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कार्यालय संवाददाता - हमीरपुर-हमीरपुर शहर में मंगलवार को भी लोगों की खासी भीड़ उमड़ी रही। खासकर महिलाओं ने करवाचौथ व्रत की पूर्व संध्या पर जमकर खरीददारी की। शहर की अधिकतर दुकानें महिला खरीददारों से भरी नजर आई। दुकानदार भी सामान की बिक्री होने से खासे खुश नजर आए। सड़क किनारे मनियारी का सामान सजाये बैठे दुकानदारों का सामान भी महिलाओं ने हाथों हाथ खरीदा। बाजार में सुबह से लेकर शाम तक ग्राहक खरीददारी करते नजर आए। बता दें कि गांधी चौक से लेकर अस्पताल चौक तक लोगों की बाजार में सामान खरीदने के लिए भीड़ जुटी रही। बाजार की दुकानों में ज्यादातर महिला ग्राहक ही खरीददारी करते नजर आए। करवाचौथ व्रत को लेकर महिलाओं ने खूब खरीददारी की। मनियारी से लेकर कपड़ों, ज्वेलर्ज, मिठाई इत्यादि की दुकानों में दिनभर भीड़ उमड़ी रही।
यही नहीं कई दुकानदारों ने बाजार में बढ़ती भीड़ को देखते हुए गर्म कपड़ों और जूतों की सेल लगा दी, जोकि देखते ही देखते बिक गई। महिलाओं ने सेल का माल हाथों हाथ खरीद लिया। यही नहीं सड़क किनारे बैठे प्रवासी मूल के दुकानदारों के सामान की भी जमकर खरीददारी हुई। बाजार में जगह-जगह मेंहदी लगाने वाले लड़कियां व लड़के बैठे हुए हैं, जिन्होंने महिलाओं की पंसद का डिजाइन उनके हाथों व पैरों पर उतारा। मेंहदी लगाने वालों के पास भी महिलाओं का शाम तक जमघट लगा रहा। शहर के सभी एटीएम दूसरे दिन भी खाली नजर आए। एसबीआई बैंक के एटीएम को छोड़कर अन्य एटीएम दोपहर तक खाली हो गए थे। हालांकि एसबीआई के एटीएम में भी हर दो घंटे के उपरांत कैश डाला जा रहा था, ताकि लोगों को पैसे निकालने में किसी तरह की परेशान न झेलनी पड़े। जिस एटीएम से पैसे निकल रहे थे, वहां पैसे निकालने वालों की लंबी-लंबी कतारें भी देखने को मिली। कुल मिलाकर करवाचौथ की पूर्व संध्या पर लोगों ने जमकर खरीददारी की।
| कार्यालय संवाददाता - हमीरपुर-हमीरपुर शहर में मंगलवार को भी लोगों की खासी भीड़ उमड़ी रही। खासकर महिलाओं ने करवाचौथ व्रत की पूर्व संध्या पर जमकर खरीददारी की। शहर की अधिकतर दुकानें महिला खरीददारों से भरी नजर आई। दुकानदार भी सामान की बिक्री होने से खासे खुश नजर आए। सड़क किनारे मनियारी का सामान सजाये बैठे दुकानदारों का सामान भी महिलाओं ने हाथों हाथ खरीदा। बाजार में सुबह से लेकर शाम तक ग्राहक खरीददारी करते नजर आए। बता दें कि गांधी चौक से लेकर अस्पताल चौक तक लोगों की बाजार में सामान खरीदने के लिए भीड़ जुटी रही। बाजार की दुकानों में ज्यादातर महिला ग्राहक ही खरीददारी करते नजर आए। करवाचौथ व्रत को लेकर महिलाओं ने खूब खरीददारी की। मनियारी से लेकर कपड़ों, ज्वेलर्ज, मिठाई इत्यादि की दुकानों में दिनभर भीड़ उमड़ी रही। यही नहीं कई दुकानदारों ने बाजार में बढ़ती भीड़ को देखते हुए गर्म कपड़ों और जूतों की सेल लगा दी, जोकि देखते ही देखते बिक गई। महिलाओं ने सेल का माल हाथों हाथ खरीद लिया। यही नहीं सड़क किनारे बैठे प्रवासी मूल के दुकानदारों के सामान की भी जमकर खरीददारी हुई। बाजार में जगह-जगह मेंहदी लगाने वाले लड़कियां व लड़के बैठे हुए हैं, जिन्होंने महिलाओं की पंसद का डिजाइन उनके हाथों व पैरों पर उतारा। मेंहदी लगाने वालों के पास भी महिलाओं का शाम तक जमघट लगा रहा। शहर के सभी एटीएम दूसरे दिन भी खाली नजर आए। एसबीआई बैंक के एटीएम को छोड़कर अन्य एटीएम दोपहर तक खाली हो गए थे। हालांकि एसबीआई के एटीएम में भी हर दो घंटे के उपरांत कैश डाला जा रहा था, ताकि लोगों को पैसे निकालने में किसी तरह की परेशान न झेलनी पड़े। जिस एटीएम से पैसे निकल रहे थे, वहां पैसे निकालने वालों की लंबी-लंबी कतारें भी देखने को मिली। कुल मिलाकर करवाचौथ की पूर्व संध्या पर लोगों ने जमकर खरीददारी की। |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
मोसिम तड़वी,बुरहानपुर। मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले में बिना रेलिंग वाले पुल पर दो बाइक की आमने-सामने टक्कर हो गई। इस सड़क हादसे में बाइक सवार एक पुलिसकर्मी नदी में डूब कर बहा गया। जबकि दो बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हो गए, उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। आरक्षक गज्जू आवडे खंडवा के बोरगांव थाने में पदस्थ है। फिलहाल पुलिसकर्मी की तलाश की जा रही है।
जानकारी के मुताबिक, शाहपुर थाना क्षेत्र के ताप्ती नदी के पास गुरुवार की रात एक बड़ा हादसा हो गया। जहां बिना रेलिंग वाली हतनूर पुलिया पर दो बाइक आपस में टकरा गई। इस हादसे में बाइक सवार पुलिसकर्मी पुल से सीधे नदी में जा गिरा और वह बह गया। जिसकी तलाश की जा रही है। आरक्षक गज्जू आवडे अपने घर आया था। इस दौरान लौटते वक्त यह हादसा हुआ। वहीं इस घटना में दो अन्य बाइक सवार को भी चोट आई है। जिन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
| मोसिम तड़वी,बुरहानपुर। मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले में बिना रेलिंग वाले पुल पर दो बाइक की आमने-सामने टक्कर हो गई। इस सड़क हादसे में बाइक सवार एक पुलिसकर्मी नदी में डूब कर बहा गया। जबकि दो बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हो गए, उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। आरक्षक गज्जू आवडे खंडवा के बोरगांव थाने में पदस्थ है। फिलहाल पुलिसकर्मी की तलाश की जा रही है। जानकारी के मुताबिक, शाहपुर थाना क्षेत्र के ताप्ती नदी के पास गुरुवार की रात एक बड़ा हादसा हो गया। जहां बिना रेलिंग वाली हतनूर पुलिया पर दो बाइक आपस में टकरा गई। इस हादसे में बाइक सवार पुलिसकर्मी पुल से सीधे नदी में जा गिरा और वह बह गया। जिसकी तलाश की जा रही है। आरक्षक गज्जू आवडे अपने घर आया था। इस दौरान लौटते वक्त यह हादसा हुआ। वहीं इस घटना में दो अन्य बाइक सवार को भी चोट आई है। जिन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। |
लखनऊ-बहराइच हाईवे पर रिठौरा सपसा मोड़ के पास गुरुवार को भीषण सड़क हादसा हो गाय। यहां साइकल सवार को बचाने के प्रयास में एक कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बैठे लोगों को रौदते हुए पेड़ से टकरा गई। इस दुर्घटना मे साइकिल सवार व कार चालक समेत पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।
बहराइचः लखनऊ-बहराइच हाईवे पर रिठौरा सपसा मोड़ के पास गुरुवार को भीषण सड़क हादसा हो गाय। यहां साइकल सवार को बचाने के प्रयास में एक कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बैठे लोगों को रौंदते हुए पेड़ से टकरा गई। इस दुर्घटना मे साइकिल सवार व कार चालक समेत पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि गंभीर रूप से घायल तीन लोगों को सीएचसी मुस्तफाबाद में भर्ती कराया गया।
क्या है पूरा मामला?
- जरवलरोड थाना अंतर्गत जरवल कस्बा के मोहल्ला अहमद शाहनगर निवासी 28 वर्षीय जीशान पुत्र मंजूर गुरुवार को पड़ोसी की कार लेकर आवश्यक कार्य से लखनऊ जा रहा था।
- कार में इसी मोहल्ले का 20 वर्षीय इम्तियाज पुत्र इस्तियाक, जरवल ब्लाक परिसर निवासी वार्ड बॉय 24 वर्षीय संदीप श्रीवास्तव पुत्र संजय श्रीवास्तव व 22 वर्षीय मोहम्मद सलीम अंसारी पुत्र साबिर भी बैठे थे।
- कार जैसे ही जरवलरोड थाने के बहराइच-लखनऊ हाइवे पर रिठौढा सपसा मोड़ के पास पहुंची तो सामने अचानक एक साइकल सवार आ गया।
- जिसके चलते कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बैठे चार लोगों को रौंदते हुए एक पेड़ से टकरा गई।
- इस दुर्घटना में कार चालक जीशान, सलीम अंसारी और सड़क किनारे बैठे रिठौड़ा निवासी 35 वर्षीय राजेश पुत्र जगमोहन, 24 वर्षीय मुनीश पुत्र राजेन्द्र व साइकिल सवार जरवलरोड थाने के नियामत पुर निवासी 30 वर्षीय साहब दयाल पुत्र सियायाराम की मौके पर ही मौत हो गयी।
- कार में सवार इम्तियाज, संदीप श्रीवास्तव सड़क किनारे बैठे रिठौड़ा के 20 वर्षीय मनोज पुत्र राज कुमार गंभीर रूप से घायल हैं । मौके पर अफरा तफरी मच गई।
- पुलिस ने घायलों को सीएचसी मुस्तफाबाद पहुंचाया। लेकिन डाक्टरों नेें बताया कि हालत गंभीर होने पर मनोज व संदीप को ट्रामा सेंट्रर लखनऊ रेफर कर दिया गया है।
- जरवलरोड पुलिस ने पंचनामा कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
थाना प्रभारी मधुप नाथ मिश्रा ने बताया कि ग्रामीणों की मदद से सभी घायलों को इलाज के लिये भर्ती कराया गया। तहरीर मिलने पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
| लखनऊ-बहराइच हाईवे पर रिठौरा सपसा मोड़ के पास गुरुवार को भीषण सड़क हादसा हो गाय। यहां साइकल सवार को बचाने के प्रयास में एक कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बैठे लोगों को रौदते हुए पेड़ से टकरा गई। इस दुर्घटना मे साइकिल सवार व कार चालक समेत पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। बहराइचः लखनऊ-बहराइच हाईवे पर रिठौरा सपसा मोड़ के पास गुरुवार को भीषण सड़क हादसा हो गाय। यहां साइकल सवार को बचाने के प्रयास में एक कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बैठे लोगों को रौंदते हुए पेड़ से टकरा गई। इस दुर्घटना मे साइकिल सवार व कार चालक समेत पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि गंभीर रूप से घायल तीन लोगों को सीएचसी मुस्तफाबाद में भर्ती कराया गया। क्या है पूरा मामला? - जरवलरोड थाना अंतर्गत जरवल कस्बा के मोहल्ला अहमद शाहनगर निवासी अट्ठाईस वर्षीय जीशान पुत्र मंजूर गुरुवार को पड़ोसी की कार लेकर आवश्यक कार्य से लखनऊ जा रहा था। - कार में इसी मोहल्ले का बीस वर्षीय इम्तियाज पुत्र इस्तियाक, जरवल ब्लाक परिसर निवासी वार्ड बॉय चौबीस वर्षीय संदीप श्रीवास्तव पुत्र संजय श्रीवास्तव व बाईस वर्षीय मोहम्मद सलीम अंसारी पुत्र साबिर भी बैठे थे। - कार जैसे ही जरवलरोड थाने के बहराइच-लखनऊ हाइवे पर रिठौढा सपसा मोड़ के पास पहुंची तो सामने अचानक एक साइकल सवार आ गया। - जिसके चलते कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बैठे चार लोगों को रौंदते हुए एक पेड़ से टकरा गई। - इस दुर्घटना में कार चालक जीशान, सलीम अंसारी और सड़क किनारे बैठे रिठौड़ा निवासी पैंतीस वर्षीय राजेश पुत्र जगमोहन, चौबीस वर्षीय मुनीश पुत्र राजेन्द्र व साइकिल सवार जरवलरोड थाने के नियामत पुर निवासी तीस वर्षीय साहब दयाल पुत्र सियायाराम की मौके पर ही मौत हो गयी। - कार में सवार इम्तियाज, संदीप श्रीवास्तव सड़क किनारे बैठे रिठौड़ा के बीस वर्षीय मनोज पुत्र राज कुमार गंभीर रूप से घायल हैं । मौके पर अफरा तफरी मच गई। - पुलिस ने घायलों को सीएचसी मुस्तफाबाद पहुंचाया। लेकिन डाक्टरों नेें बताया कि हालत गंभीर होने पर मनोज व संदीप को ट्रामा सेंट्रर लखनऊ रेफर कर दिया गया है। - जरवलरोड पुलिस ने पंचनामा कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। थाना प्रभारी मधुप नाथ मिश्रा ने बताया कि ग्रामीणों की मदद से सभी घायलों को इलाज के लिये भर्ती कराया गया। तहरीर मिलने पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। |
ब्रिटेन के लीसेस्टर नगर में हुए विस्फोट में कम से कम चार लोग मारे गए हैं।
रविवार की शाम को होने वाले इस विस्फोट में कुछ लोगों के घायल होने की भी सूचना है। ब्रिटेन की पुलिस ने लीसेस्टर शायर में होने वाले विस्फोट में चार लोगों के मारे जाने की पुष्टि की है। बताया जा रहा है कि विस्फोट में घायल होने वालों की स्थिति चिंताजनक है। विस्फोट के कारण एक दुकान और उसपर बना घर ध्वस्त हो गए।
ब्रिटेन की पुलिस ने घटनास्थल के निकटवर्ती 60 घरों को ख़ाली करवा लिया है किंतु उसका कहना है कि यह कोई आतंकवादी घटना नहीं थी। घटनास्थल की ओर जाने वाले सभी रास्ते बंद कर दिये गए हैं और लोगों को उस जाने से रोका जा रहा है। जिस स्थान पर विस्फोट हुआ है वहां पर कई व्यवसायिक स्थल है। विस्फोट की इस घटना को एक बड़ी घटना के रूप में देखा जा रहा है।
| ब्रिटेन के लीसेस्टर नगर में हुए विस्फोट में कम से कम चार लोग मारे गए हैं। रविवार की शाम को होने वाले इस विस्फोट में कुछ लोगों के घायल होने की भी सूचना है। ब्रिटेन की पुलिस ने लीसेस्टर शायर में होने वाले विस्फोट में चार लोगों के मारे जाने की पुष्टि की है। बताया जा रहा है कि विस्फोट में घायल होने वालों की स्थिति चिंताजनक है। विस्फोट के कारण एक दुकान और उसपर बना घर ध्वस्त हो गए। ब्रिटेन की पुलिस ने घटनास्थल के निकटवर्ती साठ घरों को ख़ाली करवा लिया है किंतु उसका कहना है कि यह कोई आतंकवादी घटना नहीं थी। घटनास्थल की ओर जाने वाले सभी रास्ते बंद कर दिये गए हैं और लोगों को उस जाने से रोका जा रहा है। जिस स्थान पर विस्फोट हुआ है वहां पर कई व्यवसायिक स्थल है। विस्फोट की इस घटना को एक बड़ी घटना के रूप में देखा जा रहा है। |
केरलः कोरोना वायरस की वजह से पूरे देश में लॉकडाउन लागू है और जगह-जगह शराब की दुकानें बंद कर दी गई है.
केरल में भी राज्य सरकार ने 14 अप्रैल तक शराब की दुकानों को बंद रखने का फैसला किया है, मगर केरल में शराब न मिलने की वजह से तीन युवकों ने आत्महत्या कर ली है.
कल यानी शुक्रवार को जहां शराब न मिलने की वजह से एक युवक ने आत्महत्या कर ली, वहीं आज यानी शनिवार को दो युवकों ने सुसाइड कर लिया.
शनिवार को जिस शख्स ने शराब न मिलने की वजह से आत्महत्या की है, उसका नाम सनोज बताया जा रहा है. वह थ्रिसूर का रहने वाला था और उसकी बॉडी शुक्रवार सुबह मिली.
इस तरह से जब से लॉकडाउन का ऐलान हुआ है तब से शराब न मिलने की वजह से तीन लोगों ने आत्महत्या कर ली है. एक घटना कोच्चि की है तो दूसरी कन्नूर की.
इसके अलावा, कोरोना वायरस से केरल में आज पहली मौत भी दर्ज की गई है. केरल में एर्नाकुलम मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कोरोना वायरस का इलाज करा रहे 69 वर्षीय व्यक्ति की शनिवार को मौत हो गई.
| केरलः कोरोना वायरस की वजह से पूरे देश में लॉकडाउन लागू है और जगह-जगह शराब की दुकानें बंद कर दी गई है. केरल में भी राज्य सरकार ने चौदह अप्रैल तक शराब की दुकानों को बंद रखने का फैसला किया है, मगर केरल में शराब न मिलने की वजह से तीन युवकों ने आत्महत्या कर ली है. कल यानी शुक्रवार को जहां शराब न मिलने की वजह से एक युवक ने आत्महत्या कर ली, वहीं आज यानी शनिवार को दो युवकों ने सुसाइड कर लिया. शनिवार को जिस शख्स ने शराब न मिलने की वजह से आत्महत्या की है, उसका नाम सनोज बताया जा रहा है. वह थ्रिसूर का रहने वाला था और उसकी बॉडी शुक्रवार सुबह मिली. इस तरह से जब से लॉकडाउन का ऐलान हुआ है तब से शराब न मिलने की वजह से तीन लोगों ने आत्महत्या कर ली है. एक घटना कोच्चि की है तो दूसरी कन्नूर की. इसके अलावा, कोरोना वायरस से केरल में आज पहली मौत भी दर्ज की गई है. केरल में एर्नाकुलम मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कोरोना वायरस का इलाज करा रहे उनहत्तर वर्षीय व्यक्ति की शनिवार को मौत हो गई. |
समें एक कम उम्र लड़के की प्रेम कहानी भी है. एक सफर के दौरान रज्जो से उस लड़के का साथ क्या होता है, एक नई कहानी बन जाती है. फिल्म इसी पर है. इसका बैकग्राउंड मुंबई है. हमने यहीं इसकी शूटिंग की है.
| समें एक कम उम्र लड़के की प्रेम कहानी भी है. एक सफर के दौरान रज्जो से उस लड़के का साथ क्या होता है, एक नई कहानी बन जाती है. फिल्म इसी पर है. इसका बैकग्राउंड मुंबई है. हमने यहीं इसकी शूटिंग की है. |
एयरपोर्ट के बाहर पानी का छिड़काव करता कंपनी का कर्मचारी।
- फोटो : ? ? ? ? ? ? ? ?
अमौसी एयरपोर्ट पर टर्मिनल-3 के निर्माण कार्य से हो रहे वायु प्रदूषण पर यूपीपीसीबी ने कार्यदायी संस्था एनसीसी को नोटिस जारी किया है।
अमर उजाला में छह फरवरी को खबर प्रकाशित होने के बाद यूपीपीसीबी की टीम ने निरीक्षण किया तो बिना मानक निर्माण होते मिला।
यूपीपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. राम करन ने बताया कि टीम ने निरीक्षण में पाया कि न्यू इंटीग्रेटेड पैसेंजर टर्मिनल का निर्माण 55 प्रतिशत तक पूरा कर लिया गया है।
कई निर्माण साइट पर ग्रीन नेट का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा था। पानी के छिड़काव की भी उपयुक्त व्यवस्था नहीं थी। मौरंग, बालू, सीमेंट भी बिना ढके रखी थीं।
कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधि ने कहा कि टैंकर से नियमित पानी का छिड़काव किया जाता है। साइट के बाउंड्रीवॉल के अंदर-बाहर बेर के पेड़ों पर भी प्रदूषण का असर मिला है।
यूपीपीसीबी ने कंपनी के अधिकारियों को वायु गुणवत्ता की जांच प्रमाणित लैब से कराकर रिपोर्ट देने के लिए कहा है। ऐसा नहीं होने पर जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं, कंपनी ने निर्माण के आसपास पानी का छिड़काव शुरू करा दिया है।
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| एयरपोर्ट के बाहर पानी का छिड़काव करता कंपनी का कर्मचारी। - फोटो : ? ? ? ? ? ? ? ? अमौसी एयरपोर्ट पर टर्मिनल-तीन के निर्माण कार्य से हो रहे वायु प्रदूषण पर यूपीपीसीबी ने कार्यदायी संस्था एनसीसी को नोटिस जारी किया है। अमर उजाला में छह फरवरी को खबर प्रकाशित होने के बाद यूपीपीसीबी की टीम ने निरीक्षण किया तो बिना मानक निर्माण होते मिला। यूपीपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. राम करन ने बताया कि टीम ने निरीक्षण में पाया कि न्यू इंटीग्रेटेड पैसेंजर टर्मिनल का निर्माण पचपन प्रतिशत तक पूरा कर लिया गया है। कई निर्माण साइट पर ग्रीन नेट का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा था। पानी के छिड़काव की भी उपयुक्त व्यवस्था नहीं थी। मौरंग, बालू, सीमेंट भी बिना ढके रखी थीं। कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधि ने कहा कि टैंकर से नियमित पानी का छिड़काव किया जाता है। साइट के बाउंड्रीवॉल के अंदर-बाहर बेर के पेड़ों पर भी प्रदूषण का असर मिला है। यूपीपीसीबी ने कंपनी के अधिकारियों को वायु गुणवत्ता की जांच प्रमाणित लैब से कराकर रिपोर्ट देने के लिए कहा है। ऐसा नहीं होने पर जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं, कंपनी ने निर्माण के आसपास पानी का छिड़काव शुरू करा दिया है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen. |
मध्य प्रदेश : मध्य प्रदेश के जबलपुर में हत्या और फिर आत्महत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जहां पर एक शादीशुदा युवक ने पहले तो अपनी एक्स गर्लफ्रेंड को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया और फिर उसकी लाश को कार में ही छोड़ खुद ने नर्मदा नदी में कूदकर खुदकुशी कर ली। पुलिस जांच में इस पूरे मामले का पर्दाफाश हुआ है। शहर की गौर पुलिस चौकी इलाके में स्थित नर्मदा पुल पर 23 जुलाई को जोगनी नगर राममपुर निवासी अनिभा केवट की लाश मिली थी। एक कार में गोली मारकर युवती की हत्या कर दी गई थी। हत्या का शक पूर्व प्रेमी बादल पटेल पर गहराया था। इसके तीसरे दिन ही बादल की लाश तिलवारा पुल के समीप पानी में मिली। बादल पेशे से पत्रकार था। पुलिस ने बताया कि बीते दिनों फर्जी पत्रकार गैंग पर हुई पुलिस कार्रवाई में बादल पटेल जेल चला गया था। इधर, अनिभा का मनी ट्रांजेक्शन कंपनी के मैनेजर से अफेयर शुरू हो गया था। जब बादल जेल से बाहर आया तो अपनी बेवफा प्रेमिका की जानकारी उसे मिली। इसके बाद उसने अनिभा को समझाने या मैनेजर को ब्लैकमेल करने के इरादे से उसे आईटी पार्क स्थित ऑफिस से बाहर बुलाया और अपने दोस्त की कार में नर्मदा पुल ले गया। जहां विवाद होने पर बादल ने अनिभा की गोली मारकर हत्या कर दी और उसकी लाश को कार में ही छोड़कर खुद नर्मदा नदी में कूद गया। उधर, पुलिस और गोताखोर घटना के दिन से ही लगातार नर्मदा नदी में आरोपी बादल पटेल की तलाश कर रहे थे, क्योंकि पहले ही पता चल गया था कि वारदात को अंजाम देने के बाद बादल ने नदी में छलांग लगा दी थी।
| मध्य प्रदेश : मध्य प्रदेश के जबलपुर में हत्या और फिर आत्महत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जहां पर एक शादीशुदा युवक ने पहले तो अपनी एक्स गर्लफ्रेंड को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया और फिर उसकी लाश को कार में ही छोड़ खुद ने नर्मदा नदी में कूदकर खुदकुशी कर ली। पुलिस जांच में इस पूरे मामले का पर्दाफाश हुआ है। शहर की गौर पुलिस चौकी इलाके में स्थित नर्मदा पुल पर तेईस जुलाई को जोगनी नगर राममपुर निवासी अनिभा केवट की लाश मिली थी। एक कार में गोली मारकर युवती की हत्या कर दी गई थी। हत्या का शक पूर्व प्रेमी बादल पटेल पर गहराया था। इसके तीसरे दिन ही बादल की लाश तिलवारा पुल के समीप पानी में मिली। बादल पेशे से पत्रकार था। पुलिस ने बताया कि बीते दिनों फर्जी पत्रकार गैंग पर हुई पुलिस कार्रवाई में बादल पटेल जेल चला गया था। इधर, अनिभा का मनी ट्रांजेक्शन कंपनी के मैनेजर से अफेयर शुरू हो गया था। जब बादल जेल से बाहर आया तो अपनी बेवफा प्रेमिका की जानकारी उसे मिली। इसके बाद उसने अनिभा को समझाने या मैनेजर को ब्लैकमेल करने के इरादे से उसे आईटी पार्क स्थित ऑफिस से बाहर बुलाया और अपने दोस्त की कार में नर्मदा पुल ले गया। जहां विवाद होने पर बादल ने अनिभा की गोली मारकर हत्या कर दी और उसकी लाश को कार में ही छोड़कर खुद नर्मदा नदी में कूद गया। उधर, पुलिस और गोताखोर घटना के दिन से ही लगातार नर्मदा नदी में आरोपी बादल पटेल की तलाश कर रहे थे, क्योंकि पहले ही पता चल गया था कि वारदात को अंजाम देने के बाद बादल ने नदी में छलांग लगा दी थी। |
यहां दादियों से तापसी का तात्पर्य चंद्रो तोमर और प्रकाशी तोमर से है जो भारत की सबसे अधिक उम्र की शार्प शूटर हैं और जिन पर आधारित तापसी की अगली फिल्म 'सांड की आंख' है। इसमें तापसी के साथ भूमि पेडनेकर भी खास भूमिका में हैं।
भूमि ने कहा, "मैंने 'सांड की आंख' की सफलता के लिए प्रार्थना की है। मैं निश्चित हूं कि हम इस कहानी को देश के दूरवर्ती स्थानों तक पहुंचाएंगे। "
तुषार हीरानंदानी द्वारा निर्देशित इस फिल्म को रिलायंस एंटरटेनमेंट, अनुराग कश्यप और निधि परमार ने प्रोड्यूस किया है। (आईएएनएस)
| यहां दादियों से तापसी का तात्पर्य चंद्रो तोमर और प्रकाशी तोमर से है जो भारत की सबसे अधिक उम्र की शार्प शूटर हैं और जिन पर आधारित तापसी की अगली फिल्म 'सांड की आंख' है। इसमें तापसी के साथ भूमि पेडनेकर भी खास भूमिका में हैं। भूमि ने कहा, "मैंने 'सांड की आंख' की सफलता के लिए प्रार्थना की है। मैं निश्चित हूं कि हम इस कहानी को देश के दूरवर्ती स्थानों तक पहुंचाएंगे। " तुषार हीरानंदानी द्वारा निर्देशित इस फिल्म को रिलायंस एंटरटेनमेंट, अनुराग कश्यप और निधि परमार ने प्रोड्यूस किया है। |
भजन संध्या के बीच मोदी-मोदी के नारे गुंजने के बाद संयम लोढ़ा बुरी तरह बिफ़र पड़े। इस दौरान उन्होंने बीच में माइक पकड़ लिया और नारे लगा रहे लोगों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि यह देश की बड़ी कलाकार आई है और तुम तमीज से भी नहीं सुन सकते हो। क्या तुम्हारे मां-बाप ने तुम्हें तमीज नहीं सिखाई। इस दौरान लोढ़ा ने वहां नारे लगा रहे लोगों को चेतावनी दी कि यदि किसी ने चू भी बोला तो, ठीक नहीं होगा। उन्होंने कहा कि मेहमानों की इज्जत करना सीखो।
संयम लोढ़ा का लोगों को डफोलो कहते हुए फटकार लगाने का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। दूसरी ओर यह मामला सामने आने के बाद बीजेपी नेताओं ने लोढ़ा पर जमकर तीखा हमला शुरू कर दिया है। इस दौरान पिंडवाड़ा विधायक समाराम ने ट्वीट कर लिखा कि मोदी के नाम से नफरत करने वाले विधायक जी कब तक लोगों के मुंह बंद करोगे। इसी तरह पूर्व जिला प्रमुख पायल परसरामपुरिया ने सोशल मीडिया पर लिखा कि 4 सालों तक सत्ता की मलाई खाते हुए आपको जनता डफोल लगने लगी। भाजयुमो के पूर्व अध्यक्ष हेमंत पुरोहित ने संयम लोढ़ा पर जमकर निशाना साधते हुए ट्वीट किया। जिसमें कहा कि आप तो बड़े निगुरे निकले! जनता से रोते हुए वोट की भीख मांगी। अब उसी जनता को डफोल मानने लगे हो। सात माह में यही जनता आपको बता देगी कि डफोल कौन है?
इस मामले में विधायक संयम लोढ़ा का कहना है कि खेतलाजी मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के तहत गायिका गीता रेबारी के भजन लोग सुनना चाह रहे थे। लेकिन कुछ लोगों ने धार्मिक कार्यक्रम में राजनीतिक टिप्पणियां शुरू कर दी। इसके अलावा पंडाल की लाइट और माइक को भी बाधित कर दिया। जिसके चलते भजन संध्या का कार्यक्रम निरस्त कर दिया गया। उन्होंने चेतावनी दी है कि जो लोग धार्मिक कार्यक्रम में राजनीतिक टिप्पणी करते हैं। वे मर्यादा में रहे नहीं तो, सख्त कार्रवाई होगी।
| भजन संध्या के बीच मोदी-मोदी के नारे गुंजने के बाद संयम लोढ़ा बुरी तरह बिफ़र पड़े। इस दौरान उन्होंने बीच में माइक पकड़ लिया और नारे लगा रहे लोगों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि यह देश की बड़ी कलाकार आई है और तुम तमीज से भी नहीं सुन सकते हो। क्या तुम्हारे मां-बाप ने तुम्हें तमीज नहीं सिखाई। इस दौरान लोढ़ा ने वहां नारे लगा रहे लोगों को चेतावनी दी कि यदि किसी ने चू भी बोला तो, ठीक नहीं होगा। उन्होंने कहा कि मेहमानों की इज्जत करना सीखो। संयम लोढ़ा का लोगों को डफोलो कहते हुए फटकार लगाने का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। दूसरी ओर यह मामला सामने आने के बाद बीजेपी नेताओं ने लोढ़ा पर जमकर तीखा हमला शुरू कर दिया है। इस दौरान पिंडवाड़ा विधायक समाराम ने ट्वीट कर लिखा कि मोदी के नाम से नफरत करने वाले विधायक जी कब तक लोगों के मुंह बंद करोगे। इसी तरह पूर्व जिला प्रमुख पायल परसरामपुरिया ने सोशल मीडिया पर लिखा कि चार सालों तक सत्ता की मलाई खाते हुए आपको जनता डफोल लगने लगी। भाजयुमो के पूर्व अध्यक्ष हेमंत पुरोहित ने संयम लोढ़ा पर जमकर निशाना साधते हुए ट्वीट किया। जिसमें कहा कि आप तो बड़े निगुरे निकले! जनता से रोते हुए वोट की भीख मांगी। अब उसी जनता को डफोल मानने लगे हो। सात माह में यही जनता आपको बता देगी कि डफोल कौन है? इस मामले में विधायक संयम लोढ़ा का कहना है कि खेतलाजी मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के तहत गायिका गीता रेबारी के भजन लोग सुनना चाह रहे थे। लेकिन कुछ लोगों ने धार्मिक कार्यक्रम में राजनीतिक टिप्पणियां शुरू कर दी। इसके अलावा पंडाल की लाइट और माइक को भी बाधित कर दिया। जिसके चलते भजन संध्या का कार्यक्रम निरस्त कर दिया गया। उन्होंने चेतावनी दी है कि जो लोग धार्मिक कार्यक्रम में राजनीतिक टिप्पणी करते हैं। वे मर्यादा में रहे नहीं तो, सख्त कार्रवाई होगी। |
इस षष्ठ अध्याय में प्रथम सूत्रपाठमं "सम्यक्त्वञ्च" [६।२१] सूत्र आया है । पर द्वितीय सूत्रपाठमें यह सूत्र नहीं मिलता है ।
सप्तम अध्यायमें कई सूत्रोंमें शाब्दिक अन्तर आया है। कुछ सूत्र ऐसे भी जो प्रथम सूत्रपाठमें उपलब्ध हैं, पर द्वितीय में नहीं । प्रथम सूत्रपाठमें व्रतोंको स्थिर करनेके लिए अहिंसादिव्रतोंकी पाँच-पाँच भावनाएं बतलायी गयी हैं । इन भावनाओंका अनुचिन्तन करनेसे व्रत स्थिर रहते हैं । अतः प्रथम सूत्रपाठ में अहिंसाव्रतको "वाङ्मनो गुप्तीर्यादान निक्षेपण समित्या लोकितपानभोजनानि पञ्च" [७१४] सत्याणुव्रतकी "क्रोध-लोभ- भीरुत्व-हास्यप्रत्याख्यानान्यनुवीचिभाषणञ्च पञ्च" [७१५] अचौयंव्रतकी "शून्यागार-विमोचितावास-परोपरोधाकरण-भैक्ष्यशुद्धि-सघर्माविसंवादाः पञ्च ।" [७७६], ब्रह्मचर्य व्रतकी "स्त्रीरागकथाश्रवणतन्मनोहराङ्गनिरीक्षण-पूर्वरतानुस्मरण-वृष्येष्टरस- स्वशरीसंस्कारत्यागाः पञ्च" [७१७] ओर परिग्रहत्यागव्रतके "मनोज्ञामनोज्ञेन्द्रियविषय-राग-द्वेष-वर्जनानि पञ्च" [७१८] - भावनाबोधक सूत्र आये हैं । ये पाँचों सूत्र द्वितीय सूत्रपाठ में नहीं है। किन्तु तृतीय सूत्रके भाष्यमें इनका भाव आ गया है ।
अष्टम अध्यायमें प्रथम सूत्रपाठमें "सकषायत्वाञ्जीवः कर्मणो योग्यान् पुद्गलानादत्ते स बन्धः" [८[२] सूत्र आया है। द्वितीय सूत्रपाठमें इसके दो रूप मिलते हैं। प्रथम सूत्रमें "सकषायत्वाज्जीवः कर्मणो योग्यान्दपुद्गलानादत्ते" [८/२] अंश आया है और दूसरे सूत्रमें "स बन्धः" [८।३] सूत्र आया है। इस प्रकार एक ही सूत्रके दो सूत्र रूप द्वितीय सूत्रपाठमें हो गये हैं। प्रथम सूत्रपाठमें "मति-श्रुतावधि- मनः पर्यय-केवलानाम् [८/६] सूत्र आया है। पर द्वितोय सूत्रपाठमें इसका संक्षिप्त रूप "मत्या दोनाम्" [८]७] उपलब्ध होता है। आचार्य अकलंकदेवने "मत्यादीनाम्" पाठकी समीक्षा कर प्रथम सूत्रपाठमें आये हुए सूत्रको तर्कसंगत बतलाया है। इसी प्रकार प्रथमसूत्रपाठके "दान-लाभ-भोगोपभोग-वीर्याणाम् [८/१३] सूत्रके स्थानपर द्वितीय सूत्रपाठमें "दानादीनाम्" [८।१४] संक्षिप्त सूत्र आया है। भाष्यकारने "अन्तरायः पञ्चविधः । तद्यथा- दानस्यान्तरायः लाभस्यान्तरायः, भोगस्यान्तराय उपभोगस्यान्तरायः, वीर्यान्तराय इति" उपर्युक्त प्रथम सूत्रपाठमें आये हुए अन्तरायके भेदोंका नामोल्लेख किया है। पुण्यप्रकृतियोंका प्रतिपादन करनेवाले सूत्रोंमें मौलिक अन्तर आया है। प्रथम सूत्रपाठमें पुण्यप्रकृतियोंको गणना करते हुए लिखा है "सद्व् द्य-शुभायुर्नाम-गोत्राणि पुण्यम् [८२५] और "अतोऽन्यत् पापम्" [८/२६] कहकर पापप्रकृतियोंकी गणना की है। द्वितीय सूत्रपाठमें पुष्यप्रकृतियोंका कथन करते हुए "सद्व द्यसम्यक्त्व हास्यरतिपुरुषवेदशुभायुर्नामगोत्राणि पुण्यम्" [८/२६] लिखा है। इस सूत्रके भाष्यमें "अतोऽ१६६ : तीर्थंकर महावीर और उनको आचार्य परम्परा | इस षष्ठ अध्याय में प्रथम सूत्रपाठमं "सम्यक्त्वञ्च" [छः।इक्कीस] सूत्र आया है । पर द्वितीय सूत्रपाठमें यह सूत्र नहीं मिलता है । सप्तम अध्यायमें कई सूत्रोंमें शाब्दिक अन्तर आया है। कुछ सूत्र ऐसे भी जो प्रथम सूत्रपाठमें उपलब्ध हैं, पर द्वितीय में नहीं । प्रथम सूत्रपाठमें व्रतोंको स्थिर करनेके लिए अहिंसादिव्रतोंकी पाँच-पाँच भावनाएं बतलायी गयी हैं । इन भावनाओंका अनुचिन्तन करनेसे व्रत स्थिर रहते हैं । अतः प्रथम सूत्रपाठ में अहिंसाव्रतको "वाङ्मनो गुप्तीर्यादान निक्षेपण समित्या लोकितपानभोजनानि पञ्च" [सात सौ चौदह] सत्याणुव्रतकी "क्रोध-लोभ- भीरुत्व-हास्यप्रत्याख्यानान्यनुवीचिभाषणञ्च पञ्च" [सात सौ पंद्रह] अचौयंव्रतकी "शून्यागार-विमोचितावास-परोपरोधाकरण-भैक्ष्यशुद्धि-सघर्माविसंवादाः पञ्च ।" [सात सौ छिहत्तर], ब्रह्मचर्य व्रतकी "स्त्रीरागकथाश्रवणतन्मनोहराङ्गनिरीक्षण-पूर्वरतानुस्मरण-वृष्येष्टरस- स्वशरीसंस्कारत्यागाः पञ्च" [सात सौ सत्रह] ओर परिग्रहत्यागव्रतके "मनोज्ञामनोज्ञेन्द्रियविषय-राग-द्वेष-वर्जनानि पञ्च" [सात सौ अट्ठारह] - भावनाबोधक सूत्र आये हैं । ये पाँचों सूत्र द्वितीय सूत्रपाठ में नहीं है। किन्तु तृतीय सूत्रके भाष्यमें इनका भाव आ गया है । अष्टम अध्यायमें प्रथम सूत्रपाठमें "सकषायत्वाञ्जीवः कर्मणो योग्यान् पुद्गलानादत्ते स बन्धः" [आठ[दो] सूत्र आया है। द्वितीय सूत्रपाठमें इसके दो रूप मिलते हैं। प्रथम सूत्रमें "सकषायत्वाज्जीवः कर्मणो योग्यान्दपुद्गलानादत्ते" [आठ/दो] अंश आया है और दूसरे सूत्रमें "स बन्धः" [आठ।तीन] सूत्र आया है। इस प्रकार एक ही सूत्रके दो सूत्र रूप द्वितीय सूत्रपाठमें हो गये हैं। प्रथम सूत्रपाठमें "मति-श्रुतावधि- मनः पर्यय-केवलानाम् [आठ/छः] सूत्र आया है। पर द्वितोय सूत्रपाठमें इसका संक्षिप्त रूप "मत्या दोनाम्" [आठ]सात] उपलब्ध होता है। आचार्य अकलंकदेवने "मत्यादीनाम्" पाठकी समीक्षा कर प्रथम सूत्रपाठमें आये हुए सूत्रको तर्कसंगत बतलाया है। इसी प्रकार प्रथमसूत्रपाठके "दान-लाभ-भोगोपभोग-वीर्याणाम् [आठ/तेरह] सूत्रके स्थानपर द्वितीय सूत्रपाठमें "दानादीनाम्" [आठ।चौदह] संक्षिप्त सूत्र आया है। भाष्यकारने "अन्तरायः पञ्चविधः । तद्यथा- दानस्यान्तरायः लाभस्यान्तरायः, भोगस्यान्तराय उपभोगस्यान्तरायः, वीर्यान्तराय इति" उपर्युक्त प्रथम सूत्रपाठमें आये हुए अन्तरायके भेदोंका नामोल्लेख किया है। पुण्यप्रकृतियोंका प्रतिपादन करनेवाले सूत्रोंमें मौलिक अन्तर आया है। प्रथम सूत्रपाठमें पुण्यप्रकृतियोंको गणना करते हुए लिखा है "सद्व् द्य-शुभायुर्नाम-गोत्राणि पुण्यम् [आठ सौ पच्चीस] और "अतोऽन्यत् पापम्" [आठ/छब्बीस] कहकर पापप्रकृतियोंकी गणना की है। द्वितीय सूत्रपाठमें पुष्यप्रकृतियोंका कथन करते हुए "सद्व द्यसम्यक्त्व हास्यरतिपुरुषवेदशुभायुर्नामगोत्राणि पुण्यम्" [आठ/छब्बीस] लिखा है। इस सूत्रके भाष्यमें "अतोऽएक सौ छयासठ : तीर्थंकर महावीर और उनको आचार्य परम्परा |
कहानी = "शक्ति"
रात के 3:00 बजे थे भोपाल स्टेशन पर रेल की आने की आहट पाकर सारे ऑटो वालों की हलचल तेज हो गई थी।
भले हो भी क्यों नहीं रात में ही तो कमाई का सही समय है क्योंकि कोई भी सवारी रात का अधिक रुपए देने के लिए थोड़ी ना नुकुर के बाद मान ही जाती है एक तो रात का समय होता है इसलिए रामदास को भी आती सवारी के पीछे -आगे आकर के चलिए,..भाई साहब कहां चलना है चलिए,.... मेरा ऑटो यहीं पर खड़ा है।
चलो मैं बड़े आराम से ले चलता हूं एक सवारी रामदास से जगह और रुपए की बात करके बैठ जाती है।
(रामदास साधारण कद काठी का ऑटो वालो की खाकी ड्रेस में सबसे मुस्कुरा के बात करने वाला व्यक्ति है)
रामदास बातचीत करते-करते उनकी बताई हुई जगह पर पहुंचकर रुपए लेते ही घड़ी में समय देखते हुए कुछ 15 मिनट में एक और ट्रेन के आने का समय हो गया है बस यही सोच कर के जल्दी ही अपना ऑटो वापस स्टेशन की ओर बड़ा ही था कि तभी एक ट्रक बड़ी ही तेजी में उसके ऑटो के आगे आकर के रामदास के ऑटो को जोरदार टक्कर मार के जल्दी हड़बड़ी में भाग निकला इधर रामदास तो ऑटो सहित रोड पर बिछा पड़ा था अब तो वह हिल भी नहीं पा रहा था वह तो सर में चोट खाए हुए ऑटो के नीचे पड़ा था ।
बड़ी हिम्मत से सर से निकलते खून के बाद भी वह बड़ी ही मुश्किल से बाहर तो आ गया परंतु वहां आसपास नाही किसी व्यक्ति की गाड़ी थी और ना ही कोई व्यक्ति अब तक रामदास तड़प ही रहा था।
परंतु हिम्मत बांधे था खून लगातार बाहर जा रहा था वह सड़क पर पड़े- पड़े अपने परिवार को याद कर रहा था कितने संघर्ष भरी गांव की भुखमरी भरी, जिंदगी छोड़कर वह और उसकी पत्नी शक्ति और चार लड़कियों को लेकर शहर आए थे, ताकि जीविका चला सके पूर्णता पेट भर खाना खा सके और बच्चियों को कुछ शिक्षित करके वह दोनों पति-पत्नी तो पढ़े नहीं है पर बच्चों को पढ़ाना चाहते थे इसलिए शहर में रामदास ने ऑटो चलाना सीखा और किराए के ऑटो से एक दिन - रात ऑटो की आय से लोन लेकर अपना ऑटो लिया था!
अब रामदास की सांसे थमने लगी ऑटो की ओर देखते- देखते चल बसा। सुबह भीड़ ने रामदास को देखा तभी उसका साथी ऑटो वाला उसकी रास्ते से निकला सड़क पर भीड़ देखकर वहीं जिज्ञासा के कारण भीड़ में घुसा तो वह ऑटो और रामदास के शरीर को देखकर पहचान गया।
वहां रामदास को हिलाता है,.. परंतु रामदास तो राम को प्यारा हो चुका था जैसे- तैसे करके रामदास की ओर उसके ऑटो को घर पर लाया जाता है।
वहां पत्नी शक्ति रामदास के लिए चाय-नाश्ते के इंतजाम में लगी थी, और बच्चियाँ तो स्कूल के लिए अपने-अपने बैग जमा रही थी।
(रामदास का साधारण किराए के दो कमरे का मकान था सामने आंगन था)
कि तभी एंबुलेंस की गाड़ी का शोर सुनाई देने लगा गाड़ी ठीक घर के सामने खड़ी हुई थी और बड़ी बेटी ने यूं ही घर के सामने दरवाजे से बाहर देखा कि गाड़ी का दरवाजा खुला और क्या देखा उसमें उनके ऑटो वाले चाचा जी बाहर आते हैं और उनकी आंखों में आंसुओं का सैलाब भरा था।
चाचा जी ---(उसे देखते ही )...बिटिया जाओ कोई घर में बड़ा व्यक्ति हो ,...... बुलाकर लाओ।
( कहते- कहते जाओ बिटिया जाओ ना कोई बड़े व्यक्ति को बुलाकर लाओ बिटिया ना चाहते हुए भी उनकी सिसकियां बाहर आंसू के साथ निकल रही थी)
बड़ी बेटी--- मम्मी,.. मम्मी चाचा जी बाहर एंबुलेंस में आए हैं और वह रूआसे स्वर में किसी बड़े को बुलाने को कह रहे हैं।
चलो,.. चलो ना मुझे कुछ अजीब सा लग रहा है----मां ठीक है,... ( घबराते हुए स्वर में)
शक्ति जल्दी यदि तेज कदमों से बाहर आती है क्योंकि वह भी कहां बीती रात को सो पाई थी,. पूरी रात अजीब घबराहट और बेचैनी से गुजारी थी शक्ति 3:00 बजे से दिल में अधिक भारीपन महसूस कर रही थी,.. जैसे किसी अनहोनी का अंदेशा हो रहा था ,बीती रात हवाओं ने भी तो बहुत तेज चल करके इस बात का समर्थन किया था और यह बात सुनकर के की एंबुलेंस घर के बाहर आई है वह बहुत अधिक डर के घर के बाहर कदम रखती है, रामदास का दोस्त उसे देख कर रोने लगा ।
दोस्त ---(इशारे से एंबुलेंस की ओर दिखाया रोते हुए) भाभी जी आपको हिम्मत रखनी होगी!
"शक्ति" ....यह वाक्य सुन तेजी से एंबुलेंस की ओर दौड़ती है जहां पर एक स्ट्रेचर पर रामदास का शरीर था वह रामदास को हिला कर बोली क्या हुआ आप को उठो चलो मैंने आपके पसंद का नाश्ता बनाया है चलो उठो ना जी,... क्यों सोए हो,... आपको तो अभी बच्चियों को स्कूल छोड़ने जाना है।
रामदास रात की सवारियों को लाना ले जाना करके उस सुबह कितना थका हुआ,घर आया था उसने नाश्ता करके सोने की इच्छा जाहिर की थी।
शक्ति -- सुनो जी बच्चियों को स्कूल छोड़ के आ जाओ।
(तेज आवाज में ऑर्डर शक्ति की ओर से आया था),.. परंतु रामदास बड़े ही अनमने मन से उठा था,.. तभी शक्ति ने कहा सुनो जी यदि मुझे आपका ऑटो चलाना आता तो,... मैं ही छोड़ आती बच्चियों को तभी रामदास बोला तो इसमें कौन सी बड़ी बात है ,,,, ऑटो चलाना सीखना चाहती हो चलो तो मेरे साथ,..
शक्ति ---अजी छोड़ो आप तो जल्दी छोड़ कर आओ और सो जाओ क्यों मस्करी कर रहे हो मैंने तो यूं ही कह दिया था।
रामदास--अब बोला है तो चलना ही पड़ेगा और ज़िद करने लगा।
अच्छा चलो!
बच्चियों को जल्दी स्कूल पहुंचाना है ना!
(मुस्कुराते हुए रामदास के साथ बैठ जाती हैं)
रामदास ने स्कूल से छोड़ के आते समय अब रोज शक्ति को आटो चलाना सिखाना शुरू कर दिया। जैसे कि शक्ति में आत्मविश्वास का संचार कर दिया था।
शक्ति अब अच्छे से आटो चलाने लगी थी रामदास हमेशा शक्ति का उत्साह बढ़ा रहता और कहता रहता था शक्ति तू किसी से कम नहीं उसकी यह बात आज शक्ति के कानों में गूंज रही थी वह वही आंगन में आटो को निहार रही थी और जैसे रामदास पहले शक्ति को आत्मनिर्भर बनाकर चला गया था।
अब शक्ति के सारे सवालों का जवाब वही सामने था वह अपलक उसे निहारे जा रही थी।
सरिता बघेला "अनामिका"
(यह कहानी और भी आगे हैं )
| कहानी = "शक्ति" रात के तीन:शून्य बजे थे भोपाल स्टेशन पर रेल की आने की आहट पाकर सारे ऑटो वालों की हलचल तेज हो गई थी। भले हो भी क्यों नहीं रात में ही तो कमाई का सही समय है क्योंकि कोई भी सवारी रात का अधिक रुपए देने के लिए थोड़ी ना नुकुर के बाद मान ही जाती है एक तो रात का समय होता है इसलिए रामदास को भी आती सवारी के पीछे -आगे आकर के चलिए,..भाई साहब कहां चलना है चलिए,.... मेरा ऑटो यहीं पर खड़ा है। चलो मैं बड़े आराम से ले चलता हूं एक सवारी रामदास से जगह और रुपए की बात करके बैठ जाती है। रामदास बातचीत करते-करते उनकी बताई हुई जगह पर पहुंचकर रुपए लेते ही घड़ी में समय देखते हुए कुछ पंद्रह मिनट में एक और ट्रेन के आने का समय हो गया है बस यही सोच कर के जल्दी ही अपना ऑटो वापस स्टेशन की ओर बड़ा ही था कि तभी एक ट्रक बड़ी ही तेजी में उसके ऑटो के आगे आकर के रामदास के ऑटो को जोरदार टक्कर मार के जल्दी हड़बड़ी में भाग निकला इधर रामदास तो ऑटो सहित रोड पर बिछा पड़ा था अब तो वह हिल भी नहीं पा रहा था वह तो सर में चोट खाए हुए ऑटो के नीचे पड़ा था । बड़ी हिम्मत से सर से निकलते खून के बाद भी वह बड़ी ही मुश्किल से बाहर तो आ गया परंतु वहां आसपास नाही किसी व्यक्ति की गाड़ी थी और ना ही कोई व्यक्ति अब तक रामदास तड़प ही रहा था। परंतु हिम्मत बांधे था खून लगातार बाहर जा रहा था वह सड़क पर पड़े- पड़े अपने परिवार को याद कर रहा था कितने संघर्ष भरी गांव की भुखमरी भरी, जिंदगी छोड़कर वह और उसकी पत्नी शक्ति और चार लड़कियों को लेकर शहर आए थे, ताकि जीविका चला सके पूर्णता पेट भर खाना खा सके और बच्चियों को कुछ शिक्षित करके वह दोनों पति-पत्नी तो पढ़े नहीं है पर बच्चों को पढ़ाना चाहते थे इसलिए शहर में रामदास ने ऑटो चलाना सीखा और किराए के ऑटो से एक दिन - रात ऑटो की आय से लोन लेकर अपना ऑटो लिया था! अब रामदास की सांसे थमने लगी ऑटो की ओर देखते- देखते चल बसा। सुबह भीड़ ने रामदास को देखा तभी उसका साथी ऑटो वाला उसकी रास्ते से निकला सड़क पर भीड़ देखकर वहीं जिज्ञासा के कारण भीड़ में घुसा तो वह ऑटो और रामदास के शरीर को देखकर पहचान गया। वहां रामदास को हिलाता है,.. परंतु रामदास तो राम को प्यारा हो चुका था जैसे- तैसे करके रामदास की ओर उसके ऑटो को घर पर लाया जाता है। वहां पत्नी शक्ति रामदास के लिए चाय-नाश्ते के इंतजाम में लगी थी, और बच्चियाँ तो स्कूल के लिए अपने-अपने बैग जमा रही थी। कि तभी एंबुलेंस की गाड़ी का शोर सुनाई देने लगा गाड़ी ठीक घर के सामने खड़ी हुई थी और बड़ी बेटी ने यूं ही घर के सामने दरवाजे से बाहर देखा कि गाड़ी का दरवाजा खुला और क्या देखा उसमें उनके ऑटो वाले चाचा जी बाहर आते हैं और उनकी आंखों में आंसुओं का सैलाब भरा था। चाचा जी ---...बिटिया जाओ कोई घर में बड़ा व्यक्ति हो ,...... बुलाकर लाओ। बड़ी बेटी--- मम्मी,.. मम्मी चाचा जी बाहर एंबुलेंस में आए हैं और वह रूआसे स्वर में किसी बड़े को बुलाने को कह रहे हैं। चलो,.. चलो ना मुझे कुछ अजीब सा लग रहा है----मां ठीक है,... शक्ति जल्दी यदि तेज कदमों से बाहर आती है क्योंकि वह भी कहां बीती रात को सो पाई थी,. पूरी रात अजीब घबराहट और बेचैनी से गुजारी थी शक्ति तीन:शून्य बजे से दिल में अधिक भारीपन महसूस कर रही थी,.. जैसे किसी अनहोनी का अंदेशा हो रहा था ,बीती रात हवाओं ने भी तो बहुत तेज चल करके इस बात का समर्थन किया था और यह बात सुनकर के की एंबुलेंस घर के बाहर आई है वह बहुत अधिक डर के घर के बाहर कदम रखती है, रामदास का दोस्त उसे देख कर रोने लगा । दोस्त --- भाभी जी आपको हिम्मत रखनी होगी! "शक्ति" ....यह वाक्य सुन तेजी से एंबुलेंस की ओर दौड़ती है जहां पर एक स्ट्रेचर पर रामदास का शरीर था वह रामदास को हिला कर बोली क्या हुआ आप को उठो चलो मैंने आपके पसंद का नाश्ता बनाया है चलो उठो ना जी,... क्यों सोए हो,... आपको तो अभी बच्चियों को स्कूल छोड़ने जाना है। रामदास रात की सवारियों को लाना ले जाना करके उस सुबह कितना थका हुआ,घर आया था उसने नाश्ता करके सोने की इच्छा जाहिर की थी। शक्ति -- सुनो जी बच्चियों को स्कूल छोड़ के आ जाओ। ,.. परंतु रामदास बड़े ही अनमने मन से उठा था,.. तभी शक्ति ने कहा सुनो जी यदि मुझे आपका ऑटो चलाना आता तो,... मैं ही छोड़ आती बच्चियों को तभी रामदास बोला तो इसमें कौन सी बड़ी बात है ,,,, ऑटो चलाना सीखना चाहती हो चलो तो मेरे साथ,.. शक्ति ---अजी छोड़ो आप तो जल्दी छोड़ कर आओ और सो जाओ क्यों मस्करी कर रहे हो मैंने तो यूं ही कह दिया था। रामदास--अब बोला है तो चलना ही पड़ेगा और ज़िद करने लगा। अच्छा चलो! बच्चियों को जल्दी स्कूल पहुंचाना है ना! रामदास ने स्कूल से छोड़ के आते समय अब रोज शक्ति को आटो चलाना सिखाना शुरू कर दिया। जैसे कि शक्ति में आत्मविश्वास का संचार कर दिया था। शक्ति अब अच्छे से आटो चलाने लगी थी रामदास हमेशा शक्ति का उत्साह बढ़ा रहता और कहता रहता था शक्ति तू किसी से कम नहीं उसकी यह बात आज शक्ति के कानों में गूंज रही थी वह वही आंगन में आटो को निहार रही थी और जैसे रामदास पहले शक्ति को आत्मनिर्भर बनाकर चला गया था। अब शक्ति के सारे सवालों का जवाब वही सामने था वह अपलक उसे निहारे जा रही थी। सरिता बघेला "अनामिका" |
मंगलवार की शाम हवेली खड़कपुर अनुमंडल के नगर परिषद क्षेत्र अंतर्गत हाट चौक के समीप एक बालू लदे तेज रफ्तार हाईवा वाहन की टक्कर कबाड़ी कचरे का सामान बेचने वाले साइकिल सवार की मौत हो गई। हाईवा ने साइकिल सवार व्यक्ति को बुरी तरह कुचल कुचल दिया। जिससे कबाड़ी वाले की मौत घटनास्थल पर ही हो गई।
मृतक का भतीजा प्यारेलाल ने बताया कि उसके चाचा गांव गांव घूम कर घर के पुराने प्लास्टिक टूटे-फूटे बर्तन खरीद कर बाहर बेचने का काम करता था। वह मंगलवार की दोपहर घर से निकला फेरी का काम करने। लेकिन हाट चौक के पास बालू लदे हाइवा ट्रक ने उसे रौंद दिया। जिससे उसकी मौत घटनास्थल पर ही हो गई।
मृतक नंदलाल साह के 5 बच्चे हैं। घटना के बाद उनकी पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है। पत्नी सविता देवी ने बताया कि घर का एकमात्र कमाऊ सदस्य वही था। 5 बच्चों को कैसे पालूंगी। मेरी बड़ी बेटी 13 वर्ष की सपना,12 वर्ष की प्रियंका ,10 वर्ष की सरस्वती, लक्ष्मी 5 वर्ष तथा एक पुत्र छोटू उर्फ श्रीराम 2 वर्ष का है।
अब इतने बड़े परिवार को कौन चलाएगा। सबकी पूर्ति करेगा कौन या बोलते बोलते दहारे मार कर रोने लगी । घटना की सूचना मिलते ही हवेली खरगपुर थाना के सब इंस्पेक्टर कौशलेंद्र कुमार और रवि कांत प्रसाद द्वारा दल बल के साथ घटनास्थल पर जाकर मृतक के शव को अपने कब्जे में लेकर मुंगेर सदर अस्पताल पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।
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| मंगलवार की शाम हवेली खड़कपुर अनुमंडल के नगर परिषद क्षेत्र अंतर्गत हाट चौक के समीप एक बालू लदे तेज रफ्तार हाईवा वाहन की टक्कर कबाड़ी कचरे का सामान बेचने वाले साइकिल सवार की मौत हो गई। हाईवा ने साइकिल सवार व्यक्ति को बुरी तरह कुचल कुचल दिया। जिससे कबाड़ी वाले की मौत घटनास्थल पर ही हो गई। मृतक का भतीजा प्यारेलाल ने बताया कि उसके चाचा गांव गांव घूम कर घर के पुराने प्लास्टिक टूटे-फूटे बर्तन खरीद कर बाहर बेचने का काम करता था। वह मंगलवार की दोपहर घर से निकला फेरी का काम करने। लेकिन हाट चौक के पास बालू लदे हाइवा ट्रक ने उसे रौंद दिया। जिससे उसकी मौत घटनास्थल पर ही हो गई। मृतक नंदलाल साह के पाँच बच्चे हैं। घटना के बाद उनकी पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है। पत्नी सविता देवी ने बताया कि घर का एकमात्र कमाऊ सदस्य वही था। पाँच बच्चों को कैसे पालूंगी। मेरी बड़ी बेटी तेरह वर्ष की सपना,बारह वर्ष की प्रियंका ,दस वर्ष की सरस्वती, लक्ष्मी पाँच वर्ष तथा एक पुत्र छोटू उर्फ श्रीराम दो वर्ष का है। अब इतने बड़े परिवार को कौन चलाएगा। सबकी पूर्ति करेगा कौन या बोलते बोलते दहारे मार कर रोने लगी । घटना की सूचना मिलते ही हवेली खरगपुर थाना के सब इंस्पेक्टर कौशलेंद्र कुमार और रवि कांत प्रसाद द्वारा दल बल के साथ घटनास्थल पर जाकर मृतक के शव को अपने कब्जे में लेकर मुंगेर सदर अस्पताल पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
सेना का विनाश करो ॥ १७ ॥ यह शत्रु क्षुधा, निर्धनता और भय को प्राप्त होते हुए मृत्यु के मुख में पड़ें । हे इन्द्र ! इस शत्रु वाहिनी का विनाश करो ।।१८।। हे शत्रुओ ! तुम मंत्र शक्ति से पराजित हो और त्रस्त होकर पलायन करने लगो । मन्त्रों के अधिपति वृहस्पति इनमें से किसी एक को भी जीवित न वचने दें ॥ १८ ॥ इन शत्रुओं के हाथ शस्त्र ग्रहरण करने में समर्थ न हों, उनके शस्त्र नीचे गिर पड़ें । वे भय से त्रस्त हो उठें तथा इनके मर्म स्थल विध जाँय ।। २० ।। द्यावा पृथ्वी, अन्तरिक्ष और देवगण इन्हें अभिशापित करें। यह दुर्गति को प्राप्त हों । यह किसी श्रपर्व के विद्वान् का सहारा न पावें । परस्पर वैरभाव से युक्त हो नष्ट हो जाँय ।॥ २१ ॥ अग्नि के रथ को खींचने वाली चार दिशाऐं हैं, पुरोडाश सुम हैं, अन्तरिक्ष निवास स्थान, द्यावा पृथ्वी पक्षसी और ऋतुऐ लगाम रूप हैं । वारणी परिरथ्य और अन्तर्देश किंकर रूप हैं ।। २२ ।। संवत्सर इनका रथ, परिवत्सर रथ की गद्दी, विराट ईषा, मुख और चन्द्रमा सारथि हैं । इन्द्र इनके बाऐं ओर बैठते हैं ।। २३ ।। हे राजन् ! चहुँ ओर से विजय हर ओर से जय ही उय । हमारे यजमान विजय-शील हों, शत्रु पराजित हों, इन मित्रों की विजय हेतु यह आहुति अर्पित है । नीली और लाल डोरों से शत्रुओं को लपेटता हूँ । उनके लिये यह आहुति दुराहुति सिद्ध हो ।।२४।। ६ सूक्त (पाचवाँ अनुवाक )
( ऋषि - अथर्वा । देवता - मन्त्रोक्ताः । छन्द - त्रिष्टुप् ; पङ्क्ति, अनुष्टुप्; जगती । )
कुतस्तौ जातौ कतमः सो अर्धः कस्माल्लोकात् कतमस्याः पृथिव्याः । वत्सौ विराजः मलिलादुदैतां तौ त्वा पृच्छामि कतरेरण दुग्धा ॥ १ ॥ यो प्रक्रन्दयत् सलिलं महित्वा योनि कृत्वा त्रिभुजं शयानः । | सेना का विनाश करो ॥ सत्रह ॥ यह शत्रु क्षुधा, निर्धनता और भय को प्राप्त होते हुए मृत्यु के मुख में पड़ें । हे इन्द्र ! इस शत्रु वाहिनी का विनाश करो ।।अट्ठारह।। हे शत्रुओ ! तुम मंत्र शक्ति से पराजित हो और त्रस्त होकर पलायन करने लगो । मन्त्रों के अधिपति वृहस्पति इनमें से किसी एक को भी जीवित न वचने दें ॥ अट्ठारह ॥ इन शत्रुओं के हाथ शस्त्र ग्रहरण करने में समर्थ न हों, उनके शस्त्र नीचे गिर पड़ें । वे भय से त्रस्त हो उठें तथा इनके मर्म स्थल विध जाँय ।। बीस ।। द्यावा पृथ्वी, अन्तरिक्ष और देवगण इन्हें अभिशापित करें। यह दुर्गति को प्राप्त हों । यह किसी श्रपर्व के विद्वान् का सहारा न पावें । परस्पर वैरभाव से युक्त हो नष्ट हो जाँय ।॥ इक्कीस ॥ अग्नि के रथ को खींचने वाली चार दिशाऐं हैं, पुरोडाश सुम हैं, अन्तरिक्ष निवास स्थान, द्यावा पृथ्वी पक्षसी और ऋतुऐ लगाम रूप हैं । वारणी परिरथ्य और अन्तर्देश किंकर रूप हैं ।। बाईस ।। संवत्सर इनका रथ, परिवत्सर रथ की गद्दी, विराट ईषा, मुख और चन्द्रमा सारथि हैं । इन्द्र इनके बाऐं ओर बैठते हैं ।। तेईस ।। हे राजन् ! चहुँ ओर से विजय हर ओर से जय ही उय । हमारे यजमान विजय-शील हों, शत्रु पराजित हों, इन मित्रों की विजय हेतु यह आहुति अर्पित है । नीली और लाल डोरों से शत्रुओं को लपेटता हूँ । उनके लिये यह आहुति दुराहुति सिद्ध हो ।।चौबीस।। छः सूक्त कुतस्तौ जातौ कतमः सो अर्धः कस्माल्लोकात् कतमस्याः पृथिव्याः । वत्सौ विराजः मलिलादुदैतां तौ त्वा पृच्छामि कतरेरण दुग्धा ॥ एक ॥ यो प्रक्रन्दयत् सलिलं महित्वा योनि कृत्वा त्रिभुजं शयानः । |
स्पेशल कैटेगरी वाले राज्यों को जीएसटी से पहले जिस तरह की टैक्स रियायतें मिलती थी, वो एक बार फिर उन्हें दी जा सकती है। जीएसटी काउंसिल की अगले महीने होने वाली मीटिंग में इस मसले पर चर्चा हो सकती है। सूत्रों के अनुसार, जीएसटी काउंसिल स्पेशल कैटेगरी वाले राज्यों को प्री-जीएसटी जैसे टैक्स शॉप्स फिर से दे सकती है। यह टैक्स रियायत किस तरह और किस फॉर्मेट में दी जाएगी, काउंसिल मीटिंग में इसका निर्धारण होगा। जीएसटी काउंसिल की अगली मीटिंग जनवरी में प्रस्तावित है।
टैक्स एक्सपर्ट का कहना है कि जीएसटी लागू होने से पहले इन राज्यों में इंडस्ट्री लगाने पर कारोबारियों को एक्साइज ड्यूटी में रिफंड मिलता था। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में एक्साइज ड्यूटी पर रिफंड सेनवेट क्रेडिट के जरिए मिलता था। जीएसटी आने के बाद कारोबारियों को यह बेनेफिट न के बराबर मिल रहा है। पहले एक्साइज पर छूट मंथली बेसिस पर मिलती थी जो अब जीएसटी बजटरी सपोर्ट स्कीम (बीएसएस) के तहत क्वाटर्ली मिल रही है। इससे मैन्युफैक्चर का पैसा तीन महीने के लिए ब्लॉक हो रहा है। यानी टैक्स पे करने के तीन महीने बाद कारोबारी को रिफंड मिल रहा है। सरकार के टैक्स शॉप्स नहीं देने से इन राज्यों में एमएसएमई से एक्साइज पर छूट नहीं मिल रही है। अब कारोबारियों को टैक्स रिफंड भी कम फीसदी मिल रहा है। इससे मैन्युफैक्चर को नुकसान हो रहा है।
साल 1967 से 11 राज्यों को स्पेशल कैटैगरी का स्टेटस दिया गया। इस लिस्ट में अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा, जम्मू एंड कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड शामिल हैं। इन राज्यों को स्पेशल बेनेफिट्स भी मिलते हैं।
| स्पेशल कैटेगरी वाले राज्यों को जीएसटी से पहले जिस तरह की टैक्स रियायतें मिलती थी, वो एक बार फिर उन्हें दी जा सकती है। जीएसटी काउंसिल की अगले महीने होने वाली मीटिंग में इस मसले पर चर्चा हो सकती है। सूत्रों के अनुसार, जीएसटी काउंसिल स्पेशल कैटेगरी वाले राज्यों को प्री-जीएसटी जैसे टैक्स शॉप्स फिर से दे सकती है। यह टैक्स रियायत किस तरह और किस फॉर्मेट में दी जाएगी, काउंसिल मीटिंग में इसका निर्धारण होगा। जीएसटी काउंसिल की अगली मीटिंग जनवरी में प्रस्तावित है। टैक्स एक्सपर्ट का कहना है कि जीएसटी लागू होने से पहले इन राज्यों में इंडस्ट्री लगाने पर कारोबारियों को एक्साइज ड्यूटी में रिफंड मिलता था। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में एक्साइज ड्यूटी पर रिफंड सेनवेट क्रेडिट के जरिए मिलता था। जीएसटी आने के बाद कारोबारियों को यह बेनेफिट न के बराबर मिल रहा है। पहले एक्साइज पर छूट मंथली बेसिस पर मिलती थी जो अब जीएसटी बजटरी सपोर्ट स्कीम के तहत क्वाटर्ली मिल रही है। इससे मैन्युफैक्चर का पैसा तीन महीने के लिए ब्लॉक हो रहा है। यानी टैक्स पे करने के तीन महीने बाद कारोबारी को रिफंड मिल रहा है। सरकार के टैक्स शॉप्स नहीं देने से इन राज्यों में एमएसएमई से एक्साइज पर छूट नहीं मिल रही है। अब कारोबारियों को टैक्स रिफंड भी कम फीसदी मिल रहा है। इससे मैन्युफैक्चर को नुकसान हो रहा है। साल एक हज़ार नौ सौ सरसठ से ग्यारह राज्यों को स्पेशल कैटैगरी का स्टेटस दिया गया। इस लिस्ट में अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा, जम्मू एंड कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड शामिल हैं। इन राज्यों को स्पेशल बेनेफिट्स भी मिलते हैं। |
Shanti Bhushan Death: भारत के पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण (Former Law Minister Shanti Bhushan) का निधन हो गया है। पिछले कुछ दिनों से वो काफी बीमार चल रहे थे। कानूनी मुद्दों पर उनकी पकड़ काफी मजबूत थी। शांति भूषण ने ही इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) में चर्चित राजनारायण (Rajnarayan) का प्रतिनिधित्व किया था। इस केस की वजह से देश में आपातकाल लगा था।
शांति भूषण ने मोरारजी देसाई (morarji desai) सरकार में 1977 से 1979 तक भारत के कानून मंत्री के रूप में भूमिका निभाई थी। वो जुलाई 1977 से अप्रैल 1980 तक राज्य सभा के सदस्य भी रहें। 97 साल की उम्र में उन्होंने अपने दिल्ली निवास पर अंतिम सांस ली। पूर्व कानून मंत्री होने के साथ ही उन्हें संविधान विशेषज्ञ भी मना जाता था।
पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण 2018 में उस वक्त चर्चा में आ गए थे, जब उन्होंने जनहित याचिका दायर कर 'मास्टर ऑफ रोस्टर' सिस्टम में बदलाव की मांग की थी। शांति भूषण को अपनी तल्ख राजनीतिक टिप्पणियों के लिए भी जाना जाता था। उन्होंने कई मौकों पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind kejriwal) पर निशाना साधा था।
शांति भूषण ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में राजनारायण का मुकदमा लड़ा था। इसी केस के बाद 1974 में इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री के पद से हटना पड़ा था। 1971 में हुए लोकसभा चुनाव में इंदिरा गांधी ने रायबरेली सीट से जनसंघ के राजनारायण को हराया था। राजनारायण ने इंदिरा चुनाव पर जीतने में सरकारी तंत्र का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया था। इस केस में राजनारायण का प्रतिनिधित्व शांति भूषण कर रहे थें। इस केस में राजनारायण की जीत हुई थी। न्यायमूर्ति जगमोहन लाल सिन्हा (Justice Jagmohan Lal Sinha) ने इंदिरा गांधी पर अगले छह साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी थी। जिसके बाद देश में आपातकाल (Emergency) की घोषणा की गई थी।
| Shanti Bhushan Death: भारत के पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण का निधन हो गया है। पिछले कुछ दिनों से वो काफी बीमार चल रहे थे। कानूनी मुद्दों पर उनकी पकड़ काफी मजबूत थी। शांति भूषण ने ही इलाहाबाद हाईकोर्ट में चर्चित राजनारायण का प्रतिनिधित्व किया था। इस केस की वजह से देश में आपातकाल लगा था। शांति भूषण ने मोरारजी देसाई सरकार में एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर से एक हज़ार नौ सौ उन्यासी तक भारत के कानून मंत्री के रूप में भूमिका निभाई थी। वो जुलाई एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर से अप्रैल एक हज़ार नौ सौ अस्सी तक राज्य सभा के सदस्य भी रहें। सत्तानवे साल की उम्र में उन्होंने अपने दिल्ली निवास पर अंतिम सांस ली। पूर्व कानून मंत्री होने के साथ ही उन्हें संविधान विशेषज्ञ भी मना जाता था। पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण दो हज़ार अट्ठारह में उस वक्त चर्चा में आ गए थे, जब उन्होंने जनहित याचिका दायर कर 'मास्टर ऑफ रोस्टर' सिस्टम में बदलाव की मांग की थी। शांति भूषण को अपनी तल्ख राजनीतिक टिप्पणियों के लिए भी जाना जाता था। उन्होंने कई मौकों पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा था। शांति भूषण ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में राजनारायण का मुकदमा लड़ा था। इसी केस के बाद एक हज़ार नौ सौ चौहत्तर में इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री के पद से हटना पड़ा था। एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में हुए लोकसभा चुनाव में इंदिरा गांधी ने रायबरेली सीट से जनसंघ के राजनारायण को हराया था। राजनारायण ने इंदिरा चुनाव पर जीतने में सरकारी तंत्र का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया था। इस केस में राजनारायण का प्रतिनिधित्व शांति भूषण कर रहे थें। इस केस में राजनारायण की जीत हुई थी। न्यायमूर्ति जगमोहन लाल सिन्हा ने इंदिरा गांधी पर अगले छह साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी थी। जिसके बाद देश में आपातकाल की घोषणा की गई थी। |
'किसी चीज को अगर शिद्दत से चाहो तो पूरी कायनात उसे तुमसे मिलाने की कोशिश में लग जाती है. . . ' शाहरुख खान की फिल्म ओम शांति ओम का ये डायलॉग उनकी निजी जिंदगी में भी सटीक बैठता है। एक्टर ने हमेशा से सिर्फ गौरी खान को ही चाहा है और आज वो खास घड़ी है जब इस रोमांटिक कपल ने शादी के 31 साल पूरे कर लिए हैं। 25 अक्टूबर 1991 को दोनों ने एक दूसरे से शादी की थी। शाहरुख और गौरी की लव स्टोरी से जुड़े तमाम किस्से काफी मशहूर हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं रोमांटिक स्टार की छवि वाले शाहरुख ने गौरी को शादी के लिए कैसे प्रपोज किया था? नहीं तो जानिए कि 30 साल पहले कैसे शाहरुख ने गौरी से कही अपनी दिल की बात?
शाहरुख खान और गौरी की मुलाकात के पीछे एक कहानी है। दरअसल साल 1984 में दिल्ली में एक पार्टी में 18 साल के शाहरुख ने जब पहली बार गौरी को देखा था तो वह किसी दूसरे लड़के के साथ डांस कर रही थीं। शर्मीले शाहरुख की हिम्मत नहीं हुई कि वह गौरी को डांस के लिए पूछ सकें। लेकिन फिर उन्होंने हिम्मत करके गौरी से बात करने की कोशिश की लेकिन गौरी ने ये कहकर उनसे किनारा कर लिया कि वो अपने ब्वॉयफ्रेंड का इंतजार कर रही हैं। दरअसल गौरी ने शाहरुख से झूठ बोला था। वह अपने बॉयफ्रेंड नहीं बल्कि अपने भाई के साथ आई थीं।
बाद में शाहरुख और गौरी के बीच मुलाकातों का सिलसिला जारी था। शाहरुख मन ही मन गौरी को पसंद करने लगे थे लेकिन अभी तक उन्होंने अपने दिल की बात गौरी को नहीं बताई थी। एक दिन किंग खान गौरी को अपनी गाड़ी से घर छोड़ने गए थे। जब वो गाड़ी से नीचे उतर रही थीं तो शाहरुख ने उनसे कहा कि मैं तुमसे शादी करना चाहता हूं, लेकिन शाहरुख गौरी का जवाब सुने बगैर ही वहां से चले गए थे।
एक इंटरव्यू के दौरान शाहरुख ने बताया था कि गौरी को लेकर उनकी दीवानगी इतनी बढ़ गई थी कि जब वह स्विमसूट पहनती या फिर अपने बाल खुले रखती थीं तो वह उनसे लड़ने लगते थे। बाद में गौरी खान और शाहरुख खान ने 25 अक्टूबर, 1991 को शादी कर ली। दोनों की शादी में धर्म आड़े आया था। दोनों के परिवार वाले अलग धर्म होने के कारण मानने को तैयार नहीं थे। घरवालों को मनाने के लिए उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। आखिरकार दोनों अपने परिवार वालों को मनाने में तो कामयाब रहे लेकिन उन्हें एक नहीं बल्कि दो दो बार शादी करनी पड़ी। गौरी और शाहरुख ने हिंदू और मुस्लिम दोनों रीति रिवाज से शादी की थी। निकाह के दौरान गौरी का नाम आयशा रखा गया था।
| 'किसी चीज को अगर शिद्दत से चाहो तो पूरी कायनात उसे तुमसे मिलाने की कोशिश में लग जाती है. . . ' शाहरुख खान की फिल्म ओम शांति ओम का ये डायलॉग उनकी निजी जिंदगी में भी सटीक बैठता है। एक्टर ने हमेशा से सिर्फ गौरी खान को ही चाहा है और आज वो खास घड़ी है जब इस रोमांटिक कपल ने शादी के इकतीस साल पूरे कर लिए हैं। पच्चीस अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे को दोनों ने एक दूसरे से शादी की थी। शाहरुख और गौरी की लव स्टोरी से जुड़े तमाम किस्से काफी मशहूर हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं रोमांटिक स्टार की छवि वाले शाहरुख ने गौरी को शादी के लिए कैसे प्रपोज किया था? नहीं तो जानिए कि तीस साल पहले कैसे शाहरुख ने गौरी से कही अपनी दिल की बात? शाहरुख खान और गौरी की मुलाकात के पीछे एक कहानी है। दरअसल साल एक हज़ार नौ सौ चौरासी में दिल्ली में एक पार्टी में अट्ठारह साल के शाहरुख ने जब पहली बार गौरी को देखा था तो वह किसी दूसरे लड़के के साथ डांस कर रही थीं। शर्मीले शाहरुख की हिम्मत नहीं हुई कि वह गौरी को डांस के लिए पूछ सकें। लेकिन फिर उन्होंने हिम्मत करके गौरी से बात करने की कोशिश की लेकिन गौरी ने ये कहकर उनसे किनारा कर लिया कि वो अपने ब्वॉयफ्रेंड का इंतजार कर रही हैं। दरअसल गौरी ने शाहरुख से झूठ बोला था। वह अपने बॉयफ्रेंड नहीं बल्कि अपने भाई के साथ आई थीं। बाद में शाहरुख और गौरी के बीच मुलाकातों का सिलसिला जारी था। शाहरुख मन ही मन गौरी को पसंद करने लगे थे लेकिन अभी तक उन्होंने अपने दिल की बात गौरी को नहीं बताई थी। एक दिन किंग खान गौरी को अपनी गाड़ी से घर छोड़ने गए थे। जब वो गाड़ी से नीचे उतर रही थीं तो शाहरुख ने उनसे कहा कि मैं तुमसे शादी करना चाहता हूं, लेकिन शाहरुख गौरी का जवाब सुने बगैर ही वहां से चले गए थे। एक इंटरव्यू के दौरान शाहरुख ने बताया था कि गौरी को लेकर उनकी दीवानगी इतनी बढ़ गई थी कि जब वह स्विमसूट पहनती या फिर अपने बाल खुले रखती थीं तो वह उनसे लड़ने लगते थे। बाद में गौरी खान और शाहरुख खान ने पच्चीस अक्टूबर, एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे को शादी कर ली। दोनों की शादी में धर्म आड़े आया था। दोनों के परिवार वाले अलग धर्म होने के कारण मानने को तैयार नहीं थे। घरवालों को मनाने के लिए उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। आखिरकार दोनों अपने परिवार वालों को मनाने में तो कामयाब रहे लेकिन उन्हें एक नहीं बल्कि दो दो बार शादी करनी पड़ी। गौरी और शाहरुख ने हिंदू और मुस्लिम दोनों रीति रिवाज से शादी की थी। निकाह के दौरान गौरी का नाम आयशा रखा गया था। |
।ग्राम क्रमांक :
।ग्राम का नाम :
।तहसील :
।जनपद :
।फसली वर्ष :
।भाग :
।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल (हे.)
।1 - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसे1950 ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा 117 - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ( नदारद )
।1क(क) - रिक्त ( नदारद )
।1-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ( नदारद )
।2 - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो।
।3 - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ( नदारद )
।4 - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ 4 में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ( नदारद )
।4-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -(क)जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो ।
छट्ठू / जैकरन / स्था.
सामदेव / जैकरन / स्था.
मुरारी / हरीलाल / स्था.
राजकुमार / जग्गल / स्था.
रामधनी / जग्गल / स्था.
रामजीत / छांगुर / स्था.
रामधारी / सदलू / स्था.
।4-क(ख) - अन्य भूमि । ( नदारद )
।5-1 - कृषि योग्य भूमि - नई परती (परतीजदीद)
1416फ न्यायालय उपजिलाधिकारी लालगंज दिनांक 21-11-08 को आदेश हुआ कि आ0न0 737/ 0.024 हे0 नवीनपरती के खाते से खारिज होकर आवादी वर्ग 6(2)अंकित हो। ह0र0का0 21-1-09/3-2-09 धारा123(1)
।5-2 - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती (परतीकदीम)
।5-3-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ( नदारद )
।5-3-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ( नदारद )
।5-3-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ( नदारद )
।5-3-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ( नदारद )
।5-3-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि।
।5-क (क) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ( नदारद )
।5-क (ख) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ( नदारद )
।5-क (ग) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ( नदारद )
।6-1 - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि ।
।6-2 - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो।
।6-3 - कब्रिस्तान और श्मशान (मरघट) , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो।
।6-4 - जो अन्य कारणों से अकृषित हो ।
।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
| ।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल ।एक - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसेएक हज़ार नौ सौ पचास ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा एक सौ सत्रह - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ।एकक - रिक्त ।एक-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ।दो - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।तीन - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ।चार - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ चार में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ।चार-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । छट्ठू / जैकरन / स्था. सामदेव / जैकरन / स्था. मुरारी / हरीलाल / स्था. राजकुमार / जग्गल / स्था. रामधनी / जग्गल / स्था. रामजीत / छांगुर / स्था. रामधारी / सदलू / स्था. ।चार-क - अन्य भूमि । ।पाँच-एक - कृषि योग्य भूमि - नई परती एक हज़ार चार सौ सोलहफ न्यायालय उपजिलाधिकारी लालगंज दिनांक इक्कीस नवंबर आठ को आदेश हुआ कि आशून्यनशून्य सात सौ सैंतीस/ शून्य.चौबीस हेशून्य नवीनपरती के खाते से खारिज होकर आवादी वर्ग छःअंकित हो। हशून्यरशून्यकाशून्य इक्कीस जनवरी नौ/तीन फ़रवरी नौ धाराएक सौ तेईस ।पाँच-दो - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती ।पाँच-तीन-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ।पाँच-तीन-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ।पाँच-तीन-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।पाँच-तीन-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ।पाँच-तीन-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ।छः-एक - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।छः-दो - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।छः-तीन - कब्रिस्तान और श्मशान , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।छः-चार - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है। |
दिल्ली के महरौली थाने के सतवडी रोड पर सोमवार सुबह एक बार फिर तेज रफ्तार का कहर देखने को मिला. स्कोर्पियो कार ने एक के बाद एक तीन लोगों को टक्कर मार दी, जिसमे एक की मौत हो गई और दो बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए.
घायल बच्चों का इलाज एम्स के ट्रॉमा सेंटर में चल रहा है. मृतक का शिनाख्त संजीव शर्मा के रूप में हुई है. उसकी उम्र 43 साल बताई गई है.
इस हादसे को लेकर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है. पुलिस ने स्कोर्पियो कार बरामद कर ली है, लेकिन ड्राइवर की गिरफ्तारी अभी नहीं हो पाई है. पुलिस मामले की तफ्तीश कर रही है.
| दिल्ली के महरौली थाने के सतवडी रोड पर सोमवार सुबह एक बार फिर तेज रफ्तार का कहर देखने को मिला. स्कोर्पियो कार ने एक के बाद एक तीन लोगों को टक्कर मार दी, जिसमे एक की मौत हो गई और दो बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए. घायल बच्चों का इलाज एम्स के ट्रॉमा सेंटर में चल रहा है. मृतक का शिनाख्त संजीव शर्मा के रूप में हुई है. उसकी उम्र तैंतालीस साल बताई गई है. इस हादसे को लेकर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है. पुलिस ने स्कोर्पियो कार बरामद कर ली है, लेकिन ड्राइवर की गिरफ्तारी अभी नहीं हो पाई है. पुलिस मामले की तफ्तीश कर रही है. |
फेसबुक की सीओओ शेरिल सैंडबर्ग ने जर्नलिस्ट्स से बातचीत में कहा कि वैसे तो मुझे नरेंद्र मोदी के सारे पोस्ट्स पसंद हैं. लेकिन जिस फोटो में वे अपनी मां से आशीर्वाद ले रहे हैं वो मेरी फेवरेट हैं. मैं बहुत खुश और उत्साहित हूं कि नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया की इंपॉर्टेंस को समझा है. इलेक्शन के दौरान इंडिया में फेसबुक का इस्तेमाल थ्रिलिंग रहा.
सैंडबर्ग ने कहा कि नरेंद्र मोदी वर्ल्ड के दूसरे सबसे ज्यादा पॉप्युलर लीडर हैं. उनके 18 करोड़ फेसबुक फ्रेंड्स हैं. इस मामले में अमेरिका के प्रेसीडेंट बराक ओबामा पहले नंबर पर हैं.
इसके अलावा भी उन्होंने कई बातें कहीं. सैंडबर्ग ने कहा कि भारत बहुत तेज़ी से उभरता मार्केट है. यहां के लोगों को नौकरी देना बहुत शानदार एक्सपीरियंस होगा. उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से भारत फेसबुक का सबसे बड़ा बाज़ार बनने जा रहा है. इंडिया में फेसबुक यूज़र काफी एक्टिव हैं और ज्यादातर इंडियंस मोबाइल फोन पर फेसबुक यूज करते हैं. उन्होंने कहा कि फेसबुक के जरिए इलेक्शन में कैंडीडेट और लोगों के बीच डाइरेक्ट और टू-वे कमयुनिकेशन हो सकता है. शेरिल कम से कम एक अरब और इंडियंस को फेसबुक से जोड़ना चाहती हैं. उन्होंने यह भी का कि पुने केस में फेसबुक पर वॉइलेंस भड़काने वालों को बख्शा नहीं जाएगा.
| फेसबुक की सीओओ शेरिल सैंडबर्ग ने जर्नलिस्ट्स से बातचीत में कहा कि वैसे तो मुझे नरेंद्र मोदी के सारे पोस्ट्स पसंद हैं. लेकिन जिस फोटो में वे अपनी मां से आशीर्वाद ले रहे हैं वो मेरी फेवरेट हैं. मैं बहुत खुश और उत्साहित हूं कि नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया की इंपॉर्टेंस को समझा है. इलेक्शन के दौरान इंडिया में फेसबुक का इस्तेमाल थ्रिलिंग रहा. सैंडबर्ग ने कहा कि नरेंद्र मोदी वर्ल्ड के दूसरे सबसे ज्यादा पॉप्युलर लीडर हैं. उनके अट्ठारह करोड़ फेसबुक फ्रेंड्स हैं. इस मामले में अमेरिका के प्रेसीडेंट बराक ओबामा पहले नंबर पर हैं. इसके अलावा भी उन्होंने कई बातें कहीं. सैंडबर्ग ने कहा कि भारत बहुत तेज़ी से उभरता मार्केट है. यहां के लोगों को नौकरी देना बहुत शानदार एक्सपीरियंस होगा. उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से भारत फेसबुक का सबसे बड़ा बाज़ार बनने जा रहा है. इंडिया में फेसबुक यूज़र काफी एक्टिव हैं और ज्यादातर इंडियंस मोबाइल फोन पर फेसबुक यूज करते हैं. उन्होंने कहा कि फेसबुक के जरिए इलेक्शन में कैंडीडेट और लोगों के बीच डाइरेक्ट और टू-वे कमयुनिकेशन हो सकता है. शेरिल कम से कम एक अरब और इंडियंस को फेसबुक से जोड़ना चाहती हैं. उन्होंने यह भी का कि पुने केस में फेसबुक पर वॉइलेंस भड़काने वालों को बख्शा नहीं जाएगा. |
पलियाकलां-खीरी।
संकुल स्तरीय प्रतियोगिता जीतकर लौटे सरस्वती विद्या मंदिर के छात्र छात्राओं का हौसला बढ़ाने विद्यालय पहुंचे श्री सुंदरकांड समाज सेवा मंडल के पदाधिकारियों ने पुरस्कार देकर सम्मानित किया। प्रधानाचार्य वीरेंद्र कुमार वर्मा ने बताया कि जनपद मुख्यालय पर आयोजित संकुल स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता में विद्यालय के छात्र सौरभ कांत ने लंबी कूद में पहला, गोला फेंक में दूसरा स्थान प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त तरुण वर्ग की 200 मीटर तथा 800 मीटर दौड़ में विद्यालय के छात्र शिवम सिंह ने दूसरा स्थान पाया। गंगा की निर्मलता पर यहां आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में छात्र विवेक कुमार व वेदिका सिंह ने पहला स्थान, अर्पिता सिंह, संचिता मौर्य व दिव्या राणा ने दूसरा व रंजू निषाद, संध्या राठौर व दीपक कुमार ने तीसरे स्थान प्राप्त किया। सभी होनहार छात्र छात्राओं को श्री सुंदरकांड समाज सेवा मंडल के प्रमुख निरंकार प्रसाद बरनवाल, रामचंद्र शुक्ल, उमाशंकर मिश्र, विश्व कान्त त्रिपाठी, सक्षम शुक्ला, आशीष मिश्रा, राम सागर गांधी आदि ने पुरस्कार देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर विद्यालय प्रबंधक निरंजन लाल अग्रवाल, उपप्रबंधक अभिषेक शुक्ला सोनी, प्रधानाचार्य वीरेंद्र कुमार वर्मा, आचार्य धनुषधारी द्विवेदी आदि मौजूद रहे।
| पलियाकलां-खीरी। संकुल स्तरीय प्रतियोगिता जीतकर लौटे सरस्वती विद्या मंदिर के छात्र छात्राओं का हौसला बढ़ाने विद्यालय पहुंचे श्री सुंदरकांड समाज सेवा मंडल के पदाधिकारियों ने पुरस्कार देकर सम्मानित किया। प्रधानाचार्य वीरेंद्र कुमार वर्मा ने बताया कि जनपद मुख्यालय पर आयोजित संकुल स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता में विद्यालय के छात्र सौरभ कांत ने लंबी कूद में पहला, गोला फेंक में दूसरा स्थान प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त तरुण वर्ग की दो सौ मीटर तथा आठ सौ मीटर दौड़ में विद्यालय के छात्र शिवम सिंह ने दूसरा स्थान पाया। गंगा की निर्मलता पर यहां आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में छात्र विवेक कुमार व वेदिका सिंह ने पहला स्थान, अर्पिता सिंह, संचिता मौर्य व दिव्या राणा ने दूसरा व रंजू निषाद, संध्या राठौर व दीपक कुमार ने तीसरे स्थान प्राप्त किया। सभी होनहार छात्र छात्राओं को श्री सुंदरकांड समाज सेवा मंडल के प्रमुख निरंकार प्रसाद बरनवाल, रामचंद्र शुक्ल, उमाशंकर मिश्र, विश्व कान्त त्रिपाठी, सक्षम शुक्ला, आशीष मिश्रा, राम सागर गांधी आदि ने पुरस्कार देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर विद्यालय प्रबंधक निरंजन लाल अग्रवाल, उपप्रबंधक अभिषेक शुक्ला सोनी, प्रधानाचार्य वीरेंद्र कुमार वर्मा, आचार्य धनुषधारी द्विवेदी आदि मौजूद रहे। |
जयवीर फोगाट,चरखी दादरीः
134A Admission Update: अतिरिक्त उपायुक्त डा. मुनीष नागपाल ने कहा है कि 134 ए के तहत उत्तीर्ण हुए जिला के विद्यार्थियों का 15 जनवरी तक स्कूलों में दाखिला करवाया जा सकता है। सरकार ने एडमिशन के लिए तारीख 15 जनवरी तक बढ़ा दी है।
शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डा. महावीर सिंह तथा मौलिक शिक्षा विभाग के निदेशक अंशज सिंह से वीडियो काफ्रेंस के बाद अतिरिक्त उपायुक्त ने बताया कि दादरी जिला में कुल 1237 बच्चों का 134 ए के अंतर्गत दाखिला किया जाना है। इनमें दूसरी से आठवीं तक एक हजार 96 बच्चे एवं नौवीं से 11वीं तक के 141 बच्चे हैं। अभिभावक 15 जनवरी तक चयनित किए गए विद्यालयों में दाखिला के लिए बच्चों की उपस्थिति दर्ज करवाएं।
डा. मुनीष नागपाल ने कहा कि आठवीं तक एडमिशन के लिए जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी वीरेंद्र मलिक का दायित्व रहेगा। इसी तरह नौवीं से 11 वीं कक्षा तक के एडमिशन में किसी प्रकार की परेशानी आए तो अभिभावक जिला शिक्षा अधिकारी जेपी सभ्रवाल से संपर्क कर सकते हैं।
वीडियो कांफ्रेंस में अपर मुख्य सचिव डा. महावीर सिंह ने अतिरिक्त उपायुक्त व शिक्षा अधिकारियों को सभी बच्चों का दाखिला सुनिश्चत करवाने के निर्देश दिए हैं। अंशज सिंह ने बताया कि उनकी ओर से सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
एडीसी डा. मुनीष नागपाल ने कहा कि इस कार्य में अभिभावकों एवं विद्यार्थियों को कोई दिक्कत नहीं आनी चाहिए। शिक्षा अधिकारी सभी स्कूल संचालकों को स्पष्ट कर दें कि 134 ए में चयनित हुए सभी बच्चों को उनकी कक्षा के अनुसार प्रवेश दिलवाया जाएगा। सरकार की ओर से उनकी हर प्रकार की समस्याओं का निदान किया जा रहा है।
इस मौके पर जिला शिक्षा अधिकारी जेपी सभ्रवाल, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी वीरेंद्र मलिक, खंड शिक्षा अधिकारी जलधीर कलकल, योजना अधिकारी दीवान सिंह आदि उपस्थित रहे।
| जयवीर फोगाट,चरखी दादरीः एक सौ चौंतीस एम्पीयर Admission Update: अतिरिक्त उपायुक्त डा. मुनीष नागपाल ने कहा है कि एक सौ चौंतीस ए के तहत उत्तीर्ण हुए जिला के विद्यार्थियों का पंद्रह जनवरी तक स्कूलों में दाखिला करवाया जा सकता है। सरकार ने एडमिशन के लिए तारीख पंद्रह जनवरी तक बढ़ा दी है। शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डा. महावीर सिंह तथा मौलिक शिक्षा विभाग के निदेशक अंशज सिंह से वीडियो काफ्रेंस के बाद अतिरिक्त उपायुक्त ने बताया कि दादरी जिला में कुल एक हज़ार दो सौ सैंतीस बच्चों का एक सौ चौंतीस ए के अंतर्गत दाखिला किया जाना है। इनमें दूसरी से आठवीं तक एक हजार छियानवे बच्चे एवं नौवीं से ग्यारहवीं तक के एक सौ इकतालीस बच्चे हैं। अभिभावक पंद्रह जनवरी तक चयनित किए गए विद्यालयों में दाखिला के लिए बच्चों की उपस्थिति दर्ज करवाएं। डा. मुनीष नागपाल ने कहा कि आठवीं तक एडमिशन के लिए जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी वीरेंद्र मलिक का दायित्व रहेगा। इसी तरह नौवीं से ग्यारह वीं कक्षा तक के एडमिशन में किसी प्रकार की परेशानी आए तो अभिभावक जिला शिक्षा अधिकारी जेपी सभ्रवाल से संपर्क कर सकते हैं। वीडियो कांफ्रेंस में अपर मुख्य सचिव डा. महावीर सिंह ने अतिरिक्त उपायुक्त व शिक्षा अधिकारियों को सभी बच्चों का दाखिला सुनिश्चत करवाने के निर्देश दिए हैं। अंशज सिंह ने बताया कि उनकी ओर से सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। एडीसी डा. मुनीष नागपाल ने कहा कि इस कार्य में अभिभावकों एवं विद्यार्थियों को कोई दिक्कत नहीं आनी चाहिए। शिक्षा अधिकारी सभी स्कूल संचालकों को स्पष्ट कर दें कि एक सौ चौंतीस ए में चयनित हुए सभी बच्चों को उनकी कक्षा के अनुसार प्रवेश दिलवाया जाएगा। सरकार की ओर से उनकी हर प्रकार की समस्याओं का निदान किया जा रहा है। इस मौके पर जिला शिक्षा अधिकारी जेपी सभ्रवाल, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी वीरेंद्र मलिक, खंड शिक्षा अधिकारी जलधीर कलकल, योजना अधिकारी दीवान सिंह आदि उपस्थित रहे। |
।ऋगवेन (Rigven)
शुक्र ग्रह तुला पर शासन करता है। कुलस्वामिनी को तुला राशि का आराध्य माना जाता है। इस राशि के व्यक्ति ठण्डी और सुहावनी रातें वाले मौसम में पैदा होते हैं। तुला राशि के ऋगवेन नाम के लड़कों को चालाकी करनी नहीं आती। इस राशि के व्यक्ति एपिडर्मिस (त्वचा की बहरी परत), किडनी और अण्डाशय सम्बंधित बीमारियों से ग्रस्त हो सकते हैं। इन ऋगवेन नाम के लड़कों में भविष्य में नज़र में कमी और पीठ के निचले हिस्से में दर्द हो सकता है। इस राशि के व्यक्ति परिवार के लिए बलिदान देने के लिए तैयार रहते हैं।
ऋगवेन नाम का स्वामी शुक्र ग्रह और शुभ अंक 6 है। जिनका अंक 6 होता है वे बहुत आकर्षक व खूबसूरत होते हैं। ऋगवेन नाम के लोग गंदगी जरा भी पसंद नहीं करते। इन्हें सफाई पसंद है। ये कलात्मक होते हैं। इस क्षेत्र से जुड़ने पर ये सफल हो सकते हैं। ऋगवेन नाम के व्यक्तियों में बहुत सब्र होता है और घूमने-फिरने के ये विशेष रूप से शौकीन होते हैं। 6 अंक वाले लोगों के पास धन की कमी नहीं रहती और इनका जीवन समृद्ध होता है। आपको अपने जीवन में परिवार का प्यार और सहयोग भरपूर मिलता है।
जिन लोगों का नाम ऋगवेन है, उनकी राशि तुला होती है। ये व्यक्ति अक्सर अपने लाभ के बारे में सोचते हैं और इसलिए इनमें संतुलन की कमी होती है। इस राशि के लोग अक्सर परिस्थितियों के अनुसार अपना मन बदल लेते हैं। ऋगवेन नाम के लोगों के पास हर बात का तर्क होता है। ये भविष्य के बारे में ज्यादा सोचते हैं। ऋगवेन नाम के लोग स्वभाव से सौम्य होते हैं लेकिन ये किसी तरह के फैसले नहीं ले पाते क्योंकि इन्हें जिम्मेदारी लेना पसंद नहीं होता है। ऋगवेन नाम के लोग हमेशा चीजों व लोगों की आपस में तुलना करने लग जाते हैं।
।शासक रात के (राज) (neesh), रात के भगवान (चंद्रमा)
।शासक रात के (राज) (neesh), रात के भगवान (चंद्रमा)
| ।ऋगवेन शुक्र ग्रह तुला पर शासन करता है। कुलस्वामिनी को तुला राशि का आराध्य माना जाता है। इस राशि के व्यक्ति ठण्डी और सुहावनी रातें वाले मौसम में पैदा होते हैं। तुला राशि के ऋगवेन नाम के लड़कों को चालाकी करनी नहीं आती। इस राशि के व्यक्ति एपिडर्मिस , किडनी और अण्डाशय सम्बंधित बीमारियों से ग्रस्त हो सकते हैं। इन ऋगवेन नाम के लड़कों में भविष्य में नज़र में कमी और पीठ के निचले हिस्से में दर्द हो सकता है। इस राशि के व्यक्ति परिवार के लिए बलिदान देने के लिए तैयार रहते हैं। ऋगवेन नाम का स्वामी शुक्र ग्रह और शुभ अंक छः है। जिनका अंक छः होता है वे बहुत आकर्षक व खूबसूरत होते हैं। ऋगवेन नाम के लोग गंदगी जरा भी पसंद नहीं करते। इन्हें सफाई पसंद है। ये कलात्मक होते हैं। इस क्षेत्र से जुड़ने पर ये सफल हो सकते हैं। ऋगवेन नाम के व्यक्तियों में बहुत सब्र होता है और घूमने-फिरने के ये विशेष रूप से शौकीन होते हैं। छः अंक वाले लोगों के पास धन की कमी नहीं रहती और इनका जीवन समृद्ध होता है। आपको अपने जीवन में परिवार का प्यार और सहयोग भरपूर मिलता है। जिन लोगों का नाम ऋगवेन है, उनकी राशि तुला होती है। ये व्यक्ति अक्सर अपने लाभ के बारे में सोचते हैं और इसलिए इनमें संतुलन की कमी होती है। इस राशि के लोग अक्सर परिस्थितियों के अनुसार अपना मन बदल लेते हैं। ऋगवेन नाम के लोगों के पास हर बात का तर्क होता है। ये भविष्य के बारे में ज्यादा सोचते हैं। ऋगवेन नाम के लोग स्वभाव से सौम्य होते हैं लेकिन ये किसी तरह के फैसले नहीं ले पाते क्योंकि इन्हें जिम्मेदारी लेना पसंद नहीं होता है। ऋगवेन नाम के लोग हमेशा चीजों व लोगों की आपस में तुलना करने लग जाते हैं। ।शासक रात के , रात के भगवान ।शासक रात के , रात के भगवान |
शादी-सगाई और पार्टियों में मेहमान बनकर गहने और नगदी चुराने वाले सांसी गैंग की 4 महिला सदस्यों सहित 5 बदमाशों को पुलिस ने अरेस्ट कर लिया। पुलिस ने उनके कब्जे से 9 लाख रुपए के गहने और 1. 44 लाख रुपए नगद बरामद किए।
गैंग के सदस्यों ने 4 दिन पूर्व नगर के होटल रेडियंट और 3 दिन पहले बरेली के किंग्स हेरीटेज होटल में शादी के दौरान चोरी की बड़ी घटनाओं को अंजाम दिया था। एसएसपी विनीत जायसवाल ने बदमाशों को दबोच कर चोरी की घटनाओं का खुलासा करने वाली पुलिस टीम को 25 हजार रुपये का नगद पुरस्कार दिया है।
बुधवार को रिजर्व पुलिस लाइन में एसएसपी विनीत जायसवाल ने प्रेस वार्ता कर बताया कि शादी और पार्टियों के दौरान चोरी की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर उन्होंने अधिनस्थ पुलिस अधिकारियों को बदमाशों की धरपकड़ के लिए निर्देशित किया था।
उन्होंने बताया कि थाना नई मण्डी क्षेत्र में स्थित होटल रेडिएन्ट भोपा रोड में सगाई समारोह के दौरान 02 अज्ञात महिलाओ ने वर पक्ष की और से दुल्हन के लिए लाये गये सोने व चांदी के जेवरात व नगदी से भरा हाथ का एक पर्स 26 नवंबर को चोरी कर लिया गया था।
बताया कि उक्त मामले में रुपक कुमार वर्मा पुत्र ईश्वरदयाल वर्मा निवासी 72/303 अग्रसेन बिहार थाना नई मण्डी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया कि घटना के खुलासे और बदमाशाें की धरपकड़ और माल बरामदगी के लिए उन्होंने 2 अलग-अलग पुलिस टीमों का गठन किया था।
एसएसपी विनीत जायसवाल ने बताया कि सगाई और शादी-विवाह पार्टियों में मेहमान बनकर दुल्हन और अन्य लोगों के जेवरात और नगदी चोरी करने वाले गैंग की धरपकड़ के लिये दिये गए आदेश के तहत पुलिस ने बड़ी सफलता अर्जित की।
उन्होंने बताया कि 29 नवंबर थाना नई मण्डी पर गठित दोनों टीमों के कठिन परिश्रम व सर्विलांस टीम की मदद से सांसी (भातु) जाति के गैंग को ए टू जेड रोड सूजडु की तरफ जाने वाली सड़क से गिरफ्तार किया गया। उन्होंने बताया कि यह संगीन किस्म का गिरोह है जोकि मूलतः मध्य प्रदेश के राजगढ जिले के निवासी हैं। उन्होंने बताया कि अरेस्ट किये गए गिरोह में 4 महिलाएं और 1 पुरुष शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार दबोचे गए बदमाशों ने बरेली के किंग्स होटल में आयोजित शादी समारोह में भी चोरी की घटना को अंजाम दिया था। बताया कि दबोचे गए गैंग के सदस्यों में संगीता पत्नी एस कुमार निवासी ग्राम गुलखेडी, हीना पत्नी प्रकाश निवासी ग्राम कडिया थाना बोडा, शबाना पत्नी ब्रजेश निवासी ग्राम गुलखेडी और रंजना पुत्री बीरु निवासी कडिया तथा एस कुमार पुत्र धर्म सिहं निवासी ग्राम गुलखेडी थाना बोडा जिला राजगढ, मध्यप्रदेश शामिल हैं।
एसएसपी ने बताया कि दबोचे गए बदमाशों से 9 लाख रुपये के सोने-चांदी के जेवरात और 1. 44 लाख रुपये की नगदी बरामद की गई है। उन्होंने बताया कि बरामद गहने और नगदी में बरेली के शास्त्री नगर निवासी प्रमोद कुमार की बेटी नीशू की थाना बारादरी क्षेत्र के किंग्स होटल से 27 नवंबर को शादी समारोह के दौरान चुराए गए जेवरात और नगदी भी शामिल हैं।
पुलिस ने बताया कि बदमाशों ने पूछताद में जानकारी दी कि वे लोग बडे-बडे शहरों में बडे-बडे होटल और मैरिज होम को निशाना बनाते हैं। वे देखते है कि कहां पर अच्छे पैसे वाले और रहीस लोगों की शादी है। वहां पर वे उनके पहनावे के अनुसार अच्छे-अच्छे कपडे पहनते है व मेकअप करते हैं तथा उनसे घुल मिल जाते हैं।
साथ ही दुल्हन की माता व दुल्हे के पिता व मेहमानों को निशाना बनाते हैं। उनके पास बैठकर खाते-पीते है और मौका पाकर उनका बैग या पर्स जिसमें रुपये या कीमती जेवरात होते हैं, को चोरी कर वहां से बाहर निकलकर कोई भी साधन पकड़कर अपने अन्य साथियों के पास जोकि होटल के आस-पास ही कुछ दूरी पर अपनी गाडी में खडे़ होकर हमारा इंतजार कर रहे होते हैं।
उनके पास जाकर तुरन्त उस स्थान या जिले को छोड देते हैं। बताया कि तब वे लोग वहां से करीब 100 या 200 किमी दूर अन्य शहर की तरफ दूसरी घटना करने के लिए चले जाते हैं। जहां इसी प्रकार से अन्य घटनाओं को अंजाम देते हैं।
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| शादी-सगाई और पार्टियों में मेहमान बनकर गहने और नगदी चुराने वाले सांसी गैंग की चार महिला सदस्यों सहित पाँच बदमाशों को पुलिस ने अरेस्ट कर लिया। पुलिस ने उनके कब्जे से नौ लाख रुपए के गहने और एक. चौंतालीस लाख रुपए नगद बरामद किए। गैंग के सदस्यों ने चार दिन पूर्व नगर के होटल रेडियंट और तीन दिन पहले बरेली के किंग्स हेरीटेज होटल में शादी के दौरान चोरी की बड़ी घटनाओं को अंजाम दिया था। एसएसपी विनीत जायसवाल ने बदमाशों को दबोच कर चोरी की घटनाओं का खुलासा करने वाली पुलिस टीम को पच्चीस हजार रुपये का नगद पुरस्कार दिया है। बुधवार को रिजर्व पुलिस लाइन में एसएसपी विनीत जायसवाल ने प्रेस वार्ता कर बताया कि शादी और पार्टियों के दौरान चोरी की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर उन्होंने अधिनस्थ पुलिस अधिकारियों को बदमाशों की धरपकड़ के लिए निर्देशित किया था। उन्होंने बताया कि थाना नई मण्डी क्षेत्र में स्थित होटल रेडिएन्ट भोपा रोड में सगाई समारोह के दौरान दो अज्ञात महिलाओ ने वर पक्ष की और से दुल्हन के लिए लाये गये सोने व चांदी के जेवरात व नगदी से भरा हाथ का एक पर्स छब्बीस नवंबर को चोरी कर लिया गया था। बताया कि उक्त मामले में रुपक कुमार वर्मा पुत्र ईश्वरदयाल वर्मा निवासी बहत्तर/तीन सौ तीन अग्रसेन बिहार थाना नई मण्डी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया कि घटना के खुलासे और बदमाशाें की धरपकड़ और माल बरामदगी के लिए उन्होंने दो अलग-अलग पुलिस टीमों का गठन किया था। एसएसपी विनीत जायसवाल ने बताया कि सगाई और शादी-विवाह पार्टियों में मेहमान बनकर दुल्हन और अन्य लोगों के जेवरात और नगदी चोरी करने वाले गैंग की धरपकड़ के लिये दिये गए आदेश के तहत पुलिस ने बड़ी सफलता अर्जित की। उन्होंने बताया कि उनतीस नवंबर थाना नई मण्डी पर गठित दोनों टीमों के कठिन परिश्रम व सर्विलांस टीम की मदद से सांसी जाति के गैंग को ए टू जेड रोड सूजडु की तरफ जाने वाली सड़क से गिरफ्तार किया गया। उन्होंने बताया कि यह संगीन किस्म का गिरोह है जोकि मूलतः मध्य प्रदेश के राजगढ जिले के निवासी हैं। उन्होंने बताया कि अरेस्ट किये गए गिरोह में चार महिलाएं और एक पुरुष शामिल हैं। पुलिस के अनुसार दबोचे गए बदमाशों ने बरेली के किंग्स होटल में आयोजित शादी समारोह में भी चोरी की घटना को अंजाम दिया था। बताया कि दबोचे गए गैंग के सदस्यों में संगीता पत्नी एस कुमार निवासी ग्राम गुलखेडी, हीना पत्नी प्रकाश निवासी ग्राम कडिया थाना बोडा, शबाना पत्नी ब्रजेश निवासी ग्राम गुलखेडी और रंजना पुत्री बीरु निवासी कडिया तथा एस कुमार पुत्र धर्म सिहं निवासी ग्राम गुलखेडी थाना बोडा जिला राजगढ, मध्यप्रदेश शामिल हैं। एसएसपी ने बताया कि दबोचे गए बदमाशों से नौ लाख रुपये के सोने-चांदी के जेवरात और एक. चौंतालीस लाख रुपये की नगदी बरामद की गई है। उन्होंने बताया कि बरामद गहने और नगदी में बरेली के शास्त्री नगर निवासी प्रमोद कुमार की बेटी नीशू की थाना बारादरी क्षेत्र के किंग्स होटल से सत्ताईस नवंबर को शादी समारोह के दौरान चुराए गए जेवरात और नगदी भी शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि बदमाशों ने पूछताद में जानकारी दी कि वे लोग बडे-बडे शहरों में बडे-बडे होटल और मैरिज होम को निशाना बनाते हैं। वे देखते है कि कहां पर अच्छे पैसे वाले और रहीस लोगों की शादी है। वहां पर वे उनके पहनावे के अनुसार अच्छे-अच्छे कपडे पहनते है व मेकअप करते हैं तथा उनसे घुल मिल जाते हैं। साथ ही दुल्हन की माता व दुल्हे के पिता व मेहमानों को निशाना बनाते हैं। उनके पास बैठकर खाते-पीते है और मौका पाकर उनका बैग या पर्स जिसमें रुपये या कीमती जेवरात होते हैं, को चोरी कर वहां से बाहर निकलकर कोई भी साधन पकड़कर अपने अन्य साथियों के पास जोकि होटल के आस-पास ही कुछ दूरी पर अपनी गाडी में खडे़ होकर हमारा इंतजार कर रहे होते हैं। उनके पास जाकर तुरन्त उस स्थान या जिले को छोड देते हैं। बताया कि तब वे लोग वहां से करीब एक सौ या दो सौ किमी दूर अन्य शहर की तरफ दूसरी घटना करने के लिए चले जाते हैं। जहां इसी प्रकार से अन्य घटनाओं को अंजाम देते हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
अवधी और लोकगीत (हिन्दी)
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
अवधी vs. लोकगीत (हिन्दी)
अवधी हिंदी क्षेत्र की एक उपभाषा है। यह उत्तर प्रदेश में "अवध क्षेत्र" (लखनऊ, रायबरेली, सुल्तानपुर, बाराबंकी, उन्नाव, हरदोई, सीतापुर, लखीमपुर, फैजाबाद, प्रतापगढ़), इलाहाबाद, कौशाम्बी, अम्बेडकर नगर, गोंडा, बहराइच, श्रावस्ती तथा फतेहपुर में भी बोली जाती है। इसके अतिरिक्त इसकी एक शाखा बघेलखंड में बघेली नाम से प्रचलित है। 'अवध' शब्द की व्युत्पत्ति "अयोध्या" से है। इस नाम का एक सूबा के राज्यकाल में था। तुलसीदास ने अपने "मानस" में अयोध्या को 'अवधपुरी' कहा है। इसी क्षेत्र का पुराना नाम 'कोसल' भी था जिसकी महत्ता प्राचीन काल से चली आ रही है। भाषा शास्त्री डॉ॰ सर "जार्ज अब्राहम ग्रियर्सन" के भाषा सर्वेक्षण के अनुसार अवधी बोलने वालों की कुल आबादी 1615458 थी जो सन् 1971 की जनगणना में 28399552 हो गई। मौजूदा समय में शोधकर्ताओं का अनुमान है कि 6 करोड़ से ज्यादा लोग अवधी बोलते हैं। उत्तर प्रदेश के 19 जिलों- सुल्तानपुर, अमेठी, बाराबंकी, प्रतापगढ़, इलाहाबाद, कौशांबी, फतेहपुर, रायबरेली, उन्नाव, लखनऊ, हरदोई, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, गोंडा, फैजाबाद व अंबेडकर नगर में पूरी तरह से यह बोली जाती है। जबकि 6 जिलों- जौनपुर, मिर्जापुर, कानपुर, शाहजहांपुर, बस्ती और बांदा के कुछ क्षेत्रों में इसका प्रयोग होता है। बिहार के 2 जिलों के साथ पड़ोसी देश नेपाल के 8 जिलों में यह प्रचलित है। इसी प्रकार दुनिया के अन्य देशों- मॉरिशस, त्रिनिदाद एवं टुबैगो, फिजी, गयाना, सूरीनाम सहित आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड व हॉलैंड में भी लाखों की संख्या में अवधी बोलने वाले लोग हैं। . वर्तमान हिंदीभाषी क्षेत्र प्राचीन भारत का 'मध्य देश' है। इस क्षेत्र में बोली जानेवाली बोलियों को भाषा वैज्ञानिकों ने चार भागों में बाँटा है। 'पश्चिमी हिंदी' जिसके अंतर्गत खड़ी बोली, ब्रज, बांगरू, कन्नौजी, राजस्थानी तथा बुंदेलखंडी भाषाएँ आती हैं। अवधी, बघेली तथा छत्तीसगढ़ी मध्य की भाषाएँ हैं और इसके पूर्व में बिहारी भाषा समुदाय की भोजपुरी, मैथिली तथा मगही भाषाएँ हैं। उत्तर में कुमाऊँनी भाषा है जो नैनीताल, अल्मोड़ा, गढ़वाल, टेहरी गढ़वाल, पिथौरागढ़, चमौली तथा उत्तर काशी में बोली जाती है। बोलियों की बहुत सी उप-बोलियाँ भी हैं, जिनके लोकगीतों का यथास्थान संक्षिप्त परिचय दिया जाएगा। लोकगीत चाहे कहीं के भी हों वे प्राचीन परंपराओं, रीतिरिवाजों एव धार्मिक तथा सामाजिक जीवन के या यों कहिए कि संस्कृति के द्योतक हैं। यहाँ विभिन्न क्षेत्रों के विविध लोकगीतों का परिचय देने के पूर्व ऐसे गीतों की चर्चा करे की जा रही है जो मात्र शब्दावली बदलकर अनेक क्षेत्रों में गाए जाते हैं। इनमें भाषा अथवा बोली की अनकता भले हो पर भाव की एकता एवं उसे व्यक्त करने तथा पात्रों का चयन एक जैसा होता है। ऐसे गीतों में ऋतुसंबंधी गीत, संस्कार गीत और जातीय गीत मुख्य रूप से आते हैं। पद्य गाथाएँ एवं पँवारे भी विभिन्न प्रकार से गाए जाते हैं। ऋतुगीतों में फाग और पावस गीत ऐसे हैं जो अनेक क्षेत्रों में प्रचलित दिखाई पड़ते हैं। फाग गीत मुख्य रूप से पुरुषों का गीत है जो बसंतपंचमी से लेकर होलिकादहन के सबेरे तक गाया जाता है। अवधी, ब्रज, राजस्थानी, बुंदेलखंडी, छत्तीसगढ़ी, बैसवाड़ी, बघेली, भोजपुरी आदि अनेक बोलियों में फाग संबंधी गीत पाए जाते हैं। फाग के होली, चौताल, डेढ़ताल, तिनताल, देलवइया, उलारा, चहका, लेज, झूमर और कबीर आदि अनेक प्रकार हैं। इन सब में केवल घुनों का अंतर है। पावस गीतों की भी बहुक्षेत्रीय परंपरा है। ये गीत उपर्युक्त सभी क्षेत्रों में न्यूनाधिक मात्रा में पाए जाते हैं किंतु अवधी और भोजपुरी में अधिक प्रचलित हैं। इन दोनों क्षेत्रों में इन्हें कजली कहा जाता है। संस्कार के गीतों में सोहर (जन्मगीत), मुंडन, जनेऊ, के गीत और विवाह के गीत प्रायः सभी स्थानों में गाए जाते हैं। मृत्यु के समय प्रायः प्रत्येक क्षेत्र की स्त्रियाँ राग बाँधकर रोती हैं। जातीय गीतों में काफी पृथक्ता होती है किंतु जहाँ एक ही जाति के लोग अनेक क्षेत्रों में बसे हैं, उनके गीतों की मूल प्रवृत्ति एक जैसी ही है। जैसे, पँवरिया जाति के लोग पँवारा, नट जाति के लोग आल्हा, अहीर जाति के लोग विरहा कई क्षेत्रों में गाते हैं। पद्य गाथाएँ तो प्रायः सभी क्षेत्रों में मिल जाती हैं। ये स्थानीय जननायकों के चरित्रों पर आधारित होती हैं। प्रायः सभी क्षेत्रों में माताएँ बच्चों को सुलाने के लिए लोरी तथा प्रातः उन्हें जगाने के लिए प्रभाती गाया करती हैं। बालक बालिकाएँ भी कुछ खेलों में गीतों का सहारा लेते हैं। बहुत से ऐसे खेल भी हैं जिनमें वयस्क स्त्री पुरुष गीत गाया करते हैं। लोकप्रचलित भजन और श्रमगीत तो सभी क्षेत्रों में गाए जाते हैं। लोकगाथाओं में ऐसी बहुत सी गाथाएँ भी हैं जो कई क्षेत्रों में बीच बीच गाई जाती हैं। इन पृथक्ताओं के बावजूद गीतों की प्रवृत्ति एक जैसी ही है जिससे हिंदीभाषी क्षेत्रों की अनेकता एकता में बद्ध दिखाई पड़ती है। नीचे सभी क्षेत्रों के लोकगीतों का संक्षिप्त एवं क्रमबद्ध परिचय दिया जा रहा है। .
अवधी और लोकगीत (हिन्दी) आम में एक बात है (यूनियनपीडिया में): भोजपुरी भाषा।
भोजपुरी शब्द का निर्माण बिहार का प्राचीन जिला भोजपुर के आधार पर पड़ा। जहाँ के राजा "राजा भोज" ने इस जिले का नामकरण किया था।भाषाई परिवार के स्तर पर भोजपुरी एक आर्य भाषा है और मुख्य रूप से पश्चिम बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश तथा उत्तरी झारखण्ड के क्षेत्र में बोली जाती है। आधिकारिक और व्यवहारिक रूप से भोजपुरी हिन्दी की एक उपभाषा या बोली है। भोजपुरी अपने शब्दावली के लिये मुख्यतः संस्कृत एवं हिन्दी पर निर्भर है कुछ शब्द इसने उर्दू से भी ग्रहण किये हैं। भोजपुरी जानने-समझने वालों का विस्तार विश्व के सभी महाद्वीपों पर है जिसका कारण ब्रिटिश राज के दौरान उत्तर भारत से अंग्रेजों द्वारा ले जाये गये मजदूर हैं जिनके वंशज अब जहाँ उनके पूर्वज गये थे वहीं बस गये हैं। इनमे सूरिनाम, गुयाना, त्रिनिदाद और टोबैगो, फिजी आदि देश प्रमुख है। भारत के जनगणना (2001) आंकड़ों के अनुसार भारत में लगभग 3.3 करोड़ लोग भोजपुरी बोलते हैं। पूरे विश्व में भोजपुरी जानने वालों की संख्या लगभग ४ करोड़ है, हालांकि द टाइम्स ऑफ इंडिया के एक लेख के में ये बताया गया है कि पूरे विश्व में भोजपुरी के वक्ताओं की संख्या १६ करोड़ है, जिसमें बिहार में ८ करोड़ और उत्तर प्रदेश में ७ करोड़ तथा शेष विश्व में १ करोड़ है। उत्तर अमेरिकी भोजपुरी संगठन के अनुसार वक्ताओं की संख्या १८ करोड़ है। वक्ताओं के संख्या के आंकड़ों में ऐसे अंतर का संभावित कारण ये हो सकता है कि जनगणना के समय लोगों द्वारा भोजपुरी को अपनी मातृ भाषा नहीं बताई जाती है। .
अवधी 75 संबंध है और लोकगीत (हिन्दी) 13 है। वे आम 1 में है, समानता सूचकांक 1.14% है = 1 / (75 + 13)।
यह लेख अवधी और लोकगीत (हिन्दी) के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
| अवधी और लोकगीत शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। अवधी vs. लोकगीत अवधी हिंदी क्षेत्र की एक उपभाषा है। यह उत्तर प्रदेश में "अवध क्षेत्र" , इलाहाबाद, कौशाम्बी, अम्बेडकर नगर, गोंडा, बहराइच, श्रावस्ती तथा फतेहपुर में भी बोली जाती है। इसके अतिरिक्त इसकी एक शाखा बघेलखंड में बघेली नाम से प्रचलित है। 'अवध' शब्द की व्युत्पत्ति "अयोध्या" से है। इस नाम का एक सूबा के राज्यकाल में था। तुलसीदास ने अपने "मानस" में अयोध्या को 'अवधपुरी' कहा है। इसी क्षेत्र का पुराना नाम 'कोसल' भी था जिसकी महत्ता प्राचीन काल से चली आ रही है। भाषा शास्त्री डॉ॰ सर "जार्ज अब्राहम ग्रियर्सन" के भाषा सर्वेक्षण के अनुसार अवधी बोलने वालों की कुल आबादी सोलह लाख पंद्रह हज़ार चार सौ अट्ठावन थी जो सन् एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर की जनगणना में दो करोड़ तिरासी लाख निन्यानवे हज़ार पाँच सौ बावन हो गई। मौजूदा समय में शोधकर्ताओं का अनुमान है कि छः करोड़ से ज्यादा लोग अवधी बोलते हैं। उत्तर प्रदेश के उन्नीस जिलों- सुल्तानपुर, अमेठी, बाराबंकी, प्रतापगढ़, इलाहाबाद, कौशांबी, फतेहपुर, रायबरेली, उन्नाव, लखनऊ, हरदोई, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, गोंडा, फैजाबाद व अंबेडकर नगर में पूरी तरह से यह बोली जाती है। जबकि छः जिलों- जौनपुर, मिर्जापुर, कानपुर, शाहजहांपुर, बस्ती और बांदा के कुछ क्षेत्रों में इसका प्रयोग होता है। बिहार के दो जिलों के साथ पड़ोसी देश नेपाल के आठ जिलों में यह प्रचलित है। इसी प्रकार दुनिया के अन्य देशों- मॉरिशस, त्रिनिदाद एवं टुबैगो, फिजी, गयाना, सूरीनाम सहित आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड व हॉलैंड में भी लाखों की संख्या में अवधी बोलने वाले लोग हैं। . वर्तमान हिंदीभाषी क्षेत्र प्राचीन भारत का 'मध्य देश' है। इस क्षेत्र में बोली जानेवाली बोलियों को भाषा वैज्ञानिकों ने चार भागों में बाँटा है। 'पश्चिमी हिंदी' जिसके अंतर्गत खड़ी बोली, ब्रज, बांगरू, कन्नौजी, राजस्थानी तथा बुंदेलखंडी भाषाएँ आती हैं। अवधी, बघेली तथा छत्तीसगढ़ी मध्य की भाषाएँ हैं और इसके पूर्व में बिहारी भाषा समुदाय की भोजपुरी, मैथिली तथा मगही भाषाएँ हैं। उत्तर में कुमाऊँनी भाषा है जो नैनीताल, अल्मोड़ा, गढ़वाल, टेहरी गढ़वाल, पिथौरागढ़, चमौली तथा उत्तर काशी में बोली जाती है। बोलियों की बहुत सी उप-बोलियाँ भी हैं, जिनके लोकगीतों का यथास्थान संक्षिप्त परिचय दिया जाएगा। लोकगीत चाहे कहीं के भी हों वे प्राचीन परंपराओं, रीतिरिवाजों एव धार्मिक तथा सामाजिक जीवन के या यों कहिए कि संस्कृति के द्योतक हैं। यहाँ विभिन्न क्षेत्रों के विविध लोकगीतों का परिचय देने के पूर्व ऐसे गीतों की चर्चा करे की जा रही है जो मात्र शब्दावली बदलकर अनेक क्षेत्रों में गाए जाते हैं। इनमें भाषा अथवा बोली की अनकता भले हो पर भाव की एकता एवं उसे व्यक्त करने तथा पात्रों का चयन एक जैसा होता है। ऐसे गीतों में ऋतुसंबंधी गीत, संस्कार गीत और जातीय गीत मुख्य रूप से आते हैं। पद्य गाथाएँ एवं पँवारे भी विभिन्न प्रकार से गाए जाते हैं। ऋतुगीतों में फाग और पावस गीत ऐसे हैं जो अनेक क्षेत्रों में प्रचलित दिखाई पड़ते हैं। फाग गीत मुख्य रूप से पुरुषों का गीत है जो बसंतपंचमी से लेकर होलिकादहन के सबेरे तक गाया जाता है। अवधी, ब्रज, राजस्थानी, बुंदेलखंडी, छत्तीसगढ़ी, बैसवाड़ी, बघेली, भोजपुरी आदि अनेक बोलियों में फाग संबंधी गीत पाए जाते हैं। फाग के होली, चौताल, डेढ़ताल, तिनताल, देलवइया, उलारा, चहका, लेज, झूमर और कबीर आदि अनेक प्रकार हैं। इन सब में केवल घुनों का अंतर है। पावस गीतों की भी बहुक्षेत्रीय परंपरा है। ये गीत उपर्युक्त सभी क्षेत्रों में न्यूनाधिक मात्रा में पाए जाते हैं किंतु अवधी और भोजपुरी में अधिक प्रचलित हैं। इन दोनों क्षेत्रों में इन्हें कजली कहा जाता है। संस्कार के गीतों में सोहर , मुंडन, जनेऊ, के गीत और विवाह के गीत प्रायः सभी स्थानों में गाए जाते हैं। मृत्यु के समय प्रायः प्रत्येक क्षेत्र की स्त्रियाँ राग बाँधकर रोती हैं। जातीय गीतों में काफी पृथक्ता होती है किंतु जहाँ एक ही जाति के लोग अनेक क्षेत्रों में बसे हैं, उनके गीतों की मूल प्रवृत्ति एक जैसी ही है। जैसे, पँवरिया जाति के लोग पँवारा, नट जाति के लोग आल्हा, अहीर जाति के लोग विरहा कई क्षेत्रों में गाते हैं। पद्य गाथाएँ तो प्रायः सभी क्षेत्रों में मिल जाती हैं। ये स्थानीय जननायकों के चरित्रों पर आधारित होती हैं। प्रायः सभी क्षेत्रों में माताएँ बच्चों को सुलाने के लिए लोरी तथा प्रातः उन्हें जगाने के लिए प्रभाती गाया करती हैं। बालक बालिकाएँ भी कुछ खेलों में गीतों का सहारा लेते हैं। बहुत से ऐसे खेल भी हैं जिनमें वयस्क स्त्री पुरुष गीत गाया करते हैं। लोकप्रचलित भजन और श्रमगीत तो सभी क्षेत्रों में गाए जाते हैं। लोकगाथाओं में ऐसी बहुत सी गाथाएँ भी हैं जो कई क्षेत्रों में बीच बीच गाई जाती हैं। इन पृथक्ताओं के बावजूद गीतों की प्रवृत्ति एक जैसी ही है जिससे हिंदीभाषी क्षेत्रों की अनेकता एकता में बद्ध दिखाई पड़ती है। नीचे सभी क्षेत्रों के लोकगीतों का संक्षिप्त एवं क्रमबद्ध परिचय दिया जा रहा है। . अवधी और लोकगीत आम में एक बात है : भोजपुरी भाषा। भोजपुरी शब्द का निर्माण बिहार का प्राचीन जिला भोजपुर के आधार पर पड़ा। जहाँ के राजा "राजा भोज" ने इस जिले का नामकरण किया था।भाषाई परिवार के स्तर पर भोजपुरी एक आर्य भाषा है और मुख्य रूप से पश्चिम बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश तथा उत्तरी झारखण्ड के क्षेत्र में बोली जाती है। आधिकारिक और व्यवहारिक रूप से भोजपुरी हिन्दी की एक उपभाषा या बोली है। भोजपुरी अपने शब्दावली के लिये मुख्यतः संस्कृत एवं हिन्दी पर निर्भर है कुछ शब्द इसने उर्दू से भी ग्रहण किये हैं। भोजपुरी जानने-समझने वालों का विस्तार विश्व के सभी महाद्वीपों पर है जिसका कारण ब्रिटिश राज के दौरान उत्तर भारत से अंग्रेजों द्वारा ले जाये गये मजदूर हैं जिनके वंशज अब जहाँ उनके पूर्वज गये थे वहीं बस गये हैं। इनमे सूरिनाम, गुयाना, त्रिनिदाद और टोबैगो, फिजी आदि देश प्रमुख है। भारत के जनगणना आंकड़ों के अनुसार भारत में लगभग तीन.तीन करोड़ लोग भोजपुरी बोलते हैं। पूरे विश्व में भोजपुरी जानने वालों की संख्या लगभग चार करोड़ है, हालांकि द टाइम्स ऑफ इंडिया के एक लेख के में ये बताया गया है कि पूरे विश्व में भोजपुरी के वक्ताओं की संख्या सोलह करोड़ है, जिसमें बिहार में आठ करोड़ और उत्तर प्रदेश में सात करोड़ तथा शेष विश्व में एक करोड़ है। उत्तर अमेरिकी भोजपुरी संगठन के अनुसार वक्ताओं की संख्या अट्ठारह करोड़ है। वक्ताओं के संख्या के आंकड़ों में ऐसे अंतर का संभावित कारण ये हो सकता है कि जनगणना के समय लोगों द्वारा भोजपुरी को अपनी मातृ भाषा नहीं बताई जाती है। . अवधी पचहत्तर संबंध है और लोकगीत तेरह है। वे आम एक में है, समानता सूचकांक एक.चौदह% है = एक / । यह लेख अवधी और लोकगीत के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः |
गद्य काव्य यदुवंश चरित और चम्पू भारत-संग्रह प्रकाशित है।' उन्होंने चार दण्डक स्तोत्र लिखे है ।
अद्भुताशुक की रचना १९३१ ई० मे हुई । इसका प्रथम अभिनय यदुगिरि के श्रीभूनीलावल्लभ भगवान् सम्पत्कुमार के हीरकिरीटोत्सव के अवसर पर दर्शको के प्रीत्यर्थ हुआ था। इस अवसर पर समागत पण्डितो की इच्छा थी - वीररसप्रधान नाटक देखने की, जो अदृष्टपूर्व हो ।
प्रस्तावना मे नटी कहती है --
घरे दरिहत्तपेण बुहुविखआ पुत्तआ रोइन्दि ।
इससे स्पष्ट है कि नाटक करनेवाले व्यावसायिक अभिनेताओं की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी ।
सूत्रधार के शब्दों में इसकी कथावस्तु का स्वरूप हैयद्भट्टनारायणनिर्मित प्राग् वेप्यां महाभारतवस्तु रम्यम् । तत् पूर्वभाव्यत्र विवाय वेण्या संयोजितं श्रीकविना त्वनेन ।। अर्थात् इसमे वेणीसंहार के पूर्व की कथा है ।
दिग्विजय के पश्चात् युधिष्ठिर का राजसूय यज्ञ भीम के लौटकर न आने के कारण रुका था । वे हस्तिनापुर मे दुर्योधन को जीतने के लिए गये थे, क्योंकि उसका कहना था कि मुझको जीते विना युधिष्टिर का राजसूय सार्थक नहीं है । फिर उसे जीतने के लिए भीम को जाना पड़ा था ।
भीम ने दुर्योधन के साथ दुणासन-शकुनि कर्णादि को भी बन्दी बनाकर युधिष्ठिर के पास प्रस्तुत कर दिया। युधिष्ठिर ने उन सबको बन्धनविमुक्त कराया और दुर्योधन को यज्ञ-समारम्भ मे धनाध्यक्ष पद पर नियुक्त कर दिया। उसके अन्य साथियों को भी यथायोग्य कामों में लगा दिया।
कृष्ण और बलराम यज्ञभूमि मे आये । युधिष्ठिरादि का अभिनन्दन करने के पश्चान् कृष्ण ने दुर्योधन को लज्जावनत मुख देखा। भीम ने उनकी कथा बताई । दुर्योधन ने मन में सोचा कि समय आने पर पुतली की भाँति भीम को नचाऊँगा ।
यज्ञ के अवसर पर राजसभा मे दुर्योधन को भ्रान्ति हुई-स्थल मे जल की जल मे स्थल की, द्वार मे भित्ति की और भित्ति मे द्वार को । इन सब बातो से और पाण्डयो के वैभव से अतिशय खिन्न होकर वह कर्णादि से मन्त्रणा करके पाण्डवो के उन्मूलन का उपाय सोचता है । जब कर्ण ने कहा कि मेरे रहते शत्रु तृणवत् है तो दुर्योधन ने घोर विडम्बना प्रकट करते हुए कहा१. अप्रकाशित गद्यकाव्य उपाख्यान - रत्नमंजूपा और चम्पू पतिराज है। | गद्य काव्य यदुवंश चरित और चम्पू भारत-संग्रह प्रकाशित है।' उन्होंने चार दण्डक स्तोत्र लिखे है । अद्भुताशुक की रचना एक हज़ार नौ सौ इकतीस ईशून्य मे हुई । इसका प्रथम अभिनय यदुगिरि के श्रीभूनीलावल्लभ भगवान् सम्पत्कुमार के हीरकिरीटोत्सव के अवसर पर दर्शको के प्रीत्यर्थ हुआ था। इस अवसर पर समागत पण्डितो की इच्छा थी - वीररसप्रधान नाटक देखने की, जो अदृष्टपूर्व हो । प्रस्तावना मे नटी कहती है -- घरे दरिहत्तपेण बुहुविखआ पुत्तआ रोइन्दि । इससे स्पष्ट है कि नाटक करनेवाले व्यावसायिक अभिनेताओं की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी । सूत्रधार के शब्दों में इसकी कथावस्तु का स्वरूप हैयद्भट्टनारायणनिर्मित प्राग् वेप्यां महाभारतवस्तु रम्यम् । तत् पूर्वभाव्यत्र विवाय वेण्या संयोजितं श्रीकविना त्वनेन ।। अर्थात् इसमे वेणीसंहार के पूर्व की कथा है । दिग्विजय के पश्चात् युधिष्ठिर का राजसूय यज्ञ भीम के लौटकर न आने के कारण रुका था । वे हस्तिनापुर मे दुर्योधन को जीतने के लिए गये थे, क्योंकि उसका कहना था कि मुझको जीते विना युधिष्टिर का राजसूय सार्थक नहीं है । फिर उसे जीतने के लिए भीम को जाना पड़ा था । भीम ने दुर्योधन के साथ दुणासन-शकुनि कर्णादि को भी बन्दी बनाकर युधिष्ठिर के पास प्रस्तुत कर दिया। युधिष्ठिर ने उन सबको बन्धनविमुक्त कराया और दुर्योधन को यज्ञ-समारम्भ मे धनाध्यक्ष पद पर नियुक्त कर दिया। उसके अन्य साथियों को भी यथायोग्य कामों में लगा दिया। कृष्ण और बलराम यज्ञभूमि मे आये । युधिष्ठिरादि का अभिनन्दन करने के पश्चान् कृष्ण ने दुर्योधन को लज्जावनत मुख देखा। भीम ने उनकी कथा बताई । दुर्योधन ने मन में सोचा कि समय आने पर पुतली की भाँति भीम को नचाऊँगा । यज्ञ के अवसर पर राजसभा मे दुर्योधन को भ्रान्ति हुई-स्थल मे जल की जल मे स्थल की, द्वार मे भित्ति की और भित्ति मे द्वार को । इन सब बातो से और पाण्डयो के वैभव से अतिशय खिन्न होकर वह कर्णादि से मन्त्रणा करके पाण्डवो के उन्मूलन का उपाय सोचता है । जब कर्ण ने कहा कि मेरे रहते शत्रु तृणवत् है तो दुर्योधन ने घोर विडम्बना प्रकट करते हुए कहाएक. अप्रकाशित गद्यकाव्य उपाख्यान - रत्नमंजूपा और चम्पू पतिराज है। |
Ranchi: लंबे समय से एक ही जेल में कार्यरत कर्मियों की कैदियों से सांठगांठ बढ़ गयी है. इसे देखते हुए झारखंड जेल मेंस एसोसिएशन के महामंत्री प्रदीप तिर्की ने जेल आईजी को पत्र लिखा है. जेल आईजी को लिखे गये इस पत्र में कहा गया है कि, झारखंड के विभिन्न जिलों में कार्यरत स्थायी, अनुबंध और दैनिक कर्मी पिछले 3 से 10 वर्षों से एक ही जेल में पदस्थापित है. इस वजह से जेल कर्मी और कैदियों के बीच सांठगांठ बढ़ गयी है. जो सुरक्षा की दृष्टिकोण से ठीक नहीं है.
झारखंड जेल मेंस एसोसिएशन के महामंत्री प्रदीप तिर्की ने पत्र के माध्यम से आईजी से मांग की है कि एक ही जेल में जमे कर्मियों का तबादला किया जाना चाहिए. जेल हस्तक नियम के अनुसार प्रत्येक 3 वर्ष में जेल कर्मियों का स्थानांतरण अनिवार्य रूप से होना है. जेल सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए और कारा हस्तक नियम का पालन करते हुए जेल में कार्यरत स्थायी, अनुबंध और दैनिक कर्मी जिनकी सेवा एक ही जेल में 3 वर्ष या उससे अधिक समय से हो गयी है. उनका स्थानांतरण यथाशीघ्र किया जाए.
झारखंड के कारा कक्षपाल संवर्गो के वेतन और भत्ते को बिहार कारा कक्षपाल संवर्गो के वेतन और भत्ते के समान देने की मांग की गयी है. इसको लेकर झारखंड जेल मेंस एसोसिएशन के महामंत्री प्रदीप तिर्की के द्वारा जेल आईजी को पत्र लिखा गया और कहा गया की झारखंड के जेलों में कार्यरत/ प्रतिनियुक्त कक्षपाल संवर्गो के वेतन और भत्ते में कई दशकों से पुनरीक्षण नहीं की गयी है. जिस वजह से बिहार के कक्षपालों संवर्गों की तुलना में झारखंड के कक्षपाल संवर्ग के वेतन में भारी विसंगतियां हैं.
| Ranchi: लंबे समय से एक ही जेल में कार्यरत कर्मियों की कैदियों से सांठगांठ बढ़ गयी है. इसे देखते हुए झारखंड जेल मेंस एसोसिएशन के महामंत्री प्रदीप तिर्की ने जेल आईजी को पत्र लिखा है. जेल आईजी को लिखे गये इस पत्र में कहा गया है कि, झारखंड के विभिन्न जिलों में कार्यरत स्थायी, अनुबंध और दैनिक कर्मी पिछले तीन से दस वर्षों से एक ही जेल में पदस्थापित है. इस वजह से जेल कर्मी और कैदियों के बीच सांठगांठ बढ़ गयी है. जो सुरक्षा की दृष्टिकोण से ठीक नहीं है. झारखंड जेल मेंस एसोसिएशन के महामंत्री प्रदीप तिर्की ने पत्र के माध्यम से आईजी से मांग की है कि एक ही जेल में जमे कर्मियों का तबादला किया जाना चाहिए. जेल हस्तक नियम के अनुसार प्रत्येक तीन वर्ष में जेल कर्मियों का स्थानांतरण अनिवार्य रूप से होना है. जेल सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए और कारा हस्तक नियम का पालन करते हुए जेल में कार्यरत स्थायी, अनुबंध और दैनिक कर्मी जिनकी सेवा एक ही जेल में तीन वर्ष या उससे अधिक समय से हो गयी है. उनका स्थानांतरण यथाशीघ्र किया जाए. झारखंड के कारा कक्षपाल संवर्गो के वेतन और भत्ते को बिहार कारा कक्षपाल संवर्गो के वेतन और भत्ते के समान देने की मांग की गयी है. इसको लेकर झारखंड जेल मेंस एसोसिएशन के महामंत्री प्रदीप तिर्की के द्वारा जेल आईजी को पत्र लिखा गया और कहा गया की झारखंड के जेलों में कार्यरत/ प्रतिनियुक्त कक्षपाल संवर्गो के वेतन और भत्ते में कई दशकों से पुनरीक्षण नहीं की गयी है. जिस वजह से बिहार के कक्षपालों संवर्गों की तुलना में झारखंड के कक्षपाल संवर्ग के वेतन में भारी विसंगतियां हैं. |
सहकारिता एक ऐसा सगठन है जिसमे लोग अपने आर्थिक अभिवृद्धि के लिए समानता के स्वेच्छाधार पर सम्मिलित होता है, उनका एक सामान्य आर्थिक उद्देश्य
होता है जिसे वे व्यक्तिगत प्रयास द्वारा पूरा नहीं कर पाते है। क्योंकि उनमे से अधिकाश की स्थिति दुर्बल होती है किन्तु इस व्यक्तिगत दुर्बलता पर अपने प्रसाधनों को एकत्र कर पारस्परिक सहायता द्वारा आत्म सहायता को प्रभावशाली बनाकर और आपस मे समैक्यता के सबधों को सुदृढ बनाकर विजय प्राप्त कर सकते है ।
से है ताकि व्यक्तियों के लक्ष्य सयुक्त प्रयासो द्वारा प्राप्त किये जा सके।
विस्तृत अर्थ मे सहकारिता प्रत्येक व्यक्ति के प्रसाधनों व समिश्रण और एकीकरण
निष्कर्ष रूप मे हम यह सकते है कि सहकारिता आन्दोलन उद्देश्य
रूप में ऊर्जा, यातायात का विकास, रोजगार का सृजन, जनसंख्या नियंत्रण, शिक्षा, पेयजल
की उचित व्यवस्था तथा स्वास्थ्य के सन्दर्भ में सुसंगठित व समुचित विकास करने से होता है। इस योजनार्थ वित्तीय व्यवस्था का मुख्य श्रोत घरेलू बचत व निजी निवेश होगें। कारण भारत सरकार को वित्तीय घाटे की 65% तक घटाकर औसत घरेलू बचत 21 6% करना जरूरी है। औद्योगिक ढाँचे मे बदलाव के कारण निर्यात मे 136% वृद्धि व आयात मे 8% की कमी आ सकती है। आठवीं योजना राष्ट्रीय विकास परिषद द्वारा स्वीकार की गई है।
कोआपरेटिव प्लानिंग कमेटी, 1946
अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन कोआपरेशन
मैनुअल, 1956 पेज ।
ए वर्क्स एजुकेशन | सहकारिता एक ऐसा सगठन है जिसमे लोग अपने आर्थिक अभिवृद्धि के लिए समानता के स्वेच्छाधार पर सम्मिलित होता है, उनका एक सामान्य आर्थिक उद्देश्य होता है जिसे वे व्यक्तिगत प्रयास द्वारा पूरा नहीं कर पाते है। क्योंकि उनमे से अधिकाश की स्थिति दुर्बल होती है किन्तु इस व्यक्तिगत दुर्बलता पर अपने प्रसाधनों को एकत्र कर पारस्परिक सहायता द्वारा आत्म सहायता को प्रभावशाली बनाकर और आपस मे समैक्यता के सबधों को सुदृढ बनाकर विजय प्राप्त कर सकते है । से है ताकि व्यक्तियों के लक्ष्य सयुक्त प्रयासो द्वारा प्राप्त किये जा सके। विस्तृत अर्थ मे सहकारिता प्रत्येक व्यक्ति के प्रसाधनों व समिश्रण और एकीकरण निष्कर्ष रूप मे हम यह सकते है कि सहकारिता आन्दोलन उद्देश्य रूप में ऊर्जा, यातायात का विकास, रोजगार का सृजन, जनसंख्या नियंत्रण, शिक्षा, पेयजल की उचित व्यवस्था तथा स्वास्थ्य के सन्दर्भ में सुसंगठित व समुचित विकास करने से होता है। इस योजनार्थ वित्तीय व्यवस्था का मुख्य श्रोत घरेलू बचत व निजी निवेश होगें। कारण भारत सरकार को वित्तीय घाटे की पैंसठ% तक घटाकर औसत घरेलू बचत इक्कीस छः% करना जरूरी है। औद्योगिक ढाँचे मे बदलाव के कारण निर्यात मे एक सौ छत्तीस% वृद्धि व आयात मे आठ% की कमी आ सकती है। आठवीं योजना राष्ट्रीय विकास परिषद द्वारा स्वीकार की गई है। कोआपरेटिव प्लानिंग कमेटी, एक हज़ार नौ सौ छियालीस अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन कोआपरेशन मैनुअल, एक हज़ार नौ सौ छप्पन पेज । ए वर्क्स एजुकेशन |
हर साल देश और विदेश से लाखों श्रद्धालु चारधाम दर्शनों के लिए पहुंचते हैं। आइए जानते हैं चार धामों का महत्व, इन्हें किसने बनाया और चारधाम यात्रा कब से शुरू हुई। भगवान शिव का धाम केदारनाथ उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग, भगवान विष्णु का धाम बदरीनाथ चमोली में और मां गंगा व यमुना का धाम गंगोत्री-यमुनोत्री उत्तरकाशी जिले में स्थित हैं।
कहा जाता है कि 8वीं-9वीं सदी में आदिगुरु शंकराचार्य ने बदरीनाथ की खोज की थी। भगवान बदरीनाथ की मूर्ति यहां तप्त कुंड के पास एक गुफा में थी और 16वीं सदी में गढ़वाल के एक राजा ने इसे मौजूदा मंदिर में रखा था। केदारनाथ भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। 1950 के दशक में यहां धार्मिक पर्यटन के लिहाज से आवाजाही बढ़ी।
स्कंद पुराण के अनुसार गढ़वाल को केदारखंड कहा गया है। केदारनाथ का वर्णन महाभारत में भी है। महाभारत युद्ध के बाद पांडवों के यहां पूजा करने की बात सामने आती है। माना जाता है कि केदारनाथ मंदिर आदिगुरु शंकराचार्य द्वारा बनवाया था। बदरीनाथ मंदिर का वर्णन स्कंद पुराण और विष्णु पुराण में वर्णन मिलता है। इसकी खोज भी आदिगुरु शंकराचार्य ने की थी।
गोरखा समुदाय के लोगों ने कुमाऊं-गढ़वाल 1790 से 1815 तक राज किया था। इस दौरान गंगोत्री मंदिर गोरखा जनरल अमर सिंह थापा ने बनाया था। वहीं यमुनोत्री के असली मंदिर को जयपुर की महारानी गुलेरिया ने 19वीं सदी में बनवाया था। हालांकि यह भी कहा जाता है कि यमुनोत्री को टिहरी के महाराज प्रताप शाह ने बनवाया था।
| हर साल देश और विदेश से लाखों श्रद्धालु चारधाम दर्शनों के लिए पहुंचते हैं। आइए जानते हैं चार धामों का महत्व, इन्हें किसने बनाया और चारधाम यात्रा कब से शुरू हुई। भगवान शिव का धाम केदारनाथ उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग, भगवान विष्णु का धाम बदरीनाथ चमोली में और मां गंगा व यमुना का धाम गंगोत्री-यमुनोत्री उत्तरकाशी जिले में स्थित हैं। कहा जाता है कि आठवीं-नौवीं सदी में आदिगुरु शंकराचार्य ने बदरीनाथ की खोज की थी। भगवान बदरीनाथ की मूर्ति यहां तप्त कुंड के पास एक गुफा में थी और सोलहवीं सदी में गढ़वाल के एक राजा ने इसे मौजूदा मंदिर में रखा था। केदारनाथ भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। एक हज़ार नौ सौ पचास के दशक में यहां धार्मिक पर्यटन के लिहाज से आवाजाही बढ़ी। स्कंद पुराण के अनुसार गढ़वाल को केदारखंड कहा गया है। केदारनाथ का वर्णन महाभारत में भी है। महाभारत युद्ध के बाद पांडवों के यहां पूजा करने की बात सामने आती है। माना जाता है कि केदारनाथ मंदिर आदिगुरु शंकराचार्य द्वारा बनवाया था। बदरीनाथ मंदिर का वर्णन स्कंद पुराण और विष्णु पुराण में वर्णन मिलता है। इसकी खोज भी आदिगुरु शंकराचार्य ने की थी। गोरखा समुदाय के लोगों ने कुमाऊं-गढ़वाल एक हज़ार सात सौ नब्बे से एक हज़ार आठ सौ पंद्रह तक राज किया था। इस दौरान गंगोत्री मंदिर गोरखा जनरल अमर सिंह थापा ने बनाया था। वहीं यमुनोत्री के असली मंदिर को जयपुर की महारानी गुलेरिया ने उन्नीसवीं सदी में बनवाया था। हालांकि यह भी कहा जाता है कि यमुनोत्री को टिहरी के महाराज प्रताप शाह ने बनवाया था। |
तीसरा- विचार
परम उदात्त, आदर्श और अलंकृत साहित्यिक रूप में रखने की चेष्टा की जाती थी, वास्तविक और स्वाभाविक और यथावत् रूप में रखने को नहीं। इस युग की प्रायः सभी नायक-नायिकाएँ उच्च श्रेणी के लोगों में से ही हुआ करती थीं । कवि और लेखक अपने ग्रन्थों में इनके कथोपकथन और वार्तालापों को सदा आदर्श और कृत्रिम रूप देते थे । वाल्मीकि, कालिदास, मिल्टन और जॉन्सन इत्यादि की रचनाएँ इसके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। इनकी रचनाएँ लोक-समाज के जीवन से सर्वथा भिन्न इनके अपने मस्तिष्क की कल्पना मात्र थीं, अतएव उनमें लोकभाषा के प्रयोगों ( मुहावरों) का आधिक्य संभव ही नहीं था । मुहावरों की प्रचुरता तो वहीं देखने को मिल सकती है, जहाँ सर्वसाधारण के कथन और सम्भाषण अपने वास्तविक रूप में रखे जायेंगे। जहाँ आदर्श और बनावटी रूप होगा, वहाँ मुहावरों की दाल कैसे गल सकती है। संस्कृत में भी चूँकि मृच्छकटिक नाटक में सर्वसाधारण के कथोपकथनों और सम्भाषणों को स्वाभाविक रूप में रखने का सफल प्रयत्न हुआ है, उसमें मुहावरों की प्रचुरता है।
इसके प्रतिकूल १८वीं शताब्दी के बाद के साहित्य को देखने से क्या पाश्चात्य और क्या पौर्वात्य, सभी देशों की भाषाओं में मुहावरों की प्रचुरता दिखाई देती है। इसका कारण यह है कि आधुनिक युग में समाज के कार्य क्षेत्र का आशातीत विस्तार तो हुआ ही है, साथ हो. साहित्य के क्षेत्र से आदर्शवाद को खदेड़कर, उसके स्थान पर वास्तविकता अथवा यथार्थवाद को लाने का सफल प्रयत्न हुआ है। वस्तुओं, व्यापारों, कथोपकथनों, सम्भाषणों और प्रायः सब प्रकार के इतिवृत्तों आदि को जैसा है, उसी रूप में रखने की चेष्टा हो रही है।
लोकप्रिय मुहावरों को भाषा में इतना महत्त्वपूर्ण स्थान मिलने का एक और सम्भवतः सबसे प्रधान कारण समाज के कार्य क्षेत्र का आशातीत विस्तार है। समाज बहुत से समुदायों की एक श्रृंखला है। प्रत्येक समुदाय का एक विशिष्ट व्यवसाय, व्यापार या धन्धा होता है। "जब समुदाय के कार्य क्षेत्र में पूरी विशिष्टता आ जाती है, तब नित्य प्रति के व्यवहार में भावों को सम्यक व्यंजना के लिए, 'भिन्न-भिन्न वस्तुओं, व्यापारों और प्राणियों के रूप, रंग, कार्य इत्यादि के आधार पर विलक्षण शब्द योजनाओं की (मुहावरों की) सृष्टिद्रत गति से होने लगती है। प्रारम्भ में इन मुहावरों का प्रयोग समुदाय विशेष के ही कार्य क्षेत्र में सीमित रहता है, किन्तु कालान्तर में ये व्यापक होकर सार्वत्रिक प्रयोग के शब्द हो जाते हैं। आधुनिक यूरोपीय भाषाओं, विशेषतः अँगरेजी और फ्रेंच में जो मुद्दावरे मिलते हैं, उनके भिन्न-भिन्न समुदायों, जैसे नाविक, सैनिक, कृषक आदि के शब्द योजना- कौशल का परिणाम है।"१ हिन्दी-मुहावरों के वर्गीकरण में आगे चलकर जैसा हम दिखायेंगे, हमारे यहाँ भी अधिकांश मुहावरे इसी प्रकार के भिन्न-भिन्न कार्य क्षेत्रों से आये हैं। सचमुच यदि हमारा कार्य क्षेत्र इतना विस्तृत न होता, तो आज हमारी भाषा में मुहावरों की इतनी प्रचुरता न होती।
साहित्यिक भाषा पर लोकभाषा और उसके लोकप्रिय उपयोगों के प्रभाव को संक्षेप में इस प्रकार रख सकते हैं। समाज के कार्य क्षेत्र का विस्तार होने तथा साहित्य क्षेत्र से आदर्शवाद को दरवाजा दिखाकर उसके स्थान में यथार्थवाद की स्थापना हो जाने के कारण समस्त कथोपकथन, सम्भाषण और इतिवृत्त आदि को टकसाल विशिष्ट लेखकों के विशिष्ट मस्तिष्कों से हटकर लोकमस्तिष्क में पहुँच गई । सर्वत्र लोकभाषा के प्रयोगों का सिक्का जम गया। छोटे और बड़े शिक्षित वर्ग के प्रायः सभी लोग उनका खुले हाथों प्रयोग करने लगे। बहुत से पाठकों को खोकभाषा के ये प्रयोग बहुत खटकते हैं। वे प्रायः माथा कूटकर यह कहा करते हैं कि साहित्यिक भाषा में
१. हिन्दी मुहावरे ( दो शब्द ) ।
इतना बड़ा और सुसंस्कृत शब्द-भाण्डार होते हुए भी क्यों ये लोग ऐसे अप्रचलित, असंस्कृत और प्रयोगों से अपनी पुस्तकों को लाद देते हैं । किन्तु इन सब आक्षेपों को सुनते हुए भी लोकभाषा के शब्द और लोकप्रिय मुहावरों का प्रयोग करने में वे लेशमात्र शिथिलता नहीं दिखाते । "क्यों, केवल इसीलिए कि एक ग्रामीण और वे (साहित्यिक ) प्रायः एक ही भाषा बोलते हैं। दोनों का सम्बन्ध, जितना, जीवन और जीवनव्यापी अनुभवको एकमात्र कुंजी लोक-प्रचलित मुहावरों से है, उतना कोष और व्याकरण से नहीं। दोनों जब बातचीत करते हैं, तब अपने भावों को व्यक्त करना चाहते हैं और इस बात का प्रयत्न करते हैं कि सुननेवाले या वालों के सामने उनके विचार सजीव मूर्ति के रूप में स्पष्ट हो जायँ । लेखक अपनी निजी भाषा नहीं गढ़ सकता, समाज जो उसे देता है, उसे ग्रहण करना चाहिए, और यदि वह अपने मन के राग-द्वेष, घृण और प्रेम आदि के भावों को व्यक्त करने अथवा निजी मनोविनोद के लिए उपयुक्त भाषा चाहता है, तो अपने आप ही उसे लोकप्रिय कलाकारों की पीढ़ियों द्वारा निर्मित, सुसम्पन्न और सजीव मुहावरा सामग्री का आश्रय लेना पड़ेगा । यहाँ उसे रूपक और व्याजोकि से युक्त अपनी अभिरुचि के ठोक अनुकूल, मन को फड़का देनेवाली सशक्त और विलक्षण भाषा मिलेगी। सुशोलता, निन्दा और तिरस्कार तथा श्राश्चर्य, घबराहट और सन्देह इत्यादि के भावों को व्यक्त करनेवाली सैकड़ों शब्दों, वाक्यांशों और मुहावरों में इस प्रकार की अभिरुचि और प्रबल अनुराग कूट कूट कर भरा हुआ मिलेगा। उन प्रयोगों के इतना मनोरंजनकारी, ओजपूर्ण और सर्वप्रिय होने के कारण हो उनका प्रयोग शिक्षित वर्ग में हो चला है। किन्तु लोकभाषा में एक दूसरी विशेषता उसकी कल्पना और कवित्व-शक्ति की होती है, जो एक साहित्यक के लिए और भी अधिक मूल्यवान् है।" ' मतलब यह है कि लोकभाषा के प्रयोगों अथवा मुहावरों में वे सब गुण और शक्तियाँ विद्यमान हैं, जिनकी एक साहित्यिक को आवश्यकता होती है। मुहावरों की उत्पत्ति और प्रचार का इसलिए, यह भी एक मुख्य कारण है। है
प्रस्तुत प्रसंग में हमने, किसी भाषा में मुहावरों का आविर्भाव क्यों होता है, इस समस्या पर मुख्यतया तोन दृष्टियों से विचार किया है - १. भाषाविज्ञान की दृष्टि से, २. मनोविज्ञान को दृष्टि से, ३. मुहावरों की लोकप्रियता की दृष्टि से 1
भाषाविज्ञान की दृष्टि से विचार करते हुए सर्वप्रथम हमने भाषा की स्वभाविक प्रगति की नीचे दी हुई तीन अवस्थाओं का विवेचन करते हुए यह सिद्ध करने का प्रयत्न किया है कि प्रत्येक भाषा को स्वाभाविक प्रगति मुहावरों की ओर होती है, मुहावरे उसपर लादे नहीं जाते, बल्कि उसकी प्रकृति और प्रवृत्ति और स्वभाविक प्रगति के अनुसार उनका कमिक विकास होता है । भाषा की स्वाभाविक प्रगति की तीन अवस्थाएँ१. भाषाएँ आदिकाल में प्रयुक्त होनेवाले अपने अनावश्यक व्यर्थ अथवा पुनरुक्त अंश को निकालकर अपनी एक परिधि बनाने के लिए आगे बढ़ती हैं।
२. भाषाएँ आदिकालीन अव्यवस्था और अनियमितता की अवस्था से व्यवस्था और व्याकरण की ओर बढ़ती हैं।
३. तीसरी अवस्था को पहली अवस्थाओं के सदृश, अथवा उनका परिवर्द्धित रूप ही समझना चाहिए । इस अवस्था में भाषा अलग-अलग भावों को स्वतंत्र वाक्यों में प्रकट करने का प्रयास करती है, उसकी प्रवृत्ति व्यवच्छेदात्मक हो जाती है, जो अन्त में उसे मुहावरों की ओर ले जाती है।
१. डब्ल्यू० आई०, पृ० १५५-५६, (भाषानुवाद) । | तीसरा- विचार परम उदात्त, आदर्श और अलंकृत साहित्यिक रूप में रखने की चेष्टा की जाती थी, वास्तविक और स्वाभाविक और यथावत् रूप में रखने को नहीं। इस युग की प्रायः सभी नायक-नायिकाएँ उच्च श्रेणी के लोगों में से ही हुआ करती थीं । कवि और लेखक अपने ग्रन्थों में इनके कथोपकथन और वार्तालापों को सदा आदर्श और कृत्रिम रूप देते थे । वाल्मीकि, कालिदास, मिल्टन और जॉन्सन इत्यादि की रचनाएँ इसके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। इनकी रचनाएँ लोक-समाज के जीवन से सर्वथा भिन्न इनके अपने मस्तिष्क की कल्पना मात्र थीं, अतएव उनमें लोकभाषा के प्रयोगों का आधिक्य संभव ही नहीं था । मुहावरों की प्रचुरता तो वहीं देखने को मिल सकती है, जहाँ सर्वसाधारण के कथन और सम्भाषण अपने वास्तविक रूप में रखे जायेंगे। जहाँ आदर्श और बनावटी रूप होगा, वहाँ मुहावरों की दाल कैसे गल सकती है। संस्कृत में भी चूँकि मृच्छकटिक नाटक में सर्वसाधारण के कथोपकथनों और सम्भाषणों को स्वाभाविक रूप में रखने का सफल प्रयत्न हुआ है, उसमें मुहावरों की प्रचुरता है। इसके प्रतिकूल अट्ठारहवीं शताब्दी के बाद के साहित्य को देखने से क्या पाश्चात्य और क्या पौर्वात्य, सभी देशों की भाषाओं में मुहावरों की प्रचुरता दिखाई देती है। इसका कारण यह है कि आधुनिक युग में समाज के कार्य क्षेत्र का आशातीत विस्तार तो हुआ ही है, साथ हो. साहित्य के क्षेत्र से आदर्शवाद को खदेड़कर, उसके स्थान पर वास्तविकता अथवा यथार्थवाद को लाने का सफल प्रयत्न हुआ है। वस्तुओं, व्यापारों, कथोपकथनों, सम्भाषणों और प्रायः सब प्रकार के इतिवृत्तों आदि को जैसा है, उसी रूप में रखने की चेष्टा हो रही है। लोकप्रिय मुहावरों को भाषा में इतना महत्त्वपूर्ण स्थान मिलने का एक और सम्भवतः सबसे प्रधान कारण समाज के कार्य क्षेत्र का आशातीत विस्तार है। समाज बहुत से समुदायों की एक श्रृंखला है। प्रत्येक समुदाय का एक विशिष्ट व्यवसाय, व्यापार या धन्धा होता है। "जब समुदाय के कार्य क्षेत्र में पूरी विशिष्टता आ जाती है, तब नित्य प्रति के व्यवहार में भावों को सम्यक व्यंजना के लिए, 'भिन्न-भिन्न वस्तुओं, व्यापारों और प्राणियों के रूप, रंग, कार्य इत्यादि के आधार पर विलक्षण शब्द योजनाओं की सृष्टिद्रत गति से होने लगती है। प्रारम्भ में इन मुहावरों का प्रयोग समुदाय विशेष के ही कार्य क्षेत्र में सीमित रहता है, किन्तु कालान्तर में ये व्यापक होकर सार्वत्रिक प्रयोग के शब्द हो जाते हैं। आधुनिक यूरोपीय भाषाओं, विशेषतः अँगरेजी और फ्रेंच में जो मुद्दावरे मिलते हैं, उनके भिन्न-भिन्न समुदायों, जैसे नाविक, सैनिक, कृषक आदि के शब्द योजना- कौशल का परिणाम है।"एक हिन्दी-मुहावरों के वर्गीकरण में आगे चलकर जैसा हम दिखायेंगे, हमारे यहाँ भी अधिकांश मुहावरे इसी प्रकार के भिन्न-भिन्न कार्य क्षेत्रों से आये हैं। सचमुच यदि हमारा कार्य क्षेत्र इतना विस्तृत न होता, तो आज हमारी भाषा में मुहावरों की इतनी प्रचुरता न होती। साहित्यिक भाषा पर लोकभाषा और उसके लोकप्रिय उपयोगों के प्रभाव को संक्षेप में इस प्रकार रख सकते हैं। समाज के कार्य क्षेत्र का विस्तार होने तथा साहित्य क्षेत्र से आदर्शवाद को दरवाजा दिखाकर उसके स्थान में यथार्थवाद की स्थापना हो जाने के कारण समस्त कथोपकथन, सम्भाषण और इतिवृत्त आदि को टकसाल विशिष्ट लेखकों के विशिष्ट मस्तिष्कों से हटकर लोकमस्तिष्क में पहुँच गई । सर्वत्र लोकभाषा के प्रयोगों का सिक्का जम गया। छोटे और बड़े शिक्षित वर्ग के प्रायः सभी लोग उनका खुले हाथों प्रयोग करने लगे। बहुत से पाठकों को खोकभाषा के ये प्रयोग बहुत खटकते हैं। वे प्रायः माथा कूटकर यह कहा करते हैं कि साहित्यिक भाषा में एक. हिन्दी मुहावरे । इतना बड़ा और सुसंस्कृत शब्द-भाण्डार होते हुए भी क्यों ये लोग ऐसे अप्रचलित, असंस्कृत और प्रयोगों से अपनी पुस्तकों को लाद देते हैं । किन्तु इन सब आक्षेपों को सुनते हुए भी लोकभाषा के शब्द और लोकप्रिय मुहावरों का प्रयोग करने में वे लेशमात्र शिथिलता नहीं दिखाते । "क्यों, केवल इसीलिए कि एक ग्रामीण और वे प्रायः एक ही भाषा बोलते हैं। दोनों का सम्बन्ध, जितना, जीवन और जीवनव्यापी अनुभवको एकमात्र कुंजी लोक-प्रचलित मुहावरों से है, उतना कोष और व्याकरण से नहीं। दोनों जब बातचीत करते हैं, तब अपने भावों को व्यक्त करना चाहते हैं और इस बात का प्रयत्न करते हैं कि सुननेवाले या वालों के सामने उनके विचार सजीव मूर्ति के रूप में स्पष्ट हो जायँ । लेखक अपनी निजी भाषा नहीं गढ़ सकता, समाज जो उसे देता है, उसे ग्रहण करना चाहिए, और यदि वह अपने मन के राग-द्वेष, घृण और प्रेम आदि के भावों को व्यक्त करने अथवा निजी मनोविनोद के लिए उपयुक्त भाषा चाहता है, तो अपने आप ही उसे लोकप्रिय कलाकारों की पीढ़ियों द्वारा निर्मित, सुसम्पन्न और सजीव मुहावरा सामग्री का आश्रय लेना पड़ेगा । यहाँ उसे रूपक और व्याजोकि से युक्त अपनी अभिरुचि के ठोक अनुकूल, मन को फड़का देनेवाली सशक्त और विलक्षण भाषा मिलेगी। सुशोलता, निन्दा और तिरस्कार तथा श्राश्चर्य, घबराहट और सन्देह इत्यादि के भावों को व्यक्त करनेवाली सैकड़ों शब्दों, वाक्यांशों और मुहावरों में इस प्रकार की अभिरुचि और प्रबल अनुराग कूट कूट कर भरा हुआ मिलेगा। उन प्रयोगों के इतना मनोरंजनकारी, ओजपूर्ण और सर्वप्रिय होने के कारण हो उनका प्रयोग शिक्षित वर्ग में हो चला है। किन्तु लोकभाषा में एक दूसरी विशेषता उसकी कल्पना और कवित्व-शक्ति की होती है, जो एक साहित्यक के लिए और भी अधिक मूल्यवान् है।" ' मतलब यह है कि लोकभाषा के प्रयोगों अथवा मुहावरों में वे सब गुण और शक्तियाँ विद्यमान हैं, जिनकी एक साहित्यिक को आवश्यकता होती है। मुहावरों की उत्पत्ति और प्रचार का इसलिए, यह भी एक मुख्य कारण है। है प्रस्तुत प्रसंग में हमने, किसी भाषा में मुहावरों का आविर्भाव क्यों होता है, इस समस्या पर मुख्यतया तोन दृष्टियों से विचार किया है - एक. भाषाविज्ञान की दृष्टि से, दो. मनोविज्ञान को दृष्टि से, तीन. मुहावरों की लोकप्रियता की दृष्टि से एक भाषाविज्ञान की दृष्टि से विचार करते हुए सर्वप्रथम हमने भाषा की स्वभाविक प्रगति की नीचे दी हुई तीन अवस्थाओं का विवेचन करते हुए यह सिद्ध करने का प्रयत्न किया है कि प्रत्येक भाषा को स्वाभाविक प्रगति मुहावरों की ओर होती है, मुहावरे उसपर लादे नहीं जाते, बल्कि उसकी प्रकृति और प्रवृत्ति और स्वभाविक प्रगति के अनुसार उनका कमिक विकास होता है । भाषा की स्वाभाविक प्रगति की तीन अवस्थाएँएक. भाषाएँ आदिकाल में प्रयुक्त होनेवाले अपने अनावश्यक व्यर्थ अथवा पुनरुक्त अंश को निकालकर अपनी एक परिधि बनाने के लिए आगे बढ़ती हैं। दो. भाषाएँ आदिकालीन अव्यवस्था और अनियमितता की अवस्था से व्यवस्था और व्याकरण की ओर बढ़ती हैं। तीन. तीसरी अवस्था को पहली अवस्थाओं के सदृश, अथवा उनका परिवर्द्धित रूप ही समझना चाहिए । इस अवस्था में भाषा अलग-अलग भावों को स्वतंत्र वाक्यों में प्रकट करने का प्रयास करती है, उसकी प्रवृत्ति व्यवच्छेदात्मक हो जाती है, जो अन्त में उसे मुहावरों की ओर ले जाती है। एक. डब्ल्यूशून्य आईशून्य, पृशून्य एक सौ पचपन-छप्पन, । |
नई दिल्लीः एक बार फिर अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत (Shushnat Singh Rajput) की मर्डर मिस्ट्री से जुड़ी कुछ नई बातें अब फिर से सामने आ रही है. यह मामला एक बार फिर तूल पकड़ता नजर आ रहा है.
विवेक अग्निहोत्री ने अपने ट्वीट को इस तरह लिखा है कि जिससे पता चलता है कि कभी अभिनेता ने यह बात कभी निर्देशक से कही थी. ध्यान देने वाली यह बात है कि यह बातचीत विवेक और सुशांत के बीच कब हुई और इसका रेफरेंस क्या था यह अभी तक किसी को कुछ नहीं पता चला है.
बता दें कि हाल ही में अभिनेता के मौत को करीब 2 साल बाद मुंबई के कूपर हॉस्पिटल में मोर्चरी यूनिट के कर्मचारी ने दावा किया है कि अभिनेता की मौत सुसाइड की वजह से हुई थी. अस्पताल के कर्मचारी ने यह भी कहा था कि एक्टर के शरीर पर चोटों के निशान नहीं थे और उनका पैर फ्रैक्चर दिखाई दे रहा था.
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| नई दिल्लीः एक बार फिर अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मर्डर मिस्ट्री से जुड़ी कुछ नई बातें अब फिर से सामने आ रही है. यह मामला एक बार फिर तूल पकड़ता नजर आ रहा है. विवेक अग्निहोत्री ने अपने ट्वीट को इस तरह लिखा है कि जिससे पता चलता है कि कभी अभिनेता ने यह बात कभी निर्देशक से कही थी. ध्यान देने वाली यह बात है कि यह बातचीत विवेक और सुशांत के बीच कब हुई और इसका रेफरेंस क्या था यह अभी तक किसी को कुछ नहीं पता चला है. बता दें कि हाल ही में अभिनेता के मौत को करीब दो साल बाद मुंबई के कूपर हॉस्पिटल में मोर्चरी यूनिट के कर्मचारी ने दावा किया है कि अभिनेता की मौत सुसाइड की वजह से हुई थी. अस्पताल के कर्मचारी ने यह भी कहा था कि एक्टर के शरीर पर चोटों के निशान नहीं थे और उनका पैर फ्रैक्चर दिखाई दे रहा था. As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future. |
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केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि मौजूदा बिजली परियोजनाओं के पूरा होने के बाद जम्मू और कश्मीर का किश्तवाड़ उत्तर भारत का प्रमुख "पावर हब" बन जाएगा, जो लगभग 6,000 मेगावाट बिजली पैदा करेगा।
डॉ. जितेंद्र सिंह को नागसेनी और दच्छन में दो सार्वजनिक रैलियों को संबोधित करना था लेकिन उन्होंने ओडिशा में दुखद ट्रेन दुर्घटना के पीड़ितों के सम्मान में दोनों रैलियों को रद्द कर दिया और इसके बजाय किश्तवाड़ और डोडा जिलों में विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा के लिए एक विस्तृत बैठक बुलाई। एनएचपीसी के अध्यक्ष श्री राजीव विश्नोई, किश्तवाड़ के उपायुक्त देवांश यादव और केंद्र और केंद्रशासित प्रदेश सरकारों के अधिकारियों ने परियोजनाओं की प्रगति के बारे में डॉ. जितेंद्र सिंह को जानकारी दी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मंत्री श्री सुनील शर्मा, डीडीसी सदस्य, स्थानीय पीआरआई प्रतिनिधि और प्रमुख राजनीतिक नेता, भाजपा अध्यक्ष श्री चुन्नी लाल, वरिष्ठ नेता तारिक कीन, प्रदीप परिहार, कैप हुकुम चंद के साथ-साथ क्षेत्र के कई राजनीतिक लोग इस यात्रा के दौरान उनके साथ थे।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, किश्तवाड़ से अतिरिक्त बिजली का उपयोग न केवल यूटी के अन्य हिस्सों के लिए किया जाएगा, बल्कि अन्य राज्यों द्वारा भी इसका लाभ उठाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि चिनाब के समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों का पिछली सरकारों, जिन्होंने 60-65 वर्षों तक जम्मू-कश्मीर पर शासन किया, ने उचित उपयोग नहीं किया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, यह किश्तवाड़ क्षेत्र को उत्तर भारत का एक प्रमुख पावर हब बनाता है। उन्होंने इन परियोजनाओं के लिए अकुशल नौकरियों में स्थानीय लोगों के लिए 100 प्रतिशत आरक्षण का भी आश्वासन दिया और कुशल जनशक्ति आवश्यकताओं में स्थानीय प्रतिभाओं को वरीयता देने का वादा किया।
उल्लेखनीय है कि पाकल दुल परियोजना 1000 मेगावाट क्षमता वाली सबसे बड़ी परियोजना है। इसकी अभी तक अनुमानित लागत 8,112.12 करोड़ रुपए है और इसके पूरे होने की अपेक्षित समय-सीमा 2025 है। एक अन्य प्रमुख परियोजना 624 मेगावाट की क्षमता वाली किरू जलविद्युत परियोजना है। परियोजना की अनुमानित लागत रु. 4,285.59 करोड़ है और इसकी समय सीमा भी 2025 है।
किश्तवाड़ से लगभग 43 किमी दूर स्थित एक अन्य परियोजना 624 मेगावाट की क्षमता वाली क्वार जलविद्युत परियोजना है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 4526.12 करोड़ रुपये है और इसकी समय सीमा 54 महीने है। किरू जलविद्युत परियोजना के लगभग 25 किलोमीटर अपस्ट्रीम में 930 मेगावाट की क्षमता वाली एक और जलविद्युत परियोजना कीर्थाई-II जलविद्युत परियोजना है।
वहीं, 850 मेगावाट की रतले परियोजना को केंद्र और केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के बीच एक संयुक्त उद्यम के रूप में पुनर्जीवित किया गया है। इसके अलावा, मौजूदा दुलहस्ती पावर स्टेशन की स्थापित क्षमता 390 मेगावाट है, जबकि दुलहस्ती-II जलविद्युत परियोजना की क्षमता 260 मेगावाट होगी।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ये परियोजनाएं न केवल बिजली आपूर्ति की स्थिति में वृद्धि करेंगी, जिससे केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में बिजली आपूर्ति की कमी को पूरा किया जा सकेगा, बल्कि इन परियोजनाओं के निर्माण के लिए किया जा रहा भारी निवेश प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय लोगों के लिए अवसर भी बढ़ाएगा।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, 2014 से पहले, किश्तवाड़ की सड़क यात्रा बोझिल थी और थोड़े से भूस्खलन पर डोडा-किश्तवाड़ सड़क अवरुद्ध हो जाती थी। लेकिन आज, जम्मू से किश्तवाड़ तक सड़क यात्रा का समय 2014 के 7 घंटे के मुकाबले कम होकर अब 5 घंटे से भी कम हो गया है। इसी तरह, उन्होंने कहा, इन 9 वर्षों के दौरान, किश्तवाड़ भारत के उड्डयन मानचित्र पर आया है और केंद्र की उड़ान योजना के तहत एक हवाई अड्डे को मंजूरी दी गई है, जिसकी किसी ने कभी कल्पना भी नहीं की थी।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, किश्तवाड़ को एक आयुष अस्पताल मिला है, जबकि पादार को केंद्र की रुसा योजना के तहत एक केंद्रीय विद्यालय दिया गया था, क्योंकि तत्कालीन राज्य सरकार ने ऐसा करने से मना कर दिया था।
इसी तरह, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, खिलानी-सुधमहादेव राजमार्ग सहित तीन नए राष्ट्रीय राजमार्ग, डिग्री कॉलेजों की एक श्रृंखला, मचैल यात्रा के रास्ते में मोबाइल टावर और अन्य दूरदराज के इलाके भी मोदी सरकार के दौरान सामने आए हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने नागरिकों से आह्वान किया कि वे अरोमा मिशन के तहत स्टार्टअप के अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने के लिए युवाओं को प्रेरित करें, जो पहले से ही भद्रवाह में चल रहा है और इसे आजीविका के अब तक अनछुए स्रोत के रूप में देखा जाता है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर राज्यों और अन्य पहाड़ी राज्यों जैसे क्षेत्रों को पिछले 60-65 वर्षों के दौरान केंद्र की सरकारों की अदूरदर्शी नीतियों के कारण कई तरह से नुकसान उठाना पड़ा, लेकिन मोदी सरकार के सत्ता संभालने के तुरंत बाद 2014 में, प्रधानमंत्री ने कहा था कि उत्तर पूर्वी क्षेत्र, जम्मू-कश्मीर और अन्य पिछड़े क्षेत्रों को देश के अधिक विकसित क्षेत्रों के बराबर लाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज यहां कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को हमेशा भारत में एक नई कार्य संस्कृति शुरू करने का श्रेय दिया जाएगा, जिसमें प्रत्येक गरीब-समर्थक और जन कल्याणकारी योजनाओं को इस तरह से डिजाइन किया गया था ताकि सबसे अधिक जरूरतमंदों या गरीबों और जाति, पंथ, धर्म या वोट के विचार की परवाह किए बिना अंतिम पंक्ति में अंतिम व्यक्ति तक पहुंचा जा सके। उन्होंने कहा कि इसी तरह, समकालीन भारत के उभरते परिदृश्य को देखते हुए, मोदी ने लगातार स्टार्टअप्स को बढ़ावा दिया है, जो अपनी आजीविका कमाने में सक्षम हों।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि गरीब कल्याण अन्न योजना, जन धन, उज्जवला, शौचालय, पीएम आवास, हर घर जल, हर घर बिजली और आयुष्मान जैसी क्रांतिकारी योजनाएं किश्तवाड़ जैसे पहाड़ी और दुर्गम इलाकों सहित देश के कोने-कोने तक पहुंच चुकी हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को बिना किसी भेदभाव के कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है जबकि पहले के दौर में तुष्टीकरण की नीति प्रचलित थी। मंत्री ने जोर देकर कहा कि इन कल्याणकारी उपायों ने करोड़ों लोगों को घोर गरीबी के चंगुल से बाहर निकाला और उन्हें सम्मान का जीवन दिया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि उन राज्यों जहां सुविधाएं पहुंच चुकी हैं, उनकी बजाय किश्तवाड़, उत्तर-पूर्व और अन्य पहाड़ी क्षेत्रों जैसे अप्रयुक्त क्षमता वाले क्षेत्र भारत की अगले 25 वर्षों की यात्रा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। 2047 में जब दुनिया भारत के स्वतंत्रता के 100वें वर्ष का जश्न मना रही होगी तो भारत को यह इलाके एक अग्रिम पंक्ति के राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ाएंगे।
| Posted On: केंद्रीय राज्य मंत्री विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि मौजूदा बिजली परियोजनाओं के पूरा होने के बाद जम्मू और कश्मीर का किश्तवाड़ उत्तर भारत का प्रमुख "पावर हब" बन जाएगा, जो लगभग छः,शून्य मेगावाट बिजली पैदा करेगा। डॉ. जितेंद्र सिंह को नागसेनी और दच्छन में दो सार्वजनिक रैलियों को संबोधित करना था लेकिन उन्होंने ओडिशा में दुखद ट्रेन दुर्घटना के पीड़ितों के सम्मान में दोनों रैलियों को रद्द कर दिया और इसके बजाय किश्तवाड़ और डोडा जिलों में विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा के लिए एक विस्तृत बैठक बुलाई। एनएचपीसी के अध्यक्ष श्री राजीव विश्नोई, किश्तवाड़ के उपायुक्त देवांश यादव और केंद्र और केंद्रशासित प्रदेश सरकारों के अधिकारियों ने परियोजनाओं की प्रगति के बारे में डॉ. जितेंद्र सिंह को जानकारी दी। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मंत्री श्री सुनील शर्मा, डीडीसी सदस्य, स्थानीय पीआरआई प्रतिनिधि और प्रमुख राजनीतिक नेता, भाजपा अध्यक्ष श्री चुन्नी लाल, वरिष्ठ नेता तारिक कीन, प्रदीप परिहार, कैप हुकुम चंद के साथ-साथ क्षेत्र के कई राजनीतिक लोग इस यात्रा के दौरान उनके साथ थे। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, किश्तवाड़ से अतिरिक्त बिजली का उपयोग न केवल यूटी के अन्य हिस्सों के लिए किया जाएगा, बल्कि अन्य राज्यों द्वारा भी इसका लाभ उठाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि चिनाब के समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों का पिछली सरकारों, जिन्होंने साठ-पैंसठ वर्षों तक जम्मू-कश्मीर पर शासन किया, ने उचित उपयोग नहीं किया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, यह किश्तवाड़ क्षेत्र को उत्तर भारत का एक प्रमुख पावर हब बनाता है। उन्होंने इन परियोजनाओं के लिए अकुशल नौकरियों में स्थानीय लोगों के लिए एक सौ प्रतिशत आरक्षण का भी आश्वासन दिया और कुशल जनशक्ति आवश्यकताओं में स्थानीय प्रतिभाओं को वरीयता देने का वादा किया। उल्लेखनीय है कि पाकल दुल परियोजना एक हज़ार मेगावाट क्षमता वाली सबसे बड़ी परियोजना है। इसकी अभी तक अनुमानित लागत आठ,एक सौ बारह.बारह करोड़ रुपए है और इसके पूरे होने की अपेक्षित समय-सीमा दो हज़ार पच्चीस है। एक अन्य प्रमुख परियोजना छः सौ चौबीस मेगावाट की क्षमता वाली किरू जलविद्युत परियोजना है। परियोजना की अनुमानित लागत रु. चार,दो सौ पचासी.उनसठ करोड़ है और इसकी समय सीमा भी दो हज़ार पच्चीस है। किश्तवाड़ से लगभग तैंतालीस किमी दूर स्थित एक अन्य परियोजना छः सौ चौबीस मेगावाट की क्षमता वाली क्वार जलविद्युत परियोजना है। इस परियोजना की अनुमानित लागत चार हज़ार पाँच सौ छब्बीस.बारह करोड़ रुपये है और इसकी समय सीमा चौवन महीने है। किरू जलविद्युत परियोजना के लगभग पच्चीस किलोग्राममीटर अपस्ट्रीम में नौ सौ तीस मेगावाट की क्षमता वाली एक और जलविद्युत परियोजना कीर्थाई-II जलविद्युत परियोजना है। वहीं, आठ सौ पचास मेगावाट की रतले परियोजना को केंद्र और केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के बीच एक संयुक्त उद्यम के रूप में पुनर्जीवित किया गया है। इसके अलावा, मौजूदा दुलहस्ती पावर स्टेशन की स्थापित क्षमता तीन सौ नब्बे मेगावाट है, जबकि दुलहस्ती-II जलविद्युत परियोजना की क्षमता दो सौ साठ मेगावाट होगी। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ये परियोजनाएं न केवल बिजली आपूर्ति की स्थिति में वृद्धि करेंगी, जिससे केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में बिजली आपूर्ति की कमी को पूरा किया जा सकेगा, बल्कि इन परियोजनाओं के निर्माण के लिए किया जा रहा भारी निवेश प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय लोगों के लिए अवसर भी बढ़ाएगा। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, दो हज़ार चौदह से पहले, किश्तवाड़ की सड़क यात्रा बोझिल थी और थोड़े से भूस्खलन पर डोडा-किश्तवाड़ सड़क अवरुद्ध हो जाती थी। लेकिन आज, जम्मू से किश्तवाड़ तक सड़क यात्रा का समय दो हज़ार चौदह के सात घंटाटे के मुकाबले कम होकर अब पाँच घंटाटे से भी कम हो गया है। इसी तरह, उन्होंने कहा, इन नौ वर्षों के दौरान, किश्तवाड़ भारत के उड्डयन मानचित्र पर आया है और केंद्र की उड़ान योजना के तहत एक हवाई अड्डे को मंजूरी दी गई है, जिसकी किसी ने कभी कल्पना भी नहीं की थी। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, किश्तवाड़ को एक आयुष अस्पताल मिला है, जबकि पादार को केंद्र की रुसा योजना के तहत एक केंद्रीय विद्यालय दिया गया था, क्योंकि तत्कालीन राज्य सरकार ने ऐसा करने से मना कर दिया था। इसी तरह, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, खिलानी-सुधमहादेव राजमार्ग सहित तीन नए राष्ट्रीय राजमार्ग, डिग्री कॉलेजों की एक श्रृंखला, मचैल यात्रा के रास्ते में मोबाइल टावर और अन्य दूरदराज के इलाके भी मोदी सरकार के दौरान सामने आए हैं। डॉ. जितेंद्र सिंह ने नागरिकों से आह्वान किया कि वे अरोमा मिशन के तहत स्टार्टअप के अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने के लिए युवाओं को प्रेरित करें, जो पहले से ही भद्रवाह में चल रहा है और इसे आजीविका के अब तक अनछुए स्रोत के रूप में देखा जाता है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर राज्यों और अन्य पहाड़ी राज्यों जैसे क्षेत्रों को पिछले साठ-पैंसठ वर्षों के दौरान केंद्र की सरकारों की अदूरदर्शी नीतियों के कारण कई तरह से नुकसान उठाना पड़ा, लेकिन मोदी सरकार के सत्ता संभालने के तुरंत बाद दो हज़ार चौदह में, प्रधानमंत्री ने कहा था कि उत्तर पूर्वी क्षेत्र, जम्मू-कश्मीर और अन्य पिछड़े क्षेत्रों को देश के अधिक विकसित क्षेत्रों के बराबर लाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज यहां कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को हमेशा भारत में एक नई कार्य संस्कृति शुरू करने का श्रेय दिया जाएगा, जिसमें प्रत्येक गरीब-समर्थक और जन कल्याणकारी योजनाओं को इस तरह से डिजाइन किया गया था ताकि सबसे अधिक जरूरतमंदों या गरीबों और जाति, पंथ, धर्म या वोट के विचार की परवाह किए बिना अंतिम पंक्ति में अंतिम व्यक्ति तक पहुंचा जा सके। उन्होंने कहा कि इसी तरह, समकालीन भारत के उभरते परिदृश्य को देखते हुए, मोदी ने लगातार स्टार्टअप्स को बढ़ावा दिया है, जो अपनी आजीविका कमाने में सक्षम हों। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि गरीब कल्याण अन्न योजना, जन धन, उज्जवला, शौचालय, पीएम आवास, हर घर जल, हर घर बिजली और आयुष्मान जैसी क्रांतिकारी योजनाएं किश्तवाड़ जैसे पहाड़ी और दुर्गम इलाकों सहित देश के कोने-कोने तक पहुंच चुकी हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को बिना किसी भेदभाव के कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है जबकि पहले के दौर में तुष्टीकरण की नीति प्रचलित थी। मंत्री ने जोर देकर कहा कि इन कल्याणकारी उपायों ने करोड़ों लोगों को घोर गरीबी के चंगुल से बाहर निकाला और उन्हें सम्मान का जीवन दिया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि उन राज्यों जहां सुविधाएं पहुंच चुकी हैं, उनकी बजाय किश्तवाड़, उत्तर-पूर्व और अन्य पहाड़ी क्षेत्रों जैसे अप्रयुक्त क्षमता वाले क्षेत्र भारत की अगले पच्चीस वर्षों की यात्रा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। दो हज़ार सैंतालीस में जब दुनिया भारत के स्वतंत्रता के एक सौवें वर्ष का जश्न मना रही होगी तो भारत को यह इलाके एक अग्रिम पंक्ति के राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ाएंगे। |
1. वह कौन सा जीव है, जो हर चीज का स्वाद जीभ से नहीं अपने पैरों से लेता है?
2. दो अक्षर का मेरा नाम, आता हूं खाने के काम...उलटा लिखकर नाच दिखाऊं, फिर क्यों अपना नाम छिपाऊं?
3. पांच अक्षर का मेरा नाम, उलटा-सीधा एक समान। दक्षिण भारत में रहती हूं, बोलो तो मैं कैसी हूं?
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| एक. वह कौन सा जीव है, जो हर चीज का स्वाद जीभ से नहीं अपने पैरों से लेता है? दो. दो अक्षर का मेरा नाम, आता हूं खाने के काम...उलटा लिखकर नाच दिखाऊं, फिर क्यों अपना नाम छिपाऊं? तीन. पांच अक्षर का मेरा नाम, उलटा-सीधा एक समान। दक्षिण भारत में रहती हूं, बोलो तो मैं कैसी हूं? Share: |
पूर्व राष्ट्रपति स्व. प्रणब मुखर्जी को याद कर उत्तराखंड के लोग शोकाकुल हैं। उत्तराखंड के लोग राज्य में राष्ट्रपति शासन लगने और पहली बार राष्ट्रपति के अधिकार को लेकर उत्तराखंड उच्च न्यायालय की टिप्पणी को शायद ही कभी भुला सकें। इसमें कोर्ट ने माना था कि राष्ट्रपति का आदेश न्यायिक समीक्षा से परे नहीं हो सकता। कोर्ट की यह टिप्पणी भविष्य में ऐसे प्रकरण के लिए एक मिसाल बन चुकी है। यह संयोग है कि उस दौर में प्रणब मुखर्जी राष्ट्रपति थे। हालांकि टिप्पणी केवल राष्ट्रपति के अधिकारों को लेकर ही थी।
उत्तराखंड में 18 मार्च 2016 को तत्कालीन कांग्रेस सरकार के शासन के दौरान कांग्रेस के 36 में से नौ विधायकों ने बगावत कर दी थी और बाद में सरकार को अल्पमत में बता कर निलंबित करने की मांग को लेकर विधानसभा की वेल में ही धरने पर बैठ गए थे। 20 मार्च को तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने इन विधायकों को निलंबित कर दिया था। जिस पर विधायकों ने सरकार को अल्पमत में बता विधानसभा अध्यक्ष के इस निर्णय को उनके अधिकार से बाहर बताया।
21 मार्च को कांग्रेस के बागी विधायक भाजपा के विधायकों के साथ राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिले और प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की मांग की थी। इन विधायकों के भाजपा के साथ मिलकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल देने और केंद्रीय कैबिनेट की 26 मार्च की सिफारिश के बाद 27 मार्च 2016 को राज्य में प्रणब मुखर्जी के हस्ताक्षर से पहली बार राष्ट्रपति शासन लगा था। माना जाता है कि प्रणब मुखर्जी कैबिनेट के निर्णय पर पुनः विचार करने की सलाह देना चाहते थे, लेकिन भाजपा आलाकमान की पहल पर अरुण जेटली की उनसे वार्ता और सांविधानिक व्यवस्थाओं के तहत उन्होंने कैबिनेट की सिफारिश पर बगैर विवाद में पड़े हस्ताक्षर कर दिए थे।
उत्तराखंड में तब उसी कांग्रेस पार्टी की सरकार थी जिसमें उन्होंने अपने जीवन के चालीस वर्ष बिताए थे। वे पार्टी की ओर से महत्वपूर्ण दायित्व संभाल चुके थे। यह एक दिलचस्प उदाहरण था कि उनके हस्ताक्षर से जारी राष्ट्रपति शासन को कांग्रेस पार्टी की ओर से ही हाईकोर्ट में चुनौती दी गई और दशकों तक उन्हीं के अत्यंत करीबी सहयोगी रहे कपिल सिब्बल सहित अन्य अधिवक्ताओं ने उनके आदेश को संविधान की हत्या करने वाला कहकर कोर्ट में इसकी जबरदस्त खिलाफत की। 28 मार्च को हरीश रावत ने कोर्ट में इस आदेश को चुनौती दी जिस पर कोर्ट ने उन्हें 31 मार्च को फ्लोर टेस्ट के निर्देश दिए जबकि 30 मार्च को चुनौती देने पर डबल बेंच ने इसे स्थगित कर दिया था।
बाद में केंद्र की ओर से इस निर्णय को इसी बहस के दौरान केंद्र सरकार की ओर से इसे राष्ट्रपति का अधिकार बताए जाने पर 20 अप्रैल को हाईकोर्ट की वह ऐतिहासिक टिप्पणी सामने आई। इसमें कोर्ट ने कहा था कि राष्ट्रपति का पद देश का सर्वोच्च सम्माननीय होने के बावजूद राष्ट्रपति कोई राजा नहीं और उनके अधिकार असीमित अथवा न्यायिक समीक्षा से परे नहीं हैं। लंबी सुनवाई के बाद 22 अप्रैल को कोर्ट ने उनके इस आदेश को खारिज कर दिया था और हरीश रावत सरकार फिर से बहाल हो गई थी।
| पूर्व राष्ट्रपति स्व. प्रणब मुखर्जी को याद कर उत्तराखंड के लोग शोकाकुल हैं। उत्तराखंड के लोग राज्य में राष्ट्रपति शासन लगने और पहली बार राष्ट्रपति के अधिकार को लेकर उत्तराखंड उच्च न्यायालय की टिप्पणी को शायद ही कभी भुला सकें। इसमें कोर्ट ने माना था कि राष्ट्रपति का आदेश न्यायिक समीक्षा से परे नहीं हो सकता। कोर्ट की यह टिप्पणी भविष्य में ऐसे प्रकरण के लिए एक मिसाल बन चुकी है। यह संयोग है कि उस दौर में प्रणब मुखर्जी राष्ट्रपति थे। हालांकि टिप्पणी केवल राष्ट्रपति के अधिकारों को लेकर ही थी। उत्तराखंड में अट्ठारह मार्च दो हज़ार सोलह को तत्कालीन कांग्रेस सरकार के शासन के दौरान कांग्रेस के छत्तीस में से नौ विधायकों ने बगावत कर दी थी और बाद में सरकार को अल्पमत में बता कर निलंबित करने की मांग को लेकर विधानसभा की वेल में ही धरने पर बैठ गए थे। बीस मार्च को तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने इन विधायकों को निलंबित कर दिया था। जिस पर विधायकों ने सरकार को अल्पमत में बता विधानसभा अध्यक्ष के इस निर्णय को उनके अधिकार से बाहर बताया। इक्कीस मार्च को कांग्रेस के बागी विधायक भाजपा के विधायकों के साथ राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिले और प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की मांग की थी। इन विधायकों के भाजपा के साथ मिलकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल देने और केंद्रीय कैबिनेट की छब्बीस मार्च की सिफारिश के बाद सत्ताईस मार्च दो हज़ार सोलह को राज्य में प्रणब मुखर्जी के हस्ताक्षर से पहली बार राष्ट्रपति शासन लगा था। माना जाता है कि प्रणब मुखर्जी कैबिनेट के निर्णय पर पुनः विचार करने की सलाह देना चाहते थे, लेकिन भाजपा आलाकमान की पहल पर अरुण जेटली की उनसे वार्ता और सांविधानिक व्यवस्थाओं के तहत उन्होंने कैबिनेट की सिफारिश पर बगैर विवाद में पड़े हस्ताक्षर कर दिए थे। उत्तराखंड में तब उसी कांग्रेस पार्टी की सरकार थी जिसमें उन्होंने अपने जीवन के चालीस वर्ष बिताए थे। वे पार्टी की ओर से महत्वपूर्ण दायित्व संभाल चुके थे। यह एक दिलचस्प उदाहरण था कि उनके हस्ताक्षर से जारी राष्ट्रपति शासन को कांग्रेस पार्टी की ओर से ही हाईकोर्ट में चुनौती दी गई और दशकों तक उन्हीं के अत्यंत करीबी सहयोगी रहे कपिल सिब्बल सहित अन्य अधिवक्ताओं ने उनके आदेश को संविधान की हत्या करने वाला कहकर कोर्ट में इसकी जबरदस्त खिलाफत की। अट्ठाईस मार्च को हरीश रावत ने कोर्ट में इस आदेश को चुनौती दी जिस पर कोर्ट ने उन्हें इकतीस मार्च को फ्लोर टेस्ट के निर्देश दिए जबकि तीस मार्च को चुनौती देने पर डबल बेंच ने इसे स्थगित कर दिया था। बाद में केंद्र की ओर से इस निर्णय को इसी बहस के दौरान केंद्र सरकार की ओर से इसे राष्ट्रपति का अधिकार बताए जाने पर बीस अप्रैल को हाईकोर्ट की वह ऐतिहासिक टिप्पणी सामने आई। इसमें कोर्ट ने कहा था कि राष्ट्रपति का पद देश का सर्वोच्च सम्माननीय होने के बावजूद राष्ट्रपति कोई राजा नहीं और उनके अधिकार असीमित अथवा न्यायिक समीक्षा से परे नहीं हैं। लंबी सुनवाई के बाद बाईस अप्रैल को कोर्ट ने उनके इस आदेश को खारिज कर दिया था और हरीश रावत सरकार फिर से बहाल हो गई थी। |
सीबीआई ने आर्यन खान क्रूज मामले से संबंधित भ्रष्टाचार के एक मामले में मुंबई एनसीबी के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक समीर वानखेड़े और तीन अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया है। सीबीआई ने इस मामले में मुंबई दिल्ली रांची (झारखंड) और कानपुर (उत्तर प्रदेश) में 29 ठिकानों पर छापेमारी की है। अधिकारियों ने बताया, "कॉर्डेलिया क्रूज शिप पर नशीले पदार्थ बरामदगी मामले में बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को नहीं फंसाने के बदले में 25 करोड़ रुपए की रिश्वत मांगने के आरोप में IRS अधिकारी समीर वानखेड़े के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। "
इसके अलावा अंधेरी में उनके घर और मुंबई में दूसरे ठिकानों पर तलाशी चल रही है। CBI की तरफ से मुंबई, दिल्ली, रांची और कानपुर में 29 जगहों पर छापेमारी की जा रही है।
2021 में NCB मुंबई जोन के प्रमुख रहते हुए वानखेड़े अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन की गिरफ्तारी के बाद विवादों में घिर गए थे। NCB विजिलेंस की एक रिपोर्ट के बाद CBI ने वानखेड़े और चार अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया। मामले में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के दो अधिकारियों को नामजद किया गया है। सूत्रों ने कहा कि आर्यन खान ड्रग्स-ऑन-क्रूज मामले के दौरान 25 करोड़ रुपए की मांग की गई थी और 50 लाख रुपए स्वीकार किए गए थे।
NCB के एक स्वतंत्र गवाह ने वानखेड़े पर हाई-प्रोफाइल ड्रग्स-ऑन-क्रूज मामले में रिश्वत में 8 करोड़ रुपये लेने का आरोप लगाया था। 27 अक्टूबर, 2021 को मुंबई पुलिस ने वानखेड़े पर लगे आरोपों की जांच के लिए एक SP लेवल के अधिकारी को नियुक्त किया। मामले की 'सही तरीके जांच न करने' के चलते, उन्हें चेन्नई में डायरेक्टर जनरल ऑफ टैक्सपेयर्स सर्विसेज (DGTS) में ट्रांसफर कर दिया गया।
2 अक्टूबर, 2021 को, आर्यन खान और कई दूसरे लोगों को NCB ने मुंबई के इंटरनेशनल क्रूज टर्मिनल में कॉर्डेलिया क्रूजशिप पर छापेमारी में ड्रग और तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। 2 अक्टूबर, 2021 को, आर्यन खान और कई दूसरे लोगों को NCB ने मुंबई के इंटरनेशनल क्रूज टर्मिनल में कॉर्डेलिया क्रूजशिप पर छापेमारी में ड्रग और तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, मई 2022 में एजेंसी की तरफ से दायर चार्जशीट में आर्यन खान और पांच अन्य को अपर्याप्त सबूत के कारण नामजद नहीं किया गया था।
आर्यन खान को 28 अक्टूबर, 2021 को बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपर्याप्त सबूत के आधार पर एक बड़ी ड्रग साजिश के NCB के दावों को खारिज करने के बाद जमानत दे दी थी।
खबरों के मुताबिक, NCB ने छापेमारी की फिर से जांच करने के लिए डिप्टी डायरेक्टर जनरल संजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल (SIT) बनाई गई है। SIT को छापे में कई अनियमितताएं मिलीं और ये सबूत नहीं मिले कि आर्यन खान एक बड़ी ड्रग्स साजिश या एक इंटरनेशनल ड्रग्स तस्करी सिंडिकेट में शामिल था।
| सीबीआई ने आर्यन खान क्रूज मामले से संबंधित भ्रष्टाचार के एक मामले में मुंबई एनसीबी के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक समीर वानखेड़े और तीन अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया है। सीबीआई ने इस मामले में मुंबई दिल्ली रांची और कानपुर में उनतीस ठिकानों पर छापेमारी की है। अधिकारियों ने बताया, "कॉर्डेलिया क्रूज शिप पर नशीले पदार्थ बरामदगी मामले में बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को नहीं फंसाने के बदले में पच्चीस करोड़ रुपए की रिश्वत मांगने के आरोप में IRS अधिकारी समीर वानखेड़े के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। " इसके अलावा अंधेरी में उनके घर और मुंबई में दूसरे ठिकानों पर तलाशी चल रही है। CBI की तरफ से मुंबई, दिल्ली, रांची और कानपुर में उनतीस जगहों पर छापेमारी की जा रही है। दो हज़ार इक्कीस में NCB मुंबई जोन के प्रमुख रहते हुए वानखेड़े अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन की गिरफ्तारी के बाद विवादों में घिर गए थे। NCB विजिलेंस की एक रिपोर्ट के बाद CBI ने वानखेड़े और चार अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया। मामले में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के दो अधिकारियों को नामजद किया गया है। सूत्रों ने कहा कि आर्यन खान ड्रग्स-ऑन-क्रूज मामले के दौरान पच्चीस करोड़ रुपए की मांग की गई थी और पचास लाख रुपए स्वीकार किए गए थे। NCB के एक स्वतंत्र गवाह ने वानखेड़े पर हाई-प्रोफाइल ड्रग्स-ऑन-क्रूज मामले में रिश्वत में आठ करोड़ रुपये लेने का आरोप लगाया था। सत्ताईस अक्टूबर, दो हज़ार इक्कीस को मुंबई पुलिस ने वानखेड़े पर लगे आरोपों की जांच के लिए एक SP लेवल के अधिकारी को नियुक्त किया। मामले की 'सही तरीके जांच न करने' के चलते, उन्हें चेन्नई में डायरेक्टर जनरल ऑफ टैक्सपेयर्स सर्विसेज में ट्रांसफर कर दिया गया। दो अक्टूबर, दो हज़ार इक्कीस को, आर्यन खान और कई दूसरे लोगों को NCB ने मुंबई के इंटरनेशनल क्रूज टर्मिनल में कॉर्डेलिया क्रूजशिप पर छापेमारी में ड्रग और तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। दो अक्टूबर, दो हज़ार इक्कीस को, आर्यन खान और कई दूसरे लोगों को NCB ने मुंबई के इंटरनेशनल क्रूज टर्मिनल में कॉर्डेलिया क्रूजशिप पर छापेमारी में ड्रग और तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, मई दो हज़ार बाईस में एजेंसी की तरफ से दायर चार्जशीट में आर्यन खान और पांच अन्य को अपर्याप्त सबूत के कारण नामजद नहीं किया गया था। आर्यन खान को अट्ठाईस अक्टूबर, दो हज़ार इक्कीस को बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपर्याप्त सबूत के आधार पर एक बड़ी ड्रग साजिश के NCB के दावों को खारिज करने के बाद जमानत दे दी थी। खबरों के मुताबिक, NCB ने छापेमारी की फिर से जांच करने के लिए डिप्टी डायरेक्टर जनरल संजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल बनाई गई है। SIT को छापे में कई अनियमितताएं मिलीं और ये सबूत नहीं मिले कि आर्यन खान एक बड़ी ड्रग्स साजिश या एक इंटरनेशनल ड्रग्स तस्करी सिंडिकेट में शामिल था। |
अक्षय कुमार की नई फिल्म 'लक्ष्मी बम' का ट्रेलर रिलीज हो गया है। हालांकि, ट्रेलर के साथ ही फिल्म को लेकर विवाद भी शुरू हो गया है। सोशल मीडिया पर इसके बॉयकॉट की मांग उठ रही है तो ट्विटर पर #ShameOnUAkshayKumar ट्रेंड करने लगा। दरअसल, आरोप लगाया जा रहा है कि इस फिल्म के जरिए लव जिहाद को बढ़ावा दिया जा रहा है।
लक्ष्मी बम हॉरर कॉमेडी फिल्म है। फिल्म में अक्षय कुमार के साथ कियारा आडवाणी हैं। फिल्म की कहानी के मुताबिक, कियारा आडवाणी अपने परिवार को शादी के लिए मनाने के लिए घर बुलाती हैं। अक्षय कुमार भूत प्रेत पर विश्वास नहीं करते हैं और दावा करते हैं कि जिस दिन भूत दिख गया तो चूड़ियां पहन लेंगे। ट्रेलर में दिखाया गया है कि अक्षय कुमार के शरीर में लक्ष्मी की आत्मा दाखिल हो जाती है। यह आत्मा क्यों और किससे बदला लेना चाहती है यह तो खैर फिल्म देखने के बाद ही पता चलेगा फिलहाल हम विवाद पर बात करते हैं।
Film is Produced By Separatist Shabeena Khan.
दरअसल, फिल्म लक्ष्मी बम में अक्षय कुमार के किरदार का नाम आसिफ बताया जा रहा है, जबकि कियारा के किरदार का नाम प्रिया है। दिवाली से पहले रिलीज होने जा रही फिल्म के नाम को लेकर भी आपत्ति जताई जा रही है। कुछ लोग देवी लक्ष्मी के नाम के आगे बम लगाने पर आपत्ति जाहिर कर रहे हैं।
फिल्म लक्ष्मी बम तमिल फिल्म 'कंचना' का हिंदी रीमेक है। सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स का कहना है कि ऑरिजनल फिल्म में किरदार का नाम राघव है तो इस फिल्म में आसिफ क्यों किया गया, जबकि हिरोइन का नाम प्रिया ही है।
ट्विटर पर परिचय में सुप्रीम कोर्ट के वकील बताने वाले प्रशांत पटेल उमराव कहते हैं कि फिल्म की प्रड्यूसर शबीना खान अफगानी मूल की है और कश्मीरी अलगाववादी हैं, लगातार कश्मीर और अनुच्छेद 370 के मामले में भारत और भारत सरकार के खिलाफ जहर खोलती रही हैं। इस फिल्म के जरिए लव जिहाद को प्रमोट किया जा रहा है।
| अक्षय कुमार की नई फिल्म 'लक्ष्मी बम' का ट्रेलर रिलीज हो गया है। हालांकि, ट्रेलर के साथ ही फिल्म को लेकर विवाद भी शुरू हो गया है। सोशल मीडिया पर इसके बॉयकॉट की मांग उठ रही है तो ट्विटर पर #ShameOnUAkshayKumar ट्रेंड करने लगा। दरअसल, आरोप लगाया जा रहा है कि इस फिल्म के जरिए लव जिहाद को बढ़ावा दिया जा रहा है। लक्ष्मी बम हॉरर कॉमेडी फिल्म है। फिल्म में अक्षय कुमार के साथ कियारा आडवाणी हैं। फिल्म की कहानी के मुताबिक, कियारा आडवाणी अपने परिवार को शादी के लिए मनाने के लिए घर बुलाती हैं। अक्षय कुमार भूत प्रेत पर विश्वास नहीं करते हैं और दावा करते हैं कि जिस दिन भूत दिख गया तो चूड़ियां पहन लेंगे। ट्रेलर में दिखाया गया है कि अक्षय कुमार के शरीर में लक्ष्मी की आत्मा दाखिल हो जाती है। यह आत्मा क्यों और किससे बदला लेना चाहती है यह तो खैर फिल्म देखने के बाद ही पता चलेगा फिलहाल हम विवाद पर बात करते हैं। Film is Produced By Separatist Shabeena Khan. दरअसल, फिल्म लक्ष्मी बम में अक्षय कुमार के किरदार का नाम आसिफ बताया जा रहा है, जबकि कियारा के किरदार का नाम प्रिया है। दिवाली से पहले रिलीज होने जा रही फिल्म के नाम को लेकर भी आपत्ति जताई जा रही है। कुछ लोग देवी लक्ष्मी के नाम के आगे बम लगाने पर आपत्ति जाहिर कर रहे हैं। फिल्म लक्ष्मी बम तमिल फिल्म 'कंचना' का हिंदी रीमेक है। सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स का कहना है कि ऑरिजनल फिल्म में किरदार का नाम राघव है तो इस फिल्म में आसिफ क्यों किया गया, जबकि हिरोइन का नाम प्रिया ही है। ट्विटर पर परिचय में सुप्रीम कोर्ट के वकील बताने वाले प्रशांत पटेल उमराव कहते हैं कि फिल्म की प्रड्यूसर शबीना खान अफगानी मूल की है और कश्मीरी अलगाववादी हैं, लगातार कश्मीर और अनुच्छेद तीन सौ सत्तर के मामले में भारत और भारत सरकार के खिलाफ जहर खोलती रही हैं। इस फिल्म के जरिए लव जिहाद को प्रमोट किया जा रहा है। |
कुल्लू - हिमाचल प्रदेश में एम्स बनकर ही रहेगा। प्रदेश की जनता से जो वादा किया है, उसे पूरा किया जाएगा। अपने राज्य में एम्स की सुविधा लोगों को आने वाले समय में प्रदान होगी। ये शब्द केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने शनिवार को मुख्यालय कुल्लू में मीडिया से रू-ब-रू होते हुए कहे। उन्होंने कहा कि बजट में पूरा प्रावधान है, जो लोग पढ़े लिखे हैं और बजट को समझते हैं, उन्हें पता है कि हिमाचल में एम्स बनेगा। उन्होंने बताया कि केंद्रीय सरकार ने जनता से जो भी वादा किया है वह प्राथमिकता के आधार पर पूरा कर रही है। एम्स हर सूरत बनकर ही रहेगा।
शनिवार शाम के समय केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने रघुनापुर पहुंचकर भगवान रघुनाथ के दर्शन किए और आशीर्वाद लिया। इस मौके पर सदर कुल्लू के विधायक महेश्वर सिंह का परिवार भी मौजूद रहा।
कुल्लू - स्वर्गीय पूर्व मंत्री कर्ण सिंह के परिवार से मिलने पहुंचे केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि परिवार सहित समाज ने एक अच्छा व्यक्ति खोया है, जिसका दुख परिवार को ही नहीं पूरे समाज को है। उन्होंने नम आंखें करते हुए कहा कि स्व. कर्ण सिंह के साथ मेरा दोस्ताना संबंध था, जिसे वह कभी भूल नहीं सकता।
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| कुल्लू - हिमाचल प्रदेश में एम्स बनकर ही रहेगा। प्रदेश की जनता से जो वादा किया है, उसे पूरा किया जाएगा। अपने राज्य में एम्स की सुविधा लोगों को आने वाले समय में प्रदान होगी। ये शब्द केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने शनिवार को मुख्यालय कुल्लू में मीडिया से रू-ब-रू होते हुए कहे। उन्होंने कहा कि बजट में पूरा प्रावधान है, जो लोग पढ़े लिखे हैं और बजट को समझते हैं, उन्हें पता है कि हिमाचल में एम्स बनेगा। उन्होंने बताया कि केंद्रीय सरकार ने जनता से जो भी वादा किया है वह प्राथमिकता के आधार पर पूरा कर रही है। एम्स हर सूरत बनकर ही रहेगा। शनिवार शाम के समय केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने रघुनापुर पहुंचकर भगवान रघुनाथ के दर्शन किए और आशीर्वाद लिया। इस मौके पर सदर कुल्लू के विधायक महेश्वर सिंह का परिवार भी मौजूद रहा। कुल्लू - स्वर्गीय पूर्व मंत्री कर्ण सिंह के परिवार से मिलने पहुंचे केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि परिवार सहित समाज ने एक अच्छा व्यक्ति खोया है, जिसका दुख परिवार को ही नहीं पूरे समाज को है। उन्होंने नम आंखें करते हुए कहा कि स्व. कर्ण सिंह के साथ मेरा दोस्ताना संबंध था, जिसे वह कभी भूल नहीं सकता। भारत मैट्रीमोनी पर अपना सही संगी चुनें - निःशुल्क रजिस्टर करें ! |
बॉलीवुड । श्वेता तिवारी (Shweta Tiwari) की बेटी पलक तिवारी (Palak Tiwari) ने लंबे समय के बाद सोशल मीडिया पर कमबैक किया है। उन्होंने लगातार कई ग्लैमरस तस्वीरें शेयर करके हंगामा मचाया दिया है। पलक ने बोल्ड तस्वीरें शेयर कर इंटरनेट का पारा बढ़ा दिया है। पलक की इन तस्वीरों के देखकर फैंस दीवाने हो रहे हैं और फोटोज पर कमेंट की बारिश कर रहे हैं। पलक ने फिर शेयर कीं फोटोजश्वेता तिवारी (Shweta Tiwari) की बेटी पलक तिवारी (Palak Tiwari) ने अपनी कई शानदार तस्वीरें पोस्ट की हैं। ताजा तस्वीरों में ऐसा ड्रेस कैरी की है जो काफी रिवीलिंग है। उनका ये बोल्ड अंदाज देखकर सोशल मीडिया पर लोग उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे। फोटोज सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं।
तारीफों के बंधे पुलश्वेता तिवारी (Shweta Tiwari) की बेटी पलक तिवारी (Palak Tiwari) के हुस्न की फैंस खूब तारीफें कर रहें हैं। मां की तरह ही फैंस पलक के भी दीवाने हैं। जहां कुछ लोग कमेंट में कह रहे हैं, 'मां से भी आगे' तो वहीं कुछ लिख रहे हैं, 'नजरें नहीं हट रहीं', तो एक ने यह तक कह डाला, 'तुम्हें देख मोमबत्ती की तरह पिघल रहा हूं'।लगातार पोस्ट कर रहीं तस्वीरेंपलक तिवारी (Palak Tiwari) एक के बाद एक कई तस्वीरें शेयर की हैं। हर तस्वीर में उन्होंने काफी स्टाइलिश आउटफिट कैरी किए हैं। इन तस्वीरों में पलक काफी बोल्ड ड्रेस में नजर आ रही हैं। डीप नेक गाउन ड्रेस पलक ने पहली है। वहीं उन्होंने नैपकिन टॉप और जीन्स भी कैरी किया है।
| बॉलीवुड । श्वेता तिवारी की बेटी पलक तिवारी ने लंबे समय के बाद सोशल मीडिया पर कमबैक किया है। उन्होंने लगातार कई ग्लैमरस तस्वीरें शेयर करके हंगामा मचाया दिया है। पलक ने बोल्ड तस्वीरें शेयर कर इंटरनेट का पारा बढ़ा दिया है। पलक की इन तस्वीरों के देखकर फैंस दीवाने हो रहे हैं और फोटोज पर कमेंट की बारिश कर रहे हैं। पलक ने फिर शेयर कीं फोटोजश्वेता तिवारी की बेटी पलक तिवारी ने अपनी कई शानदार तस्वीरें पोस्ट की हैं। ताजा तस्वीरों में ऐसा ड्रेस कैरी की है जो काफी रिवीलिंग है। उनका ये बोल्ड अंदाज देखकर सोशल मीडिया पर लोग उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे। फोटोज सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं। तारीफों के बंधे पुलश्वेता तिवारी की बेटी पलक तिवारी के हुस्न की फैंस खूब तारीफें कर रहें हैं। मां की तरह ही फैंस पलक के भी दीवाने हैं। जहां कुछ लोग कमेंट में कह रहे हैं, 'मां से भी आगे' तो वहीं कुछ लिख रहे हैं, 'नजरें नहीं हट रहीं', तो एक ने यह तक कह डाला, 'तुम्हें देख मोमबत्ती की तरह पिघल रहा हूं'।लगातार पोस्ट कर रहीं तस्वीरेंपलक तिवारी एक के बाद एक कई तस्वीरें शेयर की हैं। हर तस्वीर में उन्होंने काफी स्टाइलिश आउटफिट कैरी किए हैं। इन तस्वीरों में पलक काफी बोल्ड ड्रेस में नजर आ रही हैं। डीप नेक गाउन ड्रेस पलक ने पहली है। वहीं उन्होंने नैपकिन टॉप और जीन्स भी कैरी किया है। |
जम्मू के सुंजवान आर्मी कैंप पर शनिवार तड़के हुए चरमपंथी हमले में मृतकों की संख्या बढ़कर 6 हो गई है.
कैंप में अब भी सुरक्षाबलों का सर्च अभियान जारी है. कैंप के फैमिली क्वॉर्टर में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा रहा है. इसमें एक गर्भवती महिला भी हैं.
सेना के प्रवक्ता लेफ़्टिनेंट कर्नल देवेंद्र आनंद ने बताया कि गर्भवती महिला गंभीर रूप से घायल थी और सेना का डॉक्टर रात भर उसे बचाने में लगे रहे. इस महिला ने सिजेरियन ऑपरेशन के बाद एक लड़की को जन्म दिया है.
सेना के प्रवक्ता लेफ़्टिनेंट कर्नल देवेंद्र आनंद ने कहा, "जम्मू के सुंजवान आर्मी कैंप पर चरमपंथी हमले में अब तक तीन चरमपंथियों की मौत हो गई है. पिछले दो चरमपंथियों की तरह ही तीसरे चरमपंथी के पास भी बहुत से हथियार मौजूद थे और उसने सेना की वर्दी पहन रखी थी. चरमपंथियों के पास से एके 47, अंडर बैरल ग्रेनेड लॉन्चर, गोला-बारूद और ग्रेनेड बरामद किए गए हैं. "
उन्होंने कहा, "आर्मी कैंप के फैमिली क्वॉर्टर से एक जेसीओ, दो जवान और एक बुजुर्ग (एक जवान के पिता) के शव अब तक निकाले गए हैं. इन्हें शनिवार को हमले के शुरुआती दौर के दौरान चरमपंथियों ने मार दिया था. अब तक दो जेसीओ, तीन जवानों एक एक बुजुर्ग समेत छह लोगों की मौत हो गई है. इसके अलावा छह महिलाओं और बच्चे समेत 10 लोग घायल हैं. "
उन्होंने कहा, "घायलों में एक गर्भवती महिला भी है. सेना के डॉक्टर रात भर उस बुरी तरह घायल गर्भवती महिला की जान बचाने में लगे रहे. जिसने सिजेरियन ऑपरेशन से एक लड़की को जन्म दिया है. मां-बेटी दोनों सुरक्षित हैं. "
लेफ़्टिनेंट कर्नल देवेंद आनंद ने बताया कि एक 14 साल के लड़के को सिर में गोली लगी है, जिसकी हालत नाजुक बनी हुई है. राहत और बचाव अभियान जारी है.
मृतक सैनिकों की पहचान हवलदार हबीब-उल्लाह क़ुरैशी, नायक मंज़ूर अहमद, लांस नायक मोहम्मद इक़बाल और उनके पिता के रूप में हुई है. इससे पहले दो जूनियर कमिशनर ऑफिसर शनिवार को मारे गए थे.
इंस्पेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस डॉ एसडी सिंह जमवाल ने रविवार को कहा कि तीन चरमपंथी भी मारे गए हैं और कैंप में अब भी सुरक्षा बलों का अभियान ख़त्म नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि पिछले 24 घंटों से संघर्ष जारी है.
इन चरमपंथियों को जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा बताया जा रहा है. सेना के पीआरओ लेफ़्टिनेंट कर्नल देवेंद्र आनंद ने भी इस बात की पुष्टि की है कि हथियारबंद चरमपंथी जैश-ए-मोहम्मद के हैं. इससे पहले सेना ने जैश-ए-मोहम्मद के झंडे के साथ हथियार और गोला-बारूद बरामद किया था.
भारतीय सैन्य प्रमुख जनरल बिपिन रावत भी इस हमले के ख़िलाफ़ जारी सुरक्षा बलों के अभियान पर नज़र रखे हुए हैं.
बिपिन रावत शनिवार देर शाम जम्मू पहुंचे थे. उन्हें स्थानीय कमांडरों ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी थी.
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| जम्मू के सुंजवान आर्मी कैंप पर शनिवार तड़के हुए चरमपंथी हमले में मृतकों की संख्या बढ़कर छः हो गई है. कैंप में अब भी सुरक्षाबलों का सर्च अभियान जारी है. कैंप के फैमिली क्वॉर्टर में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा रहा है. इसमें एक गर्भवती महिला भी हैं. सेना के प्रवक्ता लेफ़्टिनेंट कर्नल देवेंद्र आनंद ने बताया कि गर्भवती महिला गंभीर रूप से घायल थी और सेना का डॉक्टर रात भर उसे बचाने में लगे रहे. इस महिला ने सिजेरियन ऑपरेशन के बाद एक लड़की को जन्म दिया है. सेना के प्रवक्ता लेफ़्टिनेंट कर्नल देवेंद्र आनंद ने कहा, "जम्मू के सुंजवान आर्मी कैंप पर चरमपंथी हमले में अब तक तीन चरमपंथियों की मौत हो गई है. पिछले दो चरमपंथियों की तरह ही तीसरे चरमपंथी के पास भी बहुत से हथियार मौजूद थे और उसने सेना की वर्दी पहन रखी थी. चरमपंथियों के पास से एके सैंतालीस, अंडर बैरल ग्रेनेड लॉन्चर, गोला-बारूद और ग्रेनेड बरामद किए गए हैं. " उन्होंने कहा, "आर्मी कैंप के फैमिली क्वॉर्टर से एक जेसीओ, दो जवान और एक बुजुर्ग के शव अब तक निकाले गए हैं. इन्हें शनिवार को हमले के शुरुआती दौर के दौरान चरमपंथियों ने मार दिया था. अब तक दो जेसीओ, तीन जवानों एक एक बुजुर्ग समेत छह लोगों की मौत हो गई है. इसके अलावा छह महिलाओं और बच्चे समेत दस लोग घायल हैं. " उन्होंने कहा, "घायलों में एक गर्भवती महिला भी है. सेना के डॉक्टर रात भर उस बुरी तरह घायल गर्भवती महिला की जान बचाने में लगे रहे. जिसने सिजेरियन ऑपरेशन से एक लड़की को जन्म दिया है. मां-बेटी दोनों सुरक्षित हैं. " लेफ़्टिनेंट कर्नल देवेंद आनंद ने बताया कि एक चौदह साल के लड़के को सिर में गोली लगी है, जिसकी हालत नाजुक बनी हुई है. राहत और बचाव अभियान जारी है. मृतक सैनिकों की पहचान हवलदार हबीब-उल्लाह क़ुरैशी, नायक मंज़ूर अहमद, लांस नायक मोहम्मद इक़बाल और उनके पिता के रूप में हुई है. इससे पहले दो जूनियर कमिशनर ऑफिसर शनिवार को मारे गए थे. इंस्पेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस डॉ एसडी सिंह जमवाल ने रविवार को कहा कि तीन चरमपंथी भी मारे गए हैं और कैंप में अब भी सुरक्षा बलों का अभियान ख़त्म नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि पिछले चौबीस घंटाटों से संघर्ष जारी है. इन चरमपंथियों को जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा बताया जा रहा है. सेना के पीआरओ लेफ़्टिनेंट कर्नल देवेंद्र आनंद ने भी इस बात की पुष्टि की है कि हथियारबंद चरमपंथी जैश-ए-मोहम्मद के हैं. इससे पहले सेना ने जैश-ए-मोहम्मद के झंडे के साथ हथियार और गोला-बारूद बरामद किया था. भारतीय सैन्य प्रमुख जनरल बिपिन रावत भी इस हमले के ख़िलाफ़ जारी सुरक्षा बलों के अभियान पर नज़र रखे हुए हैं. बिपिन रावत शनिवार देर शाम जम्मू पहुंचे थे. उन्हें स्थानीय कमांडरों ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी थी. |
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लड़कों की इन खास खूबियों पर पल भर में इंप्रेस हो जाती है लड़कियां ! !
घर में इस जगह मोरपंख रखने से दूर होती है सभी परेशानियाँ, जानिए इसके चमत्कारी उपाय !
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Kantara Prequel: कांतारा फिल्म में काम करने वाले मुख्य कलाकार के रूप में ऋषभ शेट्टी थे वहीं इस फिल्म को डायरेक्ट भी ऋषभ शेट्टी ने किया था। जब इस फिल्म को रिलीज़ किया गया और इस फिल्म ने जिस तरह पूरे भारत में अपने पैर पसारे, पूरी इंडस्ट्री ये देखकर दंग रह गई थी। जिस समय बॉलीवुड की तमाम फिल्म बॉक्स ऑफिस पर पिट रही थीं ऐसे समय में कांतारा फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कमाल कर दिया था। वहीं इस फिल्म के रिलीज़ होने के बाद लोग कांतारा के दूसरे पार्ट के बारे में भी बातचीत कर रहे थे। यहां हम इसी बारे में बताएंगे।
नई दिल्ली। ऋषभ शेट्टी की फिल्म कांतारा जब रिलीज़ हुई तो वो पूरे देश में छा गई। कन्नड़ा फिल्म कांतारा पहले अपने क्षेत्र में रहकर कमाल दिखाती है और उसके बाद फिल्म पूरे भारत में करिश्मा करती है। कुछ ही दिनों में फिल्म ने पूरे भारत में अपना नाम कमा लिया था। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर दमदार कलेक्शन किया था। कांतारा फिल्म में काम करने वाले मुख्य कलाकार के रूप में ऋषभ शेट्टी थे वहीं इस फिल्म को डायरेक्ट भी ऋषभ शेट्टी ने किया था। जब इस फिल्म को रिलीज़ किया गया और इस फिल्म ने जिस तरह पूरे भारत में अपने पैर पसारे, पूरी इंडस्ट्री ये देखकर दंग रह गई थी। जिस समय बॉलीवुड की तमाम फिल्म बॉक्स ऑफिस पर पिट रही थीं ऐसे समय में कांतारा फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कमाल कर दिया था। वहीं इस फिल्म के रिलीज़ होने के बाद लोग कांतारा के दूसरे पार्ट के बारे में भी बातचीत कर रहे थे। यहां हम इसी बारे में बताएंगे।
कांतारा 2 के लिए काफी बातचीत चल रही थी और लोगों की इस फिल्म को लेकर काफी मांग थी। लोग कांतारा 2 के बारे में लगातार बातचीत कर रहे थे और उनका मानना था कि कांतारा 2 फिल्म जरूर बननी चाहिए। ऋषभ शेट्टी ने खुद कांतारा 2 फिल्म को बनाने की बात स्वीकार की थी। उनका कहना था कि हम कहानी के बारे में सोच रहे हैं और जल्द ही हम स्क्रिप्टिंग का सिलसिला शुरू करने वाले हैं।
वहीं होम्बले फिल्म के प्रोडक्शन में बनी कांतारा के प्रोडक्शन हाउस ने सोशल मीडिया पर बताया है कि कांतारा 2 फिल्म की स्क्रिप्ट लिखने की तैयारी शुरू हो गई है। मेकर्स ने बताया है, "गुड़ी पड़वा और हिन्दू नववर्ष के अवसर पर कांतारा फिल्म की शुरुआत हुई है। हम बहुत ही खुश हैं कि हम कांतारा के दूसरे पार्ट को लिखने जा रहे हैं। हम आपको एक बेहतरीन कहानी और प्रकृति से जुड़ी कहानी दिखाने के लिए काफी उत्सुक हैं।
आपको बता दें ऋषभ शेट्टी ने हाल ही में घोषणा की थी कि वो कांतारा 2 को प्रीक्वेल बनाने की तैयारी में हैं। यानि की आपको कांतारा 2 में कांतारा से पहले की कहानी को दिखाया जाएगा। उन्होंने बताया था कांतारा में जो आपने देखा है वो पार्ट 2 है और अब आपको पार्ट 1 देखने को मिलने वाला है। उन्होंने बताया था वो अभी कहानी पर शोध कर रहे हैं क्योंकि कन्नड़ा का इतिहास काफी वृहद है। अब कांतारा 2 की स्क्रिप्टिंग शुरू हो गई है। आगे और क्या खबर आती है हम जरूर बताएंगे। लेकिन अगर आपने अब तक कांतारा फिल्म को नहीं देखा है तो आप नेटफ्लिक्स ओटीटी पर जाकर फिल्म को देख सकते हैं।
| Kantara Prequel: कांतारा फिल्म में काम करने वाले मुख्य कलाकार के रूप में ऋषभ शेट्टी थे वहीं इस फिल्म को डायरेक्ट भी ऋषभ शेट्टी ने किया था। जब इस फिल्म को रिलीज़ किया गया और इस फिल्म ने जिस तरह पूरे भारत में अपने पैर पसारे, पूरी इंडस्ट्री ये देखकर दंग रह गई थी। जिस समय बॉलीवुड की तमाम फिल्म बॉक्स ऑफिस पर पिट रही थीं ऐसे समय में कांतारा फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कमाल कर दिया था। वहीं इस फिल्म के रिलीज़ होने के बाद लोग कांतारा के दूसरे पार्ट के बारे में भी बातचीत कर रहे थे। यहां हम इसी बारे में बताएंगे। नई दिल्ली। ऋषभ शेट्टी की फिल्म कांतारा जब रिलीज़ हुई तो वो पूरे देश में छा गई। कन्नड़ा फिल्म कांतारा पहले अपने क्षेत्र में रहकर कमाल दिखाती है और उसके बाद फिल्म पूरे भारत में करिश्मा करती है। कुछ ही दिनों में फिल्म ने पूरे भारत में अपना नाम कमा लिया था। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर दमदार कलेक्शन किया था। कांतारा फिल्म में काम करने वाले मुख्य कलाकार के रूप में ऋषभ शेट्टी थे वहीं इस फिल्म को डायरेक्ट भी ऋषभ शेट्टी ने किया था। जब इस फिल्म को रिलीज़ किया गया और इस फिल्म ने जिस तरह पूरे भारत में अपने पैर पसारे, पूरी इंडस्ट्री ये देखकर दंग रह गई थी। जिस समय बॉलीवुड की तमाम फिल्म बॉक्स ऑफिस पर पिट रही थीं ऐसे समय में कांतारा फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कमाल कर दिया था। वहीं इस फिल्म के रिलीज़ होने के बाद लोग कांतारा के दूसरे पार्ट के बारे में भी बातचीत कर रहे थे। यहां हम इसी बारे में बताएंगे। कांतारा दो के लिए काफी बातचीत चल रही थी और लोगों की इस फिल्म को लेकर काफी मांग थी। लोग कांतारा दो के बारे में लगातार बातचीत कर रहे थे और उनका मानना था कि कांतारा दो फिल्म जरूर बननी चाहिए। ऋषभ शेट्टी ने खुद कांतारा दो फिल्म को बनाने की बात स्वीकार की थी। उनका कहना था कि हम कहानी के बारे में सोच रहे हैं और जल्द ही हम स्क्रिप्टिंग का सिलसिला शुरू करने वाले हैं। वहीं होम्बले फिल्म के प्रोडक्शन में बनी कांतारा के प्रोडक्शन हाउस ने सोशल मीडिया पर बताया है कि कांतारा दो फिल्म की स्क्रिप्ट लिखने की तैयारी शुरू हो गई है। मेकर्स ने बताया है, "गुड़ी पड़वा और हिन्दू नववर्ष के अवसर पर कांतारा फिल्म की शुरुआत हुई है। हम बहुत ही खुश हैं कि हम कांतारा के दूसरे पार्ट को लिखने जा रहे हैं। हम आपको एक बेहतरीन कहानी और प्रकृति से जुड़ी कहानी दिखाने के लिए काफी उत्सुक हैं। आपको बता दें ऋषभ शेट्टी ने हाल ही में घोषणा की थी कि वो कांतारा दो को प्रीक्वेल बनाने की तैयारी में हैं। यानि की आपको कांतारा दो में कांतारा से पहले की कहानी को दिखाया जाएगा। उन्होंने बताया था कांतारा में जो आपने देखा है वो पार्ट दो है और अब आपको पार्ट एक देखने को मिलने वाला है। उन्होंने बताया था वो अभी कहानी पर शोध कर रहे हैं क्योंकि कन्नड़ा का इतिहास काफी वृहद है। अब कांतारा दो की स्क्रिप्टिंग शुरू हो गई है। आगे और क्या खबर आती है हम जरूर बताएंगे। लेकिन अगर आपने अब तक कांतारा फिल्म को नहीं देखा है तो आप नेटफ्लिक्स ओटीटी पर जाकर फिल्म को देख सकते हैं। |
बॉलीवुड एक्टर प्रकाश राज (Prakash Raj) सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं। वे हर मुद्दे पर खुलकर राय रखने के लिए जाने जाते हैं, और उनके फैंस इस अंदाज को काफी पसंद भी करते हैं। लेकिन इस बार प्रकाश राज के साथ कुछ ऐसा हुआ कि उन्हें अपना ट्वीट डिलीट कर लोगों से माफी मांगनी पड़ी। दरअसल, भारत में कोरोना वायरस के दस्तक के बीच प्रकाश राज ने इससे बचाव के लिए एक 'अनोखा नुस्खा' शेयर किया था।
प्रकाश राज ने ट्वीट कर कहा था, 'एक कप गुनगुने पानी में नींबू का रस मिलाकर पीने से कोरोनावायरस से बचा जा सकता है। एक विश्वसनीय सूत्र से ये जानकारी मिली है और आपके साथ शेयर कर रहा हूं। आप भी इसे साझा करें'। इस ट्वीट के बाद प्रकाश राज सोशल मीडिया पर ट्रोल होने लगे और बाद में अपना ट्वीट डिलीट कर लिया।
प्रकाश राज ने लिखा कि कुछ अच्छा करने की जल्दबाजी में, मैं गलत जानकारी का शिकार हो गया था। लेकिन अच्छी बात यह है कि मैं तथ्यों को स्वीकार कर रहा हूं और अपनी गलती सुधारी है। मैंने जो ट्वीट गलत जानकारी के चलते किया था, उसे डिलीट कर दिया है...सॉरी'।
गौरतलब है कि प्रकाश राज साउथ फिल्म इंडस्ट्री के जाने माने नाम हैं और वे साउथ की कई ब्लॉक बस्टर फिल्मों में काम कर चुके हैं। प्रकाश राज को बॉलीवुड में भी सलमान खान के साथ दबंग 2, वॉन्टेड और अजय देवगन के संग सिंघम में देखा गया था। बता दें कि प्रकाश राज नागरिकता संसोधन कानून (Citizenship Amendment Act) को लेकर दिल्ली में हो रही हिंसा (Delhi Violence ) को लेकर भी लगातार ट्विटर पर रिएक्शन दे रहे हैं।
भारत में कुल 24 मरीज : भारत में इस वक्त कोरोना वायरस (Coronavirus) के कुल 24 मरीज हैं। जबकि विदेशों में रहने वाले 17 भारतीयों में वायरस की पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य मंत्रालय लगातार पूरी स्थिति की निगरानी कर रही है। आज ही स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने इस मसले पर बैठक की थी, जिसमें दिल्ली सरकार के अधिकारी भी शामिल हुए थे। उन्होंने कहा था कि पैनिक होने की जरूरत नहीं है।
| बॉलीवुड एक्टर प्रकाश राज सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं। वे हर मुद्दे पर खुलकर राय रखने के लिए जाने जाते हैं, और उनके फैंस इस अंदाज को काफी पसंद भी करते हैं। लेकिन इस बार प्रकाश राज के साथ कुछ ऐसा हुआ कि उन्हें अपना ट्वीट डिलीट कर लोगों से माफी मांगनी पड़ी। दरअसल, भारत में कोरोना वायरस के दस्तक के बीच प्रकाश राज ने इससे बचाव के लिए एक 'अनोखा नुस्खा' शेयर किया था। प्रकाश राज ने ट्वीट कर कहा था, 'एक कप गुनगुने पानी में नींबू का रस मिलाकर पीने से कोरोनावायरस से बचा जा सकता है। एक विश्वसनीय सूत्र से ये जानकारी मिली है और आपके साथ शेयर कर रहा हूं। आप भी इसे साझा करें'। इस ट्वीट के बाद प्रकाश राज सोशल मीडिया पर ट्रोल होने लगे और बाद में अपना ट्वीट डिलीट कर लिया। प्रकाश राज ने लिखा कि कुछ अच्छा करने की जल्दबाजी में, मैं गलत जानकारी का शिकार हो गया था। लेकिन अच्छी बात यह है कि मैं तथ्यों को स्वीकार कर रहा हूं और अपनी गलती सुधारी है। मैंने जो ट्वीट गलत जानकारी के चलते किया था, उसे डिलीट कर दिया है...सॉरी'। गौरतलब है कि प्रकाश राज साउथ फिल्म इंडस्ट्री के जाने माने नाम हैं और वे साउथ की कई ब्लॉक बस्टर फिल्मों में काम कर चुके हैं। प्रकाश राज को बॉलीवुड में भी सलमान खान के साथ दबंग दो, वॉन्टेड और अजय देवगन के संग सिंघम में देखा गया था। बता दें कि प्रकाश राज नागरिकता संसोधन कानून को लेकर दिल्ली में हो रही हिंसा को लेकर भी लगातार ट्विटर पर रिएक्शन दे रहे हैं। भारत में कुल चौबीस मरीज : भारत में इस वक्त कोरोना वायरस के कुल चौबीस मरीज हैं। जबकि विदेशों में रहने वाले सत्रह भारतीयों में वायरस की पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य मंत्रालय लगातार पूरी स्थिति की निगरानी कर रही है। आज ही स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने इस मसले पर बैठक की थी, जिसमें दिल्ली सरकार के अधिकारी भी शामिल हुए थे। उन्होंने कहा था कि पैनिक होने की जरूरत नहीं है। |
इन घटनाओ के कुछ ही समय बाद छत्रमुकुट नामक एक बुंदेला छत्रसाल का पक्ष छोडकर मुग़लो से जा मिला । १२६ इसी वीच में शेर अफग़न ने परगना गागरौन ( मालवा ) भी छत्रसाल के पुत्र गरीवदास से छीन लिया। छत्रसाल के अधिकार में यह परगना पिछले कोई २० वर्ष से था। शेर अफगन को इन सफलताओ के लिए बहुत पुरस्कृत किया गया । उसे राणोद तथा समीप के प्रदेश का फौजदार बना दिया गया और बहुत सी नकद रकम के साथ परगना गागरौन भी उसे दे दिया गया । १२७
अगले वर्ष अप्रेल २४, १७०० ई० को शेर अफगन ने झुना बरना के निकट छत्रसाल पर आक्रमण किया । इस मुठभेड में ७०० बुँदेले मारे गये और मुगलो के भी कई सरदार काम आये । वुंदेलो का साहस जाता रहा और स्वय छत्रसाल भी घायल होकर भाग निकले । परन्तु इस युद्ध में वास्तविक विजय छत्रसाल की ही हुई । युद्ध में एक गोली लग जाने से शेर अफगन छत्रसाल के हाथ में पड़ गया और भागते समय वे उसे भी अपने साथ उठवा ले गये । शेर अफगन की हालत बिगडती देखकर छत्रसाल ने उसके पुत्र जाफर अली को लिखा, "तुम्हारे पिता में बहुत ही कम जीवन शेप है । उसे वापिस ले जाने के लिए अपने मेवक भेज दो।" पर शेर अफगन को ले जाने के लिए जाफर अली के सैनिक आये तब तक वह दूसरे लोक को प्रयाण कर चुका था । १२८
इस घटना के कुछ ही बाद देवीसिह धंवेरा ने शाहाबाद के किले पर अ कार कर लिया । यह किला शेर अफगन के एक पुत्र अली कुली के अधिकार में था, पर वह तब इसे प्रोडकर कालावाग १२९ चला गया था । इस क़िले पर ग्वालियर के फौजदार जॉनिसार खाँ ने अक्तूबर १७०० ई० में फिर अधिकार कर लिया ।१३०
शेर अफगन की मृत्यु के बाद 'चपत के पुत्रों का दमन करने का भार इटावा के फौजदार खैरन्देश खाँ को मौंपा गया । अप्रेल १७०१ में खैरन्देश खाँ ने कालिंजर पर आक्रमण किया। इस किले में उस समय छत्रसाल के कुटुम्बी-जन रह रहे थे । खैरन्देश सां
१२९ कालाबाग - सिरोंज से ५२ मोल उत्तर ।
के इरादे कॉलिंजर पर अधिकार कर छत्रसाल के स्ववियो को बदी कर लेने के थे । पर वह अपने प्रयत्नो में असफल रहा । इसी समय उसे घामोनी की भी फ़ौजदार बना दिया गया । १३१
अक्तूबर १७०३ ई० के लगभग छत्रसाल ने नीमा जी सिंधिया को मालवा पर आक्रमण करने के लिए उकसाया । पर फिरोज़ जग ने मराठो को सिरोज के निकट परास्त कर दिया और इसलिए मराठो के साथ मिलकर मालवा में लूटपाट करने की छत्रसाल की योजनाए विफल हो रही । फिरोज़ जग की इच्छा थी कि वह स्वय छत्रसाल के विरुद्ध एक चढाई करे, परन्तु धामोनी के निकट मराठो से छुट पुट मुठभेडो में हुई सैनिक क्षति और तदनतर वर्षा ऋतु के समीप आ जाने के कारण वह अपने विचारो को कार्यान्वित नही
कर सका । १३२
औरगज्रेव के राज्यकाल के अंतिम वर्ष में नवम्बर-दिसम्बर १७०६ ई० के लगभग छत्रसाल ने फिरोज़ जग के द्वारा सम्राट् से क्षमा याचना कर शाही सेना में सम्मिलित होने की इच्छा व्यक्त की । फिरोज जग ने औरगजेब से आग्रह किया कि छत्रसाल को राजा की उपाधि और पाँच हजार का मनसव तथा उनके पुत्र हिरदेनारायण (हिरदेसाह) और पदम सिंह को भी उचित मनसव दिये जावें । औरगजेव ने फिरोज जग के सुझावो को स्वीकार कर जनवरी १, १७०७ के दिन छत्रसाल को राजा की उपाधि और चार हजार का मनसब प्रदान किया । उनके पुत्र हिरदेसाह और पदम सिंह को भी क्रमश १ हजार ५ सदी जात १००० सवार और १ हजार ५ सदी जात ५०० सवार के मनसव दिये गये 1933 इसी ममय छत्रसाल स्वयं दक्षिण गये और गाही दरवार में पहुँचकर वे
१३१. अख० ४ अप्रेल १७०१, रतलाम राज्यवश से सर्वाधित जय० अख० की जिल्द ५० ६६, मा० आ० पृ० २६५ ।
कोई सुनिश्चित आधार के अभाव में डा० यदुनाथ सरकार ने छत्रसाल के यह मनसव पाने का समय सन् १७०५ ई० निश्चित किया था। परन्तु जनवरी १, १७०७ के अखवार से अब यह ज्ञात हो गया है कि छत्रसाल और उनके पुत्रों को ये मनसब उसो दिन प्रदान किये गये थे ।
( औरग० ५, पृ० ३६६ देखें)
औरगज़ेव की सेवा में उपस्थित हुए। तदनन्तर औरंगजेब की मृत्यु तक वहीं रहकर वे फिर स्वदेश लौट आये । १३४
१३४ मा० उ० २, पृ० ५१२ । छत्रसाल ने भी अपने एक पत्र (पन्ना० ५५ ) में न्दय के नवन १७४० या सन् १६८३ ई० के कुछ आगे-पीछे दक्षिण जाने और शाही मनसव पाने का उल्लेख किया है। इस पत्र में दिया गया संवत अवश्य ही गलत है ।
मा० उ० (२, पृ० ५१२) और मा० आ० (१० २३८, २५६) में छत्रसाल घं मनाग पे दुर्गाव्यक्ष बनने तथा लुत्फुल्ला माँ की मेना में शामिल होने के उल्लेख गलत है । यहा गन्नी से धनमाल राठोर को धनमाल बुंदेला समझ लिया गया है।
छत्रसाल और औरंगज़ेब के उत्तराधिकारी : ४
१. छत्रसाल और वहादुर शाह
सम्राट् औरगज़ेव की मृत्यु ( फरवरी २०, १७०७) के पश्चात् उनके उत्तराघिकारियो में जो मत्ता हस्तगत करने के लिए युद्ध हुए उनमें छत्रसाल ने किसी का भी पक्ष नही लिया। किंतु उनके राज्य की दक्षिणी पश्चिमी सीमायें सूवा मालवा के एकदम समीप थी । मालवा पर इस समय शाहजादा आजम का आधिपत्य था । वह अहमदनगर में अपने आपको सम्राट् घोषित कर चुका था । इसलिए छत्रसाल ने आज़म से शत्रुता मोल लेना उचित न समझ उसके पक्ष का समर्थन सा करते हुए एक सदेश उसे भेजा । शाहजादा आजम ने इससे प्रसन्न होकर छत्रसाल को एक फरमान भेजकर उन्हें ५ हजार जात और ५ हजार सवार का मनसवदार बना दिया और पनवारी तथा अन्य निकटवर्ती प्रदेशो पर उनका भविपत्य स्वीकार कर लिया। उसने छत्रसाल को तुरत सैन्य संग्रह कर मालवा की ओर वढने का आदेश भी दिया । और इवर इसी आशय का एक फरमान आज़म के विरोधी वहादुरशाह ने भी छत्रसाल को भेजा, जिसमें उन्हें तुरत ही अपने पुत्र को सैन्य सहित शाहजादा मुइजुद्दीन की सहायता के लिए रवाना करने के लिए कहा गया था । पर छत्रसाल ने शायद दोनो शाहजादो के आदेशो की ओर कोई ध्यान नही दिया । १
जाजऊ के युद्ध (जून ८, १७०७) के पश्चात् छत्रसाल ने वहादुरशाह की अधीनता स्वीकार कर लेने में ही कुशल समझी और मुनीम खाँ खानखाना को मध्यस्य बना कर सम्राट् से क्षमा प्राप्त कर ली । बहादुरशाह ने औरगजेब के समय में मिली उनको जागीरो और मनसव को यथावत् ही रखा और उन्हें दरबार में शीघ्र उपस्थित होने के आदेश भेजे । पर छत्रसाल ने किन्ही आगकाओं के कारण उनका पालन तत्काल नही किया । २
मई २०, १७०८ को सम्म्राट् बहादुरशाह जब कामवख्श के विरुद्ध दक्षिण की ओर जा रहा था तव हिरदेसाह और छयमाल के अन्य पुत्र दरवार में उपस्थित हुए। सम्राट ने
१ पत्ना० १०२ (आजम का फरमान, अप्रेल १४, १७०७), पन्ना० १०३ ( बहादुरशाह का फरमान जून ५, १७०७) ।
२ पन्ना० १०४ (वहादुरशाह का फरमान अक्तूवर १८, १७०७); छत्र०
उन्हें उचित मनमव देकर सम्मानित किया । छत्रसाल के एक और पुत्र जगत सिंह (जगतराज) ने जन २५, १७०८ को सम्राट से भेंट की। छत्रसाल के पुत्रो से भेंट कर वहादुरशाह बहुत प्रसन्न हुआ और छत्रमाल के प्रति उसका रहा सहा अविश्वास भी जाता रहा । इसलिए जुनाई २, १७०८ को उसने छत्रपाल को राजा की उपाधि देकर ५ हजार जात और ४ हजार का मनसव प्रदान किया। उनके पुत्रो और अन्य सत्रवियो को भी उचित मनसव मिले और छत्रमाल के ज्येष्ठ पुत्र को उन्हें दरवार में लाने के लिए भेजा गया। पर छत्रसाल शायद अभी भी सम्राट की ओर से शक्ति थे और सम्राट के सामने उपस्थित होने में उन्हें कुछ दुविधायें थो, इसलिए दरवार में आने का साहस उनका तब भी नही हुमा 13
कामत्ररुश के दमन के पश्चात् जव मार्च १७१० में वहादुरशाह उत्तरी भारत को लौट रहा, तव छत्रसाल ने उससे भेट कर लेना ही उचित समझा । छत्रसाल के पुत्र पदम सिंह ने मार्च १६, १७१० को उनके शाही छावनी के समीप आ पहुंचने की सूचना सम्राट को दी । सम्राट ने पदम सिंह को एक कलगी देकर छत्रसाल को शाही खेमो में लाने का आदेश दिया । २६ मार्च को जब वहादुरशाह के डेरे कालीसिंध (मालवा ) पर लगे हुए ये तव छत्रसाल के बिल्कुल समीप ही आ पहुचने की सूचना प्राप्त हुई । वख्शी-उल-मुल्क महावत खाँ को छत्रसाल की अगवानी के लिए भेजा गया। छत्रसाल ने दरवार में उपस्थित होकर सम्राट को १०० अशरफी, एक हजार रुपये, ५ छोटी बहू के और एक तलवार भेंट की । सम्राट ने प्रसन्न होकर उन्हें एक हाथी, तलवार और खिलअत देकर सम्मानित किया । कुछ ही दिनो पश्चात् २ अनेन को छ माल को फिर एक जडाऊ जमकर प्रदान किया गया और उनके ६ पुत्रो तथा अन्य मत्रवियों को भी तलवारें और खिनअतें दी गई । १२ अप्रेल को छत्रमाल ने पुन कोटा के समीप करतिया नामक स्थान पर सम्राट से भेंट की और १६ अशरफियों तथा एक छेटी वदूक नजर को । छत्रसाल शाही लश्कर के साथ ही रहे और २३ अप्रैल को उन्होंने फिर सम्राट को शाह मुलेमानी की दो तस्विभेंट की। छत्रसाल की इन कई भेंटो से स्पष्ट ही है कि सम्राट बहादुरशाह उनसे मिलकर बहुत ही प्रसन्न हुआ था । इमीलिए उत्तरी भारत की ओर इम प्रस्थान में उसने उन्हें वरावर अपने माय ही रखा । १४ मई के दिन छत्रपाल को एक जोडा कान की वालियाँ मम्राट की ओर से प्राप्त हुई । ४
कुछ ही दिनी पश्चात् जब वहादुरशाह अजमेर के समीप पहुचा तब उसे मई २०, १७१० को मरहिंद और थानेश्वर के पास मित्रों द्वारा उपद्रव किये जाने के समाचार
४ अस० मार्च, १६,२६, अप्रैल २, २३, मई १४, १७१०, जय० अस० बहादुर० ४, १० ३६, ६७, ८३, जय० अस० और० ३-२२ ( जिसमें वहादुरशाह के भी ३-४ वर्षों के अपवार है) पू० १४६, १५२, कामवर० २, पृ० ३४५ ।
छत्रपाल और औरगजब के उत्तराधिकारी
प्राप्त हुए । शाही सेनाओ को तुरत ही उस ओर बढने के आदेश दिये गये । छत्रसाल भी इन सेनाओं के साथ थे । उन्होने लोहागढ के घेरे में भाग लिया और नववर ३०, १७१० को इस्लाम खाँ के साथ मुनीम खाँ खानखाना के हरावली दस्तो का नेतृत्व ग्रहण कर युद्ध में अपूर्व वीरता का परिचय दिया । लोहागढ के घेरे की समाप्ति पर छत्रसाल को उनकी वीरता के लिए एक कलगी प्रदान की गई ।
लोहागढ के पतन के पश्चात् छत्रसाल स्वदेश लौट आये । उनके शुभचिंतक वजीर मुनीम खाँ खानखाना की मृत्यु फरवरी १६, १७११ को हो गई । सग्रट् ने छत्रसाल को इसकी सूचना दी और उन्हें पूर्ववत ही कृपापात्र वनाये रखने के आश्वासन भी दिये । उस समय मालवा में विद्रोहियो के उत्पात वढने ही जा रहे थे । गगा के नेतृत्व में वे वहाँ अशा ति उत्पन्न कर रहे थे। इसलिए वहादुरशाह ने छत्रसाल को उनके दमन में शाही अधिकारियो की सहायता करने के करने के लिए भी लिख भेजा । सम्राट् बहादुरशाह के राज्यकाल के अंतिम समय में भी छत्रसाल के सबंध दिल्ली दरवार से शांतिपूर्ण ही रहे ।'
२. छत्रसाल और फर्रुख सियर--मालवा में जयसिंह से सहयोग
वहादुरशाह की मृत्यु (फरवरी १७, १७१२) के पश्चात् उसका ज्येष्ठ पुत्र मुइजुद्दीन जहाँदारशाह के नाम से दिल्ली की गद्दी पर बैठा । सम्राट जहाँदरशाह और छत्रसाल के सबधो के विशेष विवरण उपलब्ध नहीं है । जव शाहजादा एजुद्दीन को फ़र्रुखसियर के विरुद्ध इलाहाबाद की ओर भेजा जा रहा था, तव जहाँदरशाह ने छत्रसाल को एक खिलअत तथा कुछ घोडे भेजकर शाही लदकर में सम्मिलित होने के आदेश दिये थे । परन्तु छत्रसाल
० ४१, ५६; छत्र० पू० १६२; इंदिन० १, पृ० ११३ - ११५; मा० उ० २, पृ० ५१२ । छत्रसाल के पत्रो और छत्र० में छत्रसाल लोहागढ़ के घेरे में भाग लेने का विवरण अत्यत ही अतिशयोक्तिपूर्ण होने के कारण विश्वसनीय नहीं है ।
६. पन्ना० १०६ (फरमान बहादुरशाह, मार्च २६, १७११); अख० अप्रेल ८, १७११, जय० अख० बहादुर० ५-६ (१) १० १३८ ।
७ अख० १८ अक्तूबर, २७ नवबर १७१२, जय० अख० जहाँदार० पू० २८५, ३१६ । जयसिंह को लिखे गये अगस्त २७, १७१२ ( जय० अख० मिश्रित (२) १७१२१४, १० ८५, ८६) के एक पत्र में भी छत्रसाल जहाँदारशाह के एक ऐसे ही आदेश का उल्लेख करते है, जिसमें उन्हें अपने एक पुत्र को एजुद्दीन को सहायता को भेजने के लिए कहा गया था। पर २७ अगस्त और फिर १८ अक्तूवर के इन दोनो ही पत्रो से यह स्पष्ट है कि छत्रसाल जहाँदरशाह का पक्ष लेने से हिचकते थे और वे निष्पक्ष रह कर अपनी स्थिति सुरक्षित रखना चाहते थे ।
ने इन आदेशो की ओर बिल्कुल ही ध्यान नही दिया क्योकि उस समय दिल्ली की राजनीतिक स्थिति डांवाडोल थी और फर्रुखसियर ने भी इवर अपनी शक्ति बहुत बढा ली थी । राज्यलक्ष्मी किसे वरण करेगी, यह पूर्ण रूप से अनिश्चित सा था । अस्तु, छत्रसाल ने किसी का भी पक्ष न लेकर निरापद रहना ही अच्छा समझा । किंतु जब आगरे के युद्ध ( दिसबर ३१, १७१२) में फर्रुखमियर ने जहाँदरशाह को पराजित कर राज्यसत्ता हस्तगत कर ली, तव छत्रपाल ने निप्पक्ष नीति त्याग कर नये सम्राट् को अपनी सेवायें अर्पित की जिससे फर्रुखसियर ने प्रसन्न होकर अगेल २७, १७१३ ई० के दिन छत्रसाल को ५ हजारी जात और ४ हजार सवार का मनसव प्रदान किया। जून १२, १७१३ को उन्हें फिर एक विशेष 16 खिलअत, जडाऊ तलवार और हाथी देकर सम्मानित किया गया और मालवा में शाही अधिकारियो को शाति स्थापित करने में सहयोग देने के आदेश दिये गये । मालवा में उस समय मराठो के आक्रमणो और अफगान विद्रोहियो के कारण अराजकता उत्पन्न हो गई थी।
दिसवर १७१३ के मध्य में जव मालवा के नये सूत्रेदार सवाई जयसिंह उस ओर प्रस्थान कर रहे थे, तब ११ दिसवर को दडवाहको को छत्रसाल को इसकी सूचना देकर उन्हें मालवा ले जाने के लिए भेजा गया। कुछ ही समय पश्चात फरवरी १०, १७१४ को छत्रसाल का मनसव भी वढाकर ६ हजारी जात और ४ हजार सवार कर दिया गया । इसी बीच में (जनवरी १७१४) छत्रसाल को हुमैन अली खाँ की सेना में सम्मिलित होने के आदेश मिने 199 हुमैन अली खाँ को उस समय अजमेर की ओर अजीतसिंह राठौर के विरुद्व भेजा जा रहा था। यह स्पष्ट नहीं है कि छत्रसाल हुसैन अली खाँ की मेना में सम्मिलित हुए या नहीं, पर अप्रैल माह के अंत में जब अजीतसिंह राठौर से सधि हो चुकी थी, तब वे मालवा में मराठो और अफगानो के विरुद्ध जयसिंह से सहयोग कर रहे थे। उनके मम्मिलित प्रयत्नो से मराठी के मालवा में छुटपुट आक्रमण रुक गये । इस समय छत्रसाल में मुगलमत्ता के प्रवल समयंक बन गये थे। उनकी यह तत्कालीन साम्राज्यनिष्ठा जयसिंह को मई, १७१४ ई० के मध्य में लिखे गये एक पत्र मे वडी ही स्पष्टता से झलकती है। वे लिखते
१० अस० दिसवर ११, १७१३, जय० अख० फर्रुस ० १-२ (२) पृ० २४५६ कामवर० २३० ४०३ । छत्रसाल को मनसव मिलने की यह तिथि इविन० २, पृ० २३० मॅभन से जनवरी २१, १७१४ घर गई है । यह मनसव सफर ६, २ जलूस को प्रदान किया गया था, जिसकी ईस्वी तिथि नई गणना के अनुसार फरवरी २१, १७१४ और पुरानी गणना के अनुसार फरवरी १०, १७१४ होगी ।
छत्रसाल और औरंगजेब के उत्तराधिकारी
है, "मराठे नर्मदा के इस ओर आना चाहते थे, लेकिन हमारी उपस्थिति के कारण अभी उसी किनारे पर ठहर गये है । जब तक हम अपनी सेनाओ द्वारा उनका मार्ग अवरुद्ध किये हुए है, तब तक वे नदी पार करने का माहन नहीं करेंगे । सम्राट के प्रताप से उन्हें पीछे खदेड दिया जायेगा । मै चौकन्ना हूँ आप भी चौकस रहिए क्योकि मराठे बहुत घर्त और छली है ।
इस प्रकार मालवा में कुछ समय के लिए मराठों के आक्रमण तो रुक गये, परंतु वहाँ अभी भी पूर्ण रूप से आतरिक शाति स्थापित नही हो सकी थी । अफगान और अन्य विद्रोही दल सम्मिलित रूप से मालवा मे उपद्रव कर रहे थे । सवाई जयसिंह का ध्यान मराठो की ओर वॅट जाने के कारण अफगानों के ये उपद्रव अधिक गंभीर रूप धारण करते जा रहे थे । महरौली १३ के जमीदार धनसिंह ने अफगानी से मिलकर अपनी जागीरी के निकटवर्ती प्रदेश में उपद्रव प्रारंभ कर दिये थे । ओरछा के राजा उदोतसिंह ने धनसिंह के उपद्रवो को रोकने के प्रयत्न किये । पर वह अधिक सफल न हो सका । तव उदोतसिंह ने उसके दमन के लिए सहायता की प्रार्थना की और छत्रसाल को उसकी सहायता के लिए भेजा गया । छत्रसाल में एक युद्ध में धनसिंह मारा गया और उसकी जागीर महरोली पर भी सभवत बुंदेलो ने अधिकार कर लिया । "
इवर दिलेर अफगान १७१५ ई० के प्रारंभ में दक्षिण पश्चिमी मालवा में फिर प्रवल हो उठा था । उसने मराठों से भी सवय स्थापित कर लिये थे । मराठो और अफगानो की संयुक्त मेनायें अब होशगाबाद में एकत्र हुई और नर्मदा को हडिया के पान पार कर उन्होने आसपास के प्रदेश को पादाकात कर दिया। लगभग इसी नमय (मार्च १७१५ ) धामोनी के पास भी अफगानो का उपद्रव बढ गया । वामोनी पर अभी छत्रसाल का अविकार था । धामोनी का नया नायव लुत्फुल्ला खाँ नियुक्त हुआ था। पर छत्रमाल ने उसे धामोनी पर अधिकार नहीं दिया । इसलिए वह भी क्रोधित होकर अपने ६ हजार सवारो के साथ अफगानों से जा मिला ॥१५
१३ महरौलो - सभवत नहीलो नामक गाँव जो चंदेरी से ११ मोल पश्चिम और सिरोज से ४८ मोल उत्तर पूर्व में हूँ ।
१५ अख० मार्च० २०, १७१५, जय० अरू० फर्रुख० ४ (१) पृ० ३६, रघुबीर० १० ६४ । छत्रसाल को घामोनी सितवर २, १७१४ ई० को दी गई थी। फरवरी १७, १७१५ को एक दूसरी सनद द्वारा भी धामोनी पर उनका अधिकार स्वीकार कर लिया
अब सवाई जयसिंह ने स्वय इन विद्रोहियो का दमन कर मालवा में शांति स्थापित करने का निश्चय किया । वे फरवरी १७१५ के अंत में उज्जैन से सारगपुर की ओर वढे ओर वामोनी के सौमान्त प्रदेश से होकर मार्च ३०, १७१५ को सिरोज पहुँच गये । यहाँ छत्रमाल और बुद्धसिंह हाडा भी अपनी सेना सहित उनसे आ मिले । बरकदाज़ खाँ और सिरोज का फोजदार आज़मकुची खाँ पहिले ही आ चुके थे । अफगानो का पीछा करती हुई शाही मेना १० अप्रैल को उनके पडाव से ४ मील पर आ पहुँची । अफगानो की सेना में लगभग १२००० घुडसवार थे । वे तीन भागो में विभक्त थे । स्वयं दिलेर खाँ उनका नेतृत्व कर रहा था। इस युद्ध में अफगान बुरी तरह पराजित हो कर भाग निकले। उनके लगभग २,००० घुडसवार मारे गये । शाही सेना के भी ५०० सैनिक गभीर रूप से घायल हुए और बहुत से खेत रहे । छत्रसाल का पुत्र मानसिंह भी इस युद्ध में काम आया । भागते हुए अफगनो का लगभग ८ मील तक पीछा किया गया। दूसरे दिन जयमंह ने आजमकुली खाँ को अफगानो का पीछा करने का आदेश दिया और वे स्वय आलमगीर पुर लौट आये जहाँ उन्होंने अफगान उपद्रत्रकारियों के घरो को ध्वस्त कर डाला । जयसिंह ने अप्रेल २८, १७१५ को एक बार फिर छत्रसाल और वुद्धसिंह हाडा के सहयोग से दिलेर अफग़ान को मदसौर के निकट पराजित किया । १ ६
जयसिंह जब अफगानों का दमन करने में व्यस्त थे तभी मराठे कान्होजी भोसले और दभङे के नेतृत्व में फिर नर्मदा पार कर मालवा में धुम पड़े। उन्होंने धार, माडू और उज्जैन के पास मनमानो लूटपाट कर चोय वसूल की । लोगो ने त्रस्त होकर उज्जैन में शरण ली । मराठे उज्जैन से ४ मील की दूरी पर आ पहुॅचे । स्थानीय जागीरदार और जमीदार भयभीत होकर अपनी जागीरें छोड अन्य सुरक्षित स्थानों में भाग गये थे । कुछ ने अपनी वचत के लिए मराठों को चीय भी दी। मराठी के इन उपद्रवो के कारण जयसिंह ने दिलेर अफगान को पूर्ण रूप से कुचल डालने की योजनाओं को स्थगित कर दिया और वे वेगपूर्वक १०,००० घुडमवारों को लेकर उज्जैन की ओर वढे, जहाँ वे मई २, १७१५ को आ
गया था । (जय० अख० फर्रुख० ४-७, १० ४५ ) ।
प्रारंभ मे हो छत्रमाल घामोनी प्राप्त करने के लिए लालायित ये । अब जब उन्हें उस पर अधिकार मिल गया था, तो वे उसे सहज ही में छोड देना नहीं चाहते थे । इसीलिए उन्होंने लफुला सौ का विरोध किया था ।
१६ अस० अप्रैल १०, ११, २८ और मई १५, १७१५ ई०, जय० अख० फस० ४-७ दृ० ११ १२, फर्रुख० ४ (१) पृ० ११८-११६, फरंस० मिश्रित ( ३ ) पू० ८५, पना० १०६ ( फरमान० मई १८, १७१५), रघुत्रो२० ५० ६४-६५ । फरमान के अनुसार छत्रमाल को उनकी सेवाओं के पुरस्कारम्वरूप तलवार, सिलमत आदि दो गई थी ।
छत्रसाल और और जेब के उत्तराधिकारी
पहुचे । जयसिंह की उपस्थिति से मराठे घवडा उठे और शीघ्र से शीघ्र नर्मदा पार कर सुरक्षित प्रदेश में पहुँचने की चिन्ता में अपनी लूटपाट का अधिकाश भाग छोड़ कर भाग निकले । जयसिंह को जब पता चला कि मराठे पिल्सुद के निकट नर्मदा को पार किया चाहते हैं, तो उन्होने नर्मदा के इसी पार उन्हें तहस नहस करने का निश्चय किया और वे शीघ्रता से अपनी सैन्यसहित वढने हुए १० मई को सूर्यास्त के समय पिल्सुद पहुँच गये । छत्रसाल बुंदेला और बुद्धसंह हाडा उनके साथ ही थे । निकटवर्ती प्रदेश के जमीदार भी अपनी सैनिक टुकडियो सहित उनसे आ मिले थे । मराठो से लगभग चार घटो तक भयकर युद्ध हुआ। जब मराठो के पैर उखडने को हुए और उन पर दवाव अधिक पडा तो उन्होंने पीछे हट कर पिल्सुद की पहाडियो में शरण ली। दूसरे दिन प्रात काल जयसिंह के सैनिको ने मराठो को और पीछे खदेड दिया और वे अपने घायलो तथा लूट के माल को पीछे छोड कर भाग निकले । जयसिंह ने इस प्रकार अप्रत्याशित सुगमता से मराठो पर विजय प्राप्त की। शाही सैनिको की प्रसन्नता का पार न था और वे विजयोत्सव मनाने में लग गये। छत्रसाल और बुद्धसिंह हाडा भी १२ मई को प्रात काल जयसिंह को बधाई देने आये और दोपहर तक उनके साथ रहे । '
जब सवाई जयसिंह मराठो को मालवा से निकालने के लिए उज्जैन की ओर वढे थे, तब से दिलेर अफगान के विरुद्ध सैनिक अभियान रुक से गये थे । जयसिंह के पीठ फेरते ही दिलेर अफग़ान ने पुन लूट खसोट प्रारंभ कर दी और बाबू जाट से मिल कर भेलसा के समीप उपद्रव आरंभ कर दिये । इसलिए जयसिंह और छत्रसाल को उस ओर जाकर अफगानो को दमन करने के आदेश दिये गये । दिलेर अफग्रान इसी वीच में काला की ओर बढ गया था और उसके पास के इलाकों को लूट पाट कर त्रस्त कर रहा था । धामोनी के समीप गढ बनेरा का जमीदार पृथीसिंह भी विद्रोहियो से मिल गया और वे मिल कर शाही प्रदेशो की लूट करने लगे। जयसिंह एक सेना लेकर विद्रोहियो के दमन को वढे । छत्रसाल का पुत्र हिरदेसाह और अन्य बुँदेला सामत भी उनसे आ मिले । इस सम्मिलित सेना ने विद्रोहियो को पराजित कर पृथीसिंह की जागीर गढ बनेरा पर अधिकार कर लिया । पर पृथीसिंह बच कर भाग निकला और अफगानो मे मिलकर धामीनी के प्रदेशो पर छुटपुट आक्रमण करता रहा जिन्हे हिरदेसाह अत में रोकने में सफल हुआ । १६
१७. अख० मई १७, १८, १७१५ आदि; जय० अख० फर्रुख० ४-७, ५०४६, ५२ । रघुवीर० पृ० ६४-६७ । पित्सुद महेश्वर से १६ मील पूर्व और नर्मदा से २ मोल
उत्तर ।
१८ कालाबाग-सिरोज से ५२ मील उत्तर ।
मराठो और अफगानो के विरुद्ध सवाई जयसिंह की सफलताओ ने दरबार में उनकी प्रतिष्ठा बहुत वढा दी थी । छत्रसाल की सेवाओ से भी फर्रुखसियर बहुत प्रसन्न हुआ था, इसलिए सितम्बर २५, १७१५ को जयसिंह को छत्रसाल और बुद्धसिंह हाडा सहित दरवार मे आने के संदेश भेजे गये।२९ जयसिह के मालवा छोडते ही मराठो ने फिर आक्रमण आरभ कर दिये । अपनी सूत्रेदारी के अतिम भाग (मार्च १७१६- नवबर १७१७) में जयसिंह जाटो के विरुद्ध सैनिक अभियान में व्यस्त थे और मालवा के शासन की देखरेख उनका नायव रूपराम धैवई कर रहा था । उत्तरी मालवा में दिलेर खाँ और बाबू जाट फिर सिर उठा रहे थे। उनके आतंक से मार्ग अरक्षित हो गये थे और अराजकता फैल गई थी । अप्रेल १७१६ में छत्रसाल के पुत्र देवनारायण ने इन विद्रोहियो से मोर्चा लिया और बाबू जाट को एक युद्ध में पराजित कर उसके तीन हाथी, दो तोपें और बहुत से घोडो तथा ऊँटो पर अधिकार कर लिया। इस मुठभेड में छत्रसाल का भतीजा मुकुन्दसिंह मारा गया । छत्रसाल के एक दूसरे पुत्र पदम सिंह ने भी विद्रोहियो के सीकरी नामक गाँव पर आक्रमण कर उनसे दो हजार रुपये वसूल किये । छत्रसाल के पुत्रो की सफलताओ से सम्राट बहुत प्रसत हुआ और वावू जाट पर विजय पाने के उपलक्ष में छत्रसाल को एक खिलअत भेजी गई 129
छत्रसाल दिसवर १७१६ में दरबार में उपस्थित होकर सम्राट के प्रति कृतज्ञताज्ञापन करना चाहते थे। पर इसी समय मालवा में मराठो के आक्रमण निरतर वढते जा रहे थे। इसलिए छत्रसाल से अपने स्थान पर अपने पुत्र को ही दरवार में भेजने को कहा गया और उन्हें स्वय तुरन ही मालवा में जाकर जयसिंह के नायव रूपराम धैवई की सहायता करने के आदेश दिये गये । जयसिंह को भी मालवा की विगडती हुई स्थिति से अवगत कराया गया और उन्हें स्पराम बैवई को तत्पर तथा चौकस रहने के निर्देशन भेजने की सलाह दी गई । उदयपुर के राणा मग्रामसिंह और पडोस के जमीदारो को भी रूपराम की सहायता करने के आदेश भेजे गये ।२२ लेकिन फिर भी मराठो के आक्रमणो को रोका नही जा सका । यहाँ तक कि एक युद्ध में नो उन्होने रूपराम चंबई और हिम्मतसिंह नामक एक अन्य उच्च शाही अधिकारी को भी बदी कर लिया और एक लबी रकम लेकर हो उन्हें छोडा । जयसिंह उस समय जाटों से युद्ध में मलग्न थे। इसलिए अमीन साँ को अब मालवा
२० पन्ना० ११० (फरमान, जून १०, १७१५ ), अख० सितवर २५, १७१५ जय० अस० फरंज० मिश्रित ३० १२३ ।
छत्रसाल और औरगजेव के उत्तराधिकारी
का सूत्रेदार नियक्त किया गया और उसे प्रान्त में शीघ्रातिशीघ्र शाति स्थापित करने के आदेश दिये गये । अमीन खाँ तुरत ही मालवा आ पहुँचा और उसने मराठो को रोकने को तैयारियां शीघ्रता से आरंभ कर दी। मराठो ने जब मार्च १७१८ मे सता के नेतृत्व में मालवा पर आक्रमण किया तब अमीन खाँ ने उन्हें बुरी तरह पराजित कर पीछे खदेड दिया और मालवा में शाति स्थापित की । मार्च १७१७ और जनवरी १७१८ के बीच में छत्रसाल बराबर शाही सैनानायको को दिलेर अफगान, जगरूप और गजसिंह आदि बागियों के दमन में योग देते रहे । २
फर्रुखमियर के सम्राट बनने के कुछ समय पश्चात से हो मैयद भाइयो से उसके सवव विगडते जा रहे थे । फर्रुखसियर छुने छुपे जैसे भी हो सके उनके प्रभाव से मुक्त होने की चेष्टा कर रहा था । पर अत में वह असफल हुआ और मैयद भाइयो ने क्रुद्ध होकर उसे फरवरी १८, १७१६ को पदच्युत कर दिया ।
३. छत्रसाल और मुहम्मदशाह
रफीउद्दारजात और रफीउद्दौला दोनो के लगभग ७ माह के अल्प शासन के पश्चात् सैयद भाइयो ने मुहम्मदशाह को सितवर १८, १७१९ को दिल्ली का सम्राट ने घोषित किया । फर्रुखमियर का पदच्युत होकर मुहम्मदशाह का सम्राट बनना सवाई जयसिंह और उनके सहायको बुद्धसिंह हाडा तथा इलाहावाद के सूत्रेदार छवीलेराम को अच्छा नही लगा । उनका उत्यान फलसियर के राज्य काल में ही उनी की कृपा से हुआ था । अस्तु उनका अप्रमन्न होना स्वाभाविक ही था । छत्रसाल मालवा के युद्धो में जयनिह और बुद्धसिंह हाडा के संपर्क में आये थे और विशेषकर जयसिंह की योग्यताओ से बहुत ही प्रभावित हुरे थे । वे जयसिंह के अव वट्टर समर्थक बन गये थे। और फिर फर्रुखसियर के काल में उनके भी मननव और जागीरों में वृद्धि हुई थी, इसलिए यह स्पष्ट ही था कि छत्रसाल की सहानुभूति फखसियर और सवाई जयसिंह की ओर ही थी । मुख्यत इनी कारण से सम्राट् मुहम्मदशाह और छत्रसाल में अधिक समय तक अच्छे सवध रहना असंभव सा ही था । ४
सम्राट मुहम्मदशाह के राज्य काल के प्रारंभ में ही नदी के वृद्धसिंह हाडा और इलाहाबाद के सूनेदार छवीलेगम को सैयद भाइयों ने अपने विरुद्ध होने के कारण विद्रोही घोषित कर दिया और उनके दमन के लिए नववर, १७१६ में शाही सेनाएँ भेजी। बुद्धसिंह | इन घटनाओ के कुछ ही समय बाद छत्रमुकुट नामक एक बुंदेला छत्रसाल का पक्ष छोडकर मुग़लो से जा मिला । एक सौ छब्बीस इसी वीच में शेर अफग़न ने परगना गागरौन भी छत्रसाल के पुत्र गरीवदास से छीन लिया। छत्रसाल के अधिकार में यह परगना पिछले कोई बीस वर्ष से था। शेर अफगन को इन सफलताओ के लिए बहुत पुरस्कृत किया गया । उसे राणोद तथा समीप के प्रदेश का फौजदार बना दिया गया और बहुत सी नकद रकम के साथ परगना गागरौन भी उसे दे दिया गया । एक सौ सत्ताईस अगले वर्ष अप्रेल चौबीस, एक हज़ार सात सौ ईशून्य को शेर अफगन ने झुना बरना के निकट छत्रसाल पर आक्रमण किया । इस मुठभेड में सात सौ बुँदेले मारे गये और मुगलो के भी कई सरदार काम आये । वुंदेलो का साहस जाता रहा और स्वय छत्रसाल भी घायल होकर भाग निकले । परन्तु इस युद्ध में वास्तविक विजय छत्रसाल की ही हुई । युद्ध में एक गोली लग जाने से शेर अफगन छत्रसाल के हाथ में पड़ गया और भागते समय वे उसे भी अपने साथ उठवा ले गये । शेर अफगन की हालत बिगडती देखकर छत्रसाल ने उसके पुत्र जाफर अली को लिखा, "तुम्हारे पिता में बहुत ही कम जीवन शेप है । उसे वापिस ले जाने के लिए अपने मेवक भेज दो।" पर शेर अफगन को ले जाने के लिए जाफर अली के सैनिक आये तब तक वह दूसरे लोक को प्रयाण कर चुका था । एक सौ अट्ठाईस इस घटना के कुछ ही बाद देवीसिह धंवेरा ने शाहाबाद के किले पर अ कार कर लिया । यह किला शेर अफगन के एक पुत्र अली कुली के अधिकार में था, पर वह तब इसे प्रोडकर कालावाग एक सौ उनतीस चला गया था । इस क़िले पर ग्वालियर के फौजदार जॉनिसार खाँ ने अक्तूबर एक हज़ार सात सौ ईशून्य में फिर अधिकार कर लिया ।एक सौ तीस शेर अफगन की मृत्यु के बाद 'चपत के पुत्रों का दमन करने का भार इटावा के फौजदार खैरन्देश खाँ को मौंपा गया । अप्रेल एक हज़ार सात सौ एक में खैरन्देश खाँ ने कालिंजर पर आक्रमण किया। इस किले में उस समय छत्रसाल के कुटुम्बी-जन रह रहे थे । खैरन्देश सां एक सौ उनतीस कालाबाग - सिरोंज से बावन मोल उत्तर । के इरादे कॉलिंजर पर अधिकार कर छत्रसाल के स्ववियो को बदी कर लेने के थे । पर वह अपने प्रयत्नो में असफल रहा । इसी समय उसे घामोनी की भी फ़ौजदार बना दिया गया । एक सौ इकतीस अक्तूबर एक हज़ार सात सौ तीन ईशून्य के लगभग छत्रसाल ने नीमा जी सिंधिया को मालवा पर आक्रमण करने के लिए उकसाया । पर फिरोज़ जग ने मराठो को सिरोज के निकट परास्त कर दिया और इसलिए मराठो के साथ मिलकर मालवा में लूटपाट करने की छत्रसाल की योजनाए विफल हो रही । फिरोज़ जग की इच्छा थी कि वह स्वय छत्रसाल के विरुद्ध एक चढाई करे, परन्तु धामोनी के निकट मराठो से छुट पुट मुठभेडो में हुई सैनिक क्षति और तदनतर वर्षा ऋतु के समीप आ जाने के कारण वह अपने विचारो को कार्यान्वित नही कर सका । एक सौ बत्तीस औरगज्रेव के राज्यकाल के अंतिम वर्ष में नवम्बर-दिसम्बर एक हज़ार सात सौ छः ईशून्य के लगभग छत्रसाल ने फिरोज़ जग के द्वारा सम्राट् से क्षमा याचना कर शाही सेना में सम्मिलित होने की इच्छा व्यक्त की । फिरोज जग ने औरगजेब से आग्रह किया कि छत्रसाल को राजा की उपाधि और पाँच हजार का मनसव तथा उनके पुत्र हिरदेनारायण और पदम सिंह को भी उचित मनसव दिये जावें । औरगजेव ने फिरोज जग के सुझावो को स्वीकार कर जनवरी एक, एक हज़ार सात सौ सात के दिन छत्रसाल को राजा की उपाधि और चार हजार का मनसब प्रदान किया । उनके पुत्र हिरदेसाह और पदम सिंह को भी क्रमश एक हजार पाँच सदी जात एक हज़ार सवार और एक हजार पाँच सदी जात पाँच सौ सवार के मनसव दिये गये एक हज़ार नौ सौ तैंतीस इसी ममय छत्रसाल स्वयं दक्षिण गये और गाही दरवार में पहुँचकर वे एक सौ इकतीस. अखशून्य चार अप्रेल एक हज़ार सात सौ एक, रतलाम राज्यवश से सर्वाधित जयशून्य अखशून्य की जिल्द पचास छयासठ, माशून्य आशून्य पृशून्य दो सौ पैंसठ । कोई सुनिश्चित आधार के अभाव में डाशून्य यदुनाथ सरकार ने छत्रसाल के यह मनसव पाने का समय सन् एक हज़ार सात सौ पाँच ईशून्य निश्चित किया था। परन्तु जनवरी एक, एक हज़ार सात सौ सात के अखवार से अब यह ज्ञात हो गया है कि छत्रसाल और उनके पुत्रों को ये मनसब उसो दिन प्रदान किये गये थे । औरगज़ेव की सेवा में उपस्थित हुए। तदनन्तर औरंगजेब की मृत्यु तक वहीं रहकर वे फिर स्वदेश लौट आये । एक सौ चौंतीस एक सौ चौंतीस माशून्य उशून्य दो, पृशून्य पाँच सौ बारह । छत्रसाल ने भी अपने एक पत्र में न्दय के नवन एक हज़ार सात सौ चालीस या सन् एक हज़ार छः सौ तिरासी ईशून्य के कुछ आगे-पीछे दक्षिण जाने और शाही मनसव पाने का उल्लेख किया है। इस पत्र में दिया गया संवत अवश्य ही गलत है । माशून्य उशून्य और माशून्य आशून्य में छत्रसाल घं मनाग पे दुर्गाव्यक्ष बनने तथा लुत्फुल्ला माँ की मेना में शामिल होने के उल्लेख गलत है । यहा गन्नी से धनमाल राठोर को धनमाल बुंदेला समझ लिया गया है। छत्रसाल और औरंगज़ेब के उत्तराधिकारी : चार एक. छत्रसाल और वहादुर शाह सम्राट् औरगज़ेव की मृत्यु के पश्चात् उनके उत्तराघिकारियो में जो मत्ता हस्तगत करने के लिए युद्ध हुए उनमें छत्रसाल ने किसी का भी पक्ष नही लिया। किंतु उनके राज्य की दक्षिणी पश्चिमी सीमायें सूवा मालवा के एकदम समीप थी । मालवा पर इस समय शाहजादा आजम का आधिपत्य था । वह अहमदनगर में अपने आपको सम्राट् घोषित कर चुका था । इसलिए छत्रसाल ने आज़म से शत्रुता मोल लेना उचित न समझ उसके पक्ष का समर्थन सा करते हुए एक सदेश उसे भेजा । शाहजादा आजम ने इससे प्रसन्न होकर छत्रसाल को एक फरमान भेजकर उन्हें पाँच हजार जात और पाँच हजार सवार का मनसवदार बना दिया और पनवारी तथा अन्य निकटवर्ती प्रदेशो पर उनका भविपत्य स्वीकार कर लिया। उसने छत्रसाल को तुरत सैन्य संग्रह कर मालवा की ओर वढने का आदेश भी दिया । और इवर इसी आशय का एक फरमान आज़म के विरोधी वहादुरशाह ने भी छत्रसाल को भेजा, जिसमें उन्हें तुरत ही अपने पुत्र को सैन्य सहित शाहजादा मुइजुद्दीन की सहायता के लिए रवाना करने के लिए कहा गया था । पर छत्रसाल ने शायद दोनो शाहजादो के आदेशो की ओर कोई ध्यान नही दिया । एक जाजऊ के युद्ध के पश्चात् छत्रसाल ने वहादुरशाह की अधीनता स्वीकार कर लेने में ही कुशल समझी और मुनीम खाँ खानखाना को मध्यस्य बना कर सम्राट् से क्षमा प्राप्त कर ली । बहादुरशाह ने औरगजेब के समय में मिली उनको जागीरो और मनसव को यथावत् ही रखा और उन्हें दरबार में शीघ्र उपस्थित होने के आदेश भेजे । पर छत्रसाल ने किन्ही आगकाओं के कारण उनका पालन तत्काल नही किया । दो मई बीस, एक हज़ार सात सौ आठ को सम्म्राट् बहादुरशाह जब कामवख्श के विरुद्ध दक्षिण की ओर जा रहा था तव हिरदेसाह और छयमाल के अन्य पुत्र दरवार में उपस्थित हुए। सम्राट ने एक पत्नाशून्य एक सौ दो , पन्नाशून्य एक सौ तीन । दो पन्नाशून्य एक सौ चार ; छत्रशून्य उन्हें उचित मनमव देकर सम्मानित किया । छत्रसाल के एक और पुत्र जगत सिंह ने जन पच्चीस, एक हज़ार सात सौ आठ को सम्राट से भेंट की। छत्रसाल के पुत्रो से भेंट कर वहादुरशाह बहुत प्रसन्न हुआ और छत्रमाल के प्रति उसका रहा सहा अविश्वास भी जाता रहा । इसलिए जुनाई दो, एक हज़ार सात सौ आठ को उसने छत्रपाल को राजा की उपाधि देकर पाँच हजार जात और चार हजार का मनसव प्रदान किया। उनके पुत्रो और अन्य सत्रवियो को भी उचित मनसव मिले और छत्रमाल के ज्येष्ठ पुत्र को उन्हें दरवार में लाने के लिए भेजा गया। पर छत्रसाल शायद अभी भी सम्राट की ओर से शक्ति थे और सम्राट के सामने उपस्थित होने में उन्हें कुछ दुविधायें थो, इसलिए दरवार में आने का साहस उनका तब भी नही हुमा तेरह कामत्ररुश के दमन के पश्चात् जव मार्च एक हज़ार सात सौ दस में वहादुरशाह उत्तरी भारत को लौट रहा, तव छत्रसाल ने उससे भेट कर लेना ही उचित समझा । छत्रसाल के पुत्र पदम सिंह ने मार्च सोलह, एक हज़ार सात सौ दस को उनके शाही छावनी के समीप आ पहुंचने की सूचना सम्राट को दी । सम्राट ने पदम सिंह को एक कलगी देकर छत्रसाल को शाही खेमो में लाने का आदेश दिया । छब्बीस मार्च को जब वहादुरशाह के डेरे कालीसिंध पर लगे हुए ये तव छत्रसाल के बिल्कुल समीप ही आ पहुचने की सूचना प्राप्त हुई । वख्शी-उल-मुल्क महावत खाँ को छत्रसाल की अगवानी के लिए भेजा गया। छत्रसाल ने दरवार में उपस्थित होकर सम्राट को एक सौ अशरफी, एक हजार रुपये, पाँच छोटी बहू के और एक तलवार भेंट की । सम्राट ने प्रसन्न होकर उन्हें एक हाथी, तलवार और खिलअत देकर सम्मानित किया । कुछ ही दिनो पश्चात् दो अनेन को छ माल को फिर एक जडाऊ जमकर प्रदान किया गया और उनके छः पुत्रो तथा अन्य मत्रवियों को भी तलवारें और खिनअतें दी गई । बारह अप्रेल को छत्रमाल ने पुन कोटा के समीप करतिया नामक स्थान पर सम्राट से भेंट की और सोलह अशरफियों तथा एक छेटी वदूक नजर को । छत्रसाल शाही लश्कर के साथ ही रहे और तेईस अप्रैल को उन्होंने फिर सम्राट को शाह मुलेमानी की दो तस्विभेंट की। छत्रसाल की इन कई भेंटो से स्पष्ट ही है कि सम्राट बहादुरशाह उनसे मिलकर बहुत ही प्रसन्न हुआ था । इमीलिए उत्तरी भारत की ओर इम प्रस्थान में उसने उन्हें वरावर अपने माय ही रखा । चौदह मई के दिन छत्रपाल को एक जोडा कान की वालियाँ मम्राट की ओर से प्राप्त हुई । चार कुछ ही दिनी पश्चात् जब वहादुरशाह अजमेर के समीप पहुचा तब उसे मई बीस, एक हज़ार सात सौ दस को मरहिंद और थानेश्वर के पास मित्रों द्वारा उपद्रव किये जाने के समाचार चार असशून्य मार्च, सोलह,छब्बीस, अप्रैल दो, तेईस, मई चौदह, एक हज़ार सात सौ दस, जयशून्य असशून्य बहादुरशून्य चार, दस छत्तीस, सरसठ, तिरासी, जयशून्य असशून्य औरशून्य तीन-बाईस पूशून्य एक सौ छियालीस, एक सौ बावन, कामवरशून्य दो, पृशून्य तीन सौ पैंतालीस । छत्रपाल और औरगजब के उत्तराधिकारी प्राप्त हुए । शाही सेनाओ को तुरत ही उस ओर बढने के आदेश दिये गये । छत्रसाल भी इन सेनाओं के साथ थे । उन्होने लोहागढ के घेरे में भाग लिया और नववर तीस, एक हज़ार सात सौ दस को इस्लाम खाँ के साथ मुनीम खाँ खानखाना के हरावली दस्तो का नेतृत्व ग्रहण कर युद्ध में अपूर्व वीरता का परिचय दिया । लोहागढ के घेरे की समाप्ति पर छत्रसाल को उनकी वीरता के लिए एक कलगी प्रदान की गई । लोहागढ के पतन के पश्चात् छत्रसाल स्वदेश लौट आये । उनके शुभचिंतक वजीर मुनीम खाँ खानखाना की मृत्यु फरवरी सोलह, एक हज़ार सात सौ ग्यारह को हो गई । सग्रट् ने छत्रसाल को इसकी सूचना दी और उन्हें पूर्ववत ही कृपापात्र वनाये रखने के आश्वासन भी दिये । उस समय मालवा में विद्रोहियो के उत्पात वढने ही जा रहे थे । गगा के नेतृत्व में वे वहाँ अशा ति उत्पन्न कर रहे थे। इसलिए वहादुरशाह ने छत्रसाल को उनके दमन में शाही अधिकारियो की सहायता करने के करने के लिए भी लिख भेजा । सम्राट् बहादुरशाह के राज्यकाल के अंतिम समय में भी छत्रसाल के सबंध दिल्ली दरवार से शांतिपूर्ण ही रहे ।' दो. छत्रसाल और फर्रुख सियर--मालवा में जयसिंह से सहयोग वहादुरशाह की मृत्यु के पश्चात् उसका ज्येष्ठ पुत्र मुइजुद्दीन जहाँदारशाह के नाम से दिल्ली की गद्दी पर बैठा । सम्राट जहाँदरशाह और छत्रसाल के सबधो के विशेष विवरण उपलब्ध नहीं है । जव शाहजादा एजुद्दीन को फ़र्रुखसियर के विरुद्ध इलाहाबाद की ओर भेजा जा रहा था, तव जहाँदरशाह ने छत्रसाल को एक खिलअत तथा कुछ घोडे भेजकर शाही लदकर में सम्मिलित होने के आदेश दिये थे । परन्तु छत्रसाल शून्य इकतालीस, छप्पन; छत्रशून्य पूशून्य एक सौ बासठ; इंदिनशून्य एक, पृशून्य एक सौ तेरह - एक सौ पंद्रह; माशून्य उशून्य दो, पृशून्य पाँच सौ बारह । छत्रसाल के पत्रो और छत्रशून्य में छत्रसाल लोहागढ़ के घेरे में भाग लेने का विवरण अत्यत ही अतिशयोक्तिपूर्ण होने के कारण विश्वसनीय नहीं है । छः. पन्नाशून्य एक सौ छः ; अखशून्य अप्रेल आठ, एक हज़ार सात सौ ग्यारह, जयशून्य अखशून्य बहादुरशून्य पाँच-छः दस एक सौ अड़तीस । सात अखशून्य अट्ठारह अक्तूबर, सत्ताईस नवबर एक हज़ार सात सौ बारह, जयशून्य अखशून्य जहाँदारशून्य पूशून्य दो सौ पचासी, तीन सौ सोलह । जयसिंह को लिखे गये अगस्त सत्ताईस, एक हज़ार सात सौ बारह एक लाख इकहत्तर हज़ार दो सौ चौदह, दस पचासी, छियासी) के एक पत्र में भी छत्रसाल जहाँदारशाह के एक ऐसे ही आदेश का उल्लेख करते है, जिसमें उन्हें अपने एक पुत्र को एजुद्दीन को सहायता को भेजने के लिए कहा गया था। पर सत्ताईस अगस्त और फिर अट्ठारह अक्तूवर के इन दोनो ही पत्रो से यह स्पष्ट है कि छत्रसाल जहाँदरशाह का पक्ष लेने से हिचकते थे और वे निष्पक्ष रह कर अपनी स्थिति सुरक्षित रखना चाहते थे । ने इन आदेशो की ओर बिल्कुल ही ध्यान नही दिया क्योकि उस समय दिल्ली की राजनीतिक स्थिति डांवाडोल थी और फर्रुखसियर ने भी इवर अपनी शक्ति बहुत बढा ली थी । राज्यलक्ष्मी किसे वरण करेगी, यह पूर्ण रूप से अनिश्चित सा था । अस्तु, छत्रसाल ने किसी का भी पक्ष न लेकर निरापद रहना ही अच्छा समझा । किंतु जब आगरे के युद्ध में फर्रुखमियर ने जहाँदरशाह को पराजित कर राज्यसत्ता हस्तगत कर ली, तव छत्रपाल ने निप्पक्ष नीति त्याग कर नये सम्राट् को अपनी सेवायें अर्पित की जिससे फर्रुखसियर ने प्रसन्न होकर अगेल सत्ताईस, एक हज़ार सात सौ तेरह ईशून्य के दिन छत्रसाल को पाँच हजारी जात और चार हजार सवार का मनसव प्रदान किया। जून बारह, एक हज़ार सात सौ तेरह को उन्हें फिर एक विशेष सोलह खिलअत, जडाऊ तलवार और हाथी देकर सम्मानित किया गया और मालवा में शाही अधिकारियो को शाति स्थापित करने में सहयोग देने के आदेश दिये गये । मालवा में उस समय मराठो के आक्रमणो और अफगान विद्रोहियो के कारण अराजकता उत्पन्न हो गई थी। दिसवर एक हज़ार सात सौ तेरह के मध्य में जव मालवा के नये सूत्रेदार सवाई जयसिंह उस ओर प्रस्थान कर रहे थे, तब ग्यारह दिसवर को दडवाहको को छत्रसाल को इसकी सूचना देकर उन्हें मालवा ले जाने के लिए भेजा गया। कुछ ही समय पश्चात फरवरी दस, एक हज़ार सात सौ चौदह को छत्रसाल का मनसव भी वढाकर छः हजारी जात और चार हजार सवार कर दिया गया । इसी बीच में छत्रसाल को हुमैन अली खाँ की सेना में सम्मिलित होने के आदेश मिने एक सौ निन्यानवे हुमैन अली खाँ को उस समय अजमेर की ओर अजीतसिंह राठौर के विरुद्व भेजा जा रहा था। यह स्पष्ट नहीं है कि छत्रसाल हुसैन अली खाँ की मेना में सम्मिलित हुए या नहीं, पर अप्रैल माह के अंत में जब अजीतसिंह राठौर से सधि हो चुकी थी, तब वे मालवा में मराठो और अफगानो के विरुद्ध जयसिंह से सहयोग कर रहे थे। उनके मम्मिलित प्रयत्नो से मराठी के मालवा में छुटपुट आक्रमण रुक गये । इस समय छत्रसाल में मुगलमत्ता के प्रवल समयंक बन गये थे। उनकी यह तत्कालीन साम्राज्यनिष्ठा जयसिंह को मई, एक हज़ार सात सौ चौदह ईशून्य के मध्य में लिखे गये एक पत्र मे वडी ही स्पष्टता से झलकती है। वे लिखते दस असशून्य दिसवर ग्यारह, एक हज़ार सात सौ तेरह, जयशून्य अखशून्य फर्रुस शून्य एक-दो पृशून्य दो हज़ार चार सौ छप्पन कामवरशून्य दो सौ तीस चार सौ तीन । छत्रसाल को मनसव मिलने की यह तिथि इविनशून्य दो, पृशून्य दो सौ तीस मॅभन से जनवरी इक्कीस, एक हज़ार सात सौ चौदह घर गई है । यह मनसव सफर छः, दो जलूस को प्रदान किया गया था, जिसकी ईस्वी तिथि नई गणना के अनुसार फरवरी इक्कीस, एक हज़ार सात सौ चौदह और पुरानी गणना के अनुसार फरवरी दस, एक हज़ार सात सौ चौदह होगी । छत्रसाल और औरंगजेब के उत्तराधिकारी है, "मराठे नर्मदा के इस ओर आना चाहते थे, लेकिन हमारी उपस्थिति के कारण अभी उसी किनारे पर ठहर गये है । जब तक हम अपनी सेनाओ द्वारा उनका मार्ग अवरुद्ध किये हुए है, तब तक वे नदी पार करने का माहन नहीं करेंगे । सम्राट के प्रताप से उन्हें पीछे खदेड दिया जायेगा । मै चौकन्ना हूँ आप भी चौकस रहिए क्योकि मराठे बहुत घर्त और छली है । इस प्रकार मालवा में कुछ समय के लिए मराठों के आक्रमण तो रुक गये, परंतु वहाँ अभी भी पूर्ण रूप से आतरिक शाति स्थापित नही हो सकी थी । अफगान और अन्य विद्रोही दल सम्मिलित रूप से मालवा मे उपद्रव कर रहे थे । सवाई जयसिंह का ध्यान मराठो की ओर वॅट जाने के कारण अफगानों के ये उपद्रव अधिक गंभीर रूप धारण करते जा रहे थे । महरौली तेरह के जमीदार धनसिंह ने अफगानी से मिलकर अपनी जागीरी के निकटवर्ती प्रदेश में उपद्रव प्रारंभ कर दिये थे । ओरछा के राजा उदोतसिंह ने धनसिंह के उपद्रवो को रोकने के प्रयत्न किये । पर वह अधिक सफल न हो सका । तव उदोतसिंह ने उसके दमन के लिए सहायता की प्रार्थना की और छत्रसाल को उसकी सहायता के लिए भेजा गया । छत्रसाल में एक युद्ध में धनसिंह मारा गया और उसकी जागीर महरोली पर भी सभवत बुंदेलो ने अधिकार कर लिया । " इवर दिलेर अफगान एक हज़ार सात सौ पंद्रह ईशून्य के प्रारंभ में दक्षिण पश्चिमी मालवा में फिर प्रवल हो उठा था । उसने मराठों से भी सवय स्थापित कर लिये थे । मराठो और अफगानो की संयुक्त मेनायें अब होशगाबाद में एकत्र हुई और नर्मदा को हडिया के पान पार कर उन्होने आसपास के प्रदेश को पादाकात कर दिया। लगभग इसी नमय धामोनी के पास भी अफगानो का उपद्रव बढ गया । वामोनी पर अभी छत्रसाल का अविकार था । धामोनी का नया नायव लुत्फुल्ला खाँ नियुक्त हुआ था। पर छत्रमाल ने उसे धामोनी पर अधिकार नहीं दिया । इसलिए वह भी क्रोधित होकर अपने छः हजार सवारो के साथ अफगानों से जा मिला ॥पंद्रह तेरह महरौलो - सभवत नहीलो नामक गाँव जो चंदेरी से ग्यारह मोल पश्चिम और सिरोज से अड़तालीस मोल उत्तर पूर्व में हूँ । पंद्रह अखशून्य मार्चशून्य बीस, एक हज़ार सात सौ पंद्रह, जयशून्य अरूशून्य फर्रुखशून्य चार पृशून्य छत्तीस, रघुबीरशून्य दस चौंसठ । छत्रसाल को घामोनी सितवर दो, एक हज़ार सात सौ चौदह ईशून्य को दी गई थी। फरवरी सत्रह, एक हज़ार सात सौ पंद्रह को एक दूसरी सनद द्वारा भी धामोनी पर उनका अधिकार स्वीकार कर लिया अब सवाई जयसिंह ने स्वय इन विद्रोहियो का दमन कर मालवा में शांति स्थापित करने का निश्चय किया । वे फरवरी एक हज़ार सात सौ पंद्रह के अंत में उज्जैन से सारगपुर की ओर वढे ओर वामोनी के सौमान्त प्रदेश से होकर मार्च तीस, एक हज़ार सात सौ पंद्रह को सिरोज पहुँच गये । यहाँ छत्रमाल और बुद्धसिंह हाडा भी अपनी सेना सहित उनसे आ मिले । बरकदाज़ खाँ और सिरोज का फोजदार आज़मकुची खाँ पहिले ही आ चुके थे । अफगानो का पीछा करती हुई शाही मेना दस अप्रैल को उनके पडाव से चार मील पर आ पहुँची । अफगानो की सेना में लगभग बारह हज़ार घुडसवार थे । वे तीन भागो में विभक्त थे । स्वयं दिलेर खाँ उनका नेतृत्व कर रहा था। इस युद्ध में अफगान बुरी तरह पराजित हो कर भाग निकले। उनके लगभग दो,शून्य घुडसवार मारे गये । शाही सेना के भी पाँच सौ सैनिक गभीर रूप से घायल हुए और बहुत से खेत रहे । छत्रसाल का पुत्र मानसिंह भी इस युद्ध में काम आया । भागते हुए अफगनो का लगभग आठ मील तक पीछा किया गया। दूसरे दिन जयमंह ने आजमकुली खाँ को अफगानो का पीछा करने का आदेश दिया और वे स्वय आलमगीर पुर लौट आये जहाँ उन्होंने अफगान उपद्रत्रकारियों के घरो को ध्वस्त कर डाला । जयसिंह ने अप्रेल अट्ठाईस, एक हज़ार सात सौ पंद्रह को एक बार फिर छत्रसाल और वुद्धसिंह हाडा के सहयोग से दिलेर अफग़ान को मदसौर के निकट पराजित किया । एक छः जयसिंह जब अफगानों का दमन करने में व्यस्त थे तभी मराठे कान्होजी भोसले और दभङे के नेतृत्व में फिर नर्मदा पार कर मालवा में धुम पड़े। उन्होंने धार, माडू और उज्जैन के पास मनमानो लूटपाट कर चोय वसूल की । लोगो ने त्रस्त होकर उज्जैन में शरण ली । मराठे उज्जैन से चार मील की दूरी पर आ पहुॅचे । स्थानीय जागीरदार और जमीदार भयभीत होकर अपनी जागीरें छोड अन्य सुरक्षित स्थानों में भाग गये थे । कुछ ने अपनी वचत के लिए मराठों को चीय भी दी। मराठी के इन उपद्रवो के कारण जयसिंह ने दिलेर अफगान को पूर्ण रूप से कुचल डालने की योजनाओं को स्थगित कर दिया और वे वेगपूर्वक दस,शून्य घुडमवारों को लेकर उज्जैन की ओर वढे, जहाँ वे मई दो, एक हज़ार सात सौ पंद्रह को आ गया था । । प्रारंभ मे हो छत्रमाल घामोनी प्राप्त करने के लिए लालायित ये । अब जब उन्हें उस पर अधिकार मिल गया था, तो वे उसे सहज ही में छोड देना नहीं चाहते थे । इसीलिए उन्होंने लफुला सौ का विरोध किया था । सोलह असशून्य अप्रैल दस, ग्यारह, अट्ठाईस और मई पंद्रह, एक हज़ार सात सौ पंद्रह ईशून्य, जयशून्य अखशून्य फसशून्य चार-सात दृशून्य ग्यारह बारह, फर्रुखशून्य चार पृशून्य एक सौ अट्ठारह-एक सौ सोलह, फरंसशून्य मिश्रित पूशून्य पचासी, पनाशून्य एक सौ छः , रघुत्रोबीस पचास चौंसठ-पैंसठ । फरमान के अनुसार छत्रमाल को उनकी सेवाओं के पुरस्कारम्वरूप तलवार, सिलमत आदि दो गई थी । छत्रसाल और और जेब के उत्तराधिकारी पहुचे । जयसिंह की उपस्थिति से मराठे घवडा उठे और शीघ्र से शीघ्र नर्मदा पार कर सुरक्षित प्रदेश में पहुँचने की चिन्ता में अपनी लूटपाट का अधिकाश भाग छोड़ कर भाग निकले । जयसिंह को जब पता चला कि मराठे पिल्सुद के निकट नर्मदा को पार किया चाहते हैं, तो उन्होने नर्मदा के इसी पार उन्हें तहस नहस करने का निश्चय किया और वे शीघ्रता से अपनी सैन्यसहित वढने हुए दस मई को सूर्यास्त के समय पिल्सुद पहुँच गये । छत्रसाल बुंदेला और बुद्धसंह हाडा उनके साथ ही थे । निकटवर्ती प्रदेश के जमीदार भी अपनी सैनिक टुकडियो सहित उनसे आ मिले थे । मराठो से लगभग चार घटो तक भयकर युद्ध हुआ। जब मराठो के पैर उखडने को हुए और उन पर दवाव अधिक पडा तो उन्होंने पीछे हट कर पिल्सुद की पहाडियो में शरण ली। दूसरे दिन प्रात काल जयसिंह के सैनिको ने मराठो को और पीछे खदेड दिया और वे अपने घायलो तथा लूट के माल को पीछे छोड कर भाग निकले । जयसिंह ने इस प्रकार अप्रत्याशित सुगमता से मराठो पर विजय प्राप्त की। शाही सैनिको की प्रसन्नता का पार न था और वे विजयोत्सव मनाने में लग गये। छत्रसाल और बुद्धसिंह हाडा भी बारह मई को प्रात काल जयसिंह को बधाई देने आये और दोपहर तक उनके साथ रहे । ' जब सवाई जयसिंह मराठो को मालवा से निकालने के लिए उज्जैन की ओर वढे थे, तब से दिलेर अफगान के विरुद्ध सैनिक अभियान रुक से गये थे । जयसिंह के पीठ फेरते ही दिलेर अफग़ान ने पुन लूट खसोट प्रारंभ कर दी और बाबू जाट से मिल कर भेलसा के समीप उपद्रव आरंभ कर दिये । इसलिए जयसिंह और छत्रसाल को उस ओर जाकर अफगानो को दमन करने के आदेश दिये गये । दिलेर अफग्रान इसी वीच में काला की ओर बढ गया था और उसके पास के इलाकों को लूट पाट कर त्रस्त कर रहा था । धामोनी के समीप गढ बनेरा का जमीदार पृथीसिंह भी विद्रोहियो से मिल गया और वे मिल कर शाही प्रदेशो की लूट करने लगे। जयसिंह एक सेना लेकर विद्रोहियो के दमन को वढे । छत्रसाल का पुत्र हिरदेसाह और अन्य बुँदेला सामत भी उनसे आ मिले । इस सम्मिलित सेना ने विद्रोहियो को पराजित कर पृथीसिंह की जागीर गढ बनेरा पर अधिकार कर लिया । पर पृथीसिंह बच कर भाग निकला और अफगानो मे मिलकर धामीनी के प्रदेशो पर छुटपुट आक्रमण करता रहा जिन्हे हिरदेसाह अत में रोकने में सफल हुआ । सोलह सत्रह. अखशून्य मई सत्रह, अट्ठारह, एक हज़ार सात सौ पंद्रह आदि; जयशून्य अखशून्य फर्रुखशून्य चार-सात, पाँच हज़ार छियालीस, बावन । रघुवीरशून्य पृशून्य चौंसठ-सरसठ । पित्सुद महेश्वर से सोलह मील पूर्व और नर्मदा से दो मोल उत्तर । अट्ठारह कालाबाग-सिरोज से बावन मील उत्तर । मराठो और अफगानो के विरुद्ध सवाई जयसिंह की सफलताओ ने दरबार में उनकी प्रतिष्ठा बहुत वढा दी थी । छत्रसाल की सेवाओ से भी फर्रुखसियर बहुत प्रसन्न हुआ था, इसलिए सितम्बर पच्चीस, एक हज़ार सात सौ पंद्रह को जयसिंह को छत्रसाल और बुद्धसिंह हाडा सहित दरवार मे आने के संदेश भेजे गये।उनतीस जयसिह के मालवा छोडते ही मराठो ने फिर आक्रमण आरभ कर दिये । अपनी सूत्रेदारी के अतिम भाग में जयसिंह जाटो के विरुद्ध सैनिक अभियान में व्यस्त थे और मालवा के शासन की देखरेख उनका नायव रूपराम धैवई कर रहा था । उत्तरी मालवा में दिलेर खाँ और बाबू जाट फिर सिर उठा रहे थे। उनके आतंक से मार्ग अरक्षित हो गये थे और अराजकता फैल गई थी । अप्रेल एक हज़ार सात सौ सोलह में छत्रसाल के पुत्र देवनारायण ने इन विद्रोहियो से मोर्चा लिया और बाबू जाट को एक युद्ध में पराजित कर उसके तीन हाथी, दो तोपें और बहुत से घोडो तथा ऊँटो पर अधिकार कर लिया। इस मुठभेड में छत्रसाल का भतीजा मुकुन्दसिंह मारा गया । छत्रसाल के एक दूसरे पुत्र पदम सिंह ने भी विद्रोहियो के सीकरी नामक गाँव पर आक्रमण कर उनसे दो हजार रुपये वसूल किये । छत्रसाल के पुत्रो की सफलताओ से सम्राट बहुत प्रसत हुआ और वावू जाट पर विजय पाने के उपलक्ष में छत्रसाल को एक खिलअत भेजी गई एक सौ उनतीस छत्रसाल दिसवर एक हज़ार सात सौ सोलह में दरबार में उपस्थित होकर सम्राट के प्रति कृतज्ञताज्ञापन करना चाहते थे। पर इसी समय मालवा में मराठो के आक्रमण निरतर वढते जा रहे थे। इसलिए छत्रसाल से अपने स्थान पर अपने पुत्र को ही दरवार में भेजने को कहा गया और उन्हें स्वय तुरन ही मालवा में जाकर जयसिंह के नायव रूपराम धैवई की सहायता करने के आदेश दिये गये । जयसिंह को भी मालवा की विगडती हुई स्थिति से अवगत कराया गया और उन्हें स्पराम बैवई को तत्पर तथा चौकस रहने के निर्देशन भेजने की सलाह दी गई । उदयपुर के राणा मग्रामसिंह और पडोस के जमीदारो को भी रूपराम की सहायता करने के आदेश भेजे गये ।बाईस लेकिन फिर भी मराठो के आक्रमणो को रोका नही जा सका । यहाँ तक कि एक युद्ध में नो उन्होने रूपराम चंबई और हिम्मतसिंह नामक एक अन्य उच्च शाही अधिकारी को भी बदी कर लिया और एक लबी रकम लेकर हो उन्हें छोडा । जयसिंह उस समय जाटों से युद्ध में मलग्न थे। इसलिए अमीन साँ को अब मालवा बीस पन्नाशून्य एक सौ दस , अखशून्य सितवर पच्चीस, एक हज़ार सात सौ पंद्रह जयशून्य असशून्य फरंजशून्य मिश्रित तीस एक सौ तेईस । छत्रसाल और औरगजेव के उत्तराधिकारी का सूत्रेदार नियक्त किया गया और उसे प्रान्त में शीघ्रातिशीघ्र शाति स्थापित करने के आदेश दिये गये । अमीन खाँ तुरत ही मालवा आ पहुँचा और उसने मराठो को रोकने को तैयारियां शीघ्रता से आरंभ कर दी। मराठो ने जब मार्च एक हज़ार सात सौ अट्ठारह मे सता के नेतृत्व में मालवा पर आक्रमण किया तब अमीन खाँ ने उन्हें बुरी तरह पराजित कर पीछे खदेड दिया और मालवा में शाति स्थापित की । मार्च एक हज़ार सात सौ सत्रह और जनवरी एक हज़ार सात सौ अट्ठारह के बीच में छत्रसाल बराबर शाही सैनानायको को दिलेर अफगान, जगरूप और गजसिंह आदि बागियों के दमन में योग देते रहे । दो फर्रुखमियर के सम्राट बनने के कुछ समय पश्चात से हो मैयद भाइयो से उसके सवव विगडते जा रहे थे । फर्रुखसियर छुने छुपे जैसे भी हो सके उनके प्रभाव से मुक्त होने की चेष्टा कर रहा था । पर अत में वह असफल हुआ और मैयद भाइयो ने क्रुद्ध होकर उसे फरवरी अट्ठारह, एक हज़ार सात सौ सोलह को पदच्युत कर दिया । तीन. छत्रसाल और मुहम्मदशाह रफीउद्दारजात और रफीउद्दौला दोनो के लगभग सात माह के अल्प शासन के पश्चात् सैयद भाइयो ने मुहम्मदशाह को सितवर अट्ठारह, एक हज़ार सात सौ उन्नीस को दिल्ली का सम्राट ने घोषित किया । फर्रुखमियर का पदच्युत होकर मुहम्मदशाह का सम्राट बनना सवाई जयसिंह और उनके सहायको बुद्धसिंह हाडा तथा इलाहावाद के सूत्रेदार छवीलेराम को अच्छा नही लगा । उनका उत्यान फलसियर के राज्य काल में ही उनी की कृपा से हुआ था । अस्तु उनका अप्रमन्न होना स्वाभाविक ही था । छत्रसाल मालवा के युद्धो में जयनिह और बुद्धसिंह हाडा के संपर्क में आये थे और विशेषकर जयसिंह की योग्यताओ से बहुत ही प्रभावित हुरे थे । वे जयसिंह के अव वट्टर समर्थक बन गये थे। और फिर फर्रुखसियर के काल में उनके भी मननव और जागीरों में वृद्धि हुई थी, इसलिए यह स्पष्ट ही था कि छत्रसाल की सहानुभूति फखसियर और सवाई जयसिंह की ओर ही थी । मुख्यत इनी कारण से सम्राट् मुहम्मदशाह और छत्रसाल में अधिक समय तक अच्छे सवध रहना असंभव सा ही था । चार सम्राट मुहम्मदशाह के राज्य काल के प्रारंभ में ही नदी के वृद्धसिंह हाडा और इलाहाबाद के सूनेदार छवीलेगम को सैयद भाइयों ने अपने विरुद्ध होने के कारण विद्रोही घोषित कर दिया और उनके दमन के लिए नववर, एक हज़ार सात सौ सोलह में शाही सेनाएँ भेजी। बुद्धसिंह |
फिल्म 'मैनी' की भारतीय प्रोड्यूसर सोनल सहगल के लिए ये पल किसी जश्न से कम नहीं है क्योंकि इस फिल्म ने 'मियामी इंटरनेशनल साइंस फिक्शन फिल्म फेस्टिवल' में 4 अवार्ड्स जीते हैं। यह पहली भारतीय साइंस फिक्शन फिल्म है। इस थ्रिलर फिल्म की लेखिका और प्रोड्यूसर सोनल सहगल हैं। साथ ही फिल्म को कोप्रोड्यूस क्रिस्टल पुड़ाने और मराना प्रोडक्शन ने किया है।
डायरेक्टर ट्रॉय कहते हैं, 'फिल्म 'मैनी' को सबसे ज्यादा नॉमिनेशन मिले और इसने सबसे ज्यादा अवार्ड अपने नाम किए। इस फेस्टिवल में 120 फिल्मों को चुना गया था जो 30 अलग-अलग देशों से आयी थीं। फिल्म को बेस्ट साइंस फिक्शन फिल्म रनर अप का अवार्ड मिला। बेस्ट सिनेमेटोग्राफी का अवार्ड गाटिस ग्रिनबर्ग्स को दिया गया। बेस्ट बैकग्राउंड स्कोर का अवार्ड नरेश कामथ और बेस्ट स्पोर्टिंग का अवार्ड एक्टर टोनी हॉकिन्स को मिला।
कंपोजर और सिंगर नरेश कामथ को मिला बेस्ट बैकग्राउंड स्कोर के लिए इंटरनेशनल अवार्ड। वे इस जीत के लिए बहुत खुश हैं। ये इस फिल्म के दो ओरिजनल साउंड ट्रैक के कंपोजर के साथ-साथ सिंगर भी हैं। नरेश कहते हैं, 'इस महामारी ने हमें काम को एक नए तरीके से करने की सीख दी है। फिल्म को बनाते समय मैं और फिल्म के डायरेक्टर ऑनलाइन ही बात करते थे। ऐसा पहली बार हुआ है जब स्टूडियो में बिना डायरेक्टर की मौजूदगी से इतना बड़ा काम हुआ और मुझे लगता है कि इसने काम भी किया'।
सोनल सेहगल कहती हैं, "समय की अनियमित्ता और समय का आकलन ठीक से न हो पाने की वजह से मैंने इतना बड़ा पल खो दिया। मुझे लगा कि ये फंक्शन दिन में होगा, बाद में जब मैं सोकर उठी तब कुछ मैसेज और फोन कॉल मिस हो गए थे। बाद में हमारे डायरेक्टर ट्रॉय बर्नर ने बताया कि हमें ढेर सारे अवार्ड मिले हैं और मेरे लिए यह सब एक सपने जैसा था। " कोविड के चलते मियामी फिल्म फेस्टिवल का आयोजन ऑनलाइन ही किया गया। स्क्रीनिंग फंक्शन फेस्टिवल की वेबसाइट पर ही हुआ, जहां 30 देशों से प्रतिभागी जुड़े थे।
फिल्म एक ऐसी भारतीय महिला के सफर की कहानी है जो लटविया जाती है, एक लेखक के तौर पर ऑटोबायोग्राफी लिखने। उसकी जिंदगी में काफी सारे मोड़ आते हैं, जब वे तीन प्यार की राहों में जाकर फस जाती है एक असल में, दूसरा जो उसकी कल्पना में है और तीसरा जो उसके साथ है यानि की आदमी, औरत और वो खुद। फिल्म की कहानी आपको बांधे रखती है। एक घर में जहां इसे कैद कर लिया जाता है और वहां वो बहुत ही बहादुरी से अपनी खुद की सच्चाई का सामना करती है। साथ ही उस कैद से भाग निकलने में कामयाब भी होती है। फिल्म 'मैनी' काफी फिल्म फेस्टिवल में जा चुकी है और सफलतापूर्वक दिखाई भी जा चुकी है। इसे बेस्ट फिल्म के लिए 'यूरोपियन सिनेमाटोग्राफी' का अवार्ड भी मिल चुका है।
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| फिल्म 'मैनी' की भारतीय प्रोड्यूसर सोनल सहगल के लिए ये पल किसी जश्न से कम नहीं है क्योंकि इस फिल्म ने 'मियामी इंटरनेशनल साइंस फिक्शन फिल्म फेस्टिवल' में चार अवार्ड्स जीते हैं। यह पहली भारतीय साइंस फिक्शन फिल्म है। इस थ्रिलर फिल्म की लेखिका और प्रोड्यूसर सोनल सहगल हैं। साथ ही फिल्म को कोप्रोड्यूस क्रिस्टल पुड़ाने और मराना प्रोडक्शन ने किया है। डायरेक्टर ट्रॉय कहते हैं, 'फिल्म 'मैनी' को सबसे ज्यादा नॉमिनेशन मिले और इसने सबसे ज्यादा अवार्ड अपने नाम किए। इस फेस्टिवल में एक सौ बीस फिल्मों को चुना गया था जो तीस अलग-अलग देशों से आयी थीं। फिल्म को बेस्ट साइंस फिक्शन फिल्म रनर अप का अवार्ड मिला। बेस्ट सिनेमेटोग्राफी का अवार्ड गाटिस ग्रिनबर्ग्स को दिया गया। बेस्ट बैकग्राउंड स्कोर का अवार्ड नरेश कामथ और बेस्ट स्पोर्टिंग का अवार्ड एक्टर टोनी हॉकिन्स को मिला। कंपोजर और सिंगर नरेश कामथ को मिला बेस्ट बैकग्राउंड स्कोर के लिए इंटरनेशनल अवार्ड। वे इस जीत के लिए बहुत खुश हैं। ये इस फिल्म के दो ओरिजनल साउंड ट्रैक के कंपोजर के साथ-साथ सिंगर भी हैं। नरेश कहते हैं, 'इस महामारी ने हमें काम को एक नए तरीके से करने की सीख दी है। फिल्म को बनाते समय मैं और फिल्म के डायरेक्टर ऑनलाइन ही बात करते थे। ऐसा पहली बार हुआ है जब स्टूडियो में बिना डायरेक्टर की मौजूदगी से इतना बड़ा काम हुआ और मुझे लगता है कि इसने काम भी किया'। सोनल सेहगल कहती हैं, "समय की अनियमित्ता और समय का आकलन ठीक से न हो पाने की वजह से मैंने इतना बड़ा पल खो दिया। मुझे लगा कि ये फंक्शन दिन में होगा, बाद में जब मैं सोकर उठी तब कुछ मैसेज और फोन कॉल मिस हो गए थे। बाद में हमारे डायरेक्टर ट्रॉय बर्नर ने बताया कि हमें ढेर सारे अवार्ड मिले हैं और मेरे लिए यह सब एक सपने जैसा था। " कोविड के चलते मियामी फिल्म फेस्टिवल का आयोजन ऑनलाइन ही किया गया। स्क्रीनिंग फंक्शन फेस्टिवल की वेबसाइट पर ही हुआ, जहां तीस देशों से प्रतिभागी जुड़े थे। फिल्म एक ऐसी भारतीय महिला के सफर की कहानी है जो लटविया जाती है, एक लेखक के तौर पर ऑटोबायोग्राफी लिखने। उसकी जिंदगी में काफी सारे मोड़ आते हैं, जब वे तीन प्यार की राहों में जाकर फस जाती है एक असल में, दूसरा जो उसकी कल्पना में है और तीसरा जो उसके साथ है यानि की आदमी, औरत और वो खुद। फिल्म की कहानी आपको बांधे रखती है। एक घर में जहां इसे कैद कर लिया जाता है और वहां वो बहुत ही बहादुरी से अपनी खुद की सच्चाई का सामना करती है। साथ ही उस कैद से भाग निकलने में कामयाब भी होती है। फिल्म 'मैनी' काफी फिल्म फेस्टिवल में जा चुकी है और सफलतापूर्वक दिखाई भी जा चुकी है। इसे बेस्ट फिल्म के लिए 'यूरोपियन सिनेमाटोग्राफी' का अवार्ड भी मिल चुका है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
चटगांव में खेले जा रहे पहले टेस्ट मैच के चौथे दिन के खेल के दौरान उमेश यादव ने नजमुल हुसैन शांतो को आउट कर भारत को दूसरी पारी में पहली सफलता दिलाई। शंटो ने जाकिर हसन के साथ मिलकर बांग्लादेश को अच्छी शुरूआत दी और पहले विकेट के लिए 119 रन जोड़े।
भारत को पहला विकेट 47वें ओवर की पहली गेंद पर मिला, जब उमेश की गेंद शांतो का बाहरी किनारा लेकर पहली स्लिप में खड़े विराट कोहली की तरफ गई। कोहली ने दाईं तरफ तरफ जाकर कैच लपकने की कोशिश की, लेकिन गेंद छिटक गई। जिसके बाद पास में ही खड़े विकेटकीपर ऋषभ पंत ने चतुराई दिखाई और दूसरे प्रयास में गेंद को लपक ली।
बता दें कि पहली बार ऐसा हुआ है जब बांग्लादेश ने भारत के खिलाफ टेस्ट मैच में पहले विकेट के लिए शतकीय साझेदारी की है।
| चटगांव में खेले जा रहे पहले टेस्ट मैच के चौथे दिन के खेल के दौरान उमेश यादव ने नजमुल हुसैन शांतो को आउट कर भारत को दूसरी पारी में पहली सफलता दिलाई। शंटो ने जाकिर हसन के साथ मिलकर बांग्लादेश को अच्छी शुरूआत दी और पहले विकेट के लिए एक सौ उन्नीस रन जोड़े। भारत को पहला विकेट सैंतालीसवें ओवर की पहली गेंद पर मिला, जब उमेश की गेंद शांतो का बाहरी किनारा लेकर पहली स्लिप में खड़े विराट कोहली की तरफ गई। कोहली ने दाईं तरफ तरफ जाकर कैच लपकने की कोशिश की, लेकिन गेंद छिटक गई। जिसके बाद पास में ही खड़े विकेटकीपर ऋषभ पंत ने चतुराई दिखाई और दूसरे प्रयास में गेंद को लपक ली। बता दें कि पहली बार ऐसा हुआ है जब बांग्लादेश ने भारत के खिलाफ टेस्ट मैच में पहले विकेट के लिए शतकीय साझेदारी की है। |
उत्तराखंड में ऊधमसिंह नगर जिले की गूलरभोज नगर पंचायत अध्यक्ष सीट पर मंगलवार को रीकाउंटिंग के बाद कांग्रेस प्रत्याशी रेवती देवी भारतीय जनता पार्टी की प्रत्याशी अनीता दुबे से 4 वोटों से हार गईं.
आपको बता दें कि री-काउंटिंग से पहले कांग्रेस प्रत्याशी रेवती देवी बीजेपी प्रत्याशी अनीता दुबे से 22 वोटों से जीत रही थीं. रीकाउंटिंग के बाद 4 वोटों से हारने वाली कांग्रेस प्रत्याशी रेवती देवी ने आरोप लगाया कि स्थानीय विधायक और राज्य के शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने री-काउंटिंग के माध्यम से उन्हें हरवाया है. साथ ही अब वे कोर्ट की शरण में जाने की बात कह रहीं हैं.
गूलरभोज नगर पंचायत अध्यक्ष पद की कांग्रेस प्रत्याशी रेवती देवी का कहना है कि उन्हें री-काउंटिंग में जानबूझकर हराया गया है. इसलिए अब वे न्याय के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगी.
गौरतलब हो कि स्थानीय निकाय चुनावों के परिणाम आने के साथ ही जीत के जश्न और हार की खुशी के साथ ही विवाद की भी खबरें आ रही हैं. हरिद्वार में भी नगर निगम मतगणना के दौरान जमकर हंगामा हुआ. बीजेपी और कांग्रेस प्रत्याशियो में पहले तो जमकर बहस हुई फिर धक्कामुक्की भी हुई. वार्ड संख्या 11 की टेबल पर यह सारा हंगामा हुआ. इस दौरान इस सारे हंगामे को कवर कर रहे मीडियाकर्मियों से पुलिस ने बदसलूकी की.
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सनी देओल की हीरोइन को जब ज्यादा पढ़ी-लिखी होना पड़ा भारी, एक्ट्रेस ने खूब सुने थे ताने, बोलीं- इंडस्ट्री में. .
| उत्तराखंड में ऊधमसिंह नगर जिले की गूलरभोज नगर पंचायत अध्यक्ष सीट पर मंगलवार को रीकाउंटिंग के बाद कांग्रेस प्रत्याशी रेवती देवी भारतीय जनता पार्टी की प्रत्याशी अनीता दुबे से चार वोटों से हार गईं. आपको बता दें कि री-काउंटिंग से पहले कांग्रेस प्रत्याशी रेवती देवी बीजेपी प्रत्याशी अनीता दुबे से बाईस वोटों से जीत रही थीं. रीकाउंटिंग के बाद चार वोटों से हारने वाली कांग्रेस प्रत्याशी रेवती देवी ने आरोप लगाया कि स्थानीय विधायक और राज्य के शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने री-काउंटिंग के माध्यम से उन्हें हरवाया है. साथ ही अब वे कोर्ट की शरण में जाने की बात कह रहीं हैं. गूलरभोज नगर पंचायत अध्यक्ष पद की कांग्रेस प्रत्याशी रेवती देवी का कहना है कि उन्हें री-काउंटिंग में जानबूझकर हराया गया है. इसलिए अब वे न्याय के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगी. गौरतलब हो कि स्थानीय निकाय चुनावों के परिणाम आने के साथ ही जीत के जश्न और हार की खुशी के साथ ही विवाद की भी खबरें आ रही हैं. हरिद्वार में भी नगर निगम मतगणना के दौरान जमकर हंगामा हुआ. बीजेपी और कांग्रेस प्रत्याशियो में पहले तो जमकर बहस हुई फिर धक्कामुक्की भी हुई. वार्ड संख्या ग्यारह की टेबल पर यह सारा हंगामा हुआ. इस दौरान इस सारे हंगामे को कवर कर रहे मीडियाकर्मियों से पुलिस ने बदसलूकी की. . सनी देओल की हीरोइन को जब ज्यादा पढ़ी-लिखी होना पड़ा भारी, एक्ट्रेस ने खूब सुने थे ताने, बोलीं- इंडस्ट्री में. . |
उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को अपने मुंंबई दौरे में उत्तरप्रदेश में विश्वस्तर की फिल्मसिटी निर्मित किए जाने की बात कही. योगी के इस बयान के बाद सियासत गर्म हो गई है. हालाकि फिल्म सिटी निर्माण होना देश की प्रगति में एक महत्वपूर्ण योगदान भी साबित हो सकता है. योगी ने कहीं भी ऐसा नहीं कहा है कि वे मुंबई की फिल्म सिटी को उत्तरप्रदेश के नोयडा में ले जा रहे है. बल्कि उन्होंने उत्तरप्रदेश मेें नये रूप से फिल्म सिटी के निर्माण की बात कहीं है. मुख्य बात तो यह है कि मुंबई यह फिल्मसिटी की जननी है. एक माता के अलग-अलग पुत्र यदि अन्यत्र जाकर नये रूप से कुछ सृजन करते है तो वे माता के अस्तित्व को चुनौती नहीं देते बल्कि माता के अस्तित्व को अपनी योग्यता के बल पर चार चाँद लगा देते है. फिल्मसिटी के मामले में भी यही कहा जा सकता है. मुंबई यह बालीवुड की जननी रही है. उसका अस्तित्व वहीं रहेगा. भले ही उत्तरप्रदेश सहित अनेक राज्यों में फिल्म सिटी का निर्माण हो. इस हालत में यदि कोई योगी के इस निर्णय का विरोध करता है या आपत्ति जताता है तो वह अपनी एक संकुचित मानसिकता का परिचय देता है. सर्वमान्य सिध्दांत है कि जितने चिराग जलाओं उतनी रोशनी होगी. भारत में फिल्मसिटी का उद्योग बहुत पुराना है. मुंबई में सभी प्रांत के कलाकार इस फिल्मसिटी का हिस्सा हैे. भले ही फिल्मसिटी की रचना मुंबई की हो. लेकिन इसमें अधिकांश कलाकार उत्तरप्रदेश के ही है. महानायक अमिताभ बच्चन स्वयं प्रयागराज निवासी है. इसी तरह अनेक गायक,गीतकार, संगीतकार का भी उत्तरप्रदेश से तालुक रखते हैे,ऐसे में विभिन्न प्रांतों की संस्कृति से जुड़ी फिल्म सिटी है. इसलिए फिल्म सिटी का विकेन्द्रीकरण किसी क्षेत्र के उद्योग को समेटने की प्रक्रिया नहीं है बल्कि उद्योग के विस्तार का कदम है. निश्चित रूप से इससे संबंधित क्षेत्र के कालाकारों को प्रोत्साहन मिलेगा,ऐसा नहीं की पहलीबार फिल्म सिटी का विकेन्द्रीकरण किया गया हो. इससे पूर्व भी हैदराबाद में रामोजी फिल्म सिटी आरंभ हुई थी. दक्षिण भारत में तो अनेक फिल्में निर्माण हो रही है.
भारत जैसे विकसनशील देश में किसी एक दायरे में सिमटकर नहीं रहा जा सकता. उसके लिए अलग-अलग जगह पर विस्तार की रूपरेखा तय करनी होगी. महाराष्ट्र में फिल्म उद्योग का व्यापक कारोबार है. उसमें हजारों लोग जुड़े हुए है. इस हालत में फिल्मसिटी को यहां से हटाने का कोई कारण नहीं हो सकता है. लेकिन उसका विस्तार तो किया जा सकता है. खासकर उत्तरप्रदेश मेें वहां के मुख्यमंत्री द्वारा विश्वस्तर की फिल्म सिटी बनाने की बात कहीं जा रही है. इससे देश की गरिमा को भी बढ़ावा मिलेगा. स्थानीय कलाकारों को योग्य अवसर भी प्राप्त होंगे. इसलिए मुख्यमंत्री आदित्यनाथ द्वारा यदि उत्तरप्रदेश में विश्वस्तर की फिल्म ािसटी के निर्माण का बहुमान मिलेगा. इसके साथ ही उत्तरप्रदेश में जहां जातिगत राजनीति का भी सफाया हो सकता है. फिल्म के माध्यम से चाहे वह अपने संदेश ओरो तक दे सकते है. इसलिए फिल्म सिटी के लिए तत्काल प्रयास भी आरंभ करने होगे. मुंबई के गोरेगांव में जो फिल्म सिटी है उसकी भारी दुर्दशा हो रही है. उसके सुधार की अति आवश्यकता है.
कुल मिलाकर योगी आदित्यनाथ द्वारा उत्तर प्रदेश में विश्वस्तर की फिल्म सिटी आरंभ करने की जो बात कहीं जा रही है. उससे सही स्वरूप में देश के विकास में योगदान मिलेगा. वर्तमान में फिल्म उद्योग नष्ट होने की कगार पर है. लॉकडाऊन के बाद से नई फिल्मों का आना लगभग रूका हुआ है. इससे मनोरंजन जगत पर असर हुआ है. फिल्म उद्योग लगभग ाठप्प सा चल रहा है. हालांकि अनलॉक प्रक्रिया में सिनेमा उद्योग को अनुमति दी गई है. लेकिन दर्शकों की कमी आज भी पायी जा रही है. इस हालत में जरूरी है कि फिल्म उद्योग को बढ़ावा दिया जाए. यह सब तभी संभव है जब इस उद्योग को पोषक वातावरण मिले. अभिप्राय यह उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा की जानेवाली घोषणाा सराहनीय है तथा अनेक कलाकारों को उससे राहत मिल रही है. जरूरी है कि नये रूप से यदि कोई फिल्म सिटी निर्मित होती है तो वह सभी के लिए योग्य ही कही जायेगी. इसके लिए जरूरी है कि प्रतिस्पर्धा अच्छे से अच्छे निर्माण की हो. यदि आदित्यनाथ यह कहते है कि वे उत्त्तरप्रदेश में नई फिल्म सिटी का निर्माण कर रहे है तो उसका स्वागत होना चाहिए. क्योंकि उनके द्वारा निर्मित की जानेवाली फिल्मसिटी इस देश की भूमि में ही बन रही है. इससे देश के उद्योग में बढ़ोतरी होगी. इसका विरोध करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है. बल्कि इस लक्ष्य का स्वागत किया जाना चाहिए. यथाशीघ्र इस फिल्म सिटी का कार्य आरंभ हो तथा उसे पूर्ण किया जा सके. एवं नये कलाकारों को इसका लाभ मिले. इस बारे में हर कोई चाहता है. अतः योगी आदित्यनाथ की घोषणा विकास के लिए पूरक ही साबित होगी.
| उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को अपने मुंंबई दौरे में उत्तरप्रदेश में विश्वस्तर की फिल्मसिटी निर्मित किए जाने की बात कही. योगी के इस बयान के बाद सियासत गर्म हो गई है. हालाकि फिल्म सिटी निर्माण होना देश की प्रगति में एक महत्वपूर्ण योगदान भी साबित हो सकता है. योगी ने कहीं भी ऐसा नहीं कहा है कि वे मुंबई की फिल्म सिटी को उत्तरप्रदेश के नोयडा में ले जा रहे है. बल्कि उन्होंने उत्तरप्रदेश मेें नये रूप से फिल्म सिटी के निर्माण की बात कहीं है. मुख्य बात तो यह है कि मुंबई यह फिल्मसिटी की जननी है. एक माता के अलग-अलग पुत्र यदि अन्यत्र जाकर नये रूप से कुछ सृजन करते है तो वे माता के अस्तित्व को चुनौती नहीं देते बल्कि माता के अस्तित्व को अपनी योग्यता के बल पर चार चाँद लगा देते है. फिल्मसिटी के मामले में भी यही कहा जा सकता है. मुंबई यह बालीवुड की जननी रही है. उसका अस्तित्व वहीं रहेगा. भले ही उत्तरप्रदेश सहित अनेक राज्यों में फिल्म सिटी का निर्माण हो. इस हालत में यदि कोई योगी के इस निर्णय का विरोध करता है या आपत्ति जताता है तो वह अपनी एक संकुचित मानसिकता का परिचय देता है. सर्वमान्य सिध्दांत है कि जितने चिराग जलाओं उतनी रोशनी होगी. भारत में फिल्मसिटी का उद्योग बहुत पुराना है. मुंबई में सभी प्रांत के कलाकार इस फिल्मसिटी का हिस्सा हैे. भले ही फिल्मसिटी की रचना मुंबई की हो. लेकिन इसमें अधिकांश कलाकार उत्तरप्रदेश के ही है. महानायक अमिताभ बच्चन स्वयं प्रयागराज निवासी है. इसी तरह अनेक गायक,गीतकार, संगीतकार का भी उत्तरप्रदेश से तालुक रखते हैे,ऐसे में विभिन्न प्रांतों की संस्कृति से जुड़ी फिल्म सिटी है. इसलिए फिल्म सिटी का विकेन्द्रीकरण किसी क्षेत्र के उद्योग को समेटने की प्रक्रिया नहीं है बल्कि उद्योग के विस्तार का कदम है. निश्चित रूप से इससे संबंधित क्षेत्र के कालाकारों को प्रोत्साहन मिलेगा,ऐसा नहीं की पहलीबार फिल्म सिटी का विकेन्द्रीकरण किया गया हो. इससे पूर्व भी हैदराबाद में रामोजी फिल्म सिटी आरंभ हुई थी. दक्षिण भारत में तो अनेक फिल्में निर्माण हो रही है. भारत जैसे विकसनशील देश में किसी एक दायरे में सिमटकर नहीं रहा जा सकता. उसके लिए अलग-अलग जगह पर विस्तार की रूपरेखा तय करनी होगी. महाराष्ट्र में फिल्म उद्योग का व्यापक कारोबार है. उसमें हजारों लोग जुड़े हुए है. इस हालत में फिल्मसिटी को यहां से हटाने का कोई कारण नहीं हो सकता है. लेकिन उसका विस्तार तो किया जा सकता है. खासकर उत्तरप्रदेश मेें वहां के मुख्यमंत्री द्वारा विश्वस्तर की फिल्म सिटी बनाने की बात कहीं जा रही है. इससे देश की गरिमा को भी बढ़ावा मिलेगा. स्थानीय कलाकारों को योग्य अवसर भी प्राप्त होंगे. इसलिए मुख्यमंत्री आदित्यनाथ द्वारा यदि उत्तरप्रदेश में विश्वस्तर की फिल्म ािसटी के निर्माण का बहुमान मिलेगा. इसके साथ ही उत्तरप्रदेश में जहां जातिगत राजनीति का भी सफाया हो सकता है. फिल्म के माध्यम से चाहे वह अपने संदेश ओरो तक दे सकते है. इसलिए फिल्म सिटी के लिए तत्काल प्रयास भी आरंभ करने होगे. मुंबई के गोरेगांव में जो फिल्म सिटी है उसकी भारी दुर्दशा हो रही है. उसके सुधार की अति आवश्यकता है. कुल मिलाकर योगी आदित्यनाथ द्वारा उत्तर प्रदेश में विश्वस्तर की फिल्म सिटी आरंभ करने की जो बात कहीं जा रही है. उससे सही स्वरूप में देश के विकास में योगदान मिलेगा. वर्तमान में फिल्म उद्योग नष्ट होने की कगार पर है. लॉकडाऊन के बाद से नई फिल्मों का आना लगभग रूका हुआ है. इससे मनोरंजन जगत पर असर हुआ है. फिल्म उद्योग लगभग ाठप्प सा चल रहा है. हालांकि अनलॉक प्रक्रिया में सिनेमा उद्योग को अनुमति दी गई है. लेकिन दर्शकों की कमी आज भी पायी जा रही है. इस हालत में जरूरी है कि फिल्म उद्योग को बढ़ावा दिया जाए. यह सब तभी संभव है जब इस उद्योग को पोषक वातावरण मिले. अभिप्राय यह उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा की जानेवाली घोषणाा सराहनीय है तथा अनेक कलाकारों को उससे राहत मिल रही है. जरूरी है कि नये रूप से यदि कोई फिल्म सिटी निर्मित होती है तो वह सभी के लिए योग्य ही कही जायेगी. इसके लिए जरूरी है कि प्रतिस्पर्धा अच्छे से अच्छे निर्माण की हो. यदि आदित्यनाथ यह कहते है कि वे उत्त्तरप्रदेश में नई फिल्म सिटी का निर्माण कर रहे है तो उसका स्वागत होना चाहिए. क्योंकि उनके द्वारा निर्मित की जानेवाली फिल्मसिटी इस देश की भूमि में ही बन रही है. इससे देश के उद्योग में बढ़ोतरी होगी. इसका विरोध करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है. बल्कि इस लक्ष्य का स्वागत किया जाना चाहिए. यथाशीघ्र इस फिल्म सिटी का कार्य आरंभ हो तथा उसे पूर्ण किया जा सके. एवं नये कलाकारों को इसका लाभ मिले. इस बारे में हर कोई चाहता है. अतः योगी आदित्यनाथ की घोषणा विकास के लिए पूरक ही साबित होगी. |
नोएडाः एम3एम इंडिया ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि एम3एम ने पानीपत-हरियाणा में अत्याधुनिक सेल्फ-सस्टेनेबल टाउनशिप बनाने के लिए 350 एकड़ जमीन खरीदी है। एम्बियंस से खरीदी गई भूमि पर आवश्यक सरकारी शुल्क सहित अंततः एम3एम के 1500 करोड़ रुपये खर्च होंगे और कंपनी इसके विकास के लिए 1200 करोड़ रुपये का और निवेश करेगी। कुल निवेश अंततः 2700 करोड़ रुपये होगा जो भारत में हाल के दिनों में सबसे बड़ा सौदा है। एम3एम को पानीपत परियोजना से 5000 करोड़ रुपये की आमदनी की उम्मीद है।
पंकज बंसल, प्रमोटर, एम3एम इंडिया ने बताया, "प्रोजेक्ट में रेजिडेंशियल, रिटेल, एक्सपेंडेबल विला, फ्लोर, इंफ्रास्ट्रक्चर, लैंडस्केप, स्कूल, मंदिर और सोशल क्लब समेत सभी सेगमेंट शामिल होंगे। आवासीय इकाइयों के भूखंड का आकार 300, 500, 750 और 1000 वर्ग गज का होगा। परियोजनाओं में ग्रीन बेल्ट, पार्क, वॉटरपार्क, झूले सहित अन्य सुविधाएं भी होंगी।
"एम3एम फरवरी में परियोजना शुरू करेगा और इसे अगले 15-18 महीनों में डिलीवर किया जाएगा क्योंकि यह केवल बुनियादी ढांचा विकास है। पानीपत में रिटेल सेगमेंट पूरी तरह से एम3एम के स्वामित्व में होगा।
इसके अलावा, नोएडा परियोजना के बारे में बात करते हुए, पंकज बंसल ने कहा, "हम यहां नोएडा के बाजार में विश्वास बनाने और ग्राहकों एवं निवेशकों का विश्वास हासिल करने के लिए हैं। भूमि लागत सहित 2,700 करोड़ रुपये के निवेश के साथ नोएडा में हमारा प्रवेश एक मिक्स्ड यूज रियल्टी परियोजना होगी जिसमें आवास, रिटेल और सर्विस अपार्टमेंट शामिल होंगे और इससे 10,000+ नौकरियां और आजीविका के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। 13 एकड़ में फैली, 4 मिलियन वर्ग फुट से अधिक बिक्री योग्य क्षेत्र के साथ, इस परियोजना की आय 6000 करोड़ रुपये होगी। हम डेवलपर हैं और हम केवल एलएंडटी, शापूरजी, टाटा जैसे ए-ग्रेड कांट्रेक्टर के साथ काम करते हैं। हमारा ट्रम्प टॉवर शापूरजी द्वारा बनाया जा रहा है, और एम3एम लैटीट्यूड टाटा द्वारा बनाया गया है, और गोलेस्टेट एलएंडटी द्वारा । कंपनी का ध्यान नोएडा में ग्रेड-ए लैंड पार्सल पर भी है, और केवल 10 एकड़ से अधिक के भूखंडों पर विचार करेगी। कंपनी जल्द ही दो अन्य जमीन सौदों को भी पूरा करने की कोशिश कर रही है जो करीब 100 करोड़ रुपये के होंगे जो 1300-1400 करोड़ के होंगे। इसके साथ, एम3एम का लक्ष्य एक वर्ष में 10 मिलियन वर्ग फुट का पोर्टफोलियो बनाना है, जिसमें 2 बिलियन अमरीकी डालर की टॉपलाइन है, जो लगभग 16000 करोड़ रुपये है।
कंपनी की गुरुग्राम में 42 प्रोजेक्ट हैं जिनमें लगभग 6 मिलियन वर्ग फुट रिटेल स्पेस और लगभग 28 मिलियन वर्ग फुट संपूर्ण वर्ग फूट है। एम3एम इंडिया द्वारा 2019 से पूर्व शुरू की गई सभी प्रोजेक्ट की डिलीवरी पहले ही हो चुकी है।
| नोएडाः एमतीनएम इंडिया ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि एमतीनएम ने पानीपत-हरियाणा में अत्याधुनिक सेल्फ-सस्टेनेबल टाउनशिप बनाने के लिए तीन सौ पचास एकड़ जमीन खरीदी है। एम्बियंस से खरीदी गई भूमि पर आवश्यक सरकारी शुल्क सहित अंततः एमतीनएम के एक हज़ार पाँच सौ करोड़ रुपये खर्च होंगे और कंपनी इसके विकास के लिए एक हज़ार दो सौ करोड़ रुपये का और निवेश करेगी। कुल निवेश अंततः दो हज़ार सात सौ करोड़ रुपये होगा जो भारत में हाल के दिनों में सबसे बड़ा सौदा है। एमतीनएम को पानीपत परियोजना से पाँच हज़ार करोड़ रुपये की आमदनी की उम्मीद है। पंकज बंसल, प्रमोटर, एमतीनएम इंडिया ने बताया, "प्रोजेक्ट में रेजिडेंशियल, रिटेल, एक्सपेंडेबल विला, फ्लोर, इंफ्रास्ट्रक्चर, लैंडस्केप, स्कूल, मंदिर और सोशल क्लब समेत सभी सेगमेंट शामिल होंगे। आवासीय इकाइयों के भूखंड का आकार तीन सौ, पाँच सौ, सात सौ पचास और एक हज़ार वर्ग गज का होगा। परियोजनाओं में ग्रीन बेल्ट, पार्क, वॉटरपार्क, झूले सहित अन्य सुविधाएं भी होंगी। "एमतीनएम फरवरी में परियोजना शुरू करेगा और इसे अगले पंद्रह-अट्ठारह महीनों में डिलीवर किया जाएगा क्योंकि यह केवल बुनियादी ढांचा विकास है। पानीपत में रिटेल सेगमेंट पूरी तरह से एमतीनएम के स्वामित्व में होगा। इसके अलावा, नोएडा परियोजना के बारे में बात करते हुए, पंकज बंसल ने कहा, "हम यहां नोएडा के बाजार में विश्वास बनाने और ग्राहकों एवं निवेशकों का विश्वास हासिल करने के लिए हैं। भूमि लागत सहित दो,सात सौ करोड़ रुपये के निवेश के साथ नोएडा में हमारा प्रवेश एक मिक्स्ड यूज रियल्टी परियोजना होगी जिसमें आवास, रिटेल और सर्विस अपार्टमेंट शामिल होंगे और इससे दस,शून्य+ नौकरियां और आजीविका के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। तेरह एकड़ में फैली, चार मिलियन वर्ग फुट से अधिक बिक्री योग्य क्षेत्र के साथ, इस परियोजना की आय छः हज़ार करोड़ रुपये होगी। हम डेवलपर हैं और हम केवल एलएंडटी, शापूरजी, टाटा जैसे ए-ग्रेड कांट्रेक्टर के साथ काम करते हैं। हमारा ट्रम्प टॉवर शापूरजी द्वारा बनाया जा रहा है, और एमतीनएम लैटीट्यूड टाटा द्वारा बनाया गया है, और गोलेस्टेट एलएंडटी द्वारा । कंपनी का ध्यान नोएडा में ग्रेड-ए लैंड पार्सल पर भी है, और केवल दस एकड़ से अधिक के भूखंडों पर विचार करेगी। कंपनी जल्द ही दो अन्य जमीन सौदों को भी पूरा करने की कोशिश कर रही है जो करीब एक सौ करोड़ रुपये के होंगे जो एक हज़ार तीन सौ-एक हज़ार चार सौ करोड़ के होंगे। इसके साथ, एमतीनएम का लक्ष्य एक वर्ष में दस मिलियन वर्ग फुट का पोर्टफोलियो बनाना है, जिसमें दो बिलियन अमरीकी डालर की टॉपलाइन है, जो लगभग सोलह हज़ार करोड़ रुपये है। कंपनी की गुरुग्राम में बयालीस प्रोजेक्ट हैं जिनमें लगभग छः मिलियन वर्ग फुट रिटेल स्पेस और लगभग अट्ठाईस मिलियन वर्ग फुट संपूर्ण वर्ग फूट है। एमतीनएम इंडिया द्वारा दो हज़ार उन्नीस से पूर्व शुरू की गई सभी प्रोजेक्ट की डिलीवरी पहले ही हो चुकी है। |
एसपी को दिए आवेदन में ठकुरपुरा की रहने वाली महिला ने बताया कि वह अपने बच्चों को बूढ़ी सास के सहारे छोड़कर पति के साथ मजदूरी करने जाती है। हमारे पड़ोस में रहने वाले अभिषेक व उसकी पत्नी प्रियंका जाटव घर में घुस आते हैं और मेरी 13 वर्षीय बच्ची पर दबाव डालकर अवैध कृत्य करके बच्चा पैदा करना चाहते हैं।
पीडिता ने पुलिस अधीक्षक को आवेदन देते हुए बताया है कि उक्त आरोपी युवक पर पहले भी एक नाबालिग किशोरी के साथ छेडछाड का मामला दर्ज है। उसके बाद यह पति पत्नि उसकी नाबालिग बेटी पर नजर रखे हुए है। वह उसकी बेटी से फोन पर भी बात करते है और वह उनकी नाबालिग बेटी को बहलाते फुसलाते है।
| एसपी को दिए आवेदन में ठकुरपुरा की रहने वाली महिला ने बताया कि वह अपने बच्चों को बूढ़ी सास के सहारे छोड़कर पति के साथ मजदूरी करने जाती है। हमारे पड़ोस में रहने वाले अभिषेक व उसकी पत्नी प्रियंका जाटव घर में घुस आते हैं और मेरी तेरह वर्षीय बच्ची पर दबाव डालकर अवैध कृत्य करके बच्चा पैदा करना चाहते हैं। पीडिता ने पुलिस अधीक्षक को आवेदन देते हुए बताया है कि उक्त आरोपी युवक पर पहले भी एक नाबालिग किशोरी के साथ छेडछाड का मामला दर्ज है। उसके बाद यह पति पत्नि उसकी नाबालिग बेटी पर नजर रखे हुए है। वह उसकी बेटी से फोन पर भी बात करते है और वह उनकी नाबालिग बेटी को बहलाते फुसलाते है। |
टी20 वर्ल्डकप 2022 (T20 WC 2022) का बिगुल बजने में अब लगभग 1 महीने का समय बाकी है। भारतीय क्रिकेट टीम ने भी इस बार आईसीसी ट्रॉफी पर कब्जा करने के लिए कमर कसना शुरू कर दिया है। 16 अक्टूबर से ऑस्ट्रेलियाई सरजमीं पर टी20 क्रिकेट के इस महादंगल की शुरुआत होने वाली है। टीम इंडिया अपना पहला मुकाबला 23 अक्टूबर को पाकिस्तान के खिलाफ खेलने वाली है। लेकिन इससे पहले न्यूज़ीलैंड और मेजबान ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत को अभ्यास मैच भी खेलने है। इसके मद्देनजर आज यानि 12 सितंबर को भारतीय क्रिकेट बोर्ड की ओर से 15 सदस्यीय दल का ऐलान कर दिया गया है।
सबसे पहले बात की जाए टीम इंडिया के चयनित बल्लेबाजों की तो सलामी जोड़ी के रूप में केएल राहुल और कप्तान रोहित शर्मा (Rohit Sharma) नजर आने वाले हैं। हाल ही में दोनों खिलाड़ियों ने एशिया कप 2022 में एक साथ ओपन किया था। इंजरी से लौटने वाले केएल पूरी तरह से लय में नजर नहीं आए थे। सिर्फ आखिरी मैच में उनके बल्ले से 64 रनों की पारी निकली। वहीं रोहित शर्मा ने पाकिस्तान के खिलाफ एक अर्धशतक जड़कर भरोसा दिलाया है।
नंबर-3 के बल्लेबाज के रूप में विराट कोहली (Virat Kohli) का खेलना लगभग तय माना जा सकता है। वे एशिया कप 2022 में दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी बने थे। इसी टूर्नामेंट में उन्होंने पहला टी20 इंटरनेशनल शतक भी जड़ा है। बल्लेबाजी क्रम में इसके साथ ही सूर्यकुमार यादव, ऋषभ पंत और दिनेश कार्तिक का चयन किया गया है। संभावना है कि प्लेइंग एलेवन में ऋषभ और दिनेश में से किसी एक को मौका मिले।
हरफनमौला खिलाड़ी के रूप में भारतीय चयनकर्ताओं ने हार्दिक पांड्या को शामिल किया है। साल 2022 में उन्हों गेंद और बल्ले से अभूतपूर्व योगदान दिया है। साथ ही ऑस्ट्रेलिया की पिचों पर हार्दिक गेंद से ज्यादा घातक साबित हो सकते हैं। इसके अलावा चोटिल रवींद्र जडेजा (Ravindra Jadeja) की कमी पूरी करने के लिए बीसीसीआई ने उन्हीं की शैली वाले अक्षर पटेल पर भरोसा जताया है। एशिया कप 2022 में जडेजा के चोटिल होने के बाद उन्हें टीम में जगह दी थी। वहीं दायें हाथ से बल्लेबाजी और ऑफ स्पिन डालने वाले दीपक हुड्डा को अतिरिक्त गेंदबाजी विकल्प होने के नाते 15 सदस्यीय टीम में शामिल किया गया है।
टी20 वर्ल्डकप (T20 WC 2022) के लिए भारतीय टीम के गेंदबाजी क्रम में जसप्रीत बुमराह (Jasprit Bumrah) और हर्षल पटेल की वापसी हुई है। दोनों ही खिलाड़ियों को एशिया कप 2022 से पहले चोटिल होने के चलते चयन के दायरे से बाहर रखा था। लेकिन अब नैशनल क्रिकेट एकेडमी में फिटनेस हासिल करने के बाद बुमराह-हर्षल की वापसी हो चुकी है। जोकि मिडल और अंतिम ओवर में असरदार साबित हो सकते हैं।
इसके साथ नई गेंद से प्रभावशाली भुवनेश्वर कुमार को मौका दिया गया है, भुवी भारत की ओर से एशिया कप 2022 में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज है। वहीं अंतिम ओवर के स्पेशलिस्ट माने जाने वाले युवा अर्शदीप सिंह को अपना पहला वर्ल्डकप खेलने का मौका दिया गया है। अंत में ऑस्ट्रेलिया की पिचों के मद्देनजर बीसीसीआई चयनकर्ताओं ने युजवेन्द्र चहल और रविचंद्रन अश्विन की स्पिन जोड़ी पर भरोसा जताया है।
भारतीय टीमः केएल राहुल, रोहित शर्मा (कप्तान), विराट कोहली, सूर्यकुमार यादव, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), हार्दिक पांड्या, दिनेश कार्तिक (विकेटकीपर), अक्षर पटेल, दीपक हुड्डा, युजवेन्द्र चहल, रविचंद्रन अश्विन, हर्षल पटेल, भुवनेश्वर कुमार, जसप्रीत बुमराह, अर्शदीप सिंह।
🚨 NEWS: India's squad for ICC Men's T20 World Cup 2022.
| टीबीस वर्ल्डकप दो हज़ार बाईस का बिगुल बजने में अब लगभग एक महीने का समय बाकी है। भारतीय क्रिकेट टीम ने भी इस बार आईसीसी ट्रॉफी पर कब्जा करने के लिए कमर कसना शुरू कर दिया है। सोलह अक्टूबर से ऑस्ट्रेलियाई सरजमीं पर टीबीस क्रिकेट के इस महादंगल की शुरुआत होने वाली है। टीम इंडिया अपना पहला मुकाबला तेईस अक्टूबर को पाकिस्तान के खिलाफ खेलने वाली है। लेकिन इससे पहले न्यूज़ीलैंड और मेजबान ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत को अभ्यास मैच भी खेलने है। इसके मद्देनजर आज यानि बारह सितंबर को भारतीय क्रिकेट बोर्ड की ओर से पंद्रह सदस्यीय दल का ऐलान कर दिया गया है। सबसे पहले बात की जाए टीम इंडिया के चयनित बल्लेबाजों की तो सलामी जोड़ी के रूप में केएल राहुल और कप्तान रोहित शर्मा नजर आने वाले हैं। हाल ही में दोनों खिलाड़ियों ने एशिया कप दो हज़ार बाईस में एक साथ ओपन किया था। इंजरी से लौटने वाले केएल पूरी तरह से लय में नजर नहीं आए थे। सिर्फ आखिरी मैच में उनके बल्ले से चौंसठ रनों की पारी निकली। वहीं रोहित शर्मा ने पाकिस्तान के खिलाफ एक अर्धशतक जड़कर भरोसा दिलाया है। नंबर-तीन के बल्लेबाज के रूप में विराट कोहली का खेलना लगभग तय माना जा सकता है। वे एशिया कप दो हज़ार बाईस में दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी बने थे। इसी टूर्नामेंट में उन्होंने पहला टीबीस इंटरनेशनल शतक भी जड़ा है। बल्लेबाजी क्रम में इसके साथ ही सूर्यकुमार यादव, ऋषभ पंत और दिनेश कार्तिक का चयन किया गया है। संभावना है कि प्लेइंग एलेवन में ऋषभ और दिनेश में से किसी एक को मौका मिले। हरफनमौला खिलाड़ी के रूप में भारतीय चयनकर्ताओं ने हार्दिक पांड्या को शामिल किया है। साल दो हज़ार बाईस में उन्हों गेंद और बल्ले से अभूतपूर्व योगदान दिया है। साथ ही ऑस्ट्रेलिया की पिचों पर हार्दिक गेंद से ज्यादा घातक साबित हो सकते हैं। इसके अलावा चोटिल रवींद्र जडेजा की कमी पूरी करने के लिए बीसीसीआई ने उन्हीं की शैली वाले अक्षर पटेल पर भरोसा जताया है। एशिया कप दो हज़ार बाईस में जडेजा के चोटिल होने के बाद उन्हें टीम में जगह दी थी। वहीं दायें हाथ से बल्लेबाजी और ऑफ स्पिन डालने वाले दीपक हुड्डा को अतिरिक्त गेंदबाजी विकल्प होने के नाते पंद्रह सदस्यीय टीम में शामिल किया गया है। टीबीस वर्ल्डकप के लिए भारतीय टीम के गेंदबाजी क्रम में जसप्रीत बुमराह और हर्षल पटेल की वापसी हुई है। दोनों ही खिलाड़ियों को एशिया कप दो हज़ार बाईस से पहले चोटिल होने के चलते चयन के दायरे से बाहर रखा था। लेकिन अब नैशनल क्रिकेट एकेडमी में फिटनेस हासिल करने के बाद बुमराह-हर्षल की वापसी हो चुकी है। जोकि मिडल और अंतिम ओवर में असरदार साबित हो सकते हैं। इसके साथ नई गेंद से प्रभावशाली भुवनेश्वर कुमार को मौका दिया गया है, भुवी भारत की ओर से एशिया कप दो हज़ार बाईस में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज है। वहीं अंतिम ओवर के स्पेशलिस्ट माने जाने वाले युवा अर्शदीप सिंह को अपना पहला वर्ल्डकप खेलने का मौका दिया गया है। अंत में ऑस्ट्रेलिया की पिचों के मद्देनजर बीसीसीआई चयनकर्ताओं ने युजवेन्द्र चहल और रविचंद्रन अश्विन की स्पिन जोड़ी पर भरोसा जताया है। भारतीय टीमः केएल राहुल, रोहित शर्मा , विराट कोहली, सूर्यकुमार यादव, ऋषभ पंत , हार्दिक पांड्या, दिनेश कार्तिक , अक्षर पटेल, दीपक हुड्डा, युजवेन्द्र चहल, रविचंद्रन अश्विन, हर्षल पटेल, भुवनेश्वर कुमार, जसप्रीत बुमराह, अर्शदीप सिंह। 🚨 NEWS: India's squad for ICC Men's Tबीस World Cup दो हज़ार बाईस. |
Jalore: नर्मदा के पानी के लिए किसानों का धरना, पांच किसान भूख हड़ताल पर, जानें क्या है मांग?
भाजपा सांसद बृजभूषण सिंह की इस तस्वीर पर भड़कीं टीएमसी नेता, पूछा- पहलवानों को कैसा लगा होगा?
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| Jalore: नर्मदा के पानी के लिए किसानों का धरना, पांच किसान भूख हड़ताल पर, जानें क्या है मांग? भाजपा सांसद बृजभूषण सिंह की इस तस्वीर पर भड़कीं टीएमसी नेता, पूछा- पहलवानों को कैसा लगा होगा? B. A. G Convergence Pvt. Ltd. दो हज़ार बाईस : All Rights Reserved. |
नई दिल्लीः दिल्ली के पर्यावरण एवं वन मंत्री गोपाल राय (Gopal Rai) ने आज सेंट्रल रिज में 'वन महोत्सव' की शुरूआत की। उन्होंने कहा कि आज दिल्ली के सभी विधानसभाओं में विधायकों के नेतृत्व में वृक्षारोपण किया जा रहा है। साथ ही, डिप्टी सीएम, कैबिनेट मंत्री और विधानसभा अध्यक्ष अलग-अलग जगहों में इस महावृक्षारोपण अभिायन का नेतृत्व करेंगे। केजरीवाल सरकार ने अपने इस कार्यकाल में दो करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है, जिसके तहत इस साल 35 लाख पौधे लगाए जाएंगे।
वन महोत्सव की अभियान की शुरुआत करने के बाद सेंट्रल रिज में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान पर्यावरण एवं वन मंत्री गोपाल राय (Gopal Rai) ने सभी पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए बताया कि केजरीवाल सरकार द्वारा उठाए गए तमाम उपायों के परिणामस्वरूप दिल्ली के अंदर हरित क्षेत्र (ग्रीन कवर ) में काफी इज़ाफ़ा देखा गया है। दिल्ली में जहाँ साल 2013 में हरित क्षेत्र 20 फीसद था वह केजरीवाल सरकार के प्रयासों के कारण, साल 2021 में बढ़कर 23. 06 फीसदी हो गया है। समर एक्शन प्लान के 14 बिन्दुओ में शामिल वृक्षारोपण महाअभियान को गति देने के लिए आज सेंट्रल रिज से वन महोत्सव की शुरूआत हो रही है, और अगले 15 दिनों तक दिल्ली के अलग-अलग क्षेत्रों में इस महोत्सव के तहत वृक्षारोपण का महा अभियान चलाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि दिल्ली के ग्रीन बेल्ट को बढ़ाने और दिल्ली के प्रदूषण को कम करने के लिए हर साल वृक्षारोपण अभियान चलाया जा रहा है। इस साल वृक्षारोपण महाअभियान के तहत 35 लाख से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया गया है। जिसे सभी सम्बंधित 19 विभागों की हरित एजेंसी द्वारा पूरा किया जाएगा। इस अभियान के तहत लगभग 29 लाख पौधे लगाए जाएंगे और साथ ही लगभग 7 लाख पौधों का मुफ्त वितरण किया जाएंगे।
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| नई दिल्लीः दिल्ली के पर्यावरण एवं वन मंत्री गोपाल राय ने आज सेंट्रल रिज में 'वन महोत्सव' की शुरूआत की। उन्होंने कहा कि आज दिल्ली के सभी विधानसभाओं में विधायकों के नेतृत्व में वृक्षारोपण किया जा रहा है। साथ ही, डिप्टी सीएम, कैबिनेट मंत्री और विधानसभा अध्यक्ष अलग-अलग जगहों में इस महावृक्षारोपण अभिायन का नेतृत्व करेंगे। केजरीवाल सरकार ने अपने इस कार्यकाल में दो करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है, जिसके तहत इस साल पैंतीस लाख पौधे लगाए जाएंगे। वन महोत्सव की अभियान की शुरुआत करने के बाद सेंट्रल रिज में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान पर्यावरण एवं वन मंत्री गोपाल राय ने सभी पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए बताया कि केजरीवाल सरकार द्वारा उठाए गए तमाम उपायों के परिणामस्वरूप दिल्ली के अंदर हरित क्षेत्र में काफी इज़ाफ़ा देखा गया है। दिल्ली में जहाँ साल दो हज़ार तेरह में हरित क्षेत्र बीस फीसद था वह केजरीवाल सरकार के प्रयासों के कारण, साल दो हज़ार इक्कीस में बढ़कर तेईस. छः फीसदी हो गया है। समर एक्शन प्लान के चौदह बिन्दुओ में शामिल वृक्षारोपण महाअभियान को गति देने के लिए आज सेंट्रल रिज से वन महोत्सव की शुरूआत हो रही है, और अगले पंद्रह दिनों तक दिल्ली के अलग-अलग क्षेत्रों में इस महोत्सव के तहत वृक्षारोपण का महा अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि दिल्ली के ग्रीन बेल्ट को बढ़ाने और दिल्ली के प्रदूषण को कम करने के लिए हर साल वृक्षारोपण अभियान चलाया जा रहा है। इस साल वृक्षारोपण महाअभियान के तहत पैंतीस लाख से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया गया है। जिसे सभी सम्बंधित उन्नीस विभागों की हरित एजेंसी द्वारा पूरा किया जाएगा। इस अभियान के तहत लगभग उनतीस लाख पौधे लगाए जाएंगे और साथ ही लगभग सात लाख पौधों का मुफ्त वितरण किया जाएंगे। This website uses cookies. |
।ग्राम क्रमांक :
।ग्राम का नाम :
।तहसील :
।जनपद :
।फसली वर्ष :
।भाग :
।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल (हे.)
।1 - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसे1950 ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा 117 - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो ।
सम्पत्ति राज्य सरकार / . / .
।1क(क) - रिक्त ( नदारद )
।1-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ( नदारद )
।2 - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ( नदारद )
।3 - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ( नदारद )
।4 - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ 4 में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ( नदारद )
।4-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -(क)जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ( नदारद )
।4-क(ख) - अन्य भूमि । ( नदारद )
।5-1 - कृषि योग्य भूमि - नई परती (परतीजदीद) ( नदारद )
।5-2 - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती (परतीकदीम) ( नदारद )
।5-3-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ( नदारद )
।5-3-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ( नदारद )
।5-3-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ( नदारद )
।5-3-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ( नदारद )
।5-3-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ( नदारद )
।5-क (क) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ( नदारद )
।5-क (ख) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ( नदारद )
।5-क (ग) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ( नदारद )
।6-1 - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि ।
।6-2 - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो।
।6-3 - कब्रिस्तान और श्मशान (मरघट) , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ( नदारद )
।6-4 - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ( नदारद )
।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
| ।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल ।एक - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसेएक हज़ार नौ सौ पचास ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा एक सौ सत्रह - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । सम्पत्ति राज्य सरकार / . / . ।एकक - रिक्त ।एक-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ।दो - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।तीन - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ।चार - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ चार में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ।चार-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ।चार-क - अन्य भूमि । ।पाँच-एक - कृषि योग्य भूमि - नई परती ।पाँच-दो - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती ।पाँच-तीन-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ।पाँच-तीन-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ।पाँच-तीन-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।पाँच-तीन-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ।पाँच-तीन-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ।छः-एक - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।छः-दो - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।छः-तीन - कब्रिस्तान और श्मशान , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।छः-चार - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है। |
चित्रकूट. चित्रकूट जनपद में नदी नहाने गए युवक की बागे नदी में डूबने से मौत हो गई है. जिससे परिजनों ने बांदा के बालू पट्टे धारक पर अवैध खनन का आरोप लगा पट्टे धारक के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग को लेकर नदी किनारे युवक का शव रखकर जमकर प्रदर्शन किया है. वहीं बालू घाट किनारे खड़ी पोकलैंड मशीन पर अराजक तत्वों ने आग लगा दिया है. जिससे पोकलैंड मशीन धू-धूकर जलने लगी. सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और दमकल की गाड़ी ने पोकलैंड मशीन में लगी आग पर काबू पाया और परिजनों की तहरीर पर चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर परिजनों को समझा-बुझाकर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है.
मामला राजापुर तहसील के सरधुआ थाना क्षेत्र के गड़ौली गांव का है. जहां संदीप वर्मा नाम का युवक गांव के गड़ौली घाट पर नहाने के लिए सुबह गया हुआ था तभी नदी के बीच मे गहरे गड्ढे में फस जानें की वजह से डूबकर उसकी मौत हो गयी. जिसकी सूचना उनके परिजनों को मिली तो उनके परिजनों में कोहराम मच गया. पीड़ित परिजनों ने युवक के शव को नदी से निकालकर बांदा के बालू पट्टे धारक पर अवैध खनन का आरोप लगा कार्रवाई करने की मांग को लेकर हंगामा काटने लगे.
परिजनों ने आरोप लगाते हुए कहा कि बागे नदी के उस पार बांदा जिला पड़ता है जो लोहरा खदान के नाम पर राशिद अली के नाम बालू खदान का पट्टा हुआ है. जो ठेकेदार के गुर्गो द्वारा बागे नदी में अपने सीमांकन से बाहर जाकर चित्रकूट के गड़ौली घाट की तरफ पोकलैंड मशीन के माध्यम से नदी की बीच जल धारा में अवैध खनन किया जिससे नदी में बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं. जिससे आज नदी में उनके मृतक बच्चे के गड्ढे में फस जाने की वजह से डूब कर मौत हो गई है. पूर्व में भी अवैध खनन की अधिकारियों से शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई थी. जब उनके बच्चे की डूबकर मौत हो गई और ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग करने लगे तो ठेकेदार के गुर्गों ने उन्हें फसाने के लिए घाट किनारे खड़ी पोकलैंड मशीन पर आग लगा दिया और मौके से फरार हो गए है.
सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीम ने ग्रामीणों को समझा-बुझाकर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आरोपी ठेकेदार सहित चार लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कर मामले की जाँच शुरू कर दी है.
इस मामले में अपर जिलाधिकारी कुअंर बहादुर सिंह का कहना है कि बागे नदी पर बांदा जिले के पट्टे धारक द्वारा अवैध खनन किया जा रहा था. जिससे बागे नदी की जलधारा चित्रकूट की तरफ से बहने लगी थी. जिस पर कार्रवाई के लिए बांदा जनपद के जिला प्रशासन को पत्र लिखकर के शिकायत की गई थी. जिससे अवैध खनन के चलते आज एक बच्चे की नदी में डूबने से मौत हो गई है. जिसपर परिजनों की तहरीर पर बांदा के बालू ठेकेदार समेत चार लोगों के खिलाफ मुकदमा सरधुवा थाने में दर्ज कर ली गई है और वैधानिक कार्रवाई की जा रही है.
पूरे घटना पर सदर विधायक ने कहा कि गड़ौली गांव मे जो घटना घटी है वह काफी दुखदाई घटना है. जिस जगह पर बच्चे की गड्ढे में डूब कर मौत हुई है, उस जगह पर जमकर अवैध खनन किया गया है. पूर्व में प्रशासन की टीम मौके पर गई थी जिस पर बांदा जिले के प्रशासन को अवैध खनन होने की पत्राचार किया था. बावजूद इसके अवैध खनन पर कार्रवाई नहीं की गई. अगर जिला प्रशासन समय से चेत गया होता तो आज यह घटना नहीं होती.
पूरे जनपद में विशेष तौर से बागे नदी के किनारे लगातार अवैध खनन हो रहा है, मैंने यहां से सदन तक यह बात रखी है. लेकिन जिला प्रशासन इस बात को नहीं मान रहा है. मैंने आज की घटना पर अधिकारियों से यही बात रखी है. अगर चित्रकूट की सीमा पर अवैध खनन हो रहा था तो आप लोगों ने कार्रवाई क्यों नहीं की थी. तो कही ना कही जिला प्रशासन की मिलीभगत से यह घटना घटी है. पूरे बुंदेलखंड में खनन ना होने की बात बीजेपी और बीजेपी संरक्षित लोग व सदन में माननीय मुख्यमंत्री भी इस बात को कहते हैं. इसलिए इस पर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए जिले में अवैध खनन नहीं होना चाहिए.
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| चित्रकूट. चित्रकूट जनपद में नदी नहाने गए युवक की बागे नदी में डूबने से मौत हो गई है. जिससे परिजनों ने बांदा के बालू पट्टे धारक पर अवैध खनन का आरोप लगा पट्टे धारक के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग को लेकर नदी किनारे युवक का शव रखकर जमकर प्रदर्शन किया है. वहीं बालू घाट किनारे खड़ी पोकलैंड मशीन पर अराजक तत्वों ने आग लगा दिया है. जिससे पोकलैंड मशीन धू-धूकर जलने लगी. सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और दमकल की गाड़ी ने पोकलैंड मशीन में लगी आग पर काबू पाया और परिजनों की तहरीर पर चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर परिजनों को समझा-बुझाकर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. मामला राजापुर तहसील के सरधुआ थाना क्षेत्र के गड़ौली गांव का है. जहां संदीप वर्मा नाम का युवक गांव के गड़ौली घाट पर नहाने के लिए सुबह गया हुआ था तभी नदी के बीच मे गहरे गड्ढे में फस जानें की वजह से डूबकर उसकी मौत हो गयी. जिसकी सूचना उनके परिजनों को मिली तो उनके परिजनों में कोहराम मच गया. पीड़ित परिजनों ने युवक के शव को नदी से निकालकर बांदा के बालू पट्टे धारक पर अवैध खनन का आरोप लगा कार्रवाई करने की मांग को लेकर हंगामा काटने लगे. परिजनों ने आरोप लगाते हुए कहा कि बागे नदी के उस पार बांदा जिला पड़ता है जो लोहरा खदान के नाम पर राशिद अली के नाम बालू खदान का पट्टा हुआ है. जो ठेकेदार के गुर्गो द्वारा बागे नदी में अपने सीमांकन से बाहर जाकर चित्रकूट के गड़ौली घाट की तरफ पोकलैंड मशीन के माध्यम से नदी की बीच जल धारा में अवैध खनन किया जिससे नदी में बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं. जिससे आज नदी में उनके मृतक बच्चे के गड्ढे में फस जाने की वजह से डूब कर मौत हो गई है. पूर्व में भी अवैध खनन की अधिकारियों से शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई थी. जब उनके बच्चे की डूबकर मौत हो गई और ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग करने लगे तो ठेकेदार के गुर्गों ने उन्हें फसाने के लिए घाट किनारे खड़ी पोकलैंड मशीन पर आग लगा दिया और मौके से फरार हो गए है. सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीम ने ग्रामीणों को समझा-बुझाकर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आरोपी ठेकेदार सहित चार लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कर मामले की जाँच शुरू कर दी है. इस मामले में अपर जिलाधिकारी कुअंर बहादुर सिंह का कहना है कि बागे नदी पर बांदा जिले के पट्टे धारक द्वारा अवैध खनन किया जा रहा था. जिससे बागे नदी की जलधारा चित्रकूट की तरफ से बहने लगी थी. जिस पर कार्रवाई के लिए बांदा जनपद के जिला प्रशासन को पत्र लिखकर के शिकायत की गई थी. जिससे अवैध खनन के चलते आज एक बच्चे की नदी में डूबने से मौत हो गई है. जिसपर परिजनों की तहरीर पर बांदा के बालू ठेकेदार समेत चार लोगों के खिलाफ मुकदमा सरधुवा थाने में दर्ज कर ली गई है और वैधानिक कार्रवाई की जा रही है. पूरे घटना पर सदर विधायक ने कहा कि गड़ौली गांव मे जो घटना घटी है वह काफी दुखदाई घटना है. जिस जगह पर बच्चे की गड्ढे में डूब कर मौत हुई है, उस जगह पर जमकर अवैध खनन किया गया है. पूर्व में प्रशासन की टीम मौके पर गई थी जिस पर बांदा जिले के प्रशासन को अवैध खनन होने की पत्राचार किया था. बावजूद इसके अवैध खनन पर कार्रवाई नहीं की गई. अगर जिला प्रशासन समय से चेत गया होता तो आज यह घटना नहीं होती. पूरे जनपद में विशेष तौर से बागे नदी के किनारे लगातार अवैध खनन हो रहा है, मैंने यहां से सदन तक यह बात रखी है. लेकिन जिला प्रशासन इस बात को नहीं मान रहा है. मैंने आज की घटना पर अधिकारियों से यही बात रखी है. अगर चित्रकूट की सीमा पर अवैध खनन हो रहा था तो आप लोगों ने कार्रवाई क्यों नहीं की थी. तो कही ना कही जिला प्रशासन की मिलीभगत से यह घटना घटी है. पूरे बुंदेलखंड में खनन ना होने की बात बीजेपी और बीजेपी संरक्षित लोग व सदन में माननीय मुख्यमंत्री भी इस बात को कहते हैं. इसलिए इस पर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए जिले में अवैध खनन नहीं होना चाहिए. . |
अभी विज्ञान वहीं नहीं पहुँचा है, लेकिन पहुँच जायगा । क्योंकि कल वह भौतिक को स्वीकार करता था, आणविक को स्वीकार नहीं करता था। कल बह कहता था, पदार्थ ठोस चीज है । आज वह कहता है ठोस जैसी कोई चीज हो नहीं है। जो भी है सब गैर-ठोस ( नानसॉलिड ) हो गया है सब। यह दीवाल भी जो हमें इतनी ठोस दिखायी पड़ रही है, वह ठोस नहीं है । यह भी पोरस ( छिद्रभय ) है । इसमें भी छेद है और चीजें इसमें आर-पार जा रही है। फिर भी हम कहेंगे कि छेदों के आसपास जिनके बीच छेद हैं वह तो कम-से-कम ठोस अणु होंगे। वह भी ठोस अणु नहीं है। एक-एक अणु भी पोरस है । अगर हम एक अणु को बड़ा कर सकें तो जमीन और चाँद और सूरज और तारे के बीच जितना फासला है उतना अणुओं के कणों के बीच फासला है। अगर उसको इतना बड़ा कर सकें तो फासला इतना ही हो जायगा ।
फिर वह जो फासले को भी जोड़ने वाले अणु हैं, हम कहेंगे कम-से-कम वह तो ठोस हैं। लेकिन विज्ञान कहता है कि वह भी ठोस नही है । वह सिर्फ विद्युत् कण हैं। कण भी अब विज्ञान मानने को राजी नहीं है। क्योंकि कण के साथ पदार्थ का पुराना ख्याल जुड़ा हुआ है। कण का मतलब होता है पदार्थ का टुकड़ा । वह कण भी नहीं है। क्योंकि कण तो एक जैसा रहता है । वह पूरे वक्त बदलते रहते हैं। वे लहर की तरह हैं, कण की तरह नहीं हैं। जैसे पानी में एक लहर उठी । जब तक आपने कहा लहर उठी तब तक वह कुछ और हो गयी। जब आपने कहा वह रही लहर तब तक वह कुछ और हो गयी। क्योकि लहर का मतलब यह है कि वह आ रही है, जा रही है। लेकिन अगर हम लहर भी कहें तो भी पानी की लहर एक भौतिक घटना है। इसलिए विज्ञान ने एक नया शब्द खोजा है जो कि अभी था ही नहीं, बाज से तीस साल पहले। वह है क्वान्टा । अभी हिन्दुस्तान में उसके लिए दूसरा शब्द खोजना मुश्किल है। इसलिए मुश्किल है जैसे हिन्दी के पास शब्द है ब्रह्म और इसे अंग्रेजी में कहना मुश्किल है। क्योंकि कभी जरूरत पड़ गयी थी कुछ अनुभव करनेवाले लोगों को तब यह शब्द खोज लिया गया। पश्चिम उस जगह नहीं पहुँचा है कभी, इसलिए इस शब्द की उन्हें कभी जरूरत नहीं पड़ी।
इसलिए धर्म की भाषा के बहुत से शब्द पश्चिम की भाषा में नहीं मिलेंगे । जैसे ओम् । उसका कोई अनुवाद दुनिया की किसी भाषा में नहीं हो सकता है। वह कभी किन्हीं आध्यात्मिक गहराइयों में अनुभव की गयी बात है। उसके लिए हमने एक शब्द खोज लिया था। लेकिन पश्चिम के पास उसके लिए कोई समानान्तर शब्द नहीं है कि उसका अनुवाद किया जा सके। ऐसे ही क्वान्टा पश्चिम के विज्ञान की बहुत ऊँचाई पर पाया गया शब्द है जिसके लिए दूसरी भाषा में कोई
आधुनिक विज्ञान की बुबकी-धर्म के असीम रहस्य-सागर में ४०३
शब्द नहीं है । क्वाटा का अगर हम मतलब समझना चाहें तो क्वांटा का मतलब होता है कण और तरंग एक साथ। इसको कन्सीव करना ( समझना ) मुश्किल हो जायगा। कोई चीज कण और तरंग एक साथ, कभी वह तरंग की तरह व्यवहार करता है और कभी कण की तरह व्यवहार करता है । और कोई भरोसा नहीं है उसका कि वह कैसा व्यवहार करे ।
४. पदार्थ के सूक्ष्मतम ऊर्जा कणों में चेतना के लक्षण
पदार्थ हमेशा भरोसे योग्य था । पदार्थ में एक निश्चितता ( सटॅन्टी ) थी लेकिन वह जो अणु ऊर्जा के आखिरी कण मिले हैं वे अनिश्चित ( अनमर्टेन ) के हैं। उनकी कोई निश्चयात्मकता नहीं है। उनके व्यवहार को पक्का तय नहीं किया जा सकता । इसलिए पहले विज्ञान बहुत सटॅन्टी ( निश्चयात्मकता ) पर खड़ा था। वह कहता था हर चीज निश्चित है। अब वैज्ञानिक उतने दावे से नहीं कह सकता कि हर चीज निश्चित है। क्योंकि वह जहाँ पहुँचा है वहाँ उसको पता चला है कि निश्चित होना बहुत ऊपर-ऊपर की बात है। भीतर बहुत गहरा अनिश्चय है । और एक बड़े मजे की बात है कि अनिश्चय का मतलब क्या होता है ?
जहाँ अनिश्चय है वहाँ चेतना होनी चाहिए नहीं तो प्रनिश्चय नहीं हो सकता। अनसटॅन्टी ( अनिश्चयात्मकता ) जो है वह कान्शसनेस ( चेतना ) का हिस्सा है । सटॅन्टी ( निश्चयात्मकता ) जो है वह मैटर ( पदार्थ ) का हिस्सा है। अगर हम इस कमरे में एक कुर्सी को छोड़ जायँ तो लौटने पर हमे वही मिलेगी जहाँ थी । लेकिन एक बच्चे को हम इस कमरे में छोड़ जायें तो वह वहाँ नहीं मिलेगा जहाँ था । उसके बाबत अनसटॅन्टी ( अनिश्चयात्मकता ) रहेगी कि अब वह कहाँ है और क्या कर रहा है। कुर्सी के बाबत हम सटॅन ( निश्चित ) हो सकते हैं कि वह वहीं है जहाँ थी । पदार्थ के बाबत निश्चित हुआ जा सकता है। चेतना के बाबत निश्चित नहीं हुआ जा सकता है। तो विज्ञान ने जिस दिन यह स्वीकार कर लिया कि अणु का जो आखिरी हिस्सा है उसके बाबत हम निश्चित नहीं हो सकते हैं कि वह कैसा व्यवहार करेगा, उसी दिन से विज्ञान के द्वारा पदार्थ के आखिरी हिस्से में चेतना की सम्भावना स्वीकृत हो गयी है ।
अनसर्टेन्टी ( अनिश्चितता ) चेतना का लक्षण है। जड़ पदार्थ अनिश्चित नहीं हो सकता। ऐसा नहीं है कि आग का मन हो तो जलाये और मन हो तो न जलाये। ऐसा नहीं है कि पानी की तबीयत हो तो नीचे बहे और तबीयत हो तो ऊपर बहे । ऐसा नहीं है कि पानी १०० डिग्री पर गर्म होना चाहिए तो १०० पर हो, ८० पर होना चाहे तो ८० पर हो । पदार्थ का व्यवहार सुनिश्चित है। लेकिन
जब हम इन सबके भीतर प्रवेश करते है तो वह जो आखिरी हिस्से मिलते हैं पदार्थ के वह अनिश्चित है।
इसे हम ऐसा भी समझ सकते है कि समझ ले कि बम्बई के बाबत अगर हम तय करना चाहें कि रोज कितने आदमी मरते है तो तय हो जायगा। करीबकरीत्र तय हो जायगा । अगर एक करोड़ आदमी है तो साल भर का हिसाब लगाने से हमको पता चल सकता है कि रोज कितने आदमी मरते हैं और वह भविष्यवाणी करीब-करीब सही होगी। थोड़ी बहुत भूल हो सकती है। अगर हम पूरे पचास करोड़ के मुल्क के बाबत विचार करे तो भूल और कम हो जायगी । सटॅन्टी ( निश्चितता ) और बढ़ जायेगी। अगर हम सारी दुनिया के बाबत तय करें तो सटॅन्टी और बढ़ जायेगी और हम तय कर सकते है कि इतने आदमी रोज मरते है। लेकिन अगर हम एक आदमी के बाबत तय करने जायें कि यह कब मरेगा तो सटॅन्टी बहुत कम हो जायेगी ।
जितनी भीड़ बढ़ती है उतना मैटेरियल ( भौतिक ) हो जाती है चीज । जितना इन्डीवीजुअल ( निजी ) होती है बात उतनी ही कान्शस ( संचेतन ) हो जाती है। असल में एक पदार्थ का टुकड़ा भीड़ है करोड़ो अणुओ की । इसीलिए उसके वाबत हम तय कर सकते हैं। अगर हम नीचे प्रवेश करते है और एक इलेक्ट्रान को पकड़ते हैं तो वह इण्डीविजुगल ( निजी ) है । उसके बाबत तय होना मुश्किल हो जाता है। उसका व्यवहार वह खुब ही तय करता है तो पूरे पत्थर के बाबत हम कह सकते हैं कि यह यहीं मिलेगा । लेकिन इस पत्थर के भीतर जो अणुओं का व्यक्तित्व था वह वही नहीं मिलेगा । जब हम लौटकर आयेंगे तब सब बदल चुका होगा । उसने सब जगह बदल ली होगी। वह यात्रा कर चुका होगा ।
पदार्थ की गहराई में उतरकर अनिश्चय शुरू हो गया । इसलिए अत्र विज्ञान सटॅन्टी ( निश्चितता ) की बात न करके प्रोबेबिलिटी ( सम्भावनात्मकता ) की वात करने लगा । वह कहता है 'इसकी' सम्भावना ज्यादा है बजाय 'उसके' । अब वह ऐसा नहीं कहता है कि 'ऐसा ही' होगा। बड़े मजे की बात है कि विज्ञान की तो सारी दावेदारी जो थी वह उसकी निश्चयात्मकता पर थी। वह जो भी कहता था तो निश्चित था कि ऐसा होगा और विज्ञान की जो गहरी खोज है उसने विज्ञान को उगमगा दिया है। और उसका कारण है। उसका कारण यह है कि विज्ञान फिजिकल ( भौतिक ) से इथरिक ( आकाशीय ) पर चला गया है जिसका वैज्ञानिकों को अन्दाज नहीं है। असल में वह इस भाषा को स्वीकार नहीं करते इसलिए तब तक उनको अन्दाज भी नही हो सकता कि फिजिकल ( भौतिक ) से हट कर इथरिक ( आकाशीय, भाव ) पर पहुँच गये हैं। वह पदार्थ में भी
प्राधुनिक विज्ञान की डुबकी-धर्म के असीम रहस्य-सागर में ४०५ दूसरे भाव-शरीर पर पहुँच गये हैं और दूसरे शरीर की अपनी सम्भावनाएं हैं। लेकिन पहला शरीर और दूसरे शरीर के बीच कोई खाली जगह नही है । ५. ईथर के कणों को तोड़ने पर एस्ट्रल कणों का पता चलेगा
तीसरा जो एस्ट्रल ( सूक्ष्म ) शरीर है वह और भी सूक्ष्म है । वह सूक्ष्म का भी सूक्ष्म है । वह ईयर के भी अगर हम अणु बना सकें, जो अभी बहुत मुश्किल है क्योंकि अभी अभी तो हम मुश्किल से फिजिक्स में परमाणु पर पहुँच पाये है, अभी हम पदार्थ के परमाणु जान पाये हैं। अभी ईथर के लिए बहुत वक्त लग सकता है। लेकिन जिस दिन हम ईथर के परमाणु जान सकेंगे उस दिन हमें पता चलेगा कि उनके भीतर के सूक्ष्म कण आगे वाले शरीर के कण सिद्ध होंगे, एस्ट्रल के । असल में फिजिकल एटम ( भौतिक कण ) को जब हमने तोड़ा तो उसके सूक्ष्मतम कम इमरिक सिद्ध हुए हैं, ईयर को हम तोड़ेंगे तो उसके सूक्ष्मतम-कण एस्ट्रल सिद्ध होंगे, सूक्ष्म सिद्ध होगे। तब उनके बीच एक जोड़ मिल जायगा । ये तीन शरीर तो बहुत स्पष्ट जुड़े हुए हैं इसलिए प्रेतात्माओं के चित्र लिये जा सके हैं ।
६. प्रेतात्मा का शरीर इथरिक व एस्ट्रल ऊर्जा का बना हुआ
प्रेतात्मा के पास भौतिक शरीर नहीं होता है । इथरिक बॉडी ( भावशरीर ) से शुरू होता है उसका परदा । प्रेतात्माओं के चित्र लिये जा सके हैं सिर्फ इसी वजह से कि ईथर भी अगर बहुत कण्डेन्स्ड हो जाय तो बहुत सेन्सीटिव फोटो प्लेट उसे पकड़ सकती है और ईथर के साथ एक सुविधा है कि वह इतनी सूक्ष्म है कि मनस से प्रभावित होगी। अगर एक प्रेत यह चाहे कि मैं यहाँ प्रकट हो जाऊँ तो वह अपनी इथरिक बॉडी को कण्डेन्स्ड ( सघन ) कर लेगा । वह अणु जो दूर-दूर है पास सरक आयेंगे और उसकी एक रूपरेखा बन जायेगी । उस रूपरेखा का चित्र लिया जा सका है, उस रूपरेखा का चित्र पकड़ा जा सका है ।
यह जो दूसरा हमारा ईयर ( आकाश ) का बना हुआ शरीर है यह हमारे भौतिक शरीर से कहीं ज्यादा मन से प्रभावित हो सकता है । भौतिक शरीर भी हमारे मन से प्रभावित होता है लेकिन उतना नहीं। जितना सूक्ष्म होगा उतना मन से प्रभावित होने लगेगा, उतने मन के करीब हो जायगा। एस्ट्रल ( सूक्ष्म ) शरीर तो और भी ज्यादा मन से प्रभावित होगा। इसलिए एस्ट्रल ट्रेवेलिंग ( सूक्ष्म शरीर की यात्रा ) सम्भव हो जाती है। एक आदमी इस कमरे में सोकर भी अपनी एस्ट्रल बॉडी ( सूक्ष्म शरीर ) से दुनिया के किसी भी हिस्से में हो सकता है । इसलिए यह कहानियाँ बहुत बार सुनी होंगी कि एक आदमी दो जगह दिखायी पड़ गया, तीन जगह दिखायी पड़ गया, इसमें कोई कठिनाई नहीं है। उसका भौतिक शरीर एक जगह होगा, उसका एस्ट्रल शरीर दूसरी जगह हो सकता है ।
इसमें अड़चन नहीं है। यह थोड़े से ही अभ्यास की बात है और आपका शरीर दूसरी जगह प्रकट हो सकता है।
जितना हम भीतर जाते हैं उतनी ही मन को शक्ति बढ़ती चली जाती है, जितना हो हम बाहर आते हैं उतनी ही मन की शक्ति कम होती चली जाती है। ऐसा ही जैसे हम एक दीया जलायें और उस दीये के ऊपर कांच का एक ढक्कन रख दें। अब दीया उतना तेजस्वी नहीं मालूम होगा। फिर एक दूसरा ढक्कन और रख दें। अब दीया और भी कम तेजस्वी मालूम होगा, अब उस पर हम एक ढक्कन और रख दें और हम सात ढक्कन रख दें, तो सातवें ढक्कन के बाद दीये की बहुत ही कम रोशनी बाहर पहुँच पायेगी। पहले ढक्कन के बाद ज्यादा पहुँचती थी, दूसरे के बाद उससे कम तीसरे पर और कम, सातवें पर बहुत धीमी और धूमिल हो जायेगी। क्योंकि सात पर्दो को पार करके आयेगी ।
७. भौतिक ऊर्जा का ही सूक्ष्मतम रूप मनोमय-ऊर्जा
तो हमारी जो जीवन ऊर्जा की शक्ति है वह शरीर तक आते-आते बहुत धूमिल हो जाती है। इसलिए शरीर पर हमारा उतना काबू नहीं मालूम होता है । लेकिन अगर कोई भीतर प्रवेश करना शुरू करे तो शरीर पर उसका काबू बढ़ता चला जायगा । जिस मात्रा में भीतर प्रवेश होगा उस मात्रा में शरीर पर भी काबू बढ़ता चला जायगा। भौतिक का सूक्ष्मतम शरीर है इथरिक, इथरिक का सूक्ष्मतम हिस्सा है एस्ट्रल । अब चौथा शरीर है मेण्टल ।
अब तक हम सबको यही ख्याल था कि माइण्ड ( मन ) कुछ और बात है तथा पदार्थ कुछ और बात है। माइण्ड और मैटर ( पदार्थ ) अलग बातें हैं । असल में परिभाषा करने का उपाय ही न था । अगर किसी से हम पूछें कि मैटर ( पदार्थ ) क्या है तो कहा जा सकता है कि जो माइण्ड ( मन ) नहीं है । और माइण्ड ( मन ) क्या है, तो कहा जा सकता है कि जो मैटर ( पदार्थ ) नहीं है । बाकी ओर कोई परिभाषा है भी नहीं । इसी तरह हम सोचते रहे हैं इन दोनों को अलग करके । लेकिन अब हम जानते हैं कि माइण्ड ( मन ) भी मैटर का ही सूक्ष्मतम हिस्सा है या इससे उल्टा भी हम कह सकते हैं कि जिसे हम मैटर ( पदार्थ ) कहते है वह माइण्ड ( मन ) का ही कण्डेन्स्ड, ( सघन ) हो गया हिस्सा है ।
८. अलग-अलग विचारों को अलग-अलग तरंग रचना
एस्ट्रल ( सूक्ष्म ऊर्जा ) के भी अगर अणु ( कण ) टूटेंगे तो वे माइण्ड के थाट-वेव्ज ( विचार तरंगे ) बन जायेंगे । अब क्वान्टा और थाट वेव्ज ( विचार तरंगों ) में बड़ी निकटता है। अब तक नहीं समझा जाता था कि विचार भी
कोई भौतिक अस्तित्व रखता है। लेकिन जब आप एक विचार करते हैं तब आपके आसपास की तरंगें बदल जाती हैं। यह बहुत मजे की बात है । न केवल विचार को, बल्कि एक-एक शब्द की भी अपनी तरंग-लम्बान ( देव लेंथ ) है । अगर आप एक कांच के ऊपर रेत के कण बिष्ठा दें और कांच के नीचे से जोर से कहें बोम् तो उस कांच के ऊपर रेत पर अलग तरह की वेन्ज ( तरंगे ) बन जायेंगी और आप कहें राम तो अलग तरह की वेव्ज ( तरंगें ) बनेंगी । और अगर आप एक भद्दी गाली दें तो एक अलग तरह की तरंगें ( वेन्ज ) बनेंगी। और आप एक बड़ी हैरानी की बात में पड़ जायेंगे कि जितना भद्दा शब्द होगा उतना ही कुरूप ऊपर तरंगें ( वेब्ज ) बनेंगी । और जितना सुन्दर शब्द होगा उतनी सुन्दर तरंगें ( वेन्ज ) होंगी, उतना पैटर्न ( रूप ) होगा उनमें । जितना भद्दा शब्द होगा उतना पैटर्न ( ढाँचा ) नहीं होगा, अनाफिक ( अस्त-व्यस्त ) होगा ।
इसलिए बहुत हजारों वर्ष तक शब्द के लिए बड़ी खोजबीन हुई कि कौन-सा शब्द सुन्दर तरंग पैदा करता है, कौन-सा शब्द कितना वजन रखता है दूसरे के हृदय तक चोट पहुँचाने मे । लेकिन शब्द तो प्रकट हो गया विचार है । अप्रकट शब्द भी अपनी ध्वनियाँ रखता है जिसको हम विचार कहते हैं। जब आप सोच रहे हैं कुछ, तब भी आपके चारों तरफ विशेष प्रकार की ध्वनियाँ फैलनी शुरू हो जाती हैं। विशेष प्रकार की तरंगें आपको घेर लेती हैं इसलिए बहुत बार आपको ऐसा लगता है कि किसी आदमी के पास जाकर आप अचानक उदास हो जाते हैं । अभी उसने कुछ कहा भी नहीं। हो सकता है वह ऐसे हँस ही रहा हो आपको मिलकर । लेकिन फिर भी कोई उदासी भीतर से आपको पकड़ लेती है। किसी आदमी के पास जाकर आप बहुत प्रफुल्लित हो जाते हैं। किसी कमरे में प्रवेश करते ही आपको लगता है कि आप भीतर कुछ बदल गये । कुछ पवित्रता पकड़ लेती है, अपवित्रता पकड़ लेती है। किसी क्षण में कहीं कोई शान्ति पकड़ लेती है और कहीं कोई अशान्ति छू लेती है जिसको आपको समझना मुश्किल हो जाता है कि मैं तो अभी अशान्त नही था, अचानक यह अशान्ति मन में क्यों उठ आयी ।
आपके चारों तरफ विचारों की तरंगें है और वे तरंगें २४ घण्टे आपमें प्रवेश कर रही है। अभी तो एक फ्रेंच वैज्ञानिक ने एक छोटा-सा यन्त्र बनाया है जो विचार की तरंगों को पकड़ने में सफल हुआ है। उस यन्त्र के पास जाते से ही वह बताना शुरू कर देता है कि यह भावनी किस तरह के विचार कर रहा है। उस पर तरंगें पकड़नी शुरू हो जाती हैं। अगर एक इटिएट ( मूर्ख ) को जड़ बुद्धि आदमी को ले जाया जाय तो उसमें बहुत कम तरह की तरंगें पकड़ती है। क्योंकि वह विचार ही नहीं कर रहा है। अगर एक बहुत प्रतिभाशाली आदमी को ले
जाया जाय तो वह पूरा का पूरा यन्त्र कम्पन्न लेने लगता है, उसमें इतनी तरंगें पकड़ने लगती हैं ।
तो जिसको हम मन कहते हैं वह एस्ट्रल ( सूक्ष्म ) का भी सूक्ष्म है । निरन्तर भीतर हम सूक्ष्म-से-सूक्ष्म होते चले जाते हैं। अभी विज्ञान इथरिक ( आकाशीय ) तक पहुँच पाया है। अभी भी उसने उसको इथरिक नहीं कहा है, उसको एटामिक कह रहा है, परमाणविक कह रहा है, ऊर्जा एनर्जी कह रहा है। लेकिन तत्व के दूसरे शरीर पर वह उतर गया है। तीसरे शरीर पर उतरने में बहुत देर नहीं लगेगी । वह तीसरे शरीर पर उतर जायगा । उतरने की जरूरतें पैदा हो गयी है ।
चौथे शरीर पर भी बहुत दूसरी दिशाओं से काम चल रहा है। क्योंकि मन को अलग ही समझा जाता था इसलिए कुछ वैज्ञानिक मन पर अलग से ही काम कर रहे हैं । वह शरीर से काम नहीं कर रहे हैं। उन्होंने चौथे शरीर के सम्बन्ध में बहुत सी बातों का अनुभव कर लिया है। अब जैसे हम सब एक अर्थ मे ट्रान्समीटर्स ( विचार-प्रेषण यन्त्र ) हैं और हमारे विचार हमारे चारों तरफ विकीर्ण रहे हैं। मैं धापसे जब नहीं भी बोल रहा हूँ तब भी मेरा विचार आप तक जा रहा है।
९. चौथे मनस शरीर को वैज्ञानिक सम्भावना- विचार सम्प्रेषण ( टेलिपंथी ) पर खोजें
इधर रूस में इस सम्बन्ध में काफी दूर तक काम हुआ है और एक वैज्ञानिक फयादेव ने एक हजार मील दूर तक विचार का सम्प्रेषण किया। वह मास्को मे बैठा है और एक हजार मील दूर दूसरे आदमी को विचार का सम्प्रेषण कर रहा है । ठीक वैसे ही जैसे रेडियो से ट्रान्समीशन ( सम्प्रेषण ) होता है। ऐसे ही अगर हम संकल्प पूर्वक एक दिशा में अपने चित को केन्द्रित करके किसी विचार को तीव्रता से सम्प्रेषित करें तो वह उस दिशा में पहुँच जाता है। अगर दूसरी तरफ भी माइण्ड रिसीव करने को, ग्राहक होने को तैयार हो उसी क्षण में, उसी दिशा में मन केन्द्रित हो, खुला हो और स्वीकार करने को राजी हो तो विचार सम्प्रेषित हो जाते हैं ।
१०. विचार सम्प्रेषण का एक घरेलू प्रयोग
इस पर कभी छोटा-मोटा प्रयोग आप घर में करके देखें तो अच्छा होगा । छोटे बच्चे जल्दी से पकड़ लेते हैं। क्योंकि अभी उनकी ग्राहकता तीव्र होती है । कमरा बन्द कर लें । एक छोटे बच्चे को कमरे को अन्धेरा करके दूसरे कोने पर बिठा दें। आप दूसरे कोने पर बैठ जायें और उस बच्चे से कहें कि पांच मिनट के लिए तू ध्यान मेरी तरफ रखना। मैं तुझसे चुपचाप कुछ कहूँगा उसे तू सुनने की
धाधुनिक विज्ञान की डुबकी-धर्म के असीम रहत्य-सागर में ४०९
कोशिश करना । अगर तुझे सुनायी पड़ जाय तो बोल देना। फिर आप एक शब्द पकड़ लें कोई भी, जैसे राम या गुलाब। और इस शब्द को उस बच्चे की तरफ ध्यान रखकर जोर से अपने भीतर गुंजाने लगें । बोलें नहीं । राम-राम ही गुंजाने लगें। दो तीन दिन में आप पायेंगे कि उस बच्चे ने आपके शब्द को पकड़ना शुरू कर दिया। तब इसका क्या मतलब हुआ। फिर इससे उल्टा भी हो सकता है। एक दफे ऐसा हो जाय तो आपको आसानी हो जायेगी । फिर आप बच्चे को बिठा सकते हैं और उससे कह सकते हैं कि वह एक शब्द सोचकर आपकी तरफ फेंके। लेकिन तब आप ग्राहक हो सकेंगे। क्योंकि आपका सन्देह ( डाउट ) गिर गया होगा । घटना घट सकती है तो फिर ग्राहकता बढ़ जाती है। ११. निर्जरा -कर्म-मल ( कर्माणुओं ) का झड़ जाना
आपके और आपके बच्चे के बीच तो भौतिक जगत फैला हुआ है। यह विचार किसी गहरे अर्थों में भौतिक ही होना चाहिए अन्यथा इस भौतिक माध्यम को पार न कर पायेंगे । यह जानकर आपको हैरानी होगी कि महाबीर ने कर्म तक को भौतिक ( फिजिकल, मैटेरियल ) कहा है। जब आप क्रोध करते हैं और किसी की हत्या कर देते हैं तो आपने एक कर्म किया क्रोध की और हत्या करने का । तो महाबीर कहते हैं यह भी सूक्ष्म अणुओं में आपमें चिपक जाता है, कर्म-मल बन जाता है। यह भी भौतिक ( मैटेरियल ) है । यह भी कोई अभौतिक ( इममैटिरियल ) चीज नहीं है। यह भी मैटर ( पदार्थ ) की तरह पकड़ लेता है आपको । और इसलिए महावीर निर्जरा कहते हैं इस कर्म मल से छुटकारा हो जाने को। यह सारा का सारा जो कर्म-अणु आपके चारों तरफ जुड़ गये हैं ये गिर जायें। जिस दिन ये गिर जायेंगे उस दिन आप शुद्धतम शेष रह जायेंगे। वह निर्जरा होगी। निर्जरा का मतलब है कर्म के अणुओं का झड़ जाना । जब आप क्रोध करते है तब आप एक कर्म कर रहे हैं। वह क्रोध भी आणविक होकर आपके साथ चलता है। इसलिए जब आपका यह शरीर गिर जाता है तब भी उसको गिरने की जरूरत नहीं होती है। वह दूसरे जन्म में भी आपके साथ खड़ा हो जाता है। क्योंकि वह अत्यन्त सूक्ष्म है।
तो मेण्टल बॉडी (मनस शरीर ) जो है वह एस्ट्रल बॉडी ( सूक्ष्म शरीर ) सूक्ष्मतम हिस्सा है। और इसलिए इन चारों में कहीं भी कोई खाली जगह नहीं है । ये सब एक दूसरे के सूक्ष्म होते गये हिस्से हैं । मेण्टल बॉडी पर काफी काम हुआ है । क्योकि अलग से मनस-शास्त्र उस पर काम कर रहा है । और विशेष कर पेरा साइकोलॉजी ( परा-मनोविज्ञान ) उस पर अलग से काम कर रही है । और मनस-ऊर्जा के अद्भुत नियम विज्ञान की पकड़ में आ गये हैं। धर्म के पकड़ में तो बहुत समय से थे, अब विज्ञान की पकड़ में भी बहुत सी बातें साफ हो गयी है ।
बिन बोधा तिन पाइ
१२. संकल्प का विचार तरंगों का प्रभाव पदार्थ पर भी
अब जैसे मांटकालो में ऐसे ढेर मादमी हैं जिनको जुए में हराना मुश्किल है। क्योंकि वह जो पौसा फेंकते हैं वह जो नम्बर फेंकना चाहते हैं, वही फेंक लेते हैं । उनके पाँसे बदल देने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। पहले तो समझा जाता था कि बे पाँसे कुछ चालबाजी से बनाये गये हैं कि ये पासे वहीं गिर जाते हैं जहाँ थे गिराना चाहते हैं। लेकिन हर तरह के पाँसे देकर थे जो नम्बर लाना चाहते हैं वही आँकड़ा ले जाते हैं। भांख बन्द करके भी ले आते हैं। तब बड़ी मुश्किल हो गयी । तब इसकी जांच-पड़ताल करनी जरूरी हो गयी कि बात क्या है। असल में उनका विचार का तीव्र संकल्प पाँसे को प्रभावित करता है। वह जो लाना चाहते हैं उसके तीव्र संकल्प की धारा से पाँसे को फेंकते हैं। विचार की वे तरंगें उन पौसों को उसी झांकड़े पर ले ग्राती । अब इसका मतलब क्या हुआा। अगर विचार की ये तरंगे एक पौस को बदलती हैं तो विचार की तरंगें भी भौतिक हैं नहीं तो पाँसे को नहीं बदल सकती ।
१३. विचार शक्ति की एक प्रयोगात्मक जाँच
आाप छोटा सा प्रयोग करें तो आपके ख्याल में भा जाय। चूंकि विज्ञान की बात भाप करते हैं इसलिए मैं प्रयोग की बात करता हूँ। एक गिलास में पानी भरकर रख लें भौर ग्लेसरीन या कोई भी चिकना पदार्थ उस ग्लास के पानी के ऊपर थोड़ा सा डाल दें जिससे कि उसकी एक पतली हल्की फिल्म पानी के ग्लास के ऊपर फैल जाय । एक छोटी प्रालपीन बिलकुल पतली जो फिल्म पर तैर सके, उसको उसके ऊपर छोड़ दें। फिर कमरे को सब तरफ से बन्द करके दोनों हाथों से जमीन पर टेक कर भाँखें उस छोटी सी भालपीन पर गड़ा लें । पाँच मिनट चुपचाप बैठे रहें भाँखें गड़ाये हुए। फिर उस झालपीन से कहें कि बायें घूम जाओ तो मालपीन बायें घूमेगी। फिर कहें दायें घूम जानो तो दायें घूमेगी । कहें कि रुक जामो, तो रुकेगी । कहें चलो, तो चलेगी। अगर आपका विचार एक भालपीन को बायें घुमा सकता है, दायें घुमा सकता है तो फिर एक पहाड़ को भी हिला सकता है। जरा लम्बी बात है बाकी फर्क नहीं रह गया, बुनियादी फर्क नही रह गया। प्रापकी सामर्थ्य अगर एक भालपीन को हिलाती है तो बुनियादी बात पूरी हो गयी है। अब यह दूसरी बात है कि पहाड़ बहुत बड़ा पड़ जाय और आप न हिला पायें लेकिन हिल सकता है पहाड़ ।
१४. वस्तुओं द्वारा विचार तरंगों का अपशोषण
हमारे विचार की तरंगें पदार्थ को छूती और रूपान्तरित करती हैं। ऐसे लोग हैं जिनको, अगर आपके हाथ का रूमाल दिया जा सके तो आपके व्यक्तित्व | अभी विज्ञान वहीं नहीं पहुँचा है, लेकिन पहुँच जायगा । क्योंकि कल वह भौतिक को स्वीकार करता था, आणविक को स्वीकार नहीं करता था। कल बह कहता था, पदार्थ ठोस चीज है । आज वह कहता है ठोस जैसी कोई चीज हो नहीं है। जो भी है सब गैर-ठोस हो गया है सब। यह दीवाल भी जो हमें इतनी ठोस दिखायी पड़ रही है, वह ठोस नहीं है । यह भी पोरस है । इसमें भी छेद है और चीजें इसमें आर-पार जा रही है। फिर भी हम कहेंगे कि छेदों के आसपास जिनके बीच छेद हैं वह तो कम-से-कम ठोस अणु होंगे। वह भी ठोस अणु नहीं है। एक-एक अणु भी पोरस है । अगर हम एक अणु को बड़ा कर सकें तो जमीन और चाँद और सूरज और तारे के बीच जितना फासला है उतना अणुओं के कणों के बीच फासला है। अगर उसको इतना बड़ा कर सकें तो फासला इतना ही हो जायगा । फिर वह जो फासले को भी जोड़ने वाले अणु हैं, हम कहेंगे कम-से-कम वह तो ठोस हैं। लेकिन विज्ञान कहता है कि वह भी ठोस नही है । वह सिर्फ विद्युत् कण हैं। कण भी अब विज्ञान मानने को राजी नहीं है। क्योंकि कण के साथ पदार्थ का पुराना ख्याल जुड़ा हुआ है। कण का मतलब होता है पदार्थ का टुकड़ा । वह कण भी नहीं है। क्योंकि कण तो एक जैसा रहता है । वह पूरे वक्त बदलते रहते हैं। वे लहर की तरह हैं, कण की तरह नहीं हैं। जैसे पानी में एक लहर उठी । जब तक आपने कहा लहर उठी तब तक वह कुछ और हो गयी। जब आपने कहा वह रही लहर तब तक वह कुछ और हो गयी। क्योकि लहर का मतलब यह है कि वह आ रही है, जा रही है। लेकिन अगर हम लहर भी कहें तो भी पानी की लहर एक भौतिक घटना है। इसलिए विज्ञान ने एक नया शब्द खोजा है जो कि अभी था ही नहीं, बाज से तीस साल पहले। वह है क्वान्टा । अभी हिन्दुस्तान में उसके लिए दूसरा शब्द खोजना मुश्किल है। इसलिए मुश्किल है जैसे हिन्दी के पास शब्द है ब्रह्म और इसे अंग्रेजी में कहना मुश्किल है। क्योंकि कभी जरूरत पड़ गयी थी कुछ अनुभव करनेवाले लोगों को तब यह शब्द खोज लिया गया। पश्चिम उस जगह नहीं पहुँचा है कभी, इसलिए इस शब्द की उन्हें कभी जरूरत नहीं पड़ी। इसलिए धर्म की भाषा के बहुत से शब्द पश्चिम की भाषा में नहीं मिलेंगे । जैसे ओम् । उसका कोई अनुवाद दुनिया की किसी भाषा में नहीं हो सकता है। वह कभी किन्हीं आध्यात्मिक गहराइयों में अनुभव की गयी बात है। उसके लिए हमने एक शब्द खोज लिया था। लेकिन पश्चिम के पास उसके लिए कोई समानान्तर शब्द नहीं है कि उसका अनुवाद किया जा सके। ऐसे ही क्वान्टा पश्चिम के विज्ञान की बहुत ऊँचाई पर पाया गया शब्द है जिसके लिए दूसरी भाषा में कोई आधुनिक विज्ञान की बुबकी-धर्म के असीम रहस्य-सागर में चार सौ तीन शब्द नहीं है । क्वाटा का अगर हम मतलब समझना चाहें तो क्वांटा का मतलब होता है कण और तरंग एक साथ। इसको कन्सीव करना मुश्किल हो जायगा। कोई चीज कण और तरंग एक साथ, कभी वह तरंग की तरह व्यवहार करता है और कभी कण की तरह व्यवहार करता है । और कोई भरोसा नहीं है उसका कि वह कैसा व्यवहार करे । चार. पदार्थ के सूक्ष्मतम ऊर्जा कणों में चेतना के लक्षण पदार्थ हमेशा भरोसे योग्य था । पदार्थ में एक निश्चितता थी लेकिन वह जो अणु ऊर्जा के आखिरी कण मिले हैं वे अनिश्चित के हैं। उनकी कोई निश्चयात्मकता नहीं है। उनके व्यवहार को पक्का तय नहीं किया जा सकता । इसलिए पहले विज्ञान बहुत सटॅन्टी पर खड़ा था। वह कहता था हर चीज निश्चित है। अब वैज्ञानिक उतने दावे से नहीं कह सकता कि हर चीज निश्चित है। क्योंकि वह जहाँ पहुँचा है वहाँ उसको पता चला है कि निश्चित होना बहुत ऊपर-ऊपर की बात है। भीतर बहुत गहरा अनिश्चय है । और एक बड़े मजे की बात है कि अनिश्चय का मतलब क्या होता है ? जहाँ अनिश्चय है वहाँ चेतना होनी चाहिए नहीं तो प्रनिश्चय नहीं हो सकता। अनसटॅन्टी जो है वह कान्शसनेस का हिस्सा है । सटॅन्टी जो है वह मैटर का हिस्सा है। अगर हम इस कमरे में एक कुर्सी को छोड़ जायँ तो लौटने पर हमे वही मिलेगी जहाँ थी । लेकिन एक बच्चे को हम इस कमरे में छोड़ जायें तो वह वहाँ नहीं मिलेगा जहाँ था । उसके बाबत अनसटॅन्टी रहेगी कि अब वह कहाँ है और क्या कर रहा है। कुर्सी के बाबत हम सटॅन हो सकते हैं कि वह वहीं है जहाँ थी । पदार्थ के बाबत निश्चित हुआ जा सकता है। चेतना के बाबत निश्चित नहीं हुआ जा सकता है। तो विज्ञान ने जिस दिन यह स्वीकार कर लिया कि अणु का जो आखिरी हिस्सा है उसके बाबत हम निश्चित नहीं हो सकते हैं कि वह कैसा व्यवहार करेगा, उसी दिन से विज्ञान के द्वारा पदार्थ के आखिरी हिस्से में चेतना की सम्भावना स्वीकृत हो गयी है । अनसर्टेन्टी चेतना का लक्षण है। जड़ पदार्थ अनिश्चित नहीं हो सकता। ऐसा नहीं है कि आग का मन हो तो जलाये और मन हो तो न जलाये। ऐसा नहीं है कि पानी की तबीयत हो तो नीचे बहे और तबीयत हो तो ऊपर बहे । ऐसा नहीं है कि पानी एक सौ डिग्री पर गर्म होना चाहिए तो एक सौ पर हो, अस्सी पर होना चाहे तो अस्सी पर हो । पदार्थ का व्यवहार सुनिश्चित है। लेकिन जब हम इन सबके भीतर प्रवेश करते है तो वह जो आखिरी हिस्से मिलते हैं पदार्थ के वह अनिश्चित है। इसे हम ऐसा भी समझ सकते है कि समझ ले कि बम्बई के बाबत अगर हम तय करना चाहें कि रोज कितने आदमी मरते है तो तय हो जायगा। करीबकरीत्र तय हो जायगा । अगर एक करोड़ आदमी है तो साल भर का हिसाब लगाने से हमको पता चल सकता है कि रोज कितने आदमी मरते हैं और वह भविष्यवाणी करीब-करीब सही होगी। थोड़ी बहुत भूल हो सकती है। अगर हम पूरे पचास करोड़ के मुल्क के बाबत विचार करे तो भूल और कम हो जायगी । सटॅन्टी और बढ़ जायेगी। अगर हम सारी दुनिया के बाबत तय करें तो सटॅन्टी और बढ़ जायेगी और हम तय कर सकते है कि इतने आदमी रोज मरते है। लेकिन अगर हम एक आदमी के बाबत तय करने जायें कि यह कब मरेगा तो सटॅन्टी बहुत कम हो जायेगी । जितनी भीड़ बढ़ती है उतना मैटेरियल हो जाती है चीज । जितना इन्डीवीजुअल होती है बात उतनी ही कान्शस हो जाती है। असल में एक पदार्थ का टुकड़ा भीड़ है करोड़ो अणुओ की । इसीलिए उसके वाबत हम तय कर सकते हैं। अगर हम नीचे प्रवेश करते है और एक इलेक्ट्रान को पकड़ते हैं तो वह इण्डीविजुगल है । उसके बाबत तय होना मुश्किल हो जाता है। उसका व्यवहार वह खुब ही तय करता है तो पूरे पत्थर के बाबत हम कह सकते हैं कि यह यहीं मिलेगा । लेकिन इस पत्थर के भीतर जो अणुओं का व्यक्तित्व था वह वही नहीं मिलेगा । जब हम लौटकर आयेंगे तब सब बदल चुका होगा । उसने सब जगह बदल ली होगी। वह यात्रा कर चुका होगा । पदार्थ की गहराई में उतरकर अनिश्चय शुरू हो गया । इसलिए अत्र विज्ञान सटॅन्टी की बात न करके प्रोबेबिलिटी की वात करने लगा । वह कहता है 'इसकी' सम्भावना ज्यादा है बजाय 'उसके' । अब वह ऐसा नहीं कहता है कि 'ऐसा ही' होगा। बड़े मजे की बात है कि विज्ञान की तो सारी दावेदारी जो थी वह उसकी निश्चयात्मकता पर थी। वह जो भी कहता था तो निश्चित था कि ऐसा होगा और विज्ञान की जो गहरी खोज है उसने विज्ञान को उगमगा दिया है। और उसका कारण है। उसका कारण यह है कि विज्ञान फिजिकल से इथरिक पर चला गया है जिसका वैज्ञानिकों को अन्दाज नहीं है। असल में वह इस भाषा को स्वीकार नहीं करते इसलिए तब तक उनको अन्दाज भी नही हो सकता कि फिजिकल से हट कर इथरिक पर पहुँच गये हैं। वह पदार्थ में भी प्राधुनिक विज्ञान की डुबकी-धर्म के असीम रहस्य-सागर में चार सौ पाँच दूसरे भाव-शरीर पर पहुँच गये हैं और दूसरे शरीर की अपनी सम्भावनाएं हैं। लेकिन पहला शरीर और दूसरे शरीर के बीच कोई खाली जगह नही है । पाँच. ईथर के कणों को तोड़ने पर एस्ट्रल कणों का पता चलेगा तीसरा जो एस्ट्रल शरीर है वह और भी सूक्ष्म है । वह सूक्ष्म का भी सूक्ष्म है । वह ईयर के भी अगर हम अणु बना सकें, जो अभी बहुत मुश्किल है क्योंकि अभी अभी तो हम मुश्किल से फिजिक्स में परमाणु पर पहुँच पाये है, अभी हम पदार्थ के परमाणु जान पाये हैं। अभी ईथर के लिए बहुत वक्त लग सकता है। लेकिन जिस दिन हम ईथर के परमाणु जान सकेंगे उस दिन हमें पता चलेगा कि उनके भीतर के सूक्ष्म कण आगे वाले शरीर के कण सिद्ध होंगे, एस्ट्रल के । असल में फिजिकल एटम को जब हमने तोड़ा तो उसके सूक्ष्मतम कम इमरिक सिद्ध हुए हैं, ईयर को हम तोड़ेंगे तो उसके सूक्ष्मतम-कण एस्ट्रल सिद्ध होंगे, सूक्ष्म सिद्ध होगे। तब उनके बीच एक जोड़ मिल जायगा । ये तीन शरीर तो बहुत स्पष्ट जुड़े हुए हैं इसलिए प्रेतात्माओं के चित्र लिये जा सके हैं । छः. प्रेतात्मा का शरीर इथरिक व एस्ट्रल ऊर्जा का बना हुआ प्रेतात्मा के पास भौतिक शरीर नहीं होता है । इथरिक बॉडी से शुरू होता है उसका परदा । प्रेतात्माओं के चित्र लिये जा सके हैं सिर्फ इसी वजह से कि ईथर भी अगर बहुत कण्डेन्स्ड हो जाय तो बहुत सेन्सीटिव फोटो प्लेट उसे पकड़ सकती है और ईथर के साथ एक सुविधा है कि वह इतनी सूक्ष्म है कि मनस से प्रभावित होगी। अगर एक प्रेत यह चाहे कि मैं यहाँ प्रकट हो जाऊँ तो वह अपनी इथरिक बॉडी को कण्डेन्स्ड कर लेगा । वह अणु जो दूर-दूर है पास सरक आयेंगे और उसकी एक रूपरेखा बन जायेगी । उस रूपरेखा का चित्र लिया जा सका है, उस रूपरेखा का चित्र पकड़ा जा सका है । यह जो दूसरा हमारा ईयर का बना हुआ शरीर है यह हमारे भौतिक शरीर से कहीं ज्यादा मन से प्रभावित हो सकता है । भौतिक शरीर भी हमारे मन से प्रभावित होता है लेकिन उतना नहीं। जितना सूक्ष्म होगा उतना मन से प्रभावित होने लगेगा, उतने मन के करीब हो जायगा। एस्ट्रल शरीर तो और भी ज्यादा मन से प्रभावित होगा। इसलिए एस्ट्रल ट्रेवेलिंग सम्भव हो जाती है। एक आदमी इस कमरे में सोकर भी अपनी एस्ट्रल बॉडी से दुनिया के किसी भी हिस्से में हो सकता है । इसलिए यह कहानियाँ बहुत बार सुनी होंगी कि एक आदमी दो जगह दिखायी पड़ गया, तीन जगह दिखायी पड़ गया, इसमें कोई कठिनाई नहीं है। उसका भौतिक शरीर एक जगह होगा, उसका एस्ट्रल शरीर दूसरी जगह हो सकता है । इसमें अड़चन नहीं है। यह थोड़े से ही अभ्यास की बात है और आपका शरीर दूसरी जगह प्रकट हो सकता है। जितना हम भीतर जाते हैं उतनी ही मन को शक्ति बढ़ती चली जाती है, जितना हो हम बाहर आते हैं उतनी ही मन की शक्ति कम होती चली जाती है। ऐसा ही जैसे हम एक दीया जलायें और उस दीये के ऊपर कांच का एक ढक्कन रख दें। अब दीया उतना तेजस्वी नहीं मालूम होगा। फिर एक दूसरा ढक्कन और रख दें। अब दीया और भी कम तेजस्वी मालूम होगा, अब उस पर हम एक ढक्कन और रख दें और हम सात ढक्कन रख दें, तो सातवें ढक्कन के बाद दीये की बहुत ही कम रोशनी बाहर पहुँच पायेगी। पहले ढक्कन के बाद ज्यादा पहुँचती थी, दूसरे के बाद उससे कम तीसरे पर और कम, सातवें पर बहुत धीमी और धूमिल हो जायेगी। क्योंकि सात पर्दो को पार करके आयेगी । सात. भौतिक ऊर्जा का ही सूक्ष्मतम रूप मनोमय-ऊर्जा तो हमारी जो जीवन ऊर्जा की शक्ति है वह शरीर तक आते-आते बहुत धूमिल हो जाती है। इसलिए शरीर पर हमारा उतना काबू नहीं मालूम होता है । लेकिन अगर कोई भीतर प्रवेश करना शुरू करे तो शरीर पर उसका काबू बढ़ता चला जायगा । जिस मात्रा में भीतर प्रवेश होगा उस मात्रा में शरीर पर भी काबू बढ़ता चला जायगा। भौतिक का सूक्ष्मतम शरीर है इथरिक, इथरिक का सूक्ष्मतम हिस्सा है एस्ट्रल । अब चौथा शरीर है मेण्टल । अब तक हम सबको यही ख्याल था कि माइण्ड कुछ और बात है तथा पदार्थ कुछ और बात है। माइण्ड और मैटर अलग बातें हैं । असल में परिभाषा करने का उपाय ही न था । अगर किसी से हम पूछें कि मैटर क्या है तो कहा जा सकता है कि जो माइण्ड नहीं है । और माइण्ड क्या है, तो कहा जा सकता है कि जो मैटर नहीं है । बाकी ओर कोई परिभाषा है भी नहीं । इसी तरह हम सोचते रहे हैं इन दोनों को अलग करके । लेकिन अब हम जानते हैं कि माइण्ड भी मैटर का ही सूक्ष्मतम हिस्सा है या इससे उल्टा भी हम कह सकते हैं कि जिसे हम मैटर कहते है वह माइण्ड का ही कण्डेन्स्ड, हो गया हिस्सा है । आठ. अलग-अलग विचारों को अलग-अलग तरंग रचना एस्ट्रल के भी अगर अणु टूटेंगे तो वे माइण्ड के थाट-वेव्ज बन जायेंगे । अब क्वान्टा और थाट वेव्ज में बड़ी निकटता है। अब तक नहीं समझा जाता था कि विचार भी कोई भौतिक अस्तित्व रखता है। लेकिन जब आप एक विचार करते हैं तब आपके आसपास की तरंगें बदल जाती हैं। यह बहुत मजे की बात है । न केवल विचार को, बल्कि एक-एक शब्द की भी अपनी तरंग-लम्बान है । अगर आप एक कांच के ऊपर रेत के कण बिष्ठा दें और कांच के नीचे से जोर से कहें बोम् तो उस कांच के ऊपर रेत पर अलग तरह की वेन्ज बन जायेंगी और आप कहें राम तो अलग तरह की वेव्ज बनेंगी । और अगर आप एक भद्दी गाली दें तो एक अलग तरह की तरंगें बनेंगी। और आप एक बड़ी हैरानी की बात में पड़ जायेंगे कि जितना भद्दा शब्द होगा उतना ही कुरूप ऊपर तरंगें बनेंगी । और जितना सुन्दर शब्द होगा उतनी सुन्दर तरंगें होंगी, उतना पैटर्न होगा उनमें । जितना भद्दा शब्द होगा उतना पैटर्न नहीं होगा, अनाफिक होगा । इसलिए बहुत हजारों वर्ष तक शब्द के लिए बड़ी खोजबीन हुई कि कौन-सा शब्द सुन्दर तरंग पैदा करता है, कौन-सा शब्द कितना वजन रखता है दूसरे के हृदय तक चोट पहुँचाने मे । लेकिन शब्द तो प्रकट हो गया विचार है । अप्रकट शब्द भी अपनी ध्वनियाँ रखता है जिसको हम विचार कहते हैं। जब आप सोच रहे हैं कुछ, तब भी आपके चारों तरफ विशेष प्रकार की ध्वनियाँ फैलनी शुरू हो जाती हैं। विशेष प्रकार की तरंगें आपको घेर लेती हैं इसलिए बहुत बार आपको ऐसा लगता है कि किसी आदमी के पास जाकर आप अचानक उदास हो जाते हैं । अभी उसने कुछ कहा भी नहीं। हो सकता है वह ऐसे हँस ही रहा हो आपको मिलकर । लेकिन फिर भी कोई उदासी भीतर से आपको पकड़ लेती है। किसी आदमी के पास जाकर आप बहुत प्रफुल्लित हो जाते हैं। किसी कमरे में प्रवेश करते ही आपको लगता है कि आप भीतर कुछ बदल गये । कुछ पवित्रता पकड़ लेती है, अपवित्रता पकड़ लेती है। किसी क्षण में कहीं कोई शान्ति पकड़ लेती है और कहीं कोई अशान्ति छू लेती है जिसको आपको समझना मुश्किल हो जाता है कि मैं तो अभी अशान्त नही था, अचानक यह अशान्ति मन में क्यों उठ आयी । आपके चारों तरफ विचारों की तरंगें है और वे तरंगें चौबीस घण्टे आपमें प्रवेश कर रही है। अभी तो एक फ्रेंच वैज्ञानिक ने एक छोटा-सा यन्त्र बनाया है जो विचार की तरंगों को पकड़ने में सफल हुआ है। उस यन्त्र के पास जाते से ही वह बताना शुरू कर देता है कि यह भावनी किस तरह के विचार कर रहा है। उस पर तरंगें पकड़नी शुरू हो जाती हैं। अगर एक इटिएट को जड़ बुद्धि आदमी को ले जाया जाय तो उसमें बहुत कम तरह की तरंगें पकड़ती है। क्योंकि वह विचार ही नहीं कर रहा है। अगर एक बहुत प्रतिभाशाली आदमी को ले जाया जाय तो वह पूरा का पूरा यन्त्र कम्पन्न लेने लगता है, उसमें इतनी तरंगें पकड़ने लगती हैं । तो जिसको हम मन कहते हैं वह एस्ट्रल का भी सूक्ष्म है । निरन्तर भीतर हम सूक्ष्म-से-सूक्ष्म होते चले जाते हैं। अभी विज्ञान इथरिक तक पहुँच पाया है। अभी भी उसने उसको इथरिक नहीं कहा है, उसको एटामिक कह रहा है, परमाणविक कह रहा है, ऊर्जा एनर्जी कह रहा है। लेकिन तत्व के दूसरे शरीर पर वह उतर गया है। तीसरे शरीर पर उतरने में बहुत देर नहीं लगेगी । वह तीसरे शरीर पर उतर जायगा । उतरने की जरूरतें पैदा हो गयी है । चौथे शरीर पर भी बहुत दूसरी दिशाओं से काम चल रहा है। क्योंकि मन को अलग ही समझा जाता था इसलिए कुछ वैज्ञानिक मन पर अलग से ही काम कर रहे हैं । वह शरीर से काम नहीं कर रहे हैं। उन्होंने चौथे शरीर के सम्बन्ध में बहुत सी बातों का अनुभव कर लिया है। अब जैसे हम सब एक अर्थ मे ट्रान्समीटर्स हैं और हमारे विचार हमारे चारों तरफ विकीर्ण रहे हैं। मैं धापसे जब नहीं भी बोल रहा हूँ तब भी मेरा विचार आप तक जा रहा है। नौ. चौथे मनस शरीर को वैज्ञानिक सम्भावना- विचार सम्प्रेषण पर खोजें इधर रूस में इस सम्बन्ध में काफी दूर तक काम हुआ है और एक वैज्ञानिक फयादेव ने एक हजार मील दूर तक विचार का सम्प्रेषण किया। वह मास्को मे बैठा है और एक हजार मील दूर दूसरे आदमी को विचार का सम्प्रेषण कर रहा है । ठीक वैसे ही जैसे रेडियो से ट्रान्समीशन होता है। ऐसे ही अगर हम संकल्प पूर्वक एक दिशा में अपने चित को केन्द्रित करके किसी विचार को तीव्रता से सम्प्रेषित करें तो वह उस दिशा में पहुँच जाता है। अगर दूसरी तरफ भी माइण्ड रिसीव करने को, ग्राहक होने को तैयार हो उसी क्षण में, उसी दिशा में मन केन्द्रित हो, खुला हो और स्वीकार करने को राजी हो तो विचार सम्प्रेषित हो जाते हैं । दस. विचार सम्प्रेषण का एक घरेलू प्रयोग इस पर कभी छोटा-मोटा प्रयोग आप घर में करके देखें तो अच्छा होगा । छोटे बच्चे जल्दी से पकड़ लेते हैं। क्योंकि अभी उनकी ग्राहकता तीव्र होती है । कमरा बन्द कर लें । एक छोटे बच्चे को कमरे को अन्धेरा करके दूसरे कोने पर बिठा दें। आप दूसरे कोने पर बैठ जायें और उस बच्चे से कहें कि पांच मिनट के लिए तू ध्यान मेरी तरफ रखना। मैं तुझसे चुपचाप कुछ कहूँगा उसे तू सुनने की धाधुनिक विज्ञान की डुबकी-धर्म के असीम रहत्य-सागर में चार सौ नौ कोशिश करना । अगर तुझे सुनायी पड़ जाय तो बोल देना। फिर आप एक शब्द पकड़ लें कोई भी, जैसे राम या गुलाब। और इस शब्द को उस बच्चे की तरफ ध्यान रखकर जोर से अपने भीतर गुंजाने लगें । बोलें नहीं । राम-राम ही गुंजाने लगें। दो तीन दिन में आप पायेंगे कि उस बच्चे ने आपके शब्द को पकड़ना शुरू कर दिया। तब इसका क्या मतलब हुआ। फिर इससे उल्टा भी हो सकता है। एक दफे ऐसा हो जाय तो आपको आसानी हो जायेगी । फिर आप बच्चे को बिठा सकते हैं और उससे कह सकते हैं कि वह एक शब्द सोचकर आपकी तरफ फेंके। लेकिन तब आप ग्राहक हो सकेंगे। क्योंकि आपका सन्देह गिर गया होगा । घटना घट सकती है तो फिर ग्राहकता बढ़ जाती है। ग्यारह. निर्जरा -कर्म-मल का झड़ जाना आपके और आपके बच्चे के बीच तो भौतिक जगत फैला हुआ है। यह विचार किसी गहरे अर्थों में भौतिक ही होना चाहिए अन्यथा इस भौतिक माध्यम को पार न कर पायेंगे । यह जानकर आपको हैरानी होगी कि महाबीर ने कर्म तक को भौतिक कहा है। जब आप क्रोध करते हैं और किसी की हत्या कर देते हैं तो आपने एक कर्म किया क्रोध की और हत्या करने का । तो महाबीर कहते हैं यह भी सूक्ष्म अणुओं में आपमें चिपक जाता है, कर्म-मल बन जाता है। यह भी भौतिक है । यह भी कोई अभौतिक चीज नहीं है। यह भी मैटर की तरह पकड़ लेता है आपको । और इसलिए महावीर निर्जरा कहते हैं इस कर्म मल से छुटकारा हो जाने को। यह सारा का सारा जो कर्म-अणु आपके चारों तरफ जुड़ गये हैं ये गिर जायें। जिस दिन ये गिर जायेंगे उस दिन आप शुद्धतम शेष रह जायेंगे। वह निर्जरा होगी। निर्जरा का मतलब है कर्म के अणुओं का झड़ जाना । जब आप क्रोध करते है तब आप एक कर्म कर रहे हैं। वह क्रोध भी आणविक होकर आपके साथ चलता है। इसलिए जब आपका यह शरीर गिर जाता है तब भी उसको गिरने की जरूरत नहीं होती है। वह दूसरे जन्म में भी आपके साथ खड़ा हो जाता है। क्योंकि वह अत्यन्त सूक्ष्म है। तो मेण्टल बॉडी जो है वह एस्ट्रल बॉडी सूक्ष्मतम हिस्सा है। और इसलिए इन चारों में कहीं भी कोई खाली जगह नहीं है । ये सब एक दूसरे के सूक्ष्म होते गये हिस्से हैं । मेण्टल बॉडी पर काफी काम हुआ है । क्योकि अलग से मनस-शास्त्र उस पर काम कर रहा है । और विशेष कर पेरा साइकोलॉजी उस पर अलग से काम कर रही है । और मनस-ऊर्जा के अद्भुत नियम विज्ञान की पकड़ में आ गये हैं। धर्म के पकड़ में तो बहुत समय से थे, अब विज्ञान की पकड़ में भी बहुत सी बातें साफ हो गयी है । बिन बोधा तिन पाइ बारह. संकल्प का विचार तरंगों का प्रभाव पदार्थ पर भी अब जैसे मांटकालो में ऐसे ढेर मादमी हैं जिनको जुए में हराना मुश्किल है। क्योंकि वह जो पौसा फेंकते हैं वह जो नम्बर फेंकना चाहते हैं, वही फेंक लेते हैं । उनके पाँसे बदल देने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। पहले तो समझा जाता था कि बे पाँसे कुछ चालबाजी से बनाये गये हैं कि ये पासे वहीं गिर जाते हैं जहाँ थे गिराना चाहते हैं। लेकिन हर तरह के पाँसे देकर थे जो नम्बर लाना चाहते हैं वही आँकड़ा ले जाते हैं। भांख बन्द करके भी ले आते हैं। तब बड़ी मुश्किल हो गयी । तब इसकी जांच-पड़ताल करनी जरूरी हो गयी कि बात क्या है। असल में उनका विचार का तीव्र संकल्प पाँसे को प्रभावित करता है। वह जो लाना चाहते हैं उसके तीव्र संकल्प की धारा से पाँसे को फेंकते हैं। विचार की वे तरंगें उन पौसों को उसी झांकड़े पर ले ग्राती । अब इसका मतलब क्या हुआा। अगर विचार की ये तरंगे एक पौस को बदलती हैं तो विचार की तरंगें भी भौतिक हैं नहीं तो पाँसे को नहीं बदल सकती । तेरह. विचार शक्ति की एक प्रयोगात्मक जाँच आाप छोटा सा प्रयोग करें तो आपके ख्याल में भा जाय। चूंकि विज्ञान की बात भाप करते हैं इसलिए मैं प्रयोग की बात करता हूँ। एक गिलास में पानी भरकर रख लें भौर ग्लेसरीन या कोई भी चिकना पदार्थ उस ग्लास के पानी के ऊपर थोड़ा सा डाल दें जिससे कि उसकी एक पतली हल्की फिल्म पानी के ग्लास के ऊपर फैल जाय । एक छोटी प्रालपीन बिलकुल पतली जो फिल्म पर तैर सके, उसको उसके ऊपर छोड़ दें। फिर कमरे को सब तरफ से बन्द करके दोनों हाथों से जमीन पर टेक कर भाँखें उस छोटी सी भालपीन पर गड़ा लें । पाँच मिनट चुपचाप बैठे रहें भाँखें गड़ाये हुए। फिर उस झालपीन से कहें कि बायें घूम जाओ तो मालपीन बायें घूमेगी। फिर कहें दायें घूम जानो तो दायें घूमेगी । कहें कि रुक जामो, तो रुकेगी । कहें चलो, तो चलेगी। अगर आपका विचार एक भालपीन को बायें घुमा सकता है, दायें घुमा सकता है तो फिर एक पहाड़ को भी हिला सकता है। जरा लम्बी बात है बाकी फर्क नहीं रह गया, बुनियादी फर्क नही रह गया। प्रापकी सामर्थ्य अगर एक भालपीन को हिलाती है तो बुनियादी बात पूरी हो गयी है। अब यह दूसरी बात है कि पहाड़ बहुत बड़ा पड़ जाय और आप न हिला पायें लेकिन हिल सकता है पहाड़ । चौदह. वस्तुओं द्वारा विचार तरंगों का अपशोषण हमारे विचार की तरंगें पदार्थ को छूती और रूपान्तरित करती हैं। ऐसे लोग हैं जिनको, अगर आपके हाथ का रूमाल दिया जा सके तो आपके व्यक्तित्व |
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आज साल का आखिरी चंद्र ग्रहण है. भारत के कई हिस्सों में चंद्र ग्रहण दिखाई देगा. चंद्र ग्रहण का समय शाम 05 बजकर 32 मिनट से 06 बजकर 18 मिनट तक रहेगा. चंद्रग्रहण खत्म होने के बाद चावल की खीर खाना श्रेष्ठ होता है.
दरअसल, चंद्रग्रहण खत्म होने के बाद ये बड़ा सवाल होता है कि आखिर सबसे पहले क्या खाया जाए? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्रग्रहण खत्म होने के बाद सबसे पहले सफेद चीजों को खाना चाहिए. पंडितों के अनुसार ग्रहण शांति प्रयोग पुस्तक के अनुसार चंद्र ग्रहण के दौरान मन अशांत होता है, ऐसे में मन को शांत करने और ग्रहण के दुष्प्रभावों को दूर करने के लिए सफेद चीजों का सबसे पहले सेवन करना चाहिए. सफेद चीजों में चावल की खीर, रसगुल्ला, मावे से बनी मिठाइयां आदि शामिल हैं.
| आज साल का आखिरी चंद्र ग्रहण है. भारत के कई हिस्सों में चंद्र ग्रहण दिखाई देगा. चंद्र ग्रहण का समय शाम पाँच बजकर बत्तीस मिनट से छः बजकर अट्ठारह मिनट तक रहेगा. चंद्रग्रहण खत्म होने के बाद चावल की खीर खाना श्रेष्ठ होता है. दरअसल, चंद्रग्रहण खत्म होने के बाद ये बड़ा सवाल होता है कि आखिर सबसे पहले क्या खाया जाए? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्रग्रहण खत्म होने के बाद सबसे पहले सफेद चीजों को खाना चाहिए. पंडितों के अनुसार ग्रहण शांति प्रयोग पुस्तक के अनुसार चंद्र ग्रहण के दौरान मन अशांत होता है, ऐसे में मन को शांत करने और ग्रहण के दुष्प्रभावों को दूर करने के लिए सफेद चीजों का सबसे पहले सेवन करना चाहिए. सफेद चीजों में चावल की खीर, रसगुल्ला, मावे से बनी मिठाइयां आदि शामिल हैं. |
मुरादाबाद. अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा के कार्यकर्ताओं ने शनिवार को ट्रैक्टर के साथ नगर के मुख्य मार्गो से ट्रैक्टर-तिरंगा रैली निकालकर प्रदर्शन किया. इसके बाद एसडीएम और डिप्टी एसपी को ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन में तीनों कृषि कानून वापस लेने सहित सात मांग की गई.
अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा के कार्यकर्ताओं ने शनिवार को मुस्लिम इंटर कॉलेज के सामने से ढाल चौराहा, कमाल पुरी चौराहा, बाबू रामपाल द्वार चौराहा,स्योहारा बस स्टैंड बुध बाजार, गंज बाजार और मदीना ज्वेलर्स कदीर तिराहा से होकर ट्रैक्टर रैली निकाली. नूरी मार्केट कदीर तिराहा पर डिप्टी एसपी डॉक्टर अनूप सिंह और एसडीएम परमानंद सिंह को राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया.
ज्ञापन में मांग की गई कि तीनों कृषि कानून वापस लिए जाएं, सभी फसलों और एमएसपी पर खरीद की गारंटी का कानून बनाए जाएं, नया बिजली कानून रद्द किया जाये आदि मांग की गई. रैली में कैलाश सिंह प्रीतम सिंह, जीत सिंह,मदन सिंह,जय सिंह, गुरमीत सिंह आदि मौजूद रहे. किसानों ने ज्ञापन सौंपकर तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग की है.
| मुरादाबाद. अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा के कार्यकर्ताओं ने शनिवार को ट्रैक्टर के साथ नगर के मुख्य मार्गो से ट्रैक्टर-तिरंगा रैली निकालकर प्रदर्शन किया. इसके बाद एसडीएम और डिप्टी एसपी को ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन में तीनों कृषि कानून वापस लेने सहित सात मांग की गई. अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा के कार्यकर्ताओं ने शनिवार को मुस्लिम इंटर कॉलेज के सामने से ढाल चौराहा, कमाल पुरी चौराहा, बाबू रामपाल द्वार चौराहा,स्योहारा बस स्टैंड बुध बाजार, गंज बाजार और मदीना ज्वेलर्स कदीर तिराहा से होकर ट्रैक्टर रैली निकाली. नूरी मार्केट कदीर तिराहा पर डिप्टी एसपी डॉक्टर अनूप सिंह और एसडीएम परमानंद सिंह को राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया. ज्ञापन में मांग की गई कि तीनों कृषि कानून वापस लिए जाएं, सभी फसलों और एमएसपी पर खरीद की गारंटी का कानून बनाए जाएं, नया बिजली कानून रद्द किया जाये आदि मांग की गई. रैली में कैलाश सिंह प्रीतम सिंह, जीत सिंह,मदन सिंह,जय सिंह, गुरमीत सिंह आदि मौजूद रहे. किसानों ने ज्ञापन सौंपकर तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग की है. |
लंदन - भारत के मोहम्मद अनस विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप की 400 मीटर स्पर्धा में शनिवार को हीट में ही बाहर हो गए, जबकि फर्राटा धाविका दूती चंद भी निराशाजनक प्रदर्शन करते हुए महिलाओं की 100 मीटर दौड़ में अपनी हीट में बाहर हो गईं। अनस छठी हीट में मुकाबले में उतरे और 45. 98 सेकंड का समय निकालकर अपनी हीट में चौथे स्थान पर रहे। हर हीट से तीन-तीन एथलीटों ने सेमीफाइनल राउंड के लिए क्वालीफाई किया। कुल 28 धावकों ने अगले राउंड में जगह बनाई। अनस को 49 धावकों में निराशाजनक रूप से 33वां स्थान मिला। इस स्पर्धा में आखिरी क्वालीफाई करने वाले एथलीट का समय 45. 86 सेकंड था। भारतीय एथलीट का इस स्पर्धा में सर्वश्रेष्ठ समय 45. 32 सेकंड है, जो इस साल उन्होंने 15 मई को दिल्ली के नेहरू स्टेडियम में निकाला था। यदि वह इस प्रदर्शन को दोहरा जाते, तो अगले राउंड में पहुंच सकते थे। दूती चंद ने पांचवीं हीट में उतरते हुए 12. 07 सेकंड का बेहद खराब समय लिया और अपनी हीट में वह सात धावकों में छठे स्थान पर रहीं। ओवरऑल दूती 46 धावकों में 38वें स्थान पर रहीं। । विश्व चैंपियनशिप में उनके पास खुद को साबित करने का मौका था, लेकिन वह इसका फायदा नहीं उठा पाईं।
नई दिल्ली- कोलंबो टेस्ट के दूसरे दिन टीम इंडिया ने पहली पारी में श्रीलंका के खिलाफ 622 रन बनाकर मजबूत स्कोर खड़ा किया। इस दौरान भारत के स्टार आलराउंडर और दुनिया के नंबर एक टेस्ट गेंदबाज रवींद्र जडेजा ने भी अपने करियर का 8वां अर्द्धशतक पूरा किया। इस मैच के दौरान मैदान में सबसे अच्छा नराजा तब देखने को मिला, जब जडेजा ने अपना अर्द्धशतक पूरा किया और अपने चिर परिचित अंदाज में फैंस का मनोरंजन करने के लिए मैदान में तलवारबाजी की, जिसके बाद कोच रवि शास्त्री ने ड्रेसिंग रूम में रवींद्र जडेजा के इस स्टाइल को कापी करते नजर आए।
विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में निःशुल्क रजिस्टर करें !
| लंदन - भारत के मोहम्मद अनस विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप की चार सौ मीटर स्पर्धा में शनिवार को हीट में ही बाहर हो गए, जबकि फर्राटा धाविका दूती चंद भी निराशाजनक प्रदर्शन करते हुए महिलाओं की एक सौ मीटर दौड़ में अपनी हीट में बाहर हो गईं। अनस छठी हीट में मुकाबले में उतरे और पैंतालीस. अट्ठानवे सेकंड का समय निकालकर अपनी हीट में चौथे स्थान पर रहे। हर हीट से तीन-तीन एथलीटों ने सेमीफाइनल राउंड के लिए क्वालीफाई किया। कुल अट्ठाईस धावकों ने अगले राउंड में जगह बनाई। अनस को उनचास धावकों में निराशाजनक रूप से तैंतीसवां स्थान मिला। इस स्पर्धा में आखिरी क्वालीफाई करने वाले एथलीट का समय पैंतालीस. छियासी सेकंड था। भारतीय एथलीट का इस स्पर्धा में सर्वश्रेष्ठ समय पैंतालीस. बत्तीस सेकंड है, जो इस साल उन्होंने पंद्रह मई को दिल्ली के नेहरू स्टेडियम में निकाला था। यदि वह इस प्रदर्शन को दोहरा जाते, तो अगले राउंड में पहुंच सकते थे। दूती चंद ने पांचवीं हीट में उतरते हुए बारह. सात सेकंड का बेहद खराब समय लिया और अपनी हीट में वह सात धावकों में छठे स्थान पर रहीं। ओवरऑल दूती छियालीस धावकों में अड़तीसवें स्थान पर रहीं। । विश्व चैंपियनशिप में उनके पास खुद को साबित करने का मौका था, लेकिन वह इसका फायदा नहीं उठा पाईं। नई दिल्ली- कोलंबो टेस्ट के दूसरे दिन टीम इंडिया ने पहली पारी में श्रीलंका के खिलाफ छः सौ बाईस रन बनाकर मजबूत स्कोर खड़ा किया। इस दौरान भारत के स्टार आलराउंडर और दुनिया के नंबर एक टेस्ट गेंदबाज रवींद्र जडेजा ने भी अपने करियर का आठवां अर्द्धशतक पूरा किया। इस मैच के दौरान मैदान में सबसे अच्छा नराजा तब देखने को मिला, जब जडेजा ने अपना अर्द्धशतक पूरा किया और अपने चिर परिचित अंदाज में फैंस का मनोरंजन करने के लिए मैदान में तलवारबाजी की, जिसके बाद कोच रवि शास्त्री ने ड्रेसिंग रूम में रवींद्र जडेजा के इस स्टाइल को कापी करते नजर आए। विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में निःशुल्क रजिस्टर करें ! |
समृत्पद्यमानसंशयनिरोधार्थः । बद्धाथुरसंयत सम्यग्दृष्टिसासादनानामिव ग्मिथ्यावृष्टिसंयतासंयतानां च तत्रापर्याप्तकाले सम्भवः समस्ति, तत्र तेन तयोविरोधात् । अथ स्यात्तिर्यञ्चः पञ्चविधाः - तिर्यञ्चः पञ्चेन्द्रियतिर्यञ्चः पञ्चेन्द्रियपर्याप्ततिर्यञ्चः पञ्चेन्द्रियपर्याप्ततिरश्च्यः पञ्चेन्द्रियापर्याप्ततिर्यञ्च इति । तत्र न ज्ञायते क्वेमानि पञ्च गुणस्थानानि सन्तीति ? उच्यते, न तावदपर्याप्तपञ्चेन्द्रियतिर्यक्षु पञ्च गुणाः सन्ति, लब्ध्यपर्याप्तेषु मिथ्यादृष्टिव्यतिरिक्तशेषगुणासम्भवात् । तत्कुतोऽवगम्यत इति चेत् ? ' पंचिदिय-तिरिक्ख-अपज्जत्त-मिच्छाइट्ठी दव्वपमाणेण केवडिया, असंखेज्जा' इदि, तत्रैकस्यैव मिथ्यादृष्टिगुणस्य संख्यायाः प्रतिपांच गुणस्थानों में होते हैं इस सामान्य वचनसे संशय उत्पन्न हो सकता है कि वे पांच गुणस्थान कौन कौन हैं, इसलिये इस संशयको दूर करनेके लिये मिथ्यावृष्टि आदि गुणस्थानोंका नामनिर्देश किया है ।
जिस प्रकार बद्धायुष्क असंयतसम्यग्दृष्टि और सासादन गुणस्थानवालोंका तिर्यंचगतिके अपर्याप्तकालमें सद्भाव संभव है, उस प्रकार सम्यग्मिय्यादृष्टि और संयतासंयतोंका तिर्यंचगतिके अपर्याप्तकालमें सद्भाव संभव नहीं है, क्योंकि, तिर्यंचगतिमें अपर्याप्त कालके साथ सम्यग्मिथ्यावृष्टि और संयतासंयतका विरोध है।
शंका --- तिर्यंच पांच प्रकार के होते हैं, सामान्य तिर्यंच, पंचेन्द्रिय-तियंच, पंचेन्द्रियपर्याप्त तिथंच, पंचेंन्द्रिय-पर्याप्त तिर्यचिनी और पंचेन्द्रिय अपर्याप्त तिर्यंच । परंतु यह जाननेमें नहीं आया कि इन पांच भेदोंमें से किस भेदमें पूर्वोक्त पांच गुणस्थान होते हैं ?
समाधान -- उक्त शंका पर उत्तर देते हैं कि अपर्याप्त पंचेन्द्रिय-तियंचों में तो पांच गुणास्थान होते नहीं हैं, क्योंकि, लब्ध्यपर्याप्तकों में एक मिथ्यादृष्टि गुणस्थानको छोड़कर शेष गुणस्थान ही असंभव हैं ।
शंका -- यह कैसे जाना कि लब्ध्यपर्याप्तक पंचेन्द्रिय तियंचोंमें पहला ही गुणस्थान होता है ?
समाधान -- 'पंचेन्द्रिय-तिर्यंच- अपर्याप्त- मिथ्यादृष्टि जीव द्रव्यप्रमाणको अपेक्षा कितने हैं ' इस प्रकारको शंका होने पर द्रव्यप्रमाणानुगममें उत्तर दिया कि 'असंख्यात ' हैं । इस तरह द्रव्यप्रमाणानुगममें लब्ध्यपर्याप्तक-पंचेन्द्रिय-तिर्यंचोंके एक ही मिथ्यावृष्टि गुणस्थानकी संख्याका प्रतिपादन करनेवाला आर्षवचन मिलता है। इससे पता चलता है कि लब्ध्यपर्याप्तकोंके एक मिथ्यावृष्टि गुणस्थान ही होता है। शेष चार प्रकारके तिथंचोंमें पांचों ही गुणस्थान होते हैं । यदि शेषके चार भेदोंमें पांच गुणस्थान न माने जाय, तो उन चार प्रकारके तिर्यचोंमें पांच गुणस्थानोंकी संख्या आदिके प्रतिपादन करनेवाले द्रव्यानुयोग आदि आगममें | समृत्पद्यमानसंशयनिरोधार्थः । बद्धाथुरसंयत सम्यग्दृष्टिसासादनानामिव ग्मिथ्यावृष्टिसंयतासंयतानां च तत्रापर्याप्तकाले सम्भवः समस्ति, तत्र तेन तयोविरोधात् । अथ स्यात्तिर्यञ्चः पञ्चविधाः - तिर्यञ्चः पञ्चेन्द्रियतिर्यञ्चः पञ्चेन्द्रियपर्याप्ततिर्यञ्चः पञ्चेन्द्रियपर्याप्ततिरश्च्यः पञ्चेन्द्रियापर्याप्ततिर्यञ्च इति । तत्र न ज्ञायते क्वेमानि पञ्च गुणस्थानानि सन्तीति ? उच्यते, न तावदपर्याप्तपञ्चेन्द्रियतिर्यक्षु पञ्च गुणाः सन्ति, लब्ध्यपर्याप्तेषु मिथ्यादृष्टिव्यतिरिक्तशेषगुणासम्भवात् । तत्कुतोऽवगम्यत इति चेत् ? ' पंचिदिय-तिरिक्ख-अपज्जत्त-मिच्छाइट्ठी दव्वपमाणेण केवडिया, असंखेज्जा' इदि, तत्रैकस्यैव मिथ्यादृष्टिगुणस्य संख्यायाः प्रतिपांच गुणस्थानों में होते हैं इस सामान्य वचनसे संशय उत्पन्न हो सकता है कि वे पांच गुणस्थान कौन कौन हैं, इसलिये इस संशयको दूर करनेके लिये मिथ्यावृष्टि आदि गुणस्थानोंका नामनिर्देश किया है । जिस प्रकार बद्धायुष्क असंयतसम्यग्दृष्टि और सासादन गुणस्थानवालोंका तिर्यंचगतिके अपर्याप्तकालमें सद्भाव संभव है, उस प्रकार सम्यग्मिय्यादृष्टि और संयतासंयतोंका तिर्यंचगतिके अपर्याप्तकालमें सद्भाव संभव नहीं है, क्योंकि, तिर्यंचगतिमें अपर्याप्त कालके साथ सम्यग्मिथ्यावृष्टि और संयतासंयतका विरोध है। शंका --- तिर्यंच पांच प्रकार के होते हैं, सामान्य तिर्यंच, पंचेन्द्रिय-तियंच, पंचेन्द्रियपर्याप्त तिथंच, पंचेंन्द्रिय-पर्याप्त तिर्यचिनी और पंचेन्द्रिय अपर्याप्त तिर्यंच । परंतु यह जाननेमें नहीं आया कि इन पांच भेदोंमें से किस भेदमें पूर्वोक्त पांच गुणस्थान होते हैं ? समाधान -- उक्त शंका पर उत्तर देते हैं कि अपर्याप्त पंचेन्द्रिय-तियंचों में तो पांच गुणास्थान होते नहीं हैं, क्योंकि, लब्ध्यपर्याप्तकों में एक मिथ्यादृष्टि गुणस्थानको छोड़कर शेष गुणस्थान ही असंभव हैं । शंका -- यह कैसे जाना कि लब्ध्यपर्याप्तक पंचेन्द्रिय तियंचोंमें पहला ही गुणस्थान होता है ? समाधान -- 'पंचेन्द्रिय-तिर्यंच- अपर्याप्त- मिथ्यादृष्टि जीव द्रव्यप्रमाणको अपेक्षा कितने हैं ' इस प्रकारको शंका होने पर द्रव्यप्रमाणानुगममें उत्तर दिया कि 'असंख्यात ' हैं । इस तरह द्रव्यप्रमाणानुगममें लब्ध्यपर्याप्तक-पंचेन्द्रिय-तिर्यंचोंके एक ही मिथ्यावृष्टि गुणस्थानकी संख्याका प्रतिपादन करनेवाला आर्षवचन मिलता है। इससे पता चलता है कि लब्ध्यपर्याप्तकोंके एक मिथ्यावृष्टि गुणस्थान ही होता है। शेष चार प्रकारके तिथंचोंमें पांचों ही गुणस्थान होते हैं । यदि शेषके चार भेदोंमें पांच गुणस्थान न माने जाय, तो उन चार प्रकारके तिर्यचोंमें पांच गुणस्थानोंकी संख्या आदिके प्रतिपादन करनेवाले द्रव्यानुयोग आदि आगममें |
बॉलीवुड सितारे हर पर्व, त्यौहार, दिनविशेष को बड़े ही उत्साह से मनाते हैं. उन्होंने शुक्रवार को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस भी अपने खास अंदाज में मनाया. इस मौके पर सितारों ने महिलाओं का शान और सम्मान में सुबह से ही अपने-अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए शुभकामनाएं दी.
कई सितारे इस दिवस पर हुए विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल हुए. आइए देखते हैं वुमेंस डे के रंग, सितारों के संग. . . . दोनों मांओं के साथ सल्लू ने किया प्यारा पोस्ट अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर सुपरस्टार सलमान खान ने ट्विटर पर एक बेहद ही खूबसूरत-सा पोस्ट किया और वुमेन्स डे की बधाई दी. उन्होंने ट्विटर पर अपनी दोनों मांओं- सलमा खान और हेलन के साथ एक बेहद ही प्यारी फोटो शेयर की है. इस फोटो को पोस्ट करते हुए सल्लू ने लिखा, "हैप्पी वुमेन्स डे. " सलमान अपने माता-पिता के बेहद करीब हैं.
वह अपनी मां सलमा का जितना ख्याल रखते हैं उतना ही हेलन का भी रखते हैं. सलमान अपनी जिंदगी के अहम फैसले लेने से पहले अपने पैरेंट्स की सहमति जरूर लेते हैं. इंटरनेशनल स्टार्स के संग दिखीं ऋचा ऋचा चड्ढा महिला दिवस के एक खास वीडियो में अंतर्राष्ट्रीय कलाकारों- जैसे ग्रैमी विजेता मैरी जे ब्लिज, दुआ लीपा और एड शीरन के साथ नजर आई हैं. अंतर्राष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) द सर्किल के नेतृत्व में यह पहल शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य जीवन के सभी क्षेत्रों में समान महिला अधिकारों की कमी के बारे में जागरूकता बढ़ाने में मदद करना है. इस वीडियो में ये कलाकार महिलाओं के प्रतिनिधित्व और अधिकारों की कमी की वास्तविकता के आंकड़े दिखाती नजर आ रही हैं.
इस वीडियो का हिस्सा बनकर उत्साहित ऋचा ने कहा, "पिछले साल एक सर्वेक्षण में दावा किया गया था कि भारत महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित जगह है और मैं वास्तव में शर्मिंदा थीं. लेकिन मैं दूसरे सर्वेक्षण को पढ़कर अधिक परेशान थी, जिसमें 42 प्रतिशत महिलाओं ने माना कि उन्हें लगता है कि पीटा जाना (घरेलू हिंसा) ठीक है. अगर हम एक देश के रूप में वास्तविक रूप से प्रगति कर रहे हैं तो मानसिकता में व्यापक बदलाव की आवश्यकता है. मैं आभारी हूं कि वीडियो में भारत का भी प्रतिनिधित्व होगा. "
क्वीन बोलीं, खुद पर विश्वास रखें अपनी बेबाकी और बिंदासपन के लिए मशहूर बॉलीवुड क्वीन कंगना रणावत ने इंटरनेशनल वुमेन्स डे पर महिलाओं को खास बधाई संदेश दिया है. उन्होंने कहा, "महिलाएं उतनी ही सशक्त हैं, जितना वह खुद को मानती हैं. यदि आप इस बात में विश्वास नहीं रखती कि आप समान हैं तो विश्वास रखें, इस पर कोई और विश्वास नहीं रखेगा कि आप समान हैं. " महिला दिवस के खास मौके पर कंगना ने अपनी फिल्म 'पंगा' की रिलीज डेट भी घोषित कर दी. यह फिल्म अगले साल गणतंत्र दिवस के मौके पर रिलीज होगी.
अश्विनी अय्यर तिवारी के निर्देशन में बन रही इस फिल्म में कंगना कबड्डी प्लेयर के रोल में नजर आएंगी. इसमें नीना गुप्ता और ऋचा चड्ढा भी अहम किरदार निभा रही हैं. अपने हर एक रूप से करें प्यार : विद्या विद्या बालन ने महिला दिवस के मौके पर बेहद अलग अंदाज में शुभकामनाएं दी हैं. उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक तस्वीर शेयर की है. यह तस्वीर अपने आप में काफी कुछ बयां करती है लेकिन विद्या ने इसके साथ एक बेहद बेहतरीन कैप्शन भी लिखा है. उन्होंने लिखा, "आपको, मुझे और सभी महिलाओं को महिला दिवस की शुभकामनाएं. ये समय अपने आप को निखारने का है. यदि आपने ऐसा पहले कभी नहीं किया तो आज से शुरू करें. ये वक्त है खुद से प्यार करने का, अपने दिमाग, आत्मा और शरीर से प्यार करिए. खुद से प्यार करने के लिए पतले होने का या गोरे होने का, हॉट होने का या स्मार्ट होने का इंतजार न करें. इसके लिए आपको और अमीर होने या सक्सेसफुल होने का इंतजार करने की जरूरत नहीं है. ये वक्त यह समझने का है कि खुद से प्यार करने के लिए आपको इनमें से कुछ भी करने की जरूरत नहीं है. आप आज ही सबसे बेस्ट हैं. आप आज, कल और आने वाले कल में हमेशा ही बेहतरीन हैं. आपको किसी और से अपना कम्पेरिजन करने की जरूरत नहीं है, व्यक्तिगत समाज में कोई बेस्ट कैसे हो सकता है. ये तस्वीर मुझे बहुत इंस्पायरिंग लगी. "
खिलाड़ी ने महिलाओं संग चलाई बाइक अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर शुक्रवार को बॉलीवुड खिलाड़ी अक्षय कुमार नवाबों के शहर लखनऊ पहुंचे. उन्होंने मासिक धर्म को लेकर व्याप्त भ्रांतियों को दूर कर महिलाओं को जागरूक करने के लिए 'रन फॉर नाइन' को हरी झंडी दिखाई. सहारा सिटी में आयोजित इस दौड़ में उन्होंने खुद भी हिस्सा लिया. इसके बाद अक्षय ने महिलाओं के साथ बाइक चला कर भी खास संदेश दिया. 'रन फॉर नाइन' अपनी तरह की पहली ऐसी मुहिम है, जो लखनऊ सहित देश के अन्य शहरों को मासिक धर्म स्वच्छता और उसकी भ्रांतियों को समाप्त करने के उद्देश्य से चलाई जाती है. भावुक हुईं प्रियंका ग्लोबल स्टार बन चुकीं प्रियंका चोपड़ा ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को विश करते हुए काफी भावुक पोस्ट शेयर किया. इस पोस्ट को उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पेज पर शेयर किया है. प्रियंका ने पोस्ट में बताया कि जिस क्षण वह बम्बल के संस्थापक व्हिटनी सर्का से 2017 में मिली, उन्हें यकीन था कि इस सोशल नेटवर्क को भारत लाना चाहिए, लेकिन कुछ न्यूजलेयर के अनुसार भारतीय महिलाएं इसके लिए तैयार नहीं हैं. उन्हें विश्वास नहीं था कि वह एक ऐप्प के जरिए सभी के साथ जुड़ पाएंगे. लेकिन कई महिलाएं इससे जुड़ीं. " बता दें कि इस ऐप्प पर अब 15 लाख से ज्यादा यूजर्स हैं. यह ऐप्प सिर्फ डेटिंग के लिए नहीं बल्किअन्य कई चीजों के लिए है. "
| बॉलीवुड सितारे हर पर्व, त्यौहार, दिनविशेष को बड़े ही उत्साह से मनाते हैं. उन्होंने शुक्रवार को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस भी अपने खास अंदाज में मनाया. इस मौके पर सितारों ने महिलाओं का शान और सम्मान में सुबह से ही अपने-अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए शुभकामनाएं दी. कई सितारे इस दिवस पर हुए विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल हुए. आइए देखते हैं वुमेंस डे के रंग, सितारों के संग. . . . दोनों मांओं के साथ सल्लू ने किया प्यारा पोस्ट अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर सुपरस्टार सलमान खान ने ट्विटर पर एक बेहद ही खूबसूरत-सा पोस्ट किया और वुमेन्स डे की बधाई दी. उन्होंने ट्विटर पर अपनी दोनों मांओं- सलमा खान और हेलन के साथ एक बेहद ही प्यारी फोटो शेयर की है. इस फोटो को पोस्ट करते हुए सल्लू ने लिखा, "हैप्पी वुमेन्स डे. " सलमान अपने माता-पिता के बेहद करीब हैं. वह अपनी मां सलमा का जितना ख्याल रखते हैं उतना ही हेलन का भी रखते हैं. सलमान अपनी जिंदगी के अहम फैसले लेने से पहले अपने पैरेंट्स की सहमति जरूर लेते हैं. इंटरनेशनल स्टार्स के संग दिखीं ऋचा ऋचा चड्ढा महिला दिवस के एक खास वीडियो में अंतर्राष्ट्रीय कलाकारों- जैसे ग्रैमी विजेता मैरी जे ब्लिज, दुआ लीपा और एड शीरन के साथ नजर आई हैं. अंतर्राष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन द सर्किल के नेतृत्व में यह पहल शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य जीवन के सभी क्षेत्रों में समान महिला अधिकारों की कमी के बारे में जागरूकता बढ़ाने में मदद करना है. इस वीडियो में ये कलाकार महिलाओं के प्रतिनिधित्व और अधिकारों की कमी की वास्तविकता के आंकड़े दिखाती नजर आ रही हैं. इस वीडियो का हिस्सा बनकर उत्साहित ऋचा ने कहा, "पिछले साल एक सर्वेक्षण में दावा किया गया था कि भारत महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित जगह है और मैं वास्तव में शर्मिंदा थीं. लेकिन मैं दूसरे सर्वेक्षण को पढ़कर अधिक परेशान थी, जिसमें बयालीस प्रतिशत महिलाओं ने माना कि उन्हें लगता है कि पीटा जाना ठीक है. अगर हम एक देश के रूप में वास्तविक रूप से प्रगति कर रहे हैं तो मानसिकता में व्यापक बदलाव की आवश्यकता है. मैं आभारी हूं कि वीडियो में भारत का भी प्रतिनिधित्व होगा. " क्वीन बोलीं, खुद पर विश्वास रखें अपनी बेबाकी और बिंदासपन के लिए मशहूर बॉलीवुड क्वीन कंगना रणावत ने इंटरनेशनल वुमेन्स डे पर महिलाओं को खास बधाई संदेश दिया है. उन्होंने कहा, "महिलाएं उतनी ही सशक्त हैं, जितना वह खुद को मानती हैं. यदि आप इस बात में विश्वास नहीं रखती कि आप समान हैं तो विश्वास रखें, इस पर कोई और विश्वास नहीं रखेगा कि आप समान हैं. " महिला दिवस के खास मौके पर कंगना ने अपनी फिल्म 'पंगा' की रिलीज डेट भी घोषित कर दी. यह फिल्म अगले साल गणतंत्र दिवस के मौके पर रिलीज होगी. अश्विनी अय्यर तिवारी के निर्देशन में बन रही इस फिल्म में कंगना कबड्डी प्लेयर के रोल में नजर आएंगी. इसमें नीना गुप्ता और ऋचा चड्ढा भी अहम किरदार निभा रही हैं. अपने हर एक रूप से करें प्यार : विद्या विद्या बालन ने महिला दिवस के मौके पर बेहद अलग अंदाज में शुभकामनाएं दी हैं. उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक तस्वीर शेयर की है. यह तस्वीर अपने आप में काफी कुछ बयां करती है लेकिन विद्या ने इसके साथ एक बेहद बेहतरीन कैप्शन भी लिखा है. उन्होंने लिखा, "आपको, मुझे और सभी महिलाओं को महिला दिवस की शुभकामनाएं. ये समय अपने आप को निखारने का है. यदि आपने ऐसा पहले कभी नहीं किया तो आज से शुरू करें. ये वक्त है खुद से प्यार करने का, अपने दिमाग, आत्मा और शरीर से प्यार करिए. खुद से प्यार करने के लिए पतले होने का या गोरे होने का, हॉट होने का या स्मार्ट होने का इंतजार न करें. इसके लिए आपको और अमीर होने या सक्सेसफुल होने का इंतजार करने की जरूरत नहीं है. ये वक्त यह समझने का है कि खुद से प्यार करने के लिए आपको इनमें से कुछ भी करने की जरूरत नहीं है. आप आज ही सबसे बेस्ट हैं. आप आज, कल और आने वाले कल में हमेशा ही बेहतरीन हैं. आपको किसी और से अपना कम्पेरिजन करने की जरूरत नहीं है, व्यक्तिगत समाज में कोई बेस्ट कैसे हो सकता है. ये तस्वीर मुझे बहुत इंस्पायरिंग लगी. " खिलाड़ी ने महिलाओं संग चलाई बाइक अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर शुक्रवार को बॉलीवुड खिलाड़ी अक्षय कुमार नवाबों के शहर लखनऊ पहुंचे. उन्होंने मासिक धर्म को लेकर व्याप्त भ्रांतियों को दूर कर महिलाओं को जागरूक करने के लिए 'रन फॉर नाइन' को हरी झंडी दिखाई. सहारा सिटी में आयोजित इस दौड़ में उन्होंने खुद भी हिस्सा लिया. इसके बाद अक्षय ने महिलाओं के साथ बाइक चला कर भी खास संदेश दिया. 'रन फॉर नाइन' अपनी तरह की पहली ऐसी मुहिम है, जो लखनऊ सहित देश के अन्य शहरों को मासिक धर्म स्वच्छता और उसकी भ्रांतियों को समाप्त करने के उद्देश्य से चलाई जाती है. भावुक हुईं प्रियंका ग्लोबल स्टार बन चुकीं प्रियंका चोपड़ा ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को विश करते हुए काफी भावुक पोस्ट शेयर किया. इस पोस्ट को उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पेज पर शेयर किया है. प्रियंका ने पोस्ट में बताया कि जिस क्षण वह बम्बल के संस्थापक व्हिटनी सर्का से दो हज़ार सत्रह में मिली, उन्हें यकीन था कि इस सोशल नेटवर्क को भारत लाना चाहिए, लेकिन कुछ न्यूजलेयर के अनुसार भारतीय महिलाएं इसके लिए तैयार नहीं हैं. उन्हें विश्वास नहीं था कि वह एक ऐप्प के जरिए सभी के साथ जुड़ पाएंगे. लेकिन कई महिलाएं इससे जुड़ीं. " बता दें कि इस ऐप्प पर अब पंद्रह लाख से ज्यादा यूजर्स हैं. यह ऐप्प सिर्फ डेटिंग के लिए नहीं बल्किअन्य कई चीजों के लिए है. " |
Don't Miss!
शाहरुख के खिलाफ 8 अप्रैल को अदालत में एक याचिका के जरिए शिकायत की गई थी कि जिसमें लिखा था कि सार्वजनिक स्थलों पर ध्रूमपान पर रोक के बावजूद शाहरुख ने स्टेडियम में मैच के दौरान सिगरेट पी थी।
आपको बता दें कि राजस्थान में पिछले 12 साल से सार्वजनिक रूप से धूम्रपान करने पर पाबंदी है लेकिन शाहरुख ने मैच के दौरान सिगरेट पी जिसे टीवी पर भी दिखाया गया। इसके खिलाफ अदालत में एक अर्जी दायर की गई थी। इसमें कहा गया कि पुलिस ने शाहरुख के मामले में लापरवाही बरती क्योंकि क्रिकेट मैच के दौरान स्टेडियम में जाने से पहले कड़ी जांच भी की जाती है और सिगरेट भी जब्त हो जाती है।
शाहरुख के साथ ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब उन्हें सार्वजनिक स्थानों पर सिगरेट का कश उड़ाते देखा गया। इससे पहले भी मुंबई में भी शाहरूख को मुंबई में एक क्रिकेट मैच के दौरान सिगरेट के पीते देखा गया था तब एक एनजीओ ने उनपर केस किया था।
| Don't Miss! शाहरुख के खिलाफ आठ अप्रैल को अदालत में एक याचिका के जरिए शिकायत की गई थी कि जिसमें लिखा था कि सार्वजनिक स्थलों पर ध्रूमपान पर रोक के बावजूद शाहरुख ने स्टेडियम में मैच के दौरान सिगरेट पी थी। आपको बता दें कि राजस्थान में पिछले बारह साल से सार्वजनिक रूप से धूम्रपान करने पर पाबंदी है लेकिन शाहरुख ने मैच के दौरान सिगरेट पी जिसे टीवी पर भी दिखाया गया। इसके खिलाफ अदालत में एक अर्जी दायर की गई थी। इसमें कहा गया कि पुलिस ने शाहरुख के मामले में लापरवाही बरती क्योंकि क्रिकेट मैच के दौरान स्टेडियम में जाने से पहले कड़ी जांच भी की जाती है और सिगरेट भी जब्त हो जाती है। शाहरुख के साथ ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब उन्हें सार्वजनिक स्थानों पर सिगरेट का कश उड़ाते देखा गया। इससे पहले भी मुंबई में भी शाहरूख को मुंबई में एक क्रिकेट मैच के दौरान सिगरेट के पीते देखा गया था तब एक एनजीओ ने उनपर केस किया था। |
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)
आरोपी कोचिंग सेंटर के छात्रों से संपर्क कर पेपर पास कराने का सौदा करता था। पेपर सॉल्वर गैंग के सदस्य रोहतक के मकडौली निवासी अमित को तीन दिन के रिमांड पर लेकर एसटीएफ पूछताछ कर रही है।
एसटीएफ की गिरफ्त में पेपर सॉल्वर गैंग का सदस्य।
हरियाणा में पेपर सॉल्वर गैंग के सदस्य खाद्य एवं पूर्ति विभाग के उप निरीक्षक अमित उर्फ मीता ने खुलासा किया है कि वह छह लैब में साझीदार था। आरोपी रोहतक के गांव मकड़ौली के अमित उर्फ मीता को एक दिन पहले गिरफ्तार कर एसटीएफ ने तीन दिन के रिमांड पर लिया है। आरोपी कलानौर में नियुक्त था और कोचिंग सेंटर के छात्रों से संपर्क कर उनके पेपर पास कराने का सौदा करता था।
एसटीएफ ने पेपर सॉल्वर गैंग के मुख्य हैकर पलवल के गांव अतरचटा के राज सिंह उर्फ राज तेवतिया को प्रोडक्शन वारंट पर लिया है। उससे पूछताछ में पता लगा है कि वह अमित उर्फ मीता के संपर्क में था। वह अमित के साथ मिलकर वर्ष 2017 से पेपर सॉल्वर गैंग से जुड़ा था। राज सिंह से मिली जानकारी के आधार पर एसटीएफ ने आरोपी को बुधवार को गिरफ्तार कर लिया था।
एसटीएफ के अनुसार अमित ने पूछताछ में खुलासा किया है कि वह गैंग की छह लैब में साझेदार था। वह राज सिंह के साथ ही सॉल्वर गैंग के मुख्य आरोपी दिल्ली पुलिस के निलंबित सिपाही रोबिन से भी जुड़ा था। अमित का कहना है कि वह कोचिंग सेंटर में आने वाले विद्यार्थियों का डाटा जुटाकर उनसे संपर्क करता था। वह सरकारी नौकरी के लिए परीक्षा पास कराने की बात कहकर उनसे सौदा करता था। उसके बाद उनसे पेपर के अनुसार पैसे लेता था।
एसटीएफ पानीपत में दर्ज मुकदमे में जांच करते हुए गैंग के सदस्यों को लगातार गिरफ्तार कर रही है। आरोपी पेपर सॉल्व कराने के नाम पर तीन से 10 लाख रुपये में सौदा करते थे। एसटीएफ मामले में अब तक 26 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें से 19 का कोर्ट में चालान पेश किया जा चुका है।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
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| संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत आरोपी कोचिंग सेंटर के छात्रों से संपर्क कर पेपर पास कराने का सौदा करता था। पेपर सॉल्वर गैंग के सदस्य रोहतक के मकडौली निवासी अमित को तीन दिन के रिमांड पर लेकर एसटीएफ पूछताछ कर रही है। एसटीएफ की गिरफ्त में पेपर सॉल्वर गैंग का सदस्य। हरियाणा में पेपर सॉल्वर गैंग के सदस्य खाद्य एवं पूर्ति विभाग के उप निरीक्षक अमित उर्फ मीता ने खुलासा किया है कि वह छह लैब में साझीदार था। आरोपी रोहतक के गांव मकड़ौली के अमित उर्फ मीता को एक दिन पहले गिरफ्तार कर एसटीएफ ने तीन दिन के रिमांड पर लिया है। आरोपी कलानौर में नियुक्त था और कोचिंग सेंटर के छात्रों से संपर्क कर उनके पेपर पास कराने का सौदा करता था। एसटीएफ ने पेपर सॉल्वर गैंग के मुख्य हैकर पलवल के गांव अतरचटा के राज सिंह उर्फ राज तेवतिया को प्रोडक्शन वारंट पर लिया है। उससे पूछताछ में पता लगा है कि वह अमित उर्फ मीता के संपर्क में था। वह अमित के साथ मिलकर वर्ष दो हज़ार सत्रह से पेपर सॉल्वर गैंग से जुड़ा था। राज सिंह से मिली जानकारी के आधार पर एसटीएफ ने आरोपी को बुधवार को गिरफ्तार कर लिया था। एसटीएफ के अनुसार अमित ने पूछताछ में खुलासा किया है कि वह गैंग की छह लैब में साझेदार था। वह राज सिंह के साथ ही सॉल्वर गैंग के मुख्य आरोपी दिल्ली पुलिस के निलंबित सिपाही रोबिन से भी जुड़ा था। अमित का कहना है कि वह कोचिंग सेंटर में आने वाले विद्यार्थियों का डाटा जुटाकर उनसे संपर्क करता था। वह सरकारी नौकरी के लिए परीक्षा पास कराने की बात कहकर उनसे सौदा करता था। उसके बाद उनसे पेपर के अनुसार पैसे लेता था। एसटीएफ पानीपत में दर्ज मुकदमे में जांच करते हुए गैंग के सदस्यों को लगातार गिरफ्तार कर रही है। आरोपी पेपर सॉल्व कराने के नाम पर तीन से दस लाख रुपये में सौदा करते थे। एसटीएफ मामले में अब तक छब्बीस आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें से उन्नीस का कोर्ट में चालान पेश किया जा चुका है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen. |
दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान के ज़ाबुल प्रांत में रविवार की सुबह एक यात्री बस और एक तेल टैंकर की टक्कर हो गयी जिसमें कम से कम 50 लोगों की मौत हो गई।
ज़ाबुल प्रांत के गवर्नर बिस्मिल्लाह अफ़ग़ान मल ने पत्रकारों को बताया कि बस कंधार से काबुल जा रही थी तभी यह रास्ते में एक तेल टैंकर से टकरा गई। इस घटना में 50 लोगों की मौत हो गई और 20 से अधिक घायल हो गये। उन्होंने कहा कि टक्कर की वजह से आग लग गई और महिलाओं तथा बच्चों सहित कई मृतक जल गए और उनकी पहचान नहीं पाई।
ज़ाबुल के उप पुलिस प्रमुख गुलाम जीलानी फरही ने कहा कि कुछ घायलों को स्थानीय अस्पतालों में जबकि कुछ को पड़ोसी प्रांत कंधार के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। ज्ञात रहे कि काबुल - कंधार राजमार्ग आतंकवाद प्रभावित क्षेत्र से गुज़रता है और कई चालक लापरवाही और बहुत तेज गति से चलाते हैं ताकि आतंकियों की चंगुल में न फंस सकें। (AK)
| दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान के ज़ाबुल प्रांत में रविवार की सुबह एक यात्री बस और एक तेल टैंकर की टक्कर हो गयी जिसमें कम से कम पचास लोगों की मौत हो गई। ज़ाबुल प्रांत के गवर्नर बिस्मिल्लाह अफ़ग़ान मल ने पत्रकारों को बताया कि बस कंधार से काबुल जा रही थी तभी यह रास्ते में एक तेल टैंकर से टकरा गई। इस घटना में पचास लोगों की मौत हो गई और बीस से अधिक घायल हो गये। उन्होंने कहा कि टक्कर की वजह से आग लग गई और महिलाओं तथा बच्चों सहित कई मृतक जल गए और उनकी पहचान नहीं पाई। ज़ाबुल के उप पुलिस प्रमुख गुलाम जीलानी फरही ने कहा कि कुछ घायलों को स्थानीय अस्पतालों में जबकि कुछ को पड़ोसी प्रांत कंधार के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। ज्ञात रहे कि काबुल - कंधार राजमार्ग आतंकवाद प्रभावित क्षेत्र से गुज़रता है और कई चालक लापरवाही और बहुत तेज गति से चलाते हैं ताकि आतंकियों की चंगुल में न फंस सकें। |
UP Global Investors Summit से गायब रहे गौतम अडानी, कहीं हिंडनबर्ग रिपोर्ट के खुलासे का तो नहीं है असर?
यूपी में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के शुभारंभ के मौके पर पीएम, सीएम समेत कई नेता मौजूद रहे, वहीं दूसरी ओर देश विदेशों से बड़े बड़े बिजनेस मैन भी नजर आए, लेकिन इस दौरान गौतम अडानी दूर दूर तक नजर नहीं आए।
उत्तर प्रदेश में तीन दिवसीय ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 का शुभारंभ हो चुका है। बता दें, 12 फरवरी तक ये कार्यक्रम चलेगा। शुभारंभ के इस मौके पर पीएम मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सीएम योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदी बेन पटेल समेत कई नेता मौजूद रहे। ना सिर्फ नेता बल्कि इस दौरान देश ही नहीं विदेशों से भी बड़े बड़े बिजनेस मैन भी नजर आए।
लेकिन इस समिट के पहले दिन खास बात ये रही कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के शुभारंभ के मौके पर गौतम अडानी गायब रहे। जबकि यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 में रिलायंस कंपनी के मालिक मुकेश अंबानी समेत देश और दुनिया के तमाम बड़े बिजनेसमैन नजर आए।
खबरों की मानें तो यूपी सरकार ने अडानी को न्योता भेजा था, लेकिन उनके ग्रुप ने आने को लेकर कोई सहमति नहीं दी। इससे पहले साल 2018 में आयोजित इन्वेस्टर्स समिट में गौतम अडानी नजर आए थे। लेकिन जब से हिंडनबर्ग रिपोर्ट सामने आई है, तब से गौतम अडानी पब्लिकली नजर नहीं आ रहे हैं।
आपको बता दें कि यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी, बजाज फिनसर्व के चेयरमैन संजीव बजाज, आदित्य बिड़ला ग्रुप के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला, टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन, महिंद्रा और महिंद्रा के चेयरमैन आनंद महिंद्रा के अलावा देश और विदेश से कई बड़े बिजनेसमैन शामिल होने आए हुए हैं।
हाल ही में उत्तर प्रदेश में बिजली के स्मार्ट मीटर लगाने के मामले में अडानी समूह को करारा झटका लगा था। उत्तर प्रदेश के मध्यांचल विद्युत निगम ने स्मार्ट मीटर लगाने की बोली जीतने वाले अडानी के टेंडर को निरस्त कर दिया। इस टेंडर को लेकर उत्तर प्रदेश विद्युत उपभोक्ता परिषद और विद्युत नियामक आयोग (इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन) ने भी आपत्ति जताई थी।
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा का आरोप था कि जो स्मार्ट मीटर बाजार में 6000 रुपए का है उसे अडानी समूह 10,000 हजार रुपए में सरकार को दे रहा है। आरोप था कि मीटर के दाम 48 फीसदी सेलेकर 65 फीसदी तक अधिक थे। परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने इसको लेकर सीएम योगी का धन्यवाद दिया है। उन्होंने लिखा है कि उपभोक्ता परिषद की लड़ाई रंग लाई है। (यहां पढ़ें पूरी खबर)
हिंडनबर्ग की हालिया रिपोर्ट में क्या था?
25 जनवरी को हिंडनबर्ग ने अडानी ग्रुप के संबंध में 32 हजार शब्दों की एक रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट के निष्कर्ष में 88 प्रश्नों को शामिल किया। रिपोर्ट में दावा किया गया कि अडानी समूह दशकों से शेयरों के हेरफेर और अकाउंट की धोखाधड़ी में शामिल है। रिपोर्ट में कहा गया है कि तीन साल में शेयरों की कीमतें बढ़ने से अडानी समूह के संस्थापक गौतम अडानी की संपत्ति एक अरब डॉलर बढ़कर 120 अरब डॉलर हो गई है। इस दौरान समूह की 7 कंपनियों के शेयर औसत 819 फीसदी बढ़े हैं।
हिंडनबर्ग रिसर्च क्या है?
हिंडनबर्ग रिसर्च एक वित्तीय शोध करने वाली कंपनी है, जो इक्विटी, क्रेडिट और डेरिवेटिव मार्केट के आंकड़ों का विश्लेषण करती है। इसकी स्थापना साल 2017 में नाथन एंडरसन ने की है। हिंडनबर्ग रिसर्च हेज फंड का कारोबार भी करती है। इसे कॉरपोरेट जगत की गतिविधियों के बारे में खुलासा करने के लिए जाना जाता है। इस कंपनी का नाम हिंडनबर्ग आपदा पर आधारित है जो 1937 में हुई थी, जब एक जर्मन यात्री हवाई पोत में आग लग गई थी, जिसमें 35 लोग मारे गए थे।
कंपनी यह पता लगती है कि क्या शेयर मार्केट में कहीं गलत तरीके से पैसों की हेरा-फेरी तो नहीं हो रही है? क्या कोई कंपनी अकाउंट मिसमैनेजमेंट तो खुद को बड़ा नहीं दिखा रही है? क्या कंपनी अपने फायदे के लिए शेयर मार्केट में गलत तरह से दूसरी कंपनियों के शेयर को बेट लगाकर नुकसान तो नहीं पहुंचा रही?
| UP Global Investors Summit से गायब रहे गौतम अडानी, कहीं हिंडनबर्ग रिपोर्ट के खुलासे का तो नहीं है असर? यूपी में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के शुभारंभ के मौके पर पीएम, सीएम समेत कई नेता मौजूद रहे, वहीं दूसरी ओर देश विदेशों से बड़े बड़े बिजनेस मैन भी नजर आए, लेकिन इस दौरान गौतम अडानी दूर दूर तक नजर नहीं आए। उत्तर प्रदेश में तीन दिवसीय ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट दो हज़ार तेईस का शुभारंभ हो चुका है। बता दें, बारह फरवरी तक ये कार्यक्रम चलेगा। शुभारंभ के इस मौके पर पीएम मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सीएम योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदी बेन पटेल समेत कई नेता मौजूद रहे। ना सिर्फ नेता बल्कि इस दौरान देश ही नहीं विदेशों से भी बड़े बड़े बिजनेस मैन भी नजर आए। लेकिन इस समिट के पहले दिन खास बात ये रही कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के शुभारंभ के मौके पर गौतम अडानी गायब रहे। जबकि यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट दो हज़ार तेईस में रिलायंस कंपनी के मालिक मुकेश अंबानी समेत देश और दुनिया के तमाम बड़े बिजनेसमैन नजर आए। खबरों की मानें तो यूपी सरकार ने अडानी को न्योता भेजा था, लेकिन उनके ग्रुप ने आने को लेकर कोई सहमति नहीं दी। इससे पहले साल दो हज़ार अट्ठारह में आयोजित इन्वेस्टर्स समिट में गौतम अडानी नजर आए थे। लेकिन जब से हिंडनबर्ग रिपोर्ट सामने आई है, तब से गौतम अडानी पब्लिकली नजर नहीं आ रहे हैं। आपको बता दें कि यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी, बजाज फिनसर्व के चेयरमैन संजीव बजाज, आदित्य बिड़ला ग्रुप के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला, टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन, महिंद्रा और महिंद्रा के चेयरमैन आनंद महिंद्रा के अलावा देश और विदेश से कई बड़े बिजनेसमैन शामिल होने आए हुए हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश में बिजली के स्मार्ट मीटर लगाने के मामले में अडानी समूह को करारा झटका लगा था। उत्तर प्रदेश के मध्यांचल विद्युत निगम ने स्मार्ट मीटर लगाने की बोली जीतने वाले अडानी के टेंडर को निरस्त कर दिया। इस टेंडर को लेकर उत्तर प्रदेश विद्युत उपभोक्ता परिषद और विद्युत नियामक आयोग ने भी आपत्ति जताई थी। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा का आरोप था कि जो स्मार्ट मीटर बाजार में छः हज़ार रुपयापए का है उसे अडानी समूह दस,शून्य हजार रुपए में सरकार को दे रहा है। आरोप था कि मीटर के दाम अड़तालीस फीसदी सेलेकर पैंसठ फीसदी तक अधिक थे। परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने इसको लेकर सीएम योगी का धन्यवाद दिया है। उन्होंने लिखा है कि उपभोक्ता परिषद की लड़ाई रंग लाई है। हिंडनबर्ग की हालिया रिपोर्ट में क्या था? पच्चीस जनवरी को हिंडनबर्ग ने अडानी ग्रुप के संबंध में बत्तीस हजार शब्दों की एक रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट के निष्कर्ष में अठासी प्रश्नों को शामिल किया। रिपोर्ट में दावा किया गया कि अडानी समूह दशकों से शेयरों के हेरफेर और अकाउंट की धोखाधड़ी में शामिल है। रिपोर्ट में कहा गया है कि तीन साल में शेयरों की कीमतें बढ़ने से अडानी समूह के संस्थापक गौतम अडानी की संपत्ति एक अरब डॉलर बढ़कर एक सौ बीस अरब डॉलर हो गई है। इस दौरान समूह की सात कंपनियों के शेयर औसत आठ सौ उन्नीस फीसदी बढ़े हैं। हिंडनबर्ग रिसर्च क्या है? हिंडनबर्ग रिसर्च एक वित्तीय शोध करने वाली कंपनी है, जो इक्विटी, क्रेडिट और डेरिवेटिव मार्केट के आंकड़ों का विश्लेषण करती है। इसकी स्थापना साल दो हज़ार सत्रह में नाथन एंडरसन ने की है। हिंडनबर्ग रिसर्च हेज फंड का कारोबार भी करती है। इसे कॉरपोरेट जगत की गतिविधियों के बारे में खुलासा करने के लिए जाना जाता है। इस कंपनी का नाम हिंडनबर्ग आपदा पर आधारित है जो एक हज़ार नौ सौ सैंतीस में हुई थी, जब एक जर्मन यात्री हवाई पोत में आग लग गई थी, जिसमें पैंतीस लोग मारे गए थे। कंपनी यह पता लगती है कि क्या शेयर मार्केट में कहीं गलत तरीके से पैसों की हेरा-फेरी तो नहीं हो रही है? क्या कोई कंपनी अकाउंट मिसमैनेजमेंट तो खुद को बड़ा नहीं दिखा रही है? क्या कंपनी अपने फायदे के लिए शेयर मार्केट में गलत तरह से दूसरी कंपनियों के शेयर को बेट लगाकर नुकसान तो नहीं पहुंचा रही? |
देवरिया के बालाजी मन्दिर के पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी रामानुजाचार्य ने कहा कि भारतीय नववर्ष दुनिया का सबसे प्राचीन नववर्ष है। विक्रम संवत सर 2079 है। यह नववर्ष सम्पूर्ण भारतीयों का नववर्ष है। य़ह सभी मानव मात्र का नववर्ष है। श्वेत बाराह कल्प का प्रारम्भ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही हुआ था। इसे युगाब्द कहते हैं।
महाराजा विक्रमादित्य का जब सिंहासनारोहण हुआ तभी से संवत्सर का शुभारम्भ हुआ। इसमें नए भारत के सृजन का गौरव प्राप्त है। उस समय इस भारत वर्ष में न तो ईसाई थे, न मुसलमान और न ही बौद्ध थे। इसलिए य़ह सभी मानवों का का नव वर्ष है।
स्वामी जी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि ईसाई नववर्ष का भारत से क्या रिश्ता है। मुस्लमान अपना नया वर्ष मनाते हैं। भारतीय नववर्ष किसी के मजहब के विरुद्ध नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से आग्रह है कि संसद में अधिनियम लाकर भारतीय संवत्सर को देश का नव वर्ष घोषित करें और इसे राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जाए।
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| देवरिया के बालाजी मन्दिर के पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी रामानुजाचार्य ने कहा कि भारतीय नववर्ष दुनिया का सबसे प्राचीन नववर्ष है। विक्रम संवत सर दो हज़ार उन्यासी है। यह नववर्ष सम्पूर्ण भारतीयों का नववर्ष है। य़ह सभी मानव मात्र का नववर्ष है। श्वेत बाराह कल्प का प्रारम्भ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही हुआ था। इसे युगाब्द कहते हैं। महाराजा विक्रमादित्य का जब सिंहासनारोहण हुआ तभी से संवत्सर का शुभारम्भ हुआ। इसमें नए भारत के सृजन का गौरव प्राप्त है। उस समय इस भारत वर्ष में न तो ईसाई थे, न मुसलमान और न ही बौद्ध थे। इसलिए य़ह सभी मानवों का का नव वर्ष है। स्वामी जी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि ईसाई नववर्ष का भारत से क्या रिश्ता है। मुस्लमान अपना नया वर्ष मनाते हैं। भारतीय नववर्ष किसी के मजहब के विरुद्ध नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से आग्रह है कि संसद में अधिनियम लाकर भारतीय संवत्सर को देश का नव वर्ष घोषित करें और इसे राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जाए। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में एक बार फिर मालगाड़ी डिरेल हुई है। मालगाड़ी के 17 डिब्बे पटरी से उतर गए हैं। बताया जा रहा है कि, तकनीकी कारणों की वजह से हादसा हुआ है। हादसा सुबह करीब 4 बजे का बताया जा रहा है। फिलहाल मौके में DRG और RPF के जवान पहुंच गए हैं। रेलवे के कर्मचारी मार्ग बहाल करने की कोशिश में जुटे हुए हैं। मामला भांसी थाना क्षेत्र का है।
जानकारी के मुताबिक, गुरुवार-शुक्रवार की रात किरंदुल से लौह अयस्क लेकर मालगाड़ी विशाखापट्टनम जा रही थी। इस बीच भांसी और कमालूर के बीच मालगाड़ी के डिब्बे पटरी से उतर गए। इसे नक्सली करतूत बताया जा रहा था, लेकिन मौके में किसी भी प्रकार के कोई भी नक्सल बैनर या नक्सल गतिविधियों की जानकारी नहीं मिली है। SP डॉ अभिषेक पल्लव ने बताया कि दंतेवाड़ा के DRG, RPF और रेलवे के कर्मचारी मौके पर पहुंच गए हैं।
रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि, 17 डिब्बों को पटरी पर वापस लाना थोड़ा मुश्किल है। मार्ग बहाल करने में लगभग 24 घंटे से ज्यादा का समय लग सकता है। इस घटना के बाद एक पैसेंजर ट्रेन और 15 मालगाड़ी प्रभावित हुई है। वहीं सिंगल लाइन होने की वजह से किरंदुल-विशाखापट्टनम रेलवे मार्ग किरंदुल से जगदलपुर रूट तक बंद हो गया है। हालांकि जगदलपुर से विशाखापट्टनम तक मार्ग चालू है।
गढ़चिरौली मुठभेड़ के विरोध में नक्सलियों ने 27 नवंबर को भी इसी जगह रेलवे ट्रैक को उखाड़ दिया था, जिससे मालगाड़ी के डेढ़ दर्जन से ज्यादा डिब्बे डिरेल हो गए थे। वहीं लगभग 6 महीने पहले भी इसी इलाके में नक्सलियों ने एक पैसेंजर ट्रेन को डिरेल किया था। हालांकि उस समय ट्रेन की रफ्तार कम थी तो केवल इंजन ही डिरेल हुआ था।
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| छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में एक बार फिर मालगाड़ी डिरेल हुई है। मालगाड़ी के सत्रह डिब्बे पटरी से उतर गए हैं। बताया जा रहा है कि, तकनीकी कारणों की वजह से हादसा हुआ है। हादसा सुबह करीब चार बजे का बताया जा रहा है। फिलहाल मौके में DRG और RPF के जवान पहुंच गए हैं। रेलवे के कर्मचारी मार्ग बहाल करने की कोशिश में जुटे हुए हैं। मामला भांसी थाना क्षेत्र का है। जानकारी के मुताबिक, गुरुवार-शुक्रवार की रात किरंदुल से लौह अयस्क लेकर मालगाड़ी विशाखापट्टनम जा रही थी। इस बीच भांसी और कमालूर के बीच मालगाड़ी के डिब्बे पटरी से उतर गए। इसे नक्सली करतूत बताया जा रहा था, लेकिन मौके में किसी भी प्रकार के कोई भी नक्सल बैनर या नक्सल गतिविधियों की जानकारी नहीं मिली है। SP डॉ अभिषेक पल्लव ने बताया कि दंतेवाड़ा के DRG, RPF और रेलवे के कर्मचारी मौके पर पहुंच गए हैं। रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि, सत्रह डिब्बों को पटरी पर वापस लाना थोड़ा मुश्किल है। मार्ग बहाल करने में लगभग चौबीस घंटाटे से ज्यादा का समय लग सकता है। इस घटना के बाद एक पैसेंजर ट्रेन और पंद्रह मालगाड़ी प्रभावित हुई है। वहीं सिंगल लाइन होने की वजह से किरंदुल-विशाखापट्टनम रेलवे मार्ग किरंदुल से जगदलपुर रूट तक बंद हो गया है। हालांकि जगदलपुर से विशाखापट्टनम तक मार्ग चालू है। गढ़चिरौली मुठभेड़ के विरोध में नक्सलियों ने सत्ताईस नवंबर को भी इसी जगह रेलवे ट्रैक को उखाड़ दिया था, जिससे मालगाड़ी के डेढ़ दर्जन से ज्यादा डिब्बे डिरेल हो गए थे। वहीं लगभग छः महीने पहले भी इसी इलाके में नक्सलियों ने एक पैसेंजर ट्रेन को डिरेल किया था। हालांकि उस समय ट्रेन की रफ्तार कम थी तो केवल इंजन ही डिरेल हुआ था। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
मुंबई/दि. 5 - मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा है कि, कोरोना की तीसरी, चौथी और उसके बाद आने वाली लहरों को रोकने और लोगों के इलाज के लिए राज्य की स्वास्थ्य सुविधाओं को अधिक मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा. दरअसल, पेटीएम फाउंडेशन की ओर से राज्य में ऑक्सीजन निर्माणस सयंत्र, ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर मशीन और टीकाकरण के लिए राज्य सरकार को सहयोग किया जाएगा. इसके मद्देनजर मंगलवार को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक की. मुख्यमंत्री ने कहा कि, ऑक्सीजन अब दवाई बन गई है. राज्य में ऑक्सीजन का निर्माण 1500 मीट्रिक टन तक बढाने की योजना है. मुख्य सचिव सीताराम कुंटे ने कहा कि, महाराष्ट्र को ऑक्सीजन उपलब्धता में आत्मनिर्भर बनाने के लिए मिशन ऑक्सीजन उपलब्धता मेें आत्मनिर्भर बनाने के लिए मिशन ऑक्सीजन स्वावलंबन के प्रयास किए जा रहे हैं.
| मुंबई/दि. पाँच - मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा है कि, कोरोना की तीसरी, चौथी और उसके बाद आने वाली लहरों को रोकने और लोगों के इलाज के लिए राज्य की स्वास्थ्य सुविधाओं को अधिक मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा. दरअसल, पेटीएम फाउंडेशन की ओर से राज्य में ऑक्सीजन निर्माणस सयंत्र, ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर मशीन और टीकाकरण के लिए राज्य सरकार को सहयोग किया जाएगा. इसके मद्देनजर मंगलवार को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक की. मुख्यमंत्री ने कहा कि, ऑक्सीजन अब दवाई बन गई है. राज्य में ऑक्सीजन का निर्माण एक हज़ार पाँच सौ मीट्रिक टन तक बढाने की योजना है. मुख्य सचिव सीताराम कुंटे ने कहा कि, महाराष्ट्र को ऑक्सीजन उपलब्धता में आत्मनिर्भर बनाने के लिए मिशन ऑक्सीजन उपलब्धता मेें आत्मनिर्भर बनाने के लिए मिशन ऑक्सीजन स्वावलंबन के प्रयास किए जा रहे हैं. |
जमशेदपुर। चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के कप्तान एमएस धोनी (MS Dhoni) पत्नी साक्षी (Sakshi dhoni) और बेटी जीवा (Ziva) ऑफ द फील्ड हमेशा सुर्खियों में बने रहते हैं। साक्षी धौनी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और फैंस को उनका हर नया पोस्ट का इंतजार रहता है। फिलहाल साक्षी धौनी अपने पति महेंद्र सिंह धौनी के साथ दुबई में हैं, जहां आईपीएल 2021(IPL 2021) का दूसरा चरण हो रहा है।
दुबई पहुंचने के बाद जैसे ही साक्षी होटल के कमरे में गई, कमरे की सजावट देख वह सरप्राइज हो गई। साक्षी अक्सर सोशल मीडिया पर एक्टिव रहती है और उसने इंस्टाग्राम पर यूएई के होटल की एक तस्वीर शेयर की है। (Sakshi Singh_r Instagram)
होटल के कमरे की सजावट देख वह शरमा गई। उन्होंने होटल के कमरे की फोटो अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर की, जिसे देखकर साक्षी कोअपना हनीमून याद आ गया।
साक्षी ने तस्वीर शेयर करते हुए लिखा है कि होटल का कमरा यहां तक की 11 साल बाद. . . उन्होंने दोनों हाथ से चेहरे को छिपाते हुए इमोजी भी लगाई है। फैंस उनकी इस अदा पर फिदा हैं।
यहां बताते चले कि एमएस धोनी और साक्षी 4 जुलाई 2010 को परिणय सूत्र में बंधे थे। पिछले महीने ही इस कपल की शादी को 11 साल पूरे हो गए।
यूएई के होटल में अनोखे अंदाज में स्नूकर खेलते कप्तान एमएस धोनी (CSK Twitter)
जहां तक धोनी का सवाल है तो वह सोशल मीडियाा से दूर रहना ही पसंद करते हैं, वहीं साक्षी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। फैंस के लिए राहत की बात यह होती है कि साक्षी के जरिए उन्हें धोनी के बारे में भी अपडेट मिलता रहता है।
चेन्नई सुपर किंग्स यूएई के इस आलीशान होटल में ठहरी हुई हैं, जो समंदर के करीब है। . होटल के कमरे से समंदर साफ नजर आता है।
दूसरी ओर महेंद्र सिंह धौनी व साक्षी की प्यारी बिटिया भी होटल के स्विमिंग पूल में मजे कर रही है।
चेन्नई सुपर किंग्स 13 अगस्त को यूएई के लिए रवाना हुई थी।
| जमशेदपुर। चेन्नई सुपर किंग्स के कप्तान एमएस धोनी पत्नी साक्षी और बेटी जीवा ऑफ द फील्ड हमेशा सुर्खियों में बने रहते हैं। साक्षी धौनी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और फैंस को उनका हर नया पोस्ट का इंतजार रहता है। फिलहाल साक्षी धौनी अपने पति महेंद्र सिंह धौनी के साथ दुबई में हैं, जहां आईपीएल दो हज़ार इक्कीस का दूसरा चरण हो रहा है। दुबई पहुंचने के बाद जैसे ही साक्षी होटल के कमरे में गई, कमरे की सजावट देख वह सरप्राइज हो गई। साक्षी अक्सर सोशल मीडिया पर एक्टिव रहती है और उसने इंस्टाग्राम पर यूएई के होटल की एक तस्वीर शेयर की है। होटल के कमरे की सजावट देख वह शरमा गई। उन्होंने होटल के कमरे की फोटो अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर की, जिसे देखकर साक्षी कोअपना हनीमून याद आ गया। साक्षी ने तस्वीर शेयर करते हुए लिखा है कि होटल का कमरा यहां तक की ग्यारह साल बाद. . . उन्होंने दोनों हाथ से चेहरे को छिपाते हुए इमोजी भी लगाई है। फैंस उनकी इस अदा पर फिदा हैं। यहां बताते चले कि एमएस धोनी और साक्षी चार जुलाई दो हज़ार दस को परिणय सूत्र में बंधे थे। पिछले महीने ही इस कपल की शादी को ग्यारह साल पूरे हो गए। यूएई के होटल में अनोखे अंदाज में स्नूकर खेलते कप्तान एमएस धोनी जहां तक धोनी का सवाल है तो वह सोशल मीडियाा से दूर रहना ही पसंद करते हैं, वहीं साक्षी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। फैंस के लिए राहत की बात यह होती है कि साक्षी के जरिए उन्हें धोनी के बारे में भी अपडेट मिलता रहता है। चेन्नई सुपर किंग्स यूएई के इस आलीशान होटल में ठहरी हुई हैं, जो समंदर के करीब है। . होटल के कमरे से समंदर साफ नजर आता है। दूसरी ओर महेंद्र सिंह धौनी व साक्षी की प्यारी बिटिया भी होटल के स्विमिंग पूल में मजे कर रही है। चेन्नई सुपर किंग्स तेरह अगस्त को यूएई के लिए रवाना हुई थी। |
चुनाव आयोग कोविड प्रोटोकॉल्स लागू करवाने में नाकाम क्यों रहा? उसके 27 अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा क्यों ना चलाया जाये?
Lucknow : उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. ऐसे कोरोना संकट के बीच पंचायत चुनाव ड्यूटी में लगे 135 शिक्षकों की मौत का मामला सामने आया है. शिक्षकों की मौत पर संज्ञान लेते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है. साथ ही हाईकोर्ट ने आयोग से कहा कि पंचायत चुनाव के दौरान कोविड प्रोटोकॉल्स लागू नहीं करवाने पर आपके और आपके अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जाये?
हाईकोर्ट ने यूपी चुनाव आयोग को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए कहा कि वो अगली तारीख को बताये कि पंचायत चुनाव के दौरान वो कोविड प्रोटोकॉल्स लागू करवाने में नाकाम क्यों रहा? और उसके 27 अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा क्यों ना चलाया जाये? इस मामले में अब अगली सुनवाई तीन मई को होगी.
बता दें कि एक हिंदी अखबार की रिपोर्ट के अनुसार यूपी पंचायत चुनाव में ड्यूटी करने वाले 135 शिक्षक, शिक्षा मित्र और अनुदेशकों की मौत हो गयी है. साथ ही पंचायत चुनाव में प्रथम चरण के प्रशिक्षण से लेकर तीसरे चरण के मतदान तक हजारों शिक्षक, शिक्षामित्र व अनुदेशक कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं. यूपी में अभी तक जहां-जहां चुनाव हो चुके हैं वहां कोरोना संक्रमण के मामले कई गुना बढ़ने की खबर आयी है.
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पंचायत चुनाव तत्काल स्थगित कर ड्यूटी के दौरान संक्रमित हुए लोगों का निशुल्क इलाज व मृतकों के परिजनों को 50 लाख की सहायता व अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग की है. महासंघ के प्रवक्ता वीरेंद्र मिश्र ने कहा है कि जिन शिक्षकों व कर्मचारियों की चुनाव में ड्यूटी लगी है उनके परिवारों में बेचैनी है. वर्तमान हालात को देखते हुए कोई भी चुनाव ड्यूटी नहीं करना चाहता है.
शैक्षिक महासंघ ने कहा है कि पंचायत चुनाव प्रशिक्षण और ड्यूटी के बाद अब तक हरदोई-लखीमपुर में 10-10, बुलंदशहर, हाथरस, सीतापुर, शाहजहांपुर में 8-8, भदोही, लखनऊ व प्रतापगढ़ में 7-7, सोनभद्र, गाजियाबाद व गोंडा में 6-6, कुशीनगर, जौनपुर, देवरिया, महाराजगंज व मथुरा में 5-5, गोरखपुर, बहराइच, उन्नाव व बलरामपुर में 4-4 तथा श्रावस्ती में तीन शिक्षक, शिक्षा मित्र या अनुदेशक की मौत हो चुकी है.
शिक्षकों की मौत के मामले में संज्ञान लेते इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग और यूपी पुलिस ने चुनाव ड्यूटी में लगे लोगों को कोरोना संक्रमण से हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रवैया अपनाते हुए कहा, 2020 के अंत में जब कोरोना संक्रमण कमजोर पड़ा सरकार पंचायत चुनाव कराने में अगर उसने लगातार संक्रमण रोकने के लिए काम किया होता, तो आज सरकार दूसरी लहर का सामना करने के लिए तैयार रहती. अगर हम अब भी लोगों की स्वास्थ्य परेशानियों को नजरअंदाज करेंगे और उन्हें मरने के लिए छोड़ देंगे, तो आने वाली पीढ़ी हमें कभी माफ नहीं करेगी.
| चुनाव आयोग कोविड प्रोटोकॉल्स लागू करवाने में नाकाम क्यों रहा? उसके सत्ताईस अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा क्यों ना चलाया जाये? Lucknow : उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. ऐसे कोरोना संकट के बीच पंचायत चुनाव ड्यूटी में लगे एक सौ पैंतीस शिक्षकों की मौत का मामला सामने आया है. शिक्षकों की मौत पर संज्ञान लेते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है. साथ ही हाईकोर्ट ने आयोग से कहा कि पंचायत चुनाव के दौरान कोविड प्रोटोकॉल्स लागू नहीं करवाने पर आपके और आपके अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जाये? हाईकोर्ट ने यूपी चुनाव आयोग को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए कहा कि वो अगली तारीख को बताये कि पंचायत चुनाव के दौरान वो कोविड प्रोटोकॉल्स लागू करवाने में नाकाम क्यों रहा? और उसके सत्ताईस अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा क्यों ना चलाया जाये? इस मामले में अब अगली सुनवाई तीन मई को होगी. बता दें कि एक हिंदी अखबार की रिपोर्ट के अनुसार यूपी पंचायत चुनाव में ड्यूटी करने वाले एक सौ पैंतीस शिक्षक, शिक्षा मित्र और अनुदेशकों की मौत हो गयी है. साथ ही पंचायत चुनाव में प्रथम चरण के प्रशिक्षण से लेकर तीसरे चरण के मतदान तक हजारों शिक्षक, शिक्षामित्र व अनुदेशक कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं. यूपी में अभी तक जहां-जहां चुनाव हो चुके हैं वहां कोरोना संक्रमण के मामले कई गुना बढ़ने की खबर आयी है. राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पंचायत चुनाव तत्काल स्थगित कर ड्यूटी के दौरान संक्रमित हुए लोगों का निशुल्क इलाज व मृतकों के परिजनों को पचास लाख की सहायता व अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग की है. महासंघ के प्रवक्ता वीरेंद्र मिश्र ने कहा है कि जिन शिक्षकों व कर्मचारियों की चुनाव में ड्यूटी लगी है उनके परिवारों में बेचैनी है. वर्तमान हालात को देखते हुए कोई भी चुनाव ड्यूटी नहीं करना चाहता है. शैक्षिक महासंघ ने कहा है कि पंचायत चुनाव प्रशिक्षण और ड्यूटी के बाद अब तक हरदोई-लखीमपुर में दस-दस, बुलंदशहर, हाथरस, सीतापुर, शाहजहांपुर में आठ-आठ, भदोही, लखनऊ व प्रतापगढ़ में सात-सात, सोनभद्र, गाजियाबाद व गोंडा में छः-छः, कुशीनगर, जौनपुर, देवरिया, महाराजगंज व मथुरा में पाँच-पाँच, गोरखपुर, बहराइच, उन्नाव व बलरामपुर में चार-चार तथा श्रावस्ती में तीन शिक्षक, शिक्षा मित्र या अनुदेशक की मौत हो चुकी है. शिक्षकों की मौत के मामले में संज्ञान लेते इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग और यूपी पुलिस ने चुनाव ड्यूटी में लगे लोगों को कोरोना संक्रमण से हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रवैया अपनाते हुए कहा, दो हज़ार बीस के अंत में जब कोरोना संक्रमण कमजोर पड़ा सरकार पंचायत चुनाव कराने में अगर उसने लगातार संक्रमण रोकने के लिए काम किया होता, तो आज सरकार दूसरी लहर का सामना करने के लिए तैयार रहती. अगर हम अब भी लोगों की स्वास्थ्य परेशानियों को नजरअंदाज करेंगे और उन्हें मरने के लिए छोड़ देंगे, तो आने वाली पीढ़ी हमें कभी माफ नहीं करेगी. |
प्रिलिम्स के लियेः
क्लाइमेट फाइनेंस एंड USD 100 बिलियन गोलः OECD, COP (कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज़) 28, OECD (आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन), जलवायु वित्त, UNFCCC (जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क अभिसमय)
मेन्स के लियेः
चर्चा में क्यों?
दुबई में COP (कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज़) 28 के एकत्र होने से पूर्व आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसका शीर्षक 'क्लाइमेट फाइनेंस एंड USD 100 बिलियन गोल' (Climate Finance and the USD 100 Billion Goal) है, जिसमें दर्शाया गया है कि विकसित देश जलवायु शमन हेतु प्रतिवर्ष 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाने के अपने वादे में विफल रहे हैं।
- यह रिपोर्ट 2013-21 की अवधि के आधार पर विकासशील देशों के लिये विकसित देशों द्वारा प्रदत्त तथा जुटाए गए वार्षिक जलवायु वित्त के समग्र रुझान प्रस्तुत करती है।
आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) क्या है?
- परिचयः
- OECD एक अंतर-सरकारी आर्थिक संगठन है जिसकी स्थापना आर्थिक प्रगति व विश्व व्यापार को प्रोत्साहित करने के लिये की गई है।
- अधिकांश OECD सदस्य राष्ट्र उच्च आय वाली अर्थव्यवस्थाएँ हैं जिनका मानव विकास सूचकांक (HDI) बहुत उच्च है एवं उन्हें विकसित देश माना जाता है।
- स्थापनाः
- इसके मुख्यालय की स्थापना वर्ष 1961 में पेरिस, फ्राँस में की गई थी तथा इसमें कुल 38 सदस्य देश हैं।
- OECD में शामिल होने वाले सबसे हालिया देश थे- अप्रैल 2020 में कोलंबिया तथा मई 2021 में कोस्टा रिका।
- भारत इसका सदस्य नहीं है अपितु एक प्रमुख आर्थिक भागीदार है।
- OECD द्वारा जारी रिपोर्ट और सूचकांकः
पृष्ठभूमि क्या है?
- वर्ष 2009 में कोपेनहेगन में जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क अभिसमय (UNFCCC) के 15वें सम्मेलन (COP 15) में विकसित देश वर्ष 2020 तक विकासशील देशों में जलवायु कार्रवाई के लिये प्रतिवर्ष 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाने के सामूहिक लक्ष्य के लिये प्रतिबद्ध हैं।
- लक्ष्य को कैनकन में COP16 में औपचारिक रूप दिया गया था और पेरिस COP21 में इसे दोहराया गया तथा वर्ष 2025 तक इसे बढ़ा दिया गया।
- दान दाता देशों के अनुरोध पर OECD वर्ष 2015 से इस लक्ष्य की दिशा में प्रगति पर नज़र रख रहा है। यह एक मज़बूत लेखांकन ढाँचे के आधार पर की गई प्रगति का नियमित विश्लेषण करता है, जो कि स्रोत और वित्तीय साधन की फंडिंग पर पेरिस समझौते के सभी पक्षों द्वारा सहमत COP24 परिणाम के अनुरूप है।
रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष क्या हैं?
- कुल जलवायु वित्तः
- वर्ष 2021 में विकसित देशों द्वारा विकासशील देशों के लिये प्रदान किया गया और जुटाया गया कुल जलवायु वित्त 89.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर था, जो पिछले वर्ष की तुलना में 7.6% की महत्त्वपूर्ण वृद्धि दर्शाता है।
- सार्वजनिक जलवायु वित्त (द्विपक्षीय और बहुपक्षीय) 2013-21 की अवधि में लगभग दोगुना हो गया, यह 38 बिलियन अमेरिकी डॉलर से 73.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया, जो वर्ष 2021 में कुल 89.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर के भारी योगदान के लिये ज़िम्मेदार है।
- जुटाया गया निजी जलवायु वित्त, जिसके लिये तुलनीय डेटा केवल 2016 से उपलब्ध है, 2021 में 14.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर या कुल का 16% था।
- अनुकूलन वित्त में गिरावटः
- वर्ष 2021 में अनुकूलन वित्त में 4 बिलियन अमेरिकी डॉलर (-14%) की गिरावट आई, जिसके परिणामस्वरूप कुल जलवायु वित्त में इसकी हिस्सेदारी 34% से घटकर 27% हो गई।
- अनुकूलन के लिये वित्त में कमी से विकासशील देशों की शमन और अनुकूलन दोनों आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता के विषय में चिंताएँ बढ़ रही हैं।
- जलवायु वित्तपोषण में ऋण का प्रभुत्वः
- वर्ष 2021 में सार्वजनिक क्षेत्र द्वारा द्विपक्षीय और बहुपक्षीय चैनलों के माध्यम से 73.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर का वित्त जुटाया गया तथा 49.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर ऋण के रूप में प्रदान किये गए।
- अनुदान के बजाय ऋण पर निर्भरता, गरीब देशों में ऋण तनाव को बढ़ा सकती है, जिससे जलवायु चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने की उनकी क्षमता प्रभावित हो सकती है।
- सिफारिशेंः
- अनुकूलन वित्त को बढ़ाने की आवश्यकताः अंतर्राष्ट्रीय प्रदाताओं को दो आवश्यक क्षेत्रों में अपने प्रयासों को महत्त्वपूर्ण रूप से बढ़ाने की आवश्यकता हैः अनुकूलन वित्त और निजी वित्त जुटाना।
- क्षमता निर्माणः परियोजना विकास, वित्तीय साक्षरता और परिचालन दक्षता के संदर्भ में क्षमता निर्माण का समर्थन करने की आवश्यकता है, जो विकासशील देशों की जलवायु वित्त तक पहुँच, अवशोषण तथा प्रभावी ढंग से उपयोग करने की क्षमताओं को मज़बूत कर सकता है।
- वित्तीय उत्पादों को अनुकूलित और विकसित करनाः जलवायु वित्त की पहुँच और प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिये अंतर्राष्ट्रीय प्रदाताओं को उन वित्तीय उत्पादों तथा तंत्रों को अनुकूलित व विकसित करने की आवश्यकता है जो वे पेश करते हैं।
OECD रिपोर्ट के मुद्दे क्या हैं?
- परिभाषाओं में स्पष्टता का अभावः
- 'जलवायु वित्त' की सार्वभौमिक रूप से सहमत परिभाषा का अभाव है, जो विकसित देशों को आधिकारिक विकास सहायता (ODA) और उच्च लागत वाले ऋणों सहित विभिन्न प्रकार के वित्तपोषण को जलवायु वित्त के रूप में वर्गीकृत करने की अनुमति देता है।
- यह अस्पष्टता दोहरी गणना को सक्षम कर सकती है और जाँच से बच सकती है।
- अतिरिक्तता के साथ चुनौतियाँः
- UNFCCC द्वारा निर्धारित "नए और अतिरिक्त वित्त" के सिद्धांत, जिसका उद्देश्य जलवायु उद्देश्यों हेतु मौजूदा सहायता को रोकने के लिये है, पर सवाल उठाया गया है।
- कुछ देशों ने "नए और अतिरिक्त" मानदंड को कमज़ोर करते हुए सहायता की दोहरी गणना करना स्वीकार किया है।
- अंकित मूल्य पर ऋण समतुल्य अनुदान नहींः
- कुल जलवायु वित्त आँकड़े निकालते समय ऋणों को अंकित मूल्य के आधार पर माना जाता है, न कि अनुदान के बराबर।
- इसलिये जबकि गरीब देश पुनर्भुगतान और ब्याज के लिये पैसा खर्च करते हैं, फिर भी ऋण को विकसित दुनिया द्वारा प्रदान किये गए जलवायु वित्त के रूप में गिना जाता है।
- कुल जलवायु वित्त आँकड़े निकालते समय ऋणों को अंकित मूल्य के आधार पर माना जाता है, न कि अनुदान के बराबर।
- जलवायु वित्त योगदान के लिये पारदर्शी और मानकीकृत रिपोर्टिंग तंत्र स्थापित करना महत्त्वपूर्ण है। इसमें फंडिंग की ट्रैकिंग और रिपोर्टिंग हेतु स्पष्ट मानदंड और कार्यप्रणाली को परिभाषित करना, सटीकता सुनिश्चित करना तथा फंड की दोहरी गणना या गलत वर्गीकरण को रोकना शामिल है।
- जलवायु वित्त के गठन के लिये सार्वभौमिक रूप से सहमत परिभाषाएँ और मानदंड विकसित करना आवश्यक है। इससे अस्पष्टता को रोका जा सकेगा, सटीक माप संभव हो सकेगी तथा यह सुनिश्चित होगा कि वास्तव में अतिरिक्त धनराशि का उपयोग जलवायु शमन व अनुकूलन हेतु किया जा सके।
- वाणिज्यिक ऋणों पर अनुदान या रियायती ऋण के प्रावधान को प्रोत्साहित करने से विकासशील देशों पर ऋण का बोझ कम हो सकता है। जलवायु संबंधी कार्रवाइयों का समर्थन करते समय ऐसे वित्तपोषण तंत्र को प्राथमिकता देना महत्त्वपूर्ण है जो ऋण तनाव न बढ़ाते हों।
| प्रिलिम्स के लियेः क्लाइमेट फाइनेंस एंड एक सौ डॉलर बिलियन गोलः OECD, COP अट्ठाईस, OECD , जलवायु वित्त, UNFCCC मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? दुबई में COP अट्ठाईस के एकत्र होने से पूर्व आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसका शीर्षक 'क्लाइमेट फाइनेंस एंड एक सौ डॉलर बिलियन गोल' है, जिसमें दर्शाया गया है कि विकसित देश जलवायु शमन हेतु प्रतिवर्ष एक सौ बिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाने के अपने वादे में विफल रहे हैं। - यह रिपोर्ट दो हज़ार तेरह-इक्कीस की अवधि के आधार पर विकासशील देशों के लिये विकसित देशों द्वारा प्रदत्त तथा जुटाए गए वार्षिक जलवायु वित्त के समग्र रुझान प्रस्तुत करती है। आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन क्या है? - परिचयः - OECD एक अंतर-सरकारी आर्थिक संगठन है जिसकी स्थापना आर्थिक प्रगति व विश्व व्यापार को प्रोत्साहित करने के लिये की गई है। - अधिकांश OECD सदस्य राष्ट्र उच्च आय वाली अर्थव्यवस्थाएँ हैं जिनका मानव विकास सूचकांक बहुत उच्च है एवं उन्हें विकसित देश माना जाता है। - स्थापनाः - इसके मुख्यालय की स्थापना वर्ष एक हज़ार नौ सौ इकसठ में पेरिस, फ्राँस में की गई थी तथा इसमें कुल अड़तीस सदस्य देश हैं। - OECD में शामिल होने वाले सबसे हालिया देश थे- अप्रैल दो हज़ार बीस में कोलंबिया तथा मई दो हज़ार इक्कीस में कोस्टा रिका। - भारत इसका सदस्य नहीं है अपितु एक प्रमुख आर्थिक भागीदार है। - OECD द्वारा जारी रिपोर्ट और सूचकांकः पृष्ठभूमि क्या है? - वर्ष दो हज़ार नौ में कोपेनहेगन में जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क अभिसमय के पंद्रहवें सम्मेलन में विकसित देश वर्ष दो हज़ार बीस तक विकासशील देशों में जलवायु कार्रवाई के लिये प्रतिवर्ष एक सौ बिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाने के सामूहिक लक्ष्य के लिये प्रतिबद्ध हैं। - लक्ष्य को कैनकन में COPसोलह में औपचारिक रूप दिया गया था और पेरिस COPइक्कीस में इसे दोहराया गया तथा वर्ष दो हज़ार पच्चीस तक इसे बढ़ा दिया गया। - दान दाता देशों के अनुरोध पर OECD वर्ष दो हज़ार पंद्रह से इस लक्ष्य की दिशा में प्रगति पर नज़र रख रहा है। यह एक मज़बूत लेखांकन ढाँचे के आधार पर की गई प्रगति का नियमित विश्लेषण करता है, जो कि स्रोत और वित्तीय साधन की फंडिंग पर पेरिस समझौते के सभी पक्षों द्वारा सहमत COPचौबीस परिणाम के अनुरूप है। रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष क्या हैं? - कुल जलवायु वित्तः - वर्ष दो हज़ार इक्कीस में विकसित देशों द्वारा विकासशील देशों के लिये प्रदान किया गया और जुटाया गया कुल जलवायु वित्त नवासी.छः बिलियन अमेरिकी डॉलर था, जो पिछले वर्ष की तुलना में सात.छः% की महत्त्वपूर्ण वृद्धि दर्शाता है। - सार्वजनिक जलवायु वित्त दो हज़ार तेरह-इक्कीस की अवधि में लगभग दोगुना हो गया, यह अड़तीस बिलियन अमेरिकी डॉलर से तिहत्तर.एक बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया, जो वर्ष दो हज़ार इक्कीस में कुल नवासी.छः बिलियन अमेरिकी डॉलर के भारी योगदान के लिये ज़िम्मेदार है। - जुटाया गया निजी जलवायु वित्त, जिसके लिये तुलनीय डेटा केवल दो हज़ार सोलह से उपलब्ध है, दो हज़ार इक्कीस में चौदह.चार बिलियन अमेरिकी डॉलर या कुल का सोलह% था। - अनुकूलन वित्त में गिरावटः - वर्ष दो हज़ार इक्कीस में अनुकूलन वित्त में चार बिलियन अमेरिकी डॉलर की गिरावट आई, जिसके परिणामस्वरूप कुल जलवायु वित्त में इसकी हिस्सेदारी चौंतीस% से घटकर सत्ताईस% हो गई। - अनुकूलन के लिये वित्त में कमी से विकासशील देशों की शमन और अनुकूलन दोनों आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता के विषय में चिंताएँ बढ़ रही हैं। - जलवायु वित्तपोषण में ऋण का प्रभुत्वः - वर्ष दो हज़ार इक्कीस में सार्वजनिक क्षेत्र द्वारा द्विपक्षीय और बहुपक्षीय चैनलों के माध्यम से तिहत्तर.एक बिलियन अमेरिकी डॉलर का वित्त जुटाया गया तथा उनचास.छः बिलियन अमेरिकी डॉलर ऋण के रूप में प्रदान किये गए। - अनुदान के बजाय ऋण पर निर्भरता, गरीब देशों में ऋण तनाव को बढ़ा सकती है, जिससे जलवायु चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने की उनकी क्षमता प्रभावित हो सकती है। - सिफारिशेंः - अनुकूलन वित्त को बढ़ाने की आवश्यकताः अंतर्राष्ट्रीय प्रदाताओं को दो आवश्यक क्षेत्रों में अपने प्रयासों को महत्त्वपूर्ण रूप से बढ़ाने की आवश्यकता हैः अनुकूलन वित्त और निजी वित्त जुटाना। - क्षमता निर्माणः परियोजना विकास, वित्तीय साक्षरता और परिचालन दक्षता के संदर्भ में क्षमता निर्माण का समर्थन करने की आवश्यकता है, जो विकासशील देशों की जलवायु वित्त तक पहुँच, अवशोषण तथा प्रभावी ढंग से उपयोग करने की क्षमताओं को मज़बूत कर सकता है। - वित्तीय उत्पादों को अनुकूलित और विकसित करनाः जलवायु वित्त की पहुँच और प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिये अंतर्राष्ट्रीय प्रदाताओं को उन वित्तीय उत्पादों तथा तंत्रों को अनुकूलित व विकसित करने की आवश्यकता है जो वे पेश करते हैं। OECD रिपोर्ट के मुद्दे क्या हैं? - परिभाषाओं में स्पष्टता का अभावः - 'जलवायु वित्त' की सार्वभौमिक रूप से सहमत परिभाषा का अभाव है, जो विकसित देशों को आधिकारिक विकास सहायता और उच्च लागत वाले ऋणों सहित विभिन्न प्रकार के वित्तपोषण को जलवायु वित्त के रूप में वर्गीकृत करने की अनुमति देता है। - यह अस्पष्टता दोहरी गणना को सक्षम कर सकती है और जाँच से बच सकती है। - अतिरिक्तता के साथ चुनौतियाँः - UNFCCC द्वारा निर्धारित "नए और अतिरिक्त वित्त" के सिद्धांत, जिसका उद्देश्य जलवायु उद्देश्यों हेतु मौजूदा सहायता को रोकने के लिये है, पर सवाल उठाया गया है। - कुछ देशों ने "नए और अतिरिक्त" मानदंड को कमज़ोर करते हुए सहायता की दोहरी गणना करना स्वीकार किया है। - अंकित मूल्य पर ऋण समतुल्य अनुदान नहींः - कुल जलवायु वित्त आँकड़े निकालते समय ऋणों को अंकित मूल्य के आधार पर माना जाता है, न कि अनुदान के बराबर। - इसलिये जबकि गरीब देश पुनर्भुगतान और ब्याज के लिये पैसा खर्च करते हैं, फिर भी ऋण को विकसित दुनिया द्वारा प्रदान किये गए जलवायु वित्त के रूप में गिना जाता है। - कुल जलवायु वित्त आँकड़े निकालते समय ऋणों को अंकित मूल्य के आधार पर माना जाता है, न कि अनुदान के बराबर। - जलवायु वित्त योगदान के लिये पारदर्शी और मानकीकृत रिपोर्टिंग तंत्र स्थापित करना महत्त्वपूर्ण है। इसमें फंडिंग की ट्रैकिंग और रिपोर्टिंग हेतु स्पष्ट मानदंड और कार्यप्रणाली को परिभाषित करना, सटीकता सुनिश्चित करना तथा फंड की दोहरी गणना या गलत वर्गीकरण को रोकना शामिल है। - जलवायु वित्त के गठन के लिये सार्वभौमिक रूप से सहमत परिभाषाएँ और मानदंड विकसित करना आवश्यक है। इससे अस्पष्टता को रोका जा सकेगा, सटीक माप संभव हो सकेगी तथा यह सुनिश्चित होगा कि वास्तव में अतिरिक्त धनराशि का उपयोग जलवायु शमन व अनुकूलन हेतु किया जा सके। - वाणिज्यिक ऋणों पर अनुदान या रियायती ऋण के प्रावधान को प्रोत्साहित करने से विकासशील देशों पर ऋण का बोझ कम हो सकता है। जलवायु संबंधी कार्रवाइयों का समर्थन करते समय ऐसे वित्तपोषण तंत्र को प्राथमिकता देना महत्त्वपूर्ण है जो ऋण तनाव न बढ़ाते हों। |
अब ग्राहक अपने स्मार्टफोन में The Fuel Delivery मोबाइल ऐप को डाउनलोड करके फ्यूल ऑर्डर और डिलीवरी की मॉनिटरिंग कर सकते हैं.
ऐप आधारित डोर-टू-डोर फ्यूल डिलीवरी सर्विस देने के लिए 'द फ्यूल डिलीवरी' (The Fuel Delivery) भारत में दिल्ली- एनसीआर और देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से शुरुआत करने के लिए तैयार है. नई शुरूआत करते हुए मुंबई स्थित आरएसटी फ्यूल डिलीवरी प्राइनेट लिमिटेड का उद्देश्य देश में फ्यूल डिलीवरी और खपत डिमांड को बदलना है और उपभोक्ताओं के साथ-साथ निर्माण और लॉजिस्टिक कंपनियों जैसे बड़े पैमाने पर ग्राहकों को सशक्त बनाना है.
द फ्यूल डिलीवरी के संस्थापक और सीईओ रक्षित माथुर का कहना है, हम मुख्य रूप से रियल एस्टेट, अस्पतालों, कॉर्पोरेट कार्यालय, स्कूलों और संस्थानों, बैंकों, शॉपिंग मॉल, गोदामों, ट्रांसर्पोटेशन और लॉजिस्टिक, और कृषि जैसे क्षेत्रों में फ्यूल की होम डिलीवरी के लिए एक बड़ी क्षमता देखते हैं. तेल मार्केटिंग कंपनियां का अनुमान है कि आने वाले 12 से 18 महीनों में बाजार का भाव 2,000 करोड़ रुपये तक हो सकता है.
ये सिस्टम फ्यूल की होम डिलीवरी की सुविधा देता है. ग्राहक अपने स्मार्टफोन में कंपनी के मोबाइल ऐप को डाउनलोड करके फ्यूल ऑर्डर कर सकते हैं. वो ऐप के माध्यम से पेमेंट कर सकते हैं और ऐप के जरिये ही डिलीवरी की मॉनिटरिंग भी कर सकते हैं.
रक्षित माथुर ने कहा, हमने मोबाइल ऐप बनाने के लिए आईओटी टेक्नोलॉजी की मदद ली है. हमारे सभी डिलीवरी वाहनों को आईओटी सॉल्यूशन के साथ जोड़ा है, जो ऑर्डर की पूर्ति बेहतर ढंग से निगरानी और ट्रैकिंग सुनिश्चित करेगा. कंपनी की अगले 6 से 12 महीनों में अन्य प्रमुख बाजारों जैसे चंडीगढ़, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और कोलकाता में प्रवेश करने की योजना है.
- फ्यूल डिलीवरी बाजार तेजी से तेल मार्केटिंग कंपनियों जैसे हिंदुस्तान पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल के साथ तेजी से विकसित हो रहा है और इस क्षेत्र में कुछ मौजूदा स्टार्ट-अप के साथ टाई अप कर रहा है.
- सेगमेंट में स्टार्ट-अप्स के लिए फ्यूल एंटरप्रेन्योर बनने की क्षमता है. साथ ही ड्राइवर और हेल्पर्स के लिए भी रोजगार पैदा करेगा.
- कोविड-19 की स्थिति में यह उपभोक्ताओं के लिए फायदेमंद होगा, क्योंकि वे फ्यूल स्टेशनों पर लंबी कतारों से बचकर कॉन्टेक्ट-लेस डिलीवरी के माध्यम से सामाजिक दूरी के मानदंडों को बनाए रखेगा.
(इनपुट- IANS)
| अब ग्राहक अपने स्मार्टफोन में The Fuel Delivery मोबाइल ऐप को डाउनलोड करके फ्यूल ऑर्डर और डिलीवरी की मॉनिटरिंग कर सकते हैं. ऐप आधारित डोर-टू-डोर फ्यूल डिलीवरी सर्विस देने के लिए 'द फ्यूल डिलीवरी' भारत में दिल्ली- एनसीआर और देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से शुरुआत करने के लिए तैयार है. नई शुरूआत करते हुए मुंबई स्थित आरएसटी फ्यूल डिलीवरी प्राइनेट लिमिटेड का उद्देश्य देश में फ्यूल डिलीवरी और खपत डिमांड को बदलना है और उपभोक्ताओं के साथ-साथ निर्माण और लॉजिस्टिक कंपनियों जैसे बड़े पैमाने पर ग्राहकों को सशक्त बनाना है. द फ्यूल डिलीवरी के संस्थापक और सीईओ रक्षित माथुर का कहना है, हम मुख्य रूप से रियल एस्टेट, अस्पतालों, कॉर्पोरेट कार्यालय, स्कूलों और संस्थानों, बैंकों, शॉपिंग मॉल, गोदामों, ट्रांसर्पोटेशन और लॉजिस्टिक, और कृषि जैसे क्षेत्रों में फ्यूल की होम डिलीवरी के लिए एक बड़ी क्षमता देखते हैं. तेल मार्केटिंग कंपनियां का अनुमान है कि आने वाले बारह से अट्ठारह महीनों में बाजार का भाव दो,शून्य करोड़ रुपये तक हो सकता है. ये सिस्टम फ्यूल की होम डिलीवरी की सुविधा देता है. ग्राहक अपने स्मार्टफोन में कंपनी के मोबाइल ऐप को डाउनलोड करके फ्यूल ऑर्डर कर सकते हैं. वो ऐप के माध्यम से पेमेंट कर सकते हैं और ऐप के जरिये ही डिलीवरी की मॉनिटरिंग भी कर सकते हैं. रक्षित माथुर ने कहा, हमने मोबाइल ऐप बनाने के लिए आईओटी टेक्नोलॉजी की मदद ली है. हमारे सभी डिलीवरी वाहनों को आईओटी सॉल्यूशन के साथ जोड़ा है, जो ऑर्डर की पूर्ति बेहतर ढंग से निगरानी और ट्रैकिंग सुनिश्चित करेगा. कंपनी की अगले छः से बारह महीनों में अन्य प्रमुख बाजारों जैसे चंडीगढ़, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और कोलकाता में प्रवेश करने की योजना है. - फ्यूल डिलीवरी बाजार तेजी से तेल मार्केटिंग कंपनियों जैसे हिंदुस्तान पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल के साथ तेजी से विकसित हो रहा है और इस क्षेत्र में कुछ मौजूदा स्टार्ट-अप के साथ टाई अप कर रहा है. - सेगमेंट में स्टार्ट-अप्स के लिए फ्यूल एंटरप्रेन्योर बनने की क्षमता है. साथ ही ड्राइवर और हेल्पर्स के लिए भी रोजगार पैदा करेगा. - कोविड-उन्नीस की स्थिति में यह उपभोक्ताओं के लिए फायदेमंद होगा, क्योंकि वे फ्यूल स्टेशनों पर लंबी कतारों से बचकर कॉन्टेक्ट-लेस डिलीवरी के माध्यम से सामाजिक दूरी के मानदंडों को बनाए रखेगा. |
सलमान खान की 'भारत' के ट्रेलर ने इंटरनेट पर धूम मचा दी है और फिल्म के लिए लोगों का उत्साह चरम पर है।
'भारत' को अली अब्बास जफर ने निर्देशित किया है और सलमान खान, कैटरीना कैफ, दिशा पटानी और जैकी श्रॉफ मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म कोरियाई नाटक 'ओड टू माय फादर' पर आधारित है। कम से कम, ट्रेलर को देखकर ऐसा ही लगता है कि फिल्म में सुपर डुपर ब्लॉकबस्टर होने के सभी तत्व हैं।
सलमान खान और कैटरीना कैफ की केमिस्ट्री एक ऐसी चीज है जिसे कोई भी चुनौती नहीं दे सकता है क्योंकि यह एक ऐसी जोड़ी है जिसे जनता स्क्रीन पर देखना पसंद करती है। उनका पिछला इतिहास इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ट्रेलर जारी होने से पहले ही, दर्शक फिल्म के सेट से आ रही तस्वीरों को लेकर उत्साहित रहते थे और अब अपनी इस पसंदीदा जोड़ी को देखने वे सिनेमाघरों तक जाएंगे ही जाएंगे।
अली अब्बास जफर ने यह सुनिश्चित किया है कि फिल्म में एक ठेठ भाई फिल्म के सभी तत्व हैं। आने वाली ईद की छुट्टी को सामान्य रूप से लक्षित कर रहा है और इसलिए निर्माताओं ने 'भारत' को एक अच्छी मनोरंजन फिल्म बनानेका फैसला किया है।
फिल्म बहुत सारे गाने, नाटक और ट्विस्ट के साथ भरी हुई है। सलमान अलग-अलग टाइमलाइन दिखाने के लिए फिल्म के लिए अलग-अलग लुक में आ रहे हैं। वह भी कहानी को आगे बढ़ाने के लिए एक दिलचस्प परत है।
मुख्य कहानी लाइन में भारत विभाजन शामिल है और इस महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना की पृष्ठभूमि के खिलाफ अपने परिवार के साथ सलमान खान की यात्रा को दर्शाता है जिसने आधुनिक भारत को आकार दिया। पिछली बार सलमान ने इस विषय की खोज 'बजरंगी भाईजान' में की थी जिसने बॉक्स ऑफिस पर सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे।
फिल्म में शामिल इन सभी एलिमेंट्स को देखते हुए निश्चित तौर पर यह ब्लॉकबस्टर लग रही है। फिल्म के बारे में आप क्या सोचते हैं कमेंट करें और हमें बताएं।
यह भी पढ़ेंः करण जौहर के करियर की सबसे बड़ी फ्लॉप होगी 'कलंक' ?
| सलमान खान की 'भारत' के ट्रेलर ने इंटरनेट पर धूम मचा दी है और फिल्म के लिए लोगों का उत्साह चरम पर है। 'भारत' को अली अब्बास जफर ने निर्देशित किया है और सलमान खान, कैटरीना कैफ, दिशा पटानी और जैकी श्रॉफ मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म कोरियाई नाटक 'ओड टू माय फादर' पर आधारित है। कम से कम, ट्रेलर को देखकर ऐसा ही लगता है कि फिल्म में सुपर डुपर ब्लॉकबस्टर होने के सभी तत्व हैं। सलमान खान और कैटरीना कैफ की केमिस्ट्री एक ऐसी चीज है जिसे कोई भी चुनौती नहीं दे सकता है क्योंकि यह एक ऐसी जोड़ी है जिसे जनता स्क्रीन पर देखना पसंद करती है। उनका पिछला इतिहास इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ट्रेलर जारी होने से पहले ही, दर्शक फिल्म के सेट से आ रही तस्वीरों को लेकर उत्साहित रहते थे और अब अपनी इस पसंदीदा जोड़ी को देखने वे सिनेमाघरों तक जाएंगे ही जाएंगे। अली अब्बास जफर ने यह सुनिश्चित किया है कि फिल्म में एक ठेठ भाई फिल्म के सभी तत्व हैं। आने वाली ईद की छुट्टी को सामान्य रूप से लक्षित कर रहा है और इसलिए निर्माताओं ने 'भारत' को एक अच्छी मनोरंजन फिल्म बनानेका फैसला किया है। फिल्म बहुत सारे गाने, नाटक और ट्विस्ट के साथ भरी हुई है। सलमान अलग-अलग टाइमलाइन दिखाने के लिए फिल्म के लिए अलग-अलग लुक में आ रहे हैं। वह भी कहानी को आगे बढ़ाने के लिए एक दिलचस्प परत है। मुख्य कहानी लाइन में भारत विभाजन शामिल है और इस महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना की पृष्ठभूमि के खिलाफ अपने परिवार के साथ सलमान खान की यात्रा को दर्शाता है जिसने आधुनिक भारत को आकार दिया। पिछली बार सलमान ने इस विषय की खोज 'बजरंगी भाईजान' में की थी जिसने बॉक्स ऑफिस पर सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। फिल्म में शामिल इन सभी एलिमेंट्स को देखते हुए निश्चित तौर पर यह ब्लॉकबस्टर लग रही है। फिल्म के बारे में आप क्या सोचते हैं कमेंट करें और हमें बताएं। यह भी पढ़ेंः करण जौहर के करियर की सबसे बड़ी फ्लॉप होगी 'कलंक' ? |
कानपुर और आगरा यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. विनय पाठक द्वारा पदभार ग्रहण करने के साथ ही समाजवादी पार्टी ने फिर मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को गंगा किनारे स्थित सरसैया घाट पर सपा विधायक अमिताभ बाजपेई ने कुलपति की खड़ाऊ को गंगा में विसर्जित किया। वहीं सपाइयों ने सीबीआई को घेरते हुए उखाड़ पाई न सीबीआई, बधाई हो बधाई जैसे नारे भी लगाए।
आर्यनगर विधायक अमिताभ बाजपेई ने बताया कि ग्रेट कुलपति प्रो. विनय पाठक के दोबारा कार्यभार ग्रहण करने पर जिन खड़ाऊ द्वारा अभी तक विश्वविद्यालय में कार्यों का निर्वाहन किया गया, उनके पदभार ग्रहण करने के साथ खड़ाऊ का काम खत्म हो गया था। ऐसे में उनका विसर्जन धोती-बनियान पहनकर गंगा में कर दिया गया।
विधायक ने कहा कि इस वर्तमान सरकार की जीरो टॉलरेंस का यह नायाब नमूना है। ना कोई पूछताछ ना कोई पकड़ा गया, इससे बड़ा मजाक क्या हो सकता है। समाजवादी कार्यकर्ताओं और इरफान सोलंकी के मामले में बिना जांच के सीधे घर पर दबिश दे दी जाती है। बिना जांच के गिरफ्तार करके जेल भेज दिया जाता है। सीबीआई जांच के नाम पर बड़े खेल खेले जा रहे हैं।
15 दिन पहले सपा विधायक अमिताभ बाजपेई और मो. हसन रूमी ने यूनिवर्सिटी गेट पर प्रदर्शन किया था। इसमें विधायक ने VC की फोटो पर नोटों की माला के साथ ही खड़ाऊ लेकर प्रदर्शन किया था। खड़ाऊ का मतलब था कि गंभीर आरोपों के बाद भी कुलपति पद से प्रो. विनय पाठक को पद से नहीं हटाया गया। उनके न होने से यूनिवर्सिटी के कार्य प्रभावित हो रहे थे।
विनय पाठक को लेकर समाजवादी पार्टी लगातार मुखर है। अखिलेश यादव भी लगातार उनका नाम लेकर कई सरकार पर सवाल उठा चुके हैं। गौरतलब है कि प्रो. विनय पाठक के पास आगरा यूनिवर्सिटी का भी चार्ज है।
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| कानपुर और आगरा यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. विनय पाठक द्वारा पदभार ग्रहण करने के साथ ही समाजवादी पार्टी ने फिर मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को गंगा किनारे स्थित सरसैया घाट पर सपा विधायक अमिताभ बाजपेई ने कुलपति की खड़ाऊ को गंगा में विसर्जित किया। वहीं सपाइयों ने सीबीआई को घेरते हुए उखाड़ पाई न सीबीआई, बधाई हो बधाई जैसे नारे भी लगाए। आर्यनगर विधायक अमिताभ बाजपेई ने बताया कि ग्रेट कुलपति प्रो. विनय पाठक के दोबारा कार्यभार ग्रहण करने पर जिन खड़ाऊ द्वारा अभी तक विश्वविद्यालय में कार्यों का निर्वाहन किया गया, उनके पदभार ग्रहण करने के साथ खड़ाऊ का काम खत्म हो गया था। ऐसे में उनका विसर्जन धोती-बनियान पहनकर गंगा में कर दिया गया। विधायक ने कहा कि इस वर्तमान सरकार की जीरो टॉलरेंस का यह नायाब नमूना है। ना कोई पूछताछ ना कोई पकड़ा गया, इससे बड़ा मजाक क्या हो सकता है। समाजवादी कार्यकर्ताओं और इरफान सोलंकी के मामले में बिना जांच के सीधे घर पर दबिश दे दी जाती है। बिना जांच के गिरफ्तार करके जेल भेज दिया जाता है। सीबीआई जांच के नाम पर बड़े खेल खेले जा रहे हैं। पंद्रह दिन पहले सपा विधायक अमिताभ बाजपेई और मो. हसन रूमी ने यूनिवर्सिटी गेट पर प्रदर्शन किया था। इसमें विधायक ने VC की फोटो पर नोटों की माला के साथ ही खड़ाऊ लेकर प्रदर्शन किया था। खड़ाऊ का मतलब था कि गंभीर आरोपों के बाद भी कुलपति पद से प्रो. विनय पाठक को पद से नहीं हटाया गया। उनके न होने से यूनिवर्सिटी के कार्य प्रभावित हो रहे थे। विनय पाठक को लेकर समाजवादी पार्टी लगातार मुखर है। अखिलेश यादव भी लगातार उनका नाम लेकर कई सरकार पर सवाल उठा चुके हैं। गौरतलब है कि प्रो. विनय पाठक के पास आगरा यूनिवर्सिटी का भी चार्ज है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
पंजाब के फरीदकोट मॉर्डन जेल के सहायक जेल अधीक्षक भिवम तेज सिंगला ने बताया कि आज जेल में सर्च ऑपरेशन चलाया गया। इस दौरान महिला हवालाती ज्योति कौर की जेब से एक मोबाइल मिला है, जबकि 4 मोबाइल बाथरूम व बैरकों के अंदर गड्ढा खोद कर छिपाए गए थे। सर्च ऑपरेशन के दौरान मोबाइल चार्जर भी बरामद हुआ है।
जेल प्रशासन की शिकायत पर फरीदकोट सिटी थाने के ASI शविंदर सिंह ने बताया कि महिला हवालाती को नामजद करने के साथ अज्ञात अरोपियों पर मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
4 जनवरी 2022 को जेल मंत्री हरजोत बैंस ने फरीदकोट की केंद्रीय मॉडर्न जेल का जायजा लिया था। पंजाब की जेलों को जल्द ही मोबाइल फोन से मुक्त करने का दावा किया। जेल मंत्री हरजोत बैंस ने करीब 2 घंटे तक जेल का जायजा लेने के साथ अधिकारियों से सुरक्षा प्रबंधों की जानकारी ली थी। इस दौरान उन्होंने जेल की सुरक्षा बढ़ाने और कमियों को जल्द दूर करने की हिदायत भी दी।
जेल मंत्री हरजोत बैंस ने मीडिया से बातचीत करते हुए दावा किया था कि उनकी सरकार ने जेलों में VIP कल्चर खत्म करने का संकल्प लिया है। जल्द ही पंजाब की जेलों को मोबाइल फोन से मुक्त कर देंगे। जेल मंत्री ने उस दौरान कहा था कि कुछ जेलों में जैमर लगाने की प्रक्रिया भी शुरू करवाई जा रही है। साथ ही जेलों के अंदर व बाहर सुरक्षा भी बढ़ाई जा रही है।
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| पंजाब के फरीदकोट मॉर्डन जेल के सहायक जेल अधीक्षक भिवम तेज सिंगला ने बताया कि आज जेल में सर्च ऑपरेशन चलाया गया। इस दौरान महिला हवालाती ज्योति कौर की जेब से एक मोबाइल मिला है, जबकि चार मोबाइल बाथरूम व बैरकों के अंदर गड्ढा खोद कर छिपाए गए थे। सर्च ऑपरेशन के दौरान मोबाइल चार्जर भी बरामद हुआ है। जेल प्रशासन की शिकायत पर फरीदकोट सिटी थाने के ASI शविंदर सिंह ने बताया कि महिला हवालाती को नामजद करने के साथ अज्ञात अरोपियों पर मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। चार जनवरी दो हज़ार बाईस को जेल मंत्री हरजोत बैंस ने फरीदकोट की केंद्रीय मॉडर्न जेल का जायजा लिया था। पंजाब की जेलों को जल्द ही मोबाइल फोन से मुक्त करने का दावा किया। जेल मंत्री हरजोत बैंस ने करीब दो घंटाटे तक जेल का जायजा लेने के साथ अधिकारियों से सुरक्षा प्रबंधों की जानकारी ली थी। इस दौरान उन्होंने जेल की सुरक्षा बढ़ाने और कमियों को जल्द दूर करने की हिदायत भी दी। जेल मंत्री हरजोत बैंस ने मीडिया से बातचीत करते हुए दावा किया था कि उनकी सरकार ने जेलों में VIP कल्चर खत्म करने का संकल्प लिया है। जल्द ही पंजाब की जेलों को मोबाइल फोन से मुक्त कर देंगे। जेल मंत्री ने उस दौरान कहा था कि कुछ जेलों में जैमर लगाने की प्रक्रिया भी शुरू करवाई जा रही है। साथ ही जेलों के अंदर व बाहर सुरक्षा भी बढ़ाई जा रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
बुलंदशहर में मिर्ची गैंग के 3 लुटेरों को थाना खुर्जा नगर पुलिस ने रविवार को दबोच लिया। उनके पास से अवैध हथियार और कारतूस भी बरामद किए गए हैं। गिरोह के सदस्य आंखों में मिर्च झोंक देते थे फिर लूटकर फरार हो जाते थे। जिले में 2 महीने से यह गैंग तेजी से सक्रिय था। गैंग करीब 12 से अधिक वारदातों को अंजाम दे चुका है। शनिवार को जनसेवा केंद्र संचालक से भी लूट का प्रयास किया था।
खुर्जा नगर इलाके के सुभाष रोड पंचायत धर्मशाला के पास स्थित जन सेवा केंद्र पर लुटेरे पहुंचे थे। संचालक मयंक गुप्ता पर मिर्च फेंककर लूट का प्रयास किया लेकिन सफल नहीं हो पाए। इस घटना से जुड़ा एक सीसीटीवी फुटेज सामने आया था। इसके बाद पुलिस लुटेरों की तलाश में जुट गई। फुटेज के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंच गई।
पकड़े गए आरोपी सचिन शर्मा पुत्र मोहन स्वरुप शर्मा निवासी नेहरू गार्डन खोडा थाना सेक्टर-58 जनपद गौतमबुद्ध नगर, कुशल शर्मा पुत्र कन्हैया लाल शर्मा निवासी मोहल्ला अहीरपाडा कस्बा व थाना खुर्जा नगर बुलंदशहर और आकाश शर्मा पुत्र रामेश्वर दयाल शर्मा निवासी खुर्जा नगर बुलंदशहर के रूप में हुई। तीनों के पास से 02 अवैध तमंचा 315 बोर, 03 कारतूस, 01 अवैध तमंचा 32 बोर, 02 कारतूस बरामद हुए हैं।
गैंग के सदस्य रेकी कर एक के बाद एक लूट की वारदातों को अंजाम दे रहे थे। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि आज वे फिर से लूट की योजना बना रहे थे लेकिन पुलिस ने उन्हें दबोच लिया। तीनों की गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। यहां से उन्हें जेल भेज दिया।
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| बुलंदशहर में मिर्ची गैंग के तीन लुटेरों को थाना खुर्जा नगर पुलिस ने रविवार को दबोच लिया। उनके पास से अवैध हथियार और कारतूस भी बरामद किए गए हैं। गिरोह के सदस्य आंखों में मिर्च झोंक देते थे फिर लूटकर फरार हो जाते थे। जिले में दो महीने से यह गैंग तेजी से सक्रिय था। गैंग करीब बारह से अधिक वारदातों को अंजाम दे चुका है। शनिवार को जनसेवा केंद्र संचालक से भी लूट का प्रयास किया था। खुर्जा नगर इलाके के सुभाष रोड पंचायत धर्मशाला के पास स्थित जन सेवा केंद्र पर लुटेरे पहुंचे थे। संचालक मयंक गुप्ता पर मिर्च फेंककर लूट का प्रयास किया लेकिन सफल नहीं हो पाए। इस घटना से जुड़ा एक सीसीटीवी फुटेज सामने आया था। इसके बाद पुलिस लुटेरों की तलाश में जुट गई। फुटेज के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंच गई। पकड़े गए आरोपी सचिन शर्मा पुत्र मोहन स्वरुप शर्मा निवासी नेहरू गार्डन खोडा थाना सेक्टर-अट्ठावन जनपद गौतमबुद्ध नगर, कुशल शर्मा पुत्र कन्हैया लाल शर्मा निवासी मोहल्ला अहीरपाडा कस्बा व थाना खुर्जा नगर बुलंदशहर और आकाश शर्मा पुत्र रामेश्वर दयाल शर्मा निवासी खुर्जा नगर बुलंदशहर के रूप में हुई। तीनों के पास से दो अवैध तमंचा तीन सौ पंद्रह बोर, तीन कारतूस, एक अवैध तमंचा बत्तीस बोर, दो कारतूस बरामद हुए हैं। गैंग के सदस्य रेकी कर एक के बाद एक लूट की वारदातों को अंजाम दे रहे थे। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि आज वे फिर से लूट की योजना बना रहे थे लेकिन पुलिस ने उन्हें दबोच लिया। तीनों की गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। यहां से उन्हें जेल भेज दिया। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। दिल्ली में हिंदू संगठनों ने 'समुदाय पर हो रहे हमलों' के खिलाफ शनिवार को 'संकल्प मार्च' निकाला, जिसमें शामिल लोगों ने तिरंगा लहराते हुए 'जय श्री राम' के नारे लगाए। मार्च मंडी हाउस इलाके से शुरू होकर जंतर मंतर पर खत्म हुआ। इस मार्च में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा और कपिल मिश्रा ने भी हिस्सा लिया।
उत्तरी दिल्ली के पूर्व महापौर अवतार सिंह ने कहा, 'इस 'संकल्प मार्च' के लिए आज कई हिंदू समूह सड़कों पर हैं। हम यहां हिंदुओं पर हमलों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए एकत्रित हुए हैं। उन्हें इस तरह से निशाना नहीं बनाया जा सकता। हमें निशाना बनाने वालों को हम छोड़ेंगे नहीं। 'मार्च के कारण मध्य दिल्ली में कई सड़कों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया।
इसके पहले धमकी भरी कॉल से दहशत में आने वाले अथवा पुलिस से मदद न मिलने वाले हिंदू वर्ग से जुड़े लोगों को सहायता देने के लिए 35 प्रांतों में हेल्पलाइन बनाई है। दिल्ली में हेल्पलाइन नंबर- 8178088098 जारी किया है।
विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री सुरेंद्र जैन ने यह जानकारी देते हुए कहा कि उदयपुर और अरावती में हुई निर्मम हत्या और नूपुर शर्मा, नवीन कुमार को दी गई धमकी के बाद विहिप ने हिंदुओं की रक्षा के लिए कदम उठाते हुए हेल्पलाइन नंबर जारी किया है।
उन्होंने कहा कि हिंदू समाज के लोगों को जब भी धमकी मिलें, तो वह तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस कार्रवाई नहीं करती है तो इन हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें, विहिप की युवा शाखा बजरंग दल के कार्यकर्ता मदद के लिए हमेशा तैयार रहेंगे।
विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल के अनुसार शनिवार को विहिप संविधान संकल्प यात्रा निकालेगा। दिल्ली में मंडी हाउस से जंतर मंतर तक निकलने वाली इस यात्रा की अगुवाई विहिप के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार कर रहे हैं। यात्रा में बड़ी संख्या में विहिप, संत समाज के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं पूर्व सरकारी अधिकारी आदि शामिल हैं।
विनोद बंसल के अनुसार दिल्ली के अलावा राजस्थान, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, महाराष्ट्र, असम, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, केरल, तेलंगाना, कलकत्ता, उत्तर प्रदेश, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, कर्नाटक, बिहार, उड़ीसा और मध्य प्रदेश के बजरंग दल के प्रांत प्रभारियों का हेल्प नंबर भी जारी किया है।
Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें। हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
| नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। दिल्ली में हिंदू संगठनों ने 'समुदाय पर हो रहे हमलों' के खिलाफ शनिवार को 'संकल्प मार्च' निकाला, जिसमें शामिल लोगों ने तिरंगा लहराते हुए 'जय श्री राम' के नारे लगाए। मार्च मंडी हाउस इलाके से शुरू होकर जंतर मंतर पर खत्म हुआ। इस मार्च में भारतीय जनता पार्टी के नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा और कपिल मिश्रा ने भी हिस्सा लिया। उत्तरी दिल्ली के पूर्व महापौर अवतार सिंह ने कहा, 'इस 'संकल्प मार्च' के लिए आज कई हिंदू समूह सड़कों पर हैं। हम यहां हिंदुओं पर हमलों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए एकत्रित हुए हैं। उन्हें इस तरह से निशाना नहीं बनाया जा सकता। हमें निशाना बनाने वालों को हम छोड़ेंगे नहीं। 'मार्च के कारण मध्य दिल्ली में कई सड़कों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। इसके पहले धमकी भरी कॉल से दहशत में आने वाले अथवा पुलिस से मदद न मिलने वाले हिंदू वर्ग से जुड़े लोगों को सहायता देने के लिए पैंतीस प्रांतों में हेल्पलाइन बनाई है। दिल्ली में हेल्पलाइन नंबर- आठ एक सात आठ शून्य आठ आठ शून्य नौ आठ जारी किया है। विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री सुरेंद्र जैन ने यह जानकारी देते हुए कहा कि उदयपुर और अरावती में हुई निर्मम हत्या और नूपुर शर्मा, नवीन कुमार को दी गई धमकी के बाद विहिप ने हिंदुओं की रक्षा के लिए कदम उठाते हुए हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज के लोगों को जब भी धमकी मिलें, तो वह तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस कार्रवाई नहीं करती है तो इन हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें, विहिप की युवा शाखा बजरंग दल के कार्यकर्ता मदद के लिए हमेशा तैयार रहेंगे। विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल के अनुसार शनिवार को विहिप संविधान संकल्प यात्रा निकालेगा। दिल्ली में मंडी हाउस से जंतर मंतर तक निकलने वाली इस यात्रा की अगुवाई विहिप के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार कर रहे हैं। यात्रा में बड़ी संख्या में विहिप, संत समाज के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं पूर्व सरकारी अधिकारी आदि शामिल हैं। विनोद बंसल के अनुसार दिल्ली के अलावा राजस्थान, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, महाराष्ट्र, असम, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, केरल, तेलंगाना, कलकत्ता, उत्तर प्रदेश, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, कर्नाटक, बिहार, उड़ीसा और मध्य प्रदेश के बजरंग दल के प्रांत प्रभारियों का हेल्प नंबर भी जारी किया है। Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें। हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक। |
उत्तर प्रदेश से एक शर्मनाक घटना सामने आई है। दरअसल, नोएडा के गौतमबुद्ध नगर से एक बुज़ुर्ग व्यक्ति के साथ धर्म पूछकर मारपीट करने का मामला सामने आया था।
नोएडा में श्रीकांत त्यागी के समर्थन में हजारों की संख्या में त्यागी समाज के लोगों ने महापंचायत की और सांसद डॉ महेश शर्मा के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम के लिए पूरे देश भर में 21 दिनों का लॉक डाउन घोषित किया हुआ है।
| उत्तर प्रदेश से एक शर्मनाक घटना सामने आई है। दरअसल, नोएडा के गौतमबुद्ध नगर से एक बुज़ुर्ग व्यक्ति के साथ धर्म पूछकर मारपीट करने का मामला सामने आया था। नोएडा में श्रीकांत त्यागी के समर्थन में हजारों की संख्या में त्यागी समाज के लोगों ने महापंचायत की और सांसद डॉ महेश शर्मा के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम के लिए पूरे देश भर में इक्कीस दिनों का लॉक डाउन घोषित किया हुआ है। |
भारतं वेदतुन्यं स्यादर्थतोऽधिकमुच्यते । तत्रापि भगवद्गीता विष्णोर्नामसहस्रकम् ॥ ५८।। दशाधिकफलं प्रोक्तं भारतादापि सर्वशः । श्रोताऽधं फलप्राप्नाति भक्तितः शृणुयात्तु यः ॥ ५९॥ भारतं वितिहासञ्च रामायणसमुद्भवम् । यद्वेदपाठपुण्यं तज्ज्ञेय रामायणस्य च ॥६० ।। पाठात्तदर्द्ध श्रवणे व्याख्यातुश्च दशाधिकम् । बाल्मीकिना कृतं यच शतकोटिप्र विस्तरम् ।।६१।। तत्सर्वेषामादिभूतं महामंगलकारकम् । रामायणादेव नाना संति रामायणानि हि ।। ६२।। शेषभूतं चतुर्विंशत्सहस्रं प्रथमं स्मृतम् । तथा च योगनिष्ठमध्यात्माख्यं तथा स्मृतम् ॥ ६३ ॥ वायुपुत्रकृतं चापि नारदोक्तं तथा पुनः । लघुरामायण चैरवृहद्रामायण तथा ।।६४।। अगस्त्युक्तं महाश्रेष्ठं साररामायणं तथा देहरामायणं चापि वृतरामायण पुनः ।। ६५।। मर। मायणं रम्पं भारद्वाजं तथैव च शिवरामायणं क्रौंचं भारतस्य च जैमिनेः ।।६६।। आत्मधर्म श्वेतकेतुऋपेश्चैव जटायुषः ॥ ६७ ।।
रवेः पुलस्तेदव्याथ गुह्यकं मंगलं तथा गाधिजं च सुतीक्ष्णं च सुग्रीवं च विभीषणम् ।।६८॥ तथाऽऽनंद रामायणमेतन्मंगलकार कम् । एवं सहस्रशः संति श्रीरामचरितानि हि ॥ ६९ ॥ कः समर्थोऽस्ति तेषां हि संख्यवक्तं सविस्तरात् । शतकोटिनितादेव विभाति पृथपृथक् ॥७०॥ सर्वेप्वप्यानंदसंज्ञं वरिष्ठं प्रोच्यते विदम् । अस्प पाटेन यत्पुण्यं तत्ते शिष्य वदाम्यम् ॥७१ ॥ शतकोटिमितं श्रुत्वा यत्फलं लभ्यते नरैः फलमस्य तदर्द्ध हि ज्ञेयं शिष्प शुभप्रदम् ॥७२॥ श्रवणाद्विगुणं पाठे व्याख्यातुश्च दशाधिकम् । तस्मादेतत्मदाऽऽनंदसंज्ञ श्राव्यं नरोत्तमैः ।।७३ ।। नानेन सदृशं किंचिद्धतं नाग्रे भविष्यति । सर्वेष्वपि च शास्त्रेषु पाञ्चरात्रागमोऽधिकः ॥७४।। विष्णुरहस्य ये अष्टादश उपपुराण हुए। इनका पाठ करनेस पुराणपाठका आधा फल मिलता है ।। ५५ ।। ।। ५६ ।। ५७ ।। महाभारत तो साक्षात् वेदके समान है। उसमें कही हुई भगवद्गीता और विष्णुसहस्रनाम ये दोनों महाभारतसे भी दसगुना अधिक फल देते हैं। जो श्रोता भक्तिपूर्वक उन्हें सुनता है, वह आधा फल पाता है। महाभारत रामायणसे ही निकला हुआ इतिहास है। वेदके पाठसे जो पुण्य होता है, वही फल रामायण के पाठमें है ।। ५८-६० ।। मूल-मूल आधा पुण्य मिलता है और व्याख्या करनेसे दसगुना अधिक फल प्राप्त होता है। सो करोड़ा वाल्मीकिने जिस रामायणकी रचना की है, वह सब रामायणोंका मूल और महामङ्गलका क है। उस रामायण से ही विविध प्रकारकी रामायणोंकी रचना हुई है ।। ६१ ।। उसीके परिशिष्ट अंशसे बनी और वर्तमान समय में चलती हुई चोवीस हजार श्लोकोंवाली वाल्मीकिरा मायण, योगवासिष्ठ, अध्यात्मरामायणपुत्र (हनुमान्जी) की रामायण, नारदरामायण, लघुरामायण, बृहद्रामायण, अगस्त्यजी को बनायी महाश्रेष्ठ साररामायण, देहरामायण, वृत्तरामायण, भारद्वाजरामायण, शिवरामायण, क्रौंचरामायण, भरतरामायण, जैमिनिरामायण आदि बहुतेरी रामायण है।। ६२-६६ ।। इनके अतिरिक्त आत्मधर्मकी, जटायुकी, श्वेतकेतु ऋषिकी पुलस्त्यकी देवीजीकी, विश्वामित्रकी, सुतीक्ष्णकी, सुग्रोवकी, विभीषणकी और यह मङ्गलमय आनन्दरामायण, इस तरह रामचरित्रका वर्णन करनेवाली हजारों रामायण बनी हैं। ६७-६९। उन सबकी सविस्तार संख्या बतलाने में कोई भी समर्थ नहीं हो सकता। वाल्मीकिजीके सौ करोड़ श्लोकात्मक रामायणसे ही इन सबका निर्माण हुआ है ॥ ७० ॥ किन्तु ऊपर गिनायी हुई सब रामायणों में यह आनन्दरामायण ही श्रेष्ठ है। ऐसा लोगोंने कहा है। इसके पढ़नेसे क्या पुण्य होता है, सो हे शिष्य ! मैं तुमको इसका माहात्म्य बतला रहा हूँ ॥ ७१ ॥ पूर्वोक शतकोटिसंख्यात्मक वाल्मीकिरामायण के सुनने से जो पुण्य प्राप्त होता है, उसका आधा पुण्य इस आनन्दरामायण पाठसे होता है। इसको सुननेसे दुगुना और व्याख्या करनेसे दसगुना पुण्य होता है । इस कारण लोगोंको चाहिए कि इस आनन्दरामायणका श्रवण करें ॥ ७२ ॥ ७३ । इसके साथ पवित्र कोई ग्रन्यन अवतक हुआ है और न
भगवद्गीतया तुल्य फलं तस्याखिलस्य च । भारतीयकथाबंधं सत्तरेव निर्मितम् ।। ७५।। तत्काव्यं यः पठेत्प्राज्ञो दशांशं फलमाप्नुयात् । यतैर्निमित तत्तु शतांशफलदं स्मृतम् ।।७६ ।। यः करोति स्वयं काव्यं कम्पयित्वा स्वयं कथम् तमो व्यर्थतामेति तदध्येता च दोषभाक् ॥ ७७।। पौराणी भारतीं वापि तथा रामायणस्थिताम् । तथा हापपुराणस्थां कथां ग्रंथति यः स्वयम् ।।७८।। रामभक्तोऽपि लभते शक्रलोकाधिवासताम् । प्रत्यक्षरं वर्षमेक बासस्तस्य भवेद्ध्वम् ।।७९।। रामभक्तः पुराणेभ्यः कथां ग्रंथति यः पुनः समृर्तिः स लभते बृहस्पतिसलोकताम् ।।८० ।। दौहित्रपोषितः शिष्य आरामश्च जलाशयः । सङ्क्रन्थवरणं पुत्रः ते पुत्रा वै प्रकीर्तिताः ।।८१ ।। एवं भृम्यामंशभूतैर्नरैस्ते विचरंति हि अश्वत्थामादयः सप्त ये चिरंजीविनः सदा ।।८२ ।। । अतः श्रीरामभक्कैथ कवित्वैस्वसतुतिः कृता । सापि मान्या सदाव्या बुधैर्मुहुः ।।८३।। भारताच्च शवांशेन फलदात्री स्मृताऽत्र हि । निर्देति ये भक्त कवितां ते खराः स्मृताः ।।८४॥ तत्तद्भाषाकृतं काव्यं रामवर्णनसंयुतम् । भारतस्य सहस्रांतुः फलं स्मृतम् ।।८५ ।। ।। निर्मातुस्तु भवेत्पुण्यं साधुशब्दशतांशतः । गीर्वाणीकविताकर्ता सोऽपि व्यासांश ईरिख । ८६ ॥ स्वस्वभाषाकवियानां कर्तारस्ते कवीश्वराः । गोणीकविता नापि पदान्वयसमन्त्रिता ।।८७ । अर्थप्रमाणसहिता सैव मान्या न चेतरा वरस्तुतिं तु यः कुर्याजी विकार्थं कविः कचित् ॥८८ ॥ निष्फलतच्छ्रमः प्रोक्तस्तदध्येता च दोषभाक् । उन्मादेन तु यः कुर्यारकामिनीनां तुवर्णनम् ।।१९।। सहि श्वयोनिं प्राप्नोति वर्षाव्यक्षरसंख्यया । वेदोक्तार्थानुसारेण मन्त्राद्या स्मारकाः स्मृता ॥९० ॥
भविष्य में होगा। सब शास्त्रोंसे पाञ्चरात्रके आगमको विशेष महत्त्व दिया गया है। उसका पाठ करनेसे भगवद्गीता पाठके तुल्य फल प्राप्त होता है। महाभारत के कथानकों को और जिनको अच्छे-अच्छे भगवद्भक्तोंने बनाया है ।। ७४ ।। ७५ ॥ उन काव्योंको जो मनुष्य पढ़ता है, उसे रामायण के पाठका दशांश पुण्य प्राप्त होता है। अन्य भक्तोंके बनाये काव्योंका अध्ययन करनेसे शतांश फल मिलता है ॥ ७६ ॥ जो मनुष्य कथाकी कल्पना करके स्वयं काव्य बनाता है, उसका परिश्रम व्यर्थ जाता है और उसका पाठ करनेवाला भी दोषका भागी बनता है ॥ ७७ ॥ जो कवि पुराणोंमें, महाभारतमें रामायण में तथा उपपुराणोमें लिखी हुई कथाओंका संग्रह करता है। वह रामभक्त होकर इन्द्रलोकमें निवास करता है। वह प्राणी जितने अक्षरोंको लिखे रहता है, उतने ही वर्षतक इन्द्रलोकमें रहता है ॥ ७८ ॥ ७६ ॥ जो रामभक्त पुराणोसे कथाओंका संग्रह करता है, वह साक्षात् व्यासदेवके समान पूज्य होता हुआ बृहस्पतिके लोकमें निवास करता है ॥ ८० ॥ अपनी लड़कीका लड़का, पोष्य पुत्र, शिष्य, बगीचा, तालाव तथा सद्ग्रन्थको रचना, अपना निजी पुत्र, इतने सत्पुत्र माने गये हैं ॥ ८१ ॥ वे लोग अंशभूत मनुष्यों अर्थात् अश्वत्थामा आदि जो सात चिरंजीवी बतलाये गये हैं, उनके साथ पृथ्वीमंडलपर विचरते हैं ॥ ८२ ॥ अतएव बहुतेरे रामभक्तोने अपनी कविता में श्रीरामकी स्तुति की है। इसलिए लोग उनकी भी कविताओंका आदर करें, वारम्बार सुने और पढ़ें ॥ ३ ॥ रामभक्तों की कविता महाभारतका शतांश फल देनेवाली होती है। जो लोग किसी रामभक्तको बनायी कविताका निरादर करते हैं, वे एक प्रकारके गधे हैं ॥ ८४ ॥ संस्कृत भाषा के अतिरिक्त और और भाषाओं में रामके चरित्रवर्णन युक्त कवितायें श्रोता-बक्ताको महाभारतके सहस्र अंशका फल देनेवाली होती हैं ॥ ८५ ।। अच्छे शब्दों में की हुई कविता कविको शतांश फल देती है । संस्कृत कविता करनेवाला प्राणी व्यासका अंश होता है ॥ ८६ ॥ अपनी-अपनी भाषामें कविता करनेवाले कवीश्वर अथवा संस्कृत में रचना करनेवाले कवियोमेंसे जिनकी कविता पद और अन्वय संयुक्त हो, जिसमें अर्थ तथा प्रमाण दोनों विद्यमान हों, वे ही मान्य हैं, और नहीं। जो कवि अपने स्वार्थ के लिए किसी मनुष्यकी स्तुतिमयी कविता करता है, उसका परिश्रम व्यर्थं जाता है अन्य उसका अध्ययन करनेवाला प्राणी भी दोषका भागी बनता है। जो कवि उन्मादवश स्त्रियोंका वर्णन करता है, वह कवितामें लिखे हुए जितने अक्षर हैं, उतने वर्षंतक श्वानकी योनिमें | भारतं वेदतुन्यं स्यादर्थतोऽधिकमुच्यते । तत्रापि भगवद्गीता विष्णोर्नामसहस्रकम् ॥ अट्ठावन।। दशाधिकफलं प्रोक्तं भारतादापि सर्वशः । श्रोताऽधं फलप्राप्नाति भक्तितः शृणुयात्तु यः ॥ उनसठ॥ भारतं वितिहासञ्च रामायणसमुद्भवम् । यद्वेदपाठपुण्यं तज्ज्ञेय रामायणस्य च ॥साठ ।। पाठात्तदर्द्ध श्रवणे व्याख्यातुश्च दशाधिकम् । बाल्मीकिना कृतं यच शतकोटिप्र विस्तरम् ।।इकसठ।। तत्सर्वेषामादिभूतं महामंगलकारकम् । रामायणादेव नाना संति रामायणानि हि ।। बासठ।। शेषभूतं चतुर्विंशत्सहस्रं प्रथमं स्मृतम् । तथा च योगनिष्ठमध्यात्माख्यं तथा स्मृतम् ॥ तिरेसठ ॥ वायुपुत्रकृतं चापि नारदोक्तं तथा पुनः । लघुरामायण चैरवृहद्रामायण तथा ।।चौंसठ।। अगस्त्युक्तं महाश्रेष्ठं साररामायणं तथा देहरामायणं चापि वृतरामायण पुनः ।। पैंसठ।। मर। मायणं रम्पं भारद्वाजं तथैव च शिवरामायणं क्रौंचं भारतस्य च जैमिनेः ।।छयासठ।। आत्मधर्म श्वेतकेतुऋपेश्चैव जटायुषः ॥ सरसठ ।। रवेः पुलस्तेदव्याथ गुह्यकं मंगलं तथा गाधिजं च सुतीक्ष्णं च सुग्रीवं च विभीषणम् ।।अड़सठ॥ तथाऽऽनंद रामायणमेतन्मंगलकार कम् । एवं सहस्रशः संति श्रीरामचरितानि हि ॥ उनहत्तर ॥ कः समर्थोऽस्ति तेषां हि संख्यवक्तं सविस्तरात् । शतकोटिनितादेव विभाति पृथपृथक् ॥सत्तर॥ सर्वेप्वप्यानंदसंज्ञं वरिष्ठं प्रोच्यते विदम् । अस्प पाटेन यत्पुण्यं तत्ते शिष्य वदाम्यम् ॥इकहत्तर ॥ शतकोटिमितं श्रुत्वा यत्फलं लभ्यते नरैः फलमस्य तदर्द्ध हि ज्ञेयं शिष्प शुभप्रदम् ॥बहत्तर॥ श्रवणाद्विगुणं पाठे व्याख्यातुश्च दशाधिकम् । तस्मादेतत्मदाऽऽनंदसंज्ञ श्राव्यं नरोत्तमैः ।।तिहत्तर ।। नानेन सदृशं किंचिद्धतं नाग्रे भविष्यति । सर्वेष्वपि च शास्त्रेषु पाञ्चरात्रागमोऽधिकः ॥चौहत्तर।। विष्णुरहस्य ये अष्टादश उपपुराण हुए। इनका पाठ करनेस पुराणपाठका आधा फल मिलता है ।। पचपन ।। ।। छप्पन ।। सत्तावन ।। महाभारत तो साक्षात् वेदके समान है। उसमें कही हुई भगवद्गीता और विष्णुसहस्रनाम ये दोनों महाभारतसे भी दसगुना अधिक फल देते हैं। जो श्रोता भक्तिपूर्वक उन्हें सुनता है, वह आधा फल पाता है। महाभारत रामायणसे ही निकला हुआ इतिहास है। वेदके पाठसे जो पुण्य होता है, वही फल रामायण के पाठमें है ।। अट्ठावन-साठ ।। मूल-मूल आधा पुण्य मिलता है और व्याख्या करनेसे दसगुना अधिक फल प्राप्त होता है। सो करोड़ा वाल्मीकिने जिस रामायणकी रचना की है, वह सब रामायणोंका मूल और महामङ्गलका क है। उस रामायण से ही विविध प्रकारकी रामायणोंकी रचना हुई है ।। इकसठ ।। उसीके परिशिष्ट अंशसे बनी और वर्तमान समय में चलती हुई चोवीस हजार श्लोकोंवाली वाल्मीकिरा मायण, योगवासिष्ठ, अध्यात्मरामायणपुत्र की रामायण, नारदरामायण, लघुरामायण, बृहद्रामायण, अगस्त्यजी को बनायी महाश्रेष्ठ साररामायण, देहरामायण, वृत्तरामायण, भारद्वाजरामायण, शिवरामायण, क्रौंचरामायण, भरतरामायण, जैमिनिरामायण आदि बहुतेरी रामायण है।। बासठ-छयासठ ।। इनके अतिरिक्त आत्मधर्मकी, जटायुकी, श्वेतकेतु ऋषिकी पुलस्त्यकी देवीजीकी, विश्वामित्रकी, सुतीक्ष्णकी, सुग्रोवकी, विभीषणकी और यह मङ्गलमय आनन्दरामायण, इस तरह रामचरित्रका वर्णन करनेवाली हजारों रामायण बनी हैं। सरसठ-उनहत्तर। उन सबकी सविस्तार संख्या बतलाने में कोई भी समर्थ नहीं हो सकता। वाल्मीकिजीके सौ करोड़ श्लोकात्मक रामायणसे ही इन सबका निर्माण हुआ है ॥ सत्तर ॥ किन्तु ऊपर गिनायी हुई सब रामायणों में यह आनन्दरामायण ही श्रेष्ठ है। ऐसा लोगोंने कहा है। इसके पढ़नेसे क्या पुण्य होता है, सो हे शिष्य ! मैं तुमको इसका माहात्म्य बतला रहा हूँ ॥ इकहत्तर ॥ पूर्वोक शतकोटिसंख्यात्मक वाल्मीकिरामायण के सुनने से जो पुण्य प्राप्त होता है, उसका आधा पुण्य इस आनन्दरामायण पाठसे होता है। इसको सुननेसे दुगुना और व्याख्या करनेसे दसगुना पुण्य होता है । इस कारण लोगोंको चाहिए कि इस आनन्दरामायणका श्रवण करें ॥ बहत्तर ॥ तिहत्तर । इसके साथ पवित्र कोई ग्रन्यन अवतक हुआ है और न भगवद्गीतया तुल्य फलं तस्याखिलस्य च । भारतीयकथाबंधं सत्तरेव निर्मितम् ।। पचहत्तर।। तत्काव्यं यः पठेत्प्राज्ञो दशांशं फलमाप्नुयात् । यतैर्निमित तत्तु शतांशफलदं स्मृतम् ।।छिहत्तर ।। यः करोति स्वयं काव्यं कम्पयित्वा स्वयं कथम् तमो व्यर्थतामेति तदध्येता च दोषभाक् ॥ सतहत्तर।। पौराणी भारतीं वापि तथा रामायणस्थिताम् । तथा हापपुराणस्थां कथां ग्रंथति यः स्वयम् ।।अठहत्तर।। रामभक्तोऽपि लभते शक्रलोकाधिवासताम् । प्रत्यक्षरं वर्षमेक बासस्तस्य भवेद्ध्वम् ।।उन्यासी।। रामभक्तः पुराणेभ्यः कथां ग्रंथति यः पुनः समृर्तिः स लभते बृहस्पतिसलोकताम् ।।अस्सी ।। दौहित्रपोषितः शिष्य आरामश्च जलाशयः । सङ्क्रन्थवरणं पुत्रः ते पुत्रा वै प्रकीर्तिताः ।।इक्यासी ।। एवं भृम्यामंशभूतैर्नरैस्ते विचरंति हि अश्वत्थामादयः सप्त ये चिरंजीविनः सदा ।।बयासी ।। । अतः श्रीरामभक्कैथ कवित्वैस्वसतुतिः कृता । सापि मान्या सदाव्या बुधैर्मुहुः ।।तिरासी।। भारताच्च शवांशेन फलदात्री स्मृताऽत्र हि । निर्देति ये भक्त कवितां ते खराः स्मृताः ।।चौरासी॥ तत्तद्भाषाकृतं काव्यं रामवर्णनसंयुतम् । भारतस्य सहस्रांतुः फलं स्मृतम् ।।पचासी ।। ।। निर्मातुस्तु भवेत्पुण्यं साधुशब्दशतांशतः । गीर्वाणीकविताकर्ता सोऽपि व्यासांश ईरिख । छियासी ॥ स्वस्वभाषाकवियानां कर्तारस्ते कवीश्वराः । गोणीकविता नापि पदान्वयसमन्त्रिता ।।सत्तासी । अर्थप्रमाणसहिता सैव मान्या न चेतरा वरस्तुतिं तु यः कुर्याजी विकार्थं कविः कचित् ॥अठासी ॥ निष्फलतच्छ्रमः प्रोक्तस्तदध्येता च दोषभाक् । उन्मादेन तु यः कुर्यारकामिनीनां तुवर्णनम् ।।उन्नीस।। सहि श्वयोनिं प्राप्नोति वर्षाव्यक्षरसंख्यया । वेदोक्तार्थानुसारेण मन्त्राद्या स्मारकाः स्मृता ॥नब्बे ॥ भविष्य में होगा। सब शास्त्रोंसे पाञ्चरात्रके आगमको विशेष महत्त्व दिया गया है। उसका पाठ करनेसे भगवद्गीता पाठके तुल्य फल प्राप्त होता है। महाभारत के कथानकों को और जिनको अच्छे-अच्छे भगवद्भक्तोंने बनाया है ।। चौहत्तर ।। पचहत्तर ॥ उन काव्योंको जो मनुष्य पढ़ता है, उसे रामायण के पाठका दशांश पुण्य प्राप्त होता है। अन्य भक्तोंके बनाये काव्योंका अध्ययन करनेसे शतांश फल मिलता है ॥ छिहत्तर ॥ जो मनुष्य कथाकी कल्पना करके स्वयं काव्य बनाता है, उसका परिश्रम व्यर्थ जाता है और उसका पाठ करनेवाला भी दोषका भागी बनता है ॥ सतहत्तर ॥ जो कवि पुराणोंमें, महाभारतमें रामायण में तथा उपपुराणोमें लिखी हुई कथाओंका संग्रह करता है। वह रामभक्त होकर इन्द्रलोकमें निवास करता है। वह प्राणी जितने अक्षरोंको लिखे रहता है, उतने ही वर्षतक इन्द्रलोकमें रहता है ॥ अठहत्तर ॥ छिहत्तर ॥ जो रामभक्त पुराणोसे कथाओंका संग्रह करता है, वह साक्षात् व्यासदेवके समान पूज्य होता हुआ बृहस्पतिके लोकमें निवास करता है ॥ अस्सी ॥ अपनी लड़कीका लड़का, पोष्य पुत्र, शिष्य, बगीचा, तालाव तथा सद्ग्रन्थको रचना, अपना निजी पुत्र, इतने सत्पुत्र माने गये हैं ॥ इक्यासी ॥ वे लोग अंशभूत मनुष्यों अर्थात् अश्वत्थामा आदि जो सात चिरंजीवी बतलाये गये हैं, उनके साथ पृथ्वीमंडलपर विचरते हैं ॥ बयासी ॥ अतएव बहुतेरे रामभक्तोने अपनी कविता में श्रीरामकी स्तुति की है। इसलिए लोग उनकी भी कविताओंका आदर करें, वारम्बार सुने और पढ़ें ॥ तीन ॥ रामभक्तों की कविता महाभारतका शतांश फल देनेवाली होती है। जो लोग किसी रामभक्तको बनायी कविताका निरादर करते हैं, वे एक प्रकारके गधे हैं ॥ चौरासी ॥ संस्कृत भाषा के अतिरिक्त और और भाषाओं में रामके चरित्रवर्णन युक्त कवितायें श्रोता-बक्ताको महाभारतके सहस्र अंशका फल देनेवाली होती हैं ॥ पचासी ।। अच्छे शब्दों में की हुई कविता कविको शतांश फल देती है । संस्कृत कविता करनेवाला प्राणी व्यासका अंश होता है ॥ छियासी ॥ अपनी-अपनी भाषामें कविता करनेवाले कवीश्वर अथवा संस्कृत में रचना करनेवाले कवियोमेंसे जिनकी कविता पद और अन्वय संयुक्त हो, जिसमें अर्थ तथा प्रमाण दोनों विद्यमान हों, वे ही मान्य हैं, और नहीं। जो कवि अपने स्वार्थ के लिए किसी मनुष्यकी स्तुतिमयी कविता करता है, उसका परिश्रम व्यर्थं जाता है अन्य उसका अध्ययन करनेवाला प्राणी भी दोषका भागी बनता है। जो कवि उन्मादवश स्त्रियोंका वर्णन करता है, वह कवितामें लिखे हुए जितने अक्षर हैं, उतने वर्षंतक श्वानकी योनिमें |
बिहार में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीति पूरी तरह से तेज हो गई है. इन दिनों राजनीति दलों में जोड़ों से सदस्यता अभियान जारी है. जैसे-जैसा चुनाव नजदीक आ रहा है राजनीति पार्टियों की गतिविधियां तेज हो गई है.
राजद से बड़ी खबर सामने आ रही है जिसमें बताया जा रहा है कि खगड़िया से लोकसभा सांसद महबूत अली कैसर के बेट ने राजद की सदस्यता ग्रहण की है. आपको बता दें कि लोजपा ने राजग से नाता तोड़ लिया है और वे बिहार में 143 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की घोषणा कर दी है.
लोजपा के प्रधान महासचिव शाहनवाज कैफी ने यूसुफ कैसर के आरजेडी ज्वाइन करने पर कहा कि लोजपा को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है. यूसुफ कैसर पहले भी लोजपा में कोई काम नहीं कर रहे हैं. अगर यूसुफ कैसर चुनाव भी लड़ेंगे तो जीतेंगे नहीं.
| बिहार में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीति पूरी तरह से तेज हो गई है. इन दिनों राजनीति दलों में जोड़ों से सदस्यता अभियान जारी है. जैसे-जैसा चुनाव नजदीक आ रहा है राजनीति पार्टियों की गतिविधियां तेज हो गई है. राजद से बड़ी खबर सामने आ रही है जिसमें बताया जा रहा है कि खगड़िया से लोकसभा सांसद महबूत अली कैसर के बेट ने राजद की सदस्यता ग्रहण की है. आपको बता दें कि लोजपा ने राजग से नाता तोड़ लिया है और वे बिहार में एक सौ तैंतालीस सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की घोषणा कर दी है. लोजपा के प्रधान महासचिव शाहनवाज कैफी ने यूसुफ कैसर के आरजेडी ज्वाइन करने पर कहा कि लोजपा को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है. यूसुफ कैसर पहले भी लोजपा में कोई काम नहीं कर रहे हैं. अगर यूसुफ कैसर चुनाव भी लड़ेंगे तो जीतेंगे नहीं. |
फरनीचर की देखभाल
६. यदि पालिश किए हुए फरनीचर को साफ करना हो तो दो भाग पानी मे एक भाग सिरका मिलाकर उससे फरनोचर को धो डालो । जब सूख जाये तो फरनीचर - क्रीम लगाकर पालिग कर दो ।
७ यदि लकडी की किसी चीज --मेज प्रादि-- मे दरारें पड गई हो, तो टीशू पेपर को पानी में भिगोकर हाथ से अच्छी तरह मथकर, चाकू की नोक से दरारो मे भर दीजिए । ऊपर से वार्निंग का एक कोट फेर दीजिए । मालूम भी न होगा और मजबूत मरम्मत हो जायेगी । मोम रगडने से भी मोम इन दरारो मे भर जाता है। बाद मे किसी मुलायम कपडे से तारपीन का तेल रगड दीजिये ।
८ सफेद पालिश के फरनीचर को कभी-कभी दूध मे कपडा भिगोकर साफ करते रहना चाहिए । सफेदी बनी रहेगी ।
६ बहुधा लकडी की अलमारियो और मेजो की दराजो से एक प्रकार की बदबू-सी आने लगती है । यह सील के कारण होती है । इसे दूर करने के लिए एक डिब्बे मे थोडा चूना डालकर रख दीजिए । चूना सील को सोख लेगा और लकडी को किसी प्रकार की हानि नही होगी । १० यदि कोडे या दीमको ने कुर्सी की सोटो अथवा मेज को दराजो मे छेद कर दिये हो, तो मिट्टी के तेल मे कपडा भिगोकर दो-तीन `बार वहाँ फेरिये । ऊपर से वार्निश कर दीजिए । कीडे मर जायेंगे और छेद भर जायेगे । डी० डी० टी० का चूर्ण भी ऐसे स्थानो और छिद्रो मे जहाँ दीमक लग रही हो, छिडका जा सकता है । इससे भी दीमक मर कर नष्ट हो जाती है ।
११ मेज वगैरह पर पडे हुए धब्बे बहुत भद्दे जान पड़ते हैं । इसके लिए मेज़ पर अखबार का कोई कागज दोहरा या चौहरा करके बिछा दीजिए । ऊपर से मेजपोश विछा दीजिए । ऐसा करने से ऊपर से गिरी हुई वस्तु नीचे लकडी को खराब नहीं कर पायेगी ।
१२. मेज़ आदि पर पड़े हुए धब्बो को मिटाने के लिए जंतून के तेल मे नमक मिलाकर, उसमे कपडा तर करके दाग पर कस कर रगडिए । दाग एक दम साफ हो जायेगा ।
दैनिक गृहोपयोगी 'विज्ञान
१३ साधारणतया आराम-कुर्सियो मे जहाँ पर सिर रखा जाता है, चिकनाई लगते-लगते कुछ भाग काला पड जाता है जो बहुत भद्दा मालूम पड़ता है। यदि कभी-कभी सैथिलेटेड स्प्रिट से तर कपडा उस स्थान पर रगड दिया करे तो यह मैल छूट जाएगी ।
१४ चमडे से मढे हुए फरनीचर की सफाई करने के लिए एक भाग सिरके मे दो भाग अलसी का तेल मिलाकर मिश्ररण तैयार कीजिए । इस मिश्ररण को चमडे की सतह पर रगडिए । यदि चमडा बहुत पतला हो, तो आधा सेर दूध मे वीस बूंद तारपीन का तेल मिलाकर उस पर रगडिये । डे की जर्दी से भी चमडे पर पडे दाग मिटाये जा सकते है ।
१५ महागनी का वना फरनीचर सादे साबुन के गरम पानी से साफ कीजिए ।
१६ की लकडी का बना फरनीचर साफ करने के लिए पहले उस पर वैसलीन लगाइए और फिर धोइए । इसके बाद जैतून का तेल लगाइए । ऐसा न करने पर उसमे दरारे पड जाती हैं ।
१७ यदि आपकी कुर्सियाँ चमडे की है और धूप आदि से उनका रग खराब हो गया है, तो अलसी के तेल की पालिश कीजिए ।
१८ पलग, कुर्सी तथा अन्य फरनीचर को स्प्रिट से साफ कीजिए । यदि पालिश खराब हो गई हो तो नई पालिश करवाइए । चाहे तो घर पर ही पालिश कर सकते हैं । पालिश इस प्रकार बनाइए - एक बोतल मैथिलेटेड स्प्रिट लेकर उसमे चार प्रोस लाख और एक ग्रोस रूमी मस्तगी मिलाइए । इसके बाद उसे छाया मे रख दीजिए । जब स्प्रिट मे लाख और रूमी मस्तगी अच्छी प्रकार मिल जाएँ तो समझ लीजिए कि पालिश तैयार है । एक वोतल पालिश लगभग सौ वर्ग फुट लकड़ी के लिए पर्याप्त होगी। पालिग करने की विधि इस प्रकार है-- जिस चीजं पर पालिग करनी हो उसे पहले रेगमाल से साफ कर दीजिए । अब रूई का साफ फोया लेकर उसे सफेद मोटे मलमल के कपडे मे लपेटकर पोटली बना लीजिए । इसके बाद किसी चीनी के प्याले आदि मे पालिश | फरनीचर की देखभाल छः. यदि पालिश किए हुए फरनीचर को साफ करना हो तो दो भाग पानी मे एक भाग सिरका मिलाकर उससे फरनोचर को धो डालो । जब सूख जाये तो फरनीचर - क्रीम लगाकर पालिग कर दो । सात यदि लकडी की किसी चीज --मेज प्रादि-- मे दरारें पड गई हो, तो टीशू पेपर को पानी में भिगोकर हाथ से अच्छी तरह मथकर, चाकू की नोक से दरारो मे भर दीजिए । ऊपर से वार्निंग का एक कोट फेर दीजिए । मालूम भी न होगा और मजबूत मरम्मत हो जायेगी । मोम रगडने से भी मोम इन दरारो मे भर जाता है। बाद मे किसी मुलायम कपडे से तारपीन का तेल रगड दीजिये । आठ सफेद पालिश के फरनीचर को कभी-कभी दूध मे कपडा भिगोकर साफ करते रहना चाहिए । सफेदी बनी रहेगी । छः बहुधा लकडी की अलमारियो और मेजो की दराजो से एक प्रकार की बदबू-सी आने लगती है । यह सील के कारण होती है । इसे दूर करने के लिए एक डिब्बे मे थोडा चूना डालकर रख दीजिए । चूना सील को सोख लेगा और लकडी को किसी प्रकार की हानि नही होगी । दस यदि कोडे या दीमको ने कुर्सी की सोटो अथवा मेज को दराजो मे छेद कर दिये हो, तो मिट्टी के तेल मे कपडा भिगोकर दो-तीन `बार वहाँ फेरिये । ऊपर से वार्निश कर दीजिए । कीडे मर जायेंगे और छेद भर जायेगे । डीशून्य डीशून्य टीशून्य का चूर्ण भी ऐसे स्थानो और छिद्रो मे जहाँ दीमक लग रही हो, छिडका जा सकता है । इससे भी दीमक मर कर नष्ट हो जाती है । ग्यारह मेज वगैरह पर पडे हुए धब्बे बहुत भद्दे जान पड़ते हैं । इसके लिए मेज़ पर अखबार का कोई कागज दोहरा या चौहरा करके बिछा दीजिए । ऊपर से मेजपोश विछा दीजिए । ऐसा करने से ऊपर से गिरी हुई वस्तु नीचे लकडी को खराब नहीं कर पायेगी । बारह. मेज़ आदि पर पड़े हुए धब्बो को मिटाने के लिए जंतून के तेल मे नमक मिलाकर, उसमे कपडा तर करके दाग पर कस कर रगडिए । दाग एक दम साफ हो जायेगा । दैनिक गृहोपयोगी 'विज्ञान तेरह साधारणतया आराम-कुर्सियो मे जहाँ पर सिर रखा जाता है, चिकनाई लगते-लगते कुछ भाग काला पड जाता है जो बहुत भद्दा मालूम पड़ता है। यदि कभी-कभी सैथिलेटेड स्प्रिट से तर कपडा उस स्थान पर रगड दिया करे तो यह मैल छूट जाएगी । चौदह चमडे से मढे हुए फरनीचर की सफाई करने के लिए एक भाग सिरके मे दो भाग अलसी का तेल मिलाकर मिश्ररण तैयार कीजिए । इस मिश्ररण को चमडे की सतह पर रगडिए । यदि चमडा बहुत पतला हो, तो आधा सेर दूध मे वीस बूंद तारपीन का तेल मिलाकर उस पर रगडिये । डे की जर्दी से भी चमडे पर पडे दाग मिटाये जा सकते है । पंद्रह महागनी का वना फरनीचर सादे साबुन के गरम पानी से साफ कीजिए । सोलह की लकडी का बना फरनीचर साफ करने के लिए पहले उस पर वैसलीन लगाइए और फिर धोइए । इसके बाद जैतून का तेल लगाइए । ऐसा न करने पर उसमे दरारे पड जाती हैं । सत्रह यदि आपकी कुर्सियाँ चमडे की है और धूप आदि से उनका रग खराब हो गया है, तो अलसी के तेल की पालिश कीजिए । अट्ठारह पलग, कुर्सी तथा अन्य फरनीचर को स्प्रिट से साफ कीजिए । यदि पालिश खराब हो गई हो तो नई पालिश करवाइए । चाहे तो घर पर ही पालिश कर सकते हैं । पालिश इस प्रकार बनाइए - एक बोतल मैथिलेटेड स्प्रिट लेकर उसमे चार प्रोस लाख और एक ग्रोस रूमी मस्तगी मिलाइए । इसके बाद उसे छाया मे रख दीजिए । जब स्प्रिट मे लाख और रूमी मस्तगी अच्छी प्रकार मिल जाएँ तो समझ लीजिए कि पालिश तैयार है । एक वोतल पालिश लगभग सौ वर्ग फुट लकड़ी के लिए पर्याप्त होगी। पालिग करने की विधि इस प्रकार है-- जिस चीजं पर पालिग करनी हो उसे पहले रेगमाल से साफ कर दीजिए । अब रूई का साफ फोया लेकर उसे सफेद मोटे मलमल के कपडे मे लपेटकर पोटली बना लीजिए । इसके बाद किसी चीनी के प्याले आदि मे पालिश |
इरफ़ान (Irfan Pathan) ने कहा कि धोनी (MS Dhoni) को जब 2007 में टीम की कमान सौंपी गई थी, तब से लेकर उनकी कप्तानी के आख़िरी दिनों तक वो काफ़ी बदल चुके थे.
भारतीय ऑलराउंडर इरफ़ान पठान (Irfan Pathan) ने कहा है कि महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) के व्यवहार में बदलाव समय और अनुभव के साथ आया. इरफ़ान ने कहा कि धोनी को जब 2007 में टीम की कमान सौंपी गई थी, तब से लेकर उनकी कप्तानी के आख़िरी दिनों तक वो काफ़ी बदल चुके थे. पहले गेंदबाज़ के विकेट मिलने पर वो जश्न मनाने के लिए आते थे और गेंदबाज़ की भावनाओं को नियंत्रित भी करते थे, लेकिन बाद में उन्होंने ऐसा करना छोड़ दिया था.
भारतीय टीम के स्पिनर कुलदीप यादव (Kuldeep Yadav) ने कहा है कि जब आप टीम में नए होते हैं और आपके कप्तान आपको 'बैक' करते हैं तो इससे बहुत प्रेरणा मिलती है. उन्होंने कहा कि विराट कोहली (Virat Kohli) मैदान के अंदर और बाहर हमेशा उन्हें 'सपोर्ट' करते हैं. कुलदीप ने ये भी कहा कि विराट कोहली गेंदबाज़ के दिमाग़ को समझते हैं और इसीलिए मैच के बीच में आकर गेंदबाज़ी के दौरान सुझाव देते रहते हैं.
इंग्लैंड के तेज गेंदबाज़ स्टुअर्ट ब्रॉड ने दर्शकों की गैर-मौजूदगी में गेंदबाज़ी करने को लेकर स्पोर्ट्स साइकॉलजिस्ट से सलाह मशविरा किया है. इस बदलाव से दिमाग़ी तौर पर कैसे निपटा जाए, इसको लेकर साइकोलॉजिस्ट ने उन्हें सलाह मशविरा दिया है. इंग्लैंड की टीम वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ 8 जुलाई से पहला टेस्ट मैच खेलेगी. जो दशकों की गैर-मौजूदगी में होगा.
इंग्लैंड के ख़िलाफ़ पहले टेस्ट मैच के दौरान वेस्टइंडीज़ के खिलाड़ी Black Lives Matter के संदेश के साथ मैदान में उतरेंगे. ये संदेश रंगभेद के ख़िलाफ़ है. ये जानकारी वेस्टइंडीज़ के कप्तान जेसन होल्डर ने दी. अमेरिका में जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद से रंगभेद का मामला खेलों की दुनिया में भी काफ़ी गर्माया हुआ है.
टोक्यो में रहने वाले आधे से ज़्यादा लोगों को 2021 में ओलंपिक खेलों की मेज़बानी का फ़ैसला ग़लत लगता है. लोगों की राय में या तो टोक्यो ओलंपिक को और टाला जाना चाहिए या इसे रद्द कर देना चाहिए. जापान के दो समाचार पत्रों ने इस सर्वे को प्रकाशित भी किया है . जिसमें 51.7 फ़ीसदी लोगों ने ओलंपिक खेलों को स्थगित करने या टाले जाने के पक्ष में वोट दिया है.
मैनचेस्टर सिटी की टीम लिवरपूल के ख़िलाफ़ अगले मैच के दौरान नई चैम्पियन टीम को गार्ड ऑफ़ ऑनर देगी. हाल ही में लीवरपूल ने इंग्लिश प्रीमियर लीग पर क़ब्ज़ा किया था. चेल्सी के ख़िलाफ़ मैनचेस्टर सिटी की हार के साथ ही लीवरपूल ने पॉइंट केवल में निर्णायक बढ़त हासिल कर ली थी.
तीन महीने से ज़्यादा के अंतराल के बाद फ़ॉर्मूला वन रेसिंग का एक्शन एक बार फिर शुरू होगा. पांच जुलाई को ऑस्ट्रिया ग्रां प्री का आयोजन किया जाएगा. स्पीलबर्ग में होने वाली इस रेस में दर्शकों को आने की इजाज़त नहीं है लेकिन मीडिया के लोग सीमित संख्या में मीडिया सेंटर तक जा सकेंगे.
फ़ुटबॉल लीग बुंदेसलीगा के सीईओ क्रिस्चियन सीफर्ट ने कहा है कि ये सीज़न वैसा नहीं था जिसे हम प्यार करते हैं लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में इसके अलावा कोई रास्ता नहीं था. कोरोना की वजह से जब दुनिया के सभी देशों में खेल प्रतियोगिताएं ठप पड़ी हुई है तब जर्मनी ने इस घरेलू फ़ुटबॉल लीग का सफलतापूर्वक आयोजन कराया है. बुंदेसलीगा के मुक़ाबले मैदान में दर्शकों की गैर-मौजूदगी में खेले गए.
दुनिया के नंबर एक शतरंज खिलाड़ी मैगनस कार्लसन ने 'चेसएबल मास्टर्स' के सेमीफ़ाइनल में जगह बना ली है. उन्होंने दुनिया के नंबर दो खिलाड़ी फैबियानो करुआना को हराकर सेमीफ़ाइनल में जगह पक्की की. बेस्ट ऑफ़ थ्री के मुक़ाबले में कार्लसन ने 2-0 से जीत हासिल की.
| इरफ़ान ने कहा कि धोनी को जब दो हज़ार सात में टीम की कमान सौंपी गई थी, तब से लेकर उनकी कप्तानी के आख़िरी दिनों तक वो काफ़ी बदल चुके थे. भारतीय ऑलराउंडर इरफ़ान पठान ने कहा है कि महेंद्र सिंह धोनी के व्यवहार में बदलाव समय और अनुभव के साथ आया. इरफ़ान ने कहा कि धोनी को जब दो हज़ार सात में टीम की कमान सौंपी गई थी, तब से लेकर उनकी कप्तानी के आख़िरी दिनों तक वो काफ़ी बदल चुके थे. पहले गेंदबाज़ के विकेट मिलने पर वो जश्न मनाने के लिए आते थे और गेंदबाज़ की भावनाओं को नियंत्रित भी करते थे, लेकिन बाद में उन्होंने ऐसा करना छोड़ दिया था. भारतीय टीम के स्पिनर कुलदीप यादव ने कहा है कि जब आप टीम में नए होते हैं और आपके कप्तान आपको 'बैक' करते हैं तो इससे बहुत प्रेरणा मिलती है. उन्होंने कहा कि विराट कोहली मैदान के अंदर और बाहर हमेशा उन्हें 'सपोर्ट' करते हैं. कुलदीप ने ये भी कहा कि विराट कोहली गेंदबाज़ के दिमाग़ को समझते हैं और इसीलिए मैच के बीच में आकर गेंदबाज़ी के दौरान सुझाव देते रहते हैं. इंग्लैंड के तेज गेंदबाज़ स्टुअर्ट ब्रॉड ने दर्शकों की गैर-मौजूदगी में गेंदबाज़ी करने को लेकर स्पोर्ट्स साइकॉलजिस्ट से सलाह मशविरा किया है. इस बदलाव से दिमाग़ी तौर पर कैसे निपटा जाए, इसको लेकर साइकोलॉजिस्ट ने उन्हें सलाह मशविरा दिया है. इंग्लैंड की टीम वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ आठ जुलाई से पहला टेस्ट मैच खेलेगी. जो दशकों की गैर-मौजूदगी में होगा. इंग्लैंड के ख़िलाफ़ पहले टेस्ट मैच के दौरान वेस्टइंडीज़ के खिलाड़ी Black Lives Matter के संदेश के साथ मैदान में उतरेंगे. ये संदेश रंगभेद के ख़िलाफ़ है. ये जानकारी वेस्टइंडीज़ के कप्तान जेसन होल्डर ने दी. अमेरिका में जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद से रंगभेद का मामला खेलों की दुनिया में भी काफ़ी गर्माया हुआ है. टोक्यो में रहने वाले आधे से ज़्यादा लोगों को दो हज़ार इक्कीस में ओलंपिक खेलों की मेज़बानी का फ़ैसला ग़लत लगता है. लोगों की राय में या तो टोक्यो ओलंपिक को और टाला जाना चाहिए या इसे रद्द कर देना चाहिए. जापान के दो समाचार पत्रों ने इस सर्वे को प्रकाशित भी किया है . जिसमें इक्यावन.सात फ़ीसदी लोगों ने ओलंपिक खेलों को स्थगित करने या टाले जाने के पक्ष में वोट दिया है. मैनचेस्टर सिटी की टीम लिवरपूल के ख़िलाफ़ अगले मैच के दौरान नई चैम्पियन टीम को गार्ड ऑफ़ ऑनर देगी. हाल ही में लीवरपूल ने इंग्लिश प्रीमियर लीग पर क़ब्ज़ा किया था. चेल्सी के ख़िलाफ़ मैनचेस्टर सिटी की हार के साथ ही लीवरपूल ने पॉइंट केवल में निर्णायक बढ़त हासिल कर ली थी. तीन महीने से ज़्यादा के अंतराल के बाद फ़ॉर्मूला वन रेसिंग का एक्शन एक बार फिर शुरू होगा. पांच जुलाई को ऑस्ट्रिया ग्रां प्री का आयोजन किया जाएगा. स्पीलबर्ग में होने वाली इस रेस में दर्शकों को आने की इजाज़त नहीं है लेकिन मीडिया के लोग सीमित संख्या में मीडिया सेंटर तक जा सकेंगे. फ़ुटबॉल लीग बुंदेसलीगा के सीईओ क्रिस्चियन सीफर्ट ने कहा है कि ये सीज़न वैसा नहीं था जिसे हम प्यार करते हैं लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में इसके अलावा कोई रास्ता नहीं था. कोरोना की वजह से जब दुनिया के सभी देशों में खेल प्रतियोगिताएं ठप पड़ी हुई है तब जर्मनी ने इस घरेलू फ़ुटबॉल लीग का सफलतापूर्वक आयोजन कराया है. बुंदेसलीगा के मुक़ाबले मैदान में दर्शकों की गैर-मौजूदगी में खेले गए. दुनिया के नंबर एक शतरंज खिलाड़ी मैगनस कार्लसन ने 'चेसएबल मास्टर्स' के सेमीफ़ाइनल में जगह बना ली है. उन्होंने दुनिया के नंबर दो खिलाड़ी फैबियानो करुआना को हराकर सेमीफ़ाइनल में जगह पक्की की. बेस्ट ऑफ़ थ्री के मुक़ाबले में कार्लसन ने दो-शून्य से जीत हासिल की. |
नई दिल्लीः चीन से दुनिया के लिए फिर एक बुरी खबर आई है. चीन के चमगादड़ों में एक नया और खतरनाक वायरस मिला है. इस वायरस का नाम है बीटीएसवाई2 (BtSY2) . इस वायरस के लक्षण SARS-CoV-2 वायरस की तरह हैं. खतरे की बात यह है कि नया वायरस आसानी से इंसानी शरीर में प्रवेश कर सकता है. वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि नया वायरस काफी खतरनाक है और यह काफी तबाही का कारण भी बन सकता है.
नया वायरस दक्षिण चीन के चमगादड़ों में मिला है. चीन के युन्नान प्रांत के चमगादड़ों के शरीर में कुल 5 खतरनाक वायरस मिले हैं जो मनुष्य और पशुओं दोनों को कई बीमारियां दे सकते हैं. इस शोध को सिडनी यूनिवर्सिटी, युन्नान इंस्टीट्यूट ऑफ एंडेमिक डिजीज कंट्रोल और शेन्जेन स्थित सन यात-सेन यूनिवर्सिटी ने किया है.
इस शोध के लिए चीन के युन्नान राज्य के 15 प्रजातियों की जांच की गई. कुल 149 यूरिन सैंपल की जांच की गई. इसमें कुल पांच वायरस मिले. जिनमें एक वायरस कोरोना जैसा था. वैज्ञानिकों ने पाया कि नया वायरस बीटीएसवाई2 एक रिसेप्टर बाइंडिंग वायरस है जो मनुष्य की कोशिकाओं से जुड़ सकता है. आपको बता दें कि चीन का युन्नान प्रांत चमगादड़ों में पाए जाने वाले वायरस का हॉट स्पॉट बन चुका है.
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| नई दिल्लीः चीन से दुनिया के लिए फिर एक बुरी खबर आई है. चीन के चमगादड़ों में एक नया और खतरनाक वायरस मिला है. इस वायरस का नाम है बीटीएसवाईदो . इस वायरस के लक्षण SARS-CoV-दो वायरस की तरह हैं. खतरे की बात यह है कि नया वायरस आसानी से इंसानी शरीर में प्रवेश कर सकता है. वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि नया वायरस काफी खतरनाक है और यह काफी तबाही का कारण भी बन सकता है. नया वायरस दक्षिण चीन के चमगादड़ों में मिला है. चीन के युन्नान प्रांत के चमगादड़ों के शरीर में कुल पाँच खतरनाक वायरस मिले हैं जो मनुष्य और पशुओं दोनों को कई बीमारियां दे सकते हैं. इस शोध को सिडनी यूनिवर्सिटी, युन्नान इंस्टीट्यूट ऑफ एंडेमिक डिजीज कंट्रोल और शेन्जेन स्थित सन यात-सेन यूनिवर्सिटी ने किया है. इस शोध के लिए चीन के युन्नान राज्य के पंद्रह प्रजातियों की जांच की गई. कुल एक सौ उनचास यूरिन सैंपल की जांच की गई. इसमें कुल पांच वायरस मिले. जिनमें एक वायरस कोरोना जैसा था. वैज्ञानिकों ने पाया कि नया वायरस बीटीएसवाईदो एक रिसेप्टर बाइंडिंग वायरस है जो मनुष्य की कोशिकाओं से जुड़ सकता है. आपको बता दें कि चीन का युन्नान प्रांत चमगादड़ों में पाए जाने वाले वायरस का हॉट स्पॉट बन चुका है. Zee Hindustan News App: देश-दुनिया, बॉलीवुड, बिज़नेस, ज्योतिष, धर्म-कर्म, खेल और गैजेट्स की दुनिया की सभी खबरें अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें ज़ी हिंदुस्तान न्यूज़ ऐप. |
महाराष्ट्र में ठाणे की एक विशेष अदालत ने एक लड़की का पीछा करने के जुर्म में 24 वर्षीय युवक को 22 महीने के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। हाल ही में जारी आदेश में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आर आर वैष्णव ने दोषी सुनील कुमार दुखीलाल जायसवाल पर 500 रुपये का जुर्माना भी लगाया।
अदालत ने सुनील को भारतीय दंड संहिता की धारा 354 डी (पीछा करना) और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) कानून के तहत दोषी करार दिया। अतिरिक्त लोक अभियोजक उज्ज्वला मोहोलकर ने अदालत को बताया कि युवक लगातार एक लड़की का पीछा करता था। लड़की के पिता ने जून 2016 में शिकायत दर्ज कराई थी।
निर्भया केस के बाद हुए थे उत्पीड़न के कानूनों में बदलावः बता दें कि 2012 के निर्भया केस के बाद रेप और छेड़छाड़ से जुड़े कानूनों में बड़े स्तर पर बदलाव किए गए और इन्हें और ज्यादा सख्त बनाया गया है। कानूनी बदलाव के बाद आईपीसी की धारा-354 के तहत दोषी करार दिए जाने पर 5 साल तक की कैद की सजा का प्रावधान किया गया। इसमें कम से कम एक साल कैद की सजा का प्रावधान किया गया। छेड़छाड़ को गैरजमानती बनाया गया है। पहले जमानती था। धारा-354 में कई उपधाराएं भी बनाई गईं। धारा-354 ए, 354 बी, 354 सी और 354 डी का प्रावधान किया गया है। धारा-354ए में चार पार्ट हैं।
मनचलों ने पीछा कर लड़की से की छेड़खानी, भाई ने किया विरोध, तो चाकू माराः इसी हफ्ते बिहार के जहानाबद में युवक को अपनी बहन के साथ छेड़खानी कर रहे बदमाशों का विरोध करना मंहगा पड़ गया। विरोध करने पर बदमाशों ने युवक को चाकू से गोदकर गंभीर रूप से घायल कर दिया और मौके से फरार हो गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भाई-बहन अपने रिश्तेदार की बर्थडे पार्टी में शामिल होने एक होटल में गए थे। वहां कुछ बदमाश उसकी बहन से छेड़खानी करने लगे। जब लड़के ने विरोध किया, तो 2-3 अपराधियों ने उसका पीछा किया और घात लगाकर सड़क पर ही उसके साथ मारपीट की। बाद में वे उसे चाकू मारकर फरार हो गए।
| महाराष्ट्र में ठाणे की एक विशेष अदालत ने एक लड़की का पीछा करने के जुर्म में चौबीस वर्षीय युवक को बाईस महीने के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। हाल ही में जारी आदेश में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आर आर वैष्णव ने दोषी सुनील कुमार दुखीलाल जायसवाल पर पाँच सौ रुपयापये का जुर्माना भी लगाया। अदालत ने सुनील को भारतीय दंड संहिता की धारा तीन सौ चौवन डी और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण कानून के तहत दोषी करार दिया। अतिरिक्त लोक अभियोजक उज्ज्वला मोहोलकर ने अदालत को बताया कि युवक लगातार एक लड़की का पीछा करता था। लड़की के पिता ने जून दो हज़ार सोलह में शिकायत दर्ज कराई थी। निर्भया केस के बाद हुए थे उत्पीड़न के कानूनों में बदलावः बता दें कि दो हज़ार बारह के निर्भया केस के बाद रेप और छेड़छाड़ से जुड़े कानूनों में बड़े स्तर पर बदलाव किए गए और इन्हें और ज्यादा सख्त बनाया गया है। कानूनी बदलाव के बाद आईपीसी की धारा-तीन सौ चौवन के तहत दोषी करार दिए जाने पर पाँच साल तक की कैद की सजा का प्रावधान किया गया। इसमें कम से कम एक साल कैद की सजा का प्रावधान किया गया। छेड़छाड़ को गैरजमानती बनाया गया है। पहले जमानती था। धारा-तीन सौ चौवन में कई उपधाराएं भी बनाई गईं। धारा-तीन सौ चौवन ए, तीन सौ चौवन बी, तीन सौ चौवन सी और तीन सौ चौवन डी का प्रावधान किया गया है। धारा-तीन सौ चौवनए में चार पार्ट हैं। मनचलों ने पीछा कर लड़की से की छेड़खानी, भाई ने किया विरोध, तो चाकू माराः इसी हफ्ते बिहार के जहानाबद में युवक को अपनी बहन के साथ छेड़खानी कर रहे बदमाशों का विरोध करना मंहगा पड़ गया। विरोध करने पर बदमाशों ने युवक को चाकू से गोदकर गंभीर रूप से घायल कर दिया और मौके से फरार हो गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भाई-बहन अपने रिश्तेदार की बर्थडे पार्टी में शामिल होने एक होटल में गए थे। वहां कुछ बदमाश उसकी बहन से छेड़खानी करने लगे। जब लड़के ने विरोध किया, तो दो-तीन अपराधियों ने उसका पीछा किया और घात लगाकर सड़क पर ही उसके साथ मारपीट की। बाद में वे उसे चाकू मारकर फरार हो गए। |
नई दिल्ली/टीम डिजिटल।
अदम्य साहस और कर्तव्य के प्रति समर्पण के सम्मान में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के 260 कर्मियों को राष्ट्रीय एकता दिवस- 2021 पर पूर्वी लद्दाख में बल द्वारा किए गए विभिन्न विशेष अभियानों के लिए प्रतिष्ठित केंद्रीय गृह मंत्री के विशेष ऑपरेशन पदक से सम्मानित किया गया है।
आईटीबीपी के जवानों ने बर्फीले ऊंचाइयों पर अपने ऑपरेशन 'स्नो लेपर्ड' के माध्यम से चरम स्थितियों में लद्दाख में सीमाओं की रक्षा की। बल ने सभी सहयोगी संगठनों के बीच पूर्ण तालमेल और सहयोग के साथ उच्च स्तर की रणनीतिक योजना और जमीनी संचालन के कुशल निष्पादन को अंजाम दिया।
मेडल सूची में दीपम सेठ, तत्कालीन आईजी, नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर आईटीबीपी का नाम शामिल है, जो वरिष्ठ सर्वोच्च सैन्य कमांडर (एसएचएमसी) स्तर की वार्ता के 10 दौर के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य थे। व्यापक वार्ता के परिणामस्वरूप फरवरी, 2021 में सफलता मिली और आगे के स्थानों से सैनिकों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई ।
ITBP के विशेष ऑपरेशन में एक वर्ष में रणनीतिक योजना और कुशल जमीनी संचालन के उच्च स्तर का निष्पादन शामिल था। इसके अलावा, इसमें सैनिकों के लिए अग्रिम स्थान पर रसद की समय पर और पर्याप्त आपूर्ति भी शामिल है। स्वतंत्रता दिवस, 2021 पर, पूर्वी लद्दाख में अदम्य साहस के लिए आईटीबीपी के 20 कर्मियों को वीरता के लिए पुलिस पदक से सम्मानित किया गया था।
भारत-चीन युद्ध के दौरान 1962 में स्थापित, ITBP देश की 3,488 किलोमीटर हिमालयी सीमाओं की रक्षा करती है। यह केंद्रीय अर्ध सैनिक बल अपने पर्वतारोहण कौशल और कठिन सीमाओं में उच्च ऊंचाई पर तैनाती के लिए जाना जाता है और इसकी सीमा चौकियां 18,800 फीट तक स्थित हैं।
यह एक अवसर पर आईटीबीपी या किसी अन्य संगठन को मिले केंद्रीय गृह मंत्री के विशेष ऑपरेशन पदकों की सबसे अधिक संख्या है। 2019 में, उत्तराखंड में नंदा देवी पूर्व से एक पर्वतारोही की टीम की खोज और बचाव के लिए अपने पर्वतारोहियों द्वारा किए गए ऑपरेशन 'डेयरडेविल्स' के लिए बल को 16 केंद्रीय गृह मंत्री के विशेष ऑपरेशन पदक से सम्मानित किया गया था।
| नई दिल्ली/टीम डिजिटल। अदम्य साहस और कर्तव्य के प्रति समर्पण के सम्मान में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के दो सौ साठ कर्मियों को राष्ट्रीय एकता दिवस- दो हज़ार इक्कीस पर पूर्वी लद्दाख में बल द्वारा किए गए विभिन्न विशेष अभियानों के लिए प्रतिष्ठित केंद्रीय गृह मंत्री के विशेष ऑपरेशन पदक से सम्मानित किया गया है। आईटीबीपी के जवानों ने बर्फीले ऊंचाइयों पर अपने ऑपरेशन 'स्नो लेपर्ड' के माध्यम से चरम स्थितियों में लद्दाख में सीमाओं की रक्षा की। बल ने सभी सहयोगी संगठनों के बीच पूर्ण तालमेल और सहयोग के साथ उच्च स्तर की रणनीतिक योजना और जमीनी संचालन के कुशल निष्पादन को अंजाम दिया। मेडल सूची में दीपम सेठ, तत्कालीन आईजी, नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर आईटीबीपी का नाम शामिल है, जो वरिष्ठ सर्वोच्च सैन्य कमांडर स्तर की वार्ता के दस दौर के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य थे। व्यापक वार्ता के परिणामस्वरूप फरवरी, दो हज़ार इक्कीस में सफलता मिली और आगे के स्थानों से सैनिकों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई । ITBP के विशेष ऑपरेशन में एक वर्ष में रणनीतिक योजना और कुशल जमीनी संचालन के उच्च स्तर का निष्पादन शामिल था। इसके अलावा, इसमें सैनिकों के लिए अग्रिम स्थान पर रसद की समय पर और पर्याप्त आपूर्ति भी शामिल है। स्वतंत्रता दिवस, दो हज़ार इक्कीस पर, पूर्वी लद्दाख में अदम्य साहस के लिए आईटीबीपी के बीस कर्मियों को वीरता के लिए पुलिस पदक से सम्मानित किया गया था। भारत-चीन युद्ध के दौरान एक हज़ार नौ सौ बासठ में स्थापित, ITBP देश की तीन,चार सौ अठासी किलोग्राममीटर हिमालयी सीमाओं की रक्षा करती है। यह केंद्रीय अर्ध सैनिक बल अपने पर्वतारोहण कौशल और कठिन सीमाओं में उच्च ऊंचाई पर तैनाती के लिए जाना जाता है और इसकी सीमा चौकियां अट्ठारह,आठ सौ फीट तक स्थित हैं। यह एक अवसर पर आईटीबीपी या किसी अन्य संगठन को मिले केंद्रीय गृह मंत्री के विशेष ऑपरेशन पदकों की सबसे अधिक संख्या है। दो हज़ार उन्नीस में, उत्तराखंड में नंदा देवी पूर्व से एक पर्वतारोही की टीम की खोज और बचाव के लिए अपने पर्वतारोहियों द्वारा किए गए ऑपरेशन 'डेयरडेविल्स' के लिए बल को सोलह केंद्रीय गृह मंत्री के विशेष ऑपरेशन पदक से सम्मानित किया गया था। |
Dr. Vaibhav S Ganjewar नागपुर के प्रसिद्ध डॉक्टर हैं। वह गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के विशेषज्ञ हैं। कई अस्पतालों व क्लीनिक में काम कर चुके Dr. Vaibhav S Ganjewar का अनुभव 18 साल से भी ज्यादा है। आजकल Dr. Vaibhav S Ganjewar Terna Medical College Mumbai., L.T.M.M. College & L.T.M.G. Hospital Sion, Mumbai, MIDAS Multispeciality Hospital, Nagpur में काम कर रहे हैं। Dr. Vaibhav S Ganjewar इससे पहले Terna Medical College Mumbai., L.T.M.M. College & L.T.M.G. Hospital Sion, Mumbai, MIDAS Multispeciality Hospital, Nagpur में काम कर चुके हैं। Dr. Vaibhav S Ganjewar Gastroenterology, Endoscopy, Colonoscopy, ERCP, Endoscopic Ultrasound (EUS), Liver Disease Treatment में विशेषज्ञ हैं। Dr. Vaibhav S Ganjewar अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों के अलावा मेडिकल क्षेत्र में कई और तरह से भी सक्रिय हैं। Dr. Vaibhav S Ganjewar Indian Society of Gastroenterology और Indian Association of Gastrointestinal Endo-Surgeons (IAGES) के मेंबर रह चुके हैं। Dr. Vaibhav S Ganjewar ने King Edward Memorial Hospital and Seth Gordhandas Sunderdas Medical College से MBBS डिग्री हासिल की है। इसके बाद Dr. Vaibhav S Ganjewar ने DM - Gastroenterology डिग्री King Edward Memorial Hospital and Seth Gordhandas Sunderdas Medical College से पूरी की है।
Q: Dr. Vaibhav S Ganjewar की शैक्षिक क्वालिफिकेशन क्या हैं?
A: Dr. Vaibhav S Ganjewar ने MBBS व DM - Gastroenterology की डिग्री प्राप्त की हुई हैं, इनकी डिग्रीज की संपूर्ण जानकारी के लिए ऊपर देखें।
Q: Dr. Vaibhav S Ganjewar को कितने वर्षों का अनुभव है?
A: गैस्ट्रोएंटरोलॉजी में Dr. Vaibhav S Ganjewar 18 सालों से काम कर रहे हैं।
Q: रोगी Dr. Vaibhav S Ganjewar के पास किन-किन उपचार के लिए जाते हैं?
A: Dr. Vaibhav S Ganjewar के पास मरीज Gastroenterology, Endoscopy, Colonoscopy के लिए जाते हैं। Dr. Vaibhav S Ganjewar द्वारा किए जाने वाले तमाम कार्यों की जानकारी ऊपर मौजूद है।
Q: Dr. Vaibhav S Ganjewar से मिलने या बात करने का अपॉइंटमेंट किस प्रकार लें?
A: Dr. Vaibhav S Ganjewar से ऑनलाइन बात करने या क्लिनिक में जा कर सलाह लेने के लिए आप myUpchar की मदद से अपॉइंटमेंट ले सकते हैं। इसके लिए ऊपर दिए बटन "अपॉइंटमेंट बुक करें" पर क्लिक करें।
| Dr. Vaibhav S Ganjewar नागपुर के प्रसिद्ध डॉक्टर हैं। वह गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के विशेषज्ञ हैं। कई अस्पतालों व क्लीनिक में काम कर चुके Dr. Vaibhav S Ganjewar का अनुभव अट्ठारह साल से भी ज्यादा है। आजकल Dr. Vaibhav S Ganjewar Terna Medical College Mumbai., L.T.M.M. College & L.T.M.G. Hospital Sion, Mumbai, MIDAS Multispeciality Hospital, Nagpur में काम कर रहे हैं। Dr. Vaibhav S Ganjewar इससे पहले Terna Medical College Mumbai., L.T.M.M. College & L.T.M.G. Hospital Sion, Mumbai, MIDAS Multispeciality Hospital, Nagpur में काम कर चुके हैं। Dr. Vaibhav S Ganjewar Gastroenterology, Endoscopy, Colonoscopy, ERCP, Endoscopic Ultrasound , Liver Disease Treatment में विशेषज्ञ हैं। Dr. Vaibhav S Ganjewar अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों के अलावा मेडिकल क्षेत्र में कई और तरह से भी सक्रिय हैं। Dr. Vaibhav S Ganjewar Indian Society of Gastroenterology और Indian Association of Gastrointestinal Endo-Surgeons के मेंबर रह चुके हैं। Dr. Vaibhav S Ganjewar ने King Edward Memorial Hospital and Seth Gordhandas Sunderdas Medical College से MBBS डिग्री हासिल की है। इसके बाद Dr. Vaibhav S Ganjewar ने DM - Gastroenterology डिग्री King Edward Memorial Hospital and Seth Gordhandas Sunderdas Medical College से पूरी की है। Q: Dr. Vaibhav S Ganjewar की शैक्षिक क्वालिफिकेशन क्या हैं? A: Dr. Vaibhav S Ganjewar ने MBBS व DM - Gastroenterology की डिग्री प्राप्त की हुई हैं, इनकी डिग्रीज की संपूर्ण जानकारी के लिए ऊपर देखें। Q: Dr. Vaibhav S Ganjewar को कितने वर्षों का अनुभव है? A: गैस्ट्रोएंटरोलॉजी में Dr. Vaibhav S Ganjewar अट्ठारह सालों से काम कर रहे हैं। Q: रोगी Dr. Vaibhav S Ganjewar के पास किन-किन उपचार के लिए जाते हैं? A: Dr. Vaibhav S Ganjewar के पास मरीज Gastroenterology, Endoscopy, Colonoscopy के लिए जाते हैं। Dr. Vaibhav S Ganjewar द्वारा किए जाने वाले तमाम कार्यों की जानकारी ऊपर मौजूद है। Q: Dr. Vaibhav S Ganjewar से मिलने या बात करने का अपॉइंटमेंट किस प्रकार लें? A: Dr. Vaibhav S Ganjewar से ऑनलाइन बात करने या क्लिनिक में जा कर सलाह लेने के लिए आप myUpchar की मदद से अपॉइंटमेंट ले सकते हैं। इसके लिए ऊपर दिए बटन "अपॉइंटमेंट बुक करें" पर क्लिक करें। |
ड्रग्स केस में गिरफ्तार शाहरूख खान के बेटे आर्यन खान को जेल से रिहा करवाने के लिए शाहरूख ने वकीलों की फौज खड़ी कर दी है. अब आर्यन का केस कोर्ट में लडने वाले देश के पूर्व अटॉर्नी जनरल और नरेंद्र मोदी के मुख्य सलाहकार रह चुके मुकुल रोहतगी लड़ रहे है. बंबई उच्च न्यायालय आज इस पूरे मामले में अहम फैसला आने की उम्मीद है.
जाने कौन है मुकुल रोहतगी मुकुल रोहतगी भारत के 14वें अटॉर्नी जनरल (एजीआई). 66 साल के रोहतगी सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील हैं और पहले एडिश्नल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया (एएसजीआई) भी रह चुके हैं. एजीआई के पद पर वह भाजपा सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान 2014 से लेकर 2017 तक रहे. इस केस में वह आर्यन खान के वकीलों सतीश मानशिंदे और अमित देसाई की टीम की अगुवाई कर रहे हैं.
- मुकुल रोहतगी अदालत में जिन बड़े और चर्चित मुकदमों की पैरवी कर चुके हैं, उनमें 2002 का गुजरात दंगा केस भी शामिल है और वह गुजरात सरकार की ओर से दलीलें रख चुके हैं.
- एएसजी रहते हुए उन्होंने नेशनल जुडिशियल अपॉइंटमेंट कमीशन में भी सरकार का पक्ष रख चुके हैं, जिसमें सर्वोच्च अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया था.
- सीबीआई के स्पेशल जज बीएच लोया की मौत से जुड़े हाई-प्रोफाइल केस में भी उन्हें महाराष्ट्र सरकार ने स्पेशल प्रोसेक्यूटर नियुक्त किया गया था. इस केस में उन्हें महाराष्ट्र सरकार ने 1. 20 करोड़ रुपये बतौर फीस दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने इस मौत की जांच की मांग खारिज कर दी थी और रोहतगी ने अदालत के फैसले का स्वागत किया था.
- मुकुल रोहतगी के पिता अवध बिहारी रोहतगी दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस थे.
- रोहतगी ने गवर्नमेंट लॉ कॉलेज मुंबई से लॉ किया है और शुरू में योगेश कुमार सभरवाल के साथ दिल्ली हाई कोर्ट में प्रैक्टिस भी की थी, जो बाद में 36वें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बने.
- बाद में रोहतगी ने अपनी अलग से कानूनी प्रैक्टिस शुरू की. 1993 में वह दिल्ली हाई कोर्ट में सीनियर काउंसल बने और 1999 में एडिश्नल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया के पद पर नियुक्त किए गए. इनकी पत्नी वसुधा रोहतगी भी वकील हैं.
- कोर्ट में रोहतगी ने कहा कि आर्यन के नशा करने का कोई साक्ष्य नहीं है. मादक पदार्थ जब्त नहीं हुआ और तथाकथित षड्यंत्र तथा उकसाने में उनकी संलिप्तता के कोई साक्ष्य नहीं हैं, जैसा कि एनसीबी ने आरोप लगाया है. तो फिर आर्यन 20 दिन से जेल में क्यों है.
- रोहतगी ने कहा कि जहां तक एनडीपीएस का सवाल है, हमने मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट में उठाया था. क्योंकि ये अधिकारी हैं पुलिस नहीं. मैं तूफान सिंह केस में कोर्ट के फैसले का जिक्र करूंगा. जस्टिस नरीमन कोर्ट में कहते हैं कि एनडीपीएस अधिकारी जो बयान दर्ज करता है, वह अदालत में स्वीकार्य नहीं है.
- रोहतगी ने कहा कि मैंने मजिस्ट्रेट का रुख किया, उन्होंने कहा कि जमानत उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है. उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर जाएं. फिर हम जिला अदालत चले गए. जिसे खारिज कर दिया गया. मेरे खिलाफ यह तर्क दिया गया कि आप अरबाज मर्चेंट के साथ आए थे, इसलिए आपके पास कॉन्शस पजेशन था. वो कहते हैं कि यह मुझे पता था. उनके पास मेरे खलिाफ कुछ नहीं है. इसलिए वो ऐसी बातें कर रहे हैं. किसी के पास उसके जूते में क्या है, यह मेरी समस्या नहीं है. उन्होंने कहा कि जो बरामद हुआ, वह छह ग्राम की छोटी मात्रा है. यह कोई कर्मशयिल मात्रा नहीं है.
- रोहतगी ने कहा कि एनसीबी पुरानी चैट का जिक्र कर रही है और उसी के आधार पर कह रही है कि आर्यन का कुछ लोगों से लेना-देना है. मैं जब बाहर था तो इसको भी अंतरराष्ट्रीय लिंक बताया जा रहा था. यह बहुत छोटा सा मामला है और आर्यन के पिता की वजह से इस मामले को इतना हाइलाइट कर दिया गया.
- रोहतगी ने बेंच से कहा कि मुझे विटनेस नंबर 1 और 2 यानी प्रभाकर सैल और केपी गोसावी से कोई मतलब नहीं है, न ही मैं उन्हें जानता हूं. रोहतगी ने कहा कि ये नए लड़के हैं. उन्हें सुधार गृह में भेजा जा सकता है. उन पर मुकदमा नहीं चलाया जाना चाहिए. सरकार सुधार के बारे में बात कर रही है.
| ड्रग्स केस में गिरफ्तार शाहरूख खान के बेटे आर्यन खान को जेल से रिहा करवाने के लिए शाहरूख ने वकीलों की फौज खड़ी कर दी है. अब आर्यन का केस कोर्ट में लडने वाले देश के पूर्व अटॉर्नी जनरल और नरेंद्र मोदी के मुख्य सलाहकार रह चुके मुकुल रोहतगी लड़ रहे है. बंबई उच्च न्यायालय आज इस पूरे मामले में अहम फैसला आने की उम्मीद है. जाने कौन है मुकुल रोहतगी मुकुल रोहतगी भारत के चौदहवें अटॉर्नी जनरल . छयासठ साल के रोहतगी सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील हैं और पहले एडिश्नल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया भी रह चुके हैं. एजीआई के पद पर वह भाजपा सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान दो हज़ार चौदह से लेकर दो हज़ार सत्रह तक रहे. इस केस में वह आर्यन खान के वकीलों सतीश मानशिंदे और अमित देसाई की टीम की अगुवाई कर रहे हैं. - मुकुल रोहतगी अदालत में जिन बड़े और चर्चित मुकदमों की पैरवी कर चुके हैं, उनमें दो हज़ार दो का गुजरात दंगा केस भी शामिल है और वह गुजरात सरकार की ओर से दलीलें रख चुके हैं. - एएसजी रहते हुए उन्होंने नेशनल जुडिशियल अपॉइंटमेंट कमीशन में भी सरकार का पक्ष रख चुके हैं, जिसमें सर्वोच्च अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया था. - सीबीआई के स्पेशल जज बीएच लोया की मौत से जुड़े हाई-प्रोफाइल केस में भी उन्हें महाराष्ट्र सरकार ने स्पेशल प्रोसेक्यूटर नियुक्त किया गया था. इस केस में उन्हें महाराष्ट्र सरकार ने एक. बीस करोड़ रुपये बतौर फीस दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने इस मौत की जांच की मांग खारिज कर दी थी और रोहतगी ने अदालत के फैसले का स्वागत किया था. - मुकुल रोहतगी के पिता अवध बिहारी रोहतगी दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस थे. - रोहतगी ने गवर्नमेंट लॉ कॉलेज मुंबई से लॉ किया है और शुरू में योगेश कुमार सभरवाल के साथ दिल्ली हाई कोर्ट में प्रैक्टिस भी की थी, जो बाद में छत्तीसवें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बने. - बाद में रोहतगी ने अपनी अलग से कानूनी प्रैक्टिस शुरू की. एक हज़ार नौ सौ तिरानवे में वह दिल्ली हाई कोर्ट में सीनियर काउंसल बने और एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में एडिश्नल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया के पद पर नियुक्त किए गए. इनकी पत्नी वसुधा रोहतगी भी वकील हैं. - कोर्ट में रोहतगी ने कहा कि आर्यन के नशा करने का कोई साक्ष्य नहीं है. मादक पदार्थ जब्त नहीं हुआ और तथाकथित षड्यंत्र तथा उकसाने में उनकी संलिप्तता के कोई साक्ष्य नहीं हैं, जैसा कि एनसीबी ने आरोप लगाया है. तो फिर आर्यन बीस दिन से जेल में क्यों है. - रोहतगी ने कहा कि जहां तक एनडीपीएस का सवाल है, हमने मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट में उठाया था. क्योंकि ये अधिकारी हैं पुलिस नहीं. मैं तूफान सिंह केस में कोर्ट के फैसले का जिक्र करूंगा. जस्टिस नरीमन कोर्ट में कहते हैं कि एनडीपीएस अधिकारी जो बयान दर्ज करता है, वह अदालत में स्वीकार्य नहीं है. - रोहतगी ने कहा कि मैंने मजिस्ट्रेट का रुख किया, उन्होंने कहा कि जमानत उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है. उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर जाएं. फिर हम जिला अदालत चले गए. जिसे खारिज कर दिया गया. मेरे खिलाफ यह तर्क दिया गया कि आप अरबाज मर्चेंट के साथ आए थे, इसलिए आपके पास कॉन्शस पजेशन था. वो कहते हैं कि यह मुझे पता था. उनके पास मेरे खलिाफ कुछ नहीं है. इसलिए वो ऐसी बातें कर रहे हैं. किसी के पास उसके जूते में क्या है, यह मेरी समस्या नहीं है. उन्होंने कहा कि जो बरामद हुआ, वह छह ग्राम की छोटी मात्रा है. यह कोई कर्मशयिल मात्रा नहीं है. - रोहतगी ने कहा कि एनसीबी पुरानी चैट का जिक्र कर रही है और उसी के आधार पर कह रही है कि आर्यन का कुछ लोगों से लेना-देना है. मैं जब बाहर था तो इसको भी अंतरराष्ट्रीय लिंक बताया जा रहा था. यह बहुत छोटा सा मामला है और आर्यन के पिता की वजह से इस मामले को इतना हाइलाइट कर दिया गया. - रोहतगी ने बेंच से कहा कि मुझे विटनेस नंबर एक और दो यानी प्रभाकर सैल और केपी गोसावी से कोई मतलब नहीं है, न ही मैं उन्हें जानता हूं. रोहतगी ने कहा कि ये नए लड़के हैं. उन्हें सुधार गृह में भेजा जा सकता है. उन पर मुकदमा नहीं चलाया जाना चाहिए. सरकार सुधार के बारे में बात कर रही है. |
ऊना -ग्राम पंचायत बडूही में पानी की समस्या का स्थायी हल न हो पाने से पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रस्ताव पारित करके आईपीएच विभाग के अधीक्षण अभियंता इंजीनियर एसके शर्मा को सौंपा है। पंचायत प्रधान विपिन कुमार के नेतृत्व में ग्रामीणों ने इस समस्या का जल्द ही हल करने की मांग उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि आईपीएच विभाग को भी पानी की समस्या के बारे में अवगत करवाया गया, लेकिन स्थायी हल नहीं हो पा रहा है। गांव में तीन नलकूप हैं, जिनका पानी पहले ही अन्य गांवों में जा रहा है। जबकि बडूही को पेयजल की समस्या से जूझना पड़ रहा है। अब नया बोर किया जा रहा है, जिससे पानी किसी और गांव को जाएगा, जिसे सहन नहीं किया जा सकता। विभाग पहले बडूही में पानी की समस्या को हल करे। लोगों के जनमत को देखते हुए पंचायत ने प्रस्ताव पारित किया है कि नए बोर का पानी गांव को ही दिया जाए यदि ऐसा नहीं होता तो इस योजना को रोका जाए। इस प्रस्ताव को आगामी कार्रवाई हेतु विभाग को प्रेषित किया गया है। पंचायत निवासी गोल्डी चौहान, अशोक कुमार, अनिल धीमान, मनमोहन सिंह व रमा देवी सहित अन्य ने कहा कि पंचायत में पानी की कमी को दूर किया जाना चाहिए। लोगों को दूरदराज इलाके में जाकर पानी लाना पड़ रहा है और अपने ही गांव में पानी की योजनाओं का लाभ हमें खुद को नहीं मिल रहा है। जबकि नई योजना से भी दूसरे गांव को पानी देने की बातें की जा रही है जो कि सही नहीं है। इस अवसर पर रघुवीर चौहान, शौकत अली, अब्दुल, विक्रमजीत, कश्मीरी लाल, मोजदीन, गुरनाम, प्रेमचंद, जगदीश, मदन, धर्मचंद, रघुवीर, राजकुमार, कश्मीर सिंह, राम आसरा, सीता राम, दीवान चंद, प्रमोद, माया देवी, स्वर्ण देवी सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित थे।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में रिग संख्या 40 जिसकी पाइप जगह-जगह से लीक कर रही है। विभाग को सूचित करने के बावजूद रिपेयर नहीं हो पाई है, इस कारण से भी पानी की समस्या बड़ी है। उन्होंने कहा कि विभाग को तुरंत कार्रवाई करते हुए गांव में पानी की समस्या का समाधान करना चाहिए।
| ऊना -ग्राम पंचायत बडूही में पानी की समस्या का स्थायी हल न हो पाने से पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रस्ताव पारित करके आईपीएच विभाग के अधीक्षण अभियंता इंजीनियर एसके शर्मा को सौंपा है। पंचायत प्रधान विपिन कुमार के नेतृत्व में ग्रामीणों ने इस समस्या का जल्द ही हल करने की मांग उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि आईपीएच विभाग को भी पानी की समस्या के बारे में अवगत करवाया गया, लेकिन स्थायी हल नहीं हो पा रहा है। गांव में तीन नलकूप हैं, जिनका पानी पहले ही अन्य गांवों में जा रहा है। जबकि बडूही को पेयजल की समस्या से जूझना पड़ रहा है। अब नया बोर किया जा रहा है, जिससे पानी किसी और गांव को जाएगा, जिसे सहन नहीं किया जा सकता। विभाग पहले बडूही में पानी की समस्या को हल करे। लोगों के जनमत को देखते हुए पंचायत ने प्रस्ताव पारित किया है कि नए बोर का पानी गांव को ही दिया जाए यदि ऐसा नहीं होता तो इस योजना को रोका जाए। इस प्रस्ताव को आगामी कार्रवाई हेतु विभाग को प्रेषित किया गया है। पंचायत निवासी गोल्डी चौहान, अशोक कुमार, अनिल धीमान, मनमोहन सिंह व रमा देवी सहित अन्य ने कहा कि पंचायत में पानी की कमी को दूर किया जाना चाहिए। लोगों को दूरदराज इलाके में जाकर पानी लाना पड़ रहा है और अपने ही गांव में पानी की योजनाओं का लाभ हमें खुद को नहीं मिल रहा है। जबकि नई योजना से भी दूसरे गांव को पानी देने की बातें की जा रही है जो कि सही नहीं है। इस अवसर पर रघुवीर चौहान, शौकत अली, अब्दुल, विक्रमजीत, कश्मीरी लाल, मोजदीन, गुरनाम, प्रेमचंद, जगदीश, मदन, धर्मचंद, रघुवीर, राजकुमार, कश्मीर सिंह, राम आसरा, सीता राम, दीवान चंद, प्रमोद, माया देवी, स्वर्ण देवी सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित थे। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में रिग संख्या चालीस जिसकी पाइप जगह-जगह से लीक कर रही है। विभाग को सूचित करने के बावजूद रिपेयर नहीं हो पाई है, इस कारण से भी पानी की समस्या बड़ी है। उन्होंने कहा कि विभाग को तुरंत कार्रवाई करते हुए गांव में पानी की समस्या का समाधान करना चाहिए। |
DEHRADUN : प्रदेश कांग्रेस सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा सवालों के घेरे में है। कम से कम राजधानी में तो यही कहा जा सकता है। हर रोज डीएसओ को इस योजना से उलझे लोगों के सवालों का जवाब देने के लिए अपना कीमती वक्त गंवाना पड़ रहा है। उनसे लोग व जनप्रतिनिधि सवाल कर रहे हैं कि आखिरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना में जिले के कितने पात्रों का कार्ड बन पाया और किन लोगों का नहीं, जिनके कार्ड बन पाए हैं, उनको अब तक नए राशन कार्ड क्यों नहीं मिले। क्या पुराने कार्डो से अब राशन कार्डधारियों को राशन नहीं मिल पाएगा।
वेडनसडे को कुछ पार्षदों ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना व पुराने राशन कार्डो की अहमियत को लेकर डीएसओ कार्यालय पर राशन कार्डो की होली जलाई। कार्ड फाड़ दिए। अगले दिन थर्सडे को भी सुबह से लेकर दोपहर तक डीएसओ कार्यालय में लोगों की कतारें रहीं। त्यागी रोड रेस्ट कैंप के पार्षद भी अपने समर्थकों के साथ डीएसओ कार्यालय पहुंचे। उन्होंने डीएसओ को बताया कि उनके क्षेत्र में कई ऐसे सस्ते गल्ले के दुकानदार हैं, जिन्होंने अब तक राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के तैयार नए कार्ड नही बांटे हैं। फिर से पूर्व पार्षद सचिन गुप्ता का आरोप है कि राशन कार्ड के लिए जिन लोगों ने आवेदन किया था, उनके आवेदन कहीं गुम हो गए। जिसका जवाब विभाग भी नहीं दे पा रहा है। राशन विक्रेता एपीएल का राशन भी नहीं दे रहे हैं।
जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी श्याम आर्य कहते हैं कि इसके लिए फूड इंस्पेक्टर को अवगत करा दिया गया है। जिले में फिलवक्त एक लाख तीन हजार कार्ड बनने हैं, जिनके कार्ड नहीं बने हैं, उन्हें जल्द कार्ड उपलब्ध हो जाएंगे। एपीएल का राशन भी उपलब्ध हो जाएगा। इसके लिए आदेश दे दिए गए हैं। जिन लोगों के गलत राशन कार्ड बन गए हैं, उनके कार्ड रद्द हो जाएंगे।
| DEHRADUN : प्रदेश कांग्रेस सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा सवालों के घेरे में है। कम से कम राजधानी में तो यही कहा जा सकता है। हर रोज डीएसओ को इस योजना से उलझे लोगों के सवालों का जवाब देने के लिए अपना कीमती वक्त गंवाना पड़ रहा है। उनसे लोग व जनप्रतिनिधि सवाल कर रहे हैं कि आखिरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना में जिले के कितने पात्रों का कार्ड बन पाया और किन लोगों का नहीं, जिनके कार्ड बन पाए हैं, उनको अब तक नए राशन कार्ड क्यों नहीं मिले। क्या पुराने कार्डो से अब राशन कार्डधारियों को राशन नहीं मिल पाएगा। वेडनसडे को कुछ पार्षदों ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना व पुराने राशन कार्डो की अहमियत को लेकर डीएसओ कार्यालय पर राशन कार्डो की होली जलाई। कार्ड फाड़ दिए। अगले दिन थर्सडे को भी सुबह से लेकर दोपहर तक डीएसओ कार्यालय में लोगों की कतारें रहीं। त्यागी रोड रेस्ट कैंप के पार्षद भी अपने समर्थकों के साथ डीएसओ कार्यालय पहुंचे। उन्होंने डीएसओ को बताया कि उनके क्षेत्र में कई ऐसे सस्ते गल्ले के दुकानदार हैं, जिन्होंने अब तक राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के तैयार नए कार्ड नही बांटे हैं। फिर से पूर्व पार्षद सचिन गुप्ता का आरोप है कि राशन कार्ड के लिए जिन लोगों ने आवेदन किया था, उनके आवेदन कहीं गुम हो गए। जिसका जवाब विभाग भी नहीं दे पा रहा है। राशन विक्रेता एपीएल का राशन भी नहीं दे रहे हैं। जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी श्याम आर्य कहते हैं कि इसके लिए फूड इंस्पेक्टर को अवगत करा दिया गया है। जिले में फिलवक्त एक लाख तीन हजार कार्ड बनने हैं, जिनके कार्ड नहीं बने हैं, उन्हें जल्द कार्ड उपलब्ध हो जाएंगे। एपीएल का राशन भी उपलब्ध हो जाएगा। इसके लिए आदेश दे दिए गए हैं। जिन लोगों के गलत राशन कार्ड बन गए हैं, उनके कार्ड रद्द हो जाएंगे। |
नई दिल्ली (पीटीआई/आईएएनएस)। Coronavirus देश में कोरोना वायरस के मामलों में तेजी से बढ़ाेत्तरी हो रही है। पिछले 12 घंटों में कम से कम 490 नए मामले और 26 नई मौतें हुई हैं। रविवार शाम तक, कुल मामलों की संख्या 3,577 थी, जबकि 83 लोगों की मौत की सूचना मिली थी। वहीं सोमवार सुबह 9 बजे तक केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार देश में मामलों की कुल संख्या 4,067 हो गई है। वहीं मरने वालों की संख्या बढ़कर 109 हो गई है। आकंड़ों के अनुसार कोरोना के सक्रिय मामलों की संख्या 3,666 है, जबकि 291 लोग ठीक हो गए और उन्हें छुट्टी दे दी गई। इसके अलावा एक पलायन कर गया है। कुल मामलों में 65 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। ताजा आकंड़ों में महाराष्ट्र में 21 मौतें हुईं। इसके अलावा आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु से दो-दो माैतें और एक पंजाब से है। कुल मामलों में से 30 प्रतिशत मामले तब्लीगी जमात से जुड़े हैं, जो पिछले महीने दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में इस्लामिक संप्रदाय द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम से संबंधित हैं।
कोरोना वायरस महामारी की वजह से हुई माैतों के सोमवार सुबह 9 बजे आए आकंड़ों के अनुसार महाराष्ट्र में सबसे अधिक माैत हुई हैं। इसके अलावा सबसे अधिक पाॅजिटिव केस भी महाराष्ट्र में पाए गए हैं। महाराष्ट्र में अब तक 45 लोगों की मृत्यु हुई। उसके बाद गुजरात में 11, मध्य प्रदेश में नौ, तेलंगाना और दिल्ली में सात-सात, तमिलनाडु में पांच और पंजाब में छह लोगों की मौत हुई। कर्नाटक में चार मौतें हुई हैं। वहीं उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश में तीन-तीन मौतें हुई हैं। जम्मू-कश्मीर और केरल से दो-दो मौतें हुई हैं। आंकड़ों के अनुसार, बिहार, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा ने एक-एक मौत की सूचना दी है।
महाराष्ट्र में 690 मामले, तमिलनाडु में 571 मामले और दिल्ली में 503 केस सामने आए हैं। तेलंगाना में मामलों की संख्या 321, केरल में 314 और राजस्थान में 253 हो गई है। उत्तर प्रदेश में 227 मामले अब तक सामने आए हैं। आंध्र प्रदेश में 226, मध्य प्रदेश में 165, कर्नाटक में 151 और गुजरात में 122 मामले दर्ज हैं। जम्मू-कश्मीर में 106, हरियाणा में 84, पश्चिम बंगाल में 80 और पंजाब में 68 मामले दर्ज किए गए हैं। बिहार में तीस लोग पीड़ित हैं, जबकि असम और उत्तराखंड में 26-26 मामले सामने आए हैं। ओडिशा में 21, चंडीगढ़ 18, लद्दाख 14 और हिमाचल प्रदेश 13 केस पाॅजिटिव मिले हैं। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह से दस मामले सामने आए हैं, जबकि छत्तीसगढ़ में संक्रमण के नौ मामले हैं। गोवा ने सात मामलों की सूचना दी। इसके बाद पुडुचेरी ने पांच मामले, झारखंड ने तीन और मणिपुर ने दो मामले दर्ज किए। मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश में एक-एक संक्रमण हुआ है।
| नई दिल्ली । Coronavirus देश में कोरोना वायरस के मामलों में तेजी से बढ़ाेत्तरी हो रही है। पिछले बारह घंटाटों में कम से कम चार सौ नब्बे नए मामले और छब्बीस नई मौतें हुई हैं। रविवार शाम तक, कुल मामलों की संख्या तीन,पाँच सौ सतहत्तर थी, जबकि तिरासी लोगों की मौत की सूचना मिली थी। वहीं सोमवार सुबह नौ बजे तक केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार देश में मामलों की कुल संख्या चार,सरसठ हो गई है। वहीं मरने वालों की संख्या बढ़कर एक सौ नौ हो गई है। आकंड़ों के अनुसार कोरोना के सक्रिय मामलों की संख्या तीन,छः सौ छयासठ है, जबकि दो सौ इक्यानवे लोग ठीक हो गए और उन्हें छुट्टी दे दी गई। इसके अलावा एक पलायन कर गया है। कुल मामलों में पैंसठ विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। ताजा आकंड़ों में महाराष्ट्र में इक्कीस मौतें हुईं। इसके अलावा आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु से दो-दो माैतें और एक पंजाब से है। कुल मामलों में से तीस प्रतिशत मामले तब्लीगी जमात से जुड़े हैं, जो पिछले महीने दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में इस्लामिक संप्रदाय द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम से संबंधित हैं। कोरोना वायरस महामारी की वजह से हुई माैतों के सोमवार सुबह नौ बजे आए आकंड़ों के अनुसार महाराष्ट्र में सबसे अधिक माैत हुई हैं। इसके अलावा सबसे अधिक पाॅजिटिव केस भी महाराष्ट्र में पाए गए हैं। महाराष्ट्र में अब तक पैंतालीस लोगों की मृत्यु हुई। उसके बाद गुजरात में ग्यारह, मध्य प्रदेश में नौ, तेलंगाना और दिल्ली में सात-सात, तमिलनाडु में पांच और पंजाब में छह लोगों की मौत हुई। कर्नाटक में चार मौतें हुई हैं। वहीं उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश में तीन-तीन मौतें हुई हैं। जम्मू-कश्मीर और केरल से दो-दो मौतें हुई हैं। आंकड़ों के अनुसार, बिहार, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा ने एक-एक मौत की सूचना दी है। महाराष्ट्र में छः सौ नब्बे मामले, तमिलनाडु में पाँच सौ इकहत्तर मामले और दिल्ली में पाँच सौ तीन केस सामने आए हैं। तेलंगाना में मामलों की संख्या तीन सौ इक्कीस, केरल में तीन सौ चौदह और राजस्थान में दो सौ तिरेपन हो गई है। उत्तर प्रदेश में दो सौ सत्ताईस मामले अब तक सामने आए हैं। आंध्र प्रदेश में दो सौ छब्बीस, मध्य प्रदेश में एक सौ पैंसठ, कर्नाटक में एक सौ इक्यावन और गुजरात में एक सौ बाईस मामले दर्ज हैं। जम्मू-कश्मीर में एक सौ छः, हरियाणा में चौरासी, पश्चिम बंगाल में अस्सी और पंजाब में अड़सठ मामले दर्ज किए गए हैं। बिहार में तीस लोग पीड़ित हैं, जबकि असम और उत्तराखंड में छब्बीस-छब्बीस मामले सामने आए हैं। ओडिशा में इक्कीस, चंडीगढ़ अट्ठारह, लद्दाख चौदह और हिमाचल प्रदेश तेरह केस पाॅजिटिव मिले हैं। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह से दस मामले सामने आए हैं, जबकि छत्तीसगढ़ में संक्रमण के नौ मामले हैं। गोवा ने सात मामलों की सूचना दी। इसके बाद पुडुचेरी ने पांच मामले, झारखंड ने तीन और मणिपुर ने दो मामले दर्ज किए। मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश में एक-एक संक्रमण हुआ है। |
झारखण्ड मुक्ति मोर्चा जिला कार्यलय में शुक्रवार को स्व दुर्गा सोरेन की 12वीं पुण्यतिथि मनाई गई। मौक़े पर सभी बरिष्ठ पदाधिकारियों ने स्व दुर्गा सोरेन के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। साथ ही पार्टी की मजबूती के लिए उनके द्वारा किए गए कार्यों को याद किया गया। सभी नेताओं ने अपने अपने विचार रखें। वक्ताओं ने कहा कि स्व दुर्गा सोरेन एक आंदोलनकारी के साथ साथ पार्टी के महासचिव भी थे। अलग झारखंड आंदोलन में उनका अहम योगदान था। वह अनुशासनहीनता को तनिक भी बर्दाश्त नहीं करते थे। उनकी हार्दिक इच्छा थी कि झारखंड राज्य का चहुमुखी विकास हो। इसके लिए उन्होंने कई प्रयास भी किया था। सोशल डिस्टिेंसिंग के साथ आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में पार्टी के जिला अध्यक्ष किशोर डांग, जिला सचिव सफीक खान, पूर्ब विधायक सह केंद्रीय सदस्य बसंत कुमार लोंगा, केन्द्रीय सदस्य राकेश लकड़ा आदि उपस्थित थे।
| झारखण्ड मुक्ति मोर्चा जिला कार्यलय में शुक्रवार को स्व दुर्गा सोरेन की बारहवीं पुण्यतिथि मनाई गई। मौक़े पर सभी बरिष्ठ पदाधिकारियों ने स्व दुर्गा सोरेन के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। साथ ही पार्टी की मजबूती के लिए उनके द्वारा किए गए कार्यों को याद किया गया। सभी नेताओं ने अपने अपने विचार रखें। वक्ताओं ने कहा कि स्व दुर्गा सोरेन एक आंदोलनकारी के साथ साथ पार्टी के महासचिव भी थे। अलग झारखंड आंदोलन में उनका अहम योगदान था। वह अनुशासनहीनता को तनिक भी बर्दाश्त नहीं करते थे। उनकी हार्दिक इच्छा थी कि झारखंड राज्य का चहुमुखी विकास हो। इसके लिए उन्होंने कई प्रयास भी किया था। सोशल डिस्टिेंसिंग के साथ आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में पार्टी के जिला अध्यक्ष किशोर डांग, जिला सचिव सफीक खान, पूर्ब विधायक सह केंद्रीय सदस्य बसंत कुमार लोंगा, केन्द्रीय सदस्य राकेश लकड़ा आदि उपस्थित थे। |
कासिम उर्फ करमवीर की पत्नी अनीता ने बताया कि 2012 में दोनों की लव मैरिज हुई थी और उनके दो बच्चे भी हैं। अनीता के मुताबिक उसने शादी के बाद भी अपना धर्म नहीं छोड़ा था।
लखनऊः अलीगढ़ में धर्म परिवर्तन के बाद से एक युवक को लगातार धमकियां मिल रही है। उसने पुलिस के आगे सुरक्षा की गुहार लगाई है।
बताया जा रहा है उसने मुस्लिम धर्म छोड़कर हिन्दू धर्म अपनाया। उसके बाद से ही उसे धमकियां मिलना शुरू हुई। धर्म परिवर्तन करने वाले युवक का नाम कासिम है। उसकी उम्र 26 साल है।
कासिम ने बताया कि आर्य समाज में जरूरी प्रक्रिया अपनाते हुए अब वह करमवीर बन गया है। धर्म परिवर्तन पर उसका कहना है, 'ऐसा फील हुआ कि हमारे पूर्वज जो थे, वे अकबर-बाबर की औलाद नहीं थे, हमारे पूर्वज हिन्दू समाज के थे, वही मुझे अच्छा लगा और मैं अपने पूर्वजों में आया हूं, मैंने घर वापसी की है, पूरे परिवार के साथ की है, बिना किसी दबाव के की है। '
हिन्दू लड़की से शादी करने के बाद दो बच्चों के बाप ने छोड़ा मुस्लिम धर्म, मिली धमकी (फोटोःसोशल मीडिया)
उसका कहना है कि जब से धर्म परिवर्तन करके वह करमवीर बना है, उसके बाद से ही उसे लगातार धमकियां मिल रही हैं। उसका कहना है कि मेरा नाम कासिम था और मैंने अब धर्म परिवर्तन कर लिया है।
जब मैंने मुस्लिम समुदाय के लोगों को धर्म परिवर्तन के बारे में बताया तो मुझे और मेरे परिवार को जान से मारने की धमकियां मिलना शुरू हो गई। ऐसे में मैंने पुलिस के आगे सुरक्षा की गुहार लगाई है।
मुझे सुरक्षा चाहिए।
हिन्दू लड़की से शादी करने के बाद दो बच्चों के बाप ने छोड़ा मुस्लिम धर्म, मिली धमकी (फोटोःसोशल मीडिया)
वहीं इस मामले में कासिम उर्फ करमवीर की शिकायत पर एसपी क्राइम अरविंद कुमार का कहना है कि हमने पीड़ित की शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया है।
कासिम उर्फ करमवीर का आरोप है कि उन्हें कुछ लोगों द्वारा धमकी दी जा रही है इसलिए हमने उनके आवास पर सुरक्षाकर्मियों की तैनाती कर दी है।
कासिम उर्फ करमवीर की पत्नी अनीता ने बताया कि 2012 में दोनों की लव मैरिज हुई थी और उनके दो बच्चे भी हैं। अनीता के मुताबिक उसने शादी के बाद भी अपना धर्म नहीं छोड़ा था।
जबकि कासिम भी अब तक मुस्लिम ही रहे थे, लेकिन उनके सामने नमाज़ पढ़ने से परहेज़ किया करते थे। वह अक्सर उन्हें बताए बिना बाहर जाकर नमाज़ पढ़ लिया करते थे। उनके धर्म परिवर्तन से अनीता बेहद खुश है।
| कासिम उर्फ करमवीर की पत्नी अनीता ने बताया कि दो हज़ार बारह में दोनों की लव मैरिज हुई थी और उनके दो बच्चे भी हैं। अनीता के मुताबिक उसने शादी के बाद भी अपना धर्म नहीं छोड़ा था। लखनऊः अलीगढ़ में धर्म परिवर्तन के बाद से एक युवक को लगातार धमकियां मिल रही है। उसने पुलिस के आगे सुरक्षा की गुहार लगाई है। बताया जा रहा है उसने मुस्लिम धर्म छोड़कर हिन्दू धर्म अपनाया। उसके बाद से ही उसे धमकियां मिलना शुरू हुई। धर्म परिवर्तन करने वाले युवक का नाम कासिम है। उसकी उम्र छब्बीस साल है। कासिम ने बताया कि आर्य समाज में जरूरी प्रक्रिया अपनाते हुए अब वह करमवीर बन गया है। धर्म परिवर्तन पर उसका कहना है, 'ऐसा फील हुआ कि हमारे पूर्वज जो थे, वे अकबर-बाबर की औलाद नहीं थे, हमारे पूर्वज हिन्दू समाज के थे, वही मुझे अच्छा लगा और मैं अपने पूर्वजों में आया हूं, मैंने घर वापसी की है, पूरे परिवार के साथ की है, बिना किसी दबाव के की है। ' हिन्दू लड़की से शादी करने के बाद दो बच्चों के बाप ने छोड़ा मुस्लिम धर्म, मिली धमकी उसका कहना है कि जब से धर्म परिवर्तन करके वह करमवीर बना है, उसके बाद से ही उसे लगातार धमकियां मिल रही हैं। उसका कहना है कि मेरा नाम कासिम था और मैंने अब धर्म परिवर्तन कर लिया है। जब मैंने मुस्लिम समुदाय के लोगों को धर्म परिवर्तन के बारे में बताया तो मुझे और मेरे परिवार को जान से मारने की धमकियां मिलना शुरू हो गई। ऐसे में मैंने पुलिस के आगे सुरक्षा की गुहार लगाई है। मुझे सुरक्षा चाहिए। हिन्दू लड़की से शादी करने के बाद दो बच्चों के बाप ने छोड़ा मुस्लिम धर्म, मिली धमकी वहीं इस मामले में कासिम उर्फ करमवीर की शिकायत पर एसपी क्राइम अरविंद कुमार का कहना है कि हमने पीड़ित की शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया है। कासिम उर्फ करमवीर का आरोप है कि उन्हें कुछ लोगों द्वारा धमकी दी जा रही है इसलिए हमने उनके आवास पर सुरक्षाकर्मियों की तैनाती कर दी है। कासिम उर्फ करमवीर की पत्नी अनीता ने बताया कि दो हज़ार बारह में दोनों की लव मैरिज हुई थी और उनके दो बच्चे भी हैं। अनीता के मुताबिक उसने शादी के बाद भी अपना धर्म नहीं छोड़ा था। जबकि कासिम भी अब तक मुस्लिम ही रहे थे, लेकिन उनके सामने नमाज़ पढ़ने से परहेज़ किया करते थे। वह अक्सर उन्हें बताए बिना बाहर जाकर नमाज़ पढ़ लिया करते थे। उनके धर्म परिवर्तन से अनीता बेहद खुश है। |
भाजपा मंत्री अनिल विज ने एक बयान देकर और एक ट्वीट करके घमासान मचा दिया है. उनका यह ट्वीट कोरोना वायरस की दहशत के बाद आया है. वे अकसर अपने ट्वीट और बयानों को लेकर सुर्खियों में रहते हैं. अब चूंकि देश में महामारी फैली है तो भी वे जुबानी तंज कसने का मौका नहीं छोड़ रहे.
आपकी जानकारी के लिए बता दे कि मध्यप्रदेश में चल रहे सियासी घमासान के बीच हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने ट्वीट करके राजनीतिक पारा और गरमा दिया है. विज ने लिखा है कि दल बदल कानून को निष्प्रभावी कर देना चाहिए. विधायकों को फ्री हैंड मिले, ताकि वे अपनी पसंद की पार्टी को चुनकर अपने भाव व्यक्त कर सकें. उन्होंने दल बदल कानून को लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के विपरीत बताया है.
क्या कोरोना वायरस का रामबाण इलाज है योगासन ?
इस मामले को लेकर गृहमंत्री अनिल विज ने अपने निवास स्थान पर शनिवार और रविवार को लगने वाले जनता दरबार को आगामी आदेशों तक स्थगित कर दिया है. गृहमंत्री अनिल विज ने बताया कि जनता दरबार मे एक दिन में लगभग दो हजार लोग पूरे प्रदेश से शिकायतें लेकर पहुंचते हैं. कोरोना वायरस के बढ़ रहे मामलों के चलते जनता दरबार स्थगित करने का फैसला लिया गया है. विज ने कोरोना को लेकर पड़ोसी देश पाकिस्तान पर तंज कसा है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लिए कोरोना का मतलब कश्मीर का रोना है.
| भाजपा मंत्री अनिल विज ने एक बयान देकर और एक ट्वीट करके घमासान मचा दिया है. उनका यह ट्वीट कोरोना वायरस की दहशत के बाद आया है. वे अकसर अपने ट्वीट और बयानों को लेकर सुर्खियों में रहते हैं. अब चूंकि देश में महामारी फैली है तो भी वे जुबानी तंज कसने का मौका नहीं छोड़ रहे. आपकी जानकारी के लिए बता दे कि मध्यप्रदेश में चल रहे सियासी घमासान के बीच हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने ट्वीट करके राजनीतिक पारा और गरमा दिया है. विज ने लिखा है कि दल बदल कानून को निष्प्रभावी कर देना चाहिए. विधायकों को फ्री हैंड मिले, ताकि वे अपनी पसंद की पार्टी को चुनकर अपने भाव व्यक्त कर सकें. उन्होंने दल बदल कानून को लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के विपरीत बताया है. क्या कोरोना वायरस का रामबाण इलाज है योगासन ? इस मामले को लेकर गृहमंत्री अनिल विज ने अपने निवास स्थान पर शनिवार और रविवार को लगने वाले जनता दरबार को आगामी आदेशों तक स्थगित कर दिया है. गृहमंत्री अनिल विज ने बताया कि जनता दरबार मे एक दिन में लगभग दो हजार लोग पूरे प्रदेश से शिकायतें लेकर पहुंचते हैं. कोरोना वायरस के बढ़ रहे मामलों के चलते जनता दरबार स्थगित करने का फैसला लिया गया है. विज ने कोरोना को लेकर पड़ोसी देश पाकिस्तान पर तंज कसा है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लिए कोरोना का मतलब कश्मीर का रोना है. |
कोरबा। भारतीय रेल के इतिहास में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, बिलासपुर के द्वारा एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। गुरुवार को 4 मालगाड़ियों को जोड़कर पटरी पर दौड़ाया गया। 6 किलोमीटर से अधिक लंबी यह मालगाड़ी 260 किलोमीटर की दूरी महज 7 घंटे में तय कर कोरबा स्टेशन पहुंची।
कोरबा रेलवे स्टेशन के क्षेत्रीय रेल प्रबंधक विशाल ने बताया कि यह बिलासपुर जोन व नागपुर डिवीजन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। पिछली बार 3 मालगाड़ियों को जोड़कर उसे एनाकोण्डा नाम दिया गया था। इस बार लोडेड फ्रेड ट्रेन को पटरियों पर दौड़ाया गया। भिलाई से रवाना की गई यह 4 मालगाड़ियों वाली ट्रेन 260 किलोमीटर की दूरी तय कर कोरबा पहुंची है। रेल कर्मियों में इस उपलब्धि हर्ष व्याप्त है।
बता दें इसी के साथ शेषनाग ने सुपर एनाकोंडा को पछाड़ दिया है। शेषनाग भारत की सबसे लंबी ट्रेन है जो आज से चली है। शेषनाग में चार मालगाड़ी ट्रेन/रेक (4 मालगाड़ी खाली), 251 वेगन हैं। यह ट्रेन दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के नागपुर डिवीजन से कोरबा के बीच चली है।
वहीं सुपर एनाकोंडा तीन लोडेड मालगाड़ियों को जोड़कर बनाई गई थी। सुपर एनाकोंडा की कैटेगरी में दो ट्रेनें थीं। यह ट्रेन 30 जून को रायपुर डिवीजन के भिलाई से साउथ ईस्टर्न रेलवे तक चली थी और इसमें 151 वेगन थे। 1. 9 किलोमीटर लंबाई थी। यह बिलासपुर डिवीजन के लचकुरा से चक्रधरपुर डिवीजन के राउरकेला तक भी चली थी।
| कोरबा। भारतीय रेल के इतिहास में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, बिलासपुर के द्वारा एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। गुरुवार को चार मालगाड़ियों को जोड़कर पटरी पर दौड़ाया गया। छः किलोग्राममीटर से अधिक लंबी यह मालगाड़ी दो सौ साठ किलोग्राममीटर की दूरी महज सात घंटाटे में तय कर कोरबा स्टेशन पहुंची। कोरबा रेलवे स्टेशन के क्षेत्रीय रेल प्रबंधक विशाल ने बताया कि यह बिलासपुर जोन व नागपुर डिवीजन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। पिछली बार तीन मालगाड़ियों को जोड़कर उसे एनाकोण्डा नाम दिया गया था। इस बार लोडेड फ्रेड ट्रेन को पटरियों पर दौड़ाया गया। भिलाई से रवाना की गई यह चार मालगाड़ियों वाली ट्रेन दो सौ साठ किलोग्राममीटर की दूरी तय कर कोरबा पहुंची है। रेल कर्मियों में इस उपलब्धि हर्ष व्याप्त है। बता दें इसी के साथ शेषनाग ने सुपर एनाकोंडा को पछाड़ दिया है। शेषनाग भारत की सबसे लंबी ट्रेन है जो आज से चली है। शेषनाग में चार मालगाड़ी ट्रेन/रेक , दो सौ इक्यावन वेगन हैं। यह ट्रेन दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के नागपुर डिवीजन से कोरबा के बीच चली है। वहीं सुपर एनाकोंडा तीन लोडेड मालगाड़ियों को जोड़कर बनाई गई थी। सुपर एनाकोंडा की कैटेगरी में दो ट्रेनें थीं। यह ट्रेन तीस जून को रायपुर डिवीजन के भिलाई से साउथ ईस्टर्न रेलवे तक चली थी और इसमें एक सौ इक्यावन वेगन थे। एक. नौ किलोग्राममीटर लंबाई थी। यह बिलासपुर डिवीजन के लचकुरा से चक्रधरपुर डिवीजन के राउरकेला तक भी चली थी। |
उदयपुर न्यूजः सुविवि की यूजी और पीजी की वार्षिक परीक्षाएं मंगलवार से शुरू होंगी। इसमें घटक कला-विज्ञान-वाणिज्य-विधि सहित संबद्ध 198 महाविद्यालयों के 179275 विद्यार्थी 65 केंद्रों पर परीक्षा देंगे। पहले दिन दो पालियों में हिंदी साहित्य और इतिहास के पेपर होंगे। पहली पाली सुबह 7 बजे से 10 बजे तक और दूसरी पाली 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक चलेगी। एक मार्च के बाद तीन पालियों में परीक्षाएं होंगी। पहली पाली सुबह 7 बजे से 10 बजे तक, दूसरी सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक और तीसरी दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक चलेगी।
परीक्षा नियंत्रक डॉ. आरसी कुमावत ने बताया कि पहली बार सीसीटीवी कैमरों से मॉनिटरिंग की जाएगी. परीक्षा केंद्र के स्ट्रांग रूम, प्राचार्य कक्ष और परीक्षा कक्ष में कैमरे लगाए गए हैं। इन्हें विवि स्टोंग रूम से अटैच किया गया है। परीक्षा की वीडियो रिकॉर्डिंग होगी, ताकि शिकायत पर जांच के बाद संबंधित परीक्षा केंद्र व नकल करने वाले के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।
| उदयपुर न्यूजः सुविवि की यूजी और पीजी की वार्षिक परीक्षाएं मंगलवार से शुरू होंगी। इसमें घटक कला-विज्ञान-वाणिज्य-विधि सहित संबद्ध एक सौ अट्ठानवे महाविद्यालयों के एक लाख उन्यासी हज़ार दो सौ पचहत्तर विद्यार्थी पैंसठ केंद्रों पर परीक्षा देंगे। पहले दिन दो पालियों में हिंदी साहित्य और इतिहास के पेपर होंगे। पहली पाली सुबह सात बजे से दस बजे तक और दूसरी पाली ग्यारह बजे से दोपहर दो बजे तक चलेगी। एक मार्च के बाद तीन पालियों में परीक्षाएं होंगी। पहली पाली सुबह सात बजे से दस बजे तक, दूसरी सुबह ग्यारह बजे से दोपहर दो बजे तक और तीसरी दोपहर तीन बजे से शाम छः बजे तक चलेगी। परीक्षा नियंत्रक डॉ. आरसी कुमावत ने बताया कि पहली बार सीसीटीवी कैमरों से मॉनिटरिंग की जाएगी. परीक्षा केंद्र के स्ट्रांग रूम, प्राचार्य कक्ष और परीक्षा कक्ष में कैमरे लगाए गए हैं। इन्हें विवि स्टोंग रूम से अटैच किया गया है। परीक्षा की वीडियो रिकॉर्डिंग होगी, ताकि शिकायत पर जांच के बाद संबंधित परीक्षा केंद्र व नकल करने वाले के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। |
इसलिए, सरलीकरण पर यह हमें 1865.48 का मान देगा, क्या हम इसके लिए प्राप्त करते हैं और फिर हमारे पास s है । जिस क्षण हमें Q पता लगता है उस क्षण कि हम s प्राप्त कर सकते हैं, S बराबर है (संदर्भ स्लाइड समयः 23:57 ) QCc * 1 - D/P डिवाइडेड बाय Cc + Csl तो यह 1865.48 Q Cc 4 Q Cc / Cc + Csc = 29 * 1 बाय 2,1 - D / P है ½ * ½ । इसलिए 1 बाय 2, जो हमें देता है एक्स इक्वल टू 128.65 के बराबर है। अब, हम IM, IM की गणना कर सकते हैं जो कि अधिकतम इन्वेंट्री है। IM plus s बराबर है Q * 1 - (Refer Slide Time: 07:32) D / PID/P is 1/2l इसलिए, q * 1 - D/P है 932.7, 932.7 माइनस 128 हमें कुछ ऐसा देगा, 804.09
अब, जब हम Qs और IM को जान लेते हैं, तो हम यहाँ कुल विकल्प प्राप्त कर सकते हैं, (संदर्भ स्लाइड समयः 23:57) कुल लागत प्राप्त करने के लिए या हम यहाँ या यहाँ स्थानापत्र कर सकते हैं, वे एक हैं और एक ही हैं। इसलिए, यहां या इसके लिए कुल लागत और इसके लिए कुल लागत प्राप्त करना आसान है। प्रतिस्थापन पर आने के लिए कुल लागत 3216.338 आएगी। अब, बैक ऑर्डर की प्रभावशीलता को देखने के लिए, केवल एक चीज जो हम तुरंत कर सकते हैं, वह यह है कि बैक ऑर्डर की अनुमति नहीं देने पर क्या होता है (संदर्भ समय देखेंः 00:09 ) इस मॉडल ने बैकऑर्डरिंग की अनुमति दी, इस मॉडल ने बैकऑर्डरिंग की अनुमति नहीं दी ।
तो, हम वापस जा सकते हैं और संख्यात्मक चित्रण के संख्यात्मक परिणाम के साथ तुलना कर सकते हैं, अगर हमारे पास वापस आदेश नहीं था या Cs अनंत के बराबर है। तो, जब Cs अनंत के बराबर है तो यह मॉडल स्वचालित रूप से यह मॉडल बन जाएगा। हमने वैसे भी 3rd मॉडल के लिए
या अन्य मॉडल के लिए एक ही संख्यात्मक चित्रण हल किया है इसलिए जब हम ऐसा करते हैं तो हमें Q 1732.05 के बराबर होता है। मैं यहां केवल मूल्य लिख रहा हूं, अब यह आर्थिक बैच मात्रा है जब हमने बैक ऑर्डरिंग की अनुमति नहीं दी थी या जब Cs अनंत के बराबर है।
अब, उस स्थिति में अधिकतम इन्वेंट्री 866.03 थी, IM 866.03 था, उस मामले में और उस मामले में कुल लागत 3466.10 थी। अब, तुलना करने से हमें क्या हासिल होता है? पहली चीज जो हमारे दिमाग में आती है, की जब हमारे पास Cs है या जब हम बैक ऑर्डरिंग की अनुमति दे सकते हैं तो कुल लागत 3216 vs 3464 जब Cs अनंत था। वही परिणाम जब हम समय में वापस जाते हैं, तो पहले दो इन्वेंट्री मॉडल की तुलना करने के लिए जो आइटम हम खरीदते हैं, हमने दिखाया कि यदि हम बैक ऑर्डरिंग की अनुमति देते हैं, तो यह वास्तव में प्रति वर्ष बिना ऑर्डर के मामले की तुलना में सस्ता काम करता है। बिना आदेश के मामले को देखा जा सकता है या माना जा सकता है कि Cs अनंत के बराबर है, इसलिए लागत कम हो जाती है।
अब, प्रति चक्र की कुल उत्पादन मात्रा का क्या होता है, जब हम उत्पादन करने वाली मात्रा को 1865.48 पर वापस करने की अनुमति देते हैं। तो उसी वार्षिक मांग T के लिए जो चक्र छोटा है क्योंकि यह मात्रा अधिक है। हम यह भी दिखा सकते हैं कि हमने इसे स्पष्ट रूप से नहीं दिखाया है, हम दिखा सकते हैं कि इस मॉडल में वास्तव में लागत इस और (संदर्भ देखें समयः 23:57 ) के बीच एक व्यापार है। वास्तव में, यह लागत उदाहरण के लिए उन दो लागतों के बराबर होगी, हम आसानी से दिखा सकते हैं कि अब, जब Q 1865.48 के बराबर है, तो हम एक वर्ष में जितनी बार हम ऑर्डर करते हैं, वह D / Q है जो 10,000 डिवाइडेड बाय 1865.48 जो कि 5.36* 300, है 1608 ।
तो, यह घटक 1608 है (रिफर स्लाइड टाइमः 23:57) कुल 3216 है तो जाहिर है कि यह इसके बराबर है। तो, यहाँ क्या होता है प्रति चक्र उत्पादन मात्रा अधिक और थोड़ी कम होती है, चक्र की लंबाई या अवधि थोड़ा नीचे आती है। दूसरी बात यह है कि उत्पादन की मात्रा 1865.48 से थोड़ी अधिक होने के बावजूद एक बैक ऑर्डर है। यह भी अंततः साफ हो गया और फिर यहां की औसत इन्वेंट्री, वास्तव में पहले के मामले में 866 के मुकाबले 804 तक नीचे आ गई। औसत, IM अधिकतम इन्वेंट्री जो सिस्टम में है, बैकऑर्डर की वजह से नीचे आती है और कुल लागत कम आती है क्योंकि यह IM अनिवार्य रूप से थोड़े समय के लिए आयोजित किया जाता है, जबकि 866.03 आयोजित किया जा रहा है।
तो, इन्वेंट्री लागत नीचे आती है, बैकऑर्डर की लागत बढ़ती जाती है, लेकिन अंततः ऑर्डर कॉस्ट बैलेंस (संदर्भ समयः 23:57 ) इन दो लागतों और कुल लागत में कमी आती है। इसलिए, जब हमारे पास उत्पादन खपत मॉडल होता है यदि हम बैकऑर्डरिंग की अनुमति दे सकते हैं, तो हम बैकऑर्डरिंग की अनुमति देते हैं। परिणाम हमारे पास Cs के मूल्य पर बहुत अधिक निर्भर है। इसलिए, केवल अगर हम Cs को सही तरीके से जानते हैं या यदि अतिरिक्त इन्वेंटरी और इतने पर सिस्टम में पर्याप्त सुरक्षा है, तो कोई इस मॉडल को लागू करने के संदर्भ में सोच सकता है (संदर्भ स्लाइड समयः 00:09)। लेकिन, अगर हम Cs के बारे में निश्चित नहीं हैं और यदि कुछ अतिरिक्त मदद के अतिरिक्त प्रश्न नहीं हैं, तो Cs को अनंत मान लेना बेहतर है।
और फिर पहले वाले मॉडल का उपयोग करें और कोशिश न करें और लागत पर आगे का अनुकूलन करें, बैकऑर्डरिंग और एक निश्चित Cs मानकर। इस मॉडल की ताकत निहित है, या इस
मॉडल की प्रयोज्य सटीक गणना या Cs के सटीक अनुमान में निहित है। तो, अगर Cs का सही अनुमान लगाया जा सकता है और यह हमें चोट नहीं पहुंचाने वाला है, अगर हम बैकऑर्डरिंग की अनुमति देते हैं तो (संदर्भ समयः 00:09 ) इस मॉडल का उपयोग किया जा सकता है, अन्यथा इस मॉडल का उपयोग करना होगा।
(Refer Slide Time: 40:08)
Plyear D'year
अब, हमें पुराने मॉडल पर वापस आते हैं, जहां हम बैक ऑर्डरिंग की अनुमति नहीं देते हैं जो यह मॉडल है। और अब कुछ और काम करते हैं; हमें लगता है कि हम एक के लिए यह है विशेष रूप से आइटम अब जब हमने इस मॉडल पर काम किया तो हमने यह भी कहा कि किसी विशेष वस्तु के लिए, उत्पादन यहाँ से शुरू होता है, समय अवधि t1 पर रुक जाता है जो कि एक इन्वेंट्री बिल्डअप है। फिर
उस वस्तु का उत्पादन रुक जाता है। खपत इन्वेंट्री से होती है जिसे बनाया गया है। अब, अगर हम सुविधाओं के दृष्टिकोण से एक ही ग्राफ को देखना शुरू करते हैं, तो यह इस तरह दिखेगा। अब, शून्य से t1 तक मैं इस आइटम का उत्पादन कर रहा हूं। अभी मैं कुछ नहीं करता हूं, फिर एक बार यहां से मैं इस आइटम का उत्पादन करता हूं ।
अब, इस अवधि के लिए t 2, जहां हम निर्मित इन्वेंट्री से उपभोग करते हैं, पहले मैंने वहां उल्लेख किया था कि यह काफी संभावना है कि इसे निष्क्रिय नहीं रखा जाएगा और यह कुछ अन्य आइटम का उत्पादन करेगा। तो, मान लेते हैं कि यह 2nd आइटम बनाता है और फिर हमें यह मानकर चलता है कि 2nd आइटम वास्तव में यहां से शुरू होता है और 2nd आइटम चक्र यह है, इसलिए इसका अर्थ यह भी है कि अगले चक्र का 2nd आइटम ऐसा होगा। अब, यदि आप दो वस्तुओं पर विचार करते हैं तो पीला दूसरा आइटम है और सफेद 1st आइटम है। अब, एक बार फिर से 2nd आइटम का निर्माण एक निश्चित समय अवधि तक किया जाता है और फिर इस अवधि से इस अवधि तक हमारे उपकरण निष्क्रिय हो सकते हैं।
तो, हम क्या करते हैं हम 3rd आइटम का उत्पादन करते हैं जो हमें कहते हैं, कि हमारे पास यहां है। तो तीसरा आइटम यहां से आता है और कहते हैं कि 3rd आइटम का उत्पादन इस तक किया जाता है, इसलिए 3rd आइटम का उत्पादन किया जाता है। तो, एक बार फिर से चक्र अब यहाँ आता है इस अवधि के लिए हो सकता है सुविधा निष्क्रिय है और फिर अगले चक्र शुरू होता है। इसलिए, यदि हम इस सुविधा और तीन वस्तुओं को देखते हैं तो यह है कि सुविधा का उपयोग कैसा दिखेगा। अब, हमने यह भी कहा कि जब हम इस उत्पाद को निर्धारित करते हैं; यह आइटम फिर से सेट अप लागत
होने जा रहा है। इससे बदलने के लिए लागत, जब हम पीले रंग का दूसरा चक्र बनाते हैं, जो कि दूसरा आइटम है, तो सफेद से पीले रंग में बदलाव का खर्च आएगा। लेकिन, हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि बदलाव के अलावा लागत में भी बदलाव का समय है।
इसलिए, अब हमें यह मान लेना है कि यह अंतर अब चक्र के प्रभावी होने के लिए होना चाहिए। यह अंतराल तीन बदलावों के लिए पर्याप्त होना चाहिए। क्योंकि, कहीं न कहीं हमें सफ़ेद से पीले, पीले से नीले और फिर नीले से सफ़ेद रंग में बदलाव करना होगा, जिसका सीधा सा मतलब है कि, अगर हम कुछ ऐसा करने में सक्षम हैं, तो, इस बदलाव का समय पीला और फिर पीला है चक्र होता है, अब यह नीले रंग का परिवर्तन समय है, फिर नीला चक्र होता है। और फिर यह सफेद के लिए एक बार फिर से बदलाव का समय है और सफेद सेटअप होता है। अब, यदि हम इस समस्या को देखना शुरू कर रहे हैं, तो उस सुविधा के दृष्टिकोण से जो मैं निश्चित संख्या में उत्पादों को बना रहा हूं, तो मैं प्रत्येक उत्पाद के लिए चक्र समय का उत्पादन करने में सक्षम होना चाहिए यह वांछनीय है कि चक्र समय समान है।
ताकि, यह चक्र समय इस चक्र के समय के समान हो जाए, हमें इस बात को फिर से स्पष्ट रूप से आकर्षित करना होगा। तो, एक छोटा सा समय है जो वहाँ है और फिर पीला है और फिर यहाँ कुछ समय है और फिर नीला और फिर यहाँ कुछ और समय है और फिर सफेद है। अब, हम इस चक्र का समय एक ही होना चाहते हैं, यह चक्र समय एक समान है। तो, T को सभी उत्पादों के लिए समान होना चाहिए ताकि हमें उस T को ढूंढने की आवश्यकता हो और फिर अलग-अलग समय हो, जिसे आप कॉल कर सकते हैं, यह t 1 है जैसा कि कुछ t 2, यह कुछ t 3 है जल्द ही। जब आप इनमें से
| इसलिए, सरलीकरण पर यह हमें एक हज़ार आठ सौ पैंसठ.अड़तालीस का मान देगा, क्या हम इसके लिए प्राप्त करते हैं और फिर हमारे पास s है । जिस क्षण हमें Q पता लगता है उस क्षण कि हम s प्राप्त कर सकते हैं, S बराबर है QCc * एक - D/P डिवाइडेड बाय Cc + Csl तो यह एक हज़ार आठ सौ पैंसठ.अड़तालीस Q Cc चार Q Cc / Cc + Csc = उनतीस * एक बाय दो,एक - D / P है ½ * ½ । इसलिए एक बाय दो, जो हमें देता है एक्स इक्वल टू एक सौ अट्ठाईस.पैंसठ के बराबर है। अब, हम IM, IM की गणना कर सकते हैं जो कि अधिकतम इन्वेंट्री है। IM plus s बराबर है Q * एक - D / PID/P is एक/दो लीटर इसलिए, q * एक - D/P है नौ सौ बत्तीस.सात, नौ सौ बत्तीस.सात माइनस एक सौ अट्ठाईस हमें कुछ ऐसा देगा, आठ सौ चार.नौ अब, जब हम Qs और IM को जान लेते हैं, तो हम यहाँ कुल विकल्प प्राप्त कर सकते हैं, कुल लागत प्राप्त करने के लिए या हम यहाँ या यहाँ स्थानापत्र कर सकते हैं, वे एक हैं और एक ही हैं। इसलिए, यहां या इसके लिए कुल लागत और इसके लिए कुल लागत प्राप्त करना आसान है। प्रतिस्थापन पर आने के लिए कुल लागत तीन हज़ार दो सौ सोलह.तीन सौ अड़तीस आएगी। अब, बैक ऑर्डर की प्रभावशीलता को देखने के लिए, केवल एक चीज जो हम तुरंत कर सकते हैं, वह यह है कि बैक ऑर्डर की अनुमति नहीं देने पर क्या होता है इस मॉडल ने बैकऑर्डरिंग की अनुमति दी, इस मॉडल ने बैकऑर्डरिंग की अनुमति नहीं दी । तो, हम वापस जा सकते हैं और संख्यात्मक चित्रण के संख्यात्मक परिणाम के साथ तुलना कर सकते हैं, अगर हमारे पास वापस आदेश नहीं था या Cs अनंत के बराबर है। तो, जब Cs अनंत के बराबर है तो यह मॉडल स्वचालित रूप से यह मॉडल बन जाएगा। हमने वैसे भी तीनrd मॉडल के लिए या अन्य मॉडल के लिए एक ही संख्यात्मक चित्रण हल किया है इसलिए जब हम ऐसा करते हैं तो हमें Q एक हज़ार सात सौ बत्तीस.पाँच के बराबर होता है। मैं यहां केवल मूल्य लिख रहा हूं, अब यह आर्थिक बैच मात्रा है जब हमने बैक ऑर्डरिंग की अनुमति नहीं दी थी या जब Cs अनंत के बराबर है। अब, उस स्थिति में अधिकतम इन्वेंट्री आठ सौ छयासठ.तीन थी, IM आठ सौ छयासठ.तीन था, उस मामले में और उस मामले में कुल लागत तीन हज़ार चार सौ छयासठ.दस थी। अब, तुलना करने से हमें क्या हासिल होता है? पहली चीज जो हमारे दिमाग में आती है, की जब हमारे पास Cs है या जब हम बैक ऑर्डरिंग की अनुमति दे सकते हैं तो कुल लागत तीन हज़ार दो सौ सोलह vs तीन हज़ार चार सौ चौंसठ जब Cs अनंत था। वही परिणाम जब हम समय में वापस जाते हैं, तो पहले दो इन्वेंट्री मॉडल की तुलना करने के लिए जो आइटम हम खरीदते हैं, हमने दिखाया कि यदि हम बैक ऑर्डरिंग की अनुमति देते हैं, तो यह वास्तव में प्रति वर्ष बिना ऑर्डर के मामले की तुलना में सस्ता काम करता है। बिना आदेश के मामले को देखा जा सकता है या माना जा सकता है कि Cs अनंत के बराबर है, इसलिए लागत कम हो जाती है। अब, प्रति चक्र की कुल उत्पादन मात्रा का क्या होता है, जब हम उत्पादन करने वाली मात्रा को एक हज़ार आठ सौ पैंसठ.अड़तालीस पर वापस करने की अनुमति देते हैं। तो उसी वार्षिक मांग T के लिए जो चक्र छोटा है क्योंकि यह मात्रा अधिक है। हम यह भी दिखा सकते हैं कि हमने इसे स्पष्ट रूप से नहीं दिखाया है, हम दिखा सकते हैं कि इस मॉडल में वास्तव में लागत इस और के बीच एक व्यापार है। वास्तव में, यह लागत उदाहरण के लिए उन दो लागतों के बराबर होगी, हम आसानी से दिखा सकते हैं कि अब, जब Q एक हज़ार आठ सौ पैंसठ.अड़तालीस के बराबर है, तो हम एक वर्ष में जितनी बार हम ऑर्डर करते हैं, वह D / Q है जो दस,शून्य डिवाइडेड बाय एक हज़ार आठ सौ पैंसठ.अड़तालीस जो कि पाँच.छत्तीस* तीन सौ, है एक हज़ार छः सौ आठ । तो, यह घटक एक हज़ार छः सौ आठ है कुल तीन हज़ार दो सौ सोलह है तो जाहिर है कि यह इसके बराबर है। तो, यहाँ क्या होता है प्रति चक्र उत्पादन मात्रा अधिक और थोड़ी कम होती है, चक्र की लंबाई या अवधि थोड़ा नीचे आती है। दूसरी बात यह है कि उत्पादन की मात्रा एक हज़ार आठ सौ पैंसठ.अड़तालीस से थोड़ी अधिक होने के बावजूद एक बैक ऑर्डर है। यह भी अंततः साफ हो गया और फिर यहां की औसत इन्वेंट्री, वास्तव में पहले के मामले में आठ सौ छयासठ के मुकाबले आठ सौ चार तक नीचे आ गई। औसत, IM अधिकतम इन्वेंट्री जो सिस्टम में है, बैकऑर्डर की वजह से नीचे आती है और कुल लागत कम आती है क्योंकि यह IM अनिवार्य रूप से थोड़े समय के लिए आयोजित किया जाता है, जबकि आठ सौ छयासठ.तीन आयोजित किया जा रहा है। तो, इन्वेंट्री लागत नीचे आती है, बैकऑर्डर की लागत बढ़ती जाती है, लेकिन अंततः ऑर्डर कॉस्ट बैलेंस इन दो लागतों और कुल लागत में कमी आती है। इसलिए, जब हमारे पास उत्पादन खपत मॉडल होता है यदि हम बैकऑर्डरिंग की अनुमति दे सकते हैं, तो हम बैकऑर्डरिंग की अनुमति देते हैं। परिणाम हमारे पास Cs के मूल्य पर बहुत अधिक निर्भर है। इसलिए, केवल अगर हम Cs को सही तरीके से जानते हैं या यदि अतिरिक्त इन्वेंटरी और इतने पर सिस्टम में पर्याप्त सुरक्षा है, तो कोई इस मॉडल को लागू करने के संदर्भ में सोच सकता है । लेकिन, अगर हम Cs के बारे में निश्चित नहीं हैं और यदि कुछ अतिरिक्त मदद के अतिरिक्त प्रश्न नहीं हैं, तो Cs को अनंत मान लेना बेहतर है। और फिर पहले वाले मॉडल का उपयोग करें और कोशिश न करें और लागत पर आगे का अनुकूलन करें, बैकऑर्डरिंग और एक निश्चित Cs मानकर। इस मॉडल की ताकत निहित है, या इस मॉडल की प्रयोज्य सटीक गणना या Cs के सटीक अनुमान में निहित है। तो, अगर Cs का सही अनुमान लगाया जा सकता है और यह हमें चोट नहीं पहुंचाने वाला है, अगर हम बैकऑर्डरिंग की अनुमति देते हैं तो इस मॉडल का उपयोग किया जा सकता है, अन्यथा इस मॉडल का उपयोग करना होगा। Plyear D'year अब, हमें पुराने मॉडल पर वापस आते हैं, जहां हम बैक ऑर्डरिंग की अनुमति नहीं देते हैं जो यह मॉडल है। और अब कुछ और काम करते हैं; हमें लगता है कि हम एक के लिए यह है विशेष रूप से आइटम अब जब हमने इस मॉडल पर काम किया तो हमने यह भी कहा कि किसी विशेष वस्तु के लिए, उत्पादन यहाँ से शुरू होता है, समय अवधि tएक पर रुक जाता है जो कि एक इन्वेंट्री बिल्डअप है। फिर उस वस्तु का उत्पादन रुक जाता है। खपत इन्वेंट्री से होती है जिसे बनाया गया है। अब, अगर हम सुविधाओं के दृष्टिकोण से एक ही ग्राफ को देखना शुरू करते हैं, तो यह इस तरह दिखेगा। अब, शून्य से tएक तक मैं इस आइटम का उत्पादन कर रहा हूं। अभी मैं कुछ नहीं करता हूं, फिर एक बार यहां से मैं इस आइटम का उत्पादन करता हूं । अब, इस अवधि के लिए t दो, जहां हम निर्मित इन्वेंट्री से उपभोग करते हैं, पहले मैंने वहां उल्लेख किया था कि यह काफी संभावना है कि इसे निष्क्रिय नहीं रखा जाएगा और यह कुछ अन्य आइटम का उत्पादन करेगा। तो, मान लेते हैं कि यह दोnd आइटम बनाता है और फिर हमें यह मानकर चलता है कि दोnd आइटम वास्तव में यहां से शुरू होता है और दोnd आइटम चक्र यह है, इसलिए इसका अर्थ यह भी है कि अगले चक्र का दोnd आइटम ऐसा होगा। अब, यदि आप दो वस्तुओं पर विचार करते हैं तो पीला दूसरा आइटम है और सफेद एकst आइटम है। अब, एक बार फिर से दोnd आइटम का निर्माण एक निश्चित समय अवधि तक किया जाता है और फिर इस अवधि से इस अवधि तक हमारे उपकरण निष्क्रिय हो सकते हैं। तो, हम क्या करते हैं हम तीनrd आइटम का उत्पादन करते हैं जो हमें कहते हैं, कि हमारे पास यहां है। तो तीसरा आइटम यहां से आता है और कहते हैं कि तीनrd आइटम का उत्पादन इस तक किया जाता है, इसलिए तीनrd आइटम का उत्पादन किया जाता है। तो, एक बार फिर से चक्र अब यहाँ आता है इस अवधि के लिए हो सकता है सुविधा निष्क्रिय है और फिर अगले चक्र शुरू होता है। इसलिए, यदि हम इस सुविधा और तीन वस्तुओं को देखते हैं तो यह है कि सुविधा का उपयोग कैसा दिखेगा। अब, हमने यह भी कहा कि जब हम इस उत्पाद को निर्धारित करते हैं; यह आइटम फिर से सेट अप लागत होने जा रहा है। इससे बदलने के लिए लागत, जब हम पीले रंग का दूसरा चक्र बनाते हैं, जो कि दूसरा आइटम है, तो सफेद से पीले रंग में बदलाव का खर्च आएगा। लेकिन, हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि बदलाव के अलावा लागत में भी बदलाव का समय है। इसलिए, अब हमें यह मान लेना है कि यह अंतर अब चक्र के प्रभावी होने के लिए होना चाहिए। यह अंतराल तीन बदलावों के लिए पर्याप्त होना चाहिए। क्योंकि, कहीं न कहीं हमें सफ़ेद से पीले, पीले से नीले और फिर नीले से सफ़ेद रंग में बदलाव करना होगा, जिसका सीधा सा मतलब है कि, अगर हम कुछ ऐसा करने में सक्षम हैं, तो, इस बदलाव का समय पीला और फिर पीला है चक्र होता है, अब यह नीले रंग का परिवर्तन समय है, फिर नीला चक्र होता है। और फिर यह सफेद के लिए एक बार फिर से बदलाव का समय है और सफेद सेटअप होता है। अब, यदि हम इस समस्या को देखना शुरू कर रहे हैं, तो उस सुविधा के दृष्टिकोण से जो मैं निश्चित संख्या में उत्पादों को बना रहा हूं, तो मैं प्रत्येक उत्पाद के लिए चक्र समय का उत्पादन करने में सक्षम होना चाहिए यह वांछनीय है कि चक्र समय समान है। ताकि, यह चक्र समय इस चक्र के समय के समान हो जाए, हमें इस बात को फिर से स्पष्ट रूप से आकर्षित करना होगा। तो, एक छोटा सा समय है जो वहाँ है और फिर पीला है और फिर यहाँ कुछ समय है और फिर नीला और फिर यहाँ कुछ और समय है और फिर सफेद है। अब, हम इस चक्र का समय एक ही होना चाहते हैं, यह चक्र समय एक समान है। तो, T को सभी उत्पादों के लिए समान होना चाहिए ताकि हमें उस T को ढूंढने की आवश्यकता हो और फिर अलग-अलग समय हो, जिसे आप कॉल कर सकते हैं, यह t एक है जैसा कि कुछ t दो, यह कुछ t तीन है जल्द ही। जब आप इनमें से |
सुशांत सिंह राजपूत केस में ड्रग्स केस जब से सामने आया है तब से रिया फंस चुकी हैं। आप जानते ही होंगे रिया इस समय जेल में हैं और वह बाहर निकलने की लाख कोशिश कर रहीं हैं। आप सभी जानते ही होंगे रिया को ड्रग्स केस में 8 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था और उसके बाद उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। वहीं उनकी न्यायिक हिरासत 22 सिंतबर को खत्म हो रही थी लेकिन ऐसा हो ना सका और अब भी रिया को जेल में ही रहना पड़ेगा।
ऐसा इसलिए क्योंकि रिया की न्यायिक हिरासत 6 अक्टूबर तक बढ़ चुकी है। वहीं दोनों भाई बहन यानी रिया और शोविक लगातार जमानत के लिए याचिका दायर कर रहे हैं। बीते दिनों ही दोनों ने बॉम्बे हाई कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी जिसपर बॉम्बे हाईकोर्ट में आज सुनवाई होनी थी लेकिन ऐसा हो ना सका। जी दरअसल इस समय मुंबई में बहुत भारी बारिश हो रही है और इसी की वजह से यह सुनवाई आज नहीं हो पाएगी। मिली जानकारी के तहत बीती रात से मुंबई में हो रही मूसलाधार बारिश के चलते आज बॉम्बे हाईकोर्ट बंद है।
वैसे अब बात करें रिया और शोविक के बारे में तो दोनों पर ड्रग्स की खरीद फरोख्त के आरोप हैं। जी दरअसल रिया और शोविक ने एनसीबी की पूछताछ में कबूला था कि 'वे सुशांत के लिए ड्रग्स का इंतजाम किया करते थे। ' केवल यही नहीं बल्कि रिया और शोविक की कई ड्रग्स पेड्लर्स संग चैट का खुलासा हुआ है और इसमें कई बड़े बड़े दिग्गज स्टार्स के नाम भी आए हैं।
फिल्म सिटी को लेकर अखिलेश ने योगी सरकार पर साधा निशाना, कहा- "अब उनके अभिनेता का अभिनय-डायलॉग। । । । "
| सुशांत सिंह राजपूत केस में ड्रग्स केस जब से सामने आया है तब से रिया फंस चुकी हैं। आप जानते ही होंगे रिया इस समय जेल में हैं और वह बाहर निकलने की लाख कोशिश कर रहीं हैं। आप सभी जानते ही होंगे रिया को ड्रग्स केस में आठ सितंबर को गिरफ्तार किया गया था और उसके बाद उन्हें चौदह दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। वहीं उनकी न्यायिक हिरासत बाईस सिंतबर को खत्म हो रही थी लेकिन ऐसा हो ना सका और अब भी रिया को जेल में ही रहना पड़ेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि रिया की न्यायिक हिरासत छः अक्टूबर तक बढ़ चुकी है। वहीं दोनों भाई बहन यानी रिया और शोविक लगातार जमानत के लिए याचिका दायर कर रहे हैं। बीते दिनों ही दोनों ने बॉम्बे हाई कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी जिसपर बॉम्बे हाईकोर्ट में आज सुनवाई होनी थी लेकिन ऐसा हो ना सका। जी दरअसल इस समय मुंबई में बहुत भारी बारिश हो रही है और इसी की वजह से यह सुनवाई आज नहीं हो पाएगी। मिली जानकारी के तहत बीती रात से मुंबई में हो रही मूसलाधार बारिश के चलते आज बॉम्बे हाईकोर्ट बंद है। वैसे अब बात करें रिया और शोविक के बारे में तो दोनों पर ड्रग्स की खरीद फरोख्त के आरोप हैं। जी दरअसल रिया और शोविक ने एनसीबी की पूछताछ में कबूला था कि 'वे सुशांत के लिए ड्रग्स का इंतजाम किया करते थे। ' केवल यही नहीं बल्कि रिया और शोविक की कई ड्रग्स पेड्लर्स संग चैट का खुलासा हुआ है और इसमें कई बड़े बड़े दिग्गज स्टार्स के नाम भी आए हैं। फिल्म सिटी को लेकर अखिलेश ने योगी सरकार पर साधा निशाना, कहा- "अब उनके अभिनेता का अभिनय-डायलॉग। । । । " |
हूं मैं वह रिन्दजो यकदिन भी नहीं जाता हूँ चूए मै आती है लेने मुझे मै - खाने से ।। १४० ॥
जुल्मो-बेदाद योंही ओ सितम- ईजाद रहे । रोज अजूं यः तेरा हुस्ने- खुदा-दाद रहे ।। अपनी तकदीरमें लक्खीथी जो सहरा गर्दी । कैसो वामिक की तरह खानुमां बर्बाद रहे ।। खूनका लुत्फ़ मेरे उस्को चखाते रहना । तेग हल्कूम पै हरदम मेरे जल्लाद रहे । लब तलक आए न फरयाद न हो शोरो-फुग़ाँ । यारका पासे नज़ाकत दिले-नाशाद रहे ।। हो गिरफ्तार न उल्फत में अमानत कोई। सर्वसां इस चमने-दहर में आबाद रहे ॥ १४१
ग़ज़लआगा ।
किस्से परियोंके मुझे याद हैं अच्छे अच्छे । बन्द शीशेमें परी-जाद हैं अच्छे अच्छे । | हूं मैं वह रिन्दजो यकदिन भी नहीं जाता हूँ चूए मै आती है लेने मुझे मै - खाने से ।। एक सौ चालीस ॥ जुल्मो-बेदाद योंही ओ सितम- ईजाद रहे । रोज अजूं यः तेरा हुस्ने- खुदा-दाद रहे ।। अपनी तकदीरमें लक्खीथी जो सहरा गर्दी । कैसो वामिक की तरह खानुमां बर्बाद रहे ।। खूनका लुत्फ़ मेरे उस्को चखाते रहना । तेग हल्कूम पै हरदम मेरे जल्लाद रहे । लब तलक आए न फरयाद न हो शोरो-फुग़ाँ । यारका पासे नज़ाकत दिले-नाशाद रहे ।। हो गिरफ्तार न उल्फत में अमानत कोई। सर्वसां इस चमने-दहर में आबाद रहे ॥ एक सौ इकतालीस ग़ज़लआगा । किस्से परियोंके मुझे याद हैं अच्छे अच्छे । बन्द शीशेमें परी-जाद हैं अच्छे अच्छे । |
इन दिनों टीवी एक्ट्रेस हिना आए दिन चर्चाओं में रहती हैं. ऐसे में हिना को 'कांस 2019' में भी डेब्यू करने का मौका मिल गया. और वह उसके बाद और चर्चाओं में रहीं. ऐसे में हिना अपनी दूसरी फिल्म 'द लास्ट विश' की भी शूटिंग शुरू कर चुकीं हैं और वह दो फिल्मों में नजर आने वाली हैं. वहीं इतने बिजी शेड्यूल से समय निकाल कर हिना ने अपने कुछ और भी सपनों को साकार कर लिया है. जी हाँ, दरअसल हिना ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो साझा की है जिसमें वो 'ऑस्कर अवार्ड' को देख कर अपनी खुशी पर काबू नहीं कर पा रही हैं.
आप देख सकते हैं वह कितनी खुश हैं. हिना अपनी यूरोप ट्रिप के दौरान मार्क बस्केट से मुलाकात करने गईं. ऐसे में आप जानते ही होंगे कि मार्क बस्केट हॉलीवुड के ऑस्कर विनर प्रड्यूसर हैं और मार्क से मुलाकात के दौरान हिना को उनके 'ऑस्कर अवार्ड' को छूने का मौका मिला. वहीं अपने इस खास पर को हिना ने सोशल मीडिया पर शेयर किया है. जी हाँ, आप देख सकते हैं इस वीडियो को शेयर करते हुए हिना ने लिखा, 'मार्क एक बहुत ही विनम्र इंसान हैं जो कि हमारे लिए सफलता का एक जीता जागता उदाहरण भी हैं. मार्क आपने मुझको अपना ऑस्कर हाथ में पकड़ने के लिए दिया. इसके लिए मैं आपका शुक्रिया अदा करना चाहूंगी. 'इसके आगे हिना ने लिखा, ऑस्कर हाथ में लेने के बाद अब मुझको लग रहा है कि एक दिन मैं भी अपने लिए इस अवार्ड को जीत लूंगी. '
इतना ही नहीं अपनी पोस्ट में हिना ने मार्क के साथ काम करने की इच्छा भी जताई है. ' आप सभी को बता दें कि हिना की पोस्ट को देख कर कहना गलत नहीं होगा, हिना ने अभी तो अपने सफर की शुरूआत की है और वो आगे चल कर ऑस्कर विनर बनने का ख्वाब देख रही हैं. हमारी दुआ है कि हिना का यह सपना जल्द पूरा हो. .
| इन दिनों टीवी एक्ट्रेस हिना आए दिन चर्चाओं में रहती हैं. ऐसे में हिना को 'कांस दो हज़ार उन्नीस' में भी डेब्यू करने का मौका मिल गया. और वह उसके बाद और चर्चाओं में रहीं. ऐसे में हिना अपनी दूसरी फिल्म 'द लास्ट विश' की भी शूटिंग शुरू कर चुकीं हैं और वह दो फिल्मों में नजर आने वाली हैं. वहीं इतने बिजी शेड्यूल से समय निकाल कर हिना ने अपने कुछ और भी सपनों को साकार कर लिया है. जी हाँ, दरअसल हिना ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो साझा की है जिसमें वो 'ऑस्कर अवार्ड' को देख कर अपनी खुशी पर काबू नहीं कर पा रही हैं. आप देख सकते हैं वह कितनी खुश हैं. हिना अपनी यूरोप ट्रिप के दौरान मार्क बस्केट से मुलाकात करने गईं. ऐसे में आप जानते ही होंगे कि मार्क बस्केट हॉलीवुड के ऑस्कर विनर प्रड्यूसर हैं और मार्क से मुलाकात के दौरान हिना को उनके 'ऑस्कर अवार्ड' को छूने का मौका मिला. वहीं अपने इस खास पर को हिना ने सोशल मीडिया पर शेयर किया है. जी हाँ, आप देख सकते हैं इस वीडियो को शेयर करते हुए हिना ने लिखा, 'मार्क एक बहुत ही विनम्र इंसान हैं जो कि हमारे लिए सफलता का एक जीता जागता उदाहरण भी हैं. मार्क आपने मुझको अपना ऑस्कर हाथ में पकड़ने के लिए दिया. इसके लिए मैं आपका शुक्रिया अदा करना चाहूंगी. 'इसके आगे हिना ने लिखा, ऑस्कर हाथ में लेने के बाद अब मुझको लग रहा है कि एक दिन मैं भी अपने लिए इस अवार्ड को जीत लूंगी. ' इतना ही नहीं अपनी पोस्ट में हिना ने मार्क के साथ काम करने की इच्छा भी जताई है. ' आप सभी को बता दें कि हिना की पोस्ट को देख कर कहना गलत नहीं होगा, हिना ने अभी तो अपने सफर की शुरूआत की है और वो आगे चल कर ऑस्कर विनर बनने का ख्वाब देख रही हैं. हमारी दुआ है कि हिना का यह सपना जल्द पूरा हो. . |
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