व्यापारियों, दुकानदारों और कारोबारियों पर तो रोज रोज इनकम टेक्स और सेल टेक्स आदि के नाम पर छापा मारती रहती है जबकि बड़े ताकतवर और रशूक वालों को छूने से भी कतराती है. यह इस देश की जनता के साथ कितनी बड़ी गद्दारी है आप अंदाजा तक नहीं लगा सकते, सर्कार के अनुसार मुश्किल से चार सौ लाख डालर विदेशों में जमा है. बाबा रामदेव का आंकड़ा चार हज़ार दो सौ लाख है और एक स्वयंसेवी वित्तीय संस्था के अनुसार यह राशि पाँच हज़ार छः सौ लाख होगी. हालांकि ये सब अनुमानों पर आधारित है परन्तु अगर दृढ इच्छा शक्ति हो तो सच्चाई निश्चय ही पता लग सकती है. फिलहाल तो आप सरकार से ये पूछिए की जितने नाम उनके पास हैं उन सभी खाताधारियों के नाम क्यों नहीं उजागर कर रही. इस श्वेत पत्र की पेज संख्या अड़सठ पर चिंता जाहिर की गयी है की नाम खोल देने से टेक्स चोरों के मानवाधिकार का उल्लंघन होगा; गोया एक सौ बीस करोड़ हिन्दुस्तानी जिनसे ये पैसा लूटा गया उनके तो कोई मानवाधिकार हैं ही नहीं. जरा सोचिये मैं क्यों इतना खिलाफ लिख रहा हूँ और कितनी हास्यास्पद दलील है इस महान भारत सरकार की. अगली कड़ी का इंतज़ार करिए. हम आप को बतायेंगें आप कौन-कौन से टेक्स दे कर इस सरकारी दानव का पेट भर रहे है.
राज्यपाल राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति भी हैं। वह सुबह 11 बजे विश्वविद्यालय परिसर में पहुंचे और कुलपति के साथ बैठक में भाग लिया। करीब एक घंटे तक चली बैठक में प्रो-वाइस चांसलर, रजिस्ट्रार और विभिन्न विभागों के प्रमुख भी शामिल हुए। यादवपुर विश्वविद्यालय परिसर में उग्र छात्रों की भीड़ द्वारा किए गए घेराव से केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो को 'सुरक्षित निकालने' के एक माह बाद शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ विश्वविद्यालय की 'कोर्ट' बैठक में शामिल हुए। यह बैठक विश्वविद्यालय द्वारा प्रदान की जाने वाली मानद डिग्री होनोरिस कॉसा के नामों का फैसला करने के संबंध में हुई। राज्यपाल राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति भी हैं। वह सुबह 11 बजे विश्वविद्यालय परिसर में पहुंचे और कुलपति के साथ बैठक में भाग लिया। करीब एक घंटे तक चली बैठक में प्रो-वाइस चांसलर, रजिस्ट्रार और विभिन्न विभागों के प्रमुख भी शामिल हुए। अंतरराष्ट्रीय संबंध विभाग के प्रमुख ओमप्रकाश मिश्रा के मुताबिक राज्यपाल से 'कोर्ट' द्वारा सर्वसम्मति से लिए मानद डिग्री प्रदान करने के लिए तय किए गए चार नामों पर गौर करने का आग्रह किया गया। राज्यपाल ने प्रस्ताव पर सहमति जताई या नहीं, यह पूछने पर मिश्रा ने कहा कि हालांकि उन्होंने इसका विरोध नहीं किया लेकिन यह भी स्पष्ट कर दिया कि आगे से निर्णय लेने की प्रक्रिया में उन्हें शामिल किया जाना चाहिए। बता दें कि 19 सितंबर को विश्वविद्यालय में बाबुल सुप्रियो को काले झंडे दिखाए गए और विद्यार्थियों के एक धड़े ने उनके साथ धक्का-मुक्की की थी। उन्हें परिसर से बाहर जाने से भी रोका गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए धनखड़ को वहां पहुंचना पड़ा।
राज्यपाल राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति भी हैं। वह सुबह ग्यारह बजे विश्वविद्यालय परिसर में पहुंचे और कुलपति के साथ बैठक में भाग लिया। करीब एक घंटे तक चली बैठक में प्रो-वाइस चांसलर, रजिस्ट्रार और विभिन्न विभागों के प्रमुख भी शामिल हुए। यादवपुर विश्वविद्यालय परिसर में उग्र छात्रों की भीड़ द्वारा किए गए घेराव से केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो को 'सुरक्षित निकालने' के एक माह बाद शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ विश्वविद्यालय की 'कोर्ट' बैठक में शामिल हुए। यह बैठक विश्वविद्यालय द्वारा प्रदान की जाने वाली मानद डिग्री होनोरिस कॉसा के नामों का फैसला करने के संबंध में हुई। राज्यपाल राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति भी हैं। वह सुबह ग्यारह बजे विश्वविद्यालय परिसर में पहुंचे और कुलपति के साथ बैठक में भाग लिया। करीब एक घंटे तक चली बैठक में प्रो-वाइस चांसलर, रजिस्ट्रार और विभिन्न विभागों के प्रमुख भी शामिल हुए। अंतरराष्ट्रीय संबंध विभाग के प्रमुख ओमप्रकाश मिश्रा के मुताबिक राज्यपाल से 'कोर्ट' द्वारा सर्वसम्मति से लिए मानद डिग्री प्रदान करने के लिए तय किए गए चार नामों पर गौर करने का आग्रह किया गया। राज्यपाल ने प्रस्ताव पर सहमति जताई या नहीं, यह पूछने पर मिश्रा ने कहा कि हालांकि उन्होंने इसका विरोध नहीं किया लेकिन यह भी स्पष्ट कर दिया कि आगे से निर्णय लेने की प्रक्रिया में उन्हें शामिल किया जाना चाहिए। बता दें कि उन्नीस सितंबर को विश्वविद्यालय में बाबुल सुप्रियो को काले झंडे दिखाए गए और विद्यार्थियों के एक धड़े ने उनके साथ धक्का-मुक्की की थी। उन्हें परिसर से बाहर जाने से भी रोका गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए धनखड़ को वहां पहुंचना पड़ा।
मुंबई प्रदेश राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने देश के शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दिया। अशोक राज आहूजा ने समस्त भारतवासियों के खुशहाली के लिए ख्वाजा गरीब नवाज से दुवाएं मांगी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अपमान करने वालों के विरुद्ध कांग्रेसियों ने किया प्रदर्शन। मुंबई में सेकड़ो कार्यकर्ताओ ने सेवादल का राज्यस्तरीय प्रशिक्षण लिया। सेवादल का राज्यस्तरीय तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ किया गया। दुनिया में शांति के दूत माने जाने वाले गांधी को गोडसे भक्त ने गोली मारी । गणतंत्र दिवस पर प्रीमियर होगा 'मैं कुछ भी कर सकती हूँ' अशोक राज आहूजा के मार्गदर्शन में मुंबई में बाल सेवादल का शुभारंभ किया किया गया। Late Post । यहा मिलता है भूखो को मुफ्त में खाना । अल अंसार के समाजसेवक अजमेरी शेख से खास मुलाकात ।
मुंबई प्रदेश राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने देश के शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दिया। अशोक राज आहूजा ने समस्त भारतवासियों के खुशहाली के लिए ख्वाजा गरीब नवाज से दुवाएं मांगी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अपमान करने वालों के विरुद्ध कांग्रेसियों ने किया प्रदर्शन। मुंबई में सेकड़ो कार्यकर्ताओ ने सेवादल का राज्यस्तरीय प्रशिक्षण लिया। सेवादल का राज्यस्तरीय तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ किया गया। दुनिया में शांति के दूत माने जाने वाले गांधी को गोडसे भक्त ने गोली मारी । गणतंत्र दिवस पर प्रीमियर होगा 'मैं कुछ भी कर सकती हूँ' अशोक राज आहूजा के मार्गदर्शन में मुंबई में बाल सेवादल का शुभारंभ किया किया गया। Late Post । यहा मिलता है भूखो को मुफ्त में खाना । अल अंसार के समाजसेवक अजमेरी शेख से खास मुलाकात ।
ऑस्ट्रेलिया ने वेस्टइंडीज के खिलाफ पहला वनडे मुकाबला 164 रन से जीता. ऑस्ट्रेलिया की जीत के हीरो मार्नस लाबुशेन रहे. बल्ले और गेंद दोनों के दम पर ऑस्ट्रेलिया ने पहले टेस्ट मुकाबले में वेस्टइंडीज को 164 रन से धो दिया. मेजबान ऑस्ट्रेलिया ने कैरेबियाई टीम को 498 रन का लक्ष्य दिया था, जिसके जवाब में नाथन लायन की कोहराम मचाती गेंदों के सामने कैरेबियाई टीम 333 रन पर ही सिमट गई. इसी के साथ ऑस्ट्रेलिया ने 2 टेस्ट मैचों की सीरीज में 1-0 से बढ़त हासिल कर ली है. ऑस्ट्रेलिया की जीत के हीरो मार्नस लाबुशेन रहे, जिन्होंने पहली पारी में दोहरा शतक और दूसरी पारी में शतक जड़ा. लाजवाब बल्लेबाजी के दम पर वो प्लेयर ऑफ द मैच रहे. ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 4 विकेट पर 598 रन बनाकर अपनी पहली पारी घोषित की थी. लाबुशेन ने पहली पारी में 204 रन बनाए, जबकि स्टीव स्मिथ 200 रन पर नाबाद रहे. ट्रेविस हेड ने 99 रन की पारी खेली. इसके बाद ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों ने कोहराम मचाया और वेस्टइंडीज की पहली पारी को 283 रन पर ही समेट दिया. मिचेल स्टार्क और पैट कमिंस दोनों ने 3-3 विकेट लिए, जबकि नाथन लायन ने पहली पारी में 2 विकेट लिए. विंडीज की तरफ से क्रेग ब्रेथवेट और चंद्रपॉल ही ऑस्ट्रेलियाई अटैक का सामना कर पाए. दोनों ने पहली पारी में अर्धशतक जड़ा. Nathan Lyon seals it in Perth! पहली पारी में बढ़त हासिल करने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम ने 2 विकेट पर 182 रन बनाकर अपनी दूसरी पारी घोषित की और मेहमान टीम के सामने जीत के लिए 498 रन का पहाड़ जैसा लक्ष्य रख दिया. दूसरी पारी में लाबुशेन 104 रन पर नाबाद रहे. लक्ष्य का पीछा करने उतरी विंडीज टीम की तरफ से इस बार ब्रेथवेट और रोस्टन चेज ही कुछ समय मैदान पर बिता पाए. ब्रेथवेट ने 110 रन बनाए, जबकि रोस्टन ने 55 रन बनाए. विंडीज टीम ने लायन के आगे घुटने टेक दिए. लायन ने 128 रन पर 6 विकेट लेकर मेहमान टीम को 333 रन पर समेट दिया.
ऑस्ट्रेलिया ने वेस्टइंडीज के खिलाफ पहला वनडे मुकाबला एक सौ चौंसठ रन से जीता. ऑस्ट्रेलिया की जीत के हीरो मार्नस लाबुशेन रहे. बल्ले और गेंद दोनों के दम पर ऑस्ट्रेलिया ने पहले टेस्ट मुकाबले में वेस्टइंडीज को एक सौ चौंसठ रन से धो दिया. मेजबान ऑस्ट्रेलिया ने कैरेबियाई टीम को चार सौ अट्ठानवे रन का लक्ष्य दिया था, जिसके जवाब में नाथन लायन की कोहराम मचाती गेंदों के सामने कैरेबियाई टीम तीन सौ तैंतीस रन पर ही सिमट गई. इसी के साथ ऑस्ट्रेलिया ने दो टेस्ट मैचों की सीरीज में एक-शून्य से बढ़त हासिल कर ली है. ऑस्ट्रेलिया की जीत के हीरो मार्नस लाबुशेन रहे, जिन्होंने पहली पारी में दोहरा शतक और दूसरी पारी में शतक जड़ा. लाजवाब बल्लेबाजी के दम पर वो प्लेयर ऑफ द मैच रहे. ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए चार विकेट पर पाँच सौ अट्ठानवे रन बनाकर अपनी पहली पारी घोषित की थी. लाबुशेन ने पहली पारी में दो सौ चार रन बनाए, जबकि स्टीव स्मिथ दो सौ रन पर नाबाद रहे. ट्रेविस हेड ने निन्यानवे रन की पारी खेली. इसके बाद ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों ने कोहराम मचाया और वेस्टइंडीज की पहली पारी को दो सौ तिरासी रन पर ही समेट दिया. मिचेल स्टार्क और पैट कमिंस दोनों ने तीन-तीन विकेट लिए, जबकि नाथन लायन ने पहली पारी में दो विकेट लिए. विंडीज की तरफ से क्रेग ब्रेथवेट और चंद्रपॉल ही ऑस्ट्रेलियाई अटैक का सामना कर पाए. दोनों ने पहली पारी में अर्धशतक जड़ा. Nathan Lyon seals it in Perth! पहली पारी में बढ़त हासिल करने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम ने दो विकेट पर एक सौ बयासी रन बनाकर अपनी दूसरी पारी घोषित की और मेहमान टीम के सामने जीत के लिए चार सौ अट्ठानवे रन का पहाड़ जैसा लक्ष्य रख दिया. दूसरी पारी में लाबुशेन एक सौ चार रन पर नाबाद रहे. लक्ष्य का पीछा करने उतरी विंडीज टीम की तरफ से इस बार ब्रेथवेट और रोस्टन चेज ही कुछ समय मैदान पर बिता पाए. ब्रेथवेट ने एक सौ दस रन बनाए, जबकि रोस्टन ने पचपन रन बनाए. विंडीज टीम ने लायन के आगे घुटने टेक दिए. लायन ने एक सौ अट्ठाईस रन पर छः विकेट लेकर मेहमान टीम को तीन सौ तैंतीस रन पर समेट दिया.
डीएमआरसी ने एक बयान में कहा, 31 अक्टूबर (सोमवार) को 'रन फॉर यूनिटी' के प्रतिभागियों की सुविधा के लिए, दिल्ली मेट्रो ट्रेन सेवाएं सभी लाइनों के टर्मिनल स्टेशनों से तड़के चार बजे से शुरू होंगी। सभी स्टेशनों पर सुबह छह बजे तक हर आधे घंटे पर एक ट्रेन पहुंचेगी। डीएमआरसी के अधिकारियों ने बताया कि सुबह छह बजे के बाद दिन भर सामान्य टाइम टेबल के अनुसार ट्रेन चलेंगी। नेहरू युवा केंद्र की तरफ से सरदार पटेल के जन्मदिन पर देशभर में इस रन फॉर यूनिटी का आयोजन किया जा रहा है। नेहरू युवा केंद्र सरदार पटेल के जन्मदिवस को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मना रहा है।
डीएमआरसी ने एक बयान में कहा, इकतीस अक्टूबर को 'रन फॉर यूनिटी' के प्रतिभागियों की सुविधा के लिए, दिल्ली मेट्रो ट्रेन सेवाएं सभी लाइनों के टर्मिनल स्टेशनों से तड़के चार बजे से शुरू होंगी। सभी स्टेशनों पर सुबह छह बजे तक हर आधे घंटे पर एक ट्रेन पहुंचेगी। डीएमआरसी के अधिकारियों ने बताया कि सुबह छह बजे के बाद दिन भर सामान्य टाइम टेबल के अनुसार ट्रेन चलेंगी। नेहरू युवा केंद्र की तरफ से सरदार पटेल के जन्मदिन पर देशभर में इस रन फॉर यूनिटी का आयोजन किया जा रहा है। नेहरू युवा केंद्र सरदार पटेल के जन्मदिवस को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मना रहा है।
केंद्रीय मंत्री और भाजपा के फायरब्रांड गिरिराज सिंह के गोडसे वाले बयान से सियासी घमासान मचा हुआ है। गिरिराज सिंह के इस बयान के बाद जदयू और कांग्रेस ने उन पर जमकर हमला बोला है। वहीं जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि नाथूराम गोडसे के लिए यदि कोई भारत माता का बेटा होने का दावा कर रहा है तो चंबल का डकैत भी भारत मां का बेटा है, वीरप्पन और दाऊद के साथ विजय माल्या जैसा अपराधी भी भारत मां का बेटा है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
केंद्रीय मंत्री और भाजपा के फायरब्रांड गिरिराज सिंह के गोडसे वाले बयान से सियासी घमासान मचा हुआ है। गिरिराज सिंह के इस बयान के बाद जदयू और कांग्रेस ने उन पर जमकर हमला बोला है। वहीं जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि नाथूराम गोडसे के लिए यदि कोई भारत माता का बेटा होने का दावा कर रहा है तो चंबल का डकैत भी भारत मां का बेटा है, वीरप्पन और दाऊद के साथ विजय माल्या जैसा अपराधी भी भारत मां का बेटा है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
इंडियन प्रीमियर लीग के अब तक के इतिहास में जब कभी भी सबसे मजबूत और प्रभावशाली टीम की बात हुई है तो रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर का नाम हमेशा ही ऊपर रहा है। विश्व क्रिकेट की सबसे महंगी और हाई प्रोफाइल टी-20 क्रिकेट लीग इंडियन प्रीमियर लीग के दस सालों के इतिहास में हर बार रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने एक मजबूत कटेंडर के रूप में अपनी दावेदारी पेश की है। लेकिन इसके बाद भी आरसीबी ने अब तक एक भी बार खिताब को छूने का मौका नहीं पाया है। आरसीबी ने इतना जरूर है कि अब तक वो तीन बार खिताबी सफर तय कर चुके हैं लेकिन कहीं ना कहीं उनके द्वारा कमी रह ही जाती है और वो टाइटल से चूक जाते हैं। आरसीबी की टीम में शुरूआत से ही क्रिकेट जगत के एक से एक टी-20 क्रिकेट के चर्चित चेहरे रहे हैं, जिसमें विराट कोहली, क्रिस गेल और एबी डीविलियर्स जैसे दिग्गज खिलाड़ी रहे हैं। एक बार फिर से इन्होंने विराट कोहली और एबी डीविलियर्स जैसे बल्लेबाजों को रिटेन किया है, लेकिन इनको अपने इन न कुछ कमियों को पूरा करना होगा तभी वो खिताब जीतने की स्थिति में रहेंगे। आरसीबी की टीम के साथ शुरूआत से रहा है कि उनकी बल्लेबाजी विभाग तो जबरदस्त रहता है लेकिन उनकी ही कमजोर गेंदबाजी विभाग होता है। ऐसे में संतुलन की कमी रह जाती है और टीम के लिए बल्लेबाज जो मौका बनाते हैं, वो गेंदबाज तोड़ देते हैं। ऐसे में इस निलामी में आरसीबी फ्रेंचाइजी को टीम के बैलेंस को ध्यान में रखते हुए टीम का चयन करना होगा। आरसीबी के लिए गेंदबाजी उनकी कमजोर कड़ी रही है ये तो हर कोई जानता है। आरसीबी फ्रेंचाइजी ने पिछली बार टाइमल मिल्स को बड़ी रकम देकर शामिल तो किया था लेकिन वो खरे नहीं उतर सके। ऐसे में इस बार किसी ऐसे विदेशी गेंदबाज को टीम में शामिल करना होगा जो भरोसा दिखा सके। इसमें से बिग-बैश लीग के गेंदबाजों को अजमाया जा सकता है जिसमें वेस्टइंडीज के जोफ्री आर्चर और एन्ड्रू टाई हैं जो काबिलियत दिखा चुके हैं। आईपीएल की वन ऑफ द फेवरेट टीमों में शुमार आरसीबी की टीम ने इस बार अपने सबसे पुराने खिलाड़ी और टी-20 क्रिकेट के बेताज बादशाह क्रिस गेल पर रिटेन में दांव नहीं लगाया। और माना जा रहा है कि निलामी में भी आरबीसी की टीम गेल को चुनने में दिलचस्पी नहीं दिखाएगी ऐसे में अब उनके लिए विराट कोहली के साथ सही सलामी साझेदार की जरूरत होगी। आरसीबी को निलामी में किसी भरोसेमंद सलामी बल्लेबाज को चुनना होगा जिससे कि उन्हें गेल के पिछले दिनों की कमी ना खले। इसके लिए वो ऑस्ट्रेलिया के डी सोरी शोर्ट को चुन सकते हैं। आरसीबी की टीम में पिछले दो-तीन सीजन की बात करें तो उनकी बल्लेबाजी पूरी तरह से विराट गेल एबी और लोकेश राहुल पर टिकी हुई थी। जब ये बल्लेबाज फ्लॉप रहते तो नंबर-7 पर ऐसा कोई बल्लेबाज नहीं रहता जो कुछ हद तक रन जुटाने की क्षमता रखे। ऐसे में आरसीबी को एक ऑलराउंडर को लेने की जरूरत है जो गेंदबाजी में तो काम करे ही साथ ही उपयोगी बल्लेबाजी भी कर सके।
इंडियन प्रीमियर लीग के अब तक के इतिहास में जब कभी भी सबसे मजबूत और प्रभावशाली टीम की बात हुई है तो रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर का नाम हमेशा ही ऊपर रहा है। विश्व क्रिकेट की सबसे महंगी और हाई प्रोफाइल टी-बीस क्रिकेट लीग इंडियन प्रीमियर लीग के दस सालों के इतिहास में हर बार रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने एक मजबूत कटेंडर के रूप में अपनी दावेदारी पेश की है। लेकिन इसके बाद भी आरसीबी ने अब तक एक भी बार खिताब को छूने का मौका नहीं पाया है। आरसीबी ने इतना जरूर है कि अब तक वो तीन बार खिताबी सफर तय कर चुके हैं लेकिन कहीं ना कहीं उनके द्वारा कमी रह ही जाती है और वो टाइटल से चूक जाते हैं। आरसीबी की टीम में शुरूआत से ही क्रिकेट जगत के एक से एक टी-बीस क्रिकेट के चर्चित चेहरे रहे हैं, जिसमें विराट कोहली, क्रिस गेल और एबी डीविलियर्स जैसे दिग्गज खिलाड़ी रहे हैं। एक बार फिर से इन्होंने विराट कोहली और एबी डीविलियर्स जैसे बल्लेबाजों को रिटेन किया है, लेकिन इनको अपने इन न कुछ कमियों को पूरा करना होगा तभी वो खिताब जीतने की स्थिति में रहेंगे। आरसीबी की टीम के साथ शुरूआत से रहा है कि उनकी बल्लेबाजी विभाग तो जबरदस्त रहता है लेकिन उनकी ही कमजोर गेंदबाजी विभाग होता है। ऐसे में संतुलन की कमी रह जाती है और टीम के लिए बल्लेबाज जो मौका बनाते हैं, वो गेंदबाज तोड़ देते हैं। ऐसे में इस निलामी में आरसीबी फ्रेंचाइजी को टीम के बैलेंस को ध्यान में रखते हुए टीम का चयन करना होगा। आरसीबी के लिए गेंदबाजी उनकी कमजोर कड़ी रही है ये तो हर कोई जानता है। आरसीबी फ्रेंचाइजी ने पिछली बार टाइमल मिल्स को बड़ी रकम देकर शामिल तो किया था लेकिन वो खरे नहीं उतर सके। ऐसे में इस बार किसी ऐसे विदेशी गेंदबाज को टीम में शामिल करना होगा जो भरोसा दिखा सके। इसमें से बिग-बैश लीग के गेंदबाजों को अजमाया जा सकता है जिसमें वेस्टइंडीज के जोफ्री आर्चर और एन्ड्रू टाई हैं जो काबिलियत दिखा चुके हैं। आईपीएल की वन ऑफ द फेवरेट टीमों में शुमार आरसीबी की टीम ने इस बार अपने सबसे पुराने खिलाड़ी और टी-बीस क्रिकेट के बेताज बादशाह क्रिस गेल पर रिटेन में दांव नहीं लगाया। और माना जा रहा है कि निलामी में भी आरबीसी की टीम गेल को चुनने में दिलचस्पी नहीं दिखाएगी ऐसे में अब उनके लिए विराट कोहली के साथ सही सलामी साझेदार की जरूरत होगी। आरसीबी को निलामी में किसी भरोसेमंद सलामी बल्लेबाज को चुनना होगा जिससे कि उन्हें गेल के पिछले दिनों की कमी ना खले। इसके लिए वो ऑस्ट्रेलिया के डी सोरी शोर्ट को चुन सकते हैं। आरसीबी की टीम में पिछले दो-तीन सीजन की बात करें तो उनकी बल्लेबाजी पूरी तरह से विराट गेल एबी और लोकेश राहुल पर टिकी हुई थी। जब ये बल्लेबाज फ्लॉप रहते तो नंबर-सात पर ऐसा कोई बल्लेबाज नहीं रहता जो कुछ हद तक रन जुटाने की क्षमता रखे। ऐसे में आरसीबी को एक ऑलराउंडर को लेने की जरूरत है जो गेंदबाजी में तो काम करे ही साथ ही उपयोगी बल्लेबाजी भी कर सके।
भोपाल (नईदुनिया टीम)। अंचल में बना कम वायुदाब क्षेत्र अब कमजोर पड़ गया है। वर्षा का दौर थमा तो नहीं है,लेकिन कमजोर जरूर हुआ है। पिछले तीन-चार दिनों से जिन जिलों में तेज वर्षा हो रही थी,वहां अब रिमझिम वर्षा का दौर जारी है। उधर वर्षा के कारण नदियां अभी भी उफान पर बनी हुईं हैं। कई जगहों पर सड़क संपर्क अब भी टूटा हुआ है। हरदा जिले के सिराली आमाखाल में वर्षा के कारण डेम पूरा भरकर ओवर फ्लो हो रहा है। डेम के ओवर फ्लो होने से बड़ा ढाना का संपर्क सिराली से टूट गया। वहीं खिरकिया में दिन भर तो फुहारें पड़ी,लेकिन शाम से रिमझिम वर्षा का दौर शुरू हो गया है। वर्षा का दौर कमजोर होने के बाद भी रानीपुर बैतूल मार्ग अब भी नहीं खुल पाया है। यहां तेज वर्षा के कारण निर्माणाधीन पुलिया बह गई थी। वैकल्पिक व्यवस्था के लिए वर्षा थमने का इंतजार किया जा रहा है। छिंदवाड़ा में गुस्र्वार को भी लगातार तीसरे दिन वर्षा का दौर जारी रहा। वर्षा के कारण नागपुर मार्ग कुछ घंटों के लिए बंद करना पड़ा। पिछले 24 घंटे में यहां 13 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। वहीं राजगढ़ के नरसिंहगढ़ में गुस्र्वार को तेज वर्षा का दौर फिर से शुरू हो गया। यहां दोपहर 3 से 7 बजे के बीच भारी वर्षा हुई है। सारंगपुर क्षेत्र में लगातार वर्षा से कालीसिंध नदी का जल स्तर 3 मीटर बढ़ गया है।
भोपाल । अंचल में बना कम वायुदाब क्षेत्र अब कमजोर पड़ गया है। वर्षा का दौर थमा तो नहीं है,लेकिन कमजोर जरूर हुआ है। पिछले तीन-चार दिनों से जिन जिलों में तेज वर्षा हो रही थी,वहां अब रिमझिम वर्षा का दौर जारी है। उधर वर्षा के कारण नदियां अभी भी उफान पर बनी हुईं हैं। कई जगहों पर सड़क संपर्क अब भी टूटा हुआ है। हरदा जिले के सिराली आमाखाल में वर्षा के कारण डेम पूरा भरकर ओवर फ्लो हो रहा है। डेम के ओवर फ्लो होने से बड़ा ढाना का संपर्क सिराली से टूट गया। वहीं खिरकिया में दिन भर तो फुहारें पड़ी,लेकिन शाम से रिमझिम वर्षा का दौर शुरू हो गया है। वर्षा का दौर कमजोर होने के बाद भी रानीपुर बैतूल मार्ग अब भी नहीं खुल पाया है। यहां तेज वर्षा के कारण निर्माणाधीन पुलिया बह गई थी। वैकल्पिक व्यवस्था के लिए वर्षा थमने का इंतजार किया जा रहा है। छिंदवाड़ा में गुस्र्वार को भी लगातार तीसरे दिन वर्षा का दौर जारी रहा। वर्षा के कारण नागपुर मार्ग कुछ घंटों के लिए बंद करना पड़ा। पिछले चौबीस घंटाटे में यहां तेरह मिमी वर्षा दर्ज की गई है। वहीं राजगढ़ के नरसिंहगढ़ में गुस्र्वार को तेज वर्षा का दौर फिर से शुरू हो गया। यहां दोपहर तीन से सात बजे के बीच भारी वर्षा हुई है। सारंगपुर क्षेत्र में लगातार वर्षा से कालीसिंध नदी का जल स्तर तीन मीटर बढ़ गया है।
सी. आई. सी. यानि कि केंद्रीय सूचना आयोग ने प्रधानमंत्री कार्यालय के उस फैसले को सुरक्षित रखा है जिसके तहत देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र की जानकारी को सार्वजानिक रूप से सांझा नहीं किया जाएगा. पी. एम. ओ. का कहना है कि पीएम की निजी सूचनाएं होने के कारण इनका खुलासा नहीं किया जा सकता. गौरतलब है कि सोनी एस. एरामथ नाम के एक शख्स ने RTI के तहत पी. एम. ओ. से प्रधानमंत्री मोदी के आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड की जानकारी मांगी थी. साथ ही इस आवेदन में ये भी पूछा गया था कि क्या भारत के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री के पद की शपथ दिलाई थी? इसके जवाब में पी. एम. ओ. ने बताया कि संविधान के प्रावधानों के मुताबिक प्रधानमंत्री को शपथ दिलाई गई थी. मुख्य सूचना आयुक्त आर. के. माथुर ने कहा, "उन्होंने (पी. एम. ओ. के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी) बताया कि आर. टी. आई. कानून, 2005 की धारा 8 (1) (जे) के तहत उपलब्ध छूट के अनुसार आवेदक को प्रधानमंत्री के आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र के ब्यौरे की सूचना नहीं दी जा सकती. " बता दें कि पिछले कई दिनों आरटीआई कानून में संसोधन को लेकर बड़ी बहस चल रही है. वहीं सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय ने खुद को आरटीआई से दूर रखने की मांग की है.
सी. आई. सी. यानि कि केंद्रीय सूचना आयोग ने प्रधानमंत्री कार्यालय के उस फैसले को सुरक्षित रखा है जिसके तहत देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र की जानकारी को सार्वजानिक रूप से सांझा नहीं किया जाएगा. पी. एम. ओ. का कहना है कि पीएम की निजी सूचनाएं होने के कारण इनका खुलासा नहीं किया जा सकता. गौरतलब है कि सोनी एस. एरामथ नाम के एक शख्स ने RTI के तहत पी. एम. ओ. से प्रधानमंत्री मोदी के आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड की जानकारी मांगी थी. साथ ही इस आवेदन में ये भी पूछा गया था कि क्या भारत के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री के पद की शपथ दिलाई थी? इसके जवाब में पी. एम. ओ. ने बताया कि संविधान के प्रावधानों के मुताबिक प्रधानमंत्री को शपथ दिलाई गई थी. मुख्य सूचना आयुक्त आर. के. माथुर ने कहा, "उन्होंने बताया कि आर. टी. आई. कानून, दो हज़ार पाँच की धारा आठ के तहत उपलब्ध छूट के अनुसार आवेदक को प्रधानमंत्री के आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र के ब्यौरे की सूचना नहीं दी जा सकती. " बता दें कि पिछले कई दिनों आरटीआई कानून में संसोधन को लेकर बड़ी बहस चल रही है. वहीं सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय ने खुद को आरटीआई से दूर रखने की मांग की है.
Trailblazers vs Supernovas Live Streaming: ट्रेलब्लेजर्स की टीम इस टूर्नामेंट में बतौर मौजूदा विजेता के तौर पर उतर रही है और अपने खिताब को बचाने की पूरी कोशिश करेगी. महिला टी20 चैलेंज (Women T20 Challenge) की शुरुआत सोमवार से हो रही है. आईपीएल-2022 के प्लेऑफ के दौरान इसके मैच खेले जाएंगे. तीन टीमों के बीच कुल चार मैच खेले जाएंगे. पहले मैच में स्मृति मांधना की कप्तानी वाली ट्रेलब्लेजर्स का सामना हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली सुपरनोवाज (Trailblazers vs Supernovas) से होगा. ट्रेलब्लेजर्स की टीम मौजूदा विजेता के तौर पर इस मैच में उतरेगी. 2020 में खेले गए फाइनल में ट्रेलब्लेजर्स ने सुपरनावोज को मात देकर खिताब अपने नाम किया था. इस बार सुपरनोवाज की टीम अपनी उस हार का बदला लेना चाहेगी. इस टीम ने 2019 में ये खिताब अपने नाम किया था. बता दें कि पिछले साल ये टूर्नामेंट कोविड के कारण आयोजित नहीं किया जा सका था. 2018 में सिर्फ दो टीमों के बीच मैच खेला गया था और वो दो टीमें भी यही टीमें थीं. बीसीसीआई ने फिर अगले सीजन से इसे विस्तार दिया और वेलोसिटी नाम की नई टीम इस टूर्नामेंट में आई. कब खेल जाएगा ट्रेलब्लेजर्स और सुपरनोवाज के बीच महिला टी20 चैलेंज का मैच? ट्रेलब्लेजर्स और सुपरनोवाज के बीच महिला टी20 चैलेंज का मैच सोमवार 23 मई को खेला जाएगा. कहां खेला जाएगा ट्रेलब्लेजर्स और सुपरनोवाज के बीच महिला टी20 चैलेंज का मैच? कितने बजे शुरू होगा ट्रेलब्लेजर्स और सुपरनोवाज के बीच महिला टी20 चैलेंज का मैच? ट्रेलब्लेजर्स और सुपरनोवाज के बीच महिला टी20 चैलेंज का मैच शाम 7:30 बजे शुरू होगा, मुकाबले का टॉस 7 बजे होगा? कहां देख सकते हैं ट्रेलब्लेजर्स और सुपरनोवाज के बीच महिला टी20 चैलेंज का मैच? ट्रेलब्लेजर्स और सुपरनोवाज के बीच महिला टी20 चैलेंज का मैच स्टार स्पोर्ट्स के चैनल्स पर देख सकते हैं. कहां देख सकते हैं ट्रेलब्लेजर्स और सुपरनोवाज के बीच महिला टी20 चैलेंज के मैच की लाइव स्ट्रीमिंग? ट्रेलब्लेजर्स और सुपरनोवाज के बीच महिला टी20 चैलेंज मैच की लाइव स्ट्रीमिंग सब्सक्रीप्शन के साथ डिजनी हॉटस्टार पर देख सकते हैं.
Trailblazers vs Supernovas Live Streaming: ट्रेलब्लेजर्स की टीम इस टूर्नामेंट में बतौर मौजूदा विजेता के तौर पर उतर रही है और अपने खिताब को बचाने की पूरी कोशिश करेगी. महिला टीबीस चैलेंज की शुरुआत सोमवार से हो रही है. आईपीएल-दो हज़ार बाईस के प्लेऑफ के दौरान इसके मैच खेले जाएंगे. तीन टीमों के बीच कुल चार मैच खेले जाएंगे. पहले मैच में स्मृति मांधना की कप्तानी वाली ट्रेलब्लेजर्स का सामना हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली सुपरनोवाज से होगा. ट्रेलब्लेजर्स की टीम मौजूदा विजेता के तौर पर इस मैच में उतरेगी. दो हज़ार बीस में खेले गए फाइनल में ट्रेलब्लेजर्स ने सुपरनावोज को मात देकर खिताब अपने नाम किया था. इस बार सुपरनोवाज की टीम अपनी उस हार का बदला लेना चाहेगी. इस टीम ने दो हज़ार उन्नीस में ये खिताब अपने नाम किया था. बता दें कि पिछले साल ये टूर्नामेंट कोविड के कारण आयोजित नहीं किया जा सका था. दो हज़ार अट्ठारह में सिर्फ दो टीमों के बीच मैच खेला गया था और वो दो टीमें भी यही टीमें थीं. बीसीसीआई ने फिर अगले सीजन से इसे विस्तार दिया और वेलोसिटी नाम की नई टीम इस टूर्नामेंट में आई. कब खेल जाएगा ट्रेलब्लेजर्स और सुपरनोवाज के बीच महिला टीबीस चैलेंज का मैच? ट्रेलब्लेजर्स और सुपरनोवाज के बीच महिला टीबीस चैलेंज का मैच सोमवार तेईस मई को खेला जाएगा. कहां खेला जाएगा ट्रेलब्लेजर्स और सुपरनोवाज के बीच महिला टीबीस चैलेंज का मैच? कितने बजे शुरू होगा ट्रेलब्लेजर्स और सुपरनोवाज के बीच महिला टीबीस चैलेंज का मैच? ट्रेलब्लेजर्स और सुपरनोवाज के बीच महिला टीबीस चैलेंज का मैच शाम सात:तीस बजे शुरू होगा, मुकाबले का टॉस सात बजे होगा? कहां देख सकते हैं ट्रेलब्लेजर्स और सुपरनोवाज के बीच महिला टीबीस चैलेंज का मैच? ट्रेलब्लेजर्स और सुपरनोवाज के बीच महिला टीबीस चैलेंज का मैच स्टार स्पोर्ट्स के चैनल्स पर देख सकते हैं. कहां देख सकते हैं ट्रेलब्लेजर्स और सुपरनोवाज के बीच महिला टीबीस चैलेंज के मैच की लाइव स्ट्रीमिंग? ट्रेलब्लेजर्स और सुपरनोवाज के बीच महिला टीबीस चैलेंज मैच की लाइव स्ट्रीमिंग सब्सक्रीप्शन के साथ डिजनी हॉटस्टार पर देख सकते हैं.
दस दिन बाद दशहरा अर्थात शारदीय नवरात्र की आराधना शुरू हो जायेगी। कोरोना संकट काल में लंबे समय से घरों में कैद श्रद्धालुओं में दुर्गोत्सव को लेकर उत्साह है। साथ ही संबंधित तैयारी भी श्रद्धालुओं ने शुरू कर दी है। पंडित धनश्याम तिवारी शांडिल्य आदि ने पूजा के निमित आवश्यक सामग्रियों की सूची भी आम श्रद्धालुओं से साझा कर दिया है। वहीं पूजन कार्यक्रम भी जारी कर दिया है ताकि उसी अनुरूप श्रद्धालु तैयारी कर लें। मेदिनीनगर के 100 साल से अधिक समय से दुर्गोत्सव का आयोजन होता रहा है। दुर्गाबाड़ी और सार्वजनिक दुर्गापूजा समिति आयोजन का शतक मना चुके हैं। परंतु इस साल कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए राज्य सरकार ने दुर्गा पूजा को लेकर गाइडलाइन जारी करते हुए भव्य और बड़े पूजा पंडालों के निर्माण की मनाही कर दी है। मेदिनीनगर में भी एसडीएम और एसडीपीओ ने पूजा समितियों के साथ बैठक कर गाइडलाइन का अनुपालन करते हुए दुर्गोत्सव मनाने का निर्देश दिया है। इससे पंडाल निर्माण करने वाले, डेकोरेटर्स आदि को काफी नुकसान हुआ है। मेदिनीनगर नगर निगम क्षेत्र में छोटे-बड़े करीब 40 पंडालों का निर्माण होता आया है। जिनका पंडाल निर्माण व डेकोरेशन का बजट एक लाख से पांच लाख रुपये तक रहता है। परंतु इस बार छोटे पंडाल में माता की अधिकतम पांच फीट ऊंची प्रतिमा रखकर ही पूजा करने की अनुमति है। मेदिनीनगर शहर में हर साल कई पंडालों का निर्माण करने वाला भाई टेंट हाउस का संचालक रौशन ने बताया कि बंगाल से दस मजदूर तीन महीने के कांटैक्ट पर आ गये हैं। सभी पूजा से लेकर लगन तक रहते हैं। परंतु पूजा में कारोबार ठप हो गया है। कपड़ा आदि में उन्होंने निवेश कर दिया था। टेंट हाउस संचालकों ने बताया कि करीब 300 मजदूरों को पूजा पंडालों में काम मिलता था जो सरकार के गाइडलाइन के बाद बेकार रहेंगे।
दस दिन बाद दशहरा अर्थात शारदीय नवरात्र की आराधना शुरू हो जायेगी। कोरोना संकट काल में लंबे समय से घरों में कैद श्रद्धालुओं में दुर्गोत्सव को लेकर उत्साह है। साथ ही संबंधित तैयारी भी श्रद्धालुओं ने शुरू कर दी है। पंडित धनश्याम तिवारी शांडिल्य आदि ने पूजा के निमित आवश्यक सामग्रियों की सूची भी आम श्रद्धालुओं से साझा कर दिया है। वहीं पूजन कार्यक्रम भी जारी कर दिया है ताकि उसी अनुरूप श्रद्धालु तैयारी कर लें। मेदिनीनगर के एक सौ साल से अधिक समय से दुर्गोत्सव का आयोजन होता रहा है। दुर्गाबाड़ी और सार्वजनिक दुर्गापूजा समिति आयोजन का शतक मना चुके हैं। परंतु इस साल कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए राज्य सरकार ने दुर्गा पूजा को लेकर गाइडलाइन जारी करते हुए भव्य और बड़े पूजा पंडालों के निर्माण की मनाही कर दी है। मेदिनीनगर में भी एसडीएम और एसडीपीओ ने पूजा समितियों के साथ बैठक कर गाइडलाइन का अनुपालन करते हुए दुर्गोत्सव मनाने का निर्देश दिया है। इससे पंडाल निर्माण करने वाले, डेकोरेटर्स आदि को काफी नुकसान हुआ है। मेदिनीनगर नगर निगम क्षेत्र में छोटे-बड़े करीब चालीस पंडालों का निर्माण होता आया है। जिनका पंडाल निर्माण व डेकोरेशन का बजट एक लाख से पांच लाख रुपये तक रहता है। परंतु इस बार छोटे पंडाल में माता की अधिकतम पांच फीट ऊंची प्रतिमा रखकर ही पूजा करने की अनुमति है। मेदिनीनगर शहर में हर साल कई पंडालों का निर्माण करने वाला भाई टेंट हाउस का संचालक रौशन ने बताया कि बंगाल से दस मजदूर तीन महीने के कांटैक्ट पर आ गये हैं। सभी पूजा से लेकर लगन तक रहते हैं। परंतु पूजा में कारोबार ठप हो गया है। कपड़ा आदि में उन्होंने निवेश कर दिया था। टेंट हाउस संचालकों ने बताया कि करीब तीन सौ मजदूरों को पूजा पंडालों में काम मिलता था जो सरकार के गाइडलाइन के बाद बेकार रहेंगे।
पुणे/दि. 30 - महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक व उच्च माध्यमिक शिक्षा बोर्ड व्दारा ली जाने वाली दसवीं-बारहवीं की परीक्षा कुछ ही दिनों पर आ पहुंची है. वहीं दूसरी ओर कोरोना का प्रादुर्भाव तेजी से बढ रहा है. इसी बीच राज्य के कुछ स्थानीय प्रशासन ने 30 अप्रैल तक शाला-महाविद्यालय बंद रखने के आदेश दिये है. जिससे दसवीं-बारहवीं की इस बार होेने वाली परीक्षा पर कोरोना के बादल निर्माण हुए है. एक ओर विद्यार्थी व पालक चिंताग्रस्त हुए है. वहीं दूसरी ओर परीक्षा आगे ढेेकेली जाएगी, इस तरह की जानकारी शिक्षा विभाग के सूत्रों ने दी है. राज्य बोर्ड व्दारा दसवीं की लिखित परीक्षा 29 अप्रैल से 20 मई और बारहवीं की लिखित परीक्षा 23 अप्रैल से 21 मई इस समयावधि में प्रचलित पध्दति से व मंजूर प्रारुप के अनुसार आयोजित की गई है. इसके साथ ही दसवीं की प्रात्याक्षिक, श्रेणी, मौखिक व तत्सम परीक्षा 12 अप्रैल से 28 अप्रैल और बाहरवीं की प्रात्याक्षिक, श्रेणी, मौखिक तत्सम परीक्षा 5 अप्रैल से 22 अप्रैल की समयावधि में ली जाएगी. प्रात्याक्षिक, श्रेणी, मौखिक, व तत्सम परीक्षा के लिए राज्यबोर्ड ने कुछ सहुलियत दी है फिर भी लिखित परीक्षा यह नियोजित समय के अनुसार ही होगी. इसी बीच पुणे, मुंबई व नागपुर आदि शहरों में दिन में 5 हजार से ज्यादा कोरोना मरीज मिलने लगे है. इसी बीच इस संदर्भ में राज्य बोर्ड की ओर से परीक्षा आगे ढकेलने बाबत फिलहाल कोई भी गतिविधि नहीं है. टाइम टेबल के अनुसार परीक्षा लेने की तैयारी शुरु रहने की जानकारी राज्य बोर्ड के अधिकारियों ने दी है. - परीक्षा केवल ऑफलाइन रहने से केंद्र पर हाजिरी लगाएं बगैर विद्यार्थियों को पर्याय नहीं. - परीक्षा आगे ढकेली गई तो आगामी वर्ष की प्रवेश प्रक्रिया पर परिणाम होगा. - कोरोना के बढते प्रादुर्भाव के चलते परीक्षा से संबंधित अधिकारी, कर्मचारी दहशत में. - परीक्षा काल में लॉकडाउन लगा तो विद्यार्थियों को परीक्षा केंद्रों पर पहुंचने मुश्किलें जायेगी.
पुणे/दि. तीस - महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक व उच्च माध्यमिक शिक्षा बोर्ड व्दारा ली जाने वाली दसवीं-बारहवीं की परीक्षा कुछ ही दिनों पर आ पहुंची है. वहीं दूसरी ओर कोरोना का प्रादुर्भाव तेजी से बढ रहा है. इसी बीच राज्य के कुछ स्थानीय प्रशासन ने तीस अप्रैल तक शाला-महाविद्यालय बंद रखने के आदेश दिये है. जिससे दसवीं-बारहवीं की इस बार होेने वाली परीक्षा पर कोरोना के बादल निर्माण हुए है. एक ओर विद्यार्थी व पालक चिंताग्रस्त हुए है. वहीं दूसरी ओर परीक्षा आगे ढेेकेली जाएगी, इस तरह की जानकारी शिक्षा विभाग के सूत्रों ने दी है. राज्य बोर्ड व्दारा दसवीं की लिखित परीक्षा उनतीस अप्रैल से बीस मई और बारहवीं की लिखित परीक्षा तेईस अप्रैल से इक्कीस मई इस समयावधि में प्रचलित पध्दति से व मंजूर प्रारुप के अनुसार आयोजित की गई है. इसके साथ ही दसवीं की प्रात्याक्षिक, श्रेणी, मौखिक व तत्सम परीक्षा बारह अप्रैल से अट्ठाईस अप्रैल और बाहरवीं की प्रात्याक्षिक, श्रेणी, मौखिक तत्सम परीक्षा पाँच अप्रैल से बाईस अप्रैल की समयावधि में ली जाएगी. प्रात्याक्षिक, श्रेणी, मौखिक, व तत्सम परीक्षा के लिए राज्यबोर्ड ने कुछ सहुलियत दी है फिर भी लिखित परीक्षा यह नियोजित समय के अनुसार ही होगी. इसी बीच पुणे, मुंबई व नागपुर आदि शहरों में दिन में पाँच हजार से ज्यादा कोरोना मरीज मिलने लगे है. इसी बीच इस संदर्भ में राज्य बोर्ड की ओर से परीक्षा आगे ढकेलने बाबत फिलहाल कोई भी गतिविधि नहीं है. टाइम टेबल के अनुसार परीक्षा लेने की तैयारी शुरु रहने की जानकारी राज्य बोर्ड के अधिकारियों ने दी है. - परीक्षा केवल ऑफलाइन रहने से केंद्र पर हाजिरी लगाएं बगैर विद्यार्थियों को पर्याय नहीं. - परीक्षा आगे ढकेली गई तो आगामी वर्ष की प्रवेश प्रक्रिया पर परिणाम होगा. - कोरोना के बढते प्रादुर्भाव के चलते परीक्षा से संबंधित अधिकारी, कर्मचारी दहशत में. - परीक्षा काल में लॉकडाउन लगा तो विद्यार्थियों को परीक्षा केंद्रों पर पहुंचने मुश्किलें जायेगी.
बिलासपुर : आज शाम होते ही फिर एक बार प्रदेश की न्यायधानी ने ट्रांसफर की लिस्ट जारी की गई. SSP पारुल माथुर ने तबादला आदेश जारी किया है. न्यायधानी बिलासपुर में 4 थाना प्रभारियों का तबादला किया गया है. निरीक्षक सुनील कुर्रे को तारबाहर, उप निरीक्षक सागर पाठक को साइबर से सिरगिट्टी, उप निरीक्षक प्रसाद सिन्हा को सकरी से साइबर और फैजुल होदा शाह को सिरगिट्टी से सकरी थाना का प्रभार सौंपा गया है.
बिलासपुर : आज शाम होते ही फिर एक बार प्रदेश की न्यायधानी ने ट्रांसफर की लिस्ट जारी की गई. SSP पारुल माथुर ने तबादला आदेश जारी किया है. न्यायधानी बिलासपुर में चार थाना प्रभारियों का तबादला किया गया है. निरीक्षक सुनील कुर्रे को तारबाहर, उप निरीक्षक सागर पाठक को साइबर से सिरगिट्टी, उप निरीक्षक प्रसाद सिन्हा को सकरी से साइबर और फैजुल होदा शाह को सिरगिट्टी से सकरी थाना का प्रभार सौंपा गया है.
ब्रिटेन के प्रधनमंत्री का कहना है कि तुर्की किसी भी स्थिति में सन 3000 से पहले यूरोपीय संघ का सदस्य नहीं बन सकता। शिनहुआ समाचार एजेन्सी के अनुसार डेविड कैमरून ने स्काई न्यूज़ चैनेल पर दिये अपने साक्षात्कार में कहा कि यूरोपीय संघ में शामिल होने वाली 35 शर्तों में से तुर्की ने अभी तक केवल एक शर्त ही पूरी की है। उन्होंने कहा कि इस विषय के दृष्टिगत अंकारा, यूरोपीय संघ की संदस्यता प्राप्त नहीं कर सकता। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने कहा कि तुर्की की ओर से यूरोपीय संघ की शर्तों को पूरा करने की प्रक्रिया की गति को देखते हुए एेसा लगता है कि वह सन 3000 से पहले सदस्यता ग्रहण नहीं कर पाएगा। उन्होंने कहा कि इस हिसाब से यूरोपीय संघ की संदस्यता प्राप्त करने के लिए तुर्की को अभी कम से कम 984 वर्षों तक प्रतीक्षा करनी होगी।
ब्रिटेन के प्रधनमंत्री का कहना है कि तुर्की किसी भी स्थिति में सन तीन हज़ार से पहले यूरोपीय संघ का सदस्य नहीं बन सकता। शिनहुआ समाचार एजेन्सी के अनुसार डेविड कैमरून ने स्काई न्यूज़ चैनेल पर दिये अपने साक्षात्कार में कहा कि यूरोपीय संघ में शामिल होने वाली पैंतीस शर्तों में से तुर्की ने अभी तक केवल एक शर्त ही पूरी की है। उन्होंने कहा कि इस विषय के दृष्टिगत अंकारा, यूरोपीय संघ की संदस्यता प्राप्त नहीं कर सकता। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने कहा कि तुर्की की ओर से यूरोपीय संघ की शर्तों को पूरा करने की प्रक्रिया की गति को देखते हुए एेसा लगता है कि वह सन तीन हज़ार से पहले सदस्यता ग्रहण नहीं कर पाएगा। उन्होंने कहा कि इस हिसाब से यूरोपीय संघ की संदस्यता प्राप्त करने के लिए तुर्की को अभी कम से कम नौ सौ चौरासी वर्षों तक प्रतीक्षा करनी होगी।
ब्राह्मण को दिया और ग्यारह अभंग उसे लिख दिए । ब्राह्मण की तुकाराम के प्रति श्रद्धा न थी । उस ने वे अभंग और वह नारियल वहीं छोड़ वहाँ से कूच किया । इतने ही में श्रीशिवाजी महाराज के पुराणिक का पानी भरने वाला ब्राह्मण कोंडोवा वहाँ या । तुका राम जी ने वे अभंग नारियल के साथ उसे दे डाले । प्रभंगों में बड़ा उपदेश किया था कि "ईश्वर के पास मोक्ष इत्यादि पुरुषार्थी की गठरी नहीं है कि वह अलग उठाकर तुम्हारे हाथ में रख दे । इंद्रियों को जीत कर और मन को काबू में रख किसी साधना के लिए निर्विषय-निरिच्छ होना चाहिए । उपवास, पारण, व्रत, वेदमंत्रों के पाठ इत्यादि सब कर्मों का फल शांत है अर्थात् उस का फल थोड़े नियमित दिन तक ही मिलता है । सावधानता से मन की इच्छाएँ दूर की जावें तो दुःख की प्राप्ति सुलभता- पूर्वक टाली जा सकती है । स्वप्न में लगे घावों से व्यर्थ रोने वालों के साथ तुम भी क्यों रोते हो । तुकाराम के मन से फल प्राप्त करना हो तो जड़ को सँभालना चाहिए और सब काम छोड़ ईश्वर की शरण लेनी चाहिए ।" कोंडोबा ने श्रद्धापूर्वक अभंगों का पाठ किया ही दिन में विद्याभ्यास कर वह अच्छा पंडित हो गया। कुछ दिन बाद जब कोंडोबा ने नारियल फोड़ा तो उस के भीतर से सुवर्ण मुद्रा और मोती निकले । पीछे से पता लगा कि अहमदाबाद के एक मारबाड़ी भक्त ने वह नारियल तुकाराम जी को गुप्त दान करने के लिए मेजा था । ज्ञानेश्वर जी की ओर से आए ब्राह्मण के चले जाने पर श्राप ने ज्ञानेश्वर जी को संदेश भेजने के अर्थ से कुछ अभंग किए । ये अभंग बड़ी लीनता से भरे हुए हैं। एक अभंग में कहा है कि "महाराज, श्राप सब ज्ञानियों के राजा हो और इस लिए ज्ञानराज कहते हैं। मुझ ऐसे नीच मनुष्य को यह बड़ापन काहे के लिए ? पैर की जूती पैर में ही ठीक रहती है। ब्रह्मा आदि देव भी जहाँ श्राप की शरण आते हैं वहाँ दूसरे किस की झाप के साथ तुलना की जावे ? तुकाराम को तो आपकी गहरी युक्तियाँ नहीं समकीं और इसी लिए वह आपके पैरों पर अपना सिर झुकाता है । " काडोपंत लोहोकरे नाम का एक पुनवाडी का ब्राह्मण कीर्तन करते समय तुकाराम जी के साथ मृदंग बजाया करता । एक बार कुछ धनी लोग काशी- यात्रा जाने की इच्छा से तुकाराम जी की प्रशांस लेने आए । उन लोगों को देख कोडोपंत के भी मन में काशी जाने की इच्छा हुई, पर द्रव्याभाव के कारण वे चुप हो रहे । तुकाराम भी ने उन की इच्छा पहिचान एक होन उठा कर उन्हें दिया और कहा कि " जसे जाने की इच्छा है उस के लिए एक होन बहुत है। प्रतिदिन एक होन मिलना कठिन नहीं और एक होन से अधिक एक दिन में खर्च करने की भी आवश्यकता नहीं । रोज़ इस होन को भँजा कर खर्च करो पर कम से कम एक पैसा रोज़ बाकी रक्खो । दूसरे दिन तुम्हें फिर होन मिलता जावेगा ।" कोडोपंत ने एक दिन परीक्षा ली । सब खर्च कर शेष पैसे सिरहाने रख सो गया । सुबह देखता है कि पैसे ग़ायब और उन के स्थान में दूसरा होन तैयार । कोडोपंत को विश्वास हुआ और उन्हीं लोगों के साथ हो गया । तुकाराम जी ने कोडोपंत के साथ गंगा माई को विश्वनाथ को और विष्णुपद को एकएक ऐसे तीन अभंग दिए । विश्वनाथ जी से आपकी प्रार्थना थी कि "शंकरजी, श्राप तो हो विश्व के नाथ और मैं तो हूँ दीन अनाथ । मैं बौरा ग्राप के पैर गिरता हूँ। आप जो कुछ कृपा करें वह थोड़ी ही मुझे बहुत है। श्राप के पास कुछ कमी नहीं और मेरे संतोष के लिये अधिक की आवश्यकता नहीं। महाराज, तुकाराम के लिये कुछ कभी प्रसाद भेजिये । " कोंडोपंत की सब तीर्थयात्रा उसी होन पर निभ गई । प्रतिदिन उसे एक होन मिलता रहा। ब्राह्मणं चार महीने काशी में रह कर लौटा। घर आने पर होन अपने पास ही रखने की इच्छा से तुकाराम जी से झूठ मूठ श्रा कर कहा कि होन खो गया । तुकाराम जी हँस कर चुप हो गए। घर जा कर कोडोपंत ने देखा तो होन सचसत तुकाराम मुच हो खो गया था । तुकाराम जी के पास दूसरे दिन श्रा कर अपना अपराध कबूल किया और असत्य - भाषण के लिये क्षमा माँगी। श्रीतुकाराम जी महाराज की आसाढ़ कार्तिक की पंढरपुर की वारी बराबर जारी थी। केवल एक कार्तिकी की एकादशी को आप बहुत बीमार होने के कारण न जा सके । जिस समय दूसरे वारकरी लोग पंढरी जाने के लिये निकले, तब श्राप ने कुछ अभंग लिख कर श्रीविठ्ठल की सेवा में भेजे । तुकाराम-सा प्रेमी भक्त, कार्तिक एकादशी का-सा । पुण्यकारक आनंद-प्रसंग और केवल देह-दुःख के कारण पंढरी तक जाना असंभव ! इस स्थिति में क्या श्राश्चर्य कि तुकाराम जी का जी तड़पता रहा और 'देह देहू में पर मन पंढरी में' यह स्थिति हुई । इस वसर पर जो भंग के मुँह से निकले, उन में तुकाराम जो का हृदय बिल्कुल निचोड़ा पाया जाता है । करुण रस से वे अभंग भरे हुए हैं। पत्र का प्रारंभ इस प्रकार है। "हे संतों, मेरी ओर से श्रीविठ्ठल से विनती करो और पूछो कि मेरे किन अपराधी से मुझे इस बार श्रीविठ्ठल के चरण कमलों से दूर रहना पड़ा । अनेक प्रकार से मेरी करुण-कहानी पंढरीश को सुना । तुकाराम को तो इस बार पंढरी और पुंडलीक के ईंट पर के श्रीविठ्ठल के चरण देखने की आशा नहीं है।" कुछ अभंगों के बाद आप कहते है, "हे नाथ, मेरे कौन से गुणदोष समक्ष कर श्राप ने ऐसो उदासीनता धारण की है १ अन्यथा आप के यहाँ तो कोई प्रयोग्य बात होने की राति नहीं हैं। श्रतएव इस का विचार मुझे ही करना चाहिए कि आपके प्रति मेरा भाव कैसा है । तुकाराम तो यही समझता है कि उसी के बुद्धि-दोष से श्राप ने उसे दूर किया है ।" कुछ अभंगों के बाद आप ईश्वर पर नाराज़ हो कहते हैं, "अगर मन में इतना छोटापन है, तो हमें पैदा ही क्यों किया १ हम दूसरे किस के पास मुँह फाड़ रोवें ! अगर अाप ही मुझ को छोड़ देंगे, तो दूसरा कौन इस बात की खबर लगा कि मैं भूखा हूँ या नहीं १ श्रम और किस की राह है, ? किधर देखें, कौन मुझे गले लगावेगा ! मेरे मन का दुःख कौन पहचानेगा और कौन इस संकट में से मुझे उचारेगा ? हे पिता, क्या आप ऐसे तो न समझ बैठे कि तुकाराम अपना भार स्वयं उठा सकता है ? " आगे " महाराज, आज तो आप पूरे-पूरे लोभी बन गए । धन ही धन जोड़ने के पीछे पड़ा वह धन के लिये ही पागल बन जाता है। फिर उसे और कुछ नहीं दीखता । अपने बाल-बच्चे तक उसे प्यारे नहीं लगते । पैसे की तरफ़ देखते उसे सच बातें फ़ीकी मालूम देती है। तुकाराम समझता है कि आप को भी इसी तरह से लालच आ गई है।" इसी चित्तावस्था में आप को गरुड़ जी के दर्शन न हुए। गरुड़ जो बोले, "अगर आप चाहें तो आप को पीठ पर पंढरपुर ले चलूँ । देव आप को भूले नहीं हैं। पर इतने भक्तों को छोड़ वे कैसे के पास सकते हैं । अगर वे यहाँ चले श्रावें तो पंढरपुर कैसा रंग में भंग हो जावे ?" तुकाराम जा समझ गए । आप चित्त को शांति प्राप्त हुई कि श्रीविठ्ठल मुझे भूले नहीं हैं। पर भगवान् के वाहन पर बैठ पंढरपुर जाना श्राप ने उचित न समझा । श्राप देहू ही रहे । संत लोग पंढरपुर से लौटते समय इस बार देहू आए और देहू में ही थोड़े समय के लिये पंढरपुर हो गया। तुकाराम जो के अभंग खूब गाए गए । तुकाराम जी के अभंगों की कीति उन के जीवन काल में ही .. खूब फैल गई । इन के अभंग लोग लिख ले जाने लगे और गाने लगे । तुकाराम अपनी पहचान रखने के लिये अपने अभंगों के अंतिम चरण में 'तुका' पद रख देते थे । पर तुक से तुक मिला कर कवि बनने वाले बहुत से कवि तुका का नाम अपने ही बनाये हुये अभंगों में रख देते। फल यह होता कि इस बात को पहचानना बड़ा, कठिन हो जाता कि फल अभंग तुकाराम का है या नहीं। ऐसे ही एक सालोमालो नामक कवि तुकाराम जी के ही समय में हो गये । वे खुद अभंग रचते और लोग उन्हें याद करें, इस लिये उन के अंतिम चरणों में 'तुका' की छाप लगा देते । तुकाराम जी के मत से अत्यंत विरुद्ध -ऐसे कुछ प्रभंग भी सालोमालों बनाते और उन्हें तुकाराम जी के ही नाम से फैलाते । जब तुकाराम जी को उन के भक्तों ने यह बात कही " कि सालोमालो खुद अपने को हरिदास कहला कर आप के अभंगों का नाश कर रहा है, आप अभंग रूप में बोले "चावल गलगए या नहीं, यह देखने के लिये घोटना नहीं पड़ता । एक दाने से भांत की परीक्षा होती है। हंस की चोंच दूध और पानी फ़ौरन दूर कर देती है। यदि किसी ने पहनने का अच्छा कपड़ा फाड़ उसे गुदड़ी बनाई तो बात किस की बिगड़ी ? तुकाराम की समझ में तो दाने और फूस अलग करने में कुछ कष्ट नहीं ।" पर भक्तों को यह बात ठीक न मालूम हुई। उन में से दो भक्तों ने तुकाराम जी के श्रभंग लिख लेने का निश्चय किया । सब अभंगों का लिखना अशक्यप्राय था । तुकाराम जी के अभंग सर्वदा रचे ही जाते थे। यह कहने के बजाय कि वे अभंग रचना करते थे यही कथन अधिक सत्य है कि अभंग - वाणी उन के मुख से निकलती थी । पर फिर भी तक्रे गाँव के गंगा राम जी कडूसकर ने और चाकण के संताजी तेली ने यथाशक्ति बहुत अभंग लिख डाले। ये दोनों तुकोबा के कीर्तन में उन का साथ करते थे और दोनों को तुकाराम जी की भाषा शैली से खासा परिचय था । इस कारण उन के प्रायः जितने अभंग इन्हें मिले, सब इन्हों ने लिख डाले । देहू पाम ही चिंचवड़ नाम का एक गाँव है जहाँ पर श्रीगणेश जी का एक प्रसिद्ध मंदिर है। यहाँ भी देव उपनामक एक बडे गणेश भक्त हो गए थे जिन के वंशज तुकाराम जी के समय वहाँ महंती करते ये श्राप ने सुना कि तुकाराम जी नामदेव के अवतार समझे जाते है। यह बात प्रसिद्ध है कि श्रीविट्ठल नामदेव जी के साथ भोजन करते -खेलते और बोलते थे। तुकाराम जी की परीक्षा लेने के लिए एक बार देव जी ने उन्हें चिंचवड़ बुलाया । तुकाराम जी देव जी का हेतु मन में समझ गए। भोजन के समय तुकाराम जी ने देव जी से कहा "श्राप के से भक्तों के यहाँ आज श्रीविठ्ठल भोजन करने के लिए आनेवाले हैं। एक पात्र उन के लिए और एक पात्र श्रीगणेश जी के किए परोसिए । मैं श्रीविद्दल को बुला लाऊँगा और आप श्रीगणेश जी को बुलाइए । अपने मन की कु बुद्धि पहचानी देख देव जी लज्जित हुए और बोले "तुकोबा, इतना महद्भाग्य हमारा कहाँ ? हम तो अभिमान के मारे मरे जाते हैं।" यह सुन कर तुकाराम जी ने श्रीविठ्ठल की और गणेश जी की स्तुति की । "महाराज, आप की कृपा दृष्टि से तो बंध्यागाएँ भी दूध देंगी। मैं ऐसी कठिन बात के लिए आपकी विनय नहीं करता । मेरी तो केवल यही माँग है कि हमें अपने चरणों का दर्शन दीजिए । मेघ चातक के लिए बरसता है । राजहंस को श्राप मोती खिलाते हैं । तुकाराम की प्रार्थना मान्य करने में आपको इतना संकोच क्यों ?" कहा जाता है कि थोड़े समय में दोनों देवों के लिए परोमी हुई थालियों में से अन्न कम होने लगा । लोग समझ गए कि श्रीविठ्ठल और श्रीगणेश भोजन कर रहे है। इस प्रकार के अनेक चमत्कार भक्तों के मुख के सुने जाते हैं । भक्तों की बातें भक्त ही जान सकते हैं । चमत्कारों के विषय में अधिक कुछ न लिखकर केवल तुकाराम जी के जीवन के अंतिम चमत्कार वर्णन कर जीवनी का पूर्वार्द्ध समाप्त करता हूँ । तुकाराम जी की श्रात्म-विषयक भावना में बहुत ही धीरे-धीरे विश्वास उत्पन्न होता गया। अपनी जीवनी का वर्णन करते हुए उन्हों ने बड़ी लीनता से कहा कि 'सुनो भाई संतो, मैं तो सब से अधिक पतित हूँ। पर न मालूम श्राप इतना प्रेम मुझ पर क्यों करते हो । मेरा दिल तो मुझे इसी बात की गवाही देता है कि मैं अभी मुक्त नहीं हूं । व्यर्थ में एक पीछे दूसरा मुझे मानता जाता है। संसार में पीड़ा हुई, इस लिए घर छोड़ दिया, ढोरों को भगा दिया। जब कुछ पूरा नपड़ा, तब वैसा का वैसा ही रह गया । जो कुछ थोड़ा-बहुत धन था, वह पूर्णतया नष्ट हो गया । न कभी किसी ब्राह्मण को दिया न किसी याचक को इस प्रकार सहज में ही भाग्यहीन हो जाने के कारण स्त्री, पुत्र, भाई इन, का नाता टूट गया। लोगों को मुख दिखलाते न बना, अतएव कोनों में और जंगलों में रहने लगा और एकति वास का प्रेम इस तरह बढ़ गया। पेट-पूजने में बड़ा तंग हुआ । किसी को मेरी दया न श्राई। इस कारण यदि कोई अब मेरा सत्कार करता है, तो मैं बड़े चाव से उस के यहाँ जाता हूं। पुरखो ने कुछ श्रीविठ्ठल की सेवा की थी, जिसके पुण्य से मैं भी इसे पूजता हूं । इसा को यदि आप चाहो, तो भक्ति कह सकते हो ।" कितनी नम्रता और स्पष्टता है ! ये दोनों गुण वैसे के वैसे ही बने रहे। पर अंत में तुकाराम जी के मुख से ऐसे वाक्य निकलने लगे कि "कोई में मेरी तलाश ही न करने पाए, इस लिए मैं ने आपके चरण गहे हैं। हे नारायण श्रब ता ऐसा काजिए कि मेरा दर्शन हो किसी को न हो । मेरा मन सब बातों से लौट जगह की जगह पर ही विलीन हो गया है। तुकाराम खुद को भूल कर बोलना चालना भूल गया है। अब तो वह पूरा गूंगा बन गया है । " या "अब तो मैं अपने मइहर जाऊँगा । इन संतों के हाथ मुझे संदेशा भी आ चुका । मेरी सुख-दुःख की बातें सुन न तो मेरी मां के मन में करुणा की लाट श्री गई । सब तैयारी कर तो वह मुझे एक दिन ज़रूर बुलाने मेजेगी । मेरा चित्त उसी मार्ग में लगा है। रोज़ मायके की राह देख रहा हूँ । तुकाराम के लिए तो श्रम स्वयं मा-बाप उसे लिवा जाने श्रावेंगे।" इस प्रकार के विचारों की बाट होते-होते तुकारामजी के वय का इकतालीमवाँ साल पूरा हुआ और ने बयालीसवें साल में पदार्पण किया । इसी वर्ष की फागुन सुदी एकादशी के दिन महाराज ने नित्य नियमानुसार रात भर भजन कीर्तन कर प्रातःकाल के समय अपनी स्त्री को बुला कर उसे ग्यारह अभंगों के द्वारा उपदेश किया। आपने कहा - "सुनो जी, पांडुरंग हमारा चौधरी है। उसी ने हमें खेत जोतने के लिए दिया है। जिस में से फ़सल निकाल हम अपना पेट पालते हैं । उस की बाकी जो मुझे देनी है, वह माँग रहा है। आज तक उक की सत्तर की बाकी में से मैं दस दे चुका हूँ । पर अब तो वह घर में श्रा कर खटिया पर बैठ ही गया है और एक-सा तकाज़ा लगा रहा है। अब तो घर, बाड़ी, बर्तन जो कुछ है, उसे दे कर उस की लगान पूरी करनी चाहिए। बतलाओ क्या करना चाहिए । बिना बाकी दिए अब तो छुटकारा नहीं ।" इस प्रकार आरंभ में रूपक की भाषा में उसे समझाना शुरू किया । पर जब यह देखा कि उस की समझ में नहीं आता तो स्पष्ट रूप में कहा कि "इस बात की चिंता न करो कि इन बच्चों का क्या होगा। उन का नसीब उन के साथ बँधा है । तुम अपनी फँसी हुई गर्दन छुड़वा लो और गर्भ-वास के दुःख से खुद को बचाओ। अपने पास का माल देख कर चोर गला फाँसेंगे। इसी लिए मैं दूर भाग रहा हूँ । उन के मार की कल्पना ही से मेरा दिल काँप उठता है। अगर तुकाराम की ज़रूरत तुम्हें हो तो अपना मन खूब बड़ा करो । " " अगर तुम मेरे साथ योगी तो सुनो क्या-क्या सुख तुम हम दोनों को मिलेंगे । ऋषिदेव बड़ा उत्सव मनावेंगे । रत्नों से जड़े विमानों में हमें बिठलावेंगे, नामघोष के साथ गंधर्वो का गाना सुनावेंगे। बड़े-बड़े सिद्ध, साधु, महंत हमारा स्वा गत करेंगे । वहाँ सुखों की सब इच्छाएं पूरी होंगी । चलो, जहाँ मेरे माता पिता हैं, वहाँ तक जावें और उन्हें मिल उन के चरणों पर पड़े । तुकाराम के उस सुख का वर्णन कौन कर सकेगा, जब उस के माँ बाप उस से मिलेंगे १" तुकाराम जी ने तो उपदेश किया पर जिजाई के मन पर उस का कुछ भी असर न पड़ा । मानों अंधे को दर्पण दिखलाया या बहिरे को गाना सुनाया । श्रीतुकाराम जी उन दिनों अपनी यह कल्पना बराबर कहते रहे । " मैंने अपनी मौत अपने श्रींखों से देखी", "अपना घड़ा अपने ही हाथों से फोड़ डाला", "अपने देहरूप पिंड से पिंडदान किया" इत्यादि विचार आपके मुख से निकलने लगे। अंत में चैत्रबदी द्वितीया के रोज़ प्रातःकाल श्राप ने जिजाई से कहला भेजा कि "मैं बैकुंठ को जाता हूँ, श्रगर तुम को चलना हो तो चलमा ।" परंतु उस का जवाब आया कि "आप जाइए। मैं पाँच महीने के पेट से हूँ । घर में बच्चे छोटे-छोटे हैं, गाय, भैंस हैं, उन्हें कौन सम्हालेगा ? मुझे की फ़ुरसत नहीं। नंद से जाइएगा ।" जवाब सुनकर तुकाराम जी मुसकराए और इसी प्रकार के अभंग मुख से कहते, हाथ में फाँझ, तंबूरी लेकर ने श्रीविठ्ठल को नमस्कार किया और भजन करते-करते घर के बाहर निकले । लागों को भी आश्चर्य हुआ । वारी को जाने का दिन नहीं, कीर्तन का मामूलो समय नहीं और श्रोतुकाराम जी महाराज चले कहाँ ? कहाँ जाते हैं ? ऐसा यदि कोई तुकोबा से पूछता तो जवाब मिलता "हम बैकुंठ जाते हैं । अव न लौटेंगे ।" भक्तों को श्राश्चर्य मालूम हुआ और बुरा भी लगा । खासखास भक्त श्राप के साथ चलने लगे । उन सबों के साथ श्रीतुकाराम जी महाराज इंद्रायणी तीर पर आए औरने कीर्तन प्रारंभ किया । उस दिन कीर्तन के समय जो प्रभंगा के मुख से निकले वे बड़े अजीब रस से भरे हुए हैं। अपने अभंगों में समय-समय पर तुकाराम जी भिन्न-भिन्न भूमिकाओं पर आपको समझते थे। कहीं विट्ठल को माता मानते, कहीं पिता, कहीं मित्र, कहीं साहूकार जिसके पास से तुकाराम जी ने कर्ज़ा लिया हो, तो कहीं कर्जदार जिसे श्रा ने पैसा दिया हो। श्रीविठ्ठल से लड़ते, झगड़ते, प्रेम-कलह करते, भली-बुरी सुनाते, फिर क्षमा माँगते, पैरों पड़ते, रोते, अनेक प्रकार के खेल खेलते । पर इस आखिरी दिन का रंग कुछ और ही था। ये अभंग विराणी के कहलाते हैं । विराणी याने विहरिणी। इन अभंग में तुकाराम जी ने एक विहरिणी की अर्थात् स्वपति छोड़ अन्य पुरुष के साथ जिस पर कि उस का प्रेम हो, विहार करने वालो स्त्री की भूमिका ली है । संसार है पति और श्रीविठ्ठल हैं प्रियकर पुरुष । इसी कल्पना पर ये अभंग रचे हुए हैं। उदाहरणार्थ "पहले पति द्वारा मेरे मनोरथ पूर्ण न हुए । अतएव मैं व्यभिचार करने लगी। मेरे पास
ब्राह्मण को दिया और ग्यारह अभंग उसे लिख दिए । ब्राह्मण की तुकाराम के प्रति श्रद्धा न थी । उस ने वे अभंग और वह नारियल वहीं छोड़ वहाँ से कूच किया । इतने ही में श्रीशिवाजी महाराज के पुराणिक का पानी भरने वाला ब्राह्मण कोंडोवा वहाँ या । तुका राम जी ने वे अभंग नारियल के साथ उसे दे डाले । प्रभंगों में बड़ा उपदेश किया था कि "ईश्वर के पास मोक्ष इत्यादि पुरुषार्थी की गठरी नहीं है कि वह अलग उठाकर तुम्हारे हाथ में रख दे । इंद्रियों को जीत कर और मन को काबू में रख किसी साधना के लिए निर्विषय-निरिच्छ होना चाहिए । उपवास, पारण, व्रत, वेदमंत्रों के पाठ इत्यादि सब कर्मों का फल शांत है अर्थात् उस का फल थोड़े नियमित दिन तक ही मिलता है । सावधानता से मन की इच्छाएँ दूर की जावें तो दुःख की प्राप्ति सुलभता- पूर्वक टाली जा सकती है । स्वप्न में लगे घावों से व्यर्थ रोने वालों के साथ तुम भी क्यों रोते हो । तुकाराम के मन से फल प्राप्त करना हो तो जड़ को सँभालना चाहिए और सब काम छोड़ ईश्वर की शरण लेनी चाहिए ।" कोंडोबा ने श्रद्धापूर्वक अभंगों का पाठ किया ही दिन में विद्याभ्यास कर वह अच्छा पंडित हो गया। कुछ दिन बाद जब कोंडोबा ने नारियल फोड़ा तो उस के भीतर से सुवर्ण मुद्रा और मोती निकले । पीछे से पता लगा कि अहमदाबाद के एक मारबाड़ी भक्त ने वह नारियल तुकाराम जी को गुप्त दान करने के लिए मेजा था । ज्ञानेश्वर जी की ओर से आए ब्राह्मण के चले जाने पर श्राप ने ज्ञानेश्वर जी को संदेश भेजने के अर्थ से कुछ अभंग किए । ये अभंग बड़ी लीनता से भरे हुए हैं। एक अभंग में कहा है कि "महाराज, श्राप सब ज्ञानियों के राजा हो और इस लिए ज्ञानराज कहते हैं। मुझ ऐसे नीच मनुष्य को यह बड़ापन काहे के लिए ? पैर की जूती पैर में ही ठीक रहती है। ब्रह्मा आदि देव भी जहाँ श्राप की शरण आते हैं वहाँ दूसरे किस की झाप के साथ तुलना की जावे ? तुकाराम को तो आपकी गहरी युक्तियाँ नहीं समकीं और इसी लिए वह आपके पैरों पर अपना सिर झुकाता है । " काडोपंत लोहोकरे नाम का एक पुनवाडी का ब्राह्मण कीर्तन करते समय तुकाराम जी के साथ मृदंग बजाया करता । एक बार कुछ धनी लोग काशी- यात्रा जाने की इच्छा से तुकाराम जी की प्रशांस लेने आए । उन लोगों को देख कोडोपंत के भी मन में काशी जाने की इच्छा हुई, पर द्रव्याभाव के कारण वे चुप हो रहे । तुकाराम भी ने उन की इच्छा पहिचान एक होन उठा कर उन्हें दिया और कहा कि " जसे जाने की इच्छा है उस के लिए एक होन बहुत है। प्रतिदिन एक होन मिलना कठिन नहीं और एक होन से अधिक एक दिन में खर्च करने की भी आवश्यकता नहीं । रोज़ इस होन को भँजा कर खर्च करो पर कम से कम एक पैसा रोज़ बाकी रक्खो । दूसरे दिन तुम्हें फिर होन मिलता जावेगा ।" कोडोपंत ने एक दिन परीक्षा ली । सब खर्च कर शेष पैसे सिरहाने रख सो गया । सुबह देखता है कि पैसे ग़ायब और उन के स्थान में दूसरा होन तैयार । कोडोपंत को विश्वास हुआ और उन्हीं लोगों के साथ हो गया । तुकाराम जी ने कोडोपंत के साथ गंगा माई को विश्वनाथ को और विष्णुपद को एकएक ऐसे तीन अभंग दिए । विश्वनाथ जी से आपकी प्रार्थना थी कि "शंकरजी, श्राप तो हो विश्व के नाथ और मैं तो हूँ दीन अनाथ । मैं बौरा ग्राप के पैर गिरता हूँ। आप जो कुछ कृपा करें वह थोड़ी ही मुझे बहुत है। श्राप के पास कुछ कमी नहीं और मेरे संतोष के लिये अधिक की आवश्यकता नहीं। महाराज, तुकाराम के लिये कुछ कभी प्रसाद भेजिये । " कोंडोपंत की सब तीर्थयात्रा उसी होन पर निभ गई । प्रतिदिन उसे एक होन मिलता रहा। ब्राह्मणं चार महीने काशी में रह कर लौटा। घर आने पर होन अपने पास ही रखने की इच्छा से तुकाराम जी से झूठ मूठ श्रा कर कहा कि होन खो गया । तुकाराम जी हँस कर चुप हो गए। घर जा कर कोडोपंत ने देखा तो होन सचसत तुकाराम मुच हो खो गया था । तुकाराम जी के पास दूसरे दिन श्रा कर अपना अपराध कबूल किया और असत्य - भाषण के लिये क्षमा माँगी। श्रीतुकाराम जी महाराज की आसाढ़ कार्तिक की पंढरपुर की वारी बराबर जारी थी। केवल एक कार्तिकी की एकादशी को आप बहुत बीमार होने के कारण न जा सके । जिस समय दूसरे वारकरी लोग पंढरी जाने के लिये निकले, तब श्राप ने कुछ अभंग लिख कर श्रीविठ्ठल की सेवा में भेजे । तुकाराम-सा प्रेमी भक्त, कार्तिक एकादशी का-सा । पुण्यकारक आनंद-प्रसंग और केवल देह-दुःख के कारण पंढरी तक जाना असंभव ! इस स्थिति में क्या श्राश्चर्य कि तुकाराम जी का जी तड़पता रहा और 'देह देहू में पर मन पंढरी में' यह स्थिति हुई । इस वसर पर जो भंग के मुँह से निकले, उन में तुकाराम जो का हृदय बिल्कुल निचोड़ा पाया जाता है । करुण रस से वे अभंग भरे हुए हैं। पत्र का प्रारंभ इस प्रकार है। "हे संतों, मेरी ओर से श्रीविठ्ठल से विनती करो और पूछो कि मेरे किन अपराधी से मुझे इस बार श्रीविठ्ठल के चरण कमलों से दूर रहना पड़ा । अनेक प्रकार से मेरी करुण-कहानी पंढरीश को सुना । तुकाराम को तो इस बार पंढरी और पुंडलीक के ईंट पर के श्रीविठ्ठल के चरण देखने की आशा नहीं है।" कुछ अभंगों के बाद आप कहते है, "हे नाथ, मेरे कौन से गुणदोष समक्ष कर श्राप ने ऐसो उदासीनता धारण की है एक अन्यथा आप के यहाँ तो कोई प्रयोग्य बात होने की राति नहीं हैं। श्रतएव इस का विचार मुझे ही करना चाहिए कि आपके प्रति मेरा भाव कैसा है । तुकाराम तो यही समझता है कि उसी के बुद्धि-दोष से श्राप ने उसे दूर किया है ।" कुछ अभंगों के बाद आप ईश्वर पर नाराज़ हो कहते हैं, "अगर मन में इतना छोटापन है, तो हमें पैदा ही क्यों किया एक हम दूसरे किस के पास मुँह फाड़ रोवें ! अगर अाप ही मुझ को छोड़ देंगे, तो दूसरा कौन इस बात की खबर लगा कि मैं भूखा हूँ या नहीं एक श्रम और किस की राह है, ? किधर देखें, कौन मुझे गले लगावेगा ! मेरे मन का दुःख कौन पहचानेगा और कौन इस संकट में से मुझे उचारेगा ? हे पिता, क्या आप ऐसे तो न समझ बैठे कि तुकाराम अपना भार स्वयं उठा सकता है ? " आगे " महाराज, आज तो आप पूरे-पूरे लोभी बन गए । धन ही धन जोड़ने के पीछे पड़ा वह धन के लिये ही पागल बन जाता है। फिर उसे और कुछ नहीं दीखता । अपने बाल-बच्चे तक उसे प्यारे नहीं लगते । पैसे की तरफ़ देखते उसे सच बातें फ़ीकी मालूम देती है। तुकाराम समझता है कि आप को भी इसी तरह से लालच आ गई है।" इसी चित्तावस्था में आप को गरुड़ जी के दर्शन न हुए। गरुड़ जो बोले, "अगर आप चाहें तो आप को पीठ पर पंढरपुर ले चलूँ । देव आप को भूले नहीं हैं। पर इतने भक्तों को छोड़ वे कैसे के पास सकते हैं । अगर वे यहाँ चले श्रावें तो पंढरपुर कैसा रंग में भंग हो जावे ?" तुकाराम जा समझ गए । आप चित्त को शांति प्राप्त हुई कि श्रीविठ्ठल मुझे भूले नहीं हैं। पर भगवान् के वाहन पर बैठ पंढरपुर जाना श्राप ने उचित न समझा । श्राप देहू ही रहे । संत लोग पंढरपुर से लौटते समय इस बार देहू आए और देहू में ही थोड़े समय के लिये पंढरपुर हो गया। तुकाराम जो के अभंग खूब गाए गए । तुकाराम जी के अभंगों की कीति उन के जीवन काल में ही .. खूब फैल गई । इन के अभंग लोग लिख ले जाने लगे और गाने लगे । तुकाराम अपनी पहचान रखने के लिये अपने अभंगों के अंतिम चरण में 'तुका' पद रख देते थे । पर तुक से तुक मिला कर कवि बनने वाले बहुत से कवि तुका का नाम अपने ही बनाये हुये अभंगों में रख देते। फल यह होता कि इस बात को पहचानना बड़ा, कठिन हो जाता कि फल अभंग तुकाराम का है या नहीं। ऐसे ही एक सालोमालो नामक कवि तुकाराम जी के ही समय में हो गये । वे खुद अभंग रचते और लोग उन्हें याद करें, इस लिये उन के अंतिम चरणों में 'तुका' की छाप लगा देते । तुकाराम जी के मत से अत्यंत विरुद्ध -ऐसे कुछ प्रभंग भी सालोमालों बनाते और उन्हें तुकाराम जी के ही नाम से फैलाते । जब तुकाराम जी को उन के भक्तों ने यह बात कही " कि सालोमालो खुद अपने को हरिदास कहला कर आप के अभंगों का नाश कर रहा है, आप अभंग रूप में बोले "चावल गलगए या नहीं, यह देखने के लिये घोटना नहीं पड़ता । एक दाने से भांत की परीक्षा होती है। हंस की चोंच दूध और पानी फ़ौरन दूर कर देती है। यदि किसी ने पहनने का अच्छा कपड़ा फाड़ उसे गुदड़ी बनाई तो बात किस की बिगड़ी ? तुकाराम की समझ में तो दाने और फूस अलग करने में कुछ कष्ट नहीं ।" पर भक्तों को यह बात ठीक न मालूम हुई। उन में से दो भक्तों ने तुकाराम जी के श्रभंग लिख लेने का निश्चय किया । सब अभंगों का लिखना अशक्यप्राय था । तुकाराम जी के अभंग सर्वदा रचे ही जाते थे। यह कहने के बजाय कि वे अभंग रचना करते थे यही कथन अधिक सत्य है कि अभंग - वाणी उन के मुख से निकलती थी । पर फिर भी तक्रे गाँव के गंगा राम जी कडूसकर ने और चाकण के संताजी तेली ने यथाशक्ति बहुत अभंग लिख डाले। ये दोनों तुकोबा के कीर्तन में उन का साथ करते थे और दोनों को तुकाराम जी की भाषा शैली से खासा परिचय था । इस कारण उन के प्रायः जितने अभंग इन्हें मिले, सब इन्हों ने लिख डाले । देहू पाम ही चिंचवड़ नाम का एक गाँव है जहाँ पर श्रीगणेश जी का एक प्रसिद्ध मंदिर है। यहाँ भी देव उपनामक एक बडे गणेश भक्त हो गए थे जिन के वंशज तुकाराम जी के समय वहाँ महंती करते ये श्राप ने सुना कि तुकाराम जी नामदेव के अवतार समझे जाते है। यह बात प्रसिद्ध है कि श्रीविट्ठल नामदेव जी के साथ भोजन करते -खेलते और बोलते थे। तुकाराम जी की परीक्षा लेने के लिए एक बार देव जी ने उन्हें चिंचवड़ बुलाया । तुकाराम जी देव जी का हेतु मन में समझ गए। भोजन के समय तुकाराम जी ने देव जी से कहा "श्राप के से भक्तों के यहाँ आज श्रीविठ्ठल भोजन करने के लिए आनेवाले हैं। एक पात्र उन के लिए और एक पात्र श्रीगणेश जी के किए परोसिए । मैं श्रीविद्दल को बुला लाऊँगा और आप श्रीगणेश जी को बुलाइए । अपने मन की कु बुद्धि पहचानी देख देव जी लज्जित हुए और बोले "तुकोबा, इतना महद्भाग्य हमारा कहाँ ? हम तो अभिमान के मारे मरे जाते हैं।" यह सुन कर तुकाराम जी ने श्रीविठ्ठल की और गणेश जी की स्तुति की । "महाराज, आप की कृपा दृष्टि से तो बंध्यागाएँ भी दूध देंगी। मैं ऐसी कठिन बात के लिए आपकी विनय नहीं करता । मेरी तो केवल यही माँग है कि हमें अपने चरणों का दर्शन दीजिए । मेघ चातक के लिए बरसता है । राजहंस को श्राप मोती खिलाते हैं । तुकाराम की प्रार्थना मान्य करने में आपको इतना संकोच क्यों ?" कहा जाता है कि थोड़े समय में दोनों देवों के लिए परोमी हुई थालियों में से अन्न कम होने लगा । लोग समझ गए कि श्रीविठ्ठल और श्रीगणेश भोजन कर रहे है। इस प्रकार के अनेक चमत्कार भक्तों के मुख के सुने जाते हैं । भक्तों की बातें भक्त ही जान सकते हैं । चमत्कारों के विषय में अधिक कुछ न लिखकर केवल तुकाराम जी के जीवन के अंतिम चमत्कार वर्णन कर जीवनी का पूर्वार्द्ध समाप्त करता हूँ । तुकाराम जी की श्रात्म-विषयक भावना में बहुत ही धीरे-धीरे विश्वास उत्पन्न होता गया। अपनी जीवनी का वर्णन करते हुए उन्हों ने बड़ी लीनता से कहा कि 'सुनो भाई संतो, मैं तो सब से अधिक पतित हूँ। पर न मालूम श्राप इतना प्रेम मुझ पर क्यों करते हो । मेरा दिल तो मुझे इसी बात की गवाही देता है कि मैं अभी मुक्त नहीं हूं । व्यर्थ में एक पीछे दूसरा मुझे मानता जाता है। संसार में पीड़ा हुई, इस लिए घर छोड़ दिया, ढोरों को भगा दिया। जब कुछ पूरा नपड़ा, तब वैसा का वैसा ही रह गया । जो कुछ थोड़ा-बहुत धन था, वह पूर्णतया नष्ट हो गया । न कभी किसी ब्राह्मण को दिया न किसी याचक को इस प्रकार सहज में ही भाग्यहीन हो जाने के कारण स्त्री, पुत्र, भाई इन, का नाता टूट गया। लोगों को मुख दिखलाते न बना, अतएव कोनों में और जंगलों में रहने लगा और एकति वास का प्रेम इस तरह बढ़ गया। पेट-पूजने में बड़ा तंग हुआ । किसी को मेरी दया न श्राई। इस कारण यदि कोई अब मेरा सत्कार करता है, तो मैं बड़े चाव से उस के यहाँ जाता हूं। पुरखो ने कुछ श्रीविठ्ठल की सेवा की थी, जिसके पुण्य से मैं भी इसे पूजता हूं । इसा को यदि आप चाहो, तो भक्ति कह सकते हो ।" कितनी नम्रता और स्पष्टता है ! ये दोनों गुण वैसे के वैसे ही बने रहे। पर अंत में तुकाराम जी के मुख से ऐसे वाक्य निकलने लगे कि "कोई में मेरी तलाश ही न करने पाए, इस लिए मैं ने आपके चरण गहे हैं। हे नारायण श्रब ता ऐसा काजिए कि मेरा दर्शन हो किसी को न हो । मेरा मन सब बातों से लौट जगह की जगह पर ही विलीन हो गया है। तुकाराम खुद को भूल कर बोलना चालना भूल गया है। अब तो वह पूरा गूंगा बन गया है । " या "अब तो मैं अपने मइहर जाऊँगा । इन संतों के हाथ मुझे संदेशा भी आ चुका । मेरी सुख-दुःख की बातें सुन न तो मेरी मां के मन में करुणा की लाट श्री गई । सब तैयारी कर तो वह मुझे एक दिन ज़रूर बुलाने मेजेगी । मेरा चित्त उसी मार्ग में लगा है। रोज़ मायके की राह देख रहा हूँ । तुकाराम के लिए तो श्रम स्वयं मा-बाप उसे लिवा जाने श्रावेंगे।" इस प्रकार के विचारों की बाट होते-होते तुकारामजी के वय का इकतालीमवाँ साल पूरा हुआ और ने बयालीसवें साल में पदार्पण किया । इसी वर्ष की फागुन सुदी एकादशी के दिन महाराज ने नित्य नियमानुसार रात भर भजन कीर्तन कर प्रातःकाल के समय अपनी स्त्री को बुला कर उसे ग्यारह अभंगों के द्वारा उपदेश किया। आपने कहा - "सुनो जी, पांडुरंग हमारा चौधरी है। उसी ने हमें खेत जोतने के लिए दिया है। जिस में से फ़सल निकाल हम अपना पेट पालते हैं । उस की बाकी जो मुझे देनी है, वह माँग रहा है। आज तक उक की सत्तर की बाकी में से मैं दस दे चुका हूँ । पर अब तो वह घर में श्रा कर खटिया पर बैठ ही गया है और एक-सा तकाज़ा लगा रहा है। अब तो घर, बाड़ी, बर्तन जो कुछ है, उसे दे कर उस की लगान पूरी करनी चाहिए। बतलाओ क्या करना चाहिए । बिना बाकी दिए अब तो छुटकारा नहीं ।" इस प्रकार आरंभ में रूपक की भाषा में उसे समझाना शुरू किया । पर जब यह देखा कि उस की समझ में नहीं आता तो स्पष्ट रूप में कहा कि "इस बात की चिंता न करो कि इन बच्चों का क्या होगा। उन का नसीब उन के साथ बँधा है । तुम अपनी फँसी हुई गर्दन छुड़वा लो और गर्भ-वास के दुःख से खुद को बचाओ। अपने पास का माल देख कर चोर गला फाँसेंगे। इसी लिए मैं दूर भाग रहा हूँ । उन के मार की कल्पना ही से मेरा दिल काँप उठता है। अगर तुकाराम की ज़रूरत तुम्हें हो तो अपना मन खूब बड़ा करो । " " अगर तुम मेरे साथ योगी तो सुनो क्या-क्या सुख तुम हम दोनों को मिलेंगे । ऋषिदेव बड़ा उत्सव मनावेंगे । रत्नों से जड़े विमानों में हमें बिठलावेंगे, नामघोष के साथ गंधर्वो का गाना सुनावेंगे। बड़े-बड़े सिद्ध, साधु, महंत हमारा स्वा गत करेंगे । वहाँ सुखों की सब इच्छाएं पूरी होंगी । चलो, जहाँ मेरे माता पिता हैं, वहाँ तक जावें और उन्हें मिल उन के चरणों पर पड़े । तुकाराम के उस सुख का वर्णन कौन कर सकेगा, जब उस के माँ बाप उस से मिलेंगे एक" तुकाराम जी ने तो उपदेश किया पर जिजाई के मन पर उस का कुछ भी असर न पड़ा । मानों अंधे को दर्पण दिखलाया या बहिरे को गाना सुनाया । श्रीतुकाराम जी उन दिनों अपनी यह कल्पना बराबर कहते रहे । " मैंने अपनी मौत अपने श्रींखों से देखी", "अपना घड़ा अपने ही हाथों से फोड़ डाला", "अपने देहरूप पिंड से पिंडदान किया" इत्यादि विचार आपके मुख से निकलने लगे। अंत में चैत्रबदी द्वितीया के रोज़ प्रातःकाल श्राप ने जिजाई से कहला भेजा कि "मैं बैकुंठ को जाता हूँ, श्रगर तुम को चलना हो तो चलमा ।" परंतु उस का जवाब आया कि "आप जाइए। मैं पाँच महीने के पेट से हूँ । घर में बच्चे छोटे-छोटे हैं, गाय, भैंस हैं, उन्हें कौन सम्हालेगा ? मुझे की फ़ुरसत नहीं। नंद से जाइएगा ।" जवाब सुनकर तुकाराम जी मुसकराए और इसी प्रकार के अभंग मुख से कहते, हाथ में फाँझ, तंबूरी लेकर ने श्रीविठ्ठल को नमस्कार किया और भजन करते-करते घर के बाहर निकले । लागों को भी आश्चर्य हुआ । वारी को जाने का दिन नहीं, कीर्तन का मामूलो समय नहीं और श्रोतुकाराम जी महाराज चले कहाँ ? कहाँ जाते हैं ? ऐसा यदि कोई तुकोबा से पूछता तो जवाब मिलता "हम बैकुंठ जाते हैं । अव न लौटेंगे ।" भक्तों को श्राश्चर्य मालूम हुआ और बुरा भी लगा । खासखास भक्त श्राप के साथ चलने लगे । उन सबों के साथ श्रीतुकाराम जी महाराज इंद्रायणी तीर पर आए औरने कीर्तन प्रारंभ किया । उस दिन कीर्तन के समय जो प्रभंगा के मुख से निकले वे बड़े अजीब रस से भरे हुए हैं। अपने अभंगों में समय-समय पर तुकाराम जी भिन्न-भिन्न भूमिकाओं पर आपको समझते थे। कहीं विट्ठल को माता मानते, कहीं पिता, कहीं मित्र, कहीं साहूकार जिसके पास से तुकाराम जी ने कर्ज़ा लिया हो, तो कहीं कर्जदार जिसे श्रा ने पैसा दिया हो। श्रीविठ्ठल से लड़ते, झगड़ते, प्रेम-कलह करते, भली-बुरी सुनाते, फिर क्षमा माँगते, पैरों पड़ते, रोते, अनेक प्रकार के खेल खेलते । पर इस आखिरी दिन का रंग कुछ और ही था। ये अभंग विराणी के कहलाते हैं । विराणी याने विहरिणी। इन अभंग में तुकाराम जी ने एक विहरिणी की अर्थात् स्वपति छोड़ अन्य पुरुष के साथ जिस पर कि उस का प्रेम हो, विहार करने वालो स्त्री की भूमिका ली है । संसार है पति और श्रीविठ्ठल हैं प्रियकर पुरुष । इसी कल्पना पर ये अभंग रचे हुए हैं। उदाहरणार्थ "पहले पति द्वारा मेरे मनोरथ पूर्ण न हुए । अतएव मैं व्यभिचार करने लगी। मेरे पास
IIT JAM 2022: IIT रुड़की 22 मार्च को JAM परिणाम 2022 जारी करेगा. नई दिल्ली. IIT JAM 2022: IIT रुड़की ने JAM 2022 आवेदन फॉर्म भरने की अंतिम तिथि 14 अक्टूबर (रात 11:59 बजे) तक बढ़ा दी है. JAM आवेदन पत्र 2022 भरने के लिए आधिकारिक वेबसाइट jam. iitr. ac. in पर जाएं. JAM 2022 आवेदन पत्र भरने की आखिरी तारीख पहले 11 अक्टूबर थी. उम्मीदवार आवेदन प्रक्रिया शुरू करने से पहले, अपने डिजायर्ड कोर्स के लिए JAM eligibility criteria 2022 की जांच करें. JAM 2022 पात्रता मानदंड उम्मीदवारों के लिए उनकी श्रेणी और चुने गए कार्यक्रम के आधार पर अलग हैं. जैम एप्लीकेशन फॉर्म 2022 कैसे भरें? -आधिकारिक वेबसाइट (joaps. iitr. ac. in) पर जाएं. -'नया उपयोगकर्ता? ' पर क्लिक करें. यहां रजिस्टर करें' टैब. -आवश्यक विवरण भरें और 'सबमिट' टैब पर क्लिक करें. -अब एक नामांकन आईडी पंजीकृत ईमेल आईडी पर भेजी जाएगी. -लॉगिन करने के लिए पंजीकृत ईमेल आईडी / नामांकन संख्या और पासवर्ड का उपयोग करें. -फिर, आवश्यक जानकारी के साथ आवेदन पत्र भरना शुरू करें. -दस्तावेज़ को निर्धारित प्रारूप और आकार में अपलोड करें. -आवेदन शुल्क का भुगतान करें. JAM 2022 आवेदन शुल्क भी उम्मीदवारों के लिए उनकी श्रेणी के आधार पर अलग है. JAM 2022 के आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन मोड में क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग के माध्यम से करना होगा. आवेदन शुल्क का भुगतान करने के बाद, उम्मीदवार AM 2022 आवेदन पत्र और फीस रसीद का प्रिंट आउट ले सकते हैं. पंजीकृत उम्मीदवार अपने लॉगिन क्रेडेंशियल का उपयोग करके 4 जनवरी से JAM 2022 एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकेंगे. JAM 2022 एंट्रेंस टेस्ट 13 फरवरी को कंप्यूटर बेस्ड मोड में होगा. IIT रुड़की 22 मार्च को JAM परिणाम 2022 जारी करेगा. .
IIT JAM दो हज़ार बाईस: IIT रुड़की बाईस मार्च को JAM परिणाम दो हज़ार बाईस जारी करेगा. नई दिल्ली. IIT JAM दो हज़ार बाईस: IIT रुड़की ने JAM दो हज़ार बाईस आवेदन फॉर्म भरने की अंतिम तिथि चौदह अक्टूबर तक बढ़ा दी है. JAM आवेदन पत्र दो हज़ार बाईस भरने के लिए आधिकारिक वेबसाइट jam. iitr. ac. in पर जाएं. JAM दो हज़ार बाईस आवेदन पत्र भरने की आखिरी तारीख पहले ग्यारह अक्टूबर थी. उम्मीदवार आवेदन प्रक्रिया शुरू करने से पहले, अपने डिजायर्ड कोर्स के लिए JAM eligibility criteria दो हज़ार बाईस की जांच करें. JAM दो हज़ार बाईस पात्रता मानदंड उम्मीदवारों के लिए उनकी श्रेणी और चुने गए कार्यक्रम के आधार पर अलग हैं. जैम एप्लीकेशन फॉर्म दो हज़ार बाईस कैसे भरें? -आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं. -'नया उपयोगकर्ता? ' पर क्लिक करें. यहां रजिस्टर करें' टैब. -आवश्यक विवरण भरें और 'सबमिट' टैब पर क्लिक करें. -अब एक नामांकन आईडी पंजीकृत ईमेल आईडी पर भेजी जाएगी. -लॉगिन करने के लिए पंजीकृत ईमेल आईडी / नामांकन संख्या और पासवर्ड का उपयोग करें. -फिर, आवश्यक जानकारी के साथ आवेदन पत्र भरना शुरू करें. -दस्तावेज़ को निर्धारित प्रारूप और आकार में अपलोड करें. -आवेदन शुल्क का भुगतान करें. JAM दो हज़ार बाईस आवेदन शुल्क भी उम्मीदवारों के लिए उनकी श्रेणी के आधार पर अलग है. JAM दो हज़ार बाईस के आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन मोड में क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग के माध्यम से करना होगा. आवेदन शुल्क का भुगतान करने के बाद, उम्मीदवार AM दो हज़ार बाईस आवेदन पत्र और फीस रसीद का प्रिंट आउट ले सकते हैं. पंजीकृत उम्मीदवार अपने लॉगिन क्रेडेंशियल का उपयोग करके चार जनवरी से JAM दो हज़ार बाईस एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकेंगे. JAM दो हज़ार बाईस एंट्रेंस टेस्ट तेरह फरवरी को कंप्यूटर बेस्ड मोड में होगा. IIT रुड़की बाईस मार्च को JAM परिणाम दो हज़ार बाईस जारी करेगा. .
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली (New Delhi) के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (CM Arvind Kejriwal) ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर सभी को ईद की बधाई दी है. आज पूरे देश में ईद (eidulfitr) की धूम है. राजधानी दिल्ली में भी लोगों ने मस्जिदों में नमाज पढ़कर और एक दूसरे के साथ मिलकर देश में अमन और तरक्की की दुआ मांगी। रमजान के अंत के साथ ही बुधवार को देश भर में ईद का पर्व मनाया जा रहा है। बता दें कि ईद उल फितर के इस त्योहार में लोग एक दूसरे को मीठी सेवई खिलाते हैं। इस त्योहार को मनाने के लिए सबसे पहले सुबह बड़ी संख्या में मुसलमानों ने मस्जिदों और ईदगाहों में विशेष नमाज पढ़ी। पाक रमजान महीने के समापन पर दिल्ली के जामा मस्जिद, फतेहपुरी मस्जिद और हजरत निजामुद्दीन सहित बड़ी मस्जिदों में और ईदगाहों में विशेष नमाज अदा की गई। पर्व के चलते मस्जिदों और ईदगाहों में नमाज पढ़ने वालों की भारी भीड़ देखने को मिली। बता दें कि इससे पहले दिल्ली सरकार (Delhi Government) की तरफ से सोमवार को रोजा इफ्तार पार्टी आयोजित की गई थी। इसकी सबसे खास बात ये रही की इसमें दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता (Vijender Gupta) भी मौजूद थे। इस पार्टी में गुप्ता ने सीएम अरविंद केजरीवाल को खजूर खिलाकर इफ्तार पार्टी की शुरूआत की थी। इस इफ्तार पार्टी में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) सहित आम आदमी पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। 'प्रेम प्रकट करने का दिन' विजेंद्र गुप्ता ने कहा था कि, आज का दिन प्रेम प्रकट करने का है। एक-दूसरे को बधाई देने और साथ-साथ खुशी मनाने का होता है। इसलिए इफ्तार पार्टी में शामिल होने से राजनीति का कोई लेना-देना नहीं है। इस इफ्तार पार्टी का आयोजन दिल्ली सरकार की उर्दू अकादमी ने किया था। Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें। हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर सभी को ईद की बधाई दी है. आज पूरे देश में ईद की धूम है. राजधानी दिल्ली में भी लोगों ने मस्जिदों में नमाज पढ़कर और एक दूसरे के साथ मिलकर देश में अमन और तरक्की की दुआ मांगी। रमजान के अंत के साथ ही बुधवार को देश भर में ईद का पर्व मनाया जा रहा है। बता दें कि ईद उल फितर के इस त्योहार में लोग एक दूसरे को मीठी सेवई खिलाते हैं। इस त्योहार को मनाने के लिए सबसे पहले सुबह बड़ी संख्या में मुसलमानों ने मस्जिदों और ईदगाहों में विशेष नमाज पढ़ी। पाक रमजान महीने के समापन पर दिल्ली के जामा मस्जिद, फतेहपुरी मस्जिद और हजरत निजामुद्दीन सहित बड़ी मस्जिदों में और ईदगाहों में विशेष नमाज अदा की गई। पर्व के चलते मस्जिदों और ईदगाहों में नमाज पढ़ने वालों की भारी भीड़ देखने को मिली। बता दें कि इससे पहले दिल्ली सरकार की तरफ से सोमवार को रोजा इफ्तार पार्टी आयोजित की गई थी। इसकी सबसे खास बात ये रही की इसमें दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता भी मौजूद थे। इस पार्टी में गुप्ता ने सीएम अरविंद केजरीवाल को खजूर खिलाकर इफ्तार पार्टी की शुरूआत की थी। इस इफ्तार पार्टी में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित आम आदमी पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। 'प्रेम प्रकट करने का दिन' विजेंद्र गुप्ता ने कहा था कि, आज का दिन प्रेम प्रकट करने का है। एक-दूसरे को बधाई देने और साथ-साथ खुशी मनाने का होता है। इसलिए इफ्तार पार्टी में शामिल होने से राजनीति का कोई लेना-देना नहीं है। इस इफ्तार पार्टी का आयोजन दिल्ली सरकार की उर्दू अकादमी ने किया था। Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें। हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
- 1 hr ago हिंदू देवताओं पर तेल और दूध चढ़ाने को लेकर अक्षय कुमार ने कही थी ऐसी बात? अब हो रहा है बवाल! Don't Miss! - Lifestyle Sawan Month: सावन में किस वजह से है दाढ़ी-बाल कटवाने की मनाही? अब दिल्ली 6 हुयी देलही 6! कही ऐसा तो नही कि राकेश किसी अंक ज्योतिषी की सलाह पर फिल्म के हिट होने के लिए यह सब तामझाम कर रहे है। फिल्म में पहली बार अभिषेक और सोनम कपूर की जोड़ी पेश की गई है। कुछ सूत्रों के अनुसार प्रख्यात अंक ज्योतिषी भाविक संघवी के कहने पर ही फिल्म का नाम बदला गया है। उनके अनुसार दिल्ली 6 के जो अंक बनते थे उसके अनुसार यह अभिषेक ओर सोनम के लिए फिट नही बैठते थे। पर देलही 6 से बनने वाले अंको से पुरी युनिट का फायदा होने के आसार है। भाविक की गणना के अनुसार फिल्म का सबसे ज्यादा फायदा सोनम कपूर और फिलम निर्माता का होने वाला है। खैर किसका कितना फायदा होगा यह तो फिल्म के रिलीज होने के बाद ही पता चल पाएगा!
- एक hr ago हिंदू देवताओं पर तेल और दूध चढ़ाने को लेकर अक्षय कुमार ने कही थी ऐसी बात? अब हो रहा है बवाल! Don't Miss! - Lifestyle Sawan Month: सावन में किस वजह से है दाढ़ी-बाल कटवाने की मनाही? अब दिल्ली छः हुयी देलही छः! कही ऐसा तो नही कि राकेश किसी अंक ज्योतिषी की सलाह पर फिल्म के हिट होने के लिए यह सब तामझाम कर रहे है। फिल्म में पहली बार अभिषेक और सोनम कपूर की जोड़ी पेश की गई है। कुछ सूत्रों के अनुसार प्रख्यात अंक ज्योतिषी भाविक संघवी के कहने पर ही फिल्म का नाम बदला गया है। उनके अनुसार दिल्ली छः के जो अंक बनते थे उसके अनुसार यह अभिषेक ओर सोनम के लिए फिट नही बैठते थे। पर देलही छः से बनने वाले अंको से पुरी युनिट का फायदा होने के आसार है। भाविक की गणना के अनुसार फिल्म का सबसे ज्यादा फायदा सोनम कपूर और फिलम निर्माता का होने वाला है। खैर किसका कितना फायदा होगा यह तो फिल्म के रिलीज होने के बाद ही पता चल पाएगा!
टेक कंपनी गूगल का साल का सबसे बड़ा इवेंट 'Google I/O 2023' 10 मई से शुरू होने जा रहा है। इवेंट में गूगल अपने सब ब्रांड Pixel और Nest के कई डिवाइस लॉन्च करेगा। इसके साथ ही गूगल एंड्रॉयड 14 के फीचर्स और AI चैटबॉट 'बार्ड' के बारे में कई जानकारी दे सकता है। हम यहां उन प्रोडक्ट्स के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें गूगल अपने इवेंट में लॉन्च कर सकती है या फिर उसके बारे में जानकारी दे सकती है। 2022 में हुए इवेंट में गूगल ने पिक्सल 6A को लॉन्च किया था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस साल गूगल पिक्सल 7A को लॉन्च कर सकता है। गूगल इंडिया ने ट्वीट करके अगले पिक्सल स्मार्टफोन की लॉन्चिंग डेट की जानकारी भी दी है। हालांकि, कंपनी ने 11 मई को लॉन्च होने वाले हैंडसेट के नाम का खुलासा नहीं किया है। गूगल ने ट्वीट करते हुए लिखा है 'बिना चिल्लाए एक्साइटमेंट कैसे दिखाए, एक दोस्त के लिए पूछ रहा हूं. . . 11 मई को फ्लिपकार्ट पर आ रहा हूं। ' इसके साथ ही कंपनी ने स्मार्टफोन को भी टीज किया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गूगल पिक्सल 7A में कंपनी 6. 1 इंच का एमोलेड डिस्प्ले दे सकती है, जिसमें 90Hz की रिफ्रेश रेट मिल सकती है। फोटोग्राफी के लिए स्मार्टफोन में 64MP का प्रायमरी और 12MP अल्ट्रा-वाइड कैमरा मिल सकता है। गूगल पिक्सल 7A की एक्सपेक्टेड प्राइस 45,990 रुपए है। कंपनी I/O इवेंट में गूगल पिक्सल फोल्ड को भी लॉन्च कर सकती है। अपकमिंग पिक्सल फोल्ड के डिजाइन से जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। हालांकि, कंपनी ने ऑफिशियल तौर पर पिक्सल फोल्ड के बारे में किसी भी प्रकार की जानकारी नहीं दी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गूगल पिक्सल फोल्ड में कंपनी 7. 6 इंच की मेन डिस्प्ले और 6. 2 इंच का कवर डिस्प्ले दे सकती है। फोटोग्राफी के लिए स्मार्टफोन में 48MP + 10MP + 10MP का कैमरा मिल सकता है। गूगल का ये प्रीमियम स्मार्टफोन 1. 45 लाख रुपए में लॉन्च हो सकता है। गूगल ने पहली बार अक्टूबर 2022 में पिक्सल टैबलेट के बारे में बात किया था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इवेंट में गूगल इस टैबलेट को 'गूगल टेन्सर G2' प्रोसेस के साथ लॉन्च कर सकता है। इस टैबलेट में 10. 95 इंच की स्क्रीन, 8MP का फ्रंट और रियर कैमरा मिल सकता है। गूगल पिक्सल टैबलेट की एक्सपेक्टेड प्राइस 54,000-58,000 रुपए है। गूगल पहले ही एंड्रॉयड 14 के डेवलपर प्रीव्यू को रोल आउट कर चुका है। अक्टूबर तक यह सभी के लिए रोल आउट कर सकता है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गूगल I/O 2023 इवेंट में कंपनी एंड्रॉयड 14 में मिलने वाले फीचर्स के बारे में जानकारी देगी। गूगल ने I/O 2023 की ऑफिशियल वेबसाइट पर लिखा है 'जनरेटिव AI में नया क्या है? ' इससे संभावना जताई जा रही है कि इस इवेंट में कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स लॉन्च कर सकती है। इसके साथ ही AI चैटबॉट 'बार्ड' के बारे में भी कई जानकारी दी जा सकती है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गूगल इस इवेंट में 20 से अधिक AI प्रोडक्ट लॉन्च कर सकता है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
टेक कंपनी गूगल का साल का सबसे बड़ा इवेंट 'Google I/O दो हज़ार तेईस' दस मई से शुरू होने जा रहा है। इवेंट में गूगल अपने सब ब्रांड Pixel और Nest के कई डिवाइस लॉन्च करेगा। इसके साथ ही गूगल एंड्रॉयड चौदह के फीचर्स और AI चैटबॉट 'बार्ड' के बारे में कई जानकारी दे सकता है। हम यहां उन प्रोडक्ट्स के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें गूगल अपने इवेंट में लॉन्च कर सकती है या फिर उसके बारे में जानकारी दे सकती है। दो हज़ार बाईस में हुए इवेंट में गूगल ने पिक्सल छः एम्पीयर को लॉन्च किया था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस साल गूगल पिक्सल सात एम्पीयर को लॉन्च कर सकता है। गूगल इंडिया ने ट्वीट करके अगले पिक्सल स्मार्टफोन की लॉन्चिंग डेट की जानकारी भी दी है। हालांकि, कंपनी ने ग्यारह मई को लॉन्च होने वाले हैंडसेट के नाम का खुलासा नहीं किया है। गूगल ने ट्वीट करते हुए लिखा है 'बिना चिल्लाए एक्साइटमेंट कैसे दिखाए, एक दोस्त के लिए पूछ रहा हूं. . . ग्यारह मई को फ्लिपकार्ट पर आ रहा हूं। ' इसके साथ ही कंपनी ने स्मार्टफोन को भी टीज किया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गूगल पिक्सल सात एम्पीयर में कंपनी छः. एक इंच का एमोलेड डिस्प्ले दे सकती है, जिसमें नब्बे हर्ट्ज़ की रिफ्रेश रेट मिल सकती है। फोटोग्राफी के लिए स्मार्टफोन में चौंसठMP का प्रायमरी और बारहMP अल्ट्रा-वाइड कैमरा मिल सकता है। गूगल पिक्सल सात एम्पीयर की एक्सपेक्टेड प्राइस पैंतालीस,नौ सौ नब्बे रुपयापए है। कंपनी I/O इवेंट में गूगल पिक्सल फोल्ड को भी लॉन्च कर सकती है। अपकमिंग पिक्सल फोल्ड के डिजाइन से जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। हालांकि, कंपनी ने ऑफिशियल तौर पर पिक्सल फोल्ड के बारे में किसी भी प्रकार की जानकारी नहीं दी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गूगल पिक्सल फोल्ड में कंपनी सात. छः इंच की मेन डिस्प्ले और छः. दो इंच का कवर डिस्प्ले दे सकती है। फोटोग्राफी के लिए स्मार्टफोन में अड़तालीसMP + दसMP + दसMP का कैमरा मिल सकता है। गूगल का ये प्रीमियम स्मार्टफोन एक. पैंतालीस लाख रुपए में लॉन्च हो सकता है। गूगल ने पहली बार अक्टूबर दो हज़ार बाईस में पिक्सल टैबलेट के बारे में बात किया था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इवेंट में गूगल इस टैबलेट को 'गूगल टेन्सर Gदो' प्रोसेस के साथ लॉन्च कर सकता है। इस टैबलेट में दस. पचानवे इंच की स्क्रीन, आठMP का फ्रंट और रियर कैमरा मिल सकता है। गूगल पिक्सल टैबलेट की एक्सपेक्टेड प्राइस चौवन,शून्य-अट्ठावन,शून्य रुपयापए है। गूगल पहले ही एंड्रॉयड चौदह के डेवलपर प्रीव्यू को रोल आउट कर चुका है। अक्टूबर तक यह सभी के लिए रोल आउट कर सकता है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गूगल I/O दो हज़ार तेईस इवेंट में कंपनी एंड्रॉयड चौदह में मिलने वाले फीचर्स के बारे में जानकारी देगी। गूगल ने I/O दो हज़ार तेईस की ऑफिशियल वेबसाइट पर लिखा है 'जनरेटिव AI में नया क्या है? ' इससे संभावना जताई जा रही है कि इस इवेंट में कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स लॉन्च कर सकती है। इसके साथ ही AI चैटबॉट 'बार्ड' के बारे में भी कई जानकारी दी जा सकती है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गूगल इस इवेंट में बीस से अधिक AI प्रोडक्ट लॉन्च कर सकता है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
भाजपा के वरिष्ठ नेता राजीव प्रताप रूडी ने रविवार को कहा कि केंद्र सरकार किसी भी परिस्थिति में संशोधित नागरिकता कानून को निरस्त नहीं करेगी। साथ ही कहा पाकिस्तान में गुरद्वारे पर पथराव और हालिया हिंसा दिखाती है कि नया कानून कितना जरूरी है। संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के समर्थन में चलाए जा रहे जागरूकता अभियान में शामिल होने ओडिशा पहुंचे पूर्व केंद्रीय मंत्री ने विपक्षी पार्टियों पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग कानून पर लोगों को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं वे कभी सफल नहीं होंगे। भाजपा सांसद ने कहा, "सीएए को लागू करने से मोदी सरकार के एक इंच भी पीछे हटने का सवाल नहीं उठता। " संशोधित कानून का विरोध करने वालों पर निशाना साधते हुए रूडी ने कहा कि नये नागरिकता कानून के खिलाफ विधानसभा में किसी तरह का प्रस्ताव लाने का प्रयास "असंवैधानिक" था।
भाजपा के वरिष्ठ नेता राजीव प्रताप रूडी ने रविवार को कहा कि केंद्र सरकार किसी भी परिस्थिति में संशोधित नागरिकता कानून को निरस्त नहीं करेगी। साथ ही कहा पाकिस्तान में गुरद्वारे पर पथराव और हालिया हिंसा दिखाती है कि नया कानून कितना जरूरी है। संशोधित नागरिकता कानून के समर्थन में चलाए जा रहे जागरूकता अभियान में शामिल होने ओडिशा पहुंचे पूर्व केंद्रीय मंत्री ने विपक्षी पार्टियों पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग कानून पर लोगों को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं वे कभी सफल नहीं होंगे। भाजपा सांसद ने कहा, "सीएए को लागू करने से मोदी सरकार के एक इंच भी पीछे हटने का सवाल नहीं उठता। " संशोधित कानून का विरोध करने वालों पर निशाना साधते हुए रूडी ने कहा कि नये नागरिकता कानून के खिलाफ विधानसभा में किसी तरह का प्रस्ताव लाने का प्रयास "असंवैधानिक" था।
राजस्थान के सीमावर्ती बाड़मेर जिले के एक सरकारी स्कूल में स्वाधीनता दिवस कार्यक्रम के बाद नशीले पदार्थो सेवन करने का मामला सामने आया है। इस बात पर स्कूली शिक्षकों का कहना है की सथनीय लोगों ने कार्यक्रम समाप्त होने के बाद अपने स्तर पर अफीम की मांग कर इसका सेवन करना शुरू कर दिया। यह घटना बाड़मेर जिले के गुड़ामालानी ब्लॉक की रावलीनाडी स्कूल की है। यह मामला तब सामने आया जब ये सोशल मीडिया में डाला गया वायरल वीडियो में दावा किया जा रहा है स्कूल परिसर में कई लोग डोडो और अफीम का सेवन कर रहे हैं। बताया गया कि करीब दो से तीन घण्टों तक दर्जनों लोगों ने नशीले पदार्थों का सेवन किया। इस मामले में ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ओमप्रकाश बिश्नोई का कहना है कि कार्यक्रम समाप्त होने के बाद गांव के लोग यहां रुके रहे और वायरल वीडियो में वही लोग अफीम का सेवन करते हुए नजर आ रहे हैं। इसमें विद्यालय का कोई भी व्यक्ति शामिल नहीं था और ना ही विद्यालय प्रशासन द्वारा मादक पदार्थ उपलब्ध करवाए गए थे। अधिकारी ने कहा कि मंगलवार को स्कूल खुलते ही मामले की जांच शुरू की जाएगी और जो भी तथ्य होंगे वह सामने आने के बाद उनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी। वीडियो में स्कूली बच्चे भी दिखाई दे रहे हैं लेकिन बिना किसी पुख्ता सबूत से यह कहना लाजमी नहीं होगा की उन्होंने इन नशीले पदार्थों का सेवन किया है या नहीं।
राजस्थान के सीमावर्ती बाड़मेर जिले के एक सरकारी स्कूल में स्वाधीनता दिवस कार्यक्रम के बाद नशीले पदार्थो सेवन करने का मामला सामने आया है। इस बात पर स्कूली शिक्षकों का कहना है की सथनीय लोगों ने कार्यक्रम समाप्त होने के बाद अपने स्तर पर अफीम की मांग कर इसका सेवन करना शुरू कर दिया। यह घटना बाड़मेर जिले के गुड़ामालानी ब्लॉक की रावलीनाडी स्कूल की है। यह मामला तब सामने आया जब ये सोशल मीडिया में डाला गया वायरल वीडियो में दावा किया जा रहा है स्कूल परिसर में कई लोग डोडो और अफीम का सेवन कर रहे हैं। बताया गया कि करीब दो से तीन घण्टों तक दर्जनों लोगों ने नशीले पदार्थों का सेवन किया। इस मामले में ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ओमप्रकाश बिश्नोई का कहना है कि कार्यक्रम समाप्त होने के बाद गांव के लोग यहां रुके रहे और वायरल वीडियो में वही लोग अफीम का सेवन करते हुए नजर आ रहे हैं। इसमें विद्यालय का कोई भी व्यक्ति शामिल नहीं था और ना ही विद्यालय प्रशासन द्वारा मादक पदार्थ उपलब्ध करवाए गए थे। अधिकारी ने कहा कि मंगलवार को स्कूल खुलते ही मामले की जांच शुरू की जाएगी और जो भी तथ्य होंगे वह सामने आने के बाद उनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी। वीडियो में स्कूली बच्चे भी दिखाई दे रहे हैं लेकिन बिना किसी पुख्ता सबूत से यह कहना लाजमी नहीं होगा की उन्होंने इन नशीले पदार्थों का सेवन किया है या नहीं।
कुल्लू - शहर के सबसे महत्त्वपूर्ण वार्ड नंबर नौ में इन दिनों सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमराई हुई है। वार्ड नंबर नौ में आईपीएच कार्यालय के साथ बहने वाले नाले में हर तरफ गंदगी का आलम बना हुआ है, लेकिन नगर परिषद इससे पूरी तरह से बेखबर है। वार्ड नंबर नौ नगर परिषद के उपाध्यक्ष का अपना वार्ड है। ऐसे में लोगों का कहना है कि नगर परिषद के उपाध्यक्ष के अपने वार्ड का ही यह हाल है, तो बाकी वार्डों का क्या हाल होगा। उल्लेखनीय है कि आईपीएच कार्यालय के साथ बहने वाले इस नाले में स्थानीय लोग भी घरों से कचरा आदि फेंक रहे हैं। हालांकि नगर परिषद यह भी दावा करती है कि घर-घर से कूड़ा उठाने की योजना चलाई हुई है। ऐसे में यहां ये सवाल उठ रहे हैं कि घर-घर से कूड़ा उठाने की योजना के बाद भी लोग नाले में गंदगी को क्यों फैला रहे हैं। गौर रहे कि नाले का सीधा पानी सदानीरा ब्यास में जा रहा है। ऐसे में यह सारी गदंगी ब्यास में ही जा रही है, जिससे कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों की भी यहां पर जमकर अवहेलना हो रही है। बता दें कि आईपीएच कार्यालय में हर दिन लोगों का आना-जाना लगा रहता है, नाले में फैलाई जा रही गंदगी से हर कोई परेशान है। इतना ही नहीं स्थानीय लोगों ने इस बारे नगर परिषद के अधिकारियों को अवगत भी करवाया, लेकिन नगर परिषद के अधिकारियों ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। अब आलम यह है कि स्थानीय लोग भी घरों का कूड़ा-कचरा यहीं पर ही फेंक कर नियमों को ठेंगा दिखा रहे हैं।
कुल्लू - शहर के सबसे महत्त्वपूर्ण वार्ड नंबर नौ में इन दिनों सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमराई हुई है। वार्ड नंबर नौ में आईपीएच कार्यालय के साथ बहने वाले नाले में हर तरफ गंदगी का आलम बना हुआ है, लेकिन नगर परिषद इससे पूरी तरह से बेखबर है। वार्ड नंबर नौ नगर परिषद के उपाध्यक्ष का अपना वार्ड है। ऐसे में लोगों का कहना है कि नगर परिषद के उपाध्यक्ष के अपने वार्ड का ही यह हाल है, तो बाकी वार्डों का क्या हाल होगा। उल्लेखनीय है कि आईपीएच कार्यालय के साथ बहने वाले इस नाले में स्थानीय लोग भी घरों से कचरा आदि फेंक रहे हैं। हालांकि नगर परिषद यह भी दावा करती है कि घर-घर से कूड़ा उठाने की योजना चलाई हुई है। ऐसे में यहां ये सवाल उठ रहे हैं कि घर-घर से कूड़ा उठाने की योजना के बाद भी लोग नाले में गंदगी को क्यों फैला रहे हैं। गौर रहे कि नाले का सीधा पानी सदानीरा ब्यास में जा रहा है। ऐसे में यह सारी गदंगी ब्यास में ही जा रही है, जिससे कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों की भी यहां पर जमकर अवहेलना हो रही है। बता दें कि आईपीएच कार्यालय में हर दिन लोगों का आना-जाना लगा रहता है, नाले में फैलाई जा रही गंदगी से हर कोई परेशान है। इतना ही नहीं स्थानीय लोगों ने इस बारे नगर परिषद के अधिकारियों को अवगत भी करवाया, लेकिन नगर परिषद के अधिकारियों ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। अब आलम यह है कि स्थानीय लोग भी घरों का कूड़ा-कचरा यहीं पर ही फेंक कर नियमों को ठेंगा दिखा रहे हैं।
पुस्तक रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1867 ( श्रद्यपयत यथा सशाघित) ] [ 175 पहले से प्रकाशित सामग्री का पुन प्रकाशन भारतीय प्रेस परिषद् का विचार था कि किसी समाचारपत्र में प्रकाशित टिप्पणियाँ भोर सपादकीय लेख किसी प्रय समाचारपत्र में उचित प्रभिस्वीकृत भथवा ग्राना प्राप्त किय जाने पर प्रकाशित किये जा सकते हैं । (भा प्रेप वा रि 1984, पृ स 45, 49 ) नियर का आग्रह सवेदनात्मक मामलों के संबंध में किसी लेख वे लेखन और प्रकाशन के विषय में यह प्रमुखता से एच्छिा है कि उचित नियंत्रण का प्रयोग किया जाना चाहिए तथा कोई लेख प्रथवा सपादकीय प्रकाशित नहीं होना चाहिए जिससे तनाव उत्पन्न हो अथवा स्थिति में भपवृद्धि हो । समाचारपत्रो मोर पत्रिकाओं पर विशेष उत्तरदायित्व है तथा उन्हें सब प्रकार की साम्प्रदायिक्ता, सकुचित और धार्मिक भावनामों को शांत करने तथा सब वर्गों के बीच स्वस्थ्य, प्रसन्न और शांतिपूर्ण सम्ब घ बनाए रखने चाहिए। (भा प्रेप, वारि 1986 पृ स 53 ) जेल मैनुभल वे माक्षेपिन साविधिक प्रावधानों को वधता पर प्रेप कोई विचार व्यक्त नही कर सकती क्योंकि ऐसा विचार करना परिषद के काम क्षन के बाहर है (भा प्रेप, वा रि 1986 पृ स 8637) धारा 14 के तहत शिकायतें बनावटी विज्ञापन - विनापनदाता द्वारा बिना स्वीकृति व विज्ञापन प्रकाशित करना स्वीकृत पत्रकारिता नीति के नियमों का उल्लघन है। (भा प्रेप वारि 1984, पृ स 87, नि दि 61084) समाचारपत्र की कुछ प्रतियो मे विज्ञापन प्रकाशित करना और कुछ में नहीं - अनुचित पत्रकारिता है (भा प्रेप वा रि 1986, पृ स 102 ) [] शिकायत के अनुसार भाक्षेपित विज्ञापन अरुचिकर माषा में लिखा गया था तथा उसमे अत्यधिक प्रापत्तिजनक परोक्ष सकेत शामिल थे। परिषद् ने ऐसे विज्ञापन पर भसतोष यक्त किया । (भा प्रेप, वा रि 1987, पृ स 102, नि दि 24387) [] साहित्यिक चोरी पर परिषद् द्वारा सबंधित समाचारपत्र को सेद प्रकाशन का निर्देश । (माप्र प वा रि 1987, पृ स 115 ) [ योजनाबद्ध प्रादोलन परिषद् ने सबंधित समाचारपत्र में प्रकाशित समाचारों को शिकायतकर्ता के विरुद्ध एक योजनावद्ध भादोलन के रूप में प्रतीत होना तथा इस भादोलन को उद्देश्यपरक माना । किसी व्यक्ति अथव सस्थान के विरुद्ध योजनाबद्ध उद्देश्यपरक भादोलन साधारणत अभिप्रे और धनिष्ट निवारक नहीं है । ( मा प्रेप, वा रि 1987, पृ स 291) 176] [] सामान्यतया पत्रकारिता नीतियों के अनुरूप, सम्पादक को खडन प्रकाशित करना चाहिए हालावि सम्पादक, यदि चाहे तो वह अपनी टिप्पणियां प्रकाशित कर सकते हैं । ( मा प्रेप, वारि 1987, पृम 214, नि दि 25387) । यदि सम्पादक प्रत्युत्तर को आपत्तिजनक समझते थे तो उन्हें शिकायतकर्ता से पुन प्रेषित करने के लिए कहना चाहिए था अथवा उसमे सम्पादन करके उसे स्वय प्रकाशित कर देना चाहिए था। ( मा प्रेप, था रि 1987, पृ स 225 नि दि 8787) उत्तर का अधिकार स्थापित - अपने विरुद्ध प्रकाशित किसी समाचार का खडन पीडित व्यक्ति को बचाने का अधिकार है बशर्ते वह उचित भौर सौम्य हो यानि शरुचिपूर्ण नहीं हो। ( मा प्रेप, वारि 1984, पृ स 89, निदि 61084) सम्पादक द्वारा दिया स्पीकरण कि लेख के सम्बद्ध समय में वह सम्पादक नही थे, मत उन पर कोई उत्तरदायित्व नहीं था, वास्तव मे कोई स्पष्टीकरण नही था क्योकि शिकायत व्यक्तिगत रूप से उनके विरुद्ध नही थी वरन् समाचारपत्र के विरुद्ध यो (भा प्रेप, वा रि 1986, पृ स 211) परिषद् सतुष्ट थी कि शिकायतकर्ता ने वतमान मामले में कोई खडन न भेजकर पूर्णरूप से याय किया था, ऐसे खडन से ग्रसत्य शरारतपूर्ण और निदात्मक मारोपो का और प्रचार होगा। (भा प्रेप, वा रि 1986, पृ स 215, नि दि 29101986) परिषद् की जाँच समिति के समक्ष एक पक्ष द्वारा सुनवाई को भागे के लिए स्थगित करने की प्राथना की गयी। दूसरे पक्ष ने मुआवजे की माग षो । समिति ने मामले के तथ्यो और परिस्थितियो पर विचारोपरात मनुभव किया कि मुआवजे के आवेदन पर किसी प्रदेश की भावश्यकता नहीं है । ( मा प्रेप, दारि 1986, पृ स 223224, नि दि 291286) [] मानहानिजय प्रकाशन - जहाँ तक पत्रकारिता नीतियो का सबध है, यह सर्वमान्य है कि एक पत्रकार को मानहानि के विषय में प्रकाशित समाचार के परिणामों के लिए कोई विशेषाधिकार प्राप्त नहीं है तथा वह इनके लिये उतना ही उत्तरदायी होता है जितना कि एक साधारण नागरिक । ( मा प्र प वारि 1984, पृ स 136 नि दि 12384) [] प्रेस को राजनीतिक विषयों पर अभिव्यक्ति के अधिकार का उपयोग ऐसा नहीं होना चाहिये जो सम्पूरण दश के हिन को गमोर रूप से क्षति पहुँचाये ।
पुस्तक रजिस्ट्रीकरण अधिनियम एक हज़ार आठ सौ सरसठ ] [ एक सौ पचहत्तर पहले से प्रकाशित सामग्री का पुन प्रकाशन भारतीय प्रेस परिषद् का विचार था कि किसी समाचारपत्र में प्रकाशित टिप्पणियाँ भोर सपादकीय लेख किसी प्रय समाचारपत्र में उचित प्रभिस्वीकृत भथवा ग्राना प्राप्त किय जाने पर प्रकाशित किये जा सकते हैं । नियर का आग्रह सवेदनात्मक मामलों के संबंध में किसी लेख वे लेखन और प्रकाशन के विषय में यह प्रमुखता से एच्छिा है कि उचित नियंत्रण का प्रयोग किया जाना चाहिए तथा कोई लेख प्रथवा सपादकीय प्रकाशित नहीं होना चाहिए जिससे तनाव उत्पन्न हो अथवा स्थिति में भपवृद्धि हो । समाचारपत्रो मोर पत्रिकाओं पर विशेष उत्तरदायित्व है तथा उन्हें सब प्रकार की साम्प्रदायिक्ता, सकुचित और धार्मिक भावनामों को शांत करने तथा सब वर्गों के बीच स्वस्थ्य, प्रसन्न और शांतिपूर्ण सम्ब घ बनाए रखने चाहिए। जेल मैनुभल वे माक्षेपिन साविधिक प्रावधानों को वधता पर प्रेप कोई विचार व्यक्त नही कर सकती क्योंकि ऐसा विचार करना परिषद के काम क्षन के बाहर है धारा चौदह के तहत शिकायतें बनावटी विज्ञापन - विनापनदाता द्वारा बिना स्वीकृति व विज्ञापन प्रकाशित करना स्वीकृत पत्रकारिता नीति के नियमों का उल्लघन है। समाचारपत्र की कुछ प्रतियो मे विज्ञापन प्रकाशित करना और कुछ में नहीं - अनुचित पत्रकारिता है [] शिकायत के अनुसार भाक्षेपित विज्ञापन अरुचिकर माषा में लिखा गया था तथा उसमे अत्यधिक प्रापत्तिजनक परोक्ष सकेत शामिल थे। परिषद् ने ऐसे विज्ञापन पर भसतोष यक्त किया । [] साहित्यिक चोरी पर परिषद् द्वारा सबंधित समाचारपत्र को सेद प्रकाशन का निर्देश । [ योजनाबद्ध प्रादोलन परिषद् ने सबंधित समाचारपत्र में प्रकाशित समाचारों को शिकायतकर्ता के विरुद्ध एक योजनावद्ध भादोलन के रूप में प्रतीत होना तथा इस भादोलन को उद्देश्यपरक माना । किसी व्यक्ति अथव सस्थान के विरुद्ध योजनाबद्ध उद्देश्यपरक भादोलन साधारणत अभिप्रे और धनिष्ट निवारक नहीं है । एक सौ छिहत्तर] [] सामान्यतया पत्रकारिता नीतियों के अनुरूप, सम्पादक को खडन प्रकाशित करना चाहिए हालावि सम्पादक, यदि चाहे तो वह अपनी टिप्पणियां प्रकाशित कर सकते हैं । । यदि सम्पादक प्रत्युत्तर को आपत्तिजनक समझते थे तो उन्हें शिकायतकर्ता से पुन प्रेषित करने के लिए कहना चाहिए था अथवा उसमे सम्पादन करके उसे स्वय प्रकाशित कर देना चाहिए था। उत्तर का अधिकार स्थापित - अपने विरुद्ध प्रकाशित किसी समाचार का खडन पीडित व्यक्ति को बचाने का अधिकार है बशर्ते वह उचित भौर सौम्य हो यानि शरुचिपूर्ण नहीं हो। सम्पादक द्वारा दिया स्पीकरण कि लेख के सम्बद्ध समय में वह सम्पादक नही थे, मत उन पर कोई उत्तरदायित्व नहीं था, वास्तव मे कोई स्पष्टीकरण नही था क्योकि शिकायत व्यक्तिगत रूप से उनके विरुद्ध नही थी वरन् समाचारपत्र के विरुद्ध यो परिषद् सतुष्ट थी कि शिकायतकर्ता ने वतमान मामले में कोई खडन न भेजकर पूर्णरूप से याय किया था, ऐसे खडन से ग्रसत्य शरारतपूर्ण और निदात्मक मारोपो का और प्रचार होगा। परिषद् की जाँच समिति के समक्ष एक पक्ष द्वारा सुनवाई को भागे के लिए स्थगित करने की प्राथना की गयी। दूसरे पक्ष ने मुआवजे की माग षो । समिति ने मामले के तथ्यो और परिस्थितियो पर विचारोपरात मनुभव किया कि मुआवजे के आवेदन पर किसी प्रदेश की भावश्यकता नहीं है । [] मानहानिजय प्रकाशन - जहाँ तक पत्रकारिता नीतियो का सबध है, यह सर्वमान्य है कि एक पत्रकार को मानहानि के विषय में प्रकाशित समाचार के परिणामों के लिए कोई विशेषाधिकार प्राप्त नहीं है तथा वह इनके लिये उतना ही उत्तरदायी होता है जितना कि एक साधारण नागरिक । [] प्रेस को राजनीतिक विषयों पर अभिव्यक्ति के अधिकार का उपयोग ऐसा नहीं होना चाहिये जो सम्पूरण दश के हिन को गमोर रूप से क्षति पहुँचाये ।
रामगढ़ः कोरोना वायरस से बचाव एवं इसके रोकथाम हेतु पूरे देश को 3 मई तक लॉक डाउन किया गया है. हालांकि रामगढ़ जिला में अब तक किसी व्यक्ति के कोविड-19 से संक्रमित होने से संबंधित कोई भी मामला सामने नहीं आया है लेकिन जिला प्रशासन, रामगढ़ द्वारा कोविड-19 से उत्पन्न होने वाले किसी भी परिस्थिति से निपटने हेतु युद्ध स्तर पर सभी तैयारियां की जा रही हैं. इसी क्रम में बुधवार को कोविड-19 से संक्रमित किसी व्यक्ति को आइसोलेशन सेंटर से किसी अस्पताल में शिफ्ट करने हेतु पूरी प्रक्रिया की मॉक ड्रिल की गई. मॉक ड्रिल के लिए छतरमांडू स्थित सदर अस्पताल एवं स्पेशल कोविड-19 हॉस्पिटल के रूप में अधिग्रहित किए गए नई सराय स्थित सीसीएल अस्पताल को चुना गया. मॉक ड्रिल को वास्तविक रूप देने के लिए हर बारीकी जैसे समय सीमा, सोशल डिस्टेंसिंग, डिसइन्फेक्शन आदि जैसी हर बात का विशेष ध्यान रखा गया. मॉक ड्रिल दौरान जिला उपायुक्त संदीप सिंह स्वयं मौजूद रहे एवं पूरी मॉक ड्रिल प्रक्रिया में अपनी नजर बनाई रखी. मॉक ड्रिल के दौरान किस प्रकार से किसी भी मरीज को विशेष सावधानियां बरतते हुए किसी एक जगह से दूसरी जगह तक ले जाना है अथवा जरूरत पड़ने पर मरीज को किस प्रकार से वेंटिलेटर सेवा दी जानी है की पूरी प्रक्रिया को वास्तविक रूप दिया गया. मॉक ड्रिल के बाद सिंह ने नई सराय स्थित सीसीएल अस्पताल के चिकित्सकों के साथ कोविड-19 से संक्रमित किसी भी व्यक्ति के उपचार हेतु किए जाने वाले कार्यों पर विस्तार पूर्वक चर्चा की. इस दौरान उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को नियमित अंतराल पर सैनिटाइज करने, पी पी ई के इस्तेमाल, साफ सफाई आदि के संबंध में कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए. मॉक ड्रिल के दौरान पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी अनंत कुमार, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी रजनी रेजिना इंदवार, प्रभारी सिविल सर्जन डॉक्टर एस पी सिंह, डीएस सदर अस्पताल डॉ. विनोद कुमार, डॉक्टर साथी घोष, डॉ. विनय मिश्रा, एस एमओ डब्ल्यूएचओ डॉक्टर अमोल शिंदे सहित कई अन्य उपस्थित थे.
रामगढ़ः कोरोना वायरस से बचाव एवं इसके रोकथाम हेतु पूरे देश को तीन मई तक लॉक डाउन किया गया है. हालांकि रामगढ़ जिला में अब तक किसी व्यक्ति के कोविड-उन्नीस से संक्रमित होने से संबंधित कोई भी मामला सामने नहीं आया है लेकिन जिला प्रशासन, रामगढ़ द्वारा कोविड-उन्नीस से उत्पन्न होने वाले किसी भी परिस्थिति से निपटने हेतु युद्ध स्तर पर सभी तैयारियां की जा रही हैं. इसी क्रम में बुधवार को कोविड-उन्नीस से संक्रमित किसी व्यक्ति को आइसोलेशन सेंटर से किसी अस्पताल में शिफ्ट करने हेतु पूरी प्रक्रिया की मॉक ड्रिल की गई. मॉक ड्रिल के लिए छतरमांडू स्थित सदर अस्पताल एवं स्पेशल कोविड-उन्नीस हॉस्पिटल के रूप में अधिग्रहित किए गए नई सराय स्थित सीसीएल अस्पताल को चुना गया. मॉक ड्रिल को वास्तविक रूप देने के लिए हर बारीकी जैसे समय सीमा, सोशल डिस्टेंसिंग, डिसइन्फेक्शन आदि जैसी हर बात का विशेष ध्यान रखा गया. मॉक ड्रिल दौरान जिला उपायुक्त संदीप सिंह स्वयं मौजूद रहे एवं पूरी मॉक ड्रिल प्रक्रिया में अपनी नजर बनाई रखी. मॉक ड्रिल के दौरान किस प्रकार से किसी भी मरीज को विशेष सावधानियां बरतते हुए किसी एक जगह से दूसरी जगह तक ले जाना है अथवा जरूरत पड़ने पर मरीज को किस प्रकार से वेंटिलेटर सेवा दी जानी है की पूरी प्रक्रिया को वास्तविक रूप दिया गया. मॉक ड्रिल के बाद सिंह ने नई सराय स्थित सीसीएल अस्पताल के चिकित्सकों के साथ कोविड-उन्नीस से संक्रमित किसी भी व्यक्ति के उपचार हेतु किए जाने वाले कार्यों पर विस्तार पूर्वक चर्चा की. इस दौरान उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को नियमित अंतराल पर सैनिटाइज करने, पी पी ई के इस्तेमाल, साफ सफाई आदि के संबंध में कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए. मॉक ड्रिल के दौरान पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी अनंत कुमार, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी रजनी रेजिना इंदवार, प्रभारी सिविल सर्जन डॉक्टर एस पी सिंह, डीएस सदर अस्पताल डॉ. विनोद कुमार, डॉक्टर साथी घोष, डॉ. विनय मिश्रा, एस एमओ डब्ल्यूएचओ डॉक्टर अमोल शिंदे सहित कई अन्य उपस्थित थे.
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
उपराष्ट्रपति श्री एम. हामिद अंसारी ने इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि चुनाव प्रबंधों में अपनी उपलब्धियों के बावजूद हम अपनी वाह-वाही नहीं कर सकते। चुनाव आयोग द्वारा तीसरें राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर आयोजित एक राष्ट्रीय समारोह में 'सर्वेश्रेष्ठ निर्वाचन कार्य प्रणाली के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार' प्रदान करते हुए उन्होंने कहा कि छह दशकों का अनुभव हमें सिखाता है कि इसका सही तरीके से विश्लेषण किया जाना चाहिए। इससे पता चलता है कि प्रत्येक नागरिक जिसे मत देने का अधिकारी मिला हुआ है, इसका इस्तेमाल नहीं करता और दूसरा हमारे द्वारा अपनाई गई प्रणाली में अक्सर विजेता कुल डाले गये मतों के मतों के मुकाबले बहुमत से कम मत हासिल कर विजय प्राप्त करता है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि पहले भी और हाल के वर्षों में लोकसभा के निर्वाचित अधिकतर सदस्यों ने अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में डाले गये कम मतों के आधार पर चुनाव जीता। राज्य विधानसभा चुनाव में भी स्थिति बदतर हुई है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह प्रणाली उम्मीदवारों का ध्यान एक खंड के मतदाताओं के मत हासिल करने में केन्द्रीत करती है, जिससे सामाजिक विभाजन पैदा होता है। चुनाव आयोग के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि आयोग द्वारा तय किये गये उच्च मानदंडों को विश्व स्तर पर मान्यता मिली है। सच्चाई यह है कि आयोग भारतीय अंतरराष्ट्रीय लोकतांत्रिक संस्थान और चुनाव प्रबंध के जरिये अन्य देशों के साथ चुनाव प्रबंधन के बारे में अपने संसाधनों का आदान-प्रदान कर रहा है। राष्ट्रीय मतदाता दिवस का मकसद 18-19 वर्ष के मतदाताओं को मतदाता सूची में लाना है।
उपराष्ट्रपति श्री एम. हामिद अंसारी ने इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि चुनाव प्रबंधों में अपनी उपलब्धियों के बावजूद हम अपनी वाह-वाही नहीं कर सकते। चुनाव आयोग द्वारा तीसरें राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर आयोजित एक राष्ट्रीय समारोह में 'सर्वेश्रेष्ठ निर्वाचन कार्य प्रणाली के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार' प्रदान करते हुए उन्होंने कहा कि छह दशकों का अनुभव हमें सिखाता है कि इसका सही तरीके से विश्लेषण किया जाना चाहिए। इससे पता चलता है कि प्रत्येक नागरिक जिसे मत देने का अधिकारी मिला हुआ है, इसका इस्तेमाल नहीं करता और दूसरा हमारे द्वारा अपनाई गई प्रणाली में अक्सर विजेता कुल डाले गये मतों के मतों के मुकाबले बहुमत से कम मत हासिल कर विजय प्राप्त करता है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि पहले भी और हाल के वर्षों में लोकसभा के निर्वाचित अधिकतर सदस्यों ने अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में डाले गये कम मतों के आधार पर चुनाव जीता। राज्य विधानसभा चुनाव में भी स्थिति बदतर हुई है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह प्रणाली उम्मीदवारों का ध्यान एक खंड के मतदाताओं के मत हासिल करने में केन्द्रीत करती है, जिससे सामाजिक विभाजन पैदा होता है। चुनाव आयोग के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि आयोग द्वारा तय किये गये उच्च मानदंडों को विश्व स्तर पर मान्यता मिली है। सच्चाई यह है कि आयोग भारतीय अंतरराष्ट्रीय लोकतांत्रिक संस्थान और चुनाव प्रबंध के जरिये अन्य देशों के साथ चुनाव प्रबंधन के बारे में अपने संसाधनों का आदान-प्रदान कर रहा है। राष्ट्रीय मतदाता दिवस का मकसद अट्ठारह-उन्नीस वर्ष के मतदाताओं को मतदाता सूची में लाना है।
क्या केजरीवाल का ये तरीका सही है ? अक्सर मन में विचार आता है कि क्या अरविन्द केजरीवाल द्वारा लगातार ढूंढ ढूंढकर भ्रष्ट नेताओं को निशाना बनाना व् आरोपों की झड़ी लगाने का तरीका सही है ?सभी जानते हैं कि राजनीति एक दलदल है और इसमें लगभग सभी नेता गहरे तक समाये हैं .भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे हुए भारतीय राजनीतिज्ञों में से ढूंढकर जो वे आरोपों प्रत्यारोपों द्वारा अपना स्थान बनाना चाह रहे हैं क्या वह हमारे देश से भ्रष्टाचार को हटाने में कारगर साबित हो पायेगा ?सभी जानते हैं कि अधिकांश राजनीतिज्ञ भ्रष्टाचार में घिरे हैं ऐसे में जहाँ तक मेरा विचार है केजरीवाल ये सही नहीं कर रहे हैं .इस तरह वे अपने व्यक्तित्व को उबाऊ रूप दे रहे हैं धीरे धीरे इस तरह उनके भाषणों से लोगों को ऊब महसूस होगी और वे हंसी का रूप ले लेंगे .आज अगर वे सच्चे इरादे से भ्रष्टाचार रुपी बुराई से देश को निजात दिलाना चाहते हैं तो उन्हें अपने को साबित करना होगा वैसे वे स्वयं को अपनी सिविल सर्विस द्वारा भी साबित कर सकते थे .उदाहरण के लिए "खेमका " को ही देखिये जिनकी 20 साल की नौकरी में ४० तबादले हुए और आज भी वे कर्मठता व् ईमानदारी से कर्तव्य पथ पर डटे हुए हैं .ऐसे ही केजरीवाल के हाथ में भी ये शक्ति आई थी लेकिन चलिए उन्होंने इसे त्याग कर राजनीति के पथ पर आगे बढ़ भ्रष्टाचार का मुकाबला करने को ज्यादा शक्तिशाली पथ ढंग माना और उसमे आगे बढ़ अपनी हिम्मत से राजनीतिज्ञों को नाकों चने चबाने को मजबूर किया .आज उन्हें जन समर्थन प्राप्त है और इसे वोट में तब्दील करना होगा और फिर उन्हें चुनाव जीतकर भ्रष्टाचार का जड़ से विनाश करने में पूर्ण सहयोग दे जनता को दिखाना होगा कि वे उनके सपनों से खेलने वाले नहीं बल्कि साकार करने वाले हैं .इसलिए आज उन्हें ये आरोप -प्रत्यारोप की आग उगलनी छोडनी होगी क्योंकि ये जो आज सबको काट कर फैंक रही है कल उनकी अभिव्यक्ति के धार को ही काट कर रख देगी .क्या आप भी यही मानते हैं ? पिछले साठ से अधिक वर्षों में हमें मुलम्मो की चमक देखने की आदत हो गयी है और चूँकि सभी में विकल्प देने और साहस से आगे आकर बोलने का अभाव होता है इस लिए पथ्थरों को देव मानने की प्रवृति पनप जाती है । अब समय बदल रहा है और इस बदलाव के संवाहक बने है श्री केजरीवाल सरीखे व्यक्ति । एक बारगी किसी के प्रयासों को खारिज भी कर देना ठीक नहीं । राजनीति के साथ खिचड़ी शब्द की जोड़ी सही बैठती है यह पकते पकते पकती है समय की डोर पर नज़र रखिये और बदलाव में सहभागिता बनाईये । सुख भरे दिन ज़रूर आयेंगे । मेरा मानना है कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध संघर्ष में केजरीवाल जी की नीयत भले ही नेक हो लेकिन उनके काम करने के तरीके से मैं सहमत नहीं हूँ . वे राजनीती छींटाकशी में ज्यादा रूचि दिखा रहे हैं जिससे असली मुद्दा दबता जा रहा है। उन्हें समझना चाहिए कि किसी को बार बार चोर कहने से बंदा खुद साधू नहीं हो जाता। अगर उन्हें अपना क़द बुलंद करना है तो उन्हें स्व जय प्रकाश नारायण की जनक्रांति से सबक सीखना होगा । तहलका डॉट कॉम की तरह केवल मामले को सेंशेशनेलाइज करके वक़्त गंवाना उनकी अपनी निजी साख को भी भयंकर हानि पहुंचा सकता है।
क्या केजरीवाल का ये तरीका सही है ? अक्सर मन में विचार आता है कि क्या अरविन्द केजरीवाल द्वारा लगातार ढूंढ ढूंढकर भ्रष्ट नेताओं को निशाना बनाना व् आरोपों की झड़ी लगाने का तरीका सही है ?सभी जानते हैं कि राजनीति एक दलदल है और इसमें लगभग सभी नेता गहरे तक समाये हैं .भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे हुए भारतीय राजनीतिज्ञों में से ढूंढकर जो वे आरोपों प्रत्यारोपों द्वारा अपना स्थान बनाना चाह रहे हैं क्या वह हमारे देश से भ्रष्टाचार को हटाने में कारगर साबित हो पायेगा ?सभी जानते हैं कि अधिकांश राजनीतिज्ञ भ्रष्टाचार में घिरे हैं ऐसे में जहाँ तक मेरा विचार है केजरीवाल ये सही नहीं कर रहे हैं .इस तरह वे अपने व्यक्तित्व को उबाऊ रूप दे रहे हैं धीरे धीरे इस तरह उनके भाषणों से लोगों को ऊब महसूस होगी और वे हंसी का रूप ले लेंगे .आज अगर वे सच्चे इरादे से भ्रष्टाचार रुपी बुराई से देश को निजात दिलाना चाहते हैं तो उन्हें अपने को साबित करना होगा वैसे वे स्वयं को अपनी सिविल सर्विस द्वारा भी साबित कर सकते थे .उदाहरण के लिए "खेमका " को ही देखिये जिनकी बीस साल की नौकरी में चालीस तबादले हुए और आज भी वे कर्मठता व् ईमानदारी से कर्तव्य पथ पर डटे हुए हैं .ऐसे ही केजरीवाल के हाथ में भी ये शक्ति आई थी लेकिन चलिए उन्होंने इसे त्याग कर राजनीति के पथ पर आगे बढ़ भ्रष्टाचार का मुकाबला करने को ज्यादा शक्तिशाली पथ ढंग माना और उसमे आगे बढ़ अपनी हिम्मत से राजनीतिज्ञों को नाकों चने चबाने को मजबूर किया .आज उन्हें जन समर्थन प्राप्त है और इसे वोट में तब्दील करना होगा और फिर उन्हें चुनाव जीतकर भ्रष्टाचार का जड़ से विनाश करने में पूर्ण सहयोग दे जनता को दिखाना होगा कि वे उनके सपनों से खेलने वाले नहीं बल्कि साकार करने वाले हैं .इसलिए आज उन्हें ये आरोप -प्रत्यारोप की आग उगलनी छोडनी होगी क्योंकि ये जो आज सबको काट कर फैंक रही है कल उनकी अभिव्यक्ति के धार को ही काट कर रख देगी .क्या आप भी यही मानते हैं ? पिछले साठ से अधिक वर्षों में हमें मुलम्मो की चमक देखने की आदत हो गयी है और चूँकि सभी में विकल्प देने और साहस से आगे आकर बोलने का अभाव होता है इस लिए पथ्थरों को देव मानने की प्रवृति पनप जाती है । अब समय बदल रहा है और इस बदलाव के संवाहक बने है श्री केजरीवाल सरीखे व्यक्ति । एक बारगी किसी के प्रयासों को खारिज भी कर देना ठीक नहीं । राजनीति के साथ खिचड़ी शब्द की जोड़ी सही बैठती है यह पकते पकते पकती है समय की डोर पर नज़र रखिये और बदलाव में सहभागिता बनाईये । सुख भरे दिन ज़रूर आयेंगे । मेरा मानना है कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध संघर्ष में केजरीवाल जी की नीयत भले ही नेक हो लेकिन उनके काम करने के तरीके से मैं सहमत नहीं हूँ . वे राजनीती छींटाकशी में ज्यादा रूचि दिखा रहे हैं जिससे असली मुद्दा दबता जा रहा है। उन्हें समझना चाहिए कि किसी को बार बार चोर कहने से बंदा खुद साधू नहीं हो जाता। अगर उन्हें अपना क़द बुलंद करना है तो उन्हें स्व जय प्रकाश नारायण की जनक्रांति से सबक सीखना होगा । तहलका डॉट कॉम की तरह केवल मामले को सेंशेशनेलाइज करके वक़्त गंवाना उनकी अपनी निजी साख को भी भयंकर हानि पहुंचा सकता है।
Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? अक्षय कुमार की फिल्म टॉयलेट एक प्रेम कथा बॉक्स ऑफिस पर धमाका कर दिया है। फिल्म ब्लॉकबस्टर भी साबित हो चुकी है। कोई शक नहीं कि हर फिल्म की तरह बॉक्स ऑफिस को अक्षय कुमार की इस फिल्म से भी काफी उम्मीदें थीं. . और फिल्म उम्मीदों पर खरी उतरी है। बहरहाल, टॉयलेट एक प्रेम कथा 100 करोड़ का आंकड़ा पार कर चुकी है। खास बात यह है कि टॉयलेट 100 करोड़ क्लब में जाने वाली अक्षय की बैक टू बैक पांचवी फिल्म होगी। वो भी महज 20 महीनों में। यह किसी रिकॉर्ड से कम नहीं. . जहां बाकी एक्टर्स साल, दो साल में एक सुपरहिट फिल्म देते हैं। वहीं, अक्षय कुमार ने एक साल में तीन तीन 100 करोड़ी फिल्में देकर रिकॉर्ड कायम किया है। Toilet Ek Prem Katha is Akshay Kumar's consecutive 5th 100 crore film in just a span of 19 months.
Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? अक्षय कुमार की फिल्म टॉयलेट एक प्रेम कथा बॉक्स ऑफिस पर धमाका कर दिया है। फिल्म ब्लॉकबस्टर भी साबित हो चुकी है। कोई शक नहीं कि हर फिल्म की तरह बॉक्स ऑफिस को अक्षय कुमार की इस फिल्म से भी काफी उम्मीदें थीं. . और फिल्म उम्मीदों पर खरी उतरी है। बहरहाल, टॉयलेट एक प्रेम कथा एक सौ करोड़ का आंकड़ा पार कर चुकी है। खास बात यह है कि टॉयलेट एक सौ करोड़ क्लब में जाने वाली अक्षय की बैक टू बैक पांचवी फिल्म होगी। वो भी महज बीस महीनों में। यह किसी रिकॉर्ड से कम नहीं. . जहां बाकी एक्टर्स साल, दो साल में एक सुपरहिट फिल्म देते हैं। वहीं, अक्षय कुमार ने एक साल में तीन तीन एक सौ करोड़ी फिल्में देकर रिकॉर्ड कायम किया है। Toilet Ek Prem Katha is Akshay Kumar's consecutive पाँचth एक सौ crore film in just a span of उन्नीस months.
Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश का लखीमपुर खीरी एक बार फिर सुर्खियों में है. यहां पर 'विधायक' स्टीकर लगे गाड़ी से बड़ा हादसा हो गया. तेज रफ़्तार स्कॉर्पियो ने 2 लोगों को रौंद दिया है. हादसे में बाइक सवार दोनों भाइयों की दर्दनाक मौत हो गई. बताया जाता है कि गाड़ी योगेश वर्मा की पत्नी नीलम वर्मा के नाम से दर्ज है. जानकारी के मुताबिक, जिस समय यह हादसा हुआ उस समय सदर विधायक गाड़ी में मौजूद नहीं थे. वहीं, पुलिस अपर अधीक्षक अरुण सिंह ने कहा कि लखीमपुर-बहराइच रोड पर रामापुर के पास बाइक और स्कॉर्पियो की टक्कर में दो युवकों की मौत हो गई. मौके पर पकड़ी गई स्कॉर्पियो कार दर विधायक योगेश वर्मा की है. इस मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जा रही है. गाड़ी और ड्राइवर को हिरासत में लिया गया है. ये हादसा सदर कोतवाली के रामापुर के पास हुआ है. जानकारी के मुताबिक, दोनों मृतक खीरी थाना क्षेत्र के गांव कीरतपुर के रहने वाले हैं. वह किसी काम से रामापुर आए थे और जब वह घर लौट रहे थे तभी यह हादसा हो गया. वहीं, दो युवकों की मौत के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है. सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने स्कॉर्पियो कार और उसके चालक को हिरासत में ले लिया है. बता दें कि इससे पहले पिछले साल अक्टूबर में भी लखीमपुर खीरी में हादसा हुआ था. किसानों का एक समूह बीजेपी नेता और यूपी के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के दौरे के खिलाफ पिछले साल तीन अक्टूबर को प्रदर्शन कर रहा था, तभी एक एसयूवी ने चार किसानों को कथित तौर पर कुचल दिया था.
Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश का लखीमपुर खीरी एक बार फिर सुर्खियों में है. यहां पर 'विधायक' स्टीकर लगे गाड़ी से बड़ा हादसा हो गया. तेज रफ़्तार स्कॉर्पियो ने दो लोगों को रौंद दिया है. हादसे में बाइक सवार दोनों भाइयों की दर्दनाक मौत हो गई. बताया जाता है कि गाड़ी योगेश वर्मा की पत्नी नीलम वर्मा के नाम से दर्ज है. जानकारी के मुताबिक, जिस समय यह हादसा हुआ उस समय सदर विधायक गाड़ी में मौजूद नहीं थे. वहीं, पुलिस अपर अधीक्षक अरुण सिंह ने कहा कि लखीमपुर-बहराइच रोड पर रामापुर के पास बाइक और स्कॉर्पियो की टक्कर में दो युवकों की मौत हो गई. मौके पर पकड़ी गई स्कॉर्पियो कार दर विधायक योगेश वर्मा की है. इस मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जा रही है. गाड़ी और ड्राइवर को हिरासत में लिया गया है. ये हादसा सदर कोतवाली के रामापुर के पास हुआ है. जानकारी के मुताबिक, दोनों मृतक खीरी थाना क्षेत्र के गांव कीरतपुर के रहने वाले हैं. वह किसी काम से रामापुर आए थे और जब वह घर लौट रहे थे तभी यह हादसा हो गया. वहीं, दो युवकों की मौत के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है. सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने स्कॉर्पियो कार और उसके चालक को हिरासत में ले लिया है. बता दें कि इससे पहले पिछले साल अक्टूबर में भी लखीमपुर खीरी में हादसा हुआ था. किसानों का एक समूह बीजेपी नेता और यूपी के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के दौरे के खिलाफ पिछले साल तीन अक्टूबर को प्रदर्शन कर रहा था, तभी एक एसयूवी ने चार किसानों को कथित तौर पर कुचल दिया था.
सभी राशियों की अपनी विशेषताएं और लक्षण होते हैं जो किसी के व्यक्तित्व को परिभाषित करते हैं। क्या यह मददगार नहीं होगा यदि आप अपने दिन की शुरुआत इस बारे में पहले से ही जानते हुए करें कि आपके रास्ते में क्या आने वाला है? यह जानने के लिए पढ़ें कि क्या आज का दिन आपके पक्ष में रहेगा। मेष (21 मार्च -20 अप्रैल) अब समय आ गया है कि स्वस्थ जीवन शैली अपनाई जाए, यदि आप परेशानी मुक्त जीवन चाहते हैं। कुछ पिछले बकाया अब भौतिक हो सकते हैं और आपके बैंक बैलेंस को बढ़ा सकते हैं। आपका कौशल और विशेषज्ञता नई नौकरी में स्थापित होने में आपकी सबसे बड़ी संपत्ति साबित होगी। घरेलू मोर्चे पर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन वह दूर हो जाएगी। कार्ड पर छुट्टी है, लेकिन आरक्षण एक समस्या बन सकता है। लव फोकसः किसी ऐसे व्यक्ति के लिए अपना दिल खोलना वास्तव में आवश्यक नहीं है जिस पर आप अभी निश्चित नहीं हैं। वृषभ (अप्रैल 21 - मई 20) जो लोग कुछ समय से अस्वस्थ महसूस कर रहे हैं उनके जल्दी ठीक होने की संभावना है। वित्तीय लाभ आपके खजाने को भरपूर रख सकते हैं। साथी की लालसा रखने वालों को अपना जाल व्यापक बनाने की आवश्यकता होगी। आप में से कुछ लोगों को घरेलू मोर्चे पर स्थिति पर अच्छी पकड़ बनाने की आवश्यकता होगी। आप में से कुछ लोग आज लंबी दूरी की यात्रा कर सकते हैं। आप में से कुछ लोग घर या संपत्ति खरीदने के लिए बचत करने की योजना बना सकते हैं। शैक्षणिक मोर्चे पर सुकून भरे समय की उम्मीद की जा सकती है। प्यार फोकसः कुछ के लिए गाँठ बाँधकर रिश्ते को स्थायी बनाने की संभावनाएँ हैं। GEMINI (21 मई - 21 जून) अस्वस्थ लोग दवा लेने में लापरवाही कर सकते हैं और अपनी बीमारी को लम्बा खींच सकते हैं। हो सकता है कि कोई निवेश उस तरह का प्रतिफल न दे जिसकी आपने आशा की थी। कार्यस्थल पर आपके प्रदर्शन से वरिष्ठ अधिकारी प्रभावित हो सकते हैं। परिवार नए परिवेश को पसंद करेगा और जल्दी घर बसाने में आपकी मदद करेगा। यात्रा, विशेष रूप से ट्रेन से, व्यस्त साबित हो सकती है। शैक्षणिक मोर्चे पर आपके चुने हुए क्षेत्र में पहचान संभव है। लव फोकसः आप अपनी बेबाकी से प्रेमी की संवेदनाओं को ठेस पहुंचा सकते हैं। कर्क (22 जून -22 जुलाई) उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त करने की दिशा में आप सकारात्मक कदम उठाएंगे। कर्ज चुकाने में कुछ कठिनाइयाँ आ सकती हैं, इसलिए कोनों को काटना शुरू करें। आप अपने पालतू प्रोजेक्ट के बारे में बिजनेस पार्टनर को समझाने में कामयाब रहेंगे। घर का वातावरण आपकी नसों को शांत करने में मदद करेगा। छुट्टियों की योजना बनाने वालों के लिए ढेर सारा आनंद है। बिल्डरों और प्रॉपर्टी डीलरों के लिए दिन अनुकूल नजर आ रहा है। लव फोकसः प्रेमी मूडी लग सकता है, लेकिन एक साथ ड्राइव करने से चीजों को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। सिंह (23 जुलाई -23 अगस्त) सही खान-पान और सक्रिय रहने से आप अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखेंगे। धन के मामले में आप भाग्यशाली हैं, क्योंकि धन आपके रास्ते में आता है। घरेलू कामों में हाथ बंटाने से काफ़ी फ़ायदा होगा। परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर कोई कार्यक्रम मनाना कार्ड पर बहुत अधिक है। एक लंबी यात्रा सबसे अधिक थका देने वाली और उबाऊ साबित हो सकती है। कुछ के लिए संपत्ति की खरीद या विकास कार्ड पर है। लव फोकसः परिवार के साथ मिलकर छोटी-छोटी चीजें करने से प्यार के स्थायी बंधन को मजबूत करने की संभावना है। कन्या (24 अगस्त -23 सितंबर) जैसे-जैसे आप फिटनेस के प्रति जागरूक होते जाते हैं, स्वास्थ्य उत्कृष्ट बना रहता है। कोई आर्थिक मामला आपके पक्ष में रहने की संभावना है। कार्यस्थल पर कोई करीबी आपके कंधों से अधिकांश काम का बोझ उठाएगा। आपका दखलंदाजी स्वभाव आपको परिवार के किसी सदस्य के गलत पक्ष में ले जा सकता है। दोस्तों और परिवार के साथ एक ग्रामीण इलाके की यात्रा बहुत मज़ा और उल्लास का वादा करती है। संपत्ति के विवाद में किसी करीबी के साथ मनमुटाव दूर करने की कोशिशें जारी रखें। प्यार फोकसः कुछ के लिए एक आकर्षक विपरीत संख्या से परिचित होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। LIBRA (24 सितंबर -23 अक्टूबर) जो लोग कुछ समय से बीमार हैं उनमें सुधार के सकारात्मक संकेत दिखाई देंगे। आर्थिक मदद चाहने वालों को आंशिक सफलता मिल सकती है। काम पर पीठ थपथपाने की उम्मीद है और यह आपको अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए प्रोत्साहित करेगा। हो सकता है कि आपके मिजाज को घर पर अच्छी तरह से स्वीकार न किया जाए। बहुत यात्रा की परिकल्पना की गई है, लेकिन यह आपके लक्ष्यों को प्राप्त करने में आपकी सहायता करेगी। शैक्षणिक मोर्चे पर प्रतिस्पर्धी स्थिति में आपके विजयी होने की संभावना है। लव फोकसः रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए आपकी प्यार भरी कोमल देखभाल बहुत कुछ करेगी। वृश्चिक (24 अक्टूबर -22 नवंबर) व्यायाम में नियमित रहकर आप संपूर्ण स्वास्थ्य का आनंद ले सकते हैं। वर्तमान मौद्रिक स्थिति आपको उत्साहित मूड में रख सकती है। कार्यस्थल पर किसी शुभचिंतक का सहयोग मनोबल बढ़ाने वाला साबित होगा और काम का बोझ हल्का होगा। घर के किसी जरूरी काम के लिए समय निकालना मुश्किल होगा। कुछ लोगों के लिए दोस्तों के साथ सैर-सपाटे की योजना है और यह काफी मजेदार रहेगा। संपत्ति विवाद में शामिल लोगों के लिए सफलता का योग है। लव फोकसः हो सकता है कि आप जिसे प्यार करते हैं, उसके द्वारा आपकी रोमांटिक भावनाओं का आदान-प्रदान न किया जाए। धनु (23 नवंबर -21 दिसंबर) किसी मुद्दे को लेकर चिंता आपको बेचैन कर सकती है, लेकिन लंबे समय तक नहीं। कर्ज में डूबे लोगों की आर्थिक परेशानी जल्द ही खत्म होने की संभावना है। लेखकों और डिजाइनरों को ग्राहकों को उनके विचारों के बारे में समझाने में मुश्किल हो सकती है। घर में सुकून भरा माहौल बनाने की कोशिश करनी पड़ सकती है। रूटीन से ब्रेक की जरूरत वालों के लिए एक रोमांचक छुट्टी स्टोर में है। अपने घर को व्यवस्थित करने के लिए कुछ करने का संकेत मिलता है। लव फोकसः प्यार हवा में है, लेकिन पहल करना आपके ऊपर है! मकर (22 दिसंबर - 21 जनवरी) अपनी नियमित व्यायाम दिनचर्या से ब्रेक लेने से आपको लाभ होगा। किसी नए व्यापारिक उपक्रम में धन लाभ के योग हैं। नेटवर्किंग रिकॉर्ड समय में अनुमोदन प्राप्त करने में कुछ मदद कर सकती है। परिवार के साथ शॉपिंग करना मज़ेदार रहेगा, लेकिन यह ज़्यादातर विंडो शॉपिंग होगी! आप संपत्ति खरीदने या बेचने के मामले में सोच सकते हैं, क्योंकि सितारे अनुकूल दिखाई दे रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में कठिन दौर से गुजर रहे लोग अच्छा प्रदर्शन करने में सफल रहेंगे। लव फोकसः किसी के साथ रोमांटिक रूप से जुड़ना कुछ के लिए कार्ड पर है। कुम्भ (22 जनवरी -19 फरवरी) जो लोग लंबे समय से बीमार हैं वे चमत्कारिक रूप से ठीक होने की उम्मीद कर सकते हैं। उधार ली गई राशि की वसूली का प्रयास करने वालों के लिए बाधाएँ आ सकती हैं। आपका पेशेवर प्रदर्शन आज सामान्य से कम रह सकता है। घर के मोर्चे पर नवीनीकरण के संदर्भ में परिवर्तन निहाई पर हैं। जो लोग रूटीन से ब्रेक लेना चाहते हैं वे एक सुखद छुट्टी पर जाने की उम्मीद कर सकते हैं। कुछ लोगों द्वारा एक नया घर या अपार्टमेंट लेने की संभावना है। लव फोकसः आपको अपने रोमांटिक रिश्ते में पूरी तरह ईमानदार रहने की जरूरत होगी। मीन (20 फरवरी-मार्च 20) स्वास्थ्य के मामले अन्य चीजों पर प्राथमिकता ले सकते हैं। किसी दोस्त की सलाह लेने से आपको निवेश के मोर्चे पर फ़ायदा हो सकता है। जब तक आप उन्हें अच्छी तरह से नहीं जानते, काम पर दूसरों के साथ स्वतंत्रता न लें। घरेलू मोर्चे पर तनावपूर्ण स्थिति सफलतापूर्वक दूर हो जाएगी। सड़क मार्ग से यात्रा करने के इच्छुक लोगों को अत्यधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है, क्योंकि सड़क पर समस्याएँ दिखाई दे रही हैं। शैक्षणिक मोर्चे पर आपकी प्रतिष्ठा बढ़ने के आसार हैं। लव फोकसः आप जिसे चाहते हैं उसके दिल में अपने लिए जगह बनाने में सफल होते हैं।
सभी राशियों की अपनी विशेषताएं और लक्षण होते हैं जो किसी के व्यक्तित्व को परिभाषित करते हैं। क्या यह मददगार नहीं होगा यदि आप अपने दिन की शुरुआत इस बारे में पहले से ही जानते हुए करें कि आपके रास्ते में क्या आने वाला है? यह जानने के लिए पढ़ें कि क्या आज का दिन आपके पक्ष में रहेगा। मेष अब समय आ गया है कि स्वस्थ जीवन शैली अपनाई जाए, यदि आप परेशानी मुक्त जीवन चाहते हैं। कुछ पिछले बकाया अब भौतिक हो सकते हैं और आपके बैंक बैलेंस को बढ़ा सकते हैं। आपका कौशल और विशेषज्ञता नई नौकरी में स्थापित होने में आपकी सबसे बड़ी संपत्ति साबित होगी। घरेलू मोर्चे पर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन वह दूर हो जाएगी। कार्ड पर छुट्टी है, लेकिन आरक्षण एक समस्या बन सकता है। लव फोकसः किसी ऐसे व्यक्ति के लिए अपना दिल खोलना वास्तव में आवश्यक नहीं है जिस पर आप अभी निश्चित नहीं हैं। वृषभ जो लोग कुछ समय से अस्वस्थ महसूस कर रहे हैं उनके जल्दी ठीक होने की संभावना है। वित्तीय लाभ आपके खजाने को भरपूर रख सकते हैं। साथी की लालसा रखने वालों को अपना जाल व्यापक बनाने की आवश्यकता होगी। आप में से कुछ लोगों को घरेलू मोर्चे पर स्थिति पर अच्छी पकड़ बनाने की आवश्यकता होगी। आप में से कुछ लोग आज लंबी दूरी की यात्रा कर सकते हैं। आप में से कुछ लोग घर या संपत्ति खरीदने के लिए बचत करने की योजना बना सकते हैं। शैक्षणिक मोर्चे पर सुकून भरे समय की उम्मीद की जा सकती है। प्यार फोकसः कुछ के लिए गाँठ बाँधकर रिश्ते को स्थायी बनाने की संभावनाएँ हैं। GEMINI अस्वस्थ लोग दवा लेने में लापरवाही कर सकते हैं और अपनी बीमारी को लम्बा खींच सकते हैं। हो सकता है कि कोई निवेश उस तरह का प्रतिफल न दे जिसकी आपने आशा की थी। कार्यस्थल पर आपके प्रदर्शन से वरिष्ठ अधिकारी प्रभावित हो सकते हैं। परिवार नए परिवेश को पसंद करेगा और जल्दी घर बसाने में आपकी मदद करेगा। यात्रा, विशेष रूप से ट्रेन से, व्यस्त साबित हो सकती है। शैक्षणिक मोर्चे पर आपके चुने हुए क्षेत्र में पहचान संभव है। लव फोकसः आप अपनी बेबाकी से प्रेमी की संवेदनाओं को ठेस पहुंचा सकते हैं। कर्क उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त करने की दिशा में आप सकारात्मक कदम उठाएंगे। कर्ज चुकाने में कुछ कठिनाइयाँ आ सकती हैं, इसलिए कोनों को काटना शुरू करें। आप अपने पालतू प्रोजेक्ट के बारे में बिजनेस पार्टनर को समझाने में कामयाब रहेंगे। घर का वातावरण आपकी नसों को शांत करने में मदद करेगा। छुट्टियों की योजना बनाने वालों के लिए ढेर सारा आनंद है। बिल्डरों और प्रॉपर्टी डीलरों के लिए दिन अनुकूल नजर आ रहा है। लव फोकसः प्रेमी मूडी लग सकता है, लेकिन एक साथ ड्राइव करने से चीजों को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। सिंह सही खान-पान और सक्रिय रहने से आप अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखेंगे। धन के मामले में आप भाग्यशाली हैं, क्योंकि धन आपके रास्ते में आता है। घरेलू कामों में हाथ बंटाने से काफ़ी फ़ायदा होगा। परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर कोई कार्यक्रम मनाना कार्ड पर बहुत अधिक है। एक लंबी यात्रा सबसे अधिक थका देने वाली और उबाऊ साबित हो सकती है। कुछ के लिए संपत्ति की खरीद या विकास कार्ड पर है। लव फोकसः परिवार के साथ मिलकर छोटी-छोटी चीजें करने से प्यार के स्थायी बंधन को मजबूत करने की संभावना है। कन्या जैसे-जैसे आप फिटनेस के प्रति जागरूक होते जाते हैं, स्वास्थ्य उत्कृष्ट बना रहता है। कोई आर्थिक मामला आपके पक्ष में रहने की संभावना है। कार्यस्थल पर कोई करीबी आपके कंधों से अधिकांश काम का बोझ उठाएगा। आपका दखलंदाजी स्वभाव आपको परिवार के किसी सदस्य के गलत पक्ष में ले जा सकता है। दोस्तों और परिवार के साथ एक ग्रामीण इलाके की यात्रा बहुत मज़ा और उल्लास का वादा करती है। संपत्ति के विवाद में किसी करीबी के साथ मनमुटाव दूर करने की कोशिशें जारी रखें। प्यार फोकसः कुछ के लिए एक आकर्षक विपरीत संख्या से परिचित होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। LIBRA जो लोग कुछ समय से बीमार हैं उनमें सुधार के सकारात्मक संकेत दिखाई देंगे। आर्थिक मदद चाहने वालों को आंशिक सफलता मिल सकती है। काम पर पीठ थपथपाने की उम्मीद है और यह आपको अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए प्रोत्साहित करेगा। हो सकता है कि आपके मिजाज को घर पर अच्छी तरह से स्वीकार न किया जाए। बहुत यात्रा की परिकल्पना की गई है, लेकिन यह आपके लक्ष्यों को प्राप्त करने में आपकी सहायता करेगी। शैक्षणिक मोर्चे पर प्रतिस्पर्धी स्थिति में आपके विजयी होने की संभावना है। लव फोकसः रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए आपकी प्यार भरी कोमल देखभाल बहुत कुछ करेगी। वृश्चिक व्यायाम में नियमित रहकर आप संपूर्ण स्वास्थ्य का आनंद ले सकते हैं। वर्तमान मौद्रिक स्थिति आपको उत्साहित मूड में रख सकती है। कार्यस्थल पर किसी शुभचिंतक का सहयोग मनोबल बढ़ाने वाला साबित होगा और काम का बोझ हल्का होगा। घर के किसी जरूरी काम के लिए समय निकालना मुश्किल होगा। कुछ लोगों के लिए दोस्तों के साथ सैर-सपाटे की योजना है और यह काफी मजेदार रहेगा। संपत्ति विवाद में शामिल लोगों के लिए सफलता का योग है। लव फोकसः हो सकता है कि आप जिसे प्यार करते हैं, उसके द्वारा आपकी रोमांटिक भावनाओं का आदान-प्रदान न किया जाए। धनु किसी मुद्दे को लेकर चिंता आपको बेचैन कर सकती है, लेकिन लंबे समय तक नहीं। कर्ज में डूबे लोगों की आर्थिक परेशानी जल्द ही खत्म होने की संभावना है। लेखकों और डिजाइनरों को ग्राहकों को उनके विचारों के बारे में समझाने में मुश्किल हो सकती है। घर में सुकून भरा माहौल बनाने की कोशिश करनी पड़ सकती है। रूटीन से ब्रेक की जरूरत वालों के लिए एक रोमांचक छुट्टी स्टोर में है। अपने घर को व्यवस्थित करने के लिए कुछ करने का संकेत मिलता है। लव फोकसः प्यार हवा में है, लेकिन पहल करना आपके ऊपर है! मकर अपनी नियमित व्यायाम दिनचर्या से ब्रेक लेने से आपको लाभ होगा। किसी नए व्यापारिक उपक्रम में धन लाभ के योग हैं। नेटवर्किंग रिकॉर्ड समय में अनुमोदन प्राप्त करने में कुछ मदद कर सकती है। परिवार के साथ शॉपिंग करना मज़ेदार रहेगा, लेकिन यह ज़्यादातर विंडो शॉपिंग होगी! आप संपत्ति खरीदने या बेचने के मामले में सोच सकते हैं, क्योंकि सितारे अनुकूल दिखाई दे रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में कठिन दौर से गुजर रहे लोग अच्छा प्रदर्शन करने में सफल रहेंगे। लव फोकसः किसी के साथ रोमांटिक रूप से जुड़ना कुछ के लिए कार्ड पर है। कुम्भ जो लोग लंबे समय से बीमार हैं वे चमत्कारिक रूप से ठीक होने की उम्मीद कर सकते हैं। उधार ली गई राशि की वसूली का प्रयास करने वालों के लिए बाधाएँ आ सकती हैं। आपका पेशेवर प्रदर्शन आज सामान्य से कम रह सकता है। घर के मोर्चे पर नवीनीकरण के संदर्भ में परिवर्तन निहाई पर हैं। जो लोग रूटीन से ब्रेक लेना चाहते हैं वे एक सुखद छुट्टी पर जाने की उम्मीद कर सकते हैं। कुछ लोगों द्वारा एक नया घर या अपार्टमेंट लेने की संभावना है। लव फोकसः आपको अपने रोमांटिक रिश्ते में पूरी तरह ईमानदार रहने की जरूरत होगी। मीन स्वास्थ्य के मामले अन्य चीजों पर प्राथमिकता ले सकते हैं। किसी दोस्त की सलाह लेने से आपको निवेश के मोर्चे पर फ़ायदा हो सकता है। जब तक आप उन्हें अच्छी तरह से नहीं जानते, काम पर दूसरों के साथ स्वतंत्रता न लें। घरेलू मोर्चे पर तनावपूर्ण स्थिति सफलतापूर्वक दूर हो जाएगी। सड़क मार्ग से यात्रा करने के इच्छुक लोगों को अत्यधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है, क्योंकि सड़क पर समस्याएँ दिखाई दे रही हैं। शैक्षणिक मोर्चे पर आपकी प्रतिष्ठा बढ़ने के आसार हैं। लव फोकसः आप जिसे चाहते हैं उसके दिल में अपने लिए जगह बनाने में सफल होते हैं।
है अर्थात् सानुबन्ध हो, उसे पताका कहते हैं तथा जो कथा केवल एक ही प्रदेश तक सीमित रहती है, वह प्रकरी है- 'सानुबन्धं पताकाख्यं प्रकरी च प्रदेशभाक् ।" रामायण की कथा मे सुग्रीव या विभीषण का वृत्तान्त पताका है तथा श्रमणा, शबरी की कथाये प्रकरी हैं । इस प्रकार ये चार अर्थप्रकृतियॉ प्रयोजन सिद्धि की हेतु हैं ।' कार्य नामक अर्थप्रकृति स्वय प्रयोजन हैं । नाटक में जो कार्य प्रारम्भ किया जाता है, उसकी प्रगति के विभिन्न आयामो को अवस्था कहते हैं । इस प्रकार फल की इच्छा वाले नायक आदि के द्वारा प्रारब्ध कार्य की पाँच अवस्थाएँ होती हैं - आरम्भ, यत्न, प्राप्त्याशा, नियताप्ति तथा फलागम । किसी भी फल की प्राप्ति के लिए नायकादि मे इच्छा का होना, आरम्भ है । उस फल की प्राप्ति न होने पर उसे पाने के लिए जो उपाय, योजनायुक्त व्यापार एव चेष्टा होती है वह प्रयत्न है । जहाँ उपाय तथा विघ्न की आशङ्का के कारण फलप्राप्ति के विषय मे कोई एकान्तिक निश्चय नहीं हो पाता, फलप्राप्ति की सम्भावना, उपाय, विघ्न, आशका दोनो मे चलती रहती है, वहाँ प्राप्त्याशा नामक अवस्था होती है । जब विघ्न के अभाव के कारण फल की प्राप्ति निश्चित हो जाती है तो नियताप्ति नामकअवस्था होती है। समस्त फल की प्राप्ति हो जाने पर फलागम अवस्था दशरूपकम्-धनञ्जय, १ / १३ । दशरूपकम् पर धनिक की अवलोकटीका १/१८ । अवस्था पञ्च कार्यस्य प्रारब्धस्य फलाथिभिः । आरम्भयत्नप्राप्त्याशानियताप्तिफलागमाः ॥ - दशरूपकम् - ध०, १/१९ औत्सुक्यमात्रमारम्भः फललाभाय भूयसे । दशरूपकम् ध०, १ / २० प्रयत्नस्तु तदप्राप्तौ व्यापारोऽतित्वरान्वितः । - दशरूपकम् - ध०, १/२० उपायापायशङ्काभ्यां प्राप्त्याशा प्रप्तिसम्भवः । - दशरूपकम् - ध०, १ / २१ अपायाभावतः प्राप्तिर्नियताप्तिः सुनिश्चिता । दशरूपकम् ध०, १/२१ -
है अर्थात् सानुबन्ध हो, उसे पताका कहते हैं तथा जो कथा केवल एक ही प्रदेश तक सीमित रहती है, वह प्रकरी है- 'सानुबन्धं पताकाख्यं प्रकरी च प्रदेशभाक् ।" रामायण की कथा मे सुग्रीव या विभीषण का वृत्तान्त पताका है तथा श्रमणा, शबरी की कथाये प्रकरी हैं । इस प्रकार ये चार अर्थप्रकृतियॉ प्रयोजन सिद्धि की हेतु हैं ।' कार्य नामक अर्थप्रकृति स्वय प्रयोजन हैं । नाटक में जो कार्य प्रारम्भ किया जाता है, उसकी प्रगति के विभिन्न आयामो को अवस्था कहते हैं । इस प्रकार फल की इच्छा वाले नायक आदि के द्वारा प्रारब्ध कार्य की पाँच अवस्थाएँ होती हैं - आरम्भ, यत्न, प्राप्त्याशा, नियताप्ति तथा फलागम । किसी भी फल की प्राप्ति के लिए नायकादि मे इच्छा का होना, आरम्भ है । उस फल की प्राप्ति न होने पर उसे पाने के लिए जो उपाय, योजनायुक्त व्यापार एव चेष्टा होती है वह प्रयत्न है । जहाँ उपाय तथा विघ्न की आशङ्का के कारण फलप्राप्ति के विषय मे कोई एकान्तिक निश्चय नहीं हो पाता, फलप्राप्ति की सम्भावना, उपाय, विघ्न, आशका दोनो मे चलती रहती है, वहाँ प्राप्त्याशा नामक अवस्था होती है । जब विघ्न के अभाव के कारण फल की प्राप्ति निश्चित हो जाती है तो नियताप्ति नामकअवस्था होती है। समस्त फल की प्राप्ति हो जाने पर फलागम अवस्था दशरूपकम्-धनञ्जय, एक / तेरह । दशरूपकम् पर धनिक की अवलोकटीका एक/अट्ठारह । अवस्था पञ्च कार्यस्य प्रारब्धस्य फलाथिभिः । आरम्भयत्नप्राप्त्याशानियताप्तिफलागमाः ॥ - दशरूपकम् - धशून्य, एक/उन्नीस औत्सुक्यमात्रमारम्भः फललाभाय भूयसे । दशरूपकम् धशून्य, एक / बीस प्रयत्नस्तु तदप्राप्तौ व्यापारोऽतित्वरान्वितः । - दशरूपकम् - धशून्य, एक/बीस उपायापायशङ्काभ्यां प्राप्त्याशा प्रप्तिसम्भवः । - दशरूपकम् - धशून्य, एक / इक्कीस अपायाभावतः प्राप्तिर्नियताप्तिः सुनिश्चिता । दशरूपकम् धशून्य, एक/इक्कीस -
टाटा समूह को IPL का नया स्पॉन्सर बनाए जाने पर फैसला 11 जनवरी को गवर्निंग काउंसिल की मीटिंग में लिया गया। अब फिलहाल अगले 2 साल टाटा IPL की टाइटल स्पॉन्सर होगी। टाटा ग्रुप ने वीवो को टाइटल स्पॉन्सर के रूप में रिप्लेस किया है। आईपीएल गवर्निंग काउंसिल की बैठक में ये फैसला लिया गया है। बता दें, टाटा समूह को IPL का नया स्पॉन्सर बनाए जाने पर फैसला 11 जनवरी को गवर्निंग काउंसिल की मीटिंग में लिया गया। आईपीएल गवर्निंग काउंसिल के चेयरमैन ब्रिजेश पटेल ने बताया कि वीवो ने अपने हाथ स्पॉन्सरशिप से खींच लिए हैं और अब उसकी जगह टाटा हमारा नया टाइटल स्पॉन्सर होगा। IPL के साथ वीवो का करार अभी खत्म नहीं हुआ था। उसके करार के खत्म होने में अभी 2 साल और बचे थे। लेकिन, उससे पहले ही उसने भारतीय T20 लीग से अपने हाथ खींच लिए। अब फिलहाल अगले 2 साल टाटा IPL की टाइटल स्पॉन्सर होगी। मतलब ये कि IPL तो होगा पर वो वीवो आईपीएल ना होकर टाटा आईपीएल के नाम से जाना जाएगा।
टाटा समूह को IPL का नया स्पॉन्सर बनाए जाने पर फैसला ग्यारह जनवरी को गवर्निंग काउंसिल की मीटिंग में लिया गया। अब फिलहाल अगले दो साल टाटा IPL की टाइटल स्पॉन्सर होगी। टाटा ग्रुप ने वीवो को टाइटल स्पॉन्सर के रूप में रिप्लेस किया है। आईपीएल गवर्निंग काउंसिल की बैठक में ये फैसला लिया गया है। बता दें, टाटा समूह को IPL का नया स्पॉन्सर बनाए जाने पर फैसला ग्यारह जनवरी को गवर्निंग काउंसिल की मीटिंग में लिया गया। आईपीएल गवर्निंग काउंसिल के चेयरमैन ब्रिजेश पटेल ने बताया कि वीवो ने अपने हाथ स्पॉन्सरशिप से खींच लिए हैं और अब उसकी जगह टाटा हमारा नया टाइटल स्पॉन्सर होगा। IPL के साथ वीवो का करार अभी खत्म नहीं हुआ था। उसके करार के खत्म होने में अभी दो साल और बचे थे। लेकिन, उससे पहले ही उसने भारतीय Tबीस लीटरग से अपने हाथ खींच लिए। अब फिलहाल अगले दो साल टाटा IPL की टाइटल स्पॉन्सर होगी। मतलब ये कि IPL तो होगा पर वो वीवो आईपीएल ना होकर टाटा आईपीएल के नाम से जाना जाएगा।
सन बाथ से ही हमारा मनोरथ नहीं सिद्ध हो सकता । जल से जीवन-शक्ति बढ़ती है और उसे बढ़ाना हममे से प्रत्येकका उद्देश्य होना चहिये । पौधे भी धूप और पानी के बारी-बारी असर उगते हैं और उन्हें यदि अकेली धूप ही मिले तो वे जल्द सूख जाते हैं। प्रकृित में जिस प्रकार काम होता है जब हमे यह मालूम हो जाता है तो इस बात के समझने मे हमे कोई भी कठिनता नहीं रह जाती कि सन बाथ से उत्पन्न खराबियाँ ठण्डे स्नानो से किस प्रकार दूर हो जाती है । सन बाथ के साथ लुई कूने के ठण्ढे स्नानो के करने से रोग बहुत ही शीघ्र अच्छे होते है । कोई-कोई ख्याल करते होंगे कि धूप का प्रभाव ढके हुये शरीर के हिस्से की अपेक्षा नंगे शरीर के हिस्से पर अधिक होता होगा किन्तु उनका ऐसा ख्याल करना भूल है। प्रकृति की ओर देखने और ध्यान से इसका उत्तर मिल जाता है। अंगूरो की ओर देखिये । क्या अंगूर धूप से बचाने के लिये पत्तो की आड़ में नहीं हो जाते । जो पत्तियो से अच्छी तरह ढके रहते है वे मीठं होते है और अच्छी तरह पकते है; किन्तु जो खुले रहते है वे या तो खट्ट हो जाते है या उनकी वृद्धि मारी जाती है। शाहदाने के वृक्ष की भी यही दशा उस समय होती है जब फल तो पक जाते है; किन्तु पत्तियों कीड़े खा जाते है। ऐसी दशा मे फल विना बढ़े ही सूख जाते है । यदि साया के लिये पत्तियाँ रहे तो यह दशा न हो । पकने के लिये हरेक फल को पत्तियों की आवश्यकता है । उपरोक्त उदाहरणों से यह बात भली सूर्य की परोक्ष और अपरोक्ष धूप का क्या प्रभाव होता है । नंगे सर पर धूप का प्रभाव हानिकारक होता है और इससे नाना प्रकार के विकार उत्पन्न होते है । यदि हम शरीर को कपड़े से ढके रहे तो चमड़े के छेद अति शीघ्र खुल जाते है और उनमे से पसीना भी अति शीघ्र निकलने लगता है ।
सन बाथ से ही हमारा मनोरथ नहीं सिद्ध हो सकता । जल से जीवन-शक्ति बढ़ती है और उसे बढ़ाना हममे से प्रत्येकका उद्देश्य होना चहिये । पौधे भी धूप और पानी के बारी-बारी असर उगते हैं और उन्हें यदि अकेली धूप ही मिले तो वे जल्द सूख जाते हैं। प्रकृित में जिस प्रकार काम होता है जब हमे यह मालूम हो जाता है तो इस बात के समझने मे हमे कोई भी कठिनता नहीं रह जाती कि सन बाथ से उत्पन्न खराबियाँ ठण्डे स्नानो से किस प्रकार दूर हो जाती है । सन बाथ के साथ लुई कूने के ठण्ढे स्नानो के करने से रोग बहुत ही शीघ्र अच्छे होते है । कोई-कोई ख्याल करते होंगे कि धूप का प्रभाव ढके हुये शरीर के हिस्से की अपेक्षा नंगे शरीर के हिस्से पर अधिक होता होगा किन्तु उनका ऐसा ख्याल करना भूल है। प्रकृति की ओर देखने और ध्यान से इसका उत्तर मिल जाता है। अंगूरो की ओर देखिये । क्या अंगूर धूप से बचाने के लिये पत्तो की आड़ में नहीं हो जाते । जो पत्तियो से अच्छी तरह ढके रहते है वे मीठं होते है और अच्छी तरह पकते है; किन्तु जो खुले रहते है वे या तो खट्ट हो जाते है या उनकी वृद्धि मारी जाती है। शाहदाने के वृक्ष की भी यही दशा उस समय होती है जब फल तो पक जाते है; किन्तु पत्तियों कीड़े खा जाते है। ऐसी दशा मे फल विना बढ़े ही सूख जाते है । यदि साया के लिये पत्तियाँ रहे तो यह दशा न हो । पकने के लिये हरेक फल को पत्तियों की आवश्यकता है । उपरोक्त उदाहरणों से यह बात भली सूर्य की परोक्ष और अपरोक्ष धूप का क्या प्रभाव होता है । नंगे सर पर धूप का प्रभाव हानिकारक होता है और इससे नाना प्रकार के विकार उत्पन्न होते है । यदि हम शरीर को कपड़े से ढके रहे तो चमड़े के छेद अति शीघ्र खुल जाते है और उनमे से पसीना भी अति शीघ्र निकलने लगता है ।
संयुक्त राष्ट्र संघ में अमरीका की स्थायी प्रतिनिधि ने कहा है कि परमाणु समझौते से ईरान की ताक़त बढ़ी है और इस देश पर दोबारा प्रतिबंध लगाना कठिन है। निकी हेली अमरीका व इस्राईल की संयुक्त ज़ायोनी लाॅबी आइपेक की वार्षिक बैठक में अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों की समाप्ति को ईरान की अहम उपलब्धि बताया और कहा कि एक देश पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं लेकिन जब वे हटा लिए जाएं तो फिर सरलता से उन्हें दोबार लागू नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ समझौते से केवल ईरान व रूस मज़बूत हुए और ईरान को यह साहस मिल गया कि वह जो भी चाहे हासिल कर सकता है। संयुक्त राष्ट्र संघ में अमरीका की स्थायी प्रतिनिधि निकी हेली ने इसी तरह संयुक्त राष्ट्र संघ में इस्राईल विरोधी वातावरण की आलोचना की और कहा कि सुरक्षा परिषद में यहूदी काॅलोनियों के निर्माण की आलोचना जैसे किसी प्रस्ताव को पुनः पारित नहीं होने देना चाहिए। ज्ञात रहे कि पिछले साल सुरक्षा परिषद ने एक प्रस्ताव पारित करके अतिग्रहित फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों में ज़ायोनी शासन के अवैध काॅलोनी निर्माण की आलोचना की थी। अमरीका इस प्रस्ताव पर हुए मतदान में तटस्थ रहा था। (HN)
संयुक्त राष्ट्र संघ में अमरीका की स्थायी प्रतिनिधि ने कहा है कि परमाणु समझौते से ईरान की ताक़त बढ़ी है और इस देश पर दोबारा प्रतिबंध लगाना कठिन है। निकी हेली अमरीका व इस्राईल की संयुक्त ज़ायोनी लाॅबी आइपेक की वार्षिक बैठक में अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों की समाप्ति को ईरान की अहम उपलब्धि बताया और कहा कि एक देश पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं लेकिन जब वे हटा लिए जाएं तो फिर सरलता से उन्हें दोबार लागू नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ समझौते से केवल ईरान व रूस मज़बूत हुए और ईरान को यह साहस मिल गया कि वह जो भी चाहे हासिल कर सकता है। संयुक्त राष्ट्र संघ में अमरीका की स्थायी प्रतिनिधि निकी हेली ने इसी तरह संयुक्त राष्ट्र संघ में इस्राईल विरोधी वातावरण की आलोचना की और कहा कि सुरक्षा परिषद में यहूदी काॅलोनियों के निर्माण की आलोचना जैसे किसी प्रस्ताव को पुनः पारित नहीं होने देना चाहिए। ज्ञात रहे कि पिछले साल सुरक्षा परिषद ने एक प्रस्ताव पारित करके अतिग्रहित फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों में ज़ायोनी शासन के अवैध काॅलोनी निर्माण की आलोचना की थी। अमरीका इस प्रस्ताव पर हुए मतदान में तटस्थ रहा था।
भारत के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन तेंदुलकर 18 फरवरी को होने वाले आईपीएल-2021 नीलामी में शामिल होंगे। क्रिकबज की रिपोर्ट के अनुसार, अर्जुन के साथ प्रतिबंध के बाद फिर से क्रिकेट के मैदान पर लौटे तेज गेंदबाज एस श्रीसंत भी इस नीलामी के लिए उपलब्ध रहेंगे, जबकि आस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज मिशेल स्टार्क ने एक बार फिर से खुद को नीलामी से दूर रखा है। बाएं हाथ के तेज गेंदबाज अर्जुन का बेस प्राइस 20 लाख रुपये हैं। वह हाल में सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में मुंबई के लिए खेले थे और वह पिछले कुछ समय से मुंबई इंडियंस की टीम के साथ ट्रेनिंग करते आ रहे हैं। श्रीसंत के ऊपर लगा प्रतिबंध इस साल सितंबर में समाप्त हो गया था और वह हाल में सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में खेले थे। उनका बेस प्राइस 75 लाख रुपये हैं। आईपीएल-2021 की नीलामी में शामिल होने के लिए पंजीकरण करने की आखिरी तारीख चार फरवरी थी और इस बार करीब 1097 खिलाड़ियों ने नीलामी में शामिल होने के लिए पंजीकरण कराया है। इनमें 814 भारतीय और 283 विदेशी खिलाड़ी हैं।
भारत के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन तेंदुलकर अट्ठारह फरवरी को होने वाले आईपीएल-दो हज़ार इक्कीस नीलामी में शामिल होंगे। क्रिकबज की रिपोर्ट के अनुसार, अर्जुन के साथ प्रतिबंध के बाद फिर से क्रिकेट के मैदान पर लौटे तेज गेंदबाज एस श्रीसंत भी इस नीलामी के लिए उपलब्ध रहेंगे, जबकि आस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज मिशेल स्टार्क ने एक बार फिर से खुद को नीलामी से दूर रखा है। बाएं हाथ के तेज गेंदबाज अर्जुन का बेस प्राइस बीस लाख रुपये हैं। वह हाल में सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में मुंबई के लिए खेले थे और वह पिछले कुछ समय से मुंबई इंडियंस की टीम के साथ ट्रेनिंग करते आ रहे हैं। श्रीसंत के ऊपर लगा प्रतिबंध इस साल सितंबर में समाप्त हो गया था और वह हाल में सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में खेले थे। उनका बेस प्राइस पचहत्तर लाख रुपये हैं। आईपीएल-दो हज़ार इक्कीस की नीलामी में शामिल होने के लिए पंजीकरण करने की आखिरी तारीख चार फरवरी थी और इस बार करीब एक हज़ार सत्तानवे खिलाड़ियों ने नीलामी में शामिल होने के लिए पंजीकरण कराया है। इनमें आठ सौ चौदह भारतीय और दो सौ तिरासी विदेशी खिलाड़ी हैं।
भोपाल - - - - मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान मध्यप्रदेश निवेश आकर्षित करने और अमेरिकन कंपनियों को न्यौता देने के लिये अपनी पाँच दिवसीय यात्रा पर आज न्यूयार्क पहुँचे। श्री चौहान न्यूयार्क में निवेशकों से मध्यप्रदेश में निवेश से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करेंगे। साथ ही मध्यप्रदेश में निवेश के अनुकूल वातावरण और नीतियों की जानकारी देंगे। मुख्यमंत्री श्री चौहान के न्यूयार्क पहुँचने पर ओवरसीज फ्रेंड्स ऑफ बीजेपी संस्था द्वारा आयोजित कार्यकर्ताओं के सम्मेलन में भव्य स्वागत किया गया। श्री चौहान 29 अगस्त को मध्यप्रदेश में निवेश करने में रूचि रखने वाले निवेशकों और उद्योगपतियों से अलग-अलग चर्चा करेंगे। इनमें दि कौल समूह के श्री राजीव कौल, मास्टर कार्ड की उपाध्यक्ष सुश्री तारा नाथान, जल-प्रबंधन प्रौद्योगिकी की प्रमुख कंपनी एक्सलेम के प्रतिनिधि, एशिया स्पेसिफिक के गवर्नमेंट अफेयर्स के संचालक श्री क्लाउडियो लिलिएनफील्ड, इंडिया फर्स्ट ग्रुप के चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर श्री रान सोमर्स, कोका-कोला कंपनी के अंतर्राष्ट्रीय सार्वजनिक मामलों के उपाध्यक्ष श्री माइकल गोल्डजमेन, कस्टमर केयर और सेल्स साइरियस के उपाध्यक्ष श्री माइकल मूर, साइबर सिक्यूरिटी आर्किटेक्चर और आईटी रणनीति के संचालक श्री शैलेन्द्र गुप्ता, एसएनपी टेक्नालॉजी, व्यापार विकास के उपाध्यक्ष श्री सचिन पारिख और सोलर एनर्जी कंपनी के सीईओ श्री गोपाल खार शामिल हैं।
भोपाल - - - - मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान मध्यप्रदेश निवेश आकर्षित करने और अमेरिकन कंपनियों को न्यौता देने के लिये अपनी पाँच दिवसीय यात्रा पर आज न्यूयार्क पहुँचे। श्री चौहान न्यूयार्क में निवेशकों से मध्यप्रदेश में निवेश से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करेंगे। साथ ही मध्यप्रदेश में निवेश के अनुकूल वातावरण और नीतियों की जानकारी देंगे। मुख्यमंत्री श्री चौहान के न्यूयार्क पहुँचने पर ओवरसीज फ्रेंड्स ऑफ बीजेपी संस्था द्वारा आयोजित कार्यकर्ताओं के सम्मेलन में भव्य स्वागत किया गया। श्री चौहान उनतीस अगस्त को मध्यप्रदेश में निवेश करने में रूचि रखने वाले निवेशकों और उद्योगपतियों से अलग-अलग चर्चा करेंगे। इनमें दि कौल समूह के श्री राजीव कौल, मास्टर कार्ड की उपाध्यक्ष सुश्री तारा नाथान, जल-प्रबंधन प्रौद्योगिकी की प्रमुख कंपनी एक्सलेम के प्रतिनिधि, एशिया स्पेसिफिक के गवर्नमेंट अफेयर्स के संचालक श्री क्लाउडियो लिलिएनफील्ड, इंडिया फर्स्ट ग्रुप के चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर श्री रान सोमर्स, कोका-कोला कंपनी के अंतर्राष्ट्रीय सार्वजनिक मामलों के उपाध्यक्ष श्री माइकल गोल्डजमेन, कस्टमर केयर और सेल्स साइरियस के उपाध्यक्ष श्री माइकल मूर, साइबर सिक्यूरिटी आर्किटेक्चर और आईटी रणनीति के संचालक श्री शैलेन्द्र गुप्ता, एसएनपी टेक्नालॉजी, व्यापार विकास के उपाध्यक्ष श्री सचिन पारिख और सोलर एनर्जी कंपनी के सीईओ श्री गोपाल खार शामिल हैं।
फिरोजाबाद। जनपद की नगर पंचायत मक्खनपुर द्वारा तुरकिया गांव में कुछ भवन स्वामियों को नोटिस देने के खिलाफ ग्रामीणों ने शुक्रवार को नगर पंचायत कार्यालय पर प्रदर्शन किया। उनका आरोप था कि जिस जमीन पर मकान बने हैं उनका बैनामा भी हम लोगों के पास है फिर भी नगर पंचायत हमारे मकानों को आखिर किस आधार पर अवैध बता रहा और नोटिस क्यों जारी किए गए है। लोगों ने काफी देर तक हंगामा किया और धरना दिया। हालांकि नगर पंचायत के अधिकारियों द्वारा समझा-बुझाकर मामला शांत करा दिया गया और ग्रामीण अपने अपने घरों को वापस चले गए। अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि बगैर जांच पड़ताल के किसी का भी मकान नही गिराया जायेगा।
फिरोजाबाद। जनपद की नगर पंचायत मक्खनपुर द्वारा तुरकिया गांव में कुछ भवन स्वामियों को नोटिस देने के खिलाफ ग्रामीणों ने शुक्रवार को नगर पंचायत कार्यालय पर प्रदर्शन किया। उनका आरोप था कि जिस जमीन पर मकान बने हैं उनका बैनामा भी हम लोगों के पास है फिर भी नगर पंचायत हमारे मकानों को आखिर किस आधार पर अवैध बता रहा और नोटिस क्यों जारी किए गए है। लोगों ने काफी देर तक हंगामा किया और धरना दिया। हालांकि नगर पंचायत के अधिकारियों द्वारा समझा-बुझाकर मामला शांत करा दिया गया और ग्रामीण अपने अपने घरों को वापस चले गए। अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि बगैर जांच पड़ताल के किसी का भी मकान नही गिराया जायेगा।
बॉलीवुड एक्ट्रेस करीना कपूर ने हाल ही में अपने दूसरे बच्चे को जन्म दिया है। उन्होंने विमेंस डे के अवसर पर उन्होंने सोशल मीडिया पर एक खास तरीके से सभी को विमेंस डे विश किया है। उन्होंने पहली बार अपने न्यू बोर्न बेबी की तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की है।उन्हें अपने गोद में बच्चे को लिए ब्लैक एंड वाइट तस्वीर में देखा जा सकता है। उन्होंने इसके साथ एक कैप्शन भी लिखा है- 'ऐसा कुछ भी नहीं जो एक महिला नहीं कर सकती है। हैप्पी विमेंस डे माय लव।'हालांकि इस तस्वीर में उनके बच्चे का चेहरा नजर नहीं आ रहा है।करीना के अलावा विराट कोहली ने अपनी वाइफ अनुष्का और बेटी की तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की है। इसके साथ ही उन्होंने के कैप्शन लिखा है- 'बच्चे का जन्म देखना एक स्पाइन चिलिंग, अनबिलिवएवल और अमेजिंग एक्सपीरियंस है। इसका साक्षी होने के बाद, आप महिलाओं की असली ताकत और दिव्यता को समझते हैं और ये भी जानते है कि भगवान ने महिलाओं के अंदर जीवन देने की शक्ति क्यों दी है। यह इसलिए है क्योंकि वे हम लोगों की तुलना में वह अधिक मजबूत हैं।' उन्होंने आगे लिखा- 'मेरी ज़िंदगी की सबसे मज़बूत, करुणामयी महिला और अपनी माँ की तरह ही बनने वाली है हमारी बेटी। और दुनिया की सभी अद्भुत महिलाओं को महिला दिवस की शुभकामनाएं।'
बॉलीवुड एक्ट्रेस करीना कपूर ने हाल ही में अपने दूसरे बच्चे को जन्म दिया है। उन्होंने विमेंस डे के अवसर पर उन्होंने सोशल मीडिया पर एक खास तरीके से सभी को विमेंस डे विश किया है। उन्होंने पहली बार अपने न्यू बोर्न बेबी की तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की है।उन्हें अपने गोद में बच्चे को लिए ब्लैक एंड वाइट तस्वीर में देखा जा सकता है। उन्होंने इसके साथ एक कैप्शन भी लिखा है- 'ऐसा कुछ भी नहीं जो एक महिला नहीं कर सकती है। हैप्पी विमेंस डे माय लव।'हालांकि इस तस्वीर में उनके बच्चे का चेहरा नजर नहीं आ रहा है।करीना के अलावा विराट कोहली ने अपनी वाइफ अनुष्का और बेटी की तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की है। इसके साथ ही उन्होंने के कैप्शन लिखा है- 'बच्चे का जन्म देखना एक स्पाइन चिलिंग, अनबिलिवएवल और अमेजिंग एक्सपीरियंस है। इसका साक्षी होने के बाद, आप महिलाओं की असली ताकत और दिव्यता को समझते हैं और ये भी जानते है कि भगवान ने महिलाओं के अंदर जीवन देने की शक्ति क्यों दी है। यह इसलिए है क्योंकि वे हम लोगों की तुलना में वह अधिक मजबूत हैं।' उन्होंने आगे लिखा- 'मेरी ज़िंदगी की सबसे मज़बूत, करुणामयी महिला और अपनी माँ की तरह ही बनने वाली है हमारी बेटी। और दुनिया की सभी अद्भुत महिलाओं को महिला दिवस की शुभकामनाएं।'
हिन्दी के अमर कथाकार प्रेमचन्द का योगदान केवल कहानियों अथवा उपन्यासों तक ही सीमित नहीं है। स्वतंत्रता प्राप्ति के पूर्व तत्कालीन युग-चेतना के सन्दर्भ में उन्होंने कुछ महापुरुषों के जो प्रेरणादायक औौर उद्बोधक शब्दचित्र अंकित किए थे, उन्हें "कलम, तलवार भोर त्याग" में इस विश्वास के साथ प्रस्तुत किया जा रहा है कि किशोर-किशोरियों के लिए ये न केवल ज्ञानवर्द्धक, प्रत्युत मनोरंजक भी सिद्ध होंगे। इन्हें पढ़ते समय पाठकों को इतना ध्यान अवश्य रखना होगा कि कुछ सन्दर्भित तथ्य आज सर्वथा परिवर्तित हो चुके है। लेखक की युगानुभूति को परिवर्तित करना एक अनाधिकार चेष्टा हो मानी जाती, अतः 'जस की तस धर दीनी चदरिया' ही हमारा लक्ष्य रहा है ।
हिन्दी के अमर कथाकार प्रेमचन्द का योगदान केवल कहानियों अथवा उपन्यासों तक ही सीमित नहीं है। स्वतंत्रता प्राप्ति के पूर्व तत्कालीन युग-चेतना के सन्दर्भ में उन्होंने कुछ महापुरुषों के जो प्रेरणादायक औौर उद्बोधक शब्दचित्र अंकित किए थे, उन्हें "कलम, तलवार भोर त्याग" में इस विश्वास के साथ प्रस्तुत किया जा रहा है कि किशोर-किशोरियों के लिए ये न केवल ज्ञानवर्द्धक, प्रत्युत मनोरंजक भी सिद्ध होंगे। इन्हें पढ़ते समय पाठकों को इतना ध्यान अवश्य रखना होगा कि कुछ सन्दर्भित तथ्य आज सर्वथा परिवर्तित हो चुके है। लेखक की युगानुभूति को परिवर्तित करना एक अनाधिकार चेष्टा हो मानी जाती, अतः 'जस की तस धर दीनी चदरिया' ही हमारा लक्ष्य रहा है ।
Dhanbad: धनबाद सांसद पशुपतिनाथ सिंह और गिरिडीह सांसद बुरी आशंकाओं से बुरी तरह डरे हुए है. इनके डर के आगे हार है. वैसे अभी तय नहीं है कि धनबाद लोकसभा सीट से पशुपतिनाथ सिंह और गिरिडीह से वर्तमान सांसद रवींद्र पांडेय को भाजपा अगले चुनाव में भी टिकट देगी. मगर कहीं टिकट मिल ही गया तो क्या होगा? वे कैसे जीतेंगे? जनता के सामने किस मुंह से जाएंगे? उन्होंने काम क्या किया है? उल्टा लाखों लोगों की सुविधा छीन ली गयी. हजारों लोगों की रोजी-रोटी, धनबाद चंद्रपुरा रेल लाइन की बंदी ने खत्म कर दी. इस मुद्दे को लेकर जन मानस में आग भड़की हुई है. धनबाद नगर निगम वार्ड संख्या एक के पार्षद विनोद गोस्वामी रेल लाइन चालू करने की मांग को लेकर 444 दिनों से लगातार धरना पर बैठे हैं. यहां विपक्ष के बड़े नेता एक-एक कर आते रहे हैं. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार, बाबूलाल मरांडी आदि ने इस मंच से सरकार पर हमला बोला ही, साथ ही स्थानीय जन प्रतिनिधि और सांसद को भी खरी-खोटी सुनाई. इस आरोप का सांसद क्या जवाब दें कि रेल लाइन कोयला निकालने के लिए बंद की गयी. कुछ बड़े कारोबारियों के फायदे के लिए लाखों लोगों की सुविधा छिनी गयी. धनबाद डीआरएम कार्यालय में इस्ट सेंट्रल रेलवे के महाप्रबंधक ललित चंद्र त्रिवेदी की मौजूदगी में झारखंड के आठ सांसदों के साथ गुरुवार को सुबह से शाम तक मैराथन बैठक हुई. इसमें धनबाद के सांसद पीएन सिंह और गिरिडीह के सांसद रवींद्र पांडेय ने धनबाद चंद्रपुरा रेल लाइन को किसी भी तरह चालू करने की मांग की. सिंफर ने रेल लाइन के नीचे लगी आग बुझाने को लेकर प्रेजेंटेंशन भी दिया. पर नतीजा कुछ नहीं निकला. धनबाद के सांसद के लिए बड़ा मुद्दा डीसी रेल लाइन की बंदी नहीं, बल्कि इस रेल लाइन की बंदी के कारण 26 जोड़ी ट्रेनों का बंद होना है. जिससे धनबाद-बोकारो का लगभग हर आम-व-खास प्रभावित है. पहले लोगों को रांची जाने के बारे में कुछ सोचना ही नहीं था. जब चाहो तब ट्रेन. नौबत थी कि लग्जरी बसों का धंधा मंदा हो गया था. अब फिर से बसों का धंधा चमक गया है. इसे भी पढ़ें- कल्याण विभाग पर ब्यूरोक्रेट्स का कब्जा, योजना नहीं सिर्फ बिलिंग के लिए फाइल आती है मंत्री के पास (1) खान सुरक्षा महानिदेशालय की रिपोर्ट पर ही डीसी लाइन बंद हुई. अब यह लाइन चालू भी होगी तो डीजीएमएस की रिपोर्ट पर. पर सवाल है कि डीजीएमएस की रिपोर्ट बदलेगी कैसे ? क्या इस लाइन को अब भूमिगत आग से खतरा नहीं. यह अलग बात है कि बीते करीब दस साल से डीजीएमएस रेलवे को इस लाइन पर लगी आग के कारण यात्री ट्रेन चलाने से लगातार मना कर रहा था. डीजीएमएस ने धनबाद-आसनसोल लाइन पर भी भूमिगत आग से जानमाल के खतरे की आशंका कई बार जताई है. इसके अलावा रेलवे बोर्ड के अधीन बना मुख्य खनन सलाहकार व्यावहारिक रूप से माइनिंग एक्सपर्ट के साथ कार्यरत था. समय-समय पर इस कार्यालय के लोग माइनिंग एरिया में सर्वे कर रेल लाइन पर खतरे के प्रति सावधान करते थे. बाद में इस विभाग को अनुपयोगी बना दिया गया. तब से खतरनाक लाइन पर बेझिझक ट्रेन चलने लगी. डीजीएमएस, डीसी रेल लाइन पर खतरे को लेकर रेलवे को जब से सचेत कर रहा है तब से यदि वैकल्पिक मार्ग पर काम होता तो इस रेल लाइन की बंदी के बाद विकल्पहीनता की स्थिति नहीं आती. लेकिन कौन समझेगा यह बातें. इसे भी पढ़ेंःराशि निर्गत कराने वाली फाइल पर कल्याण मंत्री लुईस मरांडी ने लिखा, क्या योजनाओं के लिए मेरा अनुमोदन जरूरी नहीं (2) जब-जब भाजपा सरकार आयी कोयलांचल में आफत आई. सिंदरी खाद कारखाना बंद किया और अब डीसी लाइन बंद की गई. क्या जवाब देंगे धनबाद के सांसद पीएन सिंह और गिरिडीह सांसद रवींद्र पांडेय. अभी हाल ही में डीसी रेल लाइन का अवलोकन कर कोल इंडिया के अध्यक्ष एके झा और झारखंड के मुख्य सचिव एसके त्रिपाठी ने कोई सकारात्मक बात नहीं की. राजनीतिक दबाव में इस लाइन को लेकर बड़े अफसरों का आना-जाना और मीटिंग लगातार चल रही है. गुरुवार को भी रेल जीएम ने मीटिंग की. इसमें धनबाद सांसद पीएन सिंह और गिरिडीह सांसद रवींद्र पांडेय भी शामिल हुए. मीटिंग के बाद कई सांसद मीडिया से रूबरू हुए पर पीएन सिंह और रवींद्र पांडेय ने पतली गली पकड़ ली. कुछ बोलने से मना किया. पता नहीं किस सवाल से उनकी नाकामी प्रकट हो जाए. चुनाव का साल जो आ गया है. ऐसे में जनता की नाराजगी का डर बढ़ गया है.
Dhanbad: धनबाद सांसद पशुपतिनाथ सिंह और गिरिडीह सांसद बुरी आशंकाओं से बुरी तरह डरे हुए है. इनके डर के आगे हार है. वैसे अभी तय नहीं है कि धनबाद लोकसभा सीट से पशुपतिनाथ सिंह और गिरिडीह से वर्तमान सांसद रवींद्र पांडेय को भाजपा अगले चुनाव में भी टिकट देगी. मगर कहीं टिकट मिल ही गया तो क्या होगा? वे कैसे जीतेंगे? जनता के सामने किस मुंह से जाएंगे? उन्होंने काम क्या किया है? उल्टा लाखों लोगों की सुविधा छीन ली गयी. हजारों लोगों की रोजी-रोटी, धनबाद चंद्रपुरा रेल लाइन की बंदी ने खत्म कर दी. इस मुद्दे को लेकर जन मानस में आग भड़की हुई है. धनबाद नगर निगम वार्ड संख्या एक के पार्षद विनोद गोस्वामी रेल लाइन चालू करने की मांग को लेकर चार सौ चौंतालीस दिनों से लगातार धरना पर बैठे हैं. यहां विपक्ष के बड़े नेता एक-एक कर आते रहे हैं. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार, बाबूलाल मरांडी आदि ने इस मंच से सरकार पर हमला बोला ही, साथ ही स्थानीय जन प्रतिनिधि और सांसद को भी खरी-खोटी सुनाई. इस आरोप का सांसद क्या जवाब दें कि रेल लाइन कोयला निकालने के लिए बंद की गयी. कुछ बड़े कारोबारियों के फायदे के लिए लाखों लोगों की सुविधा छिनी गयी. धनबाद डीआरएम कार्यालय में इस्ट सेंट्रल रेलवे के महाप्रबंधक ललित चंद्र त्रिवेदी की मौजूदगी में झारखंड के आठ सांसदों के साथ गुरुवार को सुबह से शाम तक मैराथन बैठक हुई. इसमें धनबाद के सांसद पीएन सिंह और गिरिडीह के सांसद रवींद्र पांडेय ने धनबाद चंद्रपुरा रेल लाइन को किसी भी तरह चालू करने की मांग की. सिंफर ने रेल लाइन के नीचे लगी आग बुझाने को लेकर प्रेजेंटेंशन भी दिया. पर नतीजा कुछ नहीं निकला. धनबाद के सांसद के लिए बड़ा मुद्दा डीसी रेल लाइन की बंदी नहीं, बल्कि इस रेल लाइन की बंदी के कारण छब्बीस जोड़ी ट्रेनों का बंद होना है. जिससे धनबाद-बोकारो का लगभग हर आम-व-खास प्रभावित है. पहले लोगों को रांची जाने के बारे में कुछ सोचना ही नहीं था. जब चाहो तब ट्रेन. नौबत थी कि लग्जरी बसों का धंधा मंदा हो गया था. अब फिर से बसों का धंधा चमक गया है. इसे भी पढ़ें- कल्याण विभाग पर ब्यूरोक्रेट्स का कब्जा, योजना नहीं सिर्फ बिलिंग के लिए फाइल आती है मंत्री के पास खान सुरक्षा महानिदेशालय की रिपोर्ट पर ही डीसी लाइन बंद हुई. अब यह लाइन चालू भी होगी तो डीजीएमएस की रिपोर्ट पर. पर सवाल है कि डीजीएमएस की रिपोर्ट बदलेगी कैसे ? क्या इस लाइन को अब भूमिगत आग से खतरा नहीं. यह अलग बात है कि बीते करीब दस साल से डीजीएमएस रेलवे को इस लाइन पर लगी आग के कारण यात्री ट्रेन चलाने से लगातार मना कर रहा था. डीजीएमएस ने धनबाद-आसनसोल लाइन पर भी भूमिगत आग से जानमाल के खतरे की आशंका कई बार जताई है. इसके अलावा रेलवे बोर्ड के अधीन बना मुख्य खनन सलाहकार व्यावहारिक रूप से माइनिंग एक्सपर्ट के साथ कार्यरत था. समय-समय पर इस कार्यालय के लोग माइनिंग एरिया में सर्वे कर रेल लाइन पर खतरे के प्रति सावधान करते थे. बाद में इस विभाग को अनुपयोगी बना दिया गया. तब से खतरनाक लाइन पर बेझिझक ट्रेन चलने लगी. डीजीएमएस, डीसी रेल लाइन पर खतरे को लेकर रेलवे को जब से सचेत कर रहा है तब से यदि वैकल्पिक मार्ग पर काम होता तो इस रेल लाइन की बंदी के बाद विकल्पहीनता की स्थिति नहीं आती. लेकिन कौन समझेगा यह बातें. इसे भी पढ़ेंःराशि निर्गत कराने वाली फाइल पर कल्याण मंत्री लुईस मरांडी ने लिखा, क्या योजनाओं के लिए मेरा अनुमोदन जरूरी नहीं जब-जब भाजपा सरकार आयी कोयलांचल में आफत आई. सिंदरी खाद कारखाना बंद किया और अब डीसी लाइन बंद की गई. क्या जवाब देंगे धनबाद के सांसद पीएन सिंह और गिरिडीह सांसद रवींद्र पांडेय. अभी हाल ही में डीसी रेल लाइन का अवलोकन कर कोल इंडिया के अध्यक्ष एके झा और झारखंड के मुख्य सचिव एसके त्रिपाठी ने कोई सकारात्मक बात नहीं की. राजनीतिक दबाव में इस लाइन को लेकर बड़े अफसरों का आना-जाना और मीटिंग लगातार चल रही है. गुरुवार को भी रेल जीएम ने मीटिंग की. इसमें धनबाद सांसद पीएन सिंह और गिरिडीह सांसद रवींद्र पांडेय भी शामिल हुए. मीटिंग के बाद कई सांसद मीडिया से रूबरू हुए पर पीएन सिंह और रवींद्र पांडेय ने पतली गली पकड़ ली. कुछ बोलने से मना किया. पता नहीं किस सवाल से उनकी नाकामी प्रकट हो जाए. चुनाव का साल जो आ गया है. ऐसे में जनता की नाराजगी का डर बढ़ गया है.
शिवसेना पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे के राजनीतिक ज्ञान से तो सभी भली भांति परिचित हैं, लेकिन फिल्मों में उनकी कितनी पकड़ है, इसका नजारा बुधवार को एक पत्रकार परिषद में देखने को मिला। जहां उन्होंने पत्रकारों के फिल्मी सवाल का जवाब फिल्मी अंदाज में दिया। एनडीए की बैठक में शामिल होकर दिल्ली से लौटे उद्धव ठाकरे से जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या शिवसेना और भाजपा का गठबंधन वेंटिलेटर पर है तो उन्होंने जवाब दिया कि गठबंधन वेंटिलेटर पर तो नहीं, लेकिन कछुए की गति से चल रहा है। बता दें कि वेंटिलेटर, कासव फिल्म को इस बार राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है, फिल्म के कलाकारों ने मंगलवार को मातोश्री पर जाकर उद्धव ठाकरे से मुलाकात की थी। जिसके बाद बुधवार को जब पत्रकारों के सवाल में वेंटिलेटर का नाम आया जो उद्धव के जवाब में कासव का जिक्र हुआ। पाकिस्तान में कैद कुलभूषण जाधव पर बोलते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि केंद्र सरकार के सिर्फ पत्रव्यवहार करने से कुछ होने वाला नहीं। पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए सबक सिखाना जरूरी है।
शिवसेना पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे के राजनीतिक ज्ञान से तो सभी भली भांति परिचित हैं, लेकिन फिल्मों में उनकी कितनी पकड़ है, इसका नजारा बुधवार को एक पत्रकार परिषद में देखने को मिला। जहां उन्होंने पत्रकारों के फिल्मी सवाल का जवाब फिल्मी अंदाज में दिया। एनडीए की बैठक में शामिल होकर दिल्ली से लौटे उद्धव ठाकरे से जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या शिवसेना और भाजपा का गठबंधन वेंटिलेटर पर है तो उन्होंने जवाब दिया कि गठबंधन वेंटिलेटर पर तो नहीं, लेकिन कछुए की गति से चल रहा है। बता दें कि वेंटिलेटर, कासव फिल्म को इस बार राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है, फिल्म के कलाकारों ने मंगलवार को मातोश्री पर जाकर उद्धव ठाकरे से मुलाकात की थी। जिसके बाद बुधवार को जब पत्रकारों के सवाल में वेंटिलेटर का नाम आया जो उद्धव के जवाब में कासव का जिक्र हुआ। पाकिस्तान में कैद कुलभूषण जाधव पर बोलते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि केंद्र सरकार के सिर्फ पत्रव्यवहार करने से कुछ होने वाला नहीं। पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए सबक सिखाना जरूरी है।
Delhi Floods: बढ़ने लगा Yamuna का जलस्तर, अब आएगी बाढ़ ! Delhi Flood Alert । Delhi Rain News UpdatesDelhi में Yamuna River का Water Level खतरे के निशान के ऊपर पहुंच गया है. Yamuna में खतरे का निशान 205. 33m है और Yamuna River का जलस्तर 206. 24m पर पहुंच चुका है. चीन के विदेश मंत्री लापता! महिला से अफेयर तो नहीं है गुमशुदगी की वजह?
Delhi Floods: बढ़ने लगा Yamuna का जलस्तर, अब आएगी बाढ़ ! Delhi Flood Alert । Delhi Rain News UpdatesDelhi में Yamuna River का Water Level खतरे के निशान के ऊपर पहुंच गया है. Yamuna में खतरे का निशान दो सौ पाँच. तैंतीस मीटर है और Yamuna River का जलस्तर दो सौ छः. चौबीस मीटर पर पहुंच चुका है. चीन के विदेश मंत्री लापता! महिला से अफेयर तो नहीं है गुमशुदगी की वजह?
सोशल मीडिया पर एक महिला को नग्न कर पीट रहे कुछ लोगों की एक तस्वीर शेयर की जा रही है. कहा जा रहा है कि बंगाल में मोदी के समर्थन में नारे लगाने पर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने महिला को पीटा. ट्विटर यूज़र आजाद सिंह चौहान ने ये तस्वीर ट्वीट करते हुए लिखा, "ममता बनर्जी सरकार में कोई कानून नाम का चीज नहीं है है तो सिर्फ जेहाद". एक और ट्विटर यूज़र ने भी ये तस्वीर ट्वीट की. साल 2018 में भी ये तस्वीर सोशल मीडिया पर इसी दावे के साथ शेयर की गई थी. 31 अगस्त 2018 को फेसबुक यूज़र हिंदू अखिलेश गुप्ता ने ये तस्वीर इसी दावे के साथ ट्वीट की. इस यूज़र के बायो में बताया गया है कि वो भारतीय जनता पार्टी के लिए काम करते है. इस पोस्ट को आर्टिकल लिखे जाने तक 15 हज़ार बार शेयर किया गया. (आर्काइव लिंक) ये तस्वीर कई और यूज़र्स ने भी इसी मेसेज के साथ शेयर की है जिसमें प्रीतम ऋतु भी शामिल है. ट्विटर पर इस यूज़र ने खुद को 'भाजपाई' बताया है. वहीं इस यूज़र को भाजपा नेता और केन्द्रीय मंत्री पियुष गोयल का कार्यालय भी फ़ॉलो करता है. ऑल्ट न्यूज़ ने इस तस्वीर को गूगल पर रिवर्स इमेज सर्च किया और पाया कि 2016 में We Support Narendra Modi Ji नामक एक फ़ेसबुक ग्रुप में इसे शेयर किया गया था. वहीं 2017 में कुछ यूज़र्स ने इसे शेयर किया था. लेकिन ऑल्ट न्यूज़ ने जांच के दौरान पाया कि ये तस्वीर पश्चिम बंगाल से जुड़ी हुई नहीं है बल्कि साल 2007 में असम में हुई एक घटना की है. असम में आदिवासी चाय श्रमिकों ने अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल होने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था. इस पर नाराज़ होकर स्थानीय निवासियों ने एक आदिवासी महिला पर हमला किया था. कई मीडिया संगठनों ने इस घटना के बारे में रिपोर्ट पब्लिश की थी जिसमें द टाइम्स ऑफ इंडिया, न्यूज 18 और द टेलीग्राफ शामिल है. SM होक्सस्लेयर ने साल 2017 में ही इस दावे को खारिज करते हुए फ़ैक्ट-चेक रिपोर्ट पब्लिश की थी. पश्चिम बंगाल को लेकर अक्सर ही सोशल मीडिया पर तरह तरह ही गलत सूचनाएं और दावे शेयर किये जाते हैं. इससे राज्य को हिंदू विरोधी राज्य के रूप में पेश किया जाता है. ऑल्ट न्यूज़ ने ऐसी कई गलत खबरों की सच्चाई सामने लाई है (लिंक 1, लिंक 2, लिंक 3, लिंक 4, लिंक 5). सत्ता को आईना दिखाने वाली पत्रकारिता का कॉरपोरेट और राजनीति, दोनों के नियंत्रण से मुक्त होना बुनियादी ज़रूरत है. और ये तभी संभव है जब जनता ऐसी पत्रकारिता का हर मोड़ पर साथ दे. फ़ेक न्यूज़ और ग़लत जानकारियों के खिलाफ़ इस लड़ाई में हमारी मदद करें. नीचे दिए गए बटन पर क्लिक कर ऑल्ट न्यूज़ को डोनेट करें. बैंक ट्रांसफ़र / चेक / DD के माध्यम से डोनेट करने सम्बंधित जानकारी के लिए यहां क्लिक करें.
सोशल मीडिया पर एक महिला को नग्न कर पीट रहे कुछ लोगों की एक तस्वीर शेयर की जा रही है. कहा जा रहा है कि बंगाल में मोदी के समर्थन में नारे लगाने पर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने महिला को पीटा. ट्विटर यूज़र आजाद सिंह चौहान ने ये तस्वीर ट्वीट करते हुए लिखा, "ममता बनर्जी सरकार में कोई कानून नाम का चीज नहीं है है तो सिर्फ जेहाद". एक और ट्विटर यूज़र ने भी ये तस्वीर ट्वीट की. साल दो हज़ार अट्ठारह में भी ये तस्वीर सोशल मीडिया पर इसी दावे के साथ शेयर की गई थी. इकतीस अगस्त दो हज़ार अट्ठारह को फेसबुक यूज़र हिंदू अखिलेश गुप्ता ने ये तस्वीर इसी दावे के साथ ट्वीट की. इस यूज़र के बायो में बताया गया है कि वो भारतीय जनता पार्टी के लिए काम करते है. इस पोस्ट को आर्टिकल लिखे जाने तक पंद्रह हज़ार बार शेयर किया गया. ये तस्वीर कई और यूज़र्स ने भी इसी मेसेज के साथ शेयर की है जिसमें प्रीतम ऋतु भी शामिल है. ट्विटर पर इस यूज़र ने खुद को 'भाजपाई' बताया है. वहीं इस यूज़र को भाजपा नेता और केन्द्रीय मंत्री पियुष गोयल का कार्यालय भी फ़ॉलो करता है. ऑल्ट न्यूज़ ने इस तस्वीर को गूगल पर रिवर्स इमेज सर्च किया और पाया कि दो हज़ार सोलह में We Support Narendra Modi Ji नामक एक फ़ेसबुक ग्रुप में इसे शेयर किया गया था. वहीं दो हज़ार सत्रह में कुछ यूज़र्स ने इसे शेयर किया था. लेकिन ऑल्ट न्यूज़ ने जांच के दौरान पाया कि ये तस्वीर पश्चिम बंगाल से जुड़ी हुई नहीं है बल्कि साल दो हज़ार सात में असम में हुई एक घटना की है. असम में आदिवासी चाय श्रमिकों ने अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल होने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था. इस पर नाराज़ होकर स्थानीय निवासियों ने एक आदिवासी महिला पर हमला किया था. कई मीडिया संगठनों ने इस घटना के बारे में रिपोर्ट पब्लिश की थी जिसमें द टाइम्स ऑफ इंडिया, न्यूज अट्ठारह और द टेलीग्राफ शामिल है. SM होक्सस्लेयर ने साल दो हज़ार सत्रह में ही इस दावे को खारिज करते हुए फ़ैक्ट-चेक रिपोर्ट पब्लिश की थी. पश्चिम बंगाल को लेकर अक्सर ही सोशल मीडिया पर तरह तरह ही गलत सूचनाएं और दावे शेयर किये जाते हैं. इससे राज्य को हिंदू विरोधी राज्य के रूप में पेश किया जाता है. ऑल्ट न्यूज़ ने ऐसी कई गलत खबरों की सच्चाई सामने लाई है . सत्ता को आईना दिखाने वाली पत्रकारिता का कॉरपोरेट और राजनीति, दोनों के नियंत्रण से मुक्त होना बुनियादी ज़रूरत है. और ये तभी संभव है जब जनता ऐसी पत्रकारिता का हर मोड़ पर साथ दे. फ़ेक न्यूज़ और ग़लत जानकारियों के खिलाफ़ इस लड़ाई में हमारी मदद करें. नीचे दिए गए बटन पर क्लिक कर ऑल्ट न्यूज़ को डोनेट करें. बैंक ट्रांसफ़र / चेक / DD के माध्यम से डोनेट करने सम्बंधित जानकारी के लिए यहां क्लिक करें.
दिल्ली नगर निगम के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि तत्काल प्रभाव से आरोपी शिक्षिका को निलंबित कर दिया है और आगे की जांच की जा रही है. दिल्ली के सदर बाजार के एक एमसीडी के स्कूल से टीचर की हैवानियत की हद पार करते हुए पांचवी क्लास की एक बच्ची को पहली मंजिल से नीचे फेंक दिया. उसको इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है. बच्ची ने एएनआई को टीचर की क्रूरता की कहानी बयां की. पीड़ित बच्ची ने उसको कैंची से मारने और पहली मंजिल से फेंके जाने की बात बताई. बच्ची ने कहा कि टीचर ने उसको कैंची से मारा और उसके बाल भी खींचे. और टीचर ने उसको स्कूल की पहली मंजिल से फेंक दिया, जब कि उसने कुछ गलत नहीं किया था. बच्ची का इलाज हिंदू राव अस्पताल में चल रहा है. अब वह खतरे से बाहर है, अधिकारियों के मुताबिक आरोपी टीचर को निलंबित कर दिया गया है. उसके खिलाफ जांच की जा रही है. हैरान करने वाली ये घटना आज सुबह तब सामने आई जब शहर के देश बंधु गुप्ता रोड पर एक बीट सिपाही ने बताया कि इलाके के एक स्कूल की पहली मंजिल से एक बच्चा गिर गया है. दिल्ली पुलिस की डीसीपी (सेंट्रल) श्वेता चौहान ने कहा कि अधिकारियों ने लड़की को पास के अस्पताल पहुंचाया. पीटीआई की खबर के मुताबिक जानकारी मिलते ही मॉडल बस्ती क्षेत्र में प्राथमिक विद्यालय में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अधिकारी तुरंत स्कूल पहुंचे.अस्पताल में भर्ती बच्ची का कहना है कि उसकी कोई गलती नहीं थी फिर भी टीचर ने उसको कैंची से मारा और उसके बाल खींचने के बाद उसको पहली मंजिल से नीचे फेंक दिया. दिल्ली पुलिस के मुताबिक आरोपी शिक्षिका को हिरासत में ले लिया गया है. अधिकारियों के मुताबिक घायल छात्रा का इलाज हिंदू राव अस्पताल में चल रहा है, अब उसकी हालत खतरे से बाहर है. दिल्ली नगर निगम के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि तत्काल प्रभाव से आरोपी शिक्षिका को निलंबित कर दिया है और आगे की जांच की जा रही है.बता दें कि बच्ची को फेंके जाने की घटना के बाद मध्य दिल्ली के मॉडल बस्ती इलाके में स्थित प्राथमिक विद्यालय में बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ इकट्ठी हो गई. अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने मौके पर पहुंचकर हालात को काबू में किया. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपी शिक्षिका की पहचान गीता देशवाल के रूप में हुई है, जिसने छात्रा पर एक कैंची से हमला किया और फिर उसे पहली मंजिल से नीचे फेंक दिया.आरोपी टीचर को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है.पुलिस उपायुक्त (मध्य) श्वेता चौहान ने कहा कि प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर भारतीय दंड संहिता की धारा 307 के तहत हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि बच्ची की सीटी स्कैन समेत सभी जरूरी जांच की गई है, छात्रा सुरक्षित है और उसकी हालत स्थिर है.पीड़ित छात्रा के पिता का कहना है कि इस तरह की घटना पहले कभी नहीं हुई, जैसे अपना बच्चा होता है वैसे ही पराया बच्चा भी सबके बराबर होता है. उनकी बच्ची को कैंची से मारा गया. अभी वह ठीक है.
दिल्ली नगर निगम के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि तत्काल प्रभाव से आरोपी शिक्षिका को निलंबित कर दिया है और आगे की जांच की जा रही है. दिल्ली के सदर बाजार के एक एमसीडी के स्कूल से टीचर की हैवानियत की हद पार करते हुए पांचवी क्लास की एक बच्ची को पहली मंजिल से नीचे फेंक दिया. उसको इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है. बच्ची ने एएनआई को टीचर की क्रूरता की कहानी बयां की. पीड़ित बच्ची ने उसको कैंची से मारने और पहली मंजिल से फेंके जाने की बात बताई. बच्ची ने कहा कि टीचर ने उसको कैंची से मारा और उसके बाल भी खींचे. और टीचर ने उसको स्कूल की पहली मंजिल से फेंक दिया, जब कि उसने कुछ गलत नहीं किया था. बच्ची का इलाज हिंदू राव अस्पताल में चल रहा है. अब वह खतरे से बाहर है, अधिकारियों के मुताबिक आरोपी टीचर को निलंबित कर दिया गया है. उसके खिलाफ जांच की जा रही है. हैरान करने वाली ये घटना आज सुबह तब सामने आई जब शहर के देश बंधु गुप्ता रोड पर एक बीट सिपाही ने बताया कि इलाके के एक स्कूल की पहली मंजिल से एक बच्चा गिर गया है. दिल्ली पुलिस की डीसीपी श्वेता चौहान ने कहा कि अधिकारियों ने लड़की को पास के अस्पताल पहुंचाया. पीटीआई की खबर के मुताबिक जानकारी मिलते ही मॉडल बस्ती क्षेत्र में प्राथमिक विद्यालय में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अधिकारी तुरंत स्कूल पहुंचे.अस्पताल में भर्ती बच्ची का कहना है कि उसकी कोई गलती नहीं थी फिर भी टीचर ने उसको कैंची से मारा और उसके बाल खींचने के बाद उसको पहली मंजिल से नीचे फेंक दिया. दिल्ली पुलिस के मुताबिक आरोपी शिक्षिका को हिरासत में ले लिया गया है. अधिकारियों के मुताबिक घायल छात्रा का इलाज हिंदू राव अस्पताल में चल रहा है, अब उसकी हालत खतरे से बाहर है. दिल्ली नगर निगम के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि तत्काल प्रभाव से आरोपी शिक्षिका को निलंबित कर दिया है और आगे की जांच की जा रही है.बता दें कि बच्ची को फेंके जाने की घटना के बाद मध्य दिल्ली के मॉडल बस्ती इलाके में स्थित प्राथमिक विद्यालय में बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ इकट्ठी हो गई. अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने मौके पर पहुंचकर हालात को काबू में किया. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपी शिक्षिका की पहचान गीता देशवाल के रूप में हुई है, जिसने छात्रा पर एक कैंची से हमला किया और फिर उसे पहली मंजिल से नीचे फेंक दिया.आरोपी टीचर को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है.पुलिस उपायुक्त श्वेता चौहान ने कहा कि प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर भारतीय दंड संहिता की धारा तीन सौ सात के तहत हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि बच्ची की सीटी स्कैन समेत सभी जरूरी जांच की गई है, छात्रा सुरक्षित है और उसकी हालत स्थिर है.पीड़ित छात्रा के पिता का कहना है कि इस तरह की घटना पहले कभी नहीं हुई, जैसे अपना बच्चा होता है वैसे ही पराया बच्चा भी सबके बराबर होता है. उनकी बच्ची को कैंची से मारा गया. अभी वह ठीक है.
अर्गला बनी हुई है। इनके अतिरिक्त लकड़ी के भी कुछ चूप सुरक्षित हैं जिनसे पता चलता है कि अधिकतर लकड़ी के ही यूप बनते थे, क्षो फालावर में नष्ट हो गए । गुत काल के भी कुछ यूप मिले हैं जिनमें एक ३७१ ई० पा, विष्णुवर्धन का, विजयगढ़ में है । अश्वमेव की परंपरा भी इस देश में प्रति प्राचीन है । ऐतिहासिक प्रगल में भी पुष्पमित्र डांग, समुद्रगुत, कुमारगुत आदि ने श्रश्वमेघ किए। समुद्रगुप्त के मेघाश्व की तो प्रतिकृति भी मिल गई है जो लखनऊ के संग्रहालय में रखी है। भारशिव नागों ने काशी में दस अश्वमेघ किए जिससे वहाँ के प्रसिद्ध घाट का नाम ही 'दशाश्वमेघ' पड़ गया जो ग्राज तक प्रचलित हैं। इन सभी राजाओं ने अपने अपने यूप सडे किए होंगे। श्रश्वमेघों की परंपरा तो पिछले फाल तक चलती रही । दक्षिण के अनेक राजाओं ने भी श्वमेघ किए। पन्नीज के गद्दडवाल राजा जयचंद के यज्ञ का भी उल्लेख हुआ है। यूपों से मन धार्मिक अथवा धार्मिक राजनीतिक स्तंभ, जिन्हें ऐसे राजा ने स्थापित किए जिसने विजयस्तंभों के स्थान पर धर्मस्तंमों को अधिक महत्व दिया, प्रशोक ने खडे किए। धातु श्रथवा पत्थर सभी प्रकार के स्तंभों में शोक के स्तंभ प्राचीनतम है। उनका सौंदर्य शिल्प की परिधि पारवर विशुद्ध ललित कला की शालीनता प्राप्त कर चुका है। उनपर अपने श्रमिटेख लिखाकर उस महान् चिंतक श्रीरकारी युद्धविरोधी शाठिपूजक सम्राट् ने राजनीति की परंपरा ही बदल दो । अनंत घाल पूर्व सहिष्णुता का श्रद्भुत परिचय शोक ने दिया। अपने साम्राज्य की सीमाओं पर, घनी बस्तियों में उसने अपने स्तंभ खडे किए और उनके साधन से अपने प्रेम और सौहार्द के संदेश घोषित किए। इस प्रकार कम से कम तीन स्तंम उसने स्थापित किए। इनमें से अनेक तो नष्ट हो गए, पृष्ठ टूटे हुए मिले हैं, कुछ संभवतः श्रभ्भी पृथ्वी में दबे हैं, कुछ जो मिले है बहुत अच्छी दशा में हैं। इनमें दस पर उसके श्रमिलेग लिखे हैं। ये चुनार के पत्थर के बने हैं। किसी में वहीं जोड़ नहीं है, समूचा एक पत्थर का बना है। वंशरन (बिहार) जिले के लौरिया नदनगटाला स्तंम ३२६३ इंच ऊँचा, मोमबत्ती की भाँति, नीचे मोटा उपर पतला होता चला गया है। आधार पर व्यास ३५३ इंच है, उपर २२३ इंच । इस परिमारा के कारण अशोक के स्तंभों की सुंदरता साधारण हो गई है। मुजपुर जिले (बिहार) के चखीरा नामक स्थान के स्तंभ पर ले नहीं है। यह सर्वया सुरक्षित और प्रायः सभी से अधिक भारी है। ये स्तंभ दक्षिण में हैदराबाद और भैसूर तक मिले हैं। ५०-५० टन तक की तौलना इन स्तंभों को हार हजार मील दूर, जंगल, पहाद और नदियाँ पार घर कैसे ले गए होंगे, निरमयकारक है। निश्चय प्रशोक को असाधारण बुद्धि के इजिनियरों का साहाय्य प्राप्त रहा होगा। इनके अभिलेस बड़ी कुशलता से काटे गए हैं। प्रायः सभी श्रद्भुत शिल्पसौंदर्य के श्रादर्श है। प्रकट है कि पत्थर काटकर लिसने की कला अपनी चोटी पर थी। सबसे सुंदर लिखाघट बुद्ध के जन्मस्थान चिनी ( नेपाल की तराई में कमिंदेई ) में स्थापित स्तंभ पर है, जो लगती है ग्राज ही फटपर तैयार हुई है। वस्तुतः प्रस्तरशिल्प की यह मौर्यकालीन कला इतनी परिष्कृत और सुथरी हुई है कि अशोक की किसी कृति का जोड़ कहीं नहीं है। उसकी प्रत्येक कृति उस शिल्प कौशल की घनी है, प्रत्येक वास्तु पर कलाकारों ने शोमा लिसी है। इन स्तंभों के शीर्ष अघिफ्तर पशुओं की श्राकृति से मंडित हैं, सजीव श्रीर श्रनुकार्य । स्तंभों की यष्टि की ही माँति उनके शीर्ष भी समान पत्थर के बने हैसबसे ऊपर समूचा फोरा हुश्रा पशु है, उसके नीचे पट्टिका है, फिर यष्टि की चोटी पर पारसीक घंटी। पट्टिका की गोलाकार दौड़ती बाड़ पर चारों ओर चिन उत्सचित है, वृषभ, श्रस आदि के शीर्ष के पद्म गज, अश्व, वृषभ और सिंह में से कोई एक होता था। लुनिनी के स्तम पर श्रश्व था, सक्सिा के स्तंभ पर गज, रामपुरवा के दो स्तमों में एक पर वृषभ है, दूसरे पर सिंह । सारनाथ के स्तंभ पर चार सिंह पीठ से पीठ मिलाए बैठे हैं। सारनाथ के स्तंभ का शीर्ष, जो २४२ र २३२ ई० पू० के बीच फ्मी प्रस्तुत हुआ, परिष्कार, सौंदर्य और शिल्पचातुरी में सुसार की कृतियों में अनुपम है। उसके पशुत्रों की सजीवता, उसका विन्यास और किया सभी दर्शक को चकित कर देते हैं। भारतीय सरकार ने जो उसे अपना राजकीय श्रफ बना लिया है, उचित ही है । अशोक के स्तर्मो अथवा उसके समूचे वास्तु का इतना कुशल कार्य फ्लासमीक्षक के लिये एक समस्या उपस्थित पर देता है। सुरुचि और परिष्कार की बात तो उनकी टेकनिक, विशेषर उनकी फाँचवत् चमकती पालिश भी समस्या और उलझा देती है। इस प्रकार का निसार, परिष्कार और सर्वांगसुंदरता जादू से एक दिन में एक शासनकाल में नहीं प्रस्तुत की जा सक्ती, वह सदियों की निष्ठा, प्रयोग श्रीर म्यास की पराकाष्ठा होती है। श्राश्चर्य है कि वह पालिश अशोक के वास्वादर्शों पर ही आरंभ होकर उसके साथ ही समाप्त हो जाती है, न उनके पहले मी थी, न पीछे रही । स्तभों के निर्माण की समूची परिपाटी में उनपर लिखे श्रभिलेखों की पद्धति इस देश में नई थी। शोक के पहले स्तंभ बनते थे या नहीं, इसमें सदेह हो सकता है, पर यह नि.सदेह है कि वे पत्थर के नहीं बने और उनपर, या शिलाओं पर ही, श्रमिळेस खुदवाने की परंपरा भी कभी न थी। इतने लवे अभिलेस षभी लिखे ही नहीं गए । पर पड़ोसी
अर्गला बनी हुई है। इनके अतिरिक्त लकड़ी के भी कुछ चूप सुरक्षित हैं जिनसे पता चलता है कि अधिकतर लकड़ी के ही यूप बनते थे, क्षो फालावर में नष्ट हो गए । गुत काल के भी कुछ यूप मिले हैं जिनमें एक तीन सौ इकहत्तर ईशून्य पा, विष्णुवर्धन का, विजयगढ़ में है । अश्वमेव की परंपरा भी इस देश में प्रति प्राचीन है । ऐतिहासिक प्रगल में भी पुष्पमित्र डांग, समुद्रगुत, कुमारगुत आदि ने श्रश्वमेघ किए। समुद्रगुप्त के मेघाश्व की तो प्रतिकृति भी मिल गई है जो लखनऊ के संग्रहालय में रखी है। भारशिव नागों ने काशी में दस अश्वमेघ किए जिससे वहाँ के प्रसिद्ध घाट का नाम ही 'दशाश्वमेघ' पड़ गया जो ग्राज तक प्रचलित हैं। इन सभी राजाओं ने अपने अपने यूप सडे किए होंगे। श्रश्वमेघों की परंपरा तो पिछले फाल तक चलती रही । दक्षिण के अनेक राजाओं ने भी श्वमेघ किए। पन्नीज के गद्दडवाल राजा जयचंद के यज्ञ का भी उल्लेख हुआ है। यूपों से मन धार्मिक अथवा धार्मिक राजनीतिक स्तंभ, जिन्हें ऐसे राजा ने स्थापित किए जिसने विजयस्तंभों के स्थान पर धर्मस्तंमों को अधिक महत्व दिया, प्रशोक ने खडे किए। धातु श्रथवा पत्थर सभी प्रकार के स्तंभों में शोक के स्तंभ प्राचीनतम है। उनका सौंदर्य शिल्प की परिधि पारवर विशुद्ध ललित कला की शालीनता प्राप्त कर चुका है। उनपर अपने श्रमिटेख लिखाकर उस महान् चिंतक श्रीरकारी युद्धविरोधी शाठिपूजक सम्राट् ने राजनीति की परंपरा ही बदल दो । अनंत घाल पूर्व सहिष्णुता का श्रद्भुत परिचय शोक ने दिया। अपने साम्राज्य की सीमाओं पर, घनी बस्तियों में उसने अपने स्तंभ खडे किए और उनके साधन से अपने प्रेम और सौहार्द के संदेश घोषित किए। इस प्रकार कम से कम तीन स्तंम उसने स्थापित किए। इनमें से अनेक तो नष्ट हो गए, पृष्ठ टूटे हुए मिले हैं, कुछ संभवतः श्रभ्भी पृथ्वी में दबे हैं, कुछ जो मिले है बहुत अच्छी दशा में हैं। इनमें दस पर उसके श्रमिलेग लिखे हैं। ये चुनार के पत्थर के बने हैं। किसी में वहीं जोड़ नहीं है, समूचा एक पत्थर का बना है। वंशरन जिले के लौरिया नदनगटाला स्तंम तीन हज़ार दो सौ तिरेसठ इंच ऊँचा, मोमबत्ती की भाँति, नीचे मोटा उपर पतला होता चला गया है। आधार पर व्यास तीन सौ तिरेपन इंच है, उपर दो सौ तेईस इंच । इस परिमारा के कारण अशोक के स्तंभों की सुंदरता साधारण हो गई है। मुजपुर जिले के चखीरा नामक स्थान के स्तंभ पर ले नहीं है। यह सर्वया सुरक्षित और प्रायः सभी से अधिक भारी है। ये स्तंभ दक्षिण में हैदराबाद और भैसूर तक मिले हैं। पचास-पचास टन तक की तौलना इन स्तंभों को हार हजार मील दूर, जंगल, पहाद और नदियाँ पार घर कैसे ले गए होंगे, निरमयकारक है। निश्चय प्रशोक को असाधारण बुद्धि के इजिनियरों का साहाय्य प्राप्त रहा होगा। इनके अभिलेस बड़ी कुशलता से काटे गए हैं। प्रायः सभी श्रद्भुत शिल्पसौंदर्य के श्रादर्श है। प्रकट है कि पत्थर काटकर लिसने की कला अपनी चोटी पर थी। सबसे सुंदर लिखाघट बुद्ध के जन्मस्थान चिनी में स्थापित स्तंभ पर है, जो लगती है ग्राज ही फटपर तैयार हुई है। वस्तुतः प्रस्तरशिल्प की यह मौर्यकालीन कला इतनी परिष्कृत और सुथरी हुई है कि अशोक की किसी कृति का जोड़ कहीं नहीं है। उसकी प्रत्येक कृति उस शिल्प कौशल की घनी है, प्रत्येक वास्तु पर कलाकारों ने शोमा लिसी है। इन स्तंभों के शीर्ष अघिफ्तर पशुओं की श्राकृति से मंडित हैं, सजीव श्रीर श्रनुकार्य । स्तंभों की यष्टि की ही माँति उनके शीर्ष भी समान पत्थर के बने हैसबसे ऊपर समूचा फोरा हुश्रा पशु है, उसके नीचे पट्टिका है, फिर यष्टि की चोटी पर पारसीक घंटी। पट्टिका की गोलाकार दौड़ती बाड़ पर चारों ओर चिन उत्सचित है, वृषभ, श्रस आदि के शीर्ष के पद्म गज, अश्व, वृषभ और सिंह में से कोई एक होता था। लुनिनी के स्तम पर श्रश्व था, सक्सिा के स्तंभ पर गज, रामपुरवा के दो स्तमों में एक पर वृषभ है, दूसरे पर सिंह । सारनाथ के स्तंभ पर चार सिंह पीठ से पीठ मिलाए बैठे हैं। सारनाथ के स्तंभ का शीर्ष, जो दो सौ बयालीस र दो सौ बत्तीस ईशून्य पूशून्य के बीच फ्मी प्रस्तुत हुआ, परिष्कार, सौंदर्य और शिल्पचातुरी में सुसार की कृतियों में अनुपम है। उसके पशुत्रों की सजीवता, उसका विन्यास और किया सभी दर्शक को चकित कर देते हैं। भारतीय सरकार ने जो उसे अपना राजकीय श्रफ बना लिया है, उचित ही है । अशोक के स्तर्मो अथवा उसके समूचे वास्तु का इतना कुशल कार्य फ्लासमीक्षक के लिये एक समस्या उपस्थित पर देता है। सुरुचि और परिष्कार की बात तो उनकी टेकनिक, विशेषर उनकी फाँचवत् चमकती पालिश भी समस्या और उलझा देती है। इस प्रकार का निसार, परिष्कार और सर्वांगसुंदरता जादू से एक दिन में एक शासनकाल में नहीं प्रस्तुत की जा सक्ती, वह सदियों की निष्ठा, प्रयोग श्रीर म्यास की पराकाष्ठा होती है। श्राश्चर्य है कि वह पालिश अशोक के वास्वादर्शों पर ही आरंभ होकर उसके साथ ही समाप्त हो जाती है, न उनके पहले मी थी, न पीछे रही । स्तभों के निर्माण की समूची परिपाटी में उनपर लिखे श्रभिलेखों की पद्धति इस देश में नई थी। शोक के पहले स्तंभ बनते थे या नहीं, इसमें सदेह हो सकता है, पर यह नि.सदेह है कि वे पत्थर के नहीं बने और उनपर, या शिलाओं पर ही, श्रमिळेस खुदवाने की परंपरा भी कभी न थी। इतने लवे अभिलेस षभी लिखे ही नहीं गए । पर पड़ोसी
बीसीसीआई ने इसके बारे में जानकारी देते हुए लिखा- जस्प्रीत बुमराह ने चौथे टेस्ट मैच से पहले पर्सनल कारणों के चलते बीसीसीआई से रिलीज करने का अनुरोध किया था। जब वह गणेशन के साथ शादी में शामिल हुए, तो 27 वर्षीय अहमदाबाद में जन्मे पेसर ने अपनी शादी की कुछ तस्वीरें साझा कीं। IND vs ENG: आनंद महिंद्रा ने किया खुलासा, मैच के दौरान क्यों पहने 'अक्षर शेड्स' अब बुमराह ने तस्वीरों को कैप्शन दिया और लिखा, "प्यार, अगर यह आपको योग्य लगता है, आपके आपके लक्ष्य की ओर लेकर जाता है। प्यार से प्रेरित होकर, हमने एक साथ एक नई यात्रा शुरू की है। आज हमारे जीवन के सबसे खुशी के दिनों में से एक है और हम अपनी शादी की खबरें और अपनी खुशी आपके साथ साझा करने में सक्षम होने के लिए धन्य महसूस करते हैं। जसप्रित और संजना। " इस बीच, गणेश के साथ बुमराह की शादी का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चक्कर लगा रहा है। इस साल की शुरुआत में, जनवरी में गणेशन ने बुमराह के 'मूड' की तस्वीर पोस्ट की थी। बाद में ट्वीट ने उनकी शादी की अटकलों को हवा दी। "जसप्रीत बुमराह के ऑन-फील्ड मूड और मेरे दैनिक मिजाज बिल्कुल एक जैसे दिखते हैं," उन्होंने लिखा। गणेशन इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) में भी शामिल हैं। उन्होंने बांग्लादेश के शाकिब अल हसन सहित कई क्रिकेटरों के साथ कई साक्षात्कार किए हैं। इससे पहले केकेआर के पूर्व कप्तान दिनेश कार्तिक ने संजना से पूछा था अगर वह क्रिकेटर होती तो किस तरह की भूमिका निभाती। जवाब में, संजना ने बल्लेबाजी ओपन करने और अपनी टीम को तेज शुरुआत देने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने कहा, 'मैं एक सलामी बल्लेबाज होती। मुझे ऐसा लग रहा है कि मैं एक सलामी बल्लेबाज बन गई होती। मैं एक शॉटमेकर, विस्फोटक शुरुआत की तरह हूं। बुमराह अगले 2021 इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में मुंबई इंडियंस (एमआई) का हिस्सा बनने के लिए तैयार हैं, जो 9 अप्रैल से शुरू होगा।
बीसीसीआई ने इसके बारे में जानकारी देते हुए लिखा- जस्प्रीत बुमराह ने चौथे टेस्ट मैच से पहले पर्सनल कारणों के चलते बीसीसीआई से रिलीज करने का अनुरोध किया था। जब वह गणेशन के साथ शादी में शामिल हुए, तो सत्ताईस वर्षीय अहमदाबाद में जन्मे पेसर ने अपनी शादी की कुछ तस्वीरें साझा कीं। IND vs ENG: आनंद महिंद्रा ने किया खुलासा, मैच के दौरान क्यों पहने 'अक्षर शेड्स' अब बुमराह ने तस्वीरों को कैप्शन दिया और लिखा, "प्यार, अगर यह आपको योग्य लगता है, आपके आपके लक्ष्य की ओर लेकर जाता है। प्यार से प्रेरित होकर, हमने एक साथ एक नई यात्रा शुरू की है। आज हमारे जीवन के सबसे खुशी के दिनों में से एक है और हम अपनी शादी की खबरें और अपनी खुशी आपके साथ साझा करने में सक्षम होने के लिए धन्य महसूस करते हैं। जसप्रित और संजना। " इस बीच, गणेश के साथ बुमराह की शादी का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चक्कर लगा रहा है। इस साल की शुरुआत में, जनवरी में गणेशन ने बुमराह के 'मूड' की तस्वीर पोस्ट की थी। बाद में ट्वीट ने उनकी शादी की अटकलों को हवा दी। "जसप्रीत बुमराह के ऑन-फील्ड मूड और मेरे दैनिक मिजाज बिल्कुल एक जैसे दिखते हैं," उन्होंने लिखा। गणेशन इंडियन प्रीमियर लीग में कोलकाता नाइट राइडर्स में भी शामिल हैं। उन्होंने बांग्लादेश के शाकिब अल हसन सहित कई क्रिकेटरों के साथ कई साक्षात्कार किए हैं। इससे पहले केकेआर के पूर्व कप्तान दिनेश कार्तिक ने संजना से पूछा था अगर वह क्रिकेटर होती तो किस तरह की भूमिका निभाती। जवाब में, संजना ने बल्लेबाजी ओपन करने और अपनी टीम को तेज शुरुआत देने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने कहा, 'मैं एक सलामी बल्लेबाज होती। मुझे ऐसा लग रहा है कि मैं एक सलामी बल्लेबाज बन गई होती। मैं एक शॉटमेकर, विस्फोटक शुरुआत की तरह हूं। बुमराह अगले दो हज़ार इक्कीस इंडियन प्रीमियर लीग में मुंबई इंडियंस का हिस्सा बनने के लिए तैयार हैं, जो नौ अप्रैल से शुरू होगा।
आगे मिथुन चक्रवर्ती ने कहा था कि अभी म्यूजिक लॉन्च है. फिल्म की धमाकेदार रिलीज तो बाकी है. उनके इस बयान के बाद से यह कयास लगाए जाने लगे की शायद एक फिर बंगाल में महाराष्ट्र जैसा खेला होने की तैयारी है. जिससे सियासी गलियारों में हलचल बढ़ गई. मिथुन के इस बयान के बाद बंगाल की राजनीति में हलचल मच गई. लेकिन कुछ रिपोर्ट्स की मानें तो जमीनी हकीकत कुछ और ही निकली. बता दें कि 2021 के विधानसभा चुनाव में बंगाल की 294 विधानसभा सीटों में से BJP ने 77 पर जीत दर्ज की थी. नतीजों के बाद BJP के 77 में से 2 विधायक निशिथ प्रमाणिक और जगन्नाथ सरकार ने इस्तीफा दे दिया था. ये दोनों BJP से सांसद भी हैं. विधानसभा चुनाव में जीत के बाद इन्होंने विधायकी छोड़कर संसद में रहने का निर्णय लिया. इससे BJP के विधायकों की संख्या 75 हो गई. अब यह संख्या 69 पर आ चुकी है. 6 विधायक BJP छोड़कर TMC में जा चुके हैं. BJP के 18 में से 2 सांसद भी TMC में शामिल हो चुके हैं. जबकि नतीजों के बाद TMC का एक भी विधायक-सांसद या बड़ा नेता BJP में शामिल नहीं हुआ. जो भी शामिल हुए थे, सब चुनाव के पहले ही शामिल हुए थे.
आगे मिथुन चक्रवर्ती ने कहा था कि अभी म्यूजिक लॉन्च है. फिल्म की धमाकेदार रिलीज तो बाकी है. उनके इस बयान के बाद से यह कयास लगाए जाने लगे की शायद एक फिर बंगाल में महाराष्ट्र जैसा खेला होने की तैयारी है. जिससे सियासी गलियारों में हलचल बढ़ गई. मिथुन के इस बयान के बाद बंगाल की राजनीति में हलचल मच गई. लेकिन कुछ रिपोर्ट्स की मानें तो जमीनी हकीकत कुछ और ही निकली. बता दें कि दो हज़ार इक्कीस के विधानसभा चुनाव में बंगाल की दो सौ चौरानवे विधानसभा सीटों में से BJP ने सतहत्तर पर जीत दर्ज की थी. नतीजों के बाद BJP के सतहत्तर में से दो विधायक निशिथ प्रमाणिक और जगन्नाथ सरकार ने इस्तीफा दे दिया था. ये दोनों BJP से सांसद भी हैं. विधानसभा चुनाव में जीत के बाद इन्होंने विधायकी छोड़कर संसद में रहने का निर्णय लिया. इससे BJP के विधायकों की संख्या पचहत्तर हो गई. अब यह संख्या उनहत्तर पर आ चुकी है. छः विधायक BJP छोड़कर TMC में जा चुके हैं. BJP के अट्ठारह में से दो सांसद भी TMC में शामिल हो चुके हैं. जबकि नतीजों के बाद TMC का एक भी विधायक-सांसद या बड़ा नेता BJP में शामिल नहीं हुआ. जो भी शामिल हुए थे, सब चुनाव के पहले ही शामिल हुए थे.
महिला ने पति को थाने ले जाने का कारण पूछा तो ASI ने धक्का देकर नीचे गिरा गया। मामला सांसद तक पहुंचा तो ASI को लाइन हाजिर कर दिया। घटना श्रीगंगानगर के घड़साना मंडी थाना इलाके की 25 जून की है। इसका वीडियो मंगलवार को सामने आया है। पुलिस उपाधीक्षक रामेश्वर लाल ने बताया कि एक सप्ताह पहले सोहनलाल ने रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। रिपोर्ट में बताया था कि शीशपाल ने उसे कुपली रोड पर स्थित ईंट-भट्टे पर मजदूरी करने के लिए रखा था। मजदूरी के ढाई लाख रुपए शीशपाल ने अटका रखे थे। मामले में ASI रामसिंह पुलिसकर्मियों के साथ 25 जून को ईंट-भट्टे पर शीशपाल से पूछताछ करने पहुंचे थे। इस दौरान शीशपाल की पत्नी से ASI ने अभद्रता की। मामले की जांच एएसपी बनवारी लाल मीणा को सौंपी गई है। शीशपाल से पूछताछ करने गई पुलिस टीम का एक वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में शीशपाल की पत्नी ASI के सामने हाथ जोड़े दिख रही है। वह पति को गाड़ी में बैठाकर थाने ले जाने का कारण पूछती है। तब ASI ने गाड़ी से उतरकर महिला को धक्का मारकर नीचे गिरा दिया। महिला जमीन से नहीं उठी तो दूसरे पुलिसकर्मी ने मुकदमा दर्ज करने की धमकी दी। इस दौरान हंगामा हुआ। घड़साना में सोमवार को आरएलपी के सांसद हनुमान बेनीवाल की सभा थी। इस दौरान महिला ने बेनीवाल को अपनी पीड़ा बताई। इस पर सांसद ने बीकानेर आईजी ओमप्रकाश से बात की। आईजी ने सोमवार देर रात ASI को लाइन हाजिर कर दिया गया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
महिला ने पति को थाने ले जाने का कारण पूछा तो ASI ने धक्का देकर नीचे गिरा गया। मामला सांसद तक पहुंचा तो ASI को लाइन हाजिर कर दिया। घटना श्रीगंगानगर के घड़साना मंडी थाना इलाके की पच्चीस जून की है। इसका वीडियो मंगलवार को सामने आया है। पुलिस उपाधीक्षक रामेश्वर लाल ने बताया कि एक सप्ताह पहले सोहनलाल ने रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। रिपोर्ट में बताया था कि शीशपाल ने उसे कुपली रोड पर स्थित ईंट-भट्टे पर मजदूरी करने के लिए रखा था। मजदूरी के ढाई लाख रुपए शीशपाल ने अटका रखे थे। मामले में ASI रामसिंह पुलिसकर्मियों के साथ पच्चीस जून को ईंट-भट्टे पर शीशपाल से पूछताछ करने पहुंचे थे। इस दौरान शीशपाल की पत्नी से ASI ने अभद्रता की। मामले की जांच एएसपी बनवारी लाल मीणा को सौंपी गई है। शीशपाल से पूछताछ करने गई पुलिस टीम का एक वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में शीशपाल की पत्नी ASI के सामने हाथ जोड़े दिख रही है। वह पति को गाड़ी में बैठाकर थाने ले जाने का कारण पूछती है। तब ASI ने गाड़ी से उतरकर महिला को धक्का मारकर नीचे गिरा दिया। महिला जमीन से नहीं उठी तो दूसरे पुलिसकर्मी ने मुकदमा दर्ज करने की धमकी दी। इस दौरान हंगामा हुआ। घड़साना में सोमवार को आरएलपी के सांसद हनुमान बेनीवाल की सभा थी। इस दौरान महिला ने बेनीवाल को अपनी पीड़ा बताई। इस पर सांसद ने बीकानेर आईजी ओमप्रकाश से बात की। आईजी ने सोमवार देर रात ASI को लाइन हाजिर कर दिया गया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
शिवपुरी। जिले के भोंती थाना क्षेत्र के तहत भयावन रोड पर एक बाइक चालक ने तेजी व लापरवाही से चलाते हुए सड़क पर जा रहे युवक में टक्कर मार दी जिससे वह घायल हो गया। मामले में पुलिस ने फरियादी की शिकायत पर बाइक चालक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। कैलाश पुत्र जसरथसिंह लोधी निवासी साजौर ने पुलिस को शिकायत में बताया कि शुक्रवार की शाम जब वह किसी काम से जा रहा था तभी भयावन रोड पर पीछे से बाइक चालक नीरज पुत्र मातादीन लोधी निवासी मुंगावली थाना करैरा ने टक्कर मार दी। टक्कर लगने के बाद युवक जमीन पर गिर गया और चोटिल हो गया। घटना के बाद बाइक चालक भाग गया। इसके बाद घायल युवक को इलाज के लिए स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया एवं थाने में शिकायत दर्ज करवाई।
शिवपुरी। जिले के भोंती थाना क्षेत्र के तहत भयावन रोड पर एक बाइक चालक ने तेजी व लापरवाही से चलाते हुए सड़क पर जा रहे युवक में टक्कर मार दी जिससे वह घायल हो गया। मामले में पुलिस ने फरियादी की शिकायत पर बाइक चालक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। कैलाश पुत्र जसरथसिंह लोधी निवासी साजौर ने पुलिस को शिकायत में बताया कि शुक्रवार की शाम जब वह किसी काम से जा रहा था तभी भयावन रोड पर पीछे से बाइक चालक नीरज पुत्र मातादीन लोधी निवासी मुंगावली थाना करैरा ने टक्कर मार दी। टक्कर लगने के बाद युवक जमीन पर गिर गया और चोटिल हो गया। घटना के बाद बाइक चालक भाग गया। इसके बाद घायल युवक को इलाज के लिए स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया एवं थाने में शिकायत दर्ज करवाई।
योगदर्शन का संक्षिप्त परिचय - योगदर्शन के मूल में सांख्य प्रतिफलित जिज्ञासायें एवं शङ्कायें किसी न किसी रूप में वर्तमान थीं। यह दर्शन सांख्य से पूर्णतया प्रभावित है, किन्तु इसकी मान्यतायें कुछ भिन्न ही हैं। योगदर्शन में यह मान्यता की गई कि चेतन पुरुष की स्वीकृति होने पर चेतन पुरुष स्वरूप ईश्वर जो सर्वज्ञ एवं शक्तिमान् है, उसकी इच्छा के फलस्वरूप गुणों के वे प्रतिबन्ध निवृत्त हो जाते हैं जो गुणों के परिणाम में बाधक होते हैं। परिणामतः गुणों से पुरुष की भोग व मोक्ष की सिद्धि सम्भव होती है। योग दर्शन के प्रमुख आचार्य व ग्रन्थों का परिचय निम्नाङ्कत हैं। पंतञ्जलि :- योगदर्शन के प्रथम प्रतिष्ठित आचार्य महर्षि पतञ्जलि हैं । इनका स्थितिकाल ई. पू. द्वितीय शताब्दी है। वैसे कुछ पाश्चात्य विद्धान् इन्हें तृतीय व चतुर्थ शताब्दी में भी मानते हैं। वैसे पतञ्जलि नाम से तीन विद्वानों का नाम आया है। योग दर्शनकार पंतञ्जलि, महाभाष्यकार, पतञ्जलि व आयुर्वेदकार पतञ्जलि । ऐतिहासिकों ने योगदर्शन व महाभाष्य के कर्ता पंतजलि को एक ही माना है। कुछ पाश्चात्य विद्वान् दोनों को पृथक्-पृथक् भी मानते हैं । योगदर्शन वैदिक उपनिषदों से साक्षात् प्रभावित हैं जैसे श्वेताम्बर उपनिषद् (२१७-१५) में क्रियात्मक योग का विशेष निरुपण उपलब्ध है। इसी तरह छान्दोग्य वृहदारण्यक एवं कठ आदि उपनिषदों में योग विषयक वर्णन मिलते है। जैसे कि छान्दोग्य उपनिषद् ( ८ / ६) वृहदारयण्क उपनिषद् (४-३-२०) एवं कौषीतकि उपनिषद् (४/१६) के अन्तर्गत हृदय से पुरीतत तक जाने वाली हिता नामक नाड़ियों का वर्णन मिलता है । यही पुरीतत् योग कहा जाता है। इसके अलावा बौद्ध धर्म के पालि त्रिपिटकों एवं संस्कृत बौद्ध ग्रन्थों में योग सम्बन्धी विशिष्ट वर्णन मिलते हैं। जैन ग्रन्थों में भी योग सम्बन्धी वर्णन स्पष्टतया उपलब्ध है। योग भाष्य :- योग भाष्य अथवा व्यासभाष्य की रचना व्यास जी ने योगसूत्र के सिद्धान्तों के विशदीकरणार्थ की थी । ये व्यास वेद व्यास से भिन्न थे। योग भाष्य के अन्तर्गत अनेक स्थानों पर बौद्ध प्रभाव देखने को मिलता है। अतः योगभाष्य का रचनाकाल विक्रम की तृतीय शती माना जाता है। वाचस्पति मिश्र :- योगसूत्र पर आधारित व्यासभाष्य के तात्पर्य को समझना सरल नहीं है । एतदर्थ सर्वदर्शन पण्डित वाचस्पति मिश्र ने भाष्याशय के बोध की दृष्टि से तत्त्व वैशारदी की रचना की । वाचस्पति मैथिल थे। न्यायदर्शन के क्षेत्र में 'न्यायतात्पर्य टीका' इनका प्रसिद्ध ग्रन्थ है। पातञ्जल योगसूत्र की टीकार्ये :- पातञ्जल योगसूत्र की टीकाओं में भोज प्रणीत भोजवृत्ति अत्यन्त प्रसिद्ध है। इसका वास्तविक नाम राजमार्तण्ड है। योगसूत्र पर भावगणेश की वृत्ति प्रसिद्ध है। भावगणेश सांख्य के भी विद्वान् थे। इसके अलावा रामानन्दयति की मणिप्रिया अनन्तपण्डित प्रणीत योग चन्द्रिका सदा शिवेन्द्र सरस्वती रचित योगसुधारक एवं नागो जी भट्ट कृत लघ्वी एवं बृहतीवृत्तियाँ योगदर्शन के क्षेत्र में अत्यन्त महत्त्वपूर्ण हैं। योग शब्द का अर्थ :- योग की परिभाषा योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः अर्थातूचित्रवृत्तियों का निरोध ही योग है। इस शब्द की निष्पत्ति युज् धातु से हुई है। योग का सही अर्थ समाधि है। बाह्य वृत्तियों के विरोध और निरोध के फलस्वरूप समस्त वृत्तियों और संस्कारों का प्रविलय होने पर ही योग की उत्पत्ति होती है। वैसे हठ योग, मन्त्र योग लय योग आदि योग के कई भेद मिलते हैं । चित्त एवं चित्रवृत्ति :- चित्त ही कर्मेन्द्रियों एवं ज्ञानेन्द्रियों को तत्-तत् कार्यों में प्रवृत्त करता है । इस तरह सत्कर्म का प्रेरक एवं प्रवर्तक होने के कारण मन ही मोक्ष का कारण है । ज्ञान साध्य मोक्षार्थ अपेक्षित चित्त शुद्धि सत्कर्म द्वारा ही सम्भव है । चित्त की परिष्कृति एवं शुद्धि के लिए सात्विक आहार भी अपेक्षित होता है। जैसा आहार होगा वैसा ही चित्त का निर्माण होगा। गीता में प्रतिपादित है कि योगी पुरुष का आहार एवं विहार नियत परिमाण वाला होना चाहिये ।
योगदर्शन का संक्षिप्त परिचय - योगदर्शन के मूल में सांख्य प्रतिफलित जिज्ञासायें एवं शङ्कायें किसी न किसी रूप में वर्तमान थीं। यह दर्शन सांख्य से पूर्णतया प्रभावित है, किन्तु इसकी मान्यतायें कुछ भिन्न ही हैं। योगदर्शन में यह मान्यता की गई कि चेतन पुरुष की स्वीकृति होने पर चेतन पुरुष स्वरूप ईश्वर जो सर्वज्ञ एवं शक्तिमान् है, उसकी इच्छा के फलस्वरूप गुणों के वे प्रतिबन्ध निवृत्त हो जाते हैं जो गुणों के परिणाम में बाधक होते हैं। परिणामतः गुणों से पुरुष की भोग व मोक्ष की सिद्धि सम्भव होती है। योग दर्शन के प्रमुख आचार्य व ग्रन्थों का परिचय निम्नाङ्कत हैं। पंतञ्जलि :- योगदर्शन के प्रथम प्रतिष्ठित आचार्य महर्षि पतञ्जलि हैं । इनका स्थितिकाल ई. पू. द्वितीय शताब्दी है। वैसे कुछ पाश्चात्य विद्धान् इन्हें तृतीय व चतुर्थ शताब्दी में भी मानते हैं। वैसे पतञ्जलि नाम से तीन विद्वानों का नाम आया है। योग दर्शनकार पंतञ्जलि, महाभाष्यकार, पतञ्जलि व आयुर्वेदकार पतञ्जलि । ऐतिहासिकों ने योगदर्शन व महाभाष्य के कर्ता पंतजलि को एक ही माना है। कुछ पाश्चात्य विद्वान् दोनों को पृथक्-पृथक् भी मानते हैं । योगदर्शन वैदिक उपनिषदों से साक्षात् प्रभावित हैं जैसे श्वेताम्बर उपनिषद् में क्रियात्मक योग का विशेष निरुपण उपलब्ध है। इसी तरह छान्दोग्य वृहदारण्यक एवं कठ आदि उपनिषदों में योग विषयक वर्णन मिलते है। जैसे कि छान्दोग्य उपनिषद् वृहदारयण्क उपनिषद् एवं कौषीतकि उपनिषद् के अन्तर्गत हृदय से पुरीतत तक जाने वाली हिता नामक नाड़ियों का वर्णन मिलता है । यही पुरीतत् योग कहा जाता है। इसके अलावा बौद्ध धर्म के पालि त्रिपिटकों एवं संस्कृत बौद्ध ग्रन्थों में योग सम्बन्धी विशिष्ट वर्णन मिलते हैं। जैन ग्रन्थों में भी योग सम्बन्धी वर्णन स्पष्टतया उपलब्ध है। योग भाष्य :- योग भाष्य अथवा व्यासभाष्य की रचना व्यास जी ने योगसूत्र के सिद्धान्तों के विशदीकरणार्थ की थी । ये व्यास वेद व्यास से भिन्न थे। योग भाष्य के अन्तर्गत अनेक स्थानों पर बौद्ध प्रभाव देखने को मिलता है। अतः योगभाष्य का रचनाकाल विक्रम की तृतीय शती माना जाता है। वाचस्पति मिश्र :- योगसूत्र पर आधारित व्यासभाष्य के तात्पर्य को समझना सरल नहीं है । एतदर्थ सर्वदर्शन पण्डित वाचस्पति मिश्र ने भाष्याशय के बोध की दृष्टि से तत्त्व वैशारदी की रचना की । वाचस्पति मैथिल थे। न्यायदर्शन के क्षेत्र में 'न्यायतात्पर्य टीका' इनका प्रसिद्ध ग्रन्थ है। पातञ्जल योगसूत्र की टीकार्ये :- पातञ्जल योगसूत्र की टीकाओं में भोज प्रणीत भोजवृत्ति अत्यन्त प्रसिद्ध है। इसका वास्तविक नाम राजमार्तण्ड है। योगसूत्र पर भावगणेश की वृत्ति प्रसिद्ध है। भावगणेश सांख्य के भी विद्वान् थे। इसके अलावा रामानन्दयति की मणिप्रिया अनन्तपण्डित प्रणीत योग चन्द्रिका सदा शिवेन्द्र सरस्वती रचित योगसुधारक एवं नागो जी भट्ट कृत लघ्वी एवं बृहतीवृत्तियाँ योगदर्शन के क्षेत्र में अत्यन्त महत्त्वपूर्ण हैं। योग शब्द का अर्थ :- योग की परिभाषा योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः अर्थातूचित्रवृत्तियों का निरोध ही योग है। इस शब्द की निष्पत्ति युज् धातु से हुई है। योग का सही अर्थ समाधि है। बाह्य वृत्तियों के विरोध और निरोध के फलस्वरूप समस्त वृत्तियों और संस्कारों का प्रविलय होने पर ही योग की उत्पत्ति होती है। वैसे हठ योग, मन्त्र योग लय योग आदि योग के कई भेद मिलते हैं । चित्त एवं चित्रवृत्ति :- चित्त ही कर्मेन्द्रियों एवं ज्ञानेन्द्रियों को तत्-तत् कार्यों में प्रवृत्त करता है । इस तरह सत्कर्म का प्रेरक एवं प्रवर्तक होने के कारण मन ही मोक्ष का कारण है । ज्ञान साध्य मोक्षार्थ अपेक्षित चित्त शुद्धि सत्कर्म द्वारा ही सम्भव है । चित्त की परिष्कृति एवं शुद्धि के लिए सात्विक आहार भी अपेक्षित होता है। जैसा आहार होगा वैसा ही चित्त का निर्माण होगा। गीता में प्रतिपादित है कि योगी पुरुष का आहार एवं विहार नियत परिमाण वाला होना चाहिये ।
SSC CHSL Notification 2023: एसएससी कंबाइंड हायर सेकेंडरी लेवल (CHSL 2023) परीक्षा 2023 के माध्यम से लगभग 1600 रिक्तियों को भरने के लिए आवेदन आमंत्रित करते हुए एक नोटिफिकेशन जारी किया हैं। जो उम्मीदवार एसएससी सीएचएसएल 2023 के लिए आवेदन करना चाहते हैं, वे आधिकारिक वेबसाइट ssc. nic. in पर अप्लाई कर सकते हैं। इस भर्ती के जरिए ग्रुप सी पदों पर नियुक्तियां की जाएगी। इस भर्ती के लिए 12वीं पास अभ्यर्थी आवेदन कर सकेंगे। चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियां भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों / विभागों / कार्यालयों के लिए अवर मंडल लिपिक / कनिष्ठ सचिवालय सहायक, और डाटा एंट्री ऑपरेटर पदों पर की जाएगी। नोटिफिकेशन के मुताबिक भर्ती के लिए आवेदन की प्रक्रिया 9 मई से शुरू हो गई है। वहीं, आवेदन की आखिरी तारीख 8 जून 2023 है। इसके बाद किसी भी अभ्यर्थी का फॉर्म एक्सेप्ट नहीं किया जाएगा। भर्ती के जरिए कुल 1600 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। भर्ती के लिए वे सभी अभ्यर्थी आवेदन कर सकेंगे जो 12वीं पास हैं। इसके लिए ये वे अभ्यर्थी भी आवेदन कर सकेंगे जो 12वीं की परीक्षा देने वाले हैं या फिर दे चुके हैं। आयु की गणना 01-08-2023 निर्धारित की गई है। 02-08-1996 से पहले और 01-08-2005 के बाद पैदा नहीं हुए अभ्यर्थी आवेदन करने के पात्र हैं। विभिन्न श्रेणियों के लिए ऊपरी आयु सीमा में नियमानुसार छूट भी दी जाएगी। अधिक जानकारी ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर चेक किया जा सकता है। एसएससी सीएचएसएल के लिए आवेदन कर रहे सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को 100 रुपये का शुल्क जमा करना होगा। हालांकि, महिला उम्मीदवारों, अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), बेंचमार्क विकलांग व्यक्तियों (पीडब्ल्यूबीडी) और पूर्व सैनिकों (ईएसएम) जो आरक्षण के लिए पात्र हैं, उन्हें शुल्क भुगतान से छूट दी जाएगी। ऑनलाइन शुल्क जमा करने की आखिरी तारीख 10 जून 2023 तक है। अगर आप ऑफलाइन फीस जमा करने की सोच रहे हैं तो इसके लिए 11 जून तक आपको बैंक से चालान जेनरेट करवाना होगा। इसके बाद आपके पास 12 जून तक समय मिलेगा। एक बार भुगतान हो जाने के बाद वापस नहीं किया जाएगा। एसएससी सीएचएसएल आवेदन पत्र और फीस जमा करने के बाद एसएससी 14 जून से 15 जून 2023 तक उम्मीदवारों को अपने आवेदन पत्र और फीस भुगतान में हुई किसी भी गलती को सुधारने का एक मौका देगा। इस दौरान उम्मीदवारों के पास 11 बजे रात तक समय रहेगा। एसएससी सीएचएसएल परीक्षा 2023 टियर 1 अगस्त के महीने में आयोजित की जाएगी। यह सीबीटी मोड आधारित परीक्षा होगी। जबकि टियर 2 परीक्षा का कार्यक्रम बाद में जारी किया जाएगा। - लोअर डिवीजन क्लर्क (LDC) जूनियर सचिवालय सहायक (JSA) के पद पर चयनित उम्मीदवारों को वेतन स्तर -2 के तहत 19,900 से 63,200 रुपये का वेतन मिलेगा। - डाटा एंट्री ऑपरेटर, ग्रेड 'ए' के पद पर चयनित उम्मीदवारों को पे लेवल 4 के तहत 25,500 से 81,100 रुपये का वेतन मिलेगा। - सबसे पहले एसएससी की वेबसाइट ssc. nic. in पर जाएं। - होम पेज पर अप्लाई नाउ' लिंक पर क्लिक करें और फिर 'सीएचएसएल' लिंक पर क्लिक करें। - अपने आवश्यक क्रेडेंशियल्स दर्ज करें और लॉग इन करें। - सभी विवरण भरें और आवेदन शुल्क का भुगतान करें। - अब अंतिम आवेदन जमा करें, सेव कर डाउनलोड करें।
SSC CHSL Notification दो हज़ार तेईस: एसएससी कंबाइंड हायर सेकेंडरी लेवल परीक्षा दो हज़ार तेईस के माध्यम से लगभग एक हज़ार छः सौ रिक्तियों को भरने के लिए आवेदन आमंत्रित करते हुए एक नोटिफिकेशन जारी किया हैं। जो उम्मीदवार एसएससी सीएचएसएल दो हज़ार तेईस के लिए आवेदन करना चाहते हैं, वे आधिकारिक वेबसाइट ssc. nic. in पर अप्लाई कर सकते हैं। इस भर्ती के जरिए ग्रुप सी पदों पर नियुक्तियां की जाएगी। इस भर्ती के लिए बारहवीं पास अभ्यर्थी आवेदन कर सकेंगे। चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियां भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों / विभागों / कार्यालयों के लिए अवर मंडल लिपिक / कनिष्ठ सचिवालय सहायक, और डाटा एंट्री ऑपरेटर पदों पर की जाएगी। नोटिफिकेशन के मुताबिक भर्ती के लिए आवेदन की प्रक्रिया नौ मई से शुरू हो गई है। वहीं, आवेदन की आखिरी तारीख आठ जून दो हज़ार तेईस है। इसके बाद किसी भी अभ्यर्थी का फॉर्म एक्सेप्ट नहीं किया जाएगा। भर्ती के जरिए कुल एक हज़ार छः सौ पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। भर्ती के लिए वे सभी अभ्यर्थी आवेदन कर सकेंगे जो बारहवीं पास हैं। इसके लिए ये वे अभ्यर्थी भी आवेदन कर सकेंगे जो बारहवीं की परीक्षा देने वाले हैं या फिर दे चुके हैं। आयु की गणना एक अगस्त दो हज़ार तेईस निर्धारित की गई है। दो अगस्त एक हज़ार नौ सौ छियानवे से पहले और एक अगस्त दो हज़ार पाँच के बाद पैदा नहीं हुए अभ्यर्थी आवेदन करने के पात्र हैं। विभिन्न श्रेणियों के लिए ऊपरी आयु सीमा में नियमानुसार छूट भी दी जाएगी। अधिक जानकारी ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर चेक किया जा सकता है। एसएससी सीएचएसएल के लिए आवेदन कर रहे सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को एक सौ रुपयापये का शुल्क जमा करना होगा। हालांकि, महिला उम्मीदवारों, अनुसूचित जाति , अनुसूचित जनजाति , बेंचमार्क विकलांग व्यक्तियों और पूर्व सैनिकों जो आरक्षण के लिए पात्र हैं, उन्हें शुल्क भुगतान से छूट दी जाएगी। ऑनलाइन शुल्क जमा करने की आखिरी तारीख दस जून दो हज़ार तेईस तक है। अगर आप ऑफलाइन फीस जमा करने की सोच रहे हैं तो इसके लिए ग्यारह जून तक आपको बैंक से चालान जेनरेट करवाना होगा। इसके बाद आपके पास बारह जून तक समय मिलेगा। एक बार भुगतान हो जाने के बाद वापस नहीं किया जाएगा। एसएससी सीएचएसएल आवेदन पत्र और फीस जमा करने के बाद एसएससी चौदह जून से पंद्रह जून दो हज़ार तेईस तक उम्मीदवारों को अपने आवेदन पत्र और फीस भुगतान में हुई किसी भी गलती को सुधारने का एक मौका देगा। इस दौरान उम्मीदवारों के पास ग्यारह बजे रात तक समय रहेगा। एसएससी सीएचएसएल परीक्षा दो हज़ार तेईस टियर एक अगस्त के महीने में आयोजित की जाएगी। यह सीबीटी मोड आधारित परीक्षा होगी। जबकि टियर दो परीक्षा का कार्यक्रम बाद में जारी किया जाएगा। - लोअर डिवीजन क्लर्क जूनियर सचिवालय सहायक के पद पर चयनित उम्मीदवारों को वेतन स्तर -दो के तहत उन्नीस,नौ सौ से तिरेसठ,दो सौ रुपयापये का वेतन मिलेगा। - डाटा एंट्री ऑपरेटर, ग्रेड 'ए' के पद पर चयनित उम्मीदवारों को पे लेवल चार के तहत पच्चीस,पाँच सौ से इक्यासी,एक सौ रुपयापये का वेतन मिलेगा। - सबसे पहले एसएससी की वेबसाइट ssc. nic. in पर जाएं। - होम पेज पर अप्लाई नाउ' लिंक पर क्लिक करें और फिर 'सीएचएसएल' लिंक पर क्लिक करें। - अपने आवश्यक क्रेडेंशियल्स दर्ज करें और लॉग इन करें। - सभी विवरण भरें और आवेदन शुल्क का भुगतान करें। - अब अंतिम आवेदन जमा करें, सेव कर डाउनलोड करें।
गांधीनगर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के केवड़िया से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सिविल सर्विसेज के ट्रेनी अफसरों को संबोधित करते हुए कहा कि जिस समय आप सिविल सेवा में आए हैं, वह बहुत खास है। आज जब फील्ड में जाना शुरू करेंगे, तब भारत स्वतंत्रता के 75वें साल में होगा। आप ही वह ऑफिसर्स हैं, जो उस समय में भी देश सेवा में होंगे, अपने करियर के महत्वपूर्ण पड़ाव पर होंगे, जब भारत आजादी के 100 साल मनाएगा। आने वाले 25 सालों में देश की सुरक्षा, लोगों का कल्याण, वैश्विक स्तर पर भारत का स्थान, कई बड़े काम आपके जिम्मे रहेंगे। आज की रात सोने से पहले खुद को आधा घंटा जरूर दीजिए। मन में जो चल रहा है। अपने दायित्व के बारे में आप जो सोच रहे हैं, उसे लिख लीजिए। जिस कागज पर अपने सपनों को शब्द देंगे, वह सिर्फ कागज का नहीं, बल्कि आपके दिल का टुकड़ा होगा। यह आपने सपनों को साकार करने के लिए धड़कन बनकर आपके साथ रहेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्टील फ्रेम का काम देश को यह समझाना भी होता है कि बड़े से बड़े बदलाव क्यों न हो, आप देश को आगे बढ़ाने में अपना योगदान देंगे। तरह-तरह के लोगों से घिरे रहने के बाद भी आपको दायित्व भूलना नहीं है। स्टील फ्रेम का ज्यादा प्रभाव तभी होगा, जब आप टीम में रहेंगे। "आगे जाकर आपको जिले संभालने हैं, कई विभागों में तैनाती होगी, उस समय ये टीम भावना और भी काम आने वाली है। जब आप एक टीम की तरह पूरी ताकत लगा देंगे, तभी सफल होंगे और देश विफल नहीं होगा। सरदार पटेल ने आत्मनिर्भर भारत का सपना देखा था। कोरोना महामारी के दौरान हमें जो सबसे बड़ा सबक मिला, वो आत्मनिर्भर भारत का ही है। " इससे पहले मोदी ने केवडिया में एकता दिवस के प्रोग्राम को भी संबोधित किया। उन्होंने स्टेच्यू ऑफ यूनिटी पर पानी-फूल चढ़ाकर पटेल को श्रद्धांजलि दी और उन्हें नमन किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एकता दिवस की परेड में शामिल हुए। इस परेड में गुजरात पुलिस, सेंट्रल रिजर्व आर्म्ड फोर्सेज, बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स, इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस, सीआईएसएफ और नेशनल सिक्योरिटी गार्ड्स के जवानों ने हिस्सा लिया। मोदी ने जवानों को एकता की शपथ दिलवाई। इसके बाद कल्चरल प्रोग्राम हुए और एयरफोर्स के फाइटर जेट्स ने भी परफॉर्म किया। कोरोना काल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहली बार गुजरात का दौरा कर रहे हैं। दौरे के पहले दिन शुक्रवार को उन्होंने 9 घंटे में केवड़िया में स्टेच्यू ऑफ यूनिटी के आस-पास बने 1000 करोड़ रुपए के 16 प्रोजेक्ट लॉन्च किए। देश दुनिया की ताजातरीन सच्ची और अच्छी खबरों को जानने के लिए बनें रहेंwww. dastaktimes. orgके साथ। हमें फेसबुक पर फॉलों करने के लिएhttps://www. facebook. com/dastak. times. 9और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @TimesDastak पर क्लिक करें।
गांधीनगर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के केवड़िया से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सिविल सर्विसेज के ट्रेनी अफसरों को संबोधित करते हुए कहा कि जिस समय आप सिविल सेवा में आए हैं, वह बहुत खास है। आज जब फील्ड में जाना शुरू करेंगे, तब भारत स्वतंत्रता के पचहत्तरवें साल में होगा। आप ही वह ऑफिसर्स हैं, जो उस समय में भी देश सेवा में होंगे, अपने करियर के महत्वपूर्ण पड़ाव पर होंगे, जब भारत आजादी के एक सौ साल मनाएगा। आने वाले पच्चीस सालों में देश की सुरक्षा, लोगों का कल्याण, वैश्विक स्तर पर भारत का स्थान, कई बड़े काम आपके जिम्मे रहेंगे। आज की रात सोने से पहले खुद को आधा घंटा जरूर दीजिए। मन में जो चल रहा है। अपने दायित्व के बारे में आप जो सोच रहे हैं, उसे लिख लीजिए। जिस कागज पर अपने सपनों को शब्द देंगे, वह सिर्फ कागज का नहीं, बल्कि आपके दिल का टुकड़ा होगा। यह आपने सपनों को साकार करने के लिए धड़कन बनकर आपके साथ रहेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्टील फ्रेम का काम देश को यह समझाना भी होता है कि बड़े से बड़े बदलाव क्यों न हो, आप देश को आगे बढ़ाने में अपना योगदान देंगे। तरह-तरह के लोगों से घिरे रहने के बाद भी आपको दायित्व भूलना नहीं है। स्टील फ्रेम का ज्यादा प्रभाव तभी होगा, जब आप टीम में रहेंगे। "आगे जाकर आपको जिले संभालने हैं, कई विभागों में तैनाती होगी, उस समय ये टीम भावना और भी काम आने वाली है। जब आप एक टीम की तरह पूरी ताकत लगा देंगे, तभी सफल होंगे और देश विफल नहीं होगा। सरदार पटेल ने आत्मनिर्भर भारत का सपना देखा था। कोरोना महामारी के दौरान हमें जो सबसे बड़ा सबक मिला, वो आत्मनिर्भर भारत का ही है। " इससे पहले मोदी ने केवडिया में एकता दिवस के प्रोग्राम को भी संबोधित किया। उन्होंने स्टेच्यू ऑफ यूनिटी पर पानी-फूल चढ़ाकर पटेल को श्रद्धांजलि दी और उन्हें नमन किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एकता दिवस की परेड में शामिल हुए। इस परेड में गुजरात पुलिस, सेंट्रल रिजर्व आर्म्ड फोर्सेज, बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स, इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस, सीआईएसएफ और नेशनल सिक्योरिटी गार्ड्स के जवानों ने हिस्सा लिया। मोदी ने जवानों को एकता की शपथ दिलवाई। इसके बाद कल्चरल प्रोग्राम हुए और एयरफोर्स के फाइटर जेट्स ने भी परफॉर्म किया। कोरोना काल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहली बार गुजरात का दौरा कर रहे हैं। दौरे के पहले दिन शुक्रवार को उन्होंने नौ घंटाटे में केवड़िया में स्टेच्यू ऑफ यूनिटी के आस-पास बने एक हज़ार करोड़ रुपए के सोलह प्रोजेक्ट लॉन्च किए। देश दुनिया की ताजातरीन सच्ची और अच्छी खबरों को जानने के लिए बनें रहेंwww. dastaktimes. orgके साथ। हमें फेसबुक पर फॉलों करने के लिएhttps://www. facebook. com/dastak. times. नौऔर ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @TimesDastak पर क्लिक करें।
अनुसार मूर्तियाँ बनवाकर उन्हें नगर की नींव के समक्ष स्थापित करा दिया। जब शैतान निकले तो वे उन मूर्तियों को देखकर भाग गये और सिकन्दर ने नगर का पूर्ण ने रूप से निर्माण करा दिया । उसने जो बहुत-सी झूठी-सच्ची कहानियाँ लिखी हैं उनमें यह कहानी बड़ी लम्बीचौड़ी है । इस घटना का होना अनेक कारणों से असम्भव है । सर्वप्रथम शीशे का वक्स बनना और उसका लहरों की थपेड़ों से सुरक्षित रह जाना किस प्रकार सम्भव है ? दूसरी बात यह है कि वादशाह लोग अपने आपको ऐसे खतरों में नहीं डाला करते । इस प्रकार खतरे में पड़ना अपने आपको खुल्लम-खुल्ला मौत के मुँह में डालना है और अपने राज्य को अन्य लोगों के हाथों में चले जाने की अनुमति दे देना है। तीसरे जिन्नातों का कोई रूप नहीं होता । वे अपने इच्छानुसार जिस रूप में चाहें प्रकट हो सकते हैं । यह बात प्रसिद्ध है कि उनके कई सिर होते हैं तो इसका अर्थ यह है कि वे बड़े भयानक होते हैं। इसका यह अर्थ नहीं कि उनके वास्तव में अनेक सिर होते ही हैं । ये सव वातें इस कहानी को असम्भव, असत्य एवं निराधार बना देती हैं । बुद्धिगम्य न होनेवाली सबसे महत्त्वपूर्ण बात तो यह है कि जब एक व्यक्ति बक्स में बन्द होकर जल में प्रविष्ट होगा तो उसके लिए साँस लेना कठिन हो जायगा और उसकी वहीं मृत्यु हो जायगी. इसी प्रकार की बहुत सी झूठी कहानियाँ इतिहास में मिलती हैं जिनकी परीक्षा सभ्यता की स्वाभाविक एवं प्राकृतिक दशा के ज्ञान से हो सकती है। इनकी सत्यता की छान-चीन भी इसी आधार पर की जा सकती है, अपितु हमारी दृष्टि से समाज के स्वभाव की जानकारी से घटनाओं के विवरण देनेवालों के झूठ-सच का पता भलीभाँति लगाया जा सकता है। कारण कि विवरण देने वालों की सत्यता का पता तो उसी समय चल सकता है जब कि सर्वप्रथम समाचार के तथ्य का पता लग जाय कि उसका घटना सम्भव भी है अथवा नहीं । यदि उसका घटना ही सम्भव न हो तो विवरण देनेवालों के विषय में छानवीन करना आवश्यक नहीं । शोव में रुचि रखनेवालों के लिए यह उचित नहीं कि घटनाओं के विवरण के शब्दों को बदलकर उनकी ऐसी व्याख्या की जाय जो बुद्धि संगत न हो । इस प्रकार की १. एक प्राणी जिसकी उत्पत्ति अग्नि से मानी जाती है और वह दिखाई नहीं देता। २. इसके बाद इसी प्रकार की कुछ अन्य असम्भव एवं निरर्थक कहानियों को उदाहरणस्वरूप प्रस्तुत करके उनको आलोचना की गयी है ।
अनुसार मूर्तियाँ बनवाकर उन्हें नगर की नींव के समक्ष स्थापित करा दिया। जब शैतान निकले तो वे उन मूर्तियों को देखकर भाग गये और सिकन्दर ने नगर का पूर्ण ने रूप से निर्माण करा दिया । उसने जो बहुत-सी झूठी-सच्ची कहानियाँ लिखी हैं उनमें यह कहानी बड़ी लम्बीचौड़ी है । इस घटना का होना अनेक कारणों से असम्भव है । सर्वप्रथम शीशे का वक्स बनना और उसका लहरों की थपेड़ों से सुरक्षित रह जाना किस प्रकार सम्भव है ? दूसरी बात यह है कि वादशाह लोग अपने आपको ऐसे खतरों में नहीं डाला करते । इस प्रकार खतरे में पड़ना अपने आपको खुल्लम-खुल्ला मौत के मुँह में डालना है और अपने राज्य को अन्य लोगों के हाथों में चले जाने की अनुमति दे देना है। तीसरे जिन्नातों का कोई रूप नहीं होता । वे अपने इच्छानुसार जिस रूप में चाहें प्रकट हो सकते हैं । यह बात प्रसिद्ध है कि उनके कई सिर होते हैं तो इसका अर्थ यह है कि वे बड़े भयानक होते हैं। इसका यह अर्थ नहीं कि उनके वास्तव में अनेक सिर होते ही हैं । ये सव वातें इस कहानी को असम्भव, असत्य एवं निराधार बना देती हैं । बुद्धिगम्य न होनेवाली सबसे महत्त्वपूर्ण बात तो यह है कि जब एक व्यक्ति बक्स में बन्द होकर जल में प्रविष्ट होगा तो उसके लिए साँस लेना कठिन हो जायगा और उसकी वहीं मृत्यु हो जायगी. इसी प्रकार की बहुत सी झूठी कहानियाँ इतिहास में मिलती हैं जिनकी परीक्षा सभ्यता की स्वाभाविक एवं प्राकृतिक दशा के ज्ञान से हो सकती है। इनकी सत्यता की छान-चीन भी इसी आधार पर की जा सकती है, अपितु हमारी दृष्टि से समाज के स्वभाव की जानकारी से घटनाओं के विवरण देनेवालों के झूठ-सच का पता भलीभाँति लगाया जा सकता है। कारण कि विवरण देने वालों की सत्यता का पता तो उसी समय चल सकता है जब कि सर्वप्रथम समाचार के तथ्य का पता लग जाय कि उसका घटना सम्भव भी है अथवा नहीं । यदि उसका घटना ही सम्भव न हो तो विवरण देनेवालों के विषय में छानवीन करना आवश्यक नहीं । शोव में रुचि रखनेवालों के लिए यह उचित नहीं कि घटनाओं के विवरण के शब्दों को बदलकर उनकी ऐसी व्याख्या की जाय जो बुद्धि संगत न हो । इस प्रकार की एक. एक प्राणी जिसकी उत्पत्ति अग्नि से मानी जाती है और वह दिखाई नहीं देता। दो. इसके बाद इसी प्रकार की कुछ अन्य असम्भव एवं निरर्थक कहानियों को उदाहरणस्वरूप प्रस्तुत करके उनको आलोचना की गयी है ।
Guwahati , 02 जुलाई . Member of parliament तथा Chief Minister के राजनीतिक सलाहकार पवित्र मार्घेरिटा ने स्पष्ट किया है कि आने वाले चुनावों में अहोम जनजाति का प्रतिनिधित्व और अधिक बढ़ेगा. आज वशिष्ठ स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में एक पत्रकार सम्मेलन को संबोधित करते हुए मार्घेरिटा ने कहा कि विपक्षी दल बगैर तथ्य के लोगों को भ्रमित करने में जुटे हुए हैं. उन्होंने कहा कि क्षेत्र सीमा पूनर्निर्धारण की प्रक्रिया कांग्रेस सरकार के दिनों में सन् 2007 में शुरू हुई थी. जिसमें ऊपरी असम में विधानसभा की 3 सीटें कम होने वाली थी. लेकिन, फिलहाल प्रकाशित मसौदा सूची में ऊपरी असम में सीटें कम होने की बात तो दूर एक सीट बढ़ ही गई है. उन्होंने कहा कि वर्तमान में भी भारतीय जनता पार्टी के 07 अहोम नेता संसदीय जनप्रतिनिधि हैं. उन्होंने कहा कि राज्य का शिवसागर थाउरा, नाजिरा, Goldरी तथा सदिया अब पूरी तरह से अहोम बहुल हो चुका है. उन्होंने कहा कि मोरान-नाहरकटिया में भी अहोम की स्थिति और अधिक मजबूत हुई है. उन्होंने गोगोई उपाधि को लेकर की जा रही राजनीति को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा कि अहोम लोगों की उपाधि सिर्फ गोगोई ही नहीं है. बल्कि, चाइलुंग चुकाफा के सिद्धांतों पर चलने वाले ऊपरी असम के अनेक पदवीधारी अहोम हैं. उन्होंने कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे लोगों को झूठे तथ्यों को आधार बनाकर भ्रमित नहीं करें.
Guwahati , दो जुलाई . Member of parliament तथा Chief Minister के राजनीतिक सलाहकार पवित्र मार्घेरिटा ने स्पष्ट किया है कि आने वाले चुनावों में अहोम जनजाति का प्रतिनिधित्व और अधिक बढ़ेगा. आज वशिष्ठ स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में एक पत्रकार सम्मेलन को संबोधित करते हुए मार्घेरिटा ने कहा कि विपक्षी दल बगैर तथ्य के लोगों को भ्रमित करने में जुटे हुए हैं. उन्होंने कहा कि क्षेत्र सीमा पूनर्निर्धारण की प्रक्रिया कांग्रेस सरकार के दिनों में सन् दो हज़ार सात में शुरू हुई थी. जिसमें ऊपरी असम में विधानसभा की तीन सीटें कम होने वाली थी. लेकिन, फिलहाल प्रकाशित मसौदा सूची में ऊपरी असम में सीटें कम होने की बात तो दूर एक सीट बढ़ ही गई है. उन्होंने कहा कि वर्तमान में भी भारतीय जनता पार्टी के सात अहोम नेता संसदीय जनप्रतिनिधि हैं. उन्होंने कहा कि राज्य का शिवसागर थाउरा, नाजिरा, Goldरी तथा सदिया अब पूरी तरह से अहोम बहुल हो चुका है. उन्होंने कहा कि मोरान-नाहरकटिया में भी अहोम की स्थिति और अधिक मजबूत हुई है. उन्होंने गोगोई उपाधि को लेकर की जा रही राजनीति को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा कि अहोम लोगों की उपाधि सिर्फ गोगोई ही नहीं है. बल्कि, चाइलुंग चुकाफा के सिद्धांतों पर चलने वाले ऊपरी असम के अनेक पदवीधारी अहोम हैं. उन्होंने कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे लोगों को झूठे तथ्यों को आधार बनाकर भ्रमित नहीं करें.
शिवपुरी। जिले के सुभाषपुरा और पिछोर थाना क्षेत्र मेें दो अलग-अलग घटनाओं में जहर के सेवन तथा कुएं में डूबने से दो युवकों की मौत हो गई। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। पहली घटना सुभाषपुरा थाना क्षेत्र में घटित हुई जहां सुल्तान पुत्र खैरू आदिवासी निवासी ग्राम भैंसोरा ने अज्ञात कारणों के चलते जहर का सेवन कर लिया। सुल्तान की इलाज के दौरान मौत हो गई। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। वहीं पिछोर थाना क्षेत्र में रखोरा निवासी जितेंद्र लोधी पुत्र फूलसिंह लोधी की कुएं में डूबने से मृत्यु हो गई। पुलिस ने फरियादी श्रीराम लोधी की रिपोर्ट पर मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।
शिवपुरी। जिले के सुभाषपुरा और पिछोर थाना क्षेत्र मेें दो अलग-अलग घटनाओं में जहर के सेवन तथा कुएं में डूबने से दो युवकों की मौत हो गई। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। पहली घटना सुभाषपुरा थाना क्षेत्र में घटित हुई जहां सुल्तान पुत्र खैरू आदिवासी निवासी ग्राम भैंसोरा ने अज्ञात कारणों के चलते जहर का सेवन कर लिया। सुल्तान की इलाज के दौरान मौत हो गई। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। वहीं पिछोर थाना क्षेत्र में रखोरा निवासी जितेंद्र लोधी पुत्र फूलसिंह लोधी की कुएं में डूबने से मृत्यु हो गई। पुलिस ने फरियादी श्रीराम लोधी की रिपोर्ट पर मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।
से बनाए हुए विचित्र रत्नके हारों और अर्द्धहारोंसे व्याप्त और सोने के सूर्य के समान प्रकाशित श्रीदामगंड ( भूमर) भी प्रभुकी नजरको आनदित करने के लिए, आकाशके सूर्यकी तरह, ऊपर के चदोवेमे लटका दिया। फिर उसने कुवेरको आज्ञा दी कि बत्तीस करोड हिरण्य (कीमती धातुविशेष), बत्तीसकरोड़ सोना, बत्तीस नंदासन, बत्तीस भद्रासन, और दूसरे मनोहर वस्त्र इत्यादि मूल्यवान पदार्थ - जिनसे सांसारिक सुख होता है - स्वामीके सुवनमें इस तरह बरसाओ जिस तरह बादल पानी बरसाते ।" (६१०-६२२) कुचेरने आज्ञा पातेही यंभक जातिके देवोंसे कहा और उनने इंद्रकी आज्ञा के अनुसार सभी चीजें बरसाईं । कारण" ह्याज्ञाप्रचंडानां वचसा सह सिद्धघति ।" [प्रचड - शक्तिवान पुरुषोंकी आज्ञा वचनके साथही सिद्ध होती है । ] फिर अभियोगिक देवोंको इंद्रने आज्ञा दी, "तुम चारों निकायके देवोंको सूचना देदो कि जो कोई प्रभुको अथवा उनकी माताको हानि पहुँचानेका विचार करेगा उसका मस्तक अर्कमंजरीकी तरह सात तरहसे छेदा जाएगा। गुरुकी आज्ञाको शिष्य जैसे ऊँची आवाजसे सुनाता है वैसे ही उन्होंने भुवनपति, व्यतर, ज्योतिष्क और वैमानिक देवोंमें इंद्री की घोषणा १ - दस तरहके तिर्यगर्भभक देवता है, वे कुवेरकी आज्ञा में रहनेनाले हैं । २- यह एक तरह की मंजरी है। जब यह पककर फूटती है तब इसके सात भाग हो जाते हैं। १७२ ] त्रिषष्टि शलाका पुरुष - चरित्र : पव १ सर्ग २ की। फिर जैसे सूरज बादलोंमे पानी डालता है वैसेही उसने भगवानके अंगूठे में अनेक तरह के रस भरदिए अथात अंगूठे अमृत भरत स्तनपान नहीं करते इसलिए जब उनको भूख लगती है तब अपने आप, अमृतरस वरसानेवाला अपना अंगूठा, मुँह में लेकर चूसते है । फिर उसने पाच धायका काम करने के लिए वहीं रहनेकी आज्ञा दी। जिन स्नात्र हो जाने के बाद जब इद्र भगवानको रखनेके उस समय बहुतसे देवता मेरुशिग्वरसे नंदीश्वर द्वीप गए। सौधर्मेंद्रभी नाभिपुत्रको उनके महलमे रखकर, स्वर्गवासियोंके निवास समान नंदीश्वर द्वीपको गया और वहाँ पूर्व दिशाके, क्षुद्र मेरु पर्वतके समान प्रमाणवाले, देवरमण नामके अंजन गिरि पर उतरा। वहाँ उसने विचित्र मणियोंकी पीठिकावाले, चैत्यवृक्ष और इंद्रध्वजद्वारा कित, और चार दरवाजों वाले चैत्य में प्रवेश किया और अष्टाहिका उत्सव सहित ऋषभादि अर्हतों की शाश्वती प्रतिमाओं की पूजा की । उस अंजनगिरिकी चार दिशाओं में चार बड़ी बावड़ियाँ हैं। उनमें से हरेकमे एक एक स्फटिक मणिका दधिमुख नामक पर्वत है। उन चारों पर्वतोंके ऊपरके चैत्योंमें शाश्वती की प्रतिमाएँ है। शर्केद्र चार दिग्पालाने, श्रष्टाहिका उत्सवसहित, उन प्रतिमाओंकी विधिसहित पूजा की। ( ६३०-६३६ ) १ - दूसरे चार छोटे मेरु पर्वत हैं । वे ८४००० योजन ऊँचे है २ - ऋषभ, चानन, वारिषेण और वर्द्धमान इन चार नामों वालीही शाश्वती प्रतिमाएँ होती है ।
से बनाए हुए विचित्र रत्नके हारों और अर्द्धहारोंसे व्याप्त और सोने के सूर्य के समान प्रकाशित श्रीदामगंड भी प्रभुकी नजरको आनदित करने के लिए, आकाशके सूर्यकी तरह, ऊपर के चदोवेमे लटका दिया। फिर उसने कुवेरको आज्ञा दी कि बत्तीस करोड हिरण्य , बत्तीसकरोड़ सोना, बत्तीस नंदासन, बत्तीस भद्रासन, और दूसरे मनोहर वस्त्र इत्यादि मूल्यवान पदार्थ - जिनसे सांसारिक सुख होता है - स्वामीके सुवनमें इस तरह बरसाओ जिस तरह बादल पानी बरसाते ।" कुचेरने आज्ञा पातेही यंभक जातिके देवोंसे कहा और उनने इंद्रकी आज्ञा के अनुसार सभी चीजें बरसाईं । कारण" ह्याज्ञाप्रचंडानां वचसा सह सिद्धघति ।" [प्रचड - शक्तिवान पुरुषोंकी आज्ञा वचनके साथही सिद्ध होती है । ] फिर अभियोगिक देवोंको इंद्रने आज्ञा दी, "तुम चारों निकायके देवोंको सूचना देदो कि जो कोई प्रभुको अथवा उनकी माताको हानि पहुँचानेका विचार करेगा उसका मस्तक अर्कमंजरीकी तरह सात तरहसे छेदा जाएगा। गुरुकी आज्ञाको शिष्य जैसे ऊँची आवाजसे सुनाता है वैसे ही उन्होंने भुवनपति, व्यतर, ज्योतिष्क और वैमानिक देवोंमें इंद्री की घोषणा एक - दस तरहके तिर्यगर्भभक देवता है, वे कुवेरकी आज्ञा में रहनेनाले हैं । दो- यह एक तरह की मंजरी है। जब यह पककर फूटती है तब इसके सात भाग हो जाते हैं। एक सौ बहत्तर ] त्रिषष्टि शलाका पुरुष - चरित्र : पव एक सर्ग दो की। फिर जैसे सूरज बादलोंमे पानी डालता है वैसेही उसने भगवानके अंगूठे में अनेक तरह के रस भरदिए अथात अंगूठे अमृत भरत स्तनपान नहीं करते इसलिए जब उनको भूख लगती है तब अपने आप, अमृतरस वरसानेवाला अपना अंगूठा, मुँह में लेकर चूसते है । फिर उसने पाच धायका काम करने के लिए वहीं रहनेकी आज्ञा दी। जिन स्नात्र हो जाने के बाद जब इद्र भगवानको रखनेके उस समय बहुतसे देवता मेरुशिग्वरसे नंदीश्वर द्वीप गए। सौधर्मेंद्रभी नाभिपुत्रको उनके महलमे रखकर, स्वर्गवासियोंके निवास समान नंदीश्वर द्वीपको गया और वहाँ पूर्व दिशाके, क्षुद्र मेरु पर्वतके समान प्रमाणवाले, देवरमण नामके अंजन गिरि पर उतरा। वहाँ उसने विचित्र मणियोंकी पीठिकावाले, चैत्यवृक्ष और इंद्रध्वजद्वारा कित, और चार दरवाजों वाले चैत्य में प्रवेश किया और अष्टाहिका उत्सव सहित ऋषभादि अर्हतों की शाश्वती प्रतिमाओं की पूजा की । उस अंजनगिरिकी चार दिशाओं में चार बड़ी बावड़ियाँ हैं। उनमें से हरेकमे एक एक स्फटिक मणिका दधिमुख नामक पर्वत है। उन चारों पर्वतोंके ऊपरके चैत्योंमें शाश्वती की प्रतिमाएँ है। शर्केद्र चार दिग्पालाने, श्रष्टाहिका उत्सवसहित, उन प्रतिमाओंकी विधिसहित पूजा की। एक - दूसरे चार छोटे मेरु पर्वत हैं । वे चौरासी हज़ार योजन ऊँचे है दो - ऋषभ, चानन, वारिषेण और वर्द्धमान इन चार नामों वालीही शाश्वती प्रतिमाएँ होती है ।
नई दिल्लीः संसद का मानसून सत्र 17 जुलाई से शुरू होने की संभावना है. जानकारी के अनुसार ये सत्र 10 अगस्त तक चल सकता है जहां इस बार भी संसद में बड़े मुद्दों को लेकर हंगामा होना तय है. जल्द ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली CCPA की बैठक होनी है जिसमें सत्र की तारीख पर मुहर लगाई जाएगी. इस बार का संसद सत्र काफी हंगामेदार होने जा रहा है क्योंकि केंद्र सरकार दिल्ली सरकार के खिलाफ अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग मामले में अध्यादेश की जगह लेने वाले बिल को पेश करेगी. इस अध्यादेश के ख़िलाफ दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पूरे देश में घूम घूम कर विपक्षी पार्टियों से समर्थन की गुहार लगा रहे हैं. ऐसे में संसद के इस सत्र में अध्यादेश पर चर्चा तो होनी ही है साथ ही साथ कॉमन सिविल कोड को लेकर भी विपक्ष हंगामा कर सकता है. इस बार का संसद सत्र नए संसद भवन के नज़रिए से भी खास होने जा रहा है जिसे फिलहाल फिनिशिंग देने का काम चल रहा है. बता दें, 28 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए संसद भवन का उद्घाटन किया था जिस पर भी खूब बवाल हुआ था. हालांकि अब तक नए संसद भवन में मानसून सत्र आयोजित करने को लेकर कोई अधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. नए संसद भवन में शुरू होगा सत्र? केंद्र सरकार की ओर से इस बार के मानसून सत्र में दिल्ली में अफसरों की ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर लाए गए अध्यादेश का मुद्दा जरूर उठाया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पलटने के लिए केंद्र सरकार ये अध्यादेश लेकर आई है. मानसून सत्र में इस अध्यादेश की जगह लेने वाले बिल को जब पेश किया जाएगा तब चर्चा होगी जिसमें केंद्र द्वारा राष्ट्रीय राजधानी सिविल सेवा प्राधिकरण बनाने की बात कही गई है. वहीं दिल्ली के सीएम केजरीवाल ने इस अध्यादेश को गैरकानूनी, गैर संवैधानिक और लोकतंत्र के खिलाफ बताते हुए दूसरी पार्टियों का समर्थन मांगना शुरू कर दिया है. उन्हें अधिकांश पार्टियों का समर्थन मिल भी गया है लेकिन कांग्रेस ने अब तक इस पर अपना रुख साफ़ नहीं किया है.
नई दिल्लीः संसद का मानसून सत्र सत्रह जुलाई से शुरू होने की संभावना है. जानकारी के अनुसार ये सत्र दस अगस्त तक चल सकता है जहां इस बार भी संसद में बड़े मुद्दों को लेकर हंगामा होना तय है. जल्द ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली CCPA की बैठक होनी है जिसमें सत्र की तारीख पर मुहर लगाई जाएगी. इस बार का संसद सत्र काफी हंगामेदार होने जा रहा है क्योंकि केंद्र सरकार दिल्ली सरकार के खिलाफ अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग मामले में अध्यादेश की जगह लेने वाले बिल को पेश करेगी. इस अध्यादेश के ख़िलाफ दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पूरे देश में घूम घूम कर विपक्षी पार्टियों से समर्थन की गुहार लगा रहे हैं. ऐसे में संसद के इस सत्र में अध्यादेश पर चर्चा तो होनी ही है साथ ही साथ कॉमन सिविल कोड को लेकर भी विपक्ष हंगामा कर सकता है. इस बार का संसद सत्र नए संसद भवन के नज़रिए से भी खास होने जा रहा है जिसे फिलहाल फिनिशिंग देने का काम चल रहा है. बता दें, अट्ठाईस मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए संसद भवन का उद्घाटन किया था जिस पर भी खूब बवाल हुआ था. हालांकि अब तक नए संसद भवन में मानसून सत्र आयोजित करने को लेकर कोई अधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. नए संसद भवन में शुरू होगा सत्र? केंद्र सरकार की ओर से इस बार के मानसून सत्र में दिल्ली में अफसरों की ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर लाए गए अध्यादेश का मुद्दा जरूर उठाया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पलटने के लिए केंद्र सरकार ये अध्यादेश लेकर आई है. मानसून सत्र में इस अध्यादेश की जगह लेने वाले बिल को जब पेश किया जाएगा तब चर्चा होगी जिसमें केंद्र द्वारा राष्ट्रीय राजधानी सिविल सेवा प्राधिकरण बनाने की बात कही गई है. वहीं दिल्ली के सीएम केजरीवाल ने इस अध्यादेश को गैरकानूनी, गैर संवैधानिक और लोकतंत्र के खिलाफ बताते हुए दूसरी पार्टियों का समर्थन मांगना शुरू कर दिया है. उन्हें अधिकांश पार्टियों का समर्थन मिल भी गया है लेकिन कांग्रेस ने अब तक इस पर अपना रुख साफ़ नहीं किया है.
भारत के प्रमुख सूचकांक एसएंडपी बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी 50 में शुक्रवार को शुरूआती कारोबार में हल्की गिरावट दर्ज की गई। भारत के प्रमुख सूचकांक एसएंडपी बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी 50 में शुक्रवार को शुरूआती कारोबार में हल्की गिरावट दर्ज की गई। सुबह 09. 54 बजे सेंसेक्स 0. 3 फीसदी या 183 अंक नीचे 57,709 अंक पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 0. 3 फीसदी या 46 अंक नीचे 17,259 अंक पर कारोबार कर रहा था। शेयरों में सिप्ला, ओएनजीसी, डिविज लैब्स, इंफोसिस और विप्रो निफ्टी 50 कंपनियों में क्रमशः 1. 8 फीसदी, 1. 2 फीसदी, 1. 2 फीसदी, 1. 2 फीसदी और 1. 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की। जबकि, कोल इंडिया, एसबीआई लाइफ, एलएंडटी, टाटा स्टील और यूपीएल सुबह के सत्र में फायदे में रहें। बता दें कि कल दिन भर की उठापटक के बाद घरेलू शेयर बाजार गुरुवार को लाल निशान में बंद हुए। बैंकिंग समूह में हुई भारी बिकवाली का दबाव पूरे दिन बाजार पर बना रहा और अंततः बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 0. 18 प्रतिशत यानी 104. 67 अंक की गिरावट में 57,892. 01 अंक पर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 0. 10 प्रतिशत यानी 17. 60 अंक की गिरावट में 17,304. 60 अंक पर बंद हुआ। कल शुरूआती सत्र में सेंसेक्स लाल निशान में ही खुला लेकिन एचडीएफसी और रिलायंस जैसे दिग्गज कंपनियों में हुई लिवाली के दम पर यह अपराह्न् में हरे निशान में आया। दोपहर बाद बिकवाली का दौर दोबारा शुरू हो गया। एबीजी शिपयार्ड मामले में करोड़ो रुपये की चपत झेलने वाले आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों के दाम सर्वाधिक लुढ़के। एक्सिस बैंक और अल्ट्राटेक सीमेंट में भी बिकवाली रही।
भारत के प्रमुख सूचकांक एसएंडपी बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी पचास में शुक्रवार को शुरूआती कारोबार में हल्की गिरावट दर्ज की गई। भारत के प्रमुख सूचकांक एसएंडपी बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी पचास में शुक्रवार को शुरूआती कारोबार में हल्की गिरावट दर्ज की गई। सुबह नौ. चौवन बजे सेंसेक्स शून्य. तीन फीसदी या एक सौ तिरासी अंक नीचे सत्तावन,सात सौ नौ अंक पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी शून्य. तीन फीसदी या छियालीस अंक नीचे सत्रह,दो सौ उनसठ अंक पर कारोबार कर रहा था। शेयरों में सिप्ला, ओएनजीसी, डिविज लैब्स, इंफोसिस और विप्रो निफ्टी पचास कंपनियों में क्रमशः एक. आठ फीसदी, एक. दो फीसदी, एक. दो फीसदी, एक. दो फीसदी और एक. एक फीसदी की गिरावट दर्ज की। जबकि, कोल इंडिया, एसबीआई लाइफ, एलएंडटी, टाटा स्टील और यूपीएल सुबह के सत्र में फायदे में रहें। बता दें कि कल दिन भर की उठापटक के बाद घरेलू शेयर बाजार गुरुवार को लाल निशान में बंद हुए। बैंकिंग समूह में हुई भारी बिकवाली का दबाव पूरे दिन बाजार पर बना रहा और अंततः बीएसई का तीस शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स शून्य. अट्ठारह प्रतिशत यानी एक सौ चार. सरसठ अंक की गिरावट में सत्तावन,आठ सौ बानवे. एक अंक पर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी शून्य. दस प्रतिशत यानी सत्रह. साठ अंक की गिरावट में सत्रह,तीन सौ चार. साठ अंक पर बंद हुआ। कल शुरूआती सत्र में सेंसेक्स लाल निशान में ही खुला लेकिन एचडीएफसी और रिलायंस जैसे दिग्गज कंपनियों में हुई लिवाली के दम पर यह अपराह्न् में हरे निशान में आया। दोपहर बाद बिकवाली का दौर दोबारा शुरू हो गया। एबीजी शिपयार्ड मामले में करोड़ो रुपये की चपत झेलने वाले आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों के दाम सर्वाधिक लुढ़के। एक्सिस बैंक और अल्ट्राटेक सीमेंट में भी बिकवाली रही।
तीसरे मैच में जीत हासिल करते ही भारत ने तीसरी बार किसी टी-20 सीरीज़ को 3-0 से अपने नाम किया। तीसरे मैच में जीत हासिल करते ही भारत ने तीसरी बार किसी टी-20 सीरीज़ को 3-0 से अपने नाम किया। इस मामले में विश्व रिकॉर्ड पाकिस्तान के नाम है। पाकिस्तान ने ये कमाल पांच बार किया है। तीन मैचों की टी-20 सीरीज में भारत की नौवीं जीत और इस मामले में पाकिस्तान के रिकॉर्ड की बराबरी। विंडीज़ की टीम इस फॉर्मेट में दो बार की विश्व चैंपियन है, लेकिन इस सीरीज़ का तीसरा मैच हारते ही कैरेबियाई टीम ने एक शर्मनाक रिकॉर्ड भी बना दिया। विंडीज़ की टीम पहली ऐसी टीम बन गई है जिसने तीन-तीन टी-20 सीरीज़ 0-3 से हारी हैं। खास बात ये है कि ये तीनों ही हार एशिया में 2016 का टी-20 विश्व कप जीतने के बाद आई हैं। 2016 वर्ल्ड टी-20 जीतने के बाद एशिया में वेस्टइंडीज़ की ये लगातार नौवीं हार रही। भारत की तीन मैचों की टी-20 सीरीज के आखिरी मैच में अभी तक हार का सामना नहीं करना पड़ा है। भारत ने अभी तक तीन मैचों की 9 टी-20 सीरीज खेली है और सभी के आखिरी मैच में जीत हासिल की है। अंतरराष्ट्रीय टी-20 क्रिकेट में लक्ष्य का पीछा करते हुए आखिरी गेंद पर भारत की तीसरी जीत। इससे पहले भारत ने जनवरी, 2016 में ऑस्ट्रेलिया और मार्च, 2018 में बांग्लादेश को आखिरी गेंद पर हराया था। शिखर धवन ने इस मैच में 62 गेंद में 10 चौकों और दो छक्कों की मदद से 92 रन बनाए। धवन ने अपना 8वां अंतरराष्ट्रीय टी-20 अर्धशतक जड़ा। ये 92 रन उनका अंतरराष्ट्रीय टी-20 क्रिकेट का सर्वोच्च स्कोर है। इससे पहले टी-20 में उनका बेस्ट स्कोर 90 रन था, जो उन्होंने इसी साल मार्च में श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो में बनाया था। शिखर धवन ने इस पारी के दौरान टी-20 क्रिकेट में 2018 में एक हज़ार रन का आंकड़ा भी पूरा किया। इस साल उन्होंने अंतरराष्ट्रीय टी-20 क्रिकेट में अभी तक 572 रन बनाए हैं और बाकी के रन उन्होंने आइपीएल में बनाए थे। ऐसा पहली बार हुआ है जब धवन ने एक साल में टी-20 क्रिकेट में एक हज़ार रन पूरे किए हों। रिषभ पंत (21 साल 38 दिन) ने इस मैच में 38 गेंदों पर पांच चौकों और तीन छक्कों की मदद से 58 रन की पारी खेली। ये उनका टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पहला अर्धशतक रहा। वो भारत के लिए टी-20 क्रिकेट में सबसे कम उम्र में अर्धशतक जड़ने वाले दूसरे भारतीय बल्लेबाज़ बन गए हैं। रिषभ से पहले रोहित शर्मा ये काम कर चुके हैं। रोहित ने 20 साल 143 दिन की उम्र में भारत के लिए टी-20 में फिफ्टी जमाई थी। रिषभ पंत ने 58 टी-20 मैच में 100 छक्के भी पूरे किए। धवन और पंत ने मिलकर इस मैच में तीसरे विकेट के लिए 130 रन की साझेदारी की और यह वेस्टइंडीज के खिलाफ टी-20 में तीसरे विकेट की सबसे बड़ी साझेदारी रही। डैरेन ब्रावो और निकोलस पूरन ने चौथे विकेट के लिए 87 रनों की साझेदारी निभाई और यह वेस्टइंडीज की तरफ से चौथे विकेट की सबसे बड़ी साझेदारी है।
तीसरे मैच में जीत हासिल करते ही भारत ने तीसरी बार किसी टी-बीस सीरीज़ को तीन-शून्य से अपने नाम किया। तीसरे मैच में जीत हासिल करते ही भारत ने तीसरी बार किसी टी-बीस सीरीज़ को तीन-शून्य से अपने नाम किया। इस मामले में विश्व रिकॉर्ड पाकिस्तान के नाम है। पाकिस्तान ने ये कमाल पांच बार किया है। तीन मैचों की टी-बीस सीरीज में भारत की नौवीं जीत और इस मामले में पाकिस्तान के रिकॉर्ड की बराबरी। विंडीज़ की टीम इस फॉर्मेट में दो बार की विश्व चैंपियन है, लेकिन इस सीरीज़ का तीसरा मैच हारते ही कैरेबियाई टीम ने एक शर्मनाक रिकॉर्ड भी बना दिया। विंडीज़ की टीम पहली ऐसी टीम बन गई है जिसने तीन-तीन टी-बीस सीरीज़ शून्य-तीन से हारी हैं। खास बात ये है कि ये तीनों ही हार एशिया में दो हज़ार सोलह का टी-बीस विश्व कप जीतने के बाद आई हैं। दो हज़ार सोलह वर्ल्ड टी-बीस जीतने के बाद एशिया में वेस्टइंडीज़ की ये लगातार नौवीं हार रही। भारत की तीन मैचों की टी-बीस सीरीज के आखिरी मैच में अभी तक हार का सामना नहीं करना पड़ा है। भारत ने अभी तक तीन मैचों की नौ टी-बीस सीरीज खेली है और सभी के आखिरी मैच में जीत हासिल की है। अंतरराष्ट्रीय टी-बीस क्रिकेट में लक्ष्य का पीछा करते हुए आखिरी गेंद पर भारत की तीसरी जीत। इससे पहले भारत ने जनवरी, दो हज़ार सोलह में ऑस्ट्रेलिया और मार्च, दो हज़ार अट्ठारह में बांग्लादेश को आखिरी गेंद पर हराया था। शिखर धवन ने इस मैच में बासठ गेंद में दस चौकों और दो छक्कों की मदद से बानवे रन बनाए। धवन ने अपना आठवां अंतरराष्ट्रीय टी-बीस अर्धशतक जड़ा। ये बानवे रन उनका अंतरराष्ट्रीय टी-बीस क्रिकेट का सर्वोच्च स्कोर है। इससे पहले टी-बीस में उनका बेस्ट स्कोर नब्बे रन था, जो उन्होंने इसी साल मार्च में श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो में बनाया था। शिखर धवन ने इस पारी के दौरान टी-बीस क्रिकेट में दो हज़ार अट्ठारह में एक हज़ार रन का आंकड़ा भी पूरा किया। इस साल उन्होंने अंतरराष्ट्रीय टी-बीस क्रिकेट में अभी तक पाँच सौ बहत्तर रन बनाए हैं और बाकी के रन उन्होंने आइपीएल में बनाए थे। ऐसा पहली बार हुआ है जब धवन ने एक साल में टी-बीस क्रिकेट में एक हज़ार रन पूरे किए हों। रिषभ पंत ने इस मैच में अड़तीस गेंदों पर पांच चौकों और तीन छक्कों की मदद से अट्ठावन रन की पारी खेली। ये उनका टी-बीस अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पहला अर्धशतक रहा। वो भारत के लिए टी-बीस क्रिकेट में सबसे कम उम्र में अर्धशतक जड़ने वाले दूसरे भारतीय बल्लेबाज़ बन गए हैं। रिषभ से पहले रोहित शर्मा ये काम कर चुके हैं। रोहित ने बीस साल एक सौ तैंतालीस दिन की उम्र में भारत के लिए टी-बीस में फिफ्टी जमाई थी। रिषभ पंत ने अट्ठावन टी-बीस मैच में एक सौ छक्के भी पूरे किए। धवन और पंत ने मिलकर इस मैच में तीसरे विकेट के लिए एक सौ तीस रन की साझेदारी की और यह वेस्टइंडीज के खिलाफ टी-बीस में तीसरे विकेट की सबसे बड़ी साझेदारी रही। डैरेन ब्रावो और निकोलस पूरन ने चौथे विकेट के लिए सत्तासी रनों की साझेदारी निभाई और यह वेस्टइंडीज की तरफ से चौथे विकेट की सबसे बड़ी साझेदारी है।
मुंबई, डेस्क रिपोर्ट। बॉलीवुड की ग्लैमरस अभिनेत्रियों में शुमार जैकलीन फर्नांडीस (Jacqueline Fernandez) आज अपना 37वां जन्मदिन मना रही हैं। साल 2009 में फिल्म 'अलादीन' से डेब्यू करने वाली जैकलीन आज हाइएस्ट पेड एक्ट्रेस की लिस्ट में शामिल हैं। उनका जन्म 11 अगस्त 1985 को बहरीन में हुआ था। साल 2006 में जैकलीन मिस श्रीलंका यूनिवर्स रह चुकी हैं। उनके पिता श्रीलंका में म्यूजीशियन हैं जबकि मां मलेशियाई मूल की हैं। चार भाई- बहनों में जैकलीन सबसे छोटी हैं और उनका रुझान शुरू से एक्टिंग की ओर था। उन्होने यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी से मॉस कम्यूनिकेशन में ग्रेज्युएशन किया है। पढ़ाई पूरी होने के बाद वे श्रीलंका में टीवी रिपोर्टर के रूप में भी काम कर चुकी हैं, लेकिन फिर उन्होने मॉडलिंग शुरू कर दी और आखिरकार उनकी किस्मत उन्हें फिल्मों में ले आई। जैकलीन अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर भी चर्चाओं में रहती हैं। उनका पहला ब्वॉयफ्रेंड एक प्रिंस था। वो बहरीन के प्रिंस हसन बिन राशिद अली खलीफा के साथ रिलेशनशिप में थी। इसके अलावा वो साजिद खान को भी डेट कर चुकी हैं। हालांकि ये रिश्ता 2013 में टूट गया। इतना ही नहीं, उनका नाम 200 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुख्य आरोपी सुकेश चंद्रशेखर के साथ भी जुड़ा। सलमान खान ने जैकलीन फर्नांडिस को उनके करियर में काफी सपोर्ट किया। ये भी कहा जाता है कि उनका बांद्रा स्थित फ्लैट भी फिल्म किक की सक्सेस के बाद सलमान खान ने गिफ्ट में दिया था। जैकलीन हाउसफुल, मर्डर 2, हाउसफुल 2, रेस 2, किक, हाउसफुल 3, रेस 3, बच्चन पांडे जैसी सक्सेसफुल फिल्मों में काम कर चुकी है।
मुंबई, डेस्क रिपोर्ट। बॉलीवुड की ग्लैमरस अभिनेत्रियों में शुमार जैकलीन फर्नांडीस आज अपना सैंतीसवां जन्मदिन मना रही हैं। साल दो हज़ार नौ में फिल्म 'अलादीन' से डेब्यू करने वाली जैकलीन आज हाइएस्ट पेड एक्ट्रेस की लिस्ट में शामिल हैं। उनका जन्म ग्यारह अगस्त एक हज़ार नौ सौ पचासी को बहरीन में हुआ था। साल दो हज़ार छः में जैकलीन मिस श्रीलंका यूनिवर्स रह चुकी हैं। उनके पिता श्रीलंका में म्यूजीशियन हैं जबकि मां मलेशियाई मूल की हैं। चार भाई- बहनों में जैकलीन सबसे छोटी हैं और उनका रुझान शुरू से एक्टिंग की ओर था। उन्होने यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी से मॉस कम्यूनिकेशन में ग्रेज्युएशन किया है। पढ़ाई पूरी होने के बाद वे श्रीलंका में टीवी रिपोर्टर के रूप में भी काम कर चुकी हैं, लेकिन फिर उन्होने मॉडलिंग शुरू कर दी और आखिरकार उनकी किस्मत उन्हें फिल्मों में ले आई। जैकलीन अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर भी चर्चाओं में रहती हैं। उनका पहला ब्वॉयफ्रेंड एक प्रिंस था। वो बहरीन के प्रिंस हसन बिन राशिद अली खलीफा के साथ रिलेशनशिप में थी। इसके अलावा वो साजिद खान को भी डेट कर चुकी हैं। हालांकि ये रिश्ता दो हज़ार तेरह में टूट गया। इतना ही नहीं, उनका नाम दो सौ करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुख्य आरोपी सुकेश चंद्रशेखर के साथ भी जुड़ा। सलमान खान ने जैकलीन फर्नांडिस को उनके करियर में काफी सपोर्ट किया। ये भी कहा जाता है कि उनका बांद्रा स्थित फ्लैट भी फिल्म किक की सक्सेस के बाद सलमान खान ने गिफ्ट में दिया था। जैकलीन हाउसफुल, मर्डर दो, हाउसफुल दो, रेस दो, किक, हाउसफुल तीन, रेस तीन, बच्चन पांडे जैसी सक्सेसफुल फिल्मों में काम कर चुकी है।
इस लेख में हमनें अलंकार के भेद अतिशयोक्ति अलंकार के बारे में चर्चा की है। जब किसी वस्तु, व्यक्ति आदि का वर्णन बहुत बाधा चढ़ा कर किया जाए तब वहां अतिशयोक्ति अलंकार होता है। इस अलंकार में नामुमकिन तथ्य बोले जाते हैं। जैसे : अतिशयोक्ति अलंकार के उदाहरण : - हनुमान की पूंछ में लगन न पाई आग, लंका सिगरी जल गई गए निशाचर भाग। ऊपर दिए गए उदाहरण में कहा गया है कि अभी हनुमान की पूंछ में आग लगने से पहले ही पूरी लंका जलकर राख हो गयी और सारे राक्षस भाग खड़े हुए। यह बात बिलकुल असंभव है एवं लोक सीमा से बढ़ाकर वर्णन किया गया है। अतः यह उदाहरण अतिशयोक्ति अलंकार के अंतर्गत आएगा। - आगे नदियां पड़ी अपार घोडा कैसे उतरे पार। राणा ने सोचा इस पार तब तक चेतक था उस पार।। ऊपर दी गयी पंक्तियों में बताया गया है कि महाराणा प्रताप के सोचने की क्रिया ख़त्म होने से पहले ही चेतक ने नदियाँ पार कर दी। यह महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक की अतिशयोक्ति है एवं इस तथ्य को लोक सीमा से बहुत बढ़ा-चढ़ाकर वर्णन किया गया है। अतः यह उदाहरण अतिशयोक्ति अलंकार के अंतर्गत आएगा। - धनुष उठाया ज्यों ही उसने, और चढ़ाया उस पर बाण ।धरा-सिन्धु नभ काँपे सहसा, विकल हुए जीवों के प्राण। ऊपर दिए गए वाक्यों में बताया गया है कि जैसे ही अर्जुन ने धनुष उठाया और उस पर बाण चढ़ाया तभी धरती, आसमान एवं नदियाँ कांपने लगी ओर सभी जीवों के प्राण निकलने को हो गए। यह बात बिलकुल असंभव है क्योंकि बिना बाण चलाये ऐसा हो ही नहीं सकता है। इस थथ्य का लोक सीमा से बहुत बढ़ा-चढ़ाकर वर्णन किया गया है। अतः यह उदाहरण अतिशयोक्ति अलंकार के अंतर्गत आएगा। अतिशयोक्ति अलंकार के अन्य उदाहरणः - भूप सहस दस एकहिं बारा। लगे उठावन टरत न टारा।। ऊपर दिए गए उदाहरण में कहा गया है कि जब धनुर्भंग हो रहा था कोई राजा उस धनुष को उठा नहीं पा रहा था तब दस हज़ार रजा एक साथ उस धनुष को उठाने लगे लेकिन वह अपनी जगह से तनिक भी नहीं हिला। यह बात बिलकुल असंभव है क्योंकि दस हज़ार लोग एक साथ धनुष को नहीं उठा सकते। अतः यह उदाहरण अतिशयोक्ति अलंकार के अंतर्गत आएगा। - परवल पाक, फाट हिय गोहूँ। ये पंक्तियाँ प्रसिद्ध कवि मालिक मोहम्मद जायसी ने नायिका नागमती के विरह का वर्णन करते हुए कहा है कि उसके विरह के ताप के कारण परवल पाक गए एवं गेहूं का हृदय फट गया। लेकिन यह कथन बिलकुल असंभव हा क्योंकि गेहूं का कभी हृदय नहीं फट सकता है। अतः यह बात बढ़ा-चढ़ाकर बोली गयी है। अतएव यह उदाहरण अतिशयोक्ति अलंकार के अंतर्गत आएगा। - चंचला स्नान कर आये, चन्द्रिका पर्व में जैसे। उस पावन तन की शोभा, आलोक मधुर थी ऐसे।। इन पंक्तियों में नायिका के रूप एवं सौंदर्य का अतिशयोक्तिपूर्ण वर्णन किया गया है। अतः यह उदाहरण अतिशयोक्ति अलंकार के अंतर्गत आएगा। - देख लो साकेत नगरी है यही। स्वर्ग से मिलने गगन में जा रही। ऊपर दिए गए उदाहरण में जैसा की आप देख सकते हैं यहां एक नगरी की सुंदरता का वर्णन किया जा रहा है। यह वर्णन बहुत ही बढ़ा चढ़कर किया जा रहा है। जैसा की हम जानते हैं की जब किसी चीज़ का बहुत बढ़ा चढाकर वर्णन किया जाता है तो वहां अतिश्योक्ति अलंकार होता है। अतः ऊपर दी गयी पंक्ति भी अतिश्योक्ति अलंकार के अंतर्गत आएगी। - मैं बरजी कैबार तू, इतकत लेती करौंट। पंखुरी लगे गुलाब की, परि है गात खरौंट। जैसा कि आप ऊपर दिए गए उदाहरण में देख सकते हैं यहां गुलाब की पंहुरियों से शरीर में खरोंच आने की बात कही गयी है। अर्थात नारी को बहुत ही कोमल बताया गया है। जैसा की हम जानते हैं गुलाब की पंखुरिया बहुत ही कोमल होती हैं और उनसे हमें चोट नहीं लगती। यहां गुलाब की पंखुरियों से चोट लगने की बात कही गयी है जो की एक अतिश्योक्ति है। अतः यह उदाहरण अतिश्योक्ति अलंकार के अंतर्गत आएगा। - बाँधा था विधु को किसने इन काली ज़ंजीरों में, मणिवाले फणियों का मुख क्यों भरा हुआ है हीरों से। ऊपर दिए गए उदाहरण में जैसा की आप देख सकते हैं कि कवि ने मोतियों से भरी हुई प्रिया की मांग का वर्णन किया है। इन पंक्तियों में चाँद का मुख से काली ज़ंज़ीर का बालों से तथा मणिवाले फणियों से मोती भरी मांग का अतिश्योक्ति पूर्ण वर्णन किया गया है। जैसा की हम जानते हैं की जब किसी चीज़ का बढ़ा-चढ़कर उल्लेख किया जाता है तब वहां अतिश्योक्ति अलंकार होता है। अतः यह उदाहरण अतिश्योक्ति अलंकार के अंतर्गत आएगा। - देखि सुदामा की दीन दशा करुना करिके करुना निधि रोए। ऊपर दिए गए उदाहरण में कवि का काव्यांश से तात्पर्य है की सुदामा की दरिद्रावस्था को देखकर कृष्ण का रोना और उनकी आँखों से इतने आँसू गिरना कि उससे पैर धोने के वर्णन में अतिशयोक्ति है। अतः यह उदाहरण अतिश्योक्ति अलंकार के अंतर्गत आएगा। - कहती हुई यूँ उत्तरा के नेत्र जल से भर गए। हिम कणों से पूर्ण मानों हो गए पंकज नए।। जैसा की आप ऊपर दिए गए उदाहरण में देख सकते हैं , यहाँ उत्तरा के जल (आँसू) भरे नयनों (उपमेय) में हिमकणों से परिपूर्ण कमल (उपमान) की संभावना प्रकट की गई है। अर्थात उत्तरा के रोने का बढ़ा चढ़ा कर वर्णन किया गया है। जैसा की परिभाषित है की जब भी किसी तथ्य का बढ़ा चढ़ा कर वर्णन होता है तो वहां अतिश्योक्ति अलंकर होता है। अतः यह उदाहरण अतिश्योक्ति अलंकार के अंतर्गत आएगा। - दादुर धुनि चहुँ दिशा सुहाई। बेद पढ़हिं जनु बटु समुदाई ।। ऊपर दिए गए उदाहरण में जैसा की आप देख सकते हैं, यहाँ मेंढकों की आवाज़ (उपमेय) में ब्रह्मचारी समुदाय द्वारा वेद पढ़ने की संभावना प्रकट की गई है। यह एक तथ्य है की मेंढकों की आवाज़ में एवं वेड पढने में बहुत ही ज्यादा फर्क होता है अतः मेंढकों के आवाज़ निकालने को वेड पढने से तुलना किया गया है। अतः यह उदाहरण अतिश्योक्ति अलंकार के अंतर्गत आएगा। इस लेख से सम्बंधित यदि आपका कोई भी सवाल या सुझाव है, तो उसे आप नीचे कमेंट में लिख सकते हैं।
इस लेख में हमनें अलंकार के भेद अतिशयोक्ति अलंकार के बारे में चर्चा की है। जब किसी वस्तु, व्यक्ति आदि का वर्णन बहुत बाधा चढ़ा कर किया जाए तब वहां अतिशयोक्ति अलंकार होता है। इस अलंकार में नामुमकिन तथ्य बोले जाते हैं। जैसे : अतिशयोक्ति अलंकार के उदाहरण : - हनुमान की पूंछ में लगन न पाई आग, लंका सिगरी जल गई गए निशाचर भाग। ऊपर दिए गए उदाहरण में कहा गया है कि अभी हनुमान की पूंछ में आग लगने से पहले ही पूरी लंका जलकर राख हो गयी और सारे राक्षस भाग खड़े हुए। यह बात बिलकुल असंभव है एवं लोक सीमा से बढ़ाकर वर्णन किया गया है। अतः यह उदाहरण अतिशयोक्ति अलंकार के अंतर्गत आएगा। - आगे नदियां पड़ी अपार घोडा कैसे उतरे पार। राणा ने सोचा इस पार तब तक चेतक था उस पार।। ऊपर दी गयी पंक्तियों में बताया गया है कि महाराणा प्रताप के सोचने की क्रिया ख़त्म होने से पहले ही चेतक ने नदियाँ पार कर दी। यह महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक की अतिशयोक्ति है एवं इस तथ्य को लोक सीमा से बहुत बढ़ा-चढ़ाकर वर्णन किया गया है। अतः यह उदाहरण अतिशयोक्ति अलंकार के अंतर्गत आएगा। - धनुष उठाया ज्यों ही उसने, और चढ़ाया उस पर बाण ।धरा-सिन्धु नभ काँपे सहसा, विकल हुए जीवों के प्राण। ऊपर दिए गए वाक्यों में बताया गया है कि जैसे ही अर्जुन ने धनुष उठाया और उस पर बाण चढ़ाया तभी धरती, आसमान एवं नदियाँ कांपने लगी ओर सभी जीवों के प्राण निकलने को हो गए। यह बात बिलकुल असंभव है क्योंकि बिना बाण चलाये ऐसा हो ही नहीं सकता है। इस थथ्य का लोक सीमा से बहुत बढ़ा-चढ़ाकर वर्णन किया गया है। अतः यह उदाहरण अतिशयोक्ति अलंकार के अंतर्गत आएगा। अतिशयोक्ति अलंकार के अन्य उदाहरणः - भूप सहस दस एकहिं बारा। लगे उठावन टरत न टारा।। ऊपर दिए गए उदाहरण में कहा गया है कि जब धनुर्भंग हो रहा था कोई राजा उस धनुष को उठा नहीं पा रहा था तब दस हज़ार रजा एक साथ उस धनुष को उठाने लगे लेकिन वह अपनी जगह से तनिक भी नहीं हिला। यह बात बिलकुल असंभव है क्योंकि दस हज़ार लोग एक साथ धनुष को नहीं उठा सकते। अतः यह उदाहरण अतिशयोक्ति अलंकार के अंतर्गत आएगा। - परवल पाक, फाट हिय गोहूँ। ये पंक्तियाँ प्रसिद्ध कवि मालिक मोहम्मद जायसी ने नायिका नागमती के विरह का वर्णन करते हुए कहा है कि उसके विरह के ताप के कारण परवल पाक गए एवं गेहूं का हृदय फट गया। लेकिन यह कथन बिलकुल असंभव हा क्योंकि गेहूं का कभी हृदय नहीं फट सकता है। अतः यह बात बढ़ा-चढ़ाकर बोली गयी है। अतएव यह उदाहरण अतिशयोक्ति अलंकार के अंतर्गत आएगा। - चंचला स्नान कर आये, चन्द्रिका पर्व में जैसे। उस पावन तन की शोभा, आलोक मधुर थी ऐसे।। इन पंक्तियों में नायिका के रूप एवं सौंदर्य का अतिशयोक्तिपूर्ण वर्णन किया गया है। अतः यह उदाहरण अतिशयोक्ति अलंकार के अंतर्गत आएगा। - देख लो साकेत नगरी है यही। स्वर्ग से मिलने गगन में जा रही। ऊपर दिए गए उदाहरण में जैसा की आप देख सकते हैं यहां एक नगरी की सुंदरता का वर्णन किया जा रहा है। यह वर्णन बहुत ही बढ़ा चढ़कर किया जा रहा है। जैसा की हम जानते हैं की जब किसी चीज़ का बहुत बढ़ा चढाकर वर्णन किया जाता है तो वहां अतिश्योक्ति अलंकार होता है। अतः ऊपर दी गयी पंक्ति भी अतिश्योक्ति अलंकार के अंतर्गत आएगी। - मैं बरजी कैबार तू, इतकत लेती करौंट। पंखुरी लगे गुलाब की, परि है गात खरौंट। जैसा कि आप ऊपर दिए गए उदाहरण में देख सकते हैं यहां गुलाब की पंहुरियों से शरीर में खरोंच आने की बात कही गयी है। अर्थात नारी को बहुत ही कोमल बताया गया है। जैसा की हम जानते हैं गुलाब की पंखुरिया बहुत ही कोमल होती हैं और उनसे हमें चोट नहीं लगती। यहां गुलाब की पंखुरियों से चोट लगने की बात कही गयी है जो की एक अतिश्योक्ति है। अतः यह उदाहरण अतिश्योक्ति अलंकार के अंतर्गत आएगा। - बाँधा था विधु को किसने इन काली ज़ंजीरों में, मणिवाले फणियों का मुख क्यों भरा हुआ है हीरों से। ऊपर दिए गए उदाहरण में जैसा की आप देख सकते हैं कि कवि ने मोतियों से भरी हुई प्रिया की मांग का वर्णन किया है। इन पंक्तियों में चाँद का मुख से काली ज़ंज़ीर का बालों से तथा मणिवाले फणियों से मोती भरी मांग का अतिश्योक्ति पूर्ण वर्णन किया गया है। जैसा की हम जानते हैं की जब किसी चीज़ का बढ़ा-चढ़कर उल्लेख किया जाता है तब वहां अतिश्योक्ति अलंकार होता है। अतः यह उदाहरण अतिश्योक्ति अलंकार के अंतर्गत आएगा। - देखि सुदामा की दीन दशा करुना करिके करुना निधि रोए। ऊपर दिए गए उदाहरण में कवि का काव्यांश से तात्पर्य है की सुदामा की दरिद्रावस्था को देखकर कृष्ण का रोना और उनकी आँखों से इतने आँसू गिरना कि उससे पैर धोने के वर्णन में अतिशयोक्ति है। अतः यह उदाहरण अतिश्योक्ति अलंकार के अंतर्गत आएगा। - कहती हुई यूँ उत्तरा के नेत्र जल से भर गए। हिम कणों से पूर्ण मानों हो गए पंकज नए।। जैसा की आप ऊपर दिए गए उदाहरण में देख सकते हैं , यहाँ उत्तरा के जल भरे नयनों में हिमकणों से परिपूर्ण कमल की संभावना प्रकट की गई है। अर्थात उत्तरा के रोने का बढ़ा चढ़ा कर वर्णन किया गया है। जैसा की परिभाषित है की जब भी किसी तथ्य का बढ़ा चढ़ा कर वर्णन होता है तो वहां अतिश्योक्ति अलंकर होता है। अतः यह उदाहरण अतिश्योक्ति अलंकार के अंतर्गत आएगा। - दादुर धुनि चहुँ दिशा सुहाई। बेद पढ़हिं जनु बटु समुदाई ।। ऊपर दिए गए उदाहरण में जैसा की आप देख सकते हैं, यहाँ मेंढकों की आवाज़ में ब्रह्मचारी समुदाय द्वारा वेद पढ़ने की संभावना प्रकट की गई है। यह एक तथ्य है की मेंढकों की आवाज़ में एवं वेड पढने में बहुत ही ज्यादा फर्क होता है अतः मेंढकों के आवाज़ निकालने को वेड पढने से तुलना किया गया है। अतः यह उदाहरण अतिश्योक्ति अलंकार के अंतर्गत आएगा। इस लेख से सम्बंधित यदि आपका कोई भी सवाल या सुझाव है, तो उसे आप नीचे कमेंट में लिख सकते हैं।
आम आदमी पार्टी की सरकार द्वारा पंजाब में ट्रक यूनियन तोड़े जाने के विरोध में बड़ी संख्या में पंजाब के ट्रक संचालक और चालक शंभू बॉर्डर पहुंचे हैं। पटियाला : आम आदमी पार्टी की सरकार द्वारा पंजाब में ट्रक यूनियन तोड़े जाने के विरोध में बड़ी संख्या में पंजाब के ट्रक संचालक और चालक शंभू बॉर्डर पहुंचे हैं। यह विरोध दूसरे दिन भी जारी है। बीती रात एस. डी. एम. और एस. पी. के साथ हुई उनकी बैठक बेनतीजा रही। ट्रक यूनियनों के संचालकों का धरना आज दूसरे दिन सुबह से ही जारी है जिससे दूसरे दिन भी अंबाला से अमृतसर जाने वाले रूट को डायवर्ट कर दिया गया है। डी. सी. व अन्य अधिकारियों के आज शंभू बॉर्डर आने की संभावना है, जो हड़ताल खत्म कराने के लिए बैठक करेंगे। ट्रक संचालकों का कहना कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं तब तक उनका धरना जारी रहेगा। आपको बता दें कि ट्रक चालकों में काफी रोष है और उन्होंने शंभू में हरियाणा और पंजाब की सीमा को जाम कर दिया है। इससे हरियाणा और पंजाब से आने-जाने वाले लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हड़ताल के चलते हरियाणा-पंजाब के दिल्ली-अमृतसर और अमृतसर-दिल्ली हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। लोग इस जाम में फंसे हुए हैं। इस संबंध में सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जाम को शांत कराया।
आम आदमी पार्टी की सरकार द्वारा पंजाब में ट्रक यूनियन तोड़े जाने के विरोध में बड़ी संख्या में पंजाब के ट्रक संचालक और चालक शंभू बॉर्डर पहुंचे हैं। पटियाला : आम आदमी पार्टी की सरकार द्वारा पंजाब में ट्रक यूनियन तोड़े जाने के विरोध में बड़ी संख्या में पंजाब के ट्रक संचालक और चालक शंभू बॉर्डर पहुंचे हैं। यह विरोध दूसरे दिन भी जारी है। बीती रात एस. डी. एम. और एस. पी. के साथ हुई उनकी बैठक बेनतीजा रही। ट्रक यूनियनों के संचालकों का धरना आज दूसरे दिन सुबह से ही जारी है जिससे दूसरे दिन भी अंबाला से अमृतसर जाने वाले रूट को डायवर्ट कर दिया गया है। डी. सी. व अन्य अधिकारियों के आज शंभू बॉर्डर आने की संभावना है, जो हड़ताल खत्म कराने के लिए बैठक करेंगे। ट्रक संचालकों का कहना कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं तब तक उनका धरना जारी रहेगा। आपको बता दें कि ट्रक चालकों में काफी रोष है और उन्होंने शंभू में हरियाणा और पंजाब की सीमा को जाम कर दिया है। इससे हरियाणा और पंजाब से आने-जाने वाले लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हड़ताल के चलते हरियाणा-पंजाब के दिल्ली-अमृतसर और अमृतसर-दिल्ली हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। लोग इस जाम में फंसे हुए हैं। इस संबंध में सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जाम को शांत कराया।
सेंट ब्रिगेड के जीवन और चमत्कारों पर एक नज़र डालें, जिसे सेंट ब्रिजेट, सेंट ब्रिगेट और मैरी ऑफ़ द गेल भी कहा जाता है, जो 451 - 525 से आयरलैंड में रहते थे। सेंट ब्रिगेड बच्चों के संरक्षक संत हैं : शिशुओं, दाई, जिनके माता-पिता विवाहित नहीं हैं, विद्वान, कवियों, यात्रियों (विशेष रूप से जो लोग पानी से यात्रा करते हैं ), और किसान (विशेष रूप से डेयरी किसान) भगवान ने अपने जीवनकाल के दौरान ब्रिगेड के माध्यम से कई चमत्कार किए , विश्वासियों का कहना है, और उनमें से अधिकांश को उपचार के साथ करना है। एक कहानी ब्रिगेड को दो बहनों का इलाज करने के बारे में बताती है जो सुन या बात नहीं कर सके। ब्रिजेट बहनों के साथ घुड़सवारी पर यात्रा कर रहा था जब घोड़ा ब्रिगेड घुड़सवार हो गया था और ब्रिगेड गिर गया, उसके सिर को पत्थर पर मार दिया। उसके घाव से ब्रिगेड का खून जमीन पर पानी के साथ मिलाया गया, और उसे बहनों को रक्त और पानी के मिश्रण को अपनी गर्दन पर डालने का विचार मिला, जबकि यीशु मसीह के नाम पर उपचार के लिए प्रार्थना कर रहा था। एक ऐसा किया, और ठीक हो गया, जबकि दूसरा खूनी पानी को छूकर बस ठीक हो गया जब वह ब्रिगेड पर जांच करने के लिए जमीन पर उतर गई। एक और चमत्कारी कहानी में, ब्रिगेड ने पानी के एक मग को आशीर्वाद देकर कुष्ठ रोग से पीड़ित एक व्यक्ति को ठीक किया और आदमी को अपनी मठ में महिलाओं में से एक को निर्देश दिया ताकि वह अपनी त्वचा को धोने के लिए धन्य पानी का उपयोग कर सके। आदमी की त्वचा तब पूरी तरह से साफ हो गई। ब्रिगेड जानवरों के नजदीक था, और उसके जीवन से कई चमत्कारिक कहानियों को जानवरों के साथ करना पड़ता है, जैसे कि जब उसने एक गाय को छुआ था जिसे पहले से ही सूखा दूध मिला था और भूख और प्यास वाले लोगों की मदद करने के लिए इसे आशीर्वाद दिया था। फिर, जब उन्होंने गाय को दूध दिया, तो वे सामान्य रूप से 10 गुना दूध प्राप्त करने में सक्षम थे। जब ब्रिगेड भूमि की तलाश में थी तो वह अपने मठ को बनाने के लिए इस्तेमाल कर सकती थी, उसने अनिच्छुक स्थानीय राजा से उसे केवल उतना ही जमीन देने के लिए कहा था जितना उसके कपड़े पहने हुए थे, और फिर भगवान के लिए चमत्कार करने के लिए प्रार्थना की ताकि राजा को उसकी मदद करने के लिए राजा को मनाने के लिए बाहर। कहानी कहती है कि राजा के रूप में ब्रिगेड का क्लोक बड़ा हो गया, जिसने भूमि के एक बड़े क्षेत्र को कवर किया जिसे उसने उसके मठ के लिए दान किया था। ब्रिगेड का जन्म 5 वीं शताब्दी में आयरलैंड में एक मूर्तिपूजक पिता (डबथैच, लीनस्टर कबीले का सरदार) और ईसाई मां (ब्रोकका, एक गुलाम जो सेंट पैट्रिक के सुसमाचार के प्रचार के माध्यम से विश्वास करने आया था) में पैदा हुआ था। जन्म से दास माना जाता है, ब्रिगेड ने अपने दास मालिकों से दुर्व्यवहार किया, फिर भी दूसरों को असाधारण दयालुता और उदारता दिखाने के लिए एक प्रतिष्ठा विकसित की। उसने एक बार अपनी मां की पूरी आवश्यकता के लिए मक्खन की पूरी आपूर्ति दी और उसके बाद भगवान के लिए अपनी मां के लिए आपूर्ति को भरने के लिए प्रार्थना की, और अपने बचपन के बारे में एक कहानी के अनुसार, ब्रिगेड की प्रार्थनाओं के जवाब में मक्खन चमत्कारी रूप से दिखाई दिया। उसकी शारीरिक सुंदरता (गहरी नीली आंखों सहित) ने कई स्वीटर्स को आकर्षित किया, लेकिन ब्रिगेड ने शादी करने का फैसला नहीं किया ताकि वह पूरी तरह से ईसाई मंत्रालय को नन के रूप में अपना जीवन समर्पित कर सके। एक प्राचीन कहानी कहती है कि जब पुरुषों ने उसे रोमांटिक रूप से पीछा करना बंद नहीं किया, तो ब्रिगेड ने भगवान के लिए अपनी सुंदरता लेने के लिए प्रार्थना की, और उसने चेहरे की दोष और सूजन आंखों से पीड़ित करके अस्थायी रूप से ऐसा किया। जब तक ब्रिगेड की सुंदरता वापस आई, तब तक उसके संभावित सूटर्स एक पत्नी की तलाश में कहीं और चले गए थे। ब्रिगेड ने आयरलैंड के किल्डारे में एक ओक पेड़ के नीचे एक मठ की स्थापना की, और यह जल्दी से पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए एक पूर्ण पैमाने पर मठ समुदाय बन गया, जिसने धर्म, लेखन और कला का अध्ययन करने वाले कई लोगों को आकर्षित किया। एक समुदाय के नेता के रूप में जो आयरलैंड के सीखने का केंद्र बन गया, ब्रिगेड प्राचीन दुनिया और चर्च में एक महत्वपूर्ण महिला नेता बन गया। उसने अंततः एक बिशप की भूमिका ग्रहण की। अपने मठ पर, ब्रिगेड ने लोगों के साथ पवित्र आत्मा की निरंतर उपस्थिति का प्रतिनिधित्व करने के लिए अग्नि की एक अनन्त लौ स्थापित की। सुधार के दौरान कई सौ साल बाद उस लौ को बुझा दिया गया था, लेकिन 1 99 3 में फिर से प्रकाश और अभी भी किल्डारे में जलता है। अच्छी तरह से कि ब्रिजेट लोगों को बपतिस्मा देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, किल्डारे के बाहर है, और तीर्थयात्रियों ने प्रार्थना करने के लिए कुएं का दौरा किया और इसके बगल में एक इच्छा पेड़ पर रंगीन रिबन बांध दिए। "सेंट ब्रिगेड क्रॉस" के नाम से जाना जाने वाला एक विशेष प्रकार का क्रॉस पूरे आयरलैंड में लोकप्रिय है, और यह एक प्रसिद्ध कहानी का जश्न मनाता है जिसमें ब्रिगेड एक मूर्तिपूजक नेता के घर गया था जब लोगों ने उसे बताया कि वह मर रहा था और जल्द ही सुसमाचार संदेश सुनने के लिए जरूरी था । जब ब्रिगेड पहुंचे, तो आदमी विचित्र और परेशान था, जो ब्रिगेड को क्या कहना था, उसे सुनने के लिए तैयार नहीं था। तो वह उसके साथ बैठी और प्रार्थना की, और जब उसने किया, उसने मंजिल से कुछ भूसे ली और इसे एक क्रॉस के आकार में बुनाई शुरू कर दी। धीरे-धीरे आदमी चुप हो गया और ब्रिगेड से पूछा कि वह क्या कर रही थी। उसके बाद उन्होंने एक दृश्य सहायता के रूप में अपने हस्तनिर्मित क्रॉस का उपयोग करके, उन्हें सुसमाचार समझाया। तब आदमी यीशु मसीह में विश्वास करने आया, और ब्रिगेड ने उसकी मृत्यु से ठीक पहले उसे बपतिस्मा दिया। आज, कई आयरिश लोग अपने घरों में एक सेंट ब्रिगेड का क्रॉस प्रदर्शित करते हैं, क्योंकि यह बुराई से बचने और अच्छा स्वागत करने में मदद करने के लिए कहा जाता है। 525 ईसवी में ब्रिजेट की मृत्यु हो गई, और उसकी मृत्यु के बाद लोगों ने उसे संत के रूप में पूजा करना शुरू कर दिया, जिससे वह भगवान से ठीक होने की मदद के लिए प्रार्थना कर रही थी, क्योंकि उसके जीवनकाल के दौरान कई चमत्कार उपचार से संबंधित थे।
सेंट ब्रिगेड के जीवन और चमत्कारों पर एक नज़र डालें, जिसे सेंट ब्रिजेट, सेंट ब्रिगेट और मैरी ऑफ़ द गेल भी कहा जाता है, जो चार सौ इक्यावन - पाँच सौ पच्चीस से आयरलैंड में रहते थे। सेंट ब्रिगेड बच्चों के संरक्षक संत हैं : शिशुओं, दाई, जिनके माता-पिता विवाहित नहीं हैं, विद्वान, कवियों, यात्रियों , और किसान भगवान ने अपने जीवनकाल के दौरान ब्रिगेड के माध्यम से कई चमत्कार किए , विश्वासियों का कहना है, और उनमें से अधिकांश को उपचार के साथ करना है। एक कहानी ब्रिगेड को दो बहनों का इलाज करने के बारे में बताती है जो सुन या बात नहीं कर सके। ब्रिजेट बहनों के साथ घुड़सवारी पर यात्रा कर रहा था जब घोड़ा ब्रिगेड घुड़सवार हो गया था और ब्रिगेड गिर गया, उसके सिर को पत्थर पर मार दिया। उसके घाव से ब्रिगेड का खून जमीन पर पानी के साथ मिलाया गया, और उसे बहनों को रक्त और पानी के मिश्रण को अपनी गर्दन पर डालने का विचार मिला, जबकि यीशु मसीह के नाम पर उपचार के लिए प्रार्थना कर रहा था। एक ऐसा किया, और ठीक हो गया, जबकि दूसरा खूनी पानी को छूकर बस ठीक हो गया जब वह ब्रिगेड पर जांच करने के लिए जमीन पर उतर गई। एक और चमत्कारी कहानी में, ब्रिगेड ने पानी के एक मग को आशीर्वाद देकर कुष्ठ रोग से पीड़ित एक व्यक्ति को ठीक किया और आदमी को अपनी मठ में महिलाओं में से एक को निर्देश दिया ताकि वह अपनी त्वचा को धोने के लिए धन्य पानी का उपयोग कर सके। आदमी की त्वचा तब पूरी तरह से साफ हो गई। ब्रिगेड जानवरों के नजदीक था, और उसके जीवन से कई चमत्कारिक कहानियों को जानवरों के साथ करना पड़ता है, जैसे कि जब उसने एक गाय को छुआ था जिसे पहले से ही सूखा दूध मिला था और भूख और प्यास वाले लोगों की मदद करने के लिए इसे आशीर्वाद दिया था। फिर, जब उन्होंने गाय को दूध दिया, तो वे सामान्य रूप से दस गुना दूध प्राप्त करने में सक्षम थे। जब ब्रिगेड भूमि की तलाश में थी तो वह अपने मठ को बनाने के लिए इस्तेमाल कर सकती थी, उसने अनिच्छुक स्थानीय राजा से उसे केवल उतना ही जमीन देने के लिए कहा था जितना उसके कपड़े पहने हुए थे, और फिर भगवान के लिए चमत्कार करने के लिए प्रार्थना की ताकि राजा को उसकी मदद करने के लिए राजा को मनाने के लिए बाहर। कहानी कहती है कि राजा के रूप में ब्रिगेड का क्लोक बड़ा हो गया, जिसने भूमि के एक बड़े क्षेत्र को कवर किया जिसे उसने उसके मठ के लिए दान किया था। ब्रिगेड का जन्म पाँच वीं शताब्दी में आयरलैंड में एक मूर्तिपूजक पिता और ईसाई मां में पैदा हुआ था। जन्म से दास माना जाता है, ब्रिगेड ने अपने दास मालिकों से दुर्व्यवहार किया, फिर भी दूसरों को असाधारण दयालुता और उदारता दिखाने के लिए एक प्रतिष्ठा विकसित की। उसने एक बार अपनी मां की पूरी आवश्यकता के लिए मक्खन की पूरी आपूर्ति दी और उसके बाद भगवान के लिए अपनी मां के लिए आपूर्ति को भरने के लिए प्रार्थना की, और अपने बचपन के बारे में एक कहानी के अनुसार, ब्रिगेड की प्रार्थनाओं के जवाब में मक्खन चमत्कारी रूप से दिखाई दिया। उसकी शारीरिक सुंदरता ने कई स्वीटर्स को आकर्षित किया, लेकिन ब्रिगेड ने शादी करने का फैसला नहीं किया ताकि वह पूरी तरह से ईसाई मंत्रालय को नन के रूप में अपना जीवन समर्पित कर सके। एक प्राचीन कहानी कहती है कि जब पुरुषों ने उसे रोमांटिक रूप से पीछा करना बंद नहीं किया, तो ब्रिगेड ने भगवान के लिए अपनी सुंदरता लेने के लिए प्रार्थना की, और उसने चेहरे की दोष और सूजन आंखों से पीड़ित करके अस्थायी रूप से ऐसा किया। जब तक ब्रिगेड की सुंदरता वापस आई, तब तक उसके संभावित सूटर्स एक पत्नी की तलाश में कहीं और चले गए थे। ब्रिगेड ने आयरलैंड के किल्डारे में एक ओक पेड़ के नीचे एक मठ की स्थापना की, और यह जल्दी से पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए एक पूर्ण पैमाने पर मठ समुदाय बन गया, जिसने धर्म, लेखन और कला का अध्ययन करने वाले कई लोगों को आकर्षित किया। एक समुदाय के नेता के रूप में जो आयरलैंड के सीखने का केंद्र बन गया, ब्रिगेड प्राचीन दुनिया और चर्च में एक महत्वपूर्ण महिला नेता बन गया। उसने अंततः एक बिशप की भूमिका ग्रहण की। अपने मठ पर, ब्रिगेड ने लोगों के साथ पवित्र आत्मा की निरंतर उपस्थिति का प्रतिनिधित्व करने के लिए अग्नि की एक अनन्त लौ स्थापित की। सुधार के दौरान कई सौ साल बाद उस लौ को बुझा दिया गया था, लेकिन एक निन्यानवे तीन में फिर से प्रकाश और अभी भी किल्डारे में जलता है। अच्छी तरह से कि ब्रिजेट लोगों को बपतिस्मा देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, किल्डारे के बाहर है, और तीर्थयात्रियों ने प्रार्थना करने के लिए कुएं का दौरा किया और इसके बगल में एक इच्छा पेड़ पर रंगीन रिबन बांध दिए। "सेंट ब्रिगेड क्रॉस" के नाम से जाना जाने वाला एक विशेष प्रकार का क्रॉस पूरे आयरलैंड में लोकप्रिय है, और यह एक प्रसिद्ध कहानी का जश्न मनाता है जिसमें ब्रिगेड एक मूर्तिपूजक नेता के घर गया था जब लोगों ने उसे बताया कि वह मर रहा था और जल्द ही सुसमाचार संदेश सुनने के लिए जरूरी था । जब ब्रिगेड पहुंचे, तो आदमी विचित्र और परेशान था, जो ब्रिगेड को क्या कहना था, उसे सुनने के लिए तैयार नहीं था। तो वह उसके साथ बैठी और प्रार्थना की, और जब उसने किया, उसने मंजिल से कुछ भूसे ली और इसे एक क्रॉस के आकार में बुनाई शुरू कर दी। धीरे-धीरे आदमी चुप हो गया और ब्रिगेड से पूछा कि वह क्या कर रही थी। उसके बाद उन्होंने एक दृश्य सहायता के रूप में अपने हस्तनिर्मित क्रॉस का उपयोग करके, उन्हें सुसमाचार समझाया। तब आदमी यीशु मसीह में विश्वास करने आया, और ब्रिगेड ने उसकी मृत्यु से ठीक पहले उसे बपतिस्मा दिया। आज, कई आयरिश लोग अपने घरों में एक सेंट ब्रिगेड का क्रॉस प्रदर्शित करते हैं, क्योंकि यह बुराई से बचने और अच्छा स्वागत करने में मदद करने के लिए कहा जाता है। पाँच सौ पच्चीस ईसवी में ब्रिजेट की मृत्यु हो गई, और उसकी मृत्यु के बाद लोगों ने उसे संत के रूप में पूजा करना शुरू कर दिया, जिससे वह भगवान से ठीक होने की मदद के लिए प्रार्थना कर रही थी, क्योंकि उसके जीवनकाल के दौरान कई चमत्कार उपचार से संबंधित थे।
कौन सी साउथ फिल्म अदाकारा सबसे ज्यादा फीस चार्ज करती है और किस एक्ट्रेस की फीस आखिर कितनी है? ये सवाल अक्सर फिल्मों के दीवाने फैंस के बीच बना ही रहता है। हाल ही में खबर सामने आई है कि एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना (Rashmika Mandanna) ने अल्लू अर्जुन (Allu Arjun) स्टारर फिल्म पुष्पा (Pushpa) के ब्लॉकबस्टर होते ही अपनी फीस में इजाफा कर दिया है। तो आइए यहां जानते हैं कि बाकी फिल्म एक्ट्रेसेस की फीस का क्या हाल है। देखें पूरी लिस्ट।
कौन सी साउथ फिल्म अदाकारा सबसे ज्यादा फीस चार्ज करती है और किस एक्ट्रेस की फीस आखिर कितनी है? ये सवाल अक्सर फिल्मों के दीवाने फैंस के बीच बना ही रहता है। हाल ही में खबर सामने आई है कि एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना ने अल्लू अर्जुन स्टारर फिल्म पुष्पा के ब्लॉकबस्टर होते ही अपनी फीस में इजाफा कर दिया है। तो आइए यहां जानते हैं कि बाकी फिल्म एक्ट्रेसेस की फीस का क्या हाल है। देखें पूरी लिस्ट।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल त्याग राज स्टेडियम में हैप्पीनेस उत्सव के दौरान अलग ही अंदाज में नजर आए। इस उत्सव के दौरान सीएम ने ढोल बजाया। हैप्पीनेस उत्सव के समापन समारोह में अरविंद केजरीवाल के साथ उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी हिस्सा लिया। वहीं ढोल बजाते दिखे मुख्यमंत्री पर लोग कई तरह के रिएक्शन दे रहे। हैप्पीनेस उत्सव के समापन समारोह में पहुंचे अरविंद केजरीवाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि, 'रोज 18 लाख बच्चे एक साथ मेडिटेशन करते हैं। इतने बच्चे जब एक साथ मेडिटेशन करेंगे तो सुबह सुबह दिल्ली में कितनी अच्छी तरंगे फैलती होंगी। बच्चों पर आज पढ़ाई और परिवार का दबाव होता है। दिल्ली के बच्चों का इमोशनल बैलेंस हैप्पीनेस क्लास के कारण अच्छा बना है। समापन समारोह पर मनीष सिसोदिया ने कहा कि आज हम शिक्षा के क्षेत्र में जो कुछ भी करते हैं, उसका उद्देश्य देश की तरक्की होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस तरह दिल्ली में सरकार के स्कूल प्रमुख और शिक्षकों ने काम किया है, ठीक उसी तरह पंजाब सरकार के स्कूलों के शिक्षकों को एक शिक्षा मंत्री की तरह सोचने और पंजाब में शिक्षा क्रांति शुरू करने की जरुरत है। उन्होंने शिक्षकों को सुझाव दिया कि वे हमेशा पंजाब के शिक्षा मंत्री के संपर्क में रहें और उन्हें अपने नवाचारों को भेजते रहें। अरविंद केजरीवाल की तस्वीर पर कुछ सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि वह पीएम नरेंद्र मोदी की नकल कर रहे हैं तो वहीं कुछ लोगों ने कहा कि अगर आप दिल्ली वालों के लिए अच्छा काम करेंगे तो वहां की जनता अपने आप खुश रहेगी। डोली नाम की एक यूजर लिखती हैं कि पूरे टाइम मोदी जी की नकल ही करते रहते हैं। शशांक शेखर झा नाम के एक यूजर ने लिखा - जब कोरोना काल में पीएम नरेंद्र मोदी ने थाली और ताली बजाई थी तो इन लोगों ने ही उन्हें क्रिटिसाइज किया था। मोना पटेल नाम की एक यूजर ने कमेंट किया कि दिल्ली वालों का तबला तो बिजली ने बजा रखा है। रंजीत सिंह लिखते हैं, 'ये काम मोदीजी करें तो देश की बर्बादी और केजरीवाल करें तो हैप्पीनेस उत्सव बन जाता है' अभिनव शुक्ला नाम के एक यूजर ने कमेंट किया कि जैसे गुरु वैसे चेला, यह सही में आरएसएस से ही मिले हुए हैं। साहिल नाम के एक यूजर ने तंज कसते हुए लिखा कि यह वही लोग हैं, जो थाली बजाने पर ज्ञान दे रहे थे।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल त्याग राज स्टेडियम में हैप्पीनेस उत्सव के दौरान अलग ही अंदाज में नजर आए। इस उत्सव के दौरान सीएम ने ढोल बजाया। हैप्पीनेस उत्सव के समापन समारोह में अरविंद केजरीवाल के साथ उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी हिस्सा लिया। वहीं ढोल बजाते दिखे मुख्यमंत्री पर लोग कई तरह के रिएक्शन दे रहे। हैप्पीनेस उत्सव के समापन समारोह में पहुंचे अरविंद केजरीवाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि, 'रोज अट्ठारह लाख बच्चे एक साथ मेडिटेशन करते हैं। इतने बच्चे जब एक साथ मेडिटेशन करेंगे तो सुबह सुबह दिल्ली में कितनी अच्छी तरंगे फैलती होंगी। बच्चों पर आज पढ़ाई और परिवार का दबाव होता है। दिल्ली के बच्चों का इमोशनल बैलेंस हैप्पीनेस क्लास के कारण अच्छा बना है। समापन समारोह पर मनीष सिसोदिया ने कहा कि आज हम शिक्षा के क्षेत्र में जो कुछ भी करते हैं, उसका उद्देश्य देश की तरक्की होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस तरह दिल्ली में सरकार के स्कूल प्रमुख और शिक्षकों ने काम किया है, ठीक उसी तरह पंजाब सरकार के स्कूलों के शिक्षकों को एक शिक्षा मंत्री की तरह सोचने और पंजाब में शिक्षा क्रांति शुरू करने की जरुरत है। उन्होंने शिक्षकों को सुझाव दिया कि वे हमेशा पंजाब के शिक्षा मंत्री के संपर्क में रहें और उन्हें अपने नवाचारों को भेजते रहें। अरविंद केजरीवाल की तस्वीर पर कुछ सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि वह पीएम नरेंद्र मोदी की नकल कर रहे हैं तो वहीं कुछ लोगों ने कहा कि अगर आप दिल्ली वालों के लिए अच्छा काम करेंगे तो वहां की जनता अपने आप खुश रहेगी। डोली नाम की एक यूजर लिखती हैं कि पूरे टाइम मोदी जी की नकल ही करते रहते हैं। शशांक शेखर झा नाम के एक यूजर ने लिखा - जब कोरोना काल में पीएम नरेंद्र मोदी ने थाली और ताली बजाई थी तो इन लोगों ने ही उन्हें क्रिटिसाइज किया था। मोना पटेल नाम की एक यूजर ने कमेंट किया कि दिल्ली वालों का तबला तो बिजली ने बजा रखा है। रंजीत सिंह लिखते हैं, 'ये काम मोदीजी करें तो देश की बर्बादी और केजरीवाल करें तो हैप्पीनेस उत्सव बन जाता है' अभिनव शुक्ला नाम के एक यूजर ने कमेंट किया कि जैसे गुरु वैसे चेला, यह सही में आरएसएस से ही मिले हुए हैं। साहिल नाम के एक यूजर ने तंज कसते हुए लिखा कि यह वही लोग हैं, जो थाली बजाने पर ज्ञान दे रहे थे।
वर्ष संख्या ५ ] जीवन परम अहिंसकता प्रमाणिकता, मार्गनुसारिता इत्यादि सद्गुणों के बदले विलमी माधुना नामकी आवकता, चेलों की वृद्धि पुस्तकों की ममता, अयुक्त पदवियों का मिथ्या हम्बर, गुणी और गुण की और ईर्पा बडे बडे देवालय, अनंलक और परम तपस्त्री सीथङ्करों के लाखों रुपये के जेवर तथा शत्रुंजय बासी आदीश्वर का कई लाख का जवाहराती मुकुट है। वे धर्म को सामने रखकर मानो स्वयं ही धर्म के रक्षक न हो- ऐसा समझ कर धर्म के नाम में कलह करते हैं प्रजावल को क्षीण करते हैं युवकों के विकाश को रोकते हैं और जाग्रत होती हुई प्रजा को धर्म के नाम से डग कर सुला देने का प्रयन्न कर रहे हैं।" समाज में चारों और अशिक्षा का प्रगाढ अन्ध कार छाया हुआ है । बुद्धि इतनी मन्द है कि धर्म का कोई वास्तविक सिद्धान्त हमारी समझ में नहीं आताक्योंकि परम्परा से चली आई हुई रुढ़ियों के सामने वह नया और असाध्य मालूम होता है । जिम वस्तु का जो यथार्थ अर्थ था- आल हम उसका विपरीत अर्थ लगा रहे है। जिस देवद्रव्य की उपयोगिता राष्ट्र और संघ की रक्षा और विद्या प्रचार के लिये समझी गई थी उसी देवद्रव्य के लिये हमारे मुनी और धनी लोग यह कहते हैं कि इसका उपयोग तो मंदिरों के लिये है न कि समाज के कामों के लिये इन पक्तियों के । लेखक का अनुभव है कि एक दफा एक मंदिर में महावीर जयंति का उत्सव मनाने का आयोजन करना पड़ा । उसमें जो 'लाइट का विशेष स्वर्चा पड़ा, उसके लिये ट्रस्टियों की ओर से पैसे मांग लिये गये। बड़ी हँसी आती है कि महावीर जयंतियों के लिये भी हमारे मंदिरों में किराया देना पड़े। श्रद्धय पं० बेचरदासजी के शब्दों में-'जब देवद्रव्य के खर्च से ज्ञान के भण्डार, २६५ धमशालायें, उपाश्रय, और ज्ञान के उपकरण बनाने की अनुमति दी गई है, तो वर्तमान काल में समाज मे शिक्षण का प्रचार करने के लिये हम उसी द्रव्य में राष्ट्रीय पाठशालाए, राष्ट्रीय महाविद्यालय, राष्ट्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करें तथा उसके साधन छात्रालयों, छात्रवृत्तियों और पुस्तकालयों में उस द्रव्य का व्यय कर एवं तदुपरान्त संघ रक्षा के मूल भूत संघ की रक्षार्थ उस द्रव्य द्वारा जगह-जगह ब्रह्मचर्याश्रम आदि ग्वोलं- ऐसी भावना होनी चाहिये ।' इस प्रकार य ढोंगी मुनी लोग अपनी स्वेच्छाचारिता और भतो की अंर्भाक्त के वल पर समाज में अनेक प्रकार के घर्तीगे खड़े करके मंदिरों में सम्पत्ति इकड़ी कराते हैं। उनकी नागजगी से बचने के लिये तथा अपना नाम विज्ञापित करने के लिये बगवर निर्बल होता हुआ समाज उनके आदेशानुसार धन देने लगा। समाज में शिक्षा प्रचार के लिये धन की कितनी आवश्यकता है - भीषणरूप में फैली हुई बेकारी को मिटाने के लिये कितने साधनों की आवश्यकता है इसकी ओर कोई नहीं देखता । भगवान (वंतराग ) की मूर्ति के लिये लिये जवाहिगत खरीदे जाते है कीमती विदेशी वस्त्र खरीदे जाते हैं-टाइल्स लगाई जाती हैं और न जाने कितने आडम्बर रचे जाते हैं पर ज्ञान प्रचार के लिये, समाज की जागृति के लिये युवकों के विकास के लिये उस देवद्रव्य का एक पैसा की नहीं मिलचाहे उस द्रव्य का ढेर ट्रस्टियों के दीवाले में बह जाय-चोरों के हाथ में चला जाय- पर समाज के जरूरी कार्यों में देना पाप है। क्योंकि वह देवद्रव्य है ! 'व्यवस्थापकों की उस द्रव्य पर ममता होनेके कारण उसे वे अपने बाप की पूंजी समझ बैठे है। इस कारण अन्य धार्मिक क्षेत्रों ( जिन क्षेत्रों की बृद्धि की
वर्ष संख्या पाँच ] जीवन परम अहिंसकता प्रमाणिकता, मार्गनुसारिता इत्यादि सद्गुणों के बदले विलमी माधुना नामकी आवकता, चेलों की वृद्धि पुस्तकों की ममता, अयुक्त पदवियों का मिथ्या हम्बर, गुणी और गुण की और ईर्पा बडे बडे देवालय, अनंलक और परम तपस्त्री सीथङ्करों के लाखों रुपये के जेवर तथा शत्रुंजय बासी आदीश्वर का कई लाख का जवाहराती मुकुट है। वे धर्म को सामने रखकर मानो स्वयं ही धर्म के रक्षक न हो- ऐसा समझ कर धर्म के नाम में कलह करते हैं प्रजावल को क्षीण करते हैं युवकों के विकाश को रोकते हैं और जाग्रत होती हुई प्रजा को धर्म के नाम से डग कर सुला देने का प्रयन्न कर रहे हैं।" समाज में चारों और अशिक्षा का प्रगाढ अन्ध कार छाया हुआ है । बुद्धि इतनी मन्द है कि धर्म का कोई वास्तविक सिद्धान्त हमारी समझ में नहीं आताक्योंकि परम्परा से चली आई हुई रुढ़ियों के सामने वह नया और असाध्य मालूम होता है । जिम वस्तु का जो यथार्थ अर्थ था- आल हम उसका विपरीत अर्थ लगा रहे है। जिस देवद्रव्य की उपयोगिता राष्ट्र और संघ की रक्षा और विद्या प्रचार के लिये समझी गई थी उसी देवद्रव्य के लिये हमारे मुनी और धनी लोग यह कहते हैं कि इसका उपयोग तो मंदिरों के लिये है न कि समाज के कामों के लिये इन पक्तियों के । लेखक का अनुभव है कि एक दफा एक मंदिर में महावीर जयंति का उत्सव मनाने का आयोजन करना पड़ा । उसमें जो 'लाइट का विशेष स्वर्चा पड़ा, उसके लिये ट्रस्टियों की ओर से पैसे मांग लिये गये। बड़ी हँसी आती है कि महावीर जयंतियों के लिये भी हमारे मंदिरों में किराया देना पड़े। श्रद्धय पंशून्य बेचरदासजी के शब्दों में-'जब देवद्रव्य के खर्च से ज्ञान के भण्डार, दो सौ पैंसठ धमशालायें, उपाश्रय, और ज्ञान के उपकरण बनाने की अनुमति दी गई है, तो वर्तमान काल में समाज मे शिक्षण का प्रचार करने के लिये हम उसी द्रव्य में राष्ट्रीय पाठशालाए, राष्ट्रीय महाविद्यालय, राष्ट्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करें तथा उसके साधन छात्रालयों, छात्रवृत्तियों और पुस्तकालयों में उस द्रव्य का व्यय कर एवं तदुपरान्त संघ रक्षा के मूल भूत संघ की रक्षार्थ उस द्रव्य द्वारा जगह-जगह ब्रह्मचर्याश्रम आदि ग्वोलं- ऐसी भावना होनी चाहिये ।' इस प्रकार य ढोंगी मुनी लोग अपनी स्वेच्छाचारिता और भतो की अंर्भाक्त के वल पर समाज में अनेक प्रकार के घर्तीगे खड़े करके मंदिरों में सम्पत्ति इकड़ी कराते हैं। उनकी नागजगी से बचने के लिये तथा अपना नाम विज्ञापित करने के लिये बगवर निर्बल होता हुआ समाज उनके आदेशानुसार धन देने लगा। समाज में शिक्षा प्रचार के लिये धन की कितनी आवश्यकता है - भीषणरूप में फैली हुई बेकारी को मिटाने के लिये कितने साधनों की आवश्यकता है इसकी ओर कोई नहीं देखता । भगवान की मूर्ति के लिये लिये जवाहिगत खरीदे जाते है कीमती विदेशी वस्त्र खरीदे जाते हैं-टाइल्स लगाई जाती हैं और न जाने कितने आडम्बर रचे जाते हैं पर ज्ञान प्रचार के लिये, समाज की जागृति के लिये युवकों के विकास के लिये उस देवद्रव्य का एक पैसा की नहीं मिलचाहे उस द्रव्य का ढेर ट्रस्टियों के दीवाले में बह जाय-चोरों के हाथ में चला जाय- पर समाज के जरूरी कार्यों में देना पाप है। क्योंकि वह देवद्रव्य है ! 'व्यवस्थापकों की उस द्रव्य पर ममता होनेके कारण उसे वे अपने बाप की पूंजी समझ बैठे है। इस कारण अन्य धार्मिक क्षेत्रों ( जिन क्षेत्रों की बृद्धि की
नई गोवा औद्योगिक नीति, 2003 के तहत गोवा सरकार ने गोवा राज्य में औद्योगिक इकाइयों के लाभ के लिए विभिन्न नई योजनाएं तैयार की हैं। आवश्यक फॉर्म भरने में उद्यमियों की सहायता करने के लिए, उद्योग, व्यापार और वाणिज्य विभाग द्वारा लागू विभिन्न योजनाओं के संबंध में जानकारी दें, सरकार ने ग्राउंड फ्लोर पर स्थित निदेशालय में एक सुविधा काउंटर स्थापित किया है उद्योग निदेशालय, व्यापार और वाणिज्य, उद्योग भवन, पणजी-गोवा के प्रवेश द्वार। उद्यमियों और आम जनता के लिए काउंटर पर निम्नलिखित सुविधाएं प्रदान की जाती हैंः 1. उद्यमी ज्ञापन के भाग -1 और भाग-द्वितीय को भरने के लिए आवेदन पत्रों को बेचना, गोवा औद्योगिक नीति, 2003 नागरिक चार्टर और उद्योग विभाग, व्यापार और संबंधित विभाग से संबंधित अन्य मूल्यवान प्रकाशनों के लाभों के लाभ के लिए अन्य आवेदन पत्र वाणिज्य। 2. उद्यमियों और अन्य इच्छुक पार्टियों को प्रदान करना, विभिन्न अन्य रूपों जैसे कि। उद्यमियों के ज्ञापन के भाग -1 और भाग-द्वितीय को भरने के लिए फॉर्म। नई योजनाओं के लिए फॉर्म सरकार द्वारा अधिसूचित किए जाने पर प्रदान किए जाएंगे। 3. गोवा औद्योगिक नीति 2003 के तहत निदेशालय द्वारा लागू की गई योजनाओं के संबंध में उद्यमियों को जानकारी प्रदान करना, ऊपर उल्लिखित विभिन्न आवेदन पत्र भरना और आवेदनों के साथ संलग्न दस्तावेजों के बारे में स्पष्टीकरण में उनकी सहायता करना। 4. एंटरप्राइज़र्स मेमोरैंडम के भाग -1 और भाग-द्वितीय को भरने के संबंध में भरे गए आवेदन पत्रों की जांच, मध्यम सूक्ष्म और लघु उद्यमों के संदर्भ में इकाइयों के स्थान, संविधान, परिवर्तन के लिए आवेदन, सभी प्रवेश बिंदु पर ही । विवरण और योजनाओं और विभिन्न प्रोत्साहनों के बारे में किसी भी पूछताछ के लिए, डीआईटीसी परिसर के प्रवेश द्वार पर स्थित सुविधा काउंटर में सहायक निदेशक (इंडस्ट्रीज) या इंडस्ट्री इंस्पेक्टर से संपर्क किया जा सकता है। सुविधा काउंटर डीआईटीसी परिसर के प्रवेश द्वार पर स्थित है।
नई गोवा औद्योगिक नीति, दो हज़ार तीन के तहत गोवा सरकार ने गोवा राज्य में औद्योगिक इकाइयों के लाभ के लिए विभिन्न नई योजनाएं तैयार की हैं। आवश्यक फॉर्म भरने में उद्यमियों की सहायता करने के लिए, उद्योग, व्यापार और वाणिज्य विभाग द्वारा लागू विभिन्न योजनाओं के संबंध में जानकारी दें, सरकार ने ग्राउंड फ्लोर पर स्थित निदेशालय में एक सुविधा काउंटर स्थापित किया है उद्योग निदेशालय, व्यापार और वाणिज्य, उद्योग भवन, पणजी-गोवा के प्रवेश द्वार। उद्यमियों और आम जनता के लिए काउंटर पर निम्नलिखित सुविधाएं प्रदान की जाती हैंः एक. उद्यमी ज्ञापन के भाग -एक और भाग-द्वितीय को भरने के लिए आवेदन पत्रों को बेचना, गोवा औद्योगिक नीति, दो हज़ार तीन नागरिक चार्टर और उद्योग विभाग, व्यापार और संबंधित विभाग से संबंधित अन्य मूल्यवान प्रकाशनों के लाभों के लाभ के लिए अन्य आवेदन पत्र वाणिज्य। दो. उद्यमियों और अन्य इच्छुक पार्टियों को प्रदान करना, विभिन्न अन्य रूपों जैसे कि। उद्यमियों के ज्ञापन के भाग -एक और भाग-द्वितीय को भरने के लिए फॉर्म। नई योजनाओं के लिए फॉर्म सरकार द्वारा अधिसूचित किए जाने पर प्रदान किए जाएंगे। तीन. गोवा औद्योगिक नीति दो हज़ार तीन के तहत निदेशालय द्वारा लागू की गई योजनाओं के संबंध में उद्यमियों को जानकारी प्रदान करना, ऊपर उल्लिखित विभिन्न आवेदन पत्र भरना और आवेदनों के साथ संलग्न दस्तावेजों के बारे में स्पष्टीकरण में उनकी सहायता करना। चार. एंटरप्राइज़र्स मेमोरैंडम के भाग -एक और भाग-द्वितीय को भरने के संबंध में भरे गए आवेदन पत्रों की जांच, मध्यम सूक्ष्म और लघु उद्यमों के संदर्भ में इकाइयों के स्थान, संविधान, परिवर्तन के लिए आवेदन, सभी प्रवेश बिंदु पर ही । विवरण और योजनाओं और विभिन्न प्रोत्साहनों के बारे में किसी भी पूछताछ के लिए, डीआईटीसी परिसर के प्रवेश द्वार पर स्थित सुविधा काउंटर में सहायक निदेशक या इंडस्ट्री इंस्पेक्टर से संपर्क किया जा सकता है। सुविधा काउंटर डीआईटीसी परिसर के प्रवेश द्वार पर स्थित है।
या शृंगार मा बीर या दोनों की प्रमानवा होती है। अन्य रोकीना बीच बीच में भाष्यकतानुसार होती है। ढोला मारू में शृंगार रस का प्रामाम्म है; अम्मकी नाममात्र को कहीं नहीं हुई है।कीन तो हुई। बस्तुवर्धन के लिये भी कहीं विराम नहीं किया गया है। लोकगीत की कवियम म्यान्म विशेषताएँ दोसा मारू मै कहाँ कहा पाई जाती है इसका उल्लेख ऊपर उन विशेषताओं के दर्शन के प्रसंग में हो चुका है। ( ७ ) प्रषष कल्पना और बर्णन में, चाहे वह म के रूप में हो अथवा गति के रूप में, टमाओं का समय भारत को रीतियों से किया जाता है। कवि या तो पटनाक्रम को आदर्श परिणाम पर पहुँचाकर कोई कमानक की स्वाभाषिक गति को भादण उपस्थित करता है प्यान में रखते हुए मनुष्पजीवनका निष्कउपस्थिर है जिसमें पटनाओं काम आदर्शोन्मुलन रखकर उनके समन्वि केवल व्यवहारथील स्वाभाविक रूप के सौंदर्य को प्रदर्शित करता है। पहले में सप देश और मीविपूर्ण परिणाम की प्रधानता होने के कारण यह पुत्रिम सा प्रतीत होता है दूसरा सोम और स्वाभाविक होने से हमारे मना अनुर है। पिछले प्रकार में यद्यपि को यह स्वतंत्रता नहीं रहती कि हर नीति और सत्य के भादर्श मार्ग की गहेलना करे पर उसका सा रहता है प्रपना द्वारा केल यस नीति बम और सताको सामने लाना बोसोकमत और बना हो । डोसा माह का प्रबंध टिका है पवित मटनाओं द्वारा किसी आदर्श परिणाम को दिखाने का लक्ष्म होता तो कमर समय और ससके चारण का परिय्याम अवश्य दिखाया बाता परंतु ऐसा ही किया गया। साथ ही नीति धर्म और सस्य की अवहेलना भी नहीं की गई है प्रेमियों को अपनी प्रेमवाचना के मार्ग में अनेक बचाएँ उपस्थित होते हुए भी भी काम होता है। कीमत उसके दो भर्गो के सम्म निर्वाह से भी बचाती है । दोश्रम है- के घटनाक्रम का स्वामायिक विकास और चि
या शृंगार मा बीर या दोनों की प्रमानवा होती है। अन्य रोकीना बीच बीच में भाष्यकतानुसार होती है। ढोला मारू में शृंगार रस का प्रामाम्म है; अम्मकी नाममात्र को कहीं नहीं हुई है।कीन तो हुई। बस्तुवर्धन के लिये भी कहीं विराम नहीं किया गया है। लोकगीत की कवियम म्यान्म विशेषताएँ दोसा मारू मै कहाँ कहा पाई जाती है इसका उल्लेख ऊपर उन विशेषताओं के दर्शन के प्रसंग में हो चुका है। प्रषष कल्पना और बर्णन में, चाहे वह म के रूप में हो अथवा गति के रूप में, टमाओं का समय भारत को रीतियों से किया जाता है। कवि या तो पटनाक्रम को आदर्श परिणाम पर पहुँचाकर कोई कमानक की स्वाभाषिक गति को भादण उपस्थित करता है प्यान में रखते हुए मनुष्पजीवनका निष्कउपस्थिर है जिसमें पटनाओं काम आदर्शोन्मुलन रखकर उनके समन्वि केवल व्यवहारथील स्वाभाविक रूप के सौंदर्य को प्रदर्शित करता है। पहले में सप देश और मीविपूर्ण परिणाम की प्रधानता होने के कारण यह पुत्रिम सा प्रतीत होता है दूसरा सोम और स्वाभाविक होने से हमारे मना अनुर है। पिछले प्रकार में यद्यपि को यह स्वतंत्रता नहीं रहती कि हर नीति और सत्य के भादर्श मार्ग की गहेलना करे पर उसका सा रहता है प्रपना द्वारा केल यस नीति बम और सताको सामने लाना बोसोकमत और बना हो । डोसा माह का प्रबंध टिका है पवित मटनाओं द्वारा किसी आदर्श परिणाम को दिखाने का लक्ष्म होता तो कमर समय और ससके चारण का परिय्याम अवश्य दिखाया बाता परंतु ऐसा ही किया गया। साथ ही नीति धर्म और सस्य की अवहेलना भी नहीं की गई है प्रेमियों को अपनी प्रेमवाचना के मार्ग में अनेक बचाएँ उपस्थित होते हुए भी भी काम होता है। कीमत उसके दो भर्गो के सम्म निर्वाह से भी बचाती है । दोश्रम है- के घटनाक्रम का स्वामायिक विकास और चि
राकेश चतुर्वेदी, भोपाल। मध्य प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव में आरक्षण को लेकर संशोधित गाइडलाइन जारी की गई है। सिर्फ ओबीसी आरक्षण संशोधन वाले निकायों में ही नए सिरे से आरक्षण प्रक्रिया होगी। जिन निकायों में ओबीसी वार्डों के आरक्षण में संशोधन नहीं होना है, वहां पूर्व का आरक्षण ही मान्य रहेगा। ऐसे निकायों में नए सिरे से आरक्षण की प्रक्रिया नहीं करनी होगी। शादी के बाद पहली बार मायका आई युवती प्रेमी के साथ भागी, 5 दिन बाद दोनों की लाश कुएं में मिली, हत्या या आत्महत्या ? बता दें कि शेष प्रक्रिया कल जारी हुई इस गाइडलाइन के अनुसार ही रहेगी। जनरल निकाय और वार्डों में ही ओबीसी आरक्षण मिलेगा। पहले से तय sc-st आरक्षण में कोई बदलाव नहीं होगा, जहां एससी-एसटी आरक्षण 50% से कम वहीं ओबीसी आरक्षण का लाभ मिलेगा। निकाय या वार्डों में अधिकतम 35% ओबीसी आरक्षण दिया जा सकेगा। निकाय और वार्डों में आरक्षण पूर्ण करने की समय सीमा 24 मई रखी गई है। पिछड़ा वर्ग आयोग के आंकड़ों के आधार पर आरक्षण होगा। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने आरक्षण कार्यक्रम को लेकर प्रदेश के सभी कलेक्टरों को निर्देश जारी किया है।
राकेश चतुर्वेदी, भोपाल। मध्य प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव में आरक्षण को लेकर संशोधित गाइडलाइन जारी की गई है। सिर्फ ओबीसी आरक्षण संशोधन वाले निकायों में ही नए सिरे से आरक्षण प्रक्रिया होगी। जिन निकायों में ओबीसी वार्डों के आरक्षण में संशोधन नहीं होना है, वहां पूर्व का आरक्षण ही मान्य रहेगा। ऐसे निकायों में नए सिरे से आरक्षण की प्रक्रिया नहीं करनी होगी। शादी के बाद पहली बार मायका आई युवती प्रेमी के साथ भागी, पाँच दिन बाद दोनों की लाश कुएं में मिली, हत्या या आत्महत्या ? बता दें कि शेष प्रक्रिया कल जारी हुई इस गाइडलाइन के अनुसार ही रहेगी। जनरल निकाय और वार्डों में ही ओबीसी आरक्षण मिलेगा। पहले से तय sc-st आरक्षण में कोई बदलाव नहीं होगा, जहां एससी-एसटी आरक्षण पचास% से कम वहीं ओबीसी आरक्षण का लाभ मिलेगा। निकाय या वार्डों में अधिकतम पैंतीस% ओबीसी आरक्षण दिया जा सकेगा। निकाय और वार्डों में आरक्षण पूर्ण करने की समय सीमा चौबीस मई रखी गई है। पिछड़ा वर्ग आयोग के आंकड़ों के आधार पर आरक्षण होगा। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने आरक्षण कार्यक्रम को लेकर प्रदेश के सभी कलेक्टरों को निर्देश जारी किया है।
Kiriburu: किरीबुरु-मेघाहातुबुरु शहर की महिलाओं व युवतियों में क्रिकेट खेल के प्रति जुनून इस कदर हावी है कि वह सुबह से देर शाम तक शहर के दोनों बड़े मैदानों पर कब्जा कर घंटों क्रिकेट खेलती नजर आती हैं. यह शहर के लिये जहां एक खूबसूरत एवं सकारात्मक सोच व माहौल को दर्शाता है वहीं महिलाओं के मैदान में निरंतर रहने से अब पुरुष खिलाडि़यों की परेशानी बढ़ गई है. पुरुष खिलाडि़यों को खेलने के लिये अब मैदान नहीं मिल रहा है. जो महिलाओं व पुरुषों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. उल्लेखनीय है कि महिलाओं के बीच तमाम प्रकार के खेलों के प्रति रूझान बढ़ने का मुख्य वजह सेल की किरीबुरु एवं मेघाहातुबुरु प्रबंधन के अलावे लूजर्स क्लब व विभिन्न महिला समूहों द्वारा समय-समय पर खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाना रहा है. जिसमें महिलाओं की भारी भागीदारी रही है. इन खेलों के दौरान मैदानों में सेल अधिकारियों की पत्नियों के अलावे सेल कर्मचारी, ठेका मजदूर समेत सभी वर्ग की महिलाएं व युवतियों की संयुक्त भागीदारी होती है. जो आपसी एकता व भाईचारे की रिश्तों का बेहतर मिशाल पेश करती है. इस बीच 27 मार्च को शाम लगभग 3 बजे से मेघाहातुबुरु मैदान में महिलाओं की विशेष मांग पर सेल प्रबंधन द्वारा सेल के अधिकारियों व कर्मियों की पत्नियों की अलग-अलग दो टीमों के बीच दोस्ताना क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा. इसके लिये महिलाएं दिन-रात मैदान में पसीना बहा रही हैं एवं घर पर उनके पति खाना बनाने के साथ-साथ अन्य कार्य को निपटाकर महिलाओं का हौसला बढा़ रहे हैं. ऐसा माहौल एक दिन के प्रयास से नहीं बल्कि वर्षों के प्रयास से संभव हुआ है. अब वह दिन दूर नहीं जब शहर में होने वाले तमाम खेल प्रतियोगिताओं में पुरुषों के अलावे महिलाओं की टीम को भी शामिल करना अनिवार्य होगा.
Kiriburu: किरीबुरु-मेघाहातुबुरु शहर की महिलाओं व युवतियों में क्रिकेट खेल के प्रति जुनून इस कदर हावी है कि वह सुबह से देर शाम तक शहर के दोनों बड़े मैदानों पर कब्जा कर घंटों क्रिकेट खेलती नजर आती हैं. यह शहर के लिये जहां एक खूबसूरत एवं सकारात्मक सोच व माहौल को दर्शाता है वहीं महिलाओं के मैदान में निरंतर रहने से अब पुरुष खिलाडि़यों की परेशानी बढ़ गई है. पुरुष खिलाडि़यों को खेलने के लिये अब मैदान नहीं मिल रहा है. जो महिलाओं व पुरुषों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. उल्लेखनीय है कि महिलाओं के बीच तमाम प्रकार के खेलों के प्रति रूझान बढ़ने का मुख्य वजह सेल की किरीबुरु एवं मेघाहातुबुरु प्रबंधन के अलावे लूजर्स क्लब व विभिन्न महिला समूहों द्वारा समय-समय पर खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाना रहा है. जिसमें महिलाओं की भारी भागीदारी रही है. इन खेलों के दौरान मैदानों में सेल अधिकारियों की पत्नियों के अलावे सेल कर्मचारी, ठेका मजदूर समेत सभी वर्ग की महिलाएं व युवतियों की संयुक्त भागीदारी होती है. जो आपसी एकता व भाईचारे की रिश्तों का बेहतर मिशाल पेश करती है. इस बीच सत्ताईस मार्च को शाम लगभग तीन बजे से मेघाहातुबुरु मैदान में महिलाओं की विशेष मांग पर सेल प्रबंधन द्वारा सेल के अधिकारियों व कर्मियों की पत्नियों की अलग-अलग दो टीमों के बीच दोस्ताना क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा. इसके लिये महिलाएं दिन-रात मैदान में पसीना बहा रही हैं एवं घर पर उनके पति खाना बनाने के साथ-साथ अन्य कार्य को निपटाकर महिलाओं का हौसला बढा़ रहे हैं. ऐसा माहौल एक दिन के प्रयास से नहीं बल्कि वर्षों के प्रयास से संभव हुआ है. अब वह दिन दूर नहीं जब शहर में होने वाले तमाम खेल प्रतियोगिताओं में पुरुषों के अलावे महिलाओं की टीम को भी शामिल करना अनिवार्य होगा.
रायपुर। विधानसभा चुनाव में जाति समीकरण किस रूप में काम करता है इसे समझने के लिए कांग्रेस के इस चक्रव्यूह को समझना जरूरी है. कांग्रेस ने सभी 90 विधानसभा चुनाव के लिए पहली बार ऐसी व्यापक रणनीति बनाई है. इस रणनीति में बीजेपी की सत्ता को ढहाने के लिए कांग्रेस ने अनुसूचित जनजाति, जाति और पिछड़ा वर्ग के लिए एक साथ साझा कार्यक्रम तय किया. इसके तहत तीन वर्ग के प्रदेश प्रमुख एक साथ सभी विधानसभा में दौरा कर कार्यकर्ताओं की बैठक लेंगे. दरअसल इसके पीछे मकसद कांग्रेस की बेहद साफ है. कांग्रेस हर वर्ग को इस चुनाव में पूरी मजबूती के साथ लेकर चलना चाहती है. इसके लिए एक बड़ा कार्यक्रम कांग्रेस ने तय किया है. छत्तीसगढ़ में ओबीसी के 50 फीसदी, आदिवासी वर्ग के 30 फीसदी और अनुसूचित जाति वर्ग के 12 फीसदी वोटों पर कांग्रेस का फोकस है. क्योंकि यहां पर अगर पार्टी संतुलित रही तो फिर सत्ता में वापसी कांग्रेस के लिए आसान हो सकती है. लिहाज कांग्रेस ने जो कार्यक्रम तय किया उसके मुताबिक आदिवासी कांग्रेस, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कांग्रेस द्वारा संयुक्त रूप से बैठकें ली जायेगी. जिसका प्रथम चरण दिनांक 16 जुलाई 2018 को कोरिया जिले के बैकुंठपुर से हो रहा है, जिसमें जिले के समस्त विधानसभा क्षेत्रों से कांग्रेस के सभी स्थानीय प्रदेश पदाधिकारियों सांसद, पूर्व सांसद, सांसद प्रत्याशी, विधायक, पूर्व विधायक, विधायक प्रत्याशी, जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं पदाधिकारीगण, ब्लाक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं पदाधिकारीगण, मोर्चा संगठन, प्रकोष्ठ-विभाग, के प्रदेश, जिला, ब्लाक, पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं की उपस्थिति अनिवार्य है. पहले चरण का समापन 21 जुलाई 2018 रायगढ़ में होगा. जिला स्तर की इन बैठकों के कार्यक्रम के दौरान प्रदेश प्रभारी पी. एल. पुनिया, प्रभारी सचिव अरूण उरांव, चंदन यादव, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल, नेताप्रतिपक्ष टी. एस. सिंहदेव, कार्यकारी अध्यक्ष, डॉ. शिवकुमार डहरिया, रामदयाल उईके, पूर्व केन्द्रीय मंत्री चंरणदास मंहत, अरविन्द नेताम, उपनेता प्रतिपक्ष कवासी लखमा, आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनोज मंडावी सहित प्रदेश के वरिष्ठ नेतागण विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे. दिनांक 16. 07. 2018 सोमवार को जिला-कोरिया, विधानसभा क्षेत्र - मनेन्द्रगढ़, बैकुंठपुर, भरतपुर-सोनहत, के बैकुंठपुर में दोपहर 12 से 4 बजे तक जिला स्तर पर विधानसभावार बैठकें होंगी। जिसमें प्रदेश आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष अमरजीत भगत, अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष धनेश पाटिला, कांग्रेस पिछड़ा विभाग के अध्यक्ष महेन्द्र चंद्राकर सहित प्रदेश के वरिष्ठ नेतागण उपस्थित रहेंगे। दिनांक 17. 07. 2018 मंगलवार को जिला-सूरजपुर, विधानसभा क्षेत्र - प्रेमनगर, भटगांव, के सुरजपुर में दोपहर 12 से 4 बजे तक जिला स्तर पर विधानसभावार बैठकें होंगी। जिसमें प्रदेश आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष अमरजीत भगत, अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष धनेश पाटिला, कांग्रेस पिछड़ा विभाग के अध्यक्ष महेन्द्र चंद्राकर सहित प्रदेश के वरिष्ठ नेतागण उपस्थित रहेंगे। दिनांक 18. 07. 2018 बुधवार को जिला-बलरामपुर, विधानसभा क्षेत्र - रामानुजगंज, सामरी, के राजपुर में दोपहर 12 से 4 बजे तक जिला स्तर पर विधानसभावार बैठकें होंगी। जिसमें प्रदेश आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष अमरजीत भगत, अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष धनेश पाटिला, कांग्रेस पिछड़ा विभाग के अध्यक्ष महेन्द्र चंद्राकर सहित प्रदेश के वरिष्ठ नेतागण उपस्थित रहेंगे। दिनांक 19. 07. 2018 गुरूवार को जिला-सरगुजा, विधानसभा क्षेत्र - अंबिकापुर, लुण्ड्रा, सीतापुर, प्रतापपुर, के अंबिकापुर में दोपहर 12 से 4 बजे तक जिला स्तर पर विधानसभावार बैठकें होंगी। जिसमें प्रदेश आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष अमरजीत भगत, अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष धनेश पाटिला, कांग्रेस पिछड़ा विभाग के अध्यक्ष महेन्द्र चंद्राकर सहित प्रदेश के वरिष्ठ नेतागण उपस्थित रहेंगे। दिनांक 20. 07. 2018 शुक्रवार को जिला-जशपुर, विधानसभा क्षेत्र - पत्थलगांव, कुनकुरी, जशपुर, के जशपुर में दोपहर 12 से 4 बजे तक जिला स्तर पर विधानसभावार बैठकें होंगी। जिसमें प्रदेश आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष अमरजीत भगत, अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष धनेश पाटिला, कांग्रेस पिछड़ा विभाग के अध्यक्ष महेन्द्र चंद्राकर सहित प्रदेश के वरिष्ठ नेतागण उपस्थित रहेंगे। दिनांक 21. 07. 2018 शनिवार को जिला-रायगढ़, विधानसभा क्षेत्र - रायगढ़, धरमजयगढ़, लैलुंगा, सारंगढ़, खरसिया, के रायगढ़ में दोपहर 12 से 4 बजे तक जिला स्तर पर विधानसभावार बैठकें होंगी। जिसमें प्रदेश आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष अमरजीत भगत, अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष धनेश पाटिला, कांग्रेस पिछड़ा विभाग के अध्यक्ष महेन्द्र चंद्राकर सहित प्रदेश के वरिष्ठ नेतागण उपस्थित रहेंगे।
रायपुर। विधानसभा चुनाव में जाति समीकरण किस रूप में काम करता है इसे समझने के लिए कांग्रेस के इस चक्रव्यूह को समझना जरूरी है. कांग्रेस ने सभी नब्बे विधानसभा चुनाव के लिए पहली बार ऐसी व्यापक रणनीति बनाई है. इस रणनीति में बीजेपी की सत्ता को ढहाने के लिए कांग्रेस ने अनुसूचित जनजाति, जाति और पिछड़ा वर्ग के लिए एक साथ साझा कार्यक्रम तय किया. इसके तहत तीन वर्ग के प्रदेश प्रमुख एक साथ सभी विधानसभा में दौरा कर कार्यकर्ताओं की बैठक लेंगे. दरअसल इसके पीछे मकसद कांग्रेस की बेहद साफ है. कांग्रेस हर वर्ग को इस चुनाव में पूरी मजबूती के साथ लेकर चलना चाहती है. इसके लिए एक बड़ा कार्यक्रम कांग्रेस ने तय किया है. छत्तीसगढ़ में ओबीसी के पचास फीसदी, आदिवासी वर्ग के तीस फीसदी और अनुसूचित जाति वर्ग के बारह फीसदी वोटों पर कांग्रेस का फोकस है. क्योंकि यहां पर अगर पार्टी संतुलित रही तो फिर सत्ता में वापसी कांग्रेस के लिए आसान हो सकती है. लिहाज कांग्रेस ने जो कार्यक्रम तय किया उसके मुताबिक आदिवासी कांग्रेस, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कांग्रेस द्वारा संयुक्त रूप से बैठकें ली जायेगी. जिसका प्रथम चरण दिनांक सोलह जुलाई दो हज़ार अट्ठारह को कोरिया जिले के बैकुंठपुर से हो रहा है, जिसमें जिले के समस्त विधानसभा क्षेत्रों से कांग्रेस के सभी स्थानीय प्रदेश पदाधिकारियों सांसद, पूर्व सांसद, सांसद प्रत्याशी, विधायक, पूर्व विधायक, विधायक प्रत्याशी, जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं पदाधिकारीगण, ब्लाक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं पदाधिकारीगण, मोर्चा संगठन, प्रकोष्ठ-विभाग, के प्रदेश, जिला, ब्लाक, पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं की उपस्थिति अनिवार्य है. पहले चरण का समापन इक्कीस जुलाई दो हज़ार अट्ठारह रायगढ़ में होगा. जिला स्तर की इन बैठकों के कार्यक्रम के दौरान प्रदेश प्रभारी पी. एल. पुनिया, प्रभारी सचिव अरूण उरांव, चंदन यादव, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल, नेताप्रतिपक्ष टी. एस. सिंहदेव, कार्यकारी अध्यक्ष, डॉ. शिवकुमार डहरिया, रामदयाल उईके, पूर्व केन्द्रीय मंत्री चंरणदास मंहत, अरविन्द नेताम, उपनेता प्रतिपक्ष कवासी लखमा, आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनोज मंडावी सहित प्रदेश के वरिष्ठ नेतागण विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे. दिनांक सोलह. सात. दो हज़ार अट्ठारह सोमवार को जिला-कोरिया, विधानसभा क्षेत्र - मनेन्द्रगढ़, बैकुंठपुर, भरतपुर-सोनहत, के बैकुंठपुर में दोपहर बारह से चार बजे तक जिला स्तर पर विधानसभावार बैठकें होंगी। जिसमें प्रदेश आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष अमरजीत भगत, अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष धनेश पाटिला, कांग्रेस पिछड़ा विभाग के अध्यक्ष महेन्द्र चंद्राकर सहित प्रदेश के वरिष्ठ नेतागण उपस्थित रहेंगे। दिनांक सत्रह. सात. दो हज़ार अट्ठारह मंगलवार को जिला-सूरजपुर, विधानसभा क्षेत्र - प्रेमनगर, भटगांव, के सुरजपुर में दोपहर बारह से चार बजे तक जिला स्तर पर विधानसभावार बैठकें होंगी। जिसमें प्रदेश आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष अमरजीत भगत, अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष धनेश पाटिला, कांग्रेस पिछड़ा विभाग के अध्यक्ष महेन्द्र चंद्राकर सहित प्रदेश के वरिष्ठ नेतागण उपस्थित रहेंगे। दिनांक अट्ठारह. सात. दो हज़ार अट्ठारह बुधवार को जिला-बलरामपुर, विधानसभा क्षेत्र - रामानुजगंज, सामरी, के राजपुर में दोपहर बारह से चार बजे तक जिला स्तर पर विधानसभावार बैठकें होंगी। जिसमें प्रदेश आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष अमरजीत भगत, अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष धनेश पाटिला, कांग्रेस पिछड़ा विभाग के अध्यक्ष महेन्द्र चंद्राकर सहित प्रदेश के वरिष्ठ नेतागण उपस्थित रहेंगे। दिनांक उन्नीस. सात. दो हज़ार अट्ठारह गुरूवार को जिला-सरगुजा, विधानसभा क्षेत्र - अंबिकापुर, लुण्ड्रा, सीतापुर, प्रतापपुर, के अंबिकापुर में दोपहर बारह से चार बजे तक जिला स्तर पर विधानसभावार बैठकें होंगी। जिसमें प्रदेश आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष अमरजीत भगत, अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष धनेश पाटिला, कांग्रेस पिछड़ा विभाग के अध्यक्ष महेन्द्र चंद्राकर सहित प्रदेश के वरिष्ठ नेतागण उपस्थित रहेंगे। दिनांक बीस. सात. दो हज़ार अट्ठारह शुक्रवार को जिला-जशपुर, विधानसभा क्षेत्र - पत्थलगांव, कुनकुरी, जशपुर, के जशपुर में दोपहर बारह से चार बजे तक जिला स्तर पर विधानसभावार बैठकें होंगी। जिसमें प्रदेश आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष अमरजीत भगत, अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष धनेश पाटिला, कांग्रेस पिछड़ा विभाग के अध्यक्ष महेन्द्र चंद्राकर सहित प्रदेश के वरिष्ठ नेतागण उपस्थित रहेंगे। दिनांक इक्कीस. सात. दो हज़ार अट्ठारह शनिवार को जिला-रायगढ़, विधानसभा क्षेत्र - रायगढ़, धरमजयगढ़, लैलुंगा, सारंगढ़, खरसिया, के रायगढ़ में दोपहर बारह से चार बजे तक जिला स्तर पर विधानसभावार बैठकें होंगी। जिसमें प्रदेश आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष अमरजीत भगत, अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष धनेश पाटिला, कांग्रेस पिछड़ा विभाग के अध्यक्ष महेन्द्र चंद्राकर सहित प्रदेश के वरिष्ठ नेतागण उपस्थित रहेंगे।
१ जनवरी : होटेल साधारण और गंदा सा है परंतु उपाय क्या । जगह कहीं नहीं मिली। १० बजे यशपाल जी के गया । मेरी तबीयत ठीक नहीं है, पेशाव की तकलीफ है। यहाँ सर्दी भी काफी है । खाना खाकर १२ ।। बजे कोचर जी के गया फिर बीकानेर हाउस । इन दिनों यह तीर्थ-मंदिर, सव कुछ बना हुआ है। टिकटों का निबटारा हो गया है । पार्लियामेंट की सभा ७ ता० को होगी, फिर आना होगा । ३ जनवरी : मैदान गया, लोगों से बातचीत की । बहुत तरह के प्रश्न पूछते थे । क्या उत्तर देता ? आगे तो सव अनिश्चित-सा है । ८ वजे अंदाज घर आया । बंबई से बात की। अभी तक कानूनी कारवाई चल रही है । इस काम में मेरी बड़ी गलती रही है, पश्चात्ताप भी हो रहा है । इस बार यात्रा फजूल ही गयी । मुझे भी क्या हो गया है ? फजूल में रोज-रोज फिर रहा हूँ । तवीयत खराब रहने लगी । पेशाव की तकलीफ । मारवाड़ी रिलीफ सोसाइटी गया । दांता के ठाकुर साहब से मिलने गया था, महाराजा वीकानेर की पार्टी में भी । प्रायः एक सौ सनातनधर्मी लोग आए थे। ६ जनवरी : रात में हवाई जहाज से रवाना होकर सुबह दिल्ली पूग गया । प्रभुदयाल जी के ठहरा और भी सीकर के लोग आ गए थे । ग्रेट पिरामिड में जगह ले ली और उधर ही चले गए। अभी तक राजस्थान वाले नहीं आए हैं । ७ जनवरीः आज राजस्थान वाले आ गए हैं। परंतु मीटिंग कल से शुरू होगी। व्यास जी तो इन दिनों में यहीं थे, सुखाड़िया जी और सब आ गए हैं। ८ जनवरी : मीटिंग हुई, नाम भी तय हुए हैं। सुखाड़िया जी की क्लियर मेजोरिटी है, ऐसा मालूम देता है । क्या लोया, क्या पाया ? ९ जनवरी : डायरी साथ में नहीं लाया, इसलिए डायरी याददास्त से लिखनी असंभव 1. यह जरूर है कि बड़ी ही तकलीफ और मानसिक तनाव के दिन गुजरे। पूरी चिता रही। : १६ जनवरीः सुवह विज्ञानी जी से मिले, उन्होंने कहा कि तुम्हारी तो पाली की सीट हुई है । मन में काफी चिंता हुई, कमलनयन जी ने वर्धा की सीट ले ली है । बिन्नानी जी के आ जाने से सुविधा हो गयी है । १७ जनवरी : घनश्यामदास जी मेरी सीट के लिए हद से ज्यादा चेष्टा कर रहे हैं । शाम को विरला जी के यहाँ खाना खाया । उन्होंने आज १५ जगह फोन किए । ऐसा मालूम देता है, सीट का ढंग बैठ जायगा । फिर भी चिन्ता तो बहुत होती है । १८ जनवरी : सर्दी काफी है । सुवह घूमने जाता हूँ, बिरला जी से मुलाकात हो जाती है । उनका कितना वड़प्पन है, मेरे लिए बिना कहे चेष्टा करते हैं । एस० एन० सिन्हा से मिलने गया । उन्होंने कह दिया, तुम्हारी सीट ठीक है । सारे दिन बीकानेर हाउस या इधर-उधर चक्कर लगाता रहा । अभी तक पार्लियामेंट की सीटों का पूरी तौर पर तय नहीं हो पाया है। कमलनयन आज वर्धा चले गये । २२ जनवरी : इंश्योरेंस ऑफिस में गया, जे० टामस में भी गया । बाजार मंदा है, कामकाज कमती है । ऑफिस रहेगा या नहीं कौन जानता है। चुनाव की नाना तरह की खबरें आ रही हैं। दिन में विनानी जी का फोन आया कि सीकर की सीट शास्त्रीजी को दे रहे हैं, मन में काफी चिंता हुई । भागीरथजी के पास गया। शाम को जयपुर, सीकर फोन किया तव मालूम हुआ, ऐसी बात नहीं है और कल अनाउंस हो जायगा । २३ जनवरी : दिन में छुट्टी रही, नेताजी जन्म दिवस है । नेताजी की यादगार में आज जुलूस निकाले गए । कल फिर भूल जायेंगे । फारवर्ड ब्लॉक वाले अपनी राजनीति के लिए नेताजी का नाम लेते हैं, परंतु उनमें एक भी नेताजी के आदर्श पर चलनेवाला नहीं दिखता। यही हाल कांग्रेस का भी हो रहा है। आजकल राजनीति की यही विशेषता है। शाम को विवाहवालों के गया। एक अमेरिकन हमारे यहाँ ठहरा है । ५ फरवरी : सागरमलजी सोमानी को ऊँट का चिन्ह मिला है, ऐसा सुन रहे हैं । और कोई खास खवर नहीं, कल्लू खाँ सीकर वाले के बैठने की बात थी, वह नहीं बैठा है। परंतु कोई उपाय नहीं। वैसे स्थिति ठीक सी है । ८ फरवरी : सुवह फोन की चेष्टा की, नहीं हो सकी। शाम को हरलालजी आए । काफी कड़ाई की सी बात कर रहे थे। लोगों से मिला-जुला । मुसलमानों की एक मीटिंग में गया ।
एक जनवरी : होटेल साधारण और गंदा सा है परंतु उपाय क्या । जगह कहीं नहीं मिली। दस बजे यशपाल जी के गया । मेरी तबीयत ठीक नहीं है, पेशाव की तकलीफ है। यहाँ सर्दी भी काफी है । खाना खाकर बारह ।। बजे कोचर जी के गया फिर बीकानेर हाउस । इन दिनों यह तीर्थ-मंदिर, सव कुछ बना हुआ है। टिकटों का निबटारा हो गया है । पार्लियामेंट की सभा सात ताशून्य को होगी, फिर आना होगा । तीन जनवरी : मैदान गया, लोगों से बातचीत की । बहुत तरह के प्रश्न पूछते थे । क्या उत्तर देता ? आगे तो सव अनिश्चित-सा है । आठ वजे अंदाज घर आया । बंबई से बात की। अभी तक कानूनी कारवाई चल रही है । इस काम में मेरी बड़ी गलती रही है, पश्चात्ताप भी हो रहा है । इस बार यात्रा फजूल ही गयी । मुझे भी क्या हो गया है ? फजूल में रोज-रोज फिर रहा हूँ । तवीयत खराब रहने लगी । पेशाव की तकलीफ । मारवाड़ी रिलीफ सोसाइटी गया । दांता के ठाकुर साहब से मिलने गया था, महाराजा वीकानेर की पार्टी में भी । प्रायः एक सौ सनातनधर्मी लोग आए थे। छः जनवरी : रात में हवाई जहाज से रवाना होकर सुबह दिल्ली पूग गया । प्रभुदयाल जी के ठहरा और भी सीकर के लोग आ गए थे । ग्रेट पिरामिड में जगह ले ली और उधर ही चले गए। अभी तक राजस्थान वाले नहीं आए हैं । सात जनवरीः आज राजस्थान वाले आ गए हैं। परंतु मीटिंग कल से शुरू होगी। व्यास जी तो इन दिनों में यहीं थे, सुखाड़िया जी और सब आ गए हैं। आठ जनवरी : मीटिंग हुई, नाम भी तय हुए हैं। सुखाड़िया जी की क्लियर मेजोरिटी है, ऐसा मालूम देता है । क्या लोया, क्या पाया ? नौ जनवरी : डायरी साथ में नहीं लाया, इसलिए डायरी याददास्त से लिखनी असंभव एक. यह जरूर है कि बड़ी ही तकलीफ और मानसिक तनाव के दिन गुजरे। पूरी चिता रही। : सोलह जनवरीः सुवह विज्ञानी जी से मिले, उन्होंने कहा कि तुम्हारी तो पाली की सीट हुई है । मन में काफी चिंता हुई, कमलनयन जी ने वर्धा की सीट ले ली है । बिन्नानी जी के आ जाने से सुविधा हो गयी है । सत्रह जनवरी : घनश्यामदास जी मेरी सीट के लिए हद से ज्यादा चेष्टा कर रहे हैं । शाम को विरला जी के यहाँ खाना खाया । उन्होंने आज पंद्रह जगह फोन किए । ऐसा मालूम देता है, सीट का ढंग बैठ जायगा । फिर भी चिन्ता तो बहुत होती है । अट्ठारह जनवरी : सर्दी काफी है । सुवह घूमने जाता हूँ, बिरला जी से मुलाकात हो जाती है । उनका कितना वड़प्पन है, मेरे लिए बिना कहे चेष्टा करते हैं । एसशून्य एनशून्य सिन्हा से मिलने गया । उन्होंने कह दिया, तुम्हारी सीट ठीक है । सारे दिन बीकानेर हाउस या इधर-उधर चक्कर लगाता रहा । अभी तक पार्लियामेंट की सीटों का पूरी तौर पर तय नहीं हो पाया है। कमलनयन आज वर्धा चले गये । बाईस जनवरी : इंश्योरेंस ऑफिस में गया, जेशून्य टामस में भी गया । बाजार मंदा है, कामकाज कमती है । ऑफिस रहेगा या नहीं कौन जानता है। चुनाव की नाना तरह की खबरें आ रही हैं। दिन में विनानी जी का फोन आया कि सीकर की सीट शास्त्रीजी को दे रहे हैं, मन में काफी चिंता हुई । भागीरथजी के पास गया। शाम को जयपुर, सीकर फोन किया तव मालूम हुआ, ऐसी बात नहीं है और कल अनाउंस हो जायगा । तेईस जनवरी : दिन में छुट्टी रही, नेताजी जन्म दिवस है । नेताजी की यादगार में आज जुलूस निकाले गए । कल फिर भूल जायेंगे । फारवर्ड ब्लॉक वाले अपनी राजनीति के लिए नेताजी का नाम लेते हैं, परंतु उनमें एक भी नेताजी के आदर्श पर चलनेवाला नहीं दिखता। यही हाल कांग्रेस का भी हो रहा है। आजकल राजनीति की यही विशेषता है। शाम को विवाहवालों के गया। एक अमेरिकन हमारे यहाँ ठहरा है । पाँच फरवरी : सागरमलजी सोमानी को ऊँट का चिन्ह मिला है, ऐसा सुन रहे हैं । और कोई खास खवर नहीं, कल्लू खाँ सीकर वाले के बैठने की बात थी, वह नहीं बैठा है। परंतु कोई उपाय नहीं। वैसे स्थिति ठीक सी है । आठ फरवरी : सुवह फोन की चेष्टा की, नहीं हो सकी। शाम को हरलालजी आए । काफी कड़ाई की सी बात कर रहे थे। लोगों से मिला-जुला । मुसलमानों की एक मीटिंग में गया ।
Biospan Tablet डॉक्टर के लिखे गए पर्चे पर मिलने वाली दवा है। यह दवाई टैबलेट में मिलती है। यह दवाई खासतौर से इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम के उपचार के लिए इस्तेमाल की जाती है। Biospan Tablet का उपयोग कुछ अन्य स्थितियों के लिए भी किया जा सकता है, जिनके बारे में नीचे बताया गया है। Biospan Tablet को कितनी मात्रा में लेना है, यह पूर्ण रूप से रोगी के वजन, लिंग, आयु और पिछले चिकित्सकीय इतिहास पर निर्भर करता है। इसकी सही मात्रा इस पर भी निर्भर करती है, कि मरीज की मुख्य समस्या क्या है और उसे किस तरीके से दवा दी जा रही है। नीचे दिए गए खुराक के खंड में इस बारे में पूरी जानकारी के साथ बताया गया है। इन दुष्परिणामों के अलावा Biospan Tablet के कुछ अन्य दुष्प्रभाव भी हैं, जिनके बारे में आगे बताया गया है। Biospan Tablet के ये दुष्प्रभाव आमतौर पर अस्थायी होते हैं और इलाज के पूरा होने के साथ ही समाप्त हो जाते हैं। अपने डॉक्टर से संपर्क करें अगर ये साइड इफेक्ट और ज्यादा बदतर हो जाते हैं या फिर लंबे समय तक रहते हैं। इसके अलावा Biospan Tablet को गर्भावस्था के दौरान लेने पर प्रभाव मध्यम होता है और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए इसका प्रभाव सुरक्षित है। इसके अतिरिक्त Biospan Tablet का लिवर, हृदय और किडनी पर क्या असर होता है इस बारे में नीचे Biospan Tablet से जुड़ी चेतावनी के सेक्शन में चर्चा की गई है। अगर आपको पहले से ही कुछ समस्याएं हैं तो इस दवा का उपयोग न करें, इससे दुष्परिणाम हो सकते हैं। नसों में दर्द, मायस्थीनिया ग्रेविस, काला मोतियाबिंद इन समस्याओं के कुछ उदाहरण हैं। ऐसी कुछ अन्य समस्याएं भी हैं, जीने बारे में नीचे बताया गया है। अगर आपको इनमें से कोई भी समस्या है, तो Biospan Tablet न लें। साथ ही, Biospan Tablet को कुछ दवाओं के साथ लेने से गंभीर साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। नीचे ऐसी दवाओं की पूरी लिस्ट दी गई है। ऊपर बताई गई सावधानियों के अलावा यह भी ध्यान में रखें कि वाहन चलाते वक्त Biospan Tablet लेना सुरक्षित है, साथ ही इसकी लत पड़ सकती है। यह अधिकतर मामलों में दी जाने वाली Biospan Tablet की खुराक है। कृपया याद रखें कि हर रोगी और उनका मामला अलग हो सकता है। इसलिए रोग, दवाई देने के तरीके, रोगी की आयु, रोगी का चिकित्सा इतिहास और अन्य कारकों के आधार पर Biospan Tablet की खुराक अलग हो सकती है। ।किशोरावस्था(13 से 18 वर्ष) ।बच्चे(2 से 12 वर्ष) क्या Biospan Tablet का उपयोग गर्भवती महिला के लिए ठीक है? यदि Biospan का कोई दुष्प्रभाव प्रेग्नेंट महिला के स्वास्थ्य पर होता है तो इसका सेवन करना तुरंत बंद कर दें। इसके बाद चिकित्सक से सलाह के लेने पर ही इसको दोबारा शुरू करें। क्या Biospan Tablet का उपयोग स्तनपान करने वाली महिलाओं के लिए ठीक है? स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए Biospan सही और सुरक्षित है। Biospan Tablet का प्रभाव गुर्दे पर क्या होता है? Biospan का हानिकारक प्रभाव बहुत कम है, इसलिए इसे बिना डॉक्टर की सलाह के भी ले सकते हैं। Biospan Tablet का जिगर (लिवर) पर क्या असर होता है? Biospan का दुष्प्रभाव आपके लीवर पर बेहद कम पड़ेगा। आप इसे डॉक्टर से बिना सलाह लिए भी ले सकते हैं। क्या ह्रदय पर Biospan Tablet का प्रभाव पड़ता है? हृदय पर कुछ ही मामलों में Biospan का विपरित प्रभाव पड़ता है। लेकिन यह प्रभाव बहुत कम होता है, जिससे कोई परेशानी नहीं होती है। क्या Biospan Tablet आदत या लत बन सकती है? नहीं, इसका कोई प्रमाण नहीं है कि Biospan Tablet को लेने से आपको इसकी लत पड़ जाएगी। कोई भी दवा डॉक्टर से पूछ कर ही लें, जिससे कोई हानि न हो। क्या Biospan Tablet को लेते समय गाड़ी चलाना या कैसी भी बड़ी मशीन संचालित करना सुरक्षित है? हां, Biospan Tablet को लेने के बाद आपको चक्कर या नींद नहीं आती है, तो आप वाहन को चलाने व मशीन पर काम करने का काम भी कर सकते हैं। क्या Biospan Tablet को लेना सुरखित है? डॉक्टर के कहने के बाद ही Biospan Tablet का सेवन करें। वैसे यह सुरक्षित है। क्या मनोवैज्ञानिक विकार या मानसिक समस्याओं के इलाज में Biospan Tablet इस्तेमाल की जा सकती है? मस्तिष्क विकारों में Biospan Tablet काम नहीं कर पाती है। क्या Biospan Tablet को कुछ खाद्य पदार्थों के साथ लेने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है? शोध कार्यों न हो पाने के कारण इस बारे में कहना मुश्किल है कि Biospan Tablet और खाने को साथ में लेने से क्या असर होगा। जब Biospan Tablet ले रहे हों, तब शराब पीने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्या? रिसर्च न होने के कारण Biospan Tablet के नुकसान के विषय में पूर्ण जानकारी मौजूद नहीं है। अतः डॉक्टर की सलाह पर ही इसको लें।
Biospan Tablet डॉक्टर के लिखे गए पर्चे पर मिलने वाली दवा है। यह दवाई टैबलेट में मिलती है। यह दवाई खासतौर से इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम के उपचार के लिए इस्तेमाल की जाती है। Biospan Tablet का उपयोग कुछ अन्य स्थितियों के लिए भी किया जा सकता है, जिनके बारे में नीचे बताया गया है। Biospan Tablet को कितनी मात्रा में लेना है, यह पूर्ण रूप से रोगी के वजन, लिंग, आयु और पिछले चिकित्सकीय इतिहास पर निर्भर करता है। इसकी सही मात्रा इस पर भी निर्भर करती है, कि मरीज की मुख्य समस्या क्या है और उसे किस तरीके से दवा दी जा रही है। नीचे दिए गए खुराक के खंड में इस बारे में पूरी जानकारी के साथ बताया गया है। इन दुष्परिणामों के अलावा Biospan Tablet के कुछ अन्य दुष्प्रभाव भी हैं, जिनके बारे में आगे बताया गया है। Biospan Tablet के ये दुष्प्रभाव आमतौर पर अस्थायी होते हैं और इलाज के पूरा होने के साथ ही समाप्त हो जाते हैं। अपने डॉक्टर से संपर्क करें अगर ये साइड इफेक्ट और ज्यादा बदतर हो जाते हैं या फिर लंबे समय तक रहते हैं। इसके अलावा Biospan Tablet को गर्भावस्था के दौरान लेने पर प्रभाव मध्यम होता है और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए इसका प्रभाव सुरक्षित है। इसके अतिरिक्त Biospan Tablet का लिवर, हृदय और किडनी पर क्या असर होता है इस बारे में नीचे Biospan Tablet से जुड़ी चेतावनी के सेक्शन में चर्चा की गई है। अगर आपको पहले से ही कुछ समस्याएं हैं तो इस दवा का उपयोग न करें, इससे दुष्परिणाम हो सकते हैं। नसों में दर्द, मायस्थीनिया ग्रेविस, काला मोतियाबिंद इन समस्याओं के कुछ उदाहरण हैं। ऐसी कुछ अन्य समस्याएं भी हैं, जीने बारे में नीचे बताया गया है। अगर आपको इनमें से कोई भी समस्या है, तो Biospan Tablet न लें। साथ ही, Biospan Tablet को कुछ दवाओं के साथ लेने से गंभीर साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। नीचे ऐसी दवाओं की पूरी लिस्ट दी गई है। ऊपर बताई गई सावधानियों के अलावा यह भी ध्यान में रखें कि वाहन चलाते वक्त Biospan Tablet लेना सुरक्षित है, साथ ही इसकी लत पड़ सकती है। यह अधिकतर मामलों में दी जाने वाली Biospan Tablet की खुराक है। कृपया याद रखें कि हर रोगी और उनका मामला अलग हो सकता है। इसलिए रोग, दवाई देने के तरीके, रोगी की आयु, रोगी का चिकित्सा इतिहास और अन्य कारकों के आधार पर Biospan Tablet की खुराक अलग हो सकती है। ।किशोरावस्था ।बच्चे क्या Biospan Tablet का उपयोग गर्भवती महिला के लिए ठीक है? यदि Biospan का कोई दुष्प्रभाव प्रेग्नेंट महिला के स्वास्थ्य पर होता है तो इसका सेवन करना तुरंत बंद कर दें। इसके बाद चिकित्सक से सलाह के लेने पर ही इसको दोबारा शुरू करें। क्या Biospan Tablet का उपयोग स्तनपान करने वाली महिलाओं के लिए ठीक है? स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए Biospan सही और सुरक्षित है। Biospan Tablet का प्रभाव गुर्दे पर क्या होता है? Biospan का हानिकारक प्रभाव बहुत कम है, इसलिए इसे बिना डॉक्टर की सलाह के भी ले सकते हैं। Biospan Tablet का जिगर पर क्या असर होता है? Biospan का दुष्प्रभाव आपके लीवर पर बेहद कम पड़ेगा। आप इसे डॉक्टर से बिना सलाह लिए भी ले सकते हैं। क्या ह्रदय पर Biospan Tablet का प्रभाव पड़ता है? हृदय पर कुछ ही मामलों में Biospan का विपरित प्रभाव पड़ता है। लेकिन यह प्रभाव बहुत कम होता है, जिससे कोई परेशानी नहीं होती है। क्या Biospan Tablet आदत या लत बन सकती है? नहीं, इसका कोई प्रमाण नहीं है कि Biospan Tablet को लेने से आपको इसकी लत पड़ जाएगी। कोई भी दवा डॉक्टर से पूछ कर ही लें, जिससे कोई हानि न हो। क्या Biospan Tablet को लेते समय गाड़ी चलाना या कैसी भी बड़ी मशीन संचालित करना सुरक्षित है? हां, Biospan Tablet को लेने के बाद आपको चक्कर या नींद नहीं आती है, तो आप वाहन को चलाने व मशीन पर काम करने का काम भी कर सकते हैं। क्या Biospan Tablet को लेना सुरखित है? डॉक्टर के कहने के बाद ही Biospan Tablet का सेवन करें। वैसे यह सुरक्षित है। क्या मनोवैज्ञानिक विकार या मानसिक समस्याओं के इलाज में Biospan Tablet इस्तेमाल की जा सकती है? मस्तिष्क विकारों में Biospan Tablet काम नहीं कर पाती है। क्या Biospan Tablet को कुछ खाद्य पदार्थों के साथ लेने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है? शोध कार्यों न हो पाने के कारण इस बारे में कहना मुश्किल है कि Biospan Tablet और खाने को साथ में लेने से क्या असर होगा। जब Biospan Tablet ले रहे हों, तब शराब पीने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्या? रिसर्च न होने के कारण Biospan Tablet के नुकसान के विषय में पूर्ण जानकारी मौजूद नहीं है। अतः डॉक्टर की सलाह पर ही इसको लें।
बलद्वाड़ा -बलद्वाड़ा तहसील के अंतर्गत गांव पध्याण की निक्की देवी की गोशाला में रविवार रात साढ़े आठ बजे अचानक आग लग गई। आग इतनी भयंकर थी कि इस पर मुश्किल से काबू पाया गया। खबर की सूचना मिलते ही तहसीलदार बलद्वाड़ा जगदीश चंद व पटवारी हलका ने मौके पर आकर नुकसान का जायजा लिया। पुलिस भी मौके पर पहुंच गई और मामला दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है। गोशाला की मालिकिन निक्की देवी का कहना है कि गोशाला में घास सहित इमारती लकडि़यां भी जल कर राख हो गई हैं, जिसमें करीब 60 हजार रुपए का नुकसान हुआ है। तहसीलदार बलद्वाड़ा जगदीश चंद ने कहा कि जल्द ही पीडि़त परिवार को उचित फौरी राहत प्रदान की जाएगी। वहीं बलद्वाड़ा तहसील के अंतर्गत लोअर बरोट में भी रात्रि आग लगने से प्रीतो देवी की गोशाला जलकर राख हो गई। हलका कानूनगो मौके पर पहुंचे और नुकसान का जायया लिया। उन्होंने एक लाख रुपए का नुकसान होने की बात कही। बलद्वाड़ा पुलिस सब-इंस्पेक्टर भी मौके पर पहुंचे और छानबीन शुरू कर दी है।
बलद्वाड़ा -बलद्वाड़ा तहसील के अंतर्गत गांव पध्याण की निक्की देवी की गोशाला में रविवार रात साढ़े आठ बजे अचानक आग लग गई। आग इतनी भयंकर थी कि इस पर मुश्किल से काबू पाया गया। खबर की सूचना मिलते ही तहसीलदार बलद्वाड़ा जगदीश चंद व पटवारी हलका ने मौके पर आकर नुकसान का जायजा लिया। पुलिस भी मौके पर पहुंच गई और मामला दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है। गोशाला की मालिकिन निक्की देवी का कहना है कि गोशाला में घास सहित इमारती लकडि़यां भी जल कर राख हो गई हैं, जिसमें करीब साठ हजार रुपए का नुकसान हुआ है। तहसीलदार बलद्वाड़ा जगदीश चंद ने कहा कि जल्द ही पीडि़त परिवार को उचित फौरी राहत प्रदान की जाएगी। वहीं बलद्वाड़ा तहसील के अंतर्गत लोअर बरोट में भी रात्रि आग लगने से प्रीतो देवी की गोशाला जलकर राख हो गई। हलका कानूनगो मौके पर पहुंचे और नुकसान का जायया लिया। उन्होंने एक लाख रुपए का नुकसान होने की बात कही। बलद्वाड़ा पुलिस सब-इंस्पेक्टर भी मौके पर पहुंचे और छानबीन शुरू कर दी है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत और भूटान के बीच बाह्य अंतरिक्ष (आउटर स्पेस) के शांतिपूर्ण उपयोग में सहयोग पर हुए सहमति पत्र (एमओयू) को बुधवार को स्वीकृति प्रदान कर दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में दोनों देशों के बीच 19 नवंबर, 2020 को बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग में सहयोग पर हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) और उनके आदान-प्रदान को मंजूरी दी गई। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बैठक के बाद संवाददाताओं को यह जानकारी दी। इस संबंध में जारी सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, इस एमओयू से पृथ्वी के दूरस्थ संवेदन, उपग्रह संचार और उपग्रह आधारित नौवहन, अंतरिक्ष विज्ञान और ग्रहों की खोज, अंतरिक्ष यान और अंतरिक्ष प्रणालियों तथा भू प्रणाली के उपयोग, और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के उपयोग जैसे संभावित हित वाले क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना संभव होगा। इस सहमति पत्र में डीओएस/ इसरो और भूटान के सूचना और संचार मंत्रालय (एमओआईसी) के सदस्यों के एक संयुक्त कार्यकारी समूह का गठन किया जाएगा, जो कार्यान्वयन की समय सीमा और साधनों सहित कार्ययोजना पर काम करेगा। इसके माध्यम से भूटान सरकार के साथ सहयोग से मानवता के हित के लिए अंतरिक्ष तकनीक के उपयोग के क्षेत्र में संयुक्त गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसमें कहा गया है कि एमओयू के कार्यान्वयन की समयसीमा और साधनों सहित कार्ययोजना पर काम करने के लिए सहयोग के विशेष क्षेत्रों पर कार्यान्वयन की व्यवस्था की जाएगी तथा एक संयुक्त कार्यकारी समूह की स्थापना की जाएगी। बयान में कहा गया है कि भारत और भूटान औपचारिक अंतरिक्ष सहयोग कायम करने को विदेश मंत्रालय ने नवंबर, 2017 में अंतरिक्ष सहयोग के लिए अंतर सरकार एमओयू के प्रस्ताव को भूटान के सामने रखा था। उल्लेखनीय है कि फरवरी, 2020 में द्विपक्षीय बैठक के दौरान अन्य सहयोग प्रस्तावों के साथ ही इस मसौदे पर भी विचार विमर्श किया गया था। राजनयिक स्तर पर कुछ वार्ताओं के बाद दोनों पक्षों में एमओयू के व्यवहार्य मसौदे पर सहमति कायम हुई और उसे आंतरिक स्वीकृतियों के लिए आगे बढ़ाया गया। आवश्यक स्वीकृतियां हासिल करने के बाद दोनों पक्षों ने 19 नवंबर, 2020 को एमओयू पर हस्ताक्षर किया। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत और भूटान के बीच बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग में सहयोग पर हुए सहमति पत्र को बुधवार को स्वीकृति प्रदान कर दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में दोनों देशों के बीच उन्नीस नवंबर, दो हज़ार बीस को बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग में सहयोग पर हुए समझौता ज्ञापन और उनके आदान-प्रदान को मंजूरी दी गई। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बैठक के बाद संवाददाताओं को यह जानकारी दी। इस संबंध में जारी सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, इस एमओयू से पृथ्वी के दूरस्थ संवेदन, उपग्रह संचार और उपग्रह आधारित नौवहन, अंतरिक्ष विज्ञान और ग्रहों की खोज, अंतरिक्ष यान और अंतरिक्ष प्रणालियों तथा भू प्रणाली के उपयोग, और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के उपयोग जैसे संभावित हित वाले क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना संभव होगा। इस सहमति पत्र में डीओएस/ इसरो और भूटान के सूचना और संचार मंत्रालय के सदस्यों के एक संयुक्त कार्यकारी समूह का गठन किया जाएगा, जो कार्यान्वयन की समय सीमा और साधनों सहित कार्ययोजना पर काम करेगा। इसके माध्यम से भूटान सरकार के साथ सहयोग से मानवता के हित के लिए अंतरिक्ष तकनीक के उपयोग के क्षेत्र में संयुक्त गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसमें कहा गया है कि एमओयू के कार्यान्वयन की समयसीमा और साधनों सहित कार्ययोजना पर काम करने के लिए सहयोग के विशेष क्षेत्रों पर कार्यान्वयन की व्यवस्था की जाएगी तथा एक संयुक्त कार्यकारी समूह की स्थापना की जाएगी। बयान में कहा गया है कि भारत और भूटान औपचारिक अंतरिक्ष सहयोग कायम करने को विदेश मंत्रालय ने नवंबर, दो हज़ार सत्रह में अंतरिक्ष सहयोग के लिए अंतर सरकार एमओयू के प्रस्ताव को भूटान के सामने रखा था। उल्लेखनीय है कि फरवरी, दो हज़ार बीस में द्विपक्षीय बैठक के दौरान अन्य सहयोग प्रस्तावों के साथ ही इस मसौदे पर भी विचार विमर्श किया गया था। राजनयिक स्तर पर कुछ वार्ताओं के बाद दोनों पक्षों में एमओयू के व्यवहार्य मसौदे पर सहमति कायम हुई और उसे आंतरिक स्वीकृतियों के लिए आगे बढ़ाया गया। आवश्यक स्वीकृतियां हासिल करने के बाद दोनों पक्षों ने उन्नीस नवंबर, दो हज़ार बीस को एमओयू पर हस्ताक्षर किया। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
हमारे संवाददाता नई दिल्ली। सामाजिक संस्था सम्पूर्णा की अध्यक्ष डा. शोभा विजेन्द्र के नेतृत्व में गुड़िया रेप कांड के विरोध में पुलिस मुख्यालय पर जोरदार पदर्शन किया गया। पदर्शनकारियों ने गृहमंत्री, मुख्यमंत्री व पुलिस आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। वक्ताओं ने सरकार के ऊपर तीखे हमले करते हुए कहा कि उसे राजधानी की कोई चिन्ता नहीं है। भाजपा के पूर्व अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने पदर्शनकारियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि 16 दिसम्बर 2012 से 16 अपैल 2013 के चार महीनों में सरकार और पुलिस ने कोई सबक नहीं सीखा और लोगों से सिर्प झूठे वादे किए। उन्होंने कहा कि सरकार और पुलिस इतनी असंवेदनशील और गैर जिम्मेदार हो गई है कि इतनी गंभीर घटना के होने पर भी सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठे रही। मीडिया में दरिंदगी की खबर उजागर होने पर पुलिस हरकत में आई। यदि पुलिस ने गुड़िया के गायब होने के दिन ही गंभीरता से बच्ची की तलाश की होती तो शयद बच्ची दरिंदगी से बच सकती थी। श्री गुप्ता ने कहा कि पुलिस ने पहले लापरवाही बरती और फिर मामला दबाने के लिए परिजनों को 2000 रुपए दिए। घटना का विरोध कर रही छात्रा वीनू रावत को एसीपी ने सरेआम पीटा और उसके कान से खून आया। जनता न्याय के लिए आखिर क्या करे, कहां जाए? लोकतंत्र में विरोध के अधिकार को भी यह सरकार पुलिस के दमन से कुचलना चाहती है, इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। डा. शोभा विजेन्द्र ने कहा कि सरकार महिलाओं की सुरक्षा को लेकर पूरी तहत नाकाम है। मुख्यमंत्री हर मामले से अपना पल्लू झाड़ लेती है। उन्हें तत्काल पद त्याग करना चाहिए। दिल्ली के दो करोड़ लोग आखिर अब किस पर भरोसा करें। तरुणा कटारिया, सम्पूर्णा अध्यक्ष ने कहा कि पुलिस कमीश्नर अपने हाथों में चूड़ियां पहन ले और उसे तुरन्त इस्तीफा दे देना चाहिए। दिल्ली की बेटियों और महिलाओं के साथ इस तरह का घिनौना अत्याचार अब हम बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे। आज के पदर्शन में पार्षद नीलम गोयल, ममता नागपाल, सम्पूर्णा के सभी पदाधिकारी व कई हजारों सदस्यों ने भाग लिया।
हमारे संवाददाता नई दिल्ली। सामाजिक संस्था सम्पूर्णा की अध्यक्ष डा. शोभा विजेन्द्र के नेतृत्व में गुड़िया रेप कांड के विरोध में पुलिस मुख्यालय पर जोरदार पदर्शन किया गया। पदर्शनकारियों ने गृहमंत्री, मुख्यमंत्री व पुलिस आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। वक्ताओं ने सरकार के ऊपर तीखे हमले करते हुए कहा कि उसे राजधानी की कोई चिन्ता नहीं है। भाजपा के पूर्व अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने पदर्शनकारियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि सोलह दिसम्बर दो हज़ार बारह से सोलह अपैल दो हज़ार तेरह के चार महीनों में सरकार और पुलिस ने कोई सबक नहीं सीखा और लोगों से सिर्प झूठे वादे किए। उन्होंने कहा कि सरकार और पुलिस इतनी असंवेदनशील और गैर जिम्मेदार हो गई है कि इतनी गंभीर घटना के होने पर भी सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठे रही। मीडिया में दरिंदगी की खबर उजागर होने पर पुलिस हरकत में आई। यदि पुलिस ने गुड़िया के गायब होने के दिन ही गंभीरता से बच्ची की तलाश की होती तो शयद बच्ची दरिंदगी से बच सकती थी। श्री गुप्ता ने कहा कि पुलिस ने पहले लापरवाही बरती और फिर मामला दबाने के लिए परिजनों को दो हज़ार रुपयापए दिए। घटना का विरोध कर रही छात्रा वीनू रावत को एसीपी ने सरेआम पीटा और उसके कान से खून आया। जनता न्याय के लिए आखिर क्या करे, कहां जाए? लोकतंत्र में विरोध के अधिकार को भी यह सरकार पुलिस के दमन से कुचलना चाहती है, इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। डा. शोभा विजेन्द्र ने कहा कि सरकार महिलाओं की सुरक्षा को लेकर पूरी तहत नाकाम है। मुख्यमंत्री हर मामले से अपना पल्लू झाड़ लेती है। उन्हें तत्काल पद त्याग करना चाहिए। दिल्ली के दो करोड़ लोग आखिर अब किस पर भरोसा करें। तरुणा कटारिया, सम्पूर्णा अध्यक्ष ने कहा कि पुलिस कमीश्नर अपने हाथों में चूड़ियां पहन ले और उसे तुरन्त इस्तीफा दे देना चाहिए। दिल्ली की बेटियों और महिलाओं के साथ इस तरह का घिनौना अत्याचार अब हम बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे। आज के पदर्शन में पार्षद नीलम गोयल, ममता नागपाल, सम्पूर्णा के सभी पदाधिकारी व कई हजारों सदस्यों ने भाग लिया।
अक्सर हमारे साथ ऐसा होता है कि कई बार हम किसी व्यक्ति की परेशानियों को देखकर उसके मांगने पर उसे पैसे उधार दे देते है, लेकिन जब उसका बुरा समय निकल जाता है, तो वह हमारे पैसे लौटाना भूल जाता है, और मांगने पर हमें आँखे दिखाने लगता है. इनमे से तो बहुत से लोग ऐसे होते है, जो पैसे लेने के बाद दिखाई ही नहीं देते. ऐसी समस्या लगभग सभी के साथ होती है, यदि आपके साथ भी ऐसा कुछ हुआ है, तो आज हम आपको कुछ ऐसे उपाय बताएँगे जिससे आपका डूबा हुआ धन आप पुनः प्राप्त कर सकते है. अक्सर ऐसा होता है कि जब हम किसी से अपना उधार दिया गया पैसा मांगने जाते है, तो वह हमें, कल देता हूं, अगले हप्ते देता हूं, और भी बहुत से बहाने बनाकर टालते रहता है. इस पैसे को प्राप्त करने के लिए शुक्रवार के दिन कपूर जलाकर उसका काजल बनाइए. इस काजल से भोजपत्र पर उस व्यक्ति का नाम लिखिए जिससे आपको पैसे वापस लेने है, इसके बाद इस भोजपत्र पर 7 बार धीरे-धीरे अपने हांथ से मारकर उस व्यक्ति का नाम लेकर उससे अपने दिए गए धन को वापस करने को कहें, फिर इस भोजपत्र को उठाकर अपनी तिजोरी या धन रखने वाले स्थान पर रख दें. ऐसा करने से जल्द ही आपका दिया गया धन आपको पुनः प्राप्त हो जाएगा यह बहुत ही कारगर उपाय है. यदि आपके किसी करीबी ने आपसे धन उधार लिया है, तो उसे भूल जाना ही उचित होता है, क्योंकि उससे बार-बार अपना धन मांगने पर इसका प्रभाव आपके रिश्ते पर भी पड़ता है, तथा उस पैसे को याद कर आप अपने जीवन में तनाव की स्थिति निर्मित कर लेते है.
अक्सर हमारे साथ ऐसा होता है कि कई बार हम किसी व्यक्ति की परेशानियों को देखकर उसके मांगने पर उसे पैसे उधार दे देते है, लेकिन जब उसका बुरा समय निकल जाता है, तो वह हमारे पैसे लौटाना भूल जाता है, और मांगने पर हमें आँखे दिखाने लगता है. इनमे से तो बहुत से लोग ऐसे होते है, जो पैसे लेने के बाद दिखाई ही नहीं देते. ऐसी समस्या लगभग सभी के साथ होती है, यदि आपके साथ भी ऐसा कुछ हुआ है, तो आज हम आपको कुछ ऐसे उपाय बताएँगे जिससे आपका डूबा हुआ धन आप पुनः प्राप्त कर सकते है. अक्सर ऐसा होता है कि जब हम किसी से अपना उधार दिया गया पैसा मांगने जाते है, तो वह हमें, कल देता हूं, अगले हप्ते देता हूं, और भी बहुत से बहाने बनाकर टालते रहता है. इस पैसे को प्राप्त करने के लिए शुक्रवार के दिन कपूर जलाकर उसका काजल बनाइए. इस काजल से भोजपत्र पर उस व्यक्ति का नाम लिखिए जिससे आपको पैसे वापस लेने है, इसके बाद इस भोजपत्र पर सात बार धीरे-धीरे अपने हांथ से मारकर उस व्यक्ति का नाम लेकर उससे अपने दिए गए धन को वापस करने को कहें, फिर इस भोजपत्र को उठाकर अपनी तिजोरी या धन रखने वाले स्थान पर रख दें. ऐसा करने से जल्द ही आपका दिया गया धन आपको पुनः प्राप्त हो जाएगा यह बहुत ही कारगर उपाय है. यदि आपके किसी करीबी ने आपसे धन उधार लिया है, तो उसे भूल जाना ही उचित होता है, क्योंकि उससे बार-बार अपना धन मांगने पर इसका प्रभाव आपके रिश्ते पर भी पड़ता है, तथा उस पैसे को याद कर आप अपने जीवन में तनाव की स्थिति निर्मित कर लेते है.
रायपुर, चित्रा पटेल। राजधानी रायपुर के कलेक्टर डॉ. भारती दासन ने 21 जुलाई मध्य रात्रि 12 बजे से 28 जुलाई रात्रि 12 बजे तक पूर्ण लॉक डाउन लागू किया है। इस बार जारी लागू लॉक डाउन को सख्त रखने का निर्णय लिया गया है। शहर में सुबह 10 बजे के बाद से बेवजह घूमने वालों पर कार्रवाई की गाज गिरेगी। इस दौरान शहर में जरूरी सेवाओं को छोड़कर बाकि सभी सेवाएं बंद रहेगी। आवश्यक सेवाओं में सब्जी, फल, दूध, मेडिकल सुबह 6 से 10 बजे तक केवल चार घंटे खुली रहेंगी। राजधानी रायपुर में पेट्रोल पंप को सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक खोलने की अनुमति दी गई है। आपको बता दें कि पहले लॉक डाउन के दौरान किराना दुकान खोलने की अनुमति दी गई थी, लेकिन 21 जुलाई से लागू हो रहे लॉक डाउन में किराना दुकान खोलने की अनुमति नहीं दी गई है। लॉक डाउन लागू होने के बाद से किराना व्यापारियों द्वारा काला बाजारी करने की स्थिति में उन पर सख्ती से कार्रवाई करने निगम की टीम गठित की गई है। व उद्योगों को लेकर कलेक्टर भारती दासन ने कहा कि फैक्ट्रीयों के कर्मचारी के आवागमन और श्रमिकों के रहने की व्यवस्था फैक्ट्री प्रबंधन करेगा। इस दौरान सभी शासकीय एवं गैर शासकीय सभी कार्यलय बंद रखने की बात कही गई है। वहीं शराब दुकान को भी बंद रखने का निर्णय लिया गया है। शहर में आॅटो रिक्सा, सिटी बस सहित सभी परिवहन के माध्यमों को बंद रखा गया है। राजधानी रायपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय यादव ने कहा है कि राजधानी क्षेत्र में 33 नाकेबंदी की जाएगी। जिसमें 30 एकस्ट्रा पेट्रोलिंग टीम और लगाई जाएगी। साथ ही पूरे क्षेत्र में धारा 188 लागू की जाएगी। राजधानी रायपुर के कलेक्टर डॉ. भारती दासन ने ये बातें सोमवार को कलेक्टेर परिसर स्थित सभाभवन में प्रेस कॉन्फे्रस को संबोधित किया।
रायपुर, चित्रा पटेल। राजधानी रायपुर के कलेक्टर डॉ. भारती दासन ने इक्कीस जुलाई मध्य रात्रि बारह बजे से अट्ठाईस जुलाई रात्रि बारह बजे तक पूर्ण लॉक डाउन लागू किया है। इस बार जारी लागू लॉक डाउन को सख्त रखने का निर्णय लिया गया है। शहर में सुबह दस बजे के बाद से बेवजह घूमने वालों पर कार्रवाई की गाज गिरेगी। इस दौरान शहर में जरूरी सेवाओं को छोड़कर बाकि सभी सेवाएं बंद रहेगी। आवश्यक सेवाओं में सब्जी, फल, दूध, मेडिकल सुबह छः से दस बजे तक केवल चार घंटे खुली रहेंगी। राजधानी रायपुर में पेट्रोल पंप को सुबह नौ बजे से दोपहर तीन बजे तक खोलने की अनुमति दी गई है। आपको बता दें कि पहले लॉक डाउन के दौरान किराना दुकान खोलने की अनुमति दी गई थी, लेकिन इक्कीस जुलाई से लागू हो रहे लॉक डाउन में किराना दुकान खोलने की अनुमति नहीं दी गई है। लॉक डाउन लागू होने के बाद से किराना व्यापारियों द्वारा काला बाजारी करने की स्थिति में उन पर सख्ती से कार्रवाई करने निगम की टीम गठित की गई है। व उद्योगों को लेकर कलेक्टर भारती दासन ने कहा कि फैक्ट्रीयों के कर्मचारी के आवागमन और श्रमिकों के रहने की व्यवस्था फैक्ट्री प्रबंधन करेगा। इस दौरान सभी शासकीय एवं गैर शासकीय सभी कार्यलय बंद रखने की बात कही गई है। वहीं शराब दुकान को भी बंद रखने का निर्णय लिया गया है। शहर में आॅटो रिक्सा, सिटी बस सहित सभी परिवहन के माध्यमों को बंद रखा गया है। राजधानी रायपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय यादव ने कहा है कि राजधानी क्षेत्र में तैंतीस नाकेबंदी की जाएगी। जिसमें तीस एकस्ट्रा पेट्रोलिंग टीम और लगाई जाएगी। साथ ही पूरे क्षेत्र में धारा एक सौ अठासी लागू की जाएगी। राजधानी रायपुर के कलेक्टर डॉ. भारती दासन ने ये बातें सोमवार को कलेक्टेर परिसर स्थित सभाभवन में प्रेस कॉन्फे्रस को संबोधित किया।
Bilkis Bano culprits release from Jail: बिल्कीस बानो मामले में 15 साल जेल की सजा काटने के बाद गुजरात सरकार की माफी नीति के तहत 11 दोषियों को 15 अगस्त को रिहा कर दिया गया था. दाहोदः गुजरात के 2002 दंगों के दौरान बिल्कीस बानो के साथ बलात्कार और उनके परिवार के सात सदस्यों की हत्या के जुर्म में उम्र कैद की सज़ा पाए 11 दोषियों को सरकार ने माफी नीति के तहत 15 अगस्त को रिहा कर दिया है, जिसके बाद देशभर में उनकी रिहाई पर सवाल उठाए जा रहे हैं. इसी बीच गुजरात के दाहोद जिले के रंधिकपुर गांव के एक शख्स ने मंगलवार को दावा किया कि 11 दोषियों की रिहाई के बाद सुरक्षा चिंताओं के चलते कई मुसलमान उस गांव को छोड़कर चले गए हैं. वह घटना इसी गांव में हुई थी. गौरतलब है कि सांप्रदायिक दंगों के बीच, रंधिकपुर गांव में तीन मार्च 2002 को बिल्कीस बानो के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था. उनके परिवार के सात सदस्यों की हत्या भी कर दी गई थी. दाहोद के जिलाधिकारी को सोमवार को सौंपे ज्ञापन में ग्रामीणों ने डर की बात कहते हुए सुरक्षा की मांग की है. ग्रामीणों ने कहा कि वे इसलिए गांव छोड़कर जा रहे हैं, क्योंकि उन्हें महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता है. ज्ञापन में कहा गया है कि जब तक 11 मुजरिमों की गिरफ्तारी नहीं हो जाती, वे वापस नहीं लौटेंगे. वहीं, पुलिस ने कहा है कि दोषी रंधिकपुर के पास के एक गांव के रहने वाले हैं, लेकिन वे अभी उस इलाके में मौजूद नहीं हैं. हालांकि पुलिस ने स्वीकार किया है कि कुछ ग्रामीण गांव छोड़कर चले गए हैं. पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) आर. बी. देवधा ने कहा, " हमने स्थानीय लोगों से बात करने के बाद निश्चित स्थानों पर पुलिस कर्मियों को तैनात किया है और गश्त बढ़ा दी है." कुछ ग्रामीण अपना घर छोड़कर दूसरे शहरों में अपने रिश्तेदारों के साथ रहने चले गए हैं. पुलिस रंधिकपुर में लोगों के संपर्क में है और उनकी चिंताओं को दूर कर रही है. दाहोद के पुलिस अधीक्षक बलराम मीणा ने कहा है कि 11 दोषी रंधिकपुर के पास सिंगवड़ गांव के मूल निवासी हैं, लेकिन वे इलाके में मौजूद नहीं हैं.
Bilkis Bano culprits release from Jail: बिल्कीस बानो मामले में पंद्रह साल जेल की सजा काटने के बाद गुजरात सरकार की माफी नीति के तहत ग्यारह दोषियों को पंद्रह अगस्त को रिहा कर दिया गया था. दाहोदः गुजरात के दो हज़ार दो दंगों के दौरान बिल्कीस बानो के साथ बलात्कार और उनके परिवार के सात सदस्यों की हत्या के जुर्म में उम्र कैद की सज़ा पाए ग्यारह दोषियों को सरकार ने माफी नीति के तहत पंद्रह अगस्त को रिहा कर दिया है, जिसके बाद देशभर में उनकी रिहाई पर सवाल उठाए जा रहे हैं. इसी बीच गुजरात के दाहोद जिले के रंधिकपुर गांव के एक शख्स ने मंगलवार को दावा किया कि ग्यारह दोषियों की रिहाई के बाद सुरक्षा चिंताओं के चलते कई मुसलमान उस गांव को छोड़कर चले गए हैं. वह घटना इसी गांव में हुई थी. गौरतलब है कि सांप्रदायिक दंगों के बीच, रंधिकपुर गांव में तीन मार्च दो हज़ार दो को बिल्कीस बानो के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था. उनके परिवार के सात सदस्यों की हत्या भी कर दी गई थी. दाहोद के जिलाधिकारी को सोमवार को सौंपे ज्ञापन में ग्रामीणों ने डर की बात कहते हुए सुरक्षा की मांग की है. ग्रामीणों ने कहा कि वे इसलिए गांव छोड़कर जा रहे हैं, क्योंकि उन्हें महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता है. ज्ञापन में कहा गया है कि जब तक ग्यारह मुजरिमों की गिरफ्तारी नहीं हो जाती, वे वापस नहीं लौटेंगे. वहीं, पुलिस ने कहा है कि दोषी रंधिकपुर के पास के एक गांव के रहने वाले हैं, लेकिन वे अभी उस इलाके में मौजूद नहीं हैं. हालांकि पुलिस ने स्वीकार किया है कि कुछ ग्रामीण गांव छोड़कर चले गए हैं. पुलिस उपाधीक्षक आर. बी. देवधा ने कहा, " हमने स्थानीय लोगों से बात करने के बाद निश्चित स्थानों पर पुलिस कर्मियों को तैनात किया है और गश्त बढ़ा दी है." कुछ ग्रामीण अपना घर छोड़कर दूसरे शहरों में अपने रिश्तेदारों के साथ रहने चले गए हैं. पुलिस रंधिकपुर में लोगों के संपर्क में है और उनकी चिंताओं को दूर कर रही है. दाहोद के पुलिस अधीक्षक बलराम मीणा ने कहा है कि ग्यारह दोषी रंधिकपुर के पास सिंगवड़ गांव के मूल निवासी हैं, लेकिन वे इलाके में मौजूद नहीं हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत अब 2020 की महामारी के सबसे बुरे दौर से निकलने को तैयार है। वित्त मंत्रालय द्वारा कैश को संरक्षित करने के लिए वर्ष के शुरू में 80 से अधिक सरकारी विभागों और मंत्रालयों पर लगाए गए अंकुश को इस तिमाही में ढीला कर दिया गया है। जब नए खर्च की योजना को 1 फ़रवरी के बजट में पेश किया जाएगा तो इस साल के बजट को वर्तमान से बढ़ाकर 407 अरब डॉलर कर दिया जाएगा। इससे कोरोना महामारी से प्रभावित हालात को मदद करने के लिए बहुत जरूरी खर्च को बढ़ावा मिलेगा। अप्रैल से शुरू हुए वित्त वर्ष के 9 महीने बीत जाने हैं। इसके बाद भी कुल खर्च का आधा खर्च भी अभी तक नहीं हुआ है। कोरोना महामारी से उपजे हालात को वापस पटरी पर लाने के लिए सरकारी खर्च जितना ज्यादा करेगी, उससे रिकवरी में उतनी ज्यादा ही मदद मिलेगी। लॉकडाउन लगने के बाद अप्रैल से जून की तिमाही में अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई जिससे उबरने के अभी भी प्रयास किए जा रहे हैं। बजट खर्च के अलावा, मोदी सरकार ने उन उपायों की घोषणा की है जो उसने कहा है कि व्यवसायों और नौकरियों को बचाने के लिए अतिरिक्त 30 लाख करोड़ रुपए (जीडीपी का 15%) की मदद दी है। हालांकि, इस पैकेज को कुछ अर्थशास्त्रियों ने नाकाफी करार दिया और कहा कि यह सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 2% से भी कम था क्योंकि इसमें ज्यादातर लोन गारंटी थी। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स के अनुसार, यह अन्य उभरते बाजारों में औसतन GDP के डायरेक्ट खर्च का लगभग 3% है। निजी निवेश की कमी ने सरकार के लिए खर्च को बढ़ाने के लिए जरूरी कर दिया जो अक्टूबर में बजट की गई राशि का सिर्फ 55% था। क्रेडिट रेटिंग में डाउनग्रेड का खतरा भी मंडरा रहा था जिसके दबाव के चलते अधिकारियों ने आम जनमानस के हाथ में ज्यादा से ज्यादा कैश देने का प्रावधान चालू रखा और किसी अन्य तरह का टैक्स लगाने से परहेज किया। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स के मुताबिक, भारत का शुद्ध सरकारी कर्ज पिछले साल 70% से थोड़ा ज्यादा बढ़कर इस साल GDP के 90% से ज्यादा हो जाएगा। इसका संयुक्त राजकोषीय घाटा (fiscal deficit) इस साल 10 पर्सेंट से ज्यादा होगा। यही एक ऐसा फैक्टर है जिससे रेटिंग में कटौती का खतरा बना हुआ है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस महीने कहा था कि वह राजकोषीय घाटे को को लेकर कभी नहीं चाहेंगी कि सरकारी खर्च भी रुक जाए। उन्होंने कहा कि हमें ज्यादा से ज्यादा खर्च करने की जरूरत है। यही वक्त की मांग है। यह बिल्कुल स्पष्ट है। सरकार का बजट अंतर शायद इस साल जीडीपी के 8% तक पहुंच जाएगा। क्योंकि रेवेन्यू कलेक्शन पहले से ही मार खाया हुआ है। सरकार ने इस वर्ष अपनी बाजार उधारी (market borrowing) योजना को 7. 8 लाख करोड़ रुपए से 13. 1 लाख करोड़ तक बढ़ा दिया है। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) कलेक्शन में कमी की भरपाई के लिए राज्यों को इस बढ़ोतरी की जरूरत है। वैसे कुछ इंडीकेटर्स से पता चलता है कि रिकवरी शुरू हो गई है। क्योंकि रिज़र्व बैंक भी वर्तमान तिमाही में मंदी से बाहर निकलते हुए देश को देख रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक ने भी इस महीने अपने पूरे साल के विकास के नजरिए को मामूली रूप से संशोधित करते हुए 7. 5% गिरावट की बात कही है जो कि अक्टूबर में 9. 5% था। आरबीआई ने अपने दिसंबर के बुलेटिन में कहा था की सबसे बड़ी बात यह है कि भारतीय अर्थव्यवस्था कोविड-19 के गहरे प्रभाव से निकलना शुरू हो गई है। आर्थिक सूचकांक इस बात की ओर इशारा करते हैं कि आने वाले महीनों में यह रिकवरी और भी अच्छी होगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत अब दो हज़ार बीस की महामारी के सबसे बुरे दौर से निकलने को तैयार है। वित्त मंत्रालय द्वारा कैश को संरक्षित करने के लिए वर्ष के शुरू में अस्सी से अधिक सरकारी विभागों और मंत्रालयों पर लगाए गए अंकुश को इस तिमाही में ढीला कर दिया गया है। जब नए खर्च की योजना को एक फ़रवरी के बजट में पेश किया जाएगा तो इस साल के बजट को वर्तमान से बढ़ाकर चार सौ सात अरब डॉलर कर दिया जाएगा। इससे कोरोना महामारी से प्रभावित हालात को मदद करने के लिए बहुत जरूरी खर्च को बढ़ावा मिलेगा। अप्रैल से शुरू हुए वित्त वर्ष के नौ महीने बीत जाने हैं। इसके बाद भी कुल खर्च का आधा खर्च भी अभी तक नहीं हुआ है। कोरोना महामारी से उपजे हालात को वापस पटरी पर लाने के लिए सरकारी खर्च जितना ज्यादा करेगी, उससे रिकवरी में उतनी ज्यादा ही मदद मिलेगी। लॉकडाउन लगने के बाद अप्रैल से जून की तिमाही में अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई जिससे उबरने के अभी भी प्रयास किए जा रहे हैं। बजट खर्च के अलावा, मोदी सरकार ने उन उपायों की घोषणा की है जो उसने कहा है कि व्यवसायों और नौकरियों को बचाने के लिए अतिरिक्त तीस लाख करोड़ रुपए की मदद दी है। हालांकि, इस पैकेज को कुछ अर्थशास्त्रियों ने नाकाफी करार दिया और कहा कि यह सकल घरेलू उत्पाद के दो% से भी कम था क्योंकि इसमें ज्यादातर लोन गारंटी थी। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स के अनुसार, यह अन्य उभरते बाजारों में औसतन GDP के डायरेक्ट खर्च का लगभग तीन% है। निजी निवेश की कमी ने सरकार के लिए खर्च को बढ़ाने के लिए जरूरी कर दिया जो अक्टूबर में बजट की गई राशि का सिर्फ पचपन% था। क्रेडिट रेटिंग में डाउनग्रेड का खतरा भी मंडरा रहा था जिसके दबाव के चलते अधिकारियों ने आम जनमानस के हाथ में ज्यादा से ज्यादा कैश देने का प्रावधान चालू रखा और किसी अन्य तरह का टैक्स लगाने से परहेज किया। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स के मुताबिक, भारत का शुद्ध सरकारी कर्ज पिछले साल सत्तर% से थोड़ा ज्यादा बढ़कर इस साल GDP के नब्बे% से ज्यादा हो जाएगा। इसका संयुक्त राजकोषीय घाटा इस साल दस पर्सेंट से ज्यादा होगा। यही एक ऐसा फैक्टर है जिससे रेटिंग में कटौती का खतरा बना हुआ है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस महीने कहा था कि वह राजकोषीय घाटे को को लेकर कभी नहीं चाहेंगी कि सरकारी खर्च भी रुक जाए। उन्होंने कहा कि हमें ज्यादा से ज्यादा खर्च करने की जरूरत है। यही वक्त की मांग है। यह बिल्कुल स्पष्ट है। सरकार का बजट अंतर शायद इस साल जीडीपी के आठ% तक पहुंच जाएगा। क्योंकि रेवेन्यू कलेक्शन पहले से ही मार खाया हुआ है। सरकार ने इस वर्ष अपनी बाजार उधारी योजना को सात. आठ लाख करोड़ रुपए से तेरह. एक लाख करोड़ तक बढ़ा दिया है। वस्तु एवं सेवा कर कलेक्शन में कमी की भरपाई के लिए राज्यों को इस बढ़ोतरी की जरूरत है। वैसे कुछ इंडीकेटर्स से पता चलता है कि रिकवरी शुरू हो गई है। क्योंकि रिज़र्व बैंक भी वर्तमान तिमाही में मंदी से बाहर निकलते हुए देश को देख रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक ने भी इस महीने अपने पूरे साल के विकास के नजरिए को मामूली रूप से संशोधित करते हुए सात. पाँच% गिरावट की बात कही है जो कि अक्टूबर में नौ. पाँच% था। आरबीआई ने अपने दिसंबर के बुलेटिन में कहा था की सबसे बड़ी बात यह है कि भारतीय अर्थव्यवस्था कोविड-उन्नीस के गहरे प्रभाव से निकलना शुरू हो गई है। आर्थिक सूचकांक इस बात की ओर इशारा करते हैं कि आने वाले महीनों में यह रिकवरी और भी अच्छी होगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
जनज्वार। बिहार चुनावों के दौरान और प्रचार के समय एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहा था, वह है पुष्पम प्रिया का, जिन्होंने खुद को सीएम पद का दावेदार घोषित किया था। पटना की बांकीपुर और मधुबनी की बिस्फी सीट से चुनावी मैदान में उतरी पुष्पम प्रिया ने मीडिया में विज्ञापन देकर खुद को अगला मुख्यमंत्री प्रत्याशी घोषित कर रखा था। इसीलिए मीडिया की नजर उनकी दोनों सीटों पर बनी हुई थी कि क्या वो किसी एक सीट पर भी जीत हासिल करने में कामयाब हो पायेंगी, मगर उन्हें जिस तरह बहुत कम वोट मिले, जमानत भी बचाने में वह कामयाब नहीं हो पायी, उसके बाद वह बहुत दुखी नजर आई। मूल रूप से दरभंगा की रहने वाली पुष्पम प्रिया चौधरी ने लंदन के मशहूर लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर्स की डिग्री ली है और वह मार्च से ही बिहार में काफी सक्रिय रहीं। उन्होंने बुरी तरह हारने के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखी है, जो वायरल हो रही है। पुष्पम ने लिखा है, 'आज सुबह हो गयी पर बिहार में सुबह नहीं हुई। मैं बिहार वापस एक उम्मीद के साथ आयी थी कि मैं अपने बिहार और अपने बिहारवासियों की ज़िंदगी अपने नॉलेज, हिम्मत, ईमानदारी और समर्पण के साथ बदलूँगी। मैंने बहुत ही कम उम्र में अपना सबकुछ छोड़कर ये पथरीला रास्ता चुना, क्योंकि मेरा एक सपना था - बिहार को पिछड़ेपन और ग़रीबी से बाहर निकालने का।' 'बिहार के लोगों को एक ऐसी इज़्ज़तदार ज़िंदगी देना जिसके वो हक़दार तो हैं, पर जिसकी कमी की उन्हें आदत हो गयी है। बिहार को देश में वो प्रतिष्ठा दिलाना जो उसे सदियों से नसीब नहीं हुई। 'मेरा सपना था बिहार के गरीब बच्चों को वैसे स्कूल और विश्वविद्यालय देना जैसों में मैने पढ़ाई की है, जैसों में गांधी, बोस, अम्बेडकर, नेहरू, पटेल, मजहरूल हक़ और जेपी-लोहिया जैसे असली नेताओं ने पढ़ाई की थी। उसे इसी वर्ष 2020 में देना क्योंकि समय बहुत तेज़ी से बीत रहा और दुनिया बहुत तेज़ी से आगे जा रही। आज वो सपना टूट गया है, 2020 के बदलाव की क्रांति विफल रही है। 'हर छोर हर ज़िले में गयी, लाखों लोगों से मिली। आपमें भी वही बेचैनी दिखी बिहार को लेकर जो मेरे अंदर थी - बदलाव की बेचैनी। और उस बेचैनी को दिशा देने के लिए जो भी वक्त मिला उसमें मैंने और मेरे साथियों ने अपनी तरफ़ से कोई कसर नहीं छोड़ी। पर हार गए हम। इनकी भ्रष्ट ताक़त ज़्यादा हो गयी और आपकी बदलाव की बेचैनी कम। और मैं, मेरा बिहार और बिहार के वो सारे बच्चे जिनका भविष्य पूरी तरह बदल सकता था, वो हार गया। 'मीडिया मेरे कपड़ों और मेरी अंग्रेज़ी से ज़्यादा नहीं सोच पायी, बाक़ी पार्टियों के लिए चीयरलीडर बनी रही और आप नीतीश, लालू और मोदी से आगे नहीं बढ़ पाए। आपकी आवाज़ तो मैं बन गयी, पर आप मेरी आवाज़ भी नहीं बन पाए और शायद आपको मेरे आवाज़ की जरुरत भी नहीं। इनकी ताक़त को बस आपकी ताक़त हरा सकती थी, पर आपको आपस में लड़ने से फ़ुर्सत नहीं मिली। 'आज अंधेरा बरकरार है और 5 साल, और क्या पता शायद 30 साल या आपकी पूरी ज़िंदगी तक यही अंधेरा रहेगा, आप ये मुझसे बेहतर जानते हैं। आज जब अपनी मक्कारी से इन्होंने हमें हरा दिया है, मेरे पास दो रास्ते हैं। इन्होंने बहुत बड़ा खेल करके रखा है जिसपर यक़ीन होना भी मुश्किल है। या तो आपके लिए मैं उससे लड़ूूं, पर अब लड़ने के लिए कुछ नहीं बचा है ना ही पैसा ना ही आप पर विश्वास, और दूसरा बिहार को इस कीचड़ में छोड़ दूँ। निर्णय लेना थोड़ा मुश्किल है। 'मेरी संवेदना मेरे लाखों कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ है। फ़िलहाल, आप अंधेर नगरी में अंधेरे का जश्न मनाएँ और चौपट राजाओं के लिए ताली बजाएँ। जब ताली बजा कर थक जाएँ, और अंधेरा बरकरार रहे, तब सोचें कि कुछ भी बदला क्या, देखें कि सुबह आई क्या? मैंने बस हमेशा आपकी ख़ुशी और बेहतरी चाही है, सब ख़ुश रहें और आपस में मुहब्बत से रहें।'
जनज्वार। बिहार चुनावों के दौरान और प्रचार के समय एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहा था, वह है पुष्पम प्रिया का, जिन्होंने खुद को सीएम पद का दावेदार घोषित किया था। पटना की बांकीपुर और मधुबनी की बिस्फी सीट से चुनावी मैदान में उतरी पुष्पम प्रिया ने मीडिया में विज्ञापन देकर खुद को अगला मुख्यमंत्री प्रत्याशी घोषित कर रखा था। इसीलिए मीडिया की नजर उनकी दोनों सीटों पर बनी हुई थी कि क्या वो किसी एक सीट पर भी जीत हासिल करने में कामयाब हो पायेंगी, मगर उन्हें जिस तरह बहुत कम वोट मिले, जमानत भी बचाने में वह कामयाब नहीं हो पायी, उसके बाद वह बहुत दुखी नजर आई। मूल रूप से दरभंगा की रहने वाली पुष्पम प्रिया चौधरी ने लंदन के मशहूर लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर्स की डिग्री ली है और वह मार्च से ही बिहार में काफी सक्रिय रहीं। उन्होंने बुरी तरह हारने के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखी है, जो वायरल हो रही है। पुष्पम ने लिखा है, 'आज सुबह हो गयी पर बिहार में सुबह नहीं हुई। मैं बिहार वापस एक उम्मीद के साथ आयी थी कि मैं अपने बिहार और अपने बिहारवासियों की ज़िंदगी अपने नॉलेज, हिम्मत, ईमानदारी और समर्पण के साथ बदलूँगी। मैंने बहुत ही कम उम्र में अपना सबकुछ छोड़कर ये पथरीला रास्ता चुना, क्योंकि मेरा एक सपना था - बिहार को पिछड़ेपन और ग़रीबी से बाहर निकालने का।' 'बिहार के लोगों को एक ऐसी इज़्ज़तदार ज़िंदगी देना जिसके वो हक़दार तो हैं, पर जिसकी कमी की उन्हें आदत हो गयी है। बिहार को देश में वो प्रतिष्ठा दिलाना जो उसे सदियों से नसीब नहीं हुई। 'मेरा सपना था बिहार के गरीब बच्चों को वैसे स्कूल और विश्वविद्यालय देना जैसों में मैने पढ़ाई की है, जैसों में गांधी, बोस, अम्बेडकर, नेहरू, पटेल, मजहरूल हक़ और जेपी-लोहिया जैसे असली नेताओं ने पढ़ाई की थी। उसे इसी वर्ष दो हज़ार बीस में देना क्योंकि समय बहुत तेज़ी से बीत रहा और दुनिया बहुत तेज़ी से आगे जा रही। आज वो सपना टूट गया है, दो हज़ार बीस के बदलाव की क्रांति विफल रही है। 'हर छोर हर ज़िले में गयी, लाखों लोगों से मिली। आपमें भी वही बेचैनी दिखी बिहार को लेकर जो मेरे अंदर थी - बदलाव की बेचैनी। और उस बेचैनी को दिशा देने के लिए जो भी वक्त मिला उसमें मैंने और मेरे साथियों ने अपनी तरफ़ से कोई कसर नहीं छोड़ी। पर हार गए हम। इनकी भ्रष्ट ताक़त ज़्यादा हो गयी और आपकी बदलाव की बेचैनी कम। और मैं, मेरा बिहार और बिहार के वो सारे बच्चे जिनका भविष्य पूरी तरह बदल सकता था, वो हार गया। 'मीडिया मेरे कपड़ों और मेरी अंग्रेज़ी से ज़्यादा नहीं सोच पायी, बाक़ी पार्टियों के लिए चीयरलीडर बनी रही और आप नीतीश, लालू और मोदी से आगे नहीं बढ़ पाए। आपकी आवाज़ तो मैं बन गयी, पर आप मेरी आवाज़ भी नहीं बन पाए और शायद आपको मेरे आवाज़ की जरुरत भी नहीं। इनकी ताक़त को बस आपकी ताक़त हरा सकती थी, पर आपको आपस में लड़ने से फ़ुर्सत नहीं मिली। 'आज अंधेरा बरकरार है और पाँच साल, और क्या पता शायद तीस साल या आपकी पूरी ज़िंदगी तक यही अंधेरा रहेगा, आप ये मुझसे बेहतर जानते हैं। आज जब अपनी मक्कारी से इन्होंने हमें हरा दिया है, मेरे पास दो रास्ते हैं। इन्होंने बहुत बड़ा खेल करके रखा है जिसपर यक़ीन होना भी मुश्किल है। या तो आपके लिए मैं उससे लड़ूूं, पर अब लड़ने के लिए कुछ नहीं बचा है ना ही पैसा ना ही आप पर विश्वास, और दूसरा बिहार को इस कीचड़ में छोड़ दूँ। निर्णय लेना थोड़ा मुश्किल है। 'मेरी संवेदना मेरे लाखों कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ है। फ़िलहाल, आप अंधेर नगरी में अंधेरे का जश्न मनाएँ और चौपट राजाओं के लिए ताली बजाएँ। जब ताली बजा कर थक जाएँ, और अंधेरा बरकरार रहे, तब सोचें कि कुछ भी बदला क्या, देखें कि सुबह आई क्या? मैंने बस हमेशा आपकी ख़ुशी और बेहतरी चाही है, सब ख़ुश रहें और आपस में मुहब्बत से रहें।'
आज समाज डिजिटल, नई दिल्लीः Russia Ukraine War 11th day : रूस ने युद्ध के 11वें दिन यूक्रेन के 2 शहरों में संघर्षविराम के बाद फिर से हमले शुरू कर दिए हैं। देर रात खारकीव पर रूसी सेना की ओर से हवाई किए दिए हैं। हमले में कई इमारतों को भारी नुक्सान पहुंचा है। इससे पहले बीते दिन रूस ने यूक्रेन मारियुपोल और वोल्नोवाखा में रूस ने सीजफायर का ऐलान किया था ताकि इस लड़ाई के कारण संकट में फंसे लोग बिना किसी भय के उन शहरों से निकल सकें। इस बीच ऐसी खबरें है कि रूस ने संघर्षविराम का पूरी तरह पालन नहीं किया। मारियुपोल और वोल्नोवाखा में संघर्षविराम सुबह साढ़े 11 बजे सीजफायर की घोषणा की गई थी। इसके तहत दोनों शहरों में गोलीबारी रोककर सुरक्षित कारिडोर बनाए गए जहां से इन शहरों में फंसे लोग बिना किसी भय के सुरक्षित जगहों पर जाते नजर आए। सीजफायर के मुताबिक रूस के राजदूत ने कहा था कि जब तक इन दोनों शहरों में फंसे लोग यहां से निकाल नहीं लिए जाते हैं तब तक रूस की ओर से कोई बमबारी अथवा गोलीबारी नहीं की जाएगी। तास एजेंसियों और आरआईए नोवोस्ती ने रूसी रक्षा मंत्रालय के हवाले से यह जानकारी थी। (Russia Ukraine War 11th day) लेकिन इस बीच रूस की ओर से सीजफायर तोड़ने की रिपोर्टें आ रही हैं। सीजफायर के तहत मारियुपोल और वोल्नोवाखा में में कुछ घंटे तो सब कुछ ठीक चलता रहा लेकिन उसके बाद मारियुपोल प्रशासन ने नागरिकों को यह कहकर घर में रहने का निर्देश दे दिया रूस के सैनिक सीजफायर की अवहेलना कर गोलीबारी कर रहे हैं, इसलिए लोगों को निकलना जोखिम से कम नहीं है। इसके बाद यूक्रेन ने पर्यवेक्षकों व रेडक्रास की निगरानी में लोगों को निकालना शुरू किया। वहीं रूसी रक्षा मंत्रालय ने आरोप लगाया कि यूक्रेन के अति राष्ट्रवादियों के हथियारबंद दस्तों नागरिकों को मारियुपोल और वोल्नोवाखा से नहीं निकलने दिया। वे लोगों को ढाल बनाकर रूसी सेना से लड़ना चाहते हैं, ताकि नागरिकों के हताहत होने पर रूस को बदनाम किया जा सके।
आज समाज डिजिटल, नई दिल्लीः Russia Ukraine War ग्यारहth day : रूस ने युद्ध के ग्यारहवें दिन यूक्रेन के दो शहरों में संघर्षविराम के बाद फिर से हमले शुरू कर दिए हैं। देर रात खारकीव पर रूसी सेना की ओर से हवाई किए दिए हैं। हमले में कई इमारतों को भारी नुक्सान पहुंचा है। इससे पहले बीते दिन रूस ने यूक्रेन मारियुपोल और वोल्नोवाखा में रूस ने सीजफायर का ऐलान किया था ताकि इस लड़ाई के कारण संकट में फंसे लोग बिना किसी भय के उन शहरों से निकल सकें। इस बीच ऐसी खबरें है कि रूस ने संघर्षविराम का पूरी तरह पालन नहीं किया। मारियुपोल और वोल्नोवाखा में संघर्षविराम सुबह साढ़े ग्यारह बजे सीजफायर की घोषणा की गई थी। इसके तहत दोनों शहरों में गोलीबारी रोककर सुरक्षित कारिडोर बनाए गए जहां से इन शहरों में फंसे लोग बिना किसी भय के सुरक्षित जगहों पर जाते नजर आए। सीजफायर के मुताबिक रूस के राजदूत ने कहा था कि जब तक इन दोनों शहरों में फंसे लोग यहां से निकाल नहीं लिए जाते हैं तब तक रूस की ओर से कोई बमबारी अथवा गोलीबारी नहीं की जाएगी। तास एजेंसियों और आरआईए नोवोस्ती ने रूसी रक्षा मंत्रालय के हवाले से यह जानकारी थी। लेकिन इस बीच रूस की ओर से सीजफायर तोड़ने की रिपोर्टें आ रही हैं। सीजफायर के तहत मारियुपोल और वोल्नोवाखा में में कुछ घंटे तो सब कुछ ठीक चलता रहा लेकिन उसके बाद मारियुपोल प्रशासन ने नागरिकों को यह कहकर घर में रहने का निर्देश दे दिया रूस के सैनिक सीजफायर की अवहेलना कर गोलीबारी कर रहे हैं, इसलिए लोगों को निकलना जोखिम से कम नहीं है। इसके बाद यूक्रेन ने पर्यवेक्षकों व रेडक्रास की निगरानी में लोगों को निकालना शुरू किया। वहीं रूसी रक्षा मंत्रालय ने आरोप लगाया कि यूक्रेन के अति राष्ट्रवादियों के हथियारबंद दस्तों नागरिकों को मारियुपोल और वोल्नोवाखा से नहीं निकलने दिया। वे लोगों को ढाल बनाकर रूसी सेना से लड़ना चाहते हैं, ताकि नागरिकों के हताहत होने पर रूस को बदनाम किया जा सके।
Team India: घरेलू क्रिकेट ने टीम इंडिया को इतने खिलाड़ी दिए हैं कि कुछ समय के लिए कोई खिलाड़ी यदि किसी कारण से टीम से बाहर हो तो उसे कोई अन्य खिलाड़ी रिप्लेस कर सकता है। वहीं, अब टीम इंडिया मे एक खिलाड़ी रवींद्र जडेजा और अक्षर पटेल के जगह को टक्कर देने के लिए आ चुका है। न्यूज़ीलैंड के खिलाफ इस खिलाड़ी ने अपना प्रदर्शन देकर अपना दावेदारी भी पेश की है। जी हाँ हम बात कर रहे हैं ऑलराउंडर वाशिंगटन सुंदर (Washington Sundar) की। हाल के मैच मे अपने प्रदर्शन से उन्होंने फैंस का मन मोह लिया हैं। कल 27 जनवरी से भारत और न्यूजीलैंड (IND vs NZ) के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज से खेली जाएगी। इस सीरीज में धाकड़ ऑलराउंडर अक्षर पटेल अपने किसी खास काम के कारण टीम का हिस्सा नहीं हैं। ऐसे मे ये सीरीज वाशिंगटन सुंदर के लिए काफी महत्वपूर्ण होने वाला हैं। हालांकि साल 2022 मे सुंदर ने एक भी टी20 मैच नहीं खेला था और इनका वनडे सीरीज भी फ्लॉप रहा था। वॉशिंगटन सुंदर हाल ही में श्रीलंका के खिलाफ टी20 सीरीज में भी स्क्वॉड का हिस्सा थे, लेकिन अक्षर पटेल के चलते उन्हें एक भी मैच की प्लेइंग 11 में जगह नहीं मिली थी। लेकिन कीवी टीम के खिलाफ इस सीरीज से अक्षर को आराम दिया गया है। ऐसे में वॉशिंगटन सुंदर प्लेइंग 11 का हिस्सा बनने के सबसे बड़े दावेदार हैं। न्यूज़ीलैंड के खिलाफ इस मैच को खेलने से वॉशिंगटन सुंदर (Washington Sundar) ने अपना आखिरी टी20 मैच नवंबर 2022 में न्यूजीलैंड के खिलाफ ही खेला था। सुंदर ने साल 2021 मे डेब्यू करने के बाद अभी तक टीम इंडिया के लिए 4 टेस्ट मैचों में 265 रन और 6 विकेट हासिल किए हैं। वहीं, 16 वनडे और 32 टी20 मैच भी खेले हैं। इन वनडे मैचों में उन्होंने 233 रन और 16 विकेट अपने नाम किए हैं। वहीं, टी20 मैचों में सुंदर ने निचले क्रम पर बल्लेबाजी करते हुए 47 रन और गेंदबाजी में 26 विकेट हासिल किए हैं। पृथ्वी शॉ, ईशान किशन (विकेटकीपर), सूर्यकुमार यादव (उपकप्तान), राहुल त्रिपाठी, हार्दिक पांड्या (कप्तान), दीपक हुड्डा, वॉशिंगटन सुंदर, कुलदीप यादव, अर्शदीप सिंह, उमरान मलिक, शिवम मावी,
Team India: घरेलू क्रिकेट ने टीम इंडिया को इतने खिलाड़ी दिए हैं कि कुछ समय के लिए कोई खिलाड़ी यदि किसी कारण से टीम से बाहर हो तो उसे कोई अन्य खिलाड़ी रिप्लेस कर सकता है। वहीं, अब टीम इंडिया मे एक खिलाड़ी रवींद्र जडेजा और अक्षर पटेल के जगह को टक्कर देने के लिए आ चुका है। न्यूज़ीलैंड के खिलाफ इस खिलाड़ी ने अपना प्रदर्शन देकर अपना दावेदारी भी पेश की है। जी हाँ हम बात कर रहे हैं ऑलराउंडर वाशिंगटन सुंदर की। हाल के मैच मे अपने प्रदर्शन से उन्होंने फैंस का मन मोह लिया हैं। कल सत्ताईस जनवरी से भारत और न्यूजीलैंड के बीच तीन मैचों की टीबीस सीरीज से खेली जाएगी। इस सीरीज में धाकड़ ऑलराउंडर अक्षर पटेल अपने किसी खास काम के कारण टीम का हिस्सा नहीं हैं। ऐसे मे ये सीरीज वाशिंगटन सुंदर के लिए काफी महत्वपूर्ण होने वाला हैं। हालांकि साल दो हज़ार बाईस मे सुंदर ने एक भी टीबीस मैच नहीं खेला था और इनका वनडे सीरीज भी फ्लॉप रहा था। वॉशिंगटन सुंदर हाल ही में श्रीलंका के खिलाफ टीबीस सीरीज में भी स्क्वॉड का हिस्सा थे, लेकिन अक्षर पटेल के चलते उन्हें एक भी मैच की प्लेइंग ग्यारह में जगह नहीं मिली थी। लेकिन कीवी टीम के खिलाफ इस सीरीज से अक्षर को आराम दिया गया है। ऐसे में वॉशिंगटन सुंदर प्लेइंग ग्यारह का हिस्सा बनने के सबसे बड़े दावेदार हैं। न्यूज़ीलैंड के खिलाफ इस मैच को खेलने से वॉशिंगटन सुंदर ने अपना आखिरी टीबीस मैच नवंबर दो हज़ार बाईस में न्यूजीलैंड के खिलाफ ही खेला था। सुंदर ने साल दो हज़ार इक्कीस मे डेब्यू करने के बाद अभी तक टीम इंडिया के लिए चार टेस्ट मैचों में दो सौ पैंसठ रन और छः विकेट हासिल किए हैं। वहीं, सोलह वनडे और बत्तीस टीबीस मैच भी खेले हैं। इन वनडे मैचों में उन्होंने दो सौ तैंतीस रन और सोलह विकेट अपने नाम किए हैं। वहीं, टीबीस मैचों में सुंदर ने निचले क्रम पर बल्लेबाजी करते हुए सैंतालीस रन और गेंदबाजी में छब्बीस विकेट हासिल किए हैं। पृथ्वी शॉ, ईशान किशन , सूर्यकुमार यादव , राहुल त्रिपाठी, हार्दिक पांड्या , दीपक हुड्डा, वॉशिंगटन सुंदर, कुलदीप यादव, अर्शदीप सिंह, उमरान मलिक, शिवम मावी,
पति की नौकरी ही ऐसी थी कि देश-देश, शहर-शहर घूमते हुए अंत में, हम भूमण्डल के एक बड़े टुकड़े के छोटे से हिस्से में आ गए और यहीं स्थापित होने का मन बना लिया। बच्चे बड़े हो रहे हैं और इस शहर को अपना अंतिम पड़ाव बनाने का हमारा निवेदन कम्पनी ने स्वीकार कर लिया। शहर छोटा ज़रूर है, पर बड़े शहरों जैसी हर सुविधा यहाँ उपलब्ध है। बच्चों के पालन-पोषण के लिए यह स्थान उत्तम और सुरक्षित माना जाता है। इस शहर के बारे में वर्षों से अख़बारों और मैगज़ीनों में पढ़ रही थी। यहाँ का मौसम, यहाँ का ऋतु परिवर्तन देश की तरह का है और भारतीय समुदाय तथा स्थानीय लोग यहाँ खूब मिलजुल कर रहते हैं। इसका परिचय मुझे घर में प्रवेश करते ही मिल गया। एक सप्ताह तक पड़ोसियों ने मुझे खाना नहीं बनाने दिया ताकि हम सामान से भरे बॉक्स खोलकर उन्हें सेट कर लें और खाना बनाने से बेफ़िक्र होकर अपने घर में सहज हो जाएँ। सबने तहेदिल से हमारा स्वागत किया। स्वदेश के जिस क़स्बे में मैं जन्मी और बड़ी हुई; वहाँ का स्नेह, सादगी, अजनबियों को अपना बना लेने का जज़्बा मुझे दुनिया के किसी भी कोने में नहीं मिला। उसे इस शहर में पाकर मुझे सुखद अनुभूति हुई। ऐसा लगा कि मेरे बच्चे भी वैसे ही माहौल में पलकर बड़े होंगे जिस तरह के परिवेश में मेरा बचपन बीता था। एक माह तक मैं अपने आप को व्यवस्थित करने में लगी रही। घर के निकट कौन से शॉपिंग सेंटर हैं, भारतीय ग्रोसरी स्टोर कहाँ हैं, बच्चों के स्कूल की बस कितने बजे और कहाँ आकर रुकती है, बस यही जानकारियाँ लेने में उलझी रही। पड़ोस में क्या हो रहा है, कुछ जान नहीं पाई और पड़ोस की गतिविधियों में हिस्सा भी नहीं ले पाई। कार में आते-जाते, आस-पास वालों से हाय.... और बाय ज़रूर हुई। मैंने देखा एक बुज़ुर्ग महिला, ठीक हमारे घर के सामने अपने बरामदे में बैठीं; बच्चों को स्कूल जाते देख रहीं थीं। मैंने एक बात नोटिस की, सारे बच्चों ने अपने माँ-बाप को 'बाय' कहने के बाद, उन्हें भी-"बाय ग्रैंडमाँ, सी यू ऑफ्टर स्कूल" कहकर हवा में चुम्मन उछाला। वह भी उन्हें फ्लाइंग किस्स देते हुए मुस्करा रहीं थीं। सुकन्या, हमारे साथ वाले घर की पड़ोसन से मैंने उनके बारे में पूछा तो उसने मुझे बताया -"पारुल, इनका नाम मिसिज़ हाइडी है और हमारे सब-डिविज़न में सबसे पुरानी हैं। पाँच साल पहले मिस्टर हाइडी की डेथ हो गई और मिसिज़ हाइडी अकेली रह गईं।" "क्या इनके बच्चे नहीं?" मैंने पूछा। "हैं... दो बेटे। पर नाम के। मिस्टर हाइडी की डेथ पर आए थे। उसके बाद आज तक उन्होंने कभी मिसिज़ हाइडी से पूछा नहीं- "माँ तुम कैसी हो?" मिसिज़ हाइडी ही पोते-पोतियों, बेटे-बहुओं को उपहार भेजती रहती हैं। उनकी तरफ़ से तो कभी यह भी उत्तर नहीं आया कि माँ उपहार मिल गए या माँ तुम इतना खर्च क्यों करती हो। "ओह ! मिसिज़ हाइडी की आँखों का ख़ालीपन मैंने पहले दिन ही देखा था।" मेरे मुँह से अचानक निकल गया। "हम सब इनका बहुत ख़याल रखते हैं। सुबह की कॉफ़ी हाइडी आंटी के साथ इसीलिए पी जाती है कि उनकी सुबह रौनक से शुरू हो। और फिर जो भी कोई स्पेशल डिश कुक करता है, वह आंटी को ज़रूर दी जाती है।" सुकन्या ने बताया। शाम को बच्चे स्कूल से लौटकर आए तो बस से निकलते ही "ग्रैंडमाँ" कहते हुए हाइडी आंटी की तरफ भागे। उन्होंने सबको अपने हाथों से बनाए बिस्कुट खाने को दिए। बिस्कुट थामे बच्चे उछलते-कूदते अपने माँ-बाप के साथ घरों को चले गए। जब तक बच्चे आँखों से ओझिल नहीं हो गए; हाइडी आंटी की आँखों और होंठों पर मुस्कराहट उदासी की चादर ओढ़े रही। उसके बाद जिस तरह उठकर वे घर के अंदर गईं, लगा अकेलेपन का बोझा उनसे ढोया नहीं जा रहा। अपनी रसोई की खिड़की से मैं उन्हें देख सकती हूँ। बिस्कुट खाते हुए मेरे बच्चे चहके -"आसम बिस्कुट! मॉम, शी लुक्स लाइक अवर नानी।" बच्चों ने सही कहा, मेरी माँ तो हाइडी आंटी से भी अधिक अकेली हैं। मैं पाँच वर्ष की थी और मँझला भाई दस का तथा बड़ा भाई पन्द्रह का; जब बाबू जी हमें छोड़ कर चले गए। बैठे-बैठे ही लुढ़क गए थे और माँ वर्षों इस सच को स्वीकार नहीं कर पाईं थीं। माँ अपने माँ-बाप की इकलौती संतान थीं। बाबूजी के बाद नाना-नानी हमें अपने घर ले आए। मेरी शादी के कुछ वर्षों बाद तक माँ को नाना-नानी का सुख मिलता रहा। उनके जाने के बाद माँ ने अपने जीवन में आए शून्य को कभी बड़े भाई के बच्चे पालने में और कभी छोटे भाई के बच्चों की देख-भाल से भर लिया। उन वर्षों में मैं जब भी माँ से मिलने गई, निराश लौटी। माँ के पास मेरे लिए समय ही नहीं होता था। पर सकून था -माँ व्यस्त है.....वर्षों माँ को अपने जीवन के ख़ालीपन का एहसास नहीं हुआ। और अगर हुआ भी तो उसे भरने के कई विकल्प माँ के पास थे। गत कई वर्षों से मैंने माँ में एक परिवर्तन देखा है। माँ की चमकती आँखें और मुस्कराते होंठ बुझ से गए हैं। माँ का दोमंज़िला पैतृक घर है; जिसके निचले हिस्से में मेरा बड़ा भाई और ऊपरी मंज़िल पर छोटा भाई रहता है। माँ छह महीने बड़े भाई और छह महीने छोटे भाई के पास रहती है। भाई-भाभियाँ सुबह अपने-अपने काम पर चले जाते हैं और बच्चे स्कूल-कॉलेज। माँ अकेली रह जाती हैं। शाम को घर आते ही सब अपने में व्यस्त हो जाते हैं। माँ के भीतर और बाहर शून्य बढ़ने लगा है। घर के कामों में माँ सहायता करना चाहती हैं, तो वह भाभियों को अपनी गृहस्थी में दखल लगता है। मैं कई बार माँ को समझा चुकी हूँ -"माँ यह शायद आपका भ्रम है; जब भाभियों के बच्चे आप पाल रहे थे और पूरा घर आपके हवाले था; तब दखल नहीं था।" माँ बस रो देती हैं और कहती हैं -"तुम नहीं समझोगी। इतनी बेवकूफ़ लगती हूँ ,जो भ्रम और सच का अंतर न जान सकूँ।" बेवजह और फ़िज़ूल की बातों पर जब दोनों भाइयों के परिवार झगड़ते हैं तो माँ के लिए कोई स्थान नहीं रह जाता। हाइडी आंटी के सिर पर कम से कम छत तो अपनी है, माँ के पास तो वह भी नहीं। माँ टूट गई है। बिखर गई है। अकेलेपन का दर्द और उदासी अब उनके चेहरे और बदन से झलकने लगी है। कैसे बताऊँ माँ को कि मैं एक औरत की तरह उन्हें महसूस करने लगी हूँ। भीतरी भावों को समझती हूँ। माँ बाबूजी को जिस तरह याद करती हैं, महसूस किया जा सकता है कि माँ अपनी वेदना बाबूजी के साथ बाँटना चाहती है। माँ को कोई साथी चाहिए। बुढ़ापे का सहारा चाहिए। माँ सिर्फ माँ नहीं, औरत है, इंसान है। उसे भी जीने का हक़ है। माँ की जगह अगर बाबू जी होते तो सबसे पहले उनकी शादी कर दी जाती और फिर परिवार तथा समाज के लोग बड़ी सफ़ाई से कहते - "क्या करे बेचारा पुरुष! कैसे बच्चे पाले? जाने वाली चली गई अब पहाड़ जैसी ज़िन्दगी यह अकेले कैसे काटे? जीवन जीने के लिए साथी तो चाहिए।" और.... औरत की ज़िन्दगी पहाड़ जैसी नहीं होती, उसे किसी का साथ नहीं चाहिए? परिवार और समाज की इस दोहरी मानसिकता से मैं चिढ़ती हूँ। रोष से भर जाती हूँ। लपक-लपक कर बाहर आने वाले भावों को अंदर ही गटक जाती हूँ। ज़ुबान खुल गई तो अनर्थ हो जाएगा। मुझे तो कोई कुछ कह नहीं पाएगा, यह कह कर नकार देंगे; विदेश से आई है, इसलिए ऐसी बातें करती है, पर माँ का वहाँ रहना दूभर हो जाएगा। विदेश प्रवास ने सोचने और समझने के नज़रिए को बहुत व्यापक कर दिया है। स्त्री है या पुरुष सबके भीतर एक सी चेतना है और सभी पहले इंसान हैं उसके बाद कुछ और.... मानव जीवन की यहाँ बहुत क़द्र की जाती है। विदेश के परिवेश ने मानवी भावनाओं को समझने और जानने के दृष्टिकोण में ही बहुत परिवर्तन ला दिया है। देश में लोग जिन बातों को अपनी सुविधानुसार नज़रअंदाज़ कर देते हैं, विशेषतः स्त्रियों के लिए। वे दुःख पहुँचाती हैं। स्त्री सिर्फ बेटी, बहन, पत्नी और माँ ही नहीं, मानवी जज़्बात भी रखती है। बस उसके संवेगों को ही दबाया जाता है, ताकि पितृसत्ता अपना वर्चस्व रख सके। अफ़सोस पारिवारिक और सामाजिक स्तर पर नारी ही नारी का शोषण करती है। वह अपनी जात का साथ नहीं देती। माँ को अपने साथ यहाँ लाने की मैंने बहुत ज़िद की थी पर माँ नहीं मानी। अपने संस्कारों में बँधी उनकी सोच, वे बेटी के घर में कैसे आकर रहें ? माँ के दर्द को मैं दूर बैठी भी महसूस कर रही हूँ पर कुछ कर नहीं सकती। हाइडी आंटी से रोज़ मिल लेती हूँ, ऐसा लगता है माँ से मिल ली। शाम को रसोई में बर्तन साफ़ करते हुए खिड़की से बाहर नज़र पड़ी, हाइडी आंटी के घर के आगे एक कार आकर रुकी और एक बुज़ुर्ग फूलों का गुच्छा हाथ में लिये कार से निकले और उनके घर की डोर बेल बजाने लगे। मैं वहीं खड़ी देखती रही। आंटी ने मुस्कराते हुए दरवाज़ा खोला। आंटी खूब सजी-धजी थीं। मैंने सोचा कोई पहचान वाला होगा और अपने कामों में लग गई। तक़रीबन रोज़ ही वह कार मैं आंटी के घर के आगे देखने लगी। आंटी के शरीर की स्फूर्ति स्पष्ट दिखाई देने लगी और चेहरे पर आई चमक दमकने लगी। हममें से किसी ने इस बारे कोई बात नहीं की। आंटी के साथ वही दिनचर्या रही। रोज़ की तरह बच्चों को स्कूल बस में चढ़ा कर, हम सब पड़ोसने सैर को जाने लगीं तो हमारे ही घर के दाईं तरफ में रहने वाली गैब्रियल ने हमें आंटी और जॉर्ज की शादी का निमंत्रण दिया। तब मुझे सारी कहानी का पता चला। हाइडी आंटी और जॉर्ज चर्च में मिले थे। जार्ज भी विधुर हैं और उनका कोई बच्चा नहीं। दोनों के हमसफ़र इस उम्र में उनका साथ छोड़ गए। अकेले, भीतर शून्य से भरे, दर्द ही दोनों का साँझा है। चर्च के सब मित्रों ने उन्हें सलाह दी कि बाकी बची ज़िन्दगी एक दूसरे का सहारा बन कर, एक दूसरे का दुःख-सुख बाँटते हुए बिता लें। आंटी और जॉर्ज को भी महसूस हुआ कि इस उम्र में कोई बातें सुनने -सुनाने वाला, साथ हँसने- रोने वाला मित्र चाहिए। ढलती उम्र में शिथिल होती इन्द्रियाँ और पल-पल परिवर्तित होती मनःस्थिति में सखा भाव परोक्ष और अपरोक्ष रूप से सम्बन्धों में छाया रहता है। इसी सखा भाव के लिए उन्होंने शादी का फैसला कर लिया। हमारे बच्चों को विशेष रूप से बुलाया गया। सैर करते हुए सुकन्या दूसरी पड़ोसन ने एक रहस्योद्घाटन किया, जॉर्ज और हाइडी आंटी ने अपनी विल भी कर दी है कि उनकी मृत्यु के बाद उनके घरों पर हाइडी के बच्चों का कोई अधिकार नहीं होगा और उनके घर चर्च को दिए जाएँ। घरों से मिलने वाले पैसे से ग़रीब बच्चों को पढ़ाया जाए।
पति की नौकरी ही ऐसी थी कि देश-देश, शहर-शहर घूमते हुए अंत में, हम भूमण्डल के एक बड़े टुकड़े के छोटे से हिस्से में आ गए और यहीं स्थापित होने का मन बना लिया। बच्चे बड़े हो रहे हैं और इस शहर को अपना अंतिम पड़ाव बनाने का हमारा निवेदन कम्पनी ने स्वीकार कर लिया। शहर छोटा ज़रूर है, पर बड़े शहरों जैसी हर सुविधा यहाँ उपलब्ध है। बच्चों के पालन-पोषण के लिए यह स्थान उत्तम और सुरक्षित माना जाता है। इस शहर के बारे में वर्षों से अख़बारों और मैगज़ीनों में पढ़ रही थी। यहाँ का मौसम, यहाँ का ऋतु परिवर्तन देश की तरह का है और भारतीय समुदाय तथा स्थानीय लोग यहाँ खूब मिलजुल कर रहते हैं। इसका परिचय मुझे घर में प्रवेश करते ही मिल गया। एक सप्ताह तक पड़ोसियों ने मुझे खाना नहीं बनाने दिया ताकि हम सामान से भरे बॉक्स खोलकर उन्हें सेट कर लें और खाना बनाने से बेफ़िक्र होकर अपने घर में सहज हो जाएँ। सबने तहेदिल से हमारा स्वागत किया। स्वदेश के जिस क़स्बे में मैं जन्मी और बड़ी हुई; वहाँ का स्नेह, सादगी, अजनबियों को अपना बना लेने का जज़्बा मुझे दुनिया के किसी भी कोने में नहीं मिला। उसे इस शहर में पाकर मुझे सुखद अनुभूति हुई। ऐसा लगा कि मेरे बच्चे भी वैसे ही माहौल में पलकर बड़े होंगे जिस तरह के परिवेश में मेरा बचपन बीता था। एक माह तक मैं अपने आप को व्यवस्थित करने में लगी रही। घर के निकट कौन से शॉपिंग सेंटर हैं, भारतीय ग्रोसरी स्टोर कहाँ हैं, बच्चों के स्कूल की बस कितने बजे और कहाँ आकर रुकती है, बस यही जानकारियाँ लेने में उलझी रही। पड़ोस में क्या हो रहा है, कुछ जान नहीं पाई और पड़ोस की गतिविधियों में हिस्सा भी नहीं ले पाई। कार में आते-जाते, आस-पास वालों से हाय.... और बाय ज़रूर हुई। मैंने देखा एक बुज़ुर्ग महिला, ठीक हमारे घर के सामने अपने बरामदे में बैठीं; बच्चों को स्कूल जाते देख रहीं थीं। मैंने एक बात नोटिस की, सारे बच्चों ने अपने माँ-बाप को 'बाय' कहने के बाद, उन्हें भी-"बाय ग्रैंडमाँ, सी यू ऑफ्टर स्कूल" कहकर हवा में चुम्मन उछाला। वह भी उन्हें फ्लाइंग किस्स देते हुए मुस्करा रहीं थीं। सुकन्या, हमारे साथ वाले घर की पड़ोसन से मैंने उनके बारे में पूछा तो उसने मुझे बताया -"पारुल, इनका नाम मिसिज़ हाइडी है और हमारे सब-डिविज़न में सबसे पुरानी हैं। पाँच साल पहले मिस्टर हाइडी की डेथ हो गई और मिसिज़ हाइडी अकेली रह गईं।" "क्या इनके बच्चे नहीं?" मैंने पूछा। "हैं... दो बेटे। पर नाम के। मिस्टर हाइडी की डेथ पर आए थे। उसके बाद आज तक उन्होंने कभी मिसिज़ हाइडी से पूछा नहीं- "माँ तुम कैसी हो?" मिसिज़ हाइडी ही पोते-पोतियों, बेटे-बहुओं को उपहार भेजती रहती हैं। उनकी तरफ़ से तो कभी यह भी उत्तर नहीं आया कि माँ उपहार मिल गए या माँ तुम इतना खर्च क्यों करती हो। "ओह ! मिसिज़ हाइडी की आँखों का ख़ालीपन मैंने पहले दिन ही देखा था।" मेरे मुँह से अचानक निकल गया। "हम सब इनका बहुत ख़याल रखते हैं। सुबह की कॉफ़ी हाइडी आंटी के साथ इसीलिए पी जाती है कि उनकी सुबह रौनक से शुरू हो। और फिर जो भी कोई स्पेशल डिश कुक करता है, वह आंटी को ज़रूर दी जाती है।" सुकन्या ने बताया। शाम को बच्चे स्कूल से लौटकर आए तो बस से निकलते ही "ग्रैंडमाँ" कहते हुए हाइडी आंटी की तरफ भागे। उन्होंने सबको अपने हाथों से बनाए बिस्कुट खाने को दिए। बिस्कुट थामे बच्चे उछलते-कूदते अपने माँ-बाप के साथ घरों को चले गए। जब तक बच्चे आँखों से ओझिल नहीं हो गए; हाइडी आंटी की आँखों और होंठों पर मुस्कराहट उदासी की चादर ओढ़े रही। उसके बाद जिस तरह उठकर वे घर के अंदर गईं, लगा अकेलेपन का बोझा उनसे ढोया नहीं जा रहा। अपनी रसोई की खिड़की से मैं उन्हें देख सकती हूँ। बिस्कुट खाते हुए मेरे बच्चे चहके -"आसम बिस्कुट! मॉम, शी लुक्स लाइक अवर नानी।" बच्चों ने सही कहा, मेरी माँ तो हाइडी आंटी से भी अधिक अकेली हैं। मैं पाँच वर्ष की थी और मँझला भाई दस का तथा बड़ा भाई पन्द्रह का; जब बाबू जी हमें छोड़ कर चले गए। बैठे-बैठे ही लुढ़क गए थे और माँ वर्षों इस सच को स्वीकार नहीं कर पाईं थीं। माँ अपने माँ-बाप की इकलौती संतान थीं। बाबूजी के बाद नाना-नानी हमें अपने घर ले आए। मेरी शादी के कुछ वर्षों बाद तक माँ को नाना-नानी का सुख मिलता रहा। उनके जाने के बाद माँ ने अपने जीवन में आए शून्य को कभी बड़े भाई के बच्चे पालने में और कभी छोटे भाई के बच्चों की देख-भाल से भर लिया। उन वर्षों में मैं जब भी माँ से मिलने गई, निराश लौटी। माँ के पास मेरे लिए समय ही नहीं होता था। पर सकून था -माँ व्यस्त है.....वर्षों माँ को अपने जीवन के ख़ालीपन का एहसास नहीं हुआ। और अगर हुआ भी तो उसे भरने के कई विकल्प माँ के पास थे। गत कई वर्षों से मैंने माँ में एक परिवर्तन देखा है। माँ की चमकती आँखें और मुस्कराते होंठ बुझ से गए हैं। माँ का दोमंज़िला पैतृक घर है; जिसके निचले हिस्से में मेरा बड़ा भाई और ऊपरी मंज़िल पर छोटा भाई रहता है। माँ छह महीने बड़े भाई और छह महीने छोटे भाई के पास रहती है। भाई-भाभियाँ सुबह अपने-अपने काम पर चले जाते हैं और बच्चे स्कूल-कॉलेज। माँ अकेली रह जाती हैं। शाम को घर आते ही सब अपने में व्यस्त हो जाते हैं। माँ के भीतर और बाहर शून्य बढ़ने लगा है। घर के कामों में माँ सहायता करना चाहती हैं, तो वह भाभियों को अपनी गृहस्थी में दखल लगता है। मैं कई बार माँ को समझा चुकी हूँ -"माँ यह शायद आपका भ्रम है; जब भाभियों के बच्चे आप पाल रहे थे और पूरा घर आपके हवाले था; तब दखल नहीं था।" माँ बस रो देती हैं और कहती हैं -"तुम नहीं समझोगी। इतनी बेवकूफ़ लगती हूँ ,जो भ्रम और सच का अंतर न जान सकूँ।" बेवजह और फ़िज़ूल की बातों पर जब दोनों भाइयों के परिवार झगड़ते हैं तो माँ के लिए कोई स्थान नहीं रह जाता। हाइडी आंटी के सिर पर कम से कम छत तो अपनी है, माँ के पास तो वह भी नहीं। माँ टूट गई है। बिखर गई है। अकेलेपन का दर्द और उदासी अब उनके चेहरे और बदन से झलकने लगी है। कैसे बताऊँ माँ को कि मैं एक औरत की तरह उन्हें महसूस करने लगी हूँ। भीतरी भावों को समझती हूँ। माँ बाबूजी को जिस तरह याद करती हैं, महसूस किया जा सकता है कि माँ अपनी वेदना बाबूजी के साथ बाँटना चाहती है। माँ को कोई साथी चाहिए। बुढ़ापे का सहारा चाहिए। माँ सिर्फ माँ नहीं, औरत है, इंसान है। उसे भी जीने का हक़ है। माँ की जगह अगर बाबू जी होते तो सबसे पहले उनकी शादी कर दी जाती और फिर परिवार तथा समाज के लोग बड़ी सफ़ाई से कहते - "क्या करे बेचारा पुरुष! कैसे बच्चे पाले? जाने वाली चली गई अब पहाड़ जैसी ज़िन्दगी यह अकेले कैसे काटे? जीवन जीने के लिए साथी तो चाहिए।" और.... औरत की ज़िन्दगी पहाड़ जैसी नहीं होती, उसे किसी का साथ नहीं चाहिए? परिवार और समाज की इस दोहरी मानसिकता से मैं चिढ़ती हूँ। रोष से भर जाती हूँ। लपक-लपक कर बाहर आने वाले भावों को अंदर ही गटक जाती हूँ। ज़ुबान खुल गई तो अनर्थ हो जाएगा। मुझे तो कोई कुछ कह नहीं पाएगा, यह कह कर नकार देंगे; विदेश से आई है, इसलिए ऐसी बातें करती है, पर माँ का वहाँ रहना दूभर हो जाएगा। विदेश प्रवास ने सोचने और समझने के नज़रिए को बहुत व्यापक कर दिया है। स्त्री है या पुरुष सबके भीतर एक सी चेतना है और सभी पहले इंसान हैं उसके बाद कुछ और.... मानव जीवन की यहाँ बहुत क़द्र की जाती है। विदेश के परिवेश ने मानवी भावनाओं को समझने और जानने के दृष्टिकोण में ही बहुत परिवर्तन ला दिया है। देश में लोग जिन बातों को अपनी सुविधानुसार नज़रअंदाज़ कर देते हैं, विशेषतः स्त्रियों के लिए। वे दुःख पहुँचाती हैं। स्त्री सिर्फ बेटी, बहन, पत्नी और माँ ही नहीं, मानवी जज़्बात भी रखती है। बस उसके संवेगों को ही दबाया जाता है, ताकि पितृसत्ता अपना वर्चस्व रख सके। अफ़सोस पारिवारिक और सामाजिक स्तर पर नारी ही नारी का शोषण करती है। वह अपनी जात का साथ नहीं देती। माँ को अपने साथ यहाँ लाने की मैंने बहुत ज़िद की थी पर माँ नहीं मानी। अपने संस्कारों में बँधी उनकी सोच, वे बेटी के घर में कैसे आकर रहें ? माँ के दर्द को मैं दूर बैठी भी महसूस कर रही हूँ पर कुछ कर नहीं सकती। हाइडी आंटी से रोज़ मिल लेती हूँ, ऐसा लगता है माँ से मिल ली। शाम को रसोई में बर्तन साफ़ करते हुए खिड़की से बाहर नज़र पड़ी, हाइडी आंटी के घर के आगे एक कार आकर रुकी और एक बुज़ुर्ग फूलों का गुच्छा हाथ में लिये कार से निकले और उनके घर की डोर बेल बजाने लगे। मैं वहीं खड़ी देखती रही। आंटी ने मुस्कराते हुए दरवाज़ा खोला। आंटी खूब सजी-धजी थीं। मैंने सोचा कोई पहचान वाला होगा और अपने कामों में लग गई। तक़रीबन रोज़ ही वह कार मैं आंटी के घर के आगे देखने लगी। आंटी के शरीर की स्फूर्ति स्पष्ट दिखाई देने लगी और चेहरे पर आई चमक दमकने लगी। हममें से किसी ने इस बारे कोई बात नहीं की। आंटी के साथ वही दिनचर्या रही। रोज़ की तरह बच्चों को स्कूल बस में चढ़ा कर, हम सब पड़ोसने सैर को जाने लगीं तो हमारे ही घर के दाईं तरफ में रहने वाली गैब्रियल ने हमें आंटी और जॉर्ज की शादी का निमंत्रण दिया। तब मुझे सारी कहानी का पता चला। हाइडी आंटी और जॉर्ज चर्च में मिले थे। जार्ज भी विधुर हैं और उनका कोई बच्चा नहीं। दोनों के हमसफ़र इस उम्र में उनका साथ छोड़ गए। अकेले, भीतर शून्य से भरे, दर्द ही दोनों का साँझा है। चर्च के सब मित्रों ने उन्हें सलाह दी कि बाकी बची ज़िन्दगी एक दूसरे का सहारा बन कर, एक दूसरे का दुःख-सुख बाँटते हुए बिता लें। आंटी और जॉर्ज को भी महसूस हुआ कि इस उम्र में कोई बातें सुनने -सुनाने वाला, साथ हँसने- रोने वाला मित्र चाहिए। ढलती उम्र में शिथिल होती इन्द्रियाँ और पल-पल परिवर्तित होती मनःस्थिति में सखा भाव परोक्ष और अपरोक्ष रूप से सम्बन्धों में छाया रहता है। इसी सखा भाव के लिए उन्होंने शादी का फैसला कर लिया। हमारे बच्चों को विशेष रूप से बुलाया गया। सैर करते हुए सुकन्या दूसरी पड़ोसन ने एक रहस्योद्घाटन किया, जॉर्ज और हाइडी आंटी ने अपनी विल भी कर दी है कि उनकी मृत्यु के बाद उनके घरों पर हाइडी के बच्चों का कोई अधिकार नहीं होगा और उनके घर चर्च को दिए जाएँ। घरों से मिलने वाले पैसे से ग़रीब बच्चों को पढ़ाया जाए।
आज फिल्म 'फुकरे 3' सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। जिसके बाद सोशल मीडिया पर धमाल मच गया है। बॉलीवुड के उम्दा एक्टर पंकज त्रिपाठी, पुलकित सम्राट , वरुण शर्मा और ऋचा चड्ढा की फिल्म 'फुकरे 3' गुरुवार यानी 28 सितंबर को सिनेमाघरो में रिलीज हो गई है। इस फिल्म के पहले 2 पार्ट दर्शकों के पेट में दर्द कर चुके हैं वहीं, जैसे ही आज फिल्म आई सोशल मीडिया पर छा गई। ट्विटर पर दर्शकों ने फिल्म को देखने के बाद अपने-अपने रिएक्शन देने शुरू भी कर दिए हैं। रिपोर्ट्स की मानें तो फुकरे 3 को दर्शक काफी अच्छा रिस्पॉन्स दे रहे हैं। लोगों को ऋचा चड्ढा की एक्टिंग काफी पसंद आ रही है। इस मूवी को लेकर लोग ट्विटर पर जमकर रिएक्शन आ रहे हैं। एक ने लिखा,' फिल्म में पंकज त्रिपाठी ने काफी शानदार एक्टिंग की है। हमेशा की तरह उन्होंने दिल जीत लिया है। वहीं, एक यूजर ने लिखा जवान के बाद कोई फिल्म देखने लायक है तो वो ये है कुल मिलकार मूवी अच्छी है।' फुकरे 3 की बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हुई है। रिपोर्ट्स की मानें ओपनिंग डे पर 'फुकरे 3' 8-10 करोड़ रुपए का कलेक्शन कर सकती है। बता दें कि हाल ही में शाहरुख खान की फिल्म जवान भी रिलीज हुई है। फुकरे 3 की टक्कर जवान से होने वाली है। ऐसे में देखना ये दिलचस्प होगा कि फुकरे 3 कैसा परफॉर्म करती है।
आज फिल्म 'फुकरे तीन' सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। जिसके बाद सोशल मीडिया पर धमाल मच गया है। बॉलीवुड के उम्दा एक्टर पंकज त्रिपाठी, पुलकित सम्राट , वरुण शर्मा और ऋचा चड्ढा की फिल्म 'फुकरे तीन' गुरुवार यानी अट्ठाईस सितंबर को सिनेमाघरो में रिलीज हो गई है। इस फिल्म के पहले दो पार्ट दर्शकों के पेट में दर्द कर चुके हैं वहीं, जैसे ही आज फिल्म आई सोशल मीडिया पर छा गई। ट्विटर पर दर्शकों ने फिल्म को देखने के बाद अपने-अपने रिएक्शन देने शुरू भी कर दिए हैं। रिपोर्ट्स की मानें तो फुकरे तीन को दर्शक काफी अच्छा रिस्पॉन्स दे रहे हैं। लोगों को ऋचा चड्ढा की एक्टिंग काफी पसंद आ रही है। इस मूवी को लेकर लोग ट्विटर पर जमकर रिएक्शन आ रहे हैं। एक ने लिखा,' फिल्म में पंकज त्रिपाठी ने काफी शानदार एक्टिंग की है। हमेशा की तरह उन्होंने दिल जीत लिया है। वहीं, एक यूजर ने लिखा जवान के बाद कोई फिल्म देखने लायक है तो वो ये है कुल मिलकार मूवी अच्छी है।' फुकरे तीन की बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हुई है। रिपोर्ट्स की मानें ओपनिंग डे पर 'फुकरे तीन' आठ-दस करोड़ रुपए का कलेक्शन कर सकती है। बता दें कि हाल ही में शाहरुख खान की फिल्म जवान भी रिलीज हुई है। फुकरे तीन की टक्कर जवान से होने वाली है। ऐसे में देखना ये दिलचस्प होगा कि फुकरे तीन कैसा परफॉर्म करती है।
१५० की तेरों कयुं के, जीव ? अजयकुंमारे बींक खावाबी तेने कथुंके, तुं जीव अथवा मर ? अने कालसौकरिकें ढींक खावाथी कह्युं के, तुं जीव नहीं ? सेम मर पण नही ? हवे प्रजुने मरवानुं कहेवाची राजायें गुस्से घश, पोताना सुजटोने हुकम कर्योके अहींथी उठे त्यारे एने पकडवो. पछी देशनाने अंते ते कुष्टी प्रजुने नमस्कार करी उठ्यो, के, तुरत श्रेणिकना सुनटोए तेने घेरी लीधो. एटलामां ते दिव्यरूपने धारण करीने आकाशमां छडी गयो. त्यारे राजायें प्रजुने तेविषे पुढवाथी, तेमणें कयुं के, ए देव इतो. त्यारे राजाए फरीने प्रभुने पुड्युं के, हे जगवन् ! ए देव केम थयो ? तथा कुष्टी पण केम थयो ? त्यारे प्रजुए कह्युं के, वत्सदेशमां कोशांबी नामें नगरी बे, त्यां शतानीक नामें राजा हतो. ते नगरमां महादरिय अने मूर्ख, एवो सेडुक नामें ब्राह्मण हतो. एक दहाडो तेनी गर्जिणी स्त्रीए घी आदिक लाववानुं कह्युं. त्यारें तेणें कह्युं के, मारामां कं पण कुशलता नथी, के हुं ते लावी शकुं. त्यारे तेनी स्त्रीए कह्युं के, तुं राजानी सेवा कर ? त्यांथी तने प्राप्ति थशे ते वात अंगीकार करीने पुष्प आदिकथी ते राजाने सेववा लाग्यो. एटलामां एक दहाडो चंपाना राजाए, कोशांबी नगरीने घेरो घाल्यो. ते वखते कोशांबीनो राजा लश्करसहित अंदर रह्यो हतो, तथा लडवावास्ते अवसर जोतो हतो पढी वर्षाऋतु यावी त्यारे चंपानो राजा पण त्यांची पाठो पोतानी नगरी तरफ जवाने उपड्यो. ते त्रखते सेडुक ब्राह्मण पुष्पो माटे बगीचामां गयो हतो, त्यारे तेणे चंपाना राजाने लश्कररहित जोयो. तेज बखतें तेणें शतानीकने यावी कथुं के, तारो शत्रु की लश्करवालो थर उपडी जवानी तैयारी करे बे. माटे श्रत्यारे जो तुं तेनापर हल्लो करीश तो जीतीश. त्यारे राजाए पण लश्करसहित बहार नीकलीने तेनापर इल्लो कर्यो; ते वखते चंपानो राजा पण लश्कर दूर निकली जवाथी लड्याविना नाशवा लाग्यो, त्यारे तेना हाथी, घोडा, भंडार आदिक जे बाकी रह्युं हतुं, ते कोशांबीना राजाए ग्रहण कर्यु. पडी तेणें सेडुकप्रत्ये तुष्टमान यश् कह्युं के तारे जे जोइए ते माग्य त्यारे तेणें कह्युं के, हुं मारी स्त्रीने पुढीने मागीश. पढ़ी तेणें ते सघल्ली बीना स्त्रीने जपावी, त्यारें ते बुद्धिमती स्त्रीए विचार्यु के, था राजापासेची गाम आदिक मेलवशे, तो धनवान् थइ बीजी स्त्रीज परपशे; एम विचारि
एक सौ पचास की तेरों कयुं के, जीव ? अजयकुंमारे बींक खावाबी तेने कथुंके, तुं जीव अथवा मर ? अने कालसौकरिकें ढींक खावाथी कह्युं के, तुं जीव नहीं ? सेम मर पण नही ? हवे प्रजुने मरवानुं कहेवाची राजायें गुस्से घश, पोताना सुजटोने हुकम कर्योके अहींथी उठे त्यारे एने पकडवो. पछी देशनाने अंते ते कुष्टी प्रजुने नमस्कार करी उठ्यो, के, तुरत श्रेणिकना सुनटोए तेने घेरी लीधो. एटलामां ते दिव्यरूपने धारण करीने आकाशमां छडी गयो. त्यारे राजायें प्रजुने तेविषे पुढवाथी, तेमणें कयुं के, ए देव इतो. त्यारे राजाए फरीने प्रभुने पुड्युं के, हे जगवन् ! ए देव केम थयो ? तथा कुष्टी पण केम थयो ? त्यारे प्रजुए कह्युं के, वत्सदेशमां कोशांबी नामें नगरी बे, त्यां शतानीक नामें राजा हतो. ते नगरमां महादरिय अने मूर्ख, एवो सेडुक नामें ब्राह्मण हतो. एक दहाडो तेनी गर्जिणी स्त्रीए घी आदिक लाववानुं कह्युं. त्यारें तेणें कह्युं के, मारामां कं पण कुशलता नथी, के हुं ते लावी शकुं. त्यारे तेनी स्त्रीए कह्युं के, तुं राजानी सेवा कर ? त्यांथी तने प्राप्ति थशे ते वात अंगीकार करीने पुष्प आदिकथी ते राजाने सेववा लाग्यो. एटलामां एक दहाडो चंपाना राजाए, कोशांबी नगरीने घेरो घाल्यो. ते वखते कोशांबीनो राजा लश्करसहित अंदर रह्यो हतो, तथा लडवावास्ते अवसर जोतो हतो पढी वर्षाऋतु यावी त्यारे चंपानो राजा पण त्यांची पाठो पोतानी नगरी तरफ जवाने उपड्यो. ते त्रखते सेडुक ब्राह्मण पुष्पो माटे बगीचामां गयो हतो, त्यारे तेणे चंपाना राजाने लश्कररहित जोयो. तेज बखतें तेणें शतानीकने यावी कथुं के, तारो शत्रु की लश्करवालो थर उपडी जवानी तैयारी करे बे. माटे श्रत्यारे जो तुं तेनापर हल्लो करीश तो जीतीश. त्यारे राजाए पण लश्करसहित बहार नीकलीने तेनापर इल्लो कर्यो; ते वखते चंपानो राजा पण लश्कर दूर निकली जवाथी लड्याविना नाशवा लाग्यो, त्यारे तेना हाथी, घोडा, भंडार आदिक जे बाकी रह्युं हतुं, ते कोशांबीना राजाए ग्रहण कर्यु. पडी तेणें सेडुकप्रत्ये तुष्टमान यश् कह्युं के तारे जे जोइए ते माग्य त्यारे तेणें कह्युं के, हुं मारी स्त्रीने पुढीने मागीश. पढ़ी तेणें ते सघल्ली बीना स्त्रीने जपावी, त्यारें ते बुद्धिमती स्त्रीए विचार्यु के, था राजापासेची गाम आदिक मेलवशे, तो धनवान् थइ बीजी स्त्रीज परपशे; एम विचारि
India vs Sri Lanka, 1st Test: विराट कोहली (Virat Kohli) अपना 100वां टेस्ट मैच खेल रहे हैं. श्रीलंका के खिलाफ पहले टेस्ट की पहली पारी में कोहली 45 रन बनाकर आउट हुए. यह बल्लेबाज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 70 शतक जड़ चुका है. वह सर्वाधिक इंटरनेशनल सेंचुरी जड़ने वाले तीसरे बल्लेबाज हैं. विराट आईपीएल (IPL) में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर (RCB) की ओर से खेलते हैं. हालांकि इस बार वह आरसीबी कप्तान के तौर पर नजर नहीं आएंगे. आरसीबी के क्रिकेट संचालन निदेशक माइक हेसन (Mike Hesson) ने विराट कोहली की तारीफ की है. हेसन के मुताबिक विराट कोहली जैसे खिलाड़ियों को कोई बल्लेबाजी करना नहीं सिखा सकता और यह सिर्फ उन पहलुओं में इजाफा करने से जुड़ा है जो इस क्रिकेटर को पहले से पता है.
India vs Sri Lanka, एकst Test: विराट कोहली अपना एक सौवां टेस्ट मैच खेल रहे हैं. श्रीलंका के खिलाफ पहले टेस्ट की पहली पारी में कोहली पैंतालीस रन बनाकर आउट हुए. यह बल्लेबाज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सत्तर शतक जड़ चुका है. वह सर्वाधिक इंटरनेशनल सेंचुरी जड़ने वाले तीसरे बल्लेबाज हैं. विराट आईपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर की ओर से खेलते हैं. हालांकि इस बार वह आरसीबी कप्तान के तौर पर नजर नहीं आएंगे. आरसीबी के क्रिकेट संचालन निदेशक माइक हेसन ने विराट कोहली की तारीफ की है. हेसन के मुताबिक विराट कोहली जैसे खिलाड़ियों को कोई बल्लेबाजी करना नहीं सिखा सकता और यह सिर्फ उन पहलुओं में इजाफा करने से जुड़ा है जो इस क्रिकेटर को पहले से पता है.
जयपुर, दिल्ली, गंगानगर, बीकानेर तथा चुरू जैसी जगहों से सीकर के लिए बसें उपलब्ध होती हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग, एन. एच. -11 सीकर को जयपुर, बीकानेर और देश के अन्य भागों से जोड़ता है। यह हाइवे जल्दी ही एक चार लेन वाला हाइवे बनने जा रहा है जो कि इस क्षेत्र की कनेक्टिविटी को बहुत अच्छा बना देगा।
जयपुर, दिल्ली, गंगानगर, बीकानेर तथा चुरू जैसी जगहों से सीकर के लिए बसें उपलब्ध होती हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग, एन. एच. -ग्यारह सीकर को जयपुर, बीकानेर और देश के अन्य भागों से जोड़ता है। यह हाइवे जल्दी ही एक चार लेन वाला हाइवे बनने जा रहा है जो कि इस क्षेत्र की कनेक्टिविटी को बहुत अच्छा बना देगा।
ये देख कर वो और भी अचरज में पड़ गया। क्योंकि उसको बिना अम्बाला के घर नहीं आना था। वो वापिस जंगल की ओर भागा पर जंगल में प्रवेश करते ही वो खुद को उसी जगह पाता है। जहाँ वो थोड़ी देर पहले गिरा था। ऐसा वो कई बार करता है। लेकिन असफल ही होता। थक हार कर वो अपने किले की ओर जाता है। जंगल से किले तक उसने कुछ अजीब दृश्यों को देखा जैसे कुछ ऐसी इमारतें जो उसने खंडर हाल में छोड़ी थी अब एक दम नई हो गई थी। कुछ लोग जिनको हम्जा ने अंतिम बार वृद्ध अवस्था में देखा था। मगर अब वो चमत्कारी रूप से युवा दिखाई देते थे। यहाँ तक कि हम्जा उनको रोक कर उनसे बात करना चाहता है। तो वो हम्जा की बातों को नहीं सुनते और अनदेखा कर वहाँ से निकल जाते है। अपनी उलझनों के साथ जब हम्जा अपने महल पहुँचा तो वहाँ का नज़ारा देख कर उसको सब समझ आ गया। कि असल में हो क्या रहा है। हम्जा अभी भी अपने वर्तमान समय में नहीं पहुँचा था, बल्कि ऐसे समय में पहुँचा था जिस समय में उसका जन्म हुआ था, वो भी खास अपने जन्म वाले दिन, जिसका अनुमान उसको महल की कुछ बातों से ले गया था। साथ में लोग उसको अनदेखा नहीं कर रहे थे बल्कि वो इस बार अदृश्य हो कर समय में पीछे आया था, जिसके कारण वो किसी को भी दिखाई नहीं दे रहा था। इन सब का तो केवल एक ही अर्थ निकलता था, की ये वाली समय यात्रा में हम्जा को केवल कुछ जानकारी ही प्राप्त करनी है। और किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करना। बल्कि वो चाह कर भी ऐसा नहीं कर सकता, वो किसी भी बदलाव को करने में असमर्थ था। अदृश्य होने के कारण वो बिना रोक टोक महल में प्रवेश कर लेता है। उसके बाद वो देखता है। उसके पिता अत्यंत चिंतित खड़े हम्जा के जन्म की प्रतीक्षा कर रहे है। यहाँ हम्जा के पिता की अपने मंत्री से कुछ बातें वो सुनता है। जिसका आज से पहले हम्जा को कोई ज्ञान ना था। राजा " महा मंत्री हमें भय है। कही इस बार भी हमारी संतान मृत पैदा ना हो। महामंत्री " महाराज मुझे पूरा विश्वास है। इस बार ऐसा नहीं होगा, राजा " पिछले तीन वर्षों में रानी ने तीन पुत्रों को जन्म दिया और दुर्भाग्य से तीनों ही संतान मृत पैदा हुई। इस बार भी अगर ऐसा हुआ तो मैं ये पीड़ा सहन नहीं कर पाऊंगा। हम्जा अपने पिता की इन बातों को सुनते समय उनको भावुक देख कर खुद भी भावुक हो गया था। और मन ही मन बोल रहा था, पिता जी आज आपको निश्चिंत एक जीवित बालक होगा। जिसका नाम माँ हम्जा रखेंगी, लेकिन ये क्या कक्ष से दाई निकल कर आई। और बोली " क्षमा कीजिये गा महाराज आपको इस बार भी मृत संतान हुई है। इस बात ने मानो राजा का कलेजा चिर दिया हो। उनको ऐसी पीड़ा होने लगी जिसका भार उठाना उनके लिए असहनीय था। वही इन सब को सुन और देख हम्जा राजा से भी अधिक आश्चर्य में पड़ गया, और हो भी क्यों न यदि आपको अचानक पता चले कि आपके जन्म लेते ही आप परलोक सिधार गए थे तो आपको कैसा लगेगा। अभी ये सूचना राजा को मिले हुए कुछ क्षण ही बीते थे कि एक सैनिक दौड़ता हुआ आया और बोला " महाराज बिना अनुमति आने के लिए क्षमा चाहता हूँ लेकिन बाहर एक स्वामी जी आये है। वो बेहद जोर डाल कर कह रहे है। आप के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना है। राजा इस समय अपने दुख में डूबा हुआ था उसको इस समय संसार की किसी भी बात से लगाव नहीं था इसलिए वो मोन रहा और राजा को मोन देख कर महामंत्री ने ही उसको आदेश दे दिया " स्वामी जी को बोल दो अभी उचित समय नहीं है। बाद में आए। इतना बोल कर वो सैनिक रुक गया, अब राजा का भी ध्यान उस स्वामी की ओर गया और वो आगे की बात जानने के लिए बोले " और.. और क्या..? इस पर सैनिक डरते हुए बोला " महाराज यदि मेरे मुंह से कुछ अनुचित निकले तो मुझे क्षमा कीजिएगा, स्वामी जी ने बताया आज आपको एक पुत्र की प्राप्ति होगी, जिसको मृत समझा जाएगा किन्तु वो मृत नहीं होगा। हाँ यदि जल्द ही उस नए-नए जन्मे शिशु का उपचार न किया गया तो वो अवश्य मर जायेगा, जिस प्रकार एक रेगिस्तान में भटकते प्यासे को पानी मिल जाने पर नया जीवन सा मिल जाता है। ठीक उसी प्रकार से अब राजा को भी एक नया जीवन दान मिलता नज़र आने लगा। राजा की जान में जान आ गई और राजा ने बड़े ही आदरपूर्वक स्वामी जी को लाने का आदेश दे दिया। कुछ देर में स्वामी जी एक संदूक के साथ महल में प्रवेश करते है। जिन्हें देख कर राजा स्वामी के चरणों में जा गिरे और बड़े करुणामय स्वर में बोले " हे महात्मा कृपा मेरे जीवन को सफल करो मैं जीवन भर आपका क्षणी रहूंगा। वो स्वामी राजा के नवजात जन्मे मृत शिशु को उसके सामने लाने का आदेश देता है। जिसे सुन कर शीघ्र ही आदेश का पालन किया गया। स्वामी एक ओर उस बालक को ओर दूसरी ओर उस संदूक को रख कर। कुछ मंत्रों का जाप करना आरंभ करता है। अंत में उस संदूक से कुछ निकाल कर उस नव जात शिशु के मुंह में डाल देता है। इस क्रिया के समाप्त होते ही बालक चमत्कारी रूप से जीवित हो उठा। बालक की किलकारियां गुंज उठी जिसे सुन निर्बल पड़ी माता के भीतर भी जैसे प्राण आ गए हो और वो दौड़ती हुई अपने बच्चे को छाती से लगाने आ गई। इस को देख कर हम्जा को समझ आ गया कि वो कैसे जीवित है। इसके बाद राजा स्वामी को बहुत सी धन राशि भेंट स्वरूप देते है। मगर वो कुछ नहीं लेता और वहां से चला जाता है। जिसको देख कर केवल राजा ही नहीं अब हम्जा भी उसको एक महापुरुष मानने लगा। फिर हम्जा काफी देर तक अपने माता पिता को खुद पर प्रेम और स्नेह लुटाता देख इस दृश्य से आनंदित होता है। ऐसे आनंदमय दृश्यों को देखने का सौभाग्य कुछ दुर्लभ व्यक्तियों को ही प्राप्त होता है। इस लिए हम्जा इस के प्रत्येक क्षण का रस पान करने का इच्छुक था। मगर ऐसा ना हो सका तभी अचानक सब कुछ उसकी आँखों से ओझल हो गया। वो खुद को फिर उस जगह पर पाता है। जहाँ वो थोड़े समय पहले आया था। वो फिर से दौड़ कर महल के अंदर गया। और महल में उसको फिर से वो सब होता दिखा जो कुछ देर पहले होता है। वही अपने पिता और महामंत्री की बातें होते देखना, दाई द्वारा उसको मृत घोषित करना और अंत में स्वामी जी का आगमन। ये सब देख उसको ये तो समझ आ गया कि किसी कारण वश ही ये सब हो रहा है। और इन सब में ही कोई भेद छुपा है। अबकी बार वो महल में ना रुक कर उस स्वामी का पीछा करने लगा। कुछ दूरी पर चल कर हम्जा देखता है। वो स्वामी उसी शापित जंगलों में से हो कर कही जा रहा था। इसे देख कर हम्जा भी उसके पीछे जंगल में प्रवेश कर गया जिसमें इस बार उसको किसी प्रकार की कठिनाई नहीं हुई, रास्ते में वो स्वामी अपने वस्त्र उतार कर एक नए रूप में परिवर्तित होने लगा जिसे देख कर साफ था वो कोई मनुष्य नहीं है। जब वो पूरी तरह से अपने असली रूप में आ गया तो हम्जा ने देखा कि उसका शरीर मांस का नहीं बल्कि जलते अंगारों से बना था। जो दहकती अग्नि समान लग रहा था वो अब भी चले जा रहा था और हम्जा उसका पीछा करता रहा। थोड़ी दूर चल कर वो रुक गया। तो वहाँ से आगे जा कर हम्जा ने देखा कि उसकी ही तरह दो लोग और वहाँ पहले से उपस्थित है। जिनमें से एक महिला और दूसरा पुरुष था। इन सब की चाल ढाल इनका रूप इनका आकर और इनकी प्राकृतिक बनावट देख कर हम्जा समझ गया कि ये जीन परजाति के जीव है। इनके बारे में वो बचपन से किस्से कहानियों में अपनी माता गुल नाज़ से सुनता आया है। हम्जा एक कोने में खड़ा हो कर देखता है। कि पहले वाला जिन उन दोनों जीनों के आगे झुक कर बोलता है। कार्य सम्पूर्ण हुआ स्वामी अब ये भेद मेरे बली दान से यही दफन कर दीजिए। ऐसा बोल वो पहले वाला जीन अपनी गर्दन आगे कर देता है। और वो दोनों जीनों में से एक उसका सर धड़ से अलग कर उसको मार देते है। हम्जा के लिए ये रहस्य सुलझने की जगह और भी अधिक उलझ गया था। वो कुछ समझ नहीं पा रहा था। की एक बार फिर वो उसी समय और स्थान पर पहुँच गया जहाँ वो लगातार दो बार आ चुका था। अबकी बार वो महल में ना जाकर उस तरफ दौड़ता है। जहाँ वे तीनों जीन बातें कर रहे थे। वहाँ पहुँच कर हम्जा अब जो देखता है। उसको जीनों का सारा रहस्य समझ आ जाता है। असल में वो महिला और पुरुष का जीनी जोड़ा और कोई नहीं जीनों के राजा रानी थे। उनकी संतान एक ऐसी अवस्था में पैदा हुई जिसकी आत्मा तो जीवित थी पर शरीर निर्जीव अब उनको किसी भी हाल में अपनी संतान को जीवित रखना था तो उसके लिए उनके पास केवल एक ही उपाय था, जिसके लिए वो अंधकार की मदद द्वारा ऐसे मनुष्य की संतान जो एक विशेष नक्षत्रों में मृत पैदा हो उसका पता लगा कर अपने संतान की आत्मा का वास उसके शरीर के भीतर कर के उसको पुर्न जीवन प्रदान करें। इस प्रकार उनकी संतान एक मानव शरीर में जीवित रह सकती थी। इस प्रकार से उनकी क्रिया द्वारा उनकी संतान को बचा लिया गया। और वो संतान खुद हम्जा था। यदि हम अंधकार की सहायता लेते है। तो हमें अंधकार के साथ एक सौदा करना होता है। जिसका ज्ञान केवल अंधकार को और उस सौदा करने वाले को होगा। और इसी प्रकार से एक सौदा जीनों के राजा ने भी अंधकार के साथ किया था। जिसका मूल्य क्या है। ये किसी को नहीं पता। हम्जा इन सब को अपनी आंखों से देखने के बाद भी इस बात पर विश्वास नहीं कर पा रहा था कि वो आधा जीन और आधा मनुष्य है। तभी उसके दिमाग में एक तेज चुभती आवाज़ हुई, जिससे उसको भयंकर कष्ट होने लगा साथ ही कुछ दृश्य उसके दिमाग में चलने लगे। और जब तक वो दृश्य उसको दिखाई देते रहे उसकी आँखों का रंग सफेद हुआ रहा। उन दृश्यों में हम्जा सबसे पहले गजेश्वर राज्य को देखता है। फिर राजा भानु को जो संतान प्राप्ति के लिये जगह जगह जा कर प्राथना करते है। किंतु सब व्यर्थ जाता है। उसके बाद उनके पास एक शैतान का पुजारी आता है। जो उनको अंधकार से मदद लेने को कहता है। फिर हम्जा देखता है। राजा भानु अंधकार से संतान प्राप्ति के लिए एक सौदा करता है। उसके बाद वो इन्द्र और अम्बाला का जन्म देखता है। उसके बाद उस महायुद्ध की समाप्ति के बाद अम्बाला का उस पर हमला करना और अंत में हम्जा खुद को और अम्बाला को साथ देखता है। उसके बाद हम्जा को केवल अंधकार ही दिखाई देता है, और हम्जा अत्यंत पीड़ा के कारण मूर्छित हो कर गिर जाता है। उसकी आँखों से रक्त बहने लगा और वो मूर्छित ही रहा।
ये देख कर वो और भी अचरज में पड़ गया। क्योंकि उसको बिना अम्बाला के घर नहीं आना था। वो वापिस जंगल की ओर भागा पर जंगल में प्रवेश करते ही वो खुद को उसी जगह पाता है। जहाँ वो थोड़ी देर पहले गिरा था। ऐसा वो कई बार करता है। लेकिन असफल ही होता। थक हार कर वो अपने किले की ओर जाता है। जंगल से किले तक उसने कुछ अजीब दृश्यों को देखा जैसे कुछ ऐसी इमारतें जो उसने खंडर हाल में छोड़ी थी अब एक दम नई हो गई थी। कुछ लोग जिनको हम्जा ने अंतिम बार वृद्ध अवस्था में देखा था। मगर अब वो चमत्कारी रूप से युवा दिखाई देते थे। यहाँ तक कि हम्जा उनको रोक कर उनसे बात करना चाहता है। तो वो हम्जा की बातों को नहीं सुनते और अनदेखा कर वहाँ से निकल जाते है। अपनी उलझनों के साथ जब हम्जा अपने महल पहुँचा तो वहाँ का नज़ारा देख कर उसको सब समझ आ गया। कि असल में हो क्या रहा है। हम्जा अभी भी अपने वर्तमान समय में नहीं पहुँचा था, बल्कि ऐसे समय में पहुँचा था जिस समय में उसका जन्म हुआ था, वो भी खास अपने जन्म वाले दिन, जिसका अनुमान उसको महल की कुछ बातों से ले गया था। साथ में लोग उसको अनदेखा नहीं कर रहे थे बल्कि वो इस बार अदृश्य हो कर समय में पीछे आया था, जिसके कारण वो किसी को भी दिखाई नहीं दे रहा था। इन सब का तो केवल एक ही अर्थ निकलता था, की ये वाली समय यात्रा में हम्जा को केवल कुछ जानकारी ही प्राप्त करनी है। और किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करना। बल्कि वो चाह कर भी ऐसा नहीं कर सकता, वो किसी भी बदलाव को करने में असमर्थ था। अदृश्य होने के कारण वो बिना रोक टोक महल में प्रवेश कर लेता है। उसके बाद वो देखता है। उसके पिता अत्यंत चिंतित खड़े हम्जा के जन्म की प्रतीक्षा कर रहे है। यहाँ हम्जा के पिता की अपने मंत्री से कुछ बातें वो सुनता है। जिसका आज से पहले हम्जा को कोई ज्ञान ना था। राजा " महा मंत्री हमें भय है। कही इस बार भी हमारी संतान मृत पैदा ना हो। महामंत्री " महाराज मुझे पूरा विश्वास है। इस बार ऐसा नहीं होगा, राजा " पिछले तीन वर्षों में रानी ने तीन पुत्रों को जन्म दिया और दुर्भाग्य से तीनों ही संतान मृत पैदा हुई। इस बार भी अगर ऐसा हुआ तो मैं ये पीड़ा सहन नहीं कर पाऊंगा। हम्जा अपने पिता की इन बातों को सुनते समय उनको भावुक देख कर खुद भी भावुक हो गया था। और मन ही मन बोल रहा था, पिता जी आज आपको निश्चिंत एक जीवित बालक होगा। जिसका नाम माँ हम्जा रखेंगी, लेकिन ये क्या कक्ष से दाई निकल कर आई। और बोली " क्षमा कीजिये गा महाराज आपको इस बार भी मृत संतान हुई है। इस बात ने मानो राजा का कलेजा चिर दिया हो। उनको ऐसी पीड़ा होने लगी जिसका भार उठाना उनके लिए असहनीय था। वही इन सब को सुन और देख हम्जा राजा से भी अधिक आश्चर्य में पड़ गया, और हो भी क्यों न यदि आपको अचानक पता चले कि आपके जन्म लेते ही आप परलोक सिधार गए थे तो आपको कैसा लगेगा। अभी ये सूचना राजा को मिले हुए कुछ क्षण ही बीते थे कि एक सैनिक दौड़ता हुआ आया और बोला " महाराज बिना अनुमति आने के लिए क्षमा चाहता हूँ लेकिन बाहर एक स्वामी जी आये है। वो बेहद जोर डाल कर कह रहे है। आप के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना है। राजा इस समय अपने दुख में डूबा हुआ था उसको इस समय संसार की किसी भी बात से लगाव नहीं था इसलिए वो मोन रहा और राजा को मोन देख कर महामंत्री ने ही उसको आदेश दे दिया " स्वामी जी को बोल दो अभी उचित समय नहीं है। बाद में आए। इतना बोल कर वो सैनिक रुक गया, अब राजा का भी ध्यान उस स्वामी की ओर गया और वो आगे की बात जानने के लिए बोले " और.. और क्या..? इस पर सैनिक डरते हुए बोला " महाराज यदि मेरे मुंह से कुछ अनुचित निकले तो मुझे क्षमा कीजिएगा, स्वामी जी ने बताया आज आपको एक पुत्र की प्राप्ति होगी, जिसको मृत समझा जाएगा किन्तु वो मृत नहीं होगा। हाँ यदि जल्द ही उस नए-नए जन्मे शिशु का उपचार न किया गया तो वो अवश्य मर जायेगा, जिस प्रकार एक रेगिस्तान में भटकते प्यासे को पानी मिल जाने पर नया जीवन सा मिल जाता है। ठीक उसी प्रकार से अब राजा को भी एक नया जीवन दान मिलता नज़र आने लगा। राजा की जान में जान आ गई और राजा ने बड़े ही आदरपूर्वक स्वामी जी को लाने का आदेश दे दिया। कुछ देर में स्वामी जी एक संदूक के साथ महल में प्रवेश करते है। जिन्हें देख कर राजा स्वामी के चरणों में जा गिरे और बड़े करुणामय स्वर में बोले " हे महात्मा कृपा मेरे जीवन को सफल करो मैं जीवन भर आपका क्षणी रहूंगा। वो स्वामी राजा के नवजात जन्मे मृत शिशु को उसके सामने लाने का आदेश देता है। जिसे सुन कर शीघ्र ही आदेश का पालन किया गया। स्वामी एक ओर उस बालक को ओर दूसरी ओर उस संदूक को रख कर। कुछ मंत्रों का जाप करना आरंभ करता है। अंत में उस संदूक से कुछ निकाल कर उस नव जात शिशु के मुंह में डाल देता है। इस क्रिया के समाप्त होते ही बालक चमत्कारी रूप से जीवित हो उठा। बालक की किलकारियां गुंज उठी जिसे सुन निर्बल पड़ी माता के भीतर भी जैसे प्राण आ गए हो और वो दौड़ती हुई अपने बच्चे को छाती से लगाने आ गई। इस को देख कर हम्जा को समझ आ गया कि वो कैसे जीवित है। इसके बाद राजा स्वामी को बहुत सी धन राशि भेंट स्वरूप देते है। मगर वो कुछ नहीं लेता और वहां से चला जाता है। जिसको देख कर केवल राजा ही नहीं अब हम्जा भी उसको एक महापुरुष मानने लगा। फिर हम्जा काफी देर तक अपने माता पिता को खुद पर प्रेम और स्नेह लुटाता देख इस दृश्य से आनंदित होता है। ऐसे आनंदमय दृश्यों को देखने का सौभाग्य कुछ दुर्लभ व्यक्तियों को ही प्राप्त होता है। इस लिए हम्जा इस के प्रत्येक क्षण का रस पान करने का इच्छुक था। मगर ऐसा ना हो सका तभी अचानक सब कुछ उसकी आँखों से ओझल हो गया। वो खुद को फिर उस जगह पर पाता है। जहाँ वो थोड़े समय पहले आया था। वो फिर से दौड़ कर महल के अंदर गया। और महल में उसको फिर से वो सब होता दिखा जो कुछ देर पहले होता है। वही अपने पिता और महामंत्री की बातें होते देखना, दाई द्वारा उसको मृत घोषित करना और अंत में स्वामी जी का आगमन। ये सब देख उसको ये तो समझ आ गया कि किसी कारण वश ही ये सब हो रहा है। और इन सब में ही कोई भेद छुपा है। अबकी बार वो महल में ना रुक कर उस स्वामी का पीछा करने लगा। कुछ दूरी पर चल कर हम्जा देखता है। वो स्वामी उसी शापित जंगलों में से हो कर कही जा रहा था। इसे देख कर हम्जा भी उसके पीछे जंगल में प्रवेश कर गया जिसमें इस बार उसको किसी प्रकार की कठिनाई नहीं हुई, रास्ते में वो स्वामी अपने वस्त्र उतार कर एक नए रूप में परिवर्तित होने लगा जिसे देख कर साफ था वो कोई मनुष्य नहीं है। जब वो पूरी तरह से अपने असली रूप में आ गया तो हम्जा ने देखा कि उसका शरीर मांस का नहीं बल्कि जलते अंगारों से बना था। जो दहकती अग्नि समान लग रहा था वो अब भी चले जा रहा था और हम्जा उसका पीछा करता रहा। थोड़ी दूर चल कर वो रुक गया। तो वहाँ से आगे जा कर हम्जा ने देखा कि उसकी ही तरह दो लोग और वहाँ पहले से उपस्थित है। जिनमें से एक महिला और दूसरा पुरुष था। इन सब की चाल ढाल इनका रूप इनका आकर और इनकी प्राकृतिक बनावट देख कर हम्जा समझ गया कि ये जीन परजाति के जीव है। इनके बारे में वो बचपन से किस्से कहानियों में अपनी माता गुल नाज़ से सुनता आया है। हम्जा एक कोने में खड़ा हो कर देखता है। कि पहले वाला जिन उन दोनों जीनों के आगे झुक कर बोलता है। कार्य सम्पूर्ण हुआ स्वामी अब ये भेद मेरे बली दान से यही दफन कर दीजिए। ऐसा बोल वो पहले वाला जीन अपनी गर्दन आगे कर देता है। और वो दोनों जीनों में से एक उसका सर धड़ से अलग कर उसको मार देते है। हम्जा के लिए ये रहस्य सुलझने की जगह और भी अधिक उलझ गया था। वो कुछ समझ नहीं पा रहा था। की एक बार फिर वो उसी समय और स्थान पर पहुँच गया जहाँ वो लगातार दो बार आ चुका था। अबकी बार वो महल में ना जाकर उस तरफ दौड़ता है। जहाँ वे तीनों जीन बातें कर रहे थे। वहाँ पहुँच कर हम्जा अब जो देखता है। उसको जीनों का सारा रहस्य समझ आ जाता है। असल में वो महिला और पुरुष का जीनी जोड़ा और कोई नहीं जीनों के राजा रानी थे। उनकी संतान एक ऐसी अवस्था में पैदा हुई जिसकी आत्मा तो जीवित थी पर शरीर निर्जीव अब उनको किसी भी हाल में अपनी संतान को जीवित रखना था तो उसके लिए उनके पास केवल एक ही उपाय था, जिसके लिए वो अंधकार की मदद द्वारा ऐसे मनुष्य की संतान जो एक विशेष नक्षत्रों में मृत पैदा हो उसका पता लगा कर अपने संतान की आत्मा का वास उसके शरीर के भीतर कर के उसको पुर्न जीवन प्रदान करें। इस प्रकार उनकी संतान एक मानव शरीर में जीवित रह सकती थी। इस प्रकार से उनकी क्रिया द्वारा उनकी संतान को बचा लिया गया। और वो संतान खुद हम्जा था। यदि हम अंधकार की सहायता लेते है। तो हमें अंधकार के साथ एक सौदा करना होता है। जिसका ज्ञान केवल अंधकार को और उस सौदा करने वाले को होगा। और इसी प्रकार से एक सौदा जीनों के राजा ने भी अंधकार के साथ किया था। जिसका मूल्य क्या है। ये किसी को नहीं पता। हम्जा इन सब को अपनी आंखों से देखने के बाद भी इस बात पर विश्वास नहीं कर पा रहा था कि वो आधा जीन और आधा मनुष्य है। तभी उसके दिमाग में एक तेज चुभती आवाज़ हुई, जिससे उसको भयंकर कष्ट होने लगा साथ ही कुछ दृश्य उसके दिमाग में चलने लगे। और जब तक वो दृश्य उसको दिखाई देते रहे उसकी आँखों का रंग सफेद हुआ रहा। उन दृश्यों में हम्जा सबसे पहले गजेश्वर राज्य को देखता है। फिर राजा भानु को जो संतान प्राप्ति के लिये जगह जगह जा कर प्राथना करते है। किंतु सब व्यर्थ जाता है। उसके बाद उनके पास एक शैतान का पुजारी आता है। जो उनको अंधकार से मदद लेने को कहता है। फिर हम्जा देखता है। राजा भानु अंधकार से संतान प्राप्ति के लिए एक सौदा करता है। उसके बाद वो इन्द्र और अम्बाला का जन्म देखता है। उसके बाद उस महायुद्ध की समाप्ति के बाद अम्बाला का उस पर हमला करना और अंत में हम्जा खुद को और अम्बाला को साथ देखता है। उसके बाद हम्जा को केवल अंधकार ही दिखाई देता है, और हम्जा अत्यंत पीड़ा के कारण मूर्छित हो कर गिर जाता है। उसकी आँखों से रक्त बहने लगा और वो मूर्छित ही रहा।