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शिप्रापथ इलाके में स्थित एक एटीएम से रुपए निकालने गए व्यक्ति का दो शातिर लड़कों ने डेबिट कार्ड बदल लिया। डेबिट कार्ड के जरिए बैंक खाते से 1. 15 लाख रुपए निकालकर ठग लिए। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
एएसआई बाबूलाल मीणा ने बताया कि बाबा की ढाणी सांगानेर निवासी गणेश नारायण ने शुक्रवार को मामला दर्ज कराया है। रिपोर्ट में बताया कि दोपहर करीब डेढ़ बजे वह दुर्गापुरा फ्लाई ओवर के पास स्थित आईसीआईसीआई बैंक के एटीएम पर कैश निकालने आया था। मशीन में डेबिट कार्ड लगाकर स्वाइप कर रुपए निकालने के दौरान बूथ के बाहर खड़े दोनों लड़के अंदर आ गए। इमरजेंसी होने की कहकर पहले रुपए निकालने के कहा। मशीन में लगा उसका डेबिट कार्ड निकालकर बदल लिया।
पीड़ित के रुपए निकालकर वहां से चला गया। जिसके बाद डेबिट कार्ड के जरिए बैंक खाते से 4 बार में 1. 15 लाख रुपए निकाल लिए। मोबाइल पर मैसेज आने पर पीड़ित के कार्ड संभालने पर किसी ओर का निकला। धोखाधड़ी का पता चलने पर पीड़ित ने थाने जाकर मामला दर्ज कराया। पुलिस एटीएम बूथ में लगे सीसीटीवी फुटेजों को खंगालने के साथ ही दोनों शातिरों की तलाश कर रही है।
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| शिप्रापथ इलाके में स्थित एक एटीएम से रुपए निकालने गए व्यक्ति का दो शातिर लड़कों ने डेबिट कार्ड बदल लिया। डेबिट कार्ड के जरिए बैंक खाते से एक. पंद्रह लाख रुपए निकालकर ठग लिए। पुलिस मामले की जांच कर रही है। एएसआई बाबूलाल मीणा ने बताया कि बाबा की ढाणी सांगानेर निवासी गणेश नारायण ने शुक्रवार को मामला दर्ज कराया है। रिपोर्ट में बताया कि दोपहर करीब डेढ़ बजे वह दुर्गापुरा फ्लाई ओवर के पास स्थित आईसीआईसीआई बैंक के एटीएम पर कैश निकालने आया था। मशीन में डेबिट कार्ड लगाकर स्वाइप कर रुपए निकालने के दौरान बूथ के बाहर खड़े दोनों लड़के अंदर आ गए। इमरजेंसी होने की कहकर पहले रुपए निकालने के कहा। मशीन में लगा उसका डेबिट कार्ड निकालकर बदल लिया। पीड़ित के रुपए निकालकर वहां से चला गया। जिसके बाद डेबिट कार्ड के जरिए बैंक खाते से चार बार में एक. पंद्रह लाख रुपए निकाल लिए। मोबाइल पर मैसेज आने पर पीड़ित के कार्ड संभालने पर किसी ओर का निकला। धोखाधड़ी का पता चलने पर पीड़ित ने थाने जाकर मामला दर्ज कराया। पुलिस एटीएम बूथ में लगे सीसीटीवी फुटेजों को खंगालने के साथ ही दोनों शातिरों की तलाश कर रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
जयपुर में रविवार दोपहर एक नवजात बच्ची का शव मिलने से सनसनी फैल गई। कानोता पुलिस ने जयपुर सिटी FSL टीम की मदद से सबूत जुटाए है। पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए शव को SMS हॉस्पिटल की मॉच्यूरी में रखवाया है। पुलिस ने अज्ञात पेरेंट्स के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
SHO अरुण पूनिया ने बताया कि कानोता बांध के नाले के पास झाड़ियों में नवजात बच्ची का शव मिला है। दोपहर करीब 12:30 बजे वहां से ट्रेक्टर लेकर जा रहे ड्राइवर को शव पड़ा दिखाई दिया। नवजात बच्ची का शव मिलने का पता चलने पर स्थानीय लोगों और राहगीरों में सनसनी फैल गई। लोगों ने पुलिस कंट्रोल रूम को नवजात का शव मिलने की सूचना दी। कानोता थाना पुलिस सूचना पर मौके पर पहुंची। झाड़ियों में नवजात बच्ची का शव पड़ा था। पुलिस ने जयपुर सिटी FSL की मदद से मौके से सबूत जुटाए। जेके लॉन हॉस्पिटल में डॉक्टर ने जांच के बाद पोस्टमार्टम के लिए शव को SMS हॉस्पिटल की मॉच्यूरी में रखवाया है।
पुलिस को सूचना देने वाले ट्रेक्टर ड्राइवर ने बताया कि उसने दूर से एक कार को वहां खड़े देखा था। वहां से निकले समय झाड़ियों में देखा तो खून से लथपथ नवजात बच्ची मिली। पुलिस प्रथमदृष्टया जांच में सामने आया है कि नवजात बच्ची का जन्म महज कुछ घंटे पहले हुआ है। पास ही किसी छोटे हॉस्पिटल में ऑपरेशन से बच्ची का जन्म हुआ। बच्ची की डेथ होने पर न्यूज पेपर में खून से लथपथ हालत में कार सवार युवक यहां झाड़ियों में रखकर चला गया।
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| जयपुर में रविवार दोपहर एक नवजात बच्ची का शव मिलने से सनसनी फैल गई। कानोता पुलिस ने जयपुर सिटी FSL टीम की मदद से सबूत जुटाए है। पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए शव को SMS हॉस्पिटल की मॉच्यूरी में रखवाया है। पुलिस ने अज्ञात पेरेंट्स के खिलाफ मामला दर्ज किया है। SHO अरुण पूनिया ने बताया कि कानोता बांध के नाले के पास झाड़ियों में नवजात बच्ची का शव मिला है। दोपहर करीब बारह:तीस बजे वहां से ट्रेक्टर लेकर जा रहे ड्राइवर को शव पड़ा दिखाई दिया। नवजात बच्ची का शव मिलने का पता चलने पर स्थानीय लोगों और राहगीरों में सनसनी फैल गई। लोगों ने पुलिस कंट्रोल रूम को नवजात का शव मिलने की सूचना दी। कानोता थाना पुलिस सूचना पर मौके पर पहुंची। झाड़ियों में नवजात बच्ची का शव पड़ा था। पुलिस ने जयपुर सिटी FSL की मदद से मौके से सबूत जुटाए। जेके लॉन हॉस्पिटल में डॉक्टर ने जांच के बाद पोस्टमार्टम के लिए शव को SMS हॉस्पिटल की मॉच्यूरी में रखवाया है। पुलिस को सूचना देने वाले ट्रेक्टर ड्राइवर ने बताया कि उसने दूर से एक कार को वहां खड़े देखा था। वहां से निकले समय झाड़ियों में देखा तो खून से लथपथ नवजात बच्ची मिली। पुलिस प्रथमदृष्टया जांच में सामने आया है कि नवजात बच्ची का जन्म महज कुछ घंटे पहले हुआ है। पास ही किसी छोटे हॉस्पिटल में ऑपरेशन से बच्ची का जन्म हुआ। बच्ची की डेथ होने पर न्यूज पेपर में खून से लथपथ हालत में कार सवार युवक यहां झाड़ियों में रखकर चला गया। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
दूसरा अध्याय शासन के रूप
सर्व प्रथम यूनानियों में राजनीतिक विचारधारा का आरम्भ
"राजनीतिक बिचारधारा का आरम्भ" जैसा कि बार्कर (Barker) महोदय का कथन है, "सर्व प्रथम यूनानियों में हुआ । इसका आदि कारण यूनानियों का स्पष्ट हेतुवाद (Rationalism) है। भारतीयों और यहूदियों के समान यूनानियों ने धर्म को अपना अध्ययन क्षेत्र नहीं बनाया, संसार के रूप को उन्होंने विश्वास रूप से नहीं देखा वरन चिन्तन का सहारा लिया। उनके मस्तिष्क में दृश्य-जगत के प्रति उत्सुकता जगी और उन्होंने तर्क की सहायता से विश्व को समझने का प्रयत्न किया" । " इस अन्वेषक प्रवृत्ति तथा प्रकृति रहस्योद्घाटक बुद्धि द्वारा उन्होंने न केवल भाषा ( Speech) और पदार्थ (Matter) के गुणों ( Properties) पर मनन करके तर्कशास्त्र (Logic) और ज्यामिति (Geometry ) को जन्म दिया वरन् राज्य के गुणों का अनुशीलन करके राज्य-विज्ञान (Science of State) का भी स्वरूप निर्माण किया। प्रारम्भ में उन्होंने विश्व की प्रकृति (Nature) और निर्माण (Constituton) पर खोज की जिसके परिणाम स्वरूप एक निश्चित 'भौतिक विज्ञान - वेत्ता-स्कूल' (School of Physicists ) का विकास हुआ। परन्तु शीघ्र ही उनका ध्यान प्रकृति से मनुष्य की ओर अग्रसर हुआ और 'मानव प्रकृति अध्येताओं (Humanists) अथवा 'कूट तार्किकों' (Sophists ) का उदय हुआ ।
यूनान में राज्य - विभिन्नता
पर्वत-बाहुल्य होने के कारण यूनान में आरम्भ से हो एक राज्य न स्थापित हो सका । वहाँ छोटे-छोटे भूभागों में अलग-अलग नगर-राज्य (City States) थे। उनमें भिन्न-भिन्न प्रकार के शासन तथा संस्थायें थीं। मानव-संस्थाओं की इस विभिन्नता के कारण यूनानियों को केवल तुलना तथा पर्यालोचन करने का ही अवसर नहीं प्राप्त हुआ वरन विभिन्न प्रकार के शासन-रूपों के उत्थान-पतन के कारणों, उनके दोष और गुण तथा अपने राजनीतिक जीवन को अग्रसर करने के साधनों पर भी विचार करने का अवसर मिला ।
१ अर्नेस्ट बार्कर (Earnest Barker) कृत प्लेटो ऐण्ड हिज प्रड़िसेसर्स (Plato and his Predecessors ) पृष्ठ १
शासनों का वर्गीकरण : हेरोडोटस (HERODOTUS) और सुकरात (SOCRATES)
अतः स्वभावतः यूनानियों ने सर्व प्रथम शासन के विभिन्न रूपों का वर्गीकरण किया। इसका प्रथम संकेत हेरोडोटस ने दिया है। उसने एक तन्त्र, कुलीन-तन्त्र; तथा प्रजातन्त्र (Monarchy, Aristocracy and Democracy) गुणों की तुलना करने के पश्चात यह स्पष्ट किया है कि जब राजा बलोन्मत्त हो जाता है तब एकतन्त्र कठोर शासन में बदल जाता है; जब कुलीन वर्ग (Nobility ) का पारस्परिक कलह गृहयुद्ध' का रूप धारण करता है और कोई राज्य सत्ता हस्तगत कर अत्याचारी लेता है तब कुलीन-तन्त्र कठोर शासन का रूप धारण कर लेता है; और जब अज्ञानता तथा पतनवश किये हुए जनता के विद्रोह का नेतृत्व कोई शक्तिशाली पुरुष ग्रहण कर शासन - सूत्र अपने हाथ में कर लेता है और भय तथा बल प्रदर्शन द्वारा शासन करना आरम्भ करता है तब प्रजातन्त्र कठोर शासन के रूप में बदल जाता है। इसके बाद सुकरात का वर्गीकरण आता है, यह हमें जेनोफ़न ( Xenophon) द्वारा प्राप्त हुआ है। सुकरात ने भी एक तन्त्र, कुलीन-तन्त्र और प्रजातन्त्र पर सविस्तार लिखा है। उसके अनुसार शासन का अन्तिम रूप सदैव अहितकर है क्योंकि इसका आधार अज्ञान है । वह एक तन्त्र को अच्छा मानता है क्योंकि राजा क़ानून का अनुगामी और प्रजा की सम्मति से शासन करनेवाला होता है, परन्तु कठोर शासन में वह मनमानी करता है । इसी प्रकार कुलीन-तन्त्र उत्तम है क्योंकि इसका आधार योग्यता है । किन्तु अल्प-जन. तन्त्र का मूल साधन सम्पति है। सुकरात शासन के केवल पाँच रूपों को स्वीकार करता है । वे हैं, एक-तन्त्र तथा कुलीन-तन्त्र, जो हितकर हैं और कठोर-शासन, अल्प-जन तन्त्र तथा प्रजातन्त्र जो अहितकर हैं ।
प्लेटो (PLATO) का आदर्श
प्लेटो ने तीन प्रसिद्ध पुस्तकें 'रिपबलिक' (Republic), पॉलिटिक्स (The Politicus) और 'लॉज' (The Laws) लिखी हैं । प्रथम पुस्तक तर्क तथा ज्ञान की सत्ता का समर्थन करता है। वह चाहता है कि बौद्धिक कुलीन-तन्त्र राज्य पर नियन्त्रण रक्खे तथा पथ प्रदर्शन भी करे। इससे यह स्पष्ट है कि वह कुलीन-तन्त्र को शासन का आदर्श रूप स्वीकार करता है। परन्तु उसी पुस्तक में वह एक स्थान पर लिखता है कि 'जब तक राजा दार्शनिक नहीं होते और दार्शनिक राजा नहीं होते तब तक यूनानी नगर ही क्या सम्पूर्ण मानव जाति भी अपने कष्टों से छुटकारा नहीं पा सकती। इससे हम इस परिणाम पर पहुँचते हैं कि वास्तव में वह एक 'आदर्श एकतन्त्र' का समर्थक था। यह विश्वास और भी दृढ़ हो जाता है जब हम देखते हैं कि वह 'पालिटिकस' में स्वेच्छाचारी शासक अथवा विद्वान राजनीतिज्ञ का समर्थन करता 1 उसका कथन है कि वास्तविक राजनीतिज्ञ राजा होता है क्योंकि पूर्ण ज्ञान उसी में सम्भव है, वह जनमत से मुक्त तथा कानून से अनियन्त्रित होता है । | दूसरा अध्याय शासन के रूप सर्व प्रथम यूनानियों में राजनीतिक विचारधारा का आरम्भ "राजनीतिक बिचारधारा का आरम्भ" जैसा कि बार्कर महोदय का कथन है, "सर्व प्रथम यूनानियों में हुआ । इसका आदि कारण यूनानियों का स्पष्ट हेतुवाद है। भारतीयों और यहूदियों के समान यूनानियों ने धर्म को अपना अध्ययन क्षेत्र नहीं बनाया, संसार के रूप को उन्होंने विश्वास रूप से नहीं देखा वरन चिन्तन का सहारा लिया। उनके मस्तिष्क में दृश्य-जगत के प्रति उत्सुकता जगी और उन्होंने तर्क की सहायता से विश्व को समझने का प्रयत्न किया" । " इस अन्वेषक प्रवृत्ति तथा प्रकृति रहस्योद्घाटक बुद्धि द्वारा उन्होंने न केवल भाषा और पदार्थ के गुणों पर मनन करके तर्कशास्त्र और ज्यामिति को जन्म दिया वरन् राज्य के गुणों का अनुशीलन करके राज्य-विज्ञान का भी स्वरूप निर्माण किया। प्रारम्भ में उन्होंने विश्व की प्रकृति और निर्माण पर खोज की जिसके परिणाम स्वरूप एक निश्चित 'भौतिक विज्ञान - वेत्ता-स्कूल' का विकास हुआ। परन्तु शीघ्र ही उनका ध्यान प्रकृति से मनुष्य की ओर अग्रसर हुआ और 'मानव प्रकृति अध्येताओं अथवा 'कूट तार्किकों' का उदय हुआ । यूनान में राज्य - विभिन्नता पर्वत-बाहुल्य होने के कारण यूनान में आरम्भ से हो एक राज्य न स्थापित हो सका । वहाँ छोटे-छोटे भूभागों में अलग-अलग नगर-राज्य थे। उनमें भिन्न-भिन्न प्रकार के शासन तथा संस्थायें थीं। मानव-संस्थाओं की इस विभिन्नता के कारण यूनानियों को केवल तुलना तथा पर्यालोचन करने का ही अवसर नहीं प्राप्त हुआ वरन विभिन्न प्रकार के शासन-रूपों के उत्थान-पतन के कारणों, उनके दोष और गुण तथा अपने राजनीतिक जीवन को अग्रसर करने के साधनों पर भी विचार करने का अवसर मिला । एक अर्नेस्ट बार्कर कृत प्लेटो ऐण्ड हिज प्रड़िसेसर्स पृष्ठ एक शासनों का वर्गीकरण : हेरोडोटस और सुकरात अतः स्वभावतः यूनानियों ने सर्व प्रथम शासन के विभिन्न रूपों का वर्गीकरण किया। इसका प्रथम संकेत हेरोडोटस ने दिया है। उसने एक तन्त्र, कुलीन-तन्त्र; तथा प्रजातन्त्र गुणों की तुलना करने के पश्चात यह स्पष्ट किया है कि जब राजा बलोन्मत्त हो जाता है तब एकतन्त्र कठोर शासन में बदल जाता है; जब कुलीन वर्ग का पारस्परिक कलह गृहयुद्ध' का रूप धारण करता है और कोई राज्य सत्ता हस्तगत कर अत्याचारी लेता है तब कुलीन-तन्त्र कठोर शासन का रूप धारण कर लेता है; और जब अज्ञानता तथा पतनवश किये हुए जनता के विद्रोह का नेतृत्व कोई शक्तिशाली पुरुष ग्रहण कर शासन - सूत्र अपने हाथ में कर लेता है और भय तथा बल प्रदर्शन द्वारा शासन करना आरम्भ करता है तब प्रजातन्त्र कठोर शासन के रूप में बदल जाता है। इसके बाद सुकरात का वर्गीकरण आता है, यह हमें जेनोफ़न द्वारा प्राप्त हुआ है। सुकरात ने भी एक तन्त्र, कुलीन-तन्त्र और प्रजातन्त्र पर सविस्तार लिखा है। उसके अनुसार शासन का अन्तिम रूप सदैव अहितकर है क्योंकि इसका आधार अज्ञान है । वह एक तन्त्र को अच्छा मानता है क्योंकि राजा क़ानून का अनुगामी और प्रजा की सम्मति से शासन करनेवाला होता है, परन्तु कठोर शासन में वह मनमानी करता है । इसी प्रकार कुलीन-तन्त्र उत्तम है क्योंकि इसका आधार योग्यता है । किन्तु अल्प-जन. तन्त्र का मूल साधन सम्पति है। सुकरात शासन के केवल पाँच रूपों को स्वीकार करता है । वे हैं, एक-तन्त्र तथा कुलीन-तन्त्र, जो हितकर हैं और कठोर-शासन, अल्प-जन तन्त्र तथा प्रजातन्त्र जो अहितकर हैं । प्लेटो का आदर्श प्लेटो ने तीन प्रसिद्ध पुस्तकें 'रिपबलिक' , पॉलिटिक्स और 'लॉज' लिखी हैं । प्रथम पुस्तक तर्क तथा ज्ञान की सत्ता का समर्थन करता है। वह चाहता है कि बौद्धिक कुलीन-तन्त्र राज्य पर नियन्त्रण रक्खे तथा पथ प्रदर्शन भी करे। इससे यह स्पष्ट है कि वह कुलीन-तन्त्र को शासन का आदर्श रूप स्वीकार करता है। परन्तु उसी पुस्तक में वह एक स्थान पर लिखता है कि 'जब तक राजा दार्शनिक नहीं होते और दार्शनिक राजा नहीं होते तब तक यूनानी नगर ही क्या सम्पूर्ण मानव जाति भी अपने कष्टों से छुटकारा नहीं पा सकती। इससे हम इस परिणाम पर पहुँचते हैं कि वास्तव में वह एक 'आदर्श एकतन्त्र' का समर्थक था। यह विश्वास और भी दृढ़ हो जाता है जब हम देखते हैं कि वह 'पालिटिकस' में स्वेच्छाचारी शासक अथवा विद्वान राजनीतिज्ञ का समर्थन करता एक उसका कथन है कि वास्तविक राजनीतिज्ञ राजा होता है क्योंकि पूर्ण ज्ञान उसी में सम्भव है, वह जनमत से मुक्त तथा कानून से अनियन्त्रित होता है । |
श्रीदेवसुमन विवि के ऋषिकेश कैंपस में इसी सत्र से शुरू होने वाले चार बड़े व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने गेस्ट फैकल्टी की तलाश शुरू कर दी है। बुधवार को ऋषिकेश परिसर में विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए गेस्ट फैकेल्टी के उम्मीदवारों के साक्षात्कार हुए।
ऋषिकेश परिसर में एलएलएम, एमएससी माइक्रोबायोलॉजी, बीबीए और बीसीए पाठ्यक्रम शुरू होने जा रहे हैं। इनमें सर्वप्रथम अगले हफ्ते से बीबीए और बीसीए की कक्षाएं शुरू होंगी। इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने बुधवार को विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए गेस्ट फैकेल्टी के उम्मीदवारों के साक्षात्कार लिए। कुलपति एनके जोशी के निर्देश पर तैयार साक्षात्कार पैनल द्वारा उम्मीदवारों के प्रपत्रों की जांच और उनके अनुभव के साथ ही पढ़ाने के तरीकों का आंकलन भी किया गया। सुबह 11 बजे शुरू हुआ साक्षात्कार तीन बजे तक चला। ऋषिकेश परिसर के प्राचार्य एमएस रावत ने बताया कि दो-तीन दिन में इन उम्मीदवारों में से योग्यता और अनुभव के आधार पर गेस्ट फैकेल्टी का चयन कर लिया जाएगा। इसके बाद हफ्तेभर में बीबीए और बीसीए की कक्षाएं आरम्भ हो जाएंगी। साक्षात्कार में ऋषिकेश परिसर के प्राचार्य प्रोफेसर एमएस रावत, प्रो. जीके ढ़ीगरा, प्रो. दिनेश चन्द्र गोस्वामी, प्रो. वाईके शर्मा, प्रो. कंचनलता सिन्हा आदि शामिल रहे।
| श्रीदेवसुमन विवि के ऋषिकेश कैंपस में इसी सत्र से शुरू होने वाले चार बड़े व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने गेस्ट फैकल्टी की तलाश शुरू कर दी है। बुधवार को ऋषिकेश परिसर में विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए गेस्ट फैकेल्टी के उम्मीदवारों के साक्षात्कार हुए। ऋषिकेश परिसर में एलएलएम, एमएससी माइक्रोबायोलॉजी, बीबीए और बीसीए पाठ्यक्रम शुरू होने जा रहे हैं। इनमें सर्वप्रथम अगले हफ्ते से बीबीए और बीसीए की कक्षाएं शुरू होंगी। इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने बुधवार को विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए गेस्ट फैकेल्टी के उम्मीदवारों के साक्षात्कार लिए। कुलपति एनके जोशी के निर्देश पर तैयार साक्षात्कार पैनल द्वारा उम्मीदवारों के प्रपत्रों की जांच और उनके अनुभव के साथ ही पढ़ाने के तरीकों का आंकलन भी किया गया। सुबह ग्यारह बजे शुरू हुआ साक्षात्कार तीन बजे तक चला। ऋषिकेश परिसर के प्राचार्य एमएस रावत ने बताया कि दो-तीन दिन में इन उम्मीदवारों में से योग्यता और अनुभव के आधार पर गेस्ट फैकेल्टी का चयन कर लिया जाएगा। इसके बाद हफ्तेभर में बीबीए और बीसीए की कक्षाएं आरम्भ हो जाएंगी। साक्षात्कार में ऋषिकेश परिसर के प्राचार्य प्रोफेसर एमएस रावत, प्रो. जीके ढ़ीगरा, प्रो. दिनेश चन्द्र गोस्वामी, प्रो. वाईके शर्मा, प्रो. कंचनलता सिन्हा आदि शामिल रहे। |
टिप्स ऑफ दी डे (Tips Of The Day)
आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है।
खर्च बढ़ने के आसार हैं। बिना किसी कारण के विवाद हो सकता है। संयम रखें। मानहानि के योग हैं। सेहत में गिरावट आएगी।
उपायः शिव का ध्यान करें।
सभी काम पूरे होंगे। नया काम कर सकते हैं। रूका हुआ पैसा मिलेगा। बड़ी सफलता हाथ लगेगी। हेल्थ ठीक रहेगी।
उपायः बजरंग बाण का पाठ करें।
किसी काम को पूरा करने के लिए अनैतिक रास्ता अपनाने से परेशानी में पड़ सकते हैं। लालच ना करें। सेहत पर आपके खानपान का प्रभाव पड़ेगा, इसीलिए अच्छी चीजों का सेवन करें।
उपायः केले के पेड़ में जल दें।
बिजनेस से मुनाफा होगा। अच्छे शेयर खरीदे, किस्मत साथ देगी। शुभ समाचार मिलेगा।
उपायः बुजुर्गों से आशीर्वाद लें।
बच्चों से प्रेम से पेश आएं। कारोबार में परेशानी बढ़ सकती हैं। अहं का त्याग करें, फायदे में रहेंगे।
उपायः मंदिर में दीप दान करें।
कानूनी मामलों से दूर रहें। जल्दी में लिया गया फैसला हानिकारक हो सकता है। संयम रखें , वरना तनाव में आ सकते हैं।
उपायः कन्याओं को मिठाई खिलाएं।
किसी बात पर चिंतित रहेंगे। आर्थिक रूप से खर्च अधिक होगा। उदर विकार परेशान करेगा। प्रेम जीवन सुखमय रहेगा।
उपायः मां चामुण्डा की पूजा करें।
आर्थिक रूप से दिन शुभ है। आमदनी में वृद्धि होगी। विवाह का योग है। मान-सम्मान मिलेगा।
उपायः मंदिर निर्माण में पैसा दान करें।
दिन बहुत शुभ है, नए काम कर सकते हैं। जीवनसाथी प्रेम करेगा। लोगों का सहयोग मिलेगा। परिवार में एकता बढ़ेगी।
उपायः वस्त्र करें।
भावुक रहेंगे, संपत्ति के किसी भी काम से आज दूर रहें। यात्रा करने से बचें। संध्या के समय लाभ हो सकता है।
उपायः मूंग की दाल का दान करें।
अच्छे अवसर आपके हाथ से निकल सकते हैं। अनावश्यक खर्च बढ़ेगा। नया कार्य ना करें। शाम के समय शुभ समाचार मिलेगा।
उपायः मां दुर्गा की पूजा करें।
आज आपको आर्थिक लाभ होगा, कहीं से शुभ समाचार मिलेगा। भाई-बहनों से आपको लाभ मिलेगा। जीवनसाथी से थोड़ा विवाद संभव है।
उपायः मंदिर में सफेद पुष्प अर्पित करें।
(Disclaimer: इस स्टोरी में दी गई सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं। Haribhoomi. com इनकी पुष्टि नहीं करता है। इन तथ्यों को अमल में लाने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें। )
| टिप्स ऑफ दी डे आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है। खर्च बढ़ने के आसार हैं। बिना किसी कारण के विवाद हो सकता है। संयम रखें। मानहानि के योग हैं। सेहत में गिरावट आएगी। उपायः शिव का ध्यान करें। सभी काम पूरे होंगे। नया काम कर सकते हैं। रूका हुआ पैसा मिलेगा। बड़ी सफलता हाथ लगेगी। हेल्थ ठीक रहेगी। उपायः बजरंग बाण का पाठ करें। किसी काम को पूरा करने के लिए अनैतिक रास्ता अपनाने से परेशानी में पड़ सकते हैं। लालच ना करें। सेहत पर आपके खानपान का प्रभाव पड़ेगा, इसीलिए अच्छी चीजों का सेवन करें। उपायः केले के पेड़ में जल दें। बिजनेस से मुनाफा होगा। अच्छे शेयर खरीदे, किस्मत साथ देगी। शुभ समाचार मिलेगा। उपायः बुजुर्गों से आशीर्वाद लें। बच्चों से प्रेम से पेश आएं। कारोबार में परेशानी बढ़ सकती हैं। अहं का त्याग करें, फायदे में रहेंगे। उपायः मंदिर में दीप दान करें। कानूनी मामलों से दूर रहें। जल्दी में लिया गया फैसला हानिकारक हो सकता है। संयम रखें , वरना तनाव में आ सकते हैं। उपायः कन्याओं को मिठाई खिलाएं। किसी बात पर चिंतित रहेंगे। आर्थिक रूप से खर्च अधिक होगा। उदर विकार परेशान करेगा। प्रेम जीवन सुखमय रहेगा। उपायः मां चामुण्डा की पूजा करें। आर्थिक रूप से दिन शुभ है। आमदनी में वृद्धि होगी। विवाह का योग है। मान-सम्मान मिलेगा। उपायः मंदिर निर्माण में पैसा दान करें। दिन बहुत शुभ है, नए काम कर सकते हैं। जीवनसाथी प्रेम करेगा। लोगों का सहयोग मिलेगा। परिवार में एकता बढ़ेगी। उपायः वस्त्र करें। भावुक रहेंगे, संपत्ति के किसी भी काम से आज दूर रहें। यात्रा करने से बचें। संध्या के समय लाभ हो सकता है। उपायः मूंग की दाल का दान करें। अच्छे अवसर आपके हाथ से निकल सकते हैं। अनावश्यक खर्च बढ़ेगा। नया कार्य ना करें। शाम के समय शुभ समाचार मिलेगा। उपायः मां दुर्गा की पूजा करें। आज आपको आर्थिक लाभ होगा, कहीं से शुभ समाचार मिलेगा। भाई-बहनों से आपको लाभ मिलेगा। जीवनसाथी से थोड़ा विवाद संभव है। उपायः मंदिर में सफेद पुष्प अर्पित करें। |
नई दिल्लीः आजाद भारत में किसी महिला को पहली बार फांसी दी जायेगी। आपको बता दें कि अमरोहा का बावनखेड़ी हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस हत्या कांड की दोषी और उसके प्रेमीं सलीम को फांसी होना तय है। सर्वोच्च न्यायालय ने इनकी दया याचिका खारिज कर दी है। इतनी ही नहीं राष्ट्रपति ने भी इनके दया याचिका को खारिज कर फांसी देने के राह को और आसान कर दिया।
बावनखेड़ी हत्या कांड से दोषी शबनम ने अपने प्रेमी के लिए अपने ही परिवार के सात लोगो की निर्मम हत्या कर दी थी। इस वारदात के बाद शबनम रामपुर के जिला जेल में बंद है। शबनम ने राष्ट्रपति और राज्यपाल के समक्ष दया याचिकाएं डालकर माफी की अपील की थी जिसे राज्यपाल और राष्ट्रपति ने खारिज कर दिया है। अब डेथ वारंट जारी होते ही शबनम को फांसी दे दी जायेगी।
आपको बता दें कि अमरोहा जिले के बावनखेड़ी की रहने वाली शबनम का सलीम नाम के एक युवक से प्रेम प्रसंग चल रहा था। दोनो की मंशा थी कि वे शादी करेंगे, लेकिन परिवार वाले इन दोनो के शादी में रोड़ा बन रहे थे। शबनम ने इस समस्या के हल के लिए अपने परिवार के सात लोगो की हत्या कर दी।
14/15 अप्रैल 2008 की वह काली रात थी, जब शबनम ने अपने ही परिवार के सात लोंगो की कुल्हाड़ी से वार कर हत्या कर दी थी। शबनम ने पिता मास्टर शौकत, मां हाशमी, भाई अनीस और राशिद, भाभी अंजुम और फुफेरी बहन राबिया के साथ अपने भतीजे अर्श की हत्या की थी। जिसके बाद अमरोहा कोर्ट में दो साल तीन महीने तक सुनवाई चली, इस दौरान 100 तारीखों पर सुनवाई हुई। इस केस में 29 लोग गनाह बने, जिनको 649 सवालों का सामना करना पड़ा।
27 महीने तक केस की सुनवाई चली, 14 जुलाई 2010 को कोर्ट मे शबनम और उसके प्रेमी को दोषी ठहराया, वहीं इसके अगले दिन जिला जज एसएए हुसैनी ने शबनम और सलीम को 29 सेकेंड में फांसी की सजा सुना दी। आपको बता दें कि सजा की दास्तन 160 पन्नों में दर्ज किया गया है। इस केस में 3 जिला जजों ने सुनवाई की। जिसके बाद अब यह केस डेथ वारंट जारी होने की दहलीज पर खड़ा है।
| नई दिल्लीः आजाद भारत में किसी महिला को पहली बार फांसी दी जायेगी। आपको बता दें कि अमरोहा का बावनखेड़ी हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस हत्या कांड की दोषी और उसके प्रेमीं सलीम को फांसी होना तय है। सर्वोच्च न्यायालय ने इनकी दया याचिका खारिज कर दी है। इतनी ही नहीं राष्ट्रपति ने भी इनके दया याचिका को खारिज कर फांसी देने के राह को और आसान कर दिया। बावनखेड़ी हत्या कांड से दोषी शबनम ने अपने प्रेमी के लिए अपने ही परिवार के सात लोगो की निर्मम हत्या कर दी थी। इस वारदात के बाद शबनम रामपुर के जिला जेल में बंद है। शबनम ने राष्ट्रपति और राज्यपाल के समक्ष दया याचिकाएं डालकर माफी की अपील की थी जिसे राज्यपाल और राष्ट्रपति ने खारिज कर दिया है। अब डेथ वारंट जारी होते ही शबनम को फांसी दे दी जायेगी। आपको बता दें कि अमरोहा जिले के बावनखेड़ी की रहने वाली शबनम का सलीम नाम के एक युवक से प्रेम प्रसंग चल रहा था। दोनो की मंशा थी कि वे शादी करेंगे, लेकिन परिवार वाले इन दोनो के शादी में रोड़ा बन रहे थे। शबनम ने इस समस्या के हल के लिए अपने परिवार के सात लोगो की हत्या कर दी। चौदह/पंद्रह अप्रैल दो हज़ार आठ की वह काली रात थी, जब शबनम ने अपने ही परिवार के सात लोंगो की कुल्हाड़ी से वार कर हत्या कर दी थी। शबनम ने पिता मास्टर शौकत, मां हाशमी, भाई अनीस और राशिद, भाभी अंजुम और फुफेरी बहन राबिया के साथ अपने भतीजे अर्श की हत्या की थी। जिसके बाद अमरोहा कोर्ट में दो साल तीन महीने तक सुनवाई चली, इस दौरान एक सौ तारीखों पर सुनवाई हुई। इस केस में उनतीस लोग गनाह बने, जिनको छः सौ उनचास सवालों का सामना करना पड़ा। सत्ताईस महीने तक केस की सुनवाई चली, चौदह जुलाई दो हज़ार दस को कोर्ट मे शबनम और उसके प्रेमी को दोषी ठहराया, वहीं इसके अगले दिन जिला जज एसएए हुसैनी ने शबनम और सलीम को उनतीस सेकेंड में फांसी की सजा सुना दी। आपको बता दें कि सजा की दास्तन एक सौ साठ पन्नों में दर्ज किया गया है। इस केस में तीन जिला जजों ने सुनवाई की। जिसके बाद अब यह केस डेथ वारंट जारी होने की दहलीज पर खड़ा है। |
- वर्तमान में सूचना प्रौद्योगिकी और उन्नत कंप्यूटर नेटवर्कों के माध्यम से ई-कॉमर्स का उपयोग कर व्यापारिक गतिविधियों को बेहतर बनाया जा सकता है। ई-कॉमर्स इलेक्ट्रॉनिक चैनलों जैसे-इंटरनेट द्वारा की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की खरीद और बिक्री को दर्शाता है।
- ई-कॉमर्स की शुरुआत 1960 के दशक में की गई थी। इंटरनेट की व्यापक उपलब्धता से 1990 और 2000 के आरंभिक दशक में ऑनलाइन विक्रेताओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
- किसी भी डिजिटल प्रौद्योगिकी अथवा उपभोक्ता आधारित खरीद बाज़ार के समान ही ई-कॉमर्स क्षेत्र का भी निरंतर विस्तार हो रहा है। चूँकि आज मोबाइल उपकरण काफी लोकप्रिय हो गए हैं, अतः मोबाइल वाणिज्य भी एक प्रकार का बाज़ार ही बन गया है।
- ई- कॉमर्स के बाज़ार का बदलता स्वरूप कारोबारों को उनकी प्रासंगिकता में सुधार करने तथा उनके बाज़ार का विस्तार ऑनलाइन जगत तक करने का अवसर उपलब्ध कराता है।
| - वर्तमान में सूचना प्रौद्योगिकी और उन्नत कंप्यूटर नेटवर्कों के माध्यम से ई-कॉमर्स का उपयोग कर व्यापारिक गतिविधियों को बेहतर बनाया जा सकता है। ई-कॉमर्स इलेक्ट्रॉनिक चैनलों जैसे-इंटरनेट द्वारा की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की खरीद और बिक्री को दर्शाता है। - ई-कॉमर्स की शुरुआत एक हज़ार नौ सौ साठ के दशक में की गई थी। इंटरनेट की व्यापक उपलब्धता से एक हज़ार नौ सौ नब्बे और दो हज़ार के आरंभिक दशक में ऑनलाइन विक्रेताओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। - किसी भी डिजिटल प्रौद्योगिकी अथवा उपभोक्ता आधारित खरीद बाज़ार के समान ही ई-कॉमर्स क्षेत्र का भी निरंतर विस्तार हो रहा है। चूँकि आज मोबाइल उपकरण काफी लोकप्रिय हो गए हैं, अतः मोबाइल वाणिज्य भी एक प्रकार का बाज़ार ही बन गया है। - ई- कॉमर्स के बाज़ार का बदलता स्वरूप कारोबारों को उनकी प्रासंगिकता में सुधार करने तथा उनके बाज़ार का विस्तार ऑनलाइन जगत तक करने का अवसर उपलब्ध कराता है। |
कोरोना के कहर के बीच अच्छी खबर यह है कि अब तक मिले संक्रमितों में से आधे से अधिक सही हो चुके हैं। मंगलवार को ही 14 मरीज अपने घर पहुंचे, तो परिजनों की खुशी का ठिकाना न था।
इनमें से 12 अतरौली के हैं। जिले में छह नए संक्रमित मिले हैं। इनमें एक सर्राफ के पार्टनर हैैं। इन सहित अब तक जिले में 101 मरीज मिल चुके हैं। इनमें से 52 सही हो चुके हैं। हालांकि नौ को बचाया नहीं जा सका।
कोल तहसील क्षेत्र के गांव बहादुरपुर निवासी 30 वर्षीय व्यक्ति व उसकी चार साल की बेटी की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। दोनों गुजरात से आए थे। गभाना के शेल्टर होम में सैंपल लिए गए थे। महाराष्ट्र से लौटे कौडिय़ागंज निवासी एक मजदूर भी संक्रमित पाया गया। इसे अतरौली के लेवल वन हॉस्पीटल में भर्ती किया है। कनवरी गंज की 65 वर्षीय महिला का इलाज दिल्ली में चल रहा था। इनकी भी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। संक्रमित पाए गए लोगों के संपर्क में आए लोगों का पता किया जा रहा है। मंगलवार को कुल 49 रिपोर्ट आईं। इनमें से 44 मरीजों निगेटिव अच्छा संकेत है।
| कोरोना के कहर के बीच अच्छी खबर यह है कि अब तक मिले संक्रमितों में से आधे से अधिक सही हो चुके हैं। मंगलवार को ही चौदह मरीज अपने घर पहुंचे, तो परिजनों की खुशी का ठिकाना न था। इनमें से बारह अतरौली के हैं। जिले में छह नए संक्रमित मिले हैं। इनमें एक सर्राफ के पार्टनर हैैं। इन सहित अब तक जिले में एक सौ एक मरीज मिल चुके हैं। इनमें से बावन सही हो चुके हैं। हालांकि नौ को बचाया नहीं जा सका। कोल तहसील क्षेत्र के गांव बहादुरपुर निवासी तीस वर्षीय व्यक्ति व उसकी चार साल की बेटी की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। दोनों गुजरात से आए थे। गभाना के शेल्टर होम में सैंपल लिए गए थे। महाराष्ट्र से लौटे कौडिय़ागंज निवासी एक मजदूर भी संक्रमित पाया गया। इसे अतरौली के लेवल वन हॉस्पीटल में भर्ती किया है। कनवरी गंज की पैंसठ वर्षीय महिला का इलाज दिल्ली में चल रहा था। इनकी भी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। संक्रमित पाए गए लोगों के संपर्क में आए लोगों का पता किया जा रहा है। मंगलवार को कुल उनचास रिपोर्ट आईं। इनमें से चौंतालीस मरीजों निगेटिव अच्छा संकेत है। |
ने कहा कि परमेश्वर यों कहता है कि मैं आधी ५ रात को निकलके मिस्र के बीचोंबीच जाऊंगा । और मिस्र के देश में सारे पहिलोंठे फिरऊन के पहिलैठे से लेके जो अपने सिंहासन पर बैठा है उस सहेली के पहिलौंठे लो जो चक्की के ६ पीछे है और सारे पशु के पहिलोंठे मर जायेंगे । और मिस्र के
समस्त देश में ऐसा बड़ा रोना पीटना होगा जैसा कि कभी न ७ हुआ था न कभी फिर होगा । परन्तु सारे इसराएल के संतान पर एक कूकर भी अपनी जीभ न हिलावेगा न तो मनुष्य पर और न पशु पर जिसतें तुम जानो कि परमेश्वर क्योंकर मिस्रियां ८ में और इसराएलियों में बिभाग करता है। और यह तेरे
समस्त सेवक मुझ पास आवेंगे और मुझे प्रणाम करके कहेंगे कि तू निकल जा अपने समस्त पश्चाद्नामी समेत और उस के पीछे मैं निकल जाऊंगा और वह फ़िरज़न के पास से निपट
रिसियाके निकल गया ।।
और परमेश्वर ने मूसा से कहा कि फिरऊन तुम्हारी न १० सुनेगा जिसतें मेरे आश्चर्य्य मिस्र देश में बढ़ जायें। और मसा और हारुन ने ये सब आश्चर्य्य फ़िरऊन के आगे दिखाये और परमेश्वर ने फ़िरज़न के मन को कठोर कर दिया और उस ने अपने देश से इसराएल के संतान को जाने न दिया ।।
बारहवां पर्व्व।
तब परमेश्वर ने मिस्र के देश में मूसा और हारून को २ कहा । कि यह मास तुम्हारे लिये मामों का आरंभ होगा यह तुम्हारे बरस का पहिला मास होगा ।।
इसराएलियों की सारी मंडली से कहा कि इस मास के दसवें में हर एक पुरुष से अपने पितरों के घर के समान एक ४ मेम्ना घर पीछे मेम्ना अपने लिये लेवें । और यदि वह घर
२२ पर्व्व ]
मेम्ना के लिये छोटा हो तो वह और उस का परोसी जो उस के घर से लगा हुआ हो प्राणियों की गिनती के समान लेवे तुम एक एक अपने खाने के समान मेम्ने के लिये लेखा ठहराओ ।।
तुम्हारा मेम्ना निष्खोट होवे पहिले बरस का नरुख भेड़ों ६ से अथवा बकरियों से लीजियो । और तुम उसे मास के चौदहवें दिन लों रख छोड़िया और इसराएलियों की समस्त मंडली सांझ का उसे मारें ।
और वे लेाहू में से लेवें और उन घरों के जहां वे खायेंगे द्वार की दोनों ओर और ऊपर की चौखट पर छापा देवें ।
और वे उसी रात को आग में भुना हुआ उस का मांस 8 और अख़मीरी रोटी कड़वी तरकारी के साथ खावें । उसे कच्चा
और पानी में उसन के न खावें परन्तु उस के सिर पांव और १० उद्र समेत आग पर भूनके खावें । और उस में से बिहान लों कुछ न रहने दीजियो और जो कुछ उस में से बिहान लों ११ रह जायेगा तुम आग से जला दीजिया । और उसे यों खाइयो अपनी कटि बांधे हुए अपनी जूतियां अपने पाओ में पहिने हुए और अपना लउ अपने हाथों में लिये हुए और उसे बेग खा लीजियो वुह परमेश्वर का फसह है ॥
इस लिये कि मैं आज रात मिस्र के देश में होके निकलूंगा और सब पहिलैंौंठे मनुष्य के और पशुन के जो उस में हैं मारूंगा और मिस्र के समस्त देवताओं पर न्याय करूंगा मैं १३ परमेश्वर हूं । और बुह लाहू तुम्हारे घरों पर जहां जहां तुम हा तुम्हारे लिये एक चिन्ह होगा और मैं वुह लाहू देखके तुम पर से बीत जाऊंगा और जब मिस्र के देश का मारूंगा तब मरी तुम पर नाश करने का न आवेगी ।।
और यह दिन तुम्हारे लिये एक स्मरण के लिये होगा | ने कहा कि परमेश्वर यों कहता है कि मैं आधी पाँच रात को निकलके मिस्र के बीचोंबीच जाऊंगा । और मिस्र के देश में सारे पहिलोंठे फिरऊन के पहिलैठे से लेके जो अपने सिंहासन पर बैठा है उस सहेली के पहिलौंठे लो जो चक्की के छः पीछे है और सारे पशु के पहिलोंठे मर जायेंगे । और मिस्र के समस्त देश में ऐसा बड़ा रोना पीटना होगा जैसा कि कभी न सात हुआ था न कभी फिर होगा । परन्तु सारे इसराएल के संतान पर एक कूकर भी अपनी जीभ न हिलावेगा न तो मनुष्य पर और न पशु पर जिसतें तुम जानो कि परमेश्वर क्योंकर मिस्रियां आठ में और इसराएलियों में बिभाग करता है। और यह तेरे समस्त सेवक मुझ पास आवेंगे और मुझे प्रणाम करके कहेंगे कि तू निकल जा अपने समस्त पश्चाद्नामी समेत और उस के पीछे मैं निकल जाऊंगा और वह फ़िरज़न के पास से निपट रिसियाके निकल गया ।। और परमेश्वर ने मूसा से कहा कि फिरऊन तुम्हारी न दस सुनेगा जिसतें मेरे आश्चर्य्य मिस्र देश में बढ़ जायें। और मसा और हारुन ने ये सब आश्चर्य्य फ़िरऊन के आगे दिखाये और परमेश्वर ने फ़िरज़न के मन को कठोर कर दिया और उस ने अपने देश से इसराएल के संतान को जाने न दिया ।। बारहवां पर्व्व। तब परमेश्वर ने मिस्र के देश में मूसा और हारून को दो कहा । कि यह मास तुम्हारे लिये मामों का आरंभ होगा यह तुम्हारे बरस का पहिला मास होगा ।। इसराएलियों की सारी मंडली से कहा कि इस मास के दसवें में हर एक पुरुष से अपने पितरों के घर के समान एक चार मेम्ना घर पीछे मेम्ना अपने लिये लेवें । और यदि वह घर बाईस पर्व्व ] मेम्ना के लिये छोटा हो तो वह और उस का परोसी जो उस के घर से लगा हुआ हो प्राणियों की गिनती के समान लेवे तुम एक एक अपने खाने के समान मेम्ने के लिये लेखा ठहराओ ।। तुम्हारा मेम्ना निष्खोट होवे पहिले बरस का नरुख भेड़ों छः से अथवा बकरियों से लीजियो । और तुम उसे मास के चौदहवें दिन लों रख छोड़िया और इसराएलियों की समस्त मंडली सांझ का उसे मारें । और वे लेाहू में से लेवें और उन घरों के जहां वे खायेंगे द्वार की दोनों ओर और ऊपर की चौखट पर छापा देवें । और वे उसी रात को आग में भुना हुआ उस का मांस आठ और अख़मीरी रोटी कड़वी तरकारी के साथ खावें । उसे कच्चा और पानी में उसन के न खावें परन्तु उस के सिर पांव और दस उद्र समेत आग पर भूनके खावें । और उस में से बिहान लों कुछ न रहने दीजियो और जो कुछ उस में से बिहान लों ग्यारह रह जायेगा तुम आग से जला दीजिया । और उसे यों खाइयो अपनी कटि बांधे हुए अपनी जूतियां अपने पाओ में पहिने हुए और अपना लउ अपने हाथों में लिये हुए और उसे बेग खा लीजियो वुह परमेश्वर का फसह है ॥ इस लिये कि मैं आज रात मिस्र के देश में होके निकलूंगा और सब पहिलैंौंठे मनुष्य के और पशुन के जो उस में हैं मारूंगा और मिस्र के समस्त देवताओं पर न्याय करूंगा मैं तेरह परमेश्वर हूं । और बुह लाहू तुम्हारे घरों पर जहां जहां तुम हा तुम्हारे लिये एक चिन्ह होगा और मैं वुह लाहू देखके तुम पर से बीत जाऊंगा और जब मिस्र के देश का मारूंगा तब मरी तुम पर नाश करने का न आवेगी ।। और यह दिन तुम्हारे लिये एक स्मरण के लिये होगा |
दोनों की तुलना करने पर पता चलता है कि जब हिंदी सुंदरी में आठ सगण और अंत में गुरु है तो अपभ्रंश में सात सगण तथा एक मध्यवर्ती मगण मात्र है। अपभ्रश में अंतिम एक गुरु का अभाव है। नाम की एकता लक्षणों की समानता देखकर यह कहा जा सकता है कि हिंदी वालों ने सात सगणों के समूह में एक भगण को उड़ा देना ही उचित समझा होगा तथा अंतिम गुरु को स्वराघात की दृष्टि से बढ़ा लिया होगा ।
किरीट - यह आठ भगण ( sil ) का सवैया हैबालि बली न बच्यौ पर खोरहिं क्यों बचिहौ तुम अपनी सोरहिं । जा लगि क्षीर समुद्र मथ्यौ कहि कैसे न बांधि बारिधि थोर ॥
प्रा० पैं० में जो किरीट छद दिया गया है उसमें भी ८ भगण की ही शतं है ( ५७६ पृ० ) छंद नीचे उद्धृत किया गया है ।
बप्पा उक्कि सिरे जिणि लिज्जि तेज्जिय रज्ज बर्णत चले बिणु । सोअर सुंदरि संगिहि लग्गिन मारु विराध कबंध तहा इणु ॥
- आदि
दोनों सर्वथा समान हैं 4
सुमुखी - प्रा० पैं० में सुमुही नामक एक छंद मिलता है। संभावना यह है कि हिंदी के सुमुखी सवैया का विकास इसी छंद से हुआ होगा। दोनों में नामों की एकता की समानता के अतिरिक्त थोड़ा स्वरैक्य भी है। हिंदी सुमुखी में जब २३ अक्षर होते हैं तो सुमुही में २२ अक्षर, हिंदी में जब जगण पद्धति मिलती है तो सुमुही में ऐसी बात नहीं है। दोनों के उदाहरण निम्म लिखित हैं ।
मही पदपंकज जाहि लखे सिव, गंग तरंग बही जिनते । लजै रवि नंदिनि जा परसे, ग्रसते नहिं दोष दुसै तिनते ॥
का उदाहरणअइचल जोब्बण देह घणा सिविणच सोअर बंधु अणा । अबसर काल धुरी गमरा परिहर पब्बर पाप मणा ।।
ऐसे ही खोजने पर हिंदी सवैया के अन्य भेदों का भी संधान प्राप्त हो जायेगा ऐसा विश्वास किया जा सकता है । | दोनों की तुलना करने पर पता चलता है कि जब हिंदी सुंदरी में आठ सगण और अंत में गुरु है तो अपभ्रंश में सात सगण तथा एक मध्यवर्ती मगण मात्र है। अपभ्रश में अंतिम एक गुरु का अभाव है। नाम की एकता लक्षणों की समानता देखकर यह कहा जा सकता है कि हिंदी वालों ने सात सगणों के समूह में एक भगण को उड़ा देना ही उचित समझा होगा तथा अंतिम गुरु को स्वराघात की दृष्टि से बढ़ा लिया होगा । किरीट - यह आठ भगण का सवैया हैबालि बली न बच्यौ पर खोरहिं क्यों बचिहौ तुम अपनी सोरहिं । जा लगि क्षीर समुद्र मथ्यौ कहि कैसे न बांधि बारिधि थोर ॥ प्राशून्य पैंशून्य में जो किरीट छद दिया गया है उसमें भी आठ भगण की ही शतं है छंद नीचे उद्धृत किया गया है । बप्पा उक्कि सिरे जिणि लिज्जि तेज्जिय रज्ज बर्णत चले बिणु । सोअर सुंदरि संगिहि लग्गिन मारु विराध कबंध तहा इणु ॥ - आदि दोनों सर्वथा समान हैं चार सुमुखी - प्राशून्य पैंशून्य में सुमुही नामक एक छंद मिलता है। संभावना यह है कि हिंदी के सुमुखी सवैया का विकास इसी छंद से हुआ होगा। दोनों में नामों की एकता की समानता के अतिरिक्त थोड़ा स्वरैक्य भी है। हिंदी सुमुखी में जब तेईस अक्षर होते हैं तो सुमुही में बाईस अक्षर, हिंदी में जब जगण पद्धति मिलती है तो सुमुही में ऐसी बात नहीं है। दोनों के उदाहरण निम्म लिखित हैं । मही पदपंकज जाहि लखे सिव, गंग तरंग बही जिनते । लजै रवि नंदिनि जा परसे, ग्रसते नहिं दोष दुसै तिनते ॥ का उदाहरणअइचल जोब्बण देह घणा सिविणच सोअर बंधु अणा । अबसर काल धुरी गमरा परिहर पब्बर पाप मणा ।। ऐसे ही खोजने पर हिंदी सवैया के अन्य भेदों का भी संधान प्राप्त हो जायेगा ऐसा विश्वास किया जा सकता है । |
Dil Tod Ke, B Praak: हाल ही में बी प्राक (B Praak) का गाना 'दिल तोड़ के' यूट्यूब पर रिलीज किया गया है। रिलीज के साथ ही इस गाने को फैंस का भरपूर प्यार मिल रहा है। इस गाने को अब तक यूट्यूब पर ही 3 करोड़ से ज्यादा बार देखा जा चुका है। 'दिल तोड़ के' गाने की खास बात यह है कि इसे आईएएस ऑफिसर अभिषेक सिंह (Abhishek Singh) पर फिल्माया गया है।
शादीशुदा जिंदगी में खुश हैं अभिषेकः अभिषेक ने बताया कि अब वह शादीशुदा हैं और बीते दौर से बाहर निकल चुके हैं। अभिषेक की पत्नी भी उनकी तरह ही आईएएस ऑफिसर हैं। अभिषेक अपनी शादीशुदा जिंदगी में खुश हैं और उन्हें चार साल की एक बेटी भी है। बता दें कि अभिषेक ने इससे पहले एक शॉर्ट फिल्म 'चार पंद्रह' में ऐक्टिंग की और जल्द ही वो वेब शो 'दिल्ली क्राइम 2' में भी नजर आने वाले हैं।
| Dil Tod Ke, B Praak: हाल ही में बी प्राक का गाना 'दिल तोड़ के' यूट्यूब पर रिलीज किया गया है। रिलीज के साथ ही इस गाने को फैंस का भरपूर प्यार मिल रहा है। इस गाने को अब तक यूट्यूब पर ही तीन करोड़ से ज्यादा बार देखा जा चुका है। 'दिल तोड़ के' गाने की खास बात यह है कि इसे आईएएस ऑफिसर अभिषेक सिंह पर फिल्माया गया है। शादीशुदा जिंदगी में खुश हैं अभिषेकः अभिषेक ने बताया कि अब वह शादीशुदा हैं और बीते दौर से बाहर निकल चुके हैं। अभिषेक की पत्नी भी उनकी तरह ही आईएएस ऑफिसर हैं। अभिषेक अपनी शादीशुदा जिंदगी में खुश हैं और उन्हें चार साल की एक बेटी भी है। बता दें कि अभिषेक ने इससे पहले एक शॉर्ट फिल्म 'चार पंद्रह' में ऐक्टिंग की और जल्द ही वो वेब शो 'दिल्ली क्राइम दो' में भी नजर आने वाले हैं। |
अपनी मरिणयो से आलोकित कर दिया और गधर्वो व अप्सराम्रो ने अपना स्वर्गीय संगीत गाया। इस प्रकार यह नृत्य सात दिन और सात रात निरन्तर चला । बाद मे नृत्य की यह परम्परा ही 'मणिपुरी नृत्य' कहलाई।"
कत्थक नृत्य और रास- यही नहीं, वत्थक नृत्य का भी उदय रास से ही माना जाता है । कत्थक नृत्य का पुराना नाम ही, 'नटवरी नृत्य' है । नटवरी नृत्य का अर्थ है नटवर (भगवान् श्री कृष्ण) द्वारा नाचा गया नृत्य । यही नहीं, रास के वर्तमान नृत्यो घोर कत्थक नृत्यों का मूल भी एक ही है और उनके नृत्य भी एक जैसे ही हैं । अन्तर केवल यही है कि रास के नृत्य लोक-जीवन मे घुल-मिल गये है, जबकि कत्थक नृत्यो का प्राधार शास्त्रीय है ।
भारतीय साहित्य और रास - रास नृत्यो की लोकप्रियता का दूसरा बड़ा साक्षी भारतीय साहित्य है । जयदेव का गीत - गोविंद, विद्यापति प्रोर चडीदास की पदावली तथा हिन्दी व ब्रजभाषा का समस्त साहित्य तो रास के वनो से परिपूर्ण है ही, साथ ही बगाल का 'व्रज-बुलि' साहित्य तथा दक्षिण की भाषाओ के साहित्य मे भी रास के बड़े भव्य वर्णन मिलते है । प्राचीन गुजराती साहित्य मे तो रास की एक साहित्यिक परम्परा का ही उल्लेख, श्री कन्हैयालाल माणिक लाल मुशी ने अपने ग्रन्थ "गुजराती एण्ड इट्स लिटरेचर " मे किया है ।
रास के नर्त्तक नट- इस प्रकार रास के ये नृत्य प्राचीन समय मे बहुत लोक- प्रिय रहे । ऐसा प्रतीत होता है कि नट जाति का रास के इन नृत्यो से विशेष सम्बन्ध हो गया था और अपभ्रश काल तक प्राते प्राते ये नट लोग रास नृत्यों में पारगत हो गये थे । संस्कृत के बाद अपभ्रश साहित्य की पूरी खोज अभी नही हो पाई, अन्यथा रास के सम्बन्ध मे प्रौर भी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आते, किन्तु मुनि जिन विजय जी को 'सदेश रासक' नामक ग्रन्थ खोज मे मिला है ।" उसमे एक विरहिरगो व एक पथिक के सदेश के कुछ अनुवाद श्री ओझा जी ने दिये है । उसका एक प्रश इस प्रकार है"विरहिरणी - श्राप कहाँ से ना रहे हैं, कहाँ जायेंगे ? पथिक - भद्रे, मैं उस शाम्बपुर से श्रा रहा हूँ जहाँ भ्रमण करते हुए स्थान स्थान पर प्रकृति के मधुर गान सुनाई पड़ते हैं । वेदज्ञ वेद की व्याख्या करते हैं, कहीं-कहीं रासकों का अभिनय नटों द्वारा किया जाता है।"
इस ग्रन्थ से जहाँ रासको की जीवित परम्परा का पता लगता है वहीं रास नृत्यो से नट जाति के सम्बन्ध का भी पता लगता है। हमारा अनुमान है कि अपभ्रशकाल से हिन्दी के भक्ति-युग तक रास पर नटो का आधिपत्य क्षुण्ण रहा, परन्तु बाद मे नटो के हाथो रास का स्वरूप कदाचित् विगड गया। इस सम्बन्ध मे श्री जीव गोस्वामी का यह कथन दृष्टव्य है"नटैगू होतकण्ठीना, अन्योन्यात्तर काश्रियाम् ।
नर्तकीनाम् भयेद्रासो मण्डलीभूप नर्त्तनम् ॥"
१ देखिये 'साहित्य मदेश मिनम्बर १६५८ में श्याम परमार का लेख 'रास-लीला' । | अपनी मरिणयो से आलोकित कर दिया और गधर्वो व अप्सराम्रो ने अपना स्वर्गीय संगीत गाया। इस प्रकार यह नृत्य सात दिन और सात रात निरन्तर चला । बाद मे नृत्य की यह परम्परा ही 'मणिपुरी नृत्य' कहलाई।" कत्थक नृत्य और रास- यही नहीं, वत्थक नृत्य का भी उदय रास से ही माना जाता है । कत्थक नृत्य का पुराना नाम ही, 'नटवरी नृत्य' है । नटवरी नृत्य का अर्थ है नटवर द्वारा नाचा गया नृत्य । यही नहीं, रास के वर्तमान नृत्यो घोर कत्थक नृत्यों का मूल भी एक ही है और उनके नृत्य भी एक जैसे ही हैं । अन्तर केवल यही है कि रास के नृत्य लोक-जीवन मे घुल-मिल गये है, जबकि कत्थक नृत्यो का प्राधार शास्त्रीय है । भारतीय साहित्य और रास - रास नृत्यो की लोकप्रियता का दूसरा बड़ा साक्षी भारतीय साहित्य है । जयदेव का गीत - गोविंद, विद्यापति प्रोर चडीदास की पदावली तथा हिन्दी व ब्रजभाषा का समस्त साहित्य तो रास के वनो से परिपूर्ण है ही, साथ ही बगाल का 'व्रज-बुलि' साहित्य तथा दक्षिण की भाषाओ के साहित्य मे भी रास के बड़े भव्य वर्णन मिलते है । प्राचीन गुजराती साहित्य मे तो रास की एक साहित्यिक परम्परा का ही उल्लेख, श्री कन्हैयालाल माणिक लाल मुशी ने अपने ग्रन्थ "गुजराती एण्ड इट्स लिटरेचर " मे किया है । रास के नर्त्तक नट- इस प्रकार रास के ये नृत्य प्राचीन समय मे बहुत लोक- प्रिय रहे । ऐसा प्रतीत होता है कि नट जाति का रास के इन नृत्यो से विशेष सम्बन्ध हो गया था और अपभ्रश काल तक प्राते प्राते ये नट लोग रास नृत्यों में पारगत हो गये थे । संस्कृत के बाद अपभ्रश साहित्य की पूरी खोज अभी नही हो पाई, अन्यथा रास के सम्बन्ध मे प्रौर भी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आते, किन्तु मुनि जिन विजय जी को 'सदेश रासक' नामक ग्रन्थ खोज मे मिला है ।" उसमे एक विरहिरगो व एक पथिक के सदेश के कुछ अनुवाद श्री ओझा जी ने दिये है । उसका एक प्रश इस प्रकार है"विरहिरणी - श्राप कहाँ से ना रहे हैं, कहाँ जायेंगे ? पथिक - भद्रे, मैं उस शाम्बपुर से श्रा रहा हूँ जहाँ भ्रमण करते हुए स्थान स्थान पर प्रकृति के मधुर गान सुनाई पड़ते हैं । वेदज्ञ वेद की व्याख्या करते हैं, कहीं-कहीं रासकों का अभिनय नटों द्वारा किया जाता है।" इस ग्रन्थ से जहाँ रासको की जीवित परम्परा का पता लगता है वहीं रास नृत्यो से नट जाति के सम्बन्ध का भी पता लगता है। हमारा अनुमान है कि अपभ्रशकाल से हिन्दी के भक्ति-युग तक रास पर नटो का आधिपत्य क्षुण्ण रहा, परन्तु बाद मे नटो के हाथो रास का स्वरूप कदाचित् विगड गया। इस सम्बन्ध मे श्री जीव गोस्वामी का यह कथन दृष्टव्य है"नटैगू होतकण्ठीना, अन्योन्यात्तर काश्रियाम् । नर्तकीनाम् भयेद्रासो मण्डलीभूप नर्त्तनम् ॥" एक देखिये 'साहित्य मदेश मिनम्बर एक हज़ार छः सौ अट्ठावन में श्याम परमार का लेख 'रास-लीला' । |
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अटल पेंशन योजना (एपीवाई) से जुड़े लोगों की संख्या करीब 53 लाख पहुंच चुकी है। अभी इस योजना के कार्यान्वयन में 235 बैंक सहित डाक विभाग भी शामिल हैं। बैंक की शाखाओं और सीबीएस सुविधा वाले डाक विभाग के कार्यालयों के अलावा कुछ बैंक इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से भी यह सुविधा प्रदान कर रहे हैं।
एपीवाई योजना केंद्र सरकार के कर्मचारियों के एनपीएस के समान ही निवेश पद्धति का अनुसरण करती है। वित्त वर्ष 2016-17 में, 13.91 प्रतिशत का रिटर्न कमाया है।
एपीवाई योजना के अभिदाताओं को और अधिक सुविधा देने के उद्देश्य से नई प्रक्रियाएं विकसित की गई हैं जिसके अंतर्गत कोई भी अभिदाता ई-प्राण कार्ड और लेनदेन का विवरण देख सकता है और उसकी प्रति भी ले सकता है।इसके साथ ही, अभिदाता अपनी शिकायत/ आपत्ति इस वेबसाइट पर https://npslite-nsdl.com/CRAlite/grievanceSub.do दर्ज करा सकता हैं।
अभी इसके अंतर्गत 62 प्रतिशत पुरूष एवं 38 प्रतिशत महिला अभिदाता हैं। जिनमें से ज्यादातर ने मासिक जमा का विकल्प चुना है, करीब 97.5 प्रतिशत अभिदाताओं ने मासिक अंतराल का विकल्प चुना है, करीब 0.8 प्रतिशत ने त्रै-मासिक एवं 1.7 प्रतिशत ने अर्द्ध-वार्षिक का विकल्प चुना है।
इनमे से ज्यादातर लोगों ने 1000 रूपये के मासिक पेंशन का विकल्प चुना है। अभी 51.5 प्रतिशत अभिदाताओं ने 1000 रूपये के मासिक पेंशन का विकल्प चुना है और 34.5 प्रतिशत अभिदाताओं ने 5000 रूपये के मासिक पेंशन का विकल्प चुना है। अभिदाताओं के पेंशन की रकम के अनुसार विभाजन को चित्र-1 में दिखाया गया है।
1 जून 2015 से अटल पेंशन योजना लागू की गई और यह 18 से 40 वर्ष के आयु वर्ग के भारतीय नागरिकों के लिए उपलब्ध है। इस योजना के तहत कोई भी 60 वर्ष की आयु के बाद 1000 रूपये से लेकर 5000 रूपये तक का मासिक पेंशन ले सकता है, यह उसके योगदान पर निर्भर करता है। अभिदाता की मृत्यु की स्थिति में यह उसकी पत्नी को मिलेगा और यदि दोनों की मृत्यु हो जाती है तो वैसी स्थिति में यह नामित व्यक्ति को मिलेगा।
| Posted On: अटल पेंशन योजना से जुड़े लोगों की संख्या करीब तिरेपन लाख पहुंच चुकी है। अभी इस योजना के कार्यान्वयन में दो सौ पैंतीस बैंक सहित डाक विभाग भी शामिल हैं। बैंक की शाखाओं और सीबीएस सुविधा वाले डाक विभाग के कार्यालयों के अलावा कुछ बैंक इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से भी यह सुविधा प्रदान कर रहे हैं। एपीवाई योजना केंद्र सरकार के कर्मचारियों के एनपीएस के समान ही निवेश पद्धति का अनुसरण करती है। वित्त वर्ष दो हज़ार सोलह-सत्रह में, तेरह.इक्यानवे प्रतिशत का रिटर्न कमाया है। एपीवाई योजना के अभिदाताओं को और अधिक सुविधा देने के उद्देश्य से नई प्रक्रियाएं विकसित की गई हैं जिसके अंतर्गत कोई भी अभिदाता ई-प्राण कार्ड और लेनदेन का विवरण देख सकता है और उसकी प्रति भी ले सकता है।इसके साथ ही, अभिदाता अपनी शिकायत/ आपत्ति इस वेबसाइट पर https://npslite-nsdl.com/CRAlite/grievanceSub.do दर्ज करा सकता हैं। अभी इसके अंतर्गत बासठ प्रतिशत पुरूष एवं अड़तीस प्रतिशत महिला अभिदाता हैं। जिनमें से ज्यादातर ने मासिक जमा का विकल्प चुना है, करीब सत्तानवे.पाँच प्रतिशत अभिदाताओं ने मासिक अंतराल का विकल्प चुना है, करीब शून्य.आठ प्रतिशत ने त्रै-मासिक एवं एक.सात प्रतिशत ने अर्द्ध-वार्षिक का विकल्प चुना है। इनमे से ज्यादातर लोगों ने एक हज़ार रूपये के मासिक पेंशन का विकल्प चुना है। अभी इक्यावन.पाँच प्रतिशत अभिदाताओं ने एक हज़ार रूपये के मासिक पेंशन का विकल्प चुना है और चौंतीस.पाँच प्रतिशत अभिदाताओं ने पाँच हज़ार रूपये के मासिक पेंशन का विकल्प चुना है। अभिदाताओं के पेंशन की रकम के अनुसार विभाजन को चित्र-एक में दिखाया गया है। एक जून दो हज़ार पंद्रह से अटल पेंशन योजना लागू की गई और यह अट्ठारह से चालीस वर्ष के आयु वर्ग के भारतीय नागरिकों के लिए उपलब्ध है। इस योजना के तहत कोई भी साठ वर्ष की आयु के बाद एक हज़ार रूपये से लेकर पाँच हज़ार रूपये तक का मासिक पेंशन ले सकता है, यह उसके योगदान पर निर्भर करता है। अभिदाता की मृत्यु की स्थिति में यह उसकी पत्नी को मिलेगा और यदि दोनों की मृत्यु हो जाती है तो वैसी स्थिति में यह नामित व्यक्ति को मिलेगा। |
पिछले पांच साल से भारतीय टीम से बाहर चल रहे बल्लेबाज रॉबिन उथप्पा की निगाहें 'फिनिशर' के तौर पर टी20 टीम में वापसी करने पर टिकी हैं और उन्हें लगता है कि वह अभी एक और विश्व कप खेल सकते हैं।
उथप्पा वनडे विश्व कप 2007 की टीम में शामिल थे और पहले टी20 विश्व कप की विजेता टीम का हिस्सा थे। उन्होंने भारत की तरफ से अपना आखिरी मैच जुलाई 2015 में जिम्बाब्वे दौरे में खेला था। यह 34 वर्षीय बल्लेबाज अक्टूबर 2011 के बाद से केवल आठ वनडे और चार टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच ही खेल पाया है।
| पिछले पांच साल से भारतीय टीम से बाहर चल रहे बल्लेबाज रॉबिन उथप्पा की निगाहें 'फिनिशर' के तौर पर टीबीस टीम में वापसी करने पर टिकी हैं और उन्हें लगता है कि वह अभी एक और विश्व कप खेल सकते हैं। उथप्पा वनडे विश्व कप दो हज़ार सात की टीम में शामिल थे और पहले टीबीस विश्व कप की विजेता टीम का हिस्सा थे। उन्होंने भारत की तरफ से अपना आखिरी मैच जुलाई दो हज़ार पंद्रह में जिम्बाब्वे दौरे में खेला था। यह चौंतीस वर्षीय बल्लेबाज अक्टूबर दो हज़ार ग्यारह के बाद से केवल आठ वनडे और चार टीबीस अंतरराष्ट्रीय मैच ही खेल पाया है। |
(यह भी एक प्रकार की तान्त्रिक क्रिया ही है।)
(इ) वशीभूत स्त्री की पहिचान - १२वें और १३वें पद्य में वशीभूत स्त्री की पहिचान बतलाई गई है। किन्तु इसमें जो लक्षण बतलाये गये हैं वे तो सामान्य सहवास काल में भी होते हैं। अतः इन्हें साधना से सिद्ध हुई स्त्री की पहिचान नहीं कहा जा सकता ।
(ई) उपभोग्य उत्तम स्त्री - १४वें पद्य में बतलाया गया है कि जिसमें अपना मन रमता है वही सुन्दरी अपने लिये सर्वोत्तम होती है । यह एक सामान्य विचार है जिसका समर्थन चरक इत्यादि ग्रन्थों एवं कामशास्त्रीय सिद्धान्तों से भी हो जाता है ।
स्त्री सेवन विषयक परामर्श
१ - निपुण व्यक्ति को चाहिये कि स्वास्थ्य क्रम और उपयोग तथा योग्यता को समझ कर स्त्रियों का सेवन करे । वाला योग्या (तरूणी) अभिरूपा (गलित यौवना) इनके ऋतुकाल के विभाग को समझकर इनका सेवन करना चाहिये ।
(यहं तरुणी को योग्या और जरती को अभिरूढा कहा गया है ।)
यावच्छोडशवत्सरम् ।
ततः परं च तरुणी सा यावत् त्रिंशतं भवेत् ॥ २ ॥
तदूर्ध्वमभिरूढास्याद्यावत् पञ्चाशतं पुनः । वृद्धा ततः परं ज्ञेया सुरतोत्सववर्जिता ।। ३ ।।
स्त्रियों का आयु विभाजन
२-३ - जब तक नारी १६ वर्ष की आयु पर्यन्त रहती है बाला कही जाती है। उसके बाद वह तरुणी रहती है जब तक तीस वर्ष की हो जाती है। उसके बाद अभिरूढा कही जाती है जो ५० वर्ष की आयु तक रहती है । इसके बाद वृद्धा समझी जानी चाहिये जो सुरत के उत्सव से रहित होती है ।
निदाघशरदोर्बाला पथ्या विषयिणां भवेत् । हेमन्ते शिशिरे योग्या, प्रौढा वर्षावसन्तयोः ॥ ४ ॥
ऋतुओं के अनुसार नारियों का उपभोग
४ - विषयों का सेवन करने वालों के लिये ग्रीष्म और शरद् ऋतुओं में बाला पथ्य (स्वास्थ्य के अनुकूल होती है) योग्या (तरुणी) हेमन्त और शिशिर में ठीक रहती है; तथा वर्षा और वसन्त में प्रौढा (जरती) अनुकूल पड़ती है।
सततं सेव्यमानाऽपि बाला वर्धयते बलम् । क्षयं नयति योग्या स्त्री, प्रौढा तु कुरुते जराम् ॥५॥
उक्त विषय में विशेषता
५ - बाला का सेवन निरन्तर (चाहे जिस ऋतु में) करने पर भी वह बल बढ़ाती है । योग्या (तरुणी) शक्ति को क्षीण करती है और प्रौढा सेवन करने पर बुढापे को नजदीक लाती है।
अलोमकाः सतिलका नित्यं सेव्यास्तु योनयः । अलोमकत्वं कक्षेण, कक्षेण, मुखेन ज्ञायते तिलः ।।६ ।।
६ - स्त्रियों के जिस गुप्ताङ्ग पर बाल उगे हुये न हों और उस पर तिल भी हो ऐसी योनियों का निरन्तर सेवन करना चाहिये । कांख को देखकर लोम हीनता समझ ली जानी चाहिये और मुख को देखकर तिल की स्थिति जान लेनी चाहिये ।
(इसका आशय यह ज्ञात होता है कि यदि कांख में बाल नहीं होते तो योनि पर भी नहीं होते। यदि योनि पर तिल होता है तो मुख पर भी होता है । अतः मुख देखकर योनि को समझ लेना चाहिये। (अन्यत्र कहा भी गया है - - स्त्री गुप्तांग के छोर पर या दाहिनी ओर यदि तिलक होता है वह योनि प्रशसंनीय कही जाती है ।)
आसीने लालयेद् बालां, तरुणीं शयने तथा । उत्थिते चाभिरूढां तु लालनं त्रिविधं मतम् ॥ ७ ॥
प्रेम करने की स्थिति
७ -बाला से उस समय प्यार करना चाहिये जब वह बैठी हो । तरुणी से प्यार तब करना चाहिये जब वह चारपाई पर लेटी हुई हो; प्रौढा से प्रेम उठने के अवसर पर करना चाहिये ।
मेहनं नारभेत्तावद्यावन्नोत्कण्ठिता प्रिया । अन्यथा तत्सुखोच्छित्ति रशीतेऽर्ककरादिव ।। ८ ।।
सम्भोग का अवसर
७ - तब तक सम्भोग कार्य प्रारम्भ नहीं करना चाहिये जब तक प्रेयसी में उत्कण्ठा (सम्भोग की कामना जागृत न हो जाय) अन्यथा उसके सुख का विघात उसी प्रकार हो जायेगा जैसे शीत न होने पर सूर्य की किरणें कष्ट दायक हो जाती हैं।
(यहां आशय सम्भोग के प्रारम्भ करने का है जिसके लिये मोहन शब्द ठीक नहीं है। 'मेहन' शब्द का प्रयोग होना चाहिये। मेहन अर्थात् लिंग का कार्य ।)
नाभिहत्कण्ठदेशेषु दधत् श्वासं न यः क्रमात् । कामोऽहं भावयेत् कामी गायत्रीं सप्तधा जपेत् ।। ९ ।। | वशीभूत स्त्री की पहिचान - बारहवें और तेरहवें पद्य में वशीभूत स्त्री की पहिचान बतलाई गई है। किन्तु इसमें जो लक्षण बतलाये गये हैं वे तो सामान्य सहवास काल में भी होते हैं। अतः इन्हें साधना से सिद्ध हुई स्त्री की पहिचान नहीं कहा जा सकता । उपभोग्य उत्तम स्त्री - चौदहवें पद्य में बतलाया गया है कि जिसमें अपना मन रमता है वही सुन्दरी अपने लिये सर्वोत्तम होती है । यह एक सामान्य विचार है जिसका समर्थन चरक इत्यादि ग्रन्थों एवं कामशास्त्रीय सिद्धान्तों से भी हो जाता है । स्त्री सेवन विषयक परामर्श एक - निपुण व्यक्ति को चाहिये कि स्वास्थ्य क्रम और उपयोग तथा योग्यता को समझ कर स्त्रियों का सेवन करे । वाला योग्या अभिरूपा इनके ऋतुकाल के विभाग को समझकर इनका सेवन करना चाहिये । यावच्छोडशवत्सरम् । ततः परं च तरुणी सा यावत् त्रिंशतं भवेत् ॥ दो ॥ तदूर्ध्वमभिरूढास्याद्यावत् पञ्चाशतं पुनः । वृद्धा ततः परं ज्ञेया सुरतोत्सववर्जिता ।। तीन ।। स्त्रियों का आयु विभाजन दो-तीन - जब तक नारी सोलह वर्ष की आयु पर्यन्त रहती है बाला कही जाती है। उसके बाद वह तरुणी रहती है जब तक तीस वर्ष की हो जाती है। उसके बाद अभिरूढा कही जाती है जो पचास वर्ष की आयु तक रहती है । इसके बाद वृद्धा समझी जानी चाहिये जो सुरत के उत्सव से रहित होती है । निदाघशरदोर्बाला पथ्या विषयिणां भवेत् । हेमन्ते शिशिरे योग्या, प्रौढा वर्षावसन्तयोः ॥ चार ॥ ऋतुओं के अनुसार नारियों का उपभोग चार - विषयों का सेवन करने वालों के लिये ग्रीष्म और शरद् ऋतुओं में बाला पथ्य योग्या हेमन्त और शिशिर में ठीक रहती है; तथा वर्षा और वसन्त में प्रौढा अनुकूल पड़ती है। सततं सेव्यमानाऽपि बाला वर्धयते बलम् । क्षयं नयति योग्या स्त्री, प्रौढा तु कुरुते जराम् ॥पाँच॥ उक्त विषय में विशेषता पाँच - बाला का सेवन निरन्तर करने पर भी वह बल बढ़ाती है । योग्या शक्ति को क्षीण करती है और प्रौढा सेवन करने पर बुढापे को नजदीक लाती है। अलोमकाः सतिलका नित्यं सेव्यास्तु योनयः । अलोमकत्वं कक्षेण, कक्षेण, मुखेन ज्ञायते तिलः ।।छः ।। छः - स्त्रियों के जिस गुप्ताङ्ग पर बाल उगे हुये न हों और उस पर तिल भी हो ऐसी योनियों का निरन्तर सेवन करना चाहिये । कांख को देखकर लोम हीनता समझ ली जानी चाहिये और मुख को देखकर तिल की स्थिति जान लेनी चाहिये । आसीने लालयेद् बालां, तरुणीं शयने तथा । उत्थिते चाभिरूढां तु लालनं त्रिविधं मतम् ॥ सात ॥ प्रेम करने की स्थिति सात -बाला से उस समय प्यार करना चाहिये जब वह बैठी हो । तरुणी से प्यार तब करना चाहिये जब वह चारपाई पर लेटी हुई हो; प्रौढा से प्रेम उठने के अवसर पर करना चाहिये । मेहनं नारभेत्तावद्यावन्नोत्कण्ठिता प्रिया । अन्यथा तत्सुखोच्छित्ति रशीतेऽर्ककरादिव ।। आठ ।। सम्भोग का अवसर सात - तब तक सम्भोग कार्य प्रारम्भ नहीं करना चाहिये जब तक प्रेयसी में उत्कण्ठा अन्यथा उसके सुख का विघात उसी प्रकार हो जायेगा जैसे शीत न होने पर सूर्य की किरणें कष्ट दायक हो जाती हैं। नाभिहत्कण्ठदेशेषु दधत् श्वासं न यः क्रमात् । कामोऽहं भावयेत् कामी गायत्रीं सप्तधा जपेत् ।। नौ ।। |
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११ पर जब इस विशार सोजना नें मध्वम मायं का शपः प्रका तब उसके पीछे को दृष्टि भी कुछ संकुचित हुई । फिर मी मैंते इस सध्यमभार्गी विवेचन पटति मे मस्य रूप से निम्न बातें ध्यान में रखी है (१) किसी एक ही प्रन्थ का अनुवाद या सार नहीं लिख कर या किसी एक ही सम्प्रदाय के मन्तव्य का बिना अनुसरण किये ही' जी कुछ आज तक॑ जेन तत्वज्ञान के अङ्ख स्वरूप पढ़ने में या बिचार में आया हो,. उसका तटस्थं भाव से उपयोग कर विवेचन लिखना । (२) महाविद्यालय या कॉलेज़ के विद्याथियों की जिज्ञासा के अनुकूल हो तथा पुरातन प्रणाली से अभ्यास करनेवाले विद्याथियों को भी पसंद मावे इस प्रकार साम्प्रदायिक परिभाषा कायम रखने हुए उसे सरल कर पथक्करण करना । (३) जहाँ ठोक प्रतीत हो और जितना ठीक हो उतने ही परिमाण में संवाद रूप से और दोष भाग में बिना संवाद के सरलतापुबंक चर्मा करनी।। (४) विवेचन मे सूत्रपाठ एक ही रखना और बह भी भाष्य स्वीकृत गीर जहाँ जहाँ महत्त्वपूर्ण अर्थभेद हो वहाँ वहाँ भेदवाले सूत्र की लिखें कर नीचे टिप्पणी में उसका अथं देना) (५) जहाँ तक अधेदृष्टि संगत हो बैसे एक या अनेक सूत्रों को साथ लेकर उनका अथं लिखना और एक साथ ही विवेचन करना । ऐसा करते हुए बिषय लम्बा हो वहाँ उसका विभाग कर शोक द्वारा वक्तव्य का पथक्करण करना । (६) बहुत प्रसिद्ध हो वहां ओर अधिक जटिलता न आ जाय इस प्रकार जैन परिभाषा को जेनेतरपरिभाषा के साथ तुलना करना । (७) किंसी एक ही विषय पर जहां केवल दवेताम्बर या दिगम्बर या दोनों के मिल कर अनेक मन्तव्य हों वहाँ पर कितना भर क्या लेना और कितना छोड़ना इसका निर्णय सूत्रकार के आशय की निकटता और विवेचन के परिमाण को मर्यादा को लक्ष्य में रख कर स्वतन्त्र रूप से' पल पर ग गत पी १. अब ऐसी टिप्पणियाँ सुत्रपाठ में दी गई हैं ।
| लेखक : पुस्तक का साइज़ : कुल पृष्ठ : श्रेणी : लेखक के बारे में अधिक जानकारी : पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश ग्यारह पर जब इस विशार सोजना नें मध्वम मायं का शपः प्रका तब उसके पीछे को दृष्टि भी कुछ संकुचित हुई । फिर मी मैंते इस सध्यमभार्गी विवेचन पटति मे मस्य रूप से निम्न बातें ध्यान में रखी है किसी एक ही प्रन्थ का अनुवाद या सार नहीं लिख कर या किसी एक ही सम्प्रदाय के मन्तव्य का बिना अनुसरण किये ही' जी कुछ आज तक॑ जेन तत्वज्ञान के अङ्ख स्वरूप पढ़ने में या बिचार में आया हो,. उसका तटस्थं भाव से उपयोग कर विवेचन लिखना । महाविद्यालय या कॉलेज़ के विद्याथियों की जिज्ञासा के अनुकूल हो तथा पुरातन प्रणाली से अभ्यास करनेवाले विद्याथियों को भी पसंद मावे इस प्रकार साम्प्रदायिक परिभाषा कायम रखने हुए उसे सरल कर पथक्करण करना । जहाँ ठोक प्रतीत हो और जितना ठीक हो उतने ही परिमाण में संवाद रूप से और दोष भाग में बिना संवाद के सरलतापुबंक चर्मा करनी।। विवेचन मे सूत्रपाठ एक ही रखना और बह भी भाष्य स्वीकृत गीर जहाँ जहाँ महत्त्वपूर्ण अर्थभेद हो वहाँ वहाँ भेदवाले सूत्र की लिखें कर नीचे टिप्पणी में उसका अथं देना) जहाँ तक अधेदृष्टि संगत हो बैसे एक या अनेक सूत्रों को साथ लेकर उनका अथं लिखना और एक साथ ही विवेचन करना । ऐसा करते हुए बिषय लम्बा हो वहाँ उसका विभाग कर शोक द्वारा वक्तव्य का पथक्करण करना । बहुत प्रसिद्ध हो वहां ओर अधिक जटिलता न आ जाय इस प्रकार जैन परिभाषा को जेनेतरपरिभाषा के साथ तुलना करना । किंसी एक ही विषय पर जहां केवल दवेताम्बर या दिगम्बर या दोनों के मिल कर अनेक मन्तव्य हों वहाँ पर कितना भर क्या लेना और कितना छोड़ना इसका निर्णय सूत्रकार के आशय की निकटता और विवेचन के परिमाण को मर्यादा को लक्ष्य में रख कर स्वतन्त्र रूप से' पल पर ग गत पी एक. अब ऐसी टिप्पणियाँ सुत्रपाठ में दी गई हैं । |
इस दवा पर कैश ऑन डिलीवरी (CoD) की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
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Himalaya Diaper Rash Cream बिना डॉक्टर के पर्चे द्वारा मिलने वाली आयुर्वेदिक दवा है, जो मुख्यतः दर्द, डायपर रैश के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है। इसके अलावा Himalaya Diaper Rash Cream का उपयोग कुछ दूसरी समस्याओं के लिए भी किया जा सकता है। इनके बारे में नीचे विस्तार से जानकारी दी गयी है। Himalaya Diaper Rash Cream के मुख्य घटक हैं निर्गुण्डी, बादाम, एलोवेरा जिनकी प्रकृति और गुणों के बारे में नीचे बताया गया है। Himalaya Diaper Rash Cream की उचित खुराक मरीज की उम्र, लिंग और उसके स्वास्थ्य संबंधी पिछली समस्याओं पर निर्भर करती है। यह जानकारी विस्तार से खुराक वाले भाग में दी गई है।
ये दवाएं चोट के कारण होने वाली सूजन को कम करती हैं।
वे घटक जिनका इस्तेमाल फ्री रेडिकल्स की सक्रियता को कम करने और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस (मुक्त कणों के बनने और उनके शरीर के प्रति हानिकरक प्रभाव को न रोक पाने के बीच का असंतुलन) को रोकने के लिए किया जाता है।
वे मॉइश्चराइजिंग एजेंट जिससे त्वचा को नरम और मुलायम बनाया जाता है।
चिकित्सा साहित्य में Himalaya Diaper Rash Cream के दुष्प्रभावों के बारे में कोई सूचना नहीं मिली है। हालांकि, Himalaya Diaper Rash Cream का इस्तेमाल करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह-मशविरा जरूर करें।
क्या Himalaya Diaper Rash Cream का उपयोग बच्चों के लिए ठीक है?
बच्चों के लिए Himalaya Diaper Rash Cream लेना सुरक्षित माना जा सकता है।
Himalaya Diaper Rash Cream का उपयोग कैसे करें?
Himalaya Diaper Rash Cream को पर्याप्त मात्रा में अपने हाथ में लें और सौम्यता से प्रभावित हिस्से में लगाएं।
Himalaya Diaper Rash Cream से जुड़े सुझाव।
प्रभावित स्थान को सामान्य या गुनगुने पानी से साफ करना चाहिए।
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Himalaya Diaper Rash Cream का बहुत ज्यादा उपयोग न करें। डॉक्टर द्वारा निर्धारित खुराक का ही इस्तेमाल करें।
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अगर आपको Himalaya Diaper Rash Cream के उपयोग के बाद एलर्जी जैसी प्रतिक्रिया का अनुभव हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
गर्भावस्था के दौरान Himalaya Diaper Rash Cream के उपयोग से पहले डॉक्टर से सलाह लेने का सुझाव दिया जाता है।
जो महिलाएं स्तनपान करा रही हों उन्हें Himalaya Diaper Rash Cream के इस्तेमाल से पहले डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए।
Himalaya Diaper Rash Cream की खुराक छूट जाने से संक्रमण बढ़ सकता है।
जब आप Himalaya Diaper Rash Cream को प्रयोग में ला रहे हों तो प्रभावित स्थान पर गर्म पानी का प्रयोग न करें।
| इस दवा पर कैश ऑन डिलीवरी की सुविधा उपलब्ध नहीं है। यदि आप myUpchar Ayurveda उत्पाद को कार्ट में जोड़ते हैं, तो आपकी शिपिंग मुफ़्त हो जाएगी। Himalaya Diaper Rash Cream बिना डॉक्टर के पर्चे द्वारा मिलने वाली आयुर्वेदिक दवा है, जो मुख्यतः दर्द, डायपर रैश के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है। इसके अलावा Himalaya Diaper Rash Cream का उपयोग कुछ दूसरी समस्याओं के लिए भी किया जा सकता है। इनके बारे में नीचे विस्तार से जानकारी दी गयी है। Himalaya Diaper Rash Cream के मुख्य घटक हैं निर्गुण्डी, बादाम, एलोवेरा जिनकी प्रकृति और गुणों के बारे में नीचे बताया गया है। Himalaya Diaper Rash Cream की उचित खुराक मरीज की उम्र, लिंग और उसके स्वास्थ्य संबंधी पिछली समस्याओं पर निर्भर करती है। यह जानकारी विस्तार से खुराक वाले भाग में दी गई है। ये दवाएं चोट के कारण होने वाली सूजन को कम करती हैं। वे घटक जिनका इस्तेमाल फ्री रेडिकल्स की सक्रियता को कम करने और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को रोकने के लिए किया जाता है। वे मॉइश्चराइजिंग एजेंट जिससे त्वचा को नरम और मुलायम बनाया जाता है। चिकित्सा साहित्य में Himalaya Diaper Rash Cream के दुष्प्रभावों के बारे में कोई सूचना नहीं मिली है। हालांकि, Himalaya Diaper Rash Cream का इस्तेमाल करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह-मशविरा जरूर करें। क्या Himalaya Diaper Rash Cream का उपयोग बच्चों के लिए ठीक है? बच्चों के लिए Himalaya Diaper Rash Cream लेना सुरक्षित माना जा सकता है। Himalaya Diaper Rash Cream का उपयोग कैसे करें? Himalaya Diaper Rash Cream को पर्याप्त मात्रा में अपने हाथ में लें और सौम्यता से प्रभावित हिस्से में लगाएं। Himalaya Diaper Rash Cream से जुड़े सुझाव। प्रभावित स्थान को सामान्य या गुनगुने पानी से साफ करना चाहिए। प्रभावित हिस्से को अच्छी तरह से साफ करें फिर इस पर Himalaya Diaper Rash Cream का प्रयोग करें। Himalaya Diaper Rash Cream उपयोग करने के बाद आप चाहें तो प्रभावित हिस्से को रुई से ढक सकते हैं। इस हिस्से को कवर करने का सही तरीका जानने के लिए अपने डॉक्टर से बात करें। Himalaya Diaper Rash Cream का बहुत ज्यादा उपयोग न करें। डॉक्टर द्वारा निर्धारित खुराक का ही इस्तेमाल करें। Himalaya Diaper Rash Cream को ठंडे, सूखे और सामान्य से कम तापमान पर रखें। Himalaya Diaper Rash Cream को फ्रिज में न रखें। अगर आपको Himalaya Diaper Rash Cream के उपयोग के बाद एलर्जी जैसी प्रतिक्रिया का अनुभव हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। गर्भावस्था के दौरान Himalaya Diaper Rash Cream के उपयोग से पहले डॉक्टर से सलाह लेने का सुझाव दिया जाता है। जो महिलाएं स्तनपान करा रही हों उन्हें Himalaya Diaper Rash Cream के इस्तेमाल से पहले डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए। Himalaya Diaper Rash Cream की खुराक छूट जाने से संक्रमण बढ़ सकता है। जब आप Himalaya Diaper Rash Cream को प्रयोग में ला रहे हों तो प्रभावित स्थान पर गर्म पानी का प्रयोग न करें। |
नई दिल्ली (वीअ)। बाहरी दिल्ली के अमन विहार इलाके में मामूली बात को लेकर हुए विवाद में पड़ोसी ने एक युवक ने लाठी डड़ों से पीटकर एक किशोर की हत्याकर दी। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए संजय गांधी हॉस्पिटल में भेज दिया है। हत्या का मामला दर्जकर पुलिस मामले की जांच कर रही है। जानकारी के अनुसार रंजीत(17) अपने माता-पिता के साथ लक्ष्मी विहार में रहता था। बताया जाता है कि कल रविवार की रात किसी बात को लेकर पड़ोसी से इसका विवाद हो गया। विवाद इतना बढक्वा कि पड़ोसी युवक ने रंजीत के सिर पर लाठी से ताबड़तोड़ कई वार कर दिये। जिससे उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। परिजनों ने मामले की जानकारी पुलिस को दी।
| नई दिल्ली । बाहरी दिल्ली के अमन विहार इलाके में मामूली बात को लेकर हुए विवाद में पड़ोसी ने एक युवक ने लाठी डड़ों से पीटकर एक किशोर की हत्याकर दी। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए संजय गांधी हॉस्पिटल में भेज दिया है। हत्या का मामला दर्जकर पुलिस मामले की जांच कर रही है। जानकारी के अनुसार रंजीत अपने माता-पिता के साथ लक्ष्मी विहार में रहता था। बताया जाता है कि कल रविवार की रात किसी बात को लेकर पड़ोसी से इसका विवाद हो गया। विवाद इतना बढक्वा कि पड़ोसी युवक ने रंजीत के सिर पर लाठी से ताबड़तोड़ कई वार कर दिये। जिससे उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। परिजनों ने मामले की जानकारी पुलिस को दी। |
एक्ट्रेस मोनालिसा की गिनती भोजपुरी फिल्मों की बोल्ड एक्ट्रेसेस में होती है.
वह सोशल मीडिया के जरिए फैन्स पर कहर बरपाने का कोई मौका नहीं छोड़ती हैं.
मोनालिसा सोशल मीडिया पर अपना बोल्ड लुक शेयर करती रहती हैं.
एक बार फिर इस एक्ट्रेस ने इंस्टाग्राम पर अपनी तस्वीरें शेयर की हैं।
अब उन्होंने रेड कलर की शॉर्ट ड्रेस में अपनी तस्वीरें शेयर की हैं।
इस स्टाइलिश ड्रेस में उन्होंने कई कातिलाना पोज दिए हैं.
| एक्ट्रेस मोनालिसा की गिनती भोजपुरी फिल्मों की बोल्ड एक्ट्रेसेस में होती है. वह सोशल मीडिया के जरिए फैन्स पर कहर बरपाने का कोई मौका नहीं छोड़ती हैं. मोनालिसा सोशल मीडिया पर अपना बोल्ड लुक शेयर करती रहती हैं. एक बार फिर इस एक्ट्रेस ने इंस्टाग्राम पर अपनी तस्वीरें शेयर की हैं। अब उन्होंने रेड कलर की शॉर्ट ड्रेस में अपनी तस्वीरें शेयर की हैं। इस स्टाइलिश ड्रेस में उन्होंने कई कातिलाना पोज दिए हैं. |
भोट। तीनों कृषि कानूनों की वापसी की मांग को लेकर कोयला टोल प्लाजा पर एकत्र हुए किसानों का जत्था दिल्ली को रवाना हुआ। इस दौरान किसानों ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की।
क्षेत्र के किसान संगठन पिछले कई दिनों से गाजीपुर बार्डर पर चल रहे आंदोलन को सफल बनाने का किसानों से आह्वान कर रह रहे थे। इसी के तहत शुक्रवार को बिलासपुर और आसपास के गांवों के तमाम ग्रामीण कोयला टोल प्लाजा पर चल रहे बेमियादी धरने में शामिल हुए। मौजूद किसानों को संबोधित करते हुए भारतीय किसान यूनियन टिकैत के जिलाध्यक्ष हसीब अहमद ने कहा कि जब तक तीनों कानून वापस नहीं होते उनका आंदोलन जारी रहेगा। कहा कि केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार किसान विरोधी है। वक्त आने पर दोनों सरकारों को किसानों की ताकत का एहसास दिलाया जाएगा। किसानों से अपने हक की लड़ाई के लिए एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि तीनों कृषि कानून कृषि विरोधी हैं इसलिए जब तक तीनों कृषि कानूनों को वापस नहीं किया जाएगा किसान आंदोलन जारी रहेगा। इसके बाद किसानों का जत्था नारेबाजी करते हुए दिल्ली को रवाना हो गया। वहीं, टोल प्लाजा पर मंडल उपाध्यक्ष मोहम्मद तालिब के नेतृत्व में किसानों का अनिश्चितकालीन धरना 36वें दिन भी जारी रहा। इस दौरान जिला उपाध्यक्षा साबिर अली, गोपी अटवाल, तिजेंद्र विर्क, सुखविंदर सिंह हुंदल, जंगीर सिंह, सुखविंदर सिंह चीमा, वीरेंद्र सिंह, अजीत सिंह, मुस्तकीम, अमृतपाल भिंडर, लखविंदर सिंह, सुखदेव सिंह, ज्ञानी सिंह, अमरजीत सिंह, सुभाष चंद शर्मा, अमीर अहमद, महेश पाल सिंह, अनूप सिंह, मुराद अली, नासिर घोसी, इकबाल सिंह, हरभजन सिंह मोनी, गुरविंदर सिंह, ज्ञानी सिंह, बागा सिंह, पाल सिंह, सिमरन कौर आदि मौजूद रहे।
भोट। गाजीपुर बार्डर में चल रहे किसान आंदोलन में भाजपा कार्यकर्ताओं से झड़प व पुलिस द्वारा किसानों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने से आक्रोशित किसानों ने गुरुवार दोपहर करीब डेढ़ बजे कोयला टोल प्लाजा के टोल बैरियरों को हटाकर टोल फ्री करवा दिया था। आक्रोशित भाकियू कार्यकर्ताओं ने टोल गेट पर खड़े होकर सभी वाहनों को टोल टैक्स का भुगतान किए बिना ही पास करवा दिया था। वहीं गुरुवार रात करीब दस बजे संगठन के पदाधिकारियों द्वारा भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ भी रिपोट दर्ज किए जाने की सूचना पर दोबारा टोल पर वसूली शुरू होने दी। इस दौरान करीब साढे़ आठ घंटे तक टोल पर वसूली नहीं हुई। इस दौरान करीब 1600 वाहन बिना टोल दिए ही गुजर गए, जिससे करीब एक लाख रुपये के राजस्व नुकसान की आशंका जताई गई है। टोल प्लाजा प्रबंधक मुन्ना यादव ने बताया कि किसानों द्वारा जबरन टोल टैक्स की वसूली बंद कराए जाने से करीब साढ़े आठ घंटे तक टोल टैक्स की वसूली नहीं हो पाई। इस दौरान करीब 1600 वाहन बिना टोल टैक्स का भुगतान किए ही निकल गए। जिसपर करीब एक लाख रुपये की राजस्व वसूली प्रभावित हुई है। जिसकी रिपोर्ट बनाकर एनएचएआई के उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है।
| भोट। तीनों कृषि कानूनों की वापसी की मांग को लेकर कोयला टोल प्लाजा पर एकत्र हुए किसानों का जत्था दिल्ली को रवाना हुआ। इस दौरान किसानों ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। क्षेत्र के किसान संगठन पिछले कई दिनों से गाजीपुर बार्डर पर चल रहे आंदोलन को सफल बनाने का किसानों से आह्वान कर रह रहे थे। इसी के तहत शुक्रवार को बिलासपुर और आसपास के गांवों के तमाम ग्रामीण कोयला टोल प्लाजा पर चल रहे बेमियादी धरने में शामिल हुए। मौजूद किसानों को संबोधित करते हुए भारतीय किसान यूनियन टिकैत के जिलाध्यक्ष हसीब अहमद ने कहा कि जब तक तीनों कानून वापस नहीं होते उनका आंदोलन जारी रहेगा। कहा कि केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार किसान विरोधी है। वक्त आने पर दोनों सरकारों को किसानों की ताकत का एहसास दिलाया जाएगा। किसानों से अपने हक की लड़ाई के लिए एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि तीनों कृषि कानून कृषि विरोधी हैं इसलिए जब तक तीनों कृषि कानूनों को वापस नहीं किया जाएगा किसान आंदोलन जारी रहेगा। इसके बाद किसानों का जत्था नारेबाजी करते हुए दिल्ली को रवाना हो गया। वहीं, टोल प्लाजा पर मंडल उपाध्यक्ष मोहम्मद तालिब के नेतृत्व में किसानों का अनिश्चितकालीन धरना छत्तीसवें दिन भी जारी रहा। इस दौरान जिला उपाध्यक्षा साबिर अली, गोपी अटवाल, तिजेंद्र विर्क, सुखविंदर सिंह हुंदल, जंगीर सिंह, सुखविंदर सिंह चीमा, वीरेंद्र सिंह, अजीत सिंह, मुस्तकीम, अमृतपाल भिंडर, लखविंदर सिंह, सुखदेव सिंह, ज्ञानी सिंह, अमरजीत सिंह, सुभाष चंद शर्मा, अमीर अहमद, महेश पाल सिंह, अनूप सिंह, मुराद अली, नासिर घोसी, इकबाल सिंह, हरभजन सिंह मोनी, गुरविंदर सिंह, ज्ञानी सिंह, बागा सिंह, पाल सिंह, सिमरन कौर आदि मौजूद रहे। भोट। गाजीपुर बार्डर में चल रहे किसान आंदोलन में भाजपा कार्यकर्ताओं से झड़प व पुलिस द्वारा किसानों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने से आक्रोशित किसानों ने गुरुवार दोपहर करीब डेढ़ बजे कोयला टोल प्लाजा के टोल बैरियरों को हटाकर टोल फ्री करवा दिया था। आक्रोशित भाकियू कार्यकर्ताओं ने टोल गेट पर खड़े होकर सभी वाहनों को टोल टैक्स का भुगतान किए बिना ही पास करवा दिया था। वहीं गुरुवार रात करीब दस बजे संगठन के पदाधिकारियों द्वारा भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ भी रिपोट दर्ज किए जाने की सूचना पर दोबारा टोल पर वसूली शुरू होने दी। इस दौरान करीब साढे़ आठ घंटे तक टोल पर वसूली नहीं हुई। इस दौरान करीब एक हज़ार छः सौ वाहन बिना टोल दिए ही गुजर गए, जिससे करीब एक लाख रुपये के राजस्व नुकसान की आशंका जताई गई है। टोल प्लाजा प्रबंधक मुन्ना यादव ने बताया कि किसानों द्वारा जबरन टोल टैक्स की वसूली बंद कराए जाने से करीब साढ़े आठ घंटे तक टोल टैक्स की वसूली नहीं हो पाई। इस दौरान करीब एक हज़ार छः सौ वाहन बिना टोल टैक्स का भुगतान किए ही निकल गए। जिसपर करीब एक लाख रुपये की राजस्व वसूली प्रभावित हुई है। जिसकी रिपोर्ट बनाकर एनएचएआई के उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है। |
जूं पंज शाखा तू न जला उंगलिया तबीच । रख-रख के हाथ आशिके तफता जिगर पे हाथ ।। ए शमा एक चोर है वादे नसीमे सुव्ह । मारे है कोई दम में तेरे ताजे ज़र पे हाथ ।।
छोडा न दिल मे सब न आराम न शकीव । तेरी निगह ने साफ किया घर के घर पे हाथ ॥ जोदेखे उसका थाम के दिल बैठ जाय "जौक" / जत्र नाज़ से खड़ा हो वह रख कर कमर पे हाथ ॥
ओढू अपना किसी को नहीं पाते। हम को तो छुरी को नहीं पाते ॥ क्यों हम ने दिया तुझे श्री सङ्ग दिल अपना । कमवस्त हम उस सख्त घडी को नहीं पाते ॥
वह कौन सा ग़म है जिसे पाते नहीं दिल में । लेकिन नहीं पाते तो खुशी को नहीं पाते ॥ लेते हैं शचे वस्ल में हम उनके जो बोसे । वह लब पे सेहर रंग तक मिस्सी को नहीं पाते ।
मैं ऐसा कहीं गुम हूँ कि गुम होके मेरी गुमशुद्धगी मालूम नहीं उसके देहन है के नहीं है । ए 'जोक' हम उस सर खफी को नहीं पाते ॥
मिर्ज़ा असद उल्ला खां गालिब
उर्दू भाषा के सर्वश्रेष्ठ कवि सम शायरी के चमकते हुए सितारे, अपने समय के सर्वश्रेष्ठ माने हुए उस्ताद, दार्शनिक शायर मिर्ज़ा असद उल्ला खा गालिब सन् १७६६ ई० में आगरा में पैदा हुये थे। लव मिर्ज़ा नौशा था और ख़िताब नज्मुद्दौला दवीरुल मुल्क, निज़ाम जंग शंहशाहे दिल्ली से प्राप्त हुआ था । मिर्जा के दादा पहले भारत आये और शाहेग्राम के दरवार मे इज्ज़त पाई । गालित्र प्रथम बार सन् १२१६ हि० मे दिल्ली आये । आप पहले सद उपनाम रखते थे मगर बाद मे उन्होंने अपना उपनाम गालिब बदल कर रख लिया । गालिब बहुत मिलनसार थे । दोस्तों से खतो किताबत का सिलसिला जारी रहता था । उन्होने नज्म ही में नहीं गद्य में भी नाम पैदा किया । उन्होंने पत्र लिखने का एक नवीन नियम निकाला जिसकी लोगो ने नकल करनी चाही लेकिन आज तक लोग अपने इस कार्य में सफल नहीं हुये । गालिब धार्मिक ढोंगो से कोसो दूर भागते थे । इनके दोस्तों और शार्मिंदो मे सन से नामी हर गोपाल तफता थे । गालित्र इनको बहुत मानते थे । तफता साहब फ़ारसी का शेर बहुत अच्छा कहते थे । श्राप गालिब के ख़ास शागिदों मे गिने जाते हैं । वह बुराई नहीं छिनाते थे । आप शराब पीते थे । एक जगह कहते हैं ।
ये मसाएले तस्च्चुफ ये तेरा ध्यान गालिब । हम तुझे वली समझने जो न वाद रुव्वार न होता ॥ | जूं पंज शाखा तू न जला उंगलिया तबीच । रख-रख के हाथ आशिके तफता जिगर पे हाथ ।। ए शमा एक चोर है वादे नसीमे सुव्ह । मारे है कोई दम में तेरे ताजे ज़र पे हाथ ।। छोडा न दिल मे सब न आराम न शकीव । तेरी निगह ने साफ किया घर के घर पे हाथ ॥ जोदेखे उसका थाम के दिल बैठ जाय "जौक" / जत्र नाज़ से खड़ा हो वह रख कर कमर पे हाथ ॥ ओढू अपना किसी को नहीं पाते। हम को तो छुरी को नहीं पाते ॥ क्यों हम ने दिया तुझे श्री सङ्ग दिल अपना । कमवस्त हम उस सख्त घडी को नहीं पाते ॥ वह कौन सा ग़म है जिसे पाते नहीं दिल में । लेकिन नहीं पाते तो खुशी को नहीं पाते ॥ लेते हैं शचे वस्ल में हम उनके जो बोसे । वह लब पे सेहर रंग तक मिस्सी को नहीं पाते । मैं ऐसा कहीं गुम हूँ कि गुम होके मेरी गुमशुद्धगी मालूम नहीं उसके देहन है के नहीं है । ए 'जोक' हम उस सर खफी को नहीं पाते ॥ मिर्ज़ा असद उल्ला खां गालिब उर्दू भाषा के सर्वश्रेष्ठ कवि सम शायरी के चमकते हुए सितारे, अपने समय के सर्वश्रेष्ठ माने हुए उस्ताद, दार्शनिक शायर मिर्ज़ा असद उल्ला खा गालिब सन् एक हज़ार सात सौ छयासठ ईशून्य में आगरा में पैदा हुये थे। लव मिर्ज़ा नौशा था और ख़िताब नज्मुद्दौला दवीरुल मुल्क, निज़ाम जंग शंहशाहे दिल्ली से प्राप्त हुआ था । मिर्जा के दादा पहले भारत आये और शाहेग्राम के दरवार मे इज्ज़त पाई । गालित्र प्रथम बार सन् एक हज़ार दो सौ सोलह हिशून्य मे दिल्ली आये । आप पहले सद उपनाम रखते थे मगर बाद मे उन्होंने अपना उपनाम गालिब बदल कर रख लिया । गालिब बहुत मिलनसार थे । दोस्तों से खतो किताबत का सिलसिला जारी रहता था । उन्होने नज्म ही में नहीं गद्य में भी नाम पैदा किया । उन्होंने पत्र लिखने का एक नवीन नियम निकाला जिसकी लोगो ने नकल करनी चाही लेकिन आज तक लोग अपने इस कार्य में सफल नहीं हुये । गालिब धार्मिक ढोंगो से कोसो दूर भागते थे । इनके दोस्तों और शार्मिंदो मे सन से नामी हर गोपाल तफता थे । गालित्र इनको बहुत मानते थे । तफता साहब फ़ारसी का शेर बहुत अच्छा कहते थे । श्राप गालिब के ख़ास शागिदों मे गिने जाते हैं । वह बुराई नहीं छिनाते थे । आप शराब पीते थे । एक जगह कहते हैं । ये मसाएले तस्च्चुफ ये तेरा ध्यान गालिब । हम तुझे वली समझने जो न वाद रुव्वार न होता ॥ |
इस भर्ती के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास में किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से संबंधित क्षेत्र में स्नातक या डिप्लोमा होना चाहिए। इसके साथ हीं उनके पास 2 साल का अनुभव भी होना चाहिए। उम्मीदवारों का चयन टीयर 1 और टीयर 2 परीक्षा के माध्यम से किया जाएगा।
डीएसएसएसबी भर्ती में रिक्त पदों की कुल संख्या 690 निर्धारित की गई है। भर्ती के माध्यम से चयनित उम्मीदवारों को दिल्ली के विभिन्न विभागों में जूनियर इंजीनियर (सिविल और इलेक्ट्रिकल) और सेक्शन इंजीनियर (सिविल और इलेक्ट्रिकल) के पदों पर नियुक्ति दी जाएगी। उम्मीदवार आज रात 12 बजे से पहले तक अपना आवेदन कर लें।
दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (डीएसएसएसबी) ने विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए योग्य उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस भर्ती के लिए आवेदन करने की आखिरी तारीख आज 9 फरवरी, 2022 को है। जिन उम्मीदवारों ने अब तक अपना आवेदन नहीं किया है, वह डीएसएसएसबी की आधिकारिक वेबसाइट dsssbonline. nic. in पर जाकर अपना आवेदन जल्द से जल्द कर लें।
जिन उम्मीदवारों ने एमपीपीएससी भर्ती के लिए अपना आवेदन कर लिया है और इसमें कोई त्रुटि रह गई हो तो आवेदन पत्र में अब भी सुधार किया जा सकता है। इसके लिए उम्मीदवारों को 50 रुपये शुल्क जमा करने होंगे। आवेदन पत्र में सुधार की आखिरी तारीख 11 फरवरी, 2022 है।
मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) द्वारा राज्य सेवा और वन सेवा परीक्षा के माध्यम से कुल 346 पदों पर भर्तियां की जाएंगी। इनमें 283 पद राज्य सेवा के लिए हैं तो वहीं, 63 पद राज्य वन सेवा के लिए आरक्षित है।
जिन उम्मीदवारों ने अब तक इस परीक्षा के लिए अपना आवेदन नहीं किया है। वह, MPPSC की आधिकारिक वेबसाइट mppsc. nic. in पर जाकर जल्द से जल्द अपना आवेदन पूरा कर लें।
मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) ने राज्य सेवा और राज्य वन सेवा के लिए सैकड़ों पदों पर भर्तियां निकालीं हैं। इस भर्ती के लिए आवेदन का आज 9 फरवरी, 2022 को आखिरी दिन है।
जो भी योग्य और इच्छुक उम्मीदवार जूनियर इंजीनिया भर्ती के लिए अपना आवेदन करना चाहते हैं, वह राजस्थान कर्मचारी चयन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट rsmssb. rajasthan. gov. in पर जाकर नोटिफिकेशन को देख सकते हैं और लिंक शुरू होने के बाद अपना आवेदन भी कर सकते हैं।
राजस्थान कर्मचारी चयन आयोग ने जूनियर इंजीनियर को रिक्त पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है। यह आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है। आवेदन की सभी प्रक्रिया ऑनलाइन ही होगी।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने अधिकारी ए ग्रेड (सहायक प्रबंधक) भर्ती परीक्षा के लिए प्रवेश पत्र को जारी कर दिया है। इसे अब आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता है।
आधिकारिक शेड्यूल के मुताबिक जूनियर इंजीनियर भर्ती परीक्षा के लिए प्रवेश पत्र को 1 मार्च, 2022 को जारी कर दिया जाएगा। उम्मीदवार आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपनी आईडी और पासवर्ड के माध्यम से इसे डाउनलोड कर सकेंगे। इस भर्ती के लिए परीक्षा का आयोजन 6 मार्च, 2022 को किया जाएगा।
जिन उम्मीदवारों ने इस भर्ती के लिए अपना आवेदन किया था, वह पंजाब लोक सेवा आयोग की आधिकारिक वेबसाइट ppsc. gov. in पर जाकर इस शेड्यूल को चेक कर सकते हैं और आगे की जरूरत के लिए इसे डाउनलोड भी कर सकते हैं।
पंजाब लोक सेवा आयोग (PPSC) ने जूनियार इंजीनियर भर्ती की संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा का शेड्यूल जारी कर दिया है। यह शेड्यूल आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।
उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) के पुलिस विभाग में विभिन्न पदों पर भर्तियां निकलीं हैं। इन पदों पर आवेदन करने के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू हो गई है।
| इस भर्ती के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास में किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से संबंधित क्षेत्र में स्नातक या डिप्लोमा होना चाहिए। इसके साथ हीं उनके पास दो साल का अनुभव भी होना चाहिए। उम्मीदवारों का चयन टीयर एक और टीयर दो परीक्षा के माध्यम से किया जाएगा। डीएसएसएसबी भर्ती में रिक्त पदों की कुल संख्या छः सौ नब्बे निर्धारित की गई है। भर्ती के माध्यम से चयनित उम्मीदवारों को दिल्ली के विभिन्न विभागों में जूनियर इंजीनियर और सेक्शन इंजीनियर के पदों पर नियुक्ति दी जाएगी। उम्मीदवार आज रात बारह बजे से पहले तक अपना आवेदन कर लें। दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड ने विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए योग्य उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस भर्ती के लिए आवेदन करने की आखिरी तारीख आज नौ फरवरी, दो हज़ार बाईस को है। जिन उम्मीदवारों ने अब तक अपना आवेदन नहीं किया है, वह डीएसएसएसबी की आधिकारिक वेबसाइट dsssbonline. nic. in पर जाकर अपना आवेदन जल्द से जल्द कर लें। जिन उम्मीदवारों ने एमपीपीएससी भर्ती के लिए अपना आवेदन कर लिया है और इसमें कोई त्रुटि रह गई हो तो आवेदन पत्र में अब भी सुधार किया जा सकता है। इसके लिए उम्मीदवारों को पचास रुपयापये शुल्क जमा करने होंगे। आवेदन पत्र में सुधार की आखिरी तारीख ग्यारह फरवरी, दो हज़ार बाईस है। मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा राज्य सेवा और वन सेवा परीक्षा के माध्यम से कुल तीन सौ छियालीस पदों पर भर्तियां की जाएंगी। इनमें दो सौ तिरासी पद राज्य सेवा के लिए हैं तो वहीं, तिरेसठ पद राज्य वन सेवा के लिए आरक्षित है। जिन उम्मीदवारों ने अब तक इस परीक्षा के लिए अपना आवेदन नहीं किया है। वह, MPPSC की आधिकारिक वेबसाइट mppsc. nic. in पर जाकर जल्द से जल्द अपना आवेदन पूरा कर लें। मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग ने राज्य सेवा और राज्य वन सेवा के लिए सैकड़ों पदों पर भर्तियां निकालीं हैं। इस भर्ती के लिए आवेदन का आज नौ फरवरी, दो हज़ार बाईस को आखिरी दिन है। जो भी योग्य और इच्छुक उम्मीदवार जूनियर इंजीनिया भर्ती के लिए अपना आवेदन करना चाहते हैं, वह राजस्थान कर्मचारी चयन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट rsmssb. rajasthan. gov. in पर जाकर नोटिफिकेशन को देख सकते हैं और लिंक शुरू होने के बाद अपना आवेदन भी कर सकते हैं। राजस्थान कर्मचारी चयन आयोग ने जूनियर इंजीनियर को रिक्त पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है। यह आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है। आवेदन की सभी प्रक्रिया ऑनलाइन ही होगी। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने अधिकारी ए ग्रेड भर्ती परीक्षा के लिए प्रवेश पत्र को जारी कर दिया है। इसे अब आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता है। आधिकारिक शेड्यूल के मुताबिक जूनियर इंजीनियर भर्ती परीक्षा के लिए प्रवेश पत्र को एक मार्च, दो हज़ार बाईस को जारी कर दिया जाएगा। उम्मीदवार आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपनी आईडी और पासवर्ड के माध्यम से इसे डाउनलोड कर सकेंगे। इस भर्ती के लिए परीक्षा का आयोजन छः मार्च, दो हज़ार बाईस को किया जाएगा। जिन उम्मीदवारों ने इस भर्ती के लिए अपना आवेदन किया था, वह पंजाब लोक सेवा आयोग की आधिकारिक वेबसाइट ppsc. gov. in पर जाकर इस शेड्यूल को चेक कर सकते हैं और आगे की जरूरत के लिए इसे डाउनलोड भी कर सकते हैं। पंजाब लोक सेवा आयोग ने जूनियार इंजीनियर भर्ती की संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा का शेड्यूल जारी कर दिया है। यह शेड्यूल आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के पुलिस विभाग में विभिन्न पदों पर भर्तियां निकलीं हैं। इन पदों पर आवेदन करने के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू हो गई है। |
कन्यकाओने तीनसौ खास निर्मित मंडपोंको सुशोभित किया। साथकी स्त्रियां अनेक प्रकार से सुंदर मंगल गान कर रही हैं। वे कन्यायें मंडप में खड़ी होकर भरतेश्वरका ध्यान कर रही हैं और उनके आगमनकी प्रतीक्षा कर रही हैं । परंतु मरतेश्वर जल्दी नहीं आरहे हैं ।
इधर भरतेश्वरने भी विवाहोचित श्रृंगार कर लिया । और समय समीप आते ही जिनेंद्रमंदिरमें गये वहांपर भक्तिपूर्वक जिनेंद्रवंदना की । : परमहंस गुरु परमात्माका भी स्मरण किया। तदनंतर आनंद के साथ आकर महलमें रहे । इधर उधरसे उनकी राणियां बैठी हुई हैं। अपने पतिदेवके अलौकिक सौंदर्य को देखकर उनकी आंखें तृप्त नहीं होती, एक राणी विनोदके लिये कहने लगी किः- स्वामिन् ! कुछ निवेदन करना चाहती हूं । एक हंसको हजारों हंसिनी पहिलेसे मोजूद हैं, फिर भी वह हंस अनेक हंसिनियोंको प्राप्त कर रहा है । ऐसी अवस्था में पहिलेकी हंसिनियोंको दुःख होगा या नहीं ? भरतेश्वरने हसकर उत्तर दिया कि देवी । एक ही हंस जब हजारों रूपको धारणकर आगत व स्थित ऐसी हजारो हंसिनियोंको सुख देता है तो फिर दुःखका क्या कारण है ? इतनेमें दूसरी राणी कहने लगी कि राजन् ! फूलके दुकान एक भ्रमर था । वह हर एक फूलपर बैठकर रस चूस रहा था । फुलारी फिर नवीन पुष्पोंको दुकान में लाया; ऐसी अवस्था में उस भ्रमरको किन फूलोंपर इच्छा होंगी, नवीन फूलोंपर या पुराने फूलोंपर ?
भरतेश्वरने उसके मनको समझकर कहा कि देवी ! वह भ्रमर कुत्सित विचारका नहीं है । वह परमपरंज्योति परमात्माका दर्शन रात्रिंदिन करनेवाला भ्रमर है । ऐसी अवस्था में उस भ्रमरको पुराने और नयेसभी फूल समान प्रीतिके पात्र हैं । आत्मविज्ञानीकी दृष्टि से सोना और कंकर, महल और जंगल जब एक सरीखे हैं फिर नवीन और पुराने पदार्थों में वह भेद क्यों मानेंगा ! उसी समय चाकीकी राणियोनें कहा कि देवियों ! आप लोग इस मंगल समय में ऐसी बातें क्यों कर रही हैं । पतिराजके हृदय में कैसी चोट लगेगी ? सरसमें विरस क्यों ?
इस समय में आप लोग चुप रहे । लोककी सभी स्त्रियां आजावें तो मी एक पुरुष जिस प्रकार एक स्त्रीका पालन करता है, उसी प्रकार अव्याहतरूपसे पालन करनेका सामर्थ्य जब पुरुषोत्तम पतिराजको मौजूद है, फिर हमें चिंता करने की क्या जरूरत है ?
भरतेश्वरने भी उन राणियोंको संतुष्ट करते हुए कहा कि देवियो! • इस प्रसंगको कौन चाहते थे ? हजारों राणियोंके होते हुए और अधिक स्त्रियोंकी लालसा मुझे नहीं है । फिर भी पूर्व जो मैंने आत्मभावना की है उसका ही फल है कि आज उस पुण्यका उदय इस प्रकार आरहा है। आप लोग ही विचार करें कि मैंने आप लोगोंसे भी जब विवाह किया तब मैं चाह करके तो नहीं आया था ? आजकी कन्यावको भी मैं निमंत्रण देने नहीं गया था। फिर भी उस पूर्वपुण्यने आप लोगोंको व इनको बुलाकर मेरे साथ संबंध किया। जबतक कर्मका संबंध है उसके भोगको अनुभव करना ही पड़ेगा, यह संसारकी रीत है, यही परतंत्रता है । भरतेश्वरके मनको तिलमात्र मी दुःख न होवें, ऐसी भावना करनेवाली उन राणीमणियोंने उसी समय उस बासको बदलकर कहा कि स्वामिन् ! जाने दीजिए । अब विवाहका समय अत्यंत निकट है । आप विवाह मंडप में पधारियेगा । मरतेश्वर मी वहांसे उठकर विवाहमंडपकी ओर चले गए ।
उस समय मरतेश्वरकी शोभा देखने लायक थी । उस समंब वे विवाह के योग्य वस्त्राभूषणको धारण किये हुए थे। रास्ते में अनेक सेवक उनको देखते हुए हाथ जोड रहे हैं और आनंदके साथ कहते हैं कि मोगसाम्राज्यके अधिपति, लोकागम्यसुखी कामदेव विजयी मरतेश्वरकी जय हो । इसी प्रकार गायन करनेवाले गारहे हैं । स्तुतिपाठक स्तोत्र कर रहे हैं। इन सबको देखते हुए भरतेश्वर विवाह मंडप में दाखिल हुए । उन विवाहमंडपो में सब विद्याधरकन्यकाये पश्चिममुखी होकर खड़ी थीं । भरतेश्वर जाकर पूर्वमुखी होकर खड़े हुए । आते समय मरतेश्वर अकेले ही आगे थे । अब उन्होने अपनेको तीन सौ संख्या में
बना लिया अर्थात् अपने तीन सौ रूप बनाकर तीन सौ मंडपोंमें खडे हो गये । सामनेसे अनेक द्विजगण मंगलाष्टकका पाठ बहुत जोरसे कररहे हैं । अनेक विद्वान् विवाह समयोचित सिद्धांतमंत्रका उच्चारण कर रहे हैं । और उत्तमोत्तम मंगलवचनोंसे आशिर्वाद दे रहे हैं । अनेक सुवासिनी स्त्रियां मंगलपदोंको गा रही हैं। इस प्रकार बहुत वैभवके साथ आगमोक्त विवाहविधि संपन्न हो रही है । मंगलाष्टक पूर्ण होनेके बाद वधूवरके बीच स्थित परदा हटाया गया । उसी समय भरतेश्वरने उन सब कन्याओंका पाणिग्रहण किया । जिस समय भरतेश्वरने उनको हाथ लगाया उन देवियोंको एकदम रोमांच हुआ। उसके बाद उन वधुवोंके साथ भरतेश्वर होमकुंड के पास आये । और वहांपर विधिपूर्वक पूजनकर नववधूसमूहके साथ होमकुंडकी तीन प्रदक्षिणा दी । भरतेश्वर जिस समय उन पाणिगृहीत कन्यावों के साथ उस होमकुंडकी प्रदक्षिणा दे रहे थे, उस समयकी शोभा अपूर्व थी । चंद्रदेव स्वयं अपने अनेक रूपोंको बनाकर साथ में रोहिणीको भी अनेकरूप धारण कराकर मेरु पर्वतकी प्रदक्षिणा दे रहा है, ऐसा मालुम हो रहा था । कन्यावोंके मातापितांवों को बहुत ही हर्ष हुआ । उन्होंने भरतेश्वरको कन्या देकर अपनेको धन्य माना । विवाहका विधान विधिपूर्वक पूर्ण हुआ । भरते. श्वरने मंत्री, सेनाधिपति आदिको इषारा किया कि सर्व सज्जनोंको अपने २ स्थान में पहुंचाकर उनकी उचित व्यवस्था कीजियेगा । तदनुसार क्षणभरमै वह मंडप रिक्त हो गया । भरतेश्वर भी उन विवाहित नारियों को लेकर महलमें प्रवेश कर गए ।
महलमें उन्होंने शयनागारमें पहुंचकर उन नववधुओं के साथ अनेक विनोद संकथालाप किए । साथमें अनेक प्रकार से सुखका अनुभव किया एवं बादमे सुखनिद्रा में मग्न हुए । उनके साथ में जितने भी सुखका अनुभव किया वह पुण्यनिर्जरा है इस प्रकार भरतेश्वर विचार कर रहे थे। प्रातःकालके प्रहरमें मरतेश्वर उन नारीमणियोंका निद्रामंग न हो उस प्रकार उठकर अपने तल्पपर ध्यान करनेके लिए बैठे। पापरहिस निरंजन सिद्धका उन्होंने अपने हृदय में अनुभव किया । बादमें अरुणोदय हुआ । सुप्रभात मंगलको गानेवाले वहांपर उपस्थित होकर सुंदर गायन करने लगे । भरतेश्वर अभीतक आत्मदर्शन ही कर रहे हैं । गायनको सुनकर वे सब स्त्रियां अपनी शय्यासे उठी और मरतेश्वरकी ध्यानमग्नावस्थाकी शोभाको देखने लगी । भरतेश्वरने, ध्यान पूर्ण किया । साथ में अपने अनेक रूपको अदृश्य किया । नवविवाहित स्त्रियों को आश्चर्य हुआ मरतेश्वर अपने शय्यागृह से बाहर आये व नित्यकर्म में लीन हुए । इस प्रकार भरतेश्वरको तीन सौ विद्याघर कन्याओं के साथ विवाह हुआ। यह उनके पुण्यका फल है । उन्होंने पूर्व जन्म सातिशय पुण्यका उपार्जन किया था, और अब भी अखंड साम्राज्यको भोगते हुए भी उसके यथार्थस्वरूपको जान रहे हैं, अपने आत्माको बिलकुल भूल नहीं जाते हैं । सुखोके भोग करनवे उदासीनतासे विचार करते हैं कि इतने समयतंक मेरी पुण्यकर्मकी निर्जरा हुई । यह मुझे पुण्यकर्म के फलका अनुभव करना पड़ रहा है ।
सतत उनकी भावना यह रहती है कि " हे परमात्मन् ! तुम लोकके सर्व सुख दुःख के लिए साक्षीके रूपमें रहते हो । परंतु उनको साक्षात् अनुभव नहीं करते, क्यों कि तुम मोक्षके स्वरूपमें हो। इसी प्रकार मेरी आत्मा हैं। इंद्रियजन्य सुखोके लिए केवल वह साक्षी है। साक्षात् अनुभवी नहीं है । यह केवल पुण्यवर्गणाओंकी लीला है ।
हे सिद्धात्मन् ! कर्मों की निर्जरा जितने प्रमाण में होती जाती है उतना ही अधिक सुख आत्माको मिलता जाता है। इसका साक्षात्कार आप कर चुके हैं, इसलिए आप लोकंपूजित हुए हैं। इसलिए मुझे भी उसी प्रकारकी सुबुद्धि दीजियेगा ।
इसी प्रकारकी मावनाका फल है कि भरतेश्वर विशिष्ट सुखका अनुमत्र कर रहे हैं ।
।। इति खेचरिविवाहसंधिः ॥ | कन्यकाओने तीनसौ खास निर्मित मंडपोंको सुशोभित किया। साथकी स्त्रियां अनेक प्रकार से सुंदर मंगल गान कर रही हैं। वे कन्यायें मंडप में खड़ी होकर भरतेश्वरका ध्यान कर रही हैं और उनके आगमनकी प्रतीक्षा कर रही हैं । परंतु मरतेश्वर जल्दी नहीं आरहे हैं । इधर भरतेश्वरने भी विवाहोचित श्रृंगार कर लिया । और समय समीप आते ही जिनेंद्रमंदिरमें गये वहांपर भक्तिपूर्वक जिनेंद्रवंदना की । : परमहंस गुरु परमात्माका भी स्मरण किया। तदनंतर आनंद के साथ आकर महलमें रहे । इधर उधरसे उनकी राणियां बैठी हुई हैं। अपने पतिदेवके अलौकिक सौंदर्य को देखकर उनकी आंखें तृप्त नहीं होती, एक राणी विनोदके लिये कहने लगी किः- स्वामिन् ! कुछ निवेदन करना चाहती हूं । एक हंसको हजारों हंसिनी पहिलेसे मोजूद हैं, फिर भी वह हंस अनेक हंसिनियोंको प्राप्त कर रहा है । ऐसी अवस्था में पहिलेकी हंसिनियोंको दुःख होगा या नहीं ? भरतेश्वरने हसकर उत्तर दिया कि देवी । एक ही हंस जब हजारों रूपको धारणकर आगत व स्थित ऐसी हजारो हंसिनियोंको सुख देता है तो फिर दुःखका क्या कारण है ? इतनेमें दूसरी राणी कहने लगी कि राजन् ! फूलके दुकान एक भ्रमर था । वह हर एक फूलपर बैठकर रस चूस रहा था । फुलारी फिर नवीन पुष्पोंको दुकान में लाया; ऐसी अवस्था में उस भ्रमरको किन फूलोंपर इच्छा होंगी, नवीन फूलोंपर या पुराने फूलोंपर ? भरतेश्वरने उसके मनको समझकर कहा कि देवी ! वह भ्रमर कुत्सित विचारका नहीं है । वह परमपरंज्योति परमात्माका दर्शन रात्रिंदिन करनेवाला भ्रमर है । ऐसी अवस्था में उस भ्रमरको पुराने और नयेसभी फूल समान प्रीतिके पात्र हैं । आत्मविज्ञानीकी दृष्टि से सोना और कंकर, महल और जंगल जब एक सरीखे हैं फिर नवीन और पुराने पदार्थों में वह भेद क्यों मानेंगा ! उसी समय चाकीकी राणियोनें कहा कि देवियों ! आप लोग इस मंगल समय में ऐसी बातें क्यों कर रही हैं । पतिराजके हृदय में कैसी चोट लगेगी ? सरसमें विरस क्यों ? इस समय में आप लोग चुप रहे । लोककी सभी स्त्रियां आजावें तो मी एक पुरुष जिस प्रकार एक स्त्रीका पालन करता है, उसी प्रकार अव्याहतरूपसे पालन करनेका सामर्थ्य जब पुरुषोत्तम पतिराजको मौजूद है, फिर हमें चिंता करने की क्या जरूरत है ? भरतेश्वरने भी उन राणियोंको संतुष्ट करते हुए कहा कि देवियो! • इस प्रसंगको कौन चाहते थे ? हजारों राणियोंके होते हुए और अधिक स्त्रियोंकी लालसा मुझे नहीं है । फिर भी पूर्व जो मैंने आत्मभावना की है उसका ही फल है कि आज उस पुण्यका उदय इस प्रकार आरहा है। आप लोग ही विचार करें कि मैंने आप लोगोंसे भी जब विवाह किया तब मैं चाह करके तो नहीं आया था ? आजकी कन्यावको भी मैं निमंत्रण देने नहीं गया था। फिर भी उस पूर्वपुण्यने आप लोगोंको व इनको बुलाकर मेरे साथ संबंध किया। जबतक कर्मका संबंध है उसके भोगको अनुभव करना ही पड़ेगा, यह संसारकी रीत है, यही परतंत्रता है । भरतेश्वरके मनको तिलमात्र मी दुःख न होवें, ऐसी भावना करनेवाली उन राणीमणियोंने उसी समय उस बासको बदलकर कहा कि स्वामिन् ! जाने दीजिए । अब विवाहका समय अत्यंत निकट है । आप विवाह मंडप में पधारियेगा । मरतेश्वर मी वहांसे उठकर विवाहमंडपकी ओर चले गए । उस समय मरतेश्वरकी शोभा देखने लायक थी । उस समंब वे विवाह के योग्य वस्त्राभूषणको धारण किये हुए थे। रास्ते में अनेक सेवक उनको देखते हुए हाथ जोड रहे हैं और आनंदके साथ कहते हैं कि मोगसाम्राज्यके अधिपति, लोकागम्यसुखी कामदेव विजयी मरतेश्वरकी जय हो । इसी प्रकार गायन करनेवाले गारहे हैं । स्तुतिपाठक स्तोत्र कर रहे हैं। इन सबको देखते हुए भरतेश्वर विवाह मंडप में दाखिल हुए । उन विवाहमंडपो में सब विद्याधरकन्यकाये पश्चिममुखी होकर खड़ी थीं । भरतेश्वर जाकर पूर्वमुखी होकर खड़े हुए । आते समय मरतेश्वर अकेले ही आगे थे । अब उन्होने अपनेको तीन सौ संख्या में बना लिया अर्थात् अपने तीन सौ रूप बनाकर तीन सौ मंडपोंमें खडे हो गये । सामनेसे अनेक द्विजगण मंगलाष्टकका पाठ बहुत जोरसे कररहे हैं । अनेक विद्वान् विवाह समयोचित सिद्धांतमंत्रका उच्चारण कर रहे हैं । और उत्तमोत्तम मंगलवचनोंसे आशिर्वाद दे रहे हैं । अनेक सुवासिनी स्त्रियां मंगलपदोंको गा रही हैं। इस प्रकार बहुत वैभवके साथ आगमोक्त विवाहविधि संपन्न हो रही है । मंगलाष्टक पूर्ण होनेके बाद वधूवरके बीच स्थित परदा हटाया गया । उसी समय भरतेश्वरने उन सब कन्याओंका पाणिग्रहण किया । जिस समय भरतेश्वरने उनको हाथ लगाया उन देवियोंको एकदम रोमांच हुआ। उसके बाद उन वधुवोंके साथ भरतेश्वर होमकुंड के पास आये । और वहांपर विधिपूर्वक पूजनकर नववधूसमूहके साथ होमकुंडकी तीन प्रदक्षिणा दी । भरतेश्वर जिस समय उन पाणिगृहीत कन्यावों के साथ उस होमकुंडकी प्रदक्षिणा दे रहे थे, उस समयकी शोभा अपूर्व थी । चंद्रदेव स्वयं अपने अनेक रूपोंको बनाकर साथ में रोहिणीको भी अनेकरूप धारण कराकर मेरु पर्वतकी प्रदक्षिणा दे रहा है, ऐसा मालुम हो रहा था । कन्यावोंके मातापितांवों को बहुत ही हर्ष हुआ । उन्होंने भरतेश्वरको कन्या देकर अपनेको धन्य माना । विवाहका विधान विधिपूर्वक पूर्ण हुआ । भरते. श्वरने मंत्री, सेनाधिपति आदिको इषारा किया कि सर्व सज्जनोंको अपने दो स्थान में पहुंचाकर उनकी उचित व्यवस्था कीजियेगा । तदनुसार क्षणभरमै वह मंडप रिक्त हो गया । भरतेश्वर भी उन विवाहित नारियों को लेकर महलमें प्रवेश कर गए । महलमें उन्होंने शयनागारमें पहुंचकर उन नववधुओं के साथ अनेक विनोद संकथालाप किए । साथमें अनेक प्रकार से सुखका अनुभव किया एवं बादमे सुखनिद्रा में मग्न हुए । उनके साथ में जितने भी सुखका अनुभव किया वह पुण्यनिर्जरा है इस प्रकार भरतेश्वर विचार कर रहे थे। प्रातःकालके प्रहरमें मरतेश्वर उन नारीमणियोंका निद्रामंग न हो उस प्रकार उठकर अपने तल्पपर ध्यान करनेके लिए बैठे। पापरहिस निरंजन सिद्धका उन्होंने अपने हृदय में अनुभव किया । बादमें अरुणोदय हुआ । सुप्रभात मंगलको गानेवाले वहांपर उपस्थित होकर सुंदर गायन करने लगे । भरतेश्वर अभीतक आत्मदर्शन ही कर रहे हैं । गायनको सुनकर वे सब स्त्रियां अपनी शय्यासे उठी और मरतेश्वरकी ध्यानमग्नावस्थाकी शोभाको देखने लगी । भरतेश्वरने, ध्यान पूर्ण किया । साथ में अपने अनेक रूपको अदृश्य किया । नवविवाहित स्त्रियों को आश्चर्य हुआ मरतेश्वर अपने शय्यागृह से बाहर आये व नित्यकर्म में लीन हुए । इस प्रकार भरतेश्वरको तीन सौ विद्याघर कन्याओं के साथ विवाह हुआ। यह उनके पुण्यका फल है । उन्होंने पूर्व जन्म सातिशय पुण्यका उपार्जन किया था, और अब भी अखंड साम्राज्यको भोगते हुए भी उसके यथार्थस्वरूपको जान रहे हैं, अपने आत्माको बिलकुल भूल नहीं जाते हैं । सुखोके भोग करनवे उदासीनतासे विचार करते हैं कि इतने समयतंक मेरी पुण्यकर्मकी निर्जरा हुई । यह मुझे पुण्यकर्म के फलका अनुभव करना पड़ रहा है । सतत उनकी भावना यह रहती है कि " हे परमात्मन् ! तुम लोकके सर्व सुख दुःख के लिए साक्षीके रूपमें रहते हो । परंतु उनको साक्षात् अनुभव नहीं करते, क्यों कि तुम मोक्षके स्वरूपमें हो। इसी प्रकार मेरी आत्मा हैं। इंद्रियजन्य सुखोके लिए केवल वह साक्षी है। साक्षात् अनुभवी नहीं है । यह केवल पुण्यवर्गणाओंकी लीला है । हे सिद्धात्मन् ! कर्मों की निर्जरा जितने प्रमाण में होती जाती है उतना ही अधिक सुख आत्माको मिलता जाता है। इसका साक्षात्कार आप कर चुके हैं, इसलिए आप लोकंपूजित हुए हैं। इसलिए मुझे भी उसी प्रकारकी सुबुद्धि दीजियेगा । इसी प्रकारकी मावनाका फल है कि भरतेश्वर विशिष्ट सुखका अनुमत्र कर रहे हैं । ।। इति खेचरिविवाहसंधिः ॥ |
६ि० तडके का सबन्ध Vतड ( टूटना ) धातु के पूर्वकालिक कृदन्त अव्यय से लगाया जाता है किन्तु यह व्युत्पत्ति सदिग्ध है। हि० भोर शब्द का स० / भा ( चमकना ) से सबंध सिद्ध नहीं होता ।
हि० तुरत तुरत < स० अव्यय त्वरितम् । हि० कट <स अव्यय भटति ।
हि० अचानक की व्युत्पत्ति स्पष्ट नहीं है। कुछ लोग इसका सबंध स० अ + V चिन्त् 'बिना सोचे' से जोड़ते हैं और कुछ स० चमत्कार - हि० चौंक के निकट इसे बताते हैं। किन्तु दोनो व्युत्पत्तियें अत्यन्त सदिग्ध है।
६ि० भीतर
हि० बाहिर
८ स० अभ्यन्तर्
स० बहि
हि० जानो
- हि० जानना
दि० मानो
८ हि० मानना
हि० ठीक
का स० V स्था' से सबध सदिग्ध है ।
हि० सचमुच का संबंध सं० सत्य से है। हिन्दी मे यह रूप दोहरा कर बनाया गया है ।
हि० हा की व्युत्पत्ति सदिग्ध है। केलाग इसकी तुलना मराठी क्रिया आहे, चाहों से करते हैं ।
हि० नहीं को केलाग न + आहिका सयुक्त रूप बताते हैं ।
१ के, हि , ई ४९९ ।
३३५, नीचे मुख्य मुख्य समुच्चयबोधक अव्यय व्युत्पत्ति सहित दिये जा रहे हैंहि० र ( प्राचीन रूप अवर, अरु ) सं० अपर ( दूसरा ) । हि० भी < प्रा०बिहि < सं० अपि हि ।
हि० पर < सं० परं । इस अर्थ में सं० वा तथा अरबीया का प्रयोग भी हिन्दी मे होता है।
हि० कि कदाचित् फारसी से आया है। सं० किं से इसकी व्युत्पत्ति संदिग्ध है।
हि० जो < प्रा० ज*, जद < सं० यदि ।
हि० बरन स० वरन ।
हि० चाहे - हि० चाहना । हि० तो < सं० तु । | छःिशून्य तडके का सबन्ध Vतड धातु के पूर्वकालिक कृदन्त अव्यय से लगाया जाता है किन्तु यह व्युत्पत्ति सदिग्ध है। हिशून्य भोर शब्द का सशून्य / भा से सबंध सिद्ध नहीं होता । हिशून्य तुरत तुरत < सशून्य अव्यय त्वरितम् । हिशून्य कट <स अव्यय भटति । हिशून्य अचानक की व्युत्पत्ति स्पष्ट नहीं है। कुछ लोग इसका सबंध सशून्य अ + V चिन्त् 'बिना सोचे' से जोड़ते हैं और कुछ सशून्य चमत्कार - हिशून्य चौंक के निकट इसे बताते हैं। किन्तु दोनो व्युत्पत्तियें अत्यन्त सदिग्ध है। छःिशून्य भीतर हिशून्य बाहिर आठ सशून्य अभ्यन्तर् सशून्य बहि हिशून्य जानो - हिशून्य जानना दिशून्य मानो आठ हिशून्य मानना हिशून्य ठीक का सशून्य वोल्ट स्था' से सबध सदिग्ध है । हिशून्य सचमुच का संबंध संशून्य सत्य से है। हिन्दी मे यह रूप दोहरा कर बनाया गया है । हिशून्य हा की व्युत्पत्ति सदिग्ध है। केलाग इसकी तुलना मराठी क्रिया आहे, चाहों से करते हैं । हिशून्य नहीं को केलाग न + आहिका सयुक्त रूप बताते हैं । एक के, हि , ई चार सौ निन्यानवे । तीन सौ पैंतीस, नीचे मुख्य मुख्य समुच्चयबोधक अव्यय व्युत्पत्ति सहित दिये जा रहे हैंहिशून्य र संशून्य अपर । हिशून्य भी < प्राशून्यबिहि < संशून्य अपि हि । हिशून्य पर < संशून्य परं । इस अर्थ में संशून्य वा तथा अरबीया का प्रयोग भी हिन्दी मे होता है। हिशून्य कि कदाचित् फारसी से आया है। संशून्य किं से इसकी व्युत्पत्ति संदिग्ध है। हिशून्य जो < प्राशून्य ज*, जद < संशून्य यदि । हिशून्य बरन सशून्य वरन । हिशून्य चाहे - हिशून्य चाहना । हिशून्य तो < संशून्य तु । |
त्रिपुरा बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (टीबीएसई) ने 12 बोर्ड परीक्षा की डेटशीट में थोड़ा बदलाव किया है। विधानसभा चुनाव की तारीखों के चलते परीक्षा के दो विषय की तारीख बदली गई है। (टीबीएसई) के अध्यक्ष मिहिर कांति देब ने बताया कि मैथ्स और फिलॉस्फी विषयों की परीक्षा की तारीखें बदली गई हैं।
दोनों विषय की परीक्षा 12 मार्च को होनी थी, लेकिन इस दिन चरिलम विधानसभा में चुनाव है। इस चुनाव में कई छात्र पहली बार वोट देंगे। ऐसे में इन विषय की परीक्षा को रद्द किया गया है।
गौरतलब है कि इस साल राज्य बोर्ड की 12वीं की परीक्षा में 27 हजार छात्र हिस्सा लेने वाले हैं। बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार इस बार 15 मार्च को इस परीक्षा का परिणाम घोषित किया जाएगा।
| त्रिपुरा बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन ने बारह बोर्ड परीक्षा की डेटशीट में थोड़ा बदलाव किया है। विधानसभा चुनाव की तारीखों के चलते परीक्षा के दो विषय की तारीख बदली गई है। के अध्यक्ष मिहिर कांति देब ने बताया कि मैथ्स और फिलॉस्फी विषयों की परीक्षा की तारीखें बदली गई हैं। दोनों विषय की परीक्षा बारह मार्च को होनी थी, लेकिन इस दिन चरिलम विधानसभा में चुनाव है। इस चुनाव में कई छात्र पहली बार वोट देंगे। ऐसे में इन विषय की परीक्षा को रद्द किया गया है। गौरतलब है कि इस साल राज्य बोर्ड की बारहवीं की परीक्षा में सत्ताईस हजार छात्र हिस्सा लेने वाले हैं। बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार इस बार पंद्रह मार्च को इस परीक्षा का परिणाम घोषित किया जाएगा। |
बैराड। जिले के नगर परिषद बैराड में पण्डित चन्द्रशेखर आजाद जंयति पर समस्त युवाओं द्धारा उन्हे भावपूर्ण श्रध्दांजलि अर्पित की गई। कानून के छात्र प्रशांत शर्मा ने बताया कि चन्द्रशेखर आजाद कहते थे कि दुश्मन की गोलियो का। हम सामना करेंगे आजाद ही रहे है आजाद ही रहेंगे।
श्रृद्धांजलि देने वालो में मुख्य रूप से शुभम शर्मा, प्रशान्त शर्मा , राहुल मुदगल उदय नायक , टिंकल शर्मा, कपिल शर्मा राहुल शर्मा सुजीत शर्मा सोनू मुद्गल रितिक धाकड , गौरव जैमिनी , उमेश सिंघल अभिषेक भदौरिया उमेश भारद्धाज एंव अन्य लोग मौजूद रहे।
| बैराड। जिले के नगर परिषद बैराड में पण्डित चन्द्रशेखर आजाद जंयति पर समस्त युवाओं द्धारा उन्हे भावपूर्ण श्रध्दांजलि अर्पित की गई। कानून के छात्र प्रशांत शर्मा ने बताया कि चन्द्रशेखर आजाद कहते थे कि दुश्मन की गोलियो का। हम सामना करेंगे आजाद ही रहे है आजाद ही रहेंगे। श्रृद्धांजलि देने वालो में मुख्य रूप से शुभम शर्मा, प्रशान्त शर्मा , राहुल मुदगल उदय नायक , टिंकल शर्मा, कपिल शर्मा राहुल शर्मा सुजीत शर्मा सोनू मुद्गल रितिक धाकड , गौरव जैमिनी , उमेश सिंघल अभिषेक भदौरिया उमेश भारद्धाज एंव अन्य लोग मौजूद रहे। |
इस मौके पर महासचिव डी. एस. बागी, सी. उप प्रधान सर्बजीत कौर, वाईस प्रधान सुषमा सेतिया, सचिव एस. एम. सिद्धु, मंडल प्रधान मनोज शर्मा, महिला मोर्चा प्रधान मीनू सेठी, किसान मोर्चा प्रधान बलबीर सिंह, बी. सी. मोर्चा प्रधान मनोहर लाल धीमान, मायनोरिटी मोर्चा के लाल मोहम्मद, कमलजीत कौर, गुरदीप सिंह आदि भी उपस्थित थे।
| इस मौके पर महासचिव डी. एस. बागी, सी. उप प्रधान सर्बजीत कौर, वाईस प्रधान सुषमा सेतिया, सचिव एस. एम. सिद्धु, मंडल प्रधान मनोज शर्मा, महिला मोर्चा प्रधान मीनू सेठी, किसान मोर्चा प्रधान बलबीर सिंह, बी. सी. मोर्चा प्रधान मनोहर लाल धीमान, मायनोरिटी मोर्चा के लाल मोहम्मद, कमलजीत कौर, गुरदीप सिंह आदि भी उपस्थित थे। |
युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह जो लगातार सुर्ख़ियों में बने रहते हैं. उन्होंने एक बार फिर दे दिया हैं, एक ऐसा बयान जिसे सुनकर युवराज सिंह को बुरा लगना लाज़मी हैं.
दरअसल उनके बेटे युवराज सिंह की शादी बॉलीवुड अभिनेत्री और और उनकी गर्लफ्रेंड हेज़ल कीच के साथ इसी महीने की 30 तारीख को चंडीगढ़ के एक गुरूद्वारे फ़तेह सिंह साहिब में होने वाली हैं.
युवराज के पिता शादी से पहले जो रस्में 29 नवंबर को होगी उसमे शामिल होंगे. यही नहीं शादी के बाद जो फंक्शन गोवा और दिल्ली में होने वाले हैं. योगराज सिंह उनमें भी समिल्लित होगे.
युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह पहले भारत के लिए अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट भी खेल चुके हैं. यही नहीं योगराज सिंह अब फिल्मों में काम करते हैं. योगराज ने दो बड़ी हिंदी फिल्मों के अलावा काफी सारी पंजाबी फिल्मों में काम किया हैं.
आपकों बता दे, कि युवी के माता-पिता का बहुत साल पहले तलाक हो गया था. तलाक के बाद से ही भारत के दिग्गज ऑल राउंडर युवराज सिंह अपनी माँ शबनम सिंह के साथ ही रहते हैं.
| युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह जो लगातार सुर्ख़ियों में बने रहते हैं. उन्होंने एक बार फिर दे दिया हैं, एक ऐसा बयान जिसे सुनकर युवराज सिंह को बुरा लगना लाज़मी हैं. दरअसल उनके बेटे युवराज सिंह की शादी बॉलीवुड अभिनेत्री और और उनकी गर्लफ्रेंड हेज़ल कीच के साथ इसी महीने की तीस तारीख को चंडीगढ़ के एक गुरूद्वारे फ़तेह सिंह साहिब में होने वाली हैं. युवराज के पिता शादी से पहले जो रस्में उनतीस नवंबर को होगी उसमे शामिल होंगे. यही नहीं शादी के बाद जो फंक्शन गोवा और दिल्ली में होने वाले हैं. योगराज सिंह उनमें भी समिल्लित होगे. युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह पहले भारत के लिए अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट भी खेल चुके हैं. यही नहीं योगराज सिंह अब फिल्मों में काम करते हैं. योगराज ने दो बड़ी हिंदी फिल्मों के अलावा काफी सारी पंजाबी फिल्मों में काम किया हैं. आपकों बता दे, कि युवी के माता-पिता का बहुत साल पहले तलाक हो गया था. तलाक के बाद से ही भारत के दिग्गज ऑल राउंडर युवराज सिंह अपनी माँ शबनम सिंह के साथ ही रहते हैं. |
मुंबईः महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के पास डोंबिवली में स्थित मानपाडा इलाके में पिछले 8 महीने में 29 लोगों द्वारा 14 साल की एक नाबालिग लड़की के साथ रेप का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस बारे में जानकारी देते हुए कल्याण-डोम्बिवली के अडिशनल पुलिस कमिश्नर दत्ता कराले ने कहा कि इस पीड़िता के बॉयफ्रेंड ने पहले इसके साथ रेप का वीडियो बनाया और फिर उस वीडियो को अपने बाकी दोस्तों को दिखाया। आरोपी लड़के के दोस्तों ने यह वीडियो को दिखाकर लड़की को बार-बार ब्लैकमेल किया और उसके साथ रेप की घटना को अंजाम दिया।
कराले ने बताया कि 29 आरोपी लड़कों ने नाबालिग के साथ जनवरी से 22 सितंबर के बीच अलग-अलग जगहों पर रेप किया। उन्होंने बताया कि पीड़िता की शिकायत पर मामले में अब तक 29 आरोपियों में से 2 नाबालिगों सहित कुल 23 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने बताया कि लड़की के दावे की पुष्टि की जा रही है और उसे मेडिकल के लिए भेज दिया गया है। पीड़िता ने बयान दिया है कि कुछ लड़कों ने कई बार उसके साथ गैंगरेप भी किया। मामले के आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (बलात्कार) और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए हैं।
इस संबंध में मानपाड़ा थाने में 29 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इन 29 आरोपियों में से 23 को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और 6 लोगों की तलाश जारी है। लड़की के साथ जनवरी से सितंबर तक पूरे 9 महीने तक रेप की घटनाओं को अंजाम दिया जाता रहा। मामला 22 सितंबर को तब सामने आया जब पीड़िता ने खुद मनपाड़ा पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता के बॉयफ्रेंड ने जनवरी में उसका शारीरिक शोषण किए जाने का वीडियो बनाया था। बाद में यही वीडियो दिखाकर उसके साथ बार-बार रेप को अंजाम दिया जाता रहा। नाबालिग लड़की का फिलहाल एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है।
| मुंबईः महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के पास डोंबिवली में स्थित मानपाडा इलाके में पिछले आठ महीने में उनतीस लोगों द्वारा चौदह साल की एक नाबालिग लड़की के साथ रेप का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस बारे में जानकारी देते हुए कल्याण-डोम्बिवली के अडिशनल पुलिस कमिश्नर दत्ता कराले ने कहा कि इस पीड़िता के बॉयफ्रेंड ने पहले इसके साथ रेप का वीडियो बनाया और फिर उस वीडियो को अपने बाकी दोस्तों को दिखाया। आरोपी लड़के के दोस्तों ने यह वीडियो को दिखाकर लड़की को बार-बार ब्लैकमेल किया और उसके साथ रेप की घटना को अंजाम दिया। कराले ने बताया कि उनतीस आरोपी लड़कों ने नाबालिग के साथ जनवरी से बाईस सितंबर के बीच अलग-अलग जगहों पर रेप किया। उन्होंने बताया कि पीड़िता की शिकायत पर मामले में अब तक उनतीस आरोपियों में से दो नाबालिगों सहित कुल तेईस लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने बताया कि लड़की के दावे की पुष्टि की जा रही है और उसे मेडिकल के लिए भेज दिया गया है। पीड़िता ने बयान दिया है कि कुछ लड़कों ने कई बार उसके साथ गैंगरेप भी किया। मामले के आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा तीन सौ छिहत्तर और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए हैं। इस संबंध में मानपाड़ा थाने में उनतीस लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इन उनतीस आरोपियों में से तेईस को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और छः लोगों की तलाश जारी है। लड़की के साथ जनवरी से सितंबर तक पूरे नौ महीने तक रेप की घटनाओं को अंजाम दिया जाता रहा। मामला बाईस सितंबर को तब सामने आया जब पीड़िता ने खुद मनपाड़ा पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता के बॉयफ्रेंड ने जनवरी में उसका शारीरिक शोषण किए जाने का वीडियो बनाया था। बाद में यही वीडियो दिखाकर उसके साथ बार-बार रेप को अंजाम दिया जाता रहा। नाबालिग लड़की का फिलहाल एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। |
हेमंत शर्मा, इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में कोर्ट के फर्जी आदेश से आईएएस अवार्ड हासिल करने वाले संतोष वर्मा की देखभाल अब पुलिस के लिए सिरदर्दी बन गई है. संतोष वर्मा की कुशलक्षेम पूछने के लिए लगातार एमजी रोड थाना प्रभारी के पास कई वीआईपी लोगों के फोन कॉल आ रहे हैं. जिससे परेशान थाना प्रभारी ने खाने से लेकर नहाने तक की सारी जानकारी रोजनामचे में डालना शुरु कर दी है.
फर्जी कोर्ट का आदेश बनाकर आईएएस अवॉर्ड हासिल करने वाले संतोष वर्मा की खातिरदारी करने के लिए एमजी रोड थाना प्रभारी के पास कई वीआईपी लोगों के फोन आ रहे हैं. वर्मा के रिश्तेदार कई वरिष्ठ पदों पर हैं. जिसके कारण थाना प्रभारी टीवीएस नागर काफी परेशान हैं. टीवीएस नागर के पास जब भी कोई फोन कॉल आता है तो, उसमें वर्मा ने कुछ खाया या नहीं इसको लेकर जानकारी ली जाती है.
थाना प्रभारी टीवीएस नागर का कहना है कि देखभाल करने की भी हिदायत दी जाती हैं. इससे परेशान होकर उन्होंने थाने की रोजनामचा रिपोर्ट में संतोष वर्मा के खाने से लेकर नहाने तक की जानकारी डालना शुरू कर दी. जिससे किसी भी वीआईपी का या रिश्तेदार का कोई फोन आता है तो थाने पर मौजूद अधिकारी रोजनामचा देखकर परिजनों को बता देता है.
बता दें कि कोर्ट के फर्जी दस्तावेज तैयार कर पदोन्नति लेने वाले मामले में गिरफ्तार आईएएस (IAS) संतोष वर्मा को रविवार को न्यायालय में पेश किया गया. जहां मामले में पूछताछ के बाद कोर्ट से पुलिस ने संतोष वर्मा को दो दिनों के रिमांड पर लिया था. जिसके बाद फिर पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश किया और फिर तीन दिन की रिमांड पर लिया है.
संतोष वर्मा के मामले में एक पीड़िता के हुए बयान में पीड़िता ने कहा, संतोष वर्मा उसे जेल भेजवा न चाहता था. वर्मा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने वाली पीड़िता महिला ने गुरुवार को जांच अधिकारी सीएसपीएस मोटवानी को महिला एसआई की मौजूदगी में अपने बयान दर्ज कराए. जिसमें उसने वर्मा से शादी करने की बात बताई और वर्मा लगातार उस पर संपत्ति हड़पने का आरोप लगा रहा था. पीड़िता ने बताया कि उस पर एक झूठा प्रकरण भी वर्मा ने दर्ज कराया है और महिला को जेल भेजने की तैयारी वर्मा कर रहा था. महिला ने बताया कि उसने हर प्लेटफार्म पर अपने सबूत पेश किए, जिसके कारण हर बार बार निर्दोष साबित हुई.
संतोष वर्मा के खिलाफ साल 2016 में एक महिला की शिकायत पर इंदौर के लसुड़िया थाने में शादी का झांसा देकर ज्यादती करने का मामला दर्ज किया गया था. चूंकि संतोष वर्मा को राज्य प्रशासनिक सेवा से भारतीय प्रशानिक सेवा यानी आईएएस (IAS) के पद पर पदोन्नत किया जा रहा था. तब लोक सेवा आयोग ने इनके खिलाफ दर्ज अपराधिक प्रकरण और कोर्ट में लंबित मामलों की जानकारी मांगी थी. लेकिन संतोष वर्मा ने बरी होने का कोर्ट का झूठा आदेश पेश कर आईएएस (IAS) पद पर पदोन्नती ले ली.
| हेमंत शर्मा, इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में कोर्ट के फर्जी आदेश से आईएएस अवार्ड हासिल करने वाले संतोष वर्मा की देखभाल अब पुलिस के लिए सिरदर्दी बन गई है. संतोष वर्मा की कुशलक्षेम पूछने के लिए लगातार एमजी रोड थाना प्रभारी के पास कई वीआईपी लोगों के फोन कॉल आ रहे हैं. जिससे परेशान थाना प्रभारी ने खाने से लेकर नहाने तक की सारी जानकारी रोजनामचे में डालना शुरु कर दी है. फर्जी कोर्ट का आदेश बनाकर आईएएस अवॉर्ड हासिल करने वाले संतोष वर्मा की खातिरदारी करने के लिए एमजी रोड थाना प्रभारी के पास कई वीआईपी लोगों के फोन आ रहे हैं. वर्मा के रिश्तेदार कई वरिष्ठ पदों पर हैं. जिसके कारण थाना प्रभारी टीवीएस नागर काफी परेशान हैं. टीवीएस नागर के पास जब भी कोई फोन कॉल आता है तो, उसमें वर्मा ने कुछ खाया या नहीं इसको लेकर जानकारी ली जाती है. थाना प्रभारी टीवीएस नागर का कहना है कि देखभाल करने की भी हिदायत दी जाती हैं. इससे परेशान होकर उन्होंने थाने की रोजनामचा रिपोर्ट में संतोष वर्मा के खाने से लेकर नहाने तक की जानकारी डालना शुरू कर दी. जिससे किसी भी वीआईपी का या रिश्तेदार का कोई फोन आता है तो थाने पर मौजूद अधिकारी रोजनामचा देखकर परिजनों को बता देता है. बता दें कि कोर्ट के फर्जी दस्तावेज तैयार कर पदोन्नति लेने वाले मामले में गिरफ्तार आईएएस संतोष वर्मा को रविवार को न्यायालय में पेश किया गया. जहां मामले में पूछताछ के बाद कोर्ट से पुलिस ने संतोष वर्मा को दो दिनों के रिमांड पर लिया था. जिसके बाद फिर पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश किया और फिर तीन दिन की रिमांड पर लिया है. संतोष वर्मा के मामले में एक पीड़िता के हुए बयान में पीड़िता ने कहा, संतोष वर्मा उसे जेल भेजवा न चाहता था. वर्मा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने वाली पीड़िता महिला ने गुरुवार को जांच अधिकारी सीएसपीएस मोटवानी को महिला एसआई की मौजूदगी में अपने बयान दर्ज कराए. जिसमें उसने वर्मा से शादी करने की बात बताई और वर्मा लगातार उस पर संपत्ति हड़पने का आरोप लगा रहा था. पीड़िता ने बताया कि उस पर एक झूठा प्रकरण भी वर्मा ने दर्ज कराया है और महिला को जेल भेजने की तैयारी वर्मा कर रहा था. महिला ने बताया कि उसने हर प्लेटफार्म पर अपने सबूत पेश किए, जिसके कारण हर बार बार निर्दोष साबित हुई. संतोष वर्मा के खिलाफ साल दो हज़ार सोलह में एक महिला की शिकायत पर इंदौर के लसुड़िया थाने में शादी का झांसा देकर ज्यादती करने का मामला दर्ज किया गया था. चूंकि संतोष वर्मा को राज्य प्रशासनिक सेवा से भारतीय प्रशानिक सेवा यानी आईएएस के पद पर पदोन्नत किया जा रहा था. तब लोक सेवा आयोग ने इनके खिलाफ दर्ज अपराधिक प्रकरण और कोर्ट में लंबित मामलों की जानकारी मांगी थी. लेकिन संतोष वर्मा ने बरी होने का कोर्ट का झूठा आदेश पेश कर आईएएस पद पर पदोन्नती ले ली. |
पाकिस्तान की टीम (Pakistan Cricket Team) को अब इंग्लैंड में करीब एक महीने का वक्त हो गया है और पिछले तीन टेस्ट मैचों में इंग्लैंड की टीम की ताकत और कमजोरी का अंदाजा भी. पाकिस्तान टीम के सेलेक्शन में ये बात साफ नजर आ रही है.
इसे पाकिस्तान क्रिकेट टीम (Pakistan Cricket Team) की मजबूरी कहें या वक्त की जरूरत, जिन खिलाड़ियों को पाकिस्तान क्रिकेट टीम में लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा था अब वही खिलाड़ी पाकिस्तान की इज्जत बचाने के लिए मैदान में उतरेंगे. पाकिस्तान की टीम इन दिनों इंग्लैंड के दौरे पर हैं. 5 अगस्त से इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच मैनचेस्टर टेस्ट मैच शुरू होना है. जो 3 टेस्ट मैचों की सीरीज का पहला मैच होगा. इस मैच के लिए पाकिस्तान की टीम ने 20 खिलाड़ियों के नामों का ऐलान किया है. इसमें फवाद आलम (Fawad Alam), सरफराज अहमद (Sarfaraz Ahmed) और वहाब रियाज जैसे खिलाड़ी शामिल हैं. जिन्हें काफी समय से टेस्ट टीम से बाहर रखा गया था. पाकिस्तान ने इंग्लैंड में दो चार दिवसीय 'इंट्रा स्कवॉड' मैच खेले थे और इन बीस खिलाड़ियों का चयन इन दो मैचों में प्रदर्शन के आधार पर किया गया है. टेस्ट टीम की कमान अजहर अली को सौंपी गई है जबकि बाबर आजम उनके उप कप्तान होंगे.
आपको बता दें कि सरफराज अहमद को टेस्ट मैच खेले एक साल से ज्यादा का समय बीत चुका है. फवाद आलम को तो आखिरी बार 2009 में टेस्ट मैच खेलने का मौका मिला था. यानी ग्यारह साल बाद वो पाकिस्तान की टीम के प्लेइंग इलेवन में नजर आ सकते हैं. सरफराज अहमद ने जनवरी 2019 में आखिरी बार टेस्ट मैच खेला था. इस दौरे के लिए उन्हें सेकेंड विकेट-कीपर के तौर पर चुना गया था. पाकिस्तान की पहली पसंद मोहम्मद रिजवान थे, लेकिन प्रैक्टिस मैच में पाकिस्तान ने सरफराज अहमद को कप्तानी का मौका भी दिया था. मोहम्मद रिजवान ने भी प्रैक्टिस मैच में शतक लगाया था. ऐसे में ये देखना दिलचस्प होगा कि प्लेइंग इलेवन में किस खिलाड़ी को जगह मिलती है. पाकिस्तान टीम मैनेजमेंट के सूत्रों से मिले संकेत के मुताबिक मोहम्मद रिजवान का पलड़ा भारी है.
पाकिस्तान ने अनुभवी तेज गेंदबाज वहाब रियाज को भी टीम में शामिल किया है. वहाब रियाज ने पिछले साल टेस्ट क्रिकेट से अनिश्चितकाल के लिए 'ब्रेक' लिया था. लेकिन इस साल इंग्लैंड के दौरे से पहले उन्होंने खुद को चयन के लिए उपलब्ध कराया था. पाकिस्तान की टीम की नजर इस वक्त इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के बीच चल रही सीरीज पर भी है. पाकिस्तान की टीम को अब इंग्लैंड में करीब एक महीने का वक्त हो गया है और पिछले तीन टेस्ट मैचों में इंग्लैंड की टीम की ताकत और कमजोरी का अंदाजा भी. पाकिस्तान टीम के सेलेक्शन में ये बात साफ नजर आ रही है.
| पाकिस्तान की टीम को अब इंग्लैंड में करीब एक महीने का वक्त हो गया है और पिछले तीन टेस्ट मैचों में इंग्लैंड की टीम की ताकत और कमजोरी का अंदाजा भी. पाकिस्तान टीम के सेलेक्शन में ये बात साफ नजर आ रही है. इसे पाकिस्तान क्रिकेट टीम की मजबूरी कहें या वक्त की जरूरत, जिन खिलाड़ियों को पाकिस्तान क्रिकेट टीम में लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा था अब वही खिलाड़ी पाकिस्तान की इज्जत बचाने के लिए मैदान में उतरेंगे. पाकिस्तान की टीम इन दिनों इंग्लैंड के दौरे पर हैं. पाँच अगस्त से इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच मैनचेस्टर टेस्ट मैच शुरू होना है. जो तीन टेस्ट मैचों की सीरीज का पहला मैच होगा. इस मैच के लिए पाकिस्तान की टीम ने बीस खिलाड़ियों के नामों का ऐलान किया है. इसमें फवाद आलम , सरफराज अहमद और वहाब रियाज जैसे खिलाड़ी शामिल हैं. जिन्हें काफी समय से टेस्ट टीम से बाहर रखा गया था. पाकिस्तान ने इंग्लैंड में दो चार दिवसीय 'इंट्रा स्कवॉड' मैच खेले थे और इन बीस खिलाड़ियों का चयन इन दो मैचों में प्रदर्शन के आधार पर किया गया है. टेस्ट टीम की कमान अजहर अली को सौंपी गई है जबकि बाबर आजम उनके उप कप्तान होंगे. आपको बता दें कि सरफराज अहमद को टेस्ट मैच खेले एक साल से ज्यादा का समय बीत चुका है. फवाद आलम को तो आखिरी बार दो हज़ार नौ में टेस्ट मैच खेलने का मौका मिला था. यानी ग्यारह साल बाद वो पाकिस्तान की टीम के प्लेइंग इलेवन में नजर आ सकते हैं. सरफराज अहमद ने जनवरी दो हज़ार उन्नीस में आखिरी बार टेस्ट मैच खेला था. इस दौरे के लिए उन्हें सेकेंड विकेट-कीपर के तौर पर चुना गया था. पाकिस्तान की पहली पसंद मोहम्मद रिजवान थे, लेकिन प्रैक्टिस मैच में पाकिस्तान ने सरफराज अहमद को कप्तानी का मौका भी दिया था. मोहम्मद रिजवान ने भी प्रैक्टिस मैच में शतक लगाया था. ऐसे में ये देखना दिलचस्प होगा कि प्लेइंग इलेवन में किस खिलाड़ी को जगह मिलती है. पाकिस्तान टीम मैनेजमेंट के सूत्रों से मिले संकेत के मुताबिक मोहम्मद रिजवान का पलड़ा भारी है. पाकिस्तान ने अनुभवी तेज गेंदबाज वहाब रियाज को भी टीम में शामिल किया है. वहाब रियाज ने पिछले साल टेस्ट क्रिकेट से अनिश्चितकाल के लिए 'ब्रेक' लिया था. लेकिन इस साल इंग्लैंड के दौरे से पहले उन्होंने खुद को चयन के लिए उपलब्ध कराया था. पाकिस्तान की टीम की नजर इस वक्त इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के बीच चल रही सीरीज पर भी है. पाकिस्तान की टीम को अब इंग्लैंड में करीब एक महीने का वक्त हो गया है और पिछले तीन टेस्ट मैचों में इंग्लैंड की टीम की ताकत और कमजोरी का अंदाजा भी. पाकिस्तान टीम के सेलेक्शन में ये बात साफ नजर आ रही है. |
इंडिया न्यूज, जयपुरः
राजस्थान में डीजे(DJ) बजाने पर रोक लगा दी गई है। यह फैसला राज्य सरकार के गृह विभाग के निर्देश के बाद लिया गया। इसको लेकर जिला पुलिस अधीक्षकों ने आदेश जारी किए हैं। वहीं राजधानी जयपुर के पुलिस आयुक्त भी जिले में अगले आदेश तक रैली, जुलूस और शादियों में डीजे बजाने रोक लगा दी है। वहीं इस आदेश को न मानने वाले के खिलाफ भारतीय दण्ड संहिता की धारा 188 के तहत कार्यवाही भी की जाएगी।
करौली हिंसा के बाद राजस्थान सरकार ने राज्य के लगभग एक दर्जन जिलों में धारा 144 लगा रखी है। वहीं अब रैली से लेकर धार्मिक कार्यक्रमों में डीजे बजाने पर रोक लगा दी है। अब धार्मिक रैलियों, जुलूसों में डीजे बजाने से पहले पुलिस और प्रशासन की अनुमति लेनी होगी। यही नहीं अनुमति लेने के साथ-साथ डीजे पर कौन सा गाना बजेगा, यह भी लिखकर देना होगा। प्रदेश सरकार के गृह विभाग ने इसको लेकर गाइडलाइन भी जारी कर दी है।
प्रदेश के गृह विभाग द्वारा जारी की गई गाइडलाइन के अनुसार किसी भी तरह के कार्यक्रम के आयोजन में डीजे बजाने की अनुमति लेने के लिए शपथ पत्र देकर बताना होगा कि आयोजन धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक या शोभायात्रा या प्रदर्शन होगा। इसके साथ ही आयोजन की तारीख उसमे शामिल होने वाले व्यक्तियों की संख्या कितनी होगी। अगर डीजे बजाना है तो डीजे वाले का नाम-पता व डीजे पर कौन सा गाना बजेगा इसकी भी जानकारी देनी होगी। रैली या जुलूस के रूट की जानकारी भी साझा करनी होगी।
| इंडिया न्यूज, जयपुरः राजस्थान में डीजे बजाने पर रोक लगा दी गई है। यह फैसला राज्य सरकार के गृह विभाग के निर्देश के बाद लिया गया। इसको लेकर जिला पुलिस अधीक्षकों ने आदेश जारी किए हैं। वहीं राजधानी जयपुर के पुलिस आयुक्त भी जिले में अगले आदेश तक रैली, जुलूस और शादियों में डीजे बजाने रोक लगा दी है। वहीं इस आदेश को न मानने वाले के खिलाफ भारतीय दण्ड संहिता की धारा एक सौ अठासी के तहत कार्यवाही भी की जाएगी। करौली हिंसा के बाद राजस्थान सरकार ने राज्य के लगभग एक दर्जन जिलों में धारा एक सौ चौंतालीस लगा रखी है। वहीं अब रैली से लेकर धार्मिक कार्यक्रमों में डीजे बजाने पर रोक लगा दी है। अब धार्मिक रैलियों, जुलूसों में डीजे बजाने से पहले पुलिस और प्रशासन की अनुमति लेनी होगी। यही नहीं अनुमति लेने के साथ-साथ डीजे पर कौन सा गाना बजेगा, यह भी लिखकर देना होगा। प्रदेश सरकार के गृह विभाग ने इसको लेकर गाइडलाइन भी जारी कर दी है। प्रदेश के गृह विभाग द्वारा जारी की गई गाइडलाइन के अनुसार किसी भी तरह के कार्यक्रम के आयोजन में डीजे बजाने की अनुमति लेने के लिए शपथ पत्र देकर बताना होगा कि आयोजन धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक या शोभायात्रा या प्रदर्शन होगा। इसके साथ ही आयोजन की तारीख उसमे शामिल होने वाले व्यक्तियों की संख्या कितनी होगी। अगर डीजे बजाना है तो डीजे वाले का नाम-पता व डीजे पर कौन सा गाना बजेगा इसकी भी जानकारी देनी होगी। रैली या जुलूस के रूट की जानकारी भी साझा करनी होगी। |
सोनम कपूर की शादी साल की सबसे चर्चित सेरेमनी में से एक बन गई। शादी की सभी रस्में सिख रीति-रिवाज से हुईं । इस आलीशान शादी के वेन्यू की सजावट भी महंगे फूलों और कैंडल से की गई थी । सोनम की शादी उनकी मौसी के बंगले से हुई ।
सोनम की शादी और रिसेप्शन के वीडियो और फोटो तो लगातार वायरल हो रहे हैं । कुछ वेन्यू की भी तस्वीरें आई हैं । शादी का वेन्यू बेहद शानदार था । मंडप के आस-पास खुशबूदार कैंडल और मोगरे के फूल सजाए गए थे ।
ये कैंडल 'जो मैलोन' ब्रांड के थे, जिन्हें केट मिडिलटन और प्रिंस विलियम की रॉयल वेडिंग में भी इस्तेमाल किया गया था। ये कैंडल्स स्पेशली लंदन से मंगवाए गए थे। एक कैंडल की कीमत करीब 7 हजार रुपए थी।
शादी की रस्म के लिए वेन्यू पर गुरु ग्रंथ साहब रखा गया था । लोकेशन को पिंक और ब्लू थीम पर सजाया गया था । सेरेमनी में अमिताभ बच्चन, श्वेता बच्चन, करीना कपूर, सैफ अली खान, तैमूर, करिश्मा कपूर, जाह्नवी कपूर, खुशी, बोनी, अंशुला कपूर, रणवीर सिंह, रानी मुखर्जी पहुंचे थे।
बता दें कि सोनम की मौसी कविता सिंह का यह बंगला 55 हजार स्क्वायर फीट में बना है। इस बेहद खूबसूरत बंगले का नाम रॉकडेल है। रिपोर्टस के अनुसार, मुंबई की सबसे महंगी जगहों पर स्थित इस बंगले की कीमत 70 करोड़ रुपए है।
| सोनम कपूर की शादी साल की सबसे चर्चित सेरेमनी में से एक बन गई। शादी की सभी रस्में सिख रीति-रिवाज से हुईं । इस आलीशान शादी के वेन्यू की सजावट भी महंगे फूलों और कैंडल से की गई थी । सोनम की शादी उनकी मौसी के बंगले से हुई । सोनम की शादी और रिसेप्शन के वीडियो और फोटो तो लगातार वायरल हो रहे हैं । कुछ वेन्यू की भी तस्वीरें आई हैं । शादी का वेन्यू बेहद शानदार था । मंडप के आस-पास खुशबूदार कैंडल और मोगरे के फूल सजाए गए थे । ये कैंडल 'जो मैलोन' ब्रांड के थे, जिन्हें केट मिडिलटन और प्रिंस विलियम की रॉयल वेडिंग में भी इस्तेमाल किया गया था। ये कैंडल्स स्पेशली लंदन से मंगवाए गए थे। एक कैंडल की कीमत करीब सात हजार रुपए थी। शादी की रस्म के लिए वेन्यू पर गुरु ग्रंथ साहब रखा गया था । लोकेशन को पिंक और ब्लू थीम पर सजाया गया था । सेरेमनी में अमिताभ बच्चन, श्वेता बच्चन, करीना कपूर, सैफ अली खान, तैमूर, करिश्मा कपूर, जाह्नवी कपूर, खुशी, बोनी, अंशुला कपूर, रणवीर सिंह, रानी मुखर्जी पहुंचे थे। बता दें कि सोनम की मौसी कविता सिंह का यह बंगला पचपन हजार स्क्वायर फीट में बना है। इस बेहद खूबसूरत बंगले का नाम रॉकडेल है। रिपोर्टस के अनुसार, मुंबई की सबसे महंगी जगहों पर स्थित इस बंगले की कीमत सत्तर करोड़ रुपए है। |
को छोड़कर शेष तीन प्रकार से देव की उपासना की जाती है। तात्पर्य यह है कि इस प्रकार देव की उपासना में तत्पर रहने वाले व्यक्ति व्यवहार से सामायिकव्रत के धारक होते हैं ॥ ३१॥ सामायिक की दुःसाध्यता का प्रदर्शन सामायिकं सुदुःसाध्य - मप्यभ्यासेन साध्यते । निम्नीकरोति वार्विन्दुः, किन्नाश्मानं मुहुः पतन् ।।२२।।
अन्वयार्थी - ( सुदुःसाध्यम् ) अत्यन्त दुःसाध्य भी अर्थात् बड़ी कठिनता से सिद्ध होने वाला (अपि) भी (सामायिकम् ) सामायिक व्रत (अभ्यासेन) अभ्यास के द्वारा (साध्यते ) सिद्ध हो जाता है [ यतः ] क्योंकि [यथा] जैसे (मुहुः) वार वार (पतन्) गिरने वाली ( वार्विन्दु ) जल की बूँद (अश्मानम् ) पत्थर को ( न निम्नीकरोति किम्) गड्ढा विशिष्ट नहीं कर देतो है क्या ? अर्थात् कर ही देती है ।।३२।।
भाषार्थः- आकुलता-सहित कठोर अन्त करण वाले संसारियों के लिए यद्यपि सामायिक का धारण करना बहुत कठिन है, तो भी वह अभ्यास के द्वारा सिद्ध किया जा सकता है। जैसेपत्थर के ऊपर पुनः पुनः पड़ने वाली जल की बूँद पत्थर में भी गड्ढा कर देती है वैसे ही पुनः पुनः किये गये अभ्यास से आत्मा में विषय और कषायों की मन्दता होकर सामायिकत्रत की सिद्धि होती है ॥ ३२ ॥
सामायिकव्रत के अतिचार
पञ्चात्रापि मलानुज्के-दनुपस्थापनं स्मृतेः ।
कायवाङ्मनसां दुष्ट - प्रणिधानान्यनादरम् ।।३३॥ अन्वयार्थी-[ फलार्थी श्रावकः ] सामायिक के फल का इच्छुक श्रावक (त्र) इस सामायिकव्रत में (अपि ) भी (स्मृतेः ) स्मृति का (अनुपस्थापम् ) भूल जाना ( कायवाङ मनसाम् ) काय, वचन तथा मन | को छोड़कर शेष तीन प्रकार से देव की उपासना की जाती है। तात्पर्य यह है कि इस प्रकार देव की उपासना में तत्पर रहने वाले व्यक्ति व्यवहार से सामायिकव्रत के धारक होते हैं ॥ इकतीस॥ सामायिक की दुःसाध्यता का प्रदर्शन सामायिकं सुदुःसाध्य - मप्यभ्यासेन साध्यते । निम्नीकरोति वार्विन्दुः, किन्नाश्मानं मुहुः पतन् ।।बाईस।। अन्वयार्थी - अत्यन्त दुःसाध्य भी अर्थात् बड़ी कठिनता से सिद्ध होने वाला भी सामायिक व्रत अभ्यास के द्वारा सिद्ध हो जाता है [ यतः ] क्योंकि [यथा] जैसे वार वार गिरने वाली जल की बूँद पत्थर को गड्ढा विशिष्ट नहीं कर देतो है क्या ? अर्थात् कर ही देती है ।।बत्तीस।। भाषार्थः- आकुलता-सहित कठोर अन्त करण वाले संसारियों के लिए यद्यपि सामायिक का धारण करना बहुत कठिन है, तो भी वह अभ्यास के द्वारा सिद्ध किया जा सकता है। जैसेपत्थर के ऊपर पुनः पुनः पड़ने वाली जल की बूँद पत्थर में भी गड्ढा कर देती है वैसे ही पुनः पुनः किये गये अभ्यास से आत्मा में विषय और कषायों की मन्दता होकर सामायिकत्रत की सिद्धि होती है ॥ बत्तीस ॥ सामायिकव्रत के अतिचार पञ्चात्रापि मलानुज्के-दनुपस्थापनं स्मृतेः । कायवाङ्मनसां दुष्ट - प्रणिधानान्यनादरम् ।।तैंतीस॥ अन्वयार्थी-[ फलार्थी श्रावकः ] सामायिक के फल का इच्छुक श्रावक इस सामायिकव्रत में भी स्मृति का भूल जाना काय, वचन तथा मन |
Sarkari Naukri 2023 Ordnance Factory Recruitment 2023: आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है.
Ordnance Factory Recruitment 2023: ऑर्डिनेंस फैक्ट्री, चंदा (Ordnance Factory) ने अप्रेंटिस के पदों पर भर्ती (Ordnance Factory Recruitment) के लिए उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए हैं. योग्य एवं इच्छुक उम्मीदवार म्यूनिशन इंडिया लिमिटेड की आधिकारिक वेबसाइट munitionsindia. co. in के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. उम्मीदवार जो भी इन पदों के लिए आवेदन करना चाह रहे हैं, वे 30 अप्रैल तक या उससे पहले आवेदन कर सकते हैं. इस भर्ती (Ordnance Factory Bharti 2023) अभियान के तहत संगठन में 76 पदों को भरा जाएगा. उम्मीदवार जो भी इन पदों पर नौकरी (Sarkari Naukri) पाने के लिए आवेदन कर रहे हैं, वे दिए गए इन बातों को ध्यान से जरूर पढ़ें.
जो उम्मीदवार इन पदों के लिए आवेदन करना चाहते हैं, उनके पास किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय / तकनीकी शिक्षा बोर्ड से इंजीनियरिंग / प्रौद्योगिकी में अंतिम वर्ष की डिग्री या सामान्य स्ट्रीम में डिग्री और इंजीनियरिंग / प्रौद्योगिकी में डिप्लोमा होना चाहिए.
उम्मीदवार जो भी इन पदों के लिए आवेदन करना चाहते हैं, उनकी न्यूनतम आयु सीमा 14 वर्ष होनी चाहिए.
जिन उम्मीदवारों का चयन स्टाइपेंड ग्रेजुएट अपरेंटिस के लिए होते है, उन्हें ₹9000/- प्रति माह और तकनीशियन अपरेंटिस के लिए ₹8000/- प्रति माह दिया जाएगा.
उम्मीदवारों का चयन डिग्री/डिप्लोमा के अंतिम वर्ष की परीक्षा में प्राप्त अंकों की योग्यता के आधार पर किया जाएगा. उम्मीदवार इससे संबंधित विवरणों के लिए म्यूनिशन इंडिया लिमिटेड की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं.
सीआईएसएफ में सब इंस्पेक्टर की कितनी होती है सैलरी, क्या-क्या है बेनिफिट?
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| Sarkari Naukri दो हज़ार तेईस Ordnance Factory Recruitment दो हज़ार तेईस: आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है. Ordnance Factory Recruitment दो हज़ार तेईस: ऑर्डिनेंस फैक्ट्री, चंदा ने अप्रेंटिस के पदों पर भर्ती के लिए उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए हैं. योग्य एवं इच्छुक उम्मीदवार म्यूनिशन इंडिया लिमिटेड की आधिकारिक वेबसाइट munitionsindia. co. in के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. उम्मीदवार जो भी इन पदों के लिए आवेदन करना चाह रहे हैं, वे तीस अप्रैल तक या उससे पहले आवेदन कर सकते हैं. इस भर्ती अभियान के तहत संगठन में छिहत्तर पदों को भरा जाएगा. उम्मीदवार जो भी इन पदों पर नौकरी पाने के लिए आवेदन कर रहे हैं, वे दिए गए इन बातों को ध्यान से जरूर पढ़ें. जो उम्मीदवार इन पदों के लिए आवेदन करना चाहते हैं, उनके पास किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय / तकनीकी शिक्षा बोर्ड से इंजीनियरिंग / प्रौद्योगिकी में अंतिम वर्ष की डिग्री या सामान्य स्ट्रीम में डिग्री और इंजीनियरिंग / प्रौद्योगिकी में डिप्लोमा होना चाहिए. उम्मीदवार जो भी इन पदों के लिए आवेदन करना चाहते हैं, उनकी न्यूनतम आयु सीमा चौदह वर्ष होनी चाहिए. जिन उम्मीदवारों का चयन स्टाइपेंड ग्रेजुएट अपरेंटिस के लिए होते है, उन्हें नौ हज़ार रुपया/- प्रति माह और तकनीशियन अपरेंटिस के लिए आठ हज़ार रुपया/- प्रति माह दिया जाएगा. उम्मीदवारों का चयन डिग्री/डिप्लोमा के अंतिम वर्ष की परीक्षा में प्राप्त अंकों की योग्यता के आधार पर किया जाएगा. उम्मीदवार इससे संबंधित विवरणों के लिए म्यूनिशन इंडिया लिमिटेड की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं. सीआईएसएफ में सब इंस्पेक्टर की कितनी होती है सैलरी, क्या-क्या है बेनिफिट? . |
Gujarat Assembly Election 2022: गुजरात विधानसभा चुनाव में आज दूसरे और आखिरी चरण के लिए मतदान जारी है. प्रदेश के 14 जिलों की 93 विधानसभा सीटों पर सुबह 8 बजे से वोटिंग हो रही है. इस बीच पीएम मोदी के बाद अब उनकी मां वोट डालने पहुंची हैं. देखें वीडियो.
PM Modi's Mother Hira Ba casts her vote for second phase of Gujarat Assembly elections. Watch this video to know more.
| Gujarat Assembly Election दो हज़ार बाईस: गुजरात विधानसभा चुनाव में आज दूसरे और आखिरी चरण के लिए मतदान जारी है. प्रदेश के चौदह जिलों की तिरानवे विधानसभा सीटों पर सुबह आठ बजे से वोटिंग हो रही है. इस बीच पीएम मोदी के बाद अब उनकी मां वोट डालने पहुंची हैं. देखें वीडियो. PM Modi's Mother Hira Ba casts her vote for second phase of Gujarat Assembly elections. Watch this video to know more. |
नई दिल्लीः आप सरसों तेल खरीदने का प्लान कर रहे हैं तो फिर यह खबर बड़े ही काम की साबित होने जा रही है। आप बहुत सस्ते में सरसों का तेल खरीदकर घर ला सकते हैं, जिसके लिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना होगा। सरसों का तेल अपने हाई लेवल रेट से करीब 50 से 60 रुपये प्रति लीटर तक सस्ते में बिक रहा है।
इसकी आपने जल्द खरीदारी नहीं की तो फिर पछतावा करना होगा। जानकारों के अनुसार, इस बार उत्तर भारत में बेमौसम बारिस ने लाई और सरसों की फसल बर्बाद कर दी, इसलिए जाने आने वाले दिनों में तेल के दाम काफी बढ़ सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि आप घरों से बाहर निकले और सरसों तेल की सस्ते में खरीदारी का मौका हाथ से ना जाने दे।
देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में इन दिनों सरसों तेल के दाम कम होते देख आम लोगों के चेहरे पर काफी खुशी दिख रही है, क्योंकि पकवान भी अब सस्ते में बन रहे हैं। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी सरसों का तेल बहुत सस्ता बिक रहा है, जहां आप 154 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से खरीदकर घर ला सकते हैं।
इसके अलावा प्रयागराज में भी सरसों तेल की कीमत 153 रुपये प्रति लीटर दर्ज की जा रही है, जो आपने लिए बहुत बढ़िया मौका है। इसके साथ जिला सीतापुर में भी सरसों का तेल आप सस्ते में खरीदकर पैसों की बचत कर सकते हैं, जहां आराम से 157 रुपये प्रति लीटर के हिसाब खरीदकर घर ला सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि आप इन शहरों में बिना समय गंवाएं खरीदारी कर पैसे बचा सकते हैं।
पश्चिमी यूपी के जिला मेरठ में सरसों का तेल उच्चतम स्तर से 55 रुपये प्रति लीटर कम में बिक रहा है। यहां आप आराम से 155 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से खरीदारी कर पैसों की बचत कर सकते हैं। इसके अलावा जिला सहारनपुर में सरसों का तेल 156 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बिकता नजर आ रहा है। साथ ही जिला मुजफ्फरनगर में भी सरसों का तेल 153 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया जा रहा है।
| नई दिल्लीः आप सरसों तेल खरीदने का प्लान कर रहे हैं तो फिर यह खबर बड़े ही काम की साबित होने जा रही है। आप बहुत सस्ते में सरसों का तेल खरीदकर घर ला सकते हैं, जिसके लिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना होगा। सरसों का तेल अपने हाई लेवल रेट से करीब पचास से साठ रुपयापये प्रति लीटर तक सस्ते में बिक रहा है। इसकी आपने जल्द खरीदारी नहीं की तो फिर पछतावा करना होगा। जानकारों के अनुसार, इस बार उत्तर भारत में बेमौसम बारिस ने लाई और सरसों की फसल बर्बाद कर दी, इसलिए जाने आने वाले दिनों में तेल के दाम काफी बढ़ सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि आप घरों से बाहर निकले और सरसों तेल की सस्ते में खरीदारी का मौका हाथ से ना जाने दे। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में इन दिनों सरसों तेल के दाम कम होते देख आम लोगों के चेहरे पर काफी खुशी दिख रही है, क्योंकि पकवान भी अब सस्ते में बन रहे हैं। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी सरसों का तेल बहुत सस्ता बिक रहा है, जहां आप एक सौ चौवन रुपयापये प्रति लीटर के हिसाब से खरीदकर घर ला सकते हैं। इसके अलावा प्रयागराज में भी सरसों तेल की कीमत एक सौ तिरेपन रुपयापये प्रति लीटर दर्ज की जा रही है, जो आपने लिए बहुत बढ़िया मौका है। इसके साथ जिला सीतापुर में भी सरसों का तेल आप सस्ते में खरीदकर पैसों की बचत कर सकते हैं, जहां आराम से एक सौ सत्तावन रुपयापये प्रति लीटर के हिसाब खरीदकर घर ला सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि आप इन शहरों में बिना समय गंवाएं खरीदारी कर पैसे बचा सकते हैं। पश्चिमी यूपी के जिला मेरठ में सरसों का तेल उच्चतम स्तर से पचपन रुपयापये प्रति लीटर कम में बिक रहा है। यहां आप आराम से एक सौ पचपन रुपयापये प्रति लीटर के हिसाब से खरीदारी कर पैसों की बचत कर सकते हैं। इसके अलावा जिला सहारनपुर में सरसों का तेल एक सौ छप्पन रुपयापये प्रति लीटर के हिसाब से बिकता नजर आ रहा है। साथ ही जिला मुजफ्फरनगर में भी सरसों का तेल एक सौ तिरेपन रुपयापये प्रति लीटर दर्ज किया जा रहा है। |
भारतीय बल्लेबाजों के सामने पहले टेस्ट मैच में राशिद खान का जादू देखने को नहीं मिला।
नई दिल्ली, जेएनएन। भारत के खिलाफ अफगानिस्तान की तरफ से डेब्यू मैच खेलने वाले राशिद खान पर दुनिया भर के क्रिकेट फैंस की नजर सबसे ज्यादा थी। वजह ये थी कि पिछले कुछ समय से वो क्रिकेट की दुनिया में अपनी गेंदबाजी के दम पर छाए हुए थे। राशिद सिमित ओवरों के क्रिकेट में कमाल की गेंदबाजी कर रहे थे और सबको इस बात का इंतजार था कि ये स्पिनर दुनिया की नंबर एक टेस्ट टीम के खिलाफ अपने डेब्यू टेस्ट में क्या कमाल कर पाता है लेकिन राशिद फिलहाल इस टेस्ट में तो प्रभावित करने में नाकाम रहे।
भारत के विरुद्ध अपना पहला टेस्ट मैच खेलने वाले अफगानिस्तान के स्पिनर राशिद खान दुनिया के पहले ऐसे गेंदबाज बन गए जिन्होंने अपने डेब्यू टेस्ट मैच की पहली ही पारी में सबसे ज्यादा रन दिए हों। राशिद के पहले ये रिकॉर्ड पाकिस्तान के पूर्व गेंदबाज आमिर इलाही के नाम पर था। उन्होंने वर्ष 1952 में भारत के खिलाफ दिल्ली में अपने पहले टेस्ट मैच की पहली पारी में 134 रन दिए थे। पिछले 65 वर्ष से ये रिकॉर्ड इलाही के नाम पर था जो अब जाकर टूटा और नया रिकॉर्ड राशिद खान ने बना दिया।
दुनिया की नंबर एक टेस्ट टीम भारत के खिलाफ पहले टेस्ट मैच की पहली पारी में राशिद खान ने 34. 5 ओवर गेंदबाजी की और उन्होंने 154 रन लुटाए। अपनी गेंदबाजी के दौरान राशिद ने दो मेडन ओवर भी फेंके और उन्हें दो विकेट भी मिले। उन्होंने 4. 42 की इकानॉमी रेट से गेंदबाजी की। जिन दो भारतीय बल्लेबाजों को उन्होंने आउट किया वो अजिंक्य रहाणे और ईशांत शर्मा रहे। रहाणे को राशिद ने 10 रन पर LBW आउट किया जबकि ईशांत को भी उन्होंने 8 रन के स्कोर पर LBW आउट कर पवेलियन का रास्ता दिखा दिया।
राशिद खान ने अब तक अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में कुल 44 वनडे मुकाबले खेले हैं जिसमें उनके नाम पर 100 विकेट है। वहीं टी 20 मैचों की बात करें तो 33 मैचों में उन्होंने 57 विकेट बनाए हैं। अपने पहले टेस्ट मैच में राशिद दो विकेट लेने में कामयाब रहे।
| भारतीय बल्लेबाजों के सामने पहले टेस्ट मैच में राशिद खान का जादू देखने को नहीं मिला। नई दिल्ली, जेएनएन। भारत के खिलाफ अफगानिस्तान की तरफ से डेब्यू मैच खेलने वाले राशिद खान पर दुनिया भर के क्रिकेट फैंस की नजर सबसे ज्यादा थी। वजह ये थी कि पिछले कुछ समय से वो क्रिकेट की दुनिया में अपनी गेंदबाजी के दम पर छाए हुए थे। राशिद सिमित ओवरों के क्रिकेट में कमाल की गेंदबाजी कर रहे थे और सबको इस बात का इंतजार था कि ये स्पिनर दुनिया की नंबर एक टेस्ट टीम के खिलाफ अपने डेब्यू टेस्ट में क्या कमाल कर पाता है लेकिन राशिद फिलहाल इस टेस्ट में तो प्रभावित करने में नाकाम रहे। भारत के विरुद्ध अपना पहला टेस्ट मैच खेलने वाले अफगानिस्तान के स्पिनर राशिद खान दुनिया के पहले ऐसे गेंदबाज बन गए जिन्होंने अपने डेब्यू टेस्ट मैच की पहली ही पारी में सबसे ज्यादा रन दिए हों। राशिद के पहले ये रिकॉर्ड पाकिस्तान के पूर्व गेंदबाज आमिर इलाही के नाम पर था। उन्होंने वर्ष एक हज़ार नौ सौ बावन में भारत के खिलाफ दिल्ली में अपने पहले टेस्ट मैच की पहली पारी में एक सौ चौंतीस रन दिए थे। पिछले पैंसठ वर्ष से ये रिकॉर्ड इलाही के नाम पर था जो अब जाकर टूटा और नया रिकॉर्ड राशिद खान ने बना दिया। दुनिया की नंबर एक टेस्ट टीम भारत के खिलाफ पहले टेस्ट मैच की पहली पारी में राशिद खान ने चौंतीस. पाँच ओवर गेंदबाजी की और उन्होंने एक सौ चौवन रन लुटाए। अपनी गेंदबाजी के दौरान राशिद ने दो मेडन ओवर भी फेंके और उन्हें दो विकेट भी मिले। उन्होंने चार. बयालीस की इकानॉमी रेट से गेंदबाजी की। जिन दो भारतीय बल्लेबाजों को उन्होंने आउट किया वो अजिंक्य रहाणे और ईशांत शर्मा रहे। रहाणे को राशिद ने दस रन पर LBW आउट किया जबकि ईशांत को भी उन्होंने आठ रन के स्कोर पर LBW आउट कर पवेलियन का रास्ता दिखा दिया। राशिद खान ने अब तक अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में कुल चौंतालीस वनडे मुकाबले खेले हैं जिसमें उनके नाम पर एक सौ विकेट है। वहीं टी बीस मैचों की बात करें तो तैंतीस मैचों में उन्होंने सत्तावन विकेट बनाए हैं। अपने पहले टेस्ट मैच में राशिद दो विकेट लेने में कामयाब रहे। |
कोरोना की दो लहर के बाद अब स्कूलों में फिर से रौनक लौटेगी। गृह विभाग ने 15 नवंबर से पूरी क्षमता (100 प्रतिशत) के साथ स्कूलों के संचालन की अनुमति दी है। अब शिक्षा विभाग ने भी पूरी क्षमता के साथ स्कूलों के संचालन के लिए एसओपी तैयार करने की कवायद प्रारंभ कर दी है। अभी यह तय नहीं है कि इस एसओपी में स्कूलों में कौन सी गतिविधियों की छूट प्रदान की जाएगी। लेकिन माना जा रहा है कि पूरी क्षमता से स्कूल खोले जाने की स्थिति में अब प्रार्थना सभा और उत्सवों के आयोजन से भी रोक हट सकती है।
फिलहाल स्कूल क्षमता के 50 फीसदी के हिसाब से ही संचालित हो रहे हैं। इसमें भी उपस्थिति बहुत कम रहती है और करीब 30 से 40 फीसदी विद्यार्थी ही स्कूल पहुंचते हैं। कोरोना की पहली लहर के बाद पिछले साल मार्च में पहली बार स्कूलों को बंद किया गया था। इसके बाद स्कूलें प्रारंभ तो हो गई, लेकिन 20 महीने बाद ऐसी स्थिति बनेगी, जिसमें सभी बच्चे एक साथ स्कूल जाएंगे।
हालांकि अभी कई अभिभावक ऐसे हैं जो बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहते इसलिए वे चाहते हैं कि पढ़ाई के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों विकल्प उपलब्ध कराए जाएं। दूसरी ओर, निजी स्कूल संचालक विभाग की एसओपी का इंतजार कर रहे हैं।
कई निजी स्कूल चाहते हैं कि बच्चे स्कूल में पढ़ाई करें। इसलिए उन्होंने ऑनलाइन कक्षाएं बंद कर दी है। ताकि बच्चे स्कूल आकर ही पढ़ाई कर सके। इसका अभिभावक विरोध भी कर रहे हैं। जबकि कई निजी स्कूल ऐसे भी है जो पूरी क्षमता के साथ स्कूलों का संचालन प्रारंभ होने के बावजूद अॉनलाइन पढ़ाई का विकल्प उपलब्ध कराएंगे।
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| कोरोना की दो लहर के बाद अब स्कूलों में फिर से रौनक लौटेगी। गृह विभाग ने पंद्रह नवंबर से पूरी क्षमता के साथ स्कूलों के संचालन की अनुमति दी है। अब शिक्षा विभाग ने भी पूरी क्षमता के साथ स्कूलों के संचालन के लिए एसओपी तैयार करने की कवायद प्रारंभ कर दी है। अभी यह तय नहीं है कि इस एसओपी में स्कूलों में कौन सी गतिविधियों की छूट प्रदान की जाएगी। लेकिन माना जा रहा है कि पूरी क्षमता से स्कूल खोले जाने की स्थिति में अब प्रार्थना सभा और उत्सवों के आयोजन से भी रोक हट सकती है। फिलहाल स्कूल क्षमता के पचास फीसदी के हिसाब से ही संचालित हो रहे हैं। इसमें भी उपस्थिति बहुत कम रहती है और करीब तीस से चालीस फीसदी विद्यार्थी ही स्कूल पहुंचते हैं। कोरोना की पहली लहर के बाद पिछले साल मार्च में पहली बार स्कूलों को बंद किया गया था। इसके बाद स्कूलें प्रारंभ तो हो गई, लेकिन बीस महीने बाद ऐसी स्थिति बनेगी, जिसमें सभी बच्चे एक साथ स्कूल जाएंगे। हालांकि अभी कई अभिभावक ऐसे हैं जो बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहते इसलिए वे चाहते हैं कि पढ़ाई के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों विकल्प उपलब्ध कराए जाएं। दूसरी ओर, निजी स्कूल संचालक विभाग की एसओपी का इंतजार कर रहे हैं। कई निजी स्कूल चाहते हैं कि बच्चे स्कूल में पढ़ाई करें। इसलिए उन्होंने ऑनलाइन कक्षाएं बंद कर दी है। ताकि बच्चे स्कूल आकर ही पढ़ाई कर सके। इसका अभिभावक विरोध भी कर रहे हैं। जबकि कई निजी स्कूल ऐसे भी है जो पूरी क्षमता के साथ स्कूलों का संचालन प्रारंभ होने के बावजूद अॉनलाइन पढ़ाई का विकल्प उपलब्ध कराएंगे। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
का मिश्रित जातियों के सिद्धान्त, कल्पित और बालकों के किस्से कहानियों से प्रमाणित होते है ? हमारे जो पाठक व गाल के चाण्डालो के विषय में कुछ भी जानकारी रखते हैं उन्हें उनकी बुद्धि कह देगी कि ये लोग दक्षिण-पूर्वी वांगाल के आदिम निवासी थे और वहाँ जो बहुतायत से खाड़ी और नहर है उनमें मछली मार कर अपनी जीविका निर्वाह करते थे और जब आर्य लोग वगाल में आकर वसे तो उन्होंने स्वभावतः हिन्दुओं का धर्म उनकी भाषा और सभ्यता ग्रहण कर ली ।
हम यह दिखला चुके हैं कि कैवर्त और चाण्डाल लोग जुदी-जुदी आदिवासीं जाति के थे और जब उन्हें विजयी आर्यों ने हिन्दू वनाया तब उनकी हिन्दू जातियों में गणना हुई । बौंगाल में ऐसे ही और भी है । पाठकगण उपरोक्त सूची में कोच, वाग्दी, पोद, वौरी, और तेोर लोगों का नाम देखेंगे, और ये सब भिन्न-भिन्न हैं। बंगाल में हिन्दुप्रो के आने के पहले ये भिन्न-भिन्न जातियाँ आदिवासी जाति की थीं और न् प्राचीन काल की प्रत्येक शताब्दी में वे विजयी हिन्दुओं को शरण ती गईं एवं उनकी भाषा, धर्म और जोतने वाने की रीति को ग्रहण करके हिन्दुओं की जाति में नीच जातियां वन गई । वंगाल की इन जातियों में से बहुत से नाम मनु को विदित नहीं थे। जो में जातियां इसको विदित थीं उनकी उत्पति के विषय में कोई एतिहासिक अथवा मनुष्य गणना के प्रमाण न होने के कारण उसने अपने ही सिद्धान्तों के अनुसार उनकी उत्पत्ति वर्णन करने का यत्न किया गया है ।
अब हम इन उपजातियों को छोड़ कर व्यवसाय करने वाली जातियों का उल्लेख करेंगे। उपरोक्त सूची में पाठकों को कायस्थ अथवा लेखक, गोल अर्थात् गाय रखने वाले, नापित अर्थात् हजाम, तेली अर्थात् तेल बनाने वाले, जेलियों अर्थात् मा है, तांती अर्थात् कपड़ा बीननेवाले, वनियां अर्थात् व्यापारी, कुमर अर्थात् लोहार, कुम्हार अर्थात् के वर्तन बनाने वाले, धोबी अर्थात् कपड़ा धोने वाले इत्यादि जातियों के नाम मिलेंगे । यह वात भुत है कि कि मनु की मिश्रित जातियों की सूची में कुछ उपजातियों के नाम मिलते हैं परन्तु उस सूची में व्यवसाय करने वाली एक भी जाति का नाम नहीं मिलता । तो क्या ये व्यवसाय मनु के समय में थे ही नहीं ? क्या मनु के समय में लेखक और व्यापारी लोग, लोहार, और कुम्हार लोग, हज्जाम और धोबी लोग थे ही नहीं ? यह कल्पना विना सिर पैर की है, क्योंकि मनु के समय में भारतवर्ष सभ्यता में चढ़ा बढ़ा था और मनु ने अपनी स्मृति में इनके व्यवसाय का उल्लेख भी किया है । परन्तु उसने अपनी मिश्रित जातियों की सूची में उनका उल्लेख नहीं किया और न उन्हें
जाति को भांति कहीं लिखा है। इससे यह बात दृढ़ निश्चय के साथ प्रमाणित होती है कि मनु के समय में ये भिन्न-भिन्न व्यवसाय केवल व्यवसाय ही थे । उनको भिन्न-भिन्न और जातियां नहीं बनी थीं । वैश्य लोगों की और ऐसे ही शुद्ध लोगों की भी अब तक एक हो नाति थी यद्यपि वे लोग भिन्न-भिन्न व्यवसाय और व्यापार करते थे ।
अब हमको उन व्यवसाय की जातियों की सच्ची उत्पत्ति का पता लग गया जो कि मनु के समय में नहीं थीं और जो उसके उपरान्त बनी है । हमको उन उपजातियों को उत्पत्ति भी विदित हो गई जो कि मनु के समय के पहले बन गई थी और जो मनु को विदित थी । अन्त में हमें यह भी विदित हो गया कि मनु ने उपजातियों की उत्पत्ति लिखने में कैसी भूल की है । मनु की भूल ऐसी थी जिससे वह वच नहीं सकता था । उसने कैवतों और चाण्डालों की तरह भिन्न-भिन्न जातियाँ देख और उसे उन जातियों की उत्पत्ति का इतिहान विदित नहीं था । उनके समय में यह धार्मिक कथा प्रचलित थी कि सब मनुष्य जाति की चार मुख्य जातियों में ही उत्पत्ति हुई है और इसलिये उसे अपने समय की नई जातियों की उत्पत्ति के लिये भी इसी प्राचीन सिद्धान्त का आश्रय लेना पड़ा । यह सब बात समझ में करने योग्य है । जो बात समझ में नहीं तो वह यह है कि इस प्राचीन वारदेि हासिक खोज और गणना के समय में भी कुछ हिन्दू लोग कैसे विश्वास नहीं है। य इस स्मृति की पवित्रता ही ऐतिहासिक खोज को दूर भगाती है. है और गुण और दोष की परीक्षा करने वालो कामहद है कि मिश्रित जातियों का प्राचीन सिद्धान्त बहुत से प्रमाणी औरत के सी हुए भी इतनी शताव्दियों तक मान और रीड से देखा है।
जाँच तथा झूठ और सच की परीक्षा न किए जाने से यह सिद हिन्दुओं के विचार और विश्वास में स्थान पाता है। फिर भी हमिहि ऐसा सभ्य और समझ में आने योग्य तथा ऐरी है सोडा की झोली हुए जाने के साथ ही साबुन के एक वृन्दर बुलबुले के सातुन होता है।
एक्तालीसवाँ अध्याय
मनु ने गृह विधानों का जो वृत्तान्त लिखा है वह प्राचीन सूत्रकारों के आधार पर ही है । जात कर्म बच्चे के जनमते ही नारा काटे जाने के पहले होना चाहिये । जन्म के दसवें अथवा बारहवें दिन अथवा किसी शुभ दिन शुभ मुहूर्त और शुभ -नक्षत्र में नाम करण की रीति की जानी चाहिये और बच्चों का नाम रक्खा जाना चाहिये । चौथे मास में निष्क्रमण की रीति करके बच्चे को घर के बाहर निकालना चाहिये और छठें मास में बच्चे के अन्नप्रासन अर्थात् उसे पहली बार चावल खिलाने की रीति की जानी चाहिये । उपनयन अर्थात् विद्यारम्भ कराने की रोति ब्राह्मण के लिये आठवें वर्ष, क्षत्रिय के लिये ग्यारहवें वर्ष और वैश्य के लिये वारहवें वर्ष में की जानी चाहिये और तब लड़के को यज्ञोपवीत पहना कर गुरू को सौंपना चाहिये ।
विद्यार्थी के जीवन के नियम वे ही हैं जो कि धर्मसूत्रो में कहे गये हैं । विद्यार्थी को एक धोतो, एक छड़ी और एक या दो कपड़े होने चाहिये । उसे अपने गुरु की आज्ञा माननी और उसका सत्कार करना चाहिये । उसे नित्य द्वार द्वार भीख मांग कर जो कुछ मिले उसे गुरू के सामने ला रखना चाहिये और प्रतिदिन जब कि वह विद्या सीखता जाय तो उसे अपने गुरु के यहाँ रह कर उसको सब प्रकार की नीच सेवा भी करनी चाहिये । केशान्त अर्थात् सिर मुड़ाने की रीति ब्राह्मण के लिये १६ वें वर्ष, क्षत्रिय के लिये २२ वें वर्ष और वैश्य के लिये २४ वें वर्ष की जाना चाहिये ।
तोनों वेदों के पढ़ने का समय ३६ वर्ष अथवा जब तक विद्यार्थी पूरी तरह से न पढ़ लें, कहा गया हैं । यहाँ पर ( ३, १ ) हमें चौये वेद का नाम नहीं मिलता और न थन् सीखने के लिये कोई सनय नियत किया गया है। विद्यार्थी अपना अध्ययन समाप्त करने पर स्नान करके स्नातक हो जाता था और घर लौट कर विवाह करता था, फिर गृहस्थ हो कर रहता था । विवाह के समय पवित्र अग्नि जलायी | का मिश्रित जातियों के सिद्धान्त, कल्पित और बालकों के किस्से कहानियों से प्रमाणित होते है ? हमारे जो पाठक व गाल के चाण्डालो के विषय में कुछ भी जानकारी रखते हैं उन्हें उनकी बुद्धि कह देगी कि ये लोग दक्षिण-पूर्वी वांगाल के आदिम निवासी थे और वहाँ जो बहुतायत से खाड़ी और नहर है उनमें मछली मार कर अपनी जीविका निर्वाह करते थे और जब आर्य लोग वगाल में आकर वसे तो उन्होंने स्वभावतः हिन्दुओं का धर्म उनकी भाषा और सभ्यता ग्रहण कर ली । हम यह दिखला चुके हैं कि कैवर्त और चाण्डाल लोग जुदी-जुदी आदिवासीं जाति के थे और जब उन्हें विजयी आर्यों ने हिन्दू वनाया तब उनकी हिन्दू जातियों में गणना हुई । बौंगाल में ऐसे ही और भी है । पाठकगण उपरोक्त सूची में कोच, वाग्दी, पोद, वौरी, और तेोर लोगों का नाम देखेंगे, और ये सब भिन्न-भिन्न हैं। बंगाल में हिन्दुप्रो के आने के पहले ये भिन्न-भिन्न जातियाँ आदिवासी जाति की थीं और न् प्राचीन काल की प्रत्येक शताब्दी में वे विजयी हिन्दुओं को शरण ती गईं एवं उनकी भाषा, धर्म और जोतने वाने की रीति को ग्रहण करके हिन्दुओं की जाति में नीच जातियां वन गई । वंगाल की इन जातियों में से बहुत से नाम मनु को विदित नहीं थे। जो में जातियां इसको विदित थीं उनकी उत्पति के विषय में कोई एतिहासिक अथवा मनुष्य गणना के प्रमाण न होने के कारण उसने अपने ही सिद्धान्तों के अनुसार उनकी उत्पत्ति वर्णन करने का यत्न किया गया है । अब हम इन उपजातियों को छोड़ कर व्यवसाय करने वाली जातियों का उल्लेख करेंगे। उपरोक्त सूची में पाठकों को कायस्थ अथवा लेखक, गोल अर्थात् गाय रखने वाले, नापित अर्थात् हजाम, तेली अर्थात् तेल बनाने वाले, जेलियों अर्थात् मा है, तांती अर्थात् कपड़ा बीननेवाले, वनियां अर्थात् व्यापारी, कुमर अर्थात् लोहार, कुम्हार अर्थात् के वर्तन बनाने वाले, धोबी अर्थात् कपड़ा धोने वाले इत्यादि जातियों के नाम मिलेंगे । यह वात भुत है कि कि मनु की मिश्रित जातियों की सूची में कुछ उपजातियों के नाम मिलते हैं परन्तु उस सूची में व्यवसाय करने वाली एक भी जाति का नाम नहीं मिलता । तो क्या ये व्यवसाय मनु के समय में थे ही नहीं ? क्या मनु के समय में लेखक और व्यापारी लोग, लोहार, और कुम्हार लोग, हज्जाम और धोबी लोग थे ही नहीं ? यह कल्पना विना सिर पैर की है, क्योंकि मनु के समय में भारतवर्ष सभ्यता में चढ़ा बढ़ा था और मनु ने अपनी स्मृति में इनके व्यवसाय का उल्लेख भी किया है । परन्तु उसने अपनी मिश्रित जातियों की सूची में उनका उल्लेख नहीं किया और न उन्हें जाति को भांति कहीं लिखा है। इससे यह बात दृढ़ निश्चय के साथ प्रमाणित होती है कि मनु के समय में ये भिन्न-भिन्न व्यवसाय केवल व्यवसाय ही थे । उनको भिन्न-भिन्न और जातियां नहीं बनी थीं । वैश्य लोगों की और ऐसे ही शुद्ध लोगों की भी अब तक एक हो नाति थी यद्यपि वे लोग भिन्न-भिन्न व्यवसाय और व्यापार करते थे । अब हमको उन व्यवसाय की जातियों की सच्ची उत्पत्ति का पता लग गया जो कि मनु के समय में नहीं थीं और जो उसके उपरान्त बनी है । हमको उन उपजातियों को उत्पत्ति भी विदित हो गई जो कि मनु के समय के पहले बन गई थी और जो मनु को विदित थी । अन्त में हमें यह भी विदित हो गया कि मनु ने उपजातियों की उत्पत्ति लिखने में कैसी भूल की है । मनु की भूल ऐसी थी जिससे वह वच नहीं सकता था । उसने कैवतों और चाण्डालों की तरह भिन्न-भिन्न जातियाँ देख और उसे उन जातियों की उत्पत्ति का इतिहान विदित नहीं था । उनके समय में यह धार्मिक कथा प्रचलित थी कि सब मनुष्य जाति की चार मुख्य जातियों में ही उत्पत्ति हुई है और इसलिये उसे अपने समय की नई जातियों की उत्पत्ति के लिये भी इसी प्राचीन सिद्धान्त का आश्रय लेना पड़ा । यह सब बात समझ में करने योग्य है । जो बात समझ में नहीं तो वह यह है कि इस प्राचीन वारदेि हासिक खोज और गणना के समय में भी कुछ हिन्दू लोग कैसे विश्वास नहीं है। य इस स्मृति की पवित्रता ही ऐतिहासिक खोज को दूर भगाती है. है और गुण और दोष की परीक्षा करने वालो कामहद है कि मिश्रित जातियों का प्राचीन सिद्धान्त बहुत से प्रमाणी औरत के सी हुए भी इतनी शताव्दियों तक मान और रीड से देखा है। जाँच तथा झूठ और सच की परीक्षा न किए जाने से यह सिद हिन्दुओं के विचार और विश्वास में स्थान पाता है। फिर भी हमिहि ऐसा सभ्य और समझ में आने योग्य तथा ऐरी है सोडा की झोली हुए जाने के साथ ही साबुन के एक वृन्दर बुलबुले के सातुन होता है। एक्तालीसवाँ अध्याय मनु ने गृह विधानों का जो वृत्तान्त लिखा है वह प्राचीन सूत्रकारों के आधार पर ही है । जात कर्म बच्चे के जनमते ही नारा काटे जाने के पहले होना चाहिये । जन्म के दसवें अथवा बारहवें दिन अथवा किसी शुभ दिन शुभ मुहूर्त और शुभ -नक्षत्र में नाम करण की रीति की जानी चाहिये और बच्चों का नाम रक्खा जाना चाहिये । चौथे मास में निष्क्रमण की रीति करके बच्चे को घर के बाहर निकालना चाहिये और छठें मास में बच्चे के अन्नप्रासन अर्थात् उसे पहली बार चावल खिलाने की रीति की जानी चाहिये । उपनयन अर्थात् विद्यारम्भ कराने की रोति ब्राह्मण के लिये आठवें वर्ष, क्षत्रिय के लिये ग्यारहवें वर्ष और वैश्य के लिये वारहवें वर्ष में की जानी चाहिये और तब लड़के को यज्ञोपवीत पहना कर गुरू को सौंपना चाहिये । विद्यार्थी के जीवन के नियम वे ही हैं जो कि धर्मसूत्रो में कहे गये हैं । विद्यार्थी को एक धोतो, एक छड़ी और एक या दो कपड़े होने चाहिये । उसे अपने गुरु की आज्ञा माननी और उसका सत्कार करना चाहिये । उसे नित्य द्वार द्वार भीख मांग कर जो कुछ मिले उसे गुरू के सामने ला रखना चाहिये और प्रतिदिन जब कि वह विद्या सीखता जाय तो उसे अपने गुरु के यहाँ रह कर उसको सब प्रकार की नीच सेवा भी करनी चाहिये । केशान्त अर्थात् सिर मुड़ाने की रीति ब्राह्मण के लिये सोलह वें वर्ष, क्षत्रिय के लिये बाईस वें वर्ष और वैश्य के लिये चौबीस वें वर्ष की जाना चाहिये । तोनों वेदों के पढ़ने का समय छत्तीस वर्ष अथवा जब तक विद्यार्थी पूरी तरह से न पढ़ लें, कहा गया हैं । यहाँ पर हमें चौये वेद का नाम नहीं मिलता और न थन् सीखने के लिये कोई सनय नियत किया गया है। विद्यार्थी अपना अध्ययन समाप्त करने पर स्नान करके स्नातक हो जाता था और घर लौट कर विवाह करता था, फिर गृहस्थ हो कर रहता था । विवाह के समय पवित्र अग्नि जलायी |
मुंबईः कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप किस उद्योग में काम करते हैं, कड़ी मेहनत और समर्पण सफलता का नुस्खा है. इस कहावत पर विश्वास करते हुए, अभिनेत्री स्नेहा वाघ ने अपने पहले हिंदी टेलीविजन शो ज्योति के माध्यम से अपनी यात्रा के बारे में बात की, जो इस समय दंगल टीवी पर प्रसारित हो रही है.
लेकिन इसकी बाधाओं के बिना एक यात्रा क्या है और उसके प्रदर्शन को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्धता के बारे में बात कर रही है, उन्होंने कहा,"मुझे शब्दों का उच्चारण करने और भाषा को सही तरीके से प्राप्त करने के लिए बहुत सारे प्रशिक्षण से गुजरना पड़ा क्योंकि यह मेरा पहला हिंदी शो था.
पीछे देखते हुए, चुनौती को दूर करने के लिए संघर्ष ने उसे हिंदी टेलीविजन उद्योग में एक अच्छा स्थान खोजने के लिए मार्ग प्रशस्त किया.
ज्योति एक कहानी है कि कैसे एक युवा महिला अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने सपनों का बलिदान करती है. वह सभी प्रकार की बाधाओं पर विजय प्राप्त करती है ताकि उसका परिवार एक सभ्य जीवन जी सके.
| मुंबईः कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप किस उद्योग में काम करते हैं, कड़ी मेहनत और समर्पण सफलता का नुस्खा है. इस कहावत पर विश्वास करते हुए, अभिनेत्री स्नेहा वाघ ने अपने पहले हिंदी टेलीविजन शो ज्योति के माध्यम से अपनी यात्रा के बारे में बात की, जो इस समय दंगल टीवी पर प्रसारित हो रही है. लेकिन इसकी बाधाओं के बिना एक यात्रा क्या है और उसके प्रदर्शन को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्धता के बारे में बात कर रही है, उन्होंने कहा,"मुझे शब्दों का उच्चारण करने और भाषा को सही तरीके से प्राप्त करने के लिए बहुत सारे प्रशिक्षण से गुजरना पड़ा क्योंकि यह मेरा पहला हिंदी शो था. पीछे देखते हुए, चुनौती को दूर करने के लिए संघर्ष ने उसे हिंदी टेलीविजन उद्योग में एक अच्छा स्थान खोजने के लिए मार्ग प्रशस्त किया. ज्योति एक कहानी है कि कैसे एक युवा महिला अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने सपनों का बलिदान करती है. वह सभी प्रकार की बाधाओं पर विजय प्राप्त करती है ताकि उसका परिवार एक सभ्य जीवन जी सके. |
कोविड की दूसरी लहर के कारण बीमाकर्ता अपने प्रावधान को बढ़ाने के लिए मजबूर हो रहे हैं। इसकी वजह यह है कि दूसरी लहर में पहली लहर के मुकाबले अधिक मौतें हुई हैं और जीवन बीमाकर्ताओं को पहली तिमाही में अधिक दावे मिले हैं। यह वित्त वर्ष के आरंभ में निर्धारित रखी गई रकम से अधिक है। वित्त वर्ष 2022 की अप्रैल से जून तिमाही में बीमाकर्ताओं ने कोविड के कारण मृत्यु दावों में भारी उछाल देखी है। विशेषज्ञों का कहना है कि पहली तिमाही में कोविड से संबंधित मृत्यु दावों की संख्या समूचे वित्त वर्ष 2021 में मिले कोविड संबंधी मृत्यु दावों की संचयी संख्या से अधिक है। उन्होंने कहा कि समग्र दावों का बोझ भी कोविड दावों की बढ़ती संख्या के कारण बढ़ गया है। निजी क्षेत्र के दो सबसे बड़े जीवन बीमाकर्ता आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल और एचडीएफसी लाइफ ने पहली तिमाही के आंकड़े जारी किए हैं। इन दोनों बीमाकर्ताओं ने अगले तीन महीनों में कोविड संबंधी मृत्यु दावे अधिक रहने का अनुमान लगाकर और अधिक प्रावधान निर्धारित किए हैं। एचडीएफसी लाइफ ने अतिरिक्त दावों के निपटारे के लिए 700 करोड़ रुपये का अतिरिक्त कोष स्थापित की है। इसी तरह से आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल ने अप्रैल-जून तिमाही के अंत में अपने प्रावधानों को बढ़कार 500 करोड़ रुपये कर दिया जबकि वित्त वर्ष 2021 की चौथी तिमाही के बाद उसने इसके लिए 332 करोड़ रुपये रखा था। एचडीएफसी लाइफ के मुताबिक बीती तिमाही में उसे मृत्यु दावों में भारी उछाल नजर आई। दूसरी लहर में मिलने वाले चोटी के दावों की संख्या पहली लहर में मिलने वाले चोटी के दावों की संख्या से करीब 3 से 4 गुना अधिक रही। कंपनी ने कहा, 'हमने पहली तिमाही में 70,000 दावों से अधिक का भुगतान किया। सकल और शुद्घ दावों की राशि क्रमशः 1,598 करोड़ रुपये और 956 करोड़ रुपये रही। ' आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल वित्त वर्ष 2022 की पहली तिमाही में कोविड संबंधी मृत्यु दावों के तौर पर करीब 500 करोड़ रुपये का भुगतान किया। यह रकम कंपनी द्वारा वित्त वर्ष 2021 में कोविड संबंधी मृत्यु दावों के लिए किए गए भुगतान से 2. 5 गुना अधिक है। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल के मुख्य वित्त अधिकारी (सीएफओ) सत्यन जंबूनाथन ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा, 'वित्त वर्ष 2022 की पहली तिमाही के लिए कोविड-19 से संबंधित मिलने वाले दावे करीब 500 करोड़ रुपये के रहे। परिस्थिति की गंभीरता को देखते हुए हमने सोचा कि प्रावधान रकम को संशोधित कर 500 करोड़ रुपये करना सही होगा। हमारा मानना है कि कोविड-19 से संबंधित दावे जब तक 1,000 करोड़ रुपये की सीमा में रहेंगे हम इसे झेलने के लिए तैयार हैं। पहली तिमाही में मिलने वाले 500 करोड़ के दावे पिछले वित्त वर्ष में मिले दावों की तुलना में करीब 5 गुना अधिक है। परिस्थितियों को देखते हुए दावों के आने में देरी होती है। इसलिए कोविड-19 संबंधी दावों के लिए प्रावधानों से ऊपर हम 380 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान लेकर चल रहे हैं जो कि महमारी से संबंधित दावों को छोड़कर देरी से आने वाले दावों के लिए है। '
Apple जल्द Samsung को पछाड़ बन जाएगी भारत की सबसे बड़ी स्मार्टफोन निर्यातक !
| कोविड की दूसरी लहर के कारण बीमाकर्ता अपने प्रावधान को बढ़ाने के लिए मजबूर हो रहे हैं। इसकी वजह यह है कि दूसरी लहर में पहली लहर के मुकाबले अधिक मौतें हुई हैं और जीवन बीमाकर्ताओं को पहली तिमाही में अधिक दावे मिले हैं। यह वित्त वर्ष के आरंभ में निर्धारित रखी गई रकम से अधिक है। वित्त वर्ष दो हज़ार बाईस की अप्रैल से जून तिमाही में बीमाकर्ताओं ने कोविड के कारण मृत्यु दावों में भारी उछाल देखी है। विशेषज्ञों का कहना है कि पहली तिमाही में कोविड से संबंधित मृत्यु दावों की संख्या समूचे वित्त वर्ष दो हज़ार इक्कीस में मिले कोविड संबंधी मृत्यु दावों की संचयी संख्या से अधिक है। उन्होंने कहा कि समग्र दावों का बोझ भी कोविड दावों की बढ़ती संख्या के कारण बढ़ गया है। निजी क्षेत्र के दो सबसे बड़े जीवन बीमाकर्ता आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल और एचडीएफसी लाइफ ने पहली तिमाही के आंकड़े जारी किए हैं। इन दोनों बीमाकर्ताओं ने अगले तीन महीनों में कोविड संबंधी मृत्यु दावे अधिक रहने का अनुमान लगाकर और अधिक प्रावधान निर्धारित किए हैं। एचडीएफसी लाइफ ने अतिरिक्त दावों के निपटारे के लिए सात सौ करोड़ रुपये का अतिरिक्त कोष स्थापित की है। इसी तरह से आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल ने अप्रैल-जून तिमाही के अंत में अपने प्रावधानों को बढ़कार पाँच सौ करोड़ रुपये कर दिया जबकि वित्त वर्ष दो हज़ार इक्कीस की चौथी तिमाही के बाद उसने इसके लिए तीन सौ बत्तीस करोड़ रुपये रखा था। एचडीएफसी लाइफ के मुताबिक बीती तिमाही में उसे मृत्यु दावों में भारी उछाल नजर आई। दूसरी लहर में मिलने वाले चोटी के दावों की संख्या पहली लहर में मिलने वाले चोटी के दावों की संख्या से करीब तीन से चार गुना अधिक रही। कंपनी ने कहा, 'हमने पहली तिमाही में सत्तर,शून्य दावों से अधिक का भुगतान किया। सकल और शुद्घ दावों की राशि क्रमशः एक,पाँच सौ अट्ठानवे करोड़ रुपये और नौ सौ छप्पन करोड़ रुपये रही। ' आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल वित्त वर्ष दो हज़ार बाईस की पहली तिमाही में कोविड संबंधी मृत्यु दावों के तौर पर करीब पाँच सौ करोड़ रुपये का भुगतान किया। यह रकम कंपनी द्वारा वित्त वर्ष दो हज़ार इक्कीस में कोविड संबंधी मृत्यु दावों के लिए किए गए भुगतान से दो. पाँच गुना अधिक है। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल के मुख्य वित्त अधिकारी सत्यन जंबूनाथन ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा, 'वित्त वर्ष दो हज़ार बाईस की पहली तिमाही के लिए कोविड-उन्नीस से संबंधित मिलने वाले दावे करीब पाँच सौ करोड़ रुपये के रहे। परिस्थिति की गंभीरता को देखते हुए हमने सोचा कि प्रावधान रकम को संशोधित कर पाँच सौ करोड़ रुपये करना सही होगा। हमारा मानना है कि कोविड-उन्नीस से संबंधित दावे जब तक एक,शून्य करोड़ रुपये की सीमा में रहेंगे हम इसे झेलने के लिए तैयार हैं। पहली तिमाही में मिलने वाले पाँच सौ करोड़ के दावे पिछले वित्त वर्ष में मिले दावों की तुलना में करीब पाँच गुना अधिक है। परिस्थितियों को देखते हुए दावों के आने में देरी होती है। इसलिए कोविड-उन्नीस संबंधी दावों के लिए प्रावधानों से ऊपर हम तीन सौ अस्सी करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान लेकर चल रहे हैं जो कि महमारी से संबंधित दावों को छोड़कर देरी से आने वाले दावों के लिए है। ' Apple जल्द Samsung को पछाड़ बन जाएगी भारत की सबसे बड़ी स्मार्टफोन निर्यातक ! |
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के थाना बेहट क्षेत्र में एक हैडपंप को लेकर राजनीति गरमा गई है। मनिहारान मोहल्ले में दुकानदारों की गुजारिश पर उखाड़े गए इस हैंडपंप को लगाने को लेकर माहौल तनावपूर्ण होता जा रहा है। इसे लगाने को लेकर कांग्रेस विधायक और भीम आर्मी के कुछ कार्यकर्ता धरना दे रहे हैं। बजरंग दल के कार्यकर्ता हैंडपंप लगाने का विरोध कर रहे हैं।
इस मामले ने मंगलवार को तब तूल पकड़ा जब विरोध जताने जा रहे कांग्रेस विधायक नरेश सैनी और विधायक मसूद अख्तर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इन दोनों विधायकों को सहारनपुर भेज दिया गया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव इमरान मसूद पकड़े गए दोनों विधायकों को छुड़ाने के लिए सहारनपुर पुलिस लाइन पहुंच गए हैं। उनके साथ भारी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता भी मौके पर मौजूद हैं। एसपी देहात अतुल शर्मा का कहना है कि विधायकों को वापस सहारनपुर भेजा गया है, वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
आपको बता दें कि सहारनपुर के थाना बेहट क्षेत्र के एक मोहल्ले में हैंडपंप लगवाने को लेकर कांग्रेसी कई दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। इसी मामले को लेकर विधायक नरेश सैनी और मसूद अख्तर ने धरना भी दिया था। लेकिन प्रशासन की सूझबूझ से दोनों पक्षों को समझा दिया गया था। मंगलवार सुबह यह माहौल फिर गरम हो गया। जैसे ही विधायक नरेश सैनी और मसूद अख्तर बेहट में पहुंचे तो अपर जिलाधिकारी एसबी सिंह की मौजूदगी में पुलिस ने उन्हें रोक किया। इस दौरान अधिकारियों से विधायक की नोकझोंक भी हुई, जिसके बाद दोनों विधायकों को पुलिस ने एसडीएम बेहट की कार में बैठाने का प्रयास किया। कुछ देर के लिए विधायक सड़क पर ही धरना देकर बैठ गए। इसके बाद दोनों विधायकों को कार में बैठाकर सहारनपुर की तरफ भेज दिया गया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी भी की।
मामला बेहट के मोहल्ला मनिहारान का है। चालीस साल पहले पृथ्वी कांबोज ने यहां एक हैंडपंप लगवाया था। जिसे मोहल्ले में दुकान करने वाले एक दुकानदार ने प्रशासन से शिकायत करके कुछ दिन पहले हटवा दिया था। इस कार्रवाई के विरोध में बेहट विधायक नरेश सैनी और सहारनपुर देहात विधायक मसूद अख्तर धरना देकर बैठ गए थे। इस कार्रवाई के विरोध में बेहट नगर पंचायत अध्यक्ष अब्दुल रहमान व पूर्व एमएलसी उमर अली खान भी धरने में शामिल हो गए।
बेहट एसडीएम ने किसी तरह से इन्हें समझा कर शांत कर दिया था। सोमवार को बजरंग दल ने मोर्चा खोल दिया और कहा कि अब हैंडपंप दुबारा उसी स्थान पर नहीं लगेगा। बजरंगल दल कार्यकर्ताओं ने थाने में प्रदर्शन और हनुमान चालीसा का पाठ भी किया था। अब भीम आर्मी पदाधिकारियों का कहना है कि जब तक नल दुबारा मौके पर नहीं जाता है, तब तक वह उठने वाले नहीं हैं।
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| उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के थाना बेहट क्षेत्र में एक हैडपंप को लेकर राजनीति गरमा गई है। मनिहारान मोहल्ले में दुकानदारों की गुजारिश पर उखाड़े गए इस हैंडपंप को लगाने को लेकर माहौल तनावपूर्ण होता जा रहा है। इसे लगाने को लेकर कांग्रेस विधायक और भीम आर्मी के कुछ कार्यकर्ता धरना दे रहे हैं। बजरंग दल के कार्यकर्ता हैंडपंप लगाने का विरोध कर रहे हैं। इस मामले ने मंगलवार को तब तूल पकड़ा जब विरोध जताने जा रहे कांग्रेस विधायक नरेश सैनी और विधायक मसूद अख्तर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इन दोनों विधायकों को सहारनपुर भेज दिया गया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव इमरान मसूद पकड़े गए दोनों विधायकों को छुड़ाने के लिए सहारनपुर पुलिस लाइन पहुंच गए हैं। उनके साथ भारी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता भी मौके पर मौजूद हैं। एसपी देहात अतुल शर्मा का कहना है कि विधायकों को वापस सहारनपुर भेजा गया है, वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। आपको बता दें कि सहारनपुर के थाना बेहट क्षेत्र के एक मोहल्ले में हैंडपंप लगवाने को लेकर कांग्रेसी कई दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। इसी मामले को लेकर विधायक नरेश सैनी और मसूद अख्तर ने धरना भी दिया था। लेकिन प्रशासन की सूझबूझ से दोनों पक्षों को समझा दिया गया था। मंगलवार सुबह यह माहौल फिर गरम हो गया। जैसे ही विधायक नरेश सैनी और मसूद अख्तर बेहट में पहुंचे तो अपर जिलाधिकारी एसबी सिंह की मौजूदगी में पुलिस ने उन्हें रोक किया। इस दौरान अधिकारियों से विधायक की नोकझोंक भी हुई, जिसके बाद दोनों विधायकों को पुलिस ने एसडीएम बेहट की कार में बैठाने का प्रयास किया। कुछ देर के लिए विधायक सड़क पर ही धरना देकर बैठ गए। इसके बाद दोनों विधायकों को कार में बैठाकर सहारनपुर की तरफ भेज दिया गया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी भी की। मामला बेहट के मोहल्ला मनिहारान का है। चालीस साल पहले पृथ्वी कांबोज ने यहां एक हैंडपंप लगवाया था। जिसे मोहल्ले में दुकान करने वाले एक दुकानदार ने प्रशासन से शिकायत करके कुछ दिन पहले हटवा दिया था। इस कार्रवाई के विरोध में बेहट विधायक नरेश सैनी और सहारनपुर देहात विधायक मसूद अख्तर धरना देकर बैठ गए थे। इस कार्रवाई के विरोध में बेहट नगर पंचायत अध्यक्ष अब्दुल रहमान व पूर्व एमएलसी उमर अली खान भी धरने में शामिल हो गए। बेहट एसडीएम ने किसी तरह से इन्हें समझा कर शांत कर दिया था। सोमवार को बजरंग दल ने मोर्चा खोल दिया और कहा कि अब हैंडपंप दुबारा उसी स्थान पर नहीं लगेगा। बजरंगल दल कार्यकर्ताओं ने थाने में प्रदर्शन और हनुमान चालीसा का पाठ भी किया था। अब भीम आर्मी पदाधिकारियों का कहना है कि जब तक नल दुबारा मौके पर नहीं जाता है, तब तक वह उठने वाले नहीं हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
Vaishali Takkar Mother Statement टीवी एक्ट्रेस वैशाली टक्कर की मौत के बाद उनकी मां का पहला स्टेटमेंट सामने आया है। उन्होंने अपनी बेटी के गुनहगारों को सजा दिलाने की मांग करते हुए हैरान करने वाली बातें बताई हैं।
नई दिल्ली, जेएनएन। Vaishali Takkar Mother Statement: टीवी एक्ट्रेस वैशाली टक्कर की मौत ने पूरी इंडस्ट्री को हिला कर रख दिया है। पुलिस ने उनके शव को इंदौर स्थित अपार्टमेंट से बरामद किया था। वहीं, पुलिस को सुसाइड नोट मिला, जिसके आधार पर उन्होंने पड़ोसी बिजनसमैन राहुल नवलानी और उनकी पत्नी दिशा को गिरफ्तार कर लिया है। राहुल की गिरफ्तारी के बाद वैशाली टक्कर की मां का पहला रिएक्शन सामने आया है।
बेटी को खोने का गम क्या होता है, यह वैशाली टक्कर की मां के चेहरे पर साफ नजर आ रहा था। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने बताया कि उन्हें कुछ दिन पहले ही इस बात का पता चला था कि राहुल उनकी बेटी को परेशान कर रहा है। अगर हमे पता होता, तो हम उसे ढाई साल तक परेशान होने देते क्या? उन्होंने बताया कि राहुल की पत्नी दिशा को लगता था कि वैशाली की वजह से उसका घर टूट रहा है, जबकि राहुल की वजह से वैशाली की जिंदगी खराब रही थी।
वैशाली की मां ने कहा कि राहुल और वैशाली के बीच विवाद का कारण क्या था, इसका पता नहीं था। उसने हमें कुछ भी नहीं बताया था। जब राहुल के बारे में पता लगा तो उसके घर जाकर और उन्हें यहां बुलाकर बात भी की थी। कल जब वैशाली ने ये कदम उठाया, तो उसके पहले तक वो ठीक थी। रात 11:30 बजे तक मुझसे मिल कर गई थी, उसके बाद 11:30 से 12 के बीच उसने आत्महत्या कर ली। वैशाली की मां ने कहा कि हमने राहुल को समझाने की कोशिश की थी। उन्होंने राहुल को डांटा भी था।
उन्होंने कहा कि जो भी हुआ वह सबको पता है। सबने न्यूज देखी। मेरी बेटी ने राहुल नाम के शख्स का नाम सुसाइड नोट में लिखा है। राहुल को सजा मिलनी चाहिए। तभी मेरी बेटी की आत्मा को शांति मिलेगी।
| Vaishali Takkar Mother Statement टीवी एक्ट्रेस वैशाली टक्कर की मौत के बाद उनकी मां का पहला स्टेटमेंट सामने आया है। उन्होंने अपनी बेटी के गुनहगारों को सजा दिलाने की मांग करते हुए हैरान करने वाली बातें बताई हैं। नई दिल्ली, जेएनएन। Vaishali Takkar Mother Statement: टीवी एक्ट्रेस वैशाली टक्कर की मौत ने पूरी इंडस्ट्री को हिला कर रख दिया है। पुलिस ने उनके शव को इंदौर स्थित अपार्टमेंट से बरामद किया था। वहीं, पुलिस को सुसाइड नोट मिला, जिसके आधार पर उन्होंने पड़ोसी बिजनसमैन राहुल नवलानी और उनकी पत्नी दिशा को गिरफ्तार कर लिया है। राहुल की गिरफ्तारी के बाद वैशाली टक्कर की मां का पहला रिएक्शन सामने आया है। बेटी को खोने का गम क्या होता है, यह वैशाली टक्कर की मां के चेहरे पर साफ नजर आ रहा था। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने बताया कि उन्हें कुछ दिन पहले ही इस बात का पता चला था कि राहुल उनकी बेटी को परेशान कर रहा है। अगर हमे पता होता, तो हम उसे ढाई साल तक परेशान होने देते क्या? उन्होंने बताया कि राहुल की पत्नी दिशा को लगता था कि वैशाली की वजह से उसका घर टूट रहा है, जबकि राहुल की वजह से वैशाली की जिंदगी खराब रही थी। वैशाली की मां ने कहा कि राहुल और वैशाली के बीच विवाद का कारण क्या था, इसका पता नहीं था। उसने हमें कुछ भी नहीं बताया था। जब राहुल के बारे में पता लगा तो उसके घर जाकर और उन्हें यहां बुलाकर बात भी की थी। कल जब वैशाली ने ये कदम उठाया, तो उसके पहले तक वो ठीक थी। रात ग्यारह:तीस बजे तक मुझसे मिल कर गई थी, उसके बाद ग्यारह:तीस से बारह के बीच उसने आत्महत्या कर ली। वैशाली की मां ने कहा कि हमने राहुल को समझाने की कोशिश की थी। उन्होंने राहुल को डांटा भी था। उन्होंने कहा कि जो भी हुआ वह सबको पता है। सबने न्यूज देखी। मेरी बेटी ने राहुल नाम के शख्स का नाम सुसाइड नोट में लिखा है। राहुल को सजा मिलनी चाहिए। तभी मेरी बेटी की आत्मा को शांति मिलेगी। |
Hrithik Roshan In Brahmastra: बॉलीवुड की चर्चित फिल्म ब्रह्मास्त्र पार्ट 1: शिवा (Brahmastra Part 1: Shiva) सुपरहिट हो चुकी है. फिल्म ने दूसरे पार्ट की घोषणा के साथ दी एंड किया. इसके साथ ही ये खबर जोरों पर थी कि ब्रह्मास्त्र पार्ट 2: देव (Brahmastra Part 2: Dev) में देव का किरदार ऋतिक रोशन कर सकते हैं. ऋतिक रोशन ने इन खबरों पर रिएक्शन दिया है और मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि ब्रह्मास्त्र के दूसरे पार्ट में आएंगे या नहीं.
ब्रह्मास्त्र 2 को लेकर क्या बोले ऋतिक रोशन?
पीटीआई के मुताबिक, जब ऋतिक रोशन से ब्रह्मास्त्र 2 में होने का सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, 'क्या हो रहा है? कुछ नहीं हो रहा है. अगला प्रोजेक्ट फाइटर होगा और फिर भी अगर इन प्रोजेक्ट्स से जुड़ा तो बता दूंगा. ' इसके साथ ही ऋतिक ने फिंगर क्रॉस करके ये बातें कहीं.
फिल्म फाइटर सिद्धार्थ आनंद निर्देशित कर रहे हैं जिसे यशराज फिल्म्स बैनर तले बनाया जाएगा. फिल्म में ऋतिक रोशन पहली बार दीपिका पादुकोण के साथ नजर आएंगे. फिलहाल ऋतिक रोशन अपनी आने वाली फिल्म विक्रम वेधा के प्रमोशन में जुटे हैं. फिल्म 30 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी. इसमें ऋतिक ने एक गैंगस्टर का किरदार निभाया है जबकि सैफ अली खान ने एक पुलिस वाले का किरदार निभाया है.
यह भी पढ़ेंः सलमान खान बिग बॉस 16 के लिए कितनी फीस ले रहे हैं?
जानकारी के लिए बता दें, फिल्म ब्रह्मास्त्र पार्ट वनः शिवा बॉक्स ऑफिस पर सफल हुई. अब मेकर्स ने ब्रह्मास्त्र दूसरा पार्टः देव को 2025 तक लाने का ऐलान कर दिया है. हालांकि एक इवेंट में रणबीर सिंह ने कहा कि फिल्म के दोनों पार्ट्स जल्दी-जल्दी आएंगे क्योंकि फैंस ने पहली वाली को बहुत प्यार दिया है.
| Hrithik Roshan In Brahmastra: बॉलीवुड की चर्चित फिल्म ब्रह्मास्त्र पार्ट एक: शिवा सुपरहिट हो चुकी है. फिल्म ने दूसरे पार्ट की घोषणा के साथ दी एंड किया. इसके साथ ही ये खबर जोरों पर थी कि ब्रह्मास्त्र पार्ट दो: देव में देव का किरदार ऋतिक रोशन कर सकते हैं. ऋतिक रोशन ने इन खबरों पर रिएक्शन दिया है और मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि ब्रह्मास्त्र के दूसरे पार्ट में आएंगे या नहीं. ब्रह्मास्त्र दो को लेकर क्या बोले ऋतिक रोशन? पीटीआई के मुताबिक, जब ऋतिक रोशन से ब्रह्मास्त्र दो में होने का सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, 'क्या हो रहा है? कुछ नहीं हो रहा है. अगला प्रोजेक्ट फाइटर होगा और फिर भी अगर इन प्रोजेक्ट्स से जुड़ा तो बता दूंगा. ' इसके साथ ही ऋतिक ने फिंगर क्रॉस करके ये बातें कहीं. फिल्म फाइटर सिद्धार्थ आनंद निर्देशित कर रहे हैं जिसे यशराज फिल्म्स बैनर तले बनाया जाएगा. फिल्म में ऋतिक रोशन पहली बार दीपिका पादुकोण के साथ नजर आएंगे. फिलहाल ऋतिक रोशन अपनी आने वाली फिल्म विक्रम वेधा के प्रमोशन में जुटे हैं. फिल्म तीस सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी. इसमें ऋतिक ने एक गैंगस्टर का किरदार निभाया है जबकि सैफ अली खान ने एक पुलिस वाले का किरदार निभाया है. यह भी पढ़ेंः सलमान खान बिग बॉस सोलह के लिए कितनी फीस ले रहे हैं? जानकारी के लिए बता दें, फिल्म ब्रह्मास्त्र पार्ट वनः शिवा बॉक्स ऑफिस पर सफल हुई. अब मेकर्स ने ब्रह्मास्त्र दूसरा पार्टः देव को दो हज़ार पच्चीस तक लाने का ऐलान कर दिया है. हालांकि एक इवेंट में रणबीर सिंह ने कहा कि फिल्म के दोनों पार्ट्स जल्दी-जल्दी आएंगे क्योंकि फैंस ने पहली वाली को बहुत प्यार दिया है. |
नई दिल्ली : जैन समाज के पर्यूषण पर्व को लेकर मुंबई में मांस की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसे लेकर राजनीतिक बहस छिड़ गई है। एक ओर जहां कांग्रेस विरोध में जुटी हुई है वहीं एमआईएम ने भी अपना विरोध जताया है। यही नहीं शिवसेना द्वारा भी इस मसले पर अपना रूख दर्शाया गया है। अब इस मसले को गुजरात में गौमांस को लेकर चस्पा किए गए पोस्टर विवाद से जोड़ा जा रहा है। इस मामले में एमआईएम प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि भाजपा गुजरात में झूठ की फैक्ट्री चला रही है।
कुरान में ऐसा नहीं लिखा है। सरकार झूठा प्रोपेगेंडा फैला रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी निवेशकों और उद्योगपतियों से भेंट कर रहे हैं। आखिर महाराष्ट्र में मांस नहीं मिलेगा तो लोग क्या खाऐंगे। लोगों का घर किस तरह से चलेगा। आखिर निवेशकों को क्या संदेश पहुंचेगा।
मुंबई में इस तरह के प्रतिबंध को 2 दिन तक कर देना चाहिए। उल्लेखनीय है कि मुंबई और मीरा-भायंदर क्षेत्र में पर्यूषण पर्व के चलते मांस की बिक्री पर पांच दिन का प्रतिबंध लगा दिया गया है। उल्लेखनीय है कि इस तरह की मांगों को धार्मिक रंग दिया जा रहा है जिससे लोगों की भावनाऐं भड़क रही हैं। ऐसे में देश में विकट स्थिति सामने आने की संभावनाऐं हैं।
| नई दिल्ली : जैन समाज के पर्यूषण पर्व को लेकर मुंबई में मांस की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसे लेकर राजनीतिक बहस छिड़ गई है। एक ओर जहां कांग्रेस विरोध में जुटी हुई है वहीं एमआईएम ने भी अपना विरोध जताया है। यही नहीं शिवसेना द्वारा भी इस मसले पर अपना रूख दर्शाया गया है। अब इस मसले को गुजरात में गौमांस को लेकर चस्पा किए गए पोस्टर विवाद से जोड़ा जा रहा है। इस मामले में एमआईएम प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि भाजपा गुजरात में झूठ की फैक्ट्री चला रही है। कुरान में ऐसा नहीं लिखा है। सरकार झूठा प्रोपेगेंडा फैला रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी निवेशकों और उद्योगपतियों से भेंट कर रहे हैं। आखिर महाराष्ट्र में मांस नहीं मिलेगा तो लोग क्या खाऐंगे। लोगों का घर किस तरह से चलेगा। आखिर निवेशकों को क्या संदेश पहुंचेगा। मुंबई में इस तरह के प्रतिबंध को दो दिन तक कर देना चाहिए। उल्लेखनीय है कि मुंबई और मीरा-भायंदर क्षेत्र में पर्यूषण पर्व के चलते मांस की बिक्री पर पांच दिन का प्रतिबंध लगा दिया गया है। उल्लेखनीय है कि इस तरह की मांगों को धार्मिक रंग दिया जा रहा है जिससे लोगों की भावनाऐं भड़क रही हैं। ऐसे में देश में विकट स्थिति सामने आने की संभावनाऐं हैं। |
गुजरात कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष हार्दिक पटेल (Hardik Patel) ने बगावती तेवर अपना लिया है। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस में उन्हें काम नहीं करने दिया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने खुद को राम भक्त बताया है। बीजेपी ने उनकी तारीफ की है।
अहमदाबाद। गुजरात में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। चुनाव से पहले कांग्रेस की परेशानी बढ़ गई है। गुजरात कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष हार्दिक पटेल (Hardik Patel) बागी हो गए हैं। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं। इसके साथ ही वह बीजेपी को भी संकेत दे रहे हैं।
हार्दिक पटेल ने शुक्रवार को एक बार फिर राज्य कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधा है। हालांकि उन्होंने बीजेपी में जाने की बात से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि कुछ चीजें जो भाजपा के बारे में अच्छी हैं, हमें यह स्वीकार करना चाहिए। भाजपा ने राजनीतिक रूप से जो हालिया फैसले लिए हैं, हमें स्वीकार करना होगा कि उनके पास इस तरह के कदम उठाने की ताकत है। मेरा मानना है कि उनका पक्ष लिए बिना या उनकी प्रशंसा किए बिना, हम कम से कम सच्चाई को स्वीकार कर सकते हैं। अगर कांग्रेस गुजरात में मजबूत बनना चाहती है तो हमें अपने निर्णय लेने के कौशल और निर्णय लेने की शक्ति में सुधार करना होगा।
इसके साथ ही हार्दिक पटेल ने कहा कि वे भगवान राम को मानते हैं। उन्होंने कहा कि मैं भगवान राम का भक्त हूं। मुझे हिंदू होने पर गर्व है। हार्दिक ने पिता के मृत्यु संस्कार पर 4000 भगवत गीता बांटने की घोषणा भी की है। गुजरात भाजपा प्रमुख सीआर पाटिल ने सार्वजनिक रूप से बोलने के लिए हार्दिक पटेल की प्रशंसा की है। बीजेपी प्रमुख ने कहा कि पूरा देश बीजेपी की विचारधारा से प्रभावित है। 2014 से नरेंद्र मोदी देश की सेवा कर रहे हैं। यह अच्छा है कि हार्दिक पटेल ने इसे सार्वजनिक रूप से बोला है। बहुत से लोग नहीं बोलते।
दरअसल, हार्दिक पटेल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से नाखुश बताए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गुजरात कांग्रेस के भीतर मुद्दे हैं, जिनका हल करने की आवश्यकता है। हार्दिक ने कहा कि गुजरात कांग्रेस की समस्या नेतृत्व से है। मुझे गुजरात में किसी भी व्यक्तिगत नेता के साथ कोई समस्या नहीं है। नेतृत्व किसी को भी काम करने नहीं देता है। यदि कोई काम करता है तो वे उन्हें रोकते हैं।
हार्दिक पटेल ने कहा, "मैंने पार्टी के हाई कमांड के साथ चिंता व्यक्त की है। उन्होंने मुझे आश्वासन दिया है कि एक निर्णय जल्द ही लिया जाएगा। यहां तक कि जब आप घर पर कुछ पसंद नहीं करते हैं तो आप व्यक्त करते हैं कि आप अपने पिता और मां से खुश नहीं हैं। मैं सच कह रहा हूं। इसलिए मुझे नहीं लगता कि मैं पार्टी छोड़ रहा हूं। " बता दें कि गुजरात कांग्रेस में गुटबाजी दिखाई दे रही है। कई नेताओं को पार्टी से नाखुश कहा जा रहा है। कुछ अन्य लोगों ने कांग्रेस छोड़ दी है। हार्दिक पटेल की नाराजगी गुजरात में कांग्रेस की समस्याओं को बढ़ा सकती है।
| गुजरात कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष हार्दिक पटेल ने बगावती तेवर अपना लिया है। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस में उन्हें काम नहीं करने दिया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने खुद को राम भक्त बताया है। बीजेपी ने उनकी तारीफ की है। अहमदाबाद। गुजरात में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। चुनाव से पहले कांग्रेस की परेशानी बढ़ गई है। गुजरात कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष हार्दिक पटेल बागी हो गए हैं। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं। इसके साथ ही वह बीजेपी को भी संकेत दे रहे हैं। हार्दिक पटेल ने शुक्रवार को एक बार फिर राज्य कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधा है। हालांकि उन्होंने बीजेपी में जाने की बात से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि कुछ चीजें जो भाजपा के बारे में अच्छी हैं, हमें यह स्वीकार करना चाहिए। भाजपा ने राजनीतिक रूप से जो हालिया फैसले लिए हैं, हमें स्वीकार करना होगा कि उनके पास इस तरह के कदम उठाने की ताकत है। मेरा मानना है कि उनका पक्ष लिए बिना या उनकी प्रशंसा किए बिना, हम कम से कम सच्चाई को स्वीकार कर सकते हैं। अगर कांग्रेस गुजरात में मजबूत बनना चाहती है तो हमें अपने निर्णय लेने के कौशल और निर्णय लेने की शक्ति में सुधार करना होगा। इसके साथ ही हार्दिक पटेल ने कहा कि वे भगवान राम को मानते हैं। उन्होंने कहा कि मैं भगवान राम का भक्त हूं। मुझे हिंदू होने पर गर्व है। हार्दिक ने पिता के मृत्यु संस्कार पर चार हज़ार भगवत गीता बांटने की घोषणा भी की है। गुजरात भाजपा प्रमुख सीआर पाटिल ने सार्वजनिक रूप से बोलने के लिए हार्दिक पटेल की प्रशंसा की है। बीजेपी प्रमुख ने कहा कि पूरा देश बीजेपी की विचारधारा से प्रभावित है। दो हज़ार चौदह से नरेंद्र मोदी देश की सेवा कर रहे हैं। यह अच्छा है कि हार्दिक पटेल ने इसे सार्वजनिक रूप से बोला है। बहुत से लोग नहीं बोलते। दरअसल, हार्दिक पटेल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से नाखुश बताए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गुजरात कांग्रेस के भीतर मुद्दे हैं, जिनका हल करने की आवश्यकता है। हार्दिक ने कहा कि गुजरात कांग्रेस की समस्या नेतृत्व से है। मुझे गुजरात में किसी भी व्यक्तिगत नेता के साथ कोई समस्या नहीं है। नेतृत्व किसी को भी काम करने नहीं देता है। यदि कोई काम करता है तो वे उन्हें रोकते हैं। हार्दिक पटेल ने कहा, "मैंने पार्टी के हाई कमांड के साथ चिंता व्यक्त की है। उन्होंने मुझे आश्वासन दिया है कि एक निर्णय जल्द ही लिया जाएगा। यहां तक कि जब आप घर पर कुछ पसंद नहीं करते हैं तो आप व्यक्त करते हैं कि आप अपने पिता और मां से खुश नहीं हैं। मैं सच कह रहा हूं। इसलिए मुझे नहीं लगता कि मैं पार्टी छोड़ रहा हूं। " बता दें कि गुजरात कांग्रेस में गुटबाजी दिखाई दे रही है। कई नेताओं को पार्टी से नाखुश कहा जा रहा है। कुछ अन्य लोगों ने कांग्रेस छोड़ दी है। हार्दिक पटेल की नाराजगी गुजरात में कांग्रेस की समस्याओं को बढ़ा सकती है। |
'पीटीसी नेटवर्क' ने पहली बार वर्ष 2013 में 'वॉयस ऑफ पंजाब छोटा चैंप' रियलिटी शो की शुरुआत पंजाब, पंजाबी और पंजाबियत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की थी।
पापुआ न्यू गिनी के एयरपोर्ट पर मेजबान देश के प्रधानमंत्री जेम्स मारापे ने पैर छूकर पीएम मोदी का स्वागत किया।
जस्टिस ऑगस्टाइन जॉर्ज मैसिस ने सबसे पहले गिरफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारी पर और बाद में मजिस्ट्रेट द्वारा दिए गए रिमांड आदेश पर सवाल उठाया।
भावना किशोर पर दलित महिला को कार से टक्कर मारने और उसके साथ गाली गलौज करने के आरोप में पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
फिक्की फ्रेम्स 2023 में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भारतीय सिनेमा को वैश्विक मानचित्र पर ले जाने की प्रतिबद्धता के लिए मीडिया व एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की सराहना की।
कंपनी ने फरवरी में 'BSE' को सूचित किया था कि उन्होंने ओझा की उम्मीदवारी पर विचार किया है और प्रबंधन को सूचना-प्रसारण मंत्रालय की पूर्व स्वीकृति के लिए आवश्यक आवेदन फाइल करने की सलाह दी है।
बता दें कि रजिस्टर्ड MSOs की कुल संख्या 12 अप्रैल, 2023 को 1,747 थी, जिसकी तुलना में 31 अप्रैल, 2023 तक 1,736 रह गई है।
पंजाब के पूर्व CM प्रकाश सिंह बादल ने 75 साल का सफल राजनीतिक जीवन जिया। इस दौरान वह 5 बार पंजाब के मुख्यमंत्री बनें।
तमाम विपक्षी नेता बीजेपी पर हमलावर हैं। वहीं कुछ लोगों ने असद अहमद के धर्म पर भी अपनी राजनीति करना शुरू कर दी है।
मंत्रालय ने इस संबंध में समाचार पत्रों, टेलीविजन चैनलों, डिजिटल मीडिया, ऑनलाइन विज्ञापन एजेंसियों और सभी मीडिया प्रारूपों के लिए यह एडवाइजरी जारी की है।
'भारतीय सूचना सेवा' (IIS) के अधिकारियों को संबोधित करते हुए बोले केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री, 'लोकतंत्र को सशक्त बनाने में करें सही सूचनाओं का इस्तेमाल'
पंजाब पुलिस ने अमृतपाल सिंह और उसके सहयोगियों के खिलाफ 18 मार्च को बड़ा अभियान शुरू किया था और उसके बाद से ही अमृतपाल सिंह भागा-भागा फिर रहा है।
समीर जैन 'बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड' (BCCL) के वाइस चेयरमैन और एमडी थे और उनकी पत्नी मीरा जैन 'बीसीसीएल' में पूर्णकालिक निदेशक थीं।
| 'पीटीसी नेटवर्क' ने पहली बार वर्ष दो हज़ार तेरह में 'वॉयस ऑफ पंजाब छोटा चैंप' रियलिटी शो की शुरुआत पंजाब, पंजाबी और पंजाबियत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की थी। पापुआ न्यू गिनी के एयरपोर्ट पर मेजबान देश के प्रधानमंत्री जेम्स मारापे ने पैर छूकर पीएम मोदी का स्वागत किया। जस्टिस ऑगस्टाइन जॉर्ज मैसिस ने सबसे पहले गिरफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारी पर और बाद में मजिस्ट्रेट द्वारा दिए गए रिमांड आदेश पर सवाल उठाया। भावना किशोर पर दलित महिला को कार से टक्कर मारने और उसके साथ गाली गलौज करने के आरोप में पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार किया था। फिक्की फ्रेम्स दो हज़ार तेईस में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भारतीय सिनेमा को वैश्विक मानचित्र पर ले जाने की प्रतिबद्धता के लिए मीडिया व एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की सराहना की। कंपनी ने फरवरी में 'BSE' को सूचित किया था कि उन्होंने ओझा की उम्मीदवारी पर विचार किया है और प्रबंधन को सूचना-प्रसारण मंत्रालय की पूर्व स्वीकृति के लिए आवश्यक आवेदन फाइल करने की सलाह दी है। बता दें कि रजिस्टर्ड MSOs की कुल संख्या बारह अप्रैल, दो हज़ार तेईस को एक,सात सौ सैंतालीस थी, जिसकी तुलना में इकतीस अप्रैल, दो हज़ार तेईस तक एक,सात सौ छत्तीस रह गई है। पंजाब के पूर्व CM प्रकाश सिंह बादल ने पचहत्तर साल का सफल राजनीतिक जीवन जिया। इस दौरान वह पाँच बार पंजाब के मुख्यमंत्री बनें। तमाम विपक्षी नेता बीजेपी पर हमलावर हैं। वहीं कुछ लोगों ने असद अहमद के धर्म पर भी अपनी राजनीति करना शुरू कर दी है। मंत्रालय ने इस संबंध में समाचार पत्रों, टेलीविजन चैनलों, डिजिटल मीडिया, ऑनलाइन विज्ञापन एजेंसियों और सभी मीडिया प्रारूपों के लिए यह एडवाइजरी जारी की है। 'भारतीय सूचना सेवा' के अधिकारियों को संबोधित करते हुए बोले केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री, 'लोकतंत्र को सशक्त बनाने में करें सही सूचनाओं का इस्तेमाल' पंजाब पुलिस ने अमृतपाल सिंह और उसके सहयोगियों के खिलाफ अट्ठारह मार्च को बड़ा अभियान शुरू किया था और उसके बाद से ही अमृतपाल सिंह भागा-भागा फिर रहा है। समीर जैन 'बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड' के वाइस चेयरमैन और एमडी थे और उनकी पत्नी मीरा जैन 'बीसीसीएल' में पूर्णकालिक निदेशक थीं। |
सर्वेषामभयं प्रवृद्धकरुद्दीयते प्राणिनां दानं स्यादभयावि तेन रहितं दानत्रयं निष्फलम् । आहारौषधशास्त्रदानविधिभिः क्षुद्रोगजाडघाभयं यत्तत्पात्रजने विनश्यति ततो दानं तदेकं परम् ॥११ आहारात्सुखितौषधादतितरां नीरोगता जायते शास्त्रात्पात्रनिवेदितात्परभवे पाण्डित्यमत्यद्भुतम् । एतत्सर्वगुणप्रभापरिकरः पुंसोऽभयाद्दानतः पर्यन्ते पुनरुन्नतोन्नत पदप्राप्तिर्विमुक्तिस्ततः ॥ १२
कृत्वा कार्यशतानि पापबहुलान्याश्रित्य खेवं परं
भ्रान्त्वा वारिधिमेखलां वसुमतों दुःखेन यच्चार्जितम् । तत्पुत्रादपि जीवितादपि धनं प्रेयोऽस्य पन्था शुभो
दानं तेन च वीयतामिदमहो नान्येन तत्सद्गतिः ॥१३ बानेनैव गृहस्थता गुणवतो लोकद्वयोद्योतिका नैव स्यान्ननु तद्विना धनवतो लोकद्वयध्वंसकृत् । दुर्व्यापारशतेषु सत्सु गृहिणः पापं यदुत्पद्यते तन्नाशाय शशाङ्कशुभ्रयशसे दानं न चान्यत्परम् ॥१४
ज्ञान दानके दनेपर भव्यजन कुछ ही भत्रोंमें त्रैलोक्य में उत्सव करनेवाली समवसरण लक्ष्मीको प्राप्तिके साथ समस्त जगत्को हस्त रेखाके समान प्रत्यक्ष देखनेवाले केवलज्ञान के धारक होते हैं ।।१०।।
निरन्तर वर्धमान करुणा ( दया ) के धारक श्रावकोंके द्वारा सभी प्राणियोंके भयको दूर कर और उन्हें निभ्य बनाकर जो उनकी रक्षा की जाती है, उसे अभयदान करते हैं । इस अभयदानके बिना शेष तीनों दानोंका देना निष्फल है । वस्तुतः पात्र जनोंको आहार देनेंस उनका क्षुधा जनित भय दूर होता है, औषधि देनेसे रोगका भय दूर होता है और शास्त्र दान करने से जड़तासे उत्पन्न होनेवाला अज्ञानका भय विनष्ट होता है, इसलिए एक अभयदान ही सब दानोंमें श्रेष्ठ हैं, क्योंकि उसके भीतर तीनों दानोंका समावेश हो जाता है ॥ ११ ॥
पात्रोंको दिये गये आहारदानसे परभव में देव, इन्द्र, चक्रवर्ती आदिक सुखोकी प्राप्ति होती है, औषधिदानसे अत्यन्त नीरोग और रूपवान् शरीर प्राप्त होता है, शास्त्र दानसे अति चमत्कारी पाण्डित्य प्राप्त होता है। किन्तु केवल एक अभयदान से उक्त सर्व गुणोंका परिकर ( समुदाय ) मनुष्यको प्राप्त होता है और उत्तरोत्तर उन्नत पदोंकी प्राप्ति होते हुए अन्त में मुक्ति भी प्राप्त होती है ॥ १२ ॥
मनुष्य बहुत पापवालं सैकड़ों कार्योको करके, अत्यन्त खेदको प्राप्त होकर और समुद्रपर्यन्त सारी पृथ्वीपर परिभ्रमण करके अति दुःखसे जिस धनका उपार्जन करता है, वह उसे अपने पुत्रसे और जीवनसे भी प्यारा होता है। उस धनके सदुपयोगका यदि कोई शुभ मार्ग है, तो सुपात्रोंको दान देना ही है। दानके सिवाय धनका और कोई सदुपयोग या सद्-गति नहीं है, इस लिए सुपात्रोंको सदा ही दान देना चाहिए ॥ १३ ॥
दानसे ही गृहस्थपना सार्थक होता है और दानसे ही दोनों लोकों में प्रकाश करनेवाली गुणवत्ता प्राप्त होती है। किन्तु दानके बिना धनी पुरुषकी गृहस्थता दोनों लोकोंका विनाश करनेवाली होती है। गृहस्थोंके सैकड़ों खोटे व्यापारोंके होते रहने पर जो पाप उत्पन्न होता है, उसके नाश करनेके लिए, तथा चन्द्रमाके समान उज्ज्वल यश पाने के लिए दान ही सर्वश्रेष्ठ है, इससे उत्तम अन्य कोई वस्तु नहीं है । अतएव गृहस्थको चाहिए कि वह पात्रोंको दान देकर अपने गृहस्थपनेको सफल करें ॥ १४ ॥ | सर्वेषामभयं प्रवृद्धकरुद्दीयते प्राणिनां दानं स्यादभयावि तेन रहितं दानत्रयं निष्फलम् । आहारौषधशास्त्रदानविधिभिः क्षुद्रोगजाडघाभयं यत्तत्पात्रजने विनश्यति ततो दानं तदेकं परम् ॥ग्यारह आहारात्सुखितौषधादतितरां नीरोगता जायते शास्त्रात्पात्रनिवेदितात्परभवे पाण्डित्यमत्यद्भुतम् । एतत्सर्वगुणप्रभापरिकरः पुंसोऽभयाद्दानतः पर्यन्ते पुनरुन्नतोन्नत पदप्राप्तिर्विमुक्तिस्ततः ॥ बारह कृत्वा कार्यशतानि पापबहुलान्याश्रित्य खेवं परं भ्रान्त्वा वारिधिमेखलां वसुमतों दुःखेन यच्चार्जितम् । तत्पुत्रादपि जीवितादपि धनं प्रेयोऽस्य पन्था शुभो दानं तेन च वीयतामिदमहो नान्येन तत्सद्गतिः ॥तेरह बानेनैव गृहस्थता गुणवतो लोकद्वयोद्योतिका नैव स्यान्ननु तद्विना धनवतो लोकद्वयध्वंसकृत् । दुर्व्यापारशतेषु सत्सु गृहिणः पापं यदुत्पद्यते तन्नाशाय शशाङ्कशुभ्रयशसे दानं न चान्यत्परम् ॥चौदह ज्ञान दानके दनेपर भव्यजन कुछ ही भत्रोंमें त्रैलोक्य में उत्सव करनेवाली समवसरण लक्ष्मीको प्राप्तिके साथ समस्त जगत्को हस्त रेखाके समान प्रत्यक्ष देखनेवाले केवलज्ञान के धारक होते हैं ।।दस।। निरन्तर वर्धमान करुणा के धारक श्रावकोंके द्वारा सभी प्राणियोंके भयको दूर कर और उन्हें निभ्य बनाकर जो उनकी रक्षा की जाती है, उसे अभयदान करते हैं । इस अभयदानके बिना शेष तीनों दानोंका देना निष्फल है । वस्तुतः पात्र जनोंको आहार देनेंस उनका क्षुधा जनित भय दूर होता है, औषधि देनेसे रोगका भय दूर होता है और शास्त्र दान करने से जड़तासे उत्पन्न होनेवाला अज्ञानका भय विनष्ट होता है, इसलिए एक अभयदान ही सब दानोंमें श्रेष्ठ हैं, क्योंकि उसके भीतर तीनों दानोंका समावेश हो जाता है ॥ ग्यारह ॥ पात्रोंको दिये गये आहारदानसे परभव में देव, इन्द्र, चक्रवर्ती आदिक सुखोकी प्राप्ति होती है, औषधिदानसे अत्यन्त नीरोग और रूपवान् शरीर प्राप्त होता है, शास्त्र दानसे अति चमत्कारी पाण्डित्य प्राप्त होता है। किन्तु केवल एक अभयदान से उक्त सर्व गुणोंका परिकर मनुष्यको प्राप्त होता है और उत्तरोत्तर उन्नत पदोंकी प्राप्ति होते हुए अन्त में मुक्ति भी प्राप्त होती है ॥ बारह ॥ मनुष्य बहुत पापवालं सैकड़ों कार्योको करके, अत्यन्त खेदको प्राप्त होकर और समुद्रपर्यन्त सारी पृथ्वीपर परिभ्रमण करके अति दुःखसे जिस धनका उपार्जन करता है, वह उसे अपने पुत्रसे और जीवनसे भी प्यारा होता है। उस धनके सदुपयोगका यदि कोई शुभ मार्ग है, तो सुपात्रोंको दान देना ही है। दानके सिवाय धनका और कोई सदुपयोग या सद्-गति नहीं है, इस लिए सुपात्रोंको सदा ही दान देना चाहिए ॥ तेरह ॥ दानसे ही गृहस्थपना सार्थक होता है और दानसे ही दोनों लोकों में प्रकाश करनेवाली गुणवत्ता प्राप्त होती है। किन्तु दानके बिना धनी पुरुषकी गृहस्थता दोनों लोकोंका विनाश करनेवाली होती है। गृहस्थोंके सैकड़ों खोटे व्यापारोंके होते रहने पर जो पाप उत्पन्न होता है, उसके नाश करनेके लिए, तथा चन्द्रमाके समान उज्ज्वल यश पाने के लिए दान ही सर्वश्रेष्ठ है, इससे उत्तम अन्य कोई वस्तु नहीं है । अतएव गृहस्थको चाहिए कि वह पात्रोंको दान देकर अपने गृहस्थपनेको सफल करें ॥ चौदह ॥ |
खूंटीः कल तक जिन इलाकों में बाहरी लोगों के प्रवेश पर ग्रामीणों ने पत्थलगड़ी के नाम पर प्रतिबंध लगा रखा था, आज उन्हीं इलाकों के ग्रामीण सरकारी योजनाओं का लाभ लेने लिए आगे आ रहे हैं. सरकारी और गैर सरकारी संगठनों की मदद से पत्थलगड़ी इलाकों में प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत अभियान, प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना, मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना, सुकन्या योजना, मातृ वन्दना योजना, जल संचयन जागरूकता अभियान, उज्ज्वला योजना, उजाला योजना का लाभ लेने के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं और युवा आगे आ रहे हैं.
गैर सरकारी संगठन सिनी के सहयोग से ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं की जानकारी मुण्डारी भाषा में दी जा रही है. मुण्डारी भाषा में योजनाओं की जानकारी देने से ग्रामीणों में अपनेपन की भावना साफ झलकती है. साथ ही बाहरी लोगों को शक संदेह की नजरों से देखने के नजरिया में भी परिवर्तन देखने को मिल रहा है.
समय के साथ साथ जिला प्रशासन से दूरी बरतने वाले मुण्डा आदिवासी अब गांव में विकास की बयार बहाना चाहते हैं. बिजली, पानी, शौचालय,बच्चों की शिक्षा, आवास जैसी मूलभूत सुविधाओं का लाभ लेने के लिए ग्रामीणों ने अब आवेदन लिखना शुरू कर दिया है. कौशल विकास योजना संबंधी प्रशिक्षण को लेकर भी महिलाएं जागरूक दिखी. साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना रहित डाड़ीगुटू पंचायत के जोरदाग गांव में महिलाएं अब आवास योजना का पूरा लाभ लेने को उत्सुक नजर आईं. बातचीत में उन्होंने सरल सहज अंदाज में कहा कि आज तक हमारे गांव में एक भी आवास नहीं बना है. हमलोग गांव में पक्का मकान बनाना चाहते हैं. बिजली की व्यवस्था भी गांव में बेहतर होनी चाहिए जिससे बच्चों की पढ़ाई अच्छे से हो सके.
| खूंटीः कल तक जिन इलाकों में बाहरी लोगों के प्रवेश पर ग्रामीणों ने पत्थलगड़ी के नाम पर प्रतिबंध लगा रखा था, आज उन्हीं इलाकों के ग्रामीण सरकारी योजनाओं का लाभ लेने लिए आगे आ रहे हैं. सरकारी और गैर सरकारी संगठनों की मदद से पत्थलगड़ी इलाकों में प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत अभियान, प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना, मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना, सुकन्या योजना, मातृ वन्दना योजना, जल संचयन जागरूकता अभियान, उज्ज्वला योजना, उजाला योजना का लाभ लेने के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं और युवा आगे आ रहे हैं. गैर सरकारी संगठन सिनी के सहयोग से ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं की जानकारी मुण्डारी भाषा में दी जा रही है. मुण्डारी भाषा में योजनाओं की जानकारी देने से ग्रामीणों में अपनेपन की भावना साफ झलकती है. साथ ही बाहरी लोगों को शक संदेह की नजरों से देखने के नजरिया में भी परिवर्तन देखने को मिल रहा है. समय के साथ साथ जिला प्रशासन से दूरी बरतने वाले मुण्डा आदिवासी अब गांव में विकास की बयार बहाना चाहते हैं. बिजली, पानी, शौचालय,बच्चों की शिक्षा, आवास जैसी मूलभूत सुविधाओं का लाभ लेने के लिए ग्रामीणों ने अब आवेदन लिखना शुरू कर दिया है. कौशल विकास योजना संबंधी प्रशिक्षण को लेकर भी महिलाएं जागरूक दिखी. साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना रहित डाड़ीगुटू पंचायत के जोरदाग गांव में महिलाएं अब आवास योजना का पूरा लाभ लेने को उत्सुक नजर आईं. बातचीत में उन्होंने सरल सहज अंदाज में कहा कि आज तक हमारे गांव में एक भी आवास नहीं बना है. हमलोग गांव में पक्का मकान बनाना चाहते हैं. बिजली की व्यवस्था भी गांव में बेहतर होनी चाहिए जिससे बच्चों की पढ़ाई अच्छे से हो सके. |
साक्षात्कारः भारतीय उपमहाद्वीप के बंटवारे का जो असर समाज पर पड़ा, उसकी पीड़ा सिनेमा के परदे पर भी नज़र आई. एमएस सथ्यू की 'गर्म हवा' विभाजन पर बनी सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में से एक है. इस फिल्म समेत सथ्यू से उनके विभिन्न अनुभवों पर द वायर के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ भाटिया की बातचीत.
अमूल मक्खन के लोकप्रिय विज्ञापन कश्मीर के दर्जे में परिवर्तन से लेकर चीनी उत्पादों के बहिष्कार तक के मुद्दे पर सरकार के रवैये के साथ हामी भरते नज़र आते हैं.
पुलिस की बर्बरता से हम सभी को फ़र्क़ पड़ना चाहिए, भले ही निजी तौर पर हमारे साथ ऐसा न हुआ हो. ये हमारी व्यवस्था का ऐसा हिस्सा बन चुका है, जिसे बदलना चाहिए और पूरी ताक़त से मिलकर ज़ाहिर की गई जनभावना ही ऐसा कर सकती है.
हम वो देश हैं जो जुगाड़ पर नाज़ करता है, 5000 साल पहले की तथाकथित उपलब्धियों के ख्वाबों की दुनिया में रहता है. उससे यह उम्मीद करना बेमानी है कि वह व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में इतनी मेहनत करेगा कि वे बिना किसी रुकावट के और सक्षम तरीके से काम कर सकें.
बीते छह सालों में मोदी सरकार के कई फ़ैसले दिखाते हैं कि उसे जनता में डर और दहशत पैदा करने का विचार पसंद है. नोटबंदी में लंबी लाइनों में लगकर पुराने नोटों को बदलना हो, नागरिकता साबित करने के लिए कागज़ जुटाना या अचानक हुए लॉकडाउन में अनहोनी के डर पलायन, सरकार के फ़ैसलों की मार समाज के आर्थिक रूप से कमज़ोर तबके पर ही पड़ी है.
समाज में मुस्लिम विरोधी पूर्वाग्रह तो पहले से ही मौजूद था, संघ की छत्रछाया में उनके ख़िलाफ़ सतत तरीके से चलाए गए अभियान को अब लहलहाने के लिए उपजाऊ ज़मीन मिल गई है.
भाजपा का एजेंडा चुनाव की जीत से कहीं ज़्यादा बड़ा है.
साक्षात्कारः बीते दिनों द वायर के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ भाटिया के साथ बातचीत में फिल्म अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने सीएए-एनआरसी-एनपीआर के विरोध में चल रहे विरोधी प्रदर्शनों, सांप्रदायिकता के उभार और अहम मसलों पर फिल्म उद्योग के बड़े नामों की चुप्पी समेत कई विषयों पर बात की.
अगर नागरिकता संशोधन क़ानून दूसरे देशों के मुसलमानों के साथ भेदभाव करता है, तो एनआरसी भारत के मौजूदा नागरिकों के प्रति शत्रुतापूर्ण है, जिसके कारण यह कहीं ज़्यादा ख़तरनाक है.
अयोध्या के फैसले के बाद 'शांति' और मामले के आखिरकार 'ख़त्म' होने की बातों के बीच उन हज़ारों लोगों को भुला दिया गया है, जिनकी ज़िंदगी बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद बर्बाद हो गई.
समय के साथ अमिताभ बच्चन ने सतत तरीके से अपने को नए-नए रंगों में ढाला है और जोखिम लेने से गुरेज़ नहीं किया. दूसरे प्रतिक्रिया दें, इससे पहले ही वे बदलाव की नब्ज़ पकड़ने में कामयाब रहे.
राजद्रोह का गंभीर आरोप यह बताता है कि सरकार ट्रोल्स से सहमत है कि शेहला एक ख़तरनाक इंसान हैं.
सरकार के हस्तक्षेप या प्रबंधन के दबाव का आरोप लगाना एक कमज़ोर बहाना है- मीडिया पेशेवरों ने स्वयं ही ख़ुद को अपने आदर्शों से दूर कर लिया है. वे बेआवाज़ को आवाज़ देने या सत्ताधारी वर्ग से जवाबदेही की मांग करने वाले के तौर पर अपनी भूमिका नहीं देखते हैं. अगर वे खुद व्यवस्था का हिस्सा बन जाएंगे, तो वे व्यवस्था से सवाल कैसे पूछेंगे?
जब लोग बिस्किट का एक पैकेट खरीदने से पहले भी सोचने लगें, तब एक गहरे आर्थिक संकट की दस्तक सुनना ज़रूरी हो जाता है.
संचार के सारे साधनों को काटकर, उन्हें काबू में रखने के लिए सुरक्षा बलों के इस्तेमाल का मक़सद कश्मीरियों को यह याद दिलाना है कि उनका अपना कोई वजूद नहीं है- उनका अस्तित्व सत्ता के हाथ में है, वो सत्ता जिसका प्रतिनिधित्व वहां हर जगह मौजूद सेना कर रही है.
| साक्षात्कारः भारतीय उपमहाद्वीप के बंटवारे का जो असर समाज पर पड़ा, उसकी पीड़ा सिनेमा के परदे पर भी नज़र आई. एमएस सथ्यू की 'गर्म हवा' विभाजन पर बनी सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में से एक है. इस फिल्म समेत सथ्यू से उनके विभिन्न अनुभवों पर द वायर के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ भाटिया की बातचीत. अमूल मक्खन के लोकप्रिय विज्ञापन कश्मीर के दर्जे में परिवर्तन से लेकर चीनी उत्पादों के बहिष्कार तक के मुद्दे पर सरकार के रवैये के साथ हामी भरते नज़र आते हैं. पुलिस की बर्बरता से हम सभी को फ़र्क़ पड़ना चाहिए, भले ही निजी तौर पर हमारे साथ ऐसा न हुआ हो. ये हमारी व्यवस्था का ऐसा हिस्सा बन चुका है, जिसे बदलना चाहिए और पूरी ताक़त से मिलकर ज़ाहिर की गई जनभावना ही ऐसा कर सकती है. हम वो देश हैं जो जुगाड़ पर नाज़ करता है, पाँच हज़ार साल पहले की तथाकथित उपलब्धियों के ख्वाबों की दुनिया में रहता है. उससे यह उम्मीद करना बेमानी है कि वह व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में इतनी मेहनत करेगा कि वे बिना किसी रुकावट के और सक्षम तरीके से काम कर सकें. बीते छह सालों में मोदी सरकार के कई फ़ैसले दिखाते हैं कि उसे जनता में डर और दहशत पैदा करने का विचार पसंद है. नोटबंदी में लंबी लाइनों में लगकर पुराने नोटों को बदलना हो, नागरिकता साबित करने के लिए कागज़ जुटाना या अचानक हुए लॉकडाउन में अनहोनी के डर पलायन, सरकार के फ़ैसलों की मार समाज के आर्थिक रूप से कमज़ोर तबके पर ही पड़ी है. समाज में मुस्लिम विरोधी पूर्वाग्रह तो पहले से ही मौजूद था, संघ की छत्रछाया में उनके ख़िलाफ़ सतत तरीके से चलाए गए अभियान को अब लहलहाने के लिए उपजाऊ ज़मीन मिल गई है. भाजपा का एजेंडा चुनाव की जीत से कहीं ज़्यादा बड़ा है. साक्षात्कारः बीते दिनों द वायर के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ भाटिया के साथ बातचीत में फिल्म अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने सीएए-एनआरसी-एनपीआर के विरोध में चल रहे विरोधी प्रदर्शनों, सांप्रदायिकता के उभार और अहम मसलों पर फिल्म उद्योग के बड़े नामों की चुप्पी समेत कई विषयों पर बात की. अगर नागरिकता संशोधन क़ानून दूसरे देशों के मुसलमानों के साथ भेदभाव करता है, तो एनआरसी भारत के मौजूदा नागरिकों के प्रति शत्रुतापूर्ण है, जिसके कारण यह कहीं ज़्यादा ख़तरनाक है. अयोध्या के फैसले के बाद 'शांति' और मामले के आखिरकार 'ख़त्म' होने की बातों के बीच उन हज़ारों लोगों को भुला दिया गया है, जिनकी ज़िंदगी बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद बर्बाद हो गई. समय के साथ अमिताभ बच्चन ने सतत तरीके से अपने को नए-नए रंगों में ढाला है और जोखिम लेने से गुरेज़ नहीं किया. दूसरे प्रतिक्रिया दें, इससे पहले ही वे बदलाव की नब्ज़ पकड़ने में कामयाब रहे. राजद्रोह का गंभीर आरोप यह बताता है कि सरकार ट्रोल्स से सहमत है कि शेहला एक ख़तरनाक इंसान हैं. सरकार के हस्तक्षेप या प्रबंधन के दबाव का आरोप लगाना एक कमज़ोर बहाना है- मीडिया पेशेवरों ने स्वयं ही ख़ुद को अपने आदर्शों से दूर कर लिया है. वे बेआवाज़ को आवाज़ देने या सत्ताधारी वर्ग से जवाबदेही की मांग करने वाले के तौर पर अपनी भूमिका नहीं देखते हैं. अगर वे खुद व्यवस्था का हिस्सा बन जाएंगे, तो वे व्यवस्था से सवाल कैसे पूछेंगे? जब लोग बिस्किट का एक पैकेट खरीदने से पहले भी सोचने लगें, तब एक गहरे आर्थिक संकट की दस्तक सुनना ज़रूरी हो जाता है. संचार के सारे साधनों को काटकर, उन्हें काबू में रखने के लिए सुरक्षा बलों के इस्तेमाल का मक़सद कश्मीरियों को यह याद दिलाना है कि उनका अपना कोई वजूद नहीं है- उनका अस्तित्व सत्ता के हाथ में है, वो सत्ता जिसका प्रतिनिधित्व वहां हर जगह मौजूद सेना कर रही है. |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
वेदान्तदर्शन ४०७
के लिए लाठी उठाए जाते हुए देखता है तो पिटने की आशंका से भागने लगता है और यदि उनके सामने कोई पुरुष हरित तृण लिए हुए आता दिखाई पड़ता है तो उसके सम्मुख प्रवृत्त हो जाता है। यही बात पुरुषों के सम्बन्ध में भी है, व्युत्पन्नचित्त पुरुष भी यदि किसी को खड्ग लिए एवं चिल्लाते हुए देखते है तो उससे दूर हट जाते हैं, और इसके विपरीत पुरुषों को देखकर उनकी ओर प्रवृत्त होते हैं। पशुओं एवं पुरुषों के उपर्युक्त प्रवृत्ति - निवृत्ति रूप व्यवहार का कारण अध्यास है । इस प्रकार उपर्युक्त उदाहरण से यह पूर्णतया सिद्ध हो जाता है कि पुरुषों के समस्त प्रमाण-प्रमेय व्यवहार अध्यास के कार्य हैं ।
जैसा कि ऊपर कहा जा चुका है, समस्त शास्त्रीय व्यवहारों का मूल भी अभ्यास ही है । अतः आत्मबोध के पूर्व में प्रवर्तमान शास्त्र अविद्यावान् पुरुष का ही आश्रय लेता है। उदाहरण के लिए, 'ब्राह्मण को यज्ञ करना चाहिए' आदि शास्त्र व्यवहार आत्मा में, वर्ण, आश्रम, वय आदि का अभ्यास करके ही प्रवृत्त होते हैं। इस प्रकार समस्त प्रमाण-प्रमेय एवं शास्त्रीय व्यवहारों का मूल अध्यास ही है । जब अध्यास की निवृत्ति हो जाती है तो केवल अधिष्ठान तत्त्व - एक ब्रह्म की ही सत्ता वर्तमान रहती है।
चतुर्थ अध्याय के अन्तर्गत निर्गुण एवं सगुण ब्रह्म का समन्वय करते समय यह कहा जा चुका है कि सगुण ब्रह्म की उपासना के द्वारा भी मनुष्य निर्गुण ब्रह्म का साक्षात्कार करने में समर्थ है। अतः उपासना सगुण ब्रह्म की दृष्टि से ही संगत है, निर्गुण ब्रह्म की दृष्टि से नहीं । परन्तु यह सगुणोपासना अविद्या का ही रूप है । अध्यास का विवेचन करते हुए, अभी यह कहा जा चुका है, कि शास्त्रनिर्दिष्ट यज्ञादि कृत्यों का आधार अध्यास ही है । यद्यपि ईश्वर की उपासना वेदान्तिक दृष्टि से अविद्या का ही रूप है, परन्तु अविद्या के द्वारा ही मनुष्य मरणत्व को पार करके अमरत्व लाभ कर सकता है।' इसलिए अविद्यारूप उपासना भी निर्विशेष ब्रह्म की उपलब्धि कराने वाली विद्या की साधिका है। यहाँ यह उल्लेखनीय है कि उपासना विधि की उपादेयता मन्दबुद्धि साधकों के लिए ही है, उच्च साधकों के लिए नहीं ।
ब्रह्मलोक प्राप्त करने वाले सगुणोपासकों की मुक्ति
उपासना का फल चित्त की एकाग्रता है । सगुण ब्रह्म की उपासना चित्त की एकाग्रता के द्वारा निर्विशेष ब्रह्म के साक्षात्कार में हेतु है, इस कथन का समर्थन करते हुए कल्पतरुकार अमलानन्द ने कहा है कि निर्विशेष परब्रह्म के साक्षात्कार करने में जो अल्पबुद्धि वाले लोग असमर्थ हैं, उन पर दया करते हुए ही आचार्यों ने सगुण ब्रह्म का निरूपण किया है। सगुण ब्रह्म के परिशीलन के द्वारा जब उपासकों का मन वशीभूत होता है तो वे सगुण ब्रह्म का ही, कल्पित उपाधि से विनिर्मुक्त निर्गुण ब्रह्म के रूप में साक्षात्कार करते हैं ।
उपर्युक्त दृष्टि से उपासना ब्रह्मसाक्षात्कार का साक्षात् कारण न होकर परम्परया कारण है ।
अवान्तरभेदेनोपादानविधिरपि मन्दानुकम्पार्थमपवादत्वेन - रामाद्वयाचार्य, वेदान्तकौमुदी, पृ० २४१ ( मद्रास संस्करण, १६५५ ) । | वेदान्तदर्शन चार सौ सात के लिए लाठी उठाए जाते हुए देखता है तो पिटने की आशंका से भागने लगता है और यदि उनके सामने कोई पुरुष हरित तृण लिए हुए आता दिखाई पड़ता है तो उसके सम्मुख प्रवृत्त हो जाता है। यही बात पुरुषों के सम्बन्ध में भी है, व्युत्पन्नचित्त पुरुष भी यदि किसी को खड्ग लिए एवं चिल्लाते हुए देखते है तो उससे दूर हट जाते हैं, और इसके विपरीत पुरुषों को देखकर उनकी ओर प्रवृत्त होते हैं। पशुओं एवं पुरुषों के उपर्युक्त प्रवृत्ति - निवृत्ति रूप व्यवहार का कारण अध्यास है । इस प्रकार उपर्युक्त उदाहरण से यह पूर्णतया सिद्ध हो जाता है कि पुरुषों के समस्त प्रमाण-प्रमेय व्यवहार अध्यास के कार्य हैं । जैसा कि ऊपर कहा जा चुका है, समस्त शास्त्रीय व्यवहारों का मूल भी अभ्यास ही है । अतः आत्मबोध के पूर्व में प्रवर्तमान शास्त्र अविद्यावान् पुरुष का ही आश्रय लेता है। उदाहरण के लिए, 'ब्राह्मण को यज्ञ करना चाहिए' आदि शास्त्र व्यवहार आत्मा में, वर्ण, आश्रम, वय आदि का अभ्यास करके ही प्रवृत्त होते हैं। इस प्रकार समस्त प्रमाण-प्रमेय एवं शास्त्रीय व्यवहारों का मूल अध्यास ही है । जब अध्यास की निवृत्ति हो जाती है तो केवल अधिष्ठान तत्त्व - एक ब्रह्म की ही सत्ता वर्तमान रहती है। चतुर्थ अध्याय के अन्तर्गत निर्गुण एवं सगुण ब्रह्म का समन्वय करते समय यह कहा जा चुका है कि सगुण ब्रह्म की उपासना के द्वारा भी मनुष्य निर्गुण ब्रह्म का साक्षात्कार करने में समर्थ है। अतः उपासना सगुण ब्रह्म की दृष्टि से ही संगत है, निर्गुण ब्रह्म की दृष्टि से नहीं । परन्तु यह सगुणोपासना अविद्या का ही रूप है । अध्यास का विवेचन करते हुए, अभी यह कहा जा चुका है, कि शास्त्रनिर्दिष्ट यज्ञादि कृत्यों का आधार अध्यास ही है । यद्यपि ईश्वर की उपासना वेदान्तिक दृष्टि से अविद्या का ही रूप है, परन्तु अविद्या के द्वारा ही मनुष्य मरणत्व को पार करके अमरत्व लाभ कर सकता है।' इसलिए अविद्यारूप उपासना भी निर्विशेष ब्रह्म की उपलब्धि कराने वाली विद्या की साधिका है। यहाँ यह उल्लेखनीय है कि उपासना विधि की उपादेयता मन्दबुद्धि साधकों के लिए ही है, उच्च साधकों के लिए नहीं । ब्रह्मलोक प्राप्त करने वाले सगुणोपासकों की मुक्ति उपासना का फल चित्त की एकाग्रता है । सगुण ब्रह्म की उपासना चित्त की एकाग्रता के द्वारा निर्विशेष ब्रह्म के साक्षात्कार में हेतु है, इस कथन का समर्थन करते हुए कल्पतरुकार अमलानन्द ने कहा है कि निर्विशेष परब्रह्म के साक्षात्कार करने में जो अल्पबुद्धि वाले लोग असमर्थ हैं, उन पर दया करते हुए ही आचार्यों ने सगुण ब्रह्म का निरूपण किया है। सगुण ब्रह्म के परिशीलन के द्वारा जब उपासकों का मन वशीभूत होता है तो वे सगुण ब्रह्म का ही, कल्पित उपाधि से विनिर्मुक्त निर्गुण ब्रह्म के रूप में साक्षात्कार करते हैं । उपर्युक्त दृष्टि से उपासना ब्रह्मसाक्षात्कार का साक्षात् कारण न होकर परम्परया कारण है । अवान्तरभेदेनोपादानविधिरपि मन्दानुकम्पार्थमपवादत्वेन - रामाद्वयाचार्य, वेदान्तकौमुदी, पृशून्य दो सौ इकतालीस । |
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Every Year Board of Secondary Education, Andhra Pradesh (BSEAP) conducts Inter First year Exam. BSEAP will declare the AP Inter Ist year result on time. Last Year BSEAP Inter Ist year pass percent was 73. 3. After the exams, BSEAP will declare the result in the month of April. Students can check the results of the Examination on www. livehindustan. com. Apart from this, the results can be checked on the official website of the Board.
बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (बीएसईपी), आंध्र प्रदेश हर वर्ष इंटर प्रथम वर्ष की परीक्षाएं आयोजित करवाता है। इस बार बीएसईपी अप्रैल माह में समय पर इंटर फर्स्ट ईयर के नतीजे घोषित कर देगा। पिछले वर्ष बीएसईएपी इंटर फर्स्ट ईयर पास प्रतिशत 93 प्रतिशत रहा था। परीक्षा के नतीजे www. livehindustan. com पर चेक कर सकते हैं। इसके अलावा रिजल्ट बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट पर भी चेक किए जा सकेंगे।
विद्यार्थियों के लिए जरूरी नोटः लाइवहिन्दुस्तानडॉटकॉम पर बोर्ड के नतीजे उपलब्ध कराने का मकसद विद्यार्थियों तक तुरंत और आसानी से जानकारी पहुंचाना है। नतीजों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए यहां हर संभव कोशिश की गई है। हालांकि, छात्रों को जरूरी सलाह दी जाती है कि वे अपने बोर्ड से मिलने वाली आधिकारिक हार्ड कॉपी से वेबसाइट पर उपलब्ध नतीजों की पुष्टि अवश्य कर लें। किसी भी तरह की त्रुटि के लिए वेबसाइट जिम्मेदार नहीं होगी।
Note For Students :- Livehindustan aims to provide board result information to students in easier & quicker way. We have tried our best to verify provided information, although we advice to students to collect their result in hard copy. Live Hindustan won't be responsible for any errors/ mistakes shown in result.
| शायद आप ऐड ब्लॉकर का इस्तेमाल कर रहे हैं। पढ़ना जारी रखने के लिए ऐड ब्लॉकर को बंद करके पेज रिफ्रेश करें। Every Year Board of Secondary Education, Andhra Pradesh conducts Inter First year Exam. BSEAP will declare the AP Inter Ist year result on time. Last Year BSEAP Inter Ist year pass percent was तिहत्तर. तीन. After the exams, BSEAP will declare the result in the month of April. Students can check the results of the Examination on www. livehindustan. com. Apart from this, the results can be checked on the official website of the Board. बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन , आंध्र प्रदेश हर वर्ष इंटर प्रथम वर्ष की परीक्षाएं आयोजित करवाता है। इस बार बीएसईपी अप्रैल माह में समय पर इंटर फर्स्ट ईयर के नतीजे घोषित कर देगा। पिछले वर्ष बीएसईएपी इंटर फर्स्ट ईयर पास प्रतिशत तिरानवे प्रतिशत रहा था। परीक्षा के नतीजे www. livehindustan. com पर चेक कर सकते हैं। इसके अलावा रिजल्ट बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट पर भी चेक किए जा सकेंगे। विद्यार्थियों के लिए जरूरी नोटः लाइवहिन्दुस्तानडॉटकॉम पर बोर्ड के नतीजे उपलब्ध कराने का मकसद विद्यार्थियों तक तुरंत और आसानी से जानकारी पहुंचाना है। नतीजों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए यहां हर संभव कोशिश की गई है। हालांकि, छात्रों को जरूरी सलाह दी जाती है कि वे अपने बोर्ड से मिलने वाली आधिकारिक हार्ड कॉपी से वेबसाइट पर उपलब्ध नतीजों की पुष्टि अवश्य कर लें। किसी भी तरह की त्रुटि के लिए वेबसाइट जिम्मेदार नहीं होगी। Note For Students :- Livehindustan aims to provide board result information to students in easier & quicker way. We have tried our best to verify provided information, although we advice to students to collect their result in hard copy. Live Hindustan won't be responsible for any errors/ mistakes shown in result. |
प्रतिदर्श परिगणना से पता चलता है कि एक टेलीफोन कॉल को संप्रेषित करने के लिए कितनी बिटों की आवश्यकता होती है। यदि 4 कि. हर्ट्ज के टेलीफोन चैनल को 8 कि. हर्ट्ज (एक सेकेंड का 8,000 गुना) पर प्रतिदर्शित होता है तो प्रतिदर्श में कूटित विस्तारण को व्यक्त करने के लिए प्रत्येक बार 7 बिटों की जरूरत होती है तो प्रति सेकेंड 64,000 बिटों ( 64 कि. बिट्/सेकेंड) की आवश्यकता होगी।
विभिन्न संप्रेषण चैनलों की क्षमता और संदेश स्रोत की जटिलता प्रति सेकेंड बिटों के हिसाब से नापी जा सकती है। इस क्षेत्र में भी लागू होने वाला एक गणितीय सिद्धांत क्लाउड ई. शैनॉन (जन्म 1916) द्वारा सन् 1948 में बतलाया गया था। इस सिद्धांत का असर यह था कि यदि सूचना दर चैनल की क्षमता से अधिक न हो (प्रति सेकेंड बिटों में भी अभिव्यक्त किया गया) तो संदेश बिना किसी त्रुटि के भेजे जा सकते हैं। यदि ठीक से संदेश भेजा जाये (प्रति सेकेंड बिट के रूप में) तो सूचना प्रवाह चैनल की क्षमता तक पहुंच सकता है। इस सिद्धांत के आधार पर गति संकेत में प्रेषण प्रणाली की निष्पादन प्रक्रिया और व्याघात उत्पन्न करने वाले शोर तथा संकेतक की विशेषताएं इंजीनियर बतला सकते हैं और उसका मूल्यांकन कर सकते हैं।
मनुष्य के वाक् की सूचना दर कदाचित प्रति सेकेंड 1,000 बिट से कम है जबकि टेलीफोन चैनल 60,000 बिट प्रति सेकेंड संप्रेषित कर सकता है । रेडियो के लिए चैनल क्षमता 80,000 बिट प्रति सेकेंड एफ. एम. रेडियो के लिए 2,50,000 बिट है और रंगीन टी. वी. (525 लाइनें) 90 मिलियन बिट प्रति सेकेंड की है। यह परिगणना शैनॉन के सिद्धांत पर आधारित है।
प्रति सेकेंड64,000 बिटों के संप्रेषण के साथ स्वर संचार के क्षेत्र में श्रेष्ठ गुणवत्ता प्राप्त की जा सकती है। 32,000 बिट प्रति सेकेंड सीमित रखकर काफी अच्छे संकेत प्राप्त किये जा सकते हैं ।
बिटों का संयोजन
विभिन्न स्रोतों से प्राप्त बिटों को सामान्यतया संप्रेषण के उद्देश्य से संयोजित किया जाता है। यदि टेलीफोन को (8 बिट प्रतिदर्श के साथ एक सेकेंड में 8,000 गुना की दर पर) प्रतिदर्शित किया जाता है तो हमें 64,000 बिट प्रति सेकेंड की आवश्यकता होती है। यदि 24 टेलीफोन चैनल हों तो कुल 192 अंकों (और समक्रमण के लिए एक अतिरिक्त) के आठ-आठ अंकों के समय-सांचे रहेंगे। एक सेकेंड में 8,000 समयसांचों की बार बार पुनरावृति होती है जिससे 15,44,000 बिटें प्रति सेकेंड बनती हैं। दरअसल संयुक्त राज्य और जापान ने 1.544 मैगा बिट प्रति सेकेंड की दर से 24 स्वर चैनलों की एक आधारभूत इकाई को अपनाया है।
दुनिया के बाकी देशों ने 2.048 मेगा बिट प्रति सेकेंड की दर से 30 स्वर चैनल समूह अपनाये हैं। 30 चैनल प्रणाली (समक्रमण और संकेतन के लिए 2 अतिरिक्त चैनल) में 32 आधारभूत समय-सांचे होते हैं और प्रत्येक की क्षमता प्रति सेकेंड 64 किलो बिट की होती है जिससे 2,048 कि. बिट प्रति सेकेंड अथवा 2 मे. बिट प्रति सेकेंड बनती हैं। 32 विभिन्न चैनलों से प्रतिदर्श सूचना एक के बाद एक प्रतिदर्श निरंतर भेजी जाती है (चित्र- 16 ) । 2 मे. बिट प्रति सेकेंड संप्रेषण अंकानुक्रमण के प्राथमिक स्तर की संरचना करता है। 30 चैनलीय मल्टीप्लेक्स के चार चैनलों में से
चित्र-16 समय विभाजन मल्टीप्लेक्स में स्पंदन कोड मॉडुलन का प्रयोग होता है। यहां 32 स्वर चैनल, प्रति सेकेंड 8,000 चार के अनुक्रम में प्रतिदर्शित किये जाते हैं और प्रत्येक प्रतिदर्श के के आयाम का पी. सी. एम. की भांति द्विअंकीय रूप में प्रतिनिधित्व होता है जिन्हें एकाधिक 'एक' और एकाधिक 'शून्य' के रूप में अंतःपत्रित एवं संप्रेषित किया जाता है। 8 अंकों (256) के 32 समय-सांचे की (तथा 1 अतिरिक्त 257) प्रति सेकेंड 20,56,000 अंकों के योग के लिए, एक सेकेंड में 8,000 बार पुनरावृति होती है।
अंकीय स्पंदन एक ही केबिल पर अंतःपत्रित की जा सकती है जो इसके पश्चात् प्रति सेकेंड आठ मिलियन बिट के रूप में 120 वार्तालापों को वहन कर सकता है। इसके बाद 8 मिलियन बिट मल्टीप्लेक्स के चार सैट, 34 मिलियन बिटों के प्रवाह के 480 चैनल संपर्क प्राप्त करने के लिए अंतःपत्रित किये जा सकते हैं। इनमें से 4 प्रवाह भी एक ही टेलीफोन केबिल पर साथ साथ भेजे जा सकते हैं । थिरकनों की सभी श्रृंखलाएं प्राप्ति वाले छोर पर वाक् के रूप में पुनसृजित की जाती हैं।
स्पंदन कोड नियमन (पल्स कोड मॉड्युलेशन) की विशेषताएं
चार हजार हर्ट्ज तक की किसी आवृति के पुनसृजन के लिए प्रति सेकेंड 8,000 बार प्रतिदर्शित पल्स कोड मॉड्युलेशन (पी. सी. एम.) से छोटे पथों पर प्रति टेलीफोन चैनल लागत घटायी जा सकती है और नगर के भीतर ही लाइनों के उपयोग में वृद्धि हो सकती है। पी. सी. एम. के अनेक लाभ हैं। इस पर लाइन के शोर या बातचीत
के टकराव का प्रभाव नहीं पड़ता। यहां तक कि पुराने केबिल जैसे खराब साधन से भी काम चल जाता है। कंप्यूटर से प्राप्त उच्च संप्रेषण दर को भी संभालने में पी. सी. एम. आदर्श सिद्ध होता है। यह तकनीक उपग्रह संचार में काम आती है क्योंकि उपग्रह को भेजे जाने वाले बिट प्रवाह के आवश्यकतानुसार समय विभाजन भी मल्टीप्लेक्सित हो सके। नेटवर्क का नियंत्रण और गोपनीयता का प्रावधान आदि इसके कुछ अन्य लाभ हैं ।
तथापि टेलीफोन संकेतों को बिटों की कम संख्या में कूटित करने के भी तरीके हैं, जिनसे डिजिटल ट्रंकों की क्षमता में वृद्धि होती है।
कुछ सैन्य या फिर आपात संचार प्रणालियों जैसी स्थिति में जहां वाक् के परिष्कृत प्रतिदर्शन की जरूरत नहीं होती वहां पहले से ही निम्न प्रतिदर्श दरें इस्तेमाल हो रही हैं। इस पद्धति में डेल्टा मॉड्युलेशन कूट केवल इतना ज्ञात कर पाता है कि वाक् संकेत का विस्तारण पिछले प्रतिदर्श से कम है अथवा अधिक । यदि प्रतिदर्श अधिक है तो वह 'एक' है और कम है तो 'शून्य' । यह प्रतिदर्श पी. सी. एम. में एक सेकेंड में 8,000 बार के बदले 32,000 बार होता है। इस प्रकार डेल्टा मॉड्युलेशन में पी. सी. एम. के तहत एक सेकेंड में 64,000 बिटों की अपेक्षा 32,000 बिटें होंगी । इस पद्धति के स्पष्ट लाभ ये हैं कि पी. सी. एम. की तुलना में उसी सूचना को प्रेषित करने के लिए केवल आधी बैंडविड्थ और ऊर्जा अपेक्षित होती है । यद्यपि पी. सी. एम. की अपेक्षा इसमें प्रतिदर्श उतने सही नहीं होते, डेल्टा में कूटन इतना सरल है कि प्रत्येक प्रतिदर्श के लिए बिट होती है, इस कारण इसमें त्रुटि की संभावना कम होती है।
.डिजिटल संचार के क्षेत्र में त्रुटि ज्ञात करने की परिष्कृत तकनीकें प्रयोग में लायी जाती हैं। इसमें निर्धारित लंबाई के बाइनरी करेक्टर कोड में एक या एकाधिक बिटें संयुक्त की जाती हैं। उदाहरण के लिए 6 बिट के कूट में, संप्रेषण की शुद्धता की जांच करने के लिए सातवीं बिट संयुक्त कर दी जाती है।
विशेष युक्तियां
डाटा संप्रेषण के लिए कुछ विशेष युक्तियां आवश्यक हैं। टेलीफोन केबिल जैसे संप्रेषण माध्यम का अर्थ एनॉलाग संकेतकों का वहन करना होता है। जब तक टेलीफोन नेटवर्क का प्रयोग अंकीय सूचना के संप्रेषण के लिए होता रहेगा तब तक, संप्रेषण माध्यम के निमित्त उपयोगी अंकीय निर्गत को अनुकूल बनाने की युक्ति आवश्यक होगी। अनुकूलक और अननुकूलक (मॉडुलेटर और डिमॉडुलेटर) के लिए (चित्र-17 ) इस प्रकार की युक्ति मोडेम कहलाती है। यह अंकीय संकेत को केबिल या सूक्ष्म तरंगों | प्रतिदर्श परिगणना से पता चलता है कि एक टेलीफोन कॉल को संप्रेषित करने के लिए कितनी बिटों की आवश्यकता होती है। यदि चार कि. हर्ट्ज के टेलीफोन चैनल को आठ कि. हर्ट्ज पर प्रतिदर्शित होता है तो प्रतिदर्श में कूटित विस्तारण को व्यक्त करने के लिए प्रत्येक बार सात बिटों की जरूरत होती है तो प्रति सेकेंड चौंसठ,शून्य बिटों की आवश्यकता होगी। विभिन्न संप्रेषण चैनलों की क्षमता और संदेश स्रोत की जटिलता प्रति सेकेंड बिटों के हिसाब से नापी जा सकती है। इस क्षेत्र में भी लागू होने वाला एक गणितीय सिद्धांत क्लाउड ई. शैनॉन द्वारा सन् एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस में बतलाया गया था। इस सिद्धांत का असर यह था कि यदि सूचना दर चैनल की क्षमता से अधिक न हो तो संदेश बिना किसी त्रुटि के भेजे जा सकते हैं। यदि ठीक से संदेश भेजा जाये तो सूचना प्रवाह चैनल की क्षमता तक पहुंच सकता है। इस सिद्धांत के आधार पर गति संकेत में प्रेषण प्रणाली की निष्पादन प्रक्रिया और व्याघात उत्पन्न करने वाले शोर तथा संकेतक की विशेषताएं इंजीनियर बतला सकते हैं और उसका मूल्यांकन कर सकते हैं। मनुष्य के वाक् की सूचना दर कदाचित प्रति सेकेंड एक,शून्य बिट से कम है जबकि टेलीफोन चैनल साठ,शून्य बिट प्रति सेकेंड संप्रेषित कर सकता है । रेडियो के लिए चैनल क्षमता अस्सी,शून्य बिट प्रति सेकेंड एफ. एम. रेडियो के लिए दो,पचास,शून्य बिट है और रंगीन टी. वी. नब्बे मिलियन बिट प्रति सेकेंड की है। यह परिगणना शैनॉन के सिद्धांत पर आधारित है। प्रति सेकेंडचौंसठ,शून्य बिटों के संप्रेषण के साथ स्वर संचार के क्षेत्र में श्रेष्ठ गुणवत्ता प्राप्त की जा सकती है। बत्तीस,शून्य बिट प्रति सेकेंड सीमित रखकर काफी अच्छे संकेत प्राप्त किये जा सकते हैं । बिटों का संयोजन विभिन्न स्रोतों से प्राप्त बिटों को सामान्यतया संप्रेषण के उद्देश्य से संयोजित किया जाता है। यदि टेलीफोन को प्रतिदर्शित किया जाता है तो हमें चौंसठ,शून्य बिट प्रति सेकेंड की आवश्यकता होती है। यदि चौबीस टेलीफोन चैनल हों तो कुल एक सौ बानवे अंकों के आठ-आठ अंकों के समय-सांचे रहेंगे। एक सेकेंड में आठ,शून्य समयसांचों की बार बार पुनरावृति होती है जिससे पंद्रह,चौंतालीस,शून्य बिटें प्रति सेकेंड बनती हैं। दरअसल संयुक्त राज्य और जापान ने एक.पाँच सौ चौंतालीस मैगा बिट प्रति सेकेंड की दर से चौबीस स्वर चैनलों की एक आधारभूत इकाई को अपनाया है। दुनिया के बाकी देशों ने दो.अड़तालीस मेगा बिट प्रति सेकेंड की दर से तीस स्वर चैनल समूह अपनाये हैं। तीस चैनल प्रणाली में बत्तीस आधारभूत समय-सांचे होते हैं और प्रत्येक की क्षमता प्रति सेकेंड चौंसठ किलो बिट की होती है जिससे दो,अड़तालीस कि. बिट प्रति सेकेंड अथवा दो मे. बिट प्रति सेकेंड बनती हैं। बत्तीस विभिन्न चैनलों से प्रतिदर्श सूचना एक के बाद एक प्रतिदर्श निरंतर भेजी जाती है । दो मे. बिट प्रति सेकेंड संप्रेषण अंकानुक्रमण के प्राथमिक स्तर की संरचना करता है। तीस चैनलीय मल्टीप्लेक्स के चार चैनलों में से चित्र-सोलह समय विभाजन मल्टीप्लेक्स में स्पंदन कोड मॉडुलन का प्रयोग होता है। यहां बत्तीस स्वर चैनल, प्रति सेकेंड आठ,शून्य चार के अनुक्रम में प्रतिदर्शित किये जाते हैं और प्रत्येक प्रतिदर्श के के आयाम का पी. सी. एम. की भांति द्विअंकीय रूप में प्रतिनिधित्व होता है जिन्हें एकाधिक 'एक' और एकाधिक 'शून्य' के रूप में अंतःपत्रित एवं संप्रेषित किया जाता है। आठ अंकों के बत्तीस समय-सांचे की प्रति सेकेंड बीस,छप्पन,शून्य अंकों के योग के लिए, एक सेकेंड में आठ,शून्य बार पुनरावृति होती है। अंकीय स्पंदन एक ही केबिल पर अंतःपत्रित की जा सकती है जो इसके पश्चात् प्रति सेकेंड आठ मिलियन बिट के रूप में एक सौ बीस वार्तालापों को वहन कर सकता है। इसके बाद आठ मिलियन बिट मल्टीप्लेक्स के चार सैट, चौंतीस मिलियन बिटों के प्रवाह के चार सौ अस्सी चैनल संपर्क प्राप्त करने के लिए अंतःपत्रित किये जा सकते हैं। इनमें से चार प्रवाह भी एक ही टेलीफोन केबिल पर साथ साथ भेजे जा सकते हैं । थिरकनों की सभी श्रृंखलाएं प्राप्ति वाले छोर पर वाक् के रूप में पुनसृजित की जाती हैं। स्पंदन कोड नियमन की विशेषताएं चार हजार हर्ट्ज तक की किसी आवृति के पुनसृजन के लिए प्रति सेकेंड आठ,शून्य बार प्रतिदर्शित पल्स कोड मॉड्युलेशन से छोटे पथों पर प्रति टेलीफोन चैनल लागत घटायी जा सकती है और नगर के भीतर ही लाइनों के उपयोग में वृद्धि हो सकती है। पी. सी. एम. के अनेक लाभ हैं। इस पर लाइन के शोर या बातचीत के टकराव का प्रभाव नहीं पड़ता। यहां तक कि पुराने केबिल जैसे खराब साधन से भी काम चल जाता है। कंप्यूटर से प्राप्त उच्च संप्रेषण दर को भी संभालने में पी. सी. एम. आदर्श सिद्ध होता है। यह तकनीक उपग्रह संचार में काम आती है क्योंकि उपग्रह को भेजे जाने वाले बिट प्रवाह के आवश्यकतानुसार समय विभाजन भी मल्टीप्लेक्सित हो सके। नेटवर्क का नियंत्रण और गोपनीयता का प्रावधान आदि इसके कुछ अन्य लाभ हैं । तथापि टेलीफोन संकेतों को बिटों की कम संख्या में कूटित करने के भी तरीके हैं, जिनसे डिजिटल ट्रंकों की क्षमता में वृद्धि होती है। कुछ सैन्य या फिर आपात संचार प्रणालियों जैसी स्थिति में जहां वाक् के परिष्कृत प्रतिदर्शन की जरूरत नहीं होती वहां पहले से ही निम्न प्रतिदर्श दरें इस्तेमाल हो रही हैं। इस पद्धति में डेल्टा मॉड्युलेशन कूट केवल इतना ज्ञात कर पाता है कि वाक् संकेत का विस्तारण पिछले प्रतिदर्श से कम है अथवा अधिक । यदि प्रतिदर्श अधिक है तो वह 'एक' है और कम है तो 'शून्य' । यह प्रतिदर्श पी. सी. एम. में एक सेकेंड में आठ,शून्य बार के बदले बत्तीस,शून्य बार होता है। इस प्रकार डेल्टा मॉड्युलेशन में पी. सी. एम. के तहत एक सेकेंड में चौंसठ,शून्य बिटों की अपेक्षा बत्तीस,शून्य बिटें होंगी । इस पद्धति के स्पष्ट लाभ ये हैं कि पी. सी. एम. की तुलना में उसी सूचना को प्रेषित करने के लिए केवल आधी बैंडविड्थ और ऊर्जा अपेक्षित होती है । यद्यपि पी. सी. एम. की अपेक्षा इसमें प्रतिदर्श उतने सही नहीं होते, डेल्टा में कूटन इतना सरल है कि प्रत्येक प्रतिदर्श के लिए बिट होती है, इस कारण इसमें त्रुटि की संभावना कम होती है। .डिजिटल संचार के क्षेत्र में त्रुटि ज्ञात करने की परिष्कृत तकनीकें प्रयोग में लायी जाती हैं। इसमें निर्धारित लंबाई के बाइनरी करेक्टर कोड में एक या एकाधिक बिटें संयुक्त की जाती हैं। उदाहरण के लिए छः बिट के कूट में, संप्रेषण की शुद्धता की जांच करने के लिए सातवीं बिट संयुक्त कर दी जाती है। विशेष युक्तियां डाटा संप्रेषण के लिए कुछ विशेष युक्तियां आवश्यक हैं। टेलीफोन केबिल जैसे संप्रेषण माध्यम का अर्थ एनॉलाग संकेतकों का वहन करना होता है। जब तक टेलीफोन नेटवर्क का प्रयोग अंकीय सूचना के संप्रेषण के लिए होता रहेगा तब तक, संप्रेषण माध्यम के निमित्त उपयोगी अंकीय निर्गत को अनुकूल बनाने की युक्ति आवश्यक होगी। अनुकूलक और अननुकूलक के लिए इस प्रकार की युक्ति मोडेम कहलाती है। यह अंकीय संकेत को केबिल या सूक्ष्म तरंगों |
एक्ट्रेस पूजा हेगड़े (Pooja Hegde Films) साउथ और बॉलीवुड इंडस्ट्री में जाना माना नाम है। बावजूद इसके वह बॉलीवुड में अपने मौजूदगी दर्ज करवा पाने में नाकामयाब साबित हुई। इस एक्ट्रेस ने साउथ इंडस्ट्री में एक ट्रेंड सेट किया है। सोशल मीडिया पर उनकी काफी फैन फॉलोविंग है। वह सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहती हैं और अपनी रूटीन की लाइफ की तस्वीरें और वीडियो लगातार शेयर करती रहती हैं। सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाली इस एक्ट्रेस ने हाल ही में वाल्मीकि की शूटिंग पूरी की है। फिल्म का दमदार ट्रेलर भी रिलीज हो चुका है।
| एक्ट्रेस पूजा हेगड़े साउथ और बॉलीवुड इंडस्ट्री में जाना माना नाम है। बावजूद इसके वह बॉलीवुड में अपने मौजूदगी दर्ज करवा पाने में नाकामयाब साबित हुई। इस एक्ट्रेस ने साउथ इंडस्ट्री में एक ट्रेंड सेट किया है। सोशल मीडिया पर उनकी काफी फैन फॉलोविंग है। वह सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहती हैं और अपनी रूटीन की लाइफ की तस्वीरें और वीडियो लगातार शेयर करती रहती हैं। सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाली इस एक्ट्रेस ने हाल ही में वाल्मीकि की शूटिंग पूरी की है। फिल्म का दमदार ट्रेलर भी रिलीज हो चुका है। |
दिनांक 22 सितम्बर 2009 पारित किया था और तत्पश्चात 5 फरवरी 2010 को एक स्पष्टीकरण आदेश पारित किया था । जारी किए गए स्पष्टीकरण के साथ उक्त अनुसूची सीओपीटी के संशोधित दरमान में शामिल किए गए हैं। उक्त अनुसूची 31 मार्च 2010 तक अथवा इस संबंध में पोत परिवहन मंत्रालय से आगे के आदेशों तक प्रभावी रहेगी।
(xxix). उपस्कर किराये पर लेने के प्रभारों में 40 प्रतिशत तक वृद्धि प्रस्तावित की गई है जिसे पत्तन समग्र घाटा स्थिति के मद्देनजर स्वीकार किया गया है। पत्तन ने ऑयल स्किमर के लिए किराया प्रभार शामिल करने का प्रस्ताव किया है। जब प्रस्तावित दर का औचित्य स्पष्ट करने के लिए कहा गया था तो पत्तन ने स्पष्ट किया था कि इसे सामान्यतः पत्तन प्रयोजनों के लिए उपयोग किया जाता है और बहुत ही कम बाह्य लोगों को उपलब्ध कराया जाता है। पत्तन द्वारा प्रेषित स्पष्टीकरण के आधार पर और स्वीकार करते हुए कि किसी भी उपयोक्ता ने इस प्रशुल्क मद पर कोई आपत्ति नहीं उठाई है, प्रस्तावित दर अनुमानित की गई है।
(xxx). वर्तमान दरमान बल्क अथवा अन्य कार्यों के आधार पर (रू0 4.20 से रु० 9.8 प्रति टन के बीच) भारतोलन मान के उपयोग के लिए दर निर्धारित करता है और भार प्रमाणपत्र जारी करने के लिए रु0 30.80 निर्धारित किए गए हैं। पत्तन ने अब प्रति वाहन आधार पर धर्मकांटा के उपयोग के लिए प्रशुल्क वसूल करने का प्रस्ताव किया है। इसने, लदे हुए / खाली दोनों के लिए 20 ट्रेलर के लिए रु0 100, लॉरियों के लिए रु0 50 और एलसीवी के लिए रु0 30 का प्रस्ताव किया है। प्रति टन आधार जमा प्रमाणपत्र जारी करने की लागत पर वर्तमान दर के संदर्भ में रफ गणना दर्शाती है कि प्रस्तावित दरें मौजूदा दरों से पक्षीय तुलनात्मक है और इसलिए स्वीकार किया गया है। प्रस्तावित दरों में भारतोलन और भार प्रमाणपत्र जारी करने की लागत शामिल होनी चाहिए ।
(xxxi). पत्तन ने कंटेनरों के घाटशुल्क प्रभार में 40 प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव किया है। प्रस्तावित वृद्धि अन्य प्रशुल्क मदों में अनुमानित सामान्य वृद्धि के अनुसार स्वीकार की गई है। इसने कंटेनरों पर मौजूदा भूमि किराये में यथास्थिति बनाए रखने का प्रस्ताव किया है। किसी भी मामले में इसका राजस्व पर प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि पत्तन को इसके बर्थ में कंटेनर के प्रहस्तन की उम्मीद नहीं है ।
(xxxii). सीओपीटी ने निकर्षक नेहरू शताब्दी और फ्लोटिंग क्रेन पेरियार के किराया प्रभार के संशोधन के लिए पृथक प्रस्ताव दाखिल किया है जिसपर इस प्राधिकरण द्वारा समान्तर रूप से कार्यवाही की जा रही है। उस मामले में इस प्राधिकरण का निर्णय पत्तन के संशोधित दरमान में शामिल किया गया है।
पत्तन ने कंटेनर फ्रेट स्टेशन (सीएफएस) के लिए प्रभारों के निर्धारण ओर केबल टी०वी० लाइनों तथा टेलीफोन केबल लाइनों के लिए मार्गाधिकार प्रभार के निर्धारण के लिए भी पृथक प्रस्ताव दाखिल किए हैं।
पत्तन के मौजूदा दरमान में, पाइपलाइन बिछाने के लिए मार्गाधिकार प्रभार संपदा किरायों के अधीन सही निर्धारित किए गए हैं। तथापि, पत्तन ने प्रशुल्क संशोधन प्रस्ताव में विविध प्रभार के अधीन गैस / तेल पाइप लाइन के लिए मार्गाधिकार प्रभार शामिल किए हैं। इस प्राधिकरण ने विभिन्न मामलों में निर्णय दिया है कि मार्गाधिकार प्रभार तत्संबंधी महापत्तन न्यासों की भूमि के लिए लागू पट्टा किराये के बराबर निर्धारित किए जाने चाहिए। पत्तन ने संपदा किराये के संशोधन के लिए दाखिल किए गए पृथक प्रस्ताव में पाइपलाइन आदि बिछाने के लिए मार्गाधिकार प्रभारों का संशोधन भी शामिल किया है। ऐसी स्थिति में इसपर प्रासंगिक संपदा संशोधन प्रस्ताव में अलग से कार्यवाही की जाएगी।
सीएफएस के लिए प्रस्तावित प्रशुल्क के संबंध में यथास्थिति बनाए रखी गई है और इस संबंध में पत्तन के प्रस्ताव का पृथक आदेश के माध्यम से निपटान किया जाएगा।
(xx.xi). पत्तन ने यह कहते हुए एसओआर में पृथक शर्त प्रस्तावित की है कि यदि कंटेनर सीएफएस में पड़े रहते हैं और अन्य पत्तन सुविधाएं भरण / खाली करने के लिए स्थानांतरित की जाती हैं, तो जीटीआईपीएल जो उक्त सेवा करता है, के लिए अनुमोदित दरों पर हाऊसकीपिंग / स्थानांतरण प्रभार अदा करने होंगे। यह शर्त सीएफएस प्रस्ताव में प्रस्तावित नहीं की गई है। पत्तन के दरमान में ऐसी शर्त निर्धारित करना प्रासंगिक नहीं पाया गया है। किसी भी स्थिति | दिनांक बाईस सितम्बर दो हज़ार नौ पारित किया था और तत्पश्चात पाँच फरवरी दो हज़ार दस को एक स्पष्टीकरण आदेश पारित किया था । जारी किए गए स्पष्टीकरण के साथ उक्त अनुसूची सीओपीटी के संशोधित दरमान में शामिल किए गए हैं। उक्त अनुसूची इकतीस मार्च दो हज़ार दस तक अथवा इस संबंध में पोत परिवहन मंत्रालय से आगे के आदेशों तक प्रभावी रहेगी। . उपस्कर किराये पर लेने के प्रभारों में चालीस प्रतिशत तक वृद्धि प्रस्तावित की गई है जिसे पत्तन समग्र घाटा स्थिति के मद्देनजर स्वीकार किया गया है। पत्तन ने ऑयल स्किमर के लिए किराया प्रभार शामिल करने का प्रस्ताव किया है। जब प्रस्तावित दर का औचित्य स्पष्ट करने के लिए कहा गया था तो पत्तन ने स्पष्ट किया था कि इसे सामान्यतः पत्तन प्रयोजनों के लिए उपयोग किया जाता है और बहुत ही कम बाह्य लोगों को उपलब्ध कराया जाता है। पत्तन द्वारा प्रेषित स्पष्टीकरण के आधार पर और स्वीकार करते हुए कि किसी भी उपयोक्ता ने इस प्रशुल्क मद पर कोई आपत्ति नहीं उठाई है, प्रस्तावित दर अनुमानित की गई है। . वर्तमान दरमान बल्क अथवा अन्य कार्यों के आधार पर भारतोलन मान के उपयोग के लिए दर निर्धारित करता है और भार प्रमाणपत्र जारी करने के लिए शून्य रुपया तीस.अस्सी निर्धारित किए गए हैं। पत्तन ने अब प्रति वाहन आधार पर धर्मकांटा के उपयोग के लिए प्रशुल्क वसूल करने का प्रस्ताव किया है। इसने, लदे हुए / खाली दोनों के लिए बीस ट्रेलर के लिए शून्य रुपया एक सौ, लॉरियों के लिए शून्य रुपया पचास और एलसीवी के लिए शून्य रुपया तीस का प्रस्ताव किया है। प्रति टन आधार जमा प्रमाणपत्र जारी करने की लागत पर वर्तमान दर के संदर्भ में रफ गणना दर्शाती है कि प्रस्तावित दरें मौजूदा दरों से पक्षीय तुलनात्मक है और इसलिए स्वीकार किया गया है। प्रस्तावित दरों में भारतोलन और भार प्रमाणपत्र जारी करने की लागत शामिल होनी चाहिए । . पत्तन ने कंटेनरों के घाटशुल्क प्रभार में चालीस प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव किया है। प्रस्तावित वृद्धि अन्य प्रशुल्क मदों में अनुमानित सामान्य वृद्धि के अनुसार स्वीकार की गई है। इसने कंटेनरों पर मौजूदा भूमि किराये में यथास्थिति बनाए रखने का प्रस्ताव किया है। किसी भी मामले में इसका राजस्व पर प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि पत्तन को इसके बर्थ में कंटेनर के प्रहस्तन की उम्मीद नहीं है । . सीओपीटी ने निकर्षक नेहरू शताब्दी और फ्लोटिंग क्रेन पेरियार के किराया प्रभार के संशोधन के लिए पृथक प्रस्ताव दाखिल किया है जिसपर इस प्राधिकरण द्वारा समान्तर रूप से कार्यवाही की जा रही है। उस मामले में इस प्राधिकरण का निर्णय पत्तन के संशोधित दरमान में शामिल किया गया है। पत्तन ने कंटेनर फ्रेट स्टेशन के लिए प्रभारों के निर्धारण ओर केबल टीशून्यवीशून्य लाइनों तथा टेलीफोन केबल लाइनों के लिए मार्गाधिकार प्रभार के निर्धारण के लिए भी पृथक प्रस्ताव दाखिल किए हैं। पत्तन के मौजूदा दरमान में, पाइपलाइन बिछाने के लिए मार्गाधिकार प्रभार संपदा किरायों के अधीन सही निर्धारित किए गए हैं। तथापि, पत्तन ने प्रशुल्क संशोधन प्रस्ताव में विविध प्रभार के अधीन गैस / तेल पाइप लाइन के लिए मार्गाधिकार प्रभार शामिल किए हैं। इस प्राधिकरण ने विभिन्न मामलों में निर्णय दिया है कि मार्गाधिकार प्रभार तत्संबंधी महापत्तन न्यासों की भूमि के लिए लागू पट्टा किराये के बराबर निर्धारित किए जाने चाहिए। पत्तन ने संपदा किराये के संशोधन के लिए दाखिल किए गए पृथक प्रस्ताव में पाइपलाइन आदि बिछाने के लिए मार्गाधिकार प्रभारों का संशोधन भी शामिल किया है। ऐसी स्थिति में इसपर प्रासंगिक संपदा संशोधन प्रस्ताव में अलग से कार्यवाही की जाएगी। सीएफएस के लिए प्रस्तावित प्रशुल्क के संबंध में यथास्थिति बनाए रखी गई है और इस संबंध में पत्तन के प्रस्ताव का पृथक आदेश के माध्यम से निपटान किया जाएगा। . पत्तन ने यह कहते हुए एसओआर में पृथक शर्त प्रस्तावित की है कि यदि कंटेनर सीएफएस में पड़े रहते हैं और अन्य पत्तन सुविधाएं भरण / खाली करने के लिए स्थानांतरित की जाती हैं, तो जीटीआईपीएल जो उक्त सेवा करता है, के लिए अनुमोदित दरों पर हाऊसकीपिंग / स्थानांतरण प्रभार अदा करने होंगे। यह शर्त सीएफएस प्रस्ताव में प्रस्तावित नहीं की गई है। पत्तन के दरमान में ऐसी शर्त निर्धारित करना प्रासंगिक नहीं पाया गया है। किसी भी स्थिति |
कार्यकर्ताओं का कहना है कि रविवार को राजस्थान के बाड़मेर के बालटोरा में एक आरटीआई कार्यकर्ता की पुलिस हिरासत में मौत हो गई है। कार्यकर्ता की मौत के बाद पूरे थाने को लाइन हाजिर कर दिया गया है। बाड़मेर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) शरद चौधरी ने कहा कि आरटीआई कार्यकर्ता जगदीश गोलियां जो 40 के आसपास थे उन्हें शनिवार को भारतीय दंड संहिता की धारा 151 के तहत सुरक्षात्मक हिरासत में रखा गया था। उनका अपने दो रिश्तेदारों के साथ जमीन विवाद चल रहा था।
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| कार्यकर्ताओं का कहना है कि रविवार को राजस्थान के बाड़मेर के बालटोरा में एक आरटीआई कार्यकर्ता की पुलिस हिरासत में मौत हो गई है। कार्यकर्ता की मौत के बाद पूरे थाने को लाइन हाजिर कर दिया गया है। बाड़मेर के पुलिस अधीक्षक शरद चौधरी ने कहा कि आरटीआई कार्यकर्ता जगदीश गोलियां जो चालीस के आसपास थे उन्हें शनिवार को भारतीय दंड संहिता की धारा एक सौ इक्यावन के तहत सुरक्षात्मक हिरासत में रखा गया था। उनका अपने दो रिश्तेदारों के साथ जमीन विवाद चल रहा था। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi. |
भारत की मुख्य विशेषता यह है कि यहाँ विभिन्नता में एकता है। भारत में विभिन्नता का स्वरूप न केवल भौगोलिक है, बल्कि भाषायी तथा सांस्कृतिक भी है। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में 1652 मातृभाषायें प्रचलन में हैं, जबकि संविधान द्वारा 22 भाषाओं को राजभाषा की मान्यता प्रदान की गयी है। संविधान के अनुच्छेद 344 के अंतर्गत पहले केवल 15 भाषाओं को राजभाषा की मान्यता दी गयी थी, लेकिन 21वें संविधान संशोधन के द्वारा सिन्धी को तथा 71वाँ संविधान संशोधन द्वारा नेपाली, कोंकणी तथा मणिपुरी को भी राजभाषा का दर्जा प्रदान किया गया। बाद में 92वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 के द्वारा संविधान की आठवीं अनुसूची में चार नई भाषाओं बोडो, डोगरी, मैथिली तथा संथाली को राजभाषा में शामिल कर लिया गया। इस प्रकार अब संविधान में 22 भाषाओं को राजभाषा का दर्जा प्रदान किया गया है। भारत में इन 22 भाषाओं को बोलने वाले लोगों की कुल संख्या लगभग 90% है। इन 22 भाषाओं के अतिरिक्त अंग्रेज़ी भी सहायक राजभाषा है और यह मिज़ोरम, नागालैण्ड तथा मेघालय की राजभाषा भी है। कुल मिलाकर भारत में 58 भाषाओं में स्कूलों में पढ़ायी की जाती है। संविधान की आठवीं अनुसूची में उन भाषाओं का उल्लेख किया गया है, जिन्हें राजभाषा की संज्ञा दी गई है।
।हिन्दी और हिन्दीतर भाषाएँ - बांग्ला, उड़िया, मराठी,
सिंधी, असमिया, गुजराती, पंजाबी आदि।
।छान्दस् (यास्क, पाणिनि)
।संस्कृत भाषा (पाणिनि)
।भारत की प्रथम देश भाषा, भगवान बुद्ध के सारे उपदेश पालि में ही हैं।
।भगवान महावीर के सारे उपदेश प्राकृत में ही हैं।
3.आधुनिक भारतीय आर्यभाषा (हिन्दी)
।असमिया लिपि मूलतः ब्राह्मी लिपि का ही एक विकसित रूप है।
।बांग्ला ("বাংলা") लिपि मूलतः ब्राह्मी लिपि और असमिया लिपि का विकसित रूप है।
।यह बांग्लादेश और भारत के पश्चिम बंगाल, असम तथा त्रिपुरा राज्यों में बोली जाती है।
।गुजराती ("ગુજરાતી") नागरी लिपि का नया प्रवाही स्वरूप नवीन गुजराती को इंगित करता है।
।ब्राह्मी लिपि, देवनागरी लिपि, नागरी और फ़ारसी लिपि,
।कन्नड़ ("ಕನ್ನಡ") कन्नड़ लिपि का विकास अशोक की ब्राह्मी लिपि के दक्षिणी प्रकारों से हुआ है।
।ऐतिहासिक रूप से कश्मीरी भाषा को चार लिपियों में लिखा जाता है, शारदा, देवनागरी, फ़ारसी-अरबी और रोमन।
।कोंकणी अनेक लिपियों में लिखी जाती रही है; जैसे - देवनागरी, कन्न्ड, मलयालम और रोमन।
।कोंकणी गोवा, महाराष्ट्र के दक्षिणी भाग, कर्नाटक के उत्तरी भाग, केरल के कुछ क्षेत्रों में बोली जाती है।
।मलयालम भाषा मुख्यतः दक्षिण-पश्चिमी तटीय राज्य केरल में बोली जाती है, यह केरल और केंद्रशासित प्रदेश लक्षद्वीप की राजभाषा है; लेकिन सीमावर्ती कर्नाटक और तमिलनाडु के द्विभाषी समुदाय के लोग भी यह भाषा बोलते हैं।
।इस भाषा की अपनी लिपि है, जिसे स्थानीय लोग मेइतेई माएक कहते हैं।
।मुख्यतः पूर्वोत्तर भारत के लिए मणिपुर राज्य में बोली जाने वाली भाषा है। यह असम, मिज़ोरम, त्रिपुरा, बांग्लादेश और म्यांमार में भी बोली जाती है।
।"मराठी" भाषा को लिखने के लिए देवनागरी और इसके प्रवाही स्वरुप मोदी, दोनों लिपियों का उपयोग होता है।
।महाराष्ट्र की राजभाषा है। इसे बोलने का मानक स्वरुप पुणे (भूतपूर्व पूना) शहर की बोली है। यह भाषा गोवा, कर्नाटक, गुजरात में बोली जाती है। केन्द्रशासित प्रदेशों में यह दमन और दीव , और दादरा तथा नगर हवेली में भी बोली जाती है।
।यह भाषा नेपाल के अतिरिक्त भारत के सिक्किम, पश्चिम बंगाल, उत्तर-पूर्वी राज्यों आसाम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय तथा उत्तराखण्ड के अनेक लोगों की मातृभाषा है।
।उड़िया ("ଓରିୟା")
।पंजाबी ("ਪੰਜਾਬੀ")
।पंजाबी भाषा भारत तथा पाकिस्तान में बोली जाती है।
।तमिल ("தமிழ்") ऐतिहासिक रूप से तमिल लेखन प्रणाली का विकास ब्राह्मी लिपि से वट्टे-लुटटु (मुड़े हुए अक्षर) और कोले-लुट्टु (लम्बाकार अक्षर) के स्थानीय रूपांतरणों के साथ हुआ।
।विश्वभर में पाँच करोड़ से अधिक बोलने वालों में से लगभग 90% भारत में।
।तेलुगु ("తెలుగు")
।बोडो भाषा को भारत के उत्तरपूर्व, नेपाल और बांग्लादेश में रहने वाले बोडो लोग बोलते हैं।
।इसकी अपनी लिपि है, जिसे डोगरा अख्खर या डोगरे कहते हैं।
।पहले इसे मिथिलाक्षर तथा कैथी लिपि में लिखा जाता था जो बांग्ला और असमिया लिपियों से मिलती थी पर कालान्तर में देवनागरी लिपिका प्रयोग होने लगा ।
।मैथिली भाषा उत्तरी बिहार और नेपाल के तराई के ईलाक़ों में बोली जाने वाली भाषा है।
| भारत की मुख्य विशेषता यह है कि यहाँ विभिन्नता में एकता है। भारत में विभिन्नता का स्वरूप न केवल भौगोलिक है, बल्कि भाषायी तथा सांस्कृतिक भी है। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में एक हज़ार छः सौ बावन मातृभाषायें प्रचलन में हैं, जबकि संविधान द्वारा बाईस भाषाओं को राजभाषा की मान्यता प्रदान की गयी है। संविधान के अनुच्छेद तीन सौ चौंतालीस के अंतर्गत पहले केवल पंद्रह भाषाओं को राजभाषा की मान्यता दी गयी थी, लेकिन इक्कीसवें संविधान संशोधन के द्वारा सिन्धी को तथा इकहत्तरवाँ संविधान संशोधन द्वारा नेपाली, कोंकणी तथा मणिपुरी को भी राजभाषा का दर्जा प्रदान किया गया। बाद में बानवेवाँ संविधान संशोधन अधिनियम, दो हज़ार तीन के द्वारा संविधान की आठवीं अनुसूची में चार नई भाषाओं बोडो, डोगरी, मैथिली तथा संथाली को राजभाषा में शामिल कर लिया गया। इस प्रकार अब संविधान में बाईस भाषाओं को राजभाषा का दर्जा प्रदान किया गया है। भारत में इन बाईस भाषाओं को बोलने वाले लोगों की कुल संख्या लगभग नब्बे% है। इन बाईस भाषाओं के अतिरिक्त अंग्रेज़ी भी सहायक राजभाषा है और यह मिज़ोरम, नागालैण्ड तथा मेघालय की राजभाषा भी है। कुल मिलाकर भारत में अट्ठावन भाषाओं में स्कूलों में पढ़ायी की जाती है। संविधान की आठवीं अनुसूची में उन भाषाओं का उल्लेख किया गया है, जिन्हें राजभाषा की संज्ञा दी गई है। ।हिन्दी और हिन्दीतर भाषाएँ - बांग्ला, उड़िया, मराठी, सिंधी, असमिया, गुजराती, पंजाबी आदि। ।छान्दस् ।संस्कृत भाषा ।भारत की प्रथम देश भाषा, भगवान बुद्ध के सारे उपदेश पालि में ही हैं। ।भगवान महावीर के सारे उपदेश प्राकृत में ही हैं। तीन.आधुनिक भारतीय आर्यभाषा ।असमिया लिपि मूलतः ब्राह्मी लिपि का ही एक विकसित रूप है। ।बांग्ला लिपि मूलतः ब्राह्मी लिपि और असमिया लिपि का विकसित रूप है। ।यह बांग्लादेश और भारत के पश्चिम बंगाल, असम तथा त्रिपुरा राज्यों में बोली जाती है। ।गुजराती नागरी लिपि का नया प्रवाही स्वरूप नवीन गुजराती को इंगित करता है। ।ब्राह्मी लिपि, देवनागरी लिपि, नागरी और फ़ारसी लिपि, ।कन्नड़ कन्नड़ लिपि का विकास अशोक की ब्राह्मी लिपि के दक्षिणी प्रकारों से हुआ है। ।ऐतिहासिक रूप से कश्मीरी भाषा को चार लिपियों में लिखा जाता है, शारदा, देवनागरी, फ़ारसी-अरबी और रोमन। ।कोंकणी अनेक लिपियों में लिखी जाती रही है; जैसे - देवनागरी, कन्न्ड, मलयालम और रोमन। ।कोंकणी गोवा, महाराष्ट्र के दक्षिणी भाग, कर्नाटक के उत्तरी भाग, केरल के कुछ क्षेत्रों में बोली जाती है। ।मलयालम भाषा मुख्यतः दक्षिण-पश्चिमी तटीय राज्य केरल में बोली जाती है, यह केरल और केंद्रशासित प्रदेश लक्षद्वीप की राजभाषा है; लेकिन सीमावर्ती कर्नाटक और तमिलनाडु के द्विभाषी समुदाय के लोग भी यह भाषा बोलते हैं। ।इस भाषा की अपनी लिपि है, जिसे स्थानीय लोग मेइतेई माएक कहते हैं। ।मुख्यतः पूर्वोत्तर भारत के लिए मणिपुर राज्य में बोली जाने वाली भाषा है। यह असम, मिज़ोरम, त्रिपुरा, बांग्लादेश और म्यांमार में भी बोली जाती है। ।"मराठी" भाषा को लिखने के लिए देवनागरी और इसके प्रवाही स्वरुप मोदी, दोनों लिपियों का उपयोग होता है। ।महाराष्ट्र की राजभाषा है। इसे बोलने का मानक स्वरुप पुणे शहर की बोली है। यह भाषा गोवा, कर्नाटक, गुजरात में बोली जाती है। केन्द्रशासित प्रदेशों में यह दमन और दीव , और दादरा तथा नगर हवेली में भी बोली जाती है। ।यह भाषा नेपाल के अतिरिक्त भारत के सिक्किम, पश्चिम बंगाल, उत्तर-पूर्वी राज्यों आसाम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय तथा उत्तराखण्ड के अनेक लोगों की मातृभाषा है। ।उड़िया ।पंजाबी ।पंजाबी भाषा भारत तथा पाकिस्तान में बोली जाती है। ।तमिल ऐतिहासिक रूप से तमिल लेखन प्रणाली का विकास ब्राह्मी लिपि से वट्टे-लुटटु और कोले-लुट्टु के स्थानीय रूपांतरणों के साथ हुआ। ।विश्वभर में पाँच करोड़ से अधिक बोलने वालों में से लगभग नब्बे% भारत में। ।तेलुगु ।बोडो भाषा को भारत के उत्तरपूर्व, नेपाल और बांग्लादेश में रहने वाले बोडो लोग बोलते हैं। ।इसकी अपनी लिपि है, जिसे डोगरा अख्खर या डोगरे कहते हैं। ।पहले इसे मिथिलाक्षर तथा कैथी लिपि में लिखा जाता था जो बांग्ला और असमिया लिपियों से मिलती थी पर कालान्तर में देवनागरी लिपिका प्रयोग होने लगा । ।मैथिली भाषा उत्तरी बिहार और नेपाल के तराई के ईलाक़ों में बोली जाने वाली भाषा है। |
* गैर-निवासियों के लिए $ 10,126 प्रति सेमेस्टर (प्रति सत्र 9 घंटे लेना)। गैर-निवासियों के लिए $ 4,577 प्रति सेमेस्टर (प्रति सत्र 9 घंटे लेना)।
निर्माण प्रबंधन की डिग्री के मास्टर निर्माण परियोजनाओं के प्रबंधन पर केंद्रित एक अंतःविषय कार्यक्रम है। इसमें वास्तुकला, व्यवसाय और प्रबंधन में वैकल्पिक पाठ्यक्रम शामिल हैं। यह मास्टर डिग्री मुख्य रूप से सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री के साथ आवेदकों के लिए डिज़ाइन की गई है, लेकिन विभिन्न स्नातक विषयों के साथ छात्र असाइन किए गए लेवलिंग पाठ्यक्रम लेकर कार्यक्रम में प्रवेश कर सकते हैं।
जीआरई पर प्रदर्शन आवेदकों को स्वीकार करने या मास्टर या पीएचडी में प्रवेश से इनकार करने के लिए प्राथमिक मानदंड के लिए एकमात्र मानदंड नहीं होगा। कार्यक्रम। ऐसे मामलों में जहां जीआरई का प्रदर्शन अपेक्षाकृत खराब है, आवेदक द्वारा प्रस्तुत अन्य सभी योग्यताएं सफलता के लिए संभावित के साक्ष्य के लिए सावधानीपूर्वक मूल्यांकन की जाएंगी।
आवेदकों के लिए जिनकी मूल भाषा अंग्रेजी नहीं है, एक विदेशी भाषा (टीओईएफएल) के रूप में अंग्रेजी के पेपर-आधारित टेस्ट पर 550 का न्यूनतम स्कोर, टीओईएफएल आईबीटी पर 79, स्पीक पर 50, मौखिक जीआरई पर 146, एमईएलबी पर 85 (मिशिगन अंग्रेजी भाषा आकलन बैटरी), या आईईएलटीएस (अंतर्राष्ट्रीय अंग्रेजी भाषा परीक्षण प्रणाली) पर 6.5। (एमईएलबी और आईईएलटीएस केवल तब उपयोग किए जाते हैं जब आवेदक के देश में अन्य परीक्षण उपलब्ध नहीं होते हैं।)
प्रवेश आवश्यकताओं पर अतिरिक्त जानकारी।
डिग्री पूर्ण करने की आवश्यकता हैः
हमारे पारंपरिक परिसर के अलावा, शाम के कक्षा के माहौल के अलावा, यह कार्यक्रम दूरी सीखने के माध्यम से उपलब्ध है। यह लचीला विकल्प इंजीनियरिंग और निर्माण पेशेवरों के लिए आदर्श है जो नियोजित करते समय एक उन्नत डिग्री का पीछा करना चुनते हैं। दूरस्थ शिक्षा के छात्र ऑनलाइन व्याख्यान सामग्री देखने में सक्षम हैं। इसके अतिरिक्त, ब्लैकबोर्ड कोर्स प्रबंधन प्रणाली का प्रयोग परीक्षण, कक्षा असाइनमेंट और समूह चर्चाओं के लिए किया जाएगा।
प्रयोगशाला कार्य की आवश्यकता वाले एकमात्र पाठ्यक्रम सीई 5379 (निर्माण लागत अनुमान), और सीई 5386 (निर्माण योजना और निर्धारण) हैं। इन दो पाठ्यक्रमों के लिए, छात्रों को कई प्रयोगशाला अभ्यासों को पूरा करने और एक परियोजना को पूरा करने की आवश्यकता होती है। चूंकि छात्रों को इन दो पाठ्यक्रमों (Primavera P6, Timberline, और Heavy Bid) के साथ उपयोग किए जाने वाले सॉफ़्टवेयर के सीमित समय के संस्करण प्रदान करना संभव है, छात्र शारीरिक रूप से परिसर में उपस्थित हुए बिना प्रयोगशाला अभ्यास पूरा कर सकते हैं।
प्रत्येक पद के लिए प्रकाशित प्राथमिकता तिथि के बाद आवेदन स्वीकार किए जाते हैं, लेकिन प्रवेश की गारंटी पर विचार के लिए कृपया आवेदन और संबंधित सामग्रियों को प्राथमिकता तिथि से जमा करें। हालांकि, सहायता और फ़ेलोशिप जैसे प्रोग्राम-विशिष्ट फंडिंग अवसरों के लिए योग्य होने के लिए अपनी इच्छित प्रारंभ तिथि से पहले आवेदन करना महत्वपूर्ण है। ध्यान रखें कि विभागीय आवेदन प्रसंस्करण समय बहुत भिन्न होता है और कुछ कार्यक्रमों के लिए एक साल पहले तक के आवेदन की आवश्यकता होती है।
डुओलिंगो अंग्रेज़ी टेस्ट के साथ अपनी अंग्रेज़ी दक्षता प्रमाणित करें! DET दुनिया भर के 4,000 से अधिक विश्वविद्यालयों (जैसे यह) द्वारा स्वीकृत एक सुविधाजनक, तेज़ और सस्ती ऑनलाइन अंग्रेजी परीक्षा है।
| * गैर-निवासियों के लिए दस डॉलर,एक सौ छब्बीस प्रति सेमेस्टर । गैर-निवासियों के लिए चार डॉलर,पाँच सौ सतहत्तर प्रति सेमेस्टर । निर्माण प्रबंधन की डिग्री के मास्टर निर्माण परियोजनाओं के प्रबंधन पर केंद्रित एक अंतःविषय कार्यक्रम है। इसमें वास्तुकला, व्यवसाय और प्रबंधन में वैकल्पिक पाठ्यक्रम शामिल हैं। यह मास्टर डिग्री मुख्य रूप से सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री के साथ आवेदकों के लिए डिज़ाइन की गई है, लेकिन विभिन्न स्नातक विषयों के साथ छात्र असाइन किए गए लेवलिंग पाठ्यक्रम लेकर कार्यक्रम में प्रवेश कर सकते हैं। जीआरई पर प्रदर्शन आवेदकों को स्वीकार करने या मास्टर या पीएचडी में प्रवेश से इनकार करने के लिए प्राथमिक मानदंड के लिए एकमात्र मानदंड नहीं होगा। कार्यक्रम। ऐसे मामलों में जहां जीआरई का प्रदर्शन अपेक्षाकृत खराब है, आवेदक द्वारा प्रस्तुत अन्य सभी योग्यताएं सफलता के लिए संभावित के साक्ष्य के लिए सावधानीपूर्वक मूल्यांकन की जाएंगी। आवेदकों के लिए जिनकी मूल भाषा अंग्रेजी नहीं है, एक विदेशी भाषा के रूप में अंग्रेजी के पेपर-आधारित टेस्ट पर पाँच सौ पचास का न्यूनतम स्कोर, टीओईएफएल आईबीटी पर उन्यासी, स्पीक पर पचास, मौखिक जीआरई पर एक सौ छियालीस, एमईएलबी पर पचासी , या आईईएलटीएस पर छः.पाँच। प्रवेश आवश्यकताओं पर अतिरिक्त जानकारी। डिग्री पूर्ण करने की आवश्यकता हैः हमारे पारंपरिक परिसर के अलावा, शाम के कक्षा के माहौल के अलावा, यह कार्यक्रम दूरी सीखने के माध्यम से उपलब्ध है। यह लचीला विकल्प इंजीनियरिंग और निर्माण पेशेवरों के लिए आदर्श है जो नियोजित करते समय एक उन्नत डिग्री का पीछा करना चुनते हैं। दूरस्थ शिक्षा के छात्र ऑनलाइन व्याख्यान सामग्री देखने में सक्षम हैं। इसके अतिरिक्त, ब्लैकबोर्ड कोर्स प्रबंधन प्रणाली का प्रयोग परीक्षण, कक्षा असाइनमेंट और समूह चर्चाओं के लिए किया जाएगा। प्रयोगशाला कार्य की आवश्यकता वाले एकमात्र पाठ्यक्रम सीई पाँच हज़ार तीन सौ उन्यासी , और सीई पाँच हज़ार तीन सौ छियासी हैं। इन दो पाठ्यक्रमों के लिए, छात्रों को कई प्रयोगशाला अभ्यासों को पूरा करने और एक परियोजना को पूरा करने की आवश्यकता होती है। चूंकि छात्रों को इन दो पाठ्यक्रमों के साथ उपयोग किए जाने वाले सॉफ़्टवेयर के सीमित समय के संस्करण प्रदान करना संभव है, छात्र शारीरिक रूप से परिसर में उपस्थित हुए बिना प्रयोगशाला अभ्यास पूरा कर सकते हैं। प्रत्येक पद के लिए प्रकाशित प्राथमिकता तिथि के बाद आवेदन स्वीकार किए जाते हैं, लेकिन प्रवेश की गारंटी पर विचार के लिए कृपया आवेदन और संबंधित सामग्रियों को प्राथमिकता तिथि से जमा करें। हालांकि, सहायता और फ़ेलोशिप जैसे प्रोग्राम-विशिष्ट फंडिंग अवसरों के लिए योग्य होने के लिए अपनी इच्छित प्रारंभ तिथि से पहले आवेदन करना महत्वपूर्ण है। ध्यान रखें कि विभागीय आवेदन प्रसंस्करण समय बहुत भिन्न होता है और कुछ कार्यक्रमों के लिए एक साल पहले तक के आवेदन की आवश्यकता होती है। डुओलिंगो अंग्रेज़ी टेस्ट के साथ अपनी अंग्रेज़ी दक्षता प्रमाणित करें! DET दुनिया भर के चार,शून्य से अधिक विश्वविद्यालयों द्वारा स्वीकृत एक सुविधाजनक, तेज़ और सस्ती ऑनलाइन अंग्रेजी परीक्षा है। |
1 . आयोडीन की कमी, जब किसी महिला के शरीर में आयोडीन की कमी हो जाती हैं तो इससे सबसे ज्यादा नुकसान बच्चेदानी को पहुंचता हैं। क्यों की आयोडीन की कमी होने से महिलाएं थायराइड की समस्या से ग्रसित हो जाती हैं। जिससे बच्चेदानी में संकुचन आने लगता हैं और महिलाओं की बच्चेदानी को काफी नुकसान पहुंचता हैं।
2 . फोलिक एसिड की कमी, शरीर में फोलिक एसिड की कमी होने से बच्चेदानी में अंडे का निर्माण सही तरीकों से नहीं होता हैं। साथ ही साथ अंडे की गुणवत्ता भी ख़राब हो जाती हैं। जिससे बच्चेदानी को नुकसान पहुंचता हैं। इससे महिलाओं की बच्चेदानी कमजोर हो जाती हैं और उन्हें माँ बनने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता हैं।
3 . आयरन की कमी, जब किसी महिला के शरीर में आयरन की कमी हो जाती हैं तो इससे बच्चेदानी की ऊपरी परत कमजोर होने लगती हैं। जिससे बच्चेदानी को नुकसान पहुंचता हैं। साथ ही साथ महिलाओं का शरीर अस्वस्थ हो जाता हैं। इससे महिलाओं को सावधान रहनी चाहिए और रोजाना आयरन युक्त आहार का सेवन करना चाहिए ताकि इस परेशानी से बचा जा सके।
| एक . आयोडीन की कमी, जब किसी महिला के शरीर में आयोडीन की कमी हो जाती हैं तो इससे सबसे ज्यादा नुकसान बच्चेदानी को पहुंचता हैं। क्यों की आयोडीन की कमी होने से महिलाएं थायराइड की समस्या से ग्रसित हो जाती हैं। जिससे बच्चेदानी में संकुचन आने लगता हैं और महिलाओं की बच्चेदानी को काफी नुकसान पहुंचता हैं। दो . फोलिक एसिड की कमी, शरीर में फोलिक एसिड की कमी होने से बच्चेदानी में अंडे का निर्माण सही तरीकों से नहीं होता हैं। साथ ही साथ अंडे की गुणवत्ता भी ख़राब हो जाती हैं। जिससे बच्चेदानी को नुकसान पहुंचता हैं। इससे महिलाओं की बच्चेदानी कमजोर हो जाती हैं और उन्हें माँ बनने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता हैं। तीन . आयरन की कमी, जब किसी महिला के शरीर में आयरन की कमी हो जाती हैं तो इससे बच्चेदानी की ऊपरी परत कमजोर होने लगती हैं। जिससे बच्चेदानी को नुकसान पहुंचता हैं। साथ ही साथ महिलाओं का शरीर अस्वस्थ हो जाता हैं। इससे महिलाओं को सावधान रहनी चाहिए और रोजाना आयरन युक्त आहार का सेवन करना चाहिए ताकि इस परेशानी से बचा जा सके। |
10. तो आप यदि कभी मंदिर की शक्ति को महसूस करना चाहते हैं तो एक बार आपको मेंहदीपुर बालाजी जी जरूर जाना चाहिए. यदि आप एक बार यहाँ जाते हैं तो हर बार आप खुदबखुद यहाँ चले जाया करोगे.
तो इस प्रकार से मेहंदीपुर बालाजी हनुमान का यह मंदिर ना सिर्फ भारत में बल्कि विदेशों में भी अपनी शक्ति के लिए जाना जाता है. यहाँ कई हजार लोग तो बाहर के देशों से अपनी समस्याएँ लेकर आते हैं.
| दस. तो आप यदि कभी मंदिर की शक्ति को महसूस करना चाहते हैं तो एक बार आपको मेंहदीपुर बालाजी जी जरूर जाना चाहिए. यदि आप एक बार यहाँ जाते हैं तो हर बार आप खुदबखुद यहाँ चले जाया करोगे. तो इस प्रकार से मेहंदीपुर बालाजी हनुमान का यह मंदिर ना सिर्फ भारत में बल्कि विदेशों में भी अपनी शक्ति के लिए जाना जाता है. यहाँ कई हजार लोग तो बाहर के देशों से अपनी समस्याएँ लेकर आते हैं. |
यहाँ पर 39 रेफरेन्स दिए गए हैं जिन्हे आप आर्टिकल में नीचे देख सकते हैं।
यह आर्टिकल २५,२८६ बार देखा गया है।
आपका जुनून ही वह कारण है जिसकी वजह से आप सुबह उठते हैं, और इसके बारे में सोचना देर रात तक आपको उत्साह के साथ जगाए रख सकता है । यह जानने से कि आप ज़िंदगी अपनी शर्तों पर जी रहे हैं, जुनून संतुष्टि की एक भावना भी हो सकती है । बहरहाल, हर कोई अपने जुनून को तुरंत नहीं खोज सकता । चिंता न करें - चाहे आप एक नया कैरियर खोजने के लिए अपने जुनून को खोज रहे हैं, या आप पूरी तरह से एक नए शौक या गतिविधि में डूबना चाहते हैं, अपना जुनून खोजने के लिए ऐसी कुछ चीज़ें हैं जो आप कर सकते हैं ।
- किसी चीज़ को ज़बरदस्ती "करना" बंद कर दें । यह वाक्यांश मनोवैज्ञानिक क्लेटन बार्बेउ (Clayton Barbeau) ने खोजा था, जिन्होंने इस विचार को यह वर्णन करने के लिए गढ़ा था कि जब आप पर कुछ "करने" के लिए बाहरी दबाव हो, तो उस मौके पर क्या होता है ।[३] X रिसर्च सोर्स यह आपको अपने चुनावों को ले कर नाखुश और असंतुष्ट महसूस करा सकता है क्योंकि वे वास्तविक चुनावों की जगह, अपराध और भय का रूप हो सकते हैं ।[४] X रिसर्च सोर्स किसी और के कहने पर कुछ "करने" के बजाय इस बात पर ध्यान दें कि आप क्या करना चाहते हैं ।
- उस समय के बारे में सोचें जब आप संतुष्ट और राज़ी महसूस कर रहे थे । क्या जरूरतें या इच्छाएं पूरी हुई थी? इस समय या अनुभव के बारे में क्या महत्वपूर्ण था? आपको वैसा क्यों लगता है?
- यदि आप अपने परिवार, समुदाय, कार्यस्थल, पड़ोस, या यहां तक कि दुनिया के बारे में सिर्फ एक ही चीज़ बदल सकें, तो आप क्या बदलना चाहेंगे और क्यों?
- उदाहरण के लिए, शायद आपने तब अपने आप पर गर्व महसूस किया हो जब आपने अपने दम पर कुछ पूरा किया था । इससे स्वतंत्रता, आत्मनिर्भरता, और महत्वाकांक्षा की तरह संभव मान्यताओं के बारे में पता चलता है ।
- आपने शायद तब काफ़ी संतुष्ट महसूस किया था जब आप खुद को अपनी कलाकृति के माध्यम से व्यक्त करने में सक्षम थे । इससे रचनात्मकता, अन्वेषण, और दृष्टि की तरह संभव मान्यताओं का पता चलता है ।
- शायद आपको तब सबसे ज़्यादा खुशी महसूस हुई थी जब आपने अपने बच्चों की होमवर्क करने में मदद की थी, या जब आप एक पड़ोसी के आंगन को ले कर उनकी मदद करने में सक्षम थे । इससे समर्थन, समुदाय और समाज के लिए सकारात्मक योगदान की तरह संभव मान्यताओं का पता चलता है ।
- याद रखें कि आपकी मान्यताएं केवल आपकी हैं । उन्हें किसी और के मानकों के द्वारा न परखें । कुछ लोगों के लिए सहजता या प्रतिस्पर्धा का महत्व होता है, और दूसरों के लिए संरचना या सहयोग का महत्व होता है । इसमें से कोई भी दूसरे की तुलना में "बेहतर" नहीं है ।
- मेरा लक्ष्य क्या है?
- मैं ज्यादातर समय क्या करता हूं?
- मैं क्या करने की कोशिश करता रहता हूं?
- मुझे क्या आकर्षित करता है?
- यदि मैं अपने बाकी के जीवन में सिर्फ़ एक ही चीज़ कर सकूं, तो वह क्या होगी?
- मुझे क्या करना पसंद है?
- मैं क्या करना चाहूंगा, भले ही मुझे उसके लिए तनख्वाह न मिले?
- ऐसा क्या है जिसे करते हुए मुझे लगे कि उसके अलावा और किसी भी चीज़ों का अस्तित्व ही नहीं है?
- ऐसी कौन सी गतिविधि है जिसे करते हुए मैं पूरी तरह से अपने तत्व में महसूस करता हूं?
- मैं उस वक्त क्या करता हूं जब मैं "सही" या "सुंदर" या "जुड़ा हुआ" महसूस करता हूं?
It's okay अगर आप अपने पैशन को पूरी तरह से नहीं अपना पाते हैं। अपने पैशन को पाना या उसका पता लग पाना अपने आप में एक बड़ी बात है, लेकिन ये जरूरी नहीं है कि आप किसी एक ही चीज़ को लेकर पेशनेट (passionate) हों, आपके एक से ज्यादा पैशन (जुनून) भी हो सकते हैं। अधिकांश जुनून जिज्ञासा और इंट्रेस्ट के साथ शुरू होते हैं, और वे समय के साथ बढ़ते जाते हैं। अपने जीवन भर के उन अनुभवों के बारे में सोचें, जिन्होंने आपको ऊर्जावान बनाया है या आपको वास्तव में जिज्ञासु (curious) बनाया है। जितना अधिक आप उन चीजों में एंगेज होते हैं, उतना ही आप अपनी गिफ्ट्स और एक्सपर्टीज को डेवलप करेंगे, जो आपको कुछ अच्छा करने या बनाने के लिए प्रेरित करेगा और जिससे आप दूसरों को भी इनस्पायर कर पाएंगे।
1उस चीज़ के बारे में सोचें जिसे आप हमेशा से करने का सपना देखते आ रहे हैंः यह उन चीज़ों की सूची बनाने से अलग है जो आपको खुश करती हैं । आपको उन सभी चीज़ों को लिखने की ज़रूरत है जिनके आप हमेशा से सपने देखते आ रहे हैं, लेकिन आप अभी तक उन्हें कर नहीं पाएं हैं क्योंकि शायद आपके पास समय नहीं है, पैसा नहीं है, या फिर वे चीज़ें अव्यावहारिक हैं या थोड़ी सी डरावनी हैं । ये कुछ सवाल हैं जो आपको अपने आप से पूछने की ज़रूरत हैः
- वह क्या चीज़ है जिसके मैं हमेशा से सपने देख रहा हूं, लेकिन उसे कर नहीं पाया हूं?
- जब मैं एक बच्चा था, तब मैं क्या करना चाहता था?
- क्या मेरा एक अव्यावहारिक सपना था जिसे मैने छोड़ दिया था?
- मुझे क्या पढ़ना या किसके बारे में दिन में सपने देखना पसंद है?
- क्या ऐसा कुछ है जिसकी कोशिश करने में मुझे डर है कि वह मुझे अपनी आरामदेह स्थिति से बाहर ले जाएगा?
- क्या ऐसा कुछ है जो मैं हमेशा से करना चाहता था लेकिन अभी तक आर्थिक भय के कारण कर नहीं पाया हूं?
- क्या ऐसा कुछ है जो मैं हमेशा से करना चाहता था लेकिन अभी तक मैने उसे करने की कोशिश इसलिए नहीं की है क्योंकि मुझे डर है कि मैं उसमें नाकाम रहूंगा या मैं उसमें अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाउंगा?
- क्या मेरी पहचान में कोई ऐसा व्यक्ति है जो कुछ ऐसी चीज़ करता है जो मुझे रोमांचित करती है?
- यदि कोई भी प्रतिबंध न हो तो ऐसा क्या है जो मैं क्या करना चाहूंगा?
- उन तस्वीरों और प्रेरणादायक उद्धरणों को इकट्ठा करें जो यह प्रतिनिधित्व करें कि आपके लिए क्या महत्वपूर्ण है । आप जीवन में क्या बनना चाहते हैं? आप अपने जीवन से क्या चाहते हैं? आप किस चीज़ की रचना करना चाहते हैं?
- आप पिंट्रेस्ट (Pinterest) जैसी साइट पर भी एक आभासी दृष्टि तख्ता बना सकते हैं ।
- क्या यह महत्वपूर्ण है कि आप अपने कैरियर के प्रति जोशीले हैं? आपको शायद जीवन के अन्य क्षेत्रों में, जैसे कि शौक या यहां तक कि वित्तीय सुरक्षा में भी नुक़सान उठाना पड़ सकता है ।
- क्या आपके लिए यह महत्वपूर्ण है कि यात्रा या एक दूसरे शौक के प्रति जुनून को आगे बढ़ाने के लिए आपके पास पैसे होने चाहिए? आपको उसका भुगतान करने के लिए एक ठोस, अच्छी तनख्वाह वाली लेकिन कम रोमांचक नौकरी करनी पड़ सकती है ।
- जितना संभव हो उतना विशिष्ट रहें । "खुशी" और "सफलता" सहायक होने के लिए बहुत अस्पष्ट हैं । एक गाइड के रूप में कि आपको क्या खुश करता है, अपने मूल्यों और मान्यताओं पर अपने प्रतिबिंब को उपयोग करने का प्रयास करें ।
- दुविधाएं और समझौते करने के बावजूद, आप और अधिक संतुष्ट महसूस करेंगे -- और अपने चुनावों के प्रति नियंत्रित होने पर आप ज़्यादा जोशीला भी महसूस करेंगे । आपके ऊपर किसी और की उम्मीदें नहीं हैं, केवल आपकी ही उम्मीदें हैं ।
1एक लक्ष्य निर्धारित करेंः यह एक बड़ा लक्ष्य हो सकता है, जैसे कि "एक नई नौकरी ढूंढना," या एक छोटा लक्ष्य जैसे कि "एक कला की क्लास लेना" । एक ऐसा लक्ष्य निर्धारित करने के लिए जिसे आपके हासिल करने की संभावना हो, निम्नलिखित लेख पर विचार करेंः
- इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कौन जिम्मेदार है? आम तौर पर, यह आपको करना होगा, लेकिन यदि आपके लक्ष्य में दूसरे भी शामिल हैं -- जैसे कि "अपने परिवार के साथ अधिक समय बिताना" -- तो वे भी इसे पूरा करने के लिए जिम्मेदार होंगे ।
- आपके लक्ष्य का विवरण क्या है? लोगों के अपने लक्ष्यों को पूरा नहीं करने के कारणों में से एक कारण यह है कि वे काफ़ी अस्पष्ट हैं । जितना संभव हो सके उतना ठोस रहें । उदाहरण के लिए, "कलात्मक बनना सीखना" काफ़ी निरुद्देश्य है । "मेरे कलात्मक पक्ष का पता लगाने के लिए एक पेंटिंग की कक्षा लेना" ज़्यादा प्रबंधनीय है ।
- आप लक्ष्य के प्रत्येक चरण को कब पूरा करेंगे? कई लक्ष्यों को, विशेष रूप से बड़े या जटिल वालों को, कई चरणों की ज़रूरत है । पता लगाएं कि आप प्रत्येक चरण को कब समाप्त करेंगे । उदाहरण के लिएः "इस सप्ताह मेरे समुदाय में कला की कक्षाएं ढूंढे । एक कक्षा के लिए साइन अप करें और अगले सप्ताह सामान खरीदें । उस के एक सप्ताह बाद कक्षाएं लेना शुरू करें ।"
- ये लक्ष्य कहां पर शुरु होंगे? "और अधिक व्यायाम करना" के समान कई लक्ष्यों के लिए यह पता होना सहायक हो सकता है कि वह काम कहां पर किया जाएगा । उदाहरण के लिए, यदि आप सप्ताह में तीन बार व्यायाम करना चाहते हैं, तो निर्णय लें कि क्या आप जिम जाना चाहते हैं, दौड़ना चाहते हैं, घर पर अभ्यास करना चाहते हैं, या एक कक्षा लेना चाहते हैं ।
- आप प्रत्येक चरण को कैसे पूरा करेंगे? इससे आपको लक्ष्य की बनावट को परिभाषित करने में मदद मिलती है । उदाहरण के लिए, यदि आपका लक्ष्य "फ्रांस जाना" है, तो पता लगाएं कि प्रत्येक स्थिति में आपको क्या करना, जैसे कि "यात्रा गाइड और वेबसाइटों को देखें", "उन दोस्तों से बात करें जो फ्रांस जा चुके हैं", "रिजर्वेशन बुक करना", "एक पासपोर्ट लेना", आदि ।
- आप यह क्यों कर रहे हैं? अपनी प्रेरणा को स्पष्ट करने से आपका लक्ष्य को पूरा करने की अधिक संभावना है । इस लक्ष्य को पूरा करने से आपको अपना जुनून हासिल करने में क्या मदद मिलेगी?
- अगली बार जब आप खुद को यह सोचते हुए पाएं कि "हां, दुनिया की यात्रा करना/एक पक्षी का घर बनाना/एक नई नौकरी की खोज करना बहुत अच्छा होगा, लेकिन ..." तो वहीं पर रुक जाएं ।
- अपने आप से पूछेंः क्या "लेकिन", या बाधा या रोक, को आप वास्तव में पार नहीं कर सकते? या फिर उसके आगे बढ़ने के लिए केवल थोड़ी सी रचनात्मकता की ज़रूरत है?
- उदाहरण के लिए, आपका लक्ष्य कुछ ऐसा हो सकता है "मैं दुनिया की यात्रा करना चाहता हूं, लेकिन मेरे पास पैसे नहीं हैं ।" यह एक असंभव बाधा की तरह लग सकता है, लेकिन इससे आगे बढ़ने के तरीके हैं । अपने लक्ष्य को याद रखते हुए पैसे बचाएं । अपने सभी सामान को बेच दें और मुनाफे का उपयोग यात्रा के लिए करें । दूसरों के वाहन पर मुफ्त सैर करें और अजनबियों की दया पर निर्भर हों । आप के लिए जो भी महत्वपूर्ण हो उसे करने के हमेशा तरीके होते हैं ।
- अपने डर का नामकरण करने का अभ्यास करें । उसकी जांच न करें! बस जो भी आप उस समय महसूस कर रहे हैं उसे स्वीकार करें । उदाहरण के लिए, "मुझे यह जोखिम लेने से डर लग रहा है क्योंकि शायद काम नहीं बनेगा ।"[२४] X रिसर्च सोर्स फिर, अपने आप को थोड़े आत्म समर्थन के साथ दिलासा दें, जैसे कि "मैं इस पर नियंत्रण नहीं कर सकता कि परिस्थितियों का परिणाम क्या निकलता है । मैं केवल अपने खुद के कार्यों को नियंत्रित कर सकता हूं ।"
- यह स्वीकारें कि आपको अपने रास्ते में बाधाओं और चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है । वह ठीक है! हर चुनौती को एक सीखने के अनुभव मान कर चलें । जब आपको सच में अपना जुनून मिलेगा, तब जारी रहने की वजह से आपके पास अनुभव और शिक्षा की सम्पत्ति एकत्रित हो जाएगी ।
- यदि आप आप हमेशा से एक अंतरिक्ष यात्री बनना चाहते थे, तो शायद यह विचार आपको अब उतना अच्छा नहीं लगता है । याद करें कि वह विचार आपके मन में कैसे आया था -- क्योंकि शायद उसमें अंतरिक्ष, विज्ञान, या अभियान की खोज करना शामिल था -- और देखें कि क्या आपको ऐसा कर के एक नया जुनून मिलता है या नहीं ।
- बहादुर बनें । यदि आप गायक या एक अभिनेता/अभिनेत्री बनना चाहते/चाहती हैं, तो अभी भी अपने सपनों को पूरा करने के लिए देर नहीं हुई है ।
- दुर्भाग्य से, आपको कुछ मामलों में एक व्यावहारिक दृष्टिकोण रखना पड़ सकता है । यदि आप दस साल की उम्र में एक ओलिंपिक जिमनास्ट बनना चाहते थे, और अब आप चालीस साल के हैं, तो आपके भविष्य में एक स्वर्ण पदक की संभावना बहुत कम है । यदि आप कभी जिमनास्टिक के बारे में काफ़ी जोशीले थे, तो देखें कि क्या आप किसी और तरीके से उसके साथ संघटित हो सकते हैं या नहीं, जैसे कि एक ट्रेनर, या एक कोच के रूप में, या फिर एक जिम की गतिविधियों में किसी तरह से शामिल होना ।
- यदि आप भाग्यशाली हैं और आपने बचपन से एक पत्रिका रखी है, तो उसे फिर से पढ़ें । देखें कि आपको किन जुनूनों ने आकर्षित किया था, और आप बार-बार उसमें किन सपनों के बारे में लिखते थे ।
2अपनी प्रतिभाओं का सम्मिश्रण करेंः हो सकता है कि आपके पास एक से अधिक प्रतिभा हो । शायद आप बाइक स्टंट में काफ़ी अच्छे हैं और आपको लिखना भी पसंद है । तो क्या आप बाइक की सवारी और करतबों के बारे में एक किताब लिख सकते हैं, या फिर उन सच्ची कहानियों के बारे में कि बाइक चलाने वालों ने अपने जुनून की शुरुआत कैसे की? अपनी प्रतिभाओं को सम्मिश्रण करने के ये कुछ अन्य तरीके हैंः
- हो सकता है कि आपको कविताएं लिखने के साथ-साथ व्याख्यात्मक नृत्य करना भी पसंद है; तो क्या आप अपनी एक कविता की व्याख्या कर सकते हैं, या नृत्य के लिए अपने प्रेम के बारे में एक कविता लिख सकते हैं?
- यदि आप एक प्रतिभाशाली लेखक हैं, तो अपने लेखन के गुण का सबसे ज़्यादा फ़ायदा उठाएं । यदि आपको कुछ पसंद हो, तो उसके बारे में ब्लॉगिंग करने से या उसके बारे में एक वेबसाइट बनाने से आपको अपने जुनून को दूसरों से बांटने में मदद मिलेगी, अपने लेखन के गुण का उपयोग करें, और जो आप कर रहे हों उसके प्रति अपने प्यार का विकास करें ।
- यदि आपका भाषाओं के प्रति और पर्यावरण के व्यवसाय के जैसे एक असंबंधित क्षेत्र के प्रति जुनून है, तो देखें कि क्या आप उस क्षेत्र में एक अनुवादक या दुभाषिए के रूप में काम कर के अपनी भाषाओं के गुणों का उपयोग कर सकते हैं ।
3एक पसंदीदा शौक को पूर्णकालिक जुनून में बदलेंः यदि आपक जीवन में पहले से ही ऐसा कुछ है जो आपको उत्साह, खुशी, और गरिमा देता है, तो क्यों न उस शौक या गतिविधि को एक पूर्णकालिक उद्यम में बदलने की कोशिश करें? हालांकि जीवन में एक बड़ा परिवर्तन करने पर आपको डर लग सकता है, पर यदि आपको ऐसी किसी चीज़ का पता है जिसे आप पसंद करते हैं, तो यह देखने के लिए कि क्या वह आपका जुनून है या नहीं, उसके पीछे लगे रहने में अधिक समय खर्च करें ।
- आपका शौक मिट्टी के बरतन, चित्रकला, या कविता से लेकर, योग शिक्षण या स्क्रीन प्रिंटिंग तक, कुछ भी हो सकता है ।
- यदि आप अपने जुनून के साथ पैसा नहीं बना सकते हैं (उदाहरण के लिए, मैराथन दौड़), तो किसी अन्य तरीके से दौड़ने की दुनिया में शामिल हो कर आपको उस शौक को अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण जुनून बनाने का एक रास्ता मिल सकता है ।
- यह जानने के लिए कि क्या आपका पसंदीदा शौक आपका जुनून भी है, आप उस शौक को करने में अधिक समय खर्च कर के धीरे-धीरे परिवर्तन कर सकते हैं । यदि आपको डर हो कि आप सब कुछ छोड़ कर उस शौक में अपने आप को पूरे समय के लिए समर्पित कर देंगे, तो ऐसा करने के लिए छोटे-छोटे कदम उठाएं ।
- याद रखें कि आपको अपने रोज़मर्रा के काम को अपना जुनून बनाने की आवश्यकता नहीं है । यदि आपको मैराथन पसंद हो लेकिन आप उसे एक कैरियर में परिवर्तित करने का रास्ता न खोज पाएं, तो बस प्रशिक्षण करते रहें और दौड़ें!
4वह चीज़ करें जिसका आप हमेशा से सपना देखते आ रहे हैंः भले ही वह कितनी ही साहसी, जोखिम भरी, या अव्यावहारिक हो, आपको अपने सपनों को वास्तविकता में परिवर्तित करने के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए । कौन जानता है -- शायद आप साल्सा नृत्य की कोशिश करें और आपको यह एहसास हो कि वहा आपके लिए नहीं है, या फिर आप गैलापागोस द्वीप समूह के लिए यात्रा करें और उदासीन महसूस करें । हालांकि, यह होने की अधिक संभावना है कि बहादुर बनने से और वे चीज़ें करने से जिनके आप हमेशा से सपने देखते आ रहे हैं, आप उस चिंगारी को जला पाएंगे जो आपको प्रकाशित रखेगी ।
- व्यावहारिक और वित्तीय बाधाओं के बावजूद, अपने सपनों का पीछा करने के लिए दृढ़ संकल्पी रहें । भले ही वह सिर्फ थोड़ी देर के लिए ही क्यों न हो, एक ऐसी योजना बनाएं जो आपको अपने सपनों को आज़माने की अनुमति देती है । उस सपने का पीछा करने में या उचित व्यवस्थाएं बनाने में थोड़ा समय लग सकता है, लेकिन यह बाद में लाभप्रद होगा ।
- यदि आपको एक नई गतिविधि करने में डर लग रहा है, जैसे कि पहाड़ की चोटी पर चढ़ना, तो समर्थन के लिए अपने मित्रों से मदद मांगे । आपको अकेले कुछ नया और डरावना करने की ज़रूरत नहीं है ।
- कुछ करने से पहले उसके बारे में बात करना शुरू करें कि आप क्या करेंगे । यदि आप सच में अपने एक ट्री हाउस का निर्माण करना चाहते हैं, तो इसके बारे में सबको बताना शुरू करें । यह आपको अपने सपनों को साकार करने के और करीब ले जाएगा । यदि सब को यह पता हो कि आप अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं तो आपके हार मानने की संभावना कम हो जाएगी ।
1एक नया खेल खेलने की कोशिश करेंः आप शायद यह न जानते हों, लेकिन आपका असली जुनून माउंटेन बाइकिंग या तीरंदाजी हो सकता है । आपको शायद यह लगता हो कि आपको केवल कभी-कभी ही जॉगिंग के लए जाना पसंद हो, लेकिन जबतक आप प्रयास न करें तबतक आपको अपने असली जुनून का पता नहीं चलेगा । एक नया खेल खेलने से आपके एड्रेनालाईन में तेज़ी आएगी, आप दुनिया के बारे में और अधिक उत्तेजित हो जाएंगे, और यह व्यायाम का भी एक अच्छा तरीका होगा । यदि आप यह पाते हैं कि आपको यह खेल काफ़ी पसंद है, तो आप एक शिक्षक, या एक कोच बन सकते हैं, या आप ऑनलाइन समर्पित अनुयायियों के साथ इस खेल के लिए अपने प्यार को दूसरों के साथ बांटना भी शुरू कर सकते हैं । कोशिश करने के लिए ये कुछ चीज़ें हैंः
- नृत्य । साल्सा, बॉलरूम नृत्य, फ़ाक्सत्रोट, हिप हॉप, या जो भी आप चाहें उसकी एक कक्षा लें ।
- योग । अलग किस्म की योग कक्षाएं लें और देखें की क्या आप हमेशा से यह करना चाहते थे या नहीं ।
- दौड़ना । आप केवल अपने दम पर दौड़ सकते हैं और देख सकते हैं कि वह कितना अच्छा लगता है, या फिर आप एक 5K के लिए प्रशिक्षण का एक लक्ष्य निर्धारित कर सकते हैं और मैराथन के लिए तैयारी कर सकते हैं ।
- तैरना । तैरना पूरे शरीर का केवल एक अच्छा व्यायाम ही नहीं है, बल्कि तैरने से आपका दिमाग शांत होगा और पानी में होने पर आपको लगेगा कि आपका शरीर एक बिल्कुल सही जगह पर है । एक झील या सागर में तैराकी करने से आपको यह महसूस हो सकता है कि आप प्रकृति के साथ और अधिक संपर्क में हैं ।
- मार्शल आर्ट । एक कराटे या जुजित्सु की कक्षा लें और देखें क उससे आपको कैसा महसूस होता है ।
- टीम का खेल । एक बोलिंग, बेसबॉल, सॉफ्टबॉल, फुटबॉल, या वॉलीबॉल लीग में शामिल होएं और एक नया खेल के लिए अपने जुनून की तलाश करें और साथ ही दूसरों के साथ उसे बांटने की खुशी भी लें ।
- कम-पारंपरिक खेल । कर्लिंग, तीरंदाजी, माउंटेन बाइकिंग, स्केटबोर्डिंग, या कोई भी अन्य खेल जिसमें आपको हमेशा से रुचि थी ।
2अपने कलात्मक पक्ष का पता लगाएंः शायद आपमें एक अद्भुत कलात्मक पक्ष हो सकता है जिसके बारे में आपको पता ही न हो । अपने कलात्मक पक्ष का पता लगाने के लिए, आप कुछ चीज़ें आज़माने की कोशिश कर सकते हैं जैसे कि, चित्रकला, लेखन, अभिनय, गायन, या कपड़े डिजाइन करना । आप अपने भीतर के कलाकार को खोजने के लिए कई चीज़ें कर सकते हैं ।
- एक संगीत वाद्य बजाएं । शायद आपको बचपन में पियानो बजाना पसंद था और आपने अब उसे बजाना बंद कर दिया है । उसे बजाने का एक बार फिर प्रयत्न करें ।
- लिखें । एक नाटक, कविता, छोटी कहानी, या यहां तक कि एक उपन्यास लिखने की कोशिश करें । इससे आपको यह पता लग सकता है कि जितना आपने सोचा था, आपके पास कहने को शायद उससे भी अधिक चीज़ें हैं ।
- अभिनय । चाहे आपको बस कुछ दोस्तों के साथ एक नाटक का मंचन करना पसंद हो, या फिर आप एक स्थानीय थिएटर कंपनी में शामिल होने की कोशिश कर रहे हों, आपको अभिनय करने की कोशिश करने के लिए जेनिफर लॉरेंस होने की ज़रूरत नहीं है ।
- गाएं । यदि आपको हमेशा से गाने का जुनून था लेकिन कभी भी दूसरों को अपनी आवाज़ सुनाने के लिए समय नहीं था, तो उसका वक्त अभी ही है । यदि आपको एक समूह में गाना पसंद हो, तो आप एक कोरस या एक कप्पैला (cappella) समूह में भी शामिल हो सकते हैं ।
- चित्रकारी, चित्रकला, या मूर्ति बनाएं । एक चित्रकारी का आरेखन करने के लिए, एक परिदृश्य की चित्रकला करने के लिए अलग किस्मों के उपकरणों का प्रयोग करें । आपको अपने हाथों के साथ काम करके अपना सच्चे जुनून खोजने में सक्षम हो सकते हैं ।
- पंछी देखना । आप जानवरों के साम्राज्य के बारे में बहुत कुछ सीखने के साथ-साथ प्रकृति के साथ भी जुड़ सकते हैं । यदि आपमें इसके प्रति जुनून है, तो आप एक किताब लिख सकते हैं या पक्षी देखने के अभियानों का नेतृत्व कर सकते हैं ।
- पालतू जानवरों की देखभाल । हो सकता है कि आपको हमेशा से पालतू जानवर पसंद हो -- यही समय है जब आप अपने शौक को एक पूर्णकालिक जुनून में बदल दें । या शायद आप सिर्फ अपने पालतू जानवर के साथ नाता बनाने के लिए उसके साथ और अधिक समय बिताना चाहते हों । वह भी बहुत अच्छा है!
- एक नई भाषा सीखें । आप एक भाषा सिर्फ मनोरंजन के लिए भी सीख सकते हैं । आप शायद यह भी पा सकते हैं कि आप विदेशी शब्दों में लीन हैं और उसके प्रति आसक्त हैं । इसे एक जुनून में बदलने के लिए एक अनुवादक के रूप में काम करें या उस विदेशी भाषा में इतना तल्लीन हो जाएं कि आप उसी भाषा में पढ़ें और उसी भाषा में ही फिल्में देखें या यहां तक कि उसकी वजह से विदेश ही चले जाएं ।
- खाना पकाना । हो सकता है कि आप अपने तारकीय खाना पकाने के गुणों को महत्व न दे रहे हों । यदि आपको पहले से ही खाना पकाना पसंद है, तो और ज़्यादा खाना पकाने के टीवी शो देखें, ज़्यादा खाने के ब्लॉग पढ़ें, और अपने दोस्तों के साथ अपने व्यंजनों को बांटना शुरू करें और देखें कि क्या आप स्वादिष्ट भोजन के प्रति अपने प्यार को एक पूर्णकालिक जुनून में बदल सकते हैं ।
- बढ़ईगीरी । आप फर्नीचर का निर्माण करने में एक विशेषज्ञ हो सकते हैं लेकिन शायद आप ऐसा कभी कभार ही करते हैं । फर्नीचर के एक पूरे कमरे का निर्माण कर के, या यहां तक कि एक फर्नीचर बनाने के छोटे व्यवसाय को शुरू कर के, देखें कि क्या आप अपने गुणों को एक जुनून में बदल सकते हैं । कई लोगों को फर्नीचर का निर्माण करना या सुंदर चीज़ों की नक्काशी करना आध्यात्मिक, या यहां तक कि सुखदायक भी लगता है । (बस "पार्क्स ऐन्ड रेक्रीएशन" के निक ऑफ़रमेन से ही पूछ लें, जो रॉन स्वानसन के रूप में भी जाने जाते हैं ।[३४] X रिसर्च सोर्स )
4अपनी आरामदेह स्थिति से बाहर निकलेंः यदि आपको अपना जुनून ढूंढने में परेशानी हो रही है, तो ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि बार-बार वही पुरानी चीज़ें कर के शायद आप उन्हीं के आदी हो गए हैं । यह एक वास्तविक मनोवैज्ञानिक घटना हैः अभ्यस्त होने से स्थिर प्रदर्शन होता है, लेकिन ज़्यादा "आरामदेह स्थिति" में होने से अन्वेषण और रचनात्मकता दब जाती है ।[३५] X रिसर्च सोर्स यदि आप सच में अपना जुनून खोजना चाहते हैं, तो आपको खुद के साथ परीक्षण करना होगा और यह खोजने के लिए कि आपको क्या आकर्षित करता है, अपनी आरामदेह स्थिति के बाहर कदम रखना होगा । ये कुछ चीज़ें हैं जिनकी आप कोशिश कर सकते हैंः
- बंजी जंपिंग, स्काई डाइविंग, या ज़िप लाइनिंग के जैसी एक चरम गतिविधि का प्रयास करें । आपको इस उत्तेजित गतिविधि से प्यार भी हो सकता है ।
- यदि आपको लगे कि आप किसी चीज़ में अच्छे नहीं हैं तो उसे करें । यदि आपको लगे कि आप एक बहुत बुरे नर्तक, बावर्ची, बुननेवाले, या लेखक हैं, तो इस गतिविधि पर हर सप्ताह में एक घंटा बिताने की कोशिश करें । एक नए गुण या यहां तक कि एक नए जुनून की खोज कर के आप को आश्चर्य हो सकता है ।
- यदि आपका एक कलात्मक दिमाग है, तो कुछ अधिक तार्किक करने की कोशिश करें, जैसे कि वर्ग-पहेली या शतरंज । यदि आप बहुत ही व्यावहारिक हों, तो कुछ कलात्मक करने की कोशिश करें जिसमें कम सख्त नियम हों, जैसे कि तेल चित्रकला या द्रुत उतार-चढ़ाव के साथ गाना ।
- यदि आप आश्वस्त हैं कि आप तान बधिर हैं तो एक संगीत वाद्य लें । पियानो, बांसुरी, या यहां तक कि रिकॉर्डर बजाना सीखें और फिर देखें कि कैसे यह आपकी दुनिया को खोलता है ।
5यात्राः यात्रा आपकी दुनिया खोलने का और नई आंखों के साथ एक जुनून खोजने का एक शानदार तरीका हो सकता है । हालांकि आपका बजट आपको व्यापक यात्रा करने से प्रतिबंधित कर सकता है, पर एक नए स्थान जाने के लिए और रहने का, खाने का, और सांस लेने का एक नया तरीका देखने के लिए, आपसे जितना हो सके उतना करें । चाहे आप एक नए राज्य में या दुनिया में कहीं भी यात्रा कर रहे हों, यात्रा करने से आपको ऐसा कुछ मिल सकता है जिसके प्रति आप में जुनून हो ।
- आप यह पा सकते हैं कि आपका असली जुनून यात्रा है । यद आप पाते हैं कि आपको भ्रमण-लालसा है, तो उसका फ़ायदा उठाएं और एक वार्षिक -- या यहां तक कि एक मासिक -- यात्रा की योजना बनाएं ।
- यात्रा करते वक्त बहुत सारी तस्वीरें लें । आप यह भी पा सकते हैं कि आपका नया जुनून फोटोग्राफी है!
- प्रेरित हों । अपने जुनून खोजने के लिए अपने परिवेश का प्रयोग करें । यदि आप फ्लोरिडा में एक समुद्र तट पर हैं, तो आप यह पा सकते हैं कि आपका नया जुनून सीप एकत्रित करना है; यदि आप पेरिस में लूव्र का दौरा कर रहे हैं, तो आप पा सकते हैं कि आपका नया जुनून ललित कला है ।
- अपना काम कराने के लिए अपने परिवेश पर निर्भर न हों । यदि आपके पास दूर दराज की जगहों पर यात्रा करने के लिए पैसे नहीं है, तो अपने पड़ोस में ही कहीं छुट्टी पर जाएं! उसकी ओर ऐसा दृष्टिकोण रखें जैसे आप एक सैलानी हों । एक ऐसे बार या दुकान में जाएं जहां आप पहले कभी भी नहीं गए हों । एक कैफे में कुछ लोगों को देखें । सड़क पर एक यादृच्छिक अजनबी से बात करें । अपने दृष्टिकोण को बदलना वास्तव में आपके जीवन को बदल सकता है ।
6अपने समुदाय में स्वयंसेवक बनेंः यदि आपके पास अपने समुदाय में स्वयंसेवक बनने का समय है, तो आपको उसमें एक नया जुनून मिल सकता है! अपने समुदाय में स्वयंसेवक बनने के कई तरीके हैंः आप अपने स्थानीय पुस्तकालय में लोगों को उनके लेखन और पढ़ने के गुणों को विकसित करने में मदद कर सकते हैं, अपने स्थानीय सूप रसोई में स्वयंसेवक बन सकते हैं, या अपने समुदाय में एक पार्क को साफ कर सकते हैं ।
- यदि आप एक पार्क को साफ करने में मदद करते हैं, तो आप बागवानी में एक नया जुनून पा सकते हैं ।
- यदि आप लोगों को पढ़ना सिखाने में मदद करते हैं, तो आपका पढ़ाने के शिक्षण के लिए, या फिर सामान्य रूप से शिक्षण के लिए एक जुनून शुरु हो सकता है ।
- यदि आप एक बेघर आश्रय में काम करते हैं, तो ज़रूरतमंद लोगों की मदद करने के प्रति आपकी रुचि का विकास हो सकता है ।
- यदि आप स्वयंसेवक कार्यक्रम में एक नेतृत्व की भूमिका लें, जैसे कि दान किए गए कपड़ों को एकत्रित करने के स्थल पर काम करने के लिए लोगों को संयोजित करना, तब आपको शायद नेतृत्व के लिए एक जुनून मिल सकता है ।
7दूसरों की मदद ले कर नई चीज़ें आज़माने की कोशिश करेंः शायद आपका एक ऐसा दोस्त हो सकता है जो तीरंदाजी या हास्य किताबें बनाने में आसक्त है, या आपके परिवार का एक सदस्य जो पूरे देश में सबसे अच्छी मिठाई बनाने वाला बावर्ची है । अपने समुदाय में शिक्षकों को, या जिन लोगों के आप जानते हों, अपने जुनून को बारे में उन्हें बता कर अपनी नई प्रतिभा या जुनून का पता लगाने में उनकी मदद लें ।
- आपका एक दोस्त जिसे किसी चीज़ के प्रति बहुत जुनून है, उससे आप शिक्षण लें, जैसे कि रोबोटिक्स या फूलों की व्यवस्था करना । उस गतिविधि या गुण के प्रति आपके दोस्त का जुनून आपको प्रेरित करेगा ।
- अपने परिवार के किसी सदस्य को उसके पसंदीदा काम से खुद को परिचित कराने के लिए पूछें, चाहे वह मोटरसाइकिल की मरम्मत करना हो, या फिर मछली पकड़ना । किसी ऐसी चीज़ जिसके बारे में आप हमेशा से जानते थे, आपको उसके प्रति जुनून महसूस करने पर आश्चर्य हो सकता है ।
- एक कक्षा लें । चाहे आप कला की कक्षा ले रहे हों या सोवियत संघ के इतिहास पर, आप यह पा सकते हैं कि एक शिक्षक या पेशेवर से एक अवधारणा समझने से आपका जुनून शुरु हो सकता है । किसी भी ऐसी कक्षा के लिए अपना नाम लिखाएं जो आपको लुभावनी लगती हो, चाहे वह एक सामाजिक कॉलेज में हो, ऑनलाइन हो, या फिर एक स्थानीय मनोरंजन के केंद्र में हो, और फिर प्रेरित होने के लिए तैयार हो जाएं ।
- पढ़ें । कोई ऐसा व्यक्ति जो किसी एक विशिष्ट क्षेत्र में माहिर हो या ऐसा व्यक्ति जिसमें किसी चीज़ को ले कर बहुत जुनून हो, उसके द्वारा लिखी गई किताब पढ़ने से आप में जुनून शुरु हो सकता है ।
- उदाहरण के लिए, यदि आपने अपने खुद का व्यवसाय शुरू करने का फैसला लिया है, तो आपको यहा जानने की ज़रूरत है कि वैसा करने के लिए आपको क्या करना होगा । आपको किन गुणों की ज़रूरत होगी? आपको उसे शुरु करने से पहले कितना धन, उत्पाद, आदि स्थापित करने की आवश्यकता होगी?
- जिस कैरियर के प्रति आप में जुनून हो उस कैरियर या क्षेत्र के लोगों के साथ बात करना सहायक हो सकता है । आम तौर पर, लोग आपको सलाह देना पसंद करेंगे और आपको यह भी बताएंगे की उन्होंने अपना मुकाम कैसे हासिल किया । वे आपको आपके नए जुनून के बारे में आपको कम-रोमांचक बातें भी बता सकते हैं, जिसे अभी ही जानना ज़रूरी है ताकि बाद में वह जान कर आपको आश्चर्य न हो ।
- उदाहरण के लिए, एक बावर्ची बनना आपको अपने लिए एक आदर्श कैरियर लग सकता है, लेकिन किसी चीज़ को आकर्षक समझना आसान है जब आप हर दिन उसका अनुभव न कर रहे हों । एक पाकशाला संबंधी कक्षा लेना -- या यहां तक कि एक पाकशाला स्कूल में दाखिला लेना -- आपको महत्वपूर्ण विवरणों से परिचित करेगा, जैसे कि लंबे समय के लिए काम, गर्म रसोई, और आम तौर पर कम वेतन । एक बार जब आप अपनी नए रुचि के बारे में सबसे बुरी चीज़ों को जान लें और फिर भी यदि आप कुछ और करने की कल्पना न कर सकें, तो आप इस बात पर विश्वास कर सकते हैं कि आपको एक नया जुनून मिल गया है ।
- सब कामों से एक दिन के लिए छुट्टी लें । थोड़ी देर के लिए खुद को दुनिया से अलग कर लें । बिना किसी तकनीक, काम, सफाई, दोस्तों, रिश्तेदारों, और यहां तक कि परिवार के बिना एक दिन बिताएं । टीवी बंद करें, अपना मोबाइल फोन और अपना फोन भी बंद कर दें । कल्पना करें कि आपके लिए किसी चीज़ को करने की कोई भी निर्धारित तिथि नहीं है, आपको कोई कर्ज़ नहीं भरना है, आपको कोई चिंता नहीं है, और आपको कोई अन्य कार्य नहीं करने हैं । कुछ क्षणों के लिए शांत रहें और फिर अपने विचारों पर ध्यान दें । क्या अपने मन आने वाले अगले अच्छे गैजेट की कल्पना करता है? क्या आप खुद को अपने व्यवसाय का निर्माण करते हुए देखते हैं, या खुद को अगला डायमैक्सियन (Dymaxion) घर डिजाइन करते हुए देखते हैं? क्या आप उस परियोजना को शुरू करना चाहते हैं जिसके बारे में आप पिछले पांच सालों से सोच रहे हैं?
- आपको जितने समय की आवश्यकता हो उतना समय लें । विचार शायद सीधे से आपके दिमाग में न आएं, लेकिन अंत में, आप पाएंगे कि आपमें पहले से ही किसी चीज़ को लेकर जुनून है, और आपको सिर्फ अपने सहज पर विश्वास करने की ज़रूरत है ।
- यदि आप पाते हैं कि आपको अपने पुराने शौकों से उतना आनंद नहीं मिल रहा है जितना पहले मिलता था, तो उसमें कोई बुराई नहीं है । क्योंकि हम मनुष्य हैं, इसलिए हम लगातार बढ़ते और बदलते रहते हैं, और हम बहुत लंबे समय के लिए स्वरुप नहीं रहते हैं ।
- एक डायरी रखें और जो कुछ भी सोच या इच्छाएं आपके दिमाग में आएं उन्हें उसमें लिखें । ऐसा कुछ लिखें जो आपको वास्तव में उत्साहित करता है, फिर उसे पढ़ें और उनमें उन विचारों को खोजें जिन्हें आप प्राप्त कर सकते हैं और उन्हें हासिल करने के लिए वास्तव में जारी रह सकते हैं । इस विचार को प्राप्त करने के लिए अपनी सफलता और यात्रा की योजना बनाएं ।
- यदि आप उस कार्य को एक जीविका बनाने की कोशिश करने का फैसला करते हैं जिसे आप शौक के रूप में करते हैं, तो वह जल्द ही एक उबाऊ काम बन सकता है । यदि आपको लगे कि पूरे समय उस कार्य को करने से उसके प्रति आपका प्यार कम होता है, तो अपने पिछले कार्यों की ओर लौटने पर विचार करें । अपनी "जुनून" की गतिविधि से थोड़ी देर के लिए छुट्टी लें, फिर उसे करने का एक बार और प्रयत्न करें और देखें कि क्या आप उसके प्रति अपने प्यार को फिर से खोज सकते हैं या नहीं ।
- उदाहरण के लिए, यदि आपको बचपन में आइसक्रीम पसंद थी, लेकिन एक आइसक्रीम की दुकान पर पांच साल तक काम करने से, आप यह पा सकते हैं कि दुकान पर काम करने से आइसक्रीम के लिए आपका प्यार कम हो गया है । यदि यह मामला है, तो एक हिदायत है कि आप आइसक्रीम की दुकान पर कुछ समय के लिए काम करना बंद कर दें और कुछ और करने की कोशिश करें, और फिर अंत में वापस जाने पर आप आइसक्रीम के लिए अपना प्यार तलाश सकेंगे ।
- सब कुछ छोड़ कर एक वृत्ति के पीछे जाने की कोशिश न करें । हर काम में धैर्य, सावधानी से योजना बनाने, और समर्पण की ज़रूरत होती है ।
| यहाँ पर उनतालीस रेफरेन्स दिए गए हैं जिन्हे आप आर्टिकल में नीचे देख सकते हैं। यह आर्टिकल पच्चीस,दो सौ छियासी बार देखा गया है। आपका जुनून ही वह कारण है जिसकी वजह से आप सुबह उठते हैं, और इसके बारे में सोचना देर रात तक आपको उत्साह के साथ जगाए रख सकता है । यह जानने से कि आप ज़िंदगी अपनी शर्तों पर जी रहे हैं, जुनून संतुष्टि की एक भावना भी हो सकती है । बहरहाल, हर कोई अपने जुनून को तुरंत नहीं खोज सकता । चिंता न करें - चाहे आप एक नया कैरियर खोजने के लिए अपने जुनून को खोज रहे हैं, या आप पूरी तरह से एक नए शौक या गतिविधि में डूबना चाहते हैं, अपना जुनून खोजने के लिए ऐसी कुछ चीज़ें हैं जो आप कर सकते हैं । - किसी चीज़ को ज़बरदस्ती "करना" बंद कर दें । यह वाक्यांश मनोवैज्ञानिक क्लेटन बार्बेउ ने खोजा था, जिन्होंने इस विचार को यह वर्णन करने के लिए गढ़ा था कि जब आप पर कुछ "करने" के लिए बाहरी दबाव हो, तो उस मौके पर क्या होता है ।[तीन] X रिसर्च सोर्स यह आपको अपने चुनावों को ले कर नाखुश और असंतुष्ट महसूस करा सकता है क्योंकि वे वास्तविक चुनावों की जगह, अपराध और भय का रूप हो सकते हैं ।[चार] X रिसर्च सोर्स किसी और के कहने पर कुछ "करने" के बजाय इस बात पर ध्यान दें कि आप क्या करना चाहते हैं । - उस समय के बारे में सोचें जब आप संतुष्ट और राज़ी महसूस कर रहे थे । क्या जरूरतें या इच्छाएं पूरी हुई थी? इस समय या अनुभव के बारे में क्या महत्वपूर्ण था? आपको वैसा क्यों लगता है? - यदि आप अपने परिवार, समुदाय, कार्यस्थल, पड़ोस, या यहां तक कि दुनिया के बारे में सिर्फ एक ही चीज़ बदल सकें, तो आप क्या बदलना चाहेंगे और क्यों? - उदाहरण के लिए, शायद आपने तब अपने आप पर गर्व महसूस किया हो जब आपने अपने दम पर कुछ पूरा किया था । इससे स्वतंत्रता, आत्मनिर्भरता, और महत्वाकांक्षा की तरह संभव मान्यताओं के बारे में पता चलता है । - आपने शायद तब काफ़ी संतुष्ट महसूस किया था जब आप खुद को अपनी कलाकृति के माध्यम से व्यक्त करने में सक्षम थे । इससे रचनात्मकता, अन्वेषण, और दृष्टि की तरह संभव मान्यताओं का पता चलता है । - शायद आपको तब सबसे ज़्यादा खुशी महसूस हुई थी जब आपने अपने बच्चों की होमवर्क करने में मदद की थी, या जब आप एक पड़ोसी के आंगन को ले कर उनकी मदद करने में सक्षम थे । इससे समर्थन, समुदाय और समाज के लिए सकारात्मक योगदान की तरह संभव मान्यताओं का पता चलता है । - याद रखें कि आपकी मान्यताएं केवल आपकी हैं । उन्हें किसी और के मानकों के द्वारा न परखें । कुछ लोगों के लिए सहजता या प्रतिस्पर्धा का महत्व होता है, और दूसरों के लिए संरचना या सहयोग का महत्व होता है । इसमें से कोई भी दूसरे की तुलना में "बेहतर" नहीं है । - मेरा लक्ष्य क्या है? - मैं ज्यादातर समय क्या करता हूं? - मैं क्या करने की कोशिश करता रहता हूं? - मुझे क्या आकर्षित करता है? - यदि मैं अपने बाकी के जीवन में सिर्फ़ एक ही चीज़ कर सकूं, तो वह क्या होगी? - मुझे क्या करना पसंद है? - मैं क्या करना चाहूंगा, भले ही मुझे उसके लिए तनख्वाह न मिले? - ऐसा क्या है जिसे करते हुए मुझे लगे कि उसके अलावा और किसी भी चीज़ों का अस्तित्व ही नहीं है? - ऐसी कौन सी गतिविधि है जिसे करते हुए मैं पूरी तरह से अपने तत्व में महसूस करता हूं? - मैं उस वक्त क्या करता हूं जब मैं "सही" या "सुंदर" या "जुड़ा हुआ" महसूस करता हूं? It's okay अगर आप अपने पैशन को पूरी तरह से नहीं अपना पाते हैं। अपने पैशन को पाना या उसका पता लग पाना अपने आप में एक बड़ी बात है, लेकिन ये जरूरी नहीं है कि आप किसी एक ही चीज़ को लेकर पेशनेट हों, आपके एक से ज्यादा पैशन भी हो सकते हैं। अधिकांश जुनून जिज्ञासा और इंट्रेस्ट के साथ शुरू होते हैं, और वे समय के साथ बढ़ते जाते हैं। अपने जीवन भर के उन अनुभवों के बारे में सोचें, जिन्होंने आपको ऊर्जावान बनाया है या आपको वास्तव में जिज्ञासु बनाया है। जितना अधिक आप उन चीजों में एंगेज होते हैं, उतना ही आप अपनी गिफ्ट्स और एक्सपर्टीज को डेवलप करेंगे, जो आपको कुछ अच्छा करने या बनाने के लिए प्रेरित करेगा और जिससे आप दूसरों को भी इनस्पायर कर पाएंगे। एकउस चीज़ के बारे में सोचें जिसे आप हमेशा से करने का सपना देखते आ रहे हैंः यह उन चीज़ों की सूची बनाने से अलग है जो आपको खुश करती हैं । आपको उन सभी चीज़ों को लिखने की ज़रूरत है जिनके आप हमेशा से सपने देखते आ रहे हैं, लेकिन आप अभी तक उन्हें कर नहीं पाएं हैं क्योंकि शायद आपके पास समय नहीं है, पैसा नहीं है, या फिर वे चीज़ें अव्यावहारिक हैं या थोड़ी सी डरावनी हैं । ये कुछ सवाल हैं जो आपको अपने आप से पूछने की ज़रूरत हैः - वह क्या चीज़ है जिसके मैं हमेशा से सपने देख रहा हूं, लेकिन उसे कर नहीं पाया हूं? - जब मैं एक बच्चा था, तब मैं क्या करना चाहता था? - क्या मेरा एक अव्यावहारिक सपना था जिसे मैने छोड़ दिया था? - मुझे क्या पढ़ना या किसके बारे में दिन में सपने देखना पसंद है? - क्या ऐसा कुछ है जिसकी कोशिश करने में मुझे डर है कि वह मुझे अपनी आरामदेह स्थिति से बाहर ले जाएगा? - क्या ऐसा कुछ है जो मैं हमेशा से करना चाहता था लेकिन अभी तक आर्थिक भय के कारण कर नहीं पाया हूं? - क्या ऐसा कुछ है जो मैं हमेशा से करना चाहता था लेकिन अभी तक मैने उसे करने की कोशिश इसलिए नहीं की है क्योंकि मुझे डर है कि मैं उसमें नाकाम रहूंगा या मैं उसमें अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाउंगा? - क्या मेरी पहचान में कोई ऐसा व्यक्ति है जो कुछ ऐसी चीज़ करता है जो मुझे रोमांचित करती है? - यदि कोई भी प्रतिबंध न हो तो ऐसा क्या है जो मैं क्या करना चाहूंगा? - उन तस्वीरों और प्रेरणादायक उद्धरणों को इकट्ठा करें जो यह प्रतिनिधित्व करें कि आपके लिए क्या महत्वपूर्ण है । आप जीवन में क्या बनना चाहते हैं? आप अपने जीवन से क्या चाहते हैं? आप किस चीज़ की रचना करना चाहते हैं? - आप पिंट्रेस्ट जैसी साइट पर भी एक आभासी दृष्टि तख्ता बना सकते हैं । - क्या यह महत्वपूर्ण है कि आप अपने कैरियर के प्रति जोशीले हैं? आपको शायद जीवन के अन्य क्षेत्रों में, जैसे कि शौक या यहां तक कि वित्तीय सुरक्षा में भी नुक़सान उठाना पड़ सकता है । - क्या आपके लिए यह महत्वपूर्ण है कि यात्रा या एक दूसरे शौक के प्रति जुनून को आगे बढ़ाने के लिए आपके पास पैसे होने चाहिए? आपको उसका भुगतान करने के लिए एक ठोस, अच्छी तनख्वाह वाली लेकिन कम रोमांचक नौकरी करनी पड़ सकती है । - जितना संभव हो उतना विशिष्ट रहें । "खुशी" और "सफलता" सहायक होने के लिए बहुत अस्पष्ट हैं । एक गाइड के रूप में कि आपको क्या खुश करता है, अपने मूल्यों और मान्यताओं पर अपने प्रतिबिंब को उपयोग करने का प्रयास करें । - दुविधाएं और समझौते करने के बावजूद, आप और अधिक संतुष्ट महसूस करेंगे -- और अपने चुनावों के प्रति नियंत्रित होने पर आप ज़्यादा जोशीला भी महसूस करेंगे । आपके ऊपर किसी और की उम्मीदें नहीं हैं, केवल आपकी ही उम्मीदें हैं । एकएक लक्ष्य निर्धारित करेंः यह एक बड़ा लक्ष्य हो सकता है, जैसे कि "एक नई नौकरी ढूंढना," या एक छोटा लक्ष्य जैसे कि "एक कला की क्लास लेना" । एक ऐसा लक्ष्य निर्धारित करने के लिए जिसे आपके हासिल करने की संभावना हो, निम्नलिखित लेख पर विचार करेंः - इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कौन जिम्मेदार है? आम तौर पर, यह आपको करना होगा, लेकिन यदि आपके लक्ष्य में दूसरे भी शामिल हैं -- जैसे कि "अपने परिवार के साथ अधिक समय बिताना" -- तो वे भी इसे पूरा करने के लिए जिम्मेदार होंगे । - आपके लक्ष्य का विवरण क्या है? लोगों के अपने लक्ष्यों को पूरा नहीं करने के कारणों में से एक कारण यह है कि वे काफ़ी अस्पष्ट हैं । जितना संभव हो सके उतना ठोस रहें । उदाहरण के लिए, "कलात्मक बनना सीखना" काफ़ी निरुद्देश्य है । "मेरे कलात्मक पक्ष का पता लगाने के लिए एक पेंटिंग की कक्षा लेना" ज़्यादा प्रबंधनीय है । - आप लक्ष्य के प्रत्येक चरण को कब पूरा करेंगे? कई लक्ष्यों को, विशेष रूप से बड़े या जटिल वालों को, कई चरणों की ज़रूरत है । पता लगाएं कि आप प्रत्येक चरण को कब समाप्त करेंगे । उदाहरण के लिएः "इस सप्ताह मेरे समुदाय में कला की कक्षाएं ढूंढे । एक कक्षा के लिए साइन अप करें और अगले सप्ताह सामान खरीदें । उस के एक सप्ताह बाद कक्षाएं लेना शुरू करें ।" - ये लक्ष्य कहां पर शुरु होंगे? "और अधिक व्यायाम करना" के समान कई लक्ष्यों के लिए यह पता होना सहायक हो सकता है कि वह काम कहां पर किया जाएगा । उदाहरण के लिए, यदि आप सप्ताह में तीन बार व्यायाम करना चाहते हैं, तो निर्णय लें कि क्या आप जिम जाना चाहते हैं, दौड़ना चाहते हैं, घर पर अभ्यास करना चाहते हैं, या एक कक्षा लेना चाहते हैं । - आप प्रत्येक चरण को कैसे पूरा करेंगे? इससे आपको लक्ष्य की बनावट को परिभाषित करने में मदद मिलती है । उदाहरण के लिए, यदि आपका लक्ष्य "फ्रांस जाना" है, तो पता लगाएं कि प्रत्येक स्थिति में आपको क्या करना, जैसे कि "यात्रा गाइड और वेबसाइटों को देखें", "उन दोस्तों से बात करें जो फ्रांस जा चुके हैं", "रिजर्वेशन बुक करना", "एक पासपोर्ट लेना", आदि । - आप यह क्यों कर रहे हैं? अपनी प्रेरणा को स्पष्ट करने से आपका लक्ष्य को पूरा करने की अधिक संभावना है । इस लक्ष्य को पूरा करने से आपको अपना जुनून हासिल करने में क्या मदद मिलेगी? - अगली बार जब आप खुद को यह सोचते हुए पाएं कि "हां, दुनिया की यात्रा करना/एक पक्षी का घर बनाना/एक नई नौकरी की खोज करना बहुत अच्छा होगा, लेकिन ..." तो वहीं पर रुक जाएं । - अपने आप से पूछेंः क्या "लेकिन", या बाधा या रोक, को आप वास्तव में पार नहीं कर सकते? या फिर उसके आगे बढ़ने के लिए केवल थोड़ी सी रचनात्मकता की ज़रूरत है? - उदाहरण के लिए, आपका लक्ष्य कुछ ऐसा हो सकता है "मैं दुनिया की यात्रा करना चाहता हूं, लेकिन मेरे पास पैसे नहीं हैं ।" यह एक असंभव बाधा की तरह लग सकता है, लेकिन इससे आगे बढ़ने के तरीके हैं । अपने लक्ष्य को याद रखते हुए पैसे बचाएं । अपने सभी सामान को बेच दें और मुनाफे का उपयोग यात्रा के लिए करें । दूसरों के वाहन पर मुफ्त सैर करें और अजनबियों की दया पर निर्भर हों । आप के लिए जो भी महत्वपूर्ण हो उसे करने के हमेशा तरीके होते हैं । - अपने डर का नामकरण करने का अभ्यास करें । उसकी जांच न करें! बस जो भी आप उस समय महसूस कर रहे हैं उसे स्वीकार करें । उदाहरण के लिए, "मुझे यह जोखिम लेने से डर लग रहा है क्योंकि शायद काम नहीं बनेगा ।"[चौबीस] X रिसर्च सोर्स फिर, अपने आप को थोड़े आत्म समर्थन के साथ दिलासा दें, जैसे कि "मैं इस पर नियंत्रण नहीं कर सकता कि परिस्थितियों का परिणाम क्या निकलता है । मैं केवल अपने खुद के कार्यों को नियंत्रित कर सकता हूं ।" - यह स्वीकारें कि आपको अपने रास्ते में बाधाओं और चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है । वह ठीक है! हर चुनौती को एक सीखने के अनुभव मान कर चलें । जब आपको सच में अपना जुनून मिलेगा, तब जारी रहने की वजह से आपके पास अनुभव और शिक्षा की सम्पत्ति एकत्रित हो जाएगी । - यदि आप आप हमेशा से एक अंतरिक्ष यात्री बनना चाहते थे, तो शायद यह विचार आपको अब उतना अच्छा नहीं लगता है । याद करें कि वह विचार आपके मन में कैसे आया था -- क्योंकि शायद उसमें अंतरिक्ष, विज्ञान, या अभियान की खोज करना शामिल था -- और देखें कि क्या आपको ऐसा कर के एक नया जुनून मिलता है या नहीं । - बहादुर बनें । यदि आप गायक या एक अभिनेता/अभिनेत्री बनना चाहते/चाहती हैं, तो अभी भी अपने सपनों को पूरा करने के लिए देर नहीं हुई है । - दुर्भाग्य से, आपको कुछ मामलों में एक व्यावहारिक दृष्टिकोण रखना पड़ सकता है । यदि आप दस साल की उम्र में एक ओलिंपिक जिमनास्ट बनना चाहते थे, और अब आप चालीस साल के हैं, तो आपके भविष्य में एक स्वर्ण पदक की संभावना बहुत कम है । यदि आप कभी जिमनास्टिक के बारे में काफ़ी जोशीले थे, तो देखें कि क्या आप किसी और तरीके से उसके साथ संघटित हो सकते हैं या नहीं, जैसे कि एक ट्रेनर, या एक कोच के रूप में, या फिर एक जिम की गतिविधियों में किसी तरह से शामिल होना । - यदि आप भाग्यशाली हैं और आपने बचपन से एक पत्रिका रखी है, तो उसे फिर से पढ़ें । देखें कि आपको किन जुनूनों ने आकर्षित किया था, और आप बार-बार उसमें किन सपनों के बारे में लिखते थे । दोअपनी प्रतिभाओं का सम्मिश्रण करेंः हो सकता है कि आपके पास एक से अधिक प्रतिभा हो । शायद आप बाइक स्टंट में काफ़ी अच्छे हैं और आपको लिखना भी पसंद है । तो क्या आप बाइक की सवारी और करतबों के बारे में एक किताब लिख सकते हैं, या फिर उन सच्ची कहानियों के बारे में कि बाइक चलाने वालों ने अपने जुनून की शुरुआत कैसे की? अपनी प्रतिभाओं को सम्मिश्रण करने के ये कुछ अन्य तरीके हैंः - हो सकता है कि आपको कविताएं लिखने के साथ-साथ व्याख्यात्मक नृत्य करना भी पसंद है; तो क्या आप अपनी एक कविता की व्याख्या कर सकते हैं, या नृत्य के लिए अपने प्रेम के बारे में एक कविता लिख सकते हैं? - यदि आप एक प्रतिभाशाली लेखक हैं, तो अपने लेखन के गुण का सबसे ज़्यादा फ़ायदा उठाएं । यदि आपको कुछ पसंद हो, तो उसके बारे में ब्लॉगिंग करने से या उसके बारे में एक वेबसाइट बनाने से आपको अपने जुनून को दूसरों से बांटने में मदद मिलेगी, अपने लेखन के गुण का उपयोग करें, और जो आप कर रहे हों उसके प्रति अपने प्यार का विकास करें । - यदि आपका भाषाओं के प्रति और पर्यावरण के व्यवसाय के जैसे एक असंबंधित क्षेत्र के प्रति जुनून है, तो देखें कि क्या आप उस क्षेत्र में एक अनुवादक या दुभाषिए के रूप में काम कर के अपनी भाषाओं के गुणों का उपयोग कर सकते हैं । तीनएक पसंदीदा शौक को पूर्णकालिक जुनून में बदलेंः यदि आपक जीवन में पहले से ही ऐसा कुछ है जो आपको उत्साह, खुशी, और गरिमा देता है, तो क्यों न उस शौक या गतिविधि को एक पूर्णकालिक उद्यम में बदलने की कोशिश करें? हालांकि जीवन में एक बड़ा परिवर्तन करने पर आपको डर लग सकता है, पर यदि आपको ऐसी किसी चीज़ का पता है जिसे आप पसंद करते हैं, तो यह देखने के लिए कि क्या वह आपका जुनून है या नहीं, उसके पीछे लगे रहने में अधिक समय खर्च करें । - आपका शौक मिट्टी के बरतन, चित्रकला, या कविता से लेकर, योग शिक्षण या स्क्रीन प्रिंटिंग तक, कुछ भी हो सकता है । - यदि आप अपने जुनून के साथ पैसा नहीं बना सकते हैं , तो किसी अन्य तरीके से दौड़ने की दुनिया में शामिल हो कर आपको उस शौक को अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण जुनून बनाने का एक रास्ता मिल सकता है । - यह जानने के लिए कि क्या आपका पसंदीदा शौक आपका जुनून भी है, आप उस शौक को करने में अधिक समय खर्च कर के धीरे-धीरे परिवर्तन कर सकते हैं । यदि आपको डर हो कि आप सब कुछ छोड़ कर उस शौक में अपने आप को पूरे समय के लिए समर्पित कर देंगे, तो ऐसा करने के लिए छोटे-छोटे कदम उठाएं । - याद रखें कि आपको अपने रोज़मर्रा के काम को अपना जुनून बनाने की आवश्यकता नहीं है । यदि आपको मैराथन पसंद हो लेकिन आप उसे एक कैरियर में परिवर्तित करने का रास्ता न खोज पाएं, तो बस प्रशिक्षण करते रहें और दौड़ें! चारवह चीज़ करें जिसका आप हमेशा से सपना देखते आ रहे हैंः भले ही वह कितनी ही साहसी, जोखिम भरी, या अव्यावहारिक हो, आपको अपने सपनों को वास्तविकता में परिवर्तित करने के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए । कौन जानता है -- शायद आप साल्सा नृत्य की कोशिश करें और आपको यह एहसास हो कि वहा आपके लिए नहीं है, या फिर आप गैलापागोस द्वीप समूह के लिए यात्रा करें और उदासीन महसूस करें । हालांकि, यह होने की अधिक संभावना है कि बहादुर बनने से और वे चीज़ें करने से जिनके आप हमेशा से सपने देखते आ रहे हैं, आप उस चिंगारी को जला पाएंगे जो आपको प्रकाशित रखेगी । - व्यावहारिक और वित्तीय बाधाओं के बावजूद, अपने सपनों का पीछा करने के लिए दृढ़ संकल्पी रहें । भले ही वह सिर्फ थोड़ी देर के लिए ही क्यों न हो, एक ऐसी योजना बनाएं जो आपको अपने सपनों को आज़माने की अनुमति देती है । उस सपने का पीछा करने में या उचित व्यवस्थाएं बनाने में थोड़ा समय लग सकता है, लेकिन यह बाद में लाभप्रद होगा । - यदि आपको एक नई गतिविधि करने में डर लग रहा है, जैसे कि पहाड़ की चोटी पर चढ़ना, तो समर्थन के लिए अपने मित्रों से मदद मांगे । आपको अकेले कुछ नया और डरावना करने की ज़रूरत नहीं है । - कुछ करने से पहले उसके बारे में बात करना शुरू करें कि आप क्या करेंगे । यदि आप सच में अपने एक ट्री हाउस का निर्माण करना चाहते हैं, तो इसके बारे में सबको बताना शुरू करें । यह आपको अपने सपनों को साकार करने के और करीब ले जाएगा । यदि सब को यह पता हो कि आप अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं तो आपके हार मानने की संभावना कम हो जाएगी । एकएक नया खेल खेलने की कोशिश करेंः आप शायद यह न जानते हों, लेकिन आपका असली जुनून माउंटेन बाइकिंग या तीरंदाजी हो सकता है । आपको शायद यह लगता हो कि आपको केवल कभी-कभी ही जॉगिंग के लए जाना पसंद हो, लेकिन जबतक आप प्रयास न करें तबतक आपको अपने असली जुनून का पता नहीं चलेगा । एक नया खेल खेलने से आपके एड्रेनालाईन में तेज़ी आएगी, आप दुनिया के बारे में और अधिक उत्तेजित हो जाएंगे, और यह व्यायाम का भी एक अच्छा तरीका होगा । यदि आप यह पाते हैं कि आपको यह खेल काफ़ी पसंद है, तो आप एक शिक्षक, या एक कोच बन सकते हैं, या आप ऑनलाइन समर्पित अनुयायियों के साथ इस खेल के लिए अपने प्यार को दूसरों के साथ बांटना भी शुरू कर सकते हैं । कोशिश करने के लिए ये कुछ चीज़ें हैंः - नृत्य । साल्सा, बॉलरूम नृत्य, फ़ाक्सत्रोट, हिप हॉप, या जो भी आप चाहें उसकी एक कक्षा लें । - योग । अलग किस्म की योग कक्षाएं लें और देखें की क्या आप हमेशा से यह करना चाहते थे या नहीं । - दौड़ना । आप केवल अपने दम पर दौड़ सकते हैं और देख सकते हैं कि वह कितना अच्छा लगता है, या फिर आप एक पाँच केल्विन के लिए प्रशिक्षण का एक लक्ष्य निर्धारित कर सकते हैं और मैराथन के लिए तैयारी कर सकते हैं । - तैरना । तैरना पूरे शरीर का केवल एक अच्छा व्यायाम ही नहीं है, बल्कि तैरने से आपका दिमाग शांत होगा और पानी में होने पर आपको लगेगा कि आपका शरीर एक बिल्कुल सही जगह पर है । एक झील या सागर में तैराकी करने से आपको यह महसूस हो सकता है कि आप प्रकृति के साथ और अधिक संपर्क में हैं । - मार्शल आर्ट । एक कराटे या जुजित्सु की कक्षा लें और देखें क उससे आपको कैसा महसूस होता है । - टीम का खेल । एक बोलिंग, बेसबॉल, सॉफ्टबॉल, फुटबॉल, या वॉलीबॉल लीग में शामिल होएं और एक नया खेल के लिए अपने जुनून की तलाश करें और साथ ही दूसरों के साथ उसे बांटने की खुशी भी लें । - कम-पारंपरिक खेल । कर्लिंग, तीरंदाजी, माउंटेन बाइकिंग, स्केटबोर्डिंग, या कोई भी अन्य खेल जिसमें आपको हमेशा से रुचि थी । दोअपने कलात्मक पक्ष का पता लगाएंः शायद आपमें एक अद्भुत कलात्मक पक्ष हो सकता है जिसके बारे में आपको पता ही न हो । अपने कलात्मक पक्ष का पता लगाने के लिए, आप कुछ चीज़ें आज़माने की कोशिश कर सकते हैं जैसे कि, चित्रकला, लेखन, अभिनय, गायन, या कपड़े डिजाइन करना । आप अपने भीतर के कलाकार को खोजने के लिए कई चीज़ें कर सकते हैं । - एक संगीत वाद्य बजाएं । शायद आपको बचपन में पियानो बजाना पसंद था और आपने अब उसे बजाना बंद कर दिया है । उसे बजाने का एक बार फिर प्रयत्न करें । - लिखें । एक नाटक, कविता, छोटी कहानी, या यहां तक कि एक उपन्यास लिखने की कोशिश करें । इससे आपको यह पता लग सकता है कि जितना आपने सोचा था, आपके पास कहने को शायद उससे भी अधिक चीज़ें हैं । - अभिनय । चाहे आपको बस कुछ दोस्तों के साथ एक नाटक का मंचन करना पसंद हो, या फिर आप एक स्थानीय थिएटर कंपनी में शामिल होने की कोशिश कर रहे हों, आपको अभिनय करने की कोशिश करने के लिए जेनिफर लॉरेंस होने की ज़रूरत नहीं है । - गाएं । यदि आपको हमेशा से गाने का जुनून था लेकिन कभी भी दूसरों को अपनी आवाज़ सुनाने के लिए समय नहीं था, तो उसका वक्त अभी ही है । यदि आपको एक समूह में गाना पसंद हो, तो आप एक कोरस या एक कप्पैला समूह में भी शामिल हो सकते हैं । - चित्रकारी, चित्रकला, या मूर्ति बनाएं । एक चित्रकारी का आरेखन करने के लिए, एक परिदृश्य की चित्रकला करने के लिए अलग किस्मों के उपकरणों का प्रयोग करें । आपको अपने हाथों के साथ काम करके अपना सच्चे जुनून खोजने में सक्षम हो सकते हैं । - पंछी देखना । आप जानवरों के साम्राज्य के बारे में बहुत कुछ सीखने के साथ-साथ प्रकृति के साथ भी जुड़ सकते हैं । यदि आपमें इसके प्रति जुनून है, तो आप एक किताब लिख सकते हैं या पक्षी देखने के अभियानों का नेतृत्व कर सकते हैं । - पालतू जानवरों की देखभाल । हो सकता है कि आपको हमेशा से पालतू जानवर पसंद हो -- यही समय है जब आप अपने शौक को एक पूर्णकालिक जुनून में बदल दें । या शायद आप सिर्फ अपने पालतू जानवर के साथ नाता बनाने के लिए उसके साथ और अधिक समय बिताना चाहते हों । वह भी बहुत अच्छा है! - एक नई भाषा सीखें । आप एक भाषा सिर्फ मनोरंजन के लिए भी सीख सकते हैं । आप शायद यह भी पा सकते हैं कि आप विदेशी शब्दों में लीन हैं और उसके प्रति आसक्त हैं । इसे एक जुनून में बदलने के लिए एक अनुवादक के रूप में काम करें या उस विदेशी भाषा में इतना तल्लीन हो जाएं कि आप उसी भाषा में पढ़ें और उसी भाषा में ही फिल्में देखें या यहां तक कि उसकी वजह से विदेश ही चले जाएं । - खाना पकाना । हो सकता है कि आप अपने तारकीय खाना पकाने के गुणों को महत्व न दे रहे हों । यदि आपको पहले से ही खाना पकाना पसंद है, तो और ज़्यादा खाना पकाने के टीवी शो देखें, ज़्यादा खाने के ब्लॉग पढ़ें, और अपने दोस्तों के साथ अपने व्यंजनों को बांटना शुरू करें और देखें कि क्या आप स्वादिष्ट भोजन के प्रति अपने प्यार को एक पूर्णकालिक जुनून में बदल सकते हैं । - बढ़ईगीरी । आप फर्नीचर का निर्माण करने में एक विशेषज्ञ हो सकते हैं लेकिन शायद आप ऐसा कभी कभार ही करते हैं । फर्नीचर के एक पूरे कमरे का निर्माण कर के, या यहां तक कि एक फर्नीचर बनाने के छोटे व्यवसाय को शुरू कर के, देखें कि क्या आप अपने गुणों को एक जुनून में बदल सकते हैं । कई लोगों को फर्नीचर का निर्माण करना या सुंदर चीज़ों की नक्काशी करना आध्यात्मिक, या यहां तक कि सुखदायक भी लगता है । चारअपनी आरामदेह स्थिति से बाहर निकलेंः यदि आपको अपना जुनून ढूंढने में परेशानी हो रही है, तो ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि बार-बार वही पुरानी चीज़ें कर के शायद आप उन्हीं के आदी हो गए हैं । यह एक वास्तविक मनोवैज्ञानिक घटना हैः अभ्यस्त होने से स्थिर प्रदर्शन होता है, लेकिन ज़्यादा "आरामदेह स्थिति" में होने से अन्वेषण और रचनात्मकता दब जाती है ।[पैंतीस] X रिसर्च सोर्स यदि आप सच में अपना जुनून खोजना चाहते हैं, तो आपको खुद के साथ परीक्षण करना होगा और यह खोजने के लिए कि आपको क्या आकर्षित करता है, अपनी आरामदेह स्थिति के बाहर कदम रखना होगा । ये कुछ चीज़ें हैं जिनकी आप कोशिश कर सकते हैंः - बंजी जंपिंग, स्काई डाइविंग, या ज़िप लाइनिंग के जैसी एक चरम गतिविधि का प्रयास करें । आपको इस उत्तेजित गतिविधि से प्यार भी हो सकता है । - यदि आपको लगे कि आप किसी चीज़ में अच्छे नहीं हैं तो उसे करें । यदि आपको लगे कि आप एक बहुत बुरे नर्तक, बावर्ची, बुननेवाले, या लेखक हैं, तो इस गतिविधि पर हर सप्ताह में एक घंटा बिताने की कोशिश करें । एक नए गुण या यहां तक कि एक नए जुनून की खोज कर के आप को आश्चर्य हो सकता है । - यदि आपका एक कलात्मक दिमाग है, तो कुछ अधिक तार्किक करने की कोशिश करें, जैसे कि वर्ग-पहेली या शतरंज । यदि आप बहुत ही व्यावहारिक हों, तो कुछ कलात्मक करने की कोशिश करें जिसमें कम सख्त नियम हों, जैसे कि तेल चित्रकला या द्रुत उतार-चढ़ाव के साथ गाना । - यदि आप आश्वस्त हैं कि आप तान बधिर हैं तो एक संगीत वाद्य लें । पियानो, बांसुरी, या यहां तक कि रिकॉर्डर बजाना सीखें और फिर देखें कि कैसे यह आपकी दुनिया को खोलता है । पाँचयात्राः यात्रा आपकी दुनिया खोलने का और नई आंखों के साथ एक जुनून खोजने का एक शानदार तरीका हो सकता है । हालांकि आपका बजट आपको व्यापक यात्रा करने से प्रतिबंधित कर सकता है, पर एक नए स्थान जाने के लिए और रहने का, खाने का, और सांस लेने का एक नया तरीका देखने के लिए, आपसे जितना हो सके उतना करें । चाहे आप एक नए राज्य में या दुनिया में कहीं भी यात्रा कर रहे हों, यात्रा करने से आपको ऐसा कुछ मिल सकता है जिसके प्रति आप में जुनून हो । - आप यह पा सकते हैं कि आपका असली जुनून यात्रा है । यद आप पाते हैं कि आपको भ्रमण-लालसा है, तो उसका फ़ायदा उठाएं और एक वार्षिक -- या यहां तक कि एक मासिक -- यात्रा की योजना बनाएं । - यात्रा करते वक्त बहुत सारी तस्वीरें लें । आप यह भी पा सकते हैं कि आपका नया जुनून फोटोग्राफी है! - प्रेरित हों । अपने जुनून खोजने के लिए अपने परिवेश का प्रयोग करें । यदि आप फ्लोरिडा में एक समुद्र तट पर हैं, तो आप यह पा सकते हैं कि आपका नया जुनून सीप एकत्रित करना है; यदि आप पेरिस में लूव्र का दौरा कर रहे हैं, तो आप पा सकते हैं कि आपका नया जुनून ललित कला है । - अपना काम कराने के लिए अपने परिवेश पर निर्भर न हों । यदि आपके पास दूर दराज की जगहों पर यात्रा करने के लिए पैसे नहीं है, तो अपने पड़ोस में ही कहीं छुट्टी पर जाएं! उसकी ओर ऐसा दृष्टिकोण रखें जैसे आप एक सैलानी हों । एक ऐसे बार या दुकान में जाएं जहां आप पहले कभी भी नहीं गए हों । एक कैफे में कुछ लोगों को देखें । सड़क पर एक यादृच्छिक अजनबी से बात करें । अपने दृष्टिकोण को बदलना वास्तव में आपके जीवन को बदल सकता है । छःअपने समुदाय में स्वयंसेवक बनेंः यदि आपके पास अपने समुदाय में स्वयंसेवक बनने का समय है, तो आपको उसमें एक नया जुनून मिल सकता है! अपने समुदाय में स्वयंसेवक बनने के कई तरीके हैंः आप अपने स्थानीय पुस्तकालय में लोगों को उनके लेखन और पढ़ने के गुणों को विकसित करने में मदद कर सकते हैं, अपने स्थानीय सूप रसोई में स्वयंसेवक बन सकते हैं, या अपने समुदाय में एक पार्क को साफ कर सकते हैं । - यदि आप एक पार्क को साफ करने में मदद करते हैं, तो आप बागवानी में एक नया जुनून पा सकते हैं । - यदि आप लोगों को पढ़ना सिखाने में मदद करते हैं, तो आपका पढ़ाने के शिक्षण के लिए, या फिर सामान्य रूप से शिक्षण के लिए एक जुनून शुरु हो सकता है । - यदि आप एक बेघर आश्रय में काम करते हैं, तो ज़रूरतमंद लोगों की मदद करने के प्रति आपकी रुचि का विकास हो सकता है । - यदि आप स्वयंसेवक कार्यक्रम में एक नेतृत्व की भूमिका लें, जैसे कि दान किए गए कपड़ों को एकत्रित करने के स्थल पर काम करने के लिए लोगों को संयोजित करना, तब आपको शायद नेतृत्व के लिए एक जुनून मिल सकता है । सातदूसरों की मदद ले कर नई चीज़ें आज़माने की कोशिश करेंः शायद आपका एक ऐसा दोस्त हो सकता है जो तीरंदाजी या हास्य किताबें बनाने में आसक्त है, या आपके परिवार का एक सदस्य जो पूरे देश में सबसे अच्छी मिठाई बनाने वाला बावर्ची है । अपने समुदाय में शिक्षकों को, या जिन लोगों के आप जानते हों, अपने जुनून को बारे में उन्हें बता कर अपनी नई प्रतिभा या जुनून का पता लगाने में उनकी मदद लें । - आपका एक दोस्त जिसे किसी चीज़ के प्रति बहुत जुनून है, उससे आप शिक्षण लें, जैसे कि रोबोटिक्स या फूलों की व्यवस्था करना । उस गतिविधि या गुण के प्रति आपके दोस्त का जुनून आपको प्रेरित करेगा । - अपने परिवार के किसी सदस्य को उसके पसंदीदा काम से खुद को परिचित कराने के लिए पूछें, चाहे वह मोटरसाइकिल की मरम्मत करना हो, या फिर मछली पकड़ना । किसी ऐसी चीज़ जिसके बारे में आप हमेशा से जानते थे, आपको उसके प्रति जुनून महसूस करने पर आश्चर्य हो सकता है । - एक कक्षा लें । चाहे आप कला की कक्षा ले रहे हों या सोवियत संघ के इतिहास पर, आप यह पा सकते हैं कि एक शिक्षक या पेशेवर से एक अवधारणा समझने से आपका जुनून शुरु हो सकता है । किसी भी ऐसी कक्षा के लिए अपना नाम लिखाएं जो आपको लुभावनी लगती हो, चाहे वह एक सामाजिक कॉलेज में हो, ऑनलाइन हो, या फिर एक स्थानीय मनोरंजन के केंद्र में हो, और फिर प्रेरित होने के लिए तैयार हो जाएं । - पढ़ें । कोई ऐसा व्यक्ति जो किसी एक विशिष्ट क्षेत्र में माहिर हो या ऐसा व्यक्ति जिसमें किसी चीज़ को ले कर बहुत जुनून हो, उसके द्वारा लिखी गई किताब पढ़ने से आप में जुनून शुरु हो सकता है । - उदाहरण के लिए, यदि आपने अपने खुद का व्यवसाय शुरू करने का फैसला लिया है, तो आपको यहा जानने की ज़रूरत है कि वैसा करने के लिए आपको क्या करना होगा । आपको किन गुणों की ज़रूरत होगी? आपको उसे शुरु करने से पहले कितना धन, उत्पाद, आदि स्थापित करने की आवश्यकता होगी? - जिस कैरियर के प्रति आप में जुनून हो उस कैरियर या क्षेत्र के लोगों के साथ बात करना सहायक हो सकता है । आम तौर पर, लोग आपको सलाह देना पसंद करेंगे और आपको यह भी बताएंगे की उन्होंने अपना मुकाम कैसे हासिल किया । वे आपको आपके नए जुनून के बारे में आपको कम-रोमांचक बातें भी बता सकते हैं, जिसे अभी ही जानना ज़रूरी है ताकि बाद में वह जान कर आपको आश्चर्य न हो । - उदाहरण के लिए, एक बावर्ची बनना आपको अपने लिए एक आदर्श कैरियर लग सकता है, लेकिन किसी चीज़ को आकर्षक समझना आसान है जब आप हर दिन उसका अनुभव न कर रहे हों । एक पाकशाला संबंधी कक्षा लेना -- या यहां तक कि एक पाकशाला स्कूल में दाखिला लेना -- आपको महत्वपूर्ण विवरणों से परिचित करेगा, जैसे कि लंबे समय के लिए काम, गर्म रसोई, और आम तौर पर कम वेतन । एक बार जब आप अपनी नए रुचि के बारे में सबसे बुरी चीज़ों को जान लें और फिर भी यदि आप कुछ और करने की कल्पना न कर सकें, तो आप इस बात पर विश्वास कर सकते हैं कि आपको एक नया जुनून मिल गया है । - सब कामों से एक दिन के लिए छुट्टी लें । थोड़ी देर के लिए खुद को दुनिया से अलग कर लें । बिना किसी तकनीक, काम, सफाई, दोस्तों, रिश्तेदारों, और यहां तक कि परिवार के बिना एक दिन बिताएं । टीवी बंद करें, अपना मोबाइल फोन और अपना फोन भी बंद कर दें । कल्पना करें कि आपके लिए किसी चीज़ को करने की कोई भी निर्धारित तिथि नहीं है, आपको कोई कर्ज़ नहीं भरना है, आपको कोई चिंता नहीं है, और आपको कोई अन्य कार्य नहीं करने हैं । कुछ क्षणों के लिए शांत रहें और फिर अपने विचारों पर ध्यान दें । क्या अपने मन आने वाले अगले अच्छे गैजेट की कल्पना करता है? क्या आप खुद को अपने व्यवसाय का निर्माण करते हुए देखते हैं, या खुद को अगला डायमैक्सियन घर डिजाइन करते हुए देखते हैं? क्या आप उस परियोजना को शुरू करना चाहते हैं जिसके बारे में आप पिछले पांच सालों से सोच रहे हैं? - आपको जितने समय की आवश्यकता हो उतना समय लें । विचार शायद सीधे से आपके दिमाग में न आएं, लेकिन अंत में, आप पाएंगे कि आपमें पहले से ही किसी चीज़ को लेकर जुनून है, और आपको सिर्फ अपने सहज पर विश्वास करने की ज़रूरत है । - यदि आप पाते हैं कि आपको अपने पुराने शौकों से उतना आनंद नहीं मिल रहा है जितना पहले मिलता था, तो उसमें कोई बुराई नहीं है । क्योंकि हम मनुष्य हैं, इसलिए हम लगातार बढ़ते और बदलते रहते हैं, और हम बहुत लंबे समय के लिए स्वरुप नहीं रहते हैं । - एक डायरी रखें और जो कुछ भी सोच या इच्छाएं आपके दिमाग में आएं उन्हें उसमें लिखें । ऐसा कुछ लिखें जो आपको वास्तव में उत्साहित करता है, फिर उसे पढ़ें और उनमें उन विचारों को खोजें जिन्हें आप प्राप्त कर सकते हैं और उन्हें हासिल करने के लिए वास्तव में जारी रह सकते हैं । इस विचार को प्राप्त करने के लिए अपनी सफलता और यात्रा की योजना बनाएं । - यदि आप उस कार्य को एक जीविका बनाने की कोशिश करने का फैसला करते हैं जिसे आप शौक के रूप में करते हैं, तो वह जल्द ही एक उबाऊ काम बन सकता है । यदि आपको लगे कि पूरे समय उस कार्य को करने से उसके प्रति आपका प्यार कम होता है, तो अपने पिछले कार्यों की ओर लौटने पर विचार करें । अपनी "जुनून" की गतिविधि से थोड़ी देर के लिए छुट्टी लें, फिर उसे करने का एक बार और प्रयत्न करें और देखें कि क्या आप उसके प्रति अपने प्यार को फिर से खोज सकते हैं या नहीं । - उदाहरण के लिए, यदि आपको बचपन में आइसक्रीम पसंद थी, लेकिन एक आइसक्रीम की दुकान पर पांच साल तक काम करने से, आप यह पा सकते हैं कि दुकान पर काम करने से आइसक्रीम के लिए आपका प्यार कम हो गया है । यदि यह मामला है, तो एक हिदायत है कि आप आइसक्रीम की दुकान पर कुछ समय के लिए काम करना बंद कर दें और कुछ और करने की कोशिश करें, और फिर अंत में वापस जाने पर आप आइसक्रीम के लिए अपना प्यार तलाश सकेंगे । - सब कुछ छोड़ कर एक वृत्ति के पीछे जाने की कोशिश न करें । हर काम में धैर्य, सावधानी से योजना बनाने, और समर्पण की ज़रूरत होती है । |
नोट - तापस अंध - महाराज दशरथ कौशल्या से कहते हैं- युवावस्था में एक दिन शिकार की तलाश में घूमता हुआ नदी के तट पहुँचा । रात हो आयी थी । कुछ दिखाई नहीं देता था । उसी समय अन्धे माता-पिता का पुत्र ऋषि कुमार अपने माता-पिता के लिए जल लेने को नदी तीर आया । उसने जल में घड़ा डुवाया तो घड़ा डूबने का शब्द मुझे हाथी के शब्द जैसा जान पड़ा । उसी क्षण मैंने शब्दवेधी वाण छोड़ दिया और वह ऋषि पुत्र के वक्षस्थल में जा घुसा । 'हाय ! मैं मारा गया', यह शब्द करता वह पृथ्वी पर गिर पड़ा । मनुष्य का शब्द सुनते ही दौड़ा हुआ वहां जाकर मैंने देखा कि एक ऋषि पृथ्वी पर पड़े छटपटा रहे हैं । उनसे मैंने अपना परिचय दिया और अज्ञान में जो अपराध हुआ था, उसके लिए क्षमा मांगी। उन्होंने कहा- अच्छा, आप शीघ्र जल ले जाकर मेरे माता-पिता को पिलायें । वे अन्धे बहुत प्यासे हैं । मैं घड़े में जल ले कर उनके पास गया और उनसे सारा हाल कहकर दुखी हृदय से क्षमा मांगी। तदुपरात उनके कथनानुसार मैं उन्हें उनके पुत्र श्रवणकुमार के शव के पास लाया । उन्होंने भी पुत्र के साथसाथ वहीं अपने प्राण छोड़ दिये । किन्तु मरते समय अन्धे तपस्वी ने मुझ से कहाराजन् ! जाओ, जैसे पुत्र वियोग में मैं मर रहा हूँ, वैसे हो तुम्हारी भो मृत्यु होगी । भयउ बिकल बरनत इतिहासा । राम रहित धिग जीवन आसा ।। सो तनु राखि करब में काहा । जेहि न प्रेम पतु मोर निबाहा ॥
शब्दार्थ - पनु- प्रण । निवाहा- पूरा किया ।
अर्थ - उस इतिहास का वर्णन करते-करते राजा व्याकुल हो गये और बोले कि राम के बिना जीने की आशा को धिक्कार है । उस शरीर को रख कर ही में क्या करूंगा, जिसने मेरे प्रेम के प्रण को पूरा न किया ।
हा रघुनन्दन प्रान पिरीते । तुम्ह विनु जियत बहुत दिन बीते ॥ हा जानको लखन हां रघुवर । हा पितु हित चित चातक जलधर ॥ शब्दार्थ - पिरीते प्यारे । चातक पपीहा । जलधर मेघ ।
अर्थ - हा रघुकुलं को आनन्द देने वाले प्राण प्रिय राम ! तुम्हारे विना जीते हुए मुझे बहुत दिन बीत गये । हा जानकी ! हा लक्ष्मण ! हा पिता के चित्त रूपी के लिए मेघ राम ! | नोट - तापस अंध - महाराज दशरथ कौशल्या से कहते हैं- युवावस्था में एक दिन शिकार की तलाश में घूमता हुआ नदी के तट पहुँचा । रात हो आयी थी । कुछ दिखाई नहीं देता था । उसी समय अन्धे माता-पिता का पुत्र ऋषि कुमार अपने माता-पिता के लिए जल लेने को नदी तीर आया । उसने जल में घड़ा डुवाया तो घड़ा डूबने का शब्द मुझे हाथी के शब्द जैसा जान पड़ा । उसी क्षण मैंने शब्दवेधी वाण छोड़ दिया और वह ऋषि पुत्र के वक्षस्थल में जा घुसा । 'हाय ! मैं मारा गया', यह शब्द करता वह पृथ्वी पर गिर पड़ा । मनुष्य का शब्द सुनते ही दौड़ा हुआ वहां जाकर मैंने देखा कि एक ऋषि पृथ्वी पर पड़े छटपटा रहे हैं । उनसे मैंने अपना परिचय दिया और अज्ञान में जो अपराध हुआ था, उसके लिए क्षमा मांगी। उन्होंने कहा- अच्छा, आप शीघ्र जल ले जाकर मेरे माता-पिता को पिलायें । वे अन्धे बहुत प्यासे हैं । मैं घड़े में जल ले कर उनके पास गया और उनसे सारा हाल कहकर दुखी हृदय से क्षमा मांगी। तदुपरात उनके कथनानुसार मैं उन्हें उनके पुत्र श्रवणकुमार के शव के पास लाया । उन्होंने भी पुत्र के साथसाथ वहीं अपने प्राण छोड़ दिये । किन्तु मरते समय अन्धे तपस्वी ने मुझ से कहाराजन् ! जाओ, जैसे पुत्र वियोग में मैं मर रहा हूँ, वैसे हो तुम्हारी भो मृत्यु होगी । भयउ बिकल बरनत इतिहासा । राम रहित धिग जीवन आसा ।। सो तनु राखि करब में काहा । जेहि न प्रेम पतु मोर निबाहा ॥ शब्दार्थ - पनु- प्रण । निवाहा- पूरा किया । अर्थ - उस इतिहास का वर्णन करते-करते राजा व्याकुल हो गये और बोले कि राम के बिना जीने की आशा को धिक्कार है । उस शरीर को रख कर ही में क्या करूंगा, जिसने मेरे प्रेम के प्रण को पूरा न किया । हा रघुनन्दन प्रान पिरीते । तुम्ह विनु जियत बहुत दिन बीते ॥ हा जानको लखन हां रघुवर । हा पितु हित चित चातक जलधर ॥ शब्दार्थ - पिरीते प्यारे । चातक पपीहा । जलधर मेघ । अर्थ - हा रघुकुलं को आनन्द देने वाले प्राण प्रिय राम ! तुम्हारे विना जीते हुए मुझे बहुत दिन बीत गये । हा जानकी ! हा लक्ष्मण ! हा पिता के चित्त रूपी के लिए मेघ राम ! |
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के इमलीडीह स्थित पुलिस कालोनी की 6 मंजिला सरकारी इमारत की छत से कूदकर एक जवान ने जान दे दी। खुदकुशी करने वाला जवान अमलीडीह की पुलिस कॉलोनी में रहता था। 6 मंजिला सरकारी इमारत की छत से ही उसने नीचे छलांग लगा दी। मामला राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र का है।
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, घटना गुरुवार की सुबह 6:00 बजे के आस-पास की है। मॉर्निंग वॉक पर निकले पुलिसकर्मियों ने जवान के शव को देखा तो राजेंद्र नगर थाने को खबर दी। खुदकुशी करने वाले जवान का नाम राज ध्रुव बताया जा रहा है। फिलहाल पुलिस को कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है।
जवान के पड़ोसी पुलिसकर्मियों के मुताबिक राज ध्रुव रायपुर में ही ट्रैफिक विभाग में पदस्थ था। वह अक्सर शराब पीकर अपनी पत्नी से झगड़ा करता था। इस बात की शिकायत जवान की पत्नी ने विभाग में की थी। राज ध्रुव के कई सहकर्मी उसे समझा भी चुके थे फिलहाल पुलिस मामले में परिजनों से पूछताछ कर रही है।
| रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के इमलीडीह स्थित पुलिस कालोनी की छः मंजिला सरकारी इमारत की छत से कूदकर एक जवान ने जान दे दी। खुदकुशी करने वाला जवान अमलीडीह की पुलिस कॉलोनी में रहता था। छः मंजिला सरकारी इमारत की छत से ही उसने नीचे छलांग लगा दी। मामला राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र का है। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, घटना गुरुवार की सुबह छः:शून्य बजे के आस-पास की है। मॉर्निंग वॉक पर निकले पुलिसकर्मियों ने जवान के शव को देखा तो राजेंद्र नगर थाने को खबर दी। खुदकुशी करने वाले जवान का नाम राज ध्रुव बताया जा रहा है। फिलहाल पुलिस को कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। जवान के पड़ोसी पुलिसकर्मियों के मुताबिक राज ध्रुव रायपुर में ही ट्रैफिक विभाग में पदस्थ था। वह अक्सर शराब पीकर अपनी पत्नी से झगड़ा करता था। इस बात की शिकायत जवान की पत्नी ने विभाग में की थी। राज ध्रुव के कई सहकर्मी उसे समझा भी चुके थे फिलहाल पुलिस मामले में परिजनों से पूछताछ कर रही है। |
भारी बमबारी और गोलाबारी से यूक्रेनी शहरों के नष्ट होने के सिलसिले के बीच पोप फ्रांसिस यूक्रेन जा सकते हैं। पत्रकारों से बात करते हुए पोप ने कहा कि वह यूक्रेन की यात्रा करने की सोच रहे हैं। सीएनएन न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, मीडिया ने सवाल पूछा कि क्या वह कीव जाने पर विचार कर रहे हैं, इस पर पोप फ्रांसिस ने एक लंबे विराम के बाद जवाब दिया, हां, इसकी योजना बन रही है। मीडिया से बातचीत शनिवार सुबह उनके विमान से माल्टा जाने के दौरान हुई। उन्होंने विमान में सवार 70 से अधिक पत्रकारों का अभिवादन करते हुए कहा कि यह एक अच्छी यात्रा होगी।
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| भारी बमबारी और गोलाबारी से यूक्रेनी शहरों के नष्ट होने के सिलसिले के बीच पोप फ्रांसिस यूक्रेन जा सकते हैं। पत्रकारों से बात करते हुए पोप ने कहा कि वह यूक्रेन की यात्रा करने की सोच रहे हैं। सीएनएन न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, मीडिया ने सवाल पूछा कि क्या वह कीव जाने पर विचार कर रहे हैं, इस पर पोप फ्रांसिस ने एक लंबे विराम के बाद जवाब दिया, हां, इसकी योजना बन रही है। मीडिया से बातचीत शनिवार सुबह उनके विमान से माल्टा जाने के दौरान हुई। उन्होंने विमान में सवार सत्तर से अधिक पत्रकारों का अभिवादन करते हुए कहा कि यह एक अच्छी यात्रा होगी। Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news. |
ये 5 चीजें हैं नैचुरल इम्यूनिटी बूस्टर!
क्या आप हर बार मौसम बदलने पर बीमार पड़ जाते हैं? या फिर जैसे ही कोई वायरल फैलता है तो आपको खांसी और जुकाम शुरू हो जाता है? अगर ऐसा है तो अब घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि आपके पास कुछ ऐसे उपाय मौजूद हैं, जो आपको इस समस्या से बचाने में कारगर हैं। जी हां, ये कुछ चीजें आपके घर में ही मौजूद होती हैं और इनका मात्र सेवन ही आपको मौसम बदलने के दौरान होने वाली समस्याओं से बचाने में कारगर हैं। इन समस्याओं से बचने के लिए आपकी इम्यूनिटी का मजबूत होना बहुत ही जरूरी है, जिसके लिए आपको अपनी डाइट में छोटे-छोटे बदलाव करने की जरूरत होती है। ये चीजें आपके शरीर में जरूरी पोषक तत्वों को पहुंचाती है फिर चाहे वो विटामिन्स हों या मिनरल्स। आइए जानते हैं कौन सी हैं ये चीजें, जो आपकी इम्यूनिटी को बूस्ट करती हैं।
| ये पाँच चीजें हैं नैचुरल इम्यूनिटी बूस्टर! क्या आप हर बार मौसम बदलने पर बीमार पड़ जाते हैं? या फिर जैसे ही कोई वायरल फैलता है तो आपको खांसी और जुकाम शुरू हो जाता है? अगर ऐसा है तो अब घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि आपके पास कुछ ऐसे उपाय मौजूद हैं, जो आपको इस समस्या से बचाने में कारगर हैं। जी हां, ये कुछ चीजें आपके घर में ही मौजूद होती हैं और इनका मात्र सेवन ही आपको मौसम बदलने के दौरान होने वाली समस्याओं से बचाने में कारगर हैं। इन समस्याओं से बचने के लिए आपकी इम्यूनिटी का मजबूत होना बहुत ही जरूरी है, जिसके लिए आपको अपनी डाइट में छोटे-छोटे बदलाव करने की जरूरत होती है। ये चीजें आपके शरीर में जरूरी पोषक तत्वों को पहुंचाती है फिर चाहे वो विटामिन्स हों या मिनरल्स। आइए जानते हैं कौन सी हैं ये चीजें, जो आपकी इम्यूनिटी को बूस्ट करती हैं। |
कॉन्स्टेंटिन सेर्गेविक स्टानिस्लावस्की एक आदमी है,मॉस्को आर्ट थियेटर की स्थापना की और अभिनय की मौलिक नई अवधारणा बनाई। उन्होंने अपने विचारों को एक से अधिक मात्रा में समर्पित किया, और उनकी किताबें अभी भी नाटकीय व्यवसायों के प्रतिनिधियों द्वारा पढ़ाई जा रही हैं। इसकी रचना के समय स्टैनिस्लावस्की की विधि मुख्य रूप से नई थी, और अब इसके बिना एक एकल अभिनय स्कूल नहीं है। उन्हें "आधार" माना जाता है, किसी भी कलाकार के लिए आवश्यक है, भले ही वह एक अलग शैली में खेलता है।
तो, स्टैनिस्लावस्की प्रणाली क्या है? यह अभ्यास और सिद्धांतों की एक श्रृंखला है, जिस पर अभिनेता को अपनी भूमिका के सार को समझने और समझने के लिए उन्मुख होना चाहिए। Stanislavsky प्रणाली के आधार पर, तथाकथित "अनुभव स्कूल" बनाया गया था, मंच पर "अर्थहीन निष्क्रियता" सहन नहीं कर रहा था। प्रणाली आपको खेलना नहीं सिखाती है, बल्कि एक चरित्र के जीवन को जीने के लिए, अपने आप को प्रस्तावित परिस्थितियों में डुबोकर और उन्हें विश्वास करना। हर पंक्ति, मंच पर हर आंदोलन उचित होना चाहिए और भीतर से जाना चाहिए।
स्टैनिस्लावस्की प्रणाली में कई अभ्यास शामिल हैंअभिनय कौशल और कल्पना के विकास के लिए उनमें से अधिकतर आप अपने दिमाग को "धोखा" कर सकते हैं और प्रस्तावित परिस्थितियों में विश्वास कर सकते हैं। अक्सर अभिनेताओं को वर्णों का जीवन और खेल में शामिल होने वाले घटनाओं को नहीं समझा जाना चाहिए। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति कमरे में प्रवेश करता है, तो उसे पता होना चाहिए कि वह क्यों और क्यों प्रवेश कर रहा है दर्शकों को यह नहीं दिखाई देगा, लेकिन अभिनेता को यह महसूस करना चाहिए। क्या वह सड़क से आया था? मौसम क्या था? उसने प्रवेश करने से पहले क्या किया? वह क्यों आया था? और इतने पर। यह मंच पर सहजता प्राप्त करने और "अनुभव के विद्यालय" में जरूरी अर्थ को कार्रवाई करने में मदद करता है।
स्टैनिस्लावस्की सिस्टम को अभिनेता को पूरा करने की आवश्यकता हैप्रभाव और उपस्थिति और यह हासिल करना इतना आसान नहीं है इसके अलावा पुस्तक "एथिक्स" स्टैनिस्लावस्की में, वह थिएटर के भीतर संबंधों के बुनियादी सिद्धांतों को बताते हैं, जो काम के लिए सबसे अनुकूल माहौल बनाने में मदद करेंगे।
प्रणाली का निर्माण करने की प्रक्रिया में स्टानिस्लावस्कीयह कई मनो-भावनात्मक समस्याओं को हल करने के लिए आवश्यक था। इस या उस टिप्पणी को कैसे सही ठहराना है? कैसे अभिनय टिकटों और चुटकुले से छुटकारा पाने के लिए? ऑडिटोरियम को नोटिस न करने के लिए कैसे सीखें?
पहले दो समस्याओं की मदद से हल किया गयाआंतरिक प्रेरणा - अभिनेता को खुद में भावनात्मक स्थिति पैदा करने की जरूरत है जो शरीर की आवश्यक प्रतिक्रिया को जन्म देगा। जीवन में लोगों के व्यवहार का पालन करना सबसे अच्छा है और याद रखना कि वे इस या उस स्थिति में कैसे काम करते हैं। माँ अपने बेटे से कैसे मिलती है? एक लड़की प्यार कबूल करता है? कैसे एक आदमी हँसी वापस पकड़ करता है? सभागार के साथ समस्या स्टैनिस्लावस्की ने "चौथी दीवार" की शुरुआत के साथ फैसला किया - एक काल्पनिक बाधा जो दर्शकों से दृश्य को अलग करती है। यह पहले से मौजूद दृश्यों की निरंतरता की तरह है और अंतरिक्ष बंद कर देता है।
स्टैनिस्लावस्की प्रणाली भी हल करने की कोशिश कर रही हैअक्षरों और अभिनेताओं के बीच रिश्ते के साथ समस्या आखिरकार, अगर प्रतिक्रिया की भावनाओं को सही होना चाहिए, तो इसका मतलब है कि उन्हें साथी से समान रूप से सही आवेगों के कारण होना चाहिए। इसलिए, प्रणाली में मंच पर बातचीत के लिए कई अभ्यास हैं।
| कॉन्स्टेंटिन सेर्गेविक स्टानिस्लावस्की एक आदमी है,मॉस्को आर्ट थियेटर की स्थापना की और अभिनय की मौलिक नई अवधारणा बनाई। उन्होंने अपने विचारों को एक से अधिक मात्रा में समर्पित किया, और उनकी किताबें अभी भी नाटकीय व्यवसायों के प्रतिनिधियों द्वारा पढ़ाई जा रही हैं। इसकी रचना के समय स्टैनिस्लावस्की की विधि मुख्य रूप से नई थी, और अब इसके बिना एक एकल अभिनय स्कूल नहीं है। उन्हें "आधार" माना जाता है, किसी भी कलाकार के लिए आवश्यक है, भले ही वह एक अलग शैली में खेलता है। तो, स्टैनिस्लावस्की प्रणाली क्या है? यह अभ्यास और सिद्धांतों की एक श्रृंखला है, जिस पर अभिनेता को अपनी भूमिका के सार को समझने और समझने के लिए उन्मुख होना चाहिए। Stanislavsky प्रणाली के आधार पर, तथाकथित "अनुभव स्कूल" बनाया गया था, मंच पर "अर्थहीन निष्क्रियता" सहन नहीं कर रहा था। प्रणाली आपको खेलना नहीं सिखाती है, बल्कि एक चरित्र के जीवन को जीने के लिए, अपने आप को प्रस्तावित परिस्थितियों में डुबोकर और उन्हें विश्वास करना। हर पंक्ति, मंच पर हर आंदोलन उचित होना चाहिए और भीतर से जाना चाहिए। स्टैनिस्लावस्की प्रणाली में कई अभ्यास शामिल हैंअभिनय कौशल और कल्पना के विकास के लिए उनमें से अधिकतर आप अपने दिमाग को "धोखा" कर सकते हैं और प्रस्तावित परिस्थितियों में विश्वास कर सकते हैं। अक्सर अभिनेताओं को वर्णों का जीवन और खेल में शामिल होने वाले घटनाओं को नहीं समझा जाना चाहिए। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति कमरे में प्रवेश करता है, तो उसे पता होना चाहिए कि वह क्यों और क्यों प्रवेश कर रहा है दर्शकों को यह नहीं दिखाई देगा, लेकिन अभिनेता को यह महसूस करना चाहिए। क्या वह सड़क से आया था? मौसम क्या था? उसने प्रवेश करने से पहले क्या किया? वह क्यों आया था? और इतने पर। यह मंच पर सहजता प्राप्त करने और "अनुभव के विद्यालय" में जरूरी अर्थ को कार्रवाई करने में मदद करता है। स्टैनिस्लावस्की सिस्टम को अभिनेता को पूरा करने की आवश्यकता हैप्रभाव और उपस्थिति और यह हासिल करना इतना आसान नहीं है इसके अलावा पुस्तक "एथिक्स" स्टैनिस्लावस्की में, वह थिएटर के भीतर संबंधों के बुनियादी सिद्धांतों को बताते हैं, जो काम के लिए सबसे अनुकूल माहौल बनाने में मदद करेंगे। प्रणाली का निर्माण करने की प्रक्रिया में स्टानिस्लावस्कीयह कई मनो-भावनात्मक समस्याओं को हल करने के लिए आवश्यक था। इस या उस टिप्पणी को कैसे सही ठहराना है? कैसे अभिनय टिकटों और चुटकुले से छुटकारा पाने के लिए? ऑडिटोरियम को नोटिस न करने के लिए कैसे सीखें? पहले दो समस्याओं की मदद से हल किया गयाआंतरिक प्रेरणा - अभिनेता को खुद में भावनात्मक स्थिति पैदा करने की जरूरत है जो शरीर की आवश्यक प्रतिक्रिया को जन्म देगा। जीवन में लोगों के व्यवहार का पालन करना सबसे अच्छा है और याद रखना कि वे इस या उस स्थिति में कैसे काम करते हैं। माँ अपने बेटे से कैसे मिलती है? एक लड़की प्यार कबूल करता है? कैसे एक आदमी हँसी वापस पकड़ करता है? सभागार के साथ समस्या स्टैनिस्लावस्की ने "चौथी दीवार" की शुरुआत के साथ फैसला किया - एक काल्पनिक बाधा जो दर्शकों से दृश्य को अलग करती है। यह पहले से मौजूद दृश्यों की निरंतरता की तरह है और अंतरिक्ष बंद कर देता है। स्टैनिस्लावस्की प्रणाली भी हल करने की कोशिश कर रही हैअक्षरों और अभिनेताओं के बीच रिश्ते के साथ समस्या आखिरकार, अगर प्रतिक्रिया की भावनाओं को सही होना चाहिए, तो इसका मतलब है कि उन्हें साथी से समान रूप से सही आवेगों के कारण होना चाहिए। इसलिए, प्रणाली में मंच पर बातचीत के लिए कई अभ्यास हैं। |
आधार से जुडी जानकारी सार्वजनिक करने का आरोप भी लगाया है।
मामले के तूल पकडने पर रविशंकर प्रसाद ने तत्काल साक्षी की शिकायत पर कार्रवाई की और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से जुडे एक ट्विटर हैंडल से धोनी के आधार से जुडी जानकारी हटवाई।
आपको बता दें कि केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मंगलवार को धोनी के आधार कार्ड के साथ रजिस्ट्रेशन करवाते हुए एक तस्वीर ट्वीट की थी। इस फोटो में धोनी आधार कार्ड के लिए मशीन पर अपनी अंगलियों के निशान स्कैन करवा रहे थे।
| आधार से जुडी जानकारी सार्वजनिक करने का आरोप भी लगाया है। मामले के तूल पकडने पर रविशंकर प्रसाद ने तत्काल साक्षी की शिकायत पर कार्रवाई की और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से जुडे एक ट्विटर हैंडल से धोनी के आधार से जुडी जानकारी हटवाई। आपको बता दें कि केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मंगलवार को धोनी के आधार कार्ड के साथ रजिस्ट्रेशन करवाते हुए एक तस्वीर ट्वीट की थी। इस फोटो में धोनी आधार कार्ड के लिए मशीन पर अपनी अंगलियों के निशान स्कैन करवा रहे थे। |
नाहन - इस सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण 27 जुलाई को लग रहा है। इस चंद्रग्रहण की अवधि करीब चार घंटे होगी। यह जानकारी संस्कृत महाविद्यालय नाहन के ज्योतिषाचार्य डा. वेद पांडेय ने दी । उन्होंने कहा इस ग्रहण को कम से कम तीन महाद्वीपों में स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा। डा. वेद पांडेय ने कहा कि ज्योतिष शास्त्र के मुताविक यह संयोग 104 साल के बाद बन रहा है। उन्होंने कहा कि चंद्रग्रहण 27 जुलाई की मध्य रात्रि में 11 बजकर 55 मिनट पर शुरू होगा और इसका अंत 28 जुलाई की सुबह तीन बजकर 39 मिनट पर होगा। इस चंद्रग्रहण की अवधि तीन घंटे 54 मिनट की होगी। उन्होंने बताया कि चंद्रग्रहण के दौरान चांद लाल दिखता है, जिसे ब्लड मून अर्थात रक्तिम चांद भी कहा जाता है। पूर्ण चंद्रग्रहण के दौरान चांद जब धरती की छाया में रहता है तो इसकी आभा रक्तिम हो जाती है, जिसे रक्तिम चंद्र या लाल चांद कहते हैं। ऐसा तब होता है, जब चांद पूरी तरह से धरती की आभा में ढक जाता है। उन्होंने बताया की यह चंद्रग्रहण भारत के अलावा म्यांमार, भूटान, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, चीन, नेपाल, एशिया, अफ्रीका, यूरोप, अंटाकर्टिका, आस्ट्रेलिया और दक्षिण अमरिका के मध्य और पूर्वी भाग में दिखाई देगा।
| नाहन - इस सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण सत्ताईस जुलाई को लग रहा है। इस चंद्रग्रहण की अवधि करीब चार घंटे होगी। यह जानकारी संस्कृत महाविद्यालय नाहन के ज्योतिषाचार्य डा. वेद पांडेय ने दी । उन्होंने कहा इस ग्रहण को कम से कम तीन महाद्वीपों में स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा। डा. वेद पांडेय ने कहा कि ज्योतिष शास्त्र के मुताविक यह संयोग एक सौ चार साल के बाद बन रहा है। उन्होंने कहा कि चंद्रग्रहण सत्ताईस जुलाई की मध्य रात्रि में ग्यारह बजकर पचपन मिनट पर शुरू होगा और इसका अंत अट्ठाईस जुलाई की सुबह तीन बजकर उनतालीस मिनट पर होगा। इस चंद्रग्रहण की अवधि तीन घंटे चौवन मिनट की होगी। उन्होंने बताया कि चंद्रग्रहण के दौरान चांद लाल दिखता है, जिसे ब्लड मून अर्थात रक्तिम चांद भी कहा जाता है। पूर्ण चंद्रग्रहण के दौरान चांद जब धरती की छाया में रहता है तो इसकी आभा रक्तिम हो जाती है, जिसे रक्तिम चंद्र या लाल चांद कहते हैं। ऐसा तब होता है, जब चांद पूरी तरह से धरती की आभा में ढक जाता है। उन्होंने बताया की यह चंद्रग्रहण भारत के अलावा म्यांमार, भूटान, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, चीन, नेपाल, एशिया, अफ्रीका, यूरोप, अंटाकर्टिका, आस्ट्रेलिया और दक्षिण अमरिका के मध्य और पूर्वी भाग में दिखाई देगा। |
देश में जिस हफ्ते आम बजट पेश हो रहा हो, सुर्खियों में छाए रहने के लिए किसी नाटकीय घटना या किसी पूरे घटनाक्रम की ज़रूरत होती है और अडाणी से जुड़े कथित गड़बड़झाले ने वही किया है. हालांकि, बजट और कुछ हद तक आर्थिक सर्वेक्षण ने भी सुर्खियां बटोरने की हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन इनके लिए ज्यादा समय तक शीर्ष पर टिके रहना संभव नहीं हो पाया.
ताल्कालिक विश्लेषण जैसे-तैसे पूरा हुआ और देशभर के मीडिया हाउस फिर दुनिया के तीसरे सबसे अमीर व्यक्ति गौतम अडाणी की रैंकिंग में तेज़ी से जारी गिरावट की सनसनीखेज खबर पर लौट आए.
यही कारण है कि अडाणी और उनकी अडाणी इंटरप्राइजेज का निशाने पर रहना ही इस बार दिप्रिंट का न्यूज़मेकर ऑफ द वीक है.
हफ्ते की शुरुआत एकदम धमाकेदार रही. 29 जनवरी को अडाणी समूह ने अमेरिकी शॉर्ट सेलिंग फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च की तरफ से लगाए गए कई आरोपों पर 413 पन्नों का जवाब जारी किया. अडाणी की ये प्रतिक्रिया किसी के दनादन गोलियां चलाते हुए बाहर निकलने जैसी थी. अपने जवाब में, ग्रुप ने दावा किया कि उसने हिंडनबर्ग की तरफ से 24 जनवरी को जारी मूल रिपोर्ट में उठाए गए सभी 88 सवालों का जवाब दिया है.
शायद अडाणी ग्रुप को लगा होगा कि उसे सोशल मीडिया पर सक्रिय दक्षिणपंथी समूह के उसके पाले में आने से फायदा मिल सकता है. कंपनी ने दावा किया कि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट 'भारत पर एक सुनियोजित हमला' है और भारतीय संस्थानों की स्वतंत्रता, अखंडता और गुणवत्ता भी निशाने पर है.
हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें.
हिंडनबर्ग ने अपने जवाब में यह भी कहा कि फ्रॉड तो फ्रॉड ही है, भले ही यह दुनिया के सबसे धनी व्यक्तियों में से किसी ने किया हो. ज़ाहिर है कि हिंडनबर्ग ने स्पष्ट कर दिया था कि वह जवाबी हमले को हल्के में नहीं लेने वाली है.
शॉर्ट सेलर ने आगे कहा, "तथ्यों की बात की जाए तो अडाणी की '413 पन्नों' की इस प्रतिक्रिया में करीब 30 पेज ही हमारी रिपोर्ट से संबंधित मुद्दों पर केंद्रित थे. "निश्चित तौर पर, उसमें कुछ भी मतलब की बात नहीं है. अडाणी की इस लंबी प्रतिक्रिया में पिछले अदालती मामलों और निर्णयों से जुड़ी जानकारी है जो कि पेज नंबर 55 से ही शुरू हो गई है.
हिंडनबर्ग ने स्पष्ट तौर पर कहा कि बशर्ते, अडाणी ग्रुप ने सभी सवालों के जवाब देने का दावा किया है लेकिन इसने गौतम अडाणी के बड़े भाई विनोद अडाणी, उनकी कथित फ्रंट कंपनियों और ग्रुप की फर्मों के साथ उनके कथित लेन-देन के महत्वपूर्ण मुद्दे को दरकिनार कर दिया है.
सोमवार की सुबह थी, और हफ्ता अभी बस शुरू ही हुआ था.
सोमवार और मंगलवार के दौरान अडाणी ग्रुप शेयर बाज़ार में मंदड़ियों के खिलाफ पलटवार करने में कामयाब रहा, अडाणी एंटरप्राइजेज के शेयर दोनों दिनों में मामूली बढ़त के साथ बंद हुए. इस रिकवरी से गौतम अडाणी को काफी राहत मिली होगी, क्योंकि पिछले हफ्ते अडाणी के शेयरों से लगभग 4. 17 लाख करोड़ रुपये का सफाया हो गया था.
हालांकि, यह राहत अल्पकालिक थी. संयोग से बुधवार यानी बजट के दिन खबर आई कि स्विस निवेश बैंकिंग फर्म क्रेडिट सुइस ग्रुप एजी ने अपने निजी बैंकिंग ग्राहकों को दिए गए मार्जिन लोन के लिए बतौर कोलैटरल अडाणी ग्रुप के बॉन्ड स्वीकार करने बंद कर दिए हैं. हालांकि, यह कहना पूरी तरह सही नहीं था, लेकिन मूलतः इसका मतलब यह था कि क्रेडिट सुइस को अब अडाणी कंपनियों की तरफ से जारी बॉन्ड की साख पर भरोसा नहीं रहा है.
इस कदम ने इस मुद्दे को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुगबुगाहट और बढ़ा दी. मीडिया घरानों ने दावा किया कि ऐसे संकेत थे कि अडाणी ग्रुप ने कथित तौर पर अपने खुद के फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (एफपीओ) में निवेश के लिए विभिन्न संधिग्ध चैनल इस्तेमाल किए थे, जो इसे और कमज़ोर करने वाला और छवि खराब करने वाला था.
इसके बाद अडाणी के शेयरों के बाज़ार मूल्य तेज़ी से नीचे आने लगे. अडाणी एंटरप्राइजेज के शेयर ने दिन के कारोबारी सत्र को 28. 45 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की, फिर बुधवार की देर रात एक बड़ी और आश्चर्यजनक खबर आई, अडाणी एंटरप्राइजेज ने घोषणा की कि 'निवेशकों के हितों की रक्षा' का ध्यान में रखते हुए अपने 20,000 करोड़ रुपये के एफपीओ को रद्द कर रही है, जो कि भारत में सबसे बड़ा एफपीओ था.
ये घोषणा अभूतपूर्व और शर्मनाक थी और शायद यह कोई संयोग नहीं था कि अडाणी ने इसे रात में जारी किया, शेयर बाज़ार बंद होने के काफी समय बाद. यही नहीं इसे जारी करने का समय ऐसा था जबकि अधिकांश समाचार एजेंसियां दिनभर का काम निपटाकर रातभर के लिए आराम करने वाली थीं.
बहरहाल, आराम से सांस लीजिए और थोड़ा पानी पीजिए, यह सारा घटनाक्रम सिर्फ बुधवार तक का था.
जिस तरह ज्वार की स्थिति सभी नावों को पानी में ऊपर उठा देती है उसी तरह सुनामी उन्हें डुबो भी देती है. ऐसे में जो खुद को बचाने की कोशिश कर सकते हैं, वो करते हैं. गुरुवार को ऐसी ही एक खबर सामने आई कि ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के भाई जो जॉनसन ने अडाणी ग्रुप से जुड़ी यूके की एक कंपनी एलारा कैपिटल के बोर्ड में निदेशक के पद से इस्तीफा दे दिया है. हिंडनबर्ग की मूल रिपोर्ट में एलारा कैपिटल के बारे में काफी कुछ बताया गया था.
उसी दिन, सिटीग्रुप की वित्तीय शाखा ने भी दो टूक कह दिया कि 7 फरवरी से वह मार्जिन लोन के लिए कोलैटरल के तौर पर अडाणी कंपनियों की प्रतिभूतियों को स्वीकार करना बंद कर देगी.
बहरहाल, यह सारी अफरा-तफरी यहीं नहीं थमी. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने गुरुवार को घोषणा की कि वह अडाणी एंटरप्राइजेज, अडाणी पोर्ट्स और अंबुजा सीमेंट्स (अडाणी की ही एक कंपनी) के शेयरों पर कड़ी नज़र बनाए हुए है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, एसएंडपी डाउ जोन्स इंडेक्स ने कहा कि "स्टॉक में हेरफेर और लेखा संबंधी धोखाधड़ी के आरोपों को लेकर मीडिया की सुर्खियों और हितधारकों के विश्लेषण के बाद" वह भी अडाणी एंटरप्राइजेज को अपने स्थिरता सूचकांक से हटा देगा.
हम्म...तो यह सबकुछ गुरुवार तक चला. शुक्रवार की शुरुआत और यह सब लिखे जाने के समय तक, मूल हिंडनबर्ग रिपोर्ट आने के बाद से अडाणी की सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में गिरावट जारी थी और इसमें पहले ही 120 बिलियन डॉलर यानी अडाणी ग्रुप के कुल मूल्य का लगभग आधा गंवाया जा चुका है. अडाणी एंटरप्राइजेज का स्टॉक दिन के दौरान कुछ समय के लिए सुधरा, लेकिन शुक्रवार के कारोबार में 2. 2 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ.
इसके साथ ही कारोबारी सप्ताह पूरा हुआ और गौतम अडाणी को शुक्रगुज़ार होना चाहिए कि वीकेंड में शेयर बाज़ार बंद रहता है, लेकिन यह बचने का रास्ता नहीं है, बात उठी है तो दूर तलक जाएगी. भारतीय नियामकों का मैदान में उतरना तो अभी बाकी ही है.
(अनुवादः रावी द्विवेदी । संपादनः फाल्गुनी शर्मा)
(इस लेख को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
| देश में जिस हफ्ते आम बजट पेश हो रहा हो, सुर्खियों में छाए रहने के लिए किसी नाटकीय घटना या किसी पूरे घटनाक्रम की ज़रूरत होती है और अडाणी से जुड़े कथित गड़बड़झाले ने वही किया है. हालांकि, बजट और कुछ हद तक आर्थिक सर्वेक्षण ने भी सुर्खियां बटोरने की हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन इनके लिए ज्यादा समय तक शीर्ष पर टिके रहना संभव नहीं हो पाया. ताल्कालिक विश्लेषण जैसे-तैसे पूरा हुआ और देशभर के मीडिया हाउस फिर दुनिया के तीसरे सबसे अमीर व्यक्ति गौतम अडाणी की रैंकिंग में तेज़ी से जारी गिरावट की सनसनीखेज खबर पर लौट आए. यही कारण है कि अडाणी और उनकी अडाणी इंटरप्राइजेज का निशाने पर रहना ही इस बार दिप्रिंट का न्यूज़मेकर ऑफ द वीक है. हफ्ते की शुरुआत एकदम धमाकेदार रही. उनतीस जनवरी को अडाणी समूह ने अमेरिकी शॉर्ट सेलिंग फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च की तरफ से लगाए गए कई आरोपों पर चार सौ तेरह पन्नों का जवाब जारी किया. अडाणी की ये प्रतिक्रिया किसी के दनादन गोलियां चलाते हुए बाहर निकलने जैसी थी. अपने जवाब में, ग्रुप ने दावा किया कि उसने हिंडनबर्ग की तरफ से चौबीस जनवरी को जारी मूल रिपोर्ट में उठाए गए सभी अठासी सवालों का जवाब दिया है. शायद अडाणी ग्रुप को लगा होगा कि उसे सोशल मीडिया पर सक्रिय दक्षिणपंथी समूह के उसके पाले में आने से फायदा मिल सकता है. कंपनी ने दावा किया कि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट 'भारत पर एक सुनियोजित हमला' है और भारतीय संस्थानों की स्वतंत्रता, अखंडता और गुणवत्ता भी निशाने पर है. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. हिंडनबर्ग ने अपने जवाब में यह भी कहा कि फ्रॉड तो फ्रॉड ही है, भले ही यह दुनिया के सबसे धनी व्यक्तियों में से किसी ने किया हो. ज़ाहिर है कि हिंडनबर्ग ने स्पष्ट कर दिया था कि वह जवाबी हमले को हल्के में नहीं लेने वाली है. शॉर्ट सेलर ने आगे कहा, "तथ्यों की बात की जाए तो अडाणी की 'चार सौ तेरह पन्नों' की इस प्रतिक्रिया में करीब तीस पेज ही हमारी रिपोर्ट से संबंधित मुद्दों पर केंद्रित थे. "निश्चित तौर पर, उसमें कुछ भी मतलब की बात नहीं है. अडाणी की इस लंबी प्रतिक्रिया में पिछले अदालती मामलों और निर्णयों से जुड़ी जानकारी है जो कि पेज नंबर पचपन से ही शुरू हो गई है. हिंडनबर्ग ने स्पष्ट तौर पर कहा कि बशर्ते, अडाणी ग्रुप ने सभी सवालों के जवाब देने का दावा किया है लेकिन इसने गौतम अडाणी के बड़े भाई विनोद अडाणी, उनकी कथित फ्रंट कंपनियों और ग्रुप की फर्मों के साथ उनके कथित लेन-देन के महत्वपूर्ण मुद्दे को दरकिनार कर दिया है. सोमवार की सुबह थी, और हफ्ता अभी बस शुरू ही हुआ था. सोमवार और मंगलवार के दौरान अडाणी ग्रुप शेयर बाज़ार में मंदड़ियों के खिलाफ पलटवार करने में कामयाब रहा, अडाणी एंटरप्राइजेज के शेयर दोनों दिनों में मामूली बढ़त के साथ बंद हुए. इस रिकवरी से गौतम अडाणी को काफी राहत मिली होगी, क्योंकि पिछले हफ्ते अडाणी के शेयरों से लगभग चार. सत्रह लाख करोड़ रुपये का सफाया हो गया था. हालांकि, यह राहत अल्पकालिक थी. संयोग से बुधवार यानी बजट के दिन खबर आई कि स्विस निवेश बैंकिंग फर्म क्रेडिट सुइस ग्रुप एजी ने अपने निजी बैंकिंग ग्राहकों को दिए गए मार्जिन लोन के लिए बतौर कोलैटरल अडाणी ग्रुप के बॉन्ड स्वीकार करने बंद कर दिए हैं. हालांकि, यह कहना पूरी तरह सही नहीं था, लेकिन मूलतः इसका मतलब यह था कि क्रेडिट सुइस को अब अडाणी कंपनियों की तरफ से जारी बॉन्ड की साख पर भरोसा नहीं रहा है. इस कदम ने इस मुद्दे को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुगबुगाहट और बढ़ा दी. मीडिया घरानों ने दावा किया कि ऐसे संकेत थे कि अडाणी ग्रुप ने कथित तौर पर अपने खुद के फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर में निवेश के लिए विभिन्न संधिग्ध चैनल इस्तेमाल किए थे, जो इसे और कमज़ोर करने वाला और छवि खराब करने वाला था. इसके बाद अडाणी के शेयरों के बाज़ार मूल्य तेज़ी से नीचे आने लगे. अडाणी एंटरप्राइजेज के शेयर ने दिन के कारोबारी सत्र को अट्ठाईस. पैंतालीस प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की, फिर बुधवार की देर रात एक बड़ी और आश्चर्यजनक खबर आई, अडाणी एंटरप्राइजेज ने घोषणा की कि 'निवेशकों के हितों की रक्षा' का ध्यान में रखते हुए अपने बीस,शून्य करोड़ रुपये के एफपीओ को रद्द कर रही है, जो कि भारत में सबसे बड़ा एफपीओ था. ये घोषणा अभूतपूर्व और शर्मनाक थी और शायद यह कोई संयोग नहीं था कि अडाणी ने इसे रात में जारी किया, शेयर बाज़ार बंद होने के काफी समय बाद. यही नहीं इसे जारी करने का समय ऐसा था जबकि अधिकांश समाचार एजेंसियां दिनभर का काम निपटाकर रातभर के लिए आराम करने वाली थीं. बहरहाल, आराम से सांस लीजिए और थोड़ा पानी पीजिए, यह सारा घटनाक्रम सिर्फ बुधवार तक का था. जिस तरह ज्वार की स्थिति सभी नावों को पानी में ऊपर उठा देती है उसी तरह सुनामी उन्हें डुबो भी देती है. ऐसे में जो खुद को बचाने की कोशिश कर सकते हैं, वो करते हैं. गुरुवार को ऐसी ही एक खबर सामने आई कि ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के भाई जो जॉनसन ने अडाणी ग्रुप से जुड़ी यूके की एक कंपनी एलारा कैपिटल के बोर्ड में निदेशक के पद से इस्तीफा दे दिया है. हिंडनबर्ग की मूल रिपोर्ट में एलारा कैपिटल के बारे में काफी कुछ बताया गया था. उसी दिन, सिटीग्रुप की वित्तीय शाखा ने भी दो टूक कह दिया कि सात फरवरी से वह मार्जिन लोन के लिए कोलैटरल के तौर पर अडाणी कंपनियों की प्रतिभूतियों को स्वीकार करना बंद कर देगी. बहरहाल, यह सारी अफरा-तफरी यहीं नहीं थमी. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने गुरुवार को घोषणा की कि वह अडाणी एंटरप्राइजेज, अडाणी पोर्ट्स और अंबुजा सीमेंट्स के शेयरों पर कड़ी नज़र बनाए हुए है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, एसएंडपी डाउ जोन्स इंडेक्स ने कहा कि "स्टॉक में हेरफेर और लेखा संबंधी धोखाधड़ी के आरोपों को लेकर मीडिया की सुर्खियों और हितधारकों के विश्लेषण के बाद" वह भी अडाणी एंटरप्राइजेज को अपने स्थिरता सूचकांक से हटा देगा. हम्म...तो यह सबकुछ गुरुवार तक चला. शुक्रवार की शुरुआत और यह सब लिखे जाने के समय तक, मूल हिंडनबर्ग रिपोर्ट आने के बाद से अडाणी की सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में गिरावट जारी थी और इसमें पहले ही एक सौ बीस बिलियन डॉलर यानी अडाणी ग्रुप के कुल मूल्य का लगभग आधा गंवाया जा चुका है. अडाणी एंटरप्राइजेज का स्टॉक दिन के दौरान कुछ समय के लिए सुधरा, लेकिन शुक्रवार के कारोबार में दो. दो फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ. इसके साथ ही कारोबारी सप्ताह पूरा हुआ और गौतम अडाणी को शुक्रगुज़ार होना चाहिए कि वीकेंड में शेयर बाज़ार बंद रहता है, लेकिन यह बचने का रास्ता नहीं है, बात उठी है तो दूर तलक जाएगी. भारतीय नियामकों का मैदान में उतरना तो अभी बाकी ही है. |
अंतरराष्ट्रीय वनडे क्रिकेट में सबसे तेज शतक का रिकॉर्ड दक्षिण अफ्रीका के एबी डी'विलियर्स के नाम दर्ज है, जिन्होंने 31 गेंदों में शतक ठोंका था। यदि आईपीएल की बात की जाए तो यह रिकॉर्ड क्रिस गेल के नाम पर हैं जिन्होंने 30 गेंदों में शतक लगाया था। लेकिन अब कर्नाटक के इस बल्लेबाज ने 29 गेंदों में ही शतक बना दिया है। हालांकि उसका यह रिकॉर्ड इंटरनेशनल मैच में नहीं जुड़ेगा। फिर भी इतनी कम गेंदों में सेंचुरी बनाना गर्व की बात है।
प्रोलू रवींद्र की इस तूफानी पारी की मदद से सिटी जिमखाना ने 9 विकेट पर 403 रन बनाए। प्रोलू ने 58 गेंदों में 13 छक्कों और 7 चौकों की मदद से 144 रन बनाए। जवाब में जयपुर क्लब की पारी 229 रनों पर सिमट गई और इस मैच में उसे 174 रनों से हार का सामना करना पड़ा।
आंध्रप्रदेश के रहने वाले प्रोलू पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग को अपना आदर्श मानते हैं। उनका सपना आईपीएल में खेलने का है। किसान परिवार का यह बेटा क्रिकेट के जरिए पैसा कमाकर अपने परिवार की मदद करना चाहता है। इसी के चलते उसने पढ़ाई छोड़कर क्रिकेट पर सारा ध्यान केंद्रित किया है।
| अंतरराष्ट्रीय वनडे क्रिकेट में सबसे तेज शतक का रिकॉर्ड दक्षिण अफ्रीका के एबी डी'विलियर्स के नाम दर्ज है, जिन्होंने इकतीस गेंदों में शतक ठोंका था। यदि आईपीएल की बात की जाए तो यह रिकॉर्ड क्रिस गेल के नाम पर हैं जिन्होंने तीस गेंदों में शतक लगाया था। लेकिन अब कर्नाटक के इस बल्लेबाज ने उनतीस गेंदों में ही शतक बना दिया है। हालांकि उसका यह रिकॉर्ड इंटरनेशनल मैच में नहीं जुड़ेगा। फिर भी इतनी कम गेंदों में सेंचुरी बनाना गर्व की बात है। प्रोलू रवींद्र की इस तूफानी पारी की मदद से सिटी जिमखाना ने नौ विकेट पर चार सौ तीन रन बनाए। प्रोलू ने अट्ठावन गेंदों में तेरह छक्कों और सात चौकों की मदद से एक सौ चौंतालीस रन बनाए। जवाब में जयपुर क्लब की पारी दो सौ उनतीस रनों पर सिमट गई और इस मैच में उसे एक सौ चौहत्तर रनों से हार का सामना करना पड़ा। आंध्रप्रदेश के रहने वाले प्रोलू पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग को अपना आदर्श मानते हैं। उनका सपना आईपीएल में खेलने का है। किसान परिवार का यह बेटा क्रिकेट के जरिए पैसा कमाकर अपने परिवार की मदद करना चाहता है। इसी के चलते उसने पढ़ाई छोड़कर क्रिकेट पर सारा ध्यान केंद्रित किया है। |
गुरदासपुर (पंजाब)। उत्तरी पंजाब के गुरदासपुर जिले में अंतर्राष्ट्रीय सीमा के साथ सटी सीमा सुरक्षाबल (बीएसएफ) चौकी पर गोलीबारी हुई। सूत्रों के मुताबिक, बीएसएफ जवान जवाबी कार्रवाई में गुरदासपुर के चकरी गांव से आठ से 10 घुसपैठियों को खदेड़ने में कामयाब रहे।
सूत्रों के मुताबिक, गोलीबारी रात लगभग दो बजे शुरू हुई। बीएसएफ जवानों ने हैंड हेल्ड थर्मल इमेजर्स (एचएचटीआई) का इस्तेमाल कर सीमा पर आठ से 10 लोगों के होने का पता लगाया। ये घुसपैठिए सीमा पार कर चुके थे लेकिन कांटेदार बाड़ के पीछे थे।
बीएसएफ अधिकारी ने बताया, "उन्होंने बीएसएफ चौकी पर गोलीबारी की। हमारे जवानों ने तुरंत जवाबी कार्रवाई कर गोलीबारी की जिससे घुसपैठियों को वापस लौटना पड़ा। आज (सोमवार) सुबह क्षेत्र में तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया है। " गौरतलब है कि जम्मू एवं कश्मीर में हालिया आतंकवादी हमलों के बाद सेना द्वारा पीओके में किए गए 'सर्जिकल स्ट्राइक' के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है।
| गुरदासपुर । उत्तरी पंजाब के गुरदासपुर जिले में अंतर्राष्ट्रीय सीमा के साथ सटी सीमा सुरक्षाबल चौकी पर गोलीबारी हुई। सूत्रों के मुताबिक, बीएसएफ जवान जवाबी कार्रवाई में गुरदासपुर के चकरी गांव से आठ से दस घुसपैठियों को खदेड़ने में कामयाब रहे। सूत्रों के मुताबिक, गोलीबारी रात लगभग दो बजे शुरू हुई। बीएसएफ जवानों ने हैंड हेल्ड थर्मल इमेजर्स का इस्तेमाल कर सीमा पर आठ से दस लोगों के होने का पता लगाया। ये घुसपैठिए सीमा पार कर चुके थे लेकिन कांटेदार बाड़ के पीछे थे। बीएसएफ अधिकारी ने बताया, "उन्होंने बीएसएफ चौकी पर गोलीबारी की। हमारे जवानों ने तुरंत जवाबी कार्रवाई कर गोलीबारी की जिससे घुसपैठियों को वापस लौटना पड़ा। आज सुबह क्षेत्र में तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया है। " गौरतलब है कि जम्मू एवं कश्मीर में हालिया आतंकवादी हमलों के बाद सेना द्वारा पीओके में किए गए 'सर्जिकल स्ट्राइक' के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। |
प्लास्टर मिक्स एक निर्माण सामग्री हैं,दीवारों को पलस्तर के लिए करना इन दोनों को बाहरी और इनडोर काम के लिए उपयोग किया जाता है यह सामग्री पिरामिड के निर्माण के दौरान थी सीमेंट, चूने और जिप्सम के मिश्रण जाना जाता है।
काम के लिए आधुनिक विशेषज्ञों के पास लंबा हैप्लास्टर समाधान स्वयं बनाएं, और तैयार किए गए उपयोग करें ये एक औद्योगिक तरीके से तैयार किए गए सूखे प्लास्टर मिक्स हैं और 25-50 किलोग्राम के बैग में पैक किया गया है। समाप्त सामग्री को निर्देशों के अनुसार पानी से पतला किया जाता है।
प्लास्टर मिश्रण निम्नलिखित किस्मों में से हो सकता हैः
इंटीरियर कार्यों के लिए मिश्रण - उच्च नमी वाले कमरे में दीवारों को बांधने के लिए डिज़ाइन किया गया। यह सामग्री जिप्सम बेस पर उपयोग करना संभव है।
प्लास्टर मिश्रण मुखौटा बढ़ नमी प्रतिरोध के साथ यह ईंट, कंक्रीट और सीमेंट-चूने के प्लास्टर पर लागू होता है।
| प्लास्टर मिक्स एक निर्माण सामग्री हैं,दीवारों को पलस्तर के लिए करना इन दोनों को बाहरी और इनडोर काम के लिए उपयोग किया जाता है यह सामग्री पिरामिड के निर्माण के दौरान थी सीमेंट, चूने और जिप्सम के मिश्रण जाना जाता है। काम के लिए आधुनिक विशेषज्ञों के पास लंबा हैप्लास्टर समाधान स्वयं बनाएं, और तैयार किए गए उपयोग करें ये एक औद्योगिक तरीके से तैयार किए गए सूखे प्लास्टर मिक्स हैं और पच्चीस-पचास किलोग्रामग्राम के बैग में पैक किया गया है। समाप्त सामग्री को निर्देशों के अनुसार पानी से पतला किया जाता है। प्लास्टर मिश्रण निम्नलिखित किस्मों में से हो सकता हैः इंटीरियर कार्यों के लिए मिश्रण - उच्च नमी वाले कमरे में दीवारों को बांधने के लिए डिज़ाइन किया गया। यह सामग्री जिप्सम बेस पर उपयोग करना संभव है। प्लास्टर मिश्रण मुखौटा बढ़ नमी प्रतिरोध के साथ यह ईंट, कंक्रीट और सीमेंट-चूने के प्लास्टर पर लागू होता है। |
हमारे धार्मिक ग्रंथों कि मानें तो पद्मिनी एकादशी के महत्व के बारे में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को बताया था। मलमास में अनेक पुण्यों को देने वाली एकादशी का नाम पद्मिनी है।
अधिक मास या पुरुषोत्तम मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी, पद्मिनी एकादशी का व्रत आज है। हिन्दू मान्यताओं की बात करें तो पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु को सर्मपित माना जाता है। इसी कारण से इस माह में पड़ने वाली एकादशी का अत्यधिक महत्व होता है। आज के दिन लोग पद्मिनी एकदशी का व्रत रखते हैं साथ ही विधी-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। माना जाता है कि आज के दिन व्रत करने से व्रत करने वाले व्यक्ती को बैकुंठधाम की प्राप्ति होती है। इस दिन अपने शरीर की क्षमता के अनुसार निराजल या फलाहार व्रत करना चाहिए। इस दिन अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए।
पद्मिनी एकदशी 24 मई शाम 6 बजकर 18 मिनट से शुरू हो गया है वहीं इसकी समाप्ति आज यानी 25 मई को शाम 5 बजकर 47 मिनट पर हो रहा है। जो लोग इस व्रत को रख रहे हैं वो अपने व्रत का पारण 26 मई को सुबह साढ़े पांच बजे से 8 बजकर 47 मिनट पर कर सकते हैं। ध्यान देने वाली बात ये है कि इस व्रत को लोग अपनी क्षमता के अनुसार रखते हैं। जो लोग फलहारी खाना चाहते हैं वो खाते हैं। कुछ लोग ऐसे भी हैं जो ये व्रत बिना किसी अन्य ग्रहण किए करते हैं। आप भी अपनी सुविधा के अनुसार ये व्रत रख सकते हैं।
हमारे धार्मिक ग्रंथों कि मानें तो पद्मिनी एकादशी के महत्व के बारे में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को बताया था। मलमास में अनेक पुण्यों को देने वाली होती है ये एकादशी। इसका व्रत करने पर मनुष्य कीर्ति प्राप्त करके बैकुंठ को जाता है, जो मनुष्यों के लिए भी दुर्लभ है। इस दिन जरूरतमंदों को तिल, वस्त्र, धन, फल और मिठाई आदि का दान करना चाहिए। जो लोग व्रत नहीं भी करते हों वह भी इन चीजों का दान कर सकते हैं। दान करने से भी व्रत का फल प्राप्त हो जाता है।
5. श्री राम चरितमानस के अरण्य काण्ड का पाठ करें।
7. भगवान कृष्ण और राम जी की आरती करें।
| हमारे धार्मिक ग्रंथों कि मानें तो पद्मिनी एकादशी के महत्व के बारे में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को बताया था। मलमास में अनेक पुण्यों को देने वाली एकादशी का नाम पद्मिनी है। अधिक मास या पुरुषोत्तम मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी, पद्मिनी एकादशी का व्रत आज है। हिन्दू मान्यताओं की बात करें तो पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु को सर्मपित माना जाता है। इसी कारण से इस माह में पड़ने वाली एकादशी का अत्यधिक महत्व होता है। आज के दिन लोग पद्मिनी एकदशी का व्रत रखते हैं साथ ही विधी-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। माना जाता है कि आज के दिन व्रत करने से व्रत करने वाले व्यक्ती को बैकुंठधाम की प्राप्ति होती है। इस दिन अपने शरीर की क्षमता के अनुसार निराजल या फलाहार व्रत करना चाहिए। इस दिन अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए। पद्मिनी एकदशी चौबीस मई शाम छः बजकर अट्ठारह मिनट से शुरू हो गया है वहीं इसकी समाप्ति आज यानी पच्चीस मई को शाम पाँच बजकर सैंतालीस मिनट पर हो रहा है। जो लोग इस व्रत को रख रहे हैं वो अपने व्रत का पारण छब्बीस मई को सुबह साढ़े पांच बजे से आठ बजकर सैंतालीस मिनट पर कर सकते हैं। ध्यान देने वाली बात ये है कि इस व्रत को लोग अपनी क्षमता के अनुसार रखते हैं। जो लोग फलहारी खाना चाहते हैं वो खाते हैं। कुछ लोग ऐसे भी हैं जो ये व्रत बिना किसी अन्य ग्रहण किए करते हैं। आप भी अपनी सुविधा के अनुसार ये व्रत रख सकते हैं। हमारे धार्मिक ग्रंथों कि मानें तो पद्मिनी एकादशी के महत्व के बारे में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को बताया था। मलमास में अनेक पुण्यों को देने वाली होती है ये एकादशी। इसका व्रत करने पर मनुष्य कीर्ति प्राप्त करके बैकुंठ को जाता है, जो मनुष्यों के लिए भी दुर्लभ है। इस दिन जरूरतमंदों को तिल, वस्त्र, धन, फल और मिठाई आदि का दान करना चाहिए। जो लोग व्रत नहीं भी करते हों वह भी इन चीजों का दान कर सकते हैं। दान करने से भी व्रत का फल प्राप्त हो जाता है। पाँच. श्री राम चरितमानस के अरण्य काण्ड का पाठ करें। सात. भगवान कृष्ण और राम जी की आरती करें। |
Petrol Diesel Cheap: वैश्विक तेल की कीमतों में गिरावट के बाद सरकार ने घरेलू उत्पादित कच्चे तेल के साथ-साथ डीजल और एटीएफ के निर्यात पर लगाए गए अप्रत्याशित लाभ कर को घटा दिया है। 15 दिसंबर के आदेश में कहा गया है कि तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) जैसी कंपनियों द्वारा उत्पादित कच्चे तेल पर लेवी को 4,900 रुपये प्रति टन से घटाकर 1,700 रुपये प्रति टन कर दिया गया है। बता दें कि जमीन से पंप किए गए कच्चे तेल को परिष्कृत किया जाता है और पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) जैसे ईंधन में परिवर्तित किया जाता है।
सरकार ने डीजल के निर्यात पर कर को 8 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 5 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ के विदेशी शिपमेंट पर 5 रुपये से 1. 5 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। नई कर दरें 16 दिसंबर से प्रभावी हैं। कर की दर नवंबर से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में 14 प्रतिशत की गिरावट को शो करती है।
घरेलू कच्चे तेल के उत्पादन पर 23,250 रुपये प्रति टन (यूएसडी 40 प्रति बैरल) अप्रत्याशित लाभ कर भी लगाया गया था। तब से पेट्रोल पर निर्यात कर समाप्त कर दिया गया है। पिछले दो हफ्तों में तेल की औसत कीमतों के आधार पर हर पखवाड़े कर दरों की समीक्षा की जाती है।
दिसंबर में भारत द्वारा आयात किए जाने वाले कच्चे तेल की भराई औसतन 77. 79 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल थी, जबकि पिछले महीने यह 87. 55 अमेरिकी डॉलर थी। अक्टूबर में यह औसतन 91. 70 डॉलर प्रति बैरल था। इसी तरह, डीजल की कीमत भी नवंबर के 123. 18 डॉलर और अक्टूबर के 133. 52 डॉलर से घटकर इस महीने 104. 86 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है।
सरकार तेल उत्पादकों द्वारा 75-76 डॉलर प्रति बैरल की सीमा से ऊपर मिलने वाली किसी भी कीमत पर होने वाले अप्रत्याशित मुनाफे पर कर लगाती है। ईंधन निर्यात पर लेवी दरार या मार्जिन पर आधारित है जो रिफाइनर विदेशी शिपमेंट पर कमाते हैं। ये मार्जिन मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमत और लागत के बीच का अंतर है।
| Petrol Diesel Cheap: वैश्विक तेल की कीमतों में गिरावट के बाद सरकार ने घरेलू उत्पादित कच्चे तेल के साथ-साथ डीजल और एटीएफ के निर्यात पर लगाए गए अप्रत्याशित लाभ कर को घटा दिया है। पंद्रह दिसंबर के आदेश में कहा गया है कि तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम जैसी कंपनियों द्वारा उत्पादित कच्चे तेल पर लेवी को चार,नौ सौ रुपयापये प्रति टन से घटाकर एक,सात सौ रुपयापये प्रति टन कर दिया गया है। बता दें कि जमीन से पंप किए गए कच्चे तेल को परिष्कृत किया जाता है और पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल जैसे ईंधन में परिवर्तित किया जाता है। सरकार ने डीजल के निर्यात पर कर को आठ रुपयापये प्रति लीटर से घटाकर पाँच रुपयापये प्रति लीटर और एटीएफ के विदेशी शिपमेंट पर पाँच रुपयापये से एक. पाँच रुपयापये प्रति लीटर कर दिया है। नई कर दरें सोलह दिसंबर से प्रभावी हैं। कर की दर नवंबर से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में चौदह प्रतिशत की गिरावट को शो करती है। घरेलू कच्चे तेल के उत्पादन पर तेईस,दो सौ पचास रुपयापये प्रति टन अप्रत्याशित लाभ कर भी लगाया गया था। तब से पेट्रोल पर निर्यात कर समाप्त कर दिया गया है। पिछले दो हफ्तों में तेल की औसत कीमतों के आधार पर हर पखवाड़े कर दरों की समीक्षा की जाती है। दिसंबर में भारत द्वारा आयात किए जाने वाले कच्चे तेल की भराई औसतन सतहत्तर. उन्यासी अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल थी, जबकि पिछले महीने यह सत्तासी. पचपन अमेरिकी डॉलर थी। अक्टूबर में यह औसतन इक्यानवे. सत्तर डॉलर प्रति बैरल था। इसी तरह, डीजल की कीमत भी नवंबर के एक सौ तेईस. अट्ठारह डॉलर और अक्टूबर के एक सौ तैंतीस. बावन डॉलर से घटकर इस महीने एक सौ चार. छियासी डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है। सरकार तेल उत्पादकों द्वारा पचहत्तर-छिहत्तर डॉलर प्रति बैरल की सीमा से ऊपर मिलने वाली किसी भी कीमत पर होने वाले अप्रत्याशित मुनाफे पर कर लगाती है। ईंधन निर्यात पर लेवी दरार या मार्जिन पर आधारित है जो रिफाइनर विदेशी शिपमेंट पर कमाते हैं। ये मार्जिन मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमत और लागत के बीच का अंतर है। |
हे दया के समुद्र !
"सर्वज्ञ" र्थात् सब कुछ
जानने वाले है;"सर्व-दर्शी" अर्थात् घट घट के मन की बातें जानने वाले हैं, आप "शिव" रूप अर्थात् कल्याणकारी हैं, आप "चल" याने अपने पद से नही गिरने वाले है, आप रोग रहित हैं, अन्त रहित हैं, अक्षय है, वाधा से रहित हैं और ऐसे "मोक्ष " रूप स्थान को प्राप्त हो गये हैं जहाँ से कि नीचे थाने का कोई कारण बाकी नही रहा है, ऐसे मोक्ष में विराजमान "अनन्त अनन्त सिद्धो" को मेरा नमस्कार हो; तथा उन "अनन्त अनन्त अरिहतो" को भी मेरा नमस्कार हो जो कि मोक्ष मे जाने के लिये तैयार हो गये हैं ।
इस प्रकार से हे पेमचन्द भाई ! इस पाठ मे "सिद्धो की तथा अरिहतो की " स्तुति की गई है ।
पाठ सातवाँ सामायिक में क्या करना चाहिये ।
देवचन्द्र-भाई गमलान । महबानी करके श्रव यह arओ किस प्रकार से लेकर सामायिक में क्या | हे दया के समुद्र ! "सर्वज्ञ" र्थात् सब कुछ जानने वाले है;"सर्व-दर्शी" अर्थात् घट घट के मन की बातें जानने वाले हैं, आप "शिव" रूप अर्थात् कल्याणकारी हैं, आप "चल" याने अपने पद से नही गिरने वाले है, आप रोग रहित हैं, अन्त रहित हैं, अक्षय है, वाधा से रहित हैं और ऐसे "मोक्ष " रूप स्थान को प्राप्त हो गये हैं जहाँ से कि नीचे थाने का कोई कारण बाकी नही रहा है, ऐसे मोक्ष में विराजमान "अनन्त अनन्त सिद्धो" को मेरा नमस्कार हो; तथा उन "अनन्त अनन्त अरिहतो" को भी मेरा नमस्कार हो जो कि मोक्ष मे जाने के लिये तैयार हो गये हैं । इस प्रकार से हे पेमचन्द भाई ! इस पाठ मे "सिद्धो की तथा अरिहतो की " स्तुति की गई है । पाठ सातवाँ सामायिक में क्या करना चाहिये । देवचन्द्र-भाई गमलान । महबानी करके श्रव यह arओ किस प्रकार से लेकर सामायिक में क्या |
मॉडर्न ट्रेंड में बियर्ड यानी कि रौबदार दाढ़ी वाला लुक फैशन में है। पहले जहां पुरुष क्लीन शेव रहना पसंद करते थे अब वहीँ करीने से कटी दाढ़ी उन्हें माचोमैन का लुक देती है। अपने इस लुक को मेन्टेन करने के लिए पुरुष पार्लर में कई घंटे बिताते हैं इसके साथ ही शेविंग किट का भी प्रयोग करते हैं। लडकियां व महिलाएं भी अपने प्रेमी के इस माचो लुक पर जान देती हैं। दाढ़ी की छुअन मात्र उन्हें मखमली एहसास से भर देती है व कई बार उनके लिए ये अनुभव बेहद रोमांचकारी होता है जिसकी पुरुष कल्पना भी नहीं कर सकते। फिल्म कबीर सिंह में भी एक्टर शाहिद कपूर को रौबदार दाढ़ी वाले लुक में दिखाया गया है। अगर आप भी कबीर सिंह जैसी दाढ़ी पाना चाहते हैं तो घर में बनाएं ये बियर्ड आयलःबियर्ड तेल बनाने के लिएः
- कोई भी सामान्य ऑयल डालें (कोकोनट ऑयल, बादाम तेल, आंवला का तेल, एलोवेरा ऑयल, ब्राह्मी तेल, जोजोबा ऑयल)
-पसंदीदा खुशबू वाले एसेंशियल तेल की 4 से 5 बूंदे ड्रॉपर की मदद से ऑयल की शीशी में टपका लें।
- शीशी का ढक्कन बंद कर इसे अच्छे से मिक्स कर लें।
- अब आप इस ऑयल को जब चाहें तब प्रयोग कर सकते हैं।
- अगर दाढ़ी की ग्रोथ अच्छी चाहते हैं तो कोशिश करें कि इस ऑयल को दिन में दो बार दाढ़ी में लगाएं। रात में सोने से पहले इस ऑयल से दाढ़ी की मसाज करें व सो जाएं। अगले दिन शैम्पू से धो लें।
| मॉडर्न ट्रेंड में बियर्ड यानी कि रौबदार दाढ़ी वाला लुक फैशन में है। पहले जहां पुरुष क्लीन शेव रहना पसंद करते थे अब वहीँ करीने से कटी दाढ़ी उन्हें माचोमैन का लुक देती है। अपने इस लुक को मेन्टेन करने के लिए पुरुष पार्लर में कई घंटे बिताते हैं इसके साथ ही शेविंग किट का भी प्रयोग करते हैं। लडकियां व महिलाएं भी अपने प्रेमी के इस माचो लुक पर जान देती हैं। दाढ़ी की छुअन मात्र उन्हें मखमली एहसास से भर देती है व कई बार उनके लिए ये अनुभव बेहद रोमांचकारी होता है जिसकी पुरुष कल्पना भी नहीं कर सकते। फिल्म कबीर सिंह में भी एक्टर शाहिद कपूर को रौबदार दाढ़ी वाले लुक में दिखाया गया है। अगर आप भी कबीर सिंह जैसी दाढ़ी पाना चाहते हैं तो घर में बनाएं ये बियर्ड आयलःबियर्ड तेल बनाने के लिएः - कोई भी सामान्य ऑयल डालें -पसंदीदा खुशबू वाले एसेंशियल तेल की चार से पाँच बूंदे ड्रॉपर की मदद से ऑयल की शीशी में टपका लें। - शीशी का ढक्कन बंद कर इसे अच्छे से मिक्स कर लें। - अब आप इस ऑयल को जब चाहें तब प्रयोग कर सकते हैं। - अगर दाढ़ी की ग्रोथ अच्छी चाहते हैं तो कोशिश करें कि इस ऑयल को दिन में दो बार दाढ़ी में लगाएं। रात में सोने से पहले इस ऑयल से दाढ़ी की मसाज करें व सो जाएं। अगले दिन शैम्पू से धो लें। |
- 1 hr ago ब्रालेस ड्रेस पहनकर असहज हुईं जन्नत जुबैर? मीडिया के सामने ही करतीं बार बार फिक्स!
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'गोरी तेरे प्यार में' है पुनीत मल्होत्रा की लव स्टोरी!
करीना कपूर और इमरान खान दूसरी बार एक दूसरे के साथ फिल्म गोरी तेरे प्यार में नज़र आने वाले हैं। इससे पहले करीना कपूर और इमरान खान ने एक साथ फिल्म एक मैं और एक तू की थी जो कि बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास नहीं चली लेकिन इस जोड़ी को लोगों ने काफी पसंद किया और निर्माता करन जौहर को भी ये जोड़ी इतनी पसदं आई कि उन्होंने इस जोड़ी को अपनी फिल्म के लिए साइन कर लिया। दूसरी तरफ पुनीत मल्होत्रा जो कि गोरी तेरे प्यार में फिल्म के निर्देशक हैं का कहना है कि करीना और इमरान की जोडी़ उनकी फिल्म के लिए एकदम फिट थी इसलिए उन्होंने करीना-इमरान को ही चुना।
करन जौहर ने फिल्म के ट्रेलर लॉंच के दौरान कहा कि करीना कपूर और इमरान खान की कैमिस्ट्री काफी बेहतरीन है और इन दोनों को एक दूसरे के साथ ही शादी करनी चाहिए थी। इसके बाद करन जौहर से किसी ने पूछा कि उनकी गोरी कहां है और क्या वो अपनी गोरी को मनाने के लिए गांव जा सकते हैं। इसपर करन ने करीना को देखते हुए कहा कि अगर करीना गांव चली गयीं तो वो उनके पीछे पीछे जरुर जाएंगे क्योंकि करीना अब रॉयेल्टी हैं और उनका गांव में काम नहीं है। अपनी गोरी के बारे में करन ने कहा कि उनकी गोरी तो घर पर है और वो हैं उनकी मां।
करन जौहर से मीडिया ने पूछा कि वो ऐसे सपने क्यों बेचते हैं जो कि कभी सच नहीं हो सकते। क्योंकि आज कल कोई भी लड़का अपना काम छोड़कर किसी लडकी के लिए गांव में बस जाने के लिए नहीं तैयार होगा। इसपर करन ने कहा कि हमारा काम तो सपने बेचना है और मैं वही कर रहा हूं।
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
कटिहार न्यूज़ः सात निश्चय योजना के तहत शहरी क्षेत्र में हर घर नल का जल समय पूरा होने के बाद भी अधर में है. 150 करोड़ की राशि से नगरीय क्षेत्र के 34 हजार घरों में शुद्ध पेयजल पहुंचाने का कार्य अब तक ट्राय एंड रन के तहत सात वार्डों में ही नल का जल पहुंच पाया है. वो भी कभार पहुंचने से निगम क्षेत्र के लोगों के बीच विभाग के प्रति आक्रोश व्याप्त है. विभागीय कर्मियों की माने तो अब तक 24 हजार घरों में कनेक्शन तो किया गया है. लेकिन सभी घरों में अब तक शुद्ध पेयजल नही पहुंच पाया है.
वर्षों बीतने के बाद भी अब तक टेस्टिंग का कार्य किया जा रहा है. जिसका नतीजा है कि लिकेज पाइप होने के कारण कई जगहों पर जलजमाव तक की समस्या आ जाती है. विभागीय पदाधिकारी व कर्मी जहां अब तक सात वार्डों में शुद्धपेय जल पहुंचाने का दावा करते हैं. वहीं दूसरी ओर उन सभी सात वार्डों में नल का जल नहीं पहुंच पाने से लोग परेशान हैं. कर्मियों का मानना है कि वार्ड नम्बर एक, दो, तीन, चार, पांच , छह और सात के अलावा अन्य कुल 24 हजार घरो में कनेक्शन कार्य पूरा कर दिया गया है. हालांकि विभाग का कहना है कि हर घर नल का जल शत प्रतिशत कार्य पूरा नहीं हो पाया है. सात निश्चय योजना के तहत हर घर नल जल का कार्य 2018 में शुरूआत की गयी. दो वर्षों तक कोरोना के प्रभाव के कारण कार्यों में गति नहीं आने के कारण विभाग द्वारा इसमें समय की मांग की.
| कटिहार न्यूज़ः सात निश्चय योजना के तहत शहरी क्षेत्र में हर घर नल का जल समय पूरा होने के बाद भी अधर में है. एक सौ पचास करोड़ की राशि से नगरीय क्षेत्र के चौंतीस हजार घरों में शुद्ध पेयजल पहुंचाने का कार्य अब तक ट्राय एंड रन के तहत सात वार्डों में ही नल का जल पहुंच पाया है. वो भी कभार पहुंचने से निगम क्षेत्र के लोगों के बीच विभाग के प्रति आक्रोश व्याप्त है. विभागीय कर्मियों की माने तो अब तक चौबीस हजार घरों में कनेक्शन तो किया गया है. लेकिन सभी घरों में अब तक शुद्ध पेयजल नही पहुंच पाया है. वर्षों बीतने के बाद भी अब तक टेस्टिंग का कार्य किया जा रहा है. जिसका नतीजा है कि लिकेज पाइप होने के कारण कई जगहों पर जलजमाव तक की समस्या आ जाती है. विभागीय पदाधिकारी व कर्मी जहां अब तक सात वार्डों में शुद्धपेय जल पहुंचाने का दावा करते हैं. वहीं दूसरी ओर उन सभी सात वार्डों में नल का जल नहीं पहुंच पाने से लोग परेशान हैं. कर्मियों का मानना है कि वार्ड नम्बर एक, दो, तीन, चार, पांच , छह और सात के अलावा अन्य कुल चौबीस हजार घरो में कनेक्शन कार्य पूरा कर दिया गया है. हालांकि विभाग का कहना है कि हर घर नल का जल शत प्रतिशत कार्य पूरा नहीं हो पाया है. सात निश्चय योजना के तहत हर घर नल जल का कार्य दो हज़ार अट्ठारह में शुरूआत की गयी. दो वर्षों तक कोरोना के प्रभाव के कारण कार्यों में गति नहीं आने के कारण विभाग द्वारा इसमें समय की मांग की. |
नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली में संसद भवन परिसर के अंदर रविवार दोपहर करीब ढाई बजे भयंकर आग लग गई। आग संसद भवन के एसी प्लांट में लगी। इस घटना में अभी तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। खबर मिलते ही आग पर काबू पाने के लिए दमकल की 5 गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं और थोड़ी ही देर में आग पर काबू पा लिया गया।
आग लगने के बाद परिसर से धुएं का गुबार आसमान में उठने लगा। तेज हवा बहने के कारण आग बड़ी तेजी से फैलने लगी, लेकिन दमकल कर्मियों ने समय रहते आग पर काबू पा लिया। रविवार का दिन होने के कारण संसद भवन में कोई सांसद मौजूद नहीं हैं, हालांकि कुछ कर्मचारी संसद परिसर में होते हैं।आग 2 बजकर 20 मिनट पर लगी थी, जिसपर 2 बजकर 50 मिनट तक काबू पा लिया गया।
बताया जा रहा है कि आग रेलवे भवन के सामने वाले दरवाजे के पास एसी प्लांट में लगी थी। रविवार का दिन होने के कारण परिसर के भीतर काफी कम लोग थे।
फायर अफसर ने आग के पीछे चूक की बात को कारण माना है। उन्होंने बताया कि संसद परिसर में कटिंग-वेलडिंग का काम चल रहा था। इस दौरान स्पार्क के कारण एसी प्लांट में आग लग गई। खास बात यह है अभी चार दिन पहले ही इस कारण एक और मामूली आग लगी थी।
| नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली में संसद भवन परिसर के अंदर रविवार दोपहर करीब ढाई बजे भयंकर आग लग गई। आग संसद भवन के एसी प्लांट में लगी। इस घटना में अभी तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। खबर मिलते ही आग पर काबू पाने के लिए दमकल की पाँच गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं और थोड़ी ही देर में आग पर काबू पा लिया गया। आग लगने के बाद परिसर से धुएं का गुबार आसमान में उठने लगा। तेज हवा बहने के कारण आग बड़ी तेजी से फैलने लगी, लेकिन दमकल कर्मियों ने समय रहते आग पर काबू पा लिया। रविवार का दिन होने के कारण संसद भवन में कोई सांसद मौजूद नहीं हैं, हालांकि कुछ कर्मचारी संसद परिसर में होते हैं।आग दो बजकर बीस मिनट पर लगी थी, जिसपर दो बजकर पचास मिनट तक काबू पा लिया गया। बताया जा रहा है कि आग रेलवे भवन के सामने वाले दरवाजे के पास एसी प्लांट में लगी थी। रविवार का दिन होने के कारण परिसर के भीतर काफी कम लोग थे। फायर अफसर ने आग के पीछे चूक की बात को कारण माना है। उन्होंने बताया कि संसद परिसर में कटिंग-वेलडिंग का काम चल रहा था। इस दौरान स्पार्क के कारण एसी प्लांट में आग लग गई। खास बात यह है अभी चार दिन पहले ही इस कारण एक और मामूली आग लगी थी। |
३२३. पत्रः डॉ० मु० अ० अन्सारीको
डॉ० अन्सारी
प्रिय डॉ० अन्सारी,
मुझे डर है कि आपने यूरोपमे जो स्वास्थ्य लाभ किया था, उसे आप तेजीसे खोते जा रहे है। अगर आपका यही हाल रहा तो जल्दी ही भारतकी बदनामी हो जायेगी और हर व्यक्ति जो स्वास्थ्य लाभ करना या स्वस्थ रहना चाहता है, यूरोप भागेगा । इसलिए भारतकी नेकनामीकी खातिर आप ऐसी राह हमे दिखाये कि हम भारतमे ही स्वास्थ्य लाभ कर सके और स्वस्थ रह सके। और आपको ऐसा करनेका अधिकार तभी होगा जब आप "पहले कर दिखाओ तब कहो " की नीतिका पालन करेगे । आशा है, आप बोर्ड या समितिसे हटेगे नही । आपको कोई भारी थका देनेवाला कार्य करनेकी जरूरत नहीं है । लेकिन आपकी सलाह के बिना काम नही चल सकता । यह मेरी राय है ।
अग्रेजीकी नकलसे । प्यारेलाल- कागजात, सौजन्य : प्यारेलाल ।
३२४. पत्र : डॉ० गोपीचन्द भार्गवको
प्रिय डॉ० भार्गव,
सलग्न पत्र के लेखक अर्जुन देव करीब एक महीनेसे मेरे साथ पत्र व्यवहार कर रहे है । वे यहाँ आना चाहते थे। मैने उन्हे लिखा कि यह न सम्भव है और न वाछनीय ही है। उन्हें अपने निवास स्थानके नजदीककी जगहोसे ही मदद लेनी चाहिए । इसलिए लाहोर आये जान पडते है । मैंने उन्हें आपके पास जानेका सुझाव दिया है। आप उनसे पूछताछ तथा परिचय करके उनकी साख का पता
१. यह उपलब्ध नहीं है।
लगाये और फिर जो आवश्यक लगे वह करे। आशा है, ग्राम कार्य सुचारु रूपसे चल रहा होगा ।
डॉ० गोपीचन्द
अंग्रेजीकी नकलसे । प्यारेलाल-कागजात, सोजन्य : प्यारेलाल ।
चि० व्रजकृष्ण,
३२५. पत्र : ब्रजकृष्ण चाँदीवालाको
तुमारा खत मिला।
तुमारे जो प्रयत्न करना है सो यहासे नही हो सकता है क्या ? लेकिन जैसा तुमको अच्छा लगे वही किया जाय।
श्री ब्रजकृष्ण
कटरा खुशालराय
हरघ्यान सिंहजीका देखुगा । क्षेत्रकी मर्यादा तो उनको ही बनानी है। दिल्लीमे भी मैने वही कहा था।
तुमारे पास कौनसी हिन्दी किताब है ? उसके नाम इ० भेजो।
पत्रकी फोटो -तकल ( जी० एन० २४४०) से ।
३२६. पत्रः रमेशचन्द्रको
भाई रमेशचद्रजी,
आपका पत्र उचित है । निर्णय करनेका मार्ग हिंदु, मुसलमानादि भेद नही है। ऐसे बहुत मुसलमानको जानता हूं जो स्वच्छताका पालन भली भाति करते है । चद निरामीषी भी होते है। इसलिए जिस जगहपर स्वच्छता के नियमोका पालन होता है वही खाना, पोनाको मर्यादा रखे तो सब-कुछ हो जाता है। मुझे तो अनोक्युलेशन मात्र अप्रिय है। लेकिन खुन इत्यादिके सर्वथा त्याज्य है । वनस्पति अथवा खनिज पदार्थ के इस तरह त्याज्य नही है।
पत्रकी फोटो-नकल ( जी० एन० ६०९३ ) से ।
३२७. पत्रः सुरेश सिंहको
भाई सुरेश सिंह,
तुमारा खत मिला है। जितना हो सके इतना किया जाये । कोर्ट ऑफ वास तरफसे नियामक कौन है? जितनी सादगी ग्रहण कर सकते है इतनी सादगी रखकर जीवन व्यतीत किया जाय। मुझे लिखा करो। देहातीओकी जो कुछ सेवा हो सकती है वह की जाये ।
पत्रकी फोटो-नकल ( जी० एन० ८६८९ ) से । | तीन सौ तेईस. पत्रः डॉशून्य मुशून्य अशून्य अन्सारीको डॉशून्य अन्सारी प्रिय डॉशून्य अन्सारी, मुझे डर है कि आपने यूरोपमे जो स्वास्थ्य लाभ किया था, उसे आप तेजीसे खोते जा रहे है। अगर आपका यही हाल रहा तो जल्दी ही भारतकी बदनामी हो जायेगी और हर व्यक्ति जो स्वास्थ्य लाभ करना या स्वस्थ रहना चाहता है, यूरोप भागेगा । इसलिए भारतकी नेकनामीकी खातिर आप ऐसी राह हमे दिखाये कि हम भारतमे ही स्वास्थ्य लाभ कर सके और स्वस्थ रह सके। और आपको ऐसा करनेका अधिकार तभी होगा जब आप "पहले कर दिखाओ तब कहो " की नीतिका पालन करेगे । आशा है, आप बोर्ड या समितिसे हटेगे नही । आपको कोई भारी थका देनेवाला कार्य करनेकी जरूरत नहीं है । लेकिन आपकी सलाह के बिना काम नही चल सकता । यह मेरी राय है । अग्रेजीकी नकलसे । प्यारेलाल- कागजात, सौजन्य : प्यारेलाल । तीन सौ चौबीस. पत्र : डॉशून्य गोपीचन्द भार्गवको प्रिय डॉशून्य भार्गव, सलग्न पत्र के लेखक अर्जुन देव करीब एक महीनेसे मेरे साथ पत्र व्यवहार कर रहे है । वे यहाँ आना चाहते थे। मैने उन्हे लिखा कि यह न सम्भव है और न वाछनीय ही है। उन्हें अपने निवास स्थानके नजदीककी जगहोसे ही मदद लेनी चाहिए । इसलिए लाहोर आये जान पडते है । मैंने उन्हें आपके पास जानेका सुझाव दिया है। आप उनसे पूछताछ तथा परिचय करके उनकी साख का पता एक. यह उपलब्ध नहीं है। लगाये और फिर जो आवश्यक लगे वह करे। आशा है, ग्राम कार्य सुचारु रूपसे चल रहा होगा । डॉशून्य गोपीचन्द अंग्रेजीकी नकलसे । प्यारेलाल-कागजात, सोजन्य : प्यारेलाल । चिशून्य व्रजकृष्ण, तीन सौ पच्चीस. पत्र : ब्रजकृष्ण चाँदीवालाको तुमारा खत मिला। तुमारे जो प्रयत्न करना है सो यहासे नही हो सकता है क्या ? लेकिन जैसा तुमको अच्छा लगे वही किया जाय। श्री ब्रजकृष्ण कटरा खुशालराय हरघ्यान सिंहजीका देखुगा । क्षेत्रकी मर्यादा तो उनको ही बनानी है। दिल्लीमे भी मैने वही कहा था। तुमारे पास कौनसी हिन्दी किताब है ? उसके नाम इशून्य भेजो। पत्रकी फोटो -तकल से । तीन सौ छब्बीस. पत्रः रमेशचन्द्रको भाई रमेशचद्रजी, आपका पत्र उचित है । निर्णय करनेका मार्ग हिंदु, मुसलमानादि भेद नही है। ऐसे बहुत मुसलमानको जानता हूं जो स्वच्छताका पालन भली भाति करते है । चद निरामीषी भी होते है। इसलिए जिस जगहपर स्वच्छता के नियमोका पालन होता है वही खाना, पोनाको मर्यादा रखे तो सब-कुछ हो जाता है। मुझे तो अनोक्युलेशन मात्र अप्रिय है। लेकिन खुन इत्यादिके सर्वथा त्याज्य है । वनस्पति अथवा खनिज पदार्थ के इस तरह त्याज्य नही है। पत्रकी फोटो-नकल से । तीन सौ सत्ताईस. पत्रः सुरेश सिंहको भाई सुरेश सिंह, तुमारा खत मिला है। जितना हो सके इतना किया जाये । कोर्ट ऑफ वास तरफसे नियामक कौन है? जितनी सादगी ग्रहण कर सकते है इतनी सादगी रखकर जीवन व्यतीत किया जाय। मुझे लिखा करो। देहातीओकी जो कुछ सेवा हो सकती है वह की जाये । पत्रकी फोटो-नकल से । |
Adityapur (Sanjeev Mehta) : आदित्यपुर नगर निगम के वार्ड 32 का खराब डीप बोरिंग प्लांट शीघ्र चालू होगा. डीप बोरिंग बनाने के लिए सोमवार से टेक्नीशियन काम पर लग गए हैं. बता दें कि वार्ड 32 के लोग बोरिंग खराब होने से पेयजल के लिए परेशान हैं. बता दें कि यह बोरिंग प्लांट पिछले एक साल से खराब पड़ा है. जिसके कारण रोड नंबर 16, 17, 20, 21, 22 के लोगों को पेयजल की समस्या जुझना पड़ रहा है. इस संबंध में पिछले दिनों आदित्यपुर नगर परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष पुरेंद्र नारायण सिंह ने अपर नगर आयुक्त गिरिजा शंकर प्रसाद से मुलाकात कर बोरिंग चालू कराए जाने के मांग की थी. जिनके निर्देश पर सोमवार को नगर निगम के कनीय अभियंता रितेश कुमार एवं राजकुमार पंडित ने बंद पड़े बोरिंग का स्थल निरीक्षण कर जांच की है.
कनीय अभियंता ने बताया कि बोरिंग की गहराई कम है और जलस्तर काफी नीचे चला गया है इस कारण पुराने बोरिंग का चालू होना नामुमकिन है. कनीय अभियंताओं ने स्थल निरीक्षण के उपरांत कहा कि पुराने बोरिंग के बदले 4 इंच का नया बोरिंग कराने हेतु प्राक्कलन तैयार किया जाएगा एवं बोरिंग को यथाशीघ्र चालू करने का प्रयास किया जाएगा. निरीक्षण के दौरान आदित्यपुर नगर परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष पुरेंद्र नारायण सिंह, देव प्रकाश देवता, अरविंद कुमार, नितेश, अनिल मिश्रा, वशिष्ठ, राजू शर्मा, आकाश, नारायण पांडे, शुभम पांडे, रामाकांत शर्मा, राजीव आदि स्थानीय लोग मौजूद थे.
| Adityapur : आदित्यपुर नगर निगम के वार्ड बत्तीस का खराब डीप बोरिंग प्लांट शीघ्र चालू होगा. डीप बोरिंग बनाने के लिए सोमवार से टेक्नीशियन काम पर लग गए हैं. बता दें कि वार्ड बत्तीस के लोग बोरिंग खराब होने से पेयजल के लिए परेशान हैं. बता दें कि यह बोरिंग प्लांट पिछले एक साल से खराब पड़ा है. जिसके कारण रोड नंबर सोलह, सत्रह, बीस, इक्कीस, बाईस के लोगों को पेयजल की समस्या जुझना पड़ रहा है. इस संबंध में पिछले दिनों आदित्यपुर नगर परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष पुरेंद्र नारायण सिंह ने अपर नगर आयुक्त गिरिजा शंकर प्रसाद से मुलाकात कर बोरिंग चालू कराए जाने के मांग की थी. जिनके निर्देश पर सोमवार को नगर निगम के कनीय अभियंता रितेश कुमार एवं राजकुमार पंडित ने बंद पड़े बोरिंग का स्थल निरीक्षण कर जांच की है. कनीय अभियंता ने बताया कि बोरिंग की गहराई कम है और जलस्तर काफी नीचे चला गया है इस कारण पुराने बोरिंग का चालू होना नामुमकिन है. कनीय अभियंताओं ने स्थल निरीक्षण के उपरांत कहा कि पुराने बोरिंग के बदले चार इंच का नया बोरिंग कराने हेतु प्राक्कलन तैयार किया जाएगा एवं बोरिंग को यथाशीघ्र चालू करने का प्रयास किया जाएगा. निरीक्षण के दौरान आदित्यपुर नगर परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष पुरेंद्र नारायण सिंह, देव प्रकाश देवता, अरविंद कुमार, नितेश, अनिल मिश्रा, वशिष्ठ, राजू शर्मा, आकाश, नारायण पांडे, शुभम पांडे, रामाकांत शर्मा, राजीव आदि स्थानीय लोग मौजूद थे. |
Cauliflower Soup for Weight Loss: अगर आप भी सर्दियों में वजन कम करना चाहते हैं तो आज हम आपको बतायेंगे गोभी से बनी आसान सूप रेसिपी जो न केवल बनने में आसान हैं, बल्कि स्वाद में ये इतनी स्वादिष्ट हैं कि आपको लगेगा ही नहीं की आप किसी तरह की कोई डाइट फॉलो कर रहे हैं।
अक्सर सूप का नाम सुनकर लोग इसे पीने से मना कर देते हैं पर डाइटीशियन की मानें तो वजन कम (weight loss) करने के लिए सूप का सेवन जरूर करना चाहिये। वजन कम करने के लिए सूप पीने का सबसे अच्छा समय है रात का। आप रात के खाने में कुछ हैवी खाने से बेहतर है कि सूप पी लें। अगर सर्दियों में हेल्दी सूप पीने का मन तो तो गोभी के सूप जरूर ट्राई करें। गोभी में fat काटने के गुण होते हैं। अगर आप लगातार इस सूप का सेवन करेंगे तो कुछ ही दिनों में आपको अपने शरीर में फर्क महसूस होने लगेगा। जानते हैं कि कैसे बनाएं गोभी का स्वादिष्ट सूप।
| Cauliflower Soup for Weight Loss: अगर आप भी सर्दियों में वजन कम करना चाहते हैं तो आज हम आपको बतायेंगे गोभी से बनी आसान सूप रेसिपी जो न केवल बनने में आसान हैं, बल्कि स्वाद में ये इतनी स्वादिष्ट हैं कि आपको लगेगा ही नहीं की आप किसी तरह की कोई डाइट फॉलो कर रहे हैं। अक्सर सूप का नाम सुनकर लोग इसे पीने से मना कर देते हैं पर डाइटीशियन की मानें तो वजन कम करने के लिए सूप का सेवन जरूर करना चाहिये। वजन कम करने के लिए सूप पीने का सबसे अच्छा समय है रात का। आप रात के खाने में कुछ हैवी खाने से बेहतर है कि सूप पी लें। अगर सर्दियों में हेल्दी सूप पीने का मन तो तो गोभी के सूप जरूर ट्राई करें। गोभी में fat काटने के गुण होते हैं। अगर आप लगातार इस सूप का सेवन करेंगे तो कुछ ही दिनों में आपको अपने शरीर में फर्क महसूस होने लगेगा। जानते हैं कि कैसे बनाएं गोभी का स्वादिष्ट सूप। |
देश की सियासत इन दिनों दिग्भ्रमित है और उससे भी ज्यादा भ्रमित है जनता जो एक ओर तो केंद्र में मंत्रियों के भ्रष्टाचार को लेकर आंदोलन करती है वहीं कर्नाटक में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत देकर ७ साल बाद सत्ता का हस्तानांतरण करती है। कर्नाटक के चुनाव परिणाम इस मायने में भी चौंकाते हैं कि जिस भ्रष्टाचार के मुद्दे की वजह से येदुरप्पा को मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने पर मजबूर किया गया था और भारतीय जनता पार्टी ने राज्य की जनता को यह सन्देश देने की कोशिश की थी कि भ्रष्टाचार एवं भ्रष्ट को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता, उसे तो जनता ने नकार दिया किन्तु विधानसभा चुनाव से पूर्व उजागर हुए केन्द्रीय रेल मंत्री के भांजे सिंगला के कांड को उन्होंने कोई तवज्जो नहीं दी। यहां तक कि सीबीआई द्वारा उच्चतम न्यायालय को दिए अपने हलफनामे में कानून मंत्री अश्विनी कुमार और प्रधानमंत्री कार्यालय के उच्च अधिकारीयों द्वारा कोयला घोटाले की क्लोजर रिपोर्ट बदलवाने की स्वीकरोक्ति ने भी कर्नाटक में कांग्रेस विरोधी माहौल निर्मित नहीं किया। खैर इससे एक बात तो साबित होती है कि राज्य के स्थानीय मुद्दे विधानसभा चुनाव में कहीं बड़े पैमाने पर हावी होते हैं वरना तो केंद्र का भ्रष्टाचार को आश्रय देना ही खुद में स्वयंभू मुद्दा है किसी भी चुनाव में उसकी अगुवाई वाली पार्टी की करारी हार का। अब जबकि कर्नाटक विधानसभा चुनाव का परिणाम घोषित हो चुका है और भ्रष्टाचार भी कोई बड़ा चुनावी मुद्दा नहीं बन सका है तो यह मान लेना चाहिए कि जनता को भ्रष्टाचार से कोई फर्क नहीं पड़ता। हां, भ्रष्टों की जमात से वह कम भ्रष्ट को ज़रूर चुनती है। कांग्रेस को यक़ीनन कर्नाटक के चुनाव परिणाम ने राहत प्रदान की होगी। भाजपा सहित पूरा विपक्ष परिणाम से पूर्व जिस तरह से कानून मंत्री और रेल मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहा था, अब उसका रवैया कुछ सौम्य हुआ है। किन्तु केंद्र की ओर से इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि वह कर्नाटक के चुनाव परिणाम से उत्साहित होकर और खुद को जनता-जनार्दन के समक्ष भ्रष्टाचार के प्रति कड़ाई से निपटने की अगुआ साबित करने की रणनीति के तहत दोनों मंत्रियों की बलि ले सकती है। इससे अव्वल तो जनता के समक्ष भ्रष्टाचार के खिलाफ उसकी नीयत साफ़ होगी दूसरे विपक्ष के पास सरकार को कटघरे में खड़ा करने का सबसे बड़ा मुद्दा दम तोड़ देगा। फिर अपने केंद्रीय मंत्रियों की बलि लेकर भी कांग्रेस को कोई बड़ा नुकसान नहीं होने वाला है। यह भी हो सकता है कि वह दोनों मंत्रियों के मंत्रालय में फेरबदल कर दे या एक से इस्तीफ़ा ले और दूसरे को बतौर सजा स्थानांतरण का हुक्म दे डाले। सरकार की रणनीति आखिर जो भी हो, चुनावी वर्ष में वह ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगी जो उसकी वर्तमान स्थिति को और गंभीर अवस्था में पहुंचा दे।
इस वर्ष ५ और राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं और अगले वर्ष लोकसभा चुनाव हैं लिहाजा सरकार अपनी ९ वर्षों की कारगुजारियों से उपजी असहज स्थिति को काफी हद तक डैमेज कंट्रोल के करीब ले जायेगी। एक बात और, कांग्रेस को मीडिया और विपक्षी दलों द्वारा जिस तरह दयनीय साबित करने की होड़ लगी है, वास्तविकता में वह खुद को लगातार मजबूत कर रही है। संगठनात्मक स्तर पर भी नींव दुरुस्त करने के प्रयास ज़ारी हैं। वर्तमान विवादों और घोटालों को परे रखा जाए तो ऐसा एक भी कारण नहीं दिखता जो कांग्रेस को कथित तौर पर कमजोर साबित करता हो। चूंकि भाजपा इस समय नरेंद्र मोदी के भावी प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी को लेकर घर में ही घिरी हुयी है और साम्प्रदायिकता के ठप्पे के कारण भी उसे नुकसान होता रहा है लिहाजा कांग्रेस उसके मुकाबले कहीं अधिक बेहतर स्थिति में है। पहले सूरजकुंड और फिर जयपुर में चिंतन शिविर के निहितार्थों को देखें तो कर्नाटक में कांग्रेस की जीत काफी कुछ बयां करती है। जहां तक दागी और भ्रष्ट मंत्रियों का सवाल है तो उनके साथ होने वाले व्यवहार का पता ज़ल्द ही चल जाएगा। वैसे भी जबसे संगठन ने सरकार की पर नकेल कसी है, सरकार का आत्मविश्वास बड़ा ही है। यानी कांग्रेस का सरकार की मुश्कें कसना शुभ संकेत ही कहा जाएगा। संगठन किसी भी दल, समूह या सरकार की सबसे बड़ी ताकत होता है। राजनीति में तो कहा भी जाता है कि संगठन को सरकार पर मजबूत पकड़ रखनी चाहिए, वरना सत्ता का मद निरंकुशता की ओर अग्रसर करता है। बात यदि भाजपा, लेफ्ट या अन्य कैडर आधारित क्षेत्रीय दलों की करें, तो इनके सत्ता में रहते हमेशा संगठन ने इनकी कमान अपने हाथों में ही रखी है और शायद यही मुख्य वजह है कि इनका संगठनात्मक ढांचा अपेक्षाकृत कुछ अधिक ही मजबूत है। यदि कांग्रेस संगठन सरकार की कमान अपने हाथों में रखता है, तो अव्वल तो मंत्रियों की मनमानी पर लगाम लगाई जा सकेगी, दूसरे सरकार के कामकाज का निष्पक्ष आकलन किया जा सकेगा। इससे मंत्रियों के भ्रष्टाचार पर लगाम भी लगाईं जा सकेगी। सोनिया गांधी ने शायद इसी सोच को यथार्थ के धरातल पर उतारा है। चूंकि इस बार स्वयं सोनिया पार्टी की गिरती साख को लेकर चिंतित हैं, लिहाजा पार्टी के किसी क्षत्रप के पास इतना साहस नहीं कि उनकी सुधार विरोधी मुहिम को पलीता लगा सके। कांग्रेस बदल रही है तो निश्चित है कि बदलाव तो होगा ही चाहे वह किसी भी स्तर पर हो।
| देश की सियासत इन दिनों दिग्भ्रमित है और उससे भी ज्यादा भ्रमित है जनता जो एक ओर तो केंद्र में मंत्रियों के भ्रष्टाचार को लेकर आंदोलन करती है वहीं कर्नाटक में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत देकर सात साल बाद सत्ता का हस्तानांतरण करती है। कर्नाटक के चुनाव परिणाम इस मायने में भी चौंकाते हैं कि जिस भ्रष्टाचार के मुद्दे की वजह से येदुरप्पा को मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने पर मजबूर किया गया था और भारतीय जनता पार्टी ने राज्य की जनता को यह सन्देश देने की कोशिश की थी कि भ्रष्टाचार एवं भ्रष्ट को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता, उसे तो जनता ने नकार दिया किन्तु विधानसभा चुनाव से पूर्व उजागर हुए केन्द्रीय रेल मंत्री के भांजे सिंगला के कांड को उन्होंने कोई तवज्जो नहीं दी। यहां तक कि सीबीआई द्वारा उच्चतम न्यायालय को दिए अपने हलफनामे में कानून मंत्री अश्विनी कुमार और प्रधानमंत्री कार्यालय के उच्च अधिकारीयों द्वारा कोयला घोटाले की क्लोजर रिपोर्ट बदलवाने की स्वीकरोक्ति ने भी कर्नाटक में कांग्रेस विरोधी माहौल निर्मित नहीं किया। खैर इससे एक बात तो साबित होती है कि राज्य के स्थानीय मुद्दे विधानसभा चुनाव में कहीं बड़े पैमाने पर हावी होते हैं वरना तो केंद्र का भ्रष्टाचार को आश्रय देना ही खुद में स्वयंभू मुद्दा है किसी भी चुनाव में उसकी अगुवाई वाली पार्टी की करारी हार का। अब जबकि कर्नाटक विधानसभा चुनाव का परिणाम घोषित हो चुका है और भ्रष्टाचार भी कोई बड़ा चुनावी मुद्दा नहीं बन सका है तो यह मान लेना चाहिए कि जनता को भ्रष्टाचार से कोई फर्क नहीं पड़ता। हां, भ्रष्टों की जमात से वह कम भ्रष्ट को ज़रूर चुनती है। कांग्रेस को यक़ीनन कर्नाटक के चुनाव परिणाम ने राहत प्रदान की होगी। भाजपा सहित पूरा विपक्ष परिणाम से पूर्व जिस तरह से कानून मंत्री और रेल मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहा था, अब उसका रवैया कुछ सौम्य हुआ है। किन्तु केंद्र की ओर से इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि वह कर्नाटक के चुनाव परिणाम से उत्साहित होकर और खुद को जनता-जनार्दन के समक्ष भ्रष्टाचार के प्रति कड़ाई से निपटने की अगुआ साबित करने की रणनीति के तहत दोनों मंत्रियों की बलि ले सकती है। इससे अव्वल तो जनता के समक्ष भ्रष्टाचार के खिलाफ उसकी नीयत साफ़ होगी दूसरे विपक्ष के पास सरकार को कटघरे में खड़ा करने का सबसे बड़ा मुद्दा दम तोड़ देगा। फिर अपने केंद्रीय मंत्रियों की बलि लेकर भी कांग्रेस को कोई बड़ा नुकसान नहीं होने वाला है। यह भी हो सकता है कि वह दोनों मंत्रियों के मंत्रालय में फेरबदल कर दे या एक से इस्तीफ़ा ले और दूसरे को बतौर सजा स्थानांतरण का हुक्म दे डाले। सरकार की रणनीति आखिर जो भी हो, चुनावी वर्ष में वह ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगी जो उसकी वर्तमान स्थिति को और गंभीर अवस्था में पहुंचा दे। इस वर्ष पाँच और राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं और अगले वर्ष लोकसभा चुनाव हैं लिहाजा सरकार अपनी नौ वर्षों की कारगुजारियों से उपजी असहज स्थिति को काफी हद तक डैमेज कंट्रोल के करीब ले जायेगी। एक बात और, कांग्रेस को मीडिया और विपक्षी दलों द्वारा जिस तरह दयनीय साबित करने की होड़ लगी है, वास्तविकता में वह खुद को लगातार मजबूत कर रही है। संगठनात्मक स्तर पर भी नींव दुरुस्त करने के प्रयास ज़ारी हैं। वर्तमान विवादों और घोटालों को परे रखा जाए तो ऐसा एक भी कारण नहीं दिखता जो कांग्रेस को कथित तौर पर कमजोर साबित करता हो। चूंकि भाजपा इस समय नरेंद्र मोदी के भावी प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी को लेकर घर में ही घिरी हुयी है और साम्प्रदायिकता के ठप्पे के कारण भी उसे नुकसान होता रहा है लिहाजा कांग्रेस उसके मुकाबले कहीं अधिक बेहतर स्थिति में है। पहले सूरजकुंड और फिर जयपुर में चिंतन शिविर के निहितार्थों को देखें तो कर्नाटक में कांग्रेस की जीत काफी कुछ बयां करती है। जहां तक दागी और भ्रष्ट मंत्रियों का सवाल है तो उनके साथ होने वाले व्यवहार का पता ज़ल्द ही चल जाएगा। वैसे भी जबसे संगठन ने सरकार की पर नकेल कसी है, सरकार का आत्मविश्वास बड़ा ही है। यानी कांग्रेस का सरकार की मुश्कें कसना शुभ संकेत ही कहा जाएगा। संगठन किसी भी दल, समूह या सरकार की सबसे बड़ी ताकत होता है। राजनीति में तो कहा भी जाता है कि संगठन को सरकार पर मजबूत पकड़ रखनी चाहिए, वरना सत्ता का मद निरंकुशता की ओर अग्रसर करता है। बात यदि भाजपा, लेफ्ट या अन्य कैडर आधारित क्षेत्रीय दलों की करें, तो इनके सत्ता में रहते हमेशा संगठन ने इनकी कमान अपने हाथों में ही रखी है और शायद यही मुख्य वजह है कि इनका संगठनात्मक ढांचा अपेक्षाकृत कुछ अधिक ही मजबूत है। यदि कांग्रेस संगठन सरकार की कमान अपने हाथों में रखता है, तो अव्वल तो मंत्रियों की मनमानी पर लगाम लगाई जा सकेगी, दूसरे सरकार के कामकाज का निष्पक्ष आकलन किया जा सकेगा। इससे मंत्रियों के भ्रष्टाचार पर लगाम भी लगाईं जा सकेगी। सोनिया गांधी ने शायद इसी सोच को यथार्थ के धरातल पर उतारा है। चूंकि इस बार स्वयं सोनिया पार्टी की गिरती साख को लेकर चिंतित हैं, लिहाजा पार्टी के किसी क्षत्रप के पास इतना साहस नहीं कि उनकी सुधार विरोधी मुहिम को पलीता लगा सके। कांग्रेस बदल रही है तो निश्चित है कि बदलाव तो होगा ही चाहे वह किसी भी स्तर पर हो। |
एक प्रास्था-स्तम्भ
। जन संस्थाओं के माध्यम से सत्साहित्य की जो सेवा हुई और होती रहेगी, क्या. वे श्री जैन दिवाकरजी को आस्था स्तम्भ मानने से मुकर सकती है ?
जिन शिष्य - शिष्याओं को मुक्ति मार्ग के मुख्य साधन संयम की प्राप्ति में उन्होंने जो प्रेरणा दी, वे संत तथा सती आजीवन अपनी श्रद्धा अन्यत्र कैसे समर्पित करेंगी ? जिन-जिन पतितों को राज्य, समाज तथा परिवारवालों ने गले नहीं लगाया, उनको अपनी करुणा की छाया में बैठने दिया, वे श्री जैन दिवाकरजी के प्रति श्रद्धावनत हों, इसमें आश्चर्य नही है ।
इस प्रकार जिन-जिन महानुभावों को श्री जैन दिवाकरजी म. के दर्शन मिले, प्रवचन सुनने का अवसर मिला, वात्सल्य सुलभ हुआ, ज्ञान प्राप्ति हुई और मार्गदर्शन मिला, वे सब ही हृदय की गहराई से उनका सतत स्मरण करते और श्रद्धा सुमन चढ़ाते है, क्योंकि वे उनके लिए एक आशा स्तम्भ हो तो रहे है ।
[सुभाष मुनि
उनके आदर्शो का आत्मसात् करें
श्री जैन दिवाकरजी का संपूर्ण जीवन अगणित प्रेरक, मार्मिक, आदर्श और अनुकरणीय घटनाओं से ओतप्रोत था । वे संप्रदाय - समन्वय के हिमायती थे, उनके सान्निध्य में कोटा में जो सन्त-सम्मेलन हुआ, जिसमें दिगम्बर, श्वेताम्बर और स्थानकवासी सन्तों ने एक मंच से जनसमुदाय को सम्बोधित किया । वह परम्परा अक्षुण्ण रहे और समस्त सन्तसमुदाय मानव-कल्याण के लिए एक मंच से जिनशासन-धर्म का उद्घोष करे, यही इस पावन शती समारोह का आदर्श सन्देश है । जन्म-शताब्दि- वर्ष में हम उनके आदर्शों को आत्मसात् करें, यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी ।
दिनेश मुनि
'मुझे दीक्षा दीजिये'
मेरी माताजी का स्वर्गवास हो गया था । हम तीन भाई छोटे थे । हमारी सार-संभाल और व्यापार को ध्यान में रखकर पिता श्री मोड़ीरामजी गांधी पुनर्विवाह का सोच रहे थे । संयोगवश, मेवाड़धरा को पावन करते हुए पूज्य गुरुदेव चौथमलजी का देवगढ़ ( मदारिया) नगर पढार्पण हुआ । चौक बाजार में उनके व्याख्यानों की धूम थी । एक दिन पूज्य गुरुदेव ने पिताश्री को उपदेश देते हुए इच्छा प्रकट की कि आप चारों प्राणी संसारी कार्यो से निवृति ग्रहण करें और धार्मिक कार्यो में प्रवृत्त होकर जिनशासन को प्रकाशित करे । पिताश्री ने प्रत्युत्तर में कहा कि प्रताप अभी छोटा है । बड़ा होने पर हम आपकी इच्छानुसार करेंगे ।
पूज्य जैन दिवाकरजी तो अन्यत्र प्रस्थान कर गये । इधर प्लेग की बीमारी में पिताश्री और दो भाइयों की मृत्यु हो गई । केवल मै बच गया । कालान्तर मे गुरुदेव श्री नन्दलालजी म. मुनिमंडल के साथ देवगढ़ पधारे । उन्हें हमारे परिवार का पता चल गया । मुझे बुलाया और कहा 'प्रताप, तेरा सारा परिवार दीक्षित होनेवाला था किन्तु ऐसा नहीं हो सका । अव वाप का कर्ज तू चुका सकेगा ?' मैंने तत्काल कहा, 'हाँ, गुरुदेव, मैं अपने वाप का कर्ज चुकाने को तैयार हूँ । आप मुझे दीक्षा दीजिये ।' तब संवत् १९७९ में मैने उनका शिष्यत्व स्वीकार किया। मूल मे तो जैन दिवाकरजी म. थे ही ।
प्रताप मुनि
वाणी में गहन प्रभाव
वे ययानाम तथागुण थे । ची == चार, था = स्थित होना । चार मे स्थित होना । चार कौन ? सम्यक् ज्ञान, दर्शन, चारित्र्य और तप इनमे स्थित होकर चार मल्ल - क्रोध, लोभ, मान और माया को पछाड़नेवाले तथा अपनी आत्मा से उपशम तथा क्षमोपशम कर उन्होने 'चौथमल' नाम को सार्थक किया ।
श्री जैन दिवाकरजी की वाणी मे गहन प्रभाव था । जो कोई भी उनके प्रवचनों का श्रवण करता, वह कितना भी अधम तथा दुर्व्यसनी क्यों न हो, उनकी पीयूपमयी वाणी से प्रभावित होकर उन्मार्ग को छोड़कर सन्मार्ग स्वीकार कर लेता था ।
इस प्रकार कई दुव्यर्सनियों और कुमार्गियों ने उनके सदुपदेशों को सुनकर अपने जीवन तक, मार्ग ही बदल दिया और सदाचरण को अपना लिया ।
मैं ऐसे 'वाक् - विभूषण, धर्म-धुरन्धर' को अपने श्रद्धा सुमन समर्पित करती हूँ । [] महासती रामकुंवर
साहित्य की श्रीवृद्धि
संपूर्ण जैन वाडमय का संग्रह करके श्री जैन दिवाकरजी म. ने 'निर्ग्रन्थ-प्रवचन' का जो संकलन किया, वह उनकी साहित्यिक दृष्टि से अनोखी सूझ-बूझ है। इतना ही नही, 'गीता-राजाह' या 'भागवत सप्ताह' की भांति वे उसका प्रति वर्ष पारायण करते थे और एक सप्ताह तक इस पर गंभीर प्रवचन करके जिनवाणी के माध्यम से भव्य प्राणियो को अध्यात्म-रम का आस्वादन करवाते थे । वास्तव में यह ग्रन्य समग्र जैन साहित्य का निचोड़ ही है। इसके अलावा समय-समय पर उन्होंने अनेको सर्वोपयोगी प्रार्थनाएँ, विताएँ तथा काव्यमय जीवन चरित्र लिखकर अपनी आध्यात्मिक प्रतिभा का उपयोग गरने के साथ जैन साहित्य की श्रीवृद्धि भी की।
उन्होंने अनेको प्रदेशों में बिहार कर अपने प्रवत्तनो के माध्यम से जैनधर्म के सिद्धान्तों योनि सुन्दर में समाज के समक्ष प्रस्तुत किये, श्रद्धालुओं ने हृदयंगम भी किया,
नोथंकर : नव. दिस. १९७७ | एक प्रास्था-स्तम्भ । जन संस्थाओं के माध्यम से सत्साहित्य की जो सेवा हुई और होती रहेगी, क्या. वे श्री जैन दिवाकरजी को आस्था स्तम्भ मानने से मुकर सकती है ? जिन शिष्य - शिष्याओं को मुक्ति मार्ग के मुख्य साधन संयम की प्राप्ति में उन्होंने जो प्रेरणा दी, वे संत तथा सती आजीवन अपनी श्रद्धा अन्यत्र कैसे समर्पित करेंगी ? जिन-जिन पतितों को राज्य, समाज तथा परिवारवालों ने गले नहीं लगाया, उनको अपनी करुणा की छाया में बैठने दिया, वे श्री जैन दिवाकरजी के प्रति श्रद्धावनत हों, इसमें आश्चर्य नही है । इस प्रकार जिन-जिन महानुभावों को श्री जैन दिवाकरजी म. के दर्शन मिले, प्रवचन सुनने का अवसर मिला, वात्सल्य सुलभ हुआ, ज्ञान प्राप्ति हुई और मार्गदर्शन मिला, वे सब ही हृदय की गहराई से उनका सतत स्मरण करते और श्रद्धा सुमन चढ़ाते है, क्योंकि वे उनके लिए एक आशा स्तम्भ हो तो रहे है । [सुभाष मुनि उनके आदर्शो का आत्मसात् करें श्री जैन दिवाकरजी का संपूर्ण जीवन अगणित प्रेरक, मार्मिक, आदर्श और अनुकरणीय घटनाओं से ओतप्रोत था । वे संप्रदाय - समन्वय के हिमायती थे, उनके सान्निध्य में कोटा में जो सन्त-सम्मेलन हुआ, जिसमें दिगम्बर, श्वेताम्बर और स्थानकवासी सन्तों ने एक मंच से जनसमुदाय को सम्बोधित किया । वह परम्परा अक्षुण्ण रहे और समस्त सन्तसमुदाय मानव-कल्याण के लिए एक मंच से जिनशासन-धर्म का उद्घोष करे, यही इस पावन शती समारोह का आदर्श सन्देश है । जन्म-शताब्दि- वर्ष में हम उनके आदर्शों को आत्मसात् करें, यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी । दिनेश मुनि 'मुझे दीक्षा दीजिये' मेरी माताजी का स्वर्गवास हो गया था । हम तीन भाई छोटे थे । हमारी सार-संभाल और व्यापार को ध्यान में रखकर पिता श्री मोड़ीरामजी गांधी पुनर्विवाह का सोच रहे थे । संयोगवश, मेवाड़धरा को पावन करते हुए पूज्य गुरुदेव चौथमलजी का देवगढ़ नगर पढार्पण हुआ । चौक बाजार में उनके व्याख्यानों की धूम थी । एक दिन पूज्य गुरुदेव ने पिताश्री को उपदेश देते हुए इच्छा प्रकट की कि आप चारों प्राणी संसारी कार्यो से निवृति ग्रहण करें और धार्मिक कार्यो में प्रवृत्त होकर जिनशासन को प्रकाशित करे । पिताश्री ने प्रत्युत्तर में कहा कि प्रताप अभी छोटा है । बड़ा होने पर हम आपकी इच्छानुसार करेंगे । पूज्य जैन दिवाकरजी तो अन्यत्र प्रस्थान कर गये । इधर प्लेग की बीमारी में पिताश्री और दो भाइयों की मृत्यु हो गई । केवल मै बच गया । कालान्तर मे गुरुदेव श्री नन्दलालजी म. मुनिमंडल के साथ देवगढ़ पधारे । उन्हें हमारे परिवार का पता चल गया । मुझे बुलाया और कहा 'प्रताप, तेरा सारा परिवार दीक्षित होनेवाला था किन्तु ऐसा नहीं हो सका । अव वाप का कर्ज तू चुका सकेगा ?' मैंने तत्काल कहा, 'हाँ, गुरुदेव, मैं अपने वाप का कर्ज चुकाने को तैयार हूँ । आप मुझे दीक्षा दीजिये ।' तब संवत् एक हज़ार नौ सौ उन्यासी में मैने उनका शिष्यत्व स्वीकार किया। मूल मे तो जैन दिवाकरजी म. थे ही । प्रताप मुनि वाणी में गहन प्रभाव वे ययानाम तथागुण थे । ची == चार, था = स्थित होना । चार मे स्थित होना । चार कौन ? सम्यक् ज्ञान, दर्शन, चारित्र्य और तप इनमे स्थित होकर चार मल्ल - क्रोध, लोभ, मान और माया को पछाड़नेवाले तथा अपनी आत्मा से उपशम तथा क्षमोपशम कर उन्होने 'चौथमल' नाम को सार्थक किया । श्री जैन दिवाकरजी की वाणी मे गहन प्रभाव था । जो कोई भी उनके प्रवचनों का श्रवण करता, वह कितना भी अधम तथा दुर्व्यसनी क्यों न हो, उनकी पीयूपमयी वाणी से प्रभावित होकर उन्मार्ग को छोड़कर सन्मार्ग स्वीकार कर लेता था । इस प्रकार कई दुव्यर्सनियों और कुमार्गियों ने उनके सदुपदेशों को सुनकर अपने जीवन तक, मार्ग ही बदल दिया और सदाचरण को अपना लिया । मैं ऐसे 'वाक् - विभूषण, धर्म-धुरन्धर' को अपने श्रद्धा सुमन समर्पित करती हूँ । [] महासती रामकुंवर साहित्य की श्रीवृद्धि संपूर्ण जैन वाडमय का संग्रह करके श्री जैन दिवाकरजी म. ने 'निर्ग्रन्थ-प्रवचन' का जो संकलन किया, वह उनकी साहित्यिक दृष्टि से अनोखी सूझ-बूझ है। इतना ही नही, 'गीता-राजाह' या 'भागवत सप्ताह' की भांति वे उसका प्रति वर्ष पारायण करते थे और एक सप्ताह तक इस पर गंभीर प्रवचन करके जिनवाणी के माध्यम से भव्य प्राणियो को अध्यात्म-रम का आस्वादन करवाते थे । वास्तव में यह ग्रन्य समग्र जैन साहित्य का निचोड़ ही है। इसके अलावा समय-समय पर उन्होंने अनेको सर्वोपयोगी प्रार्थनाएँ, विताएँ तथा काव्यमय जीवन चरित्र लिखकर अपनी आध्यात्मिक प्रतिभा का उपयोग गरने के साथ जैन साहित्य की श्रीवृद्धि भी की। उन्होंने अनेको प्रदेशों में बिहार कर अपने प्रवत्तनो के माध्यम से जैनधर्म के सिद्धान्तों योनि सुन्दर में समाज के समक्ष प्रस्तुत किये, श्रद्धालुओं ने हृदयंगम भी किया, नोथंकर : नव. दिस. एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर |
हुस्न की परी मौनी रॉय सोशल मीडिया पर आए दिन अपने लुक से तहलका मचाती रहती हैं। एक बार फिर कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है, अपनी लेटेस्ट फोटोज़ में मौनी रॉय का खूबसूरत अंदाज फैन्स को खूब भा रहा है। अपनी इन लेटेस्ट फोटोज़ में मौनी रॉय ऑफ शोल्डर स्टाइलिश क्रॉप टॉप और शॉर्ट स्कर्ट में अदाओं का जलवा बिखेरती नजर आ रहीं हैं।
फोटोज़ में मौनी रॉय ने अपने बालों को खुला छोड़ा है साथ ही उनकी स्मोकी मेकअप उनके चेहरे पर एक अलग ही ग्लो दे रहा है। इन तस्वीरों में मौनी रॉय किसी इनडोर सेटअप में फोटोशूट करवाती नजर आ रहीं हैं।
| हुस्न की परी मौनी रॉय सोशल मीडिया पर आए दिन अपने लुक से तहलका मचाती रहती हैं। एक बार फिर कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है, अपनी लेटेस्ट फोटोज़ में मौनी रॉय का खूबसूरत अंदाज फैन्स को खूब भा रहा है। अपनी इन लेटेस्ट फोटोज़ में मौनी रॉय ऑफ शोल्डर स्टाइलिश क्रॉप टॉप और शॉर्ट स्कर्ट में अदाओं का जलवा बिखेरती नजर आ रहीं हैं। फोटोज़ में मौनी रॉय ने अपने बालों को खुला छोड़ा है साथ ही उनकी स्मोकी मेकअप उनके चेहरे पर एक अलग ही ग्लो दे रहा है। इन तस्वीरों में मौनी रॉय किसी इनडोर सेटअप में फोटोशूट करवाती नजर आ रहीं हैं। |
मंगलवार देर रात 10. 15 बजे भूकंप इतनी तेजी से आया कि लोग खौफ में आ गए। लोगों चीखते हुए अपने घरों से सड़क पर जमा हो गए। यह भूकंप चीन पाकिस्तान, किर्गिस्तान पाकिस्तान सहित करीब छह देशों में आया। पाकिस्तान में 9 और अफगानिस्तान में दो लोगों की मौत हो गई।
जयपुर. बीती रात अफगानिस्तान में जमीन से करीब डेढ़ सौ किलोमीटर नीचे आए भूकंप के चलते चीन पाकिस्तान, किर्गिस्तान पाकिस्तान सहित करीब छह देशों में भूकंप के तेज झटके आए। करीब 15 से 20 सेकंड तक आए भूकंप के लगातार झटको से पूरी धरती कांप उठी। भारत देश में उत्तराखंड,राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा नई दिल्ली, हिमाचल प्रदेश ,जम्मू कश्मीर में भी भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए।
वहीं यदि बात कही राजस्थान की तो यहां अफगानिस्तान की तरफ लगते हैं राजू बीकानेर जोधपुर कोटा अलवर गंगानगर अजमेर झुंझुनू सीकर सहित कई शहरों में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। जैसे ही भूकंप के झटके महसूस हुए 3 लोग घरों को छोड़कर खुले मैदान की तरफ उड़ने लगे। भूकंप भले ही रात 10:15 बजे के करीब आया हो लेकिन रात करीब 12:00 बजे के बाद लोग घरों में गए। जिनका कहना था कि भूकंप यदि वापस आ गया तो क्या होगा। जयपुर में रहने वाली युवती सरोज ने बताया कि वह डेढ़ करोड़ रुपए के फ्लैट में रह रही है। लेकिन जैसे ही भूकंप आया तो वह उसे छोड़कर बाहर आ गई क्योंकि यदि जिंदगी ही नहीं रही तो उससे फ्लैट का क्या करेगी। भले ही बिल्डिंग कितनी सुरक्षित क्यों ना हो लेकिन खुद का जीवन खुद के हाथ में ही हैं।
यदि बात करें इस भूकंप के केंद्र की तो यह अफगानिस्तान में करीब जमीन से डेट 150 किलोमीटर नीचे था। हालांकि केंद्र इतना नीचे होने के बाद भी इसकी तीव्रता 6. 6 मापी गई। ऐसे में इसका असर ज्यादा रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भूकंप की रिएक्टर स्केल पर तीव्रता 7 से ज्यादा होती तो यह तब आईल वालों लाने वाला हो सकता था। हालांकि गनीमत रही कि इसकी तीव्रता कम थी। हालांकि राजस्थान में इस भूकंप से कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ लेकिन देश के कई अन्य इलाकों में छुटपुट घटनाएं सामने आई है।
| मंगलवार देर रात दस. पंद्रह बजे भूकंप इतनी तेजी से आया कि लोग खौफ में आ गए। लोगों चीखते हुए अपने घरों से सड़क पर जमा हो गए। यह भूकंप चीन पाकिस्तान, किर्गिस्तान पाकिस्तान सहित करीब छह देशों में आया। पाकिस्तान में नौ और अफगानिस्तान में दो लोगों की मौत हो गई। जयपुर. बीती रात अफगानिस्तान में जमीन से करीब डेढ़ सौ किलोमीटर नीचे आए भूकंप के चलते चीन पाकिस्तान, किर्गिस्तान पाकिस्तान सहित करीब छह देशों में भूकंप के तेज झटके आए। करीब पंद्रह से बीस सेकंड तक आए भूकंप के लगातार झटको से पूरी धरती कांप उठी। भारत देश में उत्तराखंड,राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा नई दिल्ली, हिमाचल प्रदेश ,जम्मू कश्मीर में भी भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। वहीं यदि बात कही राजस्थान की तो यहां अफगानिस्तान की तरफ लगते हैं राजू बीकानेर जोधपुर कोटा अलवर गंगानगर अजमेर झुंझुनू सीकर सहित कई शहरों में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। जैसे ही भूकंप के झटके महसूस हुए तीन लोग घरों को छोड़कर खुले मैदान की तरफ उड़ने लगे। भूकंप भले ही रात दस:पंद्रह बजे के करीब आया हो लेकिन रात करीब बारह:शून्य बजे के बाद लोग घरों में गए। जिनका कहना था कि भूकंप यदि वापस आ गया तो क्या होगा। जयपुर में रहने वाली युवती सरोज ने बताया कि वह डेढ़ करोड़ रुपए के फ्लैट में रह रही है। लेकिन जैसे ही भूकंप आया तो वह उसे छोड़कर बाहर आ गई क्योंकि यदि जिंदगी ही नहीं रही तो उससे फ्लैट का क्या करेगी। भले ही बिल्डिंग कितनी सुरक्षित क्यों ना हो लेकिन खुद का जीवन खुद के हाथ में ही हैं। यदि बात करें इस भूकंप के केंद्र की तो यह अफगानिस्तान में करीब जमीन से डेट एक सौ पचास किलोग्राममीटर नीचे था। हालांकि केंद्र इतना नीचे होने के बाद भी इसकी तीव्रता छः. छः मापी गई। ऐसे में इसका असर ज्यादा रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भूकंप की रिएक्टर स्केल पर तीव्रता सात से ज्यादा होती तो यह तब आईल वालों लाने वाला हो सकता था। हालांकि गनीमत रही कि इसकी तीव्रता कम थी। हालांकि राजस्थान में इस भूकंप से कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ लेकिन देश के कई अन्य इलाकों में छुटपुट घटनाएं सामने आई है। |
बार्डर पर जमीन से पांच से सात सौ मीटर ऊंचाई पर तैनात किए जाने वाले एयरो एस्टेट निगरानी का बेहतर सिस्टम है। यह एक तरह का गुब्बारा होता है, जो जमीन से बंधा रहता है। इसमें लगे सिस्टम आकाश की ऊंचाई से जमीन पर होने वाली गतिविधियों पर नजर रखते हैं। एडीआरडीई की टीम ने आकाश और नक्षत्र नाम के एयरो एस्टेट विकसित किए थे। दो साल से एयरो एस्टेट तैयार करने का काम चल रहा है।
अधिकारिक सूत्रों के अनुसार पूर्व में तैयार एयरो एस्टेट में विदेशी मैटेरियल का प्रयोग भी किया गया है। अपग्रेड वर्जन में पूरी तरह से स्वदेशी मैटेरियल का प्रयोग किया जा रहा है। इसमें उन्नति श्रेणी के नायलान व अन्य मैटेरियल का प्रयोग होगा, जिससे कि तेज हवा चलने पर इनका बैलेंस नहीं बिगड़ेगा। नए एयरो एस्टेट का वजन 50 किग्रा तक होगा जबकि पूर्व में तैयार एयरो एस्टेट का वजन 65 किग्रा से अधिक था। नए एयरो एस्टेट को पैक करना और नीचे उतारना आसान होगा। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार जून से शुरू होने वाले ट्रायल दो से तीन महीने तक चलेंगे। इसके बाद एयरो एस्टेट का नामकरण किया जाएगा।
उन्नत श्रेणी के एयरो एस्टेट में अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे लगे होंगे। इनकी संख्या 15 से 20 होगी। उच्च क्षमता वाले नाइट विजन तकनीकि के कैमरे रात के ²श्य भी ठीक तरह से रिकार्ड कर सकेंगे। इसमें विभिन्न तरीके का डाटा संकलित करने के लिए सेंसर भी लगाए जाएंगे।
क्या है एयरो एस्टेट?
यह गुब्बारा नुमा होता है। इसमें आठ से दस रस्सी लगी होती हैं। किसी गाड़ी या फिर अन्य लोहे के भारी टुकड़े से रस्सियों को बांधा दिया जाता है। जरूरत के हिसाब से इसे एक से दूसरी जगह पर शिफ्ट किया जा सकता है।
| बार्डर पर जमीन से पांच से सात सौ मीटर ऊंचाई पर तैनात किए जाने वाले एयरो एस्टेट निगरानी का बेहतर सिस्टम है। यह एक तरह का गुब्बारा होता है, जो जमीन से बंधा रहता है। इसमें लगे सिस्टम आकाश की ऊंचाई से जमीन पर होने वाली गतिविधियों पर नजर रखते हैं। एडीआरडीई की टीम ने आकाश और नक्षत्र नाम के एयरो एस्टेट विकसित किए थे। दो साल से एयरो एस्टेट तैयार करने का काम चल रहा है। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार पूर्व में तैयार एयरो एस्टेट में विदेशी मैटेरियल का प्रयोग भी किया गया है। अपग्रेड वर्जन में पूरी तरह से स्वदेशी मैटेरियल का प्रयोग किया जा रहा है। इसमें उन्नति श्रेणी के नायलान व अन्य मैटेरियल का प्रयोग होगा, जिससे कि तेज हवा चलने पर इनका बैलेंस नहीं बिगड़ेगा। नए एयरो एस्टेट का वजन पचास किग्रा तक होगा जबकि पूर्व में तैयार एयरो एस्टेट का वजन पैंसठ किग्रा से अधिक था। नए एयरो एस्टेट को पैक करना और नीचे उतारना आसान होगा। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार जून से शुरू होने वाले ट्रायल दो से तीन महीने तक चलेंगे। इसके बाद एयरो एस्टेट का नामकरण किया जाएगा। उन्नत श्रेणी के एयरो एस्टेट में अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे लगे होंगे। इनकी संख्या पंद्रह से बीस होगी। उच्च क्षमता वाले नाइट विजन तकनीकि के कैमरे रात के ²श्य भी ठीक तरह से रिकार्ड कर सकेंगे। इसमें विभिन्न तरीके का डाटा संकलित करने के लिए सेंसर भी लगाए जाएंगे। क्या है एयरो एस्टेट? यह गुब्बारा नुमा होता है। इसमें आठ से दस रस्सी लगी होती हैं। किसी गाड़ी या फिर अन्य लोहे के भारी टुकड़े से रस्सियों को बांधा दिया जाता है। जरूरत के हिसाब से इसे एक से दूसरी जगह पर शिफ्ट किया जा सकता है। |
के संस्थापकों में थे और राजनीतिक उन्नति की भाँति ही समाजसुधार के कामों में भी उन्हें बड़ा अनुराग था । लार्ड रिपन की नंमोहन बोस की बाबत इतनी अच्छी राय थी कि जब उन की केवल ३५ वर्ष की थी तभी उन्हों ने उन्हें सन् १८८२ के इंडिअन एजूकेशन कमीशन का अध्यक्ष पद ग्रहण करने के लिए निमंत्रित कर दिया था लेकिन मि० बोस ने कहा कि एक भारतीय की अध्यक्षता में कार्य करनेवाले कमीशन की रिपोर्ट का सरकार पर उतना प्रभाव न पड़ेगा जितना एक उच्च अंग्रेज अधिकारी के अध्यक्ष होने पर । अतः उन्होंने कमीशन की अध्यक्षता के बजाय सदस्यता ही स्वीकार की । बुद्धिबल में मि० बोस अपने किसी भी समकालीन से कम नहीं थे और वे किसी भी एक दिशा में अपनी शक्ति लगा देते तो उस में सर्वोच्च स्थान पर पहुँच जाते। परंतु उन के साले सर जगदीशचंद्र बोस के शब्दों में उन का देश प्रेम इतना प्रबल था कि उन्हों ने राष्ट्रीय जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में देश की सेवा कर सकने के लिए अपनी प्रतिभा के टुकड़े-टुकड़े कर डाले । एक और प्रमुख नेता बाबू कालीचरण बनर्जी थे । ईसाई होते हुए भी उन के शरीर का रोम-रोम राष्ट्रवादी था । वे भी बड़े प्रभावशाली वक्ता थे और कांग्रेस के बड़े भक्त थे । यह एक संयोग की ही बात थी कि वे उस के अध्यक्ष न बन पाए । सर रासबिहारी घोष ने उन के संबंध में ठीक ही कहा था कि 'हृदय में यह विचार उठे बिना नहीं रहता कि कालीचरण बनर्जी को कत्र में कितनी विद्या, कितनी सादगी, कितनी धार्मिकता, कितनी दयालुता और कितनी देशभक्ति समाधिस्थ है ।'
मद्रास में प्रमुख कार्यकर्ता मिस्टर जी० सुब्रह्मण्य ऐयर थे। उन्हों ने 'हिंदू' के द्वारा, कांग्रेस के द्वारा और महाजन सभा के द्वारा मद्रास के लिए वही कार्य किया जो सुरेंद्रनाथ के बनर्जी और मोतीलाल घोष ने बंगाल के लिए तथा वाच्छा, तिलक और | के संस्थापकों में थे और राजनीतिक उन्नति की भाँति ही समाजसुधार के कामों में भी उन्हें बड़ा अनुराग था । लार्ड रिपन की नंमोहन बोस की बाबत इतनी अच्छी राय थी कि जब उन की केवल पैंतीस वर्ष की थी तभी उन्हों ने उन्हें सन् एक हज़ार आठ सौ बयासी के इंडिअन एजूकेशन कमीशन का अध्यक्ष पद ग्रहण करने के लिए निमंत्रित कर दिया था लेकिन मिशून्य बोस ने कहा कि एक भारतीय की अध्यक्षता में कार्य करनेवाले कमीशन की रिपोर्ट का सरकार पर उतना प्रभाव न पड़ेगा जितना एक उच्च अंग्रेज अधिकारी के अध्यक्ष होने पर । अतः उन्होंने कमीशन की अध्यक्षता के बजाय सदस्यता ही स्वीकार की । बुद्धिबल में मिशून्य बोस अपने किसी भी समकालीन से कम नहीं थे और वे किसी भी एक दिशा में अपनी शक्ति लगा देते तो उस में सर्वोच्च स्थान पर पहुँच जाते। परंतु उन के साले सर जगदीशचंद्र बोस के शब्दों में उन का देश प्रेम इतना प्रबल था कि उन्हों ने राष्ट्रीय जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में देश की सेवा कर सकने के लिए अपनी प्रतिभा के टुकड़े-टुकड़े कर डाले । एक और प्रमुख नेता बाबू कालीचरण बनर्जी थे । ईसाई होते हुए भी उन के शरीर का रोम-रोम राष्ट्रवादी था । वे भी बड़े प्रभावशाली वक्ता थे और कांग्रेस के बड़े भक्त थे । यह एक संयोग की ही बात थी कि वे उस के अध्यक्ष न बन पाए । सर रासबिहारी घोष ने उन के संबंध में ठीक ही कहा था कि 'हृदय में यह विचार उठे बिना नहीं रहता कि कालीचरण बनर्जी को कत्र में कितनी विद्या, कितनी सादगी, कितनी धार्मिकता, कितनी दयालुता और कितनी देशभक्ति समाधिस्थ है ।' मद्रास में प्रमुख कार्यकर्ता मिस्टर जीशून्य सुब्रह्मण्य ऐयर थे। उन्हों ने 'हिंदू' के द्वारा, कांग्रेस के द्वारा और महाजन सभा के द्वारा मद्रास के लिए वही कार्य किया जो सुरेंद्रनाथ के बनर्जी और मोतीलाल घोष ने बंगाल के लिए तथा वाच्छा, तिलक और |
पटना, बिहार में नीतीश कुमार की अगुवाई वाली महागठबंधन सरकार का मंगलवार को विस्तार हो गया है. नीतीश की नई कैबिनेट में 31 नेताओं को राज्यपाल फागू चौहान ने मंत्री पद की शपथ दिलाई है, बिहार की नई सरकार में आरजेडी से 16, जेडीयू से 11, कांग्रेस से 2, हम से एक और एक निर्दलीय ने शपथ ली है. जेडीयू के कोटे से एक निर्दलीय विधायक को मंत्री बनाया गया, इस तरह नीतीश के हिस्से में कुल 12 मंत्री पद आए हैं, जबकि आरजेडी के खाते में 16 मंत्री पद आए हैं.
कांग्रेस कोटे से मुरारी लाल गौतम को मंत्री बनाया गया है. मुरारी लाल गौतम सासाराम जिले के चेनारी विधानसभा सीट से वो विधायक हैं. बिहार में कांग्रेस की दलित राजनीति के रूप में उन्हें कैबिनेट में जगह दी गई है ताकि अपने कोर वोटबैंक को साधा जा सके.
कांग्रेस से आफाक आलम को मंत्री बनाया गया हैं, ये चार बार विधायक रह चुके हैं. कांग्रेस के टिकट पर इन्होने साल 2005 से लगातार चुनाव जीता है और विधानसभा में कांग्रेस के उपनेता रहे हैं. कांग्रेस में मुस्लिम चेहरे के तौर पर उन्हें नीतीश मंत्रिमंडल में जगह दी गई है.
जीतनराम मांझी की पार्टी हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (हम) से उनके बेटे संतोष सुमन को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है, मांझी महादलित समुदाय से आते हैं और विधान परिषद सदस्य हैं. एनडीए सरकार के दौरान भी मांझी मंत्री थे.
निर्दलीय विधायक सुमित सिंह को भी नीतीश मंत्रिमंडल में जगह दी गई है. सुमित सिंह को उन्हें जेडीयू कोटे से मंत्री बनाया गया है और इससे पहले भी एनडीए सरकार के दौरान सुमित सिंह विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री रहे हैं. सुमित सिंह बिहार के पूर्व कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह के बेटे हैं और उनके दादा श्रीकृष्णानंद सिंह दो बार चकई से चुनाव जीतकर विधायक रह चुके हैं, सुमित सिंह जमुई जिले की चकिया सीट से निर्दलीय विधायक हैं और अब इन्हें कैबिनेट में स्थान दिया गया है.
| पटना, बिहार में नीतीश कुमार की अगुवाई वाली महागठबंधन सरकार का मंगलवार को विस्तार हो गया है. नीतीश की नई कैबिनेट में इकतीस नेताओं को राज्यपाल फागू चौहान ने मंत्री पद की शपथ दिलाई है, बिहार की नई सरकार में आरजेडी से सोलह, जेडीयू से ग्यारह, कांग्रेस से दो, हम से एक और एक निर्दलीय ने शपथ ली है. जेडीयू के कोटे से एक निर्दलीय विधायक को मंत्री बनाया गया, इस तरह नीतीश के हिस्से में कुल बारह मंत्री पद आए हैं, जबकि आरजेडी के खाते में सोलह मंत्री पद आए हैं. कांग्रेस कोटे से मुरारी लाल गौतम को मंत्री बनाया गया है. मुरारी लाल गौतम सासाराम जिले के चेनारी विधानसभा सीट से वो विधायक हैं. बिहार में कांग्रेस की दलित राजनीति के रूप में उन्हें कैबिनेट में जगह दी गई है ताकि अपने कोर वोटबैंक को साधा जा सके. कांग्रेस से आफाक आलम को मंत्री बनाया गया हैं, ये चार बार विधायक रह चुके हैं. कांग्रेस के टिकट पर इन्होने साल दो हज़ार पाँच से लगातार चुनाव जीता है और विधानसभा में कांग्रेस के उपनेता रहे हैं. कांग्रेस में मुस्लिम चेहरे के तौर पर उन्हें नीतीश मंत्रिमंडल में जगह दी गई है. जीतनराम मांझी की पार्टी हिंदुस्तान आवाम मोर्चा से उनके बेटे संतोष सुमन को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है, मांझी महादलित समुदाय से आते हैं और विधान परिषद सदस्य हैं. एनडीए सरकार के दौरान भी मांझी मंत्री थे. निर्दलीय विधायक सुमित सिंह को भी नीतीश मंत्रिमंडल में जगह दी गई है. सुमित सिंह को उन्हें जेडीयू कोटे से मंत्री बनाया गया है और इससे पहले भी एनडीए सरकार के दौरान सुमित सिंह विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री रहे हैं. सुमित सिंह बिहार के पूर्व कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह के बेटे हैं और उनके दादा श्रीकृष्णानंद सिंह दो बार चकई से चुनाव जीतकर विधायक रह चुके हैं, सुमित सिंह जमुई जिले की चकिया सीट से निर्दलीय विधायक हैं और अब इन्हें कैबिनेट में स्थान दिया गया है. |
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Disclaimer : NBT के पत्रकारों ने इस आर्टिकल को नहीं लिखा है। आर्टिकल लिखे जाने तक ये प्रोडक्ट्स Amazon पर उपलब्ध हैं।
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August 1 rule changing: 1 अगस्त से पहले निपटा लें ये जरूरी काम वरना लगेगा तगड़ा जुर्माना, बदलने वाले हैं ये नियम!
August 1 rule changing: नया महीने में पैसों से जुड़े कई बदलाव होने जा रहे हैं, जिनका सीधा असर आपकी जेब पर पड़ेगा. इसमें क्रेडिट कार्ड, आईटीआर फाइल करने संबंधी चीजें शामिल हैं. आइए जानते हैं इनके बारे में.
August 1 rule changing: आज 28 जुलाई है, 3 दिन बाद नया महीना शुरू होने जा रहा है. नया महीने में पैसों से जुड़े कई बदलाव होने जा रहे हैं, जिनका सीधा असर आपकी जेब पर पड़ेगा. इसमें क्रेडिट कार्ड, आईटीआर फाइल करने संबंधी चीजें शामिल हैं. आइए जानते हैं इनके बारे में.
एक्सिस बैंक कार्डधारकों के लिए जरूरी खबर है. अब फ्लिपकार्ट से शॉपिंग करने पर अब आपको कैशबैक और इंसेंटिव प्वॉइंट कम मिलेंगे. बैंक 12 अगस्त 2023 तक इसमें कटौती की है. 12 अगस्त से फ्लिपकार्ट पर ट्रैवल खर्च का पेमेंट करने के लिए क्रेडिट कार्ड के यूज से 1.5 प्रतिशत कैशबैक ले सकते हैं.
बता दें कि आईटीआर फाइलिंग की लास्ट डेट नजदीक है. 31 जुलाई तक इनकम टैक्स रिटर्न फाइल न करने पर जुर्माना देना होगा. 1 अगस्त से 5 हजार रुपये का फाइन लगेगा. जिनकी सालाना इनकम 5 लाख से कम है उनके लिए 1 हजार रुपये जुर्माना है. बता दें कि लेट आईटीआर फाइल करने की लास्ट डेट 31 दिसंबर 2023 है.
महीने की पहली तारीख को तेल कंपनियां घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों की समीक्षा करती हैं. अगस्त में एलपीजी सिलेंडर की कीमत में बदलाव की संभावना है. इसके अलावा पीएनजी और सीएनजी की दरों में भी बदलाव की उम्मीद की जा सकती है.
अगस्त के महीने में बैंकों में छुट्टियों की भरमार है. अलग-अलग राज्यों में होने वाले त्योहार और साप्ताहिक छुट्टी को मिलाकर कुल 14 दिन बैंक में छुट्टी रहने वाली है. अगर आपका भी कोई ऐसा काम है जो बिना ब्रांच जाए नहीं पूरा हो सकता तो उसे फटाफट पूरा कर लें.
1 अगस्त से जीएसटी से जुड़ा एक बदलाव शामिल है. इसमें 5 करोड़ रुपये से ज्यादा टर्नओवर वाले कारोबारियों को इलेक्ट्रॉनिक इनवॉयस देना होगा.
| August एक rule changing: एक अगस्त से पहले निपटा लें ये जरूरी काम वरना लगेगा तगड़ा जुर्माना, बदलने वाले हैं ये नियम! August एक rule changing: नया महीने में पैसों से जुड़े कई बदलाव होने जा रहे हैं, जिनका सीधा असर आपकी जेब पर पड़ेगा. इसमें क्रेडिट कार्ड, आईटीआर फाइल करने संबंधी चीजें शामिल हैं. आइए जानते हैं इनके बारे में. August एक rule changing: आज अट्ठाईस जुलाई है, तीन दिन बाद नया महीना शुरू होने जा रहा है. नया महीने में पैसों से जुड़े कई बदलाव होने जा रहे हैं, जिनका सीधा असर आपकी जेब पर पड़ेगा. इसमें क्रेडिट कार्ड, आईटीआर फाइल करने संबंधी चीजें शामिल हैं. आइए जानते हैं इनके बारे में. एक्सिस बैंक कार्डधारकों के लिए जरूरी खबर है. अब फ्लिपकार्ट से शॉपिंग करने पर अब आपको कैशबैक और इंसेंटिव प्वॉइंट कम मिलेंगे. बैंक बारह अगस्त दो हज़ार तेईस तक इसमें कटौती की है. बारह अगस्त से फ्लिपकार्ट पर ट्रैवल खर्च का पेमेंट करने के लिए क्रेडिट कार्ड के यूज से एक.पाँच प्रतिशत कैशबैक ले सकते हैं. बता दें कि आईटीआर फाइलिंग की लास्ट डेट नजदीक है. इकतीस जुलाई तक इनकम टैक्स रिटर्न फाइल न करने पर जुर्माना देना होगा. एक अगस्त से पाँच हजार रुपये का फाइन लगेगा. जिनकी सालाना इनकम पाँच लाख से कम है उनके लिए एक हजार रुपये जुर्माना है. बता दें कि लेट आईटीआर फाइल करने की लास्ट डेट इकतीस दिसंबर दो हज़ार तेईस है. महीने की पहली तारीख को तेल कंपनियां घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों की समीक्षा करती हैं. अगस्त में एलपीजी सिलेंडर की कीमत में बदलाव की संभावना है. इसके अलावा पीएनजी और सीएनजी की दरों में भी बदलाव की उम्मीद की जा सकती है. अगस्त के महीने में बैंकों में छुट्टियों की भरमार है. अलग-अलग राज्यों में होने वाले त्योहार और साप्ताहिक छुट्टी को मिलाकर कुल चौदह दिन बैंक में छुट्टी रहने वाली है. अगर आपका भी कोई ऐसा काम है जो बिना ब्रांच जाए नहीं पूरा हो सकता तो उसे फटाफट पूरा कर लें. एक अगस्त से जीएसटी से जुड़ा एक बदलाव शामिल है. इसमें पाँच करोड़ रुपये से ज्यादा टर्नओवर वाले कारोबारियों को इलेक्ट्रॉनिक इनवॉयस देना होगा. |
प्रकृति और मानव जीवन में जंगल का मूल्य मुश्किल हैअतिवृद्धि, यह विशाल और बहुमुखी है। लोग प्राचीन समय से अपने संसाधनों का उपयोग करते हैं। और हाल ही में वन संरक्षण का सवाल, इसकी बहाली और सावधानीपूर्वक उपयोग तीव्र हो गया है।
कभी-कभी एक व्यक्ति पूरी तरह से भूल जाता हैप्रकृति और मानव जीवन में जंगल की मुख्य भूमिका। इस तथ्य को अनदेखा करते हुए कि इसका न केवल उस क्षेत्र पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है जहां यह स्थित है, बल्कि अपने पड़ोसी क्षेत्रों पर, लोग प्राकृतिक संतुलन के उल्लंघन के गवाह बन जाते हैं, और इसके बदले में, यह पारिस्थितिक आपदा का कारण बन सकता है।
जंगल की बचत या इसे बहाल, आदमीपारिस्थितिकी में सुधार, सकारात्मक रूप से जलवायु गठन को प्रभावित करता है। ग्रह का हरा संगठन ऑक्सीजन के उत्पादन के लिए "प्रयोगशाला" है, जिसके बिना पृथ्वी पर जीवन अकल्पनीय है।
प्रकृति और मानव जीवन में जंगल की भूमिका को ध्यान में रखते हुए,कोई यह नहीं कह सकता कि यह जीवों के कई प्रतिनिधियों का घर है। वह ग्रह पर पौधे के पदार्थ का मुख्य भंडार है। यही कारण है कि समुदाय में जड़ी-बूटियों, मांसाहारियों और omnivores की एक बड़ी प्रजाति विविधता है जो खाद्य श्रृंखला बनाते हैं। इन कनेक्शनों के लिए धन्यवाद, प्रकृति में संतुलन बनाए रखा जाता है।
पशु शिकार की योजनाबद्ध प्रकृति के कारणमनुष्य कुछ प्रकार के वन पौधों को संरक्षित करने का प्रबंधन करता है। ऐसे मामले हैं जब वनस्पतियां जड़ी-बूटियों या कीटों से नष्ट हो जाती हैं।
प्रकृति और मानव जीवन में जंगल की भूमिका को ध्यान में रखते हुए,आप लकड़ी के लिए मानव जरूरतों को नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं। वह हमेशा महान थी, आज कम नहीं हुई। इसके अलावा, आधुनिक आर्थिक गतिविधि में, यह एक वैश्विक चरित्र प्राप्त करता है।
प्रकृति और लोगों के जीवन में जंगल की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हैतेजी से शहरी विकास की अवधि। मानव शरीर पर हरी जगह का चिकित्सीय प्रभाव डॉक्टरों द्वारा सिद्ध किया गया है। यही कारण है कि बाकी घरों, सैनिटेरियम, और पुनर्वास केंद्र अक्सर वन क्षेत्र में स्थित होते हैं।
ग्रोव, पार्क, वर्गों के माध्यम से चलने वाले लोग, एक महान सौंदर्य आनंद प्राप्त करते हैं, जिससे समग्र स्वास्थ्य में सुधार होता है।
से संबंधित किसी भी मानव गतिविधिखेत के निवास पर इसका असर पड़ता है। कभी-कभी केवल समय के साथ, लोग अपने हस्तक्षेप के माध्यम से पर्यावरण के कारण होने वाले नुकसान के स्तर का आकलन कर सकते हैं।
क्या कहा गया है और एक आरेख तैयार करने के लिए संक्षेप में प्रयास करनाः "प्रकृति और लोगों के जीवन में जंगल की भूमिका", निश्चित रूप से कई महत्वपूर्ण कारकों का उल्लेख करना चाहिए।
- एक पारिस्थितिक तंत्र बनाने वाले घटक निकटता से जुड़े हुए हैं।
- वन पृथ्वी के जलवायु को प्रभावित करते हैं।
- लकड़ी की कच्ची सामग्री सक्रिय रूप से आर्थिक गतिविधियों में मनुष्य द्वारा उपयोग की जाती है।
- पौधों का मानव शरीर पर उपचार प्रभाव पड़ता है।
| प्रकृति और मानव जीवन में जंगल का मूल्य मुश्किल हैअतिवृद्धि, यह विशाल और बहुमुखी है। लोग प्राचीन समय से अपने संसाधनों का उपयोग करते हैं। और हाल ही में वन संरक्षण का सवाल, इसकी बहाली और सावधानीपूर्वक उपयोग तीव्र हो गया है। कभी-कभी एक व्यक्ति पूरी तरह से भूल जाता हैप्रकृति और मानव जीवन में जंगल की मुख्य भूमिका। इस तथ्य को अनदेखा करते हुए कि इसका न केवल उस क्षेत्र पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है जहां यह स्थित है, बल्कि अपने पड़ोसी क्षेत्रों पर, लोग प्राकृतिक संतुलन के उल्लंघन के गवाह बन जाते हैं, और इसके बदले में, यह पारिस्थितिक आपदा का कारण बन सकता है। जंगल की बचत या इसे बहाल, आदमीपारिस्थितिकी में सुधार, सकारात्मक रूप से जलवायु गठन को प्रभावित करता है। ग्रह का हरा संगठन ऑक्सीजन के उत्पादन के लिए "प्रयोगशाला" है, जिसके बिना पृथ्वी पर जीवन अकल्पनीय है। प्रकृति और मानव जीवन में जंगल की भूमिका को ध्यान में रखते हुए,कोई यह नहीं कह सकता कि यह जीवों के कई प्रतिनिधियों का घर है। वह ग्रह पर पौधे के पदार्थ का मुख्य भंडार है। यही कारण है कि समुदाय में जड़ी-बूटियों, मांसाहारियों और omnivores की एक बड़ी प्रजाति विविधता है जो खाद्य श्रृंखला बनाते हैं। इन कनेक्शनों के लिए धन्यवाद, प्रकृति में संतुलन बनाए रखा जाता है। पशु शिकार की योजनाबद्ध प्रकृति के कारणमनुष्य कुछ प्रकार के वन पौधों को संरक्षित करने का प्रबंधन करता है। ऐसे मामले हैं जब वनस्पतियां जड़ी-बूटियों या कीटों से नष्ट हो जाती हैं। प्रकृति और मानव जीवन में जंगल की भूमिका को ध्यान में रखते हुए,आप लकड़ी के लिए मानव जरूरतों को नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं। वह हमेशा महान थी, आज कम नहीं हुई। इसके अलावा, आधुनिक आर्थिक गतिविधि में, यह एक वैश्विक चरित्र प्राप्त करता है। प्रकृति और लोगों के जीवन में जंगल की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हैतेजी से शहरी विकास की अवधि। मानव शरीर पर हरी जगह का चिकित्सीय प्रभाव डॉक्टरों द्वारा सिद्ध किया गया है। यही कारण है कि बाकी घरों, सैनिटेरियम, और पुनर्वास केंद्र अक्सर वन क्षेत्र में स्थित होते हैं। ग्रोव, पार्क, वर्गों के माध्यम से चलने वाले लोग, एक महान सौंदर्य आनंद प्राप्त करते हैं, जिससे समग्र स्वास्थ्य में सुधार होता है। से संबंधित किसी भी मानव गतिविधिखेत के निवास पर इसका असर पड़ता है। कभी-कभी केवल समय के साथ, लोग अपने हस्तक्षेप के माध्यम से पर्यावरण के कारण होने वाले नुकसान के स्तर का आकलन कर सकते हैं। क्या कहा गया है और एक आरेख तैयार करने के लिए संक्षेप में प्रयास करनाः "प्रकृति और लोगों के जीवन में जंगल की भूमिका", निश्चित रूप से कई महत्वपूर्ण कारकों का उल्लेख करना चाहिए। - एक पारिस्थितिक तंत्र बनाने वाले घटक निकटता से जुड़े हुए हैं। - वन पृथ्वी के जलवायु को प्रभावित करते हैं। - लकड़ी की कच्ची सामग्री सक्रिय रूप से आर्थिक गतिविधियों में मनुष्य द्वारा उपयोग की जाती है। - पौधों का मानव शरीर पर उपचार प्रभाव पड़ता है। |
इस प्रकार इतने विवेचन से यह सिद्ध हो जाता है कि जैसे वेदवैषम्य प्राप्त होता है वैसे इन्द्रियवैषम्य नहीं प्राप्त होता ॥ १९ ॥
संसार में मूर्त और अमूर्त दोनों प्रकार के पदार्थ पाये जाते हैं । जिनमें, स्पर्श, रस गन्ध और वर्ण आदि धर्म पाये जाते हैं वे मूर्त हैं और शेष अमूर्त । यह पहले बतलाया जा चुका है कि मन के सिवा शेष क्षायोपशामिक ज्ञानों का विषय मूर्त पदार्थ ही है। यतः पाँचों इन्द्रियज्ञान क्षायोपशमिक हैं अतः उनका विषय मूर्त पदार्थ हो है। स्पर्शन इन्द्रिया विषय स्पर्श है, रसना इन्द्रिय का विषय रस है, घ्राण इन्द्रिय का विषय गन्ध है, चक्षुइन्द्रियका विषय वर्ण है और श्रोत्र इन्द्रियका विषय शब्द है। इस प्रकार यद्यपि पाँचों इन्द्रियों के विषय पाँच बतलाये हैं तथापि इनको सर्वथा भिन्न नहीं मानना चाहिये किन्तु ये एक ही पुद्गल द्रव्य की भिन्न भिन्न पर्याय हैं। उदाहरणार्थ एक मिसरी की डली है उसे पाँधों इन्द्रियाँ अपने अपने विषय द्वारा जानती हैं । स्पर्शनेन्द्रिय छूकर उसका स्पर्श बतलाती है, रसनेन्द्रिय चख कर उसका मीठा रस बतलाती है, घ्राणेन्द्रिय सूँघ कर उसका गंध बतलाती है, नेत्रेन्द्रिय देख कर उसका सफेद रूप बतलाती है और कर्णेन्द्रिय तोड़ने पर होनेवाले उसके शब्द को बतलाती है। ये स्पर्शादिक पुद्गल द्रव्य के धर्म हैं इस लिये उसे व्याप्त कर रहते हैं, क्योंकि अनेक गुणोंका समुदाय हो द्रव्य है इस लिये प्रत्येक गुण द्रव्य में सर्वत्र पाया जाता है। जैसे खिचड़ी में से दाल अलग की जा सकती है और चारत अलग वैसे एक द्रव्य के विविध गुणों को अलग नहीं किया जा सकता है। हाँ बुद्धि द्वारा वे पृथक पृथक जाने जा सकते हैं अवश्य । पाँचों इन्द्रियाँ यही काम करती हैं । इन्द्रियों की शक्ति अलग अलग होने से वे पृथक पृथक् रूप से जानती हैं, इस लिये एक इन्द्रियका विषय दूसरी इन्द्रिय में संक्रान्त नहीं होता। इन्द्रियों के इन पाँचों विषयों में से स्पर्श आदि चार गुणपर्याय हैं और शब्द व्यंजन पर्याय । | इस प्रकार इतने विवेचन से यह सिद्ध हो जाता है कि जैसे वेदवैषम्य प्राप्त होता है वैसे इन्द्रियवैषम्य नहीं प्राप्त होता ॥ उन्नीस ॥ संसार में मूर्त और अमूर्त दोनों प्रकार के पदार्थ पाये जाते हैं । जिनमें, स्पर्श, रस गन्ध और वर्ण आदि धर्म पाये जाते हैं वे मूर्त हैं और शेष अमूर्त । यह पहले बतलाया जा चुका है कि मन के सिवा शेष क्षायोपशामिक ज्ञानों का विषय मूर्त पदार्थ ही है। यतः पाँचों इन्द्रियज्ञान क्षायोपशमिक हैं अतः उनका विषय मूर्त पदार्थ हो है। स्पर्शन इन्द्रिया विषय स्पर्श है, रसना इन्द्रिय का विषय रस है, घ्राण इन्द्रिय का विषय गन्ध है, चक्षुइन्द्रियका विषय वर्ण है और श्रोत्र इन्द्रियका विषय शब्द है। इस प्रकार यद्यपि पाँचों इन्द्रियों के विषय पाँच बतलाये हैं तथापि इनको सर्वथा भिन्न नहीं मानना चाहिये किन्तु ये एक ही पुद्गल द्रव्य की भिन्न भिन्न पर्याय हैं। उदाहरणार्थ एक मिसरी की डली है उसे पाँधों इन्द्रियाँ अपने अपने विषय द्वारा जानती हैं । स्पर्शनेन्द्रिय छूकर उसका स्पर्श बतलाती है, रसनेन्द्रिय चख कर उसका मीठा रस बतलाती है, घ्राणेन्द्रिय सूँघ कर उसका गंध बतलाती है, नेत्रेन्द्रिय देख कर उसका सफेद रूप बतलाती है और कर्णेन्द्रिय तोड़ने पर होनेवाले उसके शब्द को बतलाती है। ये स्पर्शादिक पुद्गल द्रव्य के धर्म हैं इस लिये उसे व्याप्त कर रहते हैं, क्योंकि अनेक गुणोंका समुदाय हो द्रव्य है इस लिये प्रत्येक गुण द्रव्य में सर्वत्र पाया जाता है। जैसे खिचड़ी में से दाल अलग की जा सकती है और चारत अलग वैसे एक द्रव्य के विविध गुणों को अलग नहीं किया जा सकता है। हाँ बुद्धि द्वारा वे पृथक पृथक जाने जा सकते हैं अवश्य । पाँचों इन्द्रियाँ यही काम करती हैं । इन्द्रियों की शक्ति अलग अलग होने से वे पृथक पृथक् रूप से जानती हैं, इस लिये एक इन्द्रियका विषय दूसरी इन्द्रिय में संक्रान्त नहीं होता। इन्द्रियों के इन पाँचों विषयों में से स्पर्श आदि चार गुणपर्याय हैं और शब्द व्यंजन पर्याय । |
चर्चा में क्यों?
13 दिसंबर, 2023 को मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश में पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने के लिये उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने प्रदेश के ऑपरेशनल होटलों और रिसॉर्ट्स के स्टार वर्गीकरण की मंज़ूरी के लिये 'नई स्टार वर्गीकरण प्रणाली' शुरू की है।
- नई वर्गीकरण प्रणाली का उद्देश्य प्रदेश में अधिक होटल कमरों की उपलब्धता, बेहतर सुविधाओं के साथ हॉस्पिटैलिटी उद्योग में सुधार, होटल और रिसॉर्ट्स को उद्योग के बराबर सब्सिडी और प्रोत्साहन प्रदान करना है।
- 'नई स्टार वर्गीकरण प्रणाली' होटलों को उनकी गुणवत्ता, सेवाओं और समग्र सुविधाओं और अतिथि अनुभव के आधार पर वर्गीकृत करेगी, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
- नई संशोधित वर्गीकरण प्रणाली में पाँच अलग-अलग श्रेणियाँ शामिल हैं- प्लैटिनम, डायमंड, गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज। ये श्रेणियाँ पर्यटन मंत्रालय द्वारा निर्धारित होटल उद्योग की पारंपरिक स्टार रेटिंग क्रमशः 5-स्टार, 4-स्टार, 3-स्टार, 2-स्टार और वन स्टार वर्गीकरण के अनुरूप हैं।
- यह संशोधित प्रणाली पर्यटकों के लिये चयन प्रक्रिया को सरल बनाएगी और होटलों के बीच उच्च सेवा मानकों को प्रोत्साहित करेगी।
- इस प्रणाली के अंतर्गत मान्यता प्राप्त होटल कई प्रकार के प्रोत्साहनों के पात्र होंगे और उन्हें उद्योग मानक के तहत सब्सिडी और कर लाभ मिलेगा।
- उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) राज्य में न्यू स्टार होटल वर्गीकरण प्रणाली के कार्यान्वयन के लिये नोडल एजेंसी होगी।
| चर्चा में क्यों? तेरह दिसंबर, दो हज़ार तेईस को मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश में पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने के लिये उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने प्रदेश के ऑपरेशनल होटलों और रिसॉर्ट्स के स्टार वर्गीकरण की मंज़ूरी के लिये 'नई स्टार वर्गीकरण प्रणाली' शुरू की है। - नई वर्गीकरण प्रणाली का उद्देश्य प्रदेश में अधिक होटल कमरों की उपलब्धता, बेहतर सुविधाओं के साथ हॉस्पिटैलिटी उद्योग में सुधार, होटल और रिसॉर्ट्स को उद्योग के बराबर सब्सिडी और प्रोत्साहन प्रदान करना है। - 'नई स्टार वर्गीकरण प्रणाली' होटलों को उनकी गुणवत्ता, सेवाओं और समग्र सुविधाओं और अतिथि अनुभव के आधार पर वर्गीकृत करेगी, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। - नई संशोधित वर्गीकरण प्रणाली में पाँच अलग-अलग श्रेणियाँ शामिल हैं- प्लैटिनम, डायमंड, गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज। ये श्रेणियाँ पर्यटन मंत्रालय द्वारा निर्धारित होटल उद्योग की पारंपरिक स्टार रेटिंग क्रमशः पाँच-स्टार, चार-स्टार, तीन-स्टार, दो-स्टार और वन स्टार वर्गीकरण के अनुरूप हैं। - यह संशोधित प्रणाली पर्यटकों के लिये चयन प्रक्रिया को सरल बनाएगी और होटलों के बीच उच्च सेवा मानकों को प्रोत्साहित करेगी। - इस प्रणाली के अंतर्गत मान्यता प्राप्त होटल कई प्रकार के प्रोत्साहनों के पात्र होंगे और उन्हें उद्योग मानक के तहत सब्सिडी और कर लाभ मिलेगा। - उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम राज्य में न्यू स्टार होटल वर्गीकरण प्रणाली के कार्यान्वयन के लिये नोडल एजेंसी होगी। |
छह या सात साल पहले एक साधारण उपयोगकर्ताकंप्यूटर और खेल खेलना, पाठ के साथ काम करना, किताबें पढ़ना, संगीत सुनना, फिल्में देखना, और अधिक से अधिक न केवल घर पर, बल्कि हर जगहः सड़क पर, ट्रेन पर, व्याख्यान कक्ष में, संभवतः संभव होगा। बैठक। यह संभावना अद्वितीय उपकरणों के लिए धन्यवाद पैदा हुई - गोलियां हाल ही में, वे इतनी असंभव लग रहे थे, आज वे कंप्यूटर प्रौद्योगिकियों के विश्व के नेताओं और कम-ज्ञात कंपनियों द्वारा दोनों का उत्पादन किया जाता है। कोरियाई कंपनी सैमसंग - कोई अपवाद नहीं है।
इस तकनीक के एक छोटे अस्तित्व के लिए दिखाई दियाकुछ समीक्षा गोलियां "सैमसंग" एक डांट, और प्रशंसा के रूप में। चलो पता लगाने की ताकत क्या है, और उल्लेख लैपटॉप की कमजोर तरफ क्या है। लेकिन यथासंभव उद्देश्य बनने के लिए, यह तय करना आवश्यक है कि हम मोबाइल कंप्यूटर से वास्तव में क्या चाहते हैं। मान लीजिए कि एक साधारण उपयोगकर्ता को कम से कम 10 इंच की विकर्ण स्क्रीन वाले टैबलेट की ज़रूरत होती है, जो चित्र को स्पष्ट रूप से ट्रांसमिट करती है, न केवल उंगलियों को छूने के लिए, बल्कि स्टाइलस के आदेशों के लिए, अधिकतम संभव संख्या में वीडियो और ऑडियो प्रारूपों को बनाए रखने के लिए जवाब देती है। विशेषताओं की सूची में पिछले नहीं उच्च संकल्प प्रदर्शन होगा, और 3 जी के लिए समर्थन। एक विकल्प के रूप में, सैमसंग गैलेक्सी नोट टैबलेट के पहले मॉडल पर विचार करें।
10.1 इंच विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। 1280x800 पिक्सेल - सूचक अच्छा से अधिक है कई प्रशंसापत्र इस बारे में बात करते हैं टैबलेट "सैमसंग", द्रव्यमान में, इस तरह की विशेषता की बड़ाई कर सकते हैं, विस्तार के रूप में। कोरियाई उपकरण न केवल एक स्पष्ट, लेकिन रंगीन, रसदार चित्र प्रदान करते हैं। एक संचार मानक के रूप में, सवाल में मॉडल 3 जी प्रोटोकॉल का समर्थन करता है, जो पूरी तरह से कहा गया आवश्यकताओं को पूरा करता है। टैबलेट उंगलियों के स्पर्श के साथ काम करता है, लेकिन स्टाइलस को कंप्यूटर के एक कार्यशील तत्व के रूप में भी शामिल किया गया है। यदि आप वीडियो देखना चाहते हैं, तो आपको यह याद रखना होगा कि यह डिवाइस कई वीडियो प्रारूपों का समर्थन करता है। इनमें शामिल हैंः 3GPP (3GP) / एच .263 / एमपीईजी -4 / डिवएक्स / एच .264 / एवीसी / एमपीईजी -4 भाग 10 / एक्सवीड / डब्ल्यूएमवी। एक काफी विस्तृत सूची को स्वीकार करें, इसलिए फ़ाइलों को बदलने के बारे में चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। यह विशेषता, जैसे उच्च गति, अक्सर समीक्षाएं में शामिल की जाती है। सैमसंग टैबलेट में शक्तिशाली प्रोसेसर हैं इस मॉडल में एक ट्रैक्टर है घड़ी की गति 1400 मेगाहर्टज है और 2 जीबी रैम इस बच्चे को काफी फुर्तीला होने की अनुमति देगा। सामान्य तौर पर, मॉडल उपयुक्त है, सभी आवश्यक आवश्यकताओं को पूरा करता है।
| छह या सात साल पहले एक साधारण उपयोगकर्ताकंप्यूटर और खेल खेलना, पाठ के साथ काम करना, किताबें पढ़ना, संगीत सुनना, फिल्में देखना, और अधिक से अधिक न केवल घर पर, बल्कि हर जगहः सड़क पर, ट्रेन पर, व्याख्यान कक्ष में, संभवतः संभव होगा। बैठक। यह संभावना अद्वितीय उपकरणों के लिए धन्यवाद पैदा हुई - गोलियां हाल ही में, वे इतनी असंभव लग रहे थे, आज वे कंप्यूटर प्रौद्योगिकियों के विश्व के नेताओं और कम-ज्ञात कंपनियों द्वारा दोनों का उत्पादन किया जाता है। कोरियाई कंपनी सैमसंग - कोई अपवाद नहीं है। इस तकनीक के एक छोटे अस्तित्व के लिए दिखाई दियाकुछ समीक्षा गोलियां "सैमसंग" एक डांट, और प्रशंसा के रूप में। चलो पता लगाने की ताकत क्या है, और उल्लेख लैपटॉप की कमजोर तरफ क्या है। लेकिन यथासंभव उद्देश्य बनने के लिए, यह तय करना आवश्यक है कि हम मोबाइल कंप्यूटर से वास्तव में क्या चाहते हैं। मान लीजिए कि एक साधारण उपयोगकर्ता को कम से कम दस इंच की विकर्ण स्क्रीन वाले टैबलेट की ज़रूरत होती है, जो चित्र को स्पष्ट रूप से ट्रांसमिट करती है, न केवल उंगलियों को छूने के लिए, बल्कि स्टाइलस के आदेशों के लिए, अधिकतम संभव संख्या में वीडियो और ऑडियो प्रारूपों को बनाए रखने के लिए जवाब देती है। विशेषताओं की सूची में पिछले नहीं उच्च संकल्प प्रदर्शन होगा, और तीन जी के लिए समर्थन। एक विकल्प के रूप में, सैमसंग गैलेक्सी नोट टैबलेट के पहले मॉडल पर विचार करें। दस.एक इंच विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। एक हज़ार दो सौ अस्सीxआठ सौ पिक्सेल - सूचक अच्छा से अधिक है कई प्रशंसापत्र इस बारे में बात करते हैं टैबलेट "सैमसंग", द्रव्यमान में, इस तरह की विशेषता की बड़ाई कर सकते हैं, विस्तार के रूप में। कोरियाई उपकरण न केवल एक स्पष्ट, लेकिन रंगीन, रसदार चित्र प्रदान करते हैं। एक संचार मानक के रूप में, सवाल में मॉडल तीन जी प्रोटोकॉल का समर्थन करता है, जो पूरी तरह से कहा गया आवश्यकताओं को पूरा करता है। टैबलेट उंगलियों के स्पर्श के साथ काम करता है, लेकिन स्टाइलस को कंप्यूटर के एक कार्यशील तत्व के रूप में भी शामिल किया गया है। यदि आप वीडियो देखना चाहते हैं, तो आपको यह याद रखना होगा कि यह डिवाइस कई वीडियो प्रारूपों का समर्थन करता है। इनमें शामिल हैंः तीनGPP / एच .दो सौ तिरेसठ / एमपीईजी -चार / डिवएक्स / एच .दो सौ चौंसठ / एवीसी / एमपीईजी -चार भाग दस / एक्सवीड / डब्ल्यूएमवी। एक काफी विस्तृत सूची को स्वीकार करें, इसलिए फ़ाइलों को बदलने के बारे में चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। यह विशेषता, जैसे उच्च गति, अक्सर समीक्षाएं में शामिल की जाती है। सैमसंग टैबलेट में शक्तिशाली प्रोसेसर हैं इस मॉडल में एक ट्रैक्टर है घड़ी की गति एक हज़ार चार सौ मेगाहर्टज है और दो जीबी रैम इस बच्चे को काफी फुर्तीला होने की अनुमति देगा। सामान्य तौर पर, मॉडल उपयुक्त है, सभी आवश्यक आवश्यकताओं को पूरा करता है। |
डीएमआरसी के लोस्ट एंड फाउंड विभाग के कर्मचारी भुल्लकड़ यात्रियों से काफी परेशान हैं।
नई दिल्ली. दिल्ली की लाइफ लाइन कही जाने वाली मेट्रो में प्रतिदिन करीब 27 लाख यात्री सफर करते हैं। सभी यात्रियों को अरामदायक व सुरक्षति माहौल में यात्रा करना जहां मेट्रो की सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ कर्मियों व अधिकारियों की जिम्मेदारी है। वहीं, यदि कोई भुलक्कड़ यात्री अपना महंगा सामान या कोई किमती वस्तु मेट्रो परिसर में भूलवश या गलती से छोड़ जाए तो उस वस्तु को संभाल कर रखना डीएमआरसी की जिम्मेदारी बनती है।
यही कारण है कि डीएमआरसी के लोस्ट एंड फाउंड विभाग के कर्मचारी भुल्लकड़ यात्रियों से काफी परेशान हैं। डीएमआरसी प्रशासन को आए दिन मेट्रो परिसर में महंगे सामान लावारिस हालात में मिलता है। सीआईएसएफ को लवारिस हालत में गत जनवरी से मार्च के बीच विदेशी मुद्रा, सोने का आभूषण, लैपटॉप, आईपैड, घड़ी और विभिन्न बैंक के चेक व ड्राफ्ट मिले हैं।
सीआईएसएफ के जवानों द्वारा सभी सामानों को उक्त स्टेशनों के कस्टमर केयर अधिकारी को सौंप दिया जाता है, जहां से काश्मीरी गेट स्थित लोस्ट एंड फाउंड विभाग में सामान को सुरक्षित उस वक्त तक रखा जाता है, जब तक वह यात्री लौट कर नहीं आता, जिससे गलती से या फिर भूल के कारण मेट्रो परिसर में सामान छूट गया होता है। बताया जा रहा है कि हर दिन कुछ न कुछ सामान यात्री मेट्रो में या फिर मेट्रो परिसर में छोड़कर चले जाते हैं।
आंकड़ों पर नजर डालने से पता चलता है कि गत तीन माह में करीब 297268 रुपए नकदी, 146200 रुपए के बैंक ड्राफ्ट/चेक, 11066 विदेशी मुद्रा सीआईएसएफ कर्मियों को मेट्रो परिसर में मिले। इसी प्रकार से 40 लैपटॉप भी मिले हैं। सबसे अधिक जनवरी में 21, फरवरी में 11 और मार्च में आठ लैपटॉप मिले। इसी प्रकार से 103 मोबाइल फोन भी भुल्लकड़ यात्री मेट्रो में छोड़ गए।
सबसे अधिक मार्च में 42, जनवरी में 36 और फरवरी में 25 यात्री अपना मोबाइल फोन छोड़ गए। यही नहीं फरवरी में पांच सोने के आभूषण और जनवरी में तीन सोने के आभूषण मेट्रो परिसर में मिले। यही नहीं दो आईपैड और पांच टैबलेट यात्री भूलवश मेट्रो परिसर में छोड़कर चले गए। साथ ही 16 घड़ियां और आठ कैमरा भी लोस्ट एंड फाउंड विभाग में जमा कराया गया।
| डीएमआरसी के लोस्ट एंड फाउंड विभाग के कर्मचारी भुल्लकड़ यात्रियों से काफी परेशान हैं। नई दिल्ली. दिल्ली की लाइफ लाइन कही जाने वाली मेट्रो में प्रतिदिन करीब सत्ताईस लाख यात्री सफर करते हैं। सभी यात्रियों को अरामदायक व सुरक्षति माहौल में यात्रा करना जहां मेट्रो की सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ कर्मियों व अधिकारियों की जिम्मेदारी है। वहीं, यदि कोई भुलक्कड़ यात्री अपना महंगा सामान या कोई किमती वस्तु मेट्रो परिसर में भूलवश या गलती से छोड़ जाए तो उस वस्तु को संभाल कर रखना डीएमआरसी की जिम्मेदारी बनती है। यही कारण है कि डीएमआरसी के लोस्ट एंड फाउंड विभाग के कर्मचारी भुल्लकड़ यात्रियों से काफी परेशान हैं। डीएमआरसी प्रशासन को आए दिन मेट्रो परिसर में महंगे सामान लावारिस हालात में मिलता है। सीआईएसएफ को लवारिस हालत में गत जनवरी से मार्च के बीच विदेशी मुद्रा, सोने का आभूषण, लैपटॉप, आईपैड, घड़ी और विभिन्न बैंक के चेक व ड्राफ्ट मिले हैं। सीआईएसएफ के जवानों द्वारा सभी सामानों को उक्त स्टेशनों के कस्टमर केयर अधिकारी को सौंप दिया जाता है, जहां से काश्मीरी गेट स्थित लोस्ट एंड फाउंड विभाग में सामान को सुरक्षित उस वक्त तक रखा जाता है, जब तक वह यात्री लौट कर नहीं आता, जिससे गलती से या फिर भूल के कारण मेट्रो परिसर में सामान छूट गया होता है। बताया जा रहा है कि हर दिन कुछ न कुछ सामान यात्री मेट्रो में या फिर मेट्रो परिसर में छोड़कर चले जाते हैं। आंकड़ों पर नजर डालने से पता चलता है कि गत तीन माह में करीब दो लाख सत्तानवे हज़ार दो सौ अड़सठ रुपयापए नकदी, एक लाख छियालीस हज़ार दो सौ रुपयापए के बैंक ड्राफ्ट/चेक, ग्यारह हज़ार छयासठ विदेशी मुद्रा सीआईएसएफ कर्मियों को मेट्रो परिसर में मिले। इसी प्रकार से चालीस लैपटॉप भी मिले हैं। सबसे अधिक जनवरी में इक्कीस, फरवरी में ग्यारह और मार्च में आठ लैपटॉप मिले। इसी प्रकार से एक सौ तीन मोबाइल फोन भी भुल्लकड़ यात्री मेट्रो में छोड़ गए। सबसे अधिक मार्च में बयालीस, जनवरी में छत्तीस और फरवरी में पच्चीस यात्री अपना मोबाइल फोन छोड़ गए। यही नहीं फरवरी में पांच सोने के आभूषण और जनवरी में तीन सोने के आभूषण मेट्रो परिसर में मिले। यही नहीं दो आईपैड और पांच टैबलेट यात्री भूलवश मेट्रो परिसर में छोड़कर चले गए। साथ ही सोलह घड़ियां और आठ कैमरा भी लोस्ट एंड फाउंड विभाग में जमा कराया गया। |
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