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गिरिश गुप्ता गरियाबंदः- जिले के आदिवासी विकासखंड मैनपुर क्षेत्र में बदहाल शिक्षा व्यवस्था किसी से छिपा नहीं है शिक्षा प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में बहुत ही बड़ा महत्व होता हैं। किन्तु कुछ ऐसे भी शिक्षाक है जो अपनी जिम्मेदारीयो को ध्यान नहीं देते हैं। केवल हर माह पेमेंट मिले इतना ही काम रह गई है शिक्षा की मंदिर को अब केवल नाम मात्र रह गई है। यही देखने को मिला तहसील मुख्यालय से दुरस्थ वनांचल क्षेत्रों में देखने वाला कोई नहीं है जिले के शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों के उदासीन रवैए के चलते इसका खामियाजा आदिवासी क्षेत्र के बच्चों को भुगतना पड़ रहा है. मैनपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत धरनीढोडा शासकीय प्राथमिक शाला के शिक्षक नरेश कश्यप लगातार शराब के नशे में स्कूल पहुंचकर छात्र छात्राओं को पढ़ाना तो दूर शराब के नशे में शिक्षक द्वारा बच्चों के साथ गाली-गलौच मारपीट की शिकायत कई बार ब्लाक शिक्षा अधिकारी मैनपुर से लेकर जिला शिक्षा अधिकारी गरियाबंद तक ग्रामीण व बच्चे करते थक चुके हैं लेकिन अब तक शराबी शिक्षक पर कोई कार्रवाई नहीं किया गया जिससे उसके हौसले और बुलंद होते गए. धरनीढोला के प्राथमिक शाला के शिक्षक सहायक शिक्षक नरेश कश्यप शराब के नशे में एक पखवाड़े पूर्व बार फिर स्कूल पहुचा तो ग्रामीणों ने शराबी शिक्षक की जमकर खबर ली और विडियो में दिखाई दे रहा है कि ग्रामीण शिक्षक को उठाकर ले जा रहे हैं और शराब के नशे में धूत शिक्षक की जमकर खबर भी ली गईं हैं, और कुटाई भी करते विडियो में दिखाई दे रहा है. ग्रामीणों के द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी से शिकायत के बाद कार्यवाही ना करना अनेक संदेह को जन्म देता है. ग्राम पंचायत के सरपंच एवं शाला प्रबंधन समिति के सदस्यों के द्वारा इस मामले में 06/09/2022 को एक पंचनामा तैयार किया गया और शराबी शिक्षक नरेश कश्यप और एक अन्य शिक्षक ईश्वर मांझी द्वारा शराब के नशे में स्कूल आकर गाली-गलौज करना मारपीट करना संबंधित शिकायत पंचनामा तैयार कर जिला शिक्षा अधिकारी गरियाबंद करमन खटकर को सौंपा गया था इसके बावजूद अब तक इस शिक्षक नरेश कश्यप, ईश्वर मांझी पर कोई कार्रवाई नहीं करना अनेक संदेह को जन्म देता है इस संबंध में जब जिला शिक्षा अधिकारी से उनके पक्ष रखने के लिए मोबाइल नंबर पर फोन किया गया तो उन्होंने फोन तक नही उठाया। जिला शिक्षा अधिकारी करमन खटकर को शिकायत करने के बाद कार्यवाही नहीं होने से ग्रामीणों ने लिया सोशल मीडिया का सहारा। ग्राम पंचायत धरनीढोडा के ग्रामीणाें ने शराबी शिक्षक नरेश कश्यप का विडियो बनाकर लिखित में जिला शिक्षा अधिकारी से शिकायत करने के बाद जब एक पखवाड़े बीत जाने के बावजूद इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुआ तो मजबूरन ग्रामीणों ने शराबी शिक्षक के करतूतों का विडियो और पंचनामा तथा जिला शिक्षा अधिकारी को शिकायत प्रत्र की पावती सोशल मीडिया में वायरल किया है इसके बाद हड़कंप मची है, और शिक्षा विभाग के अधिकारी फोन नहीं उठा रहे हैं ग्रामीणों ने गरियाबंद जिले के कलेक्टर प्रभात मलिक से शराबी शिक्षकों को तत्काल बर्खास्त करने की मांग किया है. विकासखंड शिक्षा अधिकारी मैनपुर आर आर सिंग ने बताया ग्रामीणों के द्वारा शराबी शिक्षक नरेश कश्यप की शिकायत की गई है जिला शिक्षा अधिकारी को कारवाई के लिए प्रेषित किया गया है. ग्राम पंचायत धरनीढोडा के सरपंच सदनाबाई मांझी ने बताया शराब पीकर स्कूल आने वाले शिक्षक की शिकायत करने के बाद अब तक कोई कार्रवाई नहीं करना समझ से परे है शिक्षक को तत्काल बर्खास्त किया जाए और नया शिक्षक की व्यवस्था किया जाऐ।
गिरिश गुप्ता गरियाबंदः- जिले के आदिवासी विकासखंड मैनपुर क्षेत्र में बदहाल शिक्षा व्यवस्था किसी से छिपा नहीं है शिक्षा प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में बहुत ही बड़ा महत्व होता हैं। किन्तु कुछ ऐसे भी शिक्षाक है जो अपनी जिम्मेदारीयो को ध्यान नहीं देते हैं। केवल हर माह पेमेंट मिले इतना ही काम रह गई है शिक्षा की मंदिर को अब केवल नाम मात्र रह गई है। यही देखने को मिला तहसील मुख्यालय से दुरस्थ वनांचल क्षेत्रों में देखने वाला कोई नहीं है जिले के शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों के उदासीन रवैए के चलते इसका खामियाजा आदिवासी क्षेत्र के बच्चों को भुगतना पड़ रहा है. मैनपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत धरनीढोडा शासकीय प्राथमिक शाला के शिक्षक नरेश कश्यप लगातार शराब के नशे में स्कूल पहुंचकर छात्र छात्राओं को पढ़ाना तो दूर शराब के नशे में शिक्षक द्वारा बच्चों के साथ गाली-गलौच मारपीट की शिकायत कई बार ब्लाक शिक्षा अधिकारी मैनपुर से लेकर जिला शिक्षा अधिकारी गरियाबंद तक ग्रामीण व बच्चे करते थक चुके हैं लेकिन अब तक शराबी शिक्षक पर कोई कार्रवाई नहीं किया गया जिससे उसके हौसले और बुलंद होते गए. धरनीढोला के प्राथमिक शाला के शिक्षक सहायक शिक्षक नरेश कश्यप शराब के नशे में एक पखवाड़े पूर्व बार फिर स्कूल पहुचा तो ग्रामीणों ने शराबी शिक्षक की जमकर खबर ली और विडियो में दिखाई दे रहा है कि ग्रामीण शिक्षक को उठाकर ले जा रहे हैं और शराब के नशे में धूत शिक्षक की जमकर खबर भी ली गईं हैं, और कुटाई भी करते विडियो में दिखाई दे रहा है. ग्रामीणों के द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी से शिकायत के बाद कार्यवाही ना करना अनेक संदेह को जन्म देता है. ग्राम पंचायत के सरपंच एवं शाला प्रबंधन समिति के सदस्यों के द्वारा इस मामले में छः सितंबर दो हज़ार बाईस को एक पंचनामा तैयार किया गया और शराबी शिक्षक नरेश कश्यप और एक अन्य शिक्षक ईश्वर मांझी द्वारा शराब के नशे में स्कूल आकर गाली-गलौज करना मारपीट करना संबंधित शिकायत पंचनामा तैयार कर जिला शिक्षा अधिकारी गरियाबंद करमन खटकर को सौंपा गया था इसके बावजूद अब तक इस शिक्षक नरेश कश्यप, ईश्वर मांझी पर कोई कार्रवाई नहीं करना अनेक संदेह को जन्म देता है इस संबंध में जब जिला शिक्षा अधिकारी से उनके पक्ष रखने के लिए मोबाइल नंबर पर फोन किया गया तो उन्होंने फोन तक नही उठाया। जिला शिक्षा अधिकारी करमन खटकर को शिकायत करने के बाद कार्यवाही नहीं होने से ग्रामीणों ने लिया सोशल मीडिया का सहारा। ग्राम पंचायत धरनीढोडा के ग्रामीणाें ने शराबी शिक्षक नरेश कश्यप का विडियो बनाकर लिखित में जिला शिक्षा अधिकारी से शिकायत करने के बाद जब एक पखवाड़े बीत जाने के बावजूद इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुआ तो मजबूरन ग्रामीणों ने शराबी शिक्षक के करतूतों का विडियो और पंचनामा तथा जिला शिक्षा अधिकारी को शिकायत प्रत्र की पावती सोशल मीडिया में वायरल किया है इसके बाद हड़कंप मची है, और शिक्षा विभाग के अधिकारी फोन नहीं उठा रहे हैं ग्रामीणों ने गरियाबंद जिले के कलेक्टर प्रभात मलिक से शराबी शिक्षकों को तत्काल बर्खास्त करने की मांग किया है. विकासखंड शिक्षा अधिकारी मैनपुर आर आर सिंग ने बताया ग्रामीणों के द्वारा शराबी शिक्षक नरेश कश्यप की शिकायत की गई है जिला शिक्षा अधिकारी को कारवाई के लिए प्रेषित किया गया है. ग्राम पंचायत धरनीढोडा के सरपंच सदनाबाई मांझी ने बताया शराब पीकर स्कूल आने वाले शिक्षक की शिकायत करने के बाद अब तक कोई कार्रवाई नहीं करना समझ से परे है शिक्षक को तत्काल बर्खास्त किया जाए और नया शिक्षक की व्यवस्था किया जाऐ।
कोरबा,(ब्यूरो छत्तीसगढ़)। एक करोड़ रूपयों से अधिक के धान घोटाला को लेकर जिला जेल कोरबा में निरूद्ध एक आरोपी की संदिग्ध मौत की खबर से सनसनी फैल गयी। बाद में पता चला कि महज अफवाह थी। जिला जेल कोरबा में आदिवासी सेवा सहकारी समिति सोहागपुर के एक करोड़ रूपयों से अधिक के धान घोटाला का आरोपी समिति पबंधक बजूर सिंह राज, खरीदी पभारी बुटकू सिंह और डाटा एंट्री आपरेटर खगेश पताप सिंह न्यायिक अभिरक्षा में है। बीती रात क्षेत्र में खबर फैली की समिति पबंधक बजूरसिंह राज की जिला जेल में संदिग्ध मौत हो गयी। इस खबर से कोरबा से लेकर सोहागपुर तक सनसनी फैल गयी। बहरहाल जेल में संपर्प करने पर पता चला कि धान घोटाला के तीनों आरोपी सकुशल हैं। यहां उल्लेखनीय है कि इस घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद काईम ब्रांच पुलिस ने सोहागपुर से दो युवकों को अवैध रिवाल्वर के साथ गिरप्तार किया था। इसके बाद योजनाबद्ध तरीके से पचारित करने का पयास किया गया था कि डाटा एंट्री आपरेटर खगेश पताप ने इन दोनों युवकों को अपने पिता धान खरीदी पभारी बुटकू सिंह की हत्या की सुपारी दी थी। हत्या के बाद दोनों आरोपियों को जिला सहकारी केन्दीय बैंक बिलासपुर के अध्यक्ष देवेन्द पाण्डेय के इशारे पर हत्या करने का बयान कथित रूप से पुलिस में दर्ज कराना था। लेकिन न तो पुलिस जांच में ऐसे किसी तथ्य का खुलासा हुआ और नही इसे स्थापित किया जा सका। खास बात यह है कि सोहागपुर गांव वर्षों से खतरनाक हथियारों की खरीद-फरोख्त के लिए मशहूर है। इधर दूसरी ओर धान घोटाला मामले में तीन आरोपियों की गिरप्तारी के बाद मामले में नया मोड़ आ गया है। तीनों ही आरोपी घोटाले में जिला सहकारी केन्दीय बैंक बिलासपुर के अध्यक्ष देवेन्द पाण्डेय को घोटाले की रकम में से अस्सी लाख रूपये देने का आरोप लगा चुके हैं।
कोरबा,। एक करोड़ रूपयों से अधिक के धान घोटाला को लेकर जिला जेल कोरबा में निरूद्ध एक आरोपी की संदिग्ध मौत की खबर से सनसनी फैल गयी। बाद में पता चला कि महज अफवाह थी। जिला जेल कोरबा में आदिवासी सेवा सहकारी समिति सोहागपुर के एक करोड़ रूपयों से अधिक के धान घोटाला का आरोपी समिति पबंधक बजूर सिंह राज, खरीदी पभारी बुटकू सिंह और डाटा एंट्री आपरेटर खगेश पताप सिंह न्यायिक अभिरक्षा में है। बीती रात क्षेत्र में खबर फैली की समिति पबंधक बजूरसिंह राज की जिला जेल में संदिग्ध मौत हो गयी। इस खबर से कोरबा से लेकर सोहागपुर तक सनसनी फैल गयी। बहरहाल जेल में संपर्प करने पर पता चला कि धान घोटाला के तीनों आरोपी सकुशल हैं। यहां उल्लेखनीय है कि इस घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद काईम ब्रांच पुलिस ने सोहागपुर से दो युवकों को अवैध रिवाल्वर के साथ गिरप्तार किया था। इसके बाद योजनाबद्ध तरीके से पचारित करने का पयास किया गया था कि डाटा एंट्री आपरेटर खगेश पताप ने इन दोनों युवकों को अपने पिता धान खरीदी पभारी बुटकू सिंह की हत्या की सुपारी दी थी। हत्या के बाद दोनों आरोपियों को जिला सहकारी केन्दीय बैंक बिलासपुर के अध्यक्ष देवेन्द पाण्डेय के इशारे पर हत्या करने का बयान कथित रूप से पुलिस में दर्ज कराना था। लेकिन न तो पुलिस जांच में ऐसे किसी तथ्य का खुलासा हुआ और नही इसे स्थापित किया जा सका। खास बात यह है कि सोहागपुर गांव वर्षों से खतरनाक हथियारों की खरीद-फरोख्त के लिए मशहूर है। इधर दूसरी ओर धान घोटाला मामले में तीन आरोपियों की गिरप्तारी के बाद मामले में नया मोड़ आ गया है। तीनों ही आरोपी घोटाले में जिला सहकारी केन्दीय बैंक बिलासपुर के अध्यक्ष देवेन्द पाण्डेय को घोटाले की रकम में से अस्सी लाख रूपये देने का आरोप लगा चुके हैं।
Maithon : डीवीसी इम्प्लाइज एवं पेंशनर्स के द्वारा 10 जून शनिवार को मैथन स्टेशन क्लब में ऑल वैली कन्वेंशन आयोजित किया गया. कन्वेंशन में डीवीसी के पेंशन सिस्टम को सेंट्रलाइज्ड पेंशन प्रोसेसिंग सेंटर को हस्तातंरण करने एवं डीवीसी एक्ट 1948 में संशोधन कर निजीकरण करने की साजिश का विरोध किया गया. सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 22 जून को दामोदर घाटी निगम की तमाम परियोजनाओं में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा और सात जुलाई को डीवीसी मुख्यालय कोलकाता एवं फील्ड हेड क्वार्टर मैथन में डीवीसी के स्थापना दिवस पर भूख हड़ताल की जाएगी. इस कन्वेंशन में डीवीसी पेंशनर्स फेडरेशन के चेयरमैन एवं महामंत्री स्वपन महंता, डीवीसी संयुक्त ट्रेड यूनियन मोर्चा के संयोयक जीवन इईच, डीवीसी श्रमिक यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष समीर बाइन, महामंत्री अभिजीत राय, कर्मचारी संघ के महामंत्री सुब्रतो मिश्रा, स्टाफ एसोसिएशन के महामंत्री तापस कुंडू, हिंद मजदूर किसान यूनियन के महामंत्री सुदीप मुखर्जी के अलावा जी राम, निशीथ मुखर्जी, राजू मुखर्जी, धर्मदेव सिंह, सुधीर पांडेय, एसके घोष, नवेंदु चक्रवर्ती, मदन मेहता, सुमन झा सहित डीवीसी की परियोजनाओं से 212 प्रतिनिधि उपस्थित थे.
Maithon : डीवीसी इम्प्लाइज एवं पेंशनर्स के द्वारा दस जून शनिवार को मैथन स्टेशन क्लब में ऑल वैली कन्वेंशन आयोजित किया गया. कन्वेंशन में डीवीसी के पेंशन सिस्टम को सेंट्रलाइज्ड पेंशन प्रोसेसिंग सेंटर को हस्तातंरण करने एवं डीवीसी एक्ट एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस में संशोधन कर निजीकरण करने की साजिश का विरोध किया गया. सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि बाईस जून को दामोदर घाटी निगम की तमाम परियोजनाओं में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा और सात जुलाई को डीवीसी मुख्यालय कोलकाता एवं फील्ड हेड क्वार्टर मैथन में डीवीसी के स्थापना दिवस पर भूख हड़ताल की जाएगी. इस कन्वेंशन में डीवीसी पेंशनर्स फेडरेशन के चेयरमैन एवं महामंत्री स्वपन महंता, डीवीसी संयुक्त ट्रेड यूनियन मोर्चा के संयोयक जीवन इईच, डीवीसी श्रमिक यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष समीर बाइन, महामंत्री अभिजीत राय, कर्मचारी संघ के महामंत्री सुब्रतो मिश्रा, स्टाफ एसोसिएशन के महामंत्री तापस कुंडू, हिंद मजदूर किसान यूनियन के महामंत्री सुदीप मुखर्जी के अलावा जी राम, निशीथ मुखर्जी, राजू मुखर्जी, धर्मदेव सिंह, सुधीर पांडेय, एसके घोष, नवेंदु चक्रवर्ती, मदन मेहता, सुमन झा सहित डीवीसी की परियोजनाओं से दो सौ बारह प्रतिनिधि उपस्थित थे.
अमरोहा। डिडौली कोतवाली पुलिस ने दहेज हत्या के आरोपी को गिरफ्तार किया। जानकारी के अनुसार मुरादबाद के सिविल लाइन थाना क्षेत्र के हरथला सोनकपुर निवासी बबली की शादी डिडौली कोतवाली क्षेत्र के गांव अशरफपुर फैजगंज निवासी टिंकू के साथ हुई थी। बीती 14 जनवरी की रात बबली की मौत हो गई थी। उसके मायके वालों ने दहेज में दो लाख रुपये व बाइक की मांग पूरी नहीं होने पर उसकी हत्या करने का आरोप ससुराल पक्ष पर लगाया था। पुलिस ने मामले में रविवार को हत्यारोपी पति टिंकू को गिरफ्तार किया। डिडौली कोतवाल अजय कुमार सिंह ने बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी जांच के बाद करने की बात कही।
अमरोहा। डिडौली कोतवाली पुलिस ने दहेज हत्या के आरोपी को गिरफ्तार किया। जानकारी के अनुसार मुरादबाद के सिविल लाइन थाना क्षेत्र के हरथला सोनकपुर निवासी बबली की शादी डिडौली कोतवाली क्षेत्र के गांव अशरफपुर फैजगंज निवासी टिंकू के साथ हुई थी। बीती चौदह जनवरी की रात बबली की मौत हो गई थी। उसके मायके वालों ने दहेज में दो लाख रुपये व बाइक की मांग पूरी नहीं होने पर उसकी हत्या करने का आरोप ससुराल पक्ष पर लगाया था। पुलिस ने मामले में रविवार को हत्यारोपी पति टिंकू को गिरफ्तार किया। डिडौली कोतवाल अजय कुमार सिंह ने बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी जांच के बाद करने की बात कही।
India Vs New Zealand 2nd T20 Match Report Today: तीन मैचों की सीरीज में भारत ने 1-0 से बढ़त ले ली है. टी20 वर्ल्ड कप की निराशा के 10 दिनों बाद आखिरकार भारतीय टीम फिर मैदान पर उतरी और एक शानदार जीत के साथ संभावित नए दौर की शुरुआत की. कार्यवाहक कप्तान हार्दिक पंड्या के नेतृत्व में भारतीय टीम ने टी20 सीरीज के दूसरे मैच में न्यूजीलैंड को 65 रनों के बड़े अंतर से हरा दिया. पूरे साल भर दुनिया के अलग-अलग मैदानों में गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाने वाले सूर्यकुमार यादव (111 नाबाद) ने अपने पहले न्यूजीलैंड दौरे पर भी वही कमाल किया और एक हैरतअंगेज शतक ठोककर टीम की जीत की बुनियाद रखी. इस बुनियाद पर सफलता की इमारत बनाई युजवेंद्र चहल (2 विकेट) और दीपक हुड्डा (4 विकेट) की स्पिन ने. माउंट माउनगानुई में रविवार 20 नवंबर को बे ओवल मैदान में सूर्यकुमार यादव की 'वीडियो गेम' अंदाज में बैटिंग (विराट कोहली के शब्दों में) ने कीवी टीम के सामने 192 रनों का लक्ष्य रखा था. न्यूजीलैंड को भी इसका जवाब देने के लिए जोरदार बल्लेबाजी की जरूरत थी. इसके लिए युवा ओपनर फिन ऐलन से ताबड़तोड़ बैटिंग की उम्मीद थी लेकिन भुवनेश्वर कुमार ने सिर्फ 2 गेंदों के अंदर उन्हें पवेलियन लौटा दिया. डेवन कॉनवे ने कप्तान केन विलियमसन के साथ अर्धशतकीय साझेदारी की, लेकिन फिर भारत के स्पिनरों का जलवा देखने को मिला. डेढ़ साल बाद टी20 टीम में लौटे वॉशिंगटन सुंदर ने कॉनवे (25) का विकेट चटकाया. फिर कहर बरपाया युजवेंद्र चहल (2/26) ने, जिन्हें पूरे टी20 विश्व कप में टीम इंडिया ने बेंच पर बैठाए रखा. चहल ने न्यूजीलैंड के दो सबसे विस्फोटक बल्लेबाज, ग्लेन फिलिप्स और जेम्स नीशम को अपना शिकार बनाते हुए न्यूजीलैंड की हालत पतली कर दी. न्यूजीलैंड ने सिर्फ 99 रन तक ही 6 विकेट गंवा दिए थे, लेकिन दूसरी ओर से कप्तान विलियमसन (61) दूसरे छोर से डटे हुए थे. हालांकि, वह फिर तेजी से रन बना पाने में नाकाम रहे, जिसके कारण टीम के स्कोर की रफ्तार नहीं बढ़ा सके और इसका असर भी कीवी टीम पर पड़ा. फिर चहल के बाद दीपक हुड्डा (4/10) ने भी दिखाया कि टीम इंडिया ने कैसे एशिया कप और फिर टी20 विश्व कप में उनकी स्पिन का इस्तेमाल न कर कितनी बड़ी गलती की. हुड्डा ने पहले डैरिल मिचेल को फंसाया और फिर 19वें ओवर में आखिरी 3 विकेट लेकर 126 रन पर न्यूजीलैंड को ढेर कर दिया. इससे पहले बारिश से प्रभावित भारतीय पारी में एक बार फिर सूर्या का जलवा देखने को मिला. पिछले साल अपने डेब्यू के बाद से ही टी20 क्रिकेट में अतरंगी लेकिन आक्रामक बल्लेबाजी के कारण पहचान बना चुके सूर्या ने इस बार भी वही अंदाज जारी रखा. ऑस्ट्रेलिया में विश्व कप में जोरदार रन बरसाने वाले सूर्या ने सिर्फ 51 गेंदों में 111 रनों (11 चौके, 7 छक्के) की नाबाद पारी खेलकर टीम को 191 के स्कोर तक पहुंचाया. सूर्या ने आखिरी 5 ओवरों में कीवी गेंदबाजों की धुनाई करते हुए सिर्फ 49 गेंदों में अपना शतक पूरा किया. इसमें लॉकी फर्ग्युसन के ओवर में ही 22 रन बटोर लिए थे. हालांकि, आखिरी ओवर में उन्हें एक भी गेंद खेलने को नहीं मिली, जिसने भारत को 200 तक नहीं पहुंचने दिया. हालांकि, उनके अलावा टीम इंडिया का कोई भी बल्लेबाज खास असर नहीं डाल पाया. इस मुकाबले में भारत ने ऋषभ पंत और इशान किशन के रूप में आक्रामक बल्लेबाजों की ओपनिंग जोड़ी को मैदान में उतारा लेकिन पहले ऑडिशन में ये प्रयास सफल नहीं हुआ. खास तौर पर पंत को कीवी पेसरों ने मुश्किल में डाला और 13 गेंदों में सिर्फ 6 रन बनाकर आउट हो गए. इशान (36) ने कुछ अच्छे शॉट्स लगाए, लेकिन वह भी ज्यादा प्रभावी नहीं लगे. श्रेयस अय्यर, कप्तान हार्दिक पंड्या और दीपक हुड्डा भी कुछ खास नहीं कर सके. न्यूजीलैंड की ओर से आखिरी ओवर में टिम साउदी (3/34) ने हैट्रिक लेकर इतिहास रचा. वह टी20 इंटरनेशनल में दो हैट्रिक लेने वाले लसिथ मलिंगा के बाद दूसरे गेंदबाज बने.
India Vs New Zealand दोnd Tबीस Match Report Today: तीन मैचों की सीरीज में भारत ने एक-शून्य से बढ़त ले ली है. टीबीस वर्ल्ड कप की निराशा के दस दिनों बाद आखिरकार भारतीय टीम फिर मैदान पर उतरी और एक शानदार जीत के साथ संभावित नए दौर की शुरुआत की. कार्यवाहक कप्तान हार्दिक पंड्या के नेतृत्व में भारतीय टीम ने टीबीस सीरीज के दूसरे मैच में न्यूजीलैंड को पैंसठ रनों के बड़े अंतर से हरा दिया. पूरे साल भर दुनिया के अलग-अलग मैदानों में गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाने वाले सूर्यकुमार यादव ने अपने पहले न्यूजीलैंड दौरे पर भी वही कमाल किया और एक हैरतअंगेज शतक ठोककर टीम की जीत की बुनियाद रखी. इस बुनियाद पर सफलता की इमारत बनाई युजवेंद्र चहल और दीपक हुड्डा की स्पिन ने. माउंट माउनगानुई में रविवार बीस नवंबर को बे ओवल मैदान में सूर्यकुमार यादव की 'वीडियो गेम' अंदाज में बैटिंग ने कीवी टीम के सामने एक सौ बानवे रनों का लक्ष्य रखा था. न्यूजीलैंड को भी इसका जवाब देने के लिए जोरदार बल्लेबाजी की जरूरत थी. इसके लिए युवा ओपनर फिन ऐलन से ताबड़तोड़ बैटिंग की उम्मीद थी लेकिन भुवनेश्वर कुमार ने सिर्फ दो गेंदों के अंदर उन्हें पवेलियन लौटा दिया. डेवन कॉनवे ने कप्तान केन विलियमसन के साथ अर्धशतकीय साझेदारी की, लेकिन फिर भारत के स्पिनरों का जलवा देखने को मिला. डेढ़ साल बाद टीबीस टीम में लौटे वॉशिंगटन सुंदर ने कॉनवे का विकेट चटकाया. फिर कहर बरपाया युजवेंद्र चहल ने, जिन्हें पूरे टीबीस विश्व कप में टीम इंडिया ने बेंच पर बैठाए रखा. चहल ने न्यूजीलैंड के दो सबसे विस्फोटक बल्लेबाज, ग्लेन फिलिप्स और जेम्स नीशम को अपना शिकार बनाते हुए न्यूजीलैंड की हालत पतली कर दी. न्यूजीलैंड ने सिर्फ निन्यानवे रन तक ही छः विकेट गंवा दिए थे, लेकिन दूसरी ओर से कप्तान विलियमसन दूसरे छोर से डटे हुए थे. हालांकि, वह फिर तेजी से रन बना पाने में नाकाम रहे, जिसके कारण टीम के स्कोर की रफ्तार नहीं बढ़ा सके और इसका असर भी कीवी टीम पर पड़ा. फिर चहल के बाद दीपक हुड्डा ने भी दिखाया कि टीम इंडिया ने कैसे एशिया कप और फिर टीबीस विश्व कप में उनकी स्पिन का इस्तेमाल न कर कितनी बड़ी गलती की. हुड्डा ने पहले डैरिल मिचेल को फंसाया और फिर उन्नीसवें ओवर में आखिरी तीन विकेट लेकर एक सौ छब्बीस रन पर न्यूजीलैंड को ढेर कर दिया. इससे पहले बारिश से प्रभावित भारतीय पारी में एक बार फिर सूर्या का जलवा देखने को मिला. पिछले साल अपने डेब्यू के बाद से ही टीबीस क्रिकेट में अतरंगी लेकिन आक्रामक बल्लेबाजी के कारण पहचान बना चुके सूर्या ने इस बार भी वही अंदाज जारी रखा. ऑस्ट्रेलिया में विश्व कप में जोरदार रन बरसाने वाले सूर्या ने सिर्फ इक्यावन गेंदों में एक सौ ग्यारह रनों की नाबाद पारी खेलकर टीम को एक सौ इक्यानवे के स्कोर तक पहुंचाया. सूर्या ने आखिरी पाँच ओवरों में कीवी गेंदबाजों की धुनाई करते हुए सिर्फ उनचास गेंदों में अपना शतक पूरा किया. इसमें लॉकी फर्ग्युसन के ओवर में ही बाईस रन बटोर लिए थे. हालांकि, आखिरी ओवर में उन्हें एक भी गेंद खेलने को नहीं मिली, जिसने भारत को दो सौ तक नहीं पहुंचने दिया. हालांकि, उनके अलावा टीम इंडिया का कोई भी बल्लेबाज खास असर नहीं डाल पाया. इस मुकाबले में भारत ने ऋषभ पंत और इशान किशन के रूप में आक्रामक बल्लेबाजों की ओपनिंग जोड़ी को मैदान में उतारा लेकिन पहले ऑडिशन में ये प्रयास सफल नहीं हुआ. खास तौर पर पंत को कीवी पेसरों ने मुश्किल में डाला और तेरह गेंदों में सिर्फ छः रन बनाकर आउट हो गए. इशान ने कुछ अच्छे शॉट्स लगाए, लेकिन वह भी ज्यादा प्रभावी नहीं लगे. श्रेयस अय्यर, कप्तान हार्दिक पंड्या और दीपक हुड्डा भी कुछ खास नहीं कर सके. न्यूजीलैंड की ओर से आखिरी ओवर में टिम साउदी ने हैट्रिक लेकर इतिहास रचा. वह टीबीस इंटरनेशनल में दो हैट्रिक लेने वाले लसिथ मलिंगा के बाद दूसरे गेंदबाज बने.
- सावन मास का प्रत्येक दिन खास होता है। - सावन मास में कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को हरियाली अमावस्या के रुप में जाना जाता है। - श्रावण अमावस्या के दिन नदी स्नान और दान-पुण्य का बड़ा महत्व होता है। साल 2021 में सावन हरियाली अमावस्या का पर्व 08 अगस्त, रविवार के दिन मनाया जाएगा। हरियाली अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर सूर्यदेव को जल का अर्घ्य दें और फिर पितरों के निमित तर्पण करें। इस दिन पितरों की आत्मशांति के लिए दान, पूजा पाठ, ब्राह्मणों को भोजन आदि कराना चाहिए। संभव हो तो श्रावणी अमावस्या का उपवास करें। इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा और परिक्रमा करने का विधान है। सावन अमावस्या पर शिवलिंग पर जल चढ़ाकर बिल्वपत्र और धतूरा अर्पित करें और साथ ही भगवान शिव को चंदन से तिलक कर मीठे का भोग लगाएं। हरियाली अमावस्या के दिन आम, आंवला, पीपल बरगद और नीम के पौधे लगाना शुभ होता है। - धार्मिक दृष्टि से अमावस्या तिथि बहुत ही लाभकारी मानी जाती है। शास्त्रों के अनुसार, यदि अमावस्या तिथि पर कुछ विशेष कार्य किए जाएं तो कहा जाता है कि, व्यक्ति को सुख-समृद्धि का वरदान प्राप्त होता है। - सावन की अमावस्या के दिन हनुमान मंदिर जाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें। तथा हनुमान जी को सिन्दूर और चमेली का तेल चढ़ाएं। - अमावस्या की शाम को मां लक्ष्मी का प्रसन्न करने के लिए घर के ईशान कोण में घी का दीपक जलाएं। इससे घर से दरिद्रता दूर होती है। - इस दिन प्रातःकाल पीपल के वृक्ष की पूजा कर जल चढ़ाने और परिक्रमा करने से जीवन में सफलता मिलती है। - श्रावणी अमावस्या के दिन शाम को शिवजी की विधिवत पूजा करेंऔर उन्हें खीर का भोग लगाएं। ऐसा करने से आपको शिवजी की कृपा मिलती है। - अमावस्या की रात को घर में पूजा करते समय पूजा की थाली में स्वास्तिक या ऊँ बनाकर उस पर महालक्ष्मी यंत्र रखकर पूजा करना लाभकारी होता है। - अमावस्या के दिन काली चींटियो को शक्कर मिला आटा खिलाना चाहिए। - हरियाली अमावस्या की शाम तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाकर परिक्रमा करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। (Disclaimer: इस स्टोरी में दी गई सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं। Haribhoomi. com इनकी पुष्टि नहीं करता है। इन तथ्यों को अमल में लाने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)
- सावन मास का प्रत्येक दिन खास होता है। - सावन मास में कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को हरियाली अमावस्या के रुप में जाना जाता है। - श्रावण अमावस्या के दिन नदी स्नान और दान-पुण्य का बड़ा महत्व होता है। साल दो हज़ार इक्कीस में सावन हरियाली अमावस्या का पर्व आठ अगस्त, रविवार के दिन मनाया जाएगा। हरियाली अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर सूर्यदेव को जल का अर्घ्य दें और फिर पितरों के निमित तर्पण करें। इस दिन पितरों की आत्मशांति के लिए दान, पूजा पाठ, ब्राह्मणों को भोजन आदि कराना चाहिए। संभव हो तो श्रावणी अमावस्या का उपवास करें। इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा और परिक्रमा करने का विधान है। सावन अमावस्या पर शिवलिंग पर जल चढ़ाकर बिल्वपत्र और धतूरा अर्पित करें और साथ ही भगवान शिव को चंदन से तिलक कर मीठे का भोग लगाएं। हरियाली अमावस्या के दिन आम, आंवला, पीपल बरगद और नीम के पौधे लगाना शुभ होता है। - धार्मिक दृष्टि से अमावस्या तिथि बहुत ही लाभकारी मानी जाती है। शास्त्रों के अनुसार, यदि अमावस्या तिथि पर कुछ विशेष कार्य किए जाएं तो कहा जाता है कि, व्यक्ति को सुख-समृद्धि का वरदान प्राप्त होता है। - सावन की अमावस्या के दिन हनुमान मंदिर जाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें। तथा हनुमान जी को सिन्दूर और चमेली का तेल चढ़ाएं। - अमावस्या की शाम को मां लक्ष्मी का प्रसन्न करने के लिए घर के ईशान कोण में घी का दीपक जलाएं। इससे घर से दरिद्रता दूर होती है। - इस दिन प्रातःकाल पीपल के वृक्ष की पूजा कर जल चढ़ाने और परिक्रमा करने से जीवन में सफलता मिलती है। - श्रावणी अमावस्या के दिन शाम को शिवजी की विधिवत पूजा करेंऔर उन्हें खीर का भोग लगाएं। ऐसा करने से आपको शिवजी की कृपा मिलती है। - अमावस्या की रात को घर में पूजा करते समय पूजा की थाली में स्वास्तिक या ऊँ बनाकर उस पर महालक्ष्मी यंत्र रखकर पूजा करना लाभकारी होता है। - अमावस्या के दिन काली चींटियो को शक्कर मिला आटा खिलाना चाहिए। - हरियाली अमावस्या की शाम तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाकर परिक्रमा करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
पाकिस्तान के एक सासंद ने कहा है कि ईरानी राष्ट्रपति के हालिया इस्लामाबाद दौरे के बाद, दोनों देश के व्यापारिक व आर्थिक संबंध के विस्तार के मार्ग में बहुत सी रुकावटें दूर हुयी हैं। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया है कि उसने उनके देश के खिलाफ अघोषित जंग शुरु कर रखी है। ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने पाकिस्तान और भारत के बीच कश्मीर सहित अन्य समस्याओं के समाधान के लिए मध्यस्थता की भूमिका निभाने की पेशकश की है। विदेशी मामलों में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के सलाहकार सरताज अज़ीज़ ने एक बार फिर कहा है कि उनका देश पाकिस्तान के साथ वार्ता के लिए तैयार है। भारत के प्रधानमंत्री ने कहा है कि आतंकी शक्तियों को शरण देने वालों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की ज़रूरत है। भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने कहा है कि पाकिस्तान कश्मीर समस्या, आतंकवाद और लाइन आफ़ कंट्रोल पर फ़ायरिंग सहित विभिन्न मामलों में बातचीत के लिए भारत से भीख नहीं मांगे। भारत के साथ तनावों को कम करने हेतु वार्ता के लिए पाकिस्तान की तत्परता इस प्रक्रिया के जारी रहने के प्रति इस्लामाबाद की चिंता की सूचक है। विदेश मामलों पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के सलाहकार सरताज अज़ीज़, अमृतसर में आयोजित होने वाले हार्ट ऑफ एशिया के सम्मेलन में भाग लेने के लिए रविवार को भारत जाएंगे। भारत ने कहा अमृतसर में होने वाले हार्ट ऑफ़ एशिया सम्मेलन के दौरान पाकिस्तान से द्विपक्षीय वार्ता के लिए कोई अनुरोध नहीं मिला है। पाकिस्तान की सेना के नये प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा ने इस देश की सेना की कमान संभाल ली है।
पाकिस्तान के एक सासंद ने कहा है कि ईरानी राष्ट्रपति के हालिया इस्लामाबाद दौरे के बाद, दोनों देश के व्यापारिक व आर्थिक संबंध के विस्तार के मार्ग में बहुत सी रुकावटें दूर हुयी हैं। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया है कि उसने उनके देश के खिलाफ अघोषित जंग शुरु कर रखी है। ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने पाकिस्तान और भारत के बीच कश्मीर सहित अन्य समस्याओं के समाधान के लिए मध्यस्थता की भूमिका निभाने की पेशकश की है। विदेशी मामलों में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के सलाहकार सरताज अज़ीज़ ने एक बार फिर कहा है कि उनका देश पाकिस्तान के साथ वार्ता के लिए तैयार है। भारत के प्रधानमंत्री ने कहा है कि आतंकी शक्तियों को शरण देने वालों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की ज़रूरत है। भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने कहा है कि पाकिस्तान कश्मीर समस्या, आतंकवाद और लाइन आफ़ कंट्रोल पर फ़ायरिंग सहित विभिन्न मामलों में बातचीत के लिए भारत से भीख नहीं मांगे। भारत के साथ तनावों को कम करने हेतु वार्ता के लिए पाकिस्तान की तत्परता इस प्रक्रिया के जारी रहने के प्रति इस्लामाबाद की चिंता की सूचक है। विदेश मामलों पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के सलाहकार सरताज अज़ीज़, अमृतसर में आयोजित होने वाले हार्ट ऑफ एशिया के सम्मेलन में भाग लेने के लिए रविवार को भारत जाएंगे। भारत ने कहा अमृतसर में होने वाले हार्ट ऑफ़ एशिया सम्मेलन के दौरान पाकिस्तान से द्विपक्षीय वार्ता के लिए कोई अनुरोध नहीं मिला है। पाकिस्तान की सेना के नये प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा ने इस देश की सेना की कमान संभाल ली है।
डेनमार्क के रक्षा मंत्री को यूक्रेन में स्टिंगर MANPADS भेजने का "कोई मतलब नहीं दिखता" डेनमार्क द्वारा वादा किया गया सैन्य सहायता यूक्रेन को प्राप्त नहीं होगा, लेकिन कोपेनहेगन रूसी सैनिकों के संभावित आक्रमण की पृष्ठभूमि के खिलाफ कीव के लिए समर्थन व्यक्त करना जारी रखता है। यह देश के रक्षा मंत्री मोर्टन बेड्सकोव ने कहा था। बुधवार, 9 फरवरी को डेनिश सशस्त्र बलों के कमांडर फ्लेमिंग लेंटफर के साथ एक संयुक्त ब्रीफिंग में बोलते हुए, डेनिश सैन्य विभाग के प्रमुख ने कहा कि डेनमार्क के पास यूक्रेन के लिए आवश्यक हथियार हैं, विशेष रूप से, स्टिंगर MANPADS, लेकिन देश की सरकार को कोई कारण नहीं दिखता है। उन्हें कीव भेजने के लिए, क्योंकि वे पहले से ही पुराने हैं। उनके अनुसार, विमान-रोधी प्रणालियाँ गैर-कार्यशील स्थिति में गोदामों में हैं और निपटान की प्रतीक्षा कर रही हैं, लेकिन डेनमार्क को यूक्रेन को क्या भेजना चाहिए "काम करना चाहिए। " ब्रीफिंग में भाग लेते हुए, डेनिश सशस्त्र बलों के कमांडर ने कहा कि, पुराने स्टिंगर MANPADS के अलावा, डेनमार्क के पास यूक्रेन के लिए कोई अन्य हथियार नहीं है। बल्कि, यह है, लेकिन स्वयं डेन द्वारा आवश्यक है। फ्लेमिंग लेंटफर ने कहा। इस प्रकार, डेनमार्क ने सीधे यूक्रेन को सूचित किया कि वह इसे किसी के साथ आपूर्ति नहीं करने जा रहा था हथियारों. शायद बाद में कुछ दिया जाएगा, लेकिन अभी नहीं। उसी समय, कोपेनहेगन ने यूक्रेन के साथ एकजुटता व्यक्त की और रूस की नीति की निंदा की, लेकिन इससे यूक्रेनी रक्षा मंत्री ओलेक्सी रेज़निकोव के लिए यह आसान नहीं हुआ, वह पहले से ही सभी को रिंग करने में कामयाब रहा था कि वह डेनमार्क से सैन्य सहायता की उम्मीद कर रहा था। इस बीच, डेनमार्क को ही संदेह है कि यूक्रेन को स्टिंगर MANPADS की आपूर्ति करने से इनकार केवल इस तथ्य में निहित है कि वे पुराने हैं। जैसा कि स्थानीय प्रेस लिखता है, तीन साल पहले इन MANPADS का एक बैच लातविया को बेचा गया था, और एक साल पहले वे काफी काम कर रहे थे और अभ्यास में इस्तेमाल किए गए थे। - इस्तेमाल की गई तस्वीरेंः
डेनमार्क के रक्षा मंत्री को यूक्रेन में स्टिंगर MANPADS भेजने का "कोई मतलब नहीं दिखता" डेनमार्क द्वारा वादा किया गया सैन्य सहायता यूक्रेन को प्राप्त नहीं होगा, लेकिन कोपेनहेगन रूसी सैनिकों के संभावित आक्रमण की पृष्ठभूमि के खिलाफ कीव के लिए समर्थन व्यक्त करना जारी रखता है। यह देश के रक्षा मंत्री मोर्टन बेड्सकोव ने कहा था। बुधवार, नौ फरवरी को डेनिश सशस्त्र बलों के कमांडर फ्लेमिंग लेंटफर के साथ एक संयुक्त ब्रीफिंग में बोलते हुए, डेनिश सैन्य विभाग के प्रमुख ने कहा कि डेनमार्क के पास यूक्रेन के लिए आवश्यक हथियार हैं, विशेष रूप से, स्टिंगर MANPADS, लेकिन देश की सरकार को कोई कारण नहीं दिखता है। उन्हें कीव भेजने के लिए, क्योंकि वे पहले से ही पुराने हैं। उनके अनुसार, विमान-रोधी प्रणालियाँ गैर-कार्यशील स्थिति में गोदामों में हैं और निपटान की प्रतीक्षा कर रही हैं, लेकिन डेनमार्क को यूक्रेन को क्या भेजना चाहिए "काम करना चाहिए। " ब्रीफिंग में भाग लेते हुए, डेनिश सशस्त्र बलों के कमांडर ने कहा कि, पुराने स्टिंगर MANPADS के अलावा, डेनमार्क के पास यूक्रेन के लिए कोई अन्य हथियार नहीं है। बल्कि, यह है, लेकिन स्वयं डेन द्वारा आवश्यक है। फ्लेमिंग लेंटफर ने कहा। इस प्रकार, डेनमार्क ने सीधे यूक्रेन को सूचित किया कि वह इसे किसी के साथ आपूर्ति नहीं करने जा रहा था हथियारों. शायद बाद में कुछ दिया जाएगा, लेकिन अभी नहीं। उसी समय, कोपेनहेगन ने यूक्रेन के साथ एकजुटता व्यक्त की और रूस की नीति की निंदा की, लेकिन इससे यूक्रेनी रक्षा मंत्री ओलेक्सी रेज़निकोव के लिए यह आसान नहीं हुआ, वह पहले से ही सभी को रिंग करने में कामयाब रहा था कि वह डेनमार्क से सैन्य सहायता की उम्मीद कर रहा था। इस बीच, डेनमार्क को ही संदेह है कि यूक्रेन को स्टिंगर MANPADS की आपूर्ति करने से इनकार केवल इस तथ्य में निहित है कि वे पुराने हैं। जैसा कि स्थानीय प्रेस लिखता है, तीन साल पहले इन MANPADS का एक बैच लातविया को बेचा गया था, और एक साल पहले वे काफी काम कर रहे थे और अभ्यास में इस्तेमाल किए गए थे। - इस्तेमाल की गई तस्वीरेंः
लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) ने फिल्म अभिनेत्री गुल पनाग को चंडीगढ़ से अपना उम्मीदवार बनाया है। उन्हें पार्टी ने सविता भट्टी के टिकट के लिए न करने के बाद टिकट दिया है। गुल पनाग के नाम की घोषणा आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति के सदस्य मनीष सिसोदिया ने चंडीगढ़ के प्रेस क्लब में की। मनीष सिसोदिया ने गुल पनाग को आप की टोपी दी। इस मौके पर मनीष सिसोदिया ने कहा कि आम आदमी पार्टी का लक्ष्य भ्रष्टाचार खत्म करना है। गुलपनाग ने कहा कि मैं केंद्रीय विद्यालय की पढ़ी हूं, हरेक बात को जानती हूं। मेरे दादा जी 1960 में चंडीगढ़ में आए। उनका सपना समाजसेवा का रहा और इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने AAP ज्वाइन की है। मनीष सिसोदिया ने कहा गुल खास नहीं हैं, बल्कि वह भी आम आदमी की तरह हैं। गुल पनाग ने कहा कि आम आदमी की तरह ही वह अपने लक्ष्यों को हासिल करते हुए एक मुकाम तक पहुंची है।
लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने फिल्म अभिनेत्री गुल पनाग को चंडीगढ़ से अपना उम्मीदवार बनाया है। उन्हें पार्टी ने सविता भट्टी के टिकट के लिए न करने के बाद टिकट दिया है। गुल पनाग के नाम की घोषणा आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति के सदस्य मनीष सिसोदिया ने चंडीगढ़ के प्रेस क्लब में की। मनीष सिसोदिया ने गुल पनाग को आप की टोपी दी। इस मौके पर मनीष सिसोदिया ने कहा कि आम आदमी पार्टी का लक्ष्य भ्रष्टाचार खत्म करना है। गुलपनाग ने कहा कि मैं केंद्रीय विद्यालय की पढ़ी हूं, हरेक बात को जानती हूं। मेरे दादा जी एक हज़ार नौ सौ साठ में चंडीगढ़ में आए। उनका सपना समाजसेवा का रहा और इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने AAP ज्वाइन की है। मनीष सिसोदिया ने कहा गुल खास नहीं हैं, बल्कि वह भी आम आदमी की तरह हैं। गुल पनाग ने कहा कि आम आदमी की तरह ही वह अपने लक्ष्यों को हासिल करते हुए एक मुकाम तक पहुंची है।
लंदन स्थित मेटावर्स स्टार्टअप इम्प्रोबेबल को एक नई इकाई बनाने के लिए $150 मिलियन का महत्वपूर्ण धन प्राप्त हुआ है जिसका उद्देश्य ब्लॉकचेन-आधारित दुनिया को आपस में जोड़ना है। M² कहा जाता है, मिराना, डिजिटल करेंसी ग्रुप, CMT, SIG और ईथर वेंचर्स सहित Web3 स्पेस में उल्लेखनीय निवेशकों से $ 150 मिलियन जुटाने के बाद परियोजना पहले ही $ 1 बिलियन के मूल्य तक पहुंच गई है। फंडिंग राउंड का नेतृत्व असंभव समर्थकों आंद्रेसेन होरोविट्ज़ और सॉफ्टबैंक ग्रुप कॉर्प ने किया था। इम्प्रोबेबल, 2012 में स्थापित, 60 से अधिक गेम प्रकाशकों को मल्टीप्लेयर वीआर-सक्षम तकनीकों और सेवाओं को प्रदान करने के लिए जाना जाता है। कंपनी को अब तक इस दौर के साथ संयुक्त रूप से कुल $754.1 मिलियन का वित्त पोषण प्राप्त हुआ है। कंपनी का नवीनतम उद्यम एम², एम स्क्वायर के रूप में उच्चारित, इम्प्रोबेबल से एक अलग स्वतंत्र इकाई के रूप में काम करेगा। नवीनतम फंडिंग के साथ, नया प्रतिष्ठान मॉर्फियस तकनीक का लाभ उठाएगा ताकि कई आभासी दुनिया के बीच अंतर को सक्षम किया जा सके। मॉर्फियस इम्प्रोबेबल का एक अपेक्षाकृत नया उत्पाद है जो एक ही वर्चुअल स्पेस में 10,000 से अधिक खिलाड़ियों का समर्थन करता है। इम्प्रोबेबल के सीईओ हरमन नरूला ने कहा प्रेस विज्ञप्तिः "एम² इस भविष्य को स्थापित करने में हमारा योगदान है और हम आशा करते हैं कि हमारे भागीदारों को कई प्रतिभागियों और सफलता की कहानियों के साथ एक खुले मेटावर्स को उत्प्रेरित करने में मदद मिलेगी," उन्होंने कहा।
लंदन स्थित मेटावर्स स्टार्टअप इम्प्रोबेबल को एक नई इकाई बनाने के लिए एक सौ पचास डॉलर मिलियन का महत्वपूर्ण धन प्राप्त हुआ है जिसका उद्देश्य ब्लॉकचेन-आधारित दुनिया को आपस में जोड़ना है। M² कहा जाता है, मिराना, डिजिटल करेंसी ग्रुप, CMT, SIG और ईथर वेंचर्स सहित Webतीन स्पेस में उल्लेखनीय निवेशकों से एक सौ पचास डॉलर मिलियन जुटाने के बाद परियोजना पहले ही एक डॉलर बिलियन के मूल्य तक पहुंच गई है। फंडिंग राउंड का नेतृत्व असंभव समर्थकों आंद्रेसेन होरोविट्ज़ और सॉफ्टबैंक ग्रुप कॉर्प ने किया था। इम्प्रोबेबल, दो हज़ार बारह में स्थापित, साठ से अधिक गेम प्रकाशकों को मल्टीप्लेयर वीआर-सक्षम तकनीकों और सेवाओं को प्रदान करने के लिए जाना जाता है। कंपनी को अब तक इस दौर के साथ संयुक्त रूप से कुल सात सौ चौवन दशमलव एक डॉलर मिलियन का वित्त पोषण प्राप्त हुआ है। कंपनी का नवीनतम उद्यम एम², एम स्क्वायर के रूप में उच्चारित, इम्प्रोबेबल से एक अलग स्वतंत्र इकाई के रूप में काम करेगा। नवीनतम फंडिंग के साथ, नया प्रतिष्ठान मॉर्फियस तकनीक का लाभ उठाएगा ताकि कई आभासी दुनिया के बीच अंतर को सक्षम किया जा सके। मॉर्फियस इम्प्रोबेबल का एक अपेक्षाकृत नया उत्पाद है जो एक ही वर्चुअल स्पेस में दस,शून्य से अधिक खिलाड़ियों का समर्थन करता है। इम्प्रोबेबल के सीईओ हरमन नरूला ने कहा प्रेस विज्ञप्तिः "एम² इस भविष्य को स्थापित करने में हमारा योगदान है और हम आशा करते हैं कि हमारे भागीदारों को कई प्रतिभागियों और सफलता की कहानियों के साथ एक खुले मेटावर्स को उत्प्रेरित करने में मदद मिलेगी," उन्होंने कहा।
पूरे देश में एक बार फिर से COVID-19 के मामलों में अचानक से उछाल देखने को मिल रहा है। कोविड के बढ़ते मामलों के चलते कई राज्यों में वीकेंड लॉकडाउन भी लग चुका है वहीं, भारत में प्रमुख क्रिकेट गतिविधियां भी रुक गई हैं। कोविड की वापसी से फैंस काफी दुखी हैं और अपनी निराशा सोशल मीडिया पर व्यक्त कर रहे हैं। इसी कड़ी में एक फैन ने ट्विटर पर दिल्ली पुलिस से एक सवाल पूछा जिसका दिल्ली पुलिस ने भी मज़ेदार जवाब दिया। इस ट्विटर यूज़र ने अपने सवाल में पूछा, 'क्या हम सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क लगाकर क्रिकेट खेल सकते हैं ?'
पूरे देश में एक बार फिर से COVID-उन्नीस के मामलों में अचानक से उछाल देखने को मिल रहा है। कोविड के बढ़ते मामलों के चलते कई राज्यों में वीकेंड लॉकडाउन भी लग चुका है वहीं, भारत में प्रमुख क्रिकेट गतिविधियां भी रुक गई हैं। कोविड की वापसी से फैंस काफी दुखी हैं और अपनी निराशा सोशल मीडिया पर व्यक्त कर रहे हैं। इसी कड़ी में एक फैन ने ट्विटर पर दिल्ली पुलिस से एक सवाल पूछा जिसका दिल्ली पुलिस ने भी मज़ेदार जवाब दिया। इस ट्विटर यूज़र ने अपने सवाल में पूछा, 'क्या हम सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क लगाकर क्रिकेट खेल सकते हैं ?'
बुधवार को केकेआर के खिलाफ करो या मरो मुकाबले में सनराइजर्स हैदराबाद के बल्लेबाज शिखर धवन हालांकि जल्दी अपना विकेट गंवा गए लेकिन कप्तान वॉर्नर के साथ आईपीएल का सबसे बढ़िया रिकॉर्ड जरूर बना गए। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी सनराइजर्स हैदराबाद की शुरुआत तेज तो रही लेकिन जल्दी विकेट गंवाने के बाद धीमी भी हो गई। इस मैच में वॉर्नर और धवन की जोड़ी ने ऐसा रिकॉर्ड बनाया है जो न विराट कोहली और क्रिस गेल की जोड़ी कर पाई और न ही कोई और। आगे जानिए, पूरा माजरा। दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में इन दोनों ओपनरों ने बतौर जोड़ीदार आईपीएल में 1500 से ज्यादा रन बना लिए हैं। इस मैच में इन दोनों के बीच 12 रनों की साझेदारी हुई। यह आईपीएल में पहली ओपनिंग जोड़ी है जिसने 15 हजार से ज्यादा रन बनाए हों। अब आगे जानिए, इनके बाद किसका नंबर आता है।
बुधवार को केकेआर के खिलाफ करो या मरो मुकाबले में सनराइजर्स हैदराबाद के बल्लेबाज शिखर धवन हालांकि जल्दी अपना विकेट गंवा गए लेकिन कप्तान वॉर्नर के साथ आईपीएल का सबसे बढ़िया रिकॉर्ड जरूर बना गए। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी सनराइजर्स हैदराबाद की शुरुआत तेज तो रही लेकिन जल्दी विकेट गंवाने के बाद धीमी भी हो गई। इस मैच में वॉर्नर और धवन की जोड़ी ने ऐसा रिकॉर्ड बनाया है जो न विराट कोहली और क्रिस गेल की जोड़ी कर पाई और न ही कोई और। आगे जानिए, पूरा माजरा। दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में इन दोनों ओपनरों ने बतौर जोड़ीदार आईपीएल में एक हज़ार पाँच सौ से ज्यादा रन बना लिए हैं। इस मैच में इन दोनों के बीच बारह रनों की साझेदारी हुई। यह आईपीएल में पहली ओपनिंग जोड़ी है जिसने पंद्रह हजार से ज्यादा रन बनाए हों। अब आगे जानिए, इनके बाद किसका नंबर आता है।
डीजल के दाम में एक दिन के विराम के बाद बुधवार को फिर वृद्धि दर्ज की गई, जबकि पेट्रोल का भाव लगातार 16वें दिन स्थिर रहा। तेल विपणन कंपनियों ने डीजल की कीमत दिल्ली में फिर 13 पैसे, कोलकाता में 16 पैसे, मुंबई में 13 पैसे, जबकि चेन्नई में 11 पैसे प्रति लीटर बढ़ा दी है। उधर, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में लगातार दूसरे दिन तेजी जारी रही। बेंचमार्क कच्चा तेल ब्रेंट क्रूड का भाव 43 डॉलर प्रति बैरल से उपर चल रहा है, जबकि अमेरिकी क्रूड डब्ल्यूटीआई का भाव 40 डॉलर प्रति बैरल के उपर बना हुआ है। कच्चे तेल की कीमत बढ़ने पर आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की महंगाई से राहत मिलना मुश्किल होगा। इंडियन ऑयल की वेबसाइट के अनुसार, दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में डीजल की कीमत बढ़कर क्रमशः 81. 13 रुपये, 76. 33 रुपये, 79. 40 रुपये और 78. 22 रुपये प्रति लीटर हो गई ह,ै जबकि पेट्रोल का भाव भी चारों महानगरों में बिना किसी बदलाव के क्रमशः 80. 43 रुपये, 82. 10 रुपये, 87. 19 रुपये और 83. 63 रुपये प्रति लीटर बना हुआ है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में डीजल पेट्रोल के मुकाबले 75 पैसे लीटर महंगा हो गया है। अंतर्राष्ट्रीय वायदा बाजार इंटरकांटिनेंटल एक्सचेंज ; आईसीई पर बेंचमार्क कच्चा तेल ब्रेंट क्रूड के सितंबर वायदा अनुबंध में बुधवार को पिछले सत्र से 0. 63 फीसदी की तेजी के साथ 43. 17 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार चल रहा था। वहीं, न्यूयार्क मर्केंटाइल एक्सचेंज ; नायमैक्स पर अमेरिकी लाइट क्रूड वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट ; डब्ल्यूटीआई के अगस्त वायदा अनुबंध में पिछले सत्र से 0. 65 फीसदी की तेजी के साथ 40. 55 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार चल रहा था।
डीजल के दाम में एक दिन के विराम के बाद बुधवार को फिर वृद्धि दर्ज की गई, जबकि पेट्रोल का भाव लगातार सोलहवें दिन स्थिर रहा। तेल विपणन कंपनियों ने डीजल की कीमत दिल्ली में फिर तेरह पैसे, कोलकाता में सोलह पैसे, मुंबई में तेरह पैसे, जबकि चेन्नई में ग्यारह पैसे प्रति लीटर बढ़ा दी है। उधर, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में लगातार दूसरे दिन तेजी जारी रही। बेंचमार्क कच्चा तेल ब्रेंट क्रूड का भाव तैंतालीस डॉलर प्रति बैरल से उपर चल रहा है, जबकि अमेरिकी क्रूड डब्ल्यूटीआई का भाव चालीस डॉलर प्रति बैरल के उपर बना हुआ है। कच्चे तेल की कीमत बढ़ने पर आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की महंगाई से राहत मिलना मुश्किल होगा। इंडियन ऑयल की वेबसाइट के अनुसार, दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में डीजल की कीमत बढ़कर क्रमशः इक्यासी. तेरह रुपयापये, छिहत्तर. तैंतीस रुपयापये, उन्यासी. चालीस रुपयापये और अठहत्तर. बाईस रुपयापये प्रति लीटर हो गई ह,ै जबकि पेट्रोल का भाव भी चारों महानगरों में बिना किसी बदलाव के क्रमशः अस्सी. तैंतालीस रुपयापये, बयासी. दस रुपयापये, सत्तासी. उन्नीस रुपयापये और तिरासी. तिरेसठ रुपयापये प्रति लीटर बना हुआ है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में डीजल पेट्रोल के मुकाबले पचहत्तर पैसे लीटर महंगा हो गया है। अंतर्राष्ट्रीय वायदा बाजार इंटरकांटिनेंटल एक्सचेंज ; आईसीई पर बेंचमार्क कच्चा तेल ब्रेंट क्रूड के सितंबर वायदा अनुबंध में बुधवार को पिछले सत्र से शून्य. तिरेसठ फीसदी की तेजी के साथ तैंतालीस. सत्रह डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार चल रहा था। वहीं, न्यूयार्क मर्केंटाइल एक्सचेंज ; नायमैक्स पर अमेरिकी लाइट क्रूड वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट ; डब्ल्यूटीआई के अगस्त वायदा अनुबंध में पिछले सत्र से शून्य. पैंसठ फीसदी की तेजी के साथ चालीस. पचपन डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार चल रहा था।
भारतीय सनातन पंचांग के अनुसार अक्षय तृतीया तिथि को वर्ष का सबसे शुभ मुहूर्त होता है। इस मुहूर्त में किया गया प्रत्येक शुभ कार्य सफल व मंगलदायक होता है। इसलिए अक्षय तृतीया को बड़ी संख्या में लोग विवाह करते हैं। कहते हैं इस तिथि को उन लोगों का विवाह हो जाता है, जिनकी कुंडली में विवाह का योग नहीं बन रहा होता। आने वाले 26 अप्रैल को अक्षय तृतीया है, इस तिथि को दिल्ली में ही लगभग 30 से 40 हजार शादियां होनी थीं, जिन्हें लॉकडाउन के कारण टालना पड़ा। आचार्य पंडित बृजेश कुमार मिश्र ने बताया कि अक्षय तृतीया को ही भगवान परशुराम का जन्म उत्सव मनाया जाता है। इस तिथि को सूर्य और बुध का मेल होता है। मानव कल्याण के मुताबिक सभी ग्रहों की स्थिति ठीक हो जाती है, जिसके कारण भगवान इंद्र भी प्रसन्न होते हैं। 26 अप्रैल को अक्षय तृतीया के दिन सुबह 5. 45 से दोपहर 12. 19 तक साल का सबसे शुभ मुहूर्त है। इस तिथि को उन्हें आठ लोगों के विवाह का निमंत्रण मिला था। लॉकडाउन के कारण यह सभी विवाह टाल दिए गए हैं। विवाह टलने से ना केवल उन लोगों का नुकसान हुआ है जिनका विवाह होना था, बल्कि व्यापारियों, बैंड वालों शादी मंडप वालों और उससे जुड़े बहुत से लोगों का मिलाकर करोड़ों रुपयों का नुकसान हुआ है। जगतपुरी की रीना ने बताया अक्षय तृतीया के मौके पर उनके बेटे सोमिल का विवाह तय हुआ था। बारातघर, बैंड बाजे और गानों की बुकिंग हो चुकी थी लेकिन विवाह टल जाने के कारण उनके पैसे जगह-जगह पर फंस गए हैं। लगभग ऐसी ही हालत पांडव नगर के विश्व कपूर की भी है। जिनका विवाह अक्षय तृतीया को होना था। कनॉट प्लेस स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर के पुजारी पंडित सुरेश और पंडित बृजेश कुमार मिश्रा के अनुसार अक्षय तृतीया के बाद स्थिति में सुधार होने लगेगा। कोरोना का असर भी कम होने लगेगा। इन्होंने बताया कि 27 दिसंबर को संपूर्ण सूर्य ग्रहण लगने के बाद से ही हवा में सूक्ष्म जीवाणु हावी होने लगे थे। पंचांग में भी इसकी व्याख्या की गई है। सूर्य ग्रहण के बाद से ही शनि का राहु से मेल हो गया था। शनि का स्थान इंसान की नाक और मुंह है। इसके कारण मनुष्य पर कोरोना का प्रभाव बढ़ गया। अब 14 अप्रैल को सूर्य मेष राशि में और बृहस्पति मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसके बाद 26 अप्रैल को बुध और सूर्य का मेल होगा जिससे आदित्य योग बनेगा। इसके बाद सुख-समृद्धि वापस लौटेगी। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
भारतीय सनातन पंचांग के अनुसार अक्षय तृतीया तिथि को वर्ष का सबसे शुभ मुहूर्त होता है। इस मुहूर्त में किया गया प्रत्येक शुभ कार्य सफल व मंगलदायक होता है। इसलिए अक्षय तृतीया को बड़ी संख्या में लोग विवाह करते हैं। कहते हैं इस तिथि को उन लोगों का विवाह हो जाता है, जिनकी कुंडली में विवाह का योग नहीं बन रहा होता। आने वाले छब्बीस अप्रैल को अक्षय तृतीया है, इस तिथि को दिल्ली में ही लगभग तीस से चालीस हजार शादियां होनी थीं, जिन्हें लॉकडाउन के कारण टालना पड़ा। आचार्य पंडित बृजेश कुमार मिश्र ने बताया कि अक्षय तृतीया को ही भगवान परशुराम का जन्म उत्सव मनाया जाता है। इस तिथि को सूर्य और बुध का मेल होता है। मानव कल्याण के मुताबिक सभी ग्रहों की स्थिति ठीक हो जाती है, जिसके कारण भगवान इंद्र भी प्रसन्न होते हैं। छब्बीस अप्रैल को अक्षय तृतीया के दिन सुबह पाँच. पैंतालीस से दोपहर बारह. उन्नीस तक साल का सबसे शुभ मुहूर्त है। इस तिथि को उन्हें आठ लोगों के विवाह का निमंत्रण मिला था। लॉकडाउन के कारण यह सभी विवाह टाल दिए गए हैं। विवाह टलने से ना केवल उन लोगों का नुकसान हुआ है जिनका विवाह होना था, बल्कि व्यापारियों, बैंड वालों शादी मंडप वालों और उससे जुड़े बहुत से लोगों का मिलाकर करोड़ों रुपयों का नुकसान हुआ है। जगतपुरी की रीना ने बताया अक्षय तृतीया के मौके पर उनके बेटे सोमिल का विवाह तय हुआ था। बारातघर, बैंड बाजे और गानों की बुकिंग हो चुकी थी लेकिन विवाह टल जाने के कारण उनके पैसे जगह-जगह पर फंस गए हैं। लगभग ऐसी ही हालत पांडव नगर के विश्व कपूर की भी है। जिनका विवाह अक्षय तृतीया को होना था। कनॉट प्लेस स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर के पुजारी पंडित सुरेश और पंडित बृजेश कुमार मिश्रा के अनुसार अक्षय तृतीया के बाद स्थिति में सुधार होने लगेगा। कोरोना का असर भी कम होने लगेगा। इन्होंने बताया कि सत्ताईस दिसंबर को संपूर्ण सूर्य ग्रहण लगने के बाद से ही हवा में सूक्ष्म जीवाणु हावी होने लगे थे। पंचांग में भी इसकी व्याख्या की गई है। सूर्य ग्रहण के बाद से ही शनि का राहु से मेल हो गया था। शनि का स्थान इंसान की नाक और मुंह है। इसके कारण मनुष्य पर कोरोना का प्रभाव बढ़ गया। अब चौदह अप्रैल को सूर्य मेष राशि में और बृहस्पति मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसके बाद छब्बीस अप्रैल को बुध और सूर्य का मेल होगा जिससे आदित्य योग बनेगा। इसके बाद सुख-समृद्धि वापस लौटेगी। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
रायपुर के महापौर सोमवार को एक नए अभियान के साथ लोगों के बीच पहुंचे। मोर महापौर मोर द्वार नाम के इस अभियान के तहत निगम के पार्षद, अफसरों की टीम ने शहर के गोगांव और कबीर नगर इलाके का दौरा किया। करीब 6 घंटे तक निगम की टीम लोगों के बीच रही। इस दौरान नाली, कचरा, स्ट्रीट लाइट से जुड़ी शिकायतें लेकर भीड़ शिविर स्थल पर पहुंच गईं। जोन 1 और 8 के मोहल्लों में लगे शिविर में दिन भर में 315 शिकायतें पहुंचीं। निगम की तरफ से दावा किया गया है कि इसमें 301 मामलों को सुलझा लिया गया, बाकी 14 मामलों में कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। इस अभियान के पहले दिन जोन 1 के संत कबीर दास वार्ड क्रमांक 3 में गोगांव के मिडिल स्कूल गोगांव और जोन क्रमांक 8 के पंडित जवाहर लाल नेहरू वार्ड क्रमांक 2 में सामुदायिक भवन कबीर नगर में शिविर लगाया गया। रायपुर विधायक सत्यनारायण शर्मा, हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष और विधायक कुलदीप जुनेजा, सभापति प्रमोद दुबे रायपुर रायपुर ग्रामीण सहकारी बैंक के अध्यक्ष पंकज शर्मा एमआईसी सदस्य नागभूषण राव यादव,जोन 1 के अध्यक्ष मनीराम साहू, जोन 8 के अध्यक्ष घनश्याम क्षत्रिय जैसे पदाधिकारी भी शिविर में पहुंचे हुए थे। नगर निगम की एक खास बस में सवार होकर ये सभी मौके पर पहुंचे लोगों की शिकायतें सुनीं। सुखराम नगर इलाके में लोगों ने बताया कि नाला नहीं होने की वजह से पानी निकासी की समस्या है। विधायक सत्यनारायण शर्मा और महापौर ने इस वजह से अपनी निधियों से 5 - 5 लाख रुपए देने की घोषणा की। दोनों शिविरों में नया राशन कार्ड, डुप्लीकेट राशन कार्ड, नया आधार कार्ड, आधार कार्ड में सुधार, नया लाइट लगाने, बन्द लाइटों को सुधारने, नाली पुलिया सफाई, कचरे का उठाव, नया नल कनेक्शन, भवन अनुज्ञा, पीएम स्वनिधि योजना, वेंडर कार्ड, लोन, सम्पत्ति कर, आय प्रमाण पत्र, मितान कार्ड, जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे आवेदन आए। 28 जून को जोन क्रमांक 1 बाल गंगाधर तिलक, वार्ड क्रमांक 18 के सियान सदन गुढ़ियारी में और एपीजे अब्दुल कलाम वार्ड क्रमांक 19 के अशोक नगर में पार्षद कार्यालय में शिविर लगाया जाएगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
रायपुर के महापौर सोमवार को एक नए अभियान के साथ लोगों के बीच पहुंचे। मोर महापौर मोर द्वार नाम के इस अभियान के तहत निगम के पार्षद, अफसरों की टीम ने शहर के गोगांव और कबीर नगर इलाके का दौरा किया। करीब छः घंटाटे तक निगम की टीम लोगों के बीच रही। इस दौरान नाली, कचरा, स्ट्रीट लाइट से जुड़ी शिकायतें लेकर भीड़ शिविर स्थल पर पहुंच गईं। जोन एक और आठ के मोहल्लों में लगे शिविर में दिन भर में तीन सौ पंद्रह शिकायतें पहुंचीं। निगम की तरफ से दावा किया गया है कि इसमें तीन सौ एक मामलों को सुलझा लिया गया, बाकी चौदह मामलों में कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। इस अभियान के पहले दिन जोन एक के संत कबीर दास वार्ड क्रमांक तीन में गोगांव के मिडिल स्कूल गोगांव और जोन क्रमांक आठ के पंडित जवाहर लाल नेहरू वार्ड क्रमांक दो में सामुदायिक भवन कबीर नगर में शिविर लगाया गया। रायपुर विधायक सत्यनारायण शर्मा, हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष और विधायक कुलदीप जुनेजा, सभापति प्रमोद दुबे रायपुर रायपुर ग्रामीण सहकारी बैंक के अध्यक्ष पंकज शर्मा एमआईसी सदस्य नागभूषण राव यादव,जोन एक के अध्यक्ष मनीराम साहू, जोन आठ के अध्यक्ष घनश्याम क्षत्रिय जैसे पदाधिकारी भी शिविर में पहुंचे हुए थे। नगर निगम की एक खास बस में सवार होकर ये सभी मौके पर पहुंचे लोगों की शिकायतें सुनीं। सुखराम नगर इलाके में लोगों ने बताया कि नाला नहीं होने की वजह से पानी निकासी की समस्या है। विधायक सत्यनारायण शर्मा और महापौर ने इस वजह से अपनी निधियों से पाँच - पाँच लाख रुपए देने की घोषणा की। दोनों शिविरों में नया राशन कार्ड, डुप्लीकेट राशन कार्ड, नया आधार कार्ड, आधार कार्ड में सुधार, नया लाइट लगाने, बन्द लाइटों को सुधारने, नाली पुलिया सफाई, कचरे का उठाव, नया नल कनेक्शन, भवन अनुज्ञा, पीएम स्वनिधि योजना, वेंडर कार्ड, लोन, सम्पत्ति कर, आय प्रमाण पत्र, मितान कार्ड, जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे आवेदन आए। अट्ठाईस जून को जोन क्रमांक एक बाल गंगाधर तिलक, वार्ड क्रमांक अट्ठारह के सियान सदन गुढ़ियारी में और एपीजे अब्दुल कलाम वार्ड क्रमांक उन्नीस के अशोक नगर में पार्षद कार्यालय में शिविर लगाया जाएगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
अमरीका के न्यूयॉर्क में एक रेस्त्रां है, जहां दुनिया की सबसे महंगी फ्रेंच फ्राइज तैयार होती है। इसे बनाने का तरीका जितना खास है, उतना ही इसे सर्व करने का तरीका भी अनूठा है। यह फ्रेंच फ्राइज गिनीज बुक ऑफ द वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है। न्यूयॉर्क। फास्ट फूड या जंक फूड किसे पसंद नहीं। बच्चे ही नहीं बड़े भी इसके दीवाने हैं। सभी को पता है यह तमाम तरह की बीमारियों की वजह भी है, फिर भी अनूठे और चटपटे स्वाद की वजह से लोग इसे पसंद करते हैं। पिज्जा हो या बर्गर, मंचूरियन हो या चाऊमिन या फिर फ्रेंच फ्राइज, इनका नाम लेते ही मुंह में पानी आ जाता है। फिलहाल आज बात करेंगे, फ्रेंच फ्राइज की। मगर साधारण नहीं बल्कि, एक खास फ्रेंच फाइज जिसकी कीमत आपके होश उड़ा देगी और सर्व करने का तरीका आपका दिल खुश कर देगा। यह अनोखा और मजेदार फ्रेंच फाइज भी आलू से ही बनता है, बस इसका मिश्रण कुछ खास तरह का होता है, जो इसे कुछ हटकर बनाता है। यह कारनामा किया है अमरीका के एक रेस्त्रां ने। यह रेस्त्रां न्यूयॉर्क में है, जिसका नाम सेरेन डिप्टी-3 है। इसमें क्रीम दे ला क्रीम पोम फ्राइट्स (Creme de la Creme Pomme Frites) नाम से मजेदार फ्रेंच फ्राइज मिलता है। इस फ्रेंच फ्राइज के एक प्लेट की कीमत 200 डॉलर है। जी हां, आपने सही पढ़ा। भारतीय मुद्रा में इसकी कीमत करीब 15 हजार रुपए होती है और इतने में एक स्मार्टफोन आसानी से खरीदा जा सकता है। अपनी खास क्वॉलिटी और रेट की वजह से पिछले साल वर्ष 2021 में इसका नाम गिनीज बुक ऑफ द वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है। बहरहाल, सोशल मीडिया पर अब तक के सबसे महंगे फ्रेंच फाइज से जुड़ी एक वीडियो खूब वायरल हो रही है। इसमें बताया गया है कि फ्रेंच फ्राइज को बनाने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले आलू का इस्तेमाल हुआ है। इसे रेस्त्रां के शेफ जो और फ्रेडी ने तैयार किया है। आलू के अलावा, इसमें विंटेज 2006 की शैंपेन, जे ली ब्लेंक फ्रेंच शैंपेन विनगर, ट्रफल सॉल्ट, चीज, बटर और 23 कैरेट इडेबल गोल्ड डस्टिंग हुई है। इसके अलावा, आर्गेनिक जर्सी गायों के दूध से तैयार क्रीम मिलाई जाती है, तब जाकर इसे मोर्ने सॉस के साथ परोसा जाता है। मगर ऐसे ही किसी साधारण प्लेट में नहीं। जितने खास तरीके से इसे बनाया जाता है, उतने ही खास तरीके से इसे परोसा भी जाता है। इसे बैकरेट क्रिस्टल अरबीस्क प्लेट में सर्व किया जाता है। तब जाकर इसकी कीमत 15 हजार रुपए होती है।
अमरीका के न्यूयॉर्क में एक रेस्त्रां है, जहां दुनिया की सबसे महंगी फ्रेंच फ्राइज तैयार होती है। इसे बनाने का तरीका जितना खास है, उतना ही इसे सर्व करने का तरीका भी अनूठा है। यह फ्रेंच फ्राइज गिनीज बुक ऑफ द वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है। न्यूयॉर्क। फास्ट फूड या जंक फूड किसे पसंद नहीं। बच्चे ही नहीं बड़े भी इसके दीवाने हैं। सभी को पता है यह तमाम तरह की बीमारियों की वजह भी है, फिर भी अनूठे और चटपटे स्वाद की वजह से लोग इसे पसंद करते हैं। पिज्जा हो या बर्गर, मंचूरियन हो या चाऊमिन या फिर फ्रेंच फ्राइज, इनका नाम लेते ही मुंह में पानी आ जाता है। फिलहाल आज बात करेंगे, फ्रेंच फ्राइज की। मगर साधारण नहीं बल्कि, एक खास फ्रेंच फाइज जिसकी कीमत आपके होश उड़ा देगी और सर्व करने का तरीका आपका दिल खुश कर देगा। यह अनोखा और मजेदार फ्रेंच फाइज भी आलू से ही बनता है, बस इसका मिश्रण कुछ खास तरह का होता है, जो इसे कुछ हटकर बनाता है। यह कारनामा किया है अमरीका के एक रेस्त्रां ने। यह रेस्त्रां न्यूयॉर्क में है, जिसका नाम सेरेन डिप्टी-तीन है। इसमें क्रीम दे ला क्रीम पोम फ्राइट्स नाम से मजेदार फ्रेंच फ्राइज मिलता है। इस फ्रेंच फ्राइज के एक प्लेट की कीमत दो सौ डॉलर है। जी हां, आपने सही पढ़ा। भारतीय मुद्रा में इसकी कीमत करीब पंद्रह हजार रुपए होती है और इतने में एक स्मार्टफोन आसानी से खरीदा जा सकता है। अपनी खास क्वॉलिटी और रेट की वजह से पिछले साल वर्ष दो हज़ार इक्कीस में इसका नाम गिनीज बुक ऑफ द वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है। बहरहाल, सोशल मीडिया पर अब तक के सबसे महंगे फ्रेंच फाइज से जुड़ी एक वीडियो खूब वायरल हो रही है। इसमें बताया गया है कि फ्रेंच फ्राइज को बनाने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले आलू का इस्तेमाल हुआ है। इसे रेस्त्रां के शेफ जो और फ्रेडी ने तैयार किया है। आलू के अलावा, इसमें विंटेज दो हज़ार छः की शैंपेन, जे ली ब्लेंक फ्रेंच शैंपेन विनगर, ट्रफल सॉल्ट, चीज, बटर और तेईस कैरेट इडेबल गोल्ड डस्टिंग हुई है। इसके अलावा, आर्गेनिक जर्सी गायों के दूध से तैयार क्रीम मिलाई जाती है, तब जाकर इसे मोर्ने सॉस के साथ परोसा जाता है। मगर ऐसे ही किसी साधारण प्लेट में नहीं। जितने खास तरीके से इसे बनाया जाता है, उतने ही खास तरीके से इसे परोसा भी जाता है। इसे बैकरेट क्रिस्टल अरबीस्क प्लेट में सर्व किया जाता है। तब जाकर इसकी कीमत पंद्रह हजार रुपए होती है।
" फाँस " "पिछले साल फसल अच्छी हुई थी तो फुस के घर की जगह पक्का घर बनवाय दिहे रहे और तुम्हरे लिए एक ठो टीवी भी खरीद दिहे रहे।" पति ने पत्नी की ओर मुस्कुराकर कहा ," उ सनिमा अच्छा रहा ना ? " "वही, जो आज टीवी पर आवत रहा ।" "मदर इंडिया ! अम्मा ! " मुन्नी ने बीच में लपक कर कहा। " हम्म .... हम किसानन के जीवन पर बहुतै अच्छी फिलम रही।" पत्नी ने हुंकार भरी। " हाँ ..और खूब चली रही। ..सुने हैं उ सनिमा को जो लोग बनाए थे अपना सब कुछ दाँव पर लगाए दिहे रहे उ सनिमा खातिर।" पति ने पत्नी की ओर गहरी नजर से देखते हुए कहा। " अरे.. उ सब कलाकार लोग हैं, अगर फेल भी हो जाएं तो उ सब बढ़िया से जानत हैं कि अगली बार थाली में का परोसना है कि लोगन का पसंद आए। ....हम तो अपनी दु ठो सूखी रोटी में ही खुस हैं । " पत्नी ने पति के आगे खाना परोसते हुए कहा। "हम्म ..." और उसकी नज़रें शून्य में खो गई। ... चाँदनी रात, चारों ओर सन्नाटा, सांय सांय करती हवा पेड़ों के झुरमुट से टकराकर वातावरण में सिहरन की सुष्टी करती भयपूर्ण माहौल का परिचय दे रही थी। उसने घर में चारों ओर एक सरसरी नजर दौड़ाई और चर चर करती हुई किवाड़ को हौले से खोल कर धीरे धीरे पग बढ़ाते हुए खेतों की ओर निकल पड़ा। पसीने में तर बतर, किसी अंदरुनी भय और विचारों के बवंडर में फँसा वह आगे बढ़ा जा रहा था । वह जितना आगे बढ़ता उसकी परछाई आज उसे अपने से दुगुनी बड़ी और भयावह लग रही थी जैसे कि आज वह उसे लील जाने पर आमादा हो । तेज चल रही प्रचंड हावाए जैसे उसे घर वापसी की चेतावनी दे रही हो। खेतों में फूटती अनाज़ की बालियों ने बिन पानी सूखकर अब वापस धरती मैया का दामन थाम लिया था। भविष्य की कल्पना कर, परिवार के रोते बिलखते चेहरे उसकी आँखों के सामने तैरने लगे। और कोई रास्ता नहीं सूझता देख वह अपने साथ लाया फाँस पेड़ पर बाँधने का प्रयास करने लगा। अभी वह फ़ांस पेड़ पर बांधने का प्रयास कर ही रहा था कि अचानक बिजली जैसी फुर्ती से एक परछाईं आगे बढ़ी और ," इ का कर रहे हो..?" उसने उसके हाथ से फाँस खींचते हुए कहा। ,"आज जब तुम उ सनिमा का चर्चा किए रहे ना, तबही हमको तुम पर शक होय गवा रहा । " "मुझे छोड़ दे मुनिया की माई। हमरी पूरी मेहनत और लागत सब डूब गवा। कहा से खिलाएंगे तुम लोगो को ..! " कहकर जोर जोर से रोने लगा। "अरे इक फसल खराब ही हो गई तो कोनों जुर्म नहीं होय गवा ? इस बार नाहीं संभली तो का हुआ ? अगली बार संभाल लेंगे।...... जब तक अपने इ दुनु हाथ में ताकत और विश्वास है दुई बकत की रोटी का जोगाड़ जरूर कर लेंगे। संभालो अपने आप को.. ..चलो.. इहां से।" उसका पैर तो जैसे ज़मीन में धँसा जा रहा था..। चारों ओर उसके आर्तनाद की आवाज़ गूँज रही थी।
" फाँस " "पिछले साल फसल अच्छी हुई थी तो फुस के घर की जगह पक्का घर बनवाय दिहे रहे और तुम्हरे लिए एक ठो टीवी भी खरीद दिहे रहे।" पति ने पत्नी की ओर मुस्कुराकर कहा ," उ सनिमा अच्छा रहा ना ? " "वही, जो आज टीवी पर आवत रहा ।" "मदर इंडिया ! अम्मा ! " मुन्नी ने बीच में लपक कर कहा। " हम्म .... हम किसानन के जीवन पर बहुतै अच्छी फिलम रही।" पत्नी ने हुंकार भरी। " हाँ ..और खूब चली रही। ..सुने हैं उ सनिमा को जो लोग बनाए थे अपना सब कुछ दाँव पर लगाए दिहे रहे उ सनिमा खातिर।" पति ने पत्नी की ओर गहरी नजर से देखते हुए कहा। " अरे.. उ सब कलाकार लोग हैं, अगर फेल भी हो जाएं तो उ सब बढ़िया से जानत हैं कि अगली बार थाली में का परोसना है कि लोगन का पसंद आए। ....हम तो अपनी दु ठो सूखी रोटी में ही खुस हैं । " पत्नी ने पति के आगे खाना परोसते हुए कहा। "हम्म ..." और उसकी नज़रें शून्य में खो गई। ... चाँदनी रात, चारों ओर सन्नाटा, सांय सांय करती हवा पेड़ों के झुरमुट से टकराकर वातावरण में सिहरन की सुष्टी करती भयपूर्ण माहौल का परिचय दे रही थी। उसने घर में चारों ओर एक सरसरी नजर दौड़ाई और चर चर करती हुई किवाड़ को हौले से खोल कर धीरे धीरे पग बढ़ाते हुए खेतों की ओर निकल पड़ा। पसीने में तर बतर, किसी अंदरुनी भय और विचारों के बवंडर में फँसा वह आगे बढ़ा जा रहा था । वह जितना आगे बढ़ता उसकी परछाई आज उसे अपने से दुगुनी बड़ी और भयावह लग रही थी जैसे कि आज वह उसे लील जाने पर आमादा हो । तेज चल रही प्रचंड हावाए जैसे उसे घर वापसी की चेतावनी दे रही हो। खेतों में फूटती अनाज़ की बालियों ने बिन पानी सूखकर अब वापस धरती मैया का दामन थाम लिया था। भविष्य की कल्पना कर, परिवार के रोते बिलखते चेहरे उसकी आँखों के सामने तैरने लगे। और कोई रास्ता नहीं सूझता देख वह अपने साथ लाया फाँस पेड़ पर बाँधने का प्रयास करने लगा। अभी वह फ़ांस पेड़ पर बांधने का प्रयास कर ही रहा था कि अचानक बिजली जैसी फुर्ती से एक परछाईं आगे बढ़ी और ," इ का कर रहे हो..?" उसने उसके हाथ से फाँस खींचते हुए कहा। ,"आज जब तुम उ सनिमा का चर्चा किए रहे ना, तबही हमको तुम पर शक होय गवा रहा । " "मुझे छोड़ दे मुनिया की माई। हमरी पूरी मेहनत और लागत सब डूब गवा। कहा से खिलाएंगे तुम लोगो को ..! " कहकर जोर जोर से रोने लगा। "अरे इक फसल खराब ही हो गई तो कोनों जुर्म नहीं होय गवा ? इस बार नाहीं संभली तो का हुआ ? अगली बार संभाल लेंगे।...... जब तक अपने इ दुनु हाथ में ताकत और विश्वास है दुई बकत की रोटी का जोगाड़ जरूर कर लेंगे। संभालो अपने आप को.. ..चलो.. इहां से।" उसका पैर तो जैसे ज़मीन में धँसा जा रहा था..। चारों ओर उसके आर्तनाद की आवाज़ गूँज रही थी।
Posted On: भारतीय रक्षा प्रदर्शनी पिछले 10 सालों में विश्व में अपने प्रकार के सबसे विशाल कार्यक्रमों में एक अनूठी मिसाल बन गई है। रक्षा प्रदर्शनी चैन्नई में 11 से 14 अप्रैल, 2018 के बीच आयोजित की जा रही है तथा इस कार्यक्रम को जब्रदस्त समर्थन मिल रहा है। इस कार्यक्रम का स्थल चैन्नई के निकट ईस्ट कोस्ट रोड पर तिरूविदंथल, जिला कांचीपुरम है। रक्षा प्रदर्शनी 2018 के तारीखों की घोषणा के थोड़े समय बाद ही विदेशी तथा देशी दोनों रक्षा उद्योगों से भागीदारी के लिए अत्यधिक प्रक्रियाएं प्राप्त हुई हैं। 42 देशों ने अपनी भागीदारी की पहले ही पुष्टि कर दी है और आगामी दिनों में यह संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। जिन देशों ने भागीदारी की पुष्टि की है उनमें अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, फ्रांस, इजराइल, कोरिया, स्वेडन जैसे बहुत से बड़े रक्षा उत्पादक देश शामिल हैं। संभावना है कि रक्षा प्रदर्शनी में भाग लेने वाले बहुत से शिष्टमंडल मंत्रालय स्तर के होंगे। बहुत से शीर्ष सेवा अधिकारी (सेना/नौसेना/वायु सेना) भी रक्षा प्रदर्शनी में भाग ले रहे हैं। रक्षा प्रदर्शनी 2018 की मुख्य विषय-वस्तु भारत को विश्व में रक्षा उत्पादन के एक बड़े हब के रूप में दर्शाना है। इससे देशी उद्योगों में अपने स्वदेशी निर्माण मंच तथा कंपोनेंटस के प्रदर्शन के लिए जब्रदस्त उत्साह पैदा हुआ है। हर रोज लगभग दस कंपनियां रक्षा प्रदर्शनी के लिए स्थान बुक करा रही हैं। अनुमान है कि रक्षा प्रदर्शनी 2018 लगभग 2 लाख वर्ग मी. क्षेत्र में आयोजित की जाएगी।
Posted On: भारतीय रक्षा प्रदर्शनी पिछले दस सालों में विश्व में अपने प्रकार के सबसे विशाल कार्यक्रमों में एक अनूठी मिसाल बन गई है। रक्षा प्रदर्शनी चैन्नई में ग्यारह से चौदह अप्रैल, दो हज़ार अट्ठारह के बीच आयोजित की जा रही है तथा इस कार्यक्रम को जब्रदस्त समर्थन मिल रहा है। इस कार्यक्रम का स्थल चैन्नई के निकट ईस्ट कोस्ट रोड पर तिरूविदंथल, जिला कांचीपुरम है। रक्षा प्रदर्शनी दो हज़ार अट्ठारह के तारीखों की घोषणा के थोड़े समय बाद ही विदेशी तथा देशी दोनों रक्षा उद्योगों से भागीदारी के लिए अत्यधिक प्रक्रियाएं प्राप्त हुई हैं। बयालीस देशों ने अपनी भागीदारी की पहले ही पुष्टि कर दी है और आगामी दिनों में यह संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। जिन देशों ने भागीदारी की पुष्टि की है उनमें अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, फ्रांस, इजराइल, कोरिया, स्वेडन जैसे बहुत से बड़े रक्षा उत्पादक देश शामिल हैं। संभावना है कि रक्षा प्रदर्शनी में भाग लेने वाले बहुत से शिष्टमंडल मंत्रालय स्तर के होंगे। बहुत से शीर्ष सेवा अधिकारी भी रक्षा प्रदर्शनी में भाग ले रहे हैं। रक्षा प्रदर्शनी दो हज़ार अट्ठारह की मुख्य विषय-वस्तु भारत को विश्व में रक्षा उत्पादन के एक बड़े हब के रूप में दर्शाना है। इससे देशी उद्योगों में अपने स्वदेशी निर्माण मंच तथा कंपोनेंटस के प्रदर्शन के लिए जब्रदस्त उत्साह पैदा हुआ है। हर रोज लगभग दस कंपनियां रक्षा प्रदर्शनी के लिए स्थान बुक करा रही हैं। अनुमान है कि रक्षा प्रदर्शनी दो हज़ार अट्ठारह लगभग दो लाख वर्ग मी. क्षेत्र में आयोजित की जाएगी।
Ranchi: बीजेपी ने झारखंड में 3007 स्वास्थ्य स्वयंसेवक तैयार कर लिया है. जिला स्तर पर 108 और मंडल स्तर पर 2452 स्वास्थ्य स्वयंसेवक तैयार हो चुके हैं. बीजेपी ने राज्य के 29465 बूथों पर 61000 स्वास्थ्य स्वयंसेवक बनाने की योजना बनाई है. इसके तहत 27 सांगठनिक जिलों में स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है. मंडल स्तर के कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण शुरू हो गया है. बीजेपी अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राष्ट्रीय स्वास्थ्य स्वयंसेवक अभियान के झारखंड प्रभारी लाल सिंह आर्य ने प्रदेश बीजेपी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह जानकारी दी. लाल सिंह आर्य ने कहा कि बीजेपी कार्यकर्ताओं ने कोरोना काल में सेवा का कार्य किया. सेवा ही संगठन में ब्लड डोनेशन किया. करोड़ों लोगों ने इस सेवा में भाग लिया. उन्होंने कहा कि कोरोना की संभावित तीसरी लहर को लेकर बीजेपी पूरी तरह तैयार है. बीजेपी के हेल्थ वोलेंटियर हर घर जाएंगे. इस टीम में महिला और पुरुष दोनों शामिल हैं. उनके पास मेडिकल किट के साथ ऑक्सिमीटर और थर्मल मशीन भी होगी. कोरोना से क्या सावधानी बरतनी है, इसकी जानकारी दी जाएगी. उन्होंने कहा कि कांग्रेस सेवा नहीं करती सिर्फ आरोप लगाती है. कोरोना काल के समय कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक ने कुछ नहीं किया. विपक्ष सिर्फ षड्यंत्र करता है. कहा कि केंद्र सरकार मुफ्त में टीका दे रही है और झारखंड में यह टीका खराब हो रही है. नरेंद्र मोदी ने ही सभी को मुफ्त टीका दिया है. झारखंड की जनता को सही से टीका मिले इसकी व्यवस्था झारखंड सरकार को करनी चाहिए.
Ranchi: बीजेपी ने झारखंड में तीन हज़ार सात स्वास्थ्य स्वयंसेवक तैयार कर लिया है. जिला स्तर पर एक सौ आठ और मंडल स्तर पर दो हज़ार चार सौ बावन स्वास्थ्य स्वयंसेवक तैयार हो चुके हैं. बीजेपी ने राज्य के उनतीस हज़ार चार सौ पैंसठ बूथों पर इकसठ हज़ार स्वास्थ्य स्वयंसेवक बनाने की योजना बनाई है. इसके तहत सत्ताईस सांगठनिक जिलों में स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है. मंडल स्तर के कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण शुरू हो गया है. बीजेपी अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राष्ट्रीय स्वास्थ्य स्वयंसेवक अभियान के झारखंड प्रभारी लाल सिंह आर्य ने प्रदेश बीजेपी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह जानकारी दी. लाल सिंह आर्य ने कहा कि बीजेपी कार्यकर्ताओं ने कोरोना काल में सेवा का कार्य किया. सेवा ही संगठन में ब्लड डोनेशन किया. करोड़ों लोगों ने इस सेवा में भाग लिया. उन्होंने कहा कि कोरोना की संभावित तीसरी लहर को लेकर बीजेपी पूरी तरह तैयार है. बीजेपी के हेल्थ वोलेंटियर हर घर जाएंगे. इस टीम में महिला और पुरुष दोनों शामिल हैं. उनके पास मेडिकल किट के साथ ऑक्सिमीटर और थर्मल मशीन भी होगी. कोरोना से क्या सावधानी बरतनी है, इसकी जानकारी दी जाएगी. उन्होंने कहा कि कांग्रेस सेवा नहीं करती सिर्फ आरोप लगाती है. कोरोना काल के समय कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक ने कुछ नहीं किया. विपक्ष सिर्फ षड्यंत्र करता है. कहा कि केंद्र सरकार मुफ्त में टीका दे रही है और झारखंड में यह टीका खराब हो रही है. नरेंद्र मोदी ने ही सभी को मुफ्त टीका दिया है. झारखंड की जनता को सही से टीका मिले इसकी व्यवस्था झारखंड सरकार को करनी चाहिए.
नई दिल्ली : हाल ही में सैमसंग के स्मार्टफोन गैलेक्सी नोट 7 की बैटरी ब्लास्ट होने के बाद सैमसंग को सख्त कदम उठाते हुए अपने नोट 7 को वापस बुलवाना पड़ा था. इन सब घटनाओं के बाद सैमसंग अपना अगला कदम बहुत सावधानी से रख रहा है इसी के चलते है सैमसंग अपने अगले फ्लैगशिप स्मार्टफोन नोट 8 में उस बैटरी का प्रयोग नहीं करेगा जो नोट 7 में थी. इसके लिए सैमसंग द्वारा बैटरी एल. जी. चेम से खरीदी जाएगी. हालाँकि अभी बातचीत जारी है. वर्तमान समय में सैमसंग द्वारा बैटरी की सप्लाई सैमसंग एस. डी. आई. और चाइना की ए. टी. एल. से हो रही है. सैमसंग नोट 8 के डिटेल्स को देखे तो इसमें सबसे लेटेस्ट स्नैपड्रैगन 835 मिलने की उम्मीद है. वही रैम 6 GB हो सकती है. वही इसमें ब्लूटूथ 5 टेक्नोलॉजी भी देखने कियो मिल सकती है. वही अगर यह लीक सच हुई तो माना जा रहा है. तो यह स्मार्टफोन अभी तक का सबसे बेस्ट स्मार्टफोन हो होगा.
नई दिल्ली : हाल ही में सैमसंग के स्मार्टफोन गैलेक्सी नोट सात की बैटरी ब्लास्ट होने के बाद सैमसंग को सख्त कदम उठाते हुए अपने नोट सात को वापस बुलवाना पड़ा था. इन सब घटनाओं के बाद सैमसंग अपना अगला कदम बहुत सावधानी से रख रहा है इसी के चलते है सैमसंग अपने अगले फ्लैगशिप स्मार्टफोन नोट आठ में उस बैटरी का प्रयोग नहीं करेगा जो नोट सात में थी. इसके लिए सैमसंग द्वारा बैटरी एल. जी. चेम से खरीदी जाएगी. हालाँकि अभी बातचीत जारी है. वर्तमान समय में सैमसंग द्वारा बैटरी की सप्लाई सैमसंग एस. डी. आई. और चाइना की ए. टी. एल. से हो रही है. सैमसंग नोट आठ के डिटेल्स को देखे तो इसमें सबसे लेटेस्ट स्नैपड्रैगन आठ सौ पैंतीस मिलने की उम्मीद है. वही रैम छः GB हो सकती है. वही इसमें ब्लूटूथ पाँच टेक्नोलॉजी भी देखने कियो मिल सकती है. वही अगर यह लीक सच हुई तो माना जा रहा है. तो यह स्मार्टफोन अभी तक का सबसे बेस्ट स्मार्टफोन हो होगा.
मुंबई, 1 अप्रैल । अभिनेत्री रानी मुखर्जी अपने प्रशंसकों के प्रति बेहद आभारी हैं क्योंकि शादी होने और मां बनने के बाद भी दर्शकों ने न केवल उन्हें याद रखा, बल्कि उस पूर्वाग्रह से भी बचने में मदद की, जिसके तहत समझा जाता है कि एक शादीशुदा अभिनेत्री का करियर धीमा पड़ जाता है। रानी कहती हैं, अपने प्रशंसकों के बिना मैं शायद टिक भी नहीं पाती। ऐसा खासकर इसलिए क्योंकि शादी होने और मां बनने के बाद एक अभिनेत्री को जिन पूर्वाग्रहों में से होकर गुजरना पड़ता है, उनसे जूझना कई बार काफी मुश्किल हो जाता है। मुझे मेरे दर्शकों का हमेशा साथ मिला है और यही वजह है कि मैं आज भी अच्छा काम कर रही हूं। अभिनय की बात करें, तो आने वाले समय में रानी बंटी और बबली 2 और मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे में नजर आने वाली हैं। Disclaimer: This story is auto-generated from IANS service.
मुंबई, एक अप्रैल । अभिनेत्री रानी मुखर्जी अपने प्रशंसकों के प्रति बेहद आभारी हैं क्योंकि शादी होने और मां बनने के बाद भी दर्शकों ने न केवल उन्हें याद रखा, बल्कि उस पूर्वाग्रह से भी बचने में मदद की, जिसके तहत समझा जाता है कि एक शादीशुदा अभिनेत्री का करियर धीमा पड़ जाता है। रानी कहती हैं, अपने प्रशंसकों के बिना मैं शायद टिक भी नहीं पाती। ऐसा खासकर इसलिए क्योंकि शादी होने और मां बनने के बाद एक अभिनेत्री को जिन पूर्वाग्रहों में से होकर गुजरना पड़ता है, उनसे जूझना कई बार काफी मुश्किल हो जाता है। मुझे मेरे दर्शकों का हमेशा साथ मिला है और यही वजह है कि मैं आज भी अच्छा काम कर रही हूं। अभिनय की बात करें, तो आने वाले समय में रानी बंटी और बबली दो और मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे में नजर आने वाली हैं। Disclaimer: This story is auto-generated from IANS service.
औद्योगिक संगठन फिक्की के अनुसार वित्त वर्ष 2022-23 में देश के सकल घरेलू उत्पाद में 7. 4 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। औद्योगिक संगठन फिक्की के अनुसार वित्त वर्ष 2022-23 में देश के सकल घरेलू उत्पाद में 7. 4 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में भी 50 से 75 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी होने का अनुमान लगाया गया है। इस दौरान देश में थोक मूल्य सूचकांक में 12. 6 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है तो उपभोक्ता मूल्य सूचकांक वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 5. 5 प्रतिशत के करीब रह सकता है। इसके पूर्व कुछ पूर्वानुमानों में देश के सकल घरेलू उत्पाद में आठ फीसदी से ज्यादा की वृद्धि होने का अनुमान लगाया गया था, लेकिन यूक्रेन-रूस युद्ध के साथ कुछ अन्य प्रभावों के कारण माना जा रहा है कि वृद्धि दर अपेक्षित रूप से कम रह सकती है। प्रमुख औद्योगिक संगठन फिक्की के जारी अनुमानों में वित्त वर्ष 2022-23 में कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों में 3. 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है। अनाज, दलहन, अन्य फसलों और इनसे जुड़े प्रसंस्कृत उत्पादों में बढ़ोतरी से देश को खाद्यान्न मामलों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के साथ-साथ निर्यात में भी बढ़ोतरी हो सकती है। देश के किसानों और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों से जुड़े लोगों को यह खबर अच्छी लग सकती है। मार्च 2022 में देश के प्रमुख उद्योगपतियों के अनुमानों पर आधारित इस सर्वे में फिक्की ने माना है कि इस दौरान रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण तेल उत्पादों के मूल्यों में बढ़ोतरी होने से कई गणित गड़बड़ा सकते हैं। पेट्रोल जैसे उत्पादों के मूल्यों में बढ़ोतरी दूसरे महत्त्वपूर्ण उत्पादों के मूल्यों में भी महंगाई बढ़ा सकती है जिससे उपभोक्ताओं को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। युद्ध के कारण पहली छमाही में महंगाई वैश्विक तौर पर ज्यादा रह सकती है जबकि दूसरी छमाही में इसका असर कुछ कम होने का अनुमान लगाया गया है।
औद्योगिक संगठन फिक्की के अनुसार वित्त वर्ष दो हज़ार बाईस-तेईस में देश के सकल घरेलू उत्पाद में सात. चार प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। औद्योगिक संगठन फिक्की के अनुसार वित्त वर्ष दो हज़ार बाईस-तेईस में देश के सकल घरेलू उत्पाद में सात. चार प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में भी पचास से पचहत्तर बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी होने का अनुमान लगाया गया है। इस दौरान देश में थोक मूल्य सूचकांक में बारह. छः फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है तो उपभोक्ता मूल्य सूचकांक वित्त वर्ष की पहली तिमाही में पाँच. पाँच प्रतिशत के करीब रह सकता है। इसके पूर्व कुछ पूर्वानुमानों में देश के सकल घरेलू उत्पाद में आठ फीसदी से ज्यादा की वृद्धि होने का अनुमान लगाया गया था, लेकिन यूक्रेन-रूस युद्ध के साथ कुछ अन्य प्रभावों के कारण माना जा रहा है कि वृद्धि दर अपेक्षित रूप से कम रह सकती है। प्रमुख औद्योगिक संगठन फिक्की के जारी अनुमानों में वित्त वर्ष दो हज़ार बाईस-तेईस में कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों में तीन. तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है। अनाज, दलहन, अन्य फसलों और इनसे जुड़े प्रसंस्कृत उत्पादों में बढ़ोतरी से देश को खाद्यान्न मामलों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के साथ-साथ निर्यात में भी बढ़ोतरी हो सकती है। देश के किसानों और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों से जुड़े लोगों को यह खबर अच्छी लग सकती है। मार्च दो हज़ार बाईस में देश के प्रमुख उद्योगपतियों के अनुमानों पर आधारित इस सर्वे में फिक्की ने माना है कि इस दौरान रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण तेल उत्पादों के मूल्यों में बढ़ोतरी होने से कई गणित गड़बड़ा सकते हैं। पेट्रोल जैसे उत्पादों के मूल्यों में बढ़ोतरी दूसरे महत्त्वपूर्ण उत्पादों के मूल्यों में भी महंगाई बढ़ा सकती है जिससे उपभोक्ताओं को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। युद्ध के कारण पहली छमाही में महंगाई वैश्विक तौर पर ज्यादा रह सकती है जबकि दूसरी छमाही में इसका असर कुछ कम होने का अनुमान लगाया गया है।
चर्चित आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी को अवमानना मामले में बड़ी जीत मिली है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एम्स की ओर से केंद्र सरकार ने 25 हजार का चेक कोर्ट में जमा करा दिया है। नैनीताल केंद्रीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली ने कोर्ट की अवमानना करने पर भारतीय वन सेवा के चर्चित अफसर संजीव चतुर्वेदी को जुर्माने के रूप में 25 हजार रुपये अदा किए हैं। कोर्ट ने एम्स निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव प्रीति सूदन को अवमानना नोटिस जारी कर मामले में जवाब देने को कहा था। वन संरक्षक उत्तराखंड के पद पर हल्द्वानी एफटीआई मे तैनात आइएफएस संजीव ने कैट की कोर्ट में दो प्रार्थना पत्र दाखिल किए थे। एक में उन्होंने आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार द्वारा उनकी चरित्र पंजिका में किए गए जीरो अंकन मामले में दिया हलफनामा झूठा है। संजीव ने इस मामले में आपराधिक केस चलाने का आदेश पारित करने की प्रार्थना की थी। संजीव चतुर्वेदी ने एम्स पर लगाए थे आरोप दूसरे मामले में उन्होंने कहा था कि एम्स दिल्ली में घपलों को उजागर करने पर उन्हें निशाना बनाया गया। संजीव चतुर्वेदी के अनुसार, 2014 में उनके द्वारा एम्स में अनियमितता के 13 मामले पकड़े गए, जिसके बाद उन्हें एम्स से ही हटा दिया गया। कैट की कोर्ट ने दोनों मामलों में जवाब दाखिल करने के आदेश पारित किए। हाई कोर्ट ने पिछले साल संजीव की एसीआर में जीरो अंकन को प्रतिशोधात्मक कार्रवाई बताते हुए केंद्र पर 25 हजार जुर्माना लगाया था। इस आदेश को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट मे चुनौती भी दी। सुप्रीम कोर्ट ने न केवल हाई कोर्ट के आदेश को सही ठहराया बल्कि जुर्माना राशि को 25 हजार से बढ़ाकर 50 हजार कर दिया। इसके बाद संजीव द्वारा 26 जून को हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई। केंद्र सरकार ने जमा कर दिए हैं 25 हजार रुपये न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने मामले को सुनने के बाद एम्स निदेशक और केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव को अवमानना नोटिस जारी किया था। अवमानना नोटिस जारी होने के बाद केंद्र सरकार द्वारा जुर्माने की 25 हजार की रकम का चेक कोर्ट में जमा कर दिया। बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट में भी जुर्माने की रकम जमा की जा चुकी है।
चर्चित आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी को अवमानना मामले में बड़ी जीत मिली है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एम्स की ओर से केंद्र सरकार ने पच्चीस हजार का चेक कोर्ट में जमा करा दिया है। नैनीताल केंद्रीय आयुर्विज्ञान संस्थान नई दिल्ली ने कोर्ट की अवमानना करने पर भारतीय वन सेवा के चर्चित अफसर संजीव चतुर्वेदी को जुर्माने के रूप में पच्चीस हजार रुपये अदा किए हैं। कोर्ट ने एम्स निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव प्रीति सूदन को अवमानना नोटिस जारी कर मामले में जवाब देने को कहा था। वन संरक्षक उत्तराखंड के पद पर हल्द्वानी एफटीआई मे तैनात आइएफएस संजीव ने कैट की कोर्ट में दो प्रार्थना पत्र दाखिल किए थे। एक में उन्होंने आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार द्वारा उनकी चरित्र पंजिका में किए गए जीरो अंकन मामले में दिया हलफनामा झूठा है। संजीव ने इस मामले में आपराधिक केस चलाने का आदेश पारित करने की प्रार्थना की थी। संजीव चतुर्वेदी ने एम्स पर लगाए थे आरोप दूसरे मामले में उन्होंने कहा था कि एम्स दिल्ली में घपलों को उजागर करने पर उन्हें निशाना बनाया गया। संजीव चतुर्वेदी के अनुसार, दो हज़ार चौदह में उनके द्वारा एम्स में अनियमितता के तेरह मामले पकड़े गए, जिसके बाद उन्हें एम्स से ही हटा दिया गया। कैट की कोर्ट ने दोनों मामलों में जवाब दाखिल करने के आदेश पारित किए। हाई कोर्ट ने पिछले साल संजीव की एसीआर में जीरो अंकन को प्रतिशोधात्मक कार्रवाई बताते हुए केंद्र पर पच्चीस हजार जुर्माना लगाया था। इस आदेश को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट मे चुनौती भी दी। सुप्रीम कोर्ट ने न केवल हाई कोर्ट के आदेश को सही ठहराया बल्कि जुर्माना राशि को पच्चीस हजार से बढ़ाकर पचास हजार कर दिया। इसके बाद संजीव द्वारा छब्बीस जून को हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई। केंद्र सरकार ने जमा कर दिए हैं पच्चीस हजार रुपये न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने मामले को सुनने के बाद एम्स निदेशक और केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव को अवमानना नोटिस जारी किया था। अवमानना नोटिस जारी होने के बाद केंद्र सरकार द्वारा जुर्माने की पच्चीस हजार की रकम का चेक कोर्ट में जमा कर दिया। बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट में भी जुर्माने की रकम जमा की जा चुकी है।
Uttarakhand Assembly Elections 2022 विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने प्रबुद्ध सम्मेलन शुरू कर दिए हैं। सोमवार को शहर के एक लान में आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने प्रबुद्धजनों से आगामी चुनाव के लिए आशीर्वाद मांगा। जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : Uttarakhand Assembly Elections 2022 : विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने प्रबुद्ध सम्मेलन शुरू कर दिए हैं। सोमवार को शहर के एक लान में आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने प्रबुद्धजनों से आगामी चुनाव के लिए आशीर्वाद मांगा। उन्होंने पार्टी की रीति-नीति बताते हुए कहा, हमने हमेशा संघर्ष किया। बलिदान दिया। यही कारण है कि आज भाजपा विश्व की सबसे बड़ी पार्टी है। प्रदेश अध्यक्ष ने पूर्व पीएम अटल बिहारी बाजपेयी के संघर्ष से लेकर पीएम नरेन्द्र मोदी के विजन पर अपना भाषण केंद्रित रखा। साथ ही राज्य सरकार की योजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राज्य में सड़कों से लेकर रेल मार्गों का विकास तेजी से चल रहा है। इसके लिए आप सभी के आशीर्वाद की जरूरत है। हमने समृद्ध उत्तराखंड के लिए 2025 का लक्ष्य तय किया है। भाजपा जिलाध्यक्ष प्रदीप बिष्ट ने कहा कि अबकी बार साठ पार के लक्ष्य को हासिल करना है। एसबीआइ के सेवानिवृत्त महाप्रबंधक एमसी भट्ट ने भी विचार रखे। इस दौरान विधायक नवीन दुम्का, जिला महामंत्री कमल नयन जोशी, प्रदीप जनौटी, प्रदेश प्रवक्ता प्रकाश रावत, चंदन बिष्ट, विकास भगत, ब्लाक प्रमुख रूपा देवी, डा. अनिल डब्बू, भुवन जोशी आदि शामिल रहे। प्रबुद्ध नागरिक सम्मेलन में कैबिनेट मंत्री बंशीधर भगत ने किसान आंदोलन पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस प्रकार एक कन्या हट के आगे पिता को झुकना पड़ता है, जिसका दूरगामी परिणाम विवाह के पश्चात कन्या को दुष्परिणाम के रूप में भुगतना पड़ता है। ठीक उसी प्रकार किसान बिल का हश्र हुआ है। किसानों के हितों को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कृषि कानून पारित किया। उसमें आम किसान का हित निहित था, पर एक जिद्दी कन्या की तरह कुछ आंदोलनकारियों के अनावश्यक हट के कारण यह हितकारी कानून वापस लेना पड़ा है। यह आंदोलन किसानों के हित में नहीं बल्कि राष्ट्र के अहित एवं मोदी जी को हटाने के लिए किया जा रहा है।
Uttarakhand Assembly Elections दो हज़ार बाईस विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने प्रबुद्ध सम्मेलन शुरू कर दिए हैं। सोमवार को शहर के एक लान में आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने प्रबुद्धजनों से आगामी चुनाव के लिए आशीर्वाद मांगा। जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : Uttarakhand Assembly Elections दो हज़ार बाईस : विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने प्रबुद्ध सम्मेलन शुरू कर दिए हैं। सोमवार को शहर के एक लान में आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने प्रबुद्धजनों से आगामी चुनाव के लिए आशीर्वाद मांगा। उन्होंने पार्टी की रीति-नीति बताते हुए कहा, हमने हमेशा संघर्ष किया। बलिदान दिया। यही कारण है कि आज भाजपा विश्व की सबसे बड़ी पार्टी है। प्रदेश अध्यक्ष ने पूर्व पीएम अटल बिहारी बाजपेयी के संघर्ष से लेकर पीएम नरेन्द्र मोदी के विजन पर अपना भाषण केंद्रित रखा। साथ ही राज्य सरकार की योजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राज्य में सड़कों से लेकर रेल मार्गों का विकास तेजी से चल रहा है। इसके लिए आप सभी के आशीर्वाद की जरूरत है। हमने समृद्ध उत्तराखंड के लिए दो हज़ार पच्चीस का लक्ष्य तय किया है। भाजपा जिलाध्यक्ष प्रदीप बिष्ट ने कहा कि अबकी बार साठ पार के लक्ष्य को हासिल करना है। एसबीआइ के सेवानिवृत्त महाप्रबंधक एमसी भट्ट ने भी विचार रखे। इस दौरान विधायक नवीन दुम्का, जिला महामंत्री कमल नयन जोशी, प्रदीप जनौटी, प्रदेश प्रवक्ता प्रकाश रावत, चंदन बिष्ट, विकास भगत, ब्लाक प्रमुख रूपा देवी, डा. अनिल डब्बू, भुवन जोशी आदि शामिल रहे। प्रबुद्ध नागरिक सम्मेलन में कैबिनेट मंत्री बंशीधर भगत ने किसान आंदोलन पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस प्रकार एक कन्या हट के आगे पिता को झुकना पड़ता है, जिसका दूरगामी परिणाम विवाह के पश्चात कन्या को दुष्परिणाम के रूप में भुगतना पड़ता है। ठीक उसी प्रकार किसान बिल का हश्र हुआ है। किसानों के हितों को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कृषि कानून पारित किया। उसमें आम किसान का हित निहित था, पर एक जिद्दी कन्या की तरह कुछ आंदोलनकारियों के अनावश्यक हट के कारण यह हितकारी कानून वापस लेना पड़ा है। यह आंदोलन किसानों के हित में नहीं बल्कि राष्ट्र के अहित एवं मोदी जी को हटाने के लिए किया जा रहा है।
संदर्भ (स.) रोमन पोलान्सकी का कार्यक्षेत्र बहुआयामी और बौद्धिक होना चाहिए। रोमन पोलान्सकी को एक समय में एकाधिक कार्य करना पसन्द है और सम्भवतः रोमन पोलान्सकी के एकाधिक व्यवसाय होंगे। रोमन पोलान्सकी के पास अद्भुत स्मरण शक्ति, बेहतर स्वास्थ्य एवंरोमन पोलान्सकी के चरित्र में एक विशेष आकर्षण है। यह निश्चित तौर पर इंगित करता है कि रोमन पोलान्सकी नेतृत्व करने के लिये ही पैदा हुए हैं। चाहे रोमन पोलान्सकी का कार्यक्षेत्र कोई भी क्यों न हो, रोमन पोलान्सकी उसमें बेहतर करेंगे। परन्तु जब रोमन पोलान्सकी छोटे पद से वरिष्ठ पद की ओर बढेंगे तथा यदि पदोन्नति मन्द होगी, तो रोमन पोलान्सकी निराश हो जाएंगे और कुछ गलत बोलकर रोमन पोलान्सकी अपने हाथ आए हुए अवसर को खो देंगे। एक बार रोमन पोलान्सकी वरिष्ठ पद पर पहुँच गये, रोमन पोलान्सकी दृढ़ता से स्वयं को स्थापित कर पाएंगे। इससे यह स्पष्ट होता है कि रोमन पोलान्सकी उच्च पद पर अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करेंगे। निश्चय ही, हमारी यह सलाह है कि आरम्भिक समय में रोमन पोलान्सकी आगे बढ़ने के प्रति सचेत रहें। रोमन पोलान्सकी के पास वित्तीय मामलों मे निर्णय लेने की क्षमता है। रोमन पोलान्सकी अपनी योजनाओं को साकार करने में सफल होंगे यदि रोमन पोलान्सकी के व्यावसायिक भागीदार उसका विरोध नहीं करता। अतः जहां तक सम्भव हो भागीदारी वाला व्यापार न करें। रोमन पोलान्सकी को अपने शुरुआती सालों में कठिन परिश्रम करना पड़ेगा। इसके बाबजूद,रोमन पोलान्सकी की उच्च सोच के कारण न कि भाग्य के कारण रोमन पोलान्सकी को पर्याप्त वित्तीय सफलता, पद व प्रतिष्ठा प्राप्त होगी। यह रोमन पोलान्सकी के लिये उचित होगा कि अपनी योजनाओं का क्रियान्वयन अकेले ही करें। यदा-कदा रोमन पोलान्सकी के कुछ निवेश रोमन पोलान्सकी के लिये भाग्यशाली साबित होंगे और रोमन पोलान्सकी निश्चय ही सामान्य से हटकर धन बनाने में सफल होंगे।
संदर्भ रोमन पोलान्सकी का कार्यक्षेत्र बहुआयामी और बौद्धिक होना चाहिए। रोमन पोलान्सकी को एक समय में एकाधिक कार्य करना पसन्द है और सम्भवतः रोमन पोलान्सकी के एकाधिक व्यवसाय होंगे। रोमन पोलान्सकी के पास अद्भुत स्मरण शक्ति, बेहतर स्वास्थ्य एवंरोमन पोलान्सकी के चरित्र में एक विशेष आकर्षण है। यह निश्चित तौर पर इंगित करता है कि रोमन पोलान्सकी नेतृत्व करने के लिये ही पैदा हुए हैं। चाहे रोमन पोलान्सकी का कार्यक्षेत्र कोई भी क्यों न हो, रोमन पोलान्सकी उसमें बेहतर करेंगे। परन्तु जब रोमन पोलान्सकी छोटे पद से वरिष्ठ पद की ओर बढेंगे तथा यदि पदोन्नति मन्द होगी, तो रोमन पोलान्सकी निराश हो जाएंगे और कुछ गलत बोलकर रोमन पोलान्सकी अपने हाथ आए हुए अवसर को खो देंगे। एक बार रोमन पोलान्सकी वरिष्ठ पद पर पहुँच गये, रोमन पोलान्सकी दृढ़ता से स्वयं को स्थापित कर पाएंगे। इससे यह स्पष्ट होता है कि रोमन पोलान्सकी उच्च पद पर अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करेंगे। निश्चय ही, हमारी यह सलाह है कि आरम्भिक समय में रोमन पोलान्सकी आगे बढ़ने के प्रति सचेत रहें। रोमन पोलान्सकी के पास वित्तीय मामलों मे निर्णय लेने की क्षमता है। रोमन पोलान्सकी अपनी योजनाओं को साकार करने में सफल होंगे यदि रोमन पोलान्सकी के व्यावसायिक भागीदार उसका विरोध नहीं करता। अतः जहां तक सम्भव हो भागीदारी वाला व्यापार न करें। रोमन पोलान्सकी को अपने शुरुआती सालों में कठिन परिश्रम करना पड़ेगा। इसके बाबजूद,रोमन पोलान्सकी की उच्च सोच के कारण न कि भाग्य के कारण रोमन पोलान्सकी को पर्याप्त वित्तीय सफलता, पद व प्रतिष्ठा प्राप्त होगी। यह रोमन पोलान्सकी के लिये उचित होगा कि अपनी योजनाओं का क्रियान्वयन अकेले ही करें। यदा-कदा रोमन पोलान्सकी के कुछ निवेश रोमन पोलान्सकी के लिये भाग्यशाली साबित होंगे और रोमन पोलान्सकी निश्चय ही सामान्य से हटकर धन बनाने में सफल होंगे।
जापानी कार कंपनी टोयोटा की ओर से भारतीय बाजार में जल्द ही इनोवा का नया वर्जन पेश किया जाएगा। लॉन्च से पहले नई एमपीवी की कुछ डिटेल्स का खुलासा हुआ है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक नई इनोवा हाईक्रॉस में कई ऐसे फीचर्स दिए जा सकते हैं। जो अन्य एमपीवी में नहीं मिलते हैं। इस खबर में हम नई इनोवा के फीचर्स और डिजाइन की जानकारी दे रहे हैं। टोयोटा की ओर से अब इनोवा को नई तकनीक के साथ पेश किया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस एमपीवी को हाइब्रिड तकनीक के साथ पेश किया जा सकता है। जिससे इसके एवरेज में और सुधार होगा। कंपनी की ओर से हाल में ही पेश की गई नई अर्बन क्रूजर हाइराइडर को पेश किया था। जिसमें कंपनी ने हाइब्रिड तकनीक का उपयोग किया है। जिसके कारण मिड साइज एसयूवी का एवरेज काफी बेहतर हुआ है। एमपीवी में पैनोरमिक सनरूफ भी दिया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी की ओर से इसके लिए जो पेटेंट करवाया गया था उसकी कुछ फोटो लीक हुई है। उसके मुताबिक नई इनोवा हाईक्रॉस में पैनोरमिक सनरूफ दिया जा सकता है। ऐसा होता है तो ये पहली बार होगा जब इनोवा में पैनोरमिक सनरूफ दिया जाएगा। जानकारी के मुताबिक इनोवा हाईक्रॉस को नए प्लेटफॉर्म पर बनाया जाएगा। इसकी खासियत ये होगी कि ये लाइट वेट मोनोकॉक चेसिस पर आधारित होगी जो टोयोटा का नया ग्लोबल आर्किटेक्चर है। मौजूदा मॉडल को कनवेंशनल लैडर ऑन फ्रेम चेसिस पर बनाया जाता है। नए प्लेटफॉर्म पर बनने के बाद इनोवा हाईक्रॉस की राइड क्वालिटी, कंट्रोल, हैंडलिंग और एवरेज में काफी सुधार होगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नई इनोवा हाईक्रॉस में कंपनी की ओर से बेहतरीन फीचर्स भी दिए जाएंगे। इनमें 360-डिग्री कैमरा, वायरलेस चार्जिंग, एक बड़ी टचस्क्रीन वाला इंफोटेनमेंट सिस्टम, सेकेंड रो में कैप्टन सीट्स के लिए एक 'ओटोमन फंक्शन', वायरलेस कनेक्टिविटी सहित कई फीचर्स होंगे।
जापानी कार कंपनी टोयोटा की ओर से भारतीय बाजार में जल्द ही इनोवा का नया वर्जन पेश किया जाएगा। लॉन्च से पहले नई एमपीवी की कुछ डिटेल्स का खुलासा हुआ है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक नई इनोवा हाईक्रॉस में कई ऐसे फीचर्स दिए जा सकते हैं। जो अन्य एमपीवी में नहीं मिलते हैं। इस खबर में हम नई इनोवा के फीचर्स और डिजाइन की जानकारी दे रहे हैं। टोयोटा की ओर से अब इनोवा को नई तकनीक के साथ पेश किया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस एमपीवी को हाइब्रिड तकनीक के साथ पेश किया जा सकता है। जिससे इसके एवरेज में और सुधार होगा। कंपनी की ओर से हाल में ही पेश की गई नई अर्बन क्रूजर हाइराइडर को पेश किया था। जिसमें कंपनी ने हाइब्रिड तकनीक का उपयोग किया है। जिसके कारण मिड साइज एसयूवी का एवरेज काफी बेहतर हुआ है। एमपीवी में पैनोरमिक सनरूफ भी दिया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी की ओर से इसके लिए जो पेटेंट करवाया गया था उसकी कुछ फोटो लीक हुई है। उसके मुताबिक नई इनोवा हाईक्रॉस में पैनोरमिक सनरूफ दिया जा सकता है। ऐसा होता है तो ये पहली बार होगा जब इनोवा में पैनोरमिक सनरूफ दिया जाएगा। जानकारी के मुताबिक इनोवा हाईक्रॉस को नए प्लेटफॉर्म पर बनाया जाएगा। इसकी खासियत ये होगी कि ये लाइट वेट मोनोकॉक चेसिस पर आधारित होगी जो टोयोटा का नया ग्लोबल आर्किटेक्चर है। मौजूदा मॉडल को कनवेंशनल लैडर ऑन फ्रेम चेसिस पर बनाया जाता है। नए प्लेटफॉर्म पर बनने के बाद इनोवा हाईक्रॉस की राइड क्वालिटी, कंट्रोल, हैंडलिंग और एवरेज में काफी सुधार होगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नई इनोवा हाईक्रॉस में कंपनी की ओर से बेहतरीन फीचर्स भी दिए जाएंगे। इनमें तीन सौ साठ-डिग्री कैमरा, वायरलेस चार्जिंग, एक बड़ी टचस्क्रीन वाला इंफोटेनमेंट सिस्टम, सेकेंड रो में कैप्टन सीट्स के लिए एक 'ओटोमन फंक्शन', वायरलेस कनेक्टिविटी सहित कई फीचर्स होंगे।
विदेशी उत्पादकों द्वारा कीमतों में गिरावट के साथ, भारतीय उत्पादक के पास उपलब्ध एकमात्र विकल्प या तो आयात कीमतों में परिवर्तनों के साथ अपनी कीमतों को रखना अथवा आदेश खोजा है। इस कारण से बाजार हिस्से में क्षति की जांच की समग्र अवधि के दौरान क्षति आई। घरेलू उद्योग की कीमते उन कीमतों के प्रभाव को दर्शाती हैं जिन्हें घरेलू बाजार में निर्यातकों द्वारा दिये जाने की पेशकश की जा रही है। घरेलू उद्योग ने दृणतापूर्व यह भी तर्क दिया है कि निर्यातक अपनी पेशकश को उन्हें और अधिक आकर्षक बनाने के लिए भारतीय ग्राहकों को बिक्री के पश्चात छूट दे रहे हैं। घरेलू उद्योग ने अपने विदेशी आपूर्तिकर्ताओं के साथ तथा अपने ग्राहकों के साथ भी अपनी संविदाओं के बारे में तथ्यात्मक सूचना भुगतान की प्राप्तियों के साथ देने के लिए निर्यातक को आग्रह करने का अनुरोध किया है ताकि वास्तविक आयात कीमत का पता लगाया जा सके। घरेलू उद्योग को मलेशिया से संबद्ध वस्तुओं की सब्सिडी के संबंध में वास्तविक क्षति हुई है। इसके अलावा, यदि वर्तमान स्थिति जारी रहती है तब घरेलू उद्योग को सतत् क्षति होने का खतरा है। उत्पादकों/निर्यातकों/आयातकों/ अन्य हितबद्ध पक्षकारों द्वारा किया गया अनुरोध 169. उत्पादकों/निर्यातकों/ आयातकों/ अन्य हितबद्ध पक्षकारों द्वारा वर्तमान जांच की प्रक्रिया के दौरान किये गये क्षति संबंधी अनुरोध और प्राधिकारी द्वारा संगत माने गये अनुरोध निम्नलिखित हैं : कम कीमत पर बिक्री, कीमत में कटौती सकारात्मक और अधिक है। इसके अलावा घरेलू उद्योग कीमत पर दबाव के कारण हानि उठा रहा है क्योंकि वे अपनी कीमतों को उचित शर्तों तक बढ़ाने के लिए सक्षम नहीं हैं। घरेलू उद्योग के कार्य निष्पादन में लाभ के मामले में बहुत अधिक गिरावट आई है। वास्तव में घरेलू उद्योग की लाभप्रद स्थिति घाटे में बदल गई और निवेश पर आय तथा नकद लाभ की भी वही प्रवृत्ति रही है। घरेलू उद्योग की लाभप्रदत्ता में गिरावट मलेशिया से गैर-लाभप्रद कीमतों पर आयात की मात्रा में अधिक वृद्धि के कारण हुई थी। बिक्री की कीमत में वृद्धि उत्पादन की लागत में वृद्धि से कम थी और इस प्रकार से सब्सिडी आयातों के कारण घरेलू उद्योग पर कीमत न्यूनीकरण का प्रभाव पड़ रहा है। मात्रा संबंधी कोई प्रभाव नहीं है क्योंकि घरेलू उद्योग के बाजार हिस्से में पिछले वर्ष की तुलना में जांच की अवधि में वृद्धि हुई है। घरेलू उद्योग ने जांच की अवधि के दौरान अपनी क्षमता में वृद्धि की है और इस बढ़ी हुई क्षमता के फलस्वरूप अपेक्षाकृत अधिक पूंजी लगाई गई है, लगाई गई पूंजी पर नकारात्मक लाभ हुआ है और भारी हानि हुई है। घरेलू उद्योग को कोई क्षति नहीं हो रही है, क्योंकि उसका तुलन पत्र बहुत अधिक लाभ को दर्शा रहा है। इसके अलावा, कोई भी क्षति के लिए मलेशिया से आयातों को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता है। हितबद्ध पक्षकारों ने प्राधिकारी से अनुरोध किया है कि वे आलोचनात्मक रूप से क्षति के मानदंडों और अन्य कारकों की जांच करें, जिसके कारण घरेलू उद्योग को क्षति हो रही है । 170. प्राधिकारी ने घरेलू उद्योग को क्षति के संबंध में सभी हितबद्ध पक्षकारों के तर्कों और प्रति तर्कों को नोट किया है। प्राधिकारी द्वारा इस प्रकार से किया गया क्षति संबंधी विश्लेषण का समाधान यहां आगे हितबद्ध पक्षकारों द्वारा किये गये विभिन्न अनुरोधों का करता है। 171. कंपनी की लाभप्रदत्ता के संबंध में, यह नोट किया जाता है कि आवेदक बहु-उत्पाद कंपनी है और विचाराधीन उत्पाद की लाभप्रदत्ता के साथ कंपनी की लाभप्रदत्ता की तुलना करना सही नहीं है। इसके अलावा, प्राधिकारी से यह अपेक्षित है कि वे घरेलू समान उत्पाद के संबंध में और न कि कंपनी के लिए संपूर्ण रूप में घरेलू उद्योग के कार्य
विदेशी उत्पादकों द्वारा कीमतों में गिरावट के साथ, भारतीय उत्पादक के पास उपलब्ध एकमात्र विकल्प या तो आयात कीमतों में परिवर्तनों के साथ अपनी कीमतों को रखना अथवा आदेश खोजा है। इस कारण से बाजार हिस्से में क्षति की जांच की समग्र अवधि के दौरान क्षति आई। घरेलू उद्योग की कीमते उन कीमतों के प्रभाव को दर्शाती हैं जिन्हें घरेलू बाजार में निर्यातकों द्वारा दिये जाने की पेशकश की जा रही है। घरेलू उद्योग ने दृणतापूर्व यह भी तर्क दिया है कि निर्यातक अपनी पेशकश को उन्हें और अधिक आकर्षक बनाने के लिए भारतीय ग्राहकों को बिक्री के पश्चात छूट दे रहे हैं। घरेलू उद्योग ने अपने विदेशी आपूर्तिकर्ताओं के साथ तथा अपने ग्राहकों के साथ भी अपनी संविदाओं के बारे में तथ्यात्मक सूचना भुगतान की प्राप्तियों के साथ देने के लिए निर्यातक को आग्रह करने का अनुरोध किया है ताकि वास्तविक आयात कीमत का पता लगाया जा सके। घरेलू उद्योग को मलेशिया से संबद्ध वस्तुओं की सब्सिडी के संबंध में वास्तविक क्षति हुई है। इसके अलावा, यदि वर्तमान स्थिति जारी रहती है तब घरेलू उद्योग को सतत् क्षति होने का खतरा है। उत्पादकों/निर्यातकों/आयातकों/ अन्य हितबद्ध पक्षकारों द्वारा किया गया अनुरोध एक सौ उनहत्तर. उत्पादकों/निर्यातकों/ आयातकों/ अन्य हितबद्ध पक्षकारों द्वारा वर्तमान जांच की प्रक्रिया के दौरान किये गये क्षति संबंधी अनुरोध और प्राधिकारी द्वारा संगत माने गये अनुरोध निम्नलिखित हैं : कम कीमत पर बिक्री, कीमत में कटौती सकारात्मक और अधिक है। इसके अलावा घरेलू उद्योग कीमत पर दबाव के कारण हानि उठा रहा है क्योंकि वे अपनी कीमतों को उचित शर्तों तक बढ़ाने के लिए सक्षम नहीं हैं। घरेलू उद्योग के कार्य निष्पादन में लाभ के मामले में बहुत अधिक गिरावट आई है। वास्तव में घरेलू उद्योग की लाभप्रद स्थिति घाटे में बदल गई और निवेश पर आय तथा नकद लाभ की भी वही प्रवृत्ति रही है। घरेलू उद्योग की लाभप्रदत्ता में गिरावट मलेशिया से गैर-लाभप्रद कीमतों पर आयात की मात्रा में अधिक वृद्धि के कारण हुई थी। बिक्री की कीमत में वृद्धि उत्पादन की लागत में वृद्धि से कम थी और इस प्रकार से सब्सिडी आयातों के कारण घरेलू उद्योग पर कीमत न्यूनीकरण का प्रभाव पड़ रहा है। मात्रा संबंधी कोई प्रभाव नहीं है क्योंकि घरेलू उद्योग के बाजार हिस्से में पिछले वर्ष की तुलना में जांच की अवधि में वृद्धि हुई है। घरेलू उद्योग ने जांच की अवधि के दौरान अपनी क्षमता में वृद्धि की है और इस बढ़ी हुई क्षमता के फलस्वरूप अपेक्षाकृत अधिक पूंजी लगाई गई है, लगाई गई पूंजी पर नकारात्मक लाभ हुआ है और भारी हानि हुई है। घरेलू उद्योग को कोई क्षति नहीं हो रही है, क्योंकि उसका तुलन पत्र बहुत अधिक लाभ को दर्शा रहा है। इसके अलावा, कोई भी क्षति के लिए मलेशिया से आयातों को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता है। हितबद्ध पक्षकारों ने प्राधिकारी से अनुरोध किया है कि वे आलोचनात्मक रूप से क्षति के मानदंडों और अन्य कारकों की जांच करें, जिसके कारण घरेलू उद्योग को क्षति हो रही है । एक सौ सत्तर. प्राधिकारी ने घरेलू उद्योग को क्षति के संबंध में सभी हितबद्ध पक्षकारों के तर्कों और प्रति तर्कों को नोट किया है। प्राधिकारी द्वारा इस प्रकार से किया गया क्षति संबंधी विश्लेषण का समाधान यहां आगे हितबद्ध पक्षकारों द्वारा किये गये विभिन्न अनुरोधों का करता है। एक सौ इकहत्तर. कंपनी की लाभप्रदत्ता के संबंध में, यह नोट किया जाता है कि आवेदक बहु-उत्पाद कंपनी है और विचाराधीन उत्पाद की लाभप्रदत्ता के साथ कंपनी की लाभप्रदत्ता की तुलना करना सही नहीं है। इसके अलावा, प्राधिकारी से यह अपेक्षित है कि वे घरेलू समान उत्पाद के संबंध में और न कि कंपनी के लिए संपूर्ण रूप में घरेलू उद्योग के कार्य
लॉस एंजेलिस, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। टीवी शख्सियत किम कार्दशियां का तीसरा बच्चा कथित तौर पर क्रिसमस से ठीक पहले आएगा। वेबसाइट 'यूएससमैगजीन डॉट कॉम' के मुताबिक, किम और उनके पति रैपर कान्ये वेस्ट क्रिसमस के मौके पर अपने परिवार में नए सदस्य का स्वागत करेंगे। किम और कान्ये का यह बच्चा सेरोगेसी की मदद से पैदा होगा। एक सूत्र के मुताबिक, बहुत जल्द कैलिफोर्निया की हिडन हिल्स में स्थित 2 करोड़ डॉलर की कीमत वाले अपने घर में प्रवेश करेंगे। दोनों अपने तीसरे बच्चे को जन्म देने वाली सरोगेट महिला के साथ करीबी संपर्क बनाए हुए हैं। किम ने अपने पारिवारिक शो के सीजन 14 टीजर के दौरान तीसरे बच्चे की पुष्टि की थी, लेकिन अभी तक उन्होंने बच्चे बारे में और कोई जानकारी नहीं दी है। खबरें हैं कि किम की तीसरी संतान एक लड़की है। मुंबई। बॉलीवुड एक्ट्रेस वहीदा रहमान का नाम 53वें दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड के लिए चुना गया है। इसकी जानकारी केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने अपने एक्स हैंडल पर दी है। उन्होंने अदाकारा के काम की तारीफ की है और कहा कि वो इसका ऐलान करके खुद सम्मानजनक महसूस कर रहे हैं। पिछले साल यह सम्मान आशा पारेख को मिला था। अनुराग ठाकुर ने ट्विटर पर लिखा, 'मुझे यह ऐलान करते हुए बेहद खुशी और सम्मान महसूस हो रहा है कि वहीदा रहमान जी को भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान के लिए इस साल प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया जा रहा है।
लॉस एंजेलिस, अट्ठाईस अक्टूबर । टीवी शख्सियत किम कार्दशियां का तीसरा बच्चा कथित तौर पर क्रिसमस से ठीक पहले आएगा। वेबसाइट 'यूएससमैगजीन डॉट कॉम' के मुताबिक, किम और उनके पति रैपर कान्ये वेस्ट क्रिसमस के मौके पर अपने परिवार में नए सदस्य का स्वागत करेंगे। किम और कान्ये का यह बच्चा सेरोगेसी की मदद से पैदा होगा। एक सूत्र के मुताबिक, बहुत जल्द कैलिफोर्निया की हिडन हिल्स में स्थित दो करोड़ डॉलर की कीमत वाले अपने घर में प्रवेश करेंगे। दोनों अपने तीसरे बच्चे को जन्म देने वाली सरोगेट महिला के साथ करीबी संपर्क बनाए हुए हैं। किम ने अपने पारिवारिक शो के सीजन चौदह टीजर के दौरान तीसरे बच्चे की पुष्टि की थी, लेकिन अभी तक उन्होंने बच्चे बारे में और कोई जानकारी नहीं दी है। खबरें हैं कि किम की तीसरी संतान एक लड़की है। मुंबई। बॉलीवुड एक्ट्रेस वहीदा रहमान का नाम तिरेपनवें दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड के लिए चुना गया है। इसकी जानकारी केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने अपने एक्स हैंडल पर दी है। उन्होंने अदाकारा के काम की तारीफ की है और कहा कि वो इसका ऐलान करके खुद सम्मानजनक महसूस कर रहे हैं। पिछले साल यह सम्मान आशा पारेख को मिला था। अनुराग ठाकुर ने ट्विटर पर लिखा, 'मुझे यह ऐलान करते हुए बेहद खुशी और सम्मान महसूस हो रहा है कि वहीदा रहमान जी को भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान के लिए इस साल प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया जा रहा है।
पोर्टेबल एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम PPZR Piorun (पोलैंड) 2019 में, एक होनहार स्व-विकसित PPZR Piorun पोर्टेबल एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम ने पोलिश सेना के साथ सेवा में प्रवेश किया। यह मौजूदा सीरियल MANPADS के आगे के विकास का एक प्रकार था, जो उनसे एक नए तत्व आधार और बढ़ी हुई विशेषताओं में भिन्न है। हालांकि, ऐसे परिणाम प्राप्त करना गंभीर कठिनाइयों से जुड़ा था, जिसके कारण काम में गंभीर देरी हुई। पिछली शताब्दी के सत्तर के दशक में, पोलिश पीपुल्स रिपब्लिक को सोवियत MANPADS "स्ट्रेला -2 एम" के उत्पादन के लिए लाइसेंस प्राप्त हुआ था। ऐसे उत्पादों का उत्पादन सफलतापूर्वक स्थापित किया गया था, और प्रमुख घटकों की आपूर्ति यूएसएसआर से की गई थी। अस्सी के दशक के उत्तरार्ध में, एक नए इगला परिसर के निर्माण की तैयारी शुरू हुई, लेकिन प्रसिद्ध घटनाओं ने इसे पूरा नहीं होने दिया। इस संबंध में, अपने स्वयं के MANPADS का विकास और निर्माण करने का निर्णय लिया गया। कई पोलिश वैज्ञानिक और तकनीकी संगठन Przeciwlotniczy zestaw rakietowy Grom नामक परियोजना में शामिल थे, लेकिन रूसी घटकों के बिना ऐसा करना संभव नहीं था। नतीजतन, पोलिश "थंडर" सोवियत "सुई" का आंशिक रूप से स्थानीयकृत संस्करण निकला। बाद में, पोलैंड ने आयातित इकाइयों के उत्पादन में महारत हासिल करने की कोशिश की, जिसके परिणामस्वरूप PPZR Grom-2 MANPADS दिखाई दिया। 2010 में, मेस्का एसए ने ग्रोम -2 कॉम्प्लेक्स का एक उन्नत संस्करण विकसित करना शुरू किया। इस परियोजना का उद्देश्य संरचना के कार्डिनल पुनर्विक्रय के बिना मुख्य लड़ाकू विशेषताओं और गुणों में सुधार करना था। प्रारंभ में, आधुनिकीकरण परियोजना ने पदनाम ग्रोम-एम को बोर कर दिया, और फिर इसका नाम बदलकर PPZR Piorun कर दिया गया। इस नाम के तहत, वह परीक्षा में आया और सेवा में प्रवेश किया। तकनीकी दृष्टिकोण से, पिओरुन पोर्टेबल वायु रक्षा प्रणालियों की सोवियत लाइन के लिए अगला विकास विकल्प है। पुराने और सिद्ध वास्तुकला का उपयोग रॉकेट के साथ एक डिस्पोजेबल परिवहन और लॉन्च कंटेनर में किया गया था, जिस पर तथाकथित। पुनः प्रयोज्य ट्रिगर और दृष्टि। रॉकेट स्वयं अभी भी एकल-चरण ठोस-प्रणोदक है और एक अवरक्त साधक से सुसज्जित है। वजन और समग्र विशेषताएं लगभग अपने पूर्ववर्तियों के स्तर पर बनी रहीं। युद्ध के लिए तैयार स्थिति में MANPADS की कुल लंबाई 1,6 मीटर से अधिक है, और इसका वजन 16,5 किलोग्राम है। परिसर को ले जाना और उपयोग करना एक शूटर-ऑपरेटर द्वारा प्रदान किया जाता है। "पेरुन" के लिए रॉकेट एक पारदर्शी अर्धगोलाकार सिर फेयरिंग के साथ बड़े बढ़ाव के बेलनाकार शरीर में बनाया गया है, जो एक विशेषता "सुई" से सुसज्जित है। मिसाइल 1,6 मीटर लंबी, 72 मिमी व्यास और वजन 10,5 किलोग्राम है। उत्पाद का लेआउट समान रहता हैः हेड कम्पार्टमेंट नियंत्रण उपकरणों को समायोजित करता है, इंजन पूंछ में स्थित होता है, और उनके बीच एक वारहेड स्थापित होता है। आधुनिक तत्व आधार के आधार पर पोलिश डिजाइन के एक नए कूल्ड जीओएस का उपयोग किया जाता है। संवेदनशीलता में वृद्धि प्रदान की जाती है और, तदनुसार, लक्ष्य का पता लगाने की सीमा में वृद्धि या कम थर्मल हस्ताक्षर के साथ लक्ष्य पर काम करना। मिसाइल नियंत्रण प्रणाली डिजिटल है और इसमें उच्च गति है, जिससे लक्ष्य ट्रैकिंग की विश्वसनीयता और समग्र युद्ध प्रभावशीलता को बढ़ाना संभव हो गया है। पीछा करने या लक्ष्य की ओर शुरू करने के लिए ऑपरेटिंग मोड पेश किए गए हैं। मिसाइल को बढ़ाए गए चार्ज के साथ 1,82 किलोग्राम वजन का एक नया विखंडन वारहेड प्राप्त होता है। संपर्क और लेजर गैर-संपर्क फ़्यूज़ हैं। कथित तौर पर, फ़्यूज़ का ऐसा सेट आपको न केवल विमान, बल्कि छोटे लोगों को भी हिट करने की अनुमति देता है। ड्रोन. ट्रिगर में महत्वपूर्ण संशोधन हुए हैं। इसके इलेक्ट्रॉनिक्स को आधुनिक घटकों के साथ फिर से डिजाइन किया गया है और नई सुविधाओं को जोड़ा गया है। "सुई" के अनुरूप, फायरिंग मोड को कैच-अप या हेड-ऑन कोर्स पर सेट करने के लिए एक स्विच बनाया गया था। जोड़ा गया "प्राधिकरण प्रणाली" केवल ऑपरेटर को शुरू करने की कुंजी के साथ अनुमति देता है। ट्रिगर विभिन्न दृष्टि उपकरणों को माउंट करने के लिए एक सार्वभौमिक रेल से लैस था। विशेष रूप से, अवरक्त स्थलों की स्थापना की अनुमति है, जो आपको अंधेरे में लक्ष्य खोजने की अनुमति देती है। युद्धक उपयोग के दृष्टिकोण से, PPZR Piorun उत्पाद मौलिक रूप से सोवियत और रूसी MANPADS से भिन्न नहीं है, जिस पर इसका डिज़ाइन वापस जाता है। यह 400 मीटर से 6,5 किमी की दूरी पर और 10 मीटर से 4 किमी की ऊंचाई पर लक्ष्य पर प्रभावी फायरिंग सुनिश्चित करता है। रॉकेट 660 मीटर/सेकेंड की रफ्तार से उड़ता है। फायरिंग करते समय अधिकतम लक्ष्य गति - 400 मीटर / सेकंड; के बाद - 320 मीटर / सेकंड। पेरुन का डिजाइन 2015-16 में पूरा हुआ था। पहले से ही दिसंबर 2016 में, परीक्षण और विकास की प्रतीक्षा किए बिना, पोलिश रक्षा मंत्रालय ने एक नए के धारावाहिक उत्पादन के लिए मेस्का को एक बड़ा आदेश जारी किया। हथियारों. . . अनुबंध की शर्तों के तहत, 2017-20 में। ठेकेदार को टीपीके को 420 स्कोप्ड लांचर और 1300 मिसाइलों की आपूर्ति करनी थी। नए MANPADS का पहला परीक्षण 2017 के पतन में हुआ और तुरंत समस्याओं का सामना करना पड़ा। पोलिश निर्मित ठोस प्रणोदक इंजन उच्च गुणवत्ता और विश्वसनीयता के नहीं थे, यही वजह है कि एक प्रक्षेपण के दौरान एक प्रायोगिक रॉकेट में विस्फोट हो गया। 2018 के वसंत और गर्मियों में अगले दो परीक्षण चरण समान परिणामों के साथ समाप्त हुए। नए PPZR Piorun का सीरियल उत्पादन और सेना का पुनर्मूल्यांकन खतरे में था। हालांकि, मेस्का और संबंधित कंपनियों ने दुर्घटनाओं के कारणों का पता लगाया और उनसे छुटकारा पाने में कामयाब रही। 2019 में, कॉम्प्लेक्स ने सभी आवश्यक परीक्षणों को सफलतापूर्वक पास कर लिया और श्रृंखला और गोद लेने के लिए अनुशंसित किया गया। 2020 की शुरुआत तक, निर्माण कंपनी सेना को मिसाइलों के साथ लांचर और टीपीके के पहले बैच को स्थानांतरित करने में कामयाब रही। पेरुन उत्पाद को कंधे से फायरिंग के लिए पोर्टेबल एंटी-एयरक्राफ्ट हथियार के रूप में बनाया गया था। हालांकि, पहले से ही विकास के चरण में, मौजूदा एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम को आधुनिक बनाने या पूरी तरह से नए बनाने के लिए स्व-चालित और टो किए गए प्लेटफार्मों पर मिसाइलों को स्थापित करने के प्रस्ताव दिखाई दिए। 2018 में, पोलिश सेना द्वारा SPZR पोपराड स्व-चालित वायु रक्षा प्रणाली को अपनाया गया था। यह AMZ ubr-P टू-एक्सल आर्मर्ड कार के आधार पर बनाया गया है और यह सिंगल कंट्रोल यूनिट के साथ लॉन्चर से लैस है और MANPADS से चार TPK के लिए माउंट है; चार और मामले के अंदर जमा हैं। प्रारंभ में, पोपराड का उद्देश्य ग्रोम मिसाइलों का उपयोग करना था, और 2020 में नए पियोरन का एकीकरण पूरा हुआ। 2021-22 . तक उद्योग को 79 स्व-चालित वायु रक्षा प्रणालियों को सेना में स्थानांतरित करना चाहिए, और उनमें से कुछ दो प्रकार की मिसाइलों का उपयोग करने में सक्षम होंगे। लड़ाकू क्षमताओं के संदर्भ में, SPZR पोपराड कई एंटी-एयरक्राफ्ट गनर को एक बख़्तरबंद कार्मिक वाहक पर MANPADS से बदल देता है, और इसके कई अन्य विशिष्ट लाभ भी हैं। 2020 के अंत में, पोलिश सेना को पहला टो पीएसआर-ए पिलिका मिसाइल-गन माउंट प्राप्त हुआ। वास्तव में, यह नए अग्नि नियंत्रण उपकरणों और दो MANPADS मिसाइलों के लिए एक लांचर के साथ एक गहन आधुनिकीकरण ZU-23-2 है। स्थापना शुरू में थंडर और पेरुन मिसाइलों के साथ संगत है। वर्तमान आदेश केवल कुछ मिसाइल और तोप प्रतिष्ठानों के उत्पादन के लिए प्रदान करते हैं, और परियोजना की भविष्य की संभावनाएं अज्ञात हैं। सभी समस्याओं और देरी के बावजूद, अब तक Piorun MANPADS को सफलतापूर्वक श्रृंखला में लाया गया और सैनिकों को आपूर्ति की गई। ऐसे हथियारों का उपयोग स्वतंत्र रूप से और अन्य विमान-रोधी प्रणालियों के हिस्से के रूप में किया जाता है। परीक्षणों के परिणामों और ऑपरेशन के पहले वर्षों के अनुसार, सेना इस विकास के बारे में अच्छी तरह से बोलती है और उद्योग और सैनिकों के लिए इसके महत्व को नोट करती है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि ऐसे आकलनों को अस्तित्व का अधिकार है। दरअसल, पेरुन परियोजना के ढांचे के भीतर, पोलिश उद्योग सेना के लिए आवश्यक पर्याप्त उच्च विशेषताओं के साथ एक आधुनिक MANPADS बनाने में कामयाब रहा। इसके अलावा, ऐसा परिसर पूरी तरह से अपने स्वयं के उद्यमों में निर्मित होता है, और इसका उत्पादन अमित्र देशों से आयात पर निर्भर नहीं करता है। अंत में, इस परियोजना के निर्माण के दौरान, मेस्का और अन्य उद्यमों ने अनुभव प्राप्त किया जिसका उपयोग नए MANPADS और अन्य निर्देशित हथियारों के विकास में किया जा सकता है। हालाँकि, तकनीकी दृष्टिकोण से, Piorun परियोजना सफलता या उत्कृष्ट नहीं है। यह कई दशक पहले विदेशों में बनाए गए परिसर के अगले गहन आधुनिकीकरण के बारे में है। नए घटकों और असेंबलियों के कारण, पुराने स्ट्रेला -2 या थंडर पर तकनीकी और लड़ाकू लाभ प्राप्त करना संभव था, लेकिन अब आधुनिक विदेशी मॉडलों के साथ प्रतिस्पर्धा करना संभव नहीं होगा। ऐसा करने के लिए, सभी मुख्य क्षेत्रों में मौलिक रूप से नए समाधानों को विकसित और कार्यान्वित करना आवश्यक है, जबकि इसके लिए अभी भी कोई अवसर और क्षमताएं नहीं हैं। इस प्रकार, कई दशकों के काम के बाद, निरंतर कठिनाइयों और समस्याओं के साथ, पोलैंड अभी भी अपनी पोर्टेबल एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम बनाने और आयात पर निर्भरता को खत्म करने में सक्षम था। नए SSZR पिरौं में संक्रमण की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है, लेकिन सेना पहले से ही निष्कर्ष निकाल रही है - सभी उद्देश्य सीमाओं और नुकसानों के बावजूद, इस MANPADS को सफल माना जाता है। - लेखकः - इस्तेमाल की गई तस्वीरेंः
पोर्टेबल एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम PPZR Piorun दो हज़ार उन्नीस में, एक होनहार स्व-विकसित PPZR Piorun पोर्टेबल एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम ने पोलिश सेना के साथ सेवा में प्रवेश किया। यह मौजूदा सीरियल MANPADS के आगे के विकास का एक प्रकार था, जो उनसे एक नए तत्व आधार और बढ़ी हुई विशेषताओं में भिन्न है। हालांकि, ऐसे परिणाम प्राप्त करना गंभीर कठिनाइयों से जुड़ा था, जिसके कारण काम में गंभीर देरी हुई। पिछली शताब्दी के सत्तर के दशक में, पोलिश पीपुल्स रिपब्लिक को सोवियत MANPADS "स्ट्रेला -दो एम" के उत्पादन के लिए लाइसेंस प्राप्त हुआ था। ऐसे उत्पादों का उत्पादन सफलतापूर्वक स्थापित किया गया था, और प्रमुख घटकों की आपूर्ति यूएसएसआर से की गई थी। अस्सी के दशक के उत्तरार्ध में, एक नए इगला परिसर के निर्माण की तैयारी शुरू हुई, लेकिन प्रसिद्ध घटनाओं ने इसे पूरा नहीं होने दिया। इस संबंध में, अपने स्वयं के MANPADS का विकास और निर्माण करने का निर्णय लिया गया। कई पोलिश वैज्ञानिक और तकनीकी संगठन Przeciwlotniczy zestaw rakietowy Grom नामक परियोजना में शामिल थे, लेकिन रूसी घटकों के बिना ऐसा करना संभव नहीं था। नतीजतन, पोलिश "थंडर" सोवियत "सुई" का आंशिक रूप से स्थानीयकृत संस्करण निकला। बाद में, पोलैंड ने आयातित इकाइयों के उत्पादन में महारत हासिल करने की कोशिश की, जिसके परिणामस्वरूप PPZR Grom-दो MANPADS दिखाई दिया। दो हज़ार दस में, मेस्का एसए ने ग्रोम -दो कॉम्प्लेक्स का एक उन्नत संस्करण विकसित करना शुरू किया। इस परियोजना का उद्देश्य संरचना के कार्डिनल पुनर्विक्रय के बिना मुख्य लड़ाकू विशेषताओं और गुणों में सुधार करना था। प्रारंभ में, आधुनिकीकरण परियोजना ने पदनाम ग्रोम-एम को बोर कर दिया, और फिर इसका नाम बदलकर PPZR Piorun कर दिया गया। इस नाम के तहत, वह परीक्षा में आया और सेवा में प्रवेश किया। तकनीकी दृष्टिकोण से, पिओरुन पोर्टेबल वायु रक्षा प्रणालियों की सोवियत लाइन के लिए अगला विकास विकल्प है। पुराने और सिद्ध वास्तुकला का उपयोग रॉकेट के साथ एक डिस्पोजेबल परिवहन और लॉन्च कंटेनर में किया गया था, जिस पर तथाकथित। पुनः प्रयोज्य ट्रिगर और दृष्टि। रॉकेट स्वयं अभी भी एकल-चरण ठोस-प्रणोदक है और एक अवरक्त साधक से सुसज्जित है। वजन और समग्र विशेषताएं लगभग अपने पूर्ववर्तियों के स्तर पर बनी रहीं। युद्ध के लिए तैयार स्थिति में MANPADS की कुल लंबाई एक,छः मीटर से अधिक है, और इसका वजन सोलह,पाँच किलोग्रामग्राम है। परिसर को ले जाना और उपयोग करना एक शूटर-ऑपरेटर द्वारा प्रदान किया जाता है। "पेरुन" के लिए रॉकेट एक पारदर्शी अर्धगोलाकार सिर फेयरिंग के साथ बड़े बढ़ाव के बेलनाकार शरीर में बनाया गया है, जो एक विशेषता "सुई" से सुसज्जित है। मिसाइल एक,छः मीटर लंबी, बहत्तर मिमी व्यास और वजन दस,पाँच किलोग्रामग्राम है। उत्पाद का लेआउट समान रहता हैः हेड कम्पार्टमेंट नियंत्रण उपकरणों को समायोजित करता है, इंजन पूंछ में स्थित होता है, और उनके बीच एक वारहेड स्थापित होता है। आधुनिक तत्व आधार के आधार पर पोलिश डिजाइन के एक नए कूल्ड जीओएस का उपयोग किया जाता है। संवेदनशीलता में वृद्धि प्रदान की जाती है और, तदनुसार, लक्ष्य का पता लगाने की सीमा में वृद्धि या कम थर्मल हस्ताक्षर के साथ लक्ष्य पर काम करना। मिसाइल नियंत्रण प्रणाली डिजिटल है और इसमें उच्च गति है, जिससे लक्ष्य ट्रैकिंग की विश्वसनीयता और समग्र युद्ध प्रभावशीलता को बढ़ाना संभव हो गया है। पीछा करने या लक्ष्य की ओर शुरू करने के लिए ऑपरेटिंग मोड पेश किए गए हैं। मिसाइल को बढ़ाए गए चार्ज के साथ एक,बयासी किलोग्रामग्राम वजन का एक नया विखंडन वारहेड प्राप्त होता है। संपर्क और लेजर गैर-संपर्क फ़्यूज़ हैं। कथित तौर पर, फ़्यूज़ का ऐसा सेट आपको न केवल विमान, बल्कि छोटे लोगों को भी हिट करने की अनुमति देता है। ड्रोन. ट्रिगर में महत्वपूर्ण संशोधन हुए हैं। इसके इलेक्ट्रॉनिक्स को आधुनिक घटकों के साथ फिर से डिजाइन किया गया है और नई सुविधाओं को जोड़ा गया है। "सुई" के अनुरूप, फायरिंग मोड को कैच-अप या हेड-ऑन कोर्स पर सेट करने के लिए एक स्विच बनाया गया था। जोड़ा गया "प्राधिकरण प्रणाली" केवल ऑपरेटर को शुरू करने की कुंजी के साथ अनुमति देता है। ट्रिगर विभिन्न दृष्टि उपकरणों को माउंट करने के लिए एक सार्वभौमिक रेल से लैस था। विशेष रूप से, अवरक्त स्थलों की स्थापना की अनुमति है, जो आपको अंधेरे में लक्ष्य खोजने की अनुमति देती है। युद्धक उपयोग के दृष्टिकोण से, PPZR Piorun उत्पाद मौलिक रूप से सोवियत और रूसी MANPADS से भिन्न नहीं है, जिस पर इसका डिज़ाइन वापस जाता है। यह चार सौ मीटर से छः,पाँच किमी की दूरी पर और दस मीटर से चार किमी की ऊंचाई पर लक्ष्य पर प्रभावी फायरिंग सुनिश्चित करता है। रॉकेट छः सौ साठ मीटर/सेकेंड की रफ्तार से उड़ता है। फायरिंग करते समय अधिकतम लक्ष्य गति - चार सौ मीटर / सेकंड; के बाद - तीन सौ बीस मीटर / सेकंड। पेरुन का डिजाइन दो हज़ार पंद्रह-सोलह में पूरा हुआ था। पहले से ही दिसंबर दो हज़ार सोलह में, परीक्षण और विकास की प्रतीक्षा किए बिना, पोलिश रक्षा मंत्रालय ने एक नए के धारावाहिक उत्पादन के लिए मेस्का को एक बड़ा आदेश जारी किया। हथियारों. . . अनुबंध की शर्तों के तहत, दो हज़ार सत्रह-बीस में। ठेकेदार को टीपीके को चार सौ बीस स्कोप्ड लांचर और एक हज़ार तीन सौ मिसाइलों की आपूर्ति करनी थी। नए MANPADS का पहला परीक्षण दो हज़ार सत्रह के पतन में हुआ और तुरंत समस्याओं का सामना करना पड़ा। पोलिश निर्मित ठोस प्रणोदक इंजन उच्च गुणवत्ता और विश्वसनीयता के नहीं थे, यही वजह है कि एक प्रक्षेपण के दौरान एक प्रायोगिक रॉकेट में विस्फोट हो गया। दो हज़ार अट्ठारह के वसंत और गर्मियों में अगले दो परीक्षण चरण समान परिणामों के साथ समाप्त हुए। नए PPZR Piorun का सीरियल उत्पादन और सेना का पुनर्मूल्यांकन खतरे में था। हालांकि, मेस्का और संबंधित कंपनियों ने दुर्घटनाओं के कारणों का पता लगाया और उनसे छुटकारा पाने में कामयाब रही। दो हज़ार उन्नीस में, कॉम्प्लेक्स ने सभी आवश्यक परीक्षणों को सफलतापूर्वक पास कर लिया और श्रृंखला और गोद लेने के लिए अनुशंसित किया गया। दो हज़ार बीस की शुरुआत तक, निर्माण कंपनी सेना को मिसाइलों के साथ लांचर और टीपीके के पहले बैच को स्थानांतरित करने में कामयाब रही। पेरुन उत्पाद को कंधे से फायरिंग के लिए पोर्टेबल एंटी-एयरक्राफ्ट हथियार के रूप में बनाया गया था। हालांकि, पहले से ही विकास के चरण में, मौजूदा एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम को आधुनिक बनाने या पूरी तरह से नए बनाने के लिए स्व-चालित और टो किए गए प्लेटफार्मों पर मिसाइलों को स्थापित करने के प्रस्ताव दिखाई दिए। दो हज़ार अट्ठारह में, पोलिश सेना द्वारा SPZR पोपराड स्व-चालित वायु रक्षा प्रणाली को अपनाया गया था। यह AMZ ubr-P टू-एक्सल आर्मर्ड कार के आधार पर बनाया गया है और यह सिंगल कंट्रोल यूनिट के साथ लॉन्चर से लैस है और MANPADS से चार TPK के लिए माउंट है; चार और मामले के अंदर जमा हैं। प्रारंभ में, पोपराड का उद्देश्य ग्रोम मिसाइलों का उपयोग करना था, और दो हज़ार बीस में नए पियोरन का एकीकरण पूरा हुआ। दो हज़ार इक्कीस-बाईस . तक उद्योग को उन्यासी स्व-चालित वायु रक्षा प्रणालियों को सेना में स्थानांतरित करना चाहिए, और उनमें से कुछ दो प्रकार की मिसाइलों का उपयोग करने में सक्षम होंगे। लड़ाकू क्षमताओं के संदर्भ में, SPZR पोपराड कई एंटी-एयरक्राफ्ट गनर को एक बख़्तरबंद कार्मिक वाहक पर MANPADS से बदल देता है, और इसके कई अन्य विशिष्ट लाभ भी हैं। दो हज़ार बीस के अंत में, पोलिश सेना को पहला टो पीएसआर-ए पिलिका मिसाइल-गन माउंट प्राप्त हुआ। वास्तव में, यह नए अग्नि नियंत्रण उपकरणों और दो MANPADS मिसाइलों के लिए एक लांचर के साथ एक गहन आधुनिकीकरण ZU-तेईस-दो है। स्थापना शुरू में थंडर और पेरुन मिसाइलों के साथ संगत है। वर्तमान आदेश केवल कुछ मिसाइल और तोप प्रतिष्ठानों के उत्पादन के लिए प्रदान करते हैं, और परियोजना की भविष्य की संभावनाएं अज्ञात हैं। सभी समस्याओं और देरी के बावजूद, अब तक Piorun MANPADS को सफलतापूर्वक श्रृंखला में लाया गया और सैनिकों को आपूर्ति की गई। ऐसे हथियारों का उपयोग स्वतंत्र रूप से और अन्य विमान-रोधी प्रणालियों के हिस्से के रूप में किया जाता है। परीक्षणों के परिणामों और ऑपरेशन के पहले वर्षों के अनुसार, सेना इस विकास के बारे में अच्छी तरह से बोलती है और उद्योग और सैनिकों के लिए इसके महत्व को नोट करती है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि ऐसे आकलनों को अस्तित्व का अधिकार है। दरअसल, पेरुन परियोजना के ढांचे के भीतर, पोलिश उद्योग सेना के लिए आवश्यक पर्याप्त उच्च विशेषताओं के साथ एक आधुनिक MANPADS बनाने में कामयाब रहा। इसके अलावा, ऐसा परिसर पूरी तरह से अपने स्वयं के उद्यमों में निर्मित होता है, और इसका उत्पादन अमित्र देशों से आयात पर निर्भर नहीं करता है। अंत में, इस परियोजना के निर्माण के दौरान, मेस्का और अन्य उद्यमों ने अनुभव प्राप्त किया जिसका उपयोग नए MANPADS और अन्य निर्देशित हथियारों के विकास में किया जा सकता है। हालाँकि, तकनीकी दृष्टिकोण से, Piorun परियोजना सफलता या उत्कृष्ट नहीं है। यह कई दशक पहले विदेशों में बनाए गए परिसर के अगले गहन आधुनिकीकरण के बारे में है। नए घटकों और असेंबलियों के कारण, पुराने स्ट्रेला -दो या थंडर पर तकनीकी और लड़ाकू लाभ प्राप्त करना संभव था, लेकिन अब आधुनिक विदेशी मॉडलों के साथ प्रतिस्पर्धा करना संभव नहीं होगा। ऐसा करने के लिए, सभी मुख्य क्षेत्रों में मौलिक रूप से नए समाधानों को विकसित और कार्यान्वित करना आवश्यक है, जबकि इसके लिए अभी भी कोई अवसर और क्षमताएं नहीं हैं। इस प्रकार, कई दशकों के काम के बाद, निरंतर कठिनाइयों और समस्याओं के साथ, पोलैंड अभी भी अपनी पोर्टेबल एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम बनाने और आयात पर निर्भरता को खत्म करने में सक्षम था। नए SSZR पिरौं में संक्रमण की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है, लेकिन सेना पहले से ही निष्कर्ष निकाल रही है - सभी उद्देश्य सीमाओं और नुकसानों के बावजूद, इस MANPADS को सफल माना जाता है। - लेखकः - इस्तेमाल की गई तस्वीरेंः
इंग्लैंड के खिलाफ भारत ने वनडे सीरीज जीत (won the ODI series) ली है। जीते के बाद रोहित की अगुवाई वाली कंपनी यानी टीम इंडिया (Indian team) को फायदा हुआ है। भारतीय टीम ने लेटेस्ट आईसीसी मेंस ओडीआई टीम रैंकिंग (latest ICC Men's ODI Team Rankings)में पाकिस्तान (Pakistan in the latest ICC)से आगे अपने तीसरे स्थान को और मजबूत कर लिया है। भारत के अब 109 रेटिंग अंक हैं जो चौथ स्थान पर मौजूद(fourth-placed Pakistani team) पाकिस्तानी टीम से तीन अंक ज्यादा है। वहीं, न्यूजीलैंड की टीम 128 रेटिंग प्वाइंट्स के साथ आईसीसी वनडे रैंकिंग में नंबर 1 पर बनी हुई है। बटलर की कप्तानी वाली इंग्लैंड की टीम तीन मैचों की वनडे सीरीज(three-match ODI series) हारने के बावजूद 121 रेटिंग प्वाइंट के साथ दूसरे नंबर पर कब्ज़ा जमाय (rating points)बैठी है। हालांकि आने वाले हफ्तों में रैंकिंग चार्ट में बदलाव हो सकता है क्योंकि छठे स्थान पर मौजूद है साउथ अफ्रीकी (South African) टीम वर्तमान में पाकिस्तान से केवल सात रेटिंग अंक पीछे है। अगर साउथ अफ्रीका इंग्लैंड के(upcoming three-match series against England) खिलाफ अपनी आगामी तीन मैचों की सीरीज में जीत हासिल कर (India can strengthen their position) लेता है, तो वह चौथे स्थान पर पहुंच सकता (India can strengthen) their positionहै। वहीं, भारत इस सप्ताह से शुरू हो रही वेस्टइंडीज (West Indies) के खिलाफ तीन मैचों की श्रृंखला में अच्छे प्रदर्शन के साथ अपनी स्थिति को और मजबूत कर सकता है। जिसके बाद फिर से रैंकिंग ऊपर निचे हो सकती है। गौरतलब है कि वेस्टइंडीज के खिलाफ शुक्रवार से भारत की तीन मैचों (three-match series against West Indies) की सीरीज शुरू हो रही है। जिसमें शिखर धवन भारतीय टीम की कप्तानी करते हुए दिखाई देंगे। इसके अलावा पाकिस्तान वर्तमान में श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज (Test series against Sri Lanka)खेल रहा है। पाकिस्तान की टीम की अगली वनडे सीरीज (Pakistan's team's next ODI series)अगस्त में नीदरलैंड के खिलाफ होगी। इस तरह अगस्त के महीने में आईसीसी वनडे रैंकिंग ऊपर-नीचे होती रहेगी।
इंग्लैंड के खिलाफ भारत ने वनडे सीरीज जीत ली है। जीते के बाद रोहित की अगुवाई वाली कंपनी यानी टीम इंडिया को फायदा हुआ है। भारतीय टीम ने लेटेस्ट आईसीसी मेंस ओडीआई टीम रैंकिंग में पाकिस्तान से आगे अपने तीसरे स्थान को और मजबूत कर लिया है। भारत के अब एक सौ नौ रेटिंग अंक हैं जो चौथ स्थान पर मौजूद पाकिस्तानी टीम से तीन अंक ज्यादा है। वहीं, न्यूजीलैंड की टीम एक सौ अट्ठाईस रेटिंग प्वाइंट्स के साथ आईसीसी वनडे रैंकिंग में नंबर एक पर बनी हुई है। बटलर की कप्तानी वाली इंग्लैंड की टीम तीन मैचों की वनडे सीरीज हारने के बावजूद एक सौ इक्कीस रेटिंग प्वाइंट के साथ दूसरे नंबर पर कब्ज़ा जमाय बैठी है। हालांकि आने वाले हफ्तों में रैंकिंग चार्ट में बदलाव हो सकता है क्योंकि छठे स्थान पर मौजूद है साउथ अफ्रीकी टीम वर्तमान में पाकिस्तान से केवल सात रेटिंग अंक पीछे है। अगर साउथ अफ्रीका इंग्लैंड के खिलाफ अपनी आगामी तीन मैचों की सीरीज में जीत हासिल कर लेता है, तो वह चौथे स्थान पर पहुंच सकता their positionहै। वहीं, भारत इस सप्ताह से शुरू हो रही वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन मैचों की श्रृंखला में अच्छे प्रदर्शन के साथ अपनी स्थिति को और मजबूत कर सकता है। जिसके बाद फिर से रैंकिंग ऊपर निचे हो सकती है। गौरतलब है कि वेस्टइंडीज के खिलाफ शुक्रवार से भारत की तीन मैचों की सीरीज शुरू हो रही है। जिसमें शिखर धवन भारतीय टीम की कप्तानी करते हुए दिखाई देंगे। इसके अलावा पाकिस्तान वर्तमान में श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज खेल रहा है। पाकिस्तान की टीम की अगली वनडे सीरीज अगस्त में नीदरलैंड के खिलाफ होगी। इस तरह अगस्त के महीने में आईसीसी वनडे रैंकिंग ऊपर-नीचे होती रहेगी।
Bhopal: रबी सीजन की मुख्य फसल गेहूं इस समय कट चुकी है। थ्रेसरिंग का कार्य जोरों पर चल रहा है। वही सीजन का सबसे ज्यादा उपज देने वाले तथा वर्ष भर जरूरी खाद्य पदोर्थों में एक गेहूं का भंडार किया जा रहा है। आम तौर पर लोग गर्मी के इस सीजन में गेहूं खरीद कर वर्ष भर के लिए रखते हैं। लेकिन कई बार गलत किस्म का गेहूं खरीदकर रखने से वह खराब हो जाता है। उसमें कीडे लग जाते हैं। लेकिन आज हम गेहूं की कुछ खास किस्म के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हे वर्ष भर रखा जा सकता है। वर्ष भर के लिए अगर आप गेहूं रखना चाहते हैं ते आपको चाहिए कि आप खास किस्म का गेहूं खरीदे। इसके लिए बताया गया है कि चंदौसी नाम का गेहूं बहुत उपयोगी है। वहीं मालवा अंचल में पैदा होने वाला गेहूं भी भंडारण के काफी उपयोगी है। वहीं मध्य प्रदेश में पैदा हेने वाला गेहूं जिसमें लोकवन, सुजाता, मालवराज में जल्दी कीडे नहीं लगते। वहीं इस गेहूं की रोटी बहुत स्वादिस्ट और मुलायम होती है। वर्तमान समय में गेहूं का रेट बढ़ा हुआ है। कहा जाता है कि रूस यूक्रेन युद्ध के कारण यूरोपीय देशों में मध्य प्रदेश के गेहूं की जबरजस्त डिमांड बनी हुई है। बतया जाता है कि रूस-यूक्रेन में युद्ध चल रहा है। जबकि यही दोनों देश यूरोपीय देशां को सबसे ज्यादा गेहूं की सप्लाई किया करते थे। लेकिन युद्ध की वजह से या तो गेहूं की फसल बर्बाद हो गई या फिर सरकार व्यवस्था नहीं बना पा रही है।
Bhopal: रबी सीजन की मुख्य फसल गेहूं इस समय कट चुकी है। थ्रेसरिंग का कार्य जोरों पर चल रहा है। वही सीजन का सबसे ज्यादा उपज देने वाले तथा वर्ष भर जरूरी खाद्य पदोर्थों में एक गेहूं का भंडार किया जा रहा है। आम तौर पर लोग गर्मी के इस सीजन में गेहूं खरीद कर वर्ष भर के लिए रखते हैं। लेकिन कई बार गलत किस्म का गेहूं खरीदकर रखने से वह खराब हो जाता है। उसमें कीडे लग जाते हैं। लेकिन आज हम गेहूं की कुछ खास किस्म के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हे वर्ष भर रखा जा सकता है। वर्ष भर के लिए अगर आप गेहूं रखना चाहते हैं ते आपको चाहिए कि आप खास किस्म का गेहूं खरीदे। इसके लिए बताया गया है कि चंदौसी नाम का गेहूं बहुत उपयोगी है। वहीं मालवा अंचल में पैदा होने वाला गेहूं भी भंडारण के काफी उपयोगी है। वहीं मध्य प्रदेश में पैदा हेने वाला गेहूं जिसमें लोकवन, सुजाता, मालवराज में जल्दी कीडे नहीं लगते। वहीं इस गेहूं की रोटी बहुत स्वादिस्ट और मुलायम होती है। वर्तमान समय में गेहूं का रेट बढ़ा हुआ है। कहा जाता है कि रूस यूक्रेन युद्ध के कारण यूरोपीय देशों में मध्य प्रदेश के गेहूं की जबरजस्त डिमांड बनी हुई है। बतया जाता है कि रूस-यूक्रेन में युद्ध चल रहा है। जबकि यही दोनों देश यूरोपीय देशां को सबसे ज्यादा गेहूं की सप्लाई किया करते थे। लेकिन युद्ध की वजह से या तो गेहूं की फसल बर्बाद हो गई या फिर सरकार व्यवस्था नहीं बना पा रही है।
किसी एक बर्तन में घी डालकर मूंगफली भून कर अलग निकाल लें। फिर उसी बर्तन में घी डालकर मखाने भूनें। अब बाउल में आलू छीलकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें। अब इसमें सारी चीजें सेंधा नमक,गाजर,हरी मिर्च, घी,और नींबू का रस डालकर मिलाएं। इसे सर्विंग डिश में निकाल कर धनिया से गार्निश करें।
किसी एक बर्तन में घी डालकर मूंगफली भून कर अलग निकाल लें। फिर उसी बर्तन में घी डालकर मखाने भूनें। अब बाउल में आलू छीलकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें। अब इसमें सारी चीजें सेंधा नमक,गाजर,हरी मिर्च, घी,और नींबू का रस डालकर मिलाएं। इसे सर्विंग डिश में निकाल कर धनिया से गार्निश करें।
बॉलीवुड अभिनेत्री सान्या मल्होत्रा (Sanya Malhotra) ने एक वीडियो में अपने अंदर की माधुरी दीक्षित (Madhuri Dixit) को बाहर निकाला है। सान्या द्वारा साझा किए गए इस वीडियो में उन्हें माधुरी के एक लोकप्रिय गाने पर नाचते हुए देखा जा सकता है। इंस्टाग्राम के इस वीडियो में सान्या साल 1990 में आई फिल्म 'सैलाब' में माधुरी दीक्षित पर फिल्माए गीत 'हमको आजकल है इंतजार' पर हूबहू उनके ही जैसी नाचती नजर आ रही हैं। सान्या ने इस गाने पर परफॉर्म करने के लिए एक पीले रंग का चोली-ब्लाउज ब्लू जीन्स के साथ पहना है। वीडियो के कैप्शन में सान्या ने कहा, "हमको आजकल है इंतजार. . डांस करने का क्योंकि पिछले कुछ समय से मैंने डांस नहीं किया है और मैं इसे मिस कर रही थी। इस वीडियो को अब तक 3,94,759 व्यूज मिले हैं। वहीं वर्क फ्रंट की बात करें तो जनवरी में सान्या मल्होत्रा की एक्टर नवाजुद्दी सिद्दीकी के साथ फिल्म 'फोटोग्राफ रिलीज हुई थी। इस फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास रिस्पांस नहीं मिल पाया था। अब जल्द ही सान्या एक्ट्रेस विद्या बालन के साथ फिल्म 'शकुंतला देवी (Shakuntla Devi)' में नजर आएंगी। ये फिल्म अगले साल रिलीज होगी।
बॉलीवुड अभिनेत्री सान्या मल्होत्रा ने एक वीडियो में अपने अंदर की माधुरी दीक्षित को बाहर निकाला है। सान्या द्वारा साझा किए गए इस वीडियो में उन्हें माधुरी के एक लोकप्रिय गाने पर नाचते हुए देखा जा सकता है। इंस्टाग्राम के इस वीडियो में सान्या साल एक हज़ार नौ सौ नब्बे में आई फिल्म 'सैलाब' में माधुरी दीक्षित पर फिल्माए गीत 'हमको आजकल है इंतजार' पर हूबहू उनके ही जैसी नाचती नजर आ रही हैं। सान्या ने इस गाने पर परफॉर्म करने के लिए एक पीले रंग का चोली-ब्लाउज ब्लू जीन्स के साथ पहना है। वीडियो के कैप्शन में सान्या ने कहा, "हमको आजकल है इंतजार. . डांस करने का क्योंकि पिछले कुछ समय से मैंने डांस नहीं किया है और मैं इसे मिस कर रही थी। इस वीडियो को अब तक तीन,चौरानवे,सात सौ उनसठ व्यूज मिले हैं। वहीं वर्क फ्रंट की बात करें तो जनवरी में सान्या मल्होत्रा की एक्टर नवाजुद्दी सिद्दीकी के साथ फिल्म 'फोटोग्राफ रिलीज हुई थी। इस फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास रिस्पांस नहीं मिल पाया था। अब जल्द ही सान्या एक्ट्रेस विद्या बालन के साथ फिल्म 'शकुंतला देवी ' में नजर आएंगी। ये फिल्म अगले साल रिलीज होगी।
नई दिल्ली. कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के लिए रविवार को हरियाणा की पांच सीटों पर उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को सोनीपत से उम्मीदवार बनाया गया है। निर्मल सिंह को कुरुक्षेत्र, भव्य बिश्नोई को हिसार, कुलदीप शर्मा को करनाल और अवतार सिंह को फरीदाबाद से टिकट मिला है। पहले फरीदाबाद से सीट से कांग्रेस ने ललित नागर को टिकट दिया था। उधर, रविवार शाम तीसरे चरण के लिए चुनाव प्रचार थम गया। 23 अप्रैल को तीसरे चरण में 116 सीटों पर मतदान होना है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
नई दिल्ली. कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के लिए रविवार को हरियाणा की पांच सीटों पर उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को सोनीपत से उम्मीदवार बनाया गया है। निर्मल सिंह को कुरुक्षेत्र, भव्य बिश्नोई को हिसार, कुलदीप शर्मा को करनाल और अवतार सिंह को फरीदाबाद से टिकट मिला है। पहले फरीदाबाद से सीट से कांग्रेस ने ललित नागर को टिकट दिया था। उधर, रविवार शाम तीसरे चरण के लिए चुनाव प्रचार थम गया। तेईस अप्रैल को तीसरे चरण में एक सौ सोलह सीटों पर मतदान होना है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
अक्सर आपने लोगों को कहते सुना होगा, जैसा देस, वैसा भेस। बहुत से लोग अजीबोगरीब कपड़े ऐसी जगहों पर पहन लेते हैं जहां उनकी आवश्यकता भी नहीं होती। वहीं बहुत से लोग ऐसे भी होते हैं जो कपड़े तो ढंग से पहनते हैं मगर दूसरों को वो खराब लग जाता है। ऐसा ही कुछ हाल ही में फिनलैंड की एक स्त्री के साथ हुआ। वो बोल्ड कपड़े पहनकर रेस्टोरेंट (Woman wear inappropriate clothes) पहुंची जो उसके हिसाब से ठीक थे पर स्टाफ के अनुसार अमर्यादित थे जिसके कारण उन्हें रोस्टोरेंट से धक्के मारकर बाहर निकाल दिया गया। डेली स्टार न्यूज वेबसाइट के मुताबिक एरिका हेलिन (Erika Helin) मिस फिनलैंड (Miss Finland) रह चुकी हैं और सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर हैं। वो अपने इंस्टाग्राम एकाउंट पर काफी बोल्ड (woman inappropriate clothes in restaurant) फोटोज पोस्ट करती हैं। हाल ही में फिनलैंड की राजधानी हेलसिंकी में उनके साथ एक विचित्र घटना घटी जिससे वो काफी शर्मिंदा हुईं और उनका गुस्सा सोशल मीडिया पर निकला। रिपोर्ट के अनुसार एरिका एक रेस्टोरेंट में बिकिनी टॉप और स्कर्ट पहनकर गई थीं। उनका टॉप लाल रंग का था और उसपर छोटे-छोटे दिल भी बने हुए थे। दिखने में वो ब्रा जैसा ही लग रहा था। जब वो रेस्टोरेंट पहुंचीं तो वहां के स्टाफ ने उन्हें घुसने से इन्कार कर दिया क्योंकि उनके मुताबिक टॉप अधिक ही बोल्ड था। उन्होंने बोला कि कर्मी ने उनको बताया कि वो बार एडल्ट के लिए हैं और वो ऐसे कपड़ों के साथ अंदर नहीं आ सकतीं। इसके बाद कर्मियों ने उनका हाथ पकड़कर उन्हें बाहर निकाल दिया। एरिका को ये नहीं समझ आया कि ऐसी हरकत के पीछे क्या कारण था। वो इस बात से इतनी आहत हुईं कि उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर दो पोस्ट शेयर किए और बताया कि उन्हें कैसा मेहसूस हुआ। पहले पोस्ट में तो उन्होंने उसी टॉप के साथ तीन फोटो डालकर बताया था कि वही है विवादित टॉप। इसके बाद अगले पोस्ट में उन्होंने एक बिकिनी पहनकर फोटो डाली और दूसरी फोटो विवादित टॉप में। इन दो फोटोज के जरिए उन्होंने लोगों को बिकिनी और बिकिनी टॉप में फर्क बताया। उन्होंने बोला कि यदि रेस्टोरेंट की ओर से कोई ड्रेस कोड था तो टिकट लेते समय ही उन्हें बता देना चाहिए था।
अक्सर आपने लोगों को कहते सुना होगा, जैसा देस, वैसा भेस। बहुत से लोग अजीबोगरीब कपड़े ऐसी जगहों पर पहन लेते हैं जहां उनकी आवश्यकता भी नहीं होती। वहीं बहुत से लोग ऐसे भी होते हैं जो कपड़े तो ढंग से पहनते हैं मगर दूसरों को वो खराब लग जाता है। ऐसा ही कुछ हाल ही में फिनलैंड की एक स्त्री के साथ हुआ। वो बोल्ड कपड़े पहनकर रेस्टोरेंट पहुंची जो उसके हिसाब से ठीक थे पर स्टाफ के अनुसार अमर्यादित थे जिसके कारण उन्हें रोस्टोरेंट से धक्के मारकर बाहर निकाल दिया गया। डेली स्टार न्यूज वेबसाइट के मुताबिक एरिका हेलिन मिस फिनलैंड रह चुकी हैं और सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर हैं। वो अपने इंस्टाग्राम एकाउंट पर काफी बोल्ड फोटोज पोस्ट करती हैं। हाल ही में फिनलैंड की राजधानी हेलसिंकी में उनके साथ एक विचित्र घटना घटी जिससे वो काफी शर्मिंदा हुईं और उनका गुस्सा सोशल मीडिया पर निकला। रिपोर्ट के अनुसार एरिका एक रेस्टोरेंट में बिकिनी टॉप और स्कर्ट पहनकर गई थीं। उनका टॉप लाल रंग का था और उसपर छोटे-छोटे दिल भी बने हुए थे। दिखने में वो ब्रा जैसा ही लग रहा था। जब वो रेस्टोरेंट पहुंचीं तो वहां के स्टाफ ने उन्हें घुसने से इन्कार कर दिया क्योंकि उनके मुताबिक टॉप अधिक ही बोल्ड था। उन्होंने बोला कि कर्मी ने उनको बताया कि वो बार एडल्ट के लिए हैं और वो ऐसे कपड़ों के साथ अंदर नहीं आ सकतीं। इसके बाद कर्मियों ने उनका हाथ पकड़कर उन्हें बाहर निकाल दिया। एरिका को ये नहीं समझ आया कि ऐसी हरकत के पीछे क्या कारण था। वो इस बात से इतनी आहत हुईं कि उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर दो पोस्ट शेयर किए और बताया कि उन्हें कैसा मेहसूस हुआ। पहले पोस्ट में तो उन्होंने उसी टॉप के साथ तीन फोटो डालकर बताया था कि वही है विवादित टॉप। इसके बाद अगले पोस्ट में उन्होंने एक बिकिनी पहनकर फोटो डाली और दूसरी फोटो विवादित टॉप में। इन दो फोटोज के जरिए उन्होंने लोगों को बिकिनी और बिकिनी टॉप में फर्क बताया। उन्होंने बोला कि यदि रेस्टोरेंट की ओर से कोई ड्रेस कोड था तो टिकट लेते समय ही उन्हें बता देना चाहिए था।
गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिलाएं तमाम तरह की मेडिकल जांच करवाती हैं। इनमें से कुछ जांच मां और गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए बहुत जरूरी होते हैं। जबकि बाकी के कुछ जांच डॉक्टर भविष्य में होने वाली परेशानियों को देखते हुए करवाने की सलाह देते हैं। डबल मार्कर टेस्ट इन्हीं कैटेगरी की जांच है। (और पढ़ें - गर्भावस्था में देखभाल कैसे करें)
गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिलाएं तमाम तरह की मेडिकल जांच करवाती हैं। इनमें से कुछ जांच मां और गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए बहुत जरूरी होते हैं। जबकि बाकी के कुछ जांच डॉक्टर भविष्य में होने वाली परेशानियों को देखते हुए करवाने की सलाह देते हैं। डबल मार्कर टेस्ट इन्हीं कैटेगरी की जांच है।
दिलीप वेंगसरकर ने अपना अंतराष्ट्रीय क्रिकेट करियर 1975-76 में न्यूजीलैंड के विरूद्ध शुरू किया। उन्होंने भारत के लिए ओपनिंग की। भारत यह मैच आराम से जीता परंतु दिलीप वेंगसरकर का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रह। इसके बाद 1979 में दिलीप वेंगसरकर ने पाकिस्तान के विरूद्ध दूसरे टेस्ट मैच में जबरदस्त खेल दिखाया। यह मैच दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान पर खेला गया जहां भारत को जीतने के लिए 390 रनों की जरूरत थी। भारत मैच जीत तो नहीं सका लेकिन वेंगसरकर की बदौलत ड्रा जरूर हो गया। दिलीप वेंगसरकर 1983 में वर्ल्डकप जीतने वाली टीम का भी हिस्सा थे। 1985 से 1987 के बीच, दिलीप वेंगसरकर ने टीम के लिए अच्छे खासे रन बनाए। पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, वैस्टइंडीज और श्रीलंका के विरूद्ध कई शतक जमाए। इस रिकॉर्ड के दम पर वे कूपर्स और लेब्रांड रेटिंग में सबसे अच्छे बल्लेबाज बनने में भी सफल हुए। और उस वक्त वह एलन बार्डर और क्लाइव लॉयड से भी आगे थे। दिलीप वेंगसरकर के अदंर जितनी प्रतिभा है, उन्हें उतनी पहचान नहीं मिली। कहा जाता है कि इंग्लिश खिलाड़ी डेविड गोवर अगर भारत में पैदा होते तो वह ज्यादा फेमस होते। वहीं दिलीप अगर इंग्लिश खिलाड़ी होते, तो वह और निखर कर आ जाते। खैर भारत में भी वेंगसरकर का काफी सम्मान हुआ है। वह भारतीय टीम के कप्तान भी रह चुके हैं। साल 1987 वर्ल्ड कप के बाद कपिल देव की जगह वेंगसरकर को कप्तानी सौंपी गई थी।
दिलीप वेंगसरकर ने अपना अंतराष्ट्रीय क्रिकेट करियर एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर-छिहत्तर में न्यूजीलैंड के विरूद्ध शुरू किया। उन्होंने भारत के लिए ओपनिंग की। भारत यह मैच आराम से जीता परंतु दिलीप वेंगसरकर का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रह। इसके बाद एक हज़ार नौ सौ उन्यासी में दिलीप वेंगसरकर ने पाकिस्तान के विरूद्ध दूसरे टेस्ट मैच में जबरदस्त खेल दिखाया। यह मैच दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान पर खेला गया जहां भारत को जीतने के लिए तीन सौ नब्बे रनों की जरूरत थी। भारत मैच जीत तो नहीं सका लेकिन वेंगसरकर की बदौलत ड्रा जरूर हो गया। दिलीप वेंगसरकर एक हज़ार नौ सौ तिरासी में वर्ल्डकप जीतने वाली टीम का भी हिस्सा थे। एक हज़ार नौ सौ पचासी से एक हज़ार नौ सौ सत्तासी के बीच, दिलीप वेंगसरकर ने टीम के लिए अच्छे खासे रन बनाए। पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, वैस्टइंडीज और श्रीलंका के विरूद्ध कई शतक जमाए। इस रिकॉर्ड के दम पर वे कूपर्स और लेब्रांड रेटिंग में सबसे अच्छे बल्लेबाज बनने में भी सफल हुए। और उस वक्त वह एलन बार्डर और क्लाइव लॉयड से भी आगे थे। दिलीप वेंगसरकर के अदंर जितनी प्रतिभा है, उन्हें उतनी पहचान नहीं मिली। कहा जाता है कि इंग्लिश खिलाड़ी डेविड गोवर अगर भारत में पैदा होते तो वह ज्यादा फेमस होते। वहीं दिलीप अगर इंग्लिश खिलाड़ी होते, तो वह और निखर कर आ जाते। खैर भारत में भी वेंगसरकर का काफी सम्मान हुआ है। वह भारतीय टीम के कप्तान भी रह चुके हैं। साल एक हज़ार नौ सौ सत्तासी वर्ल्ड कप के बाद कपिल देव की जगह वेंगसरकर को कप्तानी सौंपी गई थी।
कदलुंदी नदी पुल हादसा (केरल, 2001) केरल में साल 2001 में हुए कदलुंडी नदी रेल पुल हादसे में 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी, ये अब तक की सबसे बड़ी ट्रेन दुर्घटनाओं में से एक है, बता दें इस हादसे में लगभग 300 लोग घायल हुए थे और कम से कम 57 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी. ये ट्रेन केरल में कोझीकोड के पास कदलुंडी नदी पर पुल 924 से गुज़र रही थी, इसी दौरान एक डिब्बा टूट गया और ट्रेन पटरी से उतर गई. रफीगंज रेल पुल (बिहार, 2002) 10 सितंबर 2002 वो काला दिन था. . इस दिन तेज रफ्तार राजधानी एक्सप्रेस उत्तर-मध्य भारत में धावे नदी पर बने पुल पर पटरी से उतर गई थी. इस हादसे में तकरीबन 130 लोगों की मौत हो गई थी, शुरूआती जांच में तो ये दुर्घटना बताई जा रही थी लेकिन फिर पता चला कि ये हादसा नक्सलियों द्वारा किया गया था. वलिगोंडा रेलवे ब्रिज (तेलंगाना, 2005) अचानक आई बाढ़ के कारण हैदराबाद के निकट वेलिगोंडा में स्थित एक छोटा पुल बह गया था, वहीं, 29 अक्टूबर 2005 को एक ट्रेन पुल के इस हिस्से को पार कर रही थी दरअसल तब लोको पायलट को ये जानकारी नहीं थी कि ट्रेन का एक हिस्सा गायब है और यह ट्रेन अपने सवारों समेत पानी में उतरती चली गई, इस दर्दनाक हादसे में लगभग 114 लोग मारे गए और 200 से अधिक घायल हो गए. भागलपुर (बिहार, 2006) साल 2006 में हावड़ा जमालपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस पर दिसंबर में 150 साल पुराना एक ओवर ब्रिज गिर गया था, इस हादसे में तकरीबन 30 लोगों की मौत हो गई थी. पंजागुट्टा पुल (तेलंगाना, 2007) हैदराबाद के पंजागुट्टा में एक निर्माणाधीन फ्लाईओवर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, उस समय पुल के नीचे से गुजरने वाले वाहनों पर फ्लाईओवर का मलबा गिरा था, इस हादसे में कई लोग घायल हुए थे जबकि 15 लोगों की मौत भी हुई थी. कोलकाता फ्लाईओवर (पश्चिम बंगाल, 2016) 31 मार्च 2016 को, कोलकाता में निर्माणाधीन विवेकानंद फ्लाईओवर अचानक गिर गया था इस हादसे में 27 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी और लगभग 80 घायल हो गए. इस हादसे के बाद कंस्ट्रक्शन फर्म, IVRCL के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया था. मुंबई फुट ओवर ब्रिज, (महाराष्ट्र, 2017) एलफिंस्टन रोड रेलवे स्टेशन पर साल 2017 में एक फुट ओवर ब्रिज दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, इस हादसे में 29 यात्रियों की मौत हो गई थी. माजेरहाट ब्रिज, कोलकाता (पश्चिम बंगाल, 2018) कोलकाता में 04 सितंबर, 2018 को एक बड़ा पुल ढह गया था, ये था माजेरहाट ब्रिज, ये दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम कोलकाता के बीच मुख्य कनेक्टर्स में से एक था. इस हादसे में 3 लोगों की मौत हो गई और कम से कम 20 लोग घायल हो गए.
कदलुंदी नदी पुल हादसा केरल में साल दो हज़ार एक में हुए कदलुंडी नदी रेल पुल हादसे में पचास से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी, ये अब तक की सबसे बड़ी ट्रेन दुर्घटनाओं में से एक है, बता दें इस हादसे में लगभग तीन सौ लोग घायल हुए थे और कम से कम सत्तावन लोगों ने अपनी जान गंवाई थी. ये ट्रेन केरल में कोझीकोड के पास कदलुंडी नदी पर पुल नौ सौ चौबीस से गुज़र रही थी, इसी दौरान एक डिब्बा टूट गया और ट्रेन पटरी से उतर गई. रफीगंज रेल पुल दस सितंबर दो हज़ार दो वो काला दिन था. . इस दिन तेज रफ्तार राजधानी एक्सप्रेस उत्तर-मध्य भारत में धावे नदी पर बने पुल पर पटरी से उतर गई थी. इस हादसे में तकरीबन एक सौ तीस लोगों की मौत हो गई थी, शुरूआती जांच में तो ये दुर्घटना बताई जा रही थी लेकिन फिर पता चला कि ये हादसा नक्सलियों द्वारा किया गया था. वलिगोंडा रेलवे ब्रिज अचानक आई बाढ़ के कारण हैदराबाद के निकट वेलिगोंडा में स्थित एक छोटा पुल बह गया था, वहीं, उनतीस अक्टूबर दो हज़ार पाँच को एक ट्रेन पुल के इस हिस्से को पार कर रही थी दरअसल तब लोको पायलट को ये जानकारी नहीं थी कि ट्रेन का एक हिस्सा गायब है और यह ट्रेन अपने सवारों समेत पानी में उतरती चली गई, इस दर्दनाक हादसे में लगभग एक सौ चौदह लोग मारे गए और दो सौ से अधिक घायल हो गए. भागलपुर साल दो हज़ार छः में हावड़ा जमालपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस पर दिसंबर में एक सौ पचास साल पुराना एक ओवर ब्रिज गिर गया था, इस हादसे में तकरीबन तीस लोगों की मौत हो गई थी. पंजागुट्टा पुल हैदराबाद के पंजागुट्टा में एक निर्माणाधीन फ्लाईओवर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, उस समय पुल के नीचे से गुजरने वाले वाहनों पर फ्लाईओवर का मलबा गिरा था, इस हादसे में कई लोग घायल हुए थे जबकि पंद्रह लोगों की मौत भी हुई थी. कोलकाता फ्लाईओवर इकतीस मार्च दो हज़ार सोलह को, कोलकाता में निर्माणाधीन विवेकानंद फ्लाईओवर अचानक गिर गया था इस हादसे में सत्ताईस लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी और लगभग अस्सी घायल हो गए. इस हादसे के बाद कंस्ट्रक्शन फर्म, IVRCL के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया था. मुंबई फुट ओवर ब्रिज, एलफिंस्टन रोड रेलवे स्टेशन पर साल दो हज़ार सत्रह में एक फुट ओवर ब्रिज दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, इस हादसे में उनतीस यात्रियों की मौत हो गई थी. माजेरहाट ब्रिज, कोलकाता कोलकाता में चार सितंबर, दो हज़ार अट्ठारह को एक बड़ा पुल ढह गया था, ये था माजेरहाट ब्रिज, ये दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम कोलकाता के बीच मुख्य कनेक्टर्स में से एक था. इस हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई और कम से कम बीस लोग घायल हो गए.
वीडियो डेस्क। हाल ही में आलिया भट्ट (Alia Bhatt)और रणबीर कपूर (Ranbir Alia)शादी के बंधन में बंधे हैं। शादी के बाद दोनों काफी सुर्खियां बटोर रहे हैं। दोनों ही अपनी अपकमिंग फिल्म की शूटिंग में बिजी हैं। कपूर खानदान की नई नवेली दुल्हन रविवार देर रात शॉर्ट ड्रेस में दिखीं। वीडियो डेस्क। काशी हिंदू विश्वविद्यालय में गरीब छात्रों के लिए खास स्कीम शुरू की गई है। अब यहां पढ़ने वाले छात्रों को 60 हजार का ऋण मिलेगा। ये स्कीम खास उन लोगों के लिए जो किसी कारणवश अपने माता पिता को खो चुके हैं और बीपीएल कार्डधारक हैं। वीडियो डेस्क। विभागीय योजनाओं की जमीनी हकीकत जानने के लिए रविवार को उत्तर प्रदेश सरकार के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह वाराणसी में जलनिगम के अफसरों संग समीक्षा करने पहुंचे। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण कार्यशाला में भी हिस्सा लिया। वीडियो डेस्क। यूपी के उन्नाव में भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'नमो' ऐप के माध्यम से एक विशेष सूक्ष्म दान अभियान शुरू किया। जिस अभियान का शुभारंभ जिला अध्यक्ष अवधेश कटिहार, सदर विधायक पंकज गुप्ता और भाजपा के कार्यकर्ता करने पहुंचे। वीडियो डेस्क। वाराणसी जिले के पिंडरा तहसील क्षेत्र के बरजी गांव में योग गुरु बाबा रामदेव ने योग शिविर में लोगों को योग के प्रति जागरूक किया। इस दौरान बरजी के साथ ही आस-पास के गांव से काफी संख्या में ग्रामीण और शहरवासी भी योग शिविर में शामिल हुए। वीडियो डेस्क। यूपी के अमरोहा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर छाया हुआ है। वीडियो बारात के दौरान का है। बारात निकलने की तैयारी हो रही थी। दूल्हे राजा भी बग्घी पर बैठकर दुल्हन को लेने के लिए बस निकलने ही वाले थे कि हुआ कुछ ऐसा कि दूल्हे को बग्घी से कूदकर भागना पड़ा। वीडियो डेस्क। जंगल के राजा शेर का ये वीडियो आपको हैरान कर देगा। सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो में शेर की हरकतें आपके रोंगटे खड़े कर देंगी। जहां एक ओपन टूरिस्ट गाड़ी में शेर घुस गया। गाड़ी में बैठे टूरिस्ट के ऊपर गुजरते हुए जंगल का राजा शेर एक शख्स के पास पहुंचा और उसे गले लगा लिया। वीडियो डेस्क। सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो वायरल होते हैं जो आपका दिन बना देते हैं। सोशल मीडिया पर वायरल ये वीडियो भी कुछ ऐसा ही है। अगर आप पालतू जानवरों के शौकीन हैं तो आपकी भी दिल इस बिल्ली पर आ जाएगा। वीडियो डेस्क। मथुरा कृष्ण की नगरी में योग शिविर लगाया जा रहा है। सिद्ध पीठ जैन चौरासी मंदिर में योग शिविर का आयोजन किया गया है। जहां प्रदेश के कारागार एवं होमगार्ड राज्यमंत्री धर्मवीर प्रजापति पहुंचे। मंत्री जी ने लोगों को योग के प्रति जागरुक किया। वीडियो डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जम्मू-कश्मीर के दौरे पर हैं। इस दौरान उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की। पीएम नरेंद्र मोदी ने सांबा जिले के पल्ली पंचायत में जम्मू-कश्मीर के पंचायत प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की। जहां पंचायत सदस्यों ने पीएम मोदी को क्षेत्र की महिलाओं द्वारा की गई तैयारियों की जानकारी दी।
वीडियो डेस्क। हाल ही में आलिया भट्ट और रणबीर कपूर शादी के बंधन में बंधे हैं। शादी के बाद दोनों काफी सुर्खियां बटोर रहे हैं। दोनों ही अपनी अपकमिंग फिल्म की शूटिंग में बिजी हैं। कपूर खानदान की नई नवेली दुल्हन रविवार देर रात शॉर्ट ड्रेस में दिखीं। वीडियो डेस्क। काशी हिंदू विश्वविद्यालय में गरीब छात्रों के लिए खास स्कीम शुरू की गई है। अब यहां पढ़ने वाले छात्रों को साठ हजार का ऋण मिलेगा। ये स्कीम खास उन लोगों के लिए जो किसी कारणवश अपने माता पिता को खो चुके हैं और बीपीएल कार्डधारक हैं। वीडियो डेस्क। विभागीय योजनाओं की जमीनी हकीकत जानने के लिए रविवार को उत्तर प्रदेश सरकार के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह वाराणसी में जलनिगम के अफसरों संग समीक्षा करने पहुंचे। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण कार्यशाला में भी हिस्सा लिया। वीडियो डेस्क। यूपी के उन्नाव में भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'नमो' ऐप के माध्यम से एक विशेष सूक्ष्म दान अभियान शुरू किया। जिस अभियान का शुभारंभ जिला अध्यक्ष अवधेश कटिहार, सदर विधायक पंकज गुप्ता और भाजपा के कार्यकर्ता करने पहुंचे। वीडियो डेस्क। वाराणसी जिले के पिंडरा तहसील क्षेत्र के बरजी गांव में योग गुरु बाबा रामदेव ने योग शिविर में लोगों को योग के प्रति जागरूक किया। इस दौरान बरजी के साथ ही आस-पास के गांव से काफी संख्या में ग्रामीण और शहरवासी भी योग शिविर में शामिल हुए। वीडियो डेस्क। यूपी के अमरोहा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर छाया हुआ है। वीडियो बारात के दौरान का है। बारात निकलने की तैयारी हो रही थी। दूल्हे राजा भी बग्घी पर बैठकर दुल्हन को लेने के लिए बस निकलने ही वाले थे कि हुआ कुछ ऐसा कि दूल्हे को बग्घी से कूदकर भागना पड़ा। वीडियो डेस्क। जंगल के राजा शेर का ये वीडियो आपको हैरान कर देगा। सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो में शेर की हरकतें आपके रोंगटे खड़े कर देंगी। जहां एक ओपन टूरिस्ट गाड़ी में शेर घुस गया। गाड़ी में बैठे टूरिस्ट के ऊपर गुजरते हुए जंगल का राजा शेर एक शख्स के पास पहुंचा और उसे गले लगा लिया। वीडियो डेस्क। सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो वायरल होते हैं जो आपका दिन बना देते हैं। सोशल मीडिया पर वायरल ये वीडियो भी कुछ ऐसा ही है। अगर आप पालतू जानवरों के शौकीन हैं तो आपकी भी दिल इस बिल्ली पर आ जाएगा। वीडियो डेस्क। मथुरा कृष्ण की नगरी में योग शिविर लगाया जा रहा है। सिद्ध पीठ जैन चौरासी मंदिर में योग शिविर का आयोजन किया गया है। जहां प्रदेश के कारागार एवं होमगार्ड राज्यमंत्री धर्मवीर प्रजापति पहुंचे। मंत्री जी ने लोगों को योग के प्रति जागरुक किया। वीडियो डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जम्मू-कश्मीर के दौरे पर हैं। इस दौरान उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की। पीएम नरेंद्र मोदी ने सांबा जिले के पल्ली पंचायत में जम्मू-कश्मीर के पंचायत प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की। जहां पंचायत सदस्यों ने पीएम मोदी को क्षेत्र की महिलाओं द्वारा की गई तैयारियों की जानकारी दी।
'इण्डिया आफिस लन्दन के पुस्तकालय में शेष अनन्त कृत 'पदार्थ चन्द्रिका' का संवत् १६५८ का एक हस्तलेख है। देखो-ग्रन्थाङ्क २०८६ । उसमें शेष अनन्त अपने गुरु का नाम शेष शार्ङ्गधर लिखता है। शेष नारायण का एक शिष्य नागोजी पुत्र शेष रामचन्द्र है, यह हम पूर्व लिख चुके हैं। हमारा विचार है कि 'पदार्थ चन्द्रिका का कर्त्ता अनन्त लक्ष्मीधर का पुत्र अनन्त है। शेष नागोजी सम्भवतः नागनाथ है। उसका पुत्र रामचन्द्र है। रामचन्द्र का गुरु प्रसिद्ध महाभाष्य टीकाकार शेष नारायण है, यह हम पूर्व लिख चुके हैं। 'नागरी प्रचारिणी सभा काशी' के हस्तलेखसंग्रह में शेष गोविन्द कृत 'अग्निष्टोमप्रयोग' का एक पूर्ण हस्तलेख है। उसके १९ वें पत्रे पर काल (संभवतः लिपिकाल) सं० १८१० वि० लिखा है। इस प्रकार शेष-वंश के ज्ञात दो व्यक्ति अनन्त-गुरु 'शेष शार्ङ्गधर और अग्निष्टोमप्रयोगकृत् 'शेष गोविन्द का सम्बन्ध इस वंशावली में जोड़ना शेष रह जाता है। उक्त वंशचित्र विट्ठलकृत 'प्रक्रियाकौमुदी-प्रसाद' तथा अन्य ग्रन्थों के आधार पर बनाया है। प्रक्रियाकौमुदी के सम्पादक ने विठ्ठलाचार्य और अनन्त को रामेश्वर के नीचे और गोपालगुरु तथा रामचन्द्र को नागनाथ के नीचे निम्न प्रकार जोड़ा हैकृष्ण यह सम्बन्ध ठीक नहीं है। क्योंकि विट्ठल-लिखित गोपालगुरु पूर्वलिखित गोपालाचार्य है। संन्यास लेने पर वह गोपालगुरु नाम से प्रसिद्ध हुआ, यह हम पूर्व लिख चुके हैं। 'प्रक्रियाप्रसाद' के अन्त के छठे श्लोक से ज्ञात होता है कि नृसिंह (प्रथम) के कई पुत्र थे, न्यून से न्यून (तीन अवश्य थे। क्योंकि 'गोपालाचार्य मुख्याः प्रथितगुण१. देखो-पृष्ठ ४०७, दि० १ । २. देखो पृष्ठ ४०७, दि० २ । गणास्तस्य पुत्रा प्रभूवन्' श्लोकांश में बहुवचन से निर्देश किया है। ज्येष्ठ का नाम गोपालाचार्य और कनिष्ठ का नाम कृष्णाचार्य था, यह स्पष्ट है। परन्तु मध्यम पुत्र के नाम का उल्लेख नहीं। विट्ठल ने विठ्ठलाचार्य गुरु के पुत्र अनन्त को नमस्कार किया है। इससे प्रतीत होता है कि गोपालाचार्य और कृष्णाचार्य का मध्यम सहोदर विट्ठल शेषवंश की वंशावली हमने ऊपर दी है। उसके अनुसार शेष नारायण शेष कृष्ण के पुत्र वीरेश्वर का समकालिक वा उससे कुछ पूर्ववर्ती है। वीरेश्वर-शिष्य विठ्ठलकृत 'प्रक्रियाकौमुदीप्रसाद' का संवत् १५३६ वि० का एक हस्तलेख लन्दन के इण्डिया आफिस के पुस्तकालय में विद्यमान है। अतः निश्चय ही विट्ठल ने 'प्रक्रियाकौमुदी' की टीका सं० १५३६ वि० से पूर्व रची होगी। इसलिये वोरेश्वर का जन्म संवत् १५१० वि० के अनन्तर नहीं हो सकता। लगभग यही काल शेष नारायण का भी समझना चाहिये । पूर्वोद्धृत श्लोकों में स्मृत 'फिरिन्दापराज' कौन है, यह प्रज्ञात है। यदि फिरिन्दापराज का निश्चय हो जावे, तो शेषनारायण का निश्चित काल ज्ञात हो सकता है। 'सूक्तिरत्नाकर' का सब से प्राचीन सं० १६७५ वि० का हस्तलेख इण्डिया ग्राफिस लन्दन के पुस्तकालय में है। देखो-सूचीपत्र भाग १, खण्ड २, ग्रन्थाङ्क ५६० । बड़ोदा के हस्तलेख संग्रह में फिरदाप भट्ट के नाम से जो हस्तलेख विद्यमान है, वह अनुमानतः विक्रम की १६वीं शती का प्रतीत होता है । ६. विष्णुमित्र ( सं० १६०० वि० ) 'विष्णुमित्र' नाम के किसी वैयाकरण ने महाभाष्य पर 'क्षीरोदर' नामक टिप्पण लिखा था। इस ग्रन्थ का उल्लेख शिवरामेन्द्र सरस्वती १. श्रीविठ्ठलाचार्यगुरोस्तनूजं सौजन्यभाजजितवादिराजम् । अनन्तसंज्ञ पदवाक्यविज्ञं प्रमाणविज्ञं तमहं नमामि ॥ अन्त का ११ वां श्लोक । २. देखो - सूचीपत्र भाग २, पृष्ठ १६७, ग्रन्थाङ्क ६१६ । विरचित महाभाष्यटीका' और भट्टोजिदीक्षितकृत शब्दकौस्तुभ में मिलता है। इन दो ग्रन्थों से अन्यत्र विष्णुमित्र अथवा क्षीरोदर का उल्लेख हमें नहीं मिला। प्रतः क्षीरोदर का निश्चित काल अज्ञात है। भट्टोजिदीक्षित का काल अधिक से अधिक सं० १५७०-१६५० वि० तक है, यह हम आगे सप्रमाण दर्शाविंगे। अतः विष्णुमित्र के काल के विषय में इतना ही कहा जा सकता है कि वह सं० १६०० वि० के समीप रहा होगा । एक विष्णुमित्र 'ॠवप्रातिशाख्य का वृत्तिकार है। इसकी आद्य दो वर्गों की वृत्ति छप चुकी है। उस के पिता का नाम देवमित्र है। यह उब्वट से प्राचीन है। यदि यही विष्णुमित्र महाभाष्यटिप्पण का रचयिता हो, तो यह ग्रन्थ बहुत प्राचीन होगा। १०. नीलकण्ठ वाजपेयी ( सं० १६००-१६७५ वि० ) नीलकण्ठ वाजपेयी ने महाभाष्य की 'भाष्यतत्त्वविवेक' नाम्नी व्याख्या लिखी है। इसका एक हस्तलेख 'मद्रास राजकीय हस्तलेख पुस्तकालय के सूचीपत्र भाग २ खण्ड १ A. पृष्ठ १६१२ ग्रन्थाङ्क १२८८ पर निर्दिष्ट है। इस हस्तलेख के अन्त में टीकाकार का नाम 'नीलकण्ठ यज्वा' लिखा है। यह सूचना श्री सीताराम दांतरे (रीवां) ने १०-३-६३ ई० के पत्र में दी है। बाडमेर वंश- नीलकण्ठ वाजपेयी ने सिद्धान्तकौमुदी की 'सुखबोधिनी' व्याख्या के आरम्भ में अपना परिचय इस प्रकार दिया हैपदवाक्यप्रमाणानां पारगं विबुधोत्तमम् । रामचन्द्रमहेन्द्राख्यं पितामहमहं भजे ॥ आत्रेयाब्धिकलानिधिः कविबुधालंकार चूडामणिः । तातः श्रीवरदेश्वरी मखिवरो योऽयष्ट देवान् मखः ।। १. तदिदं सर्व क्षीरोदराख्ये बँलिङ्गताकिकविष्णुमित्रविरचिते महाभाष्यटिप्पणे स्पष्टम् । काशी सरस्वती भवन का हस्तलेख, पत्रा है। २. ह्यवरसूत्रे क्षीरोद [ र] कारोऽप्याह । शब्दकौस्तुभ १।१।८ पृष्ठ १४४ । अध्येष्टाप्पयदीक्षितार्यतनयात् तन्त्राणि काश्यां पुनः । षड्वर्गाणि यो त्यजेष्टशिवतां प्राप नस्सोऽवतात् ।। श्रीवाजपेयिना नीलकण्ठेन विदुषां मुदे । सिद्धान्तकौमुदीव्याख्या क्रियते सुखबोधिनी ॥ अस्मद्गुरुकृतां व्याख्यां बहुर्था तत्त्वबोधिनीम् । विभाव्य तत्रानुक्त च व्याख्यास्येऽहं यथामति ॥ इन श्लोकों से विदित होता है कि नीलकण्ठ रामचन्द्र का पौत्र और वरदेश्वर का पुत्र था। वरदेश्वर ने अप्पयदीक्षित के पुत्र से विद्याध्ययन किया था। नीजकण्ठ ने तत्त्वबोधिनीकार ज्ञानेन्द्र सरस्वती से विद्या पढ़ी थी । काशी में किवदन्ती प्रसिद्ध है कि 'भट्टोजिदीक्षित ने स्वविरचित सिद्धान्तकौमुदी पर व्याख्या लिखने के लिये ज्ञानेन्द्र सरस्वती से अनेक बार प्रार्थना की। उनके अनुमत न होने पर ज्ञानेन्द्रसरस्वती को भिक्षामिष से अपने गृह पर बुलाकर ताड़ना की । अन्त में ज्ञानेन्द्र सरस्वनी ने टीका लिखना स्वीकार किया। इस किंवदन्ती से विदित होता है कि भट्टोजिदीक्षित और ज्ञानेन्द्र सरस्वती लगभग समकालिक थे। पण्डित जगन्नाथ के पिता पेरंभट्ट ने इसी ज्ञानेन्द्र भिक्षु से वेदान्तशास्त्र पढ़ा था। इससे भी पूर्वलिखित काल की पुष्टि होती है। अतः नीलकण्ठ का काल विक्रम संवत् १६००-१६७५ वि० के मध्य होना चाहिये । अन्य व्याकरण ग्रन्थ नीलकण्ठ ने व्याकरण-विषयक निम्न ग्रन्थ लिखे हैं१- पाणिनीयदीपिका २- परिभाषावृत्ति ३- सिद्धान्तकौमुदी की सुखबोधिनी टीका ४- तत्त्वबोधिनीव्याख्यान गूढार्थदीपिका । इनका वर्णन प्रगले अध्यायों में यथाप्रकरण किया जाएगा। ११. शेष विष्णु ( सं १६००-१६५० वि०) शेष विष्णु विरचित 'महाभाष्यप्रकाशिका' का एक हस्तलेख १. यह किंवदन्ती हम ने काशी के कई प्रामाणिक पण्डित महानुभावों से सुनी है। यहां पर इसका उल्लेख केवल समकालिकत्व दशनि के लिये किया है।
'इण्डिया आफिस लन्दन के पुस्तकालय में शेष अनन्त कृत 'पदार्थ चन्द्रिका' का संवत् एक हज़ार छः सौ अट्ठावन का एक हस्तलेख है। देखो-ग्रन्थाङ्क दो हज़ार छियासी । उसमें शेष अनन्त अपने गुरु का नाम शेष शार्ङ्गधर लिखता है। शेष नारायण का एक शिष्य नागोजी पुत्र शेष रामचन्द्र है, यह हम पूर्व लिख चुके हैं। हमारा विचार है कि 'पदार्थ चन्द्रिका का कर्त्ता अनन्त लक्ष्मीधर का पुत्र अनन्त है। शेष नागोजी सम्भवतः नागनाथ है। उसका पुत्र रामचन्द्र है। रामचन्द्र का गुरु प्रसिद्ध महाभाष्य टीकाकार शेष नारायण है, यह हम पूर्व लिख चुके हैं। 'नागरी प्रचारिणी सभा काशी' के हस्तलेखसंग्रह में शेष गोविन्द कृत 'अग्निष्टोमप्रयोग' का एक पूर्ण हस्तलेख है। उसके उन्नीस वें पत्रे पर काल संशून्य एक हज़ार आठ सौ दस विशून्य लिखा है। इस प्रकार शेष-वंश के ज्ञात दो व्यक्ति अनन्त-गुरु 'शेष शार्ङ्गधर और अग्निष्टोमप्रयोगकृत् 'शेष गोविन्द का सम्बन्ध इस वंशावली में जोड़ना शेष रह जाता है। उक्त वंशचित्र विट्ठलकृत 'प्रक्रियाकौमुदी-प्रसाद' तथा अन्य ग्रन्थों के आधार पर बनाया है। प्रक्रियाकौमुदी के सम्पादक ने विठ्ठलाचार्य और अनन्त को रामेश्वर के नीचे और गोपालगुरु तथा रामचन्द्र को नागनाथ के नीचे निम्न प्रकार जोड़ा हैकृष्ण यह सम्बन्ध ठीक नहीं है। क्योंकि विट्ठल-लिखित गोपालगुरु पूर्वलिखित गोपालाचार्य है। संन्यास लेने पर वह गोपालगुरु नाम से प्रसिद्ध हुआ, यह हम पूर्व लिख चुके हैं। 'प्रक्रियाप्रसाद' के अन्त के छठे श्लोक से ज्ञात होता है कि नृसिंह के कई पुत्र थे, न्यून से न्यून 'विष्णुमित्र' नाम के किसी वैयाकरण ने महाभाष्य पर 'क्षीरोदर' नामक टिप्पण लिखा था। इस ग्रन्थ का उल्लेख शिवरामेन्द्र सरस्वती एक. श्रीविठ्ठलाचार्यगुरोस्तनूजं सौजन्यभाजजितवादिराजम् । अनन्तसंज्ञ पदवाक्यविज्ञं प्रमाणविज्ञं तमहं नमामि ॥ अन्त का ग्यारह वां श्लोक । दो. देखो - सूचीपत्र भाग दो, पृष्ठ एक सौ सरसठ, ग्रन्थाङ्क छः सौ सोलह । विरचित महाभाष्यटीका' और भट्टोजिदीक्षितकृत शब्दकौस्तुभ में मिलता है। इन दो ग्रन्थों से अन्यत्र विष्णुमित्र अथवा क्षीरोदर का उल्लेख हमें नहीं मिला। प्रतः क्षीरोदर का निश्चित काल अज्ञात है। भट्टोजिदीक्षित का काल अधिक से अधिक संशून्य एक हज़ार पाँच सौ सत्तर-एक हज़ार छः सौ पचास विशून्य तक है, यह हम आगे सप्रमाण दर्शाविंगे। अतः विष्णुमित्र के काल के विषय में इतना ही कहा जा सकता है कि वह संशून्य एक हज़ार छः सौ विशून्य के समीप रहा होगा । एक विष्णुमित्र 'ॠवप्रातिशाख्य का वृत्तिकार है। इसकी आद्य दो वर्गों की वृत्ति छप चुकी है। उस के पिता का नाम देवमित्र है। यह उब्वट से प्राचीन है। यदि यही विष्णुमित्र महाभाष्यटिप्पण का रचयिता हो, तो यह ग्रन्थ बहुत प्राचीन होगा। दस. नीलकण्ठ वाजपेयी नीलकण्ठ वाजपेयी ने महाभाष्य की 'भाष्यतत्त्वविवेक' नाम्नी व्याख्या लिखी है। इसका एक हस्तलेख 'मद्रास राजकीय हस्तलेख पुस्तकालय के सूचीपत्र भाग दो खण्ड एक एम्पीयर. पृष्ठ एक हज़ार छः सौ बारह ग्रन्थाङ्क एक हज़ार दो सौ अठासी पर निर्दिष्ट है। इस हस्तलेख के अन्त में टीकाकार का नाम 'नीलकण्ठ यज्वा' लिखा है। यह सूचना श्री सीताराम दांतरे ने दस मार्च तिरेसठ ईशून्य के पत्र में दी है। बाडमेर वंश- नीलकण्ठ वाजपेयी ने सिद्धान्तकौमुदी की 'सुखबोधिनी' व्याख्या के आरम्भ में अपना परिचय इस प्रकार दिया हैपदवाक्यप्रमाणानां पारगं विबुधोत्तमम् । रामचन्द्रमहेन्द्राख्यं पितामहमहं भजे ॥ आत्रेयाब्धिकलानिधिः कविबुधालंकार चूडामणिः । तातः श्रीवरदेश्वरी मखिवरो योऽयष्ट देवान् मखः ।। एक. तदिदं सर्व क्षीरोदराख्ये बँलिङ्गताकिकविष्णुमित्रविरचिते महाभाष्यटिप्पणे स्पष्टम् । काशी सरस्वती भवन का हस्तलेख, पत्रा है। दो. ह्यवरसूत्रे क्षीरोद [ र] कारोऽप्याह । शब्दकौस्तुभ एक।एक।आठ पृष्ठ एक सौ चौंतालीस । अध्येष्टाप्पयदीक्षितार्यतनयात् तन्त्राणि काश्यां पुनः । षड्वर्गाणि यो त्यजेष्टशिवतां प्राप नस्सोऽवतात् ।। श्रीवाजपेयिना नीलकण्ठेन विदुषां मुदे । सिद्धान्तकौमुदीव्याख्या क्रियते सुखबोधिनी ॥ अस्मद्गुरुकृतां व्याख्यां बहुर्था तत्त्वबोधिनीम् । विभाव्य तत्रानुक्त च व्याख्यास्येऽहं यथामति ॥ इन श्लोकों से विदित होता है कि नीलकण्ठ रामचन्द्र का पौत्र और वरदेश्वर का पुत्र था। वरदेश्वर ने अप्पयदीक्षित के पुत्र से विद्याध्ययन किया था। नीजकण्ठ ने तत्त्वबोधिनीकार ज्ञानेन्द्र सरस्वती से विद्या पढ़ी थी । काशी में किवदन्ती प्रसिद्ध है कि 'भट्टोजिदीक्षित ने स्वविरचित सिद्धान्तकौमुदी पर व्याख्या लिखने के लिये ज्ञानेन्द्र सरस्वती से अनेक बार प्रार्थना की। उनके अनुमत न होने पर ज्ञानेन्द्रसरस्वती को भिक्षामिष से अपने गृह पर बुलाकर ताड़ना की । अन्त में ज्ञानेन्द्र सरस्वनी ने टीका लिखना स्वीकार किया। इस किंवदन्ती से विदित होता है कि भट्टोजिदीक्षित और ज्ञानेन्द्र सरस्वती लगभग समकालिक थे। पण्डित जगन्नाथ के पिता पेरंभट्ट ने इसी ज्ञानेन्द्र भिक्षु से वेदान्तशास्त्र पढ़ा था। इससे भी पूर्वलिखित काल की पुष्टि होती है। अतः नीलकण्ठ का काल विक्रम संवत् एक हज़ार छः सौ-एक हज़ार छः सौ पचहत्तर विशून्य के मध्य होना चाहिये । अन्य व्याकरण ग्रन्थ नीलकण्ठ ने व्याकरण-विषयक निम्न ग्रन्थ लिखे हैंएक- पाणिनीयदीपिका दो- परिभाषावृत्ति तीन- सिद्धान्तकौमुदी की सुखबोधिनी टीका चार- तत्त्वबोधिनीव्याख्यान गूढार्थदीपिका । इनका वर्णन प्रगले अध्यायों में यथाप्रकरण किया जाएगा। ग्यारह. शेष विष्णु शेष विष्णु विरचित 'महाभाष्यप्रकाशिका' का एक हस्तलेख एक. यह किंवदन्ती हम ने काशी के कई प्रामाणिक पण्डित महानुभावों से सुनी है। यहां पर इसका उल्लेख केवल समकालिकत्व दशनि के लिये किया है।
लेजेंडरी सिंगर लता मंगेशकर का जाना भारतीयों के लिये बड़ा नुकसान है, जिसकी भरपाई शायद ही कभी हो पायेगी. लता मंगेशकर महज एक सिंगर नहीं थीं, बल्कि कई लोगों के लिये देवी भी थीं. लता मंगेशकर के जाने के बाद कई लोगों की जिंदगी में एक अजीब सा खालीपन आ चुका है. अब लता दीदी हमारे बीच नहीं, लेकिन उनसे जुड़े कई किस्से-कहानियां हमारे दिलों में उन्हें हमेशा जिंदा रखेंगे. लेजेंडरी सिंगर को करते हुए आजतक के खास कार्यक्रम 'श्रद्धांजलिः तुम मुझे भुला ना पाओगे' में सिंगर तलत अजीज ने भी लता दीदी से जुड़ी कई यादें शेयर की हैं. 'श्रद्धांजलिः तुम मुझे भुला ना पाओगे' में लता मंगेशकर को याद करते हुए तलत अजीज ने उनसे हुई पहली मुलाकात का किस्सा शेयर किया है. तलत अजीज कहते हैं कि उन्हें पहली बार फिल्म बाजार (1982) के लिए लता मंगेशकर के साथ गाना रिकॉर्ड करने का मौका मिला था. उस समय वो काफी नवर्स थे. उन्होंने कहा, 'मैं काफी छोटा था जब मैंने लताजी के साथ अपना पहला गाना रिकॉर्ड किया था. मैंने अपना एल्बम रिकॉर्ड किया था, लेकिन यह रिलीज नहीं हुआ था. मुझे लता जी के साथ रिकॉर्ड करना पड़ता था. उन दिनों, रिकॉर्डिंग लाइव हुआ करती थी और एक गलती की वजह से पूरी रिकॉर्डिंग खराब हो जाती थी. ' आगे बात करते हुए उन्होंने कहा कि मैं बहुत घबराया हुआ था. ऐसे में लता जी ने जी मुझसे कह, 'तुम घबरा क्यों रहे हो, तुम अच्छा गाते हो. ' इस सादगी के साथ मैंने उनसे पूछा कि आपने मुझे कब सुना. इस पर लता जी कहती हैं कि वो दूरदर्शन में कार्यक्रम आता है ना 'आरोही' मैंने उसमें आपको गाते हुए सुना था. तलत कहते हैं कि उस समय वो लता मंगेशकर नहीं थीं, बल्कि एक युवा सिंगर को प्रोत्साहित करने वाली बुजुर्ग थीं. तलत ने पहली बार 1982 में लता मंगेशकर के साथ 'रात है या बारात फूलों की' गाना गाया था. क्यों खास थीं लता मंगेशकर? लता दीदी की विशेषताओं पर बात करते हुए तलत अजीज ने कहा कि लता मंगेशकर ने अपने 7 दशकों के करियर में हमेशा सुर के साथ गाया है. आज तक कभी ऐसा नहीं हुआ, जब उनके सुर कहीं हिले हों. तलत बताते हैं कि वो जितनी अच्छी सिंगर थीं, उतनी ही अच्छी इंसान भी थीं. तलत कहते हैं कि वो इतनी बड़ी सिंगर होकर भी बेहद साधारण तरीके से रहती थीं. उनमें जरा सा भी घमंड नहीं था. महान गायिका होकर भी वो घर पर गाने की रिहर्सल करती थीं. इसके अलावा हर किसी की मदद के लिये भी हाजिर रहती थीं. तलत अजीज की बातों से साफ है कि हमने लता मंगेशकर के रूप में वो हीरा खोया है, जिसे दोबारा पाना अब एक सपना बनकर रह गया है.
लेजेंडरी सिंगर लता मंगेशकर का जाना भारतीयों के लिये बड़ा नुकसान है, जिसकी भरपाई शायद ही कभी हो पायेगी. लता मंगेशकर महज एक सिंगर नहीं थीं, बल्कि कई लोगों के लिये देवी भी थीं. लता मंगेशकर के जाने के बाद कई लोगों की जिंदगी में एक अजीब सा खालीपन आ चुका है. अब लता दीदी हमारे बीच नहीं, लेकिन उनसे जुड़े कई किस्से-कहानियां हमारे दिलों में उन्हें हमेशा जिंदा रखेंगे. लेजेंडरी सिंगर को करते हुए आजतक के खास कार्यक्रम 'श्रद्धांजलिः तुम मुझे भुला ना पाओगे' में सिंगर तलत अजीज ने भी लता दीदी से जुड़ी कई यादें शेयर की हैं. 'श्रद्धांजलिः तुम मुझे भुला ना पाओगे' में लता मंगेशकर को याद करते हुए तलत अजीज ने उनसे हुई पहली मुलाकात का किस्सा शेयर किया है. तलत अजीज कहते हैं कि उन्हें पहली बार फिल्म बाजार के लिए लता मंगेशकर के साथ गाना रिकॉर्ड करने का मौका मिला था. उस समय वो काफी नवर्स थे. उन्होंने कहा, 'मैं काफी छोटा था जब मैंने लताजी के साथ अपना पहला गाना रिकॉर्ड किया था. मैंने अपना एल्बम रिकॉर्ड किया था, लेकिन यह रिलीज नहीं हुआ था. मुझे लता जी के साथ रिकॉर्ड करना पड़ता था. उन दिनों, रिकॉर्डिंग लाइव हुआ करती थी और एक गलती की वजह से पूरी रिकॉर्डिंग खराब हो जाती थी. ' आगे बात करते हुए उन्होंने कहा कि मैं बहुत घबराया हुआ था. ऐसे में लता जी ने जी मुझसे कह, 'तुम घबरा क्यों रहे हो, तुम अच्छा गाते हो. ' इस सादगी के साथ मैंने उनसे पूछा कि आपने मुझे कब सुना. इस पर लता जी कहती हैं कि वो दूरदर्शन में कार्यक्रम आता है ना 'आरोही' मैंने उसमें आपको गाते हुए सुना था. तलत कहते हैं कि उस समय वो लता मंगेशकर नहीं थीं, बल्कि एक युवा सिंगर को प्रोत्साहित करने वाली बुजुर्ग थीं. तलत ने पहली बार एक हज़ार नौ सौ बयासी में लता मंगेशकर के साथ 'रात है या बारात फूलों की' गाना गाया था. क्यों खास थीं लता मंगेशकर? लता दीदी की विशेषताओं पर बात करते हुए तलत अजीज ने कहा कि लता मंगेशकर ने अपने सात दशकों के करियर में हमेशा सुर के साथ गाया है. आज तक कभी ऐसा नहीं हुआ, जब उनके सुर कहीं हिले हों. तलत बताते हैं कि वो जितनी अच्छी सिंगर थीं, उतनी ही अच्छी इंसान भी थीं. तलत कहते हैं कि वो इतनी बड़ी सिंगर होकर भी बेहद साधारण तरीके से रहती थीं. उनमें जरा सा भी घमंड नहीं था. महान गायिका होकर भी वो घर पर गाने की रिहर्सल करती थीं. इसके अलावा हर किसी की मदद के लिये भी हाजिर रहती थीं. तलत अजीज की बातों से साफ है कि हमने लता मंगेशकर के रूप में वो हीरा खोया है, जिसे दोबारा पाना अब एक सपना बनकर रह गया है.
आईआईएफएल की लिस्ट के मुताबिक दिलीप सूर्यवंशी के पास अक्टूबर 2021 तक 4100 करोड़ रुपये की संपत्ति थी। मगर 2020 की तुलना में उनकी रैंकिग अमीर लोगों की सूची में गिरी है। उस साल उनकी संपत्ति 2800 रुपये थी। एमपी से अमीर लोगों की सूची में दिलीप बिल्डकॉन के पार्टनर देवेंद्र जैन का भी नाम था। वह प्रदेश के एक बड़े आईपीएस अधिकारी के भाई हैं। सीबीआई की छापेमारी में देवेंद्र जैन भी रडार पर हैं। दिलीप सूर्यवंशी की कंपनी ज्यादातर कंस्ट्रक्शन के क्षेत्र में काम करती है। दिलीप बिल्डकॉन के पास कई राज्यों में हाईवे का काम है। एमपी में ज्यादातर हाईवे निर्माण में दिलीप सूर्यवंशी की भूमिका है। कंपनी का नाम दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड है। कंपनी शेयर बाजार में भी रजिस्टर्ड है। एक समय में इनकी कंपनी ने ग्राहकों को अच्छा रिटर्न दिया था। दिलीप सूर्यवंशी की मां नहीं चाहती थी कि उनका बेटा नौकरी करे। पिता पुलिस सेवा में थे। हमेशा उनका तबादला होते रहता था। इसकी वजह से परिवार को काफी परेशानी होती थी। दिलीप सूर्यवंशी की शुरुआती पढ़ाई लिखाई भोपाल के शाहजहांनाबाद इलाके स्थित बारदारी स्कूल से हुई है। उसके बाद उन्होंने 1979 में जबलपुर से सिविल इंजीनियरिंग की थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने नौकरी नहीं की और खुद का बिजनेस स्थापित किया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दिलीप को अपनी बिजनेस स्थापित करने के लिए शुरुआती दौर में काफी संघर्ष करने पड़े थे। पैसों की कमी को पूरा करने के लिए उन्हें अपनी पत्नी के गहने तक गिरवी रखने पड़े थे। दिलीप ने एक इंटरव्यू में कहा था कि बच्चे के जन्म पर मिठाई बांटने के लिए एक दोस्त से दो सौ रुपये उधार लेने पड़े थे। दिलीप ने अपनी कंपनी की स्थापना 1988 में की थी। शुरुआती दौर में इन्हें छोटे-छोटे काम मिलते थे। दिलीप सूर्यवंशी के दो बेटे हैं, दोनों पिता के ही बिजनेस को संभाल रहे हैं। वहीं, आधिकारिक रूप से इसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई एक रिश्वत कांड से जुड़ा है। सूत्रों के मुताबिक दिलीप बिल्डकॉन के एक कर्मचारी एनएचआई के अफसर को 20 लाख रुपये की रिश्वत दे रहा था। इसी मामले में उसे गिरफ्तार किया गया है। दिलीप सूर्यवंशी को सीएम शिवराज सिंह चौहान का करीबी बताया जाता है। कंपनी के पार्टनर देवेंद्र जैन को सीबीआई ने हिरासत में लिया है।
आईआईएफएल की लिस्ट के मुताबिक दिलीप सूर्यवंशी के पास अक्टूबर दो हज़ार इक्कीस तक चार हज़ार एक सौ करोड़ रुपये की संपत्ति थी। मगर दो हज़ार बीस की तुलना में उनकी रैंकिग अमीर लोगों की सूची में गिरी है। उस साल उनकी संपत्ति दो हज़ार आठ सौ रुपयापये थी। एमपी से अमीर लोगों की सूची में दिलीप बिल्डकॉन के पार्टनर देवेंद्र जैन का भी नाम था। वह प्रदेश के एक बड़े आईपीएस अधिकारी के भाई हैं। सीबीआई की छापेमारी में देवेंद्र जैन भी रडार पर हैं। दिलीप सूर्यवंशी की कंपनी ज्यादातर कंस्ट्रक्शन के क्षेत्र में काम करती है। दिलीप बिल्डकॉन के पास कई राज्यों में हाईवे का काम है। एमपी में ज्यादातर हाईवे निर्माण में दिलीप सूर्यवंशी की भूमिका है। कंपनी का नाम दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड है। कंपनी शेयर बाजार में भी रजिस्टर्ड है। एक समय में इनकी कंपनी ने ग्राहकों को अच्छा रिटर्न दिया था। दिलीप सूर्यवंशी की मां नहीं चाहती थी कि उनका बेटा नौकरी करे। पिता पुलिस सेवा में थे। हमेशा उनका तबादला होते रहता था। इसकी वजह से परिवार को काफी परेशानी होती थी। दिलीप सूर्यवंशी की शुरुआती पढ़ाई लिखाई भोपाल के शाहजहांनाबाद इलाके स्थित बारदारी स्कूल से हुई है। उसके बाद उन्होंने एक हज़ार नौ सौ उन्यासी में जबलपुर से सिविल इंजीनियरिंग की थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने नौकरी नहीं की और खुद का बिजनेस स्थापित किया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दिलीप को अपनी बिजनेस स्थापित करने के लिए शुरुआती दौर में काफी संघर्ष करने पड़े थे। पैसों की कमी को पूरा करने के लिए उन्हें अपनी पत्नी के गहने तक गिरवी रखने पड़े थे। दिलीप ने एक इंटरव्यू में कहा था कि बच्चे के जन्म पर मिठाई बांटने के लिए एक दोस्त से दो सौ रुपये उधार लेने पड़े थे। दिलीप ने अपनी कंपनी की स्थापना एक हज़ार नौ सौ अठासी में की थी। शुरुआती दौर में इन्हें छोटे-छोटे काम मिलते थे। दिलीप सूर्यवंशी के दो बेटे हैं, दोनों पिता के ही बिजनेस को संभाल रहे हैं। वहीं, आधिकारिक रूप से इसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई एक रिश्वत कांड से जुड़ा है। सूत्रों के मुताबिक दिलीप बिल्डकॉन के एक कर्मचारी एनएचआई के अफसर को बीस लाख रुपये की रिश्वत दे रहा था। इसी मामले में उसे गिरफ्तार किया गया है। दिलीप सूर्यवंशी को सीएम शिवराज सिंह चौहान का करीबी बताया जाता है। कंपनी के पार्टनर देवेंद्र जैन को सीबीआई ने हिरासत में लिया है।
Your login session has expired. Please logout and login again. देखिए किस तरह बल्लेबाजी करते हुए गेंद को अच्छे से टाइम कर सकते हैं। आपने कई बल्लेबाजों को शानदार टाइमिंग करते हुए रन बनाते हुए देखा होगा। Sort by: Delete the comment? Delete the comment? 🏃🏻♀️ Sports (30+) बैकी लिंच (Becky Lynch) जॉन सीना (John Cena) ट्रिपल एच (Triple H) Edition:
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पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजे आने के कुछ घंटे बाद राज्य के कई इलाकों में भड़की राजनीतिक हिंसा में भाजपा कार्यकर्ता अभिजीत सरकार के अलावा कई हिंदू मारे गए थे। बंगाल में इस तरह के भयावह हालात पैदा हो गए थे कि वहाँ के हिन्दुओं और बीजेपी कार्यकर्ताओं को पलायन करने पर मजबूर होना पड़ा था, लेकिन उस वक्त कोई भी लिबरल पत्रकार ममता सरकार के खिलाफ नहीं बोला, बल्कि इन लोगों ने तृणमूल कॉन्ग्रेस का बचाव करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था। वहीं कुछ महीनों बाद ही गिरगिट की तरह रंग बदलने वाले लिबरल पत्रकारों ने मुस्लिमों के मरने के बाद अपने सुर बदल लिए हैं। अब उन्हें पश्चिम बंगाल में 'जंगलराज' नजर आने लगा है। पश्चिम बंगाल के बीरभूम के रामपुरहाट में सत्ताधारी पार्टी के नेता भादू शेख की बम हमले में मौत के बाद TMC समर्थकों ने जमकर हिंसा मचाई। उपद्रवियों ने टीएमसी नेता की मौत का बदला लेने के लिए इलाके के कई घरों को आग के हवाले कर दिया, जिसमें कुल 12 लोगों के जलकर मरने का दावा किया जा रहा है। वहीं पुलिस मृतकों की संख्या 8 बता रही है। देखें लिबरल गिरोह के कुछ ट्वीट्सः पत्रकार अभिजीत मजूमदार और राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी का दावा है कि बंगाल में एक हफ्ते में 26 राजनैतिक हत्याएँ हुई हैं। अब नई घटना में 12 लोगों को जिंदा जला दिया गया है। अभिजीत यह भी दावा करते हैं कि बंगाल अब जिहादी आतंक और कम्युनिस्ट युग के अपराधियों का अड्डा बन गया है, जहाँ हिंदुओं पर अत्याचार बढ़ता जा रहा है। वहीं, तथाकथित बुद्धिजीवियों के पसंदीदा समाचार पत्र टेलीग्राफ की खबर/हैडिंग में इस बार कोई भी रचनात्मकता नहीं दिखी। यहाँ तक कि टेलीग्राफ ने तृणमूल का नाम तक लेना उचित नहीं समझा और, 'Feud (कलह)' पर ठीकरा फोड़ दिया। इसको लेकर सोशल मीडिया यूजर्स खासा नाराज नजर आ रहे हैं, उन्होंने टेलीग्राफ के पहले पेज को एडिट करके ट्विटर पर शेयर किया है। दरअसल, बंगाल से छपने वाले समाचार पत्र ने ममता के शासनकाल में भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या, मजहबी दंगों और राज्य में हो रहे तमाम अपराधों हमेशा चुप्पी साधी है। ऐसे कई मौके हैं, जब इन्होंने अपनी बेहूदा हेडलाइन में मोदी सरकार और बीजेपी नेताओं को जानबूझकर अपना निशाना बनाया है। इनकी हेडलाइंस में केवल जातिवादी घृणा, हिन्दुओं से धार्मिक घृणा ही नजर आती है। बता दें कि बंगाल की घटना पर केंद्र ने उनसे 72 घंटे में जवाब माँगा है। NCPCR ने भी रिपोर्ट देने के लिए 3 दिन का समय दिया है।
पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजे आने के कुछ घंटे बाद राज्य के कई इलाकों में भड़की राजनीतिक हिंसा में भाजपा कार्यकर्ता अभिजीत सरकार के अलावा कई हिंदू मारे गए थे। बंगाल में इस तरह के भयावह हालात पैदा हो गए थे कि वहाँ के हिन्दुओं और बीजेपी कार्यकर्ताओं को पलायन करने पर मजबूर होना पड़ा था, लेकिन उस वक्त कोई भी लिबरल पत्रकार ममता सरकार के खिलाफ नहीं बोला, बल्कि इन लोगों ने तृणमूल कॉन्ग्रेस का बचाव करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था। वहीं कुछ महीनों बाद ही गिरगिट की तरह रंग बदलने वाले लिबरल पत्रकारों ने मुस्लिमों के मरने के बाद अपने सुर बदल लिए हैं। अब उन्हें पश्चिम बंगाल में 'जंगलराज' नजर आने लगा है। पश्चिम बंगाल के बीरभूम के रामपुरहाट में सत्ताधारी पार्टी के नेता भादू शेख की बम हमले में मौत के बाद TMC समर्थकों ने जमकर हिंसा मचाई। उपद्रवियों ने टीएमसी नेता की मौत का बदला लेने के लिए इलाके के कई घरों को आग के हवाले कर दिया, जिसमें कुल बारह लोगों के जलकर मरने का दावा किया जा रहा है। वहीं पुलिस मृतकों की संख्या आठ बता रही है। देखें लिबरल गिरोह के कुछ ट्वीट्सः पत्रकार अभिजीत मजूमदार और राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी का दावा है कि बंगाल में एक हफ्ते में छब्बीस राजनैतिक हत्याएँ हुई हैं। अब नई घटना में बारह लोगों को जिंदा जला दिया गया है। अभिजीत यह भी दावा करते हैं कि बंगाल अब जिहादी आतंक और कम्युनिस्ट युग के अपराधियों का अड्डा बन गया है, जहाँ हिंदुओं पर अत्याचार बढ़ता जा रहा है। वहीं, तथाकथित बुद्धिजीवियों के पसंदीदा समाचार पत्र टेलीग्राफ की खबर/हैडिंग में इस बार कोई भी रचनात्मकता नहीं दिखी। यहाँ तक कि टेलीग्राफ ने तृणमूल का नाम तक लेना उचित नहीं समझा और, 'Feud ' पर ठीकरा फोड़ दिया। इसको लेकर सोशल मीडिया यूजर्स खासा नाराज नजर आ रहे हैं, उन्होंने टेलीग्राफ के पहले पेज को एडिट करके ट्विटर पर शेयर किया है। दरअसल, बंगाल से छपने वाले समाचार पत्र ने ममता के शासनकाल में भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या, मजहबी दंगों और राज्य में हो रहे तमाम अपराधों हमेशा चुप्पी साधी है। ऐसे कई मौके हैं, जब इन्होंने अपनी बेहूदा हेडलाइन में मोदी सरकार और बीजेपी नेताओं को जानबूझकर अपना निशाना बनाया है। इनकी हेडलाइंस में केवल जातिवादी घृणा, हिन्दुओं से धार्मिक घृणा ही नजर आती है। बता दें कि बंगाल की घटना पर केंद्र ने उनसे बहत्तर घंटाटे में जवाब माँगा है। NCPCR ने भी रिपोर्ट देने के लिए तीन दिन का समय दिया है।
ग्वालियर। शहर में कल पांच कोरोना संक्रमित मिलने के बाद आज 264 लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आई है। शहर में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए जिला प्रशासन द्वारा विभिन्न प्रयासों के साथ संदिग्धों का जांच-परीक्षण कराया जा रहा है। जिले में अब तक 16 लोगो की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। जिसमें से 6 लोग स्वस्थ होकर घर जा चुकें है। वहीँ 10 लोगो का सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है। शहर में अब तक 4 हजार 306 सेम्पलों की जांच कराई गई है। इसके साथ ही 3 हजार 780 जांच निगेटिव प्राप्त हुई हैं। 106 प्रकरणों में जांच की आवश्यकता नहीं पाई गई है। 408 जांच नमूनों की रिपोर्ट आना शेष है। जिले में अब तक 8 हजार 242 लोगों को होम क्वारंटाइन कराया गया है, जिनमें से 6 हजार 698 की क्वारंटाइन अवधि पूर्ण हो गई है। जिले में कुल 3 लाख 86 हजार 609 लोगों की मेडीकल स्क्रीनिंग की गई है। आज 75 लोगो के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं।
ग्वालियर। शहर में कल पांच कोरोना संक्रमित मिलने के बाद आज दो सौ चौंसठ लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आई है। शहर में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए जिला प्रशासन द्वारा विभिन्न प्रयासों के साथ संदिग्धों का जांच-परीक्षण कराया जा रहा है। जिले में अब तक सोलह लोगो की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। जिसमें से छः लोग स्वस्थ होकर घर जा चुकें है। वहीँ दस लोगो का सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है। शहर में अब तक चार हजार तीन सौ छः सेम्पलों की जांच कराई गई है। इसके साथ ही तीन हजार सात सौ अस्सी जांच निगेटिव प्राप्त हुई हैं। एक सौ छः प्रकरणों में जांच की आवश्यकता नहीं पाई गई है। चार सौ आठ जांच नमूनों की रिपोर्ट आना शेष है। जिले में अब तक आठ हजार दो सौ बयालीस लोगों को होम क्वारंटाइन कराया गया है, जिनमें से छः हजार छः सौ अट्ठानवे की क्वारंटाइन अवधि पूर्ण हो गई है। जिले में कुल तीन लाख छियासी हजार छः सौ नौ लोगों की मेडीकल स्क्रीनिंग की गई है। आज पचहत्तर लोगो के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं।
इलाहाबाद (ब्यूरो)। स्नातक परीक्षा में 50 फीसदी से कम अंक और परास्नातक में 50 फीसदी अंक वाले अभ्यर्थी अब बीटीसी में प्रवेश परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। परीक्षा नियामक की ओर से स्नातक में 50 फीसदी से कम अंक वाले अभ्यर्थियों को पीजी में 50 फीसदी अंक पाने वालों को सुवधिा प्रदान की है। परीक्षा नियामक ने एनटीटी को टीईटी से बाहर करने के बाद इसे बंद करने का फैसला किया है। शासनादेश और खबरों के साथ तुरंत अपडेट रहने रहने के लिए अपने एंड्राइड फ़ोन के लिए गूगल प्ले स्टोर से शासनादेश डॉट कॉम का एंड्राइड एप क्लिक करके डाउनलोड करें। स्नातक परीक्षा में 50 फीसदी से कम अंक और परास्नातक में 50 फीसदी अंक वाले कर सकेंगे बीटीसी, एनटीटी को टीईटी से बाहर करने के बाद बंद करने का फैसला Reviewed by प्रवीण त्रिवेदी on 7:08 AM Rating:
इलाहाबाद । स्नातक परीक्षा में पचास फीसदी से कम अंक और परास्नातक में पचास फीसदी अंक वाले अभ्यर्थी अब बीटीसी में प्रवेश परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। परीक्षा नियामक की ओर से स्नातक में पचास फीसदी से कम अंक वाले अभ्यर्थियों को पीजी में पचास फीसदी अंक पाने वालों को सुवधिा प्रदान की है। परीक्षा नियामक ने एनटीटी को टीईटी से बाहर करने के बाद इसे बंद करने का फैसला किया है। शासनादेश और खबरों के साथ तुरंत अपडेट रहने रहने के लिए अपने एंड्राइड फ़ोन के लिए गूगल प्ले स्टोर से शासनादेश डॉट कॉम का एंड्राइड एप क्लिक करके डाउनलोड करें। स्नातक परीक्षा में पचास फीसदी से कम अंक और परास्नातक में पचास फीसदी अंक वाले कर सकेंगे बीटीसी, एनटीटी को टीईटी से बाहर करने के बाद बंद करने का फैसला Reviewed by प्रवीण त्रिवेदी on सात:आठ AM Rating:
रांची. पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस की लगातार बढ़ती कीमतों (Price Hike Of Petrol And Gas) का राजनीतिक विरोध इनदिनों चरम पर है. झारखंड की राजधानी रांची में भी झारखंड प्रदेश महिला कांग्रेस कमिटी की ओर से अनोखा और अनूठा प्रदर्शन देखने को मिला. कांग्रेस की महिला नेताओं ने राजधानी के मुख्य चौराहे अल्बर्ट एक्का चौक पर लकड़ी के चूल्हे पर रोटियां सेंककर महंगाई के मुद्दे पर केन्द्र सरकार को घेरा. झारखंड प्रदेश महिला कांग्रेस कमिटी के निर्देश पर रांची महानगर महिला कांग्रेस कमिटी की ओर से पेट्रोल-डीजल तथा गैस की कीमतों में अप्रत्याशित मूल्यवृद्धि के खिलाफ धरना-प्रदर्शन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता रांची महानगर महिला कांग्रेस अध्यक्ष चंद्र रश्मि पिंगुवा ने की. इस विरोध प्रदर्शन के मौके पर महिला कांग्रेस के नेत्रियों ने रांची के अलबर्ट एक्का चौक पर लकड़ी का चूल्हा जलाया. फिर उस पर तवा रखकर बकायदा रोटियां सेंकी. इस दौरान कई महिला नेता चूल्हे को अच्छी तरह जलाने के लिए फूंकती भी नजर आयीं. हालांकि धुएं के कारण उनकी आंखें और चेहरे लाल हो गये. प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष गुंजन सिंह ने कहा कि केन्द्र सरकार की उज्ज्वला योजना एक भ्रम फैलाने वाली योजना बन गई है. उन्होंने इसे भी एक बहुत बड़ा जुमला बताया. उन्होंने कहा कि केन्द्र की मोदी सरकार अपने पूंजीपति मित्रों को फायदा पहुंचाने के लिए देश में महंगाई बढ़ाकर आम जनता की जेब काटने का काम कर रही है. पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों में हुई अप्रत्याशित मूल्य वृद्धि से आज पूरा देश त्रस्त है. रांची महानगर महिला कांग्रेस अध्यक्ष चंद्र रश्मि पिंगुवा ने कहा कि केन्द्र की मोदी सरकार देश व जनहित में एक भी फैसले नहीं ले रही है. इस कारण आज पूरा देश आंदोलित और उग्र है. अपने चंद मित्रों को फायदा पहुंचाने के लिए पूरे देश को ताक पर रख दिया गया है. देश में महंगाई और बेरोजगार बढ़ गई है. इसके बाद भी मोदी सरकार को होश नहीं आयी है. उन्होंने केन्द्र सरकार से पेट्रोल-डीजल तथा गैस की कीमतों को नियंत्रित करने और दाम घटाने की मांग की.
रांची. पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस की लगातार बढ़ती कीमतों का राजनीतिक विरोध इनदिनों चरम पर है. झारखंड की राजधानी रांची में भी झारखंड प्रदेश महिला कांग्रेस कमिटी की ओर से अनोखा और अनूठा प्रदर्शन देखने को मिला. कांग्रेस की महिला नेताओं ने राजधानी के मुख्य चौराहे अल्बर्ट एक्का चौक पर लकड़ी के चूल्हे पर रोटियां सेंककर महंगाई के मुद्दे पर केन्द्र सरकार को घेरा. झारखंड प्रदेश महिला कांग्रेस कमिटी के निर्देश पर रांची महानगर महिला कांग्रेस कमिटी की ओर से पेट्रोल-डीजल तथा गैस की कीमतों में अप्रत्याशित मूल्यवृद्धि के खिलाफ धरना-प्रदर्शन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता रांची महानगर महिला कांग्रेस अध्यक्ष चंद्र रश्मि पिंगुवा ने की. इस विरोध प्रदर्शन के मौके पर महिला कांग्रेस के नेत्रियों ने रांची के अलबर्ट एक्का चौक पर लकड़ी का चूल्हा जलाया. फिर उस पर तवा रखकर बकायदा रोटियां सेंकी. इस दौरान कई महिला नेता चूल्हे को अच्छी तरह जलाने के लिए फूंकती भी नजर आयीं. हालांकि धुएं के कारण उनकी आंखें और चेहरे लाल हो गये. प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष गुंजन सिंह ने कहा कि केन्द्र सरकार की उज्ज्वला योजना एक भ्रम फैलाने वाली योजना बन गई है. उन्होंने इसे भी एक बहुत बड़ा जुमला बताया. उन्होंने कहा कि केन्द्र की मोदी सरकार अपने पूंजीपति मित्रों को फायदा पहुंचाने के लिए देश में महंगाई बढ़ाकर आम जनता की जेब काटने का काम कर रही है. पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों में हुई अप्रत्याशित मूल्य वृद्धि से आज पूरा देश त्रस्त है. रांची महानगर महिला कांग्रेस अध्यक्ष चंद्र रश्मि पिंगुवा ने कहा कि केन्द्र की मोदी सरकार देश व जनहित में एक भी फैसले नहीं ले रही है. इस कारण आज पूरा देश आंदोलित और उग्र है. अपने चंद मित्रों को फायदा पहुंचाने के लिए पूरे देश को ताक पर रख दिया गया है. देश में महंगाई और बेरोजगार बढ़ गई है. इसके बाद भी मोदी सरकार को होश नहीं आयी है. उन्होंने केन्द्र सरकार से पेट्रोल-डीजल तथा गैस की कीमतों को नियंत्रित करने और दाम घटाने की मांग की.
कुल्लू - कोरोना वायरस को लेकर किए गए लॉकडाउन का लोग उल्लंघन कर रहे हैं। इस बीमारी से निपटने के लिए जहां लोगों को सरकार के आदेशों का पालन करना चाहिए। वहीं, कई लोग इसको अनदेखा कर रहे हैं। पुलिस ने ऐसे लोगों पर सख्ती से निपटना शुरू कर दिया है। हालांकि लोगों को सरकार हर दिन राशन, सब्जी खरीदने के लिए समय तय कर रही है। लेकिन निर्धारित समय के बाद भी खासकर वाहन चालक बाज नहीं आ रहे हैं। पुलिस 188, 34 आईपीसी और 51 एनडीएमए अधिनियम के तहत कार्रवाई कर रही है। बता दें कि बंजार पुलिस ने हेमंत कुमार निखिल शर्मा, पुनीत कुमार के खिलाफ पीएस बंजार थाने इन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। उक्त मामले में एसडीपीओ बंजार भी उपस्थित रहे। हिमाचल में लॉकडाउन/ कर्फ्यू के दौरान एसडीपीओ बंजार अपने अधिकार क्षेत्र में चैकिंग पर थे और चिहुंटा के पास पुलिस ने एक वाहन को जब रोका तो चालक ने वाहन को नहीं रोका। पुलिस ने कुछ दूरी पर वाहन को रोकने में कामयाबी पाई और वाहन में चालक समेत तीन लोग सवार थे। जांच की गई तो यह सरकार द्वारा पारित आदेश का उल्लंघन करते पाए गए। वहीं, गुरुवार को देर शाम करीब 5ः50 बजे शाम आनी पुलिस की एक टीम निगान मौजूद थी। इस दौरान एक पिकअप आई। जिसे चैकिंग के लिए रोका गया जिसमें चालक मालिक प्रमोद कुमार तहसील आनी के अलावा घनशयाम, प्रकाश चंद, केहर सिंह व कपिल भी बैठे थे, तो गाड़ी मालिक प्रमोद कुमार आरसी एमवीएक्ट के अंतर्गत किए गए चालान में कुमारसैन पुलिस द्वारा कब्जे में ली गई पाई। प्रमोद कुमार कोई भी कर्फ्यू की परमिशन पुलिस को नहीं दे सका। पुलिस ने पिकअप, चाबी और कागजात को जब्त कर दिया। पुलिस ने 188 आईपीसी, 51 एनडीएमए अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया। वहीं, भुंतर पुलिस ने 188,269,270 आईपीसी और 51 एनडीएमए के तहत पीएस भुंतर में मामला पंजीकृत किया गया है। यह सरकार के लॉकडाउन आदेशों का उल्लंघन कर रहे थे। वहीं निरमंड ने भी एक व्यक्ति पर कार्रवाई की है। वहीं, आनी पुलिस ने भी चैकिंग पर थी। जब सरकार और उपायुक्त के आदेश पर पुलिस गुरुवार पौने सात बजे घोरला में पहुंची तो वहां पर एक व्यक्ति ने अपनी दुकान खोल रखी थी। दुकान के भीतर तीन और व्यक्ति बैठे थे। पुलिस ने 144 सीआरपीसी 144 के तहत दुकान खोलने के संदर्भ में परमिट, लाइसेंस मांगा तो वह पेश नहीं कर सकता। पुलिस ने दुकानदार के खिलाफ जिला मैजिस्ट्रेट कुल्लू के आदेशों की पालना न करने पर केस दर्ज कर लिया है। एसपी कुल्लू गौरव सिंह ने बताया कि पुलिस की टीम हर जगह पर तैनात हैं। लॉकडाउन/ कर्फ्यू की उल्लंघना करने वाले चालकों पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है।
कुल्लू - कोरोना वायरस को लेकर किए गए लॉकडाउन का लोग उल्लंघन कर रहे हैं। इस बीमारी से निपटने के लिए जहां लोगों को सरकार के आदेशों का पालन करना चाहिए। वहीं, कई लोग इसको अनदेखा कर रहे हैं। पुलिस ने ऐसे लोगों पर सख्ती से निपटना शुरू कर दिया है। हालांकि लोगों को सरकार हर दिन राशन, सब्जी खरीदने के लिए समय तय कर रही है। लेकिन निर्धारित समय के बाद भी खासकर वाहन चालक बाज नहीं आ रहे हैं। पुलिस एक सौ अठासी, चौंतीस आईपीसी और इक्यावन एनडीएमए अधिनियम के तहत कार्रवाई कर रही है। बता दें कि बंजार पुलिस ने हेमंत कुमार निखिल शर्मा, पुनीत कुमार के खिलाफ पीएस बंजार थाने इन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। उक्त मामले में एसडीपीओ बंजार भी उपस्थित रहे। हिमाचल में लॉकडाउन/ कर्फ्यू के दौरान एसडीपीओ बंजार अपने अधिकार क्षेत्र में चैकिंग पर थे और चिहुंटा के पास पुलिस ने एक वाहन को जब रोका तो चालक ने वाहन को नहीं रोका। पुलिस ने कुछ दूरी पर वाहन को रोकने में कामयाबी पाई और वाहन में चालक समेत तीन लोग सवार थे। जांच की गई तो यह सरकार द्वारा पारित आदेश का उल्लंघन करते पाए गए। वहीं, गुरुवार को देर शाम करीब पाँचःपचास बजे शाम आनी पुलिस की एक टीम निगान मौजूद थी। इस दौरान एक पिकअप आई। जिसे चैकिंग के लिए रोका गया जिसमें चालक मालिक प्रमोद कुमार तहसील आनी के अलावा घनशयाम, प्रकाश चंद, केहर सिंह व कपिल भी बैठे थे, तो गाड़ी मालिक प्रमोद कुमार आरसी एमवीएक्ट के अंतर्गत किए गए चालान में कुमारसैन पुलिस द्वारा कब्जे में ली गई पाई। प्रमोद कुमार कोई भी कर्फ्यू की परमिशन पुलिस को नहीं दे सका। पुलिस ने पिकअप, चाबी और कागजात को जब्त कर दिया। पुलिस ने एक सौ अठासी आईपीसी, इक्यावन एनडीएमए अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया। वहीं, भुंतर पुलिस ने एक सौ अठासी,दो सौ उनहत्तर,दो सौ सत्तर आईपीसी और इक्यावन एनडीएमए के तहत पीएस भुंतर में मामला पंजीकृत किया गया है। यह सरकार के लॉकडाउन आदेशों का उल्लंघन कर रहे थे। वहीं निरमंड ने भी एक व्यक्ति पर कार्रवाई की है। वहीं, आनी पुलिस ने भी चैकिंग पर थी। जब सरकार और उपायुक्त के आदेश पर पुलिस गुरुवार पौने सात बजे घोरला में पहुंची तो वहां पर एक व्यक्ति ने अपनी दुकान खोल रखी थी। दुकान के भीतर तीन और व्यक्ति बैठे थे। पुलिस ने एक सौ चौंतालीस सीआरपीसी एक सौ चौंतालीस के तहत दुकान खोलने के संदर्भ में परमिट, लाइसेंस मांगा तो वह पेश नहीं कर सकता। पुलिस ने दुकानदार के खिलाफ जिला मैजिस्ट्रेट कुल्लू के आदेशों की पालना न करने पर केस दर्ज कर लिया है। एसपी कुल्लू गौरव सिंह ने बताया कि पुलिस की टीम हर जगह पर तैनात हैं। लॉकडाउन/ कर्फ्यू की उल्लंघना करने वाले चालकों पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है।
प्रधानमंत्री प्रयुथ लोकप्रिय अरबपति थाकसिन शिनावात्रा की बेटी पेतोंगतार्न शिनावात्रा के विरूद्ध चुनाव लड़ रहे हैं. सेना ने 2006 में तख्तापलट कर थाकसिन शिनावात्रा को सत्ता से बेदखल कर दिया था. थाइलैंड में आम चुनाव के लिए रविवार को मतदान प्रारम्भ हो गया. इस चुनाव को निवर्तमान पीएम प्रयुथ चान-ओचा के 2014 में तख्तापलट से सत्ता में आने के आठ वर्ष बाद परिवर्तन के लिए एक जरूरी अवसर बताया जा रहा है. प्रधानमंत्री प्रयुथ लोकप्रिय अरबपति थाकसिन शिनावात्रा की बेटी पेतोंगतार्न शिनावात्रा के विरूद्ध चुनाव लड़ रहे हैं. सेना ने 2006 में तख्तापलट कर थाकसिन शिनावात्रा को सत्ता से बेदखल कर दिया था. उनकी सम्बन्धी यिंगलुक शिनावात्रा 2011 में पीएम बनी थीं लेकिन प्रयुथ की प्रतिनिधित्व में तख्तापलट कर उन्हें सत्ता से हटा दिया गया था. पेतोंगतार्न शिनावात्रा की प्रतिनिधित्व वाले विपक्षी दल फेयु थाई पार्टी का 500 सदस्यीय निचले सदन में सर्वाधिक सीट जीतने का अनुमान है, लेकिन अगली गवर्नमेंट का नेतृत्व कौन करेगा, यह महज रविवार के मतदान से ही तय नहीं होगा. पीएम का चयन निचले सदन और 250 सदस्यीय सीनेट के संयुक्त सत्र में जुलाई में किया जाएगा. विजेता उम्मीदवार के पास कम से कम 376 वोट होने चाहिए और किसी भी दल के अपने दम पर यह आंकड़ा छूने के आसार नहीं हैं. फेयु थाई ने 2019 के चुनाव में सबसे अधिक सीट जीती थी लेकिन उसके चिर प्रतिद्वंद्वी सेना समर्थित पलांग प्रचारथ पार्टी ने प्रयुथ के साथ गठबंधन कर लिया था. प्रयुथ दोबारा चुनाव लड़ रहे हैं. हालांकि, इस बार सेना का समर्थन दो धड़ों में विभाजित है. प्रधानमंत्री प्रयुथ पर लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था, महामारी से निपटने में कमियों और लोकतांत्रिक सुधारों को विफल करने का आरोप है. विस्कॉन्सिन यूनिवर्सिटी में थाई शोध के जानकार टायरेल हेबरकोर्न ने कहा, "युवा मतदाताओं में वृद्धि और सेना शासन से हुए हानि को लेकर आम जागरूकता इस चुनाव के नतीजे तय करने में अहम साबित हो सकते हैं.
प्रधानमंत्री प्रयुथ लोकप्रिय अरबपति थाकसिन शिनावात्रा की बेटी पेतोंगतार्न शिनावात्रा के विरूद्ध चुनाव लड़ रहे हैं. सेना ने दो हज़ार छः में तख्तापलट कर थाकसिन शिनावात्रा को सत्ता से बेदखल कर दिया था. थाइलैंड में आम चुनाव के लिए रविवार को मतदान प्रारम्भ हो गया. इस चुनाव को निवर्तमान पीएम प्रयुथ चान-ओचा के दो हज़ार चौदह में तख्तापलट से सत्ता में आने के आठ वर्ष बाद परिवर्तन के लिए एक जरूरी अवसर बताया जा रहा है. प्रधानमंत्री प्रयुथ लोकप्रिय अरबपति थाकसिन शिनावात्रा की बेटी पेतोंगतार्न शिनावात्रा के विरूद्ध चुनाव लड़ रहे हैं. सेना ने दो हज़ार छः में तख्तापलट कर थाकसिन शिनावात्रा को सत्ता से बेदखल कर दिया था. उनकी सम्बन्धी यिंगलुक शिनावात्रा दो हज़ार ग्यारह में पीएम बनी थीं लेकिन प्रयुथ की प्रतिनिधित्व में तख्तापलट कर उन्हें सत्ता से हटा दिया गया था. पेतोंगतार्न शिनावात्रा की प्रतिनिधित्व वाले विपक्षी दल फेयु थाई पार्टी का पाँच सौ सदस्यीय निचले सदन में सर्वाधिक सीट जीतने का अनुमान है, लेकिन अगली गवर्नमेंट का नेतृत्व कौन करेगा, यह महज रविवार के मतदान से ही तय नहीं होगा. पीएम का चयन निचले सदन और दो सौ पचास सदस्यीय सीनेट के संयुक्त सत्र में जुलाई में किया जाएगा. विजेता उम्मीदवार के पास कम से कम तीन सौ छिहत्तर वोट होने चाहिए और किसी भी दल के अपने दम पर यह आंकड़ा छूने के आसार नहीं हैं. फेयु थाई ने दो हज़ार उन्नीस के चुनाव में सबसे अधिक सीट जीती थी लेकिन उसके चिर प्रतिद्वंद्वी सेना समर्थित पलांग प्रचारथ पार्टी ने प्रयुथ के साथ गठबंधन कर लिया था. प्रयुथ दोबारा चुनाव लड़ रहे हैं. हालांकि, इस बार सेना का समर्थन दो धड़ों में विभाजित है. प्रधानमंत्री प्रयुथ पर लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था, महामारी से निपटने में कमियों और लोकतांत्रिक सुधारों को विफल करने का आरोप है. विस्कॉन्सिन यूनिवर्सिटी में थाई शोध के जानकार टायरेल हेबरकोर्न ने कहा, "युवा मतदाताओं में वृद्धि और सेना शासन से हुए हानि को लेकर आम जागरूकता इस चुनाव के नतीजे तय करने में अहम साबित हो सकते हैं.
सेहतमंद रहने के लिए मौसम से तालमेल बिठाना जरूरी है। सर्दियों में स्वस्थ रहना चुनौतीपूर्ण होता है। इन दिनों कम तापमान, उच्च आर्द्रता और कोहरे के कारण वातावरण में धूल के कण अधिक नहीं होते हैं। इस वजह से धूल के कण और प्रदूषक जमीन से कम ऊंचाई पर वातावरण में मौजूद होते हैं। सर्दियों में प्रदूषण का स्तर अधिक होता है। पीएम-10 और पीएम-2. 5 जैसे हानिकारक कण भी सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। जिससे जो लोग किसी बीमारी से ग्रसित हैं उनकी परेशानी बढ़ जाती है। इसके अलावा सर्दियों में मौसमी बीमारियों की चपेट में आने की संभावना भी अधिक होती है। जहरीली हवा का असर स्वस्थ लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। इसलिए सतर्क रहें और ठंड से बचने के सभी उपायों का पालन करें, ताकि आपकी सेहत पर कोई असर न पड़े। ठंड से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और सीओपीडी बढ़ जाते हैं। इसके साथ ही हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है। गले में खराश, सर्दी-खांसी जैसी मौसमी बीमारियां भी संक्रमण फैलाती हैं। ठंड के संपर्क में आने से अनियंत्रित रक्तचाप और मधुमेह हो सकता है। इसलिए सांस या अन्य किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। इसलिए आप जब भी घर से बाहर निकले तो मास्क का प्रयोग अवश्य करें। सर्दियों के मौसम में त्वचा रूखी हो जाती है और रूखापन आ जाता है। इसलिए नहाने के बाद शरीर पर कोई तेल या क्रीम लगाएं, ताकि त्वचा को पर्याप्त पोषण मिल सके। सर्दियों में लोग अधिक चिकनाई युक्त और मसालेदार भोजन का सेवन करते हैं। शारीरिक गतिविधियाँ कम हो जाती हैं और अधिकांश लोग व्यायाम करने से बचते हैं। जिससे वजन बढ़ता है। यह शरीर के जोड़ों को प्रभावित करता है। सर्दियों में कई दिनों तक धूप कम या बिल्कुल नहीं आती है। इससे शरीर में विटामिन-डी की कमी हो जाती है, जिससे जोड़ों में दर्द, अकड़न और गठिया की समस्या बढ़ जाती है। सर्दियों में सुबह तीन से चार बजे के बीच का समय अधिक संवेदनशील होता है। ठंड के कारण धमनियां सिकुड़ जाती हैं। इससे रक्त संचार और ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित होती है। यह स्थिति उच्च रक्तचाप का कारण बनती है। ऐसे में हृदय रोग के रोगियों को अधिक सतर्क रहना चाहिए। दिल के दौरे और स्ट्रोक को रोकने के लिए नियमित रूप से रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और मधुमेह की जाँच करें। अगर आप किसी बीमारी से पीड़ित हैं तो समय पर दवाई लेना न भूलें और अपनी जांच करवाएं। अत्यधिक थकान, सांस लेने में तकलीफ और सीने में भारीपन जैसे तनाव से बचें। सर्दी का मौसम वायरस और बैक्टीरिया के लिए अनुकूल होता है। ये वातावरण में मौजूद धूल के कणों से चिपक जाते हैं, जिससे ये फैलते हैं। ऐसे में बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है। इन्फ्लूएंजा के खिलाफ टीका लगवाएं। छोटे बच्चे, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं भी यह टीका लगवा सकती हैं। जिन बुजुर्गों को निमोनिया का टीका नहीं लगा है, उन्हें निमोनिया का टीका लगवाना न भूलें। इससे संक्रमण की संभावना काफी हद तक कम हो जाएगी। हरी सब्जियों और मौसमी फलों का अधिक सेवन करें। ज्यादा मसाले और ऑयली खाना ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और शुगर लेवल को अनियंत्रित रखता है. पर्याप्त पानी पियें। वैसे तो बेहतर होगा कि आप गुनगुना पानी पिएं। शारीरिक गतिविधि प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करती है। सर्दियों में बाहर जाना सेहत के लिए अच्छा नहीं होता है। इसलिए अपनी क्षमता के अनुसार घर पर ही व्यायाम करें। इससे हर अंग की सक्रियता बढ़ेगी और वजन नियंत्रित रहेगा।
सेहतमंद रहने के लिए मौसम से तालमेल बिठाना जरूरी है। सर्दियों में स्वस्थ रहना चुनौतीपूर्ण होता है। इन दिनों कम तापमान, उच्च आर्द्रता और कोहरे के कारण वातावरण में धूल के कण अधिक नहीं होते हैं। इस वजह से धूल के कण और प्रदूषक जमीन से कम ऊंचाई पर वातावरण में मौजूद होते हैं। सर्दियों में प्रदूषण का स्तर अधिक होता है। पीएम-दस और पीएम-दो. पाँच जैसे हानिकारक कण भी सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। जिससे जो लोग किसी बीमारी से ग्रसित हैं उनकी परेशानी बढ़ जाती है। इसके अलावा सर्दियों में मौसमी बीमारियों की चपेट में आने की संभावना भी अधिक होती है। जहरीली हवा का असर स्वस्थ लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। इसलिए सतर्क रहें और ठंड से बचने के सभी उपायों का पालन करें, ताकि आपकी सेहत पर कोई असर न पड़े। ठंड से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और सीओपीडी बढ़ जाते हैं। इसके साथ ही हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है। गले में खराश, सर्दी-खांसी जैसी मौसमी बीमारियां भी संक्रमण फैलाती हैं। ठंड के संपर्क में आने से अनियंत्रित रक्तचाप और मधुमेह हो सकता है। इसलिए सांस या अन्य किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। इसलिए आप जब भी घर से बाहर निकले तो मास्क का प्रयोग अवश्य करें। सर्दियों के मौसम में त्वचा रूखी हो जाती है और रूखापन आ जाता है। इसलिए नहाने के बाद शरीर पर कोई तेल या क्रीम लगाएं, ताकि त्वचा को पर्याप्त पोषण मिल सके। सर्दियों में लोग अधिक चिकनाई युक्त और मसालेदार भोजन का सेवन करते हैं। शारीरिक गतिविधियाँ कम हो जाती हैं और अधिकांश लोग व्यायाम करने से बचते हैं। जिससे वजन बढ़ता है। यह शरीर के जोड़ों को प्रभावित करता है। सर्दियों में कई दिनों तक धूप कम या बिल्कुल नहीं आती है। इससे शरीर में विटामिन-डी की कमी हो जाती है, जिससे जोड़ों में दर्द, अकड़न और गठिया की समस्या बढ़ जाती है। सर्दियों में सुबह तीन से चार बजे के बीच का समय अधिक संवेदनशील होता है। ठंड के कारण धमनियां सिकुड़ जाती हैं। इससे रक्त संचार और ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित होती है। यह स्थिति उच्च रक्तचाप का कारण बनती है। ऐसे में हृदय रोग के रोगियों को अधिक सतर्क रहना चाहिए। दिल के दौरे और स्ट्रोक को रोकने के लिए नियमित रूप से रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और मधुमेह की जाँच करें। अगर आप किसी बीमारी से पीड़ित हैं तो समय पर दवाई लेना न भूलें और अपनी जांच करवाएं। अत्यधिक थकान, सांस लेने में तकलीफ और सीने में भारीपन जैसे तनाव से बचें। सर्दी का मौसम वायरस और बैक्टीरिया के लिए अनुकूल होता है। ये वातावरण में मौजूद धूल के कणों से चिपक जाते हैं, जिससे ये फैलते हैं। ऐसे में बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है। इन्फ्लूएंजा के खिलाफ टीका लगवाएं। छोटे बच्चे, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं भी यह टीका लगवा सकती हैं। जिन बुजुर्गों को निमोनिया का टीका नहीं लगा है, उन्हें निमोनिया का टीका लगवाना न भूलें। इससे संक्रमण की संभावना काफी हद तक कम हो जाएगी। हरी सब्जियों और मौसमी फलों का अधिक सेवन करें। ज्यादा मसाले और ऑयली खाना ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और शुगर लेवल को अनियंत्रित रखता है. पर्याप्त पानी पियें। वैसे तो बेहतर होगा कि आप गुनगुना पानी पिएं। शारीरिक गतिविधि प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करती है। सर्दियों में बाहर जाना सेहत के लिए अच्छा नहीं होता है। इसलिए अपनी क्षमता के अनुसार घर पर ही व्यायाम करें। इससे हर अंग की सक्रियता बढ़ेगी और वजन नियंत्रित रहेगा।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को प्रमुख नीतिगत दर रेपो को 0. 40 प्रतिशत बढ़ाकर 4. 40 प्रतिशत कर दिया। मुख्य रूप से बढ़ती मुद्रास्फीति को काबू में लाने के लिये केंद्रीय बैंक ने यह कदम उठाया है।
भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को प्रमुख नीतिगत दर रेपो को शून्य. चालीस प्रतिशत बढ़ाकर चार. चालीस प्रतिशत कर दिया। मुख्य रूप से बढ़ती मुद्रास्फीति को काबू में लाने के लिये केंद्रीय बैंक ने यह कदम उठाया है।
शिक्षामंत्री ने कहा कि दिशानिर्देर्शों में छात्रों को लैंगिक भेदभाव, समाज में सभी को एक मानने का भाव, आपसी प्रतिस्पर्धा, शारीरिक रूप से सक्षम बनाने आदि के भाव को शामिल करने पर जोर होगा। शिक्षण संस्थानों को अब छात्रों के मानसिक सेहत का ख्याल रखना होगा जरूरी होगा। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने सोमवार को इस मुद्दे पर आयोजित उच्चस्तरीय समिति की समीक्षा बैठक में कहा कि शिक्षा मंत्रालय जल्द से जल्द मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी करें, ताकि शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी तय की जाए। इसके लिए शिक्षण संस्थानों को शिकायत प्रकोष्ठ बनाने होंगे और अधिकारी की जिम्मेदारी तय की गयी है। दरअसल, शिक्षा मंत्रालय ने छात्रों को मानसिक तनाव से उबारने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का मसौदा तैयार कर लिया है। केंद्रीय शिक्षा और कौशल विकास मंत्री ने बैठक में छात्रों को मानसिक तनाव से बचाने और शिक्षण संस्थानों में भेदभाव बर्दाश्त न करने की नीति को लेकर मंथन किया गया। बैठक में स्कूल और उच्च शिक्षा विभाग, सीबीएसई, एआईसीटीई, यूजीसी के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि एक प्रभावी शिकायत प्रकोष्ठ बनाया जाए, जिसमें अधिकारियों की जिम्मेदारी तय हो। इसका मतलब है कि यदि कोई इन विषयों पर शिकायत करता है तो उस पर तत्काल कार्रवाई करने के साथ छात्रों को न्याय सुनिश्चित हो। इसमें उन्होंने ऑनलाइन सुझाव भी आमंत्रित किये हैं, ताकि नीति बनाने से पहले उसमें समय की मांग के तहत सभी पहुलओं को शामिल किया जा सके। शिक्षामंत्री ने कहा कि दिशानिर्देर्शों में छात्रों को लैंगिक भेदभाव, समाज में सभी को एक मानने का भाव, आपसी प्रतिस्पर्धा, शारीरिक रूप से सक्षम बनाने आदि के भाव को शामिल करने पर जोर होगा। उन्होंने कहा कि फ्रेमवर्क में छात्रों को किसी भी तरह के खतरे या हमले, सामाजिक भेदभाव, छात्रों के बीच आत्मविनाशाकारी प्रवृत्ति रोकने के उपाय किये जाएंगे। शिक्षा मंत्रालय छात्रों की शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक भलाई सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार ने शैक्षणिक तनाव को कम करने के लिए समय-समय पर कई कदम उठाए हैं। इनमें सहपाठियों की सहायता से सीखना, क्षेत्रीय भाषाओं में तकनीकी शिक्षा की शुरुआत, छात्रों को मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करने के लिए मनोदर्पण पहल, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों की रोकथाम, पहचान और उपचारात्मक उपायों पर दिशानिर्देश आदि शामिल हैं। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
शिक्षामंत्री ने कहा कि दिशानिर्देर्शों में छात्रों को लैंगिक भेदभाव, समाज में सभी को एक मानने का भाव, आपसी प्रतिस्पर्धा, शारीरिक रूप से सक्षम बनाने आदि के भाव को शामिल करने पर जोर होगा। शिक्षण संस्थानों को अब छात्रों के मानसिक सेहत का ख्याल रखना होगा जरूरी होगा। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने सोमवार को इस मुद्दे पर आयोजित उच्चस्तरीय समिति की समीक्षा बैठक में कहा कि शिक्षा मंत्रालय जल्द से जल्द मानक संचालन प्रक्रिया जारी करें, ताकि शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी तय की जाए। इसके लिए शिक्षण संस्थानों को शिकायत प्रकोष्ठ बनाने होंगे और अधिकारी की जिम्मेदारी तय की गयी है। दरअसल, शिक्षा मंत्रालय ने छात्रों को मानसिक तनाव से उबारने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया का मसौदा तैयार कर लिया है। केंद्रीय शिक्षा और कौशल विकास मंत्री ने बैठक में छात्रों को मानसिक तनाव से बचाने और शिक्षण संस्थानों में भेदभाव बर्दाश्त न करने की नीति को लेकर मंथन किया गया। बैठक में स्कूल और उच्च शिक्षा विभाग, सीबीएसई, एआईसीटीई, यूजीसी के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि एक प्रभावी शिकायत प्रकोष्ठ बनाया जाए, जिसमें अधिकारियों की जिम्मेदारी तय हो। इसका मतलब है कि यदि कोई इन विषयों पर शिकायत करता है तो उस पर तत्काल कार्रवाई करने के साथ छात्रों को न्याय सुनिश्चित हो। इसमें उन्होंने ऑनलाइन सुझाव भी आमंत्रित किये हैं, ताकि नीति बनाने से पहले उसमें समय की मांग के तहत सभी पहुलओं को शामिल किया जा सके। शिक्षामंत्री ने कहा कि दिशानिर्देर्शों में छात्रों को लैंगिक भेदभाव, समाज में सभी को एक मानने का भाव, आपसी प्रतिस्पर्धा, शारीरिक रूप से सक्षम बनाने आदि के भाव को शामिल करने पर जोर होगा। उन्होंने कहा कि फ्रेमवर्क में छात्रों को किसी भी तरह के खतरे या हमले, सामाजिक भेदभाव, छात्रों के बीच आत्मविनाशाकारी प्रवृत्ति रोकने के उपाय किये जाएंगे। शिक्षा मंत्रालय छात्रों की शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक भलाई सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार ने शैक्षणिक तनाव को कम करने के लिए समय-समय पर कई कदम उठाए हैं। इनमें सहपाठियों की सहायता से सीखना, क्षेत्रीय भाषाओं में तकनीकी शिक्षा की शुरुआत, छात्रों को मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करने के लिए मनोदर्पण पहल, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों की रोकथाम, पहचान और उपचारात्मक उपायों पर दिशानिर्देश आदि शामिल हैं। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
वोलोग्दा पहले 1147 में इतिहास में उल्लेख किया गया था। टाउन, मास्को से 450 किमी दूर स्थित, न केवल रूस के उत्तर-पश्चिम में सबसे बड़ा शहर है, बल्कि क्षेत्र के मुख्य परिवहन केन्द्रों में से एक है। इसके अलावा, यह इस क्षेत्र के प्रशासनिक और वैज्ञानिक केंद्र है। संस्कृति और शहर है, जो एक विशेष ऐतिहासिक और वास्तुकला विरासत है का एक केंद्र के रूप में यह का महत्व है, तथ्य यह है कि उनमें से वोलोग्दा 224 में स्मारक राज्य सुरक्षा 128 के तहत कर रहे कहा। शहर की संस्कृति के स्तर का स्पष्ट सूचक वोलोग्दा क्षेत्रीय लाइब्रेरी है। दादी माँ का, जो अपनी ही दिलचस्प इतिहास है। वोलोग्दा सोवियत सार्वजनिक पुस्तकालय के नाम के तहत 1919 में आधिकारिक तौर पर खुला, वह शुरू में खंड हैं जो और अधिक उन्नत उम्र से भर गया था। राष्ट्रीयकृत निजी पुस्तकालयों manors, दो मठों (वोलोग्दा और Veliky महादूत माइकल में उद्धारकर्ता Sumorin), स्थानीय और आसपास के मदरसों, स्कूलों, gendarmerie, पल्लियाँ किताबें - इन सभी खजाने एक विरासत भविष्य वोलोग्दा क्षेत्रीय लाइब्रेरी प्राप्त किया। दादी। पुस्तक संग्रह पर काम इतनी सख्ती कि 1500 की मात्रा है, जो अपनी खोज के समय एक पुस्तकालय था, छह महीने 15,000 प्रतियों की एक अच्छी तरह से व्यवस्थित निधि में बदल गया में किया गया। एक महत्वपूर्ण मदद पेट्रोग्रैड था। काम 12 लोगों से मिलकर टीम तो उत्पादक है कि पुस्तकालय जल्दी से प्रांतीय स्तर तक पहुँच गया था। पुस्तकालय कर्मचारियों की गतिविधियों तपस्वी था - पुस्तकों के संग्रह के अलावा, उनके व्यवस्थापन और निर्देशिका के संकलन वैज्ञानिक और शैक्षिक गतिविधियों का मुख्य ध्यान केंद्रित किया गया। 11 से एक पुस्तकालय 12 आधी रात को कर रहा हूँ। प्रारंभ में, ढेर पूर्व नोबल सभा के भवन में स्थित हैं। वाचनालय के पहले वर्ष के दौरान 2608 लोगों को, अधिकतम 50 लोगों को एक दिन के लिए द्वारा दौरा किया था। और केवल 1922 में भविष्य वोलोग्दा क्षेत्रीय पुस्तकालय। दादी, अपने घर के लिए किताब देने के लिए इस प्रकार बहुत अपने दर्शकों का विस्तार शुरू होता है। वास्तव में, युद्ध से पहले ढेर बड़ा हुआ और क्षेत्रीय पुस्तकालयों के दर्जनों के साथ ही विस्तार किया। पुनःपूर्ति मुख्य रूप से की वजह से साहित्य और पत्र-पत्रिकाओं, इस क्षेत्र में उत्पादित हुई। पुस्तकालय में कुछ ऐसे क्षेत्र है कि सिद्ध थे, एक स्वतंत्र विभाग बन गया। इस तरह की मदद डेस्क या संदर्भ आयोग के रूप में। 1938 में, वोलोग्दा क्षेत्र का निर्माण होता है, और एक पुस्तकालय एक नई स्थिति प्राप्त कर लेता है। संस्था के युद्ध के वर्षों के दौरान यह पुस्तकालयों के लिए भी साधारण था, में नहीं अधिकृत क्षेत्रों रहे हैं - यह पाठकों की सेवा की। वे घायल हो गए थे, अस्पताल और अस्पताल ट्रेनों में था, रक्षा उद्यमों के कर्मचारियों, घर के सामने के निवासियों। बाद में, दुकान से वहाँ एक छोटा सा पुस्तकालय और आक्रमणकारियों से मुक्त क्षेत्रों को सौंप दिया है। धन की सभी 62 पुस्तकालयों के गठन के लिए 37 हजार की मात्रा जारी किए गए हैं। इसके तत्काल बाद युद्ध के बाद पुस्तकालय एक दूसरे हवा हो जाता है - पाठकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, नियमित रूप से कार्य करने की प्रक्रिया नए रूपों, ढेर एक प्रमुख वैज्ञानिक केन्द्र बनता जा रहा है। और सवाल नई इमारत के बारे में उठता है। 500 हजार संस्करणों का एक विशिष्ट भवन के निर्माण के मुद्दे पर सकारात्मक हल किया जाता है, और 1963 में, 24 दिसंबर, शहर एक उपहार नई 1964 के लिए प्राप्त कियाः लाइब्रेरी साथी क्रांतिकारी, जो 1906 में मृत्यु हो गई के खिताब से सम्मानित। तब से, वोलोग्दा क्षेत्रीय पुस्तकालय। दादी एक नई स्थिति हो जाता है। यह सार्वजनिक, वैज्ञानिक, सार्वभौमिक प्रोफ़ाइल हो जाता है। यह उल पर स्थित है। M लियानोवा, 1। क्षेत्रीय ढेर के जीवन में अगले, तीसरे चरण के लिए अपने 80 वें जन्मदिन के दिन शुरू हुआ जब पुस्तकालय के राज्यपाल के निर्णय एक नई इमारत है, जो एक उल्लेखनीय इतिहास था दिया गया था। "आधुनिक" इमारत की तो फैशनेबल शैली में जल्दी XX सदी में निर्मित भीतर इसकी दीवारों देखा और पहली परिमाण के दोनों घरेलू और विदेशी सितारों के भाषणों को सुना। लेखकों, कवियों, नर्तक, धार्मिक आंकड़े और आर्केस्ट्रा - इन सबने इमारत है, जो वर्तमान में क्षेत्रीय लाइब्रेरी है में थे। इधर, नई छत के नीचे, पास - सेंट। M लियानोवा, 7, मीडिया और इंटरनेट संसाधनों से संबंधित विभागों को स्थानांतरित। नए भवन का खूबसूरत हॉल, आधुनिक ध्वनिक साधन के साथ सुसज्जित, कार्यशालाओं और वैज्ञानिक सम्मेलनों, प्रदर्शनियों, प्रस्तुतियों, संगीत, बैठकों और साहित्यिक शाम ले। अब पुस्तकालय निधि 12 लाख किताबें है। मैं पाठकों के साथ काम की शैली बदल जाते हैं। बाइब्लिओटेका। पल में दादी, पाठकों की कुल संख्या बढ़ रही है के साथ, आभासी आगंतुकों 550 हजार को पूरा करता है। प्रति वर्ष। रियल आगंतुकों के बारे में 350 हजार है। 1994 के बाद से VOUNB - RBA की XIV वार्षिक सम्मेलन - रूसी लाइब्रेरी एसोसिएशन के सदस्य है, तो यहां, 2009 में, एक प्रमुख मंच का आयोजन किया। 1989 से 2012 तक वह वोलोग्दा पुस्तकालय Nelli Nikolaevna बेलोवा का नेतृत्व किया। दो तातियाना Nikolaevny - क्रुकोव और Bukhartsev - (क्रमशः) ने अपने पूर्ववर्ती और उत्तराधिकारी के हैं।
वोलोग्दा पहले एक हज़ार एक सौ सैंतालीस में इतिहास में उल्लेख किया गया था। टाउन, मास्को से चार सौ पचास किमी दूर स्थित, न केवल रूस के उत्तर-पश्चिम में सबसे बड़ा शहर है, बल्कि क्षेत्र के मुख्य परिवहन केन्द्रों में से एक है। इसके अलावा, यह इस क्षेत्र के प्रशासनिक और वैज्ञानिक केंद्र है। संस्कृति और शहर है, जो एक विशेष ऐतिहासिक और वास्तुकला विरासत है का एक केंद्र के रूप में यह का महत्व है, तथ्य यह है कि उनमें से वोलोग्दा दो सौ चौबीस में स्मारक राज्य सुरक्षा एक सौ अट्ठाईस के तहत कर रहे कहा। शहर की संस्कृति के स्तर का स्पष्ट सूचक वोलोग्दा क्षेत्रीय लाइब्रेरी है। दादी माँ का, जो अपनी ही दिलचस्प इतिहास है। वोलोग्दा सोवियत सार्वजनिक पुस्तकालय के नाम के तहत एक हज़ार नौ सौ उन्नीस में आधिकारिक तौर पर खुला, वह शुरू में खंड हैं जो और अधिक उन्नत उम्र से भर गया था। राष्ट्रीयकृत निजी पुस्तकालयों manors, दो मठों , स्थानीय और आसपास के मदरसों, स्कूलों, gendarmerie, पल्लियाँ किताबें - इन सभी खजाने एक विरासत भविष्य वोलोग्दा क्षेत्रीय लाइब्रेरी प्राप्त किया। दादी। पुस्तक संग्रह पर काम इतनी सख्ती कि एक हज़ार पाँच सौ की मात्रा है, जो अपनी खोज के समय एक पुस्तकालय था, छह महीने पंद्रह,शून्य प्रतियों की एक अच्छी तरह से व्यवस्थित निधि में बदल गया में किया गया। एक महत्वपूर्ण मदद पेट्रोग्रैड था। काम बारह लोगों से मिलकर टीम तो उत्पादक है कि पुस्तकालय जल्दी से प्रांतीय स्तर तक पहुँच गया था। पुस्तकालय कर्मचारियों की गतिविधियों तपस्वी था - पुस्तकों के संग्रह के अलावा, उनके व्यवस्थापन और निर्देशिका के संकलन वैज्ञानिक और शैक्षिक गतिविधियों का मुख्य ध्यान केंद्रित किया गया। ग्यारह से एक पुस्तकालय बारह आधी रात को कर रहा हूँ। प्रारंभ में, ढेर पूर्व नोबल सभा के भवन में स्थित हैं। वाचनालय के पहले वर्ष के दौरान दो हज़ार छः सौ आठ लोगों को, अधिकतम पचास लोगों को एक दिन के लिए द्वारा दौरा किया था। और केवल एक हज़ार नौ सौ बाईस में भविष्य वोलोग्दा क्षेत्रीय पुस्तकालय। दादी, अपने घर के लिए किताब देने के लिए इस प्रकार बहुत अपने दर्शकों का विस्तार शुरू होता है। वास्तव में, युद्ध से पहले ढेर बड़ा हुआ और क्षेत्रीय पुस्तकालयों के दर्जनों के साथ ही विस्तार किया। पुनःपूर्ति मुख्य रूप से की वजह से साहित्य और पत्र-पत्रिकाओं, इस क्षेत्र में उत्पादित हुई। पुस्तकालय में कुछ ऐसे क्षेत्र है कि सिद्ध थे, एक स्वतंत्र विभाग बन गया। इस तरह की मदद डेस्क या संदर्भ आयोग के रूप में। एक हज़ार नौ सौ अड़तीस में, वोलोग्दा क्षेत्र का निर्माण होता है, और एक पुस्तकालय एक नई स्थिति प्राप्त कर लेता है। संस्था के युद्ध के वर्षों के दौरान यह पुस्तकालयों के लिए भी साधारण था, में नहीं अधिकृत क्षेत्रों रहे हैं - यह पाठकों की सेवा की। वे घायल हो गए थे, अस्पताल और अस्पताल ट्रेनों में था, रक्षा उद्यमों के कर्मचारियों, घर के सामने के निवासियों। बाद में, दुकान से वहाँ एक छोटा सा पुस्तकालय और आक्रमणकारियों से मुक्त क्षेत्रों को सौंप दिया है। धन की सभी बासठ पुस्तकालयों के गठन के लिए सैंतीस हजार की मात्रा जारी किए गए हैं। इसके तत्काल बाद युद्ध के बाद पुस्तकालय एक दूसरे हवा हो जाता है - पाठकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, नियमित रूप से कार्य करने की प्रक्रिया नए रूपों, ढेर एक प्रमुख वैज्ञानिक केन्द्र बनता जा रहा है। और सवाल नई इमारत के बारे में उठता है। पाँच सौ हजार संस्करणों का एक विशिष्ट भवन के निर्माण के मुद्दे पर सकारात्मक हल किया जाता है, और एक हज़ार नौ सौ तिरेसठ में, चौबीस दिसंबर, शहर एक उपहार नई एक हज़ार नौ सौ चौंसठ के लिए प्राप्त कियाः लाइब्रेरी साथी क्रांतिकारी, जो एक हज़ार नौ सौ छः में मृत्यु हो गई के खिताब से सम्मानित। तब से, वोलोग्दा क्षेत्रीय पुस्तकालय। दादी एक नई स्थिति हो जाता है। यह सार्वजनिक, वैज्ञानिक, सार्वभौमिक प्रोफ़ाइल हो जाता है। यह उल पर स्थित है। M लियानोवा, एक। क्षेत्रीय ढेर के जीवन में अगले, तीसरे चरण के लिए अपने अस्सी वें जन्मदिन के दिन शुरू हुआ जब पुस्तकालय के राज्यपाल के निर्णय एक नई इमारत है, जो एक उल्लेखनीय इतिहास था दिया गया था। "आधुनिक" इमारत की तो फैशनेबल शैली में जल्दी XX सदी में निर्मित भीतर इसकी दीवारों देखा और पहली परिमाण के दोनों घरेलू और विदेशी सितारों के भाषणों को सुना। लेखकों, कवियों, नर्तक, धार्मिक आंकड़े और आर्केस्ट्रा - इन सबने इमारत है, जो वर्तमान में क्षेत्रीय लाइब्रेरी है में थे। इधर, नई छत के नीचे, पास - सेंट। M लियानोवा, सात, मीडिया और इंटरनेट संसाधनों से संबंधित विभागों को स्थानांतरित। नए भवन का खूबसूरत हॉल, आधुनिक ध्वनिक साधन के साथ सुसज्जित, कार्यशालाओं और वैज्ञानिक सम्मेलनों, प्रदर्शनियों, प्रस्तुतियों, संगीत, बैठकों और साहित्यिक शाम ले। अब पुस्तकालय निधि बारह लाख किताबें है। मैं पाठकों के साथ काम की शैली बदल जाते हैं। बाइब्लिओटेका। पल में दादी, पाठकों की कुल संख्या बढ़ रही है के साथ, आभासी आगंतुकों पाँच सौ पचास हजार को पूरा करता है। प्रति वर्ष। रियल आगंतुकों के बारे में तीन सौ पचास हजार है। एक हज़ार नौ सौ चौरानवे के बाद से VOUNB - RBA की XIV वार्षिक सम्मेलन - रूसी लाइब्रेरी एसोसिएशन के सदस्य है, तो यहां, दो हज़ार नौ में, एक प्रमुख मंच का आयोजन किया। एक हज़ार नौ सौ नवासी से दो हज़ार बारह तक वह वोलोग्दा पुस्तकालय Nelli Nikolaevna बेलोवा का नेतृत्व किया। दो तातियाना Nikolaevny - क्रुकोव और Bukhartsev - ने अपने पूर्ववर्ती और उत्तराधिकारी के हैं।
इस जर्सी में पहली की जर्सी के मुकाबले कई बदलाव किए गए हैं। एक बार फिर से कॉलर के रंग को बाहर से नीला कर दिया गया है। सौरभ ने अपनी पारी में आठ पुरुषों के फाइनल में अपनी पकड़ मज़बूत रखी और रजत पदकधारी से 5. 7 अंक की बढ़त बनाए रखी। इस प्रकार सौरभ अंतिम शॉट से पहले ही गोल्ड मेडल अपने नाम करने में क़ामयाब रहे।
इस जर्सी में पहली की जर्सी के मुकाबले कई बदलाव किए गए हैं। एक बार फिर से कॉलर के रंग को बाहर से नीला कर दिया गया है। सौरभ ने अपनी पारी में आठ पुरुषों के फाइनल में अपनी पकड़ मज़बूत रखी और रजत पदकधारी से पाँच. सात अंक की बढ़त बनाए रखी। इस प्रकार सौरभ अंतिम शॉट से पहले ही गोल्ड मेडल अपने नाम करने में क़ामयाब रहे।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
दुनिया का सबसे पॉपुलर सोशल मीडिया प्लेटफार्म फेसबुक पिछले कई दिनों से फेसबुक डाटा चोरे जैसे मामलों में घिरा हुआ है. वहीं अब कंपनी द्वारा 'व्हाइट जेनोसाइड कांस्पीरेसी थ्योरी' में रुचि रखने वाले यूजर को लक्षित एक विज्ञापन देने पर माफी मांगी गई है. एक समाचार वेबसाइट के मुताबिक, श्वेत नस्ल को खत्म करने की कोशिश करने वाली बाहरी ताकतों के बारे में कांस्पिरेसी थ्योरी के कुछ दिनों के बाद अभियान शुरू करने में कोई परेशानी नहीं थी, वहीं श्वेत नस्ल को खत्म करने का प्रयास कथित रूप से उस शख्स से प्रेरित था, जिसने पीट्सबर्ग उपासना केंद्र में बीते सप्ताह 11 यहुदियों को मौत के घाट उतार दिया था. इससे पहले समाचार वेबसाइट एक खास समूह के लिए दो आलेख को प्रमोट करने में पूर्व निर्धारित मानदंडों अनुसार 'व्हाइट जीनोसाइड कांस्पिरेसी थ्योरी' का चयन करने में सक्षम थी. प्राप्त मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, फेसबुक के अनुसार, रुचि लेने वाले समूह में 168,000 यूजर हैं, जिन्होंने 'व्हाइट जीनोसाइड कांस्पिरेसी थ्योरी' में अभिरुचि जाहिर की है या इससे जुड़े पेज को उनके द्वारा पसंद भी किया गया है. इस रिपोर्ट में यह बात भी सामने ऐ है कि विज्ञापन को 'ह्वाइट सुपरमेसी-टेस्ट' के तौर पर बढ़ाचढ़ाकर दिखाया गया है उसे फेसबुक की विज्ञापन शखा के सदस्य ने मंजूरी प्रदान की थी. अतः अब फेसबुक के प्रवक्ता ने कहा, "लक्षित विकल्प को हटा दिया गया है और हमने इन विज्ञापनों को भी हटाया है. उन्होंने कहा कि यह हमारे विज्ञापन के सिद्धांतों के खिलाफ है और हमें इस गलती के लिए बेहद दुःख जताया.
दुनिया का सबसे पॉपुलर सोशल मीडिया प्लेटफार्म फेसबुक पिछले कई दिनों से फेसबुक डाटा चोरे जैसे मामलों में घिरा हुआ है. वहीं अब कंपनी द्वारा 'व्हाइट जेनोसाइड कांस्पीरेसी थ्योरी' में रुचि रखने वाले यूजर को लक्षित एक विज्ञापन देने पर माफी मांगी गई है. एक समाचार वेबसाइट के मुताबिक, श्वेत नस्ल को खत्म करने की कोशिश करने वाली बाहरी ताकतों के बारे में कांस्पिरेसी थ्योरी के कुछ दिनों के बाद अभियान शुरू करने में कोई परेशानी नहीं थी, वहीं श्वेत नस्ल को खत्म करने का प्रयास कथित रूप से उस शख्स से प्रेरित था, जिसने पीट्सबर्ग उपासना केंद्र में बीते सप्ताह ग्यारह यहुदियों को मौत के घाट उतार दिया था. इससे पहले समाचार वेबसाइट एक खास समूह के लिए दो आलेख को प्रमोट करने में पूर्व निर्धारित मानदंडों अनुसार 'व्हाइट जीनोसाइड कांस्पिरेसी थ्योरी' का चयन करने में सक्षम थी. प्राप्त मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, फेसबुक के अनुसार, रुचि लेने वाले समूह में एक सौ अड़सठ,शून्य यूजर हैं, जिन्होंने 'व्हाइट जीनोसाइड कांस्पिरेसी थ्योरी' में अभिरुचि जाहिर की है या इससे जुड़े पेज को उनके द्वारा पसंद भी किया गया है. इस रिपोर्ट में यह बात भी सामने ऐ है कि विज्ञापन को 'ह्वाइट सुपरमेसी-टेस्ट' के तौर पर बढ़ाचढ़ाकर दिखाया गया है उसे फेसबुक की विज्ञापन शखा के सदस्य ने मंजूरी प्रदान की थी. अतः अब फेसबुक के प्रवक्ता ने कहा, "लक्षित विकल्प को हटा दिया गया है और हमने इन विज्ञापनों को भी हटाया है. उन्होंने कहा कि यह हमारे विज्ञापन के सिद्धांतों के खिलाफ है और हमें इस गलती के लिए बेहद दुःख जताया.
।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल (हे.) ।1 - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसे1950 ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा 117 - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ( नदारद ) ।1क(क) - रिक्त ( नदारद ) ।1-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ( नदारद ) ।2 - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ( नदारद ) ।3 - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ( नदारद ) ।4 - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ 4 में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ( नदारद ) ।4-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -(क)जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ( नदारद ) ।4-क(ख) - अन्य भूमि । ( नदारद ) ।5-1 - कृषि योग्य भूमि - नई परती (परतीजदीद) ( नदारद ) ।5-2 - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती (परतीकदीम) ( नदारद ) ।5-3-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ( नदारद ) ।5-3-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ( नदारद ) ।5-3-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ( नदारद ) ।5-3-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ( नदारद ) ।5-3-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।5-क (क) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ( नदारद ) ।5-क (ख) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ( नदारद ) ।5-क (ग) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ( नदारद ) ।6-1 - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।6-2 - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।6-3 - कब्रिस्तान और श्मशान (मरघट) , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।6-4 - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल ।एक - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसेएक हज़ार नौ सौ पचास ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा एक सौ सत्रह - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ।एकक - रिक्त ।एक-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ।दो - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।तीन - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ।चार - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ चार में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ।चार-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ।चार-क - अन्य भूमि । ।पाँच-एक - कृषि योग्य भूमि - नई परती ।पाँच-दो - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती ।पाँच-तीन-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ।पाँच-तीन-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ।पाँच-तीन-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।पाँच-तीन-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ।पाँच-तीन-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ।छः-एक - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।छः-दो - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।छः-तीन - कब्रिस्तान और श्मशान , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।छः-चार - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
अनामुल ने जडेजा पर अपना दूसरा छक्का जड़ा लेकिन लेग स्पिनर अमित मिश्रा की गुगली को चूककर बोल्ड हो गए. उन्होंने 43 गेंद की अपनी पारी में पांच चौके और दो छक्के मारे. महमूदुल्लाह और नासिर हुसैन ने इसके बाद छठे विकेट के लिए 6. 1 ओवर में 49 रन की साझेदारी करके टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया. महमूदुल्लाह ने जडेजा और अश्विन पर चौके जड़ने के अलावा मिश्रा पर छक्का भी मारा. बांग्लादेश ने अंतिम पांच ओवर में 48 रन जोड़े.
अनामुल ने जडेजा पर अपना दूसरा छक्का जड़ा लेकिन लेग स्पिनर अमित मिश्रा की गुगली को चूककर बोल्ड हो गए. उन्होंने तैंतालीस गेंद की अपनी पारी में पांच चौके और दो छक्के मारे. महमूदुल्लाह और नासिर हुसैन ने इसके बाद छठे विकेट के लिए छः. एक ओवर में उनचास रन की साझेदारी करके टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया. महमूदुल्लाह ने जडेजा और अश्विन पर चौके जड़ने के अलावा मिश्रा पर छक्का भी मारा. बांग्लादेश ने अंतिम पांच ओवर में अड़तालीस रन जोड़े.
नादौन - फ्रॉड कॉल से एक व्यक्ति को शातिरों ने एक लाख 43 हजार का चूना लगाया है। मामला पुलिस थाना नादौन में दर्ज करवाया गया है। शिकायत दर्ज कर पुलिस ने छानबीन शुरू कर दी है। आधार कार्ड व बैंक नंबर की जानकारी देने के बाद व्यक्ति को यह खामियाजा भुगतना पड़ा है। खाता नंबर देने के कुछ देर बाद ही बैंक खाते से रुपए निकलने का मैसेज आ गया। यह देखकर व्यक्ति के होश उड़ गए। बाद में इसकी शिकायत पुलिस में करवाई गई है। जानकारी के अनुसार प्रीत्तम सिंह पुत्र स्व. बरफी राम गांव तेलकड़ डाकघर सनाई तहसील नादौन जिला हमीरपुर ने यह शिकायत दर्ज करवाई है। उसने अपनी शिकायत में बताया कि एक अनजान व्यक्ति की उनके मोबाइल पर कॉल आई। उसने बताया कि वह एसबीआई की मेन ब्रांच से बोल रहा है। अपना खाता चालू रखने के लिए आधार कार्ड नंबर व खाता नंबर लिखवाने होंगे। उसने उसे अपना आधार कार्ड व बैंक खाता नंबर उसको लिखवा दिया। इसके तुरंत बाद इसे खाते से एक लाख 43 हजार रुपए निकाल लिए गए। जब वह बैंक में गया, तो पता चला कि यह रकम निकाल ली गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है। इसकी पुष्टि एसपी हमीरपुर रमन कुमार ने की है।
नादौन - फ्रॉड कॉल से एक व्यक्ति को शातिरों ने एक लाख तैंतालीस हजार का चूना लगाया है। मामला पुलिस थाना नादौन में दर्ज करवाया गया है। शिकायत दर्ज कर पुलिस ने छानबीन शुरू कर दी है। आधार कार्ड व बैंक नंबर की जानकारी देने के बाद व्यक्ति को यह खामियाजा भुगतना पड़ा है। खाता नंबर देने के कुछ देर बाद ही बैंक खाते से रुपए निकलने का मैसेज आ गया। यह देखकर व्यक्ति के होश उड़ गए। बाद में इसकी शिकायत पुलिस में करवाई गई है। जानकारी के अनुसार प्रीत्तम सिंह पुत्र स्व. बरफी राम गांव तेलकड़ डाकघर सनाई तहसील नादौन जिला हमीरपुर ने यह शिकायत दर्ज करवाई है। उसने अपनी शिकायत में बताया कि एक अनजान व्यक्ति की उनके मोबाइल पर कॉल आई। उसने बताया कि वह एसबीआई की मेन ब्रांच से बोल रहा है। अपना खाता चालू रखने के लिए आधार कार्ड नंबर व खाता नंबर लिखवाने होंगे। उसने उसे अपना आधार कार्ड व बैंक खाता नंबर उसको लिखवा दिया। इसके तुरंत बाद इसे खाते से एक लाख तैंतालीस हजार रुपए निकाल लिए गए। जब वह बैंक में गया, तो पता चला कि यह रकम निकाल ली गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है। इसकी पुष्टि एसपी हमीरपुर रमन कुमार ने की है।
1:47 बजे। लखनऊ के अमौसी एयरपोर्ट पर हिरासत में लिये गये अशोक सिंघल की तबियत खराब हो गई है। हालांकि इसके बावजूद सिंघल दिल्ली वापस नहीं लौटने पर अड़े हुए हैं। 1:40 बजे। सपा के नेता राजेंद्र चौधरी ने कहा है कि व उत्तर प्रदेश को गुजरात नहीं बनने देंगे। सच पूछिए तो इस प्रकार के बयान न चाहते हुए भी लोगों की भावनाओं को कुरेदने के प्रयास करने वाले हैं। 1:25 बजे। विहिप के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल ने सोमवार से देश भर में आंदोलन करने का ऐलान किया है। 1:20 बजे। विहिप के प्रवक्ता ने बताया कि वीएचपी की वेबसाइट हैंग कर दी गई है। इसके पीछे अखिलेश यादव की सरकार का हाथ होने का आरोप है। 1:10 बजे। दिग्विजय ने टृवीट किया- अयोध्या का मैच फिक्स है। 1 बजे। दोपहर को खबर आयी है कि विहिप के दर्जनों कार्यकर्ता अमौसी एयरपोर्ट के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं अशोक सिंघल व्हील चेयर पर बैठे हुए हैं, जिन्हें पुलिस हिरासत में माना जा रहा है। 12:45 बजे। आजम खां का पुतला जलाया गया। विहिप के कार्यकर्ताओं ने कहा कि इस यात्रा को रोकने के पीछे अखिलेश नहीं बल्कि आज़म खां हैं। 12:31: पुलिस को चकमा देकर 100 से ज्यादा विहिप के कार्यकर्ता फैजाबाद से बस्ती के बीच स्थित मखौड़ा पहुंच चुके हैं और जमकर हंगामा कर रहे हैं। यहीं से 84 कोसी यात्रा शुरू होनी थी। 11:37 बजे। बसपा ने कहा है कि यह सुनियोजित राजनीतिक नाटक था, जिसमें भाजपा और सपा दोनों ही अपने वोटबैंक मजबूत करना चाहते हैं। 11:07 बजे। मीडिया ने विहिप की 84 कोसी यात्रा को फ्लॉप शो घोषित कर दिया है। लेकिन अभी कुछ कहा नहीं जा सकता है, क्योंकि अभी पूरा दिन बाकी है। पुलिस को अभी भी सरयु नदी के तट पर सरयु पूजन को रोकना होगा। क्योंकि अगर पूजन हो गया, तो इस यात्रा को रोकना मुश्किल होगा। 11:06 बजे। संतों की गिरफ्तारी अभी भी जारी है। वहीं लखनऊ के अमौसी एयरपोर्ट पर अशोक सिंघल को रोक लिया गया है और उन्हें वापस दिल्ली भेजने की तैयारी चल रही है। 10:58 बजेः अयोध्या में माहौल शांतिपूर्ण है। भारी पहरे के चलते सड़कों पर लोग नहीं निकल रहे हैं। फिलहाल किसी अप्रिय घटना की खबर नहीं है। 10:30 बजे। यात्रा शुरू नहीं हो पायी है, क्योंकि अयोध्या में चारों तरफ कड़ी सुरक्षा है। 10 बजे। रविवार की सुबह प्रवीण तोगडि़या को अयोध्या जाते वक्त गिरफ्तार किया गया। वहीं विहिप के राष्ट्रीय अध्यक्ष अयोध्या जाने के लिये दिल्ली से लखनऊ पहुंच चुके हैं। सुबह 8 बजेः नजरबंद चल रहे विहिप नेता राम विलास वेदांती को गिरफ्तार कर लिया गया है। वेदांती को राम की पौड़ी इलाके में गिरफ्तार किया गया। 7:45 बजे। भाजपा विधायक राम चंद्र यादव को गिरफ्तार कर लिया गया। अब तक राज्य में 600 से ज्यादा विहिप कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी हो चुकी है। 7:30 बजे। रामजन्म भूमि न्यास परिषद के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपालदास को करीब 100 समर्थकों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया। नृत्यगोपालदास महंत को अयोध्या में हिरासत में लेकर उन्हीं के घर में नज़रबंद कर दिया गया है। सुबह 7 बजेः रैपिड ऐक्शन फोर्स, पीएसी, पुलिस और सेना के जवानों का अयोध्या के कई इलाकों में गश्त जारी। बाजार खुले हैं, लेकिन तमाम दुकानों के शटर आधे गिरे हुए हैं। लोग घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं। शहर में कर्फ्यू जैसा माहौल है।
एक:सैंतालीस बजे। लखनऊ के अमौसी एयरपोर्ट पर हिरासत में लिये गये अशोक सिंघल की तबियत खराब हो गई है। हालांकि इसके बावजूद सिंघल दिल्ली वापस नहीं लौटने पर अड़े हुए हैं। एक:चालीस बजे। सपा के नेता राजेंद्र चौधरी ने कहा है कि व उत्तर प्रदेश को गुजरात नहीं बनने देंगे। सच पूछिए तो इस प्रकार के बयान न चाहते हुए भी लोगों की भावनाओं को कुरेदने के प्रयास करने वाले हैं। एक:पच्चीस बजे। विहिप के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल ने सोमवार से देश भर में आंदोलन करने का ऐलान किया है। एक:बीस बजे। विहिप के प्रवक्ता ने बताया कि वीएचपी की वेबसाइट हैंग कर दी गई है। इसके पीछे अखिलेश यादव की सरकार का हाथ होने का आरोप है। एक:दस बजे। दिग्विजय ने टृवीट किया- अयोध्या का मैच फिक्स है। एक बजे। दोपहर को खबर आयी है कि विहिप के दर्जनों कार्यकर्ता अमौसी एयरपोर्ट के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं अशोक सिंघल व्हील चेयर पर बैठे हुए हैं, जिन्हें पुलिस हिरासत में माना जा रहा है। बारह:पैंतालीस बजे। आजम खां का पुतला जलाया गया। विहिप के कार्यकर्ताओं ने कहा कि इस यात्रा को रोकने के पीछे अखिलेश नहीं बल्कि आज़म खां हैं। बारह:इकतीस: पुलिस को चकमा देकर एक सौ से ज्यादा विहिप के कार्यकर्ता फैजाबाद से बस्ती के बीच स्थित मखौड़ा पहुंच चुके हैं और जमकर हंगामा कर रहे हैं। यहीं से चौरासी कोसी यात्रा शुरू होनी थी। ग्यारह:सैंतीस बजे। बसपा ने कहा है कि यह सुनियोजित राजनीतिक नाटक था, जिसमें भाजपा और सपा दोनों ही अपने वोटबैंक मजबूत करना चाहते हैं। ग्यारह:सात बजे। मीडिया ने विहिप की चौरासी कोसी यात्रा को फ्लॉप शो घोषित कर दिया है। लेकिन अभी कुछ कहा नहीं जा सकता है, क्योंकि अभी पूरा दिन बाकी है। पुलिस को अभी भी सरयु नदी के तट पर सरयु पूजन को रोकना होगा। क्योंकि अगर पूजन हो गया, तो इस यात्रा को रोकना मुश्किल होगा। ग्यारह:छः बजे। संतों की गिरफ्तारी अभी भी जारी है। वहीं लखनऊ के अमौसी एयरपोर्ट पर अशोक सिंघल को रोक लिया गया है और उन्हें वापस दिल्ली भेजने की तैयारी चल रही है। दस:अट्ठावन बजेः अयोध्या में माहौल शांतिपूर्ण है। भारी पहरे के चलते सड़कों पर लोग नहीं निकल रहे हैं। फिलहाल किसी अप्रिय घटना की खबर नहीं है। दस:तीस बजे। यात्रा शुरू नहीं हो पायी है, क्योंकि अयोध्या में चारों तरफ कड़ी सुरक्षा है। दस बजे। रविवार की सुबह प्रवीण तोगडि़या को अयोध्या जाते वक्त गिरफ्तार किया गया। वहीं विहिप के राष्ट्रीय अध्यक्ष अयोध्या जाने के लिये दिल्ली से लखनऊ पहुंच चुके हैं। सुबह आठ बजेः नजरबंद चल रहे विहिप नेता राम विलास वेदांती को गिरफ्तार कर लिया गया है। वेदांती को राम की पौड़ी इलाके में गिरफ्तार किया गया। सात:पैंतालीस बजे। भाजपा विधायक राम चंद्र यादव को गिरफ्तार कर लिया गया। अब तक राज्य में छः सौ से ज्यादा विहिप कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी हो चुकी है। सात:तीस बजे। रामजन्म भूमि न्यास परिषद के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपालदास को करीब एक सौ समर्थकों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया। नृत्यगोपालदास महंत को अयोध्या में हिरासत में लेकर उन्हीं के घर में नज़रबंद कर दिया गया है। सुबह सात बजेः रैपिड ऐक्शन फोर्स, पीएसी, पुलिस और सेना के जवानों का अयोध्या के कई इलाकों में गश्त जारी। बाजार खुले हैं, लेकिन तमाम दुकानों के शटर आधे गिरे हुए हैं। लोग घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं। शहर में कर्फ्यू जैसा माहौल है।
अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद तालिबान ने महिलाओं पर कई प्रतिबंध लगाए हैं। अब तालिबान ने मीडिया को चेतावनी दी है। अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में पूर्व महिला सांसद मुर्सल नबीजादा और उनके बॉडीगार्ड की गोली मारकर हत्या कर दी गई। फर्श पर पड़ा मिला शव। ईरान की इस्लामवादी सरकार अब तक हिजाब विरोधी प्रदर्शन में शामिल 17 लोगों को फाँसी की सजा सुना चुकी है। जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा है कि को-एजुकेशन यानी सह-शिक्षा मुस्लिम लड़कियों को 'इस्लाम त्याग' की ओर ले जा रही है। इस्लामी आतंकी संगठन अल-कायदा ने भारत और हिंदुओं के खिलाफ जहर उगला है। अयोध्या में बन रहे राम मंदिर को तबाह करने की बात कही है। पाठक ने कहा कि वह अपने पति की अत्यधिक मुखरता से डरती हैं। शाह के बातों से आहत लोग अगर उनके घर पर पत्थर फेंकने लगे तो वह क्या करेंगी। घटना की एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आई है। वीडियो में पूर्व सीएम के पैतृक गाँव को चारों ओर जलते देखा जा सकता है। तालिबान ने महिलाओं की उच्च शिक्षा और गैर-सरकारी संगठनों में काम करने पर रोक लगा दी। इससे वहाँ की महिलाओं की स्थिति पर संकट और अधिक गहरा गया। सईद नूरी ने मुस्लिमों से अपील की है कि वे नए साल की पार्टियों में शामिल न हों क्योंकि यह इस्लाम में हराम है। भारतीय क्रिकेटर ऋषभ पंत के लिए ट्वीट करने पर कट्टरपंथियों ने दानिश कनेरिया पर निशाना साधा। उनसे पूछा गया- "तू हिंदू है क्या। "
अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद तालिबान ने महिलाओं पर कई प्रतिबंध लगाए हैं। अब तालिबान ने मीडिया को चेतावनी दी है। अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में पूर्व महिला सांसद मुर्सल नबीजादा और उनके बॉडीगार्ड की गोली मारकर हत्या कर दी गई। फर्श पर पड़ा मिला शव। ईरान की इस्लामवादी सरकार अब तक हिजाब विरोधी प्रदर्शन में शामिल सत्रह लोगों को फाँसी की सजा सुना चुकी है। जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा है कि को-एजुकेशन यानी सह-शिक्षा मुस्लिम लड़कियों को 'इस्लाम त्याग' की ओर ले जा रही है। इस्लामी आतंकी संगठन अल-कायदा ने भारत और हिंदुओं के खिलाफ जहर उगला है। अयोध्या में बन रहे राम मंदिर को तबाह करने की बात कही है। पाठक ने कहा कि वह अपने पति की अत्यधिक मुखरता से डरती हैं। शाह के बातों से आहत लोग अगर उनके घर पर पत्थर फेंकने लगे तो वह क्या करेंगी। घटना की एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आई है। वीडियो में पूर्व सीएम के पैतृक गाँव को चारों ओर जलते देखा जा सकता है। तालिबान ने महिलाओं की उच्च शिक्षा और गैर-सरकारी संगठनों में काम करने पर रोक लगा दी। इससे वहाँ की महिलाओं की स्थिति पर संकट और अधिक गहरा गया। सईद नूरी ने मुस्लिमों से अपील की है कि वे नए साल की पार्टियों में शामिल न हों क्योंकि यह इस्लाम में हराम है। भारतीय क्रिकेटर ऋषभ पंत के लिए ट्वीट करने पर कट्टरपंथियों ने दानिश कनेरिया पर निशाना साधा। उनसे पूछा गया- "तू हिंदू है क्या। "
रजनीश जैन एटा। मलावन थाना क्षेत्र के अन्तर्गत बुधवार को सुबह शौच को जा रहे पनचक्की "sकेदार का पैर फिसल गया और वह नहर में जा गिरा। पानी में डूबकर उसकी मौत हो गई। घंटो बाद सूचना पर पहुंचे परिजनों के अलावा ग्रामीणों ने शव को निकालकर पुलिस को सूचना दी। अस्पताल से पुलिस ने शव को कब्जे में कर पंचनामा की कार्रवाई पूर्ण करते हुये पोस्टमार्टम गृह भेज दिया। मलावन थाना क्षेत्र के अन्तर्गत ग्राम छछैना निवासी वीरेन्द्र सिंह का 35 वर्षीय पुत्र उपेन्द्र सिंह छछैना नहर पुल पर बनी पानी से चलने वाली चक्की का "sकेदार था। वह काफी दिनों से पनचक्की की "sकेदारी करता चला आ रहा है। बताया गया है कि वह नहर विभाग की चक्की पर ही रात को सोता था। बुधवार को सुबह करीब 9 बजे उपेन्द्र नहर किनारे शौच के लिये जा रहा था कि तभी उसका पैर फिर गया और नहर में गिर पड़ा। नहर में डूबकर उसकी मौत हो गई। पानी का बहाव इतना तेज था कि लाश को बाह ले गया। बताया गया है कि घटनास्थल से करीब 1 किलो मीटर दूर बाबली नहर पुल के पास शव किसी में फंस गया। जब वह देर तक घर खाना खाने नहीं पहुंचा तो परिजनों को चिन्ता हुई, वे लोग चक्की पर पहुंचे देखा तो वहां पर उपेन्द्र नहीं था, किसी ने बताया कि नहर किनारे जाते हुये देखा तो, इस पर परिजनों को शक हुई और करीब तीन घंटा बाद नहर की तलाशी ली तो बाबली पुल के पास शव मिला। परिजन उसको लेकर जिला अस्पताल आये, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को कब्जे में कर कानूनी कार्रवाई की है।
रजनीश जैन एटा। मलावन थाना क्षेत्र के अन्तर्गत बुधवार को सुबह शौच को जा रहे पनचक्की "sकेदार का पैर फिसल गया और वह नहर में जा गिरा। पानी में डूबकर उसकी मौत हो गई। घंटो बाद सूचना पर पहुंचे परिजनों के अलावा ग्रामीणों ने शव को निकालकर पुलिस को सूचना दी। अस्पताल से पुलिस ने शव को कब्जे में कर पंचनामा की कार्रवाई पूर्ण करते हुये पोस्टमार्टम गृह भेज दिया। मलावन थाना क्षेत्र के अन्तर्गत ग्राम छछैना निवासी वीरेन्द्र सिंह का पैंतीस वर्षीय पुत्र उपेन्द्र सिंह छछैना नहर पुल पर बनी पानी से चलने वाली चक्की का "sकेदार था। वह काफी दिनों से पनचक्की की "sकेदारी करता चला आ रहा है। बताया गया है कि वह नहर विभाग की चक्की पर ही रात को सोता था। बुधवार को सुबह करीब नौ बजे उपेन्द्र नहर किनारे शौच के लिये जा रहा था कि तभी उसका पैर फिर गया और नहर में गिर पड़ा। नहर में डूबकर उसकी मौत हो गई। पानी का बहाव इतना तेज था कि लाश को बाह ले गया। बताया गया है कि घटनास्थल से करीब एक किलो मीटर दूर बाबली नहर पुल के पास शव किसी में फंस गया। जब वह देर तक घर खाना खाने नहीं पहुंचा तो परिजनों को चिन्ता हुई, वे लोग चक्की पर पहुंचे देखा तो वहां पर उपेन्द्र नहीं था, किसी ने बताया कि नहर किनारे जाते हुये देखा तो, इस पर परिजनों को शक हुई और करीब तीन घंटा बाद नहर की तलाशी ली तो बाबली पुल के पास शव मिला। परिजन उसको लेकर जिला अस्पताल आये, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को कब्जे में कर कानूनी कार्रवाई की है।
तेनाली रामकृष्ण (तेलुगुः తెనాలి రామకృష్ణ) जो विकटकवि (विदूषक) के रूप में जाने जाते थ,आंध्र प्रदेश के एक तेलुगु कवि थे। वे अपनी कुशाग्र बुद्धि और हास्य बोध के कारण प्रसिद्ध हुये। तेनाली विजयनगर साम्राज्य (१५०९-१५२९) के राजा कृष्णदेवराय के दरबार के अष्टदिग्गजों में से एक थे। विजयनगर के राजपुरोहित वयासतीर्थ तथाचार्य रामा से शत्रुता रखते थे। तथाचार्य और उसके शिष्य धनीचार्य और मनीचार्य तेनाली रामा को मुसीबत में फसाने के लिए नई-नई तरकीबें प्रयोग करते थे पर तेनाली रामा उन तरकीबों का हल निकाल लेता था। . 41 संबंधोंः एनिमेशन, तथाचार्य, तमिल, तेनाली, तेनाली रामा (टीवी धारावाहिक), तेलुगू भाषा, तेलुगू साहित्य, दूरदर्शन, धनीचार्य, धर्म, नन्दमूरि तारक रामाराव, पुरोहित, भारत, भास्कर, मनीचार्य, राजा बीरबल, लक्षम्मा, लोक साहित्य, शारधा, शैव, सब टीवी, विदूषक, विल्लुपुरम चिन्नैया गणेशन, विजयनगर, वैष्णव सम्प्रदाय, गरालपति रामैया, गुंटूर, गुंडप्पा, आन्ध्र प्रदेश, कन्नड़, कमला लक्ष्मण, कार्टून नेटवर्क (भारत), काली, कवि, कृष्ण भारद्वाज, कृष्णदेवराय, अनंत नाग, अष्टदिग्गज, अक्किनेनी नागेश्वर राव, १५०९, १५२९। चित्रःAnimexample3edit.png उछलती हुई गेंद के एनिमेशन (नीचे) में 6 फ्रेम शामिल हैं। चित्रःAnimexample.gif यह एनिमेशन 10 फ्रेम प्रति सेकण्ड की गति से चलता है। अनुप्राणन या एनिमेशन द्विआयामी और त्रिआयामी कलाकृतियों या निदर्श (मॉडल) की छवियों का, संचलन का भ्रम उत्पन्न करने के लिए तेजी से किया गया सिलसिलेवार प्रदर्शन है। यह दृष्टि की दृढ़ता के कारण उत्पन्न गति का एक प्रकाशीय भ्रम है और इसकी रचना और प्रदर्शन कई तरह से किया जा सकता है। एनिमेशन प्रस्तुत करने का सबसे आम तरीका एक चलचित्र या वीडियो कार्यक्रम के रूप में इसे प्रस्तुत करना है, हालांकि एनिमेशन कई अन्य रूपों में भी पेश किया जा सकता है। 2D एवं 3D कलाकृति को एक साथ एक निर्धारित दिशा में प्रदर्शित करने को ऐनीमेशन कहते हैं I ऐनीमेशन एक प्रकार का दृष्टी भ्रम भी हो सकता है I क्यों की ये सामान्य मानव नेत्र की दृष्टी छमता के कारण महसूस होता है I आप ऐनीमेशन को कई प्रकार से कर एवं महसूस कर सकते हैं I सबसे साधारण तरीका ये हैं कि आप इसे चलचित्र द्वारा प्रस्तुत करे I इस के अलावा इसे करने के और भी कई तरीके है . तथाचार्य या तथाचारय विजयनगर के राजा कृष्णदेवराय का राजपुरोहित था।उसकी पत्नी का नाम वरुणमाला और बेटा व्यासाचार्य था।तथाचार्य का सही नाम व्यासतीर्थ तथाचार्य था। तथाचार्य के दो शिष्य 'धनीचार्य' और 'मनीचार्य' थे। वह तेनाली रामा से शत्रुता रखते थे। तथाचार्य जितना ज्ञानी था उससे अधिक पाखंडी था।. एक तमिल परिवार श्रीलंका में तमिल बच्चे भरतनाट्यम तमिल एक मानमूल है, जिनका मुख्य निवास भारत के तमिलनाडु तथा उत्तरी श्री लंका में है। तमिल समुदाय से जुड़ी चीजों को भी तमिल कहते हैं जैसे, तमिल तथा तमिलनाडु के वासियों को भी तमिल कहा जाता है। तामिल, द्रविड़ जाति की ही एक शाखा है। बहुत से विद्वानों की राय है कि 'तामिल' शब्द संस्कृत 'द्राविड' से निकला है। मनुसंहिता, महाभारत आदि प्राचीन ग्रंथों में द्रविड देश और द्रविड जाति का उल्लेख है। मागधी प्राकृत या पाली में इसी 'द्राविड' शब्द का रूप 'दामिलो' हो गया। तामिल वर्णमाला में त, ष, द आदि के एक ही उच्चारण के कारण 'दामिलो' का 'तामिलो' या 'तामिल' हो गया। शंकराचार्य के शारीरक भाष्य में 'द्रमिल' शब्द आया है। हुएनसांग नामक चीनी यात्री ने भी द्रविड देश को 'चि - मो - लो' करके लिखा है। तमिल व्याकरण के अनुसार द्रमिल शब्द का रूप 'तिरमिड़' होता है। आजकल कुछ विद्वानों की राय हो रही है कि यह 'तिरमिड़' शब्द ही प्राचीन है जिससे संस्कृतवालों ने 'द्रविड' शब्द बना लिया। जैनों के 'शत्रुंजय माहात्म्य' नामक एक ग्रंथ में 'द्रविड' शब्द पर एक विलक्षण कल्पना की गई है। उक्त पुस्तक के मत से आदि तीर्थकर ऋषभदेव को 'द्रविड' नामक एक पुत्र जिस भूभाग में हुआ, उसका नाम 'द्रविड' पड़ गया। पर भारत, मनुसंहिता आदि प्राचीन ग्रंथों से विदित होता है कि द्रविड जाति के निवास के ही कारण देश का नाम द्रविड पड़ा। तामिल जाति अत्यंत प्राचीन हे। पुरातत्वविदों का मत है कि यह जाति अनार्य है और आर्यों के आगमन से पूर्व ही भारत के अनेक भागों में निवास करती थी। रामचंद्र ने दक्षिण में जाकर जिन लोगों की सहायता से लंका पर चढ़ाई की थी और जिन्हें वाल्मीकि ने बंदर लिखा है, वे इसी जाति के थे। उनके काले वर्ण, भिन्न आकृति तथा विकट भाषा आदि के कारण ही आर्यों ने उन्हें बंदर कहा होगा। पुरातत्ववेत्ताओं का अनुमान है कि तामिल जाति आर्यों के संसर्ग के पूर्व ही बहुत कुछ सभ्यता प्राप्त कर चुकी थी। तामिल लोगों के राजा होते थे जो किले बनाकर रहते थे। वे हजार तक गिन लेते थे। वे नाव, छोटे मोटे जहाज, धनुष, बाण, तलवार इत्यादि बना लेते थे और एक प्रकार का कपड़ा बुनना भी जानते थे। राँगे, सीसे और जस्ते को छोड़ और सब धातुओं का ज्ञान भी उन्हें था। आर्यों के संसर्ग के उपरांत उन्होंने आर्यों की सभ्यता पूर्ण रूप से ग्रहण की। दक्षिण देश में ऐसी जनश्रुति है कि अगस्त्य ऋषि ने दक्षिण में जाकर वहाँ के निवासियों को बहुत सी विद्याएँ सिखाई। बारह-तेरह सौ वर्ष पहले दक्षिण में जैन धर्म का बड़ा प्रचार था। चीनी यात्री हुएनसांग जिस समय दक्षिण में गया था, उसने वहाँ दिगंबर जैनों की प्रधानता देखी थी। तमिल भाषा का साहित्य भी अत्यंत प्राचीन है। दो हजार वर्ष पूर्व तक के काव्य तामिल भाषा में विद्यमान हैं। पर वर्णमाला नागरी लिपि की तुलना में अपूर्ण है। अनुनासिक पंचम वर्ण को छोड़ व्यंजन के एक एक वर्ग का उच्चारण एक ही सा है। क, ख, ग, घ, चारों का उच्चारण एक ही है। व्यंजनों के इस अभाव के कारण जो संस्कृत शब्द प्रयुक्त होते हैं, वे विकृत्त हो जाते हैं; जैसे, 'कृष्ण' शब्द तामिल में 'किट्टिनन' हो जाता है। तामिल भाषा का प्रधान ग्रंथ कवि तिरुवल्लुवर रचित कुराल काव्य है। . तेनाली भारत के आंध्र प्रदेश प्रान्त का एक शहर है। श्रेणीःआन्ध्र प्रदेश श्रेणीःआन्ध्र प्रदेश के नगर. तेनाली रामा (टीवी धारावाहिक) तेनाली रामा सब टीवी पर प्रसारित होने वाला एक मनोरंजन धारावाहिक है जो कि प्राचीन कवि व राजा कृष्णदेव राय के दरबारी कवि और विदूषक तेनाली रामकृष्ण पर आधारित है। . तेलुगु भाषा (तेलुगूःతెలుగు భాష) भारत के आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों की मुख्यभाषा और राजभाषा है। ये द्रविड़ भाषा-परिवार के अन्तर्गत आती है। यह भाषा आंध्र प्रदेश तथा तेलंगाना के अलावा तमिलनाडु, कर्णाटक, ओडिशा और छत्तीसगढ़ राज्यों में भी बोली जाती है। तेलुगु के तीन नाम प्रचलित हैं -- "तेलुगु", "तेनुगु" और "आंध्र"। . तेलुगु का साहित्य (तेलुगुः తెలుగు సాహిత్యం / तेलुगु साहित्यम्) अत्यन्त समृद्ध एवं प्राचीन है। इसमें काव्य, उपन्यास, नाटक, लघुकथाएँ, तथा पुराण आते हैं। तेलुगु साहित्य की परम्परा ११वीं शताब्दी के आरम्भिक काल से शुरू होती है जब महाभारत का संस्कृत से नन्नय्य द्वारा तेलुगु में अनुवाद किया गया। विजयनगर साम्राज्य के समय यह पल्लवित-पुष्पित हुई। . दूरदर्शन या टेलीविजन (या संक्षेप में, टीवी) एक ऐसी दूरसंचार प्रणाली है जिसके द्वारा चलचित्र व ध्वनि को दो स्थानों के बीच प्रसारित व प्राप्त किया जा सके। यह शब्द दूरदर्शन सेट, दूरदर्शन कार्यक्रम तथा प्रसारण के लिये भी प्रयुक्त होता है। दूरदर्शन का अंग्रेजी शब्द 'टेलिविज़न' लैटिन तथा यूनानी शब्दों से बनाया गया है जिसका अर्थ होता है दूर दृष्टि (यूनानी - टेली . धनीचार्य विजयनगर के राजा कृष्णदेवराय के राजपुरोहित तथाचार्य के दो शिष्यों में से एक था। मनीचार्य तथाचार्य का दूसरा शिष्य था।. धर्मचक्र (गुमेत संग्रहालय, पेरिस) धर्म का अर्थ होता है, धारण, अर्थात जिसे धारण किया जा सके, धर्म,कर्म प्रधान है। गुणों को जो प्रदर्शित करे वह धर्म है। धर्म को गुण भी कह सकते हैं। यहाँ उल्लेखनीय है कि धर्म शब्द में गुण अर्थ केवल मानव से संबंधित नहीं। पदार्थ के लिए भी धर्म शब्द प्रयुक्त होता है यथा पानी का धर्म है बहना, अग्नि का धर्म है प्रकाश, उष्मा देना और संपर्क में आने वाली वस्तु को जलाना। व्यापकता के दृष्टिकोण से धर्म को गुण कहना सजीव, निर्जीव दोनों के अर्थ में नितांत ही उपयुक्त है। धर्म सार्वभौमिक होता है। पदार्थ हो या मानव पूरी पृथ्वी के किसी भी कोने में बैठे मानव या पदार्थ का धर्म एक ही होता है। उसके देश, रंग रूप की कोई बाधा नहीं है। धर्म सार्वकालिक होता है यानी कि प्रत्येक काल में युग में धर्म का स्वरूप वही रहता है। धर्म कभी बदलता नहीं है। उदाहरण के लिए पानी, अग्नि आदि पदार्थ का धर्म सृष्टि निर्माण से आज पर्यन्त समान है। धर्म और सम्प्रदाय में मूलभूत अंतर है। धर्म का अर्थ जब गुण और जीवन में धारण करने योग्य होता है तो वह प्रत्येक मानव के लिए समान होना चाहिए। जब पदार्थ का धर्म सार्वभौमिक है तो मानव जाति के लिए भी तो इसकी सार्वभौमिकता होनी चाहिए। अतः मानव के सन्दर्भ में धर्म की बात करें तो वह केवल मानव धर्म है। हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई, जैन या बौद्ध आदि धर्म न होकर सम्प्रदाय या समुदाय मात्र हैं। "सम्प्रदाय" एक परम्परा के मानने वालों का समूह है। (पालिः धम्म) भारतीय संस्कृति और दर्शन की प्रमुख संकल्पना है। 'धर्म' शब्द का पश्चिमी भाषाओं में कोई तुल्य शब्द पाना बहुत कठिन है। साधारण शब्दों में धर्म के बहुत से अर्थ हैं जिनमें से कुछ ये हैं- कर्तव्य, अहिंसा, न्याय, सदाचरण, सद्-गुण आदि। . हैदराबाद-श्रीसैलम मार्ग पर स्थित एन टी रामाराव की मूर्ति नन्दमूरि तारक रामाराव (तेलुगूः నందమూరి తారక రామా రావు) या एन.टी. पुरोहितः पुरोहित दो शब्दों से बना हैः- 'पर' तथा 'हित', अर्थात ऐसा व्यक्ति जो दुसरो के कल्याण की चिंता करे। प्राचीन काल में आश्रम प्रमुख को पुरोहित कहते थे जहां शिक्षा दी जाती थी। हालांकि यज्ञ कर्म करने वाले मुख्य व्यक्ति को भी पुरोहित कहा जाता था। यह पुरोहित सभी तरह के संस्कार कराने के लिए भी नियुक्त होता है। प्रचीनकाल में किसी राजघराने से भी पुरोहित संबंधित होते थे। अर्थात राज दरबार में पुरोहित नियुक्त होते थे, जो धर्म-कर्म का कार्य देखने के साथ ही सलाहकार समीति में शामिल रहते थे। श्रेणीःहिन्दू धर्म. भारत (आधिकारिक नामः भारत गणराज्य, Republic of India) दक्षिण एशिया में स्थित भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा देश है। पूर्ण रूप से उत्तरी गोलार्ध में स्थित भारत, भौगोलिक दृष्टि से विश्व में सातवाँ सबसे बड़ा और जनसंख्या के दृष्टिकोण से दूसरा सबसे बड़ा देश है। भारत के पश्चिम में पाकिस्तान, उत्तर-पूर्व में चीन, नेपाल और भूटान, पूर्व में बांग्लादेश और म्यान्मार स्थित हैं। हिन्द महासागर में इसके दक्षिण पश्चिम में मालदीव, दक्षिण में श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व में इंडोनेशिया से भारत की सामुद्रिक सीमा लगती है। इसके उत्तर की भौतिक सीमा हिमालय पर्वत से और दक्षिण में हिन्द महासागर से लगी हुई है। पूर्व में बंगाल की खाड़ी है तथा पश्चिम में अरब सागर हैं। प्राचीन सिन्धु घाटी सभ्यता, व्यापार मार्गों और बड़े-बड़े साम्राज्यों का विकास-स्थान रहे भारतीय उपमहाद्वीप को इसके सांस्कृतिक और आर्थिक सफलता के लंबे इतिहास के लिये जाना जाता रहा है। चार प्रमुख संप्रदायोंः हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्मों का यहां उदय हुआ, पारसी, यहूदी, ईसाई, और मुस्लिम धर्म प्रथम सहस्राब्दी में यहां पहुचे और यहां की विविध संस्कृति को नया रूप दिया। क्रमिक विजयों के परिणामस्वरूप ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कंपनी ने १८वीं और १९वीं सदी में भारत के ज़्यादतर हिस्सों को अपने राज्य में मिला लिया। १८५७ के विफल विद्रोह के बाद भारत के प्रशासन का भार ब्रिटिश सरकार ने अपने ऊपर ले लिया। ब्रिटिश भारत के रूप में ब्रिटिश साम्राज्य के प्रमुख अंग भारत ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में एक लम्बे और मुख्य रूप से अहिंसक स्वतन्त्रता संग्राम के बाद १५ अगस्त १९४७ को आज़ादी पाई। १९५० में लागू हुए नये संविधान में इसे सार्वजनिक वयस्क मताधिकार के आधार पर स्थापित संवैधानिक लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित कर दिया गया और युनाईटेड किंगडम की तर्ज़ पर वेस्टमिंस्टर शैली की संसदीय सरकार स्थापित की गयी। एक संघीय राष्ट्र, भारत को २९ राज्यों और ७ संघ शासित प्रदेशों में गठित किया गया है। लम्बे समय तक समाजवादी आर्थिक नीतियों का पालन करने के बाद 1991 के पश्चात् भारत ने उदारीकरण और वैश्वीकरण की नयी नीतियों के आधार पर सार्थक आर्थिक और सामाजिक प्रगति की है। ३३ लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के साथ भारत भौगोलिक क्षेत्रफल के आधार पर विश्व का सातवाँ सबसे बड़ा राष्ट्र है। वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था क्रय शक्ति समता के आधार पर विश्व की तीसरी और मानक मूल्यों के आधार पर विश्व की दसवीं सबसे बडी अर्थव्यवस्था है। १९९१ के बाज़ार-आधारित सुधारों के बाद भारत विश्व की सबसे तेज़ विकसित होती बड़ी अर्थ-व्यवस्थाओं में से एक हो गया है और इसे एक नव-औद्योगिकृत राष्ट्र माना जाता है। परंतु भारत के सामने अभी भी गरीबी, भ्रष्टाचार, कुपोषण, अपर्याप्त सार्वजनिक स्वास्थ्य-सेवा और आतंकवाद की चुनौतियां हैं। आज भारत एक विविध, बहुभाषी, और बहु-जातीय समाज है और भारतीय सेना एक क्षेत्रीय शक्ति है। . भास्कर तेनाली रामा का पुत्र था। शारधा भास्कर की माता थी।. मनीचार्य विजयनगर के राजा कृष्णदेवराय के राजपुरोहित तथाचार्य के दो शिष्यों में से एक था। धनीचार्य तथाचार्य का दूसरा शिष्य था।. राजा बीरबल(1528-1586)-असली नाम महेश दास भट्ट(राव राजपूत) (जन्म-1528 ई.; मृत्यु- 1586 ई.) मुग़ल बादशाह अकबर के नवरत्नों में सर्वाधिक लोकप्रिय एक भट्ट ब्राह्मण(राव राजपूत) दरबारी था। बीरबल की व्यंग्यपूर्ण कहानियों और काव्य रचनाओं ने उन्हें प्रसिद्ध बनाया था। बीरबल ने दीन-ए-इलाही अपनाया था और फ़तेहपुर सीकरी में उनका एक सुंदर मकान था। बादशाह अकबर के प्रशासन में बीरबल मुग़ल दरबार का प्रमुख वज़ीर था और राज दरबार में उसका बहुत प्रभाव था। बीरबल कवियों का बहुत सम्मान करता था। वह स्वयं भी ब्रजभाषा का अच्छा जानकार और कवि था। . लक्षम्मा तेनाली रामा की माता थी। गरालपति रामैया लक्षम्मा का पति था।. लोक सहित्य का अभिप्राय उस साहित्य से है जिसकी रचना लोक करता है। लोक-साहित्य उतना ही प्राचीन है जितना कि मानव, इसलिए उसमें जन-जीवन की प्रत्येक अवस्था, प्रत्येक वर्ग, प्रत्येक समय और प्रकृति सभी कुछ समाहित है। डॉ॰ सत्येन्द्र के अनुसार- "लोक मनुष्य समाज का वह वर्ग है जो आभिजात्य संस्कार शास्त्रीयता और पांडित्य की चेतना अथवा अहंकार से शून्य है और जो एक परंपरा के प्रवाह में जीवित रहता है।" (लोक साहित्य विज्ञान, डॉ॰ सत्येन्द्र, पृष्ठ-03) साधारण जनता से संबंधित साहित्य को लोकसाहित्य कहना चाहिए। साधारण जनजीवन विशिष्ट जीवन से भिन्न होता है अतः जनसाहित्य (लोकसाहित्य) का आदर्श विशिष्ट साहित्य से पृथक् होता है। किसी देश अथवा क्षेत्र का लोकसाहित्य वहाँ की आदिकाल से लेकर अब तक की उन सभी प्रवृत्तियों का प्रतीक होता है जो साधारण जनस्वभाव के अंतर्गत आती हैं। इस साहित्य में जनजीवन की सभी प्रकार की भावनाएँ बिना किसी कृत्रिमता के समाई रहती हैं। अतः यदि कहीं की समूची संस्कृति का अध्ययन करना हो तो वहाँ के लोकसाहित्य का विशेष अवलोकन करना पड़ेगा। यह लिपिबद्ध बहुत कम और मौखिक अधिक होता है। वैसे हिंदी लोकसाहित्य को लिपिबद्ध करने का प्रयास इधर कुछ वर्षों से किया जा रहा है और अनेक ग्रंथ भी संपादित रूप में सामने आए हैं किंतु अब भी मौखिक लोकसाहित्य बहुत बड़ी मात्रा में असंगृहीत है। लोक जीवन की जैसी सरलतम, नैसर्गिक अनुभूतिमयी अभिव्यंजना का चित्रण लोकगीतों व लोक-कथाओं में मिलता है, वैसा अन्यत्र सर्वथा दुर्लभ है। लोक-साहित्य में लोक-मानव का हृदय बोलता है। प्रकृति स्वयं गाती-गुनगुनाती है। लोक-साहित्य में निहित सौंदर्य का मूल्यांकन सर्वथा अनुभूतिजन्य है। . शारधा या शारदा तेनाली रामा की पत्नी थी। भास्कर शारधा का पुत्र था।. भगवान शिव तथा उनके अवतारों को मानने वालों को शैव कहते हैं। शैव में शाक्त, नाथ, दसनामी, नाग आदि उप संप्रदाय हैं। महाभारत में माहेश्वरों (शैव) के चार सम्प्रदाय बतलाए गए हैंः (i) शैव (ii) पाशुपत (iii) कालदमन (iv) कापालिक। शैवमत का मूलरूप ॠग्वेद में रुद्र की आराधना में हैं। 12 रुद्रों में प्रमुख रुद्र ही आगे चलकर शिव, शंकर, भोलेनाथ और महादेव कहलाए। शैव धर्म से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी और तथ्यः (1) भगवान शिव की पूजा करने वालों को शैव और शिव से संबंधित धर्म को शैवधर्म कहा जाता है। (2) शिवलिंग उपासना का प्रारंभिक पुरातात्विक साक्ष्य हड़प्पा संस्कृति के अवशेषों से मिलता है। (3) ऋग्वेद में शिव के लिए रुद्र नामक देवता का उल्लेख है। (4) अथर्ववेद में शिव को भव, शर्व, पशुपति और भूपति कहा जाता है। (5) लिंगपूजा का पहला स्पष्ट वर्णन मत्स्यपुराण में मिलता है। (6) महाभारत के अनुशासन पर्व से भी लिंग पूजा का वर्णन मिलता है। (7) वामन पुराण में शैव संप्रदाय की संख्या चार बताई गई हैः (i) पाशुपत (ii) काल्पलिक (iii) कालमुख (iv) लिंगायत (7) पाशुपत संप्रदाय शैवों का सबसे प्राचीन संप्रदाय है। इसके संस्थापक लवकुलीश थे जिन्हें भगवान शिव के 18 अवतारों में से एक माना जाता है। (8) पाशुपत संप्रदाय के अनुयायियों को पंचार्थिक कहा गया, इस मत का सैद्धांतिक ग्रंथ पाशुपत सूत्र है। (9) कापलिक संप्रदाय के ईष्ट देव भैरव थे, इस संप्रदाय का प्रमुख केंद्र शैल नामक स्थान था। (10) कालामुख संप्रदाय के अनुयायिओं को शिव पुराण में महाव्रतधर कहा जाता है। इस संप्रदाय के लोग नर-पकाल में ही भोजन, जल और सुरापान करते थे और शरीर पर चिता की भस्म मलते थे। (11) लिंगायत समुदाय दक्षिण में काफी प्रचलित था। इन्हें जंगम भी कहा जाता है, इस संप्रदाय के लोग शिव लिंग की उपासना करते थे। (12) बसव पुराण में लिंगायत समुदाय के प्रवर्तक वल्लभ प्रभु और उनके शिष्य बासव को बताया गया है, इस संप्रदाय को वीरशिव संप्रदाय भी कहा जाता था। (13) दसवीं शताब्दी में मत्स्येंद्रनाथ ने नाथ संप्रदाय की स्थापना की, इस संप्रदाय का व्यापक प्रचार प्रसार बाबा गोरखनाथ के समय में हुआ। (14) दक्षिण भारत में शैवधर्म चालुक्य, राष्ट्रकूट, पल्लव और चोलों के समय लोकप्रिय रहा। (15) नायनारों संतों की संख्या 63 बताई गई है। जिनमें उप्पार, तिरूज्ञान, संबंदर और सुंदर मूर्ति के नाम उल्लेखनीय है। (16) पल्लवकाल में शैव धर्म का प्रचार प्रसार नायनारों ने किया। (17) ऐलेरा के कैलाश मदिंर का निर्माण राष्ट्रकूटों ने करवाया। (18) चोल शालक राजराज प्रथम ने तंजौर में राजराजेश्वर शैव मंदिर का निर्माण करवाया था। (19) कुषाण शासकों की मुद्राओं पर शिंव और नंदी का एक साथ अंकन प्राप्त होता है। (20) शिव पुराण में शिव के दशावतारों के अलावा अन्य का वर्णन मिलता है। ये दसों अवतार तंत्रशास्त्र से संबंधित हैंः (i) महाकाल (ii) तारा (iii) भुवनेश (iv) षोडश (v) भैरव (vi) छिन्नमस्तक गिरिजा (vii) धूम्रवान (viii) बगलामुखी (ix) मातंग (x) कमल (21) शिव के अन्य ग्यारह अवतार हैंः (i) कपाली (ii) पिंगल (iii) भीम (iv) विरुपाक्ष (v) विलोहित (vi) शास्ता (vii) अजपाद (viii) आपिर्बुध्य (ix) शम्भ (x) चण्ड (xi) भव (22) शैव ग्रंथ इस प्रकार हैंः (i) श्वेताश्वतरा उपनिषद (ii) शिव पुराण (iii) आगम ग्रंथ (iv) तिरुमुराई (23) शैव तीर्थ इस प्रकार हैंः (i) बनारस (ii) केदारनाथ (iii) सोमनाथ (iv) रामेश्वरम (v) चिदम्बरम (vi) अमरनाथ (vii) कैलाश मानसरोवर (24) शैव सम्प्रदाय के संस्कार इस प्रकार हैंः (i) शैव संप्रदाय के लोग एकेश्वरवादी होते हैं। (ii) इसके संन्यासी जटा रखते हैं। (iii) इसमें सिर तो मुंडाते हैं, लेकिन चोटी नहीं रखते। (iv) इनके अनुष्ठान रात्रि में होते हैं। (v) इनके अपने तांत्रिक मंत्र होते हैं। (vi) यह निर्वस्त्र भी रहते हैं, भगवा वस्त्र भी पहनते हैं और हाथ में कमंडल, चिमटा रखकर धूनी भी रमाते हैं। (vii) शैव चंद्र पर आधारित व्रत उपवास करते हैं। (viii) शैव संप्रदाय में समाधि देने की परंपरा है। (ix) शैव मंदिर को शिवालय कहते हैं जहां सिर्फ शिवलिंग होता है। (x) यह भभूति तीलक आड़ा लगाते हैं। (25) शैव साधुओं को नाथ, अघोरी, अवधूत, बाबा,औघड़, योगी, सिद्ध कहा जाता है। . सब टीवी एक हिन्दी टी वी चैनल है। इसकी शुरुआत 23 अप्रैल 1999 में श्री अधिकारी ब्रदर्स ने एक सामान्य मनोरंजक चैनल के रूप में की। 2003 में यह चैनल हास्य केन्द्रित हो गया। मार्च 2005 में सब टी वी को सोनी टी वी ने ग्रहण कर लिया और युवा केन्द्रित हो गया। जून 2008 में चैनल ने फिर से हास्य केन्द्रित होने की घोषणा की। यह एक हास्य पूर्ण टी वी चैनल है। यह सोनी का एक नया चेनल है। . कूडियाट्टम् में विदूषक विदूषक, भारतीय नाटकों में एक हँसाने वाला पात्र होता है। मंच पर उसके आने मात्र से ही माहौल हास्यास्पद बन जाता है। वह स्वयं अपना एवं अपने परिवेश का मजाक उडाता है। उसके कथन एक तरफ हास्य को जन्म देते हैं और दूसरी तरफ उनमें कटु सत्य का पुट होता है। . शिवाजी गणेशन (சிவாஜி கணேசன்) (जन्मःविल्लुपुरम चिन्नैया पिल्लई गणेशन, १ अक्टूबर, १९२८ - २१ जुलाई, २००१)) एक भारतीय फिल्म अभिनेता थे। ये बीसवीं शताब्दी के परार्ध में सक्रिय रहे। इनको भारत सरकार द्वारा सन १९८४ में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये तमिलनाडु राज्य से हैं। . विजयनगर साम्राज्य की राजधानी; अब यह हम्पी (पम्पा से निकला हुआ) नगर है। . वैष्णव सम्प्रदाय, भगवान विष्णु को ईश्वर मानने वालों का सम्प्रदाय है। इसके अन्तर्गत चार सम्प्रदाय मुख्य रूप से आते हैं। पहले हैं आचार्य रामानुज, निमबार्काचार्य, बल्लभाचार्य, माधवाचार्य। इसके अलावा उत्तर भारत में आचार्य रामानन्द भी वैष्णव सम्प्रदाय के आचार्य हुए और चैतन्यमहाप्रभु भी वैष्णव आचार्य है जो बंगाल में हुए। रामान्दाचार्य जी ने सर्व धर्म समभाव की भावना को बल देते हुए कबीर, रहीम सभी वर्णों (जाति) के व्यक्तियों को सगुण भक्ति का उपदेश किया। आगे रामानन्द संम्प्रदाय में गोस्वामी तुलसीदास हुए जिन्होने श्री रामचरितमानस की रचना करके जनसामान्य तक भगवत महिमा को पहुँचाया। उनकी अन्य रचनाएँ - विनय पत्रिका, दोहावली, गीतावली, बरवै रामायण एक ज्योतिष ग्रन्थ रामाज्ञा प्रश्नावली का भी निर्माण किया। . गरालपति रामैया तेनाली रामा का पिता था। लक्षम्मा रामैया की पत्नी थी।. गुंटूर आंध्र प्रदेश प्रान्त का एक शहर है। आंध्र प्रदेश के उत्तर पूर्वी भाग में कृष्णा नदी डेल्टा में स्थित है गुंटूर। विजयवाड़ा-चेन्नई ट्रंक रोड पर स्थित गुंटूर की स्थापना फ्रांसिसी शासकों ने आठवीं शताब्दी के मध्य में की थी। करीब 10 शताब्दियों तक उन्होंने यहां राज किया। बाद में 1788 में इसे ब्रिटिश साग्राज्य में मिला दिया गया। गुंटूर बौद्ध धर्म का प्रमुख केंद्र रहा है। प्रकृति ने अपनी खूबसूरती ऊचें पहाड़ों, हरीभरी घाटियों, कलकल बहती नदियों और मनमोहक तटों के रूप में यहां बिखेरी है। आज गुंटूर अपने धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों तथा चटपटे अचार के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। . गुंडप्पा तेनाली रामा का परम-मित्र था। वह तेनाली रामा से १५ (15) वर्ष छोटा था।. आन्ध्र प्रदेश ఆంధ్ర ప్రదేశ్(अनुवादः आन्ध्र का प्रांत), संक्षिप्त आं.प्र., भारत के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित राज्य है। क्षेत्र के अनुसार यह भारत का चौथा सबसे बड़ा और जनसंख्या की दृष्टि से आठवां सबसे बड़ा राज्य है। इसकी राजधानी और सबसे बड़ा शहर हैदराबाद है। भारत के सभी राज्यों में सबसे लंबा समुद्र तट गुजरात में (1600 कि॰मी॰) होते हुए, दूसरे स्थान पर इस राज्य का समुद्र तट (972 कि॰मी॰) है। हैदराबाद केवल दस साल के लिये राजधानी रहेगी, तब तक अमरावती शहर को राजधानी का रूप दे दिया जायेगा। आन्ध्र प्रदेश 12°41' तथा 22°उ॰ अक्षांश और 77° तथा 84°40'पू॰ देशांतर रेखांश के बीच है और उत्तर में महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और उड़ीसा, पूर्व में बंगाल की खाड़ी, दक्षिण में तमिल नाडु और पश्चिम में कर्नाटक से घिरा हुआ है। ऐतिहासिक रूप से आन्ध्र प्रदेश को "भारत का धान का कटोरा" कहा जाता है। यहाँ की फसल का 77% से ज़्यादा हिस्सा चावल है। इस राज्य में दो प्रमुख नदियाँ, गोदावरी और कृष्णा बहती हैं। पुदु्चेरी (पांडीचेरी) राज्य के यानम जिले का छोटा अंतःक्षेत्र (12 वर्ग मील (30 वर्ग कि॰मी॰)) इस राज्य के उत्तरी-पूर्व में स्थित गोदावरी डेल्टा में है। ऐतिहासिक दृष्टि से राज्य में शामिल क्षेत्र आन्ध्रपथ, आन्ध्रदेस, आन्ध्रवाणी और आन्ध्र विषय के रूप में जाना जाता था। आन्ध्र राज्य से आन्ध्र प्रदेश का गठन 1 नवम्बर 1956 को किया गया। फरवरी 2014 को भारतीय संसद ने अलग तेलंगाना राज्य को मंजूरी दे दी। तेलंगाना राज्य में दस जिले तथा शेष आन्ध्र प्रदेश (सीमांन्ध्र) में 13 जिले होंगे। दस साल तक हैदराबाद दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी होगी। नया राज्य सीमांन्ध्र दो-तीन महीने में अस्तित्व में आजाएगा अब लोकसभा/राज्यसभा का 25/12सिट आन्ध्र में और लोकसभा/राज्यसभा17/8 सिट तेलंगाना में होगा। इसी माह आन्ध्र प्रदेश में राष्ट्रपति शासन भी लागू हो गया जो कि राज्य के बटवारे तक लागू रहेगा। . कोई विवरण नहीं। कमला लक्ष्मण बाल पुस्तकों की भारतीय लेखिका और विख्यात कार्टूनिस्ट आर के लक्ष्मण की पत्नी थीं। उनका २०१५ में ९० वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनकी लिखी लघु कहानियों पर १९९० में तेनाली राम नामक दूरदर्शन धारावाहिक भी बना जिसमें विजय कश्यप ने शीर्षक भूमिका अदा की थी। . कार्टून नेटवर्क (भारत) कार्टून नेटवर्क भारत एक भारतीय बाल चैनल है। कार्टून नेटवर्क एक भारत में प्रसारित होने वाला पूर्व अंग्रेज़ी चैनल है। कार्टून नेटवर्क इंडिया एक केबल और सेटेलाइट टेलीविज़न चैनल है, जो टर्नर ब्रॉडकास्टिंग के द्वारा बनाई गई है, यह चैनल टाइम वॉर्नर की एक इकाई है जो एनिमेटेड प्रोग्रामिंग केलिए बनी है, जिसका मुख्यालय बम्बई, महाराष्ट्र में है। "कार्टून नेटवर्क" का १९९५ में दोहरे चैनल के रूप में भारत में प्रसारण शुरू हुआ,TCM और कार्टून नेटवर्क । टीएनटी और कार्टून नेटवर्क, जिसका प्रसारण ५ः३० am से ५ः३० pm तक होता था। फिर १ जुलाई २००१ में कार्टून नेटवर्क इंडिया में टर्नर क्लासिक फिल्म की जगह पर २४ घंटे शुरू हुआ, जिसका प्रसारण नेपाल और भूटान में शरू हुआ। कार्टून नेटवर्क भारत में हिंदी, अंग्रेज़ी, तेलुगु और तमिल में प्रसारित होता है। कार्टून नेटवर्क भारत के आलावा नेपाल, भूटान, श्रीलंका और बंगलादेश में भी प्रसारित होती है। श्रेणीःअंग्रेजी टीवी चैनल श्रेणीःतेलुगु चैनल. काली हिन्दू धर्म की एक प्रमुख देवी हैं। यह सुन्दरी रूप वाली भगवती दुर्गा का काला और भयप्रद रूप है, जिसकी उत्पत्ति राक्षसों को मारने के लिये हुई थी। उनको ख़ासतौर पर बंगाल और असम में पूजा जाता है। काली की व्युत्पत्ति काल अथवा समय से हुई है जो सबको अपना ग्रास बना लेता है। माँ का यह रूप है जो नाश करने वाला है पर यह रूप सिर्फ उनके लिए हैं जो दानवीय प्रकृति के हैं जिनमे कोई दयाभाव नहीं है। यह रूप बुराई से अच्छाई को जीत दिलवाने वाला है अतः माँ काली अच्छे मनुष्यों की शुभेच्छु है और पूजनीय है।इनको महाकाली भी कहते हैं। . कवि वह है जो भावों को रसाभिषिक्त अभिव्यक्ति देता है और सामान्य अथवा स्पष्ट के परे गहन यथार्थ का वर्णन करता है। इसीलिये वैदिक काल में ऋषयः मन्त्रदृष्टारः कवयः क्रान्तदर्शिनः अर्थात् ऋषि को मन्त्रदृष्टा और कवि को क्रान्तदर्शी कहा गया है। "जहाँ न पहुँचे रवि, वहाँ पहुँचे कवि" इस लोकोक्ति को एक दोहे के माध्यम से अभिव्यक्ति दी गयी हैः "जहाँ न पहुँचे रवि वहाँ, कवि पहुँचे तत्काल। दिन में कवि का काम क्या, निशि में करे कमाल।।" ('क्रान्त' कृत मुक्तकी से साभार) . कृष्ण भारद्वाज एक भारतीय टीवी कलाकार हैं। उनका जन्म रांची, झारखंड में हुआ था। उन्होंने कई टीवी धारावाहिकों जैसे जसुबेन जयंतीलाल जोशी की ज्वाइंट फॅमिली, सुख बाई चांस, आर के लक्ष्मण की दुनिया और पिया बसंती रे में प्रमुख भूमिकायें अदा की हैं। कृष्ण ने "आई गेस" (2013) व "वन नाइट स्टैंड" जैसी कुछ लघु फिल्मों में भी अभिनय किया है। संप्रति कृष्ण सब टीवी पर प्रसारित धारावाहिक तेनाली रामा में शीर्षक भूमिका निभा रहे हैं। यह धारावाहिक १६वीं शताब्दी में विजयनगर साम्राज्य में राजा कृष्णदेव राय के दरबारी कवि और विदूषक रामकृष्ण से संबंधित लोक साहित्य व किवदंतियों पर आधारित है। अपने ग्राम तेनाली के नाम से प्रसिद्ध रामकृष्ण अपनी कुशाग्र बुद्धि और विनोद के कारण आज भी याद किये जाते हैं। भारद्वाज को इस भूमिका के लिये अपना सर भी मुंडाना पड़ा।. कृष्णदेवराय की कांस्य प्रतिमा संगीतमय स्तम्भों से युक्त हम्पी स्थित विट्ठल मन्दिर; इसके होयसला शैली के बहुभुजाकार आधार पर ध्यान दीजिए। कृष्णदेवराय (1509-1529 ई.; राज्यकाल 1509-1529 ई) विजयनगर के सर्वाधिक कीर्तिवान राजा थे। वे स्वयं कवि और कवियों के संरक्षक थे। तेलुगु भाषा में उनका काव्य अमुक्तमाल्यद साहित्य का एक रत्न है। इनकी भारत के प्राचीन इतिहास पर आधारित पुस्तक वंशचरितावली तेलुगू के साथ - साथ संस्कृत में भी मिलती है। संभवत तेलुगू का अनुवाद ही संस्कृत में हुआ है। प्रख्यात इतिहासकार तेजपाल सिंह धामा ने हिन्दी में इनके जीवन पर प्रामाणिक उपन्यास आंध्रभोज लिखा है। तेलुगु भाषा के आठ प्रसिद्ध कवि इनके दरबार में थे जो अष्टदिग्गज के नाम से प्रसिद्ध थे। स्वयं कृष्णदेवराय भी आंध्रभोज के नाम से विख्यात थे। . अनंत नाग हिन्दी फ़िल्मों के एक अभिनेता हैं। . अष्टदिग्गज (तेलुगुः అష్టదిగ్గజాలు) विजयनगर राज्य के राजा कृष्णदेव राय के दरबार में विभूषित आठ कवियों के लिये प्रयुक्त शब्द है। कहा जाता है कि इस काल में तेलुगु साहित्य अपनी पराकाष्ठा तक पहुंच गया था। कृष्णदेव के दरबार में ये कवि साहित्य सभा के आठ स्तम्भ माने जाते थे। इस काल (१५४० से १६००) को तेलुगू कविता के सन्दर्भ में 'प्रबन्ध काल' भी कहा जाता है। ये अष्टदिग्गज ये हैं-. अक्किनेनी नागेश्वर राव (प्रचलित नाम एएनआर 20 सितम्बर 1923 - 22 जनवरी 2014) मुख्य रूप से तेलुगू सिनेमा में काम करने वाले भारतीय फ़िल्म अभिनेता एवं निर्माता थे। उन्हें मुख्यतः उनके नायिका के अभिनय के लिए जाना जाता था क्योंकि उस समय महिलाओं का फ़िल्मों में अभिनय करना निषिद्ध था। उन्हें भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए सन् १९८८ में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। . १५०९ ग्रेगोरी कैलंडर का एक साधारण वर्ष है। . 1529 ग्रेगोरी कैलंडर का एक साधारण वर्ष है। .
तेनाली रामकृष्ण जो विकटकवि के रूप में जाने जाते थ,आंध्र प्रदेश के एक तेलुगु कवि थे। वे अपनी कुशाग्र बुद्धि और हास्य बोध के कारण प्रसिद्ध हुये। तेनाली विजयनगर साम्राज्य के राजा कृष्णदेवराय के दरबार के अष्टदिग्गजों में से एक थे। विजयनगर के राजपुरोहित वयासतीर्थ तथाचार्य रामा से शत्रुता रखते थे। तथाचार्य और उसके शिष्य धनीचार्य और मनीचार्य तेनाली रामा को मुसीबत में फसाने के लिए नई-नई तरकीबें प्रयोग करते थे पर तेनाली रामा उन तरकीबों का हल निकाल लेता था। . इकतालीस संबंधोंः एनिमेशन, तथाचार्य, तमिल, तेनाली, तेनाली रामा , तेलुगू भाषा, तेलुगू साहित्य, दूरदर्शन, धनीचार्य, धर्म, नन्दमूरि तारक रामाराव, पुरोहित, भारत, भास्कर, मनीचार्य, राजा बीरबल, लक्षम्मा, लोक साहित्य, शारधा, शैव, सब टीवी, विदूषक, विल्लुपुरम चिन्नैया गणेशन, विजयनगर, वैष्णव सम्प्रदाय, गरालपति रामैया, गुंटूर, गुंडप्पा, आन्ध्र प्रदेश, कन्नड़, कमला लक्ष्मण, कार्टून नेटवर्क , काली, कवि, कृष्ण भारद्वाज, कृष्णदेवराय, अनंत नाग, अष्टदिग्गज, अक्किनेनी नागेश्वर राव, एक हज़ार पाँच सौ नौ, एक हज़ार पाँच सौ उनतीस। चित्रःAnimexampleतीनedit.png उछलती हुई गेंद के एनिमेशन में छः फ्रेम शामिल हैं। चित्रःAnimexample.gif यह एनिमेशन दस फ्रेम प्रति सेकण्ड की गति से चलता है। अनुप्राणन या एनिमेशन द्विआयामी और त्रिआयामी कलाकृतियों या निदर्श की छवियों का, संचलन का भ्रम उत्पन्न करने के लिए तेजी से किया गया सिलसिलेवार प्रदर्शन है। यह दृष्टि की दृढ़ता के कारण उत्पन्न गति का एक प्रकाशीय भ्रम है और इसकी रचना और प्रदर्शन कई तरह से किया जा सकता है। एनिमेशन प्रस्तुत करने का सबसे आम तरीका एक चलचित्र या वीडियो कार्यक्रम के रूप में इसे प्रस्तुत करना है, हालांकि एनिमेशन कई अन्य रूपों में भी पेश किया जा सकता है। दोD एवं तीनD कलाकृति को एक साथ एक निर्धारित दिशा में प्रदर्शित करने को ऐनीमेशन कहते हैं I ऐनीमेशन एक प्रकार का दृष्टी भ्रम भी हो सकता है I क्यों की ये सामान्य मानव नेत्र की दृष्टी छमता के कारण महसूस होता है I आप ऐनीमेशन को कई प्रकार से कर एवं महसूस कर सकते हैं I सबसे साधारण तरीका ये हैं कि आप इसे चलचित्र द्वारा प्रस्तुत करे I इस के अलावा इसे करने के और भी कई तरीके है . तथाचार्य या तथाचारय विजयनगर के राजा कृष्णदेवराय का राजपुरोहित था।उसकी पत्नी का नाम वरुणमाला और बेटा व्यासाचार्य था।तथाचार्य का सही नाम व्यासतीर्थ तथाचार्य था। तथाचार्य के दो शिष्य 'धनीचार्य' और 'मनीचार्य' थे। वह तेनाली रामा से शत्रुता रखते थे। तथाचार्य जितना ज्ञानी था उससे अधिक पाखंडी था।. एक तमिल परिवार श्रीलंका में तमिल बच्चे भरतनाट्यम तमिल एक मानमूल है, जिनका मुख्य निवास भारत के तमिलनाडु तथा उत्तरी श्री लंका में है। तमिल समुदाय से जुड़ी चीजों को भी तमिल कहते हैं जैसे, तमिल तथा तमिलनाडु के वासियों को भी तमिल कहा जाता है। तामिल, द्रविड़ जाति की ही एक शाखा है। बहुत से विद्वानों की राय है कि 'तामिल' शब्द संस्कृत 'द्राविड' से निकला है। मनुसंहिता, महाभारत आदि प्राचीन ग्रंथों में द्रविड देश और द्रविड जाति का उल्लेख है। मागधी प्राकृत या पाली में इसी 'द्राविड' शब्द का रूप 'दामिलो' हो गया। तामिल वर्णमाला में त, ष, द आदि के एक ही उच्चारण के कारण 'दामिलो' का 'तामिलो' या 'तामिल' हो गया। शंकराचार्य के शारीरक भाष्य में 'द्रमिल' शब्द आया है। हुएनसांग नामक चीनी यात्री ने भी द्रविड देश को 'चि - मो - लो' करके लिखा है। तमिल व्याकरण के अनुसार द्रमिल शब्द का रूप 'तिरमिड़' होता है। आजकल कुछ विद्वानों की राय हो रही है कि यह 'तिरमिड़' शब्द ही प्राचीन है जिससे संस्कृतवालों ने 'द्रविड' शब्द बना लिया। जैनों के 'शत्रुंजय माहात्म्य' नामक एक ग्रंथ में 'द्रविड' शब्द पर एक विलक्षण कल्पना की गई है। उक्त पुस्तक के मत से आदि तीर्थकर ऋषभदेव को 'द्रविड' नामक एक पुत्र जिस भूभाग में हुआ, उसका नाम 'द्रविड' पड़ गया। पर भारत, मनुसंहिता आदि प्राचीन ग्रंथों से विदित होता है कि द्रविड जाति के निवास के ही कारण देश का नाम द्रविड पड़ा। तामिल जाति अत्यंत प्राचीन हे। पुरातत्वविदों का मत है कि यह जाति अनार्य है और आर्यों के आगमन से पूर्व ही भारत के अनेक भागों में निवास करती थी। रामचंद्र ने दक्षिण में जाकर जिन लोगों की सहायता से लंका पर चढ़ाई की थी और जिन्हें वाल्मीकि ने बंदर लिखा है, वे इसी जाति के थे। उनके काले वर्ण, भिन्न आकृति तथा विकट भाषा आदि के कारण ही आर्यों ने उन्हें बंदर कहा होगा। पुरातत्ववेत्ताओं का अनुमान है कि तामिल जाति आर्यों के संसर्ग के पूर्व ही बहुत कुछ सभ्यता प्राप्त कर चुकी थी। तामिल लोगों के राजा होते थे जो किले बनाकर रहते थे। वे हजार तक गिन लेते थे। वे नाव, छोटे मोटे जहाज, धनुष, बाण, तलवार इत्यादि बना लेते थे और एक प्रकार का कपड़ा बुनना भी जानते थे। राँगे, सीसे और जस्ते को छोड़ और सब धातुओं का ज्ञान भी उन्हें था। आर्यों के संसर्ग के उपरांत उन्होंने आर्यों की सभ्यता पूर्ण रूप से ग्रहण की। दक्षिण देश में ऐसी जनश्रुति है कि अगस्त्य ऋषि ने दक्षिण में जाकर वहाँ के निवासियों को बहुत सी विद्याएँ सिखाई। बारह-तेरह सौ वर्ष पहले दक्षिण में जैन धर्म का बड़ा प्रचार था। चीनी यात्री हुएनसांग जिस समय दक्षिण में गया था, उसने वहाँ दिगंबर जैनों की प्रधानता देखी थी। तमिल भाषा का साहित्य भी अत्यंत प्राचीन है। दो हजार वर्ष पूर्व तक के काव्य तामिल भाषा में विद्यमान हैं। पर वर्णमाला नागरी लिपि की तुलना में अपूर्ण है। अनुनासिक पंचम वर्ण को छोड़ व्यंजन के एक एक वर्ग का उच्चारण एक ही सा है। क, ख, ग, घ, चारों का उच्चारण एक ही है। व्यंजनों के इस अभाव के कारण जो संस्कृत शब्द प्रयुक्त होते हैं, वे विकृत्त हो जाते हैं; जैसे, 'कृष्ण' शब्द तामिल में 'किट्टिनन' हो जाता है। तामिल भाषा का प्रधान ग्रंथ कवि तिरुवल्लुवर रचित कुराल काव्य है। . तेनाली भारत के आंध्र प्रदेश प्रान्त का एक शहर है। श्रेणीःआन्ध्र प्रदेश श्रेणीःआन्ध्र प्रदेश के नगर. तेनाली रामा तेनाली रामा सब टीवी पर प्रसारित होने वाला एक मनोरंजन धारावाहिक है जो कि प्राचीन कवि व राजा कृष्णदेव राय के दरबारी कवि और विदूषक तेनाली रामकृष्ण पर आधारित है। . तेलुगु भाषा भारत के आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों की मुख्यभाषा और राजभाषा है। ये द्रविड़ भाषा-परिवार के अन्तर्गत आती है। यह भाषा आंध्र प्रदेश तथा तेलंगाना के अलावा तमिलनाडु, कर्णाटक, ओडिशा और छत्तीसगढ़ राज्यों में भी बोली जाती है। तेलुगु के तीन नाम प्रचलित हैं -- "तेलुगु", "तेनुगु" और "आंध्र"। . तेलुगु का साहित्य अत्यन्त समृद्ध एवं प्राचीन है। इसमें काव्य, उपन्यास, नाटक, लघुकथाएँ, तथा पुराण आते हैं। तेलुगु साहित्य की परम्परा ग्यारहवीं शताब्दी के आरम्भिक काल से शुरू होती है जब महाभारत का संस्कृत से नन्नय्य द्वारा तेलुगु में अनुवाद किया गया। विजयनगर साम्राज्य के समय यह पल्लवित-पुष्पित हुई। . दूरदर्शन या टेलीविजन एक ऐसी दूरसंचार प्रणाली है जिसके द्वारा चलचित्र व ध्वनि को दो स्थानों के बीच प्रसारित व प्राप्त किया जा सके। यह शब्द दूरदर्शन सेट, दूरदर्शन कार्यक्रम तथा प्रसारण के लिये भी प्रयुक्त होता है। दूरदर्शन का अंग्रेजी शब्द 'टेलिविज़न' लैटिन तथा यूनानी शब्दों से बनाया गया है जिसका अर्थ होता है दूर दृष्टि धर्म का अर्थ होता है, धारण, अर्थात जिसे धारण किया जा सके, धर्म,कर्म प्रधान है। गुणों को जो प्रदर्शित करे वह धर्म है। धर्म को गुण भी कह सकते हैं। यहाँ उल्लेखनीय है कि धर्म शब्द में गुण अर्थ केवल मानव से संबंधित नहीं। पदार्थ के लिए भी धर्म शब्द प्रयुक्त होता है यथा पानी का धर्म है बहना, अग्नि का धर्म है प्रकाश, उष्मा देना और संपर्क में आने वाली वस्तु को जलाना। व्यापकता के दृष्टिकोण से धर्म को गुण कहना सजीव, निर्जीव दोनों के अर्थ में नितांत ही उपयुक्त है। धर्म सार्वभौमिक होता है। पदार्थ हो या मानव पूरी पृथ्वी के किसी भी कोने में बैठे मानव या पदार्थ का धर्म एक ही होता है। उसके देश, रंग रूप की कोई बाधा नहीं है। धर्म सार्वकालिक होता है यानी कि प्रत्येक काल में युग में धर्म का स्वरूप वही रहता है। धर्म कभी बदलता नहीं है। उदाहरण के लिए पानी, अग्नि आदि पदार्थ का धर्म सृष्टि निर्माण से आज पर्यन्त समान है। धर्म और सम्प्रदाय में मूलभूत अंतर है। धर्म का अर्थ जब गुण और जीवन में धारण करने योग्य होता है तो वह प्रत्येक मानव के लिए समान होना चाहिए। जब पदार्थ का धर्म सार्वभौमिक है तो मानव जाति के लिए भी तो इसकी सार्वभौमिकता होनी चाहिए। अतः मानव के सन्दर्भ में धर्म की बात करें तो वह केवल मानव धर्म है। हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई, जैन या बौद्ध आदि धर्म न होकर सम्प्रदाय या समुदाय मात्र हैं। "सम्प्रदाय" एक परम्परा के मानने वालों का समूह है। भारतीय संस्कृति और दर्शन की प्रमुख संकल्पना है। 'धर्म' शब्द का पश्चिमी भाषाओं में कोई तुल्य शब्द पाना बहुत कठिन है। साधारण शब्दों में धर्म के बहुत से अर्थ हैं जिनमें से कुछ ये हैं- कर्तव्य, अहिंसा, न्याय, सदाचरण, सद्-गुण आदि। . हैदराबाद-श्रीसैलम मार्ग पर स्थित एन टी रामाराव की मूर्ति नन्दमूरि तारक रामाराव या एन.टी. पुरोहितः पुरोहित दो शब्दों से बना हैः- 'पर' तथा 'हित', अर्थात ऐसा व्यक्ति जो दुसरो के कल्याण की चिंता करे। प्राचीन काल में आश्रम प्रमुख को पुरोहित कहते थे जहां शिक्षा दी जाती थी। हालांकि यज्ञ कर्म करने वाले मुख्य व्यक्ति को भी पुरोहित कहा जाता था। यह पुरोहित सभी तरह के संस्कार कराने के लिए भी नियुक्त होता है। प्रचीनकाल में किसी राजघराने से भी पुरोहित संबंधित होते थे। अर्थात राज दरबार में पुरोहित नियुक्त होते थे, जो धर्म-कर्म का कार्य देखने के साथ ही सलाहकार समीति में शामिल रहते थे। श्रेणीःहिन्दू धर्म. भारत दक्षिण एशिया में स्थित भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा देश है। पूर्ण रूप से उत्तरी गोलार्ध में स्थित भारत, भौगोलिक दृष्टि से विश्व में सातवाँ सबसे बड़ा और जनसंख्या के दृष्टिकोण से दूसरा सबसे बड़ा देश है। भारत के पश्चिम में पाकिस्तान, उत्तर-पूर्व में चीन, नेपाल और भूटान, पूर्व में बांग्लादेश और म्यान्मार स्थित हैं। हिन्द महासागर में इसके दक्षिण पश्चिम में मालदीव, दक्षिण में श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व में इंडोनेशिया से भारत की सामुद्रिक सीमा लगती है। इसके उत्तर की भौतिक सीमा हिमालय पर्वत से और दक्षिण में हिन्द महासागर से लगी हुई है। पूर्व में बंगाल की खाड़ी है तथा पश्चिम में अरब सागर हैं। प्राचीन सिन्धु घाटी सभ्यता, व्यापार मार्गों और बड़े-बड़े साम्राज्यों का विकास-स्थान रहे भारतीय उपमहाद्वीप को इसके सांस्कृतिक और आर्थिक सफलता के लंबे इतिहास के लिये जाना जाता रहा है। चार प्रमुख संप्रदायोंः हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्मों का यहां उदय हुआ, पारसी, यहूदी, ईसाई, और मुस्लिम धर्म प्रथम सहस्राब्दी में यहां पहुचे और यहां की विविध संस्कृति को नया रूप दिया। क्रमिक विजयों के परिणामस्वरूप ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कंपनी ने अट्ठारहवीं और उन्नीसवीं सदी में भारत के ज़्यादतर हिस्सों को अपने राज्य में मिला लिया। एक हज़ार आठ सौ सत्तावन के विफल विद्रोह के बाद भारत के प्रशासन का भार ब्रिटिश सरकार ने अपने ऊपर ले लिया। ब्रिटिश भारत के रूप में ब्रिटिश साम्राज्य के प्रमुख अंग भारत ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में एक लम्बे और मुख्य रूप से अहिंसक स्वतन्त्रता संग्राम के बाद पंद्रह अगस्त एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस को आज़ादी पाई। एक हज़ार नौ सौ पचास में लागू हुए नये संविधान में इसे सार्वजनिक वयस्क मताधिकार के आधार पर स्थापित संवैधानिक लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित कर दिया गया और युनाईटेड किंगडम की तर्ज़ पर वेस्टमिंस्टर शैली की संसदीय सरकार स्थापित की गयी। एक संघीय राष्ट्र, भारत को उनतीस राज्यों और सात संघ शासित प्रदेशों में गठित किया गया है। लम्बे समय तक समाजवादी आर्थिक नीतियों का पालन करने के बाद एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे के पश्चात् भारत ने उदारीकरण और वैश्वीकरण की नयी नीतियों के आधार पर सार्थक आर्थिक और सामाजिक प्रगति की है। तैंतीस लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के साथ भारत भौगोलिक क्षेत्रफल के आधार पर विश्व का सातवाँ सबसे बड़ा राष्ट्र है। वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था क्रय शक्ति समता के आधार पर विश्व की तीसरी और मानक मूल्यों के आधार पर विश्व की दसवीं सबसे बडी अर्थव्यवस्था है। एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे के बाज़ार-आधारित सुधारों के बाद भारत विश्व की सबसे तेज़ विकसित होती बड़ी अर्थ-व्यवस्थाओं में से एक हो गया है और इसे एक नव-औद्योगिकृत राष्ट्र माना जाता है। परंतु भारत के सामने अभी भी गरीबी, भ्रष्टाचार, कुपोषण, अपर्याप्त सार्वजनिक स्वास्थ्य-सेवा और आतंकवाद की चुनौतियां हैं। आज भारत एक विविध, बहुभाषी, और बहु-जातीय समाज है और भारतीय सेना एक क्षेत्रीय शक्ति है। . भास्कर तेनाली रामा का पुत्र था। शारधा भास्कर की माता थी।. मनीचार्य विजयनगर के राजा कृष्णदेवराय के राजपुरोहित तथाचार्य के दो शिष्यों में से एक था। धनीचार्य तथाचार्य का दूसरा शिष्य था।. राजा बीरबल-असली नाम महेश दास भट्ट मुग़ल बादशाह अकबर के नवरत्नों में सर्वाधिक लोकप्रिय एक भट्ट ब्राह्मण दरबारी था। बीरबल की व्यंग्यपूर्ण कहानियों और काव्य रचनाओं ने उन्हें प्रसिद्ध बनाया था। बीरबल ने दीन-ए-इलाही अपनाया था और फ़तेहपुर सीकरी में उनका एक सुंदर मकान था। बादशाह अकबर के प्रशासन में बीरबल मुग़ल दरबार का प्रमुख वज़ीर था और राज दरबार में उसका बहुत प्रभाव था। बीरबल कवियों का बहुत सम्मान करता था। वह स्वयं भी ब्रजभाषा का अच्छा जानकार और कवि था। . लक्षम्मा तेनाली रामा की माता थी। गरालपति रामैया लक्षम्मा का पति था।. लोक सहित्य का अभिप्राय उस साहित्य से है जिसकी रचना लोक करता है। लोक-साहित्य उतना ही प्राचीन है जितना कि मानव, इसलिए उसमें जन-जीवन की प्रत्येक अवस्था, प्रत्येक वर्ग, प्रत्येक समय और प्रकृति सभी कुछ समाहित है। डॉ॰ सत्येन्द्र के अनुसार- "लोक मनुष्य समाज का वह वर्ग है जो आभिजात्य संस्कार शास्त्रीयता और पांडित्य की चेतना अथवा अहंकार से शून्य है और जो एक परंपरा के प्रवाह में जीवित रहता है।" साधारण जनता से संबंधित साहित्य को लोकसाहित्य कहना चाहिए। साधारण जनजीवन विशिष्ट जीवन से भिन्न होता है अतः जनसाहित्य का आदर्श विशिष्ट साहित्य से पृथक् होता है। किसी देश अथवा क्षेत्र का लोकसाहित्य वहाँ की आदिकाल से लेकर अब तक की उन सभी प्रवृत्तियों का प्रतीक होता है जो साधारण जनस्वभाव के अंतर्गत आती हैं। इस साहित्य में जनजीवन की सभी प्रकार की भावनाएँ बिना किसी कृत्रिमता के समाई रहती हैं। अतः यदि कहीं की समूची संस्कृति का अध्ययन करना हो तो वहाँ के लोकसाहित्य का विशेष अवलोकन करना पड़ेगा। यह लिपिबद्ध बहुत कम और मौखिक अधिक होता है। वैसे हिंदी लोकसाहित्य को लिपिबद्ध करने का प्रयास इधर कुछ वर्षों से किया जा रहा है और अनेक ग्रंथ भी संपादित रूप में सामने आए हैं किंतु अब भी मौखिक लोकसाहित्य बहुत बड़ी मात्रा में असंगृहीत है। लोक जीवन की जैसी सरलतम, नैसर्गिक अनुभूतिमयी अभिव्यंजना का चित्रण लोकगीतों व लोक-कथाओं में मिलता है, वैसा अन्यत्र सर्वथा दुर्लभ है। लोक-साहित्य में लोक-मानव का हृदय बोलता है। प्रकृति स्वयं गाती-गुनगुनाती है। लोक-साहित्य में निहित सौंदर्य का मूल्यांकन सर्वथा अनुभूतिजन्य है। . शारधा या शारदा तेनाली रामा की पत्नी थी। भास्कर शारधा का पुत्र था।. भगवान शिव तथा उनके अवतारों को मानने वालों को शैव कहते हैं। शैव में शाक्त, नाथ, दसनामी, नाग आदि उप संप्रदाय हैं। महाभारत में माहेश्वरों के चार सम्प्रदाय बतलाए गए हैंः शैव पाशुपत कालदमन कापालिक। शैवमत का मूलरूप ॠग्वेद में रुद्र की आराधना में हैं। बारह रुपयाद्रों में प्रमुख रुद्र ही आगे चलकर शिव, शंकर, भोलेनाथ और महादेव कहलाए। शैव धर्म से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी और तथ्यः भगवान शिव की पूजा करने वालों को शैव और शिव से संबंधित धर्म को शैवधर्म कहा जाता है। शिवलिंग उपासना का प्रारंभिक पुरातात्विक साक्ष्य हड़प्पा संस्कृति के अवशेषों से मिलता है। ऋग्वेद में शिव के लिए रुद्र नामक देवता का उल्लेख है। अथर्ववेद में शिव को भव, शर्व, पशुपति और भूपति कहा जाता है। लिंगपूजा का पहला स्पष्ट वर्णन मत्स्यपुराण में मिलता है। महाभारत के अनुशासन पर्व से भी लिंग पूजा का वर्णन मिलता है। वामन पुराण में शैव संप्रदाय की संख्या चार बताई गई हैः पाशुपत काल्पलिक कालमुख लिंगायत पाशुपत संप्रदाय शैवों का सबसे प्राचीन संप्रदाय है। इसके संस्थापक लवकुलीश थे जिन्हें भगवान शिव के अट्ठारह अवतारों में से एक माना जाता है। पाशुपत संप्रदाय के अनुयायियों को पंचार्थिक कहा गया, इस मत का सैद्धांतिक ग्रंथ पाशुपत सूत्र है। कापलिक संप्रदाय के ईष्ट देव भैरव थे, इस संप्रदाय का प्रमुख केंद्र शैल नामक स्थान था। कालामुख संप्रदाय के अनुयायिओं को शिव पुराण में महाव्रतधर कहा जाता है। इस संप्रदाय के लोग नर-पकाल में ही भोजन, जल और सुरापान करते थे और शरीर पर चिता की भस्म मलते थे। लिंगायत समुदाय दक्षिण में काफी प्रचलित था। इन्हें जंगम भी कहा जाता है, इस संप्रदाय के लोग शिव लिंग की उपासना करते थे। बसव पुराण में लिंगायत समुदाय के प्रवर्तक वल्लभ प्रभु और उनके शिष्य बासव को बताया गया है, इस संप्रदाय को वीरशिव संप्रदाय भी कहा जाता था। दसवीं शताब्दी में मत्स्येंद्रनाथ ने नाथ संप्रदाय की स्थापना की, इस संप्रदाय का व्यापक प्रचार प्रसार बाबा गोरखनाथ के समय में हुआ। दक्षिण भारत में शैवधर्म चालुक्य, राष्ट्रकूट, पल्लव और चोलों के समय लोकप्रिय रहा। नायनारों संतों की संख्या तिरेसठ बताई गई है। जिनमें उप्पार, तिरूज्ञान, संबंदर और सुंदर मूर्ति के नाम उल्लेखनीय है। पल्लवकाल में शैव धर्म का प्रचार प्रसार नायनारों ने किया। ऐलेरा के कैलाश मदिंर का निर्माण राष्ट्रकूटों ने करवाया। चोल शालक राजराज प्रथम ने तंजौर में राजराजेश्वर शैव मंदिर का निर्माण करवाया था। कुषाण शासकों की मुद्राओं पर शिंव और नंदी का एक साथ अंकन प्राप्त होता है। शिव पुराण में शिव के दशावतारों के अलावा अन्य का वर्णन मिलता है। ये दसों अवतार तंत्रशास्त्र से संबंधित हैंः महाकाल तारा भुवनेश षोडश भैरव छिन्नमस्तक गिरिजा धूम्रवान बगलामुखी मातंग कमल शिव के अन्य ग्यारह अवतार हैंः कपाली पिंगल भीम विरुपाक्ष विलोहित शास्ता अजपाद आपिर्बुध्य शम्भ चण्ड भव शैव ग्रंथ इस प्रकार हैंः श्वेताश्वतरा उपनिषद शिव पुराण आगम ग्रंथ तिरुमुराई शैव तीर्थ इस प्रकार हैंः बनारस केदारनाथ सोमनाथ रामेश्वरम चिदम्बरम अमरनाथ कैलाश मानसरोवर शैव सम्प्रदाय के संस्कार इस प्रकार हैंः शैव संप्रदाय के लोग एकेश्वरवादी होते हैं। इसके संन्यासी जटा रखते हैं। इसमें सिर तो मुंडाते हैं, लेकिन चोटी नहीं रखते। इनके अनुष्ठान रात्रि में होते हैं। इनके अपने तांत्रिक मंत्र होते हैं। यह निर्वस्त्र भी रहते हैं, भगवा वस्त्र भी पहनते हैं और हाथ में कमंडल, चिमटा रखकर धूनी भी रमाते हैं। शैव चंद्र पर आधारित व्रत उपवास करते हैं। शैव संप्रदाय में समाधि देने की परंपरा है। शैव मंदिर को शिवालय कहते हैं जहां सिर्फ शिवलिंग होता है। यह भभूति तीलक आड़ा लगाते हैं। शैव साधुओं को नाथ, अघोरी, अवधूत, बाबा,औघड़, योगी, सिद्ध कहा जाता है। . सब टीवी एक हिन्दी टी वी चैनल है। इसकी शुरुआत तेईस अप्रैल एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में श्री अधिकारी ब्रदर्स ने एक सामान्य मनोरंजक चैनल के रूप में की। दो हज़ार तीन में यह चैनल हास्य केन्द्रित हो गया। मार्च दो हज़ार पाँच में सब टी वी को सोनी टी वी ने ग्रहण कर लिया और युवा केन्द्रित हो गया। जून दो हज़ार आठ में चैनल ने फिर से हास्य केन्द्रित होने की घोषणा की। यह एक हास्य पूर्ण टी वी चैनल है। यह सोनी का एक नया चेनल है। . कूडियाट्टम् में विदूषक विदूषक, भारतीय नाटकों में एक हँसाने वाला पात्र होता है। मंच पर उसके आने मात्र से ही माहौल हास्यास्पद बन जाता है। वह स्वयं अपना एवं अपने परिवेश का मजाक उडाता है। उसके कथन एक तरफ हास्य को जन्म देते हैं और दूसरी तरफ उनमें कटु सत्य का पुट होता है। . शिवाजी गणेशन ) एक भारतीय फिल्म अभिनेता थे। ये बीसवीं शताब्दी के परार्ध में सक्रिय रहे। इनको भारत सरकार द्वारा सन एक हज़ार नौ सौ चौरासी में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये तमिलनाडु राज्य से हैं। . विजयनगर साम्राज्य की राजधानी; अब यह हम्पी नगर है। . वैष्णव सम्प्रदाय, भगवान विष्णु को ईश्वर मानने वालों का सम्प्रदाय है। इसके अन्तर्गत चार सम्प्रदाय मुख्य रूप से आते हैं। पहले हैं आचार्य रामानुज, निमबार्काचार्य, बल्लभाचार्य, माधवाचार्य। इसके अलावा उत्तर भारत में आचार्य रामानन्द भी वैष्णव सम्प्रदाय के आचार्य हुए और चैतन्यमहाप्रभु भी वैष्णव आचार्य है जो बंगाल में हुए। रामान्दाचार्य जी ने सर्व धर्म समभाव की भावना को बल देते हुए कबीर, रहीम सभी वर्णों के व्यक्तियों को सगुण भक्ति का उपदेश किया। आगे रामानन्द संम्प्रदाय में गोस्वामी तुलसीदास हुए जिन्होने श्री रामचरितमानस की रचना करके जनसामान्य तक भगवत महिमा को पहुँचाया। उनकी अन्य रचनाएँ - विनय पत्रिका, दोहावली, गीतावली, बरवै रामायण एक ज्योतिष ग्रन्थ रामाज्ञा प्रश्नावली का भी निर्माण किया। . गरालपति रामैया तेनाली रामा का पिता था। लक्षम्मा रामैया की पत्नी थी।. गुंटूर आंध्र प्रदेश प्रान्त का एक शहर है। आंध्र प्रदेश के उत्तर पूर्वी भाग में कृष्णा नदी डेल्टा में स्थित है गुंटूर। विजयवाड़ा-चेन्नई ट्रंक रोड पर स्थित गुंटूर की स्थापना फ्रांसिसी शासकों ने आठवीं शताब्दी के मध्य में की थी। करीब दस शताब्दियों तक उन्होंने यहां राज किया। बाद में एक हज़ार सात सौ अठासी में इसे ब्रिटिश साग्राज्य में मिला दिया गया। गुंटूर बौद्ध धर्म का प्रमुख केंद्र रहा है। प्रकृति ने अपनी खूबसूरती ऊचें पहाड़ों, हरीभरी घाटियों, कलकल बहती नदियों और मनमोहक तटों के रूप में यहां बिखेरी है। आज गुंटूर अपने धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों तथा चटपटे अचार के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। . गुंडप्पा तेनाली रामा का परम-मित्र था। वह तेनाली रामा से पंद्रह वर्ष छोटा था।. आन्ध्र प्रदेश ఆంధ్ర ప్రదేశ్, संक्षिप्त आं.प्र., भारत के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित राज्य है। क्षेत्र के अनुसार यह भारत का चौथा सबसे बड़ा और जनसंख्या की दृष्टि से आठवां सबसे बड़ा राज्य है। इसकी राजधानी और सबसे बड़ा शहर हैदराबाद है। भारत के सभी राज्यों में सबसे लंबा समुद्र तट गुजरात में होते हुए, दूसरे स्थान पर इस राज्य का समुद्र तट है। हैदराबाद केवल दस साल के लिये राजधानी रहेगी, तब तक अमरावती शहर को राजधानी का रूप दे दिया जायेगा। आन्ध्र प्रदेश बारह°इकतालीस' तथा बाईस°उ॰ अक्षांश और सतहत्तर° तथा चौरासी°चालीस'पू॰ देशांतर रेखांश के बीच है और उत्तर में महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और उड़ीसा, पूर्व में बंगाल की खाड़ी, दक्षिण में तमिल नाडु और पश्चिम में कर्नाटक से घिरा हुआ है। ऐतिहासिक रूप से आन्ध्र प्रदेश को "भारत का धान का कटोरा" कहा जाता है। यहाँ की फसल का सतहत्तर% से ज़्यादा हिस्सा चावल है। इस राज्य में दो प्रमुख नदियाँ, गोदावरी और कृष्णा बहती हैं। पुदु्चेरी राज्य के यानम जिले का छोटा अंतःक्षेत्र ) इस राज्य के उत्तरी-पूर्व में स्थित गोदावरी डेल्टा में है। ऐतिहासिक दृष्टि से राज्य में शामिल क्षेत्र आन्ध्रपथ, आन्ध्रदेस, आन्ध्रवाणी और आन्ध्र विषय के रूप में जाना जाता था। आन्ध्र राज्य से आन्ध्र प्रदेश का गठन एक नवम्बर एक हज़ार नौ सौ छप्पन को किया गया। फरवरी दो हज़ार चौदह को भारतीय संसद ने अलग तेलंगाना राज्य को मंजूरी दे दी। तेलंगाना राज्य में दस जिले तथा शेष आन्ध्र प्रदेश में तेरह जिले होंगे। दस साल तक हैदराबाद दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी होगी। नया राज्य सीमांन्ध्र दो-तीन महीने में अस्तित्व में आजाएगा अब लोकसभा/राज्यसभा का पच्चीस/बारहसिट आन्ध्र में और लोकसभा/राज्यसभासत्रह/आठ सिट तेलंगाना में होगा। इसी माह आन्ध्र प्रदेश में राष्ट्रपति शासन भी लागू हो गया जो कि राज्य के बटवारे तक लागू रहेगा। . कोई विवरण नहीं। कमला लक्ष्मण बाल पुस्तकों की भारतीय लेखिका और विख्यात कार्टूनिस्ट आर के लक्ष्मण की पत्नी थीं। उनका दो हज़ार पंद्रह में नब्बे वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनकी लिखी लघु कहानियों पर एक हज़ार नौ सौ नब्बे में तेनाली राम नामक दूरदर्शन धारावाहिक भी बना जिसमें विजय कश्यप ने शीर्षक भूमिका अदा की थी। . कार्टून नेटवर्क कार्टून नेटवर्क भारत एक भारतीय बाल चैनल है। कार्टून नेटवर्क एक भारत में प्रसारित होने वाला पूर्व अंग्रेज़ी चैनल है। कार्टून नेटवर्क इंडिया एक केबल और सेटेलाइट टेलीविज़न चैनल है, जो टर्नर ब्रॉडकास्टिंग के द्वारा बनाई गई है, यह चैनल टाइम वॉर्नर की एक इकाई है जो एनिमेटेड प्रोग्रामिंग केलिए बनी है, जिसका मुख्यालय बम्बई, महाराष्ट्र में है। "कार्टून नेटवर्क" का एक हज़ार नौ सौ पचानवे में दोहरे चैनल के रूप में भारत में प्रसारण शुरू हुआ,TCM और कार्टून नेटवर्क । टीएनटी और कार्टून नेटवर्क, जिसका प्रसारण पाँचःतीस am से पाँचःतीस pm तक होता था। फिर एक जुलाई दो हज़ार एक में कार्टून नेटवर्क इंडिया में टर्नर क्लासिक फिल्म की जगह पर चौबीस घंटाटे शुरू हुआ, जिसका प्रसारण नेपाल और भूटान में शरू हुआ। कार्टून नेटवर्क भारत में हिंदी, अंग्रेज़ी, तेलुगु और तमिल में प्रसारित होता है। कार्टून नेटवर्क भारत के आलावा नेपाल, भूटान, श्रीलंका और बंगलादेश में भी प्रसारित होती है। श्रेणीःअंग्रेजी टीवी चैनल श्रेणीःतेलुगु चैनल. काली हिन्दू धर्म की एक प्रमुख देवी हैं। यह सुन्दरी रूप वाली भगवती दुर्गा का काला और भयप्रद रूप है, जिसकी उत्पत्ति राक्षसों को मारने के लिये हुई थी। उनको ख़ासतौर पर बंगाल और असम में पूजा जाता है। काली की व्युत्पत्ति काल अथवा समय से हुई है जो सबको अपना ग्रास बना लेता है। माँ का यह रूप है जो नाश करने वाला है पर यह रूप सिर्फ उनके लिए हैं जो दानवीय प्रकृति के हैं जिनमे कोई दयाभाव नहीं है। यह रूप बुराई से अच्छाई को जीत दिलवाने वाला है अतः माँ काली अच्छे मनुष्यों की शुभेच्छु है और पूजनीय है।इनको महाकाली भी कहते हैं। . कवि वह है जो भावों को रसाभिषिक्त अभिव्यक्ति देता है और सामान्य अथवा स्पष्ट के परे गहन यथार्थ का वर्णन करता है। इसीलिये वैदिक काल में ऋषयः मन्त्रदृष्टारः कवयः क्रान्तदर्शिनः अर्थात् ऋषि को मन्त्रदृष्टा और कवि को क्रान्तदर्शी कहा गया है। "जहाँ न पहुँचे रवि, वहाँ पहुँचे कवि" इस लोकोक्ति को एक दोहे के माध्यम से अभिव्यक्ति दी गयी हैः "जहाँ न पहुँचे रवि वहाँ, कवि पहुँचे तत्काल। दिन में कवि का काम क्या, निशि में करे कमाल।।" . कृष्ण भारद्वाज एक भारतीय टीवी कलाकार हैं। उनका जन्म रांची, झारखंड में हुआ था। उन्होंने कई टीवी धारावाहिकों जैसे जसुबेन जयंतीलाल जोशी की ज्वाइंट फॅमिली, सुख बाई चांस, आर के लक्ष्मण की दुनिया और पिया बसंती रे में प्रमुख भूमिकायें अदा की हैं। कृष्ण ने "आई गेस" व "वन नाइट स्टैंड" जैसी कुछ लघु फिल्मों में भी अभिनय किया है। संप्रति कृष्ण सब टीवी पर प्रसारित धारावाहिक तेनाली रामा में शीर्षक भूमिका निभा रहे हैं। यह धारावाहिक सोलहवीं शताब्दी में विजयनगर साम्राज्य में राजा कृष्णदेव राय के दरबारी कवि और विदूषक रामकृष्ण से संबंधित लोक साहित्य व किवदंतियों पर आधारित है। अपने ग्राम तेनाली के नाम से प्रसिद्ध रामकृष्ण अपनी कुशाग्र बुद्धि और विनोद के कारण आज भी याद किये जाते हैं। भारद्वाज को इस भूमिका के लिये अपना सर भी मुंडाना पड़ा।. कृष्णदेवराय की कांस्य प्रतिमा संगीतमय स्तम्भों से युक्त हम्पी स्थित विट्ठल मन्दिर; इसके होयसला शैली के बहुभुजाकार आधार पर ध्यान दीजिए। कृष्णदेवराय विजयनगर के सर्वाधिक कीर्तिवान राजा थे। वे स्वयं कवि और कवियों के संरक्षक थे। तेलुगु भाषा में उनका काव्य अमुक्तमाल्यद साहित्य का एक रत्न है। इनकी भारत के प्राचीन इतिहास पर आधारित पुस्तक वंशचरितावली तेलुगू के साथ - साथ संस्कृत में भी मिलती है। संभवत तेलुगू का अनुवाद ही संस्कृत में हुआ है। प्रख्यात इतिहासकार तेजपाल सिंह धामा ने हिन्दी में इनके जीवन पर प्रामाणिक उपन्यास आंध्रभोज लिखा है। तेलुगु भाषा के आठ प्रसिद्ध कवि इनके दरबार में थे जो अष्टदिग्गज के नाम से प्रसिद्ध थे। स्वयं कृष्णदेवराय भी आंध्रभोज के नाम से विख्यात थे। . अनंत नाग हिन्दी फ़िल्मों के एक अभिनेता हैं। . अष्टदिग्गज विजयनगर राज्य के राजा कृष्णदेव राय के दरबार में विभूषित आठ कवियों के लिये प्रयुक्त शब्द है। कहा जाता है कि इस काल में तेलुगु साहित्य अपनी पराकाष्ठा तक पहुंच गया था। कृष्णदेव के दरबार में ये कवि साहित्य सभा के आठ स्तम्भ माने जाते थे। इस काल को तेलुगू कविता के सन्दर्भ में 'प्रबन्ध काल' भी कहा जाता है। ये अष्टदिग्गज ये हैं-. अक्किनेनी नागेश्वर राव मुख्य रूप से तेलुगू सिनेमा में काम करने वाले भारतीय फ़िल्म अभिनेता एवं निर्माता थे। उन्हें मुख्यतः उनके नायिका के अभिनय के लिए जाना जाता था क्योंकि उस समय महिलाओं का फ़िल्मों में अभिनय करना निषिद्ध था। उन्हें भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए सन् एक हज़ार नौ सौ अठासी में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। . एक हज़ार पाँच सौ नौ ग्रेगोरी कैलंडर का एक साधारण वर्ष है। . एक हज़ार पाँच सौ उनतीस ग्रेगोरी कैलंडर का एक साधारण वर्ष है। .
Team India: भारतीय क्रिकेट टीम इस समय बांग्लादेश का दौरा कर रही है. जहां पर टीम 3 मैचों की वनडे सीरीज़ और 2 मैचों की टेस्ट सीरीज़ खेलने गई है. वहीं 26 दिसंबर को भारत का यह दौरा समाप्त हो जाएगा. जिसके बाद टीम इंडिया (Team India) वापसी भारत आएगी, और हफ्ते भर के आराम के बाद नए साल में श्रीलंका के साथ 3 मैचों की T20 और 3 ही मैचों की वनडे सीरीज़ जनवरी में खेलेगी. वहीं अब श्रीलंका के इस भारतीय दौरे का पूरा शेड्यूल भी बीसीसीआई ने जारी कर दिया है. तो आइये ऐसे में एक बार इस पर नज़र डालते हैं. आपको बता दें कि नए साल 2023 में भारतीय क्रिकेट टीम (Team India) के सामने सबसे बड़ी चुनौती एशियाई चैंपियंस श्रीलंका के रूप में होगी. जनवरी में श्रीलंका 3 मैचों की T20 और 3 मैचों की ही वनडे सीरीज़ के लिए भारत का दौरा कर रही है. इस रोमांचक व्हाइट बॉल क्रिकेट का आगाज़ 3 जनवरी से होगा. वहीं वनडे से पहले दोनों टीमें T20 में एक दूसरे के आमने-सामने होंगी. तो आइये एक बार शेड्यूल पर नज़र डालते हैं. भारत और श्रीलंका के बीच होने वाली T20I सीरीज़ का शेड्यूलः भारत और श्रीलंका के बीच होने वाली वनडे सीरीज़ का शेड्यूलः श्रीलंका के साथ वनडे सीरीज़ समाप्त होने के बाद तुरंत 18 जनवरी से भारत (Team India) और न्यूज़ीलैंड के बीच 3 मैचों की वनडे श्रृंखला शुरू हो जाएगी. बता दें कि श्रीलंका की तरह न्यूज़ीलैंड भी जनवरी में भारत का दौरा करेगी. जहां पर दोनों टीमों के बीच 3 मैचों की वनडे और इतने ही मैचों की T20I सीरीज़ भी खेली जाएगी. जिसका शेड्यूल कुछ इस प्रकार है. भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच होने वाली वनडे सीरीज़ का शेड्यूलः भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच होने वाली T20 सीरीज़ का शेड्यूलः
Team India: भारतीय क्रिकेट टीम इस समय बांग्लादेश का दौरा कर रही है. जहां पर टीम तीन मैचों की वनडे सीरीज़ और दो मैचों की टेस्ट सीरीज़ खेलने गई है. वहीं छब्बीस दिसंबर को भारत का यह दौरा समाप्त हो जाएगा. जिसके बाद टीम इंडिया वापसी भारत आएगी, और हफ्ते भर के आराम के बाद नए साल में श्रीलंका के साथ तीन मैचों की Tबीस और तीन ही मैचों की वनडे सीरीज़ जनवरी में खेलेगी. वहीं अब श्रीलंका के इस भारतीय दौरे का पूरा शेड्यूल भी बीसीसीआई ने जारी कर दिया है. तो आइये ऐसे में एक बार इस पर नज़र डालते हैं. आपको बता दें कि नए साल दो हज़ार तेईस में भारतीय क्रिकेट टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती एशियाई चैंपियंस श्रीलंका के रूप में होगी. जनवरी में श्रीलंका तीन मैचों की Tबीस और तीन मैचों की ही वनडे सीरीज़ के लिए भारत का दौरा कर रही है. इस रोमांचक व्हाइट बॉल क्रिकेट का आगाज़ तीन जनवरी से होगा. वहीं वनडे से पहले दोनों टीमें Tबीस में एक दूसरे के आमने-सामने होंगी. तो आइये एक बार शेड्यूल पर नज़र डालते हैं. भारत और श्रीलंका के बीच होने वाली TबीसI सीरीज़ का शेड्यूलः भारत और श्रीलंका के बीच होने वाली वनडे सीरीज़ का शेड्यूलः श्रीलंका के साथ वनडे सीरीज़ समाप्त होने के बाद तुरंत अट्ठारह जनवरी से भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच तीन मैचों की वनडे श्रृंखला शुरू हो जाएगी. बता दें कि श्रीलंका की तरह न्यूज़ीलैंड भी जनवरी में भारत का दौरा करेगी. जहां पर दोनों टीमों के बीच तीन मैचों की वनडे और इतने ही मैचों की TबीसI सीरीज़ भी खेली जाएगी. जिसका शेड्यूल कुछ इस प्रकार है. भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच होने वाली वनडे सीरीज़ का शेड्यूलः भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच होने वाली Tबीस सीरीज़ का शेड्यूलः
- उद्घाटन दिनांकः 8 दिसंबर, 1 9 84। टॉमटलैंड, या टॉमटे का गांव - वह स्थान जहां स्वीडिश सांता क्लॉस, टोमटे। यह दलार्ना प्रांत में मुरा शहर के पास जंगल की मोटी में स्थित है। यह एक असली जादुई देश है, जो छोटे और वयस्क दोनों आगंतुकों से अपील करेगा। सर्दी में, टॉमटलैंड, जो बर्फ से ढके हुए जमे हुए झरने और झीलों से घिरा हुआ है, केवल जादुई दिखता है। प्रवेश द्वार पर आगंतुकों को लाल टोपी पहने हुए elves द्वारा मुलाकात की जाती है। यहां आप कर सकते हैंः - दुष्ट चुड़ैल और अच्छे चुड़ैल से मिलें; - जानें कि उनके ट्रोल में कौन से खजाने को संग्रहीत किया जाता है; - देखने के लिए, gnomes का जीवन कैसे व्यवस्थित किया जाता है; - हिम रानी के निवास पर जाने के लिए। पथ के अंत में सांता का झोपड़ी है, जहां आग में आग जल जाती है, और श्रीमती सांता फायरप्लेस द्वारा बैठे एक मोज़े को बुनाती है। वह मेहमानों को असली "क्रिसमस" अदरक बिस्कुट के साथ व्यवहार करती है। और भोजन के बाद, आप बहुत सांते टोमटे जा सकते हैं और उसे एक पत्र छोड़ सकते हैं, जहां यह इंगित करना है कि आप दुनिया में सबसे ज्यादा क्या चाहते हैं। आप कार्यशाला में जा सकते हैं जहां संत के सहायक सभी बच्चों के लिए उपहार तैयार करते हैं, साथ ही लकड़ी के गोदाम में जाते हैं जहां इन उपहारों को तब तक रखा जाता है जब तक कि दादाजी टॉमटे को उनके हिरण के दोहन पर पहुंचने का समय न हो। यहां आप एक स्लेज की सवारी कर सकते हैं, जिसमें रेनडियर का उपयोग किया जाता है, पूरी तरह से जिंजरब्रेड आटा से बने स्लीघ को देखें, एक खोज में भाग लें - उदाहरण के लिए, ट्रोल के गांव की तलाश में। गर्मियों में, पर्यटक झील पर एक नाव यात्रा पर जाते हैं, जिसमें मत्स्यांगना रहता है, पानी एल्फ गायन सुनते हैं, या पेड़ों की राजकुमारी को देखने के लिए परी के जंगल के माध्यम से चलते हैं। कहाँ रहना है? टॉमटलैंड के आगंतुक सांता के गांव के बहुत करीब बंद हो सकते हैंः - थलबर्ग शहर में 4 * होटल डेलकारपिया एसपीए स्थित है; - झील सिल्जन के किनारे पर मुरा ( स्टॉकहोम की ओर) से 30 किमी दूर 3 * होटल लेरडल्सुइडेन है; - रत्विक से 2 किमी, उसी झील के तट पर सिल्जन कॉटेज कॉम्प्लेक्स दला वार्डशस है; - मुरा शहर के केंद्र में 4 * एसपीए होटल मोरा एसपीए है। टॉमटेलैंड पूरे वर्ष दौर काम करता है। प्रवेश शुल्क वयस्कों के लिए 220 एसईके और 170 और 3 साल की उम्र के बच्चों के लिए 170 है (संगत रूप से 25 से अधिक और लगभग 20 अमेरिकी डॉलर)। टॉमटलैंड कैसे जाए? स्टॉकहोम से टॉमटेलैंड का सबसे तेज़ तरीका हवा से पहुंचा जा सकता हैः स्वीडिश राजधानी से मुरा तक की उड़ान में 50 मिनट लगेंगे। कार द्वारा सांता क्लॉस के गांव में मुरा शहर से सड़क केवल आधे घंटे लगती है; आप राजमार्ग E45 पर जा सकते हैं, आप कर सकते हैं - E45 और Ryssa bygata द्वारा; एक और विकल्प - Sundsvägen - लगभग 40 मिनट ले जाएगा। आप स्टॉकहोम और कार से प्राप्त कर सकते हैं। सड़क लगभग 4 घंटे तक चली जाएगी, मार्ग संख्या 70 के साथ चलेगी। आप सार्वजनिक परिवहन से वहां जा सकते हैं, लेकिन आपको कई बदलाव करना होगाः एक ट्रेन स्टॉकहोम से मुरा की यात्रा करती है, वहां से बस स्टॉप से टॉमटेलैंड तक बस ड्राइव करना संभव है, बस स्टॉप से सांता क्लॉज के गांव तक चलने में लगभग डेढ़ किलोमीटर लगेंगे।
- उद्घाटन दिनांकः आठ दिसंबर, एक नौ चौरासी। टॉमटलैंड, या टॉमटे का गांव - वह स्थान जहां स्वीडिश सांता क्लॉस, टोमटे। यह दलार्ना प्रांत में मुरा शहर के पास जंगल की मोटी में स्थित है। यह एक असली जादुई देश है, जो छोटे और वयस्क दोनों आगंतुकों से अपील करेगा। सर्दी में, टॉमटलैंड, जो बर्फ से ढके हुए जमे हुए झरने और झीलों से घिरा हुआ है, केवल जादुई दिखता है। प्रवेश द्वार पर आगंतुकों को लाल टोपी पहने हुए elves द्वारा मुलाकात की जाती है। यहां आप कर सकते हैंः - दुष्ट चुड़ैल और अच्छे चुड़ैल से मिलें; - जानें कि उनके ट्रोल में कौन से खजाने को संग्रहीत किया जाता है; - देखने के लिए, gnomes का जीवन कैसे व्यवस्थित किया जाता है; - हिम रानी के निवास पर जाने के लिए। पथ के अंत में सांता का झोपड़ी है, जहां आग में आग जल जाती है, और श्रीमती सांता फायरप्लेस द्वारा बैठे एक मोज़े को बुनाती है। वह मेहमानों को असली "क्रिसमस" अदरक बिस्कुट के साथ व्यवहार करती है। और भोजन के बाद, आप बहुत सांते टोमटे जा सकते हैं और उसे एक पत्र छोड़ सकते हैं, जहां यह इंगित करना है कि आप दुनिया में सबसे ज्यादा क्या चाहते हैं। आप कार्यशाला में जा सकते हैं जहां संत के सहायक सभी बच्चों के लिए उपहार तैयार करते हैं, साथ ही लकड़ी के गोदाम में जाते हैं जहां इन उपहारों को तब तक रखा जाता है जब तक कि दादाजी टॉमटे को उनके हिरण के दोहन पर पहुंचने का समय न हो। यहां आप एक स्लेज की सवारी कर सकते हैं, जिसमें रेनडियर का उपयोग किया जाता है, पूरी तरह से जिंजरब्रेड आटा से बने स्लीघ को देखें, एक खोज में भाग लें - उदाहरण के लिए, ट्रोल के गांव की तलाश में। गर्मियों में, पर्यटक झील पर एक नाव यात्रा पर जाते हैं, जिसमें मत्स्यांगना रहता है, पानी एल्फ गायन सुनते हैं, या पेड़ों की राजकुमारी को देखने के लिए परी के जंगल के माध्यम से चलते हैं। कहाँ रहना है? टॉमटलैंड के आगंतुक सांता के गांव के बहुत करीब बंद हो सकते हैंः - थलबर्ग शहर में चार * होटल डेलकारपिया एसपीए स्थित है; - झील सिल्जन के किनारे पर मुरा से तीस किमी दूर तीन * होटल लेरडल्सुइडेन है; - रत्विक से दो किमी, उसी झील के तट पर सिल्जन कॉटेज कॉम्प्लेक्स दला वार्डशस है; - मुरा शहर के केंद्र में चार * एसपीए होटल मोरा एसपीए है। टॉमटेलैंड पूरे वर्ष दौर काम करता है। प्रवेश शुल्क वयस्कों के लिए दो सौ बीस एसईके और एक सौ सत्तर और तीन साल की उम्र के बच्चों के लिए एक सौ सत्तर है । टॉमटलैंड कैसे जाए? स्टॉकहोम से टॉमटेलैंड का सबसे तेज़ तरीका हवा से पहुंचा जा सकता हैः स्वीडिश राजधानी से मुरा तक की उड़ान में पचास मिनट लगेंगे। कार द्वारा सांता क्लॉस के गांव में मुरा शहर से सड़क केवल आधे घंटे लगती है; आप राजमार्ग Eपैंतालीस पर जा सकते हैं, आप कर सकते हैं - Eपैंतालीस और Ryssa bygata द्वारा; एक और विकल्प - Sundsvägen - लगभग चालीस मिनट ले जाएगा। आप स्टॉकहोम और कार से प्राप्त कर सकते हैं। सड़क लगभग चार घंटाटे तक चली जाएगी, मार्ग संख्या सत्तर के साथ चलेगी। आप सार्वजनिक परिवहन से वहां जा सकते हैं, लेकिन आपको कई बदलाव करना होगाः एक ट्रेन स्टॉकहोम से मुरा की यात्रा करती है, वहां से बस स्टॉप से टॉमटेलैंड तक बस ड्राइव करना संभव है, बस स्टॉप से सांता क्लॉज के गांव तक चलने में लगभग डेढ़ किलोमीटर लगेंगे।
ओकिनावा ओकी90 ( Okinawa Oki90) नाम का स्कूटर लॉन्च हो सकतता है. इसमें व्हील काफी बड़े इस्तेमाल किए गए हैं, जो इसके लुक को और अधिक आकर्षक बनाता है और यह व्हील साइज करीब 14 इंच के हैं. ओकिनावा (Okinava) भारत में नई इलेक्ट्रिक स्कूटर लाने की की तैयारी कर रहा है, जिसमें बड़े-बड़े टायर और काफी लुक सामने आएगा. इस स्कूटर का नाम ओकिनावा ओकी90 ( Okinawa Oki90) हो सकता है. गुरुग्राम बेस्ड यह ईवी निर्माता (EV manufacturer) कंपनी इस साल की पहली तिमाही में इस स्कूटर को लॉन्च कर सकती है. इस स्कूटर की टेस्टिंग के दौरान फोटो नजर आई है. इस स्कूटर की जानकारी एचटी ऑटो ने दी है. रिपोर्ट में बताया गया है कि रोड टेस्ट के दौरान एक इलेक्ट्रिक स्कूटर को स्पॉट किया गया है, जो ओकिनावा के स्कूटर की तरह नजर आता है. स्पाई इमेज को देखने के बाद कहा जा सकता है कि यह प्रोटोटाइप पूरी तरह से तैयार हो चुका है. साथ ही इसमें मोटर साइकिल फिनिशिंग के साथ नजर आई है. इसमें व्हील काफी बड़े इस्तेमाल किए गए हैं, जो इसके लुक को और अधिक आकर्षक बनाता है और यह व्हील साइज करीब 14 इंच के हैं. दोनों ही व्हील में डिस्क का इस्तेमाल किया गया है. अभी तक मौजूद इलेक्ट्रिक स्कूटर की तुलना में यह व्हील काफी बड़े नजर आते हैं. हालांकि पेंट डिटेल को छिपाया गया है. साथ ही इस अपकमिंग बाइक में लंबी शीट्स का इस्तेमाल किया गया है, जो दोनों लोगों को आरामदायक और ज्यादा जगह बैठने के लिए उपलब्ध कराएगी. हालांकि अभी सीट्स के साइज की जानकारी देना काफी मुश्किल है. पुरानी रिपोर्ट्स पर गौर करें तो यह स्कूटर रिमूवेबल लीथियम ऑयन बैटरी के साथ आएगा, जिसके साथ फास्ट चार्जर भी मिलेगा. इमेज में दिखाय गया है कि इसमें कोई भी हब माउंटेड का इस्तेमाल नहीं किया गया है. यह ओकिनावा का एक प्रीमियम वर्जन भी हो सकता है. इसकी टॉप स्पीड 80 किलोमीटर प्रति घंटा तक की हो सकती है. जबकि फुल चार्ज पर यह स्कूटर 150-180 किलोमीटर तक की ड्राइविंग रेंज देगी. इस इलेक्ट्रिक स्कूटर में संभवतः जियो-फेंसिंग, नेविगेशन और डाइगोनिस्टिक जैसे फीचर्स दिए गए हैं. इस इलेक्ट्रिक स्कूटर का मुकाबला ओला एस 1 प्रो इलेक्ट्रिक स्कूटर और सिंवन वन इलेक्ट्रिक स्कूटर से होगा. हालांकि अभी तक प्राइस को लेकर कंपनी की तरफ से कोई जानकारी नहीं दी गई है लेकिन संभावित कीमत 1 लाख रुपये लेकर 1.20 लाख रुपये तक होगा.
ओकिनावा ओकीनब्बे नाम का स्कूटर लॉन्च हो सकतता है. इसमें व्हील काफी बड़े इस्तेमाल किए गए हैं, जो इसके लुक को और अधिक आकर्षक बनाता है और यह व्हील साइज करीब चौदह इंच के हैं. ओकिनावा भारत में नई इलेक्ट्रिक स्कूटर लाने की की तैयारी कर रहा है, जिसमें बड़े-बड़े टायर और काफी लुक सामने आएगा. इस स्कूटर का नाम ओकिनावा ओकीनब्बे हो सकता है. गुरुग्राम बेस्ड यह ईवी निर्माता कंपनी इस साल की पहली तिमाही में इस स्कूटर को लॉन्च कर सकती है. इस स्कूटर की टेस्टिंग के दौरान फोटो नजर आई है. इस स्कूटर की जानकारी एचटी ऑटो ने दी है. रिपोर्ट में बताया गया है कि रोड टेस्ट के दौरान एक इलेक्ट्रिक स्कूटर को स्पॉट किया गया है, जो ओकिनावा के स्कूटर की तरह नजर आता है. स्पाई इमेज को देखने के बाद कहा जा सकता है कि यह प्रोटोटाइप पूरी तरह से तैयार हो चुका है. साथ ही इसमें मोटर साइकिल फिनिशिंग के साथ नजर आई है. इसमें व्हील काफी बड़े इस्तेमाल किए गए हैं, जो इसके लुक को और अधिक आकर्षक बनाता है और यह व्हील साइज करीब चौदह इंच के हैं. दोनों ही व्हील में डिस्क का इस्तेमाल किया गया है. अभी तक मौजूद इलेक्ट्रिक स्कूटर की तुलना में यह व्हील काफी बड़े नजर आते हैं. हालांकि पेंट डिटेल को छिपाया गया है. साथ ही इस अपकमिंग बाइक में लंबी शीट्स का इस्तेमाल किया गया है, जो दोनों लोगों को आरामदायक और ज्यादा जगह बैठने के लिए उपलब्ध कराएगी. हालांकि अभी सीट्स के साइज की जानकारी देना काफी मुश्किल है. पुरानी रिपोर्ट्स पर गौर करें तो यह स्कूटर रिमूवेबल लीथियम ऑयन बैटरी के साथ आएगा, जिसके साथ फास्ट चार्जर भी मिलेगा. इमेज में दिखाय गया है कि इसमें कोई भी हब माउंटेड का इस्तेमाल नहीं किया गया है. यह ओकिनावा का एक प्रीमियम वर्जन भी हो सकता है. इसकी टॉप स्पीड अस्सी किलोग्राममीटर प्रति घंटा तक की हो सकती है. जबकि फुल चार्ज पर यह स्कूटर एक सौ पचास-एक सौ अस्सी किलोग्राममीटर तक की ड्राइविंग रेंज देगी. इस इलेक्ट्रिक स्कूटर में संभवतः जियो-फेंसिंग, नेविगेशन और डाइगोनिस्टिक जैसे फीचर्स दिए गए हैं. इस इलेक्ट्रिक स्कूटर का मुकाबला ओला एस एक प्रो इलेक्ट्रिक स्कूटर और सिंवन वन इलेक्ट्रिक स्कूटर से होगा. हालांकि अभी तक प्राइस को लेकर कंपनी की तरफ से कोई जानकारी नहीं दी गई है लेकिन संभावित कीमत एक लाख रुपये लेकर एक.बीस लाख रुपये तक होगा.
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। जम्मू (جموں, पंजाबीः ਜੰਮੂ), भारत के उत्तरतम राज्य जम्मू एवं कश्मीर में तीन में से एक प्रशासनिक खण्ड है। यह क्षेत्र अपने आप में एक राज्य नहीं वरन जम्मू एवं कश्मीर राज्य का एक भाग है। क्षेत्र के प्रमुख जिलों में डोडा, कठुआ, उधमपुर, राजौरी, रामबन, रियासी, सांबा, किश्तवार एवं पुंछ आते हैं। क्षेत्र की अधिकांश भूमि पहाड़ी या पथरीली है। इसमें ही पीर पंजाल रेंज भी आता है जो कश्मीर घाटी को वृहत हिमालय से पूर्वी जिलों डोडा और किश्तवार में पृथक करता है। यहाम की प्रधान नदी चेनाब (चंद्रभागा) है। जम्मू शहर, जिसे आधिकारिक रूप से जम्मू-तवी भी कहते हैं, इस प्रभाग का सबसे बड़ा नगर है और जम्मू एवं कश्मीर राज्य की शीतकालीन राजधानी भी है। नगर के बीच से तवी नदी निकलती है, जिसके कारण इस नगर को यह आधिकारिक नाम मिला है। जम्मू नगर को "मन्दिरों का शहर" भी कहा जाता है, क्योंकि यहां ढेरों मन्दिर एवं तीर्थ हैं जिनके चमकते शिखर एवं दमकते कलश नगर की क्षितिजरेखा पर सुवर्ण बिन्दुओं जैसे दिखाई देते हैं और एक पवित्र एवं शांतिपूर्ण हिन्दू नगर का वातावरण प्रस्तुत करते हैं। यहां कुछ प्रसिद्ध हिन्दू तीर्थ भी हैं, जैसे वैष्णो देवी, आदि जिनके कारण जम्मू हिन्दू तीर्थ नगरों में गिना जाता है। यहाम की अधिकांश जनसंख्या हिन्दू ही है। हालांकि दूसरे स्थान पर यहां सिख धर्म ही आता है। वृहत अवसंरचना के कारण जम्मू इस राज्य का प्रमुख आर्थिक केन्द्र बनकर उभरा है। . पार्वती हिमनरेश हिमावन तथा मैनावती की पुत्री हैं, तथा भगवान शंकर की पत्नी हैं। उमा, गौरी भी पार्वती के ही नाम हैं। यह प्रकृति स्वरूपा हैं। पार्वती के जन्म का समाचार सुनकर देवर्षि नारद हिमनरेश के घर आये थे। हिमनरेश के पूछने पर देवर्षि नारद ने पार्वती के विषय में यह बताया कि तुम्हारी कन्या सभी सुलक्षणों से सम्पन्न है तथा इसका विवाह भगवान शंकर से होगा। किन्तु महादेव जी को पति के रूप में प्राप्त करने के लिये तुम्हारी पुत्री को घोर तपस्या करना होगा। बाद में इनके दो पुत्र कार्तिकेय तथा गणेश हुए। कई पुराणों में इनकी पुत्री अशोक सुंदरी का भी वर्णन है। . जम्मू और पार्वती आम में 2 बातें हैं (यूनियनपीडिया में): शिव, हिमालय। शिव या महादेव हिंदू धर्म में सबसे महत्वपूर्ण देवताओं में से एक है। वह त्रिदेवों में एक देव हैं। इन्हें देवों के देव भी कहते हैं। इन्हें भोलेनाथ, शंकर, महेश, रुद्र, नीलकंठ,गंगाधार के नाम से भी जाना जाता है। तंत्र साधना में इन्हे भैरव के नाम से भी जाना जाता है। हिन्दू धर्म के प्रमुख देवताओं में से हैं। वेद में इनका नाम रुद्र है। यह व्यक्ति की चेतना के अन्तर्यामी हैं। इनकी अर्धांगिनी (शक्ति) का नाम पार्वती है। इनके पुत्र कार्तिकेय और गणेश हैं, तथा पुत्री अशोक सुंदरी हैं। शिव अधिक्तर चित्रों में योगी के रूप में देखे जाते हैं और उनकी पूजा शिवलिंग तथा मूर्ति दोनों रूपों में की जाती है। शिव के गले में नाग देवता विराजित हैं और हाथों में डमरू और त्रिशूल लिए हुए हैं। कैलाश में उनका वास है। यह शैव मत के आधार है। इस मत में शिव के साथ शक्ति सर्व रूप में पूजित है। भगवान शिव को संहार का देवता कहा जाता है। भगवान शिव सौम्य आकृति एवं रौद्ररूप दोनों के लिए विख्यात हैं। अन्य देवों से शिव को भिन्न माना गया है। सृष्टि की उत्पत्ति, स्थिति एवं संहार के अधिपति शिव हैं। त्रिदेवों में भगवान शिव संहार के देवता माने गए हैं। शिव अनादि तथा सृष्टि प्रक्रिया के आदिस्रोत हैं और यह काल महाकाल ही ज्योतिषशास्त्र के आधार हैं। शिव का अर्थ यद्यपि कल्याणकारी माना गया है, लेकिन वे हमेशा लय एवं प्रलय दोनों को अपने अधीन किए हुए हैं। राम, रावण, शनि, कश्यप ऋषि आदि इनके भक्त हुए है। शिव सभी को समान दृष्टि से देखते है इसलिये उन्हें महादेव कहा जाता है। . हिमालय पर्वत की अवस्थिति का एक सरलीकृत निरूपण हिमालय एक पर्वत तन्त्र है जो भारतीय उपमहाद्वीप को मध्य एशिया और तिब्बत से अलग करता है। यह पर्वत तन्त्र मुख्य रूप से तीन समानांतर श्रेणियों- महान हिमालय, मध्य हिमालय और शिवालिक से मिलकर बना है जो पश्चिम से पूर्व की ओर एक चाप की आकृति में लगभग 2400 कि॰मी॰ की लम्बाई में फैली हैं। इस चाप का उभार दक्षिण की ओर अर्थात उत्तरी भारत के मैदान की ओर है और केन्द्र तिब्बत के पठार की ओर। इन तीन मुख्य श्रेणियों के आलावा चौथी और सबसे उत्तरी श्रेणी को परा हिमालय या ट्रांस हिमालय कहा जाता है जिसमें कराकोरम तथा कैलाश श्रेणियाँ शामिल है। हिमालय पर्वत पाँच देशों की सीमाओं में फैला हैं। ये देश हैं- पाकिस्तान, भारत, नेपाल, भूटान और चीन। अन्तरिक्ष से लिया गया हिमालय का चित्र संसार की अधिकांश ऊँची पर्वत चोटियाँ हिमालय में ही स्थित हैं। विश्व के 100 सर्वोच्च शिखरों में हिमालय की अनेक चोटियाँ हैं। विश्व का सर्वोच्च शिखर माउंट एवरेस्ट हिमालय का ही एक शिखर है। हिमालय में 100 से ज्यादा पर्वत शिखर हैं जो 7200 मीटर से ऊँचे हैं। हिमालय के कुछ प्रमुख शिखरों में सबसे महत्वपूर्ण सागरमाथा हिमाल, अन्नपूर्णा, गणेय, लांगतंग, मानसलू, रॊलवालिंग, जुगल, गौरीशंकर, कुंभू, धौलागिरी और कंचनजंघा है। हिमालय श्रेणी में 15 हजार से ज्यादा हिमनद हैं जो 12 हजार वर्ग किलॊमीटर में फैले हुए हैं। 72 किलोमीटर लंबा सियाचिन हिमनद विश्व का दूसरा सबसे लंबा हिमनद है। हिमालय की कुछ प्रमुख नदियों में शामिल हैं - सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र और यांगतेज। भूनिर्माण के सिद्धांतों के अनुसार यह भारत-आस्ट्र प्लेटों के एशियाई प्लेट में टकराने से बना है। हिमालय के निर्माण में प्रथम उत्थान 650 लाख वर्ष पूर्व हुआ था और मध्य हिमालय का उत्थान 450 लाख वर्ष पूर्व हिमालय में कुछ महत्त्वपूर्ण धार्मिक स्थल भी है। इनमें हरिद्वार, बद्रीनाथ, केदारनाथ, गोमुख, देव प्रयाग, ऋषिकेश, कैलाश, मानसरोवर तथा अमरनाथ प्रमुख हैं। भारतीय ग्रंथ गीता में भी इसका उल्लेख मिलता है (गीताः10.25)। . जम्मू 171 संबंध है और पार्वती 14 है। वे आम 2 में है, समानता सूचकांक 1.08% है = 2 / (171 + 14)। यह लेख जम्मू और पार्वती के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। जम्मू , भारत के उत्तरतम राज्य जम्मू एवं कश्मीर में तीन में से एक प्रशासनिक खण्ड है। यह क्षेत्र अपने आप में एक राज्य नहीं वरन जम्मू एवं कश्मीर राज्य का एक भाग है। क्षेत्र के प्रमुख जिलों में डोडा, कठुआ, उधमपुर, राजौरी, रामबन, रियासी, सांबा, किश्तवार एवं पुंछ आते हैं। क्षेत्र की अधिकांश भूमि पहाड़ी या पथरीली है। इसमें ही पीर पंजाल रेंज भी आता है जो कश्मीर घाटी को वृहत हिमालय से पूर्वी जिलों डोडा और किश्तवार में पृथक करता है। यहाम की प्रधान नदी चेनाब है। जम्मू शहर, जिसे आधिकारिक रूप से जम्मू-तवी भी कहते हैं, इस प्रभाग का सबसे बड़ा नगर है और जम्मू एवं कश्मीर राज्य की शीतकालीन राजधानी भी है। नगर के बीच से तवी नदी निकलती है, जिसके कारण इस नगर को यह आधिकारिक नाम मिला है। जम्मू नगर को "मन्दिरों का शहर" भी कहा जाता है, क्योंकि यहां ढेरों मन्दिर एवं तीर्थ हैं जिनके चमकते शिखर एवं दमकते कलश नगर की क्षितिजरेखा पर सुवर्ण बिन्दुओं जैसे दिखाई देते हैं और एक पवित्र एवं शांतिपूर्ण हिन्दू नगर का वातावरण प्रस्तुत करते हैं। यहां कुछ प्रसिद्ध हिन्दू तीर्थ भी हैं, जैसे वैष्णो देवी, आदि जिनके कारण जम्मू हिन्दू तीर्थ नगरों में गिना जाता है। यहाम की अधिकांश जनसंख्या हिन्दू ही है। हालांकि दूसरे स्थान पर यहां सिख धर्म ही आता है। वृहत अवसंरचना के कारण जम्मू इस राज्य का प्रमुख आर्थिक केन्द्र बनकर उभरा है। . पार्वती हिमनरेश हिमावन तथा मैनावती की पुत्री हैं, तथा भगवान शंकर की पत्नी हैं। उमा, गौरी भी पार्वती के ही नाम हैं। यह प्रकृति स्वरूपा हैं। पार्वती के जन्म का समाचार सुनकर देवर्षि नारद हिमनरेश के घर आये थे। हिमनरेश के पूछने पर देवर्षि नारद ने पार्वती के विषय में यह बताया कि तुम्हारी कन्या सभी सुलक्षणों से सम्पन्न है तथा इसका विवाह भगवान शंकर से होगा। किन्तु महादेव जी को पति के रूप में प्राप्त करने के लिये तुम्हारी पुत्री को घोर तपस्या करना होगा। बाद में इनके दो पुत्र कार्तिकेय तथा गणेश हुए। कई पुराणों में इनकी पुत्री अशोक सुंदरी का भी वर्णन है। . जम्मू और पार्वती आम में दो बातें हैं : शिव, हिमालय। शिव या महादेव हिंदू धर्म में सबसे महत्वपूर्ण देवताओं में से एक है। वह त्रिदेवों में एक देव हैं। इन्हें देवों के देव भी कहते हैं। इन्हें भोलेनाथ, शंकर, महेश, रुद्र, नीलकंठ,गंगाधार के नाम से भी जाना जाता है। तंत्र साधना में इन्हे भैरव के नाम से भी जाना जाता है। हिन्दू धर्म के प्रमुख देवताओं में से हैं। वेद में इनका नाम रुद्र है। यह व्यक्ति की चेतना के अन्तर्यामी हैं। इनकी अर्धांगिनी का नाम पार्वती है। इनके पुत्र कार्तिकेय और गणेश हैं, तथा पुत्री अशोक सुंदरी हैं। शिव अधिक्तर चित्रों में योगी के रूप में देखे जाते हैं और उनकी पूजा शिवलिंग तथा मूर्ति दोनों रूपों में की जाती है। शिव के गले में नाग देवता विराजित हैं और हाथों में डमरू और त्रिशूल लिए हुए हैं। कैलाश में उनका वास है। यह शैव मत के आधार है। इस मत में शिव के साथ शक्ति सर्व रूप में पूजित है। भगवान शिव को संहार का देवता कहा जाता है। भगवान शिव सौम्य आकृति एवं रौद्ररूप दोनों के लिए विख्यात हैं। अन्य देवों से शिव को भिन्न माना गया है। सृष्टि की उत्पत्ति, स्थिति एवं संहार के अधिपति शिव हैं। त्रिदेवों में भगवान शिव संहार के देवता माने गए हैं। शिव अनादि तथा सृष्टि प्रक्रिया के आदिस्रोत हैं और यह काल महाकाल ही ज्योतिषशास्त्र के आधार हैं। शिव का अर्थ यद्यपि कल्याणकारी माना गया है, लेकिन वे हमेशा लय एवं प्रलय दोनों को अपने अधीन किए हुए हैं। राम, रावण, शनि, कश्यप ऋषि आदि इनके भक्त हुए है। शिव सभी को समान दृष्टि से देखते है इसलिये उन्हें महादेव कहा जाता है। . हिमालय पर्वत की अवस्थिति का एक सरलीकृत निरूपण हिमालय एक पर्वत तन्त्र है जो भारतीय उपमहाद्वीप को मध्य एशिया और तिब्बत से अलग करता है। यह पर्वत तन्त्र मुख्य रूप से तीन समानांतर श्रेणियों- महान हिमालय, मध्य हिमालय और शिवालिक से मिलकर बना है जो पश्चिम से पूर्व की ओर एक चाप की आकृति में लगभग दो हज़ार चार सौ कि॰मी॰ की लम्बाई में फैली हैं। इस चाप का उभार दक्षिण की ओर अर्थात उत्तरी भारत के मैदान की ओर है और केन्द्र तिब्बत के पठार की ओर। इन तीन मुख्य श्रेणियों के आलावा चौथी और सबसे उत्तरी श्रेणी को परा हिमालय या ट्रांस हिमालय कहा जाता है जिसमें कराकोरम तथा कैलाश श्रेणियाँ शामिल है। हिमालय पर्वत पाँच देशों की सीमाओं में फैला हैं। ये देश हैं- पाकिस्तान, भारत, नेपाल, भूटान और चीन। अन्तरिक्ष से लिया गया हिमालय का चित्र संसार की अधिकांश ऊँची पर्वत चोटियाँ हिमालय में ही स्थित हैं। विश्व के एक सौ सर्वोच्च शिखरों में हिमालय की अनेक चोटियाँ हैं। विश्व का सर्वोच्च शिखर माउंट एवरेस्ट हिमालय का ही एक शिखर है। हिमालय में एक सौ से ज्यादा पर्वत शिखर हैं जो सात हज़ार दो सौ मीटर से ऊँचे हैं। हिमालय के कुछ प्रमुख शिखरों में सबसे महत्वपूर्ण सागरमाथा हिमाल, अन्नपूर्णा, गणेय, लांगतंग, मानसलू, रॊलवालिंग, जुगल, गौरीशंकर, कुंभू, धौलागिरी और कंचनजंघा है। हिमालय श्रेणी में पंद्रह हजार से ज्यादा हिमनद हैं जो बारह हजार वर्ग किलॊमीटर में फैले हुए हैं। बहत्तर किलोग्राममीटर लंबा सियाचिन हिमनद विश्व का दूसरा सबसे लंबा हिमनद है। हिमालय की कुछ प्रमुख नदियों में शामिल हैं - सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र और यांगतेज। भूनिर्माण के सिद्धांतों के अनुसार यह भारत-आस्ट्र प्लेटों के एशियाई प्लेट में टकराने से बना है। हिमालय के निर्माण में प्रथम उत्थान छः सौ पचास लाख वर्ष पूर्व हुआ था और मध्य हिमालय का उत्थान चार सौ पचास लाख वर्ष पूर्व हिमालय में कुछ महत्त्वपूर्ण धार्मिक स्थल भी है। इनमें हरिद्वार, बद्रीनाथ, केदारनाथ, गोमुख, देव प्रयाग, ऋषिकेश, कैलाश, मानसरोवर तथा अमरनाथ प्रमुख हैं। भारतीय ग्रंथ गीता में भी इसका उल्लेख मिलता है । . जम्मू एक सौ इकहत्तर संबंध है और पार्वती चौदह है। वे आम दो में है, समानता सूचकांक एक.आठ% है = दो / । यह लेख जम्मू और पार्वती के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
यमुनानगर - मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बुधवार को प्रदेश में बिजली बिल सरचार्ज माफ ी योजना दोबारा आरंभ करने की घोषणा की। इस योजना के तहत ऐसे उपभोक्ता जिनके बिजली बिल बकाया हैं और वे किसी कारण पहले इस योजना का लाभ नहीं उठा पाए उन्हें राज्य सरकार द्वारा एक और अवसर प्रदान किया जा रहा है ताकि वे बिना सरचार्ज के अपने बकाया बिजली बिल एकमुश्त या छह आसान किश्तों में जमा करवा सकें। सरचार्ज माफी योजना-2017 तुरंत प्रभाव से लागू कर दी गई है तथा यह 31 मई तक प्रभावी रहेगी। यह योजना ग्रामीण क्षेत्र में दो किलोवाट लोड तक के घरेलू व गैर घरेलू उपभोक्ताओं और शहरी क्षेत्र के दो किलोवाट लोड तक के घरेलू उपभोक्ता जिनका कनेक्शन कटा हुआ है, पर लागू होगी। वर्ष 2016 में भी राज्य सरकार द्वारा बिजली उपभोक्ताओं को मुख्यधारा में लाने हेतु बिजली बिल सरचार्ज माफी योजना लागू की गई थी, जिसके उत्साहजनक परिणाम रहे थे। इस योजना के तहत जो उपभोक्ता बिजली के बिल की मूल राशि एकमुश्त अथवा किश्तों में अदा करेंगे, उन की सरचार्ज राशि फ्रीज कर दी जाएगी।
यमुनानगर - मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बुधवार को प्रदेश में बिजली बिल सरचार्ज माफ ी योजना दोबारा आरंभ करने की घोषणा की। इस योजना के तहत ऐसे उपभोक्ता जिनके बिजली बिल बकाया हैं और वे किसी कारण पहले इस योजना का लाभ नहीं उठा पाए उन्हें राज्य सरकार द्वारा एक और अवसर प्रदान किया जा रहा है ताकि वे बिना सरचार्ज के अपने बकाया बिजली बिल एकमुश्त या छह आसान किश्तों में जमा करवा सकें। सरचार्ज माफी योजना-दो हज़ार सत्रह तुरंत प्रभाव से लागू कर दी गई है तथा यह इकतीस मई तक प्रभावी रहेगी। यह योजना ग्रामीण क्षेत्र में दो किलोवाट लोड तक के घरेलू व गैर घरेलू उपभोक्ताओं और शहरी क्षेत्र के दो किलोवाट लोड तक के घरेलू उपभोक्ता जिनका कनेक्शन कटा हुआ है, पर लागू होगी। वर्ष दो हज़ार सोलह में भी राज्य सरकार द्वारा बिजली उपभोक्ताओं को मुख्यधारा में लाने हेतु बिजली बिल सरचार्ज माफी योजना लागू की गई थी, जिसके उत्साहजनक परिणाम रहे थे। इस योजना के तहत जो उपभोक्ता बिजली के बिल की मूल राशि एकमुश्त अथवा किश्तों में अदा करेंगे, उन की सरचार्ज राशि फ्रीज कर दी जाएगी।
बठिंडा (निस) : बठिंडा की मौड़ विधानसभा सीट से शिरोमणि अकाली दल-बसपा गठबंधन के प्रत्याशी व पूर्व लोकसभा सदस्य जगमीत सिंह बराड़ ने कहाकि किसान, मजदूर, कर्मचारी, व्यापारी, छात्रों सहित सभी वर्ग कैप्टन सरकार से दुखी हैं तथा सभी वर्ग मिलकर कैप्टन सरकार का तख्ता पलटेंगे। वे आज बठिंडा सीट से गठबंधन प्रत्याशी सरुप सिंगला के निवास पर आयोजित बैठक में आए थे। जगमीत बराड़ ने कहा कि कैप्टन सरकार व मनप्रीत बादल ने जनता से किया कोई वादा पूरा नहीं किया। इसी कारण पंजाब में विकास कार्यों को विराम लग गया है। इन नेताओं ने कहा कि प्रकाश सिंह बादल, सुखबीर बादल व हरसिमरत कौर बादल का बसपा के साथ गठबंधन का फैसला सही व समय की मांग अनुसार है। दूरदृष्टा, जनचेतना के अग्रदूत, वैचारिक स्वतंत्रता के पुरोधा एवं समाजसेवी सरदार दयालसिंह मजीठिया ने 2 फरवरी, 1881 को लाहौर (अब पाकिस्तान) से 'द ट्रिब्यून' का प्रकाशन शुरू किया। विभाजन के बाद लाहौर से शिमला व अंबाला होते हुए यह समाचार पत्र अब चंडीगढ़ से प्रकाशित हो रहा है। 'द ट्रिब्यून' के सहयोगी प्रकाशनों के रूप में 15 अगस्त, 1978 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दैनिक ट्रिब्यून व पंजाबी ट्रिब्यून की शुरुआत हुई। द ट्रिब्यून प्रकाशन समूह का संचालन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है। हमें दूरदर्शी ट्रस्टियों डॉ. तुलसीदास (प्रेसीडेंट), न्यायमूर्ति डी. के. महाजन, लेफ्टिनेंट जनरल पी. एस. ज्ञानी, एच. आर. भाटिया, डॉ. एम. एस. रंधावा तथा तत्कालीन प्रधान संपादक प्रेम भाटिया का भावपूर्ण स्मरण करना जरूरी लगता है, जिनके प्रयासों से दैनिक ट्रिब्यून अस्तित्व में आया।
बठिंडा : बठिंडा की मौड़ विधानसभा सीट से शिरोमणि अकाली दल-बसपा गठबंधन के प्रत्याशी व पूर्व लोकसभा सदस्य जगमीत सिंह बराड़ ने कहाकि किसान, मजदूर, कर्मचारी, व्यापारी, छात्रों सहित सभी वर्ग कैप्टन सरकार से दुखी हैं तथा सभी वर्ग मिलकर कैप्टन सरकार का तख्ता पलटेंगे। वे आज बठिंडा सीट से गठबंधन प्रत्याशी सरुप सिंगला के निवास पर आयोजित बैठक में आए थे। जगमीत बराड़ ने कहा कि कैप्टन सरकार व मनप्रीत बादल ने जनता से किया कोई वादा पूरा नहीं किया। इसी कारण पंजाब में विकास कार्यों को विराम लग गया है। इन नेताओं ने कहा कि प्रकाश सिंह बादल, सुखबीर बादल व हरसिमरत कौर बादल का बसपा के साथ गठबंधन का फैसला सही व समय की मांग अनुसार है। दूरदृष्टा, जनचेतना के अग्रदूत, वैचारिक स्वतंत्रता के पुरोधा एवं समाजसेवी सरदार दयालसिंह मजीठिया ने दो फरवरी, एक हज़ार आठ सौ इक्यासी को लाहौर से 'द ट्रिब्यून' का प्रकाशन शुरू किया। विभाजन के बाद लाहौर से शिमला व अंबाला होते हुए यह समाचार पत्र अब चंडीगढ़ से प्रकाशित हो रहा है। 'द ट्रिब्यून' के सहयोगी प्रकाशनों के रूप में पंद्रह अगस्त, एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दैनिक ट्रिब्यून व पंजाबी ट्रिब्यून की शुरुआत हुई। द ट्रिब्यून प्रकाशन समूह का संचालन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है। हमें दूरदर्शी ट्रस्टियों डॉ. तुलसीदास , न्यायमूर्ति डी. के. महाजन, लेफ्टिनेंट जनरल पी. एस. ज्ञानी, एच. आर. भाटिया, डॉ. एम. एस. रंधावा तथा तत्कालीन प्रधान संपादक प्रेम भाटिया का भावपूर्ण स्मरण करना जरूरी लगता है, जिनके प्रयासों से दैनिक ट्रिब्यून अस्तित्व में आया।
Ranchi : रांची नगर निगम के सभागार कक्ष में शुक्रवार को 27 फरवरी से 1 मार्च तक चलने वाले पल्स पोलियो कार्यक्रम के तहत अर्बन टास्क फोर्स पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. इसकी अध्यक्षता रांची नगर निगम के सहायक लोक स्वास्थ्य पदाधिकारी ने की. कार्यशाला में डब्ल्यूएचओ के प्रतिनिधि द्वारा बताया गया कि 27 फरवरी को स्वास्थ्य विभाग भारत सरकार द्वारा नेशनल इम्यूनाइजेशन डे (NDI) / पल्स पोलियो दिवस 2022 के रूप में मनाया जाएगा. इस दिवस को बूथ लेवल तथा 28 फरवरी एवं 1 मार्च को डोर टू डोर एक्टिविटीज चलाते हुए शहर के 0 से 5 वर्ष तक के सभी बच्चों को पोलियो की खुराक दी जायेगी. जो बच्चे पोलियो खुराक से वंचित रह जायेंगे उन्हें 2 मार्च को पोलियो की खुराक दी जायेगी. इस मौके पर सहायक लोक स्वास्थ्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ किरण कुमारी, डॉ आनंद शेखर झा, नगर प्रबंधक आफताब आलम, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी सदर, रांची सदर अस्पताल के अन्य कई पदाधिकारी और कर्मचारी, एनजीओ वर्ल्ड विजन के प्रतिनिधि तथा सभी जोनल सुपरवाइजर उपस्थित रहे.
Ranchi : रांची नगर निगम के सभागार कक्ष में शुक्रवार को सत्ताईस फरवरी से एक मार्च तक चलने वाले पल्स पोलियो कार्यक्रम के तहत अर्बन टास्क फोर्स पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. इसकी अध्यक्षता रांची नगर निगम के सहायक लोक स्वास्थ्य पदाधिकारी ने की. कार्यशाला में डब्ल्यूएचओ के प्रतिनिधि द्वारा बताया गया कि सत्ताईस फरवरी को स्वास्थ्य विभाग भारत सरकार द्वारा नेशनल इम्यूनाइजेशन डे / पल्स पोलियो दिवस दो हज़ार बाईस के रूप में मनाया जाएगा. इस दिवस को बूथ लेवल तथा अट्ठाईस फरवरी एवं एक मार्च को डोर टू डोर एक्टिविटीज चलाते हुए शहर के शून्य से पाँच वर्ष तक के सभी बच्चों को पोलियो की खुराक दी जायेगी. जो बच्चे पोलियो खुराक से वंचित रह जायेंगे उन्हें दो मार्च को पोलियो की खुराक दी जायेगी. इस मौके पर सहायक लोक स्वास्थ्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ किरण कुमारी, डॉ आनंद शेखर झा, नगर प्रबंधक आफताब आलम, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी सदर, रांची सदर अस्पताल के अन्य कई पदाधिकारी और कर्मचारी, एनजीओ वर्ल्ड विजन के प्रतिनिधि तथा सभी जोनल सुपरवाइजर उपस्थित रहे.
बम्बई नगर में पुराना गुजराती दिगम्बर जैन मंदिर है । यहां पर माणिकचंद लाभचंद नामकी जैन पाठशाला बम्बई गुजराती दि० चालू की गईं थी। उस मंदिरके मुख्य प्रणन्धक नेमचंदने इसका विरोध किया जिसपर पचों में परस्पर झगड़ा हुआ। मामला अदालत तक पहुंचा । इसमें सेठजी को उलझकर कोशिस करनी पड़ी। इससे मंदिरका छः या ७ हजारका भंडार खर्च हो गया तथा जिन प्रतिपक्षियों के पास भंडार न था उनका जातीय रुपया खर्च हुआ। अंत में आपस में समाधानी हुई। कोर्टने कुछ नियम बनाके पांच टूष्टी नियत कर दिये जिनमें सेठ माणिकचंदजी मी एक हुए। जब सेठ पानाचंदजीका देहान्त हुआ तब आपके अंतिम विवाहसे अर्थात् रुक्मणीबाईसे तीन संतान सेठ पानाचंदजीकी सजीवित थीं, उनमेंसे लीलावतीका विवाह परोपकारी, विद्याप्रेमी व उद्योगी जौहरी ठाकुरदास भगवानदासके साथ हो गया जिनके संयोगसे वर्तमान में एक पुत्री है। सं. १९६९ में लीलावती १७ वर्षकी थी । इसी समय दूसरी कन्या रतनबाई जो सं० १९६९ में १५ वर्षकी थी व पढ़ने में बहुत ही चतुर थी, जिसने ६ वी श्रेणी तक चंदाराम गर्ल हाईस्कूल में इंग्रेजी शिक्षण प्राप्त किया था सो यकायक बहुत सख्त बीमार होकर सुरतमें जा ता. ३ मार्च १९१३ को इस संसारसे चल बसी । इसको शिक्षाका बहुत प्रेम था । मरनेके पहले उसने अपनी एक कन्याका इच्छासे ही १५००० ) का दान स्त्री शिक्षा१५००० ) का दान । के लिये किया और मातासे कह गई कि इस रकमसे दि० जैन समाज में स्त्री शिक्षा का प्रचार किया जाय। वास्तव में दानियोंकी संतान भी दानी होती है । इसके वियोगसे इसकी माता रुमणीबाईको तो शोक हुआ ही पर सेठजीको भी भारी दुःख हुआ क्योंकि ऐसी शिक्षित सुशील कन्यासे सेठजी भविष्यमे जैन जातिकी उन्नतिकी बहुत कुछ आशा रखते थे । स्त्रमणीबाईको अपनी तीसरी संतानपु-त्र ठाकुरभाईको देखकर संतोष हो जाता था । सं० १९६९ में यह १३ वर्षका था और नित्य स्कूल में पढ़ने जाता था। इसका चित्त सरल व कुछ धर्मपरायण है। सेठ पानाचंदकी कीर्तिको यह विस्तृत करेगा ऐसी भाशा रुक्मणीबाई व अन्य कुटुम्बी जनोंको है । पिताके समान आलस्य रहित श्रीमती मगनाईजीने इन्दौर छावनी में सेठ गेंदनलाल और भूरीबाई द्वारा निर्मापित नवीन जिन मंदिर बिम्ब प्रतिका उद्योग । प्ठोत्सव पर जाकर ८ दिन तक कई स्त्री समाएं करके मिथ्यात्वत्याग, शीलवत आदि पर व्याख्यान देकर सैकडों स्त्रियोंसे नियम कराए। श्रीमती पार्वतीबाई, गुलाबचाई, हंगामीबाई आदि पढ़ी हुई बहनोंके साथ ज्ञान चर्चा करके बहुत लाभ प्राप्त किया, फिर ता. २८-२-१३ को बम्बई लौट आई। हम ज्यों २ सेठजीके कृत्योंका विचार करते हैं त्यों २ सेठजीके निरालस्य और शिक्षाप्रेमी स्वभावसेठजीका विद्यार्थियोंसे की कोमलता देखकर आश्चर्य होता है । प्रेम और कोल्हापुर कोल्हापुर बोर्डिंग के विद्यार्थियों ने एक विद्यार्थी सम्मेलन स्थापित कर रक्खा था जिसका उत्सव ता० २१ अप्रैल १९१३ को बड़े समारोहसे करना विचार कर सांगली, हुबली, शोलापुर व वेळगांव बोर्डिंगोंके छात्रोंको व अन्य गांवोंकी करीब ४०० जैन मंडलीको एकत्रित किया । मि० ए० पी० चौगले, रा० रा० ले तथा विद्यार्थियोंके सच्चे पिता सेठ माणिकचंदजीको भी बुलाया था । ध्वजा पताकाओंसे सुशोभित करके एक मंडप बांधा गया था । सवेरे ही दर्शन पूजादि नित्य कर्मके पीछे सर्वका दूध चायसे सत्कार किया गया। फिर सर्व विद्यार्थियोंका फोटो लिया गया। सेठजीने अखाड़ेका द्वार खोला। कुस्तियोंकी कसरत के साथ पटा खेलना, दौड़ना, गेंद फेकना आदि खेल दिखलाए गए। हरएक खेलमें सर्वोत्तम तीनको इनाम दिये गए । १०।। बजे प्रोफेसर शिंदेका जादूका खेल हुआ। फिर सर्व मंडलीका विद्यार्थियोंने पक्वान्न मिठाई आदिसे खून भोजन सत्कार किया। फिर ४ बजे सभा प्रारंभ हुई। अजैन विद्वान् भी पधारे थे । सभापतिका आसन हमारे दानवीर सेठजीको प्रदान किया गया । गानके बाद श्रीयुत् हाल सेठीने रिपोर्ट सुनाई। उसके भीतर कहा कि द० म० जैन समाके स्थापनके पहले इस प्रांत में शिक्षा प्रचारका प्रयत्न रा० रा० चौगले, हंजे, लट्टे, आवटेने किया था। फिर सभा स्थापित
बम्बई नगर में पुराना गुजराती दिगम्बर जैन मंदिर है । यहां पर माणिकचंद लाभचंद नामकी जैन पाठशाला बम्बई गुजराती दिशून्य चालू की गईं थी। उस मंदिरके मुख्य प्रणन्धक नेमचंदने इसका विरोध किया जिसपर पचों में परस्पर झगड़ा हुआ। मामला अदालत तक पहुंचा । इसमें सेठजी को उलझकर कोशिस करनी पड़ी। इससे मंदिरका छः या सात हजारका भंडार खर्च हो गया तथा जिन प्रतिपक्षियों के पास भंडार न था उनका जातीय रुपया खर्च हुआ। अंत में आपस में समाधानी हुई। कोर्टने कुछ नियम बनाके पांच टूष्टी नियत कर दिये जिनमें सेठ माणिकचंदजी मी एक हुए। जब सेठ पानाचंदजीका देहान्त हुआ तब आपके अंतिम विवाहसे अर्थात् रुक्मणीबाईसे तीन संतान सेठ पानाचंदजीकी सजीवित थीं, उनमेंसे लीलावतीका विवाह परोपकारी, विद्याप्रेमी व उद्योगी जौहरी ठाकुरदास भगवानदासके साथ हो गया जिनके संयोगसे वर्तमान में एक पुत्री है। सं. एक हज़ार नौ सौ उनहत्तर में लीलावती सत्रह वर्षकी थी । इसी समय दूसरी कन्या रतनबाई जो संशून्य एक हज़ार नौ सौ उनहत्तर में पंद्रह वर्षकी थी व पढ़ने में बहुत ही चतुर थी, जिसने छः वी श्रेणी तक चंदाराम गर्ल हाईस्कूल में इंग्रेजी शिक्षण प्राप्त किया था सो यकायक बहुत सख्त बीमार होकर सुरतमें जा ता. तीन मार्च एक हज़ार नौ सौ तेरह को इस संसारसे चल बसी । इसको शिक्षाका बहुत प्रेम था । मरनेके पहले उसने अपनी एक कन्याका इच्छासे ही पंद्रह हज़ार ) का दान स्त्री शिक्षापंद्रह हज़ार ) का दान । के लिये किया और मातासे कह गई कि इस रकमसे दिशून्य जैन समाज में स्त्री शिक्षा का प्रचार किया जाय। वास्तव में दानियोंकी संतान भी दानी होती है । इसके वियोगसे इसकी माता रुमणीबाईको तो शोक हुआ ही पर सेठजीको भी भारी दुःख हुआ क्योंकि ऐसी शिक्षित सुशील कन्यासे सेठजी भविष्यमे जैन जातिकी उन्नतिकी बहुत कुछ आशा रखते थे । स्त्रमणीबाईको अपनी तीसरी संतानपु-त्र ठाकुरभाईको देखकर संतोष हो जाता था । संशून्य एक हज़ार नौ सौ उनहत्तर में यह तेरह वर्षका था और नित्य स्कूल में पढ़ने जाता था। इसका चित्त सरल व कुछ धर्मपरायण है। सेठ पानाचंदकी कीर्तिको यह विस्तृत करेगा ऐसी भाशा रुक्मणीबाई व अन्य कुटुम्बी जनोंको है । पिताके समान आलस्य रहित श्रीमती मगनाईजीने इन्दौर छावनी में सेठ गेंदनलाल और भूरीबाई द्वारा निर्मापित नवीन जिन मंदिर बिम्ब प्रतिका उद्योग । प्ठोत्सव पर जाकर आठ दिन तक कई स्त्री समाएं करके मिथ्यात्वत्याग, शीलवत आदि पर व्याख्यान देकर सैकडों स्त्रियोंसे नियम कराए। श्रीमती पार्वतीबाई, गुलाबचाई, हंगामीबाई आदि पढ़ी हुई बहनोंके साथ ज्ञान चर्चा करके बहुत लाभ प्राप्त किया, फिर ता. अट्ठाईस फ़रवरी तेरह को बम्बई लौट आई। हम ज्यों दो सेठजीके कृत्योंका विचार करते हैं त्यों दो सेठजीके निरालस्य और शिक्षाप्रेमी स्वभावसेठजीका विद्यार्थियोंसे की कोमलता देखकर आश्चर्य होता है । प्रेम और कोल्हापुर कोल्हापुर बोर्डिंग के विद्यार्थियों ने एक विद्यार्थी सम्मेलन स्थापित कर रक्खा था जिसका उत्सव ताशून्य इक्कीस अप्रैल एक हज़ार नौ सौ तेरह को बड़े समारोहसे करना विचार कर सांगली, हुबली, शोलापुर व वेळगांव बोर्डिंगोंके छात्रोंको व अन्य गांवोंकी करीब चार सौ जैन मंडलीको एकत्रित किया । मिशून्य एशून्य पीशून्य चौगले, राशून्य राशून्य ले तथा विद्यार्थियोंके सच्चे पिता सेठ माणिकचंदजीको भी बुलाया था । ध्वजा पताकाओंसे सुशोभित करके एक मंडप बांधा गया था । सवेरे ही दर्शन पूजादि नित्य कर्मके पीछे सर्वका दूध चायसे सत्कार किया गया। फिर सर्व विद्यार्थियोंका फोटो लिया गया। सेठजीने अखाड़ेका द्वार खोला। कुस्तियोंकी कसरत के साथ पटा खेलना, दौड़ना, गेंद फेकना आदि खेल दिखलाए गए। हरएक खेलमें सर्वोत्तम तीनको इनाम दिये गए । दस।। बजे प्रोफेसर शिंदेका जादूका खेल हुआ। फिर सर्व मंडलीका विद्यार्थियोंने पक्वान्न मिठाई आदिसे खून भोजन सत्कार किया। फिर चार बजे सभा प्रारंभ हुई। अजैन विद्वान् भी पधारे थे । सभापतिका आसन हमारे दानवीर सेठजीको प्रदान किया गया । गानके बाद श्रीयुत् हाल सेठीने रिपोर्ट सुनाई। उसके भीतर कहा कि दशून्य मशून्य जैन समाके स्थापनके पहले इस प्रांत में शिक्षा प्रचारका प्रयत्न राशून्य राशून्य चौगले, हंजे, लट्टे, आवटेने किया था। फिर सभा स्थापित
Don't Miss! सुपरस्टार ऋतिक रोशन की फिल्म सुपर 30 लगातार कमाल कर रही है तो उनको राज्य सरकारों का भी सहयोग काफी मिल रहा है। हाल ही में खबर आई थी कि फिल्म को बिहार सरकार ने राज्य में टैक्स फ्री कर दिया है। अब इसी नक्शेकदम पर चलते हुए यूपी और राजस्थान सरकार ने भी फिल्म को राज्य में टैक्स फ्री कर दिया है। ऋतिक रोशन की ये फिल्म काफी धमाकेदार कमाई कर रही है और लोग उनको काफी पसंद कर रहे हैं। गौरतलब है कि ऋतिक रोशन फिल्म "सुपर 30" में एक शिक्षक आंनद कुमार की भूमिका निभा रहे है। फ़िल्म में वे एक गणितज्ञ के किरदार में नज़र आएंगे, जो 30 छात्रों को आईआईटी-जेईई की प्रतियोगी परीक्षा के लिए तैयार करते है। फिल्म में ऋतिक के साथ मृणाल ठाकुर और ऋतिक के विपक्षी के रूप में पंकज त्रिपाठी भी नज़र आएंगे। ये एक सच्ची कहानी है लेकिन ये आनंद कुमार की बायोपिक नहीं है। ऋतिक रोशन इस समय फिल्म वार को लेकर भी चर्चा में हैं और इसके टीजर ने तो लोगों को हिलाकर रख दिया है। इस फिल्म में उनके साथ टाइगर श्रॉफ नजर आएंगे और आपको दोनो की दमदार भिड़ंत देखने को मिलने वाली है।
Don't Miss! सुपरस्टार ऋतिक रोशन की फिल्म सुपर तीस लगातार कमाल कर रही है तो उनको राज्य सरकारों का भी सहयोग काफी मिल रहा है। हाल ही में खबर आई थी कि फिल्म को बिहार सरकार ने राज्य में टैक्स फ्री कर दिया है। अब इसी नक्शेकदम पर चलते हुए यूपी और राजस्थान सरकार ने भी फिल्म को राज्य में टैक्स फ्री कर दिया है। ऋतिक रोशन की ये फिल्म काफी धमाकेदार कमाई कर रही है और लोग उनको काफी पसंद कर रहे हैं। गौरतलब है कि ऋतिक रोशन फिल्म "सुपर तीस" में एक शिक्षक आंनद कुमार की भूमिका निभा रहे है। फ़िल्म में वे एक गणितज्ञ के किरदार में नज़र आएंगे, जो तीस छात्रों को आईआईटी-जेईई की प्रतियोगी परीक्षा के लिए तैयार करते है। फिल्म में ऋतिक के साथ मृणाल ठाकुर और ऋतिक के विपक्षी के रूप में पंकज त्रिपाठी भी नज़र आएंगे। ये एक सच्ची कहानी है लेकिन ये आनंद कुमार की बायोपिक नहीं है। ऋतिक रोशन इस समय फिल्म वार को लेकर भी चर्चा में हैं और इसके टीजर ने तो लोगों को हिलाकर रख दिया है। इस फिल्म में उनके साथ टाइगर श्रॉफ नजर आएंगे और आपको दोनो की दमदार भिड़ंत देखने को मिलने वाली है।
चर्चा में क्यों? वित्त मंत्री द्वारा नए भारत के लिये प्रस्तुत बजट से देश में परिवर्तन के वाहक के रूप में नीति आयोग की भूमिका मज़बूत हुई है। योजना मंत्रालय, जो नीति आयोग का एक हिस्सा है, के लिये वर्ष 2017-18 के 279.79 करोड़ रुपए की आवंटन राशि को 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ाकर वर्ष 2018-19 के लिये 339.65 करोड़ रुपए कर दिया गया है। इस बजट में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और कृषि नीति जैसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों के लिये नीति आयोग की भूमिका परिभाषित की गई है। - इसके अलावा नीति आयोग के तीन वर्षीय कार्य एजेंडा, सात वर्षीय कार्यनीति और 15 वर्षीय दृष्टि-पत्र के अनुरुप राष्ट्रीय विकास में साझा दृष्टिकोण को भी दोहराया गया है। - नीति आयोग केंद्र और राज्य सरकारों के परामर्श से एक विश्वसनीय व्यवस्था करेगा ताकि किसानों को उनके उत्पाद के लिये उचित मूल्य मिल सके। - नीति आयोग राज्य सरकारों के परामर्श से एक उपयुक्त व्यवस्था ईज़ाद करेगा ताकि पट्टेदारों को ऋण भी मिले और भू-स्वामियों के अधिकार भी सुरक्षित रहें। - नीति आयोग कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इसके अनुसंधान और अनुप्रयोग के क्षेत्र में सरकार के प्रयासों को दिशा देने के लिये एक राष्ट्रीय कार्यक्रम शुरू करेगा। - ऊपर उल्लिखित के अलावा, दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना 'आयुष्मान भारत' की आयोजना में नीति आयोग के अधिकारियों, सलाहकारों और नीति निर्माण की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। - 1 जनवरी, 2015 को थिंक टैंक के रूप में अस्तित्व में आए नीति आयोग का मुख्य कार्य न्यू इंडिया के निर्माण का विज़न एवं रणनीतिक मसौदा बनाना तथा कार्ययोजनाएँ तैयार करना है। - केंद्र सरकार की नीति निर्धारण संस्था के रूप में नीति आयोग देशभर से सुझाव आमंत्रित करके जन-भागीदारी एवं राज्य सरकारों की भागीदारी से नीतियाँ बनाने का काम करता है। - 15 अगस्त, 2014 को प्रधानमंत्री ने योजना आयोग को भंग करने की घोषणा की थी। उसके बाद जब योजना आयोग भंग हुआ तो उसके साथ ही पंचवर्षीय योजना का युग भी समाप्त हो गया। - नीति आयोग की स्थापना के बाद योजनांतर्गत व्यय और गैर-योजनांतर्गत व्यय का अंतर समाप्त हो चुका है। अब केंद्र सरकार से राज्य सरकारों को धनराशि का हस्तांतरण केवल केंद्रीय वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर होता है। नीति आयोग ने अपने गठन के प्रारंभ से ही भारत के नीतिगत मामलों में एक अहम भूमिका निभाई है। उदाहरण के तौर पर, - भारतीय कृषि के पुनरुत्थान और किसानों की आय दोगुनी करने हेतु रूपरेखा तैयार करना। - अनुसूचित जाति/जनजाति के लिये निश्चित निधि के अंतरण हेतु नए दिशा-निर्देश तैयार करना। - राष्ट्रीय ऊर्जा नीति का कार्यान्वयन करना। - राष्ट्रीय पोषण कार्यनीति का कार्यान्वयन करना। - राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद विधेयक। - राष्ट्रीय चिकित्सा कार्यनीति का कार्यान्वयन करना। - केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों के कार्यनीतिक विनिवेश संबंधी सिफारिशें करना। - आदर्श भूमि पट्टाकरण विधेयक का निर्माण करना। - पूर्वोत्तर औद्योगिक विकास स्कीम (एनईआईडीएस), 2017 के माध्यम से पूर्वोत्तर को विकास सहायता उपलब्ध कराना। - रोज़गार कार्यदल का गठन करना। - 12वीं पंचवर्षीय योजना का मूल्यांकन करना। - साझा और संयोजित गतिशीलता के लिये नीति तैयार करना। - द्वीपों का समग्र विकास करना। नीति आयोग द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों और स्कीमों के माध्यम से कार्य-स्थल (ऑन-ग्राउंड) पर प्रत्यक्ष नीतिगत हस्तक्षेप भी किया जाता है। उदाहरण के तौर पर, 1. अटल नवप्रवर्तन मिशन (Atal Innovation Mission) - अटल नवप्रवर्तन मिशन नीति आयोग का एक अत्यंत लोकप्रिय कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य देशभर के विद्यालयों में अटल टिंकरिंग प्रयोगशालाओं और अटल इनक्यूबेशन केंद्रों के माध्यम से नवप्रवर्तन को बढ़ावा देना है। - अटल महाचुनौती तथा टिंकरिंग मैराथन के आयोजनों से देशभर के युवा उद्यमियों को सीखने, कुछ नया ईज़ाद करने और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी से जुड़ने के लिये प्रोत्साहन मिला है। - अभी तक 2441 अटल टिंकरिंग प्रयोगशाला विद्यालयों का चयन किया जा चुका है। - प्रत्येक अटल टिंकरिंग प्रयोगशाला की स्थापना लागत के तौर पर 10 लाख रुपए की एकमुश्त राशि और अधिकतम 5 वर्षों के लिये 10 लाख रुपए के प्रचालन व्यय सहित अनुदान सहायता प्रदान की जा रही है। - वर्तमान में देश के सभी राज्यों में अटल टिंकरिंग प्रयोगशालाएँ मौजूद हैं। इन्क्यूबेशन केंद्र (Incubation Centres) - वर्ष 2016-17 में 6 इन्क्यूबेशन केंद्रों (ईआईसी) को सहायता दी गई, जबकि वर्ष 2017-18 के दौरान लगभग 8-10 ईआईसी अनुमोदनाधीन हैं। - ईआईसी के प्रचालन में तेज़ी लाने के लिये 10 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता किश्तों में दी जानी है। - वर्ष 2016-17 में 13 अटल इन्क्यूबेशन केंद्रों का चयन किया गया, जबकि वर्ष 2017-18 के दौरान लगभग 20-25 अटल इन्क्यूबेशन केंद्र विचारार्थ हैं। - इन केंद्रों की स्थापना हेतु अधिकतम 5 वर्षों के लिये 10 करोड़ रुपए तक की वित्तीय सहायता प्रदान करने की व्यवस्था की गई है। 2. सहयोगपूर्ण संघवाद (Cooperative Federalism) - केंद्र प्रायोजित योजनाओं का पुनर्गठन करना। - कौशल विकास को प्रोत्साहन देना। - स्वच्छ भारत को प्रोत्साहन देना। - डिजिटल भुगतानों को बढ़ावा देना। - आकांक्षी ज़िलों में बदलाव के कार्यक्रम के लिये देशभर के 115 ज़िलों के ज़िलाधिकारियों तथा प्रभारी अधिकारियों का सहयोग लेना। - सचिव समूहों द्वारा नीति आयोग को अभ्यावेदन देकर विभिन्न मंत्रालयों के बीच चर्चा और सहयोग करना। 3. प्रतिस्पर्द्धी संघवाद (Competitive federalism) - राज्यों की रैंकिंग के लिये डिजिटल परिवर्तन सूचकांक तथा नवप्रवर्तन सूचकांक की शुरुआत करना। - स्वास्थ्य सूचकांक की शुरुआत करना, जो स्वास्थ्य परिणामों के मूल्यांकन के लिये वर्ष में एक बार देशभर में किया जाएगा। - सूचकांकों के संबंध में, राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों के लिये व्यापक कार्यशालाएँ आयोजित करना। - मानव पूंजी परिवर्तन हेतु संधारणीय कार्रवाई (Sustainable Action for Transforming Human Capital - SATH) के लिये स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्रों में मुख्य संकेतकों के विकास हेतु राज्यों का मार्गदर्शन करना। - विद्यालय शिक्षा गुणवत्ता सूचकांक (School Education Quality Index - SEQI) तथा समेकित जल प्रबंधन सूचकांक का निर्माण करना। 4. संधारणीय विकास लक्ष्य (Sustainable Development Goals) - एसडीजी के कार्यान्वयन पर नज़र रखने वाले नोडल निकाय के तौर पर नीति आयोग द्वारा राज्यों की प्रगति के आकलन हेतु केपीआई तैयार करना। - माप्य संकेतकों (measurable indicator) के साथ लक्ष्यों को मापने का मसौदा तैयार करना। - डीएमईओ (Development. Monitoring and Evaluation Office - DMEO) डैशबोर्ड और प्रगति सूचक के माध्यम से राज्यों के कार्य-निष्पादन का व्यापक डेटा-आधारित मूल्यांकन करना। - अनुवीक्षण के लिये मात्रात्मक और परिमेय संकेतक तथा संगत उत्पादनों एवं परिणामों को चिहि्नत करते हुए उनकी समीक्षा करना। इसके माध्यम से उत्पादन परिणाम फ्रेमवर्क में गुणात्मक सुधार लाने हेतु कड़ी कार्रवाई करना। - कार्य-निष्पादन की निगरानी के लिये कार्यनीतिक परिणाम सत्यापन प्रक्रिया (Strategic Outcomes Verification Process - SOVP) का निर्माण करना। - साथ ही कार्यक्रम का मूल्यांकन करना। इसके अंतर्गत अभी तक 12 कार्यक्रमों का मूल्यांकन किया गया है तथा निम्नलिखित से संबंधित मूल्यांकन रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया गया। ► प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम (Prime Minister Employment Generation Programme) ► राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम (National Scheduled Caste Finance Development Corporation) ► आरटीई (Right to Education Act - RTE) ► सुमेलित सर्व शिक्षा अभियान (Harmonized Sarv Siksha Abhiyaan) ► पीएमएवाई (शहरी) - विभिन्न राज्यों की सर्वश्रेष्ठ कार्य-पद्धतियों का संकलन, प्रेषण और अनुकरण करना। - समावेशः नीति आयोग तथा ज्ञान एवं अनुसंधान भागीदारों और संस्थाओं के बीच सहयोग को संभव बनाना। (SAMAVESH: enabling cooperation between NITI and knowledge, research partners and institutions) 6. राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय भागीदारियाँ (National and International Partnerships) - नीति आयोग व्याख्यान माला (NITI Lecture Series) : विद्वानों द्वारा "शासन" पर अब तक 3 व्याख्यान आयोजित किये जा चुके हैं। - नीति आयोग-डीआरसी वार्ताः सहयोग बढ़ाने के लिये नीति आयोग में चीन प्रकोष्ठ गठित किया गया। - वैश्विक उद्यमिता शिखर-सम्मेलन (Global Entrepreneurship Summit) 2017 : 2500 शीर्ष उद्यमियों, निवेशकों और इकोसिस्टम प्लेयर्स के साथ अमेरिका-भारत शिखर सम्मेलन का आयोजन। - चैम्पियंस ऑफ चेंज (Champions of Change) : 12 क्षेत्रकों में नीतिगत सुझावों के लिये स्टार्ट-अप्स और उद्योग के साथ माननीय प्रधानमंत्री के हितधारक विचार-विमर्श में सहयोग देना। 7. उन्नत प्रौद्योगिकियों का अंगीकरण (Adoption of Frontier Technologies) - नीति आयोग ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी, एआई और शासन में इसके प्रयोग संबंधी पोजीशन पेपर पर कार्य कर रहा है। - भूमि अभिलेखों, इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य अभिलेखों, आदि के संबंध में राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्रों के साथ भागीदारी पर कार्य कर रहा है। - नीति आयोग के लिये एमआईएस (management information system) डेटाबेस का कार्यान्वयन करना। - मध्यस्थता और प्रवर्तन संबंधी भारत सम्मेलन (India Conference) का आयोजन करना। - सरकार की सर्वश्रेष्ठ कार्य-पद्धतियों के संबंध में नीति आयोग के लिये डिजिटल हब (Digital Hub) तैयार करना। 8. मध्यस्थता का सुदृढ़ीकरण और विधिक सुधार (Strengthening Arbitration and Legal Reforms) - 'भारत में मध्यस्थता और प्रवर्तन का सुदृढ़ीकरण' विषय पर वैश्विक सम्मेलन का आयोजन करना। - भारत विधि आयोग के सहयोग से 'राष्ट्र के तीन स्कंधों की भूमिकाओं का संतुलन' (Balancing Roles of Three Wings of the State) विषय पर विधि दिवस सम्मेलन का आयोजन करना। स्पष्ट रूप से भारत सरकार के अग्रणी 'थिंक टैंक' के रूप में नीति आयोग आर्थिक क्षेत्र के राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व के मामलों, देश की और अन्य देशों की सर्वश्रेष्ठ कार्य-पद्धतियों के प्रचार-प्रसार, नए नीतिगत विचारों के समावेशन और विशिष्ट मामलों में सहायता प्रदान करते हुए देश का मार्ग प्रशस्त करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
चर्चा में क्यों? वित्त मंत्री द्वारा नए भारत के लिये प्रस्तुत बजट से देश में परिवर्तन के वाहक के रूप में नीति आयोग की भूमिका मज़बूत हुई है। योजना मंत्रालय, जो नीति आयोग का एक हिस्सा है, के लिये वर्ष दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह के दो सौ उन्यासी.उन्यासी करोड़ रुपए की आवंटन राशि को बीस प्रतिशत से अधिक बढ़ाकर वर्ष दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस के लिये तीन सौ उनतालीस.पैंसठ करोड़ रुपए कर दिया गया है। इस बजट में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और कृषि नीति जैसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों के लिये नीति आयोग की भूमिका परिभाषित की गई है। - इसके अलावा नीति आयोग के तीन वर्षीय कार्य एजेंडा, सात वर्षीय कार्यनीति और पंद्रह वर्षीय दृष्टि-पत्र के अनुरुप राष्ट्रीय विकास में साझा दृष्टिकोण को भी दोहराया गया है। - नीति आयोग केंद्र और राज्य सरकारों के परामर्श से एक विश्वसनीय व्यवस्था करेगा ताकि किसानों को उनके उत्पाद के लिये उचित मूल्य मिल सके। - नीति आयोग राज्य सरकारों के परामर्श से एक उपयुक्त व्यवस्था ईज़ाद करेगा ताकि पट्टेदारों को ऋण भी मिले और भू-स्वामियों के अधिकार भी सुरक्षित रहें। - नीति आयोग कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इसके अनुसंधान और अनुप्रयोग के क्षेत्र में सरकार के प्रयासों को दिशा देने के लिये एक राष्ट्रीय कार्यक्रम शुरू करेगा। - ऊपर उल्लिखित के अलावा, दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना 'आयुष्मान भारत' की आयोजना में नीति आयोग के अधिकारियों, सलाहकारों और नीति निर्माण की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। - एक जनवरी, दो हज़ार पंद्रह को थिंक टैंक के रूप में अस्तित्व में आए नीति आयोग का मुख्य कार्य न्यू इंडिया के निर्माण का विज़न एवं रणनीतिक मसौदा बनाना तथा कार्ययोजनाएँ तैयार करना है। - केंद्र सरकार की नीति निर्धारण संस्था के रूप में नीति आयोग देशभर से सुझाव आमंत्रित करके जन-भागीदारी एवं राज्य सरकारों की भागीदारी से नीतियाँ बनाने का काम करता है। - पंद्रह अगस्त, दो हज़ार चौदह को प्रधानमंत्री ने योजना आयोग को भंग करने की घोषणा की थी। उसके बाद जब योजना आयोग भंग हुआ तो उसके साथ ही पंचवर्षीय योजना का युग भी समाप्त हो गया। - नीति आयोग की स्थापना के बाद योजनांतर्गत व्यय और गैर-योजनांतर्गत व्यय का अंतर समाप्त हो चुका है। अब केंद्र सरकार से राज्य सरकारों को धनराशि का हस्तांतरण केवल केंद्रीय वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर होता है। नीति आयोग ने अपने गठन के प्रारंभ से ही भारत के नीतिगत मामलों में एक अहम भूमिका निभाई है। उदाहरण के तौर पर, - भारतीय कृषि के पुनरुत्थान और किसानों की आय दोगुनी करने हेतु रूपरेखा तैयार करना। - अनुसूचित जाति/जनजाति के लिये निश्चित निधि के अंतरण हेतु नए दिशा-निर्देश तैयार करना। - राष्ट्रीय ऊर्जा नीति का कार्यान्वयन करना। - राष्ट्रीय पोषण कार्यनीति का कार्यान्वयन करना। - राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद विधेयक। - राष्ट्रीय चिकित्सा कार्यनीति का कार्यान्वयन करना। - केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों के कार्यनीतिक विनिवेश संबंधी सिफारिशें करना। - आदर्श भूमि पट्टाकरण विधेयक का निर्माण करना। - पूर्वोत्तर औद्योगिक विकास स्कीम , दो हज़ार सत्रह के माध्यम से पूर्वोत्तर को विकास सहायता उपलब्ध कराना। - रोज़गार कार्यदल का गठन करना। - बारहवीं पंचवर्षीय योजना का मूल्यांकन करना। - साझा और संयोजित गतिशीलता के लिये नीति तैयार करना। - द्वीपों का समग्र विकास करना। नीति आयोग द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों और स्कीमों के माध्यम से कार्य-स्थल पर प्रत्यक्ष नीतिगत हस्तक्षेप भी किया जाता है। उदाहरण के तौर पर, एक. अटल नवप्रवर्तन मिशन - अटल नवप्रवर्तन मिशन नीति आयोग का एक अत्यंत लोकप्रिय कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य देशभर के विद्यालयों में अटल टिंकरिंग प्रयोगशालाओं और अटल इनक्यूबेशन केंद्रों के माध्यम से नवप्रवर्तन को बढ़ावा देना है। - अटल महाचुनौती तथा टिंकरिंग मैराथन के आयोजनों से देशभर के युवा उद्यमियों को सीखने, कुछ नया ईज़ाद करने और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी से जुड़ने के लिये प्रोत्साहन मिला है। - अभी तक दो हज़ार चार सौ इकतालीस अटल टिंकरिंग प्रयोगशाला विद्यालयों का चयन किया जा चुका है। - प्रत्येक अटल टिंकरिंग प्रयोगशाला की स्थापना लागत के तौर पर दस लाख रुपए की एकमुश्त राशि और अधिकतम पाँच वर्षों के लिये दस लाख रुपए के प्रचालन व्यय सहित अनुदान सहायता प्रदान की जा रही है। - वर्तमान में देश के सभी राज्यों में अटल टिंकरिंग प्रयोगशालाएँ मौजूद हैं। इन्क्यूबेशन केंद्र - वर्ष दो हज़ार सोलह-सत्रह में छः इन्क्यूबेशन केंद्रों को सहायता दी गई, जबकि वर्ष दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह के दौरान लगभग आठ-दस ईआईसी अनुमोदनाधीन हैं। - ईआईसी के प्रचालन में तेज़ी लाने के लिये दस करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता किश्तों में दी जानी है। - वर्ष दो हज़ार सोलह-सत्रह में तेरह अटल इन्क्यूबेशन केंद्रों का चयन किया गया, जबकि वर्ष दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह के दौरान लगभग बीस-पच्चीस अटल इन्क्यूबेशन केंद्र विचारार्थ हैं। - इन केंद्रों की स्थापना हेतु अधिकतम पाँच वर्षों के लिये दस करोड़ रुपए तक की वित्तीय सहायता प्रदान करने की व्यवस्था की गई है। दो. सहयोगपूर्ण संघवाद - केंद्र प्रायोजित योजनाओं का पुनर्गठन करना। - कौशल विकास को प्रोत्साहन देना। - स्वच्छ भारत को प्रोत्साहन देना। - डिजिटल भुगतानों को बढ़ावा देना। - आकांक्षी ज़िलों में बदलाव के कार्यक्रम के लिये देशभर के एक सौ पंद्रह ज़िलों के ज़िलाधिकारियों तथा प्रभारी अधिकारियों का सहयोग लेना। - सचिव समूहों द्वारा नीति आयोग को अभ्यावेदन देकर विभिन्न मंत्रालयों के बीच चर्चा और सहयोग करना। तीन. प्रतिस्पर्द्धी संघवाद - राज्यों की रैंकिंग के लिये डिजिटल परिवर्तन सूचकांक तथा नवप्रवर्तन सूचकांक की शुरुआत करना। - स्वास्थ्य सूचकांक की शुरुआत करना, जो स्वास्थ्य परिणामों के मूल्यांकन के लिये वर्ष में एक बार देशभर में किया जाएगा। - सूचकांकों के संबंध में, राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों के लिये व्यापक कार्यशालाएँ आयोजित करना। - मानव पूंजी परिवर्तन हेतु संधारणीय कार्रवाई के लिये स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्रों में मुख्य संकेतकों के विकास हेतु राज्यों का मार्गदर्शन करना। - विद्यालय शिक्षा गुणवत्ता सूचकांक तथा समेकित जल प्रबंधन सूचकांक का निर्माण करना। चार. संधारणीय विकास लक्ष्य - एसडीजी के कार्यान्वयन पर नज़र रखने वाले नोडल निकाय के तौर पर नीति आयोग द्वारा राज्यों की प्रगति के आकलन हेतु केपीआई तैयार करना। - माप्य संकेतकों के साथ लक्ष्यों को मापने का मसौदा तैयार करना। - डीएमईओ डैशबोर्ड और प्रगति सूचक के माध्यम से राज्यों के कार्य-निष्पादन का व्यापक डेटा-आधारित मूल्यांकन करना। - अनुवीक्षण के लिये मात्रात्मक और परिमेय संकेतक तथा संगत उत्पादनों एवं परिणामों को चिहि्नत करते हुए उनकी समीक्षा करना। इसके माध्यम से उत्पादन परिणाम फ्रेमवर्क में गुणात्मक सुधार लाने हेतु कड़ी कार्रवाई करना। - कार्य-निष्पादन की निगरानी के लिये कार्यनीतिक परिणाम सत्यापन प्रक्रिया का निर्माण करना। - साथ ही कार्यक्रम का मूल्यांकन करना। इसके अंतर्गत अभी तक बारह कार्यक्रमों का मूल्यांकन किया गया है तथा निम्नलिखित से संबंधित मूल्यांकन रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया गया। ► प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम ► राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम ► आरटीई ► सुमेलित सर्व शिक्षा अभियान ► पीएमएवाई - विभिन्न राज्यों की सर्वश्रेष्ठ कार्य-पद्धतियों का संकलन, प्रेषण और अनुकरण करना। - समावेशः नीति आयोग तथा ज्ञान एवं अनुसंधान भागीदारों और संस्थाओं के बीच सहयोग को संभव बनाना। छः. राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय भागीदारियाँ - नीति आयोग व्याख्यान माला : विद्वानों द्वारा "शासन" पर अब तक तीन व्याख्यान आयोजित किये जा चुके हैं। - नीति आयोग-डीआरसी वार्ताः सहयोग बढ़ाने के लिये नीति आयोग में चीन प्रकोष्ठ गठित किया गया। - वैश्विक उद्यमिता शिखर-सम्मेलन दो हज़ार सत्रह : दो हज़ार पाँच सौ शीर्ष उद्यमियों, निवेशकों और इकोसिस्टम प्लेयर्स के साथ अमेरिका-भारत शिखर सम्मेलन का आयोजन। - चैम्पियंस ऑफ चेंज : बारह क्षेत्रकों में नीतिगत सुझावों के लिये स्टार्ट-अप्स और उद्योग के साथ माननीय प्रधानमंत्री के हितधारक विचार-विमर्श में सहयोग देना। सात. उन्नत प्रौद्योगिकियों का अंगीकरण - नीति आयोग ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी, एआई और शासन में इसके प्रयोग संबंधी पोजीशन पेपर पर कार्य कर रहा है। - भूमि अभिलेखों, इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य अभिलेखों, आदि के संबंध में राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्रों के साथ भागीदारी पर कार्य कर रहा है। - नीति आयोग के लिये एमआईएस डेटाबेस का कार्यान्वयन करना। - मध्यस्थता और प्रवर्तन संबंधी भारत सम्मेलन का आयोजन करना। - सरकार की सर्वश्रेष्ठ कार्य-पद्धतियों के संबंध में नीति आयोग के लिये डिजिटल हब तैयार करना। आठ. मध्यस्थता का सुदृढ़ीकरण और विधिक सुधार - 'भारत में मध्यस्थता और प्रवर्तन का सुदृढ़ीकरण' विषय पर वैश्विक सम्मेलन का आयोजन करना। - भारत विधि आयोग के सहयोग से 'राष्ट्र के तीन स्कंधों की भूमिकाओं का संतुलन' विषय पर विधि दिवस सम्मेलन का आयोजन करना। स्पष्ट रूप से भारत सरकार के अग्रणी 'थिंक टैंक' के रूप में नीति आयोग आर्थिक क्षेत्र के राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व के मामलों, देश की और अन्य देशों की सर्वश्रेष्ठ कार्य-पद्धतियों के प्रचार-प्रसार, नए नीतिगत विचारों के समावेशन और विशिष्ट मामलों में सहायता प्रदान करते हुए देश का मार्ग प्रशस्त करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
विपक्ष के 26 दलों ने अगले लोकसभा चुनाव के लिए अपनी चुनावी बिसात बिछाने का आगाज करते हुए 'इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव एलायंस (इंडिया)' नाम से नए गठबंधन की घोषणा की। नेशनल डेस्कः विपक्ष के 26 दलों ने अगले लोकसभा चुनाव के लिए अपनी चुनावी बिसात बिछाने का आगाज करते हुए 'इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव एलायंस (इंडिया)' नाम से नए गठबंधन की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह 'इंडिया' 2024 में भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पराजित करेगा। इसी बीच झारखंड के पूर्व सीएम और बीजेपी के नेता बाबू लाल मंराडी विपक्षी दलों के नए गठबंधन पर तंज कसा है। उनका कहना है कि, 'पटना की बैठक के बाद AAP नाराज. . . हो गई थी। बेंगलुरु की बैठक के बाद बिहार के सीएम नीतीश कुमार नाराज हो गए हैं। ये गठबंधन है पप्पू की शादी? कोई बात नहीं हर फेरों के बाद एक फूफा नाराज हो जाता है? इससे पहले बाबूलाल मरांडी ने ट्वीट करते हुए कहा, 'भारत की जनता को INDIA नहीं India चुनना है। जनता जनार्दन सब जानती है। INDIA उन लोगों का गठबंधन है, जिनके लिए परिवार और वंशवाद राष्ट्रवाद से बड़ा है। भाजपा परिवार India यानी भारत के साथ खड़ा है। जहां राष्ट्र प्रथम है। जय भारत। एक अन्य ट्वीट में बीजेपी नेता ने कहा, 'गजब का I. N. D. I. A. (आईएनडीआईए) है . . . . पहला, VCK पार्टी है जो LTTE का खुलेआम समर्थन करती है. . . दूसरी मुस्लिम लीग है, जिसने पाकिस्तान बनाया. . . तीसरी महबूबा मुफ्ती है, जो कहती हैं कि घाटी में तिरंगा थामने वाला हाथ नहीं रहेगा. . . चौथा डफली गैंग है जो "भारत तेरे टुकड़े होंगे" का नारा लगाता है. . . इन सबका बॉस "सोरोस गैंग" है, जिसके देश विरोधी NGO और चीन से संदिग्ध रिश्ते हैं . . . वैसे ईस्ट इंडिया कंपनी में भी INDIA था और इटली कांग्रेस में भी "I" है. . . बाक़ी तो जो है सो है! ! कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने गठबंधन (इंडिया) के इस नाम का उल्लेख करते हुए कहा कि अब लड़ाई 'इंडिया और नरेन्द्र मोदी' के बीच है और यह बताने की जरूरत नहीं है कि जीत किसकी होगी। बेंगलुरु के एक पांच सितारा होटल में दो दिवसीय बैठक में विपक्षी दलों ने गठबंधन का नाम 'इंडिया' तय करने के साथ ही यह भी फैसला किया कि इसका (गठबंधन का) एक संयोजक होगा और 11 सदस्यीय समन्वय समिति होगी। इस नए गठबंधन का नेता और चेहरा कौन होगा, इसको लेकर फिलहाल तस्वीर साफ नहीं है, लेकिन विपक्षी दलों की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने यह जरूर कहा कि कांग्रेस की सत्ता या प्रधानमंत्री पद में कोई दिलचस्पी नहीं है।
विपक्ष के छब्बीस दलों ने अगले लोकसभा चुनाव के लिए अपनी चुनावी बिसात बिछाने का आगाज करते हुए 'इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव एलायंस ' नाम से नए गठबंधन की घोषणा की। नेशनल डेस्कः विपक्ष के छब्बीस दलों ने अगले लोकसभा चुनाव के लिए अपनी चुनावी बिसात बिछाने का आगाज करते हुए 'इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव एलायंस ' नाम से नए गठबंधन की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह 'इंडिया' दो हज़ार चौबीस में भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पराजित करेगा। इसी बीच झारखंड के पूर्व सीएम और बीजेपी के नेता बाबू लाल मंराडी विपक्षी दलों के नए गठबंधन पर तंज कसा है। उनका कहना है कि, 'पटना की बैठक के बाद AAP नाराज. . . हो गई थी। बेंगलुरु की बैठक के बाद बिहार के सीएम नीतीश कुमार नाराज हो गए हैं। ये गठबंधन है पप्पू की शादी? कोई बात नहीं हर फेरों के बाद एक फूफा नाराज हो जाता है? इससे पहले बाबूलाल मरांडी ने ट्वीट करते हुए कहा, 'भारत की जनता को INDIA नहीं India चुनना है। जनता जनार्दन सब जानती है। INDIA उन लोगों का गठबंधन है, जिनके लिए परिवार और वंशवाद राष्ट्रवाद से बड़ा है। भाजपा परिवार India यानी भारत के साथ खड़ा है। जहां राष्ट्र प्रथम है। जय भारत। एक अन्य ट्वीट में बीजेपी नेता ने कहा, 'गजब का I. N. D. I. A. है . . . . पहला, VCK पार्टी है जो LTTE का खुलेआम समर्थन करती है. . . दूसरी मुस्लिम लीग है, जिसने पाकिस्तान बनाया. . . तीसरी महबूबा मुफ्ती है, जो कहती हैं कि घाटी में तिरंगा थामने वाला हाथ नहीं रहेगा. . . चौथा डफली गैंग है जो "भारत तेरे टुकड़े होंगे" का नारा लगाता है. . . इन सबका बॉस "सोरोस गैंग" है, जिसके देश विरोधी NGO और चीन से संदिग्ध रिश्ते हैं . . . वैसे ईस्ट इंडिया कंपनी में भी INDIA था और इटली कांग्रेस में भी "I" है. . . बाक़ी तो जो है सो है! ! कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने गठबंधन के इस नाम का उल्लेख करते हुए कहा कि अब लड़ाई 'इंडिया और नरेन्द्र मोदी' के बीच है और यह बताने की जरूरत नहीं है कि जीत किसकी होगी। बेंगलुरु के एक पांच सितारा होटल में दो दिवसीय बैठक में विपक्षी दलों ने गठबंधन का नाम 'इंडिया' तय करने के साथ ही यह भी फैसला किया कि इसका एक संयोजक होगा और ग्यारह सदस्यीय समन्वय समिति होगी। इस नए गठबंधन का नेता और चेहरा कौन होगा, इसको लेकर फिलहाल तस्वीर साफ नहीं है, लेकिन विपक्षी दलों की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने यह जरूर कहा कि कांग्रेस की सत्ता या प्रधानमंत्री पद में कोई दिलचस्पी नहीं है।
अमरावती/दि. ८- राजापेठ स्थित दीपार्चन हॉल में करीब १० साल के अंतराल पश्चात 'रंग दे बसंती चोला' कार्यक्रम का आयोजन किया गया. पारिवारिक माहौल में रविवार ७ मई को रक्तदान समिति व श्रीराम ट्रस्ट द्वारा स्व. पुष्पादेवी हेमराजानी स्मृति में रक्तदान शिविर सप्ताह के माध्यम से रविवार को सप्ताह के अंतिम रक्तदान शिविर हुआ. इस शिविर के साथ अन्य शिविर में संकलित ४३२ बोतल रक्त से शहीद मुकुंद ठाकरे की माता द्वारकाबाई ठाकरे व पत्नी रानी ठाकरे की रक्ततुला की गई. शिविर की शुरुआत रविवार को सुबह ८. ३० बजे से की गई. इस अवसर पर उपस्थित रक्तदाताओं ने रक्तदान किया. दोपहर ३ बजे तक चले 'रंग दे बसंती चोला' उपक्रम में विविध संगठन व सामाजिक क्षेत्र के मान्यवरों ने उपस्थिति दर्ज करने के साथ ही रक्तदान किया. एक ही दिन में दीपार्चन में आयोजित रक्तदान शिविर में १२१ बोतल रक्त संकलित किया गया. इसके पूर्व आयोजकों द्वारा बुधवारा स्थित स्व. सोमेश्वर पुसतकर की स्मृति प्रित्यर्थ रक्तदान शिविर लिया गया. इसके अलावा महापालिका प्रशासन के अमरावती ठेकेदार एसोसिएशन, स्व. प्रकाशराव शिरभाते स्मृति फाउंडेशन द्वारा शहीद अमोल गोरे की स्मृति में चित्रा चौक स्थित सागर प्लास्टिक मल्टीमॉल तथा पुलिस आयुक्त कार्यालय जैसे स्थानों पर रक्तदान शिविर लिया गया. यहां संकलित रक्त को एकत्रित कर रविवार को शहीद जवान मुकुंद ठाकरे की माता द्वारका ठाकरे व पत्नी रानी ठाकरे की रक्ततुला की गई. इससे पूर्व ठाकरे परिवार के उपस्थित सदस्य पद्माकर ठाकरे, वर्षा ठाकरे, वेदांत ठाकरे, आदित्य ठाकरे, सुहानी ठाकरे, बहन माया विरखडे, भांजा सौरभ विरखडे आदि का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया गया. वीरमाता द्वारकाबाई ठाकरे तथा वीर पत्नी रानी ठाकरे को साड़ी देकर दोनों का सत्कार किया गया. स्व. पुष्पादेवी हेमराजानी की स्मृति में इस रक्तदान शिविर में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष संजय खोडके, पूर्व महापौर विलास इंगोले, एकवीरा देवी संस्था के अध्यक्ष चंद्रशेखर कुलकर्णी, भाजपा के पूर्व सभापति तुषार भारतीय, भाजपा शहराध्यक्ष किरण पातुरकर, सुनील राणा, प्रणित सोनी, पवन गट्टाणी, रघुवीर के संचालक चंद्रकांत पोपट, गुजराती समाज के अध्यक्ष दिलीपभाई पोपट, गौरक्षण संस्था अध्यक्ष एड. आर. बी. अटल, पूज्य पंचायत कंवर नगर के सचिव ओमप्रकाश खेमचंदानी, अनिल मुणोत, बजरंग चांडक, किशोर केडिया, रंगनाथन चांडक समेत अन्य ने सदिच्छा भेंट देते हुए आयोजकों को शुभकामनाएं दी. उपस्थितों द्वारा सर्वप्रथम दो मिनट मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई. पश्चात 'रंग दे बसंती चोला...' यह गीत सुनते हुए सभी ने रक्ततुला में सहभाग लेते हुए 'मुकुंद ठाकरे अमर रहे' के नारे लगाये. इस माहौल को देखकर सभी भावविभोर हो गये थे. उल्लेखनीय है कि, ४७ सालों से प्रयासरत रक्तदान समिति द्वारा १० साल पहले ६ वीर शहीद जवानों के परिवार की रक्ततुला का आयोजन किया गया था. इस अवसर पर १२३१ रक्तदाताओं ने रक्तदान कर शहीदों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की. यह एक यादगार उपक्रम रहा था. कार्यक्रम का संचालन प्रा. अरविंद देशमुख ने किया. उन्होंने शहीद जवान स्व. मुकुंद ठाकरे की जीवनी पर प्रकाश डाला. कार्यक्रम का राष्ट्रगीत से समापन किया गया. हेमराजानी परिवार की ओर से महेश हेमराजानी, शशि हेमराजानी, आदित्य हेमराजानी, सिद्धार्थ हेमराजानी, योगेश हेमराजानी, श्रीवास हेमराजानी, कर्नल मनोज सिंह, डॉ. घनश्याम बाहेती, मनोहर भूतडा, यश भूतडा, रक्तदान समिति के अध्यक्ष महेंद्र भूतडा, अजय दातेराव, नरसिंग चुडाला, जय हेमराजानी, किसनगोपाल सादानी, संजय कुलकर्णी, मोहन लड्ढा, रितेश व्यास, शैलेश चौरसिया, सिमेश श्रॉफ, उमेश पाटणकर, निखिल बाहे, निशांत जोध, दिनेश केडिया, सुनील अग्रवाल, श्याम राऊत, हरि पुरवार, योगेंद्र मोहोड, डॉ. प्रा. संजय कुलकर्णी, प्रा. राजेश पांडे, राकेश ठाकुर, बबन मोहोड, प्रा. किशोर शिरभाते, नकेश चुडासामा, भारती चौरसिया, भारती दातेराव, संपदा खेडकर, प्रीति पुरवार, अनुराधा पांडे, राधा बाहेती, दीपिका हिरापुरे, संध्या शिरभाते, नीलम ठाकुर, दुर्गा व्यास, संध्या शिंदे, रिद्धि जोशी, सरला भूतडा, कुलजीत नंदा, सपना पाटणकर, जिग्ना श्रॉफ, राधा श्रॉफ, अनीता हेमराजानी, सुचिता भूतडा, शिपा हेमराजानी, नेहा हेमराजानी, ऋषि श्रॉफ, सौम्या आहूजा, ईवाना आहूजा, खुशी हेमराजानी, यूसुफ बारामतीवाला, प्रमोद शर्मा, मुकेश ओझा, प्रकाश झंवर, प्रकाश केला तथा श्रीराम ट्रस्ट केसदस्य उपस्थित थे.
अमरावती/दि. आठ- राजापेठ स्थित दीपार्चन हॉल में करीब दस साल के अंतराल पश्चात 'रंग दे बसंती चोला' कार्यक्रम का आयोजन किया गया. पारिवारिक माहौल में रविवार सात मई को रक्तदान समिति व श्रीराम ट्रस्ट द्वारा स्व. पुष्पादेवी हेमराजानी स्मृति में रक्तदान शिविर सप्ताह के माध्यम से रविवार को सप्ताह के अंतिम रक्तदान शिविर हुआ. इस शिविर के साथ अन्य शिविर में संकलित चार सौ बत्तीस बोतल रक्त से शहीद मुकुंद ठाकरे की माता द्वारकाबाई ठाकरे व पत्नी रानी ठाकरे की रक्ततुला की गई. शिविर की शुरुआत रविवार को सुबह आठ. तीस बजे से की गई. इस अवसर पर उपस्थित रक्तदाताओं ने रक्तदान किया. दोपहर तीन बजे तक चले 'रंग दे बसंती चोला' उपक्रम में विविध संगठन व सामाजिक क्षेत्र के मान्यवरों ने उपस्थिति दर्ज करने के साथ ही रक्तदान किया. एक ही दिन में दीपार्चन में आयोजित रक्तदान शिविर में एक सौ इक्कीस बोतल रक्त संकलित किया गया. इसके पूर्व आयोजकों द्वारा बुधवारा स्थित स्व. सोमेश्वर पुसतकर की स्मृति प्रित्यर्थ रक्तदान शिविर लिया गया. इसके अलावा महापालिका प्रशासन के अमरावती ठेकेदार एसोसिएशन, स्व. प्रकाशराव शिरभाते स्मृति फाउंडेशन द्वारा शहीद अमोल गोरे की स्मृति में चित्रा चौक स्थित सागर प्लास्टिक मल्टीमॉल तथा पुलिस आयुक्त कार्यालय जैसे स्थानों पर रक्तदान शिविर लिया गया. यहां संकलित रक्त को एकत्रित कर रविवार को शहीद जवान मुकुंद ठाकरे की माता द्वारका ठाकरे व पत्नी रानी ठाकरे की रक्ततुला की गई. इससे पूर्व ठाकरे परिवार के उपस्थित सदस्य पद्माकर ठाकरे, वर्षा ठाकरे, वेदांत ठाकरे, आदित्य ठाकरे, सुहानी ठाकरे, बहन माया विरखडे, भांजा सौरभ विरखडे आदि का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया गया. वीरमाता द्वारकाबाई ठाकरे तथा वीर पत्नी रानी ठाकरे को साड़ी देकर दोनों का सत्कार किया गया. स्व. पुष्पादेवी हेमराजानी की स्मृति में इस रक्तदान शिविर में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष संजय खोडके, पूर्व महापौर विलास इंगोले, एकवीरा देवी संस्था के अध्यक्ष चंद्रशेखर कुलकर्णी, भाजपा के पूर्व सभापति तुषार भारतीय, भाजपा शहराध्यक्ष किरण पातुरकर, सुनील राणा, प्रणित सोनी, पवन गट्टाणी, रघुवीर के संचालक चंद्रकांत पोपट, गुजराती समाज के अध्यक्ष दिलीपभाई पोपट, गौरक्षण संस्था अध्यक्ष एड. आर. बी. अटल, पूज्य पंचायत कंवर नगर के सचिव ओमप्रकाश खेमचंदानी, अनिल मुणोत, बजरंग चांडक, किशोर केडिया, रंगनाथन चांडक समेत अन्य ने सदिच्छा भेंट देते हुए आयोजकों को शुभकामनाएं दी. उपस्थितों द्वारा सर्वप्रथम दो मिनट मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई. पश्चात 'रंग दे बसंती चोला...' यह गीत सुनते हुए सभी ने रक्ततुला में सहभाग लेते हुए 'मुकुंद ठाकरे अमर रहे' के नारे लगाये. इस माहौल को देखकर सभी भावविभोर हो गये थे. उल्लेखनीय है कि, सैंतालीस सालों से प्रयासरत रक्तदान समिति द्वारा दस साल पहले छः वीर शहीद जवानों के परिवार की रक्ततुला का आयोजन किया गया था. इस अवसर पर एक हज़ार दो सौ इकतीस रक्तदाताओं ने रक्तदान कर शहीदों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की. यह एक यादगार उपक्रम रहा था. कार्यक्रम का संचालन प्रा. अरविंद देशमुख ने किया. उन्होंने शहीद जवान स्व. मुकुंद ठाकरे की जीवनी पर प्रकाश डाला. कार्यक्रम का राष्ट्रगीत से समापन किया गया. हेमराजानी परिवार की ओर से महेश हेमराजानी, शशि हेमराजानी, आदित्य हेमराजानी, सिद्धार्थ हेमराजानी, योगेश हेमराजानी, श्रीवास हेमराजानी, कर्नल मनोज सिंह, डॉ. घनश्याम बाहेती, मनोहर भूतडा, यश भूतडा, रक्तदान समिति के अध्यक्ष महेंद्र भूतडा, अजय दातेराव, नरसिंग चुडाला, जय हेमराजानी, किसनगोपाल सादानी, संजय कुलकर्णी, मोहन लड्ढा, रितेश व्यास, शैलेश चौरसिया, सिमेश श्रॉफ, उमेश पाटणकर, निखिल बाहे, निशांत जोध, दिनेश केडिया, सुनील अग्रवाल, श्याम राऊत, हरि पुरवार, योगेंद्र मोहोड, डॉ. प्रा. संजय कुलकर्णी, प्रा. राजेश पांडे, राकेश ठाकुर, बबन मोहोड, प्रा. किशोर शिरभाते, नकेश चुडासामा, भारती चौरसिया, भारती दातेराव, संपदा खेडकर, प्रीति पुरवार, अनुराधा पांडे, राधा बाहेती, दीपिका हिरापुरे, संध्या शिरभाते, नीलम ठाकुर, दुर्गा व्यास, संध्या शिंदे, रिद्धि जोशी, सरला भूतडा, कुलजीत नंदा, सपना पाटणकर, जिग्ना श्रॉफ, राधा श्रॉफ, अनीता हेमराजानी, सुचिता भूतडा, शिपा हेमराजानी, नेहा हेमराजानी, ऋषि श्रॉफ, सौम्या आहूजा, ईवाना आहूजा, खुशी हेमराजानी, यूसुफ बारामतीवाला, प्रमोद शर्मा, मुकेश ओझा, प्रकाश झंवर, प्रकाश केला तथा श्रीराम ट्रस्ट केसदस्य उपस्थित थे.
BBC News, वीडियो, दिल्ली में क्या केजरीवाल का मुक़ाबला केजरीवाल से ही है? केजरीवाल के नामांकन में छह घंटे से अधिक क्यों लगे? CAA: अब तक शाहीन बाग़ क्यों नहीं गए केजरीवाल? क्या क्षेत्रीय दलों के आगे चित हो रही हैं बीजेपी-कांग्रेस? AAP ने जिन विधायकों के टिकट काटे, वो क्या बोले? सुलेमानी की मौत पर अमरीका ने भारत से क्या कहा? दिल्ली बीजेपी का मुख्यमंत्री उम्मीदवार कौन? 'नागरिकता संशोधन बिल जिन्ना के विचारों की जीत' वीडियो, क्या दिल्ली में कम हुआ है प्रदूषण? लोकप्रिय चेहरों के बिना केजरीवाल कितना कमाल कर पाएंगे? 'मुफ़्त ही मुफ़्त का जादू' क्या दिल्ली में कारगर होगा?
BBC News, वीडियो, दिल्ली में क्या केजरीवाल का मुक़ाबला केजरीवाल से ही है? केजरीवाल के नामांकन में छह घंटे से अधिक क्यों लगे? CAA: अब तक शाहीन बाग़ क्यों नहीं गए केजरीवाल? क्या क्षेत्रीय दलों के आगे चित हो रही हैं बीजेपी-कांग्रेस? AAP ने जिन विधायकों के टिकट काटे, वो क्या बोले? सुलेमानी की मौत पर अमरीका ने भारत से क्या कहा? दिल्ली बीजेपी का मुख्यमंत्री उम्मीदवार कौन? 'नागरिकता संशोधन बिल जिन्ना के विचारों की जीत' वीडियो, क्या दिल्ली में कम हुआ है प्रदूषण? लोकप्रिय चेहरों के बिना केजरीवाल कितना कमाल कर पाएंगे? 'मुफ़्त ही मुफ़्त का जादू' क्या दिल्ली में कारगर होगा?
India News(इंडिया न्युज),Maharashtra: महाराष्ट्र(Maharashtra) के नागपुर से एक बड़ा हादसा होने की खबर सामने आ रही है। जहां रविवार की शाम झील में डूबने से पांच लोगों की जान चली गई। बताया ये जा रहा है कि, एक दूसरे को बचाने की कोशिश में पांचों लोगों को अपनी जान गवानी पड़ी। वहीं पुलिस के बयान के अनसार बताया ये जा रहा है कि, आठ युवकों का समूह हिंगना क्षेत्र में स्थित झील पर पिकनिक मनाने गया, लेकिन उन्होंने अपना मन बदल लिया और कुछ युवक झील में नहाने चले गए। जिसमें पांच लोग डूब गए। वहीं एक अधिकारी ने मामले की जानकरी देते हुए कहा कि, आठ दोस्त जिल्पी झील के किनारे टहल रहे थे, तभी उनमें से कुछ ने पानी में उतरने का फैसला किया। यह देखने के बाद कि समूह का एक सदस्य तैरने के लिए हाथ-पैर मार रहा है, अन्य लोगों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन उनमें से पांच डूब गए। बता दें कि, पुलिस को घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय गोताखोरों की मदद से तलाशी अभियान शुरू किया गया। जिसके बाद पुलिस ने बताया कि, रात करीब 10 बजे ऋषिकेश परेड (21), वैभव वैद्य (20), राहुल मेश्राम (21), नितिन कुंभारे (21) और शांतनु अरमरकर (22) के शव पानी से बाहर निकाले गए। वहीं इसमें आकस्मिक मौत का मामला दर्ज किया गया है।
India News,Maharashtra: महाराष्ट्र के नागपुर से एक बड़ा हादसा होने की खबर सामने आ रही है। जहां रविवार की शाम झील में डूबने से पांच लोगों की जान चली गई। बताया ये जा रहा है कि, एक दूसरे को बचाने की कोशिश में पांचों लोगों को अपनी जान गवानी पड़ी। वहीं पुलिस के बयान के अनसार बताया ये जा रहा है कि, आठ युवकों का समूह हिंगना क्षेत्र में स्थित झील पर पिकनिक मनाने गया, लेकिन उन्होंने अपना मन बदल लिया और कुछ युवक झील में नहाने चले गए। जिसमें पांच लोग डूब गए। वहीं एक अधिकारी ने मामले की जानकरी देते हुए कहा कि, आठ दोस्त जिल्पी झील के किनारे टहल रहे थे, तभी उनमें से कुछ ने पानी में उतरने का फैसला किया। यह देखने के बाद कि समूह का एक सदस्य तैरने के लिए हाथ-पैर मार रहा है, अन्य लोगों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन उनमें से पांच डूब गए। बता दें कि, पुलिस को घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय गोताखोरों की मदद से तलाशी अभियान शुरू किया गया। जिसके बाद पुलिस ने बताया कि, रात करीब दस बजे ऋषिकेश परेड , वैभव वैद्य , राहुल मेश्राम , नितिन कुंभारे और शांतनु अरमरकर के शव पानी से बाहर निकाले गए। वहीं इसमें आकस्मिक मौत का मामला दर्ज किया गया है।
:भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने वेस्ट इंडीज को 3-0 से क्लीन स्वीप करने के बाद कहा कि हम अपने प्रदर्शन पर ध्यान दें और वहीं हमारा फोकस होना चाहिए। बाहरी शोर ड्रेसिंग रूम को परेशान नहीं करता है। रोहित ने मैच के बाद कहा,': हमारे लिए यह ज़रूरी था कि हम अपने काम को पूरा करें। अब तक हमारी टीम ने इस सीरीज़ में जिस तरीके से प्रदर्शन किया है, वह काफ़ी बढ़िया रहा है। मुझे पता कि है टीम के बाहर लोग काफ़ी बात करते रहेंगे लेकिन बाहर की बात पर ज्यादा ध्यान देना सही नहीं है। हम अपने प्रदर्शन पर ध्यान दें और वहीं हमारा फोकस होना चाहिए। बाहरी शोर ड्रेसिंग रूम को परेशान नहीं करता है। कप्तान ने तेज गेंदबाज प्रसिद्ध कृष्णा की सराहना करते हुए कहा,'जिस तरीके से प्रसिद्ध गेंदबाज़ी कर रहा और जिस लेंथ के साथ गेंदबाज़ी कर रहा है, वह काफ़ी सराहनीय है। हमारे तेज़ गेंदबाज़ो को देख कर अच्छा लग रहा है। सिराज ने भी काफ़ी बढ़िया गेंदबाज़ी की है। दीपक चाहर और शार्दुल को जब मौक़ा मिला उन्होंने बढ़िया प्रदर्शन किया है। इस सीरीज़ में टॉप ऑर्डर के बल्लेबाज़ों ने अधिक रन नहीं बनाए लेकिन जिस तरीके से मिडिल ऑर्डर के बल्लेबाज़ों ने रन बनाया. वह इस सीरीज़ में हमारे लिए सबसे सकारात्मक पक्ष रहा है। हमने इस श्रृंखला में बहुत सारे बॉक्स को टिक किए हैं। श्रृंखला से हमें वही मिला जो हम चाहते थे। उन्होंने कहा,'कुलदीप और चहल दोनों हमारे लिए महत्वपूर्ण खिलाड़ी हैं। उन्होंने एक समूह के रूप में एक साथ अच्छा प्रदर्शन किया है। यह ज़रूरी है कि कुलदीप को वापस टीम में लाया जाए और उन्हें मौक़ा दिया जाए। हमें अच्छे से पता है कि वह किस तरह के खिलाड़ी हैं और टीम के लिए किस तरह का योगदान दे सकते हैं। उम्मीद है कि हम जल्दी उन्हें टीम में एक साथ खेलते हुए देखेंगे। '(वार्ता)
:भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने वेस्ट इंडीज को तीन-शून्य से क्लीन स्वीप करने के बाद कहा कि हम अपने प्रदर्शन पर ध्यान दें और वहीं हमारा फोकस होना चाहिए। बाहरी शोर ड्रेसिंग रूम को परेशान नहीं करता है। रोहित ने मैच के बाद कहा,': हमारे लिए यह ज़रूरी था कि हम अपने काम को पूरा करें। अब तक हमारी टीम ने इस सीरीज़ में जिस तरीके से प्रदर्शन किया है, वह काफ़ी बढ़िया रहा है। मुझे पता कि है टीम के बाहर लोग काफ़ी बात करते रहेंगे लेकिन बाहर की बात पर ज्यादा ध्यान देना सही नहीं है। हम अपने प्रदर्शन पर ध्यान दें और वहीं हमारा फोकस होना चाहिए। बाहरी शोर ड्रेसिंग रूम को परेशान नहीं करता है। कप्तान ने तेज गेंदबाज प्रसिद्ध कृष्णा की सराहना करते हुए कहा,'जिस तरीके से प्रसिद्ध गेंदबाज़ी कर रहा और जिस लेंथ के साथ गेंदबाज़ी कर रहा है, वह काफ़ी सराहनीय है। हमारे तेज़ गेंदबाज़ो को देख कर अच्छा लग रहा है। सिराज ने भी काफ़ी बढ़िया गेंदबाज़ी की है। दीपक चाहर और शार्दुल को जब मौक़ा मिला उन्होंने बढ़िया प्रदर्शन किया है। इस सीरीज़ में टॉप ऑर्डर के बल्लेबाज़ों ने अधिक रन नहीं बनाए लेकिन जिस तरीके से मिडिल ऑर्डर के बल्लेबाज़ों ने रन बनाया. वह इस सीरीज़ में हमारे लिए सबसे सकारात्मक पक्ष रहा है। हमने इस श्रृंखला में बहुत सारे बॉक्स को टिक किए हैं। श्रृंखला से हमें वही मिला जो हम चाहते थे। उन्होंने कहा,'कुलदीप और चहल दोनों हमारे लिए महत्वपूर्ण खिलाड़ी हैं। उन्होंने एक समूह के रूप में एक साथ अच्छा प्रदर्शन किया है। यह ज़रूरी है कि कुलदीप को वापस टीम में लाया जाए और उन्हें मौक़ा दिया जाए। हमें अच्छे से पता है कि वह किस तरह के खिलाड़ी हैं और टीम के लिए किस तरह का योगदान दे सकते हैं। उम्मीद है कि हम जल्दी उन्हें टीम में एक साथ खेलते हुए देखेंगे। '
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। उत्तर अमेरिका (अंग्रेजीः North America; स्पेनीः América del Norte; फ़्रान्सीसीः Amérique du Nord) महाअमेरिका (उत्तर और दक्षिण अमेरिका संयुक रूप से) का उत्तरी महाद्वीप है, जो पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध में स्थित है और पूर्णतः पश्चिमी गोलार्ध में आता है। उत्तर में यह आर्कटिक महासागर, पूर्व में उत्तरी अन्ध महासागर, दक्षिणपूर्व में कैरिबियाई सागर और पश्चिम में उत्तरी प्रशान्त महासागर से घिरा हुआ है। उत्तर अमेरिका का मुख्य भाग ४० उत्तरी अक्षांश से ८३० उत्तरी अक्षांश तथआ ५३० पश्चिमी देशान्तर से १६८० पश्चिमी देशान्तर के बीच स्थित है। इसका आकार त्रिभुज के समान है जिसका शीर्ष दक्षिण की ओर और आधार उत्तर की ओर है। उत्तर अमेरिका का कुल भूभाग २,४७,०९,००० वर्ग किलोमीटर है, पृथ्वी की कुल सतह का ४.८% या कुल भूभाग का १६.५%। जुलाई, २००८ तक, इसकी अनुमानित जनसंख्या ५२.९ करोड़ थी। क्षेत्रफल की दृष्टि से यह एशिया और अफ़्रीका के बाद विश्व का तीसरा सबसे बड़ा और जनसंख्या की दृष्टि से यह एशिया, अफ़्रीका और यूरोप के बाद चौथा सबसे बड़ा महाद्वीप है। . ब्रिटेन शब्द का प्रयोग हालाँकि आम तौर पर हिंदी में संयुक्त राजशाही अर्थात् यूनाइटेड किंगडम देश का बोध करने के लिए होता है, परंतु इसका उपयोग अन्य सन्दर्भों के लिए भी हो सकता है. उत्तर अमेरिका और ब्रिटेन आम में एक बात है (यूनियनपीडिया में): इंग्लैण्ड। इंग्लैण्ड (अंग्रेज़ीः England), ग्रेट ब्रिटेन नामक टापू के दक्षिणी भाग में स्थित एक देश है। इसका क्षेत्रफल 50,331 वर्ग मील है। यह यूनाइटेड किंगडम का सबसे बड़ा निर्वाचक देश है। इंग्लैंड के अलावा स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तर आयरलैंड भी यूनाइटेड किंगडम में शामिल हैं। यह यूरोप के उत्तर पश्चिम में अवस्थित है जो मुख्य भूमि से इंग्लिश चैनल द्वारा पृथकीकृत द्वीप का अंग है। इसकी राजभाषा अंग्रेज़ी है और यह विश्व के सबसे संपन्न तथा शक्तिशाली देशों में से एक है। इंग्लैंड के इतिहास में सबसे स्वर्णिम काल उसका औपनिवेशिक युग है। अठारहवीं सदी से लेकर बीसवीं सदी के मध्य तक ब्रिटिश साम्राज्य विश्व का सबसे बड़ा और शकितशाली साम्राज्य हुआ करता था जो कई महाद्वीपों में फैला हुआ था और कहा जाता था कि ब्रिटिश साम्राज्य में सूर्य कभी अस्त नहीं होता। उसी समय पूरे विश्व में अंग्रेज़ी भाषा ने अपनी छाप छोड़ी जिसकी वज़ह से यह आज भी विश्व के सबसे अधिक लोगों द्वारा बोले व समझे जाने वाली भाषा है। . उत्तर अमेरिका 50 संबंध है और ब्रिटेन 7 है। वे आम 1 में है, समानता सूचकांक 1.75% है = 1 / (50 + 7)। यह लेख उत्तर अमेरिका और ब्रिटेन के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। उत्तर अमेरिका महाअमेरिका का उत्तरी महाद्वीप है, जो पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध में स्थित है और पूर्णतः पश्चिमी गोलार्ध में आता है। उत्तर में यह आर्कटिक महासागर, पूर्व में उत्तरी अन्ध महासागर, दक्षिणपूर्व में कैरिबियाई सागर और पश्चिम में उत्तरी प्रशान्त महासागर से घिरा हुआ है। उत्तर अमेरिका का मुख्य भाग चालीस उत्तरी अक्षांश से आठ सौ तीस उत्तरी अक्षांश तथआ पाँच सौ तीस पश्चिमी देशान्तर से एक हज़ार छः सौ अस्सी पश्चिमी देशान्तर के बीच स्थित है। इसका आकार त्रिभुज के समान है जिसका शीर्ष दक्षिण की ओर और आधार उत्तर की ओर है। उत्तर अमेरिका का कुल भूभाग दो,सैंतालीस,नौ,शून्य वर्ग किलोमीटर है, पृथ्वी की कुल सतह का चार.आठ% या कुल भूभाग का सोलह.पाँच%। जुलाई, दो हज़ार आठ तक, इसकी अनुमानित जनसंख्या बावन.नौ करोड़ थी। क्षेत्रफल की दृष्टि से यह एशिया और अफ़्रीका के बाद विश्व का तीसरा सबसे बड़ा और जनसंख्या की दृष्टि से यह एशिया, अफ़्रीका और यूरोप के बाद चौथा सबसे बड़ा महाद्वीप है। . ब्रिटेन शब्द का प्रयोग हालाँकि आम तौर पर हिंदी में संयुक्त राजशाही अर्थात् यूनाइटेड किंगडम देश का बोध करने के लिए होता है, परंतु इसका उपयोग अन्य सन्दर्भों के लिए भी हो सकता है. उत्तर अमेरिका और ब्रिटेन आम में एक बात है : इंग्लैण्ड। इंग्लैण्ड , ग्रेट ब्रिटेन नामक टापू के दक्षिणी भाग में स्थित एक देश है। इसका क्षेत्रफल पचास,तीन सौ इकतीस वर्ग मील है। यह यूनाइटेड किंगडम का सबसे बड़ा निर्वाचक देश है। इंग्लैंड के अलावा स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तर आयरलैंड भी यूनाइटेड किंगडम में शामिल हैं। यह यूरोप के उत्तर पश्चिम में अवस्थित है जो मुख्य भूमि से इंग्लिश चैनल द्वारा पृथकीकृत द्वीप का अंग है। इसकी राजभाषा अंग्रेज़ी है और यह विश्व के सबसे संपन्न तथा शक्तिशाली देशों में से एक है। इंग्लैंड के इतिहास में सबसे स्वर्णिम काल उसका औपनिवेशिक युग है। अठारहवीं सदी से लेकर बीसवीं सदी के मध्य तक ब्रिटिश साम्राज्य विश्व का सबसे बड़ा और शकितशाली साम्राज्य हुआ करता था जो कई महाद्वीपों में फैला हुआ था और कहा जाता था कि ब्रिटिश साम्राज्य में सूर्य कभी अस्त नहीं होता। उसी समय पूरे विश्व में अंग्रेज़ी भाषा ने अपनी छाप छोड़ी जिसकी वज़ह से यह आज भी विश्व के सबसे अधिक लोगों द्वारा बोले व समझे जाने वाली भाषा है। . उत्तर अमेरिका पचास संबंध है और ब्रिटेन सात है। वे आम एक में है, समानता सूचकांक एक.पचहत्तर% है = एक / । यह लेख उत्तर अमेरिका और ब्रिटेन के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
रिपोर्ट- अभिलाष मिश्रा/इंदौरः गर्मी का मौसम है तो ऐसे में गाड़ी की देखभाल भी करना बेहद जरूरी है. फिर चाहे आप गाड़ी का इस्तेमाल कम करें या फिर ज्यादा. अक्सर कार में आग लगने की घटनाएं सामने आती रहती हैं. कार में आग लगने के कई कारण हो सकते हैं. इस समय गाड़ियों में आग लगने की खबरें मिलना आम बात हो गई है. अगर आप भी कोई गाड़ी चलाते हैं और आप चाहते हैं कि आपके साथ कभी भी ऐसी कोई घटना न हो, तो आपको यहां गाड़ियों में आग लगने के कुछ प्रमुख कारण और उससे बचने के उपाय बताए जा रहे हैं, जिन्हें आपको हमेशा फॉलो करना चाहिए. 30 साल से ऑटो मोबाइल की दुकान चलाने वाले फोर व्हीलर रिपेयरिंग एक्सपर्ट त्रिलोक सिंह ने बताया कि गाड़ियों में कमजोर वायरिंग का होना, फ्यूल के लीकेज को ठीक नहीं करवाना, एलपीजी गैस से चलने वाली गाड़ियों की प्रॉपर सर्विस ना करवाना, गाड़ियों में ज्वलनशील पदार्थ रखना आदि आग लगने के कई कारण हो सकते हैं. गाड़ी की समय से सर्विसिंग करवाना, समय-समय पर गाड़ी की वायरिंग चेक करवाना, एलपीजी गैस से चलने वाली गाड़ियों की विशेष रुप से सर्विस का ख्याल रखना चाहिए. अगर कड़ी धूप में गाड़ी खड़ी कर रहे हैं तो गाड़ी के कांच को हल्का सा खोल देना चाहिए. ताकि हवा का सरकुलेशन बना रहे. गाड़ियां चलाते समय भी मीटर पर गाड़ियों के टेंपरेचर को देखा जा सकता है. इन सभी बातों का ख्याल रखकर हम अपनी गाड़ियों को सुरक्षित रख सकते हैं. इसके अलावा कार में एक लिमिट से ज्यादा पावर के म्यूजिक सिस्टम, एक्स्ट्रा हेलोजन या एलईडी लाइट्स आदि एसेसरीज नहीं लगवानी चाहिए. ये एसेसरीज कार की बैटरी पर लोड बढ़ाती हैं, जिससे बैटरी वायर में शॉर्ट सर्किट होने का खतरा बनने लगता है. इन सभी बातों को ध्यान रखकर हम अपनी गाड़ियों को सुरक्षित रख सकते हैं और किसी भी अप्रिय घटना से बच सकते हैं. . PHOTOS: पहले प्यार से गुलाम संग जबरन शादी तक. . . पाक वाली सीमा की पूरी कुंडली, जिसने सचिन के लिए की सारी हदें पार!
रिपोर्ट- अभिलाष मिश्रा/इंदौरः गर्मी का मौसम है तो ऐसे में गाड़ी की देखभाल भी करना बेहद जरूरी है. फिर चाहे आप गाड़ी का इस्तेमाल कम करें या फिर ज्यादा. अक्सर कार में आग लगने की घटनाएं सामने आती रहती हैं. कार में आग लगने के कई कारण हो सकते हैं. इस समय गाड़ियों में आग लगने की खबरें मिलना आम बात हो गई है. अगर आप भी कोई गाड़ी चलाते हैं और आप चाहते हैं कि आपके साथ कभी भी ऐसी कोई घटना न हो, तो आपको यहां गाड़ियों में आग लगने के कुछ प्रमुख कारण और उससे बचने के उपाय बताए जा रहे हैं, जिन्हें आपको हमेशा फॉलो करना चाहिए. तीस साल से ऑटो मोबाइल की दुकान चलाने वाले फोर व्हीलर रिपेयरिंग एक्सपर्ट त्रिलोक सिंह ने बताया कि गाड़ियों में कमजोर वायरिंग का होना, फ्यूल के लीकेज को ठीक नहीं करवाना, एलपीजी गैस से चलने वाली गाड़ियों की प्रॉपर सर्विस ना करवाना, गाड़ियों में ज्वलनशील पदार्थ रखना आदि आग लगने के कई कारण हो सकते हैं. गाड़ी की समय से सर्विसिंग करवाना, समय-समय पर गाड़ी की वायरिंग चेक करवाना, एलपीजी गैस से चलने वाली गाड़ियों की विशेष रुप से सर्विस का ख्याल रखना चाहिए. अगर कड़ी धूप में गाड़ी खड़ी कर रहे हैं तो गाड़ी के कांच को हल्का सा खोल देना चाहिए. ताकि हवा का सरकुलेशन बना रहे. गाड़ियां चलाते समय भी मीटर पर गाड़ियों के टेंपरेचर को देखा जा सकता है. इन सभी बातों का ख्याल रखकर हम अपनी गाड़ियों को सुरक्षित रख सकते हैं. इसके अलावा कार में एक लिमिट से ज्यादा पावर के म्यूजिक सिस्टम, एक्स्ट्रा हेलोजन या एलईडी लाइट्स आदि एसेसरीज नहीं लगवानी चाहिए. ये एसेसरीज कार की बैटरी पर लोड बढ़ाती हैं, जिससे बैटरी वायर में शॉर्ट सर्किट होने का खतरा बनने लगता है. इन सभी बातों को ध्यान रखकर हम अपनी गाड़ियों को सुरक्षित रख सकते हैं और किसी भी अप्रिय घटना से बच सकते हैं. . PHOTOS: पहले प्यार से गुलाम संग जबरन शादी तक. . . पाक वाली सीमा की पूरी कुंडली, जिसने सचिन के लिए की सारी हदें पार!
फ्लोर दर फ्लोर दर होटल को ढहाया जाएगा। होटल से सभी कीमती सामानों को हटाया जा चुका है, ताकि किसी को कोई नुकसान ना पहुंचे। होटल गिराने से पहले लोगों ने अपना आक्रोश जाहिर कर प्रदर्शन किया था, लेकिन प्रशासन द्वारा बाद में प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की गई। Joshimath: उत्तराखंड के जोशीमठ में अब तक आम लोगों के घरों में टूट का खतरा बना हुआ था लेकिन अब सेना के कुछ बैरकों में दरार आ गई है। मामले सामने आने के बाद कुछ जवानों को ऊपर के दूसरे बैरक में शिफ्ट किया गया है। बारिश और हिमपात से जोशीमठ में खतरनाक बन चुके मकान और होटलों पर संकट गहरा सकता है। जोशीमठ के पास औली में भी काफी बर्फ गिरने की जानकारी मिली है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले कुछ दिन जोशीमठ और आसपास बर्फबारी और बारिश के पूरे आसार हैं। ऐसे में उत्तराखंड सरकार और चमोली जिले का प्रशासन हर हाल में प्रभावितों को सुरक्षित जगह ले जाना चाहता है। कनवरीगंज के लोगों का कहना है कि नींव में पानी जाने की वजह से ही उनके मकानों की छतों और दीवारों पर दरारें पड़ रही हैं। इस समस्या से 20 से ज्यादा परिवार परेशान हैं। लोगों का कहना है कि रात में दरारें पड़ती हैं और चटकन की तेज आवाजें आती हैं। इससे उनकी रातों की नींद उड़ गई है। जोशीमठ में अब तक 723 मकानों में बड़ी दरारें आ चुकी हैं। यहां से 131 परिवारों को सुरक्षित जगह ले जाया गया है। बाकी परिवारों को भी हटाने की तैयारी है। प्रशासन सभी लोगों को समझा-बुझा रहा है, लेकिन लोग अपना आशियाना उजड़ते देखकर बहुत दुखी हैं। कई परिवारों के यहां खेत हैं। उत्तराखंड सरकार जोशीमठ के डेंजर जोन से हर एक आदमी को हटाना चाहती है। उसका इरादा पहले लोगों की जान बचाना है। मंगलवार तक जोशीमठ से 131 परिवारों को सुरक्षित जगह ले जाया गया था। और भी परिवारों को शिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है। सरकार ने इनको बेहतर जगह पुनर्वास कराने का वादा किया है। Joshimath Sinking: हालांकि, सीएम धामी दौरे के दौरान स्पष्ट कर चुके थे कि जिले से पलायन करने वाले सभी लोगों को किराए के मकान में रहने के लिए चार हजार रुपए प्रतिमाह दिया जाएगा। लेकिन मीडिया से मुखातिब होने के क्रम में अधिकांश लोगों का कहना है कि सरकार जहां हमें भेज रही है। उत्तराखंड के जोशीमठ में खतरनाक मकान और 2 होटलों को गिराने की कवायद चल रही है। पहले दो होटल माउंट व्यू और मलारी इन को गिराया जा रहा है। मकानों का नंबर इसके बाद आएगा। अब तक 678 घरों में गहरी और चौड़ी दरारों का पता चला है। ये सारे मकान और दोनों होटल खतरनाक घोषित किए गए हैं। जोशीमठ के खतरनाक मकानों को गिराने का सुझाव राज्य सरकार की एक कमेटी ने जांच-पड़ताल के बाद दिया है। इस कमेटी ने शनिवार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। रिपोर्ट में बताया गया है कि जोशीमठ में पहले से ही काफी मलबा था। उसी मलबे पर लोगों ने मकान और होटल वगैरा बना लिए। Uttarakhand: टिहरी झील के पास के गांव के लोगों में इस वक्त दहशत में है। टिहरी झील से सटे भटकंडा गांव में घरों की दीवारों में दरारें देखी गई है। इसके अलावा सड़कों में भी दरार नजर आ रही है। स्थानीय लोग दहशत में टूटे घरों में रहने को मजबूर है। टिहरी झील के पानी के उतार-चढ़ाव के चलते यहां पर लगातार भूस्खलन हो रहा है।
फ्लोर दर फ्लोर दर होटल को ढहाया जाएगा। होटल से सभी कीमती सामानों को हटाया जा चुका है, ताकि किसी को कोई नुकसान ना पहुंचे। होटल गिराने से पहले लोगों ने अपना आक्रोश जाहिर कर प्रदर्शन किया था, लेकिन प्रशासन द्वारा बाद में प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की गई। Joshimath: उत्तराखंड के जोशीमठ में अब तक आम लोगों के घरों में टूट का खतरा बना हुआ था लेकिन अब सेना के कुछ बैरकों में दरार आ गई है। मामले सामने आने के बाद कुछ जवानों को ऊपर के दूसरे बैरक में शिफ्ट किया गया है। बारिश और हिमपात से जोशीमठ में खतरनाक बन चुके मकान और होटलों पर संकट गहरा सकता है। जोशीमठ के पास औली में भी काफी बर्फ गिरने की जानकारी मिली है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले कुछ दिन जोशीमठ और आसपास बर्फबारी और बारिश के पूरे आसार हैं। ऐसे में उत्तराखंड सरकार और चमोली जिले का प्रशासन हर हाल में प्रभावितों को सुरक्षित जगह ले जाना चाहता है। कनवरीगंज के लोगों का कहना है कि नींव में पानी जाने की वजह से ही उनके मकानों की छतों और दीवारों पर दरारें पड़ रही हैं। इस समस्या से बीस से ज्यादा परिवार परेशान हैं। लोगों का कहना है कि रात में दरारें पड़ती हैं और चटकन की तेज आवाजें आती हैं। इससे उनकी रातों की नींद उड़ गई है। जोशीमठ में अब तक सात सौ तेईस मकानों में बड़ी दरारें आ चुकी हैं। यहां से एक सौ इकतीस परिवारों को सुरक्षित जगह ले जाया गया है। बाकी परिवारों को भी हटाने की तैयारी है। प्रशासन सभी लोगों को समझा-बुझा रहा है, लेकिन लोग अपना आशियाना उजड़ते देखकर बहुत दुखी हैं। कई परिवारों के यहां खेत हैं। उत्तराखंड सरकार जोशीमठ के डेंजर जोन से हर एक आदमी को हटाना चाहती है। उसका इरादा पहले लोगों की जान बचाना है। मंगलवार तक जोशीमठ से एक सौ इकतीस परिवारों को सुरक्षित जगह ले जाया गया था। और भी परिवारों को शिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है। सरकार ने इनको बेहतर जगह पुनर्वास कराने का वादा किया है। Joshimath Sinking: हालांकि, सीएम धामी दौरे के दौरान स्पष्ट कर चुके थे कि जिले से पलायन करने वाले सभी लोगों को किराए के मकान में रहने के लिए चार हजार रुपए प्रतिमाह दिया जाएगा। लेकिन मीडिया से मुखातिब होने के क्रम में अधिकांश लोगों का कहना है कि सरकार जहां हमें भेज रही है। उत्तराखंड के जोशीमठ में खतरनाक मकान और दो होटलों को गिराने की कवायद चल रही है। पहले दो होटल माउंट व्यू और मलारी इन को गिराया जा रहा है। मकानों का नंबर इसके बाद आएगा। अब तक छः सौ अठहत्तर घरों में गहरी और चौड़ी दरारों का पता चला है। ये सारे मकान और दोनों होटल खतरनाक घोषित किए गए हैं। जोशीमठ के खतरनाक मकानों को गिराने का सुझाव राज्य सरकार की एक कमेटी ने जांच-पड़ताल के बाद दिया है। इस कमेटी ने शनिवार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। रिपोर्ट में बताया गया है कि जोशीमठ में पहले से ही काफी मलबा था। उसी मलबे पर लोगों ने मकान और होटल वगैरा बना लिए। Uttarakhand: टिहरी झील के पास के गांव के लोगों में इस वक्त दहशत में है। टिहरी झील से सटे भटकंडा गांव में घरों की दीवारों में दरारें देखी गई है। इसके अलावा सड़कों में भी दरार नजर आ रही है। स्थानीय लोग दहशत में टूटे घरों में रहने को मजबूर है। टिहरी झील के पानी के उतार-चढ़ाव के चलते यहां पर लगातार भूस्खलन हो रहा है।
देशभर में ईद उल फितर का त्योहार और धूमधाम से मनाया जा रहा है। सुबह नमाज के लिए मस्जिदों में नमाजियों के भीड़ उमड़ पड़ी। मेरठ जनपद के दौराला में दौराला-लावड़ मार्ग पर जैनपुर गांव के सामने शनिवार देर रात कार-बाइक व साइकिल में टक्कर हो गई। टक्कर लगने से बाइक सवार युवक घायल हो गया। घायल को अस्पताल ले जाया गया लेकिन, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। थाना प्रभारी संजय कुमार शर्मा ने बताया कि थाना किला परीक्षितगढ़ के एंची खुर्द गांव निवासी 30 वर्षीय सुनील तोमर बाइक पर सवार होकर दौराला से लावड़ की ओर जा रहा था। जैसे ही वह जैनपुर गांव के पास पहुंचा तो उसकी बाइक व एक साइकिल में अज्ञात कार चालक ने टक्कर मार दी। हादसे में बाइक सवार और साइकिल सवार दिव्यांग युवक समौली निवासी गजराज घायल हो गए। घटना के बाद चालक कार लेकर भाग निकला। सूचना पर पहुंची ने घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया, जहां चिकित्सकों ने बाइक सवार सुनील तोमर को मृत घोषित कर दिया। मृतक के मोबाइल की मदद से पुलिस ने परिजनों को जानकारी दी। जानकारी मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। सूचना मिलने पर परिजन दौराला थाने पहुंचे। अभी घटना में कोई तहरीर नहीं दी गई है। सहारनपुर के छुटमलपुर में फतेहपुर कलसिया मार्ग पर अलग-अलग हुए सड़क हादसों में अज्ञात वाहनों की टक्कर से एक बाइक सवार की मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया। गंभीर घायल को जिला अस्पताल भर्ती कराया गया है, जबकि मृतक के शव का पंचनामा भर पोस्टमार्टम पर भेज दिया गया। फतेहपुर थाना क्षेत्र में पहला हादसा गांव मुस्तापुर के पास हुआ। छुटमलपुर की मुस्लिम कॉलोनी निवासी असलम (24) पुत्र सईद शनिवार शाम चार बजे अपनी बाइक से किसी काम से बेहट जा रहा था कि अज्ञात वाहन ने उसे टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल असलम को मुजफ्फराबाद चौकी पुलिस फतेहपुर सीएचसी लेकर पहुंची, जहां उसे मृत घोषित कर दिया। ईद के दिन युवक की मौत से परिजनों में कोहराम मच गया। युवक अविवाहित था। थानाध्यक्ष प्रमोद रावल ने बताया कि मृतक के शव का पंचनामा भर पोस्टमार्टम पर भेज दिया गया है। तहरीर मिलने पर रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। वहीं, दूसरा हादसा फतेहपुर कलसिया मार्ग पर मुजफ्फराबाद में हुआ। छुटमलपुर नगर पंचायत में सफाई कर्मचारी के तौर पर तैनात सुमित पुत्र मांगेराम बाइक से शाम साढे़ चार बजे अपने गांव भूलनी जा रहा था कि अज्ञात वाहन ने उसे टक्कर मार दी। दुर्घटना में सुमित गंभीर रूप से घायल हो गया। परिजन उसे लेकर फतेहपुर सीएचसी पहुंचे, जहां से गंभीर होने पर सुमित को जिला अस्पताल भेज दिया गया। मेरठ जनपद के दौराला में दादरी गांव के पास रेलवे ट्रेक पर शनिवार को एक महिला का शव पड़ा मिला। महिला की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हुई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शिनाख्त कराने का प्रयास किया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। दादरी चौकी इंचार्ज अरुण कुमार ने बताया कि शनिवार को दादरी रेलवे ट्रेक पर एक महिला का शव पड़ा होने की सूचना मिली। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर महिला के शव की शिनाख्त कराने का प्रयास किया। लेकिन, सफलता नहीं मिली। जिस पर पुलिस ने शव को मोर्चरी के लिए भेज दिया। पुलिस ने बताया कि महिला का शव क्षत-विक्षत हालत में था। महिला की उम्र लगभग 40 के आस पास है। सहारनपुर में अंबाला रोड स्थित ईदगाह में ईद की नमाज अदा करने के लिए मुस्लिम समाज के लोग पहुंचे। इस दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्थ रही। बागपत जनपद में ईदगाह में भीड़ बढ़ने पर पुलिस ने नमाज़ियों को अंदर जाने से रोका तो लोगो ने रोष जताया। पुलिस के साथ नोझोंक हुई। लोगो के बातचीत करने और शांति व्यवस्था बनाए रखने के आश्वासन के बाद ही सभी को अंदर जाने दिया गया। बिजनौर जनपद में चांदपुर ईदगाह पर मुस्लिम समाज के लोगों ने ईदगाह उल फितर की नमाज अदा की। सुरक्षा व्यवस्था की दृष्टि से सीओ, कोतवाली प्रभारी भारी पुलिस बल के साथ मौजूद रहे। मुजफ्फरनगर में ईदगाह में सवेरे 6:30 बजे ईद उल फितर की नमाज़ अमन और वतन की तरक्की व आपसी भाईचारे की दुआ के साथ मौलाना मुफ्ती खलीलुर रहमान ने अदा कराई । उन्होंने मुल्क की तरक्की के लिए सभी वर्गों व धर्मों के लोगों को साथ मिलकर भारत को मजबूत करने का आह्वान किया । उन्होंने गुजारिश की कि आज भी पिछड़े हुए मौहल्लों में और अच्छा करने की जरूरत है। इस मौके पर जिलाधिकारी अरविंद मलप्पा बंगारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजीव सुमन व अन्य अधिकारी तथा काजी तनवीर आलम, गौहर सिद्दीकी, मुफ्ती जुल्फिकार, मौलाना जाकिर, कुलन देवी आदि गणमान्य लोग ईदगाह पर मौजूद थे। मेरठ समेत पश्चिमी यूपी के विभिन्न जिलों में ईद की नमाज को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद की गई है जगह-जगह पुलिस फोर्स तैनात है। मेरठ में पुलिस प्रशासन के लाख मना करने पर भी लोगों ने सड़क पर नमाज पढ़ी। मेरठ के शाही ईदगाह के बाहर सड़क पर भारी संख्या में नमाजी एकत्र हो गए और सड़क पर ही नमाज अदा की। देशभर में ईद उल फितर का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है। मेरठ समेत पश्चिमी यूपी के विभिन्न जिलों में ईद की नमाज के लिए मस्जिदों में नमाजियों की भीड़ इकट्ठा हुई और लोगों ने अमन और चैन की दुआ मांगी। इस दौरान ईदगाहों और मस्जिदों के भीतर और बाहर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। वहीं मेरठ में पुलिस प्रशासन के मना करने के बावजूद लोगों ने सड़क पर नमाज पढ़ी। भारी संख्या में लोग मस्जिद के बाहर सड़क पर नमाज पढ़ते नजर आए। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर 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देशभर में ईद उल फितर का त्योहार और धूमधाम से मनाया जा रहा है। सुबह नमाज के लिए मस्जिदों में नमाजियों के भीड़ उमड़ पड़ी। मेरठ जनपद के दौराला में दौराला-लावड़ मार्ग पर जैनपुर गांव के सामने शनिवार देर रात कार-बाइक व साइकिल में टक्कर हो गई। टक्कर लगने से बाइक सवार युवक घायल हो गया। घायल को अस्पताल ले जाया गया लेकिन, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। थाना प्रभारी संजय कुमार शर्मा ने बताया कि थाना किला परीक्षितगढ़ के एंची खुर्द गांव निवासी तीस वर्षीय सुनील तोमर बाइक पर सवार होकर दौराला से लावड़ की ओर जा रहा था। जैसे ही वह जैनपुर गांव के पास पहुंचा तो उसकी बाइक व एक साइकिल में अज्ञात कार चालक ने टक्कर मार दी। हादसे में बाइक सवार और साइकिल सवार दिव्यांग युवक समौली निवासी गजराज घायल हो गए। घटना के बाद चालक कार लेकर भाग निकला। सूचना पर पहुंची ने घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया, जहां चिकित्सकों ने बाइक सवार सुनील तोमर को मृत घोषित कर दिया। मृतक के मोबाइल की मदद से पुलिस ने परिजनों को जानकारी दी। जानकारी मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। सूचना मिलने पर परिजन दौराला थाने पहुंचे। अभी घटना में कोई तहरीर नहीं दी गई है। सहारनपुर के छुटमलपुर में फतेहपुर कलसिया मार्ग पर अलग-अलग हुए सड़क हादसों में अज्ञात वाहनों की टक्कर से एक बाइक सवार की मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया। गंभीर घायल को जिला अस्पताल भर्ती कराया गया है, जबकि मृतक के शव का पंचनामा भर पोस्टमार्टम पर भेज दिया गया। फतेहपुर थाना क्षेत्र में पहला हादसा गांव मुस्तापुर के पास हुआ। छुटमलपुर की मुस्लिम कॉलोनी निवासी असलम पुत्र सईद शनिवार शाम चार बजे अपनी बाइक से किसी काम से बेहट जा रहा था कि अज्ञात वाहन ने उसे टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल असलम को मुजफ्फराबाद चौकी पुलिस फतेहपुर सीएचसी लेकर पहुंची, जहां उसे मृत घोषित कर दिया। ईद के दिन युवक की मौत से परिजनों में कोहराम मच गया। युवक अविवाहित था। थानाध्यक्ष प्रमोद रावल ने बताया कि मृतक के शव का पंचनामा भर पोस्टमार्टम पर भेज दिया गया है। तहरीर मिलने पर रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। वहीं, दूसरा हादसा फतेहपुर कलसिया मार्ग पर मुजफ्फराबाद में हुआ। छुटमलपुर नगर पंचायत में सफाई कर्मचारी के तौर पर तैनात सुमित पुत्र मांगेराम बाइक से शाम साढे़ चार बजे अपने गांव भूलनी जा रहा था कि अज्ञात वाहन ने उसे टक्कर मार दी। दुर्घटना में सुमित गंभीर रूप से घायल हो गया। परिजन उसे लेकर फतेहपुर सीएचसी पहुंचे, जहां से गंभीर होने पर सुमित को जिला अस्पताल भेज दिया गया। मेरठ जनपद के दौराला में दादरी गांव के पास रेलवे ट्रेक पर शनिवार को एक महिला का शव पड़ा मिला। महिला की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हुई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शिनाख्त कराने का प्रयास किया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। दादरी चौकी इंचार्ज अरुण कुमार ने बताया कि शनिवार को दादरी रेलवे ट्रेक पर एक महिला का शव पड़ा होने की सूचना मिली। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर महिला के शव की शिनाख्त कराने का प्रयास किया। लेकिन, सफलता नहीं मिली। जिस पर पुलिस ने शव को मोर्चरी के लिए भेज दिया। पुलिस ने बताया कि महिला का शव क्षत-विक्षत हालत में था। महिला की उम्र लगभग चालीस के आस पास है। सहारनपुर में अंबाला रोड स्थित ईदगाह में ईद की नमाज अदा करने के लिए मुस्लिम समाज के लोग पहुंचे। इस दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्थ रही। बागपत जनपद में ईदगाह में भीड़ बढ़ने पर पुलिस ने नमाज़ियों को अंदर जाने से रोका तो लोगो ने रोष जताया। पुलिस के साथ नोझोंक हुई। लोगो के बातचीत करने और शांति व्यवस्था बनाए रखने के आश्वासन के बाद ही सभी को अंदर जाने दिया गया। बिजनौर जनपद में चांदपुर ईदगाह पर मुस्लिम समाज के लोगों ने ईदगाह उल फितर की नमाज अदा की। सुरक्षा व्यवस्था की दृष्टि से सीओ, कोतवाली प्रभारी भारी पुलिस बल के साथ मौजूद रहे। मुजफ्फरनगर में ईदगाह में सवेरे छः:तीस बजे ईद उल फितर की नमाज़ अमन और वतन की तरक्की व आपसी भाईचारे की दुआ के साथ मौलाना मुफ्ती खलीलुर रहमान ने अदा कराई । उन्होंने मुल्क की तरक्की के लिए सभी वर्गों व धर्मों के लोगों को साथ मिलकर भारत को मजबूत करने का आह्वान किया । उन्होंने गुजारिश की कि आज भी पिछड़े हुए मौहल्लों में और अच्छा करने की जरूरत है। इस मौके पर जिलाधिकारी अरविंद मलप्पा बंगारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजीव सुमन व अन्य अधिकारी तथा काजी तनवीर आलम, गौहर सिद्दीकी, मुफ्ती जुल्फिकार, मौलाना जाकिर, कुलन देवी आदि गणमान्य लोग ईदगाह पर मौजूद थे। मेरठ समेत पश्चिमी यूपी के विभिन्न जिलों में ईद की नमाज को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद की गई है जगह-जगह पुलिस फोर्स तैनात है। मेरठ में पुलिस प्रशासन के लाख मना करने पर भी लोगों ने सड़क पर नमाज पढ़ी। मेरठ के शाही ईदगाह के बाहर सड़क पर भारी संख्या में नमाजी एकत्र हो गए और सड़क पर ही नमाज अदा की। देशभर में ईद उल फितर का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है। मेरठ समेत पश्चिमी यूपी के विभिन्न जिलों में ईद की नमाज के लिए मस्जिदों में नमाजियों की भीड़ इकट्ठा हुई और लोगों ने अमन और चैन की दुआ मांगी। इस दौरान ईदगाहों और मस्जिदों के भीतर और बाहर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। वहीं मेरठ में पुलिस प्रशासन के मना करने के बावजूद लोगों ने सड़क पर नमाज पढ़ी। भारी संख्या में लोग मस्जिद के बाहर सड़क पर नमाज पढ़ते नजर आए। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड 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रामानुजगंज,21 फरवरी। विजय नगर चौकी अंतर्गत ग्राम भाला के अधेड़ व्यक्ति की नीयत मुर्गा लेने के दौरान अकेली नाबालिग को देखकर खराब हो गई एवं अधेड़ के द्वारा नाबालिग से छेडख़ानी कर दी गई। पुलिस ने मामले मे पॉक्सो एवं छेड़छाड़ के तहत मामला पंजीबद्ध कर लिया गया। पुलिस के अनुसार ग्राम भाला के मुनेश्वर गुप्ता (58 वर्ष) मुर्गा लेने गया था। इसी दौरान घर में नाबालिग युवती घर में अकेली थी, भाई उसका खेलने गया था, वहीं पिता भी मौके पर नहीं थे। मुनेश्वर ने जब मुर्गा दिखाने के लिए बोला तो नाबालिग बोली कि घर के अंदर बंधा है आकर देख लीजिए। नाबालिग के पीछे-पीछे मुनेश्वर गया एवं पीछे से उसको पकड़ कर जबरदस्ती करने की कोशिश करने लगा, जिसके बाद वहीं खेल रहा उसका भाई आया तो वह वहां से भाग गया। परिजनों के द्वारा विजय नगर चौकी में अपराध पंजीबद्ध कराया गया है।
रामानुजगंज,इक्कीस फरवरी। विजय नगर चौकी अंतर्गत ग्राम भाला के अधेड़ व्यक्ति की नीयत मुर्गा लेने के दौरान अकेली नाबालिग को देखकर खराब हो गई एवं अधेड़ के द्वारा नाबालिग से छेडख़ानी कर दी गई। पुलिस ने मामले मे पॉक्सो एवं छेड़छाड़ के तहत मामला पंजीबद्ध कर लिया गया। पुलिस के अनुसार ग्राम भाला के मुनेश्वर गुप्ता मुर्गा लेने गया था। इसी दौरान घर में नाबालिग युवती घर में अकेली थी, भाई उसका खेलने गया था, वहीं पिता भी मौके पर नहीं थे। मुनेश्वर ने जब मुर्गा दिखाने के लिए बोला तो नाबालिग बोली कि घर के अंदर बंधा है आकर देख लीजिए। नाबालिग के पीछे-पीछे मुनेश्वर गया एवं पीछे से उसको पकड़ कर जबरदस्ती करने की कोशिश करने लगा, जिसके बाद वहीं खेल रहा उसका भाई आया तो वह वहां से भाग गया। परिजनों के द्वारा विजय नगर चौकी में अपराध पंजीबद्ध कराया गया है।
Mulayam Singh Yadav Dies: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के सरंक्षक मुलायम सिंह यादव का निधन हो गया है. उन्होंने 82 साल की उम्र में गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में आज (10 अक्टूबर) सुबह 8:16 बजे आखिरी सांस ली. मुलायम सिंह यादव को 22 अगस्त को सांस लेने में तकलीफ और लो ब्लड प्रेशर की शिकायत के बाद मेदांता अस्पताल (Medanta Hospital) में भर्ती कराया गया था, हालांकि उनकी तबीयत में सुधार नहीं हो रहा था और 1 अक्टूबर की रात को आईसीयू में शिफ्ट किया गया था, जहां एक डॉक्टरो का पैनल उनका इलाज कर रहा था. मुलायम सिंह यादव अगस्त महीने से ही मेदांता हॉस्पिटल में भर्ती थे। बीते रविवार से उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई. उनके बेटे और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव समेत सभी रिश्तेदार देखभाल कर रहे थे. मुलायम सिंह को देखने के लिए यूपी के विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया भी रविवार को मेदांता पहुंचे थे. राजा भैया ने अखिलेश से बातचीत के दौरान हौसला बंधाया और कहा कि नेताजी (मुलायम) ही राजनीति में उनके गुरु हैं. इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और बिहार के सीएम नीतीश कुमार समेत कई नेता मुलायम का हालचाल लेने हॉस्पिटल पहुंचे थे. मुलायम सिंह यूपी के कद्दावर नेताओं में गिने जाते थे. वो 3 बार यूपी के सीएम रहे हैं. चौधरी चरण सिंह की यूपी में बनी सरकार में मंत्री रहे. इसके अलावा वो केंद्र में रक्षा मंत्री भी रह चुके हैं. मुलायम सिंह यादव ने बीएसपी के साथ मिलकर भी यूपी में सरकार चलाई थी. साल 2012 में सपा के विधानसभा चुनाव जीतने के बाद उन्होंने खुद सीएम न बनते हुए बेटे अखिलेश यादव को यूपी में सत्ता की बागडोर सौंपी थी. मुलायम सिंह यादव पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ भारत की एकजुटता के बड़े पक्षधर रहे हैं. हालांकि, उनके सीएम रहते 1990 में अयोध्या में कारसेवकों पर फायरिंग और 1994 में उत्तराखंड आंदोलनकारियों के साथ रामपुर तिराहा कांड भी हुआ. ( देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं. ) This website uses cookies.
Mulayam Singh Yadav Dies: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के सरंक्षक मुलायम सिंह यादव का निधन हो गया है. उन्होंने बयासी साल की उम्र में गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में आज सुबह आठ:सोलह बजे आखिरी सांस ली. मुलायम सिंह यादव को बाईस अगस्त को सांस लेने में तकलीफ और लो ब्लड प्रेशर की शिकायत के बाद मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था, हालांकि उनकी तबीयत में सुधार नहीं हो रहा था और एक अक्टूबर की रात को आईसीयू में शिफ्ट किया गया था, जहां एक डॉक्टरो का पैनल उनका इलाज कर रहा था. मुलायम सिंह यादव अगस्त महीने से ही मेदांता हॉस्पिटल में भर्ती थे। बीते रविवार से उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई. उनके बेटे और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव समेत सभी रिश्तेदार देखभाल कर रहे थे. मुलायम सिंह को देखने के लिए यूपी के विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया भी रविवार को मेदांता पहुंचे थे. राजा भैया ने अखिलेश से बातचीत के दौरान हौसला बंधाया और कहा कि नेताजी ही राजनीति में उनके गुरु हैं. इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और बिहार के सीएम नीतीश कुमार समेत कई नेता मुलायम का हालचाल लेने हॉस्पिटल पहुंचे थे. मुलायम सिंह यूपी के कद्दावर नेताओं में गिने जाते थे. वो तीन बार यूपी के सीएम रहे हैं. चौधरी चरण सिंह की यूपी में बनी सरकार में मंत्री रहे. इसके अलावा वो केंद्र में रक्षा मंत्री भी रह चुके हैं. मुलायम सिंह यादव ने बीएसपी के साथ मिलकर भी यूपी में सरकार चलाई थी. साल दो हज़ार बारह में सपा के विधानसभा चुनाव जीतने के बाद उन्होंने खुद सीएम न बनते हुए बेटे अखिलेश यादव को यूपी में सत्ता की बागडोर सौंपी थी. मुलायम सिंह यादव पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ भारत की एकजुटता के बड़े पक्षधर रहे हैं. हालांकि, उनके सीएम रहते एक हज़ार नौ सौ नब्बे में अयोध्या में कारसेवकों पर फायरिंग और एक हज़ार नौ सौ चौरानवे में उत्तराखंड आंदोलनकारियों के साथ रामपुर तिराहा कांड भी हुआ. This website uses cookies.
बॉलीवुड दीवा मलाइका अरोड़ा अक्सर किसी ना किसी वजह से लाइमलाइट में बनी रहती हैं। खासकर मलाइका अपनी जिम वाले वीडियोज और फोटोज की वजह से सुर्खियों में बनी रहती हैं। अदाकारा अपने बोल्ड और ग्लैमरस लुक के अलावा अपनी वॉक को लेकर ट्रोलिंग का शिकार होती रहती हैं। वही अब तो मलाइका की चाल के चर्चे फिल्म फेयर अवॉर्ड्स में भी होने लगे हैं। इतना ही नहीं शो के होस्ट मनीष पॉल ने तो एक्ट्रेस की चाल की नकल भी उतारी। जिसे देखकर वहां मौजूद हर सेलेब्स की हंसी छूट गई। मनीष की बात सुनकर मलाइका भी हंसने लगती हैं फिर मनीष आगे सवाल पूछते है कि मलाइका आपने कभी गॉल्फ खेला है? इसपर एक्ट्रेस कहती हैं- नहीं मैंने गॉल्फ कभी नहीं खेला। मनीष तुरंत कहते हैं, 'ओह कितना अनलकी है गॉल्फ, जिसे आपने नहीं खेला। कब से वेट कर रहा है वो ग्राउंड्स जिसपर आप चल के आएं। ' इसी के साथ मनीष वैसी ही चाल के साथ तेजी से चलते हैं जैसा मलाइका चलती हैं। यह देखकर सभी हंस पड़ते हैं। वहां बैठ सभी सेलेब्स मनीष की चाल देखकर हंसने लगते है जिसके बाद मलाइका कहती है कि फिर से दिखाइए। इसके बाद मनीष फिर एक्ट्रेस से कहते हैं, 'आप पिलाटे जाती हैं, हम तो वहीं बाहर ही खड़े रहते हैं। वहां डॉग्स इतने खुश होते रहते हैं, आप उन्हें पू पू करती हैं और हममें क्या फंगल लगी है, एक बार हमें भी यूं कर दो आप। ' मनीष की इन बातों को सुनकर मलाइका भी शरमा जाती हैं और वहां मौजूद सभी सितारे जोर-जोर से हंसने लगते हैं।
बॉलीवुड दीवा मलाइका अरोड़ा अक्सर किसी ना किसी वजह से लाइमलाइट में बनी रहती हैं। खासकर मलाइका अपनी जिम वाले वीडियोज और फोटोज की वजह से सुर्खियों में बनी रहती हैं। अदाकारा अपने बोल्ड और ग्लैमरस लुक के अलावा अपनी वॉक को लेकर ट्रोलिंग का शिकार होती रहती हैं। वही अब तो मलाइका की चाल के चर्चे फिल्म फेयर अवॉर्ड्स में भी होने लगे हैं। इतना ही नहीं शो के होस्ट मनीष पॉल ने तो एक्ट्रेस की चाल की नकल भी उतारी। जिसे देखकर वहां मौजूद हर सेलेब्स की हंसी छूट गई। मनीष की बात सुनकर मलाइका भी हंसने लगती हैं फिर मनीष आगे सवाल पूछते है कि मलाइका आपने कभी गॉल्फ खेला है? इसपर एक्ट्रेस कहती हैं- नहीं मैंने गॉल्फ कभी नहीं खेला। मनीष तुरंत कहते हैं, 'ओह कितना अनलकी है गॉल्फ, जिसे आपने नहीं खेला। कब से वेट कर रहा है वो ग्राउंड्स जिसपर आप चल के आएं। ' इसी के साथ मनीष वैसी ही चाल के साथ तेजी से चलते हैं जैसा मलाइका चलती हैं। यह देखकर सभी हंस पड़ते हैं। वहां बैठ सभी सेलेब्स मनीष की चाल देखकर हंसने लगते है जिसके बाद मलाइका कहती है कि फिर से दिखाइए। इसके बाद मनीष फिर एक्ट्रेस से कहते हैं, 'आप पिलाटे जाती हैं, हम तो वहीं बाहर ही खड़े रहते हैं। वहां डॉग्स इतने खुश होते रहते हैं, आप उन्हें पू पू करती हैं और हममें क्या फंगल लगी है, एक बार हमें भी यूं कर दो आप। ' मनीष की इन बातों को सुनकर मलाइका भी शरमा जाती हैं और वहां मौजूद सभी सितारे जोर-जोर से हंसने लगते हैं।
विकास एआई द्वारा संचालित संक्षिप्त सारांश के लिए 'सारांश सामग्री' पर क्लिक करें। देश की विभिन्न मृदाओं और फसलों में बोरॉन की कमी देखी जा रही है जिससे फसलोत्पादन सीमित हो रहा है। पत्तियों पर बोरॉन के प्रयोग से कद्दू वर्गीय फसलों में बेल के विकास, फलों के आकार, संख्या और फसल में वृद्धि होती है। इससे पहले, झारखण्ड के रांची में खीरे (कुकुमिस सैटिवस एल.) की पत्तियों पर बोरिक अम्ल 25 पीपीएम के तीन छिड़काव के प्रभाव का अवलोकन किया गया। ऐसा पाया गया कि जिन बेलों पर बोरिक अम्ल का छिड़काव किया गया था उनमें फलों की वृद्धि 10.5 प्रति बेल से 12.2 हो गई साथ ही, फलों का औसत भार भी 368 ग्राम से बढ़कर 412 ग्राम हो गया। जिस क्षेत्र में बोरिक अम्ल का छिड़काव नहीं किया गया था उसकी उपज 48.6 टन प्रति हैक्टर के मुकाबले छिड़काव किए गए क्षेत्र में फसल उत्पादन बढ़कर 62.5 टन प्रति हैक्टर हो गया। हेसराघट्टा में गोपालपुर के श्री उमेश ने बंगलूरू की परिस्थितियों में वर्ष 2008 में लौकी और वर्ष 2009 में कद्दू पर इस तकनीक का प्रयोग किया। बोरॉन के अवशोषण को बढ़ाने के लिए घोल में 0.5 प्रतिशत यूरिया भी मिलाया गया। प्रत्येक फसल में बोरिक अम्ल और यूरिया पर 50 रुपये प्रति हैक्टर की दर से व्यय करने पर इस प्रगतिशील किसान ने कुल उत्पादन में 28 से 36 प्रतिशत तक की वृद्धि प्राप्त की। वर्तमान में, मुथकूर के श्री भद्रदेव कुमार ने पत्तियों पर एक प्रतिशत यूरिया के साथ 25 पीपीएम बोरिक अम्ल का प्रयोग किया। उन्होंने पत्तियों के आठ चरणों (बोने के 25 दिन बाद से फूल आने तक (45 दिन) में तीन बार मिश्रण का छिड़काव किया। इस प्रयोग से श्री कुमार को लौकी की फसल में औसतन प्रति बेल 1.8 से 2.9 फल की तथा भार में 3.9 किग्रा. से 5.8 किग्रा. प्रति फल की दर से वृद्धि प्राप्त हुई। इस तकनीक के प्रयोग से श्री कुमार को संभावित 56 टन प्रति हैक्टर (23 हैक्टर कंट्रोल) के उत्पादन के स्थान पर 49 टन प्रति हैक्टर फसल प्राप्त हुई। भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान (आईआईएचआर) के खेतों पर उगाई जा रही आर्का बहार लौकी में इस प्रयोग से प्रति बेल फलों में 2.14 से 3.00 की वृद्धि तथा फलों के भार में 880 ग्राम के स्थान पर 950 ग्राम तक की वृद्धि हुई। इस प्रयोग से लौकी के उत्पादन में 50 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हुई। इन दो कारणों से किसानों को भरपूर उपज प्राप्त हुई। इस प्रयोग में घोल बनाने के लिए के लिए बोरिक अम्ल (17% बी) के स्थान पर बोरैक्स (11% बी) अथवा सोल्यूबोर (20% बी) का भी प्रयोग किया जा सकता है। घोल में 1 प्रतिशत की सान्द्रता से यूरिया मिलाने पर इसका पत्तियों पर बेहतर अवशोषण होता है। यह तकनीक कम लागत वाली है और बोरॉन की कमी वाले क्षेत्रों में इसे कद्दू वर्गीय फसलों पर प्रयोग किया जा सकता है। ( यदि आपके पास उपरोक्त सामग्री पर कोई टिप्पणी / सुझाव हैं, तो कृपया उन्हें यहां पोस्ट करें)
विकास एआई द्वारा संचालित संक्षिप्त सारांश के लिए 'सारांश सामग्री' पर क्लिक करें। देश की विभिन्न मृदाओं और फसलों में बोरॉन की कमी देखी जा रही है जिससे फसलोत्पादन सीमित हो रहा है। पत्तियों पर बोरॉन के प्रयोग से कद्दू वर्गीय फसलों में बेल के विकास, फलों के आकार, संख्या और फसल में वृद्धि होती है। इससे पहले, झारखण्ड के रांची में खीरे की पत्तियों पर बोरिक अम्ल पच्चीस पीपीएम के तीन छिड़काव के प्रभाव का अवलोकन किया गया। ऐसा पाया गया कि जिन बेलों पर बोरिक अम्ल का छिड़काव किया गया था उनमें फलों की वृद्धि दस.पाँच प्रति बेल से बारह.दो हो गई साथ ही, फलों का औसत भार भी तीन सौ अड़सठ ग्राम से बढ़कर चार सौ बारह ग्राम हो गया। जिस क्षेत्र में बोरिक अम्ल का छिड़काव नहीं किया गया था उसकी उपज अड़तालीस दशमलव छः टन प्रति हैक्टर के मुकाबले छिड़काव किए गए क्षेत्र में फसल उत्पादन बढ़कर बासठ दशमलव पाँच टन प्रति हैक्टर हो गया। हेसराघट्टा में गोपालपुर के श्री उमेश ने बंगलूरू की परिस्थितियों में वर्ष दो हज़ार आठ में लौकी और वर्ष दो हज़ार नौ में कद्दू पर इस तकनीक का प्रयोग किया। बोरॉन के अवशोषण को बढ़ाने के लिए घोल में शून्य.पाँच प्रतिशत यूरिया भी मिलाया गया। प्रत्येक फसल में बोरिक अम्ल और यूरिया पर पचास रुपयापये प्रति हैक्टर की दर से व्यय करने पर इस प्रगतिशील किसान ने कुल उत्पादन में अट्ठाईस से छत्तीस प्रतिशत तक की वृद्धि प्राप्त की। वर्तमान में, मुथकूर के श्री भद्रदेव कुमार ने पत्तियों पर एक प्रतिशत यूरिया के साथ पच्चीस पीपीएम बोरिक अम्ल का प्रयोग किया। उन्होंने पत्तियों के आठ चरणों में तीन बार मिश्रण का छिड़काव किया। इस प्रयोग से श्री कुमार को लौकी की फसल में औसतन प्रति बेल एक.आठ से दो.नौ फल की तथा भार में तीन.नौ किग्रा. से पाँच.आठ किग्रा. प्रति फल की दर से वृद्धि प्राप्त हुई। इस तकनीक के प्रयोग से श्री कुमार को संभावित छप्पन टन प्रति हैक्टर के उत्पादन के स्थान पर उनचास टन प्रति हैक्टर फसल प्राप्त हुई। भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान के खेतों पर उगाई जा रही आर्का बहार लौकी में इस प्रयोग से प्रति बेल फलों में दो.चौदह से तीन.शून्य की वृद्धि तथा फलों के भार में आठ सौ अस्सी ग्राम के स्थान पर नौ सौ पचास ग्राम तक की वृद्धि हुई। इस प्रयोग से लौकी के उत्पादन में पचास प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हुई। इन दो कारणों से किसानों को भरपूर उपज प्राप्त हुई। इस प्रयोग में घोल बनाने के लिए के लिए बोरिक अम्ल के स्थान पर बोरैक्स अथवा सोल्यूबोर का भी प्रयोग किया जा सकता है। घोल में एक प्रतिशत की सान्द्रता से यूरिया मिलाने पर इसका पत्तियों पर बेहतर अवशोषण होता है। यह तकनीक कम लागत वाली है और बोरॉन की कमी वाले क्षेत्रों में इसे कद्दू वर्गीय फसलों पर प्रयोग किया जा सकता है।
बिहार के मुजफ्फरपुर में एक पोस्टर लगाया गया है। इस पोस्टर को खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताने वाले तमन्ना हाशमी के नाम के शख्स ने मुजफ्फरपुर में पोस्टर लगाए हैं। जिसमें लिखा है, "नेती प्रतिपक्ष श्री तेजस्वी यादव जी को ढूंढकर लाने वाले को 5100 रुपए का नकद ईनाम। लोकसभा चुनाव के बाद से बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव सार्वजनिक तौर पर नजर नहीं आ रहे हैं। उनके अपने दल के नेताओं को भी नहीं पता है कि तेजस्वी कहां हैं। उनके लापता होने पर अब विपक्ष भी सवाल उठाने लगा है। वहीं मुजफ्फरपुर में उनके लापता होने के होर्डिंग्स और पोस्टर लगे हैं। जिस पर लिखा है कि तेजस्वी यादव को ढूंढ कर लाने वाले को 5100 रुपए का ईनाम दिया जाएगा। बता दें कि बिहार विधानसभा में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव प्रतिपक्ष के नेता हैं। लेकिन सत्तापक्ष का आरोप है कि लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद और मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार से हुई मौतों के बाद वह राजनीति से गायब हैं। इस बीच उनकी ही पार्टी के नेता रघुवंश प्रसाद ने कहा कि शायद वो विदेश में क्रिकेट मैच देखने गए हों। इससे पहले आरजेडी के वरिष्ठ नेता भाई वीरेंद्र ने कहा था कि तेजस्वी की तबीयत अभी नासाज है इसलिए वे दिल्ली से नहीं आ सके हैं। यह पूछे जाने पर तेजस्वी की कितने दिनों से तबीयत खराब है, वीरेंद्र ने कहा था कि वह तारीख नहीं बता सकते पर उनकी तबीयत कुछ नासाज है।
बिहार के मुजफ्फरपुर में एक पोस्टर लगाया गया है। इस पोस्टर को खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताने वाले तमन्ना हाशमी के नाम के शख्स ने मुजफ्फरपुर में पोस्टर लगाए हैं। जिसमें लिखा है, "नेती प्रतिपक्ष श्री तेजस्वी यादव जी को ढूंढकर लाने वाले को पाँच हज़ार एक सौ रुपयापए का नकद ईनाम। लोकसभा चुनाव के बाद से बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव सार्वजनिक तौर पर नजर नहीं आ रहे हैं। उनके अपने दल के नेताओं को भी नहीं पता है कि तेजस्वी कहां हैं। उनके लापता होने पर अब विपक्ष भी सवाल उठाने लगा है। वहीं मुजफ्फरपुर में उनके लापता होने के होर्डिंग्स और पोस्टर लगे हैं। जिस पर लिखा है कि तेजस्वी यादव को ढूंढ कर लाने वाले को पाँच हज़ार एक सौ रुपयापए का ईनाम दिया जाएगा। बता दें कि बिहार विधानसभा में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव प्रतिपक्ष के नेता हैं। लेकिन सत्तापक्ष का आरोप है कि लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद और मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार से हुई मौतों के बाद वह राजनीति से गायब हैं। इस बीच उनकी ही पार्टी के नेता रघुवंश प्रसाद ने कहा कि शायद वो विदेश में क्रिकेट मैच देखने गए हों। इससे पहले आरजेडी के वरिष्ठ नेता भाई वीरेंद्र ने कहा था कि तेजस्वी की तबीयत अभी नासाज है इसलिए वे दिल्ली से नहीं आ सके हैं। यह पूछे जाने पर तेजस्वी की कितने दिनों से तबीयत खराब है, वीरेंद्र ने कहा था कि वह तारीख नहीं बता सकते पर उनकी तबीयत कुछ नासाज है।
ईस्टर्न कैरेबियन सुप्रीम कोर्ट में आज भगोड़ा हीरा व्यापारी मेहुल चोकसी पर सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हैबियस कॉर्पस याचिका की सुनवाई होने तक चोकसी को कहीं नहीं भेजा जाए। मामले की अगली सुनवाई 2 जून को होगी। Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.
ईस्टर्न कैरेबियन सुप्रीम कोर्ट में आज भगोड़ा हीरा व्यापारी मेहुल चोकसी पर सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हैबियस कॉर्पस याचिका की सुनवाई होने तक चोकसी को कहीं नहीं भेजा जाए। मामले की अगली सुनवाई दो जून को होगी। Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.
लॉकडाउन में सभी अपने घर में कुकिंग में कुछ नया करने की सोच रहे हैं और इसके लिए रोज नई Recipe ट्राई की जा रही हैं। इसलिए आज इस कड़ी में हम आपके लिए 'स्टफ्ड मूंग दाल एंड पोटैटो रोल' बनाने की Recipe लेकर आए हैं जो स्वाद के साथ सेहत भी दे। तो आइये जानते हैं इसकी Recipe के बारे में। हरी मूंग दाल - 1/2 कप (भीगी), दही - 2 टेबलस्पून, बेसन - 1 टेबलस्पून, हींग - एक चुटकी, बेकिंग पाउडर - एक चुटकी, नमक - स्वादानुसार। आलू - 1 कप(उबले हुए), तेल - 2 टीस्पून, जीरा - 1/2 टीस्पून, प्याज - 1/4 कप (बारीक), हरा धनिया, लाल मिर्च पाउडर - 1/2 टीस्पून, अमचूर पाउडर - 1 टीस्पून, तेल - आवश्यकतानुसार। मूंग दाल और दही को मिक्सर में डालकर बारीक पीस लें। फिर इसमें स्टफिंग के इंग्रेडिएंट्स को छोड़कर सभी इंग्रेडिएंट्स को डालकर अच्छे से मिक्स कर लें। स्टफिंग बनाने के लिए कड़ाही में तेल गरम करें और उसमें जीरा डालें, जब वह चटकने लगे तब उसमें प्याज और हरी मिर्च डालकर मीडियम फ्लेम पर एक मिनट तक भून लें। अब इसमें आलू और सभी मसाले डालकर मिक्स करें और बीच-बीच में हिलाते हुए दो मिनट तक पका लें। इसे चार पार्ट्स में बांट लें। अब नॉन-स्टिक तवे पर ब्रश से तेल लगाकर उसपर थोड़ा पानी छिड़ककर उसे गीले कपड़े से पोंछ दें। फिर मूंग दाल के बैटर को तवे पर डालकर गोल घुमाते हुए डोसे की तरह फैला दें। फिर इसके किनारों पर थोड़ा तेल डाल दें। फिर आलू के मिक्सचर के एक पार्ट को इसपर डालकर चारों ओर फैला दें और इसे रोल कर दें। अब इसे हल्का दबाते हुए दोनों ओर से गोल्डन ब्राउन होने तक सेंक लें। इसे प्लेट में निकालें और सर्व करें।
लॉकडाउन में सभी अपने घर में कुकिंग में कुछ नया करने की सोच रहे हैं और इसके लिए रोज नई Recipe ट्राई की जा रही हैं। इसलिए आज इस कड़ी में हम आपके लिए 'स्टफ्ड मूंग दाल एंड पोटैटो रोल' बनाने की Recipe लेकर आए हैं जो स्वाद के साथ सेहत भी दे। तो आइये जानते हैं इसकी Recipe के बारे में। हरी मूंग दाल - एक/दो कप , दही - दो टेबलस्पून, बेसन - एक टेबलस्पून, हींग - एक चुटकी, बेकिंग पाउडर - एक चुटकी, नमक - स्वादानुसार। आलू - एक कप, तेल - दो टीस्पून, जीरा - एक/दो टीस्पून, प्याज - एक/चार कप , हरा धनिया, लाल मिर्च पाउडर - एक/दो टीस्पून, अमचूर पाउडर - एक टीस्पून, तेल - आवश्यकतानुसार। मूंग दाल और दही को मिक्सर में डालकर बारीक पीस लें। फिर इसमें स्टफिंग के इंग्रेडिएंट्स को छोड़कर सभी इंग्रेडिएंट्स को डालकर अच्छे से मिक्स कर लें। स्टफिंग बनाने के लिए कड़ाही में तेल गरम करें और उसमें जीरा डालें, जब वह चटकने लगे तब उसमें प्याज और हरी मिर्च डालकर मीडियम फ्लेम पर एक मिनट तक भून लें। अब इसमें आलू और सभी मसाले डालकर मिक्स करें और बीच-बीच में हिलाते हुए दो मिनट तक पका लें। इसे चार पार्ट्स में बांट लें। अब नॉन-स्टिक तवे पर ब्रश से तेल लगाकर उसपर थोड़ा पानी छिड़ककर उसे गीले कपड़े से पोंछ दें। फिर मूंग दाल के बैटर को तवे पर डालकर गोल घुमाते हुए डोसे की तरह फैला दें। फिर इसके किनारों पर थोड़ा तेल डाल दें। फिर आलू के मिक्सचर के एक पार्ट को इसपर डालकर चारों ओर फैला दें और इसे रोल कर दें। अब इसे हल्का दबाते हुए दोनों ओर से गोल्डन ब्राउन होने तक सेंक लें। इसे प्लेट में निकालें और सर्व करें।
।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल (हे.) ।1 - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसे1950 ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा 117 - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ।1क(क) - रिक्त ( नदारद ) ।1-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ( नदारद ) ।2 - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।3 - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ( नदारद ) ।4 - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ 4 में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ( नदारद ) ।4-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -(क)जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ( नदारद ) ।4-क(ख) - अन्य भूमि । ( नदारद ) ।5-1 - कृषि योग्य भूमि - नई परती (परतीजदीद) ।5-2 - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती (परतीकदीम) ( नदारद ) ।5-3-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ( नदारद ) ।5-3-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ( नदारद ) ।5-3-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ( नदारद ) ।5-3-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ( नदारद ) ।5-3-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।5-क (क) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ( नदारद ) ।5-क (ख) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ( नदारद ) ।5-क (ग) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ( नदारद ) ।6-1 - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।6-2 - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।6-3 - कब्रिस्तान और श्मशान (मरघट) , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।6-4 - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल ।एक - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसेएक हज़ार नौ सौ पचास ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा एक सौ सत्रह - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ।एकक - रिक्त ।एक-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ।दो - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।तीन - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ।चार - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ चार में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ।चार-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ।चार-क - अन्य भूमि । ।पाँच-एक - कृषि योग्य भूमि - नई परती ।पाँच-दो - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती ।पाँच-तीन-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ।पाँच-तीन-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ।पाँच-तीन-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।पाँच-तीन-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ।पाँच-तीन-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ।छः-एक - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।छः-दो - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।छः-तीन - कब्रिस्तान और श्मशान , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।छः-चार - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
बीसीसीआई (BCCI) के शीर्ष अधिकारियों की बैठक मुंबई में होनी है, जिसमें कई अहम विषयों पर फैसले लिए जाने है। पूर्व भारतीय (India Cricket team) कप्तान और मौजूदा बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) का कार्यकाल समाप्त हो सकता है। पूर्व भारतीय ऑलराउंडर रोजर बिन्नी (Roger Binny) उनकी जगह लेने के सबसे मजबूत दावेदार बने हुए हैं। रोजर बिन्नी बीसीसीआई अध्यक्ष पद के दस्तावेज भरेंगे जबकि जय शाह का बीसीसीआई सचिव पद पर बने रहना तय है। आईपीएल में बदलाव होने की उम्मीद है। अरुण सिंह धूमल को आईपीएल का अगला चेयरमैन बनाया जा सकता है। अधिकारियों में एक और बड़ा बदलाव यह हो सकता है कि मुंबई में भाजपा के आशीष शेलर को कोषाध्यक्ष बनाया जा सकता है। वो जल्द ही दस्तावेज भरेंगे। राजीव शुक्ला उपाध्यक्ष पद पर बरकरार रहेंगे। केरल के जयेश जॉर्ज की जगह असम क्रिकेट एसोसिएशन के देवजित साइकिया को नया संयुक्त सचिव बनाया जा सकता है। आईपीएल गवर्निंग काउंसिल में बदलाव की उम्मीद थी क्योंकि ब्रजेश पटेल इस पद के लिए उम्र के मामले में योग्य नहीं बचे हैं। वो इस साल नवंबर में 70 साल के हो जाएंगे और पद की जिम्मेदारी नहीं ले सकते हैं। शुक्ला इस पद को पाना चाह रहे थे, जिसके कारण काफी खींचतान भी हुई। हालांकि, बीसीसीआई और भाजपा ने आश्चर्यजनक रूप से धूमल का नाम बढ़ाया, जो इस समय कोषाध्यक्ष पद पर हैं। सुप्रीम कोर्ट ने जब से सांसदों और विधायकों को राज्य व बीसीसीआई व्यवस्थाओं में पद हासिल करने की अनुमति दी तब से शेलर का नाम उठा। शेलर ने शुरूआत में संकेत दिए कि वो मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन में रुकेंगे और सोमवार को उन्होंने अध्यक्ष पद का नामांकन भरा। अब बीसीसीआई में उनकी एंट्री ने लोगों को आश्चर्य में डाल दिया है। हालांकि, नई व्यवस्था में सौरव गांगुली की गैरमौजूदगी कोई आश्चर्य की बात नहीं है। यह पहले से ही तय था कि अध्यक्ष के रूप में वह अपने पद पर जारी नहीं रहेंगे। हाल ही में दिल्ली की बैठक में खराब प्रदर्शन के लिए गांगुली की आलोचना हुई थी। अब यह देखना होगा कि गांगुली का नाम आईसीसी के लिए नामांकित किया जाएगा या नहीं, लेकिन इस समय तो ऐसा नजर नहीं आ रहा है।
बीसीसीआई के शीर्ष अधिकारियों की बैठक मुंबई में होनी है, जिसमें कई अहम विषयों पर फैसले लिए जाने है। पूर्व भारतीय कप्तान और मौजूदा बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली का कार्यकाल समाप्त हो सकता है। पूर्व भारतीय ऑलराउंडर रोजर बिन्नी उनकी जगह लेने के सबसे मजबूत दावेदार बने हुए हैं। रोजर बिन्नी बीसीसीआई अध्यक्ष पद के दस्तावेज भरेंगे जबकि जय शाह का बीसीसीआई सचिव पद पर बने रहना तय है। आईपीएल में बदलाव होने की उम्मीद है। अरुण सिंह धूमल को आईपीएल का अगला चेयरमैन बनाया जा सकता है। अधिकारियों में एक और बड़ा बदलाव यह हो सकता है कि मुंबई में भाजपा के आशीष शेलर को कोषाध्यक्ष बनाया जा सकता है। वो जल्द ही दस्तावेज भरेंगे। राजीव शुक्ला उपाध्यक्ष पद पर बरकरार रहेंगे। केरल के जयेश जॉर्ज की जगह असम क्रिकेट एसोसिएशन के देवजित साइकिया को नया संयुक्त सचिव बनाया जा सकता है। आईपीएल गवर्निंग काउंसिल में बदलाव की उम्मीद थी क्योंकि ब्रजेश पटेल इस पद के लिए उम्र के मामले में योग्य नहीं बचे हैं। वो इस साल नवंबर में सत्तर साल के हो जाएंगे और पद की जिम्मेदारी नहीं ले सकते हैं। शुक्ला इस पद को पाना चाह रहे थे, जिसके कारण काफी खींचतान भी हुई। हालांकि, बीसीसीआई और भाजपा ने आश्चर्यजनक रूप से धूमल का नाम बढ़ाया, जो इस समय कोषाध्यक्ष पद पर हैं। सुप्रीम कोर्ट ने जब से सांसदों और विधायकों को राज्य व बीसीसीआई व्यवस्थाओं में पद हासिल करने की अनुमति दी तब से शेलर का नाम उठा। शेलर ने शुरूआत में संकेत दिए कि वो मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन में रुकेंगे और सोमवार को उन्होंने अध्यक्ष पद का नामांकन भरा। अब बीसीसीआई में उनकी एंट्री ने लोगों को आश्चर्य में डाल दिया है। हालांकि, नई व्यवस्था में सौरव गांगुली की गैरमौजूदगी कोई आश्चर्य की बात नहीं है। यह पहले से ही तय था कि अध्यक्ष के रूप में वह अपने पद पर जारी नहीं रहेंगे। हाल ही में दिल्ली की बैठक में खराब प्रदर्शन के लिए गांगुली की आलोचना हुई थी। अब यह देखना होगा कि गांगुली का नाम आईसीसी के लिए नामांकित किया जाएगा या नहीं, लेकिन इस समय तो ऐसा नजर नहीं आ रहा है।
कहते हैं होनहार बिरवान के होत चिकने पात अर्थात जो पौधा आगे चलकर बड़ा वृक्ष होने वाला होता है छोटा होने पर भी उसके पत्तों में कुछ ना कुछ चिकनाई होती है इस बात को आज का आज के अभिमन्यु नाम से प्रसिद्ध मृगेंद्र राज ने साबित कर दिया है। महज 6 वर्ष की उम्र से लेखनी में पारंगत मृगेंद्र राज ने अब तक 136 किताबें लिखी हैं जिनमें रामायण के पात्रों पर आधारित 51 बायोग्राफी भी है। मृगेंद्र राज का जन्म 12 जून 2007 को फ़ैज़ाबाद वर्तमान जिला अयोध्या,उत्तर प्रदेश में हुआ था। मृगेंद्र राज अभी कक्षा सात के छात्र हैं। इनकी माता का नाम श्रीमती शक्ति पाण्डेय और पिता का नाम राजेश पाण्डेय है। मृगेंद्र राज की माँ एक निजी स्कूल में टीचर हैं और पिता उत्तर प्रदेश के गन्ना विभाग में कर्मचारी हैं। मृगेंद्र राज ने 12 वर्ष की आयु में कुल मिलाकर 78 बायोग्राफी के साथ 136 पुस्तकें लिखी हैं। कलम के नन्हें सिपाही को अनेक विषयों में रुचि है, जैसे, भारतीय संविधान, राज्य व्यवस्था, भूगोल, इतिहास आदि । मृगेंद्र टीवी चैनलों पर भी अनेक कार्यक्रम में सहभाग करते रहते हैं जिसमें वह अपने उत्कृष्ट काव्य को पढ़कर सबके मन को मोह लेते हैं। मृगेंद्र राज को अभी तक 100 से अधिक सम्मान दिया जा चुका है।साथ ही मृगेंद्र राज के नाम चार विश्व रिकॉर्ड दर्ज़ हैं। जिनमें पहला है 'यंगेस्ट पोएट ऑफ दि वर्ल्ड', दूसरा 'यंगेस्ट मल्टीडाइमेंशनल राइटर ऑफ दि वर्ल्ड', 'यंगेस्ट प्रोलोफिक राइटर ऑफ दि वर्ल्ड' और 'यंगेस्ट टू ऑथर मोस्ट बियोग्राफिज़ ऑफ दि वर्ल्ड' है। मृगेंद्र राज ने हमें बताया कि उनका पांचवा विश्व रिकॉर्ड जल्द ही पूरा होने वाला है। मृगेंद्र राज का नई पीढ़ी के नाम संदेश : रामायण के पात्रों पर किताब लिखने पर मृगेंद्र राज ने कहा कि मैंने रामायण के 51 पात्रों का विश्लेषण करने के बाद यह किताबें लिखी हैं। मेरी पुस्तकों के पृष्ठों की संख्या लगभग 25 से 100 पृष्ठों के बीच में है। 136 पुस्तकों में 78 बॉयोग्राफी के साथ,नदियों की दुर्दशा पर एक पुस्तक, संवेदना को झकझोरने वाले 2 उपन्यास, माँ पर एक पुस्तक, रामायण के पात्रों पर 51 पुस्तक , एक काव्य संग्रह ,एक पुस्तक गन्ने की खेती पर,एक पुस्तक कृषि विश्व विद्यालय पर आदि शामिल है। मृगेंद्र राज ने हमसे बातचीत के दौरान बताया कि उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर उन्होंने 2017 में एक किताब लिखी थी, जिसे वह उन्हें भेंट करना चाहते हैं।आपकी यह मनोकामना जल्द पूरी हो मृगेंद्र। मृगेंद्र राज, कविता लेखन में भी परांगत हैं, उनकी एक रचना प्रस्तुत हैः बच्चे को दो बूंद मिल जाये, वह खूब पढ़े, आगे बढ़े, माँ तब भी कहती है, जाओ बेटा कुछ खा पीकर, हे ऊपरवाले! मेरे बच्चे को सलामत रखना, लेकिन अब मुझे अपने पास बुला लो। मृगेंद्र राज ने यह सिद्ध कर दिखाया है कि परिस्थितियां परिवर्तनशील होती हैं, परिस्थितियों को जानने वाला अपरिवर्तनशील होता है।मृगेंद्र राज निश्चित ही एक सत चित्त आनन्द आत्मा है। एक दिन वह अपनी मेहनत से आगे चलकर साहित्य के फलक पर बहुत बड़ा नाम दर्ज करने वाला है।अभी हाल ही में मृगेंद्र को वर्ल्ड रिकॉर्ड यूनिवर्सिटी,लंदन से डॉक्टरेट करने के लिए आमंत्रित किया गया है। मृगेंद्र ऐसे ही विश्व पटल पर सफलताएं प्राप्त करते रहें। शुभकामनाएं।
कहते हैं होनहार बिरवान के होत चिकने पात अर्थात जो पौधा आगे चलकर बड़ा वृक्ष होने वाला होता है छोटा होने पर भी उसके पत्तों में कुछ ना कुछ चिकनाई होती है इस बात को आज का आज के अभिमन्यु नाम से प्रसिद्ध मृगेंद्र राज ने साबित कर दिया है। महज छः वर्ष की उम्र से लेखनी में पारंगत मृगेंद्र राज ने अब तक एक सौ छत्तीस किताबें लिखी हैं जिनमें रामायण के पात्रों पर आधारित इक्यावन बायोग्राफी भी है। मृगेंद्र राज का जन्म बारह जून दो हज़ार सात को फ़ैज़ाबाद वर्तमान जिला अयोध्या,उत्तर प्रदेश में हुआ था। मृगेंद्र राज अभी कक्षा सात के छात्र हैं। इनकी माता का नाम श्रीमती शक्ति पाण्डेय और पिता का नाम राजेश पाण्डेय है। मृगेंद्र राज की माँ एक निजी स्कूल में टीचर हैं और पिता उत्तर प्रदेश के गन्ना विभाग में कर्मचारी हैं। मृगेंद्र राज ने बारह वर्ष की आयु में कुल मिलाकर अठहत्तर बायोग्राफी के साथ एक सौ छत्तीस पुस्तकें लिखी हैं। कलम के नन्हें सिपाही को अनेक विषयों में रुचि है, जैसे, भारतीय संविधान, राज्य व्यवस्था, भूगोल, इतिहास आदि । मृगेंद्र टीवी चैनलों पर भी अनेक कार्यक्रम में सहभाग करते रहते हैं जिसमें वह अपने उत्कृष्ट काव्य को पढ़कर सबके मन को मोह लेते हैं। मृगेंद्र राज को अभी तक एक सौ से अधिक सम्मान दिया जा चुका है।साथ ही मृगेंद्र राज के नाम चार विश्व रिकॉर्ड दर्ज़ हैं। जिनमें पहला है 'यंगेस्ट पोएट ऑफ दि वर्ल्ड', दूसरा 'यंगेस्ट मल्टीडाइमेंशनल राइटर ऑफ दि वर्ल्ड', 'यंगेस्ट प्रोलोफिक राइटर ऑफ दि वर्ल्ड' और 'यंगेस्ट टू ऑथर मोस्ट बियोग्राफिज़ ऑफ दि वर्ल्ड' है। मृगेंद्र राज ने हमें बताया कि उनका पांचवा विश्व रिकॉर्ड जल्द ही पूरा होने वाला है। मृगेंद्र राज का नई पीढ़ी के नाम संदेश : रामायण के पात्रों पर किताब लिखने पर मृगेंद्र राज ने कहा कि मैंने रामायण के इक्यावन पात्रों का विश्लेषण करने के बाद यह किताबें लिखी हैं। मेरी पुस्तकों के पृष्ठों की संख्या लगभग पच्चीस से एक सौ पृष्ठों के बीच में है। एक सौ छत्तीस पुस्तकों में अठहत्तर बॉयोग्राफी के साथ,नदियों की दुर्दशा पर एक पुस्तक, संवेदना को झकझोरने वाले दो उपन्यास, माँ पर एक पुस्तक, रामायण के पात्रों पर इक्यावन पुस्तक , एक काव्य संग्रह ,एक पुस्तक गन्ने की खेती पर,एक पुस्तक कृषि विश्व विद्यालय पर आदि शामिल है। मृगेंद्र राज ने हमसे बातचीत के दौरान बताया कि उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर उन्होंने दो हज़ार सत्रह में एक किताब लिखी थी, जिसे वह उन्हें भेंट करना चाहते हैं।आपकी यह मनोकामना जल्द पूरी हो मृगेंद्र। मृगेंद्र राज, कविता लेखन में भी परांगत हैं, उनकी एक रचना प्रस्तुत हैः बच्चे को दो बूंद मिल जाये, वह खूब पढ़े, आगे बढ़े, माँ तब भी कहती है, जाओ बेटा कुछ खा पीकर, हे ऊपरवाले! मेरे बच्चे को सलामत रखना, लेकिन अब मुझे अपने पास बुला लो। मृगेंद्र राज ने यह सिद्ध कर दिखाया है कि परिस्थितियां परिवर्तनशील होती हैं, परिस्थितियों को जानने वाला अपरिवर्तनशील होता है।मृगेंद्र राज निश्चित ही एक सत चित्त आनन्द आत्मा है। एक दिन वह अपनी मेहनत से आगे चलकर साहित्य के फलक पर बहुत बड़ा नाम दर्ज करने वाला है।अभी हाल ही में मृगेंद्र को वर्ल्ड रिकॉर्ड यूनिवर्सिटी,लंदन से डॉक्टरेट करने के लिए आमंत्रित किया गया है। मृगेंद्र ऐसे ही विश्व पटल पर सफलताएं प्राप्त करते रहें। शुभकामनाएं।
सेवा केन्द्रो की उत्पत्ति एवं विकासात्मक प्रतिरूप [ ORIGIN AND DEVELOPMENTAL PATTERN ] पिछले अध्याय में ललितपुर जिले की भौगोलिक स्थिति एवं विस्तार, प्राकृतिक, आर्थिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक संरचना के सन्दर्भ में विस्तृत अध्ययन किया गया है । वस्तुतः किसी भी योजना के सफल अध्ययन के लिये प्रथमतः प्रादेशिक संरचना के सम्बन्ध में ज्ञान प्राप्त करना आवश्यक है । प्रस्तुत अध्याय में सेवा केन्द्रो की विभिन्न समयान्तरालों में उनकी उत्पत्ति एवं विकास के उपयुक्त कारणों एवं तथ्यों को जानने हेतु विविध सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राजनैतिक कारकों को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है । तदुपरान्त विश्लेषणात्मक अध्ययन की इस प्रक्रिया में सेवाकेन्द्रो का एक विकासात्मक प्रारूप भी निर्मित किया गया है जो अन्य क्षेत्रों के लिये एक आदर्श सिद्ध होना चाहिये । सेवाकेन्द्रो के विकास का विश्लेषण क्षेत्रीय विकास प्रक्रियाओं को जानने के लिये आवश्यक है । सेवाकेन्द्रों की उत्पत्ति एवं विकास हो जानना इतना कठिन है कि इस सम्बन्ध में कोई निश्चित कारक का प्रयोग नहीं किया जा सकता, जो समय-समय पर क्रियान्वित होते रहते । ग्राम्य अधिवासों की उत्पत्ति के सम्बन्ध में सर्तकता पूर्ण अन्वेषण की महती आवश्यकता है क्योंकि ग्राम्य अधिवास की वर्तमान संरचना एवं उसकी विशेषताओं को मिश्रित सांस् के ज्ञान के अभाव में जो उसकी (ग्रामीण बस्ती) उत्पत्ति से ही शुरू होता है, समझना कठिन है। इसके अतिरिक्त केन्द्रीय स्थानों के रूप में बस्तियों के विकास के लिये उत्तरदायी पारस्परिक कारणों के परीक्षण से सम्बन्धित साहित्य की भी कमी है वैसे इस सम्बन्ध में कुछ विद्वानों यथा दत्त, सिंह 3, अहमद, कुलश्रेष्ठ , जायसवाल, मिश्रा', कृष्णन, सिन्हा', हरप्रसाद'0, भट्टाचार्य'!, मिश्रा 12 एवं खान 3 ने अपने विचार एवं मत प्रस्तुत किये हैं । विधि तन्त्र अध्ययन क्षेत्र के अन्तर्गत सेवाकेन्द्रों की उत्पत्ति एवं विकास से सम्बन्धित साहित्य की यद्यपि अनुपलब्धता है फिर भी विभिन्न श्रोतो से ज्ञान अर्जित कर साहित्य निर्माण किया गया है । जिला गजेटियर झांसी 1965 तथा जिला ललितपुर मुख्यालय से प्राप्त पुराने एवं नवीन अभिलेखों के आधार पर ग्राम्य अधिवासों के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त हुई है । फलस्वरूप सेवा केन्द्रों की उत्पत्ति एवं विकास से सम्बन्धित प्रश्नावलियां तैयार कर विस्तृत क्षेत्रीय सर्वेक्षण किया गया तथा अनुभवी एवं बुजुर्ग व्यक्तियों से साक्षात्कार करके गांव के ऐतिहासिक विकास के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त की गई । इस अध्याय की पूर्ति में प्रधानतः क्षेत्रीय अध्ययन को महत्व दिया गया है ।
सेवा केन्द्रो की उत्पत्ति एवं विकासात्मक प्रतिरूप [ ORIGIN AND DEVELOPMENTAL PATTERN ] पिछले अध्याय में ललितपुर जिले की भौगोलिक स्थिति एवं विस्तार, प्राकृतिक, आर्थिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक संरचना के सन्दर्भ में विस्तृत अध्ययन किया गया है । वस्तुतः किसी भी योजना के सफल अध्ययन के लिये प्रथमतः प्रादेशिक संरचना के सम्बन्ध में ज्ञान प्राप्त करना आवश्यक है । प्रस्तुत अध्याय में सेवा केन्द्रो की विभिन्न समयान्तरालों में उनकी उत्पत्ति एवं विकास के उपयुक्त कारणों एवं तथ्यों को जानने हेतु विविध सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राजनैतिक कारकों को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है । तदुपरान्त विश्लेषणात्मक अध्ययन की इस प्रक्रिया में सेवाकेन्द्रो का एक विकासात्मक प्रारूप भी निर्मित किया गया है जो अन्य क्षेत्रों के लिये एक आदर्श सिद्ध होना चाहिये । सेवाकेन्द्रो के विकास का विश्लेषण क्षेत्रीय विकास प्रक्रियाओं को जानने के लिये आवश्यक है । सेवाकेन्द्रों की उत्पत्ति एवं विकास हो जानना इतना कठिन है कि इस सम्बन्ध में कोई निश्चित कारक का प्रयोग नहीं किया जा सकता, जो समय-समय पर क्रियान्वित होते रहते । ग्राम्य अधिवासों की उत्पत्ति के सम्बन्ध में सर्तकता पूर्ण अन्वेषण की महती आवश्यकता है क्योंकि ग्राम्य अधिवास की वर्तमान संरचना एवं उसकी विशेषताओं को मिश्रित सांस् के ज्ञान के अभाव में जो उसकी उत्पत्ति से ही शुरू होता है, समझना कठिन है। इसके अतिरिक्त केन्द्रीय स्थानों के रूप में बस्तियों के विकास के लिये उत्तरदायी पारस्परिक कारणों के परीक्षण से सम्बन्धित साहित्य की भी कमी है वैसे इस सम्बन्ध में कुछ विद्वानों यथा दत्त, सिंह तीन, अहमद, कुलश्रेष्ठ , जायसवाल, मिश्रा', कृष्णन, सिन्हा', हरप्रसाद'शून्य, भट्टाचार्य'!, मिश्रा बारह एवं खान तीन ने अपने विचार एवं मत प्रस्तुत किये हैं । विधि तन्त्र अध्ययन क्षेत्र के अन्तर्गत सेवाकेन्द्रों की उत्पत्ति एवं विकास से सम्बन्धित साहित्य की यद्यपि अनुपलब्धता है फिर भी विभिन्न श्रोतो से ज्ञान अर्जित कर साहित्य निर्माण किया गया है । जिला गजेटियर झांसी एक हज़ार नौ सौ पैंसठ तथा जिला ललितपुर मुख्यालय से प्राप्त पुराने एवं नवीन अभिलेखों के आधार पर ग्राम्य अधिवासों के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त हुई है । फलस्वरूप सेवा केन्द्रों की उत्पत्ति एवं विकास से सम्बन्धित प्रश्नावलियां तैयार कर विस्तृत क्षेत्रीय सर्वेक्षण किया गया तथा अनुभवी एवं बुजुर्ग व्यक्तियों से साक्षात्कार करके गांव के ऐतिहासिक विकास के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त की गई । इस अध्याय की पूर्ति में प्रधानतः क्षेत्रीय अध्ययन को महत्व दिया गया है ।
उत्तर प्रदेश में चुनावों के लिए वोट पड़ रहे हैं. पंजाब और गोवा के वोट पड़ चुके हैं. भारी संख्या में मतदान हुआ है. लोकतंत्र में लोगों का फैसला ही सर्वोपरी होता है, चाहे वो किसी की नज़र में सही हो, या किसी की नज़र में गलत हो. इस चुनाव में बहुत सारे अंतर्विरोध भी दिखाई दिए. हम आपको कुछ स्थितियां बताते हैं, ताकि आप खुद इस बात का फैसला कर सकें कि इन चुनावों में वोट पड़े हैं, तो फैसला किसके पक्ष में जाएगा. बात शुरू करने या स्थितियों का जायजा लेने से पहले हम आपको दो घटनाएं बताते हैं. एक घटना में नाम है, एक घटना में संकेत है. जिनमें संकेत हैं, उन्हें आप समझें कि उसके पात्र कौन-कौन हैं. देश की एक बहुत बड़ी अभिनेत्री अपने एक गहरे मित्र के साथ बैठी हुई थीं. दोनों की बातचीत राजनीतिज्ञों पर शुरू हुई, क्योंकि आजकल अभिनेत्री, अभिनेता और राजनेता न केवल हम प्याला-हम निवाला होते हैं, बल्कि अपनी परिधि और अपनी सीमाएं भी खुद बनाते हैं. इस अभिनेत्री ने अपने दोस्त से कहा कि चलो मैं तुम्हें एक खेल दिखाती हूं, जो रियल लाइफ ड्रामा है, पर शर्त ये है कि तुम चुप रहोगे. अगर सांस की आवाज भी फोन में आ गई, तो तुम्हारा सारा मजा किरकिरा हो जाएगा. उस दोस्त ने हामी भर दी. इस अभिनेत्री को यहां हम पीडी नाम देते हैं. पीडी ने देश के एक बड़े नेता को फोन मिलाया. ये नेता उत्तर प्रदेश के हैं और उत्तर प्रदेश के उन 8 बड़े नेताओं में शामिल हैं, जो मुख्यमंत्री की दौड़ में हैं. फोन पर इस नेता को जैसे ही पीडी की आवाज सुनाई दी, उन्होंने बहुत लरजते हुए स्वर में कहा कि आज तो मेरी शाम बन गई. लेकिन अगर आप मेरे पास होतीं, तो मैं बहुत सुकून से सोता. पीडी ने बहुत ही मधुर आवाज में इस नेता से बात की कि ऐसा क्या हो गया कि आपको मेरी आवाज से इतना सुकून हुआ. इस अंदाज में लगभग पांच मिनट तक फोन पर दोनों की बातचीत हुई. बातचीत खत्म होने के बाद पीडी का दोस्त थोड़ा भौचक्का था, क्योंकि पहले उसने पीडी से कहा था कि मुझे भरोसा ही नहीं होता कि तुम जो कह रही हो, वह सही है. इसका सबूत पीडी ने अपने दोस्त को दे दिया था, बातचीत करते हुए फोन को स्पीकर पर लगाकर. दोस्त ने कहा कि अब मुझे बताओ कि ये सब बात क्या है और कहां तक पहुंची है? पीडी ने पहले तो बताने से मना कर दिया, लेकिन इसके बाद सारी घटनाएं उसने अपने दोस्त को बताई. पीडी के सेक्रेटरी ने पीडी से कहा कि आज मुझे थोड़ा सा गंवार दिखने वाला उत्तर प्रदेश का एक आदमी मिला, वो आपसे मिलना चाहता है. पीडी ने उससे कहा कि मैं किसी से नहीं मिलूंगी, तुम किसी का भी प्रस्ताव ले के आ जाते हो. तो सेक्रेटरी ने कहा कि नहीं, वो डायमंड की पांच कैरेट की अंगूठी और पांच कैरेट के इयर रिंग्स आपको गिफ्ट करना चाहता है. पीडी ने फौरन कहा कि उसे बुला लो. अगले दिन वो व्यक्ति पीडी से मिला और पीडी को गिफ्ट दिया. गिफ्ट देने के बाद उसने कहा, मैं चाहता हूं कि आप मेरी कंपनी की ब्रांड एंबेसडर बनें. उस शख्स को यहां हम एसएन कहेंगे. ये उत्तर प्रदेश के एक शहर का बड़ा बिल्डर है, या अपकमिंग बिल्डर है. उसने पीडी से कहा कि आप अगर मेरी कंपनी की ब्रांड एंबेसडर बनेंगी, तो मेरे बनाए हुए मकान ज्यादा अच्छी तरह से बिक जाएंगे. पीडी ने हामी भर दी. उसके बाद ये शख्स पीडी को महंगे-महंगे तोहफे भेजने लगा. एक दिन इस शख्स ने कहा कि मैं आपसे मिलकर कुछ बात करना चाहता हूं. पीडी ने उसे बुला लिया. एसएन ने पीडी से कहा कि एक शख्स (एक बड़ा राजनेता) आपसे मिलना चाहता है. पीडी ने नाम सुना, तो मिलने की हामी भर दी. एसएन ने कहा कि कल शाम को वो शख्स मुंबई में होगा और वहां आपसे मुलाकात करेगा. पीडी ने कहा कि मुलाकात में क्या मैं अपने मैनेजर को साथ ला सकती हूं. एसएन ने कहा, जरूर ले आइए. अगले दिन कोलाबा के ताजमहल होटल के प्रेसिडेंसियल सुइट में रात 9 बजे पीडी की मुलाक़ात उस शख्स से हुई. मुलाक़ात में 10 मिनट के बाद पीडी ने अपने मैनेजर को इशारा किया और मैनेजर सुइट के ड्राइंग रूम में बैठ गया. इस बड़े राजनेता और पीडी के बीच बातचीत शुरू हुई, जिसमें उसने पीडी की बहुत तारीफ की. इस दौरान उस शख्स ने पीडी से कहा कि मैं तुम्हें मूनलाइट यानी चांदनी रात में ताजमहल दिखाना चाहता हूं. पीडी मुस्कुराते हुए उसके चेहरे की तरफ देखती रह गई. उस शख्स ने पीडी से यह भी पूछा कि मैं आपके लिए क्या कर सकता हूं. पीडी ने कहा कि आप क्या करना चाहते हैं. उसने कहा कि मैं चाहता हूं कि आप जिंदगी में बहुत खुश रहें, सुखी रहें. यह मुलाक़ात लगभग डेढ़ घंटे चली, फिर खाने-पीने के बाद पीडी अपने मैनेजर के साथ घर आ गई. अगले दिन से इस शख्स ने पीडी को बहुत अपनेपन के मैसेजेज भेजने शुरू किए. इसके दो हफ्ते के बाद एसएन ने पीडी से कहा कि आपको एक फंक्शन में लखनऊ में आना है, आपके वो मित्र आपको आमंत्रित कर रहे हैं. एसएन ने पीडी से ये भी कहा कि वे आपके प्यार में वशीभूत हो गए हैं और आपसे बहुत ज्यादा प्रभावित हैं. पीडी ने कहा कि पागल हो गए हो, वो इतने बड़े हैं, शादीशुदा हैं, उनके बच्चे हैं. तो एसएन ने कहा कि इससे क्या हुआ. बहुत सारे लोग शादीशुदा हैं, बहुत से लोगों को बच्चे हैं, लेकिन वो प्यार करते हैं. पीडी को उसके ऊपर भरोसा नहीं हुआ. उसे लगा कि ये गॉसिप है. हालांकि वो स्पेशल हवाईजहाज से तय समय पर लखनऊ पहुंची. लखनऊ में कोई कार्यक्रम नहीं था. एक बड़े पॉश गेस्ट हाउस में पीडी की मुलाक़ात उस शख्स से हुई. उस शख्स ने पीडी से कहा कि पीडी मैं चाहता हूं कि मैने आपको चाहा है, तो आपको जिंदगी में कभी दुःख नहीं हो. बताइए आप कहां रहती हैं. पीडी ने बताया कि मैं एक छोटे फ्लैट में रहती हूं, लेकिन एक बड़ा फ्लैट खरीदना चाहती हूं. उस शख्स ने पूछा कि उस फ्लैट की कीमत कितनी है, तो पीडी ने कहा कि वो 32 करोड़ का फ्लैट है. अब इस शख्स के चेहरे पर चिंता दिखने लगी. इसने कहा कि 32 करोड़ तो बहुत ज्यादा है, लेकिन आपके पास कितना पैसा है? पीडी ने कहा कि 12 करोड़ मेरे पास है, लेकिन बाकी 20 करोड़ नहीं है. इस व्यक्ति ने पीडी को 20 करोड़ देने का वादा कर लिया. इस वादे को उसने अगले 4 दिनों में निभाया. उसने पीडी से ये भी कहा कि मैं आपको मुंबई में एक इतनी बड़ी प्रॉपर्टी खरीद के दूंगा, जिसका किराया आएगा 15-16 लाख रुपया महीना. शायद इस व्यक्ति ने ये प्रॉपर्टी भी खरीद के पीडी को दे दी और उसके बाद उसने जिस तरह से पीडी को मैसेजेज भेजने शुरू किए- मैं ये करना चाहता हूं, मैं ये कर लूंगा, मैं ये छोड़ दूंगा. इससे पीडी परेशान हो गई और उसने एसएन से कहा कि कृपा कर मेरा इनसे पिंड छुड़वाइए. वो पिंड अभी छूटा नहीं है. दूसरी घटना, चुनाव की घोषणा हो गई, टिकटों के बंटवारे शुरू हुए, तो अमित शाह ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट नेताओं की अपने जाट मंत्रियों सहित एक मीटिंग बुलाई. मीटिंग में उन्होंने कहा, ऐसा लगता है कि जाट नाराज हैं. पिछले लोकसभा चुनाव में उन्होंने सौ प्रतिशत भारतीय जनता पार्टी को वोट दिया था. किसी भी तरह से जाटों को अपने साथ लाना है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों के जितने जाट नेता आए थे, वे अपने यहां के चौधरी माने जाते हैं. उन्होंने हाथ जोड़ लिए और कहा कि इस बार जाट आपका साथ नहीं देगा, क्योंकि आपने अजित सिंह को अपने साथ नहीं लिया. जाटों को लगता है कि अजित सिंह के राजनीतिक एकांतवास के पीछे भारतीय जनता पार्टी की रणनीति है और जाट पूरे तौर पर अजित सिंह के साथ हैं. अमित शाह ने कहा कि किसी भी तरह से जाटों को साथ रखिए, लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट मंत्रियों सहित जाट नेता अमित शाह से यह साफ कह कर चल दिए कि इस बार वे जाटों को अपने साथ या भारतीय जनता पार्टी के साथ रखने के लिए कुछ नहीं कर पाएंगे. ये दो घटनाएं दो तरह के संकेत देती हैं. एक तो, चुनाव में भारतीय जनता पार्टी कैसे अपने वादे से हटती है और कैसे अपना गठजोड़ बनाने में विफल रहती है, जिसकी वजह से पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एक बड़ा समुदाय उससे दूर चला जाता है. इसका अगला संभावित कदम लोकसभा चुनाव मेंहरियाणा में भी देखने को मिल सकता है. दूसरा यह कि उत्तर प्रदेश के अगले आठ संभावित मुख्यमंत्रियों में किस तरह के लोग हैं, जो अपनी मानवीय कमज़ोरियों को बिना किसी संकोच के पूरा करने के लिए अपनी स्थिति का फायदा उठाते हैं. सबसे पहले हम बहुजन समाज पार्टी को लेते हैं. हमारे सर्वे में शुरू में बहुजन समाज पार्टी सबसे आगे दिखाई देती थी. लेकिन बहुजन समाज पार्टी से कई लोग, पार्टी छोड़कर चले गए और वो भी तब, जब चुनाव नजदीक आ गया था. उन्होंने लोगों के बीच कई अलग-अलग तर्क दिए. लेकिन जो पार्टी में हैं, उनमें एक सज्जन मंत्री भी रहे. उन्होंने अपने किसी दोस्त से कहा कि मैंने दो टिकट मांगे थे और उन दो टिकटों के लिए मुझे 10 करोड़ रुपए देने पड़े. उन्होंने अपने मित्र से कहा कि तब मुझे लगा कि मैं क्यों इस पार्टी में हूं. जिसके लिए मैंने सब कुछ किया और मुझे भी अपने और एक दूसरे टिकट के लिए पार्टी को 10 करोड़ देने पड़ रहे हैं. इस तरह की घटनाएं बहुत सारे लोगों के साथ घटीं और जो अच्छे उम्मीदवार थे, उनकी जगह उन लोगों को टिकट मिला, जो उम्मीदवार शायद दलित समुदाय के वोट के लिए बहुजन समाज पार्टी में शामिल हुए हैं. पूरे चुनाव के दौरान या चुनाव से पहले, बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती ने मुस्लिम समाज को अपने पास न तो बुलाया, न तो उनसे मंत्रणा की और न ही उनके सवालों को हल करने का कोई वादा किया. उल्टे मुस्लिम समाज या इस समाज के नेता बहुजन समाज पार्टी के पक्ष में अपीलें करने लगें, क्योंकि उन्हें लगा कि अखिलेश यादव के अंतर्विरोध की वजह से कहीं भारतीय जनता पार्टी को बढ़त ना मिल जाय. अगर मुस्लिम समुदाय अखिलेश यादव और मायावती में बंट गया, तब भारतीय जनता पार्टी की जीत निश्चित हो जाएगी. अखिलेश यादव ने सफलता पूर्वक उत्तर प्रदेश के मुसलमानों के बीच यह संदेश पहुंचा दिया कि अगर मायावती जी ये चुनाव जीतती हैं और कुछ सीटें कम रह जाती हैं, तो उनका गठजोड़ भारतीय जनता पार्टी के साथ हो जाएगा. इस प्रचार का दबाव इतना ज्यादा बढ़ा कि मायावती जी को सार्वजनिक रूप से ये घोषणा करनी पड़ी कि मैं भले सरकार ना बना पाऊं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी की मदद से सरकार नहीं बनाऊंगी. दूसरी ताकत, जो उत्तर प्रदेश के चुनाव में सबसे बड़ी बनकर उभरी है, वो अखिलेश यादव हैं. अखिलेश यादव इस समय अति आत्मविश्वास से लबालब हैं और उन्होंने समाजवादी पार्टी की राजनीतिक दिशा एक झटके में मोड़ दी है. मुलायम सिंह यादव 30 साल तक कांग्रेस के विरोध की राजनीति करते रहे. हालांकि कांग्रेस सरकार को समर्थन भी देते रहे, सरकार भी चलवाते रहे. लेकिन सार्वजनिक तौर पर उन्होंने कभी कांग्रेस की प्रशंसा नहीं की. अखिलेश यादव ने एक झटके में कांग्रेस का साथ लिया और राहुल गांधी के साथ सीटों का समझौता कर लिया. इस समझौते के पीछे राहुल गांधी कम और प्रियंका गांधी ज्यादा थी. प्रियंका गांधी ने किसी भी तरह से अखिलेश यादव को समझाया और तैयार किया कि वो कांग्रेस के साथ समझौता करें. प्रियंका गांधी के विश्वासपात्र प्रशांत किशोर का भी इसमें बड़ा रोल रहा. अखिलेश यादव के साथ इस चुनाव में उत्तर प्रदेश का नौजवान दिखाई दे रहा है. समाजवादी पार्टी के चुने हुए एमएलए भी अखिलेश यादव के साथ हैं. लग रहा है कि अखिलेश यादव बड़े बहुमत से चुनाव जीतेंगे. लेकिन अखिलेश यादव के साथ दो अंतर्विरोध हैं. अखिलेश यादव पिछले तीन सालों से समाजवादी पार्टी को नौजवानों की पार्टी बनाने की कोशिश कर रहे थे. उन्होंने हर विधान सभा में एक नौजवान तैयार किया और उसे पिछले चार साल में उसे पैसे से मजबूत किया. उसे ठेके दिलवाए, ताकि वो किसी के प्रति आश्रित न रहे. उस व्यक्ति ने अपने चुनाव क्षेत्र में जम कर काम किया. लेकिन जैसी गतिविधिया हुईं, जिस तरह की घटनाएं घटीं और चुनाव आयोग में विधायकों के शपथपत्र की आवश्यकता पड़ी, तो अखिलेश यादव ने मौजूदा सभी विधायकों से वादा किया या उन्हें ये वादा करना पड़ा कि वे उन्हें टिकट देंगे. अखिलेश यादव ने ज्यादातर मौजूदा विधायकों को टिकट दिया. इसका परिणाम ये हुआ कि वो सारे लोग टिकट से वंचित रह गए, जो पिछले 3-4 सालों के दौरान उत्तर प्रदेश विधानसभा में जाने की तैयारी कर रहे थे और जिन्हें अखिलेश यादव ने ही मजबूत बनाया था. उनमें से अधिकांश समाजवादी पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवारों के खिलाफ ही चुनाव लड़ रहे हैं. दूसरी तरफ, जब अखिलेश यादव अपने पिता से सत्ता छीन रहे थे, तब मुलायम सिंह यादव ने दो बयान दिए. पहला बयान कि अखिलेश यादव मुस्लिम विरोधी हैं और दूसरा ये कि मैं इस गठबंधन को सही नहीं मानता और मेरे समर्थक कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़ें. इस घोषणा के बाद बहुत सारे लोग, लगभग 50 सीटों पर कांग्रेस के खिलाफ निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में खड़े हो गए. हालांकि, मुलायम सिंह यादव ने ये वादा किया था कि वे उनके लिए चुनाव प्रचार करेंगे. लेकिन मुलायम सिंह यादव किसी के लिए भी चुनाव प्रचार में अभी नहीं गए हैं. ये दो स्थितियां अखिलेश यादव के लिए परेशानी पैदा कर सकती हैं. एक तीसरी अंतर्धारा है कि शिवपाल यादव को जिस तरह से मात मिली, उससे शिवपाल यादव के बहुत सारे समर्थक चुनाव से दूर खड़े हैं. हालांकि सिर्फ शिवपाल यादव के समर्थक ही दूर नहीं खड़े हैं, मुलायम सिंह के 40 साल के राजनीतिक साथी और उनकी प्रशंसा करने वाले लोग भी चुनाव से दूर खड़े हैं. ये तीन चीजें अखिलेश यादव के पूर्ण रूप से सत्ता प्राप्त करने में आड़े आ सकती हैं. कांग्रेस पार्टी का गठजोड़ समाजवादी पार्टी से हुआ और इसमें प्रियंका गांधी का बहुत बड रोल रहा. सीटें भी लगभग बंट गईं और कांग्रेस सिर्फ 105 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. लेकिन इस समझौते में इतनी देर हो गई कि उत्तर प्रदेश की किसी भी रैली में कांग्रेस के लोग शामिल नहीं हुए (उन रैलियों को छोड़ कर जिनमें अखिलेश यादव और राहुल गांधी एक साथ बोलने वाले थे). दूसरा तथ्य, कांग्रेस के समर्थक वोट समाजवादी पार्टी को नहीं पड़े, बल्कि जहां कांग्रेस नहीं लड़ रही है, वहां कांग्रेस का वोट भारतीय जनता पार्टी को चला गया. तीसरी चीज, मुसलमानों में बंटवारा हुआ और मुसलमानों की बड़ी संख्या बहुत सारे चुनाव क्षेत्रों में अखिलेश और राहुल गांधी के गठबंधन के साथ गई. कांग्रेस की परेशानी ये है कि बहुत सारी जगहों पर उम्मीदवार ही नहीं मिले, तो उसे समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों को अपने चुनाव चिन्ह पर चुनाव में उतारना पड़ा, क्योंकि उसे अपने 105 लोगों की संख्या पूरी करनी थी. लखनऊ के ताज होटल में अखिलेश यादव और राहुल गांधी की पहली प्रेस कांफ्रेंस में लोगों ने ध्यान नहीं दिया. वहां पर राहुल गांधी अपना वर्चस्व दिखाने के लिए बेताब थे. अखिलेश यादव ने अपना संबोधन राहुल जी बोल कर किया और राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा कि अखिलेश एक अच्छा लड़का है. अखिलेश ने उनकी तरफ अचंभे से देखा और इस वाक्य के बाद उन्होंने राहुल जी की जगह राहुल कहना शुरू किया. ये बताता है कि दोनों के कार्यकर्ता एक हो कर चुनाव नहीं लड़ रहे हैं. इसलिए कांग्रेस की सीटें 35 से 45 के बीच रहने की उम्मीद है. जबकि प्रशांत किशोर का कहना है और उन्होंने प्रियंका गांधी को इस बात पर प्रजेंटेशन भी दिया कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश में 76 सीटें जीत रही है. लेकिन, प्रियंका गांधी ने सिर्फ गांधी परिवार के पारंपरिक सीट रायबरेली क्षेत्र में ही प्रचार करने का फैसला किया. जबकि, ये खबर आ रही थी कि वह पूरे उत्तर प्रदेश में कैंपेन करेंगी. प्रियंका शायद इस पशोपेश में पड़ी रहीं कि अगर वो कैंपेन करती हैं और कांग्रेस को सीटें नहीं आती हैं, तो उनके अपने राजनीतिक भविष्य को ले कर बहुत बड़ा प्रश्नवाचक चिन्ह खड़ा हो जाएगा. इस पशोपेश से राहुल गांधी का कोई लेना-देना नहीं है. राहुल गांधी इस चुनाव में साधु-संत वाली भाषा में उन सवालों पर ज्यादा बात करते दिखाई दिए, जिनका चुनाव से कोई मतलब नहीं है. भारतीय जनता पार्टी अपना चेहरा तय नहीं कर पाई है, जिसे मुख्यमंत्री बनाया जा सके. लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश की एक सभा में योगी आदित्यनाथ ने जिस तरह का भाषण दिया और उन्हें वहां जैसी प्रतिक्रिया मिली, उससे दिल्ली में बैठे पार्टी अध्यक्ष को ये निर्णय लेना पड़ा कि योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश में ज्यादा से ज्यादा जगहों पर घुमाया जाए. योगी आदित्यनाथ को दिल्ली बुलाया गया. उनके दिल्ली पहुंचने से पहले ये फैसला हो गया था कि उन्हें स्थायी रूप से प्रचार के लिए एक हेलिकॉप्टर दिया जाए, ताकि वे ज्यादा से ज्यादा जगहों पर जाएं. जब वे दिल्ली आए, तो उनसे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने, खास कर पार्टी अध्यक्ष ने कह दिया कि हम घोषणा तो नहीं कर रहे हैं, लेकिन अगर हम जीतते हैं, तो आप हमारे अगले मुख्यमंत्री होंगे. योगी आदित्यनाथ दिन-रात भारतीय जनता पार्टी के प्रचार में लगे हुए हैं. योगी द्वारा उठाए गए सवाल उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को ये आशा दे गए कि चुनाव में ध्रुवीकरण हो जाएगा और मुसलमानों के खिलाफ सारे हिंदू भाजपा को वोट देंगे. हालांकि अब तक ये ध्रुवीकरण नहीं हो पाया है. सारी कोशिशों के बाद भी, शुरू के तीन-चार फेज तक जनता ने ध्रुवीकृत होने से मना कर दिया है. अब आखिरी चरण के लिए कुछ ताकतें ध्रुवीकरण की कोशिशें कर रही है. भारतीय जनता पार्टी के पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा कोई और बड़ा कैंपेनर नहीं है. उन्हीं की सभाओं में भारी भीड़ हो रही है. वे जैसे भाषण दे रहे हैं, उससे ये माना जाना चाहिए कि उत्तर प्रदेश में भाजपा को स्पष्ट विजय मिलने वाली है. लेकिन यहां पर सन 1957 के चुनाव को याद रखना चाहिए, जब भारतीय जनसंघ की सभाएं हो रही थीं और अटल बिहारी वाजपेयी की सभाओं में लाखों लोग आते थे. बाद में अटल जी ने एक बातचीत के दौरान, जिसमें मैं शामिल था, भारत के भूतपूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर जी से कहा कि हम ये सोच रहे थे कि हम जीत रहे हैं, लेकिन बाद में मुझे पता चला कि मेरी सभाओं में जितनी भीड़ हो रही थी, उतने ही हमारे वोट कम हो रहे थे. ये बात मैं इसलिए याद कर रहा हूं क्योंकि भारतीय जनता पार्टी से ग्रामीण क्षेत्र के लोग नाराज हैं. खास कर किसान, जिन्हें इस नोटबंदी से काफी परेशानियां झेलनी पड़ी. व्यापारी वर्ग हमेशा भाजपा का समर्थक रहा है, लेकिन आज उसका एक बड़ा तबका भाजपा से नाराज है. नोटबंदी से उनका खुदरा व्यापार बहुत ज्यादा दबाव में आ गया और उन्हें उनलोगों को अपने यहां से हटाना पड़ा, जिन्हें वे नगद पैसा दे कर अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए काम में लाते थे. व्यापार पर जिस तरह की सख्ती प्रधानमंत्री मोदी लागू करने की कोशिश कर रहे हैं, वो व्यापारियों को समझ में नहीं आ रहा है. व्यापारियों की नाराजगी का दूसरा कारण यह भी है. उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी का संपूर्ण नेतृत्व पिछडों को दे दिया गया है. इससे उनका परंपरागत ब्राह्मण समाज सौ प्रतिशत भारतीय जनता पार्टी के साथ नहीं है. भारतीय जनता पार्टी को अजित सिंह के साथ गठबंधन न करने का बड़ा नुक़सान उठाना पड़ रहा है. भारतीय जनता पार्टी को कुछ मुस्लिम वोट भी मिलते, लेकिन भाजपा ने एक भी मुस्लिम उम्मीदवार को चुनाव में नहीं उतारा. इसलिए इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की स्थिति भले ही देखने में बहुत मजबूत लगे, पर ये परेशानियां चुनाव में उसके सामने आ रही हैं और लोगों को उसके पक्ष में वोट देने से रोक रही है. सरकार किसकी बनेगी. . अगर यही स्थिति रहती है, तो इसमें शंका है कि उत्तर प्रदेश में किसी भी पार्टी को बहुमत मिले और अगर ऐसा होता है, यानी किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिलता है, तो इसका मतलब है, फ्रैक्चर्ड मैंडेट यानी हंग विधान सभा उत्तर प्रदेश में दिखाई देगी. तब सरकार किसकी बनेगी? इसका सीधा जवाब है कि तब भारतीय जनता पार्टी और मायावती जी की सरकार बनेगी या भारतीय जनता पार्टी और अखिलेश यादव जी की सरकार बनेगी. अखिलेश यादव के बारे में एक आम धारणा है कि उन्होंने संघर्ष नहीं देखा है, समाजवाद नाम उनका रटा हुआ है, लेकिन समाजवादी मूल्यों में उनकी आस्था कम है. उन्होंने जैसे कांग्रेस के साथ गठबंधन किया, सरकार बनाने के लिए वैसे ही भारतीय जनता पार्टी के साथ भी गठबंधन कर सकते हैं. अगर मायावती की संख्या कम हुई, तो राहुल गांधी अखिलेश यादव का साथ छोड़ कर मायावती से भी हाथ मिला सकते हैं और उनकी सरकार बनवा सकते हैं. राहुल गांधी ने अपनी पहली प्रेस कांफ्रेंस में ये संदेश या इशारा दिया भी कि वे मायावती को बहुत हानिकारक नहीं मानते हैं. अगर चुनाव के बाद ऐसी कोई स्थिति आती है, तो मायावती साथ समझौता करने में उन्हें कोई परेशानी नहीं होगी. भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेता अगर चुनाव नहीं जीतते हैं, जिनमें संगीत सोम भी शामिल हैं, तो उत्तर प्रदेश का फैसला भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ गया माना जाएगा. ऐसी स्थिति में भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह के भविष्य पर भी असर पड़ेगा, क्योंकि बिहार और उत्तर प्रदेश के सारे फैसले सिर्फ और सिर्फ अमित शाह ने लिए हैं. अमित शाह की कोशिश राजनाथ सिंह को उत्तर प्रदेश में पार्टी का चेहरा बनाने की थी, लेकिन राजनाथ सिंह बहुत सफाई से उनके हाथ से निकल गए. उत्तर प्रदेश का चुनाव देश के आने वाले चुनावों पर भी असर डालेगा, जिनमें मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे प्रदेश शामिल हैं. 2019 के ऊपर तो निश्चित तौर पर इसका असर होगा. यह चुनाव उन रेखाओं को साफ तौर पर सामने लाएगा, जिसके आस-पास अखिलेश यादव-राहुल गांधी अपनी रणनीति तय करेंगे. प्रियंका गांधी और नीतीश कुमार, ये दो पर्दे के पीछे के खिलाड़ी हैं. प्रियंका गांधी कांग्रेस की पूरी रणनीति बनाने में, मुद्दे तय करने में, मदद पहुंचाने में सबसे बड़ा रोल प्ले कर रही हैं. दूसरी तरफ, नीतीश कुमार उत्तर प्रदेश में एक भी सीट पर चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, ताकि सेकुलर वोटों का बंटवारा न हो. हालांकि अगर वे 50-60 सीटों पर चुनाव लड़ते, तो भी उनके पास भी 6-8 सीटें होतीं. लेकिन उन्होंने वैसा ही साहसिक फैसला लिया, जैसा फैसला उन्होंने कांग्रेस को बिहार में 40 सीटें दे कर लिया था. अखिलेश यादव की एक बात सही है कि उत्तर प्रदेश का चुनाव देश का भविष्य तय करेगा. ये बात लगभग सभी लोग दबी जुबान से कर रहे हैं. मैं ये तो नहीं कहता कि यह चुनाव देश का भविष्य तय करेगा, लेकिन देश के भविष्य की दिशा तय करेगा और भारतीय जनता पार्टी को अपनी बहुत सारी नीतियों पर फिर से सोचने पर विवश करेगा. भारतीय जनता पार्टी अगर ये चुनाव जीत जाती है, तो फिर समाजवादी पार्टी हो या देश की दूसरी पार्टियां, उन्हें 2019 के लिए एक दबाव के तहत एक साथ आने पर विवश होना पड़ेगा. उस समय अगर राहुल गांधी परिस्थितियों के ऊपर सारा बोझ डाल देंगे, तब वे विपक्ष के एकमात्र नेता नहीं कहलाएंगे, उनके सामने कई सारे और नेता खड़े हो जाएंगे, जिस स्थिति का फायदा सीधे-सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को होगा.
उत्तर प्रदेश में चुनावों के लिए वोट पड़ रहे हैं. पंजाब और गोवा के वोट पड़ चुके हैं. भारी संख्या में मतदान हुआ है. लोकतंत्र में लोगों का फैसला ही सर्वोपरी होता है, चाहे वो किसी की नज़र में सही हो, या किसी की नज़र में गलत हो. इस चुनाव में बहुत सारे अंतर्विरोध भी दिखाई दिए. हम आपको कुछ स्थितियां बताते हैं, ताकि आप खुद इस बात का फैसला कर सकें कि इन चुनावों में वोट पड़े हैं, तो फैसला किसके पक्ष में जाएगा. बात शुरू करने या स्थितियों का जायजा लेने से पहले हम आपको दो घटनाएं बताते हैं. एक घटना में नाम है, एक घटना में संकेत है. जिनमें संकेत हैं, उन्हें आप समझें कि उसके पात्र कौन-कौन हैं. देश की एक बहुत बड़ी अभिनेत्री अपने एक गहरे मित्र के साथ बैठी हुई थीं. दोनों की बातचीत राजनीतिज्ञों पर शुरू हुई, क्योंकि आजकल अभिनेत्री, अभिनेता और राजनेता न केवल हम प्याला-हम निवाला होते हैं, बल्कि अपनी परिधि और अपनी सीमाएं भी खुद बनाते हैं. इस अभिनेत्री ने अपने दोस्त से कहा कि चलो मैं तुम्हें एक खेल दिखाती हूं, जो रियल लाइफ ड्रामा है, पर शर्त ये है कि तुम चुप रहोगे. अगर सांस की आवाज भी फोन में आ गई, तो तुम्हारा सारा मजा किरकिरा हो जाएगा. उस दोस्त ने हामी भर दी. इस अभिनेत्री को यहां हम पीडी नाम देते हैं. पीडी ने देश के एक बड़े नेता को फोन मिलाया. ये नेता उत्तर प्रदेश के हैं और उत्तर प्रदेश के उन आठ बड़े नेताओं में शामिल हैं, जो मुख्यमंत्री की दौड़ में हैं. फोन पर इस नेता को जैसे ही पीडी की आवाज सुनाई दी, उन्होंने बहुत लरजते हुए स्वर में कहा कि आज तो मेरी शाम बन गई. लेकिन अगर आप मेरे पास होतीं, तो मैं बहुत सुकून से सोता. पीडी ने बहुत ही मधुर आवाज में इस नेता से बात की कि ऐसा क्या हो गया कि आपको मेरी आवाज से इतना सुकून हुआ. इस अंदाज में लगभग पांच मिनट तक फोन पर दोनों की बातचीत हुई. बातचीत खत्म होने के बाद पीडी का दोस्त थोड़ा भौचक्का था, क्योंकि पहले उसने पीडी से कहा था कि मुझे भरोसा ही नहीं होता कि तुम जो कह रही हो, वह सही है. इसका सबूत पीडी ने अपने दोस्त को दे दिया था, बातचीत करते हुए फोन को स्पीकर पर लगाकर. दोस्त ने कहा कि अब मुझे बताओ कि ये सब बात क्या है और कहां तक पहुंची है? पीडी ने पहले तो बताने से मना कर दिया, लेकिन इसके बाद सारी घटनाएं उसने अपने दोस्त को बताई. पीडी के सेक्रेटरी ने पीडी से कहा कि आज मुझे थोड़ा सा गंवार दिखने वाला उत्तर प्रदेश का एक आदमी मिला, वो आपसे मिलना चाहता है. पीडी ने उससे कहा कि मैं किसी से नहीं मिलूंगी, तुम किसी का भी प्रस्ताव ले के आ जाते हो. तो सेक्रेटरी ने कहा कि नहीं, वो डायमंड की पांच कैरेट की अंगूठी और पांच कैरेट के इयर रिंग्स आपको गिफ्ट करना चाहता है. पीडी ने फौरन कहा कि उसे बुला लो. अगले दिन वो व्यक्ति पीडी से मिला और पीडी को गिफ्ट दिया. गिफ्ट देने के बाद उसने कहा, मैं चाहता हूं कि आप मेरी कंपनी की ब्रांड एंबेसडर बनें. उस शख्स को यहां हम एसएन कहेंगे. ये उत्तर प्रदेश के एक शहर का बड़ा बिल्डर है, या अपकमिंग बिल्डर है. उसने पीडी से कहा कि आप अगर मेरी कंपनी की ब्रांड एंबेसडर बनेंगी, तो मेरे बनाए हुए मकान ज्यादा अच्छी तरह से बिक जाएंगे. पीडी ने हामी भर दी. उसके बाद ये शख्स पीडी को महंगे-महंगे तोहफे भेजने लगा. एक दिन इस शख्स ने कहा कि मैं आपसे मिलकर कुछ बात करना चाहता हूं. पीडी ने उसे बुला लिया. एसएन ने पीडी से कहा कि एक शख्स आपसे मिलना चाहता है. पीडी ने नाम सुना, तो मिलने की हामी भर दी. एसएन ने कहा कि कल शाम को वो शख्स मुंबई में होगा और वहां आपसे मुलाकात करेगा. पीडी ने कहा कि मुलाकात में क्या मैं अपने मैनेजर को साथ ला सकती हूं. एसएन ने कहा, जरूर ले आइए. अगले दिन कोलाबा के ताजमहल होटल के प्रेसिडेंसियल सुइट में रात नौ बजे पीडी की मुलाक़ात उस शख्स से हुई. मुलाक़ात में दस मिनट के बाद पीडी ने अपने मैनेजर को इशारा किया और मैनेजर सुइट के ड्राइंग रूम में बैठ गया. इस बड़े राजनेता और पीडी के बीच बातचीत शुरू हुई, जिसमें उसने पीडी की बहुत तारीफ की. इस दौरान उस शख्स ने पीडी से कहा कि मैं तुम्हें मूनलाइट यानी चांदनी रात में ताजमहल दिखाना चाहता हूं. पीडी मुस्कुराते हुए उसके चेहरे की तरफ देखती रह गई. उस शख्स ने पीडी से यह भी पूछा कि मैं आपके लिए क्या कर सकता हूं. पीडी ने कहा कि आप क्या करना चाहते हैं. उसने कहा कि मैं चाहता हूं कि आप जिंदगी में बहुत खुश रहें, सुखी रहें. यह मुलाक़ात लगभग डेढ़ घंटे चली, फिर खाने-पीने के बाद पीडी अपने मैनेजर के साथ घर आ गई. अगले दिन से इस शख्स ने पीडी को बहुत अपनेपन के मैसेजेज भेजने शुरू किए. इसके दो हफ्ते के बाद एसएन ने पीडी से कहा कि आपको एक फंक्शन में लखनऊ में आना है, आपके वो मित्र आपको आमंत्रित कर रहे हैं. एसएन ने पीडी से ये भी कहा कि वे आपके प्यार में वशीभूत हो गए हैं और आपसे बहुत ज्यादा प्रभावित हैं. पीडी ने कहा कि पागल हो गए हो, वो इतने बड़े हैं, शादीशुदा हैं, उनके बच्चे हैं. तो एसएन ने कहा कि इससे क्या हुआ. बहुत सारे लोग शादीशुदा हैं, बहुत से लोगों को बच्चे हैं, लेकिन वो प्यार करते हैं. पीडी को उसके ऊपर भरोसा नहीं हुआ. उसे लगा कि ये गॉसिप है. हालांकि वो स्पेशल हवाईजहाज से तय समय पर लखनऊ पहुंची. लखनऊ में कोई कार्यक्रम नहीं था. एक बड़े पॉश गेस्ट हाउस में पीडी की मुलाक़ात उस शख्स से हुई. उस शख्स ने पीडी से कहा कि पीडी मैं चाहता हूं कि मैने आपको चाहा है, तो आपको जिंदगी में कभी दुःख नहीं हो. बताइए आप कहां रहती हैं. पीडी ने बताया कि मैं एक छोटे फ्लैट में रहती हूं, लेकिन एक बड़ा फ्लैट खरीदना चाहती हूं. उस शख्स ने पूछा कि उस फ्लैट की कीमत कितनी है, तो पीडी ने कहा कि वो बत्तीस करोड़ का फ्लैट है. अब इस शख्स के चेहरे पर चिंता दिखने लगी. इसने कहा कि बत्तीस करोड़ तो बहुत ज्यादा है, लेकिन आपके पास कितना पैसा है? पीडी ने कहा कि बारह करोड़ मेरे पास है, लेकिन बाकी बीस करोड़ नहीं है. इस व्यक्ति ने पीडी को बीस करोड़ देने का वादा कर लिया. इस वादे को उसने अगले चार दिनों में निभाया. उसने पीडी से ये भी कहा कि मैं आपको मुंबई में एक इतनी बड़ी प्रॉपर्टी खरीद के दूंगा, जिसका किराया आएगा पंद्रह-सोलह लाख रुपया महीना. शायद इस व्यक्ति ने ये प्रॉपर्टी भी खरीद के पीडी को दे दी और उसके बाद उसने जिस तरह से पीडी को मैसेजेज भेजने शुरू किए- मैं ये करना चाहता हूं, मैं ये कर लूंगा, मैं ये छोड़ दूंगा. इससे पीडी परेशान हो गई और उसने एसएन से कहा कि कृपा कर मेरा इनसे पिंड छुड़वाइए. वो पिंड अभी छूटा नहीं है. दूसरी घटना, चुनाव की घोषणा हो गई, टिकटों के बंटवारे शुरू हुए, तो अमित शाह ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट नेताओं की अपने जाट मंत्रियों सहित एक मीटिंग बुलाई. मीटिंग में उन्होंने कहा, ऐसा लगता है कि जाट नाराज हैं. पिछले लोकसभा चुनाव में उन्होंने सौ प्रतिशत भारतीय जनता पार्टी को वोट दिया था. किसी भी तरह से जाटों को अपने साथ लाना है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों के जितने जाट नेता आए थे, वे अपने यहां के चौधरी माने जाते हैं. उन्होंने हाथ जोड़ लिए और कहा कि इस बार जाट आपका साथ नहीं देगा, क्योंकि आपने अजित सिंह को अपने साथ नहीं लिया. जाटों को लगता है कि अजित सिंह के राजनीतिक एकांतवास के पीछे भारतीय जनता पार्टी की रणनीति है और जाट पूरे तौर पर अजित सिंह के साथ हैं. अमित शाह ने कहा कि किसी भी तरह से जाटों को साथ रखिए, लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट मंत्रियों सहित जाट नेता अमित शाह से यह साफ कह कर चल दिए कि इस बार वे जाटों को अपने साथ या भारतीय जनता पार्टी के साथ रखने के लिए कुछ नहीं कर पाएंगे. ये दो घटनाएं दो तरह के संकेत देती हैं. एक तो, चुनाव में भारतीय जनता पार्टी कैसे अपने वादे से हटती है और कैसे अपना गठजोड़ बनाने में विफल रहती है, जिसकी वजह से पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एक बड़ा समुदाय उससे दूर चला जाता है. इसका अगला संभावित कदम लोकसभा चुनाव मेंहरियाणा में भी देखने को मिल सकता है. दूसरा यह कि उत्तर प्रदेश के अगले आठ संभावित मुख्यमंत्रियों में किस तरह के लोग हैं, जो अपनी मानवीय कमज़ोरियों को बिना किसी संकोच के पूरा करने के लिए अपनी स्थिति का फायदा उठाते हैं. सबसे पहले हम बहुजन समाज पार्टी को लेते हैं. हमारे सर्वे में शुरू में बहुजन समाज पार्टी सबसे आगे दिखाई देती थी. लेकिन बहुजन समाज पार्टी से कई लोग, पार्टी छोड़कर चले गए और वो भी तब, जब चुनाव नजदीक आ गया था. उन्होंने लोगों के बीच कई अलग-अलग तर्क दिए. लेकिन जो पार्टी में हैं, उनमें एक सज्जन मंत्री भी रहे. उन्होंने अपने किसी दोस्त से कहा कि मैंने दो टिकट मांगे थे और उन दो टिकटों के लिए मुझे दस करोड़ रुपए देने पड़े. उन्होंने अपने मित्र से कहा कि तब मुझे लगा कि मैं क्यों इस पार्टी में हूं. जिसके लिए मैंने सब कुछ किया और मुझे भी अपने और एक दूसरे टिकट के लिए पार्टी को दस करोड़ देने पड़ रहे हैं. इस तरह की घटनाएं बहुत सारे लोगों के साथ घटीं और जो अच्छे उम्मीदवार थे, उनकी जगह उन लोगों को टिकट मिला, जो उम्मीदवार शायद दलित समुदाय के वोट के लिए बहुजन समाज पार्टी में शामिल हुए हैं. पूरे चुनाव के दौरान या चुनाव से पहले, बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती ने मुस्लिम समाज को अपने पास न तो बुलाया, न तो उनसे मंत्रणा की और न ही उनके सवालों को हल करने का कोई वादा किया. उल्टे मुस्लिम समाज या इस समाज के नेता बहुजन समाज पार्टी के पक्ष में अपीलें करने लगें, क्योंकि उन्हें लगा कि अखिलेश यादव के अंतर्विरोध की वजह से कहीं भारतीय जनता पार्टी को बढ़त ना मिल जाय. अगर मुस्लिम समुदाय अखिलेश यादव और मायावती में बंट गया, तब भारतीय जनता पार्टी की जीत निश्चित हो जाएगी. अखिलेश यादव ने सफलता पूर्वक उत्तर प्रदेश के मुसलमानों के बीच यह संदेश पहुंचा दिया कि अगर मायावती जी ये चुनाव जीतती हैं और कुछ सीटें कम रह जाती हैं, तो उनका गठजोड़ भारतीय जनता पार्टी के साथ हो जाएगा. इस प्रचार का दबाव इतना ज्यादा बढ़ा कि मायावती जी को सार्वजनिक रूप से ये घोषणा करनी पड़ी कि मैं भले सरकार ना बना पाऊं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी की मदद से सरकार नहीं बनाऊंगी. दूसरी ताकत, जो उत्तर प्रदेश के चुनाव में सबसे बड़ी बनकर उभरी है, वो अखिलेश यादव हैं. अखिलेश यादव इस समय अति आत्मविश्वास से लबालब हैं और उन्होंने समाजवादी पार्टी की राजनीतिक दिशा एक झटके में मोड़ दी है. मुलायम सिंह यादव तीस साल तक कांग्रेस के विरोध की राजनीति करते रहे. हालांकि कांग्रेस सरकार को समर्थन भी देते रहे, सरकार भी चलवाते रहे. लेकिन सार्वजनिक तौर पर उन्होंने कभी कांग्रेस की प्रशंसा नहीं की. अखिलेश यादव ने एक झटके में कांग्रेस का साथ लिया और राहुल गांधी के साथ सीटों का समझौता कर लिया. इस समझौते के पीछे राहुल गांधी कम और प्रियंका गांधी ज्यादा थी. प्रियंका गांधी ने किसी भी तरह से अखिलेश यादव को समझाया और तैयार किया कि वो कांग्रेस के साथ समझौता करें. प्रियंका गांधी के विश्वासपात्र प्रशांत किशोर का भी इसमें बड़ा रोल रहा. अखिलेश यादव के साथ इस चुनाव में उत्तर प्रदेश का नौजवान दिखाई दे रहा है. समाजवादी पार्टी के चुने हुए एमएलए भी अखिलेश यादव के साथ हैं. लग रहा है कि अखिलेश यादव बड़े बहुमत से चुनाव जीतेंगे. लेकिन अखिलेश यादव के साथ दो अंतर्विरोध हैं. अखिलेश यादव पिछले तीन सालों से समाजवादी पार्टी को नौजवानों की पार्टी बनाने की कोशिश कर रहे थे. उन्होंने हर विधान सभा में एक नौजवान तैयार किया और उसे पिछले चार साल में उसे पैसे से मजबूत किया. उसे ठेके दिलवाए, ताकि वो किसी के प्रति आश्रित न रहे. उस व्यक्ति ने अपने चुनाव क्षेत्र में जम कर काम किया. लेकिन जैसी गतिविधिया हुईं, जिस तरह की घटनाएं घटीं और चुनाव आयोग में विधायकों के शपथपत्र की आवश्यकता पड़ी, तो अखिलेश यादव ने मौजूदा सभी विधायकों से वादा किया या उन्हें ये वादा करना पड़ा कि वे उन्हें टिकट देंगे. अखिलेश यादव ने ज्यादातर मौजूदा विधायकों को टिकट दिया. इसका परिणाम ये हुआ कि वो सारे लोग टिकट से वंचित रह गए, जो पिछले तीन-चार सालों के दौरान उत्तर प्रदेश विधानसभा में जाने की तैयारी कर रहे थे और जिन्हें अखिलेश यादव ने ही मजबूत बनाया था. उनमें से अधिकांश समाजवादी पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवारों के खिलाफ ही चुनाव लड़ रहे हैं. दूसरी तरफ, जब अखिलेश यादव अपने पिता से सत्ता छीन रहे थे, तब मुलायम सिंह यादव ने दो बयान दिए. पहला बयान कि अखिलेश यादव मुस्लिम विरोधी हैं और दूसरा ये कि मैं इस गठबंधन को सही नहीं मानता और मेरे समर्थक कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़ें. इस घोषणा के बाद बहुत सारे लोग, लगभग पचास सीटों पर कांग्रेस के खिलाफ निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में खड़े हो गए. हालांकि, मुलायम सिंह यादव ने ये वादा किया था कि वे उनके लिए चुनाव प्रचार करेंगे. लेकिन मुलायम सिंह यादव किसी के लिए भी चुनाव प्रचार में अभी नहीं गए हैं. ये दो स्थितियां अखिलेश यादव के लिए परेशानी पैदा कर सकती हैं. एक तीसरी अंतर्धारा है कि शिवपाल यादव को जिस तरह से मात मिली, उससे शिवपाल यादव के बहुत सारे समर्थक चुनाव से दूर खड़े हैं. हालांकि सिर्फ शिवपाल यादव के समर्थक ही दूर नहीं खड़े हैं, मुलायम सिंह के चालीस साल के राजनीतिक साथी और उनकी प्रशंसा करने वाले लोग भी चुनाव से दूर खड़े हैं. ये तीन चीजें अखिलेश यादव के पूर्ण रूप से सत्ता प्राप्त करने में आड़े आ सकती हैं. कांग्रेस पार्टी का गठजोड़ समाजवादी पार्टी से हुआ और इसमें प्रियंका गांधी का बहुत बड रोल रहा. सीटें भी लगभग बंट गईं और कांग्रेस सिर्फ एक सौ पाँच सीटों पर चुनाव लड़ रही है. लेकिन इस समझौते में इतनी देर हो गई कि उत्तर प्रदेश की किसी भी रैली में कांग्रेस के लोग शामिल नहीं हुए . दूसरा तथ्य, कांग्रेस के समर्थक वोट समाजवादी पार्टी को नहीं पड़े, बल्कि जहां कांग्रेस नहीं लड़ रही है, वहां कांग्रेस का वोट भारतीय जनता पार्टी को चला गया. तीसरी चीज, मुसलमानों में बंटवारा हुआ और मुसलमानों की बड़ी संख्या बहुत सारे चुनाव क्षेत्रों में अखिलेश और राहुल गांधी के गठबंधन के साथ गई. कांग्रेस की परेशानी ये है कि बहुत सारी जगहों पर उम्मीदवार ही नहीं मिले, तो उसे समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों को अपने चुनाव चिन्ह पर चुनाव में उतारना पड़ा, क्योंकि उसे अपने एक सौ पाँच लोगों की संख्या पूरी करनी थी. लखनऊ के ताज होटल में अखिलेश यादव और राहुल गांधी की पहली प्रेस कांफ्रेंस में लोगों ने ध्यान नहीं दिया. वहां पर राहुल गांधी अपना वर्चस्व दिखाने के लिए बेताब थे. अखिलेश यादव ने अपना संबोधन राहुल जी बोल कर किया और राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा कि अखिलेश एक अच्छा लड़का है. अखिलेश ने उनकी तरफ अचंभे से देखा और इस वाक्य के बाद उन्होंने राहुल जी की जगह राहुल कहना शुरू किया. ये बताता है कि दोनों के कार्यकर्ता एक हो कर चुनाव नहीं लड़ रहे हैं. इसलिए कांग्रेस की सीटें पैंतीस से पैंतालीस के बीच रहने की उम्मीद है. जबकि प्रशांत किशोर का कहना है और उन्होंने प्रियंका गांधी को इस बात पर प्रजेंटेशन भी दिया कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश में छिहत्तर सीटें जीत रही है. लेकिन, प्रियंका गांधी ने सिर्फ गांधी परिवार के पारंपरिक सीट रायबरेली क्षेत्र में ही प्रचार करने का फैसला किया. जबकि, ये खबर आ रही थी कि वह पूरे उत्तर प्रदेश में कैंपेन करेंगी. प्रियंका शायद इस पशोपेश में पड़ी रहीं कि अगर वो कैंपेन करती हैं और कांग्रेस को सीटें नहीं आती हैं, तो उनके अपने राजनीतिक भविष्य को ले कर बहुत बड़ा प्रश्नवाचक चिन्ह खड़ा हो जाएगा. इस पशोपेश से राहुल गांधी का कोई लेना-देना नहीं है. राहुल गांधी इस चुनाव में साधु-संत वाली भाषा में उन सवालों पर ज्यादा बात करते दिखाई दिए, जिनका चुनाव से कोई मतलब नहीं है. भारतीय जनता पार्टी अपना चेहरा तय नहीं कर पाई है, जिसे मुख्यमंत्री बनाया जा सके. लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश की एक सभा में योगी आदित्यनाथ ने जिस तरह का भाषण दिया और उन्हें वहां जैसी प्रतिक्रिया मिली, उससे दिल्ली में बैठे पार्टी अध्यक्ष को ये निर्णय लेना पड़ा कि योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश में ज्यादा से ज्यादा जगहों पर घुमाया जाए. योगी आदित्यनाथ को दिल्ली बुलाया गया. उनके दिल्ली पहुंचने से पहले ये फैसला हो गया था कि उन्हें स्थायी रूप से प्रचार के लिए एक हेलिकॉप्टर दिया जाए, ताकि वे ज्यादा से ज्यादा जगहों पर जाएं. जब वे दिल्ली आए, तो उनसे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने, खास कर पार्टी अध्यक्ष ने कह दिया कि हम घोषणा तो नहीं कर रहे हैं, लेकिन अगर हम जीतते हैं, तो आप हमारे अगले मुख्यमंत्री होंगे. योगी आदित्यनाथ दिन-रात भारतीय जनता पार्टी के प्रचार में लगे हुए हैं. योगी द्वारा उठाए गए सवाल उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को ये आशा दे गए कि चुनाव में ध्रुवीकरण हो जाएगा और मुसलमानों के खिलाफ सारे हिंदू भाजपा को वोट देंगे. हालांकि अब तक ये ध्रुवीकरण नहीं हो पाया है. सारी कोशिशों के बाद भी, शुरू के तीन-चार फेज तक जनता ने ध्रुवीकृत होने से मना कर दिया है. अब आखिरी चरण के लिए कुछ ताकतें ध्रुवीकरण की कोशिशें कर रही है. भारतीय जनता पार्टी के पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा कोई और बड़ा कैंपेनर नहीं है. उन्हीं की सभाओं में भारी भीड़ हो रही है. वे जैसे भाषण दे रहे हैं, उससे ये माना जाना चाहिए कि उत्तर प्रदेश में भाजपा को स्पष्ट विजय मिलने वाली है. लेकिन यहां पर सन एक हज़ार नौ सौ सत्तावन के चुनाव को याद रखना चाहिए, जब भारतीय जनसंघ की सभाएं हो रही थीं और अटल बिहारी वाजपेयी की सभाओं में लाखों लोग आते थे. बाद में अटल जी ने एक बातचीत के दौरान, जिसमें मैं शामिल था, भारत के भूतपूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर जी से कहा कि हम ये सोच रहे थे कि हम जीत रहे हैं, लेकिन बाद में मुझे पता चला कि मेरी सभाओं में जितनी भीड़ हो रही थी, उतने ही हमारे वोट कम हो रहे थे. ये बात मैं इसलिए याद कर रहा हूं क्योंकि भारतीय जनता पार्टी से ग्रामीण क्षेत्र के लोग नाराज हैं. खास कर किसान, जिन्हें इस नोटबंदी से काफी परेशानियां झेलनी पड़ी. व्यापारी वर्ग हमेशा भाजपा का समर्थक रहा है, लेकिन आज उसका एक बड़ा तबका भाजपा से नाराज है. नोटबंदी से उनका खुदरा व्यापार बहुत ज्यादा दबाव में आ गया और उन्हें उनलोगों को अपने यहां से हटाना पड़ा, जिन्हें वे नगद पैसा दे कर अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए काम में लाते थे. व्यापार पर जिस तरह की सख्ती प्रधानमंत्री मोदी लागू करने की कोशिश कर रहे हैं, वो व्यापारियों को समझ में नहीं आ रहा है. व्यापारियों की नाराजगी का दूसरा कारण यह भी है. उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी का संपूर्ण नेतृत्व पिछडों को दे दिया गया है. इससे उनका परंपरागत ब्राह्मण समाज सौ प्रतिशत भारतीय जनता पार्टी के साथ नहीं है. भारतीय जनता पार्टी को अजित सिंह के साथ गठबंधन न करने का बड़ा नुक़सान उठाना पड़ रहा है. भारतीय जनता पार्टी को कुछ मुस्लिम वोट भी मिलते, लेकिन भाजपा ने एक भी मुस्लिम उम्मीदवार को चुनाव में नहीं उतारा. इसलिए इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की स्थिति भले ही देखने में बहुत मजबूत लगे, पर ये परेशानियां चुनाव में उसके सामने आ रही हैं और लोगों को उसके पक्ष में वोट देने से रोक रही है. सरकार किसकी बनेगी. . अगर यही स्थिति रहती है, तो इसमें शंका है कि उत्तर प्रदेश में किसी भी पार्टी को बहुमत मिले और अगर ऐसा होता है, यानी किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिलता है, तो इसका मतलब है, फ्रैक्चर्ड मैंडेट यानी हंग विधान सभा उत्तर प्रदेश में दिखाई देगी. तब सरकार किसकी बनेगी? इसका सीधा जवाब है कि तब भारतीय जनता पार्टी और मायावती जी की सरकार बनेगी या भारतीय जनता पार्टी और अखिलेश यादव जी की सरकार बनेगी. अखिलेश यादव के बारे में एक आम धारणा है कि उन्होंने संघर्ष नहीं देखा है, समाजवाद नाम उनका रटा हुआ है, लेकिन समाजवादी मूल्यों में उनकी आस्था कम है. उन्होंने जैसे कांग्रेस के साथ गठबंधन किया, सरकार बनाने के लिए वैसे ही भारतीय जनता पार्टी के साथ भी गठबंधन कर सकते हैं. अगर मायावती की संख्या कम हुई, तो राहुल गांधी अखिलेश यादव का साथ छोड़ कर मायावती से भी हाथ मिला सकते हैं और उनकी सरकार बनवा सकते हैं. राहुल गांधी ने अपनी पहली प्रेस कांफ्रेंस में ये संदेश या इशारा दिया भी कि वे मायावती को बहुत हानिकारक नहीं मानते हैं. अगर चुनाव के बाद ऐसी कोई स्थिति आती है, तो मायावती साथ समझौता करने में उन्हें कोई परेशानी नहीं होगी. भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेता अगर चुनाव नहीं जीतते हैं, जिनमें संगीत सोम भी शामिल हैं, तो उत्तर प्रदेश का फैसला भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ गया माना जाएगा. ऐसी स्थिति में भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह के भविष्य पर भी असर पड़ेगा, क्योंकि बिहार और उत्तर प्रदेश के सारे फैसले सिर्फ और सिर्फ अमित शाह ने लिए हैं. अमित शाह की कोशिश राजनाथ सिंह को उत्तर प्रदेश में पार्टी का चेहरा बनाने की थी, लेकिन राजनाथ सिंह बहुत सफाई से उनके हाथ से निकल गए. उत्तर प्रदेश का चुनाव देश के आने वाले चुनावों पर भी असर डालेगा, जिनमें मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे प्रदेश शामिल हैं. दो हज़ार उन्नीस के ऊपर तो निश्चित तौर पर इसका असर होगा. यह चुनाव उन रेखाओं को साफ तौर पर सामने लाएगा, जिसके आस-पास अखिलेश यादव-राहुल गांधी अपनी रणनीति तय करेंगे. प्रियंका गांधी और नीतीश कुमार, ये दो पर्दे के पीछे के खिलाड़ी हैं. प्रियंका गांधी कांग्रेस की पूरी रणनीति बनाने में, मुद्दे तय करने में, मदद पहुंचाने में सबसे बड़ा रोल प्ले कर रही हैं. दूसरी तरफ, नीतीश कुमार उत्तर प्रदेश में एक भी सीट पर चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, ताकि सेकुलर वोटों का बंटवारा न हो. हालांकि अगर वे पचास-साठ सीटों पर चुनाव लड़ते, तो भी उनके पास भी छः-आठ सीटें होतीं. लेकिन उन्होंने वैसा ही साहसिक फैसला लिया, जैसा फैसला उन्होंने कांग्रेस को बिहार में चालीस सीटें दे कर लिया था. अखिलेश यादव की एक बात सही है कि उत्तर प्रदेश का चुनाव देश का भविष्य तय करेगा. ये बात लगभग सभी लोग दबी जुबान से कर रहे हैं. मैं ये तो नहीं कहता कि यह चुनाव देश का भविष्य तय करेगा, लेकिन देश के भविष्य की दिशा तय करेगा और भारतीय जनता पार्टी को अपनी बहुत सारी नीतियों पर फिर से सोचने पर विवश करेगा. भारतीय जनता पार्टी अगर ये चुनाव जीत जाती है, तो फिर समाजवादी पार्टी हो या देश की दूसरी पार्टियां, उन्हें दो हज़ार उन्नीस के लिए एक दबाव के तहत एक साथ आने पर विवश होना पड़ेगा. उस समय अगर राहुल गांधी परिस्थितियों के ऊपर सारा बोझ डाल देंगे, तब वे विपक्ष के एकमात्र नेता नहीं कहलाएंगे, उनके सामने कई सारे और नेता खड़े हो जाएंगे, जिस स्थिति का फायदा सीधे-सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को होगा.
28 वर्षीय डेलगाइडिस बचपन से बार्बी डॉल की तरह दिखना चाहती थीं। इसके लिए उन्होंने 1-2 नहीं पूरी 200 सर्जरी कराई हैं और इस पर 16 करोड़ से ज्यादा की रकम खर्च की है। खबरों की मानें तो डेलगाइडिस बचपन में इतनी सुंदर नहीं थीं और जब उन्होंने सुंदर लोगों को महत्व मिलते देखा, तो आगे चलकर बार्बी डॉल जैसी दिखने की ठानी और इसके लिए वह किसी भी हद तक जाने को तैयार थीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, डेलगाइडिस ने 17 साल की उम्र में घर छोड़ दिया था। उन्होंने पोल डांसर के तौर पर काम शुरू किया और उससे मिलने वाले पैसों को सर्जरी के लिए बचाना शुरू कर दिया।
अट्ठाईस वर्षीय डेलगाइडिस बचपन से बार्बी डॉल की तरह दिखना चाहती थीं। इसके लिए उन्होंने एक-दो नहीं पूरी दो सौ सर्जरी कराई हैं और इस पर सोलह करोड़ से ज्यादा की रकम खर्च की है। खबरों की मानें तो डेलगाइडिस बचपन में इतनी सुंदर नहीं थीं और जब उन्होंने सुंदर लोगों को महत्व मिलते देखा, तो आगे चलकर बार्बी डॉल जैसी दिखने की ठानी और इसके लिए वह किसी भी हद तक जाने को तैयार थीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, डेलगाइडिस ने सत्रह साल की उम्र में घर छोड़ दिया था। उन्होंने पोल डांसर के तौर पर काम शुरू किया और उससे मिलने वाले पैसों को सर्जरी के लिए बचाना शुरू कर दिया।
मिनी चिड़ियाघर की मान्यता तो दे दी, धन कौन देगा! सेंटर जू ऑथरिटी (सीजेडए) ने नगर के एनटीडी में स्थित मृग विहार को मिनी चिड़ियाघर की मान्यता दे दी है, लेकिन चिड़ियाघर के सुदृढ़ीकरण के लिए बजट सीजेडए से नहीं मिला है। जिससे मिनी चिड़ियाघर को एक अच्छे पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की योजना आगे नहीं बढ़ सकी है। नगर से करीब तीन किमी दूर एनटीडी में 1980 में करीब 38 हेक्टेयर क्षेत्र में मृग विहार स्थापित है। सिविल सोयम वन प्रभाग के अधीन इस मृग विहार में आठ तेंदुए, 90 चीतल और सांभर, एक सफेद बंदर, एक भालू के अलावा काकड़ समेत कुल 105 जानवर हैं। विभाग इन जानवरों के लिए बड़ी मुश्किल से बजट की व्यवस्था कर पाता है। सीजेडए ने मृग विहार एनटीडी को मिनी चिड़ियाघर की मान्यता दे दी हैै। सीजेडए के मानकों के मुताबिक ही मिनी चिड़ियाघर में जानवरों के लिए बाड़े बनाए जाने हैं। मिनी चिड़ियाघर बनने के बाद देश के अन्य चिड़ियाघर से विभाग चीतल और सांभर की अदला-बदली कर अन्य जानवर यहां लाएगा। टाइगर, कस्तूरी मृग, मोनाल जैसे जानवर के लिए भी यहां की जलवायु अच्छी है। वन विभाग की मिनी चिड़ियाघर से करीब तीन किमी दूर डानागोलू मंदिर तक टॉय ट्रेन चलाने की भी योजना है, ताकि मिनी चिड़ियाघर अच्छे पर्यटक स्थल के रूप में विकसित हो सके। यहां प्रतिवर्ष करीब चालीस हजार पर्यटक पहुंचते हैं। सीजेडए से बजट नहीं मिलने से मिनी चिड़ियाघर के सुदृढ़ीकरण का काम शुरू नहीं हो पाया है। चिड़ियाघर के सुदृढ़ीकरण के लिए 5. 40 करोड़ का प्रस्ताव बनाकर मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक के माध्यम से सीजेडए को भेजा है। बजट अवमुक्त होने के बाद काम शुरू किया जाएगा। आरसी शर्मा, डीएफओ, सिविल सोयम वन प्रभाग अल्मोड़ा। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
मिनी चिड़ियाघर की मान्यता तो दे दी, धन कौन देगा! सेंटर जू ऑथरिटी ने नगर के एनटीडी में स्थित मृग विहार को मिनी चिड़ियाघर की मान्यता दे दी है, लेकिन चिड़ियाघर के सुदृढ़ीकरण के लिए बजट सीजेडए से नहीं मिला है। जिससे मिनी चिड़ियाघर को एक अच्छे पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की योजना आगे नहीं बढ़ सकी है। नगर से करीब तीन किमी दूर एनटीडी में एक हज़ार नौ सौ अस्सी में करीब अड़तीस हेक्टेयर क्षेत्र में मृग विहार स्थापित है। सिविल सोयम वन प्रभाग के अधीन इस मृग विहार में आठ तेंदुए, नब्बे चीतल और सांभर, एक सफेद बंदर, एक भालू के अलावा काकड़ समेत कुल एक सौ पाँच जानवर हैं। विभाग इन जानवरों के लिए बड़ी मुश्किल से बजट की व्यवस्था कर पाता है। सीजेडए ने मृग विहार एनटीडी को मिनी चिड़ियाघर की मान्यता दे दी हैै। सीजेडए के मानकों के मुताबिक ही मिनी चिड़ियाघर में जानवरों के लिए बाड़े बनाए जाने हैं। मिनी चिड़ियाघर बनने के बाद देश के अन्य चिड़ियाघर से विभाग चीतल और सांभर की अदला-बदली कर अन्य जानवर यहां लाएगा। टाइगर, कस्तूरी मृग, मोनाल जैसे जानवर के लिए भी यहां की जलवायु अच्छी है। वन विभाग की मिनी चिड़ियाघर से करीब तीन किमी दूर डानागोलू मंदिर तक टॉय ट्रेन चलाने की भी योजना है, ताकि मिनी चिड़ियाघर अच्छे पर्यटक स्थल के रूप में विकसित हो सके। यहां प्रतिवर्ष करीब चालीस हजार पर्यटक पहुंचते हैं। सीजेडए से बजट नहीं मिलने से मिनी चिड़ियाघर के सुदृढ़ीकरण का काम शुरू नहीं हो पाया है। चिड़ियाघर के सुदृढ़ीकरण के लिए पाँच. चालीस करोड़ का प्रस्ताव बनाकर मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक के माध्यम से सीजेडए को भेजा है। बजट अवमुक्त होने के बाद काम शुरू किया जाएगा। आरसी शर्मा, डीएफओ, सिविल सोयम वन प्रभाग अल्मोड़ा। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
Salman Khan Ignore Vicky Kaushal : सलमान खान इस समय आबु धाबी में आईफा 2023 में शामिल होने पहुंचे हैं। जहां से उनका एक वीडियो वायरल हुआ है। इस वीडियो में विक्की कौशल भी दिख रहे हैं, जिन्हें सलमान ने सरेआम इग्नोर कर दिया। बॉलीवुड एक्टर सलमान खान (Salman Khan) ने हाल ही में अबु धाबी से अपनी एक तस्वीर शेयर की थी। एक्टर यहां आईफा 2023 (Iifa Awards 2023) में शामिल होने के लिए आए हैं। उनके साथ ही यहां कई स्टार्स भी इस समारोह में शामिल होंगे। इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें सलमान खान और विक्की कौशल दिखाई दे रहे हैं। लेकिन वीडियो में कुछ ऐसा दिखा जिसे देखने के बाद लोग हैरान हो रहे हैं। साथ ही एक्टर को ट्रोल कर रहे हैं।
Salman Khan Ignore Vicky Kaushal : सलमान खान इस समय आबु धाबी में आईफा दो हज़ार तेईस में शामिल होने पहुंचे हैं। जहां से उनका एक वीडियो वायरल हुआ है। इस वीडियो में विक्की कौशल भी दिख रहे हैं, जिन्हें सलमान ने सरेआम इग्नोर कर दिया। बॉलीवुड एक्टर सलमान खान ने हाल ही में अबु धाबी से अपनी एक तस्वीर शेयर की थी। एक्टर यहां आईफा दो हज़ार तेईस में शामिल होने के लिए आए हैं। उनके साथ ही यहां कई स्टार्स भी इस समारोह में शामिल होंगे। इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें सलमान खान और विक्की कौशल दिखाई दे रहे हैं। लेकिन वीडियो में कुछ ऐसा दिखा जिसे देखने के बाद लोग हैरान हो रहे हैं। साथ ही एक्टर को ट्रोल कर रहे हैं।
Petrol-Diesel Price Today: क्रूड ऑयल की कीमतों में उठापटक के कारण पेट्रोल और डीजल का रेट घटने की उपभोक्ताओं की उम्मीद अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। Petrol-Diesel Price Today: पेट्रोल और डीजल के रेट में आज भी कोई बदलाव न होने से उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली। सरकारी तेल कंपनियों की ओर से आज जारी किए गए नए रेट के मुताबिक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई अंतर नहीं आया है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब साढ़े पांच महीने से स्थिरता बनी हुई है। पहले पेट्रोल और डीजल की कीमतों में प्रायः बदलाव हुआ करता था मगर अब लंबे समय से स्थिरता बनी रहने के कारण सरकार को महंगाई पर काबू पाने में भी मदद मिली है। क्रूड ऑयल की कीमतों में उठापटक के कारण पेट्रोल और डीजल का रेट घटने की उपभोक्ताओं की उम्मीद अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। केंद्र सरकार ने पिछले मई महीने के दौरान उपभोक्ताओं को राहत पहुंचाने वाला कदम उठाया था। सरकार की ओर से पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती की गई थी। इस कटौती के बाद उपभोक्ताओं ने काफी राहत महसूस की थी क्योंकि पेट्रोल की कीमत में करीब आठ रुपये और डीजल की कीमत में करीब पांच रुपये की गिरावट दर्ज की गई थी। उसके बाद से पेट्रोल और डीजल का रेट पूर्व स्तर पर टिका हुआ है। राजधानी दिल्ली में लंबे समय से पेट्रोल 96. 72 रुपये लीटर है तो डीजल 89. 62 रुपये लीटर के हिसाब से बिक रहा है। वहीं मुंबई में पेट्रोल 106. 31 रुपये और डीजल 94. 27 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। कोलकाता में पेट्रोल 106. 03 रुपये और डीजल 92. 76 रुपये प्रति लीटर है जबकि चेन्नई में पेट्रोल 102. 63 रुपये और डीजल 94. 24 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। इस बीच ओपेक देशों की ओर से कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती के फैसले का व्यापक असर दिख रहा है। कच्चे तेल में रिकॉर्ड गिरावट के बाद अब तेजी का रुख दिख रहा है। अगस्त और सितंबर महीने के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई थी। अक्टूबर की शुरुआत के बाद से ही कच्चे तेल की कीमतों में उठापटक मची हुई है। कभी तेजी का रुख दिख रहा है तो कभी हल्की गिरावट दर्ज की जा रही है। रविवार सुबह डब्यू टीआई क्रूड चार डॉलर से भी ज्याीदा चढ़कर 92. 61 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। ब्रेंट क्रूड में भी करीब चार डॉलर की तेजी देखने को मिली और यह चढ़कर 98. 57 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। सोमवार सुबह डब्यू्र टीआई क्रूड 1. 69 डॉलर गिरकर 90. 92 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। ब्रेंट क्रूड में भी गिरावट आई और यह गिरकर 97. 09 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। मंगलवार सुबह डब्यूकर टीआई क्रूड चढ़कर 92. 01 डॉलर प्रति बैरल पर देखा गया। ब्रेंट क्रूड में भी तेजी आई और यह 97. 95 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
Petrol-Diesel Price Today: क्रूड ऑयल की कीमतों में उठापटक के कारण पेट्रोल और डीजल का रेट घटने की उपभोक्ताओं की उम्मीद अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। Petrol-Diesel Price Today: पेट्रोल और डीजल के रेट में आज भी कोई बदलाव न होने से उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली। सरकारी तेल कंपनियों की ओर से आज जारी किए गए नए रेट के मुताबिक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई अंतर नहीं आया है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब साढ़े पांच महीने से स्थिरता बनी हुई है। पहले पेट्रोल और डीजल की कीमतों में प्रायः बदलाव हुआ करता था मगर अब लंबे समय से स्थिरता बनी रहने के कारण सरकार को महंगाई पर काबू पाने में भी मदद मिली है। क्रूड ऑयल की कीमतों में उठापटक के कारण पेट्रोल और डीजल का रेट घटने की उपभोक्ताओं की उम्मीद अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। केंद्र सरकार ने पिछले मई महीने के दौरान उपभोक्ताओं को राहत पहुंचाने वाला कदम उठाया था। सरकार की ओर से पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती की गई थी। इस कटौती के बाद उपभोक्ताओं ने काफी राहत महसूस की थी क्योंकि पेट्रोल की कीमत में करीब आठ रुपये और डीजल की कीमत में करीब पांच रुपये की गिरावट दर्ज की गई थी। उसके बाद से पेट्रोल और डीजल का रेट पूर्व स्तर पर टिका हुआ है। राजधानी दिल्ली में लंबे समय से पेट्रोल छियानवे. बहत्तर रुपयापये लीटर है तो डीजल नवासी. बासठ रुपयापये लीटर के हिसाब से बिक रहा है। वहीं मुंबई में पेट्रोल एक सौ छः. इकतीस रुपयापये और डीजल चौरानवे. सत्ताईस रुपयापये प्रति लीटर मिल रहा है। कोलकाता में पेट्रोल एक सौ छः. तीन रुपयापये और डीजल बानवे. छिहत्तर रुपयापये प्रति लीटर है जबकि चेन्नई में पेट्रोल एक सौ दो. तिरेसठ रुपयापये और डीजल चौरानवे. चौबीस रुपयापये प्रति लीटर बिक रहा है। इस बीच ओपेक देशों की ओर से कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती के फैसले का व्यापक असर दिख रहा है। कच्चे तेल में रिकॉर्ड गिरावट के बाद अब तेजी का रुख दिख रहा है। अगस्त और सितंबर महीने के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई थी। अक्टूबर की शुरुआत के बाद से ही कच्चे तेल की कीमतों में उठापटक मची हुई है। कभी तेजी का रुख दिख रहा है तो कभी हल्की गिरावट दर्ज की जा रही है। रविवार सुबह डब्यू टीआई क्रूड चार डॉलर से भी ज्याीदा चढ़कर बानवे. इकसठ डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। ब्रेंट क्रूड में भी करीब चार डॉलर की तेजी देखने को मिली और यह चढ़कर अट्ठानवे. सत्तावन डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। सोमवार सुबह डब्यू्र टीआई क्रूड एक. उनहत्तर डॉलर गिरकर नब्बे. बानवे डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। ब्रेंट क्रूड में भी गिरावट आई और यह गिरकर सत्तानवे. नौ डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। मंगलवार सुबह डब्यूकर टीआई क्रूड चढ़कर बानवे. एक डॉलर प्रति बैरल पर देखा गया। ब्रेंट क्रूड में भी तेजी आई और यह सत्तानवे. पचानवे डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
अक्सर, योनि दर्द से ग्रस्त महिलाएं,विभिन्न बैक्टीरिया और कवक द्वारा उकसाया। अब दवाओं की एक नई पीढ़ी दिखाई दे रही है, जो इन बीमारियों से निपटने में मदद करेगी। विभिन्न गंभीरता के योनिजन के मामले में, दवा "क्लीऑन डी 100" निर्धारित है। ये टैबलेट एक विशेष पैकेज में सफेद बादाम के आकार या मोमबत्तियां हैं। दवा में उत्कृष्ट जीवाणुरोधी, एंटिफंगल और एंटीप्राटोझोअल क्रियाएं हैं उपयोग के लिए संकेत विभिन्न प्रकार के योनिशोथ हैंः - त्रिकोमेटोस योनिटाइटिस; - खरा योनि योनिसिस; "क्लोन डी 100" की तैयारी के लिए निर्देश संलग्न हैहमेशा, ताकि दवा का उपयोग करने से पहले बिना असफल हो, इसे पढ़ें मतभेद, खुराक और साइड इफेक्ट पर विशेष ध्यान दें। * मेट्रोनिडाजोल - एक पदार्थ जो कई रोगाणुओं के खिलाफ सक्रिय है, विभिन्न सूक्ष्मजीवों की मृत्यु की ओर जाता है; * माइकोनोजोल - एक पदार्थ है जो विभिन्न कवक के खिलाफ काम करता है, यह इस घटक है जो खुजली समाप्त करता है। मोमबत्तियों का उपयोग करते समय "क्लोन डी 100" मोमबत्तीपैकेजिंग से मुक्त, ठंडा पानी के साथ धोया जाता है और योनि में जितना संभव हो उतना गहरा इंजेक्शन होता है। पिघल करने के लिए, वह वापस नहीं गई थी, आपको दवा लेने के बाद क्षैतिज स्थिति में थोड़ी देर के लिए लेटना चाहिए, ताकि शरीर में विघटित हो सके। दवा विभिन्न स्थानीय प्रतिक्रियाओं का कारण बन सकती हैः - योनि से अप्रिय निर्वहन; - जलने, दर्द, खुजली - योनि के श्लेष्म झिल्ली का जलन। पाचन तंत्र दवा की प्रतिक्रिया भी दे सकता हैः कब्ज या दस्त; - शुष्क मुंह; पेट की गुहा में दर्द; केंद्रीय तंत्रिका तंत्र ऐसी प्रतिक्रिया दे सकता हैः गंभीर सिरदर्द; विभिन्न एलर्जी प्रतिक्रियाएं भी दिखाई दे सकती हैंः - खुजली; - पित्ती; - दाने। कभी-कभी, जब यह दवा लेते हैं, तो एक त्वरित पेशाब होता है। यदि मूत्र लाल-भूरा हो तो डरना मतः यह दवा की कार्रवाई है। उनमें सेः - आंदोलनों के समन्वय का उल्लंघन; - रक्त के विभिन्न रोग; - गर्भावस्था; - लैक्टेशन अवधि; - जिगर की विफलता; - केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को नुकसान की विभिन्न डिग्री, विशेषकर - मिर्गी के साथ; - दवा पर अतिसंवेदनशीलता; प्रवेश के लिए कई विशेष निर्देश भी हैंतैयारी "क्लोन डी 100", जिसे अवश्य देखा जाना चाहिए, अन्यथा इसका प्रभाव शरीर पर आवश्यक प्रभाव नहीं होगा। निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान देने योग्य हैः - दवा के साथ उपचार के दौरान संभोग से बचना चाहिए; - उपचार का प्रभाव अधिक होगा यदि आप के साथ-साथ उपचार के दौरान और आपके यौन साथी को मिल जाए, भले ही यह रोग के बिल्कुल संकेत न हों; - शराब पीने की कोशिश मत करो; - गाड़ी चलाते समय सावधान रहें, क्योंकि अचानक चक्कर आ सकती है; - उपचार के दौरान परीक्षण पर गर्भावस्था की उपस्थिति की जांच नहीं करते, क्योंकि यह एक गलत सकारात्मक परिणाम देगा। इस दवा के साथ अधिक मात्रा के मामले नहीं हैंदर्ज की गई। यदि आप एक ही समय में अन्य दवाओं का उपयोग कर रहे हैं, तो अपने डॉक्टर को बताना सुनिश्चित करें अन्य दवाओं के उपयोग के बारे में सावधान रहें, क्योंकि "क्लोन डी 100" एजेंट सक्रिय रूप से कई बार्बिटूरेट्स और एंटीकोआगुलंट्स के साथ संपर्क करता है।
अक्सर, योनि दर्द से ग्रस्त महिलाएं,विभिन्न बैक्टीरिया और कवक द्वारा उकसाया। अब दवाओं की एक नई पीढ़ी दिखाई दे रही है, जो इन बीमारियों से निपटने में मदद करेगी। विभिन्न गंभीरता के योनिजन के मामले में, दवा "क्लीऑन डी एक सौ" निर्धारित है। ये टैबलेट एक विशेष पैकेज में सफेद बादाम के आकार या मोमबत्तियां हैं। दवा में उत्कृष्ट जीवाणुरोधी, एंटिफंगल और एंटीप्राटोझोअल क्रियाएं हैं उपयोग के लिए संकेत विभिन्न प्रकार के योनिशोथ हैंः - त्रिकोमेटोस योनिटाइटिस; - खरा योनि योनिसिस; "क्लोन डी एक सौ" की तैयारी के लिए निर्देश संलग्न हैहमेशा, ताकि दवा का उपयोग करने से पहले बिना असफल हो, इसे पढ़ें मतभेद, खुराक और साइड इफेक्ट पर विशेष ध्यान दें। * मेट्रोनिडाजोल - एक पदार्थ जो कई रोगाणुओं के खिलाफ सक्रिय है, विभिन्न सूक्ष्मजीवों की मृत्यु की ओर जाता है; * माइकोनोजोल - एक पदार्थ है जो विभिन्न कवक के खिलाफ काम करता है, यह इस घटक है जो खुजली समाप्त करता है। मोमबत्तियों का उपयोग करते समय "क्लोन डी एक सौ" मोमबत्तीपैकेजिंग से मुक्त, ठंडा पानी के साथ धोया जाता है और योनि में जितना संभव हो उतना गहरा इंजेक्शन होता है। पिघल करने के लिए, वह वापस नहीं गई थी, आपको दवा लेने के बाद क्षैतिज स्थिति में थोड़ी देर के लिए लेटना चाहिए, ताकि शरीर में विघटित हो सके। दवा विभिन्न स्थानीय प्रतिक्रियाओं का कारण बन सकती हैः - योनि से अप्रिय निर्वहन; - जलने, दर्द, खुजली - योनि के श्लेष्म झिल्ली का जलन। पाचन तंत्र दवा की प्रतिक्रिया भी दे सकता हैः कब्ज या दस्त; - शुष्क मुंह; पेट की गुहा में दर्द; केंद्रीय तंत्रिका तंत्र ऐसी प्रतिक्रिया दे सकता हैः गंभीर सिरदर्द; विभिन्न एलर्जी प्रतिक्रियाएं भी दिखाई दे सकती हैंः - खुजली; - पित्ती; - दाने। कभी-कभी, जब यह दवा लेते हैं, तो एक त्वरित पेशाब होता है। यदि मूत्र लाल-भूरा हो तो डरना मतः यह दवा की कार्रवाई है। उनमें सेः - आंदोलनों के समन्वय का उल्लंघन; - रक्त के विभिन्न रोग; - गर्भावस्था; - लैक्टेशन अवधि; - जिगर की विफलता; - केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को नुकसान की विभिन्न डिग्री, विशेषकर - मिर्गी के साथ; - दवा पर अतिसंवेदनशीलता; प्रवेश के लिए कई विशेष निर्देश भी हैंतैयारी "क्लोन डी एक सौ", जिसे अवश्य देखा जाना चाहिए, अन्यथा इसका प्रभाव शरीर पर आवश्यक प्रभाव नहीं होगा। निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान देने योग्य हैः - दवा के साथ उपचार के दौरान संभोग से बचना चाहिए; - उपचार का प्रभाव अधिक होगा यदि आप के साथ-साथ उपचार के दौरान और आपके यौन साथी को मिल जाए, भले ही यह रोग के बिल्कुल संकेत न हों; - शराब पीने की कोशिश मत करो; - गाड़ी चलाते समय सावधान रहें, क्योंकि अचानक चक्कर आ सकती है; - उपचार के दौरान परीक्षण पर गर्भावस्था की उपस्थिति की जांच नहीं करते, क्योंकि यह एक गलत सकारात्मक परिणाम देगा। इस दवा के साथ अधिक मात्रा के मामले नहीं हैंदर्ज की गई। यदि आप एक ही समय में अन्य दवाओं का उपयोग कर रहे हैं, तो अपने डॉक्टर को बताना सुनिश्चित करें अन्य दवाओं के उपयोग के बारे में सावधान रहें, क्योंकि "क्लोन डी एक सौ" एजेंट सक्रिय रूप से कई बार्बिटूरेट्स और एंटीकोआगुलंट्स के साथ संपर्क करता है।
सीआरआरसी जेडईएलसी ("सीआरआरसी") और रेल इनोवेटर्स ग्रुप ("आरआईजी") ने रॉटरडैम बंदरगाह में डीजल शंटिंग इंजनों को बदलने के उद्देश्य से 2018 में एक संयुक्त विकास समझौते पर हस्ताक्षर किए। अब जब सौदा पूरा हो गया है, तो उत्पादन शुरू हो सकता है। जीरो एमिशन लोकोमोटिव मल्टीपल मेन वोल्टेज के तहत संचालन के लिए उपयुक्त है और उच्च क्षमता वाली बैटरी और इंटेलिजेंट ब्रेक एनर्जी रीजनरेशन सिस्टम से लैस है। उन्नत बैटरी तकनीक लोकोमोटिव को बिना शक्ति वाली रेलवे लाइनों पर संचालित करने और पहले और अंतिम मील पैंतरेबाज़ी संचालन करने की अनुमति देती है। इस प्रकार, डीजल शंटिंग इंजनों के उपयोग से बचकर उत्सर्जन और शोर को कम किया जा सकता है। आरआईजी ने पहले लोकोमोटिव में निवेश किया है और रेलवे कंपनी "रेल फोर्स वन" से 2024 में रॉटरडैम के बंदरगाह में उन्हें चालू करने की उम्मीद है। रेल इनोवेटर्स ग्रुप के सीईओ जूलियन रेमी इस बात से खुश हैं कि सीआरआरसी ने आरआईजी के विनिर्देशों के लिए बनाए गए इस तरह के एक अभिनव लोकोमोटिव को डिजाइन करने का काम लिया है। "सीआरआरसी दुनिया का सबसे बड़ा लोकोमोटिव निर्माता है और बैटरी और हाइब्रिड तकनीक में एक सिद्ध ट्रैक रिकॉर्ड है। हम इसे सफल बनाने के लिए उनके ज्ञान और कौशल पर बहुत अधिक भरोसा करते हैं। सीआरआरसी की शून्य-उत्सर्जन तकनीक का उपयोग करके और इसे हरित बिजली से सशक्त करके, हम शून्य-उत्सर्जन, शुरू से अंत तक पर्यावरण के अनुकूल रेल संचालन में अग्रणी निवेश कर रहे हैं। सीआरआरसी जेडईएलसी यूरोप के प्रबंध निदेशक चेन कियांग के अनुसार, यह समय आरआईजी के साथ इस परियोजना को शुरू करने और रॉटरडैम बंदरगाह के लिए अभिनव और उत्सर्जन मुक्त हाइब्रिड इंजन प्रदान करने का है। "हमारे इंजनों को कार्बन तटस्थता प्राप्त करने के लक्ष्य के साथ डिजाइन किया गया है और रेल ऑपरेटरों और परिवहन केंद्रों को परंपरागत डीजल इंजनों के लिए एक हरा और ऊर्जा कुशल विकल्प प्रदान करता है। हमें उम्मीद है कि इन इंजनों की डिलीवरी के साथ हम आरआईजी और पोर्ट ऑफ रॉटरडैम के शून्य-उत्सर्जन भविष्य को प्राप्त करने के लक्ष्य में योगदान कर सकते हैं। पोर्ट ऑफ रॉटरडैम अथॉरिटी के वाणिज्यिक निदेशक एमिल हुगस्टेडन भी उत्साहित हैंः "हम नवाचार को चलाने का लक्ष्य रखते हैं और इस प्रकार व्यापक उद्योग के लिए सबूत की अवधारणा के लिए आवेदन और परिचालन विश्लेषण के साथ इस परियोजना का समर्थन करते हैं। पोर्ट ऑफ रॉटरडैम का लक्ष्य 2050 तक कार्बन-न्यूट्रल पोर्ट हासिल करना है और शून्य-उत्सर्जन लोकोमोटिव को रसद श्रृंखला के आगे डीकार्बोनाइजेशन में एक महत्वपूर्ण योगदान के रूप में देखता है।
सीआरआरसी जेडईएलसी और रेल इनोवेटर्स ग्रुप ने रॉटरडैम बंदरगाह में डीजल शंटिंग इंजनों को बदलने के उद्देश्य से दो हज़ार अट्ठारह में एक संयुक्त विकास समझौते पर हस्ताक्षर किए। अब जब सौदा पूरा हो गया है, तो उत्पादन शुरू हो सकता है। जीरो एमिशन लोकोमोटिव मल्टीपल मेन वोल्टेज के तहत संचालन के लिए उपयुक्त है और उच्च क्षमता वाली बैटरी और इंटेलिजेंट ब्रेक एनर्जी रीजनरेशन सिस्टम से लैस है। उन्नत बैटरी तकनीक लोकोमोटिव को बिना शक्ति वाली रेलवे लाइनों पर संचालित करने और पहले और अंतिम मील पैंतरेबाज़ी संचालन करने की अनुमति देती है। इस प्रकार, डीजल शंटिंग इंजनों के उपयोग से बचकर उत्सर्जन और शोर को कम किया जा सकता है। आरआईजी ने पहले लोकोमोटिव में निवेश किया है और रेलवे कंपनी "रेल फोर्स वन" से दो हज़ार चौबीस में रॉटरडैम के बंदरगाह में उन्हें चालू करने की उम्मीद है। रेल इनोवेटर्स ग्रुप के सीईओ जूलियन रेमी इस बात से खुश हैं कि सीआरआरसी ने आरआईजी के विनिर्देशों के लिए बनाए गए इस तरह के एक अभिनव लोकोमोटिव को डिजाइन करने का काम लिया है। "सीआरआरसी दुनिया का सबसे बड़ा लोकोमोटिव निर्माता है और बैटरी और हाइब्रिड तकनीक में एक सिद्ध ट्रैक रिकॉर्ड है। हम इसे सफल बनाने के लिए उनके ज्ञान और कौशल पर बहुत अधिक भरोसा करते हैं। सीआरआरसी की शून्य-उत्सर्जन तकनीक का उपयोग करके और इसे हरित बिजली से सशक्त करके, हम शून्य-उत्सर्जन, शुरू से अंत तक पर्यावरण के अनुकूल रेल संचालन में अग्रणी निवेश कर रहे हैं। सीआरआरसी जेडईएलसी यूरोप के प्रबंध निदेशक चेन कियांग के अनुसार, यह समय आरआईजी के साथ इस परियोजना को शुरू करने और रॉटरडैम बंदरगाह के लिए अभिनव और उत्सर्जन मुक्त हाइब्रिड इंजन प्रदान करने का है। "हमारे इंजनों को कार्बन तटस्थता प्राप्त करने के लक्ष्य के साथ डिजाइन किया गया है और रेल ऑपरेटरों और परिवहन केंद्रों को परंपरागत डीजल इंजनों के लिए एक हरा और ऊर्जा कुशल विकल्प प्रदान करता है। हमें उम्मीद है कि इन इंजनों की डिलीवरी के साथ हम आरआईजी और पोर्ट ऑफ रॉटरडैम के शून्य-उत्सर्जन भविष्य को प्राप्त करने के लक्ष्य में योगदान कर सकते हैं। पोर्ट ऑफ रॉटरडैम अथॉरिटी के वाणिज्यिक निदेशक एमिल हुगस्टेडन भी उत्साहित हैंः "हम नवाचार को चलाने का लक्ष्य रखते हैं और इस प्रकार व्यापक उद्योग के लिए सबूत की अवधारणा के लिए आवेदन और परिचालन विश्लेषण के साथ इस परियोजना का समर्थन करते हैं। पोर्ट ऑफ रॉटरडैम का लक्ष्य दो हज़ार पचास तक कार्बन-न्यूट्रल पोर्ट हासिल करना है और शून्य-उत्सर्जन लोकोमोटिव को रसद श्रृंखला के आगे डीकार्बोनाइजेशन में एक महत्वपूर्ण योगदान के रूप में देखता है।