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एलन मस्क (फोटो- twitter/OleShonko) नई दिल्ली. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (Twitter) का टेकओवर जब से एलन मस्क (Elon Musk) ने किया है तब से लगातार ये प्लेटफार्म सुर्खियों में है. ट्विटर लगातार अपने प्लेटफॉर्म पर बदलाव कर रहा है. अब कंपनी कई यूजर्स को झटका देने वाली है. अगर आप भी ट्विटर ब्लू टिक (Twitter BlueTick) का फायदा बिना पैसे दिए उठा रहे हैं तो आपको झटका लगने वाला है. मस्क ने साफ कर दिया है कि जल्द ट्विटर के वेरिफाइड यूजर्स का ब्लू टिक हटा लिया जाएगा और केवल सब्सक्रिप्शन लेने के बाद ही यूजर्स को ये टिक मिलेगा. बता दें कि पहले ट्विटर केवल मशहूर हस्तियों, राजनेताओं, पत्रकारों आदि को ही ब्लू टिक देता था. अब मस्क ने ट्विटर ब्लूटिक पेड सब्सक्रिप्शन की शुरुआत कर दी है. ट्विटर पर रिया नाम की एक यूजर ने मस्क से पूछा कि जिन लोगों के पास पहले से ट्विटर पर ब्लू टिक मौजूद है उनका क्या होगा? इसके जवाब में एलन मस्क ने कहा कि जल्द फ्री में मिले ब्लू टिक लोगों से छीन लिए जाएंगे यानी उनके अकाउंट से ब्लू टिक हट जाएगा. Legacy blue checks will be removed soon. Those are the ones that are truly corrupt. भारत में माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ट्विटर के यूजर्स को अपने अकाउंट्स में 'ब्लू टिक' निशान के लिए मोबाइल फोन के मासिक प्लान के तहत हर माह 900 रुपये खर्च करने पड़ेंगे. कंपनी ने हाल ही में यह जानकारी दी थी. प्लेटफॉर्म ने वेब के लिए ट्विटर ब्लू का दाम 650 रुपये और मोबाइल ऐप यूजर्स के लिए 900 रुपये रखा है. ट्विटर ने कहा कि मंजूरी मिलने के बाद सत्यापित फोन नंबर के साथ ब्लू के ग्राहकों को ब्लू टिक दिया जाएगा. प्लेटफॉर्म ने वेब के यूजर्स के लिए सालाना प्लान पेश किया है. इसके लिए उपभोक्ताओं को 6,800 रुपये देने होंगे. .
एलन मस्क नई दिल्ली. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर का टेकओवर जब से एलन मस्क ने किया है तब से लगातार ये प्लेटफार्म सुर्खियों में है. ट्विटर लगातार अपने प्लेटफॉर्म पर बदलाव कर रहा है. अब कंपनी कई यूजर्स को झटका देने वाली है. अगर आप भी ट्विटर ब्लू टिक का फायदा बिना पैसे दिए उठा रहे हैं तो आपको झटका लगने वाला है. मस्क ने साफ कर दिया है कि जल्द ट्विटर के वेरिफाइड यूजर्स का ब्लू टिक हटा लिया जाएगा और केवल सब्सक्रिप्शन लेने के बाद ही यूजर्स को ये टिक मिलेगा. बता दें कि पहले ट्विटर केवल मशहूर हस्तियों, राजनेताओं, पत्रकारों आदि को ही ब्लू टिक देता था. अब मस्क ने ट्विटर ब्लूटिक पेड सब्सक्रिप्शन की शुरुआत कर दी है. ट्विटर पर रिया नाम की एक यूजर ने मस्क से पूछा कि जिन लोगों के पास पहले से ट्विटर पर ब्लू टिक मौजूद है उनका क्या होगा? इसके जवाब में एलन मस्क ने कहा कि जल्द फ्री में मिले ब्लू टिक लोगों से छीन लिए जाएंगे यानी उनके अकाउंट से ब्लू टिक हट जाएगा. Legacy blue checks will be removed soon. Those are the ones that are truly corrupt. भारत में माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ट्विटर के यूजर्स को अपने अकाउंट्स में 'ब्लू टिक' निशान के लिए मोबाइल फोन के मासिक प्लान के तहत हर माह नौ सौ रुपयापये खर्च करने पड़ेंगे. कंपनी ने हाल ही में यह जानकारी दी थी. प्लेटफॉर्म ने वेब के लिए ट्विटर ब्लू का दाम छः सौ पचास रुपयापये और मोबाइल ऐप यूजर्स के लिए नौ सौ रुपयापये रखा है. ट्विटर ने कहा कि मंजूरी मिलने के बाद सत्यापित फोन नंबर के साथ ब्लू के ग्राहकों को ब्लू टिक दिया जाएगा. प्लेटफॉर्म ने वेब के यूजर्स के लिए सालाना प्लान पेश किया है. इसके लिए उपभोक्ताओं को छः,आठ सौ रुपयापये देने होंगे. .
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को आम जनता के लिए राष्ट्रपति भवन के उद्यान का उद्घाटन किया. जनता से रिश्ता वेबडेस्क । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को आम जनता के लिए राष्ट्रपति भवन के उद्यान का उद्घाटन किया. अमृत उद्यान आगंतुकों के लिए 31 जनवरी से 26 मार्च तक (सोमवार को छोड़कर जो रखरखाव दिवस है और 8 मार्च को होली के दिन) सुबह 10. 00 बजे से 1600 बजे तक खुला रहेगा। 28 मार्च से 31 मार्च तक, उद्यान विशेष श्रेणियों के लिए खुले रहेंगे - 28 मार्च को किसानों के लिए, 29 मार्च को विकलांग व्यक्तियों के लिए, 30 मार्च को रक्षा बलों, अर्धसैनिक बलों और पुलिस के कर्मियों के लिए और महिलाओं सहित 31 मार्च को आदिवासी महिला एसएचजी। जनता से रिश्ता इस खबर की पुष्टि नहीं करता है ये खबर जनसरोकार के माध्यम से मिली है और ये खबर सोशल मीडिया में वायरल हो रही थी जिसके चलते इस खबर को प्रकाशित की जा रही है। इस पर जनता से रिश्ता खबर की सच्चाई को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं करता है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को आम जनता के लिए राष्ट्रपति भवन के उद्यान का उद्घाटन किया. जनता से रिश्ता वेबडेस्क । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को आम जनता के लिए राष्ट्रपति भवन के उद्यान का उद्घाटन किया. अमृत उद्यान आगंतुकों के लिए इकतीस जनवरी से छब्बीस मार्च तक सुबह दस. शून्य बजे से एक हज़ार छः सौ बजे तक खुला रहेगा। अट्ठाईस मार्च से इकतीस मार्च तक, उद्यान विशेष श्रेणियों के लिए खुले रहेंगे - अट्ठाईस मार्च को किसानों के लिए, उनतीस मार्च को विकलांग व्यक्तियों के लिए, तीस मार्च को रक्षा बलों, अर्धसैनिक बलों और पुलिस के कर्मियों के लिए और महिलाओं सहित इकतीस मार्च को आदिवासी महिला एसएचजी। जनता से रिश्ता इस खबर की पुष्टि नहीं करता है ये खबर जनसरोकार के माध्यम से मिली है और ये खबर सोशल मीडिया में वायरल हो रही थी जिसके चलते इस खबर को प्रकाशित की जा रही है। इस पर जनता से रिश्ता खबर की सच्चाई को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं करता है।
फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के दुखद निधन के बाद अभिनेत्री हिना खान और आएशा टाकिया ने कार्यस्थल पर मिलने वाली धमकियों और तानों के बारे में खुलासे किए हैं। सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु ने मनोरंजन इंडस्ट्री के कई काले रहस्यों पर चर्चा शुरु कर दी हैंl इसमें अवसाद, भाई-भतीजावाद या कार्यस्थल पर होनेवाली बदमाशियां शामिल है। अब उनके बारे में बहुत सारे कलाकार खुलकर बात कर रहे हैं। अभिनेत्री हिना खान और आएशा टाकिया ने भी इसपर अपनी राय रखी हैं। हिना और आएशा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट्स पर लिखा है कि उन्होंने भी ऑनलाइन ट्रोल्स और वर्कप्लेस पर बदमाशी का सामना किया है। जहां बिग बॉस की एक्स-कंटेस्टेंट ने इसे शेयर किया किया, वहीं कुछ बिना मेकअप वाली तस्वीरों के साथ आएशा ने एक लंबा नोट लिखकर अपने अनुभव को याद किया।
फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के दुखद निधन के बाद अभिनेत्री हिना खान और आएशा टाकिया ने कार्यस्थल पर मिलने वाली धमकियों और तानों के बारे में खुलासे किए हैं। सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु ने मनोरंजन इंडस्ट्री के कई काले रहस्यों पर चर्चा शुरु कर दी हैंl इसमें अवसाद, भाई-भतीजावाद या कार्यस्थल पर होनेवाली बदमाशियां शामिल है। अब उनके बारे में बहुत सारे कलाकार खुलकर बात कर रहे हैं। अभिनेत्री हिना खान और आएशा टाकिया ने भी इसपर अपनी राय रखी हैं। हिना और आएशा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट्स पर लिखा है कि उन्होंने भी ऑनलाइन ट्रोल्स और वर्कप्लेस पर बदमाशी का सामना किया है। जहां बिग बॉस की एक्स-कंटेस्टेंट ने इसे शेयर किया किया, वहीं कुछ बिना मेकअप वाली तस्वीरों के साथ आएशा ने एक लंबा नोट लिखकर अपने अनुभव को याद किया।
मरने लाइट - अपने कंप्यूटर पर कहां से बचें? मरने लाइट गेम शैली में सर्वश्रेष्ठ में से एक है।प्रथम व्यक्ति जीवन रक्षा डरावनी। दिन और रात का एक विश्वसनीय चक्र है, साथ ही एक पूरी तरह से खुली दुनिया है। विशाल जगहों का अध्ययन करना वास्तव में दिलचस्प और रोमांचक है। और, ज़ाहिर है, वहां बड़ी संख्या में गंदे और भयानक लाश हैं जो मुख्य पात्र पर हमला करने का प्रयास करते हैं। लेकिन कई गेमर्स मरने लाइट को बचाने के लिए बहुत ही उचित और महत्वपूर्ण सवाल पूछ रहे हैं। आखिरकार, यदि आपको उनके संग्रहण की जगह मिलती है, तो आप मौजूदा फाइलों को नई फाइलों से प्रतिस्थापित करने या अपनी सीधी प्रतिलिपि बनाने की कोशिश कर सकते हैं। यदि आप अभी भी नहीं जानते कि मरने वाली रोशनी कहां से बचाती हैनिम्नलिखित, यह याद रखने योग्य है कि वे अभी भी पाए जा सकते हैं। दुर्भाग्यवश, ये फ़ाइलें औसत उपयोगकर्ता की आंखों से सुरक्षित रूप से छिपी हुई हैं। यह पूरी तरह से समझ में नहीं आता है कि यह क्यों किया गया था। इसलिए, सही फ़ोल्डर ढूंढना एक बहुत मुश्किल काम है। उसी समय, आगे नियंत्रण के साथ बचाता है। लेकिन आपको तुरंत आरक्षण करना चाहिएसंरक्षण में हेरफेर के अप्रत्याशित परिणाम हो सकते हैं। इस कारण से, बैकअप फ़ाइलों को अनुशंसा की जाती है ताकि किसी भी समस्या के मामले में रिकॉर्ड्स को तुरंत पुनः संयोजित किया जा सके। कैसे शुरू करें? जहां मरने वाली रोशनी को बचाया जा सकता है, पता लगा सकता हैबिल्कुल हर गेमर। लेकिन सबसे पहले आपको गेम के संस्करण पर फैसला करना होगा। यह बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि समुद्री डाकू और लाइसेंस प्राप्त कार्यक्रमों में सहेजने के पथ पूरी तरह से अलग हैं। यदि आप खेल के संस्करण को निर्धारित करते हैं, तो यह रिकॉर्ड खोजने के लिए बहुत आसान और स्पष्ट होगा। जब सहेजे जाते हैं, तो वे वास्तव में तैयार किए गए फ़ाइलों के साथ प्रतिस्थापित होते हैं जो इंटरनेट पर डाउनलोड होते हैं। उदाहरण के लिए, वे सभी इन-गेम सामग्री तक पहुंच खोलने में मदद करेंगे, या अनावश्यक परेशानी के बिना कुछ कठिन जगहों पर जाने का मौका देंगे। यही कारण है कि यह जानना जरूरी है कि बचत मरने वाली रोशनी कहां से है, जो कई नई सुविधाओं को खोलने में सक्षम हैं। यह समझने के लिए कि मरने वाली रोशनी कहाँ सहेजी जाती है, आपको अपने कंप्यूटर पर परिष्कृत प्रोग्रामडेटा फ़ोल्डर ढूंढना होगा, जिसमें सभी आवश्यक चीज़ें शामिल हैं। एक नियम के रूप में, यह डिस्क पर स्थित है सी लगभग हर आधुनिक कंप्यूटर। फिर आपको भाप निर्देशिका का चयन करना चाहिए जिसमें आरएलडी फ़ोल्डर छिपा हुआ है। यह वहां है कि लंबे समय से प्रतीक्षित रिकॉर्ड ध्यान से झूठ बोलते हैं। ऐसा करने के लिए, आपको निर्देशिका 239140 को ढूंढना और खोलना होगा, और फिर यहां जाएं - StorageOutSave। यदि किसी कारण से आप किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करना चाहते हैं, तो क्लासिक कॉपी / पेस्ट संयोजन का उपयोग करने के लिए पर्याप्त है। पहले से ही समुद्री डाकू के लिए मरने लाइट की बचतमैं देखता हूँ लेकिन लाइसेंस के साथ, चीजें अलग हैं। और यह किसी भी कार्रवाई शुरू करने से पहले याद किया जाना चाहिए। अगर गेम स्टीम सेवा के माध्यम से खरीदा और स्थापित किया गया था, तो सभी प्रविष्टियां पीसी पर संबंधित फ़ोल्डर में स्थित होंगी। बस स्टीम फ़ोल्डर खोलें, और उसके बाद Userdata निर्देशिका खोजें। अब यह सही जगह पर जाने के लिए एक अद्वितीय संख्या के साथ अपनी खुद की प्रोफाइल आईडी दर्ज करना है - स्टोरेजऑटसेव। सभी जरूरी गेम प्रविष्टियां यहां संग्रहित की जाती हैं। उपयोगकर्ता वर्तमान फ़ाइलों को प्रतिस्थापित करने में सक्षम होगा, साथ ही उन्हें कॉपी भी करेगा।
मरने लाइट - अपने कंप्यूटर पर कहां से बचें? मरने लाइट गेम शैली में सर्वश्रेष्ठ में से एक है।प्रथम व्यक्ति जीवन रक्षा डरावनी। दिन और रात का एक विश्वसनीय चक्र है, साथ ही एक पूरी तरह से खुली दुनिया है। विशाल जगहों का अध्ययन करना वास्तव में दिलचस्प और रोमांचक है। और, ज़ाहिर है, वहां बड़ी संख्या में गंदे और भयानक लाश हैं जो मुख्य पात्र पर हमला करने का प्रयास करते हैं। लेकिन कई गेमर्स मरने लाइट को बचाने के लिए बहुत ही उचित और महत्वपूर्ण सवाल पूछ रहे हैं। आखिरकार, यदि आपको उनके संग्रहण की जगह मिलती है, तो आप मौजूदा फाइलों को नई फाइलों से प्रतिस्थापित करने या अपनी सीधी प्रतिलिपि बनाने की कोशिश कर सकते हैं। यदि आप अभी भी नहीं जानते कि मरने वाली रोशनी कहां से बचाती हैनिम्नलिखित, यह याद रखने योग्य है कि वे अभी भी पाए जा सकते हैं। दुर्भाग्यवश, ये फ़ाइलें औसत उपयोगकर्ता की आंखों से सुरक्षित रूप से छिपी हुई हैं। यह पूरी तरह से समझ में नहीं आता है कि यह क्यों किया गया था। इसलिए, सही फ़ोल्डर ढूंढना एक बहुत मुश्किल काम है। उसी समय, आगे नियंत्रण के साथ बचाता है। लेकिन आपको तुरंत आरक्षण करना चाहिएसंरक्षण में हेरफेर के अप्रत्याशित परिणाम हो सकते हैं। इस कारण से, बैकअप फ़ाइलों को अनुशंसा की जाती है ताकि किसी भी समस्या के मामले में रिकॉर्ड्स को तुरंत पुनः संयोजित किया जा सके। कैसे शुरू करें? जहां मरने वाली रोशनी को बचाया जा सकता है, पता लगा सकता हैबिल्कुल हर गेमर। लेकिन सबसे पहले आपको गेम के संस्करण पर फैसला करना होगा। यह बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि समुद्री डाकू और लाइसेंस प्राप्त कार्यक्रमों में सहेजने के पथ पूरी तरह से अलग हैं। यदि आप खेल के संस्करण को निर्धारित करते हैं, तो यह रिकॉर्ड खोजने के लिए बहुत आसान और स्पष्ट होगा। जब सहेजे जाते हैं, तो वे वास्तव में तैयार किए गए फ़ाइलों के साथ प्रतिस्थापित होते हैं जो इंटरनेट पर डाउनलोड होते हैं। उदाहरण के लिए, वे सभी इन-गेम सामग्री तक पहुंच खोलने में मदद करेंगे, या अनावश्यक परेशानी के बिना कुछ कठिन जगहों पर जाने का मौका देंगे। यही कारण है कि यह जानना जरूरी है कि बचत मरने वाली रोशनी कहां से है, जो कई नई सुविधाओं को खोलने में सक्षम हैं। यह समझने के लिए कि मरने वाली रोशनी कहाँ सहेजी जाती है, आपको अपने कंप्यूटर पर परिष्कृत प्रोग्रामडेटा फ़ोल्डर ढूंढना होगा, जिसमें सभी आवश्यक चीज़ें शामिल हैं। एक नियम के रूप में, यह डिस्क पर स्थित है सी लगभग हर आधुनिक कंप्यूटर। फिर आपको भाप निर्देशिका का चयन करना चाहिए जिसमें आरएलडी फ़ोल्डर छिपा हुआ है। यह वहां है कि लंबे समय से प्रतीक्षित रिकॉर्ड ध्यान से झूठ बोलते हैं। ऐसा करने के लिए, आपको निर्देशिका दो लाख उनतालीस हज़ार एक सौ चालीस को ढूंढना और खोलना होगा, और फिर यहां जाएं - StorageOutSave। यदि किसी कारण से आप किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करना चाहते हैं, तो क्लासिक कॉपी / पेस्ट संयोजन का उपयोग करने के लिए पर्याप्त है। पहले से ही समुद्री डाकू के लिए मरने लाइट की बचतमैं देखता हूँ लेकिन लाइसेंस के साथ, चीजें अलग हैं। और यह किसी भी कार्रवाई शुरू करने से पहले याद किया जाना चाहिए। अगर गेम स्टीम सेवा के माध्यम से खरीदा और स्थापित किया गया था, तो सभी प्रविष्टियां पीसी पर संबंधित फ़ोल्डर में स्थित होंगी। बस स्टीम फ़ोल्डर खोलें, और उसके बाद Userdata निर्देशिका खोजें। अब यह सही जगह पर जाने के लिए एक अद्वितीय संख्या के साथ अपनी खुद की प्रोफाइल आईडी दर्ज करना है - स्टोरेजऑटसेव। सभी जरूरी गेम प्रविष्टियां यहां संग्रहित की जाती हैं। उपयोगकर्ता वर्तमान फ़ाइलों को प्रतिस्थापित करने में सक्षम होगा, साथ ही उन्हें कॉपी भी करेगा।
होंडा 10वीं जनरेशन सिविक सेडान को भारत में लॉन्च कर चुकी है। इसकी कीमत 17. 7 लाख से 22. 3 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) के बीच रखी गई है। कंपनी ने लॉन्च से कुछ समय पहले इसकी बुकिंग शुरू कर दी थी। इसे अब तक 1100 से ज्यादा बुकिंग मिली चुकी हैं। डीलरों की मानें तो नई सिविक के लिए ग्राहकों को 15 दिन से एक महीने का वेटिंग पीरियड दिया जा रहा है। वेरिएंट, कलर और इंजन के हिसाब से वेटिंग पीरियड कम-ज्यादा हो सकता है। होंडा के अनुसार, 20 दिनों में नई सिविक को जितनी बुकिंग मिली हैं, वह सेगमेंट की पिछले दो महीने की कुल बिक्री के बराबर है। नई सिविक का मुकाबला हुंडई एलांट्रा, स्कोडा ऑक्टाविया और टोयोटा कोरोला एल्टिस से है। cardekho. com के मुताबिक, आंकड़ों को देखें तो पिछले दो महीने में तीनों कारों की 825 यूनिट बिकी। ये आंकड़ा नई होंडा सिविक को मिली बुकिंग से कम है। इससे पता चलता है कि नई सिविक सेगमेंट में कितनी फेमस है। नई सिविक को पेट्रोल और डीजल दोनों इंजन में उतारा गया है। सिविक पेट्रोल में 1. 4 लीटर 4 सिलेंडर आई-वीटेक इंजन दिया गया है। इसकी पावर 141 पीएस और टॉर्क 174 एनएम है। पेट्रोल इंजन के साथ सीवीटी गियरबॉक्स दिया गया है। सिविक डीज़ल में सीआर-वी वाला 1. 6 लीटर, 4 सिलेंडर आई डीटेक इंजन दिया गया है। यह इंजन 120 पीएस की पावर और 300 एनएम का टॉर्क जनरेट करने में सक्षम है। डीजल वेरिएंट में 6-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स मिलेगा। होंडा का दावा है कि पेट्रोल और डीजल वेरिएंट क्रमशः 16. 5 किमी प्रति लीटर और 26. 8 किमी प्रति लीटर का माइलेज देगा। नई सिविक वी, वीएक्स और जेडएक्स समेत कुल तीन वेरिएंट में उपलब्ध है।
होंडा दसवीं जनरेशन सिविक सेडान को भारत में लॉन्च कर चुकी है। इसकी कीमत सत्रह. सात लाख से बाईस. तीन लाख रुपये के बीच रखी गई है। कंपनी ने लॉन्च से कुछ समय पहले इसकी बुकिंग शुरू कर दी थी। इसे अब तक एक हज़ार एक सौ से ज्यादा बुकिंग मिली चुकी हैं। डीलरों की मानें तो नई सिविक के लिए ग्राहकों को पंद्रह दिन से एक महीने का वेटिंग पीरियड दिया जा रहा है। वेरिएंट, कलर और इंजन के हिसाब से वेटिंग पीरियड कम-ज्यादा हो सकता है। होंडा के अनुसार, बीस दिनों में नई सिविक को जितनी बुकिंग मिली हैं, वह सेगमेंट की पिछले दो महीने की कुल बिक्री के बराबर है। नई सिविक का मुकाबला हुंडई एलांट्रा, स्कोडा ऑक्टाविया और टोयोटा कोरोला एल्टिस से है। cardekho. com के मुताबिक, आंकड़ों को देखें तो पिछले दो महीने में तीनों कारों की आठ सौ पच्चीस यूनिट बिकी। ये आंकड़ा नई होंडा सिविक को मिली बुकिंग से कम है। इससे पता चलता है कि नई सिविक सेगमेंट में कितनी फेमस है। नई सिविक को पेट्रोल और डीजल दोनों इंजन में उतारा गया है। सिविक पेट्रोल में एक. चार लीटरटर चार सिलेंडर आई-वीटेक इंजन दिया गया है। इसकी पावर एक सौ इकतालीस पीएस और टॉर्क एक सौ चौहत्तर एनएम है। पेट्रोल इंजन के साथ सीवीटी गियरबॉक्स दिया गया है। सिविक डीज़ल में सीआर-वी वाला एक. छः लीटरटर, चार सिलेंडर आई डीटेक इंजन दिया गया है। यह इंजन एक सौ बीस पीएस की पावर और तीन सौ एनएम का टॉर्क जनरेट करने में सक्षम है। डीजल वेरिएंट में छः-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स मिलेगा। होंडा का दावा है कि पेट्रोल और डीजल वेरिएंट क्रमशः सोलह. पाँच किमी प्रति लीटर और छब्बीस. आठ किमी प्रति लीटर का माइलेज देगा। नई सिविक वी, वीएक्स और जेडएक्स समेत कुल तीन वेरिएंट में उपलब्ध है।
गोड्डाः गुरुवार को उप विकास आयुक्त संजय सिन्हा की अध्यक्षता में पीएम कुसुम योजना के तहत लाभुकों के चयन हेतु बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला कृषि पदाधिकारी रमेश प्रसाद सिन्हा के द्वारा बताया गया कि विभागीय आदेश के अनुरूप कुल 277 इकाई सोलर स्टैंड एलौन पंप का वितरण एवं अधिष्ठापन किया जाएगा। जिसके लिए जिले के विभिन्न प्रखंडों के माध्यम से इच्छुक कृषकों का कुल 1462 आवेदन प्राप्त किए गए हैं। बैठक में अनुमंडल पदाधिकारी, गोड्डा ऋतुराज के द्वारा बताया गया कि लाभुकों का चयन पहले आओ पहले पाओ के आधार पर किया जाएगा। इसके लिए कृषि योग्य भूमि होने का प्रमाण पत्र अनिवार्य है। खेतों में ग्रिड कनेक्टिविटी नहीं होना चाहिए। सिंचाई सुविधा उपलब्ध होना चाहिए। अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति, लघु सीमांत कृषक, महिला कृषकों को प्राथमिकता दी जाएगी। मौके पर जिला कृषि पदाधिकारी रमेश कुमार सिन्हा, जिला कल्याण पदाधिकारी अविनाश कुमार, जिला मत्स्य पदाधिकारी मरियम मुर्मू, आत्मा के उप परियोजना निदेशक राकेश कुमार एवं संबंधित विभागों के पदाधिकारीगण मौजूद थे।
गोड्डाः गुरुवार को उप विकास आयुक्त संजय सिन्हा की अध्यक्षता में पीएम कुसुम योजना के तहत लाभुकों के चयन हेतु बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला कृषि पदाधिकारी रमेश प्रसाद सिन्हा के द्वारा बताया गया कि विभागीय आदेश के अनुरूप कुल दो सौ सतहत्तर इकाई सोलर स्टैंड एलौन पंप का वितरण एवं अधिष्ठापन किया जाएगा। जिसके लिए जिले के विभिन्न प्रखंडों के माध्यम से इच्छुक कृषकों का कुल एक हज़ार चार सौ बासठ आवेदन प्राप्त किए गए हैं। बैठक में अनुमंडल पदाधिकारी, गोड्डा ऋतुराज के द्वारा बताया गया कि लाभुकों का चयन पहले आओ पहले पाओ के आधार पर किया जाएगा। इसके लिए कृषि योग्य भूमि होने का प्रमाण पत्र अनिवार्य है। खेतों में ग्रिड कनेक्टिविटी नहीं होना चाहिए। सिंचाई सुविधा उपलब्ध होना चाहिए। अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति, लघु सीमांत कृषक, महिला कृषकों को प्राथमिकता दी जाएगी। मौके पर जिला कृषि पदाधिकारी रमेश कुमार सिन्हा, जिला कल्याण पदाधिकारी अविनाश कुमार, जिला मत्स्य पदाधिकारी मरियम मुर्मू, आत्मा के उप परियोजना निदेशक राकेश कुमार एवं संबंधित विभागों के पदाधिकारीगण मौजूद थे।
घातय घातय शत्रूञ्जहि जहि ह्रींॐ फ्रोंक्लींई स्वाहा अनेन दीपवर्येण पश्चिमाभिमुखेन मां रक्ष 'देवदत्तवरप्रदानाय ह्रींह्रींह्रींओंक्लींचीं स्वाहा' इमं मन्त्रं जपित्वा तज्जलं भूमौ निक्षिप्य पश्चिमाभिमुखो भूत्वा कृताञ्जलिः 'तंथदधनपंफंबंभमंॐ स्वाहा' इति सकृत् जपित्वा, ॐआंहींफ्रींची स्वाहा क्रोंॐ' इति मन्त्रं सहस्रावृत्त्या जपित्वा ततो यावद्दीपस्तिष्ठति तावत्प्रत्यहं तस्मिन् यन्त्रे देवं पूजयेत् । दीपनिर्वापणे देवं विसर्जयेत् । इति देवाय जपं समर्प्य स्तुत्वा प्रणमेत् । इत्थं प्रत्यहं घृतसमाप्तिर्यावद्यावच्च कार्यसिद्धिस्तावत् कुर्यादिति दीपदानविधिः । इति वैष्णवं प्रकरणम्। दीपदान विधि - श्रीदेवी ने कहा कि हे देवदेव महादेव! भक्तों पर कृपा करने वाले! मैं लोकहित की कामना से आपसे पूछती हूँ। कार्तवीर्य नृपति की दीपदान विधि मुझे बतलाइये । ईश्वर ने कहा कि हे देवि! सुनो, मैं लोकानुग्रह की कामना से अपना सर्वस्व गुह्य तुमसे कहता हूँ। इसे दुरात्माओं से नहीं कहना चाहिये । राज- चौरपीड़ा में, ग्रह-रोगभय में, नाना दुःखों में, सुख प्राप्ति के लिये गुरुदर्शित मार्ग से दीपदान करना चाहिये । सोना, चाँदी, ताम्बा, कांसा, लोहा और मिट्टी तथा गेहूँ के आँटे के दीपकों के दान से विवाद में विजय मिलता है। उड़द पिष्ट के दीपदान से शत्रुमुख का स्तम्भन होता है। मूंगपिष्ट के दीपदान से उत्तम शान्ति होती है। सोने के दीपक अप्राप्त होने पर ताम्बे के दीपक में सात पाँच तीन या एक बत्ती या कार्य की गुरुता-लघुता के अनुसार दीप-बत्तियों की संख्या होती हैं। उजले, पीले, माञ्जिष्ठ, कुसुम्भ, काले, कर्पूर सूतों की बत्ती बनावे। सबों के अभाव में उजले सूतों की बत्ती बनावे। पन्द्रह, बीस तीस चालीस या पचास सूतों से कार्य के अनुसार बत्ती बनावे। सर्वार्थ-सिद्धि के लिये गाय के घी से दीपक जलावे । नित्य क्रिया के बाद वितानादि से अलंकृत शुभ स्थान में या घर में गोबर से लिपी भूमि में कपिला गाय के गोबर से षट्कोण बनाकर उसके मध्य में लाल चन्दन से कामबीज क्लीं लिखे। छः कोणों में मूल विंशाक्षर मन्त्र के प्रणवदि काम बीजरहित छः बीज ओं फ्रों चीं धूं आं ह्रीं लिखे। षट्कोण के पूर्वादि चारो दिशाओं में शिष्ट चार बीज 'क्रों श्रीं हुं फट्' लिखे । 'कार्तवीर्यार्जुनाय नमः' के नव वर्णों से षट्कोण को वेष्टित करे । कार्यानुरूप पूर्वोक्त दीपपात्र में पूर्वोक्त बत्ती रखकर जलावे । षट्कोण मध्य में दीपों को पश्चिमाभिमुख रखे । मूल मन्त्र से तीन प्राणायाम करके ऋष्यादि न्यास करे । ताम्र पात्र में वैष्णव अष्टगन्ध से कार्तवीर्य यन्त्र में अष्टदल के बाहर चतुरस्र बनावे । दीपक के पूर्व भाग में गोबर से लिप्त भूमि पर उस यन्त्र को स्थापित करे। तिथि-वार-नक्षत्र आदि का उल्लेख करते हुये अपने कार्यसिद्धि के लिये दीपदान का संकल्प करे। उस यन्त्र में देव का आवाहन करके सभी उपचारों से अंगों सहित आवरण पूजा करे। दाँयें हाथ में जल लेकर 'ॐ आंह्नींवषट्कार्तवीर्यार्जुनाय माहिष्मतीनाथाय सहस्रबाहवे सहस्रक्रतुदीक्षिताय दत्तात्रेयप्रियाय आत्रेयाय अनुसूयागर्भरत्नाय हूंक्रू इमं दीपं गृहाण अमुकं रक्षरक्ष दुष्टान् नाशय नाशय पातय पातय घातय घातय शत्रूञ्जहि जहि ह्रीं ॐ फ्रोक्लीई स्वाहा अनेन दीपवर्येण पश्चिमाभिमुखेन मां रक्ष 'देवदत्तवरप्रदानाय ह्रींह्रींह्रींओंक्लींचीं स्वाहा' का जप करके जल को भूमि पर गिरा दे । पश्चिम की ओर मुख करके हाथ जोड़कर 'तं थं दं धं नं पं फं बं भं मं ॐ स्वाहा' का एक बार जप करे । तब ॐ आं ह्रीं फ्रीं चीं स्वाहा क्रों ॐ' का एक हजार जप करे। जब तक दीपक जलता रहे तब तक उस यन्त्र में प्रतिदिन देव की पूजा करे। दीपक के बुझने पर देव का विसर्जन करे। देव को जप समर्पित करके स्तुति करके प्रणाम करे । इस प्रकार प्रतिदिन जब तक दीप जलता रहे तब तक कार्यसिद्धि होने तक जप करता रहे । गुरु की आज्ञा पाकर दीपदान करे; अन्यथा विपरीत फल प्राप्त होता है। दीपदान का विधान कृतघ्न चुगलखोर, ब्रह्मकर्मविहीनों को नहीं बतलाना चाहिये। सुभक्त, सुशिष्य, साधकविशेष को विधान बतलाने से मैं प्रसन्न होता हूँ। हे देवि! बहुत क्या कहा जाय, यह कल्प सर्वार्थदायक है । अब मैं दीप के लिये गोघृत का मान बतलाता हूँ, जो साधकों के हितार्थ सर्वार्थसिद्धिप्रद है। भूत-विनाशन के लिये २५ पल बराबर १५०० ग्राम ( डेढ़ किलो) घी दीपक में भरे। पचास पल = तीन किलो घी का दीपक शान्ति, शत्रु- वश्य, सन्धिकार्य के लिये जलाये। साढ़े चार किलो घी का दीपक जलाने से शत्रु का पराजय होता है। एक सौ पल = छः किलो के घी का दीपक जलाने से शत्रु का नाश होता है। एक हजार पल = ६० किलो घी का दीपक जलाने से सभी कार्य होते
घातय घातय शत्रूञ्जहि जहि ह्रींॐ फ्रोंक्लींई स्वाहा अनेन दीपवर्येण पश्चिमाभिमुखेन मां रक्ष 'देवदत्तवरप्रदानाय ह्रींह्रींह्रींओंक्लींचीं स्वाहा' इमं मन्त्रं जपित्वा तज्जलं भूमौ निक्षिप्य पश्चिमाभिमुखो भूत्वा कृताञ्जलिः 'तंथदधनपंफंबंभमंॐ स्वाहा' इति सकृत् जपित्वा, ॐआंहींफ्रींची स्वाहा क्रोंॐ' इति मन्त्रं सहस्रावृत्त्या जपित्वा ततो यावद्दीपस्तिष्ठति तावत्प्रत्यहं तस्मिन् यन्त्रे देवं पूजयेत् । दीपनिर्वापणे देवं विसर्जयेत् । इति देवाय जपं समर्प्य स्तुत्वा प्रणमेत् । इत्थं प्रत्यहं घृतसमाप्तिर्यावद्यावच्च कार्यसिद्धिस्तावत् कुर्यादिति दीपदानविधिः । इति वैष्णवं प्रकरणम्। दीपदान विधि - श्रीदेवी ने कहा कि हे देवदेव महादेव! भक्तों पर कृपा करने वाले! मैं लोकहित की कामना से आपसे पूछती हूँ। कार्तवीर्य नृपति की दीपदान विधि मुझे बतलाइये । ईश्वर ने कहा कि हे देवि! सुनो, मैं लोकानुग्रह की कामना से अपना सर्वस्व गुह्य तुमसे कहता हूँ। इसे दुरात्माओं से नहीं कहना चाहिये । राज- चौरपीड़ा में, ग्रह-रोगभय में, नाना दुःखों में, सुख प्राप्ति के लिये गुरुदर्शित मार्ग से दीपदान करना चाहिये । सोना, चाँदी, ताम्बा, कांसा, लोहा और मिट्टी तथा गेहूँ के आँटे के दीपकों के दान से विवाद में विजय मिलता है। उड़द पिष्ट के दीपदान से शत्रुमुख का स्तम्भन होता है। मूंगपिष्ट के दीपदान से उत्तम शान्ति होती है। सोने के दीपक अप्राप्त होने पर ताम्बे के दीपक में सात पाँच तीन या एक बत्ती या कार्य की गुरुता-लघुता के अनुसार दीप-बत्तियों की संख्या होती हैं। उजले, पीले, माञ्जिष्ठ, कुसुम्भ, काले, कर्पूर सूतों की बत्ती बनावे। सबों के अभाव में उजले सूतों की बत्ती बनावे। पन्द्रह, बीस तीस चालीस या पचास सूतों से कार्य के अनुसार बत्ती बनावे। सर्वार्थ-सिद्धि के लिये गाय के घी से दीपक जलावे । नित्य क्रिया के बाद वितानादि से अलंकृत शुभ स्थान में या घर में गोबर से लिपी भूमि में कपिला गाय के गोबर से षट्कोण बनाकर उसके मध्य में लाल चन्दन से कामबीज क्लीं लिखे। छः कोणों में मूल विंशाक्षर मन्त्र के प्रणवदि काम बीजरहित छः बीज ओं फ्रों चीं धूं आं ह्रीं लिखे। षट्कोण के पूर्वादि चारो दिशाओं में शिष्ट चार बीज 'क्रों श्रीं हुं फट्' लिखे । 'कार्तवीर्यार्जुनाय नमः' के नव वर्णों से षट्कोण को वेष्टित करे । कार्यानुरूप पूर्वोक्त दीपपात्र में पूर्वोक्त बत्ती रखकर जलावे । षट्कोण मध्य में दीपों को पश्चिमाभिमुख रखे । मूल मन्त्र से तीन प्राणायाम करके ऋष्यादि न्यास करे । ताम्र पात्र में वैष्णव अष्टगन्ध से कार्तवीर्य यन्त्र में अष्टदल के बाहर चतुरस्र बनावे । दीपक के पूर्व भाग में गोबर से लिप्त भूमि पर उस यन्त्र को स्थापित करे। तिथि-वार-नक्षत्र आदि का उल्लेख करते हुये अपने कार्यसिद्धि के लिये दीपदान का संकल्प करे। उस यन्त्र में देव का आवाहन करके सभी उपचारों से अंगों सहित आवरण पूजा करे। दाँयें हाथ में जल लेकर 'ॐ आंह्नींवषट्कार्तवीर्यार्जुनाय माहिष्मतीनाथाय सहस्रबाहवे सहस्रक्रतुदीक्षिताय दत्तात्रेयप्रियाय आत्रेयाय अनुसूयागर्भरत्नाय हूंक्रू इमं दीपं गृहाण अमुकं रक्षरक्ष दुष्टान् नाशय नाशय पातय पातय घातय घातय शत्रूञ्जहि जहि ह्रीं ॐ फ्रोक्लीई स्वाहा अनेन दीपवर्येण पश्चिमाभिमुखेन मां रक्ष 'देवदत्तवरप्रदानाय ह्रींह्रींह्रींओंक्लींचीं स्वाहा' का जप करके जल को भूमि पर गिरा दे । पश्चिम की ओर मुख करके हाथ जोड़कर 'तं थं दं धं नं पं फं बं भं मं ॐ स्वाहा' का एक बार जप करे । तब ॐ आं ह्रीं फ्रीं चीं स्वाहा क्रों ॐ' का एक हजार जप करे। जब तक दीपक जलता रहे तब तक उस यन्त्र में प्रतिदिन देव की पूजा करे। दीपक के बुझने पर देव का विसर्जन करे। देव को जप समर्पित करके स्तुति करके प्रणाम करे । इस प्रकार प्रतिदिन जब तक दीप जलता रहे तब तक कार्यसिद्धि होने तक जप करता रहे । गुरु की आज्ञा पाकर दीपदान करे; अन्यथा विपरीत फल प्राप्त होता है। दीपदान का विधान कृतघ्न चुगलखोर, ब्रह्मकर्मविहीनों को नहीं बतलाना चाहिये। सुभक्त, सुशिष्य, साधकविशेष को विधान बतलाने से मैं प्रसन्न होता हूँ। हे देवि! बहुत क्या कहा जाय, यह कल्प सर्वार्थदायक है । अब मैं दीप के लिये गोघृत का मान बतलाता हूँ, जो साधकों के हितार्थ सर्वार्थसिद्धिप्रद है। भूत-विनाशन के लिये पच्चीस पल बराबर एक हज़ार पाँच सौ ग्राम घी दीपक में भरे। पचास पल = तीन किलो घी का दीपक शान्ति, शत्रु- वश्य, सन्धिकार्य के लिये जलाये। साढ़े चार किलो घी का दीपक जलाने से शत्रु का पराजय होता है। एक सौ पल = छः किलो के घी का दीपक जलाने से शत्रु का नाश होता है। एक हजार पल = साठ किलो घी का दीपक जलाने से सभी कार्य होते
[ PART II - SEC. 3 (ii) ] the said company shall indemnify the Central Government and its officials against any other expenditure that may be necessary in connection with any proceedings by or against the Central Government or its officials regarding the rights in or over the said lands so vested; the said Company shall have no power to transfer the said lands to any other person without the previous approval of the Central Government; and the said Company shall abide by such directions and conditions as may be given or imposed by the Central Government for particular areas of the said lands as and when necessary. [ No. 19/58/80 - CL/PRIW] SANJAY BAHADUR, Dy Secy नई दिल्ली, 11 मार्च, 2002 केन्द्रीय सरकार ने कोयला धारक क्षेत्र (अर्जन और विकास) अधिनियम, 1957 (1957 का 20 ) (जिसे इसमें इसके पश्चात् उक्त अधिनियम कहा गया है) की धारा 7 की उपधारा (1) के अधीन जारी भारत सरकार के कोयला मंत्रालय की अधिसूचना सं. का.आ. 680 तारीख 20 मार्च, 2001 जो भारत के राजपत्र, भाग 2, खंड 3, उपखंड (II) तारीख 31 मार्च, 2001 में प्रकाशित की गई थी, द्वारा उस अधिसूचना से संलग्न अनुसूची में विनिर्दिष्ट परिक्षेत्र की भूमि और ऐसी भूमि में या उस पर के समस्त अधिकारों के अर्जन करने के आशय की सूचना दी थी । और सक्षम प्राधिकारी ने उक्त अधिनियम की धारा 8 के अनुसरण में केन्द्रीय सरकार को अपनी रिपोर्ट दे दी है । और केन्द्रीय सरकार का पूर्वोक्त रिपोर्ट पर विचार करने के पश्चात् और महाराष्ट्र सरकार से परामर्श करने के पश्चात् यह समाधान हो गया है कि इससे संलग्न अनुसूची में वर्णित 334.13 हेक्टर (लगभग) या 825.64 एकड (लगभग) माप वाली भूमि और अर्जित ऐसी भूमिं में या उस पर के समस्त अधिकार अर्जित किए जाने चाहिए । अतः केन्द्रीय सरकार, उक्त अधिनियम की धारा 9 की उपधारा (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, यह घोषणा करती है कि इससे संलग्न अनुसूची में वर्णित 334.13 हैक्टर (लगभग ) या 825.64 एकड (लगभग) माप वाली भूमि और अर्जित ऐसी भूमि में या उस पर के सभी अधिकार अर्जित किए जाते हैं । इस अधिसूचना के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र के रेखांक सं. सी-1 (ई) III/ जेजेजेआर/689- 0801 तारीख 11 अगस्त, 2001 का निरीक्षण कलेक्टर, चन्द्रपुर (महाराष्ट्र ) के कार्यालय में या कोयला नियंत्रक, 1, काउंसिल हाऊस स्ट्रीट, कोलकाता (पिन 700 001) के कार्यालय में, या वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड ( राजस्व विभाग), कोयला एस्टेट, सिविल लाईन्स, नागपुर 440 001 (महाराष्ट्र) के कार्यालय में किया जा सकता है ।
[ PART II - SEC. तीन ] the said company shall indemnify the Central Government and its officials against any other expenditure that may be necessary in connection with any proceedings by or against the Central Government or its officials regarding the rights in or over the said lands so vested; the said Company shall have no power to transfer the said lands to any other person without the previous approval of the Central Government; and the said Company shall abide by such directions and conditions as may be given or imposed by the Central Government for particular areas of the said lands as and when necessary. [ No. उन्नीस अट्ठावन अस्सी - CL/PRIW] SANJAY BAHADUR, Dy Secy नई दिल्ली, ग्यारह मार्च, दो हज़ार दो केन्द्रीय सरकार ने कोयला धारक क्षेत्र अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ सत्तावन की धारा सात की उपधारा के अधीन जारी भारत सरकार के कोयला मंत्रालय की अधिसूचना सं. का.आ. छः सौ अस्सी तारीख बीस मार्च, दो हज़ार एक जो भारत के राजपत्र, भाग दो, खंड तीन, उपखंड तारीख इकतीस मार्च, दो हज़ार एक में प्रकाशित की गई थी, द्वारा उस अधिसूचना से संलग्न अनुसूची में विनिर्दिष्ट परिक्षेत्र की भूमि और ऐसी भूमि में या उस पर के समस्त अधिकारों के अर्जन करने के आशय की सूचना दी थी । और सक्षम प्राधिकारी ने उक्त अधिनियम की धारा आठ के अनुसरण में केन्द्रीय सरकार को अपनी रिपोर्ट दे दी है । और केन्द्रीय सरकार का पूर्वोक्त रिपोर्ट पर विचार करने के पश्चात् और महाराष्ट्र सरकार से परामर्श करने के पश्चात् यह समाधान हो गया है कि इससे संलग्न अनुसूची में वर्णित तीन सौ चौंतीस.तेरह हेक्टर या आठ सौ पच्चीस.चौंसठ एकड माप वाली भूमि और अर्जित ऐसी भूमिं में या उस पर के समस्त अधिकार अर्जित किए जाने चाहिए । अतः केन्द्रीय सरकार, उक्त अधिनियम की धारा नौ की उपधारा द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, यह घोषणा करती है कि इससे संलग्न अनुसूची में वर्णित तीन सौ चौंतीस.तेरह हैक्टर या आठ सौ पच्चीस.चौंसठ एकड माप वाली भूमि और अर्जित ऐसी भूमि में या उस पर के सभी अधिकार अर्जित किए जाते हैं । इस अधिसूचना के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र के रेखांक सं. सी-एक III/ जेजेजेआर/छः सौ नवासी- आठ सौ एक तारीख ग्यारह अगस्त, दो हज़ार एक का निरीक्षण कलेक्टर, चन्द्रपुर के कार्यालय में या कोयला नियंत्रक, एक, काउंसिल हाऊस स्ट्रीट, कोलकाता के कार्यालय में, या वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड , कोयला एस्टेट, सिविल लाईन्स, नागपुर चार सौ चालीस एक के कार्यालय में किया जा सकता है ।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) नोटों की पहचान के लिए नई मोबाइल ऐप लाने की तैयारी कर रहा है। यह ऐप खास तौर से दृष्टिबाधित लोगों के लिए लॉन्च की जाएगी। फिलहाल बाजार में एक रुपये, 10, 20, 50, 100, 200, 500 और 2000 रुपये के नोट चलन में है। जानकारी के लिए बता दें कि एक रुपये का नोट केंद्र सरकार जारी करती है। आइये, इस बारे में विस्तार से जानते हैं। RBI ने कहा कि दृष्टिबाधित लोगों के ट्रांजेक्शन पूरी करने के लिए नोटों की पहचान बहुत महत्वपूर्ण है। फिलहाल दृष्टिबाधित लोगों के लिए 100 रुपये से ऊपर की कीमत के नोटों पर प्रिटिंग आधारित पहचान निशान दिए गए हैं। नोटबंदी के बाद केंद्रीय बैंक ने नए साइज और डिजाइन वाले नोट जारी किए थे। नई ऐप बनाने के लिए वेंडर की तलाश में लगे RBI ने कहा कि वह दृष्टिबाधित लोगों के सामने वाली चुनौतियों के प्रति संवेदनशील हैं। इस ऐप के लिए टेक कंपनियों से बोलियां आमंत्रित करते हुए RBI ने कहा कि इसकी मदद से महात्मा गांधी और महात्मा गांधी (न्यू) सीरीज के नोटों को पहचाना जा सकेगा। इसके लिए ऐप में जाकर नोट की फोटो लेनी होगी। फोटो लेेने के बाद ऐप ऑडियो के जरिए यूजर्स को बताएगी कि यह कितनी कीमत का नोट है। अगर फोटो सही नहीं आती है तो ऐप दोबारा फोटो लेने के लिए कहेगी। पिछले साल जून में RBI ने कहा था कि वह दृष्टिबाधित लोगों के लिए नोटों की पहचान के लिए कोई डिवाइस या व्यवस्था बनाने पर काम कर रहा है। RBI के ऐप लानेे के फैसले से देशभर के 80 लाख दृष्टिबाधित लोगों को फायदा होगा। भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले महीने ATM को लेकर बैंकों को निर्देश जारी किए थे। RBI ने बैंकों से कहा था कि अगर तीन घंटे से ज़्यादा समय तक किसी बैंक का ATM कैशलेस होगा, तो उन बैंकों पर जुर्माना लगेगा। RBI के इस आदेश के बाद तीन घंटे से ज्यादा समय तक ATM में कैश न होने पर संबंधित बैंक को जुर्माना भरना होगा। जुर्माने की राशि हर क्षेत्र के हिसाब से अलग-अलग होगी।
भारतीय रिजर्व बैंक नोटों की पहचान के लिए नई मोबाइल ऐप लाने की तैयारी कर रहा है। यह ऐप खास तौर से दृष्टिबाधित लोगों के लिए लॉन्च की जाएगी। फिलहाल बाजार में एक रुपये, दस, बीस, पचास, एक सौ, दो सौ, पाँच सौ और दो हज़ार रुपयापये के नोट चलन में है। जानकारी के लिए बता दें कि एक रुपये का नोट केंद्र सरकार जारी करती है। आइये, इस बारे में विस्तार से जानते हैं। RBI ने कहा कि दृष्टिबाधित लोगों के ट्रांजेक्शन पूरी करने के लिए नोटों की पहचान बहुत महत्वपूर्ण है। फिलहाल दृष्टिबाधित लोगों के लिए एक सौ रुपयापये से ऊपर की कीमत के नोटों पर प्रिटिंग आधारित पहचान निशान दिए गए हैं। नोटबंदी के बाद केंद्रीय बैंक ने नए साइज और डिजाइन वाले नोट जारी किए थे। नई ऐप बनाने के लिए वेंडर की तलाश में लगे RBI ने कहा कि वह दृष्टिबाधित लोगों के सामने वाली चुनौतियों के प्रति संवेदनशील हैं। इस ऐप के लिए टेक कंपनियों से बोलियां आमंत्रित करते हुए RBI ने कहा कि इसकी मदद से महात्मा गांधी और महात्मा गांधी सीरीज के नोटों को पहचाना जा सकेगा। इसके लिए ऐप में जाकर नोट की फोटो लेनी होगी। फोटो लेेने के बाद ऐप ऑडियो के जरिए यूजर्स को बताएगी कि यह कितनी कीमत का नोट है। अगर फोटो सही नहीं आती है तो ऐप दोबारा फोटो लेने के लिए कहेगी। पिछले साल जून में RBI ने कहा था कि वह दृष्टिबाधित लोगों के लिए नोटों की पहचान के लिए कोई डिवाइस या व्यवस्था बनाने पर काम कर रहा है। RBI के ऐप लानेे के फैसले से देशभर के अस्सी लाख दृष्टिबाधित लोगों को फायदा होगा। भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले महीने ATM को लेकर बैंकों को निर्देश जारी किए थे। RBI ने बैंकों से कहा था कि अगर तीन घंटे से ज़्यादा समय तक किसी बैंक का ATM कैशलेस होगा, तो उन बैंकों पर जुर्माना लगेगा। RBI के इस आदेश के बाद तीन घंटे से ज्यादा समय तक ATM में कैश न होने पर संबंधित बैंक को जुर्माना भरना होगा। जुर्माने की राशि हर क्षेत्र के हिसाब से अलग-अलग होगी।
should thik about Jiva and Ajiva etc., nine Padarthas (Principalities ), vow of Ananta, about Aihat, Siddha, Acharya, Upadhyaya and all the'Sàdius-five Parmestins ( great benefectors) and nature of the soul. Because the thinking of these things will destroy anxieties and विवेचन - प्रन्थकार कहते हैं कि जो मनुष्य आत्म चिंतन करने की अभिलाषा से ससार में होने वाले सुख, दु.ख, शारीरिक कष्ट, संशय-भ्रम, द्रव्य क्षेत्र, काल, भाव आदि पाँच प्रकार के ससार के, अजीव आदि मात तत्त्व के, नौ पदार्थो के तथा अर्हन्त, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, सर्व साधु आदि पचपरमेष्ठियों के साथ अपने आत्म-स्वरूप का ध्यान करेगा उसकी चिन्ता क्या दूर नहीं होगी ? अवश्य होगी। के साथ सदा रहकर कष्ट देने वाला मुख्य संसार पाच प्रकार का है। इसका वर्णन तथा पच परमेष्टियों के स्वरूप का वर्णन पहले खड में कर चुके हैं अतः उसे देख कर तदनुसार व्यान का अभ्यास करना चाहिये । जीव, अजीव, आश्रव, । बॅर्धा, सर्वर, निर्जरा और मोक्ष ये सात तत्व हैं। इनमें पुण्य और पाप मिलाने से नौ प्रकार के हो जाते हैं। इन्हीं को नौ तत्त्व कहते हैं । इनका वर्णन यद्यपि प्रथम खंड में किया जा चुका है, पर फिर भी यहाँ पर हम प्रसंगोपात सक्षेप में वर्णन करेंगे। जैसे कि श्री कुन्दकुन्दाचार्य स्वामी ने अपने पंचास्तिकाय में कहा भी है कि - जीवाजीवा भावापुराणं पावंच संवतोसिं । संवर गिज्जर वंधो मोक्खो य हवन्तिते अठ्ठा॥११६॥ जीव, अजीव, पुण्य, पाप, आश्रव, सवर, निर्जरा, बंध और मोक्ष ये नौ पदार्थ होते हैं । अर्थात् - यहाँ इन नौ पदार्थों का कुछ स्वरूप कहते हैं । देखना, जानना, जिस का स्वभाव है वह जीव पदार्थ है। उससे भिन्न लक्षण वाला पुद्गल आदि के पाच भेद रूप अजीव पदार्थ हैं। दानपूजा आदि छः श्रावश्यक कर्मों को आदि लेकर जीव का शुभ प्रभाव करना भाव पुण्य है। इस भाव पुण्य के तिमि से प्राप्त जो साता वेदनीय आदि अशुभ प्रकृति रूप पुद्गल का पिंड है सो द्रव्य पाप है। वरहित शुद्ध आत्मा के पदार्थ से विपरीत जो रागद्वेष मोह रूप जीव का परिणाम है सो भाव श्रव है। इस भाव के निमित्त से कर्म वर्गरणाके योग्य पुद्गलॉ का योगों द्वारा श्राना द्रव्यास्रव है। कर्मों को रोकने में समय जो विकल्प सहित आत्मा की प्राप्ति रूप परिणाम है सो भाव सवर है । इस भाव के निमित्त से नवीन द्रव्य कर्मो के आने का रुकना द्रव्यसवर है। कर्म की शक्ति को मिटाने का समर्थ जो चारह प्रकार तर्फेस बढ़ता हुआ शुद्धोपयोग हूँ सो सवर पूर्वक भाव निर्जरा है। इस शुद्धोपयोग के द्वारा रस रहित होकर पुराने बघे हुए कर्मों का एक देश जल जाना द्रव्य निर्जरा है। प्रकृति आदि बध से शून्य परमात्म पदार्थ से प्रतिकूल जो मिथ्यादर्शन च रागादि रूप चिकनाहट भाव है सो भाव बंध है। इस भाव चध के निमित्त से जैसे तेल लगे हुए शरीर में धूल चिपक जाती में है वैसे जीव और कर्म के प्रदेशों का एक दूसरे मे मिल जाना द्रव्य वध है । कर्मों के मूलसे हटाने में समर्थ जो शुद्ध आत्मा की प्राप्ति रूप जीव का परिणाम है, सो भाव मोक्ष है। इस भाव मोक्ष के निमित्त से जीव और कर्म के प्रदेशों का सम्पूर्णपने से भिन्न २ हो जाना, द्रव्य मोक्ष है। द्रव्य मोक्ष भाव मोक्ष ये दोनों जीव के परिणाम कारण हैं । पुण्य और पाप आत्मा को शुभाशुभ कर्म का वध करके हमेशा पुण्य के द्वारा देवगति या उत्तम कुल मे जन्म या राज्य पद आदि अनेक प्रकार की इन्द्रिय भोग सामग्री को प्राप्त करदेने वाले हैं, और पाप कर्म नरकादि गतियोंमें तथा नीच कुल तिर्यंचादि गतियों में ले जाकर अनेक दुःख देने वाला होता है, इस लिये है आत्मन् । पुण्य और पाप दोनों तुझे ससार में भ्रमण कराने वाले हैं ऐसा समझकर इन दोनों से भिन्न निजात्म स्वरूप शुद्धात्मा का ध्यान करो इसका ध्यान करने से हमेशा के लिये सुख शान्ति की प्राप्ति होकर मोक्ष साम्राज के अधिपति वन जाओगे ।।१०३।। इस लिये जीव को हमेशा अपने चितवन व विचार में लीन होकर बाह्य वस्तु में मौन रहना श्रेष्ठ है, ऐसा अगले श्लोक में बतलाते हैःअदिरिसिदुदं कुडुवनन्ते पवनुडियंदे भव्यरं । निळपुत्र सुम्मनिर्प निजकार्य के पुरुपमृगंबोलुर्वियोळ ।।' पोळ व विविक्तसंपुगुव चैत निधानवनीक्षिपातनं । तोऴगने काण्वने सफलजन्मनला अपराजितेश्वरा ! १०४ हे अपराजितेश्वर । जैसे कोई व्यापारी किसी वस्तु को तोल कर घरांवर करके ग्राहक को देता है उसी तरह हितमित अपने शब्दो को तोलकर भव्य जीवोको सदुपदेश करनेवाले और जीवन रूपी पृथ्वी मे गाडी हुई निधि को देखने वाले के समान अपने अन्दर अपने आत्मस्वरूप को देखने वाले ऐसे योगी का तप फलीभून नहीं होगा क्या ? ॥१०४।। 104. O, Aparajiteshwar / Is not the life of such a yogi successful who speaks to the promising souls the good things after weighing wordsshort and beneficial, as some businessman gives commodity to the customer after duly weighing, and looks on his soul-nature as some hidden tresure.? विवेचन - मन्थकार कहते है कि में रत ज्ञानी योगी अपने आत्म तत्त्व में ऐसा रत रहता है कि जैसे दुकानदार अपने दुकान की व्यापार सम्बन्धी वस्तु की तौल माप, लम्बाई चौड़ाई वजन इत्यादि कराके उसका भाव और वरूप हमेशा अपनी दुकान में आनेवाले ग्राहको को बतलाते हुए अपनी वस्तु के मोल भाव करने में रत रहता है तथा वाह्य निरर्थक कार्यों में तो यह मौन रहता है, पर अपने आवश्यक कार्यों के लिए चात-चीत किया करता है। इसी तरह परमहंस महान् योगी अपने आत्म स्वरूप में लीन होते हुए अपने आत्मा को इस तरह तोल मोल किया करते हैं कि आत्मा पुरुषाकार है, घटाकार है, आकाश के समान है तथा जमीन में गडी हुई निधि के समान है। इस शरीर रूपी भूमि में रत्नत्रय अमूल्य निधि के समान मौजूद है । अर्थात मृग के समान जगल में, गिरि गुफा मे, नदी व समुद्र के तट पर, वृक्ष के कोटर में तथा निर्जन स्थान आदि में विचरने वाले श्रात्मरत योगी महा पुरुष अपने अन्दर देखे हुए या जाने हुए आत्मिक रसस्वाद का अनुभव म्वयं करते हैं । तथा उनके निकट यदि कोई भव्य जीव आत्मकल्याण करने की इच्छा से श्रा भी जाय तो उसको भी उसका स्वरूप जैसा कि उन्होंने अपने अन्दर अनुभव किया है उसी के अनुमार समझाकर आत्म कल्याण का पथ प्रदर्शन किया करते हैं । इस पृथ्वी में रात दिन आत्मा के स्वरूप का चिन्तन करनेवाले अर्थात् अपने अमूल्य समय को शुद्धात्मोपयोग में लगानेवाले योगी धन्य नहीं है क्या १ अवश्य हैं। प्रश्नः - योगी की पहिचान क्या है ?
should thik about Jiva and Ajiva etc., nine Padarthas , vow of Ananta, about Aihat, Siddha, Acharya, Upadhyaya and all the'Sàdius-five Parmestins and nature of the soul. Because the thinking of these things will destroy anxieties and विवेचन - प्रन्थकार कहते हैं कि जो मनुष्य आत्म चिंतन करने की अभिलाषा से ससार में होने वाले सुख, दु.ख, शारीरिक कष्ट, संशय-भ्रम, द्रव्य क्षेत्र, काल, भाव आदि पाँच प्रकार के ससार के, अजीव आदि मात तत्त्व के, नौ पदार्थो के तथा अर्हन्त, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, सर्व साधु आदि पचपरमेष्ठियों के साथ अपने आत्म-स्वरूप का ध्यान करेगा उसकी चिन्ता क्या दूर नहीं होगी ? अवश्य होगी। के साथ सदा रहकर कष्ट देने वाला मुख्य संसार पाच प्रकार का है। इसका वर्णन तथा पच परमेष्टियों के स्वरूप का वर्णन पहले खड में कर चुके हैं अतः उसे देख कर तदनुसार व्यान का अभ्यास करना चाहिये । जीव, अजीव, आश्रव, । बॅर्धा, सर्वर, निर्जरा और मोक्ष ये सात तत्व हैं। इनमें पुण्य और पाप मिलाने से नौ प्रकार के हो जाते हैं। इन्हीं को नौ तत्त्व कहते हैं । इनका वर्णन यद्यपि प्रथम खंड में किया जा चुका है, पर फिर भी यहाँ पर हम प्रसंगोपात सक्षेप में वर्णन करेंगे। जैसे कि श्री कुन्दकुन्दाचार्य स्वामी ने अपने पंचास्तिकाय में कहा भी है कि - जीवाजीवा भावापुराणं पावंच संवतोसिं । संवर गिज्जर वंधो मोक्खो य हवन्तिते अठ्ठा॥एक सौ सोलह॥ जीव, अजीव, पुण्य, पाप, आश्रव, सवर, निर्जरा, बंध और मोक्ष ये नौ पदार्थ होते हैं । अर्थात् - यहाँ इन नौ पदार्थों का कुछ स्वरूप कहते हैं । देखना, जानना, जिस का स्वभाव है वह जीव पदार्थ है। उससे भिन्न लक्षण वाला पुद्गल आदि के पाच भेद रूप अजीव पदार्थ हैं। दानपूजा आदि छः श्रावश्यक कर्मों को आदि लेकर जीव का शुभ प्रभाव करना भाव पुण्य है। इस भाव पुण्य के तिमि से प्राप्त जो साता वेदनीय आदि अशुभ प्रकृति रूप पुद्गल का पिंड है सो द्रव्य पाप है। वरहित शुद्ध आत्मा के पदार्थ से विपरीत जो रागद्वेष मोह रूप जीव का परिणाम है सो भाव श्रव है। इस भाव के निमित्त से कर्म वर्गरणाके योग्य पुद्गलॉ का योगों द्वारा श्राना द्रव्यास्रव है। कर्मों को रोकने में समय जो विकल्प सहित आत्मा की प्राप्ति रूप परिणाम है सो भाव सवर है । इस भाव के निमित्त से नवीन द्रव्य कर्मो के आने का रुकना द्रव्यसवर है। कर्म की शक्ति को मिटाने का समर्थ जो चारह प्रकार तर्फेस बढ़ता हुआ शुद्धोपयोग हूँ सो सवर पूर्वक भाव निर्जरा है। इस शुद्धोपयोग के द्वारा रस रहित होकर पुराने बघे हुए कर्मों का एक देश जल जाना द्रव्य निर्जरा है। प्रकृति आदि बध से शून्य परमात्म पदार्थ से प्रतिकूल जो मिथ्यादर्शन च रागादि रूप चिकनाहट भाव है सो भाव बंध है। इस भाव चध के निमित्त से जैसे तेल लगे हुए शरीर में धूल चिपक जाती में है वैसे जीव और कर्म के प्रदेशों का एक दूसरे मे मिल जाना द्रव्य वध है । कर्मों के मूलसे हटाने में समर्थ जो शुद्ध आत्मा की प्राप्ति रूप जीव का परिणाम है, सो भाव मोक्ष है। इस भाव मोक्ष के निमित्त से जीव और कर्म के प्रदेशों का सम्पूर्णपने से भिन्न दो हो जाना, द्रव्य मोक्ष है। द्रव्य मोक्ष भाव मोक्ष ये दोनों जीव के परिणाम कारण हैं । पुण्य और पाप आत्मा को शुभाशुभ कर्म का वध करके हमेशा पुण्य के द्वारा देवगति या उत्तम कुल मे जन्म या राज्य पद आदि अनेक प्रकार की इन्द्रिय भोग सामग्री को प्राप्त करदेने वाले हैं, और पाप कर्म नरकादि गतियोंमें तथा नीच कुल तिर्यंचादि गतियों में ले जाकर अनेक दुःख देने वाला होता है, इस लिये है आत्मन् । पुण्य और पाप दोनों तुझे ससार में भ्रमण कराने वाले हैं ऐसा समझकर इन दोनों से भिन्न निजात्म स्वरूप शुद्धात्मा का ध्यान करो इसका ध्यान करने से हमेशा के लिये सुख शान्ति की प्राप्ति होकर मोक्ष साम्राज के अधिपति वन जाओगे ।।एक सौ तीन।। इस लिये जीव को हमेशा अपने चितवन व विचार में लीन होकर बाह्य वस्तु में मौन रहना श्रेष्ठ है, ऐसा अगले श्लोक में बतलाते हैःअदिरिसिदुदं कुडुवनन्ते पवनुडियंदे भव्यरं । निळपुत्र सुम्मनिर्प निजकार्य के पुरुपमृगंबोलुर्वियोळ ।।' पोळ व विविक्तसंपुगुव चैत निधानवनीक्षिपातनं । तोऴगने काण्वने सफलजन्मनला अपराजितेश्वरा ! एक सौ चार हे अपराजितेश्वर । जैसे कोई व्यापारी किसी वस्तु को तोल कर घरांवर करके ग्राहक को देता है उसी तरह हितमित अपने शब्दो को तोलकर भव्य जीवोको सदुपदेश करनेवाले और जीवन रूपी पृथ्वी मे गाडी हुई निधि को देखने वाले के समान अपने अन्दर अपने आत्मस्वरूप को देखने वाले ऐसे योगी का तप फलीभून नहीं होगा क्या ? ॥एक सौ चार।। एक सौ चार. O, Aparajiteshwar / Is not the life of such a yogi successful who speaks to the promising souls the good things after weighing wordsshort and beneficial, as some businessman gives commodity to the customer after duly weighing, and looks on his soul-nature as some hidden tresure.? विवेचन - मन्थकार कहते है कि में रत ज्ञानी योगी अपने आत्म तत्त्व में ऐसा रत रहता है कि जैसे दुकानदार अपने दुकान की व्यापार सम्बन्धी वस्तु की तौल माप, लम्बाई चौड़ाई वजन इत्यादि कराके उसका भाव और वरूप हमेशा अपनी दुकान में आनेवाले ग्राहको को बतलाते हुए अपनी वस्तु के मोल भाव करने में रत रहता है तथा वाह्य निरर्थक कार्यों में तो यह मौन रहता है, पर अपने आवश्यक कार्यों के लिए चात-चीत किया करता है। इसी तरह परमहंस महान् योगी अपने आत्म स्वरूप में लीन होते हुए अपने आत्मा को इस तरह तोल मोल किया करते हैं कि आत्मा पुरुषाकार है, घटाकार है, आकाश के समान है तथा जमीन में गडी हुई निधि के समान है। इस शरीर रूपी भूमि में रत्नत्रय अमूल्य निधि के समान मौजूद है । अर्थात मृग के समान जगल में, गिरि गुफा मे, नदी व समुद्र के तट पर, वृक्ष के कोटर में तथा निर्जन स्थान आदि में विचरने वाले श्रात्मरत योगी महा पुरुष अपने अन्दर देखे हुए या जाने हुए आत्मिक रसस्वाद का अनुभव म्वयं करते हैं । तथा उनके निकट यदि कोई भव्य जीव आत्मकल्याण करने की इच्छा से श्रा भी जाय तो उसको भी उसका स्वरूप जैसा कि उन्होंने अपने अन्दर अनुभव किया है उसी के अनुमार समझाकर आत्म कल्याण का पथ प्रदर्शन किया करते हैं । इस पृथ्वी में रात दिन आत्मा के स्वरूप का चिन्तन करनेवाले अर्थात् अपने अमूल्य समय को शुद्धात्मोपयोग में लगानेवाले योगी धन्य नहीं है क्या एक अवश्य हैं। प्रश्नः - योगी की पहिचान क्या है ?
वॉट्सऐप टू स्टेप वेरिफिकेशन का इस्तेमाल करना अकाउंट की सिक्यॉरिटी के लिए काफी जरूरी है। तो आइए डीटेल में जानते हैं इस फीचर को ऐक्टिवेट करने के तरीके के बारे में। नई दिल्ली आज पूरे विश्व में इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप WhatsApp का इस्तेमाल किया जाता है। यह एक ऐसा साधन है जिसके जरिए दुनियाभर के यूजर्स एक-दूसरे से दूर होने के बावजूद भी जुड़े रहते हैं। चाहे किसी को मैसेज भेजना हो या फिर कोई वीडियो, एक-दूसरे से बात करने का यह तरीका लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हो चुका है। इसे दुनिया का सबसे लोकप्रिय ऐप भी कहा जाता है। यूजर्स के एक्सपीरियंस को और भी बेहतर बनाने के लिए कंपनी कई नए फीचर्स लॉन्च करती रहती है। यूजर्स की सुरक्षा के मद्देनजर भी कंपनी ने काफी सावधानियां बरतने की कोशिश की है। चैट को एंड-टू-एंड एनक्रिप्टेड बनाने से लेकर कई अन्य फीचर्स तक यूजर्स के अकाउंट को सुरक्षित रखने का प्रयास जारी है। इसी क्रम में कंपनी ने ऐप को सिक्योर बनाने के लिए एक फीचर लॉन्च किया था जिसका नाम टू-स्टेप वेरिफिकेशन फीचर है। इस फीचर के जरिए WhatsApp अकाउंट्स के हैक होने का खतरा कम हो जाता है। इस फीचर के तहत यूजर अपने अकाउंट को दो लेयर में सिक्योर कर सकता है। यूजर को अपने अकाउंट को सिक्योर रखने के लिए यह फीचर इनेबल करना होता है। इसमें 6 अंकों का पासकोड लगाया जाता है। साथ ही ईमेल आईडी भी रजिस्टर की जाती है। ऐसे में अगर कभी आप अपना पासकोड भूल जाते हैं तो ईमेल आईडी के जरिए उसे रीसेट किया जा सकता है। वैसे तो लोगों को इस फीचर के बारे में पता होगा लेकिन जो यूजर्स इस फीचर को इस्तेमाल करना नहीं जानते हैं उनके लिए हम यह लेख लाए हैं। तो आइए जानते हैं WhatsApp के इस सिक्योरिटी फीचर टू-स्टेप वेरिफिकेशन को कैसे करें इनेबल, डिसेबल और रीसेट। इस तरह WhatsApp पर टू-स्टेप वेरिफिकेशन फीचर करें इनेबलः 1- सबसे पहले WhatsApp को ओपन करें। 2- इसके बाद राइड साइट में दिए गए तीन डॉट्स पर क्लिक करें। यहां आपको मेन्यू का विकल्प मिलेगा। 3- मेन्यू में दिए गए सभी ऑप्शन्स में से सेटिंग्स पर टैप करें। 4- इसके बाद अकाउंट के विकल्प को सेलेक्ट करें। 5- फिर टू-स्टेप वेरिफिकेशन विकल्प पर टैप करें। 6- इसके बाद इनेबल पर टैप कर दें। 7- इस पर टैप करने के बाद WhatsApp आपसे 6 अंकों का पासकोड मांगेगा। आप अपने अनुसार यह पासकोड सेट करें। 8- यह पासकोड आपको दो बार डालना होगा कंफर्मेशन के लिए। 9- इसके बाद जो स्क्रीन ओपन होगी उसमें ईमेल एड्रेस डालना होगा और फिर कंफर्म कर दें। 10-फिर Done के विकल्प पर टैप कर दें। ऐसा करने से टू-स्टेप वेरिफिकेशन फीचर इनेबल हो जाएगा। नोटः अगर आप यह पासकोड भूल जाते हैं तो आप अपना अकाउंट ईमेल आईडी के जरिए वेरिफाई कर पाएंगे। इस तरह WhatsApp पर टू-स्टेप वेरिफिकेशन फीचर करें डिसेबलः 1- इसके लिए सबसे पहले WhatsApp सेटिंग्स ओपन करें। 2- इसके बाद Account पर टैप करें। फिर टू-स्टेप वेरिफिकेशन पर टैप करें। 3- फिर डिसेबल पर टैप कर दें। 4- इस तरह बदलें टू-स्टेप वेरिफिकेशन पिनः 5- सबसे पहले WhatsApp सेटिंग ओपन करें। 6- फिर अकाउंट पर टैप करें। फिर टू-स्टेप वेरिफिकेशन पर टैप करें। 7- यहां पर Change PIN का विकल्प दिया गया होगा इस पर टैप कर दें। 8- WhatsApp यूजर्स इस तरह एड या बदल पाएंगे ई-मेल एड्रेसः 9- सबसे पहले WhatsApp सेटिंग ओपन करें। 10-फिर अकाउंट पर टैप करें। फिर टू-स्टेप वेरिफिकेशन पर टैप करें। 11-यहां पर Add Email Address या Change Email Address का विकल्प दिया गया होगा इस पर टैप कर दें। इस तरह पासकोड कर सकते हैं रीसेटः 1- सबसे पहले WhatsApp ओपन करें। 2- अगर आप अपना पासकोड भूल गए हैं तो आपको Forgot PIN पर टैप करना होगा। 3- फिर आपको Send email पर टैप करना होगा। 4- आपकी ईमेल आईडी पर एक रीसेट लिंक भेजा जाएगा। 5- इस रीसेट लिंक पर टैप करें और Confirm पर टैप करें। 6- इसके बाद WhatsApp को दोबारा ओपन करें और Forgot PIN पर टैप करें रीसेट कर दें। 7- बिना ईमेल आईडी इस तरह कर पाएंगे पासकोड रीसेटः इस तरह से पिन को रीसेट करने के लिए आपको 7 दिनों का इंतजार करना होगा- अगर आपने पिन रीसेट करने के लिए ईमेल आईडी नहीं दिया है। पिन रीसेट करने के लिए आप ईमेल आईडी भूल गए हैं। फोन नंबर का इस्तेमाल शुरू करने से पहले ही किसी और ने टू-स्टेप वेरिफिकेशन पिन सेट किया हो तो। 7 दिन के बाद आपको WhatsApp ओपन करना होगा। फिर Forgot PIN पर टैप करें रीसेट कर दें।
वॉट्सऐप टू स्टेप वेरिफिकेशन का इस्तेमाल करना अकाउंट की सिक्यॉरिटी के लिए काफी जरूरी है। तो आइए डीटेल में जानते हैं इस फीचर को ऐक्टिवेट करने के तरीके के बारे में। नई दिल्ली आज पूरे विश्व में इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप WhatsApp का इस्तेमाल किया जाता है। यह एक ऐसा साधन है जिसके जरिए दुनियाभर के यूजर्स एक-दूसरे से दूर होने के बावजूद भी जुड़े रहते हैं। चाहे किसी को मैसेज भेजना हो या फिर कोई वीडियो, एक-दूसरे से बात करने का यह तरीका लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हो चुका है। इसे दुनिया का सबसे लोकप्रिय ऐप भी कहा जाता है। यूजर्स के एक्सपीरियंस को और भी बेहतर बनाने के लिए कंपनी कई नए फीचर्स लॉन्च करती रहती है। यूजर्स की सुरक्षा के मद्देनजर भी कंपनी ने काफी सावधानियां बरतने की कोशिश की है। चैट को एंड-टू-एंड एनक्रिप्टेड बनाने से लेकर कई अन्य फीचर्स तक यूजर्स के अकाउंट को सुरक्षित रखने का प्रयास जारी है। इसी क्रम में कंपनी ने ऐप को सिक्योर बनाने के लिए एक फीचर लॉन्च किया था जिसका नाम टू-स्टेप वेरिफिकेशन फीचर है। इस फीचर के जरिए WhatsApp अकाउंट्स के हैक होने का खतरा कम हो जाता है। इस फीचर के तहत यूजर अपने अकाउंट को दो लेयर में सिक्योर कर सकता है। यूजर को अपने अकाउंट को सिक्योर रखने के लिए यह फीचर इनेबल करना होता है। इसमें छः अंकों का पासकोड लगाया जाता है। साथ ही ईमेल आईडी भी रजिस्टर की जाती है। ऐसे में अगर कभी आप अपना पासकोड भूल जाते हैं तो ईमेल आईडी के जरिए उसे रीसेट किया जा सकता है। वैसे तो लोगों को इस फीचर के बारे में पता होगा लेकिन जो यूजर्स इस फीचर को इस्तेमाल करना नहीं जानते हैं उनके लिए हम यह लेख लाए हैं। तो आइए जानते हैं WhatsApp के इस सिक्योरिटी फीचर टू-स्टेप वेरिफिकेशन को कैसे करें इनेबल, डिसेबल और रीसेट। इस तरह WhatsApp पर टू-स्टेप वेरिफिकेशन फीचर करें इनेबलः एक- सबसे पहले WhatsApp को ओपन करें। दो- इसके बाद राइड साइट में दिए गए तीन डॉट्स पर क्लिक करें। यहां आपको मेन्यू का विकल्प मिलेगा। तीन- मेन्यू में दिए गए सभी ऑप्शन्स में से सेटिंग्स पर टैप करें। चार- इसके बाद अकाउंट के विकल्प को सेलेक्ट करें। पाँच- फिर टू-स्टेप वेरिफिकेशन विकल्प पर टैप करें। छः- इसके बाद इनेबल पर टैप कर दें। सात- इस पर टैप करने के बाद WhatsApp आपसे छः अंकों का पासकोड मांगेगा। आप अपने अनुसार यह पासकोड सेट करें। आठ- यह पासकोड आपको दो बार डालना होगा कंफर्मेशन के लिए। नौ- इसके बाद जो स्क्रीन ओपन होगी उसमें ईमेल एड्रेस डालना होगा और फिर कंफर्म कर दें। दस-फिर Done के विकल्प पर टैप कर दें। ऐसा करने से टू-स्टेप वेरिफिकेशन फीचर इनेबल हो जाएगा। नोटः अगर आप यह पासकोड भूल जाते हैं तो आप अपना अकाउंट ईमेल आईडी के जरिए वेरिफाई कर पाएंगे। इस तरह WhatsApp पर टू-स्टेप वेरिफिकेशन फीचर करें डिसेबलः एक- इसके लिए सबसे पहले WhatsApp सेटिंग्स ओपन करें। दो- इसके बाद Account पर टैप करें। फिर टू-स्टेप वेरिफिकेशन पर टैप करें। तीन- फिर डिसेबल पर टैप कर दें। चार- इस तरह बदलें टू-स्टेप वेरिफिकेशन पिनः पाँच- सबसे पहले WhatsApp सेटिंग ओपन करें। छः- फिर अकाउंट पर टैप करें। फिर टू-स्टेप वेरिफिकेशन पर टैप करें। सात- यहां पर Change PIN का विकल्प दिया गया होगा इस पर टैप कर दें। आठ- WhatsApp यूजर्स इस तरह एड या बदल पाएंगे ई-मेल एड्रेसः नौ- सबसे पहले WhatsApp सेटिंग ओपन करें। दस-फिर अकाउंट पर टैप करें। फिर टू-स्टेप वेरिफिकेशन पर टैप करें। ग्यारह-यहां पर Add Email Address या Change Email Address का विकल्प दिया गया होगा इस पर टैप कर दें। इस तरह पासकोड कर सकते हैं रीसेटः एक- सबसे पहले WhatsApp ओपन करें। दो- अगर आप अपना पासकोड भूल गए हैं तो आपको Forgot PIN पर टैप करना होगा। तीन- फिर आपको Send email पर टैप करना होगा। चार- आपकी ईमेल आईडी पर एक रीसेट लिंक भेजा जाएगा। पाँच- इस रीसेट लिंक पर टैप करें और Confirm पर टैप करें। छः- इसके बाद WhatsApp को दोबारा ओपन करें और Forgot PIN पर टैप करें रीसेट कर दें। सात- बिना ईमेल आईडी इस तरह कर पाएंगे पासकोड रीसेटः इस तरह से पिन को रीसेट करने के लिए आपको सात दिनों का इंतजार करना होगा- अगर आपने पिन रीसेट करने के लिए ईमेल आईडी नहीं दिया है। पिन रीसेट करने के लिए आप ईमेल आईडी भूल गए हैं। फोन नंबर का इस्तेमाल शुरू करने से पहले ही किसी और ने टू-स्टेप वेरिफिकेशन पिन सेट किया हो तो। सात दिन के बाद आपको WhatsApp ओपन करना होगा। फिर Forgot PIN पर टैप करें रीसेट कर दें।
Indore Crime News: इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। भंवरकुआं पुलिस ने बेटे की शिकायत पर पिता पर धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। आरोपित पर आरोप है कि उसने फर्जी हस्ताक्षर कर मकान पर 70 लाख रुपये का ऋण ले लिया। उसने भाई-बहनों पर भी साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया है। हालांकि पुलिस ने अभी पिता को ही आरोपित बनाया है। उसके खिलाफ धारा 420 की एफआइआर दर्ज की गई है। शिकायती आवेदन में तो लोन स्वीकृत करने वाले बैंक अफसर और दस्तावजों का परीक्षण करने वाली सर्च टीम पर भी संलिप्त होने का आरोप लगाया गया है। पुलिस शेष संदेहियों की भूमिका की जांच कर रही है। भंवरकुआं टीआइ शशिकांत चौरसिया के मुताबिक मनीष बाग कालोनी निवासी रमाकांत सिलावट की शिकायत पर उसके पिता लक्ष्मीनारायण पुत्र इंदर सिलावट के खिलाफ एफआइआर दर्ज हुई है। रमाकांत ने लिखित शिकायत कर कहा कि उसके पिता लक्ष्मीनारायण ने बेटे ब्रजेश, राजेश, राजकुमार, मनोज और बहन प्रीति सिलावट ने फर्जी हस्ताक्षर संयुक्त प्रोपर्टी पर चोला मंडलम फायनेंस से करीब 70 लाख रुपये का बैंक लोन ले लिया। राशि न चुकाने पर लोन करीब 80 लाख रुपये हो गया और बैंक संपत्ति से बेदखल करने की कोशिश कर रही है। रमाकांत के मुताबिक लोन लेने के लिए नामांतरण, मोर्डगेज दस्तावेजों पर उसके फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं। टीआइ के मुताबिक जिस प्रापर्टी पर लोन लिया वह रमाकांत की मां स्व. रतनबाई के नाम पर है। सपना संगीता क्षेत्र में स्थित इस प्रापर्टी की कीमत करोड़ों रुपये है। संयुक्त मालिकी की इस प्रोपर्टी को गिरवी रखने के लिए सभी भाईयों की सहमती आवश्यक थी। आरोपितों ने रमाकांत के फर्जी हस्ताक्षर कर लिए। बैंक ने गिरवी प्रोपर्टी को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू की तो पता चला उस पर 80 लाख रुपये बकाया है। रमाकांत ने स्वयं नगर निगम से दस्तावेज निकाले। स्टाप पर फर्जी हस्ताक्षरों की जांच करवा कर शिकायत की।
Indore Crime News: इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। भंवरकुआं पुलिस ने बेटे की शिकायत पर पिता पर धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। आरोपित पर आरोप है कि उसने फर्जी हस्ताक्षर कर मकान पर सत्तर लाख रुपये का ऋण ले लिया। उसने भाई-बहनों पर भी साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया है। हालांकि पुलिस ने अभी पिता को ही आरोपित बनाया है। उसके खिलाफ धारा चार सौ बीस की एफआइआर दर्ज की गई है। शिकायती आवेदन में तो लोन स्वीकृत करने वाले बैंक अफसर और दस्तावजों का परीक्षण करने वाली सर्च टीम पर भी संलिप्त होने का आरोप लगाया गया है। पुलिस शेष संदेहियों की भूमिका की जांच कर रही है। भंवरकुआं टीआइ शशिकांत चौरसिया के मुताबिक मनीष बाग कालोनी निवासी रमाकांत सिलावट की शिकायत पर उसके पिता लक्ष्मीनारायण पुत्र इंदर सिलावट के खिलाफ एफआइआर दर्ज हुई है। रमाकांत ने लिखित शिकायत कर कहा कि उसके पिता लक्ष्मीनारायण ने बेटे ब्रजेश, राजेश, राजकुमार, मनोज और बहन प्रीति सिलावट ने फर्जी हस्ताक्षर संयुक्त प्रोपर्टी पर चोला मंडलम फायनेंस से करीब सत्तर लाख रुपये का बैंक लोन ले लिया। राशि न चुकाने पर लोन करीब अस्सी लाख रुपये हो गया और बैंक संपत्ति से बेदखल करने की कोशिश कर रही है। रमाकांत के मुताबिक लोन लेने के लिए नामांतरण, मोर्डगेज दस्तावेजों पर उसके फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं। टीआइ के मुताबिक जिस प्रापर्टी पर लोन लिया वह रमाकांत की मां स्व. रतनबाई के नाम पर है। सपना संगीता क्षेत्र में स्थित इस प्रापर्टी की कीमत करोड़ों रुपये है। संयुक्त मालिकी की इस प्रोपर्टी को गिरवी रखने के लिए सभी भाईयों की सहमती आवश्यक थी। आरोपितों ने रमाकांत के फर्जी हस्ताक्षर कर लिए। बैंक ने गिरवी प्रोपर्टी को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू की तो पता चला उस पर अस्सी लाख रुपये बकाया है। रमाकांत ने स्वयं नगर निगम से दस्तावेज निकाले। स्टाप पर फर्जी हस्ताक्षरों की जांच करवा कर शिकायत की।
दवा 'Prozhestozhel'। उपयोग के लिए निर्देश। दवा तैयार करने "Prozhestozhel" mastodynia और तंतुपुटीय mastopathy का इलाज किया जाता। यह बाहरी उपयोग के लिए बेरंग पारदर्शी जेल के रूप में आता है। वर्तमान दवा के मुख्य घटक के रूप में प्रोजेस्टेरोन कार्य करता है। एस्ट्रोजन रिसेप्टर अवरुद्ध करके, यह नरम ऊतक से अवशोषण तरल बेहतर बनाता है। यह दूध नलिकाएं और ब्लॉक प्रोलैक्टिन रिसेप्टर्स की संपीड़न कम कर देता है, जिससे laktopoez को कम करने। जेल जो आवेदन की अपनी ट्रांसडर्मल विधि को इंगित करता है, मानव शरीर पर कोई प्रतिकूल असर पड़ता है उपयोग के लिए "Prozhestozhel" निर्देश। प्रयोगों से पता चला है कि नशीली दवाओं के आवेदन के बाद एक घंटे, रक्त हार्मोन के स्तर को अपरिवर्तित रहे। प्रोजेस्टेरोन और 50% करने के लिए दवा के अन्य घटकों के गुर्दों द्वारा मानव शरीर से और पित्त में 10% से प्राप्त कर रहे हैं। 2, 5 पर जेल से एक आवेदन, मशीन के साथ स्तन की त्वचा के लिए लागू किया जाना है और छोड़ दिया थोड़ी देर के लिए (दवा की पूरी अवशोषण जब तक) का अर्थ है। यह प्रक्रिया मासिक धर्म के दूसरे चरण (दिन 16-25) के दौरान दो बार एक दिन के लिए सिफारिश की है। इस दवा के साथ उपचार के दौरान मासिक धर्म के तीन चक्र के लिए किया जाता है। फिर से इलाज केवल डॉक्टर की सलाह पर किया जाता है। उपयोग के लिए निर्देश इंगित करता है कि दवा की बजाय कम प्रणालीगत अवशोषण के कारण, किसी भी जरूरत से ज्यादा संभावना नहीं है। इस दवा का उपयोग करने में कमजोर दर्द देखा जा सकता है जब स्तन, रक्तप्रदर, निस्तब्धता (गर्म), कामेच्छा में कमी। बल्कि दुर्लभ आवेदन साइट पर्विल होता है। कुछ मामलों में गर्दन और होंठ, सिर दर्द, बुखार, मतली के संभावित सूजन। जब जेल और संयुक्त हार्मोनल गर्भ निरोधकों के दोनों का उपयोग कर, उसके प्रभाव काफी बढ़ा सकते हैं। उपयोग के लिए निर्देश इंगित करता है कि दवा एक तापमान पच्चीस डिग्री से अधिक नहीं पर रखा जाना चाहिए की सिफारिश की है। स्वास्थ्य के लिए नुकसान के बिना दवा का प्रयोग करें तीन साल से अधिक नहीं हो सकता है। नोडल रूपों तंतुपुटीय mastopathy, जननांग के कैंसर और की उपस्थिति में दवा एजेंट लागू न करें स्तन ट्यूमर अनिश्चित एटियलजि की, दूसरे और गर्भावस्था की तीसरी तिमाही। यह इसकी संरचना में उसके घटकों के लिए अत्यधिक संवेदनशीलता के साथ दवा का उपयोग करने के लिए अनुशंसित नहीं है। गुर्दे और जिगर की विफलता, मिर्गी, दमा, अवसाद, माइग्रेन, अस्थानिक गर्भावस्था, हाइपरलाइपोप्रोटीनेमिया, प्रवृत्ति घनास्त्रता, तीव्र शिराशोथ, योनि, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और पोरफाइरिया से खून बह रहा में दवा एजेंट अत्यधिक सावधानी के साथ किया जाना चाहिए। इसके उपयोग के लिए निर्देश इंगित करता है कि जेल के आवेदन के बाद सूर्य के प्रकाश के त्वचा के संपर्क से बचना चाहिए। दवा त्वचा और में मला नहीं किया जाना चाहिए स्तन ग्रंथियों यह मालिश करने अनुशंसित नहीं है। दवा एजेंट mastodynia में इस्तेमाल किया जा सकता है, मौखिक गर्भ निरोधकों के उपयोग से उत्पन्न होने, में यौवन और रजोनिवृत्ति के दौरान। दवा "Prozhestozhel" मरीज की ड्राइव करने की क्षमता पर के प्रभाव पर अध्ययन किया गया है।
दवा 'Prozhestozhel'। उपयोग के लिए निर्देश। दवा तैयार करने "Prozhestozhel" mastodynia और तंतुपुटीय mastopathy का इलाज किया जाता। यह बाहरी उपयोग के लिए बेरंग पारदर्शी जेल के रूप में आता है। वर्तमान दवा के मुख्य घटक के रूप में प्रोजेस्टेरोन कार्य करता है। एस्ट्रोजन रिसेप्टर अवरुद्ध करके, यह नरम ऊतक से अवशोषण तरल बेहतर बनाता है। यह दूध नलिकाएं और ब्लॉक प्रोलैक्टिन रिसेप्टर्स की संपीड़न कम कर देता है, जिससे laktopoez को कम करने। जेल जो आवेदन की अपनी ट्रांसडर्मल विधि को इंगित करता है, मानव शरीर पर कोई प्रतिकूल असर पड़ता है उपयोग के लिए "Prozhestozhel" निर्देश। प्रयोगों से पता चला है कि नशीली दवाओं के आवेदन के बाद एक घंटे, रक्त हार्मोन के स्तर को अपरिवर्तित रहे। प्रोजेस्टेरोन और पचास% करने के लिए दवा के अन्य घटकों के गुर्दों द्वारा मानव शरीर से और पित्त में दस% से प्राप्त कर रहे हैं। दो, पाँच पर जेल से एक आवेदन, मशीन के साथ स्तन की त्वचा के लिए लागू किया जाना है और छोड़ दिया थोड़ी देर के लिए का अर्थ है। यह प्रक्रिया मासिक धर्म के दूसरे चरण के दौरान दो बार एक दिन के लिए सिफारिश की है। इस दवा के साथ उपचार के दौरान मासिक धर्म के तीन चक्र के लिए किया जाता है। फिर से इलाज केवल डॉक्टर की सलाह पर किया जाता है। उपयोग के लिए निर्देश इंगित करता है कि दवा की बजाय कम प्रणालीगत अवशोषण के कारण, किसी भी जरूरत से ज्यादा संभावना नहीं है। इस दवा का उपयोग करने में कमजोर दर्द देखा जा सकता है जब स्तन, रक्तप्रदर, निस्तब्धता , कामेच्छा में कमी। बल्कि दुर्लभ आवेदन साइट पर्विल होता है। कुछ मामलों में गर्दन और होंठ, सिर दर्द, बुखार, मतली के संभावित सूजन। जब जेल और संयुक्त हार्मोनल गर्भ निरोधकों के दोनों का उपयोग कर, उसके प्रभाव काफी बढ़ा सकते हैं। उपयोग के लिए निर्देश इंगित करता है कि दवा एक तापमान पच्चीस डिग्री से अधिक नहीं पर रखा जाना चाहिए की सिफारिश की है। स्वास्थ्य के लिए नुकसान के बिना दवा का प्रयोग करें तीन साल से अधिक नहीं हो सकता है। नोडल रूपों तंतुपुटीय mastopathy, जननांग के कैंसर और की उपस्थिति में दवा एजेंट लागू न करें स्तन ट्यूमर अनिश्चित एटियलजि की, दूसरे और गर्भावस्था की तीसरी तिमाही। यह इसकी संरचना में उसके घटकों के लिए अत्यधिक संवेदनशीलता के साथ दवा का उपयोग करने के लिए अनुशंसित नहीं है। गुर्दे और जिगर की विफलता, मिर्गी, दमा, अवसाद, माइग्रेन, अस्थानिक गर्भावस्था, हाइपरलाइपोप्रोटीनेमिया, प्रवृत्ति घनास्त्रता, तीव्र शिराशोथ, योनि, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और पोरफाइरिया से खून बह रहा में दवा एजेंट अत्यधिक सावधानी के साथ किया जाना चाहिए। इसके उपयोग के लिए निर्देश इंगित करता है कि जेल के आवेदन के बाद सूर्य के प्रकाश के त्वचा के संपर्क से बचना चाहिए। दवा त्वचा और में मला नहीं किया जाना चाहिए स्तन ग्रंथियों यह मालिश करने अनुशंसित नहीं है। दवा एजेंट mastodynia में इस्तेमाल किया जा सकता है, मौखिक गर्भ निरोधकों के उपयोग से उत्पन्न होने, में यौवन और रजोनिवृत्ति के दौरान। दवा "Prozhestozhel" मरीज की ड्राइव करने की क्षमता पर के प्रभाव पर अध्ययन किया गया है।
मेथीः मेथी में पाए जाने वाले पोषक तत्वों में नियासिन, पोटैशियम, प्रोटीन, फाइबर, विटामिन सी, आयरन आदि शामिल होते हैं। इनके सेवन से अस्थमा के साथ ही कई अन्य बीमारियों से भी बचे रह सकते हैं। इसका प्रयोग आप किसी भी प्रकार से कर सकते हैं। आप इसे भोजन में डालकर या फिर इसके पाउडर को पानी के साथ भी पी सकते हैं।
मेथीः मेथी में पाए जाने वाले पोषक तत्वों में नियासिन, पोटैशियम, प्रोटीन, फाइबर, विटामिन सी, आयरन आदि शामिल होते हैं। इनके सेवन से अस्थमा के साथ ही कई अन्य बीमारियों से भी बचे रह सकते हैं। इसका प्रयोग आप किसी भी प्रकार से कर सकते हैं। आप इसे भोजन में डालकर या फिर इसके पाउडर को पानी के साथ भी पी सकते हैं।
वित्तीय संकट से जूझ रही जेट एयरवेज कंपनी का असर देहरादून जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर भी दिखाई देने लगा है। जेट एयरवेज कंपनी ने देहरादून एयरपोर्ट पर मुंबई और गुवाहाटी की हवाई सेवा पांच मई तक के लिए स्थगित कर दी है। फ्लाइट स्थगित होने से शनिवार को हवाई यात्रियों को परेशानी से दो चार होना पड़ा। शनिवार को मुंबई और गुवाहाटी जाने के लिए जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर पहुंचे कई हवाई यात्रियों को वापस लौटने और दूसरे माध्यमों से जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। मौजूदा समय में देहरादून से सिर्फ जेट एयरवेज ही मुंबई के लिए अपनी सेवाएं उपलब्ध करा रहा है। राज्य के पर्यटन और तीर्थाटन के लिए आने वाले लोगों को हवाई सेवा उपलब्ध नहीं होने से आगे भी परेशानी झेलनी पड़ सकती है। मुंबई के लिए जेट एयरवेज काफी लंबे समय से अपनी हवाई सेवा उपलब्ध कराता आ रहा है। मुंबई जैसे मुख्य शहर से भारी संख्या में पर्यटक उत्तराखंड घूमने के लिए आते हैं। सेवा स्थगित होने से ऐसे हवाई यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ सकती है। यदि ऐसा ही रहा तो दिल्ली जैसे शहरों की उड़ानों पर भी असर पड़ना स्वाभाविक है। विमानन कपंनी के अधिकारियों के अनुसार दिल्ली की उड़ानें अभी सामान्य है। मई महीने से चारधाम यात्रा भी शुरू होने जा रही है। ऐसे में मुंबई और गुवाहाटी की हवाई सेवा अचानक स्थगित होने के कारण उन श्रद्धालुओं को परेशानी उठानी पड़ सकती है, जिन्होंने हवाई यात्रा से जौलीग्रांट तक पहुंचने की योजना बनाई हुई थी।
वित्तीय संकट से जूझ रही जेट एयरवेज कंपनी का असर देहरादून जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर भी दिखाई देने लगा है। जेट एयरवेज कंपनी ने देहरादून एयरपोर्ट पर मुंबई और गुवाहाटी की हवाई सेवा पांच मई तक के लिए स्थगित कर दी है। फ्लाइट स्थगित होने से शनिवार को हवाई यात्रियों को परेशानी से दो चार होना पड़ा। शनिवार को मुंबई और गुवाहाटी जाने के लिए जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर पहुंचे कई हवाई यात्रियों को वापस लौटने और दूसरे माध्यमों से जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। मौजूदा समय में देहरादून से सिर्फ जेट एयरवेज ही मुंबई के लिए अपनी सेवाएं उपलब्ध करा रहा है। राज्य के पर्यटन और तीर्थाटन के लिए आने वाले लोगों को हवाई सेवा उपलब्ध नहीं होने से आगे भी परेशानी झेलनी पड़ सकती है। मुंबई के लिए जेट एयरवेज काफी लंबे समय से अपनी हवाई सेवा उपलब्ध कराता आ रहा है। मुंबई जैसे मुख्य शहर से भारी संख्या में पर्यटक उत्तराखंड घूमने के लिए आते हैं। सेवा स्थगित होने से ऐसे हवाई यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ सकती है। यदि ऐसा ही रहा तो दिल्ली जैसे शहरों की उड़ानों पर भी असर पड़ना स्वाभाविक है। विमानन कपंनी के अधिकारियों के अनुसार दिल्ली की उड़ानें अभी सामान्य है। मई महीने से चारधाम यात्रा भी शुरू होने जा रही है। ऐसे में मुंबई और गुवाहाटी की हवाई सेवा अचानक स्थगित होने के कारण उन श्रद्धालुओं को परेशानी उठानी पड़ सकती है, जिन्होंने हवाई यात्रा से जौलीग्रांट तक पहुंचने की योजना बनाई हुई थी।
श्रीनगरः रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) पेरिस स्थित एक संगठन है, जो मीडिया पर नज़र रखने का काम करता है। बुधवार को आरएसएफ ने कहा कि भारत सरकार को कश्मीर प्रेस क्लब (केपीसी) को तुरंत दोबारा खुलवाना चाहिए जिसे जम्मू-कश्मीर सरकार ने पिछले चार दिनों से बंद कर रखा है। एक तीखे वक्तव्य में आरएसएफ ने कहा कि क्षेत्रीय प्रशासन ने एक पत्रकारों के समूह की मदद की, जिससे राज्य समर्थित तख्तापलट संभव हो पाया, जिसके चलते प्रेस क्लब को बंद करना पड़ा। आरएसएफ के एशिया-प्रशांत डेस्क के प्रमुख डेनियल बासटार्ड ने अपने वक्तव्य में कहा, "हम जम्मू-कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा से तुरंत केपीसी का लाइसेंस जारी करने और इसे दोबारा खोलने का आदेश देने की अपील करते हैं।" आरएसएफ ने क्लब को तुरंत खोले जाने की अपील की। यहां कश्मीरी पत्रकार आपस में बैठकर अपनी समस्याओं पर विचार-विमर्श करते थे और प्रेस की आज़ादी की रक्षा करते थे। मीडिया पर निगरानी का काम करने वाले आरएसएफ ने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर से अगस्त 2019 में भारतीय प्रशासन द्वारा विशेष दर्जा छीने जाने के बाद से प्रेस की स्वतंत्रता के उल्लंघन की घटनाएं इतनी ज़्यादा बढ़ गई हैं कि अब यह क्षेत्र सूचना और जानकारी का नया "ब्लैक होल" बनने वाला है। बता दें श्रीनगर में केपीसी का कुछ पत्रकारों ने "अधिभार" धारण करने का दावा किया था, और खुद को कल्ब की नई प्रबंधक संस्था घोषित कर दिया था। इस दौरान वहां राज्य के दर्जन भर से ज़्यादा सुरक्षाकर्मी भी मौजूद थे। इस चीज की स्थानीय और राष्ट्रीय पत्रकार संस्थाओं ने कड़ी निंदा की थी। क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियों ने भी बड़े पैमाने पर कश्मीर प्रेस क्लब में हुई घटना की निंदा की थी। महबूबा मुफ़्ती और उमर अब्दुल्ला ने इस तख्तापलट को क्षेत्र में मीडिया की आवाज़ का गला घोंटने वाली व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा करार दिया था। पूर्व जम्मू-कश्मीर राज्य में विधायक रहे हकीम यासीन ने क्लब को मनमाफ़िक तरीके से बंद करने के सरकारी फ़ैसले की आलोचना की थी। उन्होंने कहा कि यह फ़ैसला प्रेस के कामकाज़ को बर्बाद करने जैसा है। एक नए वक्तव्य में अलगाववादी समूह हुर्रियत कॉन्फ्रेंस (एपीएचसी- ऑल पार्टीज़ हुर्रियत कॉन्फ्रेंस) ने बुधवार को प्रशासन द्वारा केपीसी को जबरदस्ती "कब्ज़ाए" जाने और उसे बंद करने की निंदा की। इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें। अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।
श्रीनगरः रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स पेरिस स्थित एक संगठन है, जो मीडिया पर नज़र रखने का काम करता है। बुधवार को आरएसएफ ने कहा कि भारत सरकार को कश्मीर प्रेस क्लब को तुरंत दोबारा खुलवाना चाहिए जिसे जम्मू-कश्मीर सरकार ने पिछले चार दिनों से बंद कर रखा है। एक तीखे वक्तव्य में आरएसएफ ने कहा कि क्षेत्रीय प्रशासन ने एक पत्रकारों के समूह की मदद की, जिससे राज्य समर्थित तख्तापलट संभव हो पाया, जिसके चलते प्रेस क्लब को बंद करना पड़ा। आरएसएफ के एशिया-प्रशांत डेस्क के प्रमुख डेनियल बासटार्ड ने अपने वक्तव्य में कहा, "हम जम्मू-कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा से तुरंत केपीसी का लाइसेंस जारी करने और इसे दोबारा खोलने का आदेश देने की अपील करते हैं।" आरएसएफ ने क्लब को तुरंत खोले जाने की अपील की। यहां कश्मीरी पत्रकार आपस में बैठकर अपनी समस्याओं पर विचार-विमर्श करते थे और प्रेस की आज़ादी की रक्षा करते थे। मीडिया पर निगरानी का काम करने वाले आरएसएफ ने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर से अगस्त दो हज़ार उन्नीस में भारतीय प्रशासन द्वारा विशेष दर्जा छीने जाने के बाद से प्रेस की स्वतंत्रता के उल्लंघन की घटनाएं इतनी ज़्यादा बढ़ गई हैं कि अब यह क्षेत्र सूचना और जानकारी का नया "ब्लैक होल" बनने वाला है। बता दें श्रीनगर में केपीसी का कुछ पत्रकारों ने "अधिभार" धारण करने का दावा किया था, और खुद को कल्ब की नई प्रबंधक संस्था घोषित कर दिया था। इस दौरान वहां राज्य के दर्जन भर से ज़्यादा सुरक्षाकर्मी भी मौजूद थे। इस चीज की स्थानीय और राष्ट्रीय पत्रकार संस्थाओं ने कड़ी निंदा की थी। क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियों ने भी बड़े पैमाने पर कश्मीर प्रेस क्लब में हुई घटना की निंदा की थी। महबूबा मुफ़्ती और उमर अब्दुल्ला ने इस तख्तापलट को क्षेत्र में मीडिया की आवाज़ का गला घोंटने वाली व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा करार दिया था। पूर्व जम्मू-कश्मीर राज्य में विधायक रहे हकीम यासीन ने क्लब को मनमाफ़िक तरीके से बंद करने के सरकारी फ़ैसले की आलोचना की थी। उन्होंने कहा कि यह फ़ैसला प्रेस के कामकाज़ को बर्बाद करने जैसा है। एक नए वक्तव्य में अलगाववादी समूह हुर्रियत कॉन्फ्रेंस ने बुधवार को प्रशासन द्वारा केपीसी को जबरदस्ती "कब्ज़ाए" जाने और उसे बंद करने की निंदा की। इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें। अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।
नई दिल्ली, एजेंसियां। Gold Silver Price Today, 22 Aug: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोर रुख के बीच राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोमवार को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के मुताबिक दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोने (Gold Rate Today) का भाव 315 रुपये टूटकर 51,679 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। बीते कारोबारी सत्र में सोने का भाव 51,994 रुपये प्रति 10 ग्राम पर दर्ज किया गया था। चांदी (Silver rate today) की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई। दिल्ली के सर्राफा बाजार में चांदी 635 रुपये टूटकर 55,416 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव गिरावट के साथ 1,737 डॉलर प्रति औंस पर जबकि चांदी 18. 90 डॉलर प्रति औंस पर स्थिर है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज (HDFC Securities) के वरिष्ठ विश्लेषक (Commodities) तपन पटेल (Tapan Patel) के मुताबिक डॉलर की मजबूती और फेडरल रिजर्व के अधिकारियों से आक्रामक रुख का संकेत मिलने से सोने की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है। वायदा कारोबार में सोमवार को सोना 297 रुपये की गिरावट के साथ 51,182 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखा। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (Multi Commodity Exchange) में अक्टूबर वायदा सोना 297 रुपये यानी 0. 58 प्रतिशत की गिरावट के साथ 51,182 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखा। विश्लेषकों ने सोने की कीमतों में गिरावट की एक दूसरी वजह भी बताया है। उनका कहना है कि वायदा कारोबार में प्रतिभागियों द्वारा सौदों में कटौती के चलते सोने की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है। वैश्विक स्तर पर भी सोने की कीमतों में गिरावट का दौर जारी है। न्यूयॉर्क में सोना 0. 71 फीसद की गिरावट के साथ 1,750. 40 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता नजर आया।
नई दिल्ली, एजेंसियां। Gold Silver Price Today, बाईस अगस्त: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोर रुख के बीच राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोमवार को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के मुताबिक दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोने का भाव तीन सौ पंद्रह रुपयापये टूटकर इक्यावन,छः सौ उन्यासी रुपयापये प्रति दस ग्राम पर आ गया। बीते कारोबारी सत्र में सोने का भाव इक्यावन,नौ सौ चौरानवे रुपयापये प्रति दस ग्राम पर दर्ज किया गया था। चांदी की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई। दिल्ली के सर्राफा बाजार में चांदी छः सौ पैंतीस रुपयापये टूटकर पचपन,चार सौ सोलह रुपयापये प्रति किलोग्राम पर आ गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव गिरावट के साथ एक,सात सौ सैंतीस डॉलर प्रति औंस पर जबकि चांदी अट्ठारह. नब्बे डॉलर प्रति औंस पर स्थिर है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक तपन पटेल के मुताबिक डॉलर की मजबूती और फेडरल रिजर्व के अधिकारियों से आक्रामक रुख का संकेत मिलने से सोने की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है। वायदा कारोबार में सोमवार को सोना दो सौ सत्तानवे रुपयापये की गिरावट के साथ इक्यावन,एक सौ बयासी रुपयापये प्रति दस ग्राम पर कारोबार करता दिखा। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में अक्टूबर वायदा सोना दो सौ सत्तानवे रुपयापये यानी शून्य. अट्ठावन प्रतिशत की गिरावट के साथ इक्यावन,एक सौ बयासी रुपयापये प्रति दस ग्राम पर कारोबार करता दिखा। विश्लेषकों ने सोने की कीमतों में गिरावट की एक दूसरी वजह भी बताया है। उनका कहना है कि वायदा कारोबार में प्रतिभागियों द्वारा सौदों में कटौती के चलते सोने की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है। वैश्विक स्तर पर भी सोने की कीमतों में गिरावट का दौर जारी है। न्यूयॉर्क में सोना शून्य. इकहत्तर फीसद की गिरावट के साथ एक,सात सौ पचास. चालीस डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता नजर आया।
ने दृश्य रो मतलब भी विचार में आवेगा। ई यूँ दर्शन ही विचारणो चावे । इच्छा मात्रं प्रभो सृष्टिः ( भगवान री इच्छा ही सृष्टि है ) सय ईश्वर री इच्छा है । ईश्वर री इच्छा बुद्धि, ईश्वर री इच्छा 'अहं' ईश्वर री इच्छा मन, यूँ ही पञ्च भूत आदि, सब सत्वादि कारण कार्य ईश्वर री इच्छा है । सो इच्छा, इच्छावान् यूँ न्यारी पण है। ज्यूँ मनुष्य री कोई इच्छा री नाश व्हेवा यूँ मनुष्य से नाश नी व्हे,' ने इच्छा विना इच्छावान् रे इच्छा रेवे पण नी । वास्तव में इच्छा से कई भी रूप नी, ने इच्छा यूँ ही ज इच्छावान रो अस्तित्व सिद्ध व्हे' । प्र० इच्छा दोखे क्यूँ है ? उ० ईश्वर सत्य संकल्प है, जी हूँ। मनुष्य । पण जदी मेसमेरिजम शूं वाग ताळाव आदि विना व्हियाँ देखाय देवे । हरेक स्वप्न में अनेक पदार्थ दोखे । वास्तव में वो ही निज इच्छा ने देख रियो, है और वो री इच्छा शँ हो जड़ 'अहं' जाऐ देख रियो है । यो 'अ' ही मुख्य कपाट ईश्वर जीव रे चच्चे है। थ्रणी न्यारा न्यारा कीधा है। स्वप्न जाग्रतादि सब वो ही देखे । यो मूर्ख (हं कार ) बच्चे हो आय देखवा रो अभिमान करे । हारविमूढात्मा फर्ताहमिति मन्यते । नैव किञ्चित्करोति युक्तं मन्येल तत्वचित् ॥ -- श्री गीता घड़ा राजा रे मँड़ा आगे सेवक केवे 'तावे'दार हाजर व्हियो ताबेदार फलाणी जगा' गियो । (अ) दे। क्यूँ के राजा रे कई चीज है । चो सेवक आपने पराधीन जाणे, ई यूँ तायेदार गियो आदि श्या प्रयोग करे के पी सत्ता जणा में कुछ नी व्हे' । पण यो जड़ जीव परमेश्वर रे मूँ डा यागे अहङ्कार करे, ने आपरी न्यारो ही मत्ता माने, तो ई ने दुःख मिलगो उचित ही है, भारी गलती या ही है। जदी यो के' वे, के 'अहंदी ईश्वर रे मँड़ा आगेई नालायको रा कसूर गूँ यो सँघावा री सजा पाये। जदी के' वे 'नाह' (म्हें तो कई ना हूँ ) जदी छोड़वा रो इनाम पावे । आत्मसमर्पण रो विचार ही भक्ति है। क्यूँके विना भक्ति ईश्वर प्राप्ति कठिन है। सख्यादि सय भक्ति में श्रात्म समर्पण करणो पड़े । वात्सल्य में ज्यूँ दशरथ जी महाराज आत्म समर्पण कर यो, यूँ ही आत्मा ने अलग राग्व, प्रेम करे, वो संसारी प्रेमवत् व्हे जाय । ज्यूँ संसारी आपणी आत्मा रे 'चास्ते पुत्रादि पै प्रेम करे, पण अये ईश्वर रे वास्ते आत्मा है, वो आपणे वास्ते कुछ भी नी चावे । ज्यूँ श्री ब्रज गोपिका "आपरे वन में कोमल चरण 'मैं कण्टक लागता व्हेगा, यो दुःख है" इत्यादि भक्ताँ रा अनेक वचन है । वासना रहित व्हे' जो मोक्ष है। वासना युक्त मनख जंगल में एकान्त में भी वंध्यो है, ने ईयूँ रहित सभा में भी मुक्त है। वासना है, के नी, ईरी परीक्षा या है, के अट नाम स्मरण अन्तःकरण में करणो, जदी नाम रे बच्चे घञ्चे विचार पैदा व्हें यो वासना रो ही ज कारण है। प नाम में वड़ी सामर्थ्य है, यो वासना पिशाचिनी ने नाश कर देते है । "सहज उपाय पाय वे केरे नर हत माग देइ भट मेरे" वर्षाणे एक पण्डितजी मिल्या, वी जप करता हा, वणा कियो के हूँ (प) म्हारी वासना नष्ट व्हे उदासीन वृत्ति व्हें गई है । परमारथ विचार रो सार यो है, के नाम स्मरण जश्यो तो कोई सरल उत्तम साधन नी, ने भक्ति समान सिद्धि नी । ई रो ज्यादा लिखवा में विस्तार रो भय है, ने जगा' जगा लिख्यो पण है, तो भी मन ने समझावा ताये जश्यो कुछ विचार व्हियो, फेर कुछ लिखूँ हूँ । साधन रो यो नियम है, स्थूल यूँ सूक्ष्म देश ने प्राप्त करणो कारण, स्थूल में स्वाभाविक ही प्रवृत्ति है । ईश् एका एक सूक्ष्म री प्राप्ति नोव्हे शके । पूर्व संस्कार वा जन्म सिद्ध री वात न्यारो है । यो दो प्रकार रोव्हे' है- एक में पूर्व साधन रो त्याग, ने पर रो ( दूजारो ) ग्रहण । ज्यूँ हठ योग यूँ मन्त्र लप, लय यूँ राजयोग, एक ज्यूँ वेदान्त रो विचार या प्रारम्भ ही में राज योग । पर नाम स्मरण अश्यो है, के ई में जो प्रारम्भ करचो जाय, वो ही ठेठ तक पहुँचाय देवे याने चाही परा अवस्था है। ज्यू सड़क, एक अशी व्हे, जठे पलट पलट, ने मुकाम पे ज्यूँ रेल ने चेञ्ज करणी ( बदलणी ) पड़े । एक शूदी अ ट्रेन व्हे' जी में वीं ने छोड़वा री आवश्य कता नी पड़े। हाँ, मुख हूँ, जिव्हा शँ, कण्ठादि देश शृं, वा मन बुद्धि शुं जरूर भेद दोखे है, पण मन ही मुख्य कारण है। जणी मणख रो बोलवा में मन लागे, वो बोल ने करे तो स्मरण व्हे' ही रियो है। जीं रो बोलवा सिवाय मन और जगा, जाय, वीं ने मन में करणो चाये । बुद्धि यूँ स्मरण व्हेरियो है, वो ने ब्रह्म साक्षात्कार में कोई भेद नी है। केवल सर्विकल्प निर्विकल्प रो भेद दीखे है, सो भी स्वतः निर्विकल्पता ने प्राप्त व्हे जाय है, याने स्मरण यूँ मतलव यो है, के सुरति नाम में लागी रेवे । ब्रह्मसाक्षात्कार पण यो ही है । ब्रह्माकार चित्तरी वृत्ति व्हेवे, ई में विशेषता या है, के चित्तरी चञ्चलता शक्ति, जो कणी भी साघन गूँ नाश नी व्हे,' ई यूँ सहज में वा नष्ट व्हे, जाय, ने दूसरा साधन में जो यार बार प्रश्न उठे, वीं यूँ नी व्हये । किन्तु निश्चय व्हे' जावे । इ श्री करूणा निधान आज्ञा करे है, के८८ "अनन्यचेताः सततं यो मां स्मरति नित्यशः । तस्याहं सुलभः पार्थ नित्ययुकस्थ योगिनः ॥ १ - श्री गीता याने नाम ही ने सर्वस्व समझ निरन्तर स्मरण करे, वीं ने ब्रह्म ज्ञान से आवश्यकता नो । क्यूँ के ज्ञान यूँ ईश्वर दुर्लभ है। कारण, स्थूल वृत्ति चित्तरी व्हेवा यूँ ब्रह्मा री साक्षात्कार वृत्ति नों कर शके । क्यूँ के वशी ( ब्रह्म जशी ) कोई वस्तु हाल ई नी देखी सो वीं ने यो किस तरे जाण शके, तो यो विपरीत निश्चय कर बैठेगा। या तो शून्य ने ही ब्रह्म मान लेगा, या ब्रह्म ने विचारतों विचारताँ खुद शून्य हे जाय इत्यादि अनेक विघ्न ई ने प्राप्त व्हेगा, पर नाम शँ सहज ही यथार्थ ब्रह्म ज्ञान ईनेव्हे जायगा, सोहो योग सूत्र में लिख्यो है व्याधि आदि विघ्ननामस्मरण यूँ मिटे, ने समाधिरी प्राप्ति हें । ज्यू कोई नाद ने ही ब्रह्म मान ले,' कोई ज्योति ने ही मान बैठे, सो वास्तविक ज्ञान उपरोक्त श्लोकानुसार स्मरण शँ सहज में व्हे,
ने दृश्य रो मतलब भी विचार में आवेगा। ई यूँ दर्शन ही विचारणो चावे । इच्छा मात्रं प्रभो सृष्टिः सय ईश्वर री इच्छा है । ईश्वर री इच्छा बुद्धि, ईश्वर री इच्छा 'अहं' ईश्वर री इच्छा मन, यूँ ही पञ्च भूत आदि, सब सत्वादि कारण कार्य ईश्वर री इच्छा है । सो इच्छा, इच्छावान् यूँ न्यारी पण है। ज्यूँ मनुष्य री कोई इच्छा री नाश व्हेवा यूँ मनुष्य से नाश नी व्हे,' ने इच्छा विना इच्छावान् रे इच्छा रेवे पण नी । वास्तव में इच्छा से कई भी रूप नी, ने इच्छा यूँ ही ज इच्छावान रो अस्तित्व सिद्ध व्हे' । प्रशून्य इच्छा दोखे क्यूँ है ? उशून्य ईश्वर सत्य संकल्प है, जी हूँ। मनुष्य । पण जदी मेसमेरिजम शूं वाग ताळाव आदि विना व्हियाँ देखाय देवे । हरेक स्वप्न में अनेक पदार्थ दोखे । वास्तव में वो ही निज इच्छा ने देख रियो, है और वो री इच्छा शँ हो जड़ 'अहं' जाऐ देख रियो है । यो 'अ' ही मुख्य कपाट ईश्वर जीव रे चच्चे है। थ्रणी न्यारा न्यारा कीधा है। स्वप्न जाग्रतादि सब वो ही देखे । यो मूर्ख बच्चे हो आय देखवा रो अभिमान करे । हारविमूढात्मा फर्ताहमिति मन्यते । नैव किञ्चित्करोति युक्तं मन्येल तत्वचित् ॥ -- श्री गीता घड़ा राजा रे मँड़ा आगे सेवक केवे 'तावे'दार हाजर व्हियो ताबेदार फलाणी जगा' गियो । दे। क्यूँ के राजा रे कई चीज है । चो सेवक आपने पराधीन जाणे, ई यूँ तायेदार गियो आदि श्या प्रयोग करे के पी सत्ता जणा में कुछ नी व्हे' । पण यो जड़ जीव परमेश्वर रे मूँ डा यागे अहङ्कार करे, ने आपरी न्यारो ही मत्ता माने, तो ई ने दुःख मिलगो उचित ही है, भारी गलती या ही है। जदी यो के' वे, के 'अहंदी ईश्वर रे मँड़ा आगेई नालायको रा कसूर गूँ यो सँघावा री सजा पाये। जदी के' वे 'नाह' जदी छोड़वा रो इनाम पावे । आत्मसमर्पण रो विचार ही भक्ति है। क्यूँके विना भक्ति ईश्वर प्राप्ति कठिन है। सख्यादि सय भक्ति में श्रात्म समर्पण करणो पड़े । वात्सल्य में ज्यूँ दशरथ जी महाराज आत्म समर्पण कर यो, यूँ ही आत्मा ने अलग राग्व, प्रेम करे, वो संसारी प्रेमवत् व्हे जाय । ज्यूँ संसारी आपणी आत्मा रे 'चास्ते पुत्रादि पै प्रेम करे, पण अये ईश्वर रे वास्ते आत्मा है, वो आपणे वास्ते कुछ भी नी चावे । ज्यूँ श्री ब्रज गोपिका "आपरे वन में कोमल चरण 'मैं कण्टक लागता व्हेगा, यो दुःख है" इत्यादि भक्ताँ रा अनेक वचन है । वासना रहित व्हे' जो मोक्ष है। वासना युक्त मनख जंगल में एकान्त में भी वंध्यो है, ने ईयूँ रहित सभा में भी मुक्त है। वासना है, के नी, ईरी परीक्षा या है, के अट नाम स्मरण अन्तःकरण में करणो, जदी नाम रे बच्चे घञ्चे विचार पैदा व्हें यो वासना रो ही ज कारण है। प नाम में वड़ी सामर्थ्य है, यो वासना पिशाचिनी ने नाश कर देते है । "सहज उपाय पाय वे केरे नर हत माग देइ भट मेरे" वर्षाणे एक पण्डितजी मिल्या, वी जप करता हा, वणा कियो के हूँ म्हारी वासना नष्ट व्हे उदासीन वृत्ति व्हें गई है । परमारथ विचार रो सार यो है, के नाम स्मरण जश्यो तो कोई सरल उत्तम साधन नी, ने भक्ति समान सिद्धि नी । ई रो ज्यादा लिखवा में विस्तार रो भय है, ने जगा' जगा लिख्यो पण है, तो भी मन ने समझावा ताये जश्यो कुछ विचार व्हियो, फेर कुछ लिखूँ हूँ । साधन रो यो नियम है, स्थूल यूँ सूक्ष्म देश ने प्राप्त करणो कारण, स्थूल में स्वाभाविक ही प्रवृत्ति है । ईश् एका एक सूक्ष्म री प्राप्ति नोव्हे शके । पूर्व संस्कार वा जन्म सिद्ध री वात न्यारो है । यो दो प्रकार रोव्हे' है- एक में पूर्व साधन रो त्याग, ने पर रो ग्रहण । ज्यूँ हठ योग यूँ मन्त्र लप, लय यूँ राजयोग, एक ज्यूँ वेदान्त रो विचार या प्रारम्भ ही में राज योग । पर नाम स्मरण अश्यो है, के ई में जो प्रारम्भ करचो जाय, वो ही ठेठ तक पहुँचाय देवे याने चाही परा अवस्था है। ज्यू सड़क, एक अशी व्हे, जठे पलट पलट, ने मुकाम पे ज्यूँ रेल ने चेञ्ज करणी पड़े । एक शूदी अ ट्रेन व्हे' जी में वीं ने छोड़वा री आवश्य कता नी पड़े। हाँ, मुख हूँ, जिव्हा शँ, कण्ठादि देश शृं, वा मन बुद्धि शुं जरूर भेद दोखे है, पण मन ही मुख्य कारण है। जणी मणख रो बोलवा में मन लागे, वो बोल ने करे तो स्मरण व्हे' ही रियो है। जीं रो बोलवा सिवाय मन और जगा, जाय, वीं ने मन में करणो चाये । बुद्धि यूँ स्मरण व्हेरियो है, वो ने ब्रह्म साक्षात्कार में कोई भेद नी है। केवल सर्विकल्प निर्विकल्प रो भेद दीखे है, सो भी स्वतः निर्विकल्पता ने प्राप्त व्हे जाय है, याने स्मरण यूँ मतलव यो है, के सुरति नाम में लागी रेवे । ब्रह्मसाक्षात्कार पण यो ही है । ब्रह्माकार चित्तरी वृत्ति व्हेवे, ई में विशेषता या है, के चित्तरी चञ्चलता शक्ति, जो कणी भी साघन गूँ नाश नी व्हे,' ई यूँ सहज में वा नष्ट व्हे, जाय, ने दूसरा साधन में जो यार बार प्रश्न उठे, वीं यूँ नी व्हये । किन्तु निश्चय व्हे' जावे । इ श्री करूणा निधान आज्ञा करे है, केअठासी "अनन्यचेताः सततं यो मां स्मरति नित्यशः । तस्याहं सुलभः पार्थ नित्ययुकस्थ योगिनः ॥ एक - श्री गीता याने नाम ही ने सर्वस्व समझ निरन्तर स्मरण करे, वीं ने ब्रह्म ज्ञान से आवश्यकता नो । क्यूँ के ज्ञान यूँ ईश्वर दुर्लभ है। कारण, स्थूल वृत्ति चित्तरी व्हेवा यूँ ब्रह्मा री साक्षात्कार वृत्ति नों कर शके । क्यूँ के वशी कोई वस्तु हाल ई नी देखी सो वीं ने यो किस तरे जाण शके, तो यो विपरीत निश्चय कर बैठेगा। या तो शून्य ने ही ब्रह्म मान लेगा, या ब्रह्म ने विचारतों विचारताँ खुद शून्य हे जाय इत्यादि अनेक विघ्न ई ने प्राप्त व्हेगा, पर नाम शँ सहज ही यथार्थ ब्रह्म ज्ञान ईनेव्हे जायगा, सोहो योग सूत्र में लिख्यो है व्याधि आदि विघ्ननामस्मरण यूँ मिटे, ने समाधिरी प्राप्ति हें । ज्यू कोई नाद ने ही ब्रह्म मान ले,' कोई ज्योति ने ही मान बैठे, सो वास्तविक ज्ञान उपरोक्त श्लोकानुसार स्मरण शँ सहज में व्हे,
जिले के सहायता प्राप्त विद्यालयों का स्टाफ दो महीने से वेतन के लिए तरस रहा है। वेतन न आने से शिक्षक काफी परेशान हैं, साथ ही शिक्षकों में नाराजगी भी व्याप्त है। क्योंकि, उनका वेतन देने में लगातार मनमानी की जा रही है। शाहजहांपुर में 36 सहायता प्राप्त विद्यालयों में करीब 200 का स्टाफ कार्यरत है। शिक्षकों को दिसम्बर और जनवरी का वेतन नहीं मिल सका है। शिक्षक लगातार एओ कार्यालय के वेतन की आस में चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन वहां से उन्हें बजट न होने की बात कहकर टरका दिया जाता है। खास बात यह है कि जहां परिषदीय विद्यालयों को महीने की निर्धारित तिथि पर वेतन को ट्रांसफर कर दिया जाता है। वहीं सहायता प्राप्त विद्यालयों के स्टाफ के साथ नाइंसाफी की जा रही है। उन्हें दो महीने तक वेतन से महरुम रखा जा रहा है। इस मामले में शिक्षकों ने वित्त मंत्री सुरेश खन्ना को पत्र दिया है। जिसमें शिक्षकों के साथ मनमानी करने का आरोप लगाया है। इस संबंध में एओ बेसिक शैलेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि अभी बजट नहीं मिला है। बजट आने के बाद वेतन को नियम के अनुसार ट्रांसफर किया जाएगा।
जिले के सहायता प्राप्त विद्यालयों का स्टाफ दो महीने से वेतन के लिए तरस रहा है। वेतन न आने से शिक्षक काफी परेशान हैं, साथ ही शिक्षकों में नाराजगी भी व्याप्त है। क्योंकि, उनका वेतन देने में लगातार मनमानी की जा रही है। शाहजहांपुर में छत्तीस सहायता प्राप्त विद्यालयों में करीब दो सौ का स्टाफ कार्यरत है। शिक्षकों को दिसम्बर और जनवरी का वेतन नहीं मिल सका है। शिक्षक लगातार एओ कार्यालय के वेतन की आस में चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन वहां से उन्हें बजट न होने की बात कहकर टरका दिया जाता है। खास बात यह है कि जहां परिषदीय विद्यालयों को महीने की निर्धारित तिथि पर वेतन को ट्रांसफर कर दिया जाता है। वहीं सहायता प्राप्त विद्यालयों के स्टाफ के साथ नाइंसाफी की जा रही है। उन्हें दो महीने तक वेतन से महरुम रखा जा रहा है। इस मामले में शिक्षकों ने वित्त मंत्री सुरेश खन्ना को पत्र दिया है। जिसमें शिक्षकों के साथ मनमानी करने का आरोप लगाया है। इस संबंध में एओ बेसिक शैलेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि अभी बजट नहीं मिला है। बजट आने के बाद वेतन को नियम के अनुसार ट्रांसफर किया जाएगा।
Bangladesh vs Afghanistan (Photo Credit: File Photo) नई दिल्ली : एशिया कप 2022 का आज तीसरा मुकाबला बांग्लादेश और अफगानिस्तान के बीच खेला गया. अफगानिस्तान की टीम ने सात विकेट से इस मुकाबले को जीतने में सफलता हासिल की है. बांग्लादेश के कप्तान शाकिब अल हसन ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने का फैसला किया. पहले बल्लेबाजी करते हुए बांग्लादेश की टीम ने 7 विकेट खोकर 127 का स्कोर खड़ा किया. बांग्लादेश की टीम से मोसाद्देक हुसैन ने सबसे ज्यादा 48 रनों की पारी खेली. वहीं, अफगानिस्तान की टीम से राशिद खान और मुजिब उर रहमान ने तीन-तीन विकेट झटका. बांग्लादेश की टीम से मोहम्मद नईम और अनामुल हक सलामी बल्लेबाजी करने आए. नईम 6 रन तो अनामुल हक 5 रन बनाकर पवेलियन वापस लौट गए. नंबर तीन पर बल्लेबाजी करने आए कप्तान साकिब अल हसन भी 9 गेंदों का सामना कर 11 रन बनाकर पवेलियन वापस लौट गए. नंबर चार पर बल्लेबाजी करने आए मुशफिकुर रहीम एक रन पर आउट हो गए. इसके बाद मध्यक्रम में महमूदुल्लाह और मोसाद्देक हुसैन ने लड़खड़ाती हुई पारी को संभाली. महमूदुल्लाह ने 25 रन तो मोसाद्देक हुसैन ने 48 रन की पारी खेल टीम का स्कोर 127 तक पहुंचाया. अफगानिस्तान के गेंदबाजों की बात करें तो राशिद खान और मुजिब उर रहमान ने तीन-तीन विकेट अपने नाम करने में सफलता हासिल की. इसके अलावा किसी भी अफगानी गेंदबाजों को विकेट नहीं मिला. लक्ष्य का पीछा करने उतरी अगानिस्तान की टीम ने 3 विकेट खोकर 131 रन बनाकर मुकाबला तो जीता ही, इसके साथ ही सुपर फोर में पहुंचने वाली पहली टीम भी बन गई है. अफगानिस्तान की टीम से हजरतुल्लाह और रहमानुल्लाह गुरबाज सलामी बल्लेबाजी करने आए. हजरतुल्लाह ने 23 रनों की पारी खेली. जबकि दूसरे सलामी बल्लेबाज रहमानुल्लाह गुरबाज ने 11 रन की पारी खेली. नंबर तीन पर बल्लेबाजी करने इब्राहिम जादरान आए. इब्राहिम जादरान ने नाबाद 48 रनों की पारी खेली. नजीबुल्लाह जादरान ने भी नाबाद 43 रनों की पारी खेलकर टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई. यह भी पढ़ेंः Asia Cup 2022: विराट कोहली के इस रवैये से घबराई हांगकांग, अब क्या करेगी टीम! बांग्लादेश की गेंदबाजों की बात करें तो शाकिब अल हसन, मोसाद्देक हुसैन और मोहम्मद सैफुद्दीन ने एक-एक विकेट अपने नाम किया. इसके अलावा किसी भी गेंदबाज को विकेट नहीं मिला.
Bangladesh vs Afghanistan नई दिल्ली : एशिया कप दो हज़ार बाईस का आज तीसरा मुकाबला बांग्लादेश और अफगानिस्तान के बीच खेला गया. अफगानिस्तान की टीम ने सात विकेट से इस मुकाबले को जीतने में सफलता हासिल की है. बांग्लादेश के कप्तान शाकिब अल हसन ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने का फैसला किया. पहले बल्लेबाजी करते हुए बांग्लादेश की टीम ने सात विकेट खोकर एक सौ सत्ताईस का स्कोर खड़ा किया. बांग्लादेश की टीम से मोसाद्देक हुसैन ने सबसे ज्यादा अड़तालीस रनों की पारी खेली. वहीं, अफगानिस्तान की टीम से राशिद खान और मुजिब उर रहमान ने तीन-तीन विकेट झटका. बांग्लादेश की टीम से मोहम्मद नईम और अनामुल हक सलामी बल्लेबाजी करने आए. नईम छः रन तो अनामुल हक पाँच रन बनाकर पवेलियन वापस लौट गए. नंबर तीन पर बल्लेबाजी करने आए कप्तान साकिब अल हसन भी नौ गेंदों का सामना कर ग्यारह रन बनाकर पवेलियन वापस लौट गए. नंबर चार पर बल्लेबाजी करने आए मुशफिकुर रहीम एक रन पर आउट हो गए. इसके बाद मध्यक्रम में महमूदुल्लाह और मोसाद्देक हुसैन ने लड़खड़ाती हुई पारी को संभाली. महमूदुल्लाह ने पच्चीस रन तो मोसाद्देक हुसैन ने अड़तालीस रन की पारी खेल टीम का स्कोर एक सौ सत्ताईस तक पहुंचाया. अफगानिस्तान के गेंदबाजों की बात करें तो राशिद खान और मुजिब उर रहमान ने तीन-तीन विकेट अपने नाम करने में सफलता हासिल की. इसके अलावा किसी भी अफगानी गेंदबाजों को विकेट नहीं मिला. लक्ष्य का पीछा करने उतरी अगानिस्तान की टीम ने तीन विकेट खोकर एक सौ इकतीस रन बनाकर मुकाबला तो जीता ही, इसके साथ ही सुपर फोर में पहुंचने वाली पहली टीम भी बन गई है. अफगानिस्तान की टीम से हजरतुल्लाह और रहमानुल्लाह गुरबाज सलामी बल्लेबाजी करने आए. हजरतुल्लाह ने तेईस रनों की पारी खेली. जबकि दूसरे सलामी बल्लेबाज रहमानुल्लाह गुरबाज ने ग्यारह रन की पारी खेली. नंबर तीन पर बल्लेबाजी करने इब्राहिम जादरान आए. इब्राहिम जादरान ने नाबाद अड़तालीस रनों की पारी खेली. नजीबुल्लाह जादरान ने भी नाबाद तैंतालीस रनों की पारी खेलकर टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई. यह भी पढ़ेंः Asia Cup दो हज़ार बाईस: विराट कोहली के इस रवैये से घबराई हांगकांग, अब क्या करेगी टीम! बांग्लादेश की गेंदबाजों की बात करें तो शाकिब अल हसन, मोसाद्देक हुसैन और मोहम्मद सैफुद्दीन ने एक-एक विकेट अपने नाम किया. इसके अलावा किसी भी गेंदबाज को विकेट नहीं मिला.
सरकारी आदेशों की पालना अधिकारियों की इच्छा पर निर्भर करता है। कम से कम सेक्टर 34 स्थित इंफो सिटी में तो ऐसा ही हो रहा है। कोरोना को लेकर जारी गाइडलाइन एक ही भवन में स्थित एचएसवीपी व नगर निगम के लिए अलग-अलग हैं। निगम अधिकारियों ने गर्मी से बचाव के लिए नए एयर कंडीशन लगवा लिए तो वहीं हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) कार्यालय में सेंट्रलाइज्ड एयर कंडीशन चोरी छिपे चालू कर लिया गया है। कोरोना संबंधी डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन की पालना सुनिश्चित करवाने को लेकर सरकार बेशक ऐड़ी चोटी का जोर लगाए हुए है, लेकिन जनता पर लागू होने वाले आदेश सरकारी कार्यालयों तक पहुंचते-पहुंचते अधिकारी की इच्छा बन जाते हैं। ऐसा ही हो रहा है सेक्टर 34 स्थित इंफो सिटी स्थित नगर निगम व एचएसवीपी कार्यालय में। दोनों विभागों के दफ्तर एक ही भवन में हैं। ग्राउंड फ्लोर पर एचएसवीपी के ईओ-2 का कार्यालय है तथा पहली से तीसरी मंजिल पर नगर निगम का दफ्तर। दोनों कार्यालयों का एंट्रीगेट भी एक ही है। नगर निगम ने कोरोना संबंधी गाइडलाइन की पालना के लिए हर संभव बंदोबस्त कर रखे हैं। ऑटोमेटिक स्केनिंग मशीन से लेकर जगह-जगह सेनेटाइजर की व्यवस्था भी है। निगम के तीनों फ्लोर पर सेंट्रलाइज्ड एयर कंडीशन बंद है। जबरदस्त उमस भरे माहौल में काम कर रहे कर्मचारी गर्मी व घुटन के चलते बीमार पड़ने लगे हैं। हालांकि कुछ कर्मचारियों को सरकारी खर्चे पर टेबल फैन जरूर मंगवाकर दिए गए हैं। दूसरी तरफ ग्राउंड फ्लोर पर स्थित एचएसवीपी कार्यालय में सेंट्रलाइज्ड एयर कंडीशन कई दिनों से चलाया जा रहा है। कार्यालय के गेट पर थर्मल स्केनिंग व सेनेटाइजर का बंदोबस्त तो है, लेकिन यहां आने वाले ज्यादातर लोगों को गेट पर तैनात गार्ड ईओ के आदेशों का हवाला देकर दफ्तर में घुसने ही नहीं देते। परेशान लोग खूब मिन्नते करने और अंदर मौजूद किसी अधिकारी से गार्ड की बात करवाने के बाद ही अंदर जा सकते हैं। एक ही बिल्डिंग में दो विभागों के कार्यालयों में महामारी को लेकर अलग-अलग नियमों के सवाल का डीसी अमित खत्री के पास कोई जवाब नहीं। कई प्रयास के बावजूद उन्होंने इस संबंध में कोई जवाब नहीं दिया। सेंट्रलाइज्ड एयर कंडीशन बंद होने के कारण नगर निगम कार्यालय के कर्मचारी बेशक उमस भरे माहौल व बेहाली में काम कर रहे हैं, लेकिन अफसरों ने अपनी सहूलियत के सारे बंदोबस्त कर रखे हैं। गर्मी व घुटन से बचने के लिए निगम के कई अधिकारियों ने नए एयर कंडीशन की व्यवस्था कर ली। बताते हैं कि चार एयरकंडीशन अनुमति के साथ खरीदे गए हैं शेष बिना अनुमति लाकर चलाए जा रहे हैं। ये एसी बेशक निगम के खर्चे पर न आकर अघोषित बाहरी मदद हों लेकिन इनका बिजली खर्च निगम के खाते से किया जाएगा।
सरकारी आदेशों की पालना अधिकारियों की इच्छा पर निर्भर करता है। कम से कम सेक्टर चौंतीस स्थित इंफो सिटी में तो ऐसा ही हो रहा है। कोरोना को लेकर जारी गाइडलाइन एक ही भवन में स्थित एचएसवीपी व नगर निगम के लिए अलग-अलग हैं। निगम अधिकारियों ने गर्मी से बचाव के लिए नए एयर कंडीशन लगवा लिए तो वहीं हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण कार्यालय में सेंट्रलाइज्ड एयर कंडीशन चोरी छिपे चालू कर लिया गया है। कोरोना संबंधी डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन की पालना सुनिश्चित करवाने को लेकर सरकार बेशक ऐड़ी चोटी का जोर लगाए हुए है, लेकिन जनता पर लागू होने वाले आदेश सरकारी कार्यालयों तक पहुंचते-पहुंचते अधिकारी की इच्छा बन जाते हैं। ऐसा ही हो रहा है सेक्टर चौंतीस स्थित इंफो सिटी स्थित नगर निगम व एचएसवीपी कार्यालय में। दोनों विभागों के दफ्तर एक ही भवन में हैं। ग्राउंड फ्लोर पर एचएसवीपी के ईओ-दो का कार्यालय है तथा पहली से तीसरी मंजिल पर नगर निगम का दफ्तर। दोनों कार्यालयों का एंट्रीगेट भी एक ही है। नगर निगम ने कोरोना संबंधी गाइडलाइन की पालना के लिए हर संभव बंदोबस्त कर रखे हैं। ऑटोमेटिक स्केनिंग मशीन से लेकर जगह-जगह सेनेटाइजर की व्यवस्था भी है। निगम के तीनों फ्लोर पर सेंट्रलाइज्ड एयर कंडीशन बंद है। जबरदस्त उमस भरे माहौल में काम कर रहे कर्मचारी गर्मी व घुटन के चलते बीमार पड़ने लगे हैं। हालांकि कुछ कर्मचारियों को सरकारी खर्चे पर टेबल फैन जरूर मंगवाकर दिए गए हैं। दूसरी तरफ ग्राउंड फ्लोर पर स्थित एचएसवीपी कार्यालय में सेंट्रलाइज्ड एयर कंडीशन कई दिनों से चलाया जा रहा है। कार्यालय के गेट पर थर्मल स्केनिंग व सेनेटाइजर का बंदोबस्त तो है, लेकिन यहां आने वाले ज्यादातर लोगों को गेट पर तैनात गार्ड ईओ के आदेशों का हवाला देकर दफ्तर में घुसने ही नहीं देते। परेशान लोग खूब मिन्नते करने और अंदर मौजूद किसी अधिकारी से गार्ड की बात करवाने के बाद ही अंदर जा सकते हैं। एक ही बिल्डिंग में दो विभागों के कार्यालयों में महामारी को लेकर अलग-अलग नियमों के सवाल का डीसी अमित खत्री के पास कोई जवाब नहीं। कई प्रयास के बावजूद उन्होंने इस संबंध में कोई जवाब नहीं दिया। सेंट्रलाइज्ड एयर कंडीशन बंद होने के कारण नगर निगम कार्यालय के कर्मचारी बेशक उमस भरे माहौल व बेहाली में काम कर रहे हैं, लेकिन अफसरों ने अपनी सहूलियत के सारे बंदोबस्त कर रखे हैं। गर्मी व घुटन से बचने के लिए निगम के कई अधिकारियों ने नए एयर कंडीशन की व्यवस्था कर ली। बताते हैं कि चार एयरकंडीशन अनुमति के साथ खरीदे गए हैं शेष बिना अनुमति लाकर चलाए जा रहे हैं। ये एसी बेशक निगम के खर्चे पर न आकर अघोषित बाहरी मदद हों लेकिन इनका बिजली खर्च निगम के खाते से किया जाएगा।
फाइनल में आस्ट्रेलियाई टीम ने भारत की टीम को 9 रन से शिकस्त दी। फाइनल में भारत की ओर कप्तान हरमनप्रीत कौर ने 62 रन की पारी खेली लेकिन टीम को जिता नहीं पायी। राष्ट्रमंडल खेलों में महिला क्रिकेट स्पर्धा में भारत और आस्ट्रेलिया के बीच स्वर्ण पदक का मुकाबला खेला गया। जहां दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली । अंत में आस्ट्रेलियाई टीम ने 9 रन से मैच जीत लिया और स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। वही भारतीय टीम को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। इसके अलावा न्यूजीलैंड की महिला टीम ने इंग्लैंड की टीम को हराकर कांस्य पदक पर कब्जा जमाया। मैच में आस्ट्रेलिया ने टाॅस ने जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। लेकिन आस्ट्रेलिया की शुरुआत अच्छी नहीं रही और टीम की ओपनल एलिसा हीली 7 रन बनाकर आउट हो गई। इसके बाद मूनी और कप्तान मेग लेनिंग ने पारी की संभाला। इसी बीच मूनी ने अपना अर्धशतक पूरा किया। वें 61 रन बनाकर आउट हुई। जबकि लेनिंग 36 रन बनाकर आउट हुई। इसके बाद टीम ने गार्डनर के 25 रन के स्कोर पर निर्धारित 20 ओवर में 8 विकेट के नुकसान पर 161 रन बनाए। वही भारत की ओर से स्नेह सिंह और रेनुका सिंह ने सर्वाधिक 2-2 विकेट हासिल किए। जवाब में लक्ष्य का पीछे करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही और टीम की स्टार स्मृति मंधाना 6 रन बनाकर आउट हो गई। इसके कुछ समय बाद ही शैफाली वर्मा भी 11 रन बनाकर आउट हो गई। इसके बाद कप्तान हरमनप्रीत कौर और जेमिमा रोडिगज ने पारी को संभाला तीसरे विकेट के लिए 96 रन की साझेदारी कर टीम के स्कोर 100 के पार पहुंचाया। जहां जेमिमा 33 रन बनाकर आउट हो गई। वही कप्तान हरमनप्रीत कौर अपना अर्धशतक पूरा कर 65 रन बनाकर आउट हुई। अंत में मैच रोमांचक स्थिति में पहुंच गया। जहां भारतीय टीम को अंतिम दो ओवर में भारत 17 रन की जरूरत थी। लेकिन पूरी भारतीय टीम 19. 3 ओवर में 152 रन पर आलॅआउट हो गई और टीम 9 रन से मैच हार गई।
फाइनल में आस्ट्रेलियाई टीम ने भारत की टीम को नौ रन से शिकस्त दी। फाइनल में भारत की ओर कप्तान हरमनप्रीत कौर ने बासठ रन की पारी खेली लेकिन टीम को जिता नहीं पायी। राष्ट्रमंडल खेलों में महिला क्रिकेट स्पर्धा में भारत और आस्ट्रेलिया के बीच स्वर्ण पदक का मुकाबला खेला गया। जहां दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली । अंत में आस्ट्रेलियाई टीम ने नौ रन से मैच जीत लिया और स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। वही भारतीय टीम को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। इसके अलावा न्यूजीलैंड की महिला टीम ने इंग्लैंड की टीम को हराकर कांस्य पदक पर कब्जा जमाया। मैच में आस्ट्रेलिया ने टाॅस ने जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। लेकिन आस्ट्रेलिया की शुरुआत अच्छी नहीं रही और टीम की ओपनल एलिसा हीली सात रन बनाकर आउट हो गई। इसके बाद मूनी और कप्तान मेग लेनिंग ने पारी की संभाला। इसी बीच मूनी ने अपना अर्धशतक पूरा किया। वें इकसठ रन बनाकर आउट हुई। जबकि लेनिंग छत्तीस रन बनाकर आउट हुई। इसके बाद टीम ने गार्डनर के पच्चीस रन के स्कोर पर निर्धारित बीस ओवर में आठ विकेट के नुकसान पर एक सौ इकसठ रन बनाए। वही भारत की ओर से स्नेह सिंह और रेनुका सिंह ने सर्वाधिक दो-दो विकेट हासिल किए। जवाब में लक्ष्य का पीछे करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही और टीम की स्टार स्मृति मंधाना छः रन बनाकर आउट हो गई। इसके कुछ समय बाद ही शैफाली वर्मा भी ग्यारह रन बनाकर आउट हो गई। इसके बाद कप्तान हरमनप्रीत कौर और जेमिमा रोडिगज ने पारी को संभाला तीसरे विकेट के लिए छियानवे रन की साझेदारी कर टीम के स्कोर एक सौ के पार पहुंचाया। जहां जेमिमा तैंतीस रन बनाकर आउट हो गई। वही कप्तान हरमनप्रीत कौर अपना अर्धशतक पूरा कर पैंसठ रन बनाकर आउट हुई। अंत में मैच रोमांचक स्थिति में पहुंच गया। जहां भारतीय टीम को अंतिम दो ओवर में भारत सत्रह रन की जरूरत थी। लेकिन पूरी भारतीय टीम उन्नीस. तीन ओवर में एक सौ बावन रन पर आलॅआउट हो गई और टीम नौ रन से मैच हार गई।
इस मैच में इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए श्रीलंका के सामने 303 रन का लक्ष्य रखा। जवाब में श्रीलंका ने 2 गेंद शेष रहते ही यह मैच 1 विकेट से अपनेनाम किया था। इस मैच में महेला जयवर्धने ने 120 रन की शानदार शतकीय पारी खेली थी, जबकि सनथ जयसुर्या ने 51 रन बनाए थे। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए इस मुकाबले में टीम इंडिया ने कंगारुओं को 6 विकेट से हरा दिया। पहले बल्लेबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलिया ने टीम इंडिया के सामने 299 रन का लक्ष्य रखा। जवाब में टीम इंडिया ने 4 गेंद शेष रहते ही 299 रन बनाकर मैच जीत लिया। इस मैच में विराट कोहली ने 104 और एमएस धोनी ने 55 रन की नाबाद पारी खेली। पहले बल्लेबाजी करते हुए इंग्लैंड ने इस मुकाबले में 5 विकेट के नुकसान पर न्यूजीलैंड को जीत के लिए 297 रन का लक्ष्य दिया। जवाब में न्यूजीलैंड ने 7 गेंद शेष रहते ही 4 विकेट से यह मैच अपने नाम कर लिया। इस मैच में श्रीलंका ने ऑस्ट्रेलिया को 8 विकेट से करारी शिकस्त दी थी। पहले बल्लेबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलिया ने 6 विकेट के नुकसान पर 271 रन बनाए। जवाब में श्रीलंका ने लक्ष्य का पीछा करते हुए 274 रन बनाकर मैच अपने नाम किया। इस मैच में श्रीलंका की तरफ से तिलकरत्ने दिलशान ने 106 रन की शानदार अर्धशतकीय पारी खेली थी।
इस मैच में इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए श्रीलंका के सामने तीन सौ तीन रन का लक्ष्य रखा। जवाब में श्रीलंका ने दो गेंद शेष रहते ही यह मैच एक विकेट से अपनेनाम किया था। इस मैच में महेला जयवर्धने ने एक सौ बीस रन की शानदार शतकीय पारी खेली थी, जबकि सनथ जयसुर्या ने इक्यावन रन बनाए थे। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए इस मुकाबले में टीम इंडिया ने कंगारुओं को छः विकेट से हरा दिया। पहले बल्लेबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलिया ने टीम इंडिया के सामने दो सौ निन्यानवे रन का लक्ष्य रखा। जवाब में टीम इंडिया ने चार गेंद शेष रहते ही दो सौ निन्यानवे रन बनाकर मैच जीत लिया। इस मैच में विराट कोहली ने एक सौ चार और एमएस धोनी ने पचपन रन की नाबाद पारी खेली। पहले बल्लेबाजी करते हुए इंग्लैंड ने इस मुकाबले में पाँच विकेट के नुकसान पर न्यूजीलैंड को जीत के लिए दो सौ सत्तानवे रन का लक्ष्य दिया। जवाब में न्यूजीलैंड ने सात गेंद शेष रहते ही चार विकेट से यह मैच अपने नाम कर लिया। इस मैच में श्रीलंका ने ऑस्ट्रेलिया को आठ विकेट से करारी शिकस्त दी थी। पहले बल्लेबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलिया ने छः विकेट के नुकसान पर दो सौ इकहत्तर रन बनाए। जवाब में श्रीलंका ने लक्ष्य का पीछा करते हुए दो सौ चौहत्तर रन बनाकर मैच अपने नाम किया। इस मैच में श्रीलंका की तरफ से तिलकरत्ने दिलशान ने एक सौ छः रन की शानदार अर्धशतकीय पारी खेली थी।
Wednesday January 20, 2021, एक पेड़ की छाया के नीचे रविवार की दोपहर का आनंद लेने जैसा कुछ नहीं है, एक पिकनिक चटाई पर, सुंदर भोजन, एक या दो ड्रिंक, दोस्तों या पुस्तकों के रूप में साथी, और पक्षियों की चहचहाट भरा बैकग्राउंड म्यूजिक। उस जादू को पिकनिक में डालने वाली The Picnic Company की दो आंत्रप्रेन्योर महिलाएँ, श्वेता गुप्ता और भावना राव हैं, जिन्होंने महामारी के बीच में अवकाश-थीम वाली कंपनी शुरू करने से पहले दो बार नहीं सोचा था। श्वेता और भावना दोस्त और बिजनेस पार्टनर हैं, जिन्होंने भारतीय बाजार में कुछ नया लॉन्च करने के लिए अपनी पेशेवर पृष्ठभूमि को एक साथ लाया। जहां श्वेता के पास इवेंट मैनेजमेंट और हॉस्पिटैलिटी का बैकग्राउंड है, वहीं भावना ट्रैवल कंपनी Encompass Experience चलाने वाली ट्रैवल एंथुजियास्ट हैं। The Picnic Company को नवंबर 2020 में लॉन्च किया गया था, जिसमें सही पिकनिक पर जाने के लिए विचार किया गया था, जहां ग्राहक केवल योजना के बारे में चिंता किए बिना, सड़क पर आनंद ले सकते थे। ब्रांड का इंस्टाग्राम लॉन्च होने के बाद से उन 24 पिकनिक की झलक पेश करता है, जो लॉन्च के बाद से वे अब तक कर चुकी हैं। "विचार तब आया जब हमने महसूस किया कि COVID-19 प्रतिबंधों के कारण मनोरंजन के विकल्प लगभग शून्य थे। रेस्तरां, सिनेमा, या मॉल की एक साधारण यात्रा भी अब संभव नहीं थी। लोगों को दूर जाने के रास्ते खोजने पड़ते थे, और कई लोग बेंगलुरु के बाहर के स्थानों के लिए लॉन्ग ड्राइव या क्विक गेटवे का विकल्प चुन रहे थे। हमने सोचा कि हम इसमें कुछ मजेदार और संगठन जोड़ सकते हैं, " श्वेता कहती हैं, जो कनकपुरा रोड पर एक लोकप्रिय रेस्टो-बार Whattay Brewpark की मालिक हैं। टीम ने शहर के बाहरी इलाकों में निजी खेतों की पहचान की और भागीदारी की। स्थान दर्शनीय हैं और परिवार या दोस्तों के लिए आदर्श स्थान प्रदान करते हैं, ताकि दिन में आराम हो सके। एक बार जब पिकनिक पैकेज खरीदा जाता है - टीम स्थान (खेतों में से एक) की योजना बनाती है, तो फूड हैम्पर्स, इसे सेट करता है और मज़ेदार काम करने के बाद और भी अधिक साफ होता है। एक महान पिकनिक अनुभव का एक बड़ा हिस्सा भोजन है, और यह कुछ ऐसा है जो जोड़ी को सही होने के बारे में बहुत विशेष है। श्वेता कहती हैं, "चूंकि यह पिकनिक है, इसलिए यह पूर्णतया ठंडा भोजन है। लेकिन यह हमारे मेनू से स्वाद और विविधता को दूर नहीं करता है। हमारे पास भारतीय और कॉन्टिनेंटल तीन-कोर्स मेनू विकल्प हैं और ग्राहक दोनों में से एक या दोनों को चुन सकते हैं। एक पिकनिक हैंपर चार लोगों के परिवार के लिए पर्याप्त बड़ा है, और सभी भोजन को Whattay Brewpark रेस्तरां द्वारा पूरा किया जाता है।" एक बेसिक हैंपर में 4,999 रुपये का खर्च आता है, इसमें एक निजी खेत के स्थान पर चार, तीन घंटे के लिए भोजन, सुनिश्चित गोपनीयता और एक बड़ी पिकनिक चटाई शामिल है। कंपनी उन समूहों को प्रोत्साहित नहीं करती है जो जगह की सुविधा और शांति बनाए रखने के लिए 20 से बड़े हैं। ऐसी पार्टियों के लिए जिन्हें संपूर्ण टेबल सेट-अप, विस्तृत भोजन, लंबी अवधि आदि की आवश्यकता होती है, लागत 10,999 रुपये से ऊपर है। वे कहती हैं कि आप अपना मौसम पिकनिक पर ले आएं। और बाकी के लिए, वहाँ हमेशा The Picnic Company है!
Wednesday January बीस, दो हज़ार इक्कीस, एक पेड़ की छाया के नीचे रविवार की दोपहर का आनंद लेने जैसा कुछ नहीं है, एक पिकनिक चटाई पर, सुंदर भोजन, एक या दो ड्रिंक, दोस्तों या पुस्तकों के रूप में साथी, और पक्षियों की चहचहाट भरा बैकग्राउंड म्यूजिक। उस जादू को पिकनिक में डालने वाली The Picnic Company की दो आंत्रप्रेन्योर महिलाएँ, श्वेता गुप्ता और भावना राव हैं, जिन्होंने महामारी के बीच में अवकाश-थीम वाली कंपनी शुरू करने से पहले दो बार नहीं सोचा था। श्वेता और भावना दोस्त और बिजनेस पार्टनर हैं, जिन्होंने भारतीय बाजार में कुछ नया लॉन्च करने के लिए अपनी पेशेवर पृष्ठभूमि को एक साथ लाया। जहां श्वेता के पास इवेंट मैनेजमेंट और हॉस्पिटैलिटी का बैकग्राउंड है, वहीं भावना ट्रैवल कंपनी Encompass Experience चलाने वाली ट्रैवल एंथुजियास्ट हैं। The Picnic Company को नवंबर दो हज़ार बीस में लॉन्च किया गया था, जिसमें सही पिकनिक पर जाने के लिए विचार किया गया था, जहां ग्राहक केवल योजना के बारे में चिंता किए बिना, सड़क पर आनंद ले सकते थे। ब्रांड का इंस्टाग्राम लॉन्च होने के बाद से उन चौबीस पिकनिक की झलक पेश करता है, जो लॉन्च के बाद से वे अब तक कर चुकी हैं। "विचार तब आया जब हमने महसूस किया कि COVID-उन्नीस प्रतिबंधों के कारण मनोरंजन के विकल्प लगभग शून्य थे। रेस्तरां, सिनेमा, या मॉल की एक साधारण यात्रा भी अब संभव नहीं थी। लोगों को दूर जाने के रास्ते खोजने पड़ते थे, और कई लोग बेंगलुरु के बाहर के स्थानों के लिए लॉन्ग ड्राइव या क्विक गेटवे का विकल्प चुन रहे थे। हमने सोचा कि हम इसमें कुछ मजेदार और संगठन जोड़ सकते हैं, " श्वेता कहती हैं, जो कनकपुरा रोड पर एक लोकप्रिय रेस्टो-बार Whattay Brewpark की मालिक हैं। टीम ने शहर के बाहरी इलाकों में निजी खेतों की पहचान की और भागीदारी की। स्थान दर्शनीय हैं और परिवार या दोस्तों के लिए आदर्श स्थान प्रदान करते हैं, ताकि दिन में आराम हो सके। एक बार जब पिकनिक पैकेज खरीदा जाता है - टीम स्थान की योजना बनाती है, तो फूड हैम्पर्स, इसे सेट करता है और मज़ेदार काम करने के बाद और भी अधिक साफ होता है। एक महान पिकनिक अनुभव का एक बड़ा हिस्सा भोजन है, और यह कुछ ऐसा है जो जोड़ी को सही होने के बारे में बहुत विशेष है। श्वेता कहती हैं, "चूंकि यह पिकनिक है, इसलिए यह पूर्णतया ठंडा भोजन है। लेकिन यह हमारे मेनू से स्वाद और विविधता को दूर नहीं करता है। हमारे पास भारतीय और कॉन्टिनेंटल तीन-कोर्स मेनू विकल्प हैं और ग्राहक दोनों में से एक या दोनों को चुन सकते हैं। एक पिकनिक हैंपर चार लोगों के परिवार के लिए पर्याप्त बड़ा है, और सभी भोजन को Whattay Brewpark रेस्तरां द्वारा पूरा किया जाता है।" एक बेसिक हैंपर में चार,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये का खर्च आता है, इसमें एक निजी खेत के स्थान पर चार, तीन घंटे के लिए भोजन, सुनिश्चित गोपनीयता और एक बड़ी पिकनिक चटाई शामिल है। कंपनी उन समूहों को प्रोत्साहित नहीं करती है जो जगह की सुविधा और शांति बनाए रखने के लिए बीस से बड़े हैं। ऐसी पार्टियों के लिए जिन्हें संपूर्ण टेबल सेट-अप, विस्तृत भोजन, लंबी अवधि आदि की आवश्यकता होती है, लागत दस,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये से ऊपर है। वे कहती हैं कि आप अपना मौसम पिकनिक पर ले आएं। और बाकी के लिए, वहाँ हमेशा The Picnic Company है!
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड(सीबीएसई) ने 10वीं और 12वीं कक्षा की परीक्षाओं की तारीखों का ऐलान कर दिया है. सीबीएसई 10वीं कक्षा की परीक्षाएं 21 फरवरी से शुरू होगी जबकि 12वीं की परीक्षाएं 15 फरवरी से शुरू होकर तीन अप्रैल तक चलेंगी. परीक्षाएं सुबह के समय में होंगी और इनका समय साढ़े 10 से दोपहर डेढ़ बजे तक रहेगा. परीक्षा के लिए उत्तर पुस्तिका सुबह 10 बजे से शुरू होंगी और इसके 15 मिनट बाद पेपर दिया जाएगा. छात्र सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट cbse. nic. in पर पूरी डेट शीट देख सकते हैं.
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने दसवीं और बारहवीं कक्षा की परीक्षाओं की तारीखों का ऐलान कर दिया है. सीबीएसई दसवीं कक्षा की परीक्षाएं इक्कीस फरवरी से शुरू होगी जबकि बारहवीं की परीक्षाएं पंद्रह फरवरी से शुरू होकर तीन अप्रैल तक चलेंगी. परीक्षाएं सुबह के समय में होंगी और इनका समय साढ़े दस से दोपहर डेढ़ बजे तक रहेगा. परीक्षा के लिए उत्तर पुस्तिका सुबह दस बजे से शुरू होंगी और इसके पंद्रह मिनट बाद पेपर दिया जाएगा. छात्र सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट cbse. nic. in पर पूरी डेट शीट देख सकते हैं.
अनशन पर बैठे सिद्धू को समझाने के लिए प्रशासन जुटा है लेकिन वे नहीं मान रहे हैं. लखनऊ. लखीमपुर खरी मामला तूल पकड़ता जा रहा है. अब पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने बड़ा कदम उठाया है. लखीमपुर में हुई हिंसा में मारे गए पत्रकार रमन कश्यप के घर निघासन पहुंचे सिद्धू वहीं अनशन पर बैठ गए हैं. इस दौरान सिद्धू ने कहा कि जब तक केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा का बेटा आशीष मिश्रा गिरफ्तार नहीं हो जाता वे अनशन नहीं तोड़ेंगे. इसी के साथ उन्होंने कहा कि वे प्रियंका गांधी और राहुल गांधी से प्रेरित होकर निघासन पहुंचे हैं. उन्होंने कहा कि जो देखा सुना वो दिल दहलाने वाला है, पूरा देश न्याय की गुहार कर रहा है. इंसाफ के लिए दोहरा मापदंड नहीं अपनाया जा सकता है. सिद्धू ने इस दौरान कहा कि किसी के जीवन के मूल्य की भरपाई पैसा देकर नहीं की जा सकती है. पीड़ित परिवारों को पैसा नहीं चाहिए, उन्हें सिर्फ इंसाफ चाहिए. उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि सबूत हैं, गवाह हैं फिर भी मंत्री का बेटा होने के चलते आशीष मिश्रा को गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है. मौजूदा सिस्टम से किसानों का भरोसा उठ गया है. इस दौरान सिद्धू ने आशीष के लिए कहा कि मंत्री के बेटे को जांच में सहयोग करना चाहिए. नहीं तो उसे गिरफ्तार कर लेना चाहिए. उन्होंने कहा कि सवाल सिर्फ भरोसे का है, इंसानियत मर चुकी है, किसी को रौंद कर चले जाना कहां की इंसानियत है. गौरतलब है कि इससे पहले हिंसा में जान गंवाने वाले किसान लवप्रीत सिंह के घर पर सिद्धू गए थे और उनके परिजन से मुलाकात की थी. इसके बाद वे पत्रकार रमन कश्यप के घर पहुंचे. सिद्धू ने कहा कि हमें किसानों के इस पवित्र सत्याग्रह के लिए लड़ना होगा. उन्होंने कहा कि किसानों के पवित्र संघर्ष में किसी लीडर की आहुति होनी चाहिए. इंसाफ अमीर-गरीब और किसान के लिए अलग नहीं हो सकता है. उन्होंने ऐलान किया कि जब तक मंत्री मिश्रा का बेटा गिरफ्तार नहीं होता तब तक मैं अनशन पर बैठूंगा. गरीब और इंसानों की इस लड़ाई के लिए एक इंच नहीं हटूंगा. सिद्धू के इस ऐलान के बाद अब स्थानीय प्रशासन उन्हें मनाने में जुट गया है लेकिन वे नहीं मान रहे हैं. . 'जवान' से पहले. . . इन 5 फिल्मों में अपनी खलनायकी से डरा चुके हैं शाहरुख खान, विलेनगिरी से फिर मचाएंगे धमाल!
अनशन पर बैठे सिद्धू को समझाने के लिए प्रशासन जुटा है लेकिन वे नहीं मान रहे हैं. लखनऊ. लखीमपुर खरी मामला तूल पकड़ता जा रहा है. अब पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने बड़ा कदम उठाया है. लखीमपुर में हुई हिंसा में मारे गए पत्रकार रमन कश्यप के घर निघासन पहुंचे सिद्धू वहीं अनशन पर बैठ गए हैं. इस दौरान सिद्धू ने कहा कि जब तक केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा का बेटा आशीष मिश्रा गिरफ्तार नहीं हो जाता वे अनशन नहीं तोड़ेंगे. इसी के साथ उन्होंने कहा कि वे प्रियंका गांधी और राहुल गांधी से प्रेरित होकर निघासन पहुंचे हैं. उन्होंने कहा कि जो देखा सुना वो दिल दहलाने वाला है, पूरा देश न्याय की गुहार कर रहा है. इंसाफ के लिए दोहरा मापदंड नहीं अपनाया जा सकता है. सिद्धू ने इस दौरान कहा कि किसी के जीवन के मूल्य की भरपाई पैसा देकर नहीं की जा सकती है. पीड़ित परिवारों को पैसा नहीं चाहिए, उन्हें सिर्फ इंसाफ चाहिए. उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि सबूत हैं, गवाह हैं फिर भी मंत्री का बेटा होने के चलते आशीष मिश्रा को गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है. मौजूदा सिस्टम से किसानों का भरोसा उठ गया है. इस दौरान सिद्धू ने आशीष के लिए कहा कि मंत्री के बेटे को जांच में सहयोग करना चाहिए. नहीं तो उसे गिरफ्तार कर लेना चाहिए. उन्होंने कहा कि सवाल सिर्फ भरोसे का है, इंसानियत मर चुकी है, किसी को रौंद कर चले जाना कहां की इंसानियत है. गौरतलब है कि इससे पहले हिंसा में जान गंवाने वाले किसान लवप्रीत सिंह के घर पर सिद्धू गए थे और उनके परिजन से मुलाकात की थी. इसके बाद वे पत्रकार रमन कश्यप के घर पहुंचे. सिद्धू ने कहा कि हमें किसानों के इस पवित्र सत्याग्रह के लिए लड़ना होगा. उन्होंने कहा कि किसानों के पवित्र संघर्ष में किसी लीडर की आहुति होनी चाहिए. इंसाफ अमीर-गरीब और किसान के लिए अलग नहीं हो सकता है. उन्होंने ऐलान किया कि जब तक मंत्री मिश्रा का बेटा गिरफ्तार नहीं होता तब तक मैं अनशन पर बैठूंगा. गरीब और इंसानों की इस लड़ाई के लिए एक इंच नहीं हटूंगा. सिद्धू के इस ऐलान के बाद अब स्थानीय प्रशासन उन्हें मनाने में जुट गया है लेकिन वे नहीं मान रहे हैं. . 'जवान' से पहले. . . इन पाँच फिल्मों में अपनी खलनायकी से डरा चुके हैं शाहरुख खान, विलेनगिरी से फिर मचाएंगे धमाल!
भारत की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल ने अपने उपभोक्ताओं के लिए नया अनलिमिटेड ब्रांडबैंड प्लान लांच किया है। नए प्लान के तहत बीएसएनएल के उपभोक्ताओं को फास्ट स्पीड ब्राडबैंड की सुविधा मिलेगी। नए प्लान में तहत बीएसएनएल फ्री प्रीपेड मोबाइल कनेक्शन भी दे रहा है। बीएसएनएल के 1 एमबीपीएस अनलिमिटेड ब्रांडबैंड कांबों प्लान के तहत उपभोक्ताओं को TPTS -799 रुपए खर्च करने पड़ेंगे, जिसमें उन्हें 1 एमबीपीएस स्पीड के साथ 10 जीबी डेटा मिलेगा। इतना ही नहीं TPTS -799 के तहत उपभोक्ताओं को 100 फ्री लोकल और एसटीडी कॉल भी दी जाएंगी जिसमें से उपभोक्ता 100 मिनट की कॉल बीएसएनएल नेटर्वक पर और बाकी अन्य नेटर्वक पर कर सकता है। बीएसएनएल के दूसरे प्लान TPTS -1999 के तहत उपभोक्ताओं को हर महिने 1999 रुपए देने पड़ेंगे जिसके तहत उन्हें 4 एमबीपीएस स्पीड के साथ 75 जीबी डेटा मिलेगा। इसके अलावा TPTS -1999 प्लान के साथ 300 लोकल और एसटीडी कॉल भी दी जाएंगी। जिसमें से 150 कॉल अन्य नेटर्वक पर की जा सकती हैं। हम आपको बता दें बीएसएनए ने अपने दोनों नए प्लान हैदराबाद के उपभोक्ताओं के लिए पेश किए हैं।
भारत की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल ने अपने उपभोक्ताओं के लिए नया अनलिमिटेड ब्रांडबैंड प्लान लांच किया है। नए प्लान के तहत बीएसएनएल के उपभोक्ताओं को फास्ट स्पीड ब्राडबैंड की सुविधा मिलेगी। नए प्लान में तहत बीएसएनएल फ्री प्रीपेड मोबाइल कनेक्शन भी दे रहा है। बीएसएनएल के एक एमबीपीएस अनलिमिटेड ब्रांडबैंड कांबों प्लान के तहत उपभोक्ताओं को TPTS -सात सौ निन्यानवे रुपयापए खर्च करने पड़ेंगे, जिसमें उन्हें एक एमबीपीएस स्पीड के साथ दस जीबी डेटा मिलेगा। इतना ही नहीं TPTS -सात सौ निन्यानवे के तहत उपभोक्ताओं को एक सौ फ्री लोकल और एसटीडी कॉल भी दी जाएंगी जिसमें से उपभोक्ता एक सौ मिनट की कॉल बीएसएनएल नेटर्वक पर और बाकी अन्य नेटर्वक पर कर सकता है। बीएसएनएल के दूसरे प्लान TPTS -एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे के तहत उपभोक्ताओं को हर महिने एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे रुपयापए देने पड़ेंगे जिसके तहत उन्हें चार एमबीपीएस स्पीड के साथ पचहत्तर जीबी डेटा मिलेगा। इसके अलावा TPTS -एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे प्लान के साथ तीन सौ लोकल और एसटीडी कॉल भी दी जाएंगी। जिसमें से एक सौ पचास कॉल अन्य नेटर्वक पर की जा सकती हैं। हम आपको बता दें बीएसएनए ने अपने दोनों नए प्लान हैदराबाद के उपभोक्ताओं के लिए पेश किए हैं।
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। काशीबाई १८वीं सदी के मराठा साम्राज्य के प्रधानमंत्री (पेशवा) बाजीराव प्रथम की पहली पत्नी थी। उनके चार पुत्र थे जिनमें से बालाजी बाजीराव और रघुनाथराव आगे चल कर पेशवा बने। बाजीराव की दुसरी शादी के बाद बुंदेलखंड राज्य की मस्तानी काशीबाई की सौतन थी। बाजीराव की मौत के बाद काशीबाई ने विभिन्न तीर्थयात्राएं की। कुछ इतिहासकारों के अनुसार वे एक प्रकार के संधि शोथ से पीड़ित रही। . चिमाजी अप्पा या चिमणाजी अप्पा बालाजी विश्वनाथ के बैठे और बाजीराव के छोटे भाई थे। उन्होंने पुर्तगाली शासन से भारत के पश्चिमी तट को मुक्त कराया। वह वसई किले में हुए एक कठिन युद्ध को जीत लिया। . काशीबाई और चिमाजी अप्पा आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)। काशीबाई 20 संबंध है और चिमाजी अप्पा 2 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (20 + 2)। यह लेख काशीबाई और चिमाजी अप्पा के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। काशीबाई अट्ठारहवीं सदी के मराठा साम्राज्य के प्रधानमंत्री बाजीराव प्रथम की पहली पत्नी थी। उनके चार पुत्र थे जिनमें से बालाजी बाजीराव और रघुनाथराव आगे चल कर पेशवा बने। बाजीराव की दुसरी शादी के बाद बुंदेलखंड राज्य की मस्तानी काशीबाई की सौतन थी। बाजीराव की मौत के बाद काशीबाई ने विभिन्न तीर्थयात्राएं की। कुछ इतिहासकारों के अनुसार वे एक प्रकार के संधि शोथ से पीड़ित रही। . चिमाजी अप्पा या चिमणाजी अप्पा बालाजी विश्वनाथ के बैठे और बाजीराव के छोटे भाई थे। उन्होंने पुर्तगाली शासन से भारत के पश्चिमी तट को मुक्त कराया। वह वसई किले में हुए एक कठिन युद्ध को जीत लिया। . काशीबाई और चिमाजी अप्पा आम में शून्य बातें हैं । काशीबाई बीस संबंध है और चिमाजी अप्पा दो है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख काशीबाई और चिमाजी अप्पा के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
On this page, we bring you the Lyrics of song Karle Gunaah . Karle Gunaah is a song from the Hindi movie " Ugly Aur Pagli . This song is sung by Anushka Manchanda, IshQ Bector. Music is composed by Anu Malik. The lyrics are penned by Amitabh Verma. हिंदी गाना 'करले गुनाह' रिलीज हो गया है। अनुष्का मनचंदा, इश्क बेक्टर ने इस गाने को गाया है। अमिताभ वर्मा ने गीत लिखे हैं। म्यूजिक अनु मलिक द्वारा दिया गया है। यह वीडियो सचिन कमलाकर खोट द्वारा निर्देशित है। इस वीडियो सॉन्ग में मल्लिका शेरावत और इश्क बेक्टर नजर आ रहा है. यह वीडियो गीत टी-सीरीज़ द्वारा 1 अगस्त 2008 को जारी किया गया है। आह्ह्ह्ह !! Karle Gunaah Lyrics (English Translation) Aahhhh !! Karle Gunaah Song meta information regarding the creative artists involved in this video. ।Ugly Aur Pagli (2008) Watch the Karle Gunaah video. अमिताभ वर्मा ने गीत के बोल लिखे हैं। इस गाने को अनुष्का मनचंदा, इश्क बेक्टर ने गाया है। वीडियो का निर्देशन सचिन कमलाकर खोट ने किया है। इस वीडियो सॉन्ग में मल्लिका शेरावत और इश्क बेक्टर नजर आ रहे हैं. संगीत अनु मलिक ने दिया है। यह गाना 'अग्ली और पगली' फिल्म का है। यह गीत 1 अगस्त 2008 को टी-सीरीज़ के तहत जारी किया गया था।
On this page, we bring you the Lyrics of song Karle Gunaah . Karle Gunaah is a song from the Hindi movie " Ugly Aur Pagli . This song is sung by Anushka Manchanda, IshQ Bector. Music is composed by Anu Malik. The lyrics are penned by Amitabh Verma. हिंदी गाना 'करले गुनाह' रिलीज हो गया है। अनुष्का मनचंदा, इश्क बेक्टर ने इस गाने को गाया है। अमिताभ वर्मा ने गीत लिखे हैं। म्यूजिक अनु मलिक द्वारा दिया गया है। यह वीडियो सचिन कमलाकर खोट द्वारा निर्देशित है। इस वीडियो सॉन्ग में मल्लिका शेरावत और इश्क बेक्टर नजर आ रहा है. यह वीडियो गीत टी-सीरीज़ द्वारा एक अगस्त दो हज़ार आठ को जारी किया गया है। आह्ह्ह्ह !! Karle Gunaah Lyrics Aahhhh !! Karle Gunaah Song meta information regarding the creative artists involved in this video. ।Ugly Aur Pagli Watch the Karle Gunaah video. अमिताभ वर्मा ने गीत के बोल लिखे हैं। इस गाने को अनुष्का मनचंदा, इश्क बेक्टर ने गाया है। वीडियो का निर्देशन सचिन कमलाकर खोट ने किया है। इस वीडियो सॉन्ग में मल्लिका शेरावत और इश्क बेक्टर नजर आ रहे हैं. संगीत अनु मलिक ने दिया है। यह गाना 'अग्ली और पगली' फिल्म का है। यह गीत एक अगस्त दो हज़ार आठ को टी-सीरीज़ के तहत जारी किया गया था।
Posted On: उपराष्ट्रपति श्री एम वेंकैया नायडू ने आज संयुक्त राष्ट्र जैसे बहुपक्षीय संगठनों के पुनर्गठन और उनमें सुधार लाने के बारे में बांग्लादेश से समर्थन देने की मांग की ताकि पूरी दुनिया को प्रभावित करने वाली नीतियों का कुछ देश ही निर्धारण न कर सकें। आज नई दिल्ली में बांग्लादेश के प्रशिक्षु-राजनयिकों के साथ बातचीत करते हुए श्री नायडू ने कहा कि दुनिया अब बहुध्रुवी है। इसलिए अब नई वैश्विक वास्तविकता को दर्शाने के लिए बहुपक्षीय संगठनों के पुनर्गठन का समय है। यह देखते हुए कि भारत बांग्लादेश को सबसे अधिक महत्व देता है, उन्होंने कहा कि बांग्लादेश हमारे लिए विशेष स्थान रखता है। इसलिए आपकी यह भारत यात्रा हमारे लिए बहुत विशिष्ट है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत का हमेशा यह विश्वास रहा है कि एक मजबूत, स्थिर और समृद्ध बांग्लादेश भारत के हित में है। हम 2041 तक आपको विकसित देश बनाने के लिए आपकी प्रगति की यात्रा में भागीदार बनना चाहेंगे। इस बात पर जोर देते हुए कि भारत और बांग्लादेश भूमि सीमा और समुद्री सीमा जैसे मुद्दों सहित सभी बकाया मुद्दों का समाधान करने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि आज भारत-बांग्लादेश द्विपक्षीय संबंधों को अच्छे पड़ोसी संबंधों का आदर्श माना जाता है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत और बांग्लादेश, बंगाल की खाड़ी क्षेत्र से अधिक समृद्धि हासिल करने की क्षमता रखते हैं। हमें इस उप-क्षेत्र में मौजूद अवसरों का पूरा उपयोग करने के लिए बिम्सटेक में सक्रिय भूमिका निभाने की जरूरत है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत बांग्लादेश का एक प्रतिबद्ध विकास भागीदार देश है और भारत ने बांग्लादेश की विभिन्न बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के लिए पिछले 7 वर्षों में 8 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का सकल ऋण प्रदान किया है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी अकेले देश को भारत द्वारा दी गई यह सबसे बड़ी राशि है। नागरिकता संशोधन अधिनियम के बारे में श्री नायडू ने कहा कि भारत सरकार ने उच्च स्तर पर यह स्पष्ट किया है कि इस अधिनियम का उद्देश्य धार्मिक रूप से प्रताडि़त शरणार्थियों को नागरिकता देना है और किसी भारतीय की नागरिकता को छीनना नहीं है। यह किसी भी धर्म के भारतीय नागरिक की नागरिकता को प्रभावित नहीं करता है। श्री नायडू ने शिष्टमंडल को बताया कि म्यांमार के राखीन राज्य से लाखों विस्थापितों के बांग्लादेश में आने से बांगलादेश पर पड़ने वाले भारी बोझ से भारत पूरी तरह अवगत है। भारत इन विस्थापितों के प्रति मानवीय रुख अपनाने से बांग्लादेश की सराहना करता है। रोहिंग्या शरणार्थियों को म्यांमार में वापस भेजने के लिए म्यांमार के साथ बांग्लादेश के उनके द्विपक्षीय प्रयासों में भारत का पूरा समर्थन है। श्री नायडू ने इस बात पर जोर दिया कि भारत अपने पड़ोस में शांति और स्थिरता चाहता है इसलिए सभी पड़ोसी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध रखना चाहता है। उन्होंने कहा कि कश्मीर एक सुलझा हुआ मुद्दा था। इसने पड़ोसी देश के सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए सहायता देने, उकसाने, धन उपलब्ध कराने और आतंकवादियों को प्रशिक्षण देने के सभी प्रयासों को विफल कर दिया। भारत की विकास कहानी का विवरण देते हुए श्री नायडू ने कहा कि लगातार बनी सरकारों द्वारा किए गए क्रमबद्ध सुधारों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत और लचीला बनाया है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में भारत के बारे में विश्वास और आशावाद लगातार बढ़ रहा है। राजदूत सैयद मौसूद महमूद खुंडोकर, रेक्टर, विदेश सेवा अकादमी, ढाका और विदेश मंत्रालय के महानिदेशक तथा ढाका स्थित विदेश सेवा अकादमी के महानिदेशक श्री तौफीक इस्लाम शातिल और 20 से अधिक प्रशिक्षु राजनयिक उपराष्ट्रपति के साथ बातचीत के दौरान उपस्थित थे।
Posted On: उपराष्ट्रपति श्री एम वेंकैया नायडू ने आज संयुक्त राष्ट्र जैसे बहुपक्षीय संगठनों के पुनर्गठन और उनमें सुधार लाने के बारे में बांग्लादेश से समर्थन देने की मांग की ताकि पूरी दुनिया को प्रभावित करने वाली नीतियों का कुछ देश ही निर्धारण न कर सकें। आज नई दिल्ली में बांग्लादेश के प्रशिक्षु-राजनयिकों के साथ बातचीत करते हुए श्री नायडू ने कहा कि दुनिया अब बहुध्रुवी है। इसलिए अब नई वैश्विक वास्तविकता को दर्शाने के लिए बहुपक्षीय संगठनों के पुनर्गठन का समय है। यह देखते हुए कि भारत बांग्लादेश को सबसे अधिक महत्व देता है, उन्होंने कहा कि बांग्लादेश हमारे लिए विशेष स्थान रखता है। इसलिए आपकी यह भारत यात्रा हमारे लिए बहुत विशिष्ट है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत का हमेशा यह विश्वास रहा है कि एक मजबूत, स्थिर और समृद्ध बांग्लादेश भारत के हित में है। हम दो हज़ार इकतालीस तक आपको विकसित देश बनाने के लिए आपकी प्रगति की यात्रा में भागीदार बनना चाहेंगे। इस बात पर जोर देते हुए कि भारत और बांग्लादेश भूमि सीमा और समुद्री सीमा जैसे मुद्दों सहित सभी बकाया मुद्दों का समाधान करने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि आज भारत-बांग्लादेश द्विपक्षीय संबंधों को अच्छे पड़ोसी संबंधों का आदर्श माना जाता है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत और बांग्लादेश, बंगाल की खाड़ी क्षेत्र से अधिक समृद्धि हासिल करने की क्षमता रखते हैं। हमें इस उप-क्षेत्र में मौजूद अवसरों का पूरा उपयोग करने के लिए बिम्सटेक में सक्रिय भूमिका निभाने की जरूरत है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत बांग्लादेश का एक प्रतिबद्ध विकास भागीदार देश है और भारत ने बांग्लादेश की विभिन्न बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के लिए पिछले सात वर्षों में आठ बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का सकल ऋण प्रदान किया है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी अकेले देश को भारत द्वारा दी गई यह सबसे बड़ी राशि है। नागरिकता संशोधन अधिनियम के बारे में श्री नायडू ने कहा कि भारत सरकार ने उच्च स्तर पर यह स्पष्ट किया है कि इस अधिनियम का उद्देश्य धार्मिक रूप से प्रताडि़त शरणार्थियों को नागरिकता देना है और किसी भारतीय की नागरिकता को छीनना नहीं है। यह किसी भी धर्म के भारतीय नागरिक की नागरिकता को प्रभावित नहीं करता है। श्री नायडू ने शिष्टमंडल को बताया कि म्यांमार के राखीन राज्य से लाखों विस्थापितों के बांग्लादेश में आने से बांगलादेश पर पड़ने वाले भारी बोझ से भारत पूरी तरह अवगत है। भारत इन विस्थापितों के प्रति मानवीय रुख अपनाने से बांग्लादेश की सराहना करता है। रोहिंग्या शरणार्थियों को म्यांमार में वापस भेजने के लिए म्यांमार के साथ बांग्लादेश के उनके द्विपक्षीय प्रयासों में भारत का पूरा समर्थन है। श्री नायडू ने इस बात पर जोर दिया कि भारत अपने पड़ोस में शांति और स्थिरता चाहता है इसलिए सभी पड़ोसी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध रखना चाहता है। उन्होंने कहा कि कश्मीर एक सुलझा हुआ मुद्दा था। इसने पड़ोसी देश के सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए सहायता देने, उकसाने, धन उपलब्ध कराने और आतंकवादियों को प्रशिक्षण देने के सभी प्रयासों को विफल कर दिया। भारत की विकास कहानी का विवरण देते हुए श्री नायडू ने कहा कि लगातार बनी सरकारों द्वारा किए गए क्रमबद्ध सुधारों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत और लचीला बनाया है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में भारत के बारे में विश्वास और आशावाद लगातार बढ़ रहा है। राजदूत सैयद मौसूद महमूद खुंडोकर, रेक्टर, विदेश सेवा अकादमी, ढाका और विदेश मंत्रालय के महानिदेशक तथा ढाका स्थित विदेश सेवा अकादमी के महानिदेशक श्री तौफीक इस्लाम शातिल और बीस से अधिक प्रशिक्षु राजनयिक उपराष्ट्रपति के साथ बातचीत के दौरान उपस्थित थे।
नई दिल्लीः संतों और विद्वानों का एक वर्ग 'हिंदू राष्ट्र के तौर पर भारत के संविधान' का ड्राफ्ट तैयार कर रहा है। माघ मेला 2023 के दौरान आयोजित होने वाले 'धर्म संसद' में यह मसौदा पेश किया जाएगा। इस साल फरवरी में आयोजित किए गए माघ मेले के दौरान भारत को अपने खुद के संविधान के साथ एक 'हिंदू राष्ट्र' बनाने के लिए धर्म संसद में एक प्रस्ताव पारित किया गया था। वाराणसी स्थित शंकराचार्य परिषद के प्रमुख स्वामी आनंद स्वरूप ने कहा कि अब शाम्भवी पीठाधीश्वर के संरक्षण में 30 लोगों के समूह द्वारा इस "संविधान" का एक ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि, 'यह संविधान 750 पृष्ठों का होगा और इसके प्रारूप पर अब व्यापक रूप से मंथन किया जाएगा। धार्मिक विद्वानों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श और वाद-विवाद होगा। इसी आधार पर प्रयागराज में होने वाले माघ मेला-2023 में आधा संविधान (लगभग 300 पेज) जारी कर दिया जाएगा, जिसके लिए 'धर्म संसद' का आयोजन किया जाएगा। ' उन्होंने आगे कहा कि अब तक 32 पेज तैयार कर लिए गए हैं, जिनमें शिक्षा, रक्षा, कानून-व्यवस्था, मतदान की व्यवस्था सहित अन्य विषयों से जुड़े पहलू शामिल हैं। उन्होंने कहा कि, 'इस हिंदू राष्ट्र संविधान के मुताबिक, दिल्ली की जगह वाराणसी देश की राजधानी होगी। इसके अलावा काशी में 'धर्म संसद' बनाने का भी प्रस्ताव है। ' हिन्दू राष्ट्र के संविधान का ड्राफ्ट तैयार करने वाले समूह में हिंदू राष्ट्र निर्माण समिति के अध्यक्ष कमलेश्वर उपाध्याय, सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ वकील बीएन रेड्डी, रक्षा विशेषज्ञ आनंद वर्धन, सनातन धर्म के विद्वान चंद्रमणि मिश्रा और विश्व हिंदू महासंघ के अध्यक्ष अजय सिंह समेत अन्य शामिल हैं। इस संविधान के कवर पेज पर 'अखंड भारत' का नक्शा छापा हुआ है। स्वामी आनंद स्वरूप ने कहा कि, "यह दिखाने की कोशिश की गई है कि बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, श्रीलंका और म्यांमार जैसे अन्य देशों को भारत से अलग कर दिया गया है, जो एक दिन भारत में वापस विलय हो जाएंगे। ' दस्तावेज़ पर बात करते हुए स्वरूप ने कहा कि प्रत्येक जाति के लोगों को राष्ट्र में रहने की सुविधा और सुरक्षा मिलेगी, लेकिन अन्य धर्मों के लोगों को मतदान करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि, "हिंदू राष्ट्र के संविधान के मसौदे के मुताबिक, मुस्लिम और ईसाई वोट देने के अधिकार को छोड़कर एक आम नागरिक के सभी अधिकारों का आनंद ले सकेंगे। ' स्वरुप ने कहा कि देश में व्यवसाय करने, रोजगार पाने, शिक्षा और किसी भी आम नागरिक द्वारा प्राप्त तमाम सुविधाओं का फायदा उठाने की आजादी होगी। लेकिन उन्हें अपने मताधिकार का उपयोग करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। '
नई दिल्लीः संतों और विद्वानों का एक वर्ग 'हिंदू राष्ट्र के तौर पर भारत के संविधान' का ड्राफ्ट तैयार कर रहा है। माघ मेला दो हज़ार तेईस के दौरान आयोजित होने वाले 'धर्म संसद' में यह मसौदा पेश किया जाएगा। इस साल फरवरी में आयोजित किए गए माघ मेले के दौरान भारत को अपने खुद के संविधान के साथ एक 'हिंदू राष्ट्र' बनाने के लिए धर्म संसद में एक प्रस्ताव पारित किया गया था। वाराणसी स्थित शंकराचार्य परिषद के प्रमुख स्वामी आनंद स्वरूप ने कहा कि अब शाम्भवी पीठाधीश्वर के संरक्षण में तीस लोगों के समूह द्वारा इस "संविधान" का एक ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि, 'यह संविधान सात सौ पचास पृष्ठों का होगा और इसके प्रारूप पर अब व्यापक रूप से मंथन किया जाएगा। धार्मिक विद्वानों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श और वाद-विवाद होगा। इसी आधार पर प्रयागराज में होने वाले माघ मेला-दो हज़ार तेईस में आधा संविधान जारी कर दिया जाएगा, जिसके लिए 'धर्म संसद' का आयोजन किया जाएगा। ' उन्होंने आगे कहा कि अब तक बत्तीस पेज तैयार कर लिए गए हैं, जिनमें शिक्षा, रक्षा, कानून-व्यवस्था, मतदान की व्यवस्था सहित अन्य विषयों से जुड़े पहलू शामिल हैं। उन्होंने कहा कि, 'इस हिंदू राष्ट्र संविधान के मुताबिक, दिल्ली की जगह वाराणसी देश की राजधानी होगी। इसके अलावा काशी में 'धर्म संसद' बनाने का भी प्रस्ताव है। ' हिन्दू राष्ट्र के संविधान का ड्राफ्ट तैयार करने वाले समूह में हिंदू राष्ट्र निर्माण समिति के अध्यक्ष कमलेश्वर उपाध्याय, सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ वकील बीएन रेड्डी, रक्षा विशेषज्ञ आनंद वर्धन, सनातन धर्म के विद्वान चंद्रमणि मिश्रा और विश्व हिंदू महासंघ के अध्यक्ष अजय सिंह समेत अन्य शामिल हैं। इस संविधान के कवर पेज पर 'अखंड भारत' का नक्शा छापा हुआ है। स्वामी आनंद स्वरूप ने कहा कि, "यह दिखाने की कोशिश की गई है कि बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, श्रीलंका और म्यांमार जैसे अन्य देशों को भारत से अलग कर दिया गया है, जो एक दिन भारत में वापस विलय हो जाएंगे। ' दस्तावेज़ पर बात करते हुए स्वरूप ने कहा कि प्रत्येक जाति के लोगों को राष्ट्र में रहने की सुविधा और सुरक्षा मिलेगी, लेकिन अन्य धर्मों के लोगों को मतदान करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि, "हिंदू राष्ट्र के संविधान के मसौदे के मुताबिक, मुस्लिम और ईसाई वोट देने के अधिकार को छोड़कर एक आम नागरिक के सभी अधिकारों का आनंद ले सकेंगे। ' स्वरुप ने कहा कि देश में व्यवसाय करने, रोजगार पाने, शिक्षा और किसी भी आम नागरिक द्वारा प्राप्त तमाम सुविधाओं का फायदा उठाने की आजादी होगी। लेकिन उन्हें अपने मताधिकार का उपयोग करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। '
नई दिल्ली। आकर्षक पेन जैसे दिखने वाले इस उपकरण में मधुमेह रोगियों के जीवन में बड़ा बदलाव लाने का दम है। मरीज जिन कारणों से इंसुलिन लेने से बचते हैं, उन तमाम कारणों को यह उपकरण काफी हद तक दूर कर सकता है। मधुमेह रोगियों को अब दर्द का सामना नहीं करना पड़ेगा। खास बात यह है कि मरीजों को यह उपकरण मुफ्त उपलब्ध करवाया जाएगा। इसी तरह एक नई दवा बाजार में आने को तैयार है। इससे डायबिटीज के टाइप-2 मरीजों को रोजाना की बजाय हफ्ते में सिर्फ एक बार दवा लेनी होगी। ह्यूमा पेन या सावियो नाम का यह छोटा सा उपकरण डायबिटीज मरीजों की सभी परेशानियों को बहुत कम कर देता है। यह दिखने में बेहद आकर्षक और उपयोग में काफी आसान होने के साथ ही भरोसेमंद भी है। इसे तैयार करने वाली दवा व शोध कंपनी एलाय लिलि, इंडिया के प्रबंध निदेशक एडगार्ड एलायजोला नईदुनिया के प्रकाशन दैनिक जागरण से बातचीत में कहते हैं, "हमें इसका अंदाजा है कि डायबिटीज के रोगी नहीं चाहते कि उन्हें देखते ही लोग मरीज समझने लगें। " साथ ही वे बताते हैं कि मरीज को यह उपकरण पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध करवाया जाएगा। उन सभी मरीजों को, जिन्हें डाक्टर ने इंसुलिन की नियमित खुराक लिखी है, दवा के साथ सावियो मुफ्त दिया जाएगा। वे बताते हैं कि यह उपकरण पांच साल तक चलता है। इसमें निडल इतनी छोटी है कि आसानी से दिखाई नहीं देती और दर्द भी महसूस नहीं होता। एलायजोला ने यह भी बताया कि जल्द ही डायबिटीज के टाइप 2 मरीजों के लिए भी इलाज आसान हो जाएगा। अभी इन मरीजों को रोजाना दवा लेनी होती है। मगर "ड्यूलाग्लूटाइड" के आने के बाद उन्हें हफ्ते में सिर्फ एक बार इसे लेना होगा। उन्होंने बताया कि क्लीनिकल ट्रायल के बाद अभी इसे बाजार में उतारने का आवेदन भारत में औषधि नियामक के पास लंबित है।
नई दिल्ली। आकर्षक पेन जैसे दिखने वाले इस उपकरण में मधुमेह रोगियों के जीवन में बड़ा बदलाव लाने का दम है। मरीज जिन कारणों से इंसुलिन लेने से बचते हैं, उन तमाम कारणों को यह उपकरण काफी हद तक दूर कर सकता है। मधुमेह रोगियों को अब दर्द का सामना नहीं करना पड़ेगा। खास बात यह है कि मरीजों को यह उपकरण मुफ्त उपलब्ध करवाया जाएगा। इसी तरह एक नई दवा बाजार में आने को तैयार है। इससे डायबिटीज के टाइप-दो मरीजों को रोजाना की बजाय हफ्ते में सिर्फ एक बार दवा लेनी होगी। ह्यूमा पेन या सावियो नाम का यह छोटा सा उपकरण डायबिटीज मरीजों की सभी परेशानियों को बहुत कम कर देता है। यह दिखने में बेहद आकर्षक और उपयोग में काफी आसान होने के साथ ही भरोसेमंद भी है। इसे तैयार करने वाली दवा व शोध कंपनी एलाय लिलि, इंडिया के प्रबंध निदेशक एडगार्ड एलायजोला नईदुनिया के प्रकाशन दैनिक जागरण से बातचीत में कहते हैं, "हमें इसका अंदाजा है कि डायबिटीज के रोगी नहीं चाहते कि उन्हें देखते ही लोग मरीज समझने लगें। " साथ ही वे बताते हैं कि मरीज को यह उपकरण पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध करवाया जाएगा। उन सभी मरीजों को, जिन्हें डाक्टर ने इंसुलिन की नियमित खुराक लिखी है, दवा के साथ सावियो मुफ्त दिया जाएगा। वे बताते हैं कि यह उपकरण पांच साल तक चलता है। इसमें निडल इतनी छोटी है कि आसानी से दिखाई नहीं देती और दर्द भी महसूस नहीं होता। एलायजोला ने यह भी बताया कि जल्द ही डायबिटीज के टाइप दो मरीजों के लिए भी इलाज आसान हो जाएगा। अभी इन मरीजों को रोजाना दवा लेनी होती है। मगर "ड्यूलाग्लूटाइड" के आने के बाद उन्हें हफ्ते में सिर्फ एक बार इसे लेना होगा। उन्होंने बताया कि क्लीनिकल ट्रायल के बाद अभी इसे बाजार में उतारने का आवेदन भारत में औषधि नियामक के पास लंबित है।
देश का प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थान जेएनयू एक बार फिर सेक्सुअल हरासमेंट के चलते शर्मसार है। मामला वर्ष 2012 में पीएचडी छात्रा और गाइड (शिक्षक) का है। जीएस कैश ने एक साल तक जांच की और रिपोर्ट में आरोपों को सही बताया, लेकिन जेएनयू प्रबंधन ने अब तक दोषी शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है। इससे पहले पिछले वर्ष पीड़ित छात्रा ने सेक्सुअल हरासमेंट की शिकायत करते हुए गाइड बदलने की मांग की थी, जिसे प्रबंधन ने अनसुना कर दिया था। जीएस कैश की रिपोर्ट के बाद भी कार्रवाई न होने पर कैंपस में पोस्टर वार शुरू हो गया है। अलग-अलग ढाबों और हॉस्टल में पोस्टर चिपकाकर मामले में शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। सूत्रों के अनुसार, अगस्त 2012 में पीड़ित छात्रा ने सीएसआरडी सेंटर में पीएचडी प्रोग्राम में दाखिला लिया था। सीनियर फैकल्टी मेंबर छात्रा का गाइड था और तभी उसका सेक्सुअल हरासमेंट हुआ। परेशान छात्रा ने जेएनयू प्रबंधन से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। 'न्याय चाहिए, कहीं कोई उम्मीद नहीं' उसके बाद छात्रा पीएचडी से डी-रजिस्टर्ड (बिना गाइड से पढ़ना और डी रजिस्टर्ड होने पर छात्र 10 सालों तक दोबारा पीएचडी में रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं) हो गई। इसके साथ ही वह सितंबर 2012 में जीएस कैश (सुप्रीम कोर्ट की विशाखा गाइडलाइंस के तहत शिक्षण और कामकाजी संस्थाओं में लिंगभेद मामलों पर आधारित कमेटी) को पत्र लिखकर चली गई। पत्र में पीड़ित छात्रा ने लिखा था 'मुझे न्याय चाहिए, लेकिन कहीं कोई उम्मीद नहीं दिख रही है। ' उसके बाद जीएस कैश ने मामले की जांच की और सितंबर, 2013 में रिपोर्ट जेएनयू प्रबंधन को सौंपी। सूत्रों के अनुसार, जीएस कैश कमेटी ने जांच में आरोपी शिक्षकों को दोषी पाया है। जीएस कैश कमेटी की रिपोर्ट को जेएनयू प्रबंधन आखिरी जांच मानते हुए कार्रवाई करता है, लेकिन इस मामले में कार्रवाई न होते देख छात्र संगठन सकते में हैं।
देश का प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थान जेएनयू एक बार फिर सेक्सुअल हरासमेंट के चलते शर्मसार है। मामला वर्ष दो हज़ार बारह में पीएचडी छात्रा और गाइड का है। जीएस कैश ने एक साल तक जांच की और रिपोर्ट में आरोपों को सही बताया, लेकिन जेएनयू प्रबंधन ने अब तक दोषी शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है। इससे पहले पिछले वर्ष पीड़ित छात्रा ने सेक्सुअल हरासमेंट की शिकायत करते हुए गाइड बदलने की मांग की थी, जिसे प्रबंधन ने अनसुना कर दिया था। जीएस कैश की रिपोर्ट के बाद भी कार्रवाई न होने पर कैंपस में पोस्टर वार शुरू हो गया है। अलग-अलग ढाबों और हॉस्टल में पोस्टर चिपकाकर मामले में शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। सूत्रों के अनुसार, अगस्त दो हज़ार बारह में पीड़ित छात्रा ने सीएसआरडी सेंटर में पीएचडी प्रोग्राम में दाखिला लिया था। सीनियर फैकल्टी मेंबर छात्रा का गाइड था और तभी उसका सेक्सुअल हरासमेंट हुआ। परेशान छात्रा ने जेएनयू प्रबंधन से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। 'न्याय चाहिए, कहीं कोई उम्मीद नहीं' उसके बाद छात्रा पीएचडी से डी-रजिस्टर्ड हो गई। इसके साथ ही वह सितंबर दो हज़ार बारह में जीएस कैश को पत्र लिखकर चली गई। पत्र में पीड़ित छात्रा ने लिखा था 'मुझे न्याय चाहिए, लेकिन कहीं कोई उम्मीद नहीं दिख रही है। ' उसके बाद जीएस कैश ने मामले की जांच की और सितंबर, दो हज़ार तेरह में रिपोर्ट जेएनयू प्रबंधन को सौंपी। सूत्रों के अनुसार, जीएस कैश कमेटी ने जांच में आरोपी शिक्षकों को दोषी पाया है। जीएस कैश कमेटी की रिपोर्ट को जेएनयू प्रबंधन आखिरी जांच मानते हुए कार्रवाई करता है, लेकिन इस मामले में कार्रवाई न होते देख छात्र संगठन सकते में हैं।
वायरल वीडियो। आपने अमुमन हर रोमांटिक फिल्म में एक प्रेमी को अपनी प्रेमिका को घुटने के बल बैठ प्रपोज करते देखा होगा. फिलहाल अपने प्यार का इजहार करने का यह तरीका अब पुराना हो चला है. हर कोई इन दिनों चाहता है कि वह अपने बैटर हाफ को सबसे अलग और खास अंदाज में प्रपोज करे जिससे की लंबे समय तक उसकी याद उनके जहन में ताजा रह सकें. फिलहाल सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो भी देखने को मिलते रहते हैं. जिसमें प्रेमियों को अलग-अलग अंदाज में अपनी प्रेमिका को प्रपोज करते देखा जाता रहा है. इन दिनों सोशल मीडिया पर एक तस्वीर काफी तेजी से वायरल हो रही है. जिसके जरिए एक प्रेमी अपनी प्रेमिका को प्रपोज करने की कोशिश करते देखा जा रहा है. दरअसल सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीर वायरल हो रही है, जिससे पता चल रहा है कि अपनी प्रेमिका को प्रपोज करने के लिए जिम लार्डनर ने जस्ट ईट के माध्यम से पास के एक कैफे से एक टोस्टेड सैंडविच का ऑर्डर दिया था जिसके साथ उन्होंने एक खास नोट्स लिखा था. जिस पर उन्होंने रेस्टोरेंट वालों से अपने ऑर्डर में प्याज की एक्स्ट्रा मात्रा के साथ ही उनसे पैकेजिंग के बाहर 'मुझसे शादी करोगे' लिखने को कहा था. स्कॉटलैंड में क्लाइडबैंक के किलबोवी कैफे के कर्मचारियों ने इसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर भी की है. इसके साथ ही उन्होंने यह उम्मीद भी जताई की जिम लार्डनर की प्रेमिका इसे देख काफी एक्साइटेड होंगी और पक्का हां ही बोलेंगी. फिलहाल हमें यहां इस कहानी का दुखद अंत होते दिख रहा है. क्योंकि जिम लार्डनर ने ट्विटर पर बताया कि उसकी प्रेमिका ने उनके प्रपोजल को ठुकरा दिया है.
वायरल वीडियो। आपने अमुमन हर रोमांटिक फिल्म में एक प्रेमी को अपनी प्रेमिका को घुटने के बल बैठ प्रपोज करते देखा होगा. फिलहाल अपने प्यार का इजहार करने का यह तरीका अब पुराना हो चला है. हर कोई इन दिनों चाहता है कि वह अपने बैटर हाफ को सबसे अलग और खास अंदाज में प्रपोज करे जिससे की लंबे समय तक उसकी याद उनके जहन में ताजा रह सकें. फिलहाल सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो भी देखने को मिलते रहते हैं. जिसमें प्रेमियों को अलग-अलग अंदाज में अपनी प्रेमिका को प्रपोज करते देखा जाता रहा है. इन दिनों सोशल मीडिया पर एक तस्वीर काफी तेजी से वायरल हो रही है. जिसके जरिए एक प्रेमी अपनी प्रेमिका को प्रपोज करने की कोशिश करते देखा जा रहा है. दरअसल सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीर वायरल हो रही है, जिससे पता चल रहा है कि अपनी प्रेमिका को प्रपोज करने के लिए जिम लार्डनर ने जस्ट ईट के माध्यम से पास के एक कैफे से एक टोस्टेड सैंडविच का ऑर्डर दिया था जिसके साथ उन्होंने एक खास नोट्स लिखा था. जिस पर उन्होंने रेस्टोरेंट वालों से अपने ऑर्डर में प्याज की एक्स्ट्रा मात्रा के साथ ही उनसे पैकेजिंग के बाहर 'मुझसे शादी करोगे' लिखने को कहा था. स्कॉटलैंड में क्लाइडबैंक के किलबोवी कैफे के कर्मचारियों ने इसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर भी की है. इसके साथ ही उन्होंने यह उम्मीद भी जताई की जिम लार्डनर की प्रेमिका इसे देख काफी एक्साइटेड होंगी और पक्का हां ही बोलेंगी. फिलहाल हमें यहां इस कहानी का दुखद अंत होते दिख रहा है. क्योंकि जिम लार्डनर ने ट्विटर पर बताया कि उसकी प्रेमिका ने उनके प्रपोजल को ठुकरा दिया है.
मेरी अरज़ तू ही मेरी समज तू ही तू ही रब्ब मेरा तू ही दिल जाना मेरी अरज़ तू ही मेरी समाज तू ही तू ही रब्ब मेरा तू ही दिल जाना दिल को पता देखो ना चला तुझमें कहाँ कब खोने लगा सारी आरज़ू हां देखो मेरी तुंपे आ रुकी तेरी आशिकी की धुन सवार है तुमसे प्यार है तुमसे प्यार है तुमसे प्यार है तुमसे प्यार है तुमसे प्यार है तुमसे प्यार है तुमसे प्यार है तुमसे प्यार है ओह हो ओह हो हो ओह हो ओह हो हो.. तुमसे प्यार है मेरी अरज़ तू ही मेरी समज तू ही तू ही रब्ब मेरा तू ही दिल जाना मेरी अरज़ तू ही मेरी समज तू ही तू ही रब्ब मेरा तू ही दिल जाना लम्हे जो भी मैं गुजारूं तेरे साथ हो ना करूँ मैं तो भी जाना तुमसे बात हो लम्हे जो भी मैं गुजारूं तेरे साथ हो ना करूँ मैं तो भी जाना तुमसे बात हो तेरा ज़िक्र ही रहेगा मेरे हर अफसाने में चाह हो गुमान ये ऐतबार है तुमसे प्यार है तुमसे प्यार है तुमसे प्यार है तुमसे प्यार है तुमसे प्यार है तुमसे प्यार है तुमसे प्यार है तुमसे प्यार है मेरी अरज़ तू ही मेरी समज तू ही तू ही रब्ब मेरा तू ही दिल जाना मेरी अरज़ तू ही मेरी समज तू ही तू ही रब्ब मेरा तू ही दिल जाना
मेरी अरज़ तू ही मेरी समज तू ही तू ही रब्ब मेरा तू ही दिल जाना मेरी अरज़ तू ही मेरी समाज तू ही तू ही रब्ब मेरा तू ही दिल जाना दिल को पता देखो ना चला तुझमें कहाँ कब खोने लगा सारी आरज़ू हां देखो मेरी तुंपे आ रुकी तेरी आशिकी की धुन सवार है तुमसे प्यार है तुमसे प्यार है तुमसे प्यार है तुमसे प्यार है तुमसे प्यार है तुमसे प्यार है तुमसे प्यार है तुमसे प्यार है ओह हो ओह हो हो ओह हो ओह हो हो.. तुमसे प्यार है मेरी अरज़ तू ही मेरी समज तू ही तू ही रब्ब मेरा तू ही दिल जाना मेरी अरज़ तू ही मेरी समज तू ही तू ही रब्ब मेरा तू ही दिल जाना लम्हे जो भी मैं गुजारूं तेरे साथ हो ना करूँ मैं तो भी जाना तुमसे बात हो लम्हे जो भी मैं गुजारूं तेरे साथ हो ना करूँ मैं तो भी जाना तुमसे बात हो तेरा ज़िक्र ही रहेगा मेरे हर अफसाने में चाह हो गुमान ये ऐतबार है तुमसे प्यार है तुमसे प्यार है तुमसे प्यार है तुमसे प्यार है तुमसे प्यार है तुमसे प्यार है तुमसे प्यार है तुमसे प्यार है मेरी अरज़ तू ही मेरी समज तू ही तू ही रब्ब मेरा तू ही दिल जाना मेरी अरज़ तू ही मेरी समज तू ही तू ही रब्ब मेरा तू ही दिल जाना
रजनीश जैन मिरहची। एनपीआरसी मिरहची पर अध्यापकों के तीन दिवसीय शारीरिक शिक्षा पशिक्षण की शुरूआत खण्ड शिक्षा अधिकारी श्री ओमपकाश अकेला जी द्वारा माँ सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर की गई। पशिक्षण में पशिक्षक श्री राजीव यादव ने बताया कि शिक्षकों को शारीरिक शिक्षा पशिक्षण अति महत्वपूर्ण है। यदि हमारे शिक्षक पशिक्षित होगें तो बच्चे भी शारीरिक शिक्षा पाकर लाभान्वित होंगे। ज्ञानेन्द यादव ने बताया कि आगे के चरणों में सभी अध्यापकों को ाढम से शारीरिक शिक्षा का पशिक्षण पदान किया जायेगा। पशिक्षण में उपस्थित पमुख लोगों में विनोद यादव,ज्ञानेन्द यादव, लोकपाल यादव, सुखपाल,उमेश कुमार, विनोद कुमार, मु0 साजिद, मु0 नाजिम, वीरेन्द यादव, ब्रजेश यादव, अनुराधा यादव, अर्चना, जयपाल सिंह, सुशील तिवारी, चन्दशेखर उपाध्याय, ताराचन्द चाहर, सुबोध कुमार, दयाकिशोर, शिक्षामित्र संघ के जिलाध्यक्ष अबधेश यादव, बरिष्" एवीआरसी जीतपकाश यादव, अमीर सिंह यादव, रामेन्द सिंह, ईश्वर दयाल आदि अध्यापक मौजूद थे।
रजनीश जैन मिरहची। एनपीआरसी मिरहची पर अध्यापकों के तीन दिवसीय शारीरिक शिक्षा पशिक्षण की शुरूआत खण्ड शिक्षा अधिकारी श्री ओमपकाश अकेला जी द्वारा माँ सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर की गई। पशिक्षण में पशिक्षक श्री राजीव यादव ने बताया कि शिक्षकों को शारीरिक शिक्षा पशिक्षण अति महत्वपूर्ण है। यदि हमारे शिक्षक पशिक्षित होगें तो बच्चे भी शारीरिक शिक्षा पाकर लाभान्वित होंगे। ज्ञानेन्द यादव ने बताया कि आगे के चरणों में सभी अध्यापकों को ाढम से शारीरिक शिक्षा का पशिक्षण पदान किया जायेगा। पशिक्षण में उपस्थित पमुख लोगों में विनोद यादव,ज्ञानेन्द यादव, लोकपाल यादव, सुखपाल,उमेश कुमार, विनोद कुमार, मुशून्य साजिद, मुशून्य नाजिम, वीरेन्द यादव, ब्रजेश यादव, अनुराधा यादव, अर्चना, जयपाल सिंह, सुशील तिवारी, चन्दशेखर उपाध्याय, ताराचन्द चाहर, सुबोध कुमार, दयाकिशोर, शिक्षामित्र संघ के जिलाध्यक्ष अबधेश यादव, बरिष्" एवीआरसी जीतपकाश यादव, अमीर सिंह यादव, रामेन्द सिंह, ईश्वर दयाल आदि अध्यापक मौजूद थे।
"द ग्रेट खली" को कौन नहीं जानता, भारत का बच्चा-बच्चा खली के नाम से वाकिफ है. हिमाचल प्रदेश के रहने वाले खली का असली नाम वैसे तो दिलीप सिंग राणा है. पंजाब पुलिस में काम कर चुके खली की पहली हिंदी फ़िल्म "कुश्ती" 14 मई को रिलीज़ होने वाली है. वीनस फिल्मस के बैनर में निर्मित इस फ़िल्म के निर्देशक हैं राजीव कुमार, इस फ़िल्म में काम करने वाले अन्य कलाकार हैं ओम पुरी, शरत सक्सेना, असरानी, मनोज जोशी, राजपाल यादव व नर्गिस. फ़िल्म "कुश्ती" में उत्तर भारत का एक गाँव दिखाया है जहाँ हर साल कुश्ती होती है जहाँ के सभी लोग कुश्ती के दीवाने हैं. ऐसे ही हैं अवतार सिंह(शरत सक्सेना), जिनकी बेटी लाडली (नर्गिस) से चंदर यानि (राजपाल यादव) को प्यार हो जाता है और उसे अपने प्यार को पाने के लिए साढ़े सात फुट लम्बे पहलवान खली से कुश्ती लड़नी पड़ती है, वो लाडली से तभी शादी कर सकता है अगर वो खली को इस कुश्ती में हरा दे. क्या चंदर अपने प्यार को हासिल कर लेता है क्या वो खली को चारों खाने चित्त कर देता है. या फिर बेचारा चंदर को निराशा ही हासिल होती है. 14 मई को रिलीज़ होने वाली इस फ़िल्म "कुश्ती" में खली ने एक पहलवान की ही भूमिका अभिनीत की है.
"द ग्रेट खली" को कौन नहीं जानता, भारत का बच्चा-बच्चा खली के नाम से वाकिफ है. हिमाचल प्रदेश के रहने वाले खली का असली नाम वैसे तो दिलीप सिंग राणा है. पंजाब पुलिस में काम कर चुके खली की पहली हिंदी फ़िल्म "कुश्ती" चौदह मई को रिलीज़ होने वाली है. वीनस फिल्मस के बैनर में निर्मित इस फ़िल्म के निर्देशक हैं राजीव कुमार, इस फ़िल्म में काम करने वाले अन्य कलाकार हैं ओम पुरी, शरत सक्सेना, असरानी, मनोज जोशी, राजपाल यादव व नर्गिस. फ़िल्म "कुश्ती" में उत्तर भारत का एक गाँव दिखाया है जहाँ हर साल कुश्ती होती है जहाँ के सभी लोग कुश्ती के दीवाने हैं. ऐसे ही हैं अवतार सिंह, जिनकी बेटी लाडली से चंदर यानि को प्यार हो जाता है और उसे अपने प्यार को पाने के लिए साढ़े सात फुट लम्बे पहलवान खली से कुश्ती लड़नी पड़ती है, वो लाडली से तभी शादी कर सकता है अगर वो खली को इस कुश्ती में हरा दे. क्या चंदर अपने प्यार को हासिल कर लेता है क्या वो खली को चारों खाने चित्त कर देता है. या फिर बेचारा चंदर को निराशा ही हासिल होती है. चौदह मई को रिलीज़ होने वाली इस फ़िल्म "कुश्ती" में खली ने एक पहलवान की ही भूमिका अभिनीत की है.
दिग्गज टेक कंपनी HP अपने शानदार और दमदार लैपटॉप के लिए टेक बाजार में काफी प्रसिद्द है. यह कंपनी एक से बढ़कर एक लैपटॉप यूजर्स के लिए पेश करती है. पिछले काफी दिनों से कंपनी से जुड़ी कोई खबर सुनने को नहीं मिली थी, लेकिन अब कंपनी से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई हैं, जहां बताया जा रहा हैं कि कंपनी द्वारा एक नए चीज बाजार में पेश की गई हैं. HP ने गुरुवार को एक पोर्टेबल फोटो प्रिंटर-नया एचपी स्प्रोकेट प्लस भारतीय बाजार में पेश कर दिया हैं. जिसकी कीमत 8,999 रुपये रखी गई है. ख़ास बात यह हैं कि इसे दुनिया का सबसे पतला फोटो प्रिंटर बताया जा रहा है. एचपी स्प्रोकेट की तुलना में एचपी जिंग पेपर पर 30 फीसदी बड़े फोटोज (2. 3 इंच गुणा 3. 4 इंच) निकालने में सक्षम है. जिंक पेपर की कीमत 20 के पैक की 799 रुपये बताए गई है. इस सम्बन्ध में प्रबंध निदेशक सुमीर चंद्रा ने आगे कहा, "प्रिंटेड फोटो समय के पल को पकड़ने जैसा है और युवा इसे पसंद करने लगे हैं. डिजिटल दुनिया के निवासी अपने उन पलों की तस्वीरें प्रिंट करना चाहते हैं, जिसे वे पसंद करते हैं और प्यार करते हैं. " .
दिग्गज टेक कंपनी HP अपने शानदार और दमदार लैपटॉप के लिए टेक बाजार में काफी प्रसिद्द है. यह कंपनी एक से बढ़कर एक लैपटॉप यूजर्स के लिए पेश करती है. पिछले काफी दिनों से कंपनी से जुड़ी कोई खबर सुनने को नहीं मिली थी, लेकिन अब कंपनी से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई हैं, जहां बताया जा रहा हैं कि कंपनी द्वारा एक नए चीज बाजार में पेश की गई हैं. HP ने गुरुवार को एक पोर्टेबल फोटो प्रिंटर-नया एचपी स्प्रोकेट प्लस भारतीय बाजार में पेश कर दिया हैं. जिसकी कीमत आठ,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये रखी गई है. ख़ास बात यह हैं कि इसे दुनिया का सबसे पतला फोटो प्रिंटर बताया जा रहा है. एचपी स्प्रोकेट की तुलना में एचपी जिंग पेपर पर तीस फीसदी बड़े फोटोज निकालने में सक्षम है. जिंक पेपर की कीमत बीस के पैक की सात सौ निन्यानवे रुपयापये बताए गई है. इस सम्बन्ध में प्रबंध निदेशक सुमीर चंद्रा ने आगे कहा, "प्रिंटेड फोटो समय के पल को पकड़ने जैसा है और युवा इसे पसंद करने लगे हैं. डिजिटल दुनिया के निवासी अपने उन पलों की तस्वीरें प्रिंट करना चाहते हैं, जिसे वे पसंद करते हैं और प्यार करते हैं. " .
नाचन विधान सभा क्षेत्र के हजारों कार्यकर्ताओं ने रविवार को इकठ्ठा होकर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी नाचन का स्वागतम गेट कांग्रेस प्रत्याशी नरेश चौहान की अगुवाई में नाचन विधान सभा क्षेत्र के कनैड में लगाया। उधर नाचन विधान सभा क्षेत्र की विभिन्न पंचायतों से आए हुए हजारों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मंडी दौरे पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू हिमाचल प्रदेश सरकार का गर्मजोशी से पटाखे फोडक़र, बैंड बाजे, ढोल- नगाड़ों की थाप पर पुष्प अर्पित कर एवं फूल माला पहनाकर हार्दिक स्वागत किया। तेज धूप में मुख्यमंत्री का काफिला पहुंचने से पहले लोगों की इतनी ज्यादा भीड़ लगी कि पांव धरने को भी जगह नहीं मिली। बताते चलें कि नरेश चौहान निष्पक्ष भाव से और नाचन के किसी भी कार्यकर्ताओं से कोई भी व्यक्ति विशेष मांग नहीं करते साफ सुथरी छवि नेता के रुप में आंके जा रहे हैं। सभी कार्यकर्ता नरेश चौहान की स्वच्छ छवि को मध्यनजर रखते हुए सराहना ही करते नजर आए। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने नाचन ब्लॉक कांग्रेस कमेटी की सभी प्रबुद्ध जनता को आशीर्वाद दिया। मौके पर नरेश चौहान सहित सिराज विधान सभा क्षेत्र के प्रत्याशी ठाकुर चेत राम, महामंत्री यदोपती, उमा शर्मा, बीके शर्मा समाजसेवी, वरिष्ठ कांग्रेस पार्टी के कार्यकारी आधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। उधर, सुंदरनगर के स्वास्थ्य खंड रोहांडा के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत आरकेएस पार्टटाइम वर्कर ने सुंदरनगर में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से स्थायी नीति बनाने की मांग की। आरकेएस वर्कर्स के एक प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को लोक निर्माण विश्राम गृह सुंदरनगर में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को ज्ञापन सौंपकर उनकी सेवाओं का स्थायीकरण करने की मांग की । इस अवसर पर पूर्व मुख्य संसदीय सचिव सोहन लाल ठाकुर ने भी मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से इन कर्मचारियों के लिए नीति बनाने का आग्रह किया। स्वास्थ्य खंड रोहांडा के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत आरकेएस पार्टटाइम वर्कर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आश्वासन दिया कि वे जल्द ही स्वास्थ्य मंत्री से इस विषय में वार्तालाप करेंगे। आरकेएस वर्कर किरना देवी, सावित्री देवी, दया देवी, बिमला देवी, जयदेई ने बताया कि वे पिछले 14 वर्षो से स्वास्थ्य खंड रोहांडा के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में पिछले 14 वर्षो से आरकेएस के तहत पार्टटाइम कर्मचारी के रूप में सेवाएं दे रहे हंै। लेकिन वेतन भी बहुत कम है। उन्होंने मुख्यमत्री से मिलकर स्थाई नीति बनाने का आग्रह किया है।
नाचन विधान सभा क्षेत्र के हजारों कार्यकर्ताओं ने रविवार को इकठ्ठा होकर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी नाचन का स्वागतम गेट कांग्रेस प्रत्याशी नरेश चौहान की अगुवाई में नाचन विधान सभा क्षेत्र के कनैड में लगाया। उधर नाचन विधान सभा क्षेत्र की विभिन्न पंचायतों से आए हुए हजारों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मंडी दौरे पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू हिमाचल प्रदेश सरकार का गर्मजोशी से पटाखे फोडक़र, बैंड बाजे, ढोल- नगाड़ों की थाप पर पुष्प अर्पित कर एवं फूल माला पहनाकर हार्दिक स्वागत किया। तेज धूप में मुख्यमंत्री का काफिला पहुंचने से पहले लोगों की इतनी ज्यादा भीड़ लगी कि पांव धरने को भी जगह नहीं मिली। बताते चलें कि नरेश चौहान निष्पक्ष भाव से और नाचन के किसी भी कार्यकर्ताओं से कोई भी व्यक्ति विशेष मांग नहीं करते साफ सुथरी छवि नेता के रुप में आंके जा रहे हैं। सभी कार्यकर्ता नरेश चौहान की स्वच्छ छवि को मध्यनजर रखते हुए सराहना ही करते नजर आए। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने नाचन ब्लॉक कांग्रेस कमेटी की सभी प्रबुद्ध जनता को आशीर्वाद दिया। मौके पर नरेश चौहान सहित सिराज विधान सभा क्षेत्र के प्रत्याशी ठाकुर चेत राम, महामंत्री यदोपती, उमा शर्मा, बीके शर्मा समाजसेवी, वरिष्ठ कांग्रेस पार्टी के कार्यकारी आधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। उधर, सुंदरनगर के स्वास्थ्य खंड रोहांडा के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत आरकेएस पार्टटाइम वर्कर ने सुंदरनगर में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से स्थायी नीति बनाने की मांग की। आरकेएस वर्कर्स के एक प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को लोक निर्माण विश्राम गृह सुंदरनगर में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को ज्ञापन सौंपकर उनकी सेवाओं का स्थायीकरण करने की मांग की । इस अवसर पर पूर्व मुख्य संसदीय सचिव सोहन लाल ठाकुर ने भी मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से इन कर्मचारियों के लिए नीति बनाने का आग्रह किया। स्वास्थ्य खंड रोहांडा के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत आरकेएस पार्टटाइम वर्कर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आश्वासन दिया कि वे जल्द ही स्वास्थ्य मंत्री से इस विषय में वार्तालाप करेंगे। आरकेएस वर्कर किरना देवी, सावित्री देवी, दया देवी, बिमला देवी, जयदेई ने बताया कि वे पिछले चौदह वर्षो से स्वास्थ्य खंड रोहांडा के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में पिछले चौदह वर्षो से आरकेएस के तहत पार्टटाइम कर्मचारी के रूप में सेवाएं दे रहे हंै। लेकिन वेतन भी बहुत कम है। उन्होंने मुख्यमत्री से मिलकर स्थाई नीति बनाने का आग्रह किया है।
था कि तेरा भाई तेरी रक्षा कर सकेगा ? श्रीरंग : इस भाँति, अधीर न हों, सम्राट् ! हर्ष : (रुँधे कण्ठ से ) आज मैं रो देना चाहता हूं, श्रीरंग ! जैसे प्यासी धरती के शुष्क अधरों से उठती आहों से विदग्ध हो, गगन अविरल धाराओं में ढुलक पड़ना चाहता है, वैसे ही आज मैं भी हृदय में आलोड़ित सन्ताप को सहस्रों धाराओं में बहा देना चाहता हूँ । श्रीरंग : सम्राट् ! हर्ष : उफ ! मेरी बहन आज अनाथों की तरह धरती पर न जाने कहाँ भटक रही है ? सूर्यवंशीय प्रभाकर सम्राट् प्रभाकरवर्द्धन की पुत्री आज निराश्रिता है। स्वनामधन्य नरेश गृहवर्मा की पट्टमहिषी आज गृहविहीन हो... श्रीरंग : (अधीरतापूर्वक ) ऐसे वचन न बोलें, महाराज ! आपके रहते कौन मूढ़ महादेवी को निराश्रिता कहने की मूर्खता कर सकेगा ? हर्ष : न कहने से सच बात मिथ्या नहीं हो जाती, भद्र ! निश्चय ही राजकुमारी मुझे अपना नहीं समझती, पराया मानती है, नहीं तो क्या वह मेरे पास न आकर इस भाँति अज्ञात में खो जाती । श्रीरंग : महादेवी के प्रति ऐसे विचार मन में न लायें, सम्राट् ! निश्चय ही उन्हें यहाँ आने की राह न मिली होगी । श के गुप्तचरों का सशक्त जाल पथ में बिछा है, इसी कारण वे कहीं अन्यत्र जा छिपी होंगी । हर्ष : नहीं । ऐसी बात नहीं है, श्रीरंग । जो कारागार की लौह-शृंखलाओं से भयभीत नहीं हुई, वह मिट्टी के पुतलों से क्या डरेगी ? मुझे तो किसी और ही बात
था कि तेरा भाई तेरी रक्षा कर सकेगा ? श्रीरंग : इस भाँति, अधीर न हों, सम्राट् ! हर्ष : आज मैं रो देना चाहता हूं, श्रीरंग ! जैसे प्यासी धरती के शुष्क अधरों से उठती आहों से विदग्ध हो, गगन अविरल धाराओं में ढुलक पड़ना चाहता है, वैसे ही आज मैं भी हृदय में आलोड़ित सन्ताप को सहस्रों धाराओं में बहा देना चाहता हूँ । श्रीरंग : सम्राट् ! हर्ष : उफ ! मेरी बहन आज अनाथों की तरह धरती पर न जाने कहाँ भटक रही है ? सूर्यवंशीय प्रभाकर सम्राट् प्रभाकरवर्द्धन की पुत्री आज निराश्रिता है। स्वनामधन्य नरेश गृहवर्मा की पट्टमहिषी आज गृहविहीन हो... श्रीरंग : ऐसे वचन न बोलें, महाराज ! आपके रहते कौन मूढ़ महादेवी को निराश्रिता कहने की मूर्खता कर सकेगा ? हर्ष : न कहने से सच बात मिथ्या नहीं हो जाती, भद्र ! निश्चय ही राजकुमारी मुझे अपना नहीं समझती, पराया मानती है, नहीं तो क्या वह मेरे पास न आकर इस भाँति अज्ञात में खो जाती । श्रीरंग : महादेवी के प्रति ऐसे विचार मन में न लायें, सम्राट् ! निश्चय ही उन्हें यहाँ आने की राह न मिली होगी । श के गुप्तचरों का सशक्त जाल पथ में बिछा है, इसी कारण वे कहीं अन्यत्र जा छिपी होंगी । हर्ष : नहीं । ऐसी बात नहीं है, श्रीरंग । जो कारागार की लौह-शृंखलाओं से भयभीत नहीं हुई, वह मिट्टी के पुतलों से क्या डरेगी ? मुझे तो किसी और ही बात
इंपीरियल वॉर म्यूजियम व कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से भूले हुए फुटेज और भारत, पाकिस्तान के अखबारों से सामग्री एकत्रित कर वीरता की कहानी द लास्ट पुश विद्रोह के 72 घंटों की पुनर्रचना की गई है। यह विद्रोह नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज की बहादुरी से प्रेरित था, जिसने ब्रिटिश राज के अंत को तेज कर दिया। फिल्म का प्रीमियर 25 जनवरी को फिल्म डिवीजन ऑडिटोरियम, नई दिल्ली में केंद्रीय भारी उद्योग और सार्वजनिक उद्यम मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडे और विदेश राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी की उपस्थिति में होगा। स्क्रीनिंग के बाद फिल्म के निर्देशक सुजय, 1946: रॉयल इंडियन नेवी म्यूटिनी-लास्ट वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस के लेखक व रोली बुक्स के संस्थापक-प्रकाशक प्रमोद कपूर और डॉ. बी. आर. अम्बेडकर विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ लिबरल स्टडीज के इतिहास के प्रोफेसर सलिल मिश्रा विद्रोह पर चर्चा करेंगे। उल्लेखनीय है कि 18 फरवरी, 1946 को, रॉयल इंडियन नेवी के सिपाही बॉम्बे में हड़ताल पर चले गए, जहाजों से ब्रिटिश झंडे उतार दिए और तीन दिनों में 78 जहाजों और 21 तटीय प्रतिष्ठानों पर नियंत्रण कर लिया। विद्रोह का प्रभाव ब्रिटिश भारतीय अन्य सैन्य इकाइयों पर पड़ा। 48 घंटों तक ब्रिटिश साम्राज्य के मुकुट में जड़ा रत्न नियंत्रण से बाहर होता देखा गया। अब अंग्रेजों को एहसास हो गया था कि उनके पास भारत छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। लेकिन आजादी के 75 साल बाद भी 1946 का रॉयल इंडियन नेवी विद्रोह भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में मुश्किल से जगह बना पाता है। द लास्ट पुश एक राष्ट्र की सामूहिक स्मृति में अंतर को ठीक करने का एक छोटा सा प्रयास है। यह उन तथ्यों और घटनाओं को सामने रखने का एक प्रयास है, जिसे भारत का अंतिम स्वतंत्रता संग्राम माना जा सकता है। इस साहसिक कार्य के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए आईएएनएस के प्रबंध निदेशक, सीईओ और प्रधान संपादक संदीप बामजई ने कहा, लंदन में युद्ध के बाद की सरकार को एहसास हुआ कि आरआईएन विद्रोह ने भारत से ब्रिटेन के बाहर निकलने की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। स्वतंत्रता की भावना से ओतप्रोत स्वतःस्फूर्त इस विद्रोह का देश भर की सेनाओ पर प्रभाव पड़ा। बामजई ने कहा, विद्रोह के तुरंत बाद ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली ने सत्ता के हस्तांतरण की प्रक्रिया पर बातचीत करने के लिए भारत में कैबिनेट मिशन की घोषणा की। द लास्ट पुश के निर्माण के साथ अपने जुड़ाव को याद करते हुए सुजय ने कहा, हो सकता है कि कोई इतिहास का आजीवन छात्र रहा हो, लेकिन फिर भी, ऐसी घटनाएं होती हैं, यहां तक कि समकालीन समय से भी, जो फोकस में नहीं आतीं। जब मैंने एक फिल्म निर्माता के रूप में इस विषय पर शोध करना शुरू किया, तो मुझे एहसास हुआ कि ऐसी कई अनकही कहानियां हैं, जिन्हें समझने के लिए यह याद रखने की जरूरत है कि भारत ने अपनी आजादी कैसे हासिल की। सुजय ने विद्रोह पर अपने शोध से अपनी एक उल्लेखनीय खोज साझा की। उन्होंने कहा, फिल्म बनाते समय मैंने भारत के लोगों के लिए हड़ताल समिति के अंतिम संदेश को देखा, जो इस स्वीकृति के साथ समाप्त हुआ कि यह पहली बार था कि सेवाओं में लोगों का खून एक सामान्य कारण से बहता है और वे इसे कभी नहीं भूलेंगे। उन्होंने कहा, मुझे यह विडंबना ही लगी कि लोग उन जवानों की बहादुरी और बलिदान को भूल गए। (आईएएनएस)
इंपीरियल वॉर म्यूजियम व कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से भूले हुए फुटेज और भारत, पाकिस्तान के अखबारों से सामग्री एकत्रित कर वीरता की कहानी द लास्ट पुश विद्रोह के बहत्तर घंटाटों की पुनर्रचना की गई है। यह विद्रोह नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज की बहादुरी से प्रेरित था, जिसने ब्रिटिश राज के अंत को तेज कर दिया। फिल्म का प्रीमियर पच्चीस जनवरी को फिल्म डिवीजन ऑडिटोरियम, नई दिल्ली में केंद्रीय भारी उद्योग और सार्वजनिक उद्यम मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडे और विदेश राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी की उपस्थिति में होगा। स्क्रीनिंग के बाद फिल्म के निर्देशक सुजय, एक हज़ार नौ सौ छियालीस: रॉयल इंडियन नेवी म्यूटिनी-लास्ट वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस के लेखक व रोली बुक्स के संस्थापक-प्रकाशक प्रमोद कपूर और डॉ. बी. आर. अम्बेडकर विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ लिबरल स्टडीज के इतिहास के प्रोफेसर सलिल मिश्रा विद्रोह पर चर्चा करेंगे। उल्लेखनीय है कि अट्ठारह फरवरी, एक हज़ार नौ सौ छियालीस को, रॉयल इंडियन नेवी के सिपाही बॉम्बे में हड़ताल पर चले गए, जहाजों से ब्रिटिश झंडे उतार दिए और तीन दिनों में अठहत्तर जहाजों और इक्कीस तटीय प्रतिष्ठानों पर नियंत्रण कर लिया। विद्रोह का प्रभाव ब्रिटिश भारतीय अन्य सैन्य इकाइयों पर पड़ा। अड़तालीस घंटाटों तक ब्रिटिश साम्राज्य के मुकुट में जड़ा रत्न नियंत्रण से बाहर होता देखा गया। अब अंग्रेजों को एहसास हो गया था कि उनके पास भारत छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। लेकिन आजादी के पचहत्तर साल बाद भी एक हज़ार नौ सौ छियालीस का रॉयल इंडियन नेवी विद्रोह भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में मुश्किल से जगह बना पाता है। द लास्ट पुश एक राष्ट्र की सामूहिक स्मृति में अंतर को ठीक करने का एक छोटा सा प्रयास है। यह उन तथ्यों और घटनाओं को सामने रखने का एक प्रयास है, जिसे भारत का अंतिम स्वतंत्रता संग्राम माना जा सकता है। इस साहसिक कार्य के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए आईएएनएस के प्रबंध निदेशक, सीईओ और प्रधान संपादक संदीप बामजई ने कहा, लंदन में युद्ध के बाद की सरकार को एहसास हुआ कि आरआईएन विद्रोह ने भारत से ब्रिटेन के बाहर निकलने की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। स्वतंत्रता की भावना से ओतप्रोत स्वतःस्फूर्त इस विद्रोह का देश भर की सेनाओ पर प्रभाव पड़ा। बामजई ने कहा, विद्रोह के तुरंत बाद ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली ने सत्ता के हस्तांतरण की प्रक्रिया पर बातचीत करने के लिए भारत में कैबिनेट मिशन की घोषणा की। द लास्ट पुश के निर्माण के साथ अपने जुड़ाव को याद करते हुए सुजय ने कहा, हो सकता है कि कोई इतिहास का आजीवन छात्र रहा हो, लेकिन फिर भी, ऐसी घटनाएं होती हैं, यहां तक कि समकालीन समय से भी, जो फोकस में नहीं आतीं। जब मैंने एक फिल्म निर्माता के रूप में इस विषय पर शोध करना शुरू किया, तो मुझे एहसास हुआ कि ऐसी कई अनकही कहानियां हैं, जिन्हें समझने के लिए यह याद रखने की जरूरत है कि भारत ने अपनी आजादी कैसे हासिल की। सुजय ने विद्रोह पर अपने शोध से अपनी एक उल्लेखनीय खोज साझा की। उन्होंने कहा, फिल्म बनाते समय मैंने भारत के लोगों के लिए हड़ताल समिति के अंतिम संदेश को देखा, जो इस स्वीकृति के साथ समाप्त हुआ कि यह पहली बार था कि सेवाओं में लोगों का खून एक सामान्य कारण से बहता है और वे इसे कभी नहीं भूलेंगे। उन्होंने कहा, मुझे यह विडंबना ही लगी कि लोग उन जवानों की बहादुरी और बलिदान को भूल गए।
आर्थिक मामलों की मंत्रिमण्डलीय समिति (सीसीईए) Posted On: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-2) के चकेरी-इलाहाबाद खंड का छह लाइनों में विकास करने को अपनी मंजूरी दी है। भूमि अर्जन की लागत, पुनर्वास और पुनर्रोदधार और अन्य निर्माण-पूर्व कार्यकलापों सहित इस परियोजना की अनुमानित लागत 3691.09 करोड़ रूपये है। यह कार्य हाइब्रिड वर्षिता मोड पर राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना (एनएचडीपी) फेस V के अन्तर्गत किया जाएगा। इस परियोजना से उत्तर प्रदेश में अवसंरचना के सुधार में तेजी लाने और यातायात के लिए समय और लागत कम करने विशेष रूप से भारी यातायात, चकेरी और इलाहाबाद के बीच आने जाने में समय और लागत कम करने में मदद मिलेगी। इस मार्ग के विकास से राज्य के इस क्षेत्र की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार करने में भी मदद मिलेगी। यह परियोजना एनएच-2 पर दिल्ली और कोलकाता के बीच स्वर्ण चतुर्भुज का भाग है। इस परियोजना से उत्तर प्रदेश के दक्षिणी - पश्चिमी भाग पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। इस राजमार्ग के रास्ते में आने वाले महत्त्वपूर्ण नगर और शहरी बस्तियां कानपुर नगर, रूमा, चौदगरा, माल्वा, फतेहपुर और कौशाम्बी है। कानपुर उत्तर भारत का सबसे पुराना प्रसिद्ध औद्योगिक नगर है। इस नगर को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के "काउन्टर मैग्नेट्स" में भी शामिल किया गया है। इलाहाबाद प्रसिद्ध तीर्थयात्रा केन्द्र है जिसमें प्राचीन ऐतिहासिक स्मारक और भवनों के साथ-साथ अनेक शैक्षिक संस्थान भी मौजूद हैं। इस परियोना में, 11 ट्रक ले-बाई (सड़क के किनारे वाहन खड़ा करने का स्थान) का प्रावधान है जहां पर ट्रक मुख्य रूप से लदाई-उतराई के लिए रूकते हैं। इसमें 14 वाहन अंडर पास और 25 पैदल यात्री अंडर पास के अतिरिक्त नौ फ्लाईओवरों का भी प्रावधान है। इस परियोजना के माध्यम से परियोजना गतिविधियों के लिए स्थानीय श्रमिकों के लिए रोजगार की संभावना भी बढ़ेगी। यह अनुमान लगाया गया है कि एक किलोमीटर राजमार्ग का निर्माण करने के लिए 4076 मानव दिवसों की जरूरत होती है। इस प्रकार, इस मार्ग की निर्माण अवधि के दौरान स्थानीय रूप से 5,91,000 (अनुमानित) मानव दिवसों का रोजगार सृजन होने की संभावना है।
आर्थिक मामलों की मंत्रिमण्डलीय समिति Posted On: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग के चकेरी-इलाहाबाद खंड का छह लाइनों में विकास करने को अपनी मंजूरी दी है। भूमि अर्जन की लागत, पुनर्वास और पुनर्रोदधार और अन्य निर्माण-पूर्व कार्यकलापों सहित इस परियोजना की अनुमानित लागत तीन हज़ार छः सौ इक्यानवे.नौ करोड़ रूपये है। यह कार्य हाइब्रिड वर्षिता मोड पर राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना फेस V के अन्तर्गत किया जाएगा। इस परियोजना से उत्तर प्रदेश में अवसंरचना के सुधार में तेजी लाने और यातायात के लिए समय और लागत कम करने विशेष रूप से भारी यातायात, चकेरी और इलाहाबाद के बीच आने जाने में समय और लागत कम करने में मदद मिलेगी। इस मार्ग के विकास से राज्य के इस क्षेत्र की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार करने में भी मदद मिलेगी। यह परियोजना एनएच-दो पर दिल्ली और कोलकाता के बीच स्वर्ण चतुर्भुज का भाग है। इस परियोजना से उत्तर प्रदेश के दक्षिणी - पश्चिमी भाग पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। इस राजमार्ग के रास्ते में आने वाले महत्त्वपूर्ण नगर और शहरी बस्तियां कानपुर नगर, रूमा, चौदगरा, माल्वा, फतेहपुर और कौशाम्बी है। कानपुर उत्तर भारत का सबसे पुराना प्रसिद्ध औद्योगिक नगर है। इस नगर को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के "काउन्टर मैग्नेट्स" में भी शामिल किया गया है। इलाहाबाद प्रसिद्ध तीर्थयात्रा केन्द्र है जिसमें प्राचीन ऐतिहासिक स्मारक और भवनों के साथ-साथ अनेक शैक्षिक संस्थान भी मौजूद हैं। इस परियोना में, ग्यारह ट्रक ले-बाई का प्रावधान है जहां पर ट्रक मुख्य रूप से लदाई-उतराई के लिए रूकते हैं। इसमें चौदह वाहन अंडर पास और पच्चीस पैदल यात्री अंडर पास के अतिरिक्त नौ फ्लाईओवरों का भी प्रावधान है। इस परियोजना के माध्यम से परियोजना गतिविधियों के लिए स्थानीय श्रमिकों के लिए रोजगार की संभावना भी बढ़ेगी। यह अनुमान लगाया गया है कि एक किलोमीटर राजमार्ग का निर्माण करने के लिए चार हज़ार छिहत्तर मानव दिवसों की जरूरत होती है। इस प्रकार, इस मार्ग की निर्माण अवधि के दौरान स्थानीय रूप से पाँच,इक्यानवे,शून्य मानव दिवसों का रोजगार सृजन होने की संभावना है।
बोरिंग मरम्मत की बात कहकर थाना लाए गए भांसी के उप सरपंच बुट्टू राम वेट्टी को रायपुर पुलिस गुपचुप तरीके से अपने साथ ले गई। chhattisgarhSun, 09 Feb 2014 07:18 PM (IST) विधानसभा में शुक्रवार को चिटफंड कंपनियों की ठगी और इस मामले में पुलिस की ढीलीढाली जांच का मामला उठा। विधायक देवजी भाई पटेल ने ध्यानाकर्षण सूचना के तहत सदन का ध्यान इस ओर खींचा कि पूरे प्रदेश से 500 करोड़ रुपए बटोरने वाली . . . chhattisgarhSat, 08 Feb 2014 12:36 AM (IST) आईजी जीपी सिंह ने शहर के सभी पार्किंग ठेकेदारों को पार्किंग स्थल पर एक बोर्ड लगाने को कहा है, जिसमें पार्किंग स्थल के नाम से लेकर ठेकेदार का नाम, पता, मोबाइल नंबर, गाड़ियां का शुल्क का विवरण और पुलिस कंट्रोल रूम या नजदीक . . . chhattisgarhThu, 06 Feb 2014 11:58 PM (IST) नक्सलियों के मददगार बद्री गावंडे की निशानदेही पर एटीएस और रायपुर पुलिस ने एनजीओ संचालक प्रभात पट्टावी के घर पर बुधवार को छापा मारा। पुलिस की टीम ने छह घंटे लगातार उनके घर की तलाशी ली। मंगलवार रात को भी उनके घर पर दस्तावे. . . chhattisgarhThu, 06 Feb 2014 01:47 AM (IST) खुद को नक्सली बताते हुए माना कैम्प में रहने वाले एक व्यक्ति से दो लाख की मांग करने के आरोप में पुलिस ने युवक-युवती को बुधवार को गिरफ्तार किया। दोनों दोस्त हैं। आरोपियों ने पैसा नहीं देने पर उस व्यक्ति और उसके बेटे को जान. . . chhattisgarhWed, 05 Feb 2014 11:09 PM (IST) दो महीने पहले शहर के एक निजी अस्पताल से 127 नग स्मोक डिटेक्टर (फायर अलार्म) निकालकर ले जाने वाले एक गिरोह के दो शातिर ठग सोमवार को क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़ गए। ठगों के कब्जे से 35 नग स्मोक डिटेक्टर व दो मोबाइल बरामद कर . . . chhattisgarhTue, 04 Feb 2014 01:45 AM (IST) रविवार को आधी रात बैजनाथपारा में नाल लेकर एक घर में खिलावाए जा रहे एक जुए के फड़ में कोतवाली पुलिस ने दबिश दी। मौके से 13 कारोबारी जुआ खेलते पकड़े गए। पुलिस ने फड़ लगाने के आरोप में एक महिला को भी गिरफ्तार किया। chhattisgarhTue, 04 Feb 2014 01:44 AM (IST) भनपुरी से एक 13 साल की किशोरी गायब हो गई। तीन दिन बाद भी उसका पता नहीं चला है। पुलिस ने अपहरण का मामला दर्ज किया है। वहीं दो महिला भी लापता हैं। खमतराई पुलिस के मुताबिक भनपुरी निवासी हेमीन सेन (40) की 13 साल की बेटी 31 ज. . . chhattisgarhMon, 03 Feb 2014 12:16 AM (IST) फाइनेंस ब्रोकर सुनील आहूजा को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के मामले में पुलिस ने आरोपी कुलदीप सिंह चावला को जांच में निर्दोष पाया है। उसे जेल से रिहा करने के लिए अदालत में क्लोजर रिपोर्ट पेश की है। जबकि 13 जून 2012 की घ. . . chhattisgarhSun, 02 Feb 2014 11:44 PM (IST) पंडरी में एक कारोबारी के घर से उसका कर्मचारी पैसों से भरा बैग लेकर फरार हो गया। बैग में दो लाख रुपए थे। कारोबारी ने थाने में लिखित शिकायत की है। सिविल लाइन पुलिस के मुताबिक पंडरी अशोक विहार निवासी विशाल बैद (25) का कपड़े . . . chhattisgarhSun, 02 Feb 2014 10:57 PM (IST)
बोरिंग मरम्मत की बात कहकर थाना लाए गए भांसी के उप सरपंच बुट्टू राम वेट्टी को रायपुर पुलिस गुपचुप तरीके से अपने साथ ले गई। chhattisgarhSun, नौ फ़रवरी दो हज़ार चौदह सात:अट्ठारह PM विधानसभा में शुक्रवार को चिटफंड कंपनियों की ठगी और इस मामले में पुलिस की ढीलीढाली जांच का मामला उठा। विधायक देवजी भाई पटेल ने ध्यानाकर्षण सूचना के तहत सदन का ध्यान इस ओर खींचा कि पूरे प्रदेश से पाँच सौ करोड़ रुपए बटोरने वाली . . . chhattisgarhSat, आठ फ़रवरी दो हज़ार चौदह बारह:छत्तीस AM आईजी जीपी सिंह ने शहर के सभी पार्किंग ठेकेदारों को पार्किंग स्थल पर एक बोर्ड लगाने को कहा है, जिसमें पार्किंग स्थल के नाम से लेकर ठेकेदार का नाम, पता, मोबाइल नंबर, गाड़ियां का शुल्क का विवरण और पुलिस कंट्रोल रूम या नजदीक . . . chhattisgarhThu, छः फ़रवरी दो हज़ार चौदह ग्यारह:अट्ठावन PM नक्सलियों के मददगार बद्री गावंडे की निशानदेही पर एटीएस और रायपुर पुलिस ने एनजीओ संचालक प्रभात पट्टावी के घर पर बुधवार को छापा मारा। पुलिस की टीम ने छह घंटे लगातार उनके घर की तलाशी ली। मंगलवार रात को भी उनके घर पर दस्तावे. . . chhattisgarhThu, छः फ़रवरी दो हज़ार चौदह एक:सैंतालीस AM खुद को नक्सली बताते हुए माना कैम्प में रहने वाले एक व्यक्ति से दो लाख की मांग करने के आरोप में पुलिस ने युवक-युवती को बुधवार को गिरफ्तार किया। दोनों दोस्त हैं। आरोपियों ने पैसा नहीं देने पर उस व्यक्ति और उसके बेटे को जान. . . chhattisgarhWed, पाँच फ़रवरी दो हज़ार चौदह ग्यारह:नौ PM दो महीने पहले शहर के एक निजी अस्पताल से एक सौ सत्ताईस नग स्मोक डिटेक्टर निकालकर ले जाने वाले एक गिरोह के दो शातिर ठग सोमवार को क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़ गए। ठगों के कब्जे से पैंतीस नग स्मोक डिटेक्टर व दो मोबाइल बरामद कर . . . chhattisgarhTue, चार फ़रवरी दो हज़ार चौदह एक:पैंतालीस AM रविवार को आधी रात बैजनाथपारा में नाल लेकर एक घर में खिलावाए जा रहे एक जुए के फड़ में कोतवाली पुलिस ने दबिश दी। मौके से तेरह कारोबारी जुआ खेलते पकड़े गए। पुलिस ने फड़ लगाने के आरोप में एक महिला को भी गिरफ्तार किया। chhattisgarhTue, चार फ़रवरी दो हज़ार चौदह एक:चौंतालीस AM भनपुरी से एक तेरह साल की किशोरी गायब हो गई। तीन दिन बाद भी उसका पता नहीं चला है। पुलिस ने अपहरण का मामला दर्ज किया है। वहीं दो महिला भी लापता हैं। खमतराई पुलिस के मुताबिक भनपुरी निवासी हेमीन सेन की तेरह साल की बेटी इकतीस ज. . . chhattisgarhMon, तीन फ़रवरी दो हज़ार चौदह बारह:सोलह AM फाइनेंस ब्रोकर सुनील आहूजा को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के मामले में पुलिस ने आरोपी कुलदीप सिंह चावला को जांच में निर्दोष पाया है। उसे जेल से रिहा करने के लिए अदालत में क्लोजर रिपोर्ट पेश की है। जबकि तेरह जून दो हज़ार बारह की घ. . . chhattisgarhSun, दो फ़रवरी दो हज़ार चौदह ग्यारह:चौंतालीस PM पंडरी में एक कारोबारी के घर से उसका कर्मचारी पैसों से भरा बैग लेकर फरार हो गया। बैग में दो लाख रुपए थे। कारोबारी ने थाने में लिखित शिकायत की है। सिविल लाइन पुलिस के मुताबिक पंडरी अशोक विहार निवासी विशाल बैद का कपड़े . . . chhattisgarhSun, दो फ़रवरी दो हज़ार चौदह दस:सत्तावन PM
जीएमआर एयरपोट्र्स लिमिटेड इस महीने और जनवरी 2021 में देय बकाए के भुगतान के लिए गैर-परिवर्तनीय ऋणपत्र के जरिये 3,000 करोड़ रुपये तक जुटाएगी। इसकी आधी रकम एक साल के ऋणपत्र के जरिए जुटाई जाएगी जबकि बाकी रकम 36 महीने में परिपक्व होने वाले एनसीडी के जरिये। कंपनी को वित्त वर्ष 2021 में करीब 2,976 करोड़ रुपये मूलधन का पुनर्भुगतान करना है। कंपनी की योजना एनसीडी से जुटाई रकम और ग्रुपे एडीपी सौदे के बाद मिली 1,000 करोड़ रुपये की इक्विटी के जरिए भुगतान करने की है। फरवरी 2020 में जीएमआर समूह ने इंटरनैशनल एयरपोर्ट ऑपरेटर ग्रुपे एडीपी ऑफ फ्रांस संग करार पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत एयरपोर्ट होल्डिंग कंपनी जीएमआर एयरपोट्र्स की 49 फीसदी हिस्सेदारी बेची गई। जीएमआर समूह के पास अभी इस कंपनी में 51 फीसदी हिस्सेदारी है। केयर रेटिंग्स ने जीएमआर एयरपोट्र्स की एनसीडी को ए - रेटिंग दी है। इसका आउटलुक नकारात्मक है। इस रेटिंग में जीएएल को दो अहम एयरपोर्ट (दिल्ली इंटरनैशनल एयरपोर्ट व जीएमआर हैदराबाद इंटरनैशनल एयरपोर्ट) की होल्डिंग कंपनी का स्टेटस समाहित किया गया है। दोनों एयरपोर्ट ने वित्त्त वर्ष 2020 तक कारोबारी प्रोफाइल में लगातार सुधार दर्ज किया है। जीएमआर एयरपोट्र्स लिमिटेड इस महीने और जनवरी 2021 में देय बकाए के भुगतान के लिए गैर-परिवर्तनीय ऋणपत्र के जरिये 3,000 करोड़ रुपये तक जुटाएगी। इसकी आधी रकम एक साल के ऋणपत्र के जरिए जुटाई जाएगी जबकि बाकी रकम 36 महीने में परिपक्व होने वाले एनसीडी के जरिये।
जीएमआर एयरपोट्र्स लिमिटेड इस महीने और जनवरी दो हज़ार इक्कीस में देय बकाए के भुगतान के लिए गैर-परिवर्तनीय ऋणपत्र के जरिये तीन,शून्य करोड़ रुपये तक जुटाएगी। इसकी आधी रकम एक साल के ऋणपत्र के जरिए जुटाई जाएगी जबकि बाकी रकम छत्तीस महीने में परिपक्व होने वाले एनसीडी के जरिये। कंपनी को वित्त वर्ष दो हज़ार इक्कीस में करीब दो,नौ सौ छिहत्तर करोड़ रुपये मूलधन का पुनर्भुगतान करना है। कंपनी की योजना एनसीडी से जुटाई रकम और ग्रुपे एडीपी सौदे के बाद मिली एक,शून्य करोड़ रुपये की इक्विटी के जरिए भुगतान करने की है। फरवरी दो हज़ार बीस में जीएमआर समूह ने इंटरनैशनल एयरपोर्ट ऑपरेटर ग्रुपे एडीपी ऑफ फ्रांस संग करार पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत एयरपोर्ट होल्डिंग कंपनी जीएमआर एयरपोट्र्स की उनचास फीसदी हिस्सेदारी बेची गई। जीएमआर समूह के पास अभी इस कंपनी में इक्यावन फीसदी हिस्सेदारी है। केयर रेटिंग्स ने जीएमआर एयरपोट्र्स की एनसीडी को ए - रेटिंग दी है। इसका आउटलुक नकारात्मक है। इस रेटिंग में जीएएल को दो अहम एयरपोर्ट की होल्डिंग कंपनी का स्टेटस समाहित किया गया है। दोनों एयरपोर्ट ने वित्त्त वर्ष दो हज़ार बीस तक कारोबारी प्रोफाइल में लगातार सुधार दर्ज किया है। जीएमआर एयरपोट्र्स लिमिटेड इस महीने और जनवरी दो हज़ार इक्कीस में देय बकाए के भुगतान के लिए गैर-परिवर्तनीय ऋणपत्र के जरिये तीन,शून्य करोड़ रुपये तक जुटाएगी। इसकी आधी रकम एक साल के ऋणपत्र के जरिए जुटाई जाएगी जबकि बाकी रकम छत्तीस महीने में परिपक्व होने वाले एनसीडी के जरिये।
मुंबई के अँधेरी स्पोर्ट्स क्लब में खेले गए इंटरकॉन्टिनेंटल कप के तीसरे मैच में भारतीय फुटबॉल टीम ने कप्तान सुनील छेत्री के दो गोल की बदौलत केन्या को एकतरफा मुकाबले में 3-0 से हरा दिया। सुनील छेत्री के अलावा भारत के लिए जेजे लालपेख्लुआ ने भी एक गोल किया। भारत की यह इस टूर्नामेंट में लगातार दूसरी जीत है। सुनील छेत्री ने आज के मैच के साथ भारत के लिए अपने 100 अंतरराष्ट्रीय मैच भी पूरे किये और बाइचुंग भूटिया (104) के बाद ऐसा करने वाले दूसरे भारतीय खिलाड़ी बने। भारत के लिए आज के मुकाबले में पहला गोल सुनील छेत्री ने पेनल्टी की मदद से 68वें मिनट में किया। इसके बाद 71वें मिनट में जेजे लालपेख्लुआ ने मैच का दूसरा गोल किया। हाफ टाइम के समय दोनों टीमें 0-0 से बराबर थी लेकिन दूसरे हाफ में मेजबानों ने जबरदस्त प्रदर्शन किया। 90 मिनट में बाद खेले गए अतिरिक्त समय में कप्तान सुनील छेत्री ने 91वें मिनट में एक और गोल करके भारत को 3-0 की विजयी बढ़त दिला दी। सुनील छेत्री (61) ने अपने दो गोल के साथ मौजूदा फुटबॉल खिलाड़ियों में सबसे ज्यादा गोल करने के मामले में डेविड विला (59) को पीछे छोड़ा और उनका अगला निशाना लियोनेल मेसी (64) होंगे। भारत का अगला मैच 7 जून को न्यूजीलैंड के खिलाफ होगा। पहले मुकाबले में भारत ने चीनी तायपेई को 5-0 से और दूसरे मुकाबले में केन्या ने न्यूजीलैंड को 2-1 से हराया था। टूर्नामेंट का फाइनल 10 जून को खेला जाएगा।
मुंबई के अँधेरी स्पोर्ट्स क्लब में खेले गए इंटरकॉन्टिनेंटल कप के तीसरे मैच में भारतीय फुटबॉल टीम ने कप्तान सुनील छेत्री के दो गोल की बदौलत केन्या को एकतरफा मुकाबले में तीन-शून्य से हरा दिया। सुनील छेत्री के अलावा भारत के लिए जेजे लालपेख्लुआ ने भी एक गोल किया। भारत की यह इस टूर्नामेंट में लगातार दूसरी जीत है। सुनील छेत्री ने आज के मैच के साथ भारत के लिए अपने एक सौ अंतरराष्ट्रीय मैच भी पूरे किये और बाइचुंग भूटिया के बाद ऐसा करने वाले दूसरे भारतीय खिलाड़ी बने। भारत के लिए आज के मुकाबले में पहला गोल सुनील छेत्री ने पेनल्टी की मदद से अड़सठवें मिनट में किया। इसके बाद इकहत्तरवें मिनट में जेजे लालपेख्लुआ ने मैच का दूसरा गोल किया। हाफ टाइम के समय दोनों टीमें शून्य-शून्य से बराबर थी लेकिन दूसरे हाफ में मेजबानों ने जबरदस्त प्रदर्शन किया। नब्बे मिनट में बाद खेले गए अतिरिक्त समय में कप्तान सुनील छेत्री ने इक्यानवेवें मिनट में एक और गोल करके भारत को तीन-शून्य की विजयी बढ़त दिला दी। सुनील छेत्री ने अपने दो गोल के साथ मौजूदा फुटबॉल खिलाड़ियों में सबसे ज्यादा गोल करने के मामले में डेविड विला को पीछे छोड़ा और उनका अगला निशाना लियोनेल मेसी होंगे। भारत का अगला मैच सात जून को न्यूजीलैंड के खिलाफ होगा। पहले मुकाबले में भारत ने चीनी तायपेई को पाँच-शून्य से और दूसरे मुकाबले में केन्या ने न्यूजीलैंड को दो-एक से हराया था। टूर्नामेंट का फाइनल दस जून को खेला जाएगा।
PATNA: बाढ़ प्रभावित और जलजमाव वाले इलाकों का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पटना पहुंचे। पटना में पत्रकारों ने जब पूछा कि राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव चुनाव प्रचार के लिए बिहार आने वाले हैं इस पर आपका क्या कहना है? तब मीडिया के इस सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि उन्हें रोकता कौन है? वह तो पहले भी करते रहे हैं। लालू जी भाषण देंगे कि क्या करेंगे यह वही बताएंगे। वे तो जेल से भी यह सब करते रहे हैं। बिहार के कुशेश्वरस्थान और तारापुर में होने वाले उपचुनाव पर मुख्यमंत्री ने कहा कि एनडीए दोनों सीटों पर मजबूती से चुनाव लड़ रही है। अब जनता को फैसला लेना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम लोग एकजुट है। सीएम नीतीश ने यह भी कहा कि सभी पार्टियों को सोचने का अपना-अपना तरीका होता है कौन क्या बोलता है इससे कोई मतलब नहीं है। हम बस यही जानते है कि जनता ही सर्वेसर्वा है वही फैसला लेगी। गौरतलब है कि सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज वैशाली, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण और गोपालगंज के बाढ़ प्रभावित और जलजमाव वाले क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करने निकले थे। इस दौरान अब तक हुए बाढ़ और जलजमाव से फसलों की क्षति का उन्होंने जायजा लिया। सीएम नीतीश हाल में भारी बारिश से हुई बर्बादी का भी सर्वेक्षण किया। हवाई सर्वेक्षण के दौरान जल संसाधन मंत्री संजय झा भी उनके साथ थे। मिली जानकारी के अनुसार, इस वर्ष बाढ़ और बारिश से हुए जलजमाव के कारण 98 हजार एकड़ में लगी फसल बर्बाद हुईं है। इसकी रिपोर्ट सरकार को भेजी जा चुकी है।
PATNA: बाढ़ प्रभावित और जलजमाव वाले इलाकों का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पटना पहुंचे। पटना में पत्रकारों ने जब पूछा कि राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव चुनाव प्रचार के लिए बिहार आने वाले हैं इस पर आपका क्या कहना है? तब मीडिया के इस सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि उन्हें रोकता कौन है? वह तो पहले भी करते रहे हैं। लालू जी भाषण देंगे कि क्या करेंगे यह वही बताएंगे। वे तो जेल से भी यह सब करते रहे हैं। बिहार के कुशेश्वरस्थान और तारापुर में होने वाले उपचुनाव पर मुख्यमंत्री ने कहा कि एनडीए दोनों सीटों पर मजबूती से चुनाव लड़ रही है। अब जनता को फैसला लेना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम लोग एकजुट है। सीएम नीतीश ने यह भी कहा कि सभी पार्टियों को सोचने का अपना-अपना तरीका होता है कौन क्या बोलता है इससे कोई मतलब नहीं है। हम बस यही जानते है कि जनता ही सर्वेसर्वा है वही फैसला लेगी। गौरतलब है कि सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज वैशाली, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण और गोपालगंज के बाढ़ प्रभावित और जलजमाव वाले क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करने निकले थे। इस दौरान अब तक हुए बाढ़ और जलजमाव से फसलों की क्षति का उन्होंने जायजा लिया। सीएम नीतीश हाल में भारी बारिश से हुई बर्बादी का भी सर्वेक्षण किया। हवाई सर्वेक्षण के दौरान जल संसाधन मंत्री संजय झा भी उनके साथ थे। मिली जानकारी के अनुसार, इस वर्ष बाढ़ और बारिश से हुए जलजमाव के कारण अट्ठानवे हजार एकड़ में लगी फसल बर्बाद हुईं है। इसकी रिपोर्ट सरकार को भेजी जा चुकी है।
नई दिल्लीः अगर आपके घर में सरकारी कर्मचारी हैं तो फिर यह खबर ध्यान से पढ़ने की जरूरत है, क्योंकि सरकार ने एक चौंकाने वाला ऐलान कर दिया है। सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसे जानकर हर किसी के चेहरे पर काफी रौनक दिख रही है। सरकार ने कर्मचारियों के लिए एक ऐसा ऐलान कर दिया है, जिसे जानकर हर कोई खुशी से उछल रहा है। सरकार ने पुरानी पेंशन योजना को बाहल कर दिया है, जिससे कई हजार कर्मचारियों को फायदा पहुंचा है। कर्मचारियों के संगठन काफी दिनों से पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की मांग लगातार कर रहे थे, जिसपर सरकार आवश्वासन दे रही थी। अब सरकार ने इसे हरी झंडी दे दी है, जिसे जानकर हर किसी के चेहरे पर काफी रौनक दिख रही है। दरअसल अटल बिहार वाजपेयी सरकार ने पेंशन योजनो को अपने कार्यकाल में बंद कर दिया था, जिससे कर्मचारियों को बड़ा नुकसान हुआ था। पुरानी पेंशन योजना की बहाली के बाद कर्मचारियों के चेहरे पर काफी खुशी दिख रही है, जिसे जानकर हर कोई उछल रहा है। हिमाचल प्रदेश सरकार ने पुरानी पेंशन योजना को बाहल करने का फैसला लिया है, जो कर्मचारियों के लिए किसी बड़ी सौगात से कम नहीं है। सरकार के इस फैसले से करीब 36 हजार कर्मचारियों को फायदा होना तय माना जा रहा है। हिमाचल के सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने लोहड़ी के दिन प्रदेशवासियों को तगड़ा तोहफा दिया है, जिससे हर किसी के चेहरे पर मुस्कुराहट झलक रही है। साल के पहले ही महीने में यह किसी सपने से कम नहीं है। दरअसल हिमाचल में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने कर्मचारियों की पुरानी पेंशन योजना बहाली का वादा किया था। चुनाव नतीजों में कांग्रेस ने बीजेपी को सत्ता से हटाकर बहुमत की सरकार बनाई थी, जिसके बाद ही से ही कर्मचारी अपना वादा करने की बात कर रहे थे। कांग्रेस से सीएम बने सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपने घोषणा पत्र का ध्यान रखते हुए पुरानी पेंशन योजना को वाहन करने का फैसला लिया है। वहीं, जानकारी के लिए बता दें कि पुरानी पेंशन योजना के तहत महिलाओं को 1500 रुपए पेंशन देने का प्रावधान किया गया है। इससे कई हजार महिलाओं को बड़ा फायदा देखने को मिलेगा। सरकार से मिली रिपोर्ट के मुताबिक, 30 दिनों के अंदर सब कमेटी पेश करेगी। वहीं एक लाख लोगों को रोजगार देने के लिए कैबिनेट सब कमेटी का गठन करेगी। सरकार के इस फैसले से हर वर्ग में उत्साह दिख रहा है। सरकार कर्मचारियों को रिटायर होने के बाद महीने में मिले वेतन की 50 प्रतिशत राशि उसे हर महीने पेंशन के तौरप दी जाती थी। तत्कालीन अटल विहारी वाजपेयी सरकार ने इस स्कीम को साल 2004 में पूरी तरह से बंद कर दिया था। इसके बाद से ही राज्य व केंद्र कर्मचारी यह मांग लगातार करते आ रहे थे। हिमाचल सरकार ने अपना वादा पूरा करते हुए इसे बहाल करने का फैसला कर दिया है। जानकारी के लिए बता दें कि सरकार की ओर से तमाम कई फैसलों को अभी पेंडिंग में रखा गया है।
नई दिल्लीः अगर आपके घर में सरकारी कर्मचारी हैं तो फिर यह खबर ध्यान से पढ़ने की जरूरत है, क्योंकि सरकार ने एक चौंकाने वाला ऐलान कर दिया है। सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसे जानकर हर किसी के चेहरे पर काफी रौनक दिख रही है। सरकार ने कर्मचारियों के लिए एक ऐसा ऐलान कर दिया है, जिसे जानकर हर कोई खुशी से उछल रहा है। सरकार ने पुरानी पेंशन योजना को बाहल कर दिया है, जिससे कई हजार कर्मचारियों को फायदा पहुंचा है। कर्मचारियों के संगठन काफी दिनों से पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की मांग लगातार कर रहे थे, जिसपर सरकार आवश्वासन दे रही थी। अब सरकार ने इसे हरी झंडी दे दी है, जिसे जानकर हर किसी के चेहरे पर काफी रौनक दिख रही है। दरअसल अटल बिहार वाजपेयी सरकार ने पेंशन योजनो को अपने कार्यकाल में बंद कर दिया था, जिससे कर्मचारियों को बड़ा नुकसान हुआ था। पुरानी पेंशन योजना की बहाली के बाद कर्मचारियों के चेहरे पर काफी खुशी दिख रही है, जिसे जानकर हर कोई उछल रहा है। हिमाचल प्रदेश सरकार ने पुरानी पेंशन योजना को बाहल करने का फैसला लिया है, जो कर्मचारियों के लिए किसी बड़ी सौगात से कम नहीं है। सरकार के इस फैसले से करीब छत्तीस हजार कर्मचारियों को फायदा होना तय माना जा रहा है। हिमाचल के सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने लोहड़ी के दिन प्रदेशवासियों को तगड़ा तोहफा दिया है, जिससे हर किसी के चेहरे पर मुस्कुराहट झलक रही है। साल के पहले ही महीने में यह किसी सपने से कम नहीं है। दरअसल हिमाचल में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने कर्मचारियों की पुरानी पेंशन योजना बहाली का वादा किया था। चुनाव नतीजों में कांग्रेस ने बीजेपी को सत्ता से हटाकर बहुमत की सरकार बनाई थी, जिसके बाद ही से ही कर्मचारी अपना वादा करने की बात कर रहे थे। कांग्रेस से सीएम बने सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपने घोषणा पत्र का ध्यान रखते हुए पुरानी पेंशन योजना को वाहन करने का फैसला लिया है। वहीं, जानकारी के लिए बता दें कि पुरानी पेंशन योजना के तहत महिलाओं को एक हज़ार पाँच सौ रुपयापए पेंशन देने का प्रावधान किया गया है। इससे कई हजार महिलाओं को बड़ा फायदा देखने को मिलेगा। सरकार से मिली रिपोर्ट के मुताबिक, तीस दिनों के अंदर सब कमेटी पेश करेगी। वहीं एक लाख लोगों को रोजगार देने के लिए कैबिनेट सब कमेटी का गठन करेगी। सरकार के इस फैसले से हर वर्ग में उत्साह दिख रहा है। सरकार कर्मचारियों को रिटायर होने के बाद महीने में मिले वेतन की पचास प्रतिशत राशि उसे हर महीने पेंशन के तौरप दी जाती थी। तत्कालीन अटल विहारी वाजपेयी सरकार ने इस स्कीम को साल दो हज़ार चार में पूरी तरह से बंद कर दिया था। इसके बाद से ही राज्य व केंद्र कर्मचारी यह मांग लगातार करते आ रहे थे। हिमाचल सरकार ने अपना वादा पूरा करते हुए इसे बहाल करने का फैसला कर दिया है। जानकारी के लिए बता दें कि सरकार की ओर से तमाम कई फैसलों को अभी पेंडिंग में रखा गया है।
कुरुक्षेत्र : प्रदेश के सिखों को एक मंच पर लाने की मुहिम शुरू हो गई है। शिरोमणि अकाली दल हरियाणा के बैनर तले गठित की गई 5 सदस्यीय कमेटी में शामिल कंवलजीत सिंह अजराना ने कहा कि इस बार नवम्बर में होने वाले एस. जी. पी. सी. के चुनाव में प्रधान का चुनाव बादल की जेब से निकली पर्ची से नहीं बल्कि पंथ की नुमाइंदगी से होगा। आज यहां आयोजित एक बैठक दौरान कवलजीत सिंह अजराना ने कहा कि हरियाणा के गठन से लेकर अब तक प्रदेश का सिख समाज एकजुट होकर अपनी भलाई के फैसले नहीं ले पाया है। शिरोमणि अकाली दल हरियाणा द्वारा सबसे पहले सिख समाज को धार्मिक पक्ष से मजबूत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हम सब श्री अकाल तख्त साहिब प्रति हमेशा समॢपत रहेंगे। हमारा उद्देश्य प्रदेश के सिखों को एक मंच पर लाकर उन्हें बादल परिवार से मुक्ति दिलाना है। इतना ही नहीं श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदारों को भी बादल परिवार से मुक्ति दिलाने की मुहिम युद्ध स्तर पर छेड़ दी गई है। इस मौके पर तेजेंद्र सिंह मक्कड़, तेजपाल सिंह, सतनाम सिंह तखर, जसपाल सिंह, अवतार सिंह आदि मौजूद थे।
कुरुक्षेत्र : प्रदेश के सिखों को एक मंच पर लाने की मुहिम शुरू हो गई है। शिरोमणि अकाली दल हरियाणा के बैनर तले गठित की गई पाँच सदस्यीय कमेटी में शामिल कंवलजीत सिंह अजराना ने कहा कि इस बार नवम्बर में होने वाले एस. जी. पी. सी. के चुनाव में प्रधान का चुनाव बादल की जेब से निकली पर्ची से नहीं बल्कि पंथ की नुमाइंदगी से होगा। आज यहां आयोजित एक बैठक दौरान कवलजीत सिंह अजराना ने कहा कि हरियाणा के गठन से लेकर अब तक प्रदेश का सिख समाज एकजुट होकर अपनी भलाई के फैसले नहीं ले पाया है। शिरोमणि अकाली दल हरियाणा द्वारा सबसे पहले सिख समाज को धार्मिक पक्ष से मजबूत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हम सब श्री अकाल तख्त साहिब प्रति हमेशा समॢपत रहेंगे। हमारा उद्देश्य प्रदेश के सिखों को एक मंच पर लाकर उन्हें बादल परिवार से मुक्ति दिलाना है। इतना ही नहीं श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदारों को भी बादल परिवार से मुक्ति दिलाने की मुहिम युद्ध स्तर पर छेड़ दी गई है। इस मौके पर तेजेंद्र सिंह मक्कड़, तेजपाल सिंह, सतनाम सिंह तखर, जसपाल सिंह, अवतार सिंह आदि मौजूद थे।
सौरव अपने फेसबुक वॉल पर आगे लिखते हैं, "मेरी सोच यह थी कि लोगों का ध्यान बिहार की बाढ़ की तरफ खींचा जाए। दूसरे राज्यों में जब बाढ़ आती है तो लोग मदद के लिए आगे आते हैं। बिहार की बाढ़ की विभिषिका का जिक्र राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में उतना नहीं होता। " उन्होंने आगे कहा कि ऐसी तस्वीरों को लोग सोशल मीडिया पर रुक कर देखेंगे और यही कारण है कि ऐसा फोटोशूट किया गया है।
सौरव अपने फेसबुक वॉल पर आगे लिखते हैं, "मेरी सोच यह थी कि लोगों का ध्यान बिहार की बाढ़ की तरफ खींचा जाए। दूसरे राज्यों में जब बाढ़ आती है तो लोग मदद के लिए आगे आते हैं। बिहार की बाढ़ की विभिषिका का जिक्र राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में उतना नहीं होता। " उन्होंने आगे कहा कि ऐसी तस्वीरों को लोग सोशल मीडिया पर रुक कर देखेंगे और यही कारण है कि ऐसा फोटोशूट किया गया है।
गेहूं की मांग व आपूर्ति को लेकर आपका क्या आकलन है? उत्पादन में गिरावट को लेकर तमाम तरह की बात हो रही है? हमारे अनुमान के मुताबिक अनाज के उत्पादन के दूसरे अग्रिम अनुमान की तुलना में 2022-23 में गेहूं उत्पादन करीब 60 से 100 लाख टन कम रहने की उ मीद है। फरवरी में 1113 लाख टन उत्पादन का आकलन किया गया था। बदले परिदृश्य में खरीद को लेकर आपका क्या अनुमान है? मेरी समझ से हमें सामान्यतया राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के लिए एक साल में 210 लाख टन गेहूं की जरूरत होती है। अब हमने मु त अनाज की योजना 6 माह के लिए बढ़ा दी है, ऐसे में हमें 90 से 100 लाख टन की और जरूरत होगी। सरकार को सभी जरूरतें पूरी करने के लिए 300 से 320 लाख टन की जरूरत है। 1 अप्रैल को हमारे पास स्टॉक में 190 लाख टन था। अगर स्टॉक में से 130-140 लाख टन निकालते हैं और 200 टन खरीदने में सफल होते हैं तो हम आराम से काम कर सकेंगे। मतलब आपका मानना है कि खरीद 200 लाख टन से कम नहीं होगी? मुझे नहीं लगता कि खरीद 200 लाख टन से कम होगी। हमने 25 अप्रैल तक 130 लाख टन खरीद पूरी कर ली है। जैसी खरीद चल रही है, स्थिति चिंताजनक नहीं है। क्या आपको लगता है कि कम उत्पादन और सुस्त खरीद आदि वजहों से गेहूं निर्यात पर रोक लगाए जाने की जरूरत है? उत्पादन और खरीद की मौजूदा स्थिति को देखें तो भारत 80 से 100 लाख टन गेहूं के निर्यात का भार उठा सकता है, भले ही उत्पादन में 100 लाख टन गिरावट हो जाए। जब तक यह स्थिति रहती है, किसी अफरा-तफरी की जरूरत नहीं है। हालांकि हमें उभरती परिस्थितियों पर नजर रखने और उसके मुताबिक कदम उठाने की जरूरत है। एक पखवाड़े पहले भारत गेहूं निर्यात को लेकर उत्साहित था। क्या आपको लगता है कि सरकार ने उभरते परिदृश्य को देखते हुए गलत गणना की और वह हकीकत का अनुमान लगाने में असफल रही? अगर आप मुझसे एक महीने पहले पूछते तो मैं यह कहता कि भारत कम से कम 150 लाख टन गेहूं निर्यात कर सकता है। किसी को इस तरह की मारक गर्म हवाओं की जानकारी नहीं थी। कोई यह अनुमान लगा सकता है कि तापमान सामान्य से 2-3 डिग्री सेल्सियस बढ़ेगा। लेकिन किसे पता था कि अप्रैल में तापमान सामान्य से 6-7 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहेगा? आप कल्पना करें कि हम निर्यात के बारे में नहीं सोचते और फसल सामान्य रहती तो कीमतें जमीन पर आ जातीं। शुरुआती दौर में उत्पादन 1113 लाख टन रहने का अनुमान लगाया गया था और ऐसे में निर्यात को बढ़ावा देने की कवायद उचित थी।
गेहूं की मांग व आपूर्ति को लेकर आपका क्या आकलन है? उत्पादन में गिरावट को लेकर तमाम तरह की बात हो रही है? हमारे अनुमान के मुताबिक अनाज के उत्पादन के दूसरे अग्रिम अनुमान की तुलना में दो हज़ार बाईस-तेईस में गेहूं उत्पादन करीब साठ से एक सौ लाख टन कम रहने की उ मीद है। फरवरी में एक हज़ार एक सौ तेरह लाख टन उत्पादन का आकलन किया गया था। बदले परिदृश्य में खरीद को लेकर आपका क्या अनुमान है? मेरी समझ से हमें सामान्यतया राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के लिए एक साल में दो सौ दस लाख टन गेहूं की जरूरत होती है। अब हमने मु त अनाज की योजना छः माह के लिए बढ़ा दी है, ऐसे में हमें नब्बे से एक सौ लाख टन की और जरूरत होगी। सरकार को सभी जरूरतें पूरी करने के लिए तीन सौ से तीन सौ बीस लाख टन की जरूरत है। एक अप्रैल को हमारे पास स्टॉक में एक सौ नब्बे लाख टन था। अगर स्टॉक में से एक सौ तीस-एक सौ चालीस लाख टन निकालते हैं और दो सौ टन खरीदने में सफल होते हैं तो हम आराम से काम कर सकेंगे। मतलब आपका मानना है कि खरीद दो सौ लाख टन से कम नहीं होगी? मुझे नहीं लगता कि खरीद दो सौ लाख टन से कम होगी। हमने पच्चीस अप्रैल तक एक सौ तीस लाख टन खरीद पूरी कर ली है। जैसी खरीद चल रही है, स्थिति चिंताजनक नहीं है। क्या आपको लगता है कि कम उत्पादन और सुस्त खरीद आदि वजहों से गेहूं निर्यात पर रोक लगाए जाने की जरूरत है? उत्पादन और खरीद की मौजूदा स्थिति को देखें तो भारत अस्सी से एक सौ लाख टन गेहूं के निर्यात का भार उठा सकता है, भले ही उत्पादन में एक सौ लाख टन गिरावट हो जाए। जब तक यह स्थिति रहती है, किसी अफरा-तफरी की जरूरत नहीं है। हालांकि हमें उभरती परिस्थितियों पर नजर रखने और उसके मुताबिक कदम उठाने की जरूरत है। एक पखवाड़े पहले भारत गेहूं निर्यात को लेकर उत्साहित था। क्या आपको लगता है कि सरकार ने उभरते परिदृश्य को देखते हुए गलत गणना की और वह हकीकत का अनुमान लगाने में असफल रही? अगर आप मुझसे एक महीने पहले पूछते तो मैं यह कहता कि भारत कम से कम एक सौ पचास लाख टन गेहूं निर्यात कर सकता है। किसी को इस तरह की मारक गर्म हवाओं की जानकारी नहीं थी। कोई यह अनुमान लगा सकता है कि तापमान सामान्य से दो-तीन डिग्री सेल्सियस बढ़ेगा। लेकिन किसे पता था कि अप्रैल में तापमान सामान्य से छः-सात डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहेगा? आप कल्पना करें कि हम निर्यात के बारे में नहीं सोचते और फसल सामान्य रहती तो कीमतें जमीन पर आ जातीं। शुरुआती दौर में उत्पादन एक हज़ार एक सौ तेरह लाख टन रहने का अनुमान लगाया गया था और ऐसे में निर्यात को बढ़ावा देने की कवायद उचित थी।
बता दें कि बीएड में एडमिशन के लिए आवेदक को ग्रेजुएशन या मास्टर्स में 50 फीसदी से अधिक अंक होना जरूरी है। इग्नु की ऑफिशियल वेबसाइट ignou. ac. in पर जाकर प्राप्त कर सकते हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) में अगर आप बी. एड. में दाखिला लेना चाहते हैं तो आपके लिए एक खुशखबरी है। दरअसल, इग्नु ने इस साल एडमिशन के लिए अप्लाई की डेट बढ़ा दी है। इग्नु के बीएड में आवेदन की तारीख बढ़ाकर 18 नवंबर कर दी है। इससे पहले अप्लाई की आखिरी तारीख 15 नवंबर तय की गई थी। जो छात्र एडमिशन से संबंधित जानकारी चाहते हैं वो इग्नु की ऑफिशियल वेबसाइट ignou. ac. in पर जाकर प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा यहां से अप्लाई भी कर सकते हैं। बता दें कि बीएड में एडमिशन के लिए आवेदक को ग्रेजुएशन या मास्टर्स में 50 फीसदी से अधिक अंक होना जरूरी है। साइंस या मैथ्स के स्पेशलाइजेशन के साथ बीटेक किए हुए उम्मीदवारों के लिए 55 फीसदी अंक निर्धारित किए गए हैं। इस कोर्स के लिए जो कैंडिडेट ऑनलाइन अप्लाई करना चाहते हैं उन्हें 1000 रुपए आवेदन शुल्क देना होगा। वहीं, ऑफलाइन अप्लाई के लिए 1050 रुपए आवेदन शुल्क देना होगा। इग्नू बीएड दाखिले के लिए देशभर के एग्जाम सेंटर्स पर 16 दिसंबर को लिखित परीक्षा का आयोजन होगा।
बता दें कि बीएड में एडमिशन के लिए आवेदक को ग्रेजुएशन या मास्टर्स में पचास फीसदी से अधिक अंक होना जरूरी है। इग्नु की ऑफिशियल वेबसाइट ignou. ac. in पर जाकर प्राप्त कर सकते हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय में अगर आप बी. एड. में दाखिला लेना चाहते हैं तो आपके लिए एक खुशखबरी है। दरअसल, इग्नु ने इस साल एडमिशन के लिए अप्लाई की डेट बढ़ा दी है। इग्नु के बीएड में आवेदन की तारीख बढ़ाकर अट्ठारह नवंबर कर दी है। इससे पहले अप्लाई की आखिरी तारीख पंद्रह नवंबर तय की गई थी। जो छात्र एडमिशन से संबंधित जानकारी चाहते हैं वो इग्नु की ऑफिशियल वेबसाइट ignou. ac. in पर जाकर प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा यहां से अप्लाई भी कर सकते हैं। बता दें कि बीएड में एडमिशन के लिए आवेदक को ग्रेजुएशन या मास्टर्स में पचास फीसदी से अधिक अंक होना जरूरी है। साइंस या मैथ्स के स्पेशलाइजेशन के साथ बीटेक किए हुए उम्मीदवारों के लिए पचपन फीसदी अंक निर्धारित किए गए हैं। इस कोर्स के लिए जो कैंडिडेट ऑनलाइन अप्लाई करना चाहते हैं उन्हें एक हज़ार रुपयापए आवेदन शुल्क देना होगा। वहीं, ऑफलाइन अप्लाई के लिए एक हज़ार पचास रुपयापए आवेदन शुल्क देना होगा। इग्नू बीएड दाखिले के लिए देशभर के एग्जाम सेंटर्स पर सोलह दिसंबर को लिखित परीक्षा का आयोजन होगा।
लखनऊ, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोगों से अपने भवन में रेन वाॅटर हार्वेस्टिंग का प्रबन्ध करने की अपील करते हुए कहा कि राज्य में भूजल की उपलब्धता निरन्तर कम हो रही जिससे जल संसाधन पर दबाव चिन्ताजनक स्थिति में बढ़ रहा है। श्री योगी बुधवार को यहां अपने सरकारी आवास पर आयोजित 'भूजल सप्ताह' के समापन कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भूजल की उपलब्धता निरन्तर कम हो रही है। साथ ही, जल संसाधन पर दबाव चिन्ताजनक स्थिति में बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भूजल के संरक्षण के लिये आमजन की सहभागिता अत्यन्त आवश्यक है। जनसामान्य को भूजल के महत्व के प्रति जागरूक किया जाए। उन्होंने कहा कि जल प्रकृति की अमूल्य सम्पदा है। यदि प्रकृति प्रदत्त इस अमूल्य उपहार का हम उपयोग कर रहे हैं, तो हमें इसके संरक्षण की भी चिन्ता करनी होगी। जब हम दुनिया के परिप्रेक्ष्य में भूजल की बात करते हैं तो, उत्तर प्रदेश इस मामले में अत्यन्त समृद्धशाली राज्य है। श्री योगी ने कहा कि पिछले तीन-चार दशकों के दौरान अत्यधिक मात्रा में भूजल दोहन के कारण प्रदेश के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में व्यापक विषमता देखने को मिली है। प्रदेश के 823 विकास खण्डों में से 287 विकास खण्डों में भूजल में 20 सेमी तक की गिरावट प्रतिवर्ष देखने को मिली है। पूरे प्रदेश में 16 जुलाई से 22 जुलाई तक 'भूजल सप्ताह' का आयोजन किया गया। लखनऊ, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोगों से अपने भवन में रेन वाॅटर हार्वेस्टिंग का प्रबन्ध करने की अपील करते हुए कहा कि राज्य में भूजल की उपलब्धता निरन्तर कम हो रही जिससे जल संसाधन पर दबाव चिन्ताजनक स्थिति में बढ़ रहा है।
लखनऊ, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोगों से अपने भवन में रेन वाॅटर हार्वेस्टिंग का प्रबन्ध करने की अपील करते हुए कहा कि राज्य में भूजल की उपलब्धता निरन्तर कम हो रही जिससे जल संसाधन पर दबाव चिन्ताजनक स्थिति में बढ़ रहा है। श्री योगी बुधवार को यहां अपने सरकारी आवास पर आयोजित 'भूजल सप्ताह' के समापन कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भूजल की उपलब्धता निरन्तर कम हो रही है। साथ ही, जल संसाधन पर दबाव चिन्ताजनक स्थिति में बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भूजल के संरक्षण के लिये आमजन की सहभागिता अत्यन्त आवश्यक है। जनसामान्य को भूजल के महत्व के प्रति जागरूक किया जाए। उन्होंने कहा कि जल प्रकृति की अमूल्य सम्पदा है। यदि प्रकृति प्रदत्त इस अमूल्य उपहार का हम उपयोग कर रहे हैं, तो हमें इसके संरक्षण की भी चिन्ता करनी होगी। जब हम दुनिया के परिप्रेक्ष्य में भूजल की बात करते हैं तो, उत्तर प्रदेश इस मामले में अत्यन्त समृद्धशाली राज्य है। श्री योगी ने कहा कि पिछले तीन-चार दशकों के दौरान अत्यधिक मात्रा में भूजल दोहन के कारण प्रदेश के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में व्यापक विषमता देखने को मिली है। प्रदेश के आठ सौ तेईस विकास खण्डों में से दो सौ सत्तासी विकास खण्डों में भूजल में बीस सेमी तक की गिरावट प्रतिवर्ष देखने को मिली है। पूरे प्रदेश में सोलह जुलाई से बाईस जुलाई तक 'भूजल सप्ताह' का आयोजन किया गया। लखनऊ, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोगों से अपने भवन में रेन वाॅटर हार्वेस्टिंग का प्रबन्ध करने की अपील करते हुए कहा कि राज्य में भूजल की उपलब्धता निरन्तर कम हो रही जिससे जल संसाधन पर दबाव चिन्ताजनक स्थिति में बढ़ रहा है।
पीएम के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से इस बार विधान परिषद चुनाव में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा है। यहां से बाहुबली बृजेश सिंह की पत्नी निर्दलीय अन्नपूर्णा सिंह ने जीत दर्ज की है। उन्हें कुल 4234 मत मिले हैं, जबकि भाजपा के प्रत्याशी सुदामा पटेल को सिर्फ 170 मत मिले हैं। सुदामा पटेल से ज्यादा मत समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार उमेश यादव को मिला है। उन्हें कुल 345 मत मिले। अन्नपूर्णा सिंह इससे पहले भी विधान परिषद सदस्य रह चुकी हैं, तब वह बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर जीत हासिल की थीं। इस सीट पर पिछले दो दशक से बाहुबली बृजेश सिंह के परिवार का कब्जा है। पिछली बार 2016 के एमएलसी चुनाव में निर्दलीय बृजेश सिंह खुद मैदान में उतरे थे, तब भाजपा ने वहां से अपना उम्मीदवार नहीं उतारा था। इससे पहले दो बार बृजेश सिंह के भाई भाजपा के टिकट पर जीत चुके हैं तो एक बार उनकी पत्नी अन्नपूर्णा सिंह बीएसपी के टिकट पर एमएलसी रही हैं। जीत के बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि लोगों का उन पर बाहुबली का आरोप लगाना गलत है। कहा कि उन्हें जनता ने जिताया है, जनता का समर्थन मिला है और वे जनता के लिए काम करेंगी। खास तौर पर महिलाओं के उत्थान के लिए काम शुरू करेंगी। निर्वाचन आयोग के आधिकारिक सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि 27 सीटों के लिए मतगणना का कार्य सुबह आठ बजे शुरू हुआ, जिसमें भाजपा ने शुरू से ही बढ़त बनाए हुए है। घोषित परिणामों के मुताबिक भाजपा देवरिया-कुशीनगर, इलाहाबाद, बहराइच, सुलतानपुर, मेरठ-गाजियाबाद, लखनऊ-उन्नाव, बस्ती-सिद्धार्थनगर, बाराबंकी, बलिया, फैजाबाद-अम्बेडकर नगर, गोंडा, बरेली-रामपुर और सीतापुर की सीटें जीत चुकी है। वाराणसी और आजमगढ़ सीट पर निर्दलीय तथा प्रतापगढ़ सीट पर जनसत्ता दल-लोकतांत्रिक के उम्मीदवार जीते हैं। विधान परिषद की 36 सीटों के लिए हो रहे चुनाव में नौ सीटों पर भाजपा के विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के अनुसार, चुनाव मैदान में 95 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं। विधानसभा के बाद विधान परिषद में भी भाजपा को बहुमत हासिल हुआ है। वर्तमान में 100 सदस्यीय सदन में भाजपा के 34 सदस्य हैं। इससे पहले भाजपा के नौ प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। ये हैं- मिर्जापुर-सोनभद्र से श्याम नारायण सिंह उर्फ विनीत, मथुरा-एटा-मैनपुरी से ओम प्रकाश सिंह, मथुरा-एटा-मैनपुरी से आशीष यादव, बदायूं से वागीश पाठक, हरदोई से अशोक अग्रवाल, लखीमपुर खीरी से अनूप गुप्ता, बांदा-हमीरपुर से जितेंद्र सिंह सेंगर, अलीगढ़ से ऋषिपाल सिंह, बुलंदशहर से नरेंद्र भाटी।
पीएम के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से इस बार विधान परिषद चुनाव में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा है। यहां से बाहुबली बृजेश सिंह की पत्नी निर्दलीय अन्नपूर्णा सिंह ने जीत दर्ज की है। उन्हें कुल चार हज़ार दो सौ चौंतीस मत मिले हैं, जबकि भाजपा के प्रत्याशी सुदामा पटेल को सिर्फ एक सौ सत्तर मत मिले हैं। सुदामा पटेल से ज्यादा मत समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार उमेश यादव को मिला है। उन्हें कुल तीन सौ पैंतालीस मत मिले। अन्नपूर्णा सिंह इससे पहले भी विधान परिषद सदस्य रह चुकी हैं, तब वह बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर जीत हासिल की थीं। इस सीट पर पिछले दो दशक से बाहुबली बृजेश सिंह के परिवार का कब्जा है। पिछली बार दो हज़ार सोलह के एमएलसी चुनाव में निर्दलीय बृजेश सिंह खुद मैदान में उतरे थे, तब भाजपा ने वहां से अपना उम्मीदवार नहीं उतारा था। इससे पहले दो बार बृजेश सिंह के भाई भाजपा के टिकट पर जीत चुके हैं तो एक बार उनकी पत्नी अन्नपूर्णा सिंह बीएसपी के टिकट पर एमएलसी रही हैं। जीत के बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि लोगों का उन पर बाहुबली का आरोप लगाना गलत है। कहा कि उन्हें जनता ने जिताया है, जनता का समर्थन मिला है और वे जनता के लिए काम करेंगी। खास तौर पर महिलाओं के उत्थान के लिए काम शुरू करेंगी। निर्वाचन आयोग के आधिकारिक सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि सत्ताईस सीटों के लिए मतगणना का कार्य सुबह आठ बजे शुरू हुआ, जिसमें भाजपा ने शुरू से ही बढ़त बनाए हुए है। घोषित परिणामों के मुताबिक भाजपा देवरिया-कुशीनगर, इलाहाबाद, बहराइच, सुलतानपुर, मेरठ-गाजियाबाद, लखनऊ-उन्नाव, बस्ती-सिद्धार्थनगर, बाराबंकी, बलिया, फैजाबाद-अम्बेडकर नगर, गोंडा, बरेली-रामपुर और सीतापुर की सीटें जीत चुकी है। वाराणसी और आजमगढ़ सीट पर निर्दलीय तथा प्रतापगढ़ सीट पर जनसत्ता दल-लोकतांत्रिक के उम्मीदवार जीते हैं। विधान परिषद की छत्तीस सीटों के लिए हो रहे चुनाव में नौ सीटों पर भाजपा के विधान परिषद सदस्य पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के अनुसार, चुनाव मैदान में पचानवे उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं। विधानसभा के बाद विधान परिषद में भी भाजपा को बहुमत हासिल हुआ है। वर्तमान में एक सौ सदस्यीय सदन में भाजपा के चौंतीस सदस्य हैं। इससे पहले भाजपा के नौ प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। ये हैं- मिर्जापुर-सोनभद्र से श्याम नारायण सिंह उर्फ विनीत, मथुरा-एटा-मैनपुरी से ओम प्रकाश सिंह, मथुरा-एटा-मैनपुरी से आशीष यादव, बदायूं से वागीश पाठक, हरदोई से अशोक अग्रवाल, लखीमपुर खीरी से अनूप गुप्ता, बांदा-हमीरपुर से जितेंद्र सिंह सेंगर, अलीगढ़ से ऋषिपाल सिंह, बुलंदशहर से नरेंद्र भाटी।
फिल सिमंस को फिर से वेस्ट इंडीज टीम का मुख्य कोच चुना गया है। इससे पहले साल 2016 में विवादों के चलते उन्हें टीम का साथ छोड़ना पड़ा था। एंटीगा, आइएएनएस। साल 2016 में हुए टी20 वर्ल्ड कप के दौरान विवादित तरीके से वेस्टइंडीज टीम की कमान छोड़ने वाले फिल सिमंस को फिर से विंडीज टीम का मुख्य कोच चुना गया है। फिल सिमंस (Phil Simmons) ने अगले चार साल के लिए विंडीज टीम के साथ बतौर हेड कोच करार किया है। गौरतलब है कि फिल सिमंस को सितंबर 2016 में वेस्टइंडीज टीम के हेड के कोच के पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इससे पांच महीने वाले फिल सिमंस के नेतृत्व में वेस्टइंडीज की टीम ने दूसरा टी20 वर्ल्ड कप जीता था। इसके बाद फिल सिमंस ने अफगानिस्तान टीम के हेड कोच की कुर्सी संभाली और 2019 के वर्ल्ड कप के लिए टीम को क्वालीफाई करवाया। हालांकि, वर्ल्ड कप 2019 में अफगानिस्तान की टीम एक भी मैच नहीं जीत पाई थी। 26 टेस्ट मैच और 143 वनडे इंटरनेशनल मैच खेलने वाले फिल सिमंस की हालिया सफलता की बात करें तो उन्होंने कैरेबियन प्रीमियर लीग (CPL 2019) के इस सीजन में बारबडोस ट्राइडेंट्स को कोचिंद थी। इस टीम ने गयाना अमेजन वारियर्स को हराकर दूसरी पारी सीपीएल का खिताब जीता है। इसका फाइनल मुकाबला शनिवार को ब्रायन लारा स्टेडियम में खेला गया था। क्रिकेट वेस्टइंडीज(CWI) के अध्यक्ष रिकी स्केरिट ने कहा है, "फिल सिमंस को वापस लाना सिर्फ पिछली गलतियों को सुधारना ही नहीं, बल्कि मुझे विश्वास है क्रिकेट वेस्टइंडीज ने सही समय पर सही व्यक्ति का चुनाव किया है। मैं बेहद प्रतिभाशाली फ्लॉइड रेफर (Floyd Reifer) की मेहनत के लिए भी उनका धन्यवाद देना चाहता हूं, जिन्होंने अंतरिम कोच के तौर पर अच्छा काम किया। " आपको बता दें, बीते कुछ समय में वेस्टइंडीज टीम की परफॉर्मेंस बेहद खराब रही है। वर्ल्ड कप 2019 की बात हो या फिर भारत के वेस्टइंडीज दौरे की। कैरेबियाई टीम ने बेहद खराब प्रदर्शन किया है। ऐसे में फिल सिमंस के कंधों पर वेस्टइंडीज टीम को बूस्ट करने की जिम्मेदारी होगी। फिल सिमंस के लिए आगे की चुनौती अफगानिस्तान और भारत जैसी टीमों से है। अब देखना ये है कि सिमंस किस तरह इस जिम्मेदारी को निभाते हैं।
फिल सिमंस को फिर से वेस्ट इंडीज टीम का मुख्य कोच चुना गया है। इससे पहले साल दो हज़ार सोलह में विवादों के चलते उन्हें टीम का साथ छोड़ना पड़ा था। एंटीगा, आइएएनएस। साल दो हज़ार सोलह में हुए टीबीस वर्ल्ड कप के दौरान विवादित तरीके से वेस्टइंडीज टीम की कमान छोड़ने वाले फिल सिमंस को फिर से विंडीज टीम का मुख्य कोच चुना गया है। फिल सिमंस ने अगले चार साल के लिए विंडीज टीम के साथ बतौर हेड कोच करार किया है। गौरतलब है कि फिल सिमंस को सितंबर दो हज़ार सोलह में वेस्टइंडीज टीम के हेड के कोच के पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इससे पांच महीने वाले फिल सिमंस के नेतृत्व में वेस्टइंडीज की टीम ने दूसरा टीबीस वर्ल्ड कप जीता था। इसके बाद फिल सिमंस ने अफगानिस्तान टीम के हेड कोच की कुर्सी संभाली और दो हज़ार उन्नीस के वर्ल्ड कप के लिए टीम को क्वालीफाई करवाया। हालांकि, वर्ल्ड कप दो हज़ार उन्नीस में अफगानिस्तान की टीम एक भी मैच नहीं जीत पाई थी। छब्बीस टेस्ट मैच और एक सौ तैंतालीस वनडे इंटरनेशनल मैच खेलने वाले फिल सिमंस की हालिया सफलता की बात करें तो उन्होंने कैरेबियन प्रीमियर लीग के इस सीजन में बारबडोस ट्राइडेंट्स को कोचिंद थी। इस टीम ने गयाना अमेजन वारियर्स को हराकर दूसरी पारी सीपीएल का खिताब जीता है। इसका फाइनल मुकाबला शनिवार को ब्रायन लारा स्टेडियम में खेला गया था। क्रिकेट वेस्टइंडीज के अध्यक्ष रिकी स्केरिट ने कहा है, "फिल सिमंस को वापस लाना सिर्फ पिछली गलतियों को सुधारना ही नहीं, बल्कि मुझे विश्वास है क्रिकेट वेस्टइंडीज ने सही समय पर सही व्यक्ति का चुनाव किया है। मैं बेहद प्रतिभाशाली फ्लॉइड रेफर की मेहनत के लिए भी उनका धन्यवाद देना चाहता हूं, जिन्होंने अंतरिम कोच के तौर पर अच्छा काम किया। " आपको बता दें, बीते कुछ समय में वेस्टइंडीज टीम की परफॉर्मेंस बेहद खराब रही है। वर्ल्ड कप दो हज़ार उन्नीस की बात हो या फिर भारत के वेस्टइंडीज दौरे की। कैरेबियाई टीम ने बेहद खराब प्रदर्शन किया है। ऐसे में फिल सिमंस के कंधों पर वेस्टइंडीज टीम को बूस्ट करने की जिम्मेदारी होगी। फिल सिमंस के लिए आगे की चुनौती अफगानिस्तान और भारत जैसी टीमों से है। अब देखना ये है कि सिमंस किस तरह इस जिम्मेदारी को निभाते हैं।
अपने को दीन-हीन समझते रहेगे, भारत में एका और मे का होना सर्वथा असम्भव है । हम धर्म में आस्था रखें, पर संन्यासी, विरागी न बनें । हॉ, हम अपने एका के लिये सब प्रकार के त्याग करने को तैयार रहें । हम पैसा कमाएँ, पर उसे अपने सुख-विलास में खर्च न करें, किन्तु राष्ट्र हित में लगा दें । हिन्दू तत्वज्ञान के कर्मसम्बन्धी अंगका अनुसरण करें, शम, दम और तप त्याग उन लोगों के लिये छोड़ दें जिन्हें भगवान ने इस उच्च पद पर पहुँचने की क्षमता प्रदान की है। स्वामीजी की शिक्षा का आधार प्रेम और शक्ति है। निर्भीकता उसका प्राण है और आत्मविश्वास उसका धर्म है। उनकी शिक्षा में दुर्बलता और अनुनय-विनय के लिये तनिक भी स्थान नहीं था । उनका वेदान्त मनुष्य को सांसारिक दुःख-क्लेश से बचाने, जीवन-संग्राम में वीर की भाँति जुटने और मानसिक आध्यात्मिक आकांक्षाओं की पूर्ति की समान रूप से शिक्षा देता है। राजा मानसिंह 'दरबारे-मकवरी' के रचयिता ने, जिसकी कुलम था, क्या खूब कहा है- 'इस उच्च-कुच-सम्भूत राजा का चित्र दरवारे-भकवरी के चित्र संग्रह में सोने के पानी से खींचा जाना चाहिये । निस्सन्देह ! और न केवल मानसिंह का, किन्तु उसके कीर्तिशाली पिता राजा भगवानदास और सुविख्यात दादा राजा भारामल के चित्र भी इसी सम्मान और श्रृंगार के अधिकारी हैं । राजा भारामल वह पहला बुद्धिमान और दूर तक देखने-सोचनेवाला राजा था, जिसने हज़ारों साल के धार्मिक संस्कारों को देश के सामयिक हित पर बलिदान करके मुसलमानों से नाता जोड़ा और सन् ६६६ हिजी में अपनी रूप-गुणशीला कन्या को की पटरानी बनाया । आमेर के कछवाहा वश को विचार- स्वातन्त्र्य और धर्मगत उदारता के क्षेत्र मे प्रमुश्रा बनने का गौरव प्राप्त है। और जब तक ज़माने की निगाहों में इन पुनीत गुणों का आदर रहेगा, इस घराने के नाम पर सम्मान की श्रद्धाञ्जलि अर्पित की जाती रहेगी । मानसिह आमेर में पैदा हुआ और उसका बचपन उसी देश के जोशीले, युद्धप्रिय निवासियों में चीता, जिनसे उसने वीरता और साहस के पाठ पढ़े । पर जब जवानी ने हृदय में उत्साह और उत्साह में उमंग पैदा की तो अकबर के दरबार की तरफ रुख किया जो उस जमाने में मान-प्रतिष्ठा, पद और अधिकार की खान समझा जाता था । भगवानदास की सच्ची शुभचिन्तना और उत्सर्गमयी सहायताओं ने शाही दरबार में उसे मान-प्रतिष्ठा के आसन पर आसीन कर रखा था। उसके होनहार तेजस्वी वेटे की जितनी भाव-भगत होनी चाहिये थी, उससे अधिक हुई। अकबर ने उसके साथ पितृ-सुलभ स्नेह दिखाया। और सन
अपने को दीन-हीन समझते रहेगे, भारत में एका और मे का होना सर्वथा असम्भव है । हम धर्म में आस्था रखें, पर संन्यासी, विरागी न बनें । हॉ, हम अपने एका के लिये सब प्रकार के त्याग करने को तैयार रहें । हम पैसा कमाएँ, पर उसे अपने सुख-विलास में खर्च न करें, किन्तु राष्ट्र हित में लगा दें । हिन्दू तत्वज्ञान के कर्मसम्बन्धी अंगका अनुसरण करें, शम, दम और तप त्याग उन लोगों के लिये छोड़ दें जिन्हें भगवान ने इस उच्च पद पर पहुँचने की क्षमता प्रदान की है। स्वामीजी की शिक्षा का आधार प्रेम और शक्ति है। निर्भीकता उसका प्राण है और आत्मविश्वास उसका धर्म है। उनकी शिक्षा में दुर्बलता और अनुनय-विनय के लिये तनिक भी स्थान नहीं था । उनका वेदान्त मनुष्य को सांसारिक दुःख-क्लेश से बचाने, जीवन-संग्राम में वीर की भाँति जुटने और मानसिक आध्यात्मिक आकांक्षाओं की पूर्ति की समान रूप से शिक्षा देता है। राजा मानसिंह 'दरबारे-मकवरी' के रचयिता ने, जिसकी कुलम था, क्या खूब कहा है- 'इस उच्च-कुच-सम्भूत राजा का चित्र दरवारे-भकवरी के चित्र संग्रह में सोने के पानी से खींचा जाना चाहिये । निस्सन्देह ! और न केवल मानसिंह का, किन्तु उसके कीर्तिशाली पिता राजा भगवानदास और सुविख्यात दादा राजा भारामल के चित्र भी इसी सम्मान और श्रृंगार के अधिकारी हैं । राजा भारामल वह पहला बुद्धिमान और दूर तक देखने-सोचनेवाला राजा था, जिसने हज़ारों साल के धार्मिक संस्कारों को देश के सामयिक हित पर बलिदान करके मुसलमानों से नाता जोड़ा और सन् छः सौ छयासठ हिजी में अपनी रूप-गुणशीला कन्या को की पटरानी बनाया । आमेर के कछवाहा वश को विचार- स्वातन्त्र्य और धर्मगत उदारता के क्षेत्र मे प्रमुश्रा बनने का गौरव प्राप्त है। और जब तक ज़माने की निगाहों में इन पुनीत गुणों का आदर रहेगा, इस घराने के नाम पर सम्मान की श्रद्धाञ्जलि अर्पित की जाती रहेगी । मानसिह आमेर में पैदा हुआ और उसका बचपन उसी देश के जोशीले, युद्धप्रिय निवासियों में चीता, जिनसे उसने वीरता और साहस के पाठ पढ़े । पर जब जवानी ने हृदय में उत्साह और उत्साह में उमंग पैदा की तो अकबर के दरबार की तरफ रुख किया जो उस जमाने में मान-प्रतिष्ठा, पद और अधिकार की खान समझा जाता था । भगवानदास की सच्ची शुभचिन्तना और उत्सर्गमयी सहायताओं ने शाही दरबार में उसे मान-प्रतिष्ठा के आसन पर आसीन कर रखा था। उसके होनहार तेजस्वी वेटे की जितनी भाव-भगत होनी चाहिये थी, उससे अधिक हुई। अकबर ने उसके साथ पितृ-सुलभ स्नेह दिखाया। और सन
हरदोई लोकसभा क्षेत्र से सपा प्रत्याशी ऊषा वर्मा के समर्थन में बुधवार को शहर के राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान में हुई जनसभा में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने नाम लिए बिना ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दोनों के हाथ में झाड़ू रही लेकिन कूड़ा साफ नहीं हुआ। कूड़ा भाजपा के दिमाग में है। टिकट कटने से नाराज होकर सपा में शामिल हुए सदर सांसद अंशुल वर्मा को खासी तरजीह दी। अखिलेश यादव ने कहा कि सपा-बसपा के गठबंधन को कुछ लोग महामिलावट बताते हैं, लेकिन 38 दलों के गठबंधन को क्या कहा जाए, यह कोई नहीं बताता। भाजपा ने अंग्रेजों की तरह बांटो और राज करो की नीति अपनाई। लेकिन हम लोग एक होकर इनका मुकाबला करेंगे। यह महागठबंधन उन लोगों का है, जो गरीब हैं, जिन्हें सम्मान नहीं मिला और पसीना बहाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रचार मंत्री नहीं, हमें प्रधानमंत्री चाहिए। चाय वाला बनकर नरेंद्र मोदी आए थे। पांच साल में जनता को स्वाद पता चल गया होगा चाय का। जिनके अच्छे दिन आए, वह हमारा पैसा लेकर हवाई जहाज पर बैठकर चले गए। गंगा मैया की कसम खाकर आए थे कि साफ कर देंगे, लेकिन गंगा मैया के नाम पर भी धोखा दिया। गाय को मां बताते हैं और कहते हैं कि अगर संविधान नहीं होता तो हम भैंस चरा रहे होते। संविधान न होता तो बाबा जी क्या कर रहे होते, पता नहीं क्या कर रहे होते। फोर लेन सड़क जितनी सपा सरकार में बन रहीं थीं, वो रुक गईं। सरकार दो साल में एक भी ऐसी सड़क नहीं बना पाई। अखिलेश ने कहा कि रोजगार की चोरी कर ली, नौकरी छीन ली और पीएम कहते हैं कि जाओ पकौड़े तलो। मुख्यमंत्री को यह नहीं पता कि परिवार में कितने दिन सिलेंडर चलेगा। फौज को राजनीति में भाजपा ने घसीटा। मुख्यमंत्री यहां आए थे, ऐसा क्या बता गए जो उन्होंने किया। भाजपा के लोग हमारे आपके बीच नफरत की दीवार बनाते हैं। जीएसटी और नोटबंदी ने व्यापारियों का नुकसान किया, इसलिए वह हमारे साथ हैं। पूर्व सांसद भाजपा नेता नरेश अग्रवाल और उनके पुत्र सदर विधायक नितिन अग्रवाल का नाम लिए बिना ही अखिलेश यादव ने जमकर निशाना साधा। अखिलेश ने कहा कि हरदोई बहुत चर्चा में रहता है। जाने कौन से नशे में कोई रहता है। उन्होंने कहा कि जिसका चक्र पूरा हो जाए, उसे गणित में जीरो कहते हैं। सब दल घूम लिए, हो गए जीरो।
हरदोई लोकसभा क्षेत्र से सपा प्रत्याशी ऊषा वर्मा के समर्थन में बुधवार को शहर के राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान में हुई जनसभा में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने नाम लिए बिना ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दोनों के हाथ में झाड़ू रही लेकिन कूड़ा साफ नहीं हुआ। कूड़ा भाजपा के दिमाग में है। टिकट कटने से नाराज होकर सपा में शामिल हुए सदर सांसद अंशुल वर्मा को खासी तरजीह दी। अखिलेश यादव ने कहा कि सपा-बसपा के गठबंधन को कुछ लोग महामिलावट बताते हैं, लेकिन अड़तीस दलों के गठबंधन को क्या कहा जाए, यह कोई नहीं बताता। भाजपा ने अंग्रेजों की तरह बांटो और राज करो की नीति अपनाई। लेकिन हम लोग एक होकर इनका मुकाबला करेंगे। यह महागठबंधन उन लोगों का है, जो गरीब हैं, जिन्हें सम्मान नहीं मिला और पसीना बहाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रचार मंत्री नहीं, हमें प्रधानमंत्री चाहिए। चाय वाला बनकर नरेंद्र मोदी आए थे। पांच साल में जनता को स्वाद पता चल गया होगा चाय का। जिनके अच्छे दिन आए, वह हमारा पैसा लेकर हवाई जहाज पर बैठकर चले गए। गंगा मैया की कसम खाकर आए थे कि साफ कर देंगे, लेकिन गंगा मैया के नाम पर भी धोखा दिया। गाय को मां बताते हैं और कहते हैं कि अगर संविधान नहीं होता तो हम भैंस चरा रहे होते। संविधान न होता तो बाबा जी क्या कर रहे होते, पता नहीं क्या कर रहे होते। फोर लेन सड़क जितनी सपा सरकार में बन रहीं थीं, वो रुक गईं। सरकार दो साल में एक भी ऐसी सड़क नहीं बना पाई। अखिलेश ने कहा कि रोजगार की चोरी कर ली, नौकरी छीन ली और पीएम कहते हैं कि जाओ पकौड़े तलो। मुख्यमंत्री को यह नहीं पता कि परिवार में कितने दिन सिलेंडर चलेगा। फौज को राजनीति में भाजपा ने घसीटा। मुख्यमंत्री यहां आए थे, ऐसा क्या बता गए जो उन्होंने किया। भाजपा के लोग हमारे आपके बीच नफरत की दीवार बनाते हैं। जीएसटी और नोटबंदी ने व्यापारियों का नुकसान किया, इसलिए वह हमारे साथ हैं। पूर्व सांसद भाजपा नेता नरेश अग्रवाल और उनके पुत्र सदर विधायक नितिन अग्रवाल का नाम लिए बिना ही अखिलेश यादव ने जमकर निशाना साधा। अखिलेश ने कहा कि हरदोई बहुत चर्चा में रहता है। जाने कौन से नशे में कोई रहता है। उन्होंने कहा कि जिसका चक्र पूरा हो जाए, उसे गणित में जीरो कहते हैं। सब दल घूम लिए, हो गए जीरो।
।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल (हे.) ।1 - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसे1950 ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा 117 - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ( नदारद ) ।1क(क) - रिक्त ( नदारद ) ।1-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ( नदारद ) ।2 - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ( नदारद ) ।3 - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ( नदारद ) ।4 - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ 4 में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ( नदारद ) ।4-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -(क)जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ( नदारद ) ।4-क(ख) - अन्य भूमि । ( नदारद ) ।5-1 - कृषि योग्य भूमि - नई परती (परतीजदीद) ।5-2 - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती (परतीकदीम) ( नदारद ) ।5-3-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ।5-3-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ( नदारद ) ।5-3-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ( नदारद ) ।5-3-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ( नदारद ) ।5-3-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ( नदारद ) ।5-क (क) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ( नदारद ) ।5-क (ख) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ( नदारद ) ।5-क (ग) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ( नदारद ) ।6-1 - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।6-2 - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।6-3 - कब्रिस्तान और श्मशान (मरघट) , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।6-4 - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल ।एक - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसेएक हज़ार नौ सौ पचास ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा एक सौ सत्रह - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ।एकक - रिक्त ।एक-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ।दो - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।तीन - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ।चार - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ चार में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ।चार-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ।चार-क - अन्य भूमि । ।पाँच-एक - कृषि योग्य भूमि - नई परती ।पाँच-दो - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती ।पाँच-तीन-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ।पाँच-तीन-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ।पाँच-तीन-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।पाँच-तीन-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ।पाँच-तीन-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ।छः-एक - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।छः-दो - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।छः-तीन - कब्रिस्तान और श्मशान , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।छः-चार - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
दिशा पाटनी ने की बातचीत. मुंबई. बॉलीवुड एक्ट्रेस दिशा पाटनी (Disha Patani) इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म 'मलंग' (Malang) के प्रमोशन में बिजी हैं. उनकी यह फिल्म 7 फरवरी को रिलीज होने वाली है. इसके इतर दिशा पाटनी ने एक इंटरव्यू में अपनी लव लाइफ को लेकर खुलासे किए हैं. उन्होंने बताया कि उन्हें भी पहली नजर में प्यार हुआ था. लेकिन इसके बाद उन्हें ब्रेकअप भी सहना पड़ा था. 'मलंग' की एक्ट्रेस दिशा पाटनी ने पिंकविला को दिए इंटरव्यू में अपनी लव लाइफ के बारे में गहराई से बातचीत की. दिशा पाटनी ने इस दौरान कहा, 'जब मेरा दिल टूटा तो मैं काफी खराब हालात में चली गई थी. लेकिन मैं इस बारे में एक सकारात्मक बात भी सोचती हूं कि जब आप एक बार बाहर हो जाते हैं तो मतलब होता है आप बाहर हो गए. फिर लौटने का कोई रास्ता नहीं होती. उस दौरान ऐसी कोई फीलिंग नहीं होती कि आप वापस लौट सकें. ' . सनी देओल की हीरोइन को जब ज्यादा पढ़ी-लिखी होना पड़ा भारी, एक्ट्रेस ने खूब सुने थे ताने, बोलीं- इंडस्ट्री में. .
दिशा पाटनी ने की बातचीत. मुंबई. बॉलीवुड एक्ट्रेस दिशा पाटनी इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म 'मलंग' के प्रमोशन में बिजी हैं. उनकी यह फिल्म सात फरवरी को रिलीज होने वाली है. इसके इतर दिशा पाटनी ने एक इंटरव्यू में अपनी लव लाइफ को लेकर खुलासे किए हैं. उन्होंने बताया कि उन्हें भी पहली नजर में प्यार हुआ था. लेकिन इसके बाद उन्हें ब्रेकअप भी सहना पड़ा था. 'मलंग' की एक्ट्रेस दिशा पाटनी ने पिंकविला को दिए इंटरव्यू में अपनी लव लाइफ के बारे में गहराई से बातचीत की. दिशा पाटनी ने इस दौरान कहा, 'जब मेरा दिल टूटा तो मैं काफी खराब हालात में चली गई थी. लेकिन मैं इस बारे में एक सकारात्मक बात भी सोचती हूं कि जब आप एक बार बाहर हो जाते हैं तो मतलब होता है आप बाहर हो गए. फिर लौटने का कोई रास्ता नहीं होती. उस दौरान ऐसी कोई फीलिंग नहीं होती कि आप वापस लौट सकें. ' . सनी देओल की हीरोइन को जब ज्यादा पढ़ी-लिखी होना पड़ा भारी, एक्ट्रेस ने खूब सुने थे ताने, बोलीं- इंडस्ट्री में. .
एक दुल्हन ने अपनी शादी में तय किया कि जो मेहमान जितने महंगे गिफ्ट लेकर आएगा, उसे उतना ही अच्छा खाना खिलाया जाएगा. इसलिए दुल्हन ने शादी में आए मेहमानों के लिए अलग-अलग मेन्यू तैयार करवाए. जो मेहमान 2 लाख के ऊपर का गिफ्ट दे रहा था, उसके लिए खाने के मेन्यू में प्रीमियम प्लैटिनम ऑप्शन रखा गया. सोशल मीडिया पर इस शादी का मेन्यू वायरल हो गया. सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने गिफ्ट के आधार पर मेन्यू देने के लिए कपल की दुल्हन भी की है. अमेरिकी कपल की इस हरकत को कई लोगों ने फूहड़ करार दिया है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे शादी के कार्ड के मुताबिक, जो मेहमान 2 लाख से महंगा गिफ्ट देगा, उसे रोस्टेड चिकन और स्वोर्डफिश खिलाया जाएगा. शादी में सिल्वर कैटेगरी का मेन्यू भी तैयार किया गया था. 36 हजार रुपए से ज्यादा के गिफ्ट देने वाले लोगों को Sliced steak या Poached salmon खाने में मिल रहा था. शादी में गोल्ड कैटेगरी भी थी. 36 हजार से 72 हजार रुपए के बीच का गिफ्ट देने को ये मेन्यू दिया गया. हालांकि, कपल अपने मेहमानों को स्वागत शैंपेन से कर रहा था. लेकिन जो लोग शाकाहारी थे, उनके लिए भी ऑप्शन कम थे. शाकाहारी भोजन खाने वाले लोगों को प्लैटिनम श्रेणी में शामिल किया गया था. कैश देने वाले लोगों के लिए भी एक कैटेगरी बनाई गई थी. सोशल मीडिया पर दुल्हन की इस हरकत को कई लोगों ने जोक करार दिया. एक शख्स ने कमेंट करके लिखा कि इन लोगों ने अपना दिमागी संतुलन खो दिया. वहीं एक और शख्स ने कहा कि सभी मेहमानों को कहना चाहिए था कि उनका गिफ्ट महंगा है और जमकर भोजन खाना चाहिए था.
एक दुल्हन ने अपनी शादी में तय किया कि जो मेहमान जितने महंगे गिफ्ट लेकर आएगा, उसे उतना ही अच्छा खाना खिलाया जाएगा. इसलिए दुल्हन ने शादी में आए मेहमानों के लिए अलग-अलग मेन्यू तैयार करवाए. जो मेहमान दो लाख के ऊपर का गिफ्ट दे रहा था, उसके लिए खाने के मेन्यू में प्रीमियम प्लैटिनम ऑप्शन रखा गया. सोशल मीडिया पर इस शादी का मेन्यू वायरल हो गया. सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने गिफ्ट के आधार पर मेन्यू देने के लिए कपल की दुल्हन भी की है. अमेरिकी कपल की इस हरकत को कई लोगों ने फूहड़ करार दिया है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे शादी के कार्ड के मुताबिक, जो मेहमान दो लाख से महंगा गिफ्ट देगा, उसे रोस्टेड चिकन और स्वोर्डफिश खिलाया जाएगा. शादी में सिल्वर कैटेगरी का मेन्यू भी तैयार किया गया था. छत्तीस हजार रुपए से ज्यादा के गिफ्ट देने वाले लोगों को Sliced steak या Poached salmon खाने में मिल रहा था. शादी में गोल्ड कैटेगरी भी थी. छत्तीस हजार से बहत्तर हजार रुपए के बीच का गिफ्ट देने को ये मेन्यू दिया गया. हालांकि, कपल अपने मेहमानों को स्वागत शैंपेन से कर रहा था. लेकिन जो लोग शाकाहारी थे, उनके लिए भी ऑप्शन कम थे. शाकाहारी भोजन खाने वाले लोगों को प्लैटिनम श्रेणी में शामिल किया गया था. कैश देने वाले लोगों के लिए भी एक कैटेगरी बनाई गई थी. सोशल मीडिया पर दुल्हन की इस हरकत को कई लोगों ने जोक करार दिया. एक शख्स ने कमेंट करके लिखा कि इन लोगों ने अपना दिमागी संतुलन खो दिया. वहीं एक और शख्स ने कहा कि सभी मेहमानों को कहना चाहिए था कि उनका गिफ्ट महंगा है और जमकर भोजन खाना चाहिए था.
- फोटो : Demo Pic. अकादमिक सत्र 2016-17 में विभिन्न अकादमिक प्रोग्रामों (पीजी विभागों) में दाखिले के लिए 12 जून को होने जा रहे जम्मू यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (जेयूईटी) 2016 में नकल सहित नियमों के खिलाफ अन्य पकड़े जाने वाले मामलों पर आपराधिक मामला दर्ज होगा। ऐसे उम्मीदवारों को टेस्ट से बाहर कर दिया जाएगा। टेस्ट के लिए एक ही दिन शेष बचा है, जिससे हजारों विद्यार्थी तैयारी में जुटे हुए हैं। टेस्ट के दूसरे ही दिन विवि की वेबसाइट पर उत्तर की के जारी होने के बाद दो दिन में उम्मीदवार टेस्ट से संबंधित कोई शिकायत आनलाइन या डीन एकेडमिक अफेयर के कार्यालय में दर्ज करवा सकते हैं। छात्र राजीव शर्मा ने कहा कि एंट्रेंस में क्वालीफाई करने वाले विद्यार्थियों को ही जम्मू विश्वविद्यालय, मुख्य कैंपस/आफसाइट कैंपस और मान्यता प्राप्त कालेजों में पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) प्रोग्राम, पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी, स्नातक) डिप्लोमा प्रोग्राम और अंडर ग्रेजुएट (यूजी, 12वीं,) प्रोग्राम में दाखिला मिलेगा। लिहाजा उच्च शिक्षा पाने वाले विद्यार्थियों के लिए यह टेस्ट काफी महत्वपूर्ण है। इसमें सबसे अधिक खतरा नेगेटिव मार्किंग से होगा। जिससे कोशिश यह रहेगी कि जो उत्तर सही है उसी को मुकम्मल किया जाए। वहीं, एंट्रेंस टेस्ट को सफल बनाने के लिए जम्मू विश्वविद्यालय ने कई तैयारियां की हैं। टेस्ट के लिए जम्मू के अलावा कठुआ, उधमपुर, किश्तवाड़, भद्रवाह, राजोरी, पुंछ, श्रीनगर और लेह में परीक्षा केंद्र स्थापित किए जाएंगे। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
- फोटो : Demo Pic. अकादमिक सत्र दो हज़ार सोलह-सत्रह में विभिन्न अकादमिक प्रोग्रामों में दाखिले के लिए बारह जून को होने जा रहे जम्मू यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट दो हज़ार सोलह में नकल सहित नियमों के खिलाफ अन्य पकड़े जाने वाले मामलों पर आपराधिक मामला दर्ज होगा। ऐसे उम्मीदवारों को टेस्ट से बाहर कर दिया जाएगा। टेस्ट के लिए एक ही दिन शेष बचा है, जिससे हजारों विद्यार्थी तैयारी में जुटे हुए हैं। टेस्ट के दूसरे ही दिन विवि की वेबसाइट पर उत्तर की के जारी होने के बाद दो दिन में उम्मीदवार टेस्ट से संबंधित कोई शिकायत आनलाइन या डीन एकेडमिक अफेयर के कार्यालय में दर्ज करवा सकते हैं। छात्र राजीव शर्मा ने कहा कि एंट्रेंस में क्वालीफाई करने वाले विद्यार्थियों को ही जम्मू विश्वविद्यालय, मुख्य कैंपस/आफसाइट कैंपस और मान्यता प्राप्त कालेजों में पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम, पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा प्रोग्राम और अंडर ग्रेजुएट प्रोग्राम में दाखिला मिलेगा। लिहाजा उच्च शिक्षा पाने वाले विद्यार्थियों के लिए यह टेस्ट काफी महत्वपूर्ण है। इसमें सबसे अधिक खतरा नेगेटिव मार्किंग से होगा। जिससे कोशिश यह रहेगी कि जो उत्तर सही है उसी को मुकम्मल किया जाए। वहीं, एंट्रेंस टेस्ट को सफल बनाने के लिए जम्मू विश्वविद्यालय ने कई तैयारियां की हैं। टेस्ट के लिए जम्मू के अलावा कठुआ, उधमपुर, किश्तवाड़, भद्रवाह, राजोरी, पुंछ, श्रीनगर और लेह में परीक्षा केंद्र स्थापित किए जाएंगे। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
होनी चाहिए। एक-एक कथा मे दो-तीन पात्र प्रवश्य ही होगे। इस प्रकार सैकडों पात्र हैं तो उनके चरित्र भी दर्जनो प्रकार के ही होने चाहिए । ( २ ) 'मोनल भीग' कृति मे केवल एक ही पात्र है- मनुष्य का मन (बुद्धि - तत्व ) ; केवल एक कथावस्तु (महानी ) है भगवान ने प्रकृति की रचना की और मनुष्य भीरचा । हर मनुष्य को अपनी जिन्दगी भर की कुछ घटनामों में अपनी सगति देनी है। चरित्र भी हर मानव का एक ही है - प्रसतु घटनाओ से विरति का चिन्तन । एक उदाहरण राजा से राणी मादी पड़ी। बीमारी बघतो गई पर कोई इलाज कारगर नीं हुयो । बेहोस राणी रे पलग कन्नै राजा चुपचाप बैठ्यो हो पर भांख्या सू प्रासुदा से धारा वर्ष हो । राजा देख्यो के महल से भीत पर माड्योर्ड चित्राम र हिरण री यासू भी मासुवा रो बूंदा पडनो सरू हुई । राजा नै प्रजरज हुयो । बो बोल्यो, चित्राम रा हिरण, काई तन्नं भी राणी जो री पीड़ा से इतरी घणो दुख है हिरण उत्तर दियो, 'राजा, मन्ने राणी से पीडा रो दुख कोनो पण तेरी पोडा रो दुख है । किसी दिन तू जंगल में मायर सिकार रं नाव सू मेरी हिरणी रा प्राण लिया तो मैं तन सराप दियो हो । पण माज में तेरी हालत देखर पिसतावू हू के तन्तै सराप देवर में बड़ी भूल करी 15 शिल्पः शैलो - वैशिष्ट्य 'सोनल भीग' की शैली ग्राकर्षक है। लेखक किसी भी साधारण घटना मे दो-तीन पात्रों का निर्माण करते हैं, जो एक-दो सवाद बोलता है, पर पाठकों को आश्चर्य मे छोड़कर छुमतर हो जाता है । रचनाकार का एक ही उद्देश्य है कि उनके लेखन की शैलीगत विशेषता से पाठको का सत्-चिंतन जागृत हो और पाठक भी अपने प्रास-पास को घटनामो को लेखक की शैली के अनुसार निराले ढंग से सोचे और समझें । इस शैली का उद्देश्य है- मानवता की निजी क्षमता पर घमण्ड, दिखावा, लालच, अधिकार, घृणा, ध, धलगाव मादि वृत्सित भावनाएं भसत् Terrएं- धीरे-धीरे समाप्त हो । मनुष्य विचारdewr और पक्की लगन से इनसे पार पा सकता है। एक उदाहरणएक मेत में पूगर प्रादमी साप मैं छोड दियो साप बिल मे बडा लाग्यो तो मैं पूछो - नाग देवता, मर्न एक भेद बतायर पर्छ बिल मे बढ़ । तू ई भादमी रं दांत क्यू नो लगाया ? ३५ सोनल मींग- राजा राणी, पू. ३० साप बोल्यो, 'म्हारो जाति-मुभाव कोष है। पण म्है भी घर पर प्रेम नं पिछारणा हा । भाप र प्रेमी नै पो कुण देवं ? ई भादमी री बस या हो मन्त्रसाधना है ।' मैं पूछयो, 'जे में तन पडू तो तू के मानसी, वैर या प्रेम ?' साप उत्तर दियो- 'ई बात शे फळ पैनी नी बतायो जा सके । तूं हाथ घालर देख 198 भाषागत सौन्दर्य 'सोनल-भीग' की भाषा पर भी राजस्थानी भाषा की शेखावाटी बोली की छाप है। शब्द और मुहावरे भी इनके कथ्य को भावना को सागोपाग प्रस्तुत करने मे पूरे सफल हुए हैं। मतीरो, घड़बो, टापी, भेलवाड़, कंट, बाड, गडतुम्बो, गुवाळियों, बचियो, ऊदरो श्रादि राजस्थानी रग को सिंचित करते हैं तो पहावतें व मुहावरं प्रत्येक मानव को दैनिक जिन्दगी की बोलती कहानी है । एक दो उदाहरण द्रष्टव्य हैं-'सूरज और भी तेजी मे भायो मर बोल्यो - या छोटे मूडें बड़ी बात है । 37 'आखर प्राख खुलगी 138 'सोनल-भोग' कृति के सामूहिक प्रभाव के विषय मे श्री मम्बूजी शर्मा के उद्गार सटीक हैं- 'सामूहिक प्रभाव से दृष्टि सू लाम्बै गद्य-गीता ने छोड़कर बाकी रानं आपा मोर्ट रूप सू दो पाळी मे बाट सका । एक वै, जिका पढता ई तुरन्त समझ मे मा जावे अथवा जिला से रहस्य या शिक्षावा माचरण-कथायां रैंरूप मे पाठका सू एकदम अपरिचित नी । पण दूजा गद्य-गीत बँ है, जिका पढतों परात समझ मे श्राव भर वै बुद्धि-राज्य में पार करता या बिहारी कवि है 'नावक र तीर' री ज्यू ठेठ काळजो बीघे । वाणी री विदग्धता या उक्ति से विचित्रता जाँ प्रबूझ तो नी, पण रसज्ञ जणा से कल्पनावा सू भी इतणी कारी भर नुवी नवादा है के जठें ममंज्ञ जणा रो सिर सचालन सवारण घर सबदांवळो नीं, पण वाणी बिना पर डकार छिक कर रस पीवण से मतवाळ महिमा वाळो प्रलमस्त भोगी-भवरो है । पाठक जे एक बार थां गद्य-गीता मे बड्यो तो सुवाद रो रसियो बाघड कर बारणं मू डो मो करे - स्यात में गीत ई 'सोनल भोग' रा सान जडाऊ होरक-हार है 199 ३६ सोनल मोग- सरप रो हेत, पृ. ६१ ३७ वही बादळ घर सूरज, पृ. २ ३८ वही, कूंज-कतार, पू. ३ ३६ डा. मनोहरजी शर्मा अभिनन्दन ग्रंथ, पू. २० विशेष- श्री पम्बूजी शर्मा ने सोनल भींग को गद्य गीत माना है । [ २ ]
होनी चाहिए। एक-एक कथा मे दो-तीन पात्र प्रवश्य ही होगे। इस प्रकार सैकडों पात्र हैं तो उनके चरित्र भी दर्जनो प्रकार के ही होने चाहिए । 'मोनल भीग' कृति मे केवल एक ही पात्र है- मनुष्य का मन ; केवल एक कथावस्तु है भगवान ने प्रकृति की रचना की और मनुष्य भीरचा । हर मनुष्य को अपनी जिन्दगी भर की कुछ घटनामों में अपनी सगति देनी है। चरित्र भी हर मानव का एक ही है - प्रसतु घटनाओ से विरति का चिन्तन । एक उदाहरण राजा से राणी मादी पड़ी। बीमारी बघतो गई पर कोई इलाज कारगर नीं हुयो । बेहोस राणी रे पलग कन्नै राजा चुपचाप बैठ्यो हो पर भांख्या सू प्रासुदा से धारा वर्ष हो । राजा देख्यो के महल से भीत पर माड्योर्ड चित्राम र हिरण री यासू भी मासुवा रो बूंदा पडनो सरू हुई । राजा नै प्रजरज हुयो । बो बोल्यो, चित्राम रा हिरण, काई तन्नं भी राणी जो री पीड़ा से इतरी घणो दुख है हिरण उत्तर दियो, 'राजा, मन्ने राणी से पीडा रो दुख कोनो पण तेरी पोडा रो दुख है । किसी दिन तू जंगल में मायर सिकार रं नाव सू मेरी हिरणी रा प्राण लिया तो मैं तन सराप दियो हो । पण माज में तेरी हालत देखर पिसतावू हू के तन्तै सराप देवर में बड़ी भूल करी पंद्रह शिल्पः शैलो - वैशिष्ट्य 'सोनल भीग' की शैली ग्राकर्षक है। लेखक किसी भी साधारण घटना मे दो-तीन पात्रों का निर्माण करते हैं, जो एक-दो सवाद बोलता है, पर पाठकों को आश्चर्य मे छोड़कर छुमतर हो जाता है । रचनाकार का एक ही उद्देश्य है कि उनके लेखन की शैलीगत विशेषता से पाठको का सत्-चिंतन जागृत हो और पाठक भी अपने प्रास-पास को घटनामो को लेखक की शैली के अनुसार निराले ढंग से सोचे और समझें । इस शैली का उद्देश्य है- मानवता की निजी क्षमता पर घमण्ड, दिखावा, लालच, अधिकार, घृणा, ध, धलगाव मादि वृत्सित भावनाएं भसत् Terrएं- धीरे-धीरे समाप्त हो । मनुष्य विचारdewr और पक्की लगन से इनसे पार पा सकता है। एक उदाहरणएक मेत में पूगर प्रादमी साप मैं छोड दियो साप बिल मे बडा लाग्यो तो मैं पूछो - नाग देवता, मर्न एक भेद बतायर पर्छ बिल मे बढ़ । तू ई भादमी रं दांत क्यू नो लगाया ? पैंतीस सोनल मींग- राजा राणी, पू. तीस साप बोल्यो, 'म्हारो जाति-मुभाव कोष है। पण म्है भी घर पर प्रेम नं पिछारणा हा । भाप र प्रेमी नै पो कुण देवं ? ई भादमी री बस या हो मन्त्रसाधना है ।' मैं पूछयो, 'जे में तन पडू तो तू के मानसी, वैर या प्रेम ?' साप उत्तर दियो- 'ई बात शे फळ पैनी नी बतायो जा सके । तूं हाथ घालर देख एक सौ अट्ठानवे भाषागत सौन्दर्य 'सोनल-भीग' की भाषा पर भी राजस्थानी भाषा की शेखावाटी बोली की छाप है। शब्द और मुहावरे भी इनके कथ्य को भावना को सागोपाग प्रस्तुत करने मे पूरे सफल हुए हैं। मतीरो, घड़बो, टापी, भेलवाड़, कंट, बाड, गडतुम्बो, गुवाळियों, बचियो, ऊदरो श्रादि राजस्थानी रग को सिंचित करते हैं तो पहावतें व मुहावरं प्रत्येक मानव को दैनिक जिन्दगी की बोलती कहानी है । एक दो उदाहरण द्रष्टव्य हैं-'सूरज और भी तेजी मे भायो मर बोल्यो - या छोटे मूडें बड़ी बात है । सैंतीस 'आखर प्राख खुलगी एक सौ अड़तीस 'सोनल-भोग' कृति के सामूहिक प्रभाव के विषय मे श्री मम्बूजी शर्मा के उद्गार सटीक हैं- 'सामूहिक प्रभाव से दृष्टि सू लाम्बै गद्य-गीता ने छोड़कर बाकी रानं आपा मोर्ट रूप सू दो पाळी मे बाट सका । एक वै, जिका पढता ई तुरन्त समझ मे मा जावे अथवा जिला से रहस्य या शिक्षावा माचरण-कथायां रैंरूप मे पाठका सू एकदम अपरिचित नी । पण दूजा गद्य-गीत बँ है, जिका पढतों परात समझ मे श्राव भर वै बुद्धि-राज्य में पार करता या बिहारी कवि है 'नावक र तीर' री ज्यू ठेठ काळजो बीघे । वाणी री विदग्धता या उक्ति से विचित्रता जाँ प्रबूझ तो नी, पण रसज्ञ जणा से कल्पनावा सू भी इतणी कारी भर नुवी नवादा है के जठें ममंज्ञ जणा रो सिर सचालन सवारण घर सबदांवळो नीं, पण वाणी बिना पर डकार छिक कर रस पीवण से मतवाळ महिमा वाळो प्रलमस्त भोगी-भवरो है । पाठक जे एक बार थां गद्य-गीता मे बड्यो तो सुवाद रो रसियो बाघड कर बारणं मू डो मो करे - स्यात में गीत ई 'सोनल भोग' रा सान जडाऊ होरक-हार है एक सौ निन्यानवे छत्तीस सोनल मोग- सरप रो हेत, पृ. इकसठ सैंतीस वही बादळ घर सूरज, पृ. दो अड़तीस वही, कूंज-कतार, पू. तीन छत्तीस डा. मनोहरजी शर्मा अभिनन्दन ग्रंथ, पू. बीस विशेष- श्री पम्बूजी शर्मा ने सोनल भींग को गद्य गीत माना है । [ दो ]
भारत में एक मार्ग ईएम फॉरेस्टर द्वारा एक प्रसिद्ध आधुनिक उपन्यास है। भारत के अंग्रेजी उपनिवेशीकरण के दौरान सेट, उपन्यास नाटकीय रूप से भारतीय लोगों और औपनिवेशिक सरकार के बीच कुछ संघर्षों को दर्शाता है। यहां एक मार्ग से भारत के कुछ उद्धरण दिए गए हैं। - "इसलिए, इतनी नीरस है कि आंखों को पूरा करने वाली हर चीज है, कि जब गंगा नीचे आती है तो उसे मिट्टी में वापस लौटने की उम्मीद की जा सकती है। घर गिरते हैं, लोग डूब जाते हैं और घूमते रहते हैं, लेकिन शहर की सामान्य रूपरेखा जीवन में कुछ कम लेकिन अविनाशी रूप की तरह, वहां सिकुड़ते हुए, यहां तक कि सिकुड़ते रहते हैं। " - "दूसरी वृद्धि पर छोटे सिविल स्टेशन को रखा गया है, और इसलिए देखा गया है कि चंद्रपुर एक पूरी तरह से अलग जगह प्रतीत होता है। यह बागानों का एक शहर है। यह कोई शहर नहीं है, लेकिन एक जंगली झोपड़ियों के साथ बिखरी हुई है। यह एक उष्णकटिबंधीय pleasunce है एक महान नदी से धोया। " - "वे सभी बिल्कुल वही बन जाते हैं, बदतर नहीं, बेहतर नहीं। मैं दो साल का अंग्रेज देता हूं, चाहे वह टर्टन या बर्टन हो। यह केवल एक पत्र का अंतर है। और मैं छह महीने की कोई भी महिला महिला देता हूं। सभी बिल्कुल समान हैं। " - "उसने अपना रात्रिभोज का समय पाया है, यह सब कुछ है, और अपनी शक्ति दिखाने के लिए हर बार हमें बाधित करने का विकल्प चुनता है। " - "अपनी मंजूरी जीतकर एक मस्जिद अपनी कल्पना को ढीला कर देता है। एक और पंथ, हिंदू, ईसाई, या ग्रीक का मंदिर उसे ऊबता और सुंदरता की भावना जागने में असफल रहा। यहां इस्लाम, उसका देश था, विश्वास से अधिक , एक लड़ाई रोना से अधिक, और भी बहुत कुछ। " - "इस्लाम जीवन के प्रति एक दृष्टिकोण है जो उत्तम और टिकाऊ दोनों है, जहां उसके शरीर और उसके विचारों ने अपना घर पाया। " - "इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। भगवान यहाँ है। " - "जैसे ही वह सुंदर चंद्रमा के नीचे पहाड़ी से घूमता था, और फिर उसने सुंदर मस्जिद को देखा, वह जमीन के मालिक जितना था, उतना ही था। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कुछ झटकेदार हिंदुओं ने उससे पहले क्या किया था, और कुछ ठंडा अंग्रेजी सफल हुई। " - "मैं असली भारत देखना चाहता हूं। " - "चलो, भारत इतना बुरा नहीं है। पृथ्वी के दूसरी तरफ, यदि आप चाहें, लेकिन हम उसी पुराने चंद्रमा से चिपके रहते हैं। " - "एडवेंचर्स होते हैं, लेकिन समय-समय पर नहीं। " - "इंग्लैंड में चंद्रमा मृत और विदेशी लग रहा था; यहां वह पृथ्वी और अन्य सभी सितारों के साथ रात के शाल में पकड़ी गई थी। एकता की अचानक भावना, स्वर्गीय निकायों के साथ संबंध, पुरानी महिला और बाहर की तरह एक टैंक के माध्यम से पानी, पीछे एक अजीब ताजगी छोड़कर। " - "दूरी पर सहानुभूति करना आसान है। मैं अपने कान के करीब बोलने वाले शब्द को अधिक महत्व देता हूं। " - "नहीं, नहीं, यह दूर जा रहा है। हमें किसी को हमारे सभा से बाहर करना होगा, या हमें कुछ भी नहीं छोड़ा जाएगा। " - "नहीं, यह सुरम्य नहीं था; पूर्व, अपनी धर्मनिरपेक्ष भव्यता को छोड़कर, एक घाटी में उतर रहा था जिसका आगे की ओर कोई भी आदमी नहीं देख सकता था। " - "क्योंकि भारत पृथ्वी का हिस्सा है। और भगवान ने हमें एक दूसरे के प्रति सुखद होने के लिए धरती पर रखा है। भगवान प्यार है। " - "उन्हें एहसास नहीं हुआ कि 'सफ़ेद' के पास भगवान के साथ 'भगवान को राजा को बचाने' की तुलना में रंग के साथ और अधिक नहीं है, और यह विचार करने के लिए अप्रासंगिकता की ऊंचाई है कि यह क्या कहता है। " - "एक रहस्य केवल एक झुकाव के लिए एक उच्च ध्वनि शब्द है। किसी भी मामले में इसे हल करने में कोई फायदा नहीं है। अजीज़ और मैं अच्छी तरह से जानता हूं कि भारत एक गड़बड़ी है। " - "अज़ीज़ को टाई-पिन से स्पैट्स तक बेहद तैयार किया गया था, लेकिन वह अपने बैक-कॉलर स्टड को भूल गया था, और वहां आपके पास सभी भारतीय हैं; विस्तार से अचूकता, मौलिक ढीलापन जो दौड़ को प्रकट करती है। " - "उसके हाथ ने झटका के कारण उसे छुआ, और जानवरों के साम्राज्य में अक्सर इतने रोमांचों में से एक ने उनके बीच पारित किया, और घोषणा की कि उनकी कठिनाइयों केवल प्रेमियों के झगड़े थे। " - "और जब पूरी दुनिया इस तरह व्यवहार करती है, तो अब और नहीं होगा? " - "लेकिन वह [अज़ीज़] खुद समाज और इस्लाम में निहित थे। वह एक परंपरा से संबंधित थे, जो उन्हें बंधे थे, और उन्होंने भविष्य में समाज को दुनिया में लाया था। हालांकि वह इस भयानक बंगले में इतनी अस्पष्टता से रहते थे, फिर भी वह रखा गया था, रखा। " - "मस्जिद में उसके लिए वह सब प्यार महसूस हुआ, जो भूल गया, भूलने के लिए ताजा। " - "आप अपना धर्म रखते हैं, मैं मेरा हूं। यह सबसे अच्छा है। पूरे भारत को कुछ भी नहीं, कुछ भी नहीं, कुछ भी नहीं और अकबर की गलती थी। " - "लेकिन अचानक, उसके दिमाग के किनारे, धर्म प्रकट हुआ, गरीब छोटी बात करने वाली ईसाई धर्म, और वह जानती थी कि 'यह समाप्त हो गया है' से 'अपने जीवन के लिए प्रकाश' होने के सभी दिव्य शब्द 'केवल समाप्त हो गए हैं' ' - "मेरे पास इस देश का पच्चीस साल का अनुभव है '- और पच्चीस साल प्रतीक्षा कक्ष को अपनी स्थिरता और अपमानजनकता से भरने लगते थे -' और उन पच्चीस सालों के दौरान, मैंने कभी भी आपदा के परिणाम के अलावा कुछ भी नहीं कहा है लोग और भारतीय सामाजिक रूप से घनिष्ठ होने का प्रयास करते हैं। '" - "वे दोष नहीं दे रहे हैं, उनके पास कुत्ते का मौका नहीं है - अगर हम यहां बस गए तो हमें उनके जैसे होना चाहिए। " - "उन्होंने महिलाओं और बच्चों के बारे में बात करना शुरू कर दिया था, वह वाक्यांश जो पुरुष को सैनिटी से मुक्त करता है जब इसे दो बार दोहराया जाता है। " - "लेकिन पूर्व में हर मानवीय कृत्य आधिकारिकता से दब गया है, और उन्हें सम्मानित करते हुए उन्होंने अज़ीज़ और भारत की निंदा की। " - "जब वह भाग गई थी तब उसके बाद आवाज निकल गई थी, और वह अभी भी एक नदी की तरह जा रही थी जो धीरे-धीरे मैदान को बाढ़ कर रही थी। केवल श्रीमती मूर इसे अपने स्रोत पर वापस ले जा सकती थीं और टूटे हुए जलाशय को सील कर सकती थीं। बुराई ढीली थी . . . वह कर सकती थी इसे दूसरों के जीवन में प्रवेश सुनें। " - "उसकी ईसाई कोमलता चली गई थी, या कठोरता में विकसित हुई थी, मानव जाति के खिलाफ सिर्फ जलन थी, उसने गिरफ्तारी में कोई दिलचस्पी नहीं ली थी, किसी भी सवाल से पूछा, और मोरूरम की एक भयानक कल रात उसे बिस्तर छोड़ने से इंकार कर दिया था, जब बंगले पर हमले की उम्मीद थी। " - "जैसे ही वह भारत में उतरा, वह उसे अच्छा लग रहा था, और जब उसने मस्जिद टैंक, या गंगा, या चंद्रमा के माध्यम से रात के शाल में पकड़े गए चंद्रमा को अन्य सभी सितारों के साथ देखा, तो यह एक सुंदर लग रहा था लक्ष्य और एक आसान एक। " - "उन्होंने दुनिया में इतना महत्व क्यों दिया और सभ्यता का खिताब संभाला? " - "रोनी का धर्म निर्जलित पब्लिक स्कूल ब्रांड था, जो उष्णकटिबंधीय में भी कभी बुरा नहीं होता था। जहां भी उन्होंने प्रवेश किया, मस्जिद, गुफा या मंदिर, उन्होंने पांचवें रूप के आध्यात्मिक दृष्टिकोण को बरकरार रखा, और किसी भी प्रयास को 'कमजोर' के रूप में निंदा की उन्हें समझें। " - "श्री भट्टाचार्य के लिए कविता कभी लिखी नहीं गई, लेकिन इसका असर पड़ा। इससे उन्हें मां-भूमि की अस्पष्ट और भारी आकृति की ओर ले जाया गया। वह अपने जन्म की भूमि के लिए स्वाभाविक स्नेह नहीं था, लेकिन मारबार पहाड़ियों ने उसे चलाई इसके लिए आधे से ज्यादा आंखें बंद कर दीं, उन्होंने भारत से प्यार करने का प्रयास किया। " - "ओरिएंटल में संदेह एक प्रकार का घातक ट्यूमर है, एक मानसिक बीमारी है, जो उसे आत्म-जागरूक और असभ्य रूप से अचानक बनाता है; वह उसी समय विश्वास करता है और अविश्वास करता है जिस तरह से पश्चिमी समझ में नहीं आता है। यह उसका राक्षस है, वेस्टर्नर्स पाखंड है। " - "इस प्रकार गोडबोले, हालांकि वह उनके लिए महत्वपूर्ण नहीं थी, उन्होंने चंद्रपुर के दिनों में एक बूढ़ी औरत से मुलाकात की थी। इस गर्म स्थिति में जब वह उसे चुनती थी, तो उसने उसे अपने मन में लाया, उसने उसे नहीं चुना, वह थ्रॉन्ग के बीच हुई छवियों की मांग करने के लिए, एक छोटा सा स्प्लिंटर, और उसने उसे उस आध्यात्मिक स्थान पर अपनी आध्यात्मिक शक्ति से प्रेरित किया जहां पूर्णता पाई जा सकती है। " - "मेरा दिल अपने लोगों के लिए आगे है। " - "तो आप एक ओरिएंटल हैं। " - "लेकिन घोड़ों को यह नहीं चाहिए था-वे अलग हो गए; पृथ्वी इसे नहीं चाहती थी, चट्टानों को भेजकर जिसके माध्यम से सवारों को एक फाइल पास करनी होगी; मंदिर, टैंक, जेल, महल, पक्षियों, कैरियन , गेस्ट हाउस, जो उन्होंने देखा था, उन्होंने अंतराल से जारी किया और माउ को नीचे देखाः वे इसे नहीं चाहते थे, उन्होंने अपनी सौ आवाजों में कहा, 'नहीं, अभी तक नहीं,' और आकाश ने कहा, 'नहीं, नहीं क्या आप वहां मौजूद हैं। '"
भारत में एक मार्ग ईएम फॉरेस्टर द्वारा एक प्रसिद्ध आधुनिक उपन्यास है। भारत के अंग्रेजी उपनिवेशीकरण के दौरान सेट, उपन्यास नाटकीय रूप से भारतीय लोगों और औपनिवेशिक सरकार के बीच कुछ संघर्षों को दर्शाता है। यहां एक मार्ग से भारत के कुछ उद्धरण दिए गए हैं। - "इसलिए, इतनी नीरस है कि आंखों को पूरा करने वाली हर चीज है, कि जब गंगा नीचे आती है तो उसे मिट्टी में वापस लौटने की उम्मीद की जा सकती है। घर गिरते हैं, लोग डूब जाते हैं और घूमते रहते हैं, लेकिन शहर की सामान्य रूपरेखा जीवन में कुछ कम लेकिन अविनाशी रूप की तरह, वहां सिकुड़ते हुए, यहां तक कि सिकुड़ते रहते हैं। " - "दूसरी वृद्धि पर छोटे सिविल स्टेशन को रखा गया है, और इसलिए देखा गया है कि चंद्रपुर एक पूरी तरह से अलग जगह प्रतीत होता है। यह बागानों का एक शहर है। यह कोई शहर नहीं है, लेकिन एक जंगली झोपड़ियों के साथ बिखरी हुई है। यह एक उष्णकटिबंधीय pleasunce है एक महान नदी से धोया। " - "वे सभी बिल्कुल वही बन जाते हैं, बदतर नहीं, बेहतर नहीं। मैं दो साल का अंग्रेज देता हूं, चाहे वह टर्टन या बर्टन हो। यह केवल एक पत्र का अंतर है। और मैं छह महीने की कोई भी महिला महिला देता हूं। सभी बिल्कुल समान हैं। " - "उसने अपना रात्रिभोज का समय पाया है, यह सब कुछ है, और अपनी शक्ति दिखाने के लिए हर बार हमें बाधित करने का विकल्प चुनता है। " - "अपनी मंजूरी जीतकर एक मस्जिद अपनी कल्पना को ढीला कर देता है। एक और पंथ, हिंदू, ईसाई, या ग्रीक का मंदिर उसे ऊबता और सुंदरता की भावना जागने में असफल रहा। यहां इस्लाम, उसका देश था, विश्वास से अधिक , एक लड़ाई रोना से अधिक, और भी बहुत कुछ। " - "इस्लाम जीवन के प्रति एक दृष्टिकोण है जो उत्तम और टिकाऊ दोनों है, जहां उसके शरीर और उसके विचारों ने अपना घर पाया। " - "इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। भगवान यहाँ है। " - "जैसे ही वह सुंदर चंद्रमा के नीचे पहाड़ी से घूमता था, और फिर उसने सुंदर मस्जिद को देखा, वह जमीन के मालिक जितना था, उतना ही था। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कुछ झटकेदार हिंदुओं ने उससे पहले क्या किया था, और कुछ ठंडा अंग्रेजी सफल हुई। " - "मैं असली भारत देखना चाहता हूं। " - "चलो, भारत इतना बुरा नहीं है। पृथ्वी के दूसरी तरफ, यदि आप चाहें, लेकिन हम उसी पुराने चंद्रमा से चिपके रहते हैं। " - "एडवेंचर्स होते हैं, लेकिन समय-समय पर नहीं। " - "इंग्लैंड में चंद्रमा मृत और विदेशी लग रहा था; यहां वह पृथ्वी और अन्य सभी सितारों के साथ रात के शाल में पकड़ी गई थी। एकता की अचानक भावना, स्वर्गीय निकायों के साथ संबंध, पुरानी महिला और बाहर की तरह एक टैंक के माध्यम से पानी, पीछे एक अजीब ताजगी छोड़कर। " - "दूरी पर सहानुभूति करना आसान है। मैं अपने कान के करीब बोलने वाले शब्द को अधिक महत्व देता हूं। " - "नहीं, नहीं, यह दूर जा रहा है। हमें किसी को हमारे सभा से बाहर करना होगा, या हमें कुछ भी नहीं छोड़ा जाएगा। " - "नहीं, यह सुरम्य नहीं था; पूर्व, अपनी धर्मनिरपेक्ष भव्यता को छोड़कर, एक घाटी में उतर रहा था जिसका आगे की ओर कोई भी आदमी नहीं देख सकता था। " - "क्योंकि भारत पृथ्वी का हिस्सा है। और भगवान ने हमें एक दूसरे के प्रति सुखद होने के लिए धरती पर रखा है। भगवान प्यार है। " - "उन्हें एहसास नहीं हुआ कि 'सफ़ेद' के पास भगवान के साथ 'भगवान को राजा को बचाने' की तुलना में रंग के साथ और अधिक नहीं है, और यह विचार करने के लिए अप्रासंगिकता की ऊंचाई है कि यह क्या कहता है। " - "एक रहस्य केवल एक झुकाव के लिए एक उच्च ध्वनि शब्द है। किसी भी मामले में इसे हल करने में कोई फायदा नहीं है। अजीज़ और मैं अच्छी तरह से जानता हूं कि भारत एक गड़बड़ी है। " - "अज़ीज़ को टाई-पिन से स्पैट्स तक बेहद तैयार किया गया था, लेकिन वह अपने बैक-कॉलर स्टड को भूल गया था, और वहां आपके पास सभी भारतीय हैं; विस्तार से अचूकता, मौलिक ढीलापन जो दौड़ को प्रकट करती है। " - "उसके हाथ ने झटका के कारण उसे छुआ, और जानवरों के साम्राज्य में अक्सर इतने रोमांचों में से एक ने उनके बीच पारित किया, और घोषणा की कि उनकी कठिनाइयों केवल प्रेमियों के झगड़े थे। " - "और जब पूरी दुनिया इस तरह व्यवहार करती है, तो अब और नहीं होगा? " - "लेकिन वह [अज़ीज़] खुद समाज और इस्लाम में निहित थे। वह एक परंपरा से संबंधित थे, जो उन्हें बंधे थे, और उन्होंने भविष्य में समाज को दुनिया में लाया था। हालांकि वह इस भयानक बंगले में इतनी अस्पष्टता से रहते थे, फिर भी वह रखा गया था, रखा। " - "मस्जिद में उसके लिए वह सब प्यार महसूस हुआ, जो भूल गया, भूलने के लिए ताजा। " - "आप अपना धर्म रखते हैं, मैं मेरा हूं। यह सबसे अच्छा है। पूरे भारत को कुछ भी नहीं, कुछ भी नहीं, कुछ भी नहीं और अकबर की गलती थी। " - "लेकिन अचानक, उसके दिमाग के किनारे, धर्म प्रकट हुआ, गरीब छोटी बात करने वाली ईसाई धर्म, और वह जानती थी कि 'यह समाप्त हो गया है' से 'अपने जीवन के लिए प्रकाश' होने के सभी दिव्य शब्द 'केवल समाप्त हो गए हैं' ' - "मेरे पास इस देश का पच्चीस साल का अनुभव है '- और पच्चीस साल प्रतीक्षा कक्ष को अपनी स्थिरता और अपमानजनकता से भरने लगते थे -' और उन पच्चीस सालों के दौरान, मैंने कभी भी आपदा के परिणाम के अलावा कुछ भी नहीं कहा है लोग और भारतीय सामाजिक रूप से घनिष्ठ होने का प्रयास करते हैं। '" - "वे दोष नहीं दे रहे हैं, उनके पास कुत्ते का मौका नहीं है - अगर हम यहां बस गए तो हमें उनके जैसे होना चाहिए। " - "उन्होंने महिलाओं और बच्चों के बारे में बात करना शुरू कर दिया था, वह वाक्यांश जो पुरुष को सैनिटी से मुक्त करता है जब इसे दो बार दोहराया जाता है। " - "लेकिन पूर्व में हर मानवीय कृत्य आधिकारिकता से दब गया है, और उन्हें सम्मानित करते हुए उन्होंने अज़ीज़ और भारत की निंदा की। " - "जब वह भाग गई थी तब उसके बाद आवाज निकल गई थी, और वह अभी भी एक नदी की तरह जा रही थी जो धीरे-धीरे मैदान को बाढ़ कर रही थी। केवल श्रीमती मूर इसे अपने स्रोत पर वापस ले जा सकती थीं और टूटे हुए जलाशय को सील कर सकती थीं। बुराई ढीली थी . . . वह कर सकती थी इसे दूसरों के जीवन में प्रवेश सुनें। " - "उसकी ईसाई कोमलता चली गई थी, या कठोरता में विकसित हुई थी, मानव जाति के खिलाफ सिर्फ जलन थी, उसने गिरफ्तारी में कोई दिलचस्पी नहीं ली थी, किसी भी सवाल से पूछा, और मोरूरम की एक भयानक कल रात उसे बिस्तर छोड़ने से इंकार कर दिया था, जब बंगले पर हमले की उम्मीद थी। " - "जैसे ही वह भारत में उतरा, वह उसे अच्छा लग रहा था, और जब उसने मस्जिद टैंक, या गंगा, या चंद्रमा के माध्यम से रात के शाल में पकड़े गए चंद्रमा को अन्य सभी सितारों के साथ देखा, तो यह एक सुंदर लग रहा था लक्ष्य और एक आसान एक। " - "उन्होंने दुनिया में इतना महत्व क्यों दिया और सभ्यता का खिताब संभाला? " - "रोनी का धर्म निर्जलित पब्लिक स्कूल ब्रांड था, जो उष्णकटिबंधीय में भी कभी बुरा नहीं होता था। जहां भी उन्होंने प्रवेश किया, मस्जिद, गुफा या मंदिर, उन्होंने पांचवें रूप के आध्यात्मिक दृष्टिकोण को बरकरार रखा, और किसी भी प्रयास को 'कमजोर' के रूप में निंदा की उन्हें समझें। " - "श्री भट्टाचार्य के लिए कविता कभी लिखी नहीं गई, लेकिन इसका असर पड़ा। इससे उन्हें मां-भूमि की अस्पष्ट और भारी आकृति की ओर ले जाया गया। वह अपने जन्म की भूमि के लिए स्वाभाविक स्नेह नहीं था, लेकिन मारबार पहाड़ियों ने उसे चलाई इसके लिए आधे से ज्यादा आंखें बंद कर दीं, उन्होंने भारत से प्यार करने का प्रयास किया। " - "ओरिएंटल में संदेह एक प्रकार का घातक ट्यूमर है, एक मानसिक बीमारी है, जो उसे आत्म-जागरूक और असभ्य रूप से अचानक बनाता है; वह उसी समय विश्वास करता है और अविश्वास करता है जिस तरह से पश्चिमी समझ में नहीं आता है। यह उसका राक्षस है, वेस्टर्नर्स पाखंड है। " - "इस प्रकार गोडबोले, हालांकि वह उनके लिए महत्वपूर्ण नहीं थी, उन्होंने चंद्रपुर के दिनों में एक बूढ़ी औरत से मुलाकात की थी। इस गर्म स्थिति में जब वह उसे चुनती थी, तो उसने उसे अपने मन में लाया, उसने उसे नहीं चुना, वह थ्रॉन्ग के बीच हुई छवियों की मांग करने के लिए, एक छोटा सा स्प्लिंटर, और उसने उसे उस आध्यात्मिक स्थान पर अपनी आध्यात्मिक शक्ति से प्रेरित किया जहां पूर्णता पाई जा सकती है। " - "मेरा दिल अपने लोगों के लिए आगे है। " - "तो आप एक ओरिएंटल हैं। " - "लेकिन घोड़ों को यह नहीं चाहिए था-वे अलग हो गए; पृथ्वी इसे नहीं चाहती थी, चट्टानों को भेजकर जिसके माध्यम से सवारों को एक फाइल पास करनी होगी; मंदिर, टैंक, जेल, महल, पक्षियों, कैरियन , गेस्ट हाउस, जो उन्होंने देखा था, उन्होंने अंतराल से जारी किया और माउ को नीचे देखाः वे इसे नहीं चाहते थे, उन्होंने अपनी सौ आवाजों में कहा, 'नहीं, अभी तक नहीं,' और आकाश ने कहा, 'नहीं, नहीं क्या आप वहां मौजूद हैं। '"
Faridabad/Alive News: फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण द्वारा शहर की निर्माणाधीन सडक़ों को लेकर केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर व विधायक नरेंद्र गुप्ता ने शहरवासियों से धैर्य बरतने की अपील की है। केंद्रीय राज्यमंत्री ने रविवार को 10 करोड 34 लाख रूपये की धनराशि से बन रही सैक्टर-16-17 डिवाइडिंग रोड के निर्माण कार्य का शुभारंभ किया। केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण द्वारा 10 करोड़ 34 लाख रुपये की धनराशि से बनाई जाने वाली सेक्टर-16-17 की डिवाइडिंग रोड को 20 दिन के अंदर जनता को समर्पित कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि फरीदाबाद में चहुमुखी विकास करने का पूरा प्रयास किया जाएगा। केन्द्रीय राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर व विधायक नरेन्द्र गुप्ता ने कहा कि जल्द ही अन्य सडक़ों का निर्माण भी पूरा हो जाएगा। लेकिन तब तक लोगों को थोड़ा सब्र रखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि शहर की स्ट्रीट लाइटिंग,स्वच्छ पेयजल आपूर्ति की लाइनें और आधुनिक तकनीक की सिवरेज व्यव्स्था तथा आरएमसी सडक़ें जब बन जाएंगी तो लोग भी इस परेशानी को भूल जाएंगे। इस मौके पर भाजपा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष पंकज रामपाल, जिला सचिव मुकेश अग्रवाल, मंडल अध्यक्ष कुलदीप साहनी, संदीप बंसल, सचिन शर्मा, अजीत नंबरदार, पंकज गर्ग, छत्रपाल, विनोद भाटी, एलपी, नरेंद्र जैन,समीर टंडन, शिवशंकर भारद्वाज, आरपी गुप्ता,बलवान शर्मा सहित कई गणमान्य लोग व अधीक्षक अभियंता जेएस शर्मा, कार्यकारी अभियंता अश्विनी शर्मा,सबडिविजनल अभियंता तारा चंद व अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
Faridabad/Alive News: फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण द्वारा शहर की निर्माणाधीन सडक़ों को लेकर केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर व विधायक नरेंद्र गुप्ता ने शहरवासियों से धैर्य बरतने की अपील की है। केंद्रीय राज्यमंत्री ने रविवार को दस करोड चौंतीस लाख रूपये की धनराशि से बन रही सैक्टर-सोलह-सत्रह डिवाइडिंग रोड के निर्माण कार्य का शुभारंभ किया। केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण द्वारा दस करोड़ चौंतीस लाख रुपये की धनराशि से बनाई जाने वाली सेक्टर-सोलह-सत्रह की डिवाइडिंग रोड को बीस दिन के अंदर जनता को समर्पित कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि फरीदाबाद में चहुमुखी विकास करने का पूरा प्रयास किया जाएगा। केन्द्रीय राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर व विधायक नरेन्द्र गुप्ता ने कहा कि जल्द ही अन्य सडक़ों का निर्माण भी पूरा हो जाएगा। लेकिन तब तक लोगों को थोड़ा सब्र रखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि शहर की स्ट्रीट लाइटिंग,स्वच्छ पेयजल आपूर्ति की लाइनें और आधुनिक तकनीक की सिवरेज व्यव्स्था तथा आरएमसी सडक़ें जब बन जाएंगी तो लोग भी इस परेशानी को भूल जाएंगे। इस मौके पर भाजपा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष पंकज रामपाल, जिला सचिव मुकेश अग्रवाल, मंडल अध्यक्ष कुलदीप साहनी, संदीप बंसल, सचिन शर्मा, अजीत नंबरदार, पंकज गर्ग, छत्रपाल, विनोद भाटी, एलपी, नरेंद्र जैन,समीर टंडन, शिवशंकर भारद्वाज, आरपी गुप्ता,बलवान शर्मा सहित कई गणमान्य लोग व अधीक्षक अभियंता जेएस शर्मा, कार्यकारी अभियंता अश्विनी शर्मा,सबडिविजनल अभियंता तारा चंद व अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
इस बीच खबर है कि प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (प्रसपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव भी जल्द ही कोरोना वैक्सीन ल गवा सकते हैं. शिवपाल से जुड़े सूत्रों का कहना है कि वह जिला अस्पताल में टीका लगवाएंगे. उनके साथ उनकी पत्नी भी कोरोना का टीका लगवा सकती हैं. आपको बता दें कि देश में कोरोना वैक्सीनेशन का दूसरा फेज चल रहा है. इस फेज में 60 साल से अधिक आयुवर्ग के लोगों और 45 साल से अधिक आयुवर्ग के गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को कोरोना का टीका लगाया जा रहा है. देश में अब तक 2 करोड़ से अधिक लोगों को कोरोना का टीका लगाया जा चुका है. इटावा के पूर्व सांसद प्रेमदास कठेरिया ने भी कोरोना का टीका लगवाने का विरोध किया था लेकिन अब अखिलेश यादव के रिश्तेदार आगे बढ़कर टीका लगवा रहे हैं. ऐसे में अब देखना होगा कि अखिलेश यादव और उनके बाकी परिवार के लोग टीका लगवाते हैं या नहीं. गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 2 जनवरी को हुई एक प्रेस वार्ता में कहा था कि भाजपा का यह कोरोना का वैक्सीन है, इसलिए मैं इस पर कैसे भरोसा कर सकता हूं. इस बयान के बाद उनके कई समर्थक और समाजवादी पार्टी के पदाधिकारियों ने भी कोरोना के टीके का विरोध किया था. कोरोना वैक्सीन पर सवाल उठाने वाले समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के रिश्तेदार ने टीका लगवा लिया है. मंगलवार को अखिलेश की बुआ और फूफा ने टीका लगवाया. इटावा के रहने वाले डॉक्टर अजंट सिंह, जो कि मुलायम सिंह के इकलौते बहनोई हैं, उन्होंने अपनी पत्नी कमला सिंह के साथ 9 मार्च को कोरोना का टीका लगवाया है.
इस बीच खबर है कि प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव भी जल्द ही कोरोना वैक्सीन ल गवा सकते हैं. शिवपाल से जुड़े सूत्रों का कहना है कि वह जिला अस्पताल में टीका लगवाएंगे. उनके साथ उनकी पत्नी भी कोरोना का टीका लगवा सकती हैं. आपको बता दें कि देश में कोरोना वैक्सीनेशन का दूसरा फेज चल रहा है. इस फेज में साठ साल से अधिक आयुवर्ग के लोगों और पैंतालीस साल से अधिक आयुवर्ग के गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को कोरोना का टीका लगाया जा रहा है. देश में अब तक दो करोड़ से अधिक लोगों को कोरोना का टीका लगाया जा चुका है. इटावा के पूर्व सांसद प्रेमदास कठेरिया ने भी कोरोना का टीका लगवाने का विरोध किया था लेकिन अब अखिलेश यादव के रिश्तेदार आगे बढ़कर टीका लगवा रहे हैं. ऐसे में अब देखना होगा कि अखिलेश यादव और उनके बाकी परिवार के लोग टीका लगवाते हैं या नहीं. गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दो जनवरी को हुई एक प्रेस वार्ता में कहा था कि भाजपा का यह कोरोना का वैक्सीन है, इसलिए मैं इस पर कैसे भरोसा कर सकता हूं. इस बयान के बाद उनके कई समर्थक और समाजवादी पार्टी के पदाधिकारियों ने भी कोरोना के टीके का विरोध किया था. कोरोना वैक्सीन पर सवाल उठाने वाले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के रिश्तेदार ने टीका लगवा लिया है. मंगलवार को अखिलेश की बुआ और फूफा ने टीका लगवाया. इटावा के रहने वाले डॉक्टर अजंट सिंह, जो कि मुलायम सिंह के इकलौते बहनोई हैं, उन्होंने अपनी पत्नी कमला सिंह के साथ नौ मार्च को कोरोना का टीका लगवाया है.
नई दिल्लीः बॉलीवुड के सुपरस्टार शाहरुख खान खुद जितने अपनी फिल्मों के लेकर चर्चा में बने रहते हैं, उतनी ही सुर्खियां उनके बच्चों ने भी बटोरी है। अब किंग खान की लाडली बेटी सुहाना खान ने अपना मैगजीन डेब्यू किया है। दरअसल पिछले काफी वक्त से इस बात को लेकर चर्चा चल रही है कि सुहाना इंडस्ट्री में कदम रखने वाली हैं। अब सुहाना ने एक शानदार फोटोशूट करवाया है। दरअसल उन्होंने हाल ही में वोग मैगजीन के कवर पेज पर डेब्यू किया है। इस फोटोशूट की कुछ तस्वीरें और वीडियो मां गौरी खान ने अपने ट्विटर पेज पर भी शेयर की हैं। इसके अलावा खास बात यह कि किंग खान ने खुद इस पेज को लॉन्च किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर सुहाना का फोटोशूट का पोस्ट करते हुए इसके साथ कैप्शन में लिखा, "सुहाना को फिर से मेरे हाथों में पकड़ाने के लिए आपका शुक्रिय वोग। जब बात हमारे बच्चों की आती है तो हम उन्हें प्यार देने की कोशिश करते हैं। तुम्हें अपना सारा प्यारा और Hug भेज रहा हूं। हेलो सुहाना खान! " इस फोटोशूट में सुहाना हाई हील्स, शॉर्ट ट्रेस, ऑफ शॉल्डर गाउन पहने कई अलग- अलग अवतारों में दिखाई दे रही हैं। सुहाना सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। वह अक्सर अपने फैंस के साथ तस्वीरें और वीडियो शेयर करती रहती हैं। लेकिन उनका यह अवतार वाकई हर किसी के लिए हैरान करने वाला है। सुहाना ने डेब्यू से पहले ही काफी लाइमलाइट में आ गई हैं। अब उनके फैंस उन्हें पर्दे देखने के लिए भी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
नई दिल्लीः बॉलीवुड के सुपरस्टार शाहरुख खान खुद जितने अपनी फिल्मों के लेकर चर्चा में बने रहते हैं, उतनी ही सुर्खियां उनके बच्चों ने भी बटोरी है। अब किंग खान की लाडली बेटी सुहाना खान ने अपना मैगजीन डेब्यू किया है। दरअसल पिछले काफी वक्त से इस बात को लेकर चर्चा चल रही है कि सुहाना इंडस्ट्री में कदम रखने वाली हैं। अब सुहाना ने एक शानदार फोटोशूट करवाया है। दरअसल उन्होंने हाल ही में वोग मैगजीन के कवर पेज पर डेब्यू किया है। इस फोटोशूट की कुछ तस्वीरें और वीडियो मां गौरी खान ने अपने ट्विटर पेज पर भी शेयर की हैं। इसके अलावा खास बात यह कि किंग खान ने खुद इस पेज को लॉन्च किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर सुहाना का फोटोशूट का पोस्ट करते हुए इसके साथ कैप्शन में लिखा, "सुहाना को फिर से मेरे हाथों में पकड़ाने के लिए आपका शुक्रिय वोग। जब बात हमारे बच्चों की आती है तो हम उन्हें प्यार देने की कोशिश करते हैं। तुम्हें अपना सारा प्यारा और Hug भेज रहा हूं। हेलो सुहाना खान! " इस फोटोशूट में सुहाना हाई हील्स, शॉर्ट ट्रेस, ऑफ शॉल्डर गाउन पहने कई अलग- अलग अवतारों में दिखाई दे रही हैं। सुहाना सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। वह अक्सर अपने फैंस के साथ तस्वीरें और वीडियो शेयर करती रहती हैं। लेकिन उनका यह अवतार वाकई हर किसी के लिए हैरान करने वाला है। सुहाना ने डेब्यू से पहले ही काफी लाइमलाइट में आ गई हैं। अब उनके फैंस उन्हें पर्दे देखने के लिए भी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
नई दिल्ली : चुनावी मौसम में हर नेता आम जनता से खुद को जोड़ने के लिए तमाम हथकंडे अपना रहे हैं। मंगलवार को बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी जब हिमाचल प्रदेश के पालमपुर पहुंचे तो अपनी रैली में शहीद विक्रम बत्रा का नाम लेकर लोगों से जज्बाती रिश्ता बनाने की कोशिश की। वहीं शहीद विक्रम के परिवार ने मोदी की आलोचना करते हुए कहा कि उनके बेटे का नाम राजनीति में न घसीटा जाए। रैली के दौरान नरेंद्र मोदी ने पालमपुर में मंगलवार की सुबह एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा था कि, '"विक्रम बत्रा ने देश के लिए जान दी... उसने कहा था, ये दिल मांगे मोर... मैं भी यही कहता हूं... मैं हिमाचल प्रदेश की चारों सीटें चाहता हूं... मैं देशभर में 300 कमल देखना चाहता हूं। उन्होंने कहा कि मैं देश को गड्ढ़े से बाहर निकाल कर फिर से सही रास्ते पर लाना चाहता हूं। 1999 करगिल लड़ाई लड़ने वाले विक्रम बत्रा को परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया था। मोदी ने पहले परम वीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा का भी जिक्र अपने भाषण में किया। शहीद विक्रम बत्रा की मां कमल कांत बत्रा हमीरपुर से चुनावी क्षेत्र से आम आदमी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रही है। वहीं विक्रम के पिता जीएल बत्रा ने कहा, 'राजनीति में शहीदों का नाम घसीटना सही नहीं है। अगर वो (मोदी) शहीदों के इतने ही आभारी हैं तो इस चुनावी क्षेत्र से उन्हें विक्रम की मां के खिलाफ अपना उम्मीदवार हटा लेना चाहिए। वहीं दूसरी और बीजेपी की मीनाक्षी लेखी ने इस बयान पर पलटवार करते हुए कहा, 'उनकी (शहीद विक्रम) मां को आम आदमी पार्टी की जगह बीजेपी में शामिल होना चाहिए था। 'शहीद' शब्द का नाम सम्मान के लिए होता है। और इसे कोई भी इस्तेमाल कर सकता है इस पर किसी का कॉपीराइट नहीं है। पालमपुर में अपनी चुनावी रैली के दौरान नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, कांग्रेस ने 2009 के अपने घोषणा पत्र में कहा था कि वो 100 दिनों के अंदर महंगाई कम करेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ तो ये धोखा पत्र ही था. कांग्रेस धोखेबाज थी। नरेंद्र मोदी ने कहा, 'करगिल शहीद विक्रम बत्रा और उनके परिजनों को लेकर मेरे दिल में बेदह सम्मान है। मैं शहीदों की गरिमा को चोट पहुंचाने की बजाए राजनीति छोड़ दूंगा। नरेंद्र मोदी के इस नारे से कैप्टन विक्रम बत्रा के परिजन खुश नहीं हैं। शहीद कैप्टन के पिता जीएल बत्रा ने कहा, भारतीय जनता पार्टी को उसका (कैप्टन विक्रम बत्रा का) नाम राजनीति में नहीं घसीटना चाहिए। गौरतलब है कि देश के सर्वोच्च युद्ध सम्मान परमवीर चक्र से मरणोपरांत सम्मानित किए गए कैप्टन विक्रम बत्रा का जन्म पालमपुर में ही हुआ था, और वर्ष 1999 में करगिल युद्ध के दौरान शहीद होने से पहले कैप्टन बत्रा ने एनडीटीवी से बातचीत के दौरान एक विज्ञापन की इस पंक्ति 'ये दिल मांगे मोर' का इस्तेमाल किया था।
नई दिल्ली : चुनावी मौसम में हर नेता आम जनता से खुद को जोड़ने के लिए तमाम हथकंडे अपना रहे हैं। मंगलवार को बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी जब हिमाचल प्रदेश के पालमपुर पहुंचे तो अपनी रैली में शहीद विक्रम बत्रा का नाम लेकर लोगों से जज्बाती रिश्ता बनाने की कोशिश की। वहीं शहीद विक्रम के परिवार ने मोदी की आलोचना करते हुए कहा कि उनके बेटे का नाम राजनीति में न घसीटा जाए। रैली के दौरान नरेंद्र मोदी ने पालमपुर में मंगलवार की सुबह एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा था कि, '"विक्रम बत्रा ने देश के लिए जान दी... उसने कहा था, ये दिल मांगे मोर... मैं भी यही कहता हूं... मैं हिमाचल प्रदेश की चारों सीटें चाहता हूं... मैं देशभर में तीन सौ कमल देखना चाहता हूं। उन्होंने कहा कि मैं देश को गड्ढ़े से बाहर निकाल कर फिर से सही रास्ते पर लाना चाहता हूं। एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे करगिल लड़ाई लड़ने वाले विक्रम बत्रा को परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया था। मोदी ने पहले परम वीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा का भी जिक्र अपने भाषण में किया। शहीद विक्रम बत्रा की मां कमल कांत बत्रा हमीरपुर से चुनावी क्षेत्र से आम आदमी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रही है। वहीं विक्रम के पिता जीएल बत्रा ने कहा, 'राजनीति में शहीदों का नाम घसीटना सही नहीं है। अगर वो शहीदों के इतने ही आभारी हैं तो इस चुनावी क्षेत्र से उन्हें विक्रम की मां के खिलाफ अपना उम्मीदवार हटा लेना चाहिए। वहीं दूसरी और बीजेपी की मीनाक्षी लेखी ने इस बयान पर पलटवार करते हुए कहा, 'उनकी मां को आम आदमी पार्टी की जगह बीजेपी में शामिल होना चाहिए था। 'शहीद' शब्द का नाम सम्मान के लिए होता है। और इसे कोई भी इस्तेमाल कर सकता है इस पर किसी का कॉपीराइट नहीं है। पालमपुर में अपनी चुनावी रैली के दौरान नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, कांग्रेस ने दो हज़ार नौ के अपने घोषणा पत्र में कहा था कि वो एक सौ दिनों के अंदर महंगाई कम करेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ तो ये धोखा पत्र ही था. कांग्रेस धोखेबाज थी। नरेंद्र मोदी ने कहा, 'करगिल शहीद विक्रम बत्रा और उनके परिजनों को लेकर मेरे दिल में बेदह सम्मान है। मैं शहीदों की गरिमा को चोट पहुंचाने की बजाए राजनीति छोड़ दूंगा। नरेंद्र मोदी के इस नारे से कैप्टन विक्रम बत्रा के परिजन खुश नहीं हैं। शहीद कैप्टन के पिता जीएल बत्रा ने कहा, भारतीय जनता पार्टी को उसका नाम राजनीति में नहीं घसीटना चाहिए। गौरतलब है कि देश के सर्वोच्च युद्ध सम्मान परमवीर चक्र से मरणोपरांत सम्मानित किए गए कैप्टन विक्रम बत्रा का जन्म पालमपुर में ही हुआ था, और वर्ष एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में करगिल युद्ध के दौरान शहीद होने से पहले कैप्टन बत्रा ने एनडीटीवी से बातचीत के दौरान एक विज्ञापन की इस पंक्ति 'ये दिल मांगे मोर' का इस्तेमाल किया था।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को भोपाल स्थित एम्स में छात्रों के विरोध का सामना करना पड़ा. इस दौरान नाराज छात्रों ने जेपी नड्डा पर स्याही फेंकी. वहीं, मंत्री के काफिले से टकराकर एक छात्रा घायल हो गई. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को भोपाल स्थित एम्स में छात्रों के विरोध का सामना करना पड़ा. इस दौरान नाराज छात्रों ने जेपी नड्डा पर स्याही फेंकी. वहीं, मंत्री के काफिले से टकराकर एक छात्रा घायल हो गई. शनिवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के एम्स पहुंचते ही विरोध प्रदर्शन का सिलसिला शुरू हो गया था. छात्रों ने एम्स में निर्माण कार्य में देरी और फैकल्टी की कमी के चलते जमकर नारेबाजी की. परिसर के बाहर छात्रों के शोर-शराबे के बीच जेपी नड्डा ने एम्स में एमआरआई और सीटी स्कैन मशीन के अलावा दो वार्डों का शुभारंभ किया. केंद्रीय मंत्री ने फैकल्टी के साथ मीटिंग करने के बाद छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से भी मुलाकात कीं. इसके बाद मंत्री जैसे ही अपने वाहन की तरफ बढ़ने लगे छात्रों के एक समूह ने उन्हें घेर लिया. इस दौरान एक छात्र ने उन पर स्याही फेंक दी. मंत्री पर स्याही फेंकने की घटना के बाद एम्स परिसर में हडकंप मच गया. मंत्री तुरंत गाड़ी में बैठकर रवाना हो गए. वहीं, मंत्री को रोकने की कोशिश में एक छात्रा उनकी गाड़ी से टकरा गई, जिसे इलाज के लिए एम्स में ही भर्ती किया गया है. .
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को भोपाल स्थित एम्स में छात्रों के विरोध का सामना करना पड़ा. इस दौरान नाराज छात्रों ने जेपी नड्डा पर स्याही फेंकी. वहीं, मंत्री के काफिले से टकराकर एक छात्रा घायल हो गई. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को भोपाल स्थित एम्स में छात्रों के विरोध का सामना करना पड़ा. इस दौरान नाराज छात्रों ने जेपी नड्डा पर स्याही फेंकी. वहीं, मंत्री के काफिले से टकराकर एक छात्रा घायल हो गई. शनिवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के एम्स पहुंचते ही विरोध प्रदर्शन का सिलसिला शुरू हो गया था. छात्रों ने एम्स में निर्माण कार्य में देरी और फैकल्टी की कमी के चलते जमकर नारेबाजी की. परिसर के बाहर छात्रों के शोर-शराबे के बीच जेपी नड्डा ने एम्स में एमआरआई और सीटी स्कैन मशीन के अलावा दो वार्डों का शुभारंभ किया. केंद्रीय मंत्री ने फैकल्टी के साथ मीटिंग करने के बाद छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से भी मुलाकात कीं. इसके बाद मंत्री जैसे ही अपने वाहन की तरफ बढ़ने लगे छात्रों के एक समूह ने उन्हें घेर लिया. इस दौरान एक छात्र ने उन पर स्याही फेंक दी. मंत्री पर स्याही फेंकने की घटना के बाद एम्स परिसर में हडकंप मच गया. मंत्री तुरंत गाड़ी में बैठकर रवाना हो गए. वहीं, मंत्री को रोकने की कोशिश में एक छात्रा उनकी गाड़ी से टकरा गई, जिसे इलाज के लिए एम्स में ही भर्ती किया गया है. .
शत्रुग्नकुमारोऽसौ मथुरापुर्या सुरकहृदयोऽस्यन्तम् । न तथापि एति भेजे वैदेया विरहितो तथासीद् रामः ॥२८॥ स्वप्न इव भवति चारुसंयोगः प्राणिनां यदा तनुकालः । जनयति परमं तापं निदाघर विर श्मि जनितादधिकम् ॥ २६ ॥ इत्यार्षे रविषेणाचार्य प्रोक्ते श्रीपद्मपुराणे मथुरोपसर्गाभिधानं नाम नवतितमं पर्व ।।६०॥ सुन्दर थी, कामधेनुके समान समस्त मनोरथोंके प्रदान करनेमें चतुर थी और स्वर्ग जैसे भोगोपभोगोंसे सहित थी तथापि शत्रुघ्नकुमारका हृदय मथुरा में ही अत्यन्त अनुरक्त रहता था वह, जिस प्रकार सीताके बिना राम, धैर्यको प्राप्त नहीं होते थे उसी प्रकार मथुर के बिना धैर्यको प्राप्त नहीं होता था ॥२७-२८॥ गौतम स्वामी कहते हैं कि हे श्रेणिक ! प्राणियोंको सुन्दर वस्तुओंका समागम जब स्वप्नके समान अल्प कालके लिए होता है तब वह ग्रीष्मऋतु सम्बन्धी सूर्य की किरणोंसे उत्पन्न सन्तापसे भी कहीं अधिक सन्तापको उत्पन्न करता है ॥२६।। इस प्रकार आर्ष नामसे प्रसिद्ध, रविषेणाचार्य द्वारा कथित पद्मपुराणमें मथुरापर उपसर्गका वर्णन करनेवाला नब्बेवाँ पर्व समाप्त हुआ ॥१०॥ अथ राजगृहस्वामी जगादाद्भुतकौतुकः । भगवन्केन कार्येण तामेवासावयाचत ॥१॥ बहबो राजधान्योऽन्याः सन्ति स्वर्लोकसलिभाः । तत्र शत्रुघ्नवीरस्य का प्रीतिर्मंथुरां प्रति ॥२॥ दिग्यज्ञानसमुद्रेण गणोडुशशिना ततः । गौतमेनोध्यत 'प्रीतियथा तत्कुरु चेतलि ॥३॥ बहवो हि भवास्तस्य तस्या मेवाभवस्ततः । तामेव प्रति सोदेकं स्नेहमेष न्यषेवत ॥४॥ संसारार्णवसंसेवी जीवः कर्मस्वभावतः । जम्बूद्वीपभरते मथुरां समुपागतः ॥५॥ करो यमुनदेवाख्यो धर्मैकान्तपराङ्मुखः । स प्रेत्य कोडवालेयवाय सत्वान्यसेवत ॥६॥ भजत्वं च परिप्राप्तो मृतो भवनदाहतः । महिषो जलवाहोऽभूदायते गवले वहन् ॥ ७॥ षड्वारान्महियो भूत्वा दुःखप्रापणसङ्गतः । पञ्चकृत्वो मनुष्यत्वं दुःकुलेष्वधनोऽभजत् ॥८॥ मध्यकर्मसमाचाराः प्राप्यार्यत्वं मनुष्यताम् । प्राणिनः प्रतिपद्यन्ते किञ्चित्कर्मपरिक्षयम् ॥३॥ ततः कुलम्धराभिख्यः साधुसेवापरायणः । विप्रोडसावभवद्वपी शीलसेवाविवर्जितः ॥१०॥ अशति इव स्वामी पुरस्तस्या जयाशया । यातो देशान्तरं तस्य महिषी ललिताभिधा ॥११॥ प्रासादस्था कदाचित्सा वातायनगतेक्षणा । निरैचत तकं विप्रं दुश्चेष्टं कृतकारणम् ॥१२॥ सा तं क्रीडन्तमालोक्य मनोभवशराहता । आनाययद्द्वहोऽत्यन्तमाप्तया चित्तहारिणम् ॥१३॥ तस्या एकासने चासावुपविष्टो नृपश्च सः । अज्ञातागमनोऽपश्यत्सहसा तद्विचेष्टितम् ॥ १४ ॥ अथानन्तर अद्भुत कौतुकको धारण करने वाले राजा श्रेणिकने गौतम स्वामी से पूछा कि हे भगवन् ! वह शत्रुघ्न किस कार्यसे उसी मथुराकी याचना करता था ॥१॥ स्वर्गलोकके समान अन्य बहुत सी राजधानियाँ हैं उनमें से केवल मथुरा के प्रति ही वीर शत्रुघ्नकी प्रीति क्यों है ?॥२॥ तब दिव्य ज्ञानके सागर एवं गणरूपी नक्षत्रोंके बीच चन्द्रमा के समान गौतम गणधरने कहा कि जिस कारण शत्रुघ्नकी मथुरा में प्रीति थी उसे मैं कहता हूँ तू चित्तमें धारण कर ।।३।। यतश्च उसके बहुतसे भव उसी मथुरा में हुए थे इसलिए उसीके प्रति वह अत्यधिक स्नेह धारण करता था ।।४।। संसार रूपी सागरका सेवन करने वाला एक जीव कर्मस्वभावके कारण जम्बूद्वीप सम्बन्धी भरतक्षेत्र की मथुरा नगरीमें यमुनदेव नामसे उत्पन्न हुआ। वह स्वभावका कर था तथा धर्मसे अत्यन्त विमुख रहता था। मरनेके बाद वह क्रमसे सूकर, गधा और कौआ हुआ ॥५-६॥ फिर बकरा हुआ, तदनन्तर भवनमें आग लगने से मर कर लम्बे-लम्बे सींगोंको धारण करनेवाला भैंसा हुआ। यह भैंसा पानी ढोनेके काम आता था ।।७।। यह यमुनदेवका जीव छह बार तो नाना दुःखोंको प्राप्त करनेवाला भैंसा हुआ और पाँच बार नीच कुलोंमें निर्धन मनुष्य हुआ ।।८।। सो ठीक ही है क्योंकि जो प्राणी मध्यम आचरण करते हैं वे आर्य मनुष्य हो कुछ-कुछ कर्मोंका क्षय करते हैं ।।६।। तदनन्तर वह साधुओं की सेवा में तत्पर रहने वाला कुलन्धर नामका ब्राह्मण हुआ। वह कुलन्धर रूपवान् तो था पर शीलको आराधनासे रहित था ॥१०॥ एक दिन उस नगरका राजा विजय प्राप्त करनेकी आशासे निःशक की तरह दूसरे देशको गया था और उसकी ललिता नामकी रानी महल में अकेली थी। एक दिन वह झरोखेपर दृष्टि डाल रही थी कि उसने संकेत करनेवाले उस दुश्चेष्ट ब्राह्मणको देखा ।।११-१२।। क्रीडा करते हुए उस फुलन्धर ब्राह्मणको देख कर रानी कामके बाणों से घायल हो गई जिससे उसने एक विश्वासपात्र सखी के द्वारा उस हृदयहारीको अत्यन्त एकान्त स्थानमें बुलवाया ।।१३।। महलमें जाकर वह १. प्रीतिं म० । मायाप्रवीणया तावद्देव्या क्रन्दिसमुन्नतम् । वन्दिकोऽयमिति त्रस्तो गृहीतश्च भटैरसौ ॥१५॥ अष्टाङ्गनिग्रहं कर्तुं नगरीतो बहिः कृतः । सेषितेनासकृद्द्दष्टः कल्याणाल्येन साधुना ॥१६॥ यदि प्रवजसीत्युक्त्या तेनासौ प्रतिपक्षवान् । राज्ञः क्रूरमनुष्येभ्यो मोचितः 'श्रमणोऽभवत् ॥ १७ ॥ सोऽतिकष्टं तपः कृत्वा महाभावनयान्वितः । अभूतु विमानेशः किन्नु धर्मस्य दुष्करम् ॥१८॥ मथुरायां महाचित्तश्चन्द्रभद्र इति प्रभुः । तस्य भार्या घरा नाम त्रयस्तस्याश्च सोदराः ॥१६॥ सूर्याब्धियमुनाशब्दैर्देवान्तैनमभिः स्मृता । श्रीसत्स्विन्द्रप्रभोग्राक मुखान्ताश्चापराः सुताः ॥२०॥ द्वितीया चन्द्रभद्रस्याद्वितीया कनकप्रभा । आगत्य विमानात् स तस्यां जातोऽचलाभिधः ॥२१॥ कलागुणसमृद्धोऽसौ सर्वलोकमनोहरः । बभौ देवकुमाराभः सस्क्रीडाकरणोद्यतः ॥२२॥ अयान्यः कश्चिदकाख्यः कृत्वा धर्मानुमोदनम् । श्रावस्त्या मङ्गिकागर्भे कम्पेनापाभिधोऽभवत् ॥२३॥ कबाटजीविना तेन कम्पेन । विनयान्वितः । अपो निर्धाटितो गेहाद् दुद्राव भयदुःखितः ॥२४॥ अथाचलकुमारोऽसौ नितान्तं दयितः पितुः । धराया भ्रातृभिस्तैश्च मुखान्तैरष्टभिः सुतैः ॥२५॥ ईष्यमाणो रहो हन्तु मात्रा ज्ञात्वा पलायितः । महता कण्टकेनौ ताडित स्तिलके वने ॥२६॥ रानी के साथ जिस समय एक आसनपर बैठा था उसी समय राजा भी कहींसे अकस्मात् आ गया और उसने उसकी वह चेष्टा देख ली ॥१४॥ यद्यपि मायाचारमें प्रवीण रानीने जोरसे रोदन करते हुए कहा कि यह वन्दी जन है तथापि राजाने उसका विश्वास नहीं किया और योद्धाओंने उस भयभीत ब्राह्मणको पकड़ लिया ॥१५॥ तदनन्तर आठों अङ्गोंका निग्रह करनेके लिए वह कुलन्धर विप्र नगरीके बाहर ले जाया गया वहाँ जिसकी इसने कई बार सेवा की थी ऐसे कल्याण नामक साधुने इसे देखा और देखकर कहा कि यदि तू दीक्षा ले ले तो तुझे छुड़ाता हूँ । कुलन्धरने दीक्षा लेना स्वीकृत कर लिया जिससे साधुने राजाके दुष्ट मनुष्योंसे उसे छुड़ाया और छुड़ाते ही वह श्रमण साधु हो गया ॥१६-१७॥ तदनन्तर बहुत बड़ी भावना के साथ अत्यन्त कष्टदायी तप तपकर वह सौधर्मस्वर्गके ऋतुविमानका स्वामी हुआ सो ठीक ही है क्योंकि धर्मके लिए क्या कठिन है ? ॥१८॥ अथानन्तर मथुग में चन्द्रभद्र नामका उदारचित्त राजा था, उसकी स्त्रीका नाम धरा था और घराके तीन भाई थे - सूर्यदेव, सागरदेव और यमुनादेव । इन भाइयोंके सिवाय उसके श्रीमुख, सन्मुख, सुमुख, इन्द्रमुख, प्रभामुख, उप्रमुख अर्कमुख और अपरमुख ये आठ पुत्र थे । ॥१६-२०।। उसी चन्द्रभद्र राजाकी द्वितीय होने पर भी जो अद्वितीय - अनुपम थी ऐसी कनकप्रभा नामकी द्वितीय पत्नी थी सो कुलंधर विप्रका जीव ऋतु-विमानसे च्युत हो उसके अचल नामका पुत्र हुआ ।।२१।। वह अचल कला और गुणोंसे समृद्ध था, सब लोगोंके मनको हरनेवाला था और समीचीन क्रीड़ा करनेमें उद्यत रहता था इसलिए देव कुमारके समान सुशोभित होता था ।।२२।। अथानन्तर कोई अङ्क नामका मनुष्य धर्मको अनुमोदना कर श्रावस्ती नामा नगरीमें कम्प नामक पुरुषकी अङ्गिका नामक स्त्रीसे अप नामका पुत्र हुआ ।।२३।। कम्प कपाट बनानेकी आजीविका करता था अर्थात् जातिका बढ़ई था और उसका पुत्र अत्यन्त अविनयी था इसलिए उसने उसे घर से निकाल दिया था। फलस्वरूप वह भयसे दुखी होता हुआ इधर-उधर भटकता रहा ।।२४।। अथानन्तर पूर्वोक्त अचलकुमार पिताका अत्यन्त प्यारा था इसलिए इसकी सौतेली माता धराके तीन भाई तथा मुखान्त नामको धारण करनेवाले आठों पुत्र एकान्त में मारनेके लिए उसके साथ ईर्ष्या करते रहते थे। अचलकी माता कनकप्रभाको उनकी इस ईर्ष्याका पता चल गया १. भ्रमणो म० । २. दृष्यमाणो म० । गृहीतदारुभारेण तेनापेनाथ वीक्षितम् । अतिकष्टं कणन् खेदादचलो निश्चलः स्थितः ॥ २७॥ दारुभारं परित्यज्य तेन तस्यासिकन्यया । आकृष्टः कण्टको दस्वा' कटकं चेति भाषितः ॥२८॥ यदि नामाचलं किञ्चिालोकविश्रुतम् । स्वया तस्य ततोऽभ्याशं गन्तव्यं संशयोजितम् ॥२६॥ अपो यथोचितं यातो राजपुत्रोऽपि दुःखवान् । कौशाम्बीबाह्यमुद्देशं प्राप्तः सत्त्वसमुन्नतः ॥३०॥ तत्रेन्द्रदत्तनामानं कोशावत्ससमुद्भवम् । ययौ कलकलाशब्दात् सेवमानं खरूलिकाम् ॥३१॥ विजित्य विशिखाचार्य लब्धपूजोऽथ भूभृता प्रवेश्य नगरीमिन्द्रदत्ताख्यां लम्भितः सुताम् ॥ ३२॥ क्रमेण चानुभावेन चारुणा पूर्वकर्मणा । उपाध्याय इति ख्यातो वीरोऽसौ पार्थिवोऽभवत् ॥ ३३॥ अङ्गायान् विषयाजित्वा प्रतापी मथुरां श्रितः । बाह्योद्देशे कृतावासः स्थितः कटकसङ्गतः ॥३४॥ चन्द्रभद्रनृपः पुत्रमारोऽयमिति भाषितैः । सामन्ताः सकलास्तस्य भिनास्येनार्थसङ्गतैः ॥३५॥ एकाकी चन्द्रभद्रश्च विपादं परमं भजन् । श्यालान् सम्प्रेषयडेवशब्दान्तान् सन्धिवान्छया ॥३६॥ दृष्ट्वा ते तं परिज्ञाय विलक्षास्त्रासमागताः । अदृष्टसेवकाः साकं धरायास्तनयैः कृताः ॥ ३७॥ अचलस्य समं मात्रा सञ्जातः परमोत्सवः । राज्यं च प्रणताशेषराजकं गुणपूजितम् ॥३८॥ इसलिए उसने उसे कहीं बाहर भगा दिया। एक दिन अचल तिलक नामक वनमें जा रहा था कि उसके पैर में एक बड़ा भारी काँटा लग गया। काँटा लग जानेके कारण दुःखसे अत्यन्त दुःखदायी शब्द करता हुआ वह उसी तिलक वनमें एक ओर खड़ा हो गया। उसी समय लकड़ियों का भार लिये हुए अप वहाँ से निकला और उसने अचलको देखा ॥२५-२७।। अपने लकड़ियाँका भार छोड़ छुरीसे उसका काँटा निकाला । इसके बदले अचलने उसे अपने हाथका कड़ा देकर कहा कि यदि तू कभी किसी लोक प्रसिद्ध अचलका नाम सुने तो तुझे संशय छोड़कर उसके पास जाना चाहिए ॥२८-२६॥ तदनन्तर अप यथायोग्य स्थान पर चला गया और राजपुत्र अचल भी दुःखी होता हुआ धैर्यसे युक्त हो कौशाम्बी नगरीके बाह्यप्रदेशमें पहुँचा ।।३०।। वहाँ कौशाम्बीके राजा कोशाबत्सका पुत्र इन्द्रदत्त, बाण चलाने के स्थान में बाण विद्याका अभ्यास कर रहा था सो उसका कलकला शब्द सुन अचल उसके पास चला गया ।।३१।। वहाँ इन्द्रदत्तके साथ जो उसका विशिखाचार्य अर्थात् शस्त्र विद्या सिखानेवाला गुरु था उसे अचलने पराजित किया था । तदनन्तर जब राजा कोशावत्सको इसका पता चला तब उसने अचलका बहुत सन्मान किया और सम्मानके साथ नगरी में प्रवेश कराकर उसे अपनी इन्द्रदत्ता नामको कन्या विवाह दी ।।३२।। तदनन्तर वह क्रम-क्रमसे अपने प्रभाव और पूर्वोपार्जित पुण्यकर्म से पहले तो उपाध्याय इस नाम से प्रसिद्ध था और उसके बाद राजा हो गया ।।३३॥ तत्पश्चात् वह प्रतापी अङ्ग आदि देशोंको जीत कर मथुरा आया और उसके बाह्य स्थानमें डेरे देकर सेनाके साथ ठहर गया ।।३४।। यह चन्द्रभद्र राजा 'पुत्रको मारनेवाला है' ऐसे यथार्थ शब्द कहकर उसने उसके समस्त सामन्तोंको अपनी ओर फोड़ लिया ।।३५।। जिससे चन्द्रभद्र अकेला रह गया। अन्तमें परम विपादको प्राप्त होते हुए उसने सन्धिकी इच्छा से अपने सूर्यदेव, अब्धिदेव और यमुनादेव नामक तीन साले भेजे ॥३६॥ सो वे उसे देख तथा पहिचान कर लज्जित हो भयको प्राप्त हुए और धरा रानीके आठों पुत्रों के साथ-साथ सेवकोंसे रहित हो गये अर्थात् भयसे भाग गये ।।३७ ।। अचलको माता के साथ मिलकर बड़ा उल्लास हुआ और जिसमें समस्त राजा नम्रीभूत थे तथा जो गुणोंसे पूजित था ऐसा राज्य उसे प्राप्त हुआ ॥३८॥ १. कण्टकं म० । २. अथो ख० । ३. कोशाम्बात्ससमुद्भवम् म० । कोशावसमयोज्झितम् क० ।
शत्रुग्नकुमारोऽसौ मथुरापुर्या सुरकहृदयोऽस्यन्तम् । न तथापि एति भेजे वैदेया विरहितो तथासीद् रामः ॥अट्ठाईस॥ स्वप्न इव भवति चारुसंयोगः प्राणिनां यदा तनुकालः । जनयति परमं तापं निदाघर विर श्मि जनितादधिकम् ॥ छब्बीस ॥ इत्यार्षे रविषेणाचार्य प्रोक्ते श्रीपद्मपुराणे मथुरोपसर्गाभिधानं नाम नवतितमं पर्व ।।साठ॥ सुन्दर थी, कामधेनुके समान समस्त मनोरथोंके प्रदान करनेमें चतुर थी और स्वर्ग जैसे भोगोपभोगोंसे सहित थी तथापि शत्रुघ्नकुमारका हृदय मथुरा में ही अत्यन्त अनुरक्त रहता था वह, जिस प्रकार सीताके बिना राम, धैर्यको प्राप्त नहीं होते थे उसी प्रकार मथुर के बिना धैर्यको प्राप्त नहीं होता था ॥सत्ताईस-अट्ठाईस॥ गौतम स्वामी कहते हैं कि हे श्रेणिक ! प्राणियोंको सुन्दर वस्तुओंका समागम जब स्वप्नके समान अल्प कालके लिए होता है तब वह ग्रीष्मऋतु सम्बन्धी सूर्य की किरणोंसे उत्पन्न सन्तापसे भी कहीं अधिक सन्तापको उत्पन्न करता है ॥छब्बीस।। इस प्रकार आर्ष नामसे प्रसिद्ध, रविषेणाचार्य द्वारा कथित पद्मपुराणमें मथुरापर उपसर्गका वर्णन करनेवाला नब्बेवाँ पर्व समाप्त हुआ ॥दस॥ अथ राजगृहस्वामी जगादाद्भुतकौतुकः । भगवन्केन कार्येण तामेवासावयाचत ॥एक॥ बहबो राजधान्योऽन्याः सन्ति स्वर्लोकसलिभाः । तत्र शत्रुघ्नवीरस्य का प्रीतिर्मंथुरां प्रति ॥दो॥ दिग्यज्ञानसमुद्रेण गणोडुशशिना ततः । गौतमेनोध्यत 'प्रीतियथा तत्कुरु चेतलि ॥तीन॥ बहवो हि भवास्तस्य तस्या मेवाभवस्ततः । तामेव प्रति सोदेकं स्नेहमेष न्यषेवत ॥चार॥ संसारार्णवसंसेवी जीवः कर्मस्वभावतः । जम्बूद्वीपभरते मथुरां समुपागतः ॥पाँच॥ करो यमुनदेवाख्यो धर्मैकान्तपराङ्मुखः । स प्रेत्य कोडवालेयवाय सत्वान्यसेवत ॥छः॥ भजत्वं च परिप्राप्तो मृतो भवनदाहतः । महिषो जलवाहोऽभूदायते गवले वहन् ॥ सात॥ षड्वारान्महियो भूत्वा दुःखप्रापणसङ्गतः । पञ्चकृत्वो मनुष्यत्वं दुःकुलेष्वधनोऽभजत् ॥आठ॥ मध्यकर्मसमाचाराः प्राप्यार्यत्वं मनुष्यताम् । प्राणिनः प्रतिपद्यन्ते किञ्चित्कर्मपरिक्षयम् ॥तीन॥ ततः कुलम्धराभिख्यः साधुसेवापरायणः । विप्रोडसावभवद्वपी शीलसेवाविवर्जितः ॥दस॥ अशति इव स्वामी पुरस्तस्या जयाशया । यातो देशान्तरं तस्य महिषी ललिताभिधा ॥ग्यारह॥ प्रासादस्था कदाचित्सा वातायनगतेक्षणा । निरैचत तकं विप्रं दुश्चेष्टं कृतकारणम् ॥बारह॥ सा तं क्रीडन्तमालोक्य मनोभवशराहता । आनाययद्द्वहोऽत्यन्तमाप्तया चित्तहारिणम् ॥तेरह॥ तस्या एकासने चासावुपविष्टो नृपश्च सः । अज्ञातागमनोऽपश्यत्सहसा तद्विचेष्टितम् ॥ चौदह ॥ अथानन्तर अद्भुत कौतुकको धारण करने वाले राजा श्रेणिकने गौतम स्वामी से पूछा कि हे भगवन् ! वह शत्रुघ्न किस कार्यसे उसी मथुराकी याचना करता था ॥एक॥ स्वर्गलोकके समान अन्य बहुत सी राजधानियाँ हैं उनमें से केवल मथुरा के प्रति ही वीर शत्रुघ्नकी प्रीति क्यों है ?॥दो॥ तब दिव्य ज्ञानके सागर एवं गणरूपी नक्षत्रोंके बीच चन्द्रमा के समान गौतम गणधरने कहा कि जिस कारण शत्रुघ्नकी मथुरा में प्रीति थी उसे मैं कहता हूँ तू चित्तमें धारण कर ।।तीन।। यतश्च उसके बहुतसे भव उसी मथुरा में हुए थे इसलिए उसीके प्रति वह अत्यधिक स्नेह धारण करता था ।।चार।। संसार रूपी सागरका सेवन करने वाला एक जीव कर्मस्वभावके कारण जम्बूद्वीप सम्बन्धी भरतक्षेत्र की मथुरा नगरीमें यमुनदेव नामसे उत्पन्न हुआ। वह स्वभावका कर था तथा धर्मसे अत्यन्त विमुख रहता था। मरनेके बाद वह क्रमसे सूकर, गधा और कौआ हुआ ॥पाँच-छः॥ फिर बकरा हुआ, तदनन्तर भवनमें आग लगने से मर कर लम्बे-लम्बे सींगोंको धारण करनेवाला भैंसा हुआ। यह भैंसा पानी ढोनेके काम आता था ।।सात।। यह यमुनदेवका जीव छह बार तो नाना दुःखोंको प्राप्त करनेवाला भैंसा हुआ और पाँच बार नीच कुलोंमें निर्धन मनुष्य हुआ ।।आठ।। सो ठीक ही है क्योंकि जो प्राणी मध्यम आचरण करते हैं वे आर्य मनुष्य हो कुछ-कुछ कर्मोंका क्षय करते हैं ।।छः।। तदनन्तर वह साधुओं की सेवा में तत्पर रहने वाला कुलन्धर नामका ब्राह्मण हुआ। वह कुलन्धर रूपवान् तो था पर शीलको आराधनासे रहित था ॥दस॥ एक दिन उस नगरका राजा विजय प्राप्त करनेकी आशासे निःशक की तरह दूसरे देशको गया था और उसकी ललिता नामकी रानी महल में अकेली थी। एक दिन वह झरोखेपर दृष्टि डाल रही थी कि उसने संकेत करनेवाले उस दुश्चेष्ट ब्राह्मणको देखा ।।ग्यारह-बारह।। क्रीडा करते हुए उस फुलन्धर ब्राह्मणको देख कर रानी कामके बाणों से घायल हो गई जिससे उसने एक विश्वासपात्र सखी के द्वारा उस हृदयहारीको अत्यन्त एकान्त स्थानमें बुलवाया ।।तेरह।। महलमें जाकर वह एक. प्रीतिं मशून्य । मायाप्रवीणया तावद्देव्या क्रन्दिसमुन्नतम् । वन्दिकोऽयमिति त्रस्तो गृहीतश्च भटैरसौ ॥पंद्रह॥ अष्टाङ्गनिग्रहं कर्तुं नगरीतो बहिः कृतः । सेषितेनासकृद्द्दष्टः कल्याणाल्येन साधुना ॥सोलह॥ यदि प्रवजसीत्युक्त्या तेनासौ प्रतिपक्षवान् । राज्ञः क्रूरमनुष्येभ्यो मोचितः 'श्रमणोऽभवत् ॥ सत्रह ॥ सोऽतिकष्टं तपः कृत्वा महाभावनयान्वितः । अभूतु विमानेशः किन्नु धर्मस्य दुष्करम् ॥अट्ठारह॥ मथुरायां महाचित्तश्चन्द्रभद्र इति प्रभुः । तस्य भार्या घरा नाम त्रयस्तस्याश्च सोदराः ॥सोलह॥ सूर्याब्धियमुनाशब्दैर्देवान्तैनमभिः स्मृता । श्रीसत्स्विन्द्रप्रभोग्राक मुखान्ताश्चापराः सुताः ॥बीस॥ द्वितीया चन्द्रभद्रस्याद्वितीया कनकप्रभा । आगत्य विमानात् स तस्यां जातोऽचलाभिधः ॥इक्कीस॥ कलागुणसमृद्धोऽसौ सर्वलोकमनोहरः । बभौ देवकुमाराभः सस्क्रीडाकरणोद्यतः ॥बाईस॥ अयान्यः कश्चिदकाख्यः कृत्वा धर्मानुमोदनम् । श्रावस्त्या मङ्गिकागर्भे कम्पेनापाभिधोऽभवत् ॥तेईस॥ कबाटजीविना तेन कम्पेन । विनयान्वितः । अपो निर्धाटितो गेहाद् दुद्राव भयदुःखितः ॥चौबीस॥ अथाचलकुमारोऽसौ नितान्तं दयितः पितुः । धराया भ्रातृभिस्तैश्च मुखान्तैरष्टभिः सुतैः ॥पच्चीस॥ ईष्यमाणो रहो हन्तु मात्रा ज्ञात्वा पलायितः । महता कण्टकेनौ ताडित स्तिलके वने ॥छब्बीस॥ रानी के साथ जिस समय एक आसनपर बैठा था उसी समय राजा भी कहींसे अकस्मात् आ गया और उसने उसकी वह चेष्टा देख ली ॥चौदह॥ यद्यपि मायाचारमें प्रवीण रानीने जोरसे रोदन करते हुए कहा कि यह वन्दी जन है तथापि राजाने उसका विश्वास नहीं किया और योद्धाओंने उस भयभीत ब्राह्मणको पकड़ लिया ॥पंद्रह॥ तदनन्तर आठों अङ्गोंका निग्रह करनेके लिए वह कुलन्धर विप्र नगरीके बाहर ले जाया गया वहाँ जिसकी इसने कई बार सेवा की थी ऐसे कल्याण नामक साधुने इसे देखा और देखकर कहा कि यदि तू दीक्षा ले ले तो तुझे छुड़ाता हूँ । कुलन्धरने दीक्षा लेना स्वीकृत कर लिया जिससे साधुने राजाके दुष्ट मनुष्योंसे उसे छुड़ाया और छुड़ाते ही वह श्रमण साधु हो गया ॥सोलह-सत्रह॥ तदनन्तर बहुत बड़ी भावना के साथ अत्यन्त कष्टदायी तप तपकर वह सौधर्मस्वर्गके ऋतुविमानका स्वामी हुआ सो ठीक ही है क्योंकि धर्मके लिए क्या कठिन है ? ॥अट्ठारह॥ अथानन्तर मथुग में चन्द्रभद्र नामका उदारचित्त राजा था, उसकी स्त्रीका नाम धरा था और घराके तीन भाई थे - सूर्यदेव, सागरदेव और यमुनादेव । इन भाइयोंके सिवाय उसके श्रीमुख, सन्मुख, सुमुख, इन्द्रमुख, प्रभामुख, उप्रमुख अर्कमुख और अपरमुख ये आठ पुत्र थे । ॥सोलह-बीस।। उसी चन्द्रभद्र राजाकी द्वितीय होने पर भी जो अद्वितीय - अनुपम थी ऐसी कनकप्रभा नामकी द्वितीय पत्नी थी सो कुलंधर विप्रका जीव ऋतु-विमानसे च्युत हो उसके अचल नामका पुत्र हुआ ।।इक्कीस।। वह अचल कला और गुणोंसे समृद्ध था, सब लोगोंके मनको हरनेवाला था और समीचीन क्रीड़ा करनेमें उद्यत रहता था इसलिए देव कुमारके समान सुशोभित होता था ।।बाईस।। अथानन्तर कोई अङ्क नामका मनुष्य धर्मको अनुमोदना कर श्रावस्ती नामा नगरीमें कम्प नामक पुरुषकी अङ्गिका नामक स्त्रीसे अप नामका पुत्र हुआ ।।तेईस।। कम्प कपाट बनानेकी आजीविका करता था अर्थात् जातिका बढ़ई था और उसका पुत्र अत्यन्त अविनयी था इसलिए उसने उसे घर से निकाल दिया था। फलस्वरूप वह भयसे दुखी होता हुआ इधर-उधर भटकता रहा ।।चौबीस।। अथानन्तर पूर्वोक्त अचलकुमार पिताका अत्यन्त प्यारा था इसलिए इसकी सौतेली माता धराके तीन भाई तथा मुखान्त नामको धारण करनेवाले आठों पुत्र एकान्त में मारनेके लिए उसके साथ ईर्ष्या करते रहते थे। अचलकी माता कनकप्रभाको उनकी इस ईर्ष्याका पता चल गया एक. भ्रमणो मशून्य । दो. दृष्यमाणो मशून्य । गृहीतदारुभारेण तेनापेनाथ वीक्षितम् । अतिकष्टं कणन् खेदादचलो निश्चलः स्थितः ॥ सत्ताईस॥ दारुभारं परित्यज्य तेन तस्यासिकन्यया । आकृष्टः कण्टको दस्वा' कटकं चेति भाषितः ॥अट्ठाईस॥ यदि नामाचलं किञ्चिालोकविश्रुतम् । स्वया तस्य ततोऽभ्याशं गन्तव्यं संशयोजितम् ॥छब्बीस॥ अपो यथोचितं यातो राजपुत्रोऽपि दुःखवान् । कौशाम्बीबाह्यमुद्देशं प्राप्तः सत्त्वसमुन्नतः ॥तीस॥ तत्रेन्द्रदत्तनामानं कोशावत्ससमुद्भवम् । ययौ कलकलाशब्दात् सेवमानं खरूलिकाम् ॥इकतीस॥ विजित्य विशिखाचार्य लब्धपूजोऽथ भूभृता प्रवेश्य नगरीमिन्द्रदत्ताख्यां लम्भितः सुताम् ॥ बत्तीस॥ क्रमेण चानुभावेन चारुणा पूर्वकर्मणा । उपाध्याय इति ख्यातो वीरोऽसौ पार्थिवोऽभवत् ॥ तैंतीस॥ अङ्गायान् विषयाजित्वा प्रतापी मथुरां श्रितः । बाह्योद्देशे कृतावासः स्थितः कटकसङ्गतः ॥चौंतीस॥ चन्द्रभद्रनृपः पुत्रमारोऽयमिति भाषितैः । सामन्ताः सकलास्तस्य भिनास्येनार्थसङ्गतैः ॥पैंतीस॥ एकाकी चन्द्रभद्रश्च विपादं परमं भजन् । श्यालान् सम्प्रेषयडेवशब्दान्तान् सन्धिवान्छया ॥छत्तीस॥ दृष्ट्वा ते तं परिज्ञाय विलक्षास्त्रासमागताः । अदृष्टसेवकाः साकं धरायास्तनयैः कृताः ॥ सैंतीस॥ अचलस्य समं मात्रा सञ्जातः परमोत्सवः । राज्यं च प्रणताशेषराजकं गुणपूजितम् ॥अड़तीस॥ इसलिए उसने उसे कहीं बाहर भगा दिया। एक दिन अचल तिलक नामक वनमें जा रहा था कि उसके पैर में एक बड़ा भारी काँटा लग गया। काँटा लग जानेके कारण दुःखसे अत्यन्त दुःखदायी शब्द करता हुआ वह उसी तिलक वनमें एक ओर खड़ा हो गया। उसी समय लकड़ियों का भार लिये हुए अप वहाँ से निकला और उसने अचलको देखा ॥पच्चीस-सत्ताईस।। अपने लकड़ियाँका भार छोड़ छुरीसे उसका काँटा निकाला । इसके बदले अचलने उसे अपने हाथका कड़ा देकर कहा कि यदि तू कभी किसी लोक प्रसिद्ध अचलका नाम सुने तो तुझे संशय छोड़कर उसके पास जाना चाहिए ॥अट्ठाईस-छब्बीस॥ तदनन्तर अप यथायोग्य स्थान पर चला गया और राजपुत्र अचल भी दुःखी होता हुआ धैर्यसे युक्त हो कौशाम्बी नगरीके बाह्यप्रदेशमें पहुँचा ।।तीस।। वहाँ कौशाम्बीके राजा कोशाबत्सका पुत्र इन्द्रदत्त, बाण चलाने के स्थान में बाण विद्याका अभ्यास कर रहा था सो उसका कलकला शब्द सुन अचल उसके पास चला गया ।।इकतीस।। वहाँ इन्द्रदत्तके साथ जो उसका विशिखाचार्य अर्थात् शस्त्र विद्या सिखानेवाला गुरु था उसे अचलने पराजित किया था । तदनन्तर जब राजा कोशावत्सको इसका पता चला तब उसने अचलका बहुत सन्मान किया और सम्मानके साथ नगरी में प्रवेश कराकर उसे अपनी इन्द्रदत्ता नामको कन्या विवाह दी ।।बत्तीस।। तदनन्तर वह क्रम-क्रमसे अपने प्रभाव और पूर्वोपार्जित पुण्यकर्म से पहले तो उपाध्याय इस नाम से प्रसिद्ध था और उसके बाद राजा हो गया ।।तैंतीस॥ तत्पश्चात् वह प्रतापी अङ्ग आदि देशोंको जीत कर मथुरा आया और उसके बाह्य स्थानमें डेरे देकर सेनाके साथ ठहर गया ।।चौंतीस।। यह चन्द्रभद्र राजा 'पुत्रको मारनेवाला है' ऐसे यथार्थ शब्द कहकर उसने उसके समस्त सामन्तोंको अपनी ओर फोड़ लिया ।।पैंतीस।। जिससे चन्द्रभद्र अकेला रह गया। अन्तमें परम विपादको प्राप्त होते हुए उसने सन्धिकी इच्छा से अपने सूर्यदेव, अब्धिदेव और यमुनादेव नामक तीन साले भेजे ॥छत्तीस॥ सो वे उसे देख तथा पहिचान कर लज्जित हो भयको प्राप्त हुए और धरा रानीके आठों पुत्रों के साथ-साथ सेवकोंसे रहित हो गये अर्थात् भयसे भाग गये ।।सैंतीस ।। अचलको माता के साथ मिलकर बड़ा उल्लास हुआ और जिसमें समस्त राजा नम्रीभूत थे तथा जो गुणोंसे पूजित था ऐसा राज्य उसे प्राप्त हुआ ॥अड़तीस॥ एक. कण्टकं मशून्य । दो. अथो खशून्य । तीन. कोशाम्बात्ससमुद्भवम् मशून्य । कोशावसमयोज्झितम् कशून्य ।
जानें श्रीलंका में कब कहा और कैसे देख सकते हैं Pak vs SL का मैच। नई दिल्ली, जेएनएन। ICC World Cup 2019 Pak vs SL Live Streaming: पाकिस्तान और श्रीलंका, दोनों ही ऐसी टीमें हैं जिन्हें पहले मैच में बुरी हार झेलनी पड़ी लेकिन दूसरे मुकाबले में शानदार वापसी कर टूर्नामेंट की पहली जीत दर्ज करने में कामयाब रहीं। आत्मविश्वास से भरी पाकिस्तान और श्रीलंका अब टूर्नामेंट के 11वें मुकाबले में आमने सामने होने जा रही हैं। 7 जून यानी शुक्रवार को ब्रिस्टल के काउंटी ग्राउंड स्टेडियम में मैच खेला जाएगा। हालांकि खिताब की मजबूत दावेदार इंग्लैंड को हराकर पाकिस्तान का मनोबल बढ़ा हुआ है और श्रीलंका पर उसका पलड़ा भारी रहेगा। पाकिस्तान का इंग्लैंड के खिलाफ एक ऑलराउंड प्रदर्शन देखने को मिला। बल्लेबाजों से लेकर गेंदबाजों तक टीम की जीत में सभी खिलाड़ियों का योगदान रहा। वहीं, श्रीलंका अफगानिस्तान के खिलाफ संघर्ष करती दिखी। भले मैच श्रीलंका ने जीता हो लेकिन अफगानी गेंदबाजों के आगे टीम के बल्लेबाज बिल्कुल नाकाम रहे। जानें श्रीलंका में कब, कहा और कैसे देख सकते हैं यह मैचः कब खेला जाएगा पाकिस्तान vs श्रीलंका का मैच? वर्ल्ड कप 2019 का 11वां मैच पाकिस्तान और श्रीलंका के बीच 7 जून (शुक्रवार) को खेला जाएगा। कहां खेला जाएगा पाकिस्तान vs श्रीलंका विश्व कप 2019 का यह मैच? 11वां मैच ब्रिस्टल के काउंटी ग्राउंड स्टेडियम पर खेला जाएगा। श्रीलंका के समय के मुताबिक टीवी पर कितने बजे होगा पाकिस्तान vs श्रीलंका विश्व कप 2019 के मैच का लाइव प्रसारण ? इस मैच का लाइव प्रसारण भारत की तरह श्रीलंका के समय के मुताबिक दोपहर 3 बजे शुरू होगा। कहां देख सकते हैं पाकिस्तान vs श्रीलंका विश्व कप 2019 का मैच? इस मैच का सीधा प्रसारण आप स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क के चैनल्स पर देख सकते हैं। हिंदी कमेंट्री के लिए मैच स्टार स्पोर्ट्स हिंदी पर देखा जा सकता है। कहां देखें पाकिस्तान vs श्रीलंका विश्व कप 2019 के मैच की ऑनलाइन लाइव स्ट्रीमिंग ? मैच की ऑनलाइन लाइव स्ट्रीमिंग आप Hotstar पर देख सकते हैं। इसके अलावा आप लाइव अपडेट और मैच से जुड़ी रोचक खबरें dainikjagran. com पर पढ़ सकते हैं। शुरू हो गया है क्रिकेट क्विज कॉन्टेस्ट जागरण ऐप पर। रोज जीत सकते हैं स्मार्ट फोन। आज से ही हिस्सा लें। डाउनलोड करें जागरण ऐप। Andrioid फोन पर डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें। Iphone पर डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें।
जानें श्रीलंका में कब कहा और कैसे देख सकते हैं Pak vs SL का मैच। नई दिल्ली, जेएनएन। ICC World Cup दो हज़ार उन्नीस Pak vs SL Live Streaming: पाकिस्तान और श्रीलंका, दोनों ही ऐसी टीमें हैं जिन्हें पहले मैच में बुरी हार झेलनी पड़ी लेकिन दूसरे मुकाबले में शानदार वापसी कर टूर्नामेंट की पहली जीत दर्ज करने में कामयाब रहीं। आत्मविश्वास से भरी पाकिस्तान और श्रीलंका अब टूर्नामेंट के ग्यारहवें मुकाबले में आमने सामने होने जा रही हैं। सात जून यानी शुक्रवार को ब्रिस्टल के काउंटी ग्राउंड स्टेडियम में मैच खेला जाएगा। हालांकि खिताब की मजबूत दावेदार इंग्लैंड को हराकर पाकिस्तान का मनोबल बढ़ा हुआ है और श्रीलंका पर उसका पलड़ा भारी रहेगा। पाकिस्तान का इंग्लैंड के खिलाफ एक ऑलराउंड प्रदर्शन देखने को मिला। बल्लेबाजों से लेकर गेंदबाजों तक टीम की जीत में सभी खिलाड़ियों का योगदान रहा। वहीं, श्रीलंका अफगानिस्तान के खिलाफ संघर्ष करती दिखी। भले मैच श्रीलंका ने जीता हो लेकिन अफगानी गेंदबाजों के आगे टीम के बल्लेबाज बिल्कुल नाकाम रहे। जानें श्रीलंका में कब, कहा और कैसे देख सकते हैं यह मैचः कब खेला जाएगा पाकिस्तान vs श्रीलंका का मैच? वर्ल्ड कप दो हज़ार उन्नीस का ग्यारहवां मैच पाकिस्तान और श्रीलंका के बीच सात जून को खेला जाएगा। कहां खेला जाएगा पाकिस्तान vs श्रीलंका विश्व कप दो हज़ार उन्नीस का यह मैच? ग्यारहवां मैच ब्रिस्टल के काउंटी ग्राउंड स्टेडियम पर खेला जाएगा। श्रीलंका के समय के मुताबिक टीवी पर कितने बजे होगा पाकिस्तान vs श्रीलंका विश्व कप दो हज़ार उन्नीस के मैच का लाइव प्रसारण ? इस मैच का लाइव प्रसारण भारत की तरह श्रीलंका के समय के मुताबिक दोपहर तीन बजे शुरू होगा। कहां देख सकते हैं पाकिस्तान vs श्रीलंका विश्व कप दो हज़ार उन्नीस का मैच? इस मैच का सीधा प्रसारण आप स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क के चैनल्स पर देख सकते हैं। हिंदी कमेंट्री के लिए मैच स्टार स्पोर्ट्स हिंदी पर देखा जा सकता है। कहां देखें पाकिस्तान vs श्रीलंका विश्व कप दो हज़ार उन्नीस के मैच की ऑनलाइन लाइव स्ट्रीमिंग ? मैच की ऑनलाइन लाइव स्ट्रीमिंग आप Hotstar पर देख सकते हैं। इसके अलावा आप लाइव अपडेट और मैच से जुड़ी रोचक खबरें dainikjagran. com पर पढ़ सकते हैं। शुरू हो गया है क्रिकेट क्विज कॉन्टेस्ट जागरण ऐप पर। रोज जीत सकते हैं स्मार्ट फोन। आज से ही हिस्सा लें। डाउनलोड करें जागरण ऐप। Andrioid फोन पर डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें। Iphone पर डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें।
पॉपुलर टीवी शो 'बालिका वधू'में छोटी आनंदी के रूप में मशहूर हुईं एक्ट्रेस अविका गौर ने छोटे पर्दे पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है। एक्ट्रेस इन दिनों पर्दे से भले ही दूर हैं लेकिन फिर भी वो अपनी दमदार एक्टिंग से लाइमलाइट बटोर रही हैं। उन्होंने हाल ही में अपनी कुछ सिजलिंग तस्वीरें इंस्टा पर पोस्ट की है। हालिया पोस्ट में अविका फ्रॉक स्टाइल ड्रेस में बेहद खूबसूरत लग रही हैं। सटल मेकअप और वेवी हेयर के साथ उन्होंने इस लुक को कंप्लीट किया है। वर्कफ्रंट पर नज़र डालें तो जुलाई 2022 में रिलीज हुई नागा चैतन्य स्टारर फिल्म 'थैंक यू' में अविका ने लीड रोल प्ले किया था।
पॉपुलर टीवी शो 'बालिका वधू'में छोटी आनंदी के रूप में मशहूर हुईं एक्ट्रेस अविका गौर ने छोटे पर्दे पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है। एक्ट्रेस इन दिनों पर्दे से भले ही दूर हैं लेकिन फिर भी वो अपनी दमदार एक्टिंग से लाइमलाइट बटोर रही हैं। उन्होंने हाल ही में अपनी कुछ सिजलिंग तस्वीरें इंस्टा पर पोस्ट की है। हालिया पोस्ट में अविका फ्रॉक स्टाइल ड्रेस में बेहद खूबसूरत लग रही हैं। सटल मेकअप और वेवी हेयर के साथ उन्होंने इस लुक को कंप्लीट किया है। वर्कफ्रंट पर नज़र डालें तो जुलाई दो हज़ार बाईस में रिलीज हुई नागा चैतन्य स्टारर फिल्म 'थैंक यू' में अविका ने लीड रोल प्ले किया था।
डॉ. निशिकांत दुबे (गोड्डा): माननीय सभापति जी, हम लोक सभा अध्यक्ष जी के आभारी हैं कि उन्होंने इतने महत्वपूर्ण विषय पर आधे घंटे की चर्चा की अनुमति दी है। माननीय प्रधान मंत्री जी ने रोटी, कपड़ा और मकान, जो भारत की बेसिक समस्याएं थीं, उन्हें दूर करने का प्रयास किया । माननीय मंत्री जी हमारे बहुत पुराने मित्र हैं, हम दोनों 30-32 सालों से पारिवारिक हैं। मंत्री जी लगातार इस दिशा में काम कर रहे हैं। मैं ये बातें इसलिए कह रहा हूं क्योंकि जब मैं सांसद बनकर वर्ष 2009 में आया तब इसके लिए बजट 35 हजार करोड़ रुपये था । बाद में 45 हजार करोड़ रुपये हुआ और उसके बाद 65 हजार करोड़ रुपये हुआ । लेकिन जब माननीय मोदी जी प्रधान मंत्री जी बने, तब उन्होंने इस बजट को एक लाख पच्चीस हजार करोड़ रुपये किया। इसे नोशनल नहीं किया, इन्होंने सचमुच किसी को लखपति बनाने के लिए मकान कैसे बनाया जाता है, वह किया । महोदय, प्रधान मंत्री आवास योजना के सबसे जरूरतमंद लोग ऐसे हैं, जिनके पास लैंड नहीं है। इसमें लैंड एक्वायर करने के लिए राज्य सरकार के साथ ज्यादा सुविधा नहीं दी गई है। जो बेसिक उद्देश्य है कि हमें गरीबों को घर देना है, उसके लिए मेरा मंत्री जी से आग्रह है कि इस योजना में राज्य सरकार के साथ ऐसी स्थिति बनाइए जिसमें राज्य सरकार या तो लैंड एक्वायर करके दे या आप उस लैंड को एक्वायर करने के लिए पैसा दें। मेरे मित्र उदासि जी के क्षेत्र के लिए डेढ़ लाख करोड़ रुपये मिले हैं और पूरे कर्नाटक को 18 लाख करोड़ रुपये मिले हैं। जीआईएस जिओ टेगिंग के तीन प्रोसेस हैं। उसका प्रोसेस है कि पहले पंचायत से होता है, फिर डिस्ट्रिक्ट से होता है, फिर डिस्ट्रिक्ट से यहां आता है। इस कारण यह प्रोसेस इतना लम्बा हो जाता है कि उसका परपस खत्म हो जाता है । यह बहुत मुश्किल तरीका है। मेरा मंत्री जी से आग्रह है कि इसके बारे में जरूर सोचना चाहिए। हम जिस जिले से आते हैं वह एस्प्रेशनल डिस्ट्रिक्ट है । आप भी मानते हैं कि 114-115 जिले ऐसे हैं । हमें एस्प्रेशनल डिस्ट्रिक्ट्स के लिए अलग से व्यवस्था करनी चाहिए। हम जिस इलाके से आते हैं, मंत्री जी संयोग से वहां से वाकिफ हैं। प्रत्येक साल इस इलाके में आग लग जाती है। यदि वह बीपीएल नहीं है या इस योजना के लिए पात्र नहीं है, तो आग लगने के बाद उसका पूरा घर खत्म हो गया । आपको आग लगने वाले घर के लिए भी अलग से व्यवस्था करनी चाहिए । इसी तरह से बारिश या बाढ़ की स्थिति भी है। उनके लिए भी आपको व्यवस्था करनी चाहिए। कांग्रेस पार्टी देती थी, वह घर नहीं बन पाया या कागज पर ही बना हुआ है। उन जिलों में जब हम दिशा कमेटी की मीटिंग लेते हैं तो पता चलता है कि उन्हें घर कभी नहीं मिला। क्या ऐसे पुराने केसेज को पूरा करने के लिए आप नया फंड दे रहे हैं? माननीय सभापति : लैंड की प्रॉब्लम है। लैंडलेस, होमलेस बहुत बड़ा मामला है। केरल में एक स्कीम है, उसमें लैंड को परचेज करना, अलाट करना है। HON. CHAIRPERSON : Now, Shri Gaurav Gogoi. Not recorded SHRI S.C. UDASI (HAVERI): One minute, Sir. Sir, as you said and also as Shri Nishikant Dueby explained, there are two types of persons.. One is a homeless person where he does not have land; and the other is where one is having land. लैंडलेस के लिए जैसा दुबे जी ने बताया for landless persons, as he said, you should give directions to the State Governments. कई जगहों पर लोकल पंचायतों में गवर्नमेंट लैंड नहीं होती है और he has to acquire it from private party. Now, the land cost has also gone up. So, to acquire land, if the Government land is there, the District Administration will acquire it through the Government. They will allot sites to the site-less. But when there is no Government land available, the State Government has to acquire it from a private party. उसके लिए प्रावधान और कास्ट शेयरिंग यदि भारत सरकार करती है, तो बेहतर होगा । श्री भर्तृहरि महताब : फारेस्ट लैंड ट्रांसफर करने में बहुत दिक्कत होती है। श्री गौरव गोगोई (कलियाबोर): धन्यवाद सभापति महोदय, माननीय मंत्री महोदय बिहार से आते हैं, इसलिए बिहार में प्रतिवर्ष बाढ़ और कटाव की जो समस्या होती है उस समस्या से वह वाकई बहुत अच्छी तरह से वाकिफ होंगे। वही समस्या देश के विभिन्न राज्यों में है और वही समस्या असम में भी है । वे लोग, जो बाढ़ और कटाव से ज्यादातर प्रभावित होते हैं, क्या उनको विशेष रूप से सहायता दी जा सकती है? क्या उनको प्राथमिकता दी जा सकती है? आप भी यह महसूस करते होंगे कि जो बिहार और असम के कटाव प्रभावित क्षेत्र हैं, वहां के लोगों की किस प्रकार से मदद की जाए । महोदय, हमारे यहां असम में जनजाति के जो लोग हैं, वे अपने घर को पिलर्स पर बनाते हैं, ताकि बाढ़ के समय यदि पानी भी आए तो उनको अपना घर न छोड़ना पड़े, क्योंकि उनके घर थोड़े ऊंचाई पर होते हैं, लेकिन ऐसे घर बहुत कमजोर होते हैं। ये क्लाइमेट रेजिलिएंट नहीं होते हैं। बाढ़ में इस तरह के घरों को बहुत नुकसान हो जाता है । जो दूसरे डिजाइन्स के घर हैं, जो फ्लड का सामना करने के लिए तैयार हैं, क्या उनके डिजाइन्स को भी हम प्रधान मंत्री आवास योजना में रख सकते हैं? इस मुहिम का उद्देश्य हाउसिंग फॉर ऑल है । जब हम बाढ़ और कटाव से प्रभावित लोगों को घर नहीं दे सकते, तो फिर इस मुहिम का सपना कि सबको घर मिले, वह कैसे सच होगा? महोदय, आज हो यह रहा है कि ये लोग जो बाढ़, कटाव के कारण बिखर जाते हैं, वे कहीं और जाकर अपना घर बनाते हैं। उनके पास न कागज होता है और न ही उनके पास कोई ठोस सबूत होता है। अंततः एक समय के बाद सरकार का बुलडोजर आ ही जाता है। जब सरकारी बुलडोजर आता है तो फिर इनको दोबारा रिफ्यूजी की तरह टिन की छत के नीचे रहना पड़ता है। आखिर हम कौन सी मुहिम की तरफ जा रहे हैं? अगर हमने वास्तव में हाउसिंग फॉर ऑल का सपना देखा है तो फिर अगर कोई तकनीकी समस्या है, चाहे वह भूमि अधिग्रहण को लेकर हो, डिजास्टर को लेकर हो, उसका हम ब्यूरोक्रेटिक तरीके से ऐसा हल क्यों नहीं निकालते हैं कि यह हमारा हर साल का टार्गेट है और इस टार्गेट को हमें मीट करना है? ग्राउंड लेवेल पर जो प्रॉब्लम्स हैं, जिनको आप और हम सब देखते हैं, उनका हम कैसे समाधान कर सकते हैं? कटाव और बाढ़ के कारण बेघर होकर जो लोग एनक्रोचमेंट में रहते हैं, तो सबसे पहले बुरी नजर उन पर पड़ती है। असम में सबसे पहले उनको ही बुरी नजर से देखा जाता है। अगर ये समाज के किसी विशेष वर्ग से हैं, तो उनके घरों पर सबसे पहले बुलडोजर चलाया जाता है । इस वजह से यह एक सामाजिक समस्या बन गयी है। समाज में एक तरह से तनाव भी पैदा होता है, जब समाज का विशेष वर्ग, चाहे वह जनजाति का हो या माइनॉरिटी का हो, उनके घरों पर सबसे पहले बुलडोजर चलता है। महोदय, बाढ़, कटाव और डिजास्टर को लेकर मेरे क्षेत्र के अलावा बहुत से क्षेत्रों, जैसे चेन्नई में से आप देखें तो अनसीजनल रेन और हिल स्टोन्स के कारण वहां तथा मेघालय, असम आदि में बहुत-से घर आज टूट चुके हैं। अतः नैचुरल डिजास्टर से अफेक्टेड घरों को लेकर क्या प्रधान मंत्री आवास
डॉ. निशिकांत दुबे : माननीय सभापति जी, हम लोक सभा अध्यक्ष जी के आभारी हैं कि उन्होंने इतने महत्वपूर्ण विषय पर आधे घंटे की चर्चा की अनुमति दी है। माननीय प्रधान मंत्री जी ने रोटी, कपड़ा और मकान, जो भारत की बेसिक समस्याएं थीं, उन्हें दूर करने का प्रयास किया । माननीय मंत्री जी हमारे बहुत पुराने मित्र हैं, हम दोनों तीस-बत्तीस सालों से पारिवारिक हैं। मंत्री जी लगातार इस दिशा में काम कर रहे हैं। मैं ये बातें इसलिए कह रहा हूं क्योंकि जब मैं सांसद बनकर वर्ष दो हज़ार नौ में आया तब इसके लिए बजट पैंतीस हजार करोड़ रुपये था । बाद में पैंतालीस हजार करोड़ रुपये हुआ और उसके बाद पैंसठ हजार करोड़ रुपये हुआ । लेकिन जब माननीय मोदी जी प्रधान मंत्री जी बने, तब उन्होंने इस बजट को एक लाख पच्चीस हजार करोड़ रुपये किया। इसे नोशनल नहीं किया, इन्होंने सचमुच किसी को लखपति बनाने के लिए मकान कैसे बनाया जाता है, वह किया । महोदय, प्रधान मंत्री आवास योजना के सबसे जरूरतमंद लोग ऐसे हैं, जिनके पास लैंड नहीं है। इसमें लैंड एक्वायर करने के लिए राज्य सरकार के साथ ज्यादा सुविधा नहीं दी गई है। जो बेसिक उद्देश्य है कि हमें गरीबों को घर देना है, उसके लिए मेरा मंत्री जी से आग्रह है कि इस योजना में राज्य सरकार के साथ ऐसी स्थिति बनाइए जिसमें राज्य सरकार या तो लैंड एक्वायर करके दे या आप उस लैंड को एक्वायर करने के लिए पैसा दें। मेरे मित्र उदासि जी के क्षेत्र के लिए डेढ़ लाख करोड़ रुपये मिले हैं और पूरे कर्नाटक को अट्ठारह लाख करोड़ रुपये मिले हैं। जीआईएस जिओ टेगिंग के तीन प्रोसेस हैं। उसका प्रोसेस है कि पहले पंचायत से होता है, फिर डिस्ट्रिक्ट से होता है, फिर डिस्ट्रिक्ट से यहां आता है। इस कारण यह प्रोसेस इतना लम्बा हो जाता है कि उसका परपस खत्म हो जाता है । यह बहुत मुश्किल तरीका है। मेरा मंत्री जी से आग्रह है कि इसके बारे में जरूर सोचना चाहिए। हम जिस जिले से आते हैं वह एस्प्रेशनल डिस्ट्रिक्ट है । आप भी मानते हैं कि एक सौ चौदह-एक सौ पंद्रह जिले ऐसे हैं । हमें एस्प्रेशनल डिस्ट्रिक्ट्स के लिए अलग से व्यवस्था करनी चाहिए। हम जिस इलाके से आते हैं, मंत्री जी संयोग से वहां से वाकिफ हैं। प्रत्येक साल इस इलाके में आग लग जाती है। यदि वह बीपीएल नहीं है या इस योजना के लिए पात्र नहीं है, तो आग लगने के बाद उसका पूरा घर खत्म हो गया । आपको आग लगने वाले घर के लिए भी अलग से व्यवस्था करनी चाहिए । इसी तरह से बारिश या बाढ़ की स्थिति भी है। उनके लिए भी आपको व्यवस्था करनी चाहिए। कांग्रेस पार्टी देती थी, वह घर नहीं बन पाया या कागज पर ही बना हुआ है। उन जिलों में जब हम दिशा कमेटी की मीटिंग लेते हैं तो पता चलता है कि उन्हें घर कभी नहीं मिला। क्या ऐसे पुराने केसेज को पूरा करने के लिए आप नया फंड दे रहे हैं? माननीय सभापति : लैंड की प्रॉब्लम है। लैंडलेस, होमलेस बहुत बड़ा मामला है। केरल में एक स्कीम है, उसमें लैंड को परचेज करना, अलाट करना है। HON. CHAIRPERSON : Now, Shri Gaurav Gogoi. Not recorded SHRI S.C. UDASI : One minute, Sir. Sir, as you said and also as Shri Nishikant Dueby explained, there are two types of persons.. One is a homeless person where he does not have land; and the other is where one is having land. लैंडलेस के लिए जैसा दुबे जी ने बताया for landless persons, as he said, you should give directions to the State Governments. कई जगहों पर लोकल पंचायतों में गवर्नमेंट लैंड नहीं होती है और he has to acquire it from private party. Now, the land cost has also gone up. So, to acquire land, if the Government land is there, the District Administration will acquire it through the Government. They will allot sites to the site-less. But when there is no Government land available, the State Government has to acquire it from a private party. उसके लिए प्रावधान और कास्ट शेयरिंग यदि भारत सरकार करती है, तो बेहतर होगा । श्री भर्तृहरि महताब : फारेस्ट लैंड ट्रांसफर करने में बहुत दिक्कत होती है। श्री गौरव गोगोई : धन्यवाद सभापति महोदय, माननीय मंत्री महोदय बिहार से आते हैं, इसलिए बिहार में प्रतिवर्ष बाढ़ और कटाव की जो समस्या होती है उस समस्या से वह वाकई बहुत अच्छी तरह से वाकिफ होंगे। वही समस्या देश के विभिन्न राज्यों में है और वही समस्या असम में भी है । वे लोग, जो बाढ़ और कटाव से ज्यादातर प्रभावित होते हैं, क्या उनको विशेष रूप से सहायता दी जा सकती है? क्या उनको प्राथमिकता दी जा सकती है? आप भी यह महसूस करते होंगे कि जो बिहार और असम के कटाव प्रभावित क्षेत्र हैं, वहां के लोगों की किस प्रकार से मदद की जाए । महोदय, हमारे यहां असम में जनजाति के जो लोग हैं, वे अपने घर को पिलर्स पर बनाते हैं, ताकि बाढ़ के समय यदि पानी भी आए तो उनको अपना घर न छोड़ना पड़े, क्योंकि उनके घर थोड़े ऊंचाई पर होते हैं, लेकिन ऐसे घर बहुत कमजोर होते हैं। ये क्लाइमेट रेजिलिएंट नहीं होते हैं। बाढ़ में इस तरह के घरों को बहुत नुकसान हो जाता है । जो दूसरे डिजाइन्स के घर हैं, जो फ्लड का सामना करने के लिए तैयार हैं, क्या उनके डिजाइन्स को भी हम प्रधान मंत्री आवास योजना में रख सकते हैं? इस मुहिम का उद्देश्य हाउसिंग फॉर ऑल है । जब हम बाढ़ और कटाव से प्रभावित लोगों को घर नहीं दे सकते, तो फिर इस मुहिम का सपना कि सबको घर मिले, वह कैसे सच होगा? महोदय, आज हो यह रहा है कि ये लोग जो बाढ़, कटाव के कारण बिखर जाते हैं, वे कहीं और जाकर अपना घर बनाते हैं। उनके पास न कागज होता है और न ही उनके पास कोई ठोस सबूत होता है। अंततः एक समय के बाद सरकार का बुलडोजर आ ही जाता है। जब सरकारी बुलडोजर आता है तो फिर इनको दोबारा रिफ्यूजी की तरह टिन की छत के नीचे रहना पड़ता है। आखिर हम कौन सी मुहिम की तरफ जा रहे हैं? अगर हमने वास्तव में हाउसिंग फॉर ऑल का सपना देखा है तो फिर अगर कोई तकनीकी समस्या है, चाहे वह भूमि अधिग्रहण को लेकर हो, डिजास्टर को लेकर हो, उसका हम ब्यूरोक्रेटिक तरीके से ऐसा हल क्यों नहीं निकालते हैं कि यह हमारा हर साल का टार्गेट है और इस टार्गेट को हमें मीट करना है? ग्राउंड लेवेल पर जो प्रॉब्लम्स हैं, जिनको आप और हम सब देखते हैं, उनका हम कैसे समाधान कर सकते हैं? कटाव और बाढ़ के कारण बेघर होकर जो लोग एनक्रोचमेंट में रहते हैं, तो सबसे पहले बुरी नजर उन पर पड़ती है। असम में सबसे पहले उनको ही बुरी नजर से देखा जाता है। अगर ये समाज के किसी विशेष वर्ग से हैं, तो उनके घरों पर सबसे पहले बुलडोजर चलाया जाता है । इस वजह से यह एक सामाजिक समस्या बन गयी है। समाज में एक तरह से तनाव भी पैदा होता है, जब समाज का विशेष वर्ग, चाहे वह जनजाति का हो या माइनॉरिटी का हो, उनके घरों पर सबसे पहले बुलडोजर चलता है। महोदय, बाढ़, कटाव और डिजास्टर को लेकर मेरे क्षेत्र के अलावा बहुत से क्षेत्रों, जैसे चेन्नई में से आप देखें तो अनसीजनल रेन और हिल स्टोन्स के कारण वहां तथा मेघालय, असम आदि में बहुत-से घर आज टूट चुके हैं। अतः नैचुरल डिजास्टर से अफेक्टेड घरों को लेकर क्या प्रधान मंत्री आवास
एक समय की बात है । मोहन नाम का लड़का था, वह अत्यंत विनम्र ,सरल, मेधावी एवं अपने कार्य में लगनशील था। वह अपने दोस्तों के साथ हर आयोजन में सम्मिलित होता । खेल खेल एवं चहलकदमी में वह धीरे धीरे बडा हो रहा था।अपने गाँव के ही किसी बडे आयोजन के लिए अपनी मित्र मण्डली के साथ सामग्री जुटाने में लगा। सभी साथियों ने मिलकर बहुत कुछ कार्य संपन्न कर दिया। अब क्या होता है...? कुछ मित्र तेज धारदार कुल्हाड़ी ले कर लकडियों की व्यवस्था हेतु निकल पड़े। इसमें मोहन भी सक्रिय रूप से सम्मिलित था। सभी साथी मिलकर लगभग 15 - 20वर्ष पुराने नीम को काटने का इरादा बनाते हैं। क्रमशः सभी साथी हाथ की आजमाइश करते हुए नीम के लगभग डेड फीट के घेरे पर लगालग वार करने लगे....अबोध,अनजान किंतु आयोजन के उन्माद में अंध वे किशोर परिणाम की पर्वाह किए बगैर तने पर वार पे वार किए जा रहे थे। वार सहता वह युवा नीम मूक ही मानो बहुत कुछ कह रहा था....बालकों यह तुम क्या कर रहे हो? अपने ही कल को हाथों से क्यूं काट रहे हो? मानो वह मौन ही मौन एक एक को झकझोर रहा हो....कह रहा है.... कि मेरा अपराध क्या है कि तुम बारी बारी से प्रहार पर प्रहार कर रहे हो.... मैं गर्मी में तुम्हें छाया देता हूँ...भूल गए! कितने ही छोटे मोटे जीवों और पक्षियों को आश्रय देता हूँ उसे भी अनदेखा कर गए..... तुम तो हमेशा कक्षाओं में पढते हो कि पर्यावरण की रक्षा करनी चाहिए ...। पेड-पौधे अपने अडौस पडौस में लगाने चाहिए.... सब भूल गए और प्रहार पर प्रहार करते जा रहे हो... तनिक भी मुझ पर दया नहीं आ रही ! देखो! कैसे निष्ठुर निर्दयी तुम हो गए हो । हाथों ही अपने कल को आज काट रहे हो। अनजाने में भी किया गया आत्मघाती कार्य पीढियों के लिए सीख का कारण बनता है। तुम जो कर रहे हों.. ऊसका विरोध करने का मुझ में सामर्थ्य तो बहुत है..पर मैं अपने हाथों कल का काल नहीं बन सकता। अब तुम बालकों जो भी करो ..पूरा करना मेरा जीवन अधूरा न छोडना। सभी बच्चे अपने कार्य में व्यस्त थे... नीम आघात पे आघात से संतप्त था। इतने में कुछ बालक नवीन ऊर्जा के साथ उस स्थल पर आते हैं...नवीन जोश के साथ पूर्व कार्य को सतत् रखते हैं। अब मोहन के हाथ में था हथियार... कर रहा वह भी नीम के तने पर वार पे वार। नीम खडे रहने की हिम्मत छोड ..जहाँ बालकों को कोई नुकसान न हो ऐसी दिशा में धीरे धीरे झुकने लगा...झुकता हुआ मानो कह रहा था...मेरे इस मूक बलिदान को व्यर्थ न जाने देना बालकों...तुम्हारी असमझ का परिणाम मेरे प्राण ले गया मगर मेरे प्राण भी तुम्हें कुछ समझा दें तो मैं मेरा बलिदान सार्थक मानूँगा। यूँ कहता 20वर्षों का जीवन 80से अधिक वर्ष का जीवन छोड धराशायी हो गया। धराशायी विशाल नीम देखकर बालक सब अन्दर ही अन्दर सहम गए... मानो नीम की मूक व्यथा और कथा सहज ही समज गए।डरे सहमें बालक सब छोड़ वहीं नीम को निकल पड़े। अब क्या था बालकों का उद्देश्य अधूरा किन्तु नीम का जीवन पूरा हो गया था। नीम का जीवन कुछ के मन में बहुत कुछ कह गया था। सच कहता हूँ...उन बालकों में हर कोई अपने किए पर व्यथित था...एक के बदले दस नीम लगाने का संकल्पी था। मोहन तो अन्दर ही अन्दर दुःखी था। अपराध बोध में दबा था। किन्तु हराभरा जग करने में योगदान देने को सहज ही संकल्पित खड़ा था। धन्य है वह नीम जो स्वयं कटकर समझ बालकों की हरी कर गया। हर बालक को वास्तविक जीवन का पाठ पढा गया। अपने जीवन के बदले सैकडों हजारों जीवन आबाद करने की नींव हाथों से अपने रख गया। मोहन के साथ उसके सभी मित्र नीम के वृक्ष लगाने हेतु आज भी संकल्पित हैं। आओं मिलकर समझ बनाएँ पृथ्वी को फिर हराभरा बनाएँ।
एक समय की बात है । मोहन नाम का लड़का था, वह अत्यंत विनम्र ,सरल, मेधावी एवं अपने कार्य में लगनशील था। वह अपने दोस्तों के साथ हर आयोजन में सम्मिलित होता । खेल खेल एवं चहलकदमी में वह धीरे धीरे बडा हो रहा था।अपने गाँव के ही किसी बडे आयोजन के लिए अपनी मित्र मण्डली के साथ सामग्री जुटाने में लगा। सभी साथियों ने मिलकर बहुत कुछ कार्य संपन्न कर दिया। अब क्या होता है...? कुछ मित्र तेज धारदार कुल्हाड़ी ले कर लकडियों की व्यवस्था हेतु निकल पड़े। इसमें मोहन भी सक्रिय रूप से सम्मिलित था। सभी साथी मिलकर लगभग पंद्रह - बीसवर्ष पुराने नीम को काटने का इरादा बनाते हैं। क्रमशः सभी साथी हाथ की आजमाइश करते हुए नीम के लगभग डेड फीट के घेरे पर लगालग वार करने लगे....अबोध,अनजान किंतु आयोजन के उन्माद में अंध वे किशोर परिणाम की पर्वाह किए बगैर तने पर वार पे वार किए जा रहे थे। वार सहता वह युवा नीम मूक ही मानो बहुत कुछ कह रहा था....बालकों यह तुम क्या कर रहे हो? अपने ही कल को हाथों से क्यूं काट रहे हो? मानो वह मौन ही मौन एक एक को झकझोर रहा हो....कह रहा है.... कि मेरा अपराध क्या है कि तुम बारी बारी से प्रहार पर प्रहार कर रहे हो.... मैं गर्मी में तुम्हें छाया देता हूँ...भूल गए! कितने ही छोटे मोटे जीवों और पक्षियों को आश्रय देता हूँ उसे भी अनदेखा कर गए..... तुम तो हमेशा कक्षाओं में पढते हो कि पर्यावरण की रक्षा करनी चाहिए ...। पेड-पौधे अपने अडौस पडौस में लगाने चाहिए.... सब भूल गए और प्रहार पर प्रहार करते जा रहे हो... तनिक भी मुझ पर दया नहीं आ रही ! देखो! कैसे निष्ठुर निर्दयी तुम हो गए हो । हाथों ही अपने कल को आज काट रहे हो। अनजाने में भी किया गया आत्मघाती कार्य पीढियों के लिए सीख का कारण बनता है। तुम जो कर रहे हों.. ऊसका विरोध करने का मुझ में सामर्थ्य तो बहुत है..पर मैं अपने हाथों कल का काल नहीं बन सकता। अब तुम बालकों जो भी करो ..पूरा करना मेरा जीवन अधूरा न छोडना। सभी बच्चे अपने कार्य में व्यस्त थे... नीम आघात पे आघात से संतप्त था। इतने में कुछ बालक नवीन ऊर्जा के साथ उस स्थल पर आते हैं...नवीन जोश के साथ पूर्व कार्य को सतत् रखते हैं। अब मोहन के हाथ में था हथियार... कर रहा वह भी नीम के तने पर वार पे वार। नीम खडे रहने की हिम्मत छोड ..जहाँ बालकों को कोई नुकसान न हो ऐसी दिशा में धीरे धीरे झुकने लगा...झुकता हुआ मानो कह रहा था...मेरे इस मूक बलिदान को व्यर्थ न जाने देना बालकों...तुम्हारी असमझ का परिणाम मेरे प्राण ले गया मगर मेरे प्राण भी तुम्हें कुछ समझा दें तो मैं मेरा बलिदान सार्थक मानूँगा। यूँ कहता बीसवर्षों का जीवन अस्सीसे अधिक वर्ष का जीवन छोड धराशायी हो गया। धराशायी विशाल नीम देखकर बालक सब अन्दर ही अन्दर सहम गए... मानो नीम की मूक व्यथा और कथा सहज ही समज गए।डरे सहमें बालक सब छोड़ वहीं नीम को निकल पड़े। अब क्या था बालकों का उद्देश्य अधूरा किन्तु नीम का जीवन पूरा हो गया था। नीम का जीवन कुछ के मन में बहुत कुछ कह गया था। सच कहता हूँ...उन बालकों में हर कोई अपने किए पर व्यथित था...एक के बदले दस नीम लगाने का संकल्पी था। मोहन तो अन्दर ही अन्दर दुःखी था। अपराध बोध में दबा था। किन्तु हराभरा जग करने में योगदान देने को सहज ही संकल्पित खड़ा था। धन्य है वह नीम जो स्वयं कटकर समझ बालकों की हरी कर गया। हर बालक को वास्तविक जीवन का पाठ पढा गया। अपने जीवन के बदले सैकडों हजारों जीवन आबाद करने की नींव हाथों से अपने रख गया। मोहन के साथ उसके सभी मित्र नीम के वृक्ष लगाने हेतु आज भी संकल्पित हैं। आओं मिलकर समझ बनाएँ पृथ्वी को फिर हराभरा बनाएँ।
Seema Haider सवालों के कटघरे में, सीमा पर ATS के सवालों की बौछार,क्या सीमा उगलेगी सारे राज़ । SachinSeema Haider जाँच एजेंसियों के घेरे में है। सीमा की सच्चाई जानने के लिए UP ATS की पूछताछ जारी है। पूछताछ के दौरान UP ATS ने एक के बाद एक कई सवाल दागे। Seema Haider News: सचिन ने Pakistan से आई सीमा हैदर को जिस मकान में रखा था, वहां क्या बताया था? पाकिस्तानी सीमा हैदर का छूटा प्रेमी के घर का साथ, अब कहां है नया ठिकाना?
Seema Haider सवालों के कटघरे में, सीमा पर ATS के सवालों की बौछार,क्या सीमा उगलेगी सारे राज़ । SachinSeema Haider जाँच एजेंसियों के घेरे में है। सीमा की सच्चाई जानने के लिए UP ATS की पूछताछ जारी है। पूछताछ के दौरान UP ATS ने एक के बाद एक कई सवाल दागे। Seema Haider News: सचिन ने Pakistan से आई सीमा हैदर को जिस मकान में रखा था, वहां क्या बताया था? पाकिस्तानी सीमा हैदर का छूटा प्रेमी के घर का साथ, अब कहां है नया ठिकाना?
मैया में नाहीं दधि खायो । ख्याल परे ये सखा सबै मिली मेरे मुख लपटायो । देखि तुही सीके पर भाजन ऊँचे घर लटकायो । तुही निरखि नान्हे कर अपने में कैसे करि पायो । मुख दधि पोंछि कहत नँदनंदन दोना पीठि दुरायो । इस पद में भोले कृष्ण चतुर बनने के प्रयास में और भी भोले लगते हैं । परन्तु एक ग्वालिनी को आलिंगनादि के द्वारा तृप्त करने के बाद चतुर कृष्ण जब भोले बनने का प्रयास करते हैं तो और भी चतुर ज्ञात होते हैंझूठहि मोहि लगावति ग्वारि । खेलत मैं मोहि बोलि लियो है दोउ भुज भरि दीनी अँकवारि । मेरे कर अपने कुच धारति आपुहिं चोली फारि । माखन आपुहि मोहि खवायो मैं कब दीन्हों ढारि । कहा जानै मेरो वारो भोरो झुकी । महरि दे दे मुख गारि। सूर श्याम ग्वालिनि मन मोह्यो चितै रही इकटकहि निहारि । - सू० सा०, पृ० १७२ यशोदा द्वारा कृष्ण को माखनचोरी न करने की सीख देने में माता की जिन भाव"नाओं का अंकन ब्रजभाषा में सूर और तुलसी ने किया है, वह गुजराती के काव्य में प्राप्त नहीं होता - सूर - कन्हैया तू नहि मोहि डेरात । षटरस धरे छाँड़ि कत पर घर, चोरी करि करि खात । बकति बकति तोसों पचि हारी नेकहुँ लाज न आई । ब्रज परगन सरदार महर तू ताकी करत नन्हाई । पूत सपूत भयो कुल मेरो अब में जानी बात । सुरश्याम अबलों तोहि बकस्यो तेरी जानी घात । तुलसी ने इस स्थिति में सूर से अधिक सूक्ष्म भावग्रहणशीलता का परिचय दिया. है जो निम्नोद्धृत पंक्तियों से स्पष्ट है - छांडो मेरे ललित ललन लरिकाई । ऐहैं सुत देख वार कालि तेरे, बबै ब्याह की बात चलाई । डरिहें सासु ससुर चोरी सुनि, हँसिहँ नई दुलहिया सुहाई । उबटौं, न्हाहु, गुही चोटिया, बलि, देखि भलो वर करहि बड़ाई । -कृष्णगीतावली, पद १३ यशोदा के इन शब्दों के पीछे कवि के मानव मनोविज्ञान की सूक्ष्म परख व्यक्त होती है । गोचारण - कृष्ण के गोचारी रूप के प्रति भी कवियों ने अत्यधिक आसक्ति का परिचय दिया है । वास्तव में राजसी वेश की अपेक्षा कृष्ण का सरल वन्य वेश ही कवियों को अधिक आकर्षक लगा । भागवत के 'वर्हापीडं नटवरवपुः कर्णयोः कणिकारम्' के अनुरूप कृष्ण को मोर के पंखों का मुकुट धारण किये हुए नटवर वेश में निरूपित करके सूर, मीरां, भालण और नरसी आदि अनेक कवियों ने उनके इस रूप के प्रति अपनी विशेष आसक्ति व्यक्त की है । १ गोचारण के प्रसंग में ग्वालवालों के बीच छाक जीमते हुए, गायों को बुलाते, खेलते और सायंकाल धूल भरे ब्रज को लौटते कृष्ण के विविध मनोभावों एवं रूपचित्रणों का सरस आलेखन ब्रजभाषा काव्य में उपलब्ध होता है। गुजराती में प्रेमानंद ने पहले पहल गोचारण के लिए बन जाते हुए कृष्ण के प्रति नंद-यशोदा की ममतामयी चिता और उसी से मिलीजुली प्रसन्नता का अत्यन्त मोहक अंकन किया है। नंद उन्हें पगड़ी पहनाते हैं और यशोदा काजल लगाती हैं । सज जाने पर कृष्ण दर्पण में अपनी शोभा देखना नहीं भूलते । एक सिरे पर सीके में भोजन बांधकर, लाल लाठी कंधे पर रखकर जब वे वन को चलने लगते हैं तो यशोदा बिना चुम्बन लिये जाने नहीं देती, नंद की आँखों में आँसू आ जाते हैं । १७ भालण ने कृष्ण के वनचारी रूप के प्रति आसक्त गोपियों की मनोदशा का अतुलनीय भावुकता से वर्णन किया है । एक गोपी को स्त्री होने का ही दुख है है क्योंकि इस कारण वह दिन भर कृष्ण के साथ वन में रह नहीं सकती । इसलिए वह सोचती है कि किसी विद्या से यदि वे दिन में पुरुष बन जाती और रात में नारी बनी रहती तो कितना अच्छा होता - जो विद्या ओवी आवडे रे, थाउं दिवसे नर ने राते नार । पगले पगले परवहं रे, पधारे ज्यां प्राणाधार । - दशमस्कंध, पृ० ५८
मैया में नाहीं दधि खायो । ख्याल परे ये सखा सबै मिली मेरे मुख लपटायो । देखि तुही सीके पर भाजन ऊँचे घर लटकायो । तुही निरखि नान्हे कर अपने में कैसे करि पायो । मुख दधि पोंछि कहत नँदनंदन दोना पीठि दुरायो । इस पद में भोले कृष्ण चतुर बनने के प्रयास में और भी भोले लगते हैं । परन्तु एक ग्वालिनी को आलिंगनादि के द्वारा तृप्त करने के बाद चतुर कृष्ण जब भोले बनने का प्रयास करते हैं तो और भी चतुर ज्ञात होते हैंझूठहि मोहि लगावति ग्वारि । खेलत मैं मोहि बोलि लियो है दोउ भुज भरि दीनी अँकवारि । मेरे कर अपने कुच धारति आपुहिं चोली फारि । माखन आपुहि मोहि खवायो मैं कब दीन्हों ढारि । कहा जानै मेरो वारो भोरो झुकी । महरि दे दे मुख गारि। सूर श्याम ग्वालिनि मन मोह्यो चितै रही इकटकहि निहारि । - सूशून्य साशून्य, पृशून्य एक सौ बहत्तर यशोदा द्वारा कृष्ण को माखनचोरी न करने की सीख देने में माता की जिन भाव"नाओं का अंकन ब्रजभाषा में सूर और तुलसी ने किया है, वह गुजराती के काव्य में प्राप्त नहीं होता - सूर - कन्हैया तू नहि मोहि डेरात । षटरस धरे छाँड़ि कत पर घर, चोरी करि करि खात । बकति बकति तोसों पचि हारी नेकहुँ लाज न आई । ब्रज परगन सरदार महर तू ताकी करत नन्हाई । पूत सपूत भयो कुल मेरो अब में जानी बात । सुरश्याम अबलों तोहि बकस्यो तेरी जानी घात । तुलसी ने इस स्थिति में सूर से अधिक सूक्ष्म भावग्रहणशीलता का परिचय दिया. है जो निम्नोद्धृत पंक्तियों से स्पष्ट है - छांडो मेरे ललित ललन लरिकाई । ऐहैं सुत देख वार कालि तेरे, बबै ब्याह की बात चलाई । डरिहें सासु ससुर चोरी सुनि, हँसिहँ नई दुलहिया सुहाई । उबटौं, न्हाहु, गुही चोटिया, बलि, देखि भलो वर करहि बड़ाई । -कृष्णगीतावली, पद तेरह यशोदा के इन शब्दों के पीछे कवि के मानव मनोविज्ञान की सूक्ष्म परख व्यक्त होती है । गोचारण - कृष्ण के गोचारी रूप के प्रति भी कवियों ने अत्यधिक आसक्ति का परिचय दिया है । वास्तव में राजसी वेश की अपेक्षा कृष्ण का सरल वन्य वेश ही कवियों को अधिक आकर्षक लगा । भागवत के 'वर्हापीडं नटवरवपुः कर्णयोः कणिकारम्' के अनुरूप कृष्ण को मोर के पंखों का मुकुट धारण किये हुए नटवर वेश में निरूपित करके सूर, मीरां, भालण और नरसी आदि अनेक कवियों ने उनके इस रूप के प्रति अपनी विशेष आसक्ति व्यक्त की है । एक गोचारण के प्रसंग में ग्वालवालों के बीच छाक जीमते हुए, गायों को बुलाते, खेलते और सायंकाल धूल भरे ब्रज को लौटते कृष्ण के विविध मनोभावों एवं रूपचित्रणों का सरस आलेखन ब्रजभाषा काव्य में उपलब्ध होता है। गुजराती में प्रेमानंद ने पहले पहल गोचारण के लिए बन जाते हुए कृष्ण के प्रति नंद-यशोदा की ममतामयी चिता और उसी से मिलीजुली प्रसन्नता का अत्यन्त मोहक अंकन किया है। नंद उन्हें पगड़ी पहनाते हैं और यशोदा काजल लगाती हैं । सज जाने पर कृष्ण दर्पण में अपनी शोभा देखना नहीं भूलते । एक सिरे पर सीके में भोजन बांधकर, लाल लाठी कंधे पर रखकर जब वे वन को चलने लगते हैं तो यशोदा बिना चुम्बन लिये जाने नहीं देती, नंद की आँखों में आँसू आ जाते हैं । सत्रह भालण ने कृष्ण के वनचारी रूप के प्रति आसक्त गोपियों की मनोदशा का अतुलनीय भावुकता से वर्णन किया है । एक गोपी को स्त्री होने का ही दुख है है क्योंकि इस कारण वह दिन भर कृष्ण के साथ वन में रह नहीं सकती । इसलिए वह सोचती है कि किसी विद्या से यदि वे दिन में पुरुष बन जाती और रात में नारी बनी रहती तो कितना अच्छा होता - जो विद्या ओवी आवडे रे, थाउं दिवसे नर ने राते नार । पगले पगले परवहं रे, पधारे ज्यां प्राणाधार । - दशमस्कंध, पृशून्य अट्ठावन
बीजेपी के राजस्थान से राज्यसभा सांसद डॉ. किरोड़ी लाल मीणा पीसीसी चीफ और शिक्षा राज्यमंत्री गोविंद सिंह डोटासरा के सरकारी निवास पहुंच गए। उन्होंने डोटासरा से दो टूक कहा कि मैं किसी भी कीमत पर बेरोजगारों की आवाज को दबने नहीं दूंगा। जब तक सरकार मांगें नहीं मानेगी, संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कोरोना गाइडलाइन की आड़ में युवाओं की आवाज दबाना चाहती है, लेकिन मैं ऐसा होने नहीं दूंगा। प्रदेश के बेरोजगार युवाओं की कई मांगों को लेकर सांसद डॉ किरोड़ीलाल मीणा ने मांग उठाई, कि सभी यूनिवर्सिटी और कॉलेज कोरोना काल में पूरी तरह से बंद रहे हैं। इस कारण स्टूडेंट्स ने लाइब्रेरी,होस्टल,स्पोर्ट्स फैसिलिटीज़ समेत बाकी रिसोर्सेज़ का इस्तेमाल नहीं किया है। इसके बावजूद भी इन फैसिलिटीज़ के नाम पर स्टूडेंट्स से 2 साल से फीस वसूली जा रही है। यह किसी भी तरह ठीक नहीं है। डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा ने बेरोजगारों की बाकी मांगों को लेकर भी पीसीसी चीफ और शिक्षा राज्यमंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा का ध्यान दिलाया। किरोड़ी ने आरोप लगाया है कि सरकार ने बेरोजगारों की आवाज़ को दबाने के लिए 13 सितम्बर को विधानसभा घेराव के कार्यक्रम को कोरोना गाइडलाइन आड़ में कुचलने की साजिश रची है। सरकार को ज़िद्द छोड़नी होगी और युवाओं की मांगें माननी होगी। उन्होंने उम्मीद जताई ककि उनके मांग पत्र पर सरकार जल्द अमल करके आदेश जारी करेगी। 1. यूनिवर्सिटी-कॉलेजों में फीस और परीक्षा शुल्क के नाम पर स्टूडेंट्स से लूट बंद हो। पिछले 2 सालों में जो फीस वसूली गई उसे एडजस्ट किया जाए। 2. कोरोना पीरियड के कारण ज्यादातर स्टूडेंट्स की परीक्षा नहीं हुई, लेकिन उनसे एक्ज़ाम फीस वसूली गई, जो जस्टिफाइड नहीं है। उस एक्ज़ाम फीस को लौटाया जाए। 3. कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में ऑनलाइन क्लासेज़ और कोर्स की व्यवस्था मज़बूत की जाए, ताकि पहले से पीड़ित स्टूडेंट्स का एजुकेशनल वर्क और ज्यादा प्रभावित न हो। 4. बेरोजगारों को रोजगार देने और रोजगार नहीं मिलने तक 10 हजार रुपए का महीने का भत्ते दें। 5. हरियाणा की तर्ज पर राजस्थान के बेरोजगार युवाओं को निजी क्षेत्र में 70% आरक्षण देने की मांग । इसके लिए विधानसभा में कानून पारित किया जाए। 6. सरकारी नौकरियों में बाहरी राज्यों का कोटा 5% तक सीमित किया जाए। 7. RAS सहित अन्य भर्तियों में इंटरव्यू को बंद किया जाए। 8. राज्य के अलग-अलग सरकारी विभागों में खाली पड़े सभी पदों को भरा जाए। 9. शिक्षा का व्यवसायीकरण बंद किया जाए। 10. सरकारी स्कूलों और कॉलेजों की तरह प्राइवेट स्कूलों-कॉलेजों में ST/SC/OBC/EWS और अन्य स्टूडेंट्स की स्कॉलरशिप समेत सरकारी सहायता दिलवाई जाए। 11. प्रदेश के सभी विभागों में भ्रष्टाचार से प्रदेश की जनता के पूरी तरह से त्रस्त होने के आरोप लगाते हुए भ्रष्टाचार कानून को मजबूत बनाने, लोकायुक्त को मध्यप्रदेश की तर्ज पर ताकतवर बनाने की मांग। जो अधिकारी-कर्मचारी भ्रष्टाचार में दोषी पाए गए, उनकी अभियोजन स्वीकृति जारी हो। करीब 297 गजटेड अधिकारियों की अभियोजन स्वीकृति सरकार की ओर से रोकने के आरोप लगाते हुए,उसे तुरंत जारी करने की मांग। 12. प्रदेश में बलात्कार की घटनाएं और दलितों के साथ सर्वाधिक उत्पीड़न और कानून की स्थिति बदतर होने के आरोप लगाते हुए लगाम लगाने की मांग। 13. राज्य में टीएसपी एरिया में कुपोषण और भुखमरी के कारण बड़े पैमाने पर मौतें होने के आरोप। मिशनरियों की ओर से लालच देकर आदिवासी इलाकों में लोगों का धर्म परिवर्तन करवाने के आरोप। टीएसपी एरिया की युवतियों को गुजरात में मजदूरी के नाम पर ले जाकर बड़े पैमाने पर देह व्यापार करावाने और मानव तस्करी के प्रकरण बढ़ने के आरोप। इन मामलों की रोकथाम की मांग। 14. पूरे प्रदेश में पहली से 12वीं तक के सभी स्कूल खोलने की मांग। This website follows the DNPA Code of Ethics.
बीजेपी के राजस्थान से राज्यसभा सांसद डॉ. किरोड़ी लाल मीणा पीसीसी चीफ और शिक्षा राज्यमंत्री गोविंद सिंह डोटासरा के सरकारी निवास पहुंच गए। उन्होंने डोटासरा से दो टूक कहा कि मैं किसी भी कीमत पर बेरोजगारों की आवाज को दबने नहीं दूंगा। जब तक सरकार मांगें नहीं मानेगी, संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कोरोना गाइडलाइन की आड़ में युवाओं की आवाज दबाना चाहती है, लेकिन मैं ऐसा होने नहीं दूंगा। प्रदेश के बेरोजगार युवाओं की कई मांगों को लेकर सांसद डॉ किरोड़ीलाल मीणा ने मांग उठाई, कि सभी यूनिवर्सिटी और कॉलेज कोरोना काल में पूरी तरह से बंद रहे हैं। इस कारण स्टूडेंट्स ने लाइब्रेरी,होस्टल,स्पोर्ट्स फैसिलिटीज़ समेत बाकी रिसोर्सेज़ का इस्तेमाल नहीं किया है। इसके बावजूद भी इन फैसिलिटीज़ के नाम पर स्टूडेंट्स से दो साल से फीस वसूली जा रही है। यह किसी भी तरह ठीक नहीं है। डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा ने बेरोजगारों की बाकी मांगों को लेकर भी पीसीसी चीफ और शिक्षा राज्यमंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा का ध्यान दिलाया। किरोड़ी ने आरोप लगाया है कि सरकार ने बेरोजगारों की आवाज़ को दबाने के लिए तेरह सितम्बर को विधानसभा घेराव के कार्यक्रम को कोरोना गाइडलाइन आड़ में कुचलने की साजिश रची है। सरकार को ज़िद्द छोड़नी होगी और युवाओं की मांगें माननी होगी। उन्होंने उम्मीद जताई ककि उनके मांग पत्र पर सरकार जल्द अमल करके आदेश जारी करेगी। एक. यूनिवर्सिटी-कॉलेजों में फीस और परीक्षा शुल्क के नाम पर स्टूडेंट्स से लूट बंद हो। पिछले दो सालों में जो फीस वसूली गई उसे एडजस्ट किया जाए। दो. कोरोना पीरियड के कारण ज्यादातर स्टूडेंट्स की परीक्षा नहीं हुई, लेकिन उनसे एक्ज़ाम फीस वसूली गई, जो जस्टिफाइड नहीं है। उस एक्ज़ाम फीस को लौटाया जाए। तीन. कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में ऑनलाइन क्लासेज़ और कोर्स की व्यवस्था मज़बूत की जाए, ताकि पहले से पीड़ित स्टूडेंट्स का एजुकेशनल वर्क और ज्यादा प्रभावित न हो। चार. बेरोजगारों को रोजगार देने और रोजगार नहीं मिलने तक दस हजार रुपए का महीने का भत्ते दें। पाँच. हरियाणा की तर्ज पर राजस्थान के बेरोजगार युवाओं को निजी क्षेत्र में सत्तर% आरक्षण देने की मांग । इसके लिए विधानसभा में कानून पारित किया जाए। छः. सरकारी नौकरियों में बाहरी राज्यों का कोटा पाँच% तक सीमित किया जाए। सात. RAS सहित अन्य भर्तियों में इंटरव्यू को बंद किया जाए। आठ. राज्य के अलग-अलग सरकारी विभागों में खाली पड़े सभी पदों को भरा जाए। नौ. शिक्षा का व्यवसायीकरण बंद किया जाए। दस. सरकारी स्कूलों और कॉलेजों की तरह प्राइवेट स्कूलों-कॉलेजों में ST/SC/OBC/EWS और अन्य स्टूडेंट्स की स्कॉलरशिप समेत सरकारी सहायता दिलवाई जाए। ग्यारह. प्रदेश के सभी विभागों में भ्रष्टाचार से प्रदेश की जनता के पूरी तरह से त्रस्त होने के आरोप लगाते हुए भ्रष्टाचार कानून को मजबूत बनाने, लोकायुक्त को मध्यप्रदेश की तर्ज पर ताकतवर बनाने की मांग। जो अधिकारी-कर्मचारी भ्रष्टाचार में दोषी पाए गए, उनकी अभियोजन स्वीकृति जारी हो। करीब दो सौ सत्तानवे गजटेड अधिकारियों की अभियोजन स्वीकृति सरकार की ओर से रोकने के आरोप लगाते हुए,उसे तुरंत जारी करने की मांग। बारह. प्रदेश में बलात्कार की घटनाएं और दलितों के साथ सर्वाधिक उत्पीड़न और कानून की स्थिति बदतर होने के आरोप लगाते हुए लगाम लगाने की मांग। तेरह. राज्य में टीएसपी एरिया में कुपोषण और भुखमरी के कारण बड़े पैमाने पर मौतें होने के आरोप। मिशनरियों की ओर से लालच देकर आदिवासी इलाकों में लोगों का धर्म परिवर्तन करवाने के आरोप। टीएसपी एरिया की युवतियों को गुजरात में मजदूरी के नाम पर ले जाकर बड़े पैमाने पर देह व्यापार करावाने और मानव तस्करी के प्रकरण बढ़ने के आरोप। इन मामलों की रोकथाम की मांग। चौदह. पूरे प्रदेश में पहली से बारहवीं तक के सभी स्कूल खोलने की मांग। This website follows the DNPA Code of Ethics.
तेज रफ्तार में जा रही बस क्रमांक MP19 P2811 ने 2 बाइक सवार युवकों को रौंद दिया जिससे इस हादसे में बाईक चला रहे युवक की मौके पर ही मौत हो गई वहीं पीछे बैठा उसका उसका साथी गंभीर रूप से घायल हो है, घटना एक वीड़ियो भी सामने आया है। mp accident news: सतना । सतना जिले (satna) के नेशनल हाईवे (higway) बेला-बमीठा पर गंभीर सड़क हादसा (accident) हुआ है। जहां तेज रफ्तार (speed) जा रही बस (bus) ने 2 बाइक सवार युवकों को रौंद दिया। हादसे में बाईक चला रहे युवक की मौके पर ही मौत हो गई और पीछे बैठा उसका साथी गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना का एक वीडियो भी सामने आया है। बताया जा रहा है कि रामपुर बाघेलान थाना क्षेत्र के कोरिगवां मोड़ पर यह हादसा हुआ है। यह सतना स्मार्ट सिटी की बस से हुआ। हादसे के दौरान भी बस चालक ने लापरवाही बरती मौके पर बस को नही रोका गया जिससे जलती हुई बाइक बस में फंसी रह गयी और बहुत दूर तक घिसटती रही। सड़क दुर्घटना के प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा जानकारी दी गई है कि नेशनल हाईवे के कोरिगवां मोड़ से अंदर जाने के लिए दो पहिया वाहन पर सवार युवक सड़क पार कर रहे थे, इसी दौरान सतना की तरफ जा रही एक तेज रफ्तार में स्मार्ट सिटी की बस क्रमांक MP19 P2811 ने बाइक सवारों को रौंद दिया। बाईक के आगे का हिस्सा भी बस में फंसा रह गया, ड्राइवर द्वारा बस नहीं रोके जाने से बाईक बहुत दूर तक घसीटती हुई चली गई और दौरान अचानक से बाईक में आग भी लग गयी। सड़क हादसे में मृतक बाइक सवार की पहचान सागर कोल पुत्र रामाश्रय कोल उम्र 20 वर्ष निवासी रीवा, ग्राम जोंधी नबस्ता फैक्ट्री के पास के रूप में की गई है। हादसे में गंभीर रूप से घायल युवक प्रदुम कोल के रूप में की गई है। इस दर्दनाक दृश्य का लोगों ने वीड़ियो भी बनाया है।
तेज रफ्तार में जा रही बस क्रमांक MPउन्नीस Pदो हज़ार आठ सौ ग्यारह ने दो बाइक सवार युवकों को रौंद दिया जिससे इस हादसे में बाईक चला रहे युवक की मौके पर ही मौत हो गई वहीं पीछे बैठा उसका उसका साथी गंभीर रूप से घायल हो है, घटना एक वीड़ियो भी सामने आया है। mp accident news: सतना । सतना जिले के नेशनल हाईवे बेला-बमीठा पर गंभीर सड़क हादसा हुआ है। जहां तेज रफ्तार जा रही बस ने दो बाइक सवार युवकों को रौंद दिया। हादसे में बाईक चला रहे युवक की मौके पर ही मौत हो गई और पीछे बैठा उसका साथी गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना का एक वीडियो भी सामने आया है। बताया जा रहा है कि रामपुर बाघेलान थाना क्षेत्र के कोरिगवां मोड़ पर यह हादसा हुआ है। यह सतना स्मार्ट सिटी की बस से हुआ। हादसे के दौरान भी बस चालक ने लापरवाही बरती मौके पर बस को नही रोका गया जिससे जलती हुई बाइक बस में फंसी रह गयी और बहुत दूर तक घिसटती रही। सड़क दुर्घटना के प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा जानकारी दी गई है कि नेशनल हाईवे के कोरिगवां मोड़ से अंदर जाने के लिए दो पहिया वाहन पर सवार युवक सड़क पार कर रहे थे, इसी दौरान सतना की तरफ जा रही एक तेज रफ्तार में स्मार्ट सिटी की बस क्रमांक MPउन्नीस Pदो हज़ार आठ सौ ग्यारह ने बाइक सवारों को रौंद दिया। बाईक के आगे का हिस्सा भी बस में फंसा रह गया, ड्राइवर द्वारा बस नहीं रोके जाने से बाईक बहुत दूर तक घसीटती हुई चली गई और दौरान अचानक से बाईक में आग भी लग गयी। सड़क हादसे में मृतक बाइक सवार की पहचान सागर कोल पुत्र रामाश्रय कोल उम्र बीस वर्ष निवासी रीवा, ग्राम जोंधी नबस्ता फैक्ट्री के पास के रूप में की गई है। हादसे में गंभीर रूप से घायल युवक प्रदुम कोल के रूप में की गई है। इस दर्दनाक दृश्य का लोगों ने वीड़ियो भी बनाया है।
अयोध्या :मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के अवधपुरी में स्वागत की तैयारी हो रही है . रावण का संहार कर सीता, लक्ष्मण और वानर सेना के साथ अयोध्या लौट रहे प्रभु राम के स्वागत की संपूर्ण भावभूमि आकार ले चुकी है। सरयू किनारे रामकथा पार्क में बुधवार दोपहर पुष्पक विमान स्वरूप हेलीकॉप्टर से प्रभु राम, सीता व लक्ष्मण उतरेंगे। राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत मंत्रीगण और संत-धर्माचार्य दीप सजाकर प्रभु की अगवानी करेंगे। इसके बाद वे गुरू वशिष्ठ की भूमिका में भगवान श्रीराम का राजतिलक करेंगे। सीएम रामलला के दरबार भी जाएंगे इसके बाद मुख्यमंत्री योगी व राज्यपाल सहित कई मंत्री मां सरयू की भव्य आरती भी उतारेंगे। यहां लेजर शो, दीपों की माला के साथ रंग-बिरंगी अयोध्या स्वर्ग की भांति दिखेगी। राम की पैड़ी के 32 घाटों पर कीर्तिमान बनाने को नौ लाख दीप जलाकर साढ़े सात लाख दीप एक साथ 40 मिनट में जलाने और पांच मिनट तक जलते रहने का नया विश्व कीर्तिमान बनाने का लक्ष्य अवध के 12 हजार युवा साधेंगे। 2017 से शुरू हुए दीपोत्सव ने हर साल नए कीर्तिमान गढ़े हैं। गिनीज बुक की टीम हर साल बन रहे रिकॉर्ड की साक्षी रही है। इस बार एक नए रिकॉर्ड की साक्षी बनने के लिए गिनीज बुक की टीम अयोध्या पहुंच चुकी है। 2:30 बजे- भगवान श्रीराम सीता का हेलीकॉप्टर से आगमन। 3. 00 बजे- रामायण चित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन। 3:30 बजे - श्रीराम का राज्याभिषेक। 3:45 बजे- 12 हजार करोड़ की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास। 4:00 बजे -सीएम योगी आदित्यनाथ का भाषण। 5:20 बजे- सरयू आरती। 6:00 बजे -राम की पैड़ी पर दीपोत्सव की शुरूआत। 7:40 बजे -राम की पैड़ी पर आतिशबाजी और लेजर शो। 8:30 बजे - श्रीलंका के सांस्कृतिक दल द्वारा रामलीला मंचन।
अयोध्या :मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के अवधपुरी में स्वागत की तैयारी हो रही है . रावण का संहार कर सीता, लक्ष्मण और वानर सेना के साथ अयोध्या लौट रहे प्रभु राम के स्वागत की संपूर्ण भावभूमि आकार ले चुकी है। सरयू किनारे रामकथा पार्क में बुधवार दोपहर पुष्पक विमान स्वरूप हेलीकॉप्टर से प्रभु राम, सीता व लक्ष्मण उतरेंगे। राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत मंत्रीगण और संत-धर्माचार्य दीप सजाकर प्रभु की अगवानी करेंगे। इसके बाद वे गुरू वशिष्ठ की भूमिका में भगवान श्रीराम का राजतिलक करेंगे। सीएम रामलला के दरबार भी जाएंगे इसके बाद मुख्यमंत्री योगी व राज्यपाल सहित कई मंत्री मां सरयू की भव्य आरती भी उतारेंगे। यहां लेजर शो, दीपों की माला के साथ रंग-बिरंगी अयोध्या स्वर्ग की भांति दिखेगी। राम की पैड़ी के बत्तीस घाटों पर कीर्तिमान बनाने को नौ लाख दीप जलाकर साढ़े सात लाख दीप एक साथ चालीस मिनट में जलाने और पांच मिनट तक जलते रहने का नया विश्व कीर्तिमान बनाने का लक्ष्य अवध के बारह हजार युवा साधेंगे। दो हज़ार सत्रह से शुरू हुए दीपोत्सव ने हर साल नए कीर्तिमान गढ़े हैं। गिनीज बुक की टीम हर साल बन रहे रिकॉर्ड की साक्षी रही है। इस बार एक नए रिकॉर्ड की साक्षी बनने के लिए गिनीज बुक की टीम अयोध्या पहुंच चुकी है। दो:तीस बजे- भगवान श्रीराम सीता का हेलीकॉप्टर से आगमन। तीन. शून्य बजे- रामायण चित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन। तीन:तीस बजे - श्रीराम का राज्याभिषेक। तीन:पैंतालीस बजे- बारह हजार करोड़ की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास। चार:शून्य बजे -सीएम योगी आदित्यनाथ का भाषण। पाँच:बीस बजे- सरयू आरती। छः:शून्य बजे -राम की पैड़ी पर दीपोत्सव की शुरूआत। सात:चालीस बजे -राम की पैड़ी पर आतिशबाजी और लेजर शो। आठ:तीस बजे - श्रीलंका के सांस्कृतिक दल द्वारा रामलीला मंचन।
धीरेंद्र शास्त्री ने जवाब देते हुए कहा, 'देखिए डॉक्टर साहब आपका सवाल वर्तमान परिस्थिति के अनुसार बहुत जरूरी था। हमारे धर्म के शंकराचार्य जी ने साईं बाबा को देवताओं का स्थान नहीं दिया है। ' बागेश्वर धाम वाले धीरेंद्र शास्त्री बीते कुछ महीनों से सुर्खियों में हैं। अपने कथित चमत्कारों और बयानों को लेकर धीरेंद्र शास्त्री की मकबूलियत दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। बाबा बागेश्वर एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। इस बार धीरेंद्र शास्त्री ने साईं बाबा को लेकर एक बयान दिया है। बाबा बागेश्वर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में धीरेंद्र शास्त्री यह कहते हुए नजर आ रहे हैं कि वो साईं बाबा को भगवान नहीं मानते हैं। दरअसल, धीरेंद्र शास्त्री के एक भक्त ने उनसे एक सवाल पूछा। डॉक्टर शैलेंद्र राजपूत नाम के एक शख्स ने कथावाचक धीरेंद्र शास्त्र से पूछा कि 'मेरा एक सवाल है कि बहुत सारे लोग हमारे देश में साईं भक्त हैं। लेकिन सनातन धर्म साईं की पूजा को नकारता सा दिखता है। जबकि साईं की पूजा सनातन पद्धति से ही होता है। तो आप इसपर प्रकाश डालें। ' अपने भक्त के इस सवाल पर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि वो साईं को भगवान नहीं मानते हैं। धीरेंद्र शास्त्री ने जवाब देते हुए कहा, 'देखिए डॉक्टर साहब आपका सवाल वर्तमान परिस्थिति के अनुसार बहुत जरूरी है। हमारे धर्म के शंकराचार्य जी ने साईं बाबा को देवताओं का स्थान नहीं दिया है। और शंकराचार्य की बात मानना हर सनातनी का धर्म है क्योंकि वो अपने धर्म के प्रधानमंत्री हैं। और कोई भी संत चाहे हमारे धर्म के हों, चाहे वो तुलसीदास हो या सूरदास हों. . . वो संत हैं, महापुरुष हैं, युगपुरुष हैं लेकिन भगवान नहीं हैं। ' धीरेंद्र शास्त्री ने आगे कहा कि 'सबकी अपनी-अपनी आस्था है, हम किसी की आस्था को ठेस नहीं पहुंचा रहे हैं। पर इतना कह सकते हैं कि साईं बाबा संत हो सकते हैं, फकीर हो सकते हैं पर भगवान नहीं हो सकते हैंं। अब आपने कहा कि वैदिक धर्म से पूजा होती है तो देखो भाई गिदड़ की खाल पहनकर कोई शेर नहीं बन सकता। भगवान भगवान हैं और संत संत हैं। साईं के प्रति मेरा क्या आदर है आप इसमें मत पड़ना और न ही हमसे पूछना कि मेरा क्या आदर है। हम बस इतना कहेंगे कि जिसकी जैसी आस्था है रखनी चाहिए पर साईं भगवान नहीं हैं ऐसा हमारे शंकराचार्य कहते हैं अब आप उनके ऊपर सवाल उठा सकते हैं। ' साईं पर दिए बयान के बाद धीरेंद्र शास्त्री एक बार फिर चर्चा में हैं। दरअसल, कुछ दिनों पहले राजस्थान में धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था कि 'कुंभलगढ़ किले में जो हरे झंडे हैं उन्हे हटाकर भगवा लगा दो। ' शास्त्री के इस बयान के बाद राजस्थान पुलिस ने उनपर केस भी दर्ज किया था। वहीं धीरेंद्र शास्त्री के इस बयान के ठीक दो दिन बाद पुलिस ने पांच युवकों को गिरफ्तार किया था। दरअसल, यह पांच युवक किले में भगवा झंडा फहराने का प्रयास कर रहे थे।
धीरेंद्र शास्त्री ने जवाब देते हुए कहा, 'देखिए डॉक्टर साहब आपका सवाल वर्तमान परिस्थिति के अनुसार बहुत जरूरी था। हमारे धर्म के शंकराचार्य जी ने साईं बाबा को देवताओं का स्थान नहीं दिया है। ' बागेश्वर धाम वाले धीरेंद्र शास्त्री बीते कुछ महीनों से सुर्खियों में हैं। अपने कथित चमत्कारों और बयानों को लेकर धीरेंद्र शास्त्री की मकबूलियत दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। बाबा बागेश्वर एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। इस बार धीरेंद्र शास्त्री ने साईं बाबा को लेकर एक बयान दिया है। बाबा बागेश्वर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में धीरेंद्र शास्त्री यह कहते हुए नजर आ रहे हैं कि वो साईं बाबा को भगवान नहीं मानते हैं। दरअसल, धीरेंद्र शास्त्री के एक भक्त ने उनसे एक सवाल पूछा। डॉक्टर शैलेंद्र राजपूत नाम के एक शख्स ने कथावाचक धीरेंद्र शास्त्र से पूछा कि 'मेरा एक सवाल है कि बहुत सारे लोग हमारे देश में साईं भक्त हैं। लेकिन सनातन धर्म साईं की पूजा को नकारता सा दिखता है। जबकि साईं की पूजा सनातन पद्धति से ही होता है। तो आप इसपर प्रकाश डालें। ' अपने भक्त के इस सवाल पर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि वो साईं को भगवान नहीं मानते हैं। धीरेंद्र शास्त्री ने जवाब देते हुए कहा, 'देखिए डॉक्टर साहब आपका सवाल वर्तमान परिस्थिति के अनुसार बहुत जरूरी है। हमारे धर्म के शंकराचार्य जी ने साईं बाबा को देवताओं का स्थान नहीं दिया है। और शंकराचार्य की बात मानना हर सनातनी का धर्म है क्योंकि वो अपने धर्म के प्रधानमंत्री हैं। और कोई भी संत चाहे हमारे धर्म के हों, चाहे वो तुलसीदास हो या सूरदास हों. . . वो संत हैं, महापुरुष हैं, युगपुरुष हैं लेकिन भगवान नहीं हैं। ' धीरेंद्र शास्त्री ने आगे कहा कि 'सबकी अपनी-अपनी आस्था है, हम किसी की आस्था को ठेस नहीं पहुंचा रहे हैं। पर इतना कह सकते हैं कि साईं बाबा संत हो सकते हैं, फकीर हो सकते हैं पर भगवान नहीं हो सकते हैंं। अब आपने कहा कि वैदिक धर्म से पूजा होती है तो देखो भाई गिदड़ की खाल पहनकर कोई शेर नहीं बन सकता। भगवान भगवान हैं और संत संत हैं। साईं के प्रति मेरा क्या आदर है आप इसमें मत पड़ना और न ही हमसे पूछना कि मेरा क्या आदर है। हम बस इतना कहेंगे कि जिसकी जैसी आस्था है रखनी चाहिए पर साईं भगवान नहीं हैं ऐसा हमारे शंकराचार्य कहते हैं अब आप उनके ऊपर सवाल उठा सकते हैं। ' साईं पर दिए बयान के बाद धीरेंद्र शास्त्री एक बार फिर चर्चा में हैं। दरअसल, कुछ दिनों पहले राजस्थान में धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था कि 'कुंभलगढ़ किले में जो हरे झंडे हैं उन्हे हटाकर भगवा लगा दो। ' शास्त्री के इस बयान के बाद राजस्थान पुलिस ने उनपर केस भी दर्ज किया था। वहीं धीरेंद्र शास्त्री के इस बयान के ठीक दो दिन बाद पुलिस ने पांच युवकों को गिरफ्तार किया था। दरअसल, यह पांच युवक किले में भगवा झंडा फहराने का प्रयास कर रहे थे।
केलांग-पांच माह बाद वाहनों के लिए रोहतांग दर्रे के बहाल होते ही मंगलवार को कुल्लू-मनाली में फंसे लोगों की घर वापसी एक बार फिर शुरू हो गई है। मंगलवार को मनाली से रोहतांग दर्रे से होते हुए लाहुल के लिए 63 वाहनों में 291 लोगों को पहुंचाया गया। जानकारी के अनुसार मंगलवार सुबह ही कुल्लू व मनाली से लोगों को लाहुल भेजा गया। प्रशासन ने जहां सोमवार शाम को ही लाहुल भेजे जाने वाले लोगों की लिस्ट को फाइनल कर सभी आवेदनकर्ताओं को सूचित किया था, वहीं प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि आवेदन करने वाले लोगों को ही इस दौरान लाहुल भेजा जाएगा। ऐसे में मंगलवार सुबह 291 लोगों की सेहत पहले जहां कोठी में जांची गई, वहीं यहां तैनात स्वास्थ्य विभाग की टीम से ग्रीन सिग्नल मिलने के बाद लोगों को लाहुल की तरफ भेजा गया। रोहतांग दर्रा पार कर जैसे ही ये लोग लाहुल के प्रवेश द्वार कोकसर पहुंचे, तो वहां पर भी तैनात स्वास्थ्य विभाग की टीम ने इनकी सेहत की दोबारा जांच की और सब कुछ सही पा जाने पर इन्हें लाहुल में प्रवेश दिया। इसके अलावा पुलिस प्रशासन की टीम ने भी लाहुल में प्रवेश कर रहे लोगों व वाहनों का जहां पंजीकरण किया, वहीं क्रमबद्ध तरीके से लोगों को घाटी में भेजा गया। उधर, बीआरओ के अधिकारियों के हवाले से कहें तो रोहतांग दर्रे को सोमवार शाम को ही वाहनों के लिए बहाल किया गया है। करीब पांच माह बाद जहां बीआरओ के जवानों ने कड़ी मशक्कत कर रोहतांग दर्रे को बहाल किया है, वहीं लॉकडाउन के दौरान कुल्लू-मनाली में फंसे लाहुल के लोगों की घर वापसी का दूसरा चरण भी शुरू कर दिया गया है। उधर, कृषि मंत्री डा. रामलाल मार्कंडेय ने कहा कि कुल्लू-मनाली में फंसे लोगों की घर वापसी करवाई जा रही है। मंगलवार को वाहनों के माध्यम से लोगों को लाहुल पहुंचाया गया है।
केलांग-पांच माह बाद वाहनों के लिए रोहतांग दर्रे के बहाल होते ही मंगलवार को कुल्लू-मनाली में फंसे लोगों की घर वापसी एक बार फिर शुरू हो गई है। मंगलवार को मनाली से रोहतांग दर्रे से होते हुए लाहुल के लिए तिरेसठ वाहनों में दो सौ इक्यानवे लोगों को पहुंचाया गया। जानकारी के अनुसार मंगलवार सुबह ही कुल्लू व मनाली से लोगों को लाहुल भेजा गया। प्रशासन ने जहां सोमवार शाम को ही लाहुल भेजे जाने वाले लोगों की लिस्ट को फाइनल कर सभी आवेदनकर्ताओं को सूचित किया था, वहीं प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि आवेदन करने वाले लोगों को ही इस दौरान लाहुल भेजा जाएगा। ऐसे में मंगलवार सुबह दो सौ इक्यानवे लोगों की सेहत पहले जहां कोठी में जांची गई, वहीं यहां तैनात स्वास्थ्य विभाग की टीम से ग्रीन सिग्नल मिलने के बाद लोगों को लाहुल की तरफ भेजा गया। रोहतांग दर्रा पार कर जैसे ही ये लोग लाहुल के प्रवेश द्वार कोकसर पहुंचे, तो वहां पर भी तैनात स्वास्थ्य विभाग की टीम ने इनकी सेहत की दोबारा जांच की और सब कुछ सही पा जाने पर इन्हें लाहुल में प्रवेश दिया। इसके अलावा पुलिस प्रशासन की टीम ने भी लाहुल में प्रवेश कर रहे लोगों व वाहनों का जहां पंजीकरण किया, वहीं क्रमबद्ध तरीके से लोगों को घाटी में भेजा गया। उधर, बीआरओ के अधिकारियों के हवाले से कहें तो रोहतांग दर्रे को सोमवार शाम को ही वाहनों के लिए बहाल किया गया है। करीब पांच माह बाद जहां बीआरओ के जवानों ने कड़ी मशक्कत कर रोहतांग दर्रे को बहाल किया है, वहीं लॉकडाउन के दौरान कुल्लू-मनाली में फंसे लाहुल के लोगों की घर वापसी का दूसरा चरण भी शुरू कर दिया गया है। उधर, कृषि मंत्री डा. रामलाल मार्कंडेय ने कहा कि कुल्लू-मनाली में फंसे लोगों की घर वापसी करवाई जा रही है। मंगलवार को वाहनों के माध्यम से लोगों को लाहुल पहुंचाया गया है।
कस्त्रों में जहां हमारी बस्ती हो खुलना जाति के लिये लाभ दायक है। ताकि जाति में अधिक पढ़े लिखे और अधिक विद्वान् मिलें । इस विषय में आजकल साधु मुनि आदि भी अच्छा प्रयत्न कर रहे हैं यह हर्ष का विषय है । इन महात्माओं की प्रेरणा से उनमें धर्म शिक्षा भी दी जाती है प्रायः सामायिक, प्रतिक्रमण, देववंदन और जीव विचार तथा नव तत्व की शिक्षा दी जाती है, इनको मौखिक कराया जाता है । इस वर्म शिक्षा से विद्यार्थियोंको चरित्र बल उन्नत करने में कुछ विशेष सहायता नहीं मिलती इसलिये यदि ये अर्थ सहित सिखलाये जावें तथा १८ पापस्थानक के विषयों पर उनको व्याख्यान सुना सुनाकर उनके हृदय तक उन अठारह पापोंकी बुराई की जानकारी उतारी जावे तो उनके चरित्र बलको उन्नत होने में, सदाचार का ज्ञान होने में और सदाचारी बननेमें यह धार्मिक शिक्षा अत्यन्त सहायक हो सकती है और धर्म शिक्षा देनेका हेतु सिद्ध हो सकता है । इसी तरह यदि इन शिक्षालयों में कुछ कुछ हाथका काम भी सिखाया जाया करे तो बड़ा लाभ हो सकता है । कताई बुनाई, पिंजाई, सिलाई, रंगाई, छपाई, लकड़ीका काम, कलईका काम, झलाईका काम, कम्पोजिंगका काम, छापनेका काम, घड़ी साजीका काम और रसोई बनाने का काम इत्यादि हुन्नर ऐसे हैं जिनसे स्वावलम्बी बनाया जा सकता है । ये आसानी से सिखाये जा सकते हैं और यदि किसी भी धंधे में अच्छी रुचि उत्पन्न हो जावे और प्रवीण हो जावे तो नौकरी के लिये उसे दुर दुर नहीं भटकना पड़ेगा और भूखे भी नहीं मरना पड़ेगा । यदि प्राथमिक तीन कक्षाओं में बालक और बालिकाओंको साथ ही पढ़ाये जावें तो इससे न तो किसी प्रकार की हानि है बल्कि लाभ है । जिन अध्यापिकाओंके पास कन्याऐं पढ़ती हैं उनके पास ही यदि बालक पढ़ेंगे तो प्रथम तो खर्च में कमी होगी इसलिये अधिक योग्य अध्यापिकाएँ रखी जा सकेंगी। द्वितीय स्वजातीय भाई बहिनोंका परस्पर परिचय हो जावेगा और तृतीय एक दूसरे के साथ सभ्यतापूर्वक रहनेका अभ्यास हो जायेगा और चतुर्थ बालकों को अध्यापिका ओंके पास पढ़ना अधिक स्नेहयुक्त प्रतीत होगा जिससे वे अधिक उत्तम पढ़ सकेंगे । तीसरी कक्षा की पढ़ाई ९ वें वर्ष तक प्रायः - सब पूर्ण कर लेते हैं । इतनी छोटी उम्र में भी बालक बालिकाओं के ·साथ पढ़नेकी बातमें आशंका का कोई कारण नहीं है । स्त्री पुरुषों में एक दूसरे से पृथक रहते रहते वह संयम और सभ्यता लुप्त होगई है जो साथ रहने से जागृत रहती है । इसका प्रयोग अमेरिका में और 'एशिया में किया गया है और इसको लाभदायी पाया है, इस संगति से बाल्यकालमें ही संयमका अभ्यास हो जाता है । इसी तरह अपने यहां की पाठशालाओं में आरोग्यता संबंधी ( शरीरबल कायम रखने संबंधी, व्यायाम संबंधी तथा सफाई संबंधी ) शिक्षाका भी नियमित रूपसे दिया जाना अत्यावश्यक है । सफाई रखनेमें हम लोग इतने पीछे हैं कि यदि अंग्रेज लोग हम पर हँसे और हमको हीन दृष्टिसे देखें तो आश्चर्य की क्या बात है ? हम लोग जेवर पहिनने में व्यय कर सकते हैं किन्तु कपड़े साफ रखनेमें और मकानकी सफाई रखने खर्च नहीं कर सकते । यदि खर्च नहीं कर सकते तो हाथ से श्रम करके सफाई रख सकते हैं परन्तु हाथसे श्रम नहीं करते । घरमें अनुपयोगी सामान बहुत सा रखेंगे, कचरा बढ़ावेंगे पर हमसे उसका भी मोह न छुटेगा चाहे वह उम्रभर काममें न आवे परन्तु न तो हमसे वह किसीको दिया जा सकेगा और न फरोख्त ही किया जा सकेगा चाहे हमारी मकान की सफाई में वह अटाला कितना ही बाधक हो । हम लोग सफाई के संबंध में हमेशा म्युनिसिपल या कारपोरेशनवालोंको दोष दिया करते हैं किन्तु हम स्वयं कम दोषी नहीं होते मकान में हरकहीं नाक साफ कर पोंछ देना, थुंक देना, रास्ते में पिशाब करनेको बैठ जाना, पानी तथा कूड़ा आदि फैंक देना हमारी आदत हो गई है । कभी कभी तो हम लोग जल के उपयोग करने में जल कायके जीवोंकी हिंसा से भयभीत होकरके भी सफाई की ओर अपनी उदासीनता दिखला देते हैं । किन्तु यह बात भूल जाते हैं कि स्थावर एकेन्द्रिय जल कायकी हिंसा से बचकर यदि सफाई न रहकर मैल संग्रह होने देंगे तो बेइंद्रिीय त्रस जीवोंकी उत्पत्ति होगी और उत्पन्न होगा वह मरेगा भी अवश्य । जल काय के जीव तो अपनी स्वाभाविक मृत्युसे मरते हैं, किन्तु इन बेइन्द्रिय त्रस कायके ज़ूओं, लीकों तथा अन्य मेलमें रहनेवाले सूक्ष्म जन्तुओंकी उत्पत्ति और मुत्यु हमारे अज्ञानके कारण होंगे । इसलिये इस कई गुण अधिक हिंसाके दोषी भी हम ही होंगे । इससे तो अच्छा है कि हम · उचित सफाई रखनेके निमित्त आवश्यक जलको काम में लेकर यथेष्ट सफाई रक्खा करें, अलवत्ता जलको छानकर काममें लिया करें जिससे त्रस जीवोंकी रक्षा भी की जा सके । इसी ही प्रकार से आरोग्य संबंधी कितनी ही बातों का ज्ञान करा देना अत्यन्त आवश्यक है । जिसकी • उपयोगिता जीवन में पद पद पर सिद्ध होगी। कितने ही शिक्षालयों में पढ़ाई पर तो बहुत अधिक जोर दिया जाता है किन्तु खेल वगैरह पर कुछ ध्यान नहीं दिया जाता । यदि बालकोंको ६ घंटे पढ़ाया जावे तो कमसे कम २ घंटे तो नित्य खेलाना भी चाहिये जिससे उनका दिल बहलाव हो उनमें स्फुर्ती आवे और सहज व्यायाम भी हो जावे अन्यथा वालक सुस्त और जावेंगे और पढ़नेमें भी अच्छे नहीं रहेंगे । इसी तरह पुस्तकालय भी बड़ी उपयोगी संस्था होती है, उनमें जाकर छोटे बड़े सभी लोग विविध प्रकारकी पुस्तकें और समाचार पत्र पढ़ते हैं। घर पर भी पढ़नेको पुस्तकें लाते हैं और पढ़कर नियत अवधिमें लौटा दिया करते हैं। इन पुस्तकालयों में इस बातकी वडी आवश्यकता है कि पत्र और पुस्तकें जो यहां भेट में प्राप्त करके अथवा मुल्यसे खरीद करके पढ़ने के लिये रखी जावें वे बड़ी बुद्धिमानी से चुनाव करके रखी जावें ताकि ऐसे पत्र और पुस्तकोंसे पाठकों को उचित और आवश्यक लाभ मिले किन्तु हानि किसी प्रकारसे नहीं पहोंचे क्योंकि कई पुस्तकें इस तरह की भी होती हैं । जितनी भी संस्थाएँ हमारी जातिकी अभी चल रही हैं वहुधा धार्मिक शिक्षा की प्राप्तिके वहानेसे ही स्थापित हुई हैं और धार्मिक समर्थन भी उनको मिलता रहता है और कितनी ही संस्थाओंको कितने ही हमारे धर्म गुरू भी सहायता करवाते हैं । कैसे भी हों ये संस्थाएँ 'धार्मिकके अतिरिक्त सांसारिक शिक्षा भी देती हैं और हमारी जातिमें शिक्षा प्रचार कर हमको उन्नत ही करती हैं । अनेक स्थानों में ये शालाएँ साम्प्रदायिक होती हैं । कहीं स्थानक वासियोंकी तो कहीं मंदिर मार्गियों की । इन संस्थाओं में भेद भाव निरर्थक है । उत्तम हो यदि ये संस्थाऐं मात्र ओसवालों की ( मिश्रित ) हो । उन में धार्मिक शिक्षा जो जिनको जैसी मान्य हो दी जाये और जो पृथक् किसी को मान्य हो उसको उसकी आम्नाय के अनुसार दी जावे । सरदार हाईस्कूल जोधपुर और ओसवाल जैन स्कूल अजमेर में ऐसा ही है प्रथम तो हमारी जातिकी शालाऐं है ही बहुत कम जिसका कारण है कार्यकर्ताओं की कभी तथा अभाव । कन्या शालाऐं तो कितने ही बड़े बड़े कस्त्रों व नगरों तक में नहीं हैं । जितनी स्त्री शालायें हैं उनमें भी बहुत करके तो प्राथमिक ३-४ कक्षाओं तक शिक्षा दी जाती है, कुछ अंगुलियों पर गिनभे जितनी शालाऐं ऐसी हैं जो मिडिल तक या एक दो ऐसी भी हैं जो ऐन्ट्रैन्स तक शिक्षा देती हैं किन्तु इस जमानेमें ज्यों २ अंग्रेजी शिक्षा का प्रचार बढ़ रहा है त्यों त्यों उच्च शिक्षा की आवश्यकता भी अधिक बढ़ रही है । जो पद पहले ऐन्ट्रैन्स पास हो जाने पर प्राप्त हो सकता था उसके लिये अव बी. ए. पास करने की आवश्यकता है । ऐसी दशामें गरीब भाइयोंकी तो बड़ी ही कठिनाई है क्योंकि खर्च पढ़नेमें इतना बढ़ गया है कि साधारण आदमीको तो पढ़ना ही असंभव हो गया है । कितने ही छात्र राजपुतानामें पढ़नेके लिये, उच्च शिक्षाके लिये, पानी वगैर तड़फती हुई मछली की तरह आर्थिक सहायता के लिये प्रयत्न करते फिरते हैं । भाग्यसे ही किसी एक आध को कहीं से सहायता मिल जाती है शेष नाउम्मेद होकर बैठे जाते हैं धनिक भाइयों के लिये यह अपनी जाति सेघाका सुअवसर है ऐसे छात्रों को रूपया ऋण दे करके उनको उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सहायता दे जिनके लिये उन्हें विश्वास रखना चाहिये कि ये द्रव्योपार्जन करेंगे तत्र अवश्य चुका देंगे। ऐसे फंड खोलने की महान आवश्यकता है । किन्तु इस शिक्षा सहायता को वही कर सकेगा जो शिक्षा की कदर जानता होगा । शिक्षा के भूखों के कष्ट को पहचानता होगा और जातिके प्रति सच्चा सेवाभाव रखनेवाला होगा। ऐसे सुकृतमें निज द्रव्य का उपयोग होना भाग्यवानी है । जिसने पूर्वजन्ममें शुभ कर्म किये हो उसको यह भाग्यवानी प्राप्त हो सकती है । ऐसी संस्था ओसवाल नातिमें खानदेशमें है जो छात्रवृत्ति देकर उम्र वर्गमें शिक्षा प्राप्त करनेवालोंको सहायता देती है। किन्तु प्रथम तो वह एक जिले के लिये है वचत हो तो अन्य जिलों में सहायता देती है, दूसरे उसका फंड इतना बड़ा नहीं है कि सब स्थानवालों को सहायता दे सके । कॉलेज खोलनेसे पहले इस फंड का खोलना अधिक सहज और उपयोगी होगा और इससे भी अधिक उपयोगी बड़े बड़े शिक्षाकेन्द्रों के स्थानों में महावीर विद्यालय जैसे छात्रालय. खोलना होगा किन्तु वह उतना सहज कार्य नहीं है । हमारी जाति की चलती हुई जितनी भी संस्थाएँ हैं उनकी ८० प्रतिशतकी आर्थिक स्थिति दुर्बल पाती है । प्रथम तो अपनी जातिमें कार्यकर्ताओं का ही अभाव है यदि इने गिने कार्यकर्त्ता विचारे अपना घर का काम छोड़कर जातिके कार्य करनेमें समय देते हैं, तो लोगों का आर्थिक सहायता देने में अनुत्साह देखकर वे स्वयं निरुत्साहित हो जाते हैं । अनेक प्रकारके प्रयत्न उनको संस्थाओं का खर्च चलने के निमित्त करने पड़ते हैं, जिसमें उनका इतना समय चला जाता है कि संस्थाओंमें किस प्रकार शिक्षादि विषय में सुधार तथा उन्नति की जा सकती है इसका विचार करनेका ही उनको अवकाश नहीं मिलता और फल यह होता है कि संस्थाऐं साधारण दशामें चलती हैं अधिक उन्नत नहीं हो सकती । दूसरी आपत्ति एक यह भी होती है कि जो उन संस्थाओं को अच्छी सहायता देते हैं उन ही को सभापति या प्रधान बनाया जाता है ! उन ही के उस संस्था पर शासनाधिकार भी रहते हैं । संस्था उन ही की सहायता पर और मंत्री के परिश्रम पर ही निर्भर रहती है किसी कार्य से नाराज होकर पदाधिकारियों और सभासदों में फूट पड़ जाती है और इन दोनों के झगड़ों में संस्था ढिली पड़ जाती हैं और उठ भी जाती है ( अजमेर में ओसवाल जैन बोर्डिंग हाउस ऐसे ही कारणों से उठा था । ) यदि संस्थाओं की आर्थिक स्थिति उत्तम रहती हो तो न तो कार्यकर्ता निरुत्साहित होकर भागें और न कोई मनमानी कर सके कारण संस्था किसी पर निर्भर तो रहे नहीं वह तो सारों पर निर्भर रहे, कुछ रूठ भी जाये तो क्या हो और इस प्रकार संस्था को धक्का न लगे इसलिये हमारी संस्थाओं में ऐसे नियंत्रण की आवश्यकता है जिसमें जाति के प्रत्येक बन्धु से सहायता मिला करे जिसकी जितनी शक्ति हो उससे उतनी ही ली जाया करे और न मूल कोष ही संस्थाओं में होना चाहिये, जिससे कि कार्यकर्ता मनमानी इतनी कर सकें कि फिर उनको किसी से कुछ सहानुभूति की ही आवश्यकता नहीं रहे तथापि संस्थाओं क भवन ( मकान ) निजी - आवश्य होना चाहिये । हमारी संस्थाओं की आर्थिक स्थिति ( आय ) तब ही उत्तम हो, सकेगा जब हमारी जाति, शिक्षा के महत्व को अच्छी तरह समझ जावेगी और द्रव्य के सदुपयोग के महत्त्व को अच्छी तरह समझ जावेगी । भूलना नहीं चाहिये कि सदाचार के पश्चात् यदि कोई उपयोगी और आवश्यक वस्तु है तो शिक्षा है । सदाचार हृदय को उन्नत करता है तो शिक्षा बुद्धि को उन्नत करती है । अशिक्षित सदाचारी विशेष उपयोगी नहीं तो असदाचारी शिक्षित किसी भी उपयोगका नहीं । सदाचार और शिक्षा दोनों हो तब ही सोना और सुगंधि हैं । यही ज्ञान और क्रिया हैं । ज्ञान वगैर क्रिया अन्ध है और क्रिया बगैर अपंग है । सदाचार सम्यञ्चारित्र का कारण है और शिक्षा सम्यकज्ञान का कारण सदाचार का प्रचार करने के लिये और दुराचार को मिटाने के लिये वा दूसरे शब्दों में कहें तो सामाजिक कुरीतियां मिटाने के लिये कुसंप हटाने के लिये और अविद्या को दूर करने के लिये तथा संप, शिक्षा और सुरीतियों को प्रचार करने के लिये भी हमारी ओसवाल जाति में अनेक मण्डल, सभाएँ, समितिएँ, सोसायटिएँ और महासभा खुली हैं उनका प्रारम्भ समय का जोश देख कर तो उनको शूर वीर कहना भी अनुचित नहीं हैं किन्तु कुछ दिवस पश्चात् ही जब परस्पर ही कार्यकर्ताओं में फूट फैलने लगे, पार्टी वन्दी होने लगे तो न मालुम वह प्रारम्भिक जोश कहां छुप जाता है, जातिभर में सम्प कराने की इच्छा वालों से अपने परस्पर ही सम्प नहीं किया जाता । उनको देख कर लोग हँसते हैं और उनकी मजाक उड़ाते हैं देखो इन्होंने कैसी उन्नति की है ? यदि आपस में पार्टी बन्दी नहीं होती तो सुस्ती और निरुत्साहित फैल जाती है और कार्य कुछ नहीं होता। क्या ही अच्छा हो कि प्रथम आरम्भही में अत्यधिक जोश नहीं दिखलाया जावे । जोश थोड़ा ही रखा जाबे परन्तु स्थायी रखा जावे । उसमें सभासद कम होवे तो परवाह नहीं किन्तु ऐसे सभासद नहीं लिये जावें जिनमें किसी सभासद को उन्न हो वा जिनको सभासद बनाने में केवल • सभासदों की संख्या मात्र बढ़ती हो । जिनमें सभासद होनेकी योग्यता हो और जो जाति सेवा की रूचि रखते हों उन्हीं को सभासद बनाया जावे । ५० निरूत्साही अकर्मण्य सभासद इतने लाभदायक नहीं निकलेंगे जितने १० उत्साही और स्थायी जोशवाले सभासद लाभदायक निकलेंगे । इन सभाओं को प्रस्ताव कम पास - करना चाहिये और उनको कार्य में उत्तम रीति स परिणत करते रहना चाहिये इससे उनमें निश्चय बल की शक्ति उत्पन्न हो जावेगी इनके अतिरिक्त समय की और नियमों की पावन्दी पर भी यथेष्ट लक्ष रखना चाहिये जिससे न तो कभी फूट पड़ेगी और न स्तुति फैल सकेगी । उन्हें यह भी अवश्य ध्यान में रखना चाहिये कि इस • सभा के द्वारा प्रथम हमारा सुधार होवेगा तब जनता का होवेगा । . इन बातों के अभाव में कितनी ही सभाएँ अल्प आयु में ही अपना अस्तित्व समाप्त कर देती हैं । समाचार पत्र आदि भी एक प्रकारकी शिक्षा संस्थाही है जिनका कार्य होता है समाज की परिस्थिति को प्रगट करते रहना और • समाजको उचित माग वल पाते हुवे आदश की ओर बढ़ाते चल जाना । प्रत्येक धर्म संप्रदाय, प्रत्येक समाज, प्रत्येक राजनीतिज्ञ और प्रत्येक तरहके प्रचारक इसी साधनसे वर्तमान छापा युगमें अपना प्रचार कार्य करते हैं । करीव १० वर्षसे " ओसवाल " नामक एक मासिक पत्र हमारी जातिमें भी चल रहा है । उसका प्रारंभ रायसाहेब श्री किशनलालजी बाफना ने जोधपुरसे किया था और शीघ्रही वहां की ओसवाल यंग मेन्स सोसायटी को प्रकाशनार्थ सम्हला दिया था । कुछ वर्ष पश्चात् अखिल भारतवर्षीय ओसवाल युवक महा मण्डल की स्थापना हुई जिसको सोसायटीने सम्हला दिया । महामंडल स्वयं धराशायी हो गया और इस पत्रको बन्द कर देनेकी नौबत आन पहुँची तब आगरा निवासी श्रीयुत पदमसिंहजीने इसको अभयदान देकर ले लिया । इनने कुछ वर्ष तो संपादन तथा प्रकाशन दोनों कार्य किये किन्तु कुछ वर्ष पश्चात् संपादन का कार्य उन्होंने कितने ही अन्य सज्जनों से कराया और प्रकाशन स्वयं करते रहे हैं । आजकल भी वे ही प्रकाशन कर रहे हैं और सुजानगढ़ निवासी श्रीयुत पृथ्वीराजजी. डागा सम्पादन कार्य कर रहे हैं । श्रीयुत पदमसिंहजीने इसको अब तक जीवित रखा है जिसके. लिये वे धन्यवाद के पात्र हैं किन्तु इस बातका हमें वड़ा खेद है कि पत्र की दशा इतने वर्ष हो जाने पर भी और योग्य संपादकों के. हाथ में जाते रहने पर भी तथा अनेक जाति सेवकों द्वारा चुप चाप घाटापूर्ति होते रहने पर भी ऐसी है कि जैसी प्रारंभ कालमें थी । । इस पत्र से जो लाभ जाति को पहुँचना चाहिये था नहीं पहुँचा और सदा. दरियाफ्त करने पर यही मालूम हुआ कि प्रकाशक महाशयकी ओरसे. विलम्ब होता है तथा अन्य त्रुटियां रहती है। उधर प्रकाशक महाशय को सदा आर्थिक शिकायत तथा अवकाश की कमी है । हमारी अल्प सम्मति में यदि उनको अवकाश नहीं है तो प्रकाशन कार्य भी या तो किसी अन्य सज्जन को सौंपना वा कुछ समयके लिये बन्द कर दिया जाना भी बुरा न था ताकि या तो कोई अन्य सज्जन बन्द होता देखकर साहस कर लेते या कुछ समय पश्चात् पुनः निकाला जाता । इस पत्र का हिसाब यदि प्रति वर्ष इस पत्रमें प्रकाशित कर दिया जाता तो भी इस पत्र का जीवन इतना संकटग्रस्त नहीं रहता । जो कुछ इसकी दशा हो रही है उससे तो शीघ्र ही इसकी मुक्ति आवश्यक है या तो. दिसाव प्रकट किया जाये और आवश्यक सहायता समाजसे भी. दी जावे और इसको उत्तम स्थिति में सुधारकर लाया जावे या बन्द ही. किया जावे । ऐसी परिस्थिति तो वांछनीय नहीं है । " ओसवाल नव युवक नामक मासिक पत्र भी कलकत्ते से. निकला है । पत्र का प्रकाशन तथा कार्यकर्ताओंका नोश ( प्रकाशक ओसवाल नवयुवक समिति की ओरसे कार्य करते हैं ) अच्छा उत्साह पूर्ण है किन्तु सम्पादन तथा लेखों में अभी बहुत आगे बढ़ने की आवश्यकता है । इसके संचालकों को धन्यवाद देते हैं और आशा. करते हैं कि इनका जोश स्थायी होगा न कि केवल प्रारंभिक । सामाजिक संस्थायें । ऐसे तो अनेक गांवों में हमारे सुधार प्रिय युवक छोटी संस्थायें स्थापन कर रक्खी हैं, किन्तु जिनका अखिल ओसवाल समाजसे संबंध हैं वे केवल दो ही संस्थायें थी । ( १ ) अखिल भारतवर्षीय ओसवाल महासभा (२) अखिल भारतवर्षीय नवयुवक महामंडल, महासभाका जन्म वोदवड़में और महामंडलका जोधपुरमें जन्म हुआ
कस्त्रों में जहां हमारी बस्ती हो खुलना जाति के लिये लाभ दायक है। ताकि जाति में अधिक पढ़े लिखे और अधिक विद्वान् मिलें । इस विषय में आजकल साधु मुनि आदि भी अच्छा प्रयत्न कर रहे हैं यह हर्ष का विषय है । इन महात्माओं की प्रेरणा से उनमें धर्म शिक्षा भी दी जाती है प्रायः सामायिक, प्रतिक्रमण, देववंदन और जीव विचार तथा नव तत्व की शिक्षा दी जाती है, इनको मौखिक कराया जाता है । इस वर्म शिक्षा से विद्यार्थियोंको चरित्र बल उन्नत करने में कुछ विशेष सहायता नहीं मिलती इसलिये यदि ये अर्थ सहित सिखलाये जावें तथा अट्ठारह पापस्थानक के विषयों पर उनको व्याख्यान सुना सुनाकर उनके हृदय तक उन अठारह पापोंकी बुराई की जानकारी उतारी जावे तो उनके चरित्र बलको उन्नत होने में, सदाचार का ज्ञान होने में और सदाचारी बननेमें यह धार्मिक शिक्षा अत्यन्त सहायक हो सकती है और धर्म शिक्षा देनेका हेतु सिद्ध हो सकता है । इसी तरह यदि इन शिक्षालयों में कुछ कुछ हाथका काम भी सिखाया जाया करे तो बड़ा लाभ हो सकता है । कताई बुनाई, पिंजाई, सिलाई, रंगाई, छपाई, लकड़ीका काम, कलईका काम, झलाईका काम, कम्पोजिंगका काम, छापनेका काम, घड़ी साजीका काम और रसोई बनाने का काम इत्यादि हुन्नर ऐसे हैं जिनसे स्वावलम्बी बनाया जा सकता है । ये आसानी से सिखाये जा सकते हैं और यदि किसी भी धंधे में अच्छी रुचि उत्पन्न हो जावे और प्रवीण हो जावे तो नौकरी के लिये उसे दुर दुर नहीं भटकना पड़ेगा और भूखे भी नहीं मरना पड़ेगा । यदि प्राथमिक तीन कक्षाओं में बालक और बालिकाओंको साथ ही पढ़ाये जावें तो इससे न तो किसी प्रकार की हानि है बल्कि लाभ है । जिन अध्यापिकाओंके पास कन्याऐं पढ़ती हैं उनके पास ही यदि बालक पढ़ेंगे तो प्रथम तो खर्च में कमी होगी इसलिये अधिक योग्य अध्यापिकाएँ रखी जा सकेंगी। द्वितीय स्वजातीय भाई बहिनोंका परस्पर परिचय हो जावेगा और तृतीय एक दूसरे के साथ सभ्यतापूर्वक रहनेका अभ्यास हो जायेगा और चतुर्थ बालकों को अध्यापिका ओंके पास पढ़ना अधिक स्नेहयुक्त प्रतीत होगा जिससे वे अधिक उत्तम पढ़ सकेंगे । तीसरी कक्षा की पढ़ाई नौ वें वर्ष तक प्रायः - सब पूर्ण कर लेते हैं । इतनी छोटी उम्र में भी बालक बालिकाओं के ·साथ पढ़नेकी बातमें आशंका का कोई कारण नहीं है । स्त्री पुरुषों में एक दूसरे से पृथक रहते रहते वह संयम और सभ्यता लुप्त होगई है जो साथ रहने से जागृत रहती है । इसका प्रयोग अमेरिका में और 'एशिया में किया गया है और इसको लाभदायी पाया है, इस संगति से बाल्यकालमें ही संयमका अभ्यास हो जाता है । इसी तरह अपने यहां की पाठशालाओं में आरोग्यता संबंधी शिक्षाका भी नियमित रूपसे दिया जाना अत्यावश्यक है । सफाई रखनेमें हम लोग इतने पीछे हैं कि यदि अंग्रेज लोग हम पर हँसे और हमको हीन दृष्टिसे देखें तो आश्चर्य की क्या बात है ? हम लोग जेवर पहिनने में व्यय कर सकते हैं किन्तु कपड़े साफ रखनेमें और मकानकी सफाई रखने खर्च नहीं कर सकते । यदि खर्च नहीं कर सकते तो हाथ से श्रम करके सफाई रख सकते हैं परन्तु हाथसे श्रम नहीं करते । घरमें अनुपयोगी सामान बहुत सा रखेंगे, कचरा बढ़ावेंगे पर हमसे उसका भी मोह न छुटेगा चाहे वह उम्रभर काममें न आवे परन्तु न तो हमसे वह किसीको दिया जा सकेगा और न फरोख्त ही किया जा सकेगा चाहे हमारी मकान की सफाई में वह अटाला कितना ही बाधक हो । हम लोग सफाई के संबंध में हमेशा म्युनिसिपल या कारपोरेशनवालोंको दोष दिया करते हैं किन्तु हम स्वयं कम दोषी नहीं होते मकान में हरकहीं नाक साफ कर पोंछ देना, थुंक देना, रास्ते में पिशाब करनेको बैठ जाना, पानी तथा कूड़ा आदि फैंक देना हमारी आदत हो गई है । कभी कभी तो हम लोग जल के उपयोग करने में जल कायके जीवोंकी हिंसा से भयभीत होकरके भी सफाई की ओर अपनी उदासीनता दिखला देते हैं । किन्तु यह बात भूल जाते हैं कि स्थावर एकेन्द्रिय जल कायकी हिंसा से बचकर यदि सफाई न रहकर मैल संग्रह होने देंगे तो बेइंद्रिीय त्रस जीवोंकी उत्पत्ति होगी और उत्पन्न होगा वह मरेगा भी अवश्य । जल काय के जीव तो अपनी स्वाभाविक मृत्युसे मरते हैं, किन्तु इन बेइन्द्रिय त्रस कायके ज़ूओं, लीकों तथा अन्य मेलमें रहनेवाले सूक्ष्म जन्तुओंकी उत्पत्ति और मुत्यु हमारे अज्ञानके कारण होंगे । इसलिये इस कई गुण अधिक हिंसाके दोषी भी हम ही होंगे । इससे तो अच्छा है कि हम · उचित सफाई रखनेके निमित्त आवश्यक जलको काम में लेकर यथेष्ट सफाई रक्खा करें, अलवत्ता जलको छानकर काममें लिया करें जिससे त्रस जीवोंकी रक्षा भी की जा सके । इसी ही प्रकार से आरोग्य संबंधी कितनी ही बातों का ज्ञान करा देना अत्यन्त आवश्यक है । जिसकी • उपयोगिता जीवन में पद पद पर सिद्ध होगी। कितने ही शिक्षालयों में पढ़ाई पर तो बहुत अधिक जोर दिया जाता है किन्तु खेल वगैरह पर कुछ ध्यान नहीं दिया जाता । यदि बालकोंको छः घंटाटे पढ़ाया जावे तो कमसे कम दो घंटाटे तो नित्य खेलाना भी चाहिये जिससे उनका दिल बहलाव हो उनमें स्फुर्ती आवे और सहज व्यायाम भी हो जावे अन्यथा वालक सुस्त और जावेंगे और पढ़नेमें भी अच्छे नहीं रहेंगे । इसी तरह पुस्तकालय भी बड़ी उपयोगी संस्था होती है, उनमें जाकर छोटे बड़े सभी लोग विविध प्रकारकी पुस्तकें और समाचार पत्र पढ़ते हैं। घर पर भी पढ़नेको पुस्तकें लाते हैं और पढ़कर नियत अवधिमें लौटा दिया करते हैं। इन पुस्तकालयों में इस बातकी वडी आवश्यकता है कि पत्र और पुस्तकें जो यहां भेट में प्राप्त करके अथवा मुल्यसे खरीद करके पढ़ने के लिये रखी जावें वे बड़ी बुद्धिमानी से चुनाव करके रखी जावें ताकि ऐसे पत्र और पुस्तकोंसे पाठकों को उचित और आवश्यक लाभ मिले किन्तु हानि किसी प्रकारसे नहीं पहोंचे क्योंकि कई पुस्तकें इस तरह की भी होती हैं । जितनी भी संस्थाएँ हमारी जातिकी अभी चल रही हैं वहुधा धार्मिक शिक्षा की प्राप्तिके वहानेसे ही स्थापित हुई हैं और धार्मिक समर्थन भी उनको मिलता रहता है और कितनी ही संस्थाओंको कितने ही हमारे धर्म गुरू भी सहायता करवाते हैं । कैसे भी हों ये संस्थाएँ 'धार्मिकके अतिरिक्त सांसारिक शिक्षा भी देती हैं और हमारी जातिमें शिक्षा प्रचार कर हमको उन्नत ही करती हैं । अनेक स्थानों में ये शालाएँ साम्प्रदायिक होती हैं । कहीं स्थानक वासियोंकी तो कहीं मंदिर मार्गियों की । इन संस्थाओं में भेद भाव निरर्थक है । उत्तम हो यदि ये संस्थाऐं मात्र ओसवालों की हो । उन में धार्मिक शिक्षा जो जिनको जैसी मान्य हो दी जाये और जो पृथक् किसी को मान्य हो उसको उसकी आम्नाय के अनुसार दी जावे । सरदार हाईस्कूल जोधपुर और ओसवाल जैन स्कूल अजमेर में ऐसा ही है प्रथम तो हमारी जातिकी शालाऐं है ही बहुत कम जिसका कारण है कार्यकर्ताओं की कभी तथा अभाव । कन्या शालाऐं तो कितने ही बड़े बड़े कस्त्रों व नगरों तक में नहीं हैं । जितनी स्त्री शालायें हैं उनमें भी बहुत करके तो प्राथमिक तीन-चार कक्षाओं तक शिक्षा दी जाती है, कुछ अंगुलियों पर गिनभे जितनी शालाऐं ऐसी हैं जो मिडिल तक या एक दो ऐसी भी हैं जो ऐन्ट्रैन्स तक शिक्षा देती हैं किन्तु इस जमानेमें ज्यों दो अंग्रेजी शिक्षा का प्रचार बढ़ रहा है त्यों त्यों उच्च शिक्षा की आवश्यकता भी अधिक बढ़ रही है । जो पद पहले ऐन्ट्रैन्स पास हो जाने पर प्राप्त हो सकता था उसके लिये अव बी. ए. पास करने की आवश्यकता है । ऐसी दशामें गरीब भाइयोंकी तो बड़ी ही कठिनाई है क्योंकि खर्च पढ़नेमें इतना बढ़ गया है कि साधारण आदमीको तो पढ़ना ही असंभव हो गया है । कितने ही छात्र राजपुतानामें पढ़नेके लिये, उच्च शिक्षाके लिये, पानी वगैर तड़फती हुई मछली की तरह आर्थिक सहायता के लिये प्रयत्न करते फिरते हैं । भाग्यसे ही किसी एक आध को कहीं से सहायता मिल जाती है शेष नाउम्मेद होकर बैठे जाते हैं धनिक भाइयों के लिये यह अपनी जाति सेघाका सुअवसर है ऐसे छात्रों को रूपया ऋण दे करके उनको उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सहायता दे जिनके लिये उन्हें विश्वास रखना चाहिये कि ये द्रव्योपार्जन करेंगे तत्र अवश्य चुका देंगे। ऐसे फंड खोलने की महान आवश्यकता है । किन्तु इस शिक्षा सहायता को वही कर सकेगा जो शिक्षा की कदर जानता होगा । शिक्षा के भूखों के कष्ट को पहचानता होगा और जातिके प्रति सच्चा सेवाभाव रखनेवाला होगा। ऐसे सुकृतमें निज द्रव्य का उपयोग होना भाग्यवानी है । जिसने पूर्वजन्ममें शुभ कर्म किये हो उसको यह भाग्यवानी प्राप्त हो सकती है । ऐसी संस्था ओसवाल नातिमें खानदेशमें है जो छात्रवृत्ति देकर उम्र वर्गमें शिक्षा प्राप्त करनेवालोंको सहायता देती है। किन्तु प्रथम तो वह एक जिले के लिये है वचत हो तो अन्य जिलों में सहायता देती है, दूसरे उसका फंड इतना बड़ा नहीं है कि सब स्थानवालों को सहायता दे सके । कॉलेज खोलनेसे पहले इस फंड का खोलना अधिक सहज और उपयोगी होगा और इससे भी अधिक उपयोगी बड़े बड़े शिक्षाकेन्द्रों के स्थानों में महावीर विद्यालय जैसे छात्रालय. खोलना होगा किन्तु वह उतना सहज कार्य नहीं है । हमारी जाति की चलती हुई जितनी भी संस्थाएँ हैं उनकी अस्सी प्रतिशतकी आर्थिक स्थिति दुर्बल पाती है । प्रथम तो अपनी जातिमें कार्यकर्ताओं का ही अभाव है यदि इने गिने कार्यकर्त्ता विचारे अपना घर का काम छोड़कर जातिके कार्य करनेमें समय देते हैं, तो लोगों का आर्थिक सहायता देने में अनुत्साह देखकर वे स्वयं निरुत्साहित हो जाते हैं । अनेक प्रकारके प्रयत्न उनको संस्थाओं का खर्च चलने के निमित्त करने पड़ते हैं, जिसमें उनका इतना समय चला जाता है कि संस्थाओंमें किस प्रकार शिक्षादि विषय में सुधार तथा उन्नति की जा सकती है इसका विचार करनेका ही उनको अवकाश नहीं मिलता और फल यह होता है कि संस्थाऐं साधारण दशामें चलती हैं अधिक उन्नत नहीं हो सकती । दूसरी आपत्ति एक यह भी होती है कि जो उन संस्थाओं को अच्छी सहायता देते हैं उन ही को सभापति या प्रधान बनाया जाता है ! उन ही के उस संस्था पर शासनाधिकार भी रहते हैं । संस्था उन ही की सहायता पर और मंत्री के परिश्रम पर ही निर्भर रहती है किसी कार्य से नाराज होकर पदाधिकारियों और सभासदों में फूट पड़ जाती है और इन दोनों के झगड़ों में संस्था ढिली पड़ जाती हैं और उठ भी जाती है यदि संस्थाओं की आर्थिक स्थिति उत्तम रहती हो तो न तो कार्यकर्ता निरुत्साहित होकर भागें और न कोई मनमानी कर सके कारण संस्था किसी पर निर्भर तो रहे नहीं वह तो सारों पर निर्भर रहे, कुछ रूठ भी जाये तो क्या हो और इस प्रकार संस्था को धक्का न लगे इसलिये हमारी संस्थाओं में ऐसे नियंत्रण की आवश्यकता है जिसमें जाति के प्रत्येक बन्धु से सहायता मिला करे जिसकी जितनी शक्ति हो उससे उतनी ही ली जाया करे और न मूल कोष ही संस्थाओं में होना चाहिये, जिससे कि कार्यकर्ता मनमानी इतनी कर सकें कि फिर उनको किसी से कुछ सहानुभूति की ही आवश्यकता नहीं रहे तथापि संस्थाओं क भवन निजी - आवश्य होना चाहिये । हमारी संस्थाओं की आर्थिक स्थिति तब ही उत्तम हो, सकेगा जब हमारी जाति, शिक्षा के महत्व को अच्छी तरह समझ जावेगी और द्रव्य के सदुपयोग के महत्त्व को अच्छी तरह समझ जावेगी । भूलना नहीं चाहिये कि सदाचार के पश्चात् यदि कोई उपयोगी और आवश्यक वस्तु है तो शिक्षा है । सदाचार हृदय को उन्नत करता है तो शिक्षा बुद्धि को उन्नत करती है । अशिक्षित सदाचारी विशेष उपयोगी नहीं तो असदाचारी शिक्षित किसी भी उपयोगका नहीं । सदाचार और शिक्षा दोनों हो तब ही सोना और सुगंधि हैं । यही ज्ञान और क्रिया हैं । ज्ञान वगैर क्रिया अन्ध है और क्रिया बगैर अपंग है । सदाचार सम्यञ्चारित्र का कारण है और शिक्षा सम्यकज्ञान का कारण सदाचार का प्रचार करने के लिये और दुराचार को मिटाने के लिये वा दूसरे शब्दों में कहें तो सामाजिक कुरीतियां मिटाने के लिये कुसंप हटाने के लिये और अविद्या को दूर करने के लिये तथा संप, शिक्षा और सुरीतियों को प्रचार करने के लिये भी हमारी ओसवाल जाति में अनेक मण्डल, सभाएँ, समितिएँ, सोसायटिएँ और महासभा खुली हैं उनका प्रारम्भ समय का जोश देख कर तो उनको शूर वीर कहना भी अनुचित नहीं हैं किन्तु कुछ दिवस पश्चात् ही जब परस्पर ही कार्यकर्ताओं में फूट फैलने लगे, पार्टी वन्दी होने लगे तो न मालुम वह प्रारम्भिक जोश कहां छुप जाता है, जातिभर में सम्प कराने की इच्छा वालों से अपने परस्पर ही सम्प नहीं किया जाता । उनको देख कर लोग हँसते हैं और उनकी मजाक उड़ाते हैं देखो इन्होंने कैसी उन्नति की है ? यदि आपस में पार्टी बन्दी नहीं होती तो सुस्ती और निरुत्साहित फैल जाती है और कार्य कुछ नहीं होता। क्या ही अच्छा हो कि प्रथम आरम्भही में अत्यधिक जोश नहीं दिखलाया जावे । जोश थोड़ा ही रखा जाबे परन्तु स्थायी रखा जावे । उसमें सभासद कम होवे तो परवाह नहीं किन्तु ऐसे सभासद नहीं लिये जावें जिनमें किसी सभासद को उन्न हो वा जिनको सभासद बनाने में केवल • सभासदों की संख्या मात्र बढ़ती हो । जिनमें सभासद होनेकी योग्यता हो और जो जाति सेवा की रूचि रखते हों उन्हीं को सभासद बनाया जावे । पचास निरूत्साही अकर्मण्य सभासद इतने लाभदायक नहीं निकलेंगे जितने दस उत्साही और स्थायी जोशवाले सभासद लाभदायक निकलेंगे । इन सभाओं को प्रस्ताव कम पास - करना चाहिये और उनको कार्य में उत्तम रीति स परिणत करते रहना चाहिये इससे उनमें निश्चय बल की शक्ति उत्पन्न हो जावेगी इनके अतिरिक्त समय की और नियमों की पावन्दी पर भी यथेष्ट लक्ष रखना चाहिये जिससे न तो कभी फूट पड़ेगी और न स्तुति फैल सकेगी । उन्हें यह भी अवश्य ध्यान में रखना चाहिये कि इस • सभा के द्वारा प्रथम हमारा सुधार होवेगा तब जनता का होवेगा । . इन बातों के अभाव में कितनी ही सभाएँ अल्प आयु में ही अपना अस्तित्व समाप्त कर देती हैं । समाचार पत्र आदि भी एक प्रकारकी शिक्षा संस्थाही है जिनका कार्य होता है समाज की परिस्थिति को प्रगट करते रहना और • समाजको उचित माग वल पाते हुवे आदश की ओर बढ़ाते चल जाना । प्रत्येक धर्म संप्रदाय, प्रत्येक समाज, प्रत्येक राजनीतिज्ञ और प्रत्येक तरहके प्रचारक इसी साधनसे वर्तमान छापा युगमें अपना प्रचार कार्य करते हैं । करीव दस वर्षसे " ओसवाल " नामक एक मासिक पत्र हमारी जातिमें भी चल रहा है । उसका प्रारंभ रायसाहेब श्री किशनलालजी बाफना ने जोधपुरसे किया था और शीघ्रही वहां की ओसवाल यंग मेन्स सोसायटी को प्रकाशनार्थ सम्हला दिया था । कुछ वर्ष पश्चात् अखिल भारतवर्षीय ओसवाल युवक महा मण्डल की स्थापना हुई जिसको सोसायटीने सम्हला दिया । महामंडल स्वयं धराशायी हो गया और इस पत्रको बन्द कर देनेकी नौबत आन पहुँची तब आगरा निवासी श्रीयुत पदमसिंहजीने इसको अभयदान देकर ले लिया । इनने कुछ वर्ष तो संपादन तथा प्रकाशन दोनों कार्य किये किन्तु कुछ वर्ष पश्चात् संपादन का कार्य उन्होंने कितने ही अन्य सज्जनों से कराया और प्रकाशन स्वयं करते रहे हैं । आजकल भी वे ही प्रकाशन कर रहे हैं और सुजानगढ़ निवासी श्रीयुत पृथ्वीराजजी. डागा सम्पादन कार्य कर रहे हैं । श्रीयुत पदमसिंहजीने इसको अब तक जीवित रखा है जिसके. लिये वे धन्यवाद के पात्र हैं किन्तु इस बातका हमें वड़ा खेद है कि पत्र की दशा इतने वर्ष हो जाने पर भी और योग्य संपादकों के. हाथ में जाते रहने पर भी तथा अनेक जाति सेवकों द्वारा चुप चाप घाटापूर्ति होते रहने पर भी ऐसी है कि जैसी प्रारंभ कालमें थी । । इस पत्र से जो लाभ जाति को पहुँचना चाहिये था नहीं पहुँचा और सदा. दरियाफ्त करने पर यही मालूम हुआ कि प्रकाशक महाशयकी ओरसे. विलम्ब होता है तथा अन्य त्रुटियां रहती है। उधर प्रकाशक महाशय को सदा आर्थिक शिकायत तथा अवकाश की कमी है । हमारी अल्प सम्मति में यदि उनको अवकाश नहीं है तो प्रकाशन कार्य भी या तो किसी अन्य सज्जन को सौंपना वा कुछ समयके लिये बन्द कर दिया जाना भी बुरा न था ताकि या तो कोई अन्य सज्जन बन्द होता देखकर साहस कर लेते या कुछ समय पश्चात् पुनः निकाला जाता । इस पत्र का हिसाब यदि प्रति वर्ष इस पत्रमें प्रकाशित कर दिया जाता तो भी इस पत्र का जीवन इतना संकटग्रस्त नहीं रहता । जो कुछ इसकी दशा हो रही है उससे तो शीघ्र ही इसकी मुक्ति आवश्यक है या तो. दिसाव प्रकट किया जाये और आवश्यक सहायता समाजसे भी. दी जावे और इसको उत्तम स्थिति में सुधारकर लाया जावे या बन्द ही. किया जावे । ऐसी परिस्थिति तो वांछनीय नहीं है । " ओसवाल नव युवक नामक मासिक पत्र भी कलकत्ते से. निकला है । पत्र का प्रकाशन तथा कार्यकर्ताओंका नोश अच्छा उत्साह पूर्ण है किन्तु सम्पादन तथा लेखों में अभी बहुत आगे बढ़ने की आवश्यकता है । इसके संचालकों को धन्यवाद देते हैं और आशा. करते हैं कि इनका जोश स्थायी होगा न कि केवल प्रारंभिक । सामाजिक संस्थायें । ऐसे तो अनेक गांवों में हमारे सुधार प्रिय युवक छोटी संस्थायें स्थापन कर रक्खी हैं, किन्तु जिनका अखिल ओसवाल समाजसे संबंध हैं वे केवल दो ही संस्थायें थी । अखिल भारतवर्षीय ओसवाल महासभा अखिल भारतवर्षीय नवयुवक महामंडल, महासभाका जन्म वोदवड़में और महामंडलका जोधपुरमें जन्म हुआ
गुरुवार को कानपुर देहात के मडौली गांव जा रहे राष्ट्रीय लोकदल के कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोक लिया। आरएलडी के प्रदेश अध्यक्ष रामाशीश राय और राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल दुबे समेत दर्जनों कार्यकर्ता कानपुर देहात जा रहे थे। पुलिस ने सभी को जाजमऊ में रोक लिया। कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया तो पुलिस ने सभी को अरेस्ट कर थाने में बैठा लिया। जाजमऊ में रालोद के प्रांतीय उपाध्यक्ष सुरेश गुप्ता ने बताया कि कानपुर देहात में बीते सोमवार को हुई शर्मनाक घटना सरकार की बेलगाम अफसरशाही का नमूना है। प्रदेश अध्यक्ष को उन्नाव की ललऊखेड़ा पुलिस चौकी पर गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी की सूचना पर कानपुर के जाजमऊ पुल पर रालोद के प्रांतीय उपाध्यक्ष सुरेश गुप्ता, नगर अध्यक्ष मो. उस्मान के साथ दर्जनों कार्यकर्ता ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। राष्ट्रीय प्रवक्ता ने बताया कि प्रशासन के आला अधिकारियों की गैर जिम्मेदराना हरकत से एक मां-बेटी जिंदा जल जाती हैं। वहीं कानपुर देहात की डीएम नृत्य में व्यस्त हैं, उन्होंने मौके पर जाने की भी जरूरत नहीं समझी। इस घटना में समय नहीं बीता और एक बार फिर सीतापुर में एक गरीब व्यक्ति की दुकान बुलडोजर से ऊखाड फेंकी गई। यह तानाशाही सरकार है जो गरीबों पर जरा भी कृपा नहीं करती है। डॉ. सोहेल चौधरी विजय शंकर लाल, राजकुमार सहित दर्जनों की संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
गुरुवार को कानपुर देहात के मडौली गांव जा रहे राष्ट्रीय लोकदल के कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोक लिया। आरएलडी के प्रदेश अध्यक्ष रामाशीश राय और राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल दुबे समेत दर्जनों कार्यकर्ता कानपुर देहात जा रहे थे। पुलिस ने सभी को जाजमऊ में रोक लिया। कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया तो पुलिस ने सभी को अरेस्ट कर थाने में बैठा लिया। जाजमऊ में रालोद के प्रांतीय उपाध्यक्ष सुरेश गुप्ता ने बताया कि कानपुर देहात में बीते सोमवार को हुई शर्मनाक घटना सरकार की बेलगाम अफसरशाही का नमूना है। प्रदेश अध्यक्ष को उन्नाव की ललऊखेड़ा पुलिस चौकी पर गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी की सूचना पर कानपुर के जाजमऊ पुल पर रालोद के प्रांतीय उपाध्यक्ष सुरेश गुप्ता, नगर अध्यक्ष मो. उस्मान के साथ दर्जनों कार्यकर्ता ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। राष्ट्रीय प्रवक्ता ने बताया कि प्रशासन के आला अधिकारियों की गैर जिम्मेदराना हरकत से एक मां-बेटी जिंदा जल जाती हैं। वहीं कानपुर देहात की डीएम नृत्य में व्यस्त हैं, उन्होंने मौके पर जाने की भी जरूरत नहीं समझी। इस घटना में समय नहीं बीता और एक बार फिर सीतापुर में एक गरीब व्यक्ति की दुकान बुलडोजर से ऊखाड फेंकी गई। यह तानाशाही सरकार है जो गरीबों पर जरा भी कृपा नहीं करती है। डॉ. सोहेल चौधरी विजय शंकर लाल, राजकुमार सहित दर्जनों की संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
लुडविग वान बीथोवेन (बीथोव्हेन)(जर्मन) एक जर्मन संगीतकार थे। पश्चिमी कला संगीत में शास्त्रीय और प्रेमपूर्ण युग के बीच संक्रमण के एक महत्वपूर्ण हिस्से है, वह सबसे प्रसिद्ध और प्रभावशाली संगीतकारों में से एक थे। उनकी सबसे प्रसिद्ध रचनाओं मे उनकी ९ सिम्फनिया, ५ पियानो कोन्सर्टो, एक वायलिन कंसर्टों, ३२ पियानो सोनटा, १६ स्ट्रिंग क़्वार्टेस शामिल हैं। बॉन, पवित्र रोमन साम्राज्य की तो कोलोन के मतदाताओं की राजधानी और भाग में जन्मे, बीथोवेन छोटी उम्र से ही एक अच्छे सन्गीतकार थे, उन्हे उनके पिता जोहान वान बीथोवेन ने संगीत सिखाया। २१ साल की उम्र में उन्होंने कहा कि वह जोसेफ हेडन के साथ रचना का अध्ययन शुरू किया है, जहां वियना में ले जाया गया है, और एक गुणी पियानोवादक के रूप में ख्याति प्राप्त की। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मृत्यु वियना में रहते थे। उसके देर से 20 तक उसकी सुनवाई खराब करने के लिए शुरू किया, और अपने जीवन के अंतिम दशक से वह लगभग पूरी तरह बहरे थे। 1811 में वह आयोजित करने और सार्वजनिक रूप से प्रदर्शन कर छोड़ दिया, लेकिन शांत करने के लिए जारी रखा।. 1 संबंधः ट्रिपल एच। पॉल माइकल लेवेस्क (जन्म 27 जुलाई 1969) एक अमेरिकी पेशेवर पहलवान और अभिनेता हैं, जो अपने रिंग नाम, ट्रिपल एच से विख्यात हैं, जोकि उनके पूर्व रिंग नाम हंटर हर्स्ट हेम्सले का एक संक्षिप्त रूप है। इस समय उनका अनुबंध वर्ल्ड रेसलिंग एंटरटेनमेंट (WWE) के साथ है और वे उसके RAW ब्रांड पर लड़ते हैं, जहां वे शॉन माइकल्स के साथ एकीकृत WWE टैग टीम चैम्पियन्स का आधा हिस्सा हैं। WWE में शामिल होने से पहले, लेवेस्क ने 1993 में वर्ल्ड चैम्पियनशिप रेसलिंग (WCW) के साथ अपना कुश्ती कॅरिअर शुरू किया, पहले टेरा राइज़िग के रिंग नाम के तहत और बाद में जीन-पॉल लेवेस्क के नाम से कुश्ती लड़ी.
लुडविग वान बीथोवेन एक जर्मन संगीतकार थे। पश्चिमी कला संगीत में शास्त्रीय और प्रेमपूर्ण युग के बीच संक्रमण के एक महत्वपूर्ण हिस्से है, वह सबसे प्रसिद्ध और प्रभावशाली संगीतकारों में से एक थे। उनकी सबसे प्रसिद्ध रचनाओं मे उनकी नौ सिम्फनिया, पाँच पियानो कोन्सर्टो, एक वायलिन कंसर्टों, बत्तीस पियानो सोनटा, सोलह स्ट्रिंग क़्वार्टेस शामिल हैं। बॉन, पवित्र रोमन साम्राज्य की तो कोलोन के मतदाताओं की राजधानी और भाग में जन्मे, बीथोवेन छोटी उम्र से ही एक अच्छे सन्गीतकार थे, उन्हे उनके पिता जोहान वान बीथोवेन ने संगीत सिखाया। इक्कीस साल की उम्र में उन्होंने कहा कि वह जोसेफ हेडन के साथ रचना का अध्ययन शुरू किया है, जहां वियना में ले जाया गया है, और एक गुणी पियानोवादक के रूप में ख्याति प्राप्त की। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मृत्यु वियना में रहते थे। उसके देर से बीस तक उसकी सुनवाई खराब करने के लिए शुरू किया, और अपने जीवन के अंतिम दशक से वह लगभग पूरी तरह बहरे थे। एक हज़ार आठ सौ ग्यारह में वह आयोजित करने और सार्वजनिक रूप से प्रदर्शन कर छोड़ दिया, लेकिन शांत करने के लिए जारी रखा।. एक संबंधः ट्रिपल एच। पॉल माइकल लेवेस्क एक अमेरिकी पेशेवर पहलवान और अभिनेता हैं, जो अपने रिंग नाम, ट्रिपल एच से विख्यात हैं, जोकि उनके पूर्व रिंग नाम हंटर हर्स्ट हेम्सले का एक संक्षिप्त रूप है। इस समय उनका अनुबंध वर्ल्ड रेसलिंग एंटरटेनमेंट के साथ है और वे उसके RAW ब्रांड पर लड़ते हैं, जहां वे शॉन माइकल्स के साथ एकीकृत WWE टैग टीम चैम्पियन्स का आधा हिस्सा हैं। WWE में शामिल होने से पहले, लेवेस्क ने एक हज़ार नौ सौ तिरानवे में वर्ल्ड चैम्पियनशिप रेसलिंग के साथ अपना कुश्ती कॅरिअर शुरू किया, पहले टेरा राइज़िग के रिंग नाम के तहत और बाद में जीन-पॉल लेवेस्क के नाम से कुश्ती लड़ी.
बॉलीवुड अभिनेता कंगना रनौत (Kangana Ranaut) ने वर्ष 2022 (Year 2022) को अपने लिये ब्लॉकबस्टर ईयर्स (Blockbuster years) बताया है। कंगना रनौत की हाल ही में फिल्म धाकड़ प्रदर्शित हुयी है जो बॉक्स ऑफिस पर असफल साबित हुयी है। कंगना ने वर्ष 2022 को अपने लिये ब्लॉकबस्टर ईयर्स बताया है। कंगना रनोट ने इंस्टाग्राम स्टोरी (Instagram Story) पर एक पोस्ट किया है।
बॉलीवुड अभिनेता कंगना रनौत ने वर्ष दो हज़ार बाईस को अपने लिये ब्लॉकबस्टर ईयर्स बताया है। कंगना रनौत की हाल ही में फिल्म धाकड़ प्रदर्शित हुयी है जो बॉक्स ऑफिस पर असफल साबित हुयी है। कंगना ने वर्ष दो हज़ार बाईस को अपने लिये ब्लॉकबस्टर ईयर्स बताया है। कंगना रनोट ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक पोस्ट किया है।
Indian Idol Season 13 Winner: 02 अप्रैल 2023 को हुए सिंगिंग रियलटी शो इंडियन आइडिल के ग्रैंड फिनाले में अयोध्या के ऋषि सिंह इस शो के विजेता (Winner) रहे और खिताब अपने नाम किया। ऋषि सिंह को शो का विनर बनने पर 'इंडियन आइडल 13' की ट्रॉफी के साथ एक चमचमाती कार (Brezza) और 25 लाख रुपये इनाम के तौर पर मिले हैं। सोनी टीवी पर आने वाला सिंगिंग रियलिटी शो इंडियन आईडल के अब तक 13 सफल सीजन प्रसारित किए जा चुके हैं। इसमें मशहूर Judges के रूप में सोनू निगम, अनु मलिक, नेहा कक्कड़ और विशाल ददलानी जैसे सिंगर्स रह चुके हैं। इंडियन आइडल पॉप आइडल फॉर्मेट का भारतीय वर्ज़न है जो 2004 से सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन पर प्रसारित होता आ है। इंडियन आइडल सीजन 13 को अपना विजेता मिल गया है अयोध्या के रहने वाले ऋषि सिंह ने इस बार इंडियन आइडल 2023 की ट्रॉफी अपने नाम की है तो वही देबोस्मिता रॉय फर्स्ट रनर अप और चिराग कोटवाल सेकंड रनर अप रहे। आपको बता दें कि फिनाले में टॉप 6 कंटेंस्टेंट्स के बीच कांटे की टक्कर हुई थी। ऋषि सिंह ने शो में एंट्री करने के साथ ही ऑडिशन राउंड से ही सभी को इंप्रेस करना शुरू कर दिया था, उनकी गायकी के दीवाने भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली भी है जिन्होंने उनकी जमकर तारीफ की थी। A post shared by Sony Entertainment Television (@sonytvofficial) ● IIFA Awards किसनें जीता? ● कौन बनेगा करोड़पति (KBC) विजेताओं की सूची? ● द बिग पिक्चर शो में कैसे जाएं? इंडियन आइडल में रजिस्ट्रेशन कैसे करें? (Online Registration Process) इंडियन आइडल सीजन 13 के लिए रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन Sony Liv App के जरिए किए जा रहे है। - अपने मोबाइल फोन में सोनी लिव एप डाउनलोड करें और इस पर अपना अकाउंट बनाएं। - लॉग इन करने के बाद इंडियन आइडल डिजिटल ऑडिशन के रजिस्ट्रेशन लिंक या बैनर पर क्लिक करें। - अब पूछे गए प्रश्नों के उत्तर देंः क्या आपका किसी कंपनी के साथ कोई कॉन्ट्रैक्ट है? क्या आपने किसी सिंगिंग शो में भाग लिया है? क्या आप एक प्रशिक्षित गायक हैं? - यहाँ फार्म में पूछी गई सभी जानकारियों को सही-सही भरे (जैसेः नाम, जन्म तिथि, ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर आदि) - सभी दिशानिर्देशों का पालन करते हुए ऑडिशन के लिए शूट की गई वीडियो को अपलोड करें। - अब रजिस्ट्रेशन फॉर्म को सबमिट करें। चुने गए प्रतिभागियों से इंडियन आइडल द्वारा सम्पर्क किया जाएगा। दिशानिर्देश (Guidelines): - अपनी विभिन्न गायन शैलियों को प्रदर्शित करने के लिए प्रतिभागी द्वारा अधिकतम दो वीडियो अपलोड की जा सकती हैं। - प्रत्येक वीडियो कम से कम 90 सेकंड लम्बी होनी चाहिए। - वीडियो अच्छी रोशनी वाले स्थान पर बनाएं और ध्यान रखें कि आपका चेहरा वीडियो में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा हो। - अच्छी इंटरनेट कनेक्टिविटी के साथ ही यह सुनिश्चित करें कि कैमरा और माइक ठीक से काम कर रहे हो। - रिकॉर्डिंग के दौरान कैमरे को स्थिर रखें। नोटः इंडियन आइडल ऑडिशन के लिए फर्जी कॉल्स से सावधान रहें और किसी के साथ बैंक विवरण या खाता जानकारी साझा न करें। ● कौन बनेगा करोड़पति (KBC) में कैसे जाएं? ● आईपीएल 2023 फ्री में कैसे देखें? इंडियन आइडल के लिए पात्रता क्या है? (Indian Idol Eligibility Criteria) - उम्मीदवार की आयु 18 वर्ष यह इससे अधिक होनी चाहिए। - सुर और गायकी का ज्ञान होना आवश्यक है। - आवेदक को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना चाहिए। - भारतीय नागरिक होना चाहिए (लड़का या लड़का कोई भी भाग ले सकता है)। आवश्यक दस्तावेज़ (Documents) इसके अलावा आपके पास कुछ जरूरी दस्तावेज़ होने चाहिए जैसेः - जन्म तिथि का प्रमाण (बर्थ सर्टिफिकेट/एजुकेशन सर्टिफिकेट) Indian Idol क्या है? इंडियन आइडल भारत का एक मशहूर सिंगिंग रियलिटी शो है जिसका प्रसारण Sony टीवी पर किया जाता है इसकी शुरूआत वर्ष 2004 में हुई थी। जहां लोगों को अपने गायकी का हुनर दुनियाभर को दिखाने का मौका मिलता है जहां आपकी गायकी को दिग्गज गायकों व म्यूजिक कंपोजरो के द्वारा जज किया जाता है। इस Singing कंपटीशन में कई राउंड शामिल होते हैं जिसमें एलिमिनेशन राउंड के दौरान मुकाबले में अच्छा परफॉर्म न कर पाने वाले को एक-एक करके इस Show से बाहर कर दिया जाता है और अंत में फाइनल राउंड में सुरों के इस मुकाबले में जीतने वाले को इंडियन आइडल का विजेता घोषित कर दिया जाता है। इंडियन आइडल का खिताब जीतने वाले को पैसे के साथ ही अपनी आवाज के दम पर शोहरत भी मिलती है। Indian Idol किस चैनल पर आता है? Indian Idol का पहला सीजन 2004-2005 में भारत में प्रसारित किया गया और उसके बाद दूसरा (2005-2006), तीसरा (2007), चौथा (2008-2009), पांचवां (2010) और छठा सीज़न (2012) आया। सातवें और आठवें सीज़न में इंडियन आइडल जूनियर ने शो की जगह ली, जिसके बाद दुबारा इंडियन आइडल 2016 में 9वें सीज़न के लिए और 2018 में 10 वें सीज़न के लिए वापस आया। इस बार 2022-23 में इंडियन आइडल का 13वां सीज़न सोनी टीवी पर प्रसारित किया गया था। इंडियन आइडल कब शुरू होगा? (Start Date & Timing) इंडियन आइडल सीजन 14 का प्रीमियर 2023 के आखिरी महीनों में किया जा सकता है। यह शो सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन पर प्रसारित होगा और देखने वाले इसे हर शनिवार और रविवार रात 9:30 बजे नवीनतम एपिसोड के साथ देख सकते हैं। इंडियन आइडल के जजों के कौन है? (Indian Idol Judges Name) Indian Idol 13 की होस्टिंग आदित्य नारायण कर सकते है तो वहीं सिंगिंग रियलिटी शो इंडियन आइडल के सीजन 13 को विशाल ददलानी, नेहा कक्कड़ और अनु मलिक या हिमेश रेशमिया द्वारा जज किया जा सकता है। यह तीनों संगीत प्रतिभाओं का सही संयोजन है, जिसमें संगीत में अनु मलिक का अनुभव, विशाल ददलानी की संगीत रचना भावना और नेहा कक्कड़ की भावपूर्ण और सुरीली आवाज शामिल है जो शो में गायन प्रतिभाओं को गायन के लिए अपनी महाशक्ति दिखाने के लिए सुनिश्चित करेगी। इंडियन आइडल में कैसे जाये? इंडियन आइडल में भाग लेने के लिए आपको सोनी लिव ऐप के जरिए रजिस्ट्रेशन करना होता है जिसके बाद आपका ऑनलाइन ऑडिशन लिया जाता है ऑडिशन पास करने व सभी नियम एवं शर्तें तथा दस्तावेजों के वेरिफिकेशन के बाद आपको Show में आमंत्रित किया जाता है। यहां अपने सुर और गायकी के दम पर आप इंडियन आइडल शो में अपना स्थान बरकरार रखते हुए अंत में विजेता घोषित किए जाते हैं। यहाँ आपको Indian Idol में भाग लेने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया के बारें में जानकारी दी गई है फिलहाल सीजन 13 के Audition लिए कोई भी आधिकारिक घोषणा नहीं की गयी है। जैसे ही कोई अपडेट आएगा आपको उसकी जानकरी यहाँ दे दी जाएगी या फिर आप Sony Liv app अथवा Setindia.com के जरिए भी इस विषय में लेटेस्ट Update हासिल कर सकते है। अगर आप इंडियन आईडल का कोई पुराना सीजन या फिर ग्रैंड फिनाले देखना चाहते हैं तो वह आप गूगल प्ले स्टोर से सोनी लिव ऐप डाउनलोड करके देख सकते हैं और नए सीजन का लाइव टेलीकास्ट भी देख सकते हैं।
Indian Idol Season तेरह Winner: दो अप्रैल दो हज़ार तेईस को हुए सिंगिंग रियलटी शो इंडियन आइडिल के ग्रैंड फिनाले में अयोध्या के ऋषि सिंह इस शो के विजेता रहे और खिताब अपने नाम किया। ऋषि सिंह को शो का विनर बनने पर 'इंडियन आइडल तेरह' की ट्रॉफी के साथ एक चमचमाती कार और पच्चीस लाख रुपये इनाम के तौर पर मिले हैं। सोनी टीवी पर आने वाला सिंगिंग रियलिटी शो इंडियन आईडल के अब तक तेरह सफल सीजन प्रसारित किए जा चुके हैं। इसमें मशहूर Judges के रूप में सोनू निगम, अनु मलिक, नेहा कक्कड़ और विशाल ददलानी जैसे सिंगर्स रह चुके हैं। इंडियन आइडल पॉप आइडल फॉर्मेट का भारतीय वर्ज़न है जो दो हज़ार चार से सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन पर प्रसारित होता आ है। इंडियन आइडल सीजन तेरह को अपना विजेता मिल गया है अयोध्या के रहने वाले ऋषि सिंह ने इस बार इंडियन आइडल दो हज़ार तेईस की ट्रॉफी अपने नाम की है तो वही देबोस्मिता रॉय फर्स्ट रनर अप और चिराग कोटवाल सेकंड रनर अप रहे। आपको बता दें कि फिनाले में टॉप छः कंटेंस्टेंट्स के बीच कांटे की टक्कर हुई थी। ऋषि सिंह ने शो में एंट्री करने के साथ ही ऑडिशन राउंड से ही सभी को इंप्रेस करना शुरू कर दिया था, उनकी गायकी के दीवाने भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली भी है जिन्होंने उनकी जमकर तारीफ की थी। A post shared by Sony Entertainment Television ● IIFA Awards किसनें जीता? ● कौन बनेगा करोड़पति विजेताओं की सूची? ● द बिग पिक्चर शो में कैसे जाएं? इंडियन आइडल में रजिस्ट्रेशन कैसे करें? इंडियन आइडल सीजन तेरह के लिए रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन Sony Liv App के जरिए किए जा रहे है। - अपने मोबाइल फोन में सोनी लिव एप डाउनलोड करें और इस पर अपना अकाउंट बनाएं। - लॉग इन करने के बाद इंडियन आइडल डिजिटल ऑडिशन के रजिस्ट्रेशन लिंक या बैनर पर क्लिक करें। - अब पूछे गए प्रश्नों के उत्तर देंः क्या आपका किसी कंपनी के साथ कोई कॉन्ट्रैक्ट है? क्या आपने किसी सिंगिंग शो में भाग लिया है? क्या आप एक प्रशिक्षित गायक हैं? - यहाँ फार्म में पूछी गई सभी जानकारियों को सही-सही भरे - सभी दिशानिर्देशों का पालन करते हुए ऑडिशन के लिए शूट की गई वीडियो को अपलोड करें। - अब रजिस्ट्रेशन फॉर्म को सबमिट करें। चुने गए प्रतिभागियों से इंडियन आइडल द्वारा सम्पर्क किया जाएगा। दिशानिर्देश : - अपनी विभिन्न गायन शैलियों को प्रदर्शित करने के लिए प्रतिभागी द्वारा अधिकतम दो वीडियो अपलोड की जा सकती हैं। - प्रत्येक वीडियो कम से कम नब्बे सेकंड लम्बी होनी चाहिए। - वीडियो अच्छी रोशनी वाले स्थान पर बनाएं और ध्यान रखें कि आपका चेहरा वीडियो में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा हो। - अच्छी इंटरनेट कनेक्टिविटी के साथ ही यह सुनिश्चित करें कि कैमरा और माइक ठीक से काम कर रहे हो। - रिकॉर्डिंग के दौरान कैमरे को स्थिर रखें। नोटः इंडियन आइडल ऑडिशन के लिए फर्जी कॉल्स से सावधान रहें और किसी के साथ बैंक विवरण या खाता जानकारी साझा न करें। ● कौन बनेगा करोड़पति में कैसे जाएं? ● आईपीएल दो हज़ार तेईस फ्री में कैसे देखें? इंडियन आइडल के लिए पात्रता क्या है? - उम्मीदवार की आयु अट्ठारह वर्ष यह इससे अधिक होनी चाहिए। - सुर और गायकी का ज्ञान होना आवश्यक है। - आवेदक को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना चाहिए। - भारतीय नागरिक होना चाहिए । आवश्यक दस्तावेज़ इसके अलावा आपके पास कुछ जरूरी दस्तावेज़ होने चाहिए जैसेः - जन्म तिथि का प्रमाण Indian Idol क्या है? इंडियन आइडल भारत का एक मशहूर सिंगिंग रियलिटी शो है जिसका प्रसारण Sony टीवी पर किया जाता है इसकी शुरूआत वर्ष दो हज़ार चार में हुई थी। जहां लोगों को अपने गायकी का हुनर दुनियाभर को दिखाने का मौका मिलता है जहां आपकी गायकी को दिग्गज गायकों व म्यूजिक कंपोजरो के द्वारा जज किया जाता है। इस Singing कंपटीशन में कई राउंड शामिल होते हैं जिसमें एलिमिनेशन राउंड के दौरान मुकाबले में अच्छा परफॉर्म न कर पाने वाले को एक-एक करके इस Show से बाहर कर दिया जाता है और अंत में फाइनल राउंड में सुरों के इस मुकाबले में जीतने वाले को इंडियन आइडल का विजेता घोषित कर दिया जाता है। इंडियन आइडल का खिताब जीतने वाले को पैसे के साथ ही अपनी आवाज के दम पर शोहरत भी मिलती है। Indian Idol किस चैनल पर आता है? Indian Idol का पहला सीजन दो हज़ार चार-दो हज़ार पाँच में भारत में प्रसारित किया गया और उसके बाद दूसरा , तीसरा , चौथा , पांचवां और छठा सीज़न आया। सातवें और आठवें सीज़न में इंडियन आइडल जूनियर ने शो की जगह ली, जिसके बाद दुबारा इंडियन आइडल दो हज़ार सोलह में नौवें सीज़न के लिए और दो हज़ार अट्ठारह में दस वें सीज़न के लिए वापस आया। इस बार दो हज़ार बाईस-तेईस में इंडियन आइडल का तेरहवां सीज़न सोनी टीवी पर प्रसारित किया गया था। इंडियन आइडल कब शुरू होगा? इंडियन आइडल सीजन चौदह का प्रीमियर दो हज़ार तेईस के आखिरी महीनों में किया जा सकता है। यह शो सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन पर प्रसारित होगा और देखने वाले इसे हर शनिवार और रविवार रात नौ:तीस बजे नवीनतम एपिसोड के साथ देख सकते हैं। इंडियन आइडल के जजों के कौन है? Indian Idol तेरह की होस्टिंग आदित्य नारायण कर सकते है तो वहीं सिंगिंग रियलिटी शो इंडियन आइडल के सीजन तेरह को विशाल ददलानी, नेहा कक्कड़ और अनु मलिक या हिमेश रेशमिया द्वारा जज किया जा सकता है। यह तीनों संगीत प्रतिभाओं का सही संयोजन है, जिसमें संगीत में अनु मलिक का अनुभव, विशाल ददलानी की संगीत रचना भावना और नेहा कक्कड़ की भावपूर्ण और सुरीली आवाज शामिल है जो शो में गायन प्रतिभाओं को गायन के लिए अपनी महाशक्ति दिखाने के लिए सुनिश्चित करेगी। इंडियन आइडल में कैसे जाये? इंडियन आइडल में भाग लेने के लिए आपको सोनी लिव ऐप के जरिए रजिस्ट्रेशन करना होता है जिसके बाद आपका ऑनलाइन ऑडिशन लिया जाता है ऑडिशन पास करने व सभी नियम एवं शर्तें तथा दस्तावेजों के वेरिफिकेशन के बाद आपको Show में आमंत्रित किया जाता है। यहां अपने सुर और गायकी के दम पर आप इंडियन आइडल शो में अपना स्थान बरकरार रखते हुए अंत में विजेता घोषित किए जाते हैं। यहाँ आपको Indian Idol में भाग लेने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया के बारें में जानकारी दी गई है फिलहाल सीजन तेरह के Audition लिए कोई भी आधिकारिक घोषणा नहीं की गयी है। जैसे ही कोई अपडेट आएगा आपको उसकी जानकरी यहाँ दे दी जाएगी या फिर आप Sony Liv app अथवा Setindia.com के जरिए भी इस विषय में लेटेस्ट Update हासिल कर सकते है। अगर आप इंडियन आईडल का कोई पुराना सीजन या फिर ग्रैंड फिनाले देखना चाहते हैं तो वह आप गूगल प्ले स्टोर से सोनी लिव ऐप डाउनलोड करके देख सकते हैं और नए सीजन का लाइव टेलीकास्ट भी देख सकते हैं।
वृंदावन बांके बिहारी मंदिर में दर्शन करने आए एक महिला का पर्स लेकर बंदर फरार हो गया। बंदर द्वारा छीने गए पर्स में से नोट निकालकर हवा में उड़ा दिए गए। हवा में नोट उड़ते देख श्रद्धालुओं की भीड़ इकट्ठा हो गई। फ्रूटी की बोतल देने के बाद बंदर ने बैग जमीन पर फेंक दिया। मथुराः भगवान बांके बिहारी मंदिर में दर्शन को आने वाले श्रद्धालुओं को आए दिन यहां के उत्पाती बंदर अपना निशाना बना लेते हैं। बंदर किसी ना किसी श्रद्धालु से चश्मा, रूमाल, टोपी और बैग लेकर फरार हो जाते हैं। ऐसा ही एक ताजा मामला भगवान बांके बिहारी मंदिर को जाने वाले रास्ते का आया है। बंदर महिला श्रद्धालु का पर्स छीन कर भाग गया और बैग की चैन खोलकर उसमें से नोटों की बरसात कर दी। नोटों की बरसात होते देख श्रद्धालु रुक गए और बंदर से बैग वापस लेने का भरपूर प्रयास किया गया। काफी मशक्कत के बाद बंदर को जब फ्रूटी की बोतल दी गई तो बंदर ने बैग जमीन पर फेंक दिया। बांके बिहारी की नगरी वृंदावन में नोटों की बरसात होती दिखाई दी। एक के बाद एक नोट जमीन पर गिर रहे थे और लोग गिरते हुए नोटों को देखने के लिए रुक गए। अब हम आपको बताते हैं कि आखिर आसमान से नोटों की बारिश होने की वजह क्या है? दरअसल भगवान बांके बिहारी की नगरी वृंदावन में महिला अपने परिवार के साथ दर्शन करने के लिए आई थी और दर्शन करने के बाद वह वापस अपने गंतव्य के लिए लौट रही थी तो रास्ते में वृंदावन के उत्पाती बंदर के द्वारा उसके पर्स को छीन लिया गया। पर्स छीनकर बंदर एक मकान की टेरिस पर बैठ गया और बैग में से एक के बाद एक नोट निकालकर हवा में उड़ाने लगा। बंदर द्वारा हवा में उड़ाए जा रहे नोटों को देखकर मंदिर दर्शन को जाने वाले श्रद्धालुओं के कदम हम गए और चंद मिनटों में सैकड़ों लोग बंदर द्वारा लुटाए गए नोटों को देखने लगे। बंदर द्वारा हवा में उड़ाए जा रहे हैं नोटों का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग तरह-तरह की बातें कर रहे हैं। वहीं श्रद्धालुओं का कहना है कि वृंदावन के उत्पाती बंदर आए दिन किसी न किसी व्यक्ति का चश्मा, बैग इत्यादि सामान छीन ले जाते हैं। बंदर के द्वारा एक महिला का पर्स छीन कर ले जाना और बैग वापस लेने के एवज में बंदर अब फ्रूटी का छोटा पैक नहीं, बल्कि एक बोतल लेते हैं।
वृंदावन बांके बिहारी मंदिर में दर्शन करने आए एक महिला का पर्स लेकर बंदर फरार हो गया। बंदर द्वारा छीने गए पर्स में से नोट निकालकर हवा में उड़ा दिए गए। हवा में नोट उड़ते देख श्रद्धालुओं की भीड़ इकट्ठा हो गई। फ्रूटी की बोतल देने के बाद बंदर ने बैग जमीन पर फेंक दिया। मथुराः भगवान बांके बिहारी मंदिर में दर्शन को आने वाले श्रद्धालुओं को आए दिन यहां के उत्पाती बंदर अपना निशाना बना लेते हैं। बंदर किसी ना किसी श्रद्धालु से चश्मा, रूमाल, टोपी और बैग लेकर फरार हो जाते हैं। ऐसा ही एक ताजा मामला भगवान बांके बिहारी मंदिर को जाने वाले रास्ते का आया है। बंदर महिला श्रद्धालु का पर्स छीन कर भाग गया और बैग की चैन खोलकर उसमें से नोटों की बरसात कर दी। नोटों की बरसात होते देख श्रद्धालु रुक गए और बंदर से बैग वापस लेने का भरपूर प्रयास किया गया। काफी मशक्कत के बाद बंदर को जब फ्रूटी की बोतल दी गई तो बंदर ने बैग जमीन पर फेंक दिया। बांके बिहारी की नगरी वृंदावन में नोटों की बरसात होती दिखाई दी। एक के बाद एक नोट जमीन पर गिर रहे थे और लोग गिरते हुए नोटों को देखने के लिए रुक गए। अब हम आपको बताते हैं कि आखिर आसमान से नोटों की बारिश होने की वजह क्या है? दरअसल भगवान बांके बिहारी की नगरी वृंदावन में महिला अपने परिवार के साथ दर्शन करने के लिए आई थी और दर्शन करने के बाद वह वापस अपने गंतव्य के लिए लौट रही थी तो रास्ते में वृंदावन के उत्पाती बंदर के द्वारा उसके पर्स को छीन लिया गया। पर्स छीनकर बंदर एक मकान की टेरिस पर बैठ गया और बैग में से एक के बाद एक नोट निकालकर हवा में उड़ाने लगा। बंदर द्वारा हवा में उड़ाए जा रहे नोटों को देखकर मंदिर दर्शन को जाने वाले श्रद्धालुओं के कदम हम गए और चंद मिनटों में सैकड़ों लोग बंदर द्वारा लुटाए गए नोटों को देखने लगे। बंदर द्वारा हवा में उड़ाए जा रहे हैं नोटों का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग तरह-तरह की बातें कर रहे हैं। वहीं श्रद्धालुओं का कहना है कि वृंदावन के उत्पाती बंदर आए दिन किसी न किसी व्यक्ति का चश्मा, बैग इत्यादि सामान छीन ले जाते हैं। बंदर के द्वारा एक महिला का पर्स छीन कर ले जाना और बैग वापस लेने के एवज में बंदर अब फ्रूटी का छोटा पैक नहीं, बल्कि एक बोतल लेते हैं।
पांच से 50 ग्राम तक चांदी के सिक्के डालर बर्तन दुकानों पर सजे ग्राहकों को लुभा रहीं लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां व नई डिजाइन के गहने। संवाद सहयोगी, फिरोजाबादः रोशनी का पर्व दीपावली मंगलवार को धनतेरस के साथ शुरू होगा। धनतेरस पर सराफा कारोबारियों की खूब चांदी होगी। अच्छी खरीदारी की उम्मीद में सराफा बाजार पूरी तरह तैयार है। बाजार में नई डिजाइन में चांदी के सिक्के, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, चांदी के बर्तन उपलब्ध हैं। वहीं बर्तन बाजार भी चमकेगा। दीपावली का त्योहार नजदीक आने के साथ सराफा बाजार में चमक बिखरने लगी है। धनतेरस पर सबसे ज्यादा सराफा बाजार में खरीदारी होने की उम्मीद है। सोने चांदी के सिक्कों के साथ मूर्तियां और बर्तन शगुन के तौर पर खरीदे जाते हैं। धनतेरस पर ही शादी वाले घरों में आभूषणों की खरीदारी की जाती है। बाजार में चांदी के सिक्के, लक्ष्मी- गणेश की मूर्तियों के साथ चांदी के बर्तन के सेट, कलश, थाल, गिलास सेट भी उपलब्ध हैं। सोमवार को चांदी का रेट 66 हजार 250 रुपये प्रति किलोग्राम और सोना 49 हजार 450 प्रति दस ग्राम (24 कैरेट) रहा। वहीं स्टील 195 रुपये प्रति किग्रा और पीतल 550 प्रति किग्रा रही। चांदी के डालर व सिक्कों की यह है रेंजः बाजार में पांच से 50 ग्राम तक शुद्ध चांदी के डालर उपलब्ध है। पांच ग्राम का डालर 345 रुपये, दस ग्राम का 690, 20 ग्राम का 1380 और 50 ग्राम का डालर 3450 रुपये का है। वहीं इस बार बिस्किट (चोकोर) उपलब्ध है। पांच से 50 ग्राम तक शुद्ध चांदी का सिक्का 335 से 3350 रुपये की रेंज में है। लक्ष्मी गणेश की मूर्तियां एक हजार से लेकर 20 हजार रुपये तक की कीमत में उपलब्ध हैं। बाजार में इस बार एवर्ल्ड कंपनी की बनी चांदी की लक्ष्मी-गणेश, राम दरबार, सरस्वती, कुबेर, लड्डू गोपाल सहित अन्य देवी देवताओं की मूर्तियां काफी पसंद आ रही हैं। सराफा व्यापारियों का कहना है कि मूर्तियों की डिजाइन और फिनिशिग काफी अच्छी है। इनकी कीमत एक हजार से शुरू होकर 20 हजार रुपये तक है। लोगों ने की खरीदारी, जगह-जगह लगा रहा जामः सोमवार सुबह दस बजे बाजार खुलते ही लोग सराफा, बर्तन, कपड़ों सहित अन्य सामान की दुकानों पर पहुंचना शुरू हो गए। शाम को सदर बाजार सहित अन्य स्थानों पर जाम जैसे हालात रहे। धनतेरस पर अच्छी बिक्री होने की उम्मीद है। ग्राहकों की पसंद के अनुसार चांदी के सिक्के, लक्ष्मी, गणेश की मूर्ति, चांदी के बर्तनों के साथ नई डिजाइन में पायल, बिछुआ सहित अन्य आभूषण तैयार कराए हैं। धनतेरस से दो दिन पूर्व ही बर्तनों की खरीदारी शुरू हो जाती है। लोग पीतल के बर्तनों के बजाए स्टील के ही खरीदते हैं। पिछले साल की अपेक्षा इस बार अच्छा कारोबार होने की उम्मीद है। शाम 5. 51 से रात 8. 27 बजे तक होगा पूजनः श्री बांके बिहारी मंदिर के महंत पं. मुन्नालाल शास्त्री ने बताया कि मंगलवार शाम सूर्य अस्त होने के बाद यमराज का दीपदान होगा। शाम 5. 51 बजे से रात 8. 27 बजे तक भगवान कुबेर की पूजा का समय निर्धारित है।
पांच से पचास ग्राम तक चांदी के सिक्के डालर बर्तन दुकानों पर सजे ग्राहकों को लुभा रहीं लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां व नई डिजाइन के गहने। संवाद सहयोगी, फिरोजाबादः रोशनी का पर्व दीपावली मंगलवार को धनतेरस के साथ शुरू होगा। धनतेरस पर सराफा कारोबारियों की खूब चांदी होगी। अच्छी खरीदारी की उम्मीद में सराफा बाजार पूरी तरह तैयार है। बाजार में नई डिजाइन में चांदी के सिक्के, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, चांदी के बर्तन उपलब्ध हैं। वहीं बर्तन बाजार भी चमकेगा। दीपावली का त्योहार नजदीक आने के साथ सराफा बाजार में चमक बिखरने लगी है। धनतेरस पर सबसे ज्यादा सराफा बाजार में खरीदारी होने की उम्मीद है। सोने चांदी के सिक्कों के साथ मूर्तियां और बर्तन शगुन के तौर पर खरीदे जाते हैं। धनतेरस पर ही शादी वाले घरों में आभूषणों की खरीदारी की जाती है। बाजार में चांदी के सिक्के, लक्ष्मी- गणेश की मूर्तियों के साथ चांदी के बर्तन के सेट, कलश, थाल, गिलास सेट भी उपलब्ध हैं। सोमवार को चांदी का रेट छयासठ हजार दो सौ पचास रुपयापये प्रति किलोग्राम और सोना उनचास हजार चार सौ पचास प्रति दस ग्राम रहा। वहीं स्टील एक सौ पचानवे रुपयापये प्रति किग्रा और पीतल पाँच सौ पचास प्रति किग्रा रही। चांदी के डालर व सिक्कों की यह है रेंजः बाजार में पांच से पचास ग्राम तक शुद्ध चांदी के डालर उपलब्ध है। पांच ग्राम का डालर तीन सौ पैंतालीस रुपयापये, दस ग्राम का छः सौ नब्बे, बीस ग्राम का एक हज़ार तीन सौ अस्सी और पचास ग्राम का डालर तीन हज़ार चार सौ पचास रुपयापये का है। वहीं इस बार बिस्किट उपलब्ध है। पांच से पचास ग्राम तक शुद्ध चांदी का सिक्का तीन सौ पैंतीस से तीन हज़ार तीन सौ पचास रुपयापये की रेंज में है। लक्ष्मी गणेश की मूर्तियां एक हजार से लेकर बीस हजार रुपये तक की कीमत में उपलब्ध हैं। बाजार में इस बार एवर्ल्ड कंपनी की बनी चांदी की लक्ष्मी-गणेश, राम दरबार, सरस्वती, कुबेर, लड्डू गोपाल सहित अन्य देवी देवताओं की मूर्तियां काफी पसंद आ रही हैं। सराफा व्यापारियों का कहना है कि मूर्तियों की डिजाइन और फिनिशिग काफी अच्छी है। इनकी कीमत एक हजार से शुरू होकर बीस हजार रुपये तक है। लोगों ने की खरीदारी, जगह-जगह लगा रहा जामः सोमवार सुबह दस बजे बाजार खुलते ही लोग सराफा, बर्तन, कपड़ों सहित अन्य सामान की दुकानों पर पहुंचना शुरू हो गए। शाम को सदर बाजार सहित अन्य स्थानों पर जाम जैसे हालात रहे। धनतेरस पर अच्छी बिक्री होने की उम्मीद है। ग्राहकों की पसंद के अनुसार चांदी के सिक्के, लक्ष्मी, गणेश की मूर्ति, चांदी के बर्तनों के साथ नई डिजाइन में पायल, बिछुआ सहित अन्य आभूषण तैयार कराए हैं। धनतेरस से दो दिन पूर्व ही बर्तनों की खरीदारी शुरू हो जाती है। लोग पीतल के बर्तनों के बजाए स्टील के ही खरीदते हैं। पिछले साल की अपेक्षा इस बार अच्छा कारोबार होने की उम्मीद है। शाम पाँच. इक्यावन से रात आठ. सत्ताईस बजे तक होगा पूजनः श्री बांके बिहारी मंदिर के महंत पं. मुन्नालाल शास्त्री ने बताया कि मंगलवार शाम सूर्य अस्त होने के बाद यमराज का दीपदान होगा। शाम पाँच. इक्यावन बजे से रात आठ. सत्ताईस बजे तक भगवान कुबेर की पूजा का समय निर्धारित है।
Quick links: हरियाणा के करनाल में किसानों पर हुए लाठीचार्ज (Karnal Lathi-charge) का विरोध हर कोई कर रहा है। यहां तक कि एक अधिकारी का वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें वो पुलिस को कथित तौर पर किसानों का सिर फोड़ने (break heads) का निर्देश देते नजर आ रहे हैं। इसी कड़ी में राज्य सरकार ने वायरल वीडियो पर संज्ञान लेते हुए एसडीएम पर कार्यवाई की है। आईएएस अधिकारी आयुष सिन्हा (IAS officer Ayush Sinha) का तबादला कर दिया गया है। हरियाणा सरकार (Haryana Govt) ने बुधवार यानि 1 सितंबर को आयुष सिन्हा को करनाल के एसडीएम से अतिरिक्त उप सचिव नागरिक संसाधन सूचना के पद पर स्थानांतरित कर दिया। हाल ही में किसानों के एक समूह पर लाठीचार्ज के बाद हरियाणा पुलिस कटघरे में आ गई थी। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में अधिकारी आयुष सिन्हा पुलिस कर्मियों को निर्देश दे रहे थे कि अगर किसान बैरिकेड्स तोड़ते हैं तो विरोध करने वाले किसानों का 'सिर फोड़ दें'। पुलिस द्वारा बल प्रयोग करने को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों ने इसकी कड़ी आलोचना की थी। ये भी पढ़ें : मनीष सिसोदिया ने सीएम योगी पर साधा निशाना, कहा- 'मिड-डे मील फंड का दुरुपयोग कर रही सरकार' पंजाब के मुख्यमंत्री (सीएम) कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी किसानों पर हुए लाठीचार्ज की कड़ी निंदा की है। साथ ही उन्होंने हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर से इस्तीफे की भी मांग की है। हरियाणा के डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने भी आईएएस आयुष सिन्हा के टिप्पणी पर निंदा व्यक्त की और कार्यवाई का आश्वासन दिया था। उप मुख्यमंत्री ने 'सिर फोड़ने' का आदेश देने वाले आईएएस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई का वादा किया था। इससे पहले हरियाणा के सीएम खट्टर ने भी कहा था कि प्रशासन मामले पर संज्ञान लेगा। एसडीएम के कथित निर्देशों की निंदा करते हुए खट्टर ने कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्ती की जरूरत है। (Image Credits: PTI/ANI/@RSSurjewala/Twitter)
Quick links: हरियाणा के करनाल में किसानों पर हुए लाठीचार्ज का विरोध हर कोई कर रहा है। यहां तक कि एक अधिकारी का वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें वो पुलिस को कथित तौर पर किसानों का सिर फोड़ने का निर्देश देते नजर आ रहे हैं। इसी कड़ी में राज्य सरकार ने वायरल वीडियो पर संज्ञान लेते हुए एसडीएम पर कार्यवाई की है। आईएएस अधिकारी आयुष सिन्हा का तबादला कर दिया गया है। हरियाणा सरकार ने बुधवार यानि एक सितंबर को आयुष सिन्हा को करनाल के एसडीएम से अतिरिक्त उप सचिव नागरिक संसाधन सूचना के पद पर स्थानांतरित कर दिया। हाल ही में किसानों के एक समूह पर लाठीचार्ज के बाद हरियाणा पुलिस कटघरे में आ गई थी। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में अधिकारी आयुष सिन्हा पुलिस कर्मियों को निर्देश दे रहे थे कि अगर किसान बैरिकेड्स तोड़ते हैं तो विरोध करने वाले किसानों का 'सिर फोड़ दें'। पुलिस द्वारा बल प्रयोग करने को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों ने इसकी कड़ी आलोचना की थी। ये भी पढ़ें : मनीष सिसोदिया ने सीएम योगी पर साधा निशाना, कहा- 'मिड-डे मील फंड का दुरुपयोग कर रही सरकार' पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी किसानों पर हुए लाठीचार्ज की कड़ी निंदा की है। साथ ही उन्होंने हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर से इस्तीफे की भी मांग की है। हरियाणा के डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने भी आईएएस आयुष सिन्हा के टिप्पणी पर निंदा व्यक्त की और कार्यवाई का आश्वासन दिया था। उप मुख्यमंत्री ने 'सिर फोड़ने' का आदेश देने वाले आईएएस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई का वादा किया था। इससे पहले हरियाणा के सीएम खट्टर ने भी कहा था कि प्रशासन मामले पर संज्ञान लेगा। एसडीएम के कथित निर्देशों की निंदा करते हुए खट्टर ने कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्ती की जरूरत है।
Rajasthan News: राजस्थान के नौ जिलों में 10 अल्पसंख्यक छात्रावास बनेंगे। वहीं, जयपुर में वर्किंग वुमेन हॉस्टल और जोधपुर में नागरिक सुविधा केंद्र बनेगा। प्रदेश में अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थियों को बेहतर तालीम मुहैया कराने के लिए राज्य सरकार विभिन्न जिलों में छात्रावास खोलने जा रही है। साथ ही जयपुर के मानसरोवर में कामकाजी महिलाओं के लिए छात्रावास और जोधपुर में अल्पसंख्यक नागरिक सुविधा केंद्र बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इनकी स्थापना सहित अल्पसंख्यक विकास कोष की राशि 200 करोड़ रुपए करने और वर्ष 2022-23 में अनुमोदित प्रगतिरत कार्यों को कोष के तहत कराए जाने के प्रस्ताव का अनुमोदन किया है। जयपुर में किशनपोल (बालिका), दूदू, नागौर में कुचामन सिटी (बालिका), बारां, भरतपुर, बीकानेर, अजमेर, बूंदी, चित्तौड़गढ़ और चूरू में 50-50 बेड के छात्रावास बनाए जाएंगे। इनमें कुल 28 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इन छात्रावासों में कक्षा नौ से लेकर महाविद्यालय और विश्वविद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थी प्रवेश ले सकेंगे। मुख्यमंत्री की बजट घोषणा अनुरूप जयपुर के मानसरोवर क्षेत्र में अल्पसंख्यक समुदाय की कामकाजी महिलाओं के लिए छात्रावास बनेगा। यह 100 बेड का होगा, इसमें विभिन्न जिलों से जयपुर में आकर कार्य करने वाली अल्प-पारिश्रमिक प्राप्त महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। इसमें 10 करोड़ रुपये व्यय होंगे। जोधपुर में 12. 60 करोड़ रुपये की लागत से अल्पसंख्यक नागरिक सुविधा केंद्र बनेगा। यहां अल्पसंख्यकों से संबंधित सभी योजनाओं की जानकारी मिलेगी। केंद्र में प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन होगा। विद्यार्थियों और आमजन के प्रोत्साहन के लिए गोष्ठियां भी आयोजित हो सकेंगी। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
Rajasthan News: राजस्थान के नौ जिलों में दस अल्पसंख्यक छात्रावास बनेंगे। वहीं, जयपुर में वर्किंग वुमेन हॉस्टल और जोधपुर में नागरिक सुविधा केंद्र बनेगा। प्रदेश में अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थियों को बेहतर तालीम मुहैया कराने के लिए राज्य सरकार विभिन्न जिलों में छात्रावास खोलने जा रही है। साथ ही जयपुर के मानसरोवर में कामकाजी महिलाओं के लिए छात्रावास और जोधपुर में अल्पसंख्यक नागरिक सुविधा केंद्र बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इनकी स्थापना सहित अल्पसंख्यक विकास कोष की राशि दो सौ करोड़ रुपए करने और वर्ष दो हज़ार बाईस-तेईस में अनुमोदित प्रगतिरत कार्यों को कोष के तहत कराए जाने के प्रस्ताव का अनुमोदन किया है। जयपुर में किशनपोल , दूदू, नागौर में कुचामन सिटी , बारां, भरतपुर, बीकानेर, अजमेर, बूंदी, चित्तौड़गढ़ और चूरू में पचास-पचास बेड के छात्रावास बनाए जाएंगे। इनमें कुल अट्ठाईस करोड़ रुपये की लागत आएगी। इन छात्रावासों में कक्षा नौ से लेकर महाविद्यालय और विश्वविद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थी प्रवेश ले सकेंगे। मुख्यमंत्री की बजट घोषणा अनुरूप जयपुर के मानसरोवर क्षेत्र में अल्पसंख्यक समुदाय की कामकाजी महिलाओं के लिए छात्रावास बनेगा। यह एक सौ बेड का होगा, इसमें विभिन्न जिलों से जयपुर में आकर कार्य करने वाली अल्प-पारिश्रमिक प्राप्त महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। इसमें दस करोड़ रुपये व्यय होंगे। जोधपुर में बारह. साठ करोड़ रुपये की लागत से अल्पसंख्यक नागरिक सुविधा केंद्र बनेगा। यहां अल्पसंख्यकों से संबंधित सभी योजनाओं की जानकारी मिलेगी। केंद्र में प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन होगा। विद्यार्थियों और आमजन के प्रोत्साहन के लिए गोष्ठियां भी आयोजित हो सकेंगी। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
दंतेवाड़ाः राज्य और केंद्र के अथक प्रयासों के बाद भी वनांचल क्षेत्र दंतेवाड़ा में नक्सलियों का आतंक खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन नक्सली आतंक करने की कोशिश में रहते है। इसी बीच खबर आ रही है कि दंतेवाड़ा एक बार फिर IED ब्लास्ट की चपेट में आने से एक हेड कांस्टेबल शहीद हो गए। बताया जा रहा है कि विस्फोट इतना जबरदस्त था कि जवान के शरीर के चीथड़े उड़ गए। वह अपने साथियों के साथ इंद्रावती नदी पर बन रहे पुल की सुरक्षा के लिए तैनात थे। विस्फोट जिला मुख्यालय से करीब 45 किमी दूर हुआ है। सूचना मिलने पर फोर्स मौके पर रवाना हो गई है। घटना गीदम थाना क्षेत्र के पाहुरनार की है। विस्फोट इतना जबरदस्त था कि जवान के शरीर के चीथड़े उड़ गए। वह अपने साथियों के साथ इंद्रावती नदी पर बन रहे पुल की सुरक्षा के लिए तैनात थे। विस्फोट इतना जबरदस्त था कि जवान के शरीर के चीथड़े उड़ गए। वह अपने साथियों के साथ इंद्रावती नदी पर बन रहे पुल की सुरक्षा के लिए तैनात थे। जानकारी के मुताबिक, पाहुरनार में इंद्रावती नदी पर पुल बनाया जा रहा है। इसकी सुरक्षा के लिए CAF (छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स) 22वीं बटालियन के जवानों को कैंप लगाया गया है। बताया जा रहा है कि जवान दोपहर करीब 12. 30 बजे खाना खाने के लिए पेड़ के नीचे बैठे थे। इनमें हेड कांस्टेबल लक्ष्मीकांत द्विवेदी भी थे। अभी उन्होंने खाना शुरू ही किया था कि IED ब्लास्ट हो गया। इसकी चपेट में आकर जवान लक्ष्मीकांत मौके पर ही शहीद हो गए। इसकी सूचना अफसरों को दी गई है। इसके बाद दंतेवाड़ा से फोर्स को रवाना किया गया है। बताया जा रहा है कि प्रेशर IED के चलते विस्फोट किया गया है। नक्सलियों ने वहां पहले से ही विस्फोटक लगा रखा था। फिलहाल सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ाया जा रहा है। जवान के शव को अभी लेकर अस्पताल नहीं पहुंचे हैं। ज्यादा जानकारी जवानों के लौटने के बाद ही मिल सकेगी। फिलहाल इलाके में सर्चिंग जारी है।
दंतेवाड़ाः राज्य और केंद्र के अथक प्रयासों के बाद भी वनांचल क्षेत्र दंतेवाड़ा में नक्सलियों का आतंक खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन नक्सली आतंक करने की कोशिश में रहते है। इसी बीच खबर आ रही है कि दंतेवाड़ा एक बार फिर IED ब्लास्ट की चपेट में आने से एक हेड कांस्टेबल शहीद हो गए। बताया जा रहा है कि विस्फोट इतना जबरदस्त था कि जवान के शरीर के चीथड़े उड़ गए। वह अपने साथियों के साथ इंद्रावती नदी पर बन रहे पुल की सुरक्षा के लिए तैनात थे। विस्फोट जिला मुख्यालय से करीब पैंतालीस किमी दूर हुआ है। सूचना मिलने पर फोर्स मौके पर रवाना हो गई है। घटना गीदम थाना क्षेत्र के पाहुरनार की है। विस्फोट इतना जबरदस्त था कि जवान के शरीर के चीथड़े उड़ गए। वह अपने साथियों के साथ इंद्रावती नदी पर बन रहे पुल की सुरक्षा के लिए तैनात थे। विस्फोट इतना जबरदस्त था कि जवान के शरीर के चीथड़े उड़ गए। वह अपने साथियों के साथ इंद्रावती नदी पर बन रहे पुल की सुरक्षा के लिए तैनात थे। जानकारी के मुताबिक, पाहुरनार में इंद्रावती नदी पर पुल बनाया जा रहा है। इसकी सुरक्षा के लिए CAF बाईसवीं बटालियन के जवानों को कैंप लगाया गया है। बताया जा रहा है कि जवान दोपहर करीब बारह. तीस बजे खाना खाने के लिए पेड़ के नीचे बैठे थे। इनमें हेड कांस्टेबल लक्ष्मीकांत द्विवेदी भी थे। अभी उन्होंने खाना शुरू ही किया था कि IED ब्लास्ट हो गया। इसकी चपेट में आकर जवान लक्ष्मीकांत मौके पर ही शहीद हो गए। इसकी सूचना अफसरों को दी गई है। इसके बाद दंतेवाड़ा से फोर्स को रवाना किया गया है। बताया जा रहा है कि प्रेशर IED के चलते विस्फोट किया गया है। नक्सलियों ने वहां पहले से ही विस्फोटक लगा रखा था। फिलहाल सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ाया जा रहा है। जवान के शव को अभी लेकर अस्पताल नहीं पहुंचे हैं। ज्यादा जानकारी जवानों के लौटने के बाद ही मिल सकेगी। फिलहाल इलाके में सर्चिंग जारी है।
>BAREILLY : बाइक की सर्विस कराने के बाद फ्राइडे शाम घर लौट रहे चचेरे भाई की सड़क हादसे में मौत हो गई। दोनों को अज्ञात वाहन ने रौंद दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने परिजनों को सूचना देकर शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए। दोनों की मौत से परिजनों पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा। सभी का रो-रो कर बुरा हाल था। सिरौली थाना क्षेत्र के गांव धनौरा गोरी निवासी बहोरी लाल 30 अपने चचेरे भाई ओमपाल 29 के साथ बाइक की सर्विस कराने फ्राइडे सुबह बरेली आए थे। बाइक की सर्विस कराने के बाद के बाद वह शाम को घर लौट रहे थे। रास्ते में वह जैसे ही सिरौली के पास पहुंचे उनकी बाइक को अज्ञात वाहन पीछे से टक्कर मार दी। इससे बाइक अनियंत्रित होकर गिर गई और वाहन की चपेट में आ गए। जिसके चलते दोनों भाइयों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बाइक भी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई। राहगीरों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने परिजनों को सूचना दी। पुलिस की सूचना पर परिजन भी मौके पर पहुंचे गए। परिजनों ने बताया कि उन्होंने एक माह पहले ही नई बाइक खरीदी थी। जिसकी सर्विस कराने दोनों भाई बरेली आए थे। उन्होंने बताया कि बहोरी लाल के परिवार में पत्नी संतोष, एक बेटा और एक बेटी है। वहीं संतोष के परिवार में पत्नी किरन और एक बेटी है।
>BAREILLY : बाइक की सर्विस कराने के बाद फ्राइडे शाम घर लौट रहे चचेरे भाई की सड़क हादसे में मौत हो गई। दोनों को अज्ञात वाहन ने रौंद दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने परिजनों को सूचना देकर शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए। दोनों की मौत से परिजनों पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा। सभी का रो-रो कर बुरा हाल था। सिरौली थाना क्षेत्र के गांव धनौरा गोरी निवासी बहोरी लाल तीस अपने चचेरे भाई ओमपाल उनतीस के साथ बाइक की सर्विस कराने फ्राइडे सुबह बरेली आए थे। बाइक की सर्विस कराने के बाद के बाद वह शाम को घर लौट रहे थे। रास्ते में वह जैसे ही सिरौली के पास पहुंचे उनकी बाइक को अज्ञात वाहन पीछे से टक्कर मार दी। इससे बाइक अनियंत्रित होकर गिर गई और वाहन की चपेट में आ गए। जिसके चलते दोनों भाइयों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बाइक भी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई। राहगीरों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने परिजनों को सूचना दी। पुलिस की सूचना पर परिजन भी मौके पर पहुंचे गए। परिजनों ने बताया कि उन्होंने एक माह पहले ही नई बाइक खरीदी थी। जिसकी सर्विस कराने दोनों भाई बरेली आए थे। उन्होंने बताया कि बहोरी लाल के परिवार में पत्नी संतोष, एक बेटा और एक बेटी है। वहीं संतोष के परिवार में पत्नी किरन और एक बेटी है।
निर्भया कांड के बाद भारत सरकार ने 2012 में जस्टिस वर्मा कमेटी की अध्यक्षता में बनी कमेटी के सिफारिश पर मोदी सरकार ने देश में डायल 112 को लागू किया है। लखनऊः निर्भया कांड के बाद भारत सरकार ने 2012 में जस्टिस वर्मा कमेटी की अध्यक्षता में बनी कमेटी के सिफारिश पर मोदी सरकार ने देश में डायल 112 को लागू किया है। डायल 112 से आधा दर्जन आपातकालीन सेवाएं जुड़ जाएगी। आम जनता को डायल 112 के डायल करते ही यह सुविधायें मिलेंगी, उनको अलग से दूसरे नम्बरों को डायल करने की जरुरत नहीं पड़ेगी। आम जनता आपातकालीन सेवाओँ से जुड़े जो भी नंबर है उस पर कॉल करेंगे, वह भी नंबर डायल 112 से जुड़ जायेगा। शनिवार को केंद्रशासित राज्यों के बाद यूपी सरकार ने भी डायल 112 के एप को लांच कर दिया है। इस एप के माध्यम से सभी आपातकालीन नंबर जुड़ गए है। भारत सरकार ने 2012 में निर्भया कांड के बाद जस्टिस वर्मा कमेटी की अध्यक्षता में बनी कमेटी ने देश में अमेरिका इमरजेंसी नंबर 911 की तर्ज पर इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्स सिस्टम(ईआरएसएस ) को समूचे देश में लागू करने की सिफारिश की थी। मोदी सरकार ने भारत 112 एक इमरजेंसी नंबर मानते हुए पिछले दिनों केंद्रशासित राज्यों में लांच कर इसकी शुरुआत कर दी है। अब आप जब एक राज्य या केंद्रशासित प्रदेश से दूसरी जगह सफर कर रहे हो। यह नंबर लोगों की परेशानी कम करेगा। विश्व के अधिकांश देशों में आपातकालीन सेवाओं के लिए एक ही नंबर उपलब्ध है। भारत में सभी इमरजेंसी के लिए अलग-अलग नंबर डायल करना पड़ता था, जो अब ख़त्म हो जायेगा। भारत सरकार ने सभी राज्यों को लागू करने के लिए 321. 69 करोड़ रुपए निर्भया स्कीम के तहत यूनियन टेरेटरी को देगी जिससे ईआरएसएस मजबूत किया जा सके। ये भी पढ़ें. . . बड़ा सवाल! निर्भया से लेकर ट्विंकल तक दरिंदगी के इन केसों में आखिर कब मिलेगा न्याय? भारत सरकार ने देश में पुलिस के लिए 100, स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 108, अग्निशमन सेवाओं के लिए 101, महिला हेल्पलाइन के लिए 1091 और 181, चाइल्ड हेल्पलाइन के लिए 1098 नंबर हैं। इन सभी को 112 के अंतर्गत लाया गया है। यानी 112 डायल कर आप किसी भी इमरजेंसी सेवा का लाभ उठा सकते हैं। 112 नंबर पर कॉल करने से नेविगेशन में निश्चित लोकेशन मिलेगी। इस सेवा से फायर सर्विसेज, एंबुलेंस और एसडीआरएफ को भी जोड़ा गया है। पुलिस की गाड़ियों और साइन बोर्ड से यूपी 100 का लोगो हटाया जाएगा। इमरजेंसी सर्विस को एक्सेस करने के लिए कोई इंसान अपने फोन से 112 डायल कर सकता है या फिर अगर कोई बहुत बड़ी इमर्जेंसी है तो फोन का पावर बटन तीन बार प्रेस करने पर भी 112 नंबर डायल हो जाएगा। अगर फीचर फोन है तो 5 या फिर 9 बटन को थोड़ी देर तक दबाया जाए तो काम हो जाएगा। जैसे ही 112 पर कॉल किया जाएगा वैसे ही पुलिस ये कॉल देखेगी और तुरंत एक्शन लेगी। कॉल डिस्ट्रिक्ट कमांड सेंटर द्वारा रिसीव की जाएगी और तुरंत ही इमरजेंसी गाड़ियां भेज दी जाएंगी। कौन से राज्य लॉन्च कर रहे हैं ये इमरजेंसी नंबर? उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात, पुद्दुचेरी, लक्ष्यद्वीप, अंडमान, दादर नागर हवेली, दमन और दीव, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, नागालैंड और हिमाचल प्रदेश समेत 19 राज्य डायल 112 को लांच कर दिए है। अगर फेक कॉल किया तो? 112 एक इमरजेंसी नबंर है और सिर्फ इमर्जेंसी के लिए ही इस्तेमाल होना चाहिए। अगर कोई इस नंबर पर प्रैंक कॉल करता है या फिर बिना किसी मतलब बार-बार डायल करता है तो इसे एक तरह का जुर्म माना जाएगा। 112 का गलत इस्तेमाल करने वाले को पुलिस ट्रैक करेगी और निर्धारित सज़ा भी दी जाएगी। पुलिस इमरजेंसी कॉल सेंटर से डेटा लेकर कॉलर को आसानी से ट्रैक कर सकती है। ये भी पढ़ें. . . बड़ा सवाल! निर्भया से लेकर ट्विंकल तक दरिंदगी के इन केसों में आखिर कब मिलेगा न्याय?
निर्भया कांड के बाद भारत सरकार ने दो हज़ार बारह में जस्टिस वर्मा कमेटी की अध्यक्षता में बनी कमेटी के सिफारिश पर मोदी सरकार ने देश में डायल एक सौ बारह को लागू किया है। लखनऊः निर्भया कांड के बाद भारत सरकार ने दो हज़ार बारह में जस्टिस वर्मा कमेटी की अध्यक्षता में बनी कमेटी के सिफारिश पर मोदी सरकार ने देश में डायल एक सौ बारह को लागू किया है। डायल एक सौ बारह से आधा दर्जन आपातकालीन सेवाएं जुड़ जाएगी। आम जनता को डायल एक सौ बारह के डायल करते ही यह सुविधायें मिलेंगी, उनको अलग से दूसरे नम्बरों को डायल करने की जरुरत नहीं पड़ेगी। आम जनता आपातकालीन सेवाओँ से जुड़े जो भी नंबर है उस पर कॉल करेंगे, वह भी नंबर डायल एक सौ बारह से जुड़ जायेगा। शनिवार को केंद्रशासित राज्यों के बाद यूपी सरकार ने भी डायल एक सौ बारह के एप को लांच कर दिया है। इस एप के माध्यम से सभी आपातकालीन नंबर जुड़ गए है। भारत सरकार ने दो हज़ार बारह में निर्भया कांड के बाद जस्टिस वर्मा कमेटी की अध्यक्षता में बनी कमेटी ने देश में अमेरिका इमरजेंसी नंबर नौ सौ ग्यारह की तर्ज पर इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्स सिस्टम को समूचे देश में लागू करने की सिफारिश की थी। मोदी सरकार ने भारत एक सौ बारह एक इमरजेंसी नंबर मानते हुए पिछले दिनों केंद्रशासित राज्यों में लांच कर इसकी शुरुआत कर दी है। अब आप जब एक राज्य या केंद्रशासित प्रदेश से दूसरी जगह सफर कर रहे हो। यह नंबर लोगों की परेशानी कम करेगा। विश्व के अधिकांश देशों में आपातकालीन सेवाओं के लिए एक ही नंबर उपलब्ध है। भारत में सभी इमरजेंसी के लिए अलग-अलग नंबर डायल करना पड़ता था, जो अब ख़त्म हो जायेगा। भारत सरकार ने सभी राज्यों को लागू करने के लिए तीन सौ इक्कीस. उनहत्तर करोड़ रुपए निर्भया स्कीम के तहत यूनियन टेरेटरी को देगी जिससे ईआरएसएस मजबूत किया जा सके। ये भी पढ़ें. . . बड़ा सवाल! निर्भया से लेकर ट्विंकल तक दरिंदगी के इन केसों में आखिर कब मिलेगा न्याय? भारत सरकार ने देश में पुलिस के लिए एक सौ, स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक सौ आठ, अग्निशमन सेवाओं के लिए एक सौ एक, महिला हेल्पलाइन के लिए एक हज़ार इक्यानवे और एक सौ इक्यासी, चाइल्ड हेल्पलाइन के लिए एक हज़ार अट्ठानवे नंबर हैं। इन सभी को एक सौ बारह के अंतर्गत लाया गया है। यानी एक सौ बारह डायल कर आप किसी भी इमरजेंसी सेवा का लाभ उठा सकते हैं। एक सौ बारह नंबर पर कॉल करने से नेविगेशन में निश्चित लोकेशन मिलेगी। इस सेवा से फायर सर्विसेज, एंबुलेंस और एसडीआरएफ को भी जोड़ा गया है। पुलिस की गाड़ियों और साइन बोर्ड से यूपी एक सौ का लोगो हटाया जाएगा। इमरजेंसी सर्विस को एक्सेस करने के लिए कोई इंसान अपने फोन से एक सौ बारह डायल कर सकता है या फिर अगर कोई बहुत बड़ी इमर्जेंसी है तो फोन का पावर बटन तीन बार प्रेस करने पर भी एक सौ बारह नंबर डायल हो जाएगा। अगर फीचर फोन है तो पाँच या फिर नौ बटन को थोड़ी देर तक दबाया जाए तो काम हो जाएगा। जैसे ही एक सौ बारह पर कॉल किया जाएगा वैसे ही पुलिस ये कॉल देखेगी और तुरंत एक्शन लेगी। कॉल डिस्ट्रिक्ट कमांड सेंटर द्वारा रिसीव की जाएगी और तुरंत ही इमरजेंसी गाड़ियां भेज दी जाएंगी। कौन से राज्य लॉन्च कर रहे हैं ये इमरजेंसी नंबर? उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात, पुद्दुचेरी, लक्ष्यद्वीप, अंडमान, दादर नागर हवेली, दमन और दीव, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, नागालैंड और हिमाचल प्रदेश समेत उन्नीस राज्य डायल एक सौ बारह को लांच कर दिए है। अगर फेक कॉल किया तो? एक सौ बारह एक इमरजेंसी नबंर है और सिर्फ इमर्जेंसी के लिए ही इस्तेमाल होना चाहिए। अगर कोई इस नंबर पर प्रैंक कॉल करता है या फिर बिना किसी मतलब बार-बार डायल करता है तो इसे एक तरह का जुर्म माना जाएगा। एक सौ बारह का गलत इस्तेमाल करने वाले को पुलिस ट्रैक करेगी और निर्धारित सज़ा भी दी जाएगी। पुलिस इमरजेंसी कॉल सेंटर से डेटा लेकर कॉलर को आसानी से ट्रैक कर सकती है। ये भी पढ़ें. . . बड़ा सवाल! निर्भया से लेकर ट्विंकल तक दरिंदगी के इन केसों में आखिर कब मिलेगा न्याय?
जियो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में चल रहे हिजाब विवाद के बारे में बोलते हुए, नोबेल पुरस्कार विजेता और शिक्षा अधिकार कार्यकर्ता मलाला यूसुफजई ने कहा है कि "महिलाओं के कम या ज्यादा पहनने पर आपत्ति" बनी रहती है। मलाला ने ट्विटर पर भारत के कर्नाटक में चल रहे हिजाब विवाद के बारे में बात की, जहां हिजाब पहनने वाले मुस्लिम छात्रों को कॉलेज परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया जा रहा है। कार्यकर्ता ने फैसले के खिलाफ बात की और भारतीय नेताओं से "मुस्लिम महिलाओं के हाशिए पर जाने" को रोकने का आग्रह किया। "कॉलेज हमें पढ़ाई और हिजाब के बीच चयन करने के लिए मजबूर कर रहा है। लड़कियों को उनके हिजाब में स्कूल जाने से मना करना भयावह है। महिलाओं का उद्देश्य बना रहता है - कम या ज्यादा पहनने के लिए। भारतीय नेताओं को मुस्लिम महिलाओं के हाशिए पर जाने को रोकना चाहिए, "मलाला ने एक ट्वीट में कहा।
जियो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में चल रहे हिजाब विवाद के बारे में बोलते हुए, नोबेल पुरस्कार विजेता और शिक्षा अधिकार कार्यकर्ता मलाला यूसुफजई ने कहा है कि "महिलाओं के कम या ज्यादा पहनने पर आपत्ति" बनी रहती है। मलाला ने ट्विटर पर भारत के कर्नाटक में चल रहे हिजाब विवाद के बारे में बात की, जहां हिजाब पहनने वाले मुस्लिम छात्रों को कॉलेज परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया जा रहा है। कार्यकर्ता ने फैसले के खिलाफ बात की और भारतीय नेताओं से "मुस्लिम महिलाओं के हाशिए पर जाने" को रोकने का आग्रह किया। "कॉलेज हमें पढ़ाई और हिजाब के बीच चयन करने के लिए मजबूर कर रहा है। लड़कियों को उनके हिजाब में स्कूल जाने से मना करना भयावह है। महिलाओं का उद्देश्य बना रहता है - कम या ज्यादा पहनने के लिए। भारतीय नेताओं को मुस्लिम महिलाओं के हाशिए पर जाने को रोकना चाहिए, "मलाला ने एक ट्वीट में कहा।
ा जाता है, आपकी डायलिसिस मशीन की ट्यूब में क्लॉट बनने से रोकता है और हृदय की स्थितियों वाले व्यक्तियों में जहां क्लॉट हानिकारक हो सकता है। लोनोपीन इन्जेक्शन में एनोक्सापेरिन एक ऐक्टिव तत्व के रूप में होता है। अगर आप किसी भी सर्जरी या ऑपरेशन या एपिड्यूरल या स्पाइनल एनेस्थीसिया के लिए जा रहे हैं तो आपको अपने डॉक्टर को सूचित करना चाहिए। क्योंकि इससे आपकी मेरूरज्जा में या उसके आसपास थक्के बन सकते हैं और इससे लकवा हो सकता है। अगर आप गर्भवती हैं, गर्भधारण की योजना बना रही हैं या स्तनपान करा रही हैं और लोनोपीन 40 एमजी इंजेक्शन शुरू करने से पहले, आपके द्वारा ली जाने वाली सभी दवाओं और सप्लीमेंट और आपके द्वारा ली जाने वाली सभी स्थितियों या बीमारियों के बारे में अपने डॉक्टर को सूचित करें। ।एनोक्सापेरिन(40.0 एमजी) एमबीबीएस, एमडी (फार्माकोलॉजी) एमबीबीएस, एमडी (फार्माकोलॉजी)
ा जाता है, आपकी डायलिसिस मशीन की ट्यूब में क्लॉट बनने से रोकता है और हृदय की स्थितियों वाले व्यक्तियों में जहां क्लॉट हानिकारक हो सकता है। लोनोपीन इन्जेक्शन में एनोक्सापेरिन एक ऐक्टिव तत्व के रूप में होता है। अगर आप किसी भी सर्जरी या ऑपरेशन या एपिड्यूरल या स्पाइनल एनेस्थीसिया के लिए जा रहे हैं तो आपको अपने डॉक्टर को सूचित करना चाहिए। क्योंकि इससे आपकी मेरूरज्जा में या उसके आसपास थक्के बन सकते हैं और इससे लकवा हो सकता है। अगर आप गर्भवती हैं, गर्भधारण की योजना बना रही हैं या स्तनपान करा रही हैं और लोनोपीन चालीस एमजी इंजेक्शन शुरू करने से पहले, आपके द्वारा ली जाने वाली सभी दवाओं और सप्लीमेंट और आपके द्वारा ली जाने वाली सभी स्थितियों या बीमारियों के बारे में अपने डॉक्टर को सूचित करें। ।एनोक्सापेरिन एमबीबीएस, एमडी एमबीबीएस, एमडी
TVS Raider 125 Super Squad Edition Price: आपको भी Marvel SuperHeroes पसंद हैं तो आप लोगों के लिए टीवीएस ने रेडर 125 का स्पेशल एडिशन लॉन्च कर दिया है, जानिए कितनी है कीमत. टीवीएस मोटर ने भारतीय बाजार में ग्राहकों के लिए TVS Raider का Super Squad Edition लॉन्च कर दिया है, बता दें कि ये स्पेशल एडिशन Marvel सुपर हीरो से इंस्पायर्ड है. इस बाइक के कंपनी ने दो वर्जन उतारे हैं और दोनों ही मॉडल्स में एक से बढ़कर फीचर्स और बढ़िया डिजाइन मिलता है. कितनी है इस स्पेशल एडिशन की कीमत और क्यों है ये एडिशन खास? क्यों खास है TVS Raider Super Squad Edition? जैसा कि हमने आपको बताया टीवीएस मोटर ने इस बाइक के दो वर्जन उतारे हैं, एक वर्जन Iron Man से तो वहीं दूसरा वर्जन Black Panther से इंस्पायर्ड है. आयरन मैन वाला वर्जन आपको रेड एंड ब्लैक कलर स्कीम तो वहीं ब्लैक पैंथर वर्जन ब्लैक एंड पर्पल कलर स्कीम के साथ उतारा गया है. टीवीएस मोटर ने रेडर के इस स्पेशल एडिशन मॉडल की कीमत 98 हजार 919 रुपये (एक्स शोरूम, दिल्ली) तय की है. ऐसा पहली बार नहीं है जब टीवीएस ने स्पेशल एडिशन मॉडल को लॉन्च करने के लिए Marvel के साथ हाथ मिलाया है. कंपनी पहले ही NTorq 125 स्कूटर को चार कलर स्कीम में बेचती है जो Thor, Iron Man के अलावा Black Panther और Spiderman से इंस्पायर्ड है. आप लोगों की जानकारी के लिए बता दें कि टीवीएस ने रेडर 125 के इस स्पेशल एडिशन मॉडल में किसी भी तरह का कोई मैकेनिकल बदलाव नहीं किया है. इस बाइक में 124.8 सीसी एयर कूल्ड इंजन दिया है जो बेहतर हीट मैनेजमेंट के लिए इंटरनल ऑयल कूलर के साथ आता है. इंजन 11.22 bhp की पावर और 11.2 Nm का टॉर्क जेनरेट करता है, ये बाइक आप लोगों को 5 स्पीड गियरबॉक्स के साथ मिलेगी. माइलेज को बढ़ाने के लिए कंपनी साइलेंट मोटर स्टारटर का इस्तेमाल कर रही है.
TVS Raider एक सौ पच्चीस Super Squad Edition Price: आपको भी Marvel SuperHeroes पसंद हैं तो आप लोगों के लिए टीवीएस ने रेडर एक सौ पच्चीस का स्पेशल एडिशन लॉन्च कर दिया है, जानिए कितनी है कीमत. टीवीएस मोटर ने भारतीय बाजार में ग्राहकों के लिए TVS Raider का Super Squad Edition लॉन्च कर दिया है, बता दें कि ये स्पेशल एडिशन Marvel सुपर हीरो से इंस्पायर्ड है. इस बाइक के कंपनी ने दो वर्जन उतारे हैं और दोनों ही मॉडल्स में एक से बढ़कर फीचर्स और बढ़िया डिजाइन मिलता है. कितनी है इस स्पेशल एडिशन की कीमत और क्यों है ये एडिशन खास? क्यों खास है TVS Raider Super Squad Edition? जैसा कि हमने आपको बताया टीवीएस मोटर ने इस बाइक के दो वर्जन उतारे हैं, एक वर्जन Iron Man से तो वहीं दूसरा वर्जन Black Panther से इंस्पायर्ड है. आयरन मैन वाला वर्जन आपको रेड एंड ब्लैक कलर स्कीम तो वहीं ब्लैक पैंथर वर्जन ब्लैक एंड पर्पल कलर स्कीम के साथ उतारा गया है. टीवीएस मोटर ने रेडर के इस स्पेशल एडिशन मॉडल की कीमत अट्ठानवे हजार नौ सौ उन्नीस रुपयापये तय की है. ऐसा पहली बार नहीं है जब टीवीएस ने स्पेशल एडिशन मॉडल को लॉन्च करने के लिए Marvel के साथ हाथ मिलाया है. कंपनी पहले ही NTorq एक सौ पच्चीस स्कूटर को चार कलर स्कीम में बेचती है जो Thor, Iron Man के अलावा Black Panther और Spiderman से इंस्पायर्ड है. आप लोगों की जानकारी के लिए बता दें कि टीवीएस ने रेडर एक सौ पच्चीस के इस स्पेशल एडिशन मॉडल में किसी भी तरह का कोई मैकेनिकल बदलाव नहीं किया है. इस बाइक में एक सौ चौबीस.आठ सीसी एयर कूल्ड इंजन दिया है जो बेहतर हीट मैनेजमेंट के लिए इंटरनल ऑयल कूलर के साथ आता है. इंजन ग्यारह.बाईस bhp की पावर और ग्यारह.दो Nm का टॉर्क जेनरेट करता है, ये बाइक आप लोगों को पाँच स्पीड गियरबॉक्स के साथ मिलेगी. माइलेज को बढ़ाने के लिए कंपनी साइलेंट मोटर स्टारटर का इस्तेमाल कर रही है.
देश की राजधानी में केजरीवाल गवर्नमेंट पर लगातार ही प्रहार हो रहे हैं. जानकारी के अनुसार बता दें कि थप्पड़ कांड के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल एक बार फिर से सुर्खियों में हैं. बता दें कि मंगलवार को दिल्ली सचिवालय में केजरीवाल पर लाल मिर्च का पाउडर फेंका गया है. वहीं सचिवालय में केजरीवाल पर लाल मिर्च फेंके जाने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच गया. वहीं शुरुआती जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री केजरीवाल पर लाल मिर्च पाउडर फेंकने वाले शख्स का नाम अनिल शर्मा है व वह दिल्ली के ही नारायणा इलाके का रहने वाला है. बता दें कि सचिवालय के अंदर केजरीवाल पर लाल मिर्च फेंकने के दौरान अनिल की पुलिस से हाथापाई भी हुई. फिल्हाल पुलिस ने अनिल को हिरासत में लेकर पूछताछ प्रारम्भ कर दी है. गौरतलब है कि सचिवालय में केजरीवाल की बैठक के मुलाकात करने के लिए अनिल शर्मा बहुत ज्यादा वक्त से वेटिंग रुम में इंतजार कर रहा था. बैठक रूम से जैसे ही अरविंद केजरीवाल बाहर आए, अनिल शर्मा उनके पास गया व फिर पैरों में गिर गया. इस दौरान केजरीवाल ने अनिल को रोकने की प्रयास की व उनका चश्मा टूटकर गिर गया. पैर छूकर अनिल जैसे ही ऊपर हुआ, उसने केजरीवाल पर मिर्ची से अटैक कर दिया.
देश की राजधानी में केजरीवाल गवर्नमेंट पर लगातार ही प्रहार हो रहे हैं. जानकारी के अनुसार बता दें कि थप्पड़ कांड के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल एक बार फिर से सुर्खियों में हैं. बता दें कि मंगलवार को दिल्ली सचिवालय में केजरीवाल पर लाल मिर्च का पाउडर फेंका गया है. वहीं सचिवालय में केजरीवाल पर लाल मिर्च फेंके जाने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच गया. वहीं शुरुआती जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री केजरीवाल पर लाल मिर्च पाउडर फेंकने वाले शख्स का नाम अनिल शर्मा है व वह दिल्ली के ही नारायणा इलाके का रहने वाला है. बता दें कि सचिवालय के अंदर केजरीवाल पर लाल मिर्च फेंकने के दौरान अनिल की पुलिस से हाथापाई भी हुई. फिल्हाल पुलिस ने अनिल को हिरासत में लेकर पूछताछ प्रारम्भ कर दी है. गौरतलब है कि सचिवालय में केजरीवाल की बैठक के मुलाकात करने के लिए अनिल शर्मा बहुत ज्यादा वक्त से वेटिंग रुम में इंतजार कर रहा था. बैठक रूम से जैसे ही अरविंद केजरीवाल बाहर आए, अनिल शर्मा उनके पास गया व फिर पैरों में गिर गया. इस दौरान केजरीवाल ने अनिल को रोकने की प्रयास की व उनका चश्मा टूटकर गिर गया. पैर छूकर अनिल जैसे ही ऊपर हुआ, उसने केजरीवाल पर मिर्ची से अटैक कर दिया.
नाइजीरिया (Nigeria) के नाइजर डेल्टा क्षेत्र (Niger Delta Region) में एक अवैध तेल रिफाइनरी में धमाका (Blast in illegal oil refinery) और आग लगने से कम से कम 12 लोगों की मौत (At least 12 people died) हो गई। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि मरने वालों की संख्या और अधिक है। पुलिस प्रवक्ता ने कहा कि दक्षिणी राज्य के एमुहा परिषद क्षेत्र में एक पाइपलाइन के पास विस्फोट हुआ, जब अवैध रिफाइनरी संचालक तेल चोरी करने की कोशिश (attempt to steal oil) कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पुलिस की प्रारंभिक जांच में इस बात के संकेत मिले हैं कि साइट में आग लगने के समय सभी मृतक कच्चा तेल निकाल रहे थे। पुलिस प्रवक्ता ने कहा कि धमाका और आग लगने से पांच वाहन, चार ऑटो-रिक्शा और एक मोटरसाइकिल जलकर राख हो गए। उन्होंने कहा कि अभी अधिकारी इस बात का पता लगा रहे हैं कि इस घटना में कितने लोग मारे गए। वहीं, स्थानीय लोगों ने बताया कि विस्फोट और आग लगने की घटना में दर्जनों लोगों की मौत हो सकती है। उन्होंने कहा कि मरने वालों में ज्यादातर युवा थे, जिन्होंने कम से कम पांच वाहनों में एक पाइपलाइन से तेल निकालने और एक अवैध रिफाइनरी साइट पर ले जाने की योजना बनाई थी। उन्होंने कहा कि विस्फोट काफी तेज था, जिससे आसपास की इमारतें हिल गईं। आसपास के कुछ लोग बचाने की कोशिश करने के लिए दौड़े, लेकिन कुछ नहीं सके। यूथ्स एंड एनवायरनमेंटल एडवोकेसी सेंटर के कार्यकारी निदेशक फाइनफेस डुमनामेन ने कहा कि जैसे ही चालक ने कच्चे तेल के गैलन से लदी बस को स्टार्ट किया। इस दौरान धुआं फेंकने वाले पाइप से निकली चिंगारी से विस्फोट हो गया। बाद में अन्य में भी आग फैल गई और लगभग पांच वाहनों में सवार सभी लोग जल गए। बता दें, अफ्रीका के शीर्ष तेल उत्पादकों में शामिल नाइजीरिया में अवैध रिफाइनरी का व्यवसाय जोरशोर से होता है। अवैध रिफाइनरी संचालक तेल-संपन्न नाइजर डेल्टा क्षेत्र में अधिक सक्रिय हैं, जहां देश की अधिकांश तेल कंपियां हैं। यहां सुरक्षा मानकों का पालन शायद ही होता हो, जिससे यहां आग की घटनाएं होती रहती हैं। पिछले साल इमो राज्य में भी ऐसी ही घटना में 100 से अधिक लोग मारे गए थे।
नाइजीरिया के नाइजर डेल्टा क्षेत्र में एक अवैध तेल रिफाइनरी में धमाका और आग लगने से कम से कम बारह लोगों की मौत हो गई। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि मरने वालों की संख्या और अधिक है। पुलिस प्रवक्ता ने कहा कि दक्षिणी राज्य के एमुहा परिषद क्षेत्र में एक पाइपलाइन के पास विस्फोट हुआ, जब अवैध रिफाइनरी संचालक तेल चोरी करने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पुलिस की प्रारंभिक जांच में इस बात के संकेत मिले हैं कि साइट में आग लगने के समय सभी मृतक कच्चा तेल निकाल रहे थे। पुलिस प्रवक्ता ने कहा कि धमाका और आग लगने से पांच वाहन, चार ऑटो-रिक्शा और एक मोटरसाइकिल जलकर राख हो गए। उन्होंने कहा कि अभी अधिकारी इस बात का पता लगा रहे हैं कि इस घटना में कितने लोग मारे गए। वहीं, स्थानीय लोगों ने बताया कि विस्फोट और आग लगने की घटना में दर्जनों लोगों की मौत हो सकती है। उन्होंने कहा कि मरने वालों में ज्यादातर युवा थे, जिन्होंने कम से कम पांच वाहनों में एक पाइपलाइन से तेल निकालने और एक अवैध रिफाइनरी साइट पर ले जाने की योजना बनाई थी। उन्होंने कहा कि विस्फोट काफी तेज था, जिससे आसपास की इमारतें हिल गईं। आसपास के कुछ लोग बचाने की कोशिश करने के लिए दौड़े, लेकिन कुछ नहीं सके। यूथ्स एंड एनवायरनमेंटल एडवोकेसी सेंटर के कार्यकारी निदेशक फाइनफेस डुमनामेन ने कहा कि जैसे ही चालक ने कच्चे तेल के गैलन से लदी बस को स्टार्ट किया। इस दौरान धुआं फेंकने वाले पाइप से निकली चिंगारी से विस्फोट हो गया। बाद में अन्य में भी आग फैल गई और लगभग पांच वाहनों में सवार सभी लोग जल गए। बता दें, अफ्रीका के शीर्ष तेल उत्पादकों में शामिल नाइजीरिया में अवैध रिफाइनरी का व्यवसाय जोरशोर से होता है। अवैध रिफाइनरी संचालक तेल-संपन्न नाइजर डेल्टा क्षेत्र में अधिक सक्रिय हैं, जहां देश की अधिकांश तेल कंपियां हैं। यहां सुरक्षा मानकों का पालन शायद ही होता हो, जिससे यहां आग की घटनाएं होती रहती हैं। पिछले साल इमो राज्य में भी ऐसी ही घटना में एक सौ से अधिक लोग मारे गए थे।
- धूम-3 में डबल रोल में आमिर! फिल्म 'धूम 3' आइमैक्स के फॉर्मेट में विश्व स्तर पर रिलीज होने वाली है. ये पहली बार होगा जब कोई भारतीय फिल्म आइमैक्स फॉर्मेट में रिलीज होगी. हॉलीवुड फिल्मों में भी कुछ ही फिल्में हैं जो आइमैक्स के फॉर्मेट में रिलीज हुई हैं. 30 अक्टूबर को फिल्म का ट्रेलर भी रिलीज होने वाला है.
- धूम-तीन में डबल रोल में आमिर! फिल्म 'धूम तीन' आइमैक्स के फॉर्मेट में विश्व स्तर पर रिलीज होने वाली है. ये पहली बार होगा जब कोई भारतीय फिल्म आइमैक्स फॉर्मेट में रिलीज होगी. हॉलीवुड फिल्मों में भी कुछ ही फिल्में हैं जो आइमैक्स के फॉर्मेट में रिलीज हुई हैं. तीस अक्टूबर को फिल्म का ट्रेलर भी रिलीज होने वाला है.
Coronavirus: इस कोरोना संक्रमण की संख्या से अब दिल्ली में कुल संक्रमण के आंकड़े 1 लाख 27 हजार से ज्यादा है। इसमें से 1 लाख 9 हजार से ज्यादा लोग ठीक हो चुके है। इससे पता चलता है कि कोरोना मरीजों की रिकवरी रेट 85. 63 प्रतिशत है। जो कि पूरे देश सभी राज्यों से ज्यादा है। दिल्ली में कोरोना संक्रमण के मामले कम होते नजर आ रहे है। पिछले कुछ दिनों से कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या कम होती जा रही है। इसका कारण कारण दिल्ली सरकार ने कोरोना के जांच की संख्या कम कर दी है और लोगों ने भी पूरी तरह से सरकार की गाइडलाइन को मानते हुये सावधानियां बरत रहे है। पिछले 24 घंटे में कोरोना संक्रमण 1041 नये मामले सामने आये है। वहीं इस महामारी से 26 लोगों की मौत हो गई। 1415 मरीज ठीक होकर अपने घर जा चुके है। जो कि संक्रमण से ज्यादा ठीक होने वालों की रही है। वहीं दिल्ली में फिलहाल कोविड-19 के करीब 14554 सक्रिय मामले है। जिसमें से 8000 मरीजों का होम आइसोलेशन में इलाज चल रहा है। इस कोरोना संक्रमण की संख्या से अब दिल्ली में कुल संक्रमण के आंकड़े 1 लाख 27 हजार से ज्यादा है। इसमें से 1 लाख 9 हजार से ज्यादा लोग ठीक हो चुके है। इससे पता चलता है कि कोरोना मरीजों की रिकवरी रेट 85. 63 प्रतिशत है। जो कि पूरे देश सभी राज्यों से ज्यादा है। परंतु मौत के आंकड़े कम न होना दिल्ली सरकार के लिए चुनौती बनी हुई है। दिल्ली में अब तक 3745 मरीजों ने जान गंवाई है। वहीं दिल्ली में जांच की बात करे 18 हजार से अधिक जांच के सैंपल लिये जा चुके है। बेड की बात करें तो दिल्ली में अस्पतालों मे 15000 से अधिक और कोविड सेंटरों में लगभग 8 हजार से अधिक बेड उपलब्ध हैं। एक समाचार पत्र को दिये साक्षात्कार में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि देश की राजधानी के करीब एक तिहाई लोग इम्युनिटी हासिल चुके हैं। केजरीवाल ने कहा कि उनका अनुमान है कि दिल्ली अब हर्ड इम्युनिटी की ओर बढ़ रही है। हर्ड इम्युनिटी कोरोना संक्रमण की वह स्थिति है, जिसमें अधिकतर आबादी संक्रमण के चपेट में आ जाती है और उसके शरीर में बीमारी से लड़ने के लिए ऐंटी-बॉडीज तैयार हो जाती है।
Coronavirus: इस कोरोना संक्रमण की संख्या से अब दिल्ली में कुल संक्रमण के आंकड़े एक लाख सत्ताईस हजार से ज्यादा है। इसमें से एक लाख नौ हजार से ज्यादा लोग ठीक हो चुके है। इससे पता चलता है कि कोरोना मरीजों की रिकवरी रेट पचासी. तिरेसठ प्रतिशत है। जो कि पूरे देश सभी राज्यों से ज्यादा है। दिल्ली में कोरोना संक्रमण के मामले कम होते नजर आ रहे है। पिछले कुछ दिनों से कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या कम होती जा रही है। इसका कारण कारण दिल्ली सरकार ने कोरोना के जांच की संख्या कम कर दी है और लोगों ने भी पूरी तरह से सरकार की गाइडलाइन को मानते हुये सावधानियां बरत रहे है। पिछले चौबीस घंटाटे में कोरोना संक्रमण एक हज़ार इकतालीस नये मामले सामने आये है। वहीं इस महामारी से छब्बीस लोगों की मौत हो गई। एक हज़ार चार सौ पंद्रह मरीज ठीक होकर अपने घर जा चुके है। जो कि संक्रमण से ज्यादा ठीक होने वालों की रही है। वहीं दिल्ली में फिलहाल कोविड-उन्नीस के करीब चौदह हज़ार पाँच सौ चौवन सक्रिय मामले है। जिसमें से आठ हज़ार मरीजों का होम आइसोलेशन में इलाज चल रहा है। इस कोरोना संक्रमण की संख्या से अब दिल्ली में कुल संक्रमण के आंकड़े एक लाख सत्ताईस हजार से ज्यादा है। इसमें से एक लाख नौ हजार से ज्यादा लोग ठीक हो चुके है। इससे पता चलता है कि कोरोना मरीजों की रिकवरी रेट पचासी. तिरेसठ प्रतिशत है। जो कि पूरे देश सभी राज्यों से ज्यादा है। परंतु मौत के आंकड़े कम न होना दिल्ली सरकार के लिए चुनौती बनी हुई है। दिल्ली में अब तक तीन हज़ार सात सौ पैंतालीस मरीजों ने जान गंवाई है। वहीं दिल्ली में जांच की बात करे अट्ठारह हजार से अधिक जांच के सैंपल लिये जा चुके है। बेड की बात करें तो दिल्ली में अस्पतालों मे पंद्रह हज़ार से अधिक और कोविड सेंटरों में लगभग आठ हजार से अधिक बेड उपलब्ध हैं। एक समाचार पत्र को दिये साक्षात्कार में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि देश की राजधानी के करीब एक तिहाई लोग इम्युनिटी हासिल चुके हैं। केजरीवाल ने कहा कि उनका अनुमान है कि दिल्ली अब हर्ड इम्युनिटी की ओर बढ़ रही है। हर्ड इम्युनिटी कोरोना संक्रमण की वह स्थिति है, जिसमें अधिकतर आबादी संक्रमण के चपेट में आ जाती है और उसके शरीर में बीमारी से लड़ने के लिए ऐंटी-बॉडीज तैयार हो जाती है।
LIC Scheme : एलआईसी की इस पॉलिसी का उद्देश्य गरीब एवं कमजोर वर्ग के परिवारों की बेटियों के भविष्य को बेहतर बनना है. LIC Kanyadan Policy : अगर आप अपनी बेटी का भविष्य अच्छा बनाना चाहते हैं तो आप एलआईसी की इस स्कीम में निवेश करके अच्छा रिटर्न हासिल कर सकते हैं. क्योंकि जीवन बीमा कंपनी द्वारा एलआईसी कन्यादान पॉलिसी की शुरुआत की गई है. पूरे देश के वे सभी नागरिक जिनके घर में छोटी बेटियां है और उन्हें अपनी बेटियों के भविष्य और उनके शिक्षण संबंधी चिंता सता रही है, उनके लिए ये बेहतर योजना है. अब आपको परेशान होने की आवश्यकता नहीं है. एलआईसी कन्यादान पॉलिसी के अंतर्गत आप अपनी बेटी की शादी और उसके भविष्य के लिए निवेश कर सकते है. एलआईसी की इस पॉलिसी का उद्देश्य गरीब एवं कमजोर वर्ग के परिवारों की बेटियों के भविष्य को बेहतर बनना है. इस पॉलिसी के तहत निवेश करके एक पिता अपनी बेटी की अच्छी एवं उच्च शिक्षा, शादी और भविष्य के लिए बचत कर सकते है. इस पॉलिसी के माध्यम से रोजाना के हिसाब से 121 रुपए जमा करके और प्रति माह 3600 रुपए प्रीमियम 22 साल तक जमा करके पॉलिसी का टाइम (25 साल) पूरा होने पर बीमाधारक को 27 लाख रूपए दिए जाते है. जिसके उपयोग बेटी के विवाह या उसकी शिक्षा के लिए किया जा सकता है. अगर आप एक पिता हैं और इस पॉलिसी का लाभ लेना चाहते हैं तो इसके लिए आपको जीवन बीमा कन्यादान पॉलिसी का आवेदन करने के लिए कुछ निर्धारित पात्रताओं को पूरा करना होगा. जो लोग इस आवेदन के इन पात्रता/मापदंडो को पूरा करेंगे, केवल वही इस योजना का लाभ उठा सकेंगे. - आवेदक भारत देश का स्थायी नागरिक होना चाहिए. - बेटी के पिता इस योजना हेतु आवेदन करने के पात्र होंगे. - लाभार्थी बालिका की उम्र कम से कम 1 साल होनी चाहिए. - आवेदक की उम्र न्यूनतम 18 साल से 50 साल के बीच होनी चाहिए. - आवेदक का खाता किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक में खुला होना चाहिए. एलआईसी कन्यादान पॉलिसी का कैलकुलेशन करना काफी आसान है एवं इसे आसान से स्टेप्स के माध्यम से समझ सकते है. इस पॉलिसी में लाभार्थी व्यक्ति को पैसे जमा करने होंगे. आपने एक साल में 47,450 रुपए जमा करने है यानी साल के प्रत्येक दिन आपको 130 रुपए देने है. इस केस में पॉलिसी के प्रीमियम को सम्बंधित समयावधि के 3 सालों से कम के लिए अदा किया जाना है, जिसमें कन्यादान नीति कार्यान्वित है. इसके बाद पॉलिसीधारक की ओर से 25 वर्षों में LIC को 27 लाख रुपए दिए जाएंगे. इस पॉलिसी के अंतर्गत इस समय सीमा को कम से कम 13 साल एवं ज्यादा से ज्यादा 25 साल तय किया गया है. एलआईसी की इस बीमा योजना के अंतर्गत पॉलिसीधारक को कर अधिनियम 1961 की धारा 80सी के अनुसार किस्त पर रिहायत दी जाती है. बीमाधारक को यह छूट डेढ़ लाख रुपए तक की मिल सकती है. इसी प्रकार से धारा 10(10डी) के अनुसार पॉलिसी मोच्योर अथवा देहांत क्लेम की राशि के ऊपर भी रिहायत दी जाती है.
LIC Scheme : एलआईसी की इस पॉलिसी का उद्देश्य गरीब एवं कमजोर वर्ग के परिवारों की बेटियों के भविष्य को बेहतर बनना है. LIC Kanyadan Policy : अगर आप अपनी बेटी का भविष्य अच्छा बनाना चाहते हैं तो आप एलआईसी की इस स्कीम में निवेश करके अच्छा रिटर्न हासिल कर सकते हैं. क्योंकि जीवन बीमा कंपनी द्वारा एलआईसी कन्यादान पॉलिसी की शुरुआत की गई है. पूरे देश के वे सभी नागरिक जिनके घर में छोटी बेटियां है और उन्हें अपनी बेटियों के भविष्य और उनके शिक्षण संबंधी चिंता सता रही है, उनके लिए ये बेहतर योजना है. अब आपको परेशान होने की आवश्यकता नहीं है. एलआईसी कन्यादान पॉलिसी के अंतर्गत आप अपनी बेटी की शादी और उसके भविष्य के लिए निवेश कर सकते है. एलआईसी की इस पॉलिसी का उद्देश्य गरीब एवं कमजोर वर्ग के परिवारों की बेटियों के भविष्य को बेहतर बनना है. इस पॉलिसी के तहत निवेश करके एक पिता अपनी बेटी की अच्छी एवं उच्च शिक्षा, शादी और भविष्य के लिए बचत कर सकते है. इस पॉलिसी के माध्यम से रोजाना के हिसाब से एक सौ इक्कीस रुपयापए जमा करके और प्रति माह तीन हज़ार छः सौ रुपयापए प्रीमियम बाईस साल तक जमा करके पॉलिसी का टाइम पूरा होने पर बीमाधारक को सत्ताईस लाख रूपए दिए जाते है. जिसके उपयोग बेटी के विवाह या उसकी शिक्षा के लिए किया जा सकता है. अगर आप एक पिता हैं और इस पॉलिसी का लाभ लेना चाहते हैं तो इसके लिए आपको जीवन बीमा कन्यादान पॉलिसी का आवेदन करने के लिए कुछ निर्धारित पात्रताओं को पूरा करना होगा. जो लोग इस आवेदन के इन पात्रता/मापदंडो को पूरा करेंगे, केवल वही इस योजना का लाभ उठा सकेंगे. - आवेदक भारत देश का स्थायी नागरिक होना चाहिए. - बेटी के पिता इस योजना हेतु आवेदन करने के पात्र होंगे. - लाभार्थी बालिका की उम्र कम से कम एक साल होनी चाहिए. - आवेदक की उम्र न्यूनतम अट्ठारह साल से पचास साल के बीच होनी चाहिए. - आवेदक का खाता किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक में खुला होना चाहिए. एलआईसी कन्यादान पॉलिसी का कैलकुलेशन करना काफी आसान है एवं इसे आसान से स्टेप्स के माध्यम से समझ सकते है. इस पॉलिसी में लाभार्थी व्यक्ति को पैसे जमा करने होंगे. आपने एक साल में सैंतालीस,चार सौ पचास रुपयापए जमा करने है यानी साल के प्रत्येक दिन आपको एक सौ तीस रुपयापए देने है. इस केस में पॉलिसी के प्रीमियम को सम्बंधित समयावधि के तीन सालों से कम के लिए अदा किया जाना है, जिसमें कन्यादान नीति कार्यान्वित है. इसके बाद पॉलिसीधारक की ओर से पच्चीस वर्षों में LIC को सत्ताईस लाख रुपए दिए जाएंगे. इस पॉलिसी के अंतर्गत इस समय सीमा को कम से कम तेरह साल एवं ज्यादा से ज्यादा पच्चीस साल तय किया गया है. एलआईसी की इस बीमा योजना के अंतर्गत पॉलिसीधारक को कर अधिनियम एक हज़ार नौ सौ इकसठ की धारा अस्सीसी के अनुसार किस्त पर रिहायत दी जाती है. बीमाधारक को यह छूट डेढ़ लाख रुपए तक की मिल सकती है. इसी प्रकार से धारा दस के अनुसार पॉलिसी मोच्योर अथवा देहांत क्लेम की राशि के ऊपर भी रिहायत दी जाती है.
Pakur : पाकुड़ (Pakur) शहर में गणेशोत्सव की धूम है. यहां रेलवे मैदान में बने भव्य पंडाल में 31 अगस्त को भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर पूजा शुरू की गई. पूरा मैदान केसरिया झंडों से पटा हुआ है. रेलवे स्टेशन परिसर सहित मैदान तक पहुंचने वाली सड़क की विद्युत सज्जा की गई है. सुबह 8:00 बजे पुरोहित सजल चटर्जी व सुकान्तो साहाना ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा की. इसमें पूजा समिति के सदस्यों सहित सैकड़ों की संख्या में महिला-पुरुष व बच्चे शामिल हुए और पुष्पांजलि अर्पित की. शाम में भजन संध्या बिहार के जमालपुर से व्यास विजय चौधरी, खगड़िया से धर्मेंद्र सिंह, मोनी कुमार सिंह, चंदन प्रसाद साहेबगंज के मुकेश मिश्रा व स्थानीय हनुमान मंदिर मंडली के कलाकारों ने भजनों की प्रस्तुति दी. पूजा के बाद श्रद्धालुओं के बीच खीर महाप्रसाद का वितरण किया गया. महोत्सव के आयोजन में संस्थापक हिसाबी राय, सार्वजनिक पूजा समिति के अध्यक्ष अनिकेत गोस्वामी, सचिव तन्मय पोद्दार, कोषाध्यक्ष विमल तिवारी, अजीत मंडल, सानू रजक, राज चौधरी, बादल सहा, राहुल तिवारी, मनीष सिंह, बिट्टू राय आदि सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं.
Pakur : पाकुड़ शहर में गणेशोत्सव की धूम है. यहां रेलवे मैदान में बने भव्य पंडाल में इकतीस अगस्त को भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर पूजा शुरू की गई. पूरा मैदान केसरिया झंडों से पटा हुआ है. रेलवे स्टेशन परिसर सहित मैदान तक पहुंचने वाली सड़क की विद्युत सज्जा की गई है. सुबह आठ:शून्य बजे पुरोहित सजल चटर्जी व सुकान्तो साहाना ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा की. इसमें पूजा समिति के सदस्यों सहित सैकड़ों की संख्या में महिला-पुरुष व बच्चे शामिल हुए और पुष्पांजलि अर्पित की. शाम में भजन संध्या बिहार के जमालपुर से व्यास विजय चौधरी, खगड़िया से धर्मेंद्र सिंह, मोनी कुमार सिंह, चंदन प्रसाद साहेबगंज के मुकेश मिश्रा व स्थानीय हनुमान मंदिर मंडली के कलाकारों ने भजनों की प्रस्तुति दी. पूजा के बाद श्रद्धालुओं के बीच खीर महाप्रसाद का वितरण किया गया. महोत्सव के आयोजन में संस्थापक हिसाबी राय, सार्वजनिक पूजा समिति के अध्यक्ष अनिकेत गोस्वामी, सचिव तन्मय पोद्दार, कोषाध्यक्ष विमल तिवारी, अजीत मंडल, सानू रजक, राज चौधरी, बादल सहा, राहुल तिवारी, मनीष सिंह, बिट्टू राय आदि सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं.