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सेक्स के मामले में किसी भी तरह का कोई कैंपेन चलाना हो तो भला शर्लिन चोपड़ा से बेहतर उसका ब्रांड अम्बेसडर कौन हो सकता है जो खुद पेड सेक्स कर चुकी हैं और कैमरे के सामने खुद को न्यूड होने में जिन्हें किसी भी तरह की कोई मुश्किल नहीं होती। शर्लिन चोपड़ा ने हाल ही में पेटा (पीपल ऑफ एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स) के सदस्यों के साथ मिलकर मुंबई की सड़कों पर एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) का प्रसार किया। शर्लिन चोपड़ा के इस कैंपेन का लोगो था 'स्टर्लाइज डॉग्स- दे कान्ट यूज कंडोम' (कुत्तों की नसबंदी कराएं क्योंकि वो कंडोम यूज नही कर सकते।)
शर्लिन चोपड़ा खुद भी पेड सेक्स करने की बात को मीडिया के सामने स्वीकार कर चुकी हैं और साथ ही हाल ही में कामसूत्र 3डी एडल्ट फिल्म में अपने द्वारा शूट किये गये न्यूड सीन्स को लेकर भी वो काफी चर्चा में रहीं। शर्लिन चोपड़ा से पहले सन्नी लियोन भी पेटा के साथ मिलकर जानवरों की नसबंदी के लिए कैंपेन कर चुकी हैं। चूंकि सन्नी लियोन एक प्रोफेशल पॉर्न एक्ट्रेस हैं इसलिए उनके द्वारा किये गये इस कैंपेन को लोगों ने कुछ ज्यादा तवज्जो नहीं दी लेकिन शर्लिन चोपड़ा एक सी ग्रेड एक्ट्रेस हैं तो उनके इस कैंपेन को लोग जरुर सीरियसली लेंगे।
ज्ञात हो कि शर्लिन चोपड़ा पहली बॉलीवुड सेलिब्रिटी हैं जिन्होंने विदेशी एडल्ट मैगजीन प्लेब्वॉय के लिए न्यूड फोटोशूट कराया था। इस फोटोशूट को लेकर शर्लिन काफी समय तक सुर्खियों में रहीं। उसके बाद शर्लिन चोपड़ा ने एडल्ट फिल्म कामसूत्र 3 डी में भी अपने न्यूड सीन्स को लेकर काफी सुर्खियां बटोरीं और अब एक बार फिर से शर्लिन चोपड़ा सुर्खियों में हैं अपने कुत्तों की नसबंदी कैंपेन को लेकर।
| Don't Miss! सेक्स के मामले में किसी भी तरह का कोई कैंपेन चलाना हो तो भला शर्लिन चोपड़ा से बेहतर उसका ब्रांड अम्बेसडर कौन हो सकता है जो खुद पेड सेक्स कर चुकी हैं और कैमरे के सामने खुद को न्यूड होने में जिन्हें किसी भी तरह की कोई मुश्किल नहीं होती। शर्लिन चोपड़ा ने हाल ही में पेटा के सदस्यों के साथ मिलकर मुंबई की सड़कों पर एबीसी का प्रसार किया। शर्लिन चोपड़ा के इस कैंपेन का लोगो था 'स्टर्लाइज डॉग्स- दे कान्ट यूज कंडोम' शर्लिन चोपड़ा खुद भी पेड सेक्स करने की बात को मीडिया के सामने स्वीकार कर चुकी हैं और साथ ही हाल ही में कामसूत्र तीनडी एडल्ट फिल्म में अपने द्वारा शूट किये गये न्यूड सीन्स को लेकर भी वो काफी चर्चा में रहीं। शर्लिन चोपड़ा से पहले सन्नी लियोन भी पेटा के साथ मिलकर जानवरों की नसबंदी के लिए कैंपेन कर चुकी हैं। चूंकि सन्नी लियोन एक प्रोफेशल पॉर्न एक्ट्रेस हैं इसलिए उनके द्वारा किये गये इस कैंपेन को लोगों ने कुछ ज्यादा तवज्जो नहीं दी लेकिन शर्लिन चोपड़ा एक सी ग्रेड एक्ट्रेस हैं तो उनके इस कैंपेन को लोग जरुर सीरियसली लेंगे। ज्ञात हो कि शर्लिन चोपड़ा पहली बॉलीवुड सेलिब्रिटी हैं जिन्होंने विदेशी एडल्ट मैगजीन प्लेब्वॉय के लिए न्यूड फोटोशूट कराया था। इस फोटोशूट को लेकर शर्लिन काफी समय तक सुर्खियों में रहीं। उसके बाद शर्लिन चोपड़ा ने एडल्ट फिल्म कामसूत्र तीन डी में भी अपने न्यूड सीन्स को लेकर काफी सुर्खियां बटोरीं और अब एक बार फिर से शर्लिन चोपड़ा सुर्खियों में हैं अपने कुत्तों की नसबंदी कैंपेन को लेकर। |
पुराने समय में बासु व बरल नाम के दो राज्य थे.
इनके शासक थे दो सगे भाई हुआ करते थे. बासु का राज्य दचिड में था उसे बासु देश कहा जाता था. उत्तर में बरल का राज्य था उसे बरल देश के नाम से पुकारा जाता था.
शासक बासु के देहांत के बाद इसका नाम बासबरल हो गया.
जो बिगाड़ कर बांस बरेली कर दिया गया और बिगड़ा तो बरेली हो गया.
| पुराने समय में बासु व बरल नाम के दो राज्य थे. इनके शासक थे दो सगे भाई हुआ करते थे. बासु का राज्य दचिड में था उसे बासु देश कहा जाता था. उत्तर में बरल का राज्य था उसे बरल देश के नाम से पुकारा जाता था. शासक बासु के देहांत के बाद इसका नाम बासबरल हो गया. जो बिगाड़ कर बांस बरेली कर दिया गया और बिगड़ा तो बरेली हो गया. |
जेल में बंद किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी सहित नौ किसानों को जमानत मिल गई है। यह सभी कुछ ही देर में जेल से बाहर आएंगे। गुरनाम सिंह के वकील एडवोकेट गुरनाम सिंह चहल का बयान सामने आया है जिसमें उन्होंने बताया कि पुलिस ने धारा 307 हटा दी है।
कुरुक्षेत्र (रणदीप) : जेल में बंद किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी सहित नौ किसानों को जमानत मिल गई है। यह सभी कुछ ही देर में जेल से बाहर आएंगे। गुरनाम सिंह के वकील एडवोकेट गुरनाम सिंह चहल ने बताया कि पुलिस ने धारा 307 हटा दी है। अब किसान नेता गुरनाम सिंह की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।
आखिर पुलिस व प्रशासन द्वारा किसानों से किया गया वायदा पूरा हुआ और पुलिस ने सीजेएम कोर्ट में धारा 307 हटा दी। इसके बाद सीजेएम कोर्ट ने गुरनाम सिंह और अन्य नौ किसानों को जमानत देने का फैसला लिया है। वहीं गुरनाम सिंह के बेटे हर्ष पाल सिंह ने किसानों से अपील की है कि सभी किसान शाहबाद किसान भवन पहुंचे।
गौरतलब है कि बीते 6 जून को कुरुक्षेत्र के किसान भाकियू अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी की अगुवाई में सूरजमुखी की एमएसपी को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने दिल्ली-चंडीगढ नेशनल हाइवे को करीब 7 घंटे तक जाम कर दिया था। जिसके बाद पुलिस ने हाईकोर्ट का हवाला देते हुए उनसे सड़क खाली करने की अपील की, लेकिन जब वे नहीं माने तो पुलिस ने लाठीचार्ज कर उनको धरनास्थल से खदेड़ा और रोड खाली करवा दिया। इस दौरान पुलिस ने गुरनाम सिंह चढूनी सहित कई नेताओं को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया था। इसके बाद किसान इन नेताओं की रिहाई को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे थे। मंगलवार को किसानों और सरकार के बीच सहमति बनी थी कि उन्हें सूरजमुखी की फसल पर एमएसपी मिलेगी।
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| जेल में बंद किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी सहित नौ किसानों को जमानत मिल गई है। यह सभी कुछ ही देर में जेल से बाहर आएंगे। गुरनाम सिंह के वकील एडवोकेट गुरनाम सिंह चहल का बयान सामने आया है जिसमें उन्होंने बताया कि पुलिस ने धारा तीन सौ सात हटा दी है। कुरुक्षेत्र : जेल में बंद किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी सहित नौ किसानों को जमानत मिल गई है। यह सभी कुछ ही देर में जेल से बाहर आएंगे। गुरनाम सिंह के वकील एडवोकेट गुरनाम सिंह चहल ने बताया कि पुलिस ने धारा तीन सौ सात हटा दी है। अब किसान नेता गुरनाम सिंह की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। आखिर पुलिस व प्रशासन द्वारा किसानों से किया गया वायदा पूरा हुआ और पुलिस ने सीजेएम कोर्ट में धारा तीन सौ सात हटा दी। इसके बाद सीजेएम कोर्ट ने गुरनाम सिंह और अन्य नौ किसानों को जमानत देने का फैसला लिया है। वहीं गुरनाम सिंह के बेटे हर्ष पाल सिंह ने किसानों से अपील की है कि सभी किसान शाहबाद किसान भवन पहुंचे। गौरतलब है कि बीते छः जून को कुरुक्षेत्र के किसान भाकियू अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी की अगुवाई में सूरजमुखी की एमएसपी को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने दिल्ली-चंडीगढ नेशनल हाइवे को करीब सात घंटाटे तक जाम कर दिया था। जिसके बाद पुलिस ने हाईकोर्ट का हवाला देते हुए उनसे सड़क खाली करने की अपील की, लेकिन जब वे नहीं माने तो पुलिस ने लाठीचार्ज कर उनको धरनास्थल से खदेड़ा और रोड खाली करवा दिया। इस दौरान पुलिस ने गुरनाम सिंह चढूनी सहित कई नेताओं को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया था। इसके बाद किसान इन नेताओं की रिहाई को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे थे। मंगलवार को किसानों और सरकार के बीच सहमति बनी थी कि उन्हें सूरजमुखी की फसल पर एमएसपी मिलेगी। |
लखनऊ। बाराबंकी में रहने वाले रिंकू ने अपनी पत्नी और आठ महीने के बच्चे को इसलिए जला डाला क्योंकि उत्पीडऩ के बाद भी उसकी पत्नी दहेज की मांग को पूरी नहीं कर पाई। बच्चे ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, वहीं उसकी मां जिंदगी मौत के बीच संघर्ष कर रही है। ये केवल इकलौता मामला नहीं है उत्तर प्रदेश में हर रोज 105 महिलाएं उत्पीड़न का शिकार होती हैं।
नेशनल क्राइम ब्यूरो की वर्ष 2014 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में साढ़े 28 लाख से अधिक महिलाएं उत्पीड़न का शिकार हुई हैं। उत्तर प्रदेश महिला उत्पीड़न के मामलों में सबसे आगे रहा है। यूपी में वर्ष 2014 में 38467 मामले ऐसे सामने आए जिनमें महिलाओं का उत्पीड़न हुआ। महिलाओं के उत्पीड़न के मामले में दूसरे नंबर पर पश्चिम बंगाल है जहां पर 38299 ऐसे मामले प्रकाश में आए। उत्तर प्रदेश महिला सम्मान प्रकोष्ठ की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2014 से दिसंबर 2015 तक 2505 मामले दर्ज किए गए, यानी हर माह में करीब 120 मामले दर्ज किए गए।
बाराबंकी के थाना सतरिख क्षेत्र के रामपुर जोगा गाँव का निवासी रिंकू (30 वर्ष) ने अपनी 25 वर्षीय पत्नी रिंकी और उसके आठ महीने के बच्चे पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी। महिला और उसके बच्चे को बचाने आई उसकी सास और उसके देवर दीपू भी इस घटना में बुरी तरह से जल गए हैं। गंभीर हालत में महिला और उसकी सास को बाराबंकी से लखनऊ के लिए रेफर कर दिया गया है लेकिन बच्चे की मौत हो गई है। देवर दीपू बताता है, "जब मैंने भाभी जलते हुए देखा तो उन्हें बचाने की कोशिश की और मैं भी जल गया।" गंभीर रूप से झुलसी महिला के पिता रामचन्दर ने अपने दामाद रिंकू पर आरोप लगाते हुए बेटी को जिंदा जलाकर मार डालने का मामला दर्ज करवाया है। पुलिस ने दहेज उत्पीड़न सहित जलाकर मार डालने का केस दर्ज किया है। रामचंदर बताते है, "मेरी बेटी की शादी 2010 में हुयी थी और शादी के बाद से ही रिंकू उस पर दहेज के लिए दबाव डाल रहा था। वो लगातार धमकी दे रहा था कि उसको दहेज में उसके मन मुताबिक रुपए और मोटर साइकिल नहीं दी गयी थी। साथ ही रिंकू दूसरी लड़की से शादी रचाने की भी धमकी देता था और वह किसी दूसरी औरत के संपर्क में था। आरोपी पति रिंकू ने अपनी सफाई में कहा है की गैस सिलेंडर की पाइप फट गयी जिससे वो जल गयी जबकि घटना स्थल पर ऐसा कुछ नहीं दिखा। महिला जिस कमरे में महिला जली वहां मिट्टी का तेल की महक आ रही थी। अपर पुलिस अधीक्षक शफीक अहमद ने बताया कि मामले में आरोपी पति के प्रेम प्रसंग की भी जांच हो रही है। जो भी जांच में आएगा उसके तहत कार्रवाई की जाएगी।
| लखनऊ। बाराबंकी में रहने वाले रिंकू ने अपनी पत्नी और आठ महीने के बच्चे को इसलिए जला डाला क्योंकि उत्पीडऩ के बाद भी उसकी पत्नी दहेज की मांग को पूरी नहीं कर पाई। बच्चे ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, वहीं उसकी मां जिंदगी मौत के बीच संघर्ष कर रही है। ये केवल इकलौता मामला नहीं है उत्तर प्रदेश में हर रोज एक सौ पाँच महिलाएं उत्पीड़न का शिकार होती हैं। नेशनल क्राइम ब्यूरो की वर्ष दो हज़ार चौदह की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में साढ़े अट्ठाईस लाख से अधिक महिलाएं उत्पीड़न का शिकार हुई हैं। उत्तर प्रदेश महिला उत्पीड़न के मामलों में सबसे आगे रहा है। यूपी में वर्ष दो हज़ार चौदह में अड़तीस हज़ार चार सौ सरसठ मामले ऐसे सामने आए जिनमें महिलाओं का उत्पीड़न हुआ। महिलाओं के उत्पीड़न के मामले में दूसरे नंबर पर पश्चिम बंगाल है जहां पर अड़तीस हज़ार दो सौ निन्यानवे ऐसे मामले प्रकाश में आए। उत्तर प्रदेश महिला सम्मान प्रकोष्ठ की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक मार्च दो हज़ार चौदह से दिसंबर दो हज़ार पंद्रह तक दो हज़ार पाँच सौ पाँच मामले दर्ज किए गए, यानी हर माह में करीब एक सौ बीस मामले दर्ज किए गए। बाराबंकी के थाना सतरिख क्षेत्र के रामपुर जोगा गाँव का निवासी रिंकू ने अपनी पच्चीस वर्षीय पत्नी रिंकी और उसके आठ महीने के बच्चे पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी। महिला और उसके बच्चे को बचाने आई उसकी सास और उसके देवर दीपू भी इस घटना में बुरी तरह से जल गए हैं। गंभीर हालत में महिला और उसकी सास को बाराबंकी से लखनऊ के लिए रेफर कर दिया गया है लेकिन बच्चे की मौत हो गई है। देवर दीपू बताता है, "जब मैंने भाभी जलते हुए देखा तो उन्हें बचाने की कोशिश की और मैं भी जल गया।" गंभीर रूप से झुलसी महिला के पिता रामचन्दर ने अपने दामाद रिंकू पर आरोप लगाते हुए बेटी को जिंदा जलाकर मार डालने का मामला दर्ज करवाया है। पुलिस ने दहेज उत्पीड़न सहित जलाकर मार डालने का केस दर्ज किया है। रामचंदर बताते है, "मेरी बेटी की शादी दो हज़ार दस में हुयी थी और शादी के बाद से ही रिंकू उस पर दहेज के लिए दबाव डाल रहा था। वो लगातार धमकी दे रहा था कि उसको दहेज में उसके मन मुताबिक रुपए और मोटर साइकिल नहीं दी गयी थी। साथ ही रिंकू दूसरी लड़की से शादी रचाने की भी धमकी देता था और वह किसी दूसरी औरत के संपर्क में था। आरोपी पति रिंकू ने अपनी सफाई में कहा है की गैस सिलेंडर की पाइप फट गयी जिससे वो जल गयी जबकि घटना स्थल पर ऐसा कुछ नहीं दिखा। महिला जिस कमरे में महिला जली वहां मिट्टी का तेल की महक आ रही थी। अपर पुलिस अधीक्षक शफीक अहमद ने बताया कि मामले में आरोपी पति के प्रेम प्रसंग की भी जांच हो रही है। जो भी जांच में आएगा उसके तहत कार्रवाई की जाएगी। |
राकेश चतुर्वेदी, भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. दोनों नेताओं के बीच एक घंटे से अधिक समय तक बातचीत हुई. इस दौरान पीएम मोदी ने शिवराज सिंह चौहान से कोरोना की स्थिति को लेकर भी चर्चा की. सीएम ने पीएम को बताया कि प्रदेश में कोविड नियंत्रण में है.
बता दें कि दोनों नेताओं के बीच एक घंटे 20 मिनट तक बैठक चली. इस दौरान प्रदेश के कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर दोनों चर्चा की है. सीएम शिवराज ने कोरोना की तीसरी लहर से निपटने को लेकर क्या तैयारी है, इसके बारे में भी पीएम को जानकारी दी है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि एमपी में वैक्सीनेशन का काम जिस तरह से हो रहा है, उस पर केंद्र ने धन्यवाद किया है.
बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने बताया कि कोरोना संकट के कारण राज्यों की आर्थिक स्थिति डगमगाई है, पिछले साल राज्यों को GDP के 5. 5% तक ऋण लेने की छूट थी, इस साल ये घटकर 4. 5% हुआ है. मैंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि अधोसंरचना के विकास के काम ना रूकें इसलिए राज्य फिर से GDP का 5. 5% ऋण ले पाएं. उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में कोरोना पूरी तरह नियंत्रण में है, लेकिन हम आगे तीसरी वेव को नियंत्रित कर पाए इसमें पूरी ताकत से जुटे हैं और स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करते रहना इस सबके बारे में प्रधानमंत्री से चर्चा हुई.
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश के विकास और जनता के कल्याण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी का स्नेहपूर्ण मार्गदर्शन सदैव मिला है. वे मैन आफ आइडियाज है, प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश में विकास कार्यो को और तेजी के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है. प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन के प्रकाश में और तेजी से कामों को आगे बढ़ा पाऊंगा. प्रदेश में 21 जून से वैक्सीनेशन महाअभियान की शुरुआत की जाएगी. राज्य के विकास के अनेक मुद्दे, जनकल्याण के मुद्दे, कोरोना कंट्रोल करना, वैक्सीनेशन अभियान सहित अनेक विषयों पर उनसे चर्चा हुई है.
| राकेश चतुर्वेदी, भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. दोनों नेताओं के बीच एक घंटे से अधिक समय तक बातचीत हुई. इस दौरान पीएम मोदी ने शिवराज सिंह चौहान से कोरोना की स्थिति को लेकर भी चर्चा की. सीएम ने पीएम को बताया कि प्रदेश में कोविड नियंत्रण में है. बता दें कि दोनों नेताओं के बीच एक घंटे बीस मिनट तक बैठक चली. इस दौरान प्रदेश के कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर दोनों चर्चा की है. सीएम शिवराज ने कोरोना की तीसरी लहर से निपटने को लेकर क्या तैयारी है, इसके बारे में भी पीएम को जानकारी दी है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि एमपी में वैक्सीनेशन का काम जिस तरह से हो रहा है, उस पर केंद्र ने धन्यवाद किया है. बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने बताया कि कोरोना संकट के कारण राज्यों की आर्थिक स्थिति डगमगाई है, पिछले साल राज्यों को GDP के पाँच. पाँच% तक ऋण लेने की छूट थी, इस साल ये घटकर चार. पाँच% हुआ है. मैंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि अधोसंरचना के विकास के काम ना रूकें इसलिए राज्य फिर से GDP का पाँच. पाँच% ऋण ले पाएं. उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में कोरोना पूरी तरह नियंत्रण में है, लेकिन हम आगे तीसरी वेव को नियंत्रित कर पाए इसमें पूरी ताकत से जुटे हैं और स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करते रहना इस सबके बारे में प्रधानमंत्री से चर्चा हुई. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश के विकास और जनता के कल्याण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी का स्नेहपूर्ण मार्गदर्शन सदैव मिला है. वे मैन आफ आइडियाज है, प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश में विकास कार्यो को और तेजी के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है. प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन के प्रकाश में और तेजी से कामों को आगे बढ़ा पाऊंगा. प्रदेश में इक्कीस जून से वैक्सीनेशन महाअभियान की शुरुआत की जाएगी. राज्य के विकास के अनेक मुद्दे, जनकल्याण के मुद्दे, कोरोना कंट्रोल करना, वैक्सीनेशन अभियान सहित अनेक विषयों पर उनसे चर्चा हुई है. |
आधारभूत ढांचे पर मंत्रिमंडल समिति ने एनटीपीसी लिमि0 के द्वारा 660 मेगावाट की (कुल 7260 मेगावाट) 11 इकाईयों के लिए अत्यधिक जटिल प्रौद्योगिकी की शुभारंभ के प्रस्तावों को स्वीकृति दे दी है। इसमें एनटीपीसी की जेवी कंपनियां और डीवीसी भी शामिल हैं। इस स्वीकृति की सबसे महत्तपूर्ण शर्त अत्यंत जटिल उपकरणों का चरणबध्द रूप में देश में ही निर्माण करना है।
नवीन नबीनगर)
घाटी निगम (डीवीसी)
बॉयलर और स्टीम टरबाईन जेनरेटर के लिए पृथक अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा बोली आमंत्रि करने का फैसला किया गया है।
| आधारभूत ढांचे पर मंत्रिमंडल समिति ने एनटीपीसी लिमिशून्य के द्वारा छः सौ साठ मेगावाट की ग्यारह इकाईयों के लिए अत्यधिक जटिल प्रौद्योगिकी की शुभारंभ के प्रस्तावों को स्वीकृति दे दी है। इसमें एनटीपीसी की जेवी कंपनियां और डीवीसी भी शामिल हैं। इस स्वीकृति की सबसे महत्तपूर्ण शर्त अत्यंत जटिल उपकरणों का चरणबध्द रूप में देश में ही निर्माण करना है। नवीन नबीनगर) घाटी निगम बॉयलर और स्टीम टरबाईन जेनरेटर के लिए पृथक अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा बोली आमंत्रि करने का फैसला किया गया है। |
उपराष्ट्रपति श्री एम. वैकेंया नायडू ने कहा कि आज किफायती कीमत पर उच्च स्तर वाली विश्वस्तरीय दवाओं की आवश्यकता है। उन्होंने भारतीय दवा उद्योग से दवा निर्माण में उच्च स्तर तथा गुणवत्ता के लिए प्रतिबद्ध रहने का आग्रह किया। दवा निर्माण के लिए वैश्विक मानदंडों का अनुपालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि दवा उद्योग को नये अणुओं और नयी दवाओं के अनुसंधान के लिए संसाधनों की रूपरेखा बनानी चाहिए।
आज हैदराबाद में सरोजिनी नायडू वनिता फार्मेसी महाविद्यालय के दूसरे दशक समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि अनुसंधान और नवोन्मेष पर विशेष जोर दिया जाना चाहिए। प्रतिदिन स्वास्थ्य से संबंधित नई चुनौतियां सामने आ रही हैं। इसमें गैर संचारी बीमारियां, जीवन शैली से जुड़ी बीमारियां और कैंसर शामिल है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत विश्व स्तर पर जेनरिक दवाओं का सबसे बड़ा प्रदाता है और एड्स से लड़ने के लिए एंटी-रेट्रोवायरल दवाओं की आपूर्ति करता है।
श्री नायडू ने विकासशील देशों में किफायती जीवन रक्षक दवाएं उपलब्ध कराने के लिए भारतीय कंपनियों की सराहना की।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि वे भारत को जेनरिक दवा निर्माण क्षेत्र में नेतृत्व करने वाले देश के रूप में देखना चाहते है। इसके लिए युवा शोधार्थियों को चिकित्सा की भारतीय प्राणाली के मानकीकरण के लिए कार्य करना चाहिए। उन्हें पारम्परिक दवाओं की कार्य कुशलता, वैधता और प्रभावशीलता स्थापित करने के लिए वैश्विक प्रयोग-प्रोटोकॉल का उपयोग करना चाहिए।
श्री नायडू ने कहा कि दवा कंपनियों को अल्प-ज्ञात बीमारियों से निपटने के लिए नये अणुओं और नयी दवाओं का विकास करना चाहिए। इन बीमारियों को दुर्लभ बीमारी की श्रेणी में रखा जाता है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित लोगों को संख्या 7 करोड़ से अधिक होने का अनुमान है। दवा उद्योग को दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए किफायती दवाओं को विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए।
श्री नायडू ने कहा कि बाजार में जेनरिक दवाओं की आपूर्ति पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यक्रम, जीवन रक्षक दवा तथा रोकथाम के लिए टीकाओं पर सरकार के साथ-साथ दवा कंपनियों को भी ध्यान देना चाहिए। भारत में चिकित्सा शिक्षा को विश्वस्तरीय बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि दवा उद्योग तेजी से विकसित हो रहा है और 2020 तक यह 55 बिलियन डॉलर का हो जाएगा। केन्द्र तथा राज्य सरकारों को दवा उद्योग की विकास क्षमता का उपयोग युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों के सृजन के लिए करना चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि दवा उद्योग पर लोगों के जीवन को बचाने की जिम्मेदारी है। दवा कंपनियों को अपनी सीएसआर गतिविधियों से आगे जाकर गरीबों को किफायती कीमत पर जीवन रक्षक दवाएं उपलब्ध करानी चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने एग्जिबिशन सोसायटी की सराहना करते हुए कहा कि सोसायटी ने शिक्षा के क्षेत्र में प्रशंसनीय कार्य किया है। सोसायटी ने स्कूल से लेकर पोस्ट ग्रेजुएट स्तर तक के 18 संस्थानों की स्थापना की है। पिछले 75 वर्षों के दौरान तेलंगाना में सोसायटी ने बालिका शिक्षा पर विशेष जोर दिया है। इन संस्थानों में 30 हजार छात्र/छात्रा शिक्षा ग्रहण कर रहे है। उपराष्ट्रपति ने 10 मेधावी छात्रों को गोल्ड मेडल प्रदान किये।
इस अवसर पर सरोजिनी नायडू वनिता फार्मेसी महाविद्यालय के चेयरमैन श्री वी. वीरेन्द्र, सचिव श्री आर. सुकेश रेड्डी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
| उपराष्ट्रपति श्री एम. वैकेंया नायडू ने कहा कि आज किफायती कीमत पर उच्च स्तर वाली विश्वस्तरीय दवाओं की आवश्यकता है। उन्होंने भारतीय दवा उद्योग से दवा निर्माण में उच्च स्तर तथा गुणवत्ता के लिए प्रतिबद्ध रहने का आग्रह किया। दवा निर्माण के लिए वैश्विक मानदंडों का अनुपालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि दवा उद्योग को नये अणुओं और नयी दवाओं के अनुसंधान के लिए संसाधनों की रूपरेखा बनानी चाहिए। आज हैदराबाद में सरोजिनी नायडू वनिता फार्मेसी महाविद्यालय के दूसरे दशक समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि अनुसंधान और नवोन्मेष पर विशेष जोर दिया जाना चाहिए। प्रतिदिन स्वास्थ्य से संबंधित नई चुनौतियां सामने आ रही हैं। इसमें गैर संचारी बीमारियां, जीवन शैली से जुड़ी बीमारियां और कैंसर शामिल है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत विश्व स्तर पर जेनरिक दवाओं का सबसे बड़ा प्रदाता है और एड्स से लड़ने के लिए एंटी-रेट्रोवायरल दवाओं की आपूर्ति करता है। श्री नायडू ने विकासशील देशों में किफायती जीवन रक्षक दवाएं उपलब्ध कराने के लिए भारतीय कंपनियों की सराहना की। उपराष्ट्रपति ने कहा कि वे भारत को जेनरिक दवा निर्माण क्षेत्र में नेतृत्व करने वाले देश के रूप में देखना चाहते है। इसके लिए युवा शोधार्थियों को चिकित्सा की भारतीय प्राणाली के मानकीकरण के लिए कार्य करना चाहिए। उन्हें पारम्परिक दवाओं की कार्य कुशलता, वैधता और प्रभावशीलता स्थापित करने के लिए वैश्विक प्रयोग-प्रोटोकॉल का उपयोग करना चाहिए। श्री नायडू ने कहा कि दवा कंपनियों को अल्प-ज्ञात बीमारियों से निपटने के लिए नये अणुओं और नयी दवाओं का विकास करना चाहिए। इन बीमारियों को दुर्लभ बीमारी की श्रेणी में रखा जाता है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित लोगों को संख्या सात करोड़ से अधिक होने का अनुमान है। दवा उद्योग को दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए किफायती दवाओं को विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए। श्री नायडू ने कहा कि बाजार में जेनरिक दवाओं की आपूर्ति पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यक्रम, जीवन रक्षक दवा तथा रोकथाम के लिए टीकाओं पर सरकार के साथ-साथ दवा कंपनियों को भी ध्यान देना चाहिए। भारत में चिकित्सा शिक्षा को विश्वस्तरीय बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दवा उद्योग तेजी से विकसित हो रहा है और दो हज़ार बीस तक यह पचपन बिलियन डॉलर का हो जाएगा। केन्द्र तथा राज्य सरकारों को दवा उद्योग की विकास क्षमता का उपयोग युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों के सृजन के लिए करना चाहिए। उपराष्ट्रपति ने कहा कि दवा उद्योग पर लोगों के जीवन को बचाने की जिम्मेदारी है। दवा कंपनियों को अपनी सीएसआर गतिविधियों से आगे जाकर गरीबों को किफायती कीमत पर जीवन रक्षक दवाएं उपलब्ध करानी चाहिए। उपराष्ट्रपति ने एग्जिबिशन सोसायटी की सराहना करते हुए कहा कि सोसायटी ने शिक्षा के क्षेत्र में प्रशंसनीय कार्य किया है। सोसायटी ने स्कूल से लेकर पोस्ट ग्रेजुएट स्तर तक के अट्ठारह संस्थानों की स्थापना की है। पिछले पचहत्तर वर्षों के दौरान तेलंगाना में सोसायटी ने बालिका शिक्षा पर विशेष जोर दिया है। इन संस्थानों में तीस हजार छात्र/छात्रा शिक्षा ग्रहण कर रहे है। उपराष्ट्रपति ने दस मेधावी छात्रों को गोल्ड मेडल प्रदान किये। इस अवसर पर सरोजिनी नायडू वनिता फार्मेसी महाविद्यालय के चेयरमैन श्री वी. वीरेन्द्र, सचिव श्री आर. सुकेश रेड्डी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। |
रांचीः हर नदी के पास एक कहानी होती है। स्वर्णरेखा के पास भी है। झारखंड के लिए जीवनदायिनी स्वर्णरेखा नदी अपने नाम के मुताबिक सच में सोना उगलती है। स्वर्णरेखा नदी का उद्गम स्थल राजधानी रांची से करीब 16 किलोमीटर दूर पांडु गांव स्थित 'रानी चुआं' हैं। मान्यता है कि महाभारत काल में अज्ञातवास के दौरान पांडव इस गांव में आए थे। जहां द्रौपदी को प्यास लगी, तो अर्जुन ने बाण मारकर इसी स्थल से पानी निकाला था। हजारों साल बाद भी यहां से पानी निकल रहा है। अब रानी चुआं को एक कुआं का रूप देकर घेर दिया गया है। गर्मी के मौसम में भी इस कुआं का जलस्तर जमीन के लेवल पर बना रहता है और पानी कभी कम नहीं होता। वहीं इस कुआं से पानी बाहर निकलने का रास्ता भी बनाया गया है, जहां से पानी का रिसाव होता है, फिर खेतों से बहते हुए ये करीब दो किलोमीटर दूर बांधगांव पहुंचता हैं। रानी चुआं का पानी इसी गांव से नदी का रूप धारण कर आगे जाकर स्वर्णरेखा नदी में तब्दील हो जाती है। स्वर्णरेखा नदी झारखंड ओडिशा और पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों से गुजरते हुए 474 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद समुद्र में मिल जाती है। स्वर्णरेखा नदी में सोने के कण का रहस्य अब तक नहीं मिला का रहस्य का अब तक वैज्ञानिक खुलासा नहीं हो सका है। स्वर्णरेखा नदी से सोने के कण निकलते जरूर है। कई गांवों के ग्रामीण अब भी नदी से स्वर्णकण निकालने में जुटे रहते हैं, लेकिन कोई नहीं जानता कि इसमें सोना आता कहां से है। नदी की तेज धार का सोने के खान से घर्षण! नदी तमाम चट्टानों के बीच से होकर गुजरती है। रांची के अनगड़ा-तमाड़ के इलाके में सोने का खान भी होने की बात सामने आती है। ऐसे में भू वैज्ञानिकों का मानना है कि संभवतः किसी सोने के खदान से घर्षण की वजह से नदी में सोने के कण घुल जाते हैं। हालांकि आज तक इसका सटीक प्रमाण नहीं मिला। नदी में सोने के कण को लेकर कई किंवदंतियांसोने के कण को लेकर कई किंवदंतियां भी है। एक कहानी यह भी प्रचलित है कि इस इलाके पर राज करने वाले नागवंशी राजाओं पर जब मुगल शासकों ने आक्रमण किया, तो नागवंशी रानी ने अपने स्वर्णाभूषणों को इस नदी में प्रवाहित कर दिया। जिसके तेज धार से आभूषण स्वर्णकणों में बदल गए और आज भी प्रवाहमान है। सहायक करकरी नदी की रेत में भी सोने के कण! स्वर्णरेखा नदी की सहायक नदी में भी सोना निकलता है। स्वर्णरेखा की सहायक नदी करकरी की रेत में भी सोने के कण निकलने की बात सामने आती है। इसमें भी लोग सोना निकालते हैं। एक यह भी अनुमान लगाया जाता है कि स्वर्णरेखा नदी में करकरी नदी से ही सोना आता है। इसी एक प्रमुख सहायक नदी कांची भी है। महिलाएं आज भी सूप और छलनी लेकर नदी में दिख जाएंगी रांची और सरायकेला-खरसावां जिले के कई गांवों में आज भी स्वर्णरेखा नदी में सूप और छलनी लिए जगह-जगह खड़ी महिलाएं दिख जाएंगी। विभिन्न गांवों के कई परिवार इस नदी से निकलने वाले सोने पर ही निर्भर हैं। इस नदी से पीढ़ियों से गांव वाले सोना निकाल रहे हैं। पहले यह काम इन गांवों के पुरुष भी करते थे। लेकिन आमदनी कम होने से परिवार के पुरुष सदस्य दूसरे गांव में लग गए, लेकिन महिलाएं अब भी नदी में सोने के कण की तलाश में रहती हैं। सोने के कण से ज्यादा आमदनी नहींनदी में स्वर्णकण मिलने के बाद लोगों के जेहन में यह बात भी आती होगी कि इलाके में रहने वाले लोग कुछ ही दिन में अमीर बन जाएंगे। लेकिन सच्चाई इसके विपरीत है। नदी में स्वर्णकण की तलाश में लगे परिवारों को दिन भर में सिर्फ चावल के दाना के बराबर एक-दो कण ही मिल पाता है। जिसके एवज में स्थानीय स्वर्ण दुकानदार से प्रति कण 80 से 100 रुपए मिल जाता है। इस तरह हर दिन मेहनत करने के बावजूद महिलाएं महीने में मुश्किल से 5-6 हजार रुपए ही कमा पाती हैं। उद्गम स्थल के निकट राइस मिल और कारखानों से प्रदूषण है। लेकिन इस उद्गम स्थल के निकल ही अब कई राइस मिल औइ अन्य छोटे-बड़े कल-कारखाने लग गए है। जिसके कारण उद्गम स्थल के निकट ही नदी काफी प्रदूषित हो गई है। हालांकि अब भी उद्गम स्थल से निकलने वाला जल स्रोत जीवित है, जहां से हर समय आज भी पानी निकलता रहता है। रांची के पास स्थित उद्गम स्थल से निकलने के बाद ये नदी किसी भी दूसरी नदी में जाकर नहीं मिलती, बल्कि सीधे बंगाल की खाड़ी में जाकर गिरती है। नदी बेसिन का क्षेत्रफल 19 हजार वर्ग किलोमीटरस्वर्णरेखा नदी सिर्फ झारखंड के लिए जीवनदायिनी नहीं है, बल्कि यह नदी पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल और ओडिशा के कई इलाकों के लिए जीवनरेखा है। स्वर्णरेखा नदी के बेसिन का क्षेत्रफल करीब 19 हजार वर्ग किलोमीटर है। नदी रांची से निकलती है। जिसके बाद सरायकेला-खरसावां और पूर्वी सिंहभूम होते हुए पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर और ओडिशा के बालासोर से होकर बहती है। यह नदी सूखी तो तीनों राज्यों के कई इलाके जलविहीन हो जाएंगे। सैकड़ों गांवों में सिंचाई की सुविधास्वर्णरेखा नदी सिर्फ सोने के कण को लेकर ही जीवनदायिनी नहीं है, बल्कि नदी से सैकड़ों गांवों के खेतों में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई जाती हैं। जबकि नदी के रास्ते पर कई डैम और चेकडैम की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे लोगों को स्वच्छ पेयजल की भी आपूर्ति की जाती हैं।
| रांचीः हर नदी के पास एक कहानी होती है। स्वर्णरेखा के पास भी है। झारखंड के लिए जीवनदायिनी स्वर्णरेखा नदी अपने नाम के मुताबिक सच में सोना उगलती है। स्वर्णरेखा नदी का उद्गम स्थल राजधानी रांची से करीब सोलह किलोग्राममीटर दूर पांडु गांव स्थित 'रानी चुआं' हैं। मान्यता है कि महाभारत काल में अज्ञातवास के दौरान पांडव इस गांव में आए थे। जहां द्रौपदी को प्यास लगी, तो अर्जुन ने बाण मारकर इसी स्थल से पानी निकाला था। हजारों साल बाद भी यहां से पानी निकल रहा है। अब रानी चुआं को एक कुआं का रूप देकर घेर दिया गया है। गर्मी के मौसम में भी इस कुआं का जलस्तर जमीन के लेवल पर बना रहता है और पानी कभी कम नहीं होता। वहीं इस कुआं से पानी बाहर निकलने का रास्ता भी बनाया गया है, जहां से पानी का रिसाव होता है, फिर खेतों से बहते हुए ये करीब दो किलोमीटर दूर बांधगांव पहुंचता हैं। रानी चुआं का पानी इसी गांव से नदी का रूप धारण कर आगे जाकर स्वर्णरेखा नदी में तब्दील हो जाती है। स्वर्णरेखा नदी झारखंड ओडिशा और पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों से गुजरते हुए चार सौ चौहत्तर किलोग्राममीटर की दूरी तय करने के बाद समुद्र में मिल जाती है। स्वर्णरेखा नदी में सोने के कण का रहस्य अब तक नहीं मिला का रहस्य का अब तक वैज्ञानिक खुलासा नहीं हो सका है। स्वर्णरेखा नदी से सोने के कण निकलते जरूर है। कई गांवों के ग्रामीण अब भी नदी से स्वर्णकण निकालने में जुटे रहते हैं, लेकिन कोई नहीं जानता कि इसमें सोना आता कहां से है। नदी की तेज धार का सोने के खान से घर्षण! नदी तमाम चट्टानों के बीच से होकर गुजरती है। रांची के अनगड़ा-तमाड़ के इलाके में सोने का खान भी होने की बात सामने आती है। ऐसे में भू वैज्ञानिकों का मानना है कि संभवतः किसी सोने के खदान से घर्षण की वजह से नदी में सोने के कण घुल जाते हैं। हालांकि आज तक इसका सटीक प्रमाण नहीं मिला। नदी में सोने के कण को लेकर कई किंवदंतियांसोने के कण को लेकर कई किंवदंतियां भी है। एक कहानी यह भी प्रचलित है कि इस इलाके पर राज करने वाले नागवंशी राजाओं पर जब मुगल शासकों ने आक्रमण किया, तो नागवंशी रानी ने अपने स्वर्णाभूषणों को इस नदी में प्रवाहित कर दिया। जिसके तेज धार से आभूषण स्वर्णकणों में बदल गए और आज भी प्रवाहमान है। सहायक करकरी नदी की रेत में भी सोने के कण! स्वर्णरेखा नदी की सहायक नदी में भी सोना निकलता है। स्वर्णरेखा की सहायक नदी करकरी की रेत में भी सोने के कण निकलने की बात सामने आती है। इसमें भी लोग सोना निकालते हैं। एक यह भी अनुमान लगाया जाता है कि स्वर्णरेखा नदी में करकरी नदी से ही सोना आता है। इसी एक प्रमुख सहायक नदी कांची भी है। महिलाएं आज भी सूप और छलनी लेकर नदी में दिख जाएंगी रांची और सरायकेला-खरसावां जिले के कई गांवों में आज भी स्वर्णरेखा नदी में सूप और छलनी लिए जगह-जगह खड़ी महिलाएं दिख जाएंगी। विभिन्न गांवों के कई परिवार इस नदी से निकलने वाले सोने पर ही निर्भर हैं। इस नदी से पीढ़ियों से गांव वाले सोना निकाल रहे हैं। पहले यह काम इन गांवों के पुरुष भी करते थे। लेकिन आमदनी कम होने से परिवार के पुरुष सदस्य दूसरे गांव में लग गए, लेकिन महिलाएं अब भी नदी में सोने के कण की तलाश में रहती हैं। सोने के कण से ज्यादा आमदनी नहींनदी में स्वर्णकण मिलने के बाद लोगों के जेहन में यह बात भी आती होगी कि इलाके में रहने वाले लोग कुछ ही दिन में अमीर बन जाएंगे। लेकिन सच्चाई इसके विपरीत है। नदी में स्वर्णकण की तलाश में लगे परिवारों को दिन भर में सिर्फ चावल के दाना के बराबर एक-दो कण ही मिल पाता है। जिसके एवज में स्थानीय स्वर्ण दुकानदार से प्रति कण अस्सी से एक सौ रुपयापए मिल जाता है। इस तरह हर दिन मेहनत करने के बावजूद महिलाएं महीने में मुश्किल से पाँच-छः हजार रुपए ही कमा पाती हैं। उद्गम स्थल के निकट राइस मिल और कारखानों से प्रदूषण है। लेकिन इस उद्गम स्थल के निकल ही अब कई राइस मिल औइ अन्य छोटे-बड़े कल-कारखाने लग गए है। जिसके कारण उद्गम स्थल के निकट ही नदी काफी प्रदूषित हो गई है। हालांकि अब भी उद्गम स्थल से निकलने वाला जल स्रोत जीवित है, जहां से हर समय आज भी पानी निकलता रहता है। रांची के पास स्थित उद्गम स्थल से निकलने के बाद ये नदी किसी भी दूसरी नदी में जाकर नहीं मिलती, बल्कि सीधे बंगाल की खाड़ी में जाकर गिरती है। नदी बेसिन का क्षेत्रफल उन्नीस हजार वर्ग किलोमीटरस्वर्णरेखा नदी सिर्फ झारखंड के लिए जीवनदायिनी नहीं है, बल्कि यह नदी पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल और ओडिशा के कई इलाकों के लिए जीवनरेखा है। स्वर्णरेखा नदी के बेसिन का क्षेत्रफल करीब उन्नीस हजार वर्ग किलोमीटर है। नदी रांची से निकलती है। जिसके बाद सरायकेला-खरसावां और पूर्वी सिंहभूम होते हुए पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर और ओडिशा के बालासोर से होकर बहती है। यह नदी सूखी तो तीनों राज्यों के कई इलाके जलविहीन हो जाएंगे। सैकड़ों गांवों में सिंचाई की सुविधास्वर्णरेखा नदी सिर्फ सोने के कण को लेकर ही जीवनदायिनी नहीं है, बल्कि नदी से सैकड़ों गांवों के खेतों में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई जाती हैं। जबकि नदी के रास्ते पर कई डैम और चेकडैम की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे लोगों को स्वच्छ पेयजल की भी आपूर्ति की जाती हैं। |
जैसे-जैसे पंजाब के विधानसभा चुनाव निकट आ रहे है,वैसे-वैसे सूबे की सियासत भी गरमा रही है। आज यानी मंगलवार को प्रदेश की सत्ता बैठी कांग्रेस को एक बड़ा झटका लगा। कांग्रेस के विधायक राणा गुरमीत सिंह सोढी ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया है और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए।
भाजपा का दामन थामते हुए राणा गुरमीत सिंह सोढी का पंजाब भाजपा के चुनाव प्रभारी एवं केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने उनका स्वागत किया। इसके साथ ही वहा पर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और दिल्ली सिख गुरद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व प्रमुख मनजिंदर सिंह सिरसा व वरिष्ठ भाजपा नेता दुष्यंत गौतम भी मौजूद थे।
भाजपा का हाथ थामने के बाद गुरमीत सिंह सोढ़ी ने कहा, 'मैंने पंजाब की भलाई के लिए यह फैसला लिया है। पीएम मोदी और बीजेपी पंजाब को बचा सकते हैं। ' गुरमीत सिंह सोढ़ी ने कहा, 'कांग्रेस ने राज्य की सुरक्षा और सांप्रदायिक शांति व्यवस्था को दाव पर लगा दिया है। कांग्रेस की धर्मनिरपेक्ष छवि अब पूरी तरह नष्ट हो चुकी है। कांग्रेस में यह आपसी लड़ाई पंजाब के लिए खतरनाक हालात पैदा कर रही है। '
आपको बता दें कि राणा गुरमीत सिंह सोढी कैप्टन अमरिंदर सिंह की पूर्ववर्ती सरकार में मंत्री रहे हैं। इसके अलावा उन्हें अमरिंदर का बेहद ही खास माना जाता है। राजनीतिक हलको में ऐसी खबरें है कि उन्हें अमरिंदर के करीबी होने की वजह से मौजूदा चरणजीत सिंह चन्नी की कैबिनेट में जगह नहीं मिली थी।
राणा गुरमीत सिंह सोढी को कैप्टन अमरिंदर सिंह का करीबी समझा जाता है. गुरमीत सिंह सोढी विधानसभा क्षेत्र गुरु हर सहाय विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह के कार्यकाल में गुरमीत सिंह राणा को कैबिनेट मंत्री का दर्जा हासिल था, जहां पर सोढी खेल मंत्रालय कार्यभार संभाल रहे थे।
राणा गुरमीत सिंह को पंजाब के दिग्गज नेताओं में शुमार किया जाता है। गुरमीत सिंह लगातार चार बार विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज कर चुके हैं। 2002 में गुरमीत सिंह विधायक चुने गए थे। इसके बाद गुरमीत सिंह सोढी 2007, 2012 और 2017 के विधानसभा चुनाव में भी जीत दर्ज करने में कामयाब रहे। 2018 में कांग्रेस पार्टी की ओर से गुरमीत सिंह को चीफ व्हिप भी बनाया गया था।
उधर, दूसरी तरफ, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह लगातार अपनी पुरानी पार्टी कांग्रेस को बड़े झटके दे रहे है। अमरिंदर को मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने के बाद से कई कांग्रेसी नेताओं के पार्टी छोड़ने के कयास लगाए जा रहे थे। कैप्टन अमरिंदर सिंह पहले ही दावा कर चुके हैं, कांग्रेस के कई विधायक उनके संपर्क में हैं और जल्द ही पार्टी बदल सकते हैं। विधानसभा चुनाव के लिए कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बीजेपी के साथ गठबंधन किया है।
| जैसे-जैसे पंजाब के विधानसभा चुनाव निकट आ रहे है,वैसे-वैसे सूबे की सियासत भी गरमा रही है। आज यानी मंगलवार को प्रदेश की सत्ता बैठी कांग्रेस को एक बड़ा झटका लगा। कांग्रेस के विधायक राणा गुरमीत सिंह सोढी ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया है और भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। भाजपा का दामन थामते हुए राणा गुरमीत सिंह सोढी का पंजाब भाजपा के चुनाव प्रभारी एवं केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने उनका स्वागत किया। इसके साथ ही वहा पर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और दिल्ली सिख गुरद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व प्रमुख मनजिंदर सिंह सिरसा व वरिष्ठ भाजपा नेता दुष्यंत गौतम भी मौजूद थे। भाजपा का हाथ थामने के बाद गुरमीत सिंह सोढ़ी ने कहा, 'मैंने पंजाब की भलाई के लिए यह फैसला लिया है। पीएम मोदी और बीजेपी पंजाब को बचा सकते हैं। ' गुरमीत सिंह सोढ़ी ने कहा, 'कांग्रेस ने राज्य की सुरक्षा और सांप्रदायिक शांति व्यवस्था को दाव पर लगा दिया है। कांग्रेस की धर्मनिरपेक्ष छवि अब पूरी तरह नष्ट हो चुकी है। कांग्रेस में यह आपसी लड़ाई पंजाब के लिए खतरनाक हालात पैदा कर रही है। ' आपको बता दें कि राणा गुरमीत सिंह सोढी कैप्टन अमरिंदर सिंह की पूर्ववर्ती सरकार में मंत्री रहे हैं। इसके अलावा उन्हें अमरिंदर का बेहद ही खास माना जाता है। राजनीतिक हलको में ऐसी खबरें है कि उन्हें अमरिंदर के करीबी होने की वजह से मौजूदा चरणजीत सिंह चन्नी की कैबिनेट में जगह नहीं मिली थी। राणा गुरमीत सिंह सोढी को कैप्टन अमरिंदर सिंह का करीबी समझा जाता है. गुरमीत सिंह सोढी विधानसभा क्षेत्र गुरु हर सहाय विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह के कार्यकाल में गुरमीत सिंह राणा को कैबिनेट मंत्री का दर्जा हासिल था, जहां पर सोढी खेल मंत्रालय कार्यभार संभाल रहे थे। राणा गुरमीत सिंह को पंजाब के दिग्गज नेताओं में शुमार किया जाता है। गुरमीत सिंह लगातार चार बार विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज कर चुके हैं। दो हज़ार दो में गुरमीत सिंह विधायक चुने गए थे। इसके बाद गुरमीत सिंह सोढी दो हज़ार सात, दो हज़ार बारह और दो हज़ार सत्रह के विधानसभा चुनाव में भी जीत दर्ज करने में कामयाब रहे। दो हज़ार अट्ठारह में कांग्रेस पार्टी की ओर से गुरमीत सिंह को चीफ व्हिप भी बनाया गया था। उधर, दूसरी तरफ, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह लगातार अपनी पुरानी पार्टी कांग्रेस को बड़े झटके दे रहे है। अमरिंदर को मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने के बाद से कई कांग्रेसी नेताओं के पार्टी छोड़ने के कयास लगाए जा रहे थे। कैप्टन अमरिंदर सिंह पहले ही दावा कर चुके हैं, कांग्रेस के कई विधायक उनके संपर्क में हैं और जल्द ही पार्टी बदल सकते हैं। विधानसभा चुनाव के लिए कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बीजेपी के साथ गठबंधन किया है। |
कोलकाता : बेनियापुकुर थानांतर्गत तिलजला रोड स्थित एक परित्यक्त झोपड़ी से 11 बम बरामद किए गए। कोलकाता पुलिस के एआरएस अधिकारियों ने बम डिस्पोजल स्क्वाड और महिला विनर्स टीम की मदद से बम को बरामद किया है।
जानकारी के अनुसार कुछ दिनों पहले एआरएस अधिकारियों ने आर्म्स एक्ट के मामले में शेख तनु नामक युवक को गिरफ्तार किया था। शेख तनु से पूछताछ के दौरान पुलिस को पता चला कि तिलजला रोड की एक परित्यक्त झोपड़ी में बम रखे हुए हैं। उक्त सूचना के आधार पर पुलिस की टीम ने छापामारी कर झोपड़ी से 11 बम जब्त किए। फिलहाल पुलिस अभियुक्त शेख तनु से पूछताछ कर पता लगा रही है कि वहां पर बम किसने और किस कारणवश रखा था।
| कोलकाता : बेनियापुकुर थानांतर्गत तिलजला रोड स्थित एक परित्यक्त झोपड़ी से ग्यारह बम बरामद किए गए। कोलकाता पुलिस के एआरएस अधिकारियों ने बम डिस्पोजल स्क्वाड और महिला विनर्स टीम की मदद से बम को बरामद किया है। जानकारी के अनुसार कुछ दिनों पहले एआरएस अधिकारियों ने आर्म्स एक्ट के मामले में शेख तनु नामक युवक को गिरफ्तार किया था। शेख तनु से पूछताछ के दौरान पुलिस को पता चला कि तिलजला रोड की एक परित्यक्त झोपड़ी में बम रखे हुए हैं। उक्त सूचना के आधार पर पुलिस की टीम ने छापामारी कर झोपड़ी से ग्यारह बम जब्त किए। फिलहाल पुलिस अभियुक्त शेख तनु से पूछताछ कर पता लगा रही है कि वहां पर बम किसने और किस कारणवश रखा था। |
द्विपक्षीय विचार विमर्श के दौरान दोनों मंत्रियों ने दोनों देशों के बीच चल रही विभिन्न गतिविधियों का स्मरण करते हुए विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र में अपने संबंधों को और मजबूत करने की आशा व्यक्त की है। डॉ. हर्षवर्द्धन ने कहा कि दोनों देश मिल कर जन-स्वास्थ्य, ऊर्जा-पेयजल, खाद्य, दीर्घकालिक आधारभूत ढांचे के साथ-साथ निर्माण प्रौद्योगिकी और विशाल आंकड़ों के विश्लेषण आदि क्षेत्रों में बड़ी चुनौतियों का सामना कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के वर्तमान प्राथमिक क्षेत्रों के अंतर्गत मेक-इन-इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्मार्ट शहर, स्वच्छ भारत और स्टार्टअप भारत जैसे राष्ट्रीय अभियानों में ध्यान केन्द्रित किया जा रहा है।
अपने संबोधन में श्री जो जॉनसन ने कहा कि ब्रिटेन न्यूटन-भाभा कार्यक्रम को अपना समर्थन अधिक वित्तीय सहायता देकर जारी रखेगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि अगले वर्ष आयोजित होने वाले भारत-ब्रिटेन प्रौद्योगिकी शिखर ज्ञान प्रदर्शनी में ब्रिटेन की ओर से बड़ी भागीदारी की जाएगी।
अक्टूबर, 2016 में आयोजित होने वाले इस प्रदर्शनी के दौरान भारत और ब्रिटेन की कंपनियों के प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सहयोग का श्रेष्ठ प्रदर्शन देखने को मिलेगा। इसके साथ ही इसमें विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग की सफलता का प्रदर्शन और भविष्य होने वाले कार्यक्रमों में भागीदारी की संभावना पर विचार किया जाएगा।
भारत-ब्रिटेन प्रौद्योगिकी शिखर ज्ञान प्रदर्शनी-2016 में महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे निर्माण, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, वहनीय स्वास्थ्य देखभाल और स्वच्छ प्रौद्योगिकी पर ध्यान केन्द्रित किया जाएगा।
| द्विपक्षीय विचार विमर्श के दौरान दोनों मंत्रियों ने दोनों देशों के बीच चल रही विभिन्न गतिविधियों का स्मरण करते हुए विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र में अपने संबंधों को और मजबूत करने की आशा व्यक्त की है। डॉ. हर्षवर्द्धन ने कहा कि दोनों देश मिल कर जन-स्वास्थ्य, ऊर्जा-पेयजल, खाद्य, दीर्घकालिक आधारभूत ढांचे के साथ-साथ निर्माण प्रौद्योगिकी और विशाल आंकड़ों के विश्लेषण आदि क्षेत्रों में बड़ी चुनौतियों का सामना कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के वर्तमान प्राथमिक क्षेत्रों के अंतर्गत मेक-इन-इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्मार्ट शहर, स्वच्छ भारत और स्टार्टअप भारत जैसे राष्ट्रीय अभियानों में ध्यान केन्द्रित किया जा रहा है। अपने संबोधन में श्री जो जॉनसन ने कहा कि ब्रिटेन न्यूटन-भाभा कार्यक्रम को अपना समर्थन अधिक वित्तीय सहायता देकर जारी रखेगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि अगले वर्ष आयोजित होने वाले भारत-ब्रिटेन प्रौद्योगिकी शिखर ज्ञान प्रदर्शनी में ब्रिटेन की ओर से बड़ी भागीदारी की जाएगी। अक्टूबर, दो हज़ार सोलह में आयोजित होने वाले इस प्रदर्शनी के दौरान भारत और ब्रिटेन की कंपनियों के प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सहयोग का श्रेष्ठ प्रदर्शन देखने को मिलेगा। इसके साथ ही इसमें विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग की सफलता का प्रदर्शन और भविष्य होने वाले कार्यक्रमों में भागीदारी की संभावना पर विचार किया जाएगा। भारत-ब्रिटेन प्रौद्योगिकी शिखर ज्ञान प्रदर्शनी-दो हज़ार सोलह में महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे निर्माण, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, वहनीय स्वास्थ्य देखभाल और स्वच्छ प्रौद्योगिकी पर ध्यान केन्द्रित किया जाएगा। |
सोलहवाँ निपात एकतीसवाँ वर्ग
२४८. अधिमुत्त
सकिच स्थविर के भानजे । वे अपने मामा के पास श्रामणेर हो अर्हत् पद को प्राप्त हुए । एक दिन उपसम्पदा पाने के लिए अपनी माता से अनुमति लेने गये । जिस जगल से श्रामणेर को जाना था उसमें कुछ ढाकू बलि का विधान कर उसके लिए एक आदमी के ताक में थे। जब श्रामणेर वहाँ से गुजरे तो लोगों ने उन्हें पकड़ लिया । कुछ कहे बिना शान्त खड़े रहे। उन्हें देखकर सब ढाकू आश्चर्य चकित हो गये । ठाकुओं के सरदार ने उनकी निर्भयता का कारण पूछा । उत्तर में श्रामणेर ने अपने धार्मिक जीवन की सारी बातें सुनायीं । उससे प्रभावित हो सब डाकू लोग जीवन भर के लिए डकैती से विरत हो गये और कुछ लोग बाद में प्रन्नजित भी हुए। उस समय ढाकुओं के सरदार और श्रामणेर के बीच जो बातचीत हुई थी उसे उदान के रूप में दिया गया है
सरदार :
यक्ष के लिए या धन के लिए जिनका हम पहले हनन करते थे असहाय होकर वे भयभीत होते थे, कॉपते थे और विलाप करते थे ॥७०५॥ | सोलहवाँ निपात एकतीसवाँ वर्ग दो सौ अड़तालीस. अधिमुत्त सकिच स्थविर के भानजे । वे अपने मामा के पास श्रामणेर हो अर्हत् पद को प्राप्त हुए । एक दिन उपसम्पदा पाने के लिए अपनी माता से अनुमति लेने गये । जिस जगल से श्रामणेर को जाना था उसमें कुछ ढाकू बलि का विधान कर उसके लिए एक आदमी के ताक में थे। जब श्रामणेर वहाँ से गुजरे तो लोगों ने उन्हें पकड़ लिया । कुछ कहे बिना शान्त खड़े रहे। उन्हें देखकर सब ढाकू आश्चर्य चकित हो गये । ठाकुओं के सरदार ने उनकी निर्भयता का कारण पूछा । उत्तर में श्रामणेर ने अपने धार्मिक जीवन की सारी बातें सुनायीं । उससे प्रभावित हो सब डाकू लोग जीवन भर के लिए डकैती से विरत हो गये और कुछ लोग बाद में प्रन्नजित भी हुए। उस समय ढाकुओं के सरदार और श्रामणेर के बीच जो बातचीत हुई थी उसे उदान के रूप में दिया गया है सरदार : यक्ष के लिए या धन के लिए जिनका हम पहले हनन करते थे असहाय होकर वे भयभीत होते थे, कॉपते थे और विलाप करते थे ॥सात सौ पाँच॥ |
कुल्लू - समाजसेविका एवं नेउली वार्ड से पंचायत समिति सदस्य रेणुका डोगरा की अध्यक्षता में भुंतर में आठ साल की बच्ची से हुए रेप के बाद हत्या मामले को लेकर पीडि़ता परिजनों व लोगों ने भुंतर थाने का घेराव किया। इस दौरान एएसपी निश्चिंत सिंह नेगी ने रेणुका डोगरा और पीडि़ता के परिजनों से मुलाकात की और कहा कि पुलिस इस मामले को हल करने के बहुत करीब है और बहुत जल्द अपराधी पुलिस की गिरफ्त में होगा। पीडि़ता के पिता प्रकाश ने कहा कि उनकी बच्ची की रेप के बाद हत्या कर दी गई, पर 17 दिनों बाद भी पुलिस के हाथ खाली है। इस पर एएसपी निश्चिंत सिंह नेगी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वह बहुत जल्द ही अपराधी को पकड़ लेंगे। इस दौरान रेणुका डोगरा ने कहा कि वह भुंतर थाने के एसएचओ से नाराज हैं और उन्होंने उनसे कई बार इस मामले को लेकर फोन पर संपर्क किया पर न तो उन्होंने कॉल उठाई और न ही कॉल वापस की। उन्होंने कहा कि एएसपी निश्चिंत सिंह नेगी ने आश्वासन दिया है कि वह बहुत जल्द अपराधी को पकड़ लेंगे।
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| कुल्लू - समाजसेविका एवं नेउली वार्ड से पंचायत समिति सदस्य रेणुका डोगरा की अध्यक्षता में भुंतर में आठ साल की बच्ची से हुए रेप के बाद हत्या मामले को लेकर पीडि़ता परिजनों व लोगों ने भुंतर थाने का घेराव किया। इस दौरान एएसपी निश्चिंत सिंह नेगी ने रेणुका डोगरा और पीडि़ता के परिजनों से मुलाकात की और कहा कि पुलिस इस मामले को हल करने के बहुत करीब है और बहुत जल्द अपराधी पुलिस की गिरफ्त में होगा। पीडि़ता के पिता प्रकाश ने कहा कि उनकी बच्ची की रेप के बाद हत्या कर दी गई, पर सत्रह दिनों बाद भी पुलिस के हाथ खाली है। इस पर एएसपी निश्चिंत सिंह नेगी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वह बहुत जल्द ही अपराधी को पकड़ लेंगे। इस दौरान रेणुका डोगरा ने कहा कि वह भुंतर थाने के एसएचओ से नाराज हैं और उन्होंने उनसे कई बार इस मामले को लेकर फोन पर संपर्क किया पर न तो उन्होंने कॉल उठाई और न ही कॉल वापस की। उन्होंने कहा कि एएसपी निश्चिंत सिंह नेगी ने आश्वासन दिया है कि वह बहुत जल्द अपराधी को पकड़ लेंगे। विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं? निःशुल्क रजिस्टर करें ! |
Marine Le Pen: फ्रांस में राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए 10 अप्रैल यानी कल मतदान होने वाला है। इस बार चुनाव में कांटे की टक्कर मानी जा रही है। इस बार राष्ट्रपति पद के लिए इमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron- President of France) और नेशनल एसेंबली मेंबर मरीन ले पेन के बीच कड़ी टक्कर देखी जाने वाली है। क्योंकि मरीन ले पेन ने इस बार आक्रामक तरीके से चुनाव प्रचार किया है।
गुरुवार को ले पेन ने अपने एक बयान में कहा कि अगर वह राष्ट्रपति बन जाएंगी तो वह हिजाब पहनने पर प्रतिबंध लगा देंगी। अगर कोई सार्वजनिक स्थानों पर हिजाब पहनेगा तो उसे जुर्माना देना पड़ेगा। बता दें कि फ्रांस में इससे पहले स्कूलों में धार्मिक प्रतीकों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। सार्वजनिक स्थानों पर पूरा चेहरा ढकने की भी मनाही है।
भारत समर्थक 53 वर्षीय ले पेन ने कहा कि जिस तरह से गाड़ियों में सीटबेल्ट पहनना अनिवार्य है, उसी तरह ये फैसला भी लागू किया जाएगा कि मुसलमान सार्वजनिक स्थानों पर हिजाब नहीं पहन सकते। बता दें कि राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार मरीन ले पेन दक्षिणपंथी विचारधारा रखने वाली महिला हैं। अगर वह फ्रांस में राष्ट्रपति पद में चुनाव जीत जाती हैं तो वह फ्रांस की पहली महिला राष्ट्रपति बनेंगी।
फ्रांस में राष्ट्रपति चुनावों को लेकर जो भी सर्वेक्षण सामने आ रहे हैं, उससे यह पता चलता है कि इस रविवार यानी कल होने वाले मतदानों में ले पेन, इमैनुएल मैक्रों को कड़ी टक्कर देने वाली हैं। दूसरे दौर का मतदान 24 अप्रैल को होना है।
बता दें कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ली पेन दोनों ही हिजाब विरोधी हैं। फ्रांस में 12 लोग राष्ट्रपति पद के लिए चुनावी मैदान में उतरे हैं। इनमें तीन महिलाएं शामिल हैं। ली पेन 2011 से नेशनल रैली की प्रमुख हैं और साल 2017 से नेशनल एसेंबली की मेंबर भी हैं।
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| Marine Le Pen: फ्रांस में राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए दस अप्रैल यानी कल मतदान होने वाला है। इस बार चुनाव में कांटे की टक्कर मानी जा रही है। इस बार राष्ट्रपति पद के लिए इमैनुएल मैक्रों और नेशनल एसेंबली मेंबर मरीन ले पेन के बीच कड़ी टक्कर देखी जाने वाली है। क्योंकि मरीन ले पेन ने इस बार आक्रामक तरीके से चुनाव प्रचार किया है। गुरुवार को ले पेन ने अपने एक बयान में कहा कि अगर वह राष्ट्रपति बन जाएंगी तो वह हिजाब पहनने पर प्रतिबंध लगा देंगी। अगर कोई सार्वजनिक स्थानों पर हिजाब पहनेगा तो उसे जुर्माना देना पड़ेगा। बता दें कि फ्रांस में इससे पहले स्कूलों में धार्मिक प्रतीकों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। सार्वजनिक स्थानों पर पूरा चेहरा ढकने की भी मनाही है। भारत समर्थक तिरेपन वर्षीय ले पेन ने कहा कि जिस तरह से गाड़ियों में सीटबेल्ट पहनना अनिवार्य है, उसी तरह ये फैसला भी लागू किया जाएगा कि मुसलमान सार्वजनिक स्थानों पर हिजाब नहीं पहन सकते। बता दें कि राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार मरीन ले पेन दक्षिणपंथी विचारधारा रखने वाली महिला हैं। अगर वह फ्रांस में राष्ट्रपति पद में चुनाव जीत जाती हैं तो वह फ्रांस की पहली महिला राष्ट्रपति बनेंगी। फ्रांस में राष्ट्रपति चुनावों को लेकर जो भी सर्वेक्षण सामने आ रहे हैं, उससे यह पता चलता है कि इस रविवार यानी कल होने वाले मतदानों में ले पेन, इमैनुएल मैक्रों को कड़ी टक्कर देने वाली हैं। दूसरे दौर का मतदान चौबीस अप्रैल को होना है। बता दें कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ली पेन दोनों ही हिजाब विरोधी हैं। फ्रांस में बारह लोग राष्ट्रपति पद के लिए चुनावी मैदान में उतरे हैं। इनमें तीन महिलाएं शामिल हैं। ली पेन दो हज़ार ग्यारह से नेशनल रैली की प्रमुख हैं और साल दो हज़ार सत्रह से नेशनल एसेंबली की मेंबर भी हैं। संबंधित खबरेंः |
Ranchi: झारखंड अधिविद्य परिषद (जैक) द्वारा आयोजित प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षण परीक्षा 2020 14 से 16 सितंबर तक आयोजित की जाएगी. फर्स्ट सीटिंग की परीक्षा सुबह 10 बजे से एक बजे तक होगी. वहीं, दूसरी सीटिंग की परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक होगी. परीक्षा शहर के विभिन्न केंद्रों में आयोजित की जाएगी. वहीं जैक द्वारा आयोजित वार्षिक मदरसा परीक्षा 2020, 14 सितंबर से 18 सितंबर तक होगा. फर्स्ट सीटिंग की परीक्षा सुबह 9:45 से 1 बजे तक और दूसरी सीटिंग की परीक्षा दोपहर 2 बजे से साम 5:15 तक होगा. यह परीक्षा कांके के संत जोसेफ हाईस्कूल में आयोजित किया जाएगा.
शांतिपूर्ण तरीके से परीक्षा का आयोजन कराने के लिए परीक्षा केंद्रों पर उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी और वरीय पुलिस अधीक्षक ने पुलिस बल और पदाधिकारियों के साथ दंडाधिकारियों की नियुक्ति की गयी है. परीक्षा केंद्र पर विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सदर अनुमंडल दंडाधिकारी ने केंद्रों के 200 मीटर तक निषेधाज्ञा जारी की है. यह निषेधाज्ञा परीक्षा के दिन सुबह 6:45 बजे से रात के 8:15 बजे तक प्रभावी रहेगा.
- सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों/कर्मचारियों, सरकारी कार्यक्रम और शवयात्रा को छोड़कर 5 या 5 से अधिक व्यक्तियों का एक जगह जमा नहीं होना है.
- किसी तरह का ध्वनि विस्तारक यंत्र का प्रयोग नहीं करना है.
- सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों/कर्मचारियों को छोड़कर किसी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र जैसे बंदूक, राइफल रिवॉल्वर, बम, बारूद आदि लेकर नहीं चलना है.
- सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों/कर्मचारियों को छोड़कर किसी प्रकार का हरवे-हथियार जैसे लाठी-डंडा, तीर-धनुष, गड़ासा भाला आदि लेकर नहीं चलना है.
- किसी प्रकार की बैठक या आमसभा का आयोजन नहीं किया जा सकता है.
| Ranchi: झारखंड अधिविद्य परिषद द्वारा आयोजित प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षण परीक्षा दो हज़ार बीस चौदह से सोलह सितंबर तक आयोजित की जाएगी. फर्स्ट सीटिंग की परीक्षा सुबह दस बजे से एक बजे तक होगी. वहीं, दूसरी सीटिंग की परीक्षा दोपहर दो बजे से शाम पाँच बजे तक होगी. परीक्षा शहर के विभिन्न केंद्रों में आयोजित की जाएगी. वहीं जैक द्वारा आयोजित वार्षिक मदरसा परीक्षा दो हज़ार बीस, चौदह सितंबर से अट्ठारह सितंबर तक होगा. फर्स्ट सीटिंग की परीक्षा सुबह नौ:पैंतालीस से एक बजे तक और दूसरी सीटिंग की परीक्षा दोपहर दो बजे से साम पाँच:पंद्रह तक होगा. यह परीक्षा कांके के संत जोसेफ हाईस्कूल में आयोजित किया जाएगा. शांतिपूर्ण तरीके से परीक्षा का आयोजन कराने के लिए परीक्षा केंद्रों पर उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी और वरीय पुलिस अधीक्षक ने पुलिस बल और पदाधिकारियों के साथ दंडाधिकारियों की नियुक्ति की गयी है. परीक्षा केंद्र पर विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सदर अनुमंडल दंडाधिकारी ने केंद्रों के दो सौ मीटर तक निषेधाज्ञा जारी की है. यह निषेधाज्ञा परीक्षा के दिन सुबह छः:पैंतालीस बजे से रात के आठ:पंद्रह बजे तक प्रभावी रहेगा. - सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों/कर्मचारियों, सरकारी कार्यक्रम और शवयात्रा को छोड़कर पाँच या पाँच से अधिक व्यक्तियों का एक जगह जमा नहीं होना है. - किसी तरह का ध्वनि विस्तारक यंत्र का प्रयोग नहीं करना है. - सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों/कर्मचारियों को छोड़कर किसी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र जैसे बंदूक, राइफल रिवॉल्वर, बम, बारूद आदि लेकर नहीं चलना है. - सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों/कर्मचारियों को छोड़कर किसी प्रकार का हरवे-हथियार जैसे लाठी-डंडा, तीर-धनुष, गड़ासा भाला आदि लेकर नहीं चलना है. - किसी प्रकार की बैठक या आमसभा का आयोजन नहीं किया जा सकता है. |
किसी-किसी पुस्तक की तो आजकल लाखो प्रतियाँ छुपती हैं, और यातायात के साधनों की उन्नति के कारण देश से बाहर भी काफी संख्या में जाती है । एक देश के आदमियों का दूसरे देश वालों से विचारों का आदान-प्रदान बढ़ता जा रहा है । पढे-लिखे आदमी दुनिया भर की विचार-धाराएँ और अनुसंधान दि जानते रहते हैं। उनके विचारों का थोड़ा बहुत प्रभाव उनके पास के अनपढ़ पर भी पड़ता है । इस तरह किसी देश के आदमियों का जीवन सर्वथा एकांगी नहीं रहता। अच्छे ऊँचे साहित्यकार के सामने विश्व और उसकी समस्याएँ रहती हैं, और, वह उनपर गम्भीरता पूर्वक विचार करता है। इस तरह प्रेस तथा दूसरे आधुनिक आविष्कारों के कारण विश्व - साहित्य अधिकाधिक परिमाण में तैयार होता है, और पढ़ा जा रहा है ।
अस्तु, इन बातों से आधुनिक साहित्य से होनेवाले ज्ञान-प्रचार का परिचय हो जाता है । परन्तु साहित्य के प्रकाशन का एक दूसरा भी पहलू है। प्राचीन काल में कोई विद्वान किसी ऐसे विषय की ही पुस्तक की रचना या उसकी नकल करता था, जो बहुत हो उपयोगो होती थी । साहित्य आदर और मान की वस्तु थी । साहित्यकार पूजा और प्रतिष्ठा का अधिकारी होता था, ग्रन्थ-रचना से उसका नाम मर हो जाता था । वह भी अपनी जिम्मेवारी समझता था, और अच्छी-अच्छी कृतियों से समाज की सेवा करता था । शुरू में जब पुस्तकें छपों तो सर्वसाधारण का छपी हुई बात पर बड़ा विश्वास होता था; लोगों की यह धारणा थी कि जो भी बात छुपी है, वह सोलहों आने सच्ची है, उसमें शका की कोई गंजायश नहीं । पर क्या दशा है । पुस्तक, ट्रेक्ट या पत्रक आदि छुपाना आसान और कम खर्च का काम होने से, लेखक और प्रकाशक के निजी लोभ के कारण, दिन ऐसी अनेक बातें
छपती रहती हैं, जिन पर विचारवान आदमी विश्वास नहीं करते, और जिनसे माले-भाले पाठक खूब ठगे जाते हैं। खंडन-मंडन, गाली-गलोच,
और झूठी निन्दा-स्तुति से भरा अश्लील कुरुचिपूर्ण माहित्य बहुत बड़े परिमाण में नित्य प्रकाशित होता रहता है। पाठकों के मन और हृदय पर उसका बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। उन्हें सतर्क श्रीर सावधान रहने की आवश्यकता है कि किस चीज़ को पढ़
न पड़े।
छापेखाने के विकार से पहले, जब साहित्य का परिमाण कम होता था, और वह सुलभ भी न था, आदमी पुस्तकों को बहुत ध्यान से पढ़ते थे, और उस पर खूब विचार और मनन करते थे । पर
तोकितने ही पाठक कोई पुस्तक खरीद कर उसे पढ़ने की खास फिक्र नहीं करते। अधिकांश आदमी अपने पढ़े पर विचार नहीं करते; वे शान्ति और गम्भीरता से यह नहीं सोचते कि हमें इन बातों पर कहाँ तक अमल करना चाहिए । उनके पढ़ने से उनके जीवन, रहन-सहन या प्राचार- विचार पर विशेष प्रभाव नहीं पड़ता। आवश्यकता है, आदमी साहित्य की प्रगति करने के साथ, उससे यथेष्ट लाभ भी उठाते रहें ।
इकत्तीसवाँ अध्याय संवाद
हाल की बात है। मैं दूसरी मंजिल के अपने कमरे में बैठा लिख है रहा था । बहुत से तोतों की कुछ अज सुनी । आवाज कुछ देर ती ही रही । मेरा ध्यान उस ओर आकर्षित हुआ बाहर आकर देखता हूँ तो नीम के पेड़ से तोते ग्रा आकर मंडरा रहे हैं, और चिल्ला रहे है । इधर-उधर देखने से मालूम हुआ कि नीम के पास वाली छत पर एक नेवला घूम रहा है । अव समझ में आया कि तोते उस हिन्सक प्राणी से अपने सब साथियों को | किसी-किसी पुस्तक की तो आजकल लाखो प्रतियाँ छुपती हैं, और यातायात के साधनों की उन्नति के कारण देश से बाहर भी काफी संख्या में जाती है । एक देश के आदमियों का दूसरे देश वालों से विचारों का आदान-प्रदान बढ़ता जा रहा है । पढे-लिखे आदमी दुनिया भर की विचार-धाराएँ और अनुसंधान दि जानते रहते हैं। उनके विचारों का थोड़ा बहुत प्रभाव उनके पास के अनपढ़ पर भी पड़ता है । इस तरह किसी देश के आदमियों का जीवन सर्वथा एकांगी नहीं रहता। अच्छे ऊँचे साहित्यकार के सामने विश्व और उसकी समस्याएँ रहती हैं, और, वह उनपर गम्भीरता पूर्वक विचार करता है। इस तरह प्रेस तथा दूसरे आधुनिक आविष्कारों के कारण विश्व - साहित्य अधिकाधिक परिमाण में तैयार होता है, और पढ़ा जा रहा है । अस्तु, इन बातों से आधुनिक साहित्य से होनेवाले ज्ञान-प्रचार का परिचय हो जाता है । परन्तु साहित्य के प्रकाशन का एक दूसरा भी पहलू है। प्राचीन काल में कोई विद्वान किसी ऐसे विषय की ही पुस्तक की रचना या उसकी नकल करता था, जो बहुत हो उपयोगो होती थी । साहित्य आदर और मान की वस्तु थी । साहित्यकार पूजा और प्रतिष्ठा का अधिकारी होता था, ग्रन्थ-रचना से उसका नाम मर हो जाता था । वह भी अपनी जिम्मेवारी समझता था, और अच्छी-अच्छी कृतियों से समाज की सेवा करता था । शुरू में जब पुस्तकें छपों तो सर्वसाधारण का छपी हुई बात पर बड़ा विश्वास होता था; लोगों की यह धारणा थी कि जो भी बात छुपी है, वह सोलहों आने सच्ची है, उसमें शका की कोई गंजायश नहीं । पर क्या दशा है । पुस्तक, ट्रेक्ट या पत्रक आदि छुपाना आसान और कम खर्च का काम होने से, लेखक और प्रकाशक के निजी लोभ के कारण, दिन ऐसी अनेक बातें छपती रहती हैं, जिन पर विचारवान आदमी विश्वास नहीं करते, और जिनसे माले-भाले पाठक खूब ठगे जाते हैं। खंडन-मंडन, गाली-गलोच, और झूठी निन्दा-स्तुति से भरा अश्लील कुरुचिपूर्ण माहित्य बहुत बड़े परिमाण में नित्य प्रकाशित होता रहता है। पाठकों के मन और हृदय पर उसका बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। उन्हें सतर्क श्रीर सावधान रहने की आवश्यकता है कि किस चीज़ को पढ़ न पड़े। छापेखाने के विकार से पहले, जब साहित्य का परिमाण कम होता था, और वह सुलभ भी न था, आदमी पुस्तकों को बहुत ध्यान से पढ़ते थे, और उस पर खूब विचार और मनन करते थे । पर तोकितने ही पाठक कोई पुस्तक खरीद कर उसे पढ़ने की खास फिक्र नहीं करते। अधिकांश आदमी अपने पढ़े पर विचार नहीं करते; वे शान्ति और गम्भीरता से यह नहीं सोचते कि हमें इन बातों पर कहाँ तक अमल करना चाहिए । उनके पढ़ने से उनके जीवन, रहन-सहन या प्राचार- विचार पर विशेष प्रभाव नहीं पड़ता। आवश्यकता है, आदमी साहित्य की प्रगति करने के साथ, उससे यथेष्ट लाभ भी उठाते रहें । इकत्तीसवाँ अध्याय संवाद हाल की बात है। मैं दूसरी मंजिल के अपने कमरे में बैठा लिख है रहा था । बहुत से तोतों की कुछ अज सुनी । आवाज कुछ देर ती ही रही । मेरा ध्यान उस ओर आकर्षित हुआ बाहर आकर देखता हूँ तो नीम के पेड़ से तोते ग्रा आकर मंडरा रहे हैं, और चिल्ला रहे है । इधर-उधर देखने से मालूम हुआ कि नीम के पास वाली छत पर एक नेवला घूम रहा है । अव समझ में आया कि तोते उस हिन्सक प्राणी से अपने सब साथियों को |
लाइव हिंदी खबर :-व्यवसाय को के लिए यह सप्ताह व्यस्त रहेगा। आज का दिन आपके सभी लंबित कार्यों को पूरा करने के लिए शुभ दिन है। सहकर्मी अधिकारियों को आसान बनाने और आपकी सहायता करने के लिए आगे आएंगे। आज किसी भी तरह के निवेश के बारे में सोच विचार करने के लिए एक अच्छा दिन है। आजा फिर एक अनुकूल दिन है। फिजा में रोमांस है और यदि आप अविवाहित हैं तो अपनी नई नवेली प्यार के साथ सुखद समय बिताने की संभावना है। आप में से कुछ लोगों की किसी पुराने दोस्त से मुलाकात होगी और आप मिलकर कुछ प्रिया रे पुनर्जीवित करेंगे। आपके किस्मत आपके पक्ष में नहीं है, इसलिए आपको कोई भी जोखिम लेने की सलाह नहीं दी जाती है।
हिचकिचाहट के कारण आप व्यवसाय संबंधी उपयुक्त निर्णय नहीं ले पाएंगे। महत्वपूर्ण व्यापारिक निर्णय लेने या नई परियोजनाएं आरंभ करने से बचें। कार्यस्थल पर हो रही राजनीति आपको परेशान कर सकती है। आपको अपने व्यवसाय में अनावश्यक परिवर्तन का सामना करना पड़ सकता है। परिवार के सदस्यों के साथ विवाद पैदा हो सकता है और व्यक्तिगत संबंध खराब हो सकते हैं। जो बातें अपने कहीं ही नहीं, उनके लिए आप को दोषी ठहराया जा सकता है। आप कुछ मुद्दों पर भी संवेदनशील हो सकते हैं। आज अपने काम से काम रखने में ही समझदारी है। समय आपके लिए बहुत अनुकूल नहीं है। घरेलू मामलों में कोई भी नहीं शुरुआत करने अथवा व्यवसाय में कोई भी नया परिवर्तन लाने से बचें।
व्यापारी वर्ग जोखिम भरा निवेश में हाथ ना डाले, उन्हें भारी घाटा उठाना पड़ सकता है। परसों से संबंधित मुद्दों और आपका अपने सरदार के साथ विवाद होने की संभावना है। आज, आप पर अतिरिक्त काम का बोझ पड़ सकता है दफ्तर में कोई जटिल कार्य आप को सौंपा जा सकता है। प्रेम संबंधों में आज उतार-चढ़ाव बना रहेगा। अपने करीबी लोगों की भावनाओं को समझने की कोशिश करें। अपने साथी का समाधान और उसने आपको मिलेगा लेकिन आप किसी बात को लेकर परेशान रह सकते हैं। हालात आपके पक्ष में काम नहीं कर रहे हैं। जो परिस्थितियों आपके नियंत्रण के बाहर है उन्हें जाने दो।
| लाइव हिंदी खबर :-व्यवसाय को के लिए यह सप्ताह व्यस्त रहेगा। आज का दिन आपके सभी लंबित कार्यों को पूरा करने के लिए शुभ दिन है। सहकर्मी अधिकारियों को आसान बनाने और आपकी सहायता करने के लिए आगे आएंगे। आज किसी भी तरह के निवेश के बारे में सोच विचार करने के लिए एक अच्छा दिन है। आजा फिर एक अनुकूल दिन है। फिजा में रोमांस है और यदि आप अविवाहित हैं तो अपनी नई नवेली प्यार के साथ सुखद समय बिताने की संभावना है। आप में से कुछ लोगों की किसी पुराने दोस्त से मुलाकात होगी और आप मिलकर कुछ प्रिया रे पुनर्जीवित करेंगे। आपके किस्मत आपके पक्ष में नहीं है, इसलिए आपको कोई भी जोखिम लेने की सलाह नहीं दी जाती है। हिचकिचाहट के कारण आप व्यवसाय संबंधी उपयुक्त निर्णय नहीं ले पाएंगे। महत्वपूर्ण व्यापारिक निर्णय लेने या नई परियोजनाएं आरंभ करने से बचें। कार्यस्थल पर हो रही राजनीति आपको परेशान कर सकती है। आपको अपने व्यवसाय में अनावश्यक परिवर्तन का सामना करना पड़ सकता है। परिवार के सदस्यों के साथ विवाद पैदा हो सकता है और व्यक्तिगत संबंध खराब हो सकते हैं। जो बातें अपने कहीं ही नहीं, उनके लिए आप को दोषी ठहराया जा सकता है। आप कुछ मुद्दों पर भी संवेदनशील हो सकते हैं। आज अपने काम से काम रखने में ही समझदारी है। समय आपके लिए बहुत अनुकूल नहीं है। घरेलू मामलों में कोई भी नहीं शुरुआत करने अथवा व्यवसाय में कोई भी नया परिवर्तन लाने से बचें। व्यापारी वर्ग जोखिम भरा निवेश में हाथ ना डाले, उन्हें भारी घाटा उठाना पड़ सकता है। परसों से संबंधित मुद्दों और आपका अपने सरदार के साथ विवाद होने की संभावना है। आज, आप पर अतिरिक्त काम का बोझ पड़ सकता है दफ्तर में कोई जटिल कार्य आप को सौंपा जा सकता है। प्रेम संबंधों में आज उतार-चढ़ाव बना रहेगा। अपने करीबी लोगों की भावनाओं को समझने की कोशिश करें। अपने साथी का समाधान और उसने आपको मिलेगा लेकिन आप किसी बात को लेकर परेशान रह सकते हैं। हालात आपके पक्ष में काम नहीं कर रहे हैं। जो परिस्थितियों आपके नियंत्रण के बाहर है उन्हें जाने दो। |
वाशिंगटन, 13 अप्रैल (एपी) अमेरिका के खाद्य और औषधि प्रशासन (एफडीए) ने कहा कि जॉनसन एंड जॉनसन का टीका लगवाने वाले कुछ लोगों में खतरनाक तरीके से रक्त का थक्का जमने की खबरों पर नियामकों की जांच के बीच इस कंपनी के टीकों पर रोक कुछ ही समय तक रहने की उम्मीद है।
एफडीए और रोग नियंत्रण तथा रोकथाम केंद्र (सीडीसी) ने जॉनसन एंड जॉनसन का टीका लगाये जाने के छह से 13 दिन के अंदर छह महिलाओं में असामान्य तरीके से रक्त का थक्का जमने के मामले में जांच के लिए मंगलवार को इस टीके पर रोक की सिफारिश की।
उक्त मामलों में मस्तिष्क से रक्त का प्रवाह करने वाली रक्तनलिकाओं में थक्के जमने की बात सामने आई और साथ ही प्लेटलेट्स कम हो गये। ये सभी छह मामले 18 से 48 साल की आयु की महिलाओं में देखे गये।
अमेरिका में अब तक करीब 70 लाख लोगों को जॉनसन एंड जॉनसन के टीके की खुराक दी जा चुकी है और इनमें अधिकांश लोगों में कोई गंभीर प्रतिकूल प्रभाव नजर नहीं आया।
नियामकों का कहना है कि वे रोगियों तथा चिकित्सा पेशेवरों को रक्त के थक्के जमने के बारे में पता लगाने और उनका उपचार करने की जानकारी देना चाहते हैं।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
| वाशिंगटन, तेरह अप्रैल अमेरिका के खाद्य और औषधि प्रशासन ने कहा कि जॉनसन एंड जॉनसन का टीका लगवाने वाले कुछ लोगों में खतरनाक तरीके से रक्त का थक्का जमने की खबरों पर नियामकों की जांच के बीच इस कंपनी के टीकों पर रोक कुछ ही समय तक रहने की उम्मीद है। एफडीए और रोग नियंत्रण तथा रोकथाम केंद्र ने जॉनसन एंड जॉनसन का टीका लगाये जाने के छह से तेरह दिन के अंदर छह महिलाओं में असामान्य तरीके से रक्त का थक्का जमने के मामले में जांच के लिए मंगलवार को इस टीके पर रोक की सिफारिश की। उक्त मामलों में मस्तिष्क से रक्त का प्रवाह करने वाली रक्तनलिकाओं में थक्के जमने की बात सामने आई और साथ ही प्लेटलेट्स कम हो गये। ये सभी छह मामले अट्ठारह से अड़तालीस साल की आयु की महिलाओं में देखे गये। अमेरिका में अब तक करीब सत्तर लाख लोगों को जॉनसन एंड जॉनसन के टीके की खुराक दी जा चुकी है और इनमें अधिकांश लोगों में कोई गंभीर प्रतिकूल प्रभाव नजर नहीं आया। नियामकों का कहना है कि वे रोगियों तथा चिकित्सा पेशेवरों को रक्त के थक्के जमने के बारे में पता लगाने और उनका उपचार करने की जानकारी देना चाहते हैं। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है। |
लखनऊ, प्रगतिशील समाजवादी पार्टी अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि आजादी की लड़ाई में महती भूमिका निभाने वाले मुस्लिम धर्मगुरूओं का देश की अखंडता बनाये रखने में बड़ा योगदान है।
इस्लामिक बुद्धिजीवियों व धार्मिक नेताओं के एक कार्यक्रम में श्री यादव ने कहा कि देश की अखंडता बनाए रखने में मुस्लिम धर्मगुरुओं का बड़ा योगदान है। आजादी की लड़ाई में मुस्लिम धर्म गुरुओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह देश का दुर्भाग्य है कि आज विभाजनकारी शक्तियों द्वारा देश में साम्प्रदायिक विभाजन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होने कहा कि समाजवादी चिंतक डा राममनोहर लोहिया का कहना था कि हर व्यक्ति अपने जीवन के किसी मोड़ पर अल्पसंख्यक होता है। कई बार भीड़ में आपकी कोई विशिष्टता, आदत या पहचान आपको बाकियों से अलग कर देती है। असल में आपको अल्पसंख्यक होने की पीड़ा तब समझ में आती है। इसलिए लोकतंत्र का तकाजा है कि सभी को सम्मान मिले।
इस अवसर पर मोहम्मद शमीम कादरी और मौलाना परवेज कमाल के नेतृत्व में बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोगों ने प्रसपा की सदस्यता ग्रहण की।
| लखनऊ, प्रगतिशील समाजवादी पार्टी अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि आजादी की लड़ाई में महती भूमिका निभाने वाले मुस्लिम धर्मगुरूओं का देश की अखंडता बनाये रखने में बड़ा योगदान है। इस्लामिक बुद्धिजीवियों व धार्मिक नेताओं के एक कार्यक्रम में श्री यादव ने कहा कि देश की अखंडता बनाए रखने में मुस्लिम धर्मगुरुओं का बड़ा योगदान है। आजादी की लड़ाई में मुस्लिम धर्म गुरुओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह देश का दुर्भाग्य है कि आज विभाजनकारी शक्तियों द्वारा देश में साम्प्रदायिक विभाजन को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होने कहा कि समाजवादी चिंतक डा राममनोहर लोहिया का कहना था कि हर व्यक्ति अपने जीवन के किसी मोड़ पर अल्पसंख्यक होता है। कई बार भीड़ में आपकी कोई विशिष्टता, आदत या पहचान आपको बाकियों से अलग कर देती है। असल में आपको अल्पसंख्यक होने की पीड़ा तब समझ में आती है। इसलिए लोकतंत्र का तकाजा है कि सभी को सम्मान मिले। इस अवसर पर मोहम्मद शमीम कादरी और मौलाना परवेज कमाल के नेतृत्व में बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोगों ने प्रसपा की सदस्यता ग्रहण की। |
रायपुर की पुलिस ने सोमवार के नाइजिरिया के एक नागरिक को दिल्ली से पकड़ा। इसने रायपुर की एक महिला से फेसबुक पर दोस्ती कर 5 लाख रुपए ठगे थे। कुछ महीने पहले न्यू राजेंद्र नगर थाने में महिला ने शिकायत की थी। इसकी जांच करते हुए पुलिस को दिल्ली में आरोपी के छुपे होने की बात पता चली। 1 सप्ताह से भी अधिक वक्त तक रायपुर पुलिस ने दिल्ली में ही डेरा डाला और अब बदमाश को पकड़कर रायपुर लाया गया है। सिविल लाइंस स्थित पुलिस कंट्रोल रूम में प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस के अफसरों ने बताया कि इस तरह से ये देश की कई महिलाओं से लाखों रुपए एैंठ चुका है। विदेशी नागरिक होने के नाते महिलाएं भी इसके झांसे में आसानी से आती थीं। इस बदमाश का नाम इग्नातुस है।
रायपुर की एक महिला ने राजेंद्र नगर थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी। महिला ने बताया था कि फेसबुक पर उसे डॉ रोनाल्ड क्रिस्टोफर नाम के शख्स की फ्रेंड रिक्वेस्ट आई थी। इग्नातुस ने ही ये फेक आईडी बनाई थी। इसने महिला से कहा कि वो पेशे से डॉक्टर है। महिला से हर रोज चैट करने लगा और वॉट्सअप नंबर ले लिया। इस बीच उसने महिला को फोन किया और महंगे गिफ्ट भेजने की बात कही। दिसंबर के महीने में महिला को इसके कुछ दूसरे साथियों ने गिफ्ट को एयरपोर्ट से क्लियर करवाने के नाम पर कॉल आया।
अलग-अलग किश्त में 5 लाख रुपए खातों में महिला से जमा करवा लिए गए। इग्नातुस ने कहा कि महिला को वो यह रुपए लौटा देगा , सिर्फ फॉर्मेल्टी पूरी करने के लिए रकम ले रहा है। जैसे महिला ने रुपयों की डिमांड पूरी की डॉ बना इग्नातुस फेसबुक से गायब हो गया। इसका फोन भी स्वीच ऑफ ही आथा। इसके बाद मामला थाने पहुंचा।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने ठगी के पैटर्न को स्टडी किया। टीम को शक हुआ कि दिल्ली में रहने वाले नाइजिरियन लोग अक्सर इस तरह की वारदातों को अंजाम देते हैं। खातों की जांच, फोन नंबरों को ट्रेस करने पर लोकेशन भी दिल्ली की ही पता चली। रायपुर पुलिस की एक टीम दिल्ली गई। वहां करीब 1 सप्ताह तक स्थानीय सूत्रों से इग्नातुस के बारे में पूछताछ होती रही। आखिरकार पुलिस को इसका एड्रेस मिला। टीम ने बिना देरी किए थाना द्वारका मार्ग इलाके में भरत विहार ककरोला में छापा मारा।
पुलिस को इग्नातुस यहीं मिल गया। इसने कबूला कि महिलाओं से दोस्ती करके उन्हें ठगने का काम यह करता है। पहले भी कुछ महिलाओं को इसी तरह ठग चुका है। आरोपी के कब्जे से 4 मोबाईल फोन, 1 लैपटॉप, एटीएम कार्ड, ड्रायविंग लायसेंस, पासपोर्ट, पेन ड्राईव और पेन कार्ड मिला। अब आरोपी को दिल्ली से गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमाण्ड पर रायपुर लाया गया है। पूरे केस के सिलसिले में इससे पूछताछ जारी है।
दिल्ली में इग्नातुस जैसे कई नाइजिरियन रहते हैं। पहले भी डिजिटल ठगी के मामले में इग्नातुस जैसे लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। ये फेस बुक आई डी बनाकर महिलाओं को फ्रेण्ड रिक्वेस्ट भेजते हैं। उनसे दोस्ती करते हैं। महिला का भरोसा जीतकर उनका नंबर और दूसरी जानकारी हासिल करते हैं। कभी विदेशी तोहफा तो कभी पर्सनल समस्या में मदद करने के बहाने वो महिलाओं से रुपए मांगते हैं। पैसे मिलते ही इनकी फेसबुक आईडी डीएक्टिवेट कर दी जाती है। ये बदमाश फर्जी दस्तावेजों के जरिए बैंकों में खाता खोलने और सिम खरीदने में भी उस्ताद होते हैं। जिन्हें ये बंद करवा देते हैं। सिम को फेंक देते हैं।
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| रायपुर की पुलिस ने सोमवार के नाइजिरिया के एक नागरिक को दिल्ली से पकड़ा। इसने रायपुर की एक महिला से फेसबुक पर दोस्ती कर पाँच लाख रुपए ठगे थे। कुछ महीने पहले न्यू राजेंद्र नगर थाने में महिला ने शिकायत की थी। इसकी जांच करते हुए पुलिस को दिल्ली में आरोपी के छुपे होने की बात पता चली। एक सप्ताह से भी अधिक वक्त तक रायपुर पुलिस ने दिल्ली में ही डेरा डाला और अब बदमाश को पकड़कर रायपुर लाया गया है। सिविल लाइंस स्थित पुलिस कंट्रोल रूम में प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस के अफसरों ने बताया कि इस तरह से ये देश की कई महिलाओं से लाखों रुपए एैंठ चुका है। विदेशी नागरिक होने के नाते महिलाएं भी इसके झांसे में आसानी से आती थीं। इस बदमाश का नाम इग्नातुस है। रायपुर की एक महिला ने राजेंद्र नगर थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी। महिला ने बताया था कि फेसबुक पर उसे डॉ रोनाल्ड क्रिस्टोफर नाम के शख्स की फ्रेंड रिक्वेस्ट आई थी। इग्नातुस ने ही ये फेक आईडी बनाई थी। इसने महिला से कहा कि वो पेशे से डॉक्टर है। महिला से हर रोज चैट करने लगा और वॉट्सअप नंबर ले लिया। इस बीच उसने महिला को फोन किया और महंगे गिफ्ट भेजने की बात कही। दिसंबर के महीने में महिला को इसके कुछ दूसरे साथियों ने गिफ्ट को एयरपोर्ट से क्लियर करवाने के नाम पर कॉल आया। अलग-अलग किश्त में पाँच लाख रुपए खातों में महिला से जमा करवा लिए गए। इग्नातुस ने कहा कि महिला को वो यह रुपए लौटा देगा , सिर्फ फॉर्मेल्टी पूरी करने के लिए रकम ले रहा है। जैसे महिला ने रुपयों की डिमांड पूरी की डॉ बना इग्नातुस फेसबुक से गायब हो गया। इसका फोन भी स्वीच ऑफ ही आथा। इसके बाद मामला थाने पहुंचा। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने ठगी के पैटर्न को स्टडी किया। टीम को शक हुआ कि दिल्ली में रहने वाले नाइजिरियन लोग अक्सर इस तरह की वारदातों को अंजाम देते हैं। खातों की जांच, फोन नंबरों को ट्रेस करने पर लोकेशन भी दिल्ली की ही पता चली। रायपुर पुलिस की एक टीम दिल्ली गई। वहां करीब एक सप्ताह तक स्थानीय सूत्रों से इग्नातुस के बारे में पूछताछ होती रही। आखिरकार पुलिस को इसका एड्रेस मिला। टीम ने बिना देरी किए थाना द्वारका मार्ग इलाके में भरत विहार ककरोला में छापा मारा। पुलिस को इग्नातुस यहीं मिल गया। इसने कबूला कि महिलाओं से दोस्ती करके उन्हें ठगने का काम यह करता है। पहले भी कुछ महिलाओं को इसी तरह ठग चुका है। आरोपी के कब्जे से चार मोबाईल फोन, एक लैपटॉप, एटीएम कार्ड, ड्रायविंग लायसेंस, पासपोर्ट, पेन ड्राईव और पेन कार्ड मिला। अब आरोपी को दिल्ली से गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमाण्ड पर रायपुर लाया गया है। पूरे केस के सिलसिले में इससे पूछताछ जारी है। दिल्ली में इग्नातुस जैसे कई नाइजिरियन रहते हैं। पहले भी डिजिटल ठगी के मामले में इग्नातुस जैसे लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। ये फेस बुक आई डी बनाकर महिलाओं को फ्रेण्ड रिक्वेस्ट भेजते हैं। उनसे दोस्ती करते हैं। महिला का भरोसा जीतकर उनका नंबर और दूसरी जानकारी हासिल करते हैं। कभी विदेशी तोहफा तो कभी पर्सनल समस्या में मदद करने के बहाने वो महिलाओं से रुपए मांगते हैं। पैसे मिलते ही इनकी फेसबुक आईडी डीएक्टिवेट कर दी जाती है। ये बदमाश फर्जी दस्तावेजों के जरिए बैंकों में खाता खोलने और सिम खरीदने में भी उस्ताद होते हैं। जिन्हें ये बंद करवा देते हैं। सिम को फेंक देते हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
कोकराझार से कश्मीर तक की साइकिल यात्रा आरंभ हो गयी है. साठ दिनों का सफर तय करते हुए यह यात्रा कश्मीर पहुंचेगी. कोकराझार असम के दक्षिण पश्चिम में है. यह क्षेत्र बोडोलैंड टैरिटोरियल एरिया डिस्ट्रिक्स के अंतर्गत आता है. इसके अंतर्गत असम के और तीन जिले चिरांग, बाक्सा और उदालगिरि आते हैं. चार साल पहले यहां भीषण नस्लीय हिंसा हुई थी. यह हिंसा न सिर्फ बोडोलैंड टैरिटोरियल एरिया डिस्ट्रिक्स के लिए बल्कि पूरे असम के लिए संकट का दौर था. इस हिंसा में 114 लोग मारे गए थे और चार लाख लोग बेघर हो गए थे. नस्लीय हिंसा में सब एक दूसरे के खून के प्यासे हो गए थे. बोडो और मुस्लिम के बीच अविश्वास की खाई बढ़ती जा रही थी. कोकराझार और चिरांग में हजारों लोग अपना घर छोड़कर शरणार्थी शिविरों में पनाह लेने को बाध्य हो गए थे. जातीय हिंसक संघर्ष स्थायी तत्व बनता जा रहा था. बोडो, बंगाली मुस्लिम व आदिवासियों के बीच निरंतर अपनी पहचान व जमीन के मुद्दे पर संघर्ष होता रहता है. आजादी के बाद हिंदू व मुस्लिमों के बीच संघर्ष हुआ, जिसमें मूल निवासी बोडो मुस्लिम समुदाय के खिलाफ रहे. राज्य की जनसंख्या में बोडो 5 प्रतिशत हैं और मुस्लिम आबादी 33 प्रतिशत है. बोडो व गैर बोडो समुदायों के बीच गहरे अविश्वास का फायदा कुछ असामाजिक तत्व बखूबी उठा रहे थे.
जयनाल हुसैन कहते हैं कि इस माहौल के बीच सर्वसेवा संघ गांधीजनों ने पहल की और इस क्षेत्र के बोडो, मुस्लिम, असमी, राजबंशी राभा, नेपाली, संथाली आदिवासी, बिहारी, बंगाली को दहशत से उबारकर यहां संवाद का माहौल बनाया.
चंदन पाल के मुताबिक पिछले चार वर्षों से बोडोलैंड टैरिटोरियल एरिया डिस्ट्रिक्स के चार कोकराझार, चिरांग, बाक्सा, उदालगिरि और आसपास के कुछ जिलों के ग्राम मुखिया युवा पीढ़ी, शिक्षकों को एकजुट कर शांति की पहल की.
हिंसा के लिए बदनाम कोकराझार से पूरे देश में मोहब्बत का पैगाम लेकर निकले हैं यहां के युवक और युवतियां. इसे नेतृत्व प्रदान कर रही हैं सुप्रसिद्ध गांधीवादी नेत्री राधा भट्ट. गत तीन सितंबर को यह यात्रा बीटीडीए के सचिवालय भवन से आरंभ हुई. इस यात्रा को बीटीसी के उपप्रमुख खंपा बरगयारी, बीटीसी के पर्यटन विभाग के प्रमुख मोहनब्रह्म ने रवाना किया. यह यात्रा पश्चिम बंगाल में प्रवेश कर गयी है. जगह- जगह लोगों में बढ़ती हिंसा के प्रति आम लोगों की चिंता यात्रा के प्रति दिलचस्पी से परिलक्षित हो रही है. यह यात्रा बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, जम्मू-कश्मीर की 3500 किलोमीटर सफर तय कर श्री नगर में पूर्ण होगी.
इस यात्रा में असम के सिंग, नेपाली, बिहारी, बंगाली और असमी समुदाय का प्रतिनिधित्व है. इस यात्रा की खासियत है कि तीन युवतियां आशा बसुमतारी, जमुना बसुमतारी, जयश्री राय भी साइकिल चलाकर सफर में शामिल हैं. इनके अभिभावकों ने शांति और भाइचारे की अहमियत को समझा है. इसके अलावा लखिन्द्र बसुमतारी ने उन्हें यह पैगाम लोगों तक पहुंचाने को कहा है. इसके अलावा विनय खुंगर ब्रह्मा, धनंजय नाथ, महेन्द्र नाथ, खारगेश्वर नाथ, अमर कुमार दत्त, हर कुमार नाथ, गुतल बसुमतारी, अब्दुल मोजीद, शहीदुल इस्लाम, शोइदुल इस्लाम, बैदुल इस्लाम, इदी मुसाराय, विम्बेश्वर गोरई, धर्मेन्द्र राजपूत, जायनाल होसेन हैं. यहां के लोगों ने कभी अपना अमन-चैन खोया था, लेकिन अब ये लोग देश के प्रति अपने फर्ज को समझ रहे हैं. 'हिंसा नाई, शांति चाई' नारे के उद्घोष के साथ निकल पड़े हैं. इनका सड़कों पर आना दूसरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहा है. इसका एक उदाहरण जलपाईगुड़ी के धूपगुड़ी के सुकांता महाविद्यालय में देखने को मिला. जब वे लोग यहां पहुंचे तो कई कॉलेज के युवक और युवतियां भी इनके साथ चलने लगीं. दरअसल वे यह संदेश दे रहे थे कि हिंसा पर चुप्पी कतई उचित नहीं है. इसके विरोध में चुप्पी तोड़कर आगे आना होगा. अमन-चैन की बहाली के लिए जगह-जगह लोगों से संवाद स्थापित किया जा रहा है.
यात्रा में शामिल युवक अशांति और अहिंसा के कारकों तथा देश के ज्वलंत मुद्दों के खिलाफ लोगों को जागरूक कर रहे हैं. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी यात्रा ने कहा है कि यात्रा अपने मकसद में कामयाव हो. त्रिपुरा के हरिपद विश्वास कहते हैं कि यह एक सार्थक पहल है. सर्वोदय समाज के आदित्य पटनायक कहते हैं कि हम महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती मनाने जा रहे हैं तो गांधी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि लोगों तक उनके संदेश को पहुंचाया जाए. असम में जो पहल चार वर्ष पहले शुरू की गई थी, उसे अब यहां के युवक दूसरे क्षेत्रों में ले जा रहे हैं, यह एक अहम बात है.
राधा भट्ट का नाम आज गांधी-विनोबा युग के बचे हुए थोड़े से गांधीवादियों में प्रमुखता से शुमार किया जाता है. वे आज देश और दुनिया के शीर्षस्थ गांधीवादी संस्थाओं और संगठनों में महत्वपूर्ण पदों पर हैं और इन पदों की जिम्मेदारियों का निर्वाह एक मिसाल की तरह करती रही हैं.
वे अपने जीवन के 83वें साल के सफर में आज जिस मुकाम पर हैं, वह उनकी सूझ-बूझ, दृढ़ता और हिम्मत की उपलब्धि है. वे इस अभियान का नेतृत्व कर रही हैं. उनका कहना है कि पूरी दुनिया में हिंसा हद से ज्यादा पार कर गयी है. ग्वाटेमाला हो या मैक्सिको या उत्तरी अमेरिका, हर जगह हिंसा के कारण लोग विस्थापित हो रहे हैं. ऐसे समय में ये बच्चे समानता, अहिंसा का संदेश देने को निकले हैं. शांति और सद्भाव लोगों की मौलिक भूख है. इस यात्रा को पूरे विश्व की हिंसा के परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए. पिछले चार वर्षों से शिविरों के माध्यम से युवाओं को प्रशिक्षित किया गया हैै. इसका नतीजा यह निकला है एक समुदाय से दूसरे समुदाय के बीच नफरत की आग खत्म हो गयी है. कश्मीर तक की यात्रा के सवाल पर उनका कहना है कि जितना संवेदनशील कश्मीर है, उतना ही संवेदनशील है असम. आज संवेदना का स्तर कम हो रहा है. उस संवेदना के स्तर को जगाने की आवश्यकता है. कट्टरता समाज के लिए घातक है, तो फिर क्यों न अहिंसावादी इस कट्टरता के खिलाफ बड़ी लकीर खींचें.
| कोकराझार से कश्मीर तक की साइकिल यात्रा आरंभ हो गयी है. साठ दिनों का सफर तय करते हुए यह यात्रा कश्मीर पहुंचेगी. कोकराझार असम के दक्षिण पश्चिम में है. यह क्षेत्र बोडोलैंड टैरिटोरियल एरिया डिस्ट्रिक्स के अंतर्गत आता है. इसके अंतर्गत असम के और तीन जिले चिरांग, बाक्सा और उदालगिरि आते हैं. चार साल पहले यहां भीषण नस्लीय हिंसा हुई थी. यह हिंसा न सिर्फ बोडोलैंड टैरिटोरियल एरिया डिस्ट्रिक्स के लिए बल्कि पूरे असम के लिए संकट का दौर था. इस हिंसा में एक सौ चौदह लोग मारे गए थे और चार लाख लोग बेघर हो गए थे. नस्लीय हिंसा में सब एक दूसरे के खून के प्यासे हो गए थे. बोडो और मुस्लिम के बीच अविश्वास की खाई बढ़ती जा रही थी. कोकराझार और चिरांग में हजारों लोग अपना घर छोड़कर शरणार्थी शिविरों में पनाह लेने को बाध्य हो गए थे. जातीय हिंसक संघर्ष स्थायी तत्व बनता जा रहा था. बोडो, बंगाली मुस्लिम व आदिवासियों के बीच निरंतर अपनी पहचान व जमीन के मुद्दे पर संघर्ष होता रहता है. आजादी के बाद हिंदू व मुस्लिमों के बीच संघर्ष हुआ, जिसमें मूल निवासी बोडो मुस्लिम समुदाय के खिलाफ रहे. राज्य की जनसंख्या में बोडो पाँच प्रतिशत हैं और मुस्लिम आबादी तैंतीस प्रतिशत है. बोडो व गैर बोडो समुदायों के बीच गहरे अविश्वास का फायदा कुछ असामाजिक तत्व बखूबी उठा रहे थे. जयनाल हुसैन कहते हैं कि इस माहौल के बीच सर्वसेवा संघ गांधीजनों ने पहल की और इस क्षेत्र के बोडो, मुस्लिम, असमी, राजबंशी राभा, नेपाली, संथाली आदिवासी, बिहारी, बंगाली को दहशत से उबारकर यहां संवाद का माहौल बनाया. चंदन पाल के मुताबिक पिछले चार वर्षों से बोडोलैंड टैरिटोरियल एरिया डिस्ट्रिक्स के चार कोकराझार, चिरांग, बाक्सा, उदालगिरि और आसपास के कुछ जिलों के ग्राम मुखिया युवा पीढ़ी, शिक्षकों को एकजुट कर शांति की पहल की. हिंसा के लिए बदनाम कोकराझार से पूरे देश में मोहब्बत का पैगाम लेकर निकले हैं यहां के युवक और युवतियां. इसे नेतृत्व प्रदान कर रही हैं सुप्रसिद्ध गांधीवादी नेत्री राधा भट्ट. गत तीन सितंबर को यह यात्रा बीटीडीए के सचिवालय भवन से आरंभ हुई. इस यात्रा को बीटीसी के उपप्रमुख खंपा बरगयारी, बीटीसी के पर्यटन विभाग के प्रमुख मोहनब्रह्म ने रवाना किया. यह यात्रा पश्चिम बंगाल में प्रवेश कर गयी है. जगह- जगह लोगों में बढ़ती हिंसा के प्रति आम लोगों की चिंता यात्रा के प्रति दिलचस्पी से परिलक्षित हो रही है. यह यात्रा बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, जम्मू-कश्मीर की तीन हज़ार पाँच सौ किलोग्राममीटर सफर तय कर श्री नगर में पूर्ण होगी. इस यात्रा में असम के सिंग, नेपाली, बिहारी, बंगाली और असमी समुदाय का प्रतिनिधित्व है. इस यात्रा की खासियत है कि तीन युवतियां आशा बसुमतारी, जमुना बसुमतारी, जयश्री राय भी साइकिल चलाकर सफर में शामिल हैं. इनके अभिभावकों ने शांति और भाइचारे की अहमियत को समझा है. इसके अलावा लखिन्द्र बसुमतारी ने उन्हें यह पैगाम लोगों तक पहुंचाने को कहा है. इसके अलावा विनय खुंगर ब्रह्मा, धनंजय नाथ, महेन्द्र नाथ, खारगेश्वर नाथ, अमर कुमार दत्त, हर कुमार नाथ, गुतल बसुमतारी, अब्दुल मोजीद, शहीदुल इस्लाम, शोइदुल इस्लाम, बैदुल इस्लाम, इदी मुसाराय, विम्बेश्वर गोरई, धर्मेन्द्र राजपूत, जायनाल होसेन हैं. यहां के लोगों ने कभी अपना अमन-चैन खोया था, लेकिन अब ये लोग देश के प्रति अपने फर्ज को समझ रहे हैं. 'हिंसा नाई, शांति चाई' नारे के उद्घोष के साथ निकल पड़े हैं. इनका सड़कों पर आना दूसरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहा है. इसका एक उदाहरण जलपाईगुड़ी के धूपगुड़ी के सुकांता महाविद्यालय में देखने को मिला. जब वे लोग यहां पहुंचे तो कई कॉलेज के युवक और युवतियां भी इनके साथ चलने लगीं. दरअसल वे यह संदेश दे रहे थे कि हिंसा पर चुप्पी कतई उचित नहीं है. इसके विरोध में चुप्पी तोड़कर आगे आना होगा. अमन-चैन की बहाली के लिए जगह-जगह लोगों से संवाद स्थापित किया जा रहा है. यात्रा में शामिल युवक अशांति और अहिंसा के कारकों तथा देश के ज्वलंत मुद्दों के खिलाफ लोगों को जागरूक कर रहे हैं. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी यात्रा ने कहा है कि यात्रा अपने मकसद में कामयाव हो. त्रिपुरा के हरिपद विश्वास कहते हैं कि यह एक सार्थक पहल है. सर्वोदय समाज के आदित्य पटनायक कहते हैं कि हम महात्मा गांधी की एक सौ पचास वीं जयंती मनाने जा रहे हैं तो गांधी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि लोगों तक उनके संदेश को पहुंचाया जाए. असम में जो पहल चार वर्ष पहले शुरू की गई थी, उसे अब यहां के युवक दूसरे क्षेत्रों में ले जा रहे हैं, यह एक अहम बात है. राधा भट्ट का नाम आज गांधी-विनोबा युग के बचे हुए थोड़े से गांधीवादियों में प्रमुखता से शुमार किया जाता है. वे आज देश और दुनिया के शीर्षस्थ गांधीवादी संस्थाओं और संगठनों में महत्वपूर्ण पदों पर हैं और इन पदों की जिम्मेदारियों का निर्वाह एक मिसाल की तरह करती रही हैं. वे अपने जीवन के तिरासीवें साल के सफर में आज जिस मुकाम पर हैं, वह उनकी सूझ-बूझ, दृढ़ता और हिम्मत की उपलब्धि है. वे इस अभियान का नेतृत्व कर रही हैं. उनका कहना है कि पूरी दुनिया में हिंसा हद से ज्यादा पार कर गयी है. ग्वाटेमाला हो या मैक्सिको या उत्तरी अमेरिका, हर जगह हिंसा के कारण लोग विस्थापित हो रहे हैं. ऐसे समय में ये बच्चे समानता, अहिंसा का संदेश देने को निकले हैं. शांति और सद्भाव लोगों की मौलिक भूख है. इस यात्रा को पूरे विश्व की हिंसा के परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए. पिछले चार वर्षों से शिविरों के माध्यम से युवाओं को प्रशिक्षित किया गया हैै. इसका नतीजा यह निकला है एक समुदाय से दूसरे समुदाय के बीच नफरत की आग खत्म हो गयी है. कश्मीर तक की यात्रा के सवाल पर उनका कहना है कि जितना संवेदनशील कश्मीर है, उतना ही संवेदनशील है असम. आज संवेदना का स्तर कम हो रहा है. उस संवेदना के स्तर को जगाने की आवश्यकता है. कट्टरता समाज के लिए घातक है, तो फिर क्यों न अहिंसावादी इस कट्टरता के खिलाफ बड़ी लकीर खींचें. |
बैठक में जिला प्रमुख मीना ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा एवं ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज सहित अन्य विषयों पर हुई चर्चा में अधिकारियों को अपने-अपने विभागों से संबंधित योजनाओं एवं गतिविधियों के माध्यम से जनता को लाभान्वित करने के लिए सजगता से प्रयास करने को कहा। अलग-अलग विभागों एवं विषयों पर चर्चा के दौरान उप जिला प्रमुख मोहनलाल शर्मा ने नई का नाथ मन्दिर को पर्यटन पटल पर विकसित करने की आवश्यकता बताई। बैठक में उपस्थित जिला परिषद के सदस्यों एवं पंचायत समितियों के प्रधानों ने विचार व्यक्त करते हुए ग्रामीण क्षेत्र की जनता से जुड़े कार्यों के बारे में महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।
बैठक में जिला कलेक्टर सिद्धार्थ महाजन ने दूदू में संचालित आयुर्वेद चिकित्सालय की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए विकास अधिकारी को निर्देश दिए। उन्होंने बांसखो में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के कार्य में गुणवत्ता की जांच करने के लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए। इसके अलावा जिले में अनधिकृत चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उनके विरुद्ध मुकदमे दर्ज कराने के भी निर्देश दिए। उन्होंने मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए भी चिकित्सा अधिकारियों के साथ ग्रामीण क्षेत्र में विकास अधिकारियों, सरपंचो के माध्यम से नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आलोक रंजन ने अधिकारियों को योजनाओं के समय पर पूर्ण करने को कहा।
| बैठक में जिला प्रमुख मीना ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा एवं ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज सहित अन्य विषयों पर हुई चर्चा में अधिकारियों को अपने-अपने विभागों से संबंधित योजनाओं एवं गतिविधियों के माध्यम से जनता को लाभान्वित करने के लिए सजगता से प्रयास करने को कहा। अलग-अलग विभागों एवं विषयों पर चर्चा के दौरान उप जिला प्रमुख मोहनलाल शर्मा ने नई का नाथ मन्दिर को पर्यटन पटल पर विकसित करने की आवश्यकता बताई। बैठक में उपस्थित जिला परिषद के सदस्यों एवं पंचायत समितियों के प्रधानों ने विचार व्यक्त करते हुए ग्रामीण क्षेत्र की जनता से जुड़े कार्यों के बारे में महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। बैठक में जिला कलेक्टर सिद्धार्थ महाजन ने दूदू में संचालित आयुर्वेद चिकित्सालय की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए विकास अधिकारी को निर्देश दिए। उन्होंने बांसखो में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के कार्य में गुणवत्ता की जांच करने के लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए। इसके अलावा जिले में अनधिकृत चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उनके विरुद्ध मुकदमे दर्ज कराने के भी निर्देश दिए। उन्होंने मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए भी चिकित्सा अधिकारियों के साथ ग्रामीण क्षेत्र में विकास अधिकारियों, सरपंचो के माध्यम से नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आलोक रंजन ने अधिकारियों को योजनाओं के समय पर पूर्ण करने को कहा। |
दुर्भाग्य से, हर कोई नहीं दावा कर सकता हैएक स्वस्थ पाचन तंत्र और अगर पेट अपनी सीधी ड्यूटी से सामना नहीं करता है, तो उसे मदद करनी चाहिए। चूंकि पाचन प्रक्रिया एक रासायनिक प्रतिक्रिया है, इसलिए इसे केवल एक औषधीय विधि द्वारा ही सुधार किया जा सकता है। ऐसे उद्देश्यों के लिए, एंजाइमेटिक तैयारियां निर्धारित की जाती हैं। उनमें से एक दवा "उत्सव" है दवा काफी लोकप्रिय है और दोनों डॉक्टरों और रोगियों के अनुमोदन जीता है। लेकिन कभी-कभी "उत्सव" सस्ते के एनालॉग को चुनना आवश्यक है इसलिए हम इस बात पर विचार करेंगे कि मूल दवा बदलने के लिए क्या संभव है।
दवा का एक संक्षिप्त विवरण "उत्सव"
आइए मूल औषधि का अध्ययन करें यह समझने में मदद करेगा कि एनालॉग "फेस्टल" को कैसे बदल सकते हैं।
दवा "उत्सव" में 3 एंजाइम शामिल हैंः
- लाइपेज,
- एमिलेज।
ये घटक पूरी तरह से वसा, कार्बोहाइड्रेट को तोड़ते हैंऔर प्रोटीन उपर्युक्त पाचन एंजाइमों के अलावा, फ़ेस्टल में पित्त निकालने, हेमिसेलुलेज़ शामिल हैं। इस तरह की सामग्री सभी खाद्य घटकों और मोटे फाइबर के पाचन को बढ़ावा देती हैं। उनके लिए धन्यवाद, वसा में घुलनशील आवश्यक विटामिन का पूरा अवशोषण, सुनिश्चित किया जाता है।
नशीली दवा "उत्सव" न केवल शरीर को तैयार एंजाइम करता है, बल्कि अपने शरीर के शरीर की सक्रियता को भी बढ़ावा देती है।
इस प्रकार, दवा 2 आवश्यक कार्यों प्रदान करता हैः
इस दवा के पर्चे के मुख्य संकेत हैंः
- क्रोनिक अग्नाशयशोथ, जिसमें अग्न्याशय के अपर्याप्त एंजाइमिक फ़ंक्शन हैं।
- पित्त अम्ल के बड़े नुकसान cholic हटाने उकसाया।
- जिगर के विचित्र रोग विज्ञान, जो जहरीले क्षति या शराब, सिरोसिस पर आधारित है।
- Dysbacteriosis।
- पोषण में भोजन या अशुद्धियों के प्रचुर मात्रा में उपयोग द्वारा उकसाए भोजन की अपर्याप्त पाचन।
- पाचन अंगों की पुरानी बीमारियों में मनाया गया पित्त के गठन और रिहाई का उल्लंघन।
दवा की जगह लेना संभव है?
एंजाइम दवाओं से संबंधित कई दवाएं हैं जो "उत्सव" के लिए एक प्रभावी विकल्प के रूप में कार्य कर सकती हैं।
हालांकि, जिन रोगियों की सिफारिश की जाती हैमूल दवा का लगातार रिसेप्शन, आपको यह जानने की जरूरत हैः दवाओं की उत्कृष्ट एकाक्रियाशीलता के बावजूद, किसी एनालॉग को चुनने के लिए डॉक्टर से परामर्श किए बिना, ये नहीं होना चाहिए। सब के बाद, अधिकांश दवाएं, उनके प्रभाव के समान, संरचना में भिन्न होती हैं।
दवा के अनुरूप हैंः
- "Pankreazim"।
- "Pancreatin"।
- "Gastenorm"।
- "Mikrazim"।
- "Pangrol"।
- "Enzistal"।
- "Digestal"।
- "Normoenzim"।
- "Biofestal"।
- "Panodez"।
- "Ferestal"।
तो, आप क्या दवा "Festal" analogues सस्ता खरीद सकते हैं?
दवा "पंक्रीटिन"
यह रूस में "फेस्टल" का एक सस्ता अनुरूप है इसकी लागत 16 से 61 रूबल की है। दवा पाचन तंत्र की कार्यात्मक स्थिति को बेहतर बनाने में मदद करती है, पाचन प्रक्रिया को पुनर्स्थापित करती है।
एक दवा के लिए निर्धारित हैः
- अग्नाशयशोथ, अपच, पैनक्रेटैक्टोमी, सिस्टिक फाइब्रोसिस;
- पेट फूलना,
- गैर-संक्रामक प्रकृति के दस्त;
- रेम्खेल्ड (गैस्ट्रोकार्डियल सिंड्रोम) का सिंड्रोम;
- अपर्याप्त पाचन, वसायुक्त खाद्य पदार्थ, अनियमित भोजन या भोजन की प्रचुर मात्रा में खपत के उपयोग से उकसाया;
- पेट या आंतों के पथ की लकीर के कारण भोजन के विचलित पाचन।
दवा "पैनक्रिसिम"
यदि आपको "उत्सव" सस्ते का एनालॉग लेने की आवश्यकता है, तो इस उपकरण पर ध्यान दें। दवा की "पैनक्रिसिम" की कीमत 30 रूबल की है।
इस मामले में, दवा व्यावहारिक रूप से हैमूल उपाय के रूप में प्रभावी है यह अग्नाशयी एंजाइम की कमी की भरपाई करता है, लिपोलिटिक, प्रोटीयोलाइटीक और एमीलोॉलिटिक प्रभाव प्रदान करता है। उत्पाद पूरी तरह से पाचन प्रक्रिया को सामान्य बनाता है।
इस दवा के उपयोग के लिए सिफारिश की जाती है जबः
- क्रोनिक अग्नाशयशोथ, पैनक्रेटक्टोमी, अपच, सिस्टिक फाइब्रोसिस;
- पेटी, गैर संक्रामक उत्पत्ति के दस्त;
- भोजन (पेट, आंतों के ढंढने के बाद) के आत्मिकरण का उल्लंघन;
- भोजन की पाचन में सुधार की आवश्यकता है;
- मस्तिष्क समारोह का उल्लंघन, गतिशीलता की कमी;
दवा "गैस्टोनॉर्म"
यह "फेस्टल" (सस्ते) का एक और प्रभावी एनालॉग है दवा गोलियों के रूप में उपलब्ध है, शीर्ष लेपित यह दवा अग्नाशयी एंजाइम की कमी को खत्म करने के लिए डिज़ाइन की गई है।
इस दवा के इस्तेमाल के संकेत वास्तव में ऊपर वर्णित लोगों के समान हैं बाल चिकित्सा अभ्यास में, 3 वर्ष की आयु से और केवल डॉक्टर की देखरेख में दवा की अनुमति दी जाती है।
औषधिविदों ने एक प्रभावी विकसित किया हैएक प्रकार की दवा - "गैस्टएनोर्म फोटे।" इस दवा के मुख्य पदार्थ की एक उच्च एकाग्रता है - अग्नाशय का रस इस वजह से, यह गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट बहुत तेजी से कार्य कर सकता है, समस्या की प्रक्रिया को प्रभावी रूप से अवरुद्ध कर सकता है।
यदि हम दवा की लागत "गैस्टोनॉर्म" के बारे में बात करते हैं, तो उसके लिए औसत मूल्य 70 rubles है।
तो, अगर आपको लगता है कि दवा "उत्सव"महंगा, एक सस्ता एनालॉग है रोगियों की साक्ष्य बताते हैं कि उनमें से कई चिकित्सकों से परामर्श करने के बाद निश्चित रूप से बजटीय साधनों को चुना गया है।
मरीज़ क्या दवा "Pancreatin" के बारे में सोचते हैं? मरीजों की राय विभाजित की गई थी। कुछ लोग कहते हैं कि दवा "काम करता है", दूसरों को यह केवल एक पाचन के सामान्य होने के उद्देश्य से, एक हार्दिक भोजन द्वारा उकसाया जाता है। उसी समय, पंक्रीटन गोलियों का इस्तेमाल करने वाले सभी लोग दावा करते हैं कि उन्हें कोई दुष्प्रभाव नहीं मिला।
उत्कृष्ट समीक्षा उपकरण "गैस्टएनोर्म" प्राप्त हुआ। यह प्रभावी रूप से सभी नकारात्मक लक्षणों को समाप्त कर देता है और शरीर पर त्वरित प्रभाव डाल सकता है।
| दुर्भाग्य से, हर कोई नहीं दावा कर सकता हैएक स्वस्थ पाचन तंत्र और अगर पेट अपनी सीधी ड्यूटी से सामना नहीं करता है, तो उसे मदद करनी चाहिए। चूंकि पाचन प्रक्रिया एक रासायनिक प्रतिक्रिया है, इसलिए इसे केवल एक औषधीय विधि द्वारा ही सुधार किया जा सकता है। ऐसे उद्देश्यों के लिए, एंजाइमेटिक तैयारियां निर्धारित की जाती हैं। उनमें से एक दवा "उत्सव" है दवा काफी लोकप्रिय है और दोनों डॉक्टरों और रोगियों के अनुमोदन जीता है। लेकिन कभी-कभी "उत्सव" सस्ते के एनालॉग को चुनना आवश्यक है इसलिए हम इस बात पर विचार करेंगे कि मूल दवा बदलने के लिए क्या संभव है। दवा का एक संक्षिप्त विवरण "उत्सव" आइए मूल औषधि का अध्ययन करें यह समझने में मदद करेगा कि एनालॉग "फेस्टल" को कैसे बदल सकते हैं। दवा "उत्सव" में तीन एंजाइम शामिल हैंः - लाइपेज, - एमिलेज। ये घटक पूरी तरह से वसा, कार्बोहाइड्रेट को तोड़ते हैंऔर प्रोटीन उपर्युक्त पाचन एंजाइमों के अलावा, फ़ेस्टल में पित्त निकालने, हेमिसेलुलेज़ शामिल हैं। इस तरह की सामग्री सभी खाद्य घटकों और मोटे फाइबर के पाचन को बढ़ावा देती हैं। उनके लिए धन्यवाद, वसा में घुलनशील आवश्यक विटामिन का पूरा अवशोषण, सुनिश्चित किया जाता है। नशीली दवा "उत्सव" न केवल शरीर को तैयार एंजाइम करता है, बल्कि अपने शरीर के शरीर की सक्रियता को भी बढ़ावा देती है। इस प्रकार, दवा दो आवश्यक कार्यों प्रदान करता हैः इस दवा के पर्चे के मुख्य संकेत हैंः - क्रोनिक अग्नाशयशोथ, जिसमें अग्न्याशय के अपर्याप्त एंजाइमिक फ़ंक्शन हैं। - पित्त अम्ल के बड़े नुकसान cholic हटाने उकसाया। - जिगर के विचित्र रोग विज्ञान, जो जहरीले क्षति या शराब, सिरोसिस पर आधारित है। - Dysbacteriosis। - पोषण में भोजन या अशुद्धियों के प्रचुर मात्रा में उपयोग द्वारा उकसाए भोजन की अपर्याप्त पाचन। - पाचन अंगों की पुरानी बीमारियों में मनाया गया पित्त के गठन और रिहाई का उल्लंघन। दवा की जगह लेना संभव है? एंजाइम दवाओं से संबंधित कई दवाएं हैं जो "उत्सव" के लिए एक प्रभावी विकल्प के रूप में कार्य कर सकती हैं। हालांकि, जिन रोगियों की सिफारिश की जाती हैमूल दवा का लगातार रिसेप्शन, आपको यह जानने की जरूरत हैः दवाओं की उत्कृष्ट एकाक्रियाशीलता के बावजूद, किसी एनालॉग को चुनने के लिए डॉक्टर से परामर्श किए बिना, ये नहीं होना चाहिए। सब के बाद, अधिकांश दवाएं, उनके प्रभाव के समान, संरचना में भिन्न होती हैं। दवा के अनुरूप हैंः - "Pankreazim"। - "Pancreatin"। - "Gastenorm"। - "Mikrazim"। - "Pangrol"। - "Enzistal"। - "Digestal"। - "Normoenzim"। - "Biofestal"। - "Panodez"। - "Ferestal"। तो, आप क्या दवा "Festal" analogues सस्ता खरीद सकते हैं? दवा "पंक्रीटिन" यह रूस में "फेस्टल" का एक सस्ता अनुरूप है इसकी लागत सोलह से इकसठ रूबल की है। दवा पाचन तंत्र की कार्यात्मक स्थिति को बेहतर बनाने में मदद करती है, पाचन प्रक्रिया को पुनर्स्थापित करती है। एक दवा के लिए निर्धारित हैः - अग्नाशयशोथ, अपच, पैनक्रेटैक्टोमी, सिस्टिक फाइब्रोसिस; - पेट फूलना, - गैर-संक्रामक प्रकृति के दस्त; - रेम्खेल्ड का सिंड्रोम; - अपर्याप्त पाचन, वसायुक्त खाद्य पदार्थ, अनियमित भोजन या भोजन की प्रचुर मात्रा में खपत के उपयोग से उकसाया; - पेट या आंतों के पथ की लकीर के कारण भोजन के विचलित पाचन। दवा "पैनक्रिसिम" यदि आपको "उत्सव" सस्ते का एनालॉग लेने की आवश्यकता है, तो इस उपकरण पर ध्यान दें। दवा की "पैनक्रिसिम" की कीमत तीस रूबल की है। इस मामले में, दवा व्यावहारिक रूप से हैमूल उपाय के रूप में प्रभावी है यह अग्नाशयी एंजाइम की कमी की भरपाई करता है, लिपोलिटिक, प्रोटीयोलाइटीक और एमीलोॉलिटिक प्रभाव प्रदान करता है। उत्पाद पूरी तरह से पाचन प्रक्रिया को सामान्य बनाता है। इस दवा के उपयोग के लिए सिफारिश की जाती है जबः - क्रोनिक अग्नाशयशोथ, पैनक्रेटक्टोमी, अपच, सिस्टिक फाइब्रोसिस; - पेटी, गैर संक्रामक उत्पत्ति के दस्त; - भोजन के आत्मिकरण का उल्लंघन; - भोजन की पाचन में सुधार की आवश्यकता है; - मस्तिष्क समारोह का उल्लंघन, गतिशीलता की कमी; दवा "गैस्टोनॉर्म" यह "फेस्टल" का एक और प्रभावी एनालॉग है दवा गोलियों के रूप में उपलब्ध है, शीर्ष लेपित यह दवा अग्नाशयी एंजाइम की कमी को खत्म करने के लिए डिज़ाइन की गई है। इस दवा के इस्तेमाल के संकेत वास्तव में ऊपर वर्णित लोगों के समान हैं बाल चिकित्सा अभ्यास में, तीन वर्ष की आयु से और केवल डॉक्टर की देखरेख में दवा की अनुमति दी जाती है। औषधिविदों ने एक प्रभावी विकसित किया हैएक प्रकार की दवा - "गैस्टएनोर्म फोटे।" इस दवा के मुख्य पदार्थ की एक उच्च एकाग्रता है - अग्नाशय का रस इस वजह से, यह गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट बहुत तेजी से कार्य कर सकता है, समस्या की प्रक्रिया को प्रभावी रूप से अवरुद्ध कर सकता है। यदि हम दवा की लागत "गैस्टोनॉर्म" के बारे में बात करते हैं, तो उसके लिए औसत मूल्य सत्तर rubles है। तो, अगर आपको लगता है कि दवा "उत्सव"महंगा, एक सस्ता एनालॉग है रोगियों की साक्ष्य बताते हैं कि उनमें से कई चिकित्सकों से परामर्श करने के बाद निश्चित रूप से बजटीय साधनों को चुना गया है। मरीज़ क्या दवा "Pancreatin" के बारे में सोचते हैं? मरीजों की राय विभाजित की गई थी। कुछ लोग कहते हैं कि दवा "काम करता है", दूसरों को यह केवल एक पाचन के सामान्य होने के उद्देश्य से, एक हार्दिक भोजन द्वारा उकसाया जाता है। उसी समय, पंक्रीटन गोलियों का इस्तेमाल करने वाले सभी लोग दावा करते हैं कि उन्हें कोई दुष्प्रभाव नहीं मिला। उत्कृष्ट समीक्षा उपकरण "गैस्टएनोर्म" प्राप्त हुआ। यह प्रभावी रूप से सभी नकारात्मक लक्षणों को समाप्त कर देता है और शरीर पर त्वरित प्रभाव डाल सकता है। |
अध्याय 17
शिक्षा : सामान्य और तकनीकी
तीसरी पचवर्षीय योजना के मुख्य उद्देश्यो में से एक यह है कि शिक्षा प्रसार कार्यक्रम का विस्तार करके इसे हर घर तक पहुचाना है, ताकि शिक्षा राष्ट्रीय जीवन की हर शाखा में आयोजित विकास की केन्द्रबिन्दु बन जाए। तीसरी योजना के शिक्षा कार्यक्रम व्यापक है। इस अध्याय में सामान्य, तकनीकी और अन्य विशिष्ट शिक्षा के क्षेत्र मे आयोजन के मुख्य लक्ष्यो का और तीसरी योजना के कार्यक्रमो की कुछ विशेषताओं और समस्याओं का संक्षिप्त वर्णन किया गया है ।
विकास के सब साधनो मे से शायद सबसे मूल इस समय प्रशिक्षित जन-शक्ति है । विभिन्न दिशामो में कितनी प्रगति हो सकती है, यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर होगी कि देश में प्रशिक्षित जन शक्ति और प्रशिक्षण सुविधाए कहा तक उपलब्ध 1 अर्थव्यवस्था के विकास के साथ-साथ हमे सख्या के अतिरिक्त, कुशलता और अनुभव पर भी जोर देना होगा । आवश्यक प्रशिक्षित जनशक्ति तैयार करने की समस्याओं पर व्यापक दृष्टि से विचार किया जाना चाहिए । एक ओर तो उनको स्कूल और कालेज में हर स्तर पर दो गई शिक्षा और घरेलू जीवन पर प्रभाव पड़ता है; दूसरी ओर प्रौद्योगिक और अन्य संस्था के प्रबन्ध और संगठन की सम्पूर्ण प्रणाली और अनुसंधान तथा इसके परिणामो प्रयोग इसको सोमा में आते हैं । विज्ञान और टैक्नोलाजी तथा प्रशिक्षण के विशिष्ट क्षेत्रो में प्रगति अन्ततः सामान्य शिक्षा प्रणाली के मूल परिवर्तनो पर निर्भर होती है। इसलिए हर कदम पर सामान्य शिक्षा और तकनीकी तथा अन्य विशिष्ट शिक्षा में निकट सम्बन्ध होता है। शिक्षा की समस्याओं पर इसके विभिन्न पहलुओं के आपसी सम्बन्धों को ध्यान में रखते हुए विचार करना चाहिए । भारत की वर्तमान अवस्था में शिक्षा कार्यक्रमो का पहले से कहीं अधिक महत्व है - एक समान नागरिकता की भावना पैदा करने, लोगो की कार्य-क्षमता का उपयोग करने और देश के हर भाग के प्राकृतिक और मानवीय साधनो का विकास करने के प्रयास की तह मे शिक्षा कार्यक्रम है। पिछले दस वर्षों में जो विकास हुआ है, उससे आर्थिक प्रगति का आधार तैयार हो गया है, परन्तु शिक्षा के क्षेत्र में अभी काफी खामिया है । अगर हमे प्रगति को जारी रखना है और स्थायी बनाना है तो इस कमी को जल्दी से जल्दी पूरा करना होगा । | अध्याय सत्रह शिक्षा : सामान्य और तकनीकी तीसरी पचवर्षीय योजना के मुख्य उद्देश्यो में से एक यह है कि शिक्षा प्रसार कार्यक्रम का विस्तार करके इसे हर घर तक पहुचाना है, ताकि शिक्षा राष्ट्रीय जीवन की हर शाखा में आयोजित विकास की केन्द्रबिन्दु बन जाए। तीसरी योजना के शिक्षा कार्यक्रम व्यापक है। इस अध्याय में सामान्य, तकनीकी और अन्य विशिष्ट शिक्षा के क्षेत्र मे आयोजन के मुख्य लक्ष्यो का और तीसरी योजना के कार्यक्रमो की कुछ विशेषताओं और समस्याओं का संक्षिप्त वर्णन किया गया है । विकास के सब साधनो मे से शायद सबसे मूल इस समय प्रशिक्षित जन-शक्ति है । विभिन्न दिशामो में कितनी प्रगति हो सकती है, यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर होगी कि देश में प्रशिक्षित जन शक्ति और प्रशिक्षण सुविधाए कहा तक उपलब्ध एक अर्थव्यवस्था के विकास के साथ-साथ हमे सख्या के अतिरिक्त, कुशलता और अनुभव पर भी जोर देना होगा । आवश्यक प्रशिक्षित जनशक्ति तैयार करने की समस्याओं पर व्यापक दृष्टि से विचार किया जाना चाहिए । एक ओर तो उनको स्कूल और कालेज में हर स्तर पर दो गई शिक्षा और घरेलू जीवन पर प्रभाव पड़ता है; दूसरी ओर प्रौद्योगिक और अन्य संस्था के प्रबन्ध और संगठन की सम्पूर्ण प्रणाली और अनुसंधान तथा इसके परिणामो प्रयोग इसको सोमा में आते हैं । विज्ञान और टैक्नोलाजी तथा प्रशिक्षण के विशिष्ट क्षेत्रो में प्रगति अन्ततः सामान्य शिक्षा प्रणाली के मूल परिवर्तनो पर निर्भर होती है। इसलिए हर कदम पर सामान्य शिक्षा और तकनीकी तथा अन्य विशिष्ट शिक्षा में निकट सम्बन्ध होता है। शिक्षा की समस्याओं पर इसके विभिन्न पहलुओं के आपसी सम्बन्धों को ध्यान में रखते हुए विचार करना चाहिए । भारत की वर्तमान अवस्था में शिक्षा कार्यक्रमो का पहले से कहीं अधिक महत्व है - एक समान नागरिकता की भावना पैदा करने, लोगो की कार्य-क्षमता का उपयोग करने और देश के हर भाग के प्राकृतिक और मानवीय साधनो का विकास करने के प्रयास की तह मे शिक्षा कार्यक्रम है। पिछले दस वर्षों में जो विकास हुआ है, उससे आर्थिक प्रगति का आधार तैयार हो गया है, परन्तु शिक्षा के क्षेत्र में अभी काफी खामिया है । अगर हमे प्रगति को जारी रखना है और स्थायी बनाना है तो इस कमी को जल्दी से जल्दी पूरा करना होगा । |
::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) .....
ठंड में सबसे ज्यादा असर त्वचा पर पड़ता है। इसलिए उसे अधिक से अधिक केयर की आवश्यकता होती है। ऐसे में जरूरी है आप कुछ ऐसी बातों से अवगत हों, जो आपकी त्वचा की रौनक बनाए रखे। यहां हम आपको कुछ ऐसे ही फार्मूले बता रहे हैं, जिन्हें आप आसानी से अपनाकर अपनी त्वचा का ग्लो बढ़ा पाएंगे।
सनबर्न होने पर- अगर आपका काम ज्यादातर धूप में घूमने का है तो ठंड के दिनों की दोपहर की धूप से आपको सनटैन हो सकता है। धूप में मौजूद अल्ट्रावायलेट किरणें आपकी स्कीन की ऊपरी परत को झुलसा देती है।
अगर सनबर्न ज्यादा हो गया हो या फिर स्कीन पर लाल धब्बे हो गए हों या फिर उसका रंग काला हो रहा हो तो उसे दूर करने के लिए गुलाब जल को चेहरे पर लगाएं। ये त्वचा को काफी ठंडक पहुंचाता है। गुलाब जल एक स्प्रे करने वाली बोतल में डालें या फिर टिश्यू पेपर की सहायता से थपथपाते हुए लगाएं।
बाद में खीरा, आलू और नीबू का रस मिलाकर थोड़ी-सी मुलतानी मिट्टी डालकर पतला पेस्ट बनाएं और उसे इफेक्टेड एरिया पर लगाएं। 1 5-20 मिनट बाद हल्का गीला करके मसाज करें, फिर ठंडे पानी से धो लें। इससे सनबर्न के निशान हल्के होकर धीरे-धीरे मिट जाएंगे।
सुपर फ्रेशनेस- इन दिनों में त्वचा के रूखेपन से आप डल लगने लगते हैं। ऐसे में फ्रेशनेस के लिए जरूरी है कि ऐसे प्रोडक्ट का इस्तेमाल करें, जिससे आप ताजगी के साथ नएपन का भी एहसास करें।
आप ऐसा जेल लें, जिसमें पिपरमेंट की खुशबू हो। जब भी आप इस जेल का इस्तेमाल करेंगी तो आपको सुपर फ्रेशनेस महसूस होगी। स्कीन के डेड सेल्स हटाने के लिए लूफा का इस्तेमाल करें।
चेहरे के दाग-धब्बे - चेहरे पर दाग-धब्बे हैं तो उन्हें हटाने के लिए थोड़ा ऑरेंज ज्यूस लेकर उसमें कपड़े को डिप करें, फिर उसे अच्छी तरह निचोड़कर अपने चेहरे पर लगा लें। इसमें विटामिन-सी होता है, जो आपकी त्वचा में चमक ला देगा।
बहुत-सी महिलाओं को पेट के बल सोने की आदत होती है। इससे उनका चेहरा तकिए पर उल्टा रखे रहने से चेहरे के आसपास निशान निकल आते हैं, जो देखने में भद्दे लगते हैं। इन्हें दूर करने के लिए इन पर कंसीलर की बूंदें लगाएं, जिससे निशान हल्के होंगे।
यदि आपके पास Hindi में कोई article, inspirational story, Poetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id हैः:- kmsraj51@yahoo.in . पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!
| ::- Krishna Mohan Singh ..... ठंड में सबसे ज्यादा असर त्वचा पर पड़ता है। इसलिए उसे अधिक से अधिक केयर की आवश्यकता होती है। ऐसे में जरूरी है आप कुछ ऐसी बातों से अवगत हों, जो आपकी त्वचा की रौनक बनाए रखे। यहां हम आपको कुछ ऐसे ही फार्मूले बता रहे हैं, जिन्हें आप आसानी से अपनाकर अपनी त्वचा का ग्लो बढ़ा पाएंगे। सनबर्न होने पर- अगर आपका काम ज्यादातर धूप में घूमने का है तो ठंड के दिनों की दोपहर की धूप से आपको सनटैन हो सकता है। धूप में मौजूद अल्ट्रावायलेट किरणें आपकी स्कीन की ऊपरी परत को झुलसा देती है। अगर सनबर्न ज्यादा हो गया हो या फिर स्कीन पर लाल धब्बे हो गए हों या फिर उसका रंग काला हो रहा हो तो उसे दूर करने के लिए गुलाब जल को चेहरे पर लगाएं। ये त्वचा को काफी ठंडक पहुंचाता है। गुलाब जल एक स्प्रे करने वाली बोतल में डालें या फिर टिश्यू पेपर की सहायता से थपथपाते हुए लगाएं। बाद में खीरा, आलू और नीबू का रस मिलाकर थोड़ी-सी मुलतानी मिट्टी डालकर पतला पेस्ट बनाएं और उसे इफेक्टेड एरिया पर लगाएं। एक पाँच-बीस मिनट बाद हल्का गीला करके मसाज करें, फिर ठंडे पानी से धो लें। इससे सनबर्न के निशान हल्के होकर धीरे-धीरे मिट जाएंगे। सुपर फ्रेशनेस- इन दिनों में त्वचा के रूखेपन से आप डल लगने लगते हैं। ऐसे में फ्रेशनेस के लिए जरूरी है कि ऐसे प्रोडक्ट का इस्तेमाल करें, जिससे आप ताजगी के साथ नएपन का भी एहसास करें। आप ऐसा जेल लें, जिसमें पिपरमेंट की खुशबू हो। जब भी आप इस जेल का इस्तेमाल करेंगी तो आपको सुपर फ्रेशनेस महसूस होगी। स्कीन के डेड सेल्स हटाने के लिए लूफा का इस्तेमाल करें। चेहरे के दाग-धब्बे - चेहरे पर दाग-धब्बे हैं तो उन्हें हटाने के लिए थोड़ा ऑरेंज ज्यूस लेकर उसमें कपड़े को डिप करें, फिर उसे अच्छी तरह निचोड़कर अपने चेहरे पर लगा लें। इसमें विटामिन-सी होता है, जो आपकी त्वचा में चमक ला देगा। बहुत-सी महिलाओं को पेट के बल सोने की आदत होती है। इससे उनका चेहरा तकिए पर उल्टा रखे रहने से चेहरे के आसपास निशान निकल आते हैं, जो देखने में भद्दे लगते हैं। इन्हें दूर करने के लिए इन पर कंसीलर की बूंदें लगाएं, जिससे निशान हल्के होंगे। यदि आपके पास Hindi में कोई article, inspirational story, Poetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id हैः:- kmsrajइक्यावन@yahoo.in . पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!! |
इत्यादि वचनों से संन्यासी को एकत्र एक रात्रिमात्र रहना; अधिक निवास न करना चाहिये ।
उत्तर - यह बात थोड़े-से अंश में तो अच्छी है कि एकत्र वास करने से जगत् का उपकार अधिक नहीं हो सकता और अस्थानान्तर का भी अभिमान होता है, राग-द्वेष भी अधिक होता है, परन्तु जो विशेष उपकार एकत्र रहने से होता हो तो रहे । जैसे जनक राजा के यहां चार-चार महीने तक पञ्चशिखादि और अन्य संन्यासी कितने ही वर्षों तक निवास करते थे । और 'एकत्र न रहना' यह बात आजकल के पाखण्डी सम्प्रदायियों ने बनाई है क्योंकि जो संन्यासी एकत्र अधिक रहेगा तो हमारा पाखण्ड खण्डित होकर, अधिक न बढ़ सकेगा।
यतीनां काञ्चनं दद्यात्ताम्बूलं ब्रह्मचारिणाम् । चौराणामभयं दद्यात्स नरो नरकं व्रजेत् ॥
[ तुलना - लघु पराशर स्मृति अ० १ । श्लोक ५१] इत्यादि वचनों का अभिप्राय यह है कि संन्यासियों को जो सुवर्ण दान दे तो दाता को नरक प्राप्त होवे ।
उत्तर - यह बात भी वर्णाश्रमविरोधी, सम्प्रदायी और स्वार्थसिन्धुवाले पौराणिकों की कल्पी हुई है, क्योंकि संन्यासियों को धन मिलेगा तो वे हमारा खण्डन बहुत कर सकेंगे और हमारी हानि होगी तथा वे हमारे आधीन भी न रहेंगे । और जब भिक्षादि - व्यवहार हमारे आधीन रहेगा तो डरते रहेंगे। जब मूर्ख और स्वार्थियों को दान देने में अच्छा समझते हैं तो विद्वान् और परोपकारी संन्यासियों को देने में कुछ भी दोष नहीं हो सकता । देखो | इत्यादि वचनों से संन्यासी को एकत्र एक रात्रिमात्र रहना; अधिक निवास न करना चाहिये । उत्तर - यह बात थोड़े-से अंश में तो अच्छी है कि एकत्र वास करने से जगत् का उपकार अधिक नहीं हो सकता और अस्थानान्तर का भी अभिमान होता है, राग-द्वेष भी अधिक होता है, परन्तु जो विशेष उपकार एकत्र रहने से होता हो तो रहे । जैसे जनक राजा के यहां चार-चार महीने तक पञ्चशिखादि और अन्य संन्यासी कितने ही वर्षों तक निवास करते थे । और 'एकत्र न रहना' यह बात आजकल के पाखण्डी सम्प्रदायियों ने बनाई है क्योंकि जो संन्यासी एकत्र अधिक रहेगा तो हमारा पाखण्ड खण्डित होकर, अधिक न बढ़ सकेगा। यतीनां काञ्चनं दद्यात्ताम्बूलं ब्रह्मचारिणाम् । चौराणामभयं दद्यात्स नरो नरकं व्रजेत् ॥ [ तुलना - लघु पराशर स्मृति अशून्य एक । श्लोक इक्यावन] इत्यादि वचनों का अभिप्राय यह है कि संन्यासियों को जो सुवर्ण दान दे तो दाता को नरक प्राप्त होवे । उत्तर - यह बात भी वर्णाश्रमविरोधी, सम्प्रदायी और स्वार्थसिन्धुवाले पौराणिकों की कल्पी हुई है, क्योंकि संन्यासियों को धन मिलेगा तो वे हमारा खण्डन बहुत कर सकेंगे और हमारी हानि होगी तथा वे हमारे आधीन भी न रहेंगे । और जब भिक्षादि - व्यवहार हमारे आधीन रहेगा तो डरते रहेंगे। जब मूर्ख और स्वार्थियों को दान देने में अच्छा समझते हैं तो विद्वान् और परोपकारी संन्यासियों को देने में कुछ भी दोष नहीं हो सकता । देखो |
नई दिल्ली। चर्चित जेसिका लाल हत्याकांड के दोषी मनु शर्मा उर्फ सिद्धार्थ शर्मा को सोमवार को दिल्ली के तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया. 17 साल से सजा काट रहे मनु शर्मा के साथ 22 अन्य आरोपियों को तिहाड़ जेल से रिहा किया गया है.
हरियाणा के पूर्व मंत्री विनोद शर्मा के बेटे मनु शर्मा को दिसंबर 2006 में दिल्ली हाईकोर्ट ने 1999 में जेसिका लाल की हत्या के लिए उम्रकैद की सजा सुनाई थी.
पिछले महीने सेेंटेंस रिव्यू कमेटी की सिफारिश पर मनु शर्मा सहित उम्र कैद के 22 दोषियों की रिहाई तिहाड़ जेल से की गई है. सेंटेंस रिव्यू बोर्ड को उम्र कैद के मामले में 14 साल की सजा पूरी होने के बाद रिव्यू करने का अधिकार होता है.
बता दें कि मॉडल जेसिका लाल की 29 अप्रैल 1999 की रात को टैमरिंड कोर्ट रेस्टोरेंट में मनु शर्मा ने गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. जेसिका लाल रेस्टोरेंट की एक प्राइवेट पार्टी में एक बार टेंडर का काम कर रही थीं, जहां रात 12 बजे के बाद शराब परोसना बंद हो गया था.
पार्टी में शामिल मनु शर्मा ने शराब मांगी, जिस पर जेसिका लाल के मना करने पर मनु शर्मा ने हजार रुपये देने की पेशकश की थी, इस पर जेसिका ने जो झिकड़ी दी, जो नशे में धुत मनु को बुरी लगी और जेसिका को गोली मार दी.
| नई दिल्ली। चर्चित जेसिका लाल हत्याकांड के दोषी मनु शर्मा उर्फ सिद्धार्थ शर्मा को सोमवार को दिल्ली के तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया. सत्रह साल से सजा काट रहे मनु शर्मा के साथ बाईस अन्य आरोपियों को तिहाड़ जेल से रिहा किया गया है. हरियाणा के पूर्व मंत्री विनोद शर्मा के बेटे मनु शर्मा को दिसंबर दो हज़ार छः में दिल्ली हाईकोर्ट ने एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में जेसिका लाल की हत्या के लिए उम्रकैद की सजा सुनाई थी. पिछले महीने सेेंटेंस रिव्यू कमेटी की सिफारिश पर मनु शर्मा सहित उम्र कैद के बाईस दोषियों की रिहाई तिहाड़ जेल से की गई है. सेंटेंस रिव्यू बोर्ड को उम्र कैद के मामले में चौदह साल की सजा पूरी होने के बाद रिव्यू करने का अधिकार होता है. बता दें कि मॉडल जेसिका लाल की उनतीस अप्रैल एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे की रात को टैमरिंड कोर्ट रेस्टोरेंट में मनु शर्मा ने गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. जेसिका लाल रेस्टोरेंट की एक प्राइवेट पार्टी में एक बार टेंडर का काम कर रही थीं, जहां रात बारह बजे के बाद शराब परोसना बंद हो गया था. पार्टी में शामिल मनु शर्मा ने शराब मांगी, जिस पर जेसिका लाल के मना करने पर मनु शर्मा ने हजार रुपये देने की पेशकश की थी, इस पर जेसिका ने जो झिकड़ी दी, जो नशे में धुत मनु को बुरी लगी और जेसिका को गोली मार दी. |
यदि आप नौकरी की तलाश में हैं और ब्रैंडेंड कंटेंट के फील्ड में काम करना चाहते हैं तो आपके लिए 'अमर उजाला' की डिजिटल टीम (अमर उजाला वेब सर्विसेज) से जुड़ने का काफी अच्छा मौका है।
यही एक ऐसी पार्टी है जो ना तुष्टिकरण की राजनीति करती है, ना धर्म के आधार पर भेदभाव करती है और ना किसी अपराधी को संरक्षण देती है।
करीब छह साल पहले 'एबीपी न्यूज' छोड़कर मीडिया एकेडमिक्स का क्षेत्र चुनने वाले विजय शर्मा इस दौरान आईएमएस नोएडा और आईआईएचएस गाजियाबाद के मीडिया स्टडीज डिपार्टमेंट के प्रमुख रहे हैं।
सीनियर जर्नलिस्ट बरखा दत्त द्वारा संचालित यू-ट्यूब चैनल 'मोजो स्टोरी' को हैक किए जाने की खबर सामने आयी है।
निर्विवाद रूप से प्रधानमंत्री मोदी बीजेपी को उस जगह पर ले आए हैं, जहां पर अभी तक भारतीय जनता पार्टी का कोई नेता नहीं ला पाया था।
पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी इस समय भारत में हैंऔर उन्होंने 'इंडिया टुडे' के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई को खास इंटरव्यू भी दिया है।
बिलावल भुट्टो जरदारी गुरुवार को कराची से गोवा पहुंचे और उन्हें ताज एग्जॉटिका फाइव स्टार होटल में ठहराया गया है।
प्रसाद सान्याल ने यहां वर्ष 2019 में जॉइन किया था। इससे पहले वह Zee मीडिया में ग्रुप एडिटर (डिजिटल) के तौर पर अपनी भूमिका निभा रहे थे।
रिलायंस की सब्सिडरी वायकॉम18 (Viacom18) और वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी (Warner Bros. Discovery) के बीच बहुवर्षीय करार की घोषणा की गई है।
युवा पत्रकार काव्या मिश्रा ने हिंदी दैनिक 'हिन्दुस्तान' (Hindustan) में अपनी पारी को विराम दे दिया है। वह करीब एक साल से नोएडा में बतौर कंटेंट क्रिएटर अपनी भूमिका निभा रही थीं।
इससे पहले 'प्रसार भारती' के पास 'प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया' (PTI) का सबस्क्रिप्शन था, जो वर्ष 2020 में कैंसल हो गया था।
ब्रैंडेड कॉन्टेंट की दुनिया में एबीपी नेटवर्क (ABP Network) और डिश टीवी के ओटीटी कॉन्टेट एग्रीगेटर ऐप 'वाचो' (Watcho) ने मिलकर एक नया प्रयोग किया है।
बता दें कि एस जयशंकर ने अपनी अंग्रेजी किताब 'द इंडिया वेः स्ट्रैटेजीज फॉर एन अनसर्टेन वर्ल्ड' के मराठी संस्करण के विमोचन के दौरान यह बात कही।
तमांग को विभिन्न मीडिया संस्थानों में डिजिटल बिजनेस को संभालने का दो दशक से ज्यादा का अनुभव है।
| यदि आप नौकरी की तलाश में हैं और ब्रैंडेंड कंटेंट के फील्ड में काम करना चाहते हैं तो आपके लिए 'अमर उजाला' की डिजिटल टीम से जुड़ने का काफी अच्छा मौका है। यही एक ऐसी पार्टी है जो ना तुष्टिकरण की राजनीति करती है, ना धर्म के आधार पर भेदभाव करती है और ना किसी अपराधी को संरक्षण देती है। करीब छह साल पहले 'एबीपी न्यूज' छोड़कर मीडिया एकेडमिक्स का क्षेत्र चुनने वाले विजय शर्मा इस दौरान आईएमएस नोएडा और आईआईएचएस गाजियाबाद के मीडिया स्टडीज डिपार्टमेंट के प्रमुख रहे हैं। सीनियर जर्नलिस्ट बरखा दत्त द्वारा संचालित यू-ट्यूब चैनल 'मोजो स्टोरी' को हैक किए जाने की खबर सामने आयी है। निर्विवाद रूप से प्रधानमंत्री मोदी बीजेपी को उस जगह पर ले आए हैं, जहां पर अभी तक भारतीय जनता पार्टी का कोई नेता नहीं ला पाया था। पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी इस समय भारत में हैंऔर उन्होंने 'इंडिया टुडे' के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई को खास इंटरव्यू भी दिया है। बिलावल भुट्टो जरदारी गुरुवार को कराची से गोवा पहुंचे और उन्हें ताज एग्जॉटिका फाइव स्टार होटल में ठहराया गया है। प्रसाद सान्याल ने यहां वर्ष दो हज़ार उन्नीस में जॉइन किया था। इससे पहले वह Zee मीडिया में ग्रुप एडिटर के तौर पर अपनी भूमिका निभा रहे थे। रिलायंस की सब्सिडरी वायकॉमअट्ठारह और वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी के बीच बहुवर्षीय करार की घोषणा की गई है। युवा पत्रकार काव्या मिश्रा ने हिंदी दैनिक 'हिन्दुस्तान' में अपनी पारी को विराम दे दिया है। वह करीब एक साल से नोएडा में बतौर कंटेंट क्रिएटर अपनी भूमिका निभा रही थीं। इससे पहले 'प्रसार भारती' के पास 'प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया' का सबस्क्रिप्शन था, जो वर्ष दो हज़ार बीस में कैंसल हो गया था। ब्रैंडेड कॉन्टेंट की दुनिया में एबीपी नेटवर्क और डिश टीवी के ओटीटी कॉन्टेट एग्रीगेटर ऐप 'वाचो' ने मिलकर एक नया प्रयोग किया है। बता दें कि एस जयशंकर ने अपनी अंग्रेजी किताब 'द इंडिया वेः स्ट्रैटेजीज फॉर एन अनसर्टेन वर्ल्ड' के मराठी संस्करण के विमोचन के दौरान यह बात कही। तमांग को विभिन्न मीडिया संस्थानों में डिजिटल बिजनेस को संभालने का दो दशक से ज्यादा का अनुभव है। |
दरभंगा/मधुबनी : आजकल बिहार में विधानसभा चुनाव है। इस दौरान नेता हर उस प्रतीक का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो लोगों को आकर्षित करे। इसी कड़ी में मिथिला या मधुबनी पेंटिंग भी शामिल है। इस चुनाव में इस कला का भरपूर इस्तेमाल हो रहा है लेकिन दुखद यह है कि किसी भी राजनीतिक दल को इस कला की समस्याओं की चिंता नहीं है।
अभी बिहार चुनाव में राज्य के प्रमुख राजनीतिक चेहरे इस कला के साथ बने मास्क का प्रयोग कर रहे हैं। इसके साथ ही ये मास्क लोगों को बांटा भी जा रहा है। इस कला ने अनिवार्य मास्क पहनने के नियम को स्टाइल स्टेटमेंट में बना दिया है। मिथिला पेंटिंग से सजे मास्क 50-100 रुपये के बीच बिक रहे हैं। लेकिन केवल इतने से ही इस कला का भला नहीं हो रहा है। आपको बता दें कि कोरोना महामारी के कारण हुए लॉकडाउन ने मिथिला पेंटिंग करने वाले कलाकारों को बर्बाद कर दिया है।
इसके अलावा बिचौलिये इस कला के बाज़ार में वर्षों पहले सेंध लगा चुके हैं, जिस कारण कलाकारों तक उनकी कला का पूरा मेहनताना नहीं पहुँच पाता है।
ये बातें हमें मधुबनी पेंटिंग करने वाले कलाकारों से बातचीत के बाद पता चला। न्यूज़क्लिक की टीम ने मधुबनी पेंटिंग करने वाले कलाकारों से इस कला के मुख्य केंद्र कहे जाने वाले मधुबनी जिले के रांटी और जितवारपुर गांव जाकर मुलाकात की।
रांटी गांव के भोला झा जोकि इस कला से लंबे समय से जुड़े हुए हैं, कहते हैं, 'यह कला अपने आप में समृद्ध है। इस कला की सराहना करने वाले आज पूरी दुनिया में है। आज यह कला केवल अपने कलाकारों के कलाकारी के नाम पर जिन्दा है। इसमें सरकार या नेताओं की मदद बिल्कुल भी शामिल नहीं है।'
वे आगे कहते हैं कि इस चुनाव और कोरोना के दौर में मिथिला कलाकारी वाले मास्क की मांग आ रही है लेकिन यह बहुत कम है। कई कलाकार ऐसे भी है जो कोरोना महामारी के बाद से भारी आर्थिक मंदी से गुजर रहे है। कला को बचाने के लिए उन्हें तत्काल आर्थिक सहायता दिए जाने की जरूरत है।
इसी तरह जितवारपुर गांव के सरवन पासवान जिनका परिवार कई पीढ़ियों से मधुबनी पेंटिंग कर रही है। उन्होंने कहा, 'कला का दाम असली कलाकारों को नहीं मिल रहा है। बीच में दलालों की संख्या इतनी ज्यादा है कि वो कलाकारों की मेहनत की कमाई खा रहे हैं। जबकि इस कला को पसंद करने वाले लोग विदेशों से खरीदारी करने आते हैं लेकिन अधिकांश मामलों में वो बिचौलिए के माध्यम से ही ख़रीदारी करते हैं।'
कलाकारों से मिलने के बाद एक बात स्पष्ट हुई कि कला और उसके कलाकारों की हालत में सुधार केवल सरकारी फाइलों और राजनेताओं के भाषण में है। हमने कई कलाकारों से बात की सभी ने एक मांग की कि सरकार कला को बेचने के लिए नियमित एक बाजार उपलब्ध कराए जिससे उनको उचित दाम मिल सके। इसके साथ ही यह पेंटिंग कपड़ों ,साड़ी और अन्य वस्तुओं पर होती है इसलिए सरकार कलाकारों को यह वस्तुएं सस्ते दामों पर उपलब्ध कराए।
आपको बता दें कि इस कला की उत्पत्ति रामायण के समय से बताई जाती है, जब भगवान राम उत्तर भारत में अयोध्या के राजकुमार थे। कथा और कहानियों के अनुसार भगवान राम और देवी सीता ने एक दूसरे को पहली बार 'मधुबन' (शहद का जंगल) देखा था, जिससे मधुबनी शब्द की उत्पत्ति हुई है।
जनक - मिथिला के तत्कालीन राजा - ने अपनी बेटी सीता का विवाह भगवान राम से करवाया। इस विवाह के लिए एक पूर्व शर्त थी जिसके लिए राम ने भगवान शिव के धनुष को तोड़ा था , जिसके बाद राम और सीता दोनों की शादी हुई। इस दौराण राजा जनक ने मेहमानों पर मिथिला की अमिट छाप और समृद्ध संस्कृति को दिखाने के लिए कलाकारों के एक समूह को सुंदर चित्रों के साथ विवाह स्थल को सजाने का काम सौंपा था।
मिथिला चित्रों में दो 'घराने' हैं - रांती घराना और जितवारपुर घराना (मधुबनी जिलों में दो इलाके) - पाँच प्रसिद्ध शैलियां कोहबर, गोदना, तांत्रिक, भरनी, काचनी और हरिजन है ।
भरनी, काचनी और तांत्रिक पेंटिंग धार्मिक विषयों पर आधारित हैं। बिहार का मिथिला क्षेत्र शिवा और शक्ति समुदायों के लिए तांत्रिक साधनाओं का केंद्र रहा है। मधुबनी पेंटिंग के तांत्रिक संबंध के संदर्भ कवि विद्यापति के साहित्यिक कार्य में पाए जाते हैं,जोकि 12 वीं शताब्दी के थे।
यह एक ऐसी कला जिसने बिहार और खासतौर पर मिथिला के पुरुष प्रधान और सामंती समाज में नारी मुक्ति और सामाजिक न्याय के नए रास्ते खोले हैं। शुरुआती विरोध के बाद जातियों में बंटे समाज में इस कला से समरसता भी आई। ऊपर वर्णित तीन शैलियों का उपयोग "उच्च जाति" ब्राह्मण और कायस्थ परिवारों की महिलाओं द्वारा किया जाता था। यह उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति और जीवन शैली पर आधारित था।
लेकिन 1960 के आसपास एकाधिकार टूट गया था जब दुसाध समुदाय की दलित महिलाओं ने हरिजन पेंटिंग की शुरुआत की थी, जो काफी हद तक किंग सलेश पर आधारित थी, जिन्हें समुदाय में भगवान माना जाता है। जबकि हरिजन पेंटिंग के रूपांकनों, तकनीक और शैली पारंपरिक है, सामग्री रामायण और महाभारत के हिंदू आख्यानों से एक उल्लेखनीय बदलाव का प्रतीक है।
नवाचारों और प्रगति के बाद, बुद्ध के जीवन की कहानियों को इस कला के माध्यम से समाज के समक्ष चित्रण से किया गया है।
आपको बता दें कि त्रेता युग (युग) में मिथिला पेंटिंग शुरू हुई। 1934 तक, यह सिर्फ गांवों की लोक कला थी। उस साल एक बड़े भूकंप ने मिथिलांचल को तबाह कर दिया था, जो नुकसान और विनाश का कारण बना था। एक ब्रिटिश अधिकारी विलियम आर्चर इस क्षेत्र का दौरा करने के लिए आए जिससे उसने मलबे में पड़ी टूटी दीवारों पर चित्रों को देखा था।
उन्होंने इसे पिकासो और मीरा जैसे आधुनिक कलाकारों के चित्रों के समान पाया। 1949 में लिखे एक लेख में, उन्होंने मिथिला पेंटिंग की विशिष्टता, चमक और विशिष्ट विशेषताओं का उल्लेख किया था। और इस तरह, दुनिया के बाकी हिस्सों को इस चमत्कारिक कला के बारे में पता चला।
उस समय फुलब्राइट स्कॉलर के वित्तीय सहयोग से 1977 में मधुबनी के जितवारपुर में मास्टर क्राफ्ट्समैन एसोसिएशन ऑफ मिथिला नामक एक यूनियन की स्थापना की गई थी। इससे क्षेत्र के कलाकारों को अच्छी कमाई हुई।
हालांकि, क्षेत्र के कला रूप को आधिकारिक मान्यता बहुत बाद में मिली। 1969 में, बिहार सरकार ने अपने मधुबनी चित्रों के लिए सीता देवी को सम्मानित किया। बाद में 1975 में, जगदम्बा देवी को उनके चित्रों के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।
सीता देवी को 1984 में पद्म श्री से भी सम्मानित किया गया था। बाद में, उन्हें बिहार रत्न और शिल्पगुरु पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया। 2011 में, महासुंदरी देवी को पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। उनके बाद बुआ देवी थीं जिन्हें 2017 में यह पुरस्कार मिला।
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| दरभंगा/मधुबनी : आजकल बिहार में विधानसभा चुनाव है। इस दौरान नेता हर उस प्रतीक का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो लोगों को आकर्षित करे। इसी कड़ी में मिथिला या मधुबनी पेंटिंग भी शामिल है। इस चुनाव में इस कला का भरपूर इस्तेमाल हो रहा है लेकिन दुखद यह है कि किसी भी राजनीतिक दल को इस कला की समस्याओं की चिंता नहीं है। अभी बिहार चुनाव में राज्य के प्रमुख राजनीतिक चेहरे इस कला के साथ बने मास्क का प्रयोग कर रहे हैं। इसके साथ ही ये मास्क लोगों को बांटा भी जा रहा है। इस कला ने अनिवार्य मास्क पहनने के नियम को स्टाइल स्टेटमेंट में बना दिया है। मिथिला पेंटिंग से सजे मास्क पचास-एक सौ रुपयापये के बीच बिक रहे हैं। लेकिन केवल इतने से ही इस कला का भला नहीं हो रहा है। आपको बता दें कि कोरोना महामारी के कारण हुए लॉकडाउन ने मिथिला पेंटिंग करने वाले कलाकारों को बर्बाद कर दिया है। इसके अलावा बिचौलिये इस कला के बाज़ार में वर्षों पहले सेंध लगा चुके हैं, जिस कारण कलाकारों तक उनकी कला का पूरा मेहनताना नहीं पहुँच पाता है। ये बातें हमें मधुबनी पेंटिंग करने वाले कलाकारों से बातचीत के बाद पता चला। न्यूज़क्लिक की टीम ने मधुबनी पेंटिंग करने वाले कलाकारों से इस कला के मुख्य केंद्र कहे जाने वाले मधुबनी जिले के रांटी और जितवारपुर गांव जाकर मुलाकात की। रांटी गांव के भोला झा जोकि इस कला से लंबे समय से जुड़े हुए हैं, कहते हैं, 'यह कला अपने आप में समृद्ध है। इस कला की सराहना करने वाले आज पूरी दुनिया में है। आज यह कला केवल अपने कलाकारों के कलाकारी के नाम पर जिन्दा है। इसमें सरकार या नेताओं की मदद बिल्कुल भी शामिल नहीं है।' वे आगे कहते हैं कि इस चुनाव और कोरोना के दौर में मिथिला कलाकारी वाले मास्क की मांग आ रही है लेकिन यह बहुत कम है। कई कलाकार ऐसे भी है जो कोरोना महामारी के बाद से भारी आर्थिक मंदी से गुजर रहे है। कला को बचाने के लिए उन्हें तत्काल आर्थिक सहायता दिए जाने की जरूरत है। इसी तरह जितवारपुर गांव के सरवन पासवान जिनका परिवार कई पीढ़ियों से मधुबनी पेंटिंग कर रही है। उन्होंने कहा, 'कला का दाम असली कलाकारों को नहीं मिल रहा है। बीच में दलालों की संख्या इतनी ज्यादा है कि वो कलाकारों की मेहनत की कमाई खा रहे हैं। जबकि इस कला को पसंद करने वाले लोग विदेशों से खरीदारी करने आते हैं लेकिन अधिकांश मामलों में वो बिचौलिए के माध्यम से ही ख़रीदारी करते हैं।' कलाकारों से मिलने के बाद एक बात स्पष्ट हुई कि कला और उसके कलाकारों की हालत में सुधार केवल सरकारी फाइलों और राजनेताओं के भाषण में है। हमने कई कलाकारों से बात की सभी ने एक मांग की कि सरकार कला को बेचने के लिए नियमित एक बाजार उपलब्ध कराए जिससे उनको उचित दाम मिल सके। इसके साथ ही यह पेंटिंग कपड़ों ,साड़ी और अन्य वस्तुओं पर होती है इसलिए सरकार कलाकारों को यह वस्तुएं सस्ते दामों पर उपलब्ध कराए। आपको बता दें कि इस कला की उत्पत्ति रामायण के समय से बताई जाती है, जब भगवान राम उत्तर भारत में अयोध्या के राजकुमार थे। कथा और कहानियों के अनुसार भगवान राम और देवी सीता ने एक दूसरे को पहली बार 'मधुबन' देखा था, जिससे मधुबनी शब्द की उत्पत्ति हुई है। जनक - मिथिला के तत्कालीन राजा - ने अपनी बेटी सीता का विवाह भगवान राम से करवाया। इस विवाह के लिए एक पूर्व शर्त थी जिसके लिए राम ने भगवान शिव के धनुष को तोड़ा था , जिसके बाद राम और सीता दोनों की शादी हुई। इस दौराण राजा जनक ने मेहमानों पर मिथिला की अमिट छाप और समृद्ध संस्कृति को दिखाने के लिए कलाकारों के एक समूह को सुंदर चित्रों के साथ विवाह स्थल को सजाने का काम सौंपा था। मिथिला चित्रों में दो 'घराने' हैं - रांती घराना और जितवारपुर घराना - पाँच प्रसिद्ध शैलियां कोहबर, गोदना, तांत्रिक, भरनी, काचनी और हरिजन है । भरनी, काचनी और तांत्रिक पेंटिंग धार्मिक विषयों पर आधारित हैं। बिहार का मिथिला क्षेत्र शिवा और शक्ति समुदायों के लिए तांत्रिक साधनाओं का केंद्र रहा है। मधुबनी पेंटिंग के तांत्रिक संबंध के संदर्भ कवि विद्यापति के साहित्यिक कार्य में पाए जाते हैं,जोकि बारह वीं शताब्दी के थे। यह एक ऐसी कला जिसने बिहार और खासतौर पर मिथिला के पुरुष प्रधान और सामंती समाज में नारी मुक्ति और सामाजिक न्याय के नए रास्ते खोले हैं। शुरुआती विरोध के बाद जातियों में बंटे समाज में इस कला से समरसता भी आई। ऊपर वर्णित तीन शैलियों का उपयोग "उच्च जाति" ब्राह्मण और कायस्थ परिवारों की महिलाओं द्वारा किया जाता था। यह उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति और जीवन शैली पर आधारित था। लेकिन एक हज़ार नौ सौ साठ के आसपास एकाधिकार टूट गया था जब दुसाध समुदाय की दलित महिलाओं ने हरिजन पेंटिंग की शुरुआत की थी, जो काफी हद तक किंग सलेश पर आधारित थी, जिन्हें समुदाय में भगवान माना जाता है। जबकि हरिजन पेंटिंग के रूपांकनों, तकनीक और शैली पारंपरिक है, सामग्री रामायण और महाभारत के हिंदू आख्यानों से एक उल्लेखनीय बदलाव का प्रतीक है। नवाचारों और प्रगति के बाद, बुद्ध के जीवन की कहानियों को इस कला के माध्यम से समाज के समक्ष चित्रण से किया गया है। आपको बता दें कि त्रेता युग में मिथिला पेंटिंग शुरू हुई। एक हज़ार नौ सौ चौंतीस तक, यह सिर्फ गांवों की लोक कला थी। उस साल एक बड़े भूकंप ने मिथिलांचल को तबाह कर दिया था, जो नुकसान और विनाश का कारण बना था। एक ब्रिटिश अधिकारी विलियम आर्चर इस क्षेत्र का दौरा करने के लिए आए जिससे उसने मलबे में पड़ी टूटी दीवारों पर चित्रों को देखा था। उन्होंने इसे पिकासो और मीरा जैसे आधुनिक कलाकारों के चित्रों के समान पाया। एक हज़ार नौ सौ उनचास में लिखे एक लेख में, उन्होंने मिथिला पेंटिंग की विशिष्टता, चमक और विशिष्ट विशेषताओं का उल्लेख किया था। और इस तरह, दुनिया के बाकी हिस्सों को इस चमत्कारिक कला के बारे में पता चला। उस समय फुलब्राइट स्कॉलर के वित्तीय सहयोग से एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर में मधुबनी के जितवारपुर में मास्टर क्राफ्ट्समैन एसोसिएशन ऑफ मिथिला नामक एक यूनियन की स्थापना की गई थी। इससे क्षेत्र के कलाकारों को अच्छी कमाई हुई। हालांकि, क्षेत्र के कला रूप को आधिकारिक मान्यता बहुत बाद में मिली। एक हज़ार नौ सौ उनहत्तर में, बिहार सरकार ने अपने मधुबनी चित्रों के लिए सीता देवी को सम्मानित किया। बाद में एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर में, जगदम्बा देवी को उनके चित्रों के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। सीता देवी को एक हज़ार नौ सौ चौरासी में पद्म श्री से भी सम्मानित किया गया था। बाद में, उन्हें बिहार रत्न और शिल्पगुरु पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया। दो हज़ार ग्यारह में, महासुंदरी देवी को पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। उनके बाद बुआ देवी थीं जिन्हें दो हज़ार सत्रह में यह पुरस्कार मिला। अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें। |
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
श्री कृष्णजन्माष्टमी भगवान श्री कृष्ण का जनमोत्स्व है। योगेश्वर कृष्ण के भगवद गीता के उपदेश अनादि काल से जनमानस के लिए जीवन दर्शन प्रस्तुत करते रहे हैं। जन्माष्टमी भारत में हीं नहीं बल्कि विदेशों में बसे भारतीय भी इसे पूरी आस्था व उल्लास से मनाते हैं। श्रीकृष्ण ने अपना अवतार श्रावण माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि को अत्याचारी कंस का विनाश करने के लिए मथुरा में लिया। चूंकि भगवान स्वयं इस दिन पृथ्वी पर अवतरित हुए थे अतः इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं। इसीलिए श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर मथुरा नगरी भक्ति के रंगों से सराबोर हो उठती है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन मौके पर भगवान कान्हा की मोहक छवि देखने के लिए दूर दूर से श्रद्धालु आज के दिन मथुरा पहुंचते हैं। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर मथुरा कृष्णमय हो जात है। मंदिरों को खास तौर पर सजाया जाता है। ज्न्माष्टमी में स्त्री-पुरुष बारह बजे तक व्रत रखते हैं। इस दिन मंदिरों में झांकियां सजाई जाती है और भगवान कृष्ण को झूला झुलाया जाता है। और रासलीला का आयोजन होता है। कृष्ण जन्माष्टमी पर भक्त भव्य चांदनी चौक, दिल्ली (भारत) की खरीदारी सड़कों पर कृष्णा झुला, श्री लाडू गोपाल के लिए कपड़े और उनके प्रिय भगवान कृष्ण को खरीदते हैं। सभी मंदिरों को खूबसूरती से सजाया जाता है और भक्त आधी रात तक इंतजार करते हैं ताकि वे देख सकें कि उनके द्वारा बनाई गई खूबसूरत खरीद के साथ उनके बाल गोपाल कैसे दिखते हैं। . अष्टमी दो प्रकार की है- पहली जन्माष्टमी और दूसरी जयंती। इसमें केवल पहली अष्टमी है। स्कन्दपुराण के मतानुसार जो भी व्यक्ति जानकर भी कृष्ण जन्माष्टमी व्रत को नहीं करता, वह मनुष्य जंगल में सर्प और व्याघ्र होता है। ब्रह्मपुराण का कथन है कि कलियुग में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी में अट्ठाइसवें युग में देवकी के पुत्र श्रीकृष्ण उत्पन्न हुए थे। यदि दिन या रात में कलामात्र भी रोहिणी न हो तो विशेषकर चंद्रमा से मिली हुई रात्रि में इस व्रत को करें। भविष्यपुराण का वचन है- श्रावण मास के शुक्ल पक्ष में कृष्ण जन्माष्टमी व्रत को जो मनुष्य नहीं करता, वह क्रूर राक्षस होता है। केवल अष्टमी तिथि में ही उपवास करना कहा गया है। यदि वही तिथि रोहिणी नक्षत्र से युक्त हो तो 'जयंती' नाम से संबोधित की जाएगी। वह्निपुराण का वचन है कि कृष्णपक्ष की जन्माष्टमी में यदि एक कला भी रोहिणी नक्षत्र हो तो उसको जयंती नाम से ही संबोधित किया जाएगा। अतः उसमें प्रयत्न से उपवास करना चाहिए। .
जन्माष्टमी और जन्माष्टमी व्रत कथा आम में 4 बातें हैं (यूनियनपीडिया में): भारतीय, हिन्दू धर्म, जन्माष्टमी, कृष्ण पक्ष।
भारत देश के निवासियों को भारतीय कहा जाता है। भारत को हिन्दुस्तान नाम से भी पुकारा जाता है और इसीलिये भारतीयों को हिन्दुस्तानी भी कहतें है।.
हिन्दू धर्म (संस्कृतः सनातन धर्म) एक धर्म (या, जीवन पद्धति) है जिसके अनुयायी अधिकांशतः भारत,नेपाल और मॉरिशस में बहुमत में हैं। इसे विश्व का प्राचीनतम धर्म कहा जाता है। इसे 'वैदिक सनातन वर्णाश्रम धर्म' भी कहते हैं जिसका अर्थ है कि इसकी उत्पत्ति मानव की उत्पत्ति से भी पहले से है। विद्वान लोग हिन्दू धर्म को भारत की विभिन्न संस्कृतियों एवं परम्पराओं का सम्मिश्रण मानते हैं जिसका कोई संस्थापक नहीं है। यह धर्म अपने अन्दर कई अलग-अलग उपासना पद्धतियाँ, मत, सम्प्रदाय और दर्शन समेटे हुए हैं। अनुयायियों की संख्या के आधार पर ये विश्व का तीसरा सबसे बड़ा धर्म है। संख्या के आधार पर इसके अधिकतर उपासक भारत में हैं और प्रतिशत के आधार पर नेपाल में हैं। हालाँकि इसमें कई देवी-देवताओं की पूजा की जाती है, लेकिन वास्तव में यह एकेश्वरवादी धर्म है। इसे सनातन धर्म अथवा वैदिक धर्म भी कहते हैं। इण्डोनेशिया में इस धर्म का औपचारिक नाम "हिन्दु आगम" है। हिन्दू केवल एक धर्म या सम्प्रदाय ही नहीं है अपितु जीवन जीने की एक पद्धति है। .
श्री कृष्णजन्माष्टमी भगवान श्री कृष्ण का जनमोत्स्व है। योगेश्वर कृष्ण के भगवद गीता के उपदेश अनादि काल से जनमानस के लिए जीवन दर्शन प्रस्तुत करते रहे हैं। जन्माष्टमी भारत में हीं नहीं बल्कि विदेशों में बसे भारतीय भी इसे पूरी आस्था व उल्लास से मनाते हैं। श्रीकृष्ण ने अपना अवतार श्रावण माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि को अत्याचारी कंस का विनाश करने के लिए मथुरा में लिया। चूंकि भगवान स्वयं इस दिन पृथ्वी पर अवतरित हुए थे अतः इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं। इसीलिए श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर मथुरा नगरी भक्ति के रंगों से सराबोर हो उठती है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन मौके पर भगवान कान्हा की मोहक छवि देखने के लिए दूर दूर से श्रद्धालु आज के दिन मथुरा पहुंचते हैं। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर मथुरा कृष्णमय हो जात है। मंदिरों को खास तौर पर सजाया जाता है। ज्न्माष्टमी में स्त्री-पुरुष बारह बजे तक व्रत रखते हैं। इस दिन मंदिरों में झांकियां सजाई जाती है और भगवान कृष्ण को झूला झुलाया जाता है। और रासलीला का आयोजन होता है। कृष्ण जन्माष्टमी पर भक्त भव्य चांदनी चौक, दिल्ली (भारत) की खरीदारी सड़कों पर कृष्णा झुला, श्री लाडू गोपाल के लिए कपड़े और उनके प्रिय भगवान कृष्ण को खरीदते हैं। सभी मंदिरों को खूबसूरती से सजाया जाता है और भक्त आधी रात तक इंतजार करते हैं ताकि वे देख सकें कि उनके द्वारा बनाई गई खूबसूरत खरीद के साथ उनके बाल गोपाल कैसे दिखते हैं। .
हिन्दू समय मापन, लघुगणकीय पैमाने पर कृष्ण पक्ष हिन्दू काल गणना अनुसार पूर्णिमांत माह के उत्तरार्ध पक्ष (१५ दिन) को कहते हैं। यह पक्ष पूर्णिमा से अमावस्या तक होता है। श्रेणीःहिन्दू काल गणना श्रेणीःसमय मापन.
जन्माष्टमी 17 संबंध है और जन्माष्टमी व्रत कथा 10 है। वे आम 4 में है, समानता सूचकांक 14.81% है = 4 / (17 + 10)।
यह लेख जन्माष्टमी और जन्माष्टमी व्रत कथा के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
| शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। श्री कृष्णजन्माष्टमी भगवान श्री कृष्ण का जनमोत्स्व है। योगेश्वर कृष्ण के भगवद गीता के उपदेश अनादि काल से जनमानस के लिए जीवन दर्शन प्रस्तुत करते रहे हैं। जन्माष्टमी भारत में हीं नहीं बल्कि विदेशों में बसे भारतीय भी इसे पूरी आस्था व उल्लास से मनाते हैं। श्रीकृष्ण ने अपना अवतार श्रावण माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि को अत्याचारी कंस का विनाश करने के लिए मथुरा में लिया। चूंकि भगवान स्वयं इस दिन पृथ्वी पर अवतरित हुए थे अतः इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं। इसीलिए श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर मथुरा नगरी भक्ति के रंगों से सराबोर हो उठती है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन मौके पर भगवान कान्हा की मोहक छवि देखने के लिए दूर दूर से श्रद्धालु आज के दिन मथुरा पहुंचते हैं। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर मथुरा कृष्णमय हो जात है। मंदिरों को खास तौर पर सजाया जाता है। ज्न्माष्टमी में स्त्री-पुरुष बारह बजे तक व्रत रखते हैं। इस दिन मंदिरों में झांकियां सजाई जाती है और भगवान कृष्ण को झूला झुलाया जाता है। और रासलीला का आयोजन होता है। कृष्ण जन्माष्टमी पर भक्त भव्य चांदनी चौक, दिल्ली की खरीदारी सड़कों पर कृष्णा झुला, श्री लाडू गोपाल के लिए कपड़े और उनके प्रिय भगवान कृष्ण को खरीदते हैं। सभी मंदिरों को खूबसूरती से सजाया जाता है और भक्त आधी रात तक इंतजार करते हैं ताकि वे देख सकें कि उनके द्वारा बनाई गई खूबसूरत खरीद के साथ उनके बाल गोपाल कैसे दिखते हैं। . अष्टमी दो प्रकार की है- पहली जन्माष्टमी और दूसरी जयंती। इसमें केवल पहली अष्टमी है। स्कन्दपुराण के मतानुसार जो भी व्यक्ति जानकर भी कृष्ण जन्माष्टमी व्रत को नहीं करता, वह मनुष्य जंगल में सर्प और व्याघ्र होता है। ब्रह्मपुराण का कथन है कि कलियुग में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी में अट्ठाइसवें युग में देवकी के पुत्र श्रीकृष्ण उत्पन्न हुए थे। यदि दिन या रात में कलामात्र भी रोहिणी न हो तो विशेषकर चंद्रमा से मिली हुई रात्रि में इस व्रत को करें। भविष्यपुराण का वचन है- श्रावण मास के शुक्ल पक्ष में कृष्ण जन्माष्टमी व्रत को जो मनुष्य नहीं करता, वह क्रूर राक्षस होता है। केवल अष्टमी तिथि में ही उपवास करना कहा गया है। यदि वही तिथि रोहिणी नक्षत्र से युक्त हो तो 'जयंती' नाम से संबोधित की जाएगी। वह्निपुराण का वचन है कि कृष्णपक्ष की जन्माष्टमी में यदि एक कला भी रोहिणी नक्षत्र हो तो उसको जयंती नाम से ही संबोधित किया जाएगा। अतः उसमें प्रयत्न से उपवास करना चाहिए। . जन्माष्टमी और जन्माष्टमी व्रत कथा आम में चार बातें हैं : भारतीय, हिन्दू धर्म, जन्माष्टमी, कृष्ण पक्ष। भारत देश के निवासियों को भारतीय कहा जाता है। भारत को हिन्दुस्तान नाम से भी पुकारा जाता है और इसीलिये भारतीयों को हिन्दुस्तानी भी कहतें है।. हिन्दू धर्म एक धर्म है जिसके अनुयायी अधिकांशतः भारत,नेपाल और मॉरिशस में बहुमत में हैं। इसे विश्व का प्राचीनतम धर्म कहा जाता है। इसे 'वैदिक सनातन वर्णाश्रम धर्म' भी कहते हैं जिसका अर्थ है कि इसकी उत्पत्ति मानव की उत्पत्ति से भी पहले से है। विद्वान लोग हिन्दू धर्म को भारत की विभिन्न संस्कृतियों एवं परम्पराओं का सम्मिश्रण मानते हैं जिसका कोई संस्थापक नहीं है। यह धर्म अपने अन्दर कई अलग-अलग उपासना पद्धतियाँ, मत, सम्प्रदाय और दर्शन समेटे हुए हैं। अनुयायियों की संख्या के आधार पर ये विश्व का तीसरा सबसे बड़ा धर्म है। संख्या के आधार पर इसके अधिकतर उपासक भारत में हैं और प्रतिशत के आधार पर नेपाल में हैं। हालाँकि इसमें कई देवी-देवताओं की पूजा की जाती है, लेकिन वास्तव में यह एकेश्वरवादी धर्म है। इसे सनातन धर्म अथवा वैदिक धर्म भी कहते हैं। इण्डोनेशिया में इस धर्म का औपचारिक नाम "हिन्दु आगम" है। हिन्दू केवल एक धर्म या सम्प्रदाय ही नहीं है अपितु जीवन जीने की एक पद्धति है। . श्री कृष्णजन्माष्टमी भगवान श्री कृष्ण का जनमोत्स्व है। योगेश्वर कृष्ण के भगवद गीता के उपदेश अनादि काल से जनमानस के लिए जीवन दर्शन प्रस्तुत करते रहे हैं। जन्माष्टमी भारत में हीं नहीं बल्कि विदेशों में बसे भारतीय भी इसे पूरी आस्था व उल्लास से मनाते हैं। श्रीकृष्ण ने अपना अवतार श्रावण माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि को अत्याचारी कंस का विनाश करने के लिए मथुरा में लिया। चूंकि भगवान स्वयं इस दिन पृथ्वी पर अवतरित हुए थे अतः इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं। इसीलिए श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर मथुरा नगरी भक्ति के रंगों से सराबोर हो उठती है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन मौके पर भगवान कान्हा की मोहक छवि देखने के लिए दूर दूर से श्रद्धालु आज के दिन मथुरा पहुंचते हैं। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर मथुरा कृष्णमय हो जात है। मंदिरों को खास तौर पर सजाया जाता है। ज्न्माष्टमी में स्त्री-पुरुष बारह बजे तक व्रत रखते हैं। इस दिन मंदिरों में झांकियां सजाई जाती है और भगवान कृष्ण को झूला झुलाया जाता है। और रासलीला का आयोजन होता है। कृष्ण जन्माष्टमी पर भक्त भव्य चांदनी चौक, दिल्ली की खरीदारी सड़कों पर कृष्णा झुला, श्री लाडू गोपाल के लिए कपड़े और उनके प्रिय भगवान कृष्ण को खरीदते हैं। सभी मंदिरों को खूबसूरती से सजाया जाता है और भक्त आधी रात तक इंतजार करते हैं ताकि वे देख सकें कि उनके द्वारा बनाई गई खूबसूरत खरीद के साथ उनके बाल गोपाल कैसे दिखते हैं। . हिन्दू समय मापन, लघुगणकीय पैमाने पर कृष्ण पक्ष हिन्दू काल गणना अनुसार पूर्णिमांत माह के उत्तरार्ध पक्ष को कहते हैं। यह पक्ष पूर्णिमा से अमावस्या तक होता है। श्रेणीःहिन्दू काल गणना श्रेणीःसमय मापन. जन्माष्टमी सत्रह संबंध है और जन्माष्टमी व्रत कथा दस है। वे आम चार में है, समानता सूचकांक चौदह.इक्यासी% है = चार / । यह लेख जन्माष्टमी और जन्माष्टमी व्रत कथा के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः |
सऊदी इंटेलीजेन्स अधिकारी ने मुहम्मद बिन सलमान पर अमरीका में ठोंका मुक़द्दमा, कहा ख़ाशुक़जी की तरह मेरी भी हत्या करवाना चाहते थे क्राउन प्रिंस!
सऊदी अरब के पूर्व इंटैलीजेन्स अधिकारी सअद अलजब्री ने क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान के ख़िलाफ़ अमरीका में मुक़द्दमा दायर कर दिया है।
वाशिंग्टन की अदालत में दायर किए गए मुक़द्दमे में अलजब्री ने कहा कि मुहम्मद बिन सलमान उनकी हत्या करवाना चाहते हैं जिस तरह उन्होंने वरिष्ठ पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या करवाई थी।
अलजब्री ने अपनी शिकायत में कहा है कि बिन सलमान ने उनकी हत्या के लिए एक टीम कैनेडा भेजी थी ताकि महत्वपूर्ण दस्तावेज़ उनसे छीन सकें। अलजब्री का कहना है कि 2 अकतूबर 2018 को जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या के दो सप्ताह बाद ही एक टीम कैनेडा पहुंच गई थी और महत्वपूर्ण बात यह है कि अमरीका के वरिष्ठ अधिकारियों को इस टारगेट किलिंग के मंसूबे की जानकारी थी।
अलनिम्र नाम की टीम को अलजब्री की हत्या की ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी जो पर्यटन वीज़ा के साथ कैनेडा पहुंची थी और उसके साथ भी एक डाक्टर और सर्जिकल उपकरण थे मगर एयरपोर्ट पर कैनेडा के अधिकारियों को इसलिए संदेह हो गया कि टीम के लोगों ने दावा किया था कि वह एक दूसरे को नहीं पहचानते। संदेह हो जाने के बाद कैनेडा के अधिकारियों ने टीम के केवल एक सदस्य को देश में प्रवेश की अनुमति दी जिसके पास डिप्लोमैटिक पासपोर्ट था।
अलजब्री ने अदालत में जो दस्तावेज़ पेश किए हैं उनसे यह भी साबित होता है कि बिन सलमान ने अपने सलाहकारों को बताया था कि उन्होंने अलजब्री की हत्या का फ़तवा हासिल कर लिया है।
अलजब्री ने अदालत में जो दस्तावेज़ पेश किए हैं उनमें बिन सलमान का एक पत्र भी है जिसमें उन्होंने अलजब्री को धमकी दी है कि वह 24 घंटे के भीतर सऊदी अरब आ जाएं वरना उनकी हत्या कर दी जाएगी। बिन सलमान को यह भी लगता है कि ख़ाशुक़जी हत्या के मामले में बहुत सारी जानकारियां सीआईए को अलजब्री की वजह से मिलीं।
दस्तावेज़ में कहा गया है कि वर्ष 2017 में भी बिन सलमान ने उनकी हत्या के लिए एक टीम अमरीका के बोस्टन शहर में भेजी थी और कई महीने तक उनकी जासूसी करवाई।
अलजब्री ने अदालत को बताया कि उनके पास बहुत महत्वपूर्ण जानकारियां और दस्तावेज़ हैं जिन्हें मिटाने के लिए बिन सलमान उनकी हत्या करवाना चाहते हैं और अगर उनकी हत्या की गई तो यह सारे दस्तावेज़ सार्वजनिक कर दिए जाएंगे।
अमरीकी सेनेटर टाम मालीनोव्स्की ने सीएनएन से बातचीत में कहा कि अलजब्री ने अदालत को जो बातें बताई हैं वह सही हैं।
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| सऊदी इंटेलीजेन्स अधिकारी ने मुहम्मद बिन सलमान पर अमरीका में ठोंका मुक़द्दमा, कहा ख़ाशुक़जी की तरह मेरी भी हत्या करवाना चाहते थे क्राउन प्रिंस! सऊदी अरब के पूर्व इंटैलीजेन्स अधिकारी सअद अलजब्री ने क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान के ख़िलाफ़ अमरीका में मुक़द्दमा दायर कर दिया है। वाशिंग्टन की अदालत में दायर किए गए मुक़द्दमे में अलजब्री ने कहा कि मुहम्मद बिन सलमान उनकी हत्या करवाना चाहते हैं जिस तरह उन्होंने वरिष्ठ पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या करवाई थी। अलजब्री ने अपनी शिकायत में कहा है कि बिन सलमान ने उनकी हत्या के लिए एक टीम कैनेडा भेजी थी ताकि महत्वपूर्ण दस्तावेज़ उनसे छीन सकें। अलजब्री का कहना है कि दो अकतूबर दो हज़ार अट्ठारह को जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या के दो सप्ताह बाद ही एक टीम कैनेडा पहुंच गई थी और महत्वपूर्ण बात यह है कि अमरीका के वरिष्ठ अधिकारियों को इस टारगेट किलिंग के मंसूबे की जानकारी थी। अलनिम्र नाम की टीम को अलजब्री की हत्या की ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी जो पर्यटन वीज़ा के साथ कैनेडा पहुंची थी और उसके साथ भी एक डाक्टर और सर्जिकल उपकरण थे मगर एयरपोर्ट पर कैनेडा के अधिकारियों को इसलिए संदेह हो गया कि टीम के लोगों ने दावा किया था कि वह एक दूसरे को नहीं पहचानते। संदेह हो जाने के बाद कैनेडा के अधिकारियों ने टीम के केवल एक सदस्य को देश में प्रवेश की अनुमति दी जिसके पास डिप्लोमैटिक पासपोर्ट था। अलजब्री ने अदालत में जो दस्तावेज़ पेश किए हैं उनसे यह भी साबित होता है कि बिन सलमान ने अपने सलाहकारों को बताया था कि उन्होंने अलजब्री की हत्या का फ़तवा हासिल कर लिया है। अलजब्री ने अदालत में जो दस्तावेज़ पेश किए हैं उनमें बिन सलमान का एक पत्र भी है जिसमें उन्होंने अलजब्री को धमकी दी है कि वह चौबीस घंटाटे के भीतर सऊदी अरब आ जाएं वरना उनकी हत्या कर दी जाएगी। बिन सलमान को यह भी लगता है कि ख़ाशुक़जी हत्या के मामले में बहुत सारी जानकारियां सीआईए को अलजब्री की वजह से मिलीं। दस्तावेज़ में कहा गया है कि वर्ष दो हज़ार सत्रह में भी बिन सलमान ने उनकी हत्या के लिए एक टीम अमरीका के बोस्टन शहर में भेजी थी और कई महीने तक उनकी जासूसी करवाई। अलजब्री ने अदालत को बताया कि उनके पास बहुत महत्वपूर्ण जानकारियां और दस्तावेज़ हैं जिन्हें मिटाने के लिए बिन सलमान उनकी हत्या करवाना चाहते हैं और अगर उनकी हत्या की गई तो यह सारे दस्तावेज़ सार्वजनिक कर दिए जाएंगे। अमरीकी सेनेटर टाम मालीनोव्स्की ने सीएनएन से बातचीत में कहा कि अलजब्री ने अदालत को जो बातें बताई हैं वह सही हैं। ताज़ातरीन ख़बरों, समीक्षाओं और आर्टिकल्ज़ के लिए हमारा फ़ेसबुक पेज लाइक कीजिए! |
मंत्री महोदय ने बताया कि कृषि मंत्रालय राष्ट्रीय जैविक कृषि परियोजना, राष्ट्रीय पुष्प उत्पादन अभियान, पूर्वोत्तर क्षेत्र प्रौद्योगिकी अभियान और राष्ट्रीय कृषि विकास योजना जैसी विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन के जरिए देश में जैविक खेती को प्रोत्साहन दे रहा है।
केन्द्र सरकार के प्रयासों के अलावा विभिन्न राज्य सरकारों ने भी अपनी खुद की जैविक कृषि प्रोत्साहन योजनाएं शुरू की हैं। कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, नगालैंड, सिक्किम, मिजोरम और उत्तराखंड ने जैविक कृषि प्रोत्साहन की नीति तैयार कर ली है।
बैठक में कृषि, उपभोक्ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री प्रो. के.वी.थॉमस के अलावा लोक सभा सदस्य सर्वश्री ए.गणेशमूर्ति, शरीफुद्दीन शारिक, ध्रुव नारायण रंगास्वामी, एम.कृष्णास्वामी, के.सुकुमार, हंसराज गंगाराम अहिर, गोबिन्द चंद्र नासकर, एच.डी.कुमारस्वामी तथा राज्यसभा के सर्वश्री डी.एम.एस.स्वामीनाथन, गोबिन्द राव आदिक, विक्रम वर्मा, खेकिहो जिमोमी और श्रीमती रेणुबाला प्रधान उपस्थित थे।
(Release ID :3926)
| मंत्री महोदय ने बताया कि कृषि मंत्रालय राष्ट्रीय जैविक कृषि परियोजना, राष्ट्रीय पुष्प उत्पादन अभियान, पूर्वोत्तर क्षेत्र प्रौद्योगिकी अभियान और राष्ट्रीय कृषि विकास योजना जैसी विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन के जरिए देश में जैविक खेती को प्रोत्साहन दे रहा है। केन्द्र सरकार के प्रयासों के अलावा विभिन्न राज्य सरकारों ने भी अपनी खुद की जैविक कृषि प्रोत्साहन योजनाएं शुरू की हैं। कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, नगालैंड, सिक्किम, मिजोरम और उत्तराखंड ने जैविक कृषि प्रोत्साहन की नीति तैयार कर ली है। बैठक में कृषि, उपभोक्ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री प्रो. के.वी.थॉमस के अलावा लोक सभा सदस्य सर्वश्री ए.गणेशमूर्ति, शरीफुद्दीन शारिक, ध्रुव नारायण रंगास्वामी, एम.कृष्णास्वामी, के.सुकुमार, हंसराज गंगाराम अहिर, गोबिन्द चंद्र नासकर, एच.डी.कुमारस्वामी तथा राज्यसभा के सर्वश्री डी.एम.एस.स्वामीनाथन, गोबिन्द राव आदिक, विक्रम वर्मा, खेकिहो जिमोमी और श्रीमती रेणुबाला प्रधान उपस्थित थे। |
Delhi Election Results : दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित हो गए हैं। दिल्ली के करोल बाग विधानसभा सीट पर आम आदमी पार्टी (AAP) की विशेष रवि को जीत मिली है। भाजपा के प्रत्याशी को इतने मतों से हराया है।
दिल्ली की करोल बाग विधानसभा सीट पर आम आदमी पार्टी (AAP) ने विशेष रवि, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के योगेंद्र चंदोलिया और कांग्रेस के गौरव धनक के बीच मुकाबला था। उन्होंने भाजपा के योगेंद्र चंदोलिया और कांग्रेस के गौरव धनक को हराकर दूसरी बार विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की है। साल 2015 में भी विशेष रवि ने आप की और से चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी।
करोल बाग की इस विधानसभा सीट से आप के प्रत्याशी विशेष रवि को 67494 वोट मिले। वहीं यदि भाजपा के उम्मीदवार योगेंद्र चंदोलिया को लगभग विशेष रवि से आधे वोट ही मिल पाए। योगेंद्र चंदोलिया को सिर्फ 35734 वोटों से ही संतुष्ट होना पड़ा और यदि नोटा दबाने की बात की जाए तो यहां पर 447 लोगों ने नोटा का बटन दबाया।
आप के विशेष रवि पहले भी यहां से दो बार चुनाव जीत चुके हैं। दिल्ली विधानसभा चुनाल 2013 और 2015 में भी रवि ने इसी सीट से जीत हासिल की थी और इस बार भी विशेष रवि ने अपनी जीत का सिलसिला कायम रखा।
| Delhi Election Results : दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित हो गए हैं। दिल्ली के करोल बाग विधानसभा सीट पर आम आदमी पार्टी की विशेष रवि को जीत मिली है। भाजपा के प्रत्याशी को इतने मतों से हराया है। दिल्ली की करोल बाग विधानसभा सीट पर आम आदमी पार्टी ने विशेष रवि, भारतीय जनता पार्टी के योगेंद्र चंदोलिया और कांग्रेस के गौरव धनक के बीच मुकाबला था। उन्होंने भाजपा के योगेंद्र चंदोलिया और कांग्रेस के गौरव धनक को हराकर दूसरी बार विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की है। साल दो हज़ार पंद्रह में भी विशेष रवि ने आप की और से चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी। करोल बाग की इस विधानसभा सीट से आप के प्रत्याशी विशेष रवि को सरसठ हज़ार चार सौ चौरानवे वोट मिले। वहीं यदि भाजपा के उम्मीदवार योगेंद्र चंदोलिया को लगभग विशेष रवि से आधे वोट ही मिल पाए। योगेंद्र चंदोलिया को सिर्फ पैंतीस हज़ार सात सौ चौंतीस वोटों से ही संतुष्ट होना पड़ा और यदि नोटा दबाने की बात की जाए तो यहां पर चार सौ सैंतालीस लोगों ने नोटा का बटन दबाया। आप के विशेष रवि पहले भी यहां से दो बार चुनाव जीत चुके हैं। दिल्ली विधानसभा चुनाल दो हज़ार तेरह और दो हज़ार पंद्रह में भी रवि ने इसी सीट से जीत हासिल की थी और इस बार भी विशेष रवि ने अपनी जीत का सिलसिला कायम रखा। |
भारतीय रिज़र्व बैंक के द्वारा विनियमित सभी बैंक और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी)
वर्तमान में, भारत में बैंक और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) के द्वारा सामान्य तौर पर क्रमशः 90 दिन और 120 दिन के चूक के मानदंड के आधार पर ऋण खाते को अनर्जक आस्ति (एनपीए) के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। हमें इस प्रकार के अभ्यावेदन प्राप्त हुए हैं कि जीएसटी के तहत पंजीकरण के माध्यम से कारोबार को औपचारिक रूप देने का प्रतिकूल प्रभाव परिवर्तन के चरण के दौरान अपेक्षाकृत छोटी संस्थाओं के नकदी प्रवाह पर पड़ा है, जिसके फलस्वरूप बैंकों और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) के प्रति चुकौती संबंधी उनके दायित्वों को पूरा करने में कठिनाई हुई। उक्त संस्थाओं के द्वारा औपचारिक कारोबारी माहौल में परिवर्तन को सहारा देने के उपाय के रूप में यह निर्णय लिया गया है कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम 2006 के तहत सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम के रूप में वर्गीकृत उधारकर्ता के प्रति बैंकों और एनबीएफसी के एक्सपोज़र को निम्नलिखित शर्तों के अधीन बैंकों और एनबीएफसी की बहियों में मानक आस्ति के रूप में वर्गीकृत किया जाना जारी रहेगाः
उधारकर्ता 31 जनवरी 2018 की स्थिति के अनुसार जीएसटी व्यवस्था के तहत पंजीकृत हो।
बैंकों और एनबीएफसी का उधारकर्ता के प्रति समग्र एक्सपोजर, गैर-निधि आधारित सुविधाओं सहित, 31 जनवरी 2018 की स्थिति के अनुसार ₹ 250 मिलियन से अधिक न हो।
उधारकर्ता का खाता 31 अगस्त 2017 की स्थिति के अनुसार मानक रहा हो।
उधारकर्ता से दिनांक 1 सितंबर 2017 की स्थिति के अनुसार अतिदेय राशि और 1 सितंबर 2017 और 31 जनवरी 2018 के बीच उधारकर्ता से बकाया भुगतान की चुकौती उनकी संबंधित मूल बकाया तिथि से 180 दिनों के भीतर की जाएगी।
इस परिपत्र के अनुसार एनपीए के रूप में वर्गीकृत न किए गए एक्सपोजर के प्रति बैंकों/ एनबीएफसी के द्वारा 5% का प्रावधान किया जाएगा। खाते के संबंध में प्रावधान को 90/1201 दिन, जो भी मामला हो, के मानदंड से अधिक समय तक कोई राशि अतिदेय न रहने की दशा में प्रतिवर्ती किया जाए।
अतिरिक्त समय केवल आस्ति वर्गीकरण के प्रयोजन से प्रदान किया जा रहा है, न कि आय निर्धारण के लिए, अर्थात् यदि उधारकर्ता से ब्याज 90/1202 दिनों से अधिक समय से अतिदेय होगा, तो उक्त को उपचय के आधार पर निर्धारित नहीं किया जाएगा।
(एस. के. कर)
| भारतीय रिज़र्व बैंक के द्वारा विनियमित सभी बैंक और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां वर्तमान में, भारत में बैंक और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां के द्वारा सामान्य तौर पर क्रमशः नब्बे दिन और एक सौ बीस दिन के चूक के मानदंड के आधार पर ऋण खाते को अनर्जक आस्ति के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। हमें इस प्रकार के अभ्यावेदन प्राप्त हुए हैं कि जीएसटी के तहत पंजीकरण के माध्यम से कारोबार को औपचारिक रूप देने का प्रतिकूल प्रभाव परिवर्तन के चरण के दौरान अपेक्षाकृत छोटी संस्थाओं के नकदी प्रवाह पर पड़ा है, जिसके फलस्वरूप बैंकों और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां के प्रति चुकौती संबंधी उनके दायित्वों को पूरा करने में कठिनाई हुई। उक्त संस्थाओं के द्वारा औपचारिक कारोबारी माहौल में परिवर्तन को सहारा देने के उपाय के रूप में यह निर्णय लिया गया है कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम दो हज़ार छः के तहत सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम के रूप में वर्गीकृत उधारकर्ता के प्रति बैंकों और एनबीएफसी के एक्सपोज़र को निम्नलिखित शर्तों के अधीन बैंकों और एनबीएफसी की बहियों में मानक आस्ति के रूप में वर्गीकृत किया जाना जारी रहेगाः उधारकर्ता इकतीस जनवरी दो हज़ार अट्ठारह की स्थिति के अनुसार जीएसटी व्यवस्था के तहत पंजीकृत हो। बैंकों और एनबीएफसी का उधारकर्ता के प्रति समग्र एक्सपोजर, गैर-निधि आधारित सुविधाओं सहित, इकतीस जनवरी दो हज़ार अट्ठारह की स्थिति के अनुसार दो सौ पचास रुपया मिलियन से अधिक न हो। उधारकर्ता का खाता इकतीस अगस्त दो हज़ार सत्रह की स्थिति के अनुसार मानक रहा हो। उधारकर्ता से दिनांक एक सितंबर दो हज़ार सत्रह की स्थिति के अनुसार अतिदेय राशि और एक सितंबर दो हज़ार सत्रह और इकतीस जनवरी दो हज़ार अट्ठारह के बीच उधारकर्ता से बकाया भुगतान की चुकौती उनकी संबंधित मूल बकाया तिथि से एक सौ अस्सी दिनों के भीतर की जाएगी। इस परिपत्र के अनुसार एनपीए के रूप में वर्गीकृत न किए गए एक्सपोजर के प्रति बैंकों/ एनबीएफसी के द्वारा पाँच% का प्रावधान किया जाएगा। खाते के संबंध में प्रावधान को नब्बे/एक हज़ार दो सौ एक दिन, जो भी मामला हो, के मानदंड से अधिक समय तक कोई राशि अतिदेय न रहने की दशा में प्रतिवर्ती किया जाए। अतिरिक्त समय केवल आस्ति वर्गीकरण के प्रयोजन से प्रदान किया जा रहा है, न कि आय निर्धारण के लिए, अर्थात् यदि उधारकर्ता से ब्याज नब्बे/एक हज़ार दो सौ दो दिनों से अधिक समय से अतिदेय होगा, तो उक्त को उपचय के आधार पर निर्धारित नहीं किया जाएगा। |
UCC Update: उत्तर प्रदेश के बरेली की आला हजरत दरगाह का दुनियाभर में नाम है. अब इस परिवार की बहू रही निदा खान ने देश में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी (UCC) का पूर्ण रूप से समर्थन किया है. इसको लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखा है और यह कहा है कि इस कानून को अवश्य आना चाहिए ताकि मुस्लिम महिलाओं का भविष्य सुरक्षित हो सके.
Two Chinese nationals arrested : रक्सौल में दो चीनी नागरिक गिरफ्तार, बिना पासपोर्ट-वीजा घुस रहे थे ।
Two Chinese nationals arrested : रक्सौल में दो चीनी नागरिक गिरफ्तार, बिना पासपोर्ट-वीजा घुस रहे थे ।
| UCC Update: उत्तर प्रदेश के बरेली की आला हजरत दरगाह का दुनियाभर में नाम है. अब इस परिवार की बहू रही निदा खान ने देश में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी का पूर्ण रूप से समर्थन किया है. इसको लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखा है और यह कहा है कि इस कानून को अवश्य आना चाहिए ताकि मुस्लिम महिलाओं का भविष्य सुरक्षित हो सके. Two Chinese nationals arrested : रक्सौल में दो चीनी नागरिक गिरफ्तार, बिना पासपोर्ट-वीजा घुस रहे थे । Two Chinese nationals arrested : रक्सौल में दो चीनी नागरिक गिरफ्तार, बिना पासपोर्ट-वीजा घुस रहे थे । |
वाराणसी के कंदवा गांव में रास्ते के विवाद को लेकर पट्टीदारों ने मंगलवार सुबह अध्यापिका प्रियंका वर्मा (38) की लाठी-डंडे और ईंट से वार कर हत्या कर दी। जबकि अध्यापिका के पति दिनेश प्रजापति सहित परिवार के चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को बीएचयू स्थित ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। घायल दिनेश के चचेरे भाई विजय की तहरीर पर मंडुवाडीह पुलिस ने सात नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। दो आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। घटनास्थल पर पहुंचे डीसीपी काशी जोन और एसीपी ने जांच की।
मंडुवाडीह थाना क्षेत्र कंदवा के प्रजापति बस्ती में बीएचयू से सेवानिवृत्त कर्मचारी कल्लू राम प्रजापति का पुस्तैनी मकान है। बीएचयू में पैथालाजिस्ट के पद पर कार्यरत पुत्र दिनेश प्रजापति, जौनपुर जिले के गौरा बादशाहपुर में प्राथमिक विद्यालय में अध्यापिका बहू प्रियंका प्रजापति, पुत्री माया और परिवार के मनोज व चिंटू के साथ रहते हैं।
कल्लू के भाई स्व. लालजी के पुत्र दीपक, पुनवासी के पुत्र राजेन्द्र, रामचरण के दो पुत्र श्रीराम व रवि थोड़ी दूर पर मकान बनवाकर रहते हैं। प्रजापति बस्ती में ही दोनों परिवारों की जमीन है। उसी के पास एक छोटा सा मंदिर भी है। मंदिर से सटे जमीन की बाउंड्री करने को लेकर पिछले दस दिनों से कल्लू और दीपक में विवाद चल रहा था। देखें अगली स्लाइड्स. . . ।
सोमवार को भी दोनों परिवारों में विवाद हुआ था तो उस समय पुलिस पहुंची तो मामला शांत हो गया था। इसके बाद सुबह साढ़े सात बजे दीपक दोबारा पहुंचा और कल्लू के परिवार से विवाद करने लगा। यही नहीं, दीपक ने फोन कर अपने परिजनों को बुला लिया। सभी लाठी, डंडे, लोहे के रॉड से लैस होकर पहुंचे और मारपीट करने लगे। परिजनों की पिटाई देख बहू प्रियंका बचाव के लिए सामने आ गई तो हमलावरों ने पहले ईंट से प्रियंका पर वार किया। ईंट लगते ही प्रियंका लहूलुहान होकर गिर गई तो आरोप है कि दीपक और राजेंद्र ने लाठी व डंडे से प्रियंका के सिर पर कई वार किया। इस दौरान हमलावरों ने दिनेश, माया, मनोज और चिंटू को भी लाठी व डंडे से पीटा। घटनास्थल पर ही लहूलुहान अचेतावस्था में प्रियंका को लेकर परिजन पुलिस को सूचित करते हुए बीएचयू ट्रॉमा सेंटर पहुंचे तो चिकित्सकों ने प्रियंका को मृत घोषित कर दिया। यह सुनते ही पूरे परिवार ने कोहराम मच गया। मृतका प्रियंका की एक पुत्री खुशी(6) व पुत्र हिमांशु(4) है।
घटनास्थल से मंडुवाडीह पुलिस ने दो लाठी, एक लोहे की पाइप, ईंट व खून से सना गमछा बरामद किया। मृतका के पति दिनेश प्रजापति के चचेरे भाई विनोद कुमार प्रजापति की तहरीर पर मंडुवाडीह थाने की पुलिस ने दीपक प्रजापति, रवि प्रजापति, राजेंद्र प्रजापति, प्रकाश प्रजापति, श्रीराम प्रजापति, शुभम प्रजापति व कन्नू यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। आरोपियों की तलाश में पुलिस की टीमें दबिश दे रही हैं। इस संबंध में काशी जोन के डीसीपी अमित कुमार ने बताया कि मामले में आरोपी दीपक व कन्नू यादव को गिरफ्तार कर लिया गया। अन्य की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।
प्रजापति बस्ती में हमलावर जब दिनेश की बेरहमी से पिटाई कर रहे थे तो पत्नी को घर के अंदर रहा नहीं गया। सुहाग की रक्षा के लिए पत्नी प्रियंका घर की चौखट को लांघकर बाहर निकली और पति के ऊपर पड़ रही लाठियों को अपने ऊपर ले लिया। हमलावरों के सिर पर खून सवार था तो उन्हें कुछ नहीं सूझा और पत्नी प्रियंका के ऊपर लाठियों की बरसात कर दी। इस दौरान हमलावरों ने पहले प्रियंका के सिर पर ईंट से वार किया था। मां और बाप को लहूलुहान हाल में देख मासूम बेटा हिमांशु और बेटी खुशी चीखने चिल्लाने लगे। मौके पर ही प्रियंका ने दम तोड़ दिया था। बस्ती में इस बात की चर्चा जोरों पर रही कि सुहाग की रक्षा को पत्नी ने अपने प्राणों की आहुति दे दी।
कल्लू के परिजनों ने थाने में पत्र देकर यह गुहार लगाई थी कि किसी भी समय दीपक के परिवार वाले हमला कर सकते हैं। जमीन को लेकर जबरदस्ती कर रहे हैं। घटना के समय भी पुलिस यदि जल्दी पहुंची होती तो शायद प्रियंका की जान बच जाती। मारपीट खत्म होने के बाद आरोपी दीपक तहरीर लेकर मंडुवाडीह थाने पहुंचा तब पुलिस को जानकारी हुई। बस्ती के लोगों ने बताया कि थाने पर कई बार सूचना देने के बाद भी पुलिस समय से नहीं पहुंची। यदि पुलिस जल्दी आ गई होती तो दिनेश का हंसता खेलता परिवार नहीं उजड़ता।
प्रियंका का शव पोस्टमार्टम के लिए बीएचयू मोर्चरी में रखा गया था। पोस्टमार्टम के समय प्रियंका के आभूषण सोने की चेन, मंगलसूत्र, अंगूठी अन्य जेवर को चुरा लिया गया। पोस्टमार्टम के बाद जब परिजनों को शव सौंपा गया तो जेवरात चोरी की जानकारी हुई। प्रियंका के परिजनों ने जब हो हल्ला मचाया तब जाकर पूरे जेवर मिले। यह घटना अस्पताल प्रशासन तक पहुंच गई।
| वाराणसी के कंदवा गांव में रास्ते के विवाद को लेकर पट्टीदारों ने मंगलवार सुबह अध्यापिका प्रियंका वर्मा की लाठी-डंडे और ईंट से वार कर हत्या कर दी। जबकि अध्यापिका के पति दिनेश प्रजापति सहित परिवार के चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को बीएचयू स्थित ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। घायल दिनेश के चचेरे भाई विजय की तहरीर पर मंडुवाडीह पुलिस ने सात नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। दो आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। घटनास्थल पर पहुंचे डीसीपी काशी जोन और एसीपी ने जांच की। मंडुवाडीह थाना क्षेत्र कंदवा के प्रजापति बस्ती में बीएचयू से सेवानिवृत्त कर्मचारी कल्लू राम प्रजापति का पुस्तैनी मकान है। बीएचयू में पैथालाजिस्ट के पद पर कार्यरत पुत्र दिनेश प्रजापति, जौनपुर जिले के गौरा बादशाहपुर में प्राथमिक विद्यालय में अध्यापिका बहू प्रियंका प्रजापति, पुत्री माया और परिवार के मनोज व चिंटू के साथ रहते हैं। कल्लू के भाई स्व. लालजी के पुत्र दीपक, पुनवासी के पुत्र राजेन्द्र, रामचरण के दो पुत्र श्रीराम व रवि थोड़ी दूर पर मकान बनवाकर रहते हैं। प्रजापति बस्ती में ही दोनों परिवारों की जमीन है। उसी के पास एक छोटा सा मंदिर भी है। मंदिर से सटे जमीन की बाउंड्री करने को लेकर पिछले दस दिनों से कल्लू और दीपक में विवाद चल रहा था। देखें अगली स्लाइड्स. . . । सोमवार को भी दोनों परिवारों में विवाद हुआ था तो उस समय पुलिस पहुंची तो मामला शांत हो गया था। इसके बाद सुबह साढ़े सात बजे दीपक दोबारा पहुंचा और कल्लू के परिवार से विवाद करने लगा। यही नहीं, दीपक ने फोन कर अपने परिजनों को बुला लिया। सभी लाठी, डंडे, लोहे के रॉड से लैस होकर पहुंचे और मारपीट करने लगे। परिजनों की पिटाई देख बहू प्रियंका बचाव के लिए सामने आ गई तो हमलावरों ने पहले ईंट से प्रियंका पर वार किया। ईंट लगते ही प्रियंका लहूलुहान होकर गिर गई तो आरोप है कि दीपक और राजेंद्र ने लाठी व डंडे से प्रियंका के सिर पर कई वार किया। इस दौरान हमलावरों ने दिनेश, माया, मनोज और चिंटू को भी लाठी व डंडे से पीटा। घटनास्थल पर ही लहूलुहान अचेतावस्था में प्रियंका को लेकर परिजन पुलिस को सूचित करते हुए बीएचयू ट्रॉमा सेंटर पहुंचे तो चिकित्सकों ने प्रियंका को मृत घोषित कर दिया। यह सुनते ही पूरे परिवार ने कोहराम मच गया। मृतका प्रियंका की एक पुत्री खुशी व पुत्र हिमांशु है। घटनास्थल से मंडुवाडीह पुलिस ने दो लाठी, एक लोहे की पाइप, ईंट व खून से सना गमछा बरामद किया। मृतका के पति दिनेश प्रजापति के चचेरे भाई विनोद कुमार प्रजापति की तहरीर पर मंडुवाडीह थाने की पुलिस ने दीपक प्रजापति, रवि प्रजापति, राजेंद्र प्रजापति, प्रकाश प्रजापति, श्रीराम प्रजापति, शुभम प्रजापति व कन्नू यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। आरोपियों की तलाश में पुलिस की टीमें दबिश दे रही हैं। इस संबंध में काशी जोन के डीसीपी अमित कुमार ने बताया कि मामले में आरोपी दीपक व कन्नू यादव को गिरफ्तार कर लिया गया। अन्य की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। प्रजापति बस्ती में हमलावर जब दिनेश की बेरहमी से पिटाई कर रहे थे तो पत्नी को घर के अंदर रहा नहीं गया। सुहाग की रक्षा के लिए पत्नी प्रियंका घर की चौखट को लांघकर बाहर निकली और पति के ऊपर पड़ रही लाठियों को अपने ऊपर ले लिया। हमलावरों के सिर पर खून सवार था तो उन्हें कुछ नहीं सूझा और पत्नी प्रियंका के ऊपर लाठियों की बरसात कर दी। इस दौरान हमलावरों ने पहले प्रियंका के सिर पर ईंट से वार किया था। मां और बाप को लहूलुहान हाल में देख मासूम बेटा हिमांशु और बेटी खुशी चीखने चिल्लाने लगे। मौके पर ही प्रियंका ने दम तोड़ दिया था। बस्ती में इस बात की चर्चा जोरों पर रही कि सुहाग की रक्षा को पत्नी ने अपने प्राणों की आहुति दे दी। कल्लू के परिजनों ने थाने में पत्र देकर यह गुहार लगाई थी कि किसी भी समय दीपक के परिवार वाले हमला कर सकते हैं। जमीन को लेकर जबरदस्ती कर रहे हैं। घटना के समय भी पुलिस यदि जल्दी पहुंची होती तो शायद प्रियंका की जान बच जाती। मारपीट खत्म होने के बाद आरोपी दीपक तहरीर लेकर मंडुवाडीह थाने पहुंचा तब पुलिस को जानकारी हुई। बस्ती के लोगों ने बताया कि थाने पर कई बार सूचना देने के बाद भी पुलिस समय से नहीं पहुंची। यदि पुलिस जल्दी आ गई होती तो दिनेश का हंसता खेलता परिवार नहीं उजड़ता। प्रियंका का शव पोस्टमार्टम के लिए बीएचयू मोर्चरी में रखा गया था। पोस्टमार्टम के समय प्रियंका के आभूषण सोने की चेन, मंगलसूत्र, अंगूठी अन्य जेवर को चुरा लिया गया। पोस्टमार्टम के बाद जब परिजनों को शव सौंपा गया तो जेवरात चोरी की जानकारी हुई। प्रियंका के परिजनों ने जब हो हल्ला मचाया तब जाकर पूरे जेवर मिले। यह घटना अस्पताल प्रशासन तक पहुंच गई। |
Virat Kohli Gautam Gambhir Clash: विराट कोहली और गौतम गंभीर विश्व क्रिकेट में दो बहुत बड़े नाम हैं, लेकिन आईपीएल के 43 मैच में दोनों के बीच जो कुछ भी हुआ, वो क्रिकेट के लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं है। सोमवार को एलएसजी के खिलाफ आरसीबी ने जीत दर्ज की, इसके बाद किसी बात को लेकर विराट कोहली और एलएसजी के खिलाड़ी नवीन-उल-हक के बीच विवाद हुआ था, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि लड़ाई किसने शुरू की थी। मैच खत्म होने के बाद गंभीर और कोहली के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।
आईपीएल के नियमों का उल्लंघन करने पर विराट कोहली, गौतम गंभीर और नवीन उल हक पर जुर्माना भी लगाया गया। इस बीच अन्य दिग्गजों की तरह इस विवाद को लेकर टीम इंडिया के पूर्व हेड कोच रवि शास्त्री भी खुश नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वह स्टार जोड़ी के बीच मध्यस्थता और चीजों को शांत करने के लिए तैयार हैं।
रवि शास्त्री ने स्टार स्पोर्ट्स के साथ इस विवाद को लेकर बातचीत के दौरान कहा कि, 'मुझे लगता है कि एक या दो दिन में उन्हें एहसास होगा कि इसे बहुत बेहतर तरीके से संभाला जा सकता था। दोनों दिल्ली से आते हैं, और उन्होंने काफी क्रिकेट खेली है। मुझे लगता है कि सबसे अच्छी बात यह होगी कि दोनों को बैठाया जाए और इसे खत्म किया जाए। '
उन्होंने कहा कि, 'एलएसजी और आरसीबी के मैच में जो कुछ हुआ वो गलत था। इस तरह की चीजें मैदान पर नहीं होनी चाहिए, क्योंकि दुनियाभर के करोड़ों फैंस आपको देख रहे होते हैं। रवि शास्त्री का मानना है कि इस तरह के वाद-विवाद अगर बंद कमरे में ही हों तो अच्छा है। '
रवि शास्त्री से जब पूछा गया कि क्या वो इस मामले को शांत कराने के लिए तैयार हैं, तो उन्होंने जवाब दिया कि 'जैसे भी हो ये मामला सुलझना चाहिए। अगर मुझे करना है तो मैं इसके लिए तैयार हूं। उन्होंने कहा कि, अगर ये टीमें आपस में फिर भिड़ेंगी, तब फिर से इस तरह की चीजें देखने को मिल सकती हैं। '
दरअसल, कोहली और गंभीर पर आईपीएल की आचार संहिता का उल्लंघन करने के लिए मैच फीस का 100 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया था। मैच के बाद जब खिलाड़ी हाथ मिला रहे थे, तब एलएसजी गेंदबाज नवीन-उल-हक और कोहली के बीच कुछ कहासुनी हुई थी, हालांकि, आरसीबी के ग्लेन मेक्सवेल ने उन्हें अलग कर दिया। इसके बाद गौतम गंभीर और विराट कोहली के बीच कुछ कहासुनी हुई थी।
शुरू में कोहली को गंभीर का कंधा पकड़े हुए देखा गया था, लेकिन जैसे-जैसे गर्मागर्म आदान-प्रदान जारी रहा, अनुभवी स्पिनर अमित मिश्रा, आरसीबी के कप्तान फाफ डु प्लेसिस और एलएसजी के सहायक कोच विजय दहिया ने भी दोनों को अलग किया। इस तकरार के बाद कोहली को एलएसजी कप्तान राहुल से बात करते भी देखा गया।
| Virat Kohli Gautam Gambhir Clash: विराट कोहली और गौतम गंभीर विश्व क्रिकेट में दो बहुत बड़े नाम हैं, लेकिन आईपीएल के तैंतालीस मैच में दोनों के बीच जो कुछ भी हुआ, वो क्रिकेट के लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं है। सोमवार को एलएसजी के खिलाफ आरसीबी ने जीत दर्ज की, इसके बाद किसी बात को लेकर विराट कोहली और एलएसजी के खिलाड़ी नवीन-उल-हक के बीच विवाद हुआ था, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि लड़ाई किसने शुरू की थी। मैच खत्म होने के बाद गंभीर और कोहली के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। आईपीएल के नियमों का उल्लंघन करने पर विराट कोहली, गौतम गंभीर और नवीन उल हक पर जुर्माना भी लगाया गया। इस बीच अन्य दिग्गजों की तरह इस विवाद को लेकर टीम इंडिया के पूर्व हेड कोच रवि शास्त्री भी खुश नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वह स्टार जोड़ी के बीच मध्यस्थता और चीजों को शांत करने के लिए तैयार हैं। रवि शास्त्री ने स्टार स्पोर्ट्स के साथ इस विवाद को लेकर बातचीत के दौरान कहा कि, 'मुझे लगता है कि एक या दो दिन में उन्हें एहसास होगा कि इसे बहुत बेहतर तरीके से संभाला जा सकता था। दोनों दिल्ली से आते हैं, और उन्होंने काफी क्रिकेट खेली है। मुझे लगता है कि सबसे अच्छी बात यह होगी कि दोनों को बैठाया जाए और इसे खत्म किया जाए। ' उन्होंने कहा कि, 'एलएसजी और आरसीबी के मैच में जो कुछ हुआ वो गलत था। इस तरह की चीजें मैदान पर नहीं होनी चाहिए, क्योंकि दुनियाभर के करोड़ों फैंस आपको देख रहे होते हैं। रवि शास्त्री का मानना है कि इस तरह के वाद-विवाद अगर बंद कमरे में ही हों तो अच्छा है। ' रवि शास्त्री से जब पूछा गया कि क्या वो इस मामले को शांत कराने के लिए तैयार हैं, तो उन्होंने जवाब दिया कि 'जैसे भी हो ये मामला सुलझना चाहिए। अगर मुझे करना है तो मैं इसके लिए तैयार हूं। उन्होंने कहा कि, अगर ये टीमें आपस में फिर भिड़ेंगी, तब फिर से इस तरह की चीजें देखने को मिल सकती हैं। ' दरअसल, कोहली और गंभीर पर आईपीएल की आचार संहिता का उल्लंघन करने के लिए मैच फीस का एक सौ प्रतिशत जुर्माना लगाया गया था। मैच के बाद जब खिलाड़ी हाथ मिला रहे थे, तब एलएसजी गेंदबाज नवीन-उल-हक और कोहली के बीच कुछ कहासुनी हुई थी, हालांकि, आरसीबी के ग्लेन मेक्सवेल ने उन्हें अलग कर दिया। इसके बाद गौतम गंभीर और विराट कोहली के बीच कुछ कहासुनी हुई थी। शुरू में कोहली को गंभीर का कंधा पकड़े हुए देखा गया था, लेकिन जैसे-जैसे गर्मागर्म आदान-प्रदान जारी रहा, अनुभवी स्पिनर अमित मिश्रा, आरसीबी के कप्तान फाफ डु प्लेसिस और एलएसजी के सहायक कोच विजय दहिया ने भी दोनों को अलग किया। इस तकरार के बाद कोहली को एलएसजी कप्तान राहुल से बात करते भी देखा गया। |
देश के 75वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बिहार के राज्यकर्मियों के लिए सीएम नीतीश कुमार ने बड़ा एलान किया है। सीएम ने सरकारी कर्मचारियों की महंगाई भत्ता को केन्द्र सरकार की तर्ज पर 17 प्रतिशत से बढ़ाकर 28 प्रतिशत कर दिया है। सीएम ने कहा कि जल्द ही वित्त विभाग इसकी अधिसूचना जारी करेगा।
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आज सीएम नीतीश कुमार ने बिहारवासियों को मुबारकबाद दी।
पटना में झंडा फहराने के बाद उन्होंने देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों को याद किया, और इस मौके पर प्रदेशवासियों के विकास के लिए एक के बाद एक कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की।
सीएम नीतीश कुमार ने इस मौके पर जो ऐलान किया उसमें, महिलाओं को बीपीएससी की अंतिम परीक्षा के लिए ₹100000 देने, स्कूलों के प्राचार्य की नियुक्ति प्रतियोगिता परीक्षा के जरिए कराने, प्रदेश में 3 नए कृषि विश्वविद्यालय का निर्माण, बिहार के सरकारी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता केंद्र की तर्ज पर 17% से 28% करने, अगले 4 साल में सहकारी समितियों का विस्तार, सुधा डेयरी का प्रखंड पंचायत स्तर तक विस्तार और बिहार के हरित आवरण को 17% तक पहुंचाने का लक्ष्य शामिल है।
सीएम नीतीश कुमार ने इस मौके पर कहा कि अगले 6 महीने में 6 करोड़ लोगों को टिका दिया जाएगा। उन्होंने कहा करोना की तीसरी लहर की बात की जा रही है, इसलिए हमें सतर्क रहने की आवश्यकता है। मास्क पहने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन बहुत जरूरी है। टीकाकरण को लेकर सरकार सचेत है। सीएम ने कहा कि करोना की तीसरी लहर को देखते हुए 134 जगहों पर ऑक्सीजन प्लांट लगाया जा रहा है। अभी तक तीन करोड़ लोगों को टीका लग चुका है व्यापक पैमाने पर करोना जांच, इलाज और दवा की व्यवस्था की गई है। अभी तक 3 करोड़ 94 लाख से ज्यादा जांच हो चुका है। अब राज्य में 250 एक्टिव मरीज हैं।
| देश के पचहत्तरवें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बिहार के राज्यकर्मियों के लिए सीएम नीतीश कुमार ने बड़ा एलान किया है। सीएम ने सरकारी कर्मचारियों की महंगाई भत्ता को केन्द्र सरकार की तर्ज पर सत्रह प्रतिशत से बढ़ाकर अट्ठाईस प्रतिशत कर दिया है। सीएम ने कहा कि जल्द ही वित्त विभाग इसकी अधिसूचना जारी करेगा। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आज सीएम नीतीश कुमार ने बिहारवासियों को मुबारकबाद दी। पटना में झंडा फहराने के बाद उन्होंने देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों को याद किया, और इस मौके पर प्रदेशवासियों के विकास के लिए एक के बाद एक कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की। सीएम नीतीश कुमार ने इस मौके पर जो ऐलान किया उसमें, महिलाओं को बीपीएससी की अंतिम परीक्षा के लिए एक लाख रुपया देने, स्कूलों के प्राचार्य की नियुक्ति प्रतियोगिता परीक्षा के जरिए कराने, प्रदेश में तीन नए कृषि विश्वविद्यालय का निर्माण, बिहार के सरकारी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता केंद्र की तर्ज पर सत्रह% से अट्ठाईस% करने, अगले चार साल में सहकारी समितियों का विस्तार, सुधा डेयरी का प्रखंड पंचायत स्तर तक विस्तार और बिहार के हरित आवरण को सत्रह% तक पहुंचाने का लक्ष्य शामिल है। सीएम नीतीश कुमार ने इस मौके पर कहा कि अगले छः महीने में छः करोड़ लोगों को टिका दिया जाएगा। उन्होंने कहा करोना की तीसरी लहर की बात की जा रही है, इसलिए हमें सतर्क रहने की आवश्यकता है। मास्क पहने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन बहुत जरूरी है। टीकाकरण को लेकर सरकार सचेत है। सीएम ने कहा कि करोना की तीसरी लहर को देखते हुए एक सौ चौंतीस जगहों पर ऑक्सीजन प्लांट लगाया जा रहा है। अभी तक तीन करोड़ लोगों को टीका लग चुका है व्यापक पैमाने पर करोना जांच, इलाज और दवा की व्यवस्था की गई है। अभी तक तीन करोड़ चौरानवे लाख से ज्यादा जांच हो चुका है। अब राज्य में दो सौ पचास एक्टिव मरीज हैं। |
दिव्य हिमाचल ब्यूरो - मंडी-जिला में एक और डाक्टर कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गई है। सराज विधानसभा क्षेत्र के तहत बाड़ा पीएचसी में तैनात एक महिला डाक्टर को कोरोना के लक्षण दिखाई दिए तो उन्होंने एहतियातन अपना सैंपल दिया और उसकी रिपोर्ट अब पॉजिटिव आई है। आजकल पीएचसी बगस्याड़ में बतौर स्वास्थ्य अधिकारी कार्यरत है तथा लोगों की सैंपलिंग भी कर रही हैं।
इनका सैंपल रविवार को चेक करने पर कोविड-19 से संबंधित पॉजिटिव पाया गया है। संक्रमित डाक्टर का कहना है कि किसी संक्रमित व्यक्ति का सैंपल लेते समय यह कांटेक्ट में आ गई होंगी। बताया गया कि महिला डाक्टर के पिता भी लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कालेज नेरचौक में विभागाध्यक्ष हैं और दोनों एक साथ रहते हैं। इस बीच इनका परिवार पंजाब भी गया और वापस भी लौटे तो आशंका जताई जा रही है कि कहीं डाक्टर इसी से संक्रमित तो नहीं हुई है। फिलहाल महिला डाक्टर को उनके पिता के ही आवास में होम आइसोलेट किया गया है। बता दें कि जिला में अभी तक कोरोना वारियर दो डाक्टर और 12 स्वास्थ्य कर्मी पॉजिटिव आ चुके हैं। सीएमओ मंडी डा. देवेंद्र शर्मा ने मामले की पुष्टि की है।
जिला में कोरोना संक्रमण की चपेट में अब तक कुल 398 लोग आ चुके हैं जिसमें अब केवल 40 केस एक्टिव हैं जबकि 351 लोग संक्रमित होकर ठीक भी हो चुके हैं। जिला में अब तक 7 लोगों की मौत कोरोना संक्रमण की चपेट में आने से हुई है।
| दिव्य हिमाचल ब्यूरो - मंडी-जिला में एक और डाक्टर कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गई है। सराज विधानसभा क्षेत्र के तहत बाड़ा पीएचसी में तैनात एक महिला डाक्टर को कोरोना के लक्षण दिखाई दिए तो उन्होंने एहतियातन अपना सैंपल दिया और उसकी रिपोर्ट अब पॉजिटिव आई है। आजकल पीएचसी बगस्याड़ में बतौर स्वास्थ्य अधिकारी कार्यरत है तथा लोगों की सैंपलिंग भी कर रही हैं। इनका सैंपल रविवार को चेक करने पर कोविड-उन्नीस से संबंधित पॉजिटिव पाया गया है। संक्रमित डाक्टर का कहना है कि किसी संक्रमित व्यक्ति का सैंपल लेते समय यह कांटेक्ट में आ गई होंगी। बताया गया कि महिला डाक्टर के पिता भी लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कालेज नेरचौक में विभागाध्यक्ष हैं और दोनों एक साथ रहते हैं। इस बीच इनका परिवार पंजाब भी गया और वापस भी लौटे तो आशंका जताई जा रही है कि कहीं डाक्टर इसी से संक्रमित तो नहीं हुई है। फिलहाल महिला डाक्टर को उनके पिता के ही आवास में होम आइसोलेट किया गया है। बता दें कि जिला में अभी तक कोरोना वारियर दो डाक्टर और बारह स्वास्थ्य कर्मी पॉजिटिव आ चुके हैं। सीएमओ मंडी डा. देवेंद्र शर्मा ने मामले की पुष्टि की है। जिला में कोरोना संक्रमण की चपेट में अब तक कुल तीन सौ अट्ठानवे लोग आ चुके हैं जिसमें अब केवल चालीस केस एक्टिव हैं जबकि तीन सौ इक्यावन लोग संक्रमित होकर ठीक भी हो चुके हैं। जिला में अब तक सात लोगों की मौत कोरोना संक्रमण की चपेट में आने से हुई है। |
अगर दुकानदार के फोन में NFC टेक्नोलॉजी है तो वह इसका इस्तेमाल प्वॉइंट ऑफ सेल यानी POS की तरह कर सकता है. इस टेक्नोलॉजी के लॉन्च होने के बाद दुकानदार अब 5000 तक पेमेंट स्मार्टफोन की मदद से कॉन्टैक्टलेस ले सकते हैं.
नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया यानी NPCI ने एसबीआई पेमेंट (SBI Payments) के साथ साझेदारी में 'RuPay SoftPoS' को लॉन्च किया है. रूपे सॉफ्ट पीओएस को दुकानदारों के लिए लॉन्च किया गया है. इस टेक्नोलॉजी अडवांसमेंट की मदद से स्मार्टफोन पीओएस मशीन की तरह काम करेगा. अगर दुकानदार के फोन में NFC टेक्नोलॉजी है तो वह इसका इस्तेमाल प्वॉइंट ऑफ सेल यानी POS की तरह कर सकता है. इस टेक्नोलॉजी के लॉन्च होने के बाद दुकानदार अब 5000 तक पेमेंट स्मार्टफोन की मदद से कॉन्टैक्टलेस ले सकते हैं.
NPCI की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि RuPay SoftPoS अपने रिटेल कस्टमर्स को बहुत कम कीमत पर पेमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर का लाभ उठाने देगा. इस सर्विस के लॉन्च होने से डिजिटल पेमेंट में काफी तेजी आएगी. इसके अलावा लाखों MSMEs इसका लाभ उठा पाएंगे. इसके लिए मर्चेंट को अपने स्मार्टफोन में एक ऐप्लिकेशन डाउनलोड करना होगा. उसके बाद यह POS Machine की तरह काम करने लगेगा. एनपीसीआई का कहना है कि इसकी मदद से छोटे दुकानदारों की कैश में पेमेंट लेने की आदत कम होगी. इससे डिजिटल पेमेंट में अच्छी खासी तेजी आएगी.
SBI Payments के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ गिरी कुमार नैयर ने कहा कि हम NPCI के साथ मिलकर सरकार के डिजिटल इंडिया प्रोग्राम की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं. इस सुविधा का इस्तेमाल मोबिलिटी कार्ड NCMC cards (National Common Mobility Card) और रूपे कार्ड पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
NPCI के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर प्रवीण राय ने कहा कि SBI के साथ पार्टनरशिप कर RuPay SoftPoS को लॉन्च कर हम खुश हैं. पेमेंट की दुनिया में हम लगातार इनोवेशन पर काम कर रहे हैं. हम इस प्लैटफॉर्म से देश के सुदूर इलाकों में रहने वाले दुकानदारों को जोड़ना चाहते हैं.
| अगर दुकानदार के फोन में NFC टेक्नोलॉजी है तो वह इसका इस्तेमाल प्वॉइंट ऑफ सेल यानी POS की तरह कर सकता है. इस टेक्नोलॉजी के लॉन्च होने के बाद दुकानदार अब पाँच हज़ार तक पेमेंट स्मार्टफोन की मदद से कॉन्टैक्टलेस ले सकते हैं. नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया यानी NPCI ने एसबीआई पेमेंट के साथ साझेदारी में 'RuPay SoftPoS' को लॉन्च किया है. रूपे सॉफ्ट पीओएस को दुकानदारों के लिए लॉन्च किया गया है. इस टेक्नोलॉजी अडवांसमेंट की मदद से स्मार्टफोन पीओएस मशीन की तरह काम करेगा. अगर दुकानदार के फोन में NFC टेक्नोलॉजी है तो वह इसका इस्तेमाल प्वॉइंट ऑफ सेल यानी POS की तरह कर सकता है. इस टेक्नोलॉजी के लॉन्च होने के बाद दुकानदार अब पाँच हज़ार तक पेमेंट स्मार्टफोन की मदद से कॉन्टैक्टलेस ले सकते हैं. NPCI की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि RuPay SoftPoS अपने रिटेल कस्टमर्स को बहुत कम कीमत पर पेमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर का लाभ उठाने देगा. इस सर्विस के लॉन्च होने से डिजिटल पेमेंट में काफी तेजी आएगी. इसके अलावा लाखों MSMEs इसका लाभ उठा पाएंगे. इसके लिए मर्चेंट को अपने स्मार्टफोन में एक ऐप्लिकेशन डाउनलोड करना होगा. उसके बाद यह POS Machine की तरह काम करने लगेगा. एनपीसीआई का कहना है कि इसकी मदद से छोटे दुकानदारों की कैश में पेमेंट लेने की आदत कम होगी. इससे डिजिटल पेमेंट में अच्छी खासी तेजी आएगी. SBI Payments के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ गिरी कुमार नैयर ने कहा कि हम NPCI के साथ मिलकर सरकार के डिजिटल इंडिया प्रोग्राम की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं. इस सुविधा का इस्तेमाल मोबिलिटी कार्ड NCMC cards और रूपे कार्ड पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है. NPCI के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर प्रवीण राय ने कहा कि SBI के साथ पार्टनरशिप कर RuPay SoftPoS को लॉन्च कर हम खुश हैं. पेमेंट की दुनिया में हम लगातार इनोवेशन पर काम कर रहे हैं. हम इस प्लैटफॉर्म से देश के सुदूर इलाकों में रहने वाले दुकानदारों को जोड़ना चाहते हैं. |
बहराइच एक तरफ गवर्नमेंट वायु प्रदूषण से आवाम को राहत दिलाने के लिए जहरीले धुंए पर लगाम कसने के लिए पराली जलाने वालों पर शख़्त कारवाही करने का काम कर रही है। वहीं, एन। जी। टी द्वारा लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण के खतरे को लेकर सभी राज्यों को नोटिसें जारी कर जहरीले हो रहे वातावरण पर रोक लगाने के लिए शख़्त कदम उठाए जा रहे हैं। इसके बावजूद अनेक उत्तरदायी की गवर्नमेंट की मंसा पर पानी फेरने से बाज नहीं आ रहे।
मामला बहराइच के जिला हॉस्पिटल परिसर में देखने को मिला। जहां स्त्री हॉस्पिटल के सामने बनें कूड़ा घर में प्रबंध से जुड़े जिम्मेदारों की नाक के नीचे आग लगा दी। उन्होंने मेडिकल वेस्ट मटेरियल को नष्ट करने के लिए उसमें आग लगा दी। आपको बता दें कि हॉस्पिटल प्रबंधन की ढिलाई के चलते हॉस्पिटल परिसर में धू-धू कर जल रहे कूड़े की जहरीली दुर्गंध और धुंए का गुबार न केवल स्त्री हॉस्पिटल वार्ड बल्कि हॉस्पिटल परिसर सहित इर्द-गिर्द के क्षेत्र में फैल गया। सारा क्षेत्र धुंए से सराबोर नजर आया। प्रश्न ये है कि सरकारी मुलाजिम ही गवर्नमेंट के आदेशों को धुंए में उड़ाने पर तुले गए हैं, तो आम जनता पर आदेशों का कितना असर होगा ये आप स्वयं सोच सकते हैं।
एक तरफ गवर्नमेंट पराली जलाने वाले किसानों पर मुकदमे दर्ज कर रही है। ऐसे में उत्तरदायी ही जब ऐसे कार्य होते हैं तो कार्रवाई क्यों नहीं की जाती है। ऐसा ही एक मामला बहराइच के जिला हॉस्पिटल का सामने आया है। जहां पर हॉस्पिटल परिसर में बने कूड़ा और वेस्ट मटेरियल डालने वाले जगह पर आग लगा दी जाती है। कूड़े में लगी आग से निकलने वाले जहरीले धुएं से लोगों को सांस लेने में काफी परेशानियां हो रही है। वहीं, स्त्री हॉस्पिटल मैं पैदा हुए नवजात शिशु की भी जान को खतरा मंडरा रहा है। वीडियो में आप साफ देख सकते हैं कि किस ढंग से आग लगी हुई है। मगर जिम्मेदारों का इसपर और कोई ध्यान नहीं दिया गया है।
| बहराइच एक तरफ गवर्नमेंट वायु प्रदूषण से आवाम को राहत दिलाने के लिए जहरीले धुंए पर लगाम कसने के लिए पराली जलाने वालों पर शख़्त कारवाही करने का काम कर रही है। वहीं, एन। जी। टी द्वारा लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण के खतरे को लेकर सभी राज्यों को नोटिसें जारी कर जहरीले हो रहे वातावरण पर रोक लगाने के लिए शख़्त कदम उठाए जा रहे हैं। इसके बावजूद अनेक उत्तरदायी की गवर्नमेंट की मंसा पर पानी फेरने से बाज नहीं आ रहे। मामला बहराइच के जिला हॉस्पिटल परिसर में देखने को मिला। जहां स्त्री हॉस्पिटल के सामने बनें कूड़ा घर में प्रबंध से जुड़े जिम्मेदारों की नाक के नीचे आग लगा दी। उन्होंने मेडिकल वेस्ट मटेरियल को नष्ट करने के लिए उसमें आग लगा दी। आपको बता दें कि हॉस्पिटल प्रबंधन की ढिलाई के चलते हॉस्पिटल परिसर में धू-धू कर जल रहे कूड़े की जहरीली दुर्गंध और धुंए का गुबार न केवल स्त्री हॉस्पिटल वार्ड बल्कि हॉस्पिटल परिसर सहित इर्द-गिर्द के क्षेत्र में फैल गया। सारा क्षेत्र धुंए से सराबोर नजर आया। प्रश्न ये है कि सरकारी मुलाजिम ही गवर्नमेंट के आदेशों को धुंए में उड़ाने पर तुले गए हैं, तो आम जनता पर आदेशों का कितना असर होगा ये आप स्वयं सोच सकते हैं। एक तरफ गवर्नमेंट पराली जलाने वाले किसानों पर मुकदमे दर्ज कर रही है। ऐसे में उत्तरदायी ही जब ऐसे कार्य होते हैं तो कार्रवाई क्यों नहीं की जाती है। ऐसा ही एक मामला बहराइच के जिला हॉस्पिटल का सामने आया है। जहां पर हॉस्पिटल परिसर में बने कूड़ा और वेस्ट मटेरियल डालने वाले जगह पर आग लगा दी जाती है। कूड़े में लगी आग से निकलने वाले जहरीले धुएं से लोगों को सांस लेने में काफी परेशानियां हो रही है। वहीं, स्त्री हॉस्पिटल मैं पैदा हुए नवजात शिशु की भी जान को खतरा मंडरा रहा है। वीडियो में आप साफ देख सकते हैं कि किस ढंग से आग लगी हुई है। मगर जिम्मेदारों का इसपर और कोई ध्यान नहीं दिया गया है। |
'ये रिश्ता क्या कहलाता है' कि एक्ट्रेस ने तलाक के बाद छोड़ दी थी अपने बेटे की कस्टडी, जानें क्यों?
Simran Khanna Bharat Dudani divorced : बॉलीवुड और टीवी की मशहूर अदाकारा चाहत खन्ना (Chahat Khanna)और की बहन और 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' (Yeh Rishta Kya Kehlata Hai) की एक्ट्रेस सिमरन खन्ना ने अपने पति भरत दुदानी (Bharat Dudani) से तलाक के बाद अपने बेटे की कस्टडी छोड़ दी थी। क्यों? चलिए जानें।
| 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' कि एक्ट्रेस ने तलाक के बाद छोड़ दी थी अपने बेटे की कस्टडी, जानें क्यों? Simran Khanna Bharat Dudani divorced : बॉलीवुड और टीवी की मशहूर अदाकारा चाहत खन्ना और की बहन और 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' की एक्ट्रेस सिमरन खन्ना ने अपने पति भरत दुदानी से तलाक के बाद अपने बेटे की कस्टडी छोड़ दी थी। क्यों? चलिए जानें। |
भोपाल। कांग्रेस की मध्यप्रदेश इकाई के नवनियुक्त अध्यक्ष कमलनाथ ने यहां मंगलवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा कि अब वादों का वक्त नहीं रहा, बल्कि अब उनका अपने कार्यकाल का हिसाब देने का समय है। दिल्ली से भोपाल पहुंचे कमलनाथ ने कांग्रेस कार्यालय में पहुंचकर पदभार संभाला।
उन्होंेने कार्यकर्ताओं का आान किया कि वे पार्टी के हित में कार्य करने में जुट जाएं। कार्यकर्ता ही कांग्रेस की सबसे बड़ी ताकत हैं। प्रदेश की जनता बदलाव चाहती है। राज्य को भाजपा और देश को मोदी से मुक्त कराना चाहती है।
इससे पहले, कमलनाथ और ज्योतिरादित्य ने अन्य नेताओं के साथ हवाईअड्डे से कांग्रेस कार्यालय तक रोड शो किया। लगभग 18 किलोमीटर का रास्ता तय करने में पांच घंटे से ज्यादा समय लगा। कार्यकर्ताओं ने जगह-जगह अपने नेताओं का स्वागत किया।
कमलनाथ मंगलवार सुबह वरिष्ठ नेताओं के साथ भोपाल पहुंचे। पदभार संभालने के बाद वह यहां पार्टी जनों व पार्टी विधायकों के साथ बैठक करेंगे और आगली रणनीति तय करेंगे।
| भोपाल। कांग्रेस की मध्यप्रदेश इकाई के नवनियुक्त अध्यक्ष कमलनाथ ने यहां मंगलवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा कि अब वादों का वक्त नहीं रहा, बल्कि अब उनका अपने कार्यकाल का हिसाब देने का समय है। दिल्ली से भोपाल पहुंचे कमलनाथ ने कांग्रेस कार्यालय में पहुंचकर पदभार संभाला। उन्होंेने कार्यकर्ताओं का आान किया कि वे पार्टी के हित में कार्य करने में जुट जाएं। कार्यकर्ता ही कांग्रेस की सबसे बड़ी ताकत हैं। प्रदेश की जनता बदलाव चाहती है। राज्य को भाजपा और देश को मोदी से मुक्त कराना चाहती है। इससे पहले, कमलनाथ और ज्योतिरादित्य ने अन्य नेताओं के साथ हवाईअड्डे से कांग्रेस कार्यालय तक रोड शो किया। लगभग अट्ठारह किलोग्राममीटर का रास्ता तय करने में पांच घंटे से ज्यादा समय लगा। कार्यकर्ताओं ने जगह-जगह अपने नेताओं का स्वागत किया। कमलनाथ मंगलवार सुबह वरिष्ठ नेताओं के साथ भोपाल पहुंचे। पदभार संभालने के बाद वह यहां पार्टी जनों व पार्टी विधायकों के साथ बैठक करेंगे और आगली रणनीति तय करेंगे। |
रांचीः झारखंड हाईकोर्ट के नए भवन के लिए 106 करोड़ 21 लाख 46 हजार रुपए की स्वीकृति दी गई है. इसके पहले भवन निर्माण के लिए 267.66 करोड़ रुपए का टेंडर हुआ था, जिसमें 295 करोड़ का भुगतान हो चुका है. शेष कार्य के लिए इस राशि की स्वीकृति दी गई है. मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में यह निर्णय लिया है. बैठक में कुल 25 एजेंडों को स्वीकृति दी गई.
पोस्को एक्ट के तहत 22 फास्ट ट्रैक कोर्ट के निर्माण की स्वीकृति दी गई. इसमें जिला न्यायाधिश स्तर के 22 पद अस्थायी रूप से एक वर्ष के लिए होंगे. झारखंड वरीय न्यायिक सेवा (भर्ती नियुक्ति एवं सेवाशर्तें) नियमावली, 2001 के नियम 4(a) में उल्लिखित प्रावधान तथा झारखंड उच्च न्यायालय की अनुशंसा के आलोक में, झारखंड वरीय न्यायिक सेवा में जिला न्यायाधीश के पद पर सीधी भर्ती द्वारा नियुक्त किए गए 03 अभ्यर्थियों की नियुक्ति की कार्रवाई पर घटनोत्तर स्वीकृति दी गई. झारखंड राज्य के महाधिवक्ता राजीव रंजन की नियुक्ति की घटनोत्तर स्वीकृति दी गई.
झारखंड राज्य के अधीनस्थ न्यायालयों के लिए 24 कोर्ट मेनेजर के स्थायी पदों के सृजन की स्वीकृति दी गई. रेप एंड पोस्को एक्ट के अंतर्गत लंबित वादों के त्वरित सुनवाई एवं निष्पादन के लिए झारखंड राज्य में जिला एवं अपर सत्र न्यायधीश स्तर के 22 फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों की प्रशासनिक स्थापना के सुचारू संचालन के लिए प्रत्येक न्यायालय में वर्ग-III एवं वर्ग-IV के 07-07 कुल 154 (एक सौ चौवन) अराजपत्रित पदों के सृजन पर घटनोत्तर स्वीकृति दी गई. हजारीबाग जिला अंतर्गत बरही अनुमंडल में न्यायिक दंडाधिकारी के 02 न्यायालय के गठन करने की स्वीकृति दी गई.
डॉ. वीरेंद्र कुमार, चिकित्सा पदाधिकारी, रेफरल अस्पताल डोमचांच, कोडरमा को सेवा से विमुक्त करने की स्वीकृति दी गई. डॉ आलोक कुमार श्रीवास्तव, चिकित्सा पदाधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ईचागढ़, सरायकेला-खरसावां सेवा से विमुक्त करने की स्वीकृति दी गई. झारखंड राज्य भौतिक चिकित्सा (फिजियोथेरेपी) परिषद विधेयक-2020 के गठन की स्वीकृति दी गई. झारखंड मोटर वाहन करारोपण (संशोधन) विधेयक, 2020 के प्रारूप पर स्वीकृति दी गई.
चालू वित्तीय वर्ष 2019-20 में गृह रक्षा वाहिनी मुख्यालय के स्थापना व्यय के लिए प्राप्त बजटीय उपबंध की राशि से लोकसभा चुनाव 2019, में प्रतिनियुक्त किए गए गृह रक्षकों के कर्तव्य भत्ता आदि के भुगतान होने, गृह रक्षकों के मानदेय राशि में वृद्धि होने एवं आकस्मिक ड्यूटी में प्रतिनियुक्त गृह रक्षकों के लंबित कर्तव्य भत्ता के भुगतान के लिए झारखंड आकस्मिकता निधि से 32 करोड़ 6 लाख 43 हजार रुपए मात्र अग्रिम प्रस्ताव पर घटनोत्तर अनुमोदन की स्वीकृति दी गई. संविधान (एक सौ छब्बीसवां संशोधन) विधेयक, 2019 का अनुसमर्थन करने पर घटनोत्तर स्वीकृति दी गई.
झारखंड चिकित्सा शिक्षा सेवा (नियुक्ति प्रोन्नति एवं सेवा शर्त) नियमावली 2018 में अंकित प्रावधान को संशोधित करते हुए झारखंड चिकित्सा शिक्षा सेवा (नियुक्ति प्रोन्नति एवं सेवा शर्त) संशोधन नियमावली 2020 के गठन की स्वीकृति दी गई. वित्तीय वर्ष 2019-20 के तृतीय अनुपूरक व्यय विवरणी की घटनोत्तर स्वीकृति दी गई. वित्तीय वर्ष 2019-20 के द्वितीय अनुपूरक व्यय विवरणी पर घटनोत्तर स्वीकृति दी गई.
माननीय सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली के सिविल अपील वाद संख्या-7357/1996 में दिनांक 20 अगस्त 1998 को पारित न्यायादेश एवं माननीय झारखंड उच्च न्यायालय, रांची द्वारा विभिन्न LPA'S में पारित न्यायाधीश के आलोक में सहकारिता विभाग झारखंड अंतर्गत विभिन्न सहकारी समितियों (लैंपस/पैक्स) में कार्यरत/सेवानिवृत्त सहकारिता प्रबंधकों/पेड मैनेजरों द्वारा पूर्व में की गई सेवा की गणना राज्य सरकार अंतर्गत वर्ग-3 में की गई सेवा के साथ पेंशन प्रदायी सेवा के रूप में विनियमित करने की स्वीकृति दी गई.
पाकुड़ जिला अंतर्गत अंचल हिरणपुर के मौजा बागशीशा अंतर्निहित कुल रकबा-20 एकड़ गैरमजरूआ खास भूमि पर जवाहर नवोदय विद्यालय पाकुड़-2 की स्थापना के लिए नवोदय विद्यालय समिति, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार को निःशुल्क भू-हस्तांतरण करने की स्वीकृति दी गई.
| रांचीः झारखंड हाईकोर्ट के नए भवन के लिए एक सौ छः करोड़ इक्कीस लाख छियालीस हजार रुपए की स्वीकृति दी गई है. इसके पहले भवन निर्माण के लिए दो सौ सरसठ.छयासठ करोड़ रुपए का टेंडर हुआ था, जिसमें दो सौ पचानवे करोड़ का भुगतान हो चुका है. शेष कार्य के लिए इस राशि की स्वीकृति दी गई है. मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में यह निर्णय लिया है. बैठक में कुल पच्चीस एजेंडों को स्वीकृति दी गई. पोस्को एक्ट के तहत बाईस फास्ट ट्रैक कोर्ट के निर्माण की स्वीकृति दी गई. इसमें जिला न्यायाधिश स्तर के बाईस पद अस्थायी रूप से एक वर्ष के लिए होंगे. झारखंड वरीय न्यायिक सेवा नियमावली, दो हज़ार एक के नियम चार में उल्लिखित प्रावधान तथा झारखंड उच्च न्यायालय की अनुशंसा के आलोक में, झारखंड वरीय न्यायिक सेवा में जिला न्यायाधीश के पद पर सीधी भर्ती द्वारा नियुक्त किए गए तीन अभ्यर्थियों की नियुक्ति की कार्रवाई पर घटनोत्तर स्वीकृति दी गई. झारखंड राज्य के महाधिवक्ता राजीव रंजन की नियुक्ति की घटनोत्तर स्वीकृति दी गई. झारखंड राज्य के अधीनस्थ न्यायालयों के लिए चौबीस कोर्ट मेनेजर के स्थायी पदों के सृजन की स्वीकृति दी गई. रेप एंड पोस्को एक्ट के अंतर्गत लंबित वादों के त्वरित सुनवाई एवं निष्पादन के लिए झारखंड राज्य में जिला एवं अपर सत्र न्यायधीश स्तर के बाईस फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों की प्रशासनिक स्थापना के सुचारू संचालन के लिए प्रत्येक न्यायालय में वर्ग-III एवं वर्ग-IV के सात-सात कुल एक सौ चौवन अराजपत्रित पदों के सृजन पर घटनोत्तर स्वीकृति दी गई. हजारीबाग जिला अंतर्गत बरही अनुमंडल में न्यायिक दंडाधिकारी के दो न्यायालय के गठन करने की स्वीकृति दी गई. डॉ. वीरेंद्र कुमार, चिकित्सा पदाधिकारी, रेफरल अस्पताल डोमचांच, कोडरमा को सेवा से विमुक्त करने की स्वीकृति दी गई. डॉ आलोक कुमार श्रीवास्तव, चिकित्सा पदाधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ईचागढ़, सरायकेला-खरसावां सेवा से विमुक्त करने की स्वीकृति दी गई. झारखंड राज्य भौतिक चिकित्सा परिषद विधेयक-दो हज़ार बीस के गठन की स्वीकृति दी गई. झारखंड मोटर वाहन करारोपण विधेयक, दो हज़ार बीस के प्रारूप पर स्वीकृति दी गई. चालू वित्तीय वर्ष दो हज़ार उन्नीस-बीस में गृह रक्षा वाहिनी मुख्यालय के स्थापना व्यय के लिए प्राप्त बजटीय उपबंध की राशि से लोकसभा चुनाव दो हज़ार उन्नीस, में प्रतिनियुक्त किए गए गृह रक्षकों के कर्तव्य भत्ता आदि के भुगतान होने, गृह रक्षकों के मानदेय राशि में वृद्धि होने एवं आकस्मिक ड्यूटी में प्रतिनियुक्त गृह रक्षकों के लंबित कर्तव्य भत्ता के भुगतान के लिए झारखंड आकस्मिकता निधि से बत्तीस करोड़ छः लाख तैंतालीस हजार रुपए मात्र अग्रिम प्रस्ताव पर घटनोत्तर अनुमोदन की स्वीकृति दी गई. संविधान विधेयक, दो हज़ार उन्नीस का अनुसमर्थन करने पर घटनोत्तर स्वीकृति दी गई. झारखंड चिकित्सा शिक्षा सेवा नियमावली दो हज़ार अट्ठारह में अंकित प्रावधान को संशोधित करते हुए झारखंड चिकित्सा शिक्षा सेवा संशोधन नियमावली दो हज़ार बीस के गठन की स्वीकृति दी गई. वित्तीय वर्ष दो हज़ार उन्नीस-बीस के तृतीय अनुपूरक व्यय विवरणी की घटनोत्तर स्वीकृति दी गई. वित्तीय वर्ष दो हज़ार उन्नीस-बीस के द्वितीय अनुपूरक व्यय विवरणी पर घटनोत्तर स्वीकृति दी गई. माननीय सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली के सिविल अपील वाद संख्या-सात हज़ार तीन सौ सत्तावन/एक हज़ार नौ सौ छियानवे में दिनांक बीस अगस्त एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे को पारित न्यायादेश एवं माननीय झारखंड उच्च न्यायालय, रांची द्वारा विभिन्न LPA'S में पारित न्यायाधीश के आलोक में सहकारिता विभाग झारखंड अंतर्गत विभिन्न सहकारी समितियों में कार्यरत/सेवानिवृत्त सहकारिता प्रबंधकों/पेड मैनेजरों द्वारा पूर्व में की गई सेवा की गणना राज्य सरकार अंतर्गत वर्ग-तीन में की गई सेवा के साथ पेंशन प्रदायी सेवा के रूप में विनियमित करने की स्वीकृति दी गई. पाकुड़ जिला अंतर्गत अंचल हिरणपुर के मौजा बागशीशा अंतर्निहित कुल रकबा-बीस एकड़ गैरमजरूआ खास भूमि पर जवाहर नवोदय विद्यालय पाकुड़-दो की स्थापना के लिए नवोदय विद्यालय समिति, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार को निःशुल्क भू-हस्तांतरण करने की स्वीकृति दी गई. |
पी7 न्यूज का कैमरा जब केदारनाथ धाम पहुंचा तो डरा देने वाली तस्वीरें सामने आईं। देवभूमि पर बर्बादी का ऐसा कहर पहले कभी नहीं देखा गया था। कभी भक्तों की जय-जयकार से गूंजने वाले केदारनाथ धाम में शमशान-सा सन्नाटा छाया हुआ है।
पी7 न्यूज का कैमरा जब केदारनाथ धाम पहुंचा तो डरा देने वाली तस्वीरें सामने आईं। देवभूमि पर बर्बादी का ऐसा कहर पहले कभी नहीं देखा गया था। कभी भक्तों की जय-जयकार से गूंजने वाले केदारनाथ धाम में शमशान-सा सन्नाटा छाया हुआ है।
हिमालय में आए सैलाब के पांच दिन बाद पी7 चैनल जब केदारनाथ पहुंचा तो यहां का हाल रौंगटे खड़े देने वाला था। यहां पसरा सन्नाटा खून जमा देने वाला था। यहां की बर्बादी बता रही है कि केदारनाथ धाम पर सैलाब का कहर किस कदर लोगों पर टूटा होगा।
शनिवार की रात और रविवार की सुबह बरपे कुदरती कहर ने देखते ही देखते केदारनाथ धाम के आसपास सबकुछ बर्बाद कर दिया था। सैलाब ने केदारनाथ मंदिर के चबूतरे को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। मंदिर के बाहर लगे सूखे हुए हार इस भयानक तबाही के गवाह हैं। हमेशा शिवलिंग के सामने नजर आने वाली नंदी बैल की मूर्ति भी सलामत नहीं बची।
यहां के मौजूदा हाल के देखकर यकीन करना मुश्किल हो रहा था कि इसी जगह पर हजारों भक्तों तांता लगा रहता था। चौंकाने वाली बात यह है कि श्रद्धालुओं की दर्जनों लाशें पिछले 5 दिन से यहां अंतिम संस्कार का इंतजार कर रही हैं। जिन धर्मशालाओं में महादेव के दर्शन के बाद भक्त आराम करते थे वहां, इंसान का नामोनिशान तक नहीं है।
इस मातम के बीच भी उम्मीदें भी, उसी भोले शंकर से हैं, जिनका ये धाम है, क्योंकि केदारनाथ में सबकुछ तबाह हो चुका है, सलामत है तो सिर्फ शिवलिंग।
| पीसात न्यूज का कैमरा जब केदारनाथ धाम पहुंचा तो डरा देने वाली तस्वीरें सामने आईं। देवभूमि पर बर्बादी का ऐसा कहर पहले कभी नहीं देखा गया था। कभी भक्तों की जय-जयकार से गूंजने वाले केदारनाथ धाम में शमशान-सा सन्नाटा छाया हुआ है। पीसात न्यूज का कैमरा जब केदारनाथ धाम पहुंचा तो डरा देने वाली तस्वीरें सामने आईं। देवभूमि पर बर्बादी का ऐसा कहर पहले कभी नहीं देखा गया था। कभी भक्तों की जय-जयकार से गूंजने वाले केदारनाथ धाम में शमशान-सा सन्नाटा छाया हुआ है। हिमालय में आए सैलाब के पांच दिन बाद पीसात चैनल जब केदारनाथ पहुंचा तो यहां का हाल रौंगटे खड़े देने वाला था। यहां पसरा सन्नाटा खून जमा देने वाला था। यहां की बर्बादी बता रही है कि केदारनाथ धाम पर सैलाब का कहर किस कदर लोगों पर टूटा होगा। शनिवार की रात और रविवार की सुबह बरपे कुदरती कहर ने देखते ही देखते केदारनाथ धाम के आसपास सबकुछ बर्बाद कर दिया था। सैलाब ने केदारनाथ मंदिर के चबूतरे को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। मंदिर के बाहर लगे सूखे हुए हार इस भयानक तबाही के गवाह हैं। हमेशा शिवलिंग के सामने नजर आने वाली नंदी बैल की मूर्ति भी सलामत नहीं बची। यहां के मौजूदा हाल के देखकर यकीन करना मुश्किल हो रहा था कि इसी जगह पर हजारों भक्तों तांता लगा रहता था। चौंकाने वाली बात यह है कि श्रद्धालुओं की दर्जनों लाशें पिछले पाँच दिन से यहां अंतिम संस्कार का इंतजार कर रही हैं। जिन धर्मशालाओं में महादेव के दर्शन के बाद भक्त आराम करते थे वहां, इंसान का नामोनिशान तक नहीं है। इस मातम के बीच भी उम्मीदें भी, उसी भोले शंकर से हैं, जिनका ये धाम है, क्योंकि केदारनाथ में सबकुछ तबाह हो चुका है, सलामत है तो सिर्फ शिवलिंग। |
नई दिल्ली. आज का राशिफल, 4 मई 2019, दैनिक राशिफल का व्यक्ति के जीवन पर गहरा असर पड़ता है. राशिफल से हमें भविष्य में आगे होने वाली घटनाओं का आभास होता है. हम आपको बता रहे हैं आज यानी 4 मई शनिवार का मेष, वृषभ, सिंह, कन्या, मकर, कुंभ और मीन राशि समेत सभी राशियों का राशिफल. जानिए कैसा रहेगा आपका दिन.
मेष राशि के लोगों के दिन अच्छा रहेगा. जीवन में सफलता प्राप्त करने के नए मार्ग खुलेंगे. सम्मान और प्रतिष्ठा में बढ़ोतरी होगी. कार्य की तारीफ होगी. सावधान रहें, आज अपने साथियों से धोखा मिलने की संभावनाएं रहेंगी.
वृषभ राशि के लोगों का दिन शुभ रहेगा. कारोबार में निवेश के नए मौके मिलेंगे. कोई भी फैसला लेने से पहले अच्छे से सोच-विचार कर लें. किसी समझदार व्यक्ति से सलाह लेकर कोई भी निर्णय करें.
मिथुन राशि के लोगों का आज किस्मत साथ देगी. लंबे समय से बन रही योजना आज सफल होगी. कारोबार में बंपर धन लाभ की संभावनाएं हैं. समाजिक कार्यों में आज रुचि बनी रहेगी.
कर्क राशि के लोगों को आज कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. आज कारोबार सामान्य रहेगा. लाभ के सौदे हो सकते हैं. आज आप अपनी वाणी पर संयम बरतें, आपके संबंधों में मिठास आएगी.
सिंह राशि के लोगों के लिए दिन परेशानियों से भरपूर रहेगा. आज आपके खर्चे में बढ़ोतरी हो सकती है. कारोबार ठीक रहेगा. परिवार में किसी की सेहत को लेकर चिंता हो सकती है.
कन्या राशि के लोगों का दिन लाभकारी रहेगा. आज आपकी इनकम में बढ़ोतरी होगी. आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा. कारोबार नई ऊचाइंयों पर जाएगा. नए लोगों से मुलाकात फायदेमंद रहेगी.
वृश्चिक राशि के लोगों का दिन समाजिक कार्यों में बीतेगा. लोगों के बीच सम्मान में बढ़ोतरी होगी. कार्यस्थल पर आपके कार्य की तारीफ होगी. आज सेहत का ध्यान रखें.
धनु राशि के लोगों को आज किस्मत का पूरा साथ मिलेगा. काफी समय से रुकी योजना आज शुरू होने की संभावना है. छात्रों के लिए दिन अच्छा रहेगा. कारोबार में लाभ मिलेगा.
मकर राशि के लोगों का दिन शानदार रहेगा. मानसिक सुख के लिए आप आध्यात्म का सहारा लेंगे. आय में बढ़ोतरी होगी. आर्थिक हालत सुधरेगी. घर परिवार का पूरा सहयोग मिलेगा.
कुंभ राशि के लोगों के लिए शुभ रहेगा. आर्थिक स्थिती मजबूत रहेगा. कारोबार में बंपर धन लाभ होगा. सभी सौदे फायदे में होंगे. वाणी पर संयम बरतें.
मीन राशि के लोगों का दिन शुभ रहेगा. छात्रों का दिन शानदार रहेगा. बेरोजगारों को आज रोजगार मिलेगा. अटका हुआ धन आज वापस मिल सकता है. कारोबार में लाभ मिलेगा.
| नई दिल्ली. आज का राशिफल, चार मई दो हज़ार उन्नीस, दैनिक राशिफल का व्यक्ति के जीवन पर गहरा असर पड़ता है. राशिफल से हमें भविष्य में आगे होने वाली घटनाओं का आभास होता है. हम आपको बता रहे हैं आज यानी चार मई शनिवार का मेष, वृषभ, सिंह, कन्या, मकर, कुंभ और मीन राशि समेत सभी राशियों का राशिफल. जानिए कैसा रहेगा आपका दिन. मेष राशि के लोगों के दिन अच्छा रहेगा. जीवन में सफलता प्राप्त करने के नए मार्ग खुलेंगे. सम्मान और प्रतिष्ठा में बढ़ोतरी होगी. कार्य की तारीफ होगी. सावधान रहें, आज अपने साथियों से धोखा मिलने की संभावनाएं रहेंगी. वृषभ राशि के लोगों का दिन शुभ रहेगा. कारोबार में निवेश के नए मौके मिलेंगे. कोई भी फैसला लेने से पहले अच्छे से सोच-विचार कर लें. किसी समझदार व्यक्ति से सलाह लेकर कोई भी निर्णय करें. मिथुन राशि के लोगों का आज किस्मत साथ देगी. लंबे समय से बन रही योजना आज सफल होगी. कारोबार में बंपर धन लाभ की संभावनाएं हैं. समाजिक कार्यों में आज रुचि बनी रहेगी. कर्क राशि के लोगों को आज कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. आज कारोबार सामान्य रहेगा. लाभ के सौदे हो सकते हैं. आज आप अपनी वाणी पर संयम बरतें, आपके संबंधों में मिठास आएगी. सिंह राशि के लोगों के लिए दिन परेशानियों से भरपूर रहेगा. आज आपके खर्चे में बढ़ोतरी हो सकती है. कारोबार ठीक रहेगा. परिवार में किसी की सेहत को लेकर चिंता हो सकती है. कन्या राशि के लोगों का दिन लाभकारी रहेगा. आज आपकी इनकम में बढ़ोतरी होगी. आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा. कारोबार नई ऊचाइंयों पर जाएगा. नए लोगों से मुलाकात फायदेमंद रहेगी. वृश्चिक राशि के लोगों का दिन समाजिक कार्यों में बीतेगा. लोगों के बीच सम्मान में बढ़ोतरी होगी. कार्यस्थल पर आपके कार्य की तारीफ होगी. आज सेहत का ध्यान रखें. धनु राशि के लोगों को आज किस्मत का पूरा साथ मिलेगा. काफी समय से रुकी योजना आज शुरू होने की संभावना है. छात्रों के लिए दिन अच्छा रहेगा. कारोबार में लाभ मिलेगा. मकर राशि के लोगों का दिन शानदार रहेगा. मानसिक सुख के लिए आप आध्यात्म का सहारा लेंगे. आय में बढ़ोतरी होगी. आर्थिक हालत सुधरेगी. घर परिवार का पूरा सहयोग मिलेगा. कुंभ राशि के लोगों के लिए शुभ रहेगा. आर्थिक स्थिती मजबूत रहेगा. कारोबार में बंपर धन लाभ होगा. सभी सौदे फायदे में होंगे. वाणी पर संयम बरतें. मीन राशि के लोगों का दिन शुभ रहेगा. छात्रों का दिन शानदार रहेगा. बेरोजगारों को आज रोजगार मिलेगा. अटका हुआ धन आज वापस मिल सकता है. कारोबार में लाभ मिलेगा. |
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अफगानिस्तान की सत्ता पर तालिबान काबिज हुआ तो विश्व समुदाय ने वेट एंड वॉच की नीति अपना ली। हालांकि, चीन और पाकिस्तान जैसे देशों ने तालिबान की सरकार को मान्यता दे दी।
पाकिस्तान ने तो तालिबान की सरकार को दुनियाभर में मानों मान्यता दिलाने का ठेका ले लिया हो। पाकिस्तान के विदेश मंत्री तालिबान के सत्ता पर काबिज होने के साथ ही विदेश भ्रमण पर निकल गए तालिबान के लिए समर्थन जुटाने। तालिबान को लेकर अफगानिस्तान की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। 25 सितंबर को अमेरिका के न्यूयॉर्क में होने वाली दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) की बैठक रद्द हो गई है।
पाकिस्तान इस बैठक में तालिबान को भी शामिल करने की मांग कर रहा था। सार्क में शामिल अधिकतर देश तालिबान को भी बैठक में शामिल करने की पाकिस्तान की मांग के खिलाफ थे। सार्क के अधिकतर सदस्य देश जब पाकिस्तान की इस मांग को मानने के लिए तैयार नहीं हुए कि तालिबान सरकार के विदेश मंत्री को इस बैठक में शामिल किया जाए तो नई मांग रख दी गई।
पाकिस्तान ने इसके बाद ये शर्त रखी कि किसी भी कीमत पर अफगानिस्तान की पिछली यानी अशरफ गनी की सरकार के विदेश मंत्री को किसी भी कीमत पर इस बैठक में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। अधिकतर सार्क देशों ने पाकिस्तान की इस शर्त पर भी असहमति जताई। अंत में 25 सितंबर को होने वाली इस बैठक को रद्द करने का निर्णय लिया गया। सार्क के विदेश मंत्रियों की बैठक का रद्द होना और तालिबान के विदेश मंत्री को शामिल करने की मांग अधिकतर सदस्य देशों की ओर से ठुकराया जाना पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका है।
| अफगानिस्तान की सत्ता पर तालिबान काबिज हुआ तो विश्व समुदाय ने वेट एंड वॉच की नीति अपना ली। हालांकि, चीन और पाकिस्तान जैसे देशों ने तालिबान की सरकार को मान्यता दे दी। पाकिस्तान ने तो तालिबान की सरकार को दुनियाभर में मानों मान्यता दिलाने का ठेका ले लिया हो। पाकिस्तान के विदेश मंत्री तालिबान के सत्ता पर काबिज होने के साथ ही विदेश भ्रमण पर निकल गए तालिबान के लिए समर्थन जुटाने। तालिबान को लेकर अफगानिस्तान की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। पच्चीस सितंबर को अमेरिका के न्यूयॉर्क में होने वाली दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन की बैठक रद्द हो गई है। पाकिस्तान इस बैठक में तालिबान को भी शामिल करने की मांग कर रहा था। सार्क में शामिल अधिकतर देश तालिबान को भी बैठक में शामिल करने की पाकिस्तान की मांग के खिलाफ थे। सार्क के अधिकतर सदस्य देश जब पाकिस्तान की इस मांग को मानने के लिए तैयार नहीं हुए कि तालिबान सरकार के विदेश मंत्री को इस बैठक में शामिल किया जाए तो नई मांग रख दी गई। पाकिस्तान ने इसके बाद ये शर्त रखी कि किसी भी कीमत पर अफगानिस्तान की पिछली यानी अशरफ गनी की सरकार के विदेश मंत्री को किसी भी कीमत पर इस बैठक में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। अधिकतर सार्क देशों ने पाकिस्तान की इस शर्त पर भी असहमति जताई। अंत में पच्चीस सितंबर को होने वाली इस बैठक को रद्द करने का निर्णय लिया गया। सार्क के विदेश मंत्रियों की बैठक का रद्द होना और तालिबान के विदेश मंत्री को शामिल करने की मांग अधिकतर सदस्य देशों की ओर से ठुकराया जाना पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका है। |
को प्राप्त हुआ था । कविवर काशी में बाबरशहीद की गली में रहते थे। उनके वंशज अब तक आरा में मौजूद हैं। कविवर, के ज्येष्ठ पुत्र बाबू अजितदास की ससुराल आरा में थी और वह वहाँ ही रहने लगे थे। अपने पिता की तरह वह भी कवि थे । कविवर ने 'छन्दशतक' की रचना उन्हीं के लिए की थी । कविवर की इच्छा थी कि तुलसीकृत 'रामायण' के सदृश एक जैन रामायण बनाई जावे, तो संसार का बहुत उपकार हो, परन्तु उनकी यह इच्छा पूर्ण नहीं हुई। निदान अन्तिम सॉस लेते हुए अपने पुत्र से कविवर ने कहा कि वह उनकी इस इच्छा को पूर्ण करें । योग्य पुत्र ने यही किया। उन्होने 'जैन रामायण' रची, परंतु उन्होने उसके ७१ सर्ग ही पूर्ण कर पाये थे कि वह असमय में ही कालकवलित हो गये । इस तरह कविवर की इच्छा पूर्ण न हुई । वह अधूरी रामायण भी अप्रकाशित है। बाबू हरिदासजी उसकी पूर्ति करना चाहते थे, परंतु वह उसमें सफल हुए या नहीं, यह अज्ञात है ।
कविवर की माता का नाम सितावी था और उनकी पत्नी का रुक्मणी था । रुक्मणी एक धर्मपरायण और पतिव्रता रमणी थीं। वह लिखना पढ़ना भी अच्छी तरह जानती थीं । कविवर ने निम्नलिखित छन्द उन्हों को लक्ष्य करके रचा ऐसा प्रतीत होता है#
"प्रमदा प्रवीन व्रतलीन पावनी ।
दिद शोलुपालि कुल रीति राखिनी ॥
जल अन्न शोधि मुनिदानदायिनी ।
वह धन्य नारि मृदुमंजुभाषिनी ॥ "
[ हिन्दी जैन साहित्य को
वृन्दावनजी की ससुराल भी काशी में थी। उस समय प्रज्ञा की निजी टकसालें थी, जिनमें सिक्के ढाले जाते थे । कविवर की ससुराल में भी एक टन्साल थी। एक दिन जब वह वहाँ थे, तंब एक किरानी अंग्रेज टकसाल देखने आया, परन्तु कविवर ने उसे टक्साल नहीं दिखाई । अंग्रेज लौट गया। वृन्दावनजी सरकारी खजाँची हो गये। वही अंग्रेज वहाँ क्लक्टर होकर आया । आते ही उसने कविवर को पहचान लिया। वह दण्ड देने को तुल पड़ा । हठान् उसने कविवर को तीन मास का कारावास बोल दिया। कारावास में कविवर ने 'हो दीनबन्धु श्रीपति करुणातिवानजी' शीर्षक वाली कविता रची। एक रोज कलक्टर ने भी उन्हें यह कविता पढ़ते और आँसू बहाते देखा। वह प्रमावित हुआ। उसने कविता का अर्थ समझा और कविवर को मुक्त कर दिया। इसीलिए यह कविता सङ्कटमोचन नाम से प्रसिद्ध हैं । इसका प्रचार भी खूब है। इसमें भक्तिवाद का पूर्ण चित्रण हैवीतरागविज्ञानता का स्थान इसमें भक्ति-नस ने ले लिया है ।
प्रेमीजी ने लिखा है कि "वृन्दावनजी स्वाभाविक कवि थे । उन्हें जो कवित्वगति प्राप्त हुई थी, उनमें जो कविप्रतिभा थी, उसका उपार्जन पुस्तकों अथवा किसी के उपदेश द्वारा नहीं हुआ था, किन्तु वह पूर्व जन्म के संस्कार से प्राप्त हुई थी। उनकी ऋविता में स्वाभाविकता और सरलता बहुत है। शृंगाररसकी कविता करने की ओर भी उनकी कभी प्रवृत्ति नहीं हुई। जिस रस के पान करने से जरामरणरूप दुख अधिक नहीं सताते हैं और जिससे संसार प्रायः विमुख हो रहा है, इस अध्यात्म तथा भक्तिरस के मंथन करने में ही कविवर की लेखनी छवी रही है।"
सक्षिप्त इतिहास ].
कविवर का रचा हुआ मुख्य ग्रन्थ 'प्रवचनसार टीका' है । यह प्राकृत ग्रन्थ का पद्यानुवाद है । इसे सर्वश्रेष्ठ बनाने के लिये उन्होने तीन बार परिश्रम किया था । यथा -
"तब छन्द रची पूरन करी, चित न रुची तब पुनि रची ।। मोऊ न रुची तव अब रची, अनेकान्त रस सौं मची ॥ "
दूसरा ग्रन्थ 'चतुर्विंशति जिन पूजा पाठ' और तीसरा 'तीस चौबसी पूजापाठ' है । चौबीस पूजापाठ का प्रचार अत्यधिक है। वह कई बार प्रकाशित हो चुका है। उसमें २४ तोर्थङ्करों की पूजायें हैं । शव्दालङ्कार अनुप्रास, यमक आदि की इनमें भरमार है, पर भाव की ओर उतना ध्यान नहीं दिया गया, जितना शब्दों की ओर दिया गया है। तीसरा ग्रन्थ 'छन्द शतक' है, जो अत्यन्त सुन्दर रचना है। विद्यार्थियों के लिये इससे अच्छा और सरल छन्दशास्त्र शायद ही दूसरा होगा। प्रेमीजी ने तो लिखा है कि 'हिन्दी साहित्य सम्मेलन' की प्रथमा परीक्षा में यह पाठ्य पुस्तक बनने के योग्य है ।" सस्कृत के वृत्तरत्नाकर आदि ग्रन्थों की नाई प्रत्येक छन्द के लक्षण और नाम आदि उसी छन्द में दिये हैं और प्रत्येक छन्द में अच्छी अच्छी निर्दोष शिक्षाये भरी हुई है । एक उदाहरण"चतुर नगन मुनि दरसत,
भगत, उमंग डर सरसत । नुति थुति करि मन हरसत तरल नयन जल बरसत ॥"
इसे कविवर ने स० १८९८ में केवल १५ दिन में रचा था । श्री जमनालालजी विशारद वर्धा इसको प्रकाशित करने वाले हैं । वैसे 'वृन्दावन विलास' में एक बार यह छप चुका है।
[ हिन्दी जैन साहित्य का.
चौथा ग्रन्थ कविवर की तमाम फुटकर कविताओं का संग्रह 'वृन्दावन विलास' है, जो एक बार छप चुका है। 'अर्हन्त पासा केवली' भी उनका रचा हुआ है। 'वृन्दावन विलास' की रचनाओं का नमूना देखिये -
"जो अपनो हित चाहत है जिय, तौ यह सीख हिये अवधारो । कर्मज भाव तजो सवही निज, आतमको अनुभौ रस गारो ॥ श्री जिनचंद सों नेह करो मित, आनद कंद दशा विसतारो । मूढ़ लखै नहिं गूढ़ कथा यह, गोकुल गाँव को पैडी ही न्यारो ॥ "
एक पद भी देखिये -
"हमारी बेरियाँ काहे करत अबार जी ॥ टेक ॥
इह दरबार दीन पर करुना, होत सदा चलि आई जी ॥ हमारी० ॥ मेरी विया विलोकि रमापति, काहे सुधि विसराई जी ॥ २ ॥ मैं तो चरन कमलको किंकर, चाहूँ पद सेवकाई जी ॥ ३ ॥ हे प्राणनाथ तजो नहिं कबहूँ, तुमसों लगन लगाई जी ॥ ४ ॥ अपनो विरद निवाहो दयानिधि, दै सुख वृन्द बढाई जी ॥ ५ ॥"
बनारसीदासजी का रचा हुआ 'भविष्यदत्त चरित्र' पञ्चायती मन्दिर दिल्ली में मौजूद है । वह सं० १८९९ का लिपि किया हुआ है। उदाहरण"पञ्च परम गुरु कौं नमौ, परम हिये घर भाव । भवसदत्त जस विस्तरौं, सारद करौं पसाव ॥
जिय भवसदत संजम लिया, उपज्या सुरह मिलांण ।
फिर निरवांणो पद लह्या, बावीस सन्धि सुप्रमाण ॥८४ ॥ "
कवि का नाम लिपि कर्त्ता पण्डित जमनादास ने लिखा है । | को प्राप्त हुआ था । कविवर काशी में बाबरशहीद की गली में रहते थे। उनके वंशज अब तक आरा में मौजूद हैं। कविवर, के ज्येष्ठ पुत्र बाबू अजितदास की ससुराल आरा में थी और वह वहाँ ही रहने लगे थे। अपने पिता की तरह वह भी कवि थे । कविवर ने 'छन्दशतक' की रचना उन्हीं के लिए की थी । कविवर की इच्छा थी कि तुलसीकृत 'रामायण' के सदृश एक जैन रामायण बनाई जावे, तो संसार का बहुत उपकार हो, परन्तु उनकी यह इच्छा पूर्ण नहीं हुई। निदान अन्तिम सॉस लेते हुए अपने पुत्र से कविवर ने कहा कि वह उनकी इस इच्छा को पूर्ण करें । योग्य पुत्र ने यही किया। उन्होने 'जैन रामायण' रची, परंतु उन्होने उसके इकहत्तर सर्ग ही पूर्ण कर पाये थे कि वह असमय में ही कालकवलित हो गये । इस तरह कविवर की इच्छा पूर्ण न हुई । वह अधूरी रामायण भी अप्रकाशित है। बाबू हरिदासजी उसकी पूर्ति करना चाहते थे, परंतु वह उसमें सफल हुए या नहीं, यह अज्ञात है । कविवर की माता का नाम सितावी था और उनकी पत्नी का रुक्मणी था । रुक्मणी एक धर्मपरायण और पतिव्रता रमणी थीं। वह लिखना पढ़ना भी अच्छी तरह जानती थीं । कविवर ने निम्नलिखित छन्द उन्हों को लक्ष्य करके रचा ऐसा प्रतीत होता है# "प्रमदा प्रवीन व्रतलीन पावनी । दिद शोलुपालि कुल रीति राखिनी ॥ जल अन्न शोधि मुनिदानदायिनी । वह धन्य नारि मृदुमंजुभाषिनी ॥ " [ हिन्दी जैन साहित्य को वृन्दावनजी की ससुराल भी काशी में थी। उस समय प्रज्ञा की निजी टकसालें थी, जिनमें सिक्के ढाले जाते थे । कविवर की ससुराल में भी एक टन्साल थी। एक दिन जब वह वहाँ थे, तंब एक किरानी अंग्रेज टकसाल देखने आया, परन्तु कविवर ने उसे टक्साल नहीं दिखाई । अंग्रेज लौट गया। वृन्दावनजी सरकारी खजाँची हो गये। वही अंग्रेज वहाँ क्लक्टर होकर आया । आते ही उसने कविवर को पहचान लिया। वह दण्ड देने को तुल पड़ा । हठान् उसने कविवर को तीन मास का कारावास बोल दिया। कारावास में कविवर ने 'हो दीनबन्धु श्रीपति करुणातिवानजी' शीर्षक वाली कविता रची। एक रोज कलक्टर ने भी उन्हें यह कविता पढ़ते और आँसू बहाते देखा। वह प्रमावित हुआ। उसने कविता का अर्थ समझा और कविवर को मुक्त कर दिया। इसीलिए यह कविता सङ्कटमोचन नाम से प्रसिद्ध हैं । इसका प्रचार भी खूब है। इसमें भक्तिवाद का पूर्ण चित्रण हैवीतरागविज्ञानता का स्थान इसमें भक्ति-नस ने ले लिया है । प्रेमीजी ने लिखा है कि "वृन्दावनजी स्वाभाविक कवि थे । उन्हें जो कवित्वगति प्राप्त हुई थी, उनमें जो कविप्रतिभा थी, उसका उपार्जन पुस्तकों अथवा किसी के उपदेश द्वारा नहीं हुआ था, किन्तु वह पूर्व जन्म के संस्कार से प्राप्त हुई थी। उनकी ऋविता में स्वाभाविकता और सरलता बहुत है। शृंगाररसकी कविता करने की ओर भी उनकी कभी प्रवृत्ति नहीं हुई। जिस रस के पान करने से जरामरणरूप दुख अधिक नहीं सताते हैं और जिससे संसार प्रायः विमुख हो रहा है, इस अध्यात्म तथा भक्तिरस के मंथन करने में ही कविवर की लेखनी छवी रही है।" सक्षिप्त इतिहास ]. कविवर का रचा हुआ मुख्य ग्रन्थ 'प्रवचनसार टीका' है । यह प्राकृत ग्रन्थ का पद्यानुवाद है । इसे सर्वश्रेष्ठ बनाने के लिये उन्होने तीन बार परिश्रम किया था । यथा - "तब छन्द रची पूरन करी, चित न रुची तब पुनि रची ।। मोऊ न रुची तव अब रची, अनेकान्त रस सौं मची ॥ " दूसरा ग्रन्थ 'चतुर्विंशति जिन पूजा पाठ' और तीसरा 'तीस चौबसी पूजापाठ' है । चौबीस पूजापाठ का प्रचार अत्यधिक है। वह कई बार प्रकाशित हो चुका है। उसमें चौबीस तोर्थङ्करों की पूजायें हैं । शव्दालङ्कार अनुप्रास, यमक आदि की इनमें भरमार है, पर भाव की ओर उतना ध्यान नहीं दिया गया, जितना शब्दों की ओर दिया गया है। तीसरा ग्रन्थ 'छन्द शतक' है, जो अत्यन्त सुन्दर रचना है। विद्यार्थियों के लिये इससे अच्छा और सरल छन्दशास्त्र शायद ही दूसरा होगा। प्रेमीजी ने तो लिखा है कि 'हिन्दी साहित्य सम्मेलन' की प्रथमा परीक्षा में यह पाठ्य पुस्तक बनने के योग्य है ।" सस्कृत के वृत्तरत्नाकर आदि ग्रन्थों की नाई प्रत्येक छन्द के लक्षण और नाम आदि उसी छन्द में दिये हैं और प्रत्येक छन्द में अच्छी अच्छी निर्दोष शिक्षाये भरी हुई है । एक उदाहरण"चतुर नगन मुनि दरसत, भगत, उमंग डर सरसत । नुति थुति करि मन हरसत तरल नयन जल बरसत ॥" इसे कविवर ने सशून्य एक हज़ार आठ सौ अट्ठानवे में केवल पंद्रह दिन में रचा था । श्री जमनालालजी विशारद वर्धा इसको प्रकाशित करने वाले हैं । वैसे 'वृन्दावन विलास' में एक बार यह छप चुका है। [ हिन्दी जैन साहित्य का. चौथा ग्रन्थ कविवर की तमाम फुटकर कविताओं का संग्रह 'वृन्दावन विलास' है, जो एक बार छप चुका है। 'अर्हन्त पासा केवली' भी उनका रचा हुआ है। 'वृन्दावन विलास' की रचनाओं का नमूना देखिये - "जो अपनो हित चाहत है जिय, तौ यह सीख हिये अवधारो । कर्मज भाव तजो सवही निज, आतमको अनुभौ रस गारो ॥ श्री जिनचंद सों नेह करो मित, आनद कंद दशा विसतारो । मूढ़ लखै नहिं गूढ़ कथा यह, गोकुल गाँव को पैडी ही न्यारो ॥ " एक पद भी देखिये - "हमारी बेरियाँ काहे करत अबार जी ॥ टेक ॥ इह दरबार दीन पर करुना, होत सदा चलि आई जी ॥ हमारीशून्य ॥ मेरी विया विलोकि रमापति, काहे सुधि विसराई जी ॥ दो ॥ मैं तो चरन कमलको किंकर, चाहूँ पद सेवकाई जी ॥ तीन ॥ हे प्राणनाथ तजो नहिं कबहूँ, तुमसों लगन लगाई जी ॥ चार ॥ अपनो विरद निवाहो दयानिधि, दै सुख वृन्द बढाई जी ॥ पाँच ॥" बनारसीदासजी का रचा हुआ 'भविष्यदत्त चरित्र' पञ्चायती मन्दिर दिल्ली में मौजूद है । वह संशून्य एक हज़ार आठ सौ निन्यानवे का लिपि किया हुआ है। उदाहरण"पञ्च परम गुरु कौं नमौ, परम हिये घर भाव । भवसदत्त जस विस्तरौं, सारद करौं पसाव ॥ जिय भवसदत संजम लिया, उपज्या सुरह मिलांण । फिर निरवांणो पद लह्या, बावीस सन्धि सुप्रमाण ॥चौरासी ॥ " कवि का नाम लिपि कर्त्ता पण्डित जमनादास ने लिखा है । |
अस्तेय दर्शन
चोर्यकर्म का बोलवाला है और इसी का एक छत्र राज्य है। चोर तो चोर है ही किन्तु जिसका कर्तव्य चोर को पकड़ना है, वह भी चोर है । प्रजा के अधिक संख्यक लोग तो चोरी की बीमारी के शिवार है हो किन्तु उन पर नियंत्रण रसने वाले बडी संख्या में शासकवर्ग के लोग भी चौर्यकर्म को बड़ी लगन से, साधना से और प्रध्यवसाय से अपने जीवन में उतार रहे है । बाहर से आने वाले तस्करी के माल में, बड़े-बड़े राज्य कर्मचारियों का भी हाथ रहता है - यह तथ्य समाचार पत्रों के समाचारों से प्रमाणित होता है और एक खुला रहस्य है। सरकार के कठोर नियंत्रण के सद्भाव में भी करोड़ों रुपयो का तस्करी का माल, भारत में प्रति मास थाना है और लुकछिप कर यहाँ के बाजारों में बिकता है यह बात सर्वविदित है। बड़े-बड़े लोग इस तस्करी के काम में पकड़े जाते है, उन पर न्यायालयों और उच्चन्यायालयों में मुकदमे चल रहे है । कइयो को कारावास का दण्ड भी मिलता है किन्तु यह सब होते हुए भी, चौर्यकर्म में किसी प्रकार की कमी नहीं भा रही ।
बडे-बडे राज्यकर्मचारी उत्कोच-रिावत लेकर, जो अन्यायपूर्ण कार्य है उसे करवा देते है और जो न्याय की दृष्टि से होना चाहिए उसे ठुकरा देते हैं यह न्याय को चोरी है, इसीलिये वे चोर हैं । सामान्य राज्य कर्मचारियों को तो बात हो क्या, उच्च पदो को अलंकृत करने वाले राजनीतिज्ञों पर भी न्यायालयों में चलने वागे बडी चोरी के मुकदमों से यह स्पष्ट हो जाता है कि शासक वर्ग ६ बुद्ध लोगों की भी नीयत साफ नहीं है। ऐसी घटनाएँ रहस्यात्मक नहीं हैं प्रपितु प्रतिदिन दैनिक पत्रों में पड़ने को मिलनी है ।
'यया राजा तथा प्रजाः
यह उक्ति कालिक विश्वगत्य है। अव तनिक दृष्टिपात कीजिए वर्तमान युग की सामाजिक चोरी पर । तुलान्तराजू को कई प्राचीन एवं सर्वाचीन शासकों ने न्याय का प्रतीक माना है। कुछ राजामाँ द्वारा चलाए गये मित्रों पर तराजू का चित्र घंकित है जो सबको न्याय दिलाने का है द्वारा वर्तमान युग में न्याय के । | अस्तेय दर्शन चोर्यकर्म का बोलवाला है और इसी का एक छत्र राज्य है। चोर तो चोर है ही किन्तु जिसका कर्तव्य चोर को पकड़ना है, वह भी चोर है । प्रजा के अधिक संख्यक लोग तो चोरी की बीमारी के शिवार है हो किन्तु उन पर नियंत्रण रसने वाले बडी संख्या में शासकवर्ग के लोग भी चौर्यकर्म को बड़ी लगन से, साधना से और प्रध्यवसाय से अपने जीवन में उतार रहे है । बाहर से आने वाले तस्करी के माल में, बड़े-बड़े राज्य कर्मचारियों का भी हाथ रहता है - यह तथ्य समाचार पत्रों के समाचारों से प्रमाणित होता है और एक खुला रहस्य है। सरकार के कठोर नियंत्रण के सद्भाव में भी करोड़ों रुपयो का तस्करी का माल, भारत में प्रति मास थाना है और लुकछिप कर यहाँ के बाजारों में बिकता है यह बात सर्वविदित है। बड़े-बड़े लोग इस तस्करी के काम में पकड़े जाते है, उन पर न्यायालयों और उच्चन्यायालयों में मुकदमे चल रहे है । कइयो को कारावास का दण्ड भी मिलता है किन्तु यह सब होते हुए भी, चौर्यकर्म में किसी प्रकार की कमी नहीं भा रही । बडे-बडे राज्यकर्मचारी उत्कोच-रिावत लेकर, जो अन्यायपूर्ण कार्य है उसे करवा देते है और जो न्याय की दृष्टि से होना चाहिए उसे ठुकरा देते हैं यह न्याय को चोरी है, इसीलिये वे चोर हैं । सामान्य राज्य कर्मचारियों को तो बात हो क्या, उच्च पदो को अलंकृत करने वाले राजनीतिज्ञों पर भी न्यायालयों में चलने वागे बडी चोरी के मुकदमों से यह स्पष्ट हो जाता है कि शासक वर्ग छः बुद्ध लोगों की भी नीयत साफ नहीं है। ऐसी घटनाएँ रहस्यात्मक नहीं हैं प्रपितु प्रतिदिन दैनिक पत्रों में पड़ने को मिलनी है । 'यया राजा तथा प्रजाः यह उक्ति कालिक विश्वगत्य है। अव तनिक दृष्टिपात कीजिए वर्तमान युग की सामाजिक चोरी पर । तुलान्तराजू को कई प्राचीन एवं सर्वाचीन शासकों ने न्याय का प्रतीक माना है। कुछ राजामाँ द्वारा चलाए गये मित्रों पर तराजू का चित्र घंकित है जो सबको न्याय दिलाने का है द्वारा वर्तमान युग में न्याय के । |
पथेर पांचाली ० १७५
की लड़की पर इस तरह चोरी का आरोप लगाते देखकर वह अवाक् रह गई । विशेषकर वह दुर्गा को कई दिनों से देख रही थी । देखने में सुन्दर है, इसलिए दुर्गा उसे पसन्द भी आई थी । क्या उसके लिए चोरी करना सम्भव है ? बोली : 'संझली नानी, उसने शायद न ली हो, वह क्यों
संझली मालकिन बोली : 'तू चुप रह - तू उसे क्या जानती है ? उसने ली है या नहीं ली है, इसे मैं अच्छी तरह जानती हूं।'
एक ने कहा : 'तूने ली हो, तो निकाल दे, नहीं तो बता दे कि कहां है, बस सारा मामला खत्म हो जाएगा। अच्छी बेटी, दे दे न, क्यों झूठ-मूठ
दुर्गा जाने कैसी हो गई थी। उसके पैर थरथर कांप रहे थे । उसने दीवार से पीठ लगाकर कहाः 'चाचीजी, मैं तो नहीं जानती कि डिबिया कहां है । मैं तो....
संभली मालकिन ने कहा : 'तेरे इस कहने से मैं माननेवाली थोड़ी हूं । जरूर इसीने ली है। इसकी आंख से मुझे पक्का विश्वास है । सीधी तरह कह रही हूं कि कहां रखी है, दे दे, चीज मिल जाए तो कुछ नहीं कहने की, मुझे तो चीज़ चाहिए।'
पहलेवाली नातेदारिन ने कहा : 'भद्र घर की लड़की चोरी करती है, ऐसा तो कभी सुनने में नहीं आया। क्या इसी मुहल्ले में रहती ?'
संझली मालकिन ने कहा : 'लातों के देवता बातों से नहीं मानते । जरा मजा चखा दूं कि दूसरे के घर की चीज उड़ाने में क्या कसाले होते हैं । आज मैं तुझे...
बाद को उसने दुर्गा का हाथ पकड़ घसीटकर सहन में लाते हुए कहा : 'बोल दुर्गा, अब भी बोल दे, कहां रखी है ? नहीं बताएगी ? नहीं तू कुछ नहीं जानती, तू आई है बड़ी दूध की घुली ! दुधमुंही ! जल्दी से बता नहीं तो दांत तोड़कर रख दूंगी। बोल, जल्दी बोल, अब भी बता दे।'
टूनी की मां हाथ पकड़ने के लिए आगे बढ़ रही थी कि इतने में एक नातेदारिन ने कहा : 'जरा गम खाओ न, देखती नहीं हो ? इसीने ज़रूर उठाई है ! चोर के लिए बस मार ही दवा है। अभी चीज़ दे दो, बस झगड़ा खत्म, क्यों झूठ-मूठ दुर्गा के सिर के अन्दर जाने कैसा कर रहा था। उसने असहायता के साथ ताककर बहुत ही मुश्किल से ऐंठी हुई जीभ से किसी तरह गिड़गिड़ाकर कहा : 'चाचीजी, मैं तो नहीं जानती, जब वे लोग चले गए, तब मैं भी तो' -बात कहते | पथेर पांचाली शून्य एक सौ पचहत्तर की लड़की पर इस तरह चोरी का आरोप लगाते देखकर वह अवाक् रह गई । विशेषकर वह दुर्गा को कई दिनों से देख रही थी । देखने में सुन्दर है, इसलिए दुर्गा उसे पसन्द भी आई थी । क्या उसके लिए चोरी करना सम्भव है ? बोली : 'संझली नानी, उसने शायद न ली हो, वह क्यों संझली मालकिन बोली : 'तू चुप रह - तू उसे क्या जानती है ? उसने ली है या नहीं ली है, इसे मैं अच्छी तरह जानती हूं।' एक ने कहा : 'तूने ली हो, तो निकाल दे, नहीं तो बता दे कि कहां है, बस सारा मामला खत्म हो जाएगा। अच्छी बेटी, दे दे न, क्यों झूठ-मूठ दुर्गा जाने कैसी हो गई थी। उसके पैर थरथर कांप रहे थे । उसने दीवार से पीठ लगाकर कहाः 'चाचीजी, मैं तो नहीं जानती कि डिबिया कहां है । मैं तो.... संभली मालकिन ने कहा : 'तेरे इस कहने से मैं माननेवाली थोड़ी हूं । जरूर इसीने ली है। इसकी आंख से मुझे पक्का विश्वास है । सीधी तरह कह रही हूं कि कहां रखी है, दे दे, चीज मिल जाए तो कुछ नहीं कहने की, मुझे तो चीज़ चाहिए।' पहलेवाली नातेदारिन ने कहा : 'भद्र घर की लड़की चोरी करती है, ऐसा तो कभी सुनने में नहीं आया। क्या इसी मुहल्ले में रहती ?' संझली मालकिन ने कहा : 'लातों के देवता बातों से नहीं मानते । जरा मजा चखा दूं कि दूसरे के घर की चीज उड़ाने में क्या कसाले होते हैं । आज मैं तुझे... बाद को उसने दुर्गा का हाथ पकड़ घसीटकर सहन में लाते हुए कहा : 'बोल दुर्गा, अब भी बोल दे, कहां रखी है ? नहीं बताएगी ? नहीं तू कुछ नहीं जानती, तू आई है बड़ी दूध की घुली ! दुधमुंही ! जल्दी से बता नहीं तो दांत तोड़कर रख दूंगी। बोल, जल्दी बोल, अब भी बता दे।' टूनी की मां हाथ पकड़ने के लिए आगे बढ़ रही थी कि इतने में एक नातेदारिन ने कहा : 'जरा गम खाओ न, देखती नहीं हो ? इसीने ज़रूर उठाई है ! चोर के लिए बस मार ही दवा है। अभी चीज़ दे दो, बस झगड़ा खत्म, क्यों झूठ-मूठ दुर्गा के सिर के अन्दर जाने कैसा कर रहा था। उसने असहायता के साथ ताककर बहुत ही मुश्किल से ऐंठी हुई जीभ से किसी तरह गिड़गिड़ाकर कहा : 'चाचीजी, मैं तो नहीं जानती, जब वे लोग चले गए, तब मैं भी तो' -बात कहते |
नहीं पाया कि भारत का कौन-सा प्रान्त उन्हें जन्म देकर धन्य हुआ है। इस कारण उनका नाम मैंने 'अखिल भारतीय तम्बाकू' की सूची में रखा है। उस अखिल भारतीय यानी समूचे हिन्दुस्तान की लिस्ट में देखिए, तम्बाकू
नम्बर एक ।
(आगे बढ़कर रजिस्टर में नाम निकालने का प्रयत्न करता है। इसी समय दरवाजे पर दस्तक सुनाई देती है।)
( धीमे स्वर में आप रजिस्टर लेकर अपनी मेज पर चले जाइए । वहीं से इशारे कर मुझे बताते जाइएगा कि इस तम्बाकू से हमें कितने काम हैं । ( जरा ज़ोर से) कृपया भीतर आ जाइए।
( दरवाजा खुलता है। चपरासी एक किवाड़ पकड़ कर एक ओर खड़ा हो जाता है। उसके पीछे बन्द गले का सफ़ेद कोट और सफ़ेद पतलून पहने, नंगे सिर सदानन्द का प्रवेश । उन्हें देखकर सचमुच यह कहना कठिन है कि वह किस प्रवेश के हैं। मुन्शीजी श्रावर के साथ अपनी जगह खड़े हो जाते हैं और हेमन्त आगे बढ़कर सदानन्द का स्वागत करता है ।)
नमस्ते साहब । इस बार तो बहुत दिनों के बाद आपके दर्शन हुए। उस दिन सांझ के बाद मैं आपके घर पर हाज़िर हुआ था । पर वहां मालूम हुआ कि आप अभी दफ्तर ही से नहीं लौटे हैं ।
किस रोज़ ?
इसी पिछले सोमवार को। अगर मैं गलती नहीं करता तो उस समय रात के ८ बजे थे और आप वापस नहीं आए थे । शायद उस दिन दफ्तर में आपको बहुत देर तक बैठना पड़ा । | नहीं पाया कि भारत का कौन-सा प्रान्त उन्हें जन्म देकर धन्य हुआ है। इस कारण उनका नाम मैंने 'अखिल भारतीय तम्बाकू' की सूची में रखा है। उस अखिल भारतीय यानी समूचे हिन्दुस्तान की लिस्ट में देखिए, तम्बाकू नम्बर एक । कृपया भीतर आ जाइए। नमस्ते साहब । इस बार तो बहुत दिनों के बाद आपके दर्शन हुए। उस दिन सांझ के बाद मैं आपके घर पर हाज़िर हुआ था । पर वहां मालूम हुआ कि आप अभी दफ्तर ही से नहीं लौटे हैं । किस रोज़ ? इसी पिछले सोमवार को। अगर मैं गलती नहीं करता तो उस समय रात के आठ बजे थे और आप वापस नहीं आए थे । शायद उस दिन दफ्तर में आपको बहुत देर तक बैठना पड़ा । |
उभौ तुल्यास्त्रविदुषावुभौ युद्धविशारदौ ।।)
वे दोनों मतवाले साँड़ों, मदोन्मत्त गजराजों, एक ही हाथीपर आक्रमण करनेवाले दो सिंहों तथा युद्धके लिये उद्यत वृत्रासुर एवं इन्द्रके समान जान पड़ते थे। दोनोंके बल और उत्साह समान थे। दोनों ही एक-जैसे पराक्रमी और एक-से ही अस्त्र-शस्त्रोंके ज्ञाता थे। युद्ध करनेकी कलामें वे दोनों ही वीर अत्यन्त निपुण थे। तथैव तेषां तु बलानि तानि क्रुद्धान्यथान्योन्यमभिद्रवन्ति । गदासिखड्गैश्च परश्वधैश्च
प्रासैश्च तीक्ष्णाग्रसुपीतधारैः ।। ६ ।।
इसी प्रकार उन सबकी वे सेनाएँ भी कुपित हो गदा, तलवार, खड्ग, फरसे और भलीभाँति तेज किये हुए तीखी धारवाले प्रासों ( भालों) से प्रहार करती हुई एक-दूसरीपर टूट पड़ीं ।। ६ ।।
बलं तु मत्स्यस्य बलेन राजा सर्वं त्रिगर्ताधिपतिः सुशर्मा । प्रमथ्य जित्वा च प्रसह्य मत्स्यं
विराटमोजस्विनमभ्यधावत् ।। ७ ।। तौ निहत्य पृथग् धुर्यावुभौ तौ पार्ष्णिसारथी । विरथं मत्स्यराजानं जीवग्राहमगृह्णताम् ।। ८ ।।
त्रिगर्तदेशके स्वामी राजा सुशर्माने अपनी सेनाके द्वारा मत्स्यराजकी सेनाको मथ डाला और बलपूर्वक उसे परास्त करके महापराक्रमी मत्स्यनरेश विराटपर चढ़ाई कर दी। उन दोनों भाइयोंने पृथक्-पृथक् विराटके दोनों घोड़ोंको मारकर उनके पार्श्वभागकी रक्षा करनेवाले सिपाहियों तथा सारथिको भी मार डाला और उन्हें रथहीन करके जीते-जी ही पकड़ लिया ।। ७-८ ।।
तमुन्मथ्य सुशर्माथ युवतीमिव कामुकः ।
स्यन्दनं स्वं समारोप्य प्रययौ शीघ्रवाहनः ।। ९ ।।
जैसे कामी पुरुष किसी युवतीको बलपूर्वक पकड़ ले, वैसे ही सुशर्माने राजा विराटको पीड़ित करके पकड़ लिया और उनको शीघ्रगामी वाहनोंसे युक्त अपने रथपर चढ़ाकर वह चल दिया ।। ९ ।
तस्मिन् गृहीते विरथे विराटे बलवत्तरे ।
प्राद्रवन्त भयान्मत्स्यास्त्रिगर्तैरर्दिता भृशम् ।। १० ।।
अतिशय बलवान् राजा विराट जब रथहीन होकर पकड़ लिये गये, तब त्रिगतद्वारा अत्यन्त पीड़ित हुए मत्स्यदेशीय सैनिक भयभीत होकर भागने लगे ।। १० ।।
तेषु संत्रस्यमानेषु कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिरः । | उभौ तुल्यास्त्रविदुषावुभौ युद्धविशारदौ ।।) वे दोनों मतवाले साँड़ों, मदोन्मत्त गजराजों, एक ही हाथीपर आक्रमण करनेवाले दो सिंहों तथा युद्धके लिये उद्यत वृत्रासुर एवं इन्द्रके समान जान पड़ते थे। दोनोंके बल और उत्साह समान थे। दोनों ही एक-जैसे पराक्रमी और एक-से ही अस्त्र-शस्त्रोंके ज्ञाता थे। युद्ध करनेकी कलामें वे दोनों ही वीर अत्यन्त निपुण थे। तथैव तेषां तु बलानि तानि क्रुद्धान्यथान्योन्यमभिद्रवन्ति । गदासिखड्गैश्च परश्वधैश्च प्रासैश्च तीक्ष्णाग्रसुपीतधारैः ।। छः ।। इसी प्रकार उन सबकी वे सेनाएँ भी कुपित हो गदा, तलवार, खड्ग, फरसे और भलीभाँति तेज किये हुए तीखी धारवाले प्रासों से प्रहार करती हुई एक-दूसरीपर टूट पड़ीं ।। छः ।। बलं तु मत्स्यस्य बलेन राजा सर्वं त्रिगर्ताधिपतिः सुशर्मा । प्रमथ्य जित्वा च प्रसह्य मत्स्यं विराटमोजस्विनमभ्यधावत् ।। सात ।। तौ निहत्य पृथग् धुर्यावुभौ तौ पार्ष्णिसारथी । विरथं मत्स्यराजानं जीवग्राहमगृह्णताम् ।। आठ ।। त्रिगर्तदेशके स्वामी राजा सुशर्माने अपनी सेनाके द्वारा मत्स्यराजकी सेनाको मथ डाला और बलपूर्वक उसे परास्त करके महापराक्रमी मत्स्यनरेश विराटपर चढ़ाई कर दी। उन दोनों भाइयोंने पृथक्-पृथक् विराटके दोनों घोड़ोंको मारकर उनके पार्श्वभागकी रक्षा करनेवाले सिपाहियों तथा सारथिको भी मार डाला और उन्हें रथहीन करके जीते-जी ही पकड़ लिया ।। सात-आठ ।। तमुन्मथ्य सुशर्माथ युवतीमिव कामुकः । स्यन्दनं स्वं समारोप्य प्रययौ शीघ्रवाहनः ।। नौ ।। जैसे कामी पुरुष किसी युवतीको बलपूर्वक पकड़ ले, वैसे ही सुशर्माने राजा विराटको पीड़ित करके पकड़ लिया और उनको शीघ्रगामी वाहनोंसे युक्त अपने रथपर चढ़ाकर वह चल दिया ।। नौ । तस्मिन् गृहीते विरथे विराटे बलवत्तरे । प्राद्रवन्त भयान्मत्स्यास्त्रिगर्तैरर्दिता भृशम् ।। दस ।। अतिशय बलवान् राजा विराट जब रथहीन होकर पकड़ लिये गये, तब त्रिगतद्वारा अत्यन्त पीड़ित हुए मत्स्यदेशीय सैनिक भयभीत होकर भागने लगे ।। दस ।। तेषु संत्रस्यमानेषु कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिरः । |
SLBSRSV Guest Faculty रिक्तियों के लिए 4 नौकरी के उद्घाटन के लिए उम्मीदवारों की तलाश कर रहा है। उम्मीदवार जो Guest Faculty रिक्तियों की भूमिका के लिए आवेदन करना चाहते हैं, वे SLBSRSV भर्ती 2023 के लिए संपूर्ण विवरण और प्रक्रिया यहां देख सकते हैं।
आवेदक जो SLBSRSV Guest Faculty भर्ती 2023 के लिए आवेदन करना चाहते हैं, उन्हें अधिकारियों द्वारा पोस्ट की गई योग्यता विवरण की जांच करनी होगी, आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवारों को योग्यता को पूरा करना होगा जो कि Any Masters Degree, M. Phil/Ph. D है। योग्यता का विस्तृत विवरण प्राप्त करने के लिए, कृपया नीचे दी गई आधिकारिक अधिसूचना देखें।
Guest Faculty के लिए कुल रिक्तियां 4 है। योग्य उम्मीदवार आधिकारिक अधिसूचना के माध्यम से जा सकते हैं और नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं। वेतन और चयन प्रक्रिया का पूरा विवरण नीचे दिया गया है।
उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा / व्यक्तिगत साक्षात्कार / चिकित्सा परीक्षण / वॉकिन साक्षात्कार के आधार पर किया जाएगा। एक बार एक उम्मीदवार का चयन हो जाने के बाद उन्हें SLBSRSV में Guest Faculty के रूप में रखा जाएगा।
SLBSRSV Guest Faculty 2023 के लिए वेतन Rs. 50,000 - Rs. 50,000 Per Month है। इच्छुक उम्मीदवार नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं और नीचे नौकरी के स्थान, अंतिम तिथि और आवेदन प्रक्रिया की जांच कर सकते हैं।
SLBSRSV ने Guest Faculty पदों के लिए New Delhi में वैकेंसी नोटिफिकेशन जारी किया है। उम्मीदवार यहां स्थान और अन्य विवरण देख सकते हैं और SLBSRSV भर्ती 2023 के लिए आवेदन कर सकते हैं।
How to apply for SLBSRSV Recruitment 2023?
Guest Faculty के पद के इच्छुक उम्मीदवार 30/01/2023 से पहले आवेदन कर सकते हैं। SLBSRSV Guest Faculty भर्ती 2023 के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया चरणों के रूप में दी गई है।
चरण 2: SLBSRSV भर्ती 2023 अधिसूचना पर चयन करें।
चरण 4: सभी आवश्यक विवरण भरें।
चरण 5: अंतिम तिथि से पहले आवेदन पत्र को आवेदन करें या भेजें।
| SLBSRSV Guest Faculty रिक्तियों के लिए चार नौकरी के उद्घाटन के लिए उम्मीदवारों की तलाश कर रहा है। उम्मीदवार जो Guest Faculty रिक्तियों की भूमिका के लिए आवेदन करना चाहते हैं, वे SLBSRSV भर्ती दो हज़ार तेईस के लिए संपूर्ण विवरण और प्रक्रिया यहां देख सकते हैं। आवेदक जो SLBSRSV Guest Faculty भर्ती दो हज़ार तेईस के लिए आवेदन करना चाहते हैं, उन्हें अधिकारियों द्वारा पोस्ट की गई योग्यता विवरण की जांच करनी होगी, आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवारों को योग्यता को पूरा करना होगा जो कि Any Masters Degree, M. Phil/Ph. D है। योग्यता का विस्तृत विवरण प्राप्त करने के लिए, कृपया नीचे दी गई आधिकारिक अधिसूचना देखें। Guest Faculty के लिए कुल रिक्तियां चार है। योग्य उम्मीदवार आधिकारिक अधिसूचना के माध्यम से जा सकते हैं और नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं। वेतन और चयन प्रक्रिया का पूरा विवरण नीचे दिया गया है। उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा / व्यक्तिगत साक्षात्कार / चिकित्सा परीक्षण / वॉकिन साक्षात्कार के आधार पर किया जाएगा। एक बार एक उम्मीदवार का चयन हो जाने के बाद उन्हें SLBSRSV में Guest Faculty के रूप में रखा जाएगा। SLBSRSV Guest Faculty दो हज़ार तेईस के लिए वेतन Rs. पचास,शून्य - Rs. पचास,शून्य Per Month है। इच्छुक उम्मीदवार नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं और नीचे नौकरी के स्थान, अंतिम तिथि और आवेदन प्रक्रिया की जांच कर सकते हैं। SLBSRSV ने Guest Faculty पदों के लिए New Delhi में वैकेंसी नोटिफिकेशन जारी किया है। उम्मीदवार यहां स्थान और अन्य विवरण देख सकते हैं और SLBSRSV भर्ती दो हज़ार तेईस के लिए आवेदन कर सकते हैं। How to apply for SLBSRSV Recruitment दो हज़ार तेईस? Guest Faculty के पद के इच्छुक उम्मीदवार तीस जनवरी दो हज़ार तेईस से पहले आवेदन कर सकते हैं। SLBSRSV Guest Faculty भर्ती दो हज़ार तेईस के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया चरणों के रूप में दी गई है। चरण दो: SLBSRSV भर्ती दो हज़ार तेईस अधिसूचना पर चयन करें। चरण चार: सभी आवश्यक विवरण भरें। चरण पाँच: अंतिम तिथि से पहले आवेदन पत्र को आवेदन करें या भेजें। |
जेल के 3 प्रहरियों को निलंबित कर दिया गया है.
धमतरी जिला जेल से गुरुवार को एक खतरनाक कैदी फरार हो गया. कैदी का नाम इतवारी साहू उर्फ इतवारी सिंह बताया जा रहा है. वह हत्या के प्रयास मामले में जेल में बंद था. मिली जानकारी के मुताबिक उग्र स्वभाव के इतवारी ने एक युवक पर चाकू से सिर्फ इसलिए जानलेवा हमला कर दिया था क्योंकि उस युवक ने इतवारी को तेज बाइक चलाने पर टोक दिया था.
उधर कैदी के जेल से फरार होने की खबर के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया. मामले में तीन प्रहरियों पर कार्रवाई की गई है. कैदी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम सक्रिय हो गई है.
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सनी देओल की हीरोइन को जब ज्यादा पढ़ी-लिखी होना पड़ा भारी, एक्ट्रेस ने खूब सुने थे ताने, बोलीं- इंडस्ट्री में. .
| जेल के तीन प्रहरियों को निलंबित कर दिया गया है. धमतरी जिला जेल से गुरुवार को एक खतरनाक कैदी फरार हो गया. कैदी का नाम इतवारी साहू उर्फ इतवारी सिंह बताया जा रहा है. वह हत्या के प्रयास मामले में जेल में बंद था. मिली जानकारी के मुताबिक उग्र स्वभाव के इतवारी ने एक युवक पर चाकू से सिर्फ इसलिए जानलेवा हमला कर दिया था क्योंकि उस युवक ने इतवारी को तेज बाइक चलाने पर टोक दिया था. उधर कैदी के जेल से फरार होने की खबर के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया. मामले में तीन प्रहरियों पर कार्रवाई की गई है. कैदी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम सक्रिय हो गई है. . सनी देओल की हीरोइन को जब ज्यादा पढ़ी-लिखी होना पड़ा भारी, एक्ट्रेस ने खूब सुने थे ताने, बोलीं- इंडस्ट्री में. . |
कांग्रेस अध्यक्ष पद पर असमंजस के पीछे इतिहास का डरावना पन्ना! क्या कायम रहेगा गांधी परिवार का दबदबा?
पार्टी में एक तरफ कुछ मुखर स्वर अध्यक्ष पद के लिए चुनाव में खम ठोकने का मन बना चुके हैं। थरूर इसमें सबसे आगे हैं जबकि पृथ्वीराज चह्वाण समेत कई नेता परिवार से बाहर से अध्यक्ष बनाए जाने के हक में हैं।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली : पिछले लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी अध्यक्ष पद से राहुल गांधी का इस्तीफा और तीन साल बाद बतौर अध्यक्ष वापसी को लेकर असमंजस सिर्फ इच्छा या अनिच्छा तक सीमित नहीं है। संभवतः यह असमंजस इस मुद्दे पर ज्यादा है कि भविष्य में भी पार्टी के अंदर गांधी परिवार का दबदबा रहेगा या फिर कांग्रेस छाया से निकल पूरी तरह नई पार्टी होगी। शायद यही कारण है एक तरफ जहां सोनिया गांधी ने पार्टी नेता शशि थरूर को यह कहते हुए अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ने की अनुमति दे दी है कि वह निष्पक्ष रहेंगी। वहीं एक के बाद एक सात राज्यों से प्रदेश इकाई ने राहुल गांधी को ही अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव पारित कर दिया है।
वर्ष 2019 में इस्तीफे के बाद राहुल गांधी ने स्पष्ट कहा था कि वह न तो वह दोबारा अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी लेंगे और न ही परिवार के अंदर से कोई दूसरा बनेगा। वह काफी अरसे तक इस पर अडिग रहे। लेकिन समय से साथ थोड़ा बदलाव होता गया और अब परोक्ष रूप से यह संकेत दिया जाता है कि राहुल वापसी के लिए तैयार हो सकते हैं। जानकारों का मानना है कि यह बदलाव इतिहास की सीख के कारण है।
पार्टी में एक तरफ कुछ मुखर स्वर अध्यक्ष पद के लिए चुनाव में खम ठोकने का मन बना चुके हैं। थरूर इसमें सबसे आगे हैं जबकि पृथ्वीराज चह्वाण समेत कई नेता परिवार से बाहर से अध्यक्ष बनाए जाने के हक में हैं। यह मुखरता इसलिए दिख रही है क्योंकि पिछले वर्षों में गांधी परिवार के नेतृत्व में ही अमेठी जैसे सुरक्षित सीट भी हाथ से गए हैं और कई राज्यों में पार्टी के अंदर खिन्नता दिख रही है। सोनिया गांधी अस्वस्थ हैं, राहुल अपना नेतृत्व स्थापित नहीं कर पाए हैं और प्रियंका गांधी का करिश्मा रंग दिखाने में असफल रहा है।
जिस तरह जी-23 ने बगावत की है उसके बाद गांधी परिवार में भी बेचैनी है और यह जताने की कोशिश हो रही है कि पार्टी के लिए कोई भी कुर्बानी दी जा सकती है। लेकिन इसका खामियाजा बड़ा हो सकता है। इसमें शक नहीं कि राहुल गांधी आखिरी वक्त तक अध्यक्ष पद के लिए राजी नहीं हुए तो अशोक गहलोत जैसे विश्वस्त के हाथ कमान थमाने की कोशिश होगी। कमलनाथ, मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे नामों पर भी अटकलें लग रही हैं।
लेकिन इतिहास तो यह भी बताता है कि पीवी नरसिंह राव जैसे गांधी परिवार के विश्वस्त भी एक वक्त पर पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो गए थे। गांधी परिवार ओर नरसिंह राव के रिश्ते बहुत खराब हो गए थे। वस्तुतः राजीव गांधी की मृत्यु के बाद परिवार के प्रति उनकी निष्ठा के कारण ही उन्हें अध्यक्ष बनाया गया था। तब यह सामान्य विचार भी था राव एक अंतरिम अध्यक्ष हैं। तब कुछ लोग उन्हें प्रधानमंत्री पद की रेस से भी बाहर मान रहे थे। लेकिन संगठन पर पकड़ मजबूत बनाने के बाद वह प्रधानमंत्री भी बने और गांधी परिवार की छाया से बाहर निकलकर चुनौती भी पेश की। उनके बाद पार्टी अध्यक्ष बने सीताराम केसरी तो एक बागी ही थे और उन्हें एक तरह से अपमानित कर हटाया गया था। उसके बाद से पार्टी की कमान सोनिया गांधी के पास है। सिर्फ दो साल के लिए राहुल गांधी ने जिम्मेदारी संभाली थी।
पार्टी के सामने डा मनमोहन सिंह जैसा उदाहरण भी है जो लगातार दो कार्यकाल प्रधानमंत्री बने रहे और परिवार के प्रति उनकी निष्ठा में कोई बदलाव नहीं हुआ। लेकिन यह तब हुआ जब संगठन पर गांधी परिवार का दबदबा था। अगर राज्यों की बात की जाए तो खुद गहलोत कई मुद्दों पर नेतृत्व को झुकाने में कामयाब रहे हैं। जानकारों का मानना है कि पार्टी और राहुल के अंदर असमंजस का बड़ा कारण इतिहास का वह पन्ना है जो आशंकाओं को जन्म देता है। हालांकि पार्टी की ओर से स्पष्ट किया गया है कि किसी भी प्रदेश इकाई को कोई प्रस्ताव पारित करने के लिए नहीं कहा गया है लेकिन पार्टी के अंदर ही लोग इसे मानने से इन्कार कर रहे हैं। लेकिन यह संभावना अब प्रबल दिखने लगी है कि आखिरी वक्त में गांधी परिवार मैदान में दिख सकता है।
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नई दिल्ली। नागरिक संशोधन कानून (सीएए) और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (एनआरसी) के खिलाफ शाहीन बाग में शुरू हुआ प्रोटेस्ट चर्चा का विषय बना हुआ है। शाहीन बाग की तर्ज पर देश के कुछ और हिस्सों में बच्चे और बूढ़ी महिलाएं सीएए-एनआरसी के खिलाफ धरने पर बैठी हैं।
दिल्ली के शाहीन बाग की सड़क पर सीएए-एनआरसी के खिलाफ महिलाओं को धरने पर बैठे हुए 38 दिन हो गए हैं। महिलाएं किसी भी सूरत में अपने कदम पीछे खींचने को तैयार नहीं है। आखिर शाहीन बाग में आंदोलन की शुरुआत कैसे और कब हुई इसकी जानकारी तमाम लोगों को नहीं है।
सीएए संसद के दोनों सदनों से पास हो चुका था और राष्ट्रपति ने भी इसे मंजूरी दे दी थी। दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्विद्यालय के छात्र इसके खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। कानून आने के बाद पहला शुक्रवार 15 दिसंबर 2019 को पड़ा था। शुक्रवार की नमाज खत्म होने के बाद जामिया नगर के लोगों ने सीएए के खिलाफ सड़क पर उतर आए थे। जामिया नगर में ओखला और बटला हाउस के लोग जामिया मिल्लिया के छात्रों के साथ प्रोटेस्ट में शामिल हो गए तो दूसरे अबु फजल और शाहीन बाग के लोग नोएडा से कालिंदी मार्ग की तरफ बढ़ गए।
शाहीन बाग के प्रोटेस्ट में आप के विधायक अमानतुल्ला खान से लेकर पूर्व विधायक आसिफ मोहम्मद खान सहित इलाके के कई नेता भी शामिल थे। जामिया मिल्लिया के छात्रों का आंदोलन मथुरा रोड की तरफ बढ़ ही रहा था कि अचानक प्रदर्शन ने हिसंक रूप अख्तियार कर लिया। इस दौरान दिल्ली में बसों में तोड़फोड़ आगजनी की घटनाएं भी हुईं। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच पथराव शुरू हो गया, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और आसू गैस के गोले छोड़े गए। जामिया की लाईब्रेरी में घुसकर पुलिस ने छात्रों पर लाठी चार्ज भी किया।
जामिया प्रोटेस्ट के हिंसक होने के बाद प्रशासन ने इलाके को चारों तरफ से बंद कर दिया था। नोएडा-कालिंदी कुंज मार्ग को भी बंद कर दिया गया ताकि प्रदर्शनकारी सड़क पर न उतार पाए। मगर शाम को 8 बजे जामिया के कुछ छात्रों और शाहीन बाग की तमाम महिलाएं अपने घरों से निकलकर सड़क पर आकर बैठ गईं।
इसके बाद आसपास के लोग भी यहां जुटने लगें। कुछ ही घंटों में प्रदर्शनाकरियों की संख्या 100 से ज्यादा हो गई। जेएनयू और दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र छात्राएं और अकादमिक लोग भी आंदोलन में शामिल होने लगे। प्रोटेस्ट की कमान पूरी तरह से महिलाओं के हाथ में है। दूसरे तमाम लोग वॉलिटिंयर के रूप में काम कर रहे हैं।
यहां महिलाओं के अलावा देशभर के तमाम इलाकों से भी लोग पहुंच रहे हैं। जादोपुर विश्वविद्याय औऱ जामिया के फाइन आर्ट के छात्र पेंटिंग और पोस्टर के जरिए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस प्रोटेस्ट को विपक्ष के तमाम नेताओं ने समर्थन दिया है। कई नेता धरना स्थल तक भी पहुंच चुके हैं। बीजेपी ने आरोप भी लगाया कि प्रोटेस्ट के पीछे सरकार को बदनाम करने की विपक्षी साजिश है। कहा जा रहा है कि 15 दिंसबर को शुरु हुए इस आंदोलन में अब मंच पर बोलने के लिए महिलाओं से इजाजत लेनी पड़ रही है।
| नई दिल्ली। नागरिक संशोधन कानून और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन के खिलाफ शाहीन बाग में शुरू हुआ प्रोटेस्ट चर्चा का विषय बना हुआ है। शाहीन बाग की तर्ज पर देश के कुछ और हिस्सों में बच्चे और बूढ़ी महिलाएं सीएए-एनआरसी के खिलाफ धरने पर बैठी हैं। दिल्ली के शाहीन बाग की सड़क पर सीएए-एनआरसी के खिलाफ महिलाओं को धरने पर बैठे हुए अड़तीस दिन हो गए हैं। महिलाएं किसी भी सूरत में अपने कदम पीछे खींचने को तैयार नहीं है। आखिर शाहीन बाग में आंदोलन की शुरुआत कैसे और कब हुई इसकी जानकारी तमाम लोगों को नहीं है। सीएए संसद के दोनों सदनों से पास हो चुका था और राष्ट्रपति ने भी इसे मंजूरी दे दी थी। दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्विद्यालय के छात्र इसके खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। कानून आने के बाद पहला शुक्रवार पंद्रह दिसंबर दो हज़ार उन्नीस को पड़ा था। शुक्रवार की नमाज खत्म होने के बाद जामिया नगर के लोगों ने सीएए के खिलाफ सड़क पर उतर आए थे। जामिया नगर में ओखला और बटला हाउस के लोग जामिया मिल्लिया के छात्रों के साथ प्रोटेस्ट में शामिल हो गए तो दूसरे अबु फजल और शाहीन बाग के लोग नोएडा से कालिंदी मार्ग की तरफ बढ़ गए। शाहीन बाग के प्रोटेस्ट में आप के विधायक अमानतुल्ला खान से लेकर पूर्व विधायक आसिफ मोहम्मद खान सहित इलाके के कई नेता भी शामिल थे। जामिया मिल्लिया के छात्रों का आंदोलन मथुरा रोड की तरफ बढ़ ही रहा था कि अचानक प्रदर्शन ने हिसंक रूप अख्तियार कर लिया। इस दौरान दिल्ली में बसों में तोड़फोड़ आगजनी की घटनाएं भी हुईं। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच पथराव शुरू हो गया, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और आसू गैस के गोले छोड़े गए। जामिया की लाईब्रेरी में घुसकर पुलिस ने छात्रों पर लाठी चार्ज भी किया। जामिया प्रोटेस्ट के हिंसक होने के बाद प्रशासन ने इलाके को चारों तरफ से बंद कर दिया था। नोएडा-कालिंदी कुंज मार्ग को भी बंद कर दिया गया ताकि प्रदर्शनकारी सड़क पर न उतार पाए। मगर शाम को आठ बजे जामिया के कुछ छात्रों और शाहीन बाग की तमाम महिलाएं अपने घरों से निकलकर सड़क पर आकर बैठ गईं। इसके बाद आसपास के लोग भी यहां जुटने लगें। कुछ ही घंटों में प्रदर्शनाकरियों की संख्या एक सौ से ज्यादा हो गई। जेएनयू और दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र छात्राएं और अकादमिक लोग भी आंदोलन में शामिल होने लगे। प्रोटेस्ट की कमान पूरी तरह से महिलाओं के हाथ में है। दूसरे तमाम लोग वॉलिटिंयर के रूप में काम कर रहे हैं। यहां महिलाओं के अलावा देशभर के तमाम इलाकों से भी लोग पहुंच रहे हैं। जादोपुर विश्वविद्याय औऱ जामिया के फाइन आर्ट के छात्र पेंटिंग और पोस्टर के जरिए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस प्रोटेस्ट को विपक्ष के तमाम नेताओं ने समर्थन दिया है। कई नेता धरना स्थल तक भी पहुंच चुके हैं। बीजेपी ने आरोप भी लगाया कि प्रोटेस्ट के पीछे सरकार को बदनाम करने की विपक्षी साजिश है। कहा जा रहा है कि पंद्रह दिंसबर को शुरु हुए इस आंदोलन में अब मंच पर बोलने के लिए महिलाओं से इजाजत लेनी पड़ रही है। |
( हह )
तिथि जानी जा सकती है ) ( इन दोनों दोहों के साथ दो० सं० १६ देखिए )
अलंकारः - परिसंख्या, काव्यलिंग ( पूर्वार्ध का समर्थन उत्तरार्द्ध की युक्ति से )
नैंक हँसोही बानि तजि लख्या परतु मुँहूँ नीठि । चौका चमकनि चौंध मैं परति चौंधि* सी डीठि ॥५२॥
अर्थः - ( हे नायिका तू ) हँसते रहने की बान थोड़ा छोड़ दे ( क्योंकि जब तू हँसती है तब ) आगे के चारों दाँतों की चमक की चकाचौंध में आँख चौंधिया सी जाती है (जिससे तेरा) मुख कठिनता से दिखलाई पड़ता है (इस एक दोहे में कवि ने दाँतों की मनोहर नेत्राकर्षक चमक, हास्य की मधुरता और मुख का सौंदर्य जिसके देखने के लिए हँसने की बानि छोड़ाई जा रही है एक साथ वर्णन किया है )
अलंकारः - काव्यलिंग ( उत्तरार्द्ध बात से पूर्वार्ध का समर्थन ) । अनुक्तविषयावस्तूत्प्रेक्षा ( दाँतों की चमक चौंध के तुल्य, अनुक्त विषय हास्य । ।
१ नीठि=कठिनता से ।
२ चौका=ग्रगे के चार दाँत (दो ऊपर के दो नीचे के ) :
* केशवदास नायिका के सीस, भाल, कंठ, नाक इत्यादि पर पूरा चकाचौंध का सामान रख कर लिखते हैं - "तैसीये दसनदुति दमकत केसोराय... हरे हरे हँसि नैक चतुर चपल नैन चित चकचौंधे मेरे मदन गोपाल को " | तिथि जानी जा सकती है ) अलंकारः - परिसंख्या, काव्यलिंग नैंक हँसोही बानि तजि लख्या परतु मुँहूँ नीठि । चौका चमकनि चौंध मैं परति चौंधि* सी डीठि ॥बावन॥ अर्थः - हँसते रहने की बान थोड़ा छोड़ दे आगे के चारों दाँतों की चमक की चकाचौंध में आँख चौंधिया सी जाती है मुख कठिनता से दिखलाई पड़ता है अलंकारः - काव्यलिंग । अनुक्तविषयावस्तूत्प्रेक्षा : * केशवदास नायिका के सीस, भाल, कंठ, नाक इत्यादि पर पूरा चकाचौंध का सामान रख कर लिखते हैं - "तैसीये दसनदुति दमकत केसोराय... हरे हरे हँसि नैक चतुर चपल नैन चित चकचौंधे मेरे मदन गोपाल को " |
बरसात के मौसम में सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला स्नेेक्स होता है भुट्टा । लोग इसे अपनी पसंद से अलग-अलग स्वाद में खाना पसंद करते हैं। पर क्या आप जानते हैं कि स्वाद के साथ ही भुट्टा सेहत का भी खास स्रोत है। भुट्टा बच्चों को जरूर खिलाना चाहिए। इससे उनके दांत मजबूत होते हैं। मुंह में होने वाले कीटाणुओं से भी छुटकारा मिलता है।
आयुर्वेद के अनुसार भुट्टा तृप्तिदायक, वातकारक, कफ, पित्तनाशक, मधुर और रुचि उत्पादक अनाज है। पकाने के बाद इसकी पौष्टिकता और बढ़ जाती है। पके हुए भुट्टे में पाया जाने वाला कैरोटीनायड विटामिन-ए का अच्छा स्रोत होता है।
भुट्टे को पकाने के बाद उसके 50 प्रतिशत एंटी-ऑक्सीअडेंट्स बढ़ जाते हैं। यह बढती उम्र को रोकता है और कैंसर से लड़ने में मदद करता है। पके हुए भुट्टे में फोलिक एसिड होता है जो कि कैंसर जैसी बीमारी में लड़ने में बहुत मददगार होता है।
भुट्टे में मिनरल्स और विटामिन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। भुट्टे को एक बेहतरीन कोलेस्ट्रॉल फाइटर माना जाता है, जो दिल के मरीजों के लिए बहुत अच्छा है।
टीबी के मरीजों के लिए मक्का बहुत फायदेमंद है। टीबी के मरीजों को या जिन्हें टीबी होने की आशंका हो हर रोज मक्के की रोटी खाना चाहिए। इससे टीबी के इलाज में फायदा होगा।
मक्के के बाल (सिल्क) का उपयोग पथरी रोगों की चिकित्सा मे होता है। पथरी से बचाव के लिए रात भर सिल्क को पानी मे भिगोकर सुबह सिल्क हटाकर पानी पीने से लाभ होता है। पथरी के उपचार में सिल्क को पानी में उबालकर बनाये गये काढ़े का प्रयोग होता है।
यदि गेहूं के आटे के स्थान पर मक्के के आटे का प्रयोग करें तो यह लीवर के लिए अधिक लाभकारी है। यह प्रचूर मात्रा में रेशे से भरा हुआ है। इसलिए इसे खाने से पेट अच्छा रहता है। इससे कब्ज, बवासीर और पेट के कैंसर के होने की संभावना दूर होती है।
भुट्टे के पीले दानों में बहुत सारा मैगनीशियम, आयरन, कॉपर और फॉस्फोरस पाया जाता है जिससे हड्डियां मजबूत बनती हैं। एनीमिया को दूर करने के लिए भुट्टा खाना चाहिए क्योंकि इसमें विटामिन बी और फोलिक एसिड होता है।
खुजली के लिए भी भुट्टे का स्टॉर्च प्रयोग किया जाता है। वहीं इसके सौंदर्य लाभ भी कुछ कम नहीं है। इसके स्टार्च के प्रयोग से त्वचा खूबसूरत और चिकनी बन जाती है।
भुट्टा दिल की बीमारी को भी दूर करने में सहायक है क्योंकि इसमें विटामिन सी, कैरोटिनॉइड और बायोफ्लेवनॉइड पाया जाता है। यह कोलेस्ट्रॉल लेवल को बढ़ने से बचाता है और शरीर में खून के प्रवाह को भी बढ़ाता है।
इसका सेवन प्रेगनेंसी में भी बहुत लाभदायक होता है इसलिए गर्भवती महिलाओं को इसे अपने आहार में जरूर शामिल करना चाहिए। क्योंकि इसमें फोलिक एसिड पाया जाता है जो गर्भवती के लिए बेहद जरूरी है।
| बरसात के मौसम में सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला स्नेेक्स होता है भुट्टा । लोग इसे अपनी पसंद से अलग-अलग स्वाद में खाना पसंद करते हैं। पर क्या आप जानते हैं कि स्वाद के साथ ही भुट्टा सेहत का भी खास स्रोत है। भुट्टा बच्चों को जरूर खिलाना चाहिए। इससे उनके दांत मजबूत होते हैं। मुंह में होने वाले कीटाणुओं से भी छुटकारा मिलता है। आयुर्वेद के अनुसार भुट्टा तृप्तिदायक, वातकारक, कफ, पित्तनाशक, मधुर और रुचि उत्पादक अनाज है। पकाने के बाद इसकी पौष्टिकता और बढ़ जाती है। पके हुए भुट्टे में पाया जाने वाला कैरोटीनायड विटामिन-ए का अच्छा स्रोत होता है। भुट्टे को पकाने के बाद उसके पचास प्रतिशत एंटी-ऑक्सीअडेंट्स बढ़ जाते हैं। यह बढती उम्र को रोकता है और कैंसर से लड़ने में मदद करता है। पके हुए भुट्टे में फोलिक एसिड होता है जो कि कैंसर जैसी बीमारी में लड़ने में बहुत मददगार होता है। भुट्टे में मिनरल्स और विटामिन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। भुट्टे को एक बेहतरीन कोलेस्ट्रॉल फाइटर माना जाता है, जो दिल के मरीजों के लिए बहुत अच्छा है। टीबी के मरीजों के लिए मक्का बहुत फायदेमंद है। टीबी के मरीजों को या जिन्हें टीबी होने की आशंका हो हर रोज मक्के की रोटी खाना चाहिए। इससे टीबी के इलाज में फायदा होगा। मक्के के बाल का उपयोग पथरी रोगों की चिकित्सा मे होता है। पथरी से बचाव के लिए रात भर सिल्क को पानी मे भिगोकर सुबह सिल्क हटाकर पानी पीने से लाभ होता है। पथरी के उपचार में सिल्क को पानी में उबालकर बनाये गये काढ़े का प्रयोग होता है। यदि गेहूं के आटे के स्थान पर मक्के के आटे का प्रयोग करें तो यह लीवर के लिए अधिक लाभकारी है। यह प्रचूर मात्रा में रेशे से भरा हुआ है। इसलिए इसे खाने से पेट अच्छा रहता है। इससे कब्ज, बवासीर और पेट के कैंसर के होने की संभावना दूर होती है। भुट्टे के पीले दानों में बहुत सारा मैगनीशियम, आयरन, कॉपर और फॉस्फोरस पाया जाता है जिससे हड्डियां मजबूत बनती हैं। एनीमिया को दूर करने के लिए भुट्टा खाना चाहिए क्योंकि इसमें विटामिन बी और फोलिक एसिड होता है। खुजली के लिए भी भुट्टे का स्टॉर्च प्रयोग किया जाता है। वहीं इसके सौंदर्य लाभ भी कुछ कम नहीं है। इसके स्टार्च के प्रयोग से त्वचा खूबसूरत और चिकनी बन जाती है। भुट्टा दिल की बीमारी को भी दूर करने में सहायक है क्योंकि इसमें विटामिन सी, कैरोटिनॉइड और बायोफ्लेवनॉइड पाया जाता है। यह कोलेस्ट्रॉल लेवल को बढ़ने से बचाता है और शरीर में खून के प्रवाह को भी बढ़ाता है। इसका सेवन प्रेगनेंसी में भी बहुत लाभदायक होता है इसलिए गर्भवती महिलाओं को इसे अपने आहार में जरूर शामिल करना चाहिए। क्योंकि इसमें फोलिक एसिड पाया जाता है जो गर्भवती के लिए बेहद जरूरी है। |
संदन प्रस्तावों द्वारा उसपर अपनी स्वीकृति दे दें, तो वह घोषणा दो महीने के बाद भी लागू रहेगी ।
इस सम्बन्ध में ऐसा भी हो सकता है कि जिस समय यह उद्घोषणा जारी की जाय, उसके पहले ही लोक-सभा भग या विघटित हो चुकी हो या दो महीने के अन्दर उसका विघटन हो जाय। ऐसी अवस्था में उस उद्घोपणा पर राज्य सभा की स्वीकृति प्राप्त की जायगी और नई लोक सभा के बनने पर उसकी प्रथम बैठक के ३० दिनों के अदर इसकी स्वीकृति ले लो जायगी, अन्यथा तीस दिनों की समाशि के बाद इस उद्घोषणा को भी समाप्ति हो जायगी। यदि नई लोक सभा ने स्वीकृति दे दी, तो उसकी पहली बैठक के ३० दिनों के बाद भी यह घोषणा लागू रहेगी।
उपर्युक्त उद्घोषणा के परियान ये होंगे - (१) सारे देश का शासन-सूत्र राष्ट्रपति के हाथ में आ जायगा । संघीय कार्यपालिका को यह शक्ति मिल जायगी कि वह राज्यों को यह निर्देश दे सके कि उसकी कार्यपालिका-शक्ति का किस तरह प्रयोग किया जाय। अर्थात् राज्यों को कार्यपालिका भंग तो नहीं होगी, परन्तु वह पूर्णतः सघीय कार्यपालिका के नियन्त्रण में रहेगी। राज्यकार्यपालिकाओं का भौतिक अस्तित्व तो रहेगा, लेकिन उनकी स्वायत्तता (Auto nomy) और ध्वतन्त्रता समाप्त हो जायगी और उनका स्वरूप एकात्म व्यवस्था के अन्तर्गत स्थानीय अधिकारियों की भांति हो जायगा ।
( २ ) इस ग्रापति - उद्घोषणा का दूसरा प्रभाव यह होगा कि संसद् को सम्पूर्ण भारत का अथवा उसके किसी भी क्षेत्र के लिए सभी विषयों, अर्थात् राज्य-सूची में वर्णित विषयों पर भी कानून बनाने का अधिकार प्राप्त होगा। यदि किसी राज्य द्वारा बनाया गया कोई कानून ससद् के विरुद्ध हो, तो उसे गैरकानूनी घोषित किया जायेगा ।
इस प्रकार की उद्घोषणा जबतक लागू रहेगी, राष्ट्रपति संसद्को अवधि (जो ५ वर्ग की होती है) बढ़ा सकता है । यद्यपि संविधान ने एक बार में सिर्फ १ वर्ष की अवधिकाराष्ट्रपतिको दिया है, फिर भी राष्ट्रपति ससदू की ऋधि को इस प्रकार कितनी बार बढा सकता है, इस सम्बन्ध में उस पर कोई प्रतिवन्ध नहीं लगाया गया है। लेकिन किसी भी हालत में उद्वापणा-काल की समाप्ति के बाद ६ महीने से अधिक संसद् श्री यह बढी हुई अवधि नहीं रह सकती ।
(३) इस आपात- उद्घोपया का तीसरा प्रभाव यह होगा कि इस अवधि में सघ तथा राज्यों के बीच सरकारी मदनी को विभाजित करने के सम्बन्ध में जो व्यवस्थाएँ हैं, उन्हें स्थगित यह परिवर्तित कर सकने का अधिकार भी राष्ट्रपति को
होगा। लेकिन जिस वित्तीय वर्ष में उद्घोषणा-काल समाप्त होगा, उसी वर्ष राष्ट्ररति का यह आदेश भी समाप्त हो जायगा । राष्ट्रपति के ऐसे श्रादेश पर ससद् की स्वीकृति श्रावश्यक होगी।
(४) चौथा प्रभाव, सविधान की १६वी धारा द्वारा भारत के नागरिकों को दिये गये, स्वतंत्रता के मूल अधिकारों से सम्बन्ध रखता है। धारा ३५८ के अनुसार आपात उद्घोषणा के समय नागरिकों के निम्नलिखित मूल अधिकारों को राष्ट्रपति स्थगित कर सकता है -(क) भाषण और विचारों की अभिव्यक्ति को स्वतंत्रता, (ख) शान्तिपूर्वक समाएँ कर सकने और एकत्र होने की स्वतंत्रता (ग) समुदाय बनाने की स्वतंत्रता, घ, भारत के राज्य क्षेत्र में कहीं भी रह सकने या यह सकने की स्वतंत्रता, ङ) भारत के राज्य क्षेत्र में स्वेच्छापूर्वक था जा सकने की स्वतंत्रता, (च) सम्पत्ति को अधिगत कर सकने, रख सकने और इस्तान्तरित कर सकने की स्वतंत्रता और (छ) किसी भी पेशे, धन्ये, कारोबार, व्यापार और कार्य को कर सकने की स्वतंत्रता ।
इन मूल अधिकारों को स्थगित कर देने का प्रभाव यह होगा कि राज्य इन अधिकारों की उपेक्षा करनेवाला या इनके विरूद्ध जानेवाला कानून बना सकेगा ।
इतना ही नहीं, सविधान की धारा ३५६ के अनुसार, नागरिकों के संवैधानिक उपचारों के मूल अधिकारों को भी राष्ट्रपति स्थगित कर सकता है। अर्थात्, राष्ट्रपति यह आशा दे सकता है कि कोई भी नागरिक इस अवधि में अपने मूल अधिकारों की रक्षा के लिए सर्वोच्च या उच्च न्यायालयों की शरण नहीं ले सकता ।
(५) राष्ट्रपति को संघ तथा राज्यों के बीच राजस्व विभाजन ( Revenue distribution), अर्थात् सरकारी प्राय के विभाजन-सम्बंन्धी उपवन्धों या व्यवस्थाओं को स्थगित करने या उनमें इच्छानुसार परिवर्तन का अधिकार होगा ।
इस प्रकार हम पाते हैं कि युद्ध, बाह्य आक्रमण और श्रान्तरिक अशान्ति की दशा में या उनकी श्राशका के कारण की गई आपात उद्घोषणा का परिणाम यह होगा कि राष्ट्रपति को बहुत से व्यापक और निरंकुश अधिकार तो प्राप्त हो हो जायेंगे, साथ ही भारत का शासन सघात्मक न रहकर एकात्मक हो जायण । राज्य सरकारों के ऊपर सघ सरकार का कार्यपालिका, विधायिनी और वित्तीय मामलों में पूर्ण नियन्त्रण स्थापित हो जायगा । श्रागे चलकर इसकी और भी चर्चा की जायगी।
३४भारतीय शासन
(ख) राज्यों के सवैधानिक शासन-तत्र के विफल हो जाने से उत्पन्न संकट Emergencies arising from the failure of Constitutional machinery in
States ) -- अगर किसी राज्य के गवर्नर, अर्थात् राज्यपाल द्वारा भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर या अन्य स्रोत से राष्ट्रपति को यह सतोपण Satusfaction) हो जाय कि वहाँ ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिसमें उस राज्य का शासन सविधान के अनुसार नहीं चल रहा हो या नहीं चलाया जा सकता हो, तो राष्ट्रपति दूसरे प्रकार के सकट की घोषणा कर सकता है। इस प्रकार की आपात उद्घोषणा के प्रभावो की विवेचना के पूर्व यह स्पष्ट कर देना अनावश्यक नहीं होगा कि ऐसी घोषणा करने के लिए यह जरूरी नहीं है कि राष्ट्रपति को राज्य के प्रधान से सूचना मिले ही । वह अपने आप भी ऐसो घोपणा कर सकता है। सविधान ने राष्ट्रपति को राज्यों को कुछ आदेश देने का अधिकार दिया है। अगर किसी राज्य में राष्ट्रपति द्वारा दिये गये आदेश का पालन न हो, तो राष्ट्रपति यह मान सकता है कि उस राज्य में संविधान-तत्र विफल हो गया है और वह सकट की घोषणा कर सकता है ।
इस प्रकार की आपात उद्घोषणा के निम्नलिखित प्रभाव होंगे(अ) राष्ट्रपति उस राज्य की कार्यपालिका-शक्ति को अपने हाथ में ले सकता । राज्यपाल या अन्य किसी अधिकारी के सभी या कोई भी अधिकार या उस राज्य के समस्त और कतिपय कार्यों को स्वय धारण कर सकता है ।
(आ) उस राज्य के विधान-मंडल की शक्तियों के प्रयोग का अधिकार संसद् को दे सकता है । ऐसी दशा में सतद् को यह अधिकार होगा कि वह उन विधायिनी शक्तियों को चाहे तो राष्ट्रपति को हस्तान्तरित ( Delegate) कर दे या उसे यह भी अधिकार दे दे कि वह उन्हें किसी भी अन्य प्राधिकारी (Authority) को, जिसे वह उपयुक्त समझे, दे दे । इन्हीं अधिकारों का प्रयोग करते हुए लोक सभा ने ३० अप्रैल, १६५३ को Patiala and East Punjab States Union Legislature (Delegation of Powers) Bill पांस किया था, जिसके अनुसार उस प्रदेश की विधायिनी शक्ति राष्ट्रपति को दे दी गई थी ।
(इ) उच्च न्यायालय की शक्तियों को राष्ट्रपति नहीं छोन सकेगा, वे ज्यों-कीत्यों रहेंगी। इसे छोड़कर राष्ट्रपति कोई भी ऐसी कारंबाई कर सकता है, या प्रासंगिक और अनुसंगिक उपबन्ध (Incidental and Consequential_Provision) बना सकता है, जो इस प्रकार की घोषणा के लागू करने के उद्देश्य से आवश्यक या वाछनीय हो । | संदन प्रस्तावों द्वारा उसपर अपनी स्वीकृति दे दें, तो वह घोषणा दो महीने के बाद भी लागू रहेगी । इस सम्बन्ध में ऐसा भी हो सकता है कि जिस समय यह उद्घोषणा जारी की जाय, उसके पहले ही लोक-सभा भग या विघटित हो चुकी हो या दो महीने के अन्दर उसका विघटन हो जाय। ऐसी अवस्था में उस उद्घोपणा पर राज्य सभा की स्वीकृति प्राप्त की जायगी और नई लोक सभा के बनने पर उसकी प्रथम बैठक के तीस दिनों के अदर इसकी स्वीकृति ले लो जायगी, अन्यथा तीस दिनों की समाशि के बाद इस उद्घोषणा को भी समाप्ति हो जायगी। यदि नई लोक सभा ने स्वीकृति दे दी, तो उसकी पहली बैठक के तीस दिनों के बाद भी यह घोषणा लागू रहेगी। उपर्युक्त उद्घोषणा के परियान ये होंगे - सारे देश का शासन-सूत्र राष्ट्रपति के हाथ में आ जायगा । संघीय कार्यपालिका को यह शक्ति मिल जायगी कि वह राज्यों को यह निर्देश दे सके कि उसकी कार्यपालिका-शक्ति का किस तरह प्रयोग किया जाय। अर्थात् राज्यों को कार्यपालिका भंग तो नहीं होगी, परन्तु वह पूर्णतः सघीय कार्यपालिका के नियन्त्रण में रहेगी। राज्यकार्यपालिकाओं का भौतिक अस्तित्व तो रहेगा, लेकिन उनकी स्वायत्तता और ध्वतन्त्रता समाप्त हो जायगी और उनका स्वरूप एकात्म व्यवस्था के अन्तर्गत स्थानीय अधिकारियों की भांति हो जायगा । इस ग्रापति - उद्घोषणा का दूसरा प्रभाव यह होगा कि संसद् को सम्पूर्ण भारत का अथवा उसके किसी भी क्षेत्र के लिए सभी विषयों, अर्थात् राज्य-सूची में वर्णित विषयों पर भी कानून बनाने का अधिकार प्राप्त होगा। यदि किसी राज्य द्वारा बनाया गया कोई कानून ससद् के विरुद्ध हो, तो उसे गैरकानूनी घोषित किया जायेगा । इस प्रकार की उद्घोषणा जबतक लागू रहेगी, राष्ट्रपति संसद्को अवधि बढ़ा सकता है । यद्यपि संविधान ने एक बार में सिर्फ एक वर्ष की अवधिकाराष्ट्रपतिको दिया है, फिर भी राष्ट्रपति ससदू की ऋधि को इस प्रकार कितनी बार बढा सकता है, इस सम्बन्ध में उस पर कोई प्रतिवन्ध नहीं लगाया गया है। लेकिन किसी भी हालत में उद्वापणा-काल की समाप्ति के बाद छः महीने से अधिक संसद् श्री यह बढी हुई अवधि नहीं रह सकती । इस आपात- उद्घोपया का तीसरा प्रभाव यह होगा कि इस अवधि में सघ तथा राज्यों के बीच सरकारी मदनी को विभाजित करने के सम्बन्ध में जो व्यवस्थाएँ हैं, उन्हें स्थगित यह परिवर्तित कर सकने का अधिकार भी राष्ट्रपति को होगा। लेकिन जिस वित्तीय वर्ष में उद्घोषणा-काल समाप्त होगा, उसी वर्ष राष्ट्ररति का यह आदेश भी समाप्त हो जायगा । राष्ट्रपति के ऐसे श्रादेश पर ससद् की स्वीकृति श्रावश्यक होगी। चौथा प्रभाव, सविधान की सोलहवी धारा द्वारा भारत के नागरिकों को दिये गये, स्वतंत्रता के मूल अधिकारों से सम्बन्ध रखता है। धारा तीन सौ अट्ठावन के अनुसार आपात उद्घोषणा के समय नागरिकों के निम्नलिखित मूल अधिकारों को राष्ट्रपति स्थगित कर सकता है - भाषण और विचारों की अभिव्यक्ति को स्वतंत्रता, शान्तिपूर्वक समाएँ कर सकने और एकत्र होने की स्वतंत्रता समुदाय बनाने की स्वतंत्रता, घ, भारत के राज्य क्षेत्र में कहीं भी रह सकने या यह सकने की स्वतंत्रता, ङ) भारत के राज्य क्षेत्र में स्वेच्छापूर्वक था जा सकने की स्वतंत्रता, सम्पत्ति को अधिगत कर सकने, रख सकने और इस्तान्तरित कर सकने की स्वतंत्रता और किसी भी पेशे, धन्ये, कारोबार, व्यापार और कार्य को कर सकने की स्वतंत्रता । इन मूल अधिकारों को स्थगित कर देने का प्रभाव यह होगा कि राज्य इन अधिकारों की उपेक्षा करनेवाला या इनके विरूद्ध जानेवाला कानून बना सकेगा । इतना ही नहीं, सविधान की धारा तीन सौ छप्पन के अनुसार, नागरिकों के संवैधानिक उपचारों के मूल अधिकारों को भी राष्ट्रपति स्थगित कर सकता है। अर्थात्, राष्ट्रपति यह आशा दे सकता है कि कोई भी नागरिक इस अवधि में अपने मूल अधिकारों की रक्षा के लिए सर्वोच्च या उच्च न्यायालयों की शरण नहीं ले सकता । राष्ट्रपति को संघ तथा राज्यों के बीच राजस्व विभाजन , अर्थात् सरकारी प्राय के विभाजन-सम्बंन्धी उपवन्धों या व्यवस्थाओं को स्थगित करने या उनमें इच्छानुसार परिवर्तन का अधिकार होगा । इस प्रकार हम पाते हैं कि युद्ध, बाह्य आक्रमण और श्रान्तरिक अशान्ति की दशा में या उनकी श्राशका के कारण की गई आपात उद्घोषणा का परिणाम यह होगा कि राष्ट्रपति को बहुत से व्यापक और निरंकुश अधिकार तो प्राप्त हो हो जायेंगे, साथ ही भारत का शासन सघात्मक न रहकर एकात्मक हो जायण । राज्य सरकारों के ऊपर सघ सरकार का कार्यपालिका, विधायिनी और वित्तीय मामलों में पूर्ण नियन्त्रण स्थापित हो जायगा । श्रागे चलकर इसकी और भी चर्चा की जायगी। चौंतीसभारतीय शासन राज्यों के सवैधानिक शासन-तत्र के विफल हो जाने से उत्पन्न संकट Emergencies arising from the failure of Constitutional machinery in States ) -- अगर किसी राज्य के गवर्नर, अर्थात् राज्यपाल द्वारा भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर या अन्य स्रोत से राष्ट्रपति को यह सतोपण Satusfaction) हो जाय कि वहाँ ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिसमें उस राज्य का शासन सविधान के अनुसार नहीं चल रहा हो या नहीं चलाया जा सकता हो, तो राष्ट्रपति दूसरे प्रकार के सकट की घोषणा कर सकता है। इस प्रकार की आपात उद्घोषणा के प्रभावो की विवेचना के पूर्व यह स्पष्ट कर देना अनावश्यक नहीं होगा कि ऐसी घोषणा करने के लिए यह जरूरी नहीं है कि राष्ट्रपति को राज्य के प्रधान से सूचना मिले ही । वह अपने आप भी ऐसो घोपणा कर सकता है। सविधान ने राष्ट्रपति को राज्यों को कुछ आदेश देने का अधिकार दिया है। अगर किसी राज्य में राष्ट्रपति द्वारा दिये गये आदेश का पालन न हो, तो राष्ट्रपति यह मान सकता है कि उस राज्य में संविधान-तत्र विफल हो गया है और वह सकट की घोषणा कर सकता है । इस प्रकार की आपात उद्घोषणा के निम्नलिखित प्रभाव होंगे राष्ट्रपति उस राज्य की कार्यपालिका-शक्ति को अपने हाथ में ले सकता । राज्यपाल या अन्य किसी अधिकारी के सभी या कोई भी अधिकार या उस राज्य के समस्त और कतिपय कार्यों को स्वय धारण कर सकता है । उस राज्य के विधान-मंडल की शक्तियों के प्रयोग का अधिकार संसद् को दे सकता है । ऐसी दशा में सतद् को यह अधिकार होगा कि वह उन विधायिनी शक्तियों को चाहे तो राष्ट्रपति को हस्तान्तरित कर दे या उसे यह भी अधिकार दे दे कि वह उन्हें किसी भी अन्य प्राधिकारी को, जिसे वह उपयुक्त समझे, दे दे । इन्हीं अधिकारों का प्रयोग करते हुए लोक सभा ने तीस अप्रैल, एक हज़ार छः सौ तिरेपन को Patiala and East Punjab States Union Legislature Bill पांस किया था, जिसके अनुसार उस प्रदेश की विधायिनी शक्ति राष्ट्रपति को दे दी गई थी । उच्च न्यायालय की शक्तियों को राष्ट्रपति नहीं छोन सकेगा, वे ज्यों-कीत्यों रहेंगी। इसे छोड़कर राष्ट्रपति कोई भी ऐसी कारंबाई कर सकता है, या प्रासंगिक और अनुसंगिक उपबन्ध बना सकता है, जो इस प्रकार की घोषणा के लागू करने के उद्देश्य से आवश्यक या वाछनीय हो । |
SA vs Aus 2nd ODI लुंगी नगीडी ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपने वनडे करियर की बेस्ट गेंदबाजी की और 6 विकेट लिए।
नई दिल्ली, जेएनएन। Lungi Nagidi ODI best bowling against Australia: साउथ अफ्रीका व ऑस्ट्रेलिया के बीच दूसरे वनडे मुकाबले में प्रोटियाज तेज गेंदबाज लुंगी नगीडी ने बेहद प्रभावशाली गेंदबाजी की और अपने करियर का बेस्ट प्रदर्शन कर डाला। नगीडी ने अपने वनडे करियर के 26वें मुकाबले में पहली बार किसी मैच में पांच से ज्यादा विकेट लिए। उनकी घातक गेंदबाजी की वजह से ही ऑस्ट्रेलिया की टीम 50 ओवर में 271 रन पर ऑल आउट हो गई। नगीडी ने इस मैच में ना सिर्फ कंगारू टॉप आर्डर के बल्लेबाजों को आउट किया बल्कि निचले क्रम के बल्लेबाजों को भी अपना निशाना बनाया।
लुंगी ने कंगारू टीम के खिलाफ दूसरे वनडे मैच में 10 ओवर में 58 रन देकर 6 विकेट लिए। उनका इकॉनामी रेट 5. 80 का रहा। लुंगी ने डेविड वार्नर, स्टीव स्मिथ, मार्नस लाबुशाने जैसे बल्लेबाजों को पहले अपना शिकार बनाया और उसके बाद उन्होंने एलेक्स कैरी, एश्टन एगर व पैट कमिंस को आउट किया।
लुंगी नगीडी ने वनडे में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपनी टीम की तरफ से दूसरा बेस्ट प्रदर्शन कर डाला। इससे पहले साल 2006 में केपटाउन में मखाया एनटिनी ने कंगारू टीम के खिलाफ 22 रन देकर छह विकेट लिए थे। अब 14 साल के बाद इस टीम की तरफ से किसी गेंदबाज ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ किसी वनडे मैच में छह विकेट लेने का कमाल किया। हालांकि रन देने के मामले में लुंगी नगीडी थोड़े खर्चीले रहे। उन्होंने 58 रन देकर छह विकेट लिए और ये वनडे में कंगारू टीम के खिलाफ साउथ अफ्रीका की तरफ से दूसरा बेस्ट प्रदर्शन साबित हुआ।
Best bowling figure for SA v AUS (ODIs):
लुंगी नगीडी ने ब्मलेफोर्ट मैदान पर वनडे में दूसरा बेस्ट प्रदर्शन किया। इससे पहले साल 2018 में इमरान ताहिर ने जिम्बाब्वे के खिलाफ 24 रन देकर 6 विकेट लिए थे।
Best bowling figure at Bloemfontein (ODIs):
| SA vs Aus दोnd ODI लुंगी नगीडी ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपने वनडे करियर की बेस्ट गेंदबाजी की और छः विकेट लिए। नई दिल्ली, जेएनएन। Lungi Nagidi ODI best bowling against Australia: साउथ अफ्रीका व ऑस्ट्रेलिया के बीच दूसरे वनडे मुकाबले में प्रोटियाज तेज गेंदबाज लुंगी नगीडी ने बेहद प्रभावशाली गेंदबाजी की और अपने करियर का बेस्ट प्रदर्शन कर डाला। नगीडी ने अपने वनडे करियर के छब्बीसवें मुकाबले में पहली बार किसी मैच में पांच से ज्यादा विकेट लिए। उनकी घातक गेंदबाजी की वजह से ही ऑस्ट्रेलिया की टीम पचास ओवर में दो सौ इकहत्तर रन पर ऑल आउट हो गई। नगीडी ने इस मैच में ना सिर्फ कंगारू टॉप आर्डर के बल्लेबाजों को आउट किया बल्कि निचले क्रम के बल्लेबाजों को भी अपना निशाना बनाया। लुंगी ने कंगारू टीम के खिलाफ दूसरे वनडे मैच में दस ओवर में अट्ठावन रन देकर छः विकेट लिए। उनका इकॉनामी रेट पाँच. अस्सी का रहा। लुंगी ने डेविड वार्नर, स्टीव स्मिथ, मार्नस लाबुशाने जैसे बल्लेबाजों को पहले अपना शिकार बनाया और उसके बाद उन्होंने एलेक्स कैरी, एश्टन एगर व पैट कमिंस को आउट किया। लुंगी नगीडी ने वनडे में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपनी टीम की तरफ से दूसरा बेस्ट प्रदर्शन कर डाला। इससे पहले साल दो हज़ार छः में केपटाउन में मखाया एनटिनी ने कंगारू टीम के खिलाफ बाईस रन देकर छह विकेट लिए थे। अब चौदह साल के बाद इस टीम की तरफ से किसी गेंदबाज ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ किसी वनडे मैच में छह विकेट लेने का कमाल किया। हालांकि रन देने के मामले में लुंगी नगीडी थोड़े खर्चीले रहे। उन्होंने अट्ठावन रन देकर छह विकेट लिए और ये वनडे में कंगारू टीम के खिलाफ साउथ अफ्रीका की तरफ से दूसरा बेस्ट प्रदर्शन साबित हुआ। Best bowling figure for SA v AUS : लुंगी नगीडी ने ब्मलेफोर्ट मैदान पर वनडे में दूसरा बेस्ट प्रदर्शन किया। इससे पहले साल दो हज़ार अट्ठारह में इमरान ताहिर ने जिम्बाब्वे के खिलाफ चौबीस रन देकर छः विकेट लिए थे। Best bowling figure at Bloemfontein : |
मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि झारखंड निर्माण के बाद पहली बार इसे राज्य की सबसे बड़ी पंचायत का भवन मिलने जा रहा है. 12 सितंबर को देश के लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका उदघाटन करेंगे. यह हम सब के लिए गर्व का विषय है. हम सभी इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनेंगे. इस कार्यक्रम से झारखंड की सवा तीन करोड़ जनता का गौरव बढ़ेगा. इस आयोजन को भव्य बनाना है. उक्त निर्देश मुख्यमंत्री ने झारखंड मंत्रालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में दिये.
मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा में झारखंड के मूल जल-जंगल और जमीन को स्थान दिया गया है. यहां झारखंड की संस्कृति की झलक मिलेगी.
बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि साहेबगंज में प्रधानमंत्री द्वारा शिलान्यास किये गये मल्टी मॉडल हब का भी उदघाटन किया जायेगा. इसके बन जाने के बाद जलमार्ग से लोग सस्ती दर पर माल की ढुलाई कर सकेंगे. यह ढुलाई दूसरे राज्य के साथ साथ बांग्लादेश, म्यंमार समेत अन्य देशों तक हो सकेगी.
रघुवर दास ने कहा कि प्रधानमंत्री यहीं से किसानों के लिए पेंशन योजना प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना की शुरुआत करेंगे. यह भी झारखंड के लिए गौरव की बात है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में रहनेवाले आदिवासी, दलितों, पिछड़ों, वंचितों के बच्चों के लिए 69 नये एकलव्य विद्यालय की लांचिंग भी करेंगे. उन्होंने समारोह को सफल बनाने से संबंधित विभिन्न निर्देश अधिकारियों को दिया.
इस दौरान मुख्य सचिव डीके तिवारी, विकास आयुक्त सुखदेव सिंह, कैबिनेट के प्रधान सचिव ए पी सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ सुनील कुमार वर्णवाल, कृषि सचिव पूजा सिंघल, भवन निर्माण सचिव सुनील कुमार, डीजीपी के एन चौबे समेत अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे.
| मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि झारखंड निर्माण के बाद पहली बार इसे राज्य की सबसे बड़ी पंचायत का भवन मिलने जा रहा है. बारह सितंबर को देश के लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका उदघाटन करेंगे. यह हम सब के लिए गर्व का विषय है. हम सभी इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनेंगे. इस कार्यक्रम से झारखंड की सवा तीन करोड़ जनता का गौरव बढ़ेगा. इस आयोजन को भव्य बनाना है. उक्त निर्देश मुख्यमंत्री ने झारखंड मंत्रालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में दिये. मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा में झारखंड के मूल जल-जंगल और जमीन को स्थान दिया गया है. यहां झारखंड की संस्कृति की झलक मिलेगी. बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि साहेबगंज में प्रधानमंत्री द्वारा शिलान्यास किये गये मल्टी मॉडल हब का भी उदघाटन किया जायेगा. इसके बन जाने के बाद जलमार्ग से लोग सस्ती दर पर माल की ढुलाई कर सकेंगे. यह ढुलाई दूसरे राज्य के साथ साथ बांग्लादेश, म्यंमार समेत अन्य देशों तक हो सकेगी. रघुवर दास ने कहा कि प्रधानमंत्री यहीं से किसानों के लिए पेंशन योजना प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना की शुरुआत करेंगे. यह भी झारखंड के लिए गौरव की बात है. मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में रहनेवाले आदिवासी, दलितों, पिछड़ों, वंचितों के बच्चों के लिए उनहत्तर नये एकलव्य विद्यालय की लांचिंग भी करेंगे. उन्होंने समारोह को सफल बनाने से संबंधित विभिन्न निर्देश अधिकारियों को दिया. इस दौरान मुख्य सचिव डीके तिवारी, विकास आयुक्त सुखदेव सिंह, कैबिनेट के प्रधान सचिव ए पी सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ सुनील कुमार वर्णवाल, कृषि सचिव पूजा सिंघल, भवन निर्माण सचिव सुनील कुमार, डीजीपी के एन चौबे समेत अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे. |
हॉलीवुड एक्टर टॉम हॉलैंड ने इन दिनों अपनी अपकमिंग मूवी 'स्पाइडर मैन नो वे होम' के प्रमोशन में व्यस्त चल रहे है, जो जल्द ही रिलीज की जाने वाली है। इस मूवी के प्रमोशन के लिए टॉम हॉलैंड ने एक इंटरव्यू दिया, जिसमें अभिनेता ने खुलासा किया है वह 25 वर्ष की आयु में एक्टिंग लाइन को छोड़ने का विचार करने में लगे हुए है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार टॉम हॉलैंड ने लेटेस्ट इंटरव्यू में अपने अभिनय संबंधी चिंताओं के बारे में बात की और बताया कि उन्होंने अपनी जिंदगी में बहुत कम आयु में अभिनय की दुनिया में कदम रखा दिया था और इसी कारण से उन्हें कुछ और करने का अवसर नहीं मिला। ऐसे में अब वह कुछ और करना चाहते हैं और अभिनय की दुनिया को छोड़ने का सोच रहे हैं।
उन्होंने बोला है कि 'मुझे ये बिल्कुल भी नहीं पता कि मुझे एक्टर बनना है या नहीं। मैंने 11 वर्ष की आयु में अभिनय की दुनिया में कदम रख दिया था और इसी कारण से मैं कुछ और नहीं कर पाया हूँ, इसलिए अब मैं जाना चाहता हूं और कोई दूसरा कार्य करना चाहता हूं। ' अपनी बात को जारी रखते हुए टॉम हॉलैंड ने बोला है कि 'मुझे सच मैं नहीं पता कि 25 वर्ष की आयु में ये क्या हो रहा है। मैं इस वक़्त एक पूर्व मिडलाइफ़ संकट से गुजर रहा हूं।
हालांकि एक्टर ने इसी सप्ताह ही खुलासा किया था कि उन्हें एक बायोपिक में फ्रेड एस्टायर की भूमिका निभाने के लिए साइन अप कर लिया गया था। उनका ये स्टेटमेंट उनके करियर की शुरुआत के संकेत देने में लगे हुए है। लेकिन अब उन्हें लग रहा है कि उनके बयान को गलत तरीके से समझा जा चुका है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कि उनकी फिल्म 'No Way Home' इस वर्ष 17 दिसंबर को रिलीज की जाने वाली है और उम्मीद की जा रही है कि मूवी साल की सबसे बड़ी फिल्म होने वाली है।
टॉम हॉलैंड कम आयु में ही अभिनय लाइन को छोड़ने वाले पहले एक्टर नहीं होंगे। इससे पहले वर्ष 2014 में गेम ऑफ थ्रोन्स के स्टार जैक ग्लीसन ने भी अभिनय की दुनिया को अलविदा कहकर अपने फैंस के होश उड़ा दिए थे। इस बीच उन्होंने बोला था कि वह 8 वर्ष की आयु से एक्टिंग कर रहे थे और जितना ही वह कार्य कर रहे थे उतना उन्हें मजा आना कम होता जा रहा था। उन्होंने बताया था कि एक्टिंग अब उनके लिए सिर्फ एक शौक की तरह रह गई थी।
| हॉलीवुड एक्टर टॉम हॉलैंड ने इन दिनों अपनी अपकमिंग मूवी 'स्पाइडर मैन नो वे होम' के प्रमोशन में व्यस्त चल रहे है, जो जल्द ही रिलीज की जाने वाली है। इस मूवी के प्रमोशन के लिए टॉम हॉलैंड ने एक इंटरव्यू दिया, जिसमें अभिनेता ने खुलासा किया है वह पच्चीस वर्ष की आयु में एक्टिंग लाइन को छोड़ने का विचार करने में लगे हुए है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार टॉम हॉलैंड ने लेटेस्ट इंटरव्यू में अपने अभिनय संबंधी चिंताओं के बारे में बात की और बताया कि उन्होंने अपनी जिंदगी में बहुत कम आयु में अभिनय की दुनिया में कदम रखा दिया था और इसी कारण से उन्हें कुछ और करने का अवसर नहीं मिला। ऐसे में अब वह कुछ और करना चाहते हैं और अभिनय की दुनिया को छोड़ने का सोच रहे हैं। उन्होंने बोला है कि 'मुझे ये बिल्कुल भी नहीं पता कि मुझे एक्टर बनना है या नहीं। मैंने ग्यारह वर्ष की आयु में अभिनय की दुनिया में कदम रख दिया था और इसी कारण से मैं कुछ और नहीं कर पाया हूँ, इसलिए अब मैं जाना चाहता हूं और कोई दूसरा कार्य करना चाहता हूं। ' अपनी बात को जारी रखते हुए टॉम हॉलैंड ने बोला है कि 'मुझे सच मैं नहीं पता कि पच्चीस वर्ष की आयु में ये क्या हो रहा है। मैं इस वक़्त एक पूर्व मिडलाइफ़ संकट से गुजर रहा हूं। हालांकि एक्टर ने इसी सप्ताह ही खुलासा किया था कि उन्हें एक बायोपिक में फ्रेड एस्टायर की भूमिका निभाने के लिए साइन अप कर लिया गया था। उनका ये स्टेटमेंट उनके करियर की शुरुआत के संकेत देने में लगे हुए है। लेकिन अब उन्हें लग रहा है कि उनके बयान को गलत तरीके से समझा जा चुका है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कि उनकी फिल्म 'No Way Home' इस वर्ष सत्रह दिसंबर को रिलीज की जाने वाली है और उम्मीद की जा रही है कि मूवी साल की सबसे बड़ी फिल्म होने वाली है। टॉम हॉलैंड कम आयु में ही अभिनय लाइन को छोड़ने वाले पहले एक्टर नहीं होंगे। इससे पहले वर्ष दो हज़ार चौदह में गेम ऑफ थ्रोन्स के स्टार जैक ग्लीसन ने भी अभिनय की दुनिया को अलविदा कहकर अपने फैंस के होश उड़ा दिए थे। इस बीच उन्होंने बोला था कि वह आठ वर्ष की आयु से एक्टिंग कर रहे थे और जितना ही वह कार्य कर रहे थे उतना उन्हें मजा आना कम होता जा रहा था। उन्होंने बताया था कि एक्टिंग अब उनके लिए सिर्फ एक शौक की तरह रह गई थी। |
रविवार को अमृतसर के सीमा सुरक्षा बल के खासा मुख्यालय में एक जवान द्वारा अपने ही साथियों पर गोलीबार करने का मामला सामने आया था। जिसमें आरोपी समेत 5 जवानों की मौत हो गई। बीएसएफ ने पूरे मामले की कोर्ट ऑफ इन्क्वॉयरी के आदेश दे दिए हैं। लेकिन बताया जा रहा है कि वर्क लोड ज्यादा होने के कारण मानसिक स्थिति स्टेबल नहीं होने से जवान ने अपने साथियों पर गोलीबारी की। बता दें, आरोपी की पहचान महाराष्ट्र के सुतप्पा के रूप में किया गया है।
जानकारी के अनुसार जवान से ज्यादा ड्यूटी ली जा रही थी जिसे लेकर उसका मानसिक संतुलन गड़बड़ाया हुआ था। इस बीच शनिवार की शाम उसकी बीएसएफ के किसी बड़े अधिकारी से बहस भी हुई थी। लेकिन को हल नहीं निकला। रविवार की सुबह ड्यूटी पर तैनात सुतप्पा ने अचानक ही उनसे गुस्से में आकर अपनी राइफल से गोलियां चलानी शुरू कर दीं।
अधिकारी ने मामले की जानकारी देते हुए कहा है यह घटना सुबह 9:30 बजे के करीब भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास अटारी-वाघा सीमा चौकी से करीब 12-13 किलोमीटर दूर खासा इलाके में 144वीं बटालियन के परिसर में हुई। हालांकि अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि आरोपी ने खुद को गोली मारी या वह किसी अन्य की गोलीबारी में मारा गया।
घटनास्थल पर कुल नौ जवानों को गोलियां लगीं। जिनमें छह जवान गंभीर घायल हो गए। दो जवानों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि अन्य को जब अस्पताल ले जाया गया तो रास्ते में उनकी मौत हो गई। बाद में आरोपी जवान ने खुद को भी गोली मार ली। मरने वालों में बिहार निवासी विनोद, महाराष्ट्र निवासी तोरास्कार डीएस, जम्मू-कश्मीर निवासी रतन सिंह, हरियाणा निवासी बलजिंदर सिंह शामिल हैं। घटना के बारे में पता चलते ही पुलिस और बीएसएफ के आला अधिकारी वहां पहुंच गए। जिसके बाद घायलों को तुरंत अस्पताल में भर्ती करवाया गया।
अधिकारियों ने बताया कि आरोपी स्पष्ट रूप से अपने काम के घंटों को लेकर गुस्से में था। उसने सेकेंड-इन-कमांड रैंक के अधिकारी के परिसर में खड़े वाहन पर भी गोलियां चलाईं। वहीं, बीएसएफ महानिरीक्षक (पंजाब) आसिफ जलाल ने इस बात से इनकार किया कि आरोपी और जान गंवाने वाले अन्य कर्मियों के बीच कोई शत्रुता थी या ड्यूटी संबंधी कोई समस्या थी। महानिरीक्षक ने कहा कि पुलिस और उनका बल मामले की जांच कर रहा है।
| रविवार को अमृतसर के सीमा सुरक्षा बल के खासा मुख्यालय में एक जवान द्वारा अपने ही साथियों पर गोलीबार करने का मामला सामने आया था। जिसमें आरोपी समेत पाँच जवानों की मौत हो गई। बीएसएफ ने पूरे मामले की कोर्ट ऑफ इन्क्वॉयरी के आदेश दे दिए हैं। लेकिन बताया जा रहा है कि वर्क लोड ज्यादा होने के कारण मानसिक स्थिति स्टेबल नहीं होने से जवान ने अपने साथियों पर गोलीबारी की। बता दें, आरोपी की पहचान महाराष्ट्र के सुतप्पा के रूप में किया गया है। जानकारी के अनुसार जवान से ज्यादा ड्यूटी ली जा रही थी जिसे लेकर उसका मानसिक संतुलन गड़बड़ाया हुआ था। इस बीच शनिवार की शाम उसकी बीएसएफ के किसी बड़े अधिकारी से बहस भी हुई थी। लेकिन को हल नहीं निकला। रविवार की सुबह ड्यूटी पर तैनात सुतप्पा ने अचानक ही उनसे गुस्से में आकर अपनी राइफल से गोलियां चलानी शुरू कर दीं। अधिकारी ने मामले की जानकारी देते हुए कहा है यह घटना सुबह नौ:तीस बजे के करीब भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास अटारी-वाघा सीमा चौकी से करीब बारह-तेरह किलोग्राममीटर दूर खासा इलाके में एक सौ चौंतालीसवीं बटालियन के परिसर में हुई। हालांकि अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि आरोपी ने खुद को गोली मारी या वह किसी अन्य की गोलीबारी में मारा गया। घटनास्थल पर कुल नौ जवानों को गोलियां लगीं। जिनमें छह जवान गंभीर घायल हो गए। दो जवानों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि अन्य को जब अस्पताल ले जाया गया तो रास्ते में उनकी मौत हो गई। बाद में आरोपी जवान ने खुद को भी गोली मार ली। मरने वालों में बिहार निवासी विनोद, महाराष्ट्र निवासी तोरास्कार डीएस, जम्मू-कश्मीर निवासी रतन सिंह, हरियाणा निवासी बलजिंदर सिंह शामिल हैं। घटना के बारे में पता चलते ही पुलिस और बीएसएफ के आला अधिकारी वहां पहुंच गए। जिसके बाद घायलों को तुरंत अस्पताल में भर्ती करवाया गया। अधिकारियों ने बताया कि आरोपी स्पष्ट रूप से अपने काम के घंटों को लेकर गुस्से में था। उसने सेकेंड-इन-कमांड रैंक के अधिकारी के परिसर में खड़े वाहन पर भी गोलियां चलाईं। वहीं, बीएसएफ महानिरीक्षक आसिफ जलाल ने इस बात से इनकार किया कि आरोपी और जान गंवाने वाले अन्य कर्मियों के बीच कोई शत्रुता थी या ड्यूटी संबंधी कोई समस्या थी। महानिरीक्षक ने कहा कि पुलिस और उनका बल मामले की जांच कर रहा है। |
उन्होंने कहा कि हमने दिखा दिया है कि बीजेपी की सीटों को घटाया जा सकता है। बीजेपी की सीटों की संख्या में यह गिरावट निरंतर जारी रहेगी।
बसपा ने राज्य में चार बार अपनी सरकार बनाई है, जिसमें एक पूर्ण बहुमत की सरकार भी शामिल है। पार्टी 1993 में सपा के नेतृत्व वाली सरकार का भी हिस्सा थी। 2001 में बसपा अध्यक्ष बनने वाली मायावती चार बार राज्य की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं।
पीएम मोदी ने दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि 'चुनाव के दौरान भाजपा के कार्यकर्ताओं ने मुझसे वादा किया था कि इस बार होली 10 मार्च से ही शुरू हो जाएगी। हमारे कर्मठ कार्यकर्ताओं ने अपने वादे को पूरा करके दिखाया है। इससे कुछ समय पहले सीएम योगी ने भी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया, आज की बात में देखिए चुनाव नतीजों का सम्पूर्ण विश्लेषण।
सिराथू से हाराने के बाद उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ट्वीट कर बताया, "सिराथू विधानसभा क्षेत्र की जनता के फ़ैसले को विनम्रतापूर्वक स्वीकार करता हूं,एक एक कार्यकर्ता के परिश्रम के लिए आभारी हूं,जिन मतदाताओं ने वोट रूपी आशीर्वाद दिया उनके प्रति कृतज्ञता।
पीएम मोदी ने दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि 'चुनाव के दौरान भाजपा के कार्यकर्ताओं ने मुझसे वादा किया था कि इस बार होली 10 मार्च से ही शुरू हो जाएगी। हमारे कर्मठ कार्यकर्ताओं ने अपने वादे को पूरा करके दिखाया है।
जब प्रियंका ने टिकटों में महिलाओं के लिए 40 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा की, तो कई राजनीतिक पंडितों ने सोचा कि यह कांग्रेस के लिए गेम-चेंजर होगा। हालांकि, पार्टी ने 'अत्याचार' के शिकार लोगों को टिकट देकर इसे एक गैर-गंभीर मुद्दे में बदल दिया।
उत्तर प्रदेश विधानसभा की सभी 403 सीटों के रुझान आ चुके हैं और इन रुझानों में बीजेपी बीजेपी को बहुमत मिल चुका है। बीजेपी 275 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं, सपा 120 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, बसपा 2, कांग्रेस 3 सीटों पर जबकि अन्य दल तीन सीटों पर आगे चल रहे हैं।
AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि राजनीतिक दल नाकामी छुपाने के लिए EVM की चीख पुकार कर रहे हैं। मैं 2019 से कहता आ रहा हूं कि EVM की गलती नहीं है बल्कि लोगों के दिमाग में चिप डाल दी गई है, यह उसकी गलती है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा की सभी 403 सीटों के रुझान आ चुके हैं और इन रुझानों में बीजेपी बीजेपी को बहुमत मिल चुका है। बीजेपी 275 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं, सपा 120 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, बसपा 2, कांग्रेस 3 सीटों पर जबकि अन्य दल तीन सीटों पर आगे चल रहे हैं।
प्रियंका गांधी ने ट्वीट किया, 'लोकतंत्र में जनता का मत सर्वोपरि है। हमारे कार्यकर्ताओं और नेताओं ने मेहनत की, संगठन बनाया, जनता के मुद्दों पर संघर्ष किया। लेकिन, हम अपनी मेहनत को वोट में तब्दील करने में कामयाब नहीं हुए। '
उत्तर प्रदेश विधानसभा की सभी 403 सीटों के रुझान आ चुके हैं और इन रुझानों में बीजेपी बीजेपी को बहुमत मिल चुका है। बीजेपी 275 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं, सपा 120 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, बसपा 2, कांग्रेस 3 सीटों पर जबकि अन्य दल तीन सीटों पर आगे चल रहे हैं।
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दफ्तर पहुंचने पर भारत माता की जय और वंदे मातरम् के नारों से बीजेपी ऑफिस गूंज रहा था। सबने अपने हीरो का जमकर स्वागत किया। योगी ने कार्यकर्ताओं का धन्यवाद किया।
उत्तर प्रदेश विधानसभा की सभी 403 सीटों के रुझान आ चुके हैं और इन रुझानों में बीजेपी बीजेपी को बहुमत मिल चुका है। बीजेपी 275 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं, सपा 120 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, बसपा 2, कांग्रेस 3 सीटों पर जबकि अन्य दल तीन सीटों पर आगे चल रहे हैं।
लखनऊ में बीजेपी कार्यालय में पहुंचे योगी आदित्यनाथ ने विक्ट्री साइन दिखाते हुए कार्यकर्ताओं को जीत की बधाई दी। उत्तर प्रदेश के CM योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह प्रचंड बहुमत भाजपा के राष्ट्रवाद, विकास और सुशासन के मॉडल को उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता का आशीर्वाद हैं।
हेमा मालिनी ने कहा, 'हमें पहले से ही पता था कि हमारी सरकार बनेगी। हमने विकास के हर पहलू के लिए काम किया है, यही वजह है कि जनता हम पर भरोसा करती है। बुलडोजर के सामने कुछ भी नहीं आ सकता, क्योंकि यह एक मिनट में सब कुछ खत्म कर सकता है, चाहे साइकिल हो या कुछ और। '
गौतम बुद्ध नगर की नोएडा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे पंकज सिंह ने नया इतिहास रच दिया है। बीजेपी के मौजूदा विधायक और राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह ने 2 लाख से ज्यादा वोट पाकर जीत दर्ज की है।
कैराना विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल के प्रत्याशी नाहिद हसन (Nahid Hasan) ने जीत दर्ज की है। कैराना विधानसभा सीट पर जेल से ही चुनाव लड़े सपा के नाहिद हसन को 1 लाख से ज्यादा वोट मिले हैं।
उत्तर प्रदेश विधानसभा की 403 विधानसभा सीटों में अभी तक आए रुझान के आधार पर एआईएमआईएम को इस बार आधा फीसदी से भी कम मत मिलता हुआ नजर आ रहा है।
चुनाव से ठीक पहले योगी कैबिनेट से इस्तीफा देकर अखिलेश यादव की साइकिल की सवारी करना स्वामी प्रसाद मौर्य (Swami Prasad Maurya) को मंहगा पड़ गया है। बीजेपी छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थामने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य फाजिलनगर विधानसभा सीट से चुनाव हार गए हैं।
| उन्होंने कहा कि हमने दिखा दिया है कि बीजेपी की सीटों को घटाया जा सकता है। बीजेपी की सीटों की संख्या में यह गिरावट निरंतर जारी रहेगी। बसपा ने राज्य में चार बार अपनी सरकार बनाई है, जिसमें एक पूर्ण बहुमत की सरकार भी शामिल है। पार्टी एक हज़ार नौ सौ तिरानवे में सपा के नेतृत्व वाली सरकार का भी हिस्सा थी। दो हज़ार एक में बसपा अध्यक्ष बनने वाली मायावती चार बार राज्य की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। पीएम मोदी ने दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि 'चुनाव के दौरान भाजपा के कार्यकर्ताओं ने मुझसे वादा किया था कि इस बार होली दस मार्च से ही शुरू हो जाएगी। हमारे कर्मठ कार्यकर्ताओं ने अपने वादे को पूरा करके दिखाया है। इससे कुछ समय पहले सीएम योगी ने भी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया, आज की बात में देखिए चुनाव नतीजों का सम्पूर्ण विश्लेषण। सिराथू से हाराने के बाद उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ट्वीट कर बताया, "सिराथू विधानसभा क्षेत्र की जनता के फ़ैसले को विनम्रतापूर्वक स्वीकार करता हूं,एक एक कार्यकर्ता के परिश्रम के लिए आभारी हूं,जिन मतदाताओं ने वोट रूपी आशीर्वाद दिया उनके प्रति कृतज्ञता। पीएम मोदी ने दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि 'चुनाव के दौरान भाजपा के कार्यकर्ताओं ने मुझसे वादा किया था कि इस बार होली दस मार्च से ही शुरू हो जाएगी। हमारे कर्मठ कार्यकर्ताओं ने अपने वादे को पूरा करके दिखाया है। जब प्रियंका ने टिकटों में महिलाओं के लिए चालीस प्रतिशत आरक्षण की घोषणा की, तो कई राजनीतिक पंडितों ने सोचा कि यह कांग्रेस के लिए गेम-चेंजर होगा। हालांकि, पार्टी ने 'अत्याचार' के शिकार लोगों को टिकट देकर इसे एक गैर-गंभीर मुद्दे में बदल दिया। उत्तर प्रदेश विधानसभा की सभी चार सौ तीन सीटों के रुझान आ चुके हैं और इन रुझानों में बीजेपी बीजेपी को बहुमत मिल चुका है। बीजेपी दो सौ पचहत्तर सीटों पर आगे चल रही है। वहीं, सपा एक सौ बीस सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, बसपा दो, कांग्रेस तीन सीटों पर जबकि अन्य दल तीन सीटों पर आगे चल रहे हैं। AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि राजनीतिक दल नाकामी छुपाने के लिए EVM की चीख पुकार कर रहे हैं। मैं दो हज़ार उन्नीस से कहता आ रहा हूं कि EVM की गलती नहीं है बल्कि लोगों के दिमाग में चिप डाल दी गई है, यह उसकी गलती है। उत्तर प्रदेश विधानसभा की सभी चार सौ तीन सीटों के रुझान आ चुके हैं और इन रुझानों में बीजेपी बीजेपी को बहुमत मिल चुका है। बीजेपी दो सौ पचहत्तर सीटों पर आगे चल रही है। वहीं, सपा एक सौ बीस सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, बसपा दो, कांग्रेस तीन सीटों पर जबकि अन्य दल तीन सीटों पर आगे चल रहे हैं। प्रियंका गांधी ने ट्वीट किया, 'लोकतंत्र में जनता का मत सर्वोपरि है। हमारे कार्यकर्ताओं और नेताओं ने मेहनत की, संगठन बनाया, जनता के मुद्दों पर संघर्ष किया। लेकिन, हम अपनी मेहनत को वोट में तब्दील करने में कामयाब नहीं हुए। ' उत्तर प्रदेश विधानसभा की सभी चार सौ तीन सीटों के रुझान आ चुके हैं और इन रुझानों में बीजेपी बीजेपी को बहुमत मिल चुका है। बीजेपी दो सौ पचहत्तर सीटों पर आगे चल रही है। वहीं, सपा एक सौ बीस सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, बसपा दो, कांग्रेस तीन सीटों पर जबकि अन्य दल तीन सीटों पर आगे चल रहे हैं। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दफ्तर पहुंचने पर भारत माता की जय और वंदे मातरम् के नारों से बीजेपी ऑफिस गूंज रहा था। सबने अपने हीरो का जमकर स्वागत किया। योगी ने कार्यकर्ताओं का धन्यवाद किया। उत्तर प्रदेश विधानसभा की सभी चार सौ तीन सीटों के रुझान आ चुके हैं और इन रुझानों में बीजेपी बीजेपी को बहुमत मिल चुका है। बीजेपी दो सौ पचहत्तर सीटों पर आगे चल रही है। वहीं, सपा एक सौ बीस सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, बसपा दो, कांग्रेस तीन सीटों पर जबकि अन्य दल तीन सीटों पर आगे चल रहे हैं। लखनऊ में बीजेपी कार्यालय में पहुंचे योगी आदित्यनाथ ने विक्ट्री साइन दिखाते हुए कार्यकर्ताओं को जीत की बधाई दी। उत्तर प्रदेश के CM योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह प्रचंड बहुमत भाजपा के राष्ट्रवाद, विकास और सुशासन के मॉडल को उत्तर प्रदेश की पच्चीस करोड़ जनता का आशीर्वाद हैं। हेमा मालिनी ने कहा, 'हमें पहले से ही पता था कि हमारी सरकार बनेगी। हमने विकास के हर पहलू के लिए काम किया है, यही वजह है कि जनता हम पर भरोसा करती है। बुलडोजर के सामने कुछ भी नहीं आ सकता, क्योंकि यह एक मिनट में सब कुछ खत्म कर सकता है, चाहे साइकिल हो या कुछ और। ' गौतम बुद्ध नगर की नोएडा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे पंकज सिंह ने नया इतिहास रच दिया है। बीजेपी के मौजूदा विधायक और राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह ने दो लाख से ज्यादा वोट पाकर जीत दर्ज की है। कैराना विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल के प्रत्याशी नाहिद हसन ने जीत दर्ज की है। कैराना विधानसभा सीट पर जेल से ही चुनाव लड़े सपा के नाहिद हसन को एक लाख से ज्यादा वोट मिले हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा की चार सौ तीन विधानसभा सीटों में अभी तक आए रुझान के आधार पर एआईएमआईएम को इस बार आधा फीसदी से भी कम मत मिलता हुआ नजर आ रहा है। चुनाव से ठीक पहले योगी कैबिनेट से इस्तीफा देकर अखिलेश यादव की साइकिल की सवारी करना स्वामी प्रसाद मौर्य को मंहगा पड़ गया है। बीजेपी छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थामने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य फाजिलनगर विधानसभा सीट से चुनाव हार गए हैं। |
सिरसा, 16 अक्तूबर(निस)
ऐलनाबाद उपचुनाव मेंं अपनी टिकट कट जाने से नाराज चले आ रहे पूर्व विधायक भरत सिंह बैनिवाल शनिवार को चुनाव प्रचार के लिए कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा के साथ प्रचार में निकल पड़े हैं और उन्होंंने जनता से कांग्रेस का साथ देने का आह्वान किया। ग्रामीण सभाओं को संबोधित करते हुए कुमारी सैलजा ने कहा कि भाजपा और इनेलो एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं और इनकी झूठ और लूट की राजनीति अब ज्यादा दिन चलने वाली नहीं है। ऐलनाबाद उपचुनाव में लोगों ने कांग्रेस प्रत्याशी पवन बैनीवाल को जिताने का मन बना लिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर कहते हैं कि एमएसपी थी, है और रहेगी। फिर आज किसान किस वजह से फसल बेचने को दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। तीन काले कानूनों को लेकर चल रहे किसानों के संघर्ष में कांग्रेस साथ है। सैलजा ने कहा कि अभय चौटाला ने ऐलनाबाद की जनता से धोखा किया है।
कांग्रेस उम्मीदवार पवन बैनीवाल ने कहा कि ऐलनाबाद हलके की जनता हरियाणा की राजनीति को नई दिशा देगी और आने वाला समय कांग्रेस का होगा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुमारी सैलजा ने आज ऐलनाबाद के भुरट वाला, पोहड़कां, मिठी सुरेरा, खारी सुरेरा, किशनपुरा, मिठनपुरा, कर्मशाना, ढाणी शेरा, काशीराम का वास आदि गांवों का दौरा कर वोट की अपील की। इस अवसर पर विधायक शीशपाल केहरवाला, पूर्व सांसद चरणजीत रोड़ी, डॉ़ सुशील इंदौरा, मलकीत सिंह खोसा, लाधूराम पूनियां, सुरेन्द्र नेहरा आदि मौजूद थे।
| सिरसा, सोलह अक्तूबर ऐलनाबाद उपचुनाव मेंं अपनी टिकट कट जाने से नाराज चले आ रहे पूर्व विधायक भरत सिंह बैनिवाल शनिवार को चुनाव प्रचार के लिए कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा के साथ प्रचार में निकल पड़े हैं और उन्होंंने जनता से कांग्रेस का साथ देने का आह्वान किया। ग्रामीण सभाओं को संबोधित करते हुए कुमारी सैलजा ने कहा कि भाजपा और इनेलो एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं और इनकी झूठ और लूट की राजनीति अब ज्यादा दिन चलने वाली नहीं है। ऐलनाबाद उपचुनाव में लोगों ने कांग्रेस प्रत्याशी पवन बैनीवाल को जिताने का मन बना लिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर कहते हैं कि एमएसपी थी, है और रहेगी। फिर आज किसान किस वजह से फसल बेचने को दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। तीन काले कानूनों को लेकर चल रहे किसानों के संघर्ष में कांग्रेस साथ है। सैलजा ने कहा कि अभय चौटाला ने ऐलनाबाद की जनता से धोखा किया है। कांग्रेस उम्मीदवार पवन बैनीवाल ने कहा कि ऐलनाबाद हलके की जनता हरियाणा की राजनीति को नई दिशा देगी और आने वाला समय कांग्रेस का होगा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुमारी सैलजा ने आज ऐलनाबाद के भुरट वाला, पोहड़कां, मिठी सुरेरा, खारी सुरेरा, किशनपुरा, मिठनपुरा, कर्मशाना, ढाणी शेरा, काशीराम का वास आदि गांवों का दौरा कर वोट की अपील की। इस अवसर पर विधायक शीशपाल केहरवाला, पूर्व सांसद चरणजीत रोड़ी, डॉ़ सुशील इंदौरा, मलकीत सिंह खोसा, लाधूराम पूनियां, सुरेन्द्र नेहरा आदि मौजूद थे। |
अग्निशमन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक बृहस्पतिवार रात को लगी इस आग के कारणों के बारे में अब तक पता नहीं चल सका है, लेकिन इस बात का संदेह है कि आग संभवतः शॉर्ट सर्किट के कारण लगी थी।
पुलिस के मुताबिक मृतक की पहचान सुरेश बाबू (60) के रूप में की गयी है, उनका परिवार मूल रूप से बिहार का रहने वाला है और यहां कनहाई गांव में किराये के मकान में रहता है।
पुलिस के मुताबिक जब आग लगी तो कमरे में कुल पांच लोग सो रहे थे। आग लगने के बाद उनके पड़ोसियों ने तुरंत घटनास्थल पर पहुंचकर आग बुझाई और परिवार के अन्य सदस्यों को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। सुरेश बाबू की मौके पर ही मौत हो गयी।
जांच अधिकारी सहायक उप निरीक्षक कर्मवीर ने कहा कि उनकी पत्नी रीना साहू (54), और बेटे अनुज (20), सरोज (17) और मनोज (12) 30 से 60 प्रतिशत तक झुलस गए हैं।
| अग्निशमन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक बृहस्पतिवार रात को लगी इस आग के कारणों के बारे में अब तक पता नहीं चल सका है, लेकिन इस बात का संदेह है कि आग संभवतः शॉर्ट सर्किट के कारण लगी थी। पुलिस के मुताबिक मृतक की पहचान सुरेश बाबू के रूप में की गयी है, उनका परिवार मूल रूप से बिहार का रहने वाला है और यहां कनहाई गांव में किराये के मकान में रहता है। पुलिस के मुताबिक जब आग लगी तो कमरे में कुल पांच लोग सो रहे थे। आग लगने के बाद उनके पड़ोसियों ने तुरंत घटनास्थल पर पहुंचकर आग बुझाई और परिवार के अन्य सदस्यों को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। सुरेश बाबू की मौके पर ही मौत हो गयी। जांच अधिकारी सहायक उप निरीक्षक कर्मवीर ने कहा कि उनकी पत्नी रीना साहू , और बेटे अनुज , सरोज और मनोज तीस से साठ प्रतिशत तक झुलस गए हैं। |
PATNA :
जिस बेस फोन को बीएसएनएल ने काफी पहले खत्म कर दिया उससे नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के नाम पर टिकट दिलाने के एवज में बीस से पचास लाख रुपए की मांग की जा रही है। ये बातें राजद के राज्यसभा सदस्य और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज झा ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कही। उन्होंने कहा कि उक्त फोन नंबर से कई लोगों को कॉल्स गए हैं। इस पूरे प्रकरण में राज्य सरकार की संलिप्तता है। चुनाव के समय इस तरह का जो हथकंडा अपनाया जा रहा वह आपराधिक कृत्य है।
राजद प्रदेश कार्यालय में संवाददाताओं से बातचीत के क्रम में उन्होंने कहा कि बेस फोन नंबर 011-22117222 काफी पहले राबड़ी देवी के नाम से आवंटित था। वर्ष 2016 में इस नंबर को समाप्त करा दिया गया। बाद में यह नंबर वन विभाग को आवंटित हो गया। मार्च 2019 में वहां से भी वह नंबर खत्म हो गया। बीएसएनएल का कहना अब यह नंबर अस्तित्व में नहीं है। वहीं इसी नंबर से लगातार लोगों को यह फोन किया जा रहा कि अगर टिकट चाहिए तो बीस लाख लेकर पहुंचो, पचास लाख लेकर आओ। लोकेशन भी बताई जा रही। सरकार यह पता लगाए कि यह फोन अभी किसके पास है। मैंने कॉल डिटेल्स निकलवाने को लिखा है। यह बीएसएनएल की साख का भी सवाल है।
| PATNA : जिस बेस फोन को बीएसएनएल ने काफी पहले खत्म कर दिया उससे नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के नाम पर टिकट दिलाने के एवज में बीस से पचास लाख रुपए की मांग की जा रही है। ये बातें राजद के राज्यसभा सदस्य और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज झा ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कही। उन्होंने कहा कि उक्त फोन नंबर से कई लोगों को कॉल्स गए हैं। इस पूरे प्रकरण में राज्य सरकार की संलिप्तता है। चुनाव के समय इस तरह का जो हथकंडा अपनाया जा रहा वह आपराधिक कृत्य है। राजद प्रदेश कार्यालय में संवाददाताओं से बातचीत के क्रम में उन्होंने कहा कि बेस फोन नंबर ग्यारह-दो करोड़ इक्कीस लाख सत्रह हज़ार दो सौ बाईस काफी पहले राबड़ी देवी के नाम से आवंटित था। वर्ष दो हज़ार सोलह में इस नंबर को समाप्त करा दिया गया। बाद में यह नंबर वन विभाग को आवंटित हो गया। मार्च दो हज़ार उन्नीस में वहां से भी वह नंबर खत्म हो गया। बीएसएनएल का कहना अब यह नंबर अस्तित्व में नहीं है। वहीं इसी नंबर से लगातार लोगों को यह फोन किया जा रहा कि अगर टिकट चाहिए तो बीस लाख लेकर पहुंचो, पचास लाख लेकर आओ। लोकेशन भी बताई जा रही। सरकार यह पता लगाए कि यह फोन अभी किसके पास है। मैंने कॉल डिटेल्स निकलवाने को लिखा है। यह बीएसएनएल की साख का भी सवाल है। |
फ्रेंच ओपन के पहले ही राउंड में हारकर नाओमी ओसाका बाहर हो गई हैं। अमेरिका की अमांडा अनिसिमोवा के खिलाफ नाओमी ओसाका को कड़े मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा। ओसाका चार ग्रैंड स्लैम जीत चुकी हैं।
चार बार की ग्रैंड स्लैम विनर जापान की नाओमी ओसाका अमेरिका की अमांडा अनिसिमोवा से सोमवार के मुकाबले में हारने के बाद फ्रेंच ओपन के पहले राउंड में ही बाहर हो गई। अनिसिमोवा ने ओसाका को 90 मिनट चले मैच में 7-5, 6-4 से हराया। जनवरी में हुए ऑस्ट्रेलियन ओपन में अनिसिमोवा ने ओसाका को तीसरे दौर में 4-6, 6-3, 7-6 से शिकस्त थमाई थी।
मैच के शुरुआती हिस्से में अनिसिमोवा ने 3-1 की बढ़त हासिल की, लेकिन ओसाका ने दो गेम बाद वापसी करते हुए बराबरी कर ली। कांटे की टक्कर में अंत में अनिसिमोवा ने 6-5 की बढ़त हासिल की और 46 मिनट में सेट को 7-5 से जीता।
दूसरे सेट के सातवें गेम में अनिसिमोवा जीत की कगार पर आ खड़ी हुईं और मैच के 10वें गेम में मैच के लिए सर्विस करते समय दो मैच पॉइंट जल्दी गंवाने के बावजूद उन्होंने बैकहैंड शॉट की बदौलत दूसरे राउंड में अपनी जगह सुनश्चिति कर ली। अगले राउंड में अमांडा अनिसिमोवा का मुकाबला क्रोएशिया की डोना वेकिच से होगा।
| फ्रेंच ओपन के पहले ही राउंड में हारकर नाओमी ओसाका बाहर हो गई हैं। अमेरिका की अमांडा अनिसिमोवा के खिलाफ नाओमी ओसाका को कड़े मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा। ओसाका चार ग्रैंड स्लैम जीत चुकी हैं। चार बार की ग्रैंड स्लैम विनर जापान की नाओमी ओसाका अमेरिका की अमांडा अनिसिमोवा से सोमवार के मुकाबले में हारने के बाद फ्रेंच ओपन के पहले राउंड में ही बाहर हो गई। अनिसिमोवा ने ओसाका को नब्बे मिनट चले मैच में सात-पाँच, छः-चार से हराया। जनवरी में हुए ऑस्ट्रेलियन ओपन में अनिसिमोवा ने ओसाका को तीसरे दौर में चार-छः, छः-तीन, सात-छः से शिकस्त थमाई थी। मैच के शुरुआती हिस्से में अनिसिमोवा ने तीन-एक की बढ़त हासिल की, लेकिन ओसाका ने दो गेम बाद वापसी करते हुए बराबरी कर ली। कांटे की टक्कर में अंत में अनिसिमोवा ने छः-पाँच की बढ़त हासिल की और छियालीस मिनट में सेट को सात-पाँच से जीता। दूसरे सेट के सातवें गेम में अनिसिमोवा जीत की कगार पर आ खड़ी हुईं और मैच के दसवें गेम में मैच के लिए सर्विस करते समय दो मैच पॉइंट जल्दी गंवाने के बावजूद उन्होंने बैकहैंड शॉट की बदौलत दूसरे राउंड में अपनी जगह सुनश्चिति कर ली। अगले राउंड में अमांडा अनिसिमोवा का मुकाबला क्रोएशिया की डोना वेकिच से होगा। |
त्रिपुरा के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रद्योत देब बर्मन ने कहा कि आज जब मैं सोकर उठे तो रिलैक्स महसूस कर रहा हूं। आज के दिन की शुरुआत मैं झूठ बोलने वालों और अपराधियों को बिना सुने कर रहा हूं।
कांग्रेस को त्रिपुरा में बड़ा झटका लगा है। यहां प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रद्योत देब बर्मन ने मंगलवार (24 सितंबर) को पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। इस दौरान उन्होंने पार्टी में भ्रष्टाचार और समूहवाद के गंभीर आरोप लगाए हैं। बर्मन ने अपना इस्तीफा ट्विटर पर घोषणा करते हुए दिया है।
उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, 'आज जब मैं सोकर उठे तो रिलैक्स महसूस कर रहा हूं। आज के दिन की शुरुआत मैं झूठ बोलने वालों और अपराधियों को बिना सुने कर रहा हूं, आज मुझे ये फिक्र नहीं है कि मेरा कौन सा साथी मेरे पीठ में छुरा घोंपेगा, मुझे गोलबंदी नहीं करनी पड़ रही है, न ही मुझे हाई कमान से ये सुनना पड़ रहा है कि कैसे भ्रष्ट लोगों को पार्टी के ऊंचे ऊंचे पदों पर बिठाया जाए, आज जब से मैं सुबह सोकर उठा हूं तब से एहसास हुआ कि इन गलत तत्वों की वजह से मेरी सेहत और जिंदगी को कितना नुकसान हुआ। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि मैं भ्रष्ट तत्वों को पार्टी के ऊंचे पदों पर बिठाने के लिए तैयार नहीं था, जोकि हमारे प्रदेश बर्बाद करेंगे। मैंने कोशिश की और शायद मैं हार गया लेकिन शुरू से ही इस लड़ाई में अकेला होने पर मैं कैसे जीत सकता था? '
बता दें कि बर्मन उस समय से पार्टी के अंदर विरोध का सामना कर रहे थे जिस समय से उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। इस याचिका में उन्होंने असम जैसे एनआरसी को राज्य में लागू करने के लिए कहा था। इसके बाद से पार्टी उनसे खफा बताई जा रही थी। बताया जा रहा है कि बर्मन पर याचिका को वापस लेने का दबाव डाला जा रहा था।
हाल ही में बर्मन ने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी मुलाकात की थी और कहा था कि मैं याचिका वापस नहीं लूंगा। मैं एनआरसी की याचिका वापस लेने से समझौता नहीं कर रहा हूं। मैं लोगों को धोखा नहीं दे सकता।
| त्रिपुरा के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रद्योत देब बर्मन ने कहा कि आज जब मैं सोकर उठे तो रिलैक्स महसूस कर रहा हूं। आज के दिन की शुरुआत मैं झूठ बोलने वालों और अपराधियों को बिना सुने कर रहा हूं। कांग्रेस को त्रिपुरा में बड़ा झटका लगा है। यहां प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रद्योत देब बर्मन ने मंगलवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। इस दौरान उन्होंने पार्टी में भ्रष्टाचार और समूहवाद के गंभीर आरोप लगाए हैं। बर्मन ने अपना इस्तीफा ट्विटर पर घोषणा करते हुए दिया है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, 'आज जब मैं सोकर उठे तो रिलैक्स महसूस कर रहा हूं। आज के दिन की शुरुआत मैं झूठ बोलने वालों और अपराधियों को बिना सुने कर रहा हूं, आज मुझे ये फिक्र नहीं है कि मेरा कौन सा साथी मेरे पीठ में छुरा घोंपेगा, मुझे गोलबंदी नहीं करनी पड़ रही है, न ही मुझे हाई कमान से ये सुनना पड़ रहा है कि कैसे भ्रष्ट लोगों को पार्टी के ऊंचे ऊंचे पदों पर बिठाया जाए, आज जब से मैं सुबह सोकर उठा हूं तब से एहसास हुआ कि इन गलत तत्वों की वजह से मेरी सेहत और जिंदगी को कितना नुकसान हुआ। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि मैं भ्रष्ट तत्वों को पार्टी के ऊंचे पदों पर बिठाने के लिए तैयार नहीं था, जोकि हमारे प्रदेश बर्बाद करेंगे। मैंने कोशिश की और शायद मैं हार गया लेकिन शुरू से ही इस लड़ाई में अकेला होने पर मैं कैसे जीत सकता था? ' बता दें कि बर्मन उस समय से पार्टी के अंदर विरोध का सामना कर रहे थे जिस समय से उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। इस याचिका में उन्होंने असम जैसे एनआरसी को राज्य में लागू करने के लिए कहा था। इसके बाद से पार्टी उनसे खफा बताई जा रही थी। बताया जा रहा है कि बर्मन पर याचिका को वापस लेने का दबाव डाला जा रहा था। हाल ही में बर्मन ने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी मुलाकात की थी और कहा था कि मैं याचिका वापस नहीं लूंगा। मैं एनआरसी की याचिका वापस लेने से समझौता नहीं कर रहा हूं। मैं लोगों को धोखा नहीं दे सकता। |
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम सीट पर जीत हासिल करना अब BJP बनाम TMC की लड़ाई नहीं रह गई है, ये ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी की व्यक्तिगत लड़ाई बन गई है। पूर्व मेदिनीपुर जिले की इस प्रतिष्ठित सीट पर जबरदस्त प्रचार चल रहा है। नंदीग्राम के रण में शुभेंदु अधिकारी के समर्थन में आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का रोड शो है। वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पदयात्रा निकाली।
पदयात्रा के बाद जनता को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा, याद रखें, अगर मैंने एक बार नंदीग्राम में प्रवेश किया, तो मैं नहीं छोडूंगी। नंदीग्राम मेरी जगह है, मैं यहां रहूंगी। मैं किसी अन्य निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ सकती थी, लेकिन मैंने इस स्थान की माताओं और बहनों को अपना सम्मान देने के लिए नंदीग्राम चुना है। नंदीग्राम आंदोलन को सलाम करने के लिए, मैंने सिंगूर पर नंदीग्राम चुना।
बीजेपी पर बरसते हुए उन्होंने कहा, भारतीय जनता पार्टी को राजनीतिक रूप से दफन करना और नंदीग्राम और पश्चिम बंगाल से उन्हें बाहर करना। मतदाताओं से टीएमसी को वोट देने की अपील करते हुए मुख्यमंत्री बनर्जी ने कहा, चुनाव के दौरान अपने वोट शांति से डाले। ध्यान रहे, "कूल कूल तृणमूल, ठंडा ठंडा कूल कूल, वोट पाबे जोड़ा फूल" अपने दिमाग को 48 घंटे तक ठंडा रखें।
बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के लिए मतदान का प्रचार आज शाम पांच बजे समाप्त हो जाएगा। नंदीग्राम में एक अप्रैल को वोट डाले जाने हैं. चुनाव से पहले ही शुभेंदु अधिकारी ने ऐलान किया था कि वो ममता बनर्जी को पचास हजार से अधिक वोटों से हराएंगे। वहीं बीते दिनों अमित शाह ने भी कहा था कि बंगाल की जनता परिवर्तन करना चाहती है और उसकी नींव नंदीग्राम से रखी जाएगी।
| पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम सीट पर जीत हासिल करना अब BJP बनाम TMC की लड़ाई नहीं रह गई है, ये ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी की व्यक्तिगत लड़ाई बन गई है। पूर्व मेदिनीपुर जिले की इस प्रतिष्ठित सीट पर जबरदस्त प्रचार चल रहा है। नंदीग्राम के रण में शुभेंदु अधिकारी के समर्थन में आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का रोड शो है। वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पदयात्रा निकाली। पदयात्रा के बाद जनता को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा, याद रखें, अगर मैंने एक बार नंदीग्राम में प्रवेश किया, तो मैं नहीं छोडूंगी। नंदीग्राम मेरी जगह है, मैं यहां रहूंगी। मैं किसी अन्य निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ सकती थी, लेकिन मैंने इस स्थान की माताओं और बहनों को अपना सम्मान देने के लिए नंदीग्राम चुना है। नंदीग्राम आंदोलन को सलाम करने के लिए, मैंने सिंगूर पर नंदीग्राम चुना। बीजेपी पर बरसते हुए उन्होंने कहा, भारतीय जनता पार्टी को राजनीतिक रूप से दफन करना और नंदीग्राम और पश्चिम बंगाल से उन्हें बाहर करना। मतदाताओं से टीएमसी को वोट देने की अपील करते हुए मुख्यमंत्री बनर्जी ने कहा, चुनाव के दौरान अपने वोट शांति से डाले। ध्यान रहे, "कूल कूल तृणमूल, ठंडा ठंडा कूल कूल, वोट पाबे जोड़ा फूल" अपने दिमाग को अड़तालीस घंटाटे तक ठंडा रखें। बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के लिए मतदान का प्रचार आज शाम पांच बजे समाप्त हो जाएगा। नंदीग्राम में एक अप्रैल को वोट डाले जाने हैं. चुनाव से पहले ही शुभेंदु अधिकारी ने ऐलान किया था कि वो ममता बनर्जी को पचास हजार से अधिक वोटों से हराएंगे। वहीं बीते दिनों अमित शाह ने भी कहा था कि बंगाल की जनता परिवर्तन करना चाहती है और उसकी नींव नंदीग्राम से रखी जाएगी। |
मुकेश के गांव में मातम का माहौल है. वह परिवार वालों का सहारा था.
करनाल. हरियाणा के करनाल जिले (Karnal District) में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है. यहां के काछवा (Kachhwa) में राइसमिल (Ricemill) में काम करने वाले एक युवक के गुप्तांग में उसके दोस्त ने मजाक में हवा भर दी, जिससे उसकी मौत हो गई. परिजनों ने उस मृत युवक के दोस्त के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है. वहीं, पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. साथ ही आरोपी युवक को हिरासत में ले लिया गया है. वहीं, मृतक की पहचान मुकेश के रुप में हुई है.
जानकारी के मुताबिक, मुकेश डयूटी खत्म करने के बाद कम्प्रेसर मशीन से कपड़े साफ कर रहा था. इसी दौरान मुकेश के दोस्त ने अचानक कम्प्रेसर का पाइप उसकी गुदा में लगा दिया, जिससे मुकेश के पेट की आंत फट गई. इसके बाद आनन-फानन में मुकेश को इलाज के लिए पीजीआई ले जाया गया, लेकिन उसने दम तोड़ दिया. इसके बाद चंडीगढ़ से शव को गांव लाया गया. गांव में मातम का माहौल है.
बता दें कि बीते जून महीने में इसी तरह की खबर नोएडा में सामने आई थी. तब नोएडा के सेक्टर 63 स्थित एक कंपनी में काम करते समय दो युवकों ने वहां काम कर रहे एक श्रमिक के गुप्तांग में एयर कंप्रेसर का पाइप लगा दिया. इसकी वजह से श्रमिक की आंतें फट गईं. अत्यंत गंभीर हालत में श्रमिक को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. पुलिस ने घटना की रिपोर्ट दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था.
थाना फेस-3 के प्रभारी निरीक्षक विवेक त्रिवेदी ने बताया था कि सेक्टर 63 में स्थित एक कंपनी में काम करने वाले संदीप नामक युवक के साथ वहीं काम करने वाले दो युवकों ने इस वारदात को अंजाम दिया था. आरोप है कि अंकित और गौतम नाम के दो श्रमिकों ने संदीप के गुप्तांग में एयर कंप्रेसर की पाइप लगा दी थी. प्राइवेट पार्ट में कंप्रेसर लगाए जाने से संदीप के शरीर में हवा भर गई और उसकी आंतें फट गई थीं.
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सनी देओल की हीरोइन को जब ज्यादा पढ़ी-लिखी होना पड़ा भारी, एक्ट्रेस ने खूब सुने थे ताने, बोलीं- इंडस्ट्री में. .
| मुकेश के गांव में मातम का माहौल है. वह परिवार वालों का सहारा था. करनाल. हरियाणा के करनाल जिले में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है. यहां के काछवा में राइसमिल में काम करने वाले एक युवक के गुप्तांग में उसके दोस्त ने मजाक में हवा भर दी, जिससे उसकी मौत हो गई. परिजनों ने उस मृत युवक के दोस्त के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है. वहीं, पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. साथ ही आरोपी युवक को हिरासत में ले लिया गया है. वहीं, मृतक की पहचान मुकेश के रुप में हुई है. जानकारी के मुताबिक, मुकेश डयूटी खत्म करने के बाद कम्प्रेसर मशीन से कपड़े साफ कर रहा था. इसी दौरान मुकेश के दोस्त ने अचानक कम्प्रेसर का पाइप उसकी गुदा में लगा दिया, जिससे मुकेश के पेट की आंत फट गई. इसके बाद आनन-फानन में मुकेश को इलाज के लिए पीजीआई ले जाया गया, लेकिन उसने दम तोड़ दिया. इसके बाद चंडीगढ़ से शव को गांव लाया गया. गांव में मातम का माहौल है. बता दें कि बीते जून महीने में इसी तरह की खबर नोएडा में सामने आई थी. तब नोएडा के सेक्टर तिरेसठ स्थित एक कंपनी में काम करते समय दो युवकों ने वहां काम कर रहे एक श्रमिक के गुप्तांग में एयर कंप्रेसर का पाइप लगा दिया. इसकी वजह से श्रमिक की आंतें फट गईं. अत्यंत गंभीर हालत में श्रमिक को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. पुलिस ने घटना की रिपोर्ट दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था. थाना फेस-तीन के प्रभारी निरीक्षक विवेक त्रिवेदी ने बताया था कि सेक्टर तिरेसठ में स्थित एक कंपनी में काम करने वाले संदीप नामक युवक के साथ वहीं काम करने वाले दो युवकों ने इस वारदात को अंजाम दिया था. आरोप है कि अंकित और गौतम नाम के दो श्रमिकों ने संदीप के गुप्तांग में एयर कंप्रेसर की पाइप लगा दी थी. प्राइवेट पार्ट में कंप्रेसर लगाए जाने से संदीप के शरीर में हवा भर गई और उसकी आंतें फट गई थीं. . सनी देओल की हीरोइन को जब ज्यादा पढ़ी-लिखी होना पड़ा भारी, एक्ट्रेस ने खूब सुने थे ताने, बोलीं- इंडस्ट्री में. . |
झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा है कि राज्य सरकार को गिराने की केंद्र की भाजपा सरकार की साजिश का पर्दाफाश हो गया है। जैसा कि दुमका और बेरमो उप चुनाव के दौरान प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने कहा था कि छह महीने के भीतर राज्य में भाजपा की सरकार बनेगी। भाजपा सांसद निशिकांत दूबे ने भी कहा था कि जल्द ही बाबूलाल मरांडी मुख्यमंत्री पद पर आसीन होंगे।
उन्होंने कहा कि भाजपा ने कर्नाटक और मध्यप्रदेश मॉडल अपनाया था, लेकिन राजस्थान में मुंह की खानी पड़ी थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि झामुमो, कांग्रेस और राजद बिकाऊ नहीं हैं। बल्कि, झामुमो नेतृत्व की सरकार टिकाऊ है। उन्होंने यह भी कहा कि विधायकों में भ्रम फैलाने की कोशिश दुमका उप चुनाव से ही हो रही है।
केंद्र सरकार के विरुद्ध बोलने और नीतिगत सवाल उठानेवालों को प्रताड़ित किया जा रहा है। प्रताड़ित होने वालों में विपक्ष, पत्रकार, उद्योगपति और भाजपा नेता व कुछ अफसर भी शामिल हैं। हालांकि, उन्होंने केंद्र को यह भी चुनौती दी कि झारखंड की सरकार संघर्ष की उपज है। केंद्र के किसी भी अलोकतांत्रिक कदम का मुंहतोड़ जवाब देगी।
कांग्रेस के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा कि भाजपा पूरे देश में चुनी हुई सरकारों को अस्थिर करने का प्रयास करती रहती है। उसी की एक कड़ी में यह घटना सामने आई है। भाजपा दिन-रात लोकतंत्र का घोंटने के प्रयास में रहतीं है, लेकिन झारखंड में उसके मंसूबे सफल नहीं होंगे। जो भी नेता इस प्रयास में लगे रहते हैं, वे जल्द ही जेल में होंगे। लोकतंत्र के हत्यारों व देशद्रोहियों को बख्शा नहीं जाएगा।
उधर, प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता राकेश सिन्हा ने कहा कि भाजपा ऐसी घटना कई बार राज्य में दोहरा चुकी है, जो लोकतंत्र को कलंकित करता है। राज्य में महागठबंधन की सरकार बनने के बाद से ही भाजपा साजिश रच रही है, लेकिन वह इसमें सफल नहीं हाे पाएगी।
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| झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा है कि राज्य सरकार को गिराने की केंद्र की भाजपा सरकार की साजिश का पर्दाफाश हो गया है। जैसा कि दुमका और बेरमो उप चुनाव के दौरान प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने कहा था कि छह महीने के भीतर राज्य में भाजपा की सरकार बनेगी। भाजपा सांसद निशिकांत दूबे ने भी कहा था कि जल्द ही बाबूलाल मरांडी मुख्यमंत्री पद पर आसीन होंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा ने कर्नाटक और मध्यप्रदेश मॉडल अपनाया था, लेकिन राजस्थान में मुंह की खानी पड़ी थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि झामुमो, कांग्रेस और राजद बिकाऊ नहीं हैं। बल्कि, झामुमो नेतृत्व की सरकार टिकाऊ है। उन्होंने यह भी कहा कि विधायकों में भ्रम फैलाने की कोशिश दुमका उप चुनाव से ही हो रही है। केंद्र सरकार के विरुद्ध बोलने और नीतिगत सवाल उठानेवालों को प्रताड़ित किया जा रहा है। प्रताड़ित होने वालों में विपक्ष, पत्रकार, उद्योगपति और भाजपा नेता व कुछ अफसर भी शामिल हैं। हालांकि, उन्होंने केंद्र को यह भी चुनौती दी कि झारखंड की सरकार संघर्ष की उपज है। केंद्र के किसी भी अलोकतांत्रिक कदम का मुंहतोड़ जवाब देगी। कांग्रेस के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा कि भाजपा पूरे देश में चुनी हुई सरकारों को अस्थिर करने का प्रयास करती रहती है। उसी की एक कड़ी में यह घटना सामने आई है। भाजपा दिन-रात लोकतंत्र का घोंटने के प्रयास में रहतीं है, लेकिन झारखंड में उसके मंसूबे सफल नहीं होंगे। जो भी नेता इस प्रयास में लगे रहते हैं, वे जल्द ही जेल में होंगे। लोकतंत्र के हत्यारों व देशद्रोहियों को बख्शा नहीं जाएगा। उधर, प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता राकेश सिन्हा ने कहा कि भाजपा ऐसी घटना कई बार राज्य में दोहरा चुकी है, जो लोकतंत्र को कलंकित करता है। राज्य में महागठबंधन की सरकार बनने के बाद से ही भाजपा साजिश रच रही है, लेकिन वह इसमें सफल नहीं हाे पाएगी। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
गोरखपुर (ब्यूरो)। पुलिस हॉस्पिटल संचालक की पत्नी, माता और भाई समेत पांच के खिलाफ केस दर्ज कर मामले की जांच कर रही हैं।
जानकारी के मुताबिक, शाहपुर इलाके के हनुमंत नगर निवासी प्रवीन प्रकाश सिन्हा रविवार को शाहपुर पुलिस को तहरीर दी है। तहरीर में लिखा है कि अपने मित्र अमृत सिंह के साथ विकास कुमार सिन्हा जेल बाईपास स्थित आरूही अस्पताल और वेदांता मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में लैब खोलने के लिए फरवरी 2021 में लिखित समझौता हुआ। आरोप है कि 13 लाख रुपए तीन बार में लैब उपकरण खरीदने के लिए विकास सिन्हा के फर्म सिन्हा मेडिकल स्टोर में जमा कराया गया। जिसके बाद लैब संचालित होने के कुछ माह ठीक चला। इसी बीच विकास ने जेल बाईपास स्थित आरूही अस्पताल बंद हो गया।
हॉस्पिटल बंद होने पर प्रवीन प्रकाश और अमृत सिंह ने लैब उपकरण और रुपए मांगे तो आरोपी विकास ने गाली और जान से मारने की धमकी देने लगा। पीडि़तों ने कई बार रुपए और लैब उपकरण मांगने का निवेदन किया। उसके बाद भी आरोपी ने न रुपये दिया न लैब उपकरण वापस किया। जिसके बाद पीडि़तों ने पुलिस को तहरीर दी। रविवार की शाम शाहपुर पुलिस ने विकास सिन्हा, रूबी सिन्हा, इम्तियाज अहमद, राकेश सिन्हा और उषा देवी के खिलाफ केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
जिसपर 13 लाख रुपए हड़पने का आरोप है। वह विकास सिन्हा पहले हॉस्पिटल में काम करता था। आरोप था कि मरीजों को मेडिकल कॉलेज से पकड़ कर कमीशन मिलने वाले हॉस्पिटलों में भर्ती करा रुपए वसूलता था। दो साल पहले विकास ने जेल बाईपास स्थित आरूही अस्पताल खोला था। मेडिकल कॉलेज से एंबुलेंस चालक मरीजों को फंसा कर आरूही अस्पताल में भर्ती करा देते थे। जिसके बाद विकास पर कई मरीजों से इलाज के नाम पर अधिक रुपए वसूलने का आरोप लगा था। परिजनों के हंगामा करने पर पुलिस भी पहुंचती थी। आखिर एक साल बाद विकास ने आरूही अस्पताल बंद कर दिया।
| गोरखपुर । पुलिस हॉस्पिटल संचालक की पत्नी, माता और भाई समेत पांच के खिलाफ केस दर्ज कर मामले की जांच कर रही हैं। जानकारी के मुताबिक, शाहपुर इलाके के हनुमंत नगर निवासी प्रवीन प्रकाश सिन्हा रविवार को शाहपुर पुलिस को तहरीर दी है। तहरीर में लिखा है कि अपने मित्र अमृत सिंह के साथ विकास कुमार सिन्हा जेल बाईपास स्थित आरूही अस्पताल और वेदांता मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में लैब खोलने के लिए फरवरी दो हज़ार इक्कीस में लिखित समझौता हुआ। आरोप है कि तेरह लाख रुपए तीन बार में लैब उपकरण खरीदने के लिए विकास सिन्हा के फर्म सिन्हा मेडिकल स्टोर में जमा कराया गया। जिसके बाद लैब संचालित होने के कुछ माह ठीक चला। इसी बीच विकास ने जेल बाईपास स्थित आरूही अस्पताल बंद हो गया। हॉस्पिटल बंद होने पर प्रवीन प्रकाश और अमृत सिंह ने लैब उपकरण और रुपए मांगे तो आरोपी विकास ने गाली और जान से मारने की धमकी देने लगा। पीडि़तों ने कई बार रुपए और लैब उपकरण मांगने का निवेदन किया। उसके बाद भी आरोपी ने न रुपये दिया न लैब उपकरण वापस किया। जिसके बाद पीडि़तों ने पुलिस को तहरीर दी। रविवार की शाम शाहपुर पुलिस ने विकास सिन्हा, रूबी सिन्हा, इम्तियाज अहमद, राकेश सिन्हा और उषा देवी के खिलाफ केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। जिसपर तेरह लाख रुपए हड़पने का आरोप है। वह विकास सिन्हा पहले हॉस्पिटल में काम करता था। आरोप था कि मरीजों को मेडिकल कॉलेज से पकड़ कर कमीशन मिलने वाले हॉस्पिटलों में भर्ती करा रुपए वसूलता था। दो साल पहले विकास ने जेल बाईपास स्थित आरूही अस्पताल खोला था। मेडिकल कॉलेज से एंबुलेंस चालक मरीजों को फंसा कर आरूही अस्पताल में भर्ती करा देते थे। जिसके बाद विकास पर कई मरीजों से इलाज के नाम पर अधिक रुपए वसूलने का आरोप लगा था। परिजनों के हंगामा करने पर पुलिस भी पहुंचती थी। आखिर एक साल बाद विकास ने आरूही अस्पताल बंद कर दिया। |
नही, बल्कि उस बच्चे और चूल्हे के पीछे दुबकी बैठी एक दूसरी लडकी को इशारे से एलीशा को बताया । मानो कहा - "देते हो तो उन्हे दो, उन्हे ।"
यह देख एलीशा ने रोटी बालक की ओर बढाई । रोटी का देखना था कि वालक ने दोनो हाथ बढाकर उसे झपट लिया और नन्हे-नन्हे हाथो मे टुकडे को पकड उसमे ऐसा मुह गाडकर खाने लगा कि उसकी नाक का पता चलना मुश्किल था । पीछे से लडकी भी चलती वहा आ पहुँची और रोटी पर आख गाडे खडी होगई । एलीशा ने उसे भी टुकडा दिया । फिर एक और टुकडा काटकर उस बुढिया स्त्री को दिया । वह बुढिया भी अपने बूढे मुह से तभी उसे कुतर कर खाने लग गई ।
बोली -- "जो कही थोडा इस वक्त पानी कोई और ले आता 1 तलुए तो बेचारो के सूख रहे है । कल मै पानी लेने गई थी, या आज, याद नही सो बीच में ही गिर पडी । आगे फिर जा नही सकी । डोल वही पड़ा रह गया । कोई ले न गया हो तो कौन जाने वही पडा हो । "
एलीशा ने कुएँ का पता पूछा । बुढिया ने बता दिया । सो एलीशा गया, डोल लिया और पानी लाकर सबको पिलाया । बच्चो ने और बुढिया ने पानी आने पर उनके साथ फिर और भी कुछ रोटी खाई । लेकिन आदमी ने एक कन मुह मे न डाला । बोला, "मै खा नही सकता । "
अबतक वहा पडी दूसरी स्त्री को कोई होश नहीं मालूम होता था । वह वैसे ही अधर से टाग फेक रही थी । एलीशा तब फिर गाव की एक दूकान पर गया । वहासे कुछ जई का चून लिया । नमक, दाल और तेल ले लिया । एक कुल्हाडी भी कहीसे खोज ली और काट लाकर लकडी जमा की । फिर आग जलाई । लडकी भी आकर उसमे मदद देने लगी । उपरात उन्होने खाना तैयार किया और भूखे जनो को खिलाया । (५)
उस आदमी ने तो नाममात्र खाया । बूढिया ने भी कम ही खाया । पर बच्चो ने तो बरतन को चाटकर साफ कर दिया। फिर वे दोनो बालक आपस मे गलबाही डाले गुडी-मुडी होकर सो गये ।
उस वक्त बुढियां स्त्री और उस आदमी ने एलीशा को अपने दुख की सारी कथा सुनाई कि कैसे उनकी यह दशा हुई । वोले - "गरीव तो हम पहले ही थे । पर इस साल के सूखे ने मुसीवत ला दी । जो जमा था कठिनाई से सर्दी तक चला। जाडो के दिन आते-आते यह नौवत हुई कि पडोसी से या जिस-तिस से माँगकर काम चलाना पडा । पहले तो उन्होने दिया, पीछे वे भी इकार करने लगे । चाहते थे कि दे, पर देने को उनके पास होता नहीं था । और हमे भी मागते शर्म आती थी । सो कर्ज मे हम गले तक डूबते गये। एक-एक कर सबका लेना हम पर हो गया। किसीका पैसा चाहिए था तो किसी का नाज वाजिव था और किसी तीसरे की और कोई चीज उधार चढ गई थी ।
" ऐसी हालत होने पर, " आदमी बोला, "में काम की तलाश मे लगा । पर कोई काम नहीं मिला । पेट रखने जितना नाज मिल जाय, तो उसी मजूरी पर काम करने वेतादाद लोग तैयार थे । और कभी कुछ काम मिला भी, तो अगले दिन फिर खाली । फिर और काम ढूढो । मै इस चक्कर मे बीत चला । वुढिया और लडकी ने उधर कही दूसरी जगह जा भीख मांगना शुरू कर दिया था। पर भीख मे कुछ मिलता नही था, नाज का ऐसा अकाल था । फिर भी जैसे-तैसे हम कभी वेखाये, तो कभी अधपेट, जीते हो गये । आस थी कि अगली फसल आने तक ज्यो त्यो चले चले तो फिर देखा जायगा । पर पतझड आने तक तो हमे भीख से भी कुछ मिलना बन्द हो गया। ऊपर से बीमारी ने आ पकडा । हालत बद से बदतर होती गई । आज कुछ मिल जाता, तो दो दिन फाके के होते । आखिर घास खाकर हम लोग तन रखने लगे । मालूम नही घास की वजह थी कि क्या, मेरी बीवी बीमार पड गई । टागो पर उससे चला नही जाता, न खड़ी रह पाती है । मेरा भी दम छीन होता गया । और मदद कही कोई दीखती नही...
"तो भी " बुढिया बोली, " मै कुछ बची थी । पर निराहार काया कब तक चलती । आखिर में भी गिरती गई । लडकी यह दुवला गई और डरी-सहमी सी रहने लगी। मै कहती कि जा, पडोसियो से कुछ माग-ताग | नही, बल्कि उस बच्चे और चूल्हे के पीछे दुबकी बैठी एक दूसरी लडकी को इशारे से एलीशा को बताया । मानो कहा - "देते हो तो उन्हे दो, उन्हे ।" यह देख एलीशा ने रोटी बालक की ओर बढाई । रोटी का देखना था कि वालक ने दोनो हाथ बढाकर उसे झपट लिया और नन्हे-नन्हे हाथो मे टुकडे को पकड उसमे ऐसा मुह गाडकर खाने लगा कि उसकी नाक का पता चलना मुश्किल था । पीछे से लडकी भी चलती वहा आ पहुँची और रोटी पर आख गाडे खडी होगई । एलीशा ने उसे भी टुकडा दिया । फिर एक और टुकडा काटकर उस बुढिया स्त्री को दिया । वह बुढिया भी अपने बूढे मुह से तभी उसे कुतर कर खाने लग गई । बोली -- "जो कही थोडा इस वक्त पानी कोई और ले आता एक तलुए तो बेचारो के सूख रहे है । कल मै पानी लेने गई थी, या आज, याद नही सो बीच में ही गिर पडी । आगे फिर जा नही सकी । डोल वही पड़ा रह गया । कोई ले न गया हो तो कौन जाने वही पडा हो । " एलीशा ने कुएँ का पता पूछा । बुढिया ने बता दिया । सो एलीशा गया, डोल लिया और पानी लाकर सबको पिलाया । बच्चो ने और बुढिया ने पानी आने पर उनके साथ फिर और भी कुछ रोटी खाई । लेकिन आदमी ने एक कन मुह मे न डाला । बोला, "मै खा नही सकता । " अबतक वहा पडी दूसरी स्त्री को कोई होश नहीं मालूम होता था । वह वैसे ही अधर से टाग फेक रही थी । एलीशा तब फिर गाव की एक दूकान पर गया । वहासे कुछ जई का चून लिया । नमक, दाल और तेल ले लिया । एक कुल्हाडी भी कहीसे खोज ली और काट लाकर लकडी जमा की । फिर आग जलाई । लडकी भी आकर उसमे मदद देने लगी । उपरात उन्होने खाना तैयार किया और भूखे जनो को खिलाया । उस आदमी ने तो नाममात्र खाया । बूढिया ने भी कम ही खाया । पर बच्चो ने तो बरतन को चाटकर साफ कर दिया। फिर वे दोनो बालक आपस मे गलबाही डाले गुडी-मुडी होकर सो गये । उस वक्त बुढियां स्त्री और उस आदमी ने एलीशा को अपने दुख की सारी कथा सुनाई कि कैसे उनकी यह दशा हुई । वोले - "गरीव तो हम पहले ही थे । पर इस साल के सूखे ने मुसीवत ला दी । जो जमा था कठिनाई से सर्दी तक चला। जाडो के दिन आते-आते यह नौवत हुई कि पडोसी से या जिस-तिस से माँगकर काम चलाना पडा । पहले तो उन्होने दिया, पीछे वे भी इकार करने लगे । चाहते थे कि दे, पर देने को उनके पास होता नहीं था । और हमे भी मागते शर्म आती थी । सो कर्ज मे हम गले तक डूबते गये। एक-एक कर सबका लेना हम पर हो गया। किसीका पैसा चाहिए था तो किसी का नाज वाजिव था और किसी तीसरे की और कोई चीज उधार चढ गई थी । " ऐसी हालत होने पर, " आदमी बोला, "में काम की तलाश मे लगा । पर कोई काम नहीं मिला । पेट रखने जितना नाज मिल जाय, तो उसी मजूरी पर काम करने वेतादाद लोग तैयार थे । और कभी कुछ काम मिला भी, तो अगले दिन फिर खाली । फिर और काम ढूढो । मै इस चक्कर मे बीत चला । वुढिया और लडकी ने उधर कही दूसरी जगह जा भीख मांगना शुरू कर दिया था। पर भीख मे कुछ मिलता नही था, नाज का ऐसा अकाल था । फिर भी जैसे-तैसे हम कभी वेखाये, तो कभी अधपेट, जीते हो गये । आस थी कि अगली फसल आने तक ज्यो त्यो चले चले तो फिर देखा जायगा । पर पतझड आने तक तो हमे भीख से भी कुछ मिलना बन्द हो गया। ऊपर से बीमारी ने आ पकडा । हालत बद से बदतर होती गई । आज कुछ मिल जाता, तो दो दिन फाके के होते । आखिर घास खाकर हम लोग तन रखने लगे । मालूम नही घास की वजह थी कि क्या, मेरी बीवी बीमार पड गई । टागो पर उससे चला नही जाता, न खड़ी रह पाती है । मेरा भी दम छीन होता गया । और मदद कही कोई दीखती नही... "तो भी " बुढिया बोली, " मै कुछ बची थी । पर निराहार काया कब तक चलती । आखिर में भी गिरती गई । लडकी यह दुवला गई और डरी-सहमी सी रहने लगी। मै कहती कि जा, पडोसियो से कुछ माग-ताग |
संगरूर (विवेक सिंधवानी): चंडीगढ़-बठिंडा नेशनल हाईवे और पी. जी. आई. घाबाद के पास सर्विस रोड पर गड्ढों के कारण अक्सर लोगों को अपनी कीमती जान गंवानी पड़ती है। इसका मुख्य कारण नेशनल हाईवे पर सर्विस रोड पर लाइट की व्यवस्था न होना और सड़क में गड्ढे होना है। जो या तो प्रशासन व भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारी को नजर नहीं आ रहा है या फिर जानबूझकर गुमराह किया जा रहा है।
बता दें कि संगरूर के पास नेशनल हाईवे पर मिनी पी. जी. आई. अस्पताल है, इसलिए यहां देर सुबह काफी शोर होता है। नेशनल हाईवे पर सर्विस रोड की खराब हालत के कारण आए दिन कई सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं, लेकिन प्रशासन कोई ध्यान नहीं दे रहा है, जबकि आम जनता से टोल टैक्स तो वसूला जाता है, लेकिन बदले में उन्हें जरूरी सुविधाएं भी मुहैया कराई जाती हैं।
ऐसा लगता है कि प्रशासन और नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है, जिसके बाद हाईवे पर बने गड्ढों पर पैच वर्क को किया जा सके।
कांग्रेस नेता शक्तिजीत ने कहा कि प्रशासन को नींद से जागकर इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। शक्तिजीत ने कहा कि इस टोल रोड की हालत दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है, इस रोड पर बने गड्ढों को ठीक करने के साथ-साथ लाइट की भी उचित व्यवस्था करने की जरूरत है।
| संगरूर : चंडीगढ़-बठिंडा नेशनल हाईवे और पी. जी. आई. घाबाद के पास सर्विस रोड पर गड्ढों के कारण अक्सर लोगों को अपनी कीमती जान गंवानी पड़ती है। इसका मुख्य कारण नेशनल हाईवे पर सर्विस रोड पर लाइट की व्यवस्था न होना और सड़क में गड्ढे होना है। जो या तो प्रशासन व भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारी को नजर नहीं आ रहा है या फिर जानबूझकर गुमराह किया जा रहा है। बता दें कि संगरूर के पास नेशनल हाईवे पर मिनी पी. जी. आई. अस्पताल है, इसलिए यहां देर सुबह काफी शोर होता है। नेशनल हाईवे पर सर्विस रोड की खराब हालत के कारण आए दिन कई सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं, लेकिन प्रशासन कोई ध्यान नहीं दे रहा है, जबकि आम जनता से टोल टैक्स तो वसूला जाता है, लेकिन बदले में उन्हें जरूरी सुविधाएं भी मुहैया कराई जाती हैं। ऐसा लगता है कि प्रशासन और नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है, जिसके बाद हाईवे पर बने गड्ढों पर पैच वर्क को किया जा सके। कांग्रेस नेता शक्तिजीत ने कहा कि प्रशासन को नींद से जागकर इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। शक्तिजीत ने कहा कि इस टोल रोड की हालत दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है, इस रोड पर बने गड्ढों को ठीक करने के साथ-साथ लाइट की भी उचित व्यवस्था करने की जरूरत है। |
एसडीआर संख्या वाक्यांश का संक्षिप्त नाम है"ग्राहकों की समेकित सूची।" इसका अन्य नाम कंपनी का अनन्य अकाउंटिंग नंबर है मैं एसडीआर कोड कैसे पा सकता हूं? आपको केवल सरकारी खरीद के आधिकारिक साइट को दर्ज करने की आवश्यकता होगी।
खरीद के क्षेत्र में यूनिफाइड सूचना प्रणाली के आधिकारिक संसाधन पर जाने के बाद आप संगठन का एसडीआर कोड कैसे पा सकते हैं? इस एल्गोरिदम का पालन करेंः
- मुख्य पृष्ठ पर आपको "खोज" पंक्ति दिखाई देगी। इसमें संगठन का पूरा आधिकारिक नाम दर्ज करें हालांकि, कंपनी के टीआईएन को प्रिंट करना आसान और तेज है।
- Enter बटन दबाएं या खोज बार में आवर्धक ग्लास पर क्लिक करें।
- यदि आप चाहें, तो आप उन्नत खोज का उपयोग कर सकते हैंः प्रिंट ओजीआरएन, केपीपी, स्थान - पता, क्षेत्र, संघीय जिला।
- यदि आप अगली विंडो में सही जानकारी निर्दिष्ट करते हैं, तो कंपनी के नाम के बाईं ओर, आप संगठन के 11-वर्ण कोड देखेंगे।
- मैं अभी तक एसडीआर कोड कैसे पा सकता हूं? आइटम 5 से विंडो में, कंपनी के नाम पर क्लिक करें खुलने वाली खिड़की की पहली पंक्ति में, आपको यह कोड दिखाई देगा।
और एक और तरीके से पता चलता है कि एसडीआर कोड कैसे पता चलेगा। आपको फिर से सार्वजनिक खरीद के स्थल का मुख्य पृष्ठ खोलना होगा। और फिर - एल्गोरिदम देखेंः
- खुले मेनू में, "अतिरिक्त सूचना" ढूंढें, और इसमें - "संगठन का पंजीकरण"
- अन्य बातों के अलावा, आप "अनोखा खाता नंबर" लाइन देखेंगे, जहां 11 अंकों वाले एसपीझेड साइफर पंजीकृत होंगे।
| एसडीआर संख्या वाक्यांश का संक्षिप्त नाम है"ग्राहकों की समेकित सूची।" इसका अन्य नाम कंपनी का अनन्य अकाउंटिंग नंबर है मैं एसडीआर कोड कैसे पा सकता हूं? आपको केवल सरकारी खरीद के आधिकारिक साइट को दर्ज करने की आवश्यकता होगी। खरीद के क्षेत्र में यूनिफाइड सूचना प्रणाली के आधिकारिक संसाधन पर जाने के बाद आप संगठन का एसडीआर कोड कैसे पा सकते हैं? इस एल्गोरिदम का पालन करेंः - मुख्य पृष्ठ पर आपको "खोज" पंक्ति दिखाई देगी। इसमें संगठन का पूरा आधिकारिक नाम दर्ज करें हालांकि, कंपनी के टीआईएन को प्रिंट करना आसान और तेज है। - Enter बटन दबाएं या खोज बार में आवर्धक ग्लास पर क्लिक करें। - यदि आप चाहें, तो आप उन्नत खोज का उपयोग कर सकते हैंः प्रिंट ओजीआरएन, केपीपी, स्थान - पता, क्षेत्र, संघीय जिला। - यदि आप अगली विंडो में सही जानकारी निर्दिष्ट करते हैं, तो कंपनी के नाम के बाईं ओर, आप संगठन के ग्यारह-वर्ण कोड देखेंगे। - मैं अभी तक एसडीआर कोड कैसे पा सकता हूं? आइटम पाँच से विंडो में, कंपनी के नाम पर क्लिक करें खुलने वाली खिड़की की पहली पंक्ति में, आपको यह कोड दिखाई देगा। और एक और तरीके से पता चलता है कि एसडीआर कोड कैसे पता चलेगा। आपको फिर से सार्वजनिक खरीद के स्थल का मुख्य पृष्ठ खोलना होगा। और फिर - एल्गोरिदम देखेंः - खुले मेनू में, "अतिरिक्त सूचना" ढूंढें, और इसमें - "संगठन का पंजीकरण" - अन्य बातों के अलावा, आप "अनोखा खाता नंबर" लाइन देखेंगे, जहां ग्यारह अंकों वाले एसपीझेड साइफर पंजीकृत होंगे। |
यूपी। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के न्यूरोसर्जन ने आईआईटी रुड़की के 85 वर्षीय पूर्व प्रोफेसर का ऑपरेशन परिवार की सहमति के बगैर किया। सहमति न होने के कारण प्रोफेसर की ब्रेन 20 दिन से भी अधिक समय से रुकी थी। न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर बीके ओझा के नेतृत्व में एक टीम द्वारा शनिवार को किया गया पांच घंटे का ऑपरेशन सफल रहा और मरीज प्रोफेसर देवेंद्र स्वरूप भार्गव को शताब्दी अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां उन्हें सह-रुग्णता के कारण निगरानी में रखा गया है।
टीम में शामिल प्रोफेसर क्षितिज श्रीवास्तव ने कहा, वह एक्यूट सबड्यूरल हेमेटोमा से पीड़ित थे, एक मेडिकल इमरजेंसी, जिसमें मस्तिष्क और उसकी सबसे बाहरी परत के बीच रक्त जमा हो जाता है। यह काफी गंभीर स्थिति है। अब हम उम्मीद है कि वह जल्द ही होश में आ जाएंगे। भार्गव को करीब 20 दिन पहले आस्था सेंटर फॉर गेरिएट्रिक मेडिसिन हॉस्पिटल एंड हॉस्पिस में अर्धचेतना की स्थिति में भर्ती कराया गया था। 20 साल पहले तलाकशुदा भार्गव एक दशक से शहर के सहारा एस्टेट, जानकीपुरम में अकेले रहते हैं।
तत्काल सर्जरी के लिए डॉक्टरों की सहमति नहीं मिल सकी। आस्था अस्पताल के निदेशक डॉ. अभिषेक शुक्ला ने आगे की दिशा के लिए सीएमओ से संपर्क किया और उनसे कुछ वित्तीय सहायता की व्यवस्था करने का अनुरोध किया। इसके बाद केजीएमयू के डॉक्टर आगे आए और मरीज का ऑपरेशन करने को तैयार हो गए।
| यूपी। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के न्यूरोसर्जन ने आईआईटी रुड़की के पचासी वर्षीय पूर्व प्रोफेसर का ऑपरेशन परिवार की सहमति के बगैर किया। सहमति न होने के कारण प्रोफेसर की ब्रेन बीस दिन से भी अधिक समय से रुकी थी। न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर बीके ओझा के नेतृत्व में एक टीम द्वारा शनिवार को किया गया पांच घंटे का ऑपरेशन सफल रहा और मरीज प्रोफेसर देवेंद्र स्वरूप भार्गव को शताब्दी अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां उन्हें सह-रुग्णता के कारण निगरानी में रखा गया है। टीम में शामिल प्रोफेसर क्षितिज श्रीवास्तव ने कहा, वह एक्यूट सबड्यूरल हेमेटोमा से पीड़ित थे, एक मेडिकल इमरजेंसी, जिसमें मस्तिष्क और उसकी सबसे बाहरी परत के बीच रक्त जमा हो जाता है। यह काफी गंभीर स्थिति है। अब हम उम्मीद है कि वह जल्द ही होश में आ जाएंगे। भार्गव को करीब बीस दिन पहले आस्था सेंटर फॉर गेरिएट्रिक मेडिसिन हॉस्पिटल एंड हॉस्पिस में अर्धचेतना की स्थिति में भर्ती कराया गया था। बीस साल पहले तलाकशुदा भार्गव एक दशक से शहर के सहारा एस्टेट, जानकीपुरम में अकेले रहते हैं। तत्काल सर्जरी के लिए डॉक्टरों की सहमति नहीं मिल सकी। आस्था अस्पताल के निदेशक डॉ. अभिषेक शुक्ला ने आगे की दिशा के लिए सीएमओ से संपर्क किया और उनसे कुछ वित्तीय सहायता की व्यवस्था करने का अनुरोध किया। इसके बाद केजीएमयू के डॉक्टर आगे आए और मरीज का ऑपरेशन करने को तैयार हो गए। |
इंग्लैंड के तेज गेंदबाज टिम ब्रेसनन अपनी कोहनी की चोट से खासे परेशान हैं और इसी चोट की वजह से उन्हें वर्तमान न्यूजीलैंड दौरे से भी हटना पड़ा है। हालांकि उन्होंने इस चोट से निजात पाने के लिए अमेरिका का रुख किया है जहां पर वह अपना दूसरा ऑपरेशन करवाएंगे।
लंदन। इंग्लैंड के तेज गेंदबाज टिम ब्रेसनन अपनी कोहनी की चोट से खासे परेशान हैं और इसी चोट की वजह से उन्हें वर्तमान न्यूजीलैंड दौरे से भी हटना पड़ा है। हालांकि उन्होंने इस चोट से निजात पाने के लिए अमेरिका का रुख किया है जहां पर वह अपना दूसरा ऑपरेशन करवाएंगे।
न्यूजीलैंड दौरे से जब वह बाहर हुए थे तब राष्ट्रीय चयनकर्ता ज्यॉफ मिलर ने कहा था कि उन्हें एक और सर्जरी की जरूरत है। ब्रेसनन ने 2011 के अंत में ऑपरेशन करवाया था लेकिन 2012 के अंत तक वह अपनी पुरानी लय पाने के लिए तरसते रहे। पिछले साल अंत में भारत के खिलाफ खेली गई टेस्ट सीरीज में अंतिम दो टेस्ट मैच में उन्हें एक भी विकेट नहीं मिला था। इससे पूर्व दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेली गई सीरीज में भी कुछ खास नहीं कर पाए थे।
काउंटी में यार्कशर के लिए खेलने वाले ब्रेसनन के कप्तान एंड्रयू गेल ने इस खबर की पुष्टि करते हुए कहा कि अगले हफ्ते में वह अमेरिका जा रहे हैं और वह अपनी कोहनी के ऑपरेशन के लिए वहां एक या दो हफ्ते रहेंगे। ब्रेसनन मई के अंत में होने वाली न्यूजीलैंड सीरीज से पूर्व खुद को टीम के लिए तैयार रखना चाहेंगे। लेकिन इससे पूर्व वह अपने घर में होने वाले चैंपियंस ट्राफी के लिए इंग्लिश टीम में शामिल होना चाहेंगे। वह वनडे क्रिकेट में सातवें नंबर पर बढि़या बल्लेबाजी भी करते हैं जिसका फायदा मेजबान टीम को इस प्रतिष्ठित वनडे टूर्नामेंट में मिल सकता है।
| इंग्लैंड के तेज गेंदबाज टिम ब्रेसनन अपनी कोहनी की चोट से खासे परेशान हैं और इसी चोट की वजह से उन्हें वर्तमान न्यूजीलैंड दौरे से भी हटना पड़ा है। हालांकि उन्होंने इस चोट से निजात पाने के लिए अमेरिका का रुख किया है जहां पर वह अपना दूसरा ऑपरेशन करवाएंगे। लंदन। इंग्लैंड के तेज गेंदबाज टिम ब्रेसनन अपनी कोहनी की चोट से खासे परेशान हैं और इसी चोट की वजह से उन्हें वर्तमान न्यूजीलैंड दौरे से भी हटना पड़ा है। हालांकि उन्होंने इस चोट से निजात पाने के लिए अमेरिका का रुख किया है जहां पर वह अपना दूसरा ऑपरेशन करवाएंगे। न्यूजीलैंड दौरे से जब वह बाहर हुए थे तब राष्ट्रीय चयनकर्ता ज्यॉफ मिलर ने कहा था कि उन्हें एक और सर्जरी की जरूरत है। ब्रेसनन ने दो हज़ार ग्यारह के अंत में ऑपरेशन करवाया था लेकिन दो हज़ार बारह के अंत तक वह अपनी पुरानी लय पाने के लिए तरसते रहे। पिछले साल अंत में भारत के खिलाफ खेली गई टेस्ट सीरीज में अंतिम दो टेस्ट मैच में उन्हें एक भी विकेट नहीं मिला था। इससे पूर्व दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेली गई सीरीज में भी कुछ खास नहीं कर पाए थे। काउंटी में यार्कशर के लिए खेलने वाले ब्रेसनन के कप्तान एंड्रयू गेल ने इस खबर की पुष्टि करते हुए कहा कि अगले हफ्ते में वह अमेरिका जा रहे हैं और वह अपनी कोहनी के ऑपरेशन के लिए वहां एक या दो हफ्ते रहेंगे। ब्रेसनन मई के अंत में होने वाली न्यूजीलैंड सीरीज से पूर्व खुद को टीम के लिए तैयार रखना चाहेंगे। लेकिन इससे पूर्व वह अपने घर में होने वाले चैंपियंस ट्राफी के लिए इंग्लिश टीम में शामिल होना चाहेंगे। वह वनडे क्रिकेट में सातवें नंबर पर बढि़या बल्लेबाजी भी करते हैं जिसका फायदा मेजबान टीम को इस प्रतिष्ठित वनडे टूर्नामेंट में मिल सकता है। |
WhatsApp अपने यूजर्स के एक्सपीरिएंस को बढ़ाने के लिए नए-नए फीचर्स को जारी करता रहता है। ऐसे ही नए फीचर्स में आप जल्द ही व्हाट्सएप ग्रुप के पास्ट पार्टिसिपेंट्स के बारे में जान पाएंगे। इसके अलावा स्टेट्स पर इमोजी के जरिए रिएक्ट करने के अलावा आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में से अपने ऑनलाइन स्टेटस को छुपा भी पाएंगे। व्हाट्सएप के नए अपकमिंग फीचर्स के बारे में जानने के लिए अंत तक इस वीडियो को देखें।
| WhatsApp अपने यूजर्स के एक्सपीरिएंस को बढ़ाने के लिए नए-नए फीचर्स को जारी करता रहता है। ऐसे ही नए फीचर्स में आप जल्द ही व्हाट्सएप ग्रुप के पास्ट पार्टिसिपेंट्स के बारे में जान पाएंगे। इसके अलावा स्टेट्स पर इमोजी के जरिए रिएक्ट करने के अलावा आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में से अपने ऑनलाइन स्टेटस को छुपा भी पाएंगे। व्हाट्सएप के नए अपकमिंग फीचर्स के बारे में जानने के लिए अंत तक इस वीडियो को देखें। |
रेडियो स्टेशन के लिए कार ऐन्टेना हैकार के सबसे महत्वपूर्ण घटकों में से एक उपकरण का कार्य और दूरी सीमा सूचक इस बात पर निर्भर करता है कि उपकरण कैसे चुना गया था।
आज तक, डिज़ाइन, आयाम और तकनीकी मापदंडों में अलग-अलग बाजारों में उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला है कार उत्साही हमेशा खुद के लिए उपयुक्त मॉडल चुनने में सक्षम होगा।
रेडियो स्टेशन के लिए कार एंटीनारेडियो सिग्नल का इष्टतम रिसेप्शन सुनिश्चित करता है लेकिन किस मॉडल पर चुनना है? यहां सब कुछ आपकी आवश्यकताओं पर निर्भर करता है। कुछ केवल रेडियो कार्यक्रमों को सुनने के लिए, दूसरों को टेलीविज़न प्रसारित करने के लिए, जबकि अन्य नेविगेशन प्रणाली की उपस्थिति को पसंद करते हैं। इसलिए, खरीदने से पहले, इसे अपने बजट को निर्धारित करने की सलाह दी जाती है, डिवाइस के तकनीकी आंकड़े और इसकी स्थापना का स्थान।
वीएचएफ रेडियो स्टेशनों के लिए कार एंटेनाविभिन्न प्रकार के मॉडल द्वारा घरेलू उत्पादन का प्रतिनिधित्व डिवाइस चुनते समय "ट्रायड" के निर्माता पर अपना ध्यान रोकना उचित होता है यह रूसी कंपनी एक विस्तृत श्रेणी का प्रतिनिधित्व करती है जो कि उच्च स्तर की कार्यक्षमता, विश्वसनीयता, और एक स्वीकार्य कीमत को दर्शाती हैं।
पुनर्वितरण में एंटेना के विकास और चयन होते हैंएक उद्यम, जो आपको सभी चरणों में प्रक्रिया की निगरानी करने की अनुमति देता है। उत्पाद की उच्च गुणवत्ता की गारंटी कंपनी के कई वर्षों के अनुभव में है, साथ ही साथ उत्पादन के आधार पर समय पर लैस है।
कई मोटर चालकों के लिए एक बढ़िया विकल्परेडियो ऐन्टेना "ट्रायड वीए 63-01" का एक मॉडल हो सकता है यह डिवाइस एक छड़ी से लैस है, जिसकी लंबाई 40 सेमी है। यह 70-100 सेंटीमीटर की ऐन्टेना लंबाई के बराबर रिसेप्शन प्रदान करता है। घाव तार एक उच्च स्तर की कार्यक्षमता प्रदान करता है जो कि कई छोटे मॉडलों से अधिक है।
एक 45 सेमी लंबी रॉड के साथ एक समान एंटीनाकारों के ऐसे मॉडल पर शेवरलेट और "निवा" मानक लक्जरी पैकेज के रूप में स्थापित किया गया है। मशीन की छत के सामने इसे स्थापित करने की सिफारिश की जाती है। डिवाइस रिसावरोधी और निविड़ अंधकार है।
ऊपर उल्लिखित एंटीना की कई विशेषताओं को सूचीबद्ध करना संभव हैः
रेडियो स्टेशन के लिए कार एंटीनाघरेलू निर्माता की एक शानदार उपस्थिति है। इसकी ऊंचाई 15 सेमी है। मॉडल सिग्नल रिसेप्शन की उच्च स्तर की शुद्धता प्रदान करने में सक्षम है। प्रीसेटिंग आसान हैः डिवाइस के शीर्ष में एक स्क्रू है जो एक पारंपरिक स्क्रूड्राइवर के साथ समायोज्य है।
उत्पाद के सकारात्मक पहलूः
लेकिन एक चमकदार रंग, एंटीना में रंग के मामले मेंविशेष साधनों के समान बन जाता है, जो निश्चित रूप से यातायात पुलिस का ध्यान आकर्षित करेगा। और दक्षता का स्तर मानक अनुरूपों से बहुत कम है, जिसका लंबाई 150 सेमी है।
रेडियो स्टेशन के लिए यह कार हवाईउच्च गुणवत्ता और उचित लागत है। निर्माण में स्टेबलाइज़र के कारण, यह वोल्टेज बूंदों से डरता नहीं है। डिवाइस में शोर और हस्तक्षेप की एक छोटी राशि है। पैकेज में 275 सेमी की केबल लंबाई शामिल है। इससे आपको डिवाइस को नए तरीके से माउंट करने की अनुमति मिलती है।
उत्पाद के पेशेवरः
डिवाइस का माइनस एक है - डिवाइस को ठीक करने के लिए मोटी एंटीना की उपस्थिति। वे विंडशील्ड पर खड़े हो जाते हैं।
कार रेडियो स्टेशन के लिए सक्रिय एंटीनाइतालवी निर्माता से, छत पर स्थापित, रेडियो तरंगों को प्राप्त करने, डिजिटल टेलीविजन प्रसारण देखने और जीपीएस संकेतों को पकड़ने की अनुमति देगा। इस सेट में टेलीविजन और जीपीएस के लिए 5 मीटर के दो केबल शामिल हैं।
कंपनी सबसे अच्छा संकेत स्वागत का वादा किया - उचित सेटअप और स्थापना के साथ, यह वास्तव में प्राप्त है। एंटीना अलग अलग रंग में दिखाया गया हैः सफेद, काले और लाल मॉडल।
इतालवी निर्माता से डिवाइस प्रतिष्ठित हैएक छोटी ऊंचाई और काम का इष्टतम स्तर। स्टेनलेस स्टील पिन पर चुंबक मशीन के शरीर के लिए एक आसान लगाव प्रदान करता है। सिविल बैंड के रेडियो स्टेशनों के साथ एंटीना कार्य। अधिकतम इनपुट पावर रेटिंग 100 वाट है।
डिवाइस के पेशेवरोंः
यह एंटीना भी बहुत आकर्षक हैडिजाइन। यह छत के पीछे 60 डिग्री के कोण पर स्थापित है। ऑपरेशन के लिए आवश्यक वोल्टेज 10 से 16 वाट से भिन्न होता है। रॉड की लंबाई 41 सेमी है।
कई लोग एंटेना के बारे में सोच रहे हैंयह एक रेडियो स्टेशन (मोटर वाहन) के लिए बेहतर है। इष्टतम तकनीकी मानकों और कार्यक्षमता के उच्च स्तर वाले मॉडल का चयन करना एक आसान काम नहीं है, इसलिए हम आपको सलाह देते हैं कि आप इस मामले को समझने वाले लोगों से मदद लें। मुख्य बात यह है कि आपने डिवाइस खरीदने के लिए किस उद्देश्य का निर्णय लिया है, इसकी स्पष्ट रूप से कल्पना करना है।
यदि आपके पास सबसे सामान्य रेडियो हैकार और, रेडियो के अलावा, आपको किसी भी चीज की आवश्यकता नहीं है, तो एक ढेर डिवाइस खरीदने में कोई बात नहीं है जो सस्ते से बहुत कम लागत में है। यह वही "स्केट" खरीदने के लिए पर्याप्त होगा।
यदि, उदाहरण के लिए, आप एक टैक्सी ड्राइवर हैं, तो यह अनिवार्य नहीं होगाएक और गंभीर मॉडल का अधिग्रहण। महत्वपूर्ण तथ्य के बारे में मत भूलना कि निर्माताओं के आश्वासन के बावजूद, आधुनिक रेडियो एंटीना मॉडल के उच्च गुणवत्ता वाले स्वागत का त्रिज्या, शायद ही कभी 40 किमी से अधिक है।
डिवाइस को सही ढंग से स्थापित और समायोजित करना महत्वपूर्ण है।
रेडियो स्टेशन के लिए एंटीनाहाथ काफी सरलता से किया जाता है। यहां मुख्य बात धन की बचत कर रही है, और हस्तशिल्प डिवाइस की गुणवत्ता खरीद एनालॉग से कम नहीं है। और खुद को एक रेडियो एंटीना बनाने के लिए, आपको तैयार करना चाहिएः
इसकी पूरी लंबाई के साथ एंकर बोल्टतांबे से एक तार हवा के लिए आवश्यक है। रैपिंग दो परतों में किया जाता है। बोल्ट तार के शीर्ष पर सोल्डर किया जाना चाहिए। परिणामी संरचना मशीन की छत पर स्थित डिवाइस की सॉकेट में खराब हो जाती है।
ठंड वेल्डिंग के साथ काम केवल दस्ताने में किया जाता है, जो ठंडे पानी से गीले होते हैं। इससे हाथों की त्वचा पर उनके आसंजन से बचना संभव हो जाएगा।
एंटीना का आधार प्लास्टिक से संपर्क से बचने के लिए पारदर्शी स्वयं चिपकने वाली फिल्म के माध्यम से सील कर दिया जाता है। शीत वेल्डिंग रॉड पर समान रूप से लागू होती है, ताकि यह भी हो जाए।
एंटीना को बाद में एक सौंदर्य उपस्थिति दिया गया थासख्त रॉड एमरी द्वारा संसाधित किया जाता है। यदि सतह किसी न किसी हो गई है, तो आपको बोल्ट को रद्द करने और इसे खराद पर बनाने की आवश्यकता है। सतह को प्राथमिकता दी जाती है और कार के रंग के नीचे पेंट की कई परतों से ढकी होती है। मैट पेंट को प्राथमिकता दी जाती है। यह उत्पाद की सतह पर सभी अनियमितताओं को छुपा सकता है।
| रेडियो स्टेशन के लिए कार ऐन्टेना हैकार के सबसे महत्वपूर्ण घटकों में से एक उपकरण का कार्य और दूरी सीमा सूचक इस बात पर निर्भर करता है कि उपकरण कैसे चुना गया था। आज तक, डिज़ाइन, आयाम और तकनीकी मापदंडों में अलग-अलग बाजारों में उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला है कार उत्साही हमेशा खुद के लिए उपयुक्त मॉडल चुनने में सक्षम होगा। रेडियो स्टेशन के लिए कार एंटीनारेडियो सिग्नल का इष्टतम रिसेप्शन सुनिश्चित करता है लेकिन किस मॉडल पर चुनना है? यहां सब कुछ आपकी आवश्यकताओं पर निर्भर करता है। कुछ केवल रेडियो कार्यक्रमों को सुनने के लिए, दूसरों को टेलीविज़न प्रसारित करने के लिए, जबकि अन्य नेविगेशन प्रणाली की उपस्थिति को पसंद करते हैं। इसलिए, खरीदने से पहले, इसे अपने बजट को निर्धारित करने की सलाह दी जाती है, डिवाइस के तकनीकी आंकड़े और इसकी स्थापना का स्थान। वीएचएफ रेडियो स्टेशनों के लिए कार एंटेनाविभिन्न प्रकार के मॉडल द्वारा घरेलू उत्पादन का प्रतिनिधित्व डिवाइस चुनते समय "ट्रायड" के निर्माता पर अपना ध्यान रोकना उचित होता है यह रूसी कंपनी एक विस्तृत श्रेणी का प्रतिनिधित्व करती है जो कि उच्च स्तर की कार्यक्षमता, विश्वसनीयता, और एक स्वीकार्य कीमत को दर्शाती हैं। पुनर्वितरण में एंटेना के विकास और चयन होते हैंएक उद्यम, जो आपको सभी चरणों में प्रक्रिया की निगरानी करने की अनुमति देता है। उत्पाद की उच्च गुणवत्ता की गारंटी कंपनी के कई वर्षों के अनुभव में है, साथ ही साथ उत्पादन के आधार पर समय पर लैस है। कई मोटर चालकों के लिए एक बढ़िया विकल्परेडियो ऐन्टेना "ट्रायड वीए तिरेसठ-एक" का एक मॉडल हो सकता है यह डिवाइस एक छड़ी से लैस है, जिसकी लंबाई चालीस सेमी है। यह सत्तर-एक सौ सेंटीमीटर की ऐन्टेना लंबाई के बराबर रिसेप्शन प्रदान करता है। घाव तार एक उच्च स्तर की कार्यक्षमता प्रदान करता है जो कि कई छोटे मॉडलों से अधिक है। एक पैंतालीस सेमी लंबी रॉड के साथ एक समान एंटीनाकारों के ऐसे मॉडल पर शेवरलेट और "निवा" मानक लक्जरी पैकेज के रूप में स्थापित किया गया है। मशीन की छत के सामने इसे स्थापित करने की सिफारिश की जाती है। डिवाइस रिसावरोधी और निविड़ अंधकार है। ऊपर उल्लिखित एंटीना की कई विशेषताओं को सूचीबद्ध करना संभव हैः रेडियो स्टेशन के लिए कार एंटीनाघरेलू निर्माता की एक शानदार उपस्थिति है। इसकी ऊंचाई पंद्रह सेमी है। मॉडल सिग्नल रिसेप्शन की उच्च स्तर की शुद्धता प्रदान करने में सक्षम है। प्रीसेटिंग आसान हैः डिवाइस के शीर्ष में एक स्क्रू है जो एक पारंपरिक स्क्रूड्राइवर के साथ समायोज्य है। उत्पाद के सकारात्मक पहलूः लेकिन एक चमकदार रंग, एंटीना में रंग के मामले मेंविशेष साधनों के समान बन जाता है, जो निश्चित रूप से यातायात पुलिस का ध्यान आकर्षित करेगा। और दक्षता का स्तर मानक अनुरूपों से बहुत कम है, जिसका लंबाई एक सौ पचास सेमी है। रेडियो स्टेशन के लिए यह कार हवाईउच्च गुणवत्ता और उचित लागत है। निर्माण में स्टेबलाइज़र के कारण, यह वोल्टेज बूंदों से डरता नहीं है। डिवाइस में शोर और हस्तक्षेप की एक छोटी राशि है। पैकेज में दो सौ पचहत्तर सेमी की केबल लंबाई शामिल है। इससे आपको डिवाइस को नए तरीके से माउंट करने की अनुमति मिलती है। उत्पाद के पेशेवरः डिवाइस का माइनस एक है - डिवाइस को ठीक करने के लिए मोटी एंटीना की उपस्थिति। वे विंडशील्ड पर खड़े हो जाते हैं। कार रेडियो स्टेशन के लिए सक्रिय एंटीनाइतालवी निर्माता से, छत पर स्थापित, रेडियो तरंगों को प्राप्त करने, डिजिटल टेलीविजन प्रसारण देखने और जीपीएस संकेतों को पकड़ने की अनुमति देगा। इस सेट में टेलीविजन और जीपीएस के लिए पाँच मीटर के दो केबल शामिल हैं। कंपनी सबसे अच्छा संकेत स्वागत का वादा किया - उचित सेटअप और स्थापना के साथ, यह वास्तव में प्राप्त है। एंटीना अलग अलग रंग में दिखाया गया हैः सफेद, काले और लाल मॉडल। इतालवी निर्माता से डिवाइस प्रतिष्ठित हैएक छोटी ऊंचाई और काम का इष्टतम स्तर। स्टेनलेस स्टील पिन पर चुंबक मशीन के शरीर के लिए एक आसान लगाव प्रदान करता है। सिविल बैंड के रेडियो स्टेशनों के साथ एंटीना कार्य। अधिकतम इनपुट पावर रेटिंग एक सौ वाट है। डिवाइस के पेशेवरोंः यह एंटीना भी बहुत आकर्षक हैडिजाइन। यह छत के पीछे साठ डिग्री के कोण पर स्थापित है। ऑपरेशन के लिए आवश्यक वोल्टेज दस से सोलह वाट से भिन्न होता है। रॉड की लंबाई इकतालीस सेमी है। कई लोग एंटेना के बारे में सोच रहे हैंयह एक रेडियो स्टेशन के लिए बेहतर है। इष्टतम तकनीकी मानकों और कार्यक्षमता के उच्च स्तर वाले मॉडल का चयन करना एक आसान काम नहीं है, इसलिए हम आपको सलाह देते हैं कि आप इस मामले को समझने वाले लोगों से मदद लें। मुख्य बात यह है कि आपने डिवाइस खरीदने के लिए किस उद्देश्य का निर्णय लिया है, इसकी स्पष्ट रूप से कल्पना करना है। यदि आपके पास सबसे सामान्य रेडियो हैकार और, रेडियो के अलावा, आपको किसी भी चीज की आवश्यकता नहीं है, तो एक ढेर डिवाइस खरीदने में कोई बात नहीं है जो सस्ते से बहुत कम लागत में है। यह वही "स्केट" खरीदने के लिए पर्याप्त होगा। यदि, उदाहरण के लिए, आप एक टैक्सी ड्राइवर हैं, तो यह अनिवार्य नहीं होगाएक और गंभीर मॉडल का अधिग्रहण। महत्वपूर्ण तथ्य के बारे में मत भूलना कि निर्माताओं के आश्वासन के बावजूद, आधुनिक रेडियो एंटीना मॉडल के उच्च गुणवत्ता वाले स्वागत का त्रिज्या, शायद ही कभी चालीस किमी से अधिक है। डिवाइस को सही ढंग से स्थापित और समायोजित करना महत्वपूर्ण है। रेडियो स्टेशन के लिए एंटीनाहाथ काफी सरलता से किया जाता है। यहां मुख्य बात धन की बचत कर रही है, और हस्तशिल्प डिवाइस की गुणवत्ता खरीद एनालॉग से कम नहीं है। और खुद को एक रेडियो एंटीना बनाने के लिए, आपको तैयार करना चाहिएः इसकी पूरी लंबाई के साथ एंकर बोल्टतांबे से एक तार हवा के लिए आवश्यक है। रैपिंग दो परतों में किया जाता है। बोल्ट तार के शीर्ष पर सोल्डर किया जाना चाहिए। परिणामी संरचना मशीन की छत पर स्थित डिवाइस की सॉकेट में खराब हो जाती है। ठंड वेल्डिंग के साथ काम केवल दस्ताने में किया जाता है, जो ठंडे पानी से गीले होते हैं। इससे हाथों की त्वचा पर उनके आसंजन से बचना संभव हो जाएगा। एंटीना का आधार प्लास्टिक से संपर्क से बचने के लिए पारदर्शी स्वयं चिपकने वाली फिल्म के माध्यम से सील कर दिया जाता है। शीत वेल्डिंग रॉड पर समान रूप से लागू होती है, ताकि यह भी हो जाए। एंटीना को बाद में एक सौंदर्य उपस्थिति दिया गया थासख्त रॉड एमरी द्वारा संसाधित किया जाता है। यदि सतह किसी न किसी हो गई है, तो आपको बोल्ट को रद्द करने और इसे खराद पर बनाने की आवश्यकता है। सतह को प्राथमिकता दी जाती है और कार के रंग के नीचे पेंट की कई परतों से ढकी होती है। मैट पेंट को प्राथमिकता दी जाती है। यह उत्पाद की सतह पर सभी अनियमितताओं को छुपा सकता है। |
मुजफ्फरनगर में रेल हादसे पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने गहरा दुःख जताया है और हर संभव मदद पहुंचाने के निर्देश दिये।
मुजफ्फरनगरः खतौली में हुए रेल हादसे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा दुःख जताया और तत्काल राहत एवं बचाव कार्यों के निर्देश दिए हैं। सीएम योगी ने कहा कि हादसे में घायल यात्रियों की समुचित इलाज की व्यवस्था की जायेगी और हर जरूरी मदद पहुंचाई जाएगी।
सीएम योगी ने मुजफ्फरनगर रेल हादसे के लिये ट्वीट कर दुःख जताया और कहा कि रेल हादसे में घायल यात्रियों का समुचित इलाज होगा। साथ ही उन्होंने हर संभव मदद पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।
गौरतलब है कि आज शाम पुरी से हरिद्वार जा रही कलिंग उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन के 7 डिब्बे पटरी से उतर गये, जिसमें कई लोगों के मरने की आशंका जताई जा रही है।
मृतकों की संख्या की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई हैं। बताया जा रहा है कि कई लोग घायल हुए हैं।
| मुजफ्फरनगर में रेल हादसे पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने गहरा दुःख जताया है और हर संभव मदद पहुंचाने के निर्देश दिये। मुजफ्फरनगरः खतौली में हुए रेल हादसे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा दुःख जताया और तत्काल राहत एवं बचाव कार्यों के निर्देश दिए हैं। सीएम योगी ने कहा कि हादसे में घायल यात्रियों की समुचित इलाज की व्यवस्था की जायेगी और हर जरूरी मदद पहुंचाई जाएगी। सीएम योगी ने मुजफ्फरनगर रेल हादसे के लिये ट्वीट कर दुःख जताया और कहा कि रेल हादसे में घायल यात्रियों का समुचित इलाज होगा। साथ ही उन्होंने हर संभव मदद पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि आज शाम पुरी से हरिद्वार जा रही कलिंग उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन के सात डिब्बे पटरी से उतर गये, जिसमें कई लोगों के मरने की आशंका जताई जा रही है। मृतकों की संख्या की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई हैं। बताया जा रहा है कि कई लोग घायल हुए हैं। |
राजस्थान (Rjasthan) में अब कोरोना (Covid-19) भी सियासी हो गया है. दरअसल कोरोना ने अपनी चपेट में कई जनप्रतिनिधियों को ले लिया है.
राजस्थान (Rjasthan) में अब कोरोना (Covid-19) भी सियासी हो गया है. दरअसल कोरोना ने अपनी चपेट में कई जनप्रतिनिधियों को ले लिया है. जहां एक ओर कोरोना प्रदेश में आम लोगों पर कहर बरपा रहा है. तो दूसरी ओर कोरोना वायरस ने प्रदेश के मंत्री और विधायकों को भी अपने चपेट में ले लिया है. प्रदेश में अब तक भाजपा और कांग्रेस को मिलाकर करीब 13 विधायक और 5 सांसद कोरोना वायरस का शिकार हो चुके हैं. बताते चलें कि अकेले जयपुर में तीन हजार मरीज होम आइसोलेट हैं. जबकि लोगों का आरोप हैं कि नेताओं को वीआईपी सुविधा मिल रही है.
राजस्थान में अब तक 83,853 कोरोना मरीज सामने आ चुके हैं. मरू प्रदेश में कोरोना के चलते अब तक 1074 मरीज की जान जा चुकी है. वहीं अब कोरोना ने सियासी लोगों को अपनी जकड़ में ले लिया है. बीजेपी और कांग्रेस के 7-6 विधायक अब तक पॉजिटिव आ चुके है.वहीं अब तक 4 भाजपा सांसद और एक भाजपा गठबंधन दल आरएलपी सांसद कोरोना पॉजिटिव हुए हैं.
मरू प्रदेश में सत्ता पार्टी कांग्रेस से लेकर विपक्षी दल भाजपा के नेता तक कोरोनाकाल में आम जनता को सोशल डिस्टेंस रखने, मास्क लगाने के साथ-साथ कोरोना बचाव के लिये बनाये गये तमाम नियमों का पालन करने की नसीहत देते नजर आए, लेकिन इन दिनों खुद जमकर नियमों का मखौल उड़ाया.
28 अगस्त को कांग्रेस पार्टी ने जयपुर के अन्दर नीट और जेईई परिक्षाओं का विरोध किया था. जहां पर जमकर सोशल डिस्टेंस का मजाक उड़ा था. जिसके बाद परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरिवायास और विधायक रफीक खान धरने के बाद अब कोरोना पॉजिटिव हो गए. वहीं भाजपा ने बिजली के दामों को कम करने के लिये जगह-जगह प्रदर्शन किया. इस दौरान सोशल डिस्टेंस का जमकर मजाक उड़ा. इस प्रदर्शन में 50 से ज्यादा लोग शामिल हुए. भाजपा के प्रदर्शन के बाद राजस्थान विधानसभा के प्रतिपक्ष नेता राजेन्द्र राठौड़ कोरोना पॉजिटिव पाये गये हैं.
मरू प्रदेश में भले जनप्रतिनिधि कोरोना पॉजिटिव पाए गये हैं लेकिन आम जनता अब इस बात का विरोध करने लगी है कि जनप्रतिनिधियों को सरकारी सुविधा व अस्पताल मिल रहा है, लेकिन आम जनता को चिकित्सा विभाग उनके घरों में रहने के लिए बोल रहा है. आम जनता को मरने के लिये छोड़ रखा है. जयपुर के अन्दर कोरोना मरीज के लिए बेड की सुविधा नहीं है. अकेले आयूएचस अस्पताल में सिर्फ 100 बेड हैं. कोरोना पॉजिटिव मरीज का कहना है कि उन्हें प्राइवेट अस्पताल जाना पढ़ रहा है जहां पर एक दिन का खर्चा करीब 25 सौ रुपये तक आ रहा है. अकेले जयपुर में अभी 3 हजार से ज्यादा मरीज होम आइसोलेशन में हैं.
राजस्थान में कोरोना की जद में केवल मंत्री, विधायक ही शामिल नहीं है, बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने हाल में अपने निवास पर बड़ी संख्या में कार्यक्रताओं से मिलीं थी, इस दौरान सोशल डिस्टेंस का जमकर मखौल उड़ा था. वहीं एक महिला कार्यकर्ता कोरोना पॉजिटिव पायी गयी तो अब राजे ने तीसरी बार खुद को सेल्फ आईसोलेट कर लिया है. पहले राजे सिंगर कनिका कपूर की पार्टी में शामिल होने के बाद और दिल्ली में उनके बंगले पर बागवानी करने वाले शख्स के पॉजिटिव आने के बाद भी राजे क्वारंटीन हुईं थी.
वहीं राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के घर पर कोरोना ने दस्तक दे दी है. अशोक गहलोत के आवास पर 10 कार्मिकों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आ चुकी है. अशोक गहलोत के निवास पर कई बार सोशल डिस्टेंस नहीं रखने की तस्वीरें सामने आई हैं. वहीं कोरोना संक्रमित मिलने के बाद सीएम अशोक गहलोत ने एहतियात के तौर पर आगंतुकों से मुलाकात का कार्यक्रम रद्द कर दिया है. हांलाकि आज अशोक गहलोत ने कोरोना की बढ़ती संख्या पर चिंता जाहिर करते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिये हैं, लेकिन सवाल यहां नेताओं पर खड़ा हो रहा है कि खुद नियमों का पाठ पढ़ाने वाले अगर नियमों का मखौल उड़ाएंगे तो आम जनता क्या करेगी. सवाल ये भी उठता है कि कोरोना में भी वीआईपी कल्चर आखिर क्यों?
| राजस्थान में अब कोरोना भी सियासी हो गया है. दरअसल कोरोना ने अपनी चपेट में कई जनप्रतिनिधियों को ले लिया है. राजस्थान में अब कोरोना भी सियासी हो गया है. दरअसल कोरोना ने अपनी चपेट में कई जनप्रतिनिधियों को ले लिया है. जहां एक ओर कोरोना प्रदेश में आम लोगों पर कहर बरपा रहा है. तो दूसरी ओर कोरोना वायरस ने प्रदेश के मंत्री और विधायकों को भी अपने चपेट में ले लिया है. प्रदेश में अब तक भाजपा और कांग्रेस को मिलाकर करीब तेरह विधायक और पाँच सांसद कोरोना वायरस का शिकार हो चुके हैं. बताते चलें कि अकेले जयपुर में तीन हजार मरीज होम आइसोलेट हैं. जबकि लोगों का आरोप हैं कि नेताओं को वीआईपी सुविधा मिल रही है. राजस्थान में अब तक तिरासी,आठ सौ तिरेपन कोरोना मरीज सामने आ चुके हैं. मरू प्रदेश में कोरोना के चलते अब तक एक हज़ार चौहत्तर मरीज की जान जा चुकी है. वहीं अब कोरोना ने सियासी लोगों को अपनी जकड़ में ले लिया है. बीजेपी और कांग्रेस के सात-छः विधायक अब तक पॉजिटिव आ चुके है.वहीं अब तक चार भाजपा सांसद और एक भाजपा गठबंधन दल आरएलपी सांसद कोरोना पॉजिटिव हुए हैं. मरू प्रदेश में सत्ता पार्टी कांग्रेस से लेकर विपक्षी दल भाजपा के नेता तक कोरोनाकाल में आम जनता को सोशल डिस्टेंस रखने, मास्क लगाने के साथ-साथ कोरोना बचाव के लिये बनाये गये तमाम नियमों का पालन करने की नसीहत देते नजर आए, लेकिन इन दिनों खुद जमकर नियमों का मखौल उड़ाया. अट्ठाईस अगस्त को कांग्रेस पार्टी ने जयपुर के अन्दर नीट और जेईई परिक्षाओं का विरोध किया था. जहां पर जमकर सोशल डिस्टेंस का मजाक उड़ा था. जिसके बाद परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरिवायास और विधायक रफीक खान धरने के बाद अब कोरोना पॉजिटिव हो गए. वहीं भाजपा ने बिजली के दामों को कम करने के लिये जगह-जगह प्रदर्शन किया. इस दौरान सोशल डिस्टेंस का जमकर मजाक उड़ा. इस प्रदर्शन में पचास से ज्यादा लोग शामिल हुए. भाजपा के प्रदर्शन के बाद राजस्थान विधानसभा के प्रतिपक्ष नेता राजेन्द्र राठौड़ कोरोना पॉजिटिव पाये गये हैं. मरू प्रदेश में भले जनप्रतिनिधि कोरोना पॉजिटिव पाए गये हैं लेकिन आम जनता अब इस बात का विरोध करने लगी है कि जनप्रतिनिधियों को सरकारी सुविधा व अस्पताल मिल रहा है, लेकिन आम जनता को चिकित्सा विभाग उनके घरों में रहने के लिए बोल रहा है. आम जनता को मरने के लिये छोड़ रखा है. जयपुर के अन्दर कोरोना मरीज के लिए बेड की सुविधा नहीं है. अकेले आयूएचस अस्पताल में सिर्फ एक सौ बेड हैं. कोरोना पॉजिटिव मरीज का कहना है कि उन्हें प्राइवेट अस्पताल जाना पढ़ रहा है जहां पर एक दिन का खर्चा करीब पच्चीस सौ रुपये तक आ रहा है. अकेले जयपुर में अभी तीन हजार से ज्यादा मरीज होम आइसोलेशन में हैं. राजस्थान में कोरोना की जद में केवल मंत्री, विधायक ही शामिल नहीं है, बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने हाल में अपने निवास पर बड़ी संख्या में कार्यक्रताओं से मिलीं थी, इस दौरान सोशल डिस्टेंस का जमकर मखौल उड़ा था. वहीं एक महिला कार्यकर्ता कोरोना पॉजिटिव पायी गयी तो अब राजे ने तीसरी बार खुद को सेल्फ आईसोलेट कर लिया है. पहले राजे सिंगर कनिका कपूर की पार्टी में शामिल होने के बाद और दिल्ली में उनके बंगले पर बागवानी करने वाले शख्स के पॉजिटिव आने के बाद भी राजे क्वारंटीन हुईं थी. वहीं राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के घर पर कोरोना ने दस्तक दे दी है. अशोक गहलोत के आवास पर दस कार्मिकों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आ चुकी है. अशोक गहलोत के निवास पर कई बार सोशल डिस्टेंस नहीं रखने की तस्वीरें सामने आई हैं. वहीं कोरोना संक्रमित मिलने के बाद सीएम अशोक गहलोत ने एहतियात के तौर पर आगंतुकों से मुलाकात का कार्यक्रम रद्द कर दिया है. हांलाकि आज अशोक गहलोत ने कोरोना की बढ़ती संख्या पर चिंता जाहिर करते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिये हैं, लेकिन सवाल यहां नेताओं पर खड़ा हो रहा है कि खुद नियमों का पाठ पढ़ाने वाले अगर नियमों का मखौल उड़ाएंगे तो आम जनता क्या करेगी. सवाल ये भी उठता है कि कोरोना में भी वीआईपी कल्चर आखिर क्यों? |
कर लेता था। इस वसूलयावी का दृश्य प्रत्यन्त हृदय विदारक होता था ! और यह लोम- हर्षण अत्याचार गरीब किसान सहते थे, क्योंकि वे एक जमीदार की ज़मींदारी से निकल कर दूसरे ज़मीदार की अध्यक्षता में जाकर वस भी नही सकते थे, क्योंकि अत्याचारी ज़ार का क़ानून उन्हें एक ही स्थान पर बस कर रहने के लिए मजबूर किये हुए था !
ऐसा क्यों था, इसका एक कारण और है । सैनिक सेवा के लिए ज़ार ने एक प्रकार से उक्त भूमि को सैनिकों के हाथ गिरवीं रख दिया था ! क्योंकि ज़ार इन सैनिक-ज़मींदारों को किसी प्रकार की तनख्वाह नहीं देता था। ३५०६६५१८७ ईकड भूमि पर इन सैनिक ज़मीदारों का क्रूर शासन था। जार, पहिले तो किसानों की करुण-कहानी सुनते ही न थे, और फिर सुन कर ही वे क्या कर सकते थे। सैनिकों के हाथ भूमि गिरवी थी, फिर यदि किसान को एक ज़मींदारो छोड़ कर दूसरी ज़मीदारी में बसने की इजाजत दे दी जाती तो रूस पर आर्थिक संकट श्री पड़ता। इसी कारण से ज़ार भी चुप्पी साधे रहते थे !
अन्त में, १८६१ में, सैनिक ज़मींदारियों की इतिश्री निकट श्राई । वेतनभोगी सेनाओं की रचना की गई। और इस प्रकार परम्परागत जमींदारों के आसन डगमगाये । किसानों की गुलामी का बन्धन ढीला हुआ। जिस भूमि को किसान पराई समझ कर जोतता-चोता था, वह उसे दे दी गई। और ऐसा सदा के लिए कर दिया गया = ईकड़ से ११ ईकड़ भूमि तक एक २ किसान को मिली। पर, इसके
साथ ही सरकार ने उक्त भूमि का मूल्य ज़मीदारों को भी श्रदा कर दिया और किसानों को उक्त भूमि का मूल्य सरकार के पास किस्तों में अदा करने के लिये ४६ वर्ष का समय दिया गया । इतनाही नहीं, सरकार ने किसानों को भी इस अदायगी के लिये ६ फोसदी सूद पर रुपये उधार दे दिये । अर्थात् रूसी सरकार ने इस मामले में वैंकर का काम किया । १६०७ तक, जो कुछ किसानों से देते बना, सो उन्हों ने देदिया, इसके
की अदायगी मंसूख कर दीगई। शायद रूसी सरकार ने अपने समस्त इतिहास में किसानों के लिये यही एक अच्छा काम किया ! परन्तु, पाठकों को स्मरण रखना चाहिये कि, किसान इस, प्राकर के भूमि के सौदे से सन्तुष्ट नहीं थे, उन्हे व्यर्थ ही ४६ वर्ष तक लगान के अतिरिक्त किश्तों में भूमि का मूल्य अदा करना पड़ा, वें सरकारी कतरव्यौत से असन्तुष्टथे ।
भूमि के वापस मिलने के बाद भी भूमि-विभाजन का एक विचित्र प्रवन्ध किया गया। जिस घर में जितने पुरुष जोतवो सकते थे, उनके हिसाब से १२ वर्ष के लिये उन्हें भूमि दी जाती थी । यह 'साम्यवाद' की एक शाख़ ( Communism ) 'भौमिक साम्यवाद' के ढंग का बँटवारा हुआ । इंगलैंड के श्रानरेबिल मारिस वेरिङ्ग ने अपनी Maan Springs of Russia नामक पुस्तक में लिखा है किः"...After the emancipation, cach batch of serís belonging to each separate owner became a separate and independent community, which owned in common. The land which was thus o vned in common could not be redistributed more than once every twelre years, and even then, only if two thirds
of village assembly rote । for redistribution A sinitar majonty was necessary before any of the common land could become private property."
अर्थात्, इस मुक्ति के पश्चात् एक ज़मींदार के आधिपत्य में रहने वाले किसानों में एक स्वतंत्र गोष्ठी के रूप में, भूमि का विभाजन कर दिया गया। इस प्रकार का विभाजन १२ वर्ष के पूर्व फिर नही किया जाता था, वशर्ते, गांव की तीन चौथाई जनता का पुनर्विभाजन का मत न हो। और इसी प्रकार उक्त बँटी हुई भूमि १२ वर्ष के पहिले किसी की व्यक्तिगत सम्पत्ति भी नहीं हो सकती थी ।
कृषि योग्य जितनी भूमि थी सब किसानों में वॉट दी गई थी। एक घर के कई आदमियों के बीच में उपजाऊ और अनउपजाऊ, और दोनों प्रकार की भूमि के टुकड़े वरावर वाँटे जाते थे। बीच में यदि कोई मर जाय, तो स्वामीविहीन भूमि पर घर के लोगों का ही कब्ज़ा रहता था । १२ वर्ष वाद फिर बँटवारा होता था ।
१८६१ से १६०४ तक ये नियम काम करते रहे। १८६० में, अलेक्ज़ एडर ( तृतीय ) के समय में, यह एक नियम और के जोड़ा गया कि, "चॅटवारे की भूमि के अतिरिक्त अन्य भूमि को किसान नहीं खरीद सकता ।" इतने समय के चोच में, कृषि की कुछ भी उन्नति नहीं हुई थी, किसानों ने इस नये नियम को अपनी भूमि-वृद्धि के लिए घातक समझा। उधर सरकार ने ज़मीन्दारो की संख्या विल्कुल घटते हुए देखकर ही यह प्रतिबन्ध स्थापित किया था ।
१९०५ में, रूस को एक सर्वव्यापी राजनैतिक अशान्ति
का सामना करना पड़ा। इस प्रशान्ति के कारण लगभग एक शताब्दि हुए, तब उत्पन्न हुए थे, जिन्हें हम आगे चलकर विस्तार पूर्वक कहेंगे। यहां पर, सक्षेप में हम केवल इतना ही कहेंगे कि, जनता राजनैतिक अधिकार चाहती थी, कई बार प्रातिनिधिक शासन की मांग की गई थी, पर सारे प्रयत्न निष्फल हुए । 'पुलिस के अत्याचारों और निरंकुशता से सभी लोग परेशान थे । नागरिक जोवन एक अत्यन्त संकुचित एवं पराधीन जीवन था । इस प्रशान्ति का एक बड़ा कारण किसानों का असन्तोष था। किसानों की माँग थी कि - "हमें और भूमि दो ।"
१९०४ की प्रशान्ति के समय भी, १९०११ कृषक-ग्रामों में इगे हुए ! १९०६१९ किसानों की गिरफ्तारी हुई । ४११ आदमियों को प्राण-दण्ड दिया गया और ६०१ श्राइसी साइबेरिया में तथा कैदखानों में डाल दिये गये ! पर, साथही, किसानों ने भी जहाँ अवसर देखा, ज़मीदारों के घर जला दिये, उनके खेत नष्ट कर दिये, गोरू-हरहे हॉक दिये और अन्य नाना प्रकार की हानि पहुंचाई । इस महा अशान्ति में किसान फिर विजयी हुए ! ज़मीदारों को अपनी २ भूमि में से फिर कुछ भूमि बॅचनी पड़ी। इस प्रकार भूमि का एक बहुत बड़ा टुकड़ा किसानों को मिल गया। इस प्रकार जमोदारों की २५ फीसदी भूमि विक गई ।
१९१० में एक परिवर्तन और हुआ। श्रव एक कानून ऐसा बना दिया गया, जिसके अनुसार किसान अपनी गोष्ठी ( Commune) भी छोड़ सकता था। अर्थात् सरकारी तौर पर १२वर्ष के लिए मिलने वाली भूमि को जोतने चोने से भी वह छुट्टी पा सकता था और केवल अपनी मोल ली हुई भूमि को ही
जोत- वो सकता था। साथ ही, इच्छानुसार गोष्ठी द्वारा प्राप्त भूमि को मोल लेकर अपनी व्यक्तिगत सम्पत्ति भी बना सकता था। साथ ही यदि वह चाहता, तो उसे ( Form ) बनाने के लिए सरकारी मदद भी मिल सकती थी।
नये क़ानून की शब्दावली बहुत भली मालूम पड़ती थी । पर, संसार जानता है कि स्वेच्छाचारी श्रधिकारी-तंत्र जिस समय एक अच्छे से अच्छे कानून के अनुसार भी काम करने बैठता है, तो प्रजा को हानि हो होती ! रूसी अधिकारी-तंत्र ने इस कानून के भीतर भी एक गहरी चाल खेलो। असल चात यह थी कि, रूसी सरकार किसानों के प्रश्न को राजनैतिक दृष्टि से देखती थी, और उसी दृष्टि से उसके काम भी होते थे । १२ वर्ष वाले भूमि के बँटवारे की व्यवस्था ने सरकार को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया था, और सरकार भी यही चाहती थी कि किसान इस वंटवारे के फेर में पड़े रहे। इसा लिए, उसने ऐसी घातें खेली जिससे किसान गोष्ठी से बाहर न निकल सकें। पर जब १९०४ में गोष्ठी-व्यवस्था ( Commitne ) में साम्यवाद की बू आने लगी, तब तो रूसी सरकार बहुत चकराई ! तब उसने व्यक्तिगत सम्पत्ति रख सकने का क़ानून बनाया । इस ढंग से अधिकारी तंत्र को यह आशा थी कि, गोष्ठी-व्यवस्था के पक्ष में अधिक किसान रहेंगे, और कुछ दिनों तक ऐसा हुआ भी । व्यक्तिगत सम्पत्ति के रूप में भूमि ख़रीदने वाले किसान बहुत कम निकले। इसका कारण यह था कि, बहुत बड़ी भूमि के जोतने बोने के लिए बड़ी पूंजी की भी दरकार थी। किसानों के पास बिना धीरे २ पूंजी बढ़ाये, एक साथ बड़ी पूंजी एकत्रित कर सकने का कोई मार्गन था। इसलिए किसान एकाएक समस्त भूमि पर
कृब्ज़ा न कर सके । यद्यपि, सरकारी बैंकों द्वारा किसानों को अच्छी सहायता मिली थी, पर इस सहायता का फल धीरे २ ही प्रकट होगा ।
रूसी किसान के सम्बन्ध में हम मुख्य २ वातें बतला चुके । राजनैतिक क्षेत्र में किसानों की क्या स्थिति थी इसे हम आगे चल कर बतलावेंगे, पर यह जान लेने योग्य बात है कि, रूस का किसान राजनैतिक व्यक्ति नहीं है । वह सिर्फ आर्थिक व्यक्ति है, उसका इतिहास केवल आर्थिक समस्याओं के सोपानों पर रचा गया है। और आज भी वह संसार के आर्थिक क्षेत्र में ही अपनी रखता है। उसकी सारी पहेलियां आर्थिक हैं, और रूस में उसने जो विजय प्राप्त की है, वह केवल आर्थिक है।
यहां पर हम एक बात और कहेंगे। रूसी किसान बहुत भोला-भाला और सरल प्रकृति का जीव है । उसको स्वभाव ही इतना मोठा है कि, उसकी ऐतहासिक दीनता का प्रत्यक्ष दर्शन हो जाता है। ईश्वर पर उसका अटल विश्वास है, और प्रत्येक काम में वह ईश्वर की इच्छा को ही प्रधान मानता है। ईश्वर के ऊपर अविश्वास करने वालों को वह वेवकूफ़ समझता है । वह राजभक्त इतना कहा जाता है कि, ज़ार के अत्याचारी शासन में रह कर भी, ज़ार के व्यक्तित्व को उसने ईश्वर की शक्ति से समानता दी है। पर, जब २ उसने आर्थिक प्रश्न पर दृष्टि डाली है, वह अधिकारी - तंत्र का घोर शत्रु प्रमाणित हुआ है। आगे चल कर पाठक देखेंगे कि, रूसी किसान संसार में कौन सा स्थान रखता है।
रूसी ज़मीन्दार ।
( DVOIANSTVO ) सी ज़मीन्दारों का इतिहास भी बड़ा ही गुगल है। असल में, रूसी ज़मीन्दारों की सृष्टि उस समय से हुई, जब, रूसी सरकार ने सैनिक सेवा तथा सिविल सर्विस के लिए लोगों को कुछ पद दिये और साथ ही कुछ भूमि भी दी । इस प्रकार पद, भूमि और कुछ स्थायी अधिकारों की प्राप्ति करने के बाद, रूसी ज़मीन्दार की सृष्टि हुई । इनके अतिरिक कुछ स्वतन्त्र भूमि रखने वाले ज़मींदार भी थे, पर रूसी किसानों और ज़मीदारों का जहाँ २ वर्णन आया है, सरकारी ओहदा पाने वाले ज़मीदारों से ही तात्पर्य रहा है। यूरोप में, 'रूसा ज़मीदार' एक बहुत पुराना फिर्का है। अभी तक उनके वंशज विद्यमान रहे हैं। रूसी क्रान्ति के पश्चात उनकी क्या दशा हुई, यह अभी प्रकट नहीं हुआ है।
ज़मीन्दारों से ऊंचे पदों पर भी कुछ लोग बहुत पुराने समय में थे। ये जागीरें (Pincipalities) पूर्व समय में 'कीव' ( Kiev ) नगर की राजधानी की अध्यक्षता में थीं, जब ज़ार की राजधानी मास्को में उठकर चली गई, तब उक जागीरों का सम्बन्ध मास्को से होगया । पर मास्को में राजधानी के पहुँचने के बाद ये जागीरें सरकारी प्रान्तों में सम्मिलित कर ली गईं। जागीरों के टूटने पर भी 'प्रिंस' (जागीरदार) का उपाधि परम्परागत बनी रही और अब तक बनी हुई है । जागीरों के टूट जाने से 'प्रिन्स' उपाधि धारी लोग पूर्ण
स्वतन्त्र होगये और उन्होंने सार्वजनिक श्रान्दोलनों में भी भाग लेना आरम्भ कर दिया।
इन प्रिन्सो के सिवा दो उपाधियाँ और चली थीं । 'ग्राफ' ( Grof= Count यानी काउन्ट ) तथा 'वैरन' ( Baron ) नामक उपाधियाँ भी कुछ खान्दानों को परम्परागत रूप से प्राप्त थीं । पर ये दोनों शब्द जर्मन भाषा से लिये गये हैं, क्योंकि, रूसी भाषा में इन के पर्य्यायवाची शब्द नहीं मिलते। ये उपाधियाँ ज़ार द्वारा दी गई थी, या फिर अन्य देशों से आये हुए प्रवासी-वंशों के साथ जुड़ी हुई थीं।
जागीरदारों के जो खान्दान अब तक मशहूर हैं, उनके नाम के पीछे डलगोरुकी, वरियाटिम्स्की, श्रोब्लेन्स्की, गोर्चकाव, खोवन्स्की, गलिट्ट्सन, ट्रोवस्कोय आदि पद लगे रहते रहते हैं । रूसी क्रान्ति में कई ऐसे नाम आये है । जागीरदारों के प्रत्येक वंशज के नाम में ये शब्द जुड़े रहते हैं । इसका कारण यह मालूम पड़ता है कि, रूसी गृहस्थी में समान - धिकार ( Democracy ) सदा से रहा है । इसी कारण से उपाधियां भी केवल घर के मुखिया के नाम में न जुड़कर सभी स्त्री-पुरुष वंशजों के नाम के पीछे जुड़ती रही है।
रूसी क़ानून की दृष्टि से स्त्री को अपनी पैत्रिक सम्पत्ति में से चौदहर्वा हिस्सा मिलता है, पर पति के जीवित रहते हुए भी स्त्री अपनी निज की सम्पत्ति पर व्यक्तिगत रूप से पूरा अधिकार रखती है ।
* फ्रांस में स्त्रियों को यह अधिकार नहीं है । | कर लेता था। इस वसूलयावी का दृश्य प्रत्यन्त हृदय विदारक होता था ! और यह लोम- हर्षण अत्याचार गरीब किसान सहते थे, क्योंकि वे एक जमीदार की ज़मींदारी से निकल कर दूसरे ज़मीदार की अध्यक्षता में जाकर वस भी नही सकते थे, क्योंकि अत्याचारी ज़ार का क़ानून उन्हें एक ही स्थान पर बस कर रहने के लिए मजबूर किये हुए था ! ऐसा क्यों था, इसका एक कारण और है । सैनिक सेवा के लिए ज़ार ने एक प्रकार से उक्त भूमि को सैनिकों के हाथ गिरवीं रख दिया था ! क्योंकि ज़ार इन सैनिक-ज़मींदारों को किसी प्रकार की तनख्वाह नहीं देता था। पैंतीस करोड़ छः लाख पैंसठ हज़ार एक सौ सत्तासी ईकड भूमि पर इन सैनिक ज़मीदारों का क्रूर शासन था। जार, पहिले तो किसानों की करुण-कहानी सुनते ही न थे, और फिर सुन कर ही वे क्या कर सकते थे। सैनिकों के हाथ भूमि गिरवी थी, फिर यदि किसान को एक ज़मींदारो छोड़ कर दूसरी ज़मीदारी में बसने की इजाजत दे दी जाती तो रूस पर आर्थिक संकट श्री पड़ता। इसी कारण से ज़ार भी चुप्पी साधे रहते थे ! अन्त में, एक हज़ार आठ सौ इकसठ में, सैनिक ज़मींदारियों की इतिश्री निकट श्राई । वेतनभोगी सेनाओं की रचना की गई। और इस प्रकार परम्परागत जमींदारों के आसन डगमगाये । किसानों की गुलामी का बन्धन ढीला हुआ। जिस भूमि को किसान पराई समझ कर जोतता-चोता था, वह उसे दे दी गई। और ऐसा सदा के लिए कर दिया गया = ईकड़ से ग्यारह ईकड़ भूमि तक एक दो किसान को मिली। पर, इसके साथ ही सरकार ने उक्त भूमि का मूल्य ज़मीदारों को भी श्रदा कर दिया और किसानों को उक्त भूमि का मूल्य सरकार के पास किस्तों में अदा करने के लिये छियालीस वर्ष का समय दिया गया । इतनाही नहीं, सरकार ने किसानों को भी इस अदायगी के लिये छः फोसदी सूद पर रुपये उधार दे दिये । अर्थात् रूसी सरकार ने इस मामले में वैंकर का काम किया । एक हज़ार छः सौ सात तक, जो कुछ किसानों से देते बना, सो उन्हों ने देदिया, इसके की अदायगी मंसूख कर दीगई। शायद रूसी सरकार ने अपने समस्त इतिहास में किसानों के लिये यही एक अच्छा काम किया ! परन्तु, पाठकों को स्मरण रखना चाहिये कि, किसान इस, प्राकर के भूमि के सौदे से सन्तुष्ट नहीं थे, उन्हे व्यर्थ ही छियालीस वर्ष तक लगान के अतिरिक्त किश्तों में भूमि का मूल्य अदा करना पड़ा, वें सरकारी कतरव्यौत से असन्तुष्टथे । भूमि के वापस मिलने के बाद भी भूमि-विभाजन का एक विचित्र प्रवन्ध किया गया। जिस घर में जितने पुरुष जोतवो सकते थे, उनके हिसाब से बारह वर्ष के लिये उन्हें भूमि दी जाती थी । यह 'साम्यवाद' की एक शाख़ 'भौमिक साम्यवाद' के ढंग का बँटवारा हुआ । इंगलैंड के श्रानरेबिल मारिस वेरिङ्ग ने अपनी Maan Springs of Russia नामक पुस्तक में लिखा है किः"...After the emancipation, cach batch of serís belonging to each separate owner became a separate and independent community, which owned in common. The land which was thus o vned in common could not be redistributed more than once every twelre years, and even then, only if two thirds of village assembly rote । for redistribution A sinitar majonty was necessary before any of the common land could become private property." अर्थात्, इस मुक्ति के पश्चात् एक ज़मींदार के आधिपत्य में रहने वाले किसानों में एक स्वतंत्र गोष्ठी के रूप में, भूमि का विभाजन कर दिया गया। इस प्रकार का विभाजन बारह वर्ष के पूर्व फिर नही किया जाता था, वशर्ते, गांव की तीन चौथाई जनता का पुनर्विभाजन का मत न हो। और इसी प्रकार उक्त बँटी हुई भूमि बारह वर्ष के पहिले किसी की व्यक्तिगत सम्पत्ति भी नहीं हो सकती थी । कृषि योग्य जितनी भूमि थी सब किसानों में वॉट दी गई थी। एक घर के कई आदमियों के बीच में उपजाऊ और अनउपजाऊ, और दोनों प्रकार की भूमि के टुकड़े वरावर वाँटे जाते थे। बीच में यदि कोई मर जाय, तो स्वामीविहीन भूमि पर घर के लोगों का ही कब्ज़ा रहता था । बारह वर्ष वाद फिर बँटवारा होता था । एक हज़ार आठ सौ इकसठ से एक हज़ार छः सौ चार तक ये नियम काम करते रहे। एक हज़ार आठ सौ साठ में, अलेक्ज़ एडर के समय में, यह एक नियम और के जोड़ा गया कि, "चॅटवारे की भूमि के अतिरिक्त अन्य भूमि को किसान नहीं खरीद सकता ।" इतने समय के चोच में, कृषि की कुछ भी उन्नति नहीं हुई थी, किसानों ने इस नये नियम को अपनी भूमि-वृद्धि के लिए घातक समझा। उधर सरकार ने ज़मीन्दारो की संख्या विल्कुल घटते हुए देखकर ही यह प्रतिबन्ध स्थापित किया था । एक हज़ार नौ सौ पाँच में, रूस को एक सर्वव्यापी राजनैतिक अशान्ति का सामना करना पड़ा। इस प्रशान्ति के कारण लगभग एक शताब्दि हुए, तब उत्पन्न हुए थे, जिन्हें हम आगे चलकर विस्तार पूर्वक कहेंगे। यहां पर, सक्षेप में हम केवल इतना ही कहेंगे कि, जनता राजनैतिक अधिकार चाहती थी, कई बार प्रातिनिधिक शासन की मांग की गई थी, पर सारे प्रयत्न निष्फल हुए । 'पुलिस के अत्याचारों और निरंकुशता से सभी लोग परेशान थे । नागरिक जोवन एक अत्यन्त संकुचित एवं पराधीन जीवन था । इस प्रशान्ति का एक बड़ा कारण किसानों का असन्तोष था। किसानों की माँग थी कि - "हमें और भूमि दो ।" एक हज़ार नौ सौ चार की प्रशान्ति के समय भी, उन्नीस हज़ार ग्यारह कृषक-ग्रामों में इगे हुए ! एक लाख नब्बे हज़ार छः सौ उन्नीस किसानों की गिरफ्तारी हुई । चार सौ ग्यारह आदमियों को प्राण-दण्ड दिया गया और छः सौ एक श्राइसी साइबेरिया में तथा कैदखानों में डाल दिये गये ! पर, साथही, किसानों ने भी जहाँ अवसर देखा, ज़मीदारों के घर जला दिये, उनके खेत नष्ट कर दिये, गोरू-हरहे हॉक दिये और अन्य नाना प्रकार की हानि पहुंचाई । इस महा अशान्ति में किसान फिर विजयी हुए ! ज़मीदारों को अपनी दो भूमि में से फिर कुछ भूमि बॅचनी पड़ी। इस प्रकार भूमि का एक बहुत बड़ा टुकड़ा किसानों को मिल गया। इस प्रकार जमोदारों की पच्चीस फीसदी भूमि विक गई । एक हज़ार नौ सौ दस में एक परिवर्तन और हुआ। श्रव एक कानून ऐसा बना दिया गया, जिसके अनुसार किसान अपनी गोष्ठी भी छोड़ सकता था। अर्थात् सरकारी तौर पर बारहवर्ष के लिए मिलने वाली भूमि को जोतने चोने से भी वह छुट्टी पा सकता था और केवल अपनी मोल ली हुई भूमि को ही जोत- वो सकता था। साथ ही, इच्छानुसार गोष्ठी द्वारा प्राप्त भूमि को मोल लेकर अपनी व्यक्तिगत सम्पत्ति भी बना सकता था। साथ ही यदि वह चाहता, तो उसे बनाने के लिए सरकारी मदद भी मिल सकती थी। नये क़ानून की शब्दावली बहुत भली मालूम पड़ती थी । पर, संसार जानता है कि स्वेच्छाचारी श्रधिकारी-तंत्र जिस समय एक अच्छे से अच्छे कानून के अनुसार भी काम करने बैठता है, तो प्रजा को हानि हो होती ! रूसी अधिकारी-तंत्र ने इस कानून के भीतर भी एक गहरी चाल खेलो। असल चात यह थी कि, रूसी सरकार किसानों के प्रश्न को राजनैतिक दृष्टि से देखती थी, और उसी दृष्टि से उसके काम भी होते थे । बारह वर्ष वाले भूमि के बँटवारे की व्यवस्था ने सरकार को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया था, और सरकार भी यही चाहती थी कि किसान इस वंटवारे के फेर में पड़े रहे। इसा लिए, उसने ऐसी घातें खेली जिससे किसान गोष्ठी से बाहर न निकल सकें। पर जब एक हज़ार नौ सौ चार में गोष्ठी-व्यवस्था में साम्यवाद की बू आने लगी, तब तो रूसी सरकार बहुत चकराई ! तब उसने व्यक्तिगत सम्पत्ति रख सकने का क़ानून बनाया । इस ढंग से अधिकारी तंत्र को यह आशा थी कि, गोष्ठी-व्यवस्था के पक्ष में अधिक किसान रहेंगे, और कुछ दिनों तक ऐसा हुआ भी । व्यक्तिगत सम्पत्ति के रूप में भूमि ख़रीदने वाले किसान बहुत कम निकले। इसका कारण यह था कि, बहुत बड़ी भूमि के जोतने बोने के लिए बड़ी पूंजी की भी दरकार थी। किसानों के पास बिना धीरे दो पूंजी बढ़ाये, एक साथ बड़ी पूंजी एकत्रित कर सकने का कोई मार्गन था। इसलिए किसान एकाएक समस्त भूमि पर कृब्ज़ा न कर सके । यद्यपि, सरकारी बैंकों द्वारा किसानों को अच्छी सहायता मिली थी, पर इस सहायता का फल धीरे दो ही प्रकट होगा । रूसी किसान के सम्बन्ध में हम मुख्य दो वातें बतला चुके । राजनैतिक क्षेत्र में किसानों की क्या स्थिति थी इसे हम आगे चल कर बतलावेंगे, पर यह जान लेने योग्य बात है कि, रूस का किसान राजनैतिक व्यक्ति नहीं है । वह सिर्फ आर्थिक व्यक्ति है, उसका इतिहास केवल आर्थिक समस्याओं के सोपानों पर रचा गया है। और आज भी वह संसार के आर्थिक क्षेत्र में ही अपनी रखता है। उसकी सारी पहेलियां आर्थिक हैं, और रूस में उसने जो विजय प्राप्त की है, वह केवल आर्थिक है। यहां पर हम एक बात और कहेंगे। रूसी किसान बहुत भोला-भाला और सरल प्रकृति का जीव है । उसको स्वभाव ही इतना मोठा है कि, उसकी ऐतहासिक दीनता का प्रत्यक्ष दर्शन हो जाता है। ईश्वर पर उसका अटल विश्वास है, और प्रत्येक काम में वह ईश्वर की इच्छा को ही प्रधान मानता है। ईश्वर के ऊपर अविश्वास करने वालों को वह वेवकूफ़ समझता है । वह राजभक्त इतना कहा जाता है कि, ज़ार के अत्याचारी शासन में रह कर भी, ज़ार के व्यक्तित्व को उसने ईश्वर की शक्ति से समानता दी है। पर, जब दो उसने आर्थिक प्रश्न पर दृष्टि डाली है, वह अधिकारी - तंत्र का घोर शत्रु प्रमाणित हुआ है। आगे चल कर पाठक देखेंगे कि, रूसी किसान संसार में कौन सा स्थान रखता है। रूसी ज़मीन्दार । सी ज़मीन्दारों का इतिहास भी बड़ा ही गुगल है। असल में, रूसी ज़मीन्दारों की सृष्टि उस समय से हुई, जब, रूसी सरकार ने सैनिक सेवा तथा सिविल सर्विस के लिए लोगों को कुछ पद दिये और साथ ही कुछ भूमि भी दी । इस प्रकार पद, भूमि और कुछ स्थायी अधिकारों की प्राप्ति करने के बाद, रूसी ज़मीन्दार की सृष्टि हुई । इनके अतिरिक कुछ स्वतन्त्र भूमि रखने वाले ज़मींदार भी थे, पर रूसी किसानों और ज़मीदारों का जहाँ दो वर्णन आया है, सरकारी ओहदा पाने वाले ज़मीदारों से ही तात्पर्य रहा है। यूरोप में, 'रूसा ज़मीदार' एक बहुत पुराना फिर्का है। अभी तक उनके वंशज विद्यमान रहे हैं। रूसी क्रान्ति के पश्चात उनकी क्या दशा हुई, यह अभी प्रकट नहीं हुआ है। ज़मीन्दारों से ऊंचे पदों पर भी कुछ लोग बहुत पुराने समय में थे। ये जागीरें पूर्व समय में 'कीव' नगर की राजधानी की अध्यक्षता में थीं, जब ज़ार की राजधानी मास्को में उठकर चली गई, तब उक जागीरों का सम्बन्ध मास्को से होगया । पर मास्को में राजधानी के पहुँचने के बाद ये जागीरें सरकारी प्रान्तों में सम्मिलित कर ली गईं। जागीरों के टूटने पर भी 'प्रिंस' का उपाधि परम्परागत बनी रही और अब तक बनी हुई है । जागीरों के टूट जाने से 'प्रिन्स' उपाधि धारी लोग पूर्ण स्वतन्त्र होगये और उन्होंने सार्वजनिक श्रान्दोलनों में भी भाग लेना आरम्भ कर दिया। इन प्रिन्सो के सिवा दो उपाधियाँ और चली थीं । 'ग्राफ' तथा 'वैरन' नामक उपाधियाँ भी कुछ खान्दानों को परम्परागत रूप से प्राप्त थीं । पर ये दोनों शब्द जर्मन भाषा से लिये गये हैं, क्योंकि, रूसी भाषा में इन के पर्य्यायवाची शब्द नहीं मिलते। ये उपाधियाँ ज़ार द्वारा दी गई थी, या फिर अन्य देशों से आये हुए प्रवासी-वंशों के साथ जुड़ी हुई थीं। जागीरदारों के जो खान्दान अब तक मशहूर हैं, उनके नाम के पीछे डलगोरुकी, वरियाटिम्स्की, श्रोब्लेन्स्की, गोर्चकाव, खोवन्स्की, गलिट्ट्सन, ट्रोवस्कोय आदि पद लगे रहते रहते हैं । रूसी क्रान्ति में कई ऐसे नाम आये है । जागीरदारों के प्रत्येक वंशज के नाम में ये शब्द जुड़े रहते हैं । इसका कारण यह मालूम पड़ता है कि, रूसी गृहस्थी में समान - धिकार सदा से रहा है । इसी कारण से उपाधियां भी केवल घर के मुखिया के नाम में न जुड़कर सभी स्त्री-पुरुष वंशजों के नाम के पीछे जुड़ती रही है। रूसी क़ानून की दृष्टि से स्त्री को अपनी पैत्रिक सम्पत्ति में से चौदहर्वा हिस्सा मिलता है, पर पति के जीवित रहते हुए भी स्त्री अपनी निज की सम्पत्ति पर व्यक्तिगत रूप से पूरा अधिकार रखती है । * फ्रांस में स्त्रियों को यह अधिकार नहीं है । |
श्रीमनुजी कहते हैंएतदक्षरमेता च जपन् ध्याहृतिपूर्विकाम् । सध्ययोर्वेदविद् विप्रो वेदपुण्येन युज्यते ।।
( २ । ७८ ) 'इस ओंकार और व्याहृतिसहित गायत्रीका दोनों कालोंमें जर करनेवाला वेदज्ञ ब्राह्मण वेदपाठका पुण्यफल पा लेता है।" योऽधीते ऽहन्यहन्येतास्त्रीणि वर्षाण्यतन्द्रितः । स ब्रह्म परमभ्येति वायुभूतः समूर्तिमान् ।।
( २१८२) 'जो पुरुष तीन वर्षातक प्रतिदिन आलस्य छोड़कर गायत्रीका जप करता है, वह मृत्युके बाद वायुरूप होता है और उसके बाद आकाशकी तरह व्यापक होकर परब्रह्मको प्राप्त करता है ।
श्रीगायत्रीकी महिमाके सम्बन्धमें महाभारत, शान्तिपकि १९९ वे और २०० वें अध्यायों में एक बड़ा सुन्दर उपास्पन मिलता है । कौशिक गोत्रमें उत्पन्न पिप्पलादका पुत्र एक बड़ा तपस्वी धर्मनिष्ठ ब्राह्मण था । वह गायत्रीका जप किया करता था। लगानार एक हजार वर्पतक गायत्रीका जप कर चुकने पर उसको सावित्रीदेवीने साक्षात् दर्शन देकर कहा- मैं तुझपर प्रसन्न हूँ ।" परंतु वस समय पिप्पलादका पुत्र जप कर रहा था, यह चुपचाप जप करने में लगा रहा और सावित्रीदेवीको उसने कुछ भी उत्तर नहीं दिया। वेदमाता साविनोदेवी उसकी इस जपनिष्ठापर और भी अधिक प्रसत्र हुई और उमके जपकी प्रशसा करती वहीं खड़ी रहीं। जपकी सरया पूरी होनेपर यह धर्मात्मा ब्राह्मण खड़ा हुआ और देवीक | श्रीमनुजी कहते हैंएतदक्षरमेता च जपन् ध्याहृतिपूर्विकाम् । सध्ययोर्वेदविद् विप्रो वेदपुण्येन युज्यते ।। 'इस ओंकार और व्याहृतिसहित गायत्रीका दोनों कालोंमें जर करनेवाला वेदज्ञ ब्राह्मण वेदपाठका पुण्यफल पा लेता है।" योऽधीते ऽहन्यहन्येतास्त्रीणि वर्षाण्यतन्द्रितः । स ब्रह्म परमभ्येति वायुभूतः समूर्तिमान् ।। 'जो पुरुष तीन वर्षातक प्रतिदिन आलस्य छोड़कर गायत्रीका जप करता है, वह मृत्युके बाद वायुरूप होता है और उसके बाद आकाशकी तरह व्यापक होकर परब्रह्मको प्राप्त करता है । श्रीगायत्रीकी महिमाके सम्बन्धमें महाभारत, शान्तिपकि एक सौ निन्यानवे वे और दो सौ वें अध्यायों में एक बड़ा सुन्दर उपास्पन मिलता है । कौशिक गोत्रमें उत्पन्न पिप्पलादका पुत्र एक बड़ा तपस्वी धर्मनिष्ठ ब्राह्मण था । वह गायत्रीका जप किया करता था। लगानार एक हजार वर्पतक गायत्रीका जप कर चुकने पर उसको सावित्रीदेवीने साक्षात् दर्शन देकर कहा- मैं तुझपर प्रसन्न हूँ ।" परंतु वस समय पिप्पलादका पुत्र जप कर रहा था, यह चुपचाप जप करने में लगा रहा और सावित्रीदेवीको उसने कुछ भी उत्तर नहीं दिया। वेदमाता साविनोदेवी उसकी इस जपनिष्ठापर और भी अधिक प्रसत्र हुई और उमके जपकी प्रशसा करती वहीं खड़ी रहीं। जपकी सरया पूरी होनेपर यह धर्मात्मा ब्राह्मण खड़ा हुआ और देवीक |
दिल्ली के कनॉट प्लेस रीगल बिल्डिंग में बने मैडम तुस्साद में प्रशंसकों और मेहमानों के लिए बहुत सारे आश्चर्यजनक क्रिसमस सरप्राइज होगा, जी हाँ इस क्रिसमस के छुट्टियों के मौसम के मूड मैडम तुस्साद दर्शकों के लिए लाया है 'सेक्सी सांता' हम बात कर रहे है हॉलीवुड हिरोइन्स किम और बेयन्से की जिनका वैक्स स्टेचू मैडम तुस्साद में आ चुका है. यही नहीं इंडिया के कॉमेडियन कपिल शर्मा के वैक्स स्टेचू का आनंद ले सकते हैं। इसके अलावा क्रिसमस पर आकर्षण टिकटों पर भी स्पेशल ऑफर है जिसमे किड्स के टिकेट प्राइज पर एडल्ट भी जा सकते है, मैडम तुसाद को 1 दिसंबर को खोला गया था जिसके बाद इसने देश के दिलों पर कब्जा कर लिया है।
श्री अंशुल जैन, महाप्रबंधक, और निदेशक, मर्लिन एंटरटेनमेंट्स इंडिया प्रा। लिमिटेड ने कहा, 'जब से भारत में हमारे आंकड़ों की पहली बार अनावरण हुई, हमें दिल्ली से भारी प्रतिक्रिया मिली है। मैडम तुसाद दुनिया भर में हमारे मेहमान के लिए प्रेरणा प्रदान करने के लिए जाने जाते हैं और भारत उत्तेजना के उत्साह का प्रमाण है और गति को प्राप्त करना जारी रखता है। हमारे पहले क्रिसमस सेक्सी सांता के साथ त्योहारों को लेने के लिए, यह अभी तक एक और आश्चर्य है कि हमने राष्ट्र के लिए योजना बनाई है, जो उत्सव उन्माद को जोड़ देगा और आगंतुक को अपने पसंदीदा माउस के साथ क्रिसमस का जश्न मनाने की अनुमति देगा। शहर में सेक्सी सांता के साथ, हम मैडम तुसाद में हम सभी क्रिसमस और एक समृद्ध नया साल भारत और विदेश में सभी चाहते हैं '
| दिल्ली के कनॉट प्लेस रीगल बिल्डिंग में बने मैडम तुस्साद में प्रशंसकों और मेहमानों के लिए बहुत सारे आश्चर्यजनक क्रिसमस सरप्राइज होगा, जी हाँ इस क्रिसमस के छुट्टियों के मौसम के मूड मैडम तुस्साद दर्शकों के लिए लाया है 'सेक्सी सांता' हम बात कर रहे है हॉलीवुड हिरोइन्स किम और बेयन्से की जिनका वैक्स स्टेचू मैडम तुस्साद में आ चुका है. यही नहीं इंडिया के कॉमेडियन कपिल शर्मा के वैक्स स्टेचू का आनंद ले सकते हैं। इसके अलावा क्रिसमस पर आकर्षण टिकटों पर भी स्पेशल ऑफर है जिसमे किड्स के टिकेट प्राइज पर एडल्ट भी जा सकते है, मैडम तुसाद को एक दिसंबर को खोला गया था जिसके बाद इसने देश के दिलों पर कब्जा कर लिया है। श्री अंशुल जैन, महाप्रबंधक, और निदेशक, मर्लिन एंटरटेनमेंट्स इंडिया प्रा। लिमिटेड ने कहा, 'जब से भारत में हमारे आंकड़ों की पहली बार अनावरण हुई, हमें दिल्ली से भारी प्रतिक्रिया मिली है। मैडम तुसाद दुनिया भर में हमारे मेहमान के लिए प्रेरणा प्रदान करने के लिए जाने जाते हैं और भारत उत्तेजना के उत्साह का प्रमाण है और गति को प्राप्त करना जारी रखता है। हमारे पहले क्रिसमस सेक्सी सांता के साथ त्योहारों को लेने के लिए, यह अभी तक एक और आश्चर्य है कि हमने राष्ट्र के लिए योजना बनाई है, जो उत्सव उन्माद को जोड़ देगा और आगंतुक को अपने पसंदीदा माउस के साथ क्रिसमस का जश्न मनाने की अनुमति देगा। शहर में सेक्सी सांता के साथ, हम मैडम तुसाद में हम सभी क्रिसमस और एक समृद्ध नया साल भारत और विदेश में सभी चाहते हैं ' |
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बिरुड़ का अर्थ है 5 या 7 तरह का भीगा हुआ अंकुरित अनाज। भाद्रपद माह की पंचती को एक साफ तांबे के पात्र में इसे भिगाकर रखा जाता है।
Maharashtra Cabinet Portfolio: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने आज शुक्रवार (14 जुलाई) को अपनी कैबिनेट में विभागों का बंटवारा कर दिया है।
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लखनऊः उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज में मनचले की छेड़खानी और विरोध पर धमकी से दहशत में आई छात्रा ने कोचिंग जाना ही बंद कर दिया। यहां तक ही पीड़िता अपने घर से बाहर निकलने में भी डरने लगी। उसके स्वभाव में ये बदलाव देख परिजनों के कई बार कारण पूछने पर उसने पूरी घटना बताई। इस पर परिवार के लोगों ने अलीगंज थाने में FIR दर्ज करा दी।
केस दर्ज होने की खबर मिलते ही आरोपित युवक फरार हो गया। युवक पीड़ित पर जबरन शादी करने का भी दबाव बना रहा था। अलीगंज इंस्पेक्टर नागेश उपाध्याय ने बताया है कि, पीड़ित छात्रा हास्टल में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही है। कुछ दिनों से कोचिंग से आते-जाते वक़्त उसे अलीगंज में रहने वाला धर्मेन्द्र साहू तंग कर रहा था। पहले उसने इसे अनदेखा किया, तो आरोपी की हरकत बढ़ने लगी।
आरोपी धर्मेंद्र उससे शादी करने का दबाव बनाने लगा। विरोध करने पर धर्मेन्द्र ने उसे हत्या करने की धमकी दी। इस पर उसने कुछ दिन से कोचिंग जाना ही बंद कर दिया। कोचिंग से पीड़िता के पिता के फोन आया कि वह कोचिंग नहीं आ रही है। इस पर पिता ने पूछा तो वह बीमार होने की बात कहने लगी। फिर कुछ दिनों से उसके फोन पर सुस्त रहने और स्वभाव में अजीब बदलाव देख परिवारीजन उसके पास हास्टल पहुंचे और कारण पूछा। इसके बाद पूरी घटना सामने आई। फ़िलहाल पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है और आरोपी को दबोचने के लिए जगह-जगह दबिश दे रही है।
| लखनऊः उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज में मनचले की छेड़खानी और विरोध पर धमकी से दहशत में आई छात्रा ने कोचिंग जाना ही बंद कर दिया। यहां तक ही पीड़िता अपने घर से बाहर निकलने में भी डरने लगी। उसके स्वभाव में ये बदलाव देख परिजनों के कई बार कारण पूछने पर उसने पूरी घटना बताई। इस पर परिवार के लोगों ने अलीगंज थाने में FIR दर्ज करा दी। केस दर्ज होने की खबर मिलते ही आरोपित युवक फरार हो गया। युवक पीड़ित पर जबरन शादी करने का भी दबाव बना रहा था। अलीगंज इंस्पेक्टर नागेश उपाध्याय ने बताया है कि, पीड़ित छात्रा हास्टल में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही है। कुछ दिनों से कोचिंग से आते-जाते वक़्त उसे अलीगंज में रहने वाला धर्मेन्द्र साहू तंग कर रहा था। पहले उसने इसे अनदेखा किया, तो आरोपी की हरकत बढ़ने लगी। आरोपी धर्मेंद्र उससे शादी करने का दबाव बनाने लगा। विरोध करने पर धर्मेन्द्र ने उसे हत्या करने की धमकी दी। इस पर उसने कुछ दिन से कोचिंग जाना ही बंद कर दिया। कोचिंग से पीड़िता के पिता के फोन आया कि वह कोचिंग नहीं आ रही है। इस पर पिता ने पूछा तो वह बीमार होने की बात कहने लगी। फिर कुछ दिनों से उसके फोन पर सुस्त रहने और स्वभाव में अजीब बदलाव देख परिवारीजन उसके पास हास्टल पहुंचे और कारण पूछा। इसके बाद पूरी घटना सामने आई। फ़िलहाल पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है और आरोपी को दबोचने के लिए जगह-जगह दबिश दे रही है। |
बीएचयू के सरसुंदर लाल चिकित्सालय के पूर्व चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ओपी. उपाध्याय ने विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति, आईएमएस के निदेशक सहित नवनियुक्त चिकित्सा अधीक्षक और ट्रामा सेंटर के इंचार्ज पर कई आरोप लगाए हैं। कोविड मरीजों के उपचार में लापरवाही के कारण मौतों के मामले में हुई बीएचयू की बदनामी के लिए भी उन्होंने इन अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने पीएमओ, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और सचिव उच्च शिक्षा को मेल भेज कर शिकायत दर्ज कराई है।
डॉ. उपाध्याय ने लापरवाही के लिए सर्वाधिक जिम्मेदार कार्यवाहक कुलपति और आईएमएस के निदेशक को बताया है। उनका आरोप है कि ये दोनों न अस्पताल गए और न ही सेवा में जुटे डॉक्टरों की समस्या जानी। उन्होंने अस्पताल के एमएस प्रो. केके गुप्ता और ट्रामा सेंटर के इंचार्ज प्रो. सौरभ सिंह की तैनाती को भी गलत है। दोनों पर कई आरोप पहले से होने की बात कही।
डॉ. उपाध्याय ने पूर्व कुलपति प्रो. राकेश भटनागर पर आरोप लगाया है कि उन्होंने पीएमओ को अंधेरे में रखते हुए बोन मैरो ट्रांसप्लांट एवं स्टेम सेल रिसर्च सेंटर का उद्घाटन प्रधानमंत्री से 16 फरवरी 2020 को कराया। जबकि इससे पहले 15 जनवरी 2020 को प्रो. भटनागर स्वयं इस सेंटर का उद्घाटन कर चुके थे। प्रमाण के तौर पर उन्होंने प्रो. राकेश भटनागर के नाम के शिलापट्ट की फोटो भी मेल के साथ पीएमओ को भेजी है।
| बीएचयू के सरसुंदर लाल चिकित्सालय के पूर्व चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ओपी. उपाध्याय ने विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति, आईएमएस के निदेशक सहित नवनियुक्त चिकित्सा अधीक्षक और ट्रामा सेंटर के इंचार्ज पर कई आरोप लगाए हैं। कोविड मरीजों के उपचार में लापरवाही के कारण मौतों के मामले में हुई बीएचयू की बदनामी के लिए भी उन्होंने इन अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने पीएमओ, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और सचिव उच्च शिक्षा को मेल भेज कर शिकायत दर्ज कराई है। डॉ. उपाध्याय ने लापरवाही के लिए सर्वाधिक जिम्मेदार कार्यवाहक कुलपति और आईएमएस के निदेशक को बताया है। उनका आरोप है कि ये दोनों न अस्पताल गए और न ही सेवा में जुटे डॉक्टरों की समस्या जानी। उन्होंने अस्पताल के एमएस प्रो. केके गुप्ता और ट्रामा सेंटर के इंचार्ज प्रो. सौरभ सिंह की तैनाती को भी गलत है। दोनों पर कई आरोप पहले से होने की बात कही। डॉ. उपाध्याय ने पूर्व कुलपति प्रो. राकेश भटनागर पर आरोप लगाया है कि उन्होंने पीएमओ को अंधेरे में रखते हुए बोन मैरो ट्रांसप्लांट एवं स्टेम सेल रिसर्च सेंटर का उद्घाटन प्रधानमंत्री से सोलह फरवरी दो हज़ार बीस को कराया। जबकि इससे पहले पंद्रह जनवरी दो हज़ार बीस को प्रो. भटनागर स्वयं इस सेंटर का उद्घाटन कर चुके थे। प्रमाण के तौर पर उन्होंने प्रो. राकेश भटनागर के नाम के शिलापट्ट की फोटो भी मेल के साथ पीएमओ को भेजी है। |
शुरुआत में कुछ लोगों के लिए विभिन्न सहयोगियों की मानसिकता के साथ समायोजित करना कठिन हो सकता है, लेकिन दूसरी तरफ ऐसी टीम में काम करने के कई लाभ भी हैं. कार्यस्थल पर एक सांस्कृतिक रूप से विविध टीम होने के फायदों पर नजर डालें.
शुरुआत में कुछ लोगों के लिए विभिन्न सहयोगियों की मानसिकता के साथ समायोजित करना कठिन हो सकता है, लेकिन दूसरी तरफ ऐसी टीम में काम करने के कई लाभ भी हैं. कार्यस्थल पर एक सांस्कृतिक रूप से विविध टीम होने के फायदों पर नजर डालेंः
विविध संस्कृति वाली टीम के साथ कार्य करना अलग-अलग टापिंग्स वाला पिज़्ज़ा खाने जैसा है. अगर किसी भी चीज में पिज़्ज़ा की तरह मिश्रण हो तो वह पिज़्ज़ा की तरह ही अंत में बहुत स्वादिष्ट साबित होती है. ऐसे ही अगर आपकी टीम में, अलग अलग संस्कृतियों से सम्बन्ध रखने वाले लोग हैं तो इसके भी बहुत फायदे हो सकते हैं. आप इनसे नए दृष्टिकोण तथा नए अनुभव सीख सकते हैं.
हालांकि, शुरुवात में अलग अलग पृष्ठ-भूमियों से आये हुए सह-कर्मियों के साथ काम करने में थोड़ी परेशानी आ सकती है क्योंकि नयी-नयी मानसिकता वाले लोगों के साथ शुरवात में सामंजस्य रख पाना थोड़ा कठिन होता है.
लेकिन, ऐसे टीम में काम करने से निम्नलिखित फायदे होते हैंः
जब आप एक ऐसी टीम में काम करते हैं जिसमें सांस्कृतिक विविधता वाले लोग हों तो ऐसे में ब्रेन- स्टॉर्मिंग सेशन काफी रुचिकर बन जाते हैं. ऐसे टीम में कभी नए विचारों की कमी नहीं होती है क्योकि हर एक के अलग-अलग विचार और दृष्टिकोण होते हैं. ऐसे में यह भी संभावना रहती है कि आपकी टीम एक ऐसे अनूठे समाधानों के साथ आ सकती है जो आपके संगठन को बाजार की प्रतिस्पर्धा में आगे ले जा सकते हैं. हर संस्कृति में अपने स्वयं के विश्वासों का समूह होता है और उस संस्कृति से संबंधित व्यक्ति संगठन के लिए एक ऐसा गेटवे बन जाता है जिसके माध्यम से उस संस्कृति की मूल बातें सीखीं जा सकती हैं.
यह देखा गया है कि जब कोई किसी सांस्कृतिक रूप से विविध कार्यबल वाली टीम में कार्य करता है तो वह नए विचारों के लिए और अधिक खुल जाता है. वे बिना रुकावट के लचीलेपन को गले लगा लेता है. इसके विपरीत कठोर सोच वाला आदमी ऐसे माहौल में संघर्ष का अनुभव करता है.
उदाहरण के लिए, यदि आपको कार्यालय में एक ऐसी परियोजना मिलती है जिसके लिए टीम वर्क की आवश्यकता होती है, तो इसके बारे में हर कोई एक अलग राय रख सकता है. ऐसी स्थिति में दूसरों से अनावश्यक पूछताछ करने से बचें और हर किसी के विचार को सुनें. संभावना है कि इस तरह से निकाला गया समाधान उत्पाद या सेवा की स्वीकार्यता को बाजार में बढ़ाएगा क्योंकि इसकी प्रक्रिया में सभी संस्कृतियों की बारीकियों को ध्यान में रखा गया होगा.
अगर आपको खाने से प्यार है तो अपने दोपहर के भोजन को शेयर करके सांस्कृतिक रूप से विविध लोगों की कंपनी का आनंद लेने का इससे बेहतर कोई तरीका नहीं हो सकता है. दोपहर के भोजन के दौरान आपके पास हमेशा विभिन्न प्रकार के व्यंजन होंगे. यह कार्यालय के बाहर अस्वास्थ्यकर स्नैक्स खाने से भी आपको बचाएगा. जब आप सहकर्मियों दोपहर के भोजन में कई व्यंजनों का आनंद लेंगे तो यह आपको खुश रहने में भी मदद करेगा. इसके अलावा आप उनसे अलग-अलग व्यंजनों को बनाने की रेसिपी भी सीख सकते हैं.
विविध पृष्ठभूमि से आये हुए आपके सहकर्मी आपकी दक्षता बढ़ाने में आपकी सहायता करेंगे. यदि आप टीम में गलती कर रहे हैं, तो आपके लिए विचारों का आदान-प्रदान करना आसान हो जाएगा और उनके लिए आपको अद्वितीय कौशल सीखना होगा. इससे आप संगठन के भीतर सफल होने की क्षमता विकसित कर सकेंगे. एक सरल नियम है कि ज्ञान दूसरों के साथ शेयर करते समय फैलता है तो अपने सीमित ज्ञान का विस्तार करने और नए विचारों के लिए रास्ते खोलने के लिए उनसे ज्ञान शेयर कर सकते हैं.
भारत एक विविध संस्कृति वाला देश है.यहाँ सभी संस्कृतियों का पता कर पाना एक व्यक्ति के लिए एक मुश्किल काम है. लेकिन यदि आप सांस्कृतिक रूप से अलग सहयोगियों के साथ काम करते हैं तो आप भाग्यशाली हैं क्योंकि आप उनके उत्सव, अनुष्ठानों प्रथाओं के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.
यदि आपका कोई सहयोगी जो केरल से आता है और आप अगले अवकाश में उस स्थान पर जाने की योजना बना रहे हैं तो आप उससे केरल की संस्कृति तथा वहाँ पर यात्रा के लिए सरे सूचनाएं इकठ्ठा कर सकते हैं. इतना ही नहीं, आप उनसे मलयालम भाषा भी सीख सकते हैं ताकिआप वहां के स्थानीय लोगों से बातचीत कर सकें.
विकसित होने की प्रक्रिया में विभिन्न संस्कृतियों के बारे में जानने का एक व्यक्तिगत लाभ है. विभिन्न राज्यों के बारे में तथा वहां के लोगों की विभिन्न संस्कृतियों और जीवनशैली के बारे में बहुत सारी जानकारी गलत स्रोतों से भी सीखने को मिलती जिनमे गलत सूचनाएं होती हैं जो ग़लतफ़हमी फैलाती हैं इसलिए, किसी संस्कृति की पवित्रता के बारे में वास्तविक ज्ञान प्राप्त करने के लिए आप अपने सहयोगियों, जो विभिन्न संस्कृतियों से संबंधित हैं, की सहायता ले सकते हैं.
क्या आपके कार्यस्थल में सांस्कृतिक रूप विविध पृष्ठभूमि वाले सहकर्मियों की टीम है? अगर हाँ तो आप अपने सहकर्मियों के साथ काम करने के अपने अनुभवों को हमारे साथ शयेर कर सकते हैं.
| शुरुआत में कुछ लोगों के लिए विभिन्न सहयोगियों की मानसिकता के साथ समायोजित करना कठिन हो सकता है, लेकिन दूसरी तरफ ऐसी टीम में काम करने के कई लाभ भी हैं. कार्यस्थल पर एक सांस्कृतिक रूप से विविध टीम होने के फायदों पर नजर डालें. शुरुआत में कुछ लोगों के लिए विभिन्न सहयोगियों की मानसिकता के साथ समायोजित करना कठिन हो सकता है, लेकिन दूसरी तरफ ऐसी टीम में काम करने के कई लाभ भी हैं. कार्यस्थल पर एक सांस्कृतिक रूप से विविध टीम होने के फायदों पर नजर डालेंः विविध संस्कृति वाली टीम के साथ कार्य करना अलग-अलग टापिंग्स वाला पिज़्ज़ा खाने जैसा है. अगर किसी भी चीज में पिज़्ज़ा की तरह मिश्रण हो तो वह पिज़्ज़ा की तरह ही अंत में बहुत स्वादिष्ट साबित होती है. ऐसे ही अगर आपकी टीम में, अलग अलग संस्कृतियों से सम्बन्ध रखने वाले लोग हैं तो इसके भी बहुत फायदे हो सकते हैं. आप इनसे नए दृष्टिकोण तथा नए अनुभव सीख सकते हैं. हालांकि, शुरुवात में अलग अलग पृष्ठ-भूमियों से आये हुए सह-कर्मियों के साथ काम करने में थोड़ी परेशानी आ सकती है क्योंकि नयी-नयी मानसिकता वाले लोगों के साथ शुरवात में सामंजस्य रख पाना थोड़ा कठिन होता है. लेकिन, ऐसे टीम में काम करने से निम्नलिखित फायदे होते हैंः जब आप एक ऐसी टीम में काम करते हैं जिसमें सांस्कृतिक विविधता वाले लोग हों तो ऐसे में ब्रेन- स्टॉर्मिंग सेशन काफी रुचिकर बन जाते हैं. ऐसे टीम में कभी नए विचारों की कमी नहीं होती है क्योकि हर एक के अलग-अलग विचार और दृष्टिकोण होते हैं. ऐसे में यह भी संभावना रहती है कि आपकी टीम एक ऐसे अनूठे समाधानों के साथ आ सकती है जो आपके संगठन को बाजार की प्रतिस्पर्धा में आगे ले जा सकते हैं. हर संस्कृति में अपने स्वयं के विश्वासों का समूह होता है और उस संस्कृति से संबंधित व्यक्ति संगठन के लिए एक ऐसा गेटवे बन जाता है जिसके माध्यम से उस संस्कृति की मूल बातें सीखीं जा सकती हैं. यह देखा गया है कि जब कोई किसी सांस्कृतिक रूप से विविध कार्यबल वाली टीम में कार्य करता है तो वह नए विचारों के लिए और अधिक खुल जाता है. वे बिना रुकावट के लचीलेपन को गले लगा लेता है. इसके विपरीत कठोर सोच वाला आदमी ऐसे माहौल में संघर्ष का अनुभव करता है. उदाहरण के लिए, यदि आपको कार्यालय में एक ऐसी परियोजना मिलती है जिसके लिए टीम वर्क की आवश्यकता होती है, तो इसके बारे में हर कोई एक अलग राय रख सकता है. ऐसी स्थिति में दूसरों से अनावश्यक पूछताछ करने से बचें और हर किसी के विचार को सुनें. संभावना है कि इस तरह से निकाला गया समाधान उत्पाद या सेवा की स्वीकार्यता को बाजार में बढ़ाएगा क्योंकि इसकी प्रक्रिया में सभी संस्कृतियों की बारीकियों को ध्यान में रखा गया होगा. अगर आपको खाने से प्यार है तो अपने दोपहर के भोजन को शेयर करके सांस्कृतिक रूप से विविध लोगों की कंपनी का आनंद लेने का इससे बेहतर कोई तरीका नहीं हो सकता है. दोपहर के भोजन के दौरान आपके पास हमेशा विभिन्न प्रकार के व्यंजन होंगे. यह कार्यालय के बाहर अस्वास्थ्यकर स्नैक्स खाने से भी आपको बचाएगा. जब आप सहकर्मियों दोपहर के भोजन में कई व्यंजनों का आनंद लेंगे तो यह आपको खुश रहने में भी मदद करेगा. इसके अलावा आप उनसे अलग-अलग व्यंजनों को बनाने की रेसिपी भी सीख सकते हैं. विविध पृष्ठभूमि से आये हुए आपके सहकर्मी आपकी दक्षता बढ़ाने में आपकी सहायता करेंगे. यदि आप टीम में गलती कर रहे हैं, तो आपके लिए विचारों का आदान-प्रदान करना आसान हो जाएगा और उनके लिए आपको अद्वितीय कौशल सीखना होगा. इससे आप संगठन के भीतर सफल होने की क्षमता विकसित कर सकेंगे. एक सरल नियम है कि ज्ञान दूसरों के साथ शेयर करते समय फैलता है तो अपने सीमित ज्ञान का विस्तार करने और नए विचारों के लिए रास्ते खोलने के लिए उनसे ज्ञान शेयर कर सकते हैं. भारत एक विविध संस्कृति वाला देश है.यहाँ सभी संस्कृतियों का पता कर पाना एक व्यक्ति के लिए एक मुश्किल काम है. लेकिन यदि आप सांस्कृतिक रूप से अलग सहयोगियों के साथ काम करते हैं तो आप भाग्यशाली हैं क्योंकि आप उनके उत्सव, अनुष्ठानों प्रथाओं के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. यदि आपका कोई सहयोगी जो केरल से आता है और आप अगले अवकाश में उस स्थान पर जाने की योजना बना रहे हैं तो आप उससे केरल की संस्कृति तथा वहाँ पर यात्रा के लिए सरे सूचनाएं इकठ्ठा कर सकते हैं. इतना ही नहीं, आप उनसे मलयालम भाषा भी सीख सकते हैं ताकिआप वहां के स्थानीय लोगों से बातचीत कर सकें. विकसित होने की प्रक्रिया में विभिन्न संस्कृतियों के बारे में जानने का एक व्यक्तिगत लाभ है. विभिन्न राज्यों के बारे में तथा वहां के लोगों की विभिन्न संस्कृतियों और जीवनशैली के बारे में बहुत सारी जानकारी गलत स्रोतों से भी सीखने को मिलती जिनमे गलत सूचनाएं होती हैं जो ग़लतफ़हमी फैलाती हैं इसलिए, किसी संस्कृति की पवित्रता के बारे में वास्तविक ज्ञान प्राप्त करने के लिए आप अपने सहयोगियों, जो विभिन्न संस्कृतियों से संबंधित हैं, की सहायता ले सकते हैं. क्या आपके कार्यस्थल में सांस्कृतिक रूप विविध पृष्ठभूमि वाले सहकर्मियों की टीम है? अगर हाँ तो आप अपने सहकर्मियों के साथ काम करने के अपने अनुभवों को हमारे साथ शयेर कर सकते हैं. |
इस फोन पर Pay on Delivery का ऑप्शन भी दिया जा रहा है। ये फोन 7 दिन की रिप्लेसमेंट पॉलिसी के साथ आ रहा है। अगर आप इस फोन को खरीदते हैं तो आपको 1 साल तक कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है। क्योंकि 1 साल की वारंटी मिल रही है। ये फोन 5G Network Support के साथ आ रहा है। अब हम आपको इस फोन में मिलने वाली स्पेसिफिकेशन के बारे में बताने जा रहे हैं।
Vivo Y56 5G में डुअल रियर कैमरा भी दिया जा रहा है, जिसका प्राइमरी कैमरा 50MP का मिल रहा है। फ्रंट कैमरा को लेकर भी आपको ज्यादा शिकायत नहीं होने वाली है। इस फोन में 16MP Selfie Camera दिया जा रहा है। Vivo के फोन में 6. 58 Inch FHD+ LCD Display दिया जा रहा है। इसमें 5000 mAh Battery दी जा रही है जो 18W Fast Charging Support के साथ आता है। कुल मिलाकर ये फोन आपके लिए बेस्ट ऑप्शन साबित हो सकता है।
| इस फोन पर Pay on Delivery का ऑप्शन भी दिया जा रहा है। ये फोन सात दिन की रिप्लेसमेंट पॉलिसी के साथ आ रहा है। अगर आप इस फोन को खरीदते हैं तो आपको एक साल तक कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है। क्योंकि एक साल की वारंटी मिल रही है। ये फोन पाँचG Network Support के साथ आ रहा है। अब हम आपको इस फोन में मिलने वाली स्पेसिफिकेशन के बारे में बताने जा रहे हैं। Vivo Yछप्पन पाँचG में डुअल रियर कैमरा भी दिया जा रहा है, जिसका प्राइमरी कैमरा पचासMP का मिल रहा है। फ्रंट कैमरा को लेकर भी आपको ज्यादा शिकायत नहीं होने वाली है। इस फोन में सोलहMP Selfie Camera दिया जा रहा है। Vivo के फोन में छः. अट्ठावन Inch FHD+ LCD Display दिया जा रहा है। इसमें पाँच हज़ार mAh Battery दी जा रही है जो अट्ठारह वाट Fast Charging Support के साथ आता है। कुल मिलाकर ये फोन आपके लिए बेस्ट ऑप्शन साबित हो सकता है। |
All India Institute of Medical Science, Rishikesh ने Stenographer पद के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है. इस नौकरी के लिए आवेदन करने से पहले रोजगार संबंधी सभी आवश्यक जानकारियां पढ़ लें, उसके बाद ही आवेदन करें.
किसी भी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से 12वीं पास की हो. साथ ही हिंदी और इंग्लिश टाइपिंग जानता हो.
21 साल से 35 साल के बीच हो.
लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर चयन होगा.
5,200 से 20,000 रुपये.
आवेदन करने के लिए उम्मीदवार ऑफिश्यली वेबसाइट www. aiimsrishikesh. edu. in पर जा सकते हैं.
| All India Institute of Medical Science, Rishikesh ने Stenographer पद के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है. इस नौकरी के लिए आवेदन करने से पहले रोजगार संबंधी सभी आवश्यक जानकारियां पढ़ लें, उसके बाद ही आवेदन करें. किसी भी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से बारहवीं पास की हो. साथ ही हिंदी और इंग्लिश टाइपिंग जानता हो. इक्कीस साल से पैंतीस साल के बीच हो. लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर चयन होगा. पाँच,दो सौ से बीस,शून्य रुपयापये. आवेदन करने के लिए उम्मीदवार ऑफिश्यली वेबसाइट www. aiimsrishikesh. edu. in पर जा सकते हैं. |
लाडपुरा विधानसभा सेवा मंच की ओर से रविवार को सेवा संकल्प कार्यक्रम 'सेवक श्री' अधिवेशन होगा। अध्यक्ष खेमचंद शाक्यवाल एडवोकेट ने बताया कि अधिवेशन में हजारों लोग सेवा का संकल्प लेंगे। समारोह में मुख्य वक्ता भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय संगठन महामंत्री संजय विनायक जोशी होंगे। इस दौरान इस्कॉन टेंपल की ओर से वैष्णव कीर्तन और गीता पर व्याख्यान होंगे। वहीं रक्तदान शिविर का आयोजन भी किया जाएगा।
मंच की ओर से हर मोहल्ले में 'सेवक श्री' की नियुक्ति की जाएगी। इन्हें प्रशासन के सामने रखने के लिए सजग समितियों का गठन होगा। ये समितियां आमजन की समस्याओं को नौकरशाही के सामने रखकर त्वरित निस्तारण का प्रयास करेगी। ऐसी नियुक्तियां वार्ड, मंडल, प्रकोष्ठ स्तर पर भी की जाएगी। सेवक श्री को सेवा कार्यों की शपथ दिलाई जाएगी। वे स्वास्थ्य, पानी, बिजली, सड़क से जुड़ी समस्याओं के निराकरण, वंचितों को शिक्षा, पीड़ित और पिछड़ों को सम्मान के लिए काम करेंगे। ये सामाजिक कुरीतियों को दूर करने, भ्रष्टाचार को समाप्त करने, नशाबंदी, स्वच्छ पर्यावरण की शपथ लेंगे।
सेवक श्री रक्तदान, नेत्रदान और देहदान के प्रति लोगों में जन जागृति लाने के लिए भी कार्य करेंगे। उन्होंने बताया कि हर रविवार को 'समस्या निवारण यात्रा आपके द्वार' निकाली जाएगी। इस दौरान लोगों से प्रत्यक्ष संवाद कर समस्याओं को सुना जाएगा।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
| लाडपुरा विधानसभा सेवा मंच की ओर से रविवार को सेवा संकल्प कार्यक्रम 'सेवक श्री' अधिवेशन होगा। अध्यक्ष खेमचंद शाक्यवाल एडवोकेट ने बताया कि अधिवेशन में हजारों लोग सेवा का संकल्प लेंगे। समारोह में मुख्य वक्ता भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय संगठन महामंत्री संजय विनायक जोशी होंगे। इस दौरान इस्कॉन टेंपल की ओर से वैष्णव कीर्तन और गीता पर व्याख्यान होंगे। वहीं रक्तदान शिविर का आयोजन भी किया जाएगा। मंच की ओर से हर मोहल्ले में 'सेवक श्री' की नियुक्ति की जाएगी। इन्हें प्रशासन के सामने रखने के लिए सजग समितियों का गठन होगा। ये समितियां आमजन की समस्याओं को नौकरशाही के सामने रखकर त्वरित निस्तारण का प्रयास करेगी। ऐसी नियुक्तियां वार्ड, मंडल, प्रकोष्ठ स्तर पर भी की जाएगी। सेवक श्री को सेवा कार्यों की शपथ दिलाई जाएगी। वे स्वास्थ्य, पानी, बिजली, सड़क से जुड़ी समस्याओं के निराकरण, वंचितों को शिक्षा, पीड़ित और पिछड़ों को सम्मान के लिए काम करेंगे। ये सामाजिक कुरीतियों को दूर करने, भ्रष्टाचार को समाप्त करने, नशाबंदी, स्वच्छ पर्यावरण की शपथ लेंगे। सेवक श्री रक्तदान, नेत्रदान और देहदान के प्रति लोगों में जन जागृति लाने के लिए भी कार्य करेंगे। उन्होंने बताया कि हर रविवार को 'समस्या निवारण यात्रा आपके द्वार' निकाली जाएगी। इस दौरान लोगों से प्रत्यक्ष संवाद कर समस्याओं को सुना जाएगा। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
25 दिसंबर को नई दिल्ली के झंडेवाला मंदिर में विश्व हिंदू परिषद ने धर्म रक्षा दिवस मनाया। इस अवसर पर ईसाई से हिंदू धर्म में वापस लौटे लगभग 250 लोग उपस्थित थे। इनका मार्गदर्शन पूज्य संत रामानुजाचार्य जी ने किया। उनके अलावा कार्यक्रम को विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री सुधांशु पटनायक, दिल्ली प्रांत अध्यक्ष कपिल खन्ना एवं प्रांत मंत्री सुरेंद्र गुप्ता ने भी संबोधित किया।
स्वामी रामानुजाचार्य ने घरवापसी करने वाले हिंदुओं को आरोग्य एवं समृद्धि का आशीर्वाद दिया और कहा कि ये सभी अन्य मत - पंथ में प्यार से, मन से नहीं गए थे, अपितु भय से, जोर - जबरदस्ती से गए थे। यह हर्ष का विषय है कि आज ये लोग अपने मूल धर्म में वापस आए हैं।
विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री सुधांशु पटनायक ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि चर्च और जिहादी तत्वों द्वारा हिंदुओं का कन्वर्जन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 1966 में प्रयागराज में हुए विश्व हिंदू परिषद के सम्मेलन में पूज्य संतों ने घरवापसी का यानी परावर्तन का रास्ता बनाया। इसके बाद से अभी तक लगभग 9,00,000 लोगों को वापस लाया गया और लगभग 62,00,000 लोगों को बचाया गया। यानी ये लोग विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं की सक्रियता से ईसाई या मुसलमान बनने से बच गए। उन्होंने सभी को जीवन - पर्यन्त इस कार्य को अनवरत करते रहने की प्रेरणा दी।
दिल्ली प्रांत अध्यक्ष कपिल खन्ना ने उपस्थित लोगों को स्मरण कराया कि पूज्य गुरु गोबिंद सिंह जी, उनके साहिबजादों, गुरु तेगबहादुर जी, स्वामी श्रद्धानंद जी, स्वामी लक्ष्मणानंद जी, कोठारी बंधुओं आदि ने धर्म के लिए बलिदान दे दिया। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू समाज इन बलिदानियों को सदैव याद रखे। इससे कन्वर्जन जैसी समस्याएं दूर होंंगी।
प्रांत मंत्री सुरेंद्र गुप्ता ने कहा कि हमें चार सिर वाले राक्षस से जीतना है, जिसका एक सिर साम्यवादी चीन है, एक सिर पूंजीवादी अमेरिका है, एक सिर पाकिस्तान और सीरिया प्रेरित जिहाद है, तो एक सिर ईसाइयत द्वारा किया जा रहा कन्वर्जन है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को साधुवाद दिया जिन्होंने अपने परिश्रम से घरवापसी करवाकर लोगों को दुबारा देवताओं के पाले में ला खड़ा किया। सुरेंद्र गुप्ता ने आगे कहा कि पूरी दुनिया को इस राक्षस से बचाने की जिम्मेदारी हिंदू समाज की है और इस हिंदू समाज को संगठित करने की जिम्मेदारी विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल की है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता और कुछ संगठनों के अधिकारी उपस्थित थे।
| पच्चीस दिसंबर को नई दिल्ली के झंडेवाला मंदिर में विश्व हिंदू परिषद ने धर्म रक्षा दिवस मनाया। इस अवसर पर ईसाई से हिंदू धर्म में वापस लौटे लगभग दो सौ पचास लोग उपस्थित थे। इनका मार्गदर्शन पूज्य संत रामानुजाचार्य जी ने किया। उनके अलावा कार्यक्रम को विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री सुधांशु पटनायक, दिल्ली प्रांत अध्यक्ष कपिल खन्ना एवं प्रांत मंत्री सुरेंद्र गुप्ता ने भी संबोधित किया। स्वामी रामानुजाचार्य ने घरवापसी करने वाले हिंदुओं को आरोग्य एवं समृद्धि का आशीर्वाद दिया और कहा कि ये सभी अन्य मत - पंथ में प्यार से, मन से नहीं गए थे, अपितु भय से, जोर - जबरदस्ती से गए थे। यह हर्ष का विषय है कि आज ये लोग अपने मूल धर्म में वापस आए हैं। विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री सुधांशु पटनायक ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि चर्च और जिहादी तत्वों द्वारा हिंदुओं का कन्वर्जन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि एक हज़ार नौ सौ छयासठ में प्रयागराज में हुए विश्व हिंदू परिषद के सम्मेलन में पूज्य संतों ने घरवापसी का यानी परावर्तन का रास्ता बनाया। इसके बाद से अभी तक लगभग नौ,शून्य,शून्य लोगों को वापस लाया गया और लगभग बासठ,शून्य,शून्य लोगों को बचाया गया। यानी ये लोग विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं की सक्रियता से ईसाई या मुसलमान बनने से बच गए। उन्होंने सभी को जीवन - पर्यन्त इस कार्य को अनवरत करते रहने की प्रेरणा दी। दिल्ली प्रांत अध्यक्ष कपिल खन्ना ने उपस्थित लोगों को स्मरण कराया कि पूज्य गुरु गोबिंद सिंह जी, उनके साहिबजादों, गुरु तेगबहादुर जी, स्वामी श्रद्धानंद जी, स्वामी लक्ष्मणानंद जी, कोठारी बंधुओं आदि ने धर्म के लिए बलिदान दे दिया। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू समाज इन बलिदानियों को सदैव याद रखे। इससे कन्वर्जन जैसी समस्याएं दूर होंंगी। प्रांत मंत्री सुरेंद्र गुप्ता ने कहा कि हमें चार सिर वाले राक्षस से जीतना है, जिसका एक सिर साम्यवादी चीन है, एक सिर पूंजीवादी अमेरिका है, एक सिर पाकिस्तान और सीरिया प्रेरित जिहाद है, तो एक सिर ईसाइयत द्वारा किया जा रहा कन्वर्जन है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को साधुवाद दिया जिन्होंने अपने परिश्रम से घरवापसी करवाकर लोगों को दुबारा देवताओं के पाले में ला खड़ा किया। सुरेंद्र गुप्ता ने आगे कहा कि पूरी दुनिया को इस राक्षस से बचाने की जिम्मेदारी हिंदू समाज की है और इस हिंदू समाज को संगठित करने की जिम्मेदारी विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल की है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता और कुछ संगठनों के अधिकारी उपस्थित थे। |
दतिया (नवल यादव): चुनाव आते-आते नेताओं के बोल अब बिगड़ने लगे हैं। नेताओं के शब्द अब असंवैधानिक हो चले हैं। संसदीय भावनाओं की मर्यादा अब नेता भूलने लगे हैं। ऐसा ही कुछ वीडियो कांग्रेस नेता फूलसिंह बरैया का सामने आया है। ग्राम सालोन में मंच से संबोधित करते हुए कांग्रेसी नेता फूल सिंह बरैया ने दतिया जिले के एसपी, कलेक्टर एवं पुलिस वालों को मंच से कांग्रेस की सरकार आने पर उल्टा लटकाने की बात कहते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो में कांग्रेस नेता फूल सिंह बरैया के साथ मंच पर पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल भैया के साथ तमाम वरिष्ठ नेता मंच पर बैठे हुए दिखाई दे रहे हैं। कोई नेता बरैया को इन शब्दों पर असहमती भी नहीं दिखा रहा है। और बरैया की जुबान हर शब्द पर बे लगाम होती जा रही है।
| दतिया : चुनाव आते-आते नेताओं के बोल अब बिगड़ने लगे हैं। नेताओं के शब्द अब असंवैधानिक हो चले हैं। संसदीय भावनाओं की मर्यादा अब नेता भूलने लगे हैं। ऐसा ही कुछ वीडियो कांग्रेस नेता फूलसिंह बरैया का सामने आया है। ग्राम सालोन में मंच से संबोधित करते हुए कांग्रेसी नेता फूल सिंह बरैया ने दतिया जिले के एसपी, कलेक्टर एवं पुलिस वालों को मंच से कांग्रेस की सरकार आने पर उल्टा लटकाने की बात कहते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो में कांग्रेस नेता फूल सिंह बरैया के साथ मंच पर पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल भैया के साथ तमाम वरिष्ठ नेता मंच पर बैठे हुए दिखाई दे रहे हैं। कोई नेता बरैया को इन शब्दों पर असहमती भी नहीं दिखा रहा है। और बरैया की जुबान हर शब्द पर बे लगाम होती जा रही है। |
इस बार पंजाब में नाइट कर्फ्यू के कारण होटलों व रेस्तरां में नववर्ष का जश्न देखने को नहीं मिलेगा। आम तौर पर होटल प्रबंधक एक महीने पहले ही न्यू ईयर पार्टी की तैयारियां करनी शुरू कर देते थे। प्रबंधकों को उम्मीद थी कि सरकार नाइट कर्फ्यू में ढील दे सकती है लेकिन एक दिन पहले ही कैप्टन सरकार ने कोरोना वायरस के दूसरे फेज के कारण पंजाब में नाइट कर्फ्यू एक जनवरी तक बढ़ा दिया है।
31 दिसंबर की रात कर्फ्यू रात दस बजे से सुबह पांच बजे तक लागू रहेगा। इस दिन का होटल प्रबंधक कारोबार के लिहाज से खौसतौर पर इंतजार करते थे। नए साल के कार्यक्रमों से उनकी आमदनी आम दिनों के मुकाबले चालीस प्रतिशत ज्यादा होती थी। एक होटल व रेस्तरां आम दिनों में प्रतिदिन पचास से एक लाख रुपये का कारोबार करता था। वहीं, नए साल वाले दिन कारोबार डेढ़ से दो लाख रुपये तक पहुंच जाता है। पहले ही कोरोना की गंभीरता के कारण होटल इंडस्ट्री का कारोबार बीस प्रतिशत तक सिमट गया है।
नए साल को यादगार बनाने के लिए होटल में पार्टी रखी जाती थी। पार्टी में एंट्री के लिए शहरवासियों के कपल पास की सुविधा रखी जाती थी। पास की कीमत चार हजार से 12 हजार के बीच रहती थी। शहरवासी एंट्री पास की खरीदारी कर नए साल का जश्न मनाते थे। नए साल की पार्टी करने वाले होटल की पास सभी बिक जाते थे। रात को दस बजे का कर्फ्यू लगने से होटल व रेस्तरां प्रबंधकों ने न्यू ईयर पार्टी की प्लानिंग नहीं की है।
कोरोना समय में होटल व रेस्तरां बंंद हो गए थे। स्टाफ अपने गांव में चले गए थे। अब होटल व रेस्तरां में सिर्फ तीस प्रतिशत स्टाफ काम कर रहा है। शहर में 140 होटल व रेस्तरां है। प्रतिवर्ष 2220 करोड़ का कारोबार करते है। आम दिनों में 12000 स्टाफ होटल इंडस्ट्री में काम करता था। अब 50000 स्टाफ काम कर रहा है।
होटल व रेस्तरां एसोसिएशन ऑफ जालंधर के चेयरमैन परमजीत सिंह ने कहा कि कोरोना वायरस की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने एक जनवरी तक कर्फ्यू बढ़ाने का फैसला लिया है। पहले ही इंडस्ट्री का कारोबार तीस प्रतिशत गिर गया है। नए वर्ष वाले दिन भी कारोबार ना के बराबर रहेगा। इस बार कोरोना के कारण न्यू सेलिब्रेशन फीका रहने की उम्मीद है।
| इस बार पंजाब में नाइट कर्फ्यू के कारण होटलों व रेस्तरां में नववर्ष का जश्न देखने को नहीं मिलेगा। आम तौर पर होटल प्रबंधक एक महीने पहले ही न्यू ईयर पार्टी की तैयारियां करनी शुरू कर देते थे। प्रबंधकों को उम्मीद थी कि सरकार नाइट कर्फ्यू में ढील दे सकती है लेकिन एक दिन पहले ही कैप्टन सरकार ने कोरोना वायरस के दूसरे फेज के कारण पंजाब में नाइट कर्फ्यू एक जनवरी तक बढ़ा दिया है। इकतीस दिसंबर की रात कर्फ्यू रात दस बजे से सुबह पांच बजे तक लागू रहेगा। इस दिन का होटल प्रबंधक कारोबार के लिहाज से खौसतौर पर इंतजार करते थे। नए साल के कार्यक्रमों से उनकी आमदनी आम दिनों के मुकाबले चालीस प्रतिशत ज्यादा होती थी। एक होटल व रेस्तरां आम दिनों में प्रतिदिन पचास से एक लाख रुपये का कारोबार करता था। वहीं, नए साल वाले दिन कारोबार डेढ़ से दो लाख रुपये तक पहुंच जाता है। पहले ही कोरोना की गंभीरता के कारण होटल इंडस्ट्री का कारोबार बीस प्रतिशत तक सिमट गया है। नए साल को यादगार बनाने के लिए होटल में पार्टी रखी जाती थी। पार्टी में एंट्री के लिए शहरवासियों के कपल पास की सुविधा रखी जाती थी। पास की कीमत चार हजार से बारह हजार के बीच रहती थी। शहरवासी एंट्री पास की खरीदारी कर नए साल का जश्न मनाते थे। नए साल की पार्टी करने वाले होटल की पास सभी बिक जाते थे। रात को दस बजे का कर्फ्यू लगने से होटल व रेस्तरां प्रबंधकों ने न्यू ईयर पार्टी की प्लानिंग नहीं की है। कोरोना समय में होटल व रेस्तरां बंंद हो गए थे। स्टाफ अपने गांव में चले गए थे। अब होटल व रेस्तरां में सिर्फ तीस प्रतिशत स्टाफ काम कर रहा है। शहर में एक सौ चालीस होटल व रेस्तरां है। प्रतिवर्ष दो हज़ार दो सौ बीस करोड़ का कारोबार करते है। आम दिनों में बारह हज़ार स्टाफ होटल इंडस्ट्री में काम करता था। अब पचास हज़ार स्टाफ काम कर रहा है। होटल व रेस्तरां एसोसिएशन ऑफ जालंधर के चेयरमैन परमजीत सिंह ने कहा कि कोरोना वायरस की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने एक जनवरी तक कर्फ्यू बढ़ाने का फैसला लिया है। पहले ही इंडस्ट्री का कारोबार तीस प्रतिशत गिर गया है। नए वर्ष वाले दिन भी कारोबार ना के बराबर रहेगा। इस बार कोरोना के कारण न्यू सेलिब्रेशन फीका रहने की उम्मीद है। |
दरअसल, उवैशी रौतेला ने हाल में एक इंटरव्यू में मिस्टर आरपी (RP) शब्द का जिक्र किया है। सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो को लेकर लोगों का कहना है कि उर्वशी ने आरपी शब्द का इस्तेमाल ऋषभ पंत के लिए किया है। दूसरी ओर, एक स्क्रीनशॉट भी काफी तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें दावा किया जा रहा है कि यह ऋषभ पंत की ओर से उर्वशर रौतेला को जवाब है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उर्वशी रौतेला का जो इंटरव्यू वीडियो वायरल है, उसमें वह होटल का एक किस्सा बता रही हैं। उर्वशी ने कहा कि मैं वाराणसी शूटिंग कर दिल्ली आई थी, जहां मेरा शो होना था। मैंने पूरे दिन शूटिंग की और 10 घंटे की शूटिंग के बाद जब मैं होटल पहुंची तो थक गई थी और मैं सो गई। मिस्टर आरपी आए और वह लॉबी में मेरा इंतजार कर रहे थे। उन्होंने 17 बार मुझे कॉल किया, लेकिन मुझे पता ही नहीं चला। मुझे अच्छा नहीं लगा। फिर मैंने उनसे बात की और कहा कि जब आप मुंबई में आओगे तब हम मिलेंगे। फिर हम वहां मिले भी, लेकिन तब तक मीडिया में ये बातें सामने भी आ चुकी थीं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
बॉलीवुड अभिनेत्री उर्वशी का यह वीडियो जब वायरल हुआ, उसके बाद एक स्क्रीन शॉट वायरल होने लगा। सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि ऋषभ पंत ने यह इंस्टा स्टोरी लगाई थी और बाद में उन्होंने इसे हटा दिया। लोगों के मुताबिक वायरल इंस्टा स्टोरी में ऋषभ पंत ने लिखा कि- कितना हास्यास्पद है ना कि लोग फेमस होने और हेडलाइंस में बने रहने के लिए इंटरव्यू में झूठ बालते हैं। यह देखकर दुख होता है कि लोग नेम और फेम के लिए झूठ बोल देते हैं। उन्हें मेरी शुभकामनाएं। हैशटैग मेरा पीछा छोड़ो बहन। हैशटैग झूठ की भी लिमिट होती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
यह पहला मौका नहीं है जब ऋषभ पंत और उर्वशी रौतेला ट्रेंड कर रहे हों। इससे पहले भी दोनों को लेकर मीडिया में कई खबरें आईं। हालांकि दोनों ने अभी तक ऑफिशियली अपने बारे में कुछ नहीं कहा है। मीडिया में एक बार यह भी खबर आई थी कि ऋषभ पंत ने उर्वशी को अपने व्हाट्सअप से ब्लॉक कर दिया है। इससे पहले उर्वशी ने पंत के जन्मदिन के मौके पर ट्वीट कर उन्हें बधाई दी थी। ऋषभ पंत हाल में विंडीज दौरे से स्वदेश लौटे हैं। अब वह आगामी एशिया कप में खेलते हुए नजर आएंगे. एशिया कप आयोजन 27 अगस्त से यूएई में होगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
अब उर्वशी रौतेला का सोशल मीडिया में एक और ट्विट आया है। इसे पंत को जवाब बताया जा रहा है। अबकी बार उन्होंने ट्विट को इस तरह लिखा कि साफ पता चल जाए कि बात किसकी हो रही है। अपने इस ट्वीट में उर्वशी ने ऋषभ पंत को छोटू भैया कहा है साथ ही उन्होंने पंत को क्रिकेट खेलने की सलाह भी दी है। उर्वशी ने अपने ताजा ट्वीट में लिखा-छोटू भैया को बैट बॉल खेलनी चाहिए। मैं कोई मुन्नी नहीं हूं जो बदनाम होऊं तेरे लिए यंग किड्डो डार्लिंग।
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
| दरअसल, उवैशी रौतेला ने हाल में एक इंटरव्यू में मिस्टर आरपी शब्द का जिक्र किया है। सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो को लेकर लोगों का कहना है कि उर्वशी ने आरपी शब्द का इस्तेमाल ऋषभ पंत के लिए किया है। दूसरी ओर, एक स्क्रीनशॉट भी काफी तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें दावा किया जा रहा है कि यह ऋषभ पंत की ओर से उर्वशर रौतेला को जवाब है। उर्वशी रौतेला का जो इंटरव्यू वीडियो वायरल है, उसमें वह होटल का एक किस्सा बता रही हैं। उर्वशी ने कहा कि मैं वाराणसी शूटिंग कर दिल्ली आई थी, जहां मेरा शो होना था। मैंने पूरे दिन शूटिंग की और दस घंटाटे की शूटिंग के बाद जब मैं होटल पहुंची तो थक गई थी और मैं सो गई। मिस्टर आरपी आए और वह लॉबी में मेरा इंतजार कर रहे थे। उन्होंने सत्रह बार मुझे कॉल किया, लेकिन मुझे पता ही नहीं चला। मुझे अच्छा नहीं लगा। फिर मैंने उनसे बात की और कहा कि जब आप मुंबई में आओगे तब हम मिलेंगे। फिर हम वहां मिले भी, लेकिन तब तक मीडिया में ये बातें सामने भी आ चुकी थीं। बॉलीवुड अभिनेत्री उर्वशी का यह वीडियो जब वायरल हुआ, उसके बाद एक स्क्रीन शॉट वायरल होने लगा। सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि ऋषभ पंत ने यह इंस्टा स्टोरी लगाई थी और बाद में उन्होंने इसे हटा दिया। लोगों के मुताबिक वायरल इंस्टा स्टोरी में ऋषभ पंत ने लिखा कि- कितना हास्यास्पद है ना कि लोग फेमस होने और हेडलाइंस में बने रहने के लिए इंटरव्यू में झूठ बालते हैं। यह देखकर दुख होता है कि लोग नेम और फेम के लिए झूठ बोल देते हैं। उन्हें मेरी शुभकामनाएं। हैशटैग मेरा पीछा छोड़ो बहन। हैशटैग झूठ की भी लिमिट होती है। यह पहला मौका नहीं है जब ऋषभ पंत और उर्वशी रौतेला ट्रेंड कर रहे हों। इससे पहले भी दोनों को लेकर मीडिया में कई खबरें आईं। हालांकि दोनों ने अभी तक ऑफिशियली अपने बारे में कुछ नहीं कहा है। मीडिया में एक बार यह भी खबर आई थी कि ऋषभ पंत ने उर्वशी को अपने व्हाट्सअप से ब्लॉक कर दिया है। इससे पहले उर्वशी ने पंत के जन्मदिन के मौके पर ट्वीट कर उन्हें बधाई दी थी। ऋषभ पंत हाल में विंडीज दौरे से स्वदेश लौटे हैं। अब वह आगामी एशिया कप में खेलते हुए नजर आएंगे. एशिया कप आयोजन सत्ताईस अगस्त से यूएई में होगा। अब उर्वशी रौतेला का सोशल मीडिया में एक और ट्विट आया है। इसे पंत को जवाब बताया जा रहा है। अबकी बार उन्होंने ट्विट को इस तरह लिखा कि साफ पता चल जाए कि बात किसकी हो रही है। अपने इस ट्वीट में उर्वशी ने ऋषभ पंत को छोटू भैया कहा है साथ ही उन्होंने पंत को क्रिकेट खेलने की सलाह भी दी है। उर्वशी ने अपने ताजा ट्वीट में लिखा-छोटू भैया को बैट बॉल खेलनी चाहिए। मैं कोई मुन्नी नहीं हूं जो बदनाम होऊं तेरे लिए यंग किड्डो डार्लिंग। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड। |
स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूजः बॉलीवुड एक्टर सिद्धार्थ मल्होत्रा और कियारा आडवाणी की शादी 7 फरवरी के दिन हुई थी। इस कपल ने सात फेरे लेने के लिए राजस्थान के जैसलमेर के सूर्यगढ़ पैलेस को चुना था। दोनों ने शादी होने के बाद सोशल मीडिया अकाउंट पर कई फोटोज साझा की थीं, जिन्हें देख फैन्स और सेलेब्स खुशी से झूम उठे थे। ऐसे में अब दोनों ने अपने-अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शादी का प्यारा वीडियो साझा किया है। दोनों को वरमाला डालते और किस करते हुए देखने के बाद सेलेब्स ने सिद्धार्थ और कियारा पर खूब प्यार लुटाया है।
| स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूजः बॉलीवुड एक्टर सिद्धार्थ मल्होत्रा और कियारा आडवाणी की शादी सात फरवरी के दिन हुई थी। इस कपल ने सात फेरे लेने के लिए राजस्थान के जैसलमेर के सूर्यगढ़ पैलेस को चुना था। दोनों ने शादी होने के बाद सोशल मीडिया अकाउंट पर कई फोटोज साझा की थीं, जिन्हें देख फैन्स और सेलेब्स खुशी से झूम उठे थे। ऐसे में अब दोनों ने अपने-अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शादी का प्यारा वीडियो साझा किया है। दोनों को वरमाला डालते और किस करते हुए देखने के बाद सेलेब्स ने सिद्धार्थ और कियारा पर खूब प्यार लुटाया है। |
आश्वासन राम का माध्यम तुलसीदास का
आश्वासन स्वच्छद भाव से साँस लेना ।
सास भी हम आज सन समय खुन कर सम गति से कहाँ ले पाते हैं । कल्पना कीजिये, कोई मनुष्य भादो की तूफानी अमावस्या की रात को बवडर के झोरे से नाव से छिटक कर अचानव अपार, मथाह, उफ्नती हुई नदी मे जा गिरा है। अपनी शक्ति पर हाथ पाव पटव लेने के बाद भी उसे कूलकिनारा या कोई नौका-वेडा नही दिखता । अहसास होता रहता है उसे अपने चारो ओर मगर घडियाल जैसे भयकर जलचरो वा, क्योकि वे रह रह कर अपने दात तेज करते रहते हैं उसे वाट काट कर । वेगवती धारा की दुर्दान्त तरगो में घिरती आती मृत्यु की विभीषिका स सस्त उस मनुष्य की धौंकनी सी चलती सासें हृत्पिड को हो विदोण कर देना चाहती हैं । जरा रुक्कर सोचिये, आश्वासन के लिए विकल वह व्यक्ति वही आप हो तो नहीं हैं । आखिर यह दुनिया किस भयकर बरसाती नदी से कम है, परिस्थितियों के थपेडो और स्वार्याध मित्रो शत्रुओं के दशनो को झेलते झेलते एक सीमा के बाद किस का दम नही उखड़ जाता । उस सल्लास से व्यक्ति कसे उबरे ? आधुनिक नुस्खे क्षम नहीं है और बहुतों के लिए वे कारगर भी हो सकते हैं। किंतु घुटन टूटन, अनास्था निराशा की दिनों दिन बढती यत्रणा से पिसते हुए हृदयो को आहेवराहें साबित करती है कि मानवता के एक बडे अश के लिए ये नये नुस्खे अपर्याप्त हैं । ऐसे मे याद आती है तुलसी की आश्वासनमयी श्रद्धापूत वाणी, जिसका दावा है कि कोई भी स्थिति इतनी सक्टापस नहीं हो सकती जिससे श्रीराम की विशाल भुजाएं हमे आपको उबार न लें
जहाँ जम जातना, घोर नदी, भट कोटि जलच्चर दत ठेवया । जहँ धार भयवर वार न पार, न बोहित-नाव, न नीक खेवैया ।। तुलसी जहँ मातु पिता न सखा, नहि कोक वहूँ अवलब देवथा । तही विनु वारन राम कृपालु बिसाल भुजा गहि काढ़ लेवैया ।। '
१ कवितावलो ७१५२ | आश्वासन राम का माध्यम तुलसीदास का आश्वासन स्वच्छद भाव से साँस लेना । सास भी हम आज सन समय खुन कर सम गति से कहाँ ले पाते हैं । कल्पना कीजिये, कोई मनुष्य भादो की तूफानी अमावस्या की रात को बवडर के झोरे से नाव से छिटक कर अचानव अपार, मथाह, उफ्नती हुई नदी मे जा गिरा है। अपनी शक्ति पर हाथ पाव पटव लेने के बाद भी उसे कूलकिनारा या कोई नौका-वेडा नही दिखता । अहसास होता रहता है उसे अपने चारो ओर मगर घडियाल जैसे भयकर जलचरो वा, क्योकि वे रह रह कर अपने दात तेज करते रहते हैं उसे वाट काट कर । वेगवती धारा की दुर्दान्त तरगो में घिरती आती मृत्यु की विभीषिका स सस्त उस मनुष्य की धौंकनी सी चलती सासें हृत्पिड को हो विदोण कर देना चाहती हैं । जरा रुक्कर सोचिये, आश्वासन के लिए विकल वह व्यक्ति वही आप हो तो नहीं हैं । आखिर यह दुनिया किस भयकर बरसाती नदी से कम है, परिस्थितियों के थपेडो और स्वार्याध मित्रो शत्रुओं के दशनो को झेलते झेलते एक सीमा के बाद किस का दम नही उखड़ जाता । उस सल्लास से व्यक्ति कसे उबरे ? आधुनिक नुस्खे क्षम नहीं है और बहुतों के लिए वे कारगर भी हो सकते हैं। किंतु घुटन टूटन, अनास्था निराशा की दिनों दिन बढती यत्रणा से पिसते हुए हृदयो को आहेवराहें साबित करती है कि मानवता के एक बडे अश के लिए ये नये नुस्खे अपर्याप्त हैं । ऐसे मे याद आती है तुलसी की आश्वासनमयी श्रद्धापूत वाणी, जिसका दावा है कि कोई भी स्थिति इतनी सक्टापस नहीं हो सकती जिससे श्रीराम की विशाल भुजाएं हमे आपको उबार न लें जहाँ जम जातना, घोर नदी, भट कोटि जलच्चर दत ठेवया । जहँ धार भयवर वार न पार, न बोहित-नाव, न नीक खेवैया ।। तुलसी जहँ मातु पिता न सखा, नहि कोक वहूँ अवलब देवथा । तही विनु वारन राम कृपालु बिसाल भुजा गहि काढ़ लेवैया ।। ' एक कवितावलो सात हज़ार एक सौ बावन |
रातापानी सेंचुरी में जंगल सफारी का शुभारंभ 6 दिसंबर को हो रहा है। पर्यटक 7 दिसंबर से यहां जंगल सफारी कर सकेंगे। यह देश की एकमात्र सेंचुरी है जिसमें जंगल सफारी शुरू की जा रही है। अभी पर्यटक केवल झिरी और देलाबाड़ी की ओर से ही सफारी कर सकेंगे। फिलहाल 8 इलेक्ट्रिक व्हीकल से सेंचुरी में सफारी शुरू होगी। जिसमें 6 वाहन झिरी और 2 वाहन देलाबाड़ी की ओर लगाए गए है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने के बाद वाहनों की संख्या बढ़ाई जाएगी। सफारी का समय सुबह 6 बजे से शुरू होगी। पहले आओ पहले पाओ की तर्ज पर पर्यटकों की बुकिंग की जाएगी।
औबेदुल्लागंज वन डिवीजन के डीएफओ विजय कुमार ने बताया कि झिरी से करमई तक 40 किमी का और देलावाड़ी गेट से 20 किलोमीटर का ट्रैक बनाया गया है। शुरुआत में सफारी के लिए पर्यटकों काे गेट से टिकट लेना होगा। 15 दिसंबर के बाद रातापानी सेंचुरी के लिए ऑनलाइन बुकिंग हो सकेगी। जंगल सफारी के लिए पर्यटकों 4300 रुपए लगेंगे। जिसमें 700 रुपए फीस, 400 रुपए गाइड फीस के साथ 32 सौ रुपए वाहन शुल्क चुकाने होंगे।
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| रातापानी सेंचुरी में जंगल सफारी का शुभारंभ छः दिसंबर को हो रहा है। पर्यटक सात दिसंबर से यहां जंगल सफारी कर सकेंगे। यह देश की एकमात्र सेंचुरी है जिसमें जंगल सफारी शुरू की जा रही है। अभी पर्यटक केवल झिरी और देलाबाड़ी की ओर से ही सफारी कर सकेंगे। फिलहाल आठ इलेक्ट्रिक व्हीकल से सेंचुरी में सफारी शुरू होगी। जिसमें छः वाहन झिरी और दो वाहन देलाबाड़ी की ओर लगाए गए है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने के बाद वाहनों की संख्या बढ़ाई जाएगी। सफारी का समय सुबह छः बजे से शुरू होगी। पहले आओ पहले पाओ की तर्ज पर पर्यटकों की बुकिंग की जाएगी। औबेदुल्लागंज वन डिवीजन के डीएफओ विजय कुमार ने बताया कि झिरी से करमई तक चालीस किमी का और देलावाड़ी गेट से बीस किलोग्राममीटर का ट्रैक बनाया गया है। शुरुआत में सफारी के लिए पर्यटकों काे गेट से टिकट लेना होगा। पंद्रह दिसंबर के बाद रातापानी सेंचुरी के लिए ऑनलाइन बुकिंग हो सकेगी। जंगल सफारी के लिए पर्यटकों चार हज़ार तीन सौ रुपयापए लगेंगे। जिसमें सात सौ रुपयापए फीस, चार सौ रुपयापए गाइड फीस के साथ बत्तीस सौ रुपए वाहन शुल्क चुकाने होंगे। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
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