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अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने विनाशकारी तूफान और बवंडर की चपेट में आए मिसिसिपी राज्य के लिए आपातकालीन घोषणा को मंजूरी दी है। इस प्राकृतिक आपदा में मिसिसिपी में 25 और अलाबामा राज्य में एक व्यक्ति मारा गया। राष्ट्रपति भवन के बयान में कहा गया है कि इस घोषणा के तहत प्रभावित क्षेत्रों में केन्द्रीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। कैरोल, हम्फ्रीज़, मुनरो, और शार्की काउंटी में प्रभावित लोगों के लिए यह सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
राष्ट्रीय मौसम सेवा ने चेतावनी दी है कि रविवार को मौसम और खतरनाक हो सकता है। पूर्वी लुइसियाना, दक्षिण-मध्य मिसिसिपी और दक्षिण-मध्य अलाबामा में तेज हवाएं चलने और बवंडर आने की आशंका है।
| अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने विनाशकारी तूफान और बवंडर की चपेट में आए मिसिसिपी राज्य के लिए आपातकालीन घोषणा को मंजूरी दी है। इस प्राकृतिक आपदा में मिसिसिपी में पच्चीस और अलाबामा राज्य में एक व्यक्ति मारा गया। राष्ट्रपति भवन के बयान में कहा गया है कि इस घोषणा के तहत प्रभावित क्षेत्रों में केन्द्रीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। कैरोल, हम्फ्रीज़, मुनरो, और शार्की काउंटी में प्रभावित लोगों के लिए यह सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। राष्ट्रीय मौसम सेवा ने चेतावनी दी है कि रविवार को मौसम और खतरनाक हो सकता है। पूर्वी लुइसियाना, दक्षिण-मध्य मिसिसिपी और दक्षिण-मध्य अलाबामा में तेज हवाएं चलने और बवंडर आने की आशंका है। |
अवर अभियंता राम बहादुर ने बताया कि ट्रांसफार्मर लगवा दिया गया है। जल्द ही विद्युत सप्लाई बहाल कर दी जाएगी।
संसू, मूरतगंज : सैंता विद्युत सब स्टेशन से जुड़े लगभग तीन दर्जन गांवों की बत्ती 72 घंटे से गुल है। इससे लोगों में बिजली और पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची है। नागरिकों को यह परेशानी सब स्टेशन में लगे पांच एमवीए के ट्रांसफार्मर फुंकने के कारण हुई है। बुधवार दोपहर नया ट्रांसफार्मर आ गया, जिसे लगा दिया गया है। हालांकि, बिजली आपूर्ति देर रात अथवा गुरुवार सुबह बहाल की जा सकती है।
सैंता उपकेंद्र में लगा पांच एमबीए का ट्रांसफार्मर रविवार रात तेज वर्षा के दौरान फुंक गया था। इससे उस उपकेंद्र से जुड़े लगभग तीन दर्जन गांवों की बिजली गुल हो गई। तब से इन गांवों के लोगों को इस उमसभरी गर्मी में मुश्किलें झेलनी पड़ रही हैं। बत्ती न होने से इलेक्ट्रानिक्स उपकरण शोपीस बने हुए हैं। सबसे ज्यादा परेशानी पानी को लेकर लोगों को उठानी पड़ी। बूंद-बूंद पानी के लिए तरस गए हैं। जैसे-तैसे काम चलाया जा रहा है। वहीं, मोबाइल चार्ज न होने से तीन दिनों से लोग अपने परिचितों एवं स्वजन से भी बातचीत नहीं कर सके। अधिकारियों द्वारा सुल्तानपुर जनपद के जगदीशगंज फैक्ट्री से ट्रांसफार्मर मंगाया गया था लेकिन मंगलवार को ट्रांसफार्मर प्रतापगढ़ में नो इंट्री में फंस गया था। बुधवार को ट्रांसफार्मर आने के बाद दोपहर बाद उसे लगाया गया। हालांकि, ट्रांसफार्मर के चार्ज किए जाने के कारण आपूर्ति बहाल नहीं की जा सकी।
सब स्टेशन के कर्मचारियों को इस बात की पूरी जानकारी थी कि अब पुराना ट्रांसफार्मर नहीं चलेगा। उसके स्थान पर नया ट्रांसफार्मर लगाया जाएगा। इसके बाद भी कर्मचारियों ने पुराना ट्रांसफार्मर अपने स्थान से नहीं हटाया। जब नया ट्रांसफार्मर आया तो पहले पुराने को हटाने में तीन से चार घंटे लग गए। उसके बाद नया ट्रांसफार्मर वहां रखा गया। अगर पुराने ट्रांसफार्मर को पहले हटा दिया गया होता तो शाम तक आपूर्ति बहाल की जा सकती थी।
ट्रांसफार्मर आ गया है और उसे लगवा दिया गया है। जल्द ही विद्युत सप्लाई बहाल कर दी जाएगी।
| अवर अभियंता राम बहादुर ने बताया कि ट्रांसफार्मर लगवा दिया गया है। जल्द ही विद्युत सप्लाई बहाल कर दी जाएगी। संसू, मूरतगंज : सैंता विद्युत सब स्टेशन से जुड़े लगभग तीन दर्जन गांवों की बत्ती बहत्तर घंटाटे से गुल है। इससे लोगों में बिजली और पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची है। नागरिकों को यह परेशानी सब स्टेशन में लगे पांच एमवीए के ट्रांसफार्मर फुंकने के कारण हुई है। बुधवार दोपहर नया ट्रांसफार्मर आ गया, जिसे लगा दिया गया है। हालांकि, बिजली आपूर्ति देर रात अथवा गुरुवार सुबह बहाल की जा सकती है। सैंता उपकेंद्र में लगा पांच एमबीए का ट्रांसफार्मर रविवार रात तेज वर्षा के दौरान फुंक गया था। इससे उस उपकेंद्र से जुड़े लगभग तीन दर्जन गांवों की बिजली गुल हो गई। तब से इन गांवों के लोगों को इस उमसभरी गर्मी में मुश्किलें झेलनी पड़ रही हैं। बत्ती न होने से इलेक्ट्रानिक्स उपकरण शोपीस बने हुए हैं। सबसे ज्यादा परेशानी पानी को लेकर लोगों को उठानी पड़ी। बूंद-बूंद पानी के लिए तरस गए हैं। जैसे-तैसे काम चलाया जा रहा है। वहीं, मोबाइल चार्ज न होने से तीन दिनों से लोग अपने परिचितों एवं स्वजन से भी बातचीत नहीं कर सके। अधिकारियों द्वारा सुल्तानपुर जनपद के जगदीशगंज फैक्ट्री से ट्रांसफार्मर मंगाया गया था लेकिन मंगलवार को ट्रांसफार्मर प्रतापगढ़ में नो इंट्री में फंस गया था। बुधवार को ट्रांसफार्मर आने के बाद दोपहर बाद उसे लगाया गया। हालांकि, ट्रांसफार्मर के चार्ज किए जाने के कारण आपूर्ति बहाल नहीं की जा सकी। सब स्टेशन के कर्मचारियों को इस बात की पूरी जानकारी थी कि अब पुराना ट्रांसफार्मर नहीं चलेगा। उसके स्थान पर नया ट्रांसफार्मर लगाया जाएगा। इसके बाद भी कर्मचारियों ने पुराना ट्रांसफार्मर अपने स्थान से नहीं हटाया। जब नया ट्रांसफार्मर आया तो पहले पुराने को हटाने में तीन से चार घंटे लग गए। उसके बाद नया ट्रांसफार्मर वहां रखा गया। अगर पुराने ट्रांसफार्मर को पहले हटा दिया गया होता तो शाम तक आपूर्ति बहाल की जा सकती थी। ट्रांसफार्मर आ गया है और उसे लगवा दिया गया है। जल्द ही विद्युत सप्लाई बहाल कर दी जाएगी। |
Kisi Ka Bhai Kisi Ki Jaan: सलमान खान के फैंस को उनकी आगामी फिल्म 'किसी का भाई किसी की जान' का बेसब्री से इंतजार है। फिल्म ईद के मौके पर सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है। सोमवार की शाम मुंबई में फिल्म का ट्रेलर लॉन्च किया गया। फिल्म के ट्रेलर रिलीज से 1 दिन पहले मूवी का एक और पोस्टर रिलीज किया गया। ट्रेलर लॉन्च पर सलमान खान अपने सभी को स्टार्स के साथ पहुंचे। इस मौके पर सबके सामने सलमान ने शहनाज गिल को एक बड़ी सलाह दी है। यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर छाया हुआ है।
'बिग बॉस' फेम शहनाज गिल भी फिल्म 'किसी का भाई किसी की जान' की रिलीज का इंतजार कर रही हैं। इस फिल्म से वह बॉलीवुड में एंट्री कर रही हैं। शहनाज'बिग बॉस 14' के बाद लोकप्रिय हुईं, वह दिवंगत एक्टर सिद्धार्थ शुक्ला के साथ उनके ऑफ-स्क्रीन रोमांस की वजह से सुर्खियों में रहीं। अब फिल्म के ट्रेलर लॉन्च के मौके पर सलमान ने शहनाज से कहा, 'मूव ऑन' और सलमान ने यह बात दोहराई भी।
इसके बाद शहनाज गिल ने कहा कि वह सलमान खान को कई सालों से जानती हैं और उनके साथ एक अच्छा सौहार्द साझा करती हैं, लेकिन उनके लिए सेल्फ लव से बढ़कर कुछ भी नहीं है। वह सलमान खान से ज्यादा खुद से प्यार करती हूं। फिल्म के ट्रेलर लॉन्च के मौके पर मीडिया से बात करते हुए शहनाज ने कहाः फिल्म पर काम करते समय मुझे बिल्कुल भी घबराहट नहीं हुई। वास्तव में, मुझे पसंद है कि मैं फिल्म के अंतिम आउटपुट में कैसी दिखती हूं।
किस में बढ़ रहीं नजदीकियां?
इस मौके पर सलमान खान ने फिल्म के सेट पर बन रही एक कपल की केमिस्ट्री को लेकर भी इशारा किया। सलमान ने कहा कि इस फिल्म की शूटिंग के दौरान दो लोगों को उन्होंने पास आते हुए देखा है। केमिस्ट्री बनते हुए देखी है, लेकिन जैसे ही एक पास आता है दूसरा पीछे हो जाता है। तो अब सवाल यही है कि आखिर यह जोड़ी कौन सी है? शहनाज गिल और राघव जुयाल या फिर पलक तिवारी और इब्राहिम अली खान।
'भाईजान' के साथ-साथ इस फिल्म में पूजा हेगड़े (Pooja Hegde), शहनाज गिल (Shehnaaz Gill) और पलक तिवारी (Palak Tiwari), राघव जुयाल, भूमिका चावला, साउथ सुपरस्टार वैंकटेश जैसे सितारे भी नजर आएंगे। सलमान खान की ये ईद रिलीज यानी 21 अप्रैल, 2023 को थिएटर्स में दस्तक देने जा रही है। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही फिल्म की एडवांस बुकिंग भी शुरू हो जाएगी।
| Kisi Ka Bhai Kisi Ki Jaan: सलमान खान के फैंस को उनकी आगामी फिल्म 'किसी का भाई किसी की जान' का बेसब्री से इंतजार है। फिल्म ईद के मौके पर सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है। सोमवार की शाम मुंबई में फिल्म का ट्रेलर लॉन्च किया गया। फिल्म के ट्रेलर रिलीज से एक दिन पहले मूवी का एक और पोस्टर रिलीज किया गया। ट्रेलर लॉन्च पर सलमान खान अपने सभी को स्टार्स के साथ पहुंचे। इस मौके पर सबके सामने सलमान ने शहनाज गिल को एक बड़ी सलाह दी है। यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर छाया हुआ है। 'बिग बॉस' फेम शहनाज गिल भी फिल्म 'किसी का भाई किसी की जान' की रिलीज का इंतजार कर रही हैं। इस फिल्म से वह बॉलीवुड में एंट्री कर रही हैं। शहनाज'बिग बॉस चौदह' के बाद लोकप्रिय हुईं, वह दिवंगत एक्टर सिद्धार्थ शुक्ला के साथ उनके ऑफ-स्क्रीन रोमांस की वजह से सुर्खियों में रहीं। अब फिल्म के ट्रेलर लॉन्च के मौके पर सलमान ने शहनाज से कहा, 'मूव ऑन' और सलमान ने यह बात दोहराई भी। इसके बाद शहनाज गिल ने कहा कि वह सलमान खान को कई सालों से जानती हैं और उनके साथ एक अच्छा सौहार्द साझा करती हैं, लेकिन उनके लिए सेल्फ लव से बढ़कर कुछ भी नहीं है। वह सलमान खान से ज्यादा खुद से प्यार करती हूं। फिल्म के ट्रेलर लॉन्च के मौके पर मीडिया से बात करते हुए शहनाज ने कहाः फिल्म पर काम करते समय मुझे बिल्कुल भी घबराहट नहीं हुई। वास्तव में, मुझे पसंद है कि मैं फिल्म के अंतिम आउटपुट में कैसी दिखती हूं। किस में बढ़ रहीं नजदीकियां? इस मौके पर सलमान खान ने फिल्म के सेट पर बन रही एक कपल की केमिस्ट्री को लेकर भी इशारा किया। सलमान ने कहा कि इस फिल्म की शूटिंग के दौरान दो लोगों को उन्होंने पास आते हुए देखा है। केमिस्ट्री बनते हुए देखी है, लेकिन जैसे ही एक पास आता है दूसरा पीछे हो जाता है। तो अब सवाल यही है कि आखिर यह जोड़ी कौन सी है? शहनाज गिल और राघव जुयाल या फिर पलक तिवारी और इब्राहिम अली खान। 'भाईजान' के साथ-साथ इस फिल्म में पूजा हेगड़े , शहनाज गिल और पलक तिवारी , राघव जुयाल, भूमिका चावला, साउथ सुपरस्टार वैंकटेश जैसे सितारे भी नजर आएंगे। सलमान खान की ये ईद रिलीज यानी इक्कीस अप्रैल, दो हज़ार तेईस को थिएटर्स में दस्तक देने जा रही है। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही फिल्म की एडवांस बुकिंग भी शुरू हो जाएगी। |
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सपा गठबंधन के सभी प्रत्याशियों, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वो ईवीएम स्ट्रांग रूम की निगरानी बढ़ा दें जिससे कोई गड़बड़ी न होने पाए। ये मामले तब शुरू हुआ जब स्ट्रॉन्ग रूम में गाड़ी के पास कुछ स्पेयर्स पार्ट मिले।
दरअसल, रमाबाई अंबेडकर मैदान में बने मतगणना स्थल पर बने स्ट्रांग रूम परिसर में सोमवार को उस वक्त हंगामा मच गया जब मध्य विधानसभा सीट के रिटर्निंग अफसर गोविंद मौर्या की सरकारी गाड़ी में हथौड़ी, छेनी, ताले, प्लायर निकल आए। इस पर सपा व अन्य राजनैतिक दलों के कार्यकर्ताओं ने ईवीएम से छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए दो घंटे तक धरना-प्रदर्शन किया।
घटना की सूचना पर मध्य सीट से सपा प्रत्याशी रविदास मेहरोत्रा भी पहुंच गए। डीएम व जिला निर्वाचन अधिकारी अभिषेक प्रकाश ने बताया कि कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है। संबंधित अधिकारी को चेतावनी देने के साथ स्पष्टीकरण मांगा गया है। यह भी बताया कि प्रत्याशियों को स्ट्रांग रूम परिसर का निरीक्षण करा दिया गया है। सभी अंदर की सुरक्षा व्यवस्था से संतुष्ट हैं।
इस पर अखिलेश यादव ने ट्वीट किया कि लखनऊ में सभी के लिए प्रतिबंधित ईवीएम स्ट्रांग रूम में एक सरकारी अधिकारी के घुसने का प्रयास बेहद गंभीर मामला है। सपा-गठबंधन के सभी प्रत्याशियों, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से अपील है कि वो सभी जगह ईवीएम स्ट्रांग रूम की निगरानी बढ़ा दें। जब तक गिनवाई नहीं-तब तक ढिलाई नहीं! लखनऊ में सभी के लिए प्रतिबंधित ईवीएम स्ट्रांग रूम में एक सरकारी अधिकारी के घुसने का प्रयास बेहद गंभीर मामला है। सपा-गठबंधन के सभी प्रत्याशियों, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से अपील है कि वो सभी जगह ईवीएम स्ट्रांग रूम की निगरानी बढ़ा दें।
एसडीएम गोविंद मौर्या ने कहा कि औजार सीट के नीचे रखे हुए थे। छेनी, हथौड़ी ड्राइवर अपने इस्तेमाल के लिए रखते हैं। जिस वोटर लिस्ट के गाड़ी में होने का आरोप लगा रहे हैं, वह कमिश्नरेट का प्लान है जिसमें सेक्टर मजिस्ट्रेट आदि के नाम-नंबर लिखे होते हैं। मैंने खुद कहा कि गाड़ी की जांच कर लीजिए। मैंने खुद कार्यकर्ताओं को गाड़ी की जांच करने दी। मुझे पता था कि गाड़ी में कुछ भी गलत नहीं है। बाकी जांच में सच सामने आ जाएगा।
| सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सपा गठबंधन के सभी प्रत्याशियों, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वो ईवीएम स्ट्रांग रूम की निगरानी बढ़ा दें जिससे कोई गड़बड़ी न होने पाए। ये मामले तब शुरू हुआ जब स्ट्रॉन्ग रूम में गाड़ी के पास कुछ स्पेयर्स पार्ट मिले। दरअसल, रमाबाई अंबेडकर मैदान में बने मतगणना स्थल पर बने स्ट्रांग रूम परिसर में सोमवार को उस वक्त हंगामा मच गया जब मध्य विधानसभा सीट के रिटर्निंग अफसर गोविंद मौर्या की सरकारी गाड़ी में हथौड़ी, छेनी, ताले, प्लायर निकल आए। इस पर सपा व अन्य राजनैतिक दलों के कार्यकर्ताओं ने ईवीएम से छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए दो घंटे तक धरना-प्रदर्शन किया। घटना की सूचना पर मध्य सीट से सपा प्रत्याशी रविदास मेहरोत्रा भी पहुंच गए। डीएम व जिला निर्वाचन अधिकारी अभिषेक प्रकाश ने बताया कि कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है। संबंधित अधिकारी को चेतावनी देने के साथ स्पष्टीकरण मांगा गया है। यह भी बताया कि प्रत्याशियों को स्ट्रांग रूम परिसर का निरीक्षण करा दिया गया है। सभी अंदर की सुरक्षा व्यवस्था से संतुष्ट हैं। इस पर अखिलेश यादव ने ट्वीट किया कि लखनऊ में सभी के लिए प्रतिबंधित ईवीएम स्ट्रांग रूम में एक सरकारी अधिकारी के घुसने का प्रयास बेहद गंभीर मामला है। सपा-गठबंधन के सभी प्रत्याशियों, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से अपील है कि वो सभी जगह ईवीएम स्ट्रांग रूम की निगरानी बढ़ा दें। जब तक गिनवाई नहीं-तब तक ढिलाई नहीं! लखनऊ में सभी के लिए प्रतिबंधित ईवीएम स्ट्रांग रूम में एक सरकारी अधिकारी के घुसने का प्रयास बेहद गंभीर मामला है। सपा-गठबंधन के सभी प्रत्याशियों, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से अपील है कि वो सभी जगह ईवीएम स्ट्रांग रूम की निगरानी बढ़ा दें। एसडीएम गोविंद मौर्या ने कहा कि औजार सीट के नीचे रखे हुए थे। छेनी, हथौड़ी ड्राइवर अपने इस्तेमाल के लिए रखते हैं। जिस वोटर लिस्ट के गाड़ी में होने का आरोप लगा रहे हैं, वह कमिश्नरेट का प्लान है जिसमें सेक्टर मजिस्ट्रेट आदि के नाम-नंबर लिखे होते हैं। मैंने खुद कहा कि गाड़ी की जांच कर लीजिए। मैंने खुद कार्यकर्ताओं को गाड़ी की जांच करने दी। मुझे पता था कि गाड़ी में कुछ भी गलत नहीं है। बाकी जांच में सच सामने आ जाएगा। |
आप ही उस राज्य के उत्तराधिकारी हुए। उस समय यद्यपि उनके नादान हाथों में राज्य-सूत्र चले गये थे, तथापि उसके कारण महाराष्ट्र साम्राज्य पर उसका कोई दुष्परिणाम न हुआ । इसका कारण यह था कि यद्यपि छत्रपति शम्भाजी स्वयम् विषय हो गये थे, तथापि उनके हृदय में स्वधर्म, ग्वाभिमान एवम् स्वराज्य- प्रीति की ज्योति अभी उसी तरह दीप्तिमान थी जिस तरह उनके पिता श्री के हृदय मे अन्त तक जागरित थी । वह स्वयम् एक वीर पुरुप को सन्तान थे । अतः उनमे साहस, वीरता भी कूट-कूट कर भरी थी । यद्यपि उनकी भोग-विलास वृत्ति के कारण उन्होने अपने पिता की कमाई मे व पौरुष से कोई वृद्धि नहीं की. तथापि इतना तो अवश्य ही किया, कि जो कुछ उनके पास था उसे हाथ से जाने न दिया । छत्रपति शिवाजी ने अपने जीवित रहते महाराष्ट्र - साम्राज्य का शासन-प्रबन्ध देखने के लिये, जो अष्टप्रधान मण्डल नियुक्त किया था और उनके कर्तव्य की जो दिशा निर्धारित कर दी थीं, वही छत्रपति शम्भाजी के शासनकाल में जारी रही । परिणाम यह हुआ कि उस व्यवस्था में कोई परिवर्तन न होने के कारण साम्राज्यसंचालन का कार्य पूर्ववत् जारी रहा, और उसके पुष्टिकारणार्थ साम्राज्य को नित्य नवीन उत्साही एवम् प्रेमी तरुण मिलते गये । छत्रपति शम्भाजी का, 'भोग-विलास' उनके लिये वैयक्तिक रूपसे भले ही भयङ्कर सिद्ध हुआ, तथापि उसके कारण महाराष्ट्र साम्राज्य को कोई धक्का नहीं सहन करना पड़ा । | आप ही उस राज्य के उत्तराधिकारी हुए। उस समय यद्यपि उनके नादान हाथों में राज्य-सूत्र चले गये थे, तथापि उसके कारण महाराष्ट्र साम्राज्य पर उसका कोई दुष्परिणाम न हुआ । इसका कारण यह था कि यद्यपि छत्रपति शम्भाजी स्वयम् विषय हो गये थे, तथापि उनके हृदय में स्वधर्म, ग्वाभिमान एवम् स्वराज्य- प्रीति की ज्योति अभी उसी तरह दीप्तिमान थी जिस तरह उनके पिता श्री के हृदय मे अन्त तक जागरित थी । वह स्वयम् एक वीर पुरुप को सन्तान थे । अतः उनमे साहस, वीरता भी कूट-कूट कर भरी थी । यद्यपि उनकी भोग-विलास वृत्ति के कारण उन्होने अपने पिता की कमाई मे व पौरुष से कोई वृद्धि नहीं की. तथापि इतना तो अवश्य ही किया, कि जो कुछ उनके पास था उसे हाथ से जाने न दिया । छत्रपति शिवाजी ने अपने जीवित रहते महाराष्ट्र - साम्राज्य का शासन-प्रबन्ध देखने के लिये, जो अष्टप्रधान मण्डल नियुक्त किया था और उनके कर्तव्य की जो दिशा निर्धारित कर दी थीं, वही छत्रपति शम्भाजी के शासनकाल में जारी रही । परिणाम यह हुआ कि उस व्यवस्था में कोई परिवर्तन न होने के कारण साम्राज्यसंचालन का कार्य पूर्ववत् जारी रहा, और उसके पुष्टिकारणार्थ साम्राज्य को नित्य नवीन उत्साही एवम् प्रेमी तरुण मिलते गये । छत्रपति शम्भाजी का, 'भोग-विलास' उनके लिये वैयक्तिक रूपसे भले ही भयङ्कर सिद्ध हुआ, तथापि उसके कारण महाराष्ट्र साम्राज्य को कोई धक्का नहीं सहन करना पड़ा । |
टी20 विश्व कप 2022 का पहला सेमीफाइनल मैच न्यूजीलैंड और पाकिस्तान (NZ vs PAK) के बीच सिडनी में खेला गया जहाँ पाक टीम ने कीवियों को 8 विकेट से हराकर फ़ाइनल का टिकट हासिल कर लिया। हालांकि, इस मैच में सलामी बल्लेबाज मोहम्मद रिज़वान (Mohammad Rizwan) का आउट होना विवाद का विषय बन गया, जिसको लेकर काफी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।
बता दें कि इस मैच में न्यूजीलैंड के कप्तान केन विलियमसन ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया था। पहले बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड की टीम ने 20 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर 152 रन बनाए और पाकिस्तान को जीत के लिए 153 रनों का लक्ष्य दिया। इसके जवाब में पाकिस्तान की टीम ने 19. 1 ओवर में 3 विकेट के नुकसान पर 153 रन बनाए।
न्यूजीलैंड और पाकिस्तान (NZ vs PAK) के पहले सेमीफाइनल मैच में मोहम्मद रिज़वान (Mohammad Rizwan) का आउट होना विवाद का विषय बन गया। दरअसल, इस मैच में ट्रेंट बोल्ट की गेंद पर रिज़वान बड़ा शॉट खेलना चाहते थे लेकिन ग्लेन फिलिप्स ने उनका कैच लपक लिया और इसके बाद यहाँ पर नो बॉल का चांस बना ही था कि फिलिप्स ने दूसरे छोड़ पर गेंद फेंकी और रिज़वान दूसरा रन तेजी से रन चुराने के चक्कर में रन आउट भी हो गए। यह घटना पाकिस्तान की पारी के 17वें ओवर में घटी। इस दौरान रिज़वान नो बॉल के लिए अंपायर को इशारा करते दिखे।
हालांकि, फैंस के मन में ये सवाल है कि आखिरी रिज़वान को फेंकी गई गेंद नो बॉल क्यों नहीं दी गई क्योंकि ठीक ऐसी ही गेंद विश्व कप में भारत के खिलाफ विराट कोहली के खिलाफ फेंकी गई थी और उस फुलटॉस गेंद को अंपायर ने नो बॉल करार दिया था। इसी को लेकर फैंस जमकर प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। बता दें कि मोहम्मद रिज़वान ने 43 गेंदों में 5 चौके की मदद से 57 रन बनाए।
Tremendous batting by Mohammad Rizwan and Babar Azam. What a pleasure to see total dominance. No ifs, no buts. They were aggressive from the first to the last ball. .
Mohammad Rizwan gets caught out and run out on the same ball.
If Kohli was in place of Rizwan, the umpire would give the no-ball immediately.
| टीबीस विश्व कप दो हज़ार बाईस का पहला सेमीफाइनल मैच न्यूजीलैंड और पाकिस्तान के बीच सिडनी में खेला गया जहाँ पाक टीम ने कीवियों को आठ विकेट से हराकर फ़ाइनल का टिकट हासिल कर लिया। हालांकि, इस मैच में सलामी बल्लेबाज मोहम्मद रिज़वान का आउट होना विवाद का विषय बन गया, जिसको लेकर काफी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। बता दें कि इस मैच में न्यूजीलैंड के कप्तान केन विलियमसन ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया था। पहले बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड की टीम ने बीस ओवर में चार विकेट के नुकसान पर एक सौ बावन रन बनाए और पाकिस्तान को जीत के लिए एक सौ तिरेपन रनों का लक्ष्य दिया। इसके जवाब में पाकिस्तान की टीम ने उन्नीस. एक ओवर में तीन विकेट के नुकसान पर एक सौ तिरेपन रन बनाए। न्यूजीलैंड और पाकिस्तान के पहले सेमीफाइनल मैच में मोहम्मद रिज़वान का आउट होना विवाद का विषय बन गया। दरअसल, इस मैच में ट्रेंट बोल्ट की गेंद पर रिज़वान बड़ा शॉट खेलना चाहते थे लेकिन ग्लेन फिलिप्स ने उनका कैच लपक लिया और इसके बाद यहाँ पर नो बॉल का चांस बना ही था कि फिलिप्स ने दूसरे छोड़ पर गेंद फेंकी और रिज़वान दूसरा रन तेजी से रन चुराने के चक्कर में रन आउट भी हो गए। यह घटना पाकिस्तान की पारी के सत्रहवें ओवर में घटी। इस दौरान रिज़वान नो बॉल के लिए अंपायर को इशारा करते दिखे। हालांकि, फैंस के मन में ये सवाल है कि आखिरी रिज़वान को फेंकी गई गेंद नो बॉल क्यों नहीं दी गई क्योंकि ठीक ऐसी ही गेंद विश्व कप में भारत के खिलाफ विराट कोहली के खिलाफ फेंकी गई थी और उस फुलटॉस गेंद को अंपायर ने नो बॉल करार दिया था। इसी को लेकर फैंस जमकर प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। बता दें कि मोहम्मद रिज़वान ने तैंतालीस गेंदों में पाँच चौके की मदद से सत्तावन रन बनाए। Tremendous batting by Mohammad Rizwan and Babar Azam. What a pleasure to see total dominance. No ifs, no buts. They were aggressive from the first to the last ball. . Mohammad Rizwan gets caught out and run out on the same ball. If Kohli was in place of Rizwan, the umpire would give the no-ball immediately. |
पंच भूतों का अनादि चक्र
ओ३म । पञ्चरे चक्रे परिवर्त्तमाने तस्मिन्ना तस्थुर्भुवनानि विश्वा । तस्य नाक्षस्तप्यते न भूरिभार. सनादेव न शीर्यते सनाभि ।। ऋ १ । १६४ १३
( तस्मिन् ) उस पञ्चारे ) पाच नरों वाले ( चक्रे ) चक्र के ( परिवर्त्तमाने ) चलने पर
( विश्वा ) सच ( भुवनानि ) भुवन, लोक ( )सर स्थित होते हैं । ( तस्य ) उसका ( श्रक्षः ) अक्ष (न) न तो (तप्यते) तपता है औौर ( न ) न (भूरिभार . ) बहुत भार वाला होता है । (सनात् + एव) सनातन से ही वह (सनाभिः) सर्नाभिः =बधनयुक्त, केन्द्रयुक्त होने से (न) नहीं (शीर्यते) बिखरता, फटता, नष्ट होता यह ससार चक्र चल रहा है । न्यायदर्शन १ । १ । २ के वात्स्यायभाष्य में ससार का लक्षण हैइमे मिथ्याज्ञाना दयो दु खान्ता धर्म्मा, अविच्छेदेनैव प्रवर्त्तनानाः ससार । मिथ्याज्ञान, दोष, प्रवृति, जन्म और दुःखों का निरन्तर प्रवृत रहना ससार है ।
मिथ्याज्ञान से राग, द्वेष, मोह होते हैं, रागद्वेष भोह से प्रवृत्ति होती है, प्रवृत्ति से जन्म होता है और जन्म साक्षाद् दु ख है । साधारण लोग इस गहरे ससार के सार तक नहीं पहुंच पाते उनके मत में सूर्य्यचन्द्रनक्षत्र भूमि, श्राकाश पर्वत, नदी नाले झील तालाब, खेती धनधान्य, सामान, मकान, पिता, पुत्र, माता भगिनी आदि सब मिल मिला कर ससार
चाहे तत्त्वज्ञानियों का ससार लें, चाहे ज्ञानियों का । ढोनों का कारण एक ही है । निमित्त कारण का विचार छोड़ कर उपादान कारण पर ध्यान दीजिये । सभी के मत मे पञ्चभूतात्मक प्रकृत्ति ही इसका उपादान कारण है । गिरि, नदी, भूमि, सूर्य, चन्द्र ग्रह, उपग्रह आदिनानाविध लोक इमी के बने और इसी में रहते हैं 1 घड़ा मिट्टी से बनता और मिट्टी में रहता है । मिट्टा से बाहर घड़ा कहा है । कपड़ा तन्तु से बना है, तन्तुओं से रहता है। तन्तुनों से ग्रन्यत्र उसकी सत्ता का भान किस को होता है । इसी भाव से वेद कहता है-पश्चारे चक परिवर्त्तमाने तस्मिन्नातस्थुर्भुवनानि विश्वा
पचभृतमय, निरन्तर फिरते हुए इस ससारचक्र मे सब भुवन स्थित है । अर्थात् सारा ससार पच भूतों से बना है, और इन्हीं में स्थित है ।
रथ के पहिये का क्ष तप जाता है, उसे विश्राम देना होता है। परिणाम से अधिक भार पड़ जाये, तो वद्द टूट जाता है किन्तु वह चक्र नाक्षस्तन्यते न भूरि भार. सनादेव न शीर्यते सनाभिः इस चक्र का श्रक्ष तपता है, न बहुत भार से छूटता है और न शीर्ण होता है क्योंकि सनातन से यह नाभि =बन्धन युक्त है।
अनादि काल से यह समार चला या रहा है। उसका यक्ष लक्षपर पहुंचने से पूर्व तप ही नहीं सक्ता । बहुत भार तो तत्र हो, नत्र इससे बाहर कुछ भार हो । भार तो पहले सारा इसी में है। भगवान् इसकी नाभि है, श्रुत' इसके शीर्ण होने का प्रश्न ही नहीं है ।
दिन के वाढरात्रि के पश्चात् दिन के समान सृष्टि के बाद प्रलय, प्रलय के बाट पुनः सृष्टि इसी तर मसार चक्र चल रहा है । | पंच भूतों का अनादि चक्र ओतीनम । पञ्चरे चक्रे परिवर्त्तमाने तस्मिन्ना तस्थुर्भुवनानि विश्वा । तस्य नाक्षस्तप्यते न भूरिभार. सनादेव न शीर्यते सनाभि ।। ऋ एक । एक सौ चौंसठ तेरह उस पञ्चारे ) पाच नरों वाले चक्र के चलने पर सच भुवन, लोक सर स्थित होते हैं । उसका अक्ष न तो तपता है औौर न बहुत भार वाला होता है । सनातन से ही वह सर्नाभिः =बधनयुक्त, केन्द्रयुक्त होने से नहीं बिखरता, फटता, नष्ट होता यह ससार चक्र चल रहा है । न्यायदर्शन एक । एक । दो के वात्स्यायभाष्य में ससार का लक्षण हैइमे मिथ्याज्ञाना दयो दु खान्ता धर्म्मा, अविच्छेदेनैव प्रवर्त्तनानाः ससार । मिथ्याज्ञान, दोष, प्रवृति, जन्म और दुःखों का निरन्तर प्रवृत रहना ससार है । मिथ्याज्ञान से राग, द्वेष, मोह होते हैं, रागद्वेष भोह से प्रवृत्ति होती है, प्रवृत्ति से जन्म होता है और जन्म साक्षाद् दु ख है । साधारण लोग इस गहरे ससार के सार तक नहीं पहुंच पाते उनके मत में सूर्य्यचन्द्रनक्षत्र भूमि, श्राकाश पर्वत, नदी नाले झील तालाब, खेती धनधान्य, सामान, मकान, पिता, पुत्र, माता भगिनी आदि सब मिल मिला कर ससार चाहे तत्त्वज्ञानियों का ससार लें, चाहे ज्ञानियों का । ढोनों का कारण एक ही है । निमित्त कारण का विचार छोड़ कर उपादान कारण पर ध्यान दीजिये । सभी के मत मे पञ्चभूतात्मक प्रकृत्ति ही इसका उपादान कारण है । गिरि, नदी, भूमि, सूर्य, चन्द्र ग्रह, उपग्रह आदिनानाविध लोक इमी के बने और इसी में रहते हैं एक घड़ा मिट्टी से बनता और मिट्टी में रहता है । मिट्टा से बाहर घड़ा कहा है । कपड़ा तन्तु से बना है, तन्तुओं से रहता है। तन्तुनों से ग्रन्यत्र उसकी सत्ता का भान किस को होता है । इसी भाव से वेद कहता है-पश्चारे चक परिवर्त्तमाने तस्मिन्नातस्थुर्भुवनानि विश्वा पचभृतमय, निरन्तर फिरते हुए इस ससारचक्र मे सब भुवन स्थित है । अर्थात् सारा ससार पच भूतों से बना है, और इन्हीं में स्थित है । रथ के पहिये का क्ष तप जाता है, उसे विश्राम देना होता है। परिणाम से अधिक भार पड़ जाये, तो वद्द टूट जाता है किन्तु वह चक्र नाक्षस्तन्यते न भूरि भार. सनादेव न शीर्यते सनाभिः इस चक्र का श्रक्ष तपता है, न बहुत भार से छूटता है और न शीर्ण होता है क्योंकि सनातन से यह नाभि =बन्धन युक्त है। अनादि काल से यह समार चला या रहा है। उसका यक्ष लक्षपर पहुंचने से पूर्व तप ही नहीं सक्ता । बहुत भार तो तत्र हो, नत्र इससे बाहर कुछ भार हो । भार तो पहले सारा इसी में है। भगवान् इसकी नाभि है, श्रुत' इसके शीर्ण होने का प्रश्न ही नहीं है । दिन के वाढरात्रि के पश्चात् दिन के समान सृष्टि के बाद प्रलय, प्रलय के बाट पुनः सृष्टि इसी तर मसार चक्र चल रहा है । |
मुंबईः ब्रेन स्ट्रोक होने के बाद मुंबई के नानावती अस्पताल में भर्ती हुए बॉलीवुड अभिनेता राहुल रॉय को अब डिस्चार्ज कर दिया गया है।
अभिनेता की अस्पताल से छुट्टी होने की खबर की पुष्टि फिल्म निर्माता नितिन कुमार गुप्ता ने की। रॉय कारगिल में गुप्ता की फिल्म एलएसी : लाइव द बैटल की शूटिंग कर रहे थे, उसी दौरान 26 नवंबर को उन्हें ब्रेन स्ट्रोक हुआ था।
गुप्ता ने मुंबई मिरर को बताया, डॉक्टर सोमवार को उसे डिस्चार्ज करने वाले थे, लेकिन कागजी कार्रवाई में समय लग गया। लिहाजा उनकी बहन उन्हें अगले दिन घर ले गईं।
निर्देशक ने आगे बताया कि अभिनेता को सामान्य बोलने की क्षमता पाने के लिए स्पीच थेरेपी से गुजरना होगा।
सोमवार को रॉय ने अपने सत्यापित इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया था। इसमें वह अपनी बहन और उनके पति के सपोर्ट से खड़े नजर आ रहे थे।
अभिनेता की बहन ने वीडियो में बताया था कि रॉय ठीक हो रहे हैं। साथ ही उन्होंने प्रशंसकों को उनके प्यार और प्रार्थनाओं के लिए धन्यवाद भी दिया था।
| मुंबईः ब्रेन स्ट्रोक होने के बाद मुंबई के नानावती अस्पताल में भर्ती हुए बॉलीवुड अभिनेता राहुल रॉय को अब डिस्चार्ज कर दिया गया है। अभिनेता की अस्पताल से छुट्टी होने की खबर की पुष्टि फिल्म निर्माता नितिन कुमार गुप्ता ने की। रॉय कारगिल में गुप्ता की फिल्म एलएसी : लाइव द बैटल की शूटिंग कर रहे थे, उसी दौरान छब्बीस नवंबर को उन्हें ब्रेन स्ट्रोक हुआ था। गुप्ता ने मुंबई मिरर को बताया, डॉक्टर सोमवार को उसे डिस्चार्ज करने वाले थे, लेकिन कागजी कार्रवाई में समय लग गया। लिहाजा उनकी बहन उन्हें अगले दिन घर ले गईं। निर्देशक ने आगे बताया कि अभिनेता को सामान्य बोलने की क्षमता पाने के लिए स्पीच थेरेपी से गुजरना होगा। सोमवार को रॉय ने अपने सत्यापित इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया था। इसमें वह अपनी बहन और उनके पति के सपोर्ट से खड़े नजर आ रहे थे। अभिनेता की बहन ने वीडियो में बताया था कि रॉय ठीक हो रहे हैं। साथ ही उन्होंने प्रशंसकों को उनके प्यार और प्रार्थनाओं के लिए धन्यवाद भी दिया था। |
Arun Vikrant : बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर(BAU) को दिनांक 10 मई 2023 को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद(ICAR) नई दिल्ली द्वारा आगामी तीन वर्षों के लिए मान्यता (Accreditation) मिलने का पत्र प्राप्त हुआ है। यह मान्यता 15 मार्च 2025 तक वैध रहेगी। विश्वविद्यालय द्वारा हाल ही में समर्पित action taken report के फलस्वरूप यह पत्र कुलसचिव के ईमेल पर प्राप्त हुआ है। इस मान्यता के बाद ही बिहार कृषि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को राष्ट्रिय स्तर पर अन्य राज्यों में दाखिला मिल पाता है तथा आईसीएआर द्वारा अन्य विश्वविद्यालयों के छात्र यहाँ पढ़ाई करने आ सकते हैं।
हाल ही में यह मान्यता नहीं होने के कारण विश्वविद्यालय के छात्रों को अन्य विश्वविद्यालयों में पढ़ाई के लिए प्रवेश पाने में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा तथा विगत दो वर्षों से आईसीएआर द्वारा किसी छात्र को यहाँ पढ़ाई करने के लिए नहीं भेजा गया। University के जन संपर्क पदाधिकारी सह चयन समिति के अध्यक्ष Dr. Rajesh kumar ने बताया कि आई सी ए आर से मान्यता मिलने के फलस्वरूप अब बिहार कृषि विश्वविद्यालय के छात्रों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा तथा वे कृषि के क्षेत्र में अपने भविष्य को सुरक्शित कर पाएंगे।
यह खबर प्राप्त होने पर विश्वविद्यालय का हरेक कर्मी एवं छात्रों में प्रसन्नता की लहर है। कुलपति Dr. D. R. Singh ने मान्यता मिलने पर पर छात्रों छात्राओं सहित पूरे विवि के कर्मियों को बधाई दी है।
| Arun Vikrant : बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर को दिनांक दस मई दो हज़ार तेईस को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली द्वारा आगामी तीन वर्षों के लिए मान्यता मिलने का पत्र प्राप्त हुआ है। यह मान्यता पंद्रह मार्च दो हज़ार पच्चीस तक वैध रहेगी। विश्वविद्यालय द्वारा हाल ही में समर्पित action taken report के फलस्वरूप यह पत्र कुलसचिव के ईमेल पर प्राप्त हुआ है। इस मान्यता के बाद ही बिहार कृषि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को राष्ट्रिय स्तर पर अन्य राज्यों में दाखिला मिल पाता है तथा आईसीएआर द्वारा अन्य विश्वविद्यालयों के छात्र यहाँ पढ़ाई करने आ सकते हैं। हाल ही में यह मान्यता नहीं होने के कारण विश्वविद्यालय के छात्रों को अन्य विश्वविद्यालयों में पढ़ाई के लिए प्रवेश पाने में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा तथा विगत दो वर्षों से आईसीएआर द्वारा किसी छात्र को यहाँ पढ़ाई करने के लिए नहीं भेजा गया। University के जन संपर्क पदाधिकारी सह चयन समिति के अध्यक्ष Dr. Rajesh kumar ने बताया कि आई सी ए आर से मान्यता मिलने के फलस्वरूप अब बिहार कृषि विश्वविद्यालय के छात्रों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा तथा वे कृषि के क्षेत्र में अपने भविष्य को सुरक्शित कर पाएंगे। यह खबर प्राप्त होने पर विश्वविद्यालय का हरेक कर्मी एवं छात्रों में प्रसन्नता की लहर है। कुलपति Dr. D. R. Singh ने मान्यता मिलने पर पर छात्रों छात्राओं सहित पूरे विवि के कर्मियों को बधाई दी है। |
क्या आप जानते हैं कि भारत के इन राज्यों की एक नहीं बल्कि दो-दो राजधानियां हैं। अगर नहीं, तो चलिए आज जानते हैं।
क्या आपको मालूम है अब भी हिमाचल प्रदेश की दो राजधानियां हैं। पहली राजधानी शिमला और दूसरी राजधानी धर्मशाला है। जी हां, शिमला को ग्रीष्मकालीन राजधानी माना जाता है और धर्मशाला को शीतकालीन राजधानी माना जाता है। कहा जाता है ब्रिटश काल में भी हिमाचल प्रदेश की ये दोनों राजधानियां हुआ करती थी।
उत्तराखंड भी एक ऐसा ही राज्य है जिसकी दो-दो राजधानियां हैं। देहरादून और गैरसैंण। हाल में ही मौजूदा मुख्यमंत्री ने ये घोषणा करते हुए कहा था कि ग्रीष्मकाल में गैरसैंण और शीतकाल में देहरादून राजधानी होगी। कहा जहा है कि दो-दो राजधानियां इसलिए बनाई गई ताकि दूरदराज के क्षेत्रों के साथ आसानी से जुड़ा जा सके। (उत्तराखंड की 5 ऑफबीट डेस्टिनेशंस)
वैसे तो आप सभी को मालूम है कि महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई है, लेकिन महाराष्ट्र की दूसरी राजधानी भी है, जो नागपुर है। नागपुर को शीतकालीन राजधानी भी माना जाता है। कहा जाता है कि साल 1953 में एक राजनीतिक समझौता हुआ जिसके तहत नागपुर को शीतकालीन राजधानी माना गया। (महाराष्ट्रियन थाली)
माना जाता है कि आंध्र प्रदेश एक ऐसा राज्य है जिसकी कई राजधानियां हैं। पहले हैदराबाद हुआ करती थी, और अब अमरावती है। यहीं नहीं, साल 2020 में ही आंध्र प्रदेश विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित किया गया जिसमें विशाखापत्तनम को कार्यकारी राजधानी और कर्नूल को न्यायिक राजधानी बनाने का प्रस्ताव किया गया है। (सबसे फेमस ये 7 साउथ इंडियन डिश)
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आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
| क्या आप जानते हैं कि भारत के इन राज्यों की एक नहीं बल्कि दो-दो राजधानियां हैं। अगर नहीं, तो चलिए आज जानते हैं। क्या आपको मालूम है अब भी हिमाचल प्रदेश की दो राजधानियां हैं। पहली राजधानी शिमला और दूसरी राजधानी धर्मशाला है। जी हां, शिमला को ग्रीष्मकालीन राजधानी माना जाता है और धर्मशाला को शीतकालीन राजधानी माना जाता है। कहा जाता है ब्रिटश काल में भी हिमाचल प्रदेश की ये दोनों राजधानियां हुआ करती थी। उत्तराखंड भी एक ऐसा ही राज्य है जिसकी दो-दो राजधानियां हैं। देहरादून और गैरसैंण। हाल में ही मौजूदा मुख्यमंत्री ने ये घोषणा करते हुए कहा था कि ग्रीष्मकाल में गैरसैंण और शीतकाल में देहरादून राजधानी होगी। कहा जहा है कि दो-दो राजधानियां इसलिए बनाई गई ताकि दूरदराज के क्षेत्रों के साथ आसानी से जुड़ा जा सके। वैसे तो आप सभी को मालूम है कि महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई है, लेकिन महाराष्ट्र की दूसरी राजधानी भी है, जो नागपुर है। नागपुर को शीतकालीन राजधानी भी माना जाता है। कहा जाता है कि साल एक हज़ार नौ सौ तिरेपन में एक राजनीतिक समझौता हुआ जिसके तहत नागपुर को शीतकालीन राजधानी माना गया। माना जाता है कि आंध्र प्रदेश एक ऐसा राज्य है जिसकी कई राजधानियां हैं। पहले हैदराबाद हुआ करती थी, और अब अमरावती है। यहीं नहीं, साल दो हज़ार बीस में ही आंध्र प्रदेश विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित किया गया जिसमें विशाखापत्तनम को कार्यकारी राजधानी और कर्नूल को न्यायिक राजधानी बनाने का प्रस्ताव किया गया है। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी हो तो इसे फेसबुक पर जरूर शेयर करें और इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें। |
२. जीवन का लक्ष्य
व्यक्ति को कर्म करते हुए १०० वर्ष तक जीते रहने की इच्छा करनी चाहिए । कर्म की अपने आप मे भी कीमत है, परन्तु मनुष्य रूप मे यह जीवन का साधन है ।
किन्तु जीवन में जिएँ तो कैसे ? वेद कहता हैईशावास्यमिद सर्व यत्किच जगत्या जगत् ॥ तेन त्यक्तेन भु जीथा मा गृध कस्य स्विद्धनम् ॥
- यजु ४० १ इस चायमान समार मे जो कुछ चलता हुआ है, वह सब ईश्वर से आच्छादित है । जो कुछ भोगो, ईश्वर की देन समझकर भोगो । किसी दूसरे के धन का लालच न करो ।
वैदिक दृष्टिकोण के अनुसार संसार का प्रत्येक भाग ईश्वर से आच्छादित हैं । ईश्वर सर्वन व्यापक है, और समार की व्यवस्था उसी की व्यवस्था है ।
यदि सृष्टि मे जो कुछ है, ईश्वर की व्यवस्था के अधीन है, तो यह बात स्पष्ट है कि मनुष्यों के भोग के सभी सामान ईश्वर की देन है । मैं जीने के लिए कुछ खाता-पीता हूँ, यह सामग्री में बनाता नही । इसे जगत् मे विद्यमान पाता हूँ और इसे प्राप्त करके उसी रूप मे या थोडे परिवर्तन के साथ प्रयोग में लाता हूँ । यही नहीं, इस प्रयोग की योग्यता भी तो ईश्वर की देन हो है । अत सबका उपयोग करते हुए इश्वर का स्मरण करना चाहिए ।
धन के अच्छे और बुरे उपयोग के लिए निम्नलिखित मत्रो मे बहुमूल्य शिक्षा दी गई है ।
यविन्द्र यावतस्त्वमेतावदहमोशीय ।
स्तोतारमिद् दधिधे रदावसो न पापत्वायर सिषम् ॥
- साम •
परमात्मा 1 जगत् मे जो कुछ है, सब तुम्हारा है । इसमें मैं इतनी सम्पत्ति का स्वामी बनूं कि ईश्वरभक्तो की सहायता कर सकूं, मेरा धन पाप के लिए प्रयुक्त न हो ।"
थायन्त इव सूर्य विश्वे विन्द्रस्य भक्षत ।
वसूनि जातो बनिमान्योजसा प्रति भाग न बोधिम ॥
- साम० ३४५ 'जो कुछ उत्पन्न हो चुका है, जो कुछ उत्पन्न होगा अपने बल सहित सब परमात्मा का ही है, जैसे सूर्य की किरणे सभी सूर्य से निकलती है। अपने-अपने भाग्य को भोगो, जैसे एक पिता के पुत्र करते है । इतना ही धारण करने के योग्य है ।
वस्तुत प्रत्येक मनुष्य का उद्देश्य यह होना चाहिए कि वह आप अच्छी तरह रहे, बच्चो को अच्छी शिक्षा से सम्पन्न करके अपने पाँव पर खडा करके, शेष सत्र कुछ को समाज की सम्पत्ति समझे ।
३. सफलता के लिए
सफल जीवन के लिए कौन-से कर्म उपयोगी है, यह वेद मे अनेक स्थलो पर बताया गया है। यजुर्वेद के दो निम्नलिखित मन्त्र इस पर कुछ प्रकाश डालेंगे
स्वय बाजिस्तत्व कल्पयस्व स्वयं यजस्व स्वयं जुषस्व ।
महिमा तेऽन्येन न सन्नशे ।। ( २३ १५ )
'बलवान् आत्मा तू आप अपने शरीर को समर्थ बना, आप यज्ञकर, आप सेवा कर, तेरी महिमा किसी दूसरे के द्वारा प्राप्त नही होगी।
प्रेता जयता नर इन्द्रोव शर्म यच्छतु ।
उम्रा व. सन्तु बाहवोऽनाधृष्या यथाऽसथ ।। ( १७ : ४६) | दो. जीवन का लक्ष्य व्यक्ति को कर्म करते हुए एक सौ वर्ष तक जीते रहने की इच्छा करनी चाहिए । कर्म की अपने आप मे भी कीमत है, परन्तु मनुष्य रूप मे यह जीवन का साधन है । किन्तु जीवन में जिएँ तो कैसे ? वेद कहता हैईशावास्यमिद सर्व यत्किच जगत्या जगत् ॥ तेन त्यक्तेन भु जीथा मा गृध कस्य स्विद्धनम् ॥ - यजु चालीस एक इस चायमान समार मे जो कुछ चलता हुआ है, वह सब ईश्वर से आच्छादित है । जो कुछ भोगो, ईश्वर की देन समझकर भोगो । किसी दूसरे के धन का लालच न करो । वैदिक दृष्टिकोण के अनुसार संसार का प्रत्येक भाग ईश्वर से आच्छादित हैं । ईश्वर सर्वन व्यापक है, और समार की व्यवस्था उसी की व्यवस्था है । यदि सृष्टि मे जो कुछ है, ईश्वर की व्यवस्था के अधीन है, तो यह बात स्पष्ट है कि मनुष्यों के भोग के सभी सामान ईश्वर की देन है । मैं जीने के लिए कुछ खाता-पीता हूँ, यह सामग्री में बनाता नही । इसे जगत् मे विद्यमान पाता हूँ और इसे प्राप्त करके उसी रूप मे या थोडे परिवर्तन के साथ प्रयोग में लाता हूँ । यही नहीं, इस प्रयोग की योग्यता भी तो ईश्वर की देन हो है । अत सबका उपयोग करते हुए इश्वर का स्मरण करना चाहिए । धन के अच्छे और बुरे उपयोग के लिए निम्नलिखित मत्रो मे बहुमूल्य शिक्षा दी गई है । यविन्द्र यावतस्त्वमेतावदहमोशीय । स्तोतारमिद् दधिधे रदावसो न पापत्वायर सिषम् ॥ - साम • परमात्मा एक जगत् मे जो कुछ है, सब तुम्हारा है । इसमें मैं इतनी सम्पत्ति का स्वामी बनूं कि ईश्वरभक्तो की सहायता कर सकूं, मेरा धन पाप के लिए प्रयुक्त न हो ।" थायन्त इव सूर्य विश्वे विन्द्रस्य भक्षत । वसूनि जातो बनिमान्योजसा प्रति भाग न बोधिम ॥ - सामशून्य तीन सौ पैंतालीस 'जो कुछ उत्पन्न हो चुका है, जो कुछ उत्पन्न होगा अपने बल सहित सब परमात्मा का ही है, जैसे सूर्य की किरणे सभी सूर्य से निकलती है। अपने-अपने भाग्य को भोगो, जैसे एक पिता के पुत्र करते है । इतना ही धारण करने के योग्य है । वस्तुत प्रत्येक मनुष्य का उद्देश्य यह होना चाहिए कि वह आप अच्छी तरह रहे, बच्चो को अच्छी शिक्षा से सम्पन्न करके अपने पाँव पर खडा करके, शेष सत्र कुछ को समाज की सम्पत्ति समझे । तीन. सफलता के लिए सफल जीवन के लिए कौन-से कर्म उपयोगी है, यह वेद मे अनेक स्थलो पर बताया गया है। यजुर्वेद के दो निम्नलिखित मन्त्र इस पर कुछ प्रकाश डालेंगे स्वय बाजिस्तत्व कल्पयस्व स्वयं यजस्व स्वयं जुषस्व । महिमा तेऽन्येन न सन्नशे ।। 'बलवान् आत्मा तू आप अपने शरीर को समर्थ बना, आप यज्ञकर, आप सेवा कर, तेरी महिमा किसी दूसरे के द्वारा प्राप्त नही होगी। प्रेता जयता नर इन्द्रोव शर्म यच्छतु । उम्रा व. सन्तु बाहवोऽनाधृष्या यथाऽसथ ।। |
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि देश में किसानों की आय बढ़ी है और केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न योजनाओं की वजह से कई मामलों में दोगुनी हुई है। मोदी ने 'नरेंद्र मोदी एप' के जरिए देश के विभिन्न हिस्सों से चुनिंदा किसानों से बात की। इस दौरान उन्होंने उनसे उत्पादन और आय में वृद्धि होने की सफल कहानियों के बारे में पूछा।
मोदी ने कहा,"हम यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं कि हमारे मेहनती किसानों की आय 2022 तक दोगुनी हो जाए। इसके लिए हम जहां भी आवश्यक हो, उन्हें उचित सहायता प्रदान कर रहे हैं। हमें किसानों पर विश्वास है। वे जोखिम लेने और बेहतर परिणाम लाने के लिए तैयार हैं।
मोदी ने कहा कि सरकार ने केंद्रीय बजट में अधिसूचित फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की घोषणा करके किसानों के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित किया है।
मोदी ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए निवेश लागत में राज्य सरकारों द्वारा भूमि राजस्व के साथ परिवार श्रम, मवेशियों, मशीनों, बीजों, उर्वरकों, सिंचाई को, पट्टे पर जमीन के लिए किराया और कामकाजी पूंजी पर ब्याज शामिल होगा। मोदी ने कहा कि 2017-18 में खाद्यान्न उत्पादन 2010-2014 की तुलना में 28 करोड़ टन से अधिक बढ़ गया। 2010-2014 में खाद्यान्न उत्पादन औसतन 25 करोड़ टन रहा था।
| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि देश में किसानों की आय बढ़ी है और केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न योजनाओं की वजह से कई मामलों में दोगुनी हुई है। मोदी ने 'नरेंद्र मोदी एप' के जरिए देश के विभिन्न हिस्सों से चुनिंदा किसानों से बात की। इस दौरान उन्होंने उनसे उत्पादन और आय में वृद्धि होने की सफल कहानियों के बारे में पूछा। मोदी ने कहा,"हम यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं कि हमारे मेहनती किसानों की आय दो हज़ार बाईस तक दोगुनी हो जाए। इसके लिए हम जहां भी आवश्यक हो, उन्हें उचित सहायता प्रदान कर रहे हैं। हमें किसानों पर विश्वास है। वे जोखिम लेने और बेहतर परिणाम लाने के लिए तैयार हैं। मोदी ने कहा कि सरकार ने केंद्रीय बजट में अधिसूचित फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा करके किसानों के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित किया है। मोदी ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए निवेश लागत में राज्य सरकारों द्वारा भूमि राजस्व के साथ परिवार श्रम, मवेशियों, मशीनों, बीजों, उर्वरकों, सिंचाई को, पट्टे पर जमीन के लिए किराया और कामकाजी पूंजी पर ब्याज शामिल होगा। मोदी ने कहा कि दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह में खाद्यान्न उत्पादन दो हज़ार दस-दो हज़ार चौदह की तुलना में अट्ठाईस करोड़ टन से अधिक बढ़ गया। दो हज़ार दस-दो हज़ार चौदह में खाद्यान्न उत्पादन औसतन पच्चीस करोड़ टन रहा था। |
इंडिया न्यूज, Kasganj Fire News : कासगंज के पटियाली क्षेत्र के गांव नगला पटे में चिंगारी ने विकराल रूप ले लिया। आग से चार सिलिंडर फट गए जबकि 11 वर्षीय बच्ची अंजू की जलने से मौत हो गई जबकि 40 झोपड़ियां जलकर राख हो गई। दमकल की चार गाड़ियों ने चार घंटे बाद आग पर काबू पाया। आग से लाखों रुपये का नुकसान हुआ। पीड़ित परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। डीएम, एसपी समेत प्रशासनिक अफसरों ने जायजा लिया। राजस्व टीम को जांच रिपोर्ट देने के आदेश दिए।
आग शुरुआत गांव के बाहरी हिस्से में बने ओमवीर की झोपड़ी से हुई। यहां किसी चिंगारी से आग लग गई। इसके बाद आग ने आसपास के सभी कच्चे पक्के मकानों को चपेट में लिया। चार सिलिंडर फटने से आग की लपटें और भड़क गईं। बुर्जी, बिटौरे आदि स्थानों पर आग लग गई।
गांव नगला पटे में हुए भीषण अग्निकांड के दौरान गैस सिलिंडर के विस्फोट से स्थिति बिगड़ गई। सिलिंडर फटने की तेज आवाजों से ग्रामीण दहशत में आ गए। पूरे गांव में तीन से चार घंटे अफरातफरी का माहौल बना रहा। ग्रामीण झोपड़ियों से भागकर जान ही बचा पाए, लेकिन अपना सामान नहीं बचा पाए। ग्रामीणों की घर गृहस्थी का सब सामान जलकर नष्ट हो गया।
करीब चार बजे दमकल कर्मियों को सूचना मिली। 20 मिनट बाद पटियाली से दमकल की पहली गाड़ी पहुंची और आग बुझाने का काम शुरू किया गया, लेकिन आग इतनी विकराल थी कि एक गाड़ी से नियंत्रण नहीं हो पा रहा था। ऐसी स्थिति में जिले की सभी तीन दमकल की गाड़ियां नगला पटे पहुंची और एक दमकल पड़ोसी जनपद बदायूं से बुलाई गई। चार घंटे की कवायद के बाद आग पर काबू पाया जा सका।
| इंडिया न्यूज, Kasganj Fire News : कासगंज के पटियाली क्षेत्र के गांव नगला पटे में चिंगारी ने विकराल रूप ले लिया। आग से चार सिलिंडर फट गए जबकि ग्यारह वर्षीय बच्ची अंजू की जलने से मौत हो गई जबकि चालीस झोपड़ियां जलकर राख हो गई। दमकल की चार गाड़ियों ने चार घंटे बाद आग पर काबू पाया। आग से लाखों रुपये का नुकसान हुआ। पीड़ित परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। डीएम, एसपी समेत प्रशासनिक अफसरों ने जायजा लिया। राजस्व टीम को जांच रिपोर्ट देने के आदेश दिए। आग शुरुआत गांव के बाहरी हिस्से में बने ओमवीर की झोपड़ी से हुई। यहां किसी चिंगारी से आग लग गई। इसके बाद आग ने आसपास के सभी कच्चे पक्के मकानों को चपेट में लिया। चार सिलिंडर फटने से आग की लपटें और भड़क गईं। बुर्जी, बिटौरे आदि स्थानों पर आग लग गई। गांव नगला पटे में हुए भीषण अग्निकांड के दौरान गैस सिलिंडर के विस्फोट से स्थिति बिगड़ गई। सिलिंडर फटने की तेज आवाजों से ग्रामीण दहशत में आ गए। पूरे गांव में तीन से चार घंटे अफरातफरी का माहौल बना रहा। ग्रामीण झोपड़ियों से भागकर जान ही बचा पाए, लेकिन अपना सामान नहीं बचा पाए। ग्रामीणों की घर गृहस्थी का सब सामान जलकर नष्ट हो गया। करीब चार बजे दमकल कर्मियों को सूचना मिली। बीस मिनट बाद पटियाली से दमकल की पहली गाड़ी पहुंची और आग बुझाने का काम शुरू किया गया, लेकिन आग इतनी विकराल थी कि एक गाड़ी से नियंत्रण नहीं हो पा रहा था। ऐसी स्थिति में जिले की सभी तीन दमकल की गाड़ियां नगला पटे पहुंची और एक दमकल पड़ोसी जनपद बदायूं से बुलाई गई। चार घंटे की कवायद के बाद आग पर काबू पाया जा सका। |
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बीच पर बेड डालकर बैठी हसीना ने दिखाई हॉटनेस, लोग बोले- 'हर चीज की एक सीमा होती है यार'
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पंजाबी-कैनेडियन रैपर शुभ का स्टिल रोलिन इंडिया दौरे पर रिएक्शनः भारत का विकृत नक्शा शेयर कर निशाने पर आए खालिस्तान के कथित समर्थक पंजाबी-कैनेडियन रैपर शुभनीत सिंह के सुर अब भारी विरोध के बाद बदलते दिख रहे हैं . भारत और कनाडा के बीच राजनयिक विवाद के बीच अपने विवादास्पद सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भारी आलोचना का सामना कर रहे पंजाबी-कनाडाई रैपर शुभनीत सिंह ने गुरुवार को कहा कि वह अपना भारत दौरा रद्द होने से बहुत निराश हैं। खालिस्तान मुद्दे पर समर्थन के कारण रैपर का स्टिल रोलिन इंडिया दौरा पहले ही रद्द कर दिया गया है।
व्यक्त करते हुए इंस्टाग्राम पर साझा की गई एक पोस्ट में शुभनीत सिंह ने कहा कि पिछले दो महीनों से मैं भारत दौरे के लिए कड़ी मेहनत कर रहा था और सार्वजनिक रूप से अपने प्रदर्शन को लेकर बहुत उत्साहित था। इंस्टाग्राम पर अपने पेज पर रैपर ने पोस्ट किया कि पंजाब के एक युवा रैपर गायक के रूप में, अपने संगीत को एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखना मेरे जीवन का सपना था। लेकिन हाल की घटनाओं ने मेरी मेहनत और प्रगति को प्रभावित किया है. मैं अपनी निराशा और दुःख व्यक्त करने के लिए कुछ शब्द कहना चाहता था।
शुभनीत ने अपने विवादित पोस्ट पर सफाई देते हुए लिखा कि उनका इरादा पंजाब के लिए प्रार्थना करने का था क्योंकि राज्य में बिजली कटौती की खबर थी। उन्होंने कहा कि उनका इरादा किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था. अपना शो रद्द होने से निराश रैपर ने कहा कि उन पर लगे आरोपों ने उन्हें काफी प्रभावित किया है.
खालिस्तान समर्थक शुभनीत सिंह को होस्ट करने के लिए टिकट बुकिंग ऐप को सोशल मीडिया पर आलोचना का सामना करना पड़ा। इससे पहले बुधवार को एक्स पर #UninstallBookMyShow ट्रेंड करने लगा था और कुछ यूजर्स ने इसे शुभ खालिस्तानी कहा था। रैपर्ट ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर भारत का एक विकृत नक्शा साझा किया। जिसका कैप्शन उन्होंने 'पंजाब के लिए प्रार्थना' लिखा है। इस घटना के बाद, भारत के शीर्ष क्रिकेटर विराट कोहली ने कथित तौर पर शुभनीत को इंस्टाग्राम पर अनफॉलो कर दिया।
| पंजाबी-कैनेडियन रैपर शुभ का स्टिल रोलिन इंडिया दौरे पर रिएक्शनः भारत का विकृत नक्शा शेयर कर निशाने पर आए खालिस्तान के कथित समर्थक पंजाबी-कैनेडियन रैपर शुभनीत सिंह के सुर अब भारी विरोध के बाद बदलते दिख रहे हैं . भारत और कनाडा के बीच राजनयिक विवाद के बीच अपने विवादास्पद सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भारी आलोचना का सामना कर रहे पंजाबी-कनाडाई रैपर शुभनीत सिंह ने गुरुवार को कहा कि वह अपना भारत दौरा रद्द होने से बहुत निराश हैं। खालिस्तान मुद्दे पर समर्थन के कारण रैपर का स्टिल रोलिन इंडिया दौरा पहले ही रद्द कर दिया गया है। व्यक्त करते हुए इंस्टाग्राम पर साझा की गई एक पोस्ट में शुभनीत सिंह ने कहा कि पिछले दो महीनों से मैं भारत दौरे के लिए कड़ी मेहनत कर रहा था और सार्वजनिक रूप से अपने प्रदर्शन को लेकर बहुत उत्साहित था। इंस्टाग्राम पर अपने पेज पर रैपर ने पोस्ट किया कि पंजाब के एक युवा रैपर गायक के रूप में, अपने संगीत को एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखना मेरे जीवन का सपना था। लेकिन हाल की घटनाओं ने मेरी मेहनत और प्रगति को प्रभावित किया है. मैं अपनी निराशा और दुःख व्यक्त करने के लिए कुछ शब्द कहना चाहता था। शुभनीत ने अपने विवादित पोस्ट पर सफाई देते हुए लिखा कि उनका इरादा पंजाब के लिए प्रार्थना करने का था क्योंकि राज्य में बिजली कटौती की खबर थी। उन्होंने कहा कि उनका इरादा किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था. अपना शो रद्द होने से निराश रैपर ने कहा कि उन पर लगे आरोपों ने उन्हें काफी प्रभावित किया है. खालिस्तान समर्थक शुभनीत सिंह को होस्ट करने के लिए टिकट बुकिंग ऐप को सोशल मीडिया पर आलोचना का सामना करना पड़ा। इससे पहले बुधवार को एक्स पर #UninstallBookMyShow ट्रेंड करने लगा था और कुछ यूजर्स ने इसे शुभ खालिस्तानी कहा था। रैपर्ट ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर भारत का एक विकृत नक्शा साझा किया। जिसका कैप्शन उन्होंने 'पंजाब के लिए प्रार्थना' लिखा है। इस घटना के बाद, भारत के शीर्ष क्रिकेटर विराट कोहली ने कथित तौर पर शुभनीत को इंस्टाग्राम पर अनफॉलो कर दिया। |
जम्मू, 14 दिसम्बर । जम्मू-कश्मीर(Jammu and Kashmir) के पुंछ(Poonch) जिले के सुरनकोट इलाके में मंगलवार को आतंकवादियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। आपको बता दें कि सूत्रों ने कहा कि सुरनकोट के डोरी धूक गांव में मुठभेड़ चल रही है और लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के दो से तीन आतंकवादी फंस गए हैं।
वहीँ आपको बता दें कि पुलिस और सेना की एक संयुक्त टीम ने इलाके को घेर लिया और आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में विशेष जानकारी के आधार पर तलाशी अभियान शुरू करने के बाद मुठभेड़ हुई। वहीँ आंतकवादी अब बुरी तरह फंस गए हैं और सुरक्षा बलों ने आंतकियों को पूरी तरह से घेर लिया है.
आपको बता दें कि वहीँ जैसे ही सुरक्षा बल उस स्थान पर पहुंचे, जहां आतंकवादी छिपे हुए थे, वे भारी मात्रा में गोलीबारी की चपेट में आ गए जिससे मुठभेड़ शुरू हो गई।
| जम्मू, चौदह दिसम्बर । जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले के सुरनकोट इलाके में मंगलवार को आतंकवादियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। आपको बता दें कि सूत्रों ने कहा कि सुरनकोट के डोरी धूक गांव में मुठभेड़ चल रही है और लश्कर-ए-तैयबा के दो से तीन आतंकवादी फंस गए हैं। वहीँ आपको बता दें कि पुलिस और सेना की एक संयुक्त टीम ने इलाके को घेर लिया और आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में विशेष जानकारी के आधार पर तलाशी अभियान शुरू करने के बाद मुठभेड़ हुई। वहीँ आंतकवादी अब बुरी तरह फंस गए हैं और सुरक्षा बलों ने आंतकियों को पूरी तरह से घेर लिया है. आपको बता दें कि वहीँ जैसे ही सुरक्षा बल उस स्थान पर पहुंचे, जहां आतंकवादी छिपे हुए थे, वे भारी मात्रा में गोलीबारी की चपेट में आ गए जिससे मुठभेड़ शुरू हो गई। |
रॉयल स्पेनिश एकेडमी (RAE) के शब्दकोश में जो कुछ स्थापित किया गया है, उसके अनुसार, पंटिलो दो महान अर्थों के साथ एक शब्द हैः यह एक संगीत संकेत हो सकता है जो एक नोट या अत्यधिक आत्म-प्रेम को संशोधित करता है जो कि अप्रासंगिक है। ।मौन के मामले में (चूंकि, जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, इन्हें डॉट की उपस्थिति से भी बदला जा सकता है), बशर्ते कि वे अपनी सामान्य स्थिति में हों (लंबवत केंद्रित), डॉट को तीसरे स्थान पर खींचा जाना चाहिए कर्मचारियों के आधार से ऊपर की ओर गिनती शुरू।
डॉट क्या है, संक्षेप में, नोट की अवधि को जोड़ने के लिए, इसके पारंपरिक मूल्य का आधा हिस्सा जोड़ना है। उदाहरण के लिएः एक सफेद एक की अवधि दो दालों (दो काले) होती है; इसलिए, एक बिंदीदार सफेद का मूल्य तीन दालों (तीन काला) होगा।
यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि, पारंपरिक डॉटिंग से परे, आप डबल डॉट या ट्रिपल का भी उपयोग कर सकते हैं। जैसे साधारण नोट में आधा मूल्य जोड़ता है, वैसे ही प्रत्येक पिछले वाले के मूल्य का आधा जोड़ देता है। इसलिए, डबल डॉट का निम्न मान हैः 1 + ¼ +,, जो 1, के बराबर है।
एक डबल डॉट या ट्रिपल डॉट स्कोर करने के लिए, बस नोट के दाईं ओर आवश्यक अंक और अन्य बिंदुओं को जोड़ें ।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि कर्मचारियों में उनकी उपस्थिति को बाकी के साथ प्रासंगिक संरेखण की आवश्यकता होती है, क्योंकि सभी उपकरणों को एक ही दुर्घटना या विशेष संकेत प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं होती है। उदाहरण के लिए, यदि हमारे पास 2/4 (दो तिमाहियों में एक टुकड़ा है, यानी प्रति ताल दो अश्वेतों के बराबर एक ताल), दो सीढ़ियों पर लिखा गया है, और ऊपरी में एक बिंदीदार तिमाही नोट और एक आठवें नोट का उपयोग किया जाता है, लेकिन दूसरे में, दो अश्वेतों, निचले कर्मचारियों के दूसरे काले को डॉट के साथ संरेखित किया जाना चाहिए, क्योंकि यह वह जगह है जहां से कम्पास का दूसरा समय शुरू होता है।
| रॉयल स्पेनिश एकेडमी के शब्दकोश में जो कुछ स्थापित किया गया है, उसके अनुसार, पंटिलो दो महान अर्थों के साथ एक शब्द हैः यह एक संगीत संकेत हो सकता है जो एक नोट या अत्यधिक आत्म-प्रेम को संशोधित करता है जो कि अप्रासंगिक है। ।मौन के मामले में , बशर्ते कि वे अपनी सामान्य स्थिति में हों , डॉट को तीसरे स्थान पर खींचा जाना चाहिए कर्मचारियों के आधार से ऊपर की ओर गिनती शुरू। डॉट क्या है, संक्षेप में, नोट की अवधि को जोड़ने के लिए, इसके पारंपरिक मूल्य का आधा हिस्सा जोड़ना है। उदाहरण के लिएः एक सफेद एक की अवधि दो दालों होती है; इसलिए, एक बिंदीदार सफेद का मूल्य तीन दालों होगा। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि, पारंपरिक डॉटिंग से परे, आप डबल डॉट या ट्रिपल का भी उपयोग कर सकते हैं। जैसे साधारण नोट में आधा मूल्य जोड़ता है, वैसे ही प्रत्येक पिछले वाले के मूल्य का आधा जोड़ देता है। इसलिए, डबल डॉट का निम्न मान हैः एक + ¼ +,, जो एक, के बराबर है। एक डबल डॉट या ट्रिपल डॉट स्कोर करने के लिए, बस नोट के दाईं ओर आवश्यक अंक और अन्य बिंदुओं को जोड़ें । यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि कर्मचारियों में उनकी उपस्थिति को बाकी के साथ प्रासंगिक संरेखण की आवश्यकता होती है, क्योंकि सभी उपकरणों को एक ही दुर्घटना या विशेष संकेत प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं होती है। उदाहरण के लिए, यदि हमारे पास दो/चार , दो सीढ़ियों पर लिखा गया है, और ऊपरी में एक बिंदीदार तिमाही नोट और एक आठवें नोट का उपयोग किया जाता है, लेकिन दूसरे में, दो अश्वेतों, निचले कर्मचारियों के दूसरे काले को डॉट के साथ संरेखित किया जाना चाहिए, क्योंकि यह वह जगह है जहां से कम्पास का दूसरा समय शुरू होता है। |
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज फिर मन की बात में मधुमक्खी पालन करके शहद का उत्पादन बढ़ाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि परंपरागत खेती के साथ ही नये विकल्पों को अपनाना जरूरी है। मधुमक्खी पालन भी ऐसा ही एक विकल्प बन कर उभर रहा है। बहुत संख्या में किसान इससे जुड़ रहे हैं। ऐसे ही हरियाणा के यमुनानगर में एक किसान सुभाष कंबोज शहद से हर साल अच्छी कमाई कर रहा है।
देश में ऐसे कई किसान मधुमक्खी पालन कर रहे हैं, जिससे देश में हर साल सवा लाख टन से अधिsक शहद का उत्पादन हो रहा है।
प्रधानमंत्री ने पिछले साल 28 मार्च को भी मन की बात कार्यक्रम में यमुनानगर के सुभाष कंबोज का मधु पालन के लिए जिक्र किया था। जिला के गांव हाफिजपुर में पेशे से किसान और लम्बे समय से मधुमक्खी पालन का व्यवसाय कर रहे सुभाष कंबोज अन्य युवाओं को मधुमक्खी पालन की जानकारी व प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वावलम्बी बना रहे हैं।
सुभाष कंबोज ने बताया कि उन्होंने 6 बॉक्स से मधुमक्खी पालन का काम शुरू किया था और आज उनके पास हजार से अधिक बॉक्स हैं। उन्होंने बताया कि वे युवाओं को मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण देकर स्वावलम्बी बनाने का काम कर रहे हैं। हरियाणा सरकार मधुमक्खी पालन पर 40+45 प्रतिशत उद्यान विभाग के माध्यम से सब्सिडी उपलब्ध करवाती है।
सुभाष काम्बोज ने बताया कि वैसे तो मधुमक्खी पालन के लिए कई प्रजातियों की मक्खी होती है, लेकिन बॉक्स में एपिसमिलाफैरा मधुमक्खी पाली जाती है, जो कि ज्यादा मात्रा में शहद का उत्पादन करती है। जबकि पेड़ पर लगने वाला मधुमक्खी का छत्ता एपिस डोरसेट लगाती है। इस के अतिरिक्त एपिस सैरेना इण्डिका, एपिस फलोरिया इण्डिका तथा डंक न मारने वाली डम्भर (एपिस मेलिपोना) मधुमक्खी शहद एकत्रित करने का काम करती है।
पीएस ने बताया पहले तो एक ही प्रकार का शहद एकत्रित होता था लेकिन अब हम लोग मक्खियों के बॉक्सों को हरियाणा से राजस्थान, जम्मू कश्मीर, हरियाणा से लेह लद्दाख तक लेकर जाते है, जिस कारण सरसों के खेत में मधुमक्खी का बॉक्स रखने से सरसों का शहद, जामुन का शहद, तुलसी का शहद, नीम का शहद, सफेदा शहद, सौंफ का शहद, अजवाइन का शहद, लीची का शहद, कीकर का शहद जैसे अन्य कई प्रकार के शहद बॉक्स में पनप रही मधुमक्खी के माध्यम से मिलता है। प्रधानमंत्री द्वारा सुभाष कंबोज के जिक्र किए जाने के बाद गांव हाफिजपुर ही नहीं आसपास के गांव के इलाके के लोग भी आकर सुभाष कंबोज को बधाइयां दे रहे हैं।
| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज फिर मन की बात में मधुमक्खी पालन करके शहद का उत्पादन बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि परंपरागत खेती के साथ ही नये विकल्पों को अपनाना जरूरी है। मधुमक्खी पालन भी ऐसा ही एक विकल्प बन कर उभर रहा है। बहुत संख्या में किसान इससे जुड़ रहे हैं। ऐसे ही हरियाणा के यमुनानगर में एक किसान सुभाष कंबोज शहद से हर साल अच्छी कमाई कर रहा है। देश में ऐसे कई किसान मधुमक्खी पालन कर रहे हैं, जिससे देश में हर साल सवा लाख टन से अधिsक शहद का उत्पादन हो रहा है। प्रधानमंत्री ने पिछले साल अट्ठाईस मार्च को भी मन की बात कार्यक्रम में यमुनानगर के सुभाष कंबोज का मधु पालन के लिए जिक्र किया था। जिला के गांव हाफिजपुर में पेशे से किसान और लम्बे समय से मधुमक्खी पालन का व्यवसाय कर रहे सुभाष कंबोज अन्य युवाओं को मधुमक्खी पालन की जानकारी व प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वावलम्बी बना रहे हैं। सुभाष कंबोज ने बताया कि उन्होंने छः बॉक्स से मधुमक्खी पालन का काम शुरू किया था और आज उनके पास हजार से अधिक बॉक्स हैं। उन्होंने बताया कि वे युवाओं को मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण देकर स्वावलम्बी बनाने का काम कर रहे हैं। हरियाणा सरकार मधुमक्खी पालन पर चालीस+पैंतालीस प्रतिशत उद्यान विभाग के माध्यम से सब्सिडी उपलब्ध करवाती है। सुभाष काम्बोज ने बताया कि वैसे तो मधुमक्खी पालन के लिए कई प्रजातियों की मक्खी होती है, लेकिन बॉक्स में एपिसमिलाफैरा मधुमक्खी पाली जाती है, जो कि ज्यादा मात्रा में शहद का उत्पादन करती है। जबकि पेड़ पर लगने वाला मधुमक्खी का छत्ता एपिस डोरसेट लगाती है। इस के अतिरिक्त एपिस सैरेना इण्डिका, एपिस फलोरिया इण्डिका तथा डंक न मारने वाली डम्भर मधुमक्खी शहद एकत्रित करने का काम करती है। पीएस ने बताया पहले तो एक ही प्रकार का शहद एकत्रित होता था लेकिन अब हम लोग मक्खियों के बॉक्सों को हरियाणा से राजस्थान, जम्मू कश्मीर, हरियाणा से लेह लद्दाख तक लेकर जाते है, जिस कारण सरसों के खेत में मधुमक्खी का बॉक्स रखने से सरसों का शहद, जामुन का शहद, तुलसी का शहद, नीम का शहद, सफेदा शहद, सौंफ का शहद, अजवाइन का शहद, लीची का शहद, कीकर का शहद जैसे अन्य कई प्रकार के शहद बॉक्स में पनप रही मधुमक्खी के माध्यम से मिलता है। प्रधानमंत्री द्वारा सुभाष कंबोज के जिक्र किए जाने के बाद गांव हाफिजपुर ही नहीं आसपास के गांव के इलाके के लोग भी आकर सुभाष कंबोज को बधाइयां दे रहे हैं। |
Giridih : आपातकाल और मीसा एक्ट के विरोध में शनिवार को गिरिडीह भाजपा ने काला दिवस मनाया. वहीं आपातकाल के आंदोलनकारियों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया. पचंपा के हरिचक स्थित भाजपा कार्यालय में कार्यक्रम आयोजित कर काला दिवस मनाया गया.
इस दौरान कार्यक्रम में पहुंचे धनबाद सांसद पीएन सिंह ने कहा कि जिन नेताओं ने आपातकाल के खिलाफ जयप्रकाश नारायण के नेत्तृव में इंदिरा गांधी के शासन और आपातकाल के खिलाफ आंदोलन किया, वैसे आंदोलनकारियों याद कर सिरहन होती है. क्योंकि उस वक्त इंदिरा गांधी की सरकार ने लोगों पर जबरन जुल्म ढ़ाने का काम किया था. अटल जी और आडवाणी जी को भी गिरफ्तार किया गया था.
भाजपा के सम्मान समारोह के दौरान सूबे के पूर्व मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता चन्द्रमोहन प्रसाद ने आपातकाल के दौरान इंदिरा सरकार द्वारा किए गए जुल्मों पर बात करते हुए कहा कि उस वक्त युवाओं की नसबंदी की गयी थी. लेकिन कांग्रेस ने आज तक इसपर माफी नहीं मांगी.
समारोह को पूर्व सांसद रवीन्द्र राय, जमुआ विधायक केदार हाजरा, पूर्व सदर विधायक निर्भय शाहाबादी, आपातकाल के आंदोलनकारी अपूर सिंह, साहेब वर्मा, बाबुल गुप्ता, पूर्व विधायक लक्ष्मण स्वर्णकार समेत कई नेताओं ने संबोधित किया. समारोह में जिलाध्यक्ष महादेव दुबे, किसान मोर्चा के अध्यक्ष दिलीप वर्मा, सांसद प्रतिनिधी दिनेश यादव, जिला महामंत्री संदीप डंगाईच, सुभाष सिन्हा, हरमिंदर सिंह बग्गा समेत कई लोग शामिल रहे.
| Giridih : आपातकाल और मीसा एक्ट के विरोध में शनिवार को गिरिडीह भाजपा ने काला दिवस मनाया. वहीं आपातकाल के आंदोलनकारियों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया. पचंपा के हरिचक स्थित भाजपा कार्यालय में कार्यक्रम आयोजित कर काला दिवस मनाया गया. इस दौरान कार्यक्रम में पहुंचे धनबाद सांसद पीएन सिंह ने कहा कि जिन नेताओं ने आपातकाल के खिलाफ जयप्रकाश नारायण के नेत्तृव में इंदिरा गांधी के शासन और आपातकाल के खिलाफ आंदोलन किया, वैसे आंदोलनकारियों याद कर सिरहन होती है. क्योंकि उस वक्त इंदिरा गांधी की सरकार ने लोगों पर जबरन जुल्म ढ़ाने का काम किया था. अटल जी और आडवाणी जी को भी गिरफ्तार किया गया था. भाजपा के सम्मान समारोह के दौरान सूबे के पूर्व मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता चन्द्रमोहन प्रसाद ने आपातकाल के दौरान इंदिरा सरकार द्वारा किए गए जुल्मों पर बात करते हुए कहा कि उस वक्त युवाओं की नसबंदी की गयी थी. लेकिन कांग्रेस ने आज तक इसपर माफी नहीं मांगी. समारोह को पूर्व सांसद रवीन्द्र राय, जमुआ विधायक केदार हाजरा, पूर्व सदर विधायक निर्भय शाहाबादी, आपातकाल के आंदोलनकारी अपूर सिंह, साहेब वर्मा, बाबुल गुप्ता, पूर्व विधायक लक्ष्मण स्वर्णकार समेत कई नेताओं ने संबोधित किया. समारोह में जिलाध्यक्ष महादेव दुबे, किसान मोर्चा के अध्यक्ष दिलीप वर्मा, सांसद प्रतिनिधी दिनेश यादव, जिला महामंत्री संदीप डंगाईच, सुभाष सिन्हा, हरमिंदर सिंह बग्गा समेत कई लोग शामिल रहे. |
कुत्तों ने शव को झाड़ी से निकालकर उसे काट खाया था। मांस के लोथड़े छिटके पड़े थे। ज्यादातर हिस्सा कुत्ते खा चुके थे। जिसने भी ये देखा वह आवाक रह गया। पुलिस ने दोनों आरोपियों पर अपहरण, हत्या, दुष्कर्म और पॉक्सो की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया।
उत्तराखंड से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। कोटद्वार से लापता हुई एक 10 वर्षीय बच्ची का शव बुधवार को अलग-अलग टुकड़ो में मिला। बच्ची के साथ दुष्कर्म किया गया और फिर उसकी हत्या कर दी गई।
कोटद्वार के नगर निगम क्षेत्र से सोमवार शाम बच्ची दुकान समान लाने गई थी और वहीं से लापता हो गई। परिजनों ने कोतवाली में बच्ची के गायब होने की रिपोर्ट लिखवाई। पुलिस ने रिपोर्ट लिखकर जांच शुरू कर दी।
दुकान के पास लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज को खंगाला गया तो एक युवक बच्ची को ले जाता दिखाई दिया। पुलिस ने युवक की पहचान करते हुए पद्म नाम के आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
उससे पूछताछ हुई तो सारे राज खुल गए। उसने सोमवार रात अपने एक साथी के साथ बच्ची से बलात्कार किया और किसी को पता न चले इसलिए बच्ची का गला दबाकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने दोनों की निशानदेही पर बच्ची की हत्या वाली जगह पर पहुंची।
वहां का नजारा देख सन्न रह गई। कुत्तों ने शव को झाड़ी से निकालकर उसे काट खाया था। मांस के लोथड़े छिटके पड़े थे। ज्यादातर हिस्सा कुत्ते खा चुके थे। जिसने भी ये देखा वह आवाक रह गया। पुलिस ने दोनों आरोपियों पर अपहरण, हत्या, दुष्कर्म और पॉक्सो की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया।
| कुत्तों ने शव को झाड़ी से निकालकर उसे काट खाया था। मांस के लोथड़े छिटके पड़े थे। ज्यादातर हिस्सा कुत्ते खा चुके थे। जिसने भी ये देखा वह आवाक रह गया। पुलिस ने दोनों आरोपियों पर अपहरण, हत्या, दुष्कर्म और पॉक्सो की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। उत्तराखंड से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। कोटद्वार से लापता हुई एक दस वर्षीय बच्ची का शव बुधवार को अलग-अलग टुकड़ो में मिला। बच्ची के साथ दुष्कर्म किया गया और फिर उसकी हत्या कर दी गई। कोटद्वार के नगर निगम क्षेत्र से सोमवार शाम बच्ची दुकान समान लाने गई थी और वहीं से लापता हो गई। परिजनों ने कोतवाली में बच्ची के गायब होने की रिपोर्ट लिखवाई। पुलिस ने रिपोर्ट लिखकर जांच शुरू कर दी। दुकान के पास लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज को खंगाला गया तो एक युवक बच्ची को ले जाता दिखाई दिया। पुलिस ने युवक की पहचान करते हुए पद्म नाम के आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। उससे पूछताछ हुई तो सारे राज खुल गए। उसने सोमवार रात अपने एक साथी के साथ बच्ची से बलात्कार किया और किसी को पता न चले इसलिए बच्ची का गला दबाकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने दोनों की निशानदेही पर बच्ची की हत्या वाली जगह पर पहुंची। वहां का नजारा देख सन्न रह गई। कुत्तों ने शव को झाड़ी से निकालकर उसे काट खाया था। मांस के लोथड़े छिटके पड़े थे। ज्यादातर हिस्सा कुत्ते खा चुके थे। जिसने भी ये देखा वह आवाक रह गया। पुलिस ने दोनों आरोपियों पर अपहरण, हत्या, दुष्कर्म और पॉक्सो की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। |
स्पोर्ट्स डेस्कः अबू धाबी में खेले गये इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के मुंबई इंडियंस और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (आरसीबी) के बीच मैच में मुंबई के हार्दिक पांड्या और बैंगलोर के क्रिस मौरिस के बीच आपसी झड़प के चल्रते आईपीएल के कोड ऑफ कंडक्ट तोड़ने का दोषी पाए गए है. आईपीएल के आधिकारिक बयान के अनुसार मौरिस और हार्दिक ने नियमों का उल्लंघन किया. आरसीबी के क्रिस मौरिस को आईपीएल कोड ऑफ कंडक्ट तोड़ने पर फटकार मिली है.
मुंबई इंडियंस के खिलाफ मैच में क्रिस मौरिस ने इन नियमों का उल्लंघन करते हुए पाया गया था. इसके साथ हार्दिक पांड्या ने रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के खिलाफ मुकाबले में आईपीएल कोड ऑफ कंडक्ट तोड़ा. इस मैच में मुंबई ने बैंगलोर द्वारा दिए गये 165 रन के लक्ष्य का हासिल करने के लिए उतरी थी.
वही हार्दिक का विकेट झटकने के बाद मौरिस ने उनके बाहर जाने का इशारा किया जिसपर हार्दिक पंड्या भड़क गये. दोनों के बीच आपसी बहस हुई. ये मामला पारी के 19वें ओवर में हुआ था. जब मुंबई से हार्दिक ने गुस्से से मौरिस की बातों पर रिएक्शन दिया था. वही मौरिस लेवल 1 के 2. 5 और हार्दिक को लेवल 1 के 2. 20 के दोषी पाये गये है.
बताते चले लों आरसीबी के खिलाफ मुंबई ने बुधवार को 5 विकेट से जीत दर्ज की और 16 अंक के साथ प्लेऑफ में जगह पक्की हो गयी है. बैंगलोर और दिल्ली के अब 14 अंक हैं. इन तीनों टीमों का प्लेऑफ खेलना पक्का है. इसके साथ केकेआर और पंजाब की भी प्लेऑफ की उम्मीद बनी है.
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| स्पोर्ट्स डेस्कः अबू धाबी में खेले गये इंडियन प्रीमियर लीग के मुंबई इंडियंस और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के बीच मैच में मुंबई के हार्दिक पांड्या और बैंगलोर के क्रिस मौरिस के बीच आपसी झड़प के चल्रते आईपीएल के कोड ऑफ कंडक्ट तोड़ने का दोषी पाए गए है. आईपीएल के आधिकारिक बयान के अनुसार मौरिस और हार्दिक ने नियमों का उल्लंघन किया. आरसीबी के क्रिस मौरिस को आईपीएल कोड ऑफ कंडक्ट तोड़ने पर फटकार मिली है. मुंबई इंडियंस के खिलाफ मैच में क्रिस मौरिस ने इन नियमों का उल्लंघन करते हुए पाया गया था. इसके साथ हार्दिक पांड्या ने रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के खिलाफ मुकाबले में आईपीएल कोड ऑफ कंडक्ट तोड़ा. इस मैच में मुंबई ने बैंगलोर द्वारा दिए गये एक सौ पैंसठ रन के लक्ष्य का हासिल करने के लिए उतरी थी. वही हार्दिक का विकेट झटकने के बाद मौरिस ने उनके बाहर जाने का इशारा किया जिसपर हार्दिक पंड्या भड़क गये. दोनों के बीच आपसी बहस हुई. ये मामला पारी के उन्नीसवें ओवर में हुआ था. जब मुंबई से हार्दिक ने गुस्से से मौरिस की बातों पर रिएक्शन दिया था. वही मौरिस लेवल एक के दो. पाँच और हार्दिक को लेवल एक के दो. बीस के दोषी पाये गये है. बताते चले लों आरसीबी के खिलाफ मुंबई ने बुधवार को पाँच विकेट से जीत दर्ज की और सोलह अंक के साथ प्लेऑफ में जगह पक्की हो गयी है. बैंगलोर और दिल्ली के अब चौदह अंक हैं. इन तीनों टीमों का प्लेऑफ खेलना पक्का है. इसके साथ केकेआर और पंजाब की भी प्लेऑफ की उम्मीद बनी है. देश दुनिया की ताजातरीन सच्ची और अच्छी खबरों को जानने के लिए बनें रहेंwww. dastaktimes. orgके साथ। हमें फेसबुक पर फॉलों करने के लिएhttps://www. facebook. com/dastak. times. नौऔर ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @TimesDastak पर क्लिक करें। साथ ही देश और प्रदेश की बड़ी और चुनिंदा खबरों के 'न्यूज़-वीडियो' आप देख सकते हैं हमारे youtube चैनलhttps://www. youtube. com/c/DastakTimes/videosपर। तो फिर बने रहियेwww. dastaktimes. orgके साथ और खुद को रखिये लेटेस्ट खबरों से अपडेटेड। |
नादौन -थाना क्षेत्र नादौन के अंतर्गत बड़ा के चढ़ूं गांव में हुई एक व्यक्ति की मौत पर उसके अंतिम संस्कार में भाग लेने गए एक व्यक्ति पर पेड़ की टहनी गिर जाने से उसके सिर पर गहरी चोट आई है, जिसे तुरंत नादौन अस्पताल लाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डाक्टरों ने उसे टांडा रैफर कर दिया गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि गांव में हुई एक वृद्ध व्यक्ति की मौत पर जब 55 वर्षीय बलबीर सिंह पुत्र महेंद्र सिंह वृद्ध के अंतिम संस्कार के लिए गया था, तो वह एक पेड़ की छाया में अन्य लोगों के साथ बैठ गया। इसी दौरान उस पेड़ की एक बड़ी टहनी उसके सिर पर आ गिरी। इस कारण उसके सिर पर गहरे जख्म हो गए। आसापास के लोगों ने घायल को तुरंत नादौन अस्पताल पहुंचाया। डा. सविता राणा ने बताया कि सिर पर गहरी चोट होने के कारण घायल को टांडा रैफर कर दिया गया है।
| नादौन -थाना क्षेत्र नादौन के अंतर्गत बड़ा के चढ़ूं गांव में हुई एक व्यक्ति की मौत पर उसके अंतिम संस्कार में भाग लेने गए एक व्यक्ति पर पेड़ की टहनी गिर जाने से उसके सिर पर गहरी चोट आई है, जिसे तुरंत नादौन अस्पताल लाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डाक्टरों ने उसे टांडा रैफर कर दिया गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि गांव में हुई एक वृद्ध व्यक्ति की मौत पर जब पचपन वर्षीय बलबीर सिंह पुत्र महेंद्र सिंह वृद्ध के अंतिम संस्कार के लिए गया था, तो वह एक पेड़ की छाया में अन्य लोगों के साथ बैठ गया। इसी दौरान उस पेड़ की एक बड़ी टहनी उसके सिर पर आ गिरी। इस कारण उसके सिर पर गहरे जख्म हो गए। आसापास के लोगों ने घायल को तुरंत नादौन अस्पताल पहुंचाया। डा. सविता राणा ने बताया कि सिर पर गहरी चोट होने के कारण घायल को टांडा रैफर कर दिया गया है। |
दूषण । उसने उस सेना को सावधान किया। खर रथ पर सवार होकर सेना के साथ राम पर हमला करने के लिए निकला । खर के साथ बारह राक्षस प्रमुख थे और दूषण के साथ चार और सेनापति थे ।
यह देख कि उन पर राक्षसों की एक बड़ी सेना आक्रमण करने आ रही थी, राम ने सीता को लक्ष्मण के साथ एक गुफा में भेज दिया। उनके चले जाने के बाद राम कवच पहिनकर, राक्षसों की प्रतीक्षा करने लगे ।
इतने में शोर करती, मेरियाँ बजाती, जंगल में हो हल्ला करती, राक्षसों की सेना आ ही पहुँची। राम को सब तरफ राक्षस ही राक्षम दिखाई दिये। खर का रथ राम की पर्णशाला के पास आकर रुका । राक्षसों ने राम पर बाण वर्षा की। उनमें से कुछ को राम ने अपने बाणों से मार दिया। परन्तु राक्षसों ने भी राम को घायल कर दिया। फिर भी वे पर्वत की तरह खड़े रहे और इधर राम के बाणों से राक्षस मग्ने लगे ।
जब बहुत से राक्षस मारे गये, तो और राक्षस डरकर भागे-भागे खर के पास आये। दूषण उनको वादस देकर राम पर हमला करने आया। राम ने दूषण पर और उनके साथ आये हुए राक्षसों पर गन्धावस्त्र का उपयोग किया हजारों बाण राक्षसों पर लगे और वे मारे गये । राम और दूषण का युद्ध होने लगा। युद्ध में राम ने दूषण के सारथी को, घोड़ों को, आखिर दूषण के दोनों हाथों को बाणों से काट दिया। दूषण के साथ जो पाँच हज़ार राक्षस आये थे, उन सच को मार दिया। | दूषण । उसने उस सेना को सावधान किया। खर रथ पर सवार होकर सेना के साथ राम पर हमला करने के लिए निकला । खर के साथ बारह राक्षस प्रमुख थे और दूषण के साथ चार और सेनापति थे । यह देख कि उन पर राक्षसों की एक बड़ी सेना आक्रमण करने आ रही थी, राम ने सीता को लक्ष्मण के साथ एक गुफा में भेज दिया। उनके चले जाने के बाद राम कवच पहिनकर, राक्षसों की प्रतीक्षा करने लगे । इतने में शोर करती, मेरियाँ बजाती, जंगल में हो हल्ला करती, राक्षसों की सेना आ ही पहुँची। राम को सब तरफ राक्षस ही राक्षम दिखाई दिये। खर का रथ राम की पर्णशाला के पास आकर रुका । राक्षसों ने राम पर बाण वर्षा की। उनमें से कुछ को राम ने अपने बाणों से मार दिया। परन्तु राक्षसों ने भी राम को घायल कर दिया। फिर भी वे पर्वत की तरह खड़े रहे और इधर राम के बाणों से राक्षस मग्ने लगे । जब बहुत से राक्षस मारे गये, तो और राक्षस डरकर भागे-भागे खर के पास आये। दूषण उनको वादस देकर राम पर हमला करने आया। राम ने दूषण पर और उनके साथ आये हुए राक्षसों पर गन्धावस्त्र का उपयोग किया हजारों बाण राक्षसों पर लगे और वे मारे गये । राम और दूषण का युद्ध होने लगा। युद्ध में राम ने दूषण के सारथी को, घोड़ों को, आखिर दूषण के दोनों हाथों को बाणों से काट दिया। दूषण के साथ जो पाँच हज़ार राक्षस आये थे, उन सच को मार दिया। |
Lockdown के बीच जहां देशभर में लोगों की शनिवार की सुबह रामानंद सागर की #Ramayan के साथ हुई वहीं आज से दिन में और भी कई यादगार और हिट सीरियल्स भी दिखाए जाएंगे। 28 मार्च शनिवार सुबह 9 बजे से रामायण का पहला एपिसोड दिखाया गया जिसे फिर से रात 9 बजे भी देख सकेंगे। वहीं इसके अलावा दूरदर्शन ने दर्शकों के लिए 90 के दशक के हिट सीरियल्स BR Chopra की Mahabharat और Rajit Kapoor के शो Byomkesh Bakshi के साथ ही शाहरुख खान के सीरियल सर्कस का भी प्रसारण किया जा रहा है।
28 मार्च से जहां सुबह और रात 9 बजे रामायण का प्रसारण होगा। वहीं 11 बजे से Rajit Kapoor का जासूसी भरा शो Byomkesh Bakshi प्रसारित किया जाएगा। इसके अलावा दोपहर 12 बजे डीडी भारती पर Mahabharat का प्रसारण शुरू किया जा रहा है। इसे फिर से शाम 7 बजे देखा जा सकेगा। इसके अलावा शाहरुख खान के पहले टीवी सीरियल सर्कस का भी प्रसारण आज से ही शुरू किया गया है जो रोज रात 8 बजे देखा सकेगा।
इन सीरियल्स के शुरू होने के बाद एक बार फिर लोग उसी दौर में पहुंच गए हैं जब दूरदर्शन पर इतने सारे सीरियल्स बड़े चाव से देखे जाते थे। जब मौका मिला तो लोगों ने देर नहीं की और एक के बाद एक अपने पसंदीदा सीरियल्स शुरू करने की मांग कर दी। कुछ ने कहा कि एक बार फिर से विक्रम बेताल तो किसी ने मोगली शुरू करने की मांग कर दी। हालांकि, फिलहाल इन सीरियल्स को लेकर दूरदर्शन की तरफ से कोई ऐलान नहीं किया गया है।
#Ramayan on #Doordarshan!
#Mahabharat on #Doordarshan! !
Shekharan is BACK on @DDNational!
| Lockdown के बीच जहां देशभर में लोगों की शनिवार की सुबह रामानंद सागर की #Ramayan के साथ हुई वहीं आज से दिन में और भी कई यादगार और हिट सीरियल्स भी दिखाए जाएंगे। अट्ठाईस मार्च शनिवार सुबह नौ बजे से रामायण का पहला एपिसोड दिखाया गया जिसे फिर से रात नौ बजे भी देख सकेंगे। वहीं इसके अलावा दूरदर्शन ने दर्शकों के लिए नब्बे के दशक के हिट सीरियल्स BR Chopra की Mahabharat और Rajit Kapoor के शो Byomkesh Bakshi के साथ ही शाहरुख खान के सीरियल सर्कस का भी प्रसारण किया जा रहा है। अट्ठाईस मार्च से जहां सुबह और रात नौ बजे रामायण का प्रसारण होगा। वहीं ग्यारह बजे से Rajit Kapoor का जासूसी भरा शो Byomkesh Bakshi प्रसारित किया जाएगा। इसके अलावा दोपहर बारह बजे डीडी भारती पर Mahabharat का प्रसारण शुरू किया जा रहा है। इसे फिर से शाम सात बजे देखा जा सकेगा। इसके अलावा शाहरुख खान के पहले टीवी सीरियल सर्कस का भी प्रसारण आज से ही शुरू किया गया है जो रोज रात आठ बजे देखा सकेगा। इन सीरियल्स के शुरू होने के बाद एक बार फिर लोग उसी दौर में पहुंच गए हैं जब दूरदर्शन पर इतने सारे सीरियल्स बड़े चाव से देखे जाते थे। जब मौका मिला तो लोगों ने देर नहीं की और एक के बाद एक अपने पसंदीदा सीरियल्स शुरू करने की मांग कर दी। कुछ ने कहा कि एक बार फिर से विक्रम बेताल तो किसी ने मोगली शुरू करने की मांग कर दी। हालांकि, फिलहाल इन सीरियल्स को लेकर दूरदर्शन की तरफ से कोई ऐलान नहीं किया गया है। #Ramayan on #Doordarshan! #Mahabharat on #Doordarshan! ! Shekharan is BACK on @DDNational! |
दुनिया में तपेदिक यानी टीबी के एक करोड़ से ज्यादा मामले सामने आए हैं, जिनमें 27 लाख से ज्यादा भारत में दर्ज किए गए।
टीबी को दूर करने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक सूचना जारी की है जिसके अनुसार अगर डॉक्टर या स्थानीय अधिकारियों ने टीबी की बिमारी से मरीज को सूचित नहीं करवाया या मरीजों का इलाज नहीं किया गया तो उसे धारा 290 के तहत 6 माह से दो साल तक की सजा और जुर्माना भुगतना हो सकता है।
एक अंग्रेजी अखबार के अनुसार चिकित्सा संस्थानों, अस्पताल, क्लीनिक आदि सभी पर तपेदित की दवा भी मरीज को दी जाएंगी साथ ही इस तरह के किसी भी मरीज के साथ भेदभाव का व्यवहार ना करने का भी सरकार का अश्वासन है।
वहीं, मरीजों के हित को देखते हुए 2012 में भारत में तपेदिक को एक सूचनात्मक रोग बनाया गया था, लेकिन उस समय इसमें दंड या कार्रवाई का कोई प्रावधान नहीं था। मंत्रालय ने प्रयोगशालाओं और चिकित्सा चिकित्सकों, क्लीनिकों, अस्पतालों, नर्सिंग होम आदि के लिए इसको लेकर अलग रिपोर्टिंग प्रारूप जारी किए हैं।
आंकड़ों के अनुसार साल 2016 में टीबी के रोग से 432,000 भारतीयों की मौत हुई थी, यानि प्रतिदिन 1183 से ज्यादा लोग टीबी से मरे थे।
दुनिया में तपेदिक यानी टीबी के एक करोड़ से ज्यादा मामले सामने आए हैं, जिनमें 27 लाख से ज्यादा भारत में दर्ज किए गए।
| दुनिया में तपेदिक यानी टीबी के एक करोड़ से ज्यादा मामले सामने आए हैं, जिनमें सत्ताईस लाख से ज्यादा भारत में दर्ज किए गए। टीबी को दूर करने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक सूचना जारी की है जिसके अनुसार अगर डॉक्टर या स्थानीय अधिकारियों ने टीबी की बिमारी से मरीज को सूचित नहीं करवाया या मरीजों का इलाज नहीं किया गया तो उसे धारा दो सौ नब्बे के तहत छः माह से दो साल तक की सजा और जुर्माना भुगतना हो सकता है। एक अंग्रेजी अखबार के अनुसार चिकित्सा संस्थानों, अस्पताल, क्लीनिक आदि सभी पर तपेदित की दवा भी मरीज को दी जाएंगी साथ ही इस तरह के किसी भी मरीज के साथ भेदभाव का व्यवहार ना करने का भी सरकार का अश्वासन है। वहीं, मरीजों के हित को देखते हुए दो हज़ार बारह में भारत में तपेदिक को एक सूचनात्मक रोग बनाया गया था, लेकिन उस समय इसमें दंड या कार्रवाई का कोई प्रावधान नहीं था। मंत्रालय ने प्रयोगशालाओं और चिकित्सा चिकित्सकों, क्लीनिकों, अस्पतालों, नर्सिंग होम आदि के लिए इसको लेकर अलग रिपोर्टिंग प्रारूप जारी किए हैं। आंकड़ों के अनुसार साल दो हज़ार सोलह में टीबी के रोग से चार सौ बत्तीस,शून्य भारतीयों की मौत हुई थी, यानि प्रतिदिन एक हज़ार एक सौ तिरासी से ज्यादा लोग टीबी से मरे थे। दुनिया में तपेदिक यानी टीबी के एक करोड़ से ज्यादा मामले सामने आए हैं, जिनमें सत्ताईस लाख से ज्यादा भारत में दर्ज किए गए। |
गोरखपुर, जेएनएन। Famous Temples In Gorakhpur: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के एक ऐसे मंदिर के बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं, जो गोरखपुर ही नहीं आसपास के जिलों में भी प्रसिद्ध है। यह मंदिर काफी पुराना है। यहां श्रद्धालुओं की भीड़ पूरे साल देखने को मिलती है। जबकि नवरात्रि में यहां दूर-दूर से भक्त आते हैं। भक्तों का मानना है कि यहां शीश झुकाकर मांगी गई मन्नत कभी खाली नहीं जाती है। माता रानी अपने भक्तों की हमेशा रक्षा करती हैं। आइए हम इस मंदिर के बारे में खास बातें बताते हैं।
मंदिर की विशेषताः हम बात कर रहे हैं गोलघर की काली मंदिर का। गोरखपुर रेलवे स्टेशन से महज एक किलोमीटर दूर गोलघर के उत्तरी छोर पर मौजूद मां काली मंदिर काफी पुराना है। मां काली की कृपा का शोर शहर के साथ ही आसपास के जिलों में भी है। यहां हर दिन उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ इस देवी स्थान के प्रति लोगों की गहरी आस्था की गवाही देता है। काली मंदिर की महिमा दूर- दूर तक फैली है।
मंदिर का इतिहासः इस देवी स्थल के बारे में जनश्रुति है कि आज के गोलघर का यह हिस्सा कभी पुरिदलपुर गांव था और यह देवी उस गांव की कुलदेवी थीं, जिनमें गांव के लोगों की गहरी आस्था थी। उन दिनों गांव के लोग एक नीम के पेड़ के नीचे देवी का चौरा बनाकर पूजा-अर्चना किया करते थे। मंदिर की देखभाल मंदिर से कुछ दूरी पर रहने वाला माली परिवार किया करता था। उस समय शहर का यह हिस्सा जंगली क्षेत्र सा साथ दिखता था। देवी स्थल के रूप में इस स्थल को मान्यता कब से मिली, इस संबंध में कोई ऐतिहासिक साक्ष्य तो नहीं मिलता लेकिन इसकी प्राचीनता को लेकर किसी को कोई संदेह नहीं।
जमीन फाड़कर निकला था मां का मुखड़ाः देवी स्थल के स्थापित होने को लेकर मान्यता है कि यहां मां काली का मुखड़ा जमीन को फाड़कर निकला था। जब यह सूचना पुरिदलपुर गांव के लोगों तक पहुंची तो श्रद्धालुओं की भारी भीड़ वहां उमड़ने लगी। मुखड़ा निकलने वाले स्थल पर पूजा-अर्चना का सिलसिला शुरू हो गया। इस तथ्य का जिक्र स्व. पीके लाहिड़ी और डॉ. केके पांडेय ने अपनी पुस्तक 'आइने-गोरखपुर' में भी किया है। मंदिर की मान्यता बढ़ती गई और उसके साथ ही श्रद्धालुओं के उमड़ने का सिलसिला भी अनवरत बढ़ता गया।
भक्तों की हर मुराद पूरी करती हैं माताः भक्तों का विश्वास था कि यह मां काली, मां सिद्धिदात्री स्वरूप हैं, जो हर भक्त की सभी मुरादों को पूरी करती है। बाद में मां काली के एक भक्त जंगी लाल जायसवाल ने 1968 में देवी स्थल पर मां काली की एक भव्य प्रतिमा स्थापित कर मंदिर का निमरण कराया। यूं तो देवी के दरबार में हर दिन भक्तों की भीड़ उमड़ती है लेकिन नवरात्र के दौरान तो यहां मेले सा माहौल रहता है।
आज भी मौजूद है जमीन से निकला माता का मुखड़ाः मंदिर का निर्माण होने के बाद से नियमित रूप से यहां पूजन- अर्चन होने लगा। सुबह शाम माता की आरती का भी आयोजन होता है। वहीं पहले जमीन से निकली मूर्ति ही थी। बाद में यहां काली मां की एक बड़ी मूर्ति स्थापित की गई। मूर्ति के ठीक सामने नीचे स्वयंभू काली मां का मुखड़ा आज भी वैसा ही है, जैसा जमीन से निकला था।
कैसे पहुंचेंः गोलघर काली मंदिर नाम से प्रसिद्ध इस देवी स्थल पर जाने का रास्ता बहुत ही आसान है। इस स्थान की दूरी रेलवे स्टेशन व रेलवे बस स्टेशन से महज एक किलोमीटर है। रेलवे स्टेशन के बाहर किसी भी वाहन का सहारा लेकर गोलघर काली मंदिर आसानी से पहुंच सकते हैं।
| गोरखपुर, जेएनएन। Famous Temples In Gorakhpur: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के एक ऐसे मंदिर के बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं, जो गोरखपुर ही नहीं आसपास के जिलों में भी प्रसिद्ध है। यह मंदिर काफी पुराना है। यहां श्रद्धालुओं की भीड़ पूरे साल देखने को मिलती है। जबकि नवरात्रि में यहां दूर-दूर से भक्त आते हैं। भक्तों का मानना है कि यहां शीश झुकाकर मांगी गई मन्नत कभी खाली नहीं जाती है। माता रानी अपने भक्तों की हमेशा रक्षा करती हैं। आइए हम इस मंदिर के बारे में खास बातें बताते हैं। मंदिर की विशेषताः हम बात कर रहे हैं गोलघर की काली मंदिर का। गोरखपुर रेलवे स्टेशन से महज एक किलोमीटर दूर गोलघर के उत्तरी छोर पर मौजूद मां काली मंदिर काफी पुराना है। मां काली की कृपा का शोर शहर के साथ ही आसपास के जिलों में भी है। यहां हर दिन उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ इस देवी स्थान के प्रति लोगों की गहरी आस्था की गवाही देता है। काली मंदिर की महिमा दूर- दूर तक फैली है। मंदिर का इतिहासः इस देवी स्थल के बारे में जनश्रुति है कि आज के गोलघर का यह हिस्सा कभी पुरिदलपुर गांव था और यह देवी उस गांव की कुलदेवी थीं, जिनमें गांव के लोगों की गहरी आस्था थी। उन दिनों गांव के लोग एक नीम के पेड़ के नीचे देवी का चौरा बनाकर पूजा-अर्चना किया करते थे। मंदिर की देखभाल मंदिर से कुछ दूरी पर रहने वाला माली परिवार किया करता था। उस समय शहर का यह हिस्सा जंगली क्षेत्र सा साथ दिखता था। देवी स्थल के रूप में इस स्थल को मान्यता कब से मिली, इस संबंध में कोई ऐतिहासिक साक्ष्य तो नहीं मिलता लेकिन इसकी प्राचीनता को लेकर किसी को कोई संदेह नहीं। जमीन फाड़कर निकला था मां का मुखड़ाः देवी स्थल के स्थापित होने को लेकर मान्यता है कि यहां मां काली का मुखड़ा जमीन को फाड़कर निकला था। जब यह सूचना पुरिदलपुर गांव के लोगों तक पहुंची तो श्रद्धालुओं की भारी भीड़ वहां उमड़ने लगी। मुखड़ा निकलने वाले स्थल पर पूजा-अर्चना का सिलसिला शुरू हो गया। इस तथ्य का जिक्र स्व. पीके लाहिड़ी और डॉ. केके पांडेय ने अपनी पुस्तक 'आइने-गोरखपुर' में भी किया है। मंदिर की मान्यता बढ़ती गई और उसके साथ ही श्रद्धालुओं के उमड़ने का सिलसिला भी अनवरत बढ़ता गया। भक्तों की हर मुराद पूरी करती हैं माताः भक्तों का विश्वास था कि यह मां काली, मां सिद्धिदात्री स्वरूप हैं, जो हर भक्त की सभी मुरादों को पूरी करती है। बाद में मां काली के एक भक्त जंगी लाल जायसवाल ने एक हज़ार नौ सौ अड़सठ में देवी स्थल पर मां काली की एक भव्य प्रतिमा स्थापित कर मंदिर का निमरण कराया। यूं तो देवी के दरबार में हर दिन भक्तों की भीड़ उमड़ती है लेकिन नवरात्र के दौरान तो यहां मेले सा माहौल रहता है। आज भी मौजूद है जमीन से निकला माता का मुखड़ाः मंदिर का निर्माण होने के बाद से नियमित रूप से यहां पूजन- अर्चन होने लगा। सुबह शाम माता की आरती का भी आयोजन होता है। वहीं पहले जमीन से निकली मूर्ति ही थी। बाद में यहां काली मां की एक बड़ी मूर्ति स्थापित की गई। मूर्ति के ठीक सामने नीचे स्वयंभू काली मां का मुखड़ा आज भी वैसा ही है, जैसा जमीन से निकला था। कैसे पहुंचेंः गोलघर काली मंदिर नाम से प्रसिद्ध इस देवी स्थल पर जाने का रास्ता बहुत ही आसान है। इस स्थान की दूरी रेलवे स्टेशन व रेलवे बस स्टेशन से महज एक किलोमीटर है। रेलवे स्टेशन के बाहर किसी भी वाहन का सहारा लेकर गोलघर काली मंदिर आसानी से पहुंच सकते हैं। |
दिल्ली सरकार के मंत्रियों के खिलाफ इन दिनों सीबीआई और ईडी का एक्शन जारी है। इस बीच दिल्ली विधानसभा के सदस्यों के वेतन और भत्तों में बढ़ोतरी की गई। 66% की हुई बढ़ोतरी को लेकर सोशल मीडिया यूजर्स दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर जमकर निशाना साध रहे। कुछ यूजर्स ने तंज कसते हुए कहा कि ऐसे लोग राजनीति बदलने आए थे।
दिल्ली सरकार के लॉ एंड जस्टिस और विधाई मामलों के विभाग द्वारा नोटिस जारी की गई। अब दिल्ली के विधायकों का वेतन भत्ता 54000 से बढ़कर 90 हजार कर दिया गया है। इसके साथ मंत्रियों, विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, मुख्य सचेतक और विपक्ष के नेता के वेतन भत्ते को मौजूदा 72 हजार रुपए से बढ़ाकर 1 लाख 70 हजार रुपए प्रतिमाह कर दिया गया है।
श्वेता सिंह नाम की एक यूजर ने लिखा कि वाह मुख्यमंत्री जी, जनता त्रस्त और नेताजी मस्त। कुंवर अजय प्रताप सिंह ने लिखा- राजनीति बदलने आए थे जी और अपनी सैलरी बढ़ाने में लगे हुए हैं। अरुण नाम के एक यूजर द्वारा कमेंट किया गया, ' इन नेताओं का घर भर दो, इनको 5 साल भी कम पड़ जा रहे हैं। ' एक अन्य यूजर ने हंसने वाली इमोजी के साथ लिखा- दिल्ली का विकास हो या ना हो लेकिन विधायकों का विकास तो हो ही रहा है।
ममता नाम की एक यूजर ने लिखा कि कपिल सिब्बल जैसे बड़े वकीलों की फीस भी तो भरनी है। एक अन्य यूजर ने कमेंट किया- हम तो आम आदमी हैं जी। रोहित नाम के एक यूजर लिखते हैं कि हम गाड़ी और बंगला नहीं लेंगे कहने वाले विधायकों की सैलरी बढ़ा रहे हैं। रेखा नाम की एक यूजर ने लिखा- आम आदमी से खास आदमी बन गए हैं अरविंद केजरीवाल।
| दिल्ली सरकार के मंत्रियों के खिलाफ इन दिनों सीबीआई और ईडी का एक्शन जारी है। इस बीच दिल्ली विधानसभा के सदस्यों के वेतन और भत्तों में बढ़ोतरी की गई। छयासठ% की हुई बढ़ोतरी को लेकर सोशल मीडिया यूजर्स दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर जमकर निशाना साध रहे। कुछ यूजर्स ने तंज कसते हुए कहा कि ऐसे लोग राजनीति बदलने आए थे। दिल्ली सरकार के लॉ एंड जस्टिस और विधाई मामलों के विभाग द्वारा नोटिस जारी की गई। अब दिल्ली के विधायकों का वेतन भत्ता चौवन हज़ार से बढ़कर नब्बे हजार कर दिया गया है। इसके साथ मंत्रियों, विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, मुख्य सचेतक और विपक्ष के नेता के वेतन भत्ते को मौजूदा बहत्तर हजार रुपए से बढ़ाकर एक लाख सत्तर हजार रुपए प्रतिमाह कर दिया गया है। श्वेता सिंह नाम की एक यूजर ने लिखा कि वाह मुख्यमंत्री जी, जनता त्रस्त और नेताजी मस्त। कुंवर अजय प्रताप सिंह ने लिखा- राजनीति बदलने आए थे जी और अपनी सैलरी बढ़ाने में लगे हुए हैं। अरुण नाम के एक यूजर द्वारा कमेंट किया गया, ' इन नेताओं का घर भर दो, इनको पाँच साल भी कम पड़ जा रहे हैं। ' एक अन्य यूजर ने हंसने वाली इमोजी के साथ लिखा- दिल्ली का विकास हो या ना हो लेकिन विधायकों का विकास तो हो ही रहा है। ममता नाम की एक यूजर ने लिखा कि कपिल सिब्बल जैसे बड़े वकीलों की फीस भी तो भरनी है। एक अन्य यूजर ने कमेंट किया- हम तो आम आदमी हैं जी। रोहित नाम के एक यूजर लिखते हैं कि हम गाड़ी और बंगला नहीं लेंगे कहने वाले विधायकों की सैलरी बढ़ा रहे हैं। रेखा नाम की एक यूजर ने लिखा- आम आदमी से खास आदमी बन गए हैं अरविंद केजरीवाल। |
समाज की बढ़ती हुई भौतिक आवश्यकताएँ बदलते हुए परिवेश में अपने आपको समायोजित करने हेतु अध्यापकों को नौकरी के अतिरिक्त अन्य व्यवसाय ट्यूशन आदि का सहारा लेना पड़ता है। ताकि वह अपने परिवार का सामाजिक स्तर बनाये रखने में सक्षम हो सके ।
अध्यापक आर्थिक संत्रास में परेशान रहते हुए, विद्यालय में अध्यापन कार्य करता है। इस अध्यापन काल में उसकी वृत्ति व्यवसायिक वृत्ति हो जाती है। वह छात्र की शैक्षिक आवश्यकता पूर्ण न हो सके, और छात्र को अधूरा ज्ञान, अस्पष्ट बिम्ब, और जानकारी हासिल हो सके। जिसकी पूर्णतः के लिये छात्र को अध्यापक से ट्यूशन कराना आवश्यक हो जाये ।
अपने इस व्यवसाय के लिये उसे तमाम तरह की अनेक नीतियों का सहारा लेना पड़ता है। कभी छात्रों में गुटबन्दी करके, एक गुट को प्रश्रय देना और उस गुट से मुद्रा - दोहन करना । कभी छात्र दलालों का प्रयोग कर सम्पन्न और अबोध छात्रों को फँसाकर रूपये ऐंठना ।
कभी प्रयोगात्मक परीक्षा का भय दिखाकर, छात्रों की विवशता का लाभ उठाना। कभी प्रश्नपत्र आउट कराना। कभी परीक्षा के मूल्यॉकन में तिकड़मबाजी करना । और अध्यापकों से पारस्परिक समझौते और ब्लेक मेलिंग के आधार पर परीक्षा परिणामों को प्रभावित करना आदि-आदि ।
अध्यापक कभी आर्थिक विवशता में कभी ब्लेकमेलिंग के कारण और भय और आतंक से कक्षा में छात्रों के साथ न्याय नहीं करते है। और इस प्रकार अध्यापक शैक्षिक प्रक्रिया में एक दम उदासीन हो जाता है। वर्तमान शैक्षिक प्रशासन में ऐसी जड़ता आ गई कि, वह न तो योग्य परिश्रमी, कर्तव्यनिष्ठ अध्यापकों को न तो पुरुष्कृत करता है, और न ही अक्षम, अयोग्य, कर्तव्यच्युत अध्यापकों को दण्डित कर पाता है। इसीलिये अध्यापक यथास्थिति वादी हो गया है। और छात्रों के शैक्षिक विकास में कोई रूचि न लेने वाला व पूर्ण रूप से उदासीन हो गया है। जो अध्यापक ट्यूशन नहीं करते तथा ऐसे विषयों के अध्यापक है, जिनमें ट्यूशन नहीं मिलती। वे घुटन एवं कुण्ठा का जीवन व्यतीत करते हुए, आत्महीनता के भाव से ग्रसित हो जाते है। और उनकी रही सही क्षमता भी प्रभावहीन हो जाती है। जिससे छात्र के शैक्षिक विकास का आधार ही समाप्त हो जाता है।
(स) प्रबन्ध तन्त्रो की आर्थिक साधन विहीनताशिक्षा प्रक्रिया में होने वाले आर्थिक व्यय की सम्पूर्ति आदि काल से विभिन्न रूपों में होती रही है। वैदिक कालीन शिक्षा में गुरुकुलो से लगी हुई,
माध्यम से शिक्षा के लिये आर्थिक संसाधन जुटाएँ जाते थे। राजकोष का दसवाँ भाग शैक्षिक कार्य के लिये अनुदानित किया जाता था। प्रत्येक गृहस्थ के लिये उसकी कमाई का दसवाँ भाग ऋषि ऋण की अदायगी हेतु बचाया (प्रयोग) जाता था। और शिक्षा व शिक्षालयों की आवश्यकताओं को पूरा किया जाता था ।
मुगल कालीन शिक्षा व्यवस्था में मदरसों और मकतबों को सरकार की ओर से तथा व्यक्तिगत रूप से सम्पन्न लोगों की ओर से इम्दाद की जाती थी । वास्तव में इस्लाम धर्म चार अंग ये- नमाज, रोजा, हज, जकात। इस्लाम धर्म के चौथे भाग जिसे जकात कहा जाता था, हर मुस्लमान को अपनी नेक कमाई का 1/10 (एक / दस ) भाग जकात में देना अनिवार्य था। इस जकात से समाज के निर्बल वर्ग के लोगो यतीम मजलूम लोगों की सहायता की जाती थी । इसी जकात में से और भी शबाब (पुण्य) के काम किये जाते थे। जिनमें मदरसों एवं मकतब की इमदाद भी शामिल थी। बड़े-बड़े नबाब, बड़े पेशेवर तथा राजघरानों से सम्बन्धित व्यक्ति भी विद्यालयों को दान दिया करते थे। और तालीम में होने वाले खर्च में हाथ बटाते थे। इस प्रकार सरकारी इम्दाद, व्यक्तिगत ज़ाकत के सहारे अच्छा आर्थिक आधार प्राप्त हुआ। अंग्रेजी हुकुमत में पश्चमी व्यवस्था के अनुसार विद्यालयों को राजकीय सहायताएँ 'ग्राण्ट इन ऐड' दी जाती थी ।
रजवाड़ो में राजा-रईस लोग अपने प्रभाव वृद्धि के लिये विद्यालयों को उदार मन से दान दिया करते थे। और शिक्षा के पावन यज्ञ में उनकी यज्ञाहुतियाँ भी पड़ती रहती थी। उन दिनों न तो छात्रों से चन्दा वसूल किया जात या, न ही अध्यापकों का पेट काट कर विद्यालय विकास किया जाता था।
स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद शिक्षा के विकास को तीव्र गति प्रदान की गई। भारतीय गणतन्त्र के प्रत्येक राज्य में हर पंचवर्षीय योजनाओं में विभिन्न प्रकार के नये-नये विद्यालय खोले गये और विकसित किये गये । स्वायित्व-शासी संस्थाओं ने भी शिक्षा के इस पवित्र काम में बढ़-चढ़ कर भाग लिया । व्यक्तिगत संस्थाओं में भी, शिक्षा के प्रसार एवं प्रचार में अपना योगदान दिया। शिक्षा को राज्य सूची का विषय बनाया गया और विभिन्न राज्यों ने अपनी सामर्थ्यानुसार शिक्षा के व्यय को विभिन्न अनुपातो में वहन भी किया। जिसके कारण शिक्षा का विकास तो हुआ, किन्तु नियंत्रण विहीन रहा। और कोई राज्य शैक्षिक विकास में बहुत आगे निकल गया तो कोई राज्य बहुत पीछे रह गया ।
इस असमानता को केन्द्रीय सरकार ने अनुभव किया, और केन्द्रीय मंत्रिमण्डल ने भी यह अनुभव किया, कि शिक्षा के क्षेत्र में यह असमानता बढ़ती गई तो भयानक परिणाम सामने आयेंगे। इसीलिये सन् 1976 में डॉ० सी० एम0 छागला केन्द्रीय शिक्षा मंत्री ने शिक्षा को राज्य सूची से निकाल कर समवर्ती (Concurrent) सूची में शामिल किया और इस प्रकार पहली बार केन्द्रीय सरकार का हस्तक्षेप प्रारम्भ हुआ और राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा की व्यवस्था निर्धारित करने तथा उसके लिये राष्ट्रीय स्तर पर संसाधन जुटाएँ जाने लगे।
देशी राजा और राजवाड़ो के विलय ने विभिन्न राजाओ से मिलने वाली आर्थिक सहायता को एकदम क्षीण कर दिया। समवर्ती सूची में शिक्षा आ जाने के कारण राज्यों ने अपने शिक्षा बजट को कम कर दिया। केन्द्रीय सरकार अपने बजट का मात्र ढाई प्रतिशत ( 2.5%) शिक्षा के लिये बचा सकी। राजा-रईसो के व्यक्तिगत दान, लोकतान्त्रिक चुनाव के खर्चों में बदल गये। शिक्षा सेवी और समाज सेवी बनने की अपेक्षा नेता और राजनेता बनने का भूत सम्पन्न व्यक्तियों को सवार हो गया। और शिक्षा की आर्थिक स्थिति दीन-हीन होती चली गई
वर्तमान परिपेक्ष्य में समाज से मिलने वाला आर्थिक योगदान शून्य प्राय हो गया। राज्य सरकारों के सिकुड़ते हुए बजट और बढ़ती हुई मँहगाई में (Grant-in-add) की स्थितियों क्षीण होती चली गई। सरकार से मिलने वाले आर्वतक (Recurring) तथा अनावर्तक (Non-Recurring) ग्राण्टें कम होती चली गई। इसी बीच, किन्हीं राज्यों में शिक्षा का राष्ट्रीयकरण, किन्हीं राज्यों में स्वात्यिकरण तथा किन्हीं राज्यों में व्यक्तिगत प्रबन्धंको को प्रोत्साहन दिया गया । कुछ राज्यों ने अध्यापकों के वेतन वितरण का दायित्व भी अपने ऊपर ले लिया । जिसके कारण राज्य सरकार का शिक्षा बजट मात्र वेतन भुगतान पर व्यय होने लगा तथा विद्यालयों को मिलने वाले अनावर्तक अनुदान बन्द से हो गये। यहाॅ यह स्पष्ट कर देना समीचीन होगा कि Recurring grant (आर्वतक अनुदान) वे अनुदान है जिन्हे राज्य सरकार त्रैमासिक किस्तों में प्रतिवर्ष अदा करती थी। और जो प्रायः अध्यापकों के वेतन भुगतान के निमित्त होती थी। Non-Recurring (अनार्वतक अनुदान) वे अनुदान है, जिन्हें सरकार विद्यालय विकास, जैसे- भवन निर्माण, फर्नीचर व्यवस्था, पुस्तकालय संवर्धन, प्रयोगशाला निर्माण, कीड़ागंन निर्माण, सभागार निर्माण आदि-आदि प्रयोजनो के लिये दिया करती थी।
वेतन वितरण का दायित्व लेने के कारण सरकार के आर्थिक स्त्रोत क्षीण होते चले गये। और आर्वतक अनुदान में ही सम्पूर्ण बजट व्यय होने लगा । और नाम मात्र के लिये अनावर्तक अनुदान स्वीकृत किये गये, जिनसे विद्यालय विकास कार्यक्रम बुरी तरह प्रभावित हुए। इस प्रकार केन्द्रीय सरकार के परोक्ष हस्तक्षेप, राज्य सरकार की सीमित अधिकार हीनता के कारण विद्यालयलों के आर्थिक आधार छिन्न-भिन्न हो गये और विद्यालय प्रबन्ध तन्त्र, विद्यालय विकास से पूर्णतः उदासीन एवं अन्यमनस्क हो गया। और यह भी अध्यापक अभिभावक एसोसिएशन के निर्माण में एक आधार प्रक्रिया बनी।
(द) शिक्षकों को व्यवसायिक एवं राजनैतिक संगठनो की ओट में मिली निरंकुशता एवं नियंत्रण विहीनताशिक्षक आदिकाल से आदर्श नागरिक, प्रतिष्ठित व्यक्ति और सर्वसम्मानित व्यक्ति के रूप में माना जाता रहा है, इसी सम्मान के उपलक्ष्य में वह अपना तन, मन, धन और अपनी सम्पूर्ण प्रतिभा, सामर्थ्य एवं ज्ञान को समाज के हित के लिये अर्पित करता रहा है, स्वयं को मर्यादा और संयम की जंजीरो में बांधे हुए भौतिक चकाचौंध से दूर, आर्थिक विपन्नता के कष्टो का जहर पीते हुए, समाज को ज्ञान और अध्यात्म का अमृत बाँटता रहा है।
स्वतंत्रता संग्राम के युद्ध में शिक्षक वर्ग ने बढ़कर आत्माहुतियाँ दी है। और सम्पूर्ण राष्ट्र को नैतिक साहस प्रदान किया है, किन्तु ये बातें, आज के संदर्भ में अतीत की प्रतीक होने लगी है। वर्तमान समय में अध्यापक व्यवसायिक संगठनों में विभक्त, राजनैतिक संगठनो की विभिन्न विचारधाराओं से प्रभावित और संचालित है। अपने पुनीत व्यवसाय, जो आत्म नियन्त्रण और आत्मबलिदान पर आधारित था। आज के सन्दर्भ में आधरहीन हो गया है। अब शिक्षा व्यवसाय में जुड़े हुए अनेक संगठन खड़े हो गये है, जो ट्रेड यूनियनज्म् पर आधारित है। विभिन्न स्तरों पर शिक्षा जगत में निम्नलिखित संगठन कार्यरत है | समाज की बढ़ती हुई भौतिक आवश्यकताएँ बदलते हुए परिवेश में अपने आपको समायोजित करने हेतु अध्यापकों को नौकरी के अतिरिक्त अन्य व्यवसाय ट्यूशन आदि का सहारा लेना पड़ता है। ताकि वह अपने परिवार का सामाजिक स्तर बनाये रखने में सक्षम हो सके । अध्यापक आर्थिक संत्रास में परेशान रहते हुए, विद्यालय में अध्यापन कार्य करता है। इस अध्यापन काल में उसकी वृत्ति व्यवसायिक वृत्ति हो जाती है। वह छात्र की शैक्षिक आवश्यकता पूर्ण न हो सके, और छात्र को अधूरा ज्ञान, अस्पष्ट बिम्ब, और जानकारी हासिल हो सके। जिसकी पूर्णतः के लिये छात्र को अध्यापक से ट्यूशन कराना आवश्यक हो जाये । अपने इस व्यवसाय के लिये उसे तमाम तरह की अनेक नीतियों का सहारा लेना पड़ता है। कभी छात्रों में गुटबन्दी करके, एक गुट को प्रश्रय देना और उस गुट से मुद्रा - दोहन करना । कभी छात्र दलालों का प्रयोग कर सम्पन्न और अबोध छात्रों को फँसाकर रूपये ऐंठना । कभी प्रयोगात्मक परीक्षा का भय दिखाकर, छात्रों की विवशता का लाभ उठाना। कभी प्रश्नपत्र आउट कराना। कभी परीक्षा के मूल्यॉकन में तिकड़मबाजी करना । और अध्यापकों से पारस्परिक समझौते और ब्लेक मेलिंग के आधार पर परीक्षा परिणामों को प्रभावित करना आदि-आदि । अध्यापक कभी आर्थिक विवशता में कभी ब्लेकमेलिंग के कारण और भय और आतंक से कक्षा में छात्रों के साथ न्याय नहीं करते है। और इस प्रकार अध्यापक शैक्षिक प्रक्रिया में एक दम उदासीन हो जाता है। वर्तमान शैक्षिक प्रशासन में ऐसी जड़ता आ गई कि, वह न तो योग्य परिश्रमी, कर्तव्यनिष्ठ अध्यापकों को न तो पुरुष्कृत करता है, और न ही अक्षम, अयोग्य, कर्तव्यच्युत अध्यापकों को दण्डित कर पाता है। इसीलिये अध्यापक यथास्थिति वादी हो गया है। और छात्रों के शैक्षिक विकास में कोई रूचि न लेने वाला व पूर्ण रूप से उदासीन हो गया है। जो अध्यापक ट्यूशन नहीं करते तथा ऐसे विषयों के अध्यापक है, जिनमें ट्यूशन नहीं मिलती। वे घुटन एवं कुण्ठा का जीवन व्यतीत करते हुए, आत्महीनता के भाव से ग्रसित हो जाते है। और उनकी रही सही क्षमता भी प्रभावहीन हो जाती है। जिससे छात्र के शैक्षिक विकास का आधार ही समाप्त हो जाता है। प्रबन्ध तन्त्रो की आर्थिक साधन विहीनताशिक्षा प्रक्रिया में होने वाले आर्थिक व्यय की सम्पूर्ति आदि काल से विभिन्न रूपों में होती रही है। वैदिक कालीन शिक्षा में गुरुकुलो से लगी हुई, माध्यम से शिक्षा के लिये आर्थिक संसाधन जुटाएँ जाते थे। राजकोष का दसवाँ भाग शैक्षिक कार्य के लिये अनुदानित किया जाता था। प्रत्येक गृहस्थ के लिये उसकी कमाई का दसवाँ भाग ऋषि ऋण की अदायगी हेतु बचाया जाता था। और शिक्षा व शिक्षालयों की आवश्यकताओं को पूरा किया जाता था । मुगल कालीन शिक्षा व्यवस्था में मदरसों और मकतबों को सरकार की ओर से तथा व्यक्तिगत रूप से सम्पन्न लोगों की ओर से इम्दाद की जाती थी । वास्तव में इस्लाम धर्म चार अंग ये- नमाज, रोजा, हज, जकात। इस्लाम धर्म के चौथे भाग जिसे जकात कहा जाता था, हर मुस्लमान को अपनी नेक कमाई का एक/दस भाग जकात में देना अनिवार्य था। इस जकात से समाज के निर्बल वर्ग के लोगो यतीम मजलूम लोगों की सहायता की जाती थी । इसी जकात में से और भी शबाब के काम किये जाते थे। जिनमें मदरसों एवं मकतब की इमदाद भी शामिल थी। बड़े-बड़े नबाब, बड़े पेशेवर तथा राजघरानों से सम्बन्धित व्यक्ति भी विद्यालयों को दान दिया करते थे। और तालीम में होने वाले खर्च में हाथ बटाते थे। इस प्रकार सरकारी इम्दाद, व्यक्तिगत ज़ाकत के सहारे अच्छा आर्थिक आधार प्राप्त हुआ। अंग्रेजी हुकुमत में पश्चमी व्यवस्था के अनुसार विद्यालयों को राजकीय सहायताएँ 'ग्राण्ट इन ऐड' दी जाती थी । रजवाड़ो में राजा-रईस लोग अपने प्रभाव वृद्धि के लिये विद्यालयों को उदार मन से दान दिया करते थे। और शिक्षा के पावन यज्ञ में उनकी यज्ञाहुतियाँ भी पड़ती रहती थी। उन दिनों न तो छात्रों से चन्दा वसूल किया जात या, न ही अध्यापकों का पेट काट कर विद्यालय विकास किया जाता था। स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद शिक्षा के विकास को तीव्र गति प्रदान की गई। भारतीय गणतन्त्र के प्रत्येक राज्य में हर पंचवर्षीय योजनाओं में विभिन्न प्रकार के नये-नये विद्यालय खोले गये और विकसित किये गये । स्वायित्व-शासी संस्थाओं ने भी शिक्षा के इस पवित्र काम में बढ़-चढ़ कर भाग लिया । व्यक्तिगत संस्थाओं में भी, शिक्षा के प्रसार एवं प्रचार में अपना योगदान दिया। शिक्षा को राज्य सूची का विषय बनाया गया और विभिन्न राज्यों ने अपनी सामर्थ्यानुसार शिक्षा के व्यय को विभिन्न अनुपातो में वहन भी किया। जिसके कारण शिक्षा का विकास तो हुआ, किन्तु नियंत्रण विहीन रहा। और कोई राज्य शैक्षिक विकास में बहुत आगे निकल गया तो कोई राज्य बहुत पीछे रह गया । इस असमानता को केन्द्रीय सरकार ने अनुभव किया, और केन्द्रीय मंत्रिमण्डल ने भी यह अनुभव किया, कि शिक्षा के क्षेत्र में यह असमानता बढ़ती गई तो भयानक परिणाम सामने आयेंगे। इसीलिये सन् एक हज़ार नौ सौ छिहत्तर में डॉशून्य सीशून्य एमशून्य छागला केन्द्रीय शिक्षा मंत्री ने शिक्षा को राज्य सूची से निकाल कर समवर्ती सूची में शामिल किया और इस प्रकार पहली बार केन्द्रीय सरकार का हस्तक्षेप प्रारम्भ हुआ और राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा की व्यवस्था निर्धारित करने तथा उसके लिये राष्ट्रीय स्तर पर संसाधन जुटाएँ जाने लगे। देशी राजा और राजवाड़ो के विलय ने विभिन्न राजाओ से मिलने वाली आर्थिक सहायता को एकदम क्षीण कर दिया। समवर्ती सूची में शिक्षा आ जाने के कारण राज्यों ने अपने शिक्षा बजट को कम कर दिया। केन्द्रीय सरकार अपने बजट का मात्र ढाई प्रतिशत शिक्षा के लिये बचा सकी। राजा-रईसो के व्यक्तिगत दान, लोकतान्त्रिक चुनाव के खर्चों में बदल गये। शिक्षा सेवी और समाज सेवी बनने की अपेक्षा नेता और राजनेता बनने का भूत सम्पन्न व्यक्तियों को सवार हो गया। और शिक्षा की आर्थिक स्थिति दीन-हीन होती चली गई वर्तमान परिपेक्ष्य में समाज से मिलने वाला आर्थिक योगदान शून्य प्राय हो गया। राज्य सरकारों के सिकुड़ते हुए बजट और बढ़ती हुई मँहगाई में की स्थितियों क्षीण होती चली गई। सरकार से मिलने वाले आर्वतक तथा अनावर्तक ग्राण्टें कम होती चली गई। इसी बीच, किन्हीं राज्यों में शिक्षा का राष्ट्रीयकरण, किन्हीं राज्यों में स्वात्यिकरण तथा किन्हीं राज्यों में व्यक्तिगत प्रबन्धंको को प्रोत्साहन दिया गया । कुछ राज्यों ने अध्यापकों के वेतन वितरण का दायित्व भी अपने ऊपर ले लिया । जिसके कारण राज्य सरकार का शिक्षा बजट मात्र वेतन भुगतान पर व्यय होने लगा तथा विद्यालयों को मिलने वाले अनावर्तक अनुदान बन्द से हो गये। यहाॅ यह स्पष्ट कर देना समीचीन होगा कि Recurring grant वे अनुदान है जिन्हे राज्य सरकार त्रैमासिक किस्तों में प्रतिवर्ष अदा करती थी। और जो प्रायः अध्यापकों के वेतन भुगतान के निमित्त होती थी। Non-Recurring वे अनुदान है, जिन्हें सरकार विद्यालय विकास, जैसे- भवन निर्माण, फर्नीचर व्यवस्था, पुस्तकालय संवर्धन, प्रयोगशाला निर्माण, कीड़ागंन निर्माण, सभागार निर्माण आदि-आदि प्रयोजनो के लिये दिया करती थी। वेतन वितरण का दायित्व लेने के कारण सरकार के आर्थिक स्त्रोत क्षीण होते चले गये। और आर्वतक अनुदान में ही सम्पूर्ण बजट व्यय होने लगा । और नाम मात्र के लिये अनावर्तक अनुदान स्वीकृत किये गये, जिनसे विद्यालय विकास कार्यक्रम बुरी तरह प्रभावित हुए। इस प्रकार केन्द्रीय सरकार के परोक्ष हस्तक्षेप, राज्य सरकार की सीमित अधिकार हीनता के कारण विद्यालयलों के आर्थिक आधार छिन्न-भिन्न हो गये और विद्यालय प्रबन्ध तन्त्र, विद्यालय विकास से पूर्णतः उदासीन एवं अन्यमनस्क हो गया। और यह भी अध्यापक अभिभावक एसोसिएशन के निर्माण में एक आधार प्रक्रिया बनी। शिक्षकों को व्यवसायिक एवं राजनैतिक संगठनो की ओट में मिली निरंकुशता एवं नियंत्रण विहीनताशिक्षक आदिकाल से आदर्श नागरिक, प्रतिष्ठित व्यक्ति और सर्वसम्मानित व्यक्ति के रूप में माना जाता रहा है, इसी सम्मान के उपलक्ष्य में वह अपना तन, मन, धन और अपनी सम्पूर्ण प्रतिभा, सामर्थ्य एवं ज्ञान को समाज के हित के लिये अर्पित करता रहा है, स्वयं को मर्यादा और संयम की जंजीरो में बांधे हुए भौतिक चकाचौंध से दूर, आर्थिक विपन्नता के कष्टो का जहर पीते हुए, समाज को ज्ञान और अध्यात्म का अमृत बाँटता रहा है। स्वतंत्रता संग्राम के युद्ध में शिक्षक वर्ग ने बढ़कर आत्माहुतियाँ दी है। और सम्पूर्ण राष्ट्र को नैतिक साहस प्रदान किया है, किन्तु ये बातें, आज के संदर्भ में अतीत की प्रतीक होने लगी है। वर्तमान समय में अध्यापक व्यवसायिक संगठनों में विभक्त, राजनैतिक संगठनो की विभिन्न विचारधाराओं से प्रभावित और संचालित है। अपने पुनीत व्यवसाय, जो आत्म नियन्त्रण और आत्मबलिदान पर आधारित था। आज के सन्दर्भ में आधरहीन हो गया है। अब शिक्षा व्यवसाय में जुड़े हुए अनेक संगठन खड़े हो गये है, जो ट्रेड यूनियनज्म् पर आधारित है। विभिन्न स्तरों पर शिक्षा जगत में निम्नलिखित संगठन कार्यरत है |
संयुक्त राष्ट्र महासचिव के सहायक स्टीफ़न ओब्राएन ने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भाषण में बल दिया कि सऊदी युद्धक विमानों से यमनियों का निरंतर जनसंहार हो रहा है। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब की ओर से यमन की नाकाबंदी के कारण इस देश में मानव त्रासदी पैदा हो गयी है।
सऊदी अरब ने 26 मार्च 2015 से यमन पर हमले शुरु किए हैं और उसने यमन की ज़मीनी, हवाई और समुद्री नाकाबंदी कर रखी है। सऊदी अरब अब तक 11000 से ज़्यादा यमनी नागरिकों का जनसंहार कर चुका है, जबकि दसियों हज़ार लोग घायल हुए हैं और दसियों लाख लोग बेघर हुए हैं। इसी प्रकार सऊदी अरब ने यमन के मूल ढांचे का बहुत बड़ा भाग तबाह कर दिया है। यमन पर सऊदी अरब के अपराध पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रिया के बावजूद आले सऊद शासन ने गुरुवार को एक बार फिर यमन पर क्लस्टर बम बरसाए जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित हथियार है।
जिस चीज़ ने आले सऊद शासन को उसके अपराध जारी रखने में दुस्साहस बनाया है वह इस शासन के संबंध में संयुक्त राष्ट्र संघ की विरोधाभासी नीति है। कुछ समय पहले संयुक्त राष्ट्र संघ ने यमन में बच्चों के जनसंहार के कारण बाल अधिकार का उल्लंघन करने वाले देशों की काली सूचि में सऊदी अरब का नाम शामिल किया था लेकिन आले सऊद और अमरीका की ओर से दबाव के कारण उसने सऊदी अरब का नाम इस सूचि से निकाल दिया, जिससे आले सऊद शासन के अपराध के ख़िलाफ़ इस संघ के कमज़ोर दृष्टिकोण का पता चलता है।
आले सऊद शासन संयुक्त राष्ट्र संघ की इसी हैरानी और इस शासन से निपटने में इस संघ में गंभीर इरादे की कमी के कारण, यमन में जिस तरह चाह रहा है अपराध कर रहा है। (MAQ/T)
| संयुक्त राष्ट्र महासचिव के सहायक स्टीफ़न ओब्राएन ने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भाषण में बल दिया कि सऊदी युद्धक विमानों से यमनियों का निरंतर जनसंहार हो रहा है। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब की ओर से यमन की नाकाबंदी के कारण इस देश में मानव त्रासदी पैदा हो गयी है। सऊदी अरब ने छब्बीस मार्च दो हज़ार पंद्रह से यमन पर हमले शुरु किए हैं और उसने यमन की ज़मीनी, हवाई और समुद्री नाकाबंदी कर रखी है। सऊदी अरब अब तक ग्यारह हज़ार से ज़्यादा यमनी नागरिकों का जनसंहार कर चुका है, जबकि दसियों हज़ार लोग घायल हुए हैं और दसियों लाख लोग बेघर हुए हैं। इसी प्रकार सऊदी अरब ने यमन के मूल ढांचे का बहुत बड़ा भाग तबाह कर दिया है। यमन पर सऊदी अरब के अपराध पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रिया के बावजूद आले सऊद शासन ने गुरुवार को एक बार फिर यमन पर क्लस्टर बम बरसाए जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित हथियार है। जिस चीज़ ने आले सऊद शासन को उसके अपराध जारी रखने में दुस्साहस बनाया है वह इस शासन के संबंध में संयुक्त राष्ट्र संघ की विरोधाभासी नीति है। कुछ समय पहले संयुक्त राष्ट्र संघ ने यमन में बच्चों के जनसंहार के कारण बाल अधिकार का उल्लंघन करने वाले देशों की काली सूचि में सऊदी अरब का नाम शामिल किया था लेकिन आले सऊद और अमरीका की ओर से दबाव के कारण उसने सऊदी अरब का नाम इस सूचि से निकाल दिया, जिससे आले सऊद शासन के अपराध के ख़िलाफ़ इस संघ के कमज़ोर दृष्टिकोण का पता चलता है। आले सऊद शासन संयुक्त राष्ट्र संघ की इसी हैरानी और इस शासन से निपटने में इस संघ में गंभीर इरादे की कमी के कारण, यमन में जिस तरह चाह रहा है अपराध कर रहा है। |
Agra. बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से ताजगंज के व्यापारियों के लिए राहत भरी खबर आई तो पर्यटकों के लिए भी एक अच्छा आदेश जारी हो गया है। चांदनी रात में ताज़ का दीदार करने वाले पर्यटकों के लिए सुप्रीम कोर्ट से राहत भरी खबर आई। चांदनी रात में ताज का दीदार करने वाले पर्यटकों को अब टिकट के लिए लंबी-लंबी लाइन में खड़ा नहीं होना पड़ेगा। रात्रि दर्शन के लिए भी अब ऑनलाइन टिकट की व्यवस्था की जाएगी। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट की ओर से आदेश जारी किया गया है।
जानकरी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट में एक आवेदन दाखिल कर रात्रि दर्शन टिकट की ऑनलाइन बुकिंग की मांग की गई थी। आवेदन में कहा गया था कि अभी रात्रि दर्शन के लिए पर्यटक को रात्रि दर्शन की टिकट लेने के लिए एक दिन पहले आगरा पहुंचना पड़ता है। फिर लंबी लंबी लाइन में लाकर उसे टिकट खरीदना पड़ता है जो पर्यटकों के लिए बेहद परेशानी भरा है। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की और चांदनी रात में ताज के दीदार के लिए भी ऑनलाइन टिकट की व्यवस्था किए जाने के आदेश दिए।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पर्यटकों में भी खुशी की लहर देखने को मिल रही है। उनका कहना है कि हर पूर्णिमा के अवसर पर रात में होने वाले ताज के दीदार के लिए खासा परेशानियों का सामना करना पड़ता था लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब उनकी इस समस्या का भी समाधान हो गया है। अब उन्हें ताज रात्रि दर्शन के लिए लंबी-लंबी लाइन में खड़ा होकर टिकट नहीं लेना पड़ेगा।
| Agra. बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से ताजगंज के व्यापारियों के लिए राहत भरी खबर आई तो पर्यटकों के लिए भी एक अच्छा आदेश जारी हो गया है। चांदनी रात में ताज़ का दीदार करने वाले पर्यटकों के लिए सुप्रीम कोर्ट से राहत भरी खबर आई। चांदनी रात में ताज का दीदार करने वाले पर्यटकों को अब टिकट के लिए लंबी-लंबी लाइन में खड़ा नहीं होना पड़ेगा। रात्रि दर्शन के लिए भी अब ऑनलाइन टिकट की व्यवस्था की जाएगी। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट की ओर से आदेश जारी किया गया है। जानकरी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट में एक आवेदन दाखिल कर रात्रि दर्शन टिकट की ऑनलाइन बुकिंग की मांग की गई थी। आवेदन में कहा गया था कि अभी रात्रि दर्शन के लिए पर्यटक को रात्रि दर्शन की टिकट लेने के लिए एक दिन पहले आगरा पहुंचना पड़ता है। फिर लंबी लंबी लाइन में लाकर उसे टिकट खरीदना पड़ता है जो पर्यटकों के लिए बेहद परेशानी भरा है। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की और चांदनी रात में ताज के दीदार के लिए भी ऑनलाइन टिकट की व्यवस्था किए जाने के आदेश दिए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पर्यटकों में भी खुशी की लहर देखने को मिल रही है। उनका कहना है कि हर पूर्णिमा के अवसर पर रात में होने वाले ताज के दीदार के लिए खासा परेशानियों का सामना करना पड़ता था लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब उनकी इस समस्या का भी समाधान हो गया है। अब उन्हें ताज रात्रि दर्शन के लिए लंबी-लंबी लाइन में खड़ा होकर टिकट नहीं लेना पड़ेगा। |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
हिन्दीभाषाटी कास द्वितम् ।
कहीं इधर-उधर बैठ कर खा पी लेता है और अवशिष्ट विवर्ण एवं विरम आहार उपाश्रय में लाता है ।
टीका - साधु संघ एक समुद्र है। इस में भाँति-भाँति की मनोवृत्ति वाले साधु होते हैं। कोई अच्छा होता है तो कोई बुरा । कोई लालची होता है तो कोई सन्तोषी । बात यह है कि, अच्छों के साथ बुरे भी होते है । यद्यपि सूत्रकारों ने इसी मनुष्य को साधु बनाने के लिए लिखा है जो भद्र हो, सन्तोषी हो और सभी तरह पवित्र हो । फिर भी सर्वज्ञता के अभाव से, पवित्र साधु संघ मे अपवित्र पतित आत्माएँ, जैसे-तैसे आकर घुम ही जाती हैं । ऐसी पतित आत्माओं को शिक्षा देने के लिए, सूत्रकार कहते हैं कि, भिक्षा के लिए गाँव मे गये हुए किमी क्षुद्र बुद्धि साधु को, भाँति-भाँति के सरस नीरस भोजन पदार्थ मिले । सरम पदार्थ के देखते ही साधु के मुँह में पानी भर आता है और विचार करना है कि, यदि में यह सब आहार उपाश्रय में गुरु के समीप ले गया तो संभव है कि यह गरम पदार्थ मुझे मिले या न मिले, नहीं मिलेगा तो मै क्या करूँगा ? अतः यही अच्छा हूँ कि मैं अच्छे-अच्छे पदार्थ यहीं साले और बचा हुआ विवर्ण ( रूप रन रहिन ) और विश्न ( भोजन उपाश्रय में ले
चलूँ । इस विचार को कार्य रूप में परिणत करने वाला, अर्थात् अच्छे अच्छे पदार्थ कहीं खापर बुरे-बुरे पदार्थ उपाध्य में लगने वाला माधु, ऐसा क्यों करता हूँ और उसकी बया अवस्था होती है ? यह अग्रिम सूत्रों में सूत्रकार स्वयं वर्णन करेंगे । सूत्र मे 'भद्दा भद्दग' 'भद्रकं भद्रका है, उसका स्पष्ट भाव यह है कि, वे पदार्थ जो सब प्रकार से भद्र हैं अर्थात बारी और बलवर्द्धक हूँ । उत्थानिका - अब सूत्रवार, 'वह इसरार क्यों करता है? यह कहते हैंःजाणंतु ताइसे समणा. आयडी अयं सृणी । संतुट्टो सेवर पं. हदिनी सुतोमओ ॥३६॥ जानन्तु तावदिमे श्रमणा, आयनाथ अयं मुनिः । सन्तुष्टः सेवते प्रशन्तं. सेवते प्रान्तं रुक्षवृत्तिः सुनोप्यः ॥३६॥
पदार्थान्वयः -- इमे- ये उपाश्रयस्थ समणा - साधु तु - निश्चय ही ता - प्रथम जाणतुमुझे जाने कि अयं - यह मुखी - मुनि संतुट्टो - सन्तोष वृत्ति वाला है, इतना ही नहीं किन्तु सुतोसओ - अन्त प्रान्त आहार के मिलने पर भी बड़ा ही सन्तोष वाला है तथा लहवित्ती - रुक्षवृत्ति वाला भी है, जो पंतं - इस प्रकार के असार पदार्थो का सेवए- सेवन करता है इसलिए आयडी - यह मुनि सच्चा मोक्षार्थी है।
मूलार्थ - यह रस लम्पटी साधु, ऐसे भाव रखता है कि 'ये अन्य उपाश्री साधु मुझे प्रतिष्ठा की दृष्टि से यह जाने कि, यह साधु कैसा संतोषी और मोक्षार्थी हैं ? जो इस प्रकार के रूखे-सूखे असार पदार्थों पर ही संतोष क लेता है । जैसा मिल जाता है वैसा ही खा पीकर सन्तुष्ट हो जाता है, नारासार का तो कभी मन में विचार ही नहीं लाता । क्यों न हो, अपनी संयम क्रियाओं में पूर्ण रूप से तत्पर है ।'
टीका - वह मार्ग में ही अच्छे-अच्छे सरस पदार्थ खाने वाला पूर्वोक्त साधु, लालच में प्रतिष्ठा के भाव रखता हुआ यह विचारता है कि, क्या ही अच्छा काम बना है। स्वाद का स्वाद ले लिया और संतोषी के संतोपी बने रहे । ये उपाश्रयी साधु मेरे इस अवशिष्ट नीरस आहार को देखकर यही विचार करेगे कि देखो, यह कैसा मोक्षार्थी उत्कृष्ट साधु है ? लालच और रस-लोलुपता का तो इसमें नाम नहीं । रूखा-सूखा, ठंडा-बासी, जैसा कुछ मिल जाता है, वैसा ही ले लेता है और अपने आनन्द के साथ संतोष वृत्ति से खा पी लेता है। सरम आहार की इच्छा से जहाँ तहाँ अधिक भ्रमण करना तो यह जानता ही नहीं। वास्तव मे संयम वृत्ति यही है । चाहे लाभ हो या हानि, पर इसका समभाव कभी भंग नहीं होता। ऐसी ही आत्माएँ संसार में आने का कुछ लाभ प्राप्त कर लेती हैं । धन्य हैं ऐसे महापुरुष ! और ऐसी आत्माएँ !
उपर्युक्त विचार, छल से युक्त और संयम से सर्वथा विरुद्ध है । अतः ऐसा कुत्सित विचारक साधु संसार में अपनी उन्नति कभी नहीं कर सकता है ।
उत्थानिका ~~ अब सूत्रकार 'ऐसा करने वाला किस पाप कर्म का बंध करता है ?' इस विषय मे कथन करते हैः | हिन्दीभाषाटी कास द्वितम् । कहीं इधर-उधर बैठ कर खा पी लेता है और अवशिष्ट विवर्ण एवं विरम आहार उपाश्रय में लाता है । टीका - साधु संघ एक समुद्र है। इस में भाँति-भाँति की मनोवृत्ति वाले साधु होते हैं। कोई अच्छा होता है तो कोई बुरा । कोई लालची होता है तो कोई सन्तोषी । बात यह है कि, अच्छों के साथ बुरे भी होते है । यद्यपि सूत्रकारों ने इसी मनुष्य को साधु बनाने के लिए लिखा है जो भद्र हो, सन्तोषी हो और सभी तरह पवित्र हो । फिर भी सर्वज्ञता के अभाव से, पवित्र साधु संघ मे अपवित्र पतित आत्माएँ, जैसे-तैसे आकर घुम ही जाती हैं । ऐसी पतित आत्माओं को शिक्षा देने के लिए, सूत्रकार कहते हैं कि, भिक्षा के लिए गाँव मे गये हुए किमी क्षुद्र बुद्धि साधु को, भाँति-भाँति के सरस नीरस भोजन पदार्थ मिले । सरम पदार्थ के देखते ही साधु के मुँह में पानी भर आता है और विचार करना है कि, यदि में यह सब आहार उपाश्रय में गुरु के समीप ले गया तो संभव है कि यह गरम पदार्थ मुझे मिले या न मिले, नहीं मिलेगा तो मै क्या करूँगा ? अतः यही अच्छा हूँ कि मैं अच्छे-अच्छे पदार्थ यहीं साले और बचा हुआ विवर्ण और विश्न ( भोजन उपाश्रय में ले चलूँ । इस विचार को कार्य रूप में परिणत करने वाला, अर्थात् अच्छे अच्छे पदार्थ कहीं खापर बुरे-बुरे पदार्थ उपाध्य में लगने वाला माधु, ऐसा क्यों करता हूँ और उसकी बया अवस्था होती है ? यह अग्रिम सूत्रों में सूत्रकार स्वयं वर्णन करेंगे । सूत्र मे 'भद्दा भद्दग' 'भद्रकं भद्रका है, उसका स्पष्ट भाव यह है कि, वे पदार्थ जो सब प्रकार से भद्र हैं अर्थात बारी और बलवर्द्धक हूँ । उत्थानिका - अब सूत्रवार, 'वह इसरार क्यों करता है? यह कहते हैंःजाणंतु ताइसे समणा. आयडी अयं सृणी । संतुट्टो सेवर पं. हदिनी सुतोमओ ॥छत्तीस॥ जानन्तु तावदिमे श्रमणा, आयनाथ अयं मुनिः । सन्तुष्टः सेवते प्रशन्तं. सेवते प्रान्तं रुक्षवृत्तिः सुनोप्यः ॥छत्तीस॥ पदार्थान्वयः -- इमे- ये उपाश्रयस्थ समणा - साधु तु - निश्चय ही ता - प्रथम जाणतुमुझे जाने कि अयं - यह मुखी - मुनि संतुट्टो - सन्तोष वृत्ति वाला है, इतना ही नहीं किन्तु सुतोसओ - अन्त प्रान्त आहार के मिलने पर भी बड़ा ही सन्तोष वाला है तथा लहवित्ती - रुक्षवृत्ति वाला भी है, जो पंतं - इस प्रकार के असार पदार्थो का सेवए- सेवन करता है इसलिए आयडी - यह मुनि सच्चा मोक्षार्थी है। मूलार्थ - यह रस लम्पटी साधु, ऐसे भाव रखता है कि 'ये अन्य उपाश्री साधु मुझे प्रतिष्ठा की दृष्टि से यह जाने कि, यह साधु कैसा संतोषी और मोक्षार्थी हैं ? जो इस प्रकार के रूखे-सूखे असार पदार्थों पर ही संतोष क लेता है । जैसा मिल जाता है वैसा ही खा पीकर सन्तुष्ट हो जाता है, नारासार का तो कभी मन में विचार ही नहीं लाता । क्यों न हो, अपनी संयम क्रियाओं में पूर्ण रूप से तत्पर है ।' टीका - वह मार्ग में ही अच्छे-अच्छे सरस पदार्थ खाने वाला पूर्वोक्त साधु, लालच में प्रतिष्ठा के भाव रखता हुआ यह विचारता है कि, क्या ही अच्छा काम बना है। स्वाद का स्वाद ले लिया और संतोषी के संतोपी बने रहे । ये उपाश्रयी साधु मेरे इस अवशिष्ट नीरस आहार को देखकर यही विचार करेगे कि देखो, यह कैसा मोक्षार्थी उत्कृष्ट साधु है ? लालच और रस-लोलुपता का तो इसमें नाम नहीं । रूखा-सूखा, ठंडा-बासी, जैसा कुछ मिल जाता है, वैसा ही ले लेता है और अपने आनन्द के साथ संतोष वृत्ति से खा पी लेता है। सरम आहार की इच्छा से जहाँ तहाँ अधिक भ्रमण करना तो यह जानता ही नहीं। वास्तव मे संयम वृत्ति यही है । चाहे लाभ हो या हानि, पर इसका समभाव कभी भंग नहीं होता। ऐसी ही आत्माएँ संसार में आने का कुछ लाभ प्राप्त कर लेती हैं । धन्य हैं ऐसे महापुरुष ! और ऐसी आत्माएँ ! उपर्युक्त विचार, छल से युक्त और संयम से सर्वथा विरुद्ध है । अतः ऐसा कुत्सित विचारक साधु संसार में अपनी उन्नति कभी नहीं कर सकता है । उत्थानिका ~~ अब सूत्रकार 'ऐसा करने वाला किस पाप कर्म का बंध करता है ?' इस विषय मे कथन करते हैः |
केंद्र सरकार ने राज्यों से भी पेट्रोल और डीजल पर वैट घटाने को कहा है, ताकि आम आदमी को और ज्यादा राहत दी जा सके। इसी के चलते उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पेट्रोल में राहत देते हुए दो रुपये वैट को कम कर दिया है। उन्होंने कहा कि हालांकि कोरोना के चलते वैट संग्रहण कम हुआ है। इसके बावजूद हम पेट्रोल में दो रुपये कम कर रहे हैं। इसे दीपावली के दिन से ही लागू किया जा रहा है। पेट्रोल पर राज्य में 25 प्रतिशत वैट लागू है। अब दो रुपये घटने के बाद राज्य में पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर से कम हो जाएंगी। वित्त सचिव अमित नेगी ने कहा कि पेट्रोल में वैट कम करने को नोटिफिकेशन जारी किया जा रहा है। हालांकि डीजल में ये कमी नहीं की गई है।
उत्तराखण्ड में पेट्रोल ₹7 होगा सस्ता।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को दीपावली, गोवर्धन पूजा और भैयादूज की बधाई दी है। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा है कि दीपावली का पर्व अशांति पर शांति, बुराई पर अच्छाई और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है। दीपावली मां लक्ष्मी और देवी अन्नपूर्णा की आराधना तथा सामाजिक समरसता का पर्व भी है।
मुख्यमंत्री ने गोवर्द्धन पूजा को समाज एवं राष्ट्र की आर्थिक-सांस्कृतिक संसाधनों के संरक्षण का प्रतीक बताते हुए कहा है कि यह पर्व भगवान श्री कृष्ण के महान चरित्र का स्मरण भी कराता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भैयादूज के पावन पर्व पर प्रदेशवासियों, विशेष रूप से महिलाओं को बधाई व शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि यह पर्व भाई-बहनों के प्रेम के साथ ही मातृ शक्ति के सम्मान, परिवार एवं समाज में उनके महत्व को भी प्रदर्शित करता है। उन्होंने कहा कि दीपावली का यह पावन पर्व हम सबके जीवन में सुख समृद्धि लाये इसकी भी मुख्यमंत्री ने कामना की है।
लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
| केंद्र सरकार ने राज्यों से भी पेट्रोल और डीजल पर वैट घटाने को कहा है, ताकि आम आदमी को और ज्यादा राहत दी जा सके। इसी के चलते उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पेट्रोल में राहत देते हुए दो रुपये वैट को कम कर दिया है। उन्होंने कहा कि हालांकि कोरोना के चलते वैट संग्रहण कम हुआ है। इसके बावजूद हम पेट्रोल में दो रुपये कम कर रहे हैं। इसे दीपावली के दिन से ही लागू किया जा रहा है। पेट्रोल पर राज्य में पच्चीस प्रतिशत वैट लागू है। अब दो रुपये घटने के बाद राज्य में पेट्रोल की कीमत एक सौ रुपयापये प्रति लीटर से कम हो जाएंगी। वित्त सचिव अमित नेगी ने कहा कि पेट्रोल में वैट कम करने को नोटिफिकेशन जारी किया जा रहा है। हालांकि डीजल में ये कमी नहीं की गई है। उत्तराखण्ड में पेट्रोल सात रुपया होगा सस्ता। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को दीपावली, गोवर्धन पूजा और भैयादूज की बधाई दी है। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा है कि दीपावली का पर्व अशांति पर शांति, बुराई पर अच्छाई और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है। दीपावली मां लक्ष्मी और देवी अन्नपूर्णा की आराधना तथा सामाजिक समरसता का पर्व भी है। मुख्यमंत्री ने गोवर्द्धन पूजा को समाज एवं राष्ट्र की आर्थिक-सांस्कृतिक संसाधनों के संरक्षण का प्रतीक बताते हुए कहा है कि यह पर्व भगवान श्री कृष्ण के महान चरित्र का स्मरण भी कराता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भैयादूज के पावन पर्व पर प्रदेशवासियों, विशेष रूप से महिलाओं को बधाई व शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि यह पर्व भाई-बहनों के प्रेम के साथ ही मातृ शक्ति के सम्मान, परिवार एवं समाज में उनके महत्व को भी प्रदर्शित करता है। उन्होंने कहा कि दीपावली का यह पावन पर्व हम सबके जीवन में सुख समृद्धि लाये इसकी भी मुख्यमंत्री ने कामना की है। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड। |
कर्नाटक विधानसभा चुनाव का आगाज हो गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर्नाटक में पांच दिन में 15 रैलियां कर रहे हैं. चामराजनगर जिले के सांथेमरहल्ली में आयोजित रैली में बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दिल्ली में लोग कह रहे थे कि कर्नाटक में बीजेपी की हवा चल रही है जबकि यहां आने पर पता चला कि यहां बीजेपी की हवा नहीं आंधी चल रही हैं.
फिर से 'हिंदुत्व' की राह पर बीजेपी!
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर लगी होने पर सांसद सतीश कुमार गौतम भड़क गए हैं. उन्होंने कुलपति प्रो. तारिक मंसूर को पत्र भेजकर यह तस्वीर लगाने का औचित्य पूछा है. दूसरी ओर एएमयू के जनसंपर्क कार्यालय का कहना है कि यह तस्वीर छात्रसंघ भवन में लगी है। एएमयू प्रशासन छात्रसंघ के कार्यों में दखल नहीं देता.
राजस्थान में बीजेपी की वसुंधरा राजे सरकार अपनी सत्ता बचाए रखने की हरसंभव कोशिश में जुटी है, कुछ महीने बाद राज्य में होने वाले चुनाव से पहले उसकी कोशिश माहौल को अपने पक्ष में बनाए रखने की है और इस संबंध में ताबड़तोड़ नए फरमान जारी किए जा रहे हैं, नए आदेश में अब से राज्य में किसी सरकारी कार्यक्रम का उद्धाटन या शिलान्यास नेता ही करेंगे अधिकारीगण नहीं.
लंदन : खेलों की दुनिया में विंबलडन कितना प्रसिद्द और प्रतिष्ठित टूर्नामेंट है शायद बताने की जरुरत नहीं है. इस टूर्नामेंट को इसके सख्त नियमो के लिए भी जाना जाता है. अब इस बार के लिए विंबलडन के अधिकारियों ने आज खिलाडिय़ों को चेतावनी दी है कि अगर वे चोटिल होने के बावजूद खेलते हैं और पूरी क्षमता के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं करते है तो पुरस्कार राशि से हाथ धो सकते हैं. ऑल इंग्लैंड क्लब पुरुषों और महिलाओं के एकल मैचों के शुरुआती दौर में चोटों के कारण मैच बीच में छोडऩे की स्थिति से बचने के लिए इस साल विंबलडन में "50:50" नियम लागू करेगा.
| कर्नाटक विधानसभा चुनाव का आगाज हो गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर्नाटक में पांच दिन में पंद्रह रैलियां कर रहे हैं. चामराजनगर जिले के सांथेमरहल्ली में आयोजित रैली में बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दिल्ली में लोग कह रहे थे कि कर्नाटक में बीजेपी की हवा चल रही है जबकि यहां आने पर पता चला कि यहां बीजेपी की हवा नहीं आंधी चल रही हैं. फिर से 'हिंदुत्व' की राह पर बीजेपी! अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर लगी होने पर सांसद सतीश कुमार गौतम भड़क गए हैं. उन्होंने कुलपति प्रो. तारिक मंसूर को पत्र भेजकर यह तस्वीर लगाने का औचित्य पूछा है. दूसरी ओर एएमयू के जनसंपर्क कार्यालय का कहना है कि यह तस्वीर छात्रसंघ भवन में लगी है। एएमयू प्रशासन छात्रसंघ के कार्यों में दखल नहीं देता. राजस्थान में बीजेपी की वसुंधरा राजे सरकार अपनी सत्ता बचाए रखने की हरसंभव कोशिश में जुटी है, कुछ महीने बाद राज्य में होने वाले चुनाव से पहले उसकी कोशिश माहौल को अपने पक्ष में बनाए रखने की है और इस संबंध में ताबड़तोड़ नए फरमान जारी किए जा रहे हैं, नए आदेश में अब से राज्य में किसी सरकारी कार्यक्रम का उद्धाटन या शिलान्यास नेता ही करेंगे अधिकारीगण नहीं. लंदन : खेलों की दुनिया में विंबलडन कितना प्रसिद्द और प्रतिष्ठित टूर्नामेंट है शायद बताने की जरुरत नहीं है. इस टूर्नामेंट को इसके सख्त नियमो के लिए भी जाना जाता है. अब इस बार के लिए विंबलडन के अधिकारियों ने आज खिलाडिय़ों को चेतावनी दी है कि अगर वे चोटिल होने के बावजूद खेलते हैं और पूरी क्षमता के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं करते है तो पुरस्कार राशि से हाथ धो सकते हैं. ऑल इंग्लैंड क्लब पुरुषों और महिलाओं के एकल मैचों के शुरुआती दौर में चोटों के कारण मैच बीच में छोडऩे की स्थिति से बचने के लिए इस साल विंबलडन में "पचास:पचास" नियम लागू करेगा. |
DESK: झारखंड के गिरिडीह में दो महिलाओं से गैंगरेप का मामला सामने आया है। दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एक महिला की हालत नाजुक बतायी जा रही है। मामले में एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है जिससे पूछताछ की गयी है। लिफ्ट देने बहाने दोनों महिलाओं को कार में बिठाया और सुनसान जगह पर ले जाकर बारी-बारी से गंदा काम किया। उस वक्त कार में कुल चार लोग सवार थे। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की छानबीन कर रही है।
घटना के संबंध में बताया जाता है कि दोनों महिला देवघर एम्स में इलाज कराने गयी हुई थी। अस्पताल से घर लौटने के दौरान एक बोलेरो पर सवार चार लोगों ने लिफ्ट देने के बहाने कार में दोनों महिला को बैठा लिया। जिसके बाद सुनसान जगह पर ले जाकर गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया और दोनों को नदी के पास फेंककर फरार हो गये।
इस दौरान एक महिला की हालत काफी खराब थी। ग्रामीणों की नजर जब दोनों पर गई तब इस बात की सूचना पुलिस को दी गयी। मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों को बेंगाबाद स्थित अस्पताल में भर्ती कराया। जांच में जुटी पुलिस ने एक व्यक्ति को हिरासत में लिया और पूछताछ की। पीड़िता ने बताया कि लिफ्ट देने के नाम पर उन दोनों के साथ जबरदस्ती की गयी है।
मिली जानकारी के अनुसार एम्स से घर लौटने के लिए पहले एक ऑटो में बैठी थीं। दोनों की मुलाकात अस्पताल के गेट पर हुई थी। दोनों को अलग-अलग क्षेत्र में जाना था। इसी बीच तेज बारिश होने लगी। बारिश को देख ऑटो ड्राइवर चलने को तैयारी नहीं हुआ। जिसके बाद ऑटो से उतरकर दोनों दूसरे वाहन का इंतजार कर रहे थे तभी एक बोलेरो सामने आकर लग जाती है। बोलेरो का ड्राइवर घर तक छोड़ने की बात करने लगा।
अंधेरा होता देख दोनों महिलाए उसके झांसे में आ गई। दोनों कार में बैठने गयी तब देखा कि पहले से चार लोग बैठे है। लेकिन उन लोगों ने भरोसा दिलाया कि घबराईए नहीं हम आपकों आपके घर छोड़ देंगे। कार पर सवार लोगों की बातों पर दोनों महिलाओं ने भरोसा किया और पीछे की सीट पर बैठ गयी। लेकिन कुछ दूर जाने के बाद कार में बैठे लोग छेड़खानी करने लगे।
महिलाओं ने इसका विरोध भी किया लेकिन कार सवार उसकी मजबुरी का फायदा उठाना चाह रहा था। इस दौरान दोनों महिलाओं को सुनसान जगह पर स्थित एक मकान में ले गये और सामूहिक दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। पुलिस का कहना है कि दोनों का मेडिकल टेस्ट कराया गया है। जांच रिपोर्ट के आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की छानबीन में जुटी है।
| DESK: झारखंड के गिरिडीह में दो महिलाओं से गैंगरेप का मामला सामने आया है। दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एक महिला की हालत नाजुक बतायी जा रही है। मामले में एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है जिससे पूछताछ की गयी है। लिफ्ट देने बहाने दोनों महिलाओं को कार में बिठाया और सुनसान जगह पर ले जाकर बारी-बारी से गंदा काम किया। उस वक्त कार में कुल चार लोग सवार थे। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की छानबीन कर रही है। घटना के संबंध में बताया जाता है कि दोनों महिला देवघर एम्स में इलाज कराने गयी हुई थी। अस्पताल से घर लौटने के दौरान एक बोलेरो पर सवार चार लोगों ने लिफ्ट देने के बहाने कार में दोनों महिला को बैठा लिया। जिसके बाद सुनसान जगह पर ले जाकर गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया और दोनों को नदी के पास फेंककर फरार हो गये। इस दौरान एक महिला की हालत काफी खराब थी। ग्रामीणों की नजर जब दोनों पर गई तब इस बात की सूचना पुलिस को दी गयी। मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों को बेंगाबाद स्थित अस्पताल में भर्ती कराया। जांच में जुटी पुलिस ने एक व्यक्ति को हिरासत में लिया और पूछताछ की। पीड़िता ने बताया कि लिफ्ट देने के नाम पर उन दोनों के साथ जबरदस्ती की गयी है। मिली जानकारी के अनुसार एम्स से घर लौटने के लिए पहले एक ऑटो में बैठी थीं। दोनों की मुलाकात अस्पताल के गेट पर हुई थी। दोनों को अलग-अलग क्षेत्र में जाना था। इसी बीच तेज बारिश होने लगी। बारिश को देख ऑटो ड्राइवर चलने को तैयारी नहीं हुआ। जिसके बाद ऑटो से उतरकर दोनों दूसरे वाहन का इंतजार कर रहे थे तभी एक बोलेरो सामने आकर लग जाती है। बोलेरो का ड्राइवर घर तक छोड़ने की बात करने लगा। अंधेरा होता देख दोनों महिलाए उसके झांसे में आ गई। दोनों कार में बैठने गयी तब देखा कि पहले से चार लोग बैठे है। लेकिन उन लोगों ने भरोसा दिलाया कि घबराईए नहीं हम आपकों आपके घर छोड़ देंगे। कार पर सवार लोगों की बातों पर दोनों महिलाओं ने भरोसा किया और पीछे की सीट पर बैठ गयी। लेकिन कुछ दूर जाने के बाद कार में बैठे लोग छेड़खानी करने लगे। महिलाओं ने इसका विरोध भी किया लेकिन कार सवार उसकी मजबुरी का फायदा उठाना चाह रहा था। इस दौरान दोनों महिलाओं को सुनसान जगह पर स्थित एक मकान में ले गये और सामूहिक दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। पुलिस का कहना है कि दोनों का मेडिकल टेस्ट कराया गया है। जांच रिपोर्ट के आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की छानबीन में जुटी है। |
११ साधूजी ने सूज तो निर्दोष 'दयां कांईहोवे व्रतमें के अव्रत
आहार पाणी मेंः- अशुभ कर्म
खयथाय तथा पुन्यबंध और १२ बार व्रत निपजै
१२ साधूजौने असूज तो दोषसहित आहार पाणी दीयां कांई होवे तथा व्रतमें के अब्रत मेंः-श्रीभगवती सूत्र में कहयो छ तथा श्री ठाणांगः सूत्र के तौजै ठाणें कहयोछे अल्प आयुषबंधै अकल्याणकारी कर्म बँधै तथा असूज तो दोधो ते व्रत में नहीं
१३ अरिहंतदेव देवता के मनुष्य :- मनुष्य के १४ साधू देवता के मनुष्यः- मनुष्य के
१५ देवता साधूनों वंदा करै के नहीं करैः- करौ साधू तो सबका पूजनौक
१६ साधू देवताको बांछा करे के नहीं करेः- नहीं करे
२७ सिद्ध भगवान देवता के मनुष्य :- दोनूं नहीं १८ सिद्ध भगवान सुक्ष्म के बादरः- दोनं नहीं १८ सिद्ध भगवान वसके स्थावरः- दोनं नहीं २० सिद्ध भगवन सन्नीके असन्नी :- दोनं नहीं २१ सिद्ध भगवान पर्याप्ता के अपर्याप्ता :- दोनं नहीं ॥ इति पानाको चरचा !
१ असंयति अब्रतौने दौयां काई होवः- श्रीभगवती सूत्र के आठ में सतक छटै उदेसे को भसंयति अब्रती नें सूजतो असूजतो सचित अचित च्चार प्रकार को आहारीयां येकान्ति पाप होय निर्जरा नहीं होय
२ असंजति अब्रतो जीवको जीवणो बँकणो के के मरणो बंकणोः- असंजतिको जीवणो बंकणो नहीं मरणो बंछणो नहीं, संसार समुद्र में तिरणो बंछणो से श्रीबीतरागदेव को धर्म है ३ कसाई जोवोंने मारै तिबेल्यां साधू कसाई नें उपदेश देवे के नहीं देवेः-अवसर देखे तो उपदेश देवे के नहीं देवे :- अवसर देखे तो उपदेश देवे हिन्साका खोटाफल वा है ।
प्रश्न :-- जौवोंको जीवणी बांध कर उपदेश देवे के कसाईनें तारखा निमित्त उपदेश देवे :उत्तर - कसाई नें तारवा निमित्त उपदेश देवे ते बीतराग को धर्म है
४ कोई बाडामें पसू ज्यांनवर दुखिया है अने साधू जिगारसते जाय रह्या छै ती जीव की अनूकंपा आणी छोड़े के नहीं छोड़ेःनहीं छोड़े, किणन्याय़ उ० श्रोनिसीत, सूटके १२ वार में
उदेसे कह्यो छै अनूकम्पा करिवस जीव वांधे बंधावै अनुमोदे त्वो चौमासी प्रायश्चित् आवै, तथा वंध्या जीवां नें अनुकम्पा आणी छोड़े छुड़ावै चनुमोदे तो चौमासी प्रायश्चित् आवे तथा साधू संसारी जीवांको सार संभार करे नहीं साधू तो संसारिक कर्तव्य त्यागदिया ।
॥ अथ तेरा द्वार ।। * प्रथम मूल द्वार *
१ मूल १ दृष्टान्ति २ कुण ३ आतमा ४ जीव ५ अरु ६ निर्वद्य ७ भाव द्रव्य गुण प्रजाय द्रव्या दिक१० याज्ञा ११ ज्ञिनय १२ तलाव १३ ए तेराद्वार जांणवाः प्रथम मूसंदार कहै छै जौव ते चेतना लक्षगणा, अजीव ते अचेतना लक्षण, पुन्य ते शुभ कर्म, पाप ते अशुभ कर्म, कर्म ग्रहते आश्रव, कर्म, रोके ते संवर, देशथ को कर्म, तोडी देशथी जीव उज्जल घाय ते निर्जरा जीव संघाते शुभाशुभ कर्म वंध्या ते बंध समस्त कर्मा' सें मूकावै ते मोच, 1 ॥ इति प्रथम द्वार सम्प
।। दूसरो दृष्टान्ति द्वार ।।
२ जीव चेतन का २ दीय भेदः --- एक सिद्ध, टूजो संसारी सिद्ध करमा रहित है; संसारी करमां सहित छै, तिारा अनेक भेद है सुचम अने बादर वसने स्थावर सन्नी अने सन्नी तीन बेद चार गति पांच जाति छव काय चोदे भेद जौवनां चौवीस दंडक इत्यादिक अनेक भेद जाग्वा ते चेतन गुण ओोलखवानें सोनांरो दृष्टान्ति कहै छै, जिम सोनांनों गहण भांजी भांजीनें ओर ओर आकारे घडावे तो आकार नों विनासथाय पण सोनानों बिनाम नथी, जिमकर्मों नां उदय थी जीव की पर्याय पलटे पण मूल चेतन गुण नों बिनास नहीं ।
अजीव अचेतन तिग पांच भेदः ।
धर्मास्ति अधर्मास्ति आकारित काल पुद्गलास्ति, तिच्यारांकी पर्याय पलटे नहीं एक पुद्गलास्ति की पर्याय पलटे ते ओलखवांगे सोनानों दृष्टान्ति कहै के जिम कोई सोनानों गहणो भांजी भांजी और ओर आकारे घडावे
तो आकारनों विनास पण सोनानों बिनास नहीं, ज्यू पुद्गल को पर्याय पलंटे पण पुद्गल गुण को विनास नहीं ।
पुन्य वेशुभ वार्म पापते अशुभ कर्म, ते पुन्य पाप ओलखवानें पथ्य अपथ्य आहार नो दृष्टान्ति कहै छै, कदेक जौवके पथ्य आहार घंटे और अपथ्य आहार बंधै तो जौवक निरोगपणो घटै अने सरोगपणों बधे, कदे जीवरे पथ्य आहार वधै अपथ्य घटै तब जीवरै सरोगपणो घटै चनें निरोगपण वधै पथ्य अपथ्य दोनं घटजाय तो प्राणौ सर्ण पामें, ज्यों जौवके पुन्य घटे अरुपाप बधै तो सुख घटै अने दुख बधै, कदे जौव के पाप घटे और पुन्य बधै तो मुख बधे अने दुख घटे, पुन्य पाप दोनं खय होय तो जौब मोच पामें, कर्म ग्रहते आश्रव ते ओलखषाने तीन दृष्टान्ति पांच कहण कहै छै
१ प्रथम कहण ।
१ तलाव रे नाली ज्यं जीवरे व.
२ हवेली के बारणों ज्यों जीवरे आश्रव
३ नावांके छेद्र ज्यों जौवरे आश्रव इमकह्याथकां | ग्यारह साधूजी ने सूज तो निर्दोष 'दयां कांईहोवे व्रतमें के अव्रत आहार पाणी मेंः- अशुभ कर्म खयथाय तथा पुन्यबंध और बारह बार व्रत निपजै बारह साधूजौने असूज तो दोषसहित आहार पाणी दीयां कांई होवे तथा व्रतमें के अब्रत मेंः-श्रीभगवती सूत्र में कहयो छ तथा श्री ठाणांगः सूत्र के तौजै ठाणें कहयोछे अल्प आयुषबंधै अकल्याणकारी कर्म बँधै तथा असूज तो दोधो ते व्रत में नहीं तेरह अरिहंतदेव देवता के मनुष्य :- मनुष्य के चौदह साधू देवता के मनुष्यः- मनुष्य के पंद्रह देवता साधूनों वंदा करै के नहीं करैः- करौ साधू तो सबका पूजनौक सोलह साधू देवताको बांछा करे के नहीं करेः- नहीं करे सत्ताईस सिद्ध भगवान देवता के मनुष्य :- दोनूं नहीं अट्ठारह सिद्ध भगवान सुक्ष्म के बादरः- दोनं नहीं अट्ठारह सिद्ध भगवान वसके स्थावरः- दोनं नहीं बीस सिद्ध भगवन सन्नीके असन्नी :- दोनं नहीं इक्कीस सिद्ध भगवान पर्याप्ता के अपर्याप्ता :- दोनं नहीं ॥ इति पानाको चरचा ! एक असंयति अब्रतौने दौयां काई होवः- श्रीभगवती सूत्र के आठ में सतक छटै उदेसे को भसंयति अब्रती नें सूजतो असूजतो सचित अचित च्चार प्रकार को आहारीयां येकान्ति पाप होय निर्जरा नहीं होय दो असंजति अब्रतो जीवको जीवणो बँकणो के के मरणो बंकणोः- असंजतिको जीवणो बंकणो नहीं मरणो बंछणो नहीं, संसार समुद्र में तिरणो बंछणो से श्रीबीतरागदेव को धर्म है तीन कसाई जोवोंने मारै तिबेल्यां साधू कसाई नें उपदेश देवे के नहीं देवेः-अवसर देखे तो उपदेश देवे के नहीं देवे :- अवसर देखे तो उपदेश देवे हिन्साका खोटाफल वा है । प्रश्न :-- जौवोंको जीवणी बांध कर उपदेश देवे के कसाईनें तारखा निमित्त उपदेश देवे :उत्तर - कसाई नें तारवा निमित्त उपदेश देवे ते बीतराग को धर्म है चार कोई बाडामें पसू ज्यांनवर दुखिया है अने साधू जिगारसते जाय रह्या छै ती जीव की अनूकंपा आणी छोड़े के नहीं छोड़ेःनहीं छोड़े, किणन्याय़ उशून्य श्रोनिसीत, सूटके बारह वार में उदेसे कह्यो छै अनूकम्पा करिवस जीव वांधे बंधावै अनुमोदे त्वो चौमासी प्रायश्चित् आवै, तथा वंध्या जीवां नें अनुकम्पा आणी छोड़े छुड़ावै चनुमोदे तो चौमासी प्रायश्चित् आवे तथा साधू संसारी जीवांको सार संभार करे नहीं साधू तो संसारिक कर्तव्य त्यागदिया । ॥ अथ तेरा द्वार ।। * प्रथम मूल द्वार * एक मूल एक दृष्टान्ति दो कुण तीन आतमा चार जीव पाँच अछः रुपया निर्वद्य सात भाव द्रव्य गुण प्रजाय द्रव्या दिकदस याज्ञा ग्यारह ज्ञिनय बारह तलाव तेरह ए तेराद्वार जांणवाः प्रथम मूसंदार कहै छै जौव ते चेतना लक्षगणा, अजीव ते अचेतना लक्षण, पुन्य ते शुभ कर्म, पाप ते अशुभ कर्म, कर्म ग्रहते आश्रव, कर्म, रोके ते संवर, देशथ को कर्म, तोडी देशथी जीव उज्जल घाय ते निर्जरा जीव संघाते शुभाशुभ कर्म वंध्या ते बंध समस्त कर्मा' सें मूकावै ते मोच, एक ॥ इति प्रथम द्वार सम्प ।। दूसरो दृष्टान्ति द्वार ।। दो जीव चेतन का दो दीय भेदः --- एक सिद्ध, टूजो संसारी सिद्ध करमा रहित है; संसारी करमां सहित छै, तिारा अनेक भेद है सुचम अने बादर वसने स्थावर सन्नी अने सन्नी तीन बेद चार गति पांच जाति छव काय चोदे भेद जौवनां चौवीस दंडक इत्यादिक अनेक भेद जाग्वा ते चेतन गुण ओोलखवानें सोनांरो दृष्टान्ति कहै छै, जिम सोनांनों गहण भांजी भांजीनें ओर ओर आकारे घडावे तो आकार नों विनासथाय पण सोनानों बिनाम नथी, जिमकर्मों नां उदय थी जीव की पर्याय पलटे पण मूल चेतन गुण नों बिनास नहीं । अजीव अचेतन तिग पांच भेदः । धर्मास्ति अधर्मास्ति आकारित काल पुद्गलास्ति, तिच्यारांकी पर्याय पलटे नहीं एक पुद्गलास्ति की पर्याय पलटे ते ओलखवांगे सोनानों दृष्टान्ति कहै के जिम कोई सोनानों गहणो भांजी भांजी और ओर आकारे घडावे तो आकारनों विनास पण सोनानों बिनास नहीं, ज्यू पुद्गल को पर्याय पलंटे पण पुद्गल गुण को विनास नहीं । पुन्य वेशुभ वार्म पापते अशुभ कर्म, ते पुन्य पाप ओलखवानें पथ्य अपथ्य आहार नो दृष्टान्ति कहै छै, कदेक जौवके पथ्य आहार घंटे और अपथ्य आहार बंधै तो जौवक निरोगपणो घटै अने सरोगपणों बधे, कदे जीवरे पथ्य आहार वधै अपथ्य घटै तब जीवरै सरोगपणो घटै चनें निरोगपण वधै पथ्य अपथ्य दोनं घटजाय तो प्राणौ सर्ण पामें, ज्यों जौवके पुन्य घटे अरुपाप बधै तो सुख घटै अने दुख बधै, कदे जौव के पाप घटे और पुन्य बधै तो मुख बधे अने दुख घटे, पुन्य पाप दोनं खय होय तो जौब मोच पामें, कर्म ग्रहते आश्रव ते ओलखषाने तीन दृष्टान्ति पांच कहण कहै छै एक प्रथम कहण । एक तलाव रे नाली ज्यं जीवरे व. दो हवेली के बारणों ज्यों जीवरे आश्रव तीन नावांके छेद्र ज्यों जौवरे आश्रव इमकह्याथकां |
चीन के विदेश मंत्री वांग यी के पाकिस्तान दौरे पर चीन-पाकिस्तान ने साझा प्रेस-वार्ता करते हुए कश्मीर को एक ऐतिहासिक विवाद बताया है और इसे यूएन चार्टर के जरिए हल करनेे की भारत को नसीहत दी है।
कश्मीर में धारा 370 समाप्त होने के बाद से ही वैसे तो पाकिस्तान बौखलाया हुआ है और लगातार अंतराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की कोशिश करता रहा है लेकिन हर जगह उसे मुंह की खानी पड़ी। जिसके बाद पाकिस्तान लगातार इस मुद्दे पर चीन से समर्थन मांगता रहा है।
इस बीच चीन-पाकिस्तान ने साझा प्रेस वार्ता में कहा है कि कश्मीर एक ऐतिहासिक विवाद है जिसको शांतिपूर्ण तरीके से यूएन चार्टर के अनुसार हल किया जाना चाहिए और कोई भी देश एक तरफा इसको नहीं बदल सकता है। गौरतलब है कि चीन के विदेश मंत्री वांग यी इन दिनों पाकिस्तान के दौरे पर हैं0 और पाकिस्तान के कई बार गुहार लगाने के बाद चीन ने कहा था कि वह कश्मीर में मौजूद परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए हैं।
बता दें कि इससे पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्री महमूद कुरैशी ने भारत द्वारा 370 धारा हटाने के बाद चीन का दौरा किया था जिसके बाद चीन ने कश्मीर पर सुरक्षा परिषद में एक बैठक बुलाई, लेकिन वहां भी चीन और पाकिस्तान को निराशा ही हाथ लगी थी।
| चीन के विदेश मंत्री वांग यी के पाकिस्तान दौरे पर चीन-पाकिस्तान ने साझा प्रेस-वार्ता करते हुए कश्मीर को एक ऐतिहासिक विवाद बताया है और इसे यूएन चार्टर के जरिए हल करनेे की भारत को नसीहत दी है। कश्मीर में धारा तीन सौ सत्तर समाप्त होने के बाद से ही वैसे तो पाकिस्तान बौखलाया हुआ है और लगातार अंतराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की कोशिश करता रहा है लेकिन हर जगह उसे मुंह की खानी पड़ी। जिसके बाद पाकिस्तान लगातार इस मुद्दे पर चीन से समर्थन मांगता रहा है। इस बीच चीन-पाकिस्तान ने साझा प्रेस वार्ता में कहा है कि कश्मीर एक ऐतिहासिक विवाद है जिसको शांतिपूर्ण तरीके से यूएन चार्टर के अनुसार हल किया जाना चाहिए और कोई भी देश एक तरफा इसको नहीं बदल सकता है। गौरतलब है कि चीन के विदेश मंत्री वांग यी इन दिनों पाकिस्तान के दौरे पर हैंशून्य और पाकिस्तान के कई बार गुहार लगाने के बाद चीन ने कहा था कि वह कश्मीर में मौजूद परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए हैं। बता दें कि इससे पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्री महमूद कुरैशी ने भारत द्वारा तीन सौ सत्तर धारा हटाने के बाद चीन का दौरा किया था जिसके बाद चीन ने कश्मीर पर सुरक्षा परिषद में एक बैठक बुलाई, लेकिन वहां भी चीन और पाकिस्तान को निराशा ही हाथ लगी थी। |
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक बड़ा फैसला लिया है. टोल टैक्स नियमों में ढील देने के बाद अब केंद्रीय मंत्री ट्रक चालकों के लिए नया कानून लाने जा रहे हैं, जिसके जरिए सरकार ट्रक चालकों के घंटे तय करेगी, ताकि किसी को ज्यादा मेहनत न करनी पड़े. साथ ही देशभर में हो रहे सड़क हादसों पर भी लगाम लगेगी।
नितिन गडकरी ने जानकारी देते हुए बताया कि 2025 के अंत से पहले सड़क हादसों में 50 फीसदी कमी लाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसके चलते सरकार नए कानून बना रही है.
जानिए केंद्रीय मंत्री ने क्या कहा?
सड़क सुरक्षा सप्ताह के दौरान एक सार्वजनिक पहुंच अभियान - 'सड़क सुरक्षा अभियान' में भाग लेते हुए, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सड़क मंत्रालय सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है और सभी 4ई - इंजीनियरिंग, सड़क सुरक्षा - को लागू करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं - सड़क सुरक्षा की। शिक्षा और आपातकालीन देखभाल के क्षेत्र।
बुधवार को जारी एक सरकारी बयान के अनुसार, मंत्री ने कहा कि ट्रक चालकों के काम के घंटे तय करने के लिए एक कानून लाया जाएगा। इस वर्ष, मंत्रालय ने 'सभी के लिए सुरक्षित सड़कों' को बढ़ावा देने के लिए स्वच्छता पखवाड़ के तहत 11 से 17 जनवरी तक सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया।
| केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक बड़ा फैसला लिया है. टोल टैक्स नियमों में ढील देने के बाद अब केंद्रीय मंत्री ट्रक चालकों के लिए नया कानून लाने जा रहे हैं, जिसके जरिए सरकार ट्रक चालकों के घंटे तय करेगी, ताकि किसी को ज्यादा मेहनत न करनी पड़े. साथ ही देशभर में हो रहे सड़क हादसों पर भी लगाम लगेगी। नितिन गडकरी ने जानकारी देते हुए बताया कि दो हज़ार पच्चीस के अंत से पहले सड़क हादसों में पचास फीसदी कमी लाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसके चलते सरकार नए कानून बना रही है. जानिए केंद्रीय मंत्री ने क्या कहा? सड़क सुरक्षा सप्ताह के दौरान एक सार्वजनिक पहुंच अभियान - 'सड़क सुरक्षा अभियान' में भाग लेते हुए, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सड़क मंत्रालय सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है और सभी चारई - इंजीनियरिंग, सड़क सुरक्षा - को लागू करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं - सड़क सुरक्षा की। शिक्षा और आपातकालीन देखभाल के क्षेत्र। बुधवार को जारी एक सरकारी बयान के अनुसार, मंत्री ने कहा कि ट्रक चालकों के काम के घंटे तय करने के लिए एक कानून लाया जाएगा। इस वर्ष, मंत्रालय ने 'सभी के लिए सुरक्षित सड़कों' को बढ़ावा देने के लिए स्वच्छता पखवाड़ के तहत ग्यारह से सत्रह जनवरी तक सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया। |
नई दिल्ली, 10 दिसंबर (आईएएनएस)। नोटबंदी और जीएसटी समेत जो भी कारक पिछली पांच तिमाहियों में विकास दर में गिरावट के लिए उत्तरदायी रहे हैं, उनका प्रभाव खत्म हो गया है और भारत की अर्थव्यवस्था अब पटरी पर लौट आई है।
आगामी तिमाहियों में उध्र्वगामी विकास दर देखने को मिलेगी। यह कहना है भारत सरकार के प्रमुख सांख्यिकीविद टी. सी. ए. अनंत का।
अनंत को लगता है कि सुस्त कृषि विकास दर और महंगाई को लेकर जो चिंता जाहिर की जा रही है, वह भी कुछ बढ़ा-चढ़ाकर ही की जा रही है। वह कहते हैं कि चालू वित्तवर्ष में 'निश्चित रूप से महंगाई दर चार फीसदी से नीचे रहेगी'।
अनंत ने हालांकि चालू वित्तवर्ष में सकल घेरलू उत्पाद (जीडीपी) में विकास दर का स्पष्ट अनुमान नहीं बताया, लेकिन उनका मानना है कि विकास दर उध्र्वगामी दिशा में दर्ज की जा सकती है।
आईएनएस के साथ साक्षात्कार में अनंत ने कहा, अगर पिछले वित्तवर्ष की चारों तिमाहियों और चालू वित्तवर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी (विकास दर) में गिरावट के कारकों पर विचार करें तो यह तर्क देना संभव है कि उन कारकों का असर खत्म हो चुका है। इसलिए हमें अब विकास दर में सुधार देखना चाहिए।
अनंत के मुताबिक, पहला कारक वस्तुओं की वैश्विक कीमतें हैं, जिनमें 2014-15 में आई गिरावट के चलते निवेश लागत निचले स्तर पर पहुंच गई। इस कारण वित्तवर्ष 2014-15 और 2015-16 में विकास दर में बढ़ोतरी दर्ज की गई। लेकिन एक बार फिर वस्तुओं कीमतों में सुधार आने के बाद विकास दर घट गई, जोकि पिछले पांच तिमाहियों में देखी गई।
पिछले सप्ताह सीएसओ की ओर से सितंबर में समाप्त हुई दूसरी तिमाही की विकास दर जारी की गई थी, जिसमें पिछली पांच तिमाहियों की गिरावट के बाद सुधार दर्ज किया गया था। विनिर्माण क्षेत्र के उत्पादों में तेजी के साथ-साथ अर्थव्यवस्था उध्र्वगामी विकास दर प्राप्त करने के लिए तैयार है।
अनंत ने बताया कि रियल-स्टेट के क्षेत्र में आया संकट, जहां उच्च विकास दर के दौर में तीव्र विकास दर्ज की गई थी, और बैंकों के फंसे हुए कर्ज (एनपीए) समेत कई घरेलू कारक रहे हैं, जिनके कारण पिछली तिमाहियों में देश के विकास दर में गिरावट आई।
एनपीए संकट के संबंध में अनंत ने कहा, जहां तक निजी निवेश का सवाल है, तो एनपीए के कारण कुछ रुकावट जरूर आई है। उनका कहना था कि एनपीए या ऐसी परिसंपत्तियां जो बुरी स्थिति में चली जाती थीं, उसका दौर बहुत हद तक खत्म हो गया और अर्थव्यवस्था उस चरण में है, जहां इस मसले का समाधान तलाशने की कोशिश की जा रही है।
अनंत ने बताया कि साथ ही, वर्ष 2017-18 के चौथी तिमाही में नोटबंदी का भी अल्पकालिक प्रभाव रहा। इसके बाद चौथा सबसे बड़ा कारक ढांचागत सुधार था। सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू करने का फैसला लिया, जिससे खलल पड़ना स्वाभाविक था। खासतौर से विनिर्माण क्षेत्र की कंपनियों को जीएसटी लागू होने से पूर्व तैयार की गई वस्तुओं को लेकर परेशानियां हुईं, लेकिन जीएसटी को अमलीजामा प्रदान करने के बाद अब समस्याओं का समाधान हो चुका है।
उधर, भारतीय रिजर्व बैंक (आबीआई) ने पांचवीं द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में प्रमुख ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखने के पीछे महंगाई को एक कारण बताया था, लेकिन अनंत ने महंगाई की चिंता को सिरे से खारिज किया है।
अनंत का तर्क है कि पिछले कुछ महीनों में खाद्य पदार्थो की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण महंगाई दर्ज की गई थी, लेकिन आगामी मौसमी कारकों के चलते परंपरागत रूप से खाद्य पदार्थो की कीमतों में गिरावट रहती है।
कृषि विकास दर में गिरावट के संदर्भ में उनका कहना है कि इस साल फसलों का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले थोड़ा कम जरूर है, लेकिन उससे पीछे के चार-पांच साल के उत्पादन रिकार्ड को देखें, तो इस साल उत्पादन निश्चत तौर पर बेहतर रहा है।
| नई दिल्ली, दस दिसंबर । नोटबंदी और जीएसटी समेत जो भी कारक पिछली पांच तिमाहियों में विकास दर में गिरावट के लिए उत्तरदायी रहे हैं, उनका प्रभाव खत्म हो गया है और भारत की अर्थव्यवस्था अब पटरी पर लौट आई है। आगामी तिमाहियों में उध्र्वगामी विकास दर देखने को मिलेगी। यह कहना है भारत सरकार के प्रमुख सांख्यिकीविद टी. सी. ए. अनंत का। अनंत को लगता है कि सुस्त कृषि विकास दर और महंगाई को लेकर जो चिंता जाहिर की जा रही है, वह भी कुछ बढ़ा-चढ़ाकर ही की जा रही है। वह कहते हैं कि चालू वित्तवर्ष में 'निश्चित रूप से महंगाई दर चार फीसदी से नीचे रहेगी'। अनंत ने हालांकि चालू वित्तवर्ष में सकल घेरलू उत्पाद में विकास दर का स्पष्ट अनुमान नहीं बताया, लेकिन उनका मानना है कि विकास दर उध्र्वगामी दिशा में दर्ज की जा सकती है। आईएनएस के साथ साक्षात्कार में अनंत ने कहा, अगर पिछले वित्तवर्ष की चारों तिमाहियों और चालू वित्तवर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी में गिरावट के कारकों पर विचार करें तो यह तर्क देना संभव है कि उन कारकों का असर खत्म हो चुका है। इसलिए हमें अब विकास दर में सुधार देखना चाहिए। अनंत के मुताबिक, पहला कारक वस्तुओं की वैश्विक कीमतें हैं, जिनमें दो हज़ार चौदह-पंद्रह में आई गिरावट के चलते निवेश लागत निचले स्तर पर पहुंच गई। इस कारण वित्तवर्ष दो हज़ार चौदह-पंद्रह और दो हज़ार पंद्रह-सोलह में विकास दर में बढ़ोतरी दर्ज की गई। लेकिन एक बार फिर वस्तुओं कीमतों में सुधार आने के बाद विकास दर घट गई, जोकि पिछले पांच तिमाहियों में देखी गई। पिछले सप्ताह सीएसओ की ओर से सितंबर में समाप्त हुई दूसरी तिमाही की विकास दर जारी की गई थी, जिसमें पिछली पांच तिमाहियों की गिरावट के बाद सुधार दर्ज किया गया था। विनिर्माण क्षेत्र के उत्पादों में तेजी के साथ-साथ अर्थव्यवस्था उध्र्वगामी विकास दर प्राप्त करने के लिए तैयार है। अनंत ने बताया कि रियल-स्टेट के क्षेत्र में आया संकट, जहां उच्च विकास दर के दौर में तीव्र विकास दर्ज की गई थी, और बैंकों के फंसे हुए कर्ज समेत कई घरेलू कारक रहे हैं, जिनके कारण पिछली तिमाहियों में देश के विकास दर में गिरावट आई। एनपीए संकट के संबंध में अनंत ने कहा, जहां तक निजी निवेश का सवाल है, तो एनपीए के कारण कुछ रुकावट जरूर आई है। उनका कहना था कि एनपीए या ऐसी परिसंपत्तियां जो बुरी स्थिति में चली जाती थीं, उसका दौर बहुत हद तक खत्म हो गया और अर्थव्यवस्था उस चरण में है, जहां इस मसले का समाधान तलाशने की कोशिश की जा रही है। अनंत ने बताया कि साथ ही, वर्ष दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह के चौथी तिमाही में नोटबंदी का भी अल्पकालिक प्रभाव रहा। इसके बाद चौथा सबसे बड़ा कारक ढांचागत सुधार था। सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर लागू करने का फैसला लिया, जिससे खलल पड़ना स्वाभाविक था। खासतौर से विनिर्माण क्षेत्र की कंपनियों को जीएसटी लागू होने से पूर्व तैयार की गई वस्तुओं को लेकर परेशानियां हुईं, लेकिन जीएसटी को अमलीजामा प्रदान करने के बाद अब समस्याओं का समाधान हो चुका है। उधर, भारतीय रिजर्व बैंक ने पांचवीं द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में प्रमुख ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखने के पीछे महंगाई को एक कारण बताया था, लेकिन अनंत ने महंगाई की चिंता को सिरे से खारिज किया है। अनंत का तर्क है कि पिछले कुछ महीनों में खाद्य पदार्थो की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण महंगाई दर्ज की गई थी, लेकिन आगामी मौसमी कारकों के चलते परंपरागत रूप से खाद्य पदार्थो की कीमतों में गिरावट रहती है। कृषि विकास दर में गिरावट के संदर्भ में उनका कहना है कि इस साल फसलों का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले थोड़ा कम जरूर है, लेकिन उससे पीछे के चार-पांच साल के उत्पादन रिकार्ड को देखें, तो इस साल उत्पादन निश्चत तौर पर बेहतर रहा है। |
१७ ] वाचक होने से वह देवदत्त के समान एक ही व्यक्ति को अवगत करायेगा । उस व्यक्ति को छोड़कर अन्य व्यक्ति की अवगति इससे नहीं हो सकती है । अतः वह अनेक व्यक्तियों के कर्तव्य के रूप में नहीं हो सकता है, अर्थात् अनेक व्यक्ति उसका आचारण नहीं कर सकेंगे । इसी लिए प्राच्यत्त्र और प्रतीच्यत्व व्यक्ति वाचक या आकृति वाचक नहीं हो सकता है । अतः विधायक शब्द भी तविशिष्ट रूप में आचार का विधान नहीं कर सकता है । अर्थात् प्राच्यत्व आदि अधिकारी का विशेषण नहीं हो सकता है । यह सत्य है कि राजसूय और वैश्यस्तोम आदि जगहों में राजत्व = क्षत्रियत्व या वैश्यत्व रूप जाति अधिकारी का विशेषण हो सकता है क्योंकि सभी क्षत्रियों और सभी वैश्यों में अनुगत रूप से क्षत्रियत्व और वैश्यत्व जाति अवस्थित है ।
अपि वा=यह पूर्वपक्ष के निरास के लिए है। सर्वधर्म स्यात् = सभी का धर्म अर्थात् कर्तव्य होगा। विधानस्य = विधान का (जिसके द्वारा विहित होता है उसे विधान कहते हैं) विधायक शास्त्र का या मूलीभूत अनुमेय श्रुति का, तन्यायत्वात् = क्योंकि वैसा न्याय अर्थात् प्राची आदि देश विशिष्टता भावरूप तर्क उपलब्ध है, होलाकादि आचार देश विशेष की सीमा से आबद्ध नहीं है, अपि तु वह सभी के लिए अनुष्ठेय है, क्योंकि श्रुति के अनुमान में देश विशिष्टाभाव रूप तर्क वर्तमान है । फलतः यह सभी का कर्तव्य हो सकता है ॥ १६ ॥
दर्शनाद्विनियोगः स्यात् ॥ १७ ॥
शा० भा०-गोत्रव्यवस्थया शिखाकल्पव्यवस्थायां दर्शनं स्पष्टम् ॥१७॥ ३० ॥
भा० वि० उत्तरत्वेन सूक्तमवतारयति- दर्शनादिति । तत्र दृष्टान्तवैषम्यप्रदर्शनार्थं दर्शनादिति भागं व्याचष्टे - गोत्रेति । तत्र हि गोत्रादेरेकैकस्य व्यवस्थापकधर्मस्य दर्शनात् तद्गतस्य त्रिशिखत्वादेरपि व्यवस्थादर्शनं युक्तम् । न चैवमाचरितादीनां किञ्चिद्वयवस्थापकमस्ति येन होलकादि व्यवतिष्ठेदित्यर्थः । ततश्च तत्र गोत्रादिवाच्युपंपदोपेतश्रुत्यनुमानात् कर्तृविशेषविनियोगः स्यात् अत्र तु कर्तृविशेषणासम्भवेन तद्वाच्युपपदासम्भवान्नोपपदयुक्तस्यापि श्रुत्या कर्तृविशेषविनियोगः सिद्ध्येदिति सूत्रशेषो व्याख्येयः ।। १७ ।।
त० वा० -- यत्तु' जातिकुलगोत्रधर्मवद्व्यवस्थित विध्यनुमानमिति ? तत्रैकशब्दवाच्यानां जात्यादीनां व्यवस्थया । दर्शनाद्विनियोगः स्यात्पञ्चावत्तादिधर्मवत् ॥ ६६३
१. यस्तु मु. पु. ४ यस्तु विध्यनुमानभिभिमन्यते इत्यन्वयः ।
यः तथैव पञ्चावत्तं तु भृगूणां वसिष्टशुनकात्रिवध्न्यश्वकाण्वसंकृतिराजन्यानां नाराशंसो द्वितीयः प्रयाजः तनूनपादन्येषामित्यन्वयतो व्यतिरेकतश्चोपलक्षणसंभवाद्व्यवस्थितविध्यवसानम्, तथैव प्रतिजातिगोत्र नियत त्रिशिखै कशिखादिकल्पव्यवस्थितविधिशेपानुमानोपपत्तिरस्तीति दृष्टान्तदान्तिकवैषम्यम् ।। १७ ।।
भा० प्र० - इसी पाद के भाष्य में शिखा कर्म को गोत्र का चिह्न माना गया है (गोत्रचिह्नं शिखाकर्म) पन्द्रहवें सूत्र में भी कोई तीन शिखा कोई पाँच शिखा इसका निर्देश किया है । गोभिलगृह्यसूत्र के २१९९२३ वें सूत्र में 'यथागोत्रकुलझल्प' के द्वारा गोत्र और कुल के अनुसार शिखा रखने का या सम्पूर्ण मुण्डन कराने का विधान कराने का विधान मिलता है । आपस्तम्बगृह्यसूत्र के सोलह खण्ड के ६।७ में प्रवराध्याय में विहित ऋषि की गणना के अनुसार शिखा जाननी चाहिए (यथपशिखा निदधाति यथा वैषां कुलधर्मः) बोधायन गृह्य सूत्र के अनुसार भी यही अर्थ अवगत होता है। अर्थनमेकशिखत्रिशिखपञ्चशिखो वा यथैवैषां कुलधर्मः । यथर्षिशिखां निदधातीत्येके ( बोधायन २१४ ) वशिष्ठ गोत्र वाले दक्षिणभाग में एक शिखा । अत्रि और कश्यपगोत्र वाले उत्तर दक्षिण दोनों भागों में एक-एक दो शिखा । कुण्डपायी में तीन शिखाएँ अंगिरा और भृगु गोत्र वाले पाँच शिखा । फलतः प्रवर और ऋषि के भेद के अनुसार शिखा की संख्या निर्धारित होती है । पूर्वपक्षियों ने प्रदर्शित शिखा कर्म अर्थात् गोत्र विशेष में पृथक्-पृथक् भाग में निबद्ध शिखाओं के अनुसार इसका भी भिन्न-भिन्न रूप से कर्तव्य का निर्धारण किया है। जैसे शिखा कर्म सभी व्यक्तियों के लिए समान रूप में कर्तव्य नहीं है, वैसे ही होलाक आदि कर्म मो सभी के लिए कर्तव्य नहीं है । जैसे भृगु गोत्रियों के लिए पंच अवदान अर्थात् चक्र आदि विधिविहित संस्कारात्मक खण्डकरण आदि शास्त्रीय कर्म का निर्वाह होता है। किन्तु होलाक आदि के लिए वैसा विनियोग नहीं है। इस लिए यह सभी के लिए कर्तव्य है ।
दर्शनात् = शिखा कर्म में शास्त्रीय व्यवस्था देखी गयी है, अतः विनयोगःस्यात् = विशेष नियोग या नियम हो सकता है, किन्तु शिखा भेद के कारण बालक के गोत्र की अवगति और गोत्रानुसार शिखाओं की व्यवस्था है, किन्तु प्रकृत कर्म में न तो कोई ऐसा दृष्ट साधन है और न तो कोई नियमित हेतु है जिससे इन कर्मों को व्यक्ति विशेष के लिए व्यवस्थित किया जा सके ।। १७ ।।
लिङ्गाभावाच्च नित्यस्य ॥१८॥
शा० भा० - इदं पदेभ्यः केभ्यश्चिदुत्तरं सूत्रम् । कानि तानि पदानि ? अथ किमर्थं न लिङ्गाद् व्यवस्था ? यथा 'शुक्लो होता' इति । नास्ति तन्नित्य | सत्रह ] वाचक होने से वह देवदत्त के समान एक ही व्यक्ति को अवगत करायेगा । उस व्यक्ति को छोड़कर अन्य व्यक्ति की अवगति इससे नहीं हो सकती है । अतः वह अनेक व्यक्तियों के कर्तव्य के रूप में नहीं हो सकता है, अर्थात् अनेक व्यक्ति उसका आचारण नहीं कर सकेंगे । इसी लिए प्राच्यत्त्र और प्रतीच्यत्व व्यक्ति वाचक या आकृति वाचक नहीं हो सकता है । अतः विधायक शब्द भी तविशिष्ट रूप में आचार का विधान नहीं कर सकता है । अर्थात् प्राच्यत्व आदि अधिकारी का विशेषण नहीं हो सकता है । यह सत्य है कि राजसूय और वैश्यस्तोम आदि जगहों में राजत्व = क्षत्रियत्व या वैश्यत्व रूप जाति अधिकारी का विशेषण हो सकता है क्योंकि सभी क्षत्रियों और सभी वैश्यों में अनुगत रूप से क्षत्रियत्व और वैश्यत्व जाति अवस्थित है । अपि वा=यह पूर्वपक्ष के निरास के लिए है। सर्वधर्म स्यात् = सभी का धर्म अर्थात् कर्तव्य होगा। विधानस्य = विधान का विधायक शास्त्र का या मूलीभूत अनुमेय श्रुति का, तन्यायत्वात् = क्योंकि वैसा न्याय अर्थात् प्राची आदि देश विशिष्टता भावरूप तर्क उपलब्ध है, होलाकादि आचार देश विशेष की सीमा से आबद्ध नहीं है, अपि तु वह सभी के लिए अनुष्ठेय है, क्योंकि श्रुति के अनुमान में देश विशिष्टाभाव रूप तर्क वर्तमान है । फलतः यह सभी का कर्तव्य हो सकता है ॥ सोलह ॥ दर्शनाद्विनियोगः स्यात् ॥ सत्रह ॥ शाशून्य भाशून्य-गोत्रव्यवस्थया शिखाकल्पव्यवस्थायां दर्शनं स्पष्टम् ॥सत्रह॥ तीस ॥ भाशून्य विशून्य उत्तरत्वेन सूक्तमवतारयति- दर्शनादिति । तत्र दृष्टान्तवैषम्यप्रदर्शनार्थं दर्शनादिति भागं व्याचष्टे - गोत्रेति । तत्र हि गोत्रादेरेकैकस्य व्यवस्थापकधर्मस्य दर्शनात् तद्गतस्य त्रिशिखत्वादेरपि व्यवस्थादर्शनं युक्तम् । न चैवमाचरितादीनां किञ्चिद्वयवस्थापकमस्ति येन होलकादि व्यवतिष्ठेदित्यर्थः । ततश्च तत्र गोत्रादिवाच्युपंपदोपेतश्रुत्यनुमानात् कर्तृविशेषविनियोगः स्यात् अत्र तु कर्तृविशेषणासम्भवेन तद्वाच्युपपदासम्भवान्नोपपदयुक्तस्यापि श्रुत्या कर्तृविशेषविनियोगः सिद्ध्येदिति सूत्रशेषो व्याख्येयः ।। सत्रह ।। तशून्य वाशून्य -- यत्तु' जातिकुलगोत्रधर्मवद्व्यवस्थित विध्यनुमानमिति ? तत्रैकशब्दवाच्यानां जात्यादीनां व्यवस्थया । दर्शनाद्विनियोगः स्यात्पञ्चावत्तादिधर्मवत् ॥ छः सौ तिरेसठ एक. यस्तु मु. पु. चार यस्तु विध्यनुमानभिभिमन्यते इत्यन्वयः । यः तथैव पञ्चावत्तं तु भृगूणां वसिष्टशुनकात्रिवध्न्यश्वकाण्वसंकृतिराजन्यानां नाराशंसो द्वितीयः प्रयाजः तनूनपादन्येषामित्यन्वयतो व्यतिरेकतश्चोपलक्षणसंभवाद्व्यवस्थितविध्यवसानम्, तथैव प्रतिजातिगोत्र नियत त्रिशिखै कशिखादिकल्पव्यवस्थितविधिशेपानुमानोपपत्तिरस्तीति दृष्टान्तदान्तिकवैषम्यम् ।। सत्रह ।। भाशून्य प्रशून्य - इसी पाद के भाष्य में शिखा कर्म को गोत्र का चिह्न माना गया है पन्द्रहवें सूत्र में भी कोई तीन शिखा कोई पाँच शिखा इसका निर्देश किया है । गोभिलगृह्यसूत्र के दो लाख उन्नीस हज़ार नौ सौ तेईस वें सूत्र में 'यथागोत्रकुलझल्प' के द्वारा गोत्र और कुल के अनुसार शिखा रखने का या सम्पूर्ण मुण्डन कराने का विधान कराने का विधान मिलता है । आपस्तम्बगृह्यसूत्र के सोलह खण्ड के छः।सात में प्रवराध्याय में विहित ऋषि की गणना के अनुसार शिखा जाननी चाहिए बोधायन गृह्य सूत्र के अनुसार भी यही अर्थ अवगत होता है। अर्थनमेकशिखत्रिशिखपञ्चशिखो वा यथैवैषां कुलधर्मः । यथर्षिशिखां निदधातीत्येके वशिष्ठ गोत्र वाले दक्षिणभाग में एक शिखा । अत्रि और कश्यपगोत्र वाले उत्तर दक्षिण दोनों भागों में एक-एक दो शिखा । कुण्डपायी में तीन शिखाएँ अंगिरा और भृगु गोत्र वाले पाँच शिखा । फलतः प्रवर और ऋषि के भेद के अनुसार शिखा की संख्या निर्धारित होती है । पूर्वपक्षियों ने प्रदर्शित शिखा कर्म अर्थात् गोत्र विशेष में पृथक्-पृथक् भाग में निबद्ध शिखाओं के अनुसार इसका भी भिन्न-भिन्न रूप से कर्तव्य का निर्धारण किया है। जैसे शिखा कर्म सभी व्यक्तियों के लिए समान रूप में कर्तव्य नहीं है, वैसे ही होलाक आदि कर्म मो सभी के लिए कर्तव्य नहीं है । जैसे भृगु गोत्रियों के लिए पंच अवदान अर्थात् चक्र आदि विधिविहित संस्कारात्मक खण्डकरण आदि शास्त्रीय कर्म का निर्वाह होता है। किन्तु होलाक आदि के लिए वैसा विनियोग नहीं है। इस लिए यह सभी के लिए कर्तव्य है । दर्शनात् = शिखा कर्म में शास्त्रीय व्यवस्था देखी गयी है, अतः विनयोगःस्यात् = विशेष नियोग या नियम हो सकता है, किन्तु शिखा भेद के कारण बालक के गोत्र की अवगति और गोत्रानुसार शिखाओं की व्यवस्था है, किन्तु प्रकृत कर्म में न तो कोई ऐसा दृष्ट साधन है और न तो कोई नियमित हेतु है जिससे इन कर्मों को व्यक्ति विशेष के लिए व्यवस्थित किया जा सके ।। सत्रह ।। लिङ्गाभावाच्च नित्यस्य ॥अट्ठारह॥ शाशून्य भाशून्य - इदं पदेभ्यः केभ्यश्चिदुत्तरं सूत्रम् । कानि तानि पदानि ? अथ किमर्थं न लिङ्गाद् व्यवस्था ? यथा 'शुक्लो होता' इति । नास्ति तन्नित्य |
रांचीः राजधानी के लोगों के लिए अच्छी खबर है। अब शहर में नॉर्मल टेस्ट की तरह कोविड-19 का टेस्ट भी करा सकते हैं। वहीं, सेम डे आपको रिपोर्ट भी मिल जाएगी। जी हां, आईसीएमआर ने रांची के 3 प्राइवेट लैब को डेडिकेटेड कोविड-19 टेस्ट करने की मान्यता दे दी है। इन लैब से सुबह में सैंपल देने के बाद 6 घंटे के अंदर रिपोर्ट दे दी जा रही है। यह प्राइवेट लैब गुरुनानक हॉस्पिटल में माइक्रो प्रैक्सिस लैब, हरमू में एस शरण लैब और बरियातू में निशांत शरण मैट्रिक्स वायरोलॉजी लैब हैं, जहां कोविड टेस्ट की सुविधा उपलब्ध है। जिन लोगों को भी कोविड-19 का टेस्ट कराना है, वो सरकार के रेट पर यहां टेस्ट करा सकते हैं।
निशांत शरण मैट्रिक्स वायरोलॉजी लैब के डायरेक्टर डॉ निशांत शरण बताते हैं कि अभी जो दूसरे प्राइवेट लैब हैं वह कोविड-19 का टेस्ट कर एक दिन में रिपोर्ट देते हैं तो कोई दूसरे दिन के बाद रिपोर्ट देते हैं। लेकिन अब आईसीएमआर ने निशांत शरण मैट्रिक्स वायरोलॉजी लैब को मान्यता दी है कि वह कोविड-19 का टेस्ट करा सकता है, ऐसे में अब रांची में यह सुविधा शुरू कर दी गई है कि अगर सुबह सैंपल देते हैं तो 6 घंटे के बाद रिपोर्ट उपलब्ध करा दी जाएगी। यहां सरकार द्वारा जो रेट तय किया गया है, उसी रेट पर टेस्ट भी कराया जाएगा।
फिलहाल जो सरकार की व्यवस्था है, उसके अनुसार चार बड़े प्राइवेट लैब को सरकार ने कोविड-19 टेस्ट की अनुमति दी है। इसमें डॉक्टर लाल, पैथ काइंड, कोर डायग्नोस्टिक सहित कुछ प्राइवेट अस्पतालों को भी टेस्ट करने की अनुमति दी गई है। लेकिन इन लैब में जो सैंपल कलेक्ट किया जाता है उसको कोलकाता और गुड़गांव के लैब में टेस्ट करने के लिए भेजा जाता है। इस कारण सैंपल देने के बाद 48 से 72 घंटे तक रिपोर्ट का इंतजार करना पड़ता है। अब जब रांची में ही यह व्यवस्था शुरू हो गई है तो लोगों को टेस्ट कराने में भी सहूलियत होगी।
सरकार ने राज्य की जनता को राहत देने की कोशिश की है। दरअसल, झारखंड में कोरोना टेस्ट का शुल्क 1500 रुपए कर दिया गया है। सरकार द्वारा निकाले गए इस नोटिफिकेशन के बाद अब निजी लैब इसको लेकर मनमानी नहीं कर पाएंगे और ना इससे अधिक रुपए वसूल पाएंगे। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी आदेश में बताया गया है कि निजी क्षेत्र की लैब के लिए 29 जून 2020 को कोरोना जांच के लिए अधिकतम 2400 रुपए निर्धारित थे। इसके बाद वर्तमान में आरटीपीसीआर टेस्ट किट और वीटीएम किट के मूल्यों में गिरावट आने के कारण पूर्व में जारी विभागीय आदेश में संशोधित करते हुए तत्काल प्रभाव से निजी क्षेत्र की लैब में कोरोना टेस्ट का अधिकतम शुल्क 1500 रुपए निर्धारित किया गया। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग की ओर से कहा गया है कि निजी लैब की ओर से कोरोना टेस्ट के नाम पर अगर 1500 रुपए से अधिक शुल्क लिया जाता है, तो लैब के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
| रांचीः राजधानी के लोगों के लिए अच्छी खबर है। अब शहर में नॉर्मल टेस्ट की तरह कोविड-उन्नीस का टेस्ट भी करा सकते हैं। वहीं, सेम डे आपको रिपोर्ट भी मिल जाएगी। जी हां, आईसीएमआर ने रांची के तीन प्राइवेट लैब को डेडिकेटेड कोविड-उन्नीस टेस्ट करने की मान्यता दे दी है। इन लैब से सुबह में सैंपल देने के बाद छः घंटाटे के अंदर रिपोर्ट दे दी जा रही है। यह प्राइवेट लैब गुरुनानक हॉस्पिटल में माइक्रो प्रैक्सिस लैब, हरमू में एस शरण लैब और बरियातू में निशांत शरण मैट्रिक्स वायरोलॉजी लैब हैं, जहां कोविड टेस्ट की सुविधा उपलब्ध है। जिन लोगों को भी कोविड-उन्नीस का टेस्ट कराना है, वो सरकार के रेट पर यहां टेस्ट करा सकते हैं। निशांत शरण मैट्रिक्स वायरोलॉजी लैब के डायरेक्टर डॉ निशांत शरण बताते हैं कि अभी जो दूसरे प्राइवेट लैब हैं वह कोविड-उन्नीस का टेस्ट कर एक दिन में रिपोर्ट देते हैं तो कोई दूसरे दिन के बाद रिपोर्ट देते हैं। लेकिन अब आईसीएमआर ने निशांत शरण मैट्रिक्स वायरोलॉजी लैब को मान्यता दी है कि वह कोविड-उन्नीस का टेस्ट करा सकता है, ऐसे में अब रांची में यह सुविधा शुरू कर दी गई है कि अगर सुबह सैंपल देते हैं तो छः घंटाटे के बाद रिपोर्ट उपलब्ध करा दी जाएगी। यहां सरकार द्वारा जो रेट तय किया गया है, उसी रेट पर टेस्ट भी कराया जाएगा। फिलहाल जो सरकार की व्यवस्था है, उसके अनुसार चार बड़े प्राइवेट लैब को सरकार ने कोविड-उन्नीस टेस्ट की अनुमति दी है। इसमें डॉक्टर लाल, पैथ काइंड, कोर डायग्नोस्टिक सहित कुछ प्राइवेट अस्पतालों को भी टेस्ट करने की अनुमति दी गई है। लेकिन इन लैब में जो सैंपल कलेक्ट किया जाता है उसको कोलकाता और गुड़गांव के लैब में टेस्ट करने के लिए भेजा जाता है। इस कारण सैंपल देने के बाद अड़तालीस से बहत्तर घंटाटे तक रिपोर्ट का इंतजार करना पड़ता है। अब जब रांची में ही यह व्यवस्था शुरू हो गई है तो लोगों को टेस्ट कराने में भी सहूलियत होगी। सरकार ने राज्य की जनता को राहत देने की कोशिश की है। दरअसल, झारखंड में कोरोना टेस्ट का शुल्क एक हज़ार पाँच सौ रुपयापए कर दिया गया है। सरकार द्वारा निकाले गए इस नोटिफिकेशन के बाद अब निजी लैब इसको लेकर मनमानी नहीं कर पाएंगे और ना इससे अधिक रुपए वसूल पाएंगे। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी आदेश में बताया गया है कि निजी क्षेत्र की लैब के लिए उनतीस जून दो हज़ार बीस को कोरोना जांच के लिए अधिकतम दो हज़ार चार सौ रुपयापए निर्धारित थे। इसके बाद वर्तमान में आरटीपीसीआर टेस्ट किट और वीटीएम किट के मूल्यों में गिरावट आने के कारण पूर्व में जारी विभागीय आदेश में संशोधित करते हुए तत्काल प्रभाव से निजी क्षेत्र की लैब में कोरोना टेस्ट का अधिकतम शुल्क एक हज़ार पाँच सौ रुपयापए निर्धारित किया गया। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग की ओर से कहा गया है कि निजी लैब की ओर से कोरोना टेस्ट के नाम पर अगर एक हज़ार पाँच सौ रुपयापए से अधिक शुल्क लिया जाता है, तो लैब के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। |
है, परन्तु फिर भी मैं संक्षेप में, आत्मा के विषय में स्थापित कुछ अन्य मान्यताओं का उल्लेख करूँगा । पहले का आधार वैयक्तिक एकरूपता की चेतना है, इसका सम्वन्ध आत्मा की सत्ता से कुछ कुछ माना जा सकता है, परन्तु मेरी समझ में व लगभग असंगत-सा प्रतीत होता है । सीमा के भीतर और किसी निश्चित स्तर तक आत्मा निःसंदेह एक-सी रहती है, और सिद्धान्त द्वारा उस सीमा को निश्चित करने का भार मैं दूसरों पर छोड़ता हूँ, क्योंकि, मेरी सम्मति में, ऐसा कोई भी प्रयत्न नहीं है, जो मूलतः मनमाना न हो । परन्तु जिस बात को समझने में में असमर्थ हूँ वह एक तत्व-ज्ञान का निष्कर्प है जो एकरूपता की भावना से प्रसूत होता हैं । यह तो मैं पूरी तरह से समझता हूँ कि आत्मा के पृथक अस्तित्व मात्र सम्वन्धी सिद्धान्त को यह तथ्य नहीं मानता । अथवा यह कहना अधिक ठीक होगा, कि यह एक ऐसे सिद्धान्त का स्पष्ट उदाहरण है जो स्वयं अपना विरोध करता है । आत्मा केवल पृथक अस्तित्व रखने वाला नहीं है, और इसलिए हम उसकी सत्ता के विषय में एक स्वीकारात्मक परिणाम पर पहुँचते हैं, परन्तु वास्तविकता केवल इस प्रकार प्रतीत होती है । जब "तक आत्मा के भीतर कोई एक ही तात्त्विक आधार रहता है तब तक वह आत्मा उस आधार से कभी भी सम्बन्धित किसी भी वस्तु को अपनी स्मृति में ला सकता है । यह तात्विक एकता और एकात्मकता जो कि पुनरे की करण और पुनर्नवीकरण के सिद्धान्त पर काम करती है और अतीत को एक ही आत्मा के इतिहास के रूप में प्रस्तुत करती है - वस्तुतः यही वह स्वरूप है जिसे हमें निर्धारित करता है । इस स्वरूप से, निःसंदेह प्रकट है कि एकरूपता एक तथ्य के रूप में स्थित है और इसलिए येन-केन प्रकारेण एक-अविकारी आत्मा सत् होना चाहिए, परन्तु प्रश्न होता है कि कैसे ? प्रश्न यह है कि एक सत्-आत्मा के अस्तित्व और निरंतरता का वर्णन क्या किसी ऐसे ढंग से किया जा सकता है या नहीं, जो कि बुद्धिगम्य तो हो हो, परन्तु साथ ही चह पिछली चर्चाओं की कठिनाइयों से मुक्त हो, क्योंकि अन्यथा चाहे हमारे हाथ में एक रोचक तथ्य भले ही आ गया हो, परन्तु निःसंदेह सत् के विषय में हमें कोई दृष्टि नहीं मिली, जो ठहर सके । यदि कोई ठहर सकने वाला दृष्टिकोण हमें मिल सके, तो वह सम्भवतः हमको बतलाएगा, कि हम जिसको तथ्य समझे हुए हैं वह बहुत बड़ी मिथ्या धारणा है । कुछ भी हो, जब तक हम असंगतियों का गट्ठर ही पेश कर सकते हैं; यह विश्वास करना मूर्खता है कि यही परम सत् है । और यदि कोई स्मृति में किसी आश्चर्यजनक शक्ति को पाकर उसका सहारा लेता है, तो भी स्थिति ज्यों-की-त्यों रहती है, क्योंकि प्रश्न तो यह है - संदेश- सत्य अथवा उस संदेश पर आधारित हमारा निष्कर्ष ? मेरी तो स्थिति यह है - आप अपने मत का प्रतिपादन
पायें हों, और सारे प्रश्न का निचोड़ यह है कि हम किसी निश्चय पर पहुँचे कि नहीं । परन्तु आप जो पेश करते हैं वह अधिकतर ऐसा अनुभव-सा प्रतीत होता है जो समझ में तो नहीं आता परन्तु जिसको एक भयंकर उलझन कहा जा सकता है। आपका यह कथन वैसा ही है जैसा कि उस मनुष्य का, जो अपने मनोवेग के वशीभूत होकर, यह अनुभव करता है और समझता है कि प्रेम में ही सारे विश्व का रहस्य निहित है। प्रत्येक अवस्था में निष्कर्ष बिल्कुल ठीक है, परन्तु यह बात नहीं समझ में आती कि इसको तत्वज्ञान क्यों कहा जाय ।
और यदि प्रत्यय के मूल संकल्प को छोड़ दिया जाय तथा शक्ति की अस्पष्ट अभिव्यक्ति का सहारा लिया जाय, तो इसमें कोई प्रगति की बात नहीं। सक्रियता या निरोध शक्ति अथवा संकल्प शक्ति या बल ( अथवा और भी कोई शब्द जो आपको सर्वाधिक अच्छा प्रतीत हो) के अनुभव में, हमको अन्ततोगत्वा सत् की चट्टान पर उतरना पड़ता है। मैं इतना अप्रबुद्ध नहीं हूँ कि अन्तर्दृष्टि को अप्रमाणित करूँ । वह निःसन्देह एक रहस्य है और इसलिए जो लोग बाहरी दुनिया को उसका परिचय कराने की क्षमता रखते हैं वही लोग उसी कारणवश मौन धारण करने के लिए अथवा अज्ञान का वहाना करने के लिए विवश हो जाते हैं । इसलिए मेरे वश की जो बात है वह यही है कि मैं अदीक्षित व्यक्ति की ओर से कुछ बाहरी चर्चा करूँ ।
प्रथम तो वैज्ञानिक दृष्टि से अन्तर्दृष्टि एक धोखा है । सक्रियता - जैसी किसी भी वस्तु की मूल अनुभूति नहीं होती, निरोध-शक्ति की तो बात ही क्या ? यह एक बिलकुल गौण उपज है, जिसका मूल तनिक भी रहस्यमय नहीं और जिसके विषय में मैंने पिछले अध्याय में कुछ चर्चा की है । आप निःसन्देह अनिश्चित आलोचनों के अवशिष्ट छोर की ओर संकेत कर सकते हैं, परन्तु इनके अन्तर्गत कोई तत्व नहीं होगा । और मैं यह कहने से नहीं हिचकता कि यदि कहीं भी आपको कोई मनोवैज्ञानिक इस अनुभूति को प्रारम्भिक अथवा मौलिक मानने वाला मिले, तो आप समझ लीजिए कि वह एक ऐसा आदमी है जिसने कभी भी उसके विश्लेषण करने अथवा उस इयत्ता के विषय में पता लगाने का कोई गम्भीर प्रयत्न नहीं किया। दूसरे, तत्वज्ञान की दृष्टि -से यह संदेश चाहे किसी सूरत से क्यों न मिले, वे या तो अर्थहीन हैं या असत्य । और यहाँ फिर हम एक सर्वाधिक महत्त्व के विषय पर पहुँचते हैं। मुझे इससे कोई प्रयोजन नहीं कि आपको किस त्रिकाल-द्रष्टा ने बतलाया है, और यदि आप चाहें तो अपने चेसिर-पैर के मनोविज्ञान को यहाँ पर दिव्य संदेश मान लें, परन्तु वास्तविक प्रश्न तो यह है कि आपका जो उत्तर है (और यदि उसका कोई अर्थ है), वह एक आभास और भ्रम है या नहीं। यदि उसका कोई अर्थ नहीं है, अर्थात् यदि वह केवल एक उक्तिआत्मा की सत्ता
मात्र है जिसमें एक सिद्धान्त होने की क्षमता रखने वाला कोई जटिल तत्व न हो, तो
बहुत कुछ सुख या दुख - जैसी कोई वस्तु होगा । परन्तु यदि आप कहें कि यह तो विश्द का शास्त्रीय स्वरूप वर्णन है, तो आपकी यह भूल ही नहीं, अपितु महामूर्खता होगी। यही बात सक्रियता अथवा वल के विषय में कही जा सकती है, यदि उनका भी केवल अस्तित्व हो और उसमें कोई अर्थ न हो तो ? परन्तु इसके विपरीत अन्तर्दृष्टि का कोई अर्थ है, तो मैं यह कहूँगा कि या तो उस त्रिकाल-द्रप्टा के मस्तिष्क में इतनी उलझन है, अथवा, इसके विपरीत, यदि उसमें कोई निश्चित अभिप्राय है, तो वह झूठ है। यदि हम उसको अन्धेरे में निकाल कर अपनी पिछली आलोचना के प्रकाश में उसे देखें, तो वह अपनी अशक्यता को प्रकट कर देगी । उसमें केवल उलझी हुई गुत्थियों के अतिरिक्त, किसी भी सत्य के नहीं, अपितु आभास के दर्शन होंगे। मैं इस विषय को विना ओर किसी चर्चा के छोड़ता हूँ ।
(ङ) अंत में, मैं, संक्षेप में, परमाणुवाद पर विचार करूँगा । एक मत यह है कि.. अद्वैत दृष्टि से नहीं तो कम-से-कम तत्व की दृष्टि से प्रत्येक आत्मा के स्वतन्त्र सत् हैं । परन्तु इस प्रयत्न पर अधिक चर्चा की आवश्यकता नहीं । प्रथम तो, यदि विश्व में एक से अधिक आत्मा हैं, तो प्रश्न होता है कि उनमें परस्पर क्या सम्बन्ध है ? और यह हम तीसरे अध्याय में पहले ही देख चुके हैं कि इस प्रश्न का नकारात्मक उत्तर देना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि भेद सम्बन्ध के विना, अनेकत्व और पृथकत्व का कोई अर्थ नहीं । परस्पर-सम्बन्ध के अभाव में, वेचारे ये परमाणु प्रगतिहीन और प्रयोजनहीन हो जायेंगे । परन्तु, सम्बन्धों को मान लेना भी परमाणुओं की स्वतन्त्रता के लिए घातक होगा । वस्तु-मात्राएँ, स्पष्ट रूप से, एक सर्वात्मक इकाई के विशेष अथवा तत्व- मात्र हो जाते हैं । इसलिए, उनके आन्तरिक तत्वों के लिए, स्थिरता का कोई सवल सिद्धान्त नहीं रह जाता । और दूसरे, यदि वह रह भी जाय, तो इससे हमारी कठिनाइयों का अन्त नहीं होता, क्योंकि तनिक सोचिए और विचारिए -- अभी तक हमने देखा है कि द्वैत - और अद्वैत में संगति सम्भव नहीं । चाहे आप अपने तत्वों के साथ सम्वन्धित एक अद्वैत इकाई के अस्तित्व को लें अथवा उस अस्तित्व के अनेक विशेष रूपों को, सर्वत्र एक ही कठिनाई सामने आती है। हमें ऐसी विशेषताएँ मिलीं जिनका एकत्र होना आवश्यक था, परन्तु फिर भी उनमें एकता की प्रकृति नहीं दिखायी पड़ी । आत्मा में अनेकता है और एकता भी, परन्तु जब हम यह जानने का प्रयत्न करते हैं कि यह कैसे है, तो हम असंगतियों के चक्र में पड़ जाते हैं, अतः यह वात सच नहीं हो सकती । और अब आत्मा के पारमाणविक स्वरूप से इसको कितने ही निश्चित अर्थ में हम क्यों न लें- हमारा क्या काम चलेगा ? क्या इससे तनिक भी ज्ञात होगा कि अद्वैत के साथ द्वैत का समन्वय
कैसे हो सकेगा ? यदि यह सम्भव हो सके, तभी मैं सादर यह कहूँगा कि उसका कुछ उपयोग है, क्योंकि अन्यथा, यह तो अद्वैत- सत्ता का एक कथन एवं समर्थन मात्र रह जाता है और उसके द्वैत तत्व की समस्या या तो पूर्णतया उपेक्षित रह जाती है अथवा चह् मनगढ़ंतों और रूपकों के जाल में छिप जाता है । परन्तु यदि अद्वैत पर वल देने के अतिरिक्त अन्य कुछ अभिप्रेत है, तो आपत्तिजनक है, क्योंकि ऐसी अवस्था में, द्वैत का व्याख्यान होने के स्थान पर, उस पर तो पर्दा पड़ जायगा, और आत्मा की अद्वैत सत्ता के सीमा निर्धारण के विषय में केवल नकारात्मक उत्तर ही मिलेगा । और यह उत्तर आलोचना के आगे ठहर नहीं सकेगा। और अन्त में आत्मा का उसके तत्व के साथ क्या सम्बन्ध है, यह एक दूसरा जटिल प्रश्न वन जायगा । परमाणुवाद से वर्तमान समस्याओं में वृद्धि ही होगी और उससे किसी के भी हल में सहायता नहीं मिलेगी । यदि हमारी समस्या के विभिन्न पक्षों का हल, केवल इन्हीं दो पक्षों के प्रति दुराग्रहद्वारा ही करने का प्रयत्न किया जाय, तो यह बड़ी आश्चर्य की बात होगी ।
और इस निष्कर्ष के साथ में प्रस्तुत अध्याय का अन्त करता हूँ । यदि पाठक चाहें, तो इस विषय पर जो चर्चा हुई उसके आधार पर वे इस विषय के विस्तृत सूत्रों को और आगे ले जा सकते हैं और आत्मा की सत्ता के दावे की ओर अधिक आलोचना कर सकते हैं। परन्तु, जिन आपत्तियों को सिद्धान्त रूप में हम देख चुके हैं, यदि वे उन्हीं को हृदयंगम कराने का प्रयत्न करेंगे, तो जिस निष्कर्ष पर पहुँचेंगे, वह अभी से ही सुनिश्चित है । आत्मा को किसी भी रूप में क्यों न लिया जाय, वह आभास ही सिद्ध होगा । यदि वह सीमित या शान्त है, तो वह बाहरी सम्बन्धों के विरुद्ध अपने को स्थिर नहीं रख सकता, क्योंकि वे उसके तत्त्व में प्रविष्ट होकर उसकी स्वतन्त्रता को नष्ट कर देंगे । और उसकी सान्तता के विषय में इस आपत्ति को छोड़ देने पर भी, आत्मा सब प्रकार से अबुद्धिगम्य है, क्योंकि उस पर विचार करते हुए हमें केवल अनुभूति से ऊपर उठना पड़ता है, क्योंकि वह स्वयं पर्याप्त नहीं, परन्तु फिर भी हम किसी भी ऐसे अकाट्य विचार या बौद्धिक सिद्धान्त पर नहीं पहुँच पाते जिससे कि हम यह जान सकें कि इकाई के भीतर अनेकता का समावेश कैसे हो सकता है। परन्तु यदि हम इसको नहीं समझ सकते और यदि आत्मा-विषयक हमारी समस्त ऊहापोह असंगतियों से भरी हुई है, तो हमें इसका परिणाम स्वीकार कर लेना चाहिए । निःसन्देह हमारी अनुभूति का सर्वोत्तम स्वरूप आत्मा है, परन्तु यह सव होते हुए भी, यह कोई सच्चा स्वरूप नहीं है। वह हमारे सामने वास्तविक तथ्यों को नहीं प्रस्तुत करता, और जिस रूप में, वह प्रस्तुत करता है, उस रूप में वे आभास है, भ्रम
जिन कारणों से इस परिणाम का सर्वत्र स्वागत नहीं होता है, उनमें से एक आत्मा | है, परन्तु फिर भी मैं संक्षेप में, आत्मा के विषय में स्थापित कुछ अन्य मान्यताओं का उल्लेख करूँगा । पहले का आधार वैयक्तिक एकरूपता की चेतना है, इसका सम्वन्ध आत्मा की सत्ता से कुछ कुछ माना जा सकता है, परन्तु मेरी समझ में व लगभग असंगत-सा प्रतीत होता है । सीमा के भीतर और किसी निश्चित स्तर तक आत्मा निःसंदेह एक-सी रहती है, और सिद्धान्त द्वारा उस सीमा को निश्चित करने का भार मैं दूसरों पर छोड़ता हूँ, क्योंकि, मेरी सम्मति में, ऐसा कोई भी प्रयत्न नहीं है, जो मूलतः मनमाना न हो । परन्तु जिस बात को समझने में में असमर्थ हूँ वह एक तत्व-ज्ञान का निष्कर्प है जो एकरूपता की भावना से प्रसूत होता हैं । यह तो मैं पूरी तरह से समझता हूँ कि आत्मा के पृथक अस्तित्व मात्र सम्वन्धी सिद्धान्त को यह तथ्य नहीं मानता । अथवा यह कहना अधिक ठीक होगा, कि यह एक ऐसे सिद्धान्त का स्पष्ट उदाहरण है जो स्वयं अपना विरोध करता है । आत्मा केवल पृथक अस्तित्व रखने वाला नहीं है, और इसलिए हम उसकी सत्ता के विषय में एक स्वीकारात्मक परिणाम पर पहुँचते हैं, परन्तु वास्तविकता केवल इस प्रकार प्रतीत होती है । जब "तक आत्मा के भीतर कोई एक ही तात्त्विक आधार रहता है तब तक वह आत्मा उस आधार से कभी भी सम्बन्धित किसी भी वस्तु को अपनी स्मृति में ला सकता है । यह तात्विक एकता और एकात्मकता जो कि पुनरे की करण और पुनर्नवीकरण के सिद्धान्त पर काम करती है और अतीत को एक ही आत्मा के इतिहास के रूप में प्रस्तुत करती है - वस्तुतः यही वह स्वरूप है जिसे हमें निर्धारित करता है । इस स्वरूप से, निःसंदेह प्रकट है कि एकरूपता एक तथ्य के रूप में स्थित है और इसलिए येन-केन प्रकारेण एक-अविकारी आत्मा सत् होना चाहिए, परन्तु प्रश्न होता है कि कैसे ? प्रश्न यह है कि एक सत्-आत्मा के अस्तित्व और निरंतरता का वर्णन क्या किसी ऐसे ढंग से किया जा सकता है या नहीं, जो कि बुद्धिगम्य तो हो हो, परन्तु साथ ही चह पिछली चर्चाओं की कठिनाइयों से मुक्त हो, क्योंकि अन्यथा चाहे हमारे हाथ में एक रोचक तथ्य भले ही आ गया हो, परन्तु निःसंदेह सत् के विषय में हमें कोई दृष्टि नहीं मिली, जो ठहर सके । यदि कोई ठहर सकने वाला दृष्टिकोण हमें मिल सके, तो वह सम्भवतः हमको बतलाएगा, कि हम जिसको तथ्य समझे हुए हैं वह बहुत बड़ी मिथ्या धारणा है । कुछ भी हो, जब तक हम असंगतियों का गट्ठर ही पेश कर सकते हैं; यह विश्वास करना मूर्खता है कि यही परम सत् है । और यदि कोई स्मृति में किसी आश्चर्यजनक शक्ति को पाकर उसका सहारा लेता है, तो भी स्थिति ज्यों-की-त्यों रहती है, क्योंकि प्रश्न तो यह है - संदेश- सत्य अथवा उस संदेश पर आधारित हमारा निष्कर्ष ? मेरी तो स्थिति यह है - आप अपने मत का प्रतिपादन पायें हों, और सारे प्रश्न का निचोड़ यह है कि हम किसी निश्चय पर पहुँचे कि नहीं । परन्तु आप जो पेश करते हैं वह अधिकतर ऐसा अनुभव-सा प्रतीत होता है जो समझ में तो नहीं आता परन्तु जिसको एक भयंकर उलझन कहा जा सकता है। आपका यह कथन वैसा ही है जैसा कि उस मनुष्य का, जो अपने मनोवेग के वशीभूत होकर, यह अनुभव करता है और समझता है कि प्रेम में ही सारे विश्व का रहस्य निहित है। प्रत्येक अवस्था में निष्कर्ष बिल्कुल ठीक है, परन्तु यह बात नहीं समझ में आती कि इसको तत्वज्ञान क्यों कहा जाय । और यदि प्रत्यय के मूल संकल्प को छोड़ दिया जाय तथा शक्ति की अस्पष्ट अभिव्यक्ति का सहारा लिया जाय, तो इसमें कोई प्रगति की बात नहीं। सक्रियता या निरोध शक्ति अथवा संकल्प शक्ति या बल के अनुभव में, हमको अन्ततोगत्वा सत् की चट्टान पर उतरना पड़ता है। मैं इतना अप्रबुद्ध नहीं हूँ कि अन्तर्दृष्टि को अप्रमाणित करूँ । वह निःसन्देह एक रहस्य है और इसलिए जो लोग बाहरी दुनिया को उसका परिचय कराने की क्षमता रखते हैं वही लोग उसी कारणवश मौन धारण करने के लिए अथवा अज्ञान का वहाना करने के लिए विवश हो जाते हैं । इसलिए मेरे वश की जो बात है वह यही है कि मैं अदीक्षित व्यक्ति की ओर से कुछ बाहरी चर्चा करूँ । प्रथम तो वैज्ञानिक दृष्टि से अन्तर्दृष्टि एक धोखा है । सक्रियता - जैसी किसी भी वस्तु की मूल अनुभूति नहीं होती, निरोध-शक्ति की तो बात ही क्या ? यह एक बिलकुल गौण उपज है, जिसका मूल तनिक भी रहस्यमय नहीं और जिसके विषय में मैंने पिछले अध्याय में कुछ चर्चा की है । आप निःसन्देह अनिश्चित आलोचनों के अवशिष्ट छोर की ओर संकेत कर सकते हैं, परन्तु इनके अन्तर्गत कोई तत्व नहीं होगा । और मैं यह कहने से नहीं हिचकता कि यदि कहीं भी आपको कोई मनोवैज्ञानिक इस अनुभूति को प्रारम्भिक अथवा मौलिक मानने वाला मिले, तो आप समझ लीजिए कि वह एक ऐसा आदमी है जिसने कभी भी उसके विश्लेषण करने अथवा उस इयत्ता के विषय में पता लगाने का कोई गम्भीर प्रयत्न नहीं किया। दूसरे, तत्वज्ञान की दृष्टि -से यह संदेश चाहे किसी सूरत से क्यों न मिले, वे या तो अर्थहीन हैं या असत्य । और यहाँ फिर हम एक सर्वाधिक महत्त्व के विषय पर पहुँचते हैं। मुझे इससे कोई प्रयोजन नहीं कि आपको किस त्रिकाल-द्रष्टा ने बतलाया है, और यदि आप चाहें तो अपने चेसिर-पैर के मनोविज्ञान को यहाँ पर दिव्य संदेश मान लें, परन्तु वास्तविक प्रश्न तो यह है कि आपका जो उत्तर है , वह एक आभास और भ्रम है या नहीं। यदि उसका कोई अर्थ नहीं है, अर्थात् यदि वह केवल एक उक्तिआत्मा की सत्ता मात्र है जिसमें एक सिद्धान्त होने की क्षमता रखने वाला कोई जटिल तत्व न हो, तो बहुत कुछ सुख या दुख - जैसी कोई वस्तु होगा । परन्तु यदि आप कहें कि यह तो विश्द का शास्त्रीय स्वरूप वर्णन है, तो आपकी यह भूल ही नहीं, अपितु महामूर्खता होगी। यही बात सक्रियता अथवा वल के विषय में कही जा सकती है, यदि उनका भी केवल अस्तित्व हो और उसमें कोई अर्थ न हो तो ? परन्तु इसके विपरीत अन्तर्दृष्टि का कोई अर्थ है, तो मैं यह कहूँगा कि या तो उस त्रिकाल-द्रप्टा के मस्तिष्क में इतनी उलझन है, अथवा, इसके विपरीत, यदि उसमें कोई निश्चित अभिप्राय है, तो वह झूठ है। यदि हम उसको अन्धेरे में निकाल कर अपनी पिछली आलोचना के प्रकाश में उसे देखें, तो वह अपनी अशक्यता को प्रकट कर देगी । उसमें केवल उलझी हुई गुत्थियों के अतिरिक्त, किसी भी सत्य के नहीं, अपितु आभास के दर्शन होंगे। मैं इस विषय को विना ओर किसी चर्चा के छोड़ता हूँ । अंत में, मैं, संक्षेप में, परमाणुवाद पर विचार करूँगा । एक मत यह है कि.. अद्वैत दृष्टि से नहीं तो कम-से-कम तत्व की दृष्टि से प्रत्येक आत्मा के स्वतन्त्र सत् हैं । परन्तु इस प्रयत्न पर अधिक चर्चा की आवश्यकता नहीं । प्रथम तो, यदि विश्व में एक से अधिक आत्मा हैं, तो प्रश्न होता है कि उनमें परस्पर क्या सम्बन्ध है ? और यह हम तीसरे अध्याय में पहले ही देख चुके हैं कि इस प्रश्न का नकारात्मक उत्तर देना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि भेद सम्बन्ध के विना, अनेकत्व और पृथकत्व का कोई अर्थ नहीं । परस्पर-सम्बन्ध के अभाव में, वेचारे ये परमाणु प्रगतिहीन और प्रयोजनहीन हो जायेंगे । परन्तु, सम्बन्धों को मान लेना भी परमाणुओं की स्वतन्त्रता के लिए घातक होगा । वस्तु-मात्राएँ, स्पष्ट रूप से, एक सर्वात्मक इकाई के विशेष अथवा तत्व- मात्र हो जाते हैं । इसलिए, उनके आन्तरिक तत्वों के लिए, स्थिरता का कोई सवल सिद्धान्त नहीं रह जाता । और दूसरे, यदि वह रह भी जाय, तो इससे हमारी कठिनाइयों का अन्त नहीं होता, क्योंकि तनिक सोचिए और विचारिए -- अभी तक हमने देखा है कि द्वैत - और अद्वैत में संगति सम्भव नहीं । चाहे आप अपने तत्वों के साथ सम्वन्धित एक अद्वैत इकाई के अस्तित्व को लें अथवा उस अस्तित्व के अनेक विशेष रूपों को, सर्वत्र एक ही कठिनाई सामने आती है। हमें ऐसी विशेषताएँ मिलीं जिनका एकत्र होना आवश्यक था, परन्तु फिर भी उनमें एकता की प्रकृति नहीं दिखायी पड़ी । आत्मा में अनेकता है और एकता भी, परन्तु जब हम यह जानने का प्रयत्न करते हैं कि यह कैसे है, तो हम असंगतियों के चक्र में पड़ जाते हैं, अतः यह वात सच नहीं हो सकती । और अब आत्मा के पारमाणविक स्वरूप से इसको कितने ही निश्चित अर्थ में हम क्यों न लें- हमारा क्या काम चलेगा ? क्या इससे तनिक भी ज्ञात होगा कि अद्वैत के साथ द्वैत का समन्वय कैसे हो सकेगा ? यदि यह सम्भव हो सके, तभी मैं सादर यह कहूँगा कि उसका कुछ उपयोग है, क्योंकि अन्यथा, यह तो अद्वैत- सत्ता का एक कथन एवं समर्थन मात्र रह जाता है और उसके द्वैत तत्व की समस्या या तो पूर्णतया उपेक्षित रह जाती है अथवा चह् मनगढ़ंतों और रूपकों के जाल में छिप जाता है । परन्तु यदि अद्वैत पर वल देने के अतिरिक्त अन्य कुछ अभिप्रेत है, तो आपत्तिजनक है, क्योंकि ऐसी अवस्था में, द्वैत का व्याख्यान होने के स्थान पर, उस पर तो पर्दा पड़ जायगा, और आत्मा की अद्वैत सत्ता के सीमा निर्धारण के विषय में केवल नकारात्मक उत्तर ही मिलेगा । और यह उत्तर आलोचना के आगे ठहर नहीं सकेगा। और अन्त में आत्मा का उसके तत्व के साथ क्या सम्बन्ध है, यह एक दूसरा जटिल प्रश्न वन जायगा । परमाणुवाद से वर्तमान समस्याओं में वृद्धि ही होगी और उससे किसी के भी हल में सहायता नहीं मिलेगी । यदि हमारी समस्या के विभिन्न पक्षों का हल, केवल इन्हीं दो पक्षों के प्रति दुराग्रहद्वारा ही करने का प्रयत्न किया जाय, तो यह बड़ी आश्चर्य की बात होगी । और इस निष्कर्ष के साथ में प्रस्तुत अध्याय का अन्त करता हूँ । यदि पाठक चाहें, तो इस विषय पर जो चर्चा हुई उसके आधार पर वे इस विषय के विस्तृत सूत्रों को और आगे ले जा सकते हैं और आत्मा की सत्ता के दावे की ओर अधिक आलोचना कर सकते हैं। परन्तु, जिन आपत्तियों को सिद्धान्त रूप में हम देख चुके हैं, यदि वे उन्हीं को हृदयंगम कराने का प्रयत्न करेंगे, तो जिस निष्कर्ष पर पहुँचेंगे, वह अभी से ही सुनिश्चित है । आत्मा को किसी भी रूप में क्यों न लिया जाय, वह आभास ही सिद्ध होगा । यदि वह सीमित या शान्त है, तो वह बाहरी सम्बन्धों के विरुद्ध अपने को स्थिर नहीं रख सकता, क्योंकि वे उसके तत्त्व में प्रविष्ट होकर उसकी स्वतन्त्रता को नष्ट कर देंगे । और उसकी सान्तता के विषय में इस आपत्ति को छोड़ देने पर भी, आत्मा सब प्रकार से अबुद्धिगम्य है, क्योंकि उस पर विचार करते हुए हमें केवल अनुभूति से ऊपर उठना पड़ता है, क्योंकि वह स्वयं पर्याप्त नहीं, परन्तु फिर भी हम किसी भी ऐसे अकाट्य विचार या बौद्धिक सिद्धान्त पर नहीं पहुँच पाते जिससे कि हम यह जान सकें कि इकाई के भीतर अनेकता का समावेश कैसे हो सकता है। परन्तु यदि हम इसको नहीं समझ सकते और यदि आत्मा-विषयक हमारी समस्त ऊहापोह असंगतियों से भरी हुई है, तो हमें इसका परिणाम स्वीकार कर लेना चाहिए । निःसन्देह हमारी अनुभूति का सर्वोत्तम स्वरूप आत्मा है, परन्तु यह सव होते हुए भी, यह कोई सच्चा स्वरूप नहीं है। वह हमारे सामने वास्तविक तथ्यों को नहीं प्रस्तुत करता, और जिस रूप में, वह प्रस्तुत करता है, उस रूप में वे आभास है, भ्रम जिन कारणों से इस परिणाम का सर्वत्र स्वागत नहीं होता है, उनमें से एक आत्मा |
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (5 जुलाई 2021) को कॉन्ग्रेस टूलकिट मामले के खिलाफ जाँच कराने की माँग करने वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अगर किसी को टूलकिट पसंद नहीं है तो उसे नजरअंदाज कर देना चाहिए। अदालत ने कहा, "इसके लिए वैकल्पिक रास्ते अपनाने चाहिए। आप हाईकोर्ट जा सकते हैं। " इस टिप्पणी के बाद याचिकाकर्ता ने याचिका वापस ले ली है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और एमआर शाह ने याचिकाकर्ता एडवोकेट शशांक शेखर झा से पूछा कि अनुच्छेद-32 के तहत इस याचिका पर कैसे विचार किया जा सकता है।
वहीं, जस्टिस शाह ने कहा कि इस मामले में एक आपराधिक जाँच पहले ही लंबित है। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता को अनुच्छेद-32 के अलावा अन्य उपाय अपनाने चाहिए। शीर्ष अदालत ने कहा कि हम संविधान के अनुच्छेद-32 के तहत दायर इस याचिका पर विचार नहीं कर सकते हैं, याचिकाकर्ता को वैकल्पिक रास्ते अपनाने चाहिए। इसके बाद याचिकाकर्ता ने अदालत से याचिका वापस लेने की अनुमति माँगी।
दरअसल, इस याचिका में टूलकिट की जाँच राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) से करवाने की माँग की गई थी और जाँच में आरोप सही पाए जाने पर कॉन्ग्रेस पार्टी का पंजीकरण रद्द करने को कहा गया था।
गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर 18 मई 2021 को एक दस्तावेज खूब शेयर किया गया था, जिसके बारे में यह दावा किया गया था कि यह 'कॉन्ग्रेस का टूलकिट' है। इसमें कुम्भ मेले को बदनाम करने, ईद का महिमामंडन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि धूमिल करने और जलती चिताओं व लाशों की तस्वीरें शेयर कर भारत को बदनाम करने का खाका था।
उस दौरान कॉन्ग्रेस नेता राजीव गौड़ा ने भी स्वीकार किया था कि टूलकिट के लीक हुए दो डॉक्यूमेंट्स में से एक ऑल इंडिया कॉन्ग्रेस कमेटी (AICC) के शोध विभाग द्वारा तैयार किया गया था। कॉन्ग्रेस नेता राजीव गौड़ा ने ट्वीट करके यह जानकारी दी थी। उन्होंने कहा था कि AICC ने ही सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर एक शोध पत्र तैयार किया था।
| सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कॉन्ग्रेस टूलकिट मामले के खिलाफ जाँच कराने की माँग करने वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अगर किसी को टूलकिट पसंद नहीं है तो उसे नजरअंदाज कर देना चाहिए। अदालत ने कहा, "इसके लिए वैकल्पिक रास्ते अपनाने चाहिए। आप हाईकोर्ट जा सकते हैं। " इस टिप्पणी के बाद याचिकाकर्ता ने याचिका वापस ले ली है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और एमआर शाह ने याचिकाकर्ता एडवोकेट शशांक शेखर झा से पूछा कि अनुच्छेद-बत्तीस के तहत इस याचिका पर कैसे विचार किया जा सकता है। वहीं, जस्टिस शाह ने कहा कि इस मामले में एक आपराधिक जाँच पहले ही लंबित है। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता को अनुच्छेद-बत्तीस के अलावा अन्य उपाय अपनाने चाहिए। शीर्ष अदालत ने कहा कि हम संविधान के अनुच्छेद-बत्तीस के तहत दायर इस याचिका पर विचार नहीं कर सकते हैं, याचिकाकर्ता को वैकल्पिक रास्ते अपनाने चाहिए। इसके बाद याचिकाकर्ता ने अदालत से याचिका वापस लेने की अनुमति माँगी। दरअसल, इस याचिका में टूलकिट की जाँच राष्ट्रीय जाँच एजेंसी से करवाने की माँग की गई थी और जाँच में आरोप सही पाए जाने पर कॉन्ग्रेस पार्टी का पंजीकरण रद्द करने को कहा गया था। गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर अट्ठारह मई दो हज़ार इक्कीस को एक दस्तावेज खूब शेयर किया गया था, जिसके बारे में यह दावा किया गया था कि यह 'कॉन्ग्रेस का टूलकिट' है। इसमें कुम्भ मेले को बदनाम करने, ईद का महिमामंडन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि धूमिल करने और जलती चिताओं व लाशों की तस्वीरें शेयर कर भारत को बदनाम करने का खाका था। उस दौरान कॉन्ग्रेस नेता राजीव गौड़ा ने भी स्वीकार किया था कि टूलकिट के लीक हुए दो डॉक्यूमेंट्स में से एक ऑल इंडिया कॉन्ग्रेस कमेटी के शोध विभाग द्वारा तैयार किया गया था। कॉन्ग्रेस नेता राजीव गौड़ा ने ट्वीट करके यह जानकारी दी थी। उन्होंने कहा था कि AICC ने ही सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर एक शोध पत्र तैयार किया था। |
जैकलीन की फोटो पर कमेंट करते हुए एक यूजर ने लिखा, "वेस्टर्न गर्ल का देसी अंदाज." एक दूसरे यूजर ने कमेंट किया, "बहुत ही प्यारी स्माइल." एक और यूजर ने लिखा, "परफेक्ट फिटनेस, बेहद ही खूबसूरत लुक." वहीं एक ने लिखा, "डायमंड की तरह चमक रही हैं." (तस्वीरः इंस्टाग्राम जैकलीन फर्नांडिस)
| जैकलीन की फोटो पर कमेंट करते हुए एक यूजर ने लिखा, "वेस्टर्न गर्ल का देसी अंदाज." एक दूसरे यूजर ने कमेंट किया, "बहुत ही प्यारी स्माइल." एक और यूजर ने लिखा, "परफेक्ट फिटनेस, बेहद ही खूबसूरत लुक." वहीं एक ने लिखा, "डायमंड की तरह चमक रही हैं." |
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बाहर से जितने भी आक्रमणकारियों ने आक्रमण किया उनकी सेनाओं ने इन्ही दरों में कूच किया था ।
पूर्व में ब्रह्मपुत्र नद के मोड़ के आगे हिमालय को शाखायें दक्षिण की ओर चली गई हैं। पटकोई, नागा, तथा लुशाई पहाड़ियाँ आसाम को ब्रह्मा से पृथक करती हैं। मनीपूर राज्य में होती हुई ये पहाड़ियाँ ब्रह्मा के अराकान योमा से मिल जाती हैं और इरावदी के मुहाने के पश्चिम की ओर नीग्रेस अन्तरीप में समाप्त हो गई हैं। इनके अतिरिक्त ज्यन्तिया खासी और गारो आसाम की घाटी को सिलहट और कछार से अलग करती हैं। हिमालय की पूर्वीय श्रेणियाँ सघन वनों से आच्छादित हैं ।
हिमालय की तीसरी श्रेणी जिसे महान हिमालय के नाम से पुकारा जाता है और दूसरी श्रेणी के बीच दो चौड़ी घाटिया हैं । काठमांडू की घाट और काश्मीर की घाटी । यह बहुत चौड़े मैदान हैं जो पाँच हजार फीट की ऊँचाई पर स्थित हैं और चारो ओर ऊँचे पहाड़ों से घिरे हुए हैं। ऐसा अनुमान किया जाता है कि यह पहले विशाल झीलें थीं जो मिट्टी से मर जाने के कारण मैदानों में परिणत हो गई ।
इसी प्रकार शिवालिक और हिमालय के बीच में चौड़ी घाटियाँ हैं जिन्हें दून कहते हैं । इसी लिए देहरादून नाम पड़ा है । हिमालय से जो मिट्टी और पत्थर तेज़ नदियाँ बहाकर लाती हैं उनके जमने से ये घाटियां बनी हैं । ये नदियों के बहाव में शिवालिक पहाड़ों से रुकावट पड़ती है इस कारण ये नदियाँ बहुत सी मिट्टी और पत्थर उन मैदानों में जमा कर देती हैं जो शिवालिक और हिमालय को प्रारम्भिक पहाड़ियों के बीच में हैं ।
हिमालय के साथ साथ जहाँ वे मैदानों से मिलते हैं मैदान हैं जिन्हें भाभर कहते हैं जिनमें नदियों की लाई हुई मिट्टी, रेत और पत्थर जम जाता है। भाभर में वास्तव में चूने के पत्थर का बाहुल्य है इस कारण छोटी छोटी नदियाँ यहाँ सूख कर अन्दर बहती हैं और केवल बड़ी नदियाँ ही ऊपर रह जाती हैं। यह भाभर के मैदान उत्तर और उत्तर पश्चिम में अधिक विस्तृत है किन्तु पूर्व में कम विस्तृत हैं ।
यह जल जो कि भाभर में सुख जाता है वही फिर प्रगट होता है जहाँ कि मैदान प्रारम्भ होते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि हिमालय के समीप वर्ती मैदानों का बहुत सा भाग 'नम' और दलदल हो जाता है । इसे तराई कहते हैं । 'तराई' के मैदानों में बहुत नमी रहती है, घने जंगल खड़े हैं। यहाँ का जलवायु अधिक नमो छाने के कारण मनुष्य निवास के उपयुक्त नहीं है। | बाहर से जितने भी आक्रमणकारियों ने आक्रमण किया उनकी सेनाओं ने इन्ही दरों में कूच किया था । पूर्व में ब्रह्मपुत्र नद के मोड़ के आगे हिमालय को शाखायें दक्षिण की ओर चली गई हैं। पटकोई, नागा, तथा लुशाई पहाड़ियाँ आसाम को ब्रह्मा से पृथक करती हैं। मनीपूर राज्य में होती हुई ये पहाड़ियाँ ब्रह्मा के अराकान योमा से मिल जाती हैं और इरावदी के मुहाने के पश्चिम की ओर नीग्रेस अन्तरीप में समाप्त हो गई हैं। इनके अतिरिक्त ज्यन्तिया खासी और गारो आसाम की घाटी को सिलहट और कछार से अलग करती हैं। हिमालय की पूर्वीय श्रेणियाँ सघन वनों से आच्छादित हैं । हिमालय की तीसरी श्रेणी जिसे महान हिमालय के नाम से पुकारा जाता है और दूसरी श्रेणी के बीच दो चौड़ी घाटिया हैं । काठमांडू की घाट और काश्मीर की घाटी । यह बहुत चौड़े मैदान हैं जो पाँच हजार फीट की ऊँचाई पर स्थित हैं और चारो ओर ऊँचे पहाड़ों से घिरे हुए हैं। ऐसा अनुमान किया जाता है कि यह पहले विशाल झीलें थीं जो मिट्टी से मर जाने के कारण मैदानों में परिणत हो गई । इसी प्रकार शिवालिक और हिमालय के बीच में चौड़ी घाटियाँ हैं जिन्हें दून कहते हैं । इसी लिए देहरादून नाम पड़ा है । हिमालय से जो मिट्टी और पत्थर तेज़ नदियाँ बहाकर लाती हैं उनके जमने से ये घाटियां बनी हैं । ये नदियों के बहाव में शिवालिक पहाड़ों से रुकावट पड़ती है इस कारण ये नदियाँ बहुत सी मिट्टी और पत्थर उन मैदानों में जमा कर देती हैं जो शिवालिक और हिमालय को प्रारम्भिक पहाड़ियों के बीच में हैं । हिमालय के साथ साथ जहाँ वे मैदानों से मिलते हैं मैदान हैं जिन्हें भाभर कहते हैं जिनमें नदियों की लाई हुई मिट्टी, रेत और पत्थर जम जाता है। भाभर में वास्तव में चूने के पत्थर का बाहुल्य है इस कारण छोटी छोटी नदियाँ यहाँ सूख कर अन्दर बहती हैं और केवल बड़ी नदियाँ ही ऊपर रह जाती हैं। यह भाभर के मैदान उत्तर और उत्तर पश्चिम में अधिक विस्तृत है किन्तु पूर्व में कम विस्तृत हैं । यह जल जो कि भाभर में सुख जाता है वही फिर प्रगट होता है जहाँ कि मैदान प्रारम्भ होते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि हिमालय के समीप वर्ती मैदानों का बहुत सा भाग 'नम' और दलदल हो जाता है । इसे तराई कहते हैं । 'तराई' के मैदानों में बहुत नमी रहती है, घने जंगल खड़े हैं। यहाँ का जलवायु अधिक नमो छाने के कारण मनुष्य निवास के उपयुक्त नहीं है। |
३५८. नेटालमें व्यापारिक कानून
हमें निश्चित खबर मिली है कि डर्बन व्यापार मण्डलके बहुत से सदस्य लेडीस्मिथ के परवाना निकायके निर्णयसे घबरा गये हैं। उन्होंने जो खानगी बैठक की, उसमें भी बहुतेरे लोगोंने यह विचार प्रकट किया है कि परवाना कानून रद किया जाना चाहिए । आखिर श्री हैंडज़ और श्री बुचरको इस विषयकी जाँच करने के लिए नियुक्त किया गया है । यह एक ऐसा मौका है कि यदि इसका लाभ उठाकर हमारे नेता व्यापार मण्डलके मुखियोंसे और खासकर उन दो व्यक्तियोंसे, जिनके नाम हमने ऊपर दिये हैं, मिलें और सलाह करें तो बहुत लाभ हो सकता है । क्या किया जाना चाहिए, इस विषय में अंग्रेजीमें लेख लिखा गया है और उसका अनुवाद हम अगले अंक देंगे। इस कानूनमें परिवर्तनका सुझाव तटस्थ व्यक्तिकी तरह दिया गया है। इसलिए उसे किसीके लिए बन्धनकारक नहीं माना जा सकता । फिर भी इसमें कोई शक नहीं कि हमारे लिए यही रास्ता स्वीकार करने योग्य है ।
३५९. नेटालका नगरपालिका विधेयक'
इस सम्बन्धमें लॉर्ड एलगिन लड़ रहे हैं। यह उपकार मानने योग्य है । उनका कथन है कि असभ्यकी व्याख्यामें गिरमिटियोंके लड़कोंको नहीं लिया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, रंगदार लोगोंमें भारतीयोंका जो समावेश किया गया है वह भी वास्तविक नहीं है । क्योंकि रंगदारोंमें सभी लोगोंका समावेश हो जाता है । इस विषय में भारत सरकारको बड़ी सहानुभूति है। उसकी ओरसे आग्रह किया जा रहा है कि भारतीय समाजको राहत दी जानी चाहिए। इससे लॉर्ड एलगिनको आशा है कि नेटाल सरकार इस सम्बन्ध में विचार करेगी । इस तरह जो लड़ाई चल रही है उसमें हमारी जीतकी इसी शर्तपर सम्भावना हो सकती है कि हम अपना फर्ज अदा करें । नेटाल नगर परिषदने उत्तर दिया है कि कानून में परिवर्तन नहीं किया जाना चाहिए ?
१. देखिए " पत्रः लॉर्ड एलगिनके निजी सचिवको ", के साथ संलग्न वक्तव्य, पृष्ठ २६८-७० ।
३६०. जोहानिसबर्गकी चिट्ठी
अनुमतिपत्रके पाँच मुकदमे
श्री कुवाड़ियाके लड़केका मुकदमा फोक्सरस्टके मजिस्ट्रेट के सामने शुक्रवार तारीख १५ को हुआ था । ' श्री कुवाड़ियाकी ओरसे श्री गांधी उपस्थित थे । सिपाही मैक्ग्रेगरने वयान देते हुए कहा कि १४ वर्षसे कम उम्रके भारतीय लड़कोंको बिना अनुमतिपत्रके जाने देते हैं । किन्तु १४ वर्षके या उससे ज्यादा उम्र के लड़के हों तो उनसे अनुमतिपत्र माँगा जाता है और न दिखानेपर पकड़ा जाता है ।
श्री जेम्स कोडीने बयान देते हुए कहा कि यह नहीं कहा जा सकता कि कैप्टन फॉउलका निर्णय वर्तमान पंजीयकको हमेशा स्वीकार्य ही है। श्री कुवाड़ियाके लड़केके सम्बन्ध में कैप्टन फाउलका जो पत्र था, उसे देखकर उन्होंने कहा कि इस पत्रको अनुमतिपत्र नहीं माना जा सकता और यह श्री चैमनेके लिए बन्धनकारक नहीं है। अपने सख्त बयानके बाद उन्होंने इतना स्वीकार किया कि यदि कैप्टन फाउलने वह काम अनुमतिपत्र अधिकारीके रूपमें किया हो तो श्री चैमनेको उसे स्वीकार करना चाहिए। श्री आमद सालेजी कुवाड़ियाने अपने भतीजेकी उम्र और उसके १९०३ में जोहानिसबर्ग में पढ़ने के सम्बन्धमें बयान दिया । श्री कुवाड़ियाने स्वयं उपर्युक्त बयानका समर्थन किया । डॉ० हिकने लड़केकी उम्रके सम्बन्ध में बयान दिया और श्री गांधीने अपने पासके कैप्टन फाउलके कागज पेश किये । लड़केने भी यह बताने के लिए बयान दिया कि उसे थोड़ी-बहुत अंग्रेजी आती है। मुकदमा समाप्त हुआ और मजिस्ट्रेटने दोनों पक्षोंकी दलीलें सुनकर लड़केको छोड़ दिया ।
उसके बाद अन्य चार भारतीयोंपर दूसरे लोगोंके अनुमतिपत्रके आधारपर आने के सम्बन्ध में मुकदमे चलाये गये । उनके नाम कीकाप्रसाद, नगा भाणा, अबू वल्लभ सोनी और मिर्जाखाँ थे । उनमें से तीनने स्वीकार किया कि उनमें से हरएकने बम्बईमें ९० रुपये देकर दूसरोंके अनुमतिपत्र लिये थे । चौथे व्यक्तिने स्वीकार नहीं किया। चारोंको ४०-४० पौंडका जुर्माना और ४-४ महीनेकी कैदकी सजा दी गई ।
श्री कुवाड़ियाके मुकदमेसे मालूम होता है कि सच्चे मामलेवालोंकी भी कभी-कभी बहुत खर्च करने के बाद सुनवाई होती है। इसका मुख्य कारण यह है कि झूठे मामले भी होते हैं । जो चारों मामले एक ही दिन हुए उनसे हम देख सकते हैं कि अनुमतिपत्र बेचनेवाले दगा करके दूसरोंको ठगते हैं और उन्हें गड्ढेमें पटकते हैं। वैसे अनुमतिपत्र लेनेवाले अपनी कमाई गँवा कर बेकार बरबाद होते हैं और ट्रान्सवालमें नहीं रह सकते । दूसरी ओर इस तरह के कामसे सारे समाजको नुकसान होता है और वे सख्त कानून बनाये जानेका कारण बन जाते हैं ।
१. देखिए " जोहानिसबर्गकी चिट्ठी ", पृष्ठ ३५१-५३ । २. श्री इब्राहीम सालेजी कुवाड़ियाके भाई ।
सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय एशियाई नीलीपुस्तिका
विलायतमें एशियाई अध्यादेशके सम्बन्धमें लॉर्ड एलगिनने सारा इतिहास प्रकाशित किया है। उसके सम्बन्धमें यहाँके तीनों अखबारोंमें बड़े-बड़े तार प्रकाशित हुए हैं। उनमें खासकर लॉर्ड सेल्बोर्नका लेख भारतीय समाजके लिए सोचने योग्य है । लॉर्ड एलगिनके निर्णयपर लॉर्ड सेल्बोर्नने कड़ी टीका की है। उनका कहना है कि लॉर्ड एलगिनने भारतीय बातको स्वीकार करके लॉर्ड सेल्बोर्नका दिया हुआ वचन भंग करवाया है। यह वचन वह है जो उन्होंने पॉचेफ्स्ट्रूममें दिया था - यानी उत्तरदायी शासन आने तक किसी भी नये भारतीयको प्रवेश नहीं करने दिया जायेगा। उनकी यह शिकायत ठीक नहीं है, क्योंकि नये भारतीयों के आने की बात तो दर किनार, पुराने लोगोंको भी आनेमें दिक्कत हो रही है; महीनों बीत जाते हैं। इसके अतिरिक्त उनका कथन यह है कि बहुत से भारतीय बिना अनुमतिपत्रके प्रवेश किया करते हैं । यह बात भी अनुचित मानी जायेगी। क्योंकि यदि ऐसा होता हो तो उसे सिद्ध करने के लिए भारतीय समाज लॉर्ड सेल्बोर्नसे जाँच आयोग बैठाने के लिए कई बार कह चुका है। लेकिन लार्ड सेल्बोर्नका कडुवा लेख बताता है कि भारतीय समाजको सिर्फ गोरोंसे ही टक्कर नहीं लेनी है, उसे गवर्नरसे भी भिड़ना है, जिन्हें निष्पक्ष रहना चाहिए, किन्तु जो भारतीयोंके विरुद्ध हो गये हैं।
धारासभाके नये सदस्य
लॉर्ड सेल्बोर्नने धारासभाके १५ सदस्योंका चुनाव किया है। उनमें ११ प्रगतिशील तथा ४ हेटफ़ोक हैं। उनके नामः सर्वश्री एच० क्रॉफर्ड, एल० कटिस, कर्नल डब्ल्यू ● डायरिंपल, जी० जे० डब्ल्यू० ड्यू टायट, आर० फीलपम, डब्ल्यू० ग्रांट, मैक्स लेंगरमैन, डब्ल्यू ० ए० मार्टिन, टी० ए० आर० पर्चेस, ए० एस० रॉयट, ए० जी० रॉबर्ट्सन, पी० डी० रॉक्स, जे० रॉय, जे० फानडरबर्ग, ए० [ डी० डब्ल्यू ० ] जुलमेरन्स । | तीन सौ अट्ठावन. नेटालमें व्यापारिक कानून हमें निश्चित खबर मिली है कि डर्बन व्यापार मण्डलके बहुत से सदस्य लेडीस्मिथ के परवाना निकायके निर्णयसे घबरा गये हैं। उन्होंने जो खानगी बैठक की, उसमें भी बहुतेरे लोगोंने यह विचार प्रकट किया है कि परवाना कानून रद किया जाना चाहिए । आखिर श्री हैंडज़ और श्री बुचरको इस विषयकी जाँच करने के लिए नियुक्त किया गया है । यह एक ऐसा मौका है कि यदि इसका लाभ उठाकर हमारे नेता व्यापार मण्डलके मुखियोंसे और खासकर उन दो व्यक्तियोंसे, जिनके नाम हमने ऊपर दिये हैं, मिलें और सलाह करें तो बहुत लाभ हो सकता है । क्या किया जाना चाहिए, इस विषय में अंग्रेजीमें लेख लिखा गया है और उसका अनुवाद हम अगले अंक देंगे। इस कानूनमें परिवर्तनका सुझाव तटस्थ व्यक्तिकी तरह दिया गया है। इसलिए उसे किसीके लिए बन्धनकारक नहीं माना जा सकता । फिर भी इसमें कोई शक नहीं कि हमारे लिए यही रास्ता स्वीकार करने योग्य है । तीन सौ उनसठ. नेटालका नगरपालिका विधेयक' इस सम्बन्धमें लॉर्ड एलगिन लड़ रहे हैं। यह उपकार मानने योग्य है । उनका कथन है कि असभ्यकी व्याख्यामें गिरमिटियोंके लड़कोंको नहीं लिया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, रंगदार लोगोंमें भारतीयोंका जो समावेश किया गया है वह भी वास्तविक नहीं है । क्योंकि रंगदारोंमें सभी लोगोंका समावेश हो जाता है । इस विषय में भारत सरकारको बड़ी सहानुभूति है। उसकी ओरसे आग्रह किया जा रहा है कि भारतीय समाजको राहत दी जानी चाहिए। इससे लॉर्ड एलगिनको आशा है कि नेटाल सरकार इस सम्बन्ध में विचार करेगी । इस तरह जो लड़ाई चल रही है उसमें हमारी जीतकी इसी शर्तपर सम्भावना हो सकती है कि हम अपना फर्ज अदा करें । नेटाल नगर परिषदने उत्तर दिया है कि कानून में परिवर्तन नहीं किया जाना चाहिए ? एक. देखिए " पत्रः लॉर्ड एलगिनके निजी सचिवको ", के साथ संलग्न वक्तव्य, पृष्ठ दो सौ अड़सठ-सत्तर । तीन सौ साठ. जोहानिसबर्गकी चिट्ठी अनुमतिपत्रके पाँच मुकदमे श्री कुवाड़ियाके लड़केका मुकदमा फोक्सरस्टके मजिस्ट्रेट के सामने शुक्रवार तारीख पंद्रह को हुआ था । ' श्री कुवाड़ियाकी ओरसे श्री गांधी उपस्थित थे । सिपाही मैक्ग्रेगरने वयान देते हुए कहा कि चौदह वर्षसे कम उम्रके भारतीय लड़कोंको बिना अनुमतिपत्रके जाने देते हैं । किन्तु चौदह वर्षके या उससे ज्यादा उम्र के लड़के हों तो उनसे अनुमतिपत्र माँगा जाता है और न दिखानेपर पकड़ा जाता है । श्री जेम्स कोडीने बयान देते हुए कहा कि यह नहीं कहा जा सकता कि कैप्टन फॉउलका निर्णय वर्तमान पंजीयकको हमेशा स्वीकार्य ही है। श्री कुवाड़ियाके लड़केके सम्बन्ध में कैप्टन फाउलका जो पत्र था, उसे देखकर उन्होंने कहा कि इस पत्रको अनुमतिपत्र नहीं माना जा सकता और यह श्री चैमनेके लिए बन्धनकारक नहीं है। अपने सख्त बयानके बाद उन्होंने इतना स्वीकार किया कि यदि कैप्टन फाउलने वह काम अनुमतिपत्र अधिकारीके रूपमें किया हो तो श्री चैमनेको उसे स्वीकार करना चाहिए। श्री आमद सालेजी कुवाड़ियाने अपने भतीजेकी उम्र और उसके एक हज़ार नौ सौ तीन में जोहानिसबर्ग में पढ़ने के सम्बन्धमें बयान दिया । श्री कुवाड़ियाने स्वयं उपर्युक्त बयानका समर्थन किया । डॉशून्य हिकने लड़केकी उम्रके सम्बन्ध में बयान दिया और श्री गांधीने अपने पासके कैप्टन फाउलके कागज पेश किये । लड़केने भी यह बताने के लिए बयान दिया कि उसे थोड़ी-बहुत अंग्रेजी आती है। मुकदमा समाप्त हुआ और मजिस्ट्रेटने दोनों पक्षोंकी दलीलें सुनकर लड़केको छोड़ दिया । उसके बाद अन्य चार भारतीयोंपर दूसरे लोगोंके अनुमतिपत्रके आधारपर आने के सम्बन्ध में मुकदमे चलाये गये । उनके नाम कीकाप्रसाद, नगा भाणा, अबू वल्लभ सोनी और मिर्जाखाँ थे । उनमें से तीनने स्वीकार किया कि उनमें से हरएकने बम्बईमें नब्बे रुपयापये देकर दूसरोंके अनुमतिपत्र लिये थे । चौथे व्यक्तिने स्वीकार नहीं किया। चारोंको चालीस-चालीस पौंडका जुर्माना और चार-चार महीनेकी कैदकी सजा दी गई । श्री कुवाड़ियाके मुकदमेसे मालूम होता है कि सच्चे मामलेवालोंकी भी कभी-कभी बहुत खर्च करने के बाद सुनवाई होती है। इसका मुख्य कारण यह है कि झूठे मामले भी होते हैं । जो चारों मामले एक ही दिन हुए उनसे हम देख सकते हैं कि अनुमतिपत्र बेचनेवाले दगा करके दूसरोंको ठगते हैं और उन्हें गड्ढेमें पटकते हैं। वैसे अनुमतिपत्र लेनेवाले अपनी कमाई गँवा कर बेकार बरबाद होते हैं और ट्रान्सवालमें नहीं रह सकते । दूसरी ओर इस तरह के कामसे सारे समाजको नुकसान होता है और वे सख्त कानून बनाये जानेका कारण बन जाते हैं । एक. देखिए " जोहानिसबर्गकी चिट्ठी ", पृष्ठ तीन सौ इक्यावन-तिरेपन । दो. श्री इब्राहीम सालेजी कुवाड़ियाके भाई । सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय एशियाई नीलीपुस्तिका विलायतमें एशियाई अध्यादेशके सम्बन्धमें लॉर्ड एलगिनने सारा इतिहास प्रकाशित किया है। उसके सम्बन्धमें यहाँके तीनों अखबारोंमें बड़े-बड़े तार प्रकाशित हुए हैं। उनमें खासकर लॉर्ड सेल्बोर्नका लेख भारतीय समाजके लिए सोचने योग्य है । लॉर्ड एलगिनके निर्णयपर लॉर्ड सेल्बोर्नने कड़ी टीका की है। उनका कहना है कि लॉर्ड एलगिनने भारतीय बातको स्वीकार करके लॉर्ड सेल्बोर्नका दिया हुआ वचन भंग करवाया है। यह वचन वह है जो उन्होंने पॉचेफ्स्ट्रूममें दिया था - यानी उत्तरदायी शासन आने तक किसी भी नये भारतीयको प्रवेश नहीं करने दिया जायेगा। उनकी यह शिकायत ठीक नहीं है, क्योंकि नये भारतीयों के आने की बात तो दर किनार, पुराने लोगोंको भी आनेमें दिक्कत हो रही है; महीनों बीत जाते हैं। इसके अतिरिक्त उनका कथन यह है कि बहुत से भारतीय बिना अनुमतिपत्रके प्रवेश किया करते हैं । यह बात भी अनुचित मानी जायेगी। क्योंकि यदि ऐसा होता हो तो उसे सिद्ध करने के लिए भारतीय समाज लॉर्ड सेल्बोर्नसे जाँच आयोग बैठाने के लिए कई बार कह चुका है। लेकिन लार्ड सेल्बोर्नका कडुवा लेख बताता है कि भारतीय समाजको सिर्फ गोरोंसे ही टक्कर नहीं लेनी है, उसे गवर्नरसे भी भिड़ना है, जिन्हें निष्पक्ष रहना चाहिए, किन्तु जो भारतीयोंके विरुद्ध हो गये हैं। धारासभाके नये सदस्य लॉर्ड सेल्बोर्नने धारासभाके पंद्रह सदस्योंका चुनाव किया है। उनमें ग्यारह प्रगतिशील तथा चार हेटफ़ोक हैं। उनके नामः सर्वश्री एचशून्य क्रॉफर्ड, एलशून्य कटिस, कर्नल डब्ल्यू ● डायरिंपल, जीशून्य जेशून्य डब्ल्यूशून्य ड्यू टायट, आरशून्य फीलपम, डब्ल्यूशून्य ग्रांट, मैक्स लेंगरमैन, डब्ल्यू शून्य एशून्य मार्टिन, टीशून्य एशून्य आरशून्य पर्चेस, एशून्य एसशून्य रॉयट, एशून्य जीशून्य रॉबर्ट्सन, पीशून्य डीशून्य रॉक्स, जेशून्य रॉय, जेशून्य फानडरबर्ग, एशून्य [ डीशून्य डब्ल्यू शून्य ] जुलमेरन्स । |
Firing in US Ohio: अमेरिका के ओहियो में गोलीबारी के चलते एक शख्स की मौत हो गई है, जब दो घायल हुए हैं. ये घटना एक कम्युनिटी सेंटर के बाहर की है.
अमेरिका के ओहियो में भीषण गोलीबारी (Firing in US Ohio) हुई है, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और कम से कम दो अन्य घायल हुए हैं. ये घटना कोलंबस के एक कम्युनिटी सेंटर के बाहर हुई है, जिसे कूलिंग सुविधा (Cooling Centre Firing) के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. अधिकारियों का कहना है कि घटना के बाद बुधवार की शाम 5 बजे अफसरों को ग्लेनवुड कम्युनिटी सेंटर बुलाया गया था. प्रत्यदर्शियों का कहना है कि सुविधा केंद्र के पूल के पास पार्किंग को लेकर झगड़ा हुआ था, जिसके बाद गोलीबारी हुई. बहस थोड़ी देर में ही हिंसा में तब्दील हो गई.
मामले में कोलंबस असिस्टेंट पुलिस चीफ लाशन्ना पॉट्स ने कहा, 'दुख की बात है कि जब बहस हिंसा में बदल जाती है, हिंसा हथियारों के इस्तेमाल में, तो वही होता है जो आज हुआ.' घटना के पीड़ितों में से दो पार्किंग एरिया में मिले और तीसरा शख्स पास में ही मिला. वो लहुलुहान था. पीड़ितों को इलाज के लिए ग्रांट मेडिकल सेंटर और ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी वेक्नर मेडिकल सेंटर ले जाया गया. दो की मौत हो गई और तीसरे घायल शख्स की हालत का पता नहीं चल सका है. पुलिस के अनुसार, पीड़ितों में दो महिलाएं और एक पुरुष है. मृतकों में से एक महिला है. ये सभी टीनेजर्स और युवा हैं.
जानकारी के मुताबिक, मंगलवार रात को कोलंबस के 169,000 लोग बिना बिजली के थे. बिजली के गुरुवार रात तक आने की उम्मीद नहीं है. अमेरिका के दूसरे हिस्सों की तरह ओहियो में भी गोलीबारी की घटनाएं बढ़ रही हैं. हाल में ही न्यूयॉर्क में 10 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी और 21 लोगों को इसी तरह टेक्सास में मारा गया था. अब सरकार बंदूक नियंत्रण पर कानून लेकर आ रही है. लोगों ने भी इन बढ़ती घटनाओं को लेकर काफी विरोध प्रदर्शन किया है.
| Firing in US Ohio: अमेरिका के ओहियो में गोलीबारी के चलते एक शख्स की मौत हो गई है, जब दो घायल हुए हैं. ये घटना एक कम्युनिटी सेंटर के बाहर की है. अमेरिका के ओहियो में भीषण गोलीबारी हुई है, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और कम से कम दो अन्य घायल हुए हैं. ये घटना कोलंबस के एक कम्युनिटी सेंटर के बाहर हुई है, जिसे कूलिंग सुविधा के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. अधिकारियों का कहना है कि घटना के बाद बुधवार की शाम पाँच बजे अफसरों को ग्लेनवुड कम्युनिटी सेंटर बुलाया गया था. प्रत्यदर्शियों का कहना है कि सुविधा केंद्र के पूल के पास पार्किंग को लेकर झगड़ा हुआ था, जिसके बाद गोलीबारी हुई. बहस थोड़ी देर में ही हिंसा में तब्दील हो गई. मामले में कोलंबस असिस्टेंट पुलिस चीफ लाशन्ना पॉट्स ने कहा, 'दुख की बात है कि जब बहस हिंसा में बदल जाती है, हिंसा हथियारों के इस्तेमाल में, तो वही होता है जो आज हुआ.' घटना के पीड़ितों में से दो पार्किंग एरिया में मिले और तीसरा शख्स पास में ही मिला. वो लहुलुहान था. पीड़ितों को इलाज के लिए ग्रांट मेडिकल सेंटर और ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी वेक्नर मेडिकल सेंटर ले जाया गया. दो की मौत हो गई और तीसरे घायल शख्स की हालत का पता नहीं चल सका है. पुलिस के अनुसार, पीड़ितों में दो महिलाएं और एक पुरुष है. मृतकों में से एक महिला है. ये सभी टीनेजर्स और युवा हैं. जानकारी के मुताबिक, मंगलवार रात को कोलंबस के एक सौ उनहत्तर,शून्य लोग बिना बिजली के थे. बिजली के गुरुवार रात तक आने की उम्मीद नहीं है. अमेरिका के दूसरे हिस्सों की तरह ओहियो में भी गोलीबारी की घटनाएं बढ़ रही हैं. हाल में ही न्यूयॉर्क में दस लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी और इक्कीस लोगों को इसी तरह टेक्सास में मारा गया था. अब सरकार बंदूक नियंत्रण पर कानून लेकर आ रही है. लोगों ने भी इन बढ़ती घटनाओं को लेकर काफी विरोध प्रदर्शन किया है. |
Siddharthnagar News: भवानीगंज थाना क्षेत्र के मोहसिन पुत्र नरदाहे निवासी परसा जमाल हसीनाबाद चौराहे पर गाड़ी धुलाई का काम करता है। उसी चौराहे पर शहजाद पुत्र छोटाई चिकन बिक्री करता है।
Siddharthnagar News: थाने में मानवाधिकार का बड़ा बोर्ड इसलिए लगाया जाता है कि पुलिस जनता के साथ अमानवीय व्यवहार न करे। शिकायतकर्ताओं की समस्या सुनकर उसका निस्तारण कानून के दायरे में रहकर करें। लेकिन पुलिस अपने वर्दी की धौंस दिखाने से पीछे नहीं रहती। इन दिनों इंटरनेट मीडिया पर एक वीडियो फुटेज तेजी से वायरल हो रहा है। जिसमें एक पुलिस कर्मी युवक को लात-घूसों से पीट रहा है। वीडियो कुछ माह पहले का बताया जा रहा है। जिसमें पीटने वाले ज़िले के भवानीगंज थाने के हेड कांस्टेबल हैं और उनकी तैनाती थाने में पिछले चार वर्षो से है।
भवानीगंज थाना क्षेत्र के मोहसिन पुत्र नरदाहे निवासी परसा जमाल हसीनाबाद चौराहे पर गाड़ी धुलाई का काम करता है। उसी चौराहे पर शहजाद पुत्र छोटाई चिकन बिक्री करता है। उक्त दोनों के बीच 7 सितंबर को आपस में विवाद हो गया था। जिसमें शहजाद ने हेड कांस्टेबल रामशंकर पांडेय को फोन पर सूचना दी।
कांस्टेबल मौके पर पहुंचते ही युवक मोहसिन को बड़ी बेरहमी से लात घूसों से मारने-पीटने लगे। उक्त सारी घटना सामने के मकान में लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकार्ड हो गई। कुछ दिन बाद यह वीडियो इंटरनेट मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है और लोग पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान उठा रहे हैं। सीओ अजय कुमार श्रीवास्तव ने कहा की जांच की जा रही है। वीडियो पुराना बताया जा रहा है। बावजूद इसके जांच कर दोषी के उपर कठाेर कार्रवाई की जाएगी।
उक्त प्रकरण को लेकर सपा नेता रामकुमार उर्फ चिंकू यादव ने गुरुवार को डीआइजी को शिकायतीपत्र भेजा है। पत्र में कहा गया है कि स्थानीय पुलिस पूरी तरह से सत्ता पक्ष के इशारे पर काम कर रही है और बेगुनाहों के साथ अभद्रता कर रही है। तमाम पुलिस कर्मी ऐसे हैं जो लंबे वक्त से एक ही थाने में तैनात हैं उनका तबादला नहीं हो रहा है। यह विधानसभा चुनाव को प्रभावित करने का कार्य करेंगे। उन्होंने दोषी हेड कांस्टेबल के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई करने की मांग की है।
| Siddharthnagar News: भवानीगंज थाना क्षेत्र के मोहसिन पुत्र नरदाहे निवासी परसा जमाल हसीनाबाद चौराहे पर गाड़ी धुलाई का काम करता है। उसी चौराहे पर शहजाद पुत्र छोटाई चिकन बिक्री करता है। Siddharthnagar News: थाने में मानवाधिकार का बड़ा बोर्ड इसलिए लगाया जाता है कि पुलिस जनता के साथ अमानवीय व्यवहार न करे। शिकायतकर्ताओं की समस्या सुनकर उसका निस्तारण कानून के दायरे में रहकर करें। लेकिन पुलिस अपने वर्दी की धौंस दिखाने से पीछे नहीं रहती। इन दिनों इंटरनेट मीडिया पर एक वीडियो फुटेज तेजी से वायरल हो रहा है। जिसमें एक पुलिस कर्मी युवक को लात-घूसों से पीट रहा है। वीडियो कुछ माह पहले का बताया जा रहा है। जिसमें पीटने वाले ज़िले के भवानीगंज थाने के हेड कांस्टेबल हैं और उनकी तैनाती थाने में पिछले चार वर्षो से है। भवानीगंज थाना क्षेत्र के मोहसिन पुत्र नरदाहे निवासी परसा जमाल हसीनाबाद चौराहे पर गाड़ी धुलाई का काम करता है। उसी चौराहे पर शहजाद पुत्र छोटाई चिकन बिक्री करता है। उक्त दोनों के बीच सात सितंबर को आपस में विवाद हो गया था। जिसमें शहजाद ने हेड कांस्टेबल रामशंकर पांडेय को फोन पर सूचना दी। कांस्टेबल मौके पर पहुंचते ही युवक मोहसिन को बड़ी बेरहमी से लात घूसों से मारने-पीटने लगे। उक्त सारी घटना सामने के मकान में लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकार्ड हो गई। कुछ दिन बाद यह वीडियो इंटरनेट मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है और लोग पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान उठा रहे हैं। सीओ अजय कुमार श्रीवास्तव ने कहा की जांच की जा रही है। वीडियो पुराना बताया जा रहा है। बावजूद इसके जांच कर दोषी के उपर कठाेर कार्रवाई की जाएगी। उक्त प्रकरण को लेकर सपा नेता रामकुमार उर्फ चिंकू यादव ने गुरुवार को डीआइजी को शिकायतीपत्र भेजा है। पत्र में कहा गया है कि स्थानीय पुलिस पूरी तरह से सत्ता पक्ष के इशारे पर काम कर रही है और बेगुनाहों के साथ अभद्रता कर रही है। तमाम पुलिस कर्मी ऐसे हैं जो लंबे वक्त से एक ही थाने में तैनात हैं उनका तबादला नहीं हो रहा है। यह विधानसभा चुनाव को प्रभावित करने का कार्य करेंगे। उन्होंने दोषी हेड कांस्टेबल के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई करने की मांग की है। |
Chaibasa (Ramendra Kumar Sinha) : पश्चिमी सिंहभूम जिला के बंदगांव प्रखंड के रसोईया संयोजिका संघर्ष समिति ने जिला शिक्षा विभाग के एमडीएम कोषांग को बकाया मानदेय भुगतान के लिये एक ज्ञापन सौपा. बुधवार को सौंपे गये ज्ञापन में संषर्घ समिति से जुड़ी रसोईया व संयोजिकाओं ने कहा है कि उनका मानदेय विगत चार माह से लंबित है उसका यथा शीघ्रभुगतान करने और पूर्व वित्तीय वर्ष 2017-18 में बकाया 8 माह के मानदेय का भी भुगतान करने की मांग की है.
रसोईया व संयोजिकाओं ने अपने ज्ञापन में कहा है कि इन राशियों के बकाया होने से मिड डे मिल को तैयार करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. संघर्ष समिति के लोगों ने अपने ज्ञापन में सभी संयोजिकओं तथा रसोईयान का मानदेय भुगतान सरकारी दर के अनुसार करने का अनुरोध किया है तथा रसोईया के मानदेय को मनरेगा दर से भुगतान करते हुए उसे मनरेगा से जोड़ने की मांग की है.
| Chaibasa : पश्चिमी सिंहभूम जिला के बंदगांव प्रखंड के रसोईया संयोजिका संघर्ष समिति ने जिला शिक्षा विभाग के एमडीएम कोषांग को बकाया मानदेय भुगतान के लिये एक ज्ञापन सौपा. बुधवार को सौंपे गये ज्ञापन में संषर्घ समिति से जुड़ी रसोईया व संयोजिकाओं ने कहा है कि उनका मानदेय विगत चार माह से लंबित है उसका यथा शीघ्रभुगतान करने और पूर्व वित्तीय वर्ष दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह में बकाया आठ माह के मानदेय का भी भुगतान करने की मांग की है. रसोईया व संयोजिकाओं ने अपने ज्ञापन में कहा है कि इन राशियों के बकाया होने से मिड डे मिल को तैयार करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. संघर्ष समिति के लोगों ने अपने ज्ञापन में सभी संयोजिकओं तथा रसोईयान का मानदेय भुगतान सरकारी दर के अनुसार करने का अनुरोध किया है तथा रसोईया के मानदेय को मनरेगा दर से भुगतान करते हुए उसे मनरेगा से जोड़ने की मांग की है. |
झांसीः बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी का दीक्षांत कार्यक्रम अगले कुछ दिनों में आयोजित किया जाएगा। 7 फरवरी को यह दीक्षांत कार्यक्रम आयोजित होगा। इस दिन हजारों बच्चों को डिग्री दी जायेगी। हर वर्ष लगभग 4 हजार बच्चों को बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से डिग्री मिलती है। लेकिन इनमें से महज 10 फीसदी बच्चों को ही यूनिवर्सिटी से प्लेसमेंट मिल पाती है। जिनको जॉब मिली, उनका पैकेज भी बहुत कम था।
बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से कैंपस प्लेसमेंट का ग्राफ लगातार गिरता जा रहा है। यदि आंकड़ों को देखें तो सत्र 2017-18 में 614 विद्यार्थियों को जॉब मिली थी। वर्ष 2018-19 में यह आंकड़ा 582 था। 2019-20 में 422 और वर्ष 2020- 21 में 473 बच्चों को ही प्लेसमेंट मिला था।
कोरोना काल के बाद से यूनिवर्सिटी में प्रवेश का ग्राफ तो बढ़ा है, लेकिन, प्लेसमेंट का रिकॉर्ड नहीं बढ़ रहा है। कुछ दिनों में यूनिवर्सिटी का नैक मूल्यांकन भी होना है। मूल्यांकन में प्लेसमेंट के भी अंक मिलते हैं। लगातार गिरते इन ग्राफ का असर इस मूल्यांकन पर भी पड़ता है।
बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी के ट्रेनिंग और प्लेसमेंट सेल के समन्वयक प्रो एम एम सिंह ने बताया कि यूनिवर्सिटी द्वारा समय समय पर प्लेसमेंट कार्यक्रम करवाए जाते हैं। इसके साथ ही विद्यार्थी स्वयं भी रोजगार के लिए अवसर तलाशते रहते हैं।
पिछ्ले दो सालों में कोविड-19 काल की वजह से भी कुछ गिरावट आई है। प्रो। सिंह ने बताया कि यूनिवर्सिटी द्वारा पुरातन विद्यार्थियों से भी संपर्क किया जा रहा है। उनके माध्यम से भी कंपनियों को यूनिवर्सिटी कैंपस में प्लेसमेंट के लिए बुलाया जा रहा है।
| झांसीः बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी का दीक्षांत कार्यक्रम अगले कुछ दिनों में आयोजित किया जाएगा। सात फरवरी को यह दीक्षांत कार्यक्रम आयोजित होगा। इस दिन हजारों बच्चों को डिग्री दी जायेगी। हर वर्ष लगभग चार हजार बच्चों को बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से डिग्री मिलती है। लेकिन इनमें से महज दस फीसदी बच्चों को ही यूनिवर्सिटी से प्लेसमेंट मिल पाती है। जिनको जॉब मिली, उनका पैकेज भी बहुत कम था। बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से कैंपस प्लेसमेंट का ग्राफ लगातार गिरता जा रहा है। यदि आंकड़ों को देखें तो सत्र दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह में छः सौ चौदह विद्यार्थियों को जॉब मिली थी। वर्ष दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस में यह आंकड़ा पाँच सौ बयासी था। दो हज़ार उन्नीस-बीस में चार सौ बाईस और वर्ष दो हज़ार बीस- इक्कीस में चार सौ तिहत्तर बच्चों को ही प्लेसमेंट मिला था। कोरोना काल के बाद से यूनिवर्सिटी में प्रवेश का ग्राफ तो बढ़ा है, लेकिन, प्लेसमेंट का रिकॉर्ड नहीं बढ़ रहा है। कुछ दिनों में यूनिवर्सिटी का नैक मूल्यांकन भी होना है। मूल्यांकन में प्लेसमेंट के भी अंक मिलते हैं। लगातार गिरते इन ग्राफ का असर इस मूल्यांकन पर भी पड़ता है। बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी के ट्रेनिंग और प्लेसमेंट सेल के समन्वयक प्रो एम एम सिंह ने बताया कि यूनिवर्सिटी द्वारा समय समय पर प्लेसमेंट कार्यक्रम करवाए जाते हैं। इसके साथ ही विद्यार्थी स्वयं भी रोजगार के लिए अवसर तलाशते रहते हैं। पिछ्ले दो सालों में कोविड-उन्नीस काल की वजह से भी कुछ गिरावट आई है। प्रो। सिंह ने बताया कि यूनिवर्सिटी द्वारा पुरातन विद्यार्थियों से भी संपर्क किया जा रहा है। उनके माध्यम से भी कंपनियों को यूनिवर्सिटी कैंपस में प्लेसमेंट के लिए बुलाया जा रहा है। |
नई दिल्ली, (भाषा)। घुटने के आपरेशन के कारण सानिया मिर्जा के लिए 2011 सत्र जल्द समाप्त हो गया लेकिन इस स्टार भारतीय टेनिस खिलाड़ी ने कहा कि इससे अधिक फर्क नहीं पड़ता क्योंकि चोट सत्र का अंत करीब होने पर लगी है। अमेरिकी ओपन के दौरान सानिया को चोट लगी और हैदराबाद में एक हफ्ते पहले उनकी सर्जरी हुई जिसके कारण वह पांच से छह हफ्ते तक कोर्ट में नहीं उतर पाएंगी। इसके साथ ही सानिया डब्ल्यूटीए की सत्रांत युगल चैम्पियनशिप की दौड़ में भी नहीं हैं जिसमें शीर्ष चार टीमें प्रतिस्पर्धा पेश करेंगी। सानिया और उनकी जोड़ीदार एलेना वेसनीना इस प्रतिष्"ित प्रतियोगिता में जगह बनाने की दौड़ में थी लेकिन चोट के कारण इस भारतीय खिलाड़ी के बाहर होने के बाद उनकी रैंकिंग गिर गई। यहां राष्ट्रीय चैम्पियनशिप के विजेताओं को ट्राफी देने के बाद सानिया ने कहा, मैं रिहैबिलिटेशन पूरा होने के बाद ही अभ्यास शुरू करूंगी। फिलहाल मैं बिना किसी दर्द के चल फिर रही हूं। डाक्टरों ने मुझे कहा है कि पूरी तरह से उबरने में पांच से छह हफ्ते का समय लगेगा। सानिया ने कहा, सत्र लगभग पूरा हो गया है इसलिए चोटिल होने के लिए यह सही समय था। अब दक्षिण अफीका का ट्रेनर मेरे साथ जुड़ेगा। यह भारतीय खिलाड़ी अपने पाकिस्तान पति के लंबे समय बाद राष्ट्रीय क्रिकेट टीम में जगह बनाने से भी काफी खुश हैं। उन्होंने कहा, यह अच्छा अहसास है। एक पत्नी के रूप में निश्चित तौर पर मैं राष्ट्रीय टीम में शोएब की वापसी से खुश हूं। हम सभी उसका समर्थन कर रहे हैं और राष्ट्रीय टीम में उसे वापसी करते हुए देखना अच्छा है। सानिया इसके अलावा 30 अक्तूबर को बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट में जोन को लेकर भी उत्सुक हैं जहां भारत पहली बार ग्रेटर नोएडा में फार्मला वन ग्रां प्री की मेजबानी करेगा। उन्हेंने कहा, निश्चित तौर पर पहली फार्मला वन रेस का इंतजार है। मैं भाग्यशाली हूं कि मुझे प्रतियोगिता के लिए आमंत्रित किया गया है और मैं वहां जाने की कोशिश करूंगी। मैं इससे पहले कभी इस तरह की प्रतियोगिता में नहीं गई हूं, यह काफी अच्छा अनुभव रहेगा।
| नई दिल्ली, । घुटने के आपरेशन के कारण सानिया मिर्जा के लिए दो हज़ार ग्यारह सत्र जल्द समाप्त हो गया लेकिन इस स्टार भारतीय टेनिस खिलाड़ी ने कहा कि इससे अधिक फर्क नहीं पड़ता क्योंकि चोट सत्र का अंत करीब होने पर लगी है। अमेरिकी ओपन के दौरान सानिया को चोट लगी और हैदराबाद में एक हफ्ते पहले उनकी सर्जरी हुई जिसके कारण वह पांच से छह हफ्ते तक कोर्ट में नहीं उतर पाएंगी। इसके साथ ही सानिया डब्ल्यूटीए की सत्रांत युगल चैम्पियनशिप की दौड़ में भी नहीं हैं जिसमें शीर्ष चार टीमें प्रतिस्पर्धा पेश करेंगी। सानिया और उनकी जोड़ीदार एलेना वेसनीना इस प्रतिष्"ित प्रतियोगिता में जगह बनाने की दौड़ में थी लेकिन चोट के कारण इस भारतीय खिलाड़ी के बाहर होने के बाद उनकी रैंकिंग गिर गई। यहां राष्ट्रीय चैम्पियनशिप के विजेताओं को ट्राफी देने के बाद सानिया ने कहा, मैं रिहैबिलिटेशन पूरा होने के बाद ही अभ्यास शुरू करूंगी। फिलहाल मैं बिना किसी दर्द के चल फिर रही हूं। डाक्टरों ने मुझे कहा है कि पूरी तरह से उबरने में पांच से छह हफ्ते का समय लगेगा। सानिया ने कहा, सत्र लगभग पूरा हो गया है इसलिए चोटिल होने के लिए यह सही समय था। अब दक्षिण अफीका का ट्रेनर मेरे साथ जुड़ेगा। यह भारतीय खिलाड़ी अपने पाकिस्तान पति के लंबे समय बाद राष्ट्रीय क्रिकेट टीम में जगह बनाने से भी काफी खुश हैं। उन्होंने कहा, यह अच्छा अहसास है। एक पत्नी के रूप में निश्चित तौर पर मैं राष्ट्रीय टीम में शोएब की वापसी से खुश हूं। हम सभी उसका समर्थन कर रहे हैं और राष्ट्रीय टीम में उसे वापसी करते हुए देखना अच्छा है। सानिया इसके अलावा तीस अक्तूबर को बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट में जोन को लेकर भी उत्सुक हैं जहां भारत पहली बार ग्रेटर नोएडा में फार्मला वन ग्रां प्री की मेजबानी करेगा। उन्हेंने कहा, निश्चित तौर पर पहली फार्मला वन रेस का इंतजार है। मैं भाग्यशाली हूं कि मुझे प्रतियोगिता के लिए आमंत्रित किया गया है और मैं वहां जाने की कोशिश करूंगी। मैं इससे पहले कभी इस तरह की प्रतियोगिता में नहीं गई हूं, यह काफी अच्छा अनुभव रहेगा। |
बॉलीवुड एक्ट्रेस पूनम पांडे 71वां जन्मदिन मना रही हैं. एक्ट्रेस ने फिल्मी जगत से लेकर राजनीति तक का सफर तय किया है. आज पूनम के जन्मदिन पर जानते हैं उनकी और शत्रुघ्न सिन्हा की लव स्टोरी के बारे में.
बॉलीवुड एक्ट्रेस पूनम सिन्हा (Poonam Sinha) आज अपना 71वां जनमदिन मना रही हैं. उनका जन्म 3 नवंबर 1949 में हैदराबाद में हुआ था. 1968 में पूनम यंग मिस इंडिया रह चुकी हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बतौर मॉडल की है. एक्ट्रेस ने फिल्मों से लेकर राजनीति तक में अपना सिक्का जमाया है. एक्ट्रेस ने शत्रुघ्न सिन्हा से 9 जुलाई 1980 को शादी की थी. आज उनके जन्मदिन के खास मौके पर जानते हैं एक्ट्रेस की पहली मुलाकात शत्रुघ्न सिन्हा के साथ कैस हुई थीं और कैसे दोनों को एक- दूसरे से प्यार हुआ.
फिल्मों के काम के दौरान ही पहली बार शत्रुघ्न सिन्हा की मुलाकात पूनम से हुई थी. उन दिनों पूनम भी फिल्मों में अपना करियर बनना चाहती थी और शत्रुघ्न पहली बार पूनम को देखकर दिल हार बैठे थे.
इसके बाद दोनों की मुलाकात का सिलसिला बढ़ा और दोनों को एक- दूसरे से प्यार हो गया. शत्रुघ्न और पूनम एक बार ट्रेन से कहीं जा रहे थे. उसी समय उन्होंने 'पकीजा' फिल्म का डायलॉग 'अपने पांव जमीन पर मत रखिएगा' लिखकर लेटर दिया और घुटनों पर बैठकर पूनम को प्रपोज किया था. पूनम ने उनके प्रपोज का जवाब हां में दिया था.
शत्रुघ्न की शादी का प्रस्ताव लेकर बड़े भाई राम सिन्हा और डायरेक्टर एनएन सिप्पी पूनम के घर गए थे. लड़के की तस्वीर देखकर पूनम की मां ने रिश्ते को मना कर दिया था और कहा था लड़का तो गुंडा जैसा दिखता है. बाद में दोनों ने परिवार को मनाया और 9 जुलाई 1980 को शादी के बंधन में बंध गए. पूनम और शत्रुघ्न सिन्हा के 3 तीन बच्चे हैं. सोनाक्षी सिन्हा, लव और कुश सिन्हा. सोनाक्षी बॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेस में गिनी जाती हैं.
पूनम ने अपने करियर की शुरुआत साल 1968 में 'जिगरी दोस्त' से की थी. इसके बाद 'आदमी और इंसान', 'आग और दाग', 'सबक', 'शैतान', 'दिल दीवाना', 'ड्रीम गर्ल', 'मित्र माई फ्रेज' में नजर आई थीं. एक्ट्रेस आखिरी बार ऋतिक रोशन की फिल्म 'जोधा अखबर' में साल 2008 में नजर आईं थी.
16 अप्रैल 2019 में पूनम ने समाजवादी पार्टी ज्वाइंन की थी. 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी नेता और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के खिलाफ लखनऊ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था. एक्ट्रेस चुनाव हार गई थीं.
| बॉलीवुड एक्ट्रेस पूनम पांडे इकहत्तरवां जन्मदिन मना रही हैं. एक्ट्रेस ने फिल्मी जगत से लेकर राजनीति तक का सफर तय किया है. आज पूनम के जन्मदिन पर जानते हैं उनकी और शत्रुघ्न सिन्हा की लव स्टोरी के बारे में. बॉलीवुड एक्ट्रेस पूनम सिन्हा आज अपना इकहत्तरवां जनमदिन मना रही हैं. उनका जन्म तीन नवंबर एक हज़ार नौ सौ उनचास में हैदराबाद में हुआ था. एक हज़ार नौ सौ अड़सठ में पूनम यंग मिस इंडिया रह चुकी हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बतौर मॉडल की है. एक्ट्रेस ने फिल्मों से लेकर राजनीति तक में अपना सिक्का जमाया है. एक्ट्रेस ने शत्रुघ्न सिन्हा से नौ जुलाई एक हज़ार नौ सौ अस्सी को शादी की थी. आज उनके जन्मदिन के खास मौके पर जानते हैं एक्ट्रेस की पहली मुलाकात शत्रुघ्न सिन्हा के साथ कैस हुई थीं और कैसे दोनों को एक- दूसरे से प्यार हुआ. फिल्मों के काम के दौरान ही पहली बार शत्रुघ्न सिन्हा की मुलाकात पूनम से हुई थी. उन दिनों पूनम भी फिल्मों में अपना करियर बनना चाहती थी और शत्रुघ्न पहली बार पूनम को देखकर दिल हार बैठे थे. इसके बाद दोनों की मुलाकात का सिलसिला बढ़ा और दोनों को एक- दूसरे से प्यार हो गया. शत्रुघ्न और पूनम एक बार ट्रेन से कहीं जा रहे थे. उसी समय उन्होंने 'पकीजा' फिल्म का डायलॉग 'अपने पांव जमीन पर मत रखिएगा' लिखकर लेटर दिया और घुटनों पर बैठकर पूनम को प्रपोज किया था. पूनम ने उनके प्रपोज का जवाब हां में दिया था. शत्रुघ्न की शादी का प्रस्ताव लेकर बड़े भाई राम सिन्हा और डायरेक्टर एनएन सिप्पी पूनम के घर गए थे. लड़के की तस्वीर देखकर पूनम की मां ने रिश्ते को मना कर दिया था और कहा था लड़का तो गुंडा जैसा दिखता है. बाद में दोनों ने परिवार को मनाया और नौ जुलाई एक हज़ार नौ सौ अस्सी को शादी के बंधन में बंध गए. पूनम और शत्रुघ्न सिन्हा के तीन तीन बच्चे हैं. सोनाक्षी सिन्हा, लव और कुश सिन्हा. सोनाक्षी बॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेस में गिनी जाती हैं. पूनम ने अपने करियर की शुरुआत साल एक हज़ार नौ सौ अड़सठ में 'जिगरी दोस्त' से की थी. इसके बाद 'आदमी और इंसान', 'आग और दाग', 'सबक', 'शैतान', 'दिल दीवाना', 'ड्रीम गर्ल', 'मित्र माई फ्रेज' में नजर आई थीं. एक्ट्रेस आखिरी बार ऋतिक रोशन की फिल्म 'जोधा अखबर' में साल दो हज़ार आठ में नजर आईं थी. सोलह अप्रैल दो हज़ार उन्नीस में पूनम ने समाजवादी पार्टी ज्वाइंन की थी. दो हज़ार उन्नीस के लोकसभा चुनाव में बीजेपी नेता और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के खिलाफ लखनऊ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था. एक्ट्रेस चुनाव हार गई थीं. |
माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण खंडवा श्री एस. एस. रघुवंशी के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में तथा श्री मनीश सिंह ठाकुर, स्पेशल रेल्वे मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता एवं श्री चंद्रेश मंडलोई, जिला विधिक सहायता अधिकारी की उपस्थिति में आज शनिवार को शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, आनंद नगर खंडवा में विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री ठाकुर ने उपस्थित छात्र एवं छात्राओं को संविधान में वर्णित मौलिक अधिकार एवं कर्त्तव्य को विस्तारपूर्वक बताते हुए कहा कि हमें कानून का पालन करना चाहिए। कानून हमारी रक्षा, सुरक्षा एवं न्याय दिलाने का कार्य करता है। साथ ही पास्को एक्ट में नवीन संशोधनों एवं आईटी एक्ट से भी छात्र-छात्राओं को अवगत कराया।
इस अवसर पर जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री चंद्रेश मंडलोई ने निःशुल्क विधिक सहायता एवं सलाह योजना की जानकारी देते हुए कहा कि प्रत्येक आम नागरिक को कानूनी सहायता/सलाह उपलब्ध कराने हेतु जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दीनबंधू का कार्य करता है और प्रत्येक ऐसा व्यक्ति जिसे धन के अभाव में न्याय से वंचित है, उसे विधिक सेवा प्राधिकरण के नियमानुसार निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराता है। साथ ही मोटर वाहन अधिनियम की जानकारी देते हुए अपील की कि बिना लाइसेंस के वाहन न चलायें।
आयोजित विधिक जागरूकता कार्यक्रम में प्राचार्य श्रीमती मीनाक्षी शुक्ला ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि कानून का पालन करें और अपराध करने से बचे। आयोजित विधिक साक्षरता शिविर में विद्यालय की ओर से वरिष्ठ अध्यापक श्री नरेन्द्र डोंगरे, विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से श्री संजय बिंद, पैरालीगल वालेन्टियर्स श्री विजय मसानी एवं श्री सलमान खान की भी सहभागिता रही। कार्यक्रम का संचालन पैनल लॉयर एवं रिटेनर अधिवक्ता श्री चेतन गोहर ने किया एवं आभार विद्यालय के वरिष्ठ अध्यापक श्री बी. एल. वास्कले ने माना।
| माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण खंडवा श्री एस. एस. रघुवंशी के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में तथा श्री मनीश सिंह ठाकुर, स्पेशल रेल्वे मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता एवं श्री चंद्रेश मंडलोई, जिला विधिक सहायता अधिकारी की उपस्थिति में आज शनिवार को शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, आनंद नगर खंडवा में विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री ठाकुर ने उपस्थित छात्र एवं छात्राओं को संविधान में वर्णित मौलिक अधिकार एवं कर्त्तव्य को विस्तारपूर्वक बताते हुए कहा कि हमें कानून का पालन करना चाहिए। कानून हमारी रक्षा, सुरक्षा एवं न्याय दिलाने का कार्य करता है। साथ ही पास्को एक्ट में नवीन संशोधनों एवं आईटी एक्ट से भी छात्र-छात्राओं को अवगत कराया। इस अवसर पर जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री चंद्रेश मंडलोई ने निःशुल्क विधिक सहायता एवं सलाह योजना की जानकारी देते हुए कहा कि प्रत्येक आम नागरिक को कानूनी सहायता/सलाह उपलब्ध कराने हेतु जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दीनबंधू का कार्य करता है और प्रत्येक ऐसा व्यक्ति जिसे धन के अभाव में न्याय से वंचित है, उसे विधिक सेवा प्राधिकरण के नियमानुसार निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराता है। साथ ही मोटर वाहन अधिनियम की जानकारी देते हुए अपील की कि बिना लाइसेंस के वाहन न चलायें। आयोजित विधिक जागरूकता कार्यक्रम में प्राचार्य श्रीमती मीनाक्षी शुक्ला ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि कानून का पालन करें और अपराध करने से बचे। आयोजित विधिक साक्षरता शिविर में विद्यालय की ओर से वरिष्ठ अध्यापक श्री नरेन्द्र डोंगरे, विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से श्री संजय बिंद, पैरालीगल वालेन्टियर्स श्री विजय मसानी एवं श्री सलमान खान की भी सहभागिता रही। कार्यक्रम का संचालन पैनल लॉयर एवं रिटेनर अधिवक्ता श्री चेतन गोहर ने किया एवं आभार विद्यालय के वरिष्ठ अध्यापक श्री बी. एल. वास्कले ने माना। |
बीकानेर, 04 मई (वार्ता)। पारस इवेन्टस के बैनर तले बीकानेर के रेलवे ग्राउण्ड में म्यूजिकल शाम 'तड़का' का आयोजन सात मई को किया जाएगा जिसमें टेलीविजन एवं फिल्म जगत मशहूर हस्तियां अपनी प्रस्तुति देंगे।
कार्यक्रम के पोस्टर का विमोचन बुधवार को संभागीय आयुक्त नीरज के. पवन ने किया। संभागीय आयुक्त ने संस्था को आयोजन को लेकर शुभकामनायें दी हैं। इवेंट के आयोजक अमित यादव एवं फायख चौहान ने बताया कि सात मई को शाम को होने वाले इसमें टीवी सीरियल 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' (Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah) की बबीता जी (Babita ji) फेम मुनमुन दत्ता विशेष मेहमान होंगी।
इसके अलावा हरियाणवी कलाकार अजय हुड्डा, एक्टर एवं सिंगर विजय वर्मा, सिंगर कंचन नागर, एक्ट्रेस नीतू वर्मा बतौर गेस्ट शामिल होंगे। डीजे नाइट पार्टी में कलाकार लाइव डांस की प्रस्तुति देंगे। इस कार्यक्रम में करीब पांच हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था की जा रही है। टिकट पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर दिये जा रहे हैं।
| बीकानेर, चार मई । पारस इवेन्टस के बैनर तले बीकानेर के रेलवे ग्राउण्ड में म्यूजिकल शाम 'तड़का' का आयोजन सात मई को किया जाएगा जिसमें टेलीविजन एवं फिल्म जगत मशहूर हस्तियां अपनी प्रस्तुति देंगे। कार्यक्रम के पोस्टर का विमोचन बुधवार को संभागीय आयुक्त नीरज के. पवन ने किया। संभागीय आयुक्त ने संस्था को आयोजन को लेकर शुभकामनायें दी हैं। इवेंट के आयोजक अमित यादव एवं फायख चौहान ने बताया कि सात मई को शाम को होने वाले इसमें टीवी सीरियल 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' की बबीता जी फेम मुनमुन दत्ता विशेष मेहमान होंगी। इसके अलावा हरियाणवी कलाकार अजय हुड्डा, एक्टर एवं सिंगर विजय वर्मा, सिंगर कंचन नागर, एक्ट्रेस नीतू वर्मा बतौर गेस्ट शामिल होंगे। डीजे नाइट पार्टी में कलाकार लाइव डांस की प्रस्तुति देंगे। इस कार्यक्रम में करीब पांच हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था की जा रही है। टिकट पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर दिये जा रहे हैं। |
खबर के अनुसार गोफास्ट, स्पाइसजेट, इंडिगो, एयरइंडिया देश के अलग-अलग शहरों से पटना के लिए टिकट बुक कर रही हैं। यात्रीगण अपनी सुविधा के अनुसार फ्लाइट का शेड्यूल चेक करें। साथ ही साथ ऑनलाइन के द्वारा फ्लाइट का टिकट बुक करें।
छठ पर पटना आने के लिए विमान का किराया जारी, यहां जानिए?
चेन्नई से पटना का विमान किराया : 9032 रुपया।
मुंबई से पटना का विमान किराया : 10335 रुपया।
बेंगलुरु से पटना का विमान किराया : 7595 रुपया।
कोलकाता से पटना का विमान किराया : 4809 रुपया।
हैदराबाद से पटना का विमान किराया : 7603 रुपया।
नई दिल्ली से पटना का विमान किराया : 5692 रुपया।
अहमदाबाद से पटना का विमान किराया : 10416 रुपया।
ऐसे करें टिकट बुक : अगर आप देश के इन शहरों से पटना आना चाहते हैं तो आप गोफास्ट, स्पाइसजेट, इंडिगो, एयरइंडिया के आधिकारिक वेबसाइट पर जा कर विमान का किराया चेक करें और फिर ऑनलाइन के द्वारा टिकट बुक करें।
| खबर के अनुसार गोफास्ट, स्पाइसजेट, इंडिगो, एयरइंडिया देश के अलग-अलग शहरों से पटना के लिए टिकट बुक कर रही हैं। यात्रीगण अपनी सुविधा के अनुसार फ्लाइट का शेड्यूल चेक करें। साथ ही साथ ऑनलाइन के द्वारा फ्लाइट का टिकट बुक करें। छठ पर पटना आने के लिए विमान का किराया जारी, यहां जानिए? चेन्नई से पटना का विमान किराया : नौ हज़ार बत्तीस रुपयापया। मुंबई से पटना का विमान किराया : दस हज़ार तीन सौ पैंतीस रुपयापया। बेंगलुरु से पटना का विमान किराया : सात हज़ार पाँच सौ पचानवे रुपयापया। कोलकाता से पटना का विमान किराया : चार हज़ार आठ सौ नौ रुपयापया। हैदराबाद से पटना का विमान किराया : सात हज़ार छः सौ तीन रुपयापया। नई दिल्ली से पटना का विमान किराया : पाँच हज़ार छः सौ बानवे रुपयापया। अहमदाबाद से पटना का विमान किराया : दस हज़ार चार सौ सोलह रुपयापया। ऐसे करें टिकट बुक : अगर आप देश के इन शहरों से पटना आना चाहते हैं तो आप गोफास्ट, स्पाइसजेट, इंडिगो, एयरइंडिया के आधिकारिक वेबसाइट पर जा कर विमान का किराया चेक करें और फिर ऑनलाइन के द्वारा टिकट बुक करें। |
वह व्यक्ति भी जो किसी कारण बोलने में असमर्थ है हिन्दी बोलेगा या किसी बङ्गाली घराने में पला हुआ बालक भी हिन्दी ही बोलेगा । इस प्रकार हम देखते हैं कि भाषा, वंशानुक्रम तथा भाषा के वातावरण दोनों पर निर्भर है। यदि हम किसी खान्दान को विस्तार पूर्वक जानते हैं तो हम बता सकते हैं कि इस खान्दान के लोगों में वे विचित्रतायें या गुर होंगे जो प्रायः उनमें पाये जाते हैं । इस प्रकार यह प्रकट हुआ कि वंशानुक्रम और वातावरण एक दूसरे के विरोधी नहीं होते। अधिक से अधिक यह होता है कि वंशानुक्रम से किसी व्यक्ति के विकास की सीमा और क्षमता निर्धारित हो जाती है जो अनुकूल वातावरण पाकर प्रस्फुटित होती है । | वह व्यक्ति भी जो किसी कारण बोलने में असमर्थ है हिन्दी बोलेगा या किसी बङ्गाली घराने में पला हुआ बालक भी हिन्दी ही बोलेगा । इस प्रकार हम देखते हैं कि भाषा, वंशानुक्रम तथा भाषा के वातावरण दोनों पर निर्भर है। यदि हम किसी खान्दान को विस्तार पूर्वक जानते हैं तो हम बता सकते हैं कि इस खान्दान के लोगों में वे विचित्रतायें या गुर होंगे जो प्रायः उनमें पाये जाते हैं । इस प्रकार यह प्रकट हुआ कि वंशानुक्रम और वातावरण एक दूसरे के विरोधी नहीं होते। अधिक से अधिक यह होता है कि वंशानुक्रम से किसी व्यक्ति के विकास की सीमा और क्षमता निर्धारित हो जाती है जो अनुकूल वातावरण पाकर प्रस्फुटित होती है । |
कांग्रेस से आये राकेश चौधरी को लेकर प्रदेश की शिवराज सरकार सवालों के घेरे मे आ गई है और उसे अपने ही लोगो के विरोध का सामना करना पड़ रहा है. मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेताओं ने राकेश चौधरी का खुला विरोध किया है.
सूत्रों के मुताबिक आज रात प्रदेश कार्यालय में आयोजित होने वाली चुनाव समिति में मध्यप्रदेश से चार नाम राज्यसभा के लिए तय करने हैं निवृत्त होने वाले सदस्यों में से श्री थावरचंद गहलोत और एल के गणेशन का नाम लगभग तय माना जा रहा है, बाकी दो सदस्यों के लिए जैसे ही यह पता चला की कांग्रेस से आये राकेश चौधरी का नाम तय होना है वैसे ही भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने खुलकर विरोध करना शुरू कर दिया है.
विरोध करने वाले नेताओं में विक्रम वर्मा, रघुनंदन शर्मा, कृष्ण मुरारी मोघे और विनोद गोटियाँ प्रमुख हैं. भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि जब से राकेश चौधरी भारतीय जनता पार्टी में आये हैं उन्होंने पार्टी के लिए कोई योगदान नहीं दिया है, राकेश चौधरी के छोटे भाई को पार्टी ने विधायक भी बनाया है, इसलिये अगर राज्यसभा में भी राकेश चौधरी को भेजा जाएगा तो प्रदेशभर में गलत संदेश जाएगा.
| कांग्रेस से आये राकेश चौधरी को लेकर प्रदेश की शिवराज सरकार सवालों के घेरे मे आ गई है और उसे अपने ही लोगो के विरोध का सामना करना पड़ रहा है. मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेताओं ने राकेश चौधरी का खुला विरोध किया है. सूत्रों के मुताबिक आज रात प्रदेश कार्यालय में आयोजित होने वाली चुनाव समिति में मध्यप्रदेश से चार नाम राज्यसभा के लिए तय करने हैं निवृत्त होने वाले सदस्यों में से श्री थावरचंद गहलोत और एल के गणेशन का नाम लगभग तय माना जा रहा है, बाकी दो सदस्यों के लिए जैसे ही यह पता चला की कांग्रेस से आये राकेश चौधरी का नाम तय होना है वैसे ही भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने खुलकर विरोध करना शुरू कर दिया है. विरोध करने वाले नेताओं में विक्रम वर्मा, रघुनंदन शर्मा, कृष्ण मुरारी मोघे और विनोद गोटियाँ प्रमुख हैं. भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि जब से राकेश चौधरी भारतीय जनता पार्टी में आये हैं उन्होंने पार्टी के लिए कोई योगदान नहीं दिया है, राकेश चौधरी के छोटे भाई को पार्टी ने विधायक भी बनाया है, इसलिये अगर राज्यसभा में भी राकेश चौधरी को भेजा जाएगा तो प्रदेशभर में गलत संदेश जाएगा. |
टी-20 विमेंस रविवार को देर रात हुए मुकाबले में श्रीलंका ने टूर्नामेंट में लगातार अपनी दूसरी जीत दर्ज की। श्रीलंका ने बांग्लादेश को 7 विकेट से हराया। श्रीलंका की ओपनर हर्षिता समरविक्रमा ने 50 बॉल में 69 रन की नाबाद पारी खेली। टॉस जीत कर पहले बल्लेबाजी करने उतरी बांग्लादेश ने 20 ओवर में 8 विकेट दे कर 126 रन बनाए। जवाब में श्रीलंका ने 18. 2 ओवर में लक्ष्य का पीछा कर लिया।
बांग्लादेश अच्छी की। 6 ओवर में टीम ने 48 रन स्कोर किए। लेकिन चमारी अथापथु और इनोका रणवीरा ने बांग्लादेश के रन रेट को धीम किया और 126 रन पर ही रोक दिया। शमीना सुल्ताना ने (20), मुर्शिदा खातून (0), शोभना मोस्तरी (29), निगार सुल्ताना (28), लता मोंडल (11), शोर्ण अख्तर (5) , ऋतू मोनी (2) , सलमा खातून 9*, नाहिद अख्तर (8) और जहांआरा आलम ने 1 रन बनाए। श्रीलंका की औशादी राणसिंघे ने 3 और चमारी अथापथु ने 2 विकेट लिए। इनोका रनवीरा को 1 विकेट मिला।
श्रीलंका ने लक्ष्य का पीछा करना शुरू किया। ओपनर हर्षिता समरविक्रमा ने पॉवरप्ले में सिर्फ 13 बॉल खेली। दूसरे छोर पर कप्तान चमारी अथापथु ने 17 बॉल पर 15 रन बनाए। पावरप्ले के अंत तक हर्षिता ने 9 गेंदों पर 8 रन ही बनाए थे। इसके बाद भी वे स्लो खेलती रही। आधे रास्ते तक वह 22 में से 22 थी।
कुछ देर बाद हर्षिता क्रीज पर जमीं और 16वें ओवर में चार गेंदों पर दो छक्के और एक चौका लगा दिया। आखिर में नीलाक्षी डी सिल्वा ने उसका साथ दिया। दोनों ने 124 रन की साझेदारी की - डी सिल्वा ने उनमें से 41 रन बनाए। आखिर में श्रीलंका ने 3 विकेट खो कर टारगेट चेज कर लिया।
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| टी-बीस विमेंस रविवार को देर रात हुए मुकाबले में श्रीलंका ने टूर्नामेंट में लगातार अपनी दूसरी जीत दर्ज की। श्रीलंका ने बांग्लादेश को सात विकेट से हराया। श्रीलंका की ओपनर हर्षिता समरविक्रमा ने पचास बॉल में उनहत्तर रन की नाबाद पारी खेली। टॉस जीत कर पहले बल्लेबाजी करने उतरी बांग्लादेश ने बीस ओवर में आठ विकेट दे कर एक सौ छब्बीस रन बनाए। जवाब में श्रीलंका ने अट्ठारह. दो ओवर में लक्ष्य का पीछा कर लिया। बांग्लादेश अच्छी की। छः ओवर में टीम ने अड़तालीस रन स्कोर किए। लेकिन चमारी अथापथु और इनोका रणवीरा ने बांग्लादेश के रन रेट को धीम किया और एक सौ छब्बीस रन पर ही रोक दिया। शमीना सुल्ताना ने , मुर्शिदा खातून , शोभना मोस्तरी , निगार सुल्ताना , लता मोंडल , शोर्ण अख्तर , ऋतू मोनी , सलमा खातून नौ*, नाहिद अख्तर और जहांआरा आलम ने एक रन बनाए। श्रीलंका की औशादी राणसिंघे ने तीन और चमारी अथापथु ने दो विकेट लिए। इनोका रनवीरा को एक विकेट मिला। श्रीलंका ने लक्ष्य का पीछा करना शुरू किया। ओपनर हर्षिता समरविक्रमा ने पॉवरप्ले में सिर्फ तेरह बॉल खेली। दूसरे छोर पर कप्तान चमारी अथापथु ने सत्रह बॉल पर पंद्रह रन बनाए। पावरप्ले के अंत तक हर्षिता ने नौ गेंदों पर आठ रन ही बनाए थे। इसके बाद भी वे स्लो खेलती रही। आधे रास्ते तक वह बाईस में से बाईस थी। कुछ देर बाद हर्षिता क्रीज पर जमीं और सोलहवें ओवर में चार गेंदों पर दो छक्के और एक चौका लगा दिया। आखिर में नीलाक्षी डी सिल्वा ने उसका साथ दिया। दोनों ने एक सौ चौबीस रन की साझेदारी की - डी सिल्वा ने उनमें से इकतालीस रन बनाए। आखिर में श्रीलंका ने तीन विकेट खो कर टारगेट चेज कर लिया। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
जर शतक ०००
ससार मे सबकी रुचि एक-सी नही होती । किसी को शृङ्गार मे पसन्द है - कामिनियो का स्वर्गीय आनन्द लूटना पसन्द है, किसी को स्त्रिय विप से भी बुरी लगती है उन्हें वैराग्य पसन्द है और किसी को नीति का अध्ययन पसन्द है। इसी से भर्तृहरि ने भृद्धार, वैराग्य व नीति पर तीन शतक लिखे है ।
दीखती है, न पुरुष, न और ही कुछ; सर्वत्र एक ब्रह्म ही दोखता है । अतः भव में उसी के ध्यान में लोलीन रहता हूँ, क्योंकि वैराग्य की अग्नि से संसारी भोग-विषयों के खयालात जड़ से ही भस्म कर दिये हैं ।
101. So long as I was labouring under ignorance due to the darkness caused by Cupid, I could see nothing but woman is this whole world. Now, by applying the collyrium öf better reasoning, my cye-sight has become normal and I find Brahma pervading the three worlds.
घैराग्ये संञ्चरत्येको नीती भ्रमति चापरः । शृङ्गारे रमते कश्चिद् भुवि भेदः परस्परम् ।।१०२ कोई वैराग्य को पसन्द करता है, कोई नीति में मस्त रहता है. और कोई शृङ्गार में मग्न रहता है । इस भूतल पर, मनुष्यों में परस्पर इच्छाओं का भेदाभेद है ॥ १०२ ॥
इस दुनिया में सबकी रुचि एक नहीं । किसी को एक चीजं अच्छी लगती है, तो दूसरे को दूसरी ओर तीसरे को तीसरी सबके मन और रुचि एक नहीं; किसी को यह संसार बुरा लगता है; अतः वह इसे मिथ्या और असार समझ, सबको त्याग, परम परमात्मा को भजता है। किसी को नीतिशास्त्रों का अध्ययन ही अच्छा लगता है; अतः वह रात-दिन नीति-ग्रन्थों का ही क्रीड़ा वना रहता है। किसी को न वैराग्य पसन्द है और न नीति; उसे एकमात्र विषयों का भोगना ही अच्छा लगता है; अतः वह इन्हीं में भानन्द समझता है, दिन-रात. विषय-सुखों में ही मतथाला रहता है, स्त्रियों को ही अपनी आराध्य देवी साझता है और उनकी तारीफों से भरे हुए शृङ्गार रस के ग्रन्थ देखने में ही लगा रहता है । सबकी रुचि भिन्न-भिन्न है, इसीसे भर्तृहरि महाराज ने "वैराग्यशतक", "शृङ्गार-शतक" और "नीति-शतक" - तीन शतक, तीनों प्रकार के लोगों के लिये लिखे हैं। जिसका दिल वैराग्य में हो, वह "वैराग्य-शतक" पढ़ें; | जर शतक शून्य ससार मे सबकी रुचि एक-सी नही होती । किसी को शृङ्गार मे पसन्द है - कामिनियो का स्वर्गीय आनन्द लूटना पसन्द है, किसी को स्त्रिय विप से भी बुरी लगती है उन्हें वैराग्य पसन्द है और किसी को नीति का अध्ययन पसन्द है। इसी से भर्तृहरि ने भृद्धार, वैराग्य व नीति पर तीन शतक लिखे है । दीखती है, न पुरुष, न और ही कुछ; सर्वत्र एक ब्रह्म ही दोखता है । अतः भव में उसी के ध्यान में लोलीन रहता हूँ, क्योंकि वैराग्य की अग्नि से संसारी भोग-विषयों के खयालात जड़ से ही भस्म कर दिये हैं । एक सौ एक. So long as I was labouring under ignorance due to the darkness caused by Cupid, I could see nothing but woman is this whole world. Now, by applying the collyrium öf better reasoning, my cye-sight has become normal and I find Brahma pervading the three worlds. घैराग्ये संञ्चरत्येको नीती भ्रमति चापरः । शृङ्गारे रमते कश्चिद् भुवि भेदः परस्परम् ।।एक सौ दो कोई वैराग्य को पसन्द करता है, कोई नीति में मस्त रहता है. और कोई शृङ्गार में मग्न रहता है । इस भूतल पर, मनुष्यों में परस्पर इच्छाओं का भेदाभेद है ॥ एक सौ दो ॥ इस दुनिया में सबकी रुचि एक नहीं । किसी को एक चीजं अच्छी लगती है, तो दूसरे को दूसरी ओर तीसरे को तीसरी सबके मन और रुचि एक नहीं; किसी को यह संसार बुरा लगता है; अतः वह इसे मिथ्या और असार समझ, सबको त्याग, परम परमात्मा को भजता है। किसी को नीतिशास्त्रों का अध्ययन ही अच्छा लगता है; अतः वह रात-दिन नीति-ग्रन्थों का ही क्रीड़ा वना रहता है। किसी को न वैराग्य पसन्द है और न नीति; उसे एकमात्र विषयों का भोगना ही अच्छा लगता है; अतः वह इन्हीं में भानन्द समझता है, दिन-रात. विषय-सुखों में ही मतथाला रहता है, स्त्रियों को ही अपनी आराध्य देवी साझता है और उनकी तारीफों से भरे हुए शृङ्गार रस के ग्रन्थ देखने में ही लगा रहता है । सबकी रुचि भिन्न-भिन्न है, इसीसे भर्तृहरि महाराज ने "वैराग्यशतक", "शृङ्गार-शतक" और "नीति-शतक" - तीन शतक, तीनों प्रकार के लोगों के लिये लिखे हैं। जिसका दिल वैराग्य में हो, वह "वैराग्य-शतक" पढ़ें; |
हमारे स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए भोजन सबसे महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि विशेषज्ञ और डाॅक्टर हमेशा संतुलित और पौष्टिक आहार लेने का दबाव डालते हैं। हालांकि हमारे यहां खानपान महज स्वास्थ्य से संबंधित नहीं है अपितु यह हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। भारतीय भोजन अपने स्वाद और पौष्टिकता के लिए समूचे विश्व में जाने जाते हैं। इसके साथ ही भारतीय खाद्य पदार्थों में कई शारीरिक स्वास्थ्य लाभ भी हैं। बहरहाल आपके लिए यह जानना जरूरी है कि डाइट में कौनसा खाद्य पदार्थ शामिल करना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। तो चलिए जानते हैं, इनके बारे में।
लोग अक्सर कटहल की महक से अपनी नाक-भौं सिकोड़ लेते हैं, लेकिन इसमें मौजूद पौष्टिक तत्व कटहल के संबंध में आपकी राय बदल सकते हैं। आमतौर पर हमारे यहां कटहल को मांसाहार के विकल्प के रूप में खाया जाता है। दरअसल पकाए जाने के बाद कटहल मीट जैसा नजर आता है। यह प्रोटीन, स्टार्च, कैल्शियम, विटामिन ए, विटामिन बी, विटामिन सी, काॅपर और पोटेशियम का बेहतरीन स्रोत है। हालांकि इसमें 80 फीसदी तक कार्बोहाइड्रेट मौजूद है। लेकिन आप कटहल में मौजूद कार्बोहाइड्रेट की मात्रा को नजरंदाज कर सकते हें, क्योंकि इसमें हाई फाइबर (11 प्रतिशत) और प्राकृतिक स्टार्च है। यह ग्लाइसेमिक सूचकांक ( खाद्य पदार्थ में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा को मापने वाला सूचक) को कम करता है।
(और पढ़ें - फिट रहने के लिए क्या खाएं)
पालक खाने में जितना स्वदिष्ट है, यह उतने ही गुणों से भरपूर है। यह पोटेशियम और मैग्नीशियम का अच्छा स्रोत है जो कि आपकी मेटाबाॅलिक सक्रियता को बढ़ाता है, मांसपेशियों और तंत्रिका को स्वस्थ बनाता है, हृदय को स्वस्थ रखता है, प्रतिरक्षा तंत्र को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करता है और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है। इसके अलावा पालक विटामिन K, विटामिन बी, फाइबर और फास्फोरस से भरपूर है।
(और पढ़ें - स्वस्थ जीवन के लिए लाभदायक भोजन)
सदियों से हल्दी का इस्तेमाल बेहतर स्वास्थ्य के लिए किया जा रहा है। हालांकि हल्दी की मात्रा बढ़ा कर मोटापा कम करना एक सही तरीका नहीं है, लेकिन कहा जाता है कि हल्दी मोटापे से संबंधित सूजन को कम करने में सहायक होती है। हल्दी में कुछ मात्रा में पॉलीफेनॉल, कर्क्यूमिन नाम के तत्व मौजूद हैं जो कि एंटी-इन्फ्लेमेटरी और मोटापे को कम करने के रूप में काम करते हैं। अतः अगर आप वजन घटाने की चाह रखते हैं, तो सिमित मात्रा में हल्दी को अपनी डाइट में जरूर शामिल करें। बहरहाल हल्दी के इसके इतर भी कई गुण हैं।
(और पढ़ें - विटामिन डी से भरपूर खाद्य पदार्थ)
दही को विशेषरूप से गर्मी का सुपरफूड माना जाता है लेकिन आप साल भर इसका सेवन कर सकते हैं और इसके फायदों का लुत्फ उठा सकते हैं। लगभग 3/4 कप दही में 100-150 कैलोरी होती है और रोजाना की जरूरत का 20 फीसदी कैल्शियम भी मिलता है। अगर आप इसे नियमित अपनी डाइट में शामिल करते हैं तो इससे आपका इम्यून पाॅवर बढ़ता है, पाचन प्रणाली बेहतर होती है, हृदय और फेफड़ों से संबंधित समस्याएं कम होती हैं, हड्डियां और दांत मजबूत होते हैं। इसके साथ ही यह वजन कम करने और तनाव को कम करने में सहायक है।
( और पढ़ें - खाना खाने का सही समय)
यहां मौजूदा सभी आहार असंख्य गुणों से भरपूर हैं। आप इन्हें अपनी डाइट में शामिल करें और हेल्दी रहें। साथ ही कई तरह की बीमारियों से दूर रहें।
| हमारे स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए भोजन सबसे महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि विशेषज्ञ और डाॅक्टर हमेशा संतुलित और पौष्टिक आहार लेने का दबाव डालते हैं। हालांकि हमारे यहां खानपान महज स्वास्थ्य से संबंधित नहीं है अपितु यह हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। भारतीय भोजन अपने स्वाद और पौष्टिकता के लिए समूचे विश्व में जाने जाते हैं। इसके साथ ही भारतीय खाद्य पदार्थों में कई शारीरिक स्वास्थ्य लाभ भी हैं। बहरहाल आपके लिए यह जानना जरूरी है कि डाइट में कौनसा खाद्य पदार्थ शामिल करना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। तो चलिए जानते हैं, इनके बारे में। लोग अक्सर कटहल की महक से अपनी नाक-भौं सिकोड़ लेते हैं, लेकिन इसमें मौजूद पौष्टिक तत्व कटहल के संबंध में आपकी राय बदल सकते हैं। आमतौर पर हमारे यहां कटहल को मांसाहार के विकल्प के रूप में खाया जाता है। दरअसल पकाए जाने के बाद कटहल मीट जैसा नजर आता है। यह प्रोटीन, स्टार्च, कैल्शियम, विटामिन ए, विटामिन बी, विटामिन सी, काॅपर और पोटेशियम का बेहतरीन स्रोत है। हालांकि इसमें अस्सी फीसदी तक कार्बोहाइड्रेट मौजूद है। लेकिन आप कटहल में मौजूद कार्बोहाइड्रेट की मात्रा को नजरंदाज कर सकते हें, क्योंकि इसमें हाई फाइबर और प्राकृतिक स्टार्च है। यह ग्लाइसेमिक सूचकांक को कम करता है। पालक खाने में जितना स्वदिष्ट है, यह उतने ही गुणों से भरपूर है। यह पोटेशियम और मैग्नीशियम का अच्छा स्रोत है जो कि आपकी मेटाबाॅलिक सक्रियता को बढ़ाता है, मांसपेशियों और तंत्रिका को स्वस्थ बनाता है, हृदय को स्वस्थ रखता है, प्रतिरक्षा तंत्र को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करता है और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है। इसके अलावा पालक विटामिन K, विटामिन बी, फाइबर और फास्फोरस से भरपूर है। सदियों से हल्दी का इस्तेमाल बेहतर स्वास्थ्य के लिए किया जा रहा है। हालांकि हल्दी की मात्रा बढ़ा कर मोटापा कम करना एक सही तरीका नहीं है, लेकिन कहा जाता है कि हल्दी मोटापे से संबंधित सूजन को कम करने में सहायक होती है। हल्दी में कुछ मात्रा में पॉलीफेनॉल, कर्क्यूमिन नाम के तत्व मौजूद हैं जो कि एंटी-इन्फ्लेमेटरी और मोटापे को कम करने के रूप में काम करते हैं। अतः अगर आप वजन घटाने की चाह रखते हैं, तो सिमित मात्रा में हल्दी को अपनी डाइट में जरूर शामिल करें। बहरहाल हल्दी के इसके इतर भी कई गुण हैं। दही को विशेषरूप से गर्मी का सुपरफूड माना जाता है लेकिन आप साल भर इसका सेवन कर सकते हैं और इसके फायदों का लुत्फ उठा सकते हैं। लगभग तीन/चार कप दही में एक सौ-एक सौ पचास कैलोरी होती है और रोजाना की जरूरत का बीस फीसदी कैल्शियम भी मिलता है। अगर आप इसे नियमित अपनी डाइट में शामिल करते हैं तो इससे आपका इम्यून पाॅवर बढ़ता है, पाचन प्रणाली बेहतर होती है, हृदय और फेफड़ों से संबंधित समस्याएं कम होती हैं, हड्डियां और दांत मजबूत होते हैं। इसके साथ ही यह वजन कम करने और तनाव को कम करने में सहायक है। यहां मौजूदा सभी आहार असंख्य गुणों से भरपूर हैं। आप इन्हें अपनी डाइट में शामिल करें और हेल्दी रहें। साथ ही कई तरह की बीमारियों से दूर रहें। |
सपा सरकार में तो बबुआ ने अंधकार फैला कर रखा था। जनता को पर्याप्त बिजली कनेक्शन भी नहीं दे पाई थी सपा सरकार।
वहीं भाजपा सरकार ने दोगुने से भी अधिक बिजली कनेक्शन देकर जनता के जीवन में रोशनी लाने का काम किया है।
'बबुआ' जब सत्ता में थे. . तब गन्ना किसानों को भुगतान ही नहीं होता था।
बल्कि जो सपा-बसपा सरकार का बकाया भुगतान था, उसका भी भुगतान भाजपा सरकार ने किया।
जब सत्ता में थे तो चुनिंदा जिलों को छोड़कर पूरे प्रदेश को अंधेरे में ढकेल दिया था। अब फ्री बिजली का झूठा वादा कर बहकाने की कोशिश न करें बबुआ।
आपकी कथनी और करनी का अंतर जनता देख रही है।
| सपा सरकार में तो बबुआ ने अंधकार फैला कर रखा था। जनता को पर्याप्त बिजली कनेक्शन भी नहीं दे पाई थी सपा सरकार। वहीं भाजपा सरकार ने दोगुने से भी अधिक बिजली कनेक्शन देकर जनता के जीवन में रोशनी लाने का काम किया है। 'बबुआ' जब सत्ता में थे. . तब गन्ना किसानों को भुगतान ही नहीं होता था। बल्कि जो सपा-बसपा सरकार का बकाया भुगतान था, उसका भी भुगतान भाजपा सरकार ने किया। जब सत्ता में थे तो चुनिंदा जिलों को छोड़कर पूरे प्रदेश को अंधेरे में ढकेल दिया था। अब फ्री बिजली का झूठा वादा कर बहकाने की कोशिश न करें बबुआ। आपकी कथनी और करनी का अंतर जनता देख रही है। |
नई दिल्ली, 19 मार्च (CRICKETNMORE) । भारत ने वर्ल्ड कप के क्वार्टर फाइनल में गुरुवार को बांग्लादेश की पारी को 45 ओवरों में 193 रनों पर समेटकर एक अनोखा रिकॉर्ड बनाया है। यह लगातार सातवां वर्ल्ड कप मैच है जब टीम इंडिया ने विपक्षी टीम को ऑल आउट किया है। भारतीय गेंदबाजों ने लगातार 7 मैचों में 70 विकेट झटके हैं।
भारत ने यह उपलब्धि पहली बार हासिल की है। इससे पहले भारत ने 1983, 1985, 1999 और 2006 में चार बार विरोधी टीम को ऑल आउट किया था। भारत ने पिछले मैच में जिम्बाब्वे को ऑल आउट कर साउथ अफ्रीका के रिकॉर्ड (वर्ल्ड कप में लगातार 6 बार विपक्षी टीम को 50 ओवरों के अंदर समेटना) की बराबरी की थी। साउथ अफ्रीका ने यह रिकॉर्ड 2011 में पिछले वर्ल्ड कप में बनाया था।
वैसे यदि वन डे के लिहाज से बात की जाए तो लगातार विपक्षी टीमों का ऑल आउट करने का रिकॉर्ड 10 मैचों का है जो ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका ने बनाया था।
| नई दिल्ली, उन्नीस मार्च । भारत ने वर्ल्ड कप के क्वार्टर फाइनल में गुरुवार को बांग्लादेश की पारी को पैंतालीस ओवरों में एक सौ तिरानवे रनों पर समेटकर एक अनोखा रिकॉर्ड बनाया है। यह लगातार सातवां वर्ल्ड कप मैच है जब टीम इंडिया ने विपक्षी टीम को ऑल आउट किया है। भारतीय गेंदबाजों ने लगातार सात मैचों में सत्तर विकेट झटके हैं। भारत ने यह उपलब्धि पहली बार हासिल की है। इससे पहले भारत ने एक हज़ार नौ सौ तिरासी, एक हज़ार नौ सौ पचासी, एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे और दो हज़ार छः में चार बार विरोधी टीम को ऑल आउट किया था। भारत ने पिछले मैच में जिम्बाब्वे को ऑल आउट कर साउथ अफ्रीका के रिकॉर्ड की बराबरी की थी। साउथ अफ्रीका ने यह रिकॉर्ड दो हज़ार ग्यारह में पिछले वर्ल्ड कप में बनाया था। वैसे यदि वन डे के लिहाज से बात की जाए तो लगातार विपक्षी टीमों का ऑल आउट करने का रिकॉर्ड दस मैचों का है जो ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका ने बनाया था। |
इंडिया न्यूज, वाराणसी।
Honorary Fellowship to PM Modi : राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान अकादमी का 61वां वार्षिक सम्मेलन 26 से 28 नवंबर तक बीएचयू में मनाया जाएगा। इस दौरान स्वास्थ्य सेवाओं के उत्थान और कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई में अग्रणी योगदान के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फेलो ऑफ मेडिकल साइंसेज (एफएएमएस) देने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा अकादमी की ओर से 52 चिकित्सकों तथा वैज्ञानिकों को फेलोशिप और 106 युवा डॉक्टरों को सदस्यता दी जाएगी। आईएमएस के डीन रिसर्च और सम्मेलन के आयोजन सचिव प्रो. अशोक कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान अकादमी की स्थापना 1961 में की गई थी।
डॉ. तमिलिसाई सुंदरराजन होंगे मुख्य अतिथि (Honorary Fellowship to PM Modi)
अकादमी भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की योजना और प्रबंधन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कृषि विज्ञान संस्थान के शताब्दी कृषि प्रेक्षागृह में 26 नवंबर को होने वाले उद्घाटन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि तेलंगाना की राज्यपाल और पुंडुचेरी की उपराज्यपाल डॉ. तमिलिसाई सुंदरराजन होंगे। विशिष्ट अतिथि केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री डॉ. भागवत कराड और प्रभारी वीसी प्रो. वीके शुक्ला रहेंगे। प्रो. अशोक ने बताया कि आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो. बीआर मित्तल सम्मेलन के संरक्षक हैं।
(Honorary Fellowship to PM Modi)
| इंडिया न्यूज, वाराणसी। Honorary Fellowship to PM Modi : राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान अकादमी का इकसठवां वार्षिक सम्मेलन छब्बीस से अट्ठाईस नवंबर तक बीएचयू में मनाया जाएगा। इस दौरान स्वास्थ्य सेवाओं के उत्थान और कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई में अग्रणी योगदान के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फेलो ऑफ मेडिकल साइंसेज देने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा अकादमी की ओर से बावन चिकित्सकों तथा वैज्ञानिकों को फेलोशिप और एक सौ छः युवा डॉक्टरों को सदस्यता दी जाएगी। आईएमएस के डीन रिसर्च और सम्मेलन के आयोजन सचिव प्रो. अशोक कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान अकादमी की स्थापना एक हज़ार नौ सौ इकसठ में की गई थी। डॉ. तमिलिसाई सुंदरराजन होंगे मुख्य अतिथि अकादमी भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की योजना और प्रबंधन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कृषि विज्ञान संस्थान के शताब्दी कृषि प्रेक्षागृह में छब्बीस नवंबर को होने वाले उद्घाटन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि तेलंगाना की राज्यपाल और पुंडुचेरी की उपराज्यपाल डॉ. तमिलिसाई सुंदरराजन होंगे। विशिष्ट अतिथि केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री डॉ. भागवत कराड और प्रभारी वीसी प्रो. वीके शुक्ला रहेंगे। प्रो. अशोक ने बताया कि आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो. बीआर मित्तल सम्मेलन के संरक्षक हैं। |
वेद वाक्य तौकिक व्यवहारार्थ नहीं है, क्योंकि वह वैदिक शब्द यज्ञादि के लिये आचार्य से ही शिक्षणीय होकर प्रयुक्त होता है, उससे स्थूल व्यवहार की सिद्धि नहीं होती, अतः दोनों प्रकार के शब्दों से भेद होने के कारण पृथक कर कहा गया है। लौकिक शब्द से वैदिक शब्द में अन्य भी विशिष्टता हैं । लौकिक शब्द मे आनुपूर्वी नियम नहीं है, पर वैदिक शब्द की पूर्वी भी पतञ्जलि ने ऐसा ही कहा है ।
( ग ) शब्दार्थ का संबन्ध संवन्धी
व्याकरण के प्रतिपाद्य विषयों मे यह मुख्यतम है। शब्द नित्य है, या कृतक, इसका विस्तृत विचार यद्यपि भाग्य में नहीं है, तथापि इस विषय में भाष्यकार के सिद्धान्तभूतक वाक्य हैं । भाष्यकार ने कहा है- 'स्वभाविकमर्था भिधानम्' ( २ । १ । १ ) अर्थात् शब्द से अर्थ का ज्ञान प्रयत्न सापेक्ष नहीं है । जैसे-रूप-ज्ञान पतु का स्वभाव सिद्ध व्यापार है, वैसा अर्थका बोधन कराना शब्द का स्वभाव हैं । ( सकेत उसका सहायक तथा नियामक है यह पृथक तर्क है ) । भर्तृहरि ने स्पष्ट कहा है- 'नित्याः शब्दार्थसंबन्धाः तत्वाम्नाता महर्षिभिः सूत्राणां सानुतन्त्राणां भाष्याणां च प्रणेतृभिः' (वाक्यपदीय ) ।
पतञ्जलि का यह भी मत है कि यह शब्दार्थ संबन्ध नित्यता लोक से सिद्ध है, और इसमे शास्त्रकार का नियोग निरर्थक है । ऐसा शब्द हो नहीं सकता जिसका अर्थ न हो, या शब्द का प्रयोग अर्थशून्यता मे होता हो ( अर्थनिमित्तक एत्र शब्दः १ । १ । ४५ भाग्य शब्द प्रयोग की इस चोक सिद्धता को पतञ्जलि इतना प्रामाणिक मानते थे कि उन्होंने कई बार पासूत्र की प्राप्ति होने पर भी 'नेपोड स्ति प्रयोग : ' ( ६ । ३ । १ ) ऐसा कहा है। लोक में जिस रूप का प्रयोग नहीं है, पाणिनि सूत्रों के व्याख्यावल से उस रूप की चिन्ता करना पतञ्जलि दूपणीय समझते थे, जैसा 'वादः ( १ । ३ । ५१ ) सूत्रभाध्य से साक्षात रूप से विज्ञान होना है।
पतंजलि ने उदाहरण देकर समकाया है कि अन्य शब्द से यम्नाय शब्द विलक्षण है। वेद से सर निवन है, वर्णानुपूर्वी भी नियत है, देश और काल भी नियत है। इतना भेद गने पर मो शब्द व्यवहार की दृष्टि से दोनों समान है ( य एत्र वैदिकास्त एत्र लौकिकाः त एत्र तैयाम- वाजसनेवि - प्र।तिशाख्य ११३ की उवट व्याख्या ) | वेद वाक्य तौकिक व्यवहारार्थ नहीं है, क्योंकि वह वैदिक शब्द यज्ञादि के लिये आचार्य से ही शिक्षणीय होकर प्रयुक्त होता है, उससे स्थूल व्यवहार की सिद्धि नहीं होती, अतः दोनों प्रकार के शब्दों से भेद होने के कारण पृथक कर कहा गया है। लौकिक शब्द से वैदिक शब्द में अन्य भी विशिष्टता हैं । लौकिक शब्द मे आनुपूर्वी नियम नहीं है, पर वैदिक शब्द की पूर्वी भी पतञ्जलि ने ऐसा ही कहा है । शब्दार्थ का संबन्ध संवन्धी व्याकरण के प्रतिपाद्य विषयों मे यह मुख्यतम है। शब्द नित्य है, या कृतक, इसका विस्तृत विचार यद्यपि भाग्य में नहीं है, तथापि इस विषय में भाष्यकार के सिद्धान्तभूतक वाक्य हैं । भाष्यकार ने कहा है- 'स्वभाविकमर्था भिधानम्' अर्थात् शब्द से अर्थ का ज्ञान प्रयत्न सापेक्ष नहीं है । जैसे-रूप-ज्ञान पतु का स्वभाव सिद्ध व्यापार है, वैसा अर्थका बोधन कराना शब्द का स्वभाव हैं । । भर्तृहरि ने स्पष्ट कहा है- 'नित्याः शब्दार्थसंबन्धाः तत्वाम्नाता महर्षिभिः सूत्राणां सानुतन्त्राणां भाष्याणां च प्रणेतृभिः' । पतञ्जलि का यह भी मत है कि यह शब्दार्थ संबन्ध नित्यता लोक से सिद्ध है, और इसमे शास्त्रकार का नियोग निरर्थक है । ऐसा शब्द हो नहीं सकता जिसका अर्थ न हो, या शब्द का प्रयोग अर्थशून्यता मे होता हो ऐसा कहा है। लोक में जिस रूप का प्रयोग नहीं है, पाणिनि सूत्रों के व्याख्यावल से उस रूप की चिन्ता करना पतञ्जलि दूपणीय समझते थे, जैसा 'वादः सूत्रभाध्य से साक्षात रूप से विज्ञान होना है। पतंजलि ने उदाहरण देकर समकाया है कि अन्य शब्द से यम्नाय शब्द विलक्षण है। वेद से सर निवन है, वर्णानुपूर्वी भी नियत है, देश और काल भी नियत है। इतना भेद गने पर मो शब्द व्यवहार की दृष्टि से दोनों समान है |
दरभंगा एयरपोर्ट की स्थापना के 17वें महीने में एक बार फिर से इसके परिसर में रह रहे जंगली जानवरों को हटाने की कवायद तेज की गई है। जानवरों को हटाने के लिए पूर्व में तैयार प्राक्कलन के पुराना हो जाने के कारण नया प्राक्कलन तैयार किया जा रहा है। मिथिला के वन प्रमंडल पदाधिकारी के नेतृत्व में प्राक्कलन बनाया जा रहा है। इसमें जानवरों को हटाने की प्रक्रिया में आनेवाले खर्च का विवरण दर्ज किया जा रहा है। बताया गया है कि शीघ्र ही स्थानीय स्तर पर तैयार प्राक्कलन मुख्यालय से स्वीकृत कराने के उपरांत बरसात से पहले जानवरों को हटाने की दिशा में काम शुरू किया जाएगा।
स्थापना के वक्त से ही परिसर के जानवरों को हटाने की कोशिश सरकार ने की। इस दिशा में अप्रैल 2021 में कयावद की गई। सरकार की ओर से इस कार्य पर करीब 1. 40 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना के तहत करीब 15 लाख का आवंटन भी वन प्रमंडल दरभंगा को दिया। तत्कालीन वन प्रमंडल पदाधिकारी चंचल प्रकाशम् ने एयरपोर्ट परिसर का सर्वेक्षण कराया। इस दौरान परिसर में करीब 200 नीलगाय और इतनी संख्या में जंगली सुअरों के होने की बात सामने आई। परंतु, एयरपोर्ट के रनवे के चारों तरफ लगी चेन लिंग फेंसिंग के कमजोर होने की समस्या आई और जानवरों को हटाने की प्रक्रिया रूक गई।
मिथिला के वन प्रमंडल पदाधिकारी सुबोध गुप्ता बताते हैं जानवरों को हटाने के लिए अपनाई जानेवाली तकनीक की ट्रेनिंग स्थानीय वन कर्मियों को दी जा रही है। इस विषय पर मुख्य वन संरक्षक के साथ विमर्श किया गया है। इसके लिए कोलकाता से विशेषज्ञों को बुलाए जाने पर विचार किया जा रहा है। पहले से तैयार प्राक्कलन पुराना हो चुका है। सो, नए सिरे से इसे तैयार किया जा रहा है। मुख्यालय से अनुमोदन प्राप्त कर शीघ्र ही जानवरों को हटाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
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| दरभंगा एयरपोर्ट की स्थापना के सत्रहवें महीने में एक बार फिर से इसके परिसर में रह रहे जंगली जानवरों को हटाने की कवायद तेज की गई है। जानवरों को हटाने के लिए पूर्व में तैयार प्राक्कलन के पुराना हो जाने के कारण नया प्राक्कलन तैयार किया जा रहा है। मिथिला के वन प्रमंडल पदाधिकारी के नेतृत्व में प्राक्कलन बनाया जा रहा है। इसमें जानवरों को हटाने की प्रक्रिया में आनेवाले खर्च का विवरण दर्ज किया जा रहा है। बताया गया है कि शीघ्र ही स्थानीय स्तर पर तैयार प्राक्कलन मुख्यालय से स्वीकृत कराने के उपरांत बरसात से पहले जानवरों को हटाने की दिशा में काम शुरू किया जाएगा। स्थापना के वक्त से ही परिसर के जानवरों को हटाने की कोशिश सरकार ने की। इस दिशा में अप्रैल दो हज़ार इक्कीस में कयावद की गई। सरकार की ओर से इस कार्य पर करीब एक. चालीस करोड़ रुपये खर्च करने की योजना के तहत करीब पंद्रह लाख का आवंटन भी वन प्रमंडल दरभंगा को दिया। तत्कालीन वन प्रमंडल पदाधिकारी चंचल प्रकाशम् ने एयरपोर्ट परिसर का सर्वेक्षण कराया। इस दौरान परिसर में करीब दो सौ नीलगाय और इतनी संख्या में जंगली सुअरों के होने की बात सामने आई। परंतु, एयरपोर्ट के रनवे के चारों तरफ लगी चेन लिंग फेंसिंग के कमजोर होने की समस्या आई और जानवरों को हटाने की प्रक्रिया रूक गई। मिथिला के वन प्रमंडल पदाधिकारी सुबोध गुप्ता बताते हैं जानवरों को हटाने के लिए अपनाई जानेवाली तकनीक की ट्रेनिंग स्थानीय वन कर्मियों को दी जा रही है। इस विषय पर मुख्य वन संरक्षक के साथ विमर्श किया गया है। इसके लिए कोलकाता से विशेषज्ञों को बुलाए जाने पर विचार किया जा रहा है। पहले से तैयार प्राक्कलन पुराना हो चुका है। सो, नए सिरे से इसे तैयार किया जा रहा है। मुख्यालय से अनुमोदन प्राप्त कर शीघ्र ही जानवरों को हटाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
गुवाहाटीः धूला बलात्कार और हत्या मामले की जांच में कुछ चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं जैसे डॉक्टरों ने एक आरोपी के साथ मिलकर सबूत मिटाने की साजिश रची और आरोपी को सजा से बचाने के लिए गलत रिकॉर्ड (पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट) तैयार की। जांच में यह भी पता चला है कि तत्कालीन एएसपी रूपम फुकन ने नाबालिग लड़की से छेड़छाड़ और हत्या के आरोपी की स्क्रीनिंग के लिए तत्कालीन धूला थाना प्रभारी के माध्यम से आरोपी के परिजनों से 1. 50 लाख रुपये की रिश्वत भी ली थी।
सीआईडी सूत्रों के मुताबिक मंगलदाई सिविल अस्पताल में पहला पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर अरुण चंद्र डेका, डॉ. अजंता बोरदोलोई और डॉ. अनुपम शर्मा ने साफ तौर पर लिखा है कि 'लिगचर मार्क' के अलावा कोई चोट नहीं आई है। सीआईडी सूत्रों ने कहा कि उन्होंने खोपड़ी और गर्दन पर चोटों के जारी रहने का उल्लेख नहीं किया, जो कि जीएमसीएच (गौहाटी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल) में किए गए दूसरे पोस्टमार्टम में कोर्ट की अनुमति से शव को निकालने के बाद स्पष्ट रूप से सामने आया।
सीआईडी सूत्रों ने यह भी खुलासा किया कि दूसरे पोस्टमार्टम ने निष्कर्ष निकाला कि "चोटें पूर्व-मॉर्टम हैं और एक कुंद बल प्रभाव के कारण होती हैं। इसके अलावा, एम्स, एनईआईजीआरआईएमएस और जीएमसी के फोरेंसिक चिकित्सा विशेषज्ञों के पैनल ने स्पष्ट रूप से निष्कर्ष निकाला है कि "चोटें अधिक सामान्य हैं गला घोंटने के मामलों में और यह कि चोटें एक कुंद हथियार के कारण हैं और यह कि मौत हत्या के कारण हुई है, न कि आत्महत्या के कारण। "
सीआईडी सूत्रों ने यह भी कहा, "एफएसएल रिपोर्ट को औपचारिक रूप से साझा करने के बाद भी, गिरफ्तार डॉक्टरों ने निष्कर्ष निकाला कि कोई यौन हमला नहीं हुआ था और मौत फांसी से हुई थी जो प्रकृति में आत्मघाती थी। "
जांचकर्ताओं ने पाया कि गिरफ्तार किए गए डॉक्टरों ने पोस्टमॉर्टम करते समय कोई वीडियोग्राफी नहीं की और शव परीक्षण की उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया।
सूत्रों के अनुसार, जांचकर्ताओं ने तत्कालीन धूला थाना प्रभारी ओसी उत्पल बोरा के इकबालिया बयान के आधार पर एएसपी रूपम फुकन को गिरफ्तार किया, जिन्होंने बलात्कार और हत्या मामले के आरोपी कृष्ण कमल बरुआ के परिजनों से 5 लाख रुपये लिए थे। वह एसएसबी का जवान है।
इससे पहले, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने ढेकियाजुली में पीड़ित लड़की के घर का दौरा किया और सीआईडी को तत्कालीन दरांग एसपी राज मोहन रे, एएसपी रूपम फुकन और धूला पीएस ओसी उत्पल बोरा को निलंबित करने के अलावा जांच करने का आदेश दिया। जांचकर्ताओं ने तत्कालीन दरांग एसपी के आवास की भी तलाशी ली, लेकिन वह नहीं मिला।
| गुवाहाटीः धूला बलात्कार और हत्या मामले की जांच में कुछ चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं जैसे डॉक्टरों ने एक आरोपी के साथ मिलकर सबूत मिटाने की साजिश रची और आरोपी को सजा से बचाने के लिए गलत रिकॉर्ड तैयार की। जांच में यह भी पता चला है कि तत्कालीन एएसपी रूपम फुकन ने नाबालिग लड़की से छेड़छाड़ और हत्या के आरोपी की स्क्रीनिंग के लिए तत्कालीन धूला थाना प्रभारी के माध्यम से आरोपी के परिजनों से एक. पचास लाख रुपये की रिश्वत भी ली थी। सीआईडी सूत्रों के मुताबिक मंगलदाई सिविल अस्पताल में पहला पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर अरुण चंद्र डेका, डॉ. अजंता बोरदोलोई और डॉ. अनुपम शर्मा ने साफ तौर पर लिखा है कि 'लिगचर मार्क' के अलावा कोई चोट नहीं आई है। सीआईडी सूत्रों ने कहा कि उन्होंने खोपड़ी और गर्दन पर चोटों के जारी रहने का उल्लेख नहीं किया, जो कि जीएमसीएच में किए गए दूसरे पोस्टमार्टम में कोर्ट की अनुमति से शव को निकालने के बाद स्पष्ट रूप से सामने आया। सीआईडी सूत्रों ने यह भी खुलासा किया कि दूसरे पोस्टमार्टम ने निष्कर्ष निकाला कि "चोटें पूर्व-मॉर्टम हैं और एक कुंद बल प्रभाव के कारण होती हैं। इसके अलावा, एम्स, एनईआईजीआरआईएमएस और जीएमसी के फोरेंसिक चिकित्सा विशेषज्ञों के पैनल ने स्पष्ट रूप से निष्कर्ष निकाला है कि "चोटें अधिक सामान्य हैं गला घोंटने के मामलों में और यह कि चोटें एक कुंद हथियार के कारण हैं और यह कि मौत हत्या के कारण हुई है, न कि आत्महत्या के कारण। " सीआईडी सूत्रों ने यह भी कहा, "एफएसएल रिपोर्ट को औपचारिक रूप से साझा करने के बाद भी, गिरफ्तार डॉक्टरों ने निष्कर्ष निकाला कि कोई यौन हमला नहीं हुआ था और मौत फांसी से हुई थी जो प्रकृति में आत्मघाती थी। " जांचकर्ताओं ने पाया कि गिरफ्तार किए गए डॉक्टरों ने पोस्टमॉर्टम करते समय कोई वीडियोग्राफी नहीं की और शव परीक्षण की उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया। सूत्रों के अनुसार, जांचकर्ताओं ने तत्कालीन धूला थाना प्रभारी ओसी उत्पल बोरा के इकबालिया बयान के आधार पर एएसपी रूपम फुकन को गिरफ्तार किया, जिन्होंने बलात्कार और हत्या मामले के आरोपी कृष्ण कमल बरुआ के परिजनों से पाँच लाख रुपये लिए थे। वह एसएसबी का जवान है। इससे पहले, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने ढेकियाजुली में पीड़ित लड़की के घर का दौरा किया और सीआईडी को तत्कालीन दरांग एसपी राज मोहन रे, एएसपी रूपम फुकन और धूला पीएस ओसी उत्पल बोरा को निलंबित करने के अलावा जांच करने का आदेश दिया। जांचकर्ताओं ने तत्कालीन दरांग एसपी के आवास की भी तलाशी ली, लेकिन वह नहीं मिला। |
पद का नाम- निदेशक, प्रधान प्रबंधक और मुख्य तकनीकी अधिकारी (आईटी)स्थान- दिल्ली चयन प्रक्रिया उम्मीदवार का चयन लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के आधार पर किया जाएगा।
योग्य और इच्छुक उम्मीदवार नौकरी से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी जैसे आवेदन करने की अंतिम तिथि, आवेदन शुल्क, नौकरी के लिए चयन प्रक्रिया, नौकरी के लिए आयु सीमा, पदों का विवरण, पदों के नाम, नौकरी के लिए शैक्षणिक योग्यता, कुल जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। नीचे दिए गए पदों की संख्या।
योग्य उम्मीदवार इस नौकरी के लिए 31-8-2020 तक भारत सरकार के खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के निदेशक, प्रधान प्रबंधक और मुख्य तकनीकी अधिकारी (आईटी) के रिक्त पदों को भरने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
| पद का नाम- निदेशक, प्रधान प्रबंधक और मुख्य तकनीकी अधिकारी स्थान- दिल्ली चयन प्रक्रिया उम्मीदवार का चयन लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के आधार पर किया जाएगा। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार नौकरी से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी जैसे आवेदन करने की अंतिम तिथि, आवेदन शुल्क, नौकरी के लिए चयन प्रक्रिया, नौकरी के लिए आयु सीमा, पदों का विवरण, पदों के नाम, नौकरी के लिए शैक्षणिक योग्यता, कुल जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। नीचे दिए गए पदों की संख्या। योग्य उम्मीदवार इस नौकरी के लिए इकतीस अगस्त दो हज़ार बीस तक भारत सरकार के खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के निदेशक, प्रधान प्रबंधक और मुख्य तकनीकी अधिकारी के रिक्त पदों को भरने के लिए आवेदन कर सकते हैं। |
के समय इस मंत्र का उच्चार जरूर करना चाहिए, क्योंकि हमारा भोजन केवल पेट भरने के लिए ही नहीं है। वह ज्ञान और सामर्थ्य की प्राति के लिए है। इतना ही नहीं, इस में यह भी मांग की गई है कि हमारा वह ज्ञान, वह सामर्थ्य और भोजन भगवान् एकत्र कराए । इस में केवल पालन की प्रार्थना है। शाला में जिस प्रकार गुरु और शिष्य होते हैं उसी प्रकार सर्वत्र द्वैत है। परिवार में पुरानी और नई पीढ़ी, समाज में में स्त्री-पुरुष, वृद्ध-तरुण, शिक्षित- अशिक्षित आदि भेद हैं। उस में फिर गरीब अमीर का भेद भी है। इस प्रकार सर्वत्र भेद नजर आता है। हमारे इस हिन्दुस्थान में तो असंख्य भेद हैं । यहाँ प्रांतभेद है । यहाँ का स्त्रीवर्ग बिलकुल अलग रहता है। इसलिए यहाँ स्त्री और पुरुष में भी बहुत बड़ा भेद है। हिन्दू और मुसलमानों का भेद तो प्रसिद्ध ही है । परन्तु हिन्दु- हिन्दुओं में भी हरिजन और दूसरों में भेद है। इस प्रकार हिन्दुस्थान में अपार भेद भरे हुए हैं। हिन्दुस्थान की तरह वे संसार में भी हैं। इसलिए इस मंत्र में यह प्रार्थना की गई है कि हमें "एकत्र तार, एकत्र मार 19 मारने की प्रार्थना प्रायः कोई करता नहीं। इसलिए यहाँ एकत्र तारने की ही प्रार्थना है । लेकिन 'यदि तुझे मारना ही हो, तो कम से कम एकत्र मार' ऐसी प्रार्थना है। सारांश "हमें दूध देना है तो
एकत्र दे, सूखी रोटी देना है तो भी एकत्र दे हमारे साथ जो कुछ करना है वह एकत्र कर " ऐसी प्रार्थना इस मंत्र में है।
कैसे हो ?
आज हिन्दुस्थान में एक बात सब के जीभ पर है। सभी कहते हैं कि यह भेद जितना कम करोगे उतना ही देश आगे बढ़ेगा । देहात के लोग, याने किसान या शहराती, गरीब और श्रीमान्, इनका अन्तर जितना कम होगा उतना हो देश का कदम आगे बढ़ेगा। इसके विषय में शायद ही किसी का मतभेद हो । लेकिन तो भी यह भेद, यह अन्तर,
कम नहीं होता। अंतर दो तरह से काटा जा सकता है। ऊपरवालों के नांचे उतरने से और नीचेवालों के उपर उठने से। परंतु दोनों ओर मे. यह नहीं होता। हम सेवक कझते हैं। लेकिन किसान-मजदूरों की तुलना में तो चोटी पर ही हैं। दादाने कल अपने व्याख्यान में कहा--- मैं उनके शब्द नहीं हुडरा रहा हूं, उनका भावार्थ कह रहा हूं कि ये भोग और ऐश्वर्य भी चाहते हैं । भोगों की जरूरत है या नहीं, इस विवाद में पड़ने की यहाँ जरूरत नहीं । भोग ऐश्वर्य किसे कहें ?
लेकिन सवाल यह है कि भोग और ऐश्वर्य कई किसे ? ऐश्वर्य कहे किसे ? में अच्छा सुग्रास भोजन करूं और पड़ोस में ही दूसरा भूखों मरता रहे, इसे ? उसकी नजर बराबर मेरे भोजन पर रहे और मैं उसकी परवाह न करूं ? उसके आक्रमण से अपनी थाली की रक्षा करने के लिये एक डंडा लेकर बैठूं ? मेरा सुझस भोजन और डंडा तथा उसकी भूख क्या इन्हें ऐश्वर्य मानें ? एक सजन मुझसे आकर कहने लगे कि "हम दो आदमी एकत्र भोजन करते हैं। परंतु हमारी निभ नहीं सकती ।" मैंने पूछा, "सो क्यों ?" उन्होंने जवाब दिया "मैं नारंगिया खाता हूं । वे नहीं लाते। वे नजदूर हैं। इसलिए वे नारंगियाँ खरीद नहीं सकते। इसलिए उनके साथ खाना मुझे अप्रशस्त लगता है। मैंने पूछा "लेकिन क्या अलग घर मे रहने से उनके पेट में नारंगियाँ चली जायंगी। आप दोनों में जो व्यवहार आज हो रहा रहा है वही ठीक है। जब तक दोनों साथ खाते हो तब तक दोनों के निकट आने की संभावना है। एखाध बार तुम उसे न रंगियाँ लेने का आग्रह भी करोगे । लेकिन यदि तुम दोनों के बीच सुरक्षितता की दोवाल खड़ी कर दी गई तो भेद चिरस्थायी हो जायगा । दीवाल को सुरक्षितता का साधन मानना कैसा भयंकर है। हिन्दुस्थान में हम सब कहते हैं, हमारे संतो ने तो पुकार पुकार कर कहा है कि ईश्वर सर्वसाश्री.
है। फिर भी दीवाल की ओट में छिपने से क्या फायदा १ इससे दोनों का अंतर थोड़े ही घटेगा। सेवकों का भी यही हाल
यही हाल हम खादीधारियों का भी है। जनता के अंदर अभी ग्वादी का प्रवेश ही नहीं हुआ है। इसलिए जितने खादीधारी हैं वे सब सेवक ही हैं। सादीधारियों का सम्मेलन सेवक वर्ग का मेला ही है। यह कहा जाता है कि हमें और आप को गांवों में जाना चाहिए। लेकिन देहात में जाने पर भी वहाँ के लोगों को जहां सूखी रोटी भी नहीं मिलती तहा मैं पूड़ी खाता हूं। मेरा घी ग्वाना उस भूखे को खटकता है । आज भी किसान कहता है कि अगर मुझे पेटभर मिल जाय तो तेरे घी की मुझे पूर्वा नहीं । मुझे तेल ही मिलता रहे तो भी तसली है । यह मेद उसे भले ही न अखरता हो, लेकिन हम सेवकों को बहुत अखरना है। लेकिन, इस तरह कब तक चलता रहेगा। दुबला-पतला जीव था, इस साल मुटिया गया हूं।
· खटकता है। मैं भी उन्हीं लोगों जैसा दुबला-पतला हूं यह संतोप अब जाता रहा। पहले मेरे गाल उनके जैसे चिपके थे। अब तो मेरे शरीर पर मुख छा गई है ।
देहाती रहन सहन में सुधार
या टंगी हुई एक तख्ती पर लिखा है कि आवश्यकताएँ बढ़ाते रहना सभ्यता का लक्षण नहीं है बल्कि आवश्यकताओं का संरक्षण सभ्यता का लक्षण है । तो भी मैं कहता हूं कि देहातियों की आवश्यकताएँ बढ़नी चाहिए। वे मुधारनी भी चाहिए। लेकिन उनकी आवश्यकताएँ आज तो पूरी ही नहीं होती। उनका रहन-सहन बिलकुल गिरा हुआ है। उनके जीवन का मान बढ़ना चाहिए। मोटे हिसाब से तो यही कहना पडेगा कि आज हमारे गरीब देशतियों की आवश्यकताएँ बढ़नी चाहिए ।
मधुओं का हान्त
योगशास्त्र में मैंने पढ़ा है कि जो अहिंसक है उसके आसपास हिंसा नहीं होती । मेरा इस वचन पर पूरा पूरा विश्वास है । लेकिन मैं अपनी आंखों के सामने नित्य क्या देखता हूं १ पवनार में मेरे घर के सामने घाम नदी है। भागवतजी को मैंने वहाँ बुलाया है। वे ब्राह्मण और ब्राह्मण को अल्प-आहार और भरपूर स्नान से संतोष है । वह मैं उन्हें वहाँ दे सकता हूं।
हां, तो मैं कह रहा था कि उस नदी पर मैं एक दूसरा दृश्य भी देखता हूं। मछुए रोज वहां असंख्य मछलियाँ मारते हैं। मछुए परम उद्योगी हैं। उनके समान उद्योगी दूसरा कोई नहीं । सबेरे से शाम तक मछली मारने का उनका उद्योग बराबर चलता रहता है। और जब मछली नहीं मारते तो रास्ता चलते हुए भी अपना जाल गूंथते रहते हैं। मेरी आँखों के सामने यह हिंसा चलती रहती है। मैं सोचता हूं कि मैं भी कैसा योगी हूँ ।
मछुओं की व्यवसाय निष्ठा
एक दिन दगडू ( मेरा साथी) नंगे सिर और नंगे चदन नहाने. गया। मछुओं ने गिडगिडाकर उससे कहा, "महाराज, हमारे पेट पर न मारो !" वह आश्चर्य से पूछने लगा, "मैंने क्या किया, जिससे तुम्हारा पेट मारा गया ?" वे बोले, "तुम नंगे सिर आए । असगुन हो गया । अब. मछलियाँ पकड़ी नहीं जा सकेंगी । ऐसी करनी न करो महाराज । " उनकी ऐसी भावना है। वे हमारी अपेक्षा किसी कद्र कम नहीं। उनकी दृष्टि से तो वे ईश्वर स्मरणपूर्वक ही मछलियाँ मारते हैं। मैं उन्हें किस मुंह से कहूं कि, 'तुम मछलियाँ मत मारो !' क्या उनसे गणपतराव की दूकान से तेल खरीदने को कहूँ ? वे कहेंगे उसके लिए पैसे देने पड़ते हैं ।। मछलियों से बह यो ही मिल जाता है ।
वृत्ति परिवर्तन की आवश्यकता
मेरा मतलब यह है कि यदि हम गांवों में जाकर बैठे हैं तो हमें इसके लिए जोरों की कोशिश करनी चाहिए कि देहातों का रहन सहन कैसा ऊपर उठेगा और हमारा कैसे उतरेगा। लेकिन हम ज़रा-जरासी बातें भी तो नहीं करते। महीना हुआ, मेरे पैर में चोट लग गई है। किसी ने कहा उसे मरहम लगाओ । मरहम मेरे मुकाम पर आ भी पहुंचा। किसीने कहा मोम लगाओ, उससे ज्यादा फायदा होगा। मैंने निश्चय किया कि मरहम और मोम दोनों आखिर मिट्टी के ही वर्ग के तो है। इसलिए मिट्टी लगा ली। अभी पैर बिलकुल अच्छा नहीं हुआ है। लेकिन अब मजे में चल सकता हूँ । कल पवनार से यहाँतक चलकर आया और वापस मी पैदल ही गया । हमें मरहम जल्दी याद आएगा, लेकिन मिट्टी लगाना नहीं सूलेगा । उसमें हमारी श्रद्धा नहीं, विश्वास नहीं । यहाँ अभी यज्ञोपवीत की विधि हुई। यज्ञोपवीत सूर्य को दिखाकर धारण करना चाहिए । 'सूर्याय दर्शयित्वा' । यहाँ यह हुआ या नहीं मुझे पता नहीं । ( पुरोहितजी से) कहिये यहाँ 'सूर्याय दर्शयित्वा' हुआ कि नहीं ? ( पुरोहितजी बोले ) जी हां। हमारे सामने इतना बड़ा सूर्य खड़ा है। उसे अपना नंगा शरीर दिखाने की हमें बुद्धि नहीं होती । सूर्य के सामने अपना शरीर खुला करो। तुम्हारे सारे रोग भाग जायेंगे । लेकिन हम अपनी आदत से और शिक्षा से लाचार है। डॉक्टर कहेगा कि तुम्हें तपेदिक हो गया तब वही करेंगे ।
हम अपनी जरूरतें किस तरह कम कर सकेंगे, इसकी खोज करनी चाहिए। मैं यहाँ संन्यासी का धर्म नहीं बतला रहा हूँ । स्वासा गृहस्थ का धर्म बता रहा हूँ । ठंडी अबोहवा वाले देशों के डॉक्टर कहते हैं कि उन्हें 'कॉड लिव्हर ऑइल' दो। जहाँ सूर्य नहीं है ऐसे देशों में ( अनसनी क्कायमेट में) दूसरा चारा ही नहीं है। कॉड लिव्हर के बिना | के समय इस मंत्र का उच्चार जरूर करना चाहिए, क्योंकि हमारा भोजन केवल पेट भरने के लिए ही नहीं है। वह ज्ञान और सामर्थ्य की प्राति के लिए है। इतना ही नहीं, इस में यह भी मांग की गई है कि हमारा वह ज्ञान, वह सामर्थ्य और भोजन भगवान् एकत्र कराए । इस में केवल पालन की प्रार्थना है। शाला में जिस प्रकार गुरु और शिष्य होते हैं उसी प्रकार सर्वत्र द्वैत है। परिवार में पुरानी और नई पीढ़ी, समाज में में स्त्री-पुरुष, वृद्ध-तरुण, शिक्षित- अशिक्षित आदि भेद हैं। उस में फिर गरीब अमीर का भेद भी है। इस प्रकार सर्वत्र भेद नजर आता है। हमारे इस हिन्दुस्थान में तो असंख्य भेद हैं । यहाँ प्रांतभेद है । यहाँ का स्त्रीवर्ग बिलकुल अलग रहता है। इसलिए यहाँ स्त्री और पुरुष में भी बहुत बड़ा भेद है। हिन्दू और मुसलमानों का भेद तो प्रसिद्ध ही है । परन्तु हिन्दु- हिन्दुओं में भी हरिजन और दूसरों में भेद है। इस प्रकार हिन्दुस्थान में अपार भेद भरे हुए हैं। हिन्दुस्थान की तरह वे संसार में भी हैं। इसलिए इस मंत्र में यह प्रार्थना की गई है कि हमें "एकत्र तार, एकत्र मार उन्नीस मारने की प्रार्थना प्रायः कोई करता नहीं। इसलिए यहाँ एकत्र तारने की ही प्रार्थना है । लेकिन 'यदि तुझे मारना ही हो, तो कम से कम एकत्र मार' ऐसी प्रार्थना है। सारांश "हमें दूध देना है तो एकत्र दे, सूखी रोटी देना है तो भी एकत्र दे हमारे साथ जो कुछ करना है वह एकत्र कर " ऐसी प्रार्थना इस मंत्र में है। कैसे हो ? आज हिन्दुस्थान में एक बात सब के जीभ पर है। सभी कहते हैं कि यह भेद जितना कम करोगे उतना ही देश आगे बढ़ेगा । देहात के लोग, याने किसान या शहराती, गरीब और श्रीमान्, इनका अन्तर जितना कम होगा उतना हो देश का कदम आगे बढ़ेगा। इसके विषय में शायद ही किसी का मतभेद हो । लेकिन तो भी यह भेद, यह अन्तर, कम नहीं होता। अंतर दो तरह से काटा जा सकता है। ऊपरवालों के नांचे उतरने से और नीचेवालों के उपर उठने से। परंतु दोनों ओर मे. यह नहीं होता। हम सेवक कझते हैं। लेकिन किसान-मजदूरों की तुलना में तो चोटी पर ही हैं। दादाने कल अपने व्याख्यान में कहा--- मैं उनके शब्द नहीं हुडरा रहा हूं, उनका भावार्थ कह रहा हूं कि ये भोग और ऐश्वर्य भी चाहते हैं । भोगों की जरूरत है या नहीं, इस विवाद में पड़ने की यहाँ जरूरत नहीं । भोग ऐश्वर्य किसे कहें ? लेकिन सवाल यह है कि भोग और ऐश्वर्य कई किसे ? ऐश्वर्य कहे किसे ? में अच्छा सुग्रास भोजन करूं और पड़ोस में ही दूसरा भूखों मरता रहे, इसे ? उसकी नजर बराबर मेरे भोजन पर रहे और मैं उसकी परवाह न करूं ? उसके आक्रमण से अपनी थाली की रक्षा करने के लिये एक डंडा लेकर बैठूं ? मेरा सुझस भोजन और डंडा तथा उसकी भूख क्या इन्हें ऐश्वर्य मानें ? एक सजन मुझसे आकर कहने लगे कि "हम दो आदमी एकत्र भोजन करते हैं। परंतु हमारी निभ नहीं सकती ।" मैंने पूछा, "सो क्यों ?" उन्होंने जवाब दिया "मैं नारंगिया खाता हूं । वे नहीं लाते। वे नजदूर हैं। इसलिए वे नारंगियाँ खरीद नहीं सकते। इसलिए उनके साथ खाना मुझे अप्रशस्त लगता है। मैंने पूछा "लेकिन क्या अलग घर मे रहने से उनके पेट में नारंगियाँ चली जायंगी। आप दोनों में जो व्यवहार आज हो रहा रहा है वही ठीक है। जब तक दोनों साथ खाते हो तब तक दोनों के निकट आने की संभावना है। एखाध बार तुम उसे न रंगियाँ लेने का आग्रह भी करोगे । लेकिन यदि तुम दोनों के बीच सुरक्षितता की दोवाल खड़ी कर दी गई तो भेद चिरस्थायी हो जायगा । दीवाल को सुरक्षितता का साधन मानना कैसा भयंकर है। हिन्दुस्थान में हम सब कहते हैं, हमारे संतो ने तो पुकार पुकार कर कहा है कि ईश्वर सर्वसाश्री. है। फिर भी दीवाल की ओट में छिपने से क्या फायदा एक इससे दोनों का अंतर थोड़े ही घटेगा। सेवकों का भी यही हाल यही हाल हम खादीधारियों का भी है। जनता के अंदर अभी ग्वादी का प्रवेश ही नहीं हुआ है। इसलिए जितने खादीधारी हैं वे सब सेवक ही हैं। सादीधारियों का सम्मेलन सेवक वर्ग का मेला ही है। यह कहा जाता है कि हमें और आप को गांवों में जाना चाहिए। लेकिन देहात में जाने पर भी वहाँ के लोगों को जहां सूखी रोटी भी नहीं मिलती तहा मैं पूड़ी खाता हूं। मेरा घी ग्वाना उस भूखे को खटकता है । आज भी किसान कहता है कि अगर मुझे पेटभर मिल जाय तो तेरे घी की मुझे पूर्वा नहीं । मुझे तेल ही मिलता रहे तो भी तसली है । यह मेद उसे भले ही न अखरता हो, लेकिन हम सेवकों को बहुत अखरना है। लेकिन, इस तरह कब तक चलता रहेगा। दुबला-पतला जीव था, इस साल मुटिया गया हूं। · खटकता है। मैं भी उन्हीं लोगों जैसा दुबला-पतला हूं यह संतोप अब जाता रहा। पहले मेरे गाल उनके जैसे चिपके थे। अब तो मेरे शरीर पर मुख छा गई है । देहाती रहन सहन में सुधार या टंगी हुई एक तख्ती पर लिखा है कि आवश्यकताएँ बढ़ाते रहना सभ्यता का लक्षण नहीं है बल्कि आवश्यकताओं का संरक्षण सभ्यता का लक्षण है । तो भी मैं कहता हूं कि देहातियों की आवश्यकताएँ बढ़नी चाहिए। वे मुधारनी भी चाहिए। लेकिन उनकी आवश्यकताएँ आज तो पूरी ही नहीं होती। उनका रहन-सहन बिलकुल गिरा हुआ है। उनके जीवन का मान बढ़ना चाहिए। मोटे हिसाब से तो यही कहना पडेगा कि आज हमारे गरीब देशतियों की आवश्यकताएँ बढ़नी चाहिए । मधुओं का हान्त योगशास्त्र में मैंने पढ़ा है कि जो अहिंसक है उसके आसपास हिंसा नहीं होती । मेरा इस वचन पर पूरा पूरा विश्वास है । लेकिन मैं अपनी आंखों के सामने नित्य क्या देखता हूं एक पवनार में मेरे घर के सामने घाम नदी है। भागवतजी को मैंने वहाँ बुलाया है। वे ब्राह्मण और ब्राह्मण को अल्प-आहार और भरपूर स्नान से संतोष है । वह मैं उन्हें वहाँ दे सकता हूं। हां, तो मैं कह रहा था कि उस नदी पर मैं एक दूसरा दृश्य भी देखता हूं। मछुए रोज वहां असंख्य मछलियाँ मारते हैं। मछुए परम उद्योगी हैं। उनके समान उद्योगी दूसरा कोई नहीं । सबेरे से शाम तक मछली मारने का उनका उद्योग बराबर चलता रहता है। और जब मछली नहीं मारते तो रास्ता चलते हुए भी अपना जाल गूंथते रहते हैं। मेरी आँखों के सामने यह हिंसा चलती रहती है। मैं सोचता हूं कि मैं भी कैसा योगी हूँ । मछुओं की व्यवसाय निष्ठा एक दिन दगडू नंगे सिर और नंगे चदन नहाने. गया। मछुओं ने गिडगिडाकर उससे कहा, "महाराज, हमारे पेट पर न मारो !" वह आश्चर्य से पूछने लगा, "मैंने क्या किया, जिससे तुम्हारा पेट मारा गया ?" वे बोले, "तुम नंगे सिर आए । असगुन हो गया । अब. मछलियाँ पकड़ी नहीं जा सकेंगी । ऐसी करनी न करो महाराज । " उनकी ऐसी भावना है। वे हमारी अपेक्षा किसी कद्र कम नहीं। उनकी दृष्टि से तो वे ईश्वर स्मरणपूर्वक ही मछलियाँ मारते हैं। मैं उन्हें किस मुंह से कहूं कि, 'तुम मछलियाँ मत मारो !' क्या उनसे गणपतराव की दूकान से तेल खरीदने को कहूँ ? वे कहेंगे उसके लिए पैसे देने पड़ते हैं ।। मछलियों से बह यो ही मिल जाता है । वृत्ति परिवर्तन की आवश्यकता मेरा मतलब यह है कि यदि हम गांवों में जाकर बैठे हैं तो हमें इसके लिए जोरों की कोशिश करनी चाहिए कि देहातों का रहन सहन कैसा ऊपर उठेगा और हमारा कैसे उतरेगा। लेकिन हम ज़रा-जरासी बातें भी तो नहीं करते। महीना हुआ, मेरे पैर में चोट लग गई है। किसी ने कहा उसे मरहम लगाओ । मरहम मेरे मुकाम पर आ भी पहुंचा। किसीने कहा मोम लगाओ, उससे ज्यादा फायदा होगा। मैंने निश्चय किया कि मरहम और मोम दोनों आखिर मिट्टी के ही वर्ग के तो है। इसलिए मिट्टी लगा ली। अभी पैर बिलकुल अच्छा नहीं हुआ है। लेकिन अब मजे में चल सकता हूँ । कल पवनार से यहाँतक चलकर आया और वापस मी पैदल ही गया । हमें मरहम जल्दी याद आएगा, लेकिन मिट्टी लगाना नहीं सूलेगा । उसमें हमारी श्रद्धा नहीं, विश्वास नहीं । यहाँ अभी यज्ञोपवीत की विधि हुई। यज्ञोपवीत सूर्य को दिखाकर धारण करना चाहिए । 'सूर्याय दर्शयित्वा' । यहाँ यह हुआ या नहीं मुझे पता नहीं । कहिये यहाँ 'सूर्याय दर्शयित्वा' हुआ कि नहीं ? जी हां। हमारे सामने इतना बड़ा सूर्य खड़ा है। उसे अपना नंगा शरीर दिखाने की हमें बुद्धि नहीं होती । सूर्य के सामने अपना शरीर खुला करो। तुम्हारे सारे रोग भाग जायेंगे । लेकिन हम अपनी आदत से और शिक्षा से लाचार है। डॉक्टर कहेगा कि तुम्हें तपेदिक हो गया तब वही करेंगे । हम अपनी जरूरतें किस तरह कम कर सकेंगे, इसकी खोज करनी चाहिए। मैं यहाँ संन्यासी का धर्म नहीं बतला रहा हूँ । स्वासा गृहस्थ का धर्म बता रहा हूँ । ठंडी अबोहवा वाले देशों के डॉक्टर कहते हैं कि उन्हें 'कॉड लिव्हर ऑइल' दो। जहाँ सूर्य नहीं है ऐसे देशों में दूसरा चारा ही नहीं है। कॉड लिव्हर के बिना |
मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले के ख़िलाफ़ तृणमूल कांग्रेस ने बुधवार को संसद भवन से राष्ट्रपति भवन तक मार्च किया।
तृणमूल कांग्रेस के इस मार्च में बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिवसेना के सांसद भी शामिल हुए। आम आदमी पार्टी के सांसद भगवंत मान ने भी इस मार्च में हिस्सा लिया।
नोटबंदी के चलते आम लोगों को हो रही परेशानी पर तृणमूल कांग्रेस नेता और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि यह आम लोगों की लड़ाई है जिसपर दलगत राजनीति से उपर उठकर सभी पार्टियों को साथ आना चाहिए।
ममता बैनर्जी ने कहा कि सरकार के इस जनविरोधी फैसले के खिलाफ मैं सबको साथ लेकर चलना चाहती हूं। इसके लिए मैंने समाजवादी पार्टी नेता मुलायम सिंह यादव, राजष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को भी फोन किया था। नई दिल्ली रवाना होने से पहले कोलकाता में हवाई अड्डे पर संवाददाताओं से ममता ने कहा था कि नोटबंदी के मुद्दे पर मैं राष्ट्रपति से मिलूंगी। मैं अपने 40 सांसदों के साथ उनसे मिलने जाऊंगी। मैंने विभिन्न राजनीतिक दलों से बात की है। अगर वे मेरे साथ चलना चाहते हैं, तो अच्छी बात है। अगर नहीं तो मैं अपने सांसदों के साथ ही जाऊंगी। बनर्जी ने संवाददाताओं से कहा कि सरकार के इस फैसले से आम जनता बेहद परेशान हो रही है। कोई भी फैसला लेने से पहले उसके असर का आंकलन करना चाहिए लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया।
| मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले के ख़िलाफ़ तृणमूल कांग्रेस ने बुधवार को संसद भवन से राष्ट्रपति भवन तक मार्च किया। तृणमूल कांग्रेस के इस मार्च में बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिवसेना के सांसद भी शामिल हुए। आम आदमी पार्टी के सांसद भगवंत मान ने भी इस मार्च में हिस्सा लिया। नोटबंदी के चलते आम लोगों को हो रही परेशानी पर तृणमूल कांग्रेस नेता और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि यह आम लोगों की लड़ाई है जिसपर दलगत राजनीति से उपर उठकर सभी पार्टियों को साथ आना चाहिए। ममता बैनर्जी ने कहा कि सरकार के इस जनविरोधी फैसले के खिलाफ मैं सबको साथ लेकर चलना चाहती हूं। इसके लिए मैंने समाजवादी पार्टी नेता मुलायम सिंह यादव, राजष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को भी फोन किया था। नई दिल्ली रवाना होने से पहले कोलकाता में हवाई अड्डे पर संवाददाताओं से ममता ने कहा था कि नोटबंदी के मुद्दे पर मैं राष्ट्रपति से मिलूंगी। मैं अपने चालीस सांसदों के साथ उनसे मिलने जाऊंगी। मैंने विभिन्न राजनीतिक दलों से बात की है। अगर वे मेरे साथ चलना चाहते हैं, तो अच्छी बात है। अगर नहीं तो मैं अपने सांसदों के साथ ही जाऊंगी। बनर्जी ने संवाददाताओं से कहा कि सरकार के इस फैसले से आम जनता बेहद परेशान हो रही है। कोई भी फैसला लेने से पहले उसके असर का आंकलन करना चाहिए लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया। |
बकिरकोय किराज़्ली मेट्रो का शिलान्यास समारोह हुआः बकिरकोय किराज़्ली मेट्रो लाइन का ग्राउंडब्रेकिंग समारोह, जो कि बासिक्लर और बकिरकोय के बीच परिवहन को 13.5 मिनट तक कम कर देगा, आज प्रधान मंत्री बिनाली यिल्दिरिम की भागीदारी के साथ हुआ।
Bağcılar 2018-किलोमीटर Kirazlı Bakırköy (IDO) मेट्रो लाइन के साथ Bakırköy तट से जुड़ा होगा, जिसका निर्माण पूरा हो जाएगा और जून 9 में सेवा में आ जाएगा। इसके अलावा, लाइन, जिसे किराज़्ली-बाकासेहिर मेट्रो लाइन की निरंतरता के रूप में योजनाबद्ध किया गया है, जून 2018 में सेवा में आने पर बासिक्लर और बकिरकोय के बीच घनत्व को कम कर देगा।
लाइन, जो कि बकिरकोय मेदान में मारमार के साथ एकीकृत है, ncirli में येनिकापी बस टर्मिनल एयरपोर्ट लाइन से जुड़ी होगी।
यह apncirli में Yenikapı-bencirli-Sefaköy मेट्रो लाइन में एकीकृत किया जाएगा। 9 किलोमीटर की लंबाई के साथ, लाइन की यात्री क्षमता 70 हजार है और यात्रा का समय 13.5 मिनट है।
लाइन पर स्टेशन; बेकिरॉय आईडीओ, फ्रीडम स्क्वायर, ज़ुहुरतबाबा, इंक्लेरी, हज़ेदार, इलियुवा, यिल्दिज़ेप्टे, मोलगुरानी और किर्ज़ली के रूप में होगा। Kirazlı-Bakırköy roDO मेट्रो लाइन की अनुमानित लागत को एक्सएनएक्सएक्स टीएल के रूप में घोषित किया गया था।
Bakırköy-Kirazlı Metro के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए, प्रधान मंत्री बीनाली Yıldırım ने भाषण के बाद ग्राउंडब्रेकिंग प्रक्रिया शुरू की।
समारोह; परिवहन मंत्री, समुद्री मामलों और संचार मंत्री अहमत अर्सलान, इस्तांबुल के उप और एके पार्टी के उपाध्यक्ष हयाती याज़िक और एके पार्टी इस्तांबुल के प्रतिनिधि हारुन काराका, एक्रेम एर्डेम, मेहमत मुस, सेराप यासर, रवाज़ा कावस्की कान, सिरिन उनल और हैलीस डलिक्लिक, इस्तांबुल के मेयर Kadir Topbaş, Bağcılar मेयर Lokman ğağırıcı, Bahçelievler मेयर Osman Develioğlu, Fatih मेयर Mustafa डेमीर और कई अन्य जिला महापौर, साथ ही AK पार्टी यूथ शाखाओं Melih Ecertaş के अध्यक्ष और AK पार्टी पार्टी इस्तांबुल युवा चेयरमैन यूटा। ताहा अहान ने भी शिरकत की।
| बकिरकोय किराज़्ली मेट्रो का शिलान्यास समारोह हुआः बकिरकोय किराज़्ली मेट्रो लाइन का ग्राउंडब्रेकिंग समारोह, जो कि बासिक्लर और बकिरकोय के बीच परिवहन को तेरह दशमलव पाँच मिनट तक कम कर देगा, आज प्रधान मंत्री बिनाली यिल्दिरिम की भागीदारी के साथ हुआ। Bağcılar दो हज़ार अट्ठारह-किलोमीटर Kirazlı Bakırköy मेट्रो लाइन के साथ Bakırköy तट से जुड़ा होगा, जिसका निर्माण पूरा हो जाएगा और जून नौ में सेवा में आ जाएगा। इसके अलावा, लाइन, जिसे किराज़्ली-बाकासेहिर मेट्रो लाइन की निरंतरता के रूप में योजनाबद्ध किया गया है, जून दो हज़ार अट्ठारह में सेवा में आने पर बासिक्लर और बकिरकोय के बीच घनत्व को कम कर देगा। लाइन, जो कि बकिरकोय मेदान में मारमार के साथ एकीकृत है, ncirli में येनिकापी बस टर्मिनल एयरपोर्ट लाइन से जुड़ी होगी। यह apncirli में Yenikapı-bencirli-Sefaköy मेट्रो लाइन में एकीकृत किया जाएगा। नौ किलोग्राममीटर की लंबाई के साथ, लाइन की यात्री क्षमता सत्तर हजार है और यात्रा का समय तेरह दशमलव पाँच मिनट है। लाइन पर स्टेशन; बेकिरॉय आईडीओ, फ्रीडम स्क्वायर, ज़ुहुरतबाबा, इंक्लेरी, हज़ेदार, इलियुवा, यिल्दिज़ेप्टे, मोलगुरानी और किर्ज़ली के रूप में होगा। Kirazlı-Bakırköy roDO मेट्रो लाइन की अनुमानित लागत को एक्सएनएक्सएक्स टीएल के रूप में घोषित किया गया था। Bakırköy-Kirazlı Metro के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए, प्रधान मंत्री बीनाली Yıldırım ने भाषण के बाद ग्राउंडब्रेकिंग प्रक्रिया शुरू की। समारोह; परिवहन मंत्री, समुद्री मामलों और संचार मंत्री अहमत अर्सलान, इस्तांबुल के उप और एके पार्टी के उपाध्यक्ष हयाती याज़िक और एके पार्टी इस्तांबुल के प्रतिनिधि हारुन काराका, एक्रेम एर्डेम, मेहमत मुस, सेराप यासर, रवाज़ा कावस्की कान, सिरिन उनल और हैलीस डलिक्लिक, इस्तांबुल के मेयर Kadir Topbaş, Bağcılar मेयर Lokman ğağırıcı, Bahçelievler मेयर Osman Develioğlu, Fatih मेयर Mustafa डेमीर और कई अन्य जिला महापौर, साथ ही AK पार्टी यूथ शाखाओं Melih Ecertaş के अध्यक्ष और AK पार्टी पार्टी इस्तांबुल युवा चेयरमैन यूटा। ताहा अहान ने भी शिरकत की। |
हिमाचल प्रदेश दृष्टि दिव्यांग कर्मचारी कल्याण संघ के राज्य वरिष्ठ उपाध्यक्ष संदीप शर्मा, राज्य मीडिया प्रभारी मदन ठाकुर एवं जिला मंडी इकाई के अध्यक्ष दिनेश वर्मा द्वारा मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मांग की है कि हिमाचल प्रदेश में बैकलॉग कोटे पर नियुक्त विभिन्न श्रेणियों के दृष्टि दिव्यांग कर्मचारियों को प्रथम नियुक्ति तिथि से वरिष्ठता एवं अन्य लाभ दिए जाएं। उन्होंने कहा कि पूर्व में आठ वर्ष के अनुबंध के बाद कर्मचारी नियमित हुए हैं, जिसके कारण वर्तमान में कर्मचारियों की वरिष्ठता ने भी विसंगतियां पैदा हो गई हैं। इसके लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मांग की है कि शीघ्र प्रथम नियुक्ति तिथि से दिव्यांग कर्मचारियों को वरिष्ठता प्रदान की जाए। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के अनुरूप हिमाचल प्रदेश में तमाम बैकलॉग कोटे के पदों को शीघ्र अति शीघ्र विभिन्न विभागों में भरा जाए और उन्हें तुरंत प्रभाव से नियुक्त पत्र जारी किए जाएं, ताकि दिव्यांग बेरोजगारों को लाभ मिल सके।
| हिमाचल प्रदेश दृष्टि दिव्यांग कर्मचारी कल्याण संघ के राज्य वरिष्ठ उपाध्यक्ष संदीप शर्मा, राज्य मीडिया प्रभारी मदन ठाकुर एवं जिला मंडी इकाई के अध्यक्ष दिनेश वर्मा द्वारा मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मांग की है कि हिमाचल प्रदेश में बैकलॉग कोटे पर नियुक्त विभिन्न श्रेणियों के दृष्टि दिव्यांग कर्मचारियों को प्रथम नियुक्ति तिथि से वरिष्ठता एवं अन्य लाभ दिए जाएं। उन्होंने कहा कि पूर्व में आठ वर्ष के अनुबंध के बाद कर्मचारी नियमित हुए हैं, जिसके कारण वर्तमान में कर्मचारियों की वरिष्ठता ने भी विसंगतियां पैदा हो गई हैं। इसके लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मांग की है कि शीघ्र प्रथम नियुक्ति तिथि से दिव्यांग कर्मचारियों को वरिष्ठता प्रदान की जाए। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम दो हज़ार सोलह के अनुरूप हिमाचल प्रदेश में तमाम बैकलॉग कोटे के पदों को शीघ्र अति शीघ्र विभिन्न विभागों में भरा जाए और उन्हें तुरंत प्रभाव से नियुक्त पत्र जारी किए जाएं, ताकि दिव्यांग बेरोजगारों को लाभ मिल सके। |
अपने मां-बाप के सपनों को साकार करने एक छात्र पढ़ाई के लिए मवाना रोड स्थित जेपी इंस्टीट्यूट मेरठ आया था। कॉलेज के सामने बस से उतरा ही था कि पीछे से आई एक बेकाबू बस ने उसे कुचल दिया। इस बस ने कई और वाहनों को भी टक्कर मारी। आखिर में बस को पकड़ लिया गया। पुलिस की भी संवेदनहीनता देखने को मिली। अपने साथी की मौत सडक़ पर उतरे छात्रों पर पुलिस ने बर्बरता से लाठियां भांजी।
तारापुर रामराज थाना हस्तिनापुर के तुलसीराम का बेटा शुभम (16) जेपी इंस्टीट्यूट से इंजीनियरिंग कर रहा था। तुलसीराम का यह छोटा बेटा था। बड़ा बेटा दिनेश रामराज में मोबाइल की शॉप करता है। शुभम ने 20 दिन पहले ही यहां बीटेक सिविल इंजीनियरिंग ब्रांच में एडमिशन लिया था। रोज बस से आता जाता था। वह रोज-रोज आने-जाने से परेशान था। एक सितंबर से हॉस्टल में रहने की तैयारी कर रहा था। रोज की तरह गुरुवार को भी वह बस से अपने इंस्टीट्यूट आया था।
शुभम सुबह अपने इंस्टीट्यूट के सामने बस से उतरा। अपने इंस्टीट्यूट की ओर बढ़ा। तभी एक तेज रफ्तार बस यूपी 23एच 9198 आई और उसके कुचलते हुए निकल गई। बस का पहिया उसक सिर से होकर गुजरा। बस यूपी 23एच 9198 आई और उसके कुचलते हुए निकल गई। बस का पहिया उसक सिर से होकर गुजरा। बस को पकडऩे के लिए लोगों ने शोर भी मचाया लेकिन बस निकल गई थी। यह बस पहले मवाना में किसी बाइक सवार को टक्कर मारकर आई थी और फिर इसने स्कूटर को टक्कर मारी। यहां शुभम को कुचलकर आगे गई तो एक ट्रैक्टर ट्रॉली को टक्कर मारी।
इस का ड्राइवर बेखौफ लोगों को रास्ते में उड़ाता चला जा रहा था। बस में सवार लोगों ने उसे रोकने के लिए भी कहा लेकिन वह बस नहीं रोक रहा था। पुलिस को सूचना दी गई। फिर पुलिस ने गंगानगर चौकी पर बैरियर लगाकर इस बस को पकड़ लिया। ड्राइवर को पुलिस ने कब्जे में ले लिया। उधर सडक़ पर पड़ी शुभम की लाश के पास उसके साथी इकट्ठा हो गए। कॉलेज के लोग भी पहुंच गए। काफी देर तक सडक़ पर जाम लगाया गया। कार्रवाई की मांग की गई।
सडक़ पर जाम की सूचना पर पुलिस पहुंच गई। एएसपी राहुल चौधरी भी पहुंच गए। सडक़ पर बैठे छात्रों ने आरोपी बस चालक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। थोड़ा हंगामा किया तो पुलिस ने लाठियां बरसाईं। शुभम के शव को उठाकर मोर्चरी भिजवा दिया। शुभम के परिजनों का कहना है कि एक तो उनका लाल चला गया। वहीं पुलिस की लाठियां भी खानी पड़ीं। साथ ही कई लोगों को थाने ले गई।
| अपने मां-बाप के सपनों को साकार करने एक छात्र पढ़ाई के लिए मवाना रोड स्थित जेपी इंस्टीट्यूट मेरठ आया था। कॉलेज के सामने बस से उतरा ही था कि पीछे से आई एक बेकाबू बस ने उसे कुचल दिया। इस बस ने कई और वाहनों को भी टक्कर मारी। आखिर में बस को पकड़ लिया गया। पुलिस की भी संवेदनहीनता देखने को मिली। अपने साथी की मौत सडक़ पर उतरे छात्रों पर पुलिस ने बर्बरता से लाठियां भांजी। तारापुर रामराज थाना हस्तिनापुर के तुलसीराम का बेटा शुभम जेपी इंस्टीट्यूट से इंजीनियरिंग कर रहा था। तुलसीराम का यह छोटा बेटा था। बड़ा बेटा दिनेश रामराज में मोबाइल की शॉप करता है। शुभम ने बीस दिन पहले ही यहां बीटेक सिविल इंजीनियरिंग ब्रांच में एडमिशन लिया था। रोज बस से आता जाता था। वह रोज-रोज आने-जाने से परेशान था। एक सितंबर से हॉस्टल में रहने की तैयारी कर रहा था। रोज की तरह गुरुवार को भी वह बस से अपने इंस्टीट्यूट आया था। शुभम सुबह अपने इंस्टीट्यूट के सामने बस से उतरा। अपने इंस्टीट्यूट की ओर बढ़ा। तभी एक तेज रफ्तार बस यूपी तेईसएच नौ हज़ार एक सौ अट्ठानवे आई और उसके कुचलते हुए निकल गई। बस का पहिया उसक सिर से होकर गुजरा। बस यूपी तेईसएच नौ हज़ार एक सौ अट्ठानवे आई और उसके कुचलते हुए निकल गई। बस का पहिया उसक सिर से होकर गुजरा। बस को पकडऩे के लिए लोगों ने शोर भी मचाया लेकिन बस निकल गई थी। यह बस पहले मवाना में किसी बाइक सवार को टक्कर मारकर आई थी और फिर इसने स्कूटर को टक्कर मारी। यहां शुभम को कुचलकर आगे गई तो एक ट्रैक्टर ट्रॉली को टक्कर मारी। इस का ड्राइवर बेखौफ लोगों को रास्ते में उड़ाता चला जा रहा था। बस में सवार लोगों ने उसे रोकने के लिए भी कहा लेकिन वह बस नहीं रोक रहा था। पुलिस को सूचना दी गई। फिर पुलिस ने गंगानगर चौकी पर बैरियर लगाकर इस बस को पकड़ लिया। ड्राइवर को पुलिस ने कब्जे में ले लिया। उधर सडक़ पर पड़ी शुभम की लाश के पास उसके साथी इकट्ठा हो गए। कॉलेज के लोग भी पहुंच गए। काफी देर तक सडक़ पर जाम लगाया गया। कार्रवाई की मांग की गई। सडक़ पर जाम की सूचना पर पुलिस पहुंच गई। एएसपी राहुल चौधरी भी पहुंच गए। सडक़ पर बैठे छात्रों ने आरोपी बस चालक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। थोड़ा हंगामा किया तो पुलिस ने लाठियां बरसाईं। शुभम के शव को उठाकर मोर्चरी भिजवा दिया। शुभम के परिजनों का कहना है कि एक तो उनका लाल चला गया। वहीं पुलिस की लाठियां भी खानी पड़ीं। साथ ही कई लोगों को थाने ले गई। |
सीखने और शिक्षित होने की कोई उम्र नहीं होती। इस कहावत को सच कर दिखाया है बुलंदशहर की 92 साल की दादी सलीमा ने। जीवन के 92 वर्ष पूरे कर चुकीं सलीमा भारत सरकार द्वारा आयोजित नवभारत साक्षरता परीक्षा उत्तीर्ण कर अपनी बहू के साथ साक्षर हो गई हैं। भारत सरकार द्वारा देशभर में सभी को शिक्षित और साक्षर बनाने के लिए नवभारत साक्षर मिशन चलाया गया है। उस योजना के तहत उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में एक प्राइमरी स्कूल के प्रिंसिपल को निरीक्षकों को साक्षर बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. आचार्य प्रतिभा शर्मा ने 92 वर्षीय इंस्पेक्टर दादी सलीमा को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। इसके बाद सलीमा अपनी 35 साल की बहू फिरदौस के साथ स्कूल चली गईं. परीक्षा उत्तीर्ण कर सलीमा अब साक्षर हो गयी है।
बुलन्दशहर के जिलाधिकारी ने बताया कि जिले में 21 हजार निरक्षरों को साक्षर करने का लक्ष्य है. पहले चरण में 9 हजार निरक्षरों के लिए 24 सितंबर को परीक्षा हुई थी. 92 साल की सलीमा ने परीक्षा देकर साक्षर होकर उत्तर प्रदेश में इतिहास रच दिया है. परिवार ने सरकार का शुक्रिया भी अदा किया है.
1931 में जब सलीमा खान का जन्म हुआ तो गांव में कोई स्कूल नहीं था। औपनिवेशिक युग की समाप्ति से पहले 14 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई थी। लेकिन उनका सपना साक्षर बनने का था. सलीमा ने बताया कि जब वह छोटी थीं तो गांव में कोई स्कूल नहीं था. छह महीने पहले उन्होंने अपने से 80 साल छोटे बच्चों के बीच पढ़ाई शुरू की. उनकी 35 वर्षीय बहू भी उनके साथ स्कूल जाती थी। उनका 1 से 100 तक गिनती करने का वीडियो वायरल हो गया था. सलीमा ने बताया कि उन्हें नोट गिनना नहीं आता था इसलिए वह पोते-पोतियों को पॉकेट मनी देते हुए दादी बना देती थीं। दादी ने कहा कि अब वे दिन चले गए। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में निरक्षरता दर 73 प्रतिशत है।
| सीखने और शिक्षित होने की कोई उम्र नहीं होती। इस कहावत को सच कर दिखाया है बुलंदशहर की बानवे साल की दादी सलीमा ने। जीवन के बानवे वर्ष पूरे कर चुकीं सलीमा भारत सरकार द्वारा आयोजित नवभारत साक्षरता परीक्षा उत्तीर्ण कर अपनी बहू के साथ साक्षर हो गई हैं। भारत सरकार द्वारा देशभर में सभी को शिक्षित और साक्षर बनाने के लिए नवभारत साक्षर मिशन चलाया गया है। उस योजना के तहत उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में एक प्राइमरी स्कूल के प्रिंसिपल को निरीक्षकों को साक्षर बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. आचार्य प्रतिभा शर्मा ने बानवे वर्षीय इंस्पेक्टर दादी सलीमा को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। इसके बाद सलीमा अपनी पैंतीस साल की बहू फिरदौस के साथ स्कूल चली गईं. परीक्षा उत्तीर्ण कर सलीमा अब साक्षर हो गयी है। बुलन्दशहर के जिलाधिकारी ने बताया कि जिले में इक्कीस हजार निरक्षरों को साक्षर करने का लक्ष्य है. पहले चरण में नौ हजार निरक्षरों के लिए चौबीस सितंबर को परीक्षा हुई थी. बानवे साल की सलीमा ने परीक्षा देकर साक्षर होकर उत्तर प्रदेश में इतिहास रच दिया है. परिवार ने सरकार का शुक्रिया भी अदा किया है. एक हज़ार नौ सौ इकतीस में जब सलीमा खान का जन्म हुआ तो गांव में कोई स्कूल नहीं था। औपनिवेशिक युग की समाप्ति से पहले चौदह साल की उम्र में उनकी शादी हो गई थी। लेकिन उनका सपना साक्षर बनने का था. सलीमा ने बताया कि जब वह छोटी थीं तो गांव में कोई स्कूल नहीं था. छह महीने पहले उन्होंने अपने से अस्सी साल छोटे बच्चों के बीच पढ़ाई शुरू की. उनकी पैंतीस वर्षीय बहू भी उनके साथ स्कूल जाती थी। उनका एक से एक सौ तक गिनती करने का वीडियो वायरल हो गया था. सलीमा ने बताया कि उन्हें नोट गिनना नहीं आता था इसलिए वह पोते-पोतियों को पॉकेट मनी देते हुए दादी बना देती थीं। दादी ने कहा कि अब वे दिन चले गए। दो हज़ार ग्यारह की जनगणना के अनुसार भारत में निरक्षरता दर तिहत्तर प्रतिशत है। |
अक्टूबर की शुरुआत में, प्राइम वीडियो ने दर्शकों को अपनी आगामी हॉरर फिल्म "छोरी" के मोशन पोस्टर के साथ एक विजुअल ट्रीट दी थी और आज निर्माताओं ने टीज़र रिलीज़ कर दिया है जिसके जरिये छोरी की दुनिया की एक झलक साझा की गई है। टीज़र शहर से एक सुनसान गांव तक साक्षी (नुसरत भरुचा द्वारा अभिनीत) के सफ़र के बारे में है, जहां वह कई पैरानॉर्मल चीजों का अनुभव करती है। यह फिल्म 26 नवंबर को प्राइम वीडियो पर भारत और दुनियाभर के 240 देशों और क्षेत्रों में रिलीज होने के लिए तैयार है। टीज़र में रोंगटे खड़े कर देने वाले डरावनी झलक दिखाई गयी है जिसने फ़िल्म के प्रति सभी को अधिक प्रत्याशित कर दिया है! गाँव में उनके द्वारा देखे जाने वाले सभी ड्रामा के पीछे का रहस्य ही छोरी को एक बेहद दिलचस्प वॉच बनाता है।
विशाल फुरिया द्वारा निर्देशित और भूषण कुमार, कृष्णन कुमार, विक्रम मल्होत्रा, जैक डेविस और शिखा शर्मा द्वारा निर्मित, छोरी मराठी फिल्म लपाछपी की रीमेक है और इसमें नुसरत भरुचा की मुख्य भूमिका के साथ-साथ मीता वशिष्ठ, राजेश जायस, सौरभ गोयल और यानिया भारद्वाज अहम किरदार निभा रही हैं।
"छोरी" एक ऐसी रोमांचक थ्रिलर है जो अपने टीजर से एक बेहतरीन फिल्म होने के वादा करती दिख रही है।
| अक्टूबर की शुरुआत में, प्राइम वीडियो ने दर्शकों को अपनी आगामी हॉरर फिल्म "छोरी" के मोशन पोस्टर के साथ एक विजुअल ट्रीट दी थी और आज निर्माताओं ने टीज़र रिलीज़ कर दिया है जिसके जरिये छोरी की दुनिया की एक झलक साझा की गई है। टीज़र शहर से एक सुनसान गांव तक साक्षी के सफ़र के बारे में है, जहां वह कई पैरानॉर्मल चीजों का अनुभव करती है। यह फिल्म छब्बीस नवंबर को प्राइम वीडियो पर भारत और दुनियाभर के दो सौ चालीस देशों और क्षेत्रों में रिलीज होने के लिए तैयार है। टीज़र में रोंगटे खड़े कर देने वाले डरावनी झलक दिखाई गयी है जिसने फ़िल्म के प्रति सभी को अधिक प्रत्याशित कर दिया है! गाँव में उनके द्वारा देखे जाने वाले सभी ड्रामा के पीछे का रहस्य ही छोरी को एक बेहद दिलचस्प वॉच बनाता है। विशाल फुरिया द्वारा निर्देशित और भूषण कुमार, कृष्णन कुमार, विक्रम मल्होत्रा, जैक डेविस और शिखा शर्मा द्वारा निर्मित, छोरी मराठी फिल्म लपाछपी की रीमेक है और इसमें नुसरत भरुचा की मुख्य भूमिका के साथ-साथ मीता वशिष्ठ, राजेश जायस, सौरभ गोयल और यानिया भारद्वाज अहम किरदार निभा रही हैं। "छोरी" एक ऐसी रोमांचक थ्रिलर है जो अपने टीजर से एक बेहतरीन फिल्म होने के वादा करती दिख रही है। |
धारा रूप में बहते हैं। इन्द्र के इस महान कार्य का ऋ. १.३२ में ब्योरेवार वर्णन है, जिसके प्रथम दो मन्त्र हैं -
आज करूंगा इन्द्र वीर कार्यों का मैं निज मति से प्रवचन । जिन अग्रगण्य कार्यों को वह वज्री करता रहता क्षरण क्षरण ।। हिका हनन, वारिका तर्दन (मेघ फटे, वारि-राशि निःसृत ) । हुईं प्रवाहित पर्वत-भेदन करके वाहिनियां गति-स्पन्दित ।। उसने पर्वत के प्राश्रय में स्थित उस अहि का कर दिया हनन । त्वष्टा ने उसके हित तक्षित किया वज्र निर्घोष-परायण ।। जैसे वत्सों के प्रति उत्सुक गौएं द्रुतगति चलें रँभाती ।
बहीं वारि की ये धाराएं, जो समुद्र में जा मिल जातीं ॥ वेद-मन्त्रों के वर्णनों से यह निःसन्देह सिद्ध होता है कि इन्द्र वृत्र युद्ध किसी विशिष्ट प्राकृतिक दृश्य का रूपकात्मक वर्णन है । जब इन्द्र वृत्र का वध करता है, तब द्युलोक तथा पृथ्वी लोक कांपने लगते हैं । इन्द्र वृत्र का वध केवल एक बार नहीं करता, पुनः पुनः करता है, और उससे यह प्रार्थना की जाती है कि भविष्य में भी सदा करता रहे, जिससे कि जल बन्धन से छूटें । प्राचीन वेद-व्याख्याकार भी यह कहते हैं कि यह तडिज्भंझा का देवता है, तथा बादल ही पर्वत हैं जिनमें जल निरुद्ध है, इन बादलों में प्रवृष्टि का दैत्य वृत्र जलों को रोके रखता है। अधिकांश यूरोपीय देवशास्त्री इस सम्मति से सहमत हैं तथा उनका कथन है कि इस इन्द्र वृत्र युद्ध का प्राग्रूप प्रागैतिहासिक भारत-यूरोपीय काल में देखा जा सकता है । इन्द्र ट्यूटोनिक ( गर्जन रूपी हथौड़ा) ही वज्र है । सर्प के साथ युद्ध तडिज्भंझा का वर्णन है। हिलब्रांड इस गाथा में एक अन्य रूपक देखता है । उसके मत में वृत्र शीत- दैत्य है और इन्द्र सूर्य देव तथा इन्द्र जिन जल धाराओं को मुक्ति दिलवाता है, वे वृष्टि-जल-धाराएं नहीं हैं, अपितु भारत के उत्तमपश्चिम की नदियां हैं जो शीतकाल में सूख जाती हैं तथा सूर्य के द्वारा हिमालय के हिम के पिघलने पर जल-पूर हो जाती हैं ।
संभव है कि इन्द्र वृत्र - युद्ध में उपरिलिखित प्रकार हों, परन्तु यह निश्चित है वैदिक कवियों को प्रकृति की शक्तियों के रूप में इन्द्र वृत्र का स्पष्ट ज्ञान नहीं था । उनके लिए इन्द्र एक शक्तिशाली विजेता था, जिसमें दैत्यों जैसी शक्ति थी, तथा भारत के आदिम कृष्णवर्ण निवासी ही वृत्र थे । इन्द्र केवल वृत्र से ही नहीं लड़ता, अन्य भी अनेक दैत्यों से उसकी लड़ाइयां होती हैं । इन्द्र की दैत्यों से लड़ाइयों में प्रव्रजकों की यहां के मूलवासियों से होने वाली लड़ाइयों की झलक है । इसलिए भी, इन्द्र प्रमुख रूप से योद्धाओं का देवता है । वैदिक देव-समूह में सर्वाधिक सजीव चित्रण इन्द्र का ही है, उसके व्यक्तिगत स्वभाव, कार्यकलाप आदि
1. Thunar.
2. Mjolnir. | धारा रूप में बहते हैं। इन्द्र के इस महान कार्य का ऋ. एक.बत्तीस में ब्योरेवार वर्णन है, जिसके प्रथम दो मन्त्र हैं - आज करूंगा इन्द्र वीर कार्यों का मैं निज मति से प्रवचन । जिन अग्रगण्य कार्यों को वह वज्री करता रहता क्षरण क्षरण ।। हिका हनन, वारिका तर्दन । हुईं प्रवाहित पर्वत-भेदन करके वाहिनियां गति-स्पन्दित ।। उसने पर्वत के प्राश्रय में स्थित उस अहि का कर दिया हनन । त्वष्टा ने उसके हित तक्षित किया वज्र निर्घोष-परायण ।। जैसे वत्सों के प्रति उत्सुक गौएं द्रुतगति चलें रँभाती । बहीं वारि की ये धाराएं, जो समुद्र में जा मिल जातीं ॥ वेद-मन्त्रों के वर्णनों से यह निःसन्देह सिद्ध होता है कि इन्द्र वृत्र युद्ध किसी विशिष्ट प्राकृतिक दृश्य का रूपकात्मक वर्णन है । जब इन्द्र वृत्र का वध करता है, तब द्युलोक तथा पृथ्वी लोक कांपने लगते हैं । इन्द्र वृत्र का वध केवल एक बार नहीं करता, पुनः पुनः करता है, और उससे यह प्रार्थना की जाती है कि भविष्य में भी सदा करता रहे, जिससे कि जल बन्धन से छूटें । प्राचीन वेद-व्याख्याकार भी यह कहते हैं कि यह तडिज्भंझा का देवता है, तथा बादल ही पर्वत हैं जिनमें जल निरुद्ध है, इन बादलों में प्रवृष्टि का दैत्य वृत्र जलों को रोके रखता है। अधिकांश यूरोपीय देवशास्त्री इस सम्मति से सहमत हैं तथा उनका कथन है कि इस इन्द्र वृत्र युद्ध का प्राग्रूप प्रागैतिहासिक भारत-यूरोपीय काल में देखा जा सकता है । इन्द्र ट्यूटोनिक ही वज्र है । सर्प के साथ युद्ध तडिज्भंझा का वर्णन है। हिलब्रांड इस गाथा में एक अन्य रूपक देखता है । उसके मत में वृत्र शीत- दैत्य है और इन्द्र सूर्य देव तथा इन्द्र जिन जल धाराओं को मुक्ति दिलवाता है, वे वृष्टि-जल-धाराएं नहीं हैं, अपितु भारत के उत्तमपश्चिम की नदियां हैं जो शीतकाल में सूख जाती हैं तथा सूर्य के द्वारा हिमालय के हिम के पिघलने पर जल-पूर हो जाती हैं । संभव है कि इन्द्र वृत्र - युद्ध में उपरिलिखित प्रकार हों, परन्तु यह निश्चित है वैदिक कवियों को प्रकृति की शक्तियों के रूप में इन्द्र वृत्र का स्पष्ट ज्ञान नहीं था । उनके लिए इन्द्र एक शक्तिशाली विजेता था, जिसमें दैत्यों जैसी शक्ति थी, तथा भारत के आदिम कृष्णवर्ण निवासी ही वृत्र थे । इन्द्र केवल वृत्र से ही नहीं लड़ता, अन्य भी अनेक दैत्यों से उसकी लड़ाइयां होती हैं । इन्द्र की दैत्यों से लड़ाइयों में प्रव्रजकों की यहां के मूलवासियों से होने वाली लड़ाइयों की झलक है । इसलिए भी, इन्द्र प्रमुख रूप से योद्धाओं का देवता है । वैदिक देव-समूह में सर्वाधिक सजीव चित्रण इन्द्र का ही है, उसके व्यक्तिगत स्वभाव, कार्यकलाप आदि एक. Thunar. दो. Mjolnir. |
मॉस्को को सबसे खूबसूरत शहर कहा जा सकता हैग्रह। इसके लिए बहुत क्रेडिट डिज़ाइनर और वास्तुकारों के लिए है जो राजधानी में विशेष और अनन्य प्रत्येक अपार्टमेंट परिसर बनाने की कोशिश करते हैं। एलसीडी "शांति पार्क", व्यावहारिक रूप से अपने मुख्य अवसरों में से एक के आगे मास्को के केंद्र में बनाया गया है, इसमें आश्चर्य की बात है कि इसमें लोकप्रिय गगनचुंबी इमारतों और गगनचुंबी इमारतों नहीं हैं इसके विपरीत, सभी इमारतों में कम वृद्धि होती है, जबकि प्रत्येक व्यक्ति को एक अलग-अलग परियोजना पर बनाया जाता है। विशेष रूप से जटिल शानदार प्रकाश व्यवस्था से सजाया गया है, और कई फूलों के बिस्तर और हरियाली इस जगह को स्वर्ग की तरह दिखते हैं।
मॉस्को क्षेत्र में इसके साथ एक और जटिल हैसमान नाम - एलसीडी "मीरा पार्क" सर्पुखोव शहर है जिसमें इसे बनाया जा रहा है। यह एक वर्ग "अर्थव्यवस्था" अपार्टमेंट है इस परिसर में सात ऊंची इमारतों के साथ एक अखंड फ्रेम और ईंट की दीवारों, खेल के मैदानों और पार्किंग के साथ परिष्कृत आंगनों, मकानों के जमीन के फर्श पर स्थित अवसंरचना सुविधाएं हैं। इस अनुच्छेद में हम केवल मास्को की नई इमारत का विस्तृत विवरण प्रदान करते हैं।
एलसीडी "पार्क ऑफ द वर्ल्ड" को राजधानी के एसएओ में बनाया गया थामेट्रो स्टेशन "रिज़्स्काया" और "अलेक्सीवस्काया" के बीच के बीच आधे रास्ते के बारे में प्रोस्पेक्ट मीरा जटिल दोनों के लिए - 800 मीटर से अधिक नहीं एवेन्यू के अतिरिक्त, एलसीडी पास 2-एनटी मैटीस्चिनस्काया स्ट्रीट के तत्काल इलाके में और दो लेन - ड्रोबोलिटेनी और कुचिन पार्क ऑफ़ द वर्ल्ड के एलसीडी में, इसके सभी 26 भवनों का पता समान है - प्रोस्पेक्ट मीरा, 102, लेकिन हर घर में व्यक्तिगत संख्या और पत्र है जिससे नेविगेट करना आसान हो जाता है। उदाहरण के लिए, बिल्डिंग नंबर 102k2 या बिल्डिंग नंबर 102c31 शांति पार्क के आसपास कोई अन्य आवास परिसर नहीं है, केवल कार्यालय, जिला बुनियादी ढांचे की वस्तुओं और निर्माण के विभिन्न वर्षों के व्यक्तिगत आवासीय भवन हैं।
कार उत्साही लोगों के लिए, "शांति पार्क" का प्लस केंद्रीय एवेन्यू के पास स्थित स्थान है, जिसके माध्यम से आप मास्को के केंद्र तक पहुंच सकते हैं या उपनगरों में जा सकते हैं।
पारिस्थितिक शुद्धता के दृष्टिकोण से यह बहुत ही नहीं हैएलसीडी पार्क शांति में एक अच्छा स्थान मास्को एक खूबसूरत शहर है, लेकिन निकास धुएं द्वारा भारी प्रदूषित किया गया है। विशेष रूप से प्रतिकूल स्थिति राजधानी के केंद्र में है। परिसर मीरा, परिसर 30-50 मीटर की इमारतों का आधा हिस्सा, इसकी सुंदरता के लिए न केवल, बल्कि दैनिक ट्रैफिक जाम के लिए भी जाना जाता है, क्योंकि कारों के बड़े प्रवाह की वजह से बनाया गया था। एक ओर, ऐसी बड़ी परिवहन धमनी के पास एलसीडी का स्थान सुविधाजनक है, लेकिन दूसरी ओर यह निवासियों के लिए अनावश्यक शोर बनाता है और हवा की सफाई को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करता है। हॉल, जो एवेन्यू से 50 मीटर से अधिक हैं, लगभग पयाटनिट्स्की कब्रिस्तान तक खड़े हैं। विशेष रूप से यह घरों को चिंतित करता है № 102, 21, 22, 32 और 38. कब्रिस्तान के पास एक ट्रिनिटी चर्च का निर्माण किया गया था, गहराई बनाने के लिए एक कार्यशाला खोली गई थी।
एलसीडी के स्थान की सुखद विशेषताएं हैं सोकोल्निकी पार्क, जो पैर पर पहुंचा जा सकता है, और एक वनस्पति उद्यान।
एलसीडी "शांति पार्क" के निर्माण के लिए परियोजना लागू करता हैSminex विकास कंपनी है, जो 2007 में मास्को में इमारत बाजार पर दिखाई दिया। यह मुख्य रूप से शॉपिंग सेंटर और व्यापार कार्यालयों के निर्माण के लिए परियोजनाओं के कार्यान्वयन में लगी हुई है। वस्तुओं के आपरेशन में डाल दिया गुल्लक में - लोकप्रिय व्यापार केन्द्रों "गिरगिट", "बहुरूपदर्शक" व्यापार जिलों "वातावरण", Bankside, अपार्टमेंट, कार्यालयों और अन्य समान वस्तुओं। Sminex बानगी है कि यह बाजार की सुविधा है जो लगभग पूरी तरह से पकाया जाता है पर डालता है, कि शेयरधारकों और निवेशकों के जोखिम nullifies है।
कंपनी का नया परिसर "पीस पार्क" बनाता हैतकनीक "मोनोलिथ-ईंट", प्रत्येक इमारत में facades की मनोरम ग्लेज़िंग करता है, और औपचारिक डिजाइन पर औपचारिक बनाता है। परिसर के क्षेत्र में, कंपनी बिना किसी रुकावट के निवासियों को गर्मी और बिजली प्रदान करने के लिए अपना बॉयलर कमरा और ट्रांसफार्मर सबस्टेशन बनाता है।
एलसीडी "दुनिया का पार्क" स्टाइलिश और अनन्य दिखता है। फोटो आंगन के किनारे से और छत पर एक छत के साथ इमारत दिखाता है। डेवलपर स्माइनेक्स ने स्टालिन युग की पुरानी इमारत का पुनर्निर्माण किया, इसे आधुनिक संचार प्रणालियों के साथ सुसज्जित किया। अब यह एसीन्यू के उपयोग के साथ एलसीडी घरों में से एक है। शेष 26 इमारतें 4 से 7 तक फर्श के साथ क्लब प्रकार की नई इमारतों हैं। परिसर का क्षेत्र बहुत सुंदर है। पेड़ और फूलों की झाड़ियों के बीच एलीयस यहां बनाए जाते हैं, फव्वारे बनाए जाते हैं, बेंच और गेजबॉस स्थापित होते हैं, एक भूमिगत पार्किंग स्थल और अतिथि कार पार्क बनाया जाता है। इमारतों के पहले मंजिलों पर कैफे, बैंकों, क्लीनिकों, दुकानों, क्लबों, कार्यालय केंद्रों और एजेंसियों की शाखाएं खोली जाएंगी। "इको-फ़्यूज़न" नामक शैली में चार घर बनाए गए हैं। उनके facades और प्रवेश क्षेत्रों प्राकृतिक सामग्री के साथ समाप्त हो जाते हैं। सभी इमारतों में facades हवादार होते हैं, और प्रवेश क्षेत्र व्यक्तिगत पायलट परियोजनाओं के अनुसार किए जाते हैं।
एक नई एलसीडी खोजना मुश्किल है, जो तुरंत होगाइतना समृद्ध बुनियादी ढांचा। पीस पार्क के निवासी बड़े शहरों के सभी लाभों का आनंद ले सकते हैं, क्योंकि उनके परिसर के पास किंडरगार्टन, स्कूल, जिमनासियम, विश्वविद्यालय, दुकानों और सुपरमार्केट के दर्जनों, सौंदर्य सैलून, बच्चों के लिए विकास केंद्र, खेल क्लब और बहुत कुछ हैं।
एलसीडी "दुनिया के पार्क" में कई प्रकार के विलासिता अपार्टमेंट बनाए गए हैंः
1.समतल करना। निम्नलिखित श्रेणियों के अपार्टमेंट यहां दिए गए हैंः
- उनमें से एक कमरा, क्षेत्र (एस) - 45.4 मीटर से2 47,1 मीटर तक2;
- दो कमरे के अपार्टमेंट - 64 मीटर से2 108.3 मीटर तक2;
- तीन कमरे - 81,5 मीटर से2 121,7 मीटर तक2;
- पांच कमरे के अपार्टमेंट - 174.4 मीटर2.
2. अटारी। इस प्रकार के अपार्टमेंट में, पैनोरैमिक खिड़कियों और अतिरिक्त छत खिड़कियों के साथ बेवल वाली दीवारें। विभागः
- एक कमरे, 45.4 मीटर के क्षेत्र के साथ2;
- दो कमरे - 70,8 मीटर से2 108.3 मीटर तक2;
- तीन कमरे के अपार्टमेंट - 92.7 मीटर2.
3। दो-स्तर का अपार्टमेंट यह आवास उन लोगों के लिए तैयार है जो इच्छा रखते हैंअधिक खाली जगह प्राप्त करें। अपार्टमेंट में बहुत बड़ी पैनोरैमिक खिड़कियां और लकड़ी की सीढ़ियां हैं। दो स्तरों में अपार्टमेंट केवल 69.3 वर्ग मीटर के कुल क्षेत्रफल के साथ निः शुल्क नियोजन के दो कमरे के अपार्टमेंट द्वारा दर्शाए जाते हैं।
4. पेंथ हाउस। इस प्रकार का आवास सभी इमारतों में उपलब्ध नहीं है और एक आवासीय स्तर और एक विशाल छत का प्रतिनिधित्व करता है जहां आप एक मनोरंजन क्षेत्र तैयार कर सकते हैं। विभागः
- एक कमरे, 46.8 मीटर के क्षेत्र के साथ2;
- 51 मीटर से दो कमरे एस2 64 मीटर तक2;
- तीन बेडरूम का अपार्टमेंट - 116 मीटर2;
- पांच कमरे के अपार्टमेंट - 174.4 मीटर2.
अपार्टमेंट दो संस्करणों में किराए पर लिया जाता है - खत्म होने के साथ, फिनिश के साथ और फर्नीचर के साथ भी। उनमें अधिक आराम के लिए फायरप्लेस से लैस हैं।
चूंकि "वर्ल्ड पार्क" एलसीडी में आवास वर्ग "व्यापार" से संबंधित है, इसके लिए कीमतें उचित हैं। वर्तमान में, बिल्डर से बिक्री के चरण में, 1 मीटर वर्ग। 16 9,1 9 0 से 2 9 3,392 रूबल तक की लागत।
Sminex बैंकों के साथ सहयोग करता हैः
खरीद बिक्री के अनुबंध के चित्रण के साथ किया जाता है। बंधक के संभावित पंजीकरण।
यह परिसर अभिजात वर्ग और शानदार है, और इसके अलावा, उन लोगों के लिए बहुत आरामदायक है जो शहर के केंद्र में रहना चाहते हैं, काम से दूर नहीं, स्वच्छ और आरामदायक क्षेत्र में।
"शांति पार्क" की उल्लेखनीय योग्यताएंः
- एक अद्भुत परियोजना, सब कुछ सुंदर, सुविधाजनक, सुलभ है;
- मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन के पास बंद हो जाता है;
- विलासिता अपार्टमेंट, आप परिष्करण के साथ या बिना चुन सकते हैं;
- विशेष लेआउट;
- भूमिगत पार्किंग की उपलब्धता;
- उल्लेखनीय सजाया घर क्षेत्र;
- सुरक्षा की उपस्थिति।
उल्लेखनीय कमियोंः
- खराब पारिस्थितिकी;
कब्रिस्तान के पास;
- आंगनों में कुछ बच्चों के खेल के मैदान हैं;
- अपार्टमेंट में पंजीकरण की असंभवता;
| मॉस्को को सबसे खूबसूरत शहर कहा जा सकता हैग्रह। इसके लिए बहुत क्रेडिट डिज़ाइनर और वास्तुकारों के लिए है जो राजधानी में विशेष और अनन्य प्रत्येक अपार्टमेंट परिसर बनाने की कोशिश करते हैं। एलसीडी "शांति पार्क", व्यावहारिक रूप से अपने मुख्य अवसरों में से एक के आगे मास्को के केंद्र में बनाया गया है, इसमें आश्चर्य की बात है कि इसमें लोकप्रिय गगनचुंबी इमारतों और गगनचुंबी इमारतों नहीं हैं इसके विपरीत, सभी इमारतों में कम वृद्धि होती है, जबकि प्रत्येक व्यक्ति को एक अलग-अलग परियोजना पर बनाया जाता है। विशेष रूप से जटिल शानदार प्रकाश व्यवस्था से सजाया गया है, और कई फूलों के बिस्तर और हरियाली इस जगह को स्वर्ग की तरह दिखते हैं। मॉस्को क्षेत्र में इसके साथ एक और जटिल हैसमान नाम - एलसीडी "मीरा पार्क" सर्पुखोव शहर है जिसमें इसे बनाया जा रहा है। यह एक वर्ग "अर्थव्यवस्था" अपार्टमेंट है इस परिसर में सात ऊंची इमारतों के साथ एक अखंड फ्रेम और ईंट की दीवारों, खेल के मैदानों और पार्किंग के साथ परिष्कृत आंगनों, मकानों के जमीन के फर्श पर स्थित अवसंरचना सुविधाएं हैं। इस अनुच्छेद में हम केवल मास्को की नई इमारत का विस्तृत विवरण प्रदान करते हैं। एलसीडी "पार्क ऑफ द वर्ल्ड" को राजधानी के एसएओ में बनाया गया थामेट्रो स्टेशन "रिज़्स्काया" और "अलेक्सीवस्काया" के बीच के बीच आधे रास्ते के बारे में प्रोस्पेक्ट मीरा जटिल दोनों के लिए - आठ सौ मीटर से अधिक नहीं एवेन्यू के अतिरिक्त, एलसीडी पास दो-एनटी मैटीस्चिनस्काया स्ट्रीट के तत्काल इलाके में और दो लेन - ड्रोबोलिटेनी और कुचिन पार्क ऑफ़ द वर्ल्ड के एलसीडी में, इसके सभी छब्बीस भवनों का पता समान है - प्रोस्पेक्ट मीरा, एक सौ दो, लेकिन हर घर में व्यक्तिगत संख्या और पत्र है जिससे नेविगेट करना आसान हो जाता है। उदाहरण के लिए, बिल्डिंग नंबर एक सौ दोkदो या बिल्डिंग नंबर एक सौ दोcइकतीस शांति पार्क के आसपास कोई अन्य आवास परिसर नहीं है, केवल कार्यालय, जिला बुनियादी ढांचे की वस्तुओं और निर्माण के विभिन्न वर्षों के व्यक्तिगत आवासीय भवन हैं। कार उत्साही लोगों के लिए, "शांति पार्क" का प्लस केंद्रीय एवेन्यू के पास स्थित स्थान है, जिसके माध्यम से आप मास्को के केंद्र तक पहुंच सकते हैं या उपनगरों में जा सकते हैं। पारिस्थितिक शुद्धता के दृष्टिकोण से यह बहुत ही नहीं हैएलसीडी पार्क शांति में एक अच्छा स्थान मास्को एक खूबसूरत शहर है, लेकिन निकास धुएं द्वारा भारी प्रदूषित किया गया है। विशेष रूप से प्रतिकूल स्थिति राजधानी के केंद्र में है। परिसर मीरा, परिसर तीस-पचास मीटर की इमारतों का आधा हिस्सा, इसकी सुंदरता के लिए न केवल, बल्कि दैनिक ट्रैफिक जाम के लिए भी जाना जाता है, क्योंकि कारों के बड़े प्रवाह की वजह से बनाया गया था। एक ओर, ऐसी बड़ी परिवहन धमनी के पास एलसीडी का स्थान सुविधाजनक है, लेकिन दूसरी ओर यह निवासियों के लिए अनावश्यक शोर बनाता है और हवा की सफाई को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करता है। हॉल, जो एवेन्यू से पचास मीटर से अधिक हैं, लगभग पयाटनिट्स्की कब्रिस्तान तक खड़े हैं। विशेष रूप से यह घरों को चिंतित करता है № एक सौ दो, इक्कीस, बाईस, बत्तीस और अड़तीस. कब्रिस्तान के पास एक ट्रिनिटी चर्च का निर्माण किया गया था, गहराई बनाने के लिए एक कार्यशाला खोली गई थी। एलसीडी के स्थान की सुखद विशेषताएं हैं सोकोल्निकी पार्क, जो पैर पर पहुंचा जा सकता है, और एक वनस्पति उद्यान। एलसीडी "शांति पार्क" के निर्माण के लिए परियोजना लागू करता हैSminex विकास कंपनी है, जो दो हज़ार सात में मास्को में इमारत बाजार पर दिखाई दिया। यह मुख्य रूप से शॉपिंग सेंटर और व्यापार कार्यालयों के निर्माण के लिए परियोजनाओं के कार्यान्वयन में लगी हुई है। वस्तुओं के आपरेशन में डाल दिया गुल्लक में - लोकप्रिय व्यापार केन्द्रों "गिरगिट", "बहुरूपदर्शक" व्यापार जिलों "वातावरण", Bankside, अपार्टमेंट, कार्यालयों और अन्य समान वस्तुओं। Sminex बानगी है कि यह बाजार की सुविधा है जो लगभग पूरी तरह से पकाया जाता है पर डालता है, कि शेयरधारकों और निवेशकों के जोखिम nullifies है। कंपनी का नया परिसर "पीस पार्क" बनाता हैतकनीक "मोनोलिथ-ईंट", प्रत्येक इमारत में facades की मनोरम ग्लेज़िंग करता है, और औपचारिक डिजाइन पर औपचारिक बनाता है। परिसर के क्षेत्र में, कंपनी बिना किसी रुकावट के निवासियों को गर्मी और बिजली प्रदान करने के लिए अपना बॉयलर कमरा और ट्रांसफार्मर सबस्टेशन बनाता है। एलसीडी "दुनिया का पार्क" स्टाइलिश और अनन्य दिखता है। फोटो आंगन के किनारे से और छत पर एक छत के साथ इमारत दिखाता है। डेवलपर स्माइनेक्स ने स्टालिन युग की पुरानी इमारत का पुनर्निर्माण किया, इसे आधुनिक संचार प्रणालियों के साथ सुसज्जित किया। अब यह एसीन्यू के उपयोग के साथ एलसीडी घरों में से एक है। शेष छब्बीस इमारतें चार से सात तक फर्श के साथ क्लब प्रकार की नई इमारतों हैं। परिसर का क्षेत्र बहुत सुंदर है। पेड़ और फूलों की झाड़ियों के बीच एलीयस यहां बनाए जाते हैं, फव्वारे बनाए जाते हैं, बेंच और गेजबॉस स्थापित होते हैं, एक भूमिगत पार्किंग स्थल और अतिथि कार पार्क बनाया जाता है। इमारतों के पहले मंजिलों पर कैफे, बैंकों, क्लीनिकों, दुकानों, क्लबों, कार्यालय केंद्रों और एजेंसियों की शाखाएं खोली जाएंगी। "इको-फ़्यूज़न" नामक शैली में चार घर बनाए गए हैं। उनके facades और प्रवेश क्षेत्रों प्राकृतिक सामग्री के साथ समाप्त हो जाते हैं। सभी इमारतों में facades हवादार होते हैं, और प्रवेश क्षेत्र व्यक्तिगत पायलट परियोजनाओं के अनुसार किए जाते हैं। एक नई एलसीडी खोजना मुश्किल है, जो तुरंत होगाइतना समृद्ध बुनियादी ढांचा। पीस पार्क के निवासी बड़े शहरों के सभी लाभों का आनंद ले सकते हैं, क्योंकि उनके परिसर के पास किंडरगार्टन, स्कूल, जिमनासियम, विश्वविद्यालय, दुकानों और सुपरमार्केट के दर्जनों, सौंदर्य सैलून, बच्चों के लिए विकास केंद्र, खेल क्लब और बहुत कुछ हैं। एलसीडी "दुनिया के पार्क" में कई प्रकार के विलासिता अपार्टमेंट बनाए गए हैंः एक.समतल करना। निम्नलिखित श्रेणियों के अपार्टमेंट यहां दिए गए हैंः - उनमें से एक कमरा, क्षेत्र - पैंतालीस दशमलव चार मीटर सेदो सैंतालीस,एक मीटर तकदो; - दो कमरे के अपार्टमेंट - चौंसठ मीटर सेदो एक सौ आठ दशमलव तीन मीटर तकदो; - तीन कमरे - इक्यासी,पाँच मीटर सेदो एक सौ इक्कीस,सात मीटर तकदो; - पांच कमरे के अपार्टमेंट - एक सौ चौहत्तर.चार मीटरदो. दो. अटारी। इस प्रकार के अपार्टमेंट में, पैनोरैमिक खिड़कियों और अतिरिक्त छत खिड़कियों के साथ बेवल वाली दीवारें। विभागः - एक कमरे, पैंतालीस दशमलव चार मीटर के क्षेत्र के साथदो; - दो कमरे - सत्तर,आठ मीटर सेदो एक सौ आठ दशमलव तीन मीटर तकदो; - तीन कमरे के अपार्टमेंट - बानवे.सात मीटरदो. तीन। दो-स्तर का अपार्टमेंट यह आवास उन लोगों के लिए तैयार है जो इच्छा रखते हैंअधिक खाली जगह प्राप्त करें। अपार्टमेंट में बहुत बड़ी पैनोरैमिक खिड़कियां और लकड़ी की सीढ़ियां हैं। दो स्तरों में अपार्टमेंट केवल उनहत्तर.तीन वर्ग मीटर के कुल क्षेत्रफल के साथ निः शुल्क नियोजन के दो कमरे के अपार्टमेंट द्वारा दर्शाए जाते हैं। चार. पेंथ हाउस। इस प्रकार का आवास सभी इमारतों में उपलब्ध नहीं है और एक आवासीय स्तर और एक विशाल छत का प्रतिनिधित्व करता है जहां आप एक मनोरंजन क्षेत्र तैयार कर सकते हैं। विभागः - एक कमरे, छियालीस दशमलव आठ मीटर के क्षेत्र के साथदो; - इक्यावन मीटर से दो कमरे एसदो चौंसठ मीटर तकदो; - तीन बेडरूम का अपार्टमेंट - एक सौ सोलह मीटरदो; - पांच कमरे के अपार्टमेंट - एक सौ चौहत्तर.चार मीटरदो. अपार्टमेंट दो संस्करणों में किराए पर लिया जाता है - खत्म होने के साथ, फिनिश के साथ और फर्नीचर के साथ भी। उनमें अधिक आराम के लिए फायरप्लेस से लैस हैं। चूंकि "वर्ल्ड पार्क" एलसीडी में आवास वर्ग "व्यापार" से संबंधित है, इसके लिए कीमतें उचित हैं। वर्तमान में, बिल्डर से बिक्री के चरण में, एक मीटर वर्ग। सोलह नौ,एक नौ शून्य से दो नौ तीन,तीन सौ बानवे रूबल तक की लागत। Sminex बैंकों के साथ सहयोग करता हैः खरीद बिक्री के अनुबंध के चित्रण के साथ किया जाता है। बंधक के संभावित पंजीकरण। यह परिसर अभिजात वर्ग और शानदार है, और इसके अलावा, उन लोगों के लिए बहुत आरामदायक है जो शहर के केंद्र में रहना चाहते हैं, काम से दूर नहीं, स्वच्छ और आरामदायक क्षेत्र में। "शांति पार्क" की उल्लेखनीय योग्यताएंः - एक अद्भुत परियोजना, सब कुछ सुंदर, सुविधाजनक, सुलभ है; - मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन के पास बंद हो जाता है; - विलासिता अपार्टमेंट, आप परिष्करण के साथ या बिना चुन सकते हैं; - विशेष लेआउट; - भूमिगत पार्किंग की उपलब्धता; - उल्लेखनीय सजाया घर क्षेत्र; - सुरक्षा की उपस्थिति। उल्लेखनीय कमियोंः - खराब पारिस्थितिकी; कब्रिस्तान के पास; - आंगनों में कुछ बच्चों के खेल के मैदान हैं; - अपार्टमेंट में पंजीकरण की असंभवता; |
इस समय पाकिस्तान (Pakistan) की आर्थिक हालत बेहद खराब है। लोगों के पास दो वक्त की रोटी खाने के लिए आटा तक नहीं है और आटा खरीदने के लिए लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं लेकिन तब भी कई लोगों को यह नहीं मिल पा रहा है। सब्जियों से लेकर तमाम खाद्य पदार्थों के दाम आसमान छू रहे हैं और कमरतोड़ महंगाई ने पाकिस्तान की जनता को परेशान कर रखा है। वहीं अब तक पाकिस्तान IMF के भरोसे बैठा हुआ था ताकि उसे लोन मिल जाये लेकिन अब उसकी इस उम्मीद पर भी पानी फिरते नजर आ रहा है। जी हां, पाकिस्तान और अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (IMF) के बीच गुरुवार को बेलआउट पैकेज के लिए वार्ता बिना किसी समझौते के खत्म हो गई है। पाकिस्तान संगठन के साथ 6. 5 अरब डॉलर वाले पैकेज के लिए आईएमएफ के साथ वार्ता कर रहा था और बिना किसी नतीजे के ही यह खत्म हो गई। यह पाकिस्तान की जनता के लिए बड़ा झटका है। हालांकि दोनों पक्ष इस बात पर रजामंद हुए हैं कि उन उपायों को लागू किया जाएगा जिसके जरिए कंगाली से बचने के लिए एक डील की जा सके।
दरअसल, आईएमएफ को इस बात पर भरोसा नहीं है कि सभी कड़ी शर्तों को पाकिस्तान लागू करेगा। मीटिंग में भी अथॉरिटीज उसे इस बात पर जरा भी यकीन दिलाने में असफल रहीं। आईएमएफ की टीम 10 दिनों के दौरे पर पाकिस्तान आई थी। गुरुवार को यह दौरा भी बिना किसी समझौते के खत्म हो गया। आईएमएफ की टीम को नाथन पोर्टर लीड कर रहे थे। शहबाज सरकार में वित्त मंत्री इशाक डार, पोर्टर और उनकी टीम को जरूरी भरोसा दिलाने में पूरी तरह से असफल रहे।
आईएमएफ की टीम के साथ पिछले कई दिनों से लगातार मीटिंग कर रहे थे। मगर इसके बाद भी उन्हें जरूरी लक्ष्य हासिल नहीं हो सका। वित्त सचिव हामिद याकूब शेख ने कहा कि जरूरी एक्शन पर रजामंदी हो गई थी लेकिन इसके बाद भी स्टाफ लेवल एग्रीमेंट का ऐलान नहीं हो सका। विश्वसनीयता संकट के चलते आईएमएफ पाकिस्तान को लोन देने से बच रहा है।
| इस समय पाकिस्तान की आर्थिक हालत बेहद खराब है। लोगों के पास दो वक्त की रोटी खाने के लिए आटा तक नहीं है और आटा खरीदने के लिए लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं लेकिन तब भी कई लोगों को यह नहीं मिल पा रहा है। सब्जियों से लेकर तमाम खाद्य पदार्थों के दाम आसमान छू रहे हैं और कमरतोड़ महंगाई ने पाकिस्तान की जनता को परेशान कर रखा है। वहीं अब तक पाकिस्तान IMF के भरोसे बैठा हुआ था ताकि उसे लोन मिल जाये लेकिन अब उसकी इस उम्मीद पर भी पानी फिरते नजर आ रहा है। जी हां, पाकिस्तान और अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष के बीच गुरुवार को बेलआउट पैकेज के लिए वार्ता बिना किसी समझौते के खत्म हो गई है। पाकिस्तान संगठन के साथ छः. पाँच अरब डॉलर वाले पैकेज के लिए आईएमएफ के साथ वार्ता कर रहा था और बिना किसी नतीजे के ही यह खत्म हो गई। यह पाकिस्तान की जनता के लिए बड़ा झटका है। हालांकि दोनों पक्ष इस बात पर रजामंद हुए हैं कि उन उपायों को लागू किया जाएगा जिसके जरिए कंगाली से बचने के लिए एक डील की जा सके। दरअसल, आईएमएफ को इस बात पर भरोसा नहीं है कि सभी कड़ी शर्तों को पाकिस्तान लागू करेगा। मीटिंग में भी अथॉरिटीज उसे इस बात पर जरा भी यकीन दिलाने में असफल रहीं। आईएमएफ की टीम दस दिनों के दौरे पर पाकिस्तान आई थी। गुरुवार को यह दौरा भी बिना किसी समझौते के खत्म हो गया। आईएमएफ की टीम को नाथन पोर्टर लीड कर रहे थे। शहबाज सरकार में वित्त मंत्री इशाक डार, पोर्टर और उनकी टीम को जरूरी भरोसा दिलाने में पूरी तरह से असफल रहे। आईएमएफ की टीम के साथ पिछले कई दिनों से लगातार मीटिंग कर रहे थे। मगर इसके बाद भी उन्हें जरूरी लक्ष्य हासिल नहीं हो सका। वित्त सचिव हामिद याकूब शेख ने कहा कि जरूरी एक्शन पर रजामंदी हो गई थी लेकिन इसके बाद भी स्टाफ लेवल एग्रीमेंट का ऐलान नहीं हो सका। विश्वसनीयता संकट के चलते आईएमएफ पाकिस्तान को लोन देने से बच रहा है। |
Ranchi, 04 November: रांची के बरियातू थाना क्षेत्र स्थित मोरहाबादी के रहने वाले सरोज सिंह ने अपनी भतीजी से छेड़छाड़ करने वालों के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज करायी है. उन्होंने आरोप लगाया है कि शुक्रवार की शाम पड़ोस के सचिन और एक अन्य लड़के ने उनकी भतीजी को अश्लील इशारे किया. सरोज सिंह ने बताया कि उनका बेटा गौरव सिंह इस बात की शिकायत करने पड़ोसी के घर गया तो पड़ोसी मारपीट पर उतारू हो गया. किसी तरह वह जान बचाकर वहां से भागा. इसके बाद मामला थाना पहुंचा. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दोनों पक्ष के युवकों को थाना लाया. आरोपी युवकों को छोड़ दिया गया, जबकि गौरव सिंह को रात भर थाने में रखा गया. रविवार को एसएसपी से शिकायत करने पर उसे छोड़ा गया.
मोराबादी स्थित अपार्टमेंट और उषा निवास का खिड़की आमने-सामने है. सरोज सिंह अपने परिजन सहित अपार्टमेंट में रहते हैं, जबकि हजारीबाग के दो छात्र सचिन कुमार एक अन्य उषा निवास में रहते हैं. दोनो छात्र जिस कमरे में रहते हैं, उसी कमरा के सामने सरोज सिंह के भतीजी का कमरा है. परिजन के अनुसार दोनों छात्र अक्सर भतीजी को इशारे करते हैं. इसे लेकर कई बार विवाद भी हो चुका है.
| Ranchi, चार नवंबरember: रांची के बरियातू थाना क्षेत्र स्थित मोरहाबादी के रहने वाले सरोज सिंह ने अपनी भतीजी से छेड़छाड़ करने वालों के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज करायी है. उन्होंने आरोप लगाया है कि शुक्रवार की शाम पड़ोस के सचिन और एक अन्य लड़के ने उनकी भतीजी को अश्लील इशारे किया. सरोज सिंह ने बताया कि उनका बेटा गौरव सिंह इस बात की शिकायत करने पड़ोसी के घर गया तो पड़ोसी मारपीट पर उतारू हो गया. किसी तरह वह जान बचाकर वहां से भागा. इसके बाद मामला थाना पहुंचा. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दोनों पक्ष के युवकों को थाना लाया. आरोपी युवकों को छोड़ दिया गया, जबकि गौरव सिंह को रात भर थाने में रखा गया. रविवार को एसएसपी से शिकायत करने पर उसे छोड़ा गया. मोराबादी स्थित अपार्टमेंट और उषा निवास का खिड़की आमने-सामने है. सरोज सिंह अपने परिजन सहित अपार्टमेंट में रहते हैं, जबकि हजारीबाग के दो छात्र सचिन कुमार एक अन्य उषा निवास में रहते हैं. दोनो छात्र जिस कमरे में रहते हैं, उसी कमरा के सामने सरोज सिंह के भतीजी का कमरा है. परिजन के अनुसार दोनों छात्र अक्सर भतीजी को इशारे करते हैं. इसे लेकर कई बार विवाद भी हो चुका है. |
चेन्नई, 12 नवंबर (आईएएनएस)। भारतीय टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ऑनलाइन मैट्रीमनी प्लेटफॉर्म भारतमैट्रीमोनी के ब्रांड एम्बेसडर बनाए गए हैं।
भारतमैट्रीमोनी के साथ जुड़ने पर धोनी ने कहा कि वह एक ऐसे ब्रांड के साथ जुड़ने पर खुश हैं जिसने कई सफल शादियां कराई हैं।
वेबसाइट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मुरुगवेल जानकीरमन ने कहा, "धोनी इसके लिए सही विकल्प हैं क्योंकि वह काफी युवाओं के प्ररेणास्त्रोत हैं। उन्होंने यह प्रसिद्धि अपनी नेतृत्व क्षमता के दम पर हासिल की है।
| चेन्नई, बारह नवंबर । भारतीय टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ऑनलाइन मैट्रीमनी प्लेटफॉर्म भारतमैट्रीमोनी के ब्रांड एम्बेसडर बनाए गए हैं। भारतमैट्रीमोनी के साथ जुड़ने पर धोनी ने कहा कि वह एक ऐसे ब्रांड के साथ जुड़ने पर खुश हैं जिसने कई सफल शादियां कराई हैं। वेबसाइट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मुरुगवेल जानकीरमन ने कहा, "धोनी इसके लिए सही विकल्प हैं क्योंकि वह काफी युवाओं के प्ररेणास्त्रोत हैं। उन्होंने यह प्रसिद्धि अपनी नेतृत्व क्षमता के दम पर हासिल की है। |
जनता से रिश्ता वेबडेस्क । हैदराबादः उस्मानिया विश्वविद्यालय में सोमवार को छात्रों के विरोध का जवाब देते हुए, कुलपति प्रो डी रविंदर ने मंगलवार को कहा कि पीएचडी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए पात्रता परीक्षा नियमों और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के दिशानिर्देशों के अनुसार आयोजित की गई है। उन्होंने बताया कि जिन लोगों ने परीक्षा पास कर ली है, उन्हें साक्षात्कार के लिए आवेदन करना चाहिए और प्रवेश विवरण वेबसाइट www. ouadmissions. com पर उल्लिखित है और आवेदन करने की अंतिम तिथि 10 फरवरी, 2023 है।
जनता से रिश्ता इस खबर की पुष्टि नहीं करता है ये खबर जनसरोकार के माध्यम से मिली है और ये खबर सोशल मीडिया में वायरल हो रही थी जिसके चलते इस खबर को प्रकाशित की जा रही है। इस पर जनता से रिश्ता खबर की सच्चाई को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं करता है।
| जनता से रिश्ता वेबडेस्क । हैदराबादः उस्मानिया विश्वविद्यालय में सोमवार को छात्रों के विरोध का जवाब देते हुए, कुलपति प्रो डी रविंदर ने मंगलवार को कहा कि पीएचडी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए पात्रता परीक्षा नियमों और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार आयोजित की गई है। उन्होंने बताया कि जिन लोगों ने परीक्षा पास कर ली है, उन्हें साक्षात्कार के लिए आवेदन करना चाहिए और प्रवेश विवरण वेबसाइट www. ouadmissions. com पर उल्लिखित है और आवेदन करने की अंतिम तिथि दस फरवरी, दो हज़ार तेईस है। जनता से रिश्ता इस खबर की पुष्टि नहीं करता है ये खबर जनसरोकार के माध्यम से मिली है और ये खबर सोशल मीडिया में वायरल हो रही थी जिसके चलते इस खबर को प्रकाशित की जा रही है। इस पर जनता से रिश्ता खबर की सच्चाई को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं करता है। |
पीटर बर्जन (Peter Bergen) ने अपनी किताब 'द राइज एंड फॉल ऑफ ओसामा बिन लादेन' में बताया है कि आखिर अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन (Osama Bin Laden) का कैसे पता लगाया.
दुनिया के सबसे खूंखार आतंकियों में शुमार रहा ओसामा बिन लादेन (Osama Bin Laden) अमेरिका (America) के न्यूयॉर्क (New York) में 11 सितंबर 2001 को हुए आतंकवादी हमलों का मास्टरमाइंड था. 9/11 हमले के बाद से ही अमेरिका ने कसम खाई थी कि वो ओसामा को ठिकाने लगाकर रहेगा और उसने ऐसा करके भी दिखाया. अमेरिकी सैनिकों ने मई 2011 को पाकिस्तान (Pakistan) के एबटाबाद (Abbottabad) में ओसामा को ढेर कर दिया. अल-कायदा (Al-Qaeda) का पूर्व प्रमुख यहां पर एक खुफिया घर में रह रहा था. लेकिन क्या आपको मालूम है कि उसकी मौजूदगी के बारे में अमेरिका को कैसे पता चला?
दरअसल, सीएनएन के पूर्व प्रोड्यूसर पीटर बर्जन (Peter Bergen) ने 'द राइज एंड फॉल ऑफ ओसामा बिन लादेन' (The Rise and Fall of Osama bin Laden) नाम से एक किताब लिखी है. पीटर बर्जन राष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषक भी हैं. इस नई किताब के मुताबिक, बिन लादेन के घर के आंगन में सूखने वाले कपड़ों की संख्या ने अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA को उसकी पहचान करने और उसे मारने में मदद की. 11 सितंबर को हुए हमले के बाद बिन लादेन की तीनों पत्नियां और उसका परिवार बिखर गया. बिन लादेन खुद अफगानिस्तान और उत्तरी पाकिस्तान के पहाड़ों में छिपा था.
ओसामा बिन लादेन को अपने परिवार के बिखरने का काफी दुख था. यही वजह थी कि उसने अपने परिवार को फिर से एक करने की कसम खाई थी. इस कारण ही बिन लादेन ने अपने बॉडीगार्ड इब्राहिम सईद अहमद अब्द अल-हामिद (Ibrahim Saeed Ahmed Abd al-Hamid) को पाकिस्तान के एबटाबाद में जमीन खरीदने और एक खुफिया घर बनाने के लिए कहा था. बिन लादेन के अनुरोध पर एबटाबाद में एक तीन मंजिला घर बनाया गया था, जिसमें पहली और दूसरी मंजिल पर चार बेडरूम और हर एक में एक बाथरूम था. ऊपर की मंजिल पर बिन लादेन के निजी इस्तेमाल के लिए एक बेडरूम, एक बाथरूम, एक ऑफिस था.
कहा जाता है कि परिवार के सदस्य 2005 में इस घर में रहने लगे थे. बॉडीगार्ड और उसके परिवार के सदस्य प्रतिदिन इस घर में आते, मगर रहने के लिए दूसरे घर में जाते थे. साल 2010 में एक दिन CIA के एक मुखबिर ने पेशावर में भीड़ में बॉडीगार्ड इब्राहिम को देखा. किताब के मुताबिक, इब्राहिम की गाड़ी के जरिए बिन लादेन के खुफिया घर तक पहुंचा गया. यहां पर बिन लादेन तीन पत्नियों, आठ बच्चों और चार पोतों के साथ रहता था. इस घर में ऐसी कई चीजें थीं, जिसकी वजह से CIA को संदेह हुआ. इसमें फोन लाइन और इंटरनेट का नहीं होना और घर में बहुत ही कम खिड़कियां होना शामिल था.
CIA ने इस खुफिया घर पर नजर रखने के लिए इसके पास में ही एक बेस बनाया. इस दौरान खुफिया एजेंसी को घर में सुखाए जाने वाले कपड़ों को लेकर संदेह होना शुरू हुआ. CIA ने देखा कि हर सुबह घर का आंगन में महिलाओं के कपड़ें, पुरुषों के पारंपरिक पाकिस्तानी कपड़े, बच्चों के डायपर और कई अन्य कपड़े सुखाए जा रहे हैं. इससे लगा कि यहां पर 11 लोगों से ज्यादा लोग रहे हैं. अधिकारियों ने अनुमान लगाया कि घर में एक पुरुष, कई महिलाएं और कम से कम नौ बच्चे थे. तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा सबूत दिखाए गए और उन्होंने हमले का आदेश दिया. इस तरह मई 2011 में बिन लादेन को ढेर कर दिया गया.
| पीटर बर्जन ने अपनी किताब 'द राइज एंड फॉल ऑफ ओसामा बिन लादेन' में बताया है कि आखिर अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन का कैसे पता लगाया. दुनिया के सबसे खूंखार आतंकियों में शुमार रहा ओसामा बिन लादेन अमेरिका के न्यूयॉर्क में ग्यारह सितंबर दो हज़ार एक को हुए आतंकवादी हमलों का मास्टरमाइंड था. नौ/ग्यारह हमले के बाद से ही अमेरिका ने कसम खाई थी कि वो ओसामा को ठिकाने लगाकर रहेगा और उसने ऐसा करके भी दिखाया. अमेरिकी सैनिकों ने मई दो हज़ार ग्यारह को पाकिस्तान के एबटाबाद में ओसामा को ढेर कर दिया. अल-कायदा का पूर्व प्रमुख यहां पर एक खुफिया घर में रह रहा था. लेकिन क्या आपको मालूम है कि उसकी मौजूदगी के बारे में अमेरिका को कैसे पता चला? दरअसल, सीएनएन के पूर्व प्रोड्यूसर पीटर बर्जन ने 'द राइज एंड फॉल ऑफ ओसामा बिन लादेन' नाम से एक किताब लिखी है. पीटर बर्जन राष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषक भी हैं. इस नई किताब के मुताबिक, बिन लादेन के घर के आंगन में सूखने वाले कपड़ों की संख्या ने अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA को उसकी पहचान करने और उसे मारने में मदद की. ग्यारह सितंबर को हुए हमले के बाद बिन लादेन की तीनों पत्नियां और उसका परिवार बिखर गया. बिन लादेन खुद अफगानिस्तान और उत्तरी पाकिस्तान के पहाड़ों में छिपा था. ओसामा बिन लादेन को अपने परिवार के बिखरने का काफी दुख था. यही वजह थी कि उसने अपने परिवार को फिर से एक करने की कसम खाई थी. इस कारण ही बिन लादेन ने अपने बॉडीगार्ड इब्राहिम सईद अहमद अब्द अल-हामिद को पाकिस्तान के एबटाबाद में जमीन खरीदने और एक खुफिया घर बनाने के लिए कहा था. बिन लादेन के अनुरोध पर एबटाबाद में एक तीन मंजिला घर बनाया गया था, जिसमें पहली और दूसरी मंजिल पर चार बेडरूम और हर एक में एक बाथरूम था. ऊपर की मंजिल पर बिन लादेन के निजी इस्तेमाल के लिए एक बेडरूम, एक बाथरूम, एक ऑफिस था. कहा जाता है कि परिवार के सदस्य दो हज़ार पाँच में इस घर में रहने लगे थे. बॉडीगार्ड और उसके परिवार के सदस्य प्रतिदिन इस घर में आते, मगर रहने के लिए दूसरे घर में जाते थे. साल दो हज़ार दस में एक दिन CIA के एक मुखबिर ने पेशावर में भीड़ में बॉडीगार्ड इब्राहिम को देखा. किताब के मुताबिक, इब्राहिम की गाड़ी के जरिए बिन लादेन के खुफिया घर तक पहुंचा गया. यहां पर बिन लादेन तीन पत्नियों, आठ बच्चों और चार पोतों के साथ रहता था. इस घर में ऐसी कई चीजें थीं, जिसकी वजह से CIA को संदेह हुआ. इसमें फोन लाइन और इंटरनेट का नहीं होना और घर में बहुत ही कम खिड़कियां होना शामिल था. CIA ने इस खुफिया घर पर नजर रखने के लिए इसके पास में ही एक बेस बनाया. इस दौरान खुफिया एजेंसी को घर में सुखाए जाने वाले कपड़ों को लेकर संदेह होना शुरू हुआ. CIA ने देखा कि हर सुबह घर का आंगन में महिलाओं के कपड़ें, पुरुषों के पारंपरिक पाकिस्तानी कपड़े, बच्चों के डायपर और कई अन्य कपड़े सुखाए जा रहे हैं. इससे लगा कि यहां पर ग्यारह लोगों से ज्यादा लोग रहे हैं. अधिकारियों ने अनुमान लगाया कि घर में एक पुरुष, कई महिलाएं और कम से कम नौ बच्चे थे. तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा सबूत दिखाए गए और उन्होंने हमले का आदेश दिया. इस तरह मई दो हज़ार ग्यारह में बिन लादेन को ढेर कर दिया गया. |
GORAKHPUR : पिछले एक माह से गर्मी का दंश झेल रहे गोरखपुराइट्स को अभी भी राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। प्री-मानसून के बाद मानसून के भी दगा देने से गोरखपुराइट्स की प्रॉब्लम सॉल्व होने के बजाए बढ़ती नजर आ रही है। गोरखपुर में मानसून आने का टाइम क्भ् जून के आसपास होता है। जबकि मानसून एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से करीब क्0 दिन ऑलरेडी लेट चल रही है। ऐसे में गर्मी का इफेक्ट बढ़ना तय है। हालांकि दिल्ली के बाद कानपुर और लखनऊ में हुई बारिश से जलती धूप से जरूर राहत मिली है।
वेदर एक्सपर्ट के मुताबिक मानसून एक्सप्रेस स्टार्टिग से ही लेट चल रही है। केरल में जहां मानसून मई के लास्ट वीक में पहुंच जाता है, वहीं इस बार वह भ् जून के बाद पहुंचा। इसके बाद मानसून की रफ्तार और धीमी हो गई। ऐसे में मानसून को गोरखपुर आने में करीब क्0 से क्ख् दिन अधिक लगेंगे। मतलब जून के लास्ट वीक तक मानसून आने की संभावना है। ऐसे में मई के बाद जून भी लगभग बारिश को तरसता नजर आएगा। जबकि पिछले सालों में जून के अंत तक क्00 मिमी से अधिक बारिश हो जाती थी। हालांकि कानपुर, लखनऊ में हुई प्री-मानसून बारिश से गोरखपुर का टेंप्रेचर भी कुछ डाउन हुआ है। पहले जहां टेंप्रेचर ब्ख् डिग्री सेल्सियस के पार चल रहा था, वहीं अब टेंप्रेचर कुछ नॉर्मल हुआ है। संडे को मैक्सिमम टेंप्रेचर --- डिग्री सेल्सियस और मिनिमम टेंप्रेचर --- डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम वैज्ञानिक शफीक अहमद ने बताया कि मानसून लेट चल रहा है। इससे गर्मी अधिक सता रही है। गोरखपुर में मानसून ख्ख् जून के आसपास आने की उम्मीद है।
| GORAKHPUR : पिछले एक माह से गर्मी का दंश झेल रहे गोरखपुराइट्स को अभी भी राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। प्री-मानसून के बाद मानसून के भी दगा देने से गोरखपुराइट्स की प्रॉब्लम सॉल्व होने के बजाए बढ़ती नजर आ रही है। गोरखपुर में मानसून आने का टाइम क्भ् जून के आसपास होता है। जबकि मानसून एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से करीब क्शून्य दिन ऑलरेडी लेट चल रही है। ऐसे में गर्मी का इफेक्ट बढ़ना तय है। हालांकि दिल्ली के बाद कानपुर और लखनऊ में हुई बारिश से जलती धूप से जरूर राहत मिली है। वेदर एक्सपर्ट के मुताबिक मानसून एक्सप्रेस स्टार्टिग से ही लेट चल रही है। केरल में जहां मानसून मई के लास्ट वीक में पहुंच जाता है, वहीं इस बार वह भ् जून के बाद पहुंचा। इसके बाद मानसून की रफ्तार और धीमी हो गई। ऐसे में मानसून को गोरखपुर आने में करीब क्शून्य से क्ख् दिन अधिक लगेंगे। मतलब जून के लास्ट वीक तक मानसून आने की संभावना है। ऐसे में मई के बाद जून भी लगभग बारिश को तरसता नजर आएगा। जबकि पिछले सालों में जून के अंत तक क्शून्य मिमी से अधिक बारिश हो जाती थी। हालांकि कानपुर, लखनऊ में हुई प्री-मानसून बारिश से गोरखपुर का टेंप्रेचर भी कुछ डाउन हुआ है। पहले जहां टेंप्रेचर ब्ख् डिग्री सेल्सियस के पार चल रहा था, वहीं अब टेंप्रेचर कुछ नॉर्मल हुआ है। संडे को मैक्सिमम टेंप्रेचर --- डिग्री सेल्सियस और मिनिमम टेंप्रेचर --- डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम वैज्ञानिक शफीक अहमद ने बताया कि मानसून लेट चल रहा है। इससे गर्मी अधिक सता रही है। गोरखपुर में मानसून ख्ख् जून के आसपास आने की उम्मीद है। |
भोपाल । बिपरजॉय चक्रवात थमन के बाद अब यूपी में बिपरजॉय का असर दिखेगा। फिलहाल यूपी में यह कम दबाद का क्षेत्र बना रहा है। बिपरजॉय से पंजाब तक में ट्रफ लाइन बनी हुई है। इन्ही दो मौसम की वजह है जिससे प्रदेश में भी बारिश होने की संभावना है।
मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश के बुदेंलखण्ड रीजन में दो दिन तेज बारिश की हो सकती है। साथ ही भोपाल, ग्वालियर, रीवा, शहडोल, चंबल, उज्जैन आदि संभागों में भी तेज हवा के साथ के बारिश होने की संभावना है। फिलहाल प्रदेश भर में बादल छाय रहेगें।
बता दें कि बंगाल की खाड़ी में एक मौसम प्रणाली एक्टिव है। जिससे दक्षिण- पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने की संभावना है। फिलहाल प्रदेश भर में तेज गर्मी पड़ रही है। बीते 24 घंटों की बात करें तो इसमें भोपाल का तापमान 44.6 रहा वहीं गुना में 37.6 तापमान था। साथ ही दतिया में 10.6 और छिंदवाड़ा में 0.4 मिमी. बारिश हुई।
बिपरजॉय के कारण प्रदेश भर में बादल छाय रहेगें। अब तक तो पश्चिमी मप्र में ही बारिश हो रही थी लेकिन अब पूर्वी मप्र में भी बारिश का दौर प्रारंभ होगा।
मौसम वैज्ञानिकों ने बताया है कि बंगाल की खाड़ी में उत्तरी और दक्षिणी क्षेत्र में हवा के ऊपरी भाग में चक्रवात का निर्माण हो रहा है। जिससे यह चक्रवात मप्र भी पहुंचने की संभावना है। साथ ही मप्र में 24 जून तक मानसून के पहुंचने के आसार है।
| भोपाल । बिपरजॉय चक्रवात थमन के बाद अब यूपी में बिपरजॉय का असर दिखेगा। फिलहाल यूपी में यह कम दबाद का क्षेत्र बना रहा है। बिपरजॉय से पंजाब तक में ट्रफ लाइन बनी हुई है। इन्ही दो मौसम की वजह है जिससे प्रदेश में भी बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश के बुदेंलखण्ड रीजन में दो दिन तेज बारिश की हो सकती है। साथ ही भोपाल, ग्वालियर, रीवा, शहडोल, चंबल, उज्जैन आदि संभागों में भी तेज हवा के साथ के बारिश होने की संभावना है। फिलहाल प्रदेश भर में बादल छाय रहेगें। बता दें कि बंगाल की खाड़ी में एक मौसम प्रणाली एक्टिव है। जिससे दक्षिण- पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने की संभावना है। फिलहाल प्रदेश भर में तेज गर्मी पड़ रही है। बीते चौबीस घंटाटों की बात करें तो इसमें भोपाल का तापमान चौंतालीस.छः रहा वहीं गुना में सैंतीस.छः तापमान था। साथ ही दतिया में दस.छः और छिंदवाड़ा में शून्य.चार मिमी. बारिश हुई। बिपरजॉय के कारण प्रदेश भर में बादल छाय रहेगें। अब तक तो पश्चिमी मप्र में ही बारिश हो रही थी लेकिन अब पूर्वी मप्र में भी बारिश का दौर प्रारंभ होगा। मौसम वैज्ञानिकों ने बताया है कि बंगाल की खाड़ी में उत्तरी और दक्षिणी क्षेत्र में हवा के ऊपरी भाग में चक्रवात का निर्माण हो रहा है। जिससे यह चक्रवात मप्र भी पहुंचने की संभावना है। साथ ही मप्र में चौबीस जून तक मानसून के पहुंचने के आसार है। |
Samsung गैलेक्सी ए सीरीज के दो नए फोन पर काम कर रहा है जिनमें Samsung Galaxy A34 5G और Galaxy A54 5G शामिल हैं। कुछ दिन पहले Galaxy A34 5G और Galaxy A54 5G को कई सर्टिफिकेशन साइट पर देखा गया था और अब खबर है कि Samsung Galaxy A34 5G और Galaxy A54 5G को 15 मार्च को लॉन्च किया जाएगा।
टिप्स्टर @OnLeaks के मुताबिक Galaxy A34 और Galaxy A54 15 मार्च को लॉन्च होंगे। इनमें से Galaxy A34 को हाल ही में गूगल प्ले कंसोल पर चिपसेट/मॉडल नंबर MT6877V/TTZA के साथ देखा गया है। कहा जा रहा है कि फोन को मीडियाटेक Dimensity 1080 प्रोसेसर के साथ लॉन्च किया जाएगा और इसमें 6 जीबी रैम मिलेगी।
Galaxy A54 को लेकर खबर है कि इसे Samsung के Exynos 1380 प्रोसेसर और 8 जीबी रैम के साथ पेश किया जाएगा। फोन में 256 जीबी तक की स्टोरेज मिल सकती है। इसके अलावा फोन में एंड्रॉयड 13 आधारित One UI 5. 0 होगा। एक अन्य रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि Galaxy A34 और Galaxy A54 5G को एक ही कैमरा मॉड्यूल के साथ लॉन्च किया जाएगा जैसा कि Galaxy S23 series में है।
Samsung Galaxy A34 और Samsung Galaxy A54 की ग्लोबल प्राइस को लेकर भी रिपोर्ट सामने आई है। Galaxy A34 की शुरुआती कीमत 410 यूरो यानी करीब 36,200 रुपये हो सकती है, वहीं इसके टॉप मॉडल की कीमत 470 यूरो यानी करीब 43,300 रुपये हो सकती है। Galaxy A54 की शुरुआती कीमत 530 यूरो यानी करीब 46,800 रुपये हो सकती है। इस कीमत में 8 जीबी रैम के साथ 128 जीबी स्टोरेज मॉडल मिलेगा।
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| Samsung गैलेक्सी ए सीरीज के दो नए फोन पर काम कर रहा है जिनमें Samsung Galaxy Aचौंतीस पाँचG और Galaxy Aचौवन पाँचG शामिल हैं। कुछ दिन पहले Galaxy Aचौंतीस पाँचG और Galaxy Aचौवन पाँचG को कई सर्टिफिकेशन साइट पर देखा गया था और अब खबर है कि Samsung Galaxy Aचौंतीस पाँचG और Galaxy Aचौवन पाँचG को पंद्रह मार्च को लॉन्च किया जाएगा। टिप्स्टर @OnLeaks के मुताबिक Galaxy Aचौंतीस और Galaxy Aचौवन पंद्रह मार्च को लॉन्च होंगे। इनमें से Galaxy Aचौंतीस को हाल ही में गूगल प्ले कंसोल पर चिपसेट/मॉडल नंबर MTछः हज़ार आठ सौ सतहत्तर वोल्ट/TTZA के साथ देखा गया है। कहा जा रहा है कि फोन को मीडियाटेक Dimensity एक हज़ार अस्सी प्रोसेसर के साथ लॉन्च किया जाएगा और इसमें छः जीबी रैम मिलेगी। Galaxy Aचौवन को लेकर खबर है कि इसे Samsung के Exynos एक हज़ार तीन सौ अस्सी प्रोसेसर और आठ जीबी रैम के साथ पेश किया जाएगा। फोन में दो सौ छप्पन जीबी तक की स्टोरेज मिल सकती है। इसके अलावा फोन में एंड्रॉयड तेरह आधारित One UI पाँच. शून्य होगा। एक अन्य रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि Galaxy Aचौंतीस और Galaxy Aचौवन पाँचG को एक ही कैमरा मॉड्यूल के साथ लॉन्च किया जाएगा जैसा कि Galaxy Sतेईस series में है। Samsung Galaxy Aचौंतीस और Samsung Galaxy Aचौवन की ग्लोबल प्राइस को लेकर भी रिपोर्ट सामने आई है। Galaxy Aचौंतीस की शुरुआती कीमत चार सौ दस यूरो यानी करीब छत्तीस,दो सौ रुपयापये हो सकती है, वहीं इसके टॉप मॉडल की कीमत चार सौ सत्तर यूरो यानी करीब तैंतालीस,तीन सौ रुपयापये हो सकती है। Galaxy Aचौवन की शुरुआती कीमत पाँच सौ तीस यूरो यानी करीब छियालीस,आठ सौ रुपयापये हो सकती है। इस कीमत में आठ जीबी रैम के साथ एक सौ अट्ठाईस जीबी स्टोरेज मॉडल मिलेगा। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen. |
Faridabad/Alive News: सोमवार को उगते हुए सूर्य की उपासना के साथ महिलाओं का चार दिवसीय छठ महापर्व पूर्ण हुआ। शहर की सोसाइटी और समितियों द्वारा आयोजित पूजा समारोह में व्रतधारी महिलाओं और पुरुषों ने कृत्रिम तालाब में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य दिया।
बता दे कि शहर की करीब 100 से ज्यादा समितियों द्वारा पूजा का आयोजक किया गया, जिसमें 4 लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए। महामारी के दो वर्षों के पश्चात श्रद्धालु बिना किसी रोकटोक के घाट पर पहुंचे। पूजा को लेकर लोगों में काफी उत्साह देखने को मिला। सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। वहीं लोगों की सुरक्षा में पुलिस जगह जगह तैनात रही। सोमवार को सूर्य की उपासना के साथ व्रतधातियों का व्रत संपन्न हुआ, महिलाओं ने गुड़ और अदरक से पारण किया।
ग्रेटर फरीदाबाद की सोसाइटी की महिलाओं ने भी पिछले वर्षों की भांति छठ महापर्व का उपवास रखा। पूजा के लिए सोसायटियों में एक सप्ताह पहले से ही तैयारियां चल रही थी। बीपीटीपी पार्क फ्लोर 2, रॉयल हेरिटेज, प्रिंसेस पार्क सोसाइटी, एसआरएस रेजीडेंसी और पार्क एलीट प्रीमियम सोसाइटी की महिलाओ ने भी महापर्व को किया। बीपीटीपी पार्क फ्लोर 2 निवासी जयंत महंती ने बताया कि सोसाइटी में कृत्रिम तालाब बनाया गया था, इसके अतिरिक्त चारों ओर फूल और रंग बिरंगी लड़ियों से सजावट की गई थी, पूजा में सोसाइटी की अन्य महिलाएं भी शामिल रहीं।
| Faridabad/Alive News: सोमवार को उगते हुए सूर्य की उपासना के साथ महिलाओं का चार दिवसीय छठ महापर्व पूर्ण हुआ। शहर की सोसाइटी और समितियों द्वारा आयोजित पूजा समारोह में व्रतधारी महिलाओं और पुरुषों ने कृत्रिम तालाब में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य दिया। बता दे कि शहर की करीब एक सौ से ज्यादा समितियों द्वारा पूजा का आयोजक किया गया, जिसमें चार लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए। महामारी के दो वर्षों के पश्चात श्रद्धालु बिना किसी रोकटोक के घाट पर पहुंचे। पूजा को लेकर लोगों में काफी उत्साह देखने को मिला। सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। वहीं लोगों की सुरक्षा में पुलिस जगह जगह तैनात रही। सोमवार को सूर्य की उपासना के साथ व्रतधातियों का व्रत संपन्न हुआ, महिलाओं ने गुड़ और अदरक से पारण किया। ग्रेटर फरीदाबाद की सोसाइटी की महिलाओं ने भी पिछले वर्षों की भांति छठ महापर्व का उपवास रखा। पूजा के लिए सोसायटियों में एक सप्ताह पहले से ही तैयारियां चल रही थी। बीपीटीपी पार्क फ्लोर दो, रॉयल हेरिटेज, प्रिंसेस पार्क सोसाइटी, एसआरएस रेजीडेंसी और पार्क एलीट प्रीमियम सोसाइटी की महिलाओ ने भी महापर्व को किया। बीपीटीपी पार्क फ्लोर दो निवासी जयंत महंती ने बताया कि सोसाइटी में कृत्रिम तालाब बनाया गया था, इसके अतिरिक्त चारों ओर फूल और रंग बिरंगी लड़ियों से सजावट की गई थी, पूजा में सोसाइटी की अन्य महिलाएं भी शामिल रहीं। |
दोस्त के साथ कार से घर जा रहे युवक के साथ मारपीट और नगदी छीनने का मामला सामने आया है। घर जाते समय अचानक सामने से बाइक आने पर युवक की कार मकान के चबुतरे से टच हो गई। उसके बाद लोगों ने युवक और उसके दोस्त के साथ मारपीट की । दूसरे पक्ष ने कार सवार युवकों के शराब के नशे में होने का आरोप लगाया है। दोनों पक्षों ने थाने में क्रॉस मुकदमा दर्ज करवाया है।
सीकर के कोतवाली थाने में उमेश कुमार ने रिपोर्ट दर्ज करवाई कि वह कल्याण सर्किल से वापस दोस्त पीयूष शर्मा के साथ घर जा रहा था। जब रायजी के कुएं के पास पहुंचा तो अचानक सामने से बाइक आ गई। उसको बचाने के चक्कर कार पास में मकान के चबुतरे से टच हो गई। जिसके बाद मकान के अन्दर से शबीर धोलू,शकील, लतीफ, शरीफ, रईस और अन्य लोगों ने आकर गाली गलौच करना शुरू कर दिया। गाली गलौच करते हुए दोनों को गाड़ी से बाहर निकालकर सड़क पर पटक कर लाठी, सरियों और बरछी से मारपीट की। कार से 8 हजार रुपए और जरूरी कागजात छीनने का आरोप लगाया।
दूसरे पक्ष के शबीर ने रिपोर्ट दर्ज करवाई कि घर के गेट पर बेटा सैफ खड़ा था। उसी दौरान कार जोर से टकराई जिससे बेटा बाल-बाल बच गया। उन्होंने बताया कि कार में सवार दोनों युवक शराब के नशे में थे। जिसकी सूचना पुलिस को दी। कुछ देर बाद तीन चार लोग गाड़ियां लेकर वहां आ गए। सभी ने एक राय होकर परिवार के सदस्यों से गाली-गलौच कर मारपीट करना शुरू कर दिया। कार की टक्कर से काफी नुकसान हुआ। उन्होंने कार सवार युवकों पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगयाा। दोनों पक्षों की ओर से थाने में क्रॉस मुकदमा दर्ज करवाया गया।
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| दोस्त के साथ कार से घर जा रहे युवक के साथ मारपीट और नगदी छीनने का मामला सामने आया है। घर जाते समय अचानक सामने से बाइक आने पर युवक की कार मकान के चबुतरे से टच हो गई। उसके बाद लोगों ने युवक और उसके दोस्त के साथ मारपीट की । दूसरे पक्ष ने कार सवार युवकों के शराब के नशे में होने का आरोप लगाया है। दोनों पक्षों ने थाने में क्रॉस मुकदमा दर्ज करवाया है। सीकर के कोतवाली थाने में उमेश कुमार ने रिपोर्ट दर्ज करवाई कि वह कल्याण सर्किल से वापस दोस्त पीयूष शर्मा के साथ घर जा रहा था। जब रायजी के कुएं के पास पहुंचा तो अचानक सामने से बाइक आ गई। उसको बचाने के चक्कर कार पास में मकान के चबुतरे से टच हो गई। जिसके बाद मकान के अन्दर से शबीर धोलू,शकील, लतीफ, शरीफ, रईस और अन्य लोगों ने आकर गाली गलौच करना शुरू कर दिया। गाली गलौच करते हुए दोनों को गाड़ी से बाहर निकालकर सड़क पर पटक कर लाठी, सरियों और बरछी से मारपीट की। कार से आठ हजार रुपए और जरूरी कागजात छीनने का आरोप लगाया। दूसरे पक्ष के शबीर ने रिपोर्ट दर्ज करवाई कि घर के गेट पर बेटा सैफ खड़ा था। उसी दौरान कार जोर से टकराई जिससे बेटा बाल-बाल बच गया। उन्होंने बताया कि कार में सवार दोनों युवक शराब के नशे में थे। जिसकी सूचना पुलिस को दी। कुछ देर बाद तीन चार लोग गाड़ियां लेकर वहां आ गए। सभी ने एक राय होकर परिवार के सदस्यों से गाली-गलौच कर मारपीट करना शुरू कर दिया। कार की टक्कर से काफी नुकसान हुआ। उन्होंने कार सवार युवकों पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगयाा। दोनों पक्षों की ओर से थाने में क्रॉस मुकदमा दर्ज करवाया गया। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
से 6 सप्ताह पश्चात अनेक लोगों में उग्र फ्लू (सर्दी-जुकाम) जैसी बीमारी हो जाती है । इस उग्र अवस्था के साथ-साथ बुखार आता है, गला दुखता है, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द होता है और अन्य सामान्य लक्षण दिखायी देते हैं । लेकिन यह रुग्णावस्था इतनी मामूली होती है कि उस समय यह बिना किसी का ध्यान आकर्षित किए बीत जाती है और कुछ समय बीत जाने पर इसे कोई याद भी नहीं रखता है। इस अवस्था की समाप्ति पर अधिकांश संक्रमित व्यक्तियों के शरीर में एच आई वी एंटीबाडी बन जाती है। रक्त में इनकी पहचान भी की जा सकती है । इसलिए इस उग्र अवस्था को सीरम रूपांतरण रुग्णावस्था भी कहते हैं ।
प्रारंभिक अवस्था की यह हल्की किस्म की बीमारी ( जो बहुत-सी अन्य उग्र विषाणु रोगों से मिलती-जुलती है) एक विवाद का प्रमुख कारण है। अनेक वैज्ञानिकों - विशेषकर एक अमेरिकी रेट्रोविषाणुविज्ञानी प्रोफेसर पीटर ड्यूसबर्ग-द्वारा प्रारंभ किये गये इस विवाद के अनुसार एच आई वी / एड्स के लिए बिलकुल भी जिम्मेदार नहीं है। फिर भी एच आई वी, और वास्तव में सभी रेट्रोवायरसों की विचित्र प्रकृति (रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज़) ने और साथ ही साथ विभिन्न प्रकार की जानपदिक रोगविज्ञानी विशिष्टताओं ने अधिकांश वैज्ञानिकों और चिकित्सकों को इस बात का कायल कर दिया है कि वास्तव में एच आई वी ही एड्स के लिए प्रमुख रूप से जिम्मेदार है। हालांकि यह हो सकता है कि रोग को अंतिम अवस्था पूर्ण विकसित एड्स तक पहुंचाने में अन्य (संक्रामक और गैर-संक्रामक ) कारक भी अपना योगदान देते हों। अगले अध्याय में इनका वर्णन किया गया है ।
अलाक्षणिक अवस्था : उग्र अवस्था के पश्चात, चाहे वह पहचान में आए अथवा न आए, संक्रमित व्यक्ति एच आई वी रोग की अलाक्षणिक अवस्था में प्रवेश करता है। इस समय किसी भी बीमारी के चिह्न और लक्षण नहीं होते हैं और संक्रमित व्यक्ति पूरी तरह स्वस्थ रहता है। जैसा कि पहले बताया जा चुका है इस समय उसे विषाणु का सक्षम वाहक माना जाता है। इसका मतलब है कि वह अपने रक्त और जननांग द्रवों के माध्यम से दूसरे व्यक्तियों को संक्रमित कर सकता है।
सतत सामान्य लिम्फएडिनोपैथी ( पी जी एल) : कुछ एच आई वी संक्रमित व्यक्तियों में यह अवस्था स्पष्ट दिखायी देती है जबकि अन्य में नहीं। इस अवस्था के दौरान संक्रमित व्यक्ति के गले और बगल में मौजूद लसीका ग्रंथियों में स्पष्ट सूजन दिखायी देती है। केवल इसे छोड़कर संक्रमित व्यक्ति सामान्य दिखता है और सामान्य महसूस भी करता है । ग्रंथियों में सूजन संक्रमित व्यक्ति की शरीर की सुरक्षात्मक क्रियाविधि की प्रतिरक्षा अनुक्रिया का परिणाम होती है। इस प्रकार की
अनुक्रिया अन्य परिस्थितियों में प्रकट हो सकती है इसलिए इस अवस्था में भी एड्स को पहचान पाना कठिन होता है ।
एड्स से संबंधित जटिलताएं ( ए आर सी ) : इस अवस्था में संक्रमित व्यक्ति में शारीरिक अथवा मानसिक रुग्णता के चिह्न और लक्षण दिखाई देने लगते हैं । एड्स संबंधित जटिलताओं के अंतर्गत आने वाले रोगों की सूची काफी बड़ी है। वास्तव में जिस समय एड्स के निदान की विशिष्ट प्रयोगशाला तकनीकें उपलब्ध नहीं थीं उस समय इस अवस्था को एड्स के निदान हेतु महत्वपूर्ण समझा जाता था। उस व्यक्ति को ए आर सी से ग्रस्त माना जाता है जिसे लगातार हलका बुखार ( तीन महीने अथवा और अधिक दिन तक ) रहता हो और जिसके शरीर का वजन 10 प्रतिशत कम हो गया हो अथवा जिसे लगातार दस्त (अतिसार) आते हों; शक्ति अत्यधिक क्षीण हो जाना तथा रात में पसीना आना, आदि अन्य लक्षण हो सकते हैं ।
विकासशील देशों में खराब पोषण तथा बहुत अधिक मात्रा में अन्य संक्रमणों के कारण ये सारे चिह्न और लक्षण अन्य कारण (णों) से भी हो सकते हैं। इसलिए एच आई वी / एड्स की पहचान अभी भी मुश्किल होगी। हालांकि, आमतौर पर इस बात का संदेह होने पर कि रोगी का एड्स के लिए जिम्मेदार खतरे वाले कारणों से सामना हुआ है, चिकित्सक विशिष्ट नैदानिक प्रयोगशाला परीक्षण किए जाने का अनुरोध करेगा।
अर्जित प्रतिरक्षा अल्पता संलक्षण (एड्स) : यह एच आई वी रोग की अंतिम अवस्था है । इस अवस्था में संक्रमित व्यक्ति को एक अथवा अधिक रोग हो जाते हैं। इनमें से अधिकांश रोग अवसरवादी संक्रमणों अथवा कैंसर के कारण होते हैं। कुछ संक्रामक जीव-परजीवी, जीवाणुवीय, विषाणुवीय और कवकीय-चुपचाप शरीर में अपनी उपस्थिति प्रकट किए बिना पड़े रहते हैं । वे अपना प्रभाव दिखाने के अवसर की तलाश में रहते हैं और जब शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति ( प्रतिरक्षा प्रणाली का कार्य) कम हो जाती है तब वे रोग पैदा कर देते हैं। इन रोगों को अवसरवादी संक्रमण / रोग कहते हैं । यह बात उन कैंसरीय कोशिकाओं पर भी लागू होती है जो कड़ी प्रतिरक्षा निगरानी प्रणाली के कारण नियंत्रण में रहती हैं। प्रतिरक्षा प्रणाली के कमजोर होने अथवा असफल होने पर ये कोशिकाएं अवसर का लाभ उठाकर अवसरवादी कैंसर को जन्म देती हैं ।
यदि शरीर की प्रतिरक्षा प्रक्रिया अक्षत रहे तो व्यक्ति अधिकांश अवसरवादी रोगों पर काबू पा सकता है। लेकिन एड्स के रोगियों में एक विशेष प्रकार की सी डी 4 पाजिटिव टी-सहायक कोशिकाओं (एक प्रकार की लसीका कोशिका) की | से छः सप्ताह पश्चात अनेक लोगों में उग्र फ्लू जैसी बीमारी हो जाती है । इस उग्र अवस्था के साथ-साथ बुखार आता है, गला दुखता है, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द होता है और अन्य सामान्य लक्षण दिखायी देते हैं । लेकिन यह रुग्णावस्था इतनी मामूली होती है कि उस समय यह बिना किसी का ध्यान आकर्षित किए बीत जाती है और कुछ समय बीत जाने पर इसे कोई याद भी नहीं रखता है। इस अवस्था की समाप्ति पर अधिकांश संक्रमित व्यक्तियों के शरीर में एच आई वी एंटीबाडी बन जाती है। रक्त में इनकी पहचान भी की जा सकती है । इसलिए इस उग्र अवस्था को सीरम रूपांतरण रुग्णावस्था भी कहते हैं । प्रारंभिक अवस्था की यह हल्की किस्म की बीमारी एक विवाद का प्रमुख कारण है। अनेक वैज्ञानिकों - विशेषकर एक अमेरिकी रेट्रोविषाणुविज्ञानी प्रोफेसर पीटर ड्यूसबर्ग-द्वारा प्रारंभ किये गये इस विवाद के अनुसार एच आई वी / एड्स के लिए बिलकुल भी जिम्मेदार नहीं है। फिर भी एच आई वी, और वास्तव में सभी रेट्रोवायरसों की विचित्र प्रकृति ने और साथ ही साथ विभिन्न प्रकार की जानपदिक रोगविज्ञानी विशिष्टताओं ने अधिकांश वैज्ञानिकों और चिकित्सकों को इस बात का कायल कर दिया है कि वास्तव में एच आई वी ही एड्स के लिए प्रमुख रूप से जिम्मेदार है। हालांकि यह हो सकता है कि रोग को अंतिम अवस्था पूर्ण विकसित एड्स तक पहुंचाने में अन्य कारक भी अपना योगदान देते हों। अगले अध्याय में इनका वर्णन किया गया है । अलाक्षणिक अवस्था : उग्र अवस्था के पश्चात, चाहे वह पहचान में आए अथवा न आए, संक्रमित व्यक्ति एच आई वी रोग की अलाक्षणिक अवस्था में प्रवेश करता है। इस समय किसी भी बीमारी के चिह्न और लक्षण नहीं होते हैं और संक्रमित व्यक्ति पूरी तरह स्वस्थ रहता है। जैसा कि पहले बताया जा चुका है इस समय उसे विषाणु का सक्षम वाहक माना जाता है। इसका मतलब है कि वह अपने रक्त और जननांग द्रवों के माध्यम से दूसरे व्यक्तियों को संक्रमित कर सकता है। सतत सामान्य लिम्फएडिनोपैथी : कुछ एच आई वी संक्रमित व्यक्तियों में यह अवस्था स्पष्ट दिखायी देती है जबकि अन्य में नहीं। इस अवस्था के दौरान संक्रमित व्यक्ति के गले और बगल में मौजूद लसीका ग्रंथियों में स्पष्ट सूजन दिखायी देती है। केवल इसे छोड़कर संक्रमित व्यक्ति सामान्य दिखता है और सामान्य महसूस भी करता है । ग्रंथियों में सूजन संक्रमित व्यक्ति की शरीर की सुरक्षात्मक क्रियाविधि की प्रतिरक्षा अनुक्रिया का परिणाम होती है। इस प्रकार की अनुक्रिया अन्य परिस्थितियों में प्रकट हो सकती है इसलिए इस अवस्था में भी एड्स को पहचान पाना कठिन होता है । एड्स से संबंधित जटिलताएं : इस अवस्था में संक्रमित व्यक्ति में शारीरिक अथवा मानसिक रुग्णता के चिह्न और लक्षण दिखाई देने लगते हैं । एड्स संबंधित जटिलताओं के अंतर्गत आने वाले रोगों की सूची काफी बड़ी है। वास्तव में जिस समय एड्स के निदान की विशिष्ट प्रयोगशाला तकनीकें उपलब्ध नहीं थीं उस समय इस अवस्था को एड्स के निदान हेतु महत्वपूर्ण समझा जाता था। उस व्यक्ति को ए आर सी से ग्रस्त माना जाता है जिसे लगातार हलका बुखार रहता हो और जिसके शरीर का वजन दस प्रतिशत कम हो गया हो अथवा जिसे लगातार दस्त आते हों; शक्ति अत्यधिक क्षीण हो जाना तथा रात में पसीना आना, आदि अन्य लक्षण हो सकते हैं । विकासशील देशों में खराब पोषण तथा बहुत अधिक मात्रा में अन्य संक्रमणों के कारण ये सारे चिह्न और लक्षण अन्य कारण से भी हो सकते हैं। इसलिए एच आई वी / एड्स की पहचान अभी भी मुश्किल होगी। हालांकि, आमतौर पर इस बात का संदेह होने पर कि रोगी का एड्स के लिए जिम्मेदार खतरे वाले कारणों से सामना हुआ है, चिकित्सक विशिष्ट नैदानिक प्रयोगशाला परीक्षण किए जाने का अनुरोध करेगा। अर्जित प्रतिरक्षा अल्पता संलक्षण : यह एच आई वी रोग की अंतिम अवस्था है । इस अवस्था में संक्रमित व्यक्ति को एक अथवा अधिक रोग हो जाते हैं। इनमें से अधिकांश रोग अवसरवादी संक्रमणों अथवा कैंसर के कारण होते हैं। कुछ संक्रामक जीव-परजीवी, जीवाणुवीय, विषाणुवीय और कवकीय-चुपचाप शरीर में अपनी उपस्थिति प्रकट किए बिना पड़े रहते हैं । वे अपना प्रभाव दिखाने के अवसर की तलाश में रहते हैं और जब शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति कम हो जाती है तब वे रोग पैदा कर देते हैं। इन रोगों को अवसरवादी संक्रमण / रोग कहते हैं । यह बात उन कैंसरीय कोशिकाओं पर भी लागू होती है जो कड़ी प्रतिरक्षा निगरानी प्रणाली के कारण नियंत्रण में रहती हैं। प्रतिरक्षा प्रणाली के कमजोर होने अथवा असफल होने पर ये कोशिकाएं अवसर का लाभ उठाकर अवसरवादी कैंसर को जन्म देती हैं । यदि शरीर की प्रतिरक्षा प्रक्रिया अक्षत रहे तो व्यक्ति अधिकांश अवसरवादी रोगों पर काबू पा सकता है। लेकिन एड्स के रोगियों में एक विशेष प्रकार की सी डी चार पाजिटिव टी-सहायक कोशिकाओं की |
पटना (आससे)। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने डी. एल. एड. (विशेष) परीक्षा, २०२०, इंटरमीडिएट कंपार्टमेंटल-सह-विशेष परीक्षा २०२१ नया माध्यमिक कंपार्टनेंटल-सह-विशेष परीक्षा २०२१ को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया है।
ये परीक्षाएं अप्रैल व मई में आयोजित होनेवाली थीं। इन परीक्षाओं के स्थगित किये जाने का निर्णय राज्य में कोरोना के तेजी से हो रहे संक्रमण और इससे उत्पन्न हुई विषम परिस्थितियों के मद्देनजर किया गया है।
उल्लेखनीय है कि डी. एल. एड (विशेष) परीक्षा २०२० इस महीने की २६ तारीख से ३० तारीख तक होनेवाली थी जबकि इंटरमीडिएट कंपार्टमेंटल-सह-विशेष परीक्षा २९ अप्रैल से १० मई तक होनेवाली थी।
इसी तरह माध्यमिक कंपार्टमेंटल-सह-विशेष परीक्षा २०२१ का आयोजन ५ मई से ८ मई तक किया जाना था। कोरोना महामारी की वर्तमान स्थिति देखते हुए ये तीनों परीक्षाएं अगले ओदश तक स्थगित कर दी गयी हैं। इस आशय की जानकारी बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के आधिकारिक सूत्रों ने दी।
| पटना । बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने डी. एल. एड. परीक्षा, दो हज़ार बीस, इंटरमीडिएट कंपार्टमेंटल-सह-विशेष परीक्षा दो हज़ार इक्कीस नया माध्यमिक कंपार्टनेंटल-सह-विशेष परीक्षा दो हज़ार इक्कीस को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया है। ये परीक्षाएं अप्रैल व मई में आयोजित होनेवाली थीं। इन परीक्षाओं के स्थगित किये जाने का निर्णय राज्य में कोरोना के तेजी से हो रहे संक्रमण और इससे उत्पन्न हुई विषम परिस्थितियों के मद्देनजर किया गया है। उल्लेखनीय है कि डी. एल. एड परीक्षा दो हज़ार बीस इस महीने की छब्बीस तारीख से तीस तारीख तक होनेवाली थी जबकि इंटरमीडिएट कंपार्टमेंटल-सह-विशेष परीक्षा उनतीस अप्रैल से दस मई तक होनेवाली थी। इसी तरह माध्यमिक कंपार्टमेंटल-सह-विशेष परीक्षा दो हज़ार इक्कीस का आयोजन पाँच मई से आठ मई तक किया जाना था। कोरोना महामारी की वर्तमान स्थिति देखते हुए ये तीनों परीक्षाएं अगले ओदश तक स्थगित कर दी गयी हैं। इस आशय की जानकारी बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के आधिकारिक सूत्रों ने दी। |
सराहन पंचायत के चपलाह गांव में पेड़ से गिरने के कारण ग्रामीण की मौत हो गई। मृतक की पहचान धरमू वासी गांव चपलाह के तौर पर की गई है। पुलिस ने मेडिकल कालेज चंबा में शव का पोस्टमार्टम करवाकर अंतिम संस्कार हेतु परिजनों के हवाले कर दिया है। उपमंडलीय प्रशासन की ओर से मृतक के परिजनों को दस हजार रुपए की फौरी राहत प्रदान कर दी गई है। पुलिस ने घटना की इत्ल्ला रपट रोजनामचे में डालकर विस्तृत कारणों की जांच आरंभ कर दी है। चपलाह गांव का 71 वर्षीय धरमू घर के समीप बान के पेड़ से पशुओं के लिए चारा काट रहा था।
इसी दौरान अचानक पांव फिसलने के कारण धरमू अनियंत्रित होकर धड़ाम से नीचे आ गिरा। धरमू को पेड़ से गिरता देख मौके पर पहुंचे लोगों ने तुरंत परिजनों के सहयोग से उठाकर वाहन के जरिए उपचार के लिए मेडिकल कालेज चंबा पहुंचाया। जहां मौजूद चिकित्सक ने धरमू को मृत घोषित करार दे दिया। इसी बीच घटना की सूचना पाते ही पुलिस टीम ने मेडिकल कालेज पहुंचकर शव को अपने कब्जे में ले लिया। पुलिस ने परिजनों के ब्यान के आधार पर फिलहाल इस संदर्भ में सीआरपीसी की धारा 174 के तहत कार्रवाई अमल में लाई है। उधर, डीएसपी हैडक्वार्टर चंबा अभिमन्यु वर्मा ने घटना की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि घटना को लेकर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई अमल में लाई गई है। उन्होंने बताया कि शव का पोस्टमार्टम करवाकर वारिसों को सौंप दिया गया है।
| सराहन पंचायत के चपलाह गांव में पेड़ से गिरने के कारण ग्रामीण की मौत हो गई। मृतक की पहचान धरमू वासी गांव चपलाह के तौर पर की गई है। पुलिस ने मेडिकल कालेज चंबा में शव का पोस्टमार्टम करवाकर अंतिम संस्कार हेतु परिजनों के हवाले कर दिया है। उपमंडलीय प्रशासन की ओर से मृतक के परिजनों को दस हजार रुपए की फौरी राहत प्रदान कर दी गई है। पुलिस ने घटना की इत्ल्ला रपट रोजनामचे में डालकर विस्तृत कारणों की जांच आरंभ कर दी है। चपलाह गांव का इकहत्तर वर्षीय धरमू घर के समीप बान के पेड़ से पशुओं के लिए चारा काट रहा था। इसी दौरान अचानक पांव फिसलने के कारण धरमू अनियंत्रित होकर धड़ाम से नीचे आ गिरा। धरमू को पेड़ से गिरता देख मौके पर पहुंचे लोगों ने तुरंत परिजनों के सहयोग से उठाकर वाहन के जरिए उपचार के लिए मेडिकल कालेज चंबा पहुंचाया। जहां मौजूद चिकित्सक ने धरमू को मृत घोषित करार दे दिया। इसी बीच घटना की सूचना पाते ही पुलिस टीम ने मेडिकल कालेज पहुंचकर शव को अपने कब्जे में ले लिया। पुलिस ने परिजनों के ब्यान के आधार पर फिलहाल इस संदर्भ में सीआरपीसी की धारा एक सौ चौहत्तर के तहत कार्रवाई अमल में लाई है। उधर, डीएसपी हैडक्वार्टर चंबा अभिमन्यु वर्मा ने घटना की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि घटना को लेकर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई अमल में लाई गई है। उन्होंने बताया कि शव का पोस्टमार्टम करवाकर वारिसों को सौंप दिया गया है। |
प्रलेस, जलेस एवं जसम की ओर से शुक्रवार को निराला सभागार में जुटे रचनाकारो ने आलोचना के शिखर पुरुष नामवर सिंह को याद किया। बतौर अध्यक्ष प्रो. राजेंद्र कुमार ने कहा, नामवर सिंह और रामविलास शर्मा उस समय की आलोचना के दो पाट थे । इन दो पाटों से बचना मुश्किल था लेकिन इन दो पाटों से आलोचना का अंतर्द्वंद विकसित हुआ। उनका दायरा तो दिल्ली बना लेकिन उनका चिंतन आधार इलाहाबाद था।
नामवर जी विवादों में रहना स्वयं पसंद करते थे क्योंकि उनका मानना था कि इससे ठहरे हुए जल को गति मिलती है । संतोष भदौरिया ने कहा, कहन की अपेक्षा उनका स्वयं का लेखन ज्यादा प्रामाणिक व प्रभावी है। रामप्यारे राय ने कहा, नामवर जी लिविंग लीजेंड थे। सुधांशु मालवीय ने उनके अध्यापकीय कौशल और श्री प्रकाश मिश्र ने लेखन के अंतर्विरोधों की बात की । प्रणय कृष्ण ने कहा कि उनका व्यक्तित्व जेएनयू के लोकतांत्रिक माहौल के एकदम अनुकूल था।
हिंदी पट्टी में विकसित गुरुडम, स्टारडम और पांव छुआई के वह बिल्कुल खिलाफ थे । अस्मिता विमर्शों जैसे दलित या स्त्री का उन्होंने निषेध किया, जो तब भी बहस तलब और अब भी है। सेन्टर ऑफ मीडिया स्टडीज के कोर्स कोआर्डिनेटर धनंजय चोपड़ा ने कहा नामवर जी के पास पत्रकारिता का विजन था ।
अमितेश ने अंतिम दिनों में लिए उनके इंटरव्यू के हवाले से कहा कि वह अंत तक अध्ययन में अद्यतन और स्मृतियों को संजोए रखना चाहते थे। रामजी राय ने कहा किसी भी बड़े आदमी के जीवन में अंतर्विरोध होते हैं लेकिन उन पर बात करने से उसका कद छोटा नहीं होता। श्रद्धांजलि सभा का संचालन समकालीन जनमत के संपादक केके पांडेय ने किया।
सभा में अनिल रंजन भौमिक, अशोक त्रिपाठी, प्रियदर्शन मालवीय. सूर्य नारायण, सुनील विक्त्रस्म सिंह अविनाश मिश्र, प्रवीण शेखर, अनुपम परिहार, शिवानंद आदि ने भी अपने संस्मरण एवं विचार साझा किए। सभा में नसीम अंसारी, हरिश्चंद्र द्विवेदी,एटक सचिव रामसागर, एक्टू सचिव डॉ कमल, कथाकार नीलम शंकर,अशरफ अली बेग, असरार गांधी,अंशुमान कुशवाहा, फजले हसनैन,अनु पटेल, डॉ आरपी सिंह, डॉ सरोज सिंह, डॉ दीनानाथ,निरंजन सिंह,प्रोफेसर विवेक तिवारी,कुमार वीरेंद्र, राजू, शिवकुमार आदि मौजूद थे। '
| प्रलेस, जलेस एवं जसम की ओर से शुक्रवार को निराला सभागार में जुटे रचनाकारो ने आलोचना के शिखर पुरुष नामवर सिंह को याद किया। बतौर अध्यक्ष प्रो. राजेंद्र कुमार ने कहा, नामवर सिंह और रामविलास शर्मा उस समय की आलोचना के दो पाट थे । इन दो पाटों से बचना मुश्किल था लेकिन इन दो पाटों से आलोचना का अंतर्द्वंद विकसित हुआ। उनका दायरा तो दिल्ली बना लेकिन उनका चिंतन आधार इलाहाबाद था। नामवर जी विवादों में रहना स्वयं पसंद करते थे क्योंकि उनका मानना था कि इससे ठहरे हुए जल को गति मिलती है । संतोष भदौरिया ने कहा, कहन की अपेक्षा उनका स्वयं का लेखन ज्यादा प्रामाणिक व प्रभावी है। रामप्यारे राय ने कहा, नामवर जी लिविंग लीजेंड थे। सुधांशु मालवीय ने उनके अध्यापकीय कौशल और श्री प्रकाश मिश्र ने लेखन के अंतर्विरोधों की बात की । प्रणय कृष्ण ने कहा कि उनका व्यक्तित्व जेएनयू के लोकतांत्रिक माहौल के एकदम अनुकूल था। हिंदी पट्टी में विकसित गुरुडम, स्टारडम और पांव छुआई के वह बिल्कुल खिलाफ थे । अस्मिता विमर्शों जैसे दलित या स्त्री का उन्होंने निषेध किया, जो तब भी बहस तलब और अब भी है। सेन्टर ऑफ मीडिया स्टडीज के कोर्स कोआर्डिनेटर धनंजय चोपड़ा ने कहा नामवर जी के पास पत्रकारिता का विजन था । अमितेश ने अंतिम दिनों में लिए उनके इंटरव्यू के हवाले से कहा कि वह अंत तक अध्ययन में अद्यतन और स्मृतियों को संजोए रखना चाहते थे। रामजी राय ने कहा किसी भी बड़े आदमी के जीवन में अंतर्विरोध होते हैं लेकिन उन पर बात करने से उसका कद छोटा नहीं होता। श्रद्धांजलि सभा का संचालन समकालीन जनमत के संपादक केके पांडेय ने किया। सभा में अनिल रंजन भौमिक, अशोक त्रिपाठी, प्रियदर्शन मालवीय. सूर्य नारायण, सुनील विक्त्रस्म सिंह अविनाश मिश्र, प्रवीण शेखर, अनुपम परिहार, शिवानंद आदि ने भी अपने संस्मरण एवं विचार साझा किए। सभा में नसीम अंसारी, हरिश्चंद्र द्विवेदी,एटक सचिव रामसागर, एक्टू सचिव डॉ कमल, कथाकार नीलम शंकर,अशरफ अली बेग, असरार गांधी,अंशुमान कुशवाहा, फजले हसनैन,अनु पटेल, डॉ आरपी सिंह, डॉ सरोज सिंह, डॉ दीनानाथ,निरंजन सिंह,प्रोफेसर विवेक तिवारी,कुमार वीरेंद्र, राजू, शिवकुमार आदि मौजूद थे। ' |
India News (इंडिया न्यूज), Agra News: मसहूर कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर (Devkinandan Thakur) ने हाल ही में दावा कि आगरा (Agra News) की जामा मस्जिद की सीढ़ियों में भगवान श्रीकृष्ण की मूर्तियों को दबाया गया है। वहीं दावे के बाद आगरा कोर्ट में देवकीनंदन ठाकुर की पहल पर गठित ट्रस्ट ने वाद भी दाखिल कर दिया है। वहीं देवकीनंदन के दावे के बाद मस्जिद के गेट पर पुलिस वालों को तैनात किया गया है।
दायर वाद मे कहा गया है कि औरंगजेब ने मथुरा से भगवान श्रीकृष्ण की मूर्तियां लूट कर आगरा की जामा मस्जिद की सीढ़ियों में दबा दिया था। उस वाद में मांग की गयी है कि सीढियों की खुदाई की जाए और मूर्तियां वापस सौंपी जाए। वहीं इन मुर्तियों को मथुरा के श्री कृष्ण जन्म स्थान पर स्थापित किया जाएगा। इस वाद को स्वीकारते हुए कोर्ट ने मस्जिद पक्ष को नोटिस भी जारी किया है। कुछ दिनों पहले देवकीनंदन ठाकुर ने भोपाल में आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से मुलाकात की थी।
वहीं वहां से उन्होंने ऐलान किया था कि जामा मस्जिद की सीढ़ियों में दबे भगवान श्री कृष्ण को वापस मथुरा लाकर रहेंगे। अब इसी मामले में कथावाचक के संरक्षण में एक ट्रस्ट का गठन किया गया है। ट्रस्ट ने न्यायालय में वाद दाखिल किया है। कोर्ट ने वाद को स्वीकार कर लिया है साथ ही मस्जिद पक्ष को नोटिस देकर जवाब मांगा है। पूरा मामला धार्मिक है इसको दखते हुए प्रशासन मुस्तैद है यही कारण है कि सुरक्षा को देखते हुए सीढ़ियों के पास बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात कर दिए गए हैं।
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| India News , Agra News: मसहूर कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने हाल ही में दावा कि आगरा की जामा मस्जिद की सीढ़ियों में भगवान श्रीकृष्ण की मूर्तियों को दबाया गया है। वहीं दावे के बाद आगरा कोर्ट में देवकीनंदन ठाकुर की पहल पर गठित ट्रस्ट ने वाद भी दाखिल कर दिया है। वहीं देवकीनंदन के दावे के बाद मस्जिद के गेट पर पुलिस वालों को तैनात किया गया है। दायर वाद मे कहा गया है कि औरंगजेब ने मथुरा से भगवान श्रीकृष्ण की मूर्तियां लूट कर आगरा की जामा मस्जिद की सीढ़ियों में दबा दिया था। उस वाद में मांग की गयी है कि सीढियों की खुदाई की जाए और मूर्तियां वापस सौंपी जाए। वहीं इन मुर्तियों को मथुरा के श्री कृष्ण जन्म स्थान पर स्थापित किया जाएगा। इस वाद को स्वीकारते हुए कोर्ट ने मस्जिद पक्ष को नोटिस भी जारी किया है। कुछ दिनों पहले देवकीनंदन ठाकुर ने भोपाल में आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से मुलाकात की थी। वहीं वहां से उन्होंने ऐलान किया था कि जामा मस्जिद की सीढ़ियों में दबे भगवान श्री कृष्ण को वापस मथुरा लाकर रहेंगे। अब इसी मामले में कथावाचक के संरक्षण में एक ट्रस्ट का गठन किया गया है। ट्रस्ट ने न्यायालय में वाद दाखिल किया है। कोर्ट ने वाद को स्वीकार कर लिया है साथ ही मस्जिद पक्ष को नोटिस देकर जवाब मांगा है। पूरा मामला धार्मिक है इसको दखते हुए प्रशासन मुस्तैद है यही कारण है कि सुरक्षा को देखते हुए सीढ़ियों के पास बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात कर दिए गए हैं। Also Read: |
दिलेर समाचार, नई दिल्लीः रवीना टंडन के खिलाफ ओडिशा के भुवनेश्वर में स्थित लिंगराज मंदिर के प्रशासन ने केस दर्ज करा दिया है. मंदिर प्रशासन ने बॉलीवुड एक्ट्रेस पर लिंगराज मंदिर परिसर के 'नो कैमरा जोन' में विज्ञापन के लिए शूटिंग करने का आरोप लगाया है. भगवान शिव का 11वीं सदी का यह मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की देख-रेख में है. इस बात की जानकारी न्यूज एजेंसी एएनआई के ट्वीट में दी गई है. रिपोर्टों के मुताबिक, यह मामला उस समय सामने आया जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें मंदिर परिसर में रवीना टंडन ब्यूटी टिप्स देती नजर आ रही थीं. इस वीडियो को मोबाइल से रिकॉर्ड किया गया था. रवीना टंडन रविवार को मंदिर गई थीं.
| दिलेर समाचार, नई दिल्लीः रवीना टंडन के खिलाफ ओडिशा के भुवनेश्वर में स्थित लिंगराज मंदिर के प्रशासन ने केस दर्ज करा दिया है. मंदिर प्रशासन ने बॉलीवुड एक्ट्रेस पर लिंगराज मंदिर परिसर के 'नो कैमरा जोन' में विज्ञापन के लिए शूटिंग करने का आरोप लगाया है. भगवान शिव का ग्यारहवीं सदी का यह मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की देख-रेख में है. इस बात की जानकारी न्यूज एजेंसी एएनआई के ट्वीट में दी गई है. रिपोर्टों के मुताबिक, यह मामला उस समय सामने आया जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें मंदिर परिसर में रवीना टंडन ब्यूटी टिप्स देती नजर आ रही थीं. इस वीडियो को मोबाइल से रिकॉर्ड किया गया था. रवीना टंडन रविवार को मंदिर गई थीं. |
वाले व्यक्ति फिसल सकते हैं और उनके चोट लग सकती एक व्यक्ति सड़क पर पड़े केलों के छिलकों को देखकर सोचता है कि किसी व्यक्ति का अनजाने में केलों के छिलकों पर पैर फिसल सकता है और फिसल जाने से उसके चोट लग सकती है। यह विचार कर वह व्यक्ति उन छिलकों को उठाकर ऐसी जगह रख देता है जहां पर किसी के पैर पड़ने की सम्भावना न हो ।
यद्यपि पहले व्यक्ति के मन में यह भावना नहीं है कि इन छिलकों से किसी व्यक्ति को कष्ट हो, वह तो केवल लापरवाही से ही छिलके फेंक देता है, परन्तु फिर भी उसके बुरे कर्मों का ही संचय होगा, क्योंकि वह ऐसा कार्य कर रहा है, जिससे दूसरों को कष्ट पहुंचने की सम्भावना है। इसके विपरीत दूसरे व्यक्ति के, उसकी अच्छी भावनाओं के कारण, अच्छे कर्मों का संचय होगा ।
(२४) एक डाकू है। उसने कई अन्य व्यक्तियों को साथ लेकर अपना एक गिरोह बनाया हुआ है। वह गिरोह डाके डालता है, लूइमार करता तथा हत्याएं भी करता रहता है। डाके डालने, लूटमार करने तथा हत्याए करने की योजना वह डाकू सरदार स्वयं बनाता है। फिर अपने साथियों को लेकर वह उन योजनाओ को क्रियान्वित करता है ।
उनमें से एक साथी इन बुरे कार्यों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेता है । वह सोचता रहता है कि यह सरदार मर जाये या पुलिस द्वारा पकड़ा जाये, तो वह इस गिरोह का सरदार बन जाये ।
एक अन्य साथी बहुत अनिच्छा से इस गिरोह के साथ है । वह यह सोचता रहता है कि जैसे ही अवसर मिले, वह इस गिरोह से और ऐसे कार्यों से अलग हो जाये।
इन तीनों व्यक्तियों में से सरदार के बहुत अधिक बुरे कर्मों का संचय होगा, दूसरे व्यक्ति के उससे कुछ कम और तीसरे व्यक्ति के, और भी कम बुरे कर्मों का संचय होगा।
इस प्रकार अज्ञान व असंयम के कारण हमारे मन में भिन्न-भिन्न भावनाएं उठती रहती हैं और उन भावनाओं के अनुसार ही हमारे कर्मों का संचय होता रहता है। जितनी अधिक तीव्र हमारी भावनाएं होंगी, उतने ही शक्तिशाली कर्मों का हमारे संचय होगा, उन्हीं के अनुसार हमको अधिक प्रभावदायक फल भोगना पड़ेगा तथा उन कर्मों को नष्ट करने के लिये भी उतनी ही अधिक साधना की आवश्यकता पडेगी ।
अपनी भावनाओं के अनुसार कर्मों के संचय होने के सम्बन्ध में यह स्पष्ट कर देना आवश्यक है कि कोई व्यक्ति बुरे कार्य तो करता रहे और
कहता यह रहे कि उसकी भावनाएं बरे कार्य करने की नहीं हैं तथा वह तो लाचारी से ही ऐसे कार्य कर रहा है, तो वह अन्य व्यक्तियों के साथ ही नहीं, स्वयं अपने साथ भी छल कर रहा है। किसी व्यक्ति की भावनाएं कुछ और हों और उसके कार्य उन भावनाओ से बिलकुल भिन्न हों- ऐसा होना यदि असम्भव नही तो कठिन अवश्य है । जो व्यक्ति अपने जीवनयापन के लिए या अन्य किसी कारणवश अनुचित कार्य कर रहे हैं, वे यदि चाहें तो अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति और दृढ निश्चय के बल पर अनुचित साधन छोड़कर, परिश्रम, ईमानदारी व समुचित साधनों के द्वारा भी अपना जीवनयापन कर सकते है। यह सम्भव है कि इस प्रकार अनुचित साधन छोड देने से प्रारम्भ में उनको कुछ कठिनाइयां आये और उन्हें कुछ शारीसे रिक सुख व सुविधायें छोडनी पडे, परन्तु ऐसा करने से यदि हम भविष्य में मिलने वाले सुफल को दृष्टि में न भी लायें तो भी उनको तत्काल ही जो आन्तरिक सुख व शान्ति प्राप्त होगी, उनकी तुलना में वे कठिनाइयां कुछ भी नहीं हैं। *
अधिकांश में यही देखा गया है कि जो व्यक्ति परिश्रम, ईमानदारी व समुचित साधनों पर दृढ रहते है, अन्तत सफलता उनके चरण चूमती है । अनेकों दृढ निश्चयी पुरुषों व महिलाओं ने अनुचित साधनों को न अपनाकर, समुचित साधनों पर ही दृढ रहने के कारण अनेको कष्ट सहे है, तथा अनेकों प्रलोभनों व दबावों के बावजूद भी वे अपने मार्ग से कभी विचलित नहीं हुए । बहुत समय व्यतीत जाने पर भी जनसाधारण उनके जीवन से प्ररणा प्राप्त करते रहते हैं ।
फिर भी यदि हमारी इच्छा शक्ति इतनी दृढ नहीं है और हमें अत्यधिक लाचारी में अपनी भावनाओं के प्रतिकूल कोई बुरा कार्य करना भी पड जाये, तो हमें उस कार्य में लिप्त नही होना चाहिये । जिस प्रकार एक रोगी बालक कडवी औषधि पीने का विरोध करता है, उसी प्रकार हमे उस कार्य का विरोध करना चाहिये, और जितनी जल्दी हो सके उस कार्य से अलग
हमें इस बात को भली प्रकार समझ लेना चाहिये कि अनुचित साधनों का फल कभी भी अच्छा नहीं होता। अनूचित साधनों के प्रयोग के बाद हमें जो सफलता प्राप्त होती है और जिसे हम अनुचित साधनों का फल मान लेते है, वास्तव में वह सफलता हमारे द्वारा भूतकाल में किये हुए अच्छे कर्मों का ही सुफल है । यदि यह सफलता अनुचित साधनों का फल होती, तो संसार में जितने भी व्यक्ति अनुचित साधन प्रयोग में लाते हैं, वे सभी सफल हो गये होते ।
जाना चाहिये ।
हमने पिछले पृष्ठों में कई बार इस तथ्य का उल्लेख किया है, कि जैसी भी हमारी भावनाएं और हमारे कार्य होते हैं, उन्हीं के अनुसार अच्छे व बुरे कर्म हमारी आत्मा की ओर आकृष्ट होते हैं और वे आत्मा के ऊपर कर्मों का आवरण बनाते रहते हैं। यही कर्म अपनी अवधि आने पर हमें अच्छा व बुरा फल देते रहते हैं और अपना फल देकर आत्मा के ऊपर बने हुए कर्मों के आवरण से अलग होते रहते हैं। वैसे तो हमारी भावनाएं इतनी विविध प्रकार की होती हैं कि उनकी कोई गिनती नहीं हो सकती । इसलिये उन भावनाओं के फलस्वरूप जो कर्म हमारी आत्मा की ओर आकृष्ट होते हैं उनमें भी बहुत ही विविधता होती है। कर्मों की इस विविधता के कारण उनके फल भी बहुत विविध होते हैं। कर्मों के फल में इस विविधता के कारण ही इस विश्व के प्राणियों को भिन्न-भिन्न फल मलता है और उनमें इतनी विभिन्नता होती है कि इस विश्व में दो प्राणी भी बिलकुल एक जैसे शायद ही मिल सकें। इन कर्मों में इतनी विविधता होते हुए भी विचारकों ने उन कर्मों को आठ वर्गों में विभक्त किया है ।
(१) जब हम अपनी आत्मा, अपने शरीर और इस विश्व की वास्तविकता की न तो स्वयं जानकारी करते हैं और न दूसरे प्राणियों को करने देते हैं तो हमारी आत्मा की ओर ऐसे कर्मों का आगमन होता है जो पहले वर्ग में आते हैं और जिनके फलस्वरूप हमें अपनी आत्मा, अपने शरीर और इस विश्व का सच्चा ज्ञान नहीं हो पाता । ( आत्मा का अस्तित्व है, आत्मा इस भौतिक शरीर से बिलकुल भिन्न एक अभौतिक द्रव्य है, आत्मा अजर व अमर है, यह आत्मा अपने कर्मों के फलस्वरूप इस विश्व में विभिन्न योनियां ग्रहण करती रहती है और सुख व दुःख भोगती रहती , यह आत्मा अपने ही सत-प्रयत्नों से इन कर्मों को अपने से अलग करके सच्चा सुख ( मुक्ति ) प्राप्त कर सकती है और एक बार मुक्ति प्राप्त कर लेने पर यह आत्मा सदैव के लिए ही सच्चे सुख का भोग करती हैयही सच्चा ज्ञान है ।)
(२) जब हम ऊपर लिखित सत्य का विश्वास व श्रद्धान न स्वयं करते है और न दूसरों को करने देते हैं तो हमारी आत्मा की ओर ऐसे कर्मों का आगमन होता है, जो दूसरे वर्ग में आते हैं और जिनके फलस्वरूप हमें "सत्य" का विश्वास व श्रद्धान नहीं हो पाता।
(३) जब हमारी भावनाएं दूसरे प्राणियों को शारीरिक व मानसिक कष्ट पहुंचाने की होती हैं तब हमारी आत्मा की ओर ऐसे कर्मों का आग मन होता है जो तीसरे वर्ग में आते हैं और जिनके फलस्वरूप हमें शारीरिक व मानसिक कष्ट भोगने पड़ते हैं।। | वाले व्यक्ति फिसल सकते हैं और उनके चोट लग सकती एक व्यक्ति सड़क पर पड़े केलों के छिलकों को देखकर सोचता है कि किसी व्यक्ति का अनजाने में केलों के छिलकों पर पैर फिसल सकता है और फिसल जाने से उसके चोट लग सकती है। यह विचार कर वह व्यक्ति उन छिलकों को उठाकर ऐसी जगह रख देता है जहां पर किसी के पैर पड़ने की सम्भावना न हो । यद्यपि पहले व्यक्ति के मन में यह भावना नहीं है कि इन छिलकों से किसी व्यक्ति को कष्ट हो, वह तो केवल लापरवाही से ही छिलके फेंक देता है, परन्तु फिर भी उसके बुरे कर्मों का ही संचय होगा, क्योंकि वह ऐसा कार्य कर रहा है, जिससे दूसरों को कष्ट पहुंचने की सम्भावना है। इसके विपरीत दूसरे व्यक्ति के, उसकी अच्छी भावनाओं के कारण, अच्छे कर्मों का संचय होगा । एक डाकू है। उसने कई अन्य व्यक्तियों को साथ लेकर अपना एक गिरोह बनाया हुआ है। वह गिरोह डाके डालता है, लूइमार करता तथा हत्याएं भी करता रहता है। डाके डालने, लूटमार करने तथा हत्याए करने की योजना वह डाकू सरदार स्वयं बनाता है। फिर अपने साथियों को लेकर वह उन योजनाओ को क्रियान्वित करता है । उनमें से एक साथी इन बुरे कार्यों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेता है । वह सोचता रहता है कि यह सरदार मर जाये या पुलिस द्वारा पकड़ा जाये, तो वह इस गिरोह का सरदार बन जाये । एक अन्य साथी बहुत अनिच्छा से इस गिरोह के साथ है । वह यह सोचता रहता है कि जैसे ही अवसर मिले, वह इस गिरोह से और ऐसे कार्यों से अलग हो जाये। इन तीनों व्यक्तियों में से सरदार के बहुत अधिक बुरे कर्मों का संचय होगा, दूसरे व्यक्ति के उससे कुछ कम और तीसरे व्यक्ति के, और भी कम बुरे कर्मों का संचय होगा। इस प्रकार अज्ञान व असंयम के कारण हमारे मन में भिन्न-भिन्न भावनाएं उठती रहती हैं और उन भावनाओं के अनुसार ही हमारे कर्मों का संचय होता रहता है। जितनी अधिक तीव्र हमारी भावनाएं होंगी, उतने ही शक्तिशाली कर्मों का हमारे संचय होगा, उन्हीं के अनुसार हमको अधिक प्रभावदायक फल भोगना पड़ेगा तथा उन कर्मों को नष्ट करने के लिये भी उतनी ही अधिक साधना की आवश्यकता पडेगी । अपनी भावनाओं के अनुसार कर्मों के संचय होने के सम्बन्ध में यह स्पष्ट कर देना आवश्यक है कि कोई व्यक्ति बुरे कार्य तो करता रहे और कहता यह रहे कि उसकी भावनाएं बरे कार्य करने की नहीं हैं तथा वह तो लाचारी से ही ऐसे कार्य कर रहा है, तो वह अन्य व्यक्तियों के साथ ही नहीं, स्वयं अपने साथ भी छल कर रहा है। किसी व्यक्ति की भावनाएं कुछ और हों और उसके कार्य उन भावनाओ से बिलकुल भिन्न हों- ऐसा होना यदि असम्भव नही तो कठिन अवश्य है । जो व्यक्ति अपने जीवनयापन के लिए या अन्य किसी कारणवश अनुचित कार्य कर रहे हैं, वे यदि चाहें तो अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति और दृढ निश्चय के बल पर अनुचित साधन छोड़कर, परिश्रम, ईमानदारी व समुचित साधनों के द्वारा भी अपना जीवनयापन कर सकते है। यह सम्भव है कि इस प्रकार अनुचित साधन छोड देने से प्रारम्भ में उनको कुछ कठिनाइयां आये और उन्हें कुछ शारीसे रिक सुख व सुविधायें छोडनी पडे, परन्तु ऐसा करने से यदि हम भविष्य में मिलने वाले सुफल को दृष्टि में न भी लायें तो भी उनको तत्काल ही जो आन्तरिक सुख व शान्ति प्राप्त होगी, उनकी तुलना में वे कठिनाइयां कुछ भी नहीं हैं। * अधिकांश में यही देखा गया है कि जो व्यक्ति परिश्रम, ईमानदारी व समुचित साधनों पर दृढ रहते है, अन्तत सफलता उनके चरण चूमती है । अनेकों दृढ निश्चयी पुरुषों व महिलाओं ने अनुचित साधनों को न अपनाकर, समुचित साधनों पर ही दृढ रहने के कारण अनेको कष्ट सहे है, तथा अनेकों प्रलोभनों व दबावों के बावजूद भी वे अपने मार्ग से कभी विचलित नहीं हुए । बहुत समय व्यतीत जाने पर भी जनसाधारण उनके जीवन से प्ररणा प्राप्त करते रहते हैं । फिर भी यदि हमारी इच्छा शक्ति इतनी दृढ नहीं है और हमें अत्यधिक लाचारी में अपनी भावनाओं के प्रतिकूल कोई बुरा कार्य करना भी पड जाये, तो हमें उस कार्य में लिप्त नही होना चाहिये । जिस प्रकार एक रोगी बालक कडवी औषधि पीने का विरोध करता है, उसी प्रकार हमे उस कार्य का विरोध करना चाहिये, और जितनी जल्दी हो सके उस कार्य से अलग हमें इस बात को भली प्रकार समझ लेना चाहिये कि अनुचित साधनों का फल कभी भी अच्छा नहीं होता। अनूचित साधनों के प्रयोग के बाद हमें जो सफलता प्राप्त होती है और जिसे हम अनुचित साधनों का फल मान लेते है, वास्तव में वह सफलता हमारे द्वारा भूतकाल में किये हुए अच्छे कर्मों का ही सुफल है । यदि यह सफलता अनुचित साधनों का फल होती, तो संसार में जितने भी व्यक्ति अनुचित साधन प्रयोग में लाते हैं, वे सभी सफल हो गये होते । जाना चाहिये । हमने पिछले पृष्ठों में कई बार इस तथ्य का उल्लेख किया है, कि जैसी भी हमारी भावनाएं और हमारे कार्य होते हैं, उन्हीं के अनुसार अच्छे व बुरे कर्म हमारी आत्मा की ओर आकृष्ट होते हैं और वे आत्मा के ऊपर कर्मों का आवरण बनाते रहते हैं। यही कर्म अपनी अवधि आने पर हमें अच्छा व बुरा फल देते रहते हैं और अपना फल देकर आत्मा के ऊपर बने हुए कर्मों के आवरण से अलग होते रहते हैं। वैसे तो हमारी भावनाएं इतनी विविध प्रकार की होती हैं कि उनकी कोई गिनती नहीं हो सकती । इसलिये उन भावनाओं के फलस्वरूप जो कर्म हमारी आत्मा की ओर आकृष्ट होते हैं उनमें भी बहुत ही विविधता होती है। कर्मों की इस विविधता के कारण उनके फल भी बहुत विविध होते हैं। कर्मों के फल में इस विविधता के कारण ही इस विश्व के प्राणियों को भिन्न-भिन्न फल मलता है और उनमें इतनी विभिन्नता होती है कि इस विश्व में दो प्राणी भी बिलकुल एक जैसे शायद ही मिल सकें। इन कर्मों में इतनी विविधता होते हुए भी विचारकों ने उन कर्मों को आठ वर्गों में विभक्त किया है । जब हम अपनी आत्मा, अपने शरीर और इस विश्व की वास्तविकता की न तो स्वयं जानकारी करते हैं और न दूसरे प्राणियों को करने देते हैं तो हमारी आत्मा की ओर ऐसे कर्मों का आगमन होता है जो पहले वर्ग में आते हैं और जिनके फलस्वरूप हमें अपनी आत्मा, अपने शरीर और इस विश्व का सच्चा ज्ञान नहीं हो पाता । प्राप्त कर सकती है और एक बार मुक्ति प्राप्त कर लेने पर यह आत्मा सदैव के लिए ही सच्चे सुख का भोग करती हैयही सच्चा ज्ञान है ।) जब हम ऊपर लिखित सत्य का विश्वास व श्रद्धान न स्वयं करते है और न दूसरों को करने देते हैं तो हमारी आत्मा की ओर ऐसे कर्मों का आगमन होता है, जो दूसरे वर्ग में आते हैं और जिनके फलस्वरूप हमें "सत्य" का विश्वास व श्रद्धान नहीं हो पाता। जब हमारी भावनाएं दूसरे प्राणियों को शारीरिक व मानसिक कष्ट पहुंचाने की होती हैं तब हमारी आत्मा की ओर ऐसे कर्मों का आग मन होता है जो तीसरे वर्ग में आते हैं और जिनके फलस्वरूप हमें शारीरिक व मानसिक कष्ट भोगने पड़ते हैं।। |
पटना। बिहार के पटना में एक पादरी द्वारा दो महिलाओं से रेप का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में आरोपी पादरी को गिरफ्तार कर लिया है। पादरी चंद्र कुमार पर आरोप है कि वह महिलाओं का धर्म परिवर्तन करा कर उनका यौन शोषण करता था।
ऐसी दो महिलाएं जिनका बदला हुआ नाम गुडिया और रेशमा है जिन्हें पिछले 6 महीनों से वो अपनी हवस का शिकार बना रहा था। इस दौरान पादरी ने दोनों का अबॉर्शन भी कराया।
दोनों महिलाओं का आरोप है कि वे करीब छह माह से चर्च से जुड़ी थीं। वहां जाकर प्रेयर करती थीं। महिलाओं के मुताबिक, प्रेयर के दौरान प्राइवेट पार्ट को टच करते थे। यही नहीं कहते थे कि ऐसा करने से शरीर में मौजूद शैतान भाग जाएगा।
एक पीड़िता ने बताया कि जब वो प्रेग्नेंट हो गई तो पादरी ने राजा बाजार स्थित एक हॉस्पिटल में उसे ले जाकर अबॉर्शन कराया। फिलहाल, महिलाओं की शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी पादरी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
| पटना। बिहार के पटना में एक पादरी द्वारा दो महिलाओं से रेप का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में आरोपी पादरी को गिरफ्तार कर लिया है। पादरी चंद्र कुमार पर आरोप है कि वह महिलाओं का धर्म परिवर्तन करा कर उनका यौन शोषण करता था। ऐसी दो महिलाएं जिनका बदला हुआ नाम गुडिया और रेशमा है जिन्हें पिछले छः महीनों से वो अपनी हवस का शिकार बना रहा था। इस दौरान पादरी ने दोनों का अबॉर्शन भी कराया। दोनों महिलाओं का आरोप है कि वे करीब छह माह से चर्च से जुड़ी थीं। वहां जाकर प्रेयर करती थीं। महिलाओं के मुताबिक, प्रेयर के दौरान प्राइवेट पार्ट को टच करते थे। यही नहीं कहते थे कि ऐसा करने से शरीर में मौजूद शैतान भाग जाएगा। एक पीड़िता ने बताया कि जब वो प्रेग्नेंट हो गई तो पादरी ने राजा बाजार स्थित एक हॉस्पिटल में उसे ले जाकर अबॉर्शन कराया। फिलहाल, महिलाओं की शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी पादरी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। |
मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण पश्चिम मानसून जैसलमेर, कोटा, गोपालपुर, पेंड्रारोड होते हुए पूर्व मध्य बंगाल की खाड़ी की ओर गुजर रही हैं। जिसके कारण बिहार में मानसून की गति फिर से कमजोर हो गई हैं। हालांकि कुछ जिलों में बारिश का अनुमान हैं।
बता दें की पटना समेत राज्य के कई जिलों में हल्की से मध्यम स्तर की बारिश हो सकती हैं। हालांकि पूर्णिया, किशनगंज, अररिया में कुछ स्थानों पर गरज के साथ भारी बारिश होने की संभावना हैं। इसके लिए लोगों को अलर्ट किया गया हैं।
मिली जानकारी के अनुसार मौसम विभाग ने इन जिलों के कुछ स्थानों पर वज्रपात होने की भी संभावना जताई हैं। इसलिए खराब मौसम के दौरान घर से बाहर ना निकले और सावधान रहें। साथ ही साथ बिजली के तार और बड़े-पेड़ पौधें से दूर रहें।
| मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण पश्चिम मानसून जैसलमेर, कोटा, गोपालपुर, पेंड्रारोड होते हुए पूर्व मध्य बंगाल की खाड़ी की ओर गुजर रही हैं। जिसके कारण बिहार में मानसून की गति फिर से कमजोर हो गई हैं। हालांकि कुछ जिलों में बारिश का अनुमान हैं। बता दें की पटना समेत राज्य के कई जिलों में हल्की से मध्यम स्तर की बारिश हो सकती हैं। हालांकि पूर्णिया, किशनगंज, अररिया में कुछ स्थानों पर गरज के साथ भारी बारिश होने की संभावना हैं। इसके लिए लोगों को अलर्ट किया गया हैं। मिली जानकारी के अनुसार मौसम विभाग ने इन जिलों के कुछ स्थानों पर वज्रपात होने की भी संभावना जताई हैं। इसलिए खराब मौसम के दौरान घर से बाहर ना निकले और सावधान रहें। साथ ही साथ बिजली के तार और बड़े-पेड़ पौधें से दूर रहें। |
नई दिल्ली. गुड़गांव में जमीन सौदे के मामले में शनिवार को यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा और पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। इस मामले में मुख्यमंत्री एमएल खट्टर ने रविवार को कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी है। जिन लोगों को दोषी पाया जाएगा, उन्हें सजा मिलेगी। पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा ने कहा- सरकार केवल अपनी भड़ास निकाल रही है।
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| नई दिल्ली. गुड़गांव में जमीन सौदे के मामले में शनिवार को यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा और पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। इस मामले में मुख्यमंत्री एमएल खट्टर ने रविवार को कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी है। जिन लोगों को दोषी पाया जाएगा, उन्हें सजा मिलेगी। पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा ने कहा- सरकार केवल अपनी भड़ास निकाल रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
पैगंबर मोहम्मद विवाद (Prophet Muhammad controversy) को लेकर दुनिया भर में जो हंगामा मचा हुआ है, उसे लेकर अब चीन (China) की टिप्पणी भी सामने आ गई है। चीन ने भारत को समझाया कि इस घटना से और भी बेहतर तरीके से निपटा जा सकता है। बता दें ये वही चीन है जिस पर उइगर मुस्लिमों के हालात को लेकर पहले सवाल उठाए गए थे। ऐसे में चीन की ओर से दी गई इस सलाह पर भी जमकर सवाल उठ जा रहे हैं।
चीन ने इस विवाद पर कहा कि वह मानता है कि सभी सभ्यताओं और सभी धर्मों को एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए और समान स्तर पर सह-अस्तित्व में ही रहना चाहिए। यह टिप्पणी सरकारी चीनी मीडिया द्वारा पैगंबर विवाद को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने दी है। उन्होंने कहा, 'हमने वर्तमान में चल रही सभी खबरों पर गौर किया है। हमें उम्मीद है कि संबंधित घटना से और बेहतर तरीके से निपटा जा सकता है। ' उन्होंने कहा कि अहंकार और पूर्वाग्रह को त्यागना बहुत आवश्यक है।
पैगंबर मोहम्मद को लेकर एक टीवी बहस के दौरान नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) ने आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसके बाद से ही यह विवाद रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। इस पर कुछ मुस्लिम संगठन बेहद नाराज हो गए थे। इतना ही नहीं देश भर के कई राज्यों में इसे लेकर हिंसक घटनाएं भी हुई। कई जगह नूपुर के खिलाफ मामले भी दर्ज कराए गए हैं। इस मामले में बीजेपी ने भी नूपुर शर्मा पर एक्शन लेते हुए, उन्हें 6 साल के लिए पार्टी से निलंबित कर दिया है।
बता दें कि चीन में करीब 2 करोड़ से ज्यादा मुस्लिम हैं। जिनमें से उइगर मुसलमान अल्पसंख्यक तुर्क जातीय समूह से संबंध रखते हैं। चीन में जिन अल्पसंख्यक समुदायों को मान्यता दी गई है उनमें उइगर भी शामिल हैं। चीन इन्हें स्वदेशी समूह मानने को लेकर मना कर चुका है। इस समुदाय पर चीनीयों द्वारा कई तरह के अत्याचारों की खबरें भी सामने आती रही हैं, लेकिन चीन इन बातों से हमेशा इनकार करता आया है।
| पैगंबर मोहम्मद विवाद को लेकर दुनिया भर में जो हंगामा मचा हुआ है, उसे लेकर अब चीन की टिप्पणी भी सामने आ गई है। चीन ने भारत को समझाया कि इस घटना से और भी बेहतर तरीके से निपटा जा सकता है। बता दें ये वही चीन है जिस पर उइगर मुस्लिमों के हालात को लेकर पहले सवाल उठाए गए थे। ऐसे में चीन की ओर से दी गई इस सलाह पर भी जमकर सवाल उठ जा रहे हैं। चीन ने इस विवाद पर कहा कि वह मानता है कि सभी सभ्यताओं और सभी धर्मों को एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए और समान स्तर पर सह-अस्तित्व में ही रहना चाहिए। यह टिप्पणी सरकारी चीनी मीडिया द्वारा पैगंबर विवाद को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने दी है। उन्होंने कहा, 'हमने वर्तमान में चल रही सभी खबरों पर गौर किया है। हमें उम्मीद है कि संबंधित घटना से और बेहतर तरीके से निपटा जा सकता है। ' उन्होंने कहा कि अहंकार और पूर्वाग्रह को त्यागना बहुत आवश्यक है। पैगंबर मोहम्मद को लेकर एक टीवी बहस के दौरान नूपुर शर्मा ने आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसके बाद से ही यह विवाद रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। इस पर कुछ मुस्लिम संगठन बेहद नाराज हो गए थे। इतना ही नहीं देश भर के कई राज्यों में इसे लेकर हिंसक घटनाएं भी हुई। कई जगह नूपुर के खिलाफ मामले भी दर्ज कराए गए हैं। इस मामले में बीजेपी ने भी नूपुर शर्मा पर एक्शन लेते हुए, उन्हें छः साल के लिए पार्टी से निलंबित कर दिया है। बता दें कि चीन में करीब दो करोड़ से ज्यादा मुस्लिम हैं। जिनमें से उइगर मुसलमान अल्पसंख्यक तुर्क जातीय समूह से संबंध रखते हैं। चीन में जिन अल्पसंख्यक समुदायों को मान्यता दी गई है उनमें उइगर भी शामिल हैं। चीन इन्हें स्वदेशी समूह मानने को लेकर मना कर चुका है। इस समुदाय पर चीनीयों द्वारा कई तरह के अत्याचारों की खबरें भी सामने आती रही हैं, लेकिन चीन इन बातों से हमेशा इनकार करता आया है। |
जानती थीं। इनकी शिक्षा उसीके आधार पर हुई थी । इसीलिए ये उन आदर्शों की भावना के खयाल से मार्ग में अपने पूर्वकालिक अक्षरदाता गुरु को देख कर वहीं से उनके साथ वापिस लौट पड़ीं और फिर ओसियाजी आकर उनकी यथाशक्ति सेवा की। सेवा के अवसर को समुख देख कर उसे हाथ से न जाने दिया ।
तीवरी में आकर रत्नश्रीजी ने वहां अधर्म का व्यापक अधिशासन देखा । लोग अपने श्रावकों के धर्म और कर्तव्य को सर्वथा भूल गये ये । पारस्परिक सांप्रदायिक द्वेप एवं कलह बहुत ज्यादा फैला हुआ था। मंदिरों की आत्यंतिक दुर्व्यवस्था और आशातना होरही थी। मंदिरों में मनों से धूलि का साम्राज्य जमा हुआ था। वर्षों से उनकी सफाई बंद थी । पूजा के लिये जो पुजारी नियुक्त थे, वे आकर प्रतिमाजी को कुछ पानी के छोटे डाल कर प्रक्षालन का कार्य समाप्त करते थे और बाद में केसर- चंदन के कुछ छींटे डाल कर पूजन का कर्म पूर्ण करते थे। इस प्रकार उनकी पूजा विधि समाप्त होती थी । संक्षेप में, मंदिरों की दशा बड़ी शोचनीय थी । पूजा का ढोंगमात्र रचा जाता था । अन्य शब्दों में पूजा विधि का मृत कलेवर बचा था, आत्मा चली गई थी। इतने पर भी श्रावक लोग कभी भी निरीक्षण न करते थे । यह तो हुई धार्मिक स्थानों की बात । अव आतिथ्य पर दृष्टि डाडिए ।
जब रत्नश्रीजी महाराज साहब वहां पधारे, इनको आहार एवं पानी संबंधी बड़े परीपह सहन करने पड़े। इनको उष्ण-जल | जानती थीं। इनकी शिक्षा उसीके आधार पर हुई थी । इसीलिए ये उन आदर्शों की भावना के खयाल से मार्ग में अपने पूर्वकालिक अक्षरदाता गुरु को देख कर वहीं से उनके साथ वापिस लौट पड़ीं और फिर ओसियाजी आकर उनकी यथाशक्ति सेवा की। सेवा के अवसर को समुख देख कर उसे हाथ से न जाने दिया । तीवरी में आकर रत्नश्रीजी ने वहां अधर्म का व्यापक अधिशासन देखा । लोग अपने श्रावकों के धर्म और कर्तव्य को सर्वथा भूल गये ये । पारस्परिक सांप्रदायिक द्वेप एवं कलह बहुत ज्यादा फैला हुआ था। मंदिरों की आत्यंतिक दुर्व्यवस्था और आशातना होरही थी। मंदिरों में मनों से धूलि का साम्राज्य जमा हुआ था। वर्षों से उनकी सफाई बंद थी । पूजा के लिये जो पुजारी नियुक्त थे, वे आकर प्रतिमाजी को कुछ पानी के छोटे डाल कर प्रक्षालन का कार्य समाप्त करते थे और बाद में केसर- चंदन के कुछ छींटे डाल कर पूजन का कर्म पूर्ण करते थे। इस प्रकार उनकी पूजा विधि समाप्त होती थी । संक्षेप में, मंदिरों की दशा बड़ी शोचनीय थी । पूजा का ढोंगमात्र रचा जाता था । अन्य शब्दों में पूजा विधि का मृत कलेवर बचा था, आत्मा चली गई थी। इतने पर भी श्रावक लोग कभी भी निरीक्षण न करते थे । यह तो हुई धार्मिक स्थानों की बात । अव आतिथ्य पर दृष्टि डाडिए । जब रत्नश्रीजी महाराज साहब वहां पधारे, इनको आहार एवं पानी संबंधी बड़े परीपह सहन करने पड़े। इनको उष्ण-जल |
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में बदलाव किए हैं। केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की है, इसे 6 फीसदी से कम करके 5. 75 फीसदी कर दिया है। रेपो रेट घटने से बैंक से लोन लेने वाले कर्जदारों को थोड़ी राहत जरूर मिलने वाली है। जानकारों के मुताबिक आरबीआई के इस कदम से लोन सस्ता हो सकता है। इसके अलावा रिवर्स रेपो रेट को भी संतुलित करने की कोशिश की गई है। इसे 5. 50 फीसदी किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति के सभी मेंबर रेपो रेट में 0. 25% की कटौती और बदलाव के पक्ष में रहे। मौद्रिक नीति सिमिति की बैठक का पूरा ब्यौरा 20 जून 2019 को जारी किया जएगा।
रिजर्व बैंक के इस कदम से बैंक से ऋण लेने वाले या ईएमआई वालों को राहत मिलने के आसार हैं। पिछले पांच महीनों में उधारी दर यानी रेपो दर में यह तीसरी कटौती है। इससे बैंकों के धन की लागत कम होने और उनकी ओर से मकान, कारोबार और वाहनों के कर्ज पर मासिक किस्त (ईएमआई) कम किए जाने की संभावना है। साथ ही कंपनियों पर कर्ज लौटाने का बोझ कम होगा। Cमाना जा रहा है रेपो रेट में कटौती की वजह से बैंक अपने ब्याज दर घटा सकते हैं। क्योंकि, इस कदम से अब बैंको का मार्जिनल कॉस्ट बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) भी घट जाएगा।
हालांकि, जमाकर्ताओं के बैंक में जमा धनराशि पर कमाई कम हो जाएगी। गौरतलब है कि यह बदलाव पिछले महीने आधिकारिक आंकड़ों के सामने आने के बाद किया गया है। उस दौरान बताया गया था कि देश की जीडीपी में 31 मार्च तक 5. 8 फीसदी पर आ गई है और भारत की अर्थव्यवस्था चीन से पिछड़ने लगी है। रिपोर्ट में बताया गया कि भारत के विकास की रफ्तार सुस्त हो रही है और वह तेजी से बढ़ने वाली इकॉनमी का स्टेटस खो चुका है।
| भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में बदलाव किए हैं। केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में पच्चीस बेसिस पॉइंट की कटौती की है, इसे छः फीसदी से कम करके पाँच. पचहत्तर फीसदी कर दिया है। रेपो रेट घटने से बैंक से लोन लेने वाले कर्जदारों को थोड़ी राहत जरूर मिलने वाली है। जानकारों के मुताबिक आरबीआई के इस कदम से लोन सस्ता हो सकता है। इसके अलावा रिवर्स रेपो रेट को भी संतुलित करने की कोशिश की गई है। इसे पाँच. पचास फीसदी किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति के सभी मेंबर रेपो रेट में शून्य. पच्चीस% की कटौती और बदलाव के पक्ष में रहे। मौद्रिक नीति सिमिति की बैठक का पूरा ब्यौरा बीस जून दो हज़ार उन्नीस को जारी किया जएगा। रिजर्व बैंक के इस कदम से बैंक से ऋण लेने वाले या ईएमआई वालों को राहत मिलने के आसार हैं। पिछले पांच महीनों में उधारी दर यानी रेपो दर में यह तीसरी कटौती है। इससे बैंकों के धन की लागत कम होने और उनकी ओर से मकान, कारोबार और वाहनों के कर्ज पर मासिक किस्त कम किए जाने की संभावना है। साथ ही कंपनियों पर कर्ज लौटाने का बोझ कम होगा। Cमाना जा रहा है रेपो रेट में कटौती की वजह से बैंक अपने ब्याज दर घटा सकते हैं। क्योंकि, इस कदम से अब बैंको का मार्जिनल कॉस्ट बेस्ड लेंडिंग रेट भी घट जाएगा। हालांकि, जमाकर्ताओं के बैंक में जमा धनराशि पर कमाई कम हो जाएगी। गौरतलब है कि यह बदलाव पिछले महीने आधिकारिक आंकड़ों के सामने आने के बाद किया गया है। उस दौरान बताया गया था कि देश की जीडीपी में इकतीस मार्च तक पाँच. आठ फीसदी पर आ गई है और भारत की अर्थव्यवस्था चीन से पिछड़ने लगी है। रिपोर्ट में बताया गया कि भारत के विकास की रफ्तार सुस्त हो रही है और वह तेजी से बढ़ने वाली इकॉनमी का स्टेटस खो चुका है। |
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