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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
Toyota Innova Crysta भारतीय बाजार में काफी लोकप्रिय MPV है। काफी लंबे समय से भारतीय बाजार में होने के बावजूद इसकी खूब बिक्री हो रही है। यह आरामदायक है, इसमें पर्याप्त जगह है, विश्वसनीय है और रखरखाव की लागत काफी कम है। लोग Innova को अनुकूलित कर रहे हैं और हमने उनमें से कुछ को अपनी वेबसाइट पर भी दिखाया है। यहां, हमारे पास Innova Crysta का एक और उदाहरण है जिसमें दुकान ने बेस वेरिएंट लिया है और इसे टॉप-एंड वेरिएंट की तरह दिखने के लिए संशोधित किया है। वीडियो को Autorounders द्वारा YouTube पर अपलोड किया गया है और संशोधन भी उनके द्वारा किया गया है। Innova Crysta में लगे सीट कवर इन-हाउस बनाए गए हैं। सीट कवर के लिए सामग्री वाहन के मालिक द्वारा चुनी जाती है। प्रस्ताव पर अन्य सामग्री और रंग भी हैं। सीटों को हटाकर सीट कवर लगाए जाते हैं। डोर पैड और डैशबोर्ड के कुछ इंसर्ट भी हटा दिए गए थे क्योंकि ग्राहक लकड़ी के इंसर्ट चाहते थे। इसके अलावा, स्टॉक रूफ लाइनर को भी हटा दिया गया था क्योंकि ग्राहक गैलेक्सी रूफ लाइनर चाहता था जिसे हम आमतौर पर Rolls Royce वाहनों पर देखते हैं। दुकान ने आफ्टर-मार्केट HID फॉग लैंप भी लगाए हैं जो हाई बीम और लो बीम के साथ आते हैं। विंडो बेल्टलाइन क्रोम में समाप्त हो गई है और डोर विज़र्स लगाए गए हैं। उन्होंने पर्दे भी लगाए जिन्हें क्षैतिज रूप से खिसकाया जा सकता है। ये केबिन के तापमान को कम रखने में मदद करते हैं। स्टीयरिंग व्हील को भी असली लेदर से लपेटा गया है और ऊपर के हिस्से पर लकड़ी का इंसर्ट दिया गया है। सेंटर कंसोल पर अपहोल्स्ट्री को बदला गया है। सफेद स्टिचिंग के साथ गियर नॉब और हैंड ब्रेक को भी लैदर में लपेटा गया है। कुल मिलाकर दुकान द्वारा किया गया काम काफी अच्छा लग रहा है। एक्सटीरियर में ज्यादा बदलाव नहीं किए गए हैं लेकिन इंटीरियर रेगुलर Innova के मुकाबले एक बड़ा अपग्रेड है। इसमें बैठना बहुत अधिक प्रीमियम और अच्छा लगता है। Innova 17.30 लाख रुपये एक्स-शोरूम से शुरू होती है। और 25.32 लाख रुपये एक्स-शोरूम तक जाती है। इसका कोई सीधा प्रतिद्वंदी नहीं है लेकिन यह Kia Carens, Mahindra XUV700, Mahindra Marazzo, Tata Safari, Hyundai Alcazar और MG Hector Plus को टक्कर देती है। Toyota Innova Crysta के साथ दो इंजन विकल्प पेश करती है। इसमें 2.7-लीटर पेट्रोल और 2.4-लीटर डीजल इंजन है। पेट्रोल इंजन 166 पीएस की अधिकतम पावर और 245 एनएम की पीक टॉर्क पैदा करता है। डीजल इंजन 150 पीएस की अधिकतम शक्ति और 360 एनएम का पीक टॉर्क पैदा करता है। दोनों इंजनों को 5-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स या 6-स्पीड टॉर्क कन्वर्टर ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन के साथ पेश किया जाता है। Toyota Innova के पांच वेरिएंट उपलब्ध हैं। इसमें G, G+, GX, VX और ZX है। आप MPV को 7-सीटर या 8-सीटर के रूप में प्राप्त कर सकते हैं। 7-सीटर बीच की पंक्ति में बेंच सीट के बजाय दो कैप्टन कुर्सियों के साथ आता है।
Toyota Innova Crysta भारतीय बाजार में काफी लोकप्रिय MPV है। काफी लंबे समय से भारतीय बाजार में होने के बावजूद इसकी खूब बिक्री हो रही है। यह आरामदायक है, इसमें पर्याप्त जगह है, विश्वसनीय है और रखरखाव की लागत काफी कम है। लोग Innova को अनुकूलित कर रहे हैं और हमने उनमें से कुछ को अपनी वेबसाइट पर भी दिखाया है। यहां, हमारे पास Innova Crysta का एक और उदाहरण है जिसमें दुकान ने बेस वेरिएंट लिया है और इसे टॉप-एंड वेरिएंट की तरह दिखने के लिए संशोधित किया है। वीडियो को Autorounders द्वारा YouTube पर अपलोड किया गया है और संशोधन भी उनके द्वारा किया गया है। Innova Crysta में लगे सीट कवर इन-हाउस बनाए गए हैं। सीट कवर के लिए सामग्री वाहन के मालिक द्वारा चुनी जाती है। प्रस्ताव पर अन्य सामग्री और रंग भी हैं। सीटों को हटाकर सीट कवर लगाए जाते हैं। डोर पैड और डैशबोर्ड के कुछ इंसर्ट भी हटा दिए गए थे क्योंकि ग्राहक लकड़ी के इंसर्ट चाहते थे। इसके अलावा, स्टॉक रूफ लाइनर को भी हटा दिया गया था क्योंकि ग्राहक गैलेक्सी रूफ लाइनर चाहता था जिसे हम आमतौर पर Rolls Royce वाहनों पर देखते हैं। दुकान ने आफ्टर-मार्केट HID फॉग लैंप भी लगाए हैं जो हाई बीम और लो बीम के साथ आते हैं। विंडो बेल्टलाइन क्रोम में समाप्त हो गई है और डोर विज़र्स लगाए गए हैं। उन्होंने पर्दे भी लगाए जिन्हें क्षैतिज रूप से खिसकाया जा सकता है। ये केबिन के तापमान को कम रखने में मदद करते हैं। स्टीयरिंग व्हील को भी असली लेदर से लपेटा गया है और ऊपर के हिस्से पर लकड़ी का इंसर्ट दिया गया है। सेंटर कंसोल पर अपहोल्स्ट्री को बदला गया है। सफेद स्टिचिंग के साथ गियर नॉब और हैंड ब्रेक को भी लैदर में लपेटा गया है। कुल मिलाकर दुकान द्वारा किया गया काम काफी अच्छा लग रहा है। एक्सटीरियर में ज्यादा बदलाव नहीं किए गए हैं लेकिन इंटीरियर रेगुलर Innova के मुकाबले एक बड़ा अपग्रेड है। इसमें बैठना बहुत अधिक प्रीमियम और अच्छा लगता है। Innova सत्रह.तीस लाख रुपये एक्स-शोरूम से शुरू होती है। और पच्चीस.बत्तीस लाख रुपये एक्स-शोरूम तक जाती है। इसका कोई सीधा प्रतिद्वंदी नहीं है लेकिन यह Kia Carens, Mahindra XUVसात सौ, Mahindra Marazzo, Tata Safari, Hyundai Alcazar और MG Hector Plus को टक्कर देती है। Toyota Innova Crysta के साथ दो इंजन विकल्प पेश करती है। इसमें दो.सात-लीटर पेट्रोल और दो.चार-लीटर डीजल इंजन है। पेट्रोल इंजन एक सौ छयासठ पीएस की अधिकतम पावर और दो सौ पैंतालीस एनएम की पीक टॉर्क पैदा करता है। डीजल इंजन एक सौ पचास पीएस की अधिकतम शक्ति और तीन सौ साठ एनएम का पीक टॉर्क पैदा करता है। दोनों इंजनों को पाँच-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स या छः-स्पीड टॉर्क कन्वर्टर ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन के साथ पेश किया जाता है। Toyota Innova के पांच वेरिएंट उपलब्ध हैं। इसमें G, G+, GX, VX और ZX है। आप MPV को सात-सीटर या आठ-सीटर के रूप में प्राप्त कर सकते हैं। सात-सीटर बीच की पंक्ति में बेंच सीट के बजाय दो कैप्टन कुर्सियों के साथ आता है।
दोस्तों बॉलीवुड फिल्म जगत के जाने माने लेखक और गीतकार जावेद अख्तर ने 17 जनवरी को अपना 75 वा जन्मदिन मनाया है इस मौके पर जावेद अख्तर ने पार्टी का आयोजन किया। 16 जनवरी को जो पार्टी रखी गई थी उसमें पहुंचे सभी सितारे रेट्रो लुक में नजर आए थे। अब एक अन्य पार्टी में बॉलीवुड के कई बड़े सितारे ग्लैमरस अंदाज में पहुंचे। बता दे की पार्टी का आयोजन मुंबई स्थित फाइव स्टार होटल ताज लैंड्स एंड में किया गया। जहां शाहरुख से लेकर दीपिका पादुकोण तक सभी बड़े सितारे पार्टी में पहुंचे थे। लेकिन पार्टी में सभी की निगाहें रेखा पर टिक गईं। हमेशा की तरह रेखा इस पार्टी में भी साडी में नज़र आयी लेकिन इस बार गोल्डन कलर की साड़ी की जगह रेखा ने ग्रीन कलर की साड़ी पहनी थी। रेखा हमेशा की तरह बेहद खूबसूरत लग रही थीं। पार्टी में शाहरुख पत्नी गौरी के साथ पहुंचे थे। दोनों ने मैचिंग ड्रेस पहनी। जहां शाहरुख ने ब्लैक सूट पहना था वहीं गौरी ने ब्लैक एंड व्हाइट कलर की ड्रेस कैरी की।वही अभिनेत्री दीपिका पादुकोण ने व्हाइट कलर की शिमरी साड़ी कैरी की। लाइट मेकअप के साथ दीपिका ने हैवी इयरिंग्स पहनी थी। और करण जौहर भी कुछ खास अंदाज में नजर आए। वही जामे माने बिज़नेस मैन मुकेश अंबानी अपने बेटे आकाश अंबानी और बहू श्लोका मेहता के साथ पोज देते हुए। मुकेश अंबानी और आकाश अंबानी फॉर्मल लुक में थे। वहीं श्लोका ने फ्लोरल प्रिंट गाउन पहना था। माधुरी दीक्षित पति श्रीराम नेने के साथ। माधुरी ने इस दौरान रेड कलर का हैवी वर्क सूट पहना था। जावेद अख्तर की इस पार्टी में अभिनेता ऋतिक रोशन अपने पिता राकेश रोशन और मां पिंकी रोशन के साथ पहुंचे। इसके अलावा कटरीना कैफ और अर्जुन कपूर हाथ पकड़े एक साथ पोज़ देते नजर आए। कटरीना ने व्हाइट कलर की ड्रेस पहनी थी। साथ ही जावेद अख्तर की बेटी और निर्देशक जोया अख्तर पार्टी में नज़र आयी। साथ ही गुज़रे ज़माने की जानी मानी अभिनेत्री वहीदा रहमान, जावेद अख्तर के बेटे फरहान अख्तर भी पार्टी में नज़र आये । जावेद अख्तर की बर्थडे पार्टी पहुंचे अम्बानी, शाहरुख़, सहित कई बड़ी हस्तिया, रेखा ने फिर लूट ली महफ़िल! दोस्तों बॉलीवुड फिल्म जगत के जाने माने लेखक और गीतकार जावेद अख्तर ने 17 जनवरी को अपना 75 वा जन्मदिन मनाया है इस मौके पर जावेद अख्तर ने पार्टी का आयोजन किया। 16 जनवरी को जो पार्टी रखी गई थी उसमें पहुंचे सभी सितारे रेट्रो लुक में नजर आए थे। अब एक अन्य पार्टी में बॉलीवुड के कई बड़े सितारे ग्लैमरस अंदाज में पहुंचे।
दोस्तों बॉलीवुड फिल्म जगत के जाने माने लेखक और गीतकार जावेद अख्तर ने सत्रह जनवरी को अपना पचहत्तर वा जन्मदिन मनाया है इस मौके पर जावेद अख्तर ने पार्टी का आयोजन किया। सोलह जनवरी को जो पार्टी रखी गई थी उसमें पहुंचे सभी सितारे रेट्रो लुक में नजर आए थे। अब एक अन्य पार्टी में बॉलीवुड के कई बड़े सितारे ग्लैमरस अंदाज में पहुंचे। बता दे की पार्टी का आयोजन मुंबई स्थित फाइव स्टार होटल ताज लैंड्स एंड में किया गया। जहां शाहरुख से लेकर दीपिका पादुकोण तक सभी बड़े सितारे पार्टी में पहुंचे थे। लेकिन पार्टी में सभी की निगाहें रेखा पर टिक गईं। हमेशा की तरह रेखा इस पार्टी में भी साडी में नज़र आयी लेकिन इस बार गोल्डन कलर की साड़ी की जगह रेखा ने ग्रीन कलर की साड़ी पहनी थी। रेखा हमेशा की तरह बेहद खूबसूरत लग रही थीं। पार्टी में शाहरुख पत्नी गौरी के साथ पहुंचे थे। दोनों ने मैचिंग ड्रेस पहनी। जहां शाहरुख ने ब्लैक सूट पहना था वहीं गौरी ने ब्लैक एंड व्हाइट कलर की ड्रेस कैरी की।वही अभिनेत्री दीपिका पादुकोण ने व्हाइट कलर की शिमरी साड़ी कैरी की। लाइट मेकअप के साथ दीपिका ने हैवी इयरिंग्स पहनी थी। और करण जौहर भी कुछ खास अंदाज में नजर आए। वही जामे माने बिज़नेस मैन मुकेश अंबानी अपने बेटे आकाश अंबानी और बहू श्लोका मेहता के साथ पोज देते हुए। मुकेश अंबानी और आकाश अंबानी फॉर्मल लुक में थे। वहीं श्लोका ने फ्लोरल प्रिंट गाउन पहना था। माधुरी दीक्षित पति श्रीराम नेने के साथ। माधुरी ने इस दौरान रेड कलर का हैवी वर्क सूट पहना था। जावेद अख्तर की इस पार्टी में अभिनेता ऋतिक रोशन अपने पिता राकेश रोशन और मां पिंकी रोशन के साथ पहुंचे। इसके अलावा कटरीना कैफ और अर्जुन कपूर हाथ पकड़े एक साथ पोज़ देते नजर आए। कटरीना ने व्हाइट कलर की ड्रेस पहनी थी। साथ ही जावेद अख्तर की बेटी और निर्देशक जोया अख्तर पार्टी में नज़र आयी। साथ ही गुज़रे ज़माने की जानी मानी अभिनेत्री वहीदा रहमान, जावेद अख्तर के बेटे फरहान अख्तर भी पार्टी में नज़र आये । जावेद अख्तर की बर्थडे पार्टी पहुंचे अम्बानी, शाहरुख़, सहित कई बड़ी हस्तिया, रेखा ने फिर लूट ली महफ़िल! दोस्तों बॉलीवुड फिल्म जगत के जाने माने लेखक और गीतकार जावेद अख्तर ने सत्रह जनवरी को अपना पचहत्तर वा जन्मदिन मनाया है इस मौके पर जावेद अख्तर ने पार्टी का आयोजन किया। सोलह जनवरी को जो पार्टी रखी गई थी उसमें पहुंचे सभी सितारे रेट्रो लुक में नजर आए थे। अब एक अन्य पार्टी में बॉलीवुड के कई बड़े सितारे ग्लैमरस अंदाज में पहुंचे।
- अंकिता लोखंडे आखिरकार बॉयफ्रेंड विकी जैन से कर रहीं शादी। - एक्ट्रेस के दोस्तों को भेजा जा रहा है निमंत्रण। - 12 दिसंबर को होगा एक्ट्रेस का मेहंदी समारोह। मुंबईः अंकिता लोखंडे अगले महीने अपने बॉयफ्रेंड विकास जैन के साथ शादी के बंधन में बंधने के लिए तैयार हैं। अब रिपोर्ट्स के हवाले से उनकी शादी के कुछ खास विवरण सामने आए हैं। यह कपल 14 दिसंबर को विवाह बंधन में बंध जाएगा। तीन दिन तक चलने वाला यह रिश्ता शादी से पहले की रस्मों से परिपूर्ण होगा। जोड़े के एक करीबी सूत्र ने बताया, 'शादी का निमंत्रण उनके प्रियजनों के साथ साझा कर दिया गया है। मेहंदी समारोह 12 दिसंबर को होगा और उसके बाद शाम को उनकी सगाई होगी। 13 दिसंबर को कपल की हल्दी सेरेमनी होगी और शाम को संगीत होगा। शादी अगले दिन सुबह होगी और शाम को रिसेप्शन होगा। ' अभिनेत्री ने सभी रीति-रिवाजों के विषयों पर सावधानीपूर्वक काम किया है। स्रोत ने खुलासा किया, 'जहां मेहंदी की थीम उज्ज्वल पॉप और जीवंत पोशाक है, सगाई सभी ग्लिट्ज और ग्लैम होगी। हल्दी समारोह एक पीले रंग की थीम वाला उत्सव होगा और संगीत इंडो-वेस्टर्न होगा। ' अंकिता और विक्की पिछले साढ़े तीन साल से स्थिर चल रहे हैं। इस कपल ने हमेशा मुश्किल समय में एक-दूसरे का साथ दिया है। एक्ट्रेस सोशल मीडिया पर अपने रोमांटिक पलों की झलकियां शेयर करती रहती हैं। जब विक्की ने उन्हें एक-दूसरे के खास दिनों, रोमांटिक ट्रिप और अब अपनी शादी की तैयारियों का जश्न मनाने का प्रस्ताव दिया, तब से अंकिता अपने प्रशंसकों को अपडेट रख रही हैं। इससे पहले आई रिपोर्ट्स के अनुसार, अंकिता मुंबई में ही शादी करेंगी। दोनों की शादी मुंबई के एक फाइव स्टार होटल में होगी। दरअसल कपल अपनी शादी के लिए ज्यादा ट्रैवल नहीं करना चाहता है। अंकिता लोखंडे और विक्की जैन ने अपने करीबी दोस्तों और रिश्तेदारों को सूचित कर दिया गया है।
- अंकिता लोखंडे आखिरकार बॉयफ्रेंड विकी जैन से कर रहीं शादी। - एक्ट्रेस के दोस्तों को भेजा जा रहा है निमंत्रण। - बारह दिसंबर को होगा एक्ट्रेस का मेहंदी समारोह। मुंबईः अंकिता लोखंडे अगले महीने अपने बॉयफ्रेंड विकास जैन के साथ शादी के बंधन में बंधने के लिए तैयार हैं। अब रिपोर्ट्स के हवाले से उनकी शादी के कुछ खास विवरण सामने आए हैं। यह कपल चौदह दिसंबर को विवाह बंधन में बंध जाएगा। तीन दिन तक चलने वाला यह रिश्ता शादी से पहले की रस्मों से परिपूर्ण होगा। जोड़े के एक करीबी सूत्र ने बताया, 'शादी का निमंत्रण उनके प्रियजनों के साथ साझा कर दिया गया है। मेहंदी समारोह बारह दिसंबर को होगा और उसके बाद शाम को उनकी सगाई होगी। तेरह दिसंबर को कपल की हल्दी सेरेमनी होगी और शाम को संगीत होगा। शादी अगले दिन सुबह होगी और शाम को रिसेप्शन होगा। ' अभिनेत्री ने सभी रीति-रिवाजों के विषयों पर सावधानीपूर्वक काम किया है। स्रोत ने खुलासा किया, 'जहां मेहंदी की थीम उज्ज्वल पॉप और जीवंत पोशाक है, सगाई सभी ग्लिट्ज और ग्लैम होगी। हल्दी समारोह एक पीले रंग की थीम वाला उत्सव होगा और संगीत इंडो-वेस्टर्न होगा। ' अंकिता और विक्की पिछले साढ़े तीन साल से स्थिर चल रहे हैं। इस कपल ने हमेशा मुश्किल समय में एक-दूसरे का साथ दिया है। एक्ट्रेस सोशल मीडिया पर अपने रोमांटिक पलों की झलकियां शेयर करती रहती हैं। जब विक्की ने उन्हें एक-दूसरे के खास दिनों, रोमांटिक ट्रिप और अब अपनी शादी की तैयारियों का जश्न मनाने का प्रस्ताव दिया, तब से अंकिता अपने प्रशंसकों को अपडेट रख रही हैं। इससे पहले आई रिपोर्ट्स के अनुसार, अंकिता मुंबई में ही शादी करेंगी। दोनों की शादी मुंबई के एक फाइव स्टार होटल में होगी। दरअसल कपल अपनी शादी के लिए ज्यादा ट्रैवल नहीं करना चाहता है। अंकिता लोखंडे और विक्की जैन ने अपने करीबी दोस्तों और रिश्तेदारों को सूचित कर दिया गया है।
- 7 hrs ago राम चरण की सुपरहिट फिल्म 'आरआरआर' का जल्द आएगा सीक्वल, परंतु राजामौली नहीं होगे डायरेक्टर! - 7 hrs ago Shahrukh Khan की 'जवान' प्रीव्यू पर सलमान खान का शानदार रिएक्शन, बोले, "पठान जवान बन गया, वाह. . " Don't Miss! - News विदेश मंत्री बनने के बाद कितनी बढ़ी एस जयशंकर और उनकी पत्नी की संपत्ति? - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? बॉलीवुड अभिनेत्री कैटरीना कैफ ने गुरुवार को घर में क्वारंटीन होकर ही अपना जन्मदिन सेलिब्रेट किया है। इस मौके पर बॉलीवुड के सभी सितारों ने उन्हें सोशल मीडिया पर खास बधाई भी दी है। जहां सलमान खान, करीना कपूर ने कैट के साथ अपनी तस्वीरें भी शेयर की हैं। कैटरीना ने केक के साथ अपनी तस्वीर शेयर करते हुए लिखा- - केक और घर, आपकी शुभकामनाओं के लिए शुक्रिया. . जाहिर है लॉकडाउन की वजह से कैटरीना का यह जन्मदिन बाकी सालों से थोड़ा अलग रहा। जहां उन्होंने किसी फिल्म सेट या पार्टी में ही. . बल्कि घर पर रहकर ही सेलिब्रेट किया। कैट लॉकडाउन में अपनी इसाबेल के साथ हैं। कैटरीना कैफ के जन्मदिन पर बॉलीवुड सितारों ने उन्हें दिल खोलकर शुभकामनाएं दी। फिलहाल कैटरीना घर पर ही आने वाली फिल्मों की तैयारी कर रही हैं। अक्षय कुमार के साथ उनकी फिल्म सूर्यवंशी लॉकडाउन की वजह से अटकी पड़ी है। वहीं, अली अब्बास जफर के कैट के सुपरहीरो फिल्म की चर्चा है। ईद, क्रिसमस,
- सात hrs ago राम चरण की सुपरहिट फिल्म 'आरआरआर' का जल्द आएगा सीक्वल, परंतु राजामौली नहीं होगे डायरेक्टर! - सात hrs ago Shahrukh Khan की 'जवान' प्रीव्यू पर सलमान खान का शानदार रिएक्शन, बोले, "पठान जवान बन गया, वाह. . " Don't Miss! - News विदेश मंत्री बनने के बाद कितनी बढ़ी एस जयशंकर और उनकी पत्नी की संपत्ति? - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? बॉलीवुड अभिनेत्री कैटरीना कैफ ने गुरुवार को घर में क्वारंटीन होकर ही अपना जन्मदिन सेलिब्रेट किया है। इस मौके पर बॉलीवुड के सभी सितारों ने उन्हें सोशल मीडिया पर खास बधाई भी दी है। जहां सलमान खान, करीना कपूर ने कैट के साथ अपनी तस्वीरें भी शेयर की हैं। कैटरीना ने केक के साथ अपनी तस्वीर शेयर करते हुए लिखा- - केक और घर, आपकी शुभकामनाओं के लिए शुक्रिया. . जाहिर है लॉकडाउन की वजह से कैटरीना का यह जन्मदिन बाकी सालों से थोड़ा अलग रहा। जहां उन्होंने किसी फिल्म सेट या पार्टी में ही. . बल्कि घर पर रहकर ही सेलिब्रेट किया। कैट लॉकडाउन में अपनी इसाबेल के साथ हैं। कैटरीना कैफ के जन्मदिन पर बॉलीवुड सितारों ने उन्हें दिल खोलकर शुभकामनाएं दी। फिलहाल कैटरीना घर पर ही आने वाली फिल्मों की तैयारी कर रही हैं। अक्षय कुमार के साथ उनकी फिल्म सूर्यवंशी लॉकडाउन की वजह से अटकी पड़ी है। वहीं, अली अब्बास जफर के कैट के सुपरहीरो फिल्म की चर्चा है। ईद, क्रिसमस,
तथा उसके नीचे होने पर उसमें और कमी की आशा करते हैं, तो समस्त सिद्धान्त उल्टा हो जाता है । 217 (5) यह सिद्धान्त असफल हो जाता है जबकि मन्दी गौर तेजी की स्थितियों में इसके प्रयोग पर विचार किया जाता है ( the theory fails when its applicability is considered in the situations of depression and boom) । यह सिद्धान्त बताता है कि यदि तरलता पसन्दगी ऊँची है तो व्याज दर भी ऊंची होगी । मन्दी के समय में तरलता-पसन्दगी बहुत ऊँची होती है (गिरती हुई कीमतों के कारण ), परन्तु ब्याज की दर ऊँची नहीं होती है बल्कि बहुत नीची होती है। मन्दी के समय में विनियोग के अवसर लगभग बन्द हो जाते हैं (क्योकि कीमतें बहुत नीची होती हैं) और व्यक्तियों की द्रव्य को तरल रूप में रखने की प्रवृत्ति बहुत तीव्र हो जाती है । गतः यह सिद्धान्त मन्दी की स्थिति में असफल हो जाता है क्योकि लोगों की तरलता-परान्दगी तो बहुत ऊँची होती है जबकि ब्याज की दर बहुत नीची होती है। पुनः, यह सिद्धान्त बताता है कि यदि तरलता पसन्दगी नीची है तो ब्याज की दर भी नीची होगी। तेजी के समय मे तरलता-पसन्दगी बहुत नीची होती है, परन्तु ब्याज की दर बहुत ऊँची होती है। इस प्रकार से यह सिद्धान्त तेजी की स्थिति में भी लागू नहीं होता है । ( 6 ) यह सिद्धान्त केवल अल्पकाल में ब्याज निर्धारण को बताता है अर्थात् यह केवल 'तात्कालिक फोटोग्राफिक चित्र' (instantaneous photographic picture ) प्रस्तुत करता है। यह सिद्धान्त ब्याज निर्धारण की दीर्घकालीन शक्तियों पर प्रकाश नही डालता अर्थात् यह 'सिनेमा-सम्बन्धी चित्र' (cinematographic picture ) को प्रस्तुत नहीं करता। पूंजी-विनियोग के लिए दीर्घकालीन ब्याज दर अधिक महत्त्वपूर्ण है अपेक्षाकृत अल्पकालीन ब्याज दर के (7) तरलता-जाल (liquidity trap ) के विचार का वास्तविक जगत में कोई व्यावहारिक महत्व नहीं है, मुख्यतया दीर्घकालीन दृष्टि से अमरीका में 1930 को महान मन्दी के ठीक बाद के वर्षों में तरलता-जाल का अस्तित्व ( existence) एक वास्तविकता ( reality) लगती थी न कि एक सम्भावना (possibility ) । [ ध्यान रहे कि केंज ने अपनी पुस्तक General theory सन् 1936 में लिखी थी 1] परन्तु आधुनिक युग में तरलता-जाल का विचार एक सिरे की स्थिति है; ऐसी स्थिति का वास्तविक जगत में पाया जाना बहुत ही कठिन है या असम्भव है। वास्तव में तरलता-जाल केवल एक अल्पकालीन सैद्धान्तिक विचार है। "तरलता-जाल मुख्यतया एक अल्पकालीन, प्रावैगिक, सैद्धान्तिक विचार है जो कि (i) दीर्घकालीन स्पॅतिक माडल के साथ मेल नहीं खाता, परन्तु (ii) यह विचार अल्पकालीन स्थितियों में एक महत्त्वपूर्ण पार्ट अदा कर सकता है । "19 **The liquidity preference curve-and hence the whole of Keynes' theory depends upon people expecting a change in the rate of interest and in the price of bonds. If people do not in fact expect the rate of interest to change, there is nothing left of the liquidity preference curve. As importantly, if people expect the rate of interest to rise further when it is high, and to fall when it is low, the whole theory would be reversed." इसी बात को मजाक मे D. Robertson इन शब्दों में व्यक्त करते हैं : According to Keynes theory, as Robertson puts is, "the rate of interest is what it is because it is expected to be other than it is. But if it is not expected to be other than it is, there is nothing to tell us why it is what it is the organ that secretes it has been amputed, but some how it still servives; a grin without a cat." "The liquidity trap is essentially a short-run, dynamic, theoretical consideration which is : (1) inconsistent with a long-run static model but (2) can perform an important role in short-run situations
तथा उसके नीचे होने पर उसमें और कमी की आशा करते हैं, तो समस्त सिद्धान्त उल्टा हो जाता है । दो सौ सत्रह यह सिद्धान्त असफल हो जाता है जबकि मन्दी गौर तेजी की स्थितियों में इसके प्रयोग पर विचार किया जाता है । यह सिद्धान्त बताता है कि यदि तरलता पसन्दगी ऊँची है तो व्याज दर भी ऊंची होगी । मन्दी के समय में तरलता-पसन्दगी बहुत ऊँची होती है , परन्तु ब्याज की दर ऊँची नहीं होती है बल्कि बहुत नीची होती है। मन्दी के समय में विनियोग के अवसर लगभग बन्द हो जाते हैं और व्यक्तियों की द्रव्य को तरल रूप में रखने की प्रवृत्ति बहुत तीव्र हो जाती है । गतः यह सिद्धान्त मन्दी की स्थिति में असफल हो जाता है क्योकि लोगों की तरलता-परान्दगी तो बहुत ऊँची होती है जबकि ब्याज की दर बहुत नीची होती है। पुनः, यह सिद्धान्त बताता है कि यदि तरलता पसन्दगी नीची है तो ब्याज की दर भी नीची होगी। तेजी के समय मे तरलता-पसन्दगी बहुत नीची होती है, परन्तु ब्याज की दर बहुत ऊँची होती है। इस प्रकार से यह सिद्धान्त तेजी की स्थिति में भी लागू नहीं होता है । यह सिद्धान्त केवल अल्पकाल में ब्याज निर्धारण को बताता है अर्थात् यह केवल 'तात्कालिक फोटोग्राफिक चित्र' प्रस्तुत करता है। यह सिद्धान्त ब्याज निर्धारण की दीर्घकालीन शक्तियों पर प्रकाश नही डालता अर्थात् यह 'सिनेमा-सम्बन्धी चित्र' को प्रस्तुत नहीं करता। पूंजी-विनियोग के लिए दीर्घकालीन ब्याज दर अधिक महत्त्वपूर्ण है अपेक्षाकृत अल्पकालीन ब्याज दर के तरलता-जाल के विचार का वास्तविक जगत में कोई व्यावहारिक महत्व नहीं है, मुख्यतया दीर्घकालीन दृष्टि से अमरीका में एक हज़ार नौ सौ तीस को महान मन्दी के ठीक बाद के वर्षों में तरलता-जाल का अस्तित्व एक वास्तविकता लगती थी न कि एक सम्भावना । [ ध्यान रहे कि केंज ने अपनी पुस्तक General theory सन् एक हज़ार नौ सौ छत्तीस में लिखी थी एक] परन्तु आधुनिक युग में तरलता-जाल का विचार एक सिरे की स्थिति है; ऐसी स्थिति का वास्तविक जगत में पाया जाना बहुत ही कठिन है या असम्भव है। वास्तव में तरलता-जाल केवल एक अल्पकालीन सैद्धान्तिक विचार है। "तरलता-जाल मुख्यतया एक अल्पकालीन, प्रावैगिक, सैद्धान्तिक विचार है जो कि दीर्घकालीन स्पॅतिक माडल के साथ मेल नहीं खाता, परन्तु यह विचार अल्पकालीन स्थितियों में एक महत्त्वपूर्ण पार्ट अदा कर सकता है । "उन्नीस **The liquidity preference curve-and hence the whole of Keynes' theory depends upon people expecting a change in the rate of interest and in the price of bonds. If people do not in fact expect the rate of interest to change, there is nothing left of the liquidity preference curve. As importantly, if people expect the rate of interest to rise further when it is high, and to fall when it is low, the whole theory would be reversed." इसी बात को मजाक मे D. Robertson इन शब्दों में व्यक्त करते हैं : According to Keynes theory, as Robertson puts is, "the rate of interest is what it is because it is expected to be other than it is. But if it is not expected to be other than it is, there is nothing to tell us why it is what it is the organ that secretes it has been amputed, but some how it still servives; a grin without a cat." "The liquidity trap is essentially a short-run, dynamic, theoretical consideration which is : inconsistent with a long-run static model but can perform an important role in short-run situations
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है, जिसमें भारत में विदेशी आक्रांताओं के नाम पर शहर, सड़क, इमारतों और संस्थान के नाम बदलने के लिए आयोग बनाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता वकील अश्विनी उपाध्याय ने अपनी याचिका में हजार से ज्यादा नामों को हवाला दिया है। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 21, 25 और 29 का हवाला देते हुए रिनेमिंग कमीशन बनाने का आदेश जारी करने की अपील की गई है और ऐतिहासिक गलतियों के सुधार की भी बात कही गई है। जनहित याचिका में औरंगजेब रोड, औरंगाबाद, इलाहाबाद, राजपथ जैसे कई नामों में बदलाव कर उनका स्वदेशीकरण करने का जिक्र किया गया है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में अश्विनी उपाध्याय ने ऐतिहासिक गलतियों को ठीक करने के लिए कई कोर्ट के निर्णयों का भी उल्लेख किया है। इसके साथ ही याचिका में यह भी सवाल उठाया गया है कि क्या प्राचीन ऐतिहासिक सांस्कृतिक धार्मिक स्थलों का नाम बर्बर आक्रमणकारियों के नाम पर जारी रखना देश की संप्रभुता के विरुद्ध है? याचिका में आगे कहा गया है कि अभी हाल ही में सरकार ने राष्ट्रपति भवन में बने मुगल गार्डन का नाम बदलकर अमृत उद्यान कर दिया है, लेकिन अभी भी राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस तरह की कई जगहें हैं, जो विदेशी आक्रांताओं के नाम पर हैं। वहां नेता से लेकर न्यायाधीश तक रहते हैं। बाबर रोड, हुमायूं रोड, अकबर रोड, जहांगीर रोड, शाहजहां रोज, बहादुर शाह रोड, शेरशाह रोड, औरंगजेब रोड, सफदरगंज रोड, तुगलक रोड, लोधी रोड, जौहर रोड, चेम्सफोर्ड रोड और हैली रोड के नाम नहीं बदले गए हैं।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है, जिसमें भारत में विदेशी आक्रांताओं के नाम पर शहर, सड़क, इमारतों और संस्थान के नाम बदलने के लिए आयोग बनाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता वकील अश्विनी उपाध्याय ने अपनी याचिका में हजार से ज्यादा नामों को हवाला दिया है। याचिका में संविधान के अनुच्छेद इक्कीस, पच्चीस और उनतीस का हवाला देते हुए रिनेमिंग कमीशन बनाने का आदेश जारी करने की अपील की गई है और ऐतिहासिक गलतियों के सुधार की भी बात कही गई है। जनहित याचिका में औरंगजेब रोड, औरंगाबाद, इलाहाबाद, राजपथ जैसे कई नामों में बदलाव कर उनका स्वदेशीकरण करने का जिक्र किया गया है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में अश्विनी उपाध्याय ने ऐतिहासिक गलतियों को ठीक करने के लिए कई कोर्ट के निर्णयों का भी उल्लेख किया है। इसके साथ ही याचिका में यह भी सवाल उठाया गया है कि क्या प्राचीन ऐतिहासिक सांस्कृतिक धार्मिक स्थलों का नाम बर्बर आक्रमणकारियों के नाम पर जारी रखना देश की संप्रभुता के विरुद्ध है? याचिका में आगे कहा गया है कि अभी हाल ही में सरकार ने राष्ट्रपति भवन में बने मुगल गार्डन का नाम बदलकर अमृत उद्यान कर दिया है, लेकिन अभी भी राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस तरह की कई जगहें हैं, जो विदेशी आक्रांताओं के नाम पर हैं। वहां नेता से लेकर न्यायाधीश तक रहते हैं। बाबर रोड, हुमायूं रोड, अकबर रोड, जहांगीर रोड, शाहजहां रोज, बहादुर शाह रोड, शेरशाह रोड, औरंगजेब रोड, सफदरगंज रोड, तुगलक रोड, लोधी रोड, जौहर रोड, चेम्सफोर्ड रोड और हैली रोड के नाम नहीं बदले गए हैं।
बेंगलुरु : कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस-जेडी (एस) सरकार से दो निर्दलीय विधायकों ने गठबंधन सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया है। यह एचडी कुमारस्वामी सरकार के लिए झटका माना जा रहा है। सरकार से समर्थन वापस लेने वाले विधायकों के नाम एच नागेश और आर शंकर. नागेश मुलाबागिलू सीट से निर्दलीय विधायक हैं। वहीं, शंकर रेनेबेन्नूर विधानसभा सीट से केपीजेपी के विधायक हैं। हालांकि, इससे सरकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सरकार के पास अभी भी 118 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। निर्दलीय विधायक आर शंकर ने कहा, 'आज मकर संक्रांति है। आज के दिन हम सरकार में बदलाव चाहते हैं। सरकार सक्षम होनी चाहिए। मैं कर्नाटक सरकार से समर्थन वापस ले रहा हूं। ' इस बीच कांग्रेस ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि वह सरकार गिराने के लिए उसके विधायकों को तोड़ने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस ने कहा है कि दो विधायकों के समर्थन वापस लेने के बाद भी उसकी सरकार को अभी कोई खतरा नहीं है।
बेंगलुरु : कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस-जेडी सरकार से दो निर्दलीय विधायकों ने गठबंधन सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया है। यह एचडी कुमारस्वामी सरकार के लिए झटका माना जा रहा है। सरकार से समर्थन वापस लेने वाले विधायकों के नाम एच नागेश और आर शंकर. नागेश मुलाबागिलू सीट से निर्दलीय विधायक हैं। वहीं, शंकर रेनेबेन्नूर विधानसभा सीट से केपीजेपी के विधायक हैं। हालांकि, इससे सरकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सरकार के पास अभी भी एक सौ अट्ठारह विधायकों का समर्थन प्राप्त है। निर्दलीय विधायक आर शंकर ने कहा, 'आज मकर संक्रांति है। आज के दिन हम सरकार में बदलाव चाहते हैं। सरकार सक्षम होनी चाहिए। मैं कर्नाटक सरकार से समर्थन वापस ले रहा हूं। ' इस बीच कांग्रेस ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि वह सरकार गिराने के लिए उसके विधायकों को तोड़ने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस ने कहा है कि दो विधायकों के समर्थन वापस लेने के बाद भी उसकी सरकार को अभी कोई खतरा नहीं है।
ऑनलाइन काम आज सबसे ज्यादा ट्रेंड में हैं। पेश है इसी पर एक संक्षिप्त चर्चा. ऑनलाइन काम आज सबसे ज्यादा ट्रेंड में हैं। पेश है इसी पर एक संक्षिप्त चर्चा. Smartphone usage good habits are very uncommon these days. This is how you can nurture good phone using habits. पासवर्ड भूलना आम बात है। जानिए कैसे एक आसान लेकिन मजबूत पासवर्ड बनाना पूरी तरह से संभव है. इंटरनेट पर ज्ञान पाने के कुछ खास sites हैं। पेश हैं 5 ऐसे ही साइट्स.
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LUCKNOW(2august) संडे को गंज के माहौल में उदासी के साथ साथ प्राइड एण्ड ऑनर वाला जज्बा नजर आया। शायद इसलिए कि उनके जाने का दर्द अभी भी सबके दिलों मे ताजा है। पूर्व राष्ट्रपति ए. पी. जे अब्दुल कलाम को समर्पित गंजिंग में डिंग्निटरीज ने उनके साथ गुजारे लम्हों को शेयर किया। जिलाधिकारी राजशेखर ने कलाम साहब को याद करते हुए कहा कि मैंने उनके साथ महज ब्0 मिनट बिताए और उन लम्हों मे उनसे बहुत कुछ सीखा, देश के विकास की बातें, लोगों की मदद का जज्बा, देश को सुपर पावर बनाने का सपना और बच्चों को सही दिशा दिखाना। उनकी आंखों में हिंदुस्तान के विकास का सपना तैरते हुए देखा। जब मुझे उनके निधन का पता चला तो जैसे सकपका गया। यकीन नहीं आया कि अभी कुछ दिन पहले ही तो उनसे मिला था। इन बातों को शेयर करते हुए जिलाधिकारी राजशेखर की आंखों में आंसू आ गए। कलाम के साथ आखिरी वक्त गुजारने वाले उनके सलाहकार सृजनपाल सिंह ने बताया कि जब उनकी तबियत खराब हुई तो ये नहीं पता था कि वो हमारा साथ छोड़ जाएंगे। मेरे लिए उस लम्हे में खुद को संभालना मुश्किल हो गया था। काफी लम्बा साथ रहा हमारा और हमेशा उनसे अच्छा काम करने की सीख हासिल की। ये बातें शेयर करते-करते उनकी आवाज थोड़ी रूंध गई और वह रोने लगे। जिसके बाद कुछ पल के लिए माहौल और गमगीन हो गया। उन तमाम डिग्निटरीज के बीच में मिलेनियर स्कूल के बच्चे भी मौजूद थे जिनके साथ कलाम ने कुछ पल बांटे थे। उन बच्चों की मौजूदगी कलाम के प्रति उनके प्यार का सबूत दे रही थी। वहां मौजूद मान्या जो कि इस वक्त क्क् साल की है ने बताया मैं जब कलाम सर से मिली थी तो बहुत छोटी थी इतना पता नहीं था उनके बारे में लेकिन जितनी देर भी साथ रही अच्छी बाते सीखी। कलाम को श्रद्धांजली देने के लिए राह चलते लोग भी गाडि़यां रोक कर खड़े हो गए और उन्हें याद करने वालों में खुद को शामिल कर कलाम की यादों में जीने का प्रयास किया।
LUCKNOW संडे को गंज के माहौल में उदासी के साथ साथ प्राइड एण्ड ऑनर वाला जज्बा नजर आया। शायद इसलिए कि उनके जाने का दर्द अभी भी सबके दिलों मे ताजा है। पूर्व राष्ट्रपति ए. पी. जे अब्दुल कलाम को समर्पित गंजिंग में डिंग्निटरीज ने उनके साथ गुजारे लम्हों को शेयर किया। जिलाधिकारी राजशेखर ने कलाम साहब को याद करते हुए कहा कि मैंने उनके साथ महज ब्शून्य मिनट बिताए और उन लम्हों मे उनसे बहुत कुछ सीखा, देश के विकास की बातें, लोगों की मदद का जज्बा, देश को सुपर पावर बनाने का सपना और बच्चों को सही दिशा दिखाना। उनकी आंखों में हिंदुस्तान के विकास का सपना तैरते हुए देखा। जब मुझे उनके निधन का पता चला तो जैसे सकपका गया। यकीन नहीं आया कि अभी कुछ दिन पहले ही तो उनसे मिला था। इन बातों को शेयर करते हुए जिलाधिकारी राजशेखर की आंखों में आंसू आ गए। कलाम के साथ आखिरी वक्त गुजारने वाले उनके सलाहकार सृजनपाल सिंह ने बताया कि जब उनकी तबियत खराब हुई तो ये नहीं पता था कि वो हमारा साथ छोड़ जाएंगे। मेरे लिए उस लम्हे में खुद को संभालना मुश्किल हो गया था। काफी लम्बा साथ रहा हमारा और हमेशा उनसे अच्छा काम करने की सीख हासिल की। ये बातें शेयर करते-करते उनकी आवाज थोड़ी रूंध गई और वह रोने लगे। जिसके बाद कुछ पल के लिए माहौल और गमगीन हो गया। उन तमाम डिग्निटरीज के बीच में मिलेनियर स्कूल के बच्चे भी मौजूद थे जिनके साथ कलाम ने कुछ पल बांटे थे। उन बच्चों की मौजूदगी कलाम के प्रति उनके प्यार का सबूत दे रही थी। वहां मौजूद मान्या जो कि इस वक्त क्क् साल की है ने बताया मैं जब कलाम सर से मिली थी तो बहुत छोटी थी इतना पता नहीं था उनके बारे में लेकिन जितनी देर भी साथ रही अच्छी बाते सीखी। कलाम को श्रद्धांजली देने के लिए राह चलते लोग भी गाडि़यां रोक कर खड़े हो गए और उन्हें याद करने वालों में खुद को शामिल कर कलाम की यादों में जीने का प्रयास किया।
बॉलीवुड की बेहतरीन और सबसे खूबसूरत अदाकाराओं में से एक रहीं श्रीदेवी को आज भी याद किया जाता है। उनके गाने और उनकी फिल्मों को लोग आज भी काफी पसंद करते हैं। श्रीदेवी के पति और फिल्म मेकर सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं। वहीं अब हाल ही में बोनी कपूर ने श्रीदेवी के साथ की कुछ अनसीन फोटोज शेयर की है। इन फोटोज में बोनी और श्रीदेवी एक-दूसरे के साथ फुरसत के पल बिताते नजर आ रहे हैं। दरअसल आज यानी 2 जून को बोनी कपूर और श्रीदेवी शादी की 27वीं सालगिरह मना रहे हैं। ऐसे में बोनी ने एक पोस्ट शेयर की है। अपनी शादी की सालगिरह के खास मौके पर बोनी कपूर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर कर श्रीदेवी को याद किया है। उन्होंने अपनी पत्नी के लिए एक नोट लिखा है और थ्रोबैक फोटोज शेयर की है। बोनी ने इंस्टाग्राम पर जो फोटो शेयर की है, उसमें वे श्रीदेवी के साथ वेनिस में बोटिंग करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने कैप्शन में लिखा 1996, 2 जून को हमने शिरडी में शादी की थी, आज हमने 27 साल पूरे कर लिए हैं। इसके अलावा बोनी कपूर ने अपनी इंस्टा स्टोरी पर भी एक अनसीन फोटो शेयर की है। तस्वीर में बोनी और श्रीदेवी एक मंदिर में बैठे हुए दिखाई दे रहे हैं। फोटो में एक्ट्रेस पिंक कलर की कांजीवरम साड़ी में दिखाई दे रही हैं, वहीं बोनी सफेद धोती-कुर्ता पहने नजर आ रहे हैं। 1996 में बोनी कपूर और श्रीदेवी शादी के बंधन में बंधे थे। श्रीदेवी की शादी के पहले की आखिरी फिल्म जुदाई थी। शादी के बाद बोनी और श्रीदेवी पेरेंट्स बने। श्रीदेवी ने 6 मार्च 1997 में जाह्नवी कपूर को जन्म दिया था। वहीं साल 2000 में श्रीदेवी ने खुशी कपूर को जन्म दिया। श्रीदेवी की मौत कैसे हुई थी?
बॉलीवुड की बेहतरीन और सबसे खूबसूरत अदाकाराओं में से एक रहीं श्रीदेवी को आज भी याद किया जाता है। उनके गाने और उनकी फिल्मों को लोग आज भी काफी पसंद करते हैं। श्रीदेवी के पति और फिल्म मेकर सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं। वहीं अब हाल ही में बोनी कपूर ने श्रीदेवी के साथ की कुछ अनसीन फोटोज शेयर की है। इन फोटोज में बोनी और श्रीदेवी एक-दूसरे के साथ फुरसत के पल बिताते नजर आ रहे हैं। दरअसल आज यानी दो जून को बोनी कपूर और श्रीदेवी शादी की सत्ताईसवीं सालगिरह मना रहे हैं। ऐसे में बोनी ने एक पोस्ट शेयर की है। अपनी शादी की सालगिरह के खास मौके पर बोनी कपूर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर कर श्रीदेवी को याद किया है। उन्होंने अपनी पत्नी के लिए एक नोट लिखा है और थ्रोबैक फोटोज शेयर की है। बोनी ने इंस्टाग्राम पर जो फोटो शेयर की है, उसमें वे श्रीदेवी के साथ वेनिस में बोटिंग करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने कैप्शन में लिखा एक हज़ार नौ सौ छियानवे, दो जून को हमने शिरडी में शादी की थी, आज हमने सत्ताईस साल पूरे कर लिए हैं। इसके अलावा बोनी कपूर ने अपनी इंस्टा स्टोरी पर भी एक अनसीन फोटो शेयर की है। तस्वीर में बोनी और श्रीदेवी एक मंदिर में बैठे हुए दिखाई दे रहे हैं। फोटो में एक्ट्रेस पिंक कलर की कांजीवरम साड़ी में दिखाई दे रही हैं, वहीं बोनी सफेद धोती-कुर्ता पहने नजर आ रहे हैं। एक हज़ार नौ सौ छियानवे में बोनी कपूर और श्रीदेवी शादी के बंधन में बंधे थे। श्रीदेवी की शादी के पहले की आखिरी फिल्म जुदाई थी। शादी के बाद बोनी और श्रीदेवी पेरेंट्स बने। श्रीदेवी ने छः मार्च एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे में जाह्नवी कपूर को जन्म दिया था। वहीं साल दो हज़ार में श्रीदेवी ने खुशी कपूर को जन्म दिया। श्रीदेवी की मौत कैसे हुई थी?
बक्सर : केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता गिरिराज सिंह ने मंगलवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तंज कसते हुए कहा कि हर घर शराब पहुंचाने के बाद अब गंगा जल पहुंचाकर नीतीश कुमार प्रायश्चित करना चाहते है। उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि बिहार में चूहों को भी शराबी बनाने वाले नीतीश प्रायश्चित नहीं कर पाएंगे। उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने पर जोर देते हुए कहा कि बिहार में भाजपा की सरकार बनी तो सरकार जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाएगी। एक दिवसीय दौरे पर बक्सर पहुंचे केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने यहां पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि जिस तरह से हर घर नल का जल पहुंचाने का सपना दिखाकर उन्होंने कुर्सी प्राप्त की, वैसे ही अब गंगा जल पहुचाने का वादा कर कुर्सी पर बने रहना चाहते है। उन्होंने कहा कि वे सर्वे करा लें हर घर नल का जल का पता चल जाएगा। उन्होंने देश की बढ़ती जनसंख्या पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि, आज चीन में जंहा 1 मिनट में 10 बच्चे जन्म लेते है वहीं भारत में 31 बच्चे प्रति मिनट जन्म ले रहे हैं, जिसके कारण जीडीपी का ग्रोथ तेज नहीं हो पा रहा। उन्होंने कहा कि संसाधन सीमित हैं। उन्होंने कहा कि यदि बिहार में भाजपा की सरकार बनी तो सबसे पहले जनसंख्या नियंत्रण कानून लाएगी, जो सभी जाति, धर्म के लोगों पर लागू होगा। उन्होंने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि 2024 में कांग्रेस पूरे भारत मे 24 सीट भी नही ला पाएगी, गुजरात विधानसभा चुनाव में ही कांग्रेस को युवराज राहुल गांधी के भारत जोड़ो यात्रा का पता चल जाएगा, कि यात्रा कितना सफल है।
बक्सर : केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता गिरिराज सिंह ने मंगलवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तंज कसते हुए कहा कि हर घर शराब पहुंचाने के बाद अब गंगा जल पहुंचाकर नीतीश कुमार प्रायश्चित करना चाहते है। उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि बिहार में चूहों को भी शराबी बनाने वाले नीतीश प्रायश्चित नहीं कर पाएंगे। उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने पर जोर देते हुए कहा कि बिहार में भाजपा की सरकार बनी तो सरकार जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाएगी। एक दिवसीय दौरे पर बक्सर पहुंचे केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने यहां पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि जिस तरह से हर घर नल का जल पहुंचाने का सपना दिखाकर उन्होंने कुर्सी प्राप्त की, वैसे ही अब गंगा जल पहुचाने का वादा कर कुर्सी पर बने रहना चाहते है। उन्होंने कहा कि वे सर्वे करा लें हर घर नल का जल का पता चल जाएगा। उन्होंने देश की बढ़ती जनसंख्या पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि, आज चीन में जंहा एक मिनट में दस बच्चे जन्म लेते है वहीं भारत में इकतीस बच्चे प्रति मिनट जन्म ले रहे हैं, जिसके कारण जीडीपी का ग्रोथ तेज नहीं हो पा रहा। उन्होंने कहा कि संसाधन सीमित हैं। उन्होंने कहा कि यदि बिहार में भाजपा की सरकार बनी तो सबसे पहले जनसंख्या नियंत्रण कानून लाएगी, जो सभी जाति, धर्म के लोगों पर लागू होगा। उन्होंने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि दो हज़ार चौबीस में कांग्रेस पूरे भारत मे चौबीस सीट भी नही ला पाएगी, गुजरात विधानसभा चुनाव में ही कांग्रेस को युवराज राहुल गांधी के भारत जोड़ो यात्रा का पता चल जाएगा, कि यात्रा कितना सफल है।
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर सभी दलों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। सूबे में जहां एक तरफ बीजेपी शिवसेना है, तो वहीं दूसरी तरफ से कांग्रेस और एनसीपी होंगे। अब एनसीपी प्रमुख ने चुनाव से पहले कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे पर बड़ा बयान दिया है। शरद पवार ने आगे कहा कि केंद्र सरकार चुनाव (महाराष्ट्र) से पहले अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर रही है, उन नेताओं पर दबाव डाल रही है जो भाजपा में शामिल होने के इच्छुक नहीं हैं। यह केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है, यह हर जगह हुआ है।
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर सभी दलों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। सूबे में जहां एक तरफ बीजेपी शिवसेना है, तो वहीं दूसरी तरफ से कांग्रेस और एनसीपी होंगे। अब एनसीपी प्रमुख ने चुनाव से पहले कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे पर बड़ा बयान दिया है। शरद पवार ने आगे कहा कि केंद्र सरकार चुनाव से पहले अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर रही है, उन नेताओं पर दबाव डाल रही है जो भाजपा में शामिल होने के इच्छुक नहीं हैं। यह केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है, यह हर जगह हुआ है।
दोस्त के साथ पोखरे के पास नशे की लत मिटा रहे युवक का अचानक गला रेत दिया गया। हॉस्पिटल ले जाने पर डॉक्टर्स ने उसे मृत घोषित कर दिया। मौका ए वारदात पर पहुंची पुलिस ने युवक पर इस तरह से हुए हमले से पहले उसके साथ रहे एक दोस्त को पकड़ा है लेकिन उसके बयान ने खुद पुलिस को ही उलझा दिया। नशे में होने के कारण उसने बताया कि प्रकाश पटेल को उसने नहीं बल्कि दो अन्य लोगों ने मारा है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। घटना कैंट थाना क्षेत्र के ओमनगर कॉलोनी में रविवार की शाम एक पोखरे के पास हुई। जिस प्रकाश पटेल को मौत के घाट उतारा गया उसकी उम्र ख्8 वर्ष थी। घुरेपुर सथवा सारनाथ का रहने वाला प्रकाश गोइठहा स्थित एक पावरलूम में काम करता था। रविवार को वो अपनी पत्नी और दो बच्चों को लेने के लिए सारनाथ के परशुराम स्थित अपनी ससुराल जाने के लिए निकला था। रास्ते में उसकी मुलाकात सथवा निवासी अपने दोस्त रमेश से हो गई और दोनों ओमनगर कॉलोनी स्थित पोखरे के पास नशा करने पहुंच गए। पुलिस की मानें तो दोनों ने यहां शराब और गांजा छककर पीया। पुलिस को मौके से गांजा और चिलम भी मिला है। नशे में धुत प्रकाश पर कैसे हमला हुआ और उसे किसने मारा पुलिस ने इस मिस्ट्री को सुलझाने के लिए रमेश को हिरासत में ले लेकर उसके नॉर्मल होने का वेट कर रही है।
दोस्त के साथ पोखरे के पास नशे की लत मिटा रहे युवक का अचानक गला रेत दिया गया। हॉस्पिटल ले जाने पर डॉक्टर्स ने उसे मृत घोषित कर दिया। मौका ए वारदात पर पहुंची पुलिस ने युवक पर इस तरह से हुए हमले से पहले उसके साथ रहे एक दोस्त को पकड़ा है लेकिन उसके बयान ने खुद पुलिस को ही उलझा दिया। नशे में होने के कारण उसने बताया कि प्रकाश पटेल को उसने नहीं बल्कि दो अन्य लोगों ने मारा है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। घटना कैंट थाना क्षेत्र के ओमनगर कॉलोनी में रविवार की शाम एक पोखरे के पास हुई। जिस प्रकाश पटेल को मौत के घाट उतारा गया उसकी उम्र ख्आठ वर्ष थी। घुरेपुर सथवा सारनाथ का रहने वाला प्रकाश गोइठहा स्थित एक पावरलूम में काम करता था। रविवार को वो अपनी पत्नी और दो बच्चों को लेने के लिए सारनाथ के परशुराम स्थित अपनी ससुराल जाने के लिए निकला था। रास्ते में उसकी मुलाकात सथवा निवासी अपने दोस्त रमेश से हो गई और दोनों ओमनगर कॉलोनी स्थित पोखरे के पास नशा करने पहुंच गए। पुलिस की मानें तो दोनों ने यहां शराब और गांजा छककर पीया। पुलिस को मौके से गांजा और चिलम भी मिला है। नशे में धुत प्रकाश पर कैसे हमला हुआ और उसे किसने मारा पुलिस ने इस मिस्ट्री को सुलझाने के लिए रमेश को हिरासत में ले लेकर उसके नॉर्मल होने का वेट कर रही है।
उन्होंने कहा कि राजग की सरकार ने यूपीए के सौदे से बढ़िया सौदा किया है तो यह क्यों नहीं बता रही कि विमान किस कीमत पर खरीदे गए हैं। मनीष तिवारी का कहना है कि यूपीए सरकार ने 126 राफेल विमानों की खरीद के लिए बातचीत कर कीमत तय की थी। उसे रद्द करके सरकार ने 36 विमान खरीदने का फैसला लिया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या नए सौदे से पहले एयर चीफ मार्शल की राय ली गई थी। प्रधानमंत्री ने पेरिस में विमान खरीद की घोषणा के पहले क्या रक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी से अनुमति ली थी या क्लीयरेंस से पहले घोषणा कर दी। तिवारी ने एक न्यूज वेबसाइट के हवाले से बताया कि यूपीए सरकार ने राफेल सौदे के लिए जिन दो कंपनियों की छंटनी की थी, उसमें से एक ने अपने दूतावास के माध्यम से जुलाई में तत्कालीन रक्षा मंत्री को पत्र भेजकर एक विमान 138 मिलियन यूरो में आपूर्ति करने का प्रस्ताव भेजा था। उन्होंने कहा कि सरकार अधिकृत तौर पर राफेल की कीमत नहीं बता रही है, लेकिन बाजार में जो सूचना है उसके मुताबिक 157 मिलियन यूरो में विमान खरीदा जा रहा है। तिवारी ने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि जब कोई कंपनी कम कीमत पर तैयार थी तो उसके प्रस्ताव को क्यों खारिज किया गया।
उन्होंने कहा कि राजग की सरकार ने यूपीए के सौदे से बढ़िया सौदा किया है तो यह क्यों नहीं बता रही कि विमान किस कीमत पर खरीदे गए हैं। मनीष तिवारी का कहना है कि यूपीए सरकार ने एक सौ छब्बीस राफेल विमानों की खरीद के लिए बातचीत कर कीमत तय की थी। उसे रद्द करके सरकार ने छत्तीस विमान खरीदने का फैसला लिया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या नए सौदे से पहले एयर चीफ मार्शल की राय ली गई थी। प्रधानमंत्री ने पेरिस में विमान खरीद की घोषणा के पहले क्या रक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी से अनुमति ली थी या क्लीयरेंस से पहले घोषणा कर दी। तिवारी ने एक न्यूज वेबसाइट के हवाले से बताया कि यूपीए सरकार ने राफेल सौदे के लिए जिन दो कंपनियों की छंटनी की थी, उसमें से एक ने अपने दूतावास के माध्यम से जुलाई में तत्कालीन रक्षा मंत्री को पत्र भेजकर एक विमान एक सौ अड़तीस मिलियन यूरो में आपूर्ति करने का प्रस्ताव भेजा था। उन्होंने कहा कि सरकार अधिकृत तौर पर राफेल की कीमत नहीं बता रही है, लेकिन बाजार में जो सूचना है उसके मुताबिक एक सौ सत्तावन मिलियन यूरो में विमान खरीदा जा रहा है। तिवारी ने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि जब कोई कंपनी कम कीमत पर तैयार थी तो उसके प्रस्ताव को क्यों खारिज किया गया।
यह इस डिवाइस की दूसरी फ़्लैश सेल है जो आज दोपहर 12 बजे से फ्लिप्कार्ट पर शुरू होगी। Honor ने हाल ही में भारत में अपने दो नए स्मार्टफोंस को लॉन्च किया था, इन स्मार्टफोंस में Honor 7A और Honor 7C स्मार्टफोंस शामिल हैं। हालाँकि आज हम बात करने वाले हैं, Honor 7A स्मार्टफोन की। आज यह डिवाइस फ्लिप्कार्ट पर सेल के लिए उपलब्ध होगा। यह इस डिवाइस की दूसरी फ़्लैश सेल है जो आज दोपहर 12 बजे से शुरू होगी। इस डिवाइस पर फ्लिप्कार्ट पर आपको कुछ दमदार ऑफर्स भी मिल रहे हैं। Honor 7A स्मार्टफोन को फ्लिप्कार्ट के माध्यम से महज Rs 8,999 की कीमत में ख़रीदा जा सकेगा, हालाँकि बाजार में इसकी असल कीमत Rs 10,999 है। इसके अलावा एक्सिस बैंक के माध्यम से पेमेंट करने पर यूजर्स को 5 फीसदी का कैशबैक भी दिया जाने वाला है। इसके अलावा अलग से Rs 2,000 का डिस्काउंट भी आपको इस फोन के साथ मिलेगा। Honor 7A स्मार्टफोन के स्पेक्स आदि की चर्चा करें तो आपको बता देते हैं कि इस स्मार्टफोन को ड्यूल सिम सपोर्ट और एंड्राइड Oreo के साथ लॉन्च किया गया है। इसके अलावा इसमें आपको एक 5.7-इंच की HD+ डिस्प्ले 720×1440 पिक्सल रेजोल्यूशन के साथ 18:9 आस्पेक्ट रेश्यो वाली है। फोन को ओक्टा-कोर क्वालकॉम स्नेपड्रैगन 430 प्रोसेसर के साथ लॉन्च किया गया है। फोन में एक 3000mAh क्षमता की बैटरी भी मिल रही है। अगर कैमरा की चर्चा करें तो डिवाइस के बैक पर एक 13-मेगापिक्सल का रियर कैमरा और एक 2-मेगापिक्सल का सेकेंडरी कैमरा मिल रहा है। वहीं सेल्फी के लिए इस डिवाइस में 8-मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा मिल रहा है। फोन की स्टोरेज को आप माइक्रोएसडी कार्ड की सहायता से 128GB तक बढ़ा भी सकते हैं। Honor 7A को 3GB रैम और 32GB स्टोरेज के साथ लॉन्च किया गया है और इसकी कीमत 8,999 रूपये रखी गई है।
यह इस डिवाइस की दूसरी फ़्लैश सेल है जो आज दोपहर बारह बजे से फ्लिप्कार्ट पर शुरू होगी। Honor ने हाल ही में भारत में अपने दो नए स्मार्टफोंस को लॉन्च किया था, इन स्मार्टफोंस में Honor सात एम्पीयर और Honor सात डिग्री सेल्सियस स्मार्टफोंस शामिल हैं। हालाँकि आज हम बात करने वाले हैं, Honor सात एम्पीयर स्मार्टफोन की। आज यह डिवाइस फ्लिप्कार्ट पर सेल के लिए उपलब्ध होगा। यह इस डिवाइस की दूसरी फ़्लैश सेल है जो आज दोपहर बारह बजे से शुरू होगी। इस डिवाइस पर फ्लिप्कार्ट पर आपको कुछ दमदार ऑफर्स भी मिल रहे हैं। Honor सात एम्पीयर स्मार्टफोन को फ्लिप्कार्ट के माध्यम से महज आठ रुपया,नौ सौ निन्यानवे की कीमत में ख़रीदा जा सकेगा, हालाँकि बाजार में इसकी असल कीमत दस रुपया,नौ सौ निन्यानवे है। इसके अलावा एक्सिस बैंक के माध्यम से पेमेंट करने पर यूजर्स को पाँच फीसदी का कैशबैक भी दिया जाने वाला है। इसके अलावा अलग से दो रुपया,शून्य का डिस्काउंट भी आपको इस फोन के साथ मिलेगा। Honor सात एम्पीयर स्मार्टफोन के स्पेक्स आदि की चर्चा करें तो आपको बता देते हैं कि इस स्मार्टफोन को ड्यूल सिम सपोर्ट और एंड्राइड Oreo के साथ लॉन्च किया गया है। इसके अलावा इसमें आपको एक पाँच.सात-इंच की HD+ डिस्प्ले सात सौ बीस×एक हज़ार चार सौ चालीस पिक्सल रेजोल्यूशन के साथ अट्ठारह:नौ आस्पेक्ट रेश्यो वाली है। फोन को ओक्टा-कोर क्वालकॉम स्नेपड्रैगन चार सौ तीस प्रोसेसर के साथ लॉन्च किया गया है। फोन में एक तीन हज़ारmAh क्षमता की बैटरी भी मिल रही है। अगर कैमरा की चर्चा करें तो डिवाइस के बैक पर एक तेरह-मेगापिक्सल का रियर कैमरा और एक दो-मेगापिक्सल का सेकेंडरी कैमरा मिल रहा है। वहीं सेल्फी के लिए इस डिवाइस में आठ-मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा मिल रहा है। फोन की स्टोरेज को आप माइक्रोएसडी कार्ड की सहायता से एक सौ अट्ठाईसGB तक बढ़ा भी सकते हैं। Honor सात एम्पीयर को तीनGB रैम और बत्तीसGB स्टोरेज के साथ लॉन्च किया गया है और इसकी कीमत आठ,नौ सौ निन्यानवे रूपये रखी गई है।
PATNA : नगर निगम वाले बड़े शहरों की रैकिंग में हैदराबाद, चेन्नई, जयपुर, चंडीगढ़, बेंगलुरु, दक्षिणी दिल्ली और लखनऊ आदि को पछाड़कर पटना 16वें स्थान पर पहुंच गया है। वहीं 'ईज ऑफ लि¨वग इंडेक्स-2020' यानी रहने लायक बेहतर शहरों की सूची में भी लंबी छलांग लगाते हुए 33वीं रैंक हासिल की है। नगर निगमों में गवर्नेंस के मामले में पटना देशभर में 19वें पायदान पर है तो फाइनेंस कैटेगरी में पटना देश भर के 51 नगर निगमों में 25वें नंबर पर है। टेक्नोलॉजी में पटना देश भर के नगर निगमों में 40वें नंबर पर है। तो वहीं योजना बनाकर काम करने वाली कैटेगरी में पटना देश के टॉप-10 शहरों में शामिल है। पटना को इस कैटेगरी में 9वां स्थान मिला है। केंद्रीय शहरी मंत्रालय ने गुरुवार को देश के 111 शहरों की ईज ऑफ लिविंग और म्युनिसिपल वर्ग में अलग-अलग सूची जारी की है। दोनों ही वर्गो में दो तरह के शहरों की सूची जारी की गई है। एक श्रेणी 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की है, तो दूसरी 10 लाख से कम आबादी वाले शहरों की। 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में बिहार से सिर्फ पटना शामिल है। वहीं 10 लाख से कम आबादी वाले शहरों में बिहारशरीफ, भागलपुर और मुजफ्फरपुर शामिल हैं। वर्ष 2018 में जारी रैंकिंग में पटना सबसे निचले यानी 109वें पायदान पर था। पहली बार जारी म्युनिसिपल परफॉर्मेस इंडेक्स में पटना प्लानिंग के मामले में देश के टॉप-10 शहरों में शामिल रहा। उसे नौवां स्थान मिला है। इसके अलावा गवर्नेस में 19वां, फाइनेंस में 25वां और सर्विस के मामले में 32वां रैंक मिला है। तकनीक के मामले में पटना को 40वां स्थान दिया गया है। इस सूची में 51 शामिल हैं। ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स में आर्थिक क्षमता के मामले में पटना देश के 49 शहरों में 14वें स्थान पर रहा। सिटीजन सर्वे में भी उसकी स्थिति 22वें स्थान के साथ बेहतर रही। गुणवत्तापूर्ण जीवन यानी क्वालिटी ऑफ लाइफ में पटना को 42वां जबकि स्थिरता के मामले में 44वें स्थान से संतोष करना पड़ा। ईज ऑफ लिविंग (10 लाख से अधिक आबादी) ईज ऑफ लिविंग (10 लाख से कम आबादी) म्युनिसिपल परफॉर्मेस इंडेक्स (10 लाख से अधिक आबादी) म्युनिसिपल परफॉर्मेस इंडेक्स (10 लाख से कम आबादी)
PATNA : नगर निगम वाले बड़े शहरों की रैकिंग में हैदराबाद, चेन्नई, जयपुर, चंडीगढ़, बेंगलुरु, दक्षिणी दिल्ली और लखनऊ आदि को पछाड़कर पटना सोलहवें स्थान पर पहुंच गया है। वहीं 'ईज ऑफ लि¨वग इंडेक्स-दो हज़ार बीस' यानी रहने लायक बेहतर शहरों की सूची में भी लंबी छलांग लगाते हुए तैंतीसवीं रैंक हासिल की है। नगर निगमों में गवर्नेंस के मामले में पटना देशभर में उन्नीसवें पायदान पर है तो फाइनेंस कैटेगरी में पटना देश भर के इक्यावन नगर निगमों में पच्चीसवें नंबर पर है। टेक्नोलॉजी में पटना देश भर के नगर निगमों में चालीसवें नंबर पर है। तो वहीं योजना बनाकर काम करने वाली कैटेगरी में पटना देश के टॉप-दस शहरों में शामिल है। पटना को इस कैटेगरी में नौवां स्थान मिला है। केंद्रीय शहरी मंत्रालय ने गुरुवार को देश के एक सौ ग्यारह शहरों की ईज ऑफ लिविंग और म्युनिसिपल वर्ग में अलग-अलग सूची जारी की है। दोनों ही वर्गो में दो तरह के शहरों की सूची जारी की गई है। एक श्रेणी दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की है, तो दूसरी दस लाख से कम आबादी वाले शहरों की। दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में बिहार से सिर्फ पटना शामिल है। वहीं दस लाख से कम आबादी वाले शहरों में बिहारशरीफ, भागलपुर और मुजफ्फरपुर शामिल हैं। वर्ष दो हज़ार अट्ठारह में जारी रैंकिंग में पटना सबसे निचले यानी एक सौ नौवें पायदान पर था। पहली बार जारी म्युनिसिपल परफॉर्मेस इंडेक्स में पटना प्लानिंग के मामले में देश के टॉप-दस शहरों में शामिल रहा। उसे नौवां स्थान मिला है। इसके अलावा गवर्नेस में उन्नीसवां, फाइनेंस में पच्चीसवां और सर्विस के मामले में बत्तीसवां रैंक मिला है। तकनीक के मामले में पटना को चालीसवां स्थान दिया गया है। इस सूची में इक्यावन शामिल हैं। ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स में आर्थिक क्षमता के मामले में पटना देश के उनचास शहरों में चौदहवें स्थान पर रहा। सिटीजन सर्वे में भी उसकी स्थिति बाईसवें स्थान के साथ बेहतर रही। गुणवत्तापूर्ण जीवन यानी क्वालिटी ऑफ लाइफ में पटना को बयालीसवां जबकि स्थिरता के मामले में चौंतालीसवें स्थान से संतोष करना पड़ा। ईज ऑफ लिविंग ईज ऑफ लिविंग म्युनिसिपल परफॉर्मेस इंडेक्स म्युनिसिपल परफॉर्मेस इंडेक्स
उनके अनुसार, जो नेतृत्व करता है lb. ua, पश्चिमी यूरोप के अधिक से अधिक राजनेताओं का कहना है कि उनके देश "प्रतिबंधों से थक गए हैं", और उन्हें रद्द करने या कम करने की पेशकश करते हैं। यह पता चला है कि साझेदार उन प्रतिबंधों से थक गए हैं जो वे खुद लगाए गए थे और जो वास्तव में उनकी सुरक्षा हैं। लेकिन यूक्रेन, इसलिए, "रक्त और दर्द का अनुभव नहीं होता है जो उसे हर दिन अनुभव होता है? ", टर्चिनोव ने कहा। और सचिव के अनुसार, यूरोपीय दोहरे मानकों का सबसे महत्वपूर्ण उदाहरण, नॉर्ड स्ट्रीम- 2 है। एक तरफ (पश्चिमी नेता) औपचारिक रूप से प्रतिबंधों के विस्तार के बारे में बात करते हैं, और दूसरी तरफ, वे रूसी आर्थिक रणनीतिक हितों को महसूस करने में मदद करते हैं, जो पिछले चार वर्षों में हुए सभी विकासों को पार करते हैं,उसने घोषित किया। स्मरण करो कि नई गैस पाइपलाइन परियोजना में बाल्टिक सागर के नीचे दो तारों को रखना शामिल है जिसकी कुल क्षमता 55 बिलियन क्यूबिक मीटर प्रति वर्ष है। रूसी संघ के तट से जर्मनी तक नॉर्ड स्ट्रीम के बगल में पाइपलाइन का निर्माण किया जा रहा है। नॉर्ड स्ट्रीम-एक्सएनयूएमएक्स के सबसे प्रबल विरोधी बाल्टिक देश और यूक्रेन हैं, जो रूसी प्राकृतिक ईंधन के पारगमन से राजस्व खोने का डर है। संयुक्त राज्य अमेरिका भी एक गंभीर प्रतिद्वंद्वी है, यूरोप को अपने एलएनजी निर्यात करने की योजना के साथ। मॉस्को ने परियोजना का राजनीतिकरण नहीं करने और गैस पाइपलाइन के निर्माण को एक आर्थिक परियोजना के रूप में माना। उसी समय, व्लादिमीर पुतिन ने मई के अंत में कहा कि नई पाइपलाइन यूक्रेन के माध्यम से गैस पारगमन को स्वचालित रूप से रोकती नहीं है। अगर कीव उनकी आर्थिक व्यवहार्यता साबित करता है तो ये प्रसव जारी रहेंगे।
उनके अनुसार, जो नेतृत्व करता है lb. ua, पश्चिमी यूरोप के अधिक से अधिक राजनेताओं का कहना है कि उनके देश "प्रतिबंधों से थक गए हैं", और उन्हें रद्द करने या कम करने की पेशकश करते हैं। यह पता चला है कि साझेदार उन प्रतिबंधों से थक गए हैं जो वे खुद लगाए गए थे और जो वास्तव में उनकी सुरक्षा हैं। लेकिन यूक्रेन, इसलिए, "रक्त और दर्द का अनुभव नहीं होता है जो उसे हर दिन अनुभव होता है? ", टर्चिनोव ने कहा। और सचिव के अनुसार, यूरोपीय दोहरे मानकों का सबसे महत्वपूर्ण उदाहरण, नॉर्ड स्ट्रीम- दो है। एक तरफ औपचारिक रूप से प्रतिबंधों के विस्तार के बारे में बात करते हैं, और दूसरी तरफ, वे रूसी आर्थिक रणनीतिक हितों को महसूस करने में मदद करते हैं, जो पिछले चार वर्षों में हुए सभी विकासों को पार करते हैं,उसने घोषित किया। स्मरण करो कि नई गैस पाइपलाइन परियोजना में बाल्टिक सागर के नीचे दो तारों को रखना शामिल है जिसकी कुल क्षमता पचपन बिलियन क्यूबिक मीटर प्रति वर्ष है। रूसी संघ के तट से जर्मनी तक नॉर्ड स्ट्रीम के बगल में पाइपलाइन का निर्माण किया जा रहा है। नॉर्ड स्ट्रीम-एक्सएनयूएमएक्स के सबसे प्रबल विरोधी बाल्टिक देश और यूक्रेन हैं, जो रूसी प्राकृतिक ईंधन के पारगमन से राजस्व खोने का डर है। संयुक्त राज्य अमेरिका भी एक गंभीर प्रतिद्वंद्वी है, यूरोप को अपने एलएनजी निर्यात करने की योजना के साथ। मॉस्को ने परियोजना का राजनीतिकरण नहीं करने और गैस पाइपलाइन के निर्माण को एक आर्थिक परियोजना के रूप में माना। उसी समय, व्लादिमीर पुतिन ने मई के अंत में कहा कि नई पाइपलाइन यूक्रेन के माध्यम से गैस पारगमन को स्वचालित रूप से रोकती नहीं है। अगर कीव उनकी आर्थिक व्यवहार्यता साबित करता है तो ये प्रसव जारी रहेंगे।
को कोई युक्ति नहीं सुझो तो कहा सरकार बात की लड़ाई है अभी सेठजी ने ही कुछ नहीं समझा शेखावाटी में फिर हमारा राज़ = कैसे चलेगा, नाजिम साहब गुस्से में थे गाटर को हटवाने का हुक्म दे दिया सलाम के खातिर मियांजी को रूसाने वाली कहावत हो गई । "हाकीम की ग्रांट बूरी, मूंडोरी टाट वूरी, वैश्या को हाट दूरी, प्रौरत की चाट दूरी, भाईयो को फूट बूरी" फिर तो सेठजी भागकर जयपुर गये । इधर राजाजी खेतड़ी ठाकर बिसाऊ, नवलगढ़, मण्डावा, अलसीसर, मलसीसर चौकड़ी ने महाराजा श्रीमाधोसिंह जी के चरणों में तलवार रखदी और अर्ज किया शेखावाटी से शेखावतों का राज़ जा रहा है, एक महाजन अपमान कर रहा है हमारा मुकावला कर रहा है, महाराजा जयपुर अपने भाई बन्धुओं को नाराज नहीं करना चाहते थे । नवाव साहब जो उस ज़माने में मुसाहिब थे, उनको बुलाकर शेखावाटी के नाज़िम का हुक्म बहाल कर दिया गाटर हटाने का हुक्म दे दिया। सेटज़ी खवास वालाववस से मिले । खवास जो ने महाराजा साहव से कहा यह तो अन्याय हो गया श्री लक्ष्मीनाथ ज़ी के मन्दिर की रसोवड़ की गाटर है । होनहार की वात रात को ही महाराजा श्री माधोसिंह जी का स्वर्गवास हो गया । यह घटना अक्टूबर १९२२ ई० की है सेठजी को वड़ा दुःख हुवा चीर अपने पड़ोस के गोयनका घराने की वुढीया का श्राप यादया गया कि हमारे टोड़ क्या उतराये है तुमको भी प्यारी ईमारत तुड़वाने का दुःख होगा । सेठजी उसी वक्त श्री गोविन्ददेवजी के मन्दिर में गये और कहने लगे कि "तू कुछ और विचारत है नर तेरो विचार धर्यो हो रहगो" सीधे ही वृन्दावन चले गये झुन्झुनू में जीवन भर पैर नहीं रखा वृन्दावन में सेठज़ी ने दस हज़ार रूपये की हूंडी की थी, रात को डाकू एक डाकू सेठजी की छाती पर छुरा लेकर बैठ गया सेठजी ने तीजोरी की तांलो देदी डाकू ने कहा पुलिस में रिपोर्ट करोगे तो सेटज़ी ने कहा में न रिपोर्ट करूगां न फरयाद, डाकू रुपये लेकर चंपत हुवे । सेठजी सुवह श्री विहारीजी के दर्शन करके हरिद्वार जो प्रस्थान कर गये । हरिद्ववार मैं गंगा किनारे दस वीघा जमीन लेकर बहुत सुन्दर मकान बनाया । जमीन के तीन भाग किये एक भाग राजा वलदेव दास जी विड़ला को दुसरा केशर देव जी पोदार रामगढ़वालों को दे दिया । सेठजी ने वर्षों तक कड़ी तपस्या की । मेरे नाम जनरल पावर ग्राफ टन यानी मुख्तार नामा झुन्झुनू वेनी प्रसाद सुलताने वाला मुनीम था और मैं मुख्तार ग्राम । श्री चिरंजीलाल जी खेतारण सेठजी के तीसरे पुत्र की निगरानी थी । सेटजी के सबसे छोटे पांचवे पुत्र श्री लीलाधर जी का अचानक स्वर्गवास हो गया घर वालों को और गांव वालों को आशा थी व तो सेठजी भुत्भुनू में एक वार आगे ही, परन्तु नही आये। सेठजी के पोते श्री भगवति प्रसाद खेताण का सम्वन्ध श्री ग्रानन्दी लाल जी पोदार नवलगढ़ की पोती से हुवा था उस मौके पर भी आने का पक्का विचार था. पोदर जी भुन्भुनू मै बैठा विवाह करने आये थे । चीटी तारं भुगतते रहे जाते है कल आगे मगर नहीं आये उनका ध्यान तो भागवत भजन में ही लगा रहा। झुन्झुनू का कोई भी आदमी हरिद्वार जाता था उसकी हाशापुरी की जाती थी स्थान खाना-पीना कोई ग्रार्थिक मदद चाहतां थी तो वोह भी गुप्त दान के रुप दी जाती थी । राजा वलदेव दासजी बिड़ला उनको अपना गुरु व वड़ा भाई मानते थे, सेठजी का ज्ञान तपोवल बहुत वढ गया था, कई साधु महात्मा सेटज़ी के पास ग्राते थे उनको दक्षिणा दी जाती थी । गज़ा वलदेव दास जी विड़ला ने एक दिन कहा अन्त समय काशीजी में मरने से मोक्ष प्राप्त होती है, वोह काशीजी चले गये सेठजी ने कहा समय पर में भी काशीजी आजाउंगां । श्री चिरंजी लाल जी खेतारण ने पंचपाने के सरदारों से फैसला कर लिया गाटर चढ़ाने का पट्टा करा लिया, सेठ जी को प्रभात काल में प्रभास हुवा कि आपकी संसार यात्रा जल्दी ही समाप्त होने वाली है सेठजी काशीज़ी चले गये । चारों पुत्र पोते पोती लड़कियां प्यारे प्रसंगी सव काशीजी मै इकट्ठे हो गये । भुन्भुनू में वीर बहादुर सिंहजो नाजिम आगये उन्होंने गाटर चढाने का हुकम दे दिया, गाटर चढा दी गई सेउज़ी को गाटर चढाने का तार दे दिया तो माने नहीं कहा मुझे भुलाया जा रहा है श्री घासीराम जी तिवाड़ी और मै दो ही ग्रामी झुन्झुनू में उनका काम संभालने वाले थे । तिवाड़ी जी गाटर का फोटू लेकर काशीजी गये । सेठजी वड़े खुश हुवे । दूसरे दिन गंगाजी के बोच में बड़ी नाव लेजायी गई सब परिवार वालों से पुछा आप लोग मेरी मोक्ष चाहते हो, सबने कहा हम आपकी मोक्ष चाहते है तो सेठजी ने कहा मेरे अन्त समय में मेरा सर राजा वलदेवदास जी विड़ला के गोडे पर रखा जावेगा तो मेरी सद्गति होगी चारों भाई एक दुसरे की तरफ देखते रह गये । अन्त समय आया तो राजा वलदेवदास जी ने गोडा लगाया, जय गंगे हर हर गंगे कहकर सेठजी स्वर्ग सिधार गये पंडितगण गीता, रामायण, वेद पाठ कह रहे थे । ऐसे ये सेठ महा पुरुष सेठ विलासराय खेताण । जब तक श्री लक्ष्मीनाथ जी का सुन्दर मंदिर रहेगा सेठ जी अमर रहेगें । झुन्झुनू में पुराने पोस्ट ऑफिस के सामने सेठजी ने एक पीपल का सुन्दर और मजबूत गट्टा बनाया था जिस पर लिखा हुआ है सेठ रामकरणदास सेठ विलासराय खेताण श्री मन्नालाल जी वेताण के पुत्रों ने दो सौ गज में सड़क बनाई है। जिस पर एक पत्थर तो पुराने पोस्ट ऑफिस के पास लगाया है और दुसरा जयरानदाल जी के मन्दिर के पास दोनों ही पत्थरों पर लिखा गया है "सेठ मन्नालाल खेताणं मार्ग" "क्या विलास राय खेतारण मार्ग" गाड़ियों के मोहल्ले में होगा । सेठ तो झुन्झुनू में श्री विलास राय । खेताण ही हुवे है, झुन्झुनू आबाद है तब तक उनका नाम भुलाया नहीं जा सकता । अच्छा हो दूसरे पत्थर लगाकर "सेठ विलासराय, मन्नालाल खेताण मार्ग लिखाया जावे, भूल सुधारी जावे, चन्द्रमा पर सूर्य का प्रकाश पड़ने पर ही रोशनी देता है। श्री मन्नालाल जी खेताण के सुपुत्र श्री परमेश्वरलाल जी ज्योतिष के प्रकाण्ड पंडित है, आस पास के पंडित उनसे टक्कर नहीं ले सकते यह इश्वरीय देन है, उनके केवल एक पुत्र श्री चन्द्रवावू खेताण है और सात लड़कीयां है आप कनाडा सरकार में पच्चीस हजार रूपये महिने में उच्च पद पर ऑफिसर थे, प्रभु की क्या माया है आपको वैराग्य होगया, संसार के सब सुखों को लात मार कर नौकरी से स्तिफा देकर भारत चले आये और अपने पंड़ दादा सेठ विलासराय जी खेताण के हरिद्वार वाले आश्रम में, आ विराजे । आपकी आयू छोटी ही है, विवाह भी नहीं किया है । भागवत् भजन और अध्ययन में मन लगा लिया, माता-पिता के एक ही पुत्र और सात वहिनें, आप सावारण गृहस्थ जैसे कपड़े पहनते है, जरा भी मान गूमान नहीं है, स्वयं भोजन बनाकर भगवान के भांग लगाते है । मैं हरि द्वार में मिलने गया, प्रेम से मिले । मैं ने कहा मेरे को भी कुछ वतावों तो श्री गंगाजी की तरफ ईशारा कर दिया, इनसे पुछो । आपका सिद्धान्त है किश्रात्मा की आवाज वाहर क्या दिखलाइये, तर जपिये राम । क्या काज संसार से, तुझे घरनी से काम ।। आश्रम के मुनिम को बुलाया और कहा मेरे को भोजन करने में एक वज जावेगा, इनको मारवाड़ी ढ़ावे में भोजन करा लावों। आश्रम में व मरा खोल दिया। दो दिन रहा शाम को आरती और प्रार्थना के वक्त उनसे मिलना होता था । पुस्तक बहुत बड़ा व सुन्दर है कई भाषाओं के दुर्लभ ग्रंथ मौजूद है । परीक्षा के तौर पर मैंने गूजराना पंडित श्री रामचन्द्र जी डींगरा की भागवत् मांगी दो मिनट में हा लाकर देवी । "चलना भला न कौस का बेटी भली न एक । कर्जा भला न बाप का जो प्रभू राखे टैक" ।1 श्री वसन्तलाल जी व श्री मन्नालाल जी खेताण का मैं मस्तार आम रहा हूँ । विवाह आदि में शामिल रहा हूं । श्री मन्नालाल जी वैताग की पुत्री श्रीमती रतनी बाई का विवाह नवलगढ़ में हुआ था । दस दिन रहना हुआ क्या रजवाड़ों का सा विवाह किया गया । श्री बद्रीप्रसादजी खेतारण का व मेरा डेरा एक ही कमरे में था, श्री ग्रानन्दीलाल जी पोहार ने खेतारा परिवार की शाही मीजवानी दी, वैडवाजा नगर के सेठ साहूकार, गीत, नाच, रंग रंगेलिया, खातिर तव्वजों । श्री मन्नालाल जी खेताण जुवाई वनकर चिड़ावा गये थे । श्री कन्हैयालाल जी शेखसरिया चिड़ावा वालों के लड़के श्री भजनलाल का विवाह था । सिल्वर किंग श्री मोतीलाल जी मलसीसर वाले लड़के वालों के भत्तई थे, नगर नूत था वड़ी अच्छी महफिले सजाई गई थी। भारत की प्रसिद्ध गायिकाओं को बुलाया गया था । कविवर श्री नानूलाल चिड़ावा वाला की पार्टी का भी खेल हुआ था । कवि दुलाराम उस वक्त यौवन पर था, आज तक ऐसी महफिले और गाजा बजाना नहीं देखा, हम लोगों को वीस भरी चांदी की दन्नी चौर वीस किलो पचान दिया गया था । खातिर तव्वजों, मेहमान नवाजी का तो वर्णन करे तो दो पाने भर जावें । कई सरदार और राजा साहब खेतड़ी भी पधारे थे । श्री नानगराम जमनादास रंगून वालों का लड़का था, और श्री नारंग राम जी खेतारण की परिवार की लड़की थी गाजियावाद में बैठा विवाह हुआ था । श्री राधावल्लभ जी सेतारण झुन्भुतू जागला जी के ज़वाई थे । मेरे को भी खेतारण राधावल्लभ जी साथ ले गये थे । दस दिन गाजियाबाद में रहे । जुबाई जी की खातिर होती है वह सव जानते है । रसोये, टहलवे कार, रंग राग हर तरह को छूट । पंडित श्री भावरमल जी शुक्ल कन्या पक्ष वालों की तरफ से पधारे हुये थे, उनको देखकर हमारी बोली वन्द हो गई, शुक्ला जी का कितना सम्मान, हर करोड़पति चरण छूता था, मेरे तो वोह यज्ञी पवित्र के गुरु थे, पंचम स्वर में बोलते थे । मैं उससे डरता भी था । श्री राधावल्लभ जी खेतारण भी उनका सम्मान रखते थे । गुरू पंडित झाबरमल जी शुक्ला जी की आशिर्वादका प्रताप है कि मैं मुखं होते हुवे भो विद्वानों की मण्डली में अपना गुजर वसर करता रहा। चालीसी की उम्र तक संतानन होने पर उन्होंने एक अनुष्ठान भी किया था । तीन योग्य पुत्र है । धन्य है गुरू कृपा की महिमा । श्रीर शंकर भगवान साकम्बरी माता की कृपा । एक वार बिड़ला जी के यहां चर्चा चल रही थी कि विवाह में कितना समय लगना चाहिये तो बाबू घनश्याम दास जी विड़ला ने कहा तीस मिनट में विवाह होता है, तो चतुर गुरू श्री भांवरमल जी ने कहा पच्चीस मिनट से ज्यादा नहीं लगते । त्रिडला परिवार में किसी वाई का । विवाह होता था, पंडित भावरमल जी शुक्ल ने पच्चीस मिनट में विधो विधान से विवाह करवा दिया। विड़ला जो बहुत राजी हुवे आईन्दा के लिए शुक्ला जी ही विवाह में बुलाये जाते थे । बिड़ला भवन कलकत्ते में रोजाना वरणी करने को पं० झावरमल जी शुक्ल झुन्झुन की नियुक्ति करदी । आज भी उनके सुपुत्र पं० किशोरीलाल जी शुक्ल वरगो करते है । पिलानी के अनेक नाम और अनेक रुप ढलेलगढ़, रायला पिलानी, बड़वाली पिलानी और बिड़लावाली पिलानी । दलेलगढ़ में पक्का गढ बनाया गया जिसका नाम ही दलेल - गढ़ रखा गया । तीन कुवें बनाये गये । कच्चे मकान ज्यादा थे पक्के कोठे तो गिनती मिनती के थे । ठा० दलेल सिंह जी अमलदार थे, उनका अमल जब उगता था, कि कुवे में से चड़स ढाणे के पास आ जाता था, तो किलीया गुण में से कीली खोल देता था, भरा हुआ चड़स कुर्वे में जा गिरता था और भुण की गड़गड़ाहट होती थी तब खंखारा करते थे, तब अमल उगता था । ठा० दलेल सिंह जी वुड़े भी हो गये थे, छोटा परिवार था, खुद ठुकरानी और एक छोटा पीता मंगलसिंह ठाकुर साहब की कमजोरी देख कर ठा० लक्ष्मण सिंह जी महनसर ने अचानक हमला कर कर दिया, वृद्ध ठाकुर को मार भगाया, ठा० दलेल सिंह जी जंगल में वलौदा गांव के पास रात कुवे के पास कच्ची खुड्डी और झोपड़ी वंधाली वैराग्य हो गया था, अज्ञातवास की तरह रहने लगे । भगवान का भजन करने लगे । ठा० श्यामसिंह जी विसाऊ नारनील को जीत कर वापस आ रहे थे वलौदा गांव में विश्राम किया, ठा० श्यामसिंह जी का व्रत था, पुजा पाठ करके श्री गोपीनाथ जी के भोग लगाते थे और थाल में अपने परिवार का कोई सदस्य होता था, उनको साथ में जिमाते थे । अकेले भोजन नहीं करते थे । अपने कामदार साह शंकरदास जी से कहा आज तो उपवास ही करना पड़ेगा, मेरे खानदान का कोई नहीं है तो साह शंकरदास ने कहा आपके काका जी इस गांव में मौजूद है, ठा० श्यामसिंह जी ने नाराज होकर फरमाया क्या बकता है, मेरे काका और इस गांव में, साह शंकरदास पुराने कामदार ने सब कहानी सुनादी, ठा० साहव ने फरमाया तुरन्त सम्मान पूर्वक उनको ले आवो, साह शंकरदास ने एक रथ और कई घुड़सवारों को साथ लेकर पैदल चल दिये । ठा० दलेलसिंह जी ने देखा यहां भी ठा० लक्ष्मणसिंह मारने को आया है । साह शंकरदास ने पसर कर प्रणाम किया और कहा ठा० श्यामसिंह जी बिसाऊ आपको वुला रहे है, खुद गये मगर ठकुरानी ने कंवर मंगलसिंह जी को साथ नहीं भेजा ठा० श्यामसिंह जी ने खड़े होकर उनको प्रणाम किया, आदर मान से बैठाया, भोजन का थाल आया तो ठा० दलेलसिंह जी ने कहा आज़ तो आपके साथ जोमलूंगा, कल यह थाल कहां से, वैगा तो ठा० ग्रामसिंह जी अपना आधा गांव वलौदा और भूरिवास और कासनी गांव और दो हजार वीघा जमीन झुन्झुनू गांव से पुर्वी दक्षिरणी भाग की दे दी जिसमें नेता, चौधरी की ढारगी, फौज़ के मालियों का मोहल्ला और मेरा नोहरा है । इनका पट्टा कर दिया, मामला मातमी खुद ठि० बिसाऊ से देना कर दिया, आनन्द से सज्जन गोठ हुई, दुःख सुख की बातें हुई, दलेल सिंह जी को साथ चलने को बहुत कहा तो ठा० दलेलसिंह जी ने कहा अवतो झोपड़ी में हो मन लग रहा है, दलेल गढ़ नवलगढ़ के ठाकरों को देदेना जो मेरे नज़दीक है। यह कहकर ठा० श्यामसिंह जी को विदाई दी । जिन्दगी की डौर सौंपी हाथ दीनानाथ के, महलों में राखें चाहे झोंपड़ी में वासदे, धन्यवाद निर्विवाद राम राम कहिये, जांही बिधी राखे राम वांही विधी रहिये, ठा० लक्ष्मणसिंह जी को पता लगा की ठा० श्यामसिंह जी इघर आ रहे है तो अपना बोरिया विस्तर उठाकर भाग गये । दलेलगढ़, नवलगढ़ के ठाकरों को देदीया गया, पिलानी की रिश्राया को जो पट्टळे जमीन के दिये जाते थे उनमें कस्वा दलेलगढ़ लिखा जाता था, विडला परिवार और सेठ साहूकार जनता के पास पट्ट है सव में दलेलगढ़ दर्ज है पिलानी का कहीं नाम नहीं है । पिलानी पर जगत पिता की कृपा हुई विड़ला जी जैसा परिवार ग्राया, होनहार महापुरूप पैदा हवे, लक्ष्मी और सरस्वती का संगम हुआ अव तो पिलानी सुदामा पुरी हो गई । वैद शास्त्रों ने और संत महात्माओं ने सतसंग को बहुत महिमा की है, वर्तमान जमाने में बाबू घनश्यामदासजी विड़ला भारत में पहले सज्जन है जिनको हजारों महापुरुषों का, साधुसंत पंडित महात्मा और देश भक्तों देश के चोटी के नेताओं की संगत की है। ग्रों ने अपनी जड़ भारत में जमा ली थी तो बंगाल में एक क्रान्तिकारियों का गठन हुवा था और अंग्रेजों को मार भगाने की योजना थी, यह संगठन गुप्त था, जिसमें जान पर खेलने वाले उसके सदस्य थे श्री कन्हैयालाल ही उसके मंत्री और कर्ता धर्ता थे बिड़लाजी उग्र विचार के थे उस पार्टी के सक्रिय मेम्बर बन गये, कई बदमाश की हत्या हुई, कई जगह वम फेंके गये जों की सी०डी० को इस संस्था का पता चल गया कई देश भक्त गिरफ्तार हुवे फांसी पर लटकाये गये । जिनके नाम वारंट जारी हुवे उसमें श्री घनश्याम दास जो विड़ला का भी नाम था, वारंट पर दस्तखत होने से पहले एक बंगाली महाशय यादि और वात्रु घनश्याम दास जो बिड़ला से कहा पांच हजार रूपया दो, तोरछी नजर से उसकी तरफ देवा, मालूम होता है यह कोई जिम्मेदार आदमी है, रूपये का भुगतान कर दिया गया, उस व्यक्ति ने कहा आपके नाम गिरफ्तारी वारंट है क्रान्तिकारीयों के सरगना है फौरन कलकत्ता छोड़ दो विड़लाजी अज्ञातवास हो गये और पिलानी रियासत जयपुर में आकर प्राईव्हेट रहने लगे एक घण्टे बाद वारन्टों पर दस्तखत हो गये । दोड़ आई पर विडलाजी का पता नही लगा । महाराजा साहव जयपुर को लिखा आपकी रियासत के रहने वाले श्री वनश्याम दास बिड़ला को गिरफ्तार करके राजपुताने के गर्वनर के सामने पेश करो, भुन्भुनू के नाजिम के नाम हुक्म आया, नाजिम साहव दल वल सहित पिलानी पहुचे, लम्बी घोड़ी ग्रोछी भीख, शौरगुल पकड़ने का बहूत हुवा, तीन दिन के पड़ाव के वाद नाजिम, श्री श्रव्दुलसमद खां पठान बगड़ वालों ने रिर्पोट कर दी कि छः महिनों में विड़ला जी पिलानी नही आये, महाराजा साहव ने नाजिम की रिर्पोट के हवाले से राजपुताने के गर्वनर को रिर्पोट भेजदी, जयपुर दरवार खुद गिरफ्तारी के विरुद्ध थे, एक साल पिलानी में रहे । कलकत्ता में वाईसराय का तबादला हो गया, लार्ड कर्जना गये जोड़ तोड़ बैठा लिया गया वारंट को दीमक चाट गई, पकड़ धकड़ वाली फाईल ही गुम हो गई, वावू घनश्यामदास विड़ला का प्रथम विदेश यात्रा का विचार हुआ, सवाल पैदा हुआ किसको साथ ले जावे तो पंजाव केसरी लाला लाजपतराय पर नजर पड़ी भारत में उस वक्त तीन ही सितारे चमकते थे वाल, पाल, लाल लाला जी से सीधी बात करने की हिम्मत नही हुई, गांधीजी से कहा आप लालाजी को विदेश यात्रा में मेरे साथ जाने को तैयार कर दे, गांधीजी मुस्कराये, लाला लाजपतराय गांधीजी से मिलते रहते थे । गांधीजी ने लालाजी से पुछा आपका आर्य विश्व विद्यालय कैसे चलता है तो लाला जी ने आर्थिक कठीनाई वतलाई गांधीजी ने कहा आप छः महिने तक श्री घनश्यामदास विड़ला के साथ विदेश यात्रा पर चले जावो लालाजी रजामंद हो गये, लाहौर जाकर अपने साथी महात्मा हंसराय और स्वामी ब्रजानन्द परिवाज को काम संभला कर विड़ला जी के साथ रवाना हो गये, दुनिया देखो नये नये कारखाने देखे अच्छे अच्छे श्रम नेताओं से मिले बहुत कुछ देखा अंग्रेजी के प्रकान्ड पंडित बन गये, फाइनेन्स को संमझा, छः महिने में पारस वन गये । भारत आये लाला जी को छः लाख रूपये भेंट किये गये जो लाहौर विश्व विद्यालय में खर्च हो गये । महात्मा गांधी की सेवा करने लगे पं० मदन मोहन मालवीया जी के आज्ञाकारी हो गये रात को मालवीया जी जव आराम करते थे तो श्री वनश्याम दास जी पैर दवाते थे । मालवीया जी को नींद आ जाती थी तो तेथे मालवीया जी के जमाने की अंग्रेजो पार्लियामेन्ट के सदस्य थे और भारत के राजेन्द्र मंडल के सभापति थे, राजेन्द्र मंडल का सालाना जलसा होता था उसमें राजा, महाराजा नवाव आते थे करोव छः सौ कुर्सी यो । पं० मदन मोहन मालवीया जी तेथे जब सव महाराजा नवाव खड़ होकर प्रणाम करते थे, सभापति का आसन ग्रहण करते थे । एक वार के जमाने की पालियामेंट का चुनाव हो रहा था । श्री प्रकाश जी के मुकाबले में बनारस से वावू धनश्यामदास जी को खड़ा कर दिया सेठ भगवानदास जी शिव प्रसाद जी का काशी में बहुत प्रभाव था, सेठ और विद्वान थे हजारों कार्यकर्ता उनके साथ थे । लोग चक्कर में पड़ गये कि काशी में घनदास बिड़ला कैसे जीत सकते हैं । पं० मदन मोहन मालवीया जी को पहली सभा काशी जी के वड़ो चौक में हुई मालवीया जी ने कहा घनश्याम दास विड़ला की जीत मालवीया की जीत है, और घनश्याम दास विड़ला की हार मालवीया की हार है, यह ऐलान सुनते ही हजारों पंडे पंडित साधु सन्यासी और मालवीया जी के भक्त उनके साथ हो गये । और काशी नरेश भी मालवीया जी के खेमें में आ गये । चुनाव हुआ श्री घनश्याम दास जी प्रवल बहुमत से जीते, वावु श्री प्रकाश जी गये श्री धनश्यामदास जी ने रामायण, भागवत महा भारत श्रुति, हार संस्कृत और हिन्दी के ग्रंथ भी है, कई भाषाओं के जानकार है । रोजाना एक नई पुस्तक पढ़ते आपकी धर्म पत्नी का स्वर्गवास हो गया, आप केवल ३३ साल के थे, दुसरा विवाह करने के लिए कई करोड़पति अपने जाने पहचाने रिश्तेदारों ने जोर दिया साफ इन्कार हो गये, कई विद्वान होनहार लड़कियों ने भी पोछा किया मगर कामयाव नहीं हुई, आपने ऐलान कर दिया आजन्म ब्रह्मचारी रहूंगा भगवानका व्रत निभा दिया आपके पिता राजा वलदेवदास जी ने गांधी जी से जोरदार शब्दों में प्रार्थना की, धनश्याम का विवाह करा दो, आजकल के युवक तो ३०-३२ साल की उम्र में पहला विवाह करते है । गांधीजी ने टटोला तो उनके चरणों के हाथ लगा कर कह दिया के बारे में आपके पास कोई शिकायत नहीं आवेगी । राजा साहब का तर्क था । धन यौवन और ठाकरी तां उपर प्रविवेक, यह चारों भेला भयां अनर्थ करे अनेक, फिर तो आपने ऐसा प्रोग्राम बना लिया अपने व्यवसाय में पढ़ने लिखने में, काम काज संभालने में सतसंग में समय लगाने लगे, पांच मिनट भी जीवन फालतू की नही खोई, मन तो ठाला होता है तब वूरी वातों में दौड़ लगाता है आपने मन रूपो घोड़े के मजबूत लगाम लगादी और अपने मजबूत हाथों में थामली, पिछे की दोनों टांगे पीछाड़ी की मजबूत रस्सी से बांध दी, आप मन पर असवार है, मन आप पर अस वार नहीं हैं । दुनियां भर में फाईनेन्स (वित्त) के समझने वालों में आपका पहला नम्बर है, एक आघ पौईन्ट में कोई आगे पिछे हो सकता है परन्तु आप तो हरफनमौला है, यानि संकल गुण निधान है । बाबू राजेन्द्रप्रसाद जी राष्ट्रपति बनने से पहले कई वार पिलानी स्वास्थ सुधारने को आते थे श्री घनश्यामदासजी उनकी सेवा में रहते थे। एक बार पं० जवाहरलालजी नेहरू पिलानी पधारे थे तो ऊंट की सवारी का प्रोग्राम रखा ऊंट को दुल्हे की तरह सजाया गया था पंडितजी ऊंट के अगले आसन पर बैठ ऊंट की नकेल अपने हाथ में लो पिछले आसन पर वावू घनश्यामदासजी ऐसे चढे जैसे पूराने ऊंट के सवार है वोह ऊंट भी वडभागी था जिसने भारत के दो महाविभूतियों को एक साथ अपने ऊपर विठलाया, हम लोग डर रहे थे कि ऊंट दौड़ लगा कर पंडितजी को गिरा न दें, पंडितजी घोड़ी के तो अच्छे सवार थे। शायद ऊंट का तो पहला ही मौका था । वावू घनश्यामदासजी अक्सर विदेश यात्रा में जाते रहते है, वहां के बड़े बड़े आदमी आपके सम्मान में रात्री भोज देते है, फ्रांन्स वाशिगंटन लंदन में तो ऐसे मौको पर सुरा और सुन्दरियों का जौर रहता है, अब तो भारत में सांस्कृतिक कार्यक्रम में दुनियां भर की विश्व सुन्दरियों को बुलाया जाता है, देश विदेश की नामी फिल्मी गायिकाओं को वूलाया जाता है। "पनघट जाते पन घंटे पनघट जांको नाम कहिये पन कैसे रहे पनिहारी के धाम" "पनघट जाते पन घंटे यही कहे सब कोय पनघट जा नहीं पन घटे जो घट मे पन होय',
को कोई युक्ति नहीं सुझो तो कहा सरकार बात की लड़ाई है अभी सेठजी ने ही कुछ नहीं समझा शेखावाटी में फिर हमारा राज़ = कैसे चलेगा, नाजिम साहब गुस्से में थे गाटर को हटवाने का हुक्म दे दिया सलाम के खातिर मियांजी को रूसाने वाली कहावत हो गई । "हाकीम की ग्रांट बूरी, मूंडोरी टाट वूरी, वैश्या को हाट दूरी, प्रौरत की चाट दूरी, भाईयो को फूट बूरी" फिर तो सेठजी भागकर जयपुर गये । इधर राजाजी खेतड़ी ठाकर बिसाऊ, नवलगढ़, मण्डावा, अलसीसर, मलसीसर चौकड़ी ने महाराजा श्रीमाधोसिंह जी के चरणों में तलवार रखदी और अर्ज किया शेखावाटी से शेखावतों का राज़ जा रहा है, एक महाजन अपमान कर रहा है हमारा मुकावला कर रहा है, महाराजा जयपुर अपने भाई बन्धुओं को नाराज नहीं करना चाहते थे । नवाव साहब जो उस ज़माने में मुसाहिब थे, उनको बुलाकर शेखावाटी के नाज़िम का हुक्म बहाल कर दिया गाटर हटाने का हुक्म दे दिया। सेटज़ी खवास वालाववस से मिले । खवास जो ने महाराजा साहव से कहा यह तो अन्याय हो गया श्री लक्ष्मीनाथ ज़ी के मन्दिर की रसोवड़ की गाटर है । होनहार की वात रात को ही महाराजा श्री माधोसिंह जी का स्वर्गवास हो गया । यह घटना अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ बाईस ईशून्य की है सेठजी को वड़ा दुःख हुवा चीर अपने पड़ोस के गोयनका घराने की वुढीया का श्राप यादया गया कि हमारे टोड़ क्या उतराये है तुमको भी प्यारी ईमारत तुड़वाने का दुःख होगा । सेठजी उसी वक्त श्री गोविन्ददेवजी के मन्दिर में गये और कहने लगे कि "तू कुछ और विचारत है नर तेरो विचार धर्यो हो रहगो" सीधे ही वृन्दावन चले गये झुन्झुनू में जीवन भर पैर नहीं रखा वृन्दावन में सेठज़ी ने दस हज़ार रूपये की हूंडी की थी, रात को डाकू एक डाकू सेठजी की छाती पर छुरा लेकर बैठ गया सेठजी ने तीजोरी की तांलो देदी डाकू ने कहा पुलिस में रिपोर्ट करोगे तो सेटज़ी ने कहा में न रिपोर्ट करूगां न फरयाद, डाकू रुपये लेकर चंपत हुवे । सेठजी सुवह श्री विहारीजी के दर्शन करके हरिद्वार जो प्रस्थान कर गये । हरिद्ववार मैं गंगा किनारे दस वीघा जमीन लेकर बहुत सुन्दर मकान बनाया । जमीन के तीन भाग किये एक भाग राजा वलदेव दास जी विड़ला को दुसरा केशर देव जी पोदार रामगढ़वालों को दे दिया । सेठजी ने वर्षों तक कड़ी तपस्या की । मेरे नाम जनरल पावर ग्राफ टन यानी मुख्तार नामा झुन्झुनू वेनी प्रसाद सुलताने वाला मुनीम था और मैं मुख्तार ग्राम । श्री चिरंजीलाल जी खेतारण सेठजी के तीसरे पुत्र की निगरानी थी । सेटजी के सबसे छोटे पांचवे पुत्र श्री लीलाधर जी का अचानक स्वर्गवास हो गया घर वालों को और गांव वालों को आशा थी व तो सेठजी भुत्भुनू में एक वार आगे ही, परन्तु नही आये। सेठजी के पोते श्री भगवति प्रसाद खेताण का सम्वन्ध श्री ग्रानन्दी लाल जी पोदार नवलगढ़ की पोती से हुवा था उस मौके पर भी आने का पक्का विचार था. पोदर जी भुन्भुनू मै बैठा विवाह करने आये थे । चीटी तारं भुगतते रहे जाते है कल आगे मगर नहीं आये उनका ध्यान तो भागवत भजन में ही लगा रहा। झुन्झुनू का कोई भी आदमी हरिद्वार जाता था उसकी हाशापुरी की जाती थी स्थान खाना-पीना कोई ग्रार्थिक मदद चाहतां थी तो वोह भी गुप्त दान के रुप दी जाती थी । राजा वलदेव दासजी बिड़ला उनको अपना गुरु व वड़ा भाई मानते थे, सेठजी का ज्ञान तपोवल बहुत वढ गया था, कई साधु महात्मा सेटज़ी के पास ग्राते थे उनको दक्षिणा दी जाती थी । गज़ा वलदेव दास जी विड़ला ने एक दिन कहा अन्त समय काशीजी में मरने से मोक्ष प्राप्त होती है, वोह काशीजी चले गये सेठजी ने कहा समय पर में भी काशीजी आजाउंगां । श्री चिरंजी लाल जी खेतारण ने पंचपाने के सरदारों से फैसला कर लिया गाटर चढ़ाने का पट्टा करा लिया, सेठ जी को प्रभात काल में प्रभास हुवा कि आपकी संसार यात्रा जल्दी ही समाप्त होने वाली है सेठजी काशीज़ी चले गये । चारों पुत्र पोते पोती लड़कियां प्यारे प्रसंगी सव काशीजी मै इकट्ठे हो गये । भुन्भुनू में वीर बहादुर सिंहजो नाजिम आगये उन्होंने गाटर चढाने का हुकम दे दिया, गाटर चढा दी गई सेउज़ी को गाटर चढाने का तार दे दिया तो माने नहीं कहा मुझे भुलाया जा रहा है श्री घासीराम जी तिवाड़ी और मै दो ही ग्रामी झुन्झुनू में उनका काम संभालने वाले थे । तिवाड़ी जी गाटर का फोटू लेकर काशीजी गये । सेठजी वड़े खुश हुवे । दूसरे दिन गंगाजी के बोच में बड़ी नाव लेजायी गई सब परिवार वालों से पुछा आप लोग मेरी मोक्ष चाहते हो, सबने कहा हम आपकी मोक्ष चाहते है तो सेठजी ने कहा मेरे अन्त समय में मेरा सर राजा वलदेवदास जी विड़ला के गोडे पर रखा जावेगा तो मेरी सद्गति होगी चारों भाई एक दुसरे की तरफ देखते रह गये । अन्त समय आया तो राजा वलदेवदास जी ने गोडा लगाया, जय गंगे हर हर गंगे कहकर सेठजी स्वर्ग सिधार गये पंडितगण गीता, रामायण, वेद पाठ कह रहे थे । ऐसे ये सेठ महा पुरुष सेठ विलासराय खेताण । जब तक श्री लक्ष्मीनाथ जी का सुन्दर मंदिर रहेगा सेठ जी अमर रहेगें । झुन्झुनू में पुराने पोस्ट ऑफिस के सामने सेठजी ने एक पीपल का सुन्दर और मजबूत गट्टा बनाया था जिस पर लिखा हुआ है सेठ रामकरणदास सेठ विलासराय खेताण श्री मन्नालाल जी वेताण के पुत्रों ने दो सौ गज में सड़क बनाई है। जिस पर एक पत्थर तो पुराने पोस्ट ऑफिस के पास लगाया है और दुसरा जयरानदाल जी के मन्दिर के पास दोनों ही पत्थरों पर लिखा गया है "सेठ मन्नालाल खेताणं मार्ग" "क्या विलास राय खेतारण मार्ग" गाड़ियों के मोहल्ले में होगा । सेठ तो झुन्झुनू में श्री विलास राय । खेताण ही हुवे है, झुन्झुनू आबाद है तब तक उनका नाम भुलाया नहीं जा सकता । अच्छा हो दूसरे पत्थर लगाकर "सेठ विलासराय, मन्नालाल खेताण मार्ग लिखाया जावे, भूल सुधारी जावे, चन्द्रमा पर सूर्य का प्रकाश पड़ने पर ही रोशनी देता है। श्री मन्नालाल जी खेताण के सुपुत्र श्री परमेश्वरलाल जी ज्योतिष के प्रकाण्ड पंडित है, आस पास के पंडित उनसे टक्कर नहीं ले सकते यह इश्वरीय देन है, उनके केवल एक पुत्र श्री चन्द्रवावू खेताण है और सात लड़कीयां है आप कनाडा सरकार में पच्चीस हजार रूपये महिने में उच्च पद पर ऑफिसर थे, प्रभु की क्या माया है आपको वैराग्य होगया, संसार के सब सुखों को लात मार कर नौकरी से स्तिफा देकर भारत चले आये और अपने पंड़ दादा सेठ विलासराय जी खेताण के हरिद्वार वाले आश्रम में, आ विराजे । आपकी आयू छोटी ही है, विवाह भी नहीं किया है । भागवत् भजन और अध्ययन में मन लगा लिया, माता-पिता के एक ही पुत्र और सात वहिनें, आप सावारण गृहस्थ जैसे कपड़े पहनते है, जरा भी मान गूमान नहीं है, स्वयं भोजन बनाकर भगवान के भांग लगाते है । मैं हरि द्वार में मिलने गया, प्रेम से मिले । मैं ने कहा मेरे को भी कुछ वतावों तो श्री गंगाजी की तरफ ईशारा कर दिया, इनसे पुछो । आपका सिद्धान्त है किश्रात्मा की आवाज वाहर क्या दिखलाइये, तर जपिये राम । क्या काज संसार से, तुझे घरनी से काम ।। आश्रम के मुनिम को बुलाया और कहा मेरे को भोजन करने में एक वज जावेगा, इनको मारवाड़ी ढ़ावे में भोजन करा लावों। आश्रम में व मरा खोल दिया। दो दिन रहा शाम को आरती और प्रार्थना के वक्त उनसे मिलना होता था । पुस्तक बहुत बड़ा व सुन्दर है कई भाषाओं के दुर्लभ ग्रंथ मौजूद है । परीक्षा के तौर पर मैंने गूजराना पंडित श्री रामचन्द्र जी डींगरा की भागवत् मांगी दो मिनट में हा लाकर देवी । "चलना भला न कौस का बेटी भली न एक । कर्जा भला न बाप का जो प्रभू राखे टैक" ।एक श्री वसन्तलाल जी व श्री मन्नालाल जी खेताण का मैं मस्तार आम रहा हूँ । विवाह आदि में शामिल रहा हूं । श्री मन्नालाल जी वैताग की पुत्री श्रीमती रतनी बाई का विवाह नवलगढ़ में हुआ था । दस दिन रहना हुआ क्या रजवाड़ों का सा विवाह किया गया । श्री बद्रीप्रसादजी खेतारण का व मेरा डेरा एक ही कमरे में था, श्री ग्रानन्दीलाल जी पोहार ने खेतारा परिवार की शाही मीजवानी दी, वैडवाजा नगर के सेठ साहूकार, गीत, नाच, रंग रंगेलिया, खातिर तव्वजों । श्री मन्नालाल जी खेताण जुवाई वनकर चिड़ावा गये थे । श्री कन्हैयालाल जी शेखसरिया चिड़ावा वालों के लड़के श्री भजनलाल का विवाह था । सिल्वर किंग श्री मोतीलाल जी मलसीसर वाले लड़के वालों के भत्तई थे, नगर नूत था वड़ी अच्छी महफिले सजाई गई थी। भारत की प्रसिद्ध गायिकाओं को बुलाया गया था । कविवर श्री नानूलाल चिड़ावा वाला की पार्टी का भी खेल हुआ था । कवि दुलाराम उस वक्त यौवन पर था, आज तक ऐसी महफिले और गाजा बजाना नहीं देखा, हम लोगों को वीस भरी चांदी की दन्नी चौर वीस किलो पचान दिया गया था । खातिर तव्वजों, मेहमान नवाजी का तो वर्णन करे तो दो पाने भर जावें । कई सरदार और राजा साहब खेतड़ी भी पधारे थे । श्री नानगराम जमनादास रंगून वालों का लड़का था, और श्री नारंग राम जी खेतारण की परिवार की लड़की थी गाजियावाद में बैठा विवाह हुआ था । श्री राधावल्लभ जी सेतारण झुन्भुतू जागला जी के ज़वाई थे । मेरे को भी खेतारण राधावल्लभ जी साथ ले गये थे । दस दिन गाजियाबाद में रहे । जुबाई जी की खातिर होती है वह सव जानते है । रसोये, टहलवे कार, रंग राग हर तरह को छूट । पंडित श्री भावरमल जी शुक्ल कन्या पक्ष वालों की तरफ से पधारे हुये थे, उनको देखकर हमारी बोली वन्द हो गई, शुक्ला जी का कितना सम्मान, हर करोड़पति चरण छूता था, मेरे तो वोह यज्ञी पवित्र के गुरु थे, पंचम स्वर में बोलते थे । मैं उससे डरता भी था । श्री राधावल्लभ जी खेतारण भी उनका सम्मान रखते थे । गुरू पंडित झाबरमल जी शुक्ला जी की आशिर्वादका प्रताप है कि मैं मुखं होते हुवे भो विद्वानों की मण्डली में अपना गुजर वसर करता रहा। चालीसी की उम्र तक संतानन होने पर उन्होंने एक अनुष्ठान भी किया था । तीन योग्य पुत्र है । धन्य है गुरू कृपा की महिमा । श्रीर शंकर भगवान साकम्बरी माता की कृपा । एक वार बिड़ला जी के यहां चर्चा चल रही थी कि विवाह में कितना समय लगना चाहिये तो बाबू घनश्याम दास जी विड़ला ने कहा तीस मिनट में विवाह होता है, तो चतुर गुरू श्री भांवरमल जी ने कहा पच्चीस मिनट से ज्यादा नहीं लगते । त्रिडला परिवार में किसी वाई का । विवाह होता था, पंडित भावरमल जी शुक्ल ने पच्चीस मिनट में विधो विधान से विवाह करवा दिया। विड़ला जो बहुत राजी हुवे आईन्दा के लिए शुक्ला जी ही विवाह में बुलाये जाते थे । बिड़ला भवन कलकत्ते में रोजाना वरणी करने को पंशून्य झावरमल जी शुक्ल झुन्झुन की नियुक्ति करदी । आज भी उनके सुपुत्र पंशून्य किशोरीलाल जी शुक्ल वरगो करते है । पिलानी के अनेक नाम और अनेक रुप ढलेलगढ़, रायला पिलानी, बड़वाली पिलानी और बिड़लावाली पिलानी । दलेलगढ़ में पक्का गढ बनाया गया जिसका नाम ही दलेल - गढ़ रखा गया । तीन कुवें बनाये गये । कच्चे मकान ज्यादा थे पक्के कोठे तो गिनती मिनती के थे । ठाशून्य दलेल सिंह जी अमलदार थे, उनका अमल जब उगता था, कि कुवे में से चड़स ढाणे के पास आ जाता था, तो किलीया गुण में से कीली खोल देता था, भरा हुआ चड़स कुर्वे में जा गिरता था और भुण की गड़गड़ाहट होती थी तब खंखारा करते थे, तब अमल उगता था । ठाशून्य दलेल सिंह जी वुड़े भी हो गये थे, छोटा परिवार था, खुद ठुकरानी और एक छोटा पीता मंगलसिंह ठाकुर साहब की कमजोरी देख कर ठाशून्य लक्ष्मण सिंह जी महनसर ने अचानक हमला कर कर दिया, वृद्ध ठाकुर को मार भगाया, ठाशून्य दलेल सिंह जी जंगल में वलौदा गांव के पास रात कुवे के पास कच्ची खुड्डी और झोपड़ी वंधाली वैराग्य हो गया था, अज्ञातवास की तरह रहने लगे । भगवान का भजन करने लगे । ठाशून्य श्यामसिंह जी विसाऊ नारनील को जीत कर वापस आ रहे थे वलौदा गांव में विश्राम किया, ठाशून्य श्यामसिंह जी का व्रत था, पुजा पाठ करके श्री गोपीनाथ जी के भोग लगाते थे और थाल में अपने परिवार का कोई सदस्य होता था, उनको साथ में जिमाते थे । अकेले भोजन नहीं करते थे । अपने कामदार साह शंकरदास जी से कहा आज तो उपवास ही करना पड़ेगा, मेरे खानदान का कोई नहीं है तो साह शंकरदास ने कहा आपके काका जी इस गांव में मौजूद है, ठाशून्य श्यामसिंह जी ने नाराज होकर फरमाया क्या बकता है, मेरे काका और इस गांव में, साह शंकरदास पुराने कामदार ने सब कहानी सुनादी, ठाशून्य साहव ने फरमाया तुरन्त सम्मान पूर्वक उनको ले आवो, साह शंकरदास ने एक रथ और कई घुड़सवारों को साथ लेकर पैदल चल दिये । ठाशून्य दलेलसिंह जी ने देखा यहां भी ठाशून्य लक्ष्मणसिंह मारने को आया है । साह शंकरदास ने पसर कर प्रणाम किया और कहा ठाशून्य श्यामसिंह जी बिसाऊ आपको वुला रहे है, खुद गये मगर ठकुरानी ने कंवर मंगलसिंह जी को साथ नहीं भेजा ठाशून्य श्यामसिंह जी ने खड़े होकर उनको प्रणाम किया, आदर मान से बैठाया, भोजन का थाल आया तो ठाशून्य दलेलसिंह जी ने कहा आज़ तो आपके साथ जोमलूंगा, कल यह थाल कहां से, वैगा तो ठाशून्य ग्रामसिंह जी अपना आधा गांव वलौदा और भूरिवास और कासनी गांव और दो हजार वीघा जमीन झुन्झुनू गांव से पुर्वी दक्षिरणी भाग की दे दी जिसमें नेता, चौधरी की ढारगी, फौज़ के मालियों का मोहल्ला और मेरा नोहरा है । इनका पट्टा कर दिया, मामला मातमी खुद ठिशून्य बिसाऊ से देना कर दिया, आनन्द से सज्जन गोठ हुई, दुःख सुख की बातें हुई, दलेल सिंह जी को साथ चलने को बहुत कहा तो ठाशून्य दलेलसिंह जी ने कहा अवतो झोपड़ी में हो मन लग रहा है, दलेल गढ़ नवलगढ़ के ठाकरों को देदेना जो मेरे नज़दीक है। यह कहकर ठाशून्य श्यामसिंह जी को विदाई दी । जिन्दगी की डौर सौंपी हाथ दीनानाथ के, महलों में राखें चाहे झोंपड़ी में वासदे, धन्यवाद निर्विवाद राम राम कहिये, जांही बिधी राखे राम वांही विधी रहिये, ठाशून्य लक्ष्मणसिंह जी को पता लगा की ठाशून्य श्यामसिंह जी इघर आ रहे है तो अपना बोरिया विस्तर उठाकर भाग गये । दलेलगढ़, नवलगढ़ के ठाकरों को देदीया गया, पिलानी की रिश्राया को जो पट्टळे जमीन के दिये जाते थे उनमें कस्वा दलेलगढ़ लिखा जाता था, विडला परिवार और सेठ साहूकार जनता के पास पट्ट है सव में दलेलगढ़ दर्ज है पिलानी का कहीं नाम नहीं है । पिलानी पर जगत पिता की कृपा हुई विड़ला जी जैसा परिवार ग्राया, होनहार महापुरूप पैदा हवे, लक्ष्मी और सरस्वती का संगम हुआ अव तो पिलानी सुदामा पुरी हो गई । वैद शास्त्रों ने और संत महात्माओं ने सतसंग को बहुत महिमा की है, वर्तमान जमाने में बाबू घनश्यामदासजी विड़ला भारत में पहले सज्जन है जिनको हजारों महापुरुषों का, साधुसंत पंडित महात्मा और देश भक्तों देश के चोटी के नेताओं की संगत की है। ग्रों ने अपनी जड़ भारत में जमा ली थी तो बंगाल में एक क्रान्तिकारियों का गठन हुवा था और अंग्रेजों को मार भगाने की योजना थी, यह संगठन गुप्त था, जिसमें जान पर खेलने वाले उसके सदस्य थे श्री कन्हैयालाल ही उसके मंत्री और कर्ता धर्ता थे बिड़लाजी उग्र विचार के थे उस पार्टी के सक्रिय मेम्बर बन गये, कई बदमाश की हत्या हुई, कई जगह वम फेंके गये जों की सीशून्यडीशून्य को इस संस्था का पता चल गया कई देश भक्त गिरफ्तार हुवे फांसी पर लटकाये गये । जिनके नाम वारंट जारी हुवे उसमें श्री घनश्याम दास जो विड़ला का भी नाम था, वारंट पर दस्तखत होने से पहले एक बंगाली महाशय यादि और वात्रु घनश्याम दास जो बिड़ला से कहा पांच हजार रूपया दो, तोरछी नजर से उसकी तरफ देवा, मालूम होता है यह कोई जिम्मेदार आदमी है, रूपये का भुगतान कर दिया गया, उस व्यक्ति ने कहा आपके नाम गिरफ्तारी वारंट है क्रान्तिकारीयों के सरगना है फौरन कलकत्ता छोड़ दो विड़लाजी अज्ञातवास हो गये और पिलानी रियासत जयपुर में आकर प्राईव्हेट रहने लगे एक घण्टे बाद वारन्टों पर दस्तखत हो गये । दोड़ आई पर विडलाजी का पता नही लगा । महाराजा साहव जयपुर को लिखा आपकी रियासत के रहने वाले श्री वनश्याम दास बिड़ला को गिरफ्तार करके राजपुताने के गर्वनर के सामने पेश करो, भुन्भुनू के नाजिम के नाम हुक्म आया, नाजिम साहव दल वल सहित पिलानी पहुचे, लम्बी घोड़ी ग्रोछी भीख, शौरगुल पकड़ने का बहूत हुवा, तीन दिन के पड़ाव के वाद नाजिम, श्री श्रव्दुलसमद खां पठान बगड़ वालों ने रिर्पोट कर दी कि छः महिनों में विड़ला जी पिलानी नही आये, महाराजा साहव ने नाजिम की रिर्पोट के हवाले से राजपुताने के गर्वनर को रिर्पोट भेजदी, जयपुर दरवार खुद गिरफ्तारी के विरुद्ध थे, एक साल पिलानी में रहे । कलकत्ता में वाईसराय का तबादला हो गया, लार्ड कर्जना गये जोड़ तोड़ बैठा लिया गया वारंट को दीमक चाट गई, पकड़ धकड़ वाली फाईल ही गुम हो गई, वावू घनश्यामदास विड़ला का प्रथम विदेश यात्रा का विचार हुआ, सवाल पैदा हुआ किसको साथ ले जावे तो पंजाव केसरी लाला लाजपतराय पर नजर पड़ी भारत में उस वक्त तीन ही सितारे चमकते थे वाल, पाल, लाल लाला जी से सीधी बात करने की हिम्मत नही हुई, गांधीजी से कहा आप लालाजी को विदेश यात्रा में मेरे साथ जाने को तैयार कर दे, गांधीजी मुस्कराये, लाला लाजपतराय गांधीजी से मिलते रहते थे । गांधीजी ने लालाजी से पुछा आपका आर्य विश्व विद्यालय कैसे चलता है तो लाला जी ने आर्थिक कठीनाई वतलाई गांधीजी ने कहा आप छः महिने तक श्री घनश्यामदास विड़ला के साथ विदेश यात्रा पर चले जावो लालाजी रजामंद हो गये, लाहौर जाकर अपने साथी महात्मा हंसराय और स्वामी ब्रजानन्द परिवाज को काम संभला कर विड़ला जी के साथ रवाना हो गये, दुनिया देखो नये नये कारखाने देखे अच्छे अच्छे श्रम नेताओं से मिले बहुत कुछ देखा अंग्रेजी के प्रकान्ड पंडित बन गये, फाइनेन्स को संमझा, छः महिने में पारस वन गये । भारत आये लाला जी को छः लाख रूपये भेंट किये गये जो लाहौर विश्व विद्यालय में खर्च हो गये । महात्मा गांधी की सेवा करने लगे पंशून्य मदन मोहन मालवीया जी के आज्ञाकारी हो गये रात को मालवीया जी जव आराम करते थे तो श्री वनश्याम दास जी पैर दवाते थे । मालवीया जी को नींद आ जाती थी तो तेथे मालवीया जी के जमाने की अंग्रेजो पार्लियामेन्ट के सदस्य थे और भारत के राजेन्द्र मंडल के सभापति थे, राजेन्द्र मंडल का सालाना जलसा होता था उसमें राजा, महाराजा नवाव आते थे करोव छः सौ कुर्सी यो । पंशून्य मदन मोहन मालवीया जी तेथे जब सव महाराजा नवाव खड़ होकर प्रणाम करते थे, सभापति का आसन ग्रहण करते थे । एक वार के जमाने की पालियामेंट का चुनाव हो रहा था । श्री प्रकाश जी के मुकाबले में बनारस से वावू धनश्यामदास जी को खड़ा कर दिया सेठ भगवानदास जी शिव प्रसाद जी का काशी में बहुत प्रभाव था, सेठ और विद्वान थे हजारों कार्यकर्ता उनके साथ थे । लोग चक्कर में पड़ गये कि काशी में घनदास बिड़ला कैसे जीत सकते हैं । पंशून्य मदन मोहन मालवीया जी को पहली सभा काशी जी के वड़ो चौक में हुई मालवीया जी ने कहा घनश्याम दास विड़ला की जीत मालवीया की जीत है, और घनश्याम दास विड़ला की हार मालवीया की हार है, यह ऐलान सुनते ही हजारों पंडे पंडित साधु सन्यासी और मालवीया जी के भक्त उनके साथ हो गये । और काशी नरेश भी मालवीया जी के खेमें में आ गये । चुनाव हुआ श्री घनश्याम दास जी प्रवल बहुमत से जीते, वावु श्री प्रकाश जी गये श्री धनश्यामदास जी ने रामायण, भागवत महा भारत श्रुति, हार संस्कृत और हिन्दी के ग्रंथ भी है, कई भाषाओं के जानकार है । रोजाना एक नई पुस्तक पढ़ते आपकी धर्म पत्नी का स्वर्गवास हो गया, आप केवल तैंतीस साल के थे, दुसरा विवाह करने के लिए कई करोड़पति अपने जाने पहचाने रिश्तेदारों ने जोर दिया साफ इन्कार हो गये, कई विद्वान होनहार लड़कियों ने भी पोछा किया मगर कामयाव नहीं हुई, आपने ऐलान कर दिया आजन्म ब्रह्मचारी रहूंगा भगवानका व्रत निभा दिया आपके पिता राजा वलदेवदास जी ने गांधी जी से जोरदार शब्दों में प्रार्थना की, धनश्याम का विवाह करा दो, आजकल के युवक तो तीस-बत्तीस साल की उम्र में पहला विवाह करते है । गांधीजी ने टटोला तो उनके चरणों के हाथ लगा कर कह दिया के बारे में आपके पास कोई शिकायत नहीं आवेगी । राजा साहब का तर्क था । धन यौवन और ठाकरी तां उपर प्रविवेक, यह चारों भेला भयां अनर्थ करे अनेक, फिर तो आपने ऐसा प्रोग्राम बना लिया अपने व्यवसाय में पढ़ने लिखने में, काम काज संभालने में सतसंग में समय लगाने लगे, पांच मिनट भी जीवन फालतू की नही खोई, मन तो ठाला होता है तब वूरी वातों में दौड़ लगाता है आपने मन रूपो घोड़े के मजबूत लगाम लगादी और अपने मजबूत हाथों में थामली, पिछे की दोनों टांगे पीछाड़ी की मजबूत रस्सी से बांध दी, आप मन पर असवार है, मन आप पर अस वार नहीं हैं । दुनियां भर में फाईनेन्स के समझने वालों में आपका पहला नम्बर है, एक आघ पौईन्ट में कोई आगे पिछे हो सकता है परन्तु आप तो हरफनमौला है, यानि संकल गुण निधान है । बाबू राजेन्द्रप्रसाद जी राष्ट्रपति बनने से पहले कई वार पिलानी स्वास्थ सुधारने को आते थे श्री घनश्यामदासजी उनकी सेवा में रहते थे। एक बार पंशून्य जवाहरलालजी नेहरू पिलानी पधारे थे तो ऊंट की सवारी का प्रोग्राम रखा ऊंट को दुल्हे की तरह सजाया गया था पंडितजी ऊंट के अगले आसन पर बैठ ऊंट की नकेल अपने हाथ में लो पिछले आसन पर वावू घनश्यामदासजी ऐसे चढे जैसे पूराने ऊंट के सवार है वोह ऊंट भी वडभागी था जिसने भारत के दो महाविभूतियों को एक साथ अपने ऊपर विठलाया, हम लोग डर रहे थे कि ऊंट दौड़ लगा कर पंडितजी को गिरा न दें, पंडितजी घोड़ी के तो अच्छे सवार थे। शायद ऊंट का तो पहला ही मौका था । वावू घनश्यामदासजी अक्सर विदेश यात्रा में जाते रहते है, वहां के बड़े बड़े आदमी आपके सम्मान में रात्री भोज देते है, फ्रांन्स वाशिगंटन लंदन में तो ऐसे मौको पर सुरा और सुन्दरियों का जौर रहता है, अब तो भारत में सांस्कृतिक कार्यक्रम में दुनियां भर की विश्व सुन्दरियों को बुलाया जाता है, देश विदेश की नामी फिल्मी गायिकाओं को वूलाया जाता है। "पनघट जाते पन घंटे पनघट जांको नाम कहिये पन कैसे रहे पनिहारी के धाम" "पनघट जाते पन घंटे यही कहे सब कोय पनघट जा नहीं पन घटे जो घट मे पन होय',
Hindi. filmibeat. comखूबसूरत फिल्म एक कंप्लीट डिज्नी टाइप की फिल्म है, मजेदार, लव स्टोरी और खूबसूरत। फिल्म की लोकेशन बेहद खूबसूरत है और कॉमेडी भी काफी अच्छी है। हालांकि खूबसूरत में ऐसा कुछ खास नहीं है जो कि आपको सिनेमाहॉल छोड़ने के बाद याद रहेगा लेकिन आपके दो घंटे हंसते हुए बीतेंगे ये कह सकते हैं। फिल्म का पहला भाग थोड़ा सा बो�. . Jawan- 50 करोड़ की ओपनिंग के साथ Shahrukh Khan? इस एक्टर ने की तगड़ी भविष्यवाणी!
Hindi. filmibeat. comखूबसूरत फिल्म एक कंप्लीट डिज्नी टाइप की फिल्म है, मजेदार, लव स्टोरी और खूबसूरत। फिल्म की लोकेशन बेहद खूबसूरत है और कॉमेडी भी काफी अच्छी है। हालांकि खूबसूरत में ऐसा कुछ खास नहीं है जो कि आपको सिनेमाहॉल छोड़ने के बाद याद रहेगा लेकिन आपके दो घंटे हंसते हुए बीतेंगे ये कह सकते हैं। फिल्म का पहला भाग थोड़ा सा बो�. . Jawan- पचास करोड़ की ओपनिंग के साथ Shahrukh Khan? इस एक्टर ने की तगड़ी भविष्यवाणी!
अभिनेत्री दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह व शाहिद कपूर के शानदार अभिनय से सजी फिल्म 'पद्मावती' जिसका निर्देशन कर रहे है बॉलीवुड के दिग्गज फिल्ममेकर संजय लीला भंसाली जो कि इस फिल्म के कारण मारपीट के भी शिकार हो चुके है. अब एक बार फिर से फिल्म के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. जी हां बता दे कि, वैसे भी इस फिल्म में हमे दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह व शाहिद कपूर का लुक देखने को मिल चूका है. अब इस फिल्म के एक और अहम किरदार जलालुद्दीन खिलजी के रूप में नजर आने वाले अभिनेता रजा मुराद का भी लुक सोशलमीडिया साइट्स पर आ चूका है. दरअसल फिल्म में रणवीर सिंह का अलाउद्दीन खिलजी लुक जारी होने के बाद रजा मुराद ने भी अपने जलालुद्दीन खिलजी लुक को फेसबुक पर शेयर किया था. वैसे भी इस फिल्म पर हमे पूर्व में भी कई तरह के घटनाक्रम सुनने को मिल चुके है जो की सभी को ज्ञात है. अब इस फिल्म पर स्मृति ईरानी ने भी कुछ बयान दिया है. केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने ये विश्वास दिलाया है कि पद्मावती के रिलीज को लेकर राजस्थान में कोई समस्या न आए. उन्होंने कहा कि सरकार इसका पूरा ध्यान रखेगी. बता दें कि पद्मावती के रिलीज को लेकर करणी सेना ने पहले ही धमकी दी थी कि वो फिल्म को रिलीज नहीं होने देंगे. क्या साल के आखिरी तिमाही में इन सुपरस्टार की फिल्मे धमाल मचाएंगी?
अभिनेत्री दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह व शाहिद कपूर के शानदार अभिनय से सजी फिल्म 'पद्मावती' जिसका निर्देशन कर रहे है बॉलीवुड के दिग्गज फिल्ममेकर संजय लीला भंसाली जो कि इस फिल्म के कारण मारपीट के भी शिकार हो चुके है. अब एक बार फिर से फिल्म के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. जी हां बता दे कि, वैसे भी इस फिल्म में हमे दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह व शाहिद कपूर का लुक देखने को मिल चूका है. अब इस फिल्म के एक और अहम किरदार जलालुद्दीन खिलजी के रूप में नजर आने वाले अभिनेता रजा मुराद का भी लुक सोशलमीडिया साइट्स पर आ चूका है. दरअसल फिल्म में रणवीर सिंह का अलाउद्दीन खिलजी लुक जारी होने के बाद रजा मुराद ने भी अपने जलालुद्दीन खिलजी लुक को फेसबुक पर शेयर किया था. वैसे भी इस फिल्म पर हमे पूर्व में भी कई तरह के घटनाक्रम सुनने को मिल चुके है जो की सभी को ज्ञात है. अब इस फिल्म पर स्मृति ईरानी ने भी कुछ बयान दिया है. केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने ये विश्वास दिलाया है कि पद्मावती के रिलीज को लेकर राजस्थान में कोई समस्या न आए. उन्होंने कहा कि सरकार इसका पूरा ध्यान रखेगी. बता दें कि पद्मावती के रिलीज को लेकर करणी सेना ने पहले ही धमकी दी थी कि वो फिल्म को रिलीज नहीं होने देंगे. क्या साल के आखिरी तिमाही में इन सुपरस्टार की फिल्मे धमाल मचाएंगी?
Digitized by the Internet Archive in 2010 with funding from University of Toronto श्रवनीतल के परम मनोहर श्रोस बिन्दु अरे निर्जन वन के निर्मल निर्भर ! एकान्त गात जीवन स्त्रोत श्रो प्रवाहिनी, रुक जा ओ मेरे पथ, जीवन-पथ ! श्री समीर, प्रातः समीर ! इस सोते संसार बीच कवि मेरा सुखा-सा जीवन कहा, 'सजनी क्यों प्रातःकाल क्या कहते हो एक शक्ति से गगन में गूंजे गर्वित गान गिर गई मेरी छोटी कुटी श्रो समीर, प्रातः समीर ! ११ ये गजरे तारों वाले अनन्त स्मृति श्रनुमय कूल तिरस्कार संगीत निनराशा में श्राशा
Digitized by the Internet Archive in दो हज़ार दस with funding from University of Toronto श्रवनीतल के परम मनोहर श्रोस बिन्दु अरे निर्जन वन के निर्मल निर्भर ! एकान्त गात जीवन स्त्रोत श्रो प्रवाहिनी, रुक जा ओ मेरे पथ, जीवन-पथ ! श्री समीर, प्रातः समीर ! इस सोते संसार बीच कवि मेरा सुखा-सा जीवन कहा, 'सजनी क्यों प्रातःकाल क्या कहते हो एक शक्ति से गगन में गूंजे गर्वित गान गिर गई मेरी छोटी कुटी श्रो समीर, प्रातः समीर ! ग्यारह ये गजरे तारों वाले अनन्त स्मृति श्रनुमय कूल तिरस्कार संगीत निनराशा में श्राशा
लोक चिकित्सा में, कई हैंपौधों, प्राचीन काल से मानवता के साथ कदम में बारीकी से पैर चलना। ऐसे प्राकृतिक चिकित्सकों के बीच, एक सम्माननीय स्थान का दायरा एक बाक़ी पर कब्जा कर लिया गया है, एक अन्य तरीके से इसे बोझ कहा जाता है। इस उपयोगी संयंत्र के बारे में, साथ ही साथ जिस बोरा को गले में घूमने के लिए रखा गया है, इस लेख में बताया जाएगा। सरल दृष्टिकोण के साथ, सड़क के किनारे के पास बढ़ रहा हैसड़कों और शहर के बाहरी इलाके में, साथ ही साथ धाराओं के साथ, यह वास्तव में मानव स्वास्थ्य के लिए अपूरणीय उपचार गुण हैं। यह सब बोदंड के बारे में कहा जा सकता है इस पौधे के सभी हिस्सों में हीलिंग शक्ति है यही कारण है कि गैर-पारंपरिक चिकित्सा में, साथ ही कॉस्मेटोलॉजी में, जड़, और पत्तियों और फलों का उपयोग करें, और बोदंड के बीज। पत्तियों का एक बड़ा, मोटे तौर पर अंडाकार रूप है, एक हरे रंग की चोटी पर और एक भूरा-भूरे रंग के नीचे से छोटे शाखाओं के साथ, सीधे स्टेम। फूल शराबी, गुलाबी-बकाइन एग्रीमोनी अपने बीज फैलाने में सक्षम है, मानव कपड़ों से चिपके हुए है। यह संयंत्र प्रदान करने में सक्षम हैज्वरनाशक, मूत्रवर्धक, रेचक, विरोधी भड़काऊ, रक्त शुद्ध, विरोधी ट्यूमर, एंटीऑक्सिडेंट, immunostimulant, घाव भरने, toning और विरोधी विषाक्त कार्रवाई। Burdock अच्छी तरह से वायरस और बैक्टीरिया, कवक भी शुद्ध करने में सक्षम लड़ने के लिए मदद करता है। मुख्य बात - पता करने के लिए कौन सा पक्ष burdock डाल करने के लिए। रोग के आधार पर, आप खाना बनाना कर सकते हैंबोबोक से कई प्रकार के लोशन, टिंक्चर, या बस इसे गले लगाने के स्थान पर लागू करें या इससे चाय बनायें। यह ज्ञात है कि इस चिकित्सा संयंत्र की जड़ों में आवश्यक तेलों, एक जटिल विटामिन (उदाहरण के लिए, बी, सी, ई, ए, पी), साथ ही साथ कार्बनिक अम्ल और खनिज लवण होते हैं। बूढ़ों में उपयोगी पदार्थों को मनुष्यों में चयापचय बहाल करना पड़ता है, और इससे सुगंध शरीर के गुर्दा रोगों और सूजन संबंधी प्रतिक्रियाओं के साथ मदद करता है। बड़बड़ाना के आधार पर तैयार कई दवाएं हैं इसलिए, ग्रीष्मवासी निवासियों, इस खरपतवार को नष्ट करते हैं, बिना यह सोचते हैं कि यह उन्हें कितना लाभ ला सकता है। शायद एक व्यक्ति की एक व्यक्ति हैइस संयंत्र को असहिष्णुता इस मामले में, यह उसके लिए contraindicated होगा। लेकिन कोई विशिष्ट नकारात्मक नतीजे नहीं होते हैं जो बोबोक का कारण हो सकता है। इसलिए, आप इसे सुरक्षित रूप से भोजन के रूप में प्रयोग कर सकते हैं, और लोशन के रूप में घूमने के लिए मग को किस स्थान के बारे में बताया जाएगा, बाद में बताया जाएगा। जब आंतरिक अंगों के रोग तैयार होते हैंburdock के अर्क। उदाहरण के लिए, यदि आप गुर्दे चोट, यह आवश्यक निम्नलिखित नुस्खा के अनुसार अर्क तैयार करने के लिए हैः दो चम्मच की मात्रा में ताजे या सूखे burdock उबलते पानी का एक गिलास डालना। इसके बाद, जिसके परिणामस्वरूप मिश्रण एक अंधेरी जगह में दो घंटे के लिए संचार किया गया था। दवा का उपयोग करने के पांच दिन के लिए तैयार होना चाहिए। ऑन्कोलॉजिकल रोगों, लोक चिकित्सा के साथएक पाउडर, जलसेक या शोरबा के रूप में बोदंड की जड़ लेने की सलाह देता है दवा को तैयार करने के लिए आपको बराबर मात्रा में शहद, बोदंड जड़ और चिकित्सा अल्कोहल लेने की आवश्यकता होती है। सभी अवयवों को एक साथ मिश्रित किया जाना चाहिए और इसे दो सप्ताह तक पाना चाहिए। एक दिन में तीन बार एक बड़ा चमचा होना चाहिए। संयुक्त रोगों के मामले में, आप संपर्क कर सकते हैंइस चमत्कारी संयंत्र में मदद के लिए ऐसा करने के लिए, आपको यह पता होना चाहिए कि किसी बीमारी को ठीक से कैसे लागू किया जाए। सबसे पहले यह ताजा पत्तियों को तोड़ने और रात के लिए एक बीमार संयुक्त के साथ उन्हें लपेटो आवश्यक है। बिस्तर को खराब करने के लिए, और पूरी रात को पौध को रखने के लिए, जगह के आसपास धुंध पट्टिका लपेट करना जरूरी है जहां शीट हैं। सुबह में बोझ के विरोधी भड़काऊ गुणों के कारण व्यक्ति को काफी राहत महसूस होगी। जैसा कि ऊपर उल्लिखित है, हीलिंग संयंत्र के पत्तेताजा होना चाहिए इसे अपने उपयोगी गुणों को अधिक समय देने के लिए, यह ठंडा पानी से सिक्त होना चाहिए। कुछ लोग खुद से नहीं पूछते हैं कि किनारे का बोझ कड़े स्थान पर डाला जाए। लेकिन वास्तव में यह बहुत महत्वपूर्ण है। इसकी शास्त्रीय सतह के कारण, बाधक आवश्यक औषधीय पदार्थों को हासिल करने में सक्षम है। यही कारण है कि इसे सिर्फ जगह पर भुलक्कड़ होना चाहिए जहां आपको दर्द या परेशानी महसूस होती है। सुबह में हालत से राहत के बाद कपड़े या पट्टी के साथ घुटने की जगह को बांटने के लिए, आप इस पौधे की जड़ से बनाई गई मरहम का उपयोग कर सकते हैं। याद करने के लिए मुख्य बात यह है कि कैसे सही तरीके से (जो पक्ष) बोराक को घूमने के स्थान पर लागू किया जाता है और इसे कितना रखना चाहिए और फिर वह होम मेडिसिन छाती से सबसे वफादार सहायकों में से एक बन जाएगा। कीट के काटने के साथ, आप भी उपयोग कर सकते हैंपत्तियां ऐसा करने के लिए, यह अच्छी तरह से धोया जाना चाहिए और, सुखाने के बिना, काटने की जगह को संलग्न करना चाहिए। इसके बाद, आपको हर दो घंटे में शीट को बदलना होगा। दिन के दौरान, सूजन होनी चाहिए और खुजली घट जाती है। यदि बीमारी उपेक्षित रूप में है, तोआशा है कि केवल बोझ के लिए यह लायक नहीं है। इसलिए, यहां तक कि सबकुछ सही ढंग से कर रहा है और यह जानकर कि कौन सा पक्ष दुखद स्थान पर बोझ लागू करता है, आप वसूली के चरण को कस कर सकते हैं। वह बीमारी के शुरुआती चरणों में मदद कर सकता है या एंटीबायोटिक्स लेने पर द्वितीयक दवा हो सकता है। बर्डॉक सिरदर्द के साथ भी मदद करता है। यदि आप एक शीट तोड़ते हैं और इसे माथे पर डालते हैं, और किस तरफ बोझ डालते हैं, तो ऊपर कहा गया था, तो आप जल्द ही राहत महसूस कर सकते हैं।
लोक चिकित्सा में, कई हैंपौधों, प्राचीन काल से मानवता के साथ कदम में बारीकी से पैर चलना। ऐसे प्राकृतिक चिकित्सकों के बीच, एक सम्माननीय स्थान का दायरा एक बाक़ी पर कब्जा कर लिया गया है, एक अन्य तरीके से इसे बोझ कहा जाता है। इस उपयोगी संयंत्र के बारे में, साथ ही साथ जिस बोरा को गले में घूमने के लिए रखा गया है, इस लेख में बताया जाएगा। सरल दृष्टिकोण के साथ, सड़क के किनारे के पास बढ़ रहा हैसड़कों और शहर के बाहरी इलाके में, साथ ही साथ धाराओं के साथ, यह वास्तव में मानव स्वास्थ्य के लिए अपूरणीय उपचार गुण हैं। यह सब बोदंड के बारे में कहा जा सकता है इस पौधे के सभी हिस्सों में हीलिंग शक्ति है यही कारण है कि गैर-पारंपरिक चिकित्सा में, साथ ही कॉस्मेटोलॉजी में, जड़, और पत्तियों और फलों का उपयोग करें, और बोदंड के बीज। पत्तियों का एक बड़ा, मोटे तौर पर अंडाकार रूप है, एक हरे रंग की चोटी पर और एक भूरा-भूरे रंग के नीचे से छोटे शाखाओं के साथ, सीधे स्टेम। फूल शराबी, गुलाबी-बकाइन एग्रीमोनी अपने बीज फैलाने में सक्षम है, मानव कपड़ों से चिपके हुए है। यह संयंत्र प्रदान करने में सक्षम हैज्वरनाशक, मूत्रवर्धक, रेचक, विरोधी भड़काऊ, रक्त शुद्ध, विरोधी ट्यूमर, एंटीऑक्सिडेंट, immunostimulant, घाव भरने, toning और विरोधी विषाक्त कार्रवाई। Burdock अच्छी तरह से वायरस और बैक्टीरिया, कवक भी शुद्ध करने में सक्षम लड़ने के लिए मदद करता है। मुख्य बात - पता करने के लिए कौन सा पक्ष burdock डाल करने के लिए। रोग के आधार पर, आप खाना बनाना कर सकते हैंबोबोक से कई प्रकार के लोशन, टिंक्चर, या बस इसे गले लगाने के स्थान पर लागू करें या इससे चाय बनायें। यह ज्ञात है कि इस चिकित्सा संयंत्र की जड़ों में आवश्यक तेलों, एक जटिल विटामिन , साथ ही साथ कार्बनिक अम्ल और खनिज लवण होते हैं। बूढ़ों में उपयोगी पदार्थों को मनुष्यों में चयापचय बहाल करना पड़ता है, और इससे सुगंध शरीर के गुर्दा रोगों और सूजन संबंधी प्रतिक्रियाओं के साथ मदद करता है। बड़बड़ाना के आधार पर तैयार कई दवाएं हैं इसलिए, ग्रीष्मवासी निवासियों, इस खरपतवार को नष्ट करते हैं, बिना यह सोचते हैं कि यह उन्हें कितना लाभ ला सकता है। शायद एक व्यक्ति की एक व्यक्ति हैइस संयंत्र को असहिष्णुता इस मामले में, यह उसके लिए contraindicated होगा। लेकिन कोई विशिष्ट नकारात्मक नतीजे नहीं होते हैं जो बोबोक का कारण हो सकता है। इसलिए, आप इसे सुरक्षित रूप से भोजन के रूप में प्रयोग कर सकते हैं, और लोशन के रूप में घूमने के लिए मग को किस स्थान के बारे में बताया जाएगा, बाद में बताया जाएगा। जब आंतरिक अंगों के रोग तैयार होते हैंburdock के अर्क। उदाहरण के लिए, यदि आप गुर्दे चोट, यह आवश्यक निम्नलिखित नुस्खा के अनुसार अर्क तैयार करने के लिए हैः दो चम्मच की मात्रा में ताजे या सूखे burdock उबलते पानी का एक गिलास डालना। इसके बाद, जिसके परिणामस्वरूप मिश्रण एक अंधेरी जगह में दो घंटे के लिए संचार किया गया था। दवा का उपयोग करने के पांच दिन के लिए तैयार होना चाहिए। ऑन्कोलॉजिकल रोगों, लोक चिकित्सा के साथएक पाउडर, जलसेक या शोरबा के रूप में बोदंड की जड़ लेने की सलाह देता है दवा को तैयार करने के लिए आपको बराबर मात्रा में शहद, बोदंड जड़ और चिकित्सा अल्कोहल लेने की आवश्यकता होती है। सभी अवयवों को एक साथ मिश्रित किया जाना चाहिए और इसे दो सप्ताह तक पाना चाहिए। एक दिन में तीन बार एक बड़ा चमचा होना चाहिए। संयुक्त रोगों के मामले में, आप संपर्क कर सकते हैंइस चमत्कारी संयंत्र में मदद के लिए ऐसा करने के लिए, आपको यह पता होना चाहिए कि किसी बीमारी को ठीक से कैसे लागू किया जाए। सबसे पहले यह ताजा पत्तियों को तोड़ने और रात के लिए एक बीमार संयुक्त के साथ उन्हें लपेटो आवश्यक है। बिस्तर को खराब करने के लिए, और पूरी रात को पौध को रखने के लिए, जगह के आसपास धुंध पट्टिका लपेट करना जरूरी है जहां शीट हैं। सुबह में बोझ के विरोधी भड़काऊ गुणों के कारण व्यक्ति को काफी राहत महसूस होगी। जैसा कि ऊपर उल्लिखित है, हीलिंग संयंत्र के पत्तेताजा होना चाहिए इसे अपने उपयोगी गुणों को अधिक समय देने के लिए, यह ठंडा पानी से सिक्त होना चाहिए। कुछ लोग खुद से नहीं पूछते हैं कि किनारे का बोझ कड़े स्थान पर डाला जाए। लेकिन वास्तव में यह बहुत महत्वपूर्ण है। इसकी शास्त्रीय सतह के कारण, बाधक आवश्यक औषधीय पदार्थों को हासिल करने में सक्षम है। यही कारण है कि इसे सिर्फ जगह पर भुलक्कड़ होना चाहिए जहां आपको दर्द या परेशानी महसूस होती है। सुबह में हालत से राहत के बाद कपड़े या पट्टी के साथ घुटने की जगह को बांटने के लिए, आप इस पौधे की जड़ से बनाई गई मरहम का उपयोग कर सकते हैं। याद करने के लिए मुख्य बात यह है कि कैसे सही तरीके से बोराक को घूमने के स्थान पर लागू किया जाता है और इसे कितना रखना चाहिए और फिर वह होम मेडिसिन छाती से सबसे वफादार सहायकों में से एक बन जाएगा। कीट के काटने के साथ, आप भी उपयोग कर सकते हैंपत्तियां ऐसा करने के लिए, यह अच्छी तरह से धोया जाना चाहिए और, सुखाने के बिना, काटने की जगह को संलग्न करना चाहिए। इसके बाद, आपको हर दो घंटे में शीट को बदलना होगा। दिन के दौरान, सूजन होनी चाहिए और खुजली घट जाती है। यदि बीमारी उपेक्षित रूप में है, तोआशा है कि केवल बोझ के लिए यह लायक नहीं है। इसलिए, यहां तक कि सबकुछ सही ढंग से कर रहा है और यह जानकर कि कौन सा पक्ष दुखद स्थान पर बोझ लागू करता है, आप वसूली के चरण को कस कर सकते हैं। वह बीमारी के शुरुआती चरणों में मदद कर सकता है या एंटीबायोटिक्स लेने पर द्वितीयक दवा हो सकता है। बर्डॉक सिरदर्द के साथ भी मदद करता है। यदि आप एक शीट तोड़ते हैं और इसे माथे पर डालते हैं, और किस तरफ बोझ डालते हैं, तो ऊपर कहा गया था, तो आप जल्द ही राहत महसूस कर सकते हैं।
स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूजः सूत्रों के अनुसार, शक्तिपुंज एक्सप्रेस को कोलकाता की ओर रवाना करने से पूर्व साफ-सफाई धुलाई के बाद शंटिंग के लिए ले जाया जा रहा था। इस दौरान बोगी का एक पहिया रेल पटरी से नीचे उतर गया और फिर घटना के बाद ही हड़कंप मच गया। मामले की सूचना मिलते ही रेल प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जैक-मशीन लगाकर पहियों को ऊपर चढ़ाया। इस मामले को लेकर रेल प्रशासन ने जांच के निर्देश दिए हैं।
स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूजः सूत्रों के अनुसार, शक्तिपुंज एक्सप्रेस को कोलकाता की ओर रवाना करने से पूर्व साफ-सफाई धुलाई के बाद शंटिंग के लिए ले जाया जा रहा था। इस दौरान बोगी का एक पहिया रेल पटरी से नीचे उतर गया और फिर घटना के बाद ही हड़कंप मच गया। मामले की सूचना मिलते ही रेल प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जैक-मशीन लगाकर पहियों को ऊपर चढ़ाया। इस मामले को लेकर रेल प्रशासन ने जांच के निर्देश दिए हैं।
भुवनेश्वर। हनुमान जयंती की शोभायात्रा के दौरान शुक्रवार को हिंसा के बाद शनिवार को अगली सूचना तक ओडिशा के संबलपुर में हुई कर्फ्यू लगा दिया गया. संबलपुर उपजिलाधिकारी ने धारा 144 के तहत कर्फ्यू घोषित कर दिया है. इसके साथ ही नगर थाना, धानुपाली थाना, खेतराजपुर थाना, ऐंथापाली थाना, बरेईपाली थाना और संबलपुर के सदर थाना क्षेत्र के अधिकार क्षेत्र में किसी भी व्यक्ति या समूह के घर से बाहर निकलने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. उपजिलाधिकारी ने कहा कि इस आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. हालांकि, लोगों को आपात स्थिति में सुबह आठ बजे से 10 बजे तक और दोपहर 3. 30 बजे से शाम 5. 30 बजे तक आवश्यक वस्तुओं की खरीद करने की अनुमति है. इसके अतिरिक्त, जिला मुख्यालय अस्पताल में चिकित्सा आपात स्थिति के लिए एक हेल्पलाइन स्थापित की गई है. मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि शुक्रवार को ताजा हिंसा में कई दुकानों में आग लगा दी गई थी. ओडिशा सरकार ने शाम को मार्च से पहले शहर में लगभग 1,500 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया था और समारोह का मुख्य आकर्षण 'महाआरती' कार्यक्रम भारी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में आयोजित किया गया. हनुमान जयंती शोभायात्रा में कुल 35 जत्थों ने हिस्सा लिया था, जो शाम को ब्रुक्सपाल हनुमान मंदिर से शुरू होकर संवेदनशील इलाकों से होकर गुजरा. इसके पहले बुधवार को हनुमान जयंती के उपलक्ष्य में निकाली गई बाइक रैली के दौरान दो समुदायों के बीच झड़प हो गई थी. इसके बाद दोनों समुदायों के बीच सड़कों पर संघर्ष शुरू हो गया, जिसमें कई वाहन क्षतिग्रस्त कर दिए गए और कुछ दुकानों में आग लगा दी गई. झड़प के दौरान पथराव की घटना में कुल 10 पुलिसकर्मी और हनुमान जयंती समन्वय समिति के कार्यकारी अध्यक्ष दामोदर कार सहित लगभग 12 सदस्य घायल हो गए. संबलपुर में दंगा करने के आरोप में 32 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया और कुछ को हिरासत में भी लिया गया है.
भुवनेश्वर। हनुमान जयंती की शोभायात्रा के दौरान शुक्रवार को हिंसा के बाद शनिवार को अगली सूचना तक ओडिशा के संबलपुर में हुई कर्फ्यू लगा दिया गया. संबलपुर उपजिलाधिकारी ने धारा एक सौ चौंतालीस के तहत कर्फ्यू घोषित कर दिया है. इसके साथ ही नगर थाना, धानुपाली थाना, खेतराजपुर थाना, ऐंथापाली थाना, बरेईपाली थाना और संबलपुर के सदर थाना क्षेत्र के अधिकार क्षेत्र में किसी भी व्यक्ति या समूह के घर से बाहर निकलने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. उपजिलाधिकारी ने कहा कि इस आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. हालांकि, लोगों को आपात स्थिति में सुबह आठ बजे से दस बजे तक और दोपहर तीन. तीस बजे से शाम पाँच. तीस बजे तक आवश्यक वस्तुओं की खरीद करने की अनुमति है. इसके अतिरिक्त, जिला मुख्यालय अस्पताल में चिकित्सा आपात स्थिति के लिए एक हेल्पलाइन स्थापित की गई है. मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि शुक्रवार को ताजा हिंसा में कई दुकानों में आग लगा दी गई थी. ओडिशा सरकार ने शाम को मार्च से पहले शहर में लगभग एक,पाँच सौ सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया था और समारोह का मुख्य आकर्षण 'महाआरती' कार्यक्रम भारी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में आयोजित किया गया. हनुमान जयंती शोभायात्रा में कुल पैंतीस जत्थों ने हिस्सा लिया था, जो शाम को ब्रुक्सपाल हनुमान मंदिर से शुरू होकर संवेदनशील इलाकों से होकर गुजरा. इसके पहले बुधवार को हनुमान जयंती के उपलक्ष्य में निकाली गई बाइक रैली के दौरान दो समुदायों के बीच झड़प हो गई थी. इसके बाद दोनों समुदायों के बीच सड़कों पर संघर्ष शुरू हो गया, जिसमें कई वाहन क्षतिग्रस्त कर दिए गए और कुछ दुकानों में आग लगा दी गई. झड़प के दौरान पथराव की घटना में कुल दस पुलिसकर्मी और हनुमान जयंती समन्वय समिति के कार्यकारी अध्यक्ष दामोदर कार सहित लगभग बारह सदस्य घायल हो गए. संबलपुर में दंगा करने के आरोप में बत्तीस लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया और कुछ को हिरासत में भी लिया गया है.
राज्य सरकार संक्रमण रोकने के लिए विभिन्न पहलुओं पर विचार कर रही है। इसके तहत लेकसिटी उदयपुर में नाइट कर्फ्यू की अवधि को बढ़ाया जा सकता है। उदयपुर में शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक कर्फ्यू लगाये जाने की संभावना जताई जा रही है। उदयपुर। राजस्थान में कोरोना वायरस का खतरा बढ़ता ही जा रहा है। प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बहुत तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। उदयपुर की बात करें तो यहां भी यह घातक बीमारी लोगों को अपनी चपेट में बहुत तेजी से लेती जा रही है। इसी को देखते हुए राजस्थान सरकार कड़े कदम उठा सकती है। राज्य सरकार संक्रमण रोकने के लिए विभिन्न पहलुओं पर विचार कर रही है। इसके तहत लेकसिटी उदयपुर में नाइट कर्फ्यू (Night curfew) की अवधि को बढ़ाया जा सकता है। उदयपुर (Udaipur) में शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक कर्फ्यू लगाये जाने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों की मानें तो उदयपुर के साथ ही राजधानी जयपुर समेत कोटा और जोधपुर में भी कर्फ्यू का समय बढ़ाये जाने के आसार हैं। इसके साथ ही पर्यटन स्थलों पर आवाजाही सीमित किये जाने पर भी विचार किया जा रहा है। प्रभावित जिलों में माइक्रो कंटेनमेंट जोन बढ़ाये जा सकते हैं। संक्रमण के फैलाव को देखते हुये कोरोना गाइड लाइन की और सख्ती से पालना कराई जाएगी। वहीं इससे पहले गुरुवार रात को सीएमआर में आयोजित कोविड समीक्षा बैठक में सीएम गहलोत ने प्रदेश में संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ने पर गहरी चिंता व्यक्त की। सीएम अशोक गहलोत ने निर्देश दिये कि स्थिति पर नियंत्रण के लिए शहरी क्षेत्रों में धारा-144 की कड़ाई से पालना करवाई जाए। 5 से अधिक व्यक्तियों के इकट्ठा होने पर रोक की सख्ती से पालना कराई जाए।
राज्य सरकार संक्रमण रोकने के लिए विभिन्न पहलुओं पर विचार कर रही है। इसके तहत लेकसिटी उदयपुर में नाइट कर्फ्यू की अवधि को बढ़ाया जा सकता है। उदयपुर में शाम छः बजे से सुबह छः बजे तक कर्फ्यू लगाये जाने की संभावना जताई जा रही है। उदयपुर। राजस्थान में कोरोना वायरस का खतरा बढ़ता ही जा रहा है। प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बहुत तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। उदयपुर की बात करें तो यहां भी यह घातक बीमारी लोगों को अपनी चपेट में बहुत तेजी से लेती जा रही है। इसी को देखते हुए राजस्थान सरकार कड़े कदम उठा सकती है। राज्य सरकार संक्रमण रोकने के लिए विभिन्न पहलुओं पर विचार कर रही है। इसके तहत लेकसिटी उदयपुर में नाइट कर्फ्यू की अवधि को बढ़ाया जा सकता है। उदयपुर में शाम छः बजे से सुबह छः बजे तक कर्फ्यू लगाये जाने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों की मानें तो उदयपुर के साथ ही राजधानी जयपुर समेत कोटा और जोधपुर में भी कर्फ्यू का समय बढ़ाये जाने के आसार हैं। इसके साथ ही पर्यटन स्थलों पर आवाजाही सीमित किये जाने पर भी विचार किया जा रहा है। प्रभावित जिलों में माइक्रो कंटेनमेंट जोन बढ़ाये जा सकते हैं। संक्रमण के फैलाव को देखते हुये कोरोना गाइड लाइन की और सख्ती से पालना कराई जाएगी। वहीं इससे पहले गुरुवार रात को सीएमआर में आयोजित कोविड समीक्षा बैठक में सीएम गहलोत ने प्रदेश में संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ने पर गहरी चिंता व्यक्त की। सीएम अशोक गहलोत ने निर्देश दिये कि स्थिति पर नियंत्रण के लिए शहरी क्षेत्रों में धारा-एक सौ चौंतालीस की कड़ाई से पालना करवाई जाए। पाँच से अधिक व्यक्तियों के इकट्ठा होने पर रोक की सख्ती से पालना कराई जाए।
नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा शनिवार को लोकसभा में पेश किया गया दूसरा केंद्रीय बजट 2020-21 महिला, गरीब, किसान और मध्यम वर्ग पर केंद्रित है। बजट में विभिन्न केंद्रीय योजनाओं, मंत्रालयों और विभागों के लिए बजट का आवंटन किया गया है। आइए विस्तार से जानते हैं कि वित्त मंत्री ने किस योजना, किसान मंत्रालय और किस विभाग को अपने बजट में कितना धन आवंटित किया है।
नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा शनिवार को लोकसभा में पेश किया गया दूसरा केंद्रीय बजट दो हज़ार बीस-इक्कीस महिला, गरीब, किसान और मध्यम वर्ग पर केंद्रित है। बजट में विभिन्न केंद्रीय योजनाओं, मंत्रालयों और विभागों के लिए बजट का आवंटन किया गया है। आइए विस्तार से जानते हैं कि वित्त मंत्री ने किस योजना, किसान मंत्रालय और किस विभाग को अपने बजट में कितना धन आवंटित किया है।
सीएम ने कहा," पुरकायस्थ को उनकी उपलब्धि पर बधाई, मैं रिसर्च और डेवलपमेंट में आपकी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए आपको धन्यवाद देता हूं और आशा करता हूं कि आप हमारे राज्य को और अधिक सम्मान दिलाने के लिए अपनी सेवाएं जारी रखेंगी." असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड अलाइड साइंसेज के वैज्ञानिक डॉ जुबली पुरकायस्थ को एंटी कोविड वैक्सीन बनाने में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए बधाई दी है. दरअसल बुधवार को असम के मुख्यमंत्री हेमंत ने डॉ पुरकायस्थ को एक बधाई पत्र में कहा, "असम को देश के कई वैज्ञानिक मंचों में आपकी भूमिका के लिए आप पर गर्व है. DRDO (रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन) के साथ आपका जुड़ाव और 2-डीजी दवा विकसित करने में आपकी भूमिका कई युवाओं को प्रेरणा देती है". मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भारत में एक युवा आबादी है जो नए विचारों और अवसरों से भरी हुई है. उन्होंने कहा कि अपने समृद्ध मानव संसाधनों के साथ, हमारा देश आम तौर पर दुनिया को बहुत कुछ देने के लिए तैयार है. पिछले कुछ सालो में हमारे देश ने जो गुणात्मक परिवर्तन देखे हैं, वे वास्तव में प्रशंसनीय हैं. सीएम ने कहा नए विचार हमारे भविष्य को आगे बढ़ाएंगे और हम इसे बनाने के लिए समर्पित रूप से काम कर रहे हैं.
सीएम ने कहा," पुरकायस्थ को उनकी उपलब्धि पर बधाई, मैं रिसर्च और डेवलपमेंट में आपकी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए आपको धन्यवाद देता हूं और आशा करता हूं कि आप हमारे राज्य को और अधिक सम्मान दिलाने के लिए अपनी सेवाएं जारी रखेंगी." असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड अलाइड साइंसेज के वैज्ञानिक डॉ जुबली पुरकायस्थ को एंटी कोविड वैक्सीन बनाने में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए बधाई दी है. दरअसल बुधवार को असम के मुख्यमंत्री हेमंत ने डॉ पुरकायस्थ को एक बधाई पत्र में कहा, "असम को देश के कई वैज्ञानिक मंचों में आपकी भूमिका के लिए आप पर गर्व है. DRDO के साथ आपका जुड़ाव और दो-डीजी दवा विकसित करने में आपकी भूमिका कई युवाओं को प्रेरणा देती है". मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भारत में एक युवा आबादी है जो नए विचारों और अवसरों से भरी हुई है. उन्होंने कहा कि अपने समृद्ध मानव संसाधनों के साथ, हमारा देश आम तौर पर दुनिया को बहुत कुछ देने के लिए तैयार है. पिछले कुछ सालो में हमारे देश ने जो गुणात्मक परिवर्तन देखे हैं, वे वास्तव में प्रशंसनीय हैं. सीएम ने कहा नए विचार हमारे भविष्य को आगे बढ़ाएंगे और हम इसे बनाने के लिए समर्पित रूप से काम कर रहे हैं.
भारत का राजपत नगम्बर 9, 199कार्तिक 18, 1918 1ped receptor is of rectangle shape of sides 230x170 millimetre. The LED display of character size 25 mitlimetre indicates the weiglhing result. The instrument operates on 12 volts, direct current-power supply. धनबाद चले - (figure ) Further, in exercise of the powers conferred by sub-section (12) of the said section, the Central Government hereby declares that this certificate of approval of the Model shall also cover the weighing instrument of similar make accuracy and performance of same series with maximum capacity of 2kg/1g 4kg/2g, 5kg, /2g, 10kg/5g and 20Kg./10g maunfactured by the same manufacture in accordance with the same principle, design and with the same materials with which, the approved Model has been maufactured. [F. No. WM-21 (44) / 93] RAJIV SRIVASTAVA Ji. Secy. 31 27. -केन्द्रीय सरकार का विहित प्राधिकारी द्वारा निवेदित रिपोर्ट (नीचे प्रकृति देखिए) करने के पश्चात् समाधन हो गया है कि उक्त रिपोर्ट में वर्णित माडल बाट और माप मानक अधिनियम, 1976 ( 1976 का 60 ) और बाट और माल माकफ (माथल का अनुमोदन) नियम, 1987 के उपबन्धों के अनुरूप है और इस बात की संभावना है कि वह लगातार प्रयोग की अवधि में यथार्थता बनाए रखेगा और विभिन्न परिस्थितियों में उपयुक्त सेवा देता रहेगा , अतः केन्द्रीय सरकार, उक्त अधिनियम की धारा 36 उपधारा ( 7 ) और उपधारा ( 8 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग यथार्थता वर्ग III के जे. एस. ई. 0600-टाइप के की संप्रदर्श करने वाले स्वतः सूचक गैर-स्वचालित टेबलटाप तोलन उपकरण के माडल का (जिसे इसमें इसके पश्चात् माडल कहा गया है ) जिसका विनिर्माण मैसर्स ओ. एम. ई. इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड, 33- ए, चौरिधी रोड, कलकत्ता द्वारा किया गया है और जिसे अनुमोदन चिन्ह प्राई. एन. डी. / 09/95/ 32 समनुदिष्ट किया गया है, अनुमोदन प्रमाणपत्र प्रकाशित करती है. माडल ( प्राकृति देखिए) एक मध्यम यथार्थता ( यथार्थता वर्ग III ) का सोलन उपकरण है जिसकी अधिकतम क्षमता 600 ग्राम और न्यूनतम क्षमता 2 ग्राम है । सत्यापन मापमान अंतर (ई) 0.1 ग्राम है। इसमें एक टेपल युषित है जिसका व्यकलनात्मक प्रतिधारित टेयर प्रभाव 100 प्रतिशत है। आधार और प्लेटफार्म धात्वि है। भारग्राही यताकार प्राकृति
भारत का राजपत नगम्बर नौ, एक सौ निन्यानवेकार्तिक अट्ठारह, एक हज़ार नौ सौ अट्ठारह एकped receptor is of rectangle shape of sides दो सौ तीसxएक सौ सत्तर millimetre. The LED display of character size पच्चीस mitlimetre indicates the weiglhing result. The instrument operates on बारह volts, direct current-power supply. धनबाद चले - Further, in exercise of the powers conferred by sub-section of the said section, the Central Government hereby declares that this certificate of approval of the Model shall also cover the weighing instrument of similar make accuracy and performance of same series with maximum capacity of दो किलोग्राम/एक ग्राम चार किलोग्राम/दो ग्राम, पाँच किलोग्राम, /दो ग्राम, दस किलोग्राम/पाँच ग्राम and बीसKg./दस ग्राम maunfactured by the same manufacture in accordance with the same principle, design and with the same materials with which, the approved Model has been maufactured. [F. No. WM-इक्कीस / तिरानवे] RAJIV SRIVASTAVA Ji. Secy. इकतीस सत्ताईस. -केन्द्रीय सरकार का विहित प्राधिकारी द्वारा निवेदित रिपोर्ट करने के पश्चात् समाधन हो गया है कि उक्त रिपोर्ट में वर्णित माडल बाट और माप मानक अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ छिहत्तर और बाट और माल माकफ नियम, एक हज़ार नौ सौ सत्तासी के उपबन्धों के अनुरूप है और इस बात की संभावना है कि वह लगातार प्रयोग की अवधि में यथार्थता बनाए रखेगा और विभिन्न परिस्थितियों में उपयुक्त सेवा देता रहेगा , अतः केन्द्रीय सरकार, उक्त अधिनियम की धारा छत्तीस उपधारा और उपधारा द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग यथार्थता वर्ग III के जे. एस. ई. छः सौ-टाइप के की संप्रदर्श करने वाले स्वतः सूचक गैर-स्वचालित टेबलटाप तोलन उपकरण के माडल का जिसका विनिर्माण मैसर्स ओ. एम. ई. इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड, तैंतीस- ए, चौरिधी रोड, कलकत्ता द्वारा किया गया है और जिसे अनुमोदन चिन्ह प्राई. एन. डी. / नौ/पचानवे/ बत्तीस समनुदिष्ट किया गया है, अनुमोदन प्रमाणपत्र प्रकाशित करती है. माडल एक मध्यम यथार्थता का सोलन उपकरण है जिसकी अधिकतम क्षमता छः सौ ग्राम और न्यूनतम क्षमता दो ग्राम है । सत्यापन मापमान अंतर शून्य दशमलव एक ग्राम है। इसमें एक टेपल युषित है जिसका व्यकलनात्मक प्रतिधारित टेयर प्रभाव एक सौ प्रतिशत है। आधार और प्लेटफार्म धात्वि है। भारग्राही यताकार प्राकृति
यह एक दान, एक बीमारी, या किसी भी तरह से एक पुलिस या अग्निशामक से संबद्ध समूह के लिए धन जुटाने वाला दान है। आपको क्या करना चाहिये? फोन रख देना? अपना क्रेडिट कार्ड प्राप्त करें? उन्हें बाद में फोन करने के लिए कहो? जो भी आप तय करते हैं, बहुत सावधान रहें। इन दिनों टेलीफोन द्वारा घोटाला सबसे आम अपराध होना चाहिए। वह कॉल एक वैध दान से हो सकता है, एक टेलीमार्केट जो दान की तरफ से बुलाता है, या पूरी तरह से धोखाधड़ी करता है। टेलीमार्केटिंग क्या है? टेलीमार्केटिंग सर्वव्यापी है। व्यवसाय अपने उत्पादों या सेवाओं को बेचने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। चैरिटी इसका उपयोग अपने मौजूदा या संभावित दाताओं तक पहुंचने के लिए करते हैं। यह सिर्फ उपभोक्ताओं तक पहुंचने के लिए फोन का उपयोग कर रहा है। दुर्भाग्य से, टेलीमार्केटिंग सभी प्रकार के स्कैमर द्वारा प्रेतवाधित है। और उन घोटालों में दान अक्सर पकड़े गए हैं। चैरिटीज द्वारा टेलीमार्केटिंग इतनी खराब है? अकेले टेलीमार्केट दान के लिए एक बुरी चीज नहीं है। विशेष रूप से जब कोई दान कर्मचारी या स्वयंसेवकों का उपयोग करके कॉल करता है। जब समस्याएं बाहरी कंपनियों को उनके लिए टेलीमार्केटिंग करने के लिए किराए पर लेती हैं तो समस्याएं उत्पन्न होती हैं। कई बड़े दान, क्योंकि उन्हें हजारों दाताओं की आवश्यकता है, टेलीमार्केटिंग फर्मों का उपयोग करें। आपको शायद इन अल्मा माटर या जाने-माने राष्ट्रीय दानों में से एक के लिए काम करने वाली कंपनियों में से एक द्वारा बुलाया गया है। अक्सर यह ठीक है। कंपनियां जो लाया जाता है और पैमाने की अर्थव्यवस्था से गैर-लाभकारी लाभ का उचित प्रतिशत कमाते हैं। टेलीमार्केटिंग कंपनियों द्वारा प्राप्त किए गए बड़े हिस्सों को कुछ विशेषज्ञों द्वारा बचाव किया जाता है क्योंकि टेलीमार्केटिंग की लागत पहले से कम है और समय के साथ घट जाती है। उदाहरण के लिए, शायद टेलीमार्केटिंग कंपनी का उपयोग करके दान देने वाले पहले $ 25 में से अधिकांश को कंपनी को भुगतान किया जाता है। लेकिन, चूंकि अब आप एक दाता हैं और कई सालों तक दे सकते हैं, दान के लिए दी गई प्रति डॉलर लागत कम हो जाती है। लेकिन कुछ दान कंपनियां उन कंपनियों को किराए पर लेती हैं जो दान करने के लिए लोगों को मनाने के लिए संदिग्ध तकनीकों का उपयोग करती हैं, और फिर कंपनियां दान के लिए वापस जाने के कुछ हिस्सों के साथ अधिकतर धन रखती हैं। इस तरह की प्रथाओं में अक्षमता होती है। यह दान द्वारा उठाए गए प्रति डॉलर बहुत अधिक खर्च करता है। यही कारण है कि दाताओं को दान के दक्षता आंकड़ों की जांच करने की आवश्यकता होती है। हालांकि, केवल उन आंकड़ों को देखकर आपको बहुत कुछ नहीं बताया जा सकता है। कई दाताओं को चौंका दिया जाता है जब वे सीखते हैं कि चैरिटी की आय का चालीस प्रतिशत ओवरहेड तक जाता है। लेकिन वे भूल जाते हैं कि उपरि (या अप्रत्यक्ष लागत) में बहुत सारी जमीन शामिल है। यह केवल धन उगाहने की लागत के बारे में नहीं है। दरवाजों को खुले रखने, उपकरणों को अद्यतित रखने, वाहनों की रख-रखाव, जो दान की सेवाओं को प्रदान करने में मदद करते हैं, के साथ जुड़े लागत भी हैं। अक्सर हम एक असंभव मानक के लिए दान रखते हैं, जिससे वे नंगे हड्डियों के बजट पर सामाजिक जरूरतों को हल करने की उम्मीद करते हैं। अकेले दक्षता स्कोर पूरी कहानी नहीं बताते हैं। दाताओं को यह तय करने से पहले ओवरहेड मिथक से परिचित होना चाहिए कि कोई दान अपने ऑपरेशन को चलाने पर बहुत अधिक खर्च करता है या नहीं। दान का एक बेहतर उपाय यह कितना प्रभावी है। लेकिन यह मापना हमेशा आसान नहीं होता है और शायद यही कारण है कि दानदाता सरल और भ्रामक दक्षता स्कोर का सहारा लेते हैं। सौभाग्य से, चैरिटी नेविगेटर जैसे बेहतर व्यापार ब्यूरो ने चैरिटी राइटर्स को अब और अधिक यथार्थवादी मॉडल विकसित किए हैं, यह आकलन करते समय कि दान कितना अच्छा कर रहा है। हाल के वर्षों में, प्रेस द्वारा कई संदिग्ध टेलीमार्केटिंग स्थितियों का खुलासा किया गया है, जो इसे हर किसी के ध्यान में ला रहा है और कुछ दानों को दर्दनाक काले आंखें दे रहा है। कुछ प्रसिद्ध और सम्मानित दान मुख्य समाचारों के साथ-साथ छोटे गैर-लाभकारी लोगों के लिए अज्ञात हैं। वे टेलीमार्केटिंग कंपनियों से जुड़े हुए हैं जो धर्मार्थ टेलीमार्केटिंग से कमाई गई भारी मात्रा में धन के लिए कुख्यात हैं। हालांकि चैरिटी फंडराइजिंग में खराब अभिनेताओं के बारे में जागरूक होना महत्वपूर्ण है, लेकिन यह भी बुद्धिमान है कि सभी धर्मार्थियों को उसी काले ब्रश से पेंट न करें। अधिकतर दानदाताओं को आपके दाता डॉलर को जिस तरह से वे कहते हैं, खर्च करने के लिए भरोसा किया जा सकता है। सभी दाताओं को उनके द्वारा समर्थित दानों और विस्तारित अवधि से परिचित होना चाहिए। कभी आश्चर्य की बात है कि आपको एक दान से कॉल (या प्रत्यक्ष मेल धन उगाहने वाला पत्र) क्यों मिला है, जिसमें आपने कभी रुचि नहीं दिखाई है? उन्हें आपकी जानकारी कैसे मिली? देश के कई सबसे बड़े दान या तो अपने दाताओं के नाम बेचते हैं या साझा करते हैं। देश के कई सबसे प्रसिद्ध धर्मार्थियों के लिए दाता सूची ऑनलाइन डेटा दलालों से बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। चैरिटी नेविगेटर के अनुसार, फोर्ब्स द्वारा सूचीबद्ध 25 सबसे बड़े दानों में से आठ में पर्याप्त दाता गोपनीयता नीतियों की कमी है। उनके पास या तो पॉलिसी की कमी है, यह बताता है कि जब तक दाता स्पष्ट रूप से बाहर निकलता है तब तक वे जानकारी साझा करते हैं या जानकारी साझा करते हैं । उन 25 सबसे बड़े दानों में से केवल सात चैरिटी नेविगेटर से उच्चतम गोपनीयता रेटिंग प्राप्त करते हैं। 25 सबसे बड़े दानों में से कुछ ऐसे हैं जो पर्याप्त दाता गोपनीयता का वादा करते हैं। इनमें डायरेक्ट रिलीफ, बॉयज़ एंड गर्ल्स क्लब ऑफ अमेरिका, कम्पासियन इंटरनेशनल और समरिटिन पर्स शामिल हैं। उच्च दाता गोपनीयता नीतियों वाले छोटे दानों में विकीमीडिया फाउंडेशन, इलेक्ट्रॉनिक फ्रंटियर फाउंडेशन, कक्ष पढ़ने और दानः पानी शामिल हैं। चैरिटीज टेलीमार्केटिंग का उपयोग करते समय आपके अधिकार क्या हैं? नेशनल डू नॉट कॉल रजिस्ट्री है, जिसे हम में से अधिकांश को अवांछित फोन कॉल पर कटौती करने के लिए उपयोग करना चाहिए। लेकिन, रजिस्ट्री में दानों द्वारा किए गए कॉल शामिल नहीं हैं। हालांकि, अगर कोई चैरिटी टेलीमार्केटिंग कंपनी का उपयोग करता है, तो उस कंपनी को "नो कॉल" सूची बनाए रखना चाहिए। आप अनुरोध कर सकते हैं कि आपका नाम उस सूची में रखा गया हो। यह केवल उस विशेष दान को कवर करेगा, हालांकि। टेलीमार्केटर्स द्वारा घोटाले से बचने के लिए आपको क्या करना चाहिए? - फोन रख देना! यदि आप टेलीमार्केटिंग कॉल से नफरत करते हैं, तो करने के लिए सबसे अच्छी बात तुरंत लटका है। या कॉल लटका जाना चाहिए कॉल बुरी तरह से जाना चाहिए। मैंने हाल ही में एक राजनीतिक धन उगाहने वाले कॉल पर लटका दिया क्योंकि कॉलर ने मुझे यह भी पूछे बिना कि वह मुझे कॉल करने का सुविधाजनक समय है, उसे बिना पिच के साथ डूब गया। - कॉलर से पूछें कि क्या वह टेलीमार्केटिंग कंपनी के लिए काम करता है या यदि वह दानकर्ता का स्वयंसेवक या स्टाफ सदस्य है। आप एक पेशेवर टेलीमार्केट की तुलना में एक स्वयंसेवक को देने की इच्छा रखते हैं। अगर कॉल किसी कंपनी से है, तो कॉलर से पूछें कि आपका दान दान में कितना होगा। कानून की आवश्यकता है कि कंपनियां आपको बताएं। और वे जानते हैं। अगर कॉलर कहता है कि उसके पास वह जानकारी नहीं है, तो कॉल को समाप्त करें। - कहें कि आप फोन नहीं देते हैं। यह वही है जो मैं हमेशा करता हूं। क्योंकि मैं फोन नहीं देता हूं। फोन पर क्रेडिट कार्ड नंबर साझा करना बहुत खतरनाक है। - क्या तुम खोज करते हो। दान की जांच करने के लिए चैरिटी रेटिंग संगठनों का उपयोग करें। चैरिटी नॅविगेटर या बेहतर बिजनेस ब्यूरो साइट पर जाएं और जिस दान पर आप विचार कर रहे हैं उसे देखें। यदि इसका स्कोर अधिक है, तो दान करने पर विचार करें। इन सूचियों पर सभी दानों को खोजने की उम्मीद न करें। लेकिन आम तौर पर बड़े होते हैं। छोटे दानों के लिए, अपने स्थानीय क्षेत्र में रहना बुद्धिमानी है। उन संगठनों को समझना और उन पर टैब रखना आसान है। - सीधे दें अपने पसंदीदा दान को चेक भेजें या इसे चैरिटी के कार्यालय से छोड़ दें। चैरिटी की वेबसाइट पर जाएं और अपनी भुगतान प्रणाली का उपयोग करके दान करें। अपने टिकट खरीदें, अपनी विशेष घटनाओं में भाग लें, और, विशेष रूप से यदि आप एक महत्वपूर्ण राशि दे रहे हैं, तो व्यक्तिगत रूप से धन उगाहने वाले अधिकारी से मिलने के लिए कहें। - कॉलर द्वारा खराब करने में मत देना। दबाव में कभी न दें। यदि आप असहज महसूस करते हैं, तो कॉल समाप्त करें। - फोन पर अपनी क्रेडिट कार्ड की जानकारी, बैंकिंग या किसी अन्य प्रकार की व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से बचें। यह बस सुरक्षित नहीं है। यदि आप दान करना चाहते हैं, तो कॉलर को आपको मेल में एक पत्र भेजने के लिए कहें (स्कैमर ऐसा नहीं करेंगे) या आप दान देने के लिए चैरिटी वेबसाइट पर जाएंगे। - दान करने से पहले किसी भी चैरिटी की गोपनीयता नीतियां देखें। यदि आप नहीं चाहते हैं कि आपकी जानकारी अन्य समूहों के साथ साझा की जाए, तो किसी भी दान को दान न करें जो गोपनीयता का वादा नहीं करता है। बस ऐसा करने से फ़ोन कॉल और डायरेक्ट मेल पर रास्ता कम हो सकता है जिसे आप नहीं चाहते हैं। गोपनीयता नीतियां किसी भी चैरिटी की वेबसाइट पर सही होनी चाहिए, और चैरिटी नेविगेटर प्रत्येक चैरिटी को अपने डेटाबेस में गोपनीयता के लिए रेट करता है। - धर्मार्थ देने के बारे में खुद को शिक्षित करें। अपने पसंदीदा प्रकाशनों में परोपकार और दान पर लेख पढ़ें, रेटिंग साइटों पर आलेख ब्राउज़ करें, धर्मार्थ देने के बारे में मित्रों के साथ बातचीत में संलग्न हों, और जानकारी साझा करें। आप एक कार नहीं खरीदेंगे, जिम नहीं लेंगे, या अपना शोध किए बिना डेकेयर चुनेंगे। चैरिटेबल देने के लिए देखभाल और ध्यान की एक ही राशि का हकदार है। दान से टेलीमार्केटिंग कॉल स्वाभाविक रूप से बुरा नहीं हैं। और कुछ दान सिर्फ हाल ही में दान के लिए चेक इन करने के लिए फोन करते हैं, या यहां तक कि आपको धन्यवाद भी देते हैं। एक बार जब आप जानते हैं कि कॉल धन उगाहने के लिए है, तो सुनिश्चित करें कि आप एक वैध कंपनी या दानकर्ता के स्वयंसेवक या कर्मचारी सदस्य के साथ बात कर रहे हैं। उदार रहो, लेकिन घोटाले के लिए मत गिरना।
यह एक दान, एक बीमारी, या किसी भी तरह से एक पुलिस या अग्निशामक से संबद्ध समूह के लिए धन जुटाने वाला दान है। आपको क्या करना चाहिये? फोन रख देना? अपना क्रेडिट कार्ड प्राप्त करें? उन्हें बाद में फोन करने के लिए कहो? जो भी आप तय करते हैं, बहुत सावधान रहें। इन दिनों टेलीफोन द्वारा घोटाला सबसे आम अपराध होना चाहिए। वह कॉल एक वैध दान से हो सकता है, एक टेलीमार्केट जो दान की तरफ से बुलाता है, या पूरी तरह से धोखाधड़ी करता है। टेलीमार्केटिंग क्या है? टेलीमार्केटिंग सर्वव्यापी है। व्यवसाय अपने उत्पादों या सेवाओं को बेचने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। चैरिटी इसका उपयोग अपने मौजूदा या संभावित दाताओं तक पहुंचने के लिए करते हैं। यह सिर्फ उपभोक्ताओं तक पहुंचने के लिए फोन का उपयोग कर रहा है। दुर्भाग्य से, टेलीमार्केटिंग सभी प्रकार के स्कैमर द्वारा प्रेतवाधित है। और उन घोटालों में दान अक्सर पकड़े गए हैं। चैरिटीज द्वारा टेलीमार्केटिंग इतनी खराब है? अकेले टेलीमार्केट दान के लिए एक बुरी चीज नहीं है। विशेष रूप से जब कोई दान कर्मचारी या स्वयंसेवकों का उपयोग करके कॉल करता है। जब समस्याएं बाहरी कंपनियों को उनके लिए टेलीमार्केटिंग करने के लिए किराए पर लेती हैं तो समस्याएं उत्पन्न होती हैं। कई बड़े दान, क्योंकि उन्हें हजारों दाताओं की आवश्यकता है, टेलीमार्केटिंग फर्मों का उपयोग करें। आपको शायद इन अल्मा माटर या जाने-माने राष्ट्रीय दानों में से एक के लिए काम करने वाली कंपनियों में से एक द्वारा बुलाया गया है। अक्सर यह ठीक है। कंपनियां जो लाया जाता है और पैमाने की अर्थव्यवस्था से गैर-लाभकारी लाभ का उचित प्रतिशत कमाते हैं। टेलीमार्केटिंग कंपनियों द्वारा प्राप्त किए गए बड़े हिस्सों को कुछ विशेषज्ञों द्वारा बचाव किया जाता है क्योंकि टेलीमार्केटिंग की लागत पहले से कम है और समय के साथ घट जाती है। उदाहरण के लिए, शायद टेलीमार्केटिंग कंपनी का उपयोग करके दान देने वाले पहले पच्चीस डॉलर में से अधिकांश को कंपनी को भुगतान किया जाता है। लेकिन, चूंकि अब आप एक दाता हैं और कई सालों तक दे सकते हैं, दान के लिए दी गई प्रति डॉलर लागत कम हो जाती है। लेकिन कुछ दान कंपनियां उन कंपनियों को किराए पर लेती हैं जो दान करने के लिए लोगों को मनाने के लिए संदिग्ध तकनीकों का उपयोग करती हैं, और फिर कंपनियां दान के लिए वापस जाने के कुछ हिस्सों के साथ अधिकतर धन रखती हैं। इस तरह की प्रथाओं में अक्षमता होती है। यह दान द्वारा उठाए गए प्रति डॉलर बहुत अधिक खर्च करता है। यही कारण है कि दाताओं को दान के दक्षता आंकड़ों की जांच करने की आवश्यकता होती है। हालांकि, केवल उन आंकड़ों को देखकर आपको बहुत कुछ नहीं बताया जा सकता है। कई दाताओं को चौंका दिया जाता है जब वे सीखते हैं कि चैरिटी की आय का चालीस प्रतिशत ओवरहेड तक जाता है। लेकिन वे भूल जाते हैं कि उपरि में बहुत सारी जमीन शामिल है। यह केवल धन उगाहने की लागत के बारे में नहीं है। दरवाजों को खुले रखने, उपकरणों को अद्यतित रखने, वाहनों की रख-रखाव, जो दान की सेवाओं को प्रदान करने में मदद करते हैं, के साथ जुड़े लागत भी हैं। अक्सर हम एक असंभव मानक के लिए दान रखते हैं, जिससे वे नंगे हड्डियों के बजट पर सामाजिक जरूरतों को हल करने की उम्मीद करते हैं। अकेले दक्षता स्कोर पूरी कहानी नहीं बताते हैं। दाताओं को यह तय करने से पहले ओवरहेड मिथक से परिचित होना चाहिए कि कोई दान अपने ऑपरेशन को चलाने पर बहुत अधिक खर्च करता है या नहीं। दान का एक बेहतर उपाय यह कितना प्रभावी है। लेकिन यह मापना हमेशा आसान नहीं होता है और शायद यही कारण है कि दानदाता सरल और भ्रामक दक्षता स्कोर का सहारा लेते हैं। सौभाग्य से, चैरिटी नेविगेटर जैसे बेहतर व्यापार ब्यूरो ने चैरिटी राइटर्स को अब और अधिक यथार्थवादी मॉडल विकसित किए हैं, यह आकलन करते समय कि दान कितना अच्छा कर रहा है। हाल के वर्षों में, प्रेस द्वारा कई संदिग्ध टेलीमार्केटिंग स्थितियों का खुलासा किया गया है, जो इसे हर किसी के ध्यान में ला रहा है और कुछ दानों को दर्दनाक काले आंखें दे रहा है। कुछ प्रसिद्ध और सम्मानित दान मुख्य समाचारों के साथ-साथ छोटे गैर-लाभकारी लोगों के लिए अज्ञात हैं। वे टेलीमार्केटिंग कंपनियों से जुड़े हुए हैं जो धर्मार्थ टेलीमार्केटिंग से कमाई गई भारी मात्रा में धन के लिए कुख्यात हैं। हालांकि चैरिटी फंडराइजिंग में खराब अभिनेताओं के बारे में जागरूक होना महत्वपूर्ण है, लेकिन यह भी बुद्धिमान है कि सभी धर्मार्थियों को उसी काले ब्रश से पेंट न करें। अधिकतर दानदाताओं को आपके दाता डॉलर को जिस तरह से वे कहते हैं, खर्च करने के लिए भरोसा किया जा सकता है। सभी दाताओं को उनके द्वारा समर्थित दानों और विस्तारित अवधि से परिचित होना चाहिए। कभी आश्चर्य की बात है कि आपको एक दान से कॉल क्यों मिला है, जिसमें आपने कभी रुचि नहीं दिखाई है? उन्हें आपकी जानकारी कैसे मिली? देश के कई सबसे बड़े दान या तो अपने दाताओं के नाम बेचते हैं या साझा करते हैं। देश के कई सबसे प्रसिद्ध धर्मार्थियों के लिए दाता सूची ऑनलाइन डेटा दलालों से बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। चैरिटी नेविगेटर के अनुसार, फोर्ब्स द्वारा सूचीबद्ध पच्चीस सबसे बड़े दानों में से आठ में पर्याप्त दाता गोपनीयता नीतियों की कमी है। उनके पास या तो पॉलिसी की कमी है, यह बताता है कि जब तक दाता स्पष्ट रूप से बाहर निकलता है तब तक वे जानकारी साझा करते हैं या जानकारी साझा करते हैं । उन पच्चीस सबसे बड़े दानों में से केवल सात चैरिटी नेविगेटर से उच्चतम गोपनीयता रेटिंग प्राप्त करते हैं। पच्चीस सबसे बड़े दानों में से कुछ ऐसे हैं जो पर्याप्त दाता गोपनीयता का वादा करते हैं। इनमें डायरेक्ट रिलीफ, बॉयज़ एंड गर्ल्स क्लब ऑफ अमेरिका, कम्पासियन इंटरनेशनल और समरिटिन पर्स शामिल हैं। उच्च दाता गोपनीयता नीतियों वाले छोटे दानों में विकीमीडिया फाउंडेशन, इलेक्ट्रॉनिक फ्रंटियर फाउंडेशन, कक्ष पढ़ने और दानः पानी शामिल हैं। चैरिटीज टेलीमार्केटिंग का उपयोग करते समय आपके अधिकार क्या हैं? नेशनल डू नॉट कॉल रजिस्ट्री है, जिसे हम में से अधिकांश को अवांछित फोन कॉल पर कटौती करने के लिए उपयोग करना चाहिए। लेकिन, रजिस्ट्री में दानों द्वारा किए गए कॉल शामिल नहीं हैं। हालांकि, अगर कोई चैरिटी टेलीमार्केटिंग कंपनी का उपयोग करता है, तो उस कंपनी को "नो कॉल" सूची बनाए रखना चाहिए। आप अनुरोध कर सकते हैं कि आपका नाम उस सूची में रखा गया हो। यह केवल उस विशेष दान को कवर करेगा, हालांकि। टेलीमार्केटर्स द्वारा घोटाले से बचने के लिए आपको क्या करना चाहिए? - फोन रख देना! यदि आप टेलीमार्केटिंग कॉल से नफरत करते हैं, तो करने के लिए सबसे अच्छी बात तुरंत लटका है। या कॉल लटका जाना चाहिए कॉल बुरी तरह से जाना चाहिए। मैंने हाल ही में एक राजनीतिक धन उगाहने वाले कॉल पर लटका दिया क्योंकि कॉलर ने मुझे यह भी पूछे बिना कि वह मुझे कॉल करने का सुविधाजनक समय है, उसे बिना पिच के साथ डूब गया। - कॉलर से पूछें कि क्या वह टेलीमार्केटिंग कंपनी के लिए काम करता है या यदि वह दानकर्ता का स्वयंसेवक या स्टाफ सदस्य है। आप एक पेशेवर टेलीमार्केट की तुलना में एक स्वयंसेवक को देने की इच्छा रखते हैं। अगर कॉल किसी कंपनी से है, तो कॉलर से पूछें कि आपका दान दान में कितना होगा। कानून की आवश्यकता है कि कंपनियां आपको बताएं। और वे जानते हैं। अगर कॉलर कहता है कि उसके पास वह जानकारी नहीं है, तो कॉल को समाप्त करें। - कहें कि आप फोन नहीं देते हैं। यह वही है जो मैं हमेशा करता हूं। क्योंकि मैं फोन नहीं देता हूं। फोन पर क्रेडिट कार्ड नंबर साझा करना बहुत खतरनाक है। - क्या तुम खोज करते हो। दान की जांच करने के लिए चैरिटी रेटिंग संगठनों का उपयोग करें। चैरिटी नॅविगेटर या बेहतर बिजनेस ब्यूरो साइट पर जाएं और जिस दान पर आप विचार कर रहे हैं उसे देखें। यदि इसका स्कोर अधिक है, तो दान करने पर विचार करें। इन सूचियों पर सभी दानों को खोजने की उम्मीद न करें। लेकिन आम तौर पर बड़े होते हैं। छोटे दानों के लिए, अपने स्थानीय क्षेत्र में रहना बुद्धिमानी है। उन संगठनों को समझना और उन पर टैब रखना आसान है। - सीधे दें अपने पसंदीदा दान को चेक भेजें या इसे चैरिटी के कार्यालय से छोड़ दें। चैरिटी की वेबसाइट पर जाएं और अपनी भुगतान प्रणाली का उपयोग करके दान करें। अपने टिकट खरीदें, अपनी विशेष घटनाओं में भाग लें, और, विशेष रूप से यदि आप एक महत्वपूर्ण राशि दे रहे हैं, तो व्यक्तिगत रूप से धन उगाहने वाले अधिकारी से मिलने के लिए कहें। - कॉलर द्वारा खराब करने में मत देना। दबाव में कभी न दें। यदि आप असहज महसूस करते हैं, तो कॉल समाप्त करें। - फोन पर अपनी क्रेडिट कार्ड की जानकारी, बैंकिंग या किसी अन्य प्रकार की व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से बचें। यह बस सुरक्षित नहीं है। यदि आप दान करना चाहते हैं, तो कॉलर को आपको मेल में एक पत्र भेजने के लिए कहें या आप दान देने के लिए चैरिटी वेबसाइट पर जाएंगे। - दान करने से पहले किसी भी चैरिटी की गोपनीयता नीतियां देखें। यदि आप नहीं चाहते हैं कि आपकी जानकारी अन्य समूहों के साथ साझा की जाए, तो किसी भी दान को दान न करें जो गोपनीयता का वादा नहीं करता है। बस ऐसा करने से फ़ोन कॉल और डायरेक्ट मेल पर रास्ता कम हो सकता है जिसे आप नहीं चाहते हैं। गोपनीयता नीतियां किसी भी चैरिटी की वेबसाइट पर सही होनी चाहिए, और चैरिटी नेविगेटर प्रत्येक चैरिटी को अपने डेटाबेस में गोपनीयता के लिए रेट करता है। - धर्मार्थ देने के बारे में खुद को शिक्षित करें। अपने पसंदीदा प्रकाशनों में परोपकार और दान पर लेख पढ़ें, रेटिंग साइटों पर आलेख ब्राउज़ करें, धर्मार्थ देने के बारे में मित्रों के साथ बातचीत में संलग्न हों, और जानकारी साझा करें। आप एक कार नहीं खरीदेंगे, जिम नहीं लेंगे, या अपना शोध किए बिना डेकेयर चुनेंगे। चैरिटेबल देने के लिए देखभाल और ध्यान की एक ही राशि का हकदार है। दान से टेलीमार्केटिंग कॉल स्वाभाविक रूप से बुरा नहीं हैं। और कुछ दान सिर्फ हाल ही में दान के लिए चेक इन करने के लिए फोन करते हैं, या यहां तक कि आपको धन्यवाद भी देते हैं। एक बार जब आप जानते हैं कि कॉल धन उगाहने के लिए है, तो सुनिश्चित करें कि आप एक वैध कंपनी या दानकर्ता के स्वयंसेवक या कर्मचारी सदस्य के साथ बात कर रहे हैं। उदार रहो, लेकिन घोटाले के लिए मत गिरना।
अँगलियोंपर गिने जा सकते हैं । वर्ण-धर्मके पालने में स्वार्थकी गुंजाय नहीं, या वह गौण है । वर्ण-धर्म में तो परमार्थ ही हो सकता है, या फिर असका मुख्य स्थान हो । ब्राह्मण ब्रह्मको जानने और बतानेमें ही वक्त लगाये और यह माने कि असका गुजर भगवान चलाता है । क्षत्रिय प्रजाको पालनेका फर्ज अदा करे और उसके बदलेमें गुजारेके लिओ अक हदके भीतर खर्च ले । वैश्य जनताकी भलाओीके लिओ खेती, गायकी परवरिश और व्यापार करे; जो रुपया मिले असमेंसे सच्चा वैश्य अपने गुजरके लायक रखकर बाकीको लोगोंकी भलाओमें लगा दे । अिसी तरह शूद्र सेवा करे तो धर्म समझकर करे । मामूली तौरपर वर्णका फैसला जन्मसे किया जाता है । अक हृद तक कर्मसे भी किया जाता है। ब्राह्मणका लड़का ब्राह्मणके घर पैदा होकर ब्राह्मण तो कहलायेगा, मगर बड़ा होनेपर असमें ब्राह्मण के लक्षण या गुण न दिखें, तो वह ब्राह्मण नहीं माना जायगा । वह तो पतित हुआ । अिससे अलटा, जो दूसरे वर्णमें पैदा होकर ब्राह्मणके लक्षण साफ साफ और रोज बताया करेगा, वह भले ही खुदको ब्राह्मण न कहे तो भी ब्राह्मण मानने के लायक होगा । दुनिया असे ब्राह्मण ही मानेगी । अिस धर्मके मुताबिक अगर दुनिया चले तो सब जगह सन्तोष फैले, झूठी होड़ मिटे, अर्ध्या दूर हो, कोअी भूखों न मरे, जन्म मरण बराबर रहें और बीमारियाँ जाती रहें । लेकिन वर्ण अगर धर्म वन जाय और अधिकार न रहे, तो वर्ण वर्णके बीच भेद न रहे, और सब वर्ण बराबर हो जायँ । बहुत समय से हिन्दू धर्ममें धर्म के नामपर मूँचनीचके भेद घुस गये हैं । यह वर्ण-धर्मका टेढ़ामेढ़ा रूप है, भयंकर रूप है । पुरखोंने कठिन तपस्यासे जिस बड़े कानूनको ढूंढ़ निकाला था और जिसपर भरसक अमल किया था, उसका अनर्थ करके आज हमने असे दुनियाके लिओ हँसीकी चीज बना दिया है । नतीजा यह है कि आज हिन्दुओं में भी असा फिरका निकल पड़ा है जो वर्ण-व्यवस्थाका नाश करनेपर तुला हुआ है, क्योंकि वह मानता है. कि वर्णसे हिन्दू जाति पामाल हुआ है । और आज वर्णके नामपर जो हालत पाअी जाती है, उसमें तो हिन्दू जातिका नाश ही है । आज रोटी-बेटीके व्यवहारकी हृदबन्दीमें वर्ण-धर्मका पालन समाया हुआ है । ब्राह्मण ब्राह्मणके साथ और असमें भी भला हो तो अपनी अपजातिके साथ ही रोटी-बेटी व्यवहार रखेगा और असीमें अपने धर्मकी अितिश्री मानेगा । अत्तरमें कहावत है कि ' आठ कनौजिये नौ चूल्हे । यह है धर्मपालन ! सब अक दूसरेके छूनेसे नापाक हो जाते हैं । अिसी तरह खाने पीने के बारे में जो विवेक रखा जाता है, असे भी वर्ण-धर्मका जुज मानकर ब्राह्मणपन या क्षत्रियपन वगैराका खात्मा अिसीमें समझा जाता है कि फलाँ चीज खाओ जाय या न खाओ जाय । फिर क्या अचरज कि दुनिया जैसे धर्मको दुतकारती है और कितने ही समझदार हिन्दू भी अिस अव्यवस्थाको मिटानेपर तुले हैं ! यहाँ मेरे कहनेका मतलब यह बिलकुल नहीं कि रोटी-बेटी व्यवहारकी मर्यादा या खानपान के विवेककी गुंजायश ही नहीं । मैं खुद हर किसीके साथ सब कुछ खानेका धर्म न मानता हूँ, न पालता हूं । हर किसीके साथ बेटाबेटी लेना-देना मनमानी समझता हूँ । जिस तरह हर व्यवहार में कड़ी मर्यादा या संयम जरूरी है, असी तरह अिसमें भी जरूरी है, मेरा असा मानना है कि खाने पीनेका शास्त्र है। मनुष्य सब कुछ खानेवाला प्राणी नहीं है । असके खानेकी चीजोंकी भी हद है । लेकिन रोटी-बेटी व्यवहार और खानपानकी तमीज़पर वर्ण-धर्मका दारमदार नहीं है । वर्ण-धर्म अक अलग ही शास्त्र है । मैं यह कल्पना कर सकता हूँ कि ओक वर्णकी दूसरे वर्ण में शादी करने में कोअी बुराओ नहीं है । मैं मानता हूँ कि सफाओ वगैराके नियमोको पालते हुआ और खानपानमें विवेक करत हुञे सब वर्णक लोग अंक पंगत बैठकर खायँ तो कोअ दोष नहीं । पुराने जमाने में रोटी-बेटी व्यवहार अिस तरह होनेके बहुतसे सबूत हैं। रोटी-बेटी व्यवहारका वर्ण-धर्म के साथ जोड़ देनेमें हिन्दूधर्मको भारी नुकसान पहुँचा है । यह सही है कि वर्ण-धर्मकी खोज हिन्दूधर्म में हुआ है, मगर अिससे कोअ यह न माने कि ये नियम हिन्दुओंको ही लागू होते हैं और दूसरों को नहीं होते । हर हर धर्ममें कोभी न कोअी विशेषता होती ही है । मगर यह विशेषता असूलके तौर पर हो तो वह सब जगह फैल जानी चाहिये । दुनिया भले ही आज असे न माने । अतनी ही वह घाटेमें रहेगी । वर्ण-धर्म के बारेमें मेरा यह मानना है । अिसे मैं अक बड़ी भारी खोज मानता हूँ । आज नहीं, तो कल दुनियाको असे मानना ही होगा ।" अिस असूलको थोड़े में मैं अिस तरह रखता हूँ : जो आदमी जिस खानदानमें पैदा हो असका धन्धा, अगर वह नीतिके खिलाफ न हो तो, धर्मभावसे करे और असे करते हुआ जो आमदनी हो, असमेंसे मामूली गुज़रके लायक रखकर बाकीको सार्वजनिक यानी सबकी भलाओमें लगाये । चार वर्णोंको शरीरके चार अंगोंकी अपमा वेदमें दी गभी है । शरीर के अंगोंमें जैसे यह भेद नहीं होता कि ओक अँच और दूसरा नीच है; और अंगो में समझ हो और अँचनीचका भेद वे रखें, तो शरीररूपी राष्ट्र के टुकड़े टुकड़े हो जायँ । अिसी तरह जगत्का राष्ट्र भी अपने वर्णरूपी चार अंगोंके बीच अँचनीचका भेदभाव रखे तो टुकड़े टुकड़े हो जाय । आज जगत में अँचनीचके भेद हैं, और जगत् में जो आपसी झगड़ा चल रहा है, मुसके वे खास कारण हैं । अिस बातके समझने में मामूली आदमीको भी मुश्किल न होनी चाहिये कि यह लड़ाअी वर्णधर्म पर चलनेसे मिट सकती है । वर्ण-धर्म में हर वर्णको अपना अपना काम धर्म समझकर करना है । पेट भरना तो अिसका थोड़ा-सा फल है । यह मिले या न मिले तो भी चारों वर्णोंको अपने अपने धर्म में लगा रहना है । अिस वर्ण-धर्मपर अमल हो, तो आजकल दुनिया में जो चनीचपन मौजूद है, असकी जगह बराबरीका बोलबाला रहे, सारे धन्धे अिज्जत और कीमत दोनों में अक से समझे जायँ, और वजीर, वकील, डाक्टर, व्यापारी, चमार, बढ़ी, भंगी और ब्राह्मण बराबर बराबर कमायें । जहाँ वर्ण-धर्म पाला जाता हो वहाँ जैसी दया अपजानेवाली हालत हो ही नहीं सकती, न होनी ही चाहिये कि तीन वर्ण ज्यादा कमायें और शूद्र थोड़ा कमाये, या क्षत्रिय महलोंमें चढ़कर बैठें, ब्राह्मण भिखारी यानी झोंपड़े में रहे, वैश्य बड़ी बड़ी हवेलियाँ बनायें और शुद्र बिना घरबारका गुलाम बनकर रहे । मेरे कहने का मतलब यह नहीं कि जिस वक्त वर्णाश्रम धर्म खोज निकाला गया था, अस वक्त भी हिन्दू समाज अिस आदर्श तक पहुँच गया था । मुझे मालूम नहीं कि किस समय वर्ण-धर्म अिस अँचे दर्जे तक पहुँचा था । मगर मैं अितना कह सकता हूँ कि वर्णधर्मका आदर्श यही हो सकता है । 'समझदार के लिओ अिस धर्म पर चलना सहल है । असा वर्ण-धर्म सिर्फ हिन्दुओंके लिओ ही नहीं, बल्कि सारी दुनिया में जो समझ सकते हैं अन सबके लिये है । अिस व्यवस्था में जिसके पास जो जायदाद होगी, असका वह सारी जनताके लिओ रखवाला होगा । वह अपनेको कभी असका मालिक नहीं मानेगा । राजा अपने महलका या प्रजासे जो कर वसूल करता है उसका मालिक नहीं, बल्कि रखवाला है। वह अपने लिओ पेटभर लेकर बाकीको प्रजाके लिये खर्च करनेको बँधा हुआ है । यानी प्रजासे वह जितना लेगा असमें अपनी होशियारी से बढ़ती करके असी प्रजाको किसी न किसी तरह लौटा देगा । यही बात वैश्यकी है । का तो कहना ही क्या ? और अगर किसी भी तरह मुकाबिला किया जा सकता है तो सिर्फ धर्म समझकर सेवा ही करता है । जिसके पास को भी जायदाद कभी होनेवाली ही नहीं और जिसे मालिक बननेका लालच तक नहीं, वह हजार नमस्कारके लायक है और सबसे ऊँचा है। धर्मपर चलनेवाला शूद्र अपने बारे में असा न समझेगा, लेकिन देवता तो असपर फूल बरसायेंगे । यह वाक्य आजकलके सेवा करनेवालोंके बारेमें भले ही शोभा न दे । वे चप्पा भर जमीनके मालिक न होकर भी मालिकी चाहते हों। यानी वे अपने शूद्रपनको सुख देनेवाले धर्मके तौरपर नहीं देखते हों, बल्कि भोगकी अिच्छा पूरी न होनेसे दुखदायी समझते हों । अिसीलिभे मैंने तो आदर्श शुद्रको प्रणाम किया है, और दुनियासे कहता हूँ कि वह भी उसके सामने सिर झुकाये । लेकिन यह शुद्धका धर्म अस पर लादा नहीं जा सकता ८ तीन वर्ण अपनेको प्रजाके सेवक मानते हों और जो जायदाद अनके पास रहे असके सबकी भलाओ के लिओ अपनेको रखवाले साबित कर सकते हों, अन्हीं के मुँहसे बाद धर्मकी बड़ाअी करना अच्छा लग सकता है । आज तो जहाँ
अँगलियोंपर गिने जा सकते हैं । वर्ण-धर्मके पालने में स्वार्थकी गुंजाय नहीं, या वह गौण है । वर्ण-धर्म में तो परमार्थ ही हो सकता है, या फिर असका मुख्य स्थान हो । ब्राह्मण ब्रह्मको जानने और बतानेमें ही वक्त लगाये और यह माने कि असका गुजर भगवान चलाता है । क्षत्रिय प्रजाको पालनेका फर्ज अदा करे और उसके बदलेमें गुजारेके लिओ अक हदके भीतर खर्च ले । वैश्य जनताकी भलाओीके लिओ खेती, गायकी परवरिश और व्यापार करे; जो रुपया मिले असमेंसे सच्चा वैश्य अपने गुजरके लायक रखकर बाकीको लोगोंकी भलाओमें लगा दे । अिसी तरह शूद्र सेवा करे तो धर्म समझकर करे । मामूली तौरपर वर्णका फैसला जन्मसे किया जाता है । अक हृद तक कर्मसे भी किया जाता है। ब्राह्मणका लड़का ब्राह्मणके घर पैदा होकर ब्राह्मण तो कहलायेगा, मगर बड़ा होनेपर असमें ब्राह्मण के लक्षण या गुण न दिखें, तो वह ब्राह्मण नहीं माना जायगा । वह तो पतित हुआ । अिससे अलटा, जो दूसरे वर्णमें पैदा होकर ब्राह्मणके लक्षण साफ साफ और रोज बताया करेगा, वह भले ही खुदको ब्राह्मण न कहे तो भी ब्राह्मण मानने के लायक होगा । दुनिया असे ब्राह्मण ही मानेगी । अिस धर्मके मुताबिक अगर दुनिया चले तो सब जगह सन्तोष फैले, झूठी होड़ मिटे, अर्ध्या दूर हो, कोअी भूखों न मरे, जन्म मरण बराबर रहें और बीमारियाँ जाती रहें । लेकिन वर्ण अगर धर्म वन जाय और अधिकार न रहे, तो वर्ण वर्णके बीच भेद न रहे, और सब वर्ण बराबर हो जायँ । बहुत समय से हिन्दू धर्ममें धर्म के नामपर मूँचनीचके भेद घुस गये हैं । यह वर्ण-धर्मका टेढ़ामेढ़ा रूप है, भयंकर रूप है । पुरखोंने कठिन तपस्यासे जिस बड़े कानूनको ढूंढ़ निकाला था और जिसपर भरसक अमल किया था, उसका अनर्थ करके आज हमने असे दुनियाके लिओ हँसीकी चीज बना दिया है । नतीजा यह है कि आज हिन्दुओं में भी असा फिरका निकल पड़ा है जो वर्ण-व्यवस्थाका नाश करनेपर तुला हुआ है, क्योंकि वह मानता है. कि वर्णसे हिन्दू जाति पामाल हुआ है । और आज वर्णके नामपर जो हालत पाअी जाती है, उसमें तो हिन्दू जातिका नाश ही है । आज रोटी-बेटीके व्यवहारकी हृदबन्दीमें वर्ण-धर्मका पालन समाया हुआ है । ब्राह्मण ब्राह्मणके साथ और असमें भी भला हो तो अपनी अपजातिके साथ ही रोटी-बेटी व्यवहार रखेगा और असीमें अपने धर्मकी अितिश्री मानेगा । अत्तरमें कहावत है कि ' आठ कनौजिये नौ चूल्हे । यह है धर्मपालन ! सब अक दूसरेके छूनेसे नापाक हो जाते हैं । अिसी तरह खाने पीने के बारे में जो विवेक रखा जाता है, असे भी वर्ण-धर्मका जुज मानकर ब्राह्मणपन या क्षत्रियपन वगैराका खात्मा अिसीमें समझा जाता है कि फलाँ चीज खाओ जाय या न खाओ जाय । फिर क्या अचरज कि दुनिया जैसे धर्मको दुतकारती है और कितने ही समझदार हिन्दू भी अिस अव्यवस्थाको मिटानेपर तुले हैं ! यहाँ मेरे कहनेका मतलब यह बिलकुल नहीं कि रोटी-बेटी व्यवहारकी मर्यादा या खानपान के विवेककी गुंजायश ही नहीं । मैं खुद हर किसीके साथ सब कुछ खानेका धर्म न मानता हूँ, न पालता हूं । हर किसीके साथ बेटाबेटी लेना-देना मनमानी समझता हूँ । जिस तरह हर व्यवहार में कड़ी मर्यादा या संयम जरूरी है, असी तरह अिसमें भी जरूरी है, मेरा असा मानना है कि खाने पीनेका शास्त्र है। मनुष्य सब कुछ खानेवाला प्राणी नहीं है । असके खानेकी चीजोंकी भी हद है । लेकिन रोटी-बेटी व्यवहार और खानपानकी तमीज़पर वर्ण-धर्मका दारमदार नहीं है । वर्ण-धर्म अक अलग ही शास्त्र है । मैं यह कल्पना कर सकता हूँ कि ओक वर्णकी दूसरे वर्ण में शादी करने में कोअी बुराओ नहीं है । मैं मानता हूँ कि सफाओ वगैराके नियमोको पालते हुआ और खानपानमें विवेक करत हुञे सब वर्णक लोग अंक पंगत बैठकर खायँ तो कोअ दोष नहीं । पुराने जमाने में रोटी-बेटी व्यवहार अिस तरह होनेके बहुतसे सबूत हैं। रोटी-बेटी व्यवहारका वर्ण-धर्म के साथ जोड़ देनेमें हिन्दूधर्मको भारी नुकसान पहुँचा है । यह सही है कि वर्ण-धर्मकी खोज हिन्दूधर्म में हुआ है, मगर अिससे कोअ यह न माने कि ये नियम हिन्दुओंको ही लागू होते हैं और दूसरों को नहीं होते । हर हर धर्ममें कोभी न कोअी विशेषता होती ही है । मगर यह विशेषता असूलके तौर पर हो तो वह सब जगह फैल जानी चाहिये । दुनिया भले ही आज असे न माने । अतनी ही वह घाटेमें रहेगी । वर्ण-धर्म के बारेमें मेरा यह मानना है । अिसे मैं अक बड़ी भारी खोज मानता हूँ । आज नहीं, तो कल दुनियाको असे मानना ही होगा ।" अिस असूलको थोड़े में मैं अिस तरह रखता हूँ : जो आदमी जिस खानदानमें पैदा हो असका धन्धा, अगर वह नीतिके खिलाफ न हो तो, धर्मभावसे करे और असे करते हुआ जो आमदनी हो, असमेंसे मामूली गुज़रके लायक रखकर बाकीको सार्वजनिक यानी सबकी भलाओमें लगाये । चार वर्णोंको शरीरके चार अंगोंकी अपमा वेदमें दी गभी है । शरीर के अंगोंमें जैसे यह भेद नहीं होता कि ओक अँच और दूसरा नीच है; और अंगो में समझ हो और अँचनीचका भेद वे रखें, तो शरीररूपी राष्ट्र के टुकड़े टुकड़े हो जायँ । अिसी तरह जगत्का राष्ट्र भी अपने वर्णरूपी चार अंगोंके बीच अँचनीचका भेदभाव रखे तो टुकड़े टुकड़े हो जाय । आज जगत में अँचनीचके भेद हैं, और जगत् में जो आपसी झगड़ा चल रहा है, मुसके वे खास कारण हैं । अिस बातके समझने में मामूली आदमीको भी मुश्किल न होनी चाहिये कि यह लड़ाअी वर्णधर्म पर चलनेसे मिट सकती है । वर्ण-धर्म में हर वर्णको अपना अपना काम धर्म समझकर करना है । पेट भरना तो अिसका थोड़ा-सा फल है । यह मिले या न मिले तो भी चारों वर्णोंको अपने अपने धर्म में लगा रहना है । अिस वर्ण-धर्मपर अमल हो, तो आजकल दुनिया में जो चनीचपन मौजूद है, असकी जगह बराबरीका बोलबाला रहे, सारे धन्धे अिज्जत और कीमत दोनों में अक से समझे जायँ, और वजीर, वकील, डाक्टर, व्यापारी, चमार, बढ़ी, भंगी और ब्राह्मण बराबर बराबर कमायें । जहाँ वर्ण-धर्म पाला जाता हो वहाँ जैसी दया अपजानेवाली हालत हो ही नहीं सकती, न होनी ही चाहिये कि तीन वर्ण ज्यादा कमायें और शूद्र थोड़ा कमाये, या क्षत्रिय महलोंमें चढ़कर बैठें, ब्राह्मण भिखारी यानी झोंपड़े में रहे, वैश्य बड़ी बड़ी हवेलियाँ बनायें और शुद्र बिना घरबारका गुलाम बनकर रहे । मेरे कहने का मतलब यह नहीं कि जिस वक्त वर्णाश्रम धर्म खोज निकाला गया था, अस वक्त भी हिन्दू समाज अिस आदर्श तक पहुँच गया था । मुझे मालूम नहीं कि किस समय वर्ण-धर्म अिस अँचे दर्जे तक पहुँचा था । मगर मैं अितना कह सकता हूँ कि वर्णधर्मका आदर्श यही हो सकता है । 'समझदार के लिओ अिस धर्म पर चलना सहल है । असा वर्ण-धर्म सिर्फ हिन्दुओंके लिओ ही नहीं, बल्कि सारी दुनिया में जो समझ सकते हैं अन सबके लिये है । अिस व्यवस्था में जिसके पास जो जायदाद होगी, असका वह सारी जनताके लिओ रखवाला होगा । वह अपनेको कभी असका मालिक नहीं मानेगा । राजा अपने महलका या प्रजासे जो कर वसूल करता है उसका मालिक नहीं, बल्कि रखवाला है। वह अपने लिओ पेटभर लेकर बाकीको प्रजाके लिये खर्च करनेको बँधा हुआ है । यानी प्रजासे वह जितना लेगा असमें अपनी होशियारी से बढ़ती करके असी प्रजाको किसी न किसी तरह लौटा देगा । यही बात वैश्यकी है । का तो कहना ही क्या ? और अगर किसी भी तरह मुकाबिला किया जा सकता है तो सिर्फ धर्म समझकर सेवा ही करता है । जिसके पास को भी जायदाद कभी होनेवाली ही नहीं और जिसे मालिक बननेका लालच तक नहीं, वह हजार नमस्कारके लायक है और सबसे ऊँचा है। धर्मपर चलनेवाला शूद्र अपने बारे में असा न समझेगा, लेकिन देवता तो असपर फूल बरसायेंगे । यह वाक्य आजकलके सेवा करनेवालोंके बारेमें भले ही शोभा न दे । वे चप्पा भर जमीनके मालिक न होकर भी मालिकी चाहते हों। यानी वे अपने शूद्रपनको सुख देनेवाले धर्मके तौरपर नहीं देखते हों, बल्कि भोगकी अिच्छा पूरी न होनेसे दुखदायी समझते हों । अिसीलिभे मैंने तो आदर्श शुद्रको प्रणाम किया है, और दुनियासे कहता हूँ कि वह भी उसके सामने सिर झुकाये । लेकिन यह शुद्धका धर्म अस पर लादा नहीं जा सकता आठ तीन वर्ण अपनेको प्रजाके सेवक मानते हों और जो जायदाद अनके पास रहे असके सबकी भलाओ के लिओ अपनेको रखवाले साबित कर सकते हों, अन्हीं के मुँहसे बाद धर्मकी बड़ाअी करना अच्छा लग सकता है । आज तो जहाँ
मिस म्यूरियल लीस्टर से परिचय यह घटना सन् 1925 या 26 की है। श्री कृष्णदत्त पालीवाल कांग्रेस की ओर से एसेम्बली का चुनाव लड रहे थे और उनके साथ एक अग्रेज महिला भी पधारी थी जो भारतीय ग्रामो को दशा देखने को उत्सुक थी । मुझे एक सज्जन ने सूचना दी कि वह साबरमती आश्रम में महात्मा जी के दर्शन करती हुई आई हैं और श्रीरामचन्द्र पालीवाल के घर पर ठहरी हैं । मै तुरन्त ही वहाँ गया और मैंने पालीवाल जी से पूछा, 'इधर ठहरने की आपने क्या व्यवस्था को है ?" पालीवाल जो ने सहज भाव से कहा, 'हमारे पास तो केवल एक ही जगह है, पौरी का चबूतरा ।" मैने उस पर एतराज किया तो उन्होंने कहा, "आप अगर बेहतर प्रबन्ध कर सकते हैं तो करें ।" मै तुरन्त बाबू हजारीलाल चतुर्वेदी की सेवा मे उपस्थित हुआ और उनसे प्रार्थना की कि वह चौबे मुहल्ला स्थित अपनी पीली कोठी की ताली मुझे दे दें जहाँ मै मिस म्यूरियल लीस्टर को ठहरा सकूँ । उन्होने ताली मेरे सुपर्द कर दी और तब उस कोठी के हॉल मे उन्हें ठहरा दिया गया। वह बडी प्रसन्नतापूर्वक वहाँ ठहरी और प्रात काल उन्होने कहा, "यहाँ के निर्मल आकाश को देखकर मुझे बडा आनन्द आया ।" कुछ देर बाद मिस म्यूरियल लीस्टर को मैं अपने घर ताई जी और अपनी पत्नी से मिलाने ले आया । उन दोनो ने स्वागत सत्कार के बाद मुझसे कहा, "इनसे पूछिये कि इन्होने शादी की ?" इस पर मुझे कुछ हँसी आ गयी । मिस म्यूरियल ने पूछा, "ये क्या पूछ रही है ?" तो मैने अग्रेजी मे उनका प्रश्न दुहरा दिया। इस पर म्यूरियल लीस्टर ने अग्रेजी मे कहा, "टेल देम, आई एम ए वर्कर ।" ( इनसे कहिए कि मै तो एक काम करने वाली स्त्री हूँ।) मैंने उनकी बात घरवालो को समझा दी । जब पालीवाल जी के साथ मिस म्यूरियल लोस्टर ग्राम-भ्रमण के लिए जाने लगी तो पालीवाल जी ने कहा कि आप इनके दुभाषिया बन जाइये। मैने यह कार्य सहर्ष स्वीकार कर लिया और पांच-छ घण्टे तक दुभाषिये का काम करता रहा । इस प्रकार मेरा उनसे कुछ परिचय हो गया। उसके बाद मैने विलायत से उनके कार्य का विवरण भी मँगा लिया और उस पर एक लेख लिखकर पत्रों मे छपवा भी दिया। जब वह साबरमती में महात्मा जी ने मिली थी तो उन्होंने महात्मा जी से प्रार्थना की कि आप हमारे देश इंग्लैंड की यात्रा कीजिये । महात्मा जी ने उत्तर दिया, "मै आप लोगो को क्या सिखा सकता हूँ " (वॉट कंन आई टीच यू ?) इस पर मिस म्यूरियल लीस्टर ने तपाक से कहा, "आपसे कौन कहता है कि आप हमे कुछ सिखावें, आप हमसे कुछ सीखे ।" ( हू आम्क्स यू टू टीच अस, यू मस्ट लर्न समथिंग फ्रॉम अस ।) महात्मा जी जवाब खाने वाने आदमी नही थे । उन्होने फौरन ही उत्तर दिया, "बिरकुल ठीक । मै इंग्लैंड आऊँगा । पर इस शर्त पर कि आप इग्लैंड, वेल्स और स्कॉटलैंड की यात्रा करके अपने देशवासियो को बतलाइये कि आपकी ब्रिटिश सरकार किस तरह भारतीयो को शराब का जहर पिला रही है।" वह राजी हो गयी और उन्होने वचन दिया कि वह ऐसा अवश्य करेंगी ! अपने वचन का उन्होने पालन भी किया। यह बात ध्यान देने योग्य है कि जब महात्मा जी गोलमेज कान्फ्रेंस मे विलायत गये थे तो वह अन्यत्र न ठहरकर मिस म्यूरियल लीस्टर के कार्यस्थल 'किंग्सले हॉल' मे ही ठहरे थे । मिस म्यूरिल लीस्टर ने आगे चलकर एक पुस्तक लिखी जिसका नाम था 'एण्टरटेनिंग गाधी' यानी गांधी जी का आतिथ्य । किंग्सले मिस म्यूरियल लीस्टर का भाई था। उसके स्वर्गवास के बाद उसकी स्मृति मे मिस म्यूरियल लीस्टर ने किंग्सले हॉल की स्थापना की कुछ विदेशी महापुरुष / 111 थी । इनके पिता जी ने इन दोनों के लिए जो पैसा छोडा था उससे 500 रुपये के करीब ब्याज आता था । वह सब रुपया मिस म्यूग्यिल लीस्टर ने लन्दन के मुहल्ले के बच्चो और स्त्रियों की सेवा के लिए अर्पित कर दिया । मिस म्यूरियल लीस्टर बडो दबग महिला थी । उन्होने जापान की यात्रा के समय जापानियों को खासी डाँट भी बनला दी थी क्योकि उन दिनो जापान चीन पर जुल्म कर रहा था । उन्होंने दो किताबें और भी लिखी थी-- 'माई होस्ट दि हिन्दू' एवं 'इट ऑकर्ड टू मी ।' मिस म्यूरियल लोस्टर को विलायत मे जेल की यात्रा भी करनी पड़ी थी। उनकी माँग थी कि बच्चो को जो दूध दिया जाय वह पूर्ण रूप से जाँच के बाद ही दिया जाय । इस अभियान में वह विजयी हुई थी । नोबुल पुरस्कार विजेता पर्ल बक जिन दिनो मै 'विशाल भारत' में काम कर रहा था, मेरे नाम एक फोन आया । वह कलकत्ते के एक विख्यात ग्रैंड होटल से था । मैने फोन उठाया तो उधर मे किसी मज्जन ने कहा, "मैं अमेरिका से आया हूँ और गाधीवादी लेखक रिचर्ड ग्रिग द्वारा लिखित परिचय पत्र आपके नाम लाया हूँ । आपसे मिलने कब आऊँ ?" मैने तुरन्त ही उत्तर दिया, " आपको कष्ट करने की जरूरत नहीं है मैं खुद ही अपकी सेवा मे हाज़िर हो रहा हूँ।" इतना रहकर मैं होटल ग्रैंड पहुँचा। वहाँ 'एशिया' नामक पत्र के सचालक मि० रिचर्ड वार्ल्स उपस्थित थे। उनमे घण्टे भर बातचीत होती रही । चलते वक्त उन्होने कहा, "क्या आप एक अमेरिकन लेखिका पर्ल बक से मिलना पसन्द करेगे ? वह छद्म नाम से यात्रा कर रही है। पुलिटजर प्राइज की वह विजेता हैं। वह ग्रेट ईस्टर्न होटल मे ठहरी है।" मैंने उत्तर दिया, 112 / महापुरुषों की खोज मे "मैं अवश्य उनकी सेवा में उपस्थित होऊँगा ।" अकस्मात् उस दिन होली पडवा थी। मुझे इस बात की पूरी आशका यी कि मुझ पर कोई न कोई रग अवश्य डालेगा। इसलिए मैंने एक जोडी कपडे अपने साथ ले लिये थे । घोडा गाडी तक पहुँचते ही एक सज्जन ने मुझ पर रग डाल दिया। घोडा गाडी के भीतर मैंने अपने कपडे बदले और रगीन कपडो का पुलन्दा बनाकर बगल में ले लिया। पुलन्दा लिए हुए मैं पर्ल बक की सेवा में पहुँचा। कोई पौने घण्टे उनसे बातचीत होती रही। उन्होंने मुझे बतलाया कि वह आगरे जा रही है। तब मैंने कहा, "आगरे के लिए मै परिचय पत्र दे दूंगा । यहाँ मेरे साथ श्रीराम शर्मा नामक सज्जन ठहरे हुए हैं, वह आपकी आगरे की यात्रा का प्रबन्ध कर देंगे।" श्रीमती पर्ल बक ने पूछा, यह पोटली क्या है जो बगल मे लिए हुए हो ?" "तब मैंने होली पर्व का हाल बताया । जिससे उनकी जिज्ञासा जाग्रत हो गई और उन्होन कहा, "मै होली देखना चाहती हूँ।" मैने उत्तर दिया, "कलकत्ते की होली मे बडा हुडदंग होता है । उसका देखना खतरनाक होगा ।" इतना कहकर मैं चला आया और निवास स्थान पर पहुँचकर भाई श्रीराम जी से कहा, "एक बढिया शिकार हाथ आ गया है ।" वह चौकन्ने हुए और बोले, "कौन-सा शिकार ?" तब मैंने सम्पूर्ण वृत्तान्त बतलाया। दूसरे दिन मै उन्हे साथ लेकर पर्ल बक की सेवा मे गया । भाई श्रीराम जो ग्रामीण प्रश्नो के विशेषज्ञ थे और उन्होने पर्ल बक को वचन दिया कि वह भारतीय ग्रामीण जीवन की एक झलक उन्हें दिखला देगे । जब मिस्टर वार्ल्स और पर्ल बक आगरे पहुंचे तो मेरे छोटे भाई स्व० रामनारायण चतुर्वेदी ने उनसे मुलाकात की और उन दोनों को भाई श्रीराम जी के ग्राम ले गये । पर्ल बक ने अपनी पुस्तक 'माई सेवरल वर्ल्ड स ( मेरे अनेक ससार ) मे एक अध्याय अपनी किरथरा यात्रा पर दिया है जो काफी मनोरजक है। किरथरा मे उनके आतिथ्य का प्रबन्ध श्रीरामजी के अनुज जगन्नाथ ने किया था, जो कई वर्ष से अस्वस्थ थे और खाट पर लेटे रहते थे। पर उनमे ग्रजब की प्रबन्ध शक्ति थी। श्रीराम जी की धर्मपत्नी ने भी स्वादिष्ट भोजन बनाया था। भोजन के उपरान्त उन दोनो अतिथियों ने पूछा कि भोजन बनाया कैसे गया । जब उन्हें मामूली चूल्हा दिखलाया गया तो वह चकित रह गये। मिस्टर वार्ल्स बड़े साधन-सम्पन्न प्रकाशक थे । उनके द्वारा प्रकाशित 'एशिया' नामक पत्रिका की चालीस हजार प्रतियाँ छपती थी, जिन्हें वह बहुत कम मानते थे । उस वक्त तक उनका विवाह पलं बक के साथ नही हुआ था, आगे चलकर हो गया था। यद्यपि मैं उन दोनो विख्यात अमेरिकन अतिथियों के बारे में स्वयं ही लेख लिख सकता था । पर मैंने यह सुअवसर भाई श्रीराम को प्रदान कर दिया था। भाई श्रीराम जी ने बहुत अच्छा लेख लिखा था जिसे मैंने 'विशाल भारत मे छाप दिया था। पेशेवर प्रतिष्ठित लेखक ऐसा कभी नहीं करते कि ऐसे दुर्लभ अवसरो का उपयोग दूसरो को करने दे । भारत-यात्रा के दो-तीन वर्ष बाद पर्ल बक को जब नोबुल प्राइज़ मिला था तब मुझे कुछ आश्चर्य हुआ था और मैने भाई श्रीराम जी से कहा था, "क्या पर्ल तक वही है जिनसे हम लोग मिले थे ? वह तो युवती-सी ही मालूम होती थी जबकि उनकी उम्र चालीस साल बताई जाती है।" इस पर श्रीरामजी बोले, "हाँ, यह वही पर्ल बक हैं। अपने स्वास्थ्य का भरपूर ध्यान रखकर वह अपने यौवन को बनाये हुए हैं।" इसके कुछ वर्ष बाद पर्ल बक भारत पधारी । उनका दिल्ली में स्वागत किया गया था। मैं उस मीटिंग में उपस्थित था और मैंने उन्हें अपने पिछले परिचय की याद दिलायी। उन्हें उसका भली-भांति स्मरण था। उन्होने बड़े दुखपूर्वक कहा, "मै तो अब विधवा हूँ। कुछ समय पूर्व मिस्टर वार्ल्स का देहान्त हो चुका है ।" अमेरिका में भारतीय स्वाधीनता की समर्थक सस्था मे पर्ल बक का प्रमुख हाथ था। अपने ग्रन्थो से उन्हें जो आमदनी हुई थी उसे उन्होंने कुछ भिन्नभिन्न जातीय बच्चो के पालन-पोषण पर खर्च कर दिया था। उनका जन्म और पालन-पोषण चीन मे हुआ था जहाँ उनके पिता मिशनरी थे । उनके ग्रन्थ 'गुड अर्थ', जिस पर उन्हें नोबुल प्राइज मिला था, मे चीन के ग्रामीण जीवन का ही वर्णन है । उस ग्रन्थ पुर एक उत्कृष्ट फिल्म भी बनी थी जिसे देखने का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ था । अमेरिकन पत्रकार लुई फ़िशर एक दिन मैंने राइटर का यह तार किसी अग्रेजी पत्र मे पढा कि लुई फिशर नामक अमेरिकन पत्रकार अमुक प्रकाशक के लिए महात्मा गांधी जी का जीवन चरित लिख रहे है। मैंने तुरन्त ही हवाई डाक से एक पत्र अमेरिका भेज दिया जिसका आशय यह था कि मैं आपके इस महत्वपूर्ण कार्य मे सर्वथा निस्वार्थ भाव से कुछ सेवा करना चाहता हूँ। लौटनी डाक से उनका पत्र आया । उसका एक वाक्य था, "आई एम ग्लैंड ईंट यू एक्जिस्ट" (यानी मुझे यह देखकर हर्ष होता है कि आप जैसा कोई व्यक्ति मौजूद है ) । फिर उन्होने लिखा था, "कृपया बताइये, आप क्या मदद दे सकते हैं ?" मैंने तुरन्त ही चि० बुद्धिप्रकाश से ऐण्डू ज-गाधी-पत्र व्यवहार की 53 चिट्ठियाँ टाइप करायी और उन्हें हवाई डाक द्वारा तेरह रुपया खर्च करके अमेरिका भेज दिया। लुई फिशर ने उन पत्रो का उपयोग अपनी पुस्तक महात्मा गांधी जी की जीवनी मे यथास्थान कर दिया। उस पुस्तक की रचना में उनके दो वर्ष से अधिक लग गये थे और उसके छपते ही सर्वप्रथम उसकी एक प्रति उन्होंने मुझे भेंट दी थी । कुछ विदेशी महापुरुष / 113 जब लुई फ़िशर साहब भारत पधारे तो मैंने उनकी सेवा में उपस्थित होकर उनसे बातचीत भी की थी । वह रूस मे पद्रह वर्ष रह चुके थे और उनकी पत्नी भी रूसी ही थी। वह तत्कालीन रूसी शासन पद्धति के विरोधी थे। अशोक होटल मे जब मैं उनसे बातचीत कर रहा था, लुई फिशर साहब ने मुझसे एक सवाल किया, "५० जवाहर लाल जी का स्थान कौन ले सकता है ?" मैं उनके इस प्रश्न का उत्तर न दे सका तो उन्होंने स्वय ही कहा, "क्या जयप्रकाश जी उनके उत्तराधिकारी नहीं बन सकते ?" मैंने उत्तर दिया, "ही हैज आलरेडी मिस्ड दि बस" (यानी उन्होंने तो इसका अवसर खो ही दिया है) । अब में सोचता हूँ कि अपने उस वाक्य मे मैंने श्रद्धेय जयप्रकाश जी के साथ न्याय नही किया था। वह पदलोलुप नही थे और उस दिशा में उनकी कोई आकांक्षा भी नहीं थी । लुई फिशर साहब की जो थोडी-सी सेवा मैंने की उसके बदले में उन्होंने मेरे कई कार्य किये । सुप्रसिद्ध अहिंसावादी सम्पादक विलियम लायड गैरीसन के पौत से उन्होने 1200 रुपये हिन्दी भवन, दिल्ली मे गैरीसन लाइब्रेरी खुलवाने के लिए भिजवाये और गैरीसन की चार बहदाकार जिल्दो वाली जीवनी भी उन्होंने मुझे भेजी। वह ग्रन्थ सर्वथा दुर्लभ था और शायद एक हजार रुपये मे भी न मिलता । लुई फिशर एक सप्ताह तक महात्मा गांधी जी के साथ भी रह चुके थे और उन्होने 'ए वीक विद गाधी' नामक पुस्तक भी लिखी थी। उनकी लिखी महात्मा गांधी जी की अग्रेजी जीवनी का हिन्दी अनुवाद सस्ता साहित्य मण्डल ने प्रकाशित किया था। उनकी एक पुस्तक 'स्टालिन और गाधी' भी थी जिसमे दोनो का तुलनात्मक अध्ययन था । लुई फिशर अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति के पत्रकार थे और उनका जीवन बडा सघर्षमय रहा। एक बार तो 114 / महापुरुषों की खोज मे उन्हे भोजन के लाले भी पड गये थे और उन्हें अपना ओवर कोट बेचना पडा था। अपने जीवन के अन्तिम काल मे वह एक विश्वविद्यालय के अन्त राष्ट्रीय राजनीति के अध्यापक भी बन गये थे। मेरे सग्रहालय में उनके बहुत से पत्र सुरक्षित हैं। जापान के गांधी : कागावा कागावा का शुभ नाम मैंने पहले सुन रखा था। वाई०एम०सी०ए० के प्रकाशन विभाग से मैंने उनका जीवन-चरित भी मँगा लिया था और उसके आधार पर एक लेख 'जापान के गांधी कागावा' लिखकर ट्रैक्टाकार में प्रकाशित भी करा दिया था। पर मुझे स्वप्न में भी यह आशा नही थी कि मुझे कभी कागावा के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हो सकेगा । इसलिए पत्रो मे यह समाचार पढकर, कि ईसाई मिशनरियो की एक सभा में सम्मिलित होने के लिए कागावा जापान से भारत पधार रहे हैं, मुझे अत्यन्त हर्ष हुआ । मै उन दिनो बम्बई गया हुआ था और कागावा भी मद्रास से बम्बई आने वाले थे । इसलिए मैंने बम्बई मे मिलने के लिए उनसे समय माँगा। उन्होने सहर्ष समय दे दिया। उही दिनो महाराज वीरसिंह जूदेव भी बम्बई पधारे थे। मैंने उनसे अपने कागावा से मिलने की बात कही। उन्होने तुरन्त ही कहा, " इस समय अंग्रेज़ो के सम्बन्ध जापान से अच्छे नही हैं। और स्वभावत अग्रेजो की ख फिया पुलिस कागावा पर निगाह रखेगी। यदि आप कागावा से मिलेंगे, तो सी० आई० डी० की कुदृष्टि आप पर भी पड जायेगी। आप ख द सोच-समझ लीजिये ।" तब मेरे मन मे यह ख्याल आया कि मैं देशी रियासत मे रह रहा हूँ। ओरछा राज्य के एक मंत्री ठाकुर सज्जन सिंह जी ने मुझे सावधान करते हुए कहा था, "चोबे जी, आप कोई ऐसा काम न करें जिससे महाराज पर धर्मे सकट उपस्थित हो । यदि ब्रिटिश सरकार औरछेश पर यह दबाव डालेगी कि चौबे जी को राज्य से निष्कासित कर दिया जाय, तो वह ऐसा हरगिज नहीं करेंगे, चाहे उन्हे गद्दी छोडनी पडे ।" ठाकुर साहब की इस बात को ध्यान में रखकर मैंने यही उचित समझा कि कागावा से न मिलूँ और मैंने उन्हे (कागावा को) लिख भी दिया कि मैं दो दिन पहले बम्बई छोड़ रहा हूँ। इस पर कागावा का उत्तर आया कि मैं दो दिन पहले बम्बई पहुँच सकता हूँ । इसका कोई उत्तर न देकर मैं बम्बई से टीकमगढ के लिए रवाना हो गया। इसके आठदस दिन बाद मुझे कलकत्ते जाना पडा । अकस्मात् उन्हीं दिनो कागावा भी कलकत्ते पहुँचे । मैंने पत्रो मे पढा कि उनका भाषण वाई० एम० सी० ए० के भवन में होने वाला है। मैं भाषण से कुछ मिनट पहले भवन में पहुँच गया और ज्यो ही कागावा साहब पधारे, मैंने तुरन्त उनसे प्रार्थना कर दो कि मीटिंग समाप्त होने के बाद मुझे पद्रह मिनट समय दे । वह सहमत हो गये। मीटिंग समाप्त होने पर मैं अकेले ही उनसे मिला । मैंने उनसे कहा, "सम्भवत अग्रेजो की सी० आई० डी० आपका पीछा कर रही होगी। इसी कारण मैं बम्बई मे आपसे न मिल सका।" उन्होने कहा कि मुझे इस बात का पता है। मैंने अपने उस लेख की प्रति भी उन्हें भेट कर दी, जो मैंने उनके विषय मे लिखा था। उनके पास अधिक समय था भी नहीं, इसलिए विशेष बातचीत हो नहीं सकी । यह बात ध्यान देने योग्य है कि कागावा ने वर्धा पहुँचकर महात्मा गाधी जी के दर्शन किए थे और बातचीत भी की थी। उस बातचीत की पूरीपूरी रिपोर्ट महादेव भाई रेसाई ने 'यग इडिया' मे छपा दी थी । जापान मे नगरो की गन्दी बस्तियो को सुधारने के लिए कागावा ने अपना सम्पूर्ण जीवन ही अपित कर दिया था। अपने विवाह के बाद वह अपनी पत्नी सहित एक गन्दी बस्ती के छोटे से कमरे मे रहने के लिए चले गये थे । उस कमरे मे कई व्यक्ति पहले से मौजूद थे। कोठरी की लम्बाई छ फुट थी और चौडाई भी इतनी ही थी। उसमे सत्तर वर्ष का एक बूढ़ा, साठ पैसठ वर्ष की एक बुढ़िया, ग्यारह वर्ष का एक अपराधी लडका, एक अनाथ माता और उसके चार बच्चे और एक भिखारिन थे । यही कागावा का परिवार था । किसी नयी बहू के सामने ऐसी विकट समस्या शायद ही कभी उपस्थित हुई हो । कागावा की आमदनी कुल जमा तीन पोण्ड, यानी करीब 45 रुपये थी और इतने मे ही ग्यारह प्राणियों का पेट भरता था। उस गन्दी बस्ती मे चारो ओर अस्वच्छता तथा दुर्गन्ध का साम्राज्य था। पाखाना एक ही था । कपडो को एक छोटी से नदी मे धोना पडता था और उनके सुखाने के लिए कोई जगह न थी। खटमलो की भरमार थी और वह अमर थे। जितने ही मारो, उतने ही बढ़ते थे। कुछ वर्ष पूर्व कागावा का देहान्त हो चुका है, पर शान्ति निकेतन के जापान अध्यापक साईजी माकिनो से मुझे ज्ञात हुआ था कि कागावा की धर्मपत्नी अभी जीवित हैं। कुछ विदेशी महापुरुष / 115
मिस म्यूरियल लीस्टर से परिचय यह घटना सन् एक हज़ार नौ सौ पच्चीस या छब्बीस की है। श्री कृष्णदत्त पालीवाल कांग्रेस की ओर से एसेम्बली का चुनाव लड रहे थे और उनके साथ एक अग्रेज महिला भी पधारी थी जो भारतीय ग्रामो को दशा देखने को उत्सुक थी । मुझे एक सज्जन ने सूचना दी कि वह साबरमती आश्रम में महात्मा जी के दर्शन करती हुई आई हैं और श्रीरामचन्द्र पालीवाल के घर पर ठहरी हैं । मै तुरन्त ही वहाँ गया और मैंने पालीवाल जी से पूछा, 'इधर ठहरने की आपने क्या व्यवस्था को है ?" पालीवाल जो ने सहज भाव से कहा, 'हमारे पास तो केवल एक ही जगह है, पौरी का चबूतरा ।" मैने उस पर एतराज किया तो उन्होंने कहा, "आप अगर बेहतर प्रबन्ध कर सकते हैं तो करें ।" मै तुरन्त बाबू हजारीलाल चतुर्वेदी की सेवा मे उपस्थित हुआ और उनसे प्रार्थना की कि वह चौबे मुहल्ला स्थित अपनी पीली कोठी की ताली मुझे दे दें जहाँ मै मिस म्यूरियल लीस्टर को ठहरा सकूँ । उन्होने ताली मेरे सुपर्द कर दी और तब उस कोठी के हॉल मे उन्हें ठहरा दिया गया। वह बडी प्रसन्नतापूर्वक वहाँ ठहरी और प्रात काल उन्होने कहा, "यहाँ के निर्मल आकाश को देखकर मुझे बडा आनन्द आया ।" कुछ देर बाद मिस म्यूरियल लीस्टर को मैं अपने घर ताई जी और अपनी पत्नी से मिलाने ले आया । उन दोनो ने स्वागत सत्कार के बाद मुझसे कहा, "इनसे पूछिये कि इन्होने शादी की ?" इस पर मुझे कुछ हँसी आ गयी । मिस म्यूरियल ने पूछा, "ये क्या पूछ रही है ?" तो मैने अग्रेजी मे उनका प्रश्न दुहरा दिया। इस पर म्यूरियल लीस्टर ने अग्रेजी मे कहा, "टेल देम, आई एम ए वर्कर ।" मैंने उनकी बात घरवालो को समझा दी । जब पालीवाल जी के साथ मिस म्यूरियल लोस्टर ग्राम-भ्रमण के लिए जाने लगी तो पालीवाल जी ने कहा कि आप इनके दुभाषिया बन जाइये। मैने यह कार्य सहर्ष स्वीकार कर लिया और पांच-छ घण्टे तक दुभाषिये का काम करता रहा । इस प्रकार मेरा उनसे कुछ परिचय हो गया। उसके बाद मैने विलायत से उनके कार्य का विवरण भी मँगा लिया और उस पर एक लेख लिखकर पत्रों मे छपवा भी दिया। जब वह साबरमती में महात्मा जी ने मिली थी तो उन्होंने महात्मा जी से प्रार्थना की कि आप हमारे देश इंग्लैंड की यात्रा कीजिये । महात्मा जी ने उत्तर दिया, "मै आप लोगो को क्या सिखा सकता हूँ " इस पर मिस म्यूरियल लीस्टर ने तपाक से कहा, "आपसे कौन कहता है कि आप हमे कुछ सिखावें, आप हमसे कुछ सीखे ।" महात्मा जी जवाब खाने वाने आदमी नही थे । उन्होने फौरन ही उत्तर दिया, "बिरकुल ठीक । मै इंग्लैंड आऊँगा । पर इस शर्त पर कि आप इग्लैंड, वेल्स और स्कॉटलैंड की यात्रा करके अपने देशवासियो को बतलाइये कि आपकी ब्रिटिश सरकार किस तरह भारतीयो को शराब का जहर पिला रही है।" वह राजी हो गयी और उन्होने वचन दिया कि वह ऐसा अवश्य करेंगी ! अपने वचन का उन्होने पालन भी किया। यह बात ध्यान देने योग्य है कि जब महात्मा जी गोलमेज कान्फ्रेंस मे विलायत गये थे तो वह अन्यत्र न ठहरकर मिस म्यूरियल लीस्टर के कार्यस्थल 'किंग्सले हॉल' मे ही ठहरे थे । मिस म्यूरिल लीस्टर ने आगे चलकर एक पुस्तक लिखी जिसका नाम था 'एण्टरटेनिंग गाधी' यानी गांधी जी का आतिथ्य । किंग्सले मिस म्यूरियल लीस्टर का भाई था। उसके स्वर्गवास के बाद उसकी स्मृति मे मिस म्यूरियल लीस्टर ने किंग्सले हॉल की स्थापना की कुछ विदेशी महापुरुष / एक सौ ग्यारह थी । इनके पिता जी ने इन दोनों के लिए जो पैसा छोडा था उससे पाँच सौ रुपयापये के करीब ब्याज आता था । वह सब रुपया मिस म्यूग्यिल लीस्टर ने लन्दन के मुहल्ले के बच्चो और स्त्रियों की सेवा के लिए अर्पित कर दिया । मिस म्यूरियल लीस्टर बडो दबग महिला थी । उन्होने जापान की यात्रा के समय जापानियों को खासी डाँट भी बनला दी थी क्योकि उन दिनो जापान चीन पर जुल्म कर रहा था । उन्होंने दो किताबें और भी लिखी थी-- 'माई होस्ट दि हिन्दू' एवं 'इट ऑकर्ड टू मी ।' मिस म्यूरियल लोस्टर को विलायत मे जेल की यात्रा भी करनी पड़ी थी। उनकी माँग थी कि बच्चो को जो दूध दिया जाय वह पूर्ण रूप से जाँच के बाद ही दिया जाय । इस अभियान में वह विजयी हुई थी । नोबुल पुरस्कार विजेता पर्ल बक जिन दिनो मै 'विशाल भारत' में काम कर रहा था, मेरे नाम एक फोन आया । वह कलकत्ते के एक विख्यात ग्रैंड होटल से था । मैने फोन उठाया तो उधर मे किसी मज्जन ने कहा, "मैं अमेरिका से आया हूँ और गाधीवादी लेखक रिचर्ड ग्रिग द्वारा लिखित परिचय पत्र आपके नाम लाया हूँ । आपसे मिलने कब आऊँ ?" मैने तुरन्त ही उत्तर दिया, " आपको कष्ट करने की जरूरत नहीं है मैं खुद ही अपकी सेवा मे हाज़िर हो रहा हूँ।" इतना रहकर मैं होटल ग्रैंड पहुँचा। वहाँ 'एशिया' नामक पत्र के सचालक मिशून्य रिचर्ड वार्ल्स उपस्थित थे। उनमे घण्टे भर बातचीत होती रही । चलते वक्त उन्होने कहा, "क्या आप एक अमेरिकन लेखिका पर्ल बक से मिलना पसन्द करेगे ? वह छद्म नाम से यात्रा कर रही है। पुलिटजर प्राइज की वह विजेता हैं। वह ग्रेट ईस्टर्न होटल मे ठहरी है।" मैंने उत्तर दिया, एक सौ बारह / महापुरुषों की खोज मे "मैं अवश्य उनकी सेवा में उपस्थित होऊँगा ।" अकस्मात् उस दिन होली पडवा थी। मुझे इस बात की पूरी आशका यी कि मुझ पर कोई न कोई रग अवश्य डालेगा। इसलिए मैंने एक जोडी कपडे अपने साथ ले लिये थे । घोडा गाडी तक पहुँचते ही एक सज्जन ने मुझ पर रग डाल दिया। घोडा गाडी के भीतर मैंने अपने कपडे बदले और रगीन कपडो का पुलन्दा बनाकर बगल में ले लिया। पुलन्दा लिए हुए मैं पर्ल बक की सेवा में पहुँचा। कोई पौने घण्टे उनसे बातचीत होती रही। उन्होंने मुझे बतलाया कि वह आगरे जा रही है। तब मैंने कहा, "आगरे के लिए मै परिचय पत्र दे दूंगा । यहाँ मेरे साथ श्रीराम शर्मा नामक सज्जन ठहरे हुए हैं, वह आपकी आगरे की यात्रा का प्रबन्ध कर देंगे।" श्रीमती पर्ल बक ने पूछा, यह पोटली क्या है जो बगल मे लिए हुए हो ?" "तब मैंने होली पर्व का हाल बताया । जिससे उनकी जिज्ञासा जाग्रत हो गई और उन्होन कहा, "मै होली देखना चाहती हूँ।" मैने उत्तर दिया, "कलकत्ते की होली मे बडा हुडदंग होता है । उसका देखना खतरनाक होगा ।" इतना कहकर मैं चला आया और निवास स्थान पर पहुँचकर भाई श्रीराम जी से कहा, "एक बढिया शिकार हाथ आ गया है ।" वह चौकन्ने हुए और बोले, "कौन-सा शिकार ?" तब मैंने सम्पूर्ण वृत्तान्त बतलाया। दूसरे दिन मै उन्हे साथ लेकर पर्ल बक की सेवा मे गया । भाई श्रीराम जो ग्रामीण प्रश्नो के विशेषज्ञ थे और उन्होने पर्ल बक को वचन दिया कि वह भारतीय ग्रामीण जीवन की एक झलक उन्हें दिखला देगे । जब मिस्टर वार्ल्स और पर्ल बक आगरे पहुंचे तो मेरे छोटे भाई स्वशून्य रामनारायण चतुर्वेदी ने उनसे मुलाकात की और उन दोनों को भाई श्रीराम जी के ग्राम ले गये । पर्ल बक ने अपनी पुस्तक 'माई सेवरल वर्ल्ड स मे एक अध्याय अपनी किरथरा यात्रा पर दिया है जो काफी मनोरजक है। किरथरा मे उनके आतिथ्य का प्रबन्ध श्रीरामजी के अनुज जगन्नाथ ने किया था, जो कई वर्ष से अस्वस्थ थे और खाट पर लेटे रहते थे। पर उनमे ग्रजब की प्रबन्ध शक्ति थी। श्रीराम जी की धर्मपत्नी ने भी स्वादिष्ट भोजन बनाया था। भोजन के उपरान्त उन दोनो अतिथियों ने पूछा कि भोजन बनाया कैसे गया । जब उन्हें मामूली चूल्हा दिखलाया गया तो वह चकित रह गये। मिस्टर वार्ल्स बड़े साधन-सम्पन्न प्रकाशक थे । उनके द्वारा प्रकाशित 'एशिया' नामक पत्रिका की चालीस हजार प्रतियाँ छपती थी, जिन्हें वह बहुत कम मानते थे । उस वक्त तक उनका विवाह पलं बक के साथ नही हुआ था, आगे चलकर हो गया था। यद्यपि मैं उन दोनो विख्यात अमेरिकन अतिथियों के बारे में स्वयं ही लेख लिख सकता था । पर मैंने यह सुअवसर भाई श्रीराम को प्रदान कर दिया था। भाई श्रीराम जी ने बहुत अच्छा लेख लिखा था जिसे मैंने 'विशाल भारत मे छाप दिया था। पेशेवर प्रतिष्ठित लेखक ऐसा कभी नहीं करते कि ऐसे दुर्लभ अवसरो का उपयोग दूसरो को करने दे । भारत-यात्रा के दो-तीन वर्ष बाद पर्ल बक को जब नोबुल प्राइज़ मिला था तब मुझे कुछ आश्चर्य हुआ था और मैने भाई श्रीराम जी से कहा था, "क्या पर्ल तक वही है जिनसे हम लोग मिले थे ? वह तो युवती-सी ही मालूम होती थी जबकि उनकी उम्र चालीस साल बताई जाती है।" इस पर श्रीरामजी बोले, "हाँ, यह वही पर्ल बक हैं। अपने स्वास्थ्य का भरपूर ध्यान रखकर वह अपने यौवन को बनाये हुए हैं।" इसके कुछ वर्ष बाद पर्ल बक भारत पधारी । उनका दिल्ली में स्वागत किया गया था। मैं उस मीटिंग में उपस्थित था और मैंने उन्हें अपने पिछले परिचय की याद दिलायी। उन्हें उसका भली-भांति स्मरण था। उन्होने बड़े दुखपूर्वक कहा, "मै तो अब विधवा हूँ। कुछ समय पूर्व मिस्टर वार्ल्स का देहान्त हो चुका है ।" अमेरिका में भारतीय स्वाधीनता की समर्थक सस्था मे पर्ल बक का प्रमुख हाथ था। अपने ग्रन्थो से उन्हें जो आमदनी हुई थी उसे उन्होंने कुछ भिन्नभिन्न जातीय बच्चो के पालन-पोषण पर खर्च कर दिया था। उनका जन्म और पालन-पोषण चीन मे हुआ था जहाँ उनके पिता मिशनरी थे । उनके ग्रन्थ 'गुड अर्थ', जिस पर उन्हें नोबुल प्राइज मिला था, मे चीन के ग्रामीण जीवन का ही वर्णन है । उस ग्रन्थ पुर एक उत्कृष्ट फिल्म भी बनी थी जिसे देखने का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ था । अमेरिकन पत्रकार लुई फ़िशर एक दिन मैंने राइटर का यह तार किसी अग्रेजी पत्र मे पढा कि लुई फिशर नामक अमेरिकन पत्रकार अमुक प्रकाशक के लिए महात्मा गांधी जी का जीवन चरित लिख रहे है। मैंने तुरन्त ही हवाई डाक से एक पत्र अमेरिका भेज दिया जिसका आशय यह था कि मैं आपके इस महत्वपूर्ण कार्य मे सर्वथा निस्वार्थ भाव से कुछ सेवा करना चाहता हूँ। लौटनी डाक से उनका पत्र आया । उसका एक वाक्य था, "आई एम ग्लैंड ईंट यू एक्जिस्ट" । फिर उन्होने लिखा था, "कृपया बताइये, आप क्या मदद दे सकते हैं ?" मैंने तुरन्त ही चिशून्य बुद्धिप्रकाश से ऐण्डू ज-गाधी-पत्र व्यवहार की तिरेपन चिट्ठियाँ टाइप करायी और उन्हें हवाई डाक द्वारा तेरह रुपया खर्च करके अमेरिका भेज दिया। लुई फिशर ने उन पत्रो का उपयोग अपनी पुस्तक महात्मा गांधी जी की जीवनी मे यथास्थान कर दिया। उस पुस्तक की रचना में उनके दो वर्ष से अधिक लग गये थे और उसके छपते ही सर्वप्रथम उसकी एक प्रति उन्होंने मुझे भेंट दी थी । कुछ विदेशी महापुरुष / एक सौ तेरह जब लुई फ़िशर साहब भारत पधारे तो मैंने उनकी सेवा में उपस्थित होकर उनसे बातचीत भी की थी । वह रूस मे पद्रह वर्ष रह चुके थे और उनकी पत्नी भी रूसी ही थी। वह तत्कालीन रूसी शासन पद्धति के विरोधी थे। अशोक होटल मे जब मैं उनसे बातचीत कर रहा था, लुई फिशर साहब ने मुझसे एक सवाल किया, "पचास जवाहर लाल जी का स्थान कौन ले सकता है ?" मैं उनके इस प्रश्न का उत्तर न दे सका तो उन्होंने स्वय ही कहा, "क्या जयप्रकाश जी उनके उत्तराधिकारी नहीं बन सकते ?" मैंने उत्तर दिया, "ही हैज आलरेडी मिस्ड दि बस" । अब में सोचता हूँ कि अपने उस वाक्य मे मैंने श्रद्धेय जयप्रकाश जी के साथ न्याय नही किया था। वह पदलोलुप नही थे और उस दिशा में उनकी कोई आकांक्षा भी नहीं थी । लुई फिशर साहब की जो थोडी-सी सेवा मैंने की उसके बदले में उन्होंने मेरे कई कार्य किये । सुप्रसिद्ध अहिंसावादी सम्पादक विलियम लायड गैरीसन के पौत से उन्होने एक हज़ार दो सौ रुपयापये हिन्दी भवन, दिल्ली मे गैरीसन लाइब्रेरी खुलवाने के लिए भिजवाये और गैरीसन की चार बहदाकार जिल्दो वाली जीवनी भी उन्होंने मुझे भेजी। वह ग्रन्थ सर्वथा दुर्लभ था और शायद एक हजार रुपये मे भी न मिलता । लुई फिशर एक सप्ताह तक महात्मा गांधी जी के साथ भी रह चुके थे और उन्होने 'ए वीक विद गाधी' नामक पुस्तक भी लिखी थी। उनकी लिखी महात्मा गांधी जी की अग्रेजी जीवनी का हिन्दी अनुवाद सस्ता साहित्य मण्डल ने प्रकाशित किया था। उनकी एक पुस्तक 'स्टालिन और गाधी' भी थी जिसमे दोनो का तुलनात्मक अध्ययन था । लुई फिशर अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति के पत्रकार थे और उनका जीवन बडा सघर्षमय रहा। एक बार तो एक सौ चौदह / महापुरुषों की खोज मे उन्हे भोजन के लाले भी पड गये थे और उन्हें अपना ओवर कोट बेचना पडा था। अपने जीवन के अन्तिम काल मे वह एक विश्वविद्यालय के अन्त राष्ट्रीय राजनीति के अध्यापक भी बन गये थे। मेरे सग्रहालय में उनके बहुत से पत्र सुरक्षित हैं। जापान के गांधी : कागावा कागावा का शुभ नाम मैंने पहले सुन रखा था। वाईशून्यएमशून्यसीशून्यएशून्य के प्रकाशन विभाग से मैंने उनका जीवन-चरित भी मँगा लिया था और उसके आधार पर एक लेख 'जापान के गांधी कागावा' लिखकर ट्रैक्टाकार में प्रकाशित भी करा दिया था। पर मुझे स्वप्न में भी यह आशा नही थी कि मुझे कभी कागावा के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हो सकेगा । इसलिए पत्रो मे यह समाचार पढकर, कि ईसाई मिशनरियो की एक सभा में सम्मिलित होने के लिए कागावा जापान से भारत पधार रहे हैं, मुझे अत्यन्त हर्ष हुआ । मै उन दिनो बम्बई गया हुआ था और कागावा भी मद्रास से बम्बई आने वाले थे । इसलिए मैंने बम्बई मे मिलने के लिए उनसे समय माँगा। उन्होने सहर्ष समय दे दिया। उही दिनो महाराज वीरसिंह जूदेव भी बम्बई पधारे थे। मैंने उनसे अपने कागावा से मिलने की बात कही। उन्होने तुरन्त ही कहा, " इस समय अंग्रेज़ो के सम्बन्ध जापान से अच्छे नही हैं। और स्वभावत अग्रेजो की ख फिया पुलिस कागावा पर निगाह रखेगी। यदि आप कागावा से मिलेंगे, तो सीशून्य आईशून्य डीशून्य की कुदृष्टि आप पर भी पड जायेगी। आप ख द सोच-समझ लीजिये ।" तब मेरे मन मे यह ख्याल आया कि मैं देशी रियासत मे रह रहा हूँ। ओरछा राज्य के एक मंत्री ठाकुर सज्जन सिंह जी ने मुझे सावधान करते हुए कहा था, "चोबे जी, आप कोई ऐसा काम न करें जिससे महाराज पर धर्मे सकट उपस्थित हो । यदि ब्रिटिश सरकार औरछेश पर यह दबाव डालेगी कि चौबे जी को राज्य से निष्कासित कर दिया जाय, तो वह ऐसा हरगिज नहीं करेंगे, चाहे उन्हे गद्दी छोडनी पडे ।" ठाकुर साहब की इस बात को ध्यान में रखकर मैंने यही उचित समझा कि कागावा से न मिलूँ और मैंने उन्हे लिख भी दिया कि मैं दो दिन पहले बम्बई छोड़ रहा हूँ। इस पर कागावा का उत्तर आया कि मैं दो दिन पहले बम्बई पहुँच सकता हूँ । इसका कोई उत्तर न देकर मैं बम्बई से टीकमगढ के लिए रवाना हो गया। इसके आठदस दिन बाद मुझे कलकत्ते जाना पडा । अकस्मात् उन्हीं दिनो कागावा भी कलकत्ते पहुँचे । मैंने पत्रो मे पढा कि उनका भाषण वाईशून्य एमशून्य सीशून्य एशून्य के भवन में होने वाला है। मैं भाषण से कुछ मिनट पहले भवन में पहुँच गया और ज्यो ही कागावा साहब पधारे, मैंने तुरन्त उनसे प्रार्थना कर दो कि मीटिंग समाप्त होने के बाद मुझे पद्रह मिनट समय दे । वह सहमत हो गये। मीटिंग समाप्त होने पर मैं अकेले ही उनसे मिला । मैंने उनसे कहा, "सम्भवत अग्रेजो की सीशून्य आईशून्य डीशून्य आपका पीछा कर रही होगी। इसी कारण मैं बम्बई मे आपसे न मिल सका।" उन्होने कहा कि मुझे इस बात का पता है। मैंने अपने उस लेख की प्रति भी उन्हें भेट कर दी, जो मैंने उनके विषय मे लिखा था। उनके पास अधिक समय था भी नहीं, इसलिए विशेष बातचीत हो नहीं सकी । यह बात ध्यान देने योग्य है कि कागावा ने वर्धा पहुँचकर महात्मा गाधी जी के दर्शन किए थे और बातचीत भी की थी। उस बातचीत की पूरीपूरी रिपोर्ट महादेव भाई रेसाई ने 'यग इडिया' मे छपा दी थी । जापान मे नगरो की गन्दी बस्तियो को सुधारने के लिए कागावा ने अपना सम्पूर्ण जीवन ही अपित कर दिया था। अपने विवाह के बाद वह अपनी पत्नी सहित एक गन्दी बस्ती के छोटे से कमरे मे रहने के लिए चले गये थे । उस कमरे मे कई व्यक्ति पहले से मौजूद थे। कोठरी की लम्बाई छ फुट थी और चौडाई भी इतनी ही थी। उसमे सत्तर वर्ष का एक बूढ़ा, साठ पैसठ वर्ष की एक बुढ़िया, ग्यारह वर्ष का एक अपराधी लडका, एक अनाथ माता और उसके चार बच्चे और एक भिखारिन थे । यही कागावा का परिवार था । किसी नयी बहू के सामने ऐसी विकट समस्या शायद ही कभी उपस्थित हुई हो । कागावा की आमदनी कुल जमा तीन पोण्ड, यानी करीब पैंतालीस रुपयापये थी और इतने मे ही ग्यारह प्राणियों का पेट भरता था। उस गन्दी बस्ती मे चारो ओर अस्वच्छता तथा दुर्गन्ध का साम्राज्य था। पाखाना एक ही था । कपडो को एक छोटी से नदी मे धोना पडता था और उनके सुखाने के लिए कोई जगह न थी। खटमलो की भरमार थी और वह अमर थे। जितने ही मारो, उतने ही बढ़ते थे। कुछ वर्ष पूर्व कागावा का देहान्त हो चुका है, पर शान्ति निकेतन के जापान अध्यापक साईजी माकिनो से मुझे ज्ञात हुआ था कि कागावा की धर्मपत्नी अभी जीवित हैं। कुछ विदेशी महापुरुष / एक सौ पंद्रह
हसनपुर चौकी के निकट गोली मारकर युवक की हत्या कर दी गई। युवक का शव राजोरी गार्डन में एक खाली प्लाट में पडा मिला। सुचंना मिलने पर पुसिल मौके पर पहुंची और को शव कब्जे मे लिया ,युवक की पहचान अनुज पुत्र सुरेन्द्र गांव गाढडा में रूप में हुई। थान सदर बाजार क्षेत्र का मामला सुबह करीब पौने दस बजे पुलिस को सुचंना मिली की तहारपुर रोड स्थित राजोरी गार्डन कालोनी के खाली पडे प्लाट में गोली लगा युवक का शव पड़ा है। सुचंना मिलते ही पुलिस मोके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे ले लिया शव के पास मृतक के पास मोबाइ्रल फोन व तंमचा भी बरामद किया। युवक के फोन पर आई काले के आधार पर युवक की पहचान अनुज पुत्र सुरेंद्र के रूप में हुई। जिसके बाद पुलिस ने युवक का शव जिला अस्पताल भिजवा दिया है। युवक के परिजन भी अस्पताल पहुंच चुके है। एसएसपी दिनेश कुमार पी ने बताया की घटना की जांच कराई जा रही है।
हसनपुर चौकी के निकट गोली मारकर युवक की हत्या कर दी गई। युवक का शव राजोरी गार्डन में एक खाली प्लाट में पडा मिला। सुचंना मिलने पर पुसिल मौके पर पहुंची और को शव कब्जे मे लिया ,युवक की पहचान अनुज पुत्र सुरेन्द्र गांव गाढडा में रूप में हुई। थान सदर बाजार क्षेत्र का मामला सुबह करीब पौने दस बजे पुलिस को सुचंना मिली की तहारपुर रोड स्थित राजोरी गार्डन कालोनी के खाली पडे प्लाट में गोली लगा युवक का शव पड़ा है। सुचंना मिलते ही पुलिस मोके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे ले लिया शव के पास मृतक के पास मोबाइ्रल फोन व तंमचा भी बरामद किया। युवक के फोन पर आई काले के आधार पर युवक की पहचान अनुज पुत्र सुरेंद्र के रूप में हुई। जिसके बाद पुलिस ने युवक का शव जिला अस्पताल भिजवा दिया है। युवक के परिजन भी अस्पताल पहुंच चुके है। एसएसपी दिनेश कुमार पी ने बताया की घटना की जांच कराई जा रही है।
मां-बाप का कत्ल करके घर में ही दफनाने के बाद उदयन दास मॉस्को, वियतनाम, सिंगापुर, अमेरिका के कुछ स्थानों पर घूमने चला गया था. प्रेमिका के चाल चलन पर शक होने के चलते उसने उसका भी कत्ल कर डाला. किसी भी अनजान या बाहरी इंसान पर जल्दी ही विश्वास कर लेना हमेशा घाटे का सौदा साबित होता है. कभी-कभी तो ऐसी गलतियां परिवारों की तबाही का कारण भी बन जाती हैं. यहां मैं एक ऐसी ही गलती से हुई किसी परिवार की तबाही का जिक्र कर रहा हूं. उस घटना का जिक्र, जिसका आइडिया कातिल ने एक अमेरिकी टीवी शो से लिया था. वो टीवी शो था 'द वॉकिंग डेड' (The Walking Dead). सीरियल से लिए खतरनाक आइडिया के बलबूते हत्यारे ने एक के बाद एक, तीन हंसते-खेलते बेकसूरों को बेरहमी से कत्ल कर डाला. और जमाने को हवा तक नहीं लगी. गंभीर तो यह है कि मरने वालों में से कोई भी हत्यारे का दुश्मन नहीं था. अपने ही बेटे के हाथ बेमौत मरने वालों में दो वे वृद्ध माता-पिता थे, जिन्होंने इस मास्टरमाइंड को जन्म दिया था. तीसरी मरने वाली वो 28 साल की एक बेकसूर लड़की थी जिसने, कातिल पर अपने मां-बाप, भाई-बहन जैसा विश्वास किया था. उस साइको-किलर के ऊपर जरूरत से ज्यादा विश्वास करके उसके सहारे, खुद की जिंदगी खुबसूरत बनाने की गफलत में माता-पिता का घर तक छोड़ दिया था. साइको किलर की ही मुंहजुबानी सुनकर पड़ताल कर रही पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश की पुलिस भी कांप गई. हालांकि पुलिस से भी ज्यादा हैरत में अगर कोई और भी था, तो वो था बांकुरा (पश्चिम बंगाल) में रहने वाला शर्मा दंपती. वो शर्मा दंपती जो इस "साइको-किलर" के साथ दो-तीन घंटे की मीटिंग करते रहने के बाद भी जिंदा बच गया था. तीन बेगुनाहों के कातिल ने उस मीटिंग वाले दिन मिसेज शर्मा और उनके पति के भी कत्ल का इंतजाम कर रखा था. किस्मत ने मगर शर्मा दंपती का साथ दिया. लिहाजा उस दिन वे दोनों बेमौत मारे जाने से बच गए. पुलिस रिकार्ड और कोर्ट-कचहरी में दाखिल कानूनी दस्तावेजों में दर्ज तथ्यों के मुताबिक, इन लोमहर्षक तीन-तीन कत्लों की शुरुआत तो अप्रैल 2010 से होती है. अगर बात सिर्फ लड़की के कत्ल की ही की जाए तो उसका ताना-बाना सन् 2015-2016 में ही बुना जाने लगा था. जब फेसबुक के जरिए लड़की की मुलाकात, मां-बाप के कत्ल के आरोपी खतरनाक इरादों वाले उदयन दास से हुई थी. दोस्ती इस कदर परवान चढ़ी कि, कालांतर में (2016-2017) में उदयन दास लड़की के घर भी आने-जाने लगा. अब तक मास्टरमाइंड और अय्याश मिजाज उदयन समझ चुका था कि, उसकी महिला फेसबुक फ्रेंड के घर वाले पूरी तरह से उस पर लट्टू हुए पड़े हैं. लड़की खुद ही अमेरिका में जाकर सेट होने के लिए व्याकुल है. बस इसी कमजोरी का फायदा शातिर दिमाग उदयन दास ने उठाने में देर नहीं की. जाल में पूरी तरह फंस चुके उस परिवार की लड़की को एक दिन आरोपी ने न्यूयॉर्क में नौकरी का जाली ऑफर लेटर लाकर थमा दिया. बेटी को विदेश में नौकरी मिलने की खबर से, बैंक में चीफ मैनेजर पिता और घरेलू महिला मां की तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा. बीएससी (इलैक्ट्रॉनिक्स) और एमएससी पास, बेटी भी घर बैठे-बिठाए न्यूयॉर्क की नौकरी मिलने से खुशी से फूली नहीं समायी. बांकुरा पुलिस के मुताबिक, फरेबी उदयन दास ने लड़की और उसके परिवार को पूरी तरह जाल में फंसाने के लिए खुद के बारे में बताया था कि वो, वाशिंगटन (अमेरिका) में भारत सरकार का एक बड़ा अधिकारी है. बेटी का न्यूयॉर्क से अप्वाइंटमेंट लेटर आने पर माता-पिता ने उसे 24 जून 2016 को न्यूयॉर्क के लिए रवाना कर दिया. दो-तीन दिन बाद बेटी ने माता-पिता को बताया कि वो न्यूयॉर्क पहुंच चुकी है. कहानी में टर्निंग प्वाइंट तब आता है, जब 14 जुलाई 2016 के बाद अचानक बेटी की भारत में माता-पिता और भाई से बात होनी बंद हो गई. बांकुरा में रह रहे माता पिता को बेटी न्यूयॉर्क से मैसेज, वहां के फोटो तो भेजती. मगर मां-बाप की फोन कॉल का कोई जवाब नहीं देती. न ही खुद वो न्यूयॉर्क से माता-पिता को कॉल करती. माता-पिता ने सोचा कि बेटी न्यूयॉर्क में नई-नई नौकरी में व्यस्त होगी. लिहाजा उन्होंने भी कुछ दिन उसे फोन नहीं किया. जब कभी करते तो मैसेज कर देते. जिसका जबाब बेटी मैसेज में ही दे देती. एक दिन माता पिता ने जब बेटी को बात न करने का कारण बताने के लिए बहुत कुरेदा. तो वो बोली मोबाइल का फ्रंट कैमरा खराब हो गया है. लिहाजा ऐसे में बेटी की बात मानकर मन मसोकर मां-बाप चुप्पी साध गए. एक दिन अक्टूबर 2016 में अचानक ही उदयन दास (लड़की का फेसबुक फ्रेंड और जिसने लड़की की नौकरी न्यूयार्क में लगवाने का कथित इंतजाम किया था) लड़की के बांकुरा (पश्चिम बंगाल) स्थित घर पहुंच गया. बेटी के साथी को घर में देखकर माता-पिता खुश हो गए. लड़की की मां रसोई में चाय बनाने जाने लगी तो, उदयन दास (बेटी और अपने मां-बाप का कातिल) ने उन्हें रोक दिया. उदयन बार-बार इस बात पर जोर दे रहा था कि, वो किचन में जाकर खुद अपने हाथ से चाय बनाकर लड़की के मां-बाप को पिलाएगा. लड़की के माता-पिता ने उसकी वो जिद मगर पूरी होने नहीं दी. लड़की की मां ने खुद ही चाय बनाकर पिलाई. हां, लड़की के माता-पिता के मन में एक शंका जरूर पैदा हुई कि, उदयन दास आखिर बार-बार खुद चाय बनाकर उन्हें पिलाने की जिद पर क्यों अड़ा हुआ था? उस घटना के बाद से उदयन का भी मोबाइल फोन बंद जाने लगा. तब शर्मा दंपती (लड़की के माता पिता) का माथा ठनका. उन्होंने पुलिस में बेटी की गुमशुदगी और बाद में उसके अपहरण का मुकदमा दर्ज करा दिया. शक और शिकायत की बिना पर बांकुरा और भोपाल पुलिस ने उदयन दास को गिरफ्तार कर लिया. तो पता चला कि वो साल 2010 में अपने माता-पिता को कत्ल करके घर में ही कब्र खोदकर उन्हें दफना चुका है. जबकि अपनी दोस्त और शर्मा दंपत्ति की बेटी की हत्या करके उसकी लाश आंगन में ही दफ्न कर दी थी. उस जगह पर उसने मजार बना रखी थी. मां-बाप का कत्ल करके घर में ही दफनाने के बाद उदयन दास मॉस्को, वियतनाम, सिंगापुर, अमेरिका के कुछ स्थानों पर घूमने चला गया था. जहां तक बात 28 साल की प्रेमिका को न्यूयॉर्क में नौकरी दिलाने की थी. तो वो उसे न्यूयार्क के नाम पर उसके बांकुरा स्थित घर से सीधा साकेत नगर भोपाल स्थित अपने मकान पर ले गया. जहां वो प्रेमिका के साथ पति-पत्नी की तरह रहने लगा था. प्रेमिका के चाल चलन पर शक होने के चलते उसने उसका कत्ल कर डाला. आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसका इरादा प्रेमिका के माता-पिता का भी कत्ल करने का था. चूंकि उन दोनों ने उसे रसोई में चाय बनाने जाने नहीं दिया, लिहाजा चाय में उन्हें नशे की गोलियां देने के बाद शर्मा दंपती के कत्ल करने की उसकी योजना धरी रह गई. रायपुर वाले मकान में माता-पिता के कत्ल के पीछे उसने उनके पास मौजूद अकूत दौलत को वजह बताया. यह भी पढ़ें- हिंदुस्तान-तालिबान दोस्ती : इतिहास भूलकर तालिबान से दोस्ती करना भारत के लिए कितना सही फैसला?
मां-बाप का कत्ल करके घर में ही दफनाने के बाद उदयन दास मॉस्को, वियतनाम, सिंगापुर, अमेरिका के कुछ स्थानों पर घूमने चला गया था. प्रेमिका के चाल चलन पर शक होने के चलते उसने उसका भी कत्ल कर डाला. किसी भी अनजान या बाहरी इंसान पर जल्दी ही विश्वास कर लेना हमेशा घाटे का सौदा साबित होता है. कभी-कभी तो ऐसी गलतियां परिवारों की तबाही का कारण भी बन जाती हैं. यहां मैं एक ऐसी ही गलती से हुई किसी परिवार की तबाही का जिक्र कर रहा हूं. उस घटना का जिक्र, जिसका आइडिया कातिल ने एक अमेरिकी टीवी शो से लिया था. वो टीवी शो था 'द वॉकिंग डेड' . सीरियल से लिए खतरनाक आइडिया के बलबूते हत्यारे ने एक के बाद एक, तीन हंसते-खेलते बेकसूरों को बेरहमी से कत्ल कर डाला. और जमाने को हवा तक नहीं लगी. गंभीर तो यह है कि मरने वालों में से कोई भी हत्यारे का दुश्मन नहीं था. अपने ही बेटे के हाथ बेमौत मरने वालों में दो वे वृद्ध माता-पिता थे, जिन्होंने इस मास्टरमाइंड को जन्म दिया था. तीसरी मरने वाली वो अट्ठाईस साल की एक बेकसूर लड़की थी जिसने, कातिल पर अपने मां-बाप, भाई-बहन जैसा विश्वास किया था. उस साइको-किलर के ऊपर जरूरत से ज्यादा विश्वास करके उसके सहारे, खुद की जिंदगी खुबसूरत बनाने की गफलत में माता-पिता का घर तक छोड़ दिया था. साइको किलर की ही मुंहजुबानी सुनकर पड़ताल कर रही पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश की पुलिस भी कांप गई. हालांकि पुलिस से भी ज्यादा हैरत में अगर कोई और भी था, तो वो था बांकुरा में रहने वाला शर्मा दंपती. वो शर्मा दंपती जो इस "साइको-किलर" के साथ दो-तीन घंटे की मीटिंग करते रहने के बाद भी जिंदा बच गया था. तीन बेगुनाहों के कातिल ने उस मीटिंग वाले दिन मिसेज शर्मा और उनके पति के भी कत्ल का इंतजाम कर रखा था. किस्मत ने मगर शर्मा दंपती का साथ दिया. लिहाजा उस दिन वे दोनों बेमौत मारे जाने से बच गए. पुलिस रिकार्ड और कोर्ट-कचहरी में दाखिल कानूनी दस्तावेजों में दर्ज तथ्यों के मुताबिक, इन लोमहर्षक तीन-तीन कत्लों की शुरुआत तो अप्रैल दो हज़ार दस से होती है. अगर बात सिर्फ लड़की के कत्ल की ही की जाए तो उसका ताना-बाना सन् दो हज़ार पंद्रह-दो हज़ार सोलह में ही बुना जाने लगा था. जब फेसबुक के जरिए लड़की की मुलाकात, मां-बाप के कत्ल के आरोपी खतरनाक इरादों वाले उदयन दास से हुई थी. दोस्ती इस कदर परवान चढ़ी कि, कालांतर में में उदयन दास लड़की के घर भी आने-जाने लगा. अब तक मास्टरमाइंड और अय्याश मिजाज उदयन समझ चुका था कि, उसकी महिला फेसबुक फ्रेंड के घर वाले पूरी तरह से उस पर लट्टू हुए पड़े हैं. लड़की खुद ही अमेरिका में जाकर सेट होने के लिए व्याकुल है. बस इसी कमजोरी का फायदा शातिर दिमाग उदयन दास ने उठाने में देर नहीं की. जाल में पूरी तरह फंस चुके उस परिवार की लड़की को एक दिन आरोपी ने न्यूयॉर्क में नौकरी का जाली ऑफर लेटर लाकर थमा दिया. बेटी को विदेश में नौकरी मिलने की खबर से, बैंक में चीफ मैनेजर पिता और घरेलू महिला मां की तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा. बीएससी और एमएससी पास, बेटी भी घर बैठे-बिठाए न्यूयॉर्क की नौकरी मिलने से खुशी से फूली नहीं समायी. बांकुरा पुलिस के मुताबिक, फरेबी उदयन दास ने लड़की और उसके परिवार को पूरी तरह जाल में फंसाने के लिए खुद के बारे में बताया था कि वो, वाशिंगटन में भारत सरकार का एक बड़ा अधिकारी है. बेटी का न्यूयॉर्क से अप्वाइंटमेंट लेटर आने पर माता-पिता ने उसे चौबीस जून दो हज़ार सोलह को न्यूयॉर्क के लिए रवाना कर दिया. दो-तीन दिन बाद बेटी ने माता-पिता को बताया कि वो न्यूयॉर्क पहुंच चुकी है. कहानी में टर्निंग प्वाइंट तब आता है, जब चौदह जुलाई दो हज़ार सोलह के बाद अचानक बेटी की भारत में माता-पिता और भाई से बात होनी बंद हो गई. बांकुरा में रह रहे माता पिता को बेटी न्यूयॉर्क से मैसेज, वहां के फोटो तो भेजती. मगर मां-बाप की फोन कॉल का कोई जवाब नहीं देती. न ही खुद वो न्यूयॉर्क से माता-पिता को कॉल करती. माता-पिता ने सोचा कि बेटी न्यूयॉर्क में नई-नई नौकरी में व्यस्त होगी. लिहाजा उन्होंने भी कुछ दिन उसे फोन नहीं किया. जब कभी करते तो मैसेज कर देते. जिसका जबाब बेटी मैसेज में ही दे देती. एक दिन माता पिता ने जब बेटी को बात न करने का कारण बताने के लिए बहुत कुरेदा. तो वो बोली मोबाइल का फ्रंट कैमरा खराब हो गया है. लिहाजा ऐसे में बेटी की बात मानकर मन मसोकर मां-बाप चुप्पी साध गए. एक दिन अक्टूबर दो हज़ार सोलह में अचानक ही उदयन दास लड़की के बांकुरा स्थित घर पहुंच गया. बेटी के साथी को घर में देखकर माता-पिता खुश हो गए. लड़की की मां रसोई में चाय बनाने जाने लगी तो, उदयन दास ने उन्हें रोक दिया. उदयन बार-बार इस बात पर जोर दे रहा था कि, वो किचन में जाकर खुद अपने हाथ से चाय बनाकर लड़की के मां-बाप को पिलाएगा. लड़की के माता-पिता ने उसकी वो जिद मगर पूरी होने नहीं दी. लड़की की मां ने खुद ही चाय बनाकर पिलाई. हां, लड़की के माता-पिता के मन में एक शंका जरूर पैदा हुई कि, उदयन दास आखिर बार-बार खुद चाय बनाकर उन्हें पिलाने की जिद पर क्यों अड़ा हुआ था? उस घटना के बाद से उदयन का भी मोबाइल फोन बंद जाने लगा. तब शर्मा दंपती का माथा ठनका. उन्होंने पुलिस में बेटी की गुमशुदगी और बाद में उसके अपहरण का मुकदमा दर्ज करा दिया. शक और शिकायत की बिना पर बांकुरा और भोपाल पुलिस ने उदयन दास को गिरफ्तार कर लिया. तो पता चला कि वो साल दो हज़ार दस में अपने माता-पिता को कत्ल करके घर में ही कब्र खोदकर उन्हें दफना चुका है. जबकि अपनी दोस्त और शर्मा दंपत्ति की बेटी की हत्या करके उसकी लाश आंगन में ही दफ्न कर दी थी. उस जगह पर उसने मजार बना रखी थी. मां-बाप का कत्ल करके घर में ही दफनाने के बाद उदयन दास मॉस्को, वियतनाम, सिंगापुर, अमेरिका के कुछ स्थानों पर घूमने चला गया था. जहां तक बात अट्ठाईस साल की प्रेमिका को न्यूयॉर्क में नौकरी दिलाने की थी. तो वो उसे न्यूयार्क के नाम पर उसके बांकुरा स्थित घर से सीधा साकेत नगर भोपाल स्थित अपने मकान पर ले गया. जहां वो प्रेमिका के साथ पति-पत्नी की तरह रहने लगा था. प्रेमिका के चाल चलन पर शक होने के चलते उसने उसका कत्ल कर डाला. आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसका इरादा प्रेमिका के माता-पिता का भी कत्ल करने का था. चूंकि उन दोनों ने उसे रसोई में चाय बनाने जाने नहीं दिया, लिहाजा चाय में उन्हें नशे की गोलियां देने के बाद शर्मा दंपती के कत्ल करने की उसकी योजना धरी रह गई. रायपुर वाले मकान में माता-पिता के कत्ल के पीछे उसने उनके पास मौजूद अकूत दौलत को वजह बताया. यह भी पढ़ें- हिंदुस्तान-तालिबान दोस्ती : इतिहास भूलकर तालिबान से दोस्ती करना भारत के लिए कितना सही फैसला?
नई दिल्ली। कांग्रेस मुक्त पूर्वोत्तर का नारा बुलंद करने वाले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष अमित शाह ने मंगलवार को विश्वास जताते हुए कहा कि पार्टी की अगुवाई में पूर्वोत्तर जनतांत्रिक गठबंधन (एनईडीए) पूर्वोत्तर के आठ में से बचे तीन राज्यों में भी अपनी सरकार बनाएगा। शाह ने दूसरे एनईडीए सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि घुसपैठ, वोट-बैंक राजनीति और हत्यारे समूहों का राजनीतिक प्रयोग किए जाने से पूर्वोत्तर का विकास बाधित हुआ है। इससे पहले असम के वित्त मंत्री ने कहा कि एनईडीए ऐसे पार्टियों का समूह है जो पूर्वोत्तर भारत के विकास और कांग्रेस मुक्त भारत बनाने के लिए अग्रसर है। सम्मेलन में असम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और नागालैंड के मुख्यमंत्री शामिल हुए। अन्य तीन राज्यों में से त्रिपुरा में मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी की सरकार है वहीं मेघालय एवं मिजोरम में कांग्रेस की सरकार है। शाह ने कहा कि गत 65 वर्षो में क्षेत्र के विकास के लिए कुछ नहीं किया गया। शाह ने कहा कि उनकी पार्टी ने क्षेत्र के विकास के लिए बीते तीन साल में काफी कदम उठाए हैं। उन्होंने क्षेत्र के लोगों के बीच सांस्कृतिक एकता बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एनईडीए केवल एक राजनीतिक मंच नहीं है बल्कि यह पूर्वोत्तर के लोगों को पूरे देश से सांस्कृतिक रूप में जोड़ने का एक पवित्र प्रयास है। यहां 270 से ज्यादा जाति और संस्कृति है और 180 से ज्यादा भाषाएं बोली जाती हैं। संस्कृति में इतनी विविधता को एकसूत्र में पिरोये रखना राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) और भाजपा का मुख्य उद्देश्य है। क्षेत्र की सभी सभ्यताओं और संस्कृति को एक साथ लाकर एनईडीए एक सांस्कृतिक मंच बनेगा और साथ ही पूर्वोत्तर के विकास का भी मंच बनेगा।
नई दिल्ली। कांग्रेस मुक्त पूर्वोत्तर का नारा बुलंद करने वाले भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने मंगलवार को विश्वास जताते हुए कहा कि पार्टी की अगुवाई में पूर्वोत्तर जनतांत्रिक गठबंधन पूर्वोत्तर के आठ में से बचे तीन राज्यों में भी अपनी सरकार बनाएगा। शाह ने दूसरे एनईडीए सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि घुसपैठ, वोट-बैंक राजनीति और हत्यारे समूहों का राजनीतिक प्रयोग किए जाने से पूर्वोत्तर का विकास बाधित हुआ है। इससे पहले असम के वित्त मंत्री ने कहा कि एनईडीए ऐसे पार्टियों का समूह है जो पूर्वोत्तर भारत के विकास और कांग्रेस मुक्त भारत बनाने के लिए अग्रसर है। सम्मेलन में असम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और नागालैंड के मुख्यमंत्री शामिल हुए। अन्य तीन राज्यों में से त्रिपुरा में मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी की सरकार है वहीं मेघालय एवं मिजोरम में कांग्रेस की सरकार है। शाह ने कहा कि गत पैंसठ वर्षो में क्षेत्र के विकास के लिए कुछ नहीं किया गया। शाह ने कहा कि उनकी पार्टी ने क्षेत्र के विकास के लिए बीते तीन साल में काफी कदम उठाए हैं। उन्होंने क्षेत्र के लोगों के बीच सांस्कृतिक एकता बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एनईडीए केवल एक राजनीतिक मंच नहीं है बल्कि यह पूर्वोत्तर के लोगों को पूरे देश से सांस्कृतिक रूप में जोड़ने का एक पवित्र प्रयास है। यहां दो सौ सत्तर से ज्यादा जाति और संस्कृति है और एक सौ अस्सी से ज्यादा भाषाएं बोली जाती हैं। संस्कृति में इतनी विविधता को एकसूत्र में पिरोये रखना राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन और भाजपा का मुख्य उद्देश्य है। क्षेत्र की सभी सभ्यताओं और संस्कृति को एक साथ लाकर एनईडीए एक सांस्कृतिक मंच बनेगा और साथ ही पूर्वोत्तर के विकास का भी मंच बनेगा।
Ukraine on Maa Kali: रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग के बीच यूक्रेन ने एक ऐसी घटिया हरकत कर दी है, जिससे भारतीयों में नाराजगी छा गई है। यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने एक फोटो शेयर किया है, जिसे देखने के बाद हिंदू समुदाय नाराज है। यूक्रेन ने हिंदुओं में पूजनीय मां काली का एक ऐसा फोटो शेयर किया है, जिसे लेकर आपत्ति है। यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय के इस कृत्य कोलेकर हिंदू समुदाय के लोग कड़ी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। हालांकि बाद में विवाद बढ़ता देख यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने मां काली से जुड़ा शेयर किया ट्वीट हटा दिया। दरअसल, यूक्रेनी रक्षा मंत्रालय ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से मां काली की एक फोटो शेयर की, जो बेहद अपमानजनक है। इस फोटो को लेकर भारतीय यूजर्स ने नाराजगी जाहिर करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर से एक्शन लेने की मांग की है। यूजर्स इसे यूक्रेन की घटिया मानसिकता बता रहे हैं। यूक्रेन के डिफेंस मिनस्ट्री के आधिकारिक ट्विटर हैंडल @DefenceU की तरफ से 30 अप्रैल को मां काली की फोटो शेयर की गई। इसमें देखा जा सकता है कि मां काली को हॉलीवुड की एक्ट्रेस मर्लिन मुनरो की तरह दिखाया गया है। तस्वीर में काली माता के चेहरे पर ब्लास्ट से हुआ धुआं नजर आ रहा है। तस्वीर में जीभ बाहर दिख रही है। साथ ही माता काली के गले में खोपड़ियों की माला है। इस फोटो को देखने के बाद भारतीय हिंदू कह रहे है कि यूक्रेन भारतीयों को इसलिए टारगेट कर रहा है क्योंकि भारत की तरफ से उन्हें जंग में मदद नहीं मिली है। यूक्रेन ने फोटो कैप्शन में 'वर्क ऑफ आर्ट' लिखा हुआ है। यूक्रेन की इस हरकत के बाद भारतीय यूजर्स एलन मस्क और भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। बता दें कि यूक्रेन और रूस के बीच 24 फरवरी 2022 से जंग जारी है। इस जंग में यूक्रेन बुरी तरह शिकस्त खा चुका है। भारत ने जंग रोकने के लिए भी रूस से गुहार की है। लेकिन इसके बावजूद यूक्रेन इस तरह की हरकतें कर रहा है। ऐसी स्थिति में भारत के साथ यूक्रेन को यह हरकत महंगी पड़ सकती है। Also Read:
Ukraine on Maa Kali: रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग के बीच यूक्रेन ने एक ऐसी घटिया हरकत कर दी है, जिससे भारतीयों में नाराजगी छा गई है। यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने एक फोटो शेयर किया है, जिसे देखने के बाद हिंदू समुदाय नाराज है। यूक्रेन ने हिंदुओं में पूजनीय मां काली का एक ऐसा फोटो शेयर किया है, जिसे लेकर आपत्ति है। यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय के इस कृत्य कोलेकर हिंदू समुदाय के लोग कड़ी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। हालांकि बाद में विवाद बढ़ता देख यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने मां काली से जुड़ा शेयर किया ट्वीट हटा दिया। दरअसल, यूक्रेनी रक्षा मंत्रालय ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से मां काली की एक फोटो शेयर की, जो बेहद अपमानजनक है। इस फोटो को लेकर भारतीय यूजर्स ने नाराजगी जाहिर करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर से एक्शन लेने की मांग की है। यूजर्स इसे यूक्रेन की घटिया मानसिकता बता रहे हैं। यूक्रेन के डिफेंस मिनस्ट्री के आधिकारिक ट्विटर हैंडल @DefenceU की तरफ से तीस अप्रैल को मां काली की फोटो शेयर की गई। इसमें देखा जा सकता है कि मां काली को हॉलीवुड की एक्ट्रेस मर्लिन मुनरो की तरह दिखाया गया है। तस्वीर में काली माता के चेहरे पर ब्लास्ट से हुआ धुआं नजर आ रहा है। तस्वीर में जीभ बाहर दिख रही है। साथ ही माता काली के गले में खोपड़ियों की माला है। इस फोटो को देखने के बाद भारतीय हिंदू कह रहे है कि यूक्रेन भारतीयों को इसलिए टारगेट कर रहा है क्योंकि भारत की तरफ से उन्हें जंग में मदद नहीं मिली है। यूक्रेन ने फोटो कैप्शन में 'वर्क ऑफ आर्ट' लिखा हुआ है। यूक्रेन की इस हरकत के बाद भारतीय यूजर्स एलन मस्क और भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। बता दें कि यूक्रेन और रूस के बीच चौबीस फरवरी दो हज़ार बाईस से जंग जारी है। इस जंग में यूक्रेन बुरी तरह शिकस्त खा चुका है। भारत ने जंग रोकने के लिए भी रूस से गुहार की है। लेकिन इसके बावजूद यूक्रेन इस तरह की हरकतें कर रहा है। ऐसी स्थिति में भारत के साथ यूक्रेन को यह हरकत महंगी पड़ सकती है। Also Read:
इंदौरः मध्य प्रदेश के इंदौर में एक वीडियो इस समय चर्चाओं का हिस्सा बना हुआ है। जी दरअसल यहाँ एक चूड़ी बेचने वाले 25 साल के युवक की पिटाई की गई और उसी की पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस घटना को बीते रविवार 22 अगस्त की बताया जा रहा है। यह घटना गोविंद नगर के बाणगंगा इलाके में हुई। वहीं इस घटना से गुस्साए हजारों लोगों की भीड़ कोतवाली थाने के बाहर जुट गई और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, जिसके बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। अब इस पूरे मामले को लेकर कुमार विश्वास ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। जी दरअसल उन्होंने एक ट्वीट किया है। इस ट्वीट में वह वीडियो भी लगा है और लिखा गया है, 'एक चूड़ी बेचनेवाले को घेरकर लतियाते ये दर्जन भर लोग अगर इतने ही वीर हैं तो जरा सीमा पर जाकर दुश्मन के आगे ज़ोर दिखाएं ? आशा है शिवराज सिंह चौहान इस खुली अराजकता पर आप खामोश नहीं रहेंगे। कानून संविधान के खिलाफ जाने वाले किसी धर्म/मजहब के हों देशद्रोही हैं। कानून सब पर लागू हो। ' इस वीडियो में दिखाई दे रहे युवक की पहचान 25 वर्षीय तस्लीम के रूप में हुई है, जिसे बाणगंगा इलाके में पुरुषों की भीड़ ने बेहरमी से पीटा था। बताया जा रहा है अज्ञात लोगों ने पीड़ित को धार्मिक गालियां भी दी। वैसे अभी कुछ दिन पहले बॉम्बे बाजार में भी कुछ ऐसा ही हुआ था। यहाँ वाल्मिकी समाज से जुड़े सब्जी बेचने वाले और उसके दो नाबालिग रिश्तेदारों को पीटा गया था। फिलहाल वायरल हो रहे वीडियो के बारे में बात करें तो इस मामले में पीड़ित का कहना है, वह बाणगंगा इलाके में चूड़ियां बेच रहा था, तभी आरोपियों ने उस पर हमला कर दिया। पीड़ित ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में कहा कि 'आरोपियों ने पहले मेरा नाम पूछा और मेरा नाम डायल करने के बाद मुझे पीटना शुरू कर दिया, उन्होंने मेरे 10,000 रुपये भी लूट लिए और चूड़ियां और अन्य सामग्री जो मैं ले जा रहा था, उन्हें भी तोड़ दिया। ' वहीं इस मामले में ग्रह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का कहना है चूड़ी बेचने वाले ने अपना हिन्दू नाम बताया था। PM मोदी से मुलाकात के बाद बोले नीतीश कुमार- 'जातिगत जनगणना नहीं होगी। । । ' इंदौरः मेघदूत में बुलाकर बुजुर्गों को मिलने बुलाती थी लड़की और फिर। । ।
इंदौरः मध्य प्रदेश के इंदौर में एक वीडियो इस समय चर्चाओं का हिस्सा बना हुआ है। जी दरअसल यहाँ एक चूड़ी बेचने वाले पच्चीस साल के युवक की पिटाई की गई और उसी की पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस घटना को बीते रविवार बाईस अगस्त की बताया जा रहा है। यह घटना गोविंद नगर के बाणगंगा इलाके में हुई। वहीं इस घटना से गुस्साए हजारों लोगों की भीड़ कोतवाली थाने के बाहर जुट गई और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, जिसके बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। अब इस पूरे मामले को लेकर कुमार विश्वास ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। जी दरअसल उन्होंने एक ट्वीट किया है। इस ट्वीट में वह वीडियो भी लगा है और लिखा गया है, 'एक चूड़ी बेचनेवाले को घेरकर लतियाते ये दर्जन भर लोग अगर इतने ही वीर हैं तो जरा सीमा पर जाकर दुश्मन के आगे ज़ोर दिखाएं ? आशा है शिवराज सिंह चौहान इस खुली अराजकता पर आप खामोश नहीं रहेंगे। कानून संविधान के खिलाफ जाने वाले किसी धर्म/मजहब के हों देशद्रोही हैं। कानून सब पर लागू हो। ' इस वीडियो में दिखाई दे रहे युवक की पहचान पच्चीस वर्षीय तस्लीम के रूप में हुई है, जिसे बाणगंगा इलाके में पुरुषों की भीड़ ने बेहरमी से पीटा था। बताया जा रहा है अज्ञात लोगों ने पीड़ित को धार्मिक गालियां भी दी। वैसे अभी कुछ दिन पहले बॉम्बे बाजार में भी कुछ ऐसा ही हुआ था। यहाँ वाल्मिकी समाज से जुड़े सब्जी बेचने वाले और उसके दो नाबालिग रिश्तेदारों को पीटा गया था। फिलहाल वायरल हो रहे वीडियो के बारे में बात करें तो इस मामले में पीड़ित का कहना है, वह बाणगंगा इलाके में चूड़ियां बेच रहा था, तभी आरोपियों ने उस पर हमला कर दिया। पीड़ित ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में कहा कि 'आरोपियों ने पहले मेरा नाम पूछा और मेरा नाम डायल करने के बाद मुझे पीटना शुरू कर दिया, उन्होंने मेरे दस,शून्य रुपयापये भी लूट लिए और चूड़ियां और अन्य सामग्री जो मैं ले जा रहा था, उन्हें भी तोड़ दिया। ' वहीं इस मामले में ग्रह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का कहना है चूड़ी बेचने वाले ने अपना हिन्दू नाम बताया था। PM मोदी से मुलाकात के बाद बोले नीतीश कुमार- 'जातिगत जनगणना नहीं होगी। । । ' इंदौरः मेघदूत में बुलाकर बुजुर्गों को मिलने बुलाती थी लड़की और फिर। । ।
अनुसार शून्य अवकागवाले फ्लास्कमे या अति अल्प निष्क्रिय वायुसे भरी ट्यूबोंमें रखा जाता है । सामान्य इलेक्ट्रिक सेलमे आल्कली वातुकी पट्टी केथोडका काम करती है । उसमे से अलग होनेवाले इलेक्ट्रोन एनोडकी ओर वहकर एनीड पर जमा होते है । (आकृतिम गोलेके वीचमें एनोड है) यह होते हुए ही विद्युतप्रवाह शुरू होता है और प्रकाशके गिरते रहने तक चालू रहता है । काँचके गोले पर गिरनेवाला प्रकाश एक-सा रहता है तब तक उत्पन्न होनेवाले प्रवाहका जोर एक-सा रहता है : प्रकाशमे फर्क उत्पन्न होते ही प्रवाह जोरमे फर्क पड़ता है । फोटोइलेक्ट्रिक-सेल अत्यंत सवेदनक्षम उपकरण है और रूपविकारी तारोंके प्रकाशकी कमी वेशीको नापनेके लिये वह बहुत उपयोगी है। रूपविकारी तारोके सिवाय वह दूसरे तारोके तेज नापनेका भी काम देती है। वजह यह है कि फोटोइलेक्ट्रिक सेल पर गिरनेवाले प्रकाश के अनुपातमे वह इलेक्ट्रोन छोड़ती है और इस कारण पैदा होनेवाले सूक्ष्म विद्युत् प्रवाहको अत्यंत वारीकीसे नापा जा सकता है । तारोके प्रकाशके हिसाब से उनके वर्ग सरलतासे मालूम किये जाते हैं । कुछेक संकुल इलेक्ट्रिक सेलोंमे एक धातुपट्टी के एवजमे दो धातुपट्टियाँ काममे लायी जाती है। प्रकाशके आपतनसे पहली पट्टीमेसे छूटनेवाले इलेक्ट्रोन दूसरी पट्टी के साथ टकराकर उसमेसे इलेक्ट्रोनोंको उत्पन्न करते हैं । इन द्वितीयक या गौण इलेक्ट्रोनोंकी उपज दूसरी पट्टीसे टकरानेवाले कणोके वेगके प्रमाणमे होती है। पट्टियोंके बीचके विद्युत्-पोटेन्शियलको बढ़ाकर इस वेगको भी बढ़ाया जा सकता है। कुछ धातुओके द्वारा दो गाँण इलेक्ट्रोन पैदा किये जाते है तो कुछके द्वारा दस तक गौण इलेक्ट्रोन उत्पन्न किये जाते है । इस अधिकताका लाभ खगोलीय फोटोमीट्री में काम आनेवाली फोटोमल्टिप्लायर ट्यूबोंके द्वारा उठाया गया है। ये ट्यूव अत्यंत सवेदनक्षम होती है । प्रकाश - संवेदनक्षम उपकरणोंकी कार्यदक्षता उनकी प्रमाणक्षमतासे निश्चित होती है। सामान्य फोटोइलेक्ट्रिक सेलमे प्रकाशके १० कण प्रवेश करते है तब उनमें से सिर्फ एक कण ही धातु-पट्टीमेसे इलेक्ट्रोन अलग करता है । फोटोइलेक्ट्रिक सेलकी प्रमाणक्षमता है । यह आँक छोटा जरूर है मगर फोटोग्राफीकी तुलनामें वह १०० गुना ज्यादा है ! फोटोइलेक्ट्रिक-सेलसे ज्यादा प्रमाणक्षमता दिखानेवाला उपकरण फोटोकन्डक्टिववेधशाला और यंत्र - २ : २४९
अनुसार शून्य अवकागवाले फ्लास्कमे या अति अल्प निष्क्रिय वायुसे भरी ट्यूबोंमें रखा जाता है । सामान्य इलेक्ट्रिक सेलमे आल्कली वातुकी पट्टी केथोडका काम करती है । उसमे से अलग होनेवाले इलेक्ट्रोन एनोडकी ओर वहकर एनीड पर जमा होते है । यह होते हुए ही विद्युतप्रवाह शुरू होता है और प्रकाशके गिरते रहने तक चालू रहता है । काँचके गोले पर गिरनेवाला प्रकाश एक-सा रहता है तब तक उत्पन्न होनेवाले प्रवाहका जोर एक-सा रहता है : प्रकाशमे फर्क उत्पन्न होते ही प्रवाह जोरमे फर्क पड़ता है । फोटोइलेक्ट्रिक-सेल अत्यंत सवेदनक्षम उपकरण है और रूपविकारी तारोंके प्रकाशकी कमी वेशीको नापनेके लिये वह बहुत उपयोगी है। रूपविकारी तारोके सिवाय वह दूसरे तारोके तेज नापनेका भी काम देती है। वजह यह है कि फोटोइलेक्ट्रिक सेल पर गिरनेवाले प्रकाश के अनुपातमे वह इलेक्ट्रोन छोड़ती है और इस कारण पैदा होनेवाले सूक्ष्म विद्युत् प्रवाहको अत्यंत वारीकीसे नापा जा सकता है । तारोके प्रकाशके हिसाब से उनके वर्ग सरलतासे मालूम किये जाते हैं । कुछेक संकुल इलेक्ट्रिक सेलोंमे एक धातुपट्टी के एवजमे दो धातुपट्टियाँ काममे लायी जाती है। प्रकाशके आपतनसे पहली पट्टीमेसे छूटनेवाले इलेक्ट्रोन दूसरी पट्टी के साथ टकराकर उसमेसे इलेक्ट्रोनोंको उत्पन्न करते हैं । इन द्वितीयक या गौण इलेक्ट्रोनोंकी उपज दूसरी पट्टीसे टकरानेवाले कणोके वेगके प्रमाणमे होती है। पट्टियोंके बीचके विद्युत्-पोटेन्शियलको बढ़ाकर इस वेगको भी बढ़ाया जा सकता है। कुछ धातुओके द्वारा दो गाँण इलेक्ट्रोन पैदा किये जाते है तो कुछके द्वारा दस तक गौण इलेक्ट्रोन उत्पन्न किये जाते है । इस अधिकताका लाभ खगोलीय फोटोमीट्री में काम आनेवाली फोटोमल्टिप्लायर ट्यूबोंके द्वारा उठाया गया है। ये ट्यूव अत्यंत सवेदनक्षम होती है । प्रकाश - संवेदनक्षम उपकरणोंकी कार्यदक्षता उनकी प्रमाणक्षमतासे निश्चित होती है। सामान्य फोटोइलेक्ट्रिक सेलमे प्रकाशके दस कण प्रवेश करते है तब उनमें से सिर्फ एक कण ही धातु-पट्टीमेसे इलेक्ट्रोन अलग करता है । फोटोइलेक्ट्रिक सेलकी प्रमाणक्षमता है । यह आँक छोटा जरूर है मगर फोटोग्राफीकी तुलनामें वह एक सौ गुना ज्यादा है ! फोटोइलेक्ट्रिक-सेलसे ज्यादा प्रमाणक्षमता दिखानेवाला उपकरण फोटोकन्डक्टिववेधशाला और यंत्र - दो : दो सौ उनचास
कानपुर (ब्यूरो) निदेशक ने बताया कि इंडोनेशिया का इंजीनियङ्क्षरग संस्थान अपने यहां चीनी व संबद्ध उद्योगों के विकास व जनशक्ति को बेहतर करने के लिए कार्य कर रहा है, लेकिन उम्मीद के अनुसार परिणाम नहीं आ रहे हैं। इंडोनेशिया के चीनी उद्योग को बढ़ाने और जनशक्ति के विकास के लिए यह एमओयू हुआ है। इस दौरान दोनों देशों के विदेश मंत्री भी मौजूद रहे। समझौते के तहत राष्ट्रीय शर्करा संस्थान की ओर से इंडोनेशिया के संस्थान के लिए टीचर्स डेवलपमेंट प्रोग्राम व टेक्निकल ट्रेनिंग प्रोग्राम किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि सुविधा व आवश्यकता के अनुसार ऐसे कार्यक्रम भौतिक रूप से या वर्चुअल मोड (आनलाइन) आयोजित होंगे। इंडोनेशिया के स्टूडेंट्स को भी राष्ट्रीय शर्करा संस्थान में अध्ययन करने का मौका मिलेगा। इंडोनेशिया के चीनी उद्योग के विकास के साथ ही दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत होंगे।
कानपुर निदेशक ने बताया कि इंडोनेशिया का इंजीनियङ्क्षरग संस्थान अपने यहां चीनी व संबद्ध उद्योगों के विकास व जनशक्ति को बेहतर करने के लिए कार्य कर रहा है, लेकिन उम्मीद के अनुसार परिणाम नहीं आ रहे हैं। इंडोनेशिया के चीनी उद्योग को बढ़ाने और जनशक्ति के विकास के लिए यह एमओयू हुआ है। इस दौरान दोनों देशों के विदेश मंत्री भी मौजूद रहे। समझौते के तहत राष्ट्रीय शर्करा संस्थान की ओर से इंडोनेशिया के संस्थान के लिए टीचर्स डेवलपमेंट प्रोग्राम व टेक्निकल ट्रेनिंग प्रोग्राम किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि सुविधा व आवश्यकता के अनुसार ऐसे कार्यक्रम भौतिक रूप से या वर्चुअल मोड आयोजित होंगे। इंडोनेशिया के स्टूडेंट्स को भी राष्ट्रीय शर्करा संस्थान में अध्ययन करने का मौका मिलेगा। इंडोनेशिया के चीनी उद्योग के विकास के साथ ही दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत होंगे।
एयरपोर्ट पर उज्बेकिस्तान की दो महिलाओं के यौन उत्पीड़न व छेड़छाड़ के दोषी पूर्व कस्टम अधिकारी के खिलाफ केंद्र सरकार ने कड़ी कार्रवाई की है। सरकार ने पूर्व सीमा शुल्क अधीक्षक डीके हुडा को अनिवार्य सेवानिवृत्त कर दिया। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
एयरपोर्ट पर उज्बेकिस्तान की दो महिलाओं के यौन उत्पीड़न व छेड़छाड़ के दोषी पूर्व कस्टम अधिकारी के खिलाफ केंद्र सरकार ने कड़ी कार्रवाई की है। सरकार ने पूर्व सीमा शुल्क अधीक्षक डीके हुडा को अनिवार्य सेवानिवृत्त कर दिया। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
आधिकारिक सूचना के मुताबिक मालदीव में चुनाव आयोग के चार सदस्यों पर देश छोड़ने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। इससे पहले शीर्ष अदालत ने अब्दुल्ला यामीन की चुनाव में धांधली वाली याचिका को ख़ारिज कर दिया था। जिसके कारण यामीन सरकार चुनाव आयोग पर दबाव बना रही है। मालदीव में राजनीतिक अस्थिरता की शुरुआत फ़रवरी माह से हुई थी जब राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने देश में आपातकाल घोषित कर दिया था। आलोचकों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के जजों और विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया गया। हालांकि मालदीव के राष्ट्रपति चुनाव में राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन सरकार की हार के बाद देश से निर्वासित नेताओं की वापसी की उम्मीद बढ़ गयी है। अब्दुल्ला यामीन की चुनाव में हार के बाद विपक्षी नेता राष्ट्रपति से 17 नवंबर तक सत्ता का आसानी से हस्तांतरण की कोशिश कर रहे हैं। मालदीव अधिकारियों ने बताया कि चुनाव आयोग के चार सदस्य भाग गए और तीन श्रीलंका में निर्वासित है अब चुनाव आयोग में मात्र एक सदस्य बचा है। भागे हुए एक चुनाव अधिकारी ने बताया कि वे जान से मारने की धमकी की वजह से देश छोड़ना प़ड़ा । अब्दुल्ला यामीन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि चुनाव अधिकारी मतदान में हुई धांधली की जारी वीडियो के कारण देश से भागे हैं। सत्ता शासित प्रोग्रेसिव पार्टी ऑफ़ मालदीव के प्रवक्ता ने बताया कि चुनाव में धांधली की वीडियो लीक हुई जिससे जनता में आक्रोश था इस डर के कारण चुनाव अधिकारियों ने देश छोड़ा है। अब्दुल्ला यामीन की सरकार पर अधिकारियों को रिश्वत देकर चुनाव परिणाम को बदलने के लिए गलत बयान देने को कहा था। अब्दुल्ला यामीन की सरकार ने आरोपों को नकारते हुए कहा कि यह अदालत के फैसले से ध्यान भटकाने की साजिश है। मालदीव की मीडिया के मुताबिक अब्दुल्ला यामीन को विपक्षी गठबंधन के उमीदवार इब्राहिम सोलह ने 16.8 फीसदी मतों से मात दी थी। चुनाव आयोग ने चुनाव को निष्पक्ष और स्वतंत्र बताया था। हालांकि अब्दुल्ला यामीन के वकील ने अदालत में याचिका दायर कर कहा कि उनके समर्थकों ने चुनाव में हेराफेरी की शिकायते की हैं। क्षेत्रीय प्रभाविक्ता को बढ़ाने के लिहाज़ से मालदीव भारत और चीन दोनों के लिए महत्वपूर्ण देश है। अब्दुल्ला यामीन की सरकार चीन की बेल्ट एंड रोड परियोजना में सहयोगी भी है।
आधिकारिक सूचना के मुताबिक मालदीव में चुनाव आयोग के चार सदस्यों पर देश छोड़ने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। इससे पहले शीर्ष अदालत ने अब्दुल्ला यामीन की चुनाव में धांधली वाली याचिका को ख़ारिज कर दिया था। जिसके कारण यामीन सरकार चुनाव आयोग पर दबाव बना रही है। मालदीव में राजनीतिक अस्थिरता की शुरुआत फ़रवरी माह से हुई थी जब राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने देश में आपातकाल घोषित कर दिया था। आलोचकों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के जजों और विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया गया। हालांकि मालदीव के राष्ट्रपति चुनाव में राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन सरकार की हार के बाद देश से निर्वासित नेताओं की वापसी की उम्मीद बढ़ गयी है। अब्दुल्ला यामीन की चुनाव में हार के बाद विपक्षी नेता राष्ट्रपति से सत्रह नवंबर तक सत्ता का आसानी से हस्तांतरण की कोशिश कर रहे हैं। मालदीव अधिकारियों ने बताया कि चुनाव आयोग के चार सदस्य भाग गए और तीन श्रीलंका में निर्वासित है अब चुनाव आयोग में मात्र एक सदस्य बचा है। भागे हुए एक चुनाव अधिकारी ने बताया कि वे जान से मारने की धमकी की वजह से देश छोड़ना प़ड़ा । अब्दुल्ला यामीन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि चुनाव अधिकारी मतदान में हुई धांधली की जारी वीडियो के कारण देश से भागे हैं। सत्ता शासित प्रोग्रेसिव पार्टी ऑफ़ मालदीव के प्रवक्ता ने बताया कि चुनाव में धांधली की वीडियो लीक हुई जिससे जनता में आक्रोश था इस डर के कारण चुनाव अधिकारियों ने देश छोड़ा है। अब्दुल्ला यामीन की सरकार पर अधिकारियों को रिश्वत देकर चुनाव परिणाम को बदलने के लिए गलत बयान देने को कहा था। अब्दुल्ला यामीन की सरकार ने आरोपों को नकारते हुए कहा कि यह अदालत के फैसले से ध्यान भटकाने की साजिश है। मालदीव की मीडिया के मुताबिक अब्दुल्ला यामीन को विपक्षी गठबंधन के उमीदवार इब्राहिम सोलह ने सोलह.आठ फीसदी मतों से मात दी थी। चुनाव आयोग ने चुनाव को निष्पक्ष और स्वतंत्र बताया था। हालांकि अब्दुल्ला यामीन के वकील ने अदालत में याचिका दायर कर कहा कि उनके समर्थकों ने चुनाव में हेराफेरी की शिकायते की हैं। क्षेत्रीय प्रभाविक्ता को बढ़ाने के लिहाज़ से मालदीव भारत और चीन दोनों के लिए महत्वपूर्ण देश है। अब्दुल्ला यामीन की सरकार चीन की बेल्ट एंड रोड परियोजना में सहयोगी भी है।
बर्लिन, 18 जुलाई (आईएएनएस)। दक्षिण-पश्चिम जर्मनी के एसलिंगेन कस्बे में स्थित एक व्यावसायिक स्कूल में कथित तौर पर बंदूक के साथ एक किशोर के घुसने की घटना के बाद पुलिस ने किशोर को ढूंढ़ने के लिए तलाशी अभियान चलाया। इस किशोर ने सोमवार को स्कूल में प्रवेश किया और बगैर किसी को नुकसान पहुंचाए वहां से भाग गया। रूटलिंगन पुलिस ने ट्विटर पर कहा कि यह संदिग्ध फ्रेडरिक-एबर्ट स्कूल में पहुंचा और थोड़ी देर बाद ही वहां से मोटरसाइकिल से भाग गया। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, विद्यार्थियों द्वारा फोन पर सूचित करने के बाद पुलिस ने स्कूल परिसर को घेर लिया और पूरे स्कूल में तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान पुलिस को कोई भी संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। पुलिस ने ट्विटर पर कहा कि इस संदिग्ध की आयु 17 से 19 वर्ष के आसपास थी और वह 170 से 180 सेंटीमीटर लंबा था। उसका रंग काला था। इस घटना के मद्देनजर पास के स्कूलों और किंडरगार्टन को भी बंद कर दिया गया। पुलिस ने कहा कि किसी स्कूल में कोई खतरा नहीं है और सभी विद्यार्थी घर जा सकते हैं। स्थानीय और संघीय पुलिस ने एसलिंगेन के कुछ मार्गो को भी बंद कर दिया है और संदिग्ध की तलाश के लिए हेलीकॉप्टर तैनात किए हैं। पुलिस ने ट्विटर पर कहा कि खोज अभियान जारी रहेगा। लंदन। खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद से कनाडा और भारत के बीच तनाव बढ़ता ही जा रहा है। इसका असर अब स्कॉटलैंड के ग्लासगो में देखने को मिला है। दरअसल, यूनाइटेड किंगडम में भारतीय उच्चायुक्त विक्रम दोरईस्वामी को 29 सितंबर को ग्लासगो में एक गुरुद्वारे में प्रवेश करने से रोक दिया गया। सूत्रों के मुताबिक, ब्रिटेन में भारतीय उच्चायुक्त विक्रम दोरईस्वामी ने बहस में पड़ने के बजाय वहां से चले जाने का फैसला किया। इस मुद्दे को ब्रिटेन के विदेश कार्यालय और पुलिस के समक्ष भी उठाया गया है। 'सिख यूथ यूके' के इंस्टाग्राम चैनल पर एक वीडियो पोस्ट की गई है, जिसमें कथित तौर पर खालिस्तान समर्थक एक व्यक्ति को अल्बर्ट ड्राइव पर ग्लासगो गुरुद्वारे में प्रवेश करने से दोरईस्वामी को रोकते हुए देखा जा सकता है। फिलहाल, घटना पर लंदन में भारतीय उच्चायोग और विदेश मंत्रालय (एमईए) की औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। 'सिख यूथ यूके' का दावा है कि भारतीय अधिकारियों के आधिकारिक तौर पर गुरुद्वारे में जाने पर प्रतिबंध लगा हुआ है। वीडियो के मुताबिक, पार्किंग में उच्चायुक्त की कार के पास दो लोग खड़े हुए है और उनमें से एक को कार का दरवाजा खोलने की कोशिश कर रहा है। कथित वीडियो में उच्चायुक्त की कार को गुरुद्वारा परिसर से निकलते देखा गया। वीडियो में एक अन्य व्यक्ति कैमरे पर बोल रहा है कि गुरुद्वारे में आने वाले किसी भी भारतीय राजदूत या किसी भी भारतीय सरकारी अधिकारी के साथ इसी तरह का व्यवहार किया जाएगा। क्या है पूरा मामला? प्राप्त समाचार के मुताबिक, खालिस्तान समर्थक एक कार्यकर्ता ने बताया की भारतीय उच्चायुक्त को अल्बर्ट ड्राइव पर ग्लासगो गुरुद्वारा की गुरुद्वारा समिति के साथ बैठक करनी थी। कुछ लोगों ने उनका स्वागत नहीं किया और वह वहां से चले गए। इस बीच हल्की नोकझोंक हुई। खालिस्तान समर्थक ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि जो कुछ हुआ उससे गुरुद्वारा कमेटी बहुत खुश है, लेकिन ब्रिटेन के किसी भी गुरुद्वारे में भारतीय अधिकारियों का स्वागत नहीं है। कर्नाटक-तमिलनाडु के बीच कावेरी जल विवाद पर चिदंबरम ने दिया यह सुझाव, क्या हल होगी समस्या?
बर्लिन, अट्ठारह जुलाई । दक्षिण-पश्चिम जर्मनी के एसलिंगेन कस्बे में स्थित एक व्यावसायिक स्कूल में कथित तौर पर बंदूक के साथ एक किशोर के घुसने की घटना के बाद पुलिस ने किशोर को ढूंढ़ने के लिए तलाशी अभियान चलाया। इस किशोर ने सोमवार को स्कूल में प्रवेश किया और बगैर किसी को नुकसान पहुंचाए वहां से भाग गया। रूटलिंगन पुलिस ने ट्विटर पर कहा कि यह संदिग्ध फ्रेडरिक-एबर्ट स्कूल में पहुंचा और थोड़ी देर बाद ही वहां से मोटरसाइकिल से भाग गया। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, विद्यार्थियों द्वारा फोन पर सूचित करने के बाद पुलिस ने स्कूल परिसर को घेर लिया और पूरे स्कूल में तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान पुलिस को कोई भी संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। पुलिस ने ट्विटर पर कहा कि इस संदिग्ध की आयु सत्रह से उन्नीस वर्ष के आसपास थी और वह एक सौ सत्तर से एक सौ अस्सी सेंटीमीटर लंबा था। उसका रंग काला था। इस घटना के मद्देनजर पास के स्कूलों और किंडरगार्टन को भी बंद कर दिया गया। पुलिस ने कहा कि किसी स्कूल में कोई खतरा नहीं है और सभी विद्यार्थी घर जा सकते हैं। स्थानीय और संघीय पुलिस ने एसलिंगेन के कुछ मार्गो को भी बंद कर दिया है और संदिग्ध की तलाश के लिए हेलीकॉप्टर तैनात किए हैं। पुलिस ने ट्विटर पर कहा कि खोज अभियान जारी रहेगा। लंदन। खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद से कनाडा और भारत के बीच तनाव बढ़ता ही जा रहा है। इसका असर अब स्कॉटलैंड के ग्लासगो में देखने को मिला है। दरअसल, यूनाइटेड किंगडम में भारतीय उच्चायुक्त विक्रम दोरईस्वामी को उनतीस सितंबर को ग्लासगो में एक गुरुद्वारे में प्रवेश करने से रोक दिया गया। सूत्रों के मुताबिक, ब्रिटेन में भारतीय उच्चायुक्त विक्रम दोरईस्वामी ने बहस में पड़ने के बजाय वहां से चले जाने का फैसला किया। इस मुद्दे को ब्रिटेन के विदेश कार्यालय और पुलिस के समक्ष भी उठाया गया है। 'सिख यूथ यूके' के इंस्टाग्राम चैनल पर एक वीडियो पोस्ट की गई है, जिसमें कथित तौर पर खालिस्तान समर्थक एक व्यक्ति को अल्बर्ट ड्राइव पर ग्लासगो गुरुद्वारे में प्रवेश करने से दोरईस्वामी को रोकते हुए देखा जा सकता है। फिलहाल, घटना पर लंदन में भारतीय उच्चायोग और विदेश मंत्रालय की औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। 'सिख यूथ यूके' का दावा है कि भारतीय अधिकारियों के आधिकारिक तौर पर गुरुद्वारे में जाने पर प्रतिबंध लगा हुआ है। वीडियो के मुताबिक, पार्किंग में उच्चायुक्त की कार के पास दो लोग खड़े हुए है और उनमें से एक को कार का दरवाजा खोलने की कोशिश कर रहा है। कथित वीडियो में उच्चायुक्त की कार को गुरुद्वारा परिसर से निकलते देखा गया। वीडियो में एक अन्य व्यक्ति कैमरे पर बोल रहा है कि गुरुद्वारे में आने वाले किसी भी भारतीय राजदूत या किसी भी भारतीय सरकारी अधिकारी के साथ इसी तरह का व्यवहार किया जाएगा। क्या है पूरा मामला? प्राप्त समाचार के मुताबिक, खालिस्तान समर्थक एक कार्यकर्ता ने बताया की भारतीय उच्चायुक्त को अल्बर्ट ड्राइव पर ग्लासगो गुरुद्वारा की गुरुद्वारा समिति के साथ बैठक करनी थी। कुछ लोगों ने उनका स्वागत नहीं किया और वह वहां से चले गए। इस बीच हल्की नोकझोंक हुई। खालिस्तान समर्थक ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि जो कुछ हुआ उससे गुरुद्वारा कमेटी बहुत खुश है, लेकिन ब्रिटेन के किसी भी गुरुद्वारे में भारतीय अधिकारियों का स्वागत नहीं है। कर्नाटक-तमिलनाडु के बीच कावेरी जल विवाद पर चिदंबरम ने दिया यह सुझाव, क्या हल होगी समस्या?
' द ग्रेट खली भारतीय मूल के WWE रैसलर है। 2006 से लेकर 2014 तक द ग्रेट खली WWE का एक बड़ा नाम थे, लेकिन फिलहाल वह WWE से बाहर चल रहे हैं। जुलाई 2007 में खली WWE के वर्ल्ड हैवीवेट चैंपियन बने थे। वह WWE इतिहास में चैंपियन बनने वाले पहले भारतीय थे। WWE में द ग्रेट खली को सिंगल्स मैच में हराना किसी भी रैसलर के लिए आसान नहीं रहा है, लेकिन WWW. PROFIGHTDB. COM से उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक WWE का ही एक ऐसा रैसलर है, जिसने सिंगल्स मैच में खली को 1 या 2 बार नहीं, बल्कि कुल 6 बार हराया है। आज उसी रैसलर का नाम हम आपको बताने जा रहे हैं। WWW. PROFIGHTDB. COM से उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक द ग्रेट खली को सिंगल्स मैच में कुल 6 बार हराने की उपलब्धि केन ने हासिल की हुई है। उनके अलावा अन्य कोई भी रैसलर्स सिंगल्स मैच में खली को 6 बार नहीं हरा पाया है। बता दें कि केन WWE के एक काफी प्रसिद्द रैसलर है। उन्होंने अपने WWE करियर में अंडरटेकर जैसे सुपरस्टार को भी हराया हुआ है। केन ने खली को कब और कहां हराया? केन ने पहली बार सिंगल्स मैच में खली को 16 अक्टूबर 2007 की स्मैकडाउन में डिस्क्वालिफिकेशन के जरिए हराया था। इसके बाद 19 फरवरी 2008 की स्मैकडाउन में केन ने खली को पिन करके हरा दिया था। समरस्लैम 2009 में भी केन ने खली को पिन करके कामयाबी हासिल की थी। वहीं ब्रेकिंग पॉइंट 2009 में भी खली को पिन करके केन विजेता बने थे। इसके बाद 24 मई 2011 की स्मैकडाउन में केन ने खली को हराया था। वहीं छठी बार 30 अप्रैल 2012 की रॉ में एक क्लॉक बीट चैलेंज मैच में हरा दिया था। इसके अलावा सुपरस्टार केन 2, 3 और 9 जून 2012 को WWE के लाइव इवेंट्स में भी द ग्रेट खली को पिन करके तीन बार हरा चुके हैं।
' द ग्रेट खली भारतीय मूल के WWE रैसलर है। दो हज़ार छः से लेकर दो हज़ार चौदह तक द ग्रेट खली WWE का एक बड़ा नाम थे, लेकिन फिलहाल वह WWE से बाहर चल रहे हैं। जुलाई दो हज़ार सात में खली WWE के वर्ल्ड हैवीवेट चैंपियन बने थे। वह WWE इतिहास में चैंपियन बनने वाले पहले भारतीय थे। WWE में द ग्रेट खली को सिंगल्स मैच में हराना किसी भी रैसलर के लिए आसान नहीं रहा है, लेकिन WWW. PROFIGHTDB. COM से उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक WWE का ही एक ऐसा रैसलर है, जिसने सिंगल्स मैच में खली को एक या दो बार नहीं, बल्कि कुल छः बार हराया है। आज उसी रैसलर का नाम हम आपको बताने जा रहे हैं। WWW. PROFIGHTDB. COM से उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक द ग्रेट खली को सिंगल्स मैच में कुल छः बार हराने की उपलब्धि केन ने हासिल की हुई है। उनके अलावा अन्य कोई भी रैसलर्स सिंगल्स मैच में खली को छः बार नहीं हरा पाया है। बता दें कि केन WWE के एक काफी प्रसिद्द रैसलर है। उन्होंने अपने WWE करियर में अंडरटेकर जैसे सुपरस्टार को भी हराया हुआ है। केन ने खली को कब और कहां हराया? केन ने पहली बार सिंगल्स मैच में खली को सोलह अक्टूबर दो हज़ार सात की स्मैकडाउन में डिस्क्वालिफिकेशन के जरिए हराया था। इसके बाद उन्नीस फरवरी दो हज़ार आठ की स्मैकडाउन में केन ने खली को पिन करके हरा दिया था। समरस्लैम दो हज़ार नौ में भी केन ने खली को पिन करके कामयाबी हासिल की थी। वहीं ब्रेकिंग पॉइंट दो हज़ार नौ में भी खली को पिन करके केन विजेता बने थे। इसके बाद चौबीस मई दो हज़ार ग्यारह की स्मैकडाउन में केन ने खली को हराया था। वहीं छठी बार तीस अप्रैल दो हज़ार बारह की रॉ में एक क्लॉक बीट चैलेंज मैच में हरा दिया था। इसके अलावा सुपरस्टार केन दो, तीन और नौ जून दो हज़ार बारह को WWE के लाइव इवेंट्स में भी द ग्रेट खली को पिन करके तीन बार हरा चुके हैं।
सन्धिविश्लिष्ट तथा सन्धिभङ्ग में उक्त विधि से उसे सुव्यवस्थित कर उस अंग को इस प्रकार सुबद्ध कर गले में लटका दे कि उसपर किसी प्रकार से कोई श्रम न पड़े । ६ - इन्द्रवस्ति मर्म - प्रकोष्ठ में हथेली की ओर इन्द्रवस्ति नामक मर्म है । यह कालान्तर प्राणहर मर्म है और इसकी मोटाई भोज और गयदास के अनुसार २ अङ्गुल या २ इञ्च र अन्य आचार्यों के अनुसार अर्धाङ्गुल या श्राधा इञ्च है । यहां पर वेध होने से रक्तस्रावाधिक्यजन्य क्षय से मृत्यु होती है } "हस्तं प्रति प्रकोष्ठमध्ये इन्द्रवस्तिर्नाम, तत्र शोणितक्षयेण मरणम् ।" रचना - श्रप्रवाहु के पिण्डली का स्थान जहां पर मणिबंध संकोचिन्यादि उत्तान पेशियों के नीचे अन्तःप्रकोष्टीया धमनी ( Ulnar Artery ) और अध्यकोष्टीका नाड़ी ( Median nerve ) इत्यादि महत्व के इस मर्म की बनावट में निम्न अवयव जुड़ते हैं :( १ ) बहिःप्रकोष्टीया धमनी, अपनी करतल धानुषी शाखाओं के ( Radial artery with its volar branches ) २ ) [अन्तःप्रकोष्टीया धमनी की रत्न धानुषी शाखाएँ । ( Volar intreossions branches of the ulnar artery) साथ । ( ३ ) मध्यप्रकोष्टीया नाड़ी और उसकी शाखाएँ । ( ४ ) करविवर्तिनी दीर्घा ( Pronator Teres muscle ) ( ५ ) अङ्गुलीसंकोचिनी सध्यपर्विका ( Flexor digitorum smblimiss ) ( ६ ) मणिबंधसंकोचिनो बहिःस्था ( Flexor Carpi - radialis ) इस मर्म की रचना से ही स्पष्ट हो जाता है कि यहां का अभिघात किस प्रकार कालान्तर में सांघांतिक होता है। प्रधान धमनियों तथा नाड़ियों का सन्निपात ही इसके मर्म शब्द को सार्थक बनाते हैं । उक्त धमनियों के अति होने से तथा फटने से रक्तस्राव अधिक होता है और रक्त के क्षय से क्षयजन्य मृत्यु होती है
सन्धिविश्लिष्ट तथा सन्धिभङ्ग में उक्त विधि से उसे सुव्यवस्थित कर उस अंग को इस प्रकार सुबद्ध कर गले में लटका दे कि उसपर किसी प्रकार से कोई श्रम न पड़े । छः - इन्द्रवस्ति मर्म - प्रकोष्ठ में हथेली की ओर इन्द्रवस्ति नामक मर्म है । यह कालान्तर प्राणहर मर्म है और इसकी मोटाई भोज और गयदास के अनुसार दो अङ्गुल या दो इञ्च र अन्य आचार्यों के अनुसार अर्धाङ्गुल या श्राधा इञ्च है । यहां पर वेध होने से रक्तस्रावाधिक्यजन्य क्षय से मृत्यु होती है } "हस्तं प्रति प्रकोष्ठमध्ये इन्द्रवस्तिर्नाम, तत्र शोणितक्षयेण मरणम् ।" रचना - श्रप्रवाहु के पिण्डली का स्थान जहां पर मणिबंध संकोचिन्यादि उत्तान पेशियों के नीचे अन्तःप्रकोष्टीया धमनी और अध्यकोष्टीका नाड़ी इत्यादि महत्व के इस मर्म की बनावट में निम्न अवयव जुड़ते हैं : बहिःप्रकोष्टीया धमनी, अपनी करतल धानुषी शाखाओं के दो ) [अन्तःप्रकोष्टीया धमनी की रत्न धानुषी शाखाएँ । साथ । मध्यप्रकोष्टीया नाड़ी और उसकी शाखाएँ । करविवर्तिनी दीर्घा अङ्गुलीसंकोचिनी सध्यपर्विका मणिबंधसंकोचिनो बहिःस्था इस मर्म की रचना से ही स्पष्ट हो जाता है कि यहां का अभिघात किस प्रकार कालान्तर में सांघांतिक होता है। प्रधान धमनियों तथा नाड़ियों का सन्निपात ही इसके मर्म शब्द को सार्थक बनाते हैं । उक्त धमनियों के अति होने से तथा फटने से रक्तस्राव अधिक होता है और रक्त के क्षय से क्षयजन्य मृत्यु होती है
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेट कप्तान स्टीव स्मिथ की कोहनी की सर्जरी सफल रही है। उनकी मैनेजमेंट टीम ने कहा है कि वह इंग्लैंड में होने वाले विश्व कप में खेलने के लिए सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। स्मिथ पर गेंद से छेड़छाड़ के लिए लगा प्रतिबंध मार्च के अंत में समाप्त हो रहा है। उन्हें लिगामेंट में समस्या के कारण पिछले महीने बांग्लादेश प्रीमियर लीग ट्वेंटी20 टूर्नामेंट से हटने के लिए बाध्य होना पड़ा था। स्मिथ के मैनेजर वारेन क्रेग ने क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया वेबसाइट से कहा कि सर्जरी सफल रही और उन्हें खेलने के लिए तैयार होने में अभी साढ़े तीन हफ्ते के करीब समय लगेगा। उन्होंने कहा, 'हम चाहते हैं कि वह इंडियन प्रीमियर लीग में खेले और इसके बाद विश्व कप और फिर एशेज। ' कयास लगाए जा रहे हैं कि स्टीव स्मिथ और डेविड वार्नर आगामी वनडे विश्व कप में ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट टीम का हिस्सा हो सकते हैं। सभी खेलों से जुड़े समाचार पढ़ें सबसे पहले Live Hindustan पर। अपने मोबाइल पर Live Hindustan पढ़ने के लिए डाउनलोड करें हमारा न्यूज एप। और देश-दुनिया की हर खबर से रहें अपडेट।
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेट कप्तान स्टीव स्मिथ की कोहनी की सर्जरी सफल रही है। उनकी मैनेजमेंट टीम ने कहा है कि वह इंग्लैंड में होने वाले विश्व कप में खेलने के लिए सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। स्मिथ पर गेंद से छेड़छाड़ के लिए लगा प्रतिबंध मार्च के अंत में समाप्त हो रहा है। उन्हें लिगामेंट में समस्या के कारण पिछले महीने बांग्लादेश प्रीमियर लीग ट्वेंटीबीस टूर्नामेंट से हटने के लिए बाध्य होना पड़ा था। स्मिथ के मैनेजर वारेन क्रेग ने क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया वेबसाइट से कहा कि सर्जरी सफल रही और उन्हें खेलने के लिए तैयार होने में अभी साढ़े तीन हफ्ते के करीब समय लगेगा। उन्होंने कहा, 'हम चाहते हैं कि वह इंडियन प्रीमियर लीग में खेले और इसके बाद विश्व कप और फिर एशेज। ' कयास लगाए जा रहे हैं कि स्टीव स्मिथ और डेविड वार्नर आगामी वनडे विश्व कप में ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट टीम का हिस्सा हो सकते हैं। सभी खेलों से जुड़े समाचार पढ़ें सबसे पहले Live Hindustan पर। अपने मोबाइल पर Live Hindustan पढ़ने के लिए डाउनलोड करें हमारा न्यूज एप। और देश-दुनिया की हर खबर से रहें अपडेट।
Khunti: अड़की थाना में पदस्थापित सिपाही को 'कालिया' और 'पतलू' कहने वाले थाना प्रभारी को लाइन हाजिर किया गया है. अड़की थाने में पदस्थापित जवानों को और प्रोबेशनल सब-इंस्पेक्टर को अर्मयादित शब्दों का इस्तेमाल कर बुलाने वाले थानेदार विक्रांत कुमार को खूंटी एसपी आशुतोष शेखर ने लाइन हाजिर कर दिया है. अड़की के नये थानेदार पंकज दास बनाये गये हैं. मिली जानकारी के अनुसार उक्त थाना प्रभारी अड़की थाना में पदस्थापित पुलिसकर्मियों को कालिया और पतलू कहकर बुलाते थे. थाने में पदस्थापित पुलिसकर्मी कई दिनों से थाना प्रभारी विक्रांत कुमार के अभद्र और अमर्यादित शब्दों से परेशान हो गये थे. लगातार दुर्व्यवहार किये जाने से परेशान पुलिसकर्मियों ने इसकी शिकायत एसपी से की थी. शिकायत मिलने के बाद एसपी आशुतोष शेखर ने जांच का आदेश एसडीपीओ आशीष महली को दिया था. एसडीपीओ ने दो दिनों तक लगातार जवानों से पूछताछ की इसके बाद एसपी को जांच रिपोर्ट सौंपा गया. बताया जा रहा है, एसपी खुद गुरुवार को अड़की थाना पहुंचे थे जहां उन्होंने प्रोबेशनल सब-इंस्पेक्टर से बातचीत की थी. उसके बाद सोमवार को एसपी ने विक्रांत कुमार को लाइन हाजिर कर दिया.
Khunti: अड़की थाना में पदस्थापित सिपाही को 'कालिया' और 'पतलू' कहने वाले थाना प्रभारी को लाइन हाजिर किया गया है. अड़की थाने में पदस्थापित जवानों को और प्रोबेशनल सब-इंस्पेक्टर को अर्मयादित शब्दों का इस्तेमाल कर बुलाने वाले थानेदार विक्रांत कुमार को खूंटी एसपी आशुतोष शेखर ने लाइन हाजिर कर दिया है. अड़की के नये थानेदार पंकज दास बनाये गये हैं. मिली जानकारी के अनुसार उक्त थाना प्रभारी अड़की थाना में पदस्थापित पुलिसकर्मियों को कालिया और पतलू कहकर बुलाते थे. थाने में पदस्थापित पुलिसकर्मी कई दिनों से थाना प्रभारी विक्रांत कुमार के अभद्र और अमर्यादित शब्दों से परेशान हो गये थे. लगातार दुर्व्यवहार किये जाने से परेशान पुलिसकर्मियों ने इसकी शिकायत एसपी से की थी. शिकायत मिलने के बाद एसपी आशुतोष शेखर ने जांच का आदेश एसडीपीओ आशीष महली को दिया था. एसडीपीओ ने दो दिनों तक लगातार जवानों से पूछताछ की इसके बाद एसपी को जांच रिपोर्ट सौंपा गया. बताया जा रहा है, एसपी खुद गुरुवार को अड़की थाना पहुंचे थे जहां उन्होंने प्रोबेशनल सब-इंस्पेक्टर से बातचीत की थी. उसके बाद सोमवार को एसपी ने विक्रांत कुमार को लाइन हाजिर कर दिया.
आपने सर्च किया थाः राजद ने बंगाल में पिटे डॉक्टरों की जाति गिना कर डॉक्टरों की देशव्यापी हड़ताल को 'महज एक-दो सर्वणों की पिटाई' पर हुआ बवाल बताया है। यह नया नहीं है। यह संवेदनशील मुद्दों को जातिगत मोड़ देकर राजनीतिक मलाई चाभने की लालू की ही पुरानी नीति है। पहले दिन सांसदों ने जम कर 'भारत माता की जय' के नारे लगाए और जब आसनसोल से चुने गए बाबुल सुप्रियों ने शपथ लिया, तब सदन में 'जय श्री राम' के नारे गूँजे। अभी तक विपक्षी पार्टी कॉन्ग्रेस ने सदन में अपने नेता के नाम की घोषणा नहीं की है। "अगर आज़ादी का कोई भी अर्थ है, तो वह लोगों को वह सुनाने का अधिकार है जो वह नहीं सुनना चाहते। " हम निश्चित तौर पर आपकी मुवक्किल स्वाति चतुर्वेदी और कई अन्य पत्रकारों को वह सुनाने के दोषी हैं जो वह नहीं सुनना चाहते। जैसा कि आपकी मुवक्किल के द्वारा प्रदर्शित किया गया, यह मानहानि नहीं आज़ादी है। सिख ड्राइवर की तलवार Vs पुलिस की बर्बर पिटाईः गृह मंत्रालय को मँगानी पड़ी रिपोर्ट, 4 वीडियो में सब क्लियर! वीडियो में दिख रहा है कि टेम्पो चालक तलवार निकाल कर पुलिस वालों को धमकी भरे अंदाज में कुछ कह रहा है और फिर एक पुलिस वाले पर तलवार से वार भी करता है। वीडियो में सभी पुलिस वाले उसके तलवार से बचते दिख रहे हैं और उसे पकड़ने की कोशिश कर रहे हैं। 11 बजे से 4 बजे तक दिन में सभी निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी गई है। सरकारी मनरेगा योजनाएँ व उनके तहत होने वाले कामकाज भी सुबह 10. 30 के बाद ठप्प रहेंगे। खुले स्थानों पर किसी भी प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करने पर भी प्रशासन ने निषेध लगा दिया है। बैंक ने बताया कि बिड़ला सूर्या लिमिटेड को मुंबई के नरीमन प्वाइंट कॉरपोरेट ब्रांच से 100 करोड़ रुपए की क्रेडिट लिमिट दी गई थी। इसमें 67. 55 करोड़ का ब्याज न चुका पाने के कारण कंपनी को 3 जून को एनपीए घोषित कर दिया गया। दोनों देशों की सेनाओं ने इस संयुक्त ऑपरेशन में जिन उग्रवादी संगठनों को निशाना बनाया गया, उनमें कामतापुर लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन (KLO), एनएससीएन (NSCN), उल्फा और नैशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (NDFB) शामिल हैं। आज बिहार लाचार है। बिहार के ग़रीब परिवारों के सामने उनके बच्चों की जानें जा रही हैं और सरकारें हाथ पर हाथ धरे बैठी हैं। आज बिहार के इन ग़रीबों की सुनने वाला कोई नहीं है। अस्पताल के अधिकारी भी इन्हें फटकार रहे हैं। 93 मौतों वाली भयंकर त्रासदी। पुलिस का कहना है कि लड़की ने दो दिन पहले इसकी शिकायत की थी, जिसके आधार पर आरोपित एमिली राज को हिरासत में लिया गया है।
आपने सर्च किया थाः राजद ने बंगाल में पिटे डॉक्टरों की जाति गिना कर डॉक्टरों की देशव्यापी हड़ताल को 'महज एक-दो सर्वणों की पिटाई' पर हुआ बवाल बताया है। यह नया नहीं है। यह संवेदनशील मुद्दों को जातिगत मोड़ देकर राजनीतिक मलाई चाभने की लालू की ही पुरानी नीति है। पहले दिन सांसदों ने जम कर 'भारत माता की जय' के नारे लगाए और जब आसनसोल से चुने गए बाबुल सुप्रियों ने शपथ लिया, तब सदन में 'जय श्री राम' के नारे गूँजे। अभी तक विपक्षी पार्टी कॉन्ग्रेस ने सदन में अपने नेता के नाम की घोषणा नहीं की है। "अगर आज़ादी का कोई भी अर्थ है, तो वह लोगों को वह सुनाने का अधिकार है जो वह नहीं सुनना चाहते। " हम निश्चित तौर पर आपकी मुवक्किल स्वाति चतुर्वेदी और कई अन्य पत्रकारों को वह सुनाने के दोषी हैं जो वह नहीं सुनना चाहते। जैसा कि आपकी मुवक्किल के द्वारा प्रदर्शित किया गया, यह मानहानि नहीं आज़ादी है। सिख ड्राइवर की तलवार Vs पुलिस की बर्बर पिटाईः गृह मंत्रालय को मँगानी पड़ी रिपोर्ट, चार वीडियो में सब क्लियर! वीडियो में दिख रहा है कि टेम्पो चालक तलवार निकाल कर पुलिस वालों को धमकी भरे अंदाज में कुछ कह रहा है और फिर एक पुलिस वाले पर तलवार से वार भी करता है। वीडियो में सभी पुलिस वाले उसके तलवार से बचते दिख रहे हैं और उसे पकड़ने की कोशिश कर रहे हैं। ग्यारह बजे से चार बजे तक दिन में सभी निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी गई है। सरकारी मनरेगा योजनाएँ व उनके तहत होने वाले कामकाज भी सुबह दस. तीस के बाद ठप्प रहेंगे। खुले स्थानों पर किसी भी प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करने पर भी प्रशासन ने निषेध लगा दिया है। बैंक ने बताया कि बिड़ला सूर्या लिमिटेड को मुंबई के नरीमन प्वाइंट कॉरपोरेट ब्रांच से एक सौ करोड़ रुपए की क्रेडिट लिमिट दी गई थी। इसमें सरसठ. पचपन करोड़ का ब्याज न चुका पाने के कारण कंपनी को तीन जून को एनपीए घोषित कर दिया गया। दोनों देशों की सेनाओं ने इस संयुक्त ऑपरेशन में जिन उग्रवादी संगठनों को निशाना बनाया गया, उनमें कामतापुर लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन , एनएससीएन , उल्फा और नैशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड शामिल हैं। आज बिहार लाचार है। बिहार के ग़रीब परिवारों के सामने उनके बच्चों की जानें जा रही हैं और सरकारें हाथ पर हाथ धरे बैठी हैं। आज बिहार के इन ग़रीबों की सुनने वाला कोई नहीं है। अस्पताल के अधिकारी भी इन्हें फटकार रहे हैं। तिरानवे मौतों वाली भयंकर त्रासदी। पुलिस का कहना है कि लड़की ने दो दिन पहले इसकी शिकायत की थी, जिसके आधार पर आरोपित एमिली राज को हिरासत में लिया गया है।
४. २७ अनुनासिकता हिन्दी में अनुनासिकता ध्वनिग्रामिक है, क्योंकि अनुनासिकता के कारण अर्थ में अन्तर हो जाता है । यथा; । भाग्। तथा । भांग । । गोद तथा गोंद। ४.२८ विवृति विवृति के कारण भी, हिन्दी में, अर्थ में, परिवर्तन आ जाता है । इसके के मुख्य चार प्रकार देखने में मिलते हैं । अल्प विवृति - यथा; । पाली । तथा पा - - ली। । खाली । तथा खा -- ली। । सिका। तथा सिर्का । इन उदाहरणों में प्रथम में, बिना कहीं रुके, पूरे शब्द का उच्चारण करते हैं किन्तु द्वितीय में हम 'पा', 'खा' तथा 'सिर्' के बाद क्षणमात्र के लिए रुक कर 'ली', 'ली', तथा 'का' का उच्चारण करते हैं जिससे कि अर्थ में अन्तर आ जाता है । । वह जायेगा । ? निलम्बित विवृति--जहाँ पर दो वाक्यों को किसी संयोजक द्वारा मिलाया जाता है वहाँ संयोजक के पूर्व यह विवृति पाई जाती है । यथा; मैं जाने ही वाला था -- कि पानी बरसने लगा । आरोही विवृति- - यह प्रश्नवाचक वाक्यों के अन्त में होती है । यथा; अवरोही विवृति -- सामान्य कथनों के अन्त में प्रयोग होता है । यथा; मैं जाता हूँ । यद्यपि हिन्दी में सुर का विशेष महत्त्व नहीं है तथापि इसका प्रयोग कभी-कभी होता है जिससे अर्थ में भिन्नता आ जाती है । इस भिन्नता का अवबोध भी केवल उन्हीं लोगों को होता है जो भलीभांति हिन्दी बोलते तथा समझते हैं । इस तथ्य को हिन्दी के एक वाक्य से स्पष्ट किया जा सकता है । उदाहरणार्थ 'मैं दिल्ली जा रहा हूँ इस वाक्य को निम्नलिखित रूपों में बोला जा सकता है -- १. मैं दिल्ली जा रहा हूँ । ( सामान्य भाव ) २. मैं दिल्ली जा रहा हूँ, "मैं" पर विशेष बल देकर विशेष कथन, जिसका अर्थ है कि केवल "मैं" दिल्ली जा रहा हूँ, अन्य कोई व्यक्ति नहीं ।
चार. सत्ताईस अनुनासिकता हिन्दी में अनुनासिकता ध्वनिग्रामिक है, क्योंकि अनुनासिकता के कारण अर्थ में अन्तर हो जाता है । यथा; । भाग्। तथा । भांग । । गोद तथा गोंद। चार.अट्ठाईस विवृति विवृति के कारण भी, हिन्दी में, अर्थ में, परिवर्तन आ जाता है । इसके के मुख्य चार प्रकार देखने में मिलते हैं । अल्प विवृति - यथा; । पाली । तथा पा - - ली। । खाली । तथा खा -- ली। । सिका। तथा सिर्का । इन उदाहरणों में प्रथम में, बिना कहीं रुके, पूरे शब्द का उच्चारण करते हैं किन्तु द्वितीय में हम 'पा', 'खा' तथा 'सिर्' के बाद क्षणमात्र के लिए रुक कर 'ली', 'ली', तथा 'का' का उच्चारण करते हैं जिससे कि अर्थ में अन्तर आ जाता है । । वह जायेगा । ? निलम्बित विवृति--जहाँ पर दो वाक्यों को किसी संयोजक द्वारा मिलाया जाता है वहाँ संयोजक के पूर्व यह विवृति पाई जाती है । यथा; मैं जाने ही वाला था -- कि पानी बरसने लगा । आरोही विवृति- - यह प्रश्नवाचक वाक्यों के अन्त में होती है । यथा; अवरोही विवृति -- सामान्य कथनों के अन्त में प्रयोग होता है । यथा; मैं जाता हूँ । यद्यपि हिन्दी में सुर का विशेष महत्त्व नहीं है तथापि इसका प्रयोग कभी-कभी होता है जिससे अर्थ में भिन्नता आ जाती है । इस भिन्नता का अवबोध भी केवल उन्हीं लोगों को होता है जो भलीभांति हिन्दी बोलते तथा समझते हैं । इस तथ्य को हिन्दी के एक वाक्य से स्पष्ट किया जा सकता है । उदाहरणार्थ 'मैं दिल्ली जा रहा हूँ इस वाक्य को निम्नलिखित रूपों में बोला जा सकता है -- एक. मैं दिल्ली जा रहा हूँ । दो. मैं दिल्ली जा रहा हूँ, "मैं" पर विशेष बल देकर विशेष कथन, जिसका अर्थ है कि केवल "मैं" दिल्ली जा रहा हूँ, अन्य कोई व्यक्ति नहीं ।
नगर नारियां रास रमने लगीं । श्रद्धावंत भव्य-जन कदम कदम परे लकड़ियों से रास खेलने लगे, चारों ओर सुश्राविकाएँ महामङ्गल गाने लगीं। चतुर रसिकों से आगे खींचा जाता हुआ रथ फिरने लगा, प्रत्येक बाजार व प्रत्येक घर में उसकी पूजा होने लगी। उसके पीछे सकल संघ के साथ सुहस्ति आचार्य फिरने लगे, इस भांति चलते-चलते वह रथ राजमहल के द्वार पर आ पहुँचा । अत्र राजा मानों अपने कर्म विवर में फिरते हों, इस भांति उस संघ में सुस्तिसूरि को देख कर संतुष्ट हो विचार करने लगामैं सोचता हूँ कि - इन दयानिधान मुनींद्र को मैंने पूर्व कहीं देखा है, क्योंकि ये मेरे मन रूप सागर को चन्द्रमा के समान प्रफुल्लित कर रहे हैं । यह सोचते सोचते उमे जाति-स्मरण ज्ञान उत्पन्न हुआ, जिससे वह सर्व कार्य छोड़कर गुरु के चरणों में प्रणाम करने को आया । प्रणाम के अनन्तर वह गुरु को पूछने लगा कि जिन - धर्म का क्या फल है ? सूरि बोले कि - वह स्वर्ग और मोक्ष का फल देता है । तत्र राजा पुनः बोला कि- अव्यक्त सामायिक का क्या फल है ? मुनींद्र बोले कि - राज्य आदि । तब संतुष्ट हो राजा कहने लगा कि- हे भगवन् ! मुझे पहिचानते हो ? तव आचार्य उत्तम श्रुत ज्ञान के शुद्ध उपयोग से उसे पहिचान कर कहने लगे कि- हे राजन् ! तू पूर्व भव में मेरा शिष्य था । सो इस प्रकार कि- एक समय दुष्काल के समय हम महागिरि आचार्य के साथ मासकल्प से विचरते हुए कौशांबी नगरी में आये । वहां वस्ती तंग होने से व मुनि बहुत से होने से श्री आचार्य महागिरि और हम पृथक-पृथक बस्ती में रहे। अब सूत्र पौरुषी और अर्थ पौरुषी पूर्ण होने के अनन्तर भिक्षा के समय हमारे साधुओं का एक संघ किसी धनिक के घर गया । तब उक्त धनिक ने अपने को धन्य भाग्य मान कर भक्ति पूर्वक उक्त संच को बहुत-सा भक्तपान दिया। वह वहां बैठे हुए एक भिखारी ने देखा, जिससे वह सोचने लगा कि - श्रमणों के पुण्य की महिमा देखो ! दोनों भिक्षाचर होते हुए, इन पुण्यशालियों को सर्वत्र मिलता रहता है, तब मैं पुण्यहीन होने से गालियां खाता हूँ । यह सोच वह उनके पीछे लगकर मार्ग में बारम्बार मांगने लगा कि- हे भगवन् ! तुमको सब के यहां से मिलता है, तो सुके थोड़ा-सा दीजिये । तब साधु बोत्ते कि- हे मोजे ! हम तुझे नहीं दे सकते, क्योंकि हमारे व इस धनपति के स्वामी गुरु बस्ती में रहते हैं। तब वह आशा से प्रेरित होकर बस्ती में आकर हम से मांगने लगा, साथ ही साधुओं ने भी मार्ग का सत्र वृत्तान्त कहा । तब हमने श्रु तज्ञान के बल से प्रवचन को उन्नति होने वाली देख कर उससे सामायिक श्रुत का उच्चारण करवा कर शीघ्र ही दीक्षा दे दी। पश्चात् उसे मन भरकर मनोज आहार पानी खिलाया, रात्रि में वह तीव्र विशूचिका से शुद्ध मन से मर गया । वही श्री चन्द्रगुप्त के पुत्र बिन्दुसार के पुत्र अशोक श्री राजा के प्रिय पुत्र कुणाल का पुत्र तू हुआ है । यह सुनकर राजा बहुमान से रोमांचित हो मस्तक पर हाथ जोड़कर उनकी इस प्रकार स्तुति करने लगाहे ज्ञान दिवाकर ! परोपकार परायण, अत्यन्त करुणा जल के सागर मुनीश्वर ! आपके चरणों को नमस्कार हो । हे करुणानिधि ! दारिद्य रूप भरपूर समुद्र में डूबते हुए जीवों को पार लगाने के
नगर नारियां रास रमने लगीं । श्रद्धावंत भव्य-जन कदम कदम परे लकड़ियों से रास खेलने लगे, चारों ओर सुश्राविकाएँ महामङ्गल गाने लगीं। चतुर रसिकों से आगे खींचा जाता हुआ रथ फिरने लगा, प्रत्येक बाजार व प्रत्येक घर में उसकी पूजा होने लगी। उसके पीछे सकल संघ के साथ सुहस्ति आचार्य फिरने लगे, इस भांति चलते-चलते वह रथ राजमहल के द्वार पर आ पहुँचा । अत्र राजा मानों अपने कर्म विवर में फिरते हों, इस भांति उस संघ में सुस्तिसूरि को देख कर संतुष्ट हो विचार करने लगामैं सोचता हूँ कि - इन दयानिधान मुनींद्र को मैंने पूर्व कहीं देखा है, क्योंकि ये मेरे मन रूप सागर को चन्द्रमा के समान प्रफुल्लित कर रहे हैं । यह सोचते सोचते उमे जाति-स्मरण ज्ञान उत्पन्न हुआ, जिससे वह सर्व कार्य छोड़कर गुरु के चरणों में प्रणाम करने को आया । प्रणाम के अनन्तर वह गुरु को पूछने लगा कि जिन - धर्म का क्या फल है ? सूरि बोले कि - वह स्वर्ग और मोक्ष का फल देता है । तत्र राजा पुनः बोला कि- अव्यक्त सामायिक का क्या फल है ? मुनींद्र बोले कि - राज्य आदि । तब संतुष्ट हो राजा कहने लगा कि- हे भगवन् ! मुझे पहिचानते हो ? तव आचार्य उत्तम श्रुत ज्ञान के शुद्ध उपयोग से उसे पहिचान कर कहने लगे कि- हे राजन् ! तू पूर्व भव में मेरा शिष्य था । सो इस प्रकार कि- एक समय दुष्काल के समय हम महागिरि आचार्य के साथ मासकल्प से विचरते हुए कौशांबी नगरी में आये । वहां वस्ती तंग होने से व मुनि बहुत से होने से श्री आचार्य महागिरि और हम पृथक-पृथक बस्ती में रहे। अब सूत्र पौरुषी और अर्थ पौरुषी पूर्ण होने के अनन्तर भिक्षा के समय हमारे साधुओं का एक संघ किसी धनिक के घर गया । तब उक्त धनिक ने अपने को धन्य भाग्य मान कर भक्ति पूर्वक उक्त संच को बहुत-सा भक्तपान दिया। वह वहां बैठे हुए एक भिखारी ने देखा, जिससे वह सोचने लगा कि - श्रमणों के पुण्य की महिमा देखो ! दोनों भिक्षाचर होते हुए, इन पुण्यशालियों को सर्वत्र मिलता रहता है, तब मैं पुण्यहीन होने से गालियां खाता हूँ । यह सोच वह उनके पीछे लगकर मार्ग में बारम्बार मांगने लगा कि- हे भगवन् ! तुमको सब के यहां से मिलता है, तो सुके थोड़ा-सा दीजिये । तब साधु बोत्ते कि- हे मोजे ! हम तुझे नहीं दे सकते, क्योंकि हमारे व इस धनपति के स्वामी गुरु बस्ती में रहते हैं। तब वह आशा से प्रेरित होकर बस्ती में आकर हम से मांगने लगा, साथ ही साधुओं ने भी मार्ग का सत्र वृत्तान्त कहा । तब हमने श्रु तज्ञान के बल से प्रवचन को उन्नति होने वाली देख कर उससे सामायिक श्रुत का उच्चारण करवा कर शीघ्र ही दीक्षा दे दी। पश्चात् उसे मन भरकर मनोज आहार पानी खिलाया, रात्रि में वह तीव्र विशूचिका से शुद्ध मन से मर गया । वही श्री चन्द्रगुप्त के पुत्र बिन्दुसार के पुत्र अशोक श्री राजा के प्रिय पुत्र कुणाल का पुत्र तू हुआ है । यह सुनकर राजा बहुमान से रोमांचित हो मस्तक पर हाथ जोड़कर उनकी इस प्रकार स्तुति करने लगाहे ज्ञान दिवाकर ! परोपकार परायण, अत्यन्त करुणा जल के सागर मुनीश्वर ! आपके चरणों को नमस्कार हो । हे करुणानिधि ! दारिद्य रूप भरपूर समुद्र में डूबते हुए जीवों को पार लगाने के
मध्य प्रदेश का व्यावसायिक नगर इंदौर देश में स्वच्छता में नंबर वन है। यहां के प्रसिद्ध स्थान है राजबाड़ा, गोपाल मंदिर, लाल बाग पैलेस, खजराना गणेश मंदिर, बिजासन माता का मंदिर, पितृ पर्वत, गोम्मट गिरी, देवगुराड़िया आदि कई स्थान ऐसे हैं जो इंदौर के अंदर ही है। हम आपको इंदौर के बाहर आसपास घूमने के 10 खूबसूरत पिकनिक स्टॉप बताते हैं। 1. पातालपानी : पातालपानी जलप्रपात इंदौर जिले की महू तहसील में स्थित है। यहां लगभग 300 फीट ऊंचाई नीचे जल गिरता है। पातालपानी के आसपास का क्षेत्र बहुत ही सुंदर और हराभरा है। यह एक लोकप्रिय पिकनिक और ट्रेकिंग स्पॉट भी है। यहां के लिए महू से स्पेशल ट्रेन चलती है। इंदौर से लगभग 36 किलोमीटर दूर है यह स्थान। 2. गंगा महादेव मंदिर : इंदौर के पास धार जिले में तिरला विकासखंड के सुल्तानपुर गांव में गंगा महादेव मंदिर स्थित है जो इंदौर के लोगों के लिए एक दर्शनीय स्थल के साथ ही पिकनिक स्पॉट भी है। गंगा महादेव में सुन्दर झरना बहता है और यहां की प्राकृतिक छटा देखते ही रह जाओगे। 3. तिंछा फॉल : यह मुख्य इंदौर से लगभग 25 किलोमीटर दूर नेमावर-मुंबई रोड़ पर स्थित है। यह भी भी बहुत ऊंचाई से झरना गिरता है। इंदौर के लोगों के लिए यह सबसे खास डेस्टिनेशन है। सिमलोल मेन रोड़ से 9 किलोमीटर अंदर है तिंचा फॉल। 4. गुलावत : इंदौर जिले की हड़ौद तेहसिल में लोटस वैली के नाम से प्रसिद्ध इस स्थान पर भी आप घूमने जा सकते हैं। यहां लाखों कमल के फूल एक झील में खिलते हुए देख सकते हैं। यह स्थान भी शहर से लगभग 35 किलोमीटर दूर है। एरोड्रम रोड से सीधे यहां पहुंच सकते हो। 5. रालामंडल अभयारण्य : इंदौर शहर से 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित रालामंडल अभयारण्य इंदौर शहर की एक शानदार जगह है, जो चारों तरफ से जगलों से घिरी हुई है। यहां पर पर्यटक को लुभाने के लिए डियर पार्क बनाया गया है। डियर पार्क में आप सफारी का मजा ले सकते हैं। 6. देवास टेकरी : इंदौर से लगभग 35 किलोमीटर दूर देवास नगर में माताजी की एक छोटी सी पहाड़ी है। यहां पर आप घूमने, दर्शन करने के साथ ही पिकनिक का मजा भी ले सकते हैं। देवास से 5 किलोमीटर दूर शंकरगढ़, नागदाह और बिलावली नामक स्थान भी घूमने और पिकनिक के लिए आदर्श स्थान है। यहां पर पहाड़ी पर जाने के लिए आप ट्राम का मजा भी ले सकते हो। 7. चोरल नदी डेम : खंडवा रोड के आगे जोरल गांव है जहां पर थोड़ी दूरी पर ही चोरल नदी बहती है। यहां रिसॉर्ट है और साथ ही आप यहां बोटिंग का मजा भी ले सकते हैं। 8. शीतला माता फॉल : इंदौर से करीब 55 किलोमीटर दूर यह स्थान है। मानपुर से यह जगह 3 किलोमीटर जानापावा की जगह है। यहां दो झरने हैं एक जरा ज्यादा रिस्की है। 9. कजलीगढ़ : इंदौर से लगभग 25 किलोमीटर दूर उत्तर सिमरोल से यहां के लिए रास्ता जाता है। यहां झरने, पहाड़ और प्राचीन किले देखे जा सकते हैं। यहां एक शिव मंदिर भी है। 10. वाचू पॉइंट : इंदौर से लगभग 65 किलोमीटर दूर वाचू पॉइंट है जहां से मालवा का पठार प्रारंभ होता है। बारिश के मौसम में यहां पहाड़ियों के बीच से गुजरते बादलों को देखना बहुत ही सुंदर लगता है। यह हिल स्टेशन है। इसी स्थान से इंदौर को नर्मदा जल प्रदाय किया जाता है। जलूद पम्प स्टेशन से पानी पाइप के सहारे पहाड़ी पर पहुंचाया जाता है। यहां फॉरेस्ट डिपार्टमेंट और पीड्ब्ल्यूडी के रेस्ट हाउस भी जहां पहले से अनुमति लेकर रूका भी जा सकता है। यहां मानपुर होते हुए पहुंचा जा सकता है। इसके अलावा इंदौर के आसमान घूमने के और भी कई स्थान है जैसे तीर्थ नगरी उज्जैन। उज्जैन में विष्णु सागर एक पिकनिक स्पॉट है। उज्जैन के अलावा मांडू, बागली, नेमावर, उदरपुरा, गिदिया खो, हरदा, डबलचौकी, ओमकारेश्वर, महेश्वर, मंडलेश्वर आदि और भी कई स्थान है।
मध्य प्रदेश का व्यावसायिक नगर इंदौर देश में स्वच्छता में नंबर वन है। यहां के प्रसिद्ध स्थान है राजबाड़ा, गोपाल मंदिर, लाल बाग पैलेस, खजराना गणेश मंदिर, बिजासन माता का मंदिर, पितृ पर्वत, गोम्मट गिरी, देवगुराड़िया आदि कई स्थान ऐसे हैं जो इंदौर के अंदर ही है। हम आपको इंदौर के बाहर आसपास घूमने के दस खूबसूरत पिकनिक स्टॉप बताते हैं। एक. पातालपानी : पातालपानी जलप्रपात इंदौर जिले की महू तहसील में स्थित है। यहां लगभग तीन सौ फीट ऊंचाई नीचे जल गिरता है। पातालपानी के आसपास का क्षेत्र बहुत ही सुंदर और हराभरा है। यह एक लोकप्रिय पिकनिक और ट्रेकिंग स्पॉट भी है। यहां के लिए महू से स्पेशल ट्रेन चलती है। इंदौर से लगभग छत्तीस किलोग्राममीटर दूर है यह स्थान। दो. गंगा महादेव मंदिर : इंदौर के पास धार जिले में तिरला विकासखंड के सुल्तानपुर गांव में गंगा महादेव मंदिर स्थित है जो इंदौर के लोगों के लिए एक दर्शनीय स्थल के साथ ही पिकनिक स्पॉट भी है। गंगा महादेव में सुन्दर झरना बहता है और यहां की प्राकृतिक छटा देखते ही रह जाओगे। तीन. तिंछा फॉल : यह मुख्य इंदौर से लगभग पच्चीस किलोग्राममीटर दूर नेमावर-मुंबई रोड़ पर स्थित है। यह भी भी बहुत ऊंचाई से झरना गिरता है। इंदौर के लोगों के लिए यह सबसे खास डेस्टिनेशन है। सिमलोल मेन रोड़ से नौ किलोग्राममीटर अंदर है तिंचा फॉल। चार. गुलावत : इंदौर जिले की हड़ौद तेहसिल में लोटस वैली के नाम से प्रसिद्ध इस स्थान पर भी आप घूमने जा सकते हैं। यहां लाखों कमल के फूल एक झील में खिलते हुए देख सकते हैं। यह स्थान भी शहर से लगभग पैंतीस किलोग्राममीटर दूर है। एरोड्रम रोड से सीधे यहां पहुंच सकते हो। पाँच. रालामंडल अभयारण्य : इंदौर शहर से बारह किलोग्राममीटर की दूरी पर स्थित रालामंडल अभयारण्य इंदौर शहर की एक शानदार जगह है, जो चारों तरफ से जगलों से घिरी हुई है। यहां पर पर्यटक को लुभाने के लिए डियर पार्क बनाया गया है। डियर पार्क में आप सफारी का मजा ले सकते हैं। छः. देवास टेकरी : इंदौर से लगभग पैंतीस किलोग्राममीटर दूर देवास नगर में माताजी की एक छोटी सी पहाड़ी है। यहां पर आप घूमने, दर्शन करने के साथ ही पिकनिक का मजा भी ले सकते हैं। देवास से पाँच किलोग्राममीटर दूर शंकरगढ़, नागदाह और बिलावली नामक स्थान भी घूमने और पिकनिक के लिए आदर्श स्थान है। यहां पर पहाड़ी पर जाने के लिए आप ट्राम का मजा भी ले सकते हो। सात. चोरल नदी डेम : खंडवा रोड के आगे जोरल गांव है जहां पर थोड़ी दूरी पर ही चोरल नदी बहती है। यहां रिसॉर्ट है और साथ ही आप यहां बोटिंग का मजा भी ले सकते हैं। आठ. शीतला माता फॉल : इंदौर से करीब पचपन किलोग्राममीटर दूर यह स्थान है। मानपुर से यह जगह तीन किलोग्राममीटर जानापावा की जगह है। यहां दो झरने हैं एक जरा ज्यादा रिस्की है। नौ. कजलीगढ़ : इंदौर से लगभग पच्चीस किलोग्राममीटर दूर उत्तर सिमरोल से यहां के लिए रास्ता जाता है। यहां झरने, पहाड़ और प्राचीन किले देखे जा सकते हैं। यहां एक शिव मंदिर भी है। दस. वाचू पॉइंट : इंदौर से लगभग पैंसठ किलोग्राममीटर दूर वाचू पॉइंट है जहां से मालवा का पठार प्रारंभ होता है। बारिश के मौसम में यहां पहाड़ियों के बीच से गुजरते बादलों को देखना बहुत ही सुंदर लगता है। यह हिल स्टेशन है। इसी स्थान से इंदौर को नर्मदा जल प्रदाय किया जाता है। जलूद पम्प स्टेशन से पानी पाइप के सहारे पहाड़ी पर पहुंचाया जाता है। यहां फॉरेस्ट डिपार्टमेंट और पीड्ब्ल्यूडी के रेस्ट हाउस भी जहां पहले से अनुमति लेकर रूका भी जा सकता है। यहां मानपुर होते हुए पहुंचा जा सकता है। इसके अलावा इंदौर के आसमान घूमने के और भी कई स्थान है जैसे तीर्थ नगरी उज्जैन। उज्जैन में विष्णु सागर एक पिकनिक स्पॉट है। उज्जैन के अलावा मांडू, बागली, नेमावर, उदरपुरा, गिदिया खो, हरदा, डबलचौकी, ओमकारेश्वर, महेश्वर, मंडलेश्वर आदि और भी कई स्थान है।
श्रीलंका क्रिकेट चयन समिति ने 2022/23 के भारत के आगामी श्रीलंका दौरे के लिए 20 सदस्यीय टीम का ऐलान कर दिया है। दासुन शनाका वनडे और T20 सीरीज में टीम के कप्तान होंगे जबकि कुसल मेंडिंस वनडे सीरीज में उपकप्तानी का जिम्मा संभालेंगे। भानुका राजपक्षे और नुवान तुषारा को सिर्फ T20I टीम में जगह दी गई है जबकि नुवानिडु फर्नांडो केवल वनडे टीम का हिस्सा होंगे। अविष्का फर्नांडो की श्रीलंका की टीम में वापसी हुई। फर्नांडो ने श्रीलंका की ओर से पिछला मैच फरवरी में खेला था जिसके बाद वह चोटिल होने के कारण टीम से बाहर हो गए थे। सदीरा समरविक्रम को दिनेश चांदीमल पर तरजीह देते हुए टीम में शामिल किया गया है जबकि चमिका करूणारत्ने की भी टीम में वापसी हुई है। मुंबई में पहले T20 मुकाबले के बाद सीरीज के दो अन्य मैच पुणे (पांच जनवरी) और राजकोट (सात जनवरी) में खेले जाएंगे। वनडे सीरीज के मुकाबले गुवाहाटी, कोलकाता और तिरुवनंतपुरम में क्रमशः 10, 12 और 15 जनवरी को होंगे। भारत दौरे के लिए श्रीलंका की टीमः दासुन शनाका (कप्तान), पथुम निसंका, अविष्का फर्नांडो, सदीरा समरविक्रमा, कुसल मेंडिस (ODI उपकप्तान), भानुका राजपक्षे (केवल T20I के लिए) चरिथ असलंका, धनंजय डी सिल्वा, वानिन्दु हसरंगा, एशेन बंडारा, महेश तीक्षाना, जेफरी वांडरसे, दिमुथ करुणारत्ने, दिलशान मधुशंका, कसुन राजिथा, नुवानिडु फर्नांडो (केवल ODI मैचों के लिए), डुनिथ वेलालेज, प्रमोद मदुशन, लाहिरू कुमारा, नुवान तुषारा (केवल T20I मैचों के लिए)। लंका के ऐलान करने से एक दिन पहले ही भारत ने 3 मैचों की T20I और वनडे सीरीज के लिए अपनी टीम घोषित की थी। T20I में हार्दिक पांड्या कप्तानी करेंगे जबकि वनडे में रोहित शर्मा टीम इंडिया की कमान संभालेंगे। T20I सीरीज के लिए भारत की टीमः हार्दिक पांड्या (कप्तान), इशान किशन (wk), रुतुराज गायकवाड़, शुभमन गिल, सूर्यकुमार यादव (VC), दीपक हुड्डा, राहुल त्रिपाठी, संजू सैमसन, वाशिंगटन सुंदर, युजवेंद्र चहल, अक्षर पटेल, अर्शदीप सिंह, हर्षल पटेल, उमरान मलिक, शिवम मावी, मुकेश कुमार। वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीमः रोहित शर्मा (कप्तान), शुभमन गिल, विराट कोहली, सूर्यकुमार यादव, श्रेयस अय्यर, केएल राहुल (विकेटकीपर), ईशान किशन (विकेटकीपर), हार्दिक पांड्या (उपकप्तान), वाशिंगटन सुंदर, युजवेंद्र चहल, कुलदीप यादव, अक्षर पटेल, मोहम्मद शमी, मोहम्म सिराज, उमरान मलिक, अर्शदीप सिंह।
श्रीलंका क्रिकेट चयन समिति ने दो हज़ार बाईस/तेईस के भारत के आगामी श्रीलंका दौरे के लिए बीस सदस्यीय टीम का ऐलान कर दिया है। दासुन शनाका वनडे और Tबीस सीरीज में टीम के कप्तान होंगे जबकि कुसल मेंडिंस वनडे सीरीज में उपकप्तानी का जिम्मा संभालेंगे। भानुका राजपक्षे और नुवान तुषारा को सिर्फ TबीसI टीम में जगह दी गई है जबकि नुवानिडु फर्नांडो केवल वनडे टीम का हिस्सा होंगे। अविष्का फर्नांडो की श्रीलंका की टीम में वापसी हुई। फर्नांडो ने श्रीलंका की ओर से पिछला मैच फरवरी में खेला था जिसके बाद वह चोटिल होने के कारण टीम से बाहर हो गए थे। सदीरा समरविक्रम को दिनेश चांदीमल पर तरजीह देते हुए टीम में शामिल किया गया है जबकि चमिका करूणारत्ने की भी टीम में वापसी हुई है। मुंबई में पहले Tबीस मुकाबले के बाद सीरीज के दो अन्य मैच पुणे और राजकोट में खेले जाएंगे। वनडे सीरीज के मुकाबले गुवाहाटी, कोलकाता और तिरुवनंतपुरम में क्रमशः दस, बारह और पंद्रह जनवरी को होंगे। भारत दौरे के लिए श्रीलंका की टीमः दासुन शनाका , पथुम निसंका, अविष्का फर्नांडो, सदीरा समरविक्रमा, कुसल मेंडिस , भानुका राजपक्षे चरिथ असलंका, धनंजय डी सिल्वा, वानिन्दु हसरंगा, एशेन बंडारा, महेश तीक्षाना, जेफरी वांडरसे, दिमुथ करुणारत्ने, दिलशान मधुशंका, कसुन राजिथा, नुवानिडु फर्नांडो , डुनिथ वेलालेज, प्रमोद मदुशन, लाहिरू कुमारा, नुवान तुषारा । लंका के ऐलान करने से एक दिन पहले ही भारत ने तीन मैचों की TबीसI और वनडे सीरीज के लिए अपनी टीम घोषित की थी। TबीसI में हार्दिक पांड्या कप्तानी करेंगे जबकि वनडे में रोहित शर्मा टीम इंडिया की कमान संभालेंगे। TबीसI सीरीज के लिए भारत की टीमः हार्दिक पांड्या , इशान किशन , रुतुराज गायकवाड़, शुभमन गिल, सूर्यकुमार यादव , दीपक हुड्डा, राहुल त्रिपाठी, संजू सैमसन, वाशिंगटन सुंदर, युजवेंद्र चहल, अक्षर पटेल, अर्शदीप सिंह, हर्षल पटेल, उमरान मलिक, शिवम मावी, मुकेश कुमार। वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीमः रोहित शर्मा , शुभमन गिल, विराट कोहली, सूर्यकुमार यादव, श्रेयस अय्यर, केएल राहुल , ईशान किशन , हार्दिक पांड्या , वाशिंगटन सुंदर, युजवेंद्र चहल, कुलदीप यादव, अक्षर पटेल, मोहम्मद शमी, मोहम्म सिराज, उमरान मलिक, अर्शदीप सिंह।
सांवले रंग के कारण कई अभिनेत्रियों को भेदभाव का शिकार होना पड़ा है। उन्ही में शामिल रहीं हैं एक्ट्रेस चित्रांगदा सिंह। आप सभी ने चित्रांगदा सिंह को कई बेहतरीन फिल्मों में देखा होगा। चित्रांगदा सिंह को उनके किरदारों के लिए जाना जाता है और उन्होंने अपनी एक्टिंग से सभी का दिल जीता है। ऐसे में हाल ही में उन्होंने खुलासा किया है कि सांवले रंग के कारण उन्होंने भेदभाव का सामना किया है। उन्होंने हाल ही में एक वेबसाइट से बातचीत में कहा- 'मैंने बचपन से बड़े होने के दौरान डिसक्रिमिनेशन का सामना किया है। मॉडलिंग के प्रोफेशन में भी इसका सामना किया है। सांवले रंग के कारण मुझे मॉडलिंग के कई असाइनमेंट नहीं दिए गए। ' जी दरअसल बीते दिनों ही चित्रांगदा ने एक इंस्टाग्राम स्टोरी शेयर की थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि 'वो 'भूरी और खुश' हैं। ' अब हाल ही में दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि, 'त्वचा के रंग के आधार पर बहुत अधिक डिसक्रिमिनेशन होता है। हर कोई घर से व्हाइट स्किन्ड वाले लोगों की तलाश में नहीं निकलता। मैं सांवली रंगत वाली लड़की के रूप में जीवन जीने की भावना को जानती हूं। हालांकि ऐसी बात नहीं है कि लोग सीधे आपके चेहरे पर कहेंगे, आप केवल इसे समझ सकते हैं। उत्तर भारत में बचपन से बड़े होने के दौरान मैं इस तरह के पूर्वाग्रह से गुजर चुकी हूं। ' आप सभी को हम यह भी बता दें कि मुंबई आने से पहले चित्रांगदा सिंह राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में रहती थी। हाल ही में दिए इंटरव्यू में चित्रांगदा ने कहा, 'मुझे मॉडलिंग के असाइनमेंट में नहीं लिया गया क्योंकि मैं सांवली थीं। मॉडलिंग के शुरुआती दिनों में मुझसे कह दिया गया कि मैं सांवली हूं। मेरे उसी ऑडिशन को गुलजार सर ने देखा। ऑडिशन देखने के बाद उन्होंने अपने म्यूजिक वीडियो में मुझे काम दे दिया। इसके बाद मुझे हौसला मिला कि हर कोई गोरा रंग के आधार पर ही काम नहीं देता। ' इन दिनों वह डायलॉग्स लिख रहीं हैं।
सांवले रंग के कारण कई अभिनेत्रियों को भेदभाव का शिकार होना पड़ा है। उन्ही में शामिल रहीं हैं एक्ट्रेस चित्रांगदा सिंह। आप सभी ने चित्रांगदा सिंह को कई बेहतरीन फिल्मों में देखा होगा। चित्रांगदा सिंह को उनके किरदारों के लिए जाना जाता है और उन्होंने अपनी एक्टिंग से सभी का दिल जीता है। ऐसे में हाल ही में उन्होंने खुलासा किया है कि सांवले रंग के कारण उन्होंने भेदभाव का सामना किया है। उन्होंने हाल ही में एक वेबसाइट से बातचीत में कहा- 'मैंने बचपन से बड़े होने के दौरान डिसक्रिमिनेशन का सामना किया है। मॉडलिंग के प्रोफेशन में भी इसका सामना किया है। सांवले रंग के कारण मुझे मॉडलिंग के कई असाइनमेंट नहीं दिए गए। ' जी दरअसल बीते दिनों ही चित्रांगदा ने एक इंस्टाग्राम स्टोरी शेयर की थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि 'वो 'भूरी और खुश' हैं। ' अब हाल ही में दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि, 'त्वचा के रंग के आधार पर बहुत अधिक डिसक्रिमिनेशन होता है। हर कोई घर से व्हाइट स्किन्ड वाले लोगों की तलाश में नहीं निकलता। मैं सांवली रंगत वाली लड़की के रूप में जीवन जीने की भावना को जानती हूं। हालांकि ऐसी बात नहीं है कि लोग सीधे आपके चेहरे पर कहेंगे, आप केवल इसे समझ सकते हैं। उत्तर भारत में बचपन से बड़े होने के दौरान मैं इस तरह के पूर्वाग्रह से गुजर चुकी हूं। ' आप सभी को हम यह भी बता दें कि मुंबई आने से पहले चित्रांगदा सिंह राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में रहती थी। हाल ही में दिए इंटरव्यू में चित्रांगदा ने कहा, 'मुझे मॉडलिंग के असाइनमेंट में नहीं लिया गया क्योंकि मैं सांवली थीं। मॉडलिंग के शुरुआती दिनों में मुझसे कह दिया गया कि मैं सांवली हूं। मेरे उसी ऑडिशन को गुलजार सर ने देखा। ऑडिशन देखने के बाद उन्होंने अपने म्यूजिक वीडियो में मुझे काम दे दिया। इसके बाद मुझे हौसला मिला कि हर कोई गोरा रंग के आधार पर ही काम नहीं देता। ' इन दिनों वह डायलॉग्स लिख रहीं हैं।
बेशक शिमला शहर स्मार्ट सिटी योजना के तहत लाया गया है, लेकिन यह जाम सिटी बनकर रह गया है, जिससे लोग प्रतिदिन लगने वाले जाम से दो चार हो रहे है। जिला प्रशासन ने पुलिस महकमे के सहयोग और आम लोगों की राय के बाद ट्रैफिक प्लान बनाया है, लेकिन यह प्लान अभी तक फाइलों की धूल फांक रहा है और यह धरातल पर नहीं उतर सका है। इस प्लान के तहत बड़ी बसों को बाहर बाहर से ही भेजने का प्रावधान है, लेकिन इसे अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है। नतीजतन प्रतिदिन कार्यालयों, अस्पतालों सहित अन्य कामों से जाने वाले लोगों को शिमला शहर के जाम से जूझना पड़ता है। आलम यह होता है कि लोग शिमला शहर के पास पहुंचते ही पैदल चलना शुरू कर देते है, ताकि जाम में न फंसकर वह अपने गंतव्यों तक पहुंच सके। सबसे अधिक दिक्कत वर्किंग डे और वीकेंड के बाद रहती है, जहां लोग चंद मिनटों का फासला घंटों में तय करने को बाध्य हो जाते है। सबसे अधिक दिक्कत लोगों को उपचार करवाने के लिए अस्पतालों को जाने में झेलते है, क्योंकि जाम में फंसने के कारण वह समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते है, जिससे उनके पंजीकरण से लेकर टेस्ट आदि करवाने और ओपीडी में अपना नंबर आने के लिए पूरे दिन का इंतजार भूखे प्यासे भी करना पड़ जाता है, जबकि सुबह दस बजे कार्यालयों में पहुंचने के लिए कर्मचारी कड़ी मशक्कत करते है, लेकिन फिर भी समय से नहीं पहुंच पाते है। (एचडीएम)
बेशक शिमला शहर स्मार्ट सिटी योजना के तहत लाया गया है, लेकिन यह जाम सिटी बनकर रह गया है, जिससे लोग प्रतिदिन लगने वाले जाम से दो चार हो रहे है। जिला प्रशासन ने पुलिस महकमे के सहयोग और आम लोगों की राय के बाद ट्रैफिक प्लान बनाया है, लेकिन यह प्लान अभी तक फाइलों की धूल फांक रहा है और यह धरातल पर नहीं उतर सका है। इस प्लान के तहत बड़ी बसों को बाहर बाहर से ही भेजने का प्रावधान है, लेकिन इसे अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है। नतीजतन प्रतिदिन कार्यालयों, अस्पतालों सहित अन्य कामों से जाने वाले लोगों को शिमला शहर के जाम से जूझना पड़ता है। आलम यह होता है कि लोग शिमला शहर के पास पहुंचते ही पैदल चलना शुरू कर देते है, ताकि जाम में न फंसकर वह अपने गंतव्यों तक पहुंच सके। सबसे अधिक दिक्कत वर्किंग डे और वीकेंड के बाद रहती है, जहां लोग चंद मिनटों का फासला घंटों में तय करने को बाध्य हो जाते है। सबसे अधिक दिक्कत लोगों को उपचार करवाने के लिए अस्पतालों को जाने में झेलते है, क्योंकि जाम में फंसने के कारण वह समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते है, जिससे उनके पंजीकरण से लेकर टेस्ट आदि करवाने और ओपीडी में अपना नंबर आने के लिए पूरे दिन का इंतजार भूखे प्यासे भी करना पड़ जाता है, जबकि सुबह दस बजे कार्यालयों में पहुंचने के लिए कर्मचारी कड़ी मशक्कत करते है, लेकिन फिर भी समय से नहीं पहुंच पाते है।
नई दिल्लीः दिल्ली के एक पॉश इलाके के एक बड़े आश्रम पर कोर्ट के आदेश के बाद महिला आयोग और दिल्ली पुलिस की टीम ने रेड डाली और इस रेड में आश्रम के अंदर से जो कुछ मिला वो चौंकाने वाला था। मामला है देश की राजधानी दिल्ली में रोहिणी के विजय विहार इलाक़े की जहां एक आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के सर्वे-सर्वा बाबा पर लगा है यहां रहने वाली लड़कियों से यौन शोषण करने का आरोप। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाती मालीवाल पुलिस की पूरी फौज के साथ इस आश्रम में रेड करने पहुंची थी। जैसे ही इलाक़े के लोगों को आश्रम में रेड की ख़बर मिली वहां भीड़ जमा हो गई। क़रीब 4 बजे रेड करने के लिए पुलिस की टीम आश्रम के अंदर दाखिल हुई और क़रीब 7 घंटे बाद जब आश्रम से बाहर निकली तो पुलिसवालों के हाथों में कई बोरियां थीं। बताया जा रहा कि रेड के दौरान आश्रम के कुछ लोगों ने स्वाति मालीवाल और पुलिस की टीम पर हमला भी किया जिसके बाद पुलिस ने आश्रम से एक लड़की और यहां तैनात एक गार्ड को हिरासत में ले लिया। आखिर किसका है ये आश्रम और कौन है ये बाबा? अब सवाल ये है कि आखिर किसका है ये आश्रम और कौन है ये बाबा जिस पर लड़कियों के साथ बेहद घिनौनी हरकत करने का आरोप है और इस आध्यात्मिक विश्वविद्यालय की चाहर दिवारियों के पीछे लड़कियों के साथ आखिर क्या होता है। दिल्ली जिस आश्रम के बाहर आधी रात हंगामा हुआ, भागमभाग हुई, वो आश्रम कम और पाप का अड्डा ज़्यादा है। दिल्ली के इस आश्रम के अंदर बाबा पर बलात्कार, नाबालिग लड़कियों को कैद करने और सेक्स रैकेट चलाने के बेहद संगीन आरोप हैं। इस बाबा का नाम है वीरेंद्र देव दीक्षित जो वैसे तो लोगों को देवता, मानवता और लोक कल्याण का संदेश देता है लेकिन खुद करता है महापाप। दिल्ली के रोहिणी इलाके में बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित का आध्यात्मिक विश्वविद्यालय क़रीब चालीस सालों से चल रहा है लेकिन अब जब इस आश्रम को लेकर खुलासों का दौर शुरू हुआ तो पता चला कि ये कोई आश्रम नहीं बल्कि एक पाखंडी के पाप का किला है। मंगलवार रात को दिल्ली पुलिस की टीम ने आश्रम से जुड़ी घिनौनी करतूतों का सच जानने के लिए यहां रेड की। एक महीने पहले कुछ परिवार वालों ने आश्रम पर धावा बोला था और बाबा पर लड़कियों को कैद में रखने और उनका यौन शोषण जैसे बेहद संगीन आरोप लगाए थे। फर्रुखाबाद से दिल्ली आकर बसने वाले इस बाबा के साथ इतने कांड जुड़े हैं जो इसे दूसरा राम रहीम बनाते हैं। वीरेंद्र देव दीक्षित की दरिंदंगी का शिकार बनी एक लड़की के मुताबिक़ आश्रम में राम रहीम की तरह ही इस बाबा ने भी कई गुफा, छोटे-छोटे गुप्त रास्ते बना रखे हैं। खुद को भगवान शंकर, राम और कृष्ण कहने वाला वीरेंद्र देव दलील देता है कि उसकी सभी लड़कियां सोलह हजार रानियां हैं। पुलिस बाबा के ख़िलाफ़ जांच कर रही है लेकिन वीरेंद्र देव दीक्षित का कोई अता पता नहीं है।
नई दिल्लीः दिल्ली के एक पॉश इलाके के एक बड़े आश्रम पर कोर्ट के आदेश के बाद महिला आयोग और दिल्ली पुलिस की टीम ने रेड डाली और इस रेड में आश्रम के अंदर से जो कुछ मिला वो चौंकाने वाला था। मामला है देश की राजधानी दिल्ली में रोहिणी के विजय विहार इलाक़े की जहां एक आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के सर्वे-सर्वा बाबा पर लगा है यहां रहने वाली लड़कियों से यौन शोषण करने का आरोप। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाती मालीवाल पुलिस की पूरी फौज के साथ इस आश्रम में रेड करने पहुंची थी। जैसे ही इलाक़े के लोगों को आश्रम में रेड की ख़बर मिली वहां भीड़ जमा हो गई। क़रीब चार बजे रेड करने के लिए पुलिस की टीम आश्रम के अंदर दाखिल हुई और क़रीब सात घंटाटे बाद जब आश्रम से बाहर निकली तो पुलिसवालों के हाथों में कई बोरियां थीं। बताया जा रहा कि रेड के दौरान आश्रम के कुछ लोगों ने स्वाति मालीवाल और पुलिस की टीम पर हमला भी किया जिसके बाद पुलिस ने आश्रम से एक लड़की और यहां तैनात एक गार्ड को हिरासत में ले लिया। आखिर किसका है ये आश्रम और कौन है ये बाबा? अब सवाल ये है कि आखिर किसका है ये आश्रम और कौन है ये बाबा जिस पर लड़कियों के साथ बेहद घिनौनी हरकत करने का आरोप है और इस आध्यात्मिक विश्वविद्यालय की चाहर दिवारियों के पीछे लड़कियों के साथ आखिर क्या होता है। दिल्ली जिस आश्रम के बाहर आधी रात हंगामा हुआ, भागमभाग हुई, वो आश्रम कम और पाप का अड्डा ज़्यादा है। दिल्ली के इस आश्रम के अंदर बाबा पर बलात्कार, नाबालिग लड़कियों को कैद करने और सेक्स रैकेट चलाने के बेहद संगीन आरोप हैं। इस बाबा का नाम है वीरेंद्र देव दीक्षित जो वैसे तो लोगों को देवता, मानवता और लोक कल्याण का संदेश देता है लेकिन खुद करता है महापाप। दिल्ली के रोहिणी इलाके में बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित का आध्यात्मिक विश्वविद्यालय क़रीब चालीस सालों से चल रहा है लेकिन अब जब इस आश्रम को लेकर खुलासों का दौर शुरू हुआ तो पता चला कि ये कोई आश्रम नहीं बल्कि एक पाखंडी के पाप का किला है। मंगलवार रात को दिल्ली पुलिस की टीम ने आश्रम से जुड़ी घिनौनी करतूतों का सच जानने के लिए यहां रेड की। एक महीने पहले कुछ परिवार वालों ने आश्रम पर धावा बोला था और बाबा पर लड़कियों को कैद में रखने और उनका यौन शोषण जैसे बेहद संगीन आरोप लगाए थे। फर्रुखाबाद से दिल्ली आकर बसने वाले इस बाबा के साथ इतने कांड जुड़े हैं जो इसे दूसरा राम रहीम बनाते हैं। वीरेंद्र देव दीक्षित की दरिंदंगी का शिकार बनी एक लड़की के मुताबिक़ आश्रम में राम रहीम की तरह ही इस बाबा ने भी कई गुफा, छोटे-छोटे गुप्त रास्ते बना रखे हैं। खुद को भगवान शंकर, राम और कृष्ण कहने वाला वीरेंद्र देव दलील देता है कि उसकी सभी लड़कियां सोलह हजार रानियां हैं। पुलिस बाबा के ख़िलाफ़ जांच कर रही है लेकिन वीरेंद्र देव दीक्षित का कोई अता पता नहीं है।
ग्वालियर-चंबल अंचल की तेरह सीटाें पर उपचुनाव हाेना है, इसके लिए तीन नवंबर काे मतदान हाेगा। रविवार शाम छह बजे चुनाव प्रचार थमने से पहले भाजपा और कांग्रेस दाेनाें ही दलाें ने पूरी ताकत झाेंक दी है। कांग्रेस प्रत्याशियाें के समर्थन में पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ मुरैना में राेड शाे कर रहे हैं। वहीं भाजपा प्रत्याशियाें के समर्थन में राज्यसभा सदस्य ज्याेतिरादित्य सिंधिया और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा अंचल में सभाएं लेंगे। रविवार काे शाम छह बजे के बाद राजनीतिक दल काेई भी सभा या राेड शाे नहीं कर सकेंगे। इसके बाद व्यक्तिगत प्रचार ही संभव हाे सकेगा। इसलिए दाेनाें ही दलाें का फाेकस है कि किसी भी तरह अधिक से अधिक विधानसभा क्षेत्राें में स्टार प्रचारकाें की सभाएं हाे सकें। ऐसे में सुबह से ही अंचल में राजनीतिक गतिविधियां बढ़ गई हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ का अपने पुत्र नकुल नाथ के साथ कांग्रेस प्रत्याशियाें के समर्थन में मुरैना में राेड शाे जारी है। इसमें खुली जीप में सवार कमल नाथ लाेगाें काे अभिवादन करते हुए चल रहे हैं। इसके बाद वह ग्वालियर विधानसभा क्षेत्र में इंटक मैदान में कार्यकर्ता सम्मेलन काे संबाेधित करेंगे और पत्रकाराें से चर्चा करेंगे। राज्यसभा सदस्य ज्याेतिरादित्य सिंधिया की मेहगांव के अमायन में आमसभा चल रही है। वे दाेपहर 12. 30 बजे भांडेर विधानसभा क्षेत्र और दाेपहर दाे बजे करैरा विधानसभा क्षेत्र में सभा काे संबाेधित करेंगे। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा दाेपहर एक बजे दिमनी विधानसभा क्षेत्र में बैठक लेंगे, इसके बाद मुरैना में सामाजिक बैठक काे संबाेधित करेंगे। शाम चार बजे ग्वालियर विधानसभा क्षेत्र में काेट्श्वर मंडल द्वारा राय प्रगति गार्डन में आयाेजित सभा काे संबाेधित करेंगे। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह ताेमर रविवार काे दाेपहर बारह बजे अंबाह में राेड शाे करेंगे। इसके बाद पाेरसा में भी राेड शाे हाेगा। भारतीय जनता युवा माेर्चा ने ग्वालियर पूर्व विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी मुन्नालाल गाेयल के समर्थन में वाहन रैली निकाली। यह रैली सुबह ग्यारह बजे महाराजा कॉम्पलेक्स डीडी नगर से शुरू हुई और बारादरी, थाटीपुर चाैराहा, कटाेराताल से हाेते हुए इंदरगंज पहुंचकर समाप्त हुई।
ग्वालियर-चंबल अंचल की तेरह सीटाें पर उपचुनाव हाेना है, इसके लिए तीन नवंबर काे मतदान हाेगा। रविवार शाम छह बजे चुनाव प्रचार थमने से पहले भाजपा और कांग्रेस दाेनाें ही दलाें ने पूरी ताकत झाेंक दी है। कांग्रेस प्रत्याशियाें के समर्थन में पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ मुरैना में राेड शाे कर रहे हैं। वहीं भाजपा प्रत्याशियाें के समर्थन में राज्यसभा सदस्य ज्याेतिरादित्य सिंधिया और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा अंचल में सभाएं लेंगे। रविवार काे शाम छह बजे के बाद राजनीतिक दल काेई भी सभा या राेड शाे नहीं कर सकेंगे। इसके बाद व्यक्तिगत प्रचार ही संभव हाे सकेगा। इसलिए दाेनाें ही दलाें का फाेकस है कि किसी भी तरह अधिक से अधिक विधानसभा क्षेत्राें में स्टार प्रचारकाें की सभाएं हाे सकें। ऐसे में सुबह से ही अंचल में राजनीतिक गतिविधियां बढ़ गई हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ का अपने पुत्र नकुल नाथ के साथ कांग्रेस प्रत्याशियाें के समर्थन में मुरैना में राेड शाे जारी है। इसमें खुली जीप में सवार कमल नाथ लाेगाें काे अभिवादन करते हुए चल रहे हैं। इसके बाद वह ग्वालियर विधानसभा क्षेत्र में इंटक मैदान में कार्यकर्ता सम्मेलन काे संबाेधित करेंगे और पत्रकाराें से चर्चा करेंगे। राज्यसभा सदस्य ज्याेतिरादित्य सिंधिया की मेहगांव के अमायन में आमसभा चल रही है। वे दाेपहर बारह. तीस बजे भांडेर विधानसभा क्षेत्र और दाेपहर दाे बजे करैरा विधानसभा क्षेत्र में सभा काे संबाेधित करेंगे। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा दाेपहर एक बजे दिमनी विधानसभा क्षेत्र में बैठक लेंगे, इसके बाद मुरैना में सामाजिक बैठक काे संबाेधित करेंगे। शाम चार बजे ग्वालियर विधानसभा क्षेत्र में काेट्श्वर मंडल द्वारा राय प्रगति गार्डन में आयाेजित सभा काे संबाेधित करेंगे। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह ताेमर रविवार काे दाेपहर बारह बजे अंबाह में राेड शाे करेंगे। इसके बाद पाेरसा में भी राेड शाे हाेगा। भारतीय जनता युवा माेर्चा ने ग्वालियर पूर्व विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी मुन्नालाल गाेयल के समर्थन में वाहन रैली निकाली। यह रैली सुबह ग्यारह बजे महाराजा कॉम्पलेक्स डीडी नगर से शुरू हुई और बारादरी, थाटीपुर चाैराहा, कटाेराताल से हाेते हुए इंदरगंज पहुंचकर समाप्त हुई।
पठानकोट में हुए आतंकी हमले के सूत्रधार और जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगवाने के प्रस्ताव पर चीन की अड़ंगेबाजी को लेकर भारत पहले ही नाराजगी जता चुका था। अब उसने उचित ही इस मसले पर संयुक्त राष्ट्र में जवाबदेही का सवाल उठाया है। गौरतलब है कि आतंकी संगठनों व व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्तावों पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक समिति विचार करती है। पिछले दिनों मसूद अजहर को प्रतिबंधित करने का भारत का प्रस्ताव आया तो चीन ने उसे नाकाम कर दिया। समिति के पंद्रह सदस्यों में चीन भी शामिल है। चीन के ना कहने से प्रस्ताव गिर गया, क्योंकि समिति इस आधार पर काम करती है कि उसके फैसले सर्वसम्मति से होंगे और किसका क्या रुख था यह औपचारिक तौर पर नहीं बताया जाएगा। इसलिए चीन के ना को 'गुप्त वीटो' कहा गया। सवाल है कि गोपनीयता का यह प्रावधान क्यों? संयुक्त राष्ट्र महासभा के सामने समिति अपनी जवाबदेही कैसे साबित कर सकती है, अगर वह औपचारिक रूप से यह नहीं बताएगी कि किस प्रस्ताव को क्यों स्वीकार या खारिज किया गया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी दूत अकबरूद््दीन ने यह मौजूं सवाल उठाया है कि प्रतिबंध समिति अंतरराष्ट्रीय समुदाय के भरोसे की बिना पर काम करती है, लिहाजा वह संयुक्त राष्ट्र महासभा के सामने अपने फैसलों के कारण बताने से कैसे बच सकती है? जहां तक मसूद अजहर को प्रतिबंधित करने के भारत के प्रस्ताव का सवाल है, उसे खारिज करने से चीन की साख पर बट्टा लगा है। द्विपक्षीय बातचीत में और वैश्विक मंचों पर भी चीन आतंकवाद के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता दोहराता आया है। फिर उसने भारत के प्रस्ताव को पलीता क्यों लगाया? अगर पठानकोट मामले में उसे सबूतों का इंतजार था, तब भी पहले के रिकार्ड मसूद अजहर को प्रतिबंधित करने के लिए काफी थे। हाफिज सईद और मसूद अजहर ने ही भारत पर हुए अधिकतर आतंकी हमलों को निर्देशित किया है। तालिबान और अलकायदा से संबंध रखने के कारण जैश-ए-मोहम्मद को सुरक्षा परिषद ने काफी पहले से प्रतिबंधित कर रखा है। फिर मसूद अजहर पर प्रतिबंध क्यों नहीं, जबकि जैश की कमान उसी के हाथ में है? इस सवाल का शायद ही कोई जवाब चीन के पास हो। सीमा संबंधी विवाद बने रहने के बावजूद पिछले कुछ सालों में भारत और चीन के बीच व्यापार तेजी से बढ़ा है। जी-20 और विश्व व्यापार संगठन जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दोनों देशों ने अक्सर समान रुख अख्तियार किए हैं और विकसित देशों के दबावों का एकजुट होकर सामना किया है। लेकिन आतंकवाद के मामले में चीन का ऐसा बेतुका व्यवहार क्यों है? चीन से भारत की शिकायत अपनी जगह है, पर ताजा अनुभव को देखते हुए प्रतिबंध समिति को गोपनीयता के ढर्रे से बाहर निकालने की पहल होनी ही चाहिए।
पठानकोट में हुए आतंकी हमले के सूत्रधार और जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगवाने के प्रस्ताव पर चीन की अड़ंगेबाजी को लेकर भारत पहले ही नाराजगी जता चुका था। अब उसने उचित ही इस मसले पर संयुक्त राष्ट्र में जवाबदेही का सवाल उठाया है। गौरतलब है कि आतंकी संगठनों व व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्तावों पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक समिति विचार करती है। पिछले दिनों मसूद अजहर को प्रतिबंधित करने का भारत का प्रस्ताव आया तो चीन ने उसे नाकाम कर दिया। समिति के पंद्रह सदस्यों में चीन भी शामिल है। चीन के ना कहने से प्रस्ताव गिर गया, क्योंकि समिति इस आधार पर काम करती है कि उसके फैसले सर्वसम्मति से होंगे और किसका क्या रुख था यह औपचारिक तौर पर नहीं बताया जाएगा। इसलिए चीन के ना को 'गुप्त वीटो' कहा गया। सवाल है कि गोपनीयता का यह प्रावधान क्यों? संयुक्त राष्ट्र महासभा के सामने समिति अपनी जवाबदेही कैसे साबित कर सकती है, अगर वह औपचारिक रूप से यह नहीं बताएगी कि किस प्रस्ताव को क्यों स्वीकार या खारिज किया गया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी दूत अकबरूद््दीन ने यह मौजूं सवाल उठाया है कि प्रतिबंध समिति अंतरराष्ट्रीय समुदाय के भरोसे की बिना पर काम करती है, लिहाजा वह संयुक्त राष्ट्र महासभा के सामने अपने फैसलों के कारण बताने से कैसे बच सकती है? जहां तक मसूद अजहर को प्रतिबंधित करने के भारत के प्रस्ताव का सवाल है, उसे खारिज करने से चीन की साख पर बट्टा लगा है। द्विपक्षीय बातचीत में और वैश्विक मंचों पर भी चीन आतंकवाद के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता दोहराता आया है। फिर उसने भारत के प्रस्ताव को पलीता क्यों लगाया? अगर पठानकोट मामले में उसे सबूतों का इंतजार था, तब भी पहले के रिकार्ड मसूद अजहर को प्रतिबंधित करने के लिए काफी थे। हाफिज सईद और मसूद अजहर ने ही भारत पर हुए अधिकतर आतंकी हमलों को निर्देशित किया है। तालिबान और अलकायदा से संबंध रखने के कारण जैश-ए-मोहम्मद को सुरक्षा परिषद ने काफी पहले से प्रतिबंधित कर रखा है। फिर मसूद अजहर पर प्रतिबंध क्यों नहीं, जबकि जैश की कमान उसी के हाथ में है? इस सवाल का शायद ही कोई जवाब चीन के पास हो। सीमा संबंधी विवाद बने रहने के बावजूद पिछले कुछ सालों में भारत और चीन के बीच व्यापार तेजी से बढ़ा है। जी-बीस और विश्व व्यापार संगठन जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दोनों देशों ने अक्सर समान रुख अख्तियार किए हैं और विकसित देशों के दबावों का एकजुट होकर सामना किया है। लेकिन आतंकवाद के मामले में चीन का ऐसा बेतुका व्यवहार क्यों है? चीन से भारत की शिकायत अपनी जगह है, पर ताजा अनुभव को देखते हुए प्रतिबंध समिति को गोपनीयता के ढर्रे से बाहर निकालने की पहल होनी ही चाहिए।
केन्द्र सरकार ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को 2020 के बाद से जेल के आंकड़ों वाली रिपोर्ट में ट्रांसजेंडर कैदियों का ब्योरा शामिल करने के लिए एक पत्र जारी किया गया है। मुख्य न्यायाधीश डी. एन. पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की एक पीठ को अतिरिक्त सॉलिस्टर जनरल (एएसजी) चेतन शर्मा ने एक रिपोर्ट सौंपी। जेल के आंकड़ों की रिपोर्ट में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) को "ट्रांसजेंडर कैदियों का ब्योरा शामिल करने के लिए अपेक्षित नीति बनाने और संशोधन करने" के लिए दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध वाली याचिका के जवाब में उन्होंने यह रिपोर्ट जारी की है। एएसजी ने कहा कि यह नोटिस 4 दिसम्बर को ही जारी कर दिया गया था, इसलिए अब इस याचिका के कोई मायने नहीं है। एएसजी के प्रतिवेदन जारी करने के मद्देनजर अदालत ने करण त्रिपाठी की याचिका का निस्तारण कर दिया।
केन्द्र सरकार ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को दो हज़ार बीस के बाद से जेल के आंकड़ों वाली रिपोर्ट में ट्रांसजेंडर कैदियों का ब्योरा शामिल करने के लिए एक पत्र जारी किया गया है। मुख्य न्यायाधीश डी. एन. पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की एक पीठ को अतिरिक्त सॉलिस्टर जनरल चेतन शर्मा ने एक रिपोर्ट सौंपी। जेल के आंकड़ों की रिपोर्ट में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो को "ट्रांसजेंडर कैदियों का ब्योरा शामिल करने के लिए अपेक्षित नीति बनाने और संशोधन करने" के लिए दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध वाली याचिका के जवाब में उन्होंने यह रिपोर्ट जारी की है। एएसजी ने कहा कि यह नोटिस चार दिसम्बर को ही जारी कर दिया गया था, इसलिए अब इस याचिका के कोई मायने नहीं है। एएसजी के प्रतिवेदन जारी करने के मद्देनजर अदालत ने करण त्रिपाठी की याचिका का निस्तारण कर दिया।
बथुआ के पत्ते- 150 ग्राम (बारीक कटा) . सबसे पहले दही को ब्लेंड करके छाछ की तरह पतला करें। . अब एक बाउल में बेसन और पानी मिवाकर गाढ़ा घोल बनाएं। इसमें गांठें ना पड़ने दें। . इसके बाद बेसन को छाछ में मिक्स करके इसमें करीब 2 गिलास पानी मिलाएं। . कड़ाही में तेल गर्म करके मेथी दाना डालें। . अब इसमें लहसुन, हींग, साबुत लाल मिर्च, हल्दी और लाल मिर्च एक-एक करके डालें। . तड़का भूनने पर इसमें बथुआ डालकर 2 मिनट पकाएं। . बथुआ थोड़ा गलने पर इसमें बेसन-दही का मिक्सचर मिलाएं। . गैस की तेज आंच पर 2 उबाल आने दें और कढ़ी को लगातार चलाते हुए उबालें। . इसके बाद कम आंच पर करीब 30 मिनट तक कढ़ी पकने दें। . लीजिए आपकी बथुआ कढ़ी बनकर तैयार है। . इसके ऊपर देसी घी डालकर रोटीस, परांठे के साथ सर्व करें।
बथुआ के पत्ते- एक सौ पचास ग्राम . सबसे पहले दही को ब्लेंड करके छाछ की तरह पतला करें। . अब एक बाउल में बेसन और पानी मिवाकर गाढ़ा घोल बनाएं। इसमें गांठें ना पड़ने दें। . इसके बाद बेसन को छाछ में मिक्स करके इसमें करीब दो गिलास पानी मिलाएं। . कड़ाही में तेल गर्म करके मेथी दाना डालें। . अब इसमें लहसुन, हींग, साबुत लाल मिर्च, हल्दी और लाल मिर्च एक-एक करके डालें। . तड़का भूनने पर इसमें बथुआ डालकर दो मिनट पकाएं। . बथुआ थोड़ा गलने पर इसमें बेसन-दही का मिक्सचर मिलाएं। . गैस की तेज आंच पर दो उबाल आने दें और कढ़ी को लगातार चलाते हुए उबालें। . इसके बाद कम आंच पर करीब तीस मिनट तक कढ़ी पकने दें। . लीजिए आपकी बथुआ कढ़ी बनकर तैयार है। . इसके ऊपर देसी घी डालकर रोटीस, परांठे के साथ सर्व करें।
विमर्शः- चरकाचार्य ने च० नि० अ० १ में वैसे तो सामान्य सन्ताप लक्षण वाले ज्वर को एक ही प्रकार का माना है किन्तु फिर उसके दो भेद कर दिये हैं ( १ ) निजज्वर तथा (२) आगन्तुक ज्वर । पुनः निजज्वर को शीत और उष्ण भेद से द्विविध तथा वातादित्रिदोष भेद त्रिविध, इस त्रिविध के साथ सन्निपातज्वर को मिलाने से चतुर्विध एवं इन चतुर्विध ज्वरों के अतिरिक्त दो-दो दोषों के विकल्पन ( द्वन्द्वजभेद) से सप्तविध निजज्वर होता है 'ज्वरस्त्वेक एव सन्तापलक्षणः । तमेवाभिप्राय विशेषाद् द्विविधमाचक्षते, निजागन्तु विशेषाच्च । तत्र निजं द्विविधं, त्रिविधं, चतुर्विधं सप्तविधाहुभिषजो वातादिविकल्पात् । (च० नि० अ० १ ) महामहोपाध्याय गणनाथ सेन जी ने भी प्रथम ज्वर के निज और आगन्तुक ऐसे दो भेद किये हैं - ज्वरः प्रधानो रोगाणां त्वचि सन्तापलक्षणः । देहेन्द्रियमनस्तापी निजश्चागन्तुजश्च सः ॥ ( सि० नि० ) चरकाचार्य तथा सेनजी ने केवल ज्वर के ही ये दो विभाग किये हैं ऐसी बात नहीं अपि तु सामान्यतया सर्व रोगों में विविध भेद मान लिये हैं - द्विविधा प्रकृतिरेपामागन्तुनिजविभागादिति' ( च० सू० अ० २० ) चरकाचार्य ने पुनः चिकिसासौर्य की दृष्टि से विधि, अधिष्ठान आदि भेद से दो-दो तथा पञ्च, सप्त और अष्ट भेद कर दिये हैं- द्विविधो विधिभेदेन ज्वरः शाःे!मानसः । पुनश्च द्विविधो दृष्टः सौम्यश्चाग्नेय एव वा ॥ अन्तर्वैगो वहिर्वैगो द्विविधः पुनरुच्यते । प्राकृतो वैकृतश्चैव साध्य - श्वासाध्य एव च ॥ पुनः पञ्चविधो दृष्टो दोषकालबलाबलात् । सन्ततः सततोऽन्येद्युस्तृतीयकचतुर्थकौ ॥ पुनराश्रयभेदेन धातूनां सप्तधा मतः । भिन्नः कारणभेदेन पुनरष्टविधो ज्वरः ॥ सेनजीने निज ज्वरों में ( १ ) वातिक, (२) पैत्तिक, (३) श्लैष्मिक और तीन प्रकार के द्वन्द्वज तथा सातवां सान्निपातिक ज्वर माना है। इसी प्रकार आगन्तुक ज्वरों में (१) कामज्वर, (२) शोकज्वर, ( ३ ) भयज्वर, ( ४ ) क्रोधज्वर, ( ५ ) भूताभिषङ्गजज्वर, विषवृक्षा निलस्पर्शजन्यूज्वर या तृणपुष्पाख्यज्वर, ७) आन्त्रिकज्वर, (८) ग्रन्थिकज्वर, (९) श्लेष्मकज्वर, (१०) सन्धिकज्वर, (११) श्वसनकज्वर, (१२) आक्षेपकज्वर, (१३) मसूरिकाज्वर, (१४) दण्डकाव्यज्वर, (१५) कर्णमूलि - कुज्वर, (१६) रोमान्तिका, (१७) विषमज्वर इसके भेद जैसे सन्ततज्वर, सततकज्वर, अन्येचुष्कज्वर, तृतीयकज्वर, चतुर्थकज्वर और (१८) कालज्वर (१९) वातबलासकज्वर, (२०) प्रलेपकज्वर, (२१) श्लीपदज्वर, (२२) औपदविकज्वर, (२३) देशान्तरीय शोणज्वर ( स्कार्लेटफीवर), और हारिद्रकज्वर (यलोफीवर ) और ( २४ ) रसादिशुक्रान्त सप्तधातुगतज्वर, (२५) अन्तर्वैगबहिर्वेगज्वर, (२६) आमपच्यमाननिरामज्वर, (२७) प्राकृत और वैकृतज्वर आदि भेद लिखे हैं। पाश्चात्त्यमत से ज्वरपरिभाषा - प्राकृत ताप की वृद्धि को ज्वर कहा गया है। इसका कारण अनूर्जता ( Allergy ) या बाह्यपदार्थों का शरीर में प्रवेश होकर प्रभाव होने से शरीर की प्रतिक्रिया का बोधक स्वरूप है। बाह्यपदार्थों में (१) उपसर्ग ( Infection ) और (२) विषमयता ( Toxaemia ) प्रधान है। इन बाह्यपदार्थों के शरीर में प्रवेश होने से जीवरस ( Protoplasm ) की प्राकृतिक जीवरासायनिक क्रिया ( BioChemical activity ) की वृद्धि होती है जिससे शरीर में ताप उत्पन्न होता है और इस ताप के अत्यधिक होने से वातसूत्र कोषाणुओं (Nerve cells) के कायाणुरस (Cytoplasm) को स्कन्दित ( Cognlate ) कर उनकी क्रिया को नष्ट कर देता है । प्राकृतावस्था में श्वसनक्रिया, स्वेद का बाष्पीभवन ( Evaporation ) तथा मस्तिष्कगततापकेन्द्र ( Heat regulating centre ) ताप की वृद्धि पर नियन्त्रण रखते हैं । पाश्चात्त्य चिकित्सा में ज्वर को मुख्य रोग न मान कर विभिन्न है ऐसा वर्णन मिलता है - (१) सन्ततप्रकार (Gontinuous) - प्रकार के रोगों में निम्न विभिन्न स्वरूप का ज्वर पाया जाता इस प्रकार का ज्वर आन्त्रिकज्वर (Typhoid ) में पाया जाता है। इसमें रोगी के शरीर का तापक्रम अहर्निश प्राकृत से अधिक रहता है । प्रतिदिन सर्वोच्च ( Maximum ) तथा अल्पतम ( Minimum ) ताप का अन्तर १३ अंश से अधिक नहीं होता । ( २ ) अविसर्गीप्रकार ( Remitent ) - यह भी अहर्निश प्राकृत से अधिक रहता है परन्तु प्रतिदिन के सर्वोच्च तथा अल्पतम ताप का अन्तर २ अंश से अधिक होता है । ( ३ ) विसर्गों ( Intermiltent ) - इसे अन्येयुष्कज्वर भी कहते हैं । यह प्रकार मारक विषमज्वर (Malignant । malaria ) में मिलता है। इसमें तापक्रम प्रतिदिन कुछ समय के लिये प्राकृत हो जाता है। (४) प्रलेपक (Hectic) - विद्रधि ( Abscess ) और पूयभवन ( Suppuration ) में यह विसर्गी का ही एक प्रकार है । यह राजयक्ष्मा ( T. B. ) मिलता है । प्रतिदिन मध्याह्न में शरीर में कम्पन ( Rigor ) ।के साथ ज्वर प्रारम्भ हो कर सन्ध्या समय तक प्राकृत से tion ) के साथ ताप कम होकर प्रातःकाल पुनः प्राकृत हो ३-४ अंश अधिक हो जाता है । रात्रि में प्रस्वेद ( Perspiraजाता है । प्रलिम्पन्निव गात्राणि धर्मेण गौरवेण च । मन्दज्वर विलेपी प्रति दूसरे दिन प्राकृत रहता है । इस प्रकार का तापक्रम घातक च सशीतः स्यात्प्रलेपकः ॥ ( ५ ) तृतीयक ( Te.tian ) :-ज्वर तृतीयक विषमज्वर ( Benign tertian M. F. ) में होता है । (६) चतुर्थंक (Quartan) :-शरीर का ताप प्रत्येक चौथे दिन प्राकृत से अधिक हो जाता है । यह (Quartan M. F.) में होता है। (७) सोपानसम ( Stepladder ) :-ज्वर क्रमशः प्रति दूसरे दिन विगत दिन से एक अंश अधिक रहता है । यह आन्त्रिकज्वर के प्रथम सप्ताह में मिलता है । (८) द्विभागीय या मध्यनिम्न (Biphasic or saddle back):तापक्रम दो भाग में विभुक्त रहता है । ज्वर प्रथम दो या तीन दिन सन्तत रहता है तत्पश्चात् दो या तीन दिन अल्प रहता है और अन्तिम एक या दो दिन पुनः तीव्र होकर प्राकृत हो जाता है । यह तापक्रम दण्डक ज्वर (Dengue F.) में मिलता है। (९) विपरीत ( Inverted ) प्रकार :प्रातःकाल उच्चतम रहता है और सन्ध्या समय में प्राकृत हो जाता है । इस प्रकार का तापक्रम ( Miliary T. B. ) में मिलता है । ( १० )विवार आरोही ( Double rise ) ज्वर प्रतिदिन दो वार तीव्र तथा अल्प होता है। यह प्रकार ।( Pel-ebstein ) :-ज्वर प्रायः दो सप्ताह तक सन्तत रहता कालज्वर (K, A. ) में होता है । ( ११ ) आवर्तक प्रकार है पश्चात् दो सप्ताह तक ताप प्राकृत रहता है । यही क्रम चलता रहता है। यह ( Hodgkin 's ) के रोग में मिलता है । ज्वरसम्प्राप्ति - वातादि दोष वर्षा, शरद् और वसन्त
विमर्शः- चरकाचार्य ने चशून्य निशून्य अशून्य एक में वैसे तो सामान्य सन्ताप लक्षण वाले ज्वर को एक ही प्रकार का माना है किन्तु फिर उसके दो भेद कर दिये हैं निजज्वर तथा आगन्तुक ज्वर । पुनः निजज्वर को शीत और उष्ण भेद से द्विविध तथा वातादित्रिदोष भेद त्रिविध, इस त्रिविध के साथ सन्निपातज्वर को मिलाने से चतुर्विध एवं इन चतुर्विध ज्वरों के अतिरिक्त दो-दो दोषों के विकल्पन से सप्तविध निजज्वर होता है 'ज्वरस्त्वेक एव सन्तापलक्षणः । तमेवाभिप्राय विशेषाद् द्विविधमाचक्षते, निजागन्तु विशेषाच्च । तत्र निजं द्विविधं, त्रिविधं, चतुर्विधं सप्तविधाहुभिषजो वातादिविकल्पात् । महामहोपाध्याय गणनाथ सेन जी ने भी प्रथम ज्वर के निज और आगन्तुक ऐसे दो भेद किये हैं - ज्वरः प्रधानो रोगाणां त्वचि सन्तापलक्षणः । देहेन्द्रियमनस्तापी निजश्चागन्तुजश्च सः ॥ चरकाचार्य तथा सेनजी ने केवल ज्वर के ही ये दो विभाग किये हैं ऐसी बात नहीं अपि तु सामान्यतया सर्व रोगों में विविध भेद मान लिये हैं - द्विविधा प्रकृतिरेपामागन्तुनिजविभागादिति' चरकाचार्य ने पुनः चिकिसासौर्य की दृष्टि से विधि, अधिष्ठान आदि भेद से दो-दो तथा पञ्च, सप्त और अष्ट भेद कर दिये हैं- द्विविधो विधिभेदेन ज्वरः शाःे!मानसः । पुनश्च द्विविधो दृष्टः सौम्यश्चाग्नेय एव वा ॥ अन्तर्वैगो वहिर्वैगो द्विविधः पुनरुच्यते । प्राकृतो वैकृतश्चैव साध्य - श्वासाध्य एव च ॥ पुनः पञ्चविधो दृष्टो दोषकालबलाबलात् । सन्ततः सततोऽन्येद्युस्तृतीयकचतुर्थकौ ॥ पुनराश्रयभेदेन धातूनां सप्तधा मतः । भिन्नः कारणभेदेन पुनरष्टविधो ज्वरः ॥ सेनजीने निज ज्वरों में वातिक, पैत्तिक, श्लैष्मिक और तीन प्रकार के द्वन्द्वज तथा सातवां सान्निपातिक ज्वर माना है। इसी प्रकार आगन्तुक ज्वरों में कामज्वर, शोकज्वर, भयज्वर, क्रोधज्वर, भूताभिषङ्गजज्वर, विषवृक्षा निलस्पर्शजन्यूज्वर या तृणपुष्पाख्यज्वर, सात) आन्त्रिकज्वर, ग्रन्थिकज्वर, श्लेष्मकज्वर, सन्धिकज्वर, श्वसनकज्वर, आक्षेपकज्वर, मसूरिकाज्वर, दण्डकाव्यज्वर, कर्णमूलि - कुज्वर, रोमान्तिका, विषमज्वर इसके भेद जैसे सन्ततज्वर, सततकज्वर, अन्येचुष्कज्वर, तृतीयकज्वर, चतुर्थकज्वर और कालज्वर वातबलासकज्वर, प्रलेपकज्वर, श्लीपदज्वर, औपदविकज्वर, देशान्तरीय शोणज्वर , और हारिद्रकज्वर और रसादिशुक्रान्त सप्तधातुगतज्वर, अन्तर्वैगबहिर्वेगज्वर, आमपच्यमाननिरामज्वर, प्राकृत और वैकृतज्वर आदि भेद लिखे हैं। पाश्चात्त्यमत से ज्वरपरिभाषा - प्राकृत ताप की वृद्धि को ज्वर कहा गया है। इसका कारण अनूर्जता या बाह्यपदार्थों का शरीर में प्रवेश होकर प्रभाव होने से शरीर की प्रतिक्रिया का बोधक स्वरूप है। बाह्यपदार्थों में उपसर्ग और विषमयता प्रधान है। इन बाह्यपदार्थों के शरीर में प्रवेश होने से जीवरस की प्राकृतिक जीवरासायनिक क्रिया की वृद्धि होती है जिससे शरीर में ताप उत्पन्न होता है और इस ताप के अत्यधिक होने से वातसूत्र कोषाणुओं के कायाणुरस को स्कन्दित कर उनकी क्रिया को नष्ट कर देता है । प्राकृतावस्था में श्वसनक्रिया, स्वेद का बाष्पीभवन तथा मस्तिष्कगततापकेन्द्र ताप की वृद्धि पर नियन्त्रण रखते हैं । पाश्चात्त्य चिकित्सा में ज्वर को मुख्य रोग न मान कर विभिन्न है ऐसा वर्णन मिलता है - सन्ततप्रकार - प्रकार के रोगों में निम्न विभिन्न स्वरूप का ज्वर पाया जाता इस प्रकार का ज्वर आन्त्रिकज्वर में पाया जाता है। इसमें रोगी के शरीर का तापक्रम अहर्निश प्राकृत से अधिक रहता है । प्रतिदिन सर्वोच्च तथा अल्पतम ताप का अन्तर तेरह अंश से अधिक नहीं होता । अविसर्गीप्रकार - यह भी अहर्निश प्राकृत से अधिक रहता है परन्तु प्रतिदिन के सर्वोच्च तथा अल्पतम ताप का अन्तर दो अंश से अधिक होता है । विसर्गों - इसे अन्येयुष्कज्वर भी कहते हैं । यह प्रकार मारक विषमज्वर में मिलता है। इसमें तापक्रम प्रतिदिन कुछ समय के लिये प्राकृत हो जाता है। प्रलेपक - विद्रधि और पूयभवन में यह विसर्गी का ही एक प्रकार है । यह राजयक्ष्मा मिलता है । प्रतिदिन मध्याह्न में शरीर में कम्पन ।के साथ ज्वर प्रारम्भ हो कर सन्ध्या समय तक प्राकृत से tion ) के साथ ताप कम होकर प्रातःकाल पुनः प्राकृत हो तीन-चार अंश अधिक हो जाता है । रात्रि में प्रस्वेद तृतीयक :-ज्वर तृतीयक विषमज्वर में होता है । चतुर्थंक :-शरीर का ताप प्रत्येक चौथे दिन प्राकृत से अधिक हो जाता है । यह में होता है। सोपानसम :-ज्वर क्रमशः प्रति दूसरे दिन विगत दिन से एक अंश अधिक रहता है । यह आन्त्रिकज्वर के प्रथम सप्ताह में मिलता है । द्विभागीय या मध्यनिम्न :तापक्रम दो भाग में विभुक्त रहता है । ज्वर प्रथम दो या तीन दिन सन्तत रहता है तत्पश्चात् दो या तीन दिन अल्प रहता है और अन्तिम एक या दो दिन पुनः तीव्र होकर प्राकृत हो जाता है । यह तापक्रम दण्डक ज्वर में मिलता है। विपरीत प्रकार :प्रातःकाल उच्चतम रहता है और सन्ध्या समय में प्राकृत हो जाता है । इस प्रकार का तापक्रम में मिलता है । विवार आरोही ज्वर प्रतिदिन दो वार तीव्र तथा अल्प होता है। यह प्रकार । :-ज्वर प्रायः दो सप्ताह तक सन्तत रहता कालज्वर में होता है । आवर्तक प्रकार है पश्चात् दो सप्ताह तक ताप प्राकृत रहता है । यही क्रम चलता रहता है। यह के रोग में मिलता है । ज्वरसम्प्राप्ति - वातादि दोष वर्षा, शरद् और वसन्त
करता हूँ। आप लोगों के ही साथ में रहने से मेरे पुण्यों का उदय हुआ और निर्मल ज्ञान के सम्मुख मोह की शक्ति पराजित हो गई । अतः मैं परब्रह्म में लीन होता हूँ।" बिना आत्मस्थ योगी के किसी सामान्य कवि के मुख से ऐसी वाणी सुनी ही नहीं जा सकती। इनका पूर्व जीवन अवश्य ही किसी राजा का था, जिसकी प्रशंसा इन्होंने की है। इनका अपनी पत्नी में अन्य प्रेम था । तब भी इनका जीवन आदर्श था । उस जीवन से इन्हें घृणा नहीं हुई और यदि स्त्री पर अविश्वास उत्पन्न न हुआ होता, इनके प्रेमका विचल आधार रहता तो ये योगी नहीं होते और जब योगी हुए तब सारे नश्वर पदार्थों को सर्वदा के लिए तिलाञ्जलि दे दी । इसीलिए इधर और उधर दोनों ओर पड़े लटकते रहने का इन्होंने घोर विरोध किया है। इन्होंने शिव जी को एकमात्र देव माना है और गंगा को ही नदी, गिरि-गुहा को घर और दिशाओं को वस्त्र, दीनताको व्रत और वट विटप को प्रिया । इससे ऐसा प्रतीत होता है कि विश्वनाथपुरी से अनतिदूर चरणाद्रि की गुहा में गंगाजी के तट पर, लता से ढके उसी स्थान पर ये रहते थे जहाँ आज एक सुन्दर, छोटा किन्तु दृढ़ दुर्ग खड़ा है। अतः उस प्राचीन अनुश्रुति को हमें यों हो दृष्टि से परे न हटाकर उस पर खोज करनी होगी। सातवीं शती की इनकी स्थिति सन्देह से मुक्त नहीं है । भाग्यवाद भारतीय संस्कृति का है। भारतीय जनता का भाग्य या नियति पर अटूट विश्वास है । इस विश्वास के बल पर ही भारत का साधन१. एकः रागिषु राजते प्रियतमादेहार्धहारी हरो नीरागेषु जिनो विमुक्तललनासङ्गो न यस्मात्परः । दुर्वारस्मरघस्मरोरग विषज्वालावलीढ़ो शेषो मोहविजृम्भितो हि विषयान् भोक्तुं न मोक्तुं क्षमः ॥ २. महादेवो देवः सरिदपि च सैषा सुरसरिद्गुहा एवागारं वसनमपि ता एव हरितः । सुहृद्वा कालोऽयं व्रतमिद मदैन्यव्रतमिदं कियद्वा ययामो वटविटप एवास्तु दयिता ।। - वैराग्य०, ३५ ।
करता हूँ। आप लोगों के ही साथ में रहने से मेरे पुण्यों का उदय हुआ और निर्मल ज्ञान के सम्मुख मोह की शक्ति पराजित हो गई । अतः मैं परब्रह्म में लीन होता हूँ।" बिना आत्मस्थ योगी के किसी सामान्य कवि के मुख से ऐसी वाणी सुनी ही नहीं जा सकती। इनका पूर्व जीवन अवश्य ही किसी राजा का था, जिसकी प्रशंसा इन्होंने की है। इनका अपनी पत्नी में अन्य प्रेम था । तब भी इनका जीवन आदर्श था । उस जीवन से इन्हें घृणा नहीं हुई और यदि स्त्री पर अविश्वास उत्पन्न न हुआ होता, इनके प्रेमका विचल आधार रहता तो ये योगी नहीं होते और जब योगी हुए तब सारे नश्वर पदार्थों को सर्वदा के लिए तिलाञ्जलि दे दी । इसीलिए इधर और उधर दोनों ओर पड़े लटकते रहने का इन्होंने घोर विरोध किया है। इन्होंने शिव जी को एकमात्र देव माना है और गंगा को ही नदी, गिरि-गुहा को घर और दिशाओं को वस्त्र, दीनताको व्रत और वट विटप को प्रिया । इससे ऐसा प्रतीत होता है कि विश्वनाथपुरी से अनतिदूर चरणाद्रि की गुहा में गंगाजी के तट पर, लता से ढके उसी स्थान पर ये रहते थे जहाँ आज एक सुन्दर, छोटा किन्तु दृढ़ दुर्ग खड़ा है। अतः उस प्राचीन अनुश्रुति को हमें यों हो दृष्टि से परे न हटाकर उस पर खोज करनी होगी। सातवीं शती की इनकी स्थिति सन्देह से मुक्त नहीं है । भाग्यवाद भारतीय संस्कृति का है। भारतीय जनता का भाग्य या नियति पर अटूट विश्वास है । इस विश्वास के बल पर ही भारत का साधनएक. एकः रागिषु राजते प्रियतमादेहार्धहारी हरो नीरागेषु जिनो विमुक्तललनासङ्गो न यस्मात्परः । दुर्वारस्मरघस्मरोरग विषज्वालावलीढ़ो शेषो मोहविजृम्भितो हि विषयान् भोक्तुं न मोक्तुं क्षमः ॥ दो. महादेवो देवः सरिदपि च सैषा सुरसरिद्गुहा एवागारं वसनमपि ता एव हरितः । सुहृद्वा कालोऽयं व्रतमिद मदैन्यव्रतमिदं कियद्वा ययामो वटविटप एवास्तु दयिता ।। - वैराग्यशून्य, पैंतीस ।
Ranchi: रातू रोड एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण 15 फीसदी तक हो गया है. 3. 50 किमी लंबे इसे एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण कार्य जुलाई 2022 में प्रारंभ हुआ था. काम काफी तेजी से किया जा रहा है. कचहरी जाकिर हुसैन पार्क से रातू रोड होते हुए पिस्का मोड़ ओटीसी ग्राउंड के पहले तक बनने वाले इस एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण अब तक दो दर्जन से अधिक पीयर बन गये हैं. पीलर कैप भी चढ़ाया जा रहा है. लाहकोठी के पास अभी पीयर बनाने के लिए ड्रिलिंग चल रहा है. यह प्रयास हो रहा है कि जल्द बिजली पोल हटाकर पिस्का मोड़ से लाहकोठी तक पीयर का काम पूरा कर दिया जाये. एनएचएआई के इंजीनियरों के मुताबिक जो रफ़तार है कॉरिोडर निर्माण का उसके अनुसार 25 अप्रैल 2024 तक इसे पूरा कर हैंडओवर भी कर दिया जायेगा. एनएचआई इस एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण के लिए 557 करोड़ की योजना की स्वीकृति दी है, जिसमें 291 करोड़ सिविल कॉस्ट है. शेष राशि जमीन अधिग्रहण इत्यादि में खर्च की गयी है. इस फ्लाईओवर का निर्माण केसीसी बिल्डकॉन कर रहा है. एलिवेटेड कॉरिडोर निर्माण से रातू रोड क्षेत्र में रहने वाले लाखों लोगों को काफी फायदा होगा. रातू, मांडर पंडरा, इटकी रोड इत्यादि से आने वाहन उपर ही उपर फ्लाईओवर के जरिये कचहरी तक चले जायेंगे. नीचे की दोनों ओर की सड़क में कंजेशन कम होगा. इससे रोजाना जाम से निजात भी मिलेगी.
Ranchi: रातू रोड एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण पंद्रह फीसदी तक हो गया है. तीन. पचास किमी लंबे इसे एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण कार्य जुलाई दो हज़ार बाईस में प्रारंभ हुआ था. काम काफी तेजी से किया जा रहा है. कचहरी जाकिर हुसैन पार्क से रातू रोड होते हुए पिस्का मोड़ ओटीसी ग्राउंड के पहले तक बनने वाले इस एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण अब तक दो दर्जन से अधिक पीयर बन गये हैं. पीलर कैप भी चढ़ाया जा रहा है. लाहकोठी के पास अभी पीयर बनाने के लिए ड्रिलिंग चल रहा है. यह प्रयास हो रहा है कि जल्द बिजली पोल हटाकर पिस्का मोड़ से लाहकोठी तक पीयर का काम पूरा कर दिया जाये. एनएचएआई के इंजीनियरों के मुताबिक जो रफ़तार है कॉरिोडर निर्माण का उसके अनुसार पच्चीस अप्रैल दो हज़ार चौबीस तक इसे पूरा कर हैंडओवर भी कर दिया जायेगा. एनएचआई इस एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण के लिए पाँच सौ सत्तावन करोड़ की योजना की स्वीकृति दी है, जिसमें दो सौ इक्यानवे करोड़ सिविल कॉस्ट है. शेष राशि जमीन अधिग्रहण इत्यादि में खर्च की गयी है. इस फ्लाईओवर का निर्माण केसीसी बिल्डकॉन कर रहा है. एलिवेटेड कॉरिडोर निर्माण से रातू रोड क्षेत्र में रहने वाले लाखों लोगों को काफी फायदा होगा. रातू, मांडर पंडरा, इटकी रोड इत्यादि से आने वाहन उपर ही उपर फ्लाईओवर के जरिये कचहरी तक चले जायेंगे. नीचे की दोनों ओर की सड़क में कंजेशन कम होगा. इससे रोजाना जाम से निजात भी मिलेगी.
नई दिल्ली। निर्भया गैंगरेप के एक दोषी पवन ने दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट में याचिका दायर कर मंडोली जेल के दो पुलिसकर्मियों के खिलाफ मारपीट करने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने मंडोली जेल प्रशासन को नोटिस जारी किया है और 12 मार्च तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च को होगी। पवन ने याचिका में कहा है कि पुलिस कर्मियों की पिटाई से उसके सिर में चोटें आई हैं। निर्भया मामले के दोषी विनय शर्मा ने पिछली 09 मार्च को दिल्ली के उप-राज्यपाल के समक्ष अर्जी दाखिल की थी। विनय शर्मा ने फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग की है। विनय ने वकील एपी सिंह के जरिये दायर अर्जी में अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 432 और धारा 433 के तहत फांसी की सजा को निलंबित करने की मांग की है। पिछली 5 मार्च को पटियाला हाउस कोर्ट ने चौथी बार निर्भया गैंगरेप के दोषियों के खिलाफ नया डेथ वारंट जारी किया है। एडिशनल सेशंस जज धर्मेंद्र राणा ने चारों दोषियों को 20 मार्च की सुबह साढ़े पांच बजे फांसी देने का आदेश दिया है। इसके पहले पिछली 02 मार्च को कोर्ट ने निर्भया गैंगरेप के दोषियों की 3 मार्च को फांसी देने के आदेश पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने दोषी पवन गुप्ता की राष्ट्रपति के यहां दया याचिका लंबित होने की वजह से फांसी की सजा पर रोक लगाई थी। 2 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पवन गुप्ता की क्युरेटिव याचिका खारिज कर दी थी। जिसके तुरंत बाद 2 मार्च को ही पवन गुप्ता की ओर से राष्ट्रपति के यहां दया याचिका दायर की गई। इसके पहले पटियाला हाउस कोर्ट ने पिछली 17 फरवरी को निर्भया के दोषियों के खिलाफ डेथ वारंट जारी कर दिया था। कोर्ट ने 3 मार्च की सुबह 6 बजे फांसी देने का आदेश जारी किया था।
नई दिल्ली। निर्भया गैंगरेप के एक दोषी पवन ने दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट में याचिका दायर कर मंडोली जेल के दो पुलिसकर्मियों के खिलाफ मारपीट करने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने मंडोली जेल प्रशासन को नोटिस जारी किया है और बारह मार्च तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई बारह मार्च को होगी। पवन ने याचिका में कहा है कि पुलिस कर्मियों की पिटाई से उसके सिर में चोटें आई हैं। निर्भया मामले के दोषी विनय शर्मा ने पिछली नौ मार्च को दिल्ली के उप-राज्यपाल के समक्ष अर्जी दाखिल की थी। विनय शर्मा ने फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग की है। विनय ने वकील एपी सिंह के जरिये दायर अर्जी में अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा चार सौ बत्तीस और धारा चार सौ तैंतीस के तहत फांसी की सजा को निलंबित करने की मांग की है। पिछली पाँच मार्च को पटियाला हाउस कोर्ट ने चौथी बार निर्भया गैंगरेप के दोषियों के खिलाफ नया डेथ वारंट जारी किया है। एडिशनल सेशंस जज धर्मेंद्र राणा ने चारों दोषियों को बीस मार्च की सुबह साढ़े पांच बजे फांसी देने का आदेश दिया है। इसके पहले पिछली दो मार्च को कोर्ट ने निर्भया गैंगरेप के दोषियों की तीन मार्च को फांसी देने के आदेश पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने दोषी पवन गुप्ता की राष्ट्रपति के यहां दया याचिका लंबित होने की वजह से फांसी की सजा पर रोक लगाई थी। दो मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पवन गुप्ता की क्युरेटिव याचिका खारिज कर दी थी। जिसके तुरंत बाद दो मार्च को ही पवन गुप्ता की ओर से राष्ट्रपति के यहां दया याचिका दायर की गई। इसके पहले पटियाला हाउस कोर्ट ने पिछली सत्रह फरवरी को निर्भया के दोषियों के खिलाफ डेथ वारंट जारी कर दिया था। कोर्ट ने तीन मार्च की सुबह छः बजे फांसी देने का आदेश जारी किया था।
शिमला -अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई द्वारा विद्यार्थी परिषद के प्रदेश स्तरीय आह्वान पर विश्वविद्यालय के पिंक पैटल चौक पर धरना-प्रदर्शन किया गया। इकाई मंत्री मुनीष वर्मा ने कहा कि यूजी वर्ष 2019 के रिवेल्यूवेशन के परीक्षा परिणाम न आने के कारण प्रदेश के हजारों छात्रों का भविष्य अनियमितताओं में पड़ गया है। सात महीने से ज्यादा समय होने पर भी विश्वविद्यालय प्रशासन रिवेल्यूवेशन का परिणाम घोषित नहीं कर पाया है। विद्यार्थी परिषद की मांग है कि रिवेल्यूवेशन के परिणाम शीघ्र घोषित हों। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जो इक्डोल में 30 प्रतिशत तक की भारी भरकम फीस वृद्धि की गई है, उसको तुरंत प्रभाव से वापस ले। इससे प्रदेश के निम्न वर्ग परिवार से संबंध रखने वाले छात्रों को लूटा जा रहा है। कार्यकर्ताओं ने कहा कि विद्यार्थी परिषद इस भारी भरकम फीस वृद्धि को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगी। विद्यार्थी परिषद की मांग है कि यूजी सेकेंड इयर के लंबित पडे़ परीक्षा परिणामों को शीघ्र घोषित किया जाए। इकाई अध्यक्ष विशाल वर्मा ने कहा रिवेल्यूवेशन के परिणाम घोषित नहीं होने के कारण प्रदेश भर के हजारों छात्र परेशानी का सामना कर रहे हैं। छात्रों के शोषण को विद्यार्थी परिषद बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगी। विद्यार्थी परिषद विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ छात्र शक्ति को लामबंद करेगी। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि विद्यार्थी परिषद इक्डोल में हुई भारी भरकम फीस वृद्धि का विरोध करती है। एबीवीपी ने कहा कि इक्डोल में जो लाखों रुपए के घोटाले हुए हैं, इक्डोल और विश्वविद्यालय प्रशासन उसकी भरपाई प्रदेश भर के छात्रों को लूटकर करना चाहता है। छात्रों का आरोप है कि विद्यार्थी परिषद फीस वृद्धि के फैसले के खिलाफ है। अगर विश्वविद्यालय प्रशासन हमारी मांगों को तुरंत प्रभाव से पूरा नहीं करता है, तो विद्यार्थी परिषद विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ आंदोलन को बड़े स्वरूप में ले जाएगी, जिसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन जिम्मेदार होगा।
शिमला -अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई द्वारा विद्यार्थी परिषद के प्रदेश स्तरीय आह्वान पर विश्वविद्यालय के पिंक पैटल चौक पर धरना-प्रदर्शन किया गया। इकाई मंत्री मुनीष वर्मा ने कहा कि यूजी वर्ष दो हज़ार उन्नीस के रिवेल्यूवेशन के परीक्षा परिणाम न आने के कारण प्रदेश के हजारों छात्रों का भविष्य अनियमितताओं में पड़ गया है। सात महीने से ज्यादा समय होने पर भी विश्वविद्यालय प्रशासन रिवेल्यूवेशन का परिणाम घोषित नहीं कर पाया है। विद्यार्थी परिषद की मांग है कि रिवेल्यूवेशन के परिणाम शीघ्र घोषित हों। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जो इक्डोल में तीस प्रतिशत तक की भारी भरकम फीस वृद्धि की गई है, उसको तुरंत प्रभाव से वापस ले। इससे प्रदेश के निम्न वर्ग परिवार से संबंध रखने वाले छात्रों को लूटा जा रहा है। कार्यकर्ताओं ने कहा कि विद्यार्थी परिषद इस भारी भरकम फीस वृद्धि को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगी। विद्यार्थी परिषद की मांग है कि यूजी सेकेंड इयर के लंबित पडे़ परीक्षा परिणामों को शीघ्र घोषित किया जाए। इकाई अध्यक्ष विशाल वर्मा ने कहा रिवेल्यूवेशन के परिणाम घोषित नहीं होने के कारण प्रदेश भर के हजारों छात्र परेशानी का सामना कर रहे हैं। छात्रों के शोषण को विद्यार्थी परिषद बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगी। विद्यार्थी परिषद विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ छात्र शक्ति को लामबंद करेगी। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि विद्यार्थी परिषद इक्डोल में हुई भारी भरकम फीस वृद्धि का विरोध करती है। एबीवीपी ने कहा कि इक्डोल में जो लाखों रुपए के घोटाले हुए हैं, इक्डोल और विश्वविद्यालय प्रशासन उसकी भरपाई प्रदेश भर के छात्रों को लूटकर करना चाहता है। छात्रों का आरोप है कि विद्यार्थी परिषद फीस वृद्धि के फैसले के खिलाफ है। अगर विश्वविद्यालय प्रशासन हमारी मांगों को तुरंत प्रभाव से पूरा नहीं करता है, तो विद्यार्थी परिषद विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ आंदोलन को बड़े स्वरूप में ले जाएगी, जिसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन जिम्मेदार होगा।
भारत और चीन की सेनाओं के बीच पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर महीने भर से जारी सीमा विवाद इस सप्ताह के अंत तक हल हो सकता है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि इसके लिए दोनों देशों के बीच 6 जून को लेफ्टिनेंट जनरल रैंक के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के स्तर की एक महत्वपूर्ण बैठक होगी। भारत और चीन की सेनाओं के बीच पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर महीने भर से जारी सीमा विवाद इस सप्ताह के अंत तक हल हो सकता है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि इसके लिए दोनों देशों के बीच 6 जून को लेफ्टिनेंट जनरल रैंक के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के स्तर की एक महत्वपूर्ण बैठक होगी। भारत की ओर से इसमें लेह-लद्दाख के इलाके में एलएसी की सुरक्षा के लिए तैनात सेना की 14वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह अपने चीनी समकक्ष के साथ शामिल हो सकते हैं। इसके लिए दोनों ओर से जरूरी तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। गौरतलब है कि सेना की जम्मू-कश्मीर में तैनात उत्तरी कमांड के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल योगेश कुमार जोशी ने हाल में लद्दाख का दौरा कर वहां 14वीं कोर के कमांडर के साथ आगामी बैठक को लेकर गहन विचार-विमर्श किया है और उन्हें इस दौरान भारत का पक्ष मजबूती से चीन के समक्ष रखने के लिए जरूरी निर्देश भी दे दिए हैं। इस वक्त एलएसी पर भारतीय और चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। संख्याबल के हिसाब से भी काफी संख्या में दोनों सेनाओं के जवान जरूरी सैन्य साजो सामान के साथ एक-दूसरे के आमने-सामने डटे हुए हैं। बीते 4 से 6 मई के दौरान दोनों के बीच जर्बरदस्त तनातनी होने के तथ्य का भी खुलासा हुआ था। इसके बाद से दोनों ओर से इस विवाद को शांत करने के लिए सेना के कर्नल, ब्रिगेडियर से लेकर मेजर जनरल रैंक स्तर तक के अधिकारियों के बीच करीब 6 दौर की वार्ता बैठकें भी हो चुकी हैं। लेकिन यह सभी पूरी तरह से बेनतीजा रही हैं। इसी के बाद अब सेना में शीर्ष स्तर यानि लेफ्टिनेंट जनरल रैंक की बैठक को उक्त विवाद को समाप्त करने के लिए आयोजित करने का फैसला लिया गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी सप्ताहांत में होने वाली इस बैठक की पुष्टि की है। सेनाप्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरावणे ने उन्हें हाल ही में इस बैठक के बारे में विस्तार से ब्रीफ किया है। रक्षा मंत्री अपने पूर्ववर्ती बयानों में यह स्पष्ट कर चुके हैं कि भारत-चीन के बीच विवाद का निपटारा मौजूदा तंत्र की मदद से बातचीत के जरिए ही निकाला जाएगा। दोनों देश इसकी कवायद में लगे हैं। उधर मंगलवार देर रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप से फोन पर हुई वार्ता के दौरान भी चर्चा की है।
भारत और चीन की सेनाओं के बीच पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर महीने भर से जारी सीमा विवाद इस सप्ताह के अंत तक हल हो सकता है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि इसके लिए दोनों देशों के बीच छः जून को लेफ्टिनेंट जनरल रैंक के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के स्तर की एक महत्वपूर्ण बैठक होगी। भारत और चीन की सेनाओं के बीच पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर महीने भर से जारी सीमा विवाद इस सप्ताह के अंत तक हल हो सकता है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि इसके लिए दोनों देशों के बीच छः जून को लेफ्टिनेंट जनरल रैंक के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के स्तर की एक महत्वपूर्ण बैठक होगी। भारत की ओर से इसमें लेह-लद्दाख के इलाके में एलएसी की सुरक्षा के लिए तैनात सेना की चौदहवीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह अपने चीनी समकक्ष के साथ शामिल हो सकते हैं। इसके लिए दोनों ओर से जरूरी तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। गौरतलब है कि सेना की जम्मू-कश्मीर में तैनात उत्तरी कमांड के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल योगेश कुमार जोशी ने हाल में लद्दाख का दौरा कर वहां चौदहवीं कोर के कमांडर के साथ आगामी बैठक को लेकर गहन विचार-विमर्श किया है और उन्हें इस दौरान भारत का पक्ष मजबूती से चीन के समक्ष रखने के लिए जरूरी निर्देश भी दे दिए हैं। इस वक्त एलएसी पर भारतीय और चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। संख्याबल के हिसाब से भी काफी संख्या में दोनों सेनाओं के जवान जरूरी सैन्य साजो सामान के साथ एक-दूसरे के आमने-सामने डटे हुए हैं। बीते चार से छः मई के दौरान दोनों के बीच जर्बरदस्त तनातनी होने के तथ्य का भी खुलासा हुआ था। इसके बाद से दोनों ओर से इस विवाद को शांत करने के लिए सेना के कर्नल, ब्रिगेडियर से लेकर मेजर जनरल रैंक स्तर तक के अधिकारियों के बीच करीब छः दौर की वार्ता बैठकें भी हो चुकी हैं। लेकिन यह सभी पूरी तरह से बेनतीजा रही हैं। इसी के बाद अब सेना में शीर्ष स्तर यानि लेफ्टिनेंट जनरल रैंक की बैठक को उक्त विवाद को समाप्त करने के लिए आयोजित करने का फैसला लिया गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी सप्ताहांत में होने वाली इस बैठक की पुष्टि की है। सेनाप्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरावणे ने उन्हें हाल ही में इस बैठक के बारे में विस्तार से ब्रीफ किया है। रक्षा मंत्री अपने पूर्ववर्ती बयानों में यह स्पष्ट कर चुके हैं कि भारत-चीन के बीच विवाद का निपटारा मौजूदा तंत्र की मदद से बातचीत के जरिए ही निकाला जाएगा। दोनों देश इसकी कवायद में लगे हैं। उधर मंगलवार देर रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप से फोन पर हुई वार्ता के दौरान भी चर्चा की है।
है । अन्त मे विभीषण के विलाप में उसके मन की ग्लानि है । वह अपने भाई के पक्ष को छोड़कर है और यह बात उसके मन को अन्त में पीड़ा अवश्य पहुॅचाती है - 'तुम्हारा पक्ष न ग्रहण करने वाला मैं यदि धार्मिकों में प्रमुख गिना जाऊँगा तो भला धार्मिकों में प्रमुख कौन गिना जायगा ११ (१५ः८८) । यद्यपि विभीषण के चरित्र के साथ उसका यह कथन व्यग्य के समान ही है। मानवीय मनोभावों के चित्रण की दृष्टि से कालिदास भावात्मक परि के समकक्ष यदि कोई दूसरा कवि पहुँच सका है तो स्थितियाँ तथा प्रवरसेन ही । रस के अन्तर्गत विभाव, अनुभाव तथा मनोभावों की सचारियों आदि के वर्णन की बात दूसरी है । इस अभिव्यक्ति प्रकार के वर्णनों में अन्य कवियों ने सूक्ष्मदृष्टि का परिचय दिया है । पर मानवीय जीवन के सहज तथा स्वाभाविक स्तर पर भावात्मक परिस्थितियों तथा मनोभावों की अभिव्यक्ति और उसका निर्वाह बिल्कुल भिन्न बात है । इस क्षेत्र में कालिदास संस्कृत के कवियों मे हैं। परष्टि तथा सवेदनशीलता की दृष्टि से प्राकृत कवि प्रवरसेन कालिदास के निकट पहुँच जाते हैं । के कवियों में मनोवैज्ञानिक परिस्थितियों तथा सूक्ष्म मनोभावों के चित्ररण के स्थान पर रूपात्मक स्थितियों तथा अनुभावों का चित्रमय वर्णन मिलता है । परन्तु प्रवरसेन ने मनुष्य के मन के नानाविध भावों को प्रकार से अभिव्यक्त करने का प्रयत्न किया है। और इस प्रकार के चित्रणों में भावों के सूक्ष्म छायातपों (shades ) को कवि उतार सका है। प्रवरसेन ने अनेक स्थलों पर भावों को व्यक्ति के बाह्य रूपाकार में अभिव्यक्त किया है। मनुष्य के आन्तरिक भावों की छाया उसके मुखादि पर प्रतिघटित हो जाती है । कवि इस प्रकार के चित्रण में पूर्ण सफलता प्राप्त कर सका है- 'हनुमान के जाने के बहुत समय बीत जाने पर सीतामिलन के शा-सूत्र के दृश्य होने के कारण प्रवाह के रुक जाने पर भी उनके मुख पर रुदन का भाव घना था' (१ : ३५) । इस चित्र मे राम के मन की निराशा, पीड़ा, क्लेश तथा निरुपायता प्रकट हो जाती है। इसी प्रकार राम के आन्तरिक क्रोध को कवि ने भगिमा मे व्यजित किया है :बाहमइल पि तो से दहमुहचिन्तावियम्भमारणामरिसम् । जा दुक्खालो जरढा अन्तरविमण्डल विम् ।।१ः४३।। सुग्रीव के ओजस्वी भाषण के बाद जाम्बवान् की गम्भीर तथा विचारशील मुद्रा का कवि ने किया है - 'निकटवर्ती छोटे श्वेत मेघखण्ड से जिसकी घोषधि की प्रभा कुछ खिन्न सी हो गई है ऐसे पर्वत के समान जाम्बवान् की दृष्टि बुढापे के कारण झुकी हुई भौहों से अवरुद्ध हुई' (४ : १७) । इस चित्रण में जाम्बवान् के व्यक्तित्व के साथ उनका उस क्षण का अान्तरिक भाव भी व्यक्त हुआ । वे समझ रहे कि केवल साहसपूर्ण वचनों से यह दुष्कर कार्य सम्पन्न नहीं हो सकता। प्रचलित अनुभवों के माध्यम से मनोभावों की व्यजना में भी कवि सफल हुआ है :अह जणि अमिउडिभङ्ग जात्र धगुहुत्तवलिलो जुलम् । मरिसविणकम्य सिढिलजडाभारबधण तस्स मुहम् ।।५ः१५॥ राम की वक्र भ्रु कुटियों से, कम्पित होकर ढीली पड़ गई जटाओं से उनका क्रोध प्रत्यक्ष हो जाता है। वानरों के अथक परिश्रम के बाद भी जब सागर पर सेतु न बन सका तब सुग्रीव ने नल से सेतु-रचना के लिए कहा, और उस समय उन्होंने तिरछे करकेत रूप से स्थित वाये हाथ पर अपनी ठुड्ढी का भार आरोपित कर रखा है, जिससे उनके मन का भाव स्पष्ट हो गया है । यहाॅ सुग्रीव के मन का हतोत्साह, चिन्ता तथा व्यग्रता आदि व्यक्त की गई है (८ : १३) । नल के कथन के समय की भगिमा मे उसके मन की भावस्थिति परिलक्षित होती है तो पलाहि फुड विरगाणासड घणिव्वलन्तच्छायो । पभमुम्मुहविराणभहित्यलोणो भगइ गलो ।।८ः१८।।
है । अन्त मे विभीषण के विलाप में उसके मन की ग्लानि है । वह अपने भाई के पक्ष को छोड़कर है और यह बात उसके मन को अन्त में पीड़ा अवश्य पहुॅचाती है - 'तुम्हारा पक्ष न ग्रहण करने वाला मैं यदि धार्मिकों में प्रमुख गिना जाऊँगा तो भला धार्मिकों में प्रमुख कौन गिना जायगा ग्यारह । यद्यपि विभीषण के चरित्र के साथ उसका यह कथन व्यग्य के समान ही है। मानवीय मनोभावों के चित्रण की दृष्टि से कालिदास भावात्मक परि के समकक्ष यदि कोई दूसरा कवि पहुँच सका है तो स्थितियाँ तथा प्रवरसेन ही । रस के अन्तर्गत विभाव, अनुभाव तथा मनोभावों की सचारियों आदि के वर्णन की बात दूसरी है । इस अभिव्यक्ति प्रकार के वर्णनों में अन्य कवियों ने सूक्ष्मदृष्टि का परिचय दिया है । पर मानवीय जीवन के सहज तथा स्वाभाविक स्तर पर भावात्मक परिस्थितियों तथा मनोभावों की अभिव्यक्ति और उसका निर्वाह बिल्कुल भिन्न बात है । इस क्षेत्र में कालिदास संस्कृत के कवियों मे हैं। परष्टि तथा सवेदनशीलता की दृष्टि से प्राकृत कवि प्रवरसेन कालिदास के निकट पहुँच जाते हैं । के कवियों में मनोवैज्ञानिक परिस्थितियों तथा सूक्ष्म मनोभावों के चित्ररण के स्थान पर रूपात्मक स्थितियों तथा अनुभावों का चित्रमय वर्णन मिलता है । परन्तु प्रवरसेन ने मनुष्य के मन के नानाविध भावों को प्रकार से अभिव्यक्त करने का प्रयत्न किया है। और इस प्रकार के चित्रणों में भावों के सूक्ष्म छायातपों को कवि उतार सका है। प्रवरसेन ने अनेक स्थलों पर भावों को व्यक्ति के बाह्य रूपाकार में अभिव्यक्त किया है। मनुष्य के आन्तरिक भावों की छाया उसके मुखादि पर प्रतिघटित हो जाती है । कवि इस प्रकार के चित्रण में पूर्ण सफलता प्राप्त कर सका है- 'हनुमान के जाने के बहुत समय बीत जाने पर सीतामिलन के शा-सूत्र के दृश्य होने के कारण प्रवाह के रुक जाने पर भी उनके मुख पर रुदन का भाव घना था' । इस चित्र मे राम के मन की निराशा, पीड़ा, क्लेश तथा निरुपायता प्रकट हो जाती है। इसी प्रकार राम के आन्तरिक क्रोध को कवि ने भगिमा मे व्यजित किया है :बाहमइल पि तो से दहमुहचिन्तावियम्भमारणामरिसम् । जा दुक्खालो जरढा अन्तरविमण्डल विम् ।।एकःतैंतालीस।। सुग्रीव के ओजस्वी भाषण के बाद जाम्बवान् की गम्भीर तथा विचारशील मुद्रा का कवि ने किया है - 'निकटवर्ती छोटे श्वेत मेघखण्ड से जिसकी घोषधि की प्रभा कुछ खिन्न सी हो गई है ऐसे पर्वत के समान जाम्बवान् की दृष्टि बुढापे के कारण झुकी हुई भौहों से अवरुद्ध हुई' । इस चित्रण में जाम्बवान् के व्यक्तित्व के साथ उनका उस क्षण का अान्तरिक भाव भी व्यक्त हुआ । वे समझ रहे कि केवल साहसपूर्ण वचनों से यह दुष्कर कार्य सम्पन्न नहीं हो सकता। प्रचलित अनुभवों के माध्यम से मनोभावों की व्यजना में भी कवि सफल हुआ है :अह जणि अमिउडिभङ्ग जात्र धगुहुत्तवलिलो जुलम् । मरिसविणकम्य सिढिलजडाभारबधण तस्स मुहम् ।।पाँचःपंद्रह॥ राम की वक्र भ्रु कुटियों से, कम्पित होकर ढीली पड़ गई जटाओं से उनका क्रोध प्रत्यक्ष हो जाता है। वानरों के अथक परिश्रम के बाद भी जब सागर पर सेतु न बन सका तब सुग्रीव ने नल से सेतु-रचना के लिए कहा, और उस समय उन्होंने तिरछे करकेत रूप से स्थित वाये हाथ पर अपनी ठुड्ढी का भार आरोपित कर रखा है, जिससे उनके मन का भाव स्पष्ट हो गया है । यहाॅ सुग्रीव के मन का हतोत्साह, चिन्ता तथा व्यग्रता आदि व्यक्त की गई है । नल के कथन के समय की भगिमा मे उसके मन की भावस्थिति परिलक्षित होती है तो पलाहि फुड विरगाणासड घणिव्वलन्तच्छायो । पभमुम्मुहविराणभहित्यलोणो भगइ गलो ।।आठःअट्ठारह।।
देश की एकता पर कभी आँच आने नहीं देना। प्यार से आबाद रखना वतन के चमन को। 1- हर बार जो कत्ल एकता का हुआ। जख्में ज़िगर मेरे मुल्क़ का था। फिर भी क्यूं हर कोई यहाँ प्यार बाँटता नहीं। 3 -एक आँख भी रोती है जो, तो रोता है, मेरा देश । फिर भी क्यूँ "सर्वे भवन्तु सुखिनः" का मंत्र हर कोई बाँचता नहीं। हर बार जो कत्ल एकता का हुआ जख्में जिगर मेरे देश का था। फिर क्यूँ हर कोई प्यार बांटता नहीं। 4- मैं हिन्दु, मैं मुस्लिम, मैं सिक्ख, मैं ईसाई। ये दूरियाँ नहीं सुहाती मेरे देश को, एक ही है पहचान हम सबकी । जो डाल -डाल है, पात-पात पर। मेरे देश के लिए है ज़हर । मेरा मुल्क तेरा मुल्क है, ये एक ही है हम सबकी पहचान, 6 -अन्न -धन बढ़ा, दौलत बढ़ी, बढ़ा मान - सम्मान , शोध बढ़ी ,अनुसंधान हुए , बढ़ा ज्ञान - विज्ञान। जन - जीवन से "ईमान "! " ईमान" ही सबसे बड़ा धर्म है। मेरा मुल्क तेरा मुल्क एक है, एक ही है हम सबकी पहचान । लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
देश की एकता पर कभी आँच आने नहीं देना। प्यार से आबाद रखना वतन के चमन को। एक- हर बार जो कत्ल एकता का हुआ। जख्में ज़िगर मेरे मुल्क़ का था। फिर भी क्यूं हर कोई यहाँ प्यार बाँटता नहीं। तीन -एक आँख भी रोती है जो, तो रोता है, मेरा देश । फिर भी क्यूँ "सर्वे भवन्तु सुखिनः" का मंत्र हर कोई बाँचता नहीं। हर बार जो कत्ल एकता का हुआ जख्में जिगर मेरे देश का था। फिर क्यूँ हर कोई प्यार बांटता नहीं। चार- मैं हिन्दु, मैं मुस्लिम, मैं सिक्ख, मैं ईसाई। ये दूरियाँ नहीं सुहाती मेरे देश को, एक ही है पहचान हम सबकी । जो डाल -डाल है, पात-पात पर। मेरे देश के लिए है ज़हर । मेरा मुल्क तेरा मुल्क है, ये एक ही है हम सबकी पहचान, छः -अन्न -धन बढ़ा, दौलत बढ़ी, बढ़ा मान - सम्मान , शोध बढ़ी ,अनुसंधान हुए , बढ़ा ज्ञान - विज्ञान। जन - जीवन से "ईमान "! " ईमान" ही सबसे बड़ा धर्म है। मेरा मुल्क तेरा मुल्क एक है, एक ही है हम सबकी पहचान । लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
यमुनानगर - पंचनद शोध संस्थान यमुनानगर अध्ययन केंद्र द्वारा विद्यार्थियों में बढ़ती हिंसात्मक प्रवृति विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन डीएवी कन्या महाविद्यालय में किया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वद्यिलय भोपाल मध्य प्रदेश के कुलपति, संस्थान के राष्ट्रीय निदेशक प्रोफेसर बीके कुठियाला उपस्थित रहे। इस मौके पर मुख्य वक्ता ने कहा कि एकाध घटनाओं के चलते पूरी युवा पीढ़ी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। भारतीय संस्कृति और परंपराओं का उदाहरण देते हुए प्रोफेसर कुठियाला ने कहा कि जब तक भारतीय शिक्षा व्यवस्था में भारतीयता का प्रभाव रहा, तब तक गुरु-शिष्य के बीच बहुत ही प्रभावी और स्नेह भरे संबंध रहे। इस अवसर पर डीएवी कालेज प्रबंध समिति नई दिल्ली के कोषाध्यक्ष डा. एमसी शर्मा ने पिछले दिनों यमुनानगर में हुए प्रिंसीपल हत्याकांड पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि बच्चों को संस्कारित करना वक्त की जरूरत है। पंचनद यमुनानगर के अध्यक्ष सुरेश पाल ने अतिथियों का परिचय करवाते हुए पंचनद के बारे में जानकारी दी। डीएवी कन्या महाविद्यालय की कार्यवाहक प्राचार्या डा. विभा गुप्ता ने कहा कि उनके कालेज में छात्राओं के लिए प्रतिदिन प्रार्थना व समय समय पर नैतिक उत्थान के लिए अनेकों आयोजन होते हैं, जिससे कि उनका आत्मिक, नैतिक और मानसिक विकास हो सके।
यमुनानगर - पंचनद शोध संस्थान यमुनानगर अध्ययन केंद्र द्वारा विद्यार्थियों में बढ़ती हिंसात्मक प्रवृति विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन डीएवी कन्या महाविद्यालय में किया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वद्यिलय भोपाल मध्य प्रदेश के कुलपति, संस्थान के राष्ट्रीय निदेशक प्रोफेसर बीके कुठियाला उपस्थित रहे। इस मौके पर मुख्य वक्ता ने कहा कि एकाध घटनाओं के चलते पूरी युवा पीढ़ी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। भारतीय संस्कृति और परंपराओं का उदाहरण देते हुए प्रोफेसर कुठियाला ने कहा कि जब तक भारतीय शिक्षा व्यवस्था में भारतीयता का प्रभाव रहा, तब तक गुरु-शिष्य के बीच बहुत ही प्रभावी और स्नेह भरे संबंध रहे। इस अवसर पर डीएवी कालेज प्रबंध समिति नई दिल्ली के कोषाध्यक्ष डा. एमसी शर्मा ने पिछले दिनों यमुनानगर में हुए प्रिंसीपल हत्याकांड पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि बच्चों को संस्कारित करना वक्त की जरूरत है। पंचनद यमुनानगर के अध्यक्ष सुरेश पाल ने अतिथियों का परिचय करवाते हुए पंचनद के बारे में जानकारी दी। डीएवी कन्या महाविद्यालय की कार्यवाहक प्राचार्या डा. विभा गुप्ता ने कहा कि उनके कालेज में छात्राओं के लिए प्रतिदिन प्रार्थना व समय समय पर नैतिक उत्थान के लिए अनेकों आयोजन होते हैं, जिससे कि उनका आत्मिक, नैतिक और मानसिक विकास हो सके।
नेपालगन्ज,(बाँके) पवन जायसवाल, कार्तिक ३० गते । बाँके जिला के नेपालगन्ज -५ स्थित समावेशी ईग्लिस मिडियम स्कूल नेपालगञ्ज ने शनिवार को एक दिन का छात्रों को भित्ते-पत्रिका सम्वन्धित पत्रकारिता का प्रशिक्षण दिया है । विद्यालय में अभी जल्द ही बाल क्लव का गठन हुआ क्लब में आवद्ध विद्यार्थीयों को लक्षित करके पत्रकारिता का प्रशिक्षण दिया गया है । विद्यार्थीयों ने भित्तेलेखन प्रकाशन को अच्छा, व्यवस्थित तथा प्रभावकारी बनाने के लियें और बिद्यार्थीयो का क्षमता अभिबृद्धि कराने के लियें बिद्यालय में एक दिन का भित्तेपत्रिका सम्वन्धित प्रशिक्षण दिया गया है । विद्यालय के प्रधानाध्यापक हेमन्तराज काफ्ले ने जानकारी दिया है। बिद्यालय के कक्षा ६ से १० तक में अध्ययनरत दो दर्जन से अधिक विद्यार्थीयों की सहभागिता रही थी प्रशिक्षण उद्घाटन कार्यक्रम में नेपाल पत्रकार महासंघ बाँके जिला के अध्यक्ष रुद्र सुवेदी ने भित्तेलेखन प्रकाशन ने विद्यार्थीयों में अतिरिक्त प्रतिभा आयेंगी बताया । भित्तेलेखन प्रकाशन पत्रकारिता कार्यक्रम में बाँके जिला के रेडियो कृष्णसार एफएम के समाचार सह-संयोजक एवं सहजकर्ता प्रियास्मृति ढकाल ने भित्तेपत्रिका लेखन पत्रकारिता की जग है वताया । इसी तरह एक दिन के प्रशिक्षण में रेडियो कृष्णसार एफ.एमकर्मी सावित्री गिरी ने भी सहजीकरण किया था बिद्यालय के प्रधानाध्यापक हेमन्तराज काफ्ले ने बताया ।
नेपालगन्ज, पवन जायसवाल, कार्तिक तीस गते । बाँके जिला के नेपालगन्ज -पाँच स्थित समावेशी ईग्लिस मिडियम स्कूल नेपालगञ्ज ने शनिवार को एक दिन का छात्रों को भित्ते-पत्रिका सम्वन्धित पत्रकारिता का प्रशिक्षण दिया है । विद्यालय में अभी जल्द ही बाल क्लव का गठन हुआ क्लब में आवद्ध विद्यार्थीयों को लक्षित करके पत्रकारिता का प्रशिक्षण दिया गया है । विद्यार्थीयों ने भित्तेलेखन प्रकाशन को अच्छा, व्यवस्थित तथा प्रभावकारी बनाने के लियें और बिद्यार्थीयो का क्षमता अभिबृद्धि कराने के लियें बिद्यालय में एक दिन का भित्तेपत्रिका सम्वन्धित प्रशिक्षण दिया गया है । विद्यालय के प्रधानाध्यापक हेमन्तराज काफ्ले ने जानकारी दिया है। बिद्यालय के कक्षा छः से दस तक में अध्ययनरत दो दर्जन से अधिक विद्यार्थीयों की सहभागिता रही थी प्रशिक्षण उद्घाटन कार्यक्रम में नेपाल पत्रकार महासंघ बाँके जिला के अध्यक्ष रुद्र सुवेदी ने भित्तेलेखन प्रकाशन ने विद्यार्थीयों में अतिरिक्त प्रतिभा आयेंगी बताया । भित्तेलेखन प्रकाशन पत्रकारिता कार्यक्रम में बाँके जिला के रेडियो कृष्णसार एफएम के समाचार सह-संयोजक एवं सहजकर्ता प्रियास्मृति ढकाल ने भित्तेपत्रिका लेखन पत्रकारिता की जग है वताया । इसी तरह एक दिन के प्रशिक्षण में रेडियो कृष्णसार एफ.एमकर्मी सावित्री गिरी ने भी सहजीकरण किया था बिद्यालय के प्रधानाध्यापक हेमन्तराज काफ्ले ने बताया ।
लखनऊ। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष हरीश रावत ने भाजपा सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि आखिरी समय में राज्य सचिवालय में धन का खुला खेल हुआ है। ट्रांसफर-पोस्टिंग में करोड़ों के वारे न्यारे किए गए। चुनाव आयोग के आदेशों का शर्मनाक तरीके से उल्लंघन किया गया। कहा कि सचिवालय में धन का जो खेल हुआ है, भ्रष्टाचार के कारण उससे आसपास का वातारण भी दूषित हो गया है। कांग्रेस मुख्यालय में प्रेववार्ता को संबोधित करते हुए पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा कि राज्य में चुनाव की घोषणा के बाद आबकारी विभाग में एक आदेश निकाला गया, जिसके जरिए करोड़ों रुपए का खेल हुआ। यह आदेश उच्च क्वालिटी की मदिरा को लेकर था, जिसके लिए आबकारी कमिश्नर तक को बदल दिया गया। आबकारी के अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य और सहकारिता में चहेतों को बैक डोर से पोस्टिंग दी गई। शिक्षा विभाग में शर्मनाक तरीके से छुट्टी वाले दिन कार्यालय खुलवाकर छह सौ से अधिक आदेश निकले गए, इनकी संख्या ज्यादा भी हो सकती है। रावत ने कहा कि कांग्रेस ने चुनाव आयोग को ऐसे विभागों की लिस्ट भेजकर शिकायत दर्ज करा दी है। हरीश रावत ने कहा सरकार ने आनन-फानन में सांविधानिक पदों पर जो राजनीतिक नियुक्तियां की हैं, कांग्रेस के सत्ता में लौटने पर सबको रद्द करने के साथ इनकी जांच कराई जाएगी। इस जांच में जो भी अधिकारी दोषी पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ कांग्रेस हर तरीके से अपना विरोध दर्ज कराएगी। रावत का आरोप है कि सरकार ने आखिरी समय में बड़े पैमाने पर राजनीतिक नियुक्तियां की हैं। इनकी प्रेस रिलीज और पोस्टर आचार संहिता लागू हो जाने के बाद बाहर आ रहे हैं। स्पष्ट है कि राज्य में चुनाव आचार संहिता लागू हो जाने के बाद यह नियुक्तियां की गई हैं, जो चुनाव आयोग के नियमों का खुला उल्लंघन है। ऐसा करके सरकार किसकी आंखों में धूल झोंक रही है। उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की कि ऐसी सभी फाइलों को सीज किया जाए और नियुक्तियों को रद्द किया जाए। जिन अधिकारियों ने ऐसे आदेश जारी किए हैं, उनके ऊपर चुनाव आयोग नियमों के अनुसार कार्रवाई करे।
लखनऊ। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष हरीश रावत ने भाजपा सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि आखिरी समय में राज्य सचिवालय में धन का खुला खेल हुआ है। ट्रांसफर-पोस्टिंग में करोड़ों के वारे न्यारे किए गए। चुनाव आयोग के आदेशों का शर्मनाक तरीके से उल्लंघन किया गया। कहा कि सचिवालय में धन का जो खेल हुआ है, भ्रष्टाचार के कारण उससे आसपास का वातारण भी दूषित हो गया है। कांग्रेस मुख्यालय में प्रेववार्ता को संबोधित करते हुए पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा कि राज्य में चुनाव की घोषणा के बाद आबकारी विभाग में एक आदेश निकाला गया, जिसके जरिए करोड़ों रुपए का खेल हुआ। यह आदेश उच्च क्वालिटी की मदिरा को लेकर था, जिसके लिए आबकारी कमिश्नर तक को बदल दिया गया। आबकारी के अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य और सहकारिता में चहेतों को बैक डोर से पोस्टिंग दी गई। शिक्षा विभाग में शर्मनाक तरीके से छुट्टी वाले दिन कार्यालय खुलवाकर छह सौ से अधिक आदेश निकले गए, इनकी संख्या ज्यादा भी हो सकती है। रावत ने कहा कि कांग्रेस ने चुनाव आयोग को ऐसे विभागों की लिस्ट भेजकर शिकायत दर्ज करा दी है। हरीश रावत ने कहा सरकार ने आनन-फानन में सांविधानिक पदों पर जो राजनीतिक नियुक्तियां की हैं, कांग्रेस के सत्ता में लौटने पर सबको रद्द करने के साथ इनकी जांच कराई जाएगी। इस जांच में जो भी अधिकारी दोषी पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ कांग्रेस हर तरीके से अपना विरोध दर्ज कराएगी। रावत का आरोप है कि सरकार ने आखिरी समय में बड़े पैमाने पर राजनीतिक नियुक्तियां की हैं। इनकी प्रेस रिलीज और पोस्टर आचार संहिता लागू हो जाने के बाद बाहर आ रहे हैं। स्पष्ट है कि राज्य में चुनाव आचार संहिता लागू हो जाने के बाद यह नियुक्तियां की गई हैं, जो चुनाव आयोग के नियमों का खुला उल्लंघन है। ऐसा करके सरकार किसकी आंखों में धूल झोंक रही है। उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की कि ऐसी सभी फाइलों को सीज किया जाए और नियुक्तियों को रद्द किया जाए। जिन अधिकारियों ने ऐसे आदेश जारी किए हैं, उनके ऊपर चुनाव आयोग नियमों के अनुसार कार्रवाई करे।
NewDelhi : शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (एनएसए) और सुरक्षा अधिकारियों की बैठक आज बुधवार को दिल्ली में होगी. बैठक की अध्यक्षता इस बार भारत के हिस्से में आयी है. खबर है कि एनएसए अजीत डोभाल बैठक की अध्यक्षता करेंगे. यह भी खबर है कि चीन और पाकिस्तान के प्रतिनिधि इसमें वर्चुअल शामिल होंगे. जान लें कि एससीओ आठ देशों का एक ग्रुप है. इस ग्रुप में चीन, भारत, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल हैं. जानकारी के अनुसार एनएसए की बैठक के बाद सदस्य देशों के रक्षा मंत्रियों, विदेश मंत्रियों और उसके बाद राष्ट्र प्रमुखों की बैठक होगी. भारत ने सभी सदस्य देशों चीन, पाकिस्तान, रूस, उज्बेकिस्तान, तुर्केमिनिस्तान, किर्गिजस्तान, कजाखस्तान, ताजिकिस्तान सहित कुछ अन्य देशों को आमंत्रण भेज दिया है. जान लें कि अजीत डोभाल हमेशा एससीओ के मंच से आतंकवाद को बढ़ावा देने की पाकिस्तान को लताड़ते आये हैं. इस बार भी यही हो सकता है. याद करें कि 2021 में इसी मंच से डोभाल ने पाकिस्तान की शह पर पलने वाले आतंकी संगठन लश्करे तैयबा और जैश ए मोहम्मद के खिलाफ एससीओ की तरफ से संयुक्त कार्य योजना बनाने का प्रस्ताव किया था. बताया गया है कि आज दिल्ली में हो रही इस बैठक में अफगानिस्तान का मुद्दा भी उठेगा. शंघाई सहयोग संगठन एक प्रमुख क्षेत्रीय महाशक्ति है, जिसकी स्थापना दो दशक पहले अपने सदस्य देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सैन्य सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गयी थी. भारत 9 जून, 2017 को एससीओ का पूर्ण सदस्य बन गया था.
NewDelhi : शंघाई सहयोग संगठन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और सुरक्षा अधिकारियों की बैठक आज बुधवार को दिल्ली में होगी. बैठक की अध्यक्षता इस बार भारत के हिस्से में आयी है. खबर है कि एनएसए अजीत डोभाल बैठक की अध्यक्षता करेंगे. यह भी खबर है कि चीन और पाकिस्तान के प्रतिनिधि इसमें वर्चुअल शामिल होंगे. जान लें कि एससीओ आठ देशों का एक ग्रुप है. इस ग्रुप में चीन, भारत, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल हैं. जानकारी के अनुसार एनएसए की बैठक के बाद सदस्य देशों के रक्षा मंत्रियों, विदेश मंत्रियों और उसके बाद राष्ट्र प्रमुखों की बैठक होगी. भारत ने सभी सदस्य देशों चीन, पाकिस्तान, रूस, उज्बेकिस्तान, तुर्केमिनिस्तान, किर्गिजस्तान, कजाखस्तान, ताजिकिस्तान सहित कुछ अन्य देशों को आमंत्रण भेज दिया है. जान लें कि अजीत डोभाल हमेशा एससीओ के मंच से आतंकवाद को बढ़ावा देने की पाकिस्तान को लताड़ते आये हैं. इस बार भी यही हो सकता है. याद करें कि दो हज़ार इक्कीस में इसी मंच से डोभाल ने पाकिस्तान की शह पर पलने वाले आतंकी संगठन लश्करे तैयबा और जैश ए मोहम्मद के खिलाफ एससीओ की तरफ से संयुक्त कार्य योजना बनाने का प्रस्ताव किया था. बताया गया है कि आज दिल्ली में हो रही इस बैठक में अफगानिस्तान का मुद्दा भी उठेगा. शंघाई सहयोग संगठन एक प्रमुख क्षेत्रीय महाशक्ति है, जिसकी स्थापना दो दशक पहले अपने सदस्य देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सैन्य सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गयी थी. भारत नौ जून, दो हज़ार सत्रह को एससीओ का पूर्ण सदस्य बन गया था.
पूर्व मंत्री जीएस बाली ने नगरोटा बगवां में आज कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। इस बैठक में विधानसभा क्षेत्र के सैकड़ों लोगों ने शिरकत की और पार्टी की मजबूती को लेकर रणनीति पर बात की। इससे पहले पूर्व मंत्री ने क्षेत्र के लोगों को नए साल की शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने भी जीएस बाली को नए साल की शुभकामनाएं दी और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की। इस कार्यक्रम को कई स्थानीय नेताओं ने संबोधित किया और सभी ने एक सुर में कहा कि नगरोटा बगवां में जीएस बाली ने जो विकास कार्य करवाये थे वो रुक गए हैं। क्षेत्र के विकास के लिए ये ज़रूरी है कि एक बार फिर कमान जीएस बाली के कंधों पर हो और प्रदेश में कांग्रेस की सरकार हो। आगामी चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस की सरकार हो इसके लिए सभी कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर अभी से अभियान में जुड़ना होगा।
पूर्व मंत्री जीएस बाली ने नगरोटा बगवां में आज कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। इस बैठक में विधानसभा क्षेत्र के सैकड़ों लोगों ने शिरकत की और पार्टी की मजबूती को लेकर रणनीति पर बात की। इससे पहले पूर्व मंत्री ने क्षेत्र के लोगों को नए साल की शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने भी जीएस बाली को नए साल की शुभकामनाएं दी और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की। इस कार्यक्रम को कई स्थानीय नेताओं ने संबोधित किया और सभी ने एक सुर में कहा कि नगरोटा बगवां में जीएस बाली ने जो विकास कार्य करवाये थे वो रुक गए हैं। क्षेत्र के विकास के लिए ये ज़रूरी है कि एक बार फिर कमान जीएस बाली के कंधों पर हो और प्रदेश में कांग्रेस की सरकार हो। आगामी चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस की सरकार हो इसके लिए सभी कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर अभी से अभियान में जुड़ना होगा।
भगवान राम और मां सीता की कहानी जिस महाकाव्य में है, उसे रामायण कहा जाता है. रामायण हिंदू रघुवंश के राजा राम की कहानी है. जिसकी रचना आदि कवि वाल्मीकि द्वारा की गई थी. जिसमें भगवान राम को जिस दिन राज सिंहासन मिलने वाला था. उसे वनवास का आदेश दिया गया. जिसके साथ में माता सीता और लक्ष्मण भी जाते हैं. वहां सीता माता को लंकापति रावण ले जाता है. भगवान श्रीराम रावण से युद्ध कर हराकर सीता माता को घर लाते हैं. रामायण के बारे में ये तो आपने पढ़ा होगा. इसमें बहुत से रहस्य भी हैं. आज मुख्य तीन रहस्यों की चर्चा करते हैं. जिनके बारें में शायद आप नहीं जानते होगें. गायत्री मंत्र में 24 अक्षर होते हैं. वहीं वाल्कमिकी की रामायण में 24000 श्लोक हैं. रामायण के हर एक हजार श्लोक के बाद आने वाले पहले अक्षर से गायत्री मंत्र बनता है. यह मंत्र इस पवित्र महाकाव्य का सार है. अगर हम बात करें कि गायत्री मंत्र का सबसे पहले उल्लेख कहां हुआ था. तो वैदिक साहित्य में ऋग्वेद में हमें गायत्री मंत्र का सबसे पहले उल्लेख मिलता है. आपने सुना होगा कि राम के तीन भाई और थे. लेकिन आपको बता दें राजा दशरथ को एक पुत्री भी थी. जिसका नाम शांता था. वो चारों भाईयों में सबसे बड़ी थी तथा उसकी माता का नाम कौशल्या था. ऐसा बताया जाता है कि अंक देश के राजा रोमपद और उसकी रानी वर्षणी को कोई संतान नहीं थी. जब राजा दशरथ को यह बात पता चली तो उन्होनें अपनी पुत्री शांता को राजा रोमपद और रानी वर्षणी को गोद दे दिया था. इसके बाद उन्होने की शांता के माता पिता होने के सारे कर्तव्य निभाए. यह भी पढ़ेंः भगवान को भोग लगाते समय कौन सा भजन गाना चाहिए? भगवान राम के छोटे भाई लक्ष्मण का भ्रातृ प्रेम तो आप जानते ही होगें. जो अपने भाई के साथ 14 वर्षों के लिए वनवास में आ गया. ऐसा माना जाता है कि वनवास के 14 वर्षों के दौरान लक्ष्मण अपने बड़े भाई राम और भाभी सीता की रक्षा के लिए कभी नहीं सोते थे. इसी कारण उनका नाम गुदाकेश रखा गया.
भगवान राम और मां सीता की कहानी जिस महाकाव्य में है, उसे रामायण कहा जाता है. रामायण हिंदू रघुवंश के राजा राम की कहानी है. जिसकी रचना आदि कवि वाल्मीकि द्वारा की गई थी. जिसमें भगवान राम को जिस दिन राज सिंहासन मिलने वाला था. उसे वनवास का आदेश दिया गया. जिसके साथ में माता सीता और लक्ष्मण भी जाते हैं. वहां सीता माता को लंकापति रावण ले जाता है. भगवान श्रीराम रावण से युद्ध कर हराकर सीता माता को घर लाते हैं. रामायण के बारे में ये तो आपने पढ़ा होगा. इसमें बहुत से रहस्य भी हैं. आज मुख्य तीन रहस्यों की चर्चा करते हैं. जिनके बारें में शायद आप नहीं जानते होगें. गायत्री मंत्र में चौबीस अक्षर होते हैं. वहीं वाल्कमिकी की रामायण में चौबीस हज़ार श्लोक हैं. रामायण के हर एक हजार श्लोक के बाद आने वाले पहले अक्षर से गायत्री मंत्र बनता है. यह मंत्र इस पवित्र महाकाव्य का सार है. अगर हम बात करें कि गायत्री मंत्र का सबसे पहले उल्लेख कहां हुआ था. तो वैदिक साहित्य में ऋग्वेद में हमें गायत्री मंत्र का सबसे पहले उल्लेख मिलता है. आपने सुना होगा कि राम के तीन भाई और थे. लेकिन आपको बता दें राजा दशरथ को एक पुत्री भी थी. जिसका नाम शांता था. वो चारों भाईयों में सबसे बड़ी थी तथा उसकी माता का नाम कौशल्या था. ऐसा बताया जाता है कि अंक देश के राजा रोमपद और उसकी रानी वर्षणी को कोई संतान नहीं थी. जब राजा दशरथ को यह बात पता चली तो उन्होनें अपनी पुत्री शांता को राजा रोमपद और रानी वर्षणी को गोद दे दिया था. इसके बाद उन्होने की शांता के माता पिता होने के सारे कर्तव्य निभाए. यह भी पढ़ेंः भगवान को भोग लगाते समय कौन सा भजन गाना चाहिए? भगवान राम के छोटे भाई लक्ष्मण का भ्रातृ प्रेम तो आप जानते ही होगें. जो अपने भाई के साथ चौदह वर्षों के लिए वनवास में आ गया. ऐसा माना जाता है कि वनवास के चौदह वर्षों के दौरान लक्ष्मण अपने बड़े भाई राम और भाभी सीता की रक्षा के लिए कभी नहीं सोते थे. इसी कारण उनका नाम गुदाकेश रखा गया.
Tariff Tussle News: टैरिफ बढ़ोतरी पर केबल ऑपरेटर्स और चैनलों में ठनी, प्रसारण बन्द टैरिफ बढ़ोतरी को लेकर टेलीविजन प्रसारकों और केबल ऑपरेटरों के बीच झगड़ा अब बढ़ गया है। Tariff Tussle News: टैरिफ बढ़ोतरी पर केबल ऑपरेटर्स और चैनलों में ठनी, प्रसारण बन्द टैरिफ बढ़ोतरी को लेकर टेलीविजन प्रसारकों और केबल ऑपरेटरों के बीच झगड़ा बढ़ गया है। डिज्नी स्टार, ज़ी एंटरटेनमेंट और सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया जैसे बड़े प्रसारकों ने कई बड़े केबल ऑपरेटरों के लिए अपने सिग्नल बन्द कर दिए हैं। जिससे चार करोड़ से अधिक ग्राहकों पर असर पड़ा है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के एक नए आदेश, एनटीओ 3. 0, के मद्देनजर प्रसारकों ने चैनल की टैरिफ पर 10 से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। लेकिन केबल ऑपरेटर्स को ये पसंद नहीं आ रहा है। समूह के साथ अच्छी तरह से नहीं बैठती है। ऑपरेटरों का कहना है कि फीस बढ़ाने का फैसला उपभोक्ताओं के साथ-साथ उनके अपने बिजनेस को भी प्रभावित करेगा। बताया जाता है कि सभी डीटीएच (डायरेक्ट टू होम) ऑपरेटरों, जिनमें एयरटेल और टाटा प्ले शामिल हैं, और पूरे भारत में अधिकांश केबल ऑपरेटरों ने ब्रॉडकास्टर्स के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। लेकिन बड़े ग्राहक आधार वाले मुट्ठी भर केबल ऑपरेटर करार करने से इनकार कर रहे हैं। ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन (एआईडीसीएफ) के नौ सदस्य केरल उच्च न्यायालय भी गए थे और गुहार लगाई थी कि ट्राई टीवी चैनलों के मूल्य निर्धारण को विनियमित करने या उनकी कीमतों को सीमित करने में विफल रहा है। अपनी ओर से ट्राई ने तर्क दिया कि महासंघ ने यह नहीं दिखाया है कि यह विनियमन या टैरिफ आदेश से कैसे प्रभावित होता है और इसलिए, इसे चुनौती देने का कोई अधिकार नहीं है। नियामक ने यह भी दावा किया कि एआईडीसीएफ ने 19 रुपये प्रति चैनल की कीमत कैप पर सहमति जताई थी। ईस बीच, सोनी, ज़ी और डिज़नी स्टार ने कोर्ट जाने वाले इन ऑपरेटरों के लिए अपनी सेवाएं बंद कर दीं। वायकॉम 18 मीडिया ने अपने को इससे बाहर रखा है। दिलचस्प बात यह है कि रिलायंस के पास डेन नेटवर्क्स और हैथवे केबल और डाटाकॉम जैसी केबल टीवी वितरण कंपनियां हैं, जो इन प्रसारकों के खिलाफ अदालत में गई हैं। ब्रॉडकास्टर्स द्वारा इन केबल ऑपरेटरों के लिए सिग्नल बंद करने के कदम पर इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन ने कहा था, कि अधिकांश डीटीएच और केबल ऑपरेटरों ने पहले ही नई कीमतों को लागू करना शुरू कर दिया है, जिसके लिए उन्हें उपभोक्ता कीमतों में पांच फीसदी वृद्धि करनी पड़ी। कुछ केबल ऑपरेटरों ने नए समझौतों पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं जिससे प्रसारकों को उचित नोटिस देने के बाद अपनी सेवाएं बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
Tariff Tussle News: टैरिफ बढ़ोतरी पर केबल ऑपरेटर्स और चैनलों में ठनी, प्रसारण बन्द टैरिफ बढ़ोतरी को लेकर टेलीविजन प्रसारकों और केबल ऑपरेटरों के बीच झगड़ा अब बढ़ गया है। Tariff Tussle News: टैरिफ बढ़ोतरी पर केबल ऑपरेटर्स और चैनलों में ठनी, प्रसारण बन्द टैरिफ बढ़ोतरी को लेकर टेलीविजन प्रसारकों और केबल ऑपरेटरों के बीच झगड़ा बढ़ गया है। डिज्नी स्टार, ज़ी एंटरटेनमेंट और सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया जैसे बड़े प्रसारकों ने कई बड़े केबल ऑपरेटरों के लिए अपने सिग्नल बन्द कर दिए हैं। जिससे चार करोड़ से अधिक ग्राहकों पर असर पड़ा है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण के एक नए आदेश, एनटीओ तीन. शून्य, के मद्देनजर प्रसारकों ने चैनल की टैरिफ पर दस से पंद्रह प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। लेकिन केबल ऑपरेटर्स को ये पसंद नहीं आ रहा है। समूह के साथ अच्छी तरह से नहीं बैठती है। ऑपरेटरों का कहना है कि फीस बढ़ाने का फैसला उपभोक्ताओं के साथ-साथ उनके अपने बिजनेस को भी प्रभावित करेगा। बताया जाता है कि सभी डीटीएच ऑपरेटरों, जिनमें एयरटेल और टाटा प्ले शामिल हैं, और पूरे भारत में अधिकांश केबल ऑपरेटरों ने ब्रॉडकास्टर्स के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। लेकिन बड़े ग्राहक आधार वाले मुट्ठी भर केबल ऑपरेटर करार करने से इनकार कर रहे हैं। ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन के नौ सदस्य केरल उच्च न्यायालय भी गए थे और गुहार लगाई थी कि ट्राई टीवी चैनलों के मूल्य निर्धारण को विनियमित करने या उनकी कीमतों को सीमित करने में विफल रहा है। अपनी ओर से ट्राई ने तर्क दिया कि महासंघ ने यह नहीं दिखाया है कि यह विनियमन या टैरिफ आदेश से कैसे प्रभावित होता है और इसलिए, इसे चुनौती देने का कोई अधिकार नहीं है। नियामक ने यह भी दावा किया कि एआईडीसीएफ ने उन्नीस रुपयापये प्रति चैनल की कीमत कैप पर सहमति जताई थी। ईस बीच, सोनी, ज़ी और डिज़नी स्टार ने कोर्ट जाने वाले इन ऑपरेटरों के लिए अपनी सेवाएं बंद कर दीं। वायकॉम अट्ठारह मीडिया ने अपने को इससे बाहर रखा है। दिलचस्प बात यह है कि रिलायंस के पास डेन नेटवर्क्स और हैथवे केबल और डाटाकॉम जैसी केबल टीवी वितरण कंपनियां हैं, जो इन प्रसारकों के खिलाफ अदालत में गई हैं। ब्रॉडकास्टर्स द्वारा इन केबल ऑपरेटरों के लिए सिग्नल बंद करने के कदम पर इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन ने कहा था, कि अधिकांश डीटीएच और केबल ऑपरेटरों ने पहले ही नई कीमतों को लागू करना शुरू कर दिया है, जिसके लिए उन्हें उपभोक्ता कीमतों में पांच फीसदी वृद्धि करनी पड़ी। कुछ केबल ऑपरेटरों ने नए समझौतों पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं जिससे प्रसारकों को उचित नोटिस देने के बाद अपनी सेवाएं बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
करियर डेस्क. UPSC 2019 Toppers Success Story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा 2019 का रिजल्ट (Civil Services Examination 2019 result) घोषित कर दिया है। यूपीएससी-2019 परीक्षा में प्रदीप सिंह (Pradeep Singh) ने पहला स्थान हासिल किया है। वहीं दूसरे स्थान पर जतिन किशोर (Jatin Kishore) और तीसरे स्थान पर प्रतिभा वर्मा (Pratibha Verma) रही हैं। दिल्ली पुलिस (Delhi Police) के द्वारका डीसीपी दफ्तर में तैनात एक ASI राजकुमार की बेटी विशाखा यादव (Vishakha Yadav) ने छठी रैंक हासिल की है। इस बार कुल 829 उम्मीदवारों का चयन किया गया है। यूपीएससी मुख्य परीक्षा में कुल 2304 उम्मीदवार सफल हुए थे। इनके लिए इंटरव्यू की प्रक्रिया 17 फरवरी, 2020 से शुरू हुई थी लेकिन कोरोना लॉकडाउन के चलते मार्च में इंटरव्यू स्थगित कर दिए गए थे। इंटरव्यू 20 जुलाई से 30 जुलाई के बीच आयोजित किए गए। UPSC के इस बार के टॉपर हैं हरियाणा के सोनीपत जिले के रहने वाले प्रदीप सिंह। प्रदीप का ये चौथा प्रयास था इससे पहले उन्होंने 2018 की सिविल सेवा परीक्षा में 260 वीं रैंक हासिल की थी। प्रदीप सिंह ने जब पहली बार यूपीएससी परीक्षा पास की थी तो उस समय उनकी उम्र मात्र 22 साल थी। टॉपर प्रदीप सोनीपत तेवड़ी गांव के रहने वाले एक साधारण किसान के बेटे हैं। प्रदीप अपनी सफलता का श्रेय पिता की मेहनत और विश्वास को बताते हैं। प्रदीप बताते हैं ये उनका ये चौथा प्रयास था, इससे पहले 2018 के यूपीएससी एग्जाम में उन्होंने 260 रैंक हासिल की थी। प्रदीप से अधिकारी के तौर पर उनकी प्राथमिकता के बारे में पूछे जाने पर कहा कि एक अधिकारी के तौर पर किसान और गरीबों के लिए काम करना उनकी प्राथमिकता है। प्रदीप सिंह फिलहाल इंडियन रेवेन्यू सर्विस के अंतर्गत भारत सरकार के अधीन सेवारत हैं। प्रदीप का कहना है कि वह एक साधारण परिवार से हैं और उनके पिता किसान हैं। प्रदीप की इच्छा है कि वह अपना गृह राज्य हरियाणा का कैडर लेना चाहते हैं। फिलहाल सोनीपत के तेवड़ी गांव और प्रदीप के घर पर खुशी और जश्न का माहौल है। बता दें कि विशाखा यादव उत्तर प्रदेश की मथुरा की रहने वाली हैं। विशाखा ने बीटेक दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनिरिंग से की है। बेंगलुरु में दो साल की इंजीनियरिंग की नौकरी करने के बाद विशाखा ने यूपीएससी की परीक्षा देने का फैसला किया। पिछले तीन-चार से विशाखा यूपीएससी इग्जाम की तैयारी कर रही थीं। विशाखा ने तीसरे प्रयास में छठी रैंक हासिल की है। इससे पहले दो प्रयास में विशाखा ने यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा भी पास नहीं कर सकी थी। विशाखा ने अपने इंटरव्यू में कहा है कि उनके पिता दिल्ली पुलिस में काम करते हैं। यही वजह है कि मैं यूपीएससी के लिए मन बनाया। मैं फाइनेंशियल स्वतंत्रता हासिल करना चाहती थी। परीक्षा में यूपी के सुल्तानपुर (Sultanpur) की प्रतिभा वर्मा ने लड़कियों में पहला स्थान हासिल किया है। प्रतिभा वर्मा की ओवरऑल रैंकिग 3 है। जबकि परीक्षा में दूसरे स्थान पर जतिन किशोर रहे हैं। प्रतिभा वर्मा सुल्तानपुर के बघराजपुर निवासी प्रधानाध्यापिका ऊषा वर्मा की पुत्री हैं। उनके इस प्रदर्शन से पूरे सुल्तानपुर में खुशी की लहर है। हिमांशु जैन जिन्होंने यूपीएससी में चौथी रैंक प्राप्त की है। हिमांशु हरियाणा होटल के मूल निवासी हैं लेकिन पिछले 10 सालों से दिल्ली में रह रहे हैं। हिमांशु बिजनेस फैमिली से आते हैं। पिता सचिन जैन और दादा बिजनेस करते हैं। मां ऋतु जैन घर संभालती है। छोटा भाई मुंबई में रहकर लॉ की पढ़ाई कर रहा है। हिमांशु ने बताया कि सिविल सर्विस में आने के पीछे उनके दादा का सबसे बड़ा हाथ है। उनके दादा ओम प्रकाश जैन शुरू से कहते थे कि बिजनेस में कुछ नहीं रखा। मैं अपने बेटे को अफसर बनाऊंगा और आज मेरे दादा जी का सपना पूरा होने जा रहा है। यूपीएससी परीक्षा में चौथी रैंक पाने वाले हिमांशु जैन ने बताया, कॉलेज खत्म करने के बाद उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा दी थी लेकिन सफलता नहीं मिली उसके बाद उन्होंने ठाना कि जो चूक हुई है उसको सुधारते हुए इस बार सफलता पानी है। अब उनका सपना पूरा होता नजर आ रहा है हिमांशु ने बताया कि आईएएस अधिकारी बनना चाहते हैं। यूपीएससी मुख्य परीक्षा में कुल 2304 उम्मीदवार सफल हुए थे। इनके लिए इंटरव्यू की प्रक्रिया 17 फरवरी, 2020 से शुरू हुई थी लेकिन कोरोना लॉकडाउन के चलते मार्च में इंटरव्यू स्थगित कर दिए गए थे। इंटरव्यू 20 जुलाई से 30 जुलाई के बीच आयोजित किए गए।
करियर डेस्क. UPSC दो हज़ार उन्नीस Toppers Success Story: संघ लोक सेवा आयोग ने सिविल सेवा परीक्षा दो हज़ार उन्नीस का रिजल्ट घोषित कर दिया है। यूपीएससी-दो हज़ार उन्नीस परीक्षा में प्रदीप सिंह ने पहला स्थान हासिल किया है। वहीं दूसरे स्थान पर जतिन किशोर और तीसरे स्थान पर प्रतिभा वर्मा रही हैं। दिल्ली पुलिस के द्वारका डीसीपी दफ्तर में तैनात एक ASI राजकुमार की बेटी विशाखा यादव ने छठी रैंक हासिल की है। इस बार कुल आठ सौ उनतीस उम्मीदवारों का चयन किया गया है। यूपीएससी मुख्य परीक्षा में कुल दो हज़ार तीन सौ चार उम्मीदवार सफल हुए थे। इनके लिए इंटरव्यू की प्रक्रिया सत्रह फरवरी, दो हज़ार बीस से शुरू हुई थी लेकिन कोरोना लॉकडाउन के चलते मार्च में इंटरव्यू स्थगित कर दिए गए थे। इंटरव्यू बीस जुलाई से तीस जुलाई के बीच आयोजित किए गए। UPSC के इस बार के टॉपर हैं हरियाणा के सोनीपत जिले के रहने वाले प्रदीप सिंह। प्रदीप का ये चौथा प्रयास था इससे पहले उन्होंने दो हज़ार अट्ठारह की सिविल सेवा परीक्षा में दो सौ साठ वीं रैंक हासिल की थी। प्रदीप सिंह ने जब पहली बार यूपीएससी परीक्षा पास की थी तो उस समय उनकी उम्र मात्र बाईस साल थी। टॉपर प्रदीप सोनीपत तेवड़ी गांव के रहने वाले एक साधारण किसान के बेटे हैं। प्रदीप अपनी सफलता का श्रेय पिता की मेहनत और विश्वास को बताते हैं। प्रदीप बताते हैं ये उनका ये चौथा प्रयास था, इससे पहले दो हज़ार अट्ठारह के यूपीएससी एग्जाम में उन्होंने दो सौ साठ रैंक हासिल की थी। प्रदीप से अधिकारी के तौर पर उनकी प्राथमिकता के बारे में पूछे जाने पर कहा कि एक अधिकारी के तौर पर किसान और गरीबों के लिए काम करना उनकी प्राथमिकता है। प्रदीप सिंह फिलहाल इंडियन रेवेन्यू सर्विस के अंतर्गत भारत सरकार के अधीन सेवारत हैं। प्रदीप का कहना है कि वह एक साधारण परिवार से हैं और उनके पिता किसान हैं। प्रदीप की इच्छा है कि वह अपना गृह राज्य हरियाणा का कैडर लेना चाहते हैं। फिलहाल सोनीपत के तेवड़ी गांव और प्रदीप के घर पर खुशी और जश्न का माहौल है। बता दें कि विशाखा यादव उत्तर प्रदेश की मथुरा की रहने वाली हैं। विशाखा ने बीटेक दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनिरिंग से की है। बेंगलुरु में दो साल की इंजीनियरिंग की नौकरी करने के बाद विशाखा ने यूपीएससी की परीक्षा देने का फैसला किया। पिछले तीन-चार से विशाखा यूपीएससी इग्जाम की तैयारी कर रही थीं। विशाखा ने तीसरे प्रयास में छठी रैंक हासिल की है। इससे पहले दो प्रयास में विशाखा ने यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा भी पास नहीं कर सकी थी। विशाखा ने अपने इंटरव्यू में कहा है कि उनके पिता दिल्ली पुलिस में काम करते हैं। यही वजह है कि मैं यूपीएससी के लिए मन बनाया। मैं फाइनेंशियल स्वतंत्रता हासिल करना चाहती थी। परीक्षा में यूपी के सुल्तानपुर की प्रतिभा वर्मा ने लड़कियों में पहला स्थान हासिल किया है। प्रतिभा वर्मा की ओवरऑल रैंकिग तीन है। जबकि परीक्षा में दूसरे स्थान पर जतिन किशोर रहे हैं। प्रतिभा वर्मा सुल्तानपुर के बघराजपुर निवासी प्रधानाध्यापिका ऊषा वर्मा की पुत्री हैं। उनके इस प्रदर्शन से पूरे सुल्तानपुर में खुशी की लहर है। हिमांशु जैन जिन्होंने यूपीएससी में चौथी रैंक प्राप्त की है। हिमांशु हरियाणा होटल के मूल निवासी हैं लेकिन पिछले दस सालों से दिल्ली में रह रहे हैं। हिमांशु बिजनेस फैमिली से आते हैं। पिता सचिन जैन और दादा बिजनेस करते हैं। मां ऋतु जैन घर संभालती है। छोटा भाई मुंबई में रहकर लॉ की पढ़ाई कर रहा है। हिमांशु ने बताया कि सिविल सर्विस में आने के पीछे उनके दादा का सबसे बड़ा हाथ है। उनके दादा ओम प्रकाश जैन शुरू से कहते थे कि बिजनेस में कुछ नहीं रखा। मैं अपने बेटे को अफसर बनाऊंगा और आज मेरे दादा जी का सपना पूरा होने जा रहा है। यूपीएससी परीक्षा में चौथी रैंक पाने वाले हिमांशु जैन ने बताया, कॉलेज खत्म करने के बाद उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा दी थी लेकिन सफलता नहीं मिली उसके बाद उन्होंने ठाना कि जो चूक हुई है उसको सुधारते हुए इस बार सफलता पानी है। अब उनका सपना पूरा होता नजर आ रहा है हिमांशु ने बताया कि आईएएस अधिकारी बनना चाहते हैं। यूपीएससी मुख्य परीक्षा में कुल दो हज़ार तीन सौ चार उम्मीदवार सफल हुए थे। इनके लिए इंटरव्यू की प्रक्रिया सत्रह फरवरी, दो हज़ार बीस से शुरू हुई थी लेकिन कोरोना लॉकडाउन के चलते मार्च में इंटरव्यू स्थगित कर दिए गए थे। इंटरव्यू बीस जुलाई से तीस जुलाई के बीच आयोजित किए गए।
उच्च हिमालयी क्षेत्र (High Himalayan Region) में स्थित घास के मैदानों (Grasslands) का संरक्षण (Conservation) करने के लिए वन विभाग (Forest Department) ने जिले में ऐसे मैदानों में रात को रूकने, तंबू लगाने और कैंपफायर के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है. उच्च हिमालयी क्षेत्र (High Himalayan Region) में स्थित घास के मैदानों (Grasslands) का संरक्षण (Conservation) करने के लिए वन विभाग (Forest Department) ने जिले में ऐसे मैदानों में रात को रूकने, तंबू लगाने और कैंपफायर के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है. जिले के उप प्रभागीय वन अधिकारी नवीन पंत ने बताया, 'घास के मैदानों में रात में रूकने, कैंपिंग करने और कैंपफायर के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के अलावा वहां दिन के दौरान जाने वाले लोगों की संख्या को भी 200 तक सीमित कर दिया गया है'. उन्होंने कहा, 'इस कवायद की शुरूआत मुनस्यारी वन रेंज में 3500 मीटर की उंचाई पर स्थित खलिया बुग्याल (Khalia Bugyal) से कर दी गयी है. पंत ने कहा, 'यह कदम हिमालयी बुग्यालों को संरक्षित करने की द्रष्टि से उठाया गया है, क्योंकि इस प्रकार की मानवीय गतिविधियों से मिट्टी को नुकसान पहुंचता है और वहां प्रदूषण (Pollution) भी होता है'.
उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित घास के मैदानों का संरक्षण करने के लिए वन विभाग ने जिले में ऐसे मैदानों में रात को रूकने, तंबू लगाने और कैंपफायर के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है. उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित घास के मैदानों का संरक्षण करने के लिए वन विभाग ने जिले में ऐसे मैदानों में रात को रूकने, तंबू लगाने और कैंपफायर के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है. जिले के उप प्रभागीय वन अधिकारी नवीन पंत ने बताया, 'घास के मैदानों में रात में रूकने, कैंपिंग करने और कैंपफायर के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के अलावा वहां दिन के दौरान जाने वाले लोगों की संख्या को भी दो सौ तक सीमित कर दिया गया है'. उन्होंने कहा, 'इस कवायद की शुरूआत मुनस्यारी वन रेंज में तीन हज़ार पाँच सौ मीटर की उंचाई पर स्थित खलिया बुग्याल से कर दी गयी है. पंत ने कहा, 'यह कदम हिमालयी बुग्यालों को संरक्षित करने की द्रष्टि से उठाया गया है, क्योंकि इस प्रकार की मानवीय गतिविधियों से मिट्टी को नुकसान पहुंचता है और वहां प्रदूषण भी होता है'.
त्रिवेदीगंज बाराबंकी - इलेक्ट्रॉनिक भार तोलन मशीन में डिवाइस व रिमोट के सहारे प्रति किलो सौ ग्राम घटतौली करने योग्य बना लोगों को ठगने वाले गिरोह के एक सदस्य को एसटीएफ लखनऊ व लोनीकटरा पुलिस ने संयुक्त रुप से कार्यवाही करते हुये अन्य उपकरणों के साथ एक ब्यक्ति को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। प्रभारी निरीक्षक लोनीकटरा अशोक कुमार यादव ने बताया कि मकान न. 355/6356 थाना नाका लखनऊ निवासी दिनेश उपाध्याय इलेक्ट्रॉनिक भार तोलन मशीन में डिवाइस लगा रिमोट के सहारे घटतौली योग्य बना देता था। जिससे प्रति किलो सौ ग्राम की घटतौली आसानी से हो जाती है। पकड़े गये दिनेश ने बताया कि उक्त मशीन व उपकरण आलमबाग माधव कम्लेक्स निवासी शमशाद व नवल पांडेय से खरीदकर थाना लोनीकटरा क्षेत्र के गौरवा उस्मानपुर निवासी शमशुल हसन मोहम्मद लल्लन को बेंचा था। जिसमें कुछ खराबी आ गई थी। जिसे दूर करने वह गौरवा उस्मानपुर जा रहा था। सम्बन्धित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा गया है।
त्रिवेदीगंज बाराबंकी - इलेक्ट्रॉनिक भार तोलन मशीन में डिवाइस व रिमोट के सहारे प्रति किलो सौ ग्राम घटतौली करने योग्य बना लोगों को ठगने वाले गिरोह के एक सदस्य को एसटीएफ लखनऊ व लोनीकटरा पुलिस ने संयुक्त रुप से कार्यवाही करते हुये अन्य उपकरणों के साथ एक ब्यक्ति को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। प्रभारी निरीक्षक लोनीकटरा अशोक कुमार यादव ने बताया कि मकान न. तीन सौ पचपन/छः हज़ार तीन सौ छप्पन थाना नाका लखनऊ निवासी दिनेश उपाध्याय इलेक्ट्रॉनिक भार तोलन मशीन में डिवाइस लगा रिमोट के सहारे घटतौली योग्य बना देता था। जिससे प्रति किलो सौ ग्राम की घटतौली आसानी से हो जाती है। पकड़े गये दिनेश ने बताया कि उक्त मशीन व उपकरण आलमबाग माधव कम्लेक्स निवासी शमशाद व नवल पांडेय से खरीदकर थाना लोनीकटरा क्षेत्र के गौरवा उस्मानपुर निवासी शमशुल हसन मोहम्मद लल्लन को बेंचा था। जिसमें कुछ खराबी आ गई थी। जिसे दूर करने वह गौरवा उस्मानपुर जा रहा था। सम्बन्धित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा गया है।
मुंबई : 'उड़ता पंजाब' पर कैंची चलाने के बाद अब सेंसर बोर्ड कटरीना कैफ और सिद्दार्थ मल्होत्रा की फिल्म 'बार बार देखो' में कट लगाने को लेकर सुर्खियों में है. इस फिल्म में अश्लील फिल्मों का बड़ा नाम सविता भाभी का जिक्र है. इस पर सेंसर बोर्ड ने आपत्ति जताई है. इसके साथ ही बार के एक सीन में कई लड़कियां बेहद कम कपड़ों में हैं, इसे भी हटाया गया है. खबरों के मुताबिक, फिल्म के मेकर्स कोई विवाद नहीं चाहते थे इसलिए इन सीन्स को हटा लिया गया है.
मुंबई : 'उड़ता पंजाब' पर कैंची चलाने के बाद अब सेंसर बोर्ड कटरीना कैफ और सिद्दार्थ मल्होत्रा की फिल्म 'बार बार देखो' में कट लगाने को लेकर सुर्खियों में है. इस फिल्म में अश्लील फिल्मों का बड़ा नाम सविता भाभी का जिक्र है. इस पर सेंसर बोर्ड ने आपत्ति जताई है. इसके साथ ही बार के एक सीन में कई लड़कियां बेहद कम कपड़ों में हैं, इसे भी हटाया गया है. खबरों के मुताबिक, फिल्म के मेकर्स कोई विवाद नहीं चाहते थे इसलिए इन सीन्स को हटा लिया गया है.
त्रिवेणीगंज, निज संवाददाता। पिछले कुछ दिनों से हो रही लगातार बारिश से प्रखंड में धान के बीज की बिक्री में तेजी आ गई है। कम समय में उपज होने वाले प्रभेद बीजों की सबसे अधिक बिक्री हो रही है। इसके अलावा मक्का, अरहर आदि फसलों के बीज की बिक्री भी बढ़ गई है। हालांकि किसानों को महंगे दामों में बीज खरीदना पड़ रहा है। किसानों ने बताया कि आद्रा नक्षत्र में धान की बुआई हो जाने से समय पर रोपनी हो जाएगी। बताया कि खेत जुताई भर अभी बारिश हुई है। इस वजह किसानों को बिचड़े बोने के लिए मोटर पंप का सहारा लेना पड़ रहा है। यह हिन्दुस्तान अखबार की ऑटेमेटेड न्यूज फीड है, इसे लाइव हिन्दुस्तान की टीम ने संपादित नहीं किया है।
त्रिवेणीगंज, निज संवाददाता। पिछले कुछ दिनों से हो रही लगातार बारिश से प्रखंड में धान के बीज की बिक्री में तेजी आ गई है। कम समय में उपज होने वाले प्रभेद बीजों की सबसे अधिक बिक्री हो रही है। इसके अलावा मक्का, अरहर आदि फसलों के बीज की बिक्री भी बढ़ गई है। हालांकि किसानों को महंगे दामों में बीज खरीदना पड़ रहा है। किसानों ने बताया कि आद्रा नक्षत्र में धान की बुआई हो जाने से समय पर रोपनी हो जाएगी। बताया कि खेत जुताई भर अभी बारिश हुई है। इस वजह किसानों को बिचड़े बोने के लिए मोटर पंप का सहारा लेना पड़ रहा है। यह हिन्दुस्तान अखबार की ऑटेमेटेड न्यूज फीड है, इसे लाइव हिन्दुस्तान की टीम ने संपादित नहीं किया है।
हेल्थ अपडेट : कार्डियक अरेस्ट आने के बाद अब कैसी है राजू श्रीवास्तव की तबीयत? कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव को लेकर हाल ही में एक शॉकिंग खबर आई कि जिम में वर्कआउट करते वक्त अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। जिसके बाद उन्हें दिल्ली के एम्स अस्पताल ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने बताया की कि राजू श्रीवास्तव को कार्डियक अरेस्ट आया है। राजू श्रीवास्तव के भाई और उनके पीआरओ ने कॉमेडियन का हेल्थ अपडेट दिया है। राजू श्रीवास्तव के पीआरओ अजीत सक्सेना ने बताया कि राजू श्रीवास्तव की पल्स अब ठीक है। उनकी हालत भी अभी स्टेबल है। डॉक्टरों ने कॉमेडियन की पिछली मेडिकल रिपोर्ट्स देखने के बाद एंजियोग्राफी करने का फैसला लिया है। बताया जा रहा है कि राजू श्रीवास्तव के दिल में कई ब्लॉकेज हैं। उन्हें कुछ दिनों तक डॉक्टरों की निगरानी में रहना पड़ेगा इसके बाद ही वह अस्पताल से डिस्चार्ज होंगे। वहीं कॉमेडियन सुनील पाल ने भी इंस्टाग्राम पर राजू श्रीवास्तव की हेल्थ के बारे में अपडेट देते हुए एक वीडियो शेयर किया है। उन्होंने कहा, यह सच है कि कॉमेडी किंग राजू श्रीवास्तव को दिल का दौरा पड़ा था। उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया था लेकिन अब वह काफी बेहतर हैं। आप सभी की प्रार्थनाओं और भगवान के आशीर्वाद से वह अच्छा कर रहे हैं। सुनील पाल ने कहा, वह खतरे से बाहर हैं। राजू भाई, जल्दी ठीक हो जाओ। हम सब तुमसे बहुत प्यार करते हैं। यह सबके लिए अच्छी खबर है कि वह अब बेहतर कर रहे हैं। हम मुंबई में उनका इंतजार कर रहे हैं। राजू श्रीवास्तव कानपुर के रहने वाले हैं। उन्होंने अपनी स्टैंडअप कॉमेडी से एक अलग पहचान बनाई है। कॉमेडियन होने के साथ वह राजनीति में भी कदम रख चुके हैं। उन्होंने 2014 में भाजपा ज्वॉइन की थी। वह उत्तर प्रदेश फिल्म विकास परिषद के चेयरमैन हैं।
हेल्थ अपडेट : कार्डियक अरेस्ट आने के बाद अब कैसी है राजू श्रीवास्तव की तबीयत? कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव को लेकर हाल ही में एक शॉकिंग खबर आई कि जिम में वर्कआउट करते वक्त अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। जिसके बाद उन्हें दिल्ली के एम्स अस्पताल ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने बताया की कि राजू श्रीवास्तव को कार्डियक अरेस्ट आया है। राजू श्रीवास्तव के भाई और उनके पीआरओ ने कॉमेडियन का हेल्थ अपडेट दिया है। राजू श्रीवास्तव के पीआरओ अजीत सक्सेना ने बताया कि राजू श्रीवास्तव की पल्स अब ठीक है। उनकी हालत भी अभी स्टेबल है। डॉक्टरों ने कॉमेडियन की पिछली मेडिकल रिपोर्ट्स देखने के बाद एंजियोग्राफी करने का फैसला लिया है। बताया जा रहा है कि राजू श्रीवास्तव के दिल में कई ब्लॉकेज हैं। उन्हें कुछ दिनों तक डॉक्टरों की निगरानी में रहना पड़ेगा इसके बाद ही वह अस्पताल से डिस्चार्ज होंगे। वहीं कॉमेडियन सुनील पाल ने भी इंस्टाग्राम पर राजू श्रीवास्तव की हेल्थ के बारे में अपडेट देते हुए एक वीडियो शेयर किया है। उन्होंने कहा, यह सच है कि कॉमेडी किंग राजू श्रीवास्तव को दिल का दौरा पड़ा था। उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया था लेकिन अब वह काफी बेहतर हैं। आप सभी की प्रार्थनाओं और भगवान के आशीर्वाद से वह अच्छा कर रहे हैं। सुनील पाल ने कहा, वह खतरे से बाहर हैं। राजू भाई, जल्दी ठीक हो जाओ। हम सब तुमसे बहुत प्यार करते हैं। यह सबके लिए अच्छी खबर है कि वह अब बेहतर कर रहे हैं। हम मुंबई में उनका इंतजार कर रहे हैं। राजू श्रीवास्तव कानपुर के रहने वाले हैं। उन्होंने अपनी स्टैंडअप कॉमेडी से एक अलग पहचान बनाई है। कॉमेडियन होने के साथ वह राजनीति में भी कदम रख चुके हैं। उन्होंने दो हज़ार चौदह में भाजपा ज्वॉइन की थी। वह उत्तर प्रदेश फिल्म विकास परिषद के चेयरमैन हैं।
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। ये लेख कश्मीर की वादी के बारे में है। इस राज्य का लेख देखने के लिये यहाँ जायेंः जम्मू और कश्मीर। एडवर्ड मॉलीनक्स द्वारा बनाया श्रीनगर का दृश्य कश्मीर (कश्मीरीः (नस्तालीक़), कॅशीर) भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे उत्तरी भौगोलिक क्षेत्र है। कश्मीर एक मुस्लिमबहुल प्रदेश है। आज ये आतंकवाद से जूझ रहा है। इसकी मुख्य भाषा कश्मीरी है। जम्मू और कश्मीर के बाक़ी दो खण्ड हैं जम्मू और लद्दाख़। . एक कर्मकाण्डी पण्डित (ब्राह्मण) का चित्र पण्डित (पंडित), या पण्डा (पंडा), अंग्रेजी में Pandit का अर्थ है एक विद्वान, एक अध्यापक, विशेषकर जो संस्कृत और हिंदू विधि, धर्म, संगीत या दर्शनशास्त्र में दक्ष हो। अपने मूल अर्थ में 'पण्डित' शब्द का तात्पर्य हमेशा उस हिन्दू ब्राह्मण से लिया जाता है जिसने वेदों का कोई एक मुख्य भाग उसके उच्चारण और गायन के लय व ताल सहित कण्ठस्थ कर लिया हो। . कश्मीर और पण्डित आम में 3 बातें हैं (यूनियनपीडिया में): ब्राह्मण, मुसलमान, कश्मीर। ब्राह्मण का शब्द दो शब्दों से बना है। ब्रह्म+रमण। इसके दो अर्थ होते हैं, ब्रह्मा देश अर्थात वर्तमान वर्मा देशवासी,द्वितीय ब्रह्म में रमण करने वाला।यदि ऋग्वेद के अनुसार ब्रह्म अर्थात ईश्वर को रमण करने वाला ब्राहमण होता है। । स्कन्दपुराण में षोडशोपचार पूजन के अंतर्गत अष्टम उपचार में ब्रह्मा द्वारा नारद को द्विज की उत्त्पत्ति बताई गई है जन्मना जायते शूद्रः संस्कारात् द्विज उच्यते। शापानुग्रहसामर्थ्यं तथा क्रोधः प्रसन्नता। ब्राह्मण (आचार्य, विप्र, द्विज, द्विजोत्तम) यह वर्ण व्यवस्था का वर्ण है। एेतिहासिक रूप हिन्दु वर्ण व्यवस्था में चार वर्ण होते हैं। ब्राह्मण (ज्ञानी ओर आध्यात्मिकता के लिए उत्तरदायी), क्षत्रिय (धर्म रक्षक), वैश्य (व्यापारी) तथा शूद्र (सेवक, श्रमिक समाज)। यस्क मुनि की निरुक्त के अनुसार - ब्रह्म जानाति ब्राह्मणः -- ब्राह्मण वह है जो ब्रह्म (अंतिम सत्य, ईश्वर या परम ज्ञान) को जानता है। अतः ब्राह्मण का अर्थ है - "ईश्वर का ज्ञाता"। सनः' शब्द के भी तप, वेद विद्या अदि अर्थ है । निरंतारार्थक अनन्य में भी 'सना' शब्द का पाठ है । 'आढ्य' का अर्थ होता है धनी । फलतः जो तप, वेद, और विद्या के द्वारा निरंतर पूर्ण है, उसे ही "सनाढ्य" कहते है - 'सनेन तपसा वेदेन च सना निरंतरमाढ्यः पूर्ण सनाढ्यः' उपर्युक्त रीति से 'सनाढ्य' शब्द में ब्राह्मणत्व के सभी प्रकार अनुगत होने पर जो सनाढ्य है वे ब्राह्मण है और जो ब्राह्मण है वे सनाढ्य है । यह निर्विवाद सिद्ध है । अर्थात ऐसा कौन ब्राह्मण होगा, जो 'सनाढ्य' नहीं होना चाहेगा । भारतीय संस्कृति की महान धाराओं के निर्माण में सनाढ्यो का अप्रतिभ योगदान रहा है । वे अपने सुखो की उपेक्षा कर दीपबत्ती की तरह तिलतिल कर जल कर समाज के लिए मिटते रहे है । . मिसरी (ईजिप्ट) मुस्लिमान नमाज़ पढ रहे हैं, एक तस्वीर। मुसलमान (अरबीः مسلم، مسلمة फ़ारसीः مسلمان،, अंग्रेजीः Muslim) का मतलब वह व्यक्ति है जो इस्लाम में विश्वास रखता हो। हालाँकि मुसलमानों के आस्था के अनुसार इस्लाम ईश्वर का धर्म है और धर्म हज़रत मुहम्मद से पहले मौजूद था और जो लोग अल्लाह के धर्म का पालन करते रहे वह मुसलमान हैं। जैसे कुरान के अनुसार हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम भी मुसलमान थे। मगर आजकल मुसलमान का मतलब उसे लिया जाता है जो हज़रत मुहम्मद लाए हुए दीन का पालन करता हो और विश्वास रखता हो। मध्यकालीन मुस्लिम इतिहासकारों ने भारत को हिन्द अथवा हिन्दुस्तान कहा है । . ये लेख कश्मीर की वादी के बारे में है। इस राज्य का लेख देखने के लिये यहाँ जायेंः जम्मू और कश्मीर। एडवर्ड मॉलीनक्स द्वारा बनाया श्रीनगर का दृश्य कश्मीर (कश्मीरीः (नस्तालीक़), कॅशीर) भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे उत्तरी भौगोलिक क्षेत्र है। कश्मीर एक मुस्लिमबहुल प्रदेश है। आज ये आतंकवाद से जूझ रहा है। इसकी मुख्य भाषा कश्मीरी है। जम्मू और कश्मीर के बाक़ी दो खण्ड हैं जम्मू और लद्दाख़। . कश्मीर 59 संबंध है और पण्डित 47 है। वे आम 3 में है, समानता सूचकांक 2.83% है = 3 / (59 + 47)। यह लेख कश्मीर और पण्डित के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। ये लेख कश्मीर की वादी के बारे में है। इस राज्य का लेख देखने के लिये यहाँ जायेंः जम्मू और कश्मीर। एडवर्ड मॉलीनक्स द्वारा बनाया श्रीनगर का दृश्य कश्मीर , कॅशीर) भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे उत्तरी भौगोलिक क्षेत्र है। कश्मीर एक मुस्लिमबहुल प्रदेश है। आज ये आतंकवाद से जूझ रहा है। इसकी मुख्य भाषा कश्मीरी है। जम्मू और कश्मीर के बाक़ी दो खण्ड हैं जम्मू और लद्दाख़। . एक कर्मकाण्डी पण्डित का चित्र पण्डित , या पण्डा , अंग्रेजी में Pandit का अर्थ है एक विद्वान, एक अध्यापक, विशेषकर जो संस्कृत और हिंदू विधि, धर्म, संगीत या दर्शनशास्त्र में दक्ष हो। अपने मूल अर्थ में 'पण्डित' शब्द का तात्पर्य हमेशा उस हिन्दू ब्राह्मण से लिया जाता है जिसने वेदों का कोई एक मुख्य भाग उसके उच्चारण और गायन के लय व ताल सहित कण्ठस्थ कर लिया हो। . कश्मीर और पण्डित आम में तीन बातें हैं : ब्राह्मण, मुसलमान, कश्मीर। ब्राह्मण का शब्द दो शब्दों से बना है। ब्रह्म+रमण। इसके दो अर्थ होते हैं, ब्रह्मा देश अर्थात वर्तमान वर्मा देशवासी,द्वितीय ब्रह्म में रमण करने वाला।यदि ऋग्वेद के अनुसार ब्रह्म अर्थात ईश्वर को रमण करने वाला ब्राहमण होता है। । स्कन्दपुराण में षोडशोपचार पूजन के अंतर्गत अष्टम उपचार में ब्रह्मा द्वारा नारद को द्विज की उत्त्पत्ति बताई गई है जन्मना जायते शूद्रः संस्कारात् द्विज उच्यते। शापानुग्रहसामर्थ्यं तथा क्रोधः प्रसन्नता। ब्राह्मण यह वर्ण व्यवस्था का वर्ण है। एेतिहासिक रूप हिन्दु वर्ण व्यवस्था में चार वर्ण होते हैं। ब्राह्मण , क्षत्रिय , वैश्य तथा शूद्र । यस्क मुनि की निरुक्त के अनुसार - ब्रह्म जानाति ब्राह्मणः -- ब्राह्मण वह है जो ब्रह्म को जानता है। अतः ब्राह्मण का अर्थ है - "ईश्वर का ज्ञाता"। सनः' शब्द के भी तप, वेद विद्या अदि अर्थ है । निरंतारार्थक अनन्य में भी 'सना' शब्द का पाठ है । 'आढ्य' का अर्थ होता है धनी । फलतः जो तप, वेद, और विद्या के द्वारा निरंतर पूर्ण है, उसे ही "सनाढ्य" कहते है - 'सनेन तपसा वेदेन च सना निरंतरमाढ्यः पूर्ण सनाढ्यः' उपर्युक्त रीति से 'सनाढ्य' शब्द में ब्राह्मणत्व के सभी प्रकार अनुगत होने पर जो सनाढ्य है वे ब्राह्मण है और जो ब्राह्मण है वे सनाढ्य है । यह निर्विवाद सिद्ध है । अर्थात ऐसा कौन ब्राह्मण होगा, जो 'सनाढ्य' नहीं होना चाहेगा । भारतीय संस्कृति की महान धाराओं के निर्माण में सनाढ्यो का अप्रतिभ योगदान रहा है । वे अपने सुखो की उपेक्षा कर दीपबत्ती की तरह तिलतिल कर जल कर समाज के लिए मिटते रहे है । . मिसरी मुस्लिमान नमाज़ पढ रहे हैं, एक तस्वीर। मुसलमान का मतलब वह व्यक्ति है जो इस्लाम में विश्वास रखता हो। हालाँकि मुसलमानों के आस्था के अनुसार इस्लाम ईश्वर का धर्म है और धर्म हज़रत मुहम्मद से पहले मौजूद था और जो लोग अल्लाह के धर्म का पालन करते रहे वह मुसलमान हैं। जैसे कुरान के अनुसार हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम भी मुसलमान थे। मगर आजकल मुसलमान का मतलब उसे लिया जाता है जो हज़रत मुहम्मद लाए हुए दीन का पालन करता हो और विश्वास रखता हो। मध्यकालीन मुस्लिम इतिहासकारों ने भारत को हिन्द अथवा हिन्दुस्तान कहा है । . ये लेख कश्मीर की वादी के बारे में है। इस राज्य का लेख देखने के लिये यहाँ जायेंः जम्मू और कश्मीर। एडवर्ड मॉलीनक्स द्वारा बनाया श्रीनगर का दृश्य कश्मीर , कॅशीर) भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे उत्तरी भौगोलिक क्षेत्र है। कश्मीर एक मुस्लिमबहुल प्रदेश है। आज ये आतंकवाद से जूझ रहा है। इसकी मुख्य भाषा कश्मीरी है। जम्मू और कश्मीर के बाक़ी दो खण्ड हैं जम्मू और लद्दाख़। . कश्मीर उनसठ संबंध है और पण्डित सैंतालीस है। वे आम तीन में है, समानता सूचकांक दो.तिरासी% है = तीन / । यह लेख कश्मीर और पण्डित के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उनपर एक इंटीरियर डिजाइनर को खुदकुशी के लिए उकसाने का आरोप लगा है। गिरफ्तारी के बाद अर्नब ने पुलिस पर उनके साथ मारपीट का आरोप लगाया है। अब सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिसमें एक शख्स जमीन पर पड़े नजर आ रहा है। एक पुलिस वाला उस शख्स के पैर को पकड़े दिखाई दे रहा है। वहीं, दूसरा पुलिसवाला उसके मुंह पर पैर रखकर बेल्ट से मारता नजर आ रहा है। दावा किया जा रहा है कि पुलिस जिस शख्स को पीट रही है, वो अर्नब गोस्वामी है। वहीं एक अन्य यूजर ने तस्वीरें शेयर करते हुए महाराष्ट्र सरकार को बर्खास्त करने की मांग की है। मिली, जिसके मुताबिक यूपी में मोबाइल चोरी के आरोपी युवक को पुलिसकर्मियों ने बुरी तरह पीटा था और तस्वीरें उस वक्त की हैं। के मुताबिक, यूपी के देवरिया में तीन पुलिसवालों ने पुलिस स्टेशन में मोबाइल चोरी के आरोपी के मुंह पर पैर रखकर बेरहमी से पीटा था। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद आरोपी तीनों सिपाहियों को निलंबित कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। अर्नब गोस्वामी को अलीबाग कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. साथ ही, कोर्ट ने गोस्वामी का वो आरोप भी खारिज कर दिया, जिसमें वो कह रहे थे कि पुलिस ने उनके साथ जोर-जबरदस्ती की है. बता दें, अर्नब गोस्वामी की गिरफ्तारी के बाद रिपब्लिक टीवी ने अर्नब के घर के लाइव फुटेज दिखाए थे, जिसमें पुलिस और अर्नब के बीच झड़प होती दिख रही है। एक वीडियो में अर्नब गोस्वामी पुलिस की वैन में पुलिस द्वारा ले जाते हुए कह रहे हैं- मुझे पुलिस ने पीटा है। वेबदुनिया ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल तस्वीरें उत्तर प्रदेश की हैं। वायरल तस्वीरों में दिख रहा शख्स अर्नब गोस्वामी नहीं, बल्कि मोबाइल चोरी का आरोपी है और दोषी पुलिसवालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा चुका है।
रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उनपर एक इंटीरियर डिजाइनर को खुदकुशी के लिए उकसाने का आरोप लगा है। गिरफ्तारी के बाद अर्नब ने पुलिस पर उनके साथ मारपीट का आरोप लगाया है। अब सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिसमें एक शख्स जमीन पर पड़े नजर आ रहा है। एक पुलिस वाला उस शख्स के पैर को पकड़े दिखाई दे रहा है। वहीं, दूसरा पुलिसवाला उसके मुंह पर पैर रखकर बेल्ट से मारता नजर आ रहा है। दावा किया जा रहा है कि पुलिस जिस शख्स को पीट रही है, वो अर्नब गोस्वामी है। वहीं एक अन्य यूजर ने तस्वीरें शेयर करते हुए महाराष्ट्र सरकार को बर्खास्त करने की मांग की है। मिली, जिसके मुताबिक यूपी में मोबाइल चोरी के आरोपी युवक को पुलिसकर्मियों ने बुरी तरह पीटा था और तस्वीरें उस वक्त की हैं। के मुताबिक, यूपी के देवरिया में तीन पुलिसवालों ने पुलिस स्टेशन में मोबाइल चोरी के आरोपी के मुंह पर पैर रखकर बेरहमी से पीटा था। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद आरोपी तीनों सिपाहियों को निलंबित कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। अर्नब गोस्वामी को अलीबाग कोर्ट ने चौदह दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. साथ ही, कोर्ट ने गोस्वामी का वो आरोप भी खारिज कर दिया, जिसमें वो कह रहे थे कि पुलिस ने उनके साथ जोर-जबरदस्ती की है. बता दें, अर्नब गोस्वामी की गिरफ्तारी के बाद रिपब्लिक टीवी ने अर्नब के घर के लाइव फुटेज दिखाए थे, जिसमें पुलिस और अर्नब के बीच झड़प होती दिख रही है। एक वीडियो में अर्नब गोस्वामी पुलिस की वैन में पुलिस द्वारा ले जाते हुए कह रहे हैं- मुझे पुलिस ने पीटा है। वेबदुनिया ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल तस्वीरें उत्तर प्रदेश की हैं। वायरल तस्वीरों में दिख रहा शख्स अर्नब गोस्वामी नहीं, बल्कि मोबाइल चोरी का आरोपी है और दोषी पुलिसवालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा चुका है।
टेक्नो पोवा 4 प्रो को बांग्लादेश में 26,990 BDT (करीब 21,500 रुपये) में लॉन्च किया गया है। यह स्मार्टफोन फिलहाल बांग्लादेश में उपलब्ध कराया गया है। और दूसरे बाजारों में डिवाइस को लॉन्च करने से जुड़ी कोई जानकारी नहीं है। नए टेक्नो पोवा 4 प्रो में 6. 6 इंच फुल एचडी+ डिस्प्ले दी गई है। स्क्रीन का रिफ्रेश रेट 90 हर्ट्ज़ है। टेक्नो के इस स्मार्टफोन में डिस्प्ले पर बीच मे पंच-होल नॉच दी गई है जिसमें सेल्फी कैमरा मौजूद है। लेटेस्ट पोवा सीरीज स्मार्टफोन में ऑक्टा-कोर मीडियाटेक हीलियो G99 प्रोसेसर दिया गया है। ग्राफिक्स के लिए हैंडसेट में माली G57 GPU मौजूद है। टेक्नो पोवा 4 प्रो में 8 जीबी रैम व 256 जीबी इनबिल्ट स्टोरेज दी गई है। हैंडसेट 5GB तक एक्सटेंडेड रैम सपोर्ट करता है। टेक्नो का यह फोन ऐंड्रॉयड 12 के साथ आता है। फोन में रियर पर 50 मेगापिक्सल का प्राइमरी सेंसर दिया गया है। फोन में ड्यूल-एलईडी फ्लैश के साथ सेकंडरी सेंसर मिलता है। स्मार्टफोन को पावर देने के लिए आगे की तरफ एलईडी फ्लैश के साथ 8 मेगापिक्सल का फ्रंट सेंसर दिया गया है। टेक्नो पोवा 4 प्रो को पावर देने के लिए 6000mAh की बैटरी मिलती है जो 45W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट करती है। स्मार्टफोन 10W रिवर्स चार्जिंग भी सपोर्ट करता है। इस हैंडसेट में चार्जिंग और डेटा ट्रांसफर के लिए टाइप-सी पोर्ट दिए गए हैं। डिवाइस में Hi-res ऑडियो के साथ स्टीरियो स्पीकर मिलता है। टेक्नो पोवा 4 प्रो को फ्लोराइट ब्लू कलर ऑप्शन में उपलब्ध कराया गया है। डिवाइस का डाइमेंशन 164. 79 × 77 × 9. 19 मिलीमीटर है। कनेक्टिविटी के लिए हैंडसेट में ड्यूल-सिम, 4G, वाई-फाई, ब्लूटूथ, एनएफसी और जीपीएस जैसे फीचर्स दिए गए हैं।
टेक्नो पोवा चार प्रो को बांग्लादेश में छब्बीस,नौ सौ नब्बे BDT में लॉन्च किया गया है। यह स्मार्टफोन फिलहाल बांग्लादेश में उपलब्ध कराया गया है। और दूसरे बाजारों में डिवाइस को लॉन्च करने से जुड़ी कोई जानकारी नहीं है। नए टेक्नो पोवा चार प्रो में छः. छः इंच फुल एचडी+ डिस्प्ले दी गई है। स्क्रीन का रिफ्रेश रेट नब्बे हर्ट्ज़ है। टेक्नो के इस स्मार्टफोन में डिस्प्ले पर बीच मे पंच-होल नॉच दी गई है जिसमें सेल्फी कैमरा मौजूद है। लेटेस्ट पोवा सीरीज स्मार्टफोन में ऑक्टा-कोर मीडियाटेक हीलियो Gनिन्यानवे प्रोसेसर दिया गया है। ग्राफिक्स के लिए हैंडसेट में माली Gसत्तावन GPU मौजूद है। टेक्नो पोवा चार प्रो में आठ जीबी रैम व दो सौ छप्पन जीबी इनबिल्ट स्टोरेज दी गई है। हैंडसेट पाँचGB तक एक्सटेंडेड रैम सपोर्ट करता है। टेक्नो का यह फोन ऐंड्रॉयड बारह के साथ आता है। फोन में रियर पर पचास मेगापिक्सल का प्राइमरी सेंसर दिया गया है। फोन में ड्यूल-एलईडी फ्लैश के साथ सेकंडरी सेंसर मिलता है। स्मार्टफोन को पावर देने के लिए आगे की तरफ एलईडी फ्लैश के साथ आठ मेगापिक्सल का फ्रंट सेंसर दिया गया है। टेक्नो पोवा चार प्रो को पावर देने के लिए छः हज़ारmAh की बैटरी मिलती है जो पैंतालीस वाट फास्ट चार्जिंग सपोर्ट करती है। स्मार्टफोन दस वाट रिवर्स चार्जिंग भी सपोर्ट करता है। इस हैंडसेट में चार्जिंग और डेटा ट्रांसफर के लिए टाइप-सी पोर्ट दिए गए हैं। डिवाइस में Hi-res ऑडियो के साथ स्टीरियो स्पीकर मिलता है। टेक्नो पोवा चार प्रो को फ्लोराइट ब्लू कलर ऑप्शन में उपलब्ध कराया गया है। डिवाइस का डाइमेंशन एक सौ चौंसठ. उन्यासी × सतहत्तर × नौ. उन्नीस मिलीमीटर है। कनेक्टिविटी के लिए हैंडसेट में ड्यूल-सिम, चारG, वाई-फाई, ब्लूटूथ, एनएफसी और जीपीएस जैसे फीचर्स दिए गए हैं।
शायद आप ऐड ब्लॉकर का इस्तेमाल कर रहे हैं। पढ़ना जारी रखने के लिए ऐड ब्लॉकर को बंद करके पेज रिफ्रेश करें। उत्तर प्रदेश Uttar Pradesh के रायबरेली Bareilly-Nainital Highway में नैनीताल हाईवे Nainital Highway पर कुछ बाइकर्स bikers का वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें तीन बाइक पर 14 युवक बैठे हैं। एक बाइक पर 6 सवारों की स्टंटबाजी का ये वीडियो वायरल हुआ तो पुलिस ने बाइक समेत लापरवाहों पर कार्रवाई की। ज्यादा जानकारी के लिए देखें वीडियो।
शायद आप ऐड ब्लॉकर का इस्तेमाल कर रहे हैं। पढ़ना जारी रखने के लिए ऐड ब्लॉकर को बंद करके पेज रिफ्रेश करें। उत्तर प्रदेश Uttar Pradesh के रायबरेली Bareilly-Nainital Highway में नैनीताल हाईवे Nainital Highway पर कुछ बाइकर्स bikers का वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें तीन बाइक पर चौदह युवक बैठे हैं। एक बाइक पर छः सवारों की स्टंटबाजी का ये वीडियो वायरल हुआ तो पुलिस ने बाइक समेत लापरवाहों पर कार्रवाई की। ज्यादा जानकारी के लिए देखें वीडियो।
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जहाँ सुख, स्नेह, भाईचारा और सदभावना नहीं रहे , ऐसा विकास स्वीकार्य नहीं हो सकता। उन्होंने भौतिक प्रगति के मायने, दिशा और दशा पर विचार की आवश्यकता बताई है। श्री चौहान ने यह विचार शांति, सदभाव एवं स्वच्छ भारत के लिये प्रतिबद्ध आशा यात्रा के भोपाल आगमन पर मुख्यमंत्री निवास में गुरुश्री एम. के आध्यात्मिक सत्संग में व्यक्त किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि भौतिकता की गलाकाट प्रतियोगिता का अंत क्या होगा। इसका उत्तर भारतीय संस्कृति में ही मिल सकता है, जहाँ धर्म का मतलब सबका सुख है। दूसरों की भलाई को ही सबसे बड़ा धर्म माना गया है। दूसरों को परेशान करने को ही सबसे बड़ा पाप बताया गया है। उन्होंने कहा कि यह भारतीय संस्कृति ही है, जो प्राणियों में सदभावना और विश्व के कल्याण की प्रार्थना करती है। उन्होंने आशा यात्रा के प्रर्वतक गुरू श्री एम. एवं पदयात्रियों का स्वागत करते हुये कहा कि यात्रा से शांति एवं सदभाव की नई आशा और विश्वास जगा है। देश में नया वातारण बन रहा है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने गुरुश्री का शॉल, श्रीफल भेंट कर सम्मान किया। उन्होंने पुष्प-गुच्छ भेंट कर आर्कबिशप श्री लियो कार्नेलियो, ज्ञानी दिलीप सिंह, भन्तेपुत्र श्रीसकलशाक्य और सुश्री कलापनि का अभिनंदन किया। आध्यात्मिक संध्या में गुरु श्री एम. ने कहा कि शांति, सदभाव और ज्ञान का संदेश भारत-भूमि से ही दुनिया में प्रसारित होगा। आध्यात्मिक शांति और सदभावना के ज्ञान के लिये सारी दुनिया के लोग भारत आयेंगे। उन्होंने कहा कि सर्वव्यापी ईश्वर का अंश प्रत्येक मानव के हृदय में विराजमान है। मानव स्वयं परमात्मा का मंदिर है। मानव-सेवा ही उसकी आराधना है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति कस्तूरी मृग के समान बाहरी दुनिया में सुख की खोज करता रहता है, जबकि वह उसके हृदय में ही है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति ने सभी धर्मों को खुले दिल से गले लगाया है। मानवता के इसी संदेश को प्रसारित करने के लिए ही आशा यात्रा शुरू की गयी है। यह पदयात्रा जनवरी 2015 में कन्याकुमारी से प्रारंभ हुयी और अप्रैल 2016 में कश्मीर पहुँचेगी। आध्यात्मिक सत्संग में गुरु श्री एम. ने भी भजन प्रस्तुत किया। आध्यात्मिक संध्या में सुश्री कलापनि ने मालवा अंचल के भक्त कवि गोपीचंद, नाथ संत और कबीर दास के भजनों की प्रस्तुति दी। प्रारंभ से अभी तक की आशा यात्रा पर आधारित वृत्त चित्र भी दिखाया गया। इस मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री श्री कैलाश जोशी, मुख्यमंत्री की धर्म-पत्नी श्रीमती साधना सिंह, वाणिज्य, उद्योग मंत्री श्रीमती यशोधराराजे सिंधिया, राजस्व मंत्री श्री रामपाल सिंह एवं गणमान्य नागरिक तथा आशा यात्रा के कोरग्रुप के सदस्य उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जहाँ सुख, स्नेह, भाईचारा और सदभावना नहीं रहे , ऐसा विकास स्वीकार्य नहीं हो सकता। उन्होंने भौतिक प्रगति के मायने, दिशा और दशा पर विचार की आवश्यकता बताई है। श्री चौहान ने यह विचार शांति, सदभाव एवं स्वच्छ भारत के लिये प्रतिबद्ध आशा यात्रा के भोपाल आगमन पर मुख्यमंत्री निवास में गुरुश्री एम. के आध्यात्मिक सत्संग में व्यक्त किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि भौतिकता की गलाकाट प्रतियोगिता का अंत क्या होगा। इसका उत्तर भारतीय संस्कृति में ही मिल सकता है, जहाँ धर्म का मतलब सबका सुख है। दूसरों की भलाई को ही सबसे बड़ा धर्म माना गया है। दूसरों को परेशान करने को ही सबसे बड़ा पाप बताया गया है। उन्होंने कहा कि यह भारतीय संस्कृति ही है, जो प्राणियों में सदभावना और विश्व के कल्याण की प्रार्थना करती है। उन्होंने आशा यात्रा के प्रर्वतक गुरू श्री एम. एवं पदयात्रियों का स्वागत करते हुये कहा कि यात्रा से शांति एवं सदभाव की नई आशा और विश्वास जगा है। देश में नया वातारण बन रहा है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने गुरुश्री का शॉल, श्रीफल भेंट कर सम्मान किया। उन्होंने पुष्प-गुच्छ भेंट कर आर्कबिशप श्री लियो कार्नेलियो, ज्ञानी दिलीप सिंह, भन्तेपुत्र श्रीसकलशाक्य और सुश्री कलापनि का अभिनंदन किया। आध्यात्मिक संध्या में गुरु श्री एम. ने कहा कि शांति, सदभाव और ज्ञान का संदेश भारत-भूमि से ही दुनिया में प्रसारित होगा। आध्यात्मिक शांति और सदभावना के ज्ञान के लिये सारी दुनिया के लोग भारत आयेंगे। उन्होंने कहा कि सर्वव्यापी ईश्वर का अंश प्रत्येक मानव के हृदय में विराजमान है। मानव स्वयं परमात्मा का मंदिर है। मानव-सेवा ही उसकी आराधना है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति कस्तूरी मृग के समान बाहरी दुनिया में सुख की खोज करता रहता है, जबकि वह उसके हृदय में ही है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति ने सभी धर्मों को खुले दिल से गले लगाया है। मानवता के इसी संदेश को प्रसारित करने के लिए ही आशा यात्रा शुरू की गयी है। यह पदयात्रा जनवरी दो हज़ार पंद्रह में कन्याकुमारी से प्रारंभ हुयी और अप्रैल दो हज़ार सोलह में कश्मीर पहुँचेगी। आध्यात्मिक सत्संग में गुरु श्री एम. ने भी भजन प्रस्तुत किया। आध्यात्मिक संध्या में सुश्री कलापनि ने मालवा अंचल के भक्त कवि गोपीचंद, नाथ संत और कबीर दास के भजनों की प्रस्तुति दी। प्रारंभ से अभी तक की आशा यात्रा पर आधारित वृत्त चित्र भी दिखाया गया। इस मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री श्री कैलाश जोशी, मुख्यमंत्री की धर्म-पत्नी श्रीमती साधना सिंह, वाणिज्य, उद्योग मंत्री श्रीमती यशोधराराजे सिंधिया, राजस्व मंत्री श्री रामपाल सिंह एवं गणमान्य नागरिक तथा आशा यात्रा के कोरग्रुप के सदस्य उपस्थित थे।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जिनकी पूजा सबसे आसान हैं, वो देवा धी देव महादेव हैं। महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा का बहुत अधिक महत्व होता है। जितने सरल शिव हैं, उतना ही विकट उनका स्वरूप है, जिसका कोई मेल ही नहीं है। महाशिवरात्रि पर रात्रि में चार बार शिव पूजन की परंपरा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जिनकी पूजा सबसे आसान हैं, वो देवा धी देव महादेव हैं। महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा का बहुत अधिक महत्व होता है। जितने सरल शिव हैं, उतना ही विकट उनका स्वरूप है, जिसका कोई मेल ही नहीं है। महाशिवरात्रि पर रात्रि में चार बार शिव पूजन की परंपरा है।
'गुम है किसी के प्यार में' की ऐश्वर्या शर्मा पत्रलेखा के नाम से घर-घर में मशहूर हो गईं। ऐश्वर्या को शो में ही नील भट्ट से प्यार हो गया और दोनों ने शादी कर ली। ऐश्वर्या ने अब शो छोड़ दिया है और वो 'खतरों के खिलाड़ी 13' में नजर आ रही हैं। ऐश्वर्या के बारे में आज हम कई बातें बताएंगे, जिनमें से एक है कि उन्हें टैटू का बहुत शौक है और उनका पहला टैटू उनके लोवर बैक पर है। ऐश्वर्या ने एक्टिंग में आने से पहले कथक डांस में ट्रेनिंग और इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। ऐश्वर्या को ऋतिक रोशन और इरफान खान ये दोनों ही एक्टर्स काफी पसंद हैं। ऐश्वर्या को गिटार बजाने का भी खूब शौक है। वो खाली वक्त में अक्सर प्ले करती हैं। ऐश्वर्या शर्मा और नील भट्ट फनी रील्स बनाते रहते हैं। दोनों के रील्स काफी पॉपुलर भी होते हैं। ऐश्वर्या शर्मा की प्रोफाइल काफी ज्यादा खूबसूरत फोटोज से भरी है। फैंस हर दिन उनके अपडेट्स का इंतजार करते हैं। Thanks For Reading!
'गुम है किसी के प्यार में' की ऐश्वर्या शर्मा पत्रलेखा के नाम से घर-घर में मशहूर हो गईं। ऐश्वर्या को शो में ही नील भट्ट से प्यार हो गया और दोनों ने शादी कर ली। ऐश्वर्या ने अब शो छोड़ दिया है और वो 'खतरों के खिलाड़ी तेरह' में नजर आ रही हैं। ऐश्वर्या के बारे में आज हम कई बातें बताएंगे, जिनमें से एक है कि उन्हें टैटू का बहुत शौक है और उनका पहला टैटू उनके लोवर बैक पर है। ऐश्वर्या ने एक्टिंग में आने से पहले कथक डांस में ट्रेनिंग और इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। ऐश्वर्या को ऋतिक रोशन और इरफान खान ये दोनों ही एक्टर्स काफी पसंद हैं। ऐश्वर्या को गिटार बजाने का भी खूब शौक है। वो खाली वक्त में अक्सर प्ले करती हैं। ऐश्वर्या शर्मा और नील भट्ट फनी रील्स बनाते रहते हैं। दोनों के रील्स काफी पॉपुलर भी होते हैं। ऐश्वर्या शर्मा की प्रोफाइल काफी ज्यादा खूबसूरत फोटोज से भरी है। फैंस हर दिन उनके अपडेट्स का इंतजार करते हैं। Thanks For Reading!
दिया "महाराज भूल से यह गो हमारे मुण्ड में आगयी हमने समझा हमारी हो है, इसलिए सजा दिया । भूल में हो यह दान भी हो गयी ।" यह मुनकर मुझे बड़ा भ्रम हुआ। मैं बड़े धर्म सकट में पड़ा मैंने उन गो के यथार्थ स्वामी ब्राह्मण से कहा- "ब्रह्मन् ! मुझसे भूल हो गयो क्षमा करें। इस गो के बदले में मैं आपको एक लक्ष गौए दिये देता हूँ।" ब्राह्मण ने रोप मे भर कर कहा- "राजन् ! आप मुझे लोभो समझते हैं ? क्या मैं गौ को बेच सकता है ? यह मेरी यज्ञीय धेनु है। आप चाहें मुझे इसके बदले में अपना राज्य भी दे दें तो भी न लूंगा।" यह सुनकर मैं निरुत्तर हो गया। फिर मैंने उस दान लेने वाले ब्राह्मण से कहा - "ब्रह्मन् ! मुझ से अज्ञान में यह अपराध बन गया है। आप दोनों में से कोई भी मेरे ऊपर कृपा करें मैं आपको शरण हूँ मुझे घोर नरक में पड़ने से बचानें। ये ब्राह्मण नहीं मानते, तो आप हो एक लाख गोयें लेकर इस गो को इन ब्राह्मण को दे दें ।" यह सुनकर वह ब्राह्मण बोले -- "राजन् ! देने को तो कोई बात नहीं थी, किन्तु जब मेरा प्रतिपक्षी ब्राह्मण लाख गौओं के बदले में भी इस गौ को छोड़ने को उद्यत नहीं, इसे बेचना बता रहा है, तो में इसके सम्मुख एक लाख गो लेकर इसे कैसे दे सकता है। आप राजा हैं। वैसे चाहें तो आप गौ ले सकते हैं ) यदि अदला बदलो मोल भाव की आप बातें करेंगे, तो मैं लाख क्या, लाख से और भो दश सहस्र अधिक दें तो भी मैं न लूँगा । ब्राह्मण समाजमें मैं अपना अपमान थोड़े ही कराऊँगा । लीजिये रखिये अपनी गौ को, में जाता है। यह कहकर वह असन्तुष्ट होकर छोड़कर चलें गये। दूसरे ब्राह्मण भी बिना कुछ नृगांद्वार को कथा लिये चले गये । इस घटना से मुझे बड़ा दुःख हुआ । उसी समय मेरी मृत्यु हो गयी । यमदूत मुझे लेने आये । मुझे आदर पूर्वक धर्मराज की सभा में ले गये। धर्मराज ने मेरा स्वागत सत्कार किया और बड़े स्नेह से बोले - राजन् ! आपने इतना अधिक पुण्य किया कि उसकी कोई सीमा नहीं। आपको अनन्त काल तक अक्षय दिव्य तेजोमय लोको को प्राप्ति होगी । पुण्यों के साथ आपके कुछ पाप भी हैं। वे पाप आपके पुण्यों के आगे वैसे भी नही जैसी सुमेरु के सामने राई । किन्तु फिर भी पाप और पुण्य दोनों का ही फल भोगना है, तो पहिले पापों का फल भोगना चाहते है या पुण्यों का ? जैसी आपकी आज्ञा हो वंसा हो मैं प्रबन्ध करू ? 20 मैंने अपने मन में सोचा- "प्रथम सुख भोग कर और पोछे दुख भोगना तो अत्यन्त ही कष्ट प्रद होगा । प्रथम सुन्दर स्वादिष्ट पदार्थ खाकर पीछे बुरे सड़े गले खाने से चित्त बिगड़ जाता है, बड़ा कष्ट होता है । अतः दोनों का खाना अनिवार्य हो हो तो पहिले बुरे कड़वे पदार्थों को खाकर तब मोठे स्वादिष्ट पदार्थों को अन्त में खाय । इसी प्रकार पहिले दुःख भोगकर तब सुख भोगना चाहिये ।" यही सब सोच समझकर मैंने यमराजसे कहा- "देव ! पहिले मैं पाप कर्मों का ही फल भोगना चाहता हूँ। आप ऐसा प्रबन्ध करें कि मेरे पहिले कर्मों का ही फल भोग द्वारा समाप्त हो जाय ।" यमराज ने कहा- "बड़ी अच्छी बात है, अच्छा तो गिरिये ।" यमराज का 'गिरिये' यह कहना था कि मैं तुरन्त ही वृंथियो पर कृकलास ( गिरगिट) बनकर उत्पन्न हो गया। पाप दो प्रकारः के होते हैं एक जान में एक अनजान में मुझसे अनजान में पाप हुआ था इस लिये मुझे गिरगिट योनि में भी कोई कष्ट नही हुआ । यहीं नहीं मुझे पुण्य क्षेत्र का निवास मिला। छँ महोने तो मैं गढ़मुक्तश्वर की गङ्गाजी के एक कुण्ड में रहता था और छे महीने यहाँ परम पुण्य मयी द्वारकापुरी में रहता था। गिरगिट योनि मे मुझे कोई भी कष्ट प्रतीत नहीं होता था। आपके चरणों का चिन्तन करता रहता था। में ब्राह्मणों का भक्त या आपका सेवक था और दान धर्म में निरत रहता था, इन्हीं सब पुण्यो प्रभाव से मेरी स्मृति नष्ट नहीं हुई। पुण्य क्षेत्रों का वास मिला और समस्त दान, धर्म पुण्य और शुभ कर्मों का एक मात्र फल यह मिल गया, कि आपके देव दुलंभ दर्शन मुझे प्राप्त हुए। यदि पुण्य लोको में जाकर सुख भोग करता रहता, तो वहीं वे हो अप्सरायें मिलती स्वर्गीय भोग प्राप्त होते । संसार सागर से सदा के लिये पार पहुंचाने वाले आपके पाद पद्मों का दर्शन तो मुझे प्राप्त न होता । उन दिव्य भोगों से तो यह कुकलास यौनि करोड़ों गुनो उत्तम निकलो जिससे संसार पाश को छेदने वाले आपके चरण मुझे मिल गये । भगवान् ने खेद प्रकट करते हुए कहा - "राजन् ! इतने धर्मात्मा होने पर भी आपको ये इतने कष्ट सहन करने पड़े । निन्दित गिरगिट की योनि में रहना पड़ा।" नृगोद्धार की कथा महाराज नृग ने कहा - "योनियाँ तो सभी एक सो हैं सभी में आहार, निद्रा तथा मैथुनका सुख मिलता है। वास्तव में विपत्ति तो यही है कि आपके चरणों की स्मृति न रहे और सुख यही है कि आपका चिन्तन बना रहे । थापको कृपासे आजतक मेरी पूर्वस्मृति नष्ट नहीं हुई है। आप परत्मा हैं । विषयी जन आपको कभी भी प्राप्त नहीं कर सकते। जिनका चित्त विशुद्ध बन गया है वे योगी जन हो अपनी उपनिषद रूप दिव्य दृष्टि से आपको प्राप्त कर सकते है। वे ही निरन्तर हृदय कमलंके मध्य में आपके तेजो
दिया "महाराज भूल से यह गो हमारे मुण्ड में आगयी हमने समझा हमारी हो है, इसलिए सजा दिया । भूल में हो यह दान भी हो गयी ।" यह मुनकर मुझे बड़ा भ्रम हुआ। मैं बड़े धर्म सकट में पड़ा मैंने उन गो के यथार्थ स्वामी ब्राह्मण से कहा- "ब्रह्मन् ! मुझसे भूल हो गयो क्षमा करें। इस गो के बदले में मैं आपको एक लक्ष गौए दिये देता हूँ।" ब्राह्मण ने रोप मे भर कर कहा- "राजन् ! आप मुझे लोभो समझते हैं ? क्या मैं गौ को बेच सकता है ? यह मेरी यज्ञीय धेनु है। आप चाहें मुझे इसके बदले में अपना राज्य भी दे दें तो भी न लूंगा।" यह सुनकर मैं निरुत्तर हो गया। फिर मैंने उस दान लेने वाले ब्राह्मण से कहा - "ब्रह्मन् ! मुझ से अज्ञान में यह अपराध बन गया है। आप दोनों में से कोई भी मेरे ऊपर कृपा करें मैं आपको शरण हूँ मुझे घोर नरक में पड़ने से बचानें। ये ब्राह्मण नहीं मानते, तो आप हो एक लाख गोयें लेकर इस गो को इन ब्राह्मण को दे दें ।" यह सुनकर वह ब्राह्मण बोले -- "राजन् ! देने को तो कोई बात नहीं थी, किन्तु जब मेरा प्रतिपक्षी ब्राह्मण लाख गौओं के बदले में भी इस गौ को छोड़ने को उद्यत नहीं, इसे बेचना बता रहा है, तो में इसके सम्मुख एक लाख गो लेकर इसे कैसे दे सकता है। आप राजा हैं। वैसे चाहें तो आप गौ ले सकते हैं ) यदि अदला बदलो मोल भाव की आप बातें करेंगे, तो मैं लाख क्या, लाख से और भो दश सहस्र अधिक दें तो भी मैं न लूँगा । ब्राह्मण समाजमें मैं अपना अपमान थोड़े ही कराऊँगा । लीजिये रखिये अपनी गौ को, में जाता है। यह कहकर वह असन्तुष्ट होकर छोड़कर चलें गये। दूसरे ब्राह्मण भी बिना कुछ नृगांद्वार को कथा लिये चले गये । इस घटना से मुझे बड़ा दुःख हुआ । उसी समय मेरी मृत्यु हो गयी । यमदूत मुझे लेने आये । मुझे आदर पूर्वक धर्मराज की सभा में ले गये। धर्मराज ने मेरा स्वागत सत्कार किया और बड़े स्नेह से बोले - राजन् ! आपने इतना अधिक पुण्य किया कि उसकी कोई सीमा नहीं। आपको अनन्त काल तक अक्षय दिव्य तेजोमय लोको को प्राप्ति होगी । पुण्यों के साथ आपके कुछ पाप भी हैं। वे पाप आपके पुण्यों के आगे वैसे भी नही जैसी सुमेरु के सामने राई । किन्तु फिर भी पाप और पुण्य दोनों का ही फल भोगना है, तो पहिले पापों का फल भोगना चाहते है या पुण्यों का ? जैसी आपकी आज्ञा हो वंसा हो मैं प्रबन्ध करू ? बीस मैंने अपने मन में सोचा- "प्रथम सुख भोग कर और पोछे दुख भोगना तो अत्यन्त ही कष्ट प्रद होगा । प्रथम सुन्दर स्वादिष्ट पदार्थ खाकर पीछे बुरे सड़े गले खाने से चित्त बिगड़ जाता है, बड़ा कष्ट होता है । अतः दोनों का खाना अनिवार्य हो हो तो पहिले बुरे कड़वे पदार्थों को खाकर तब मोठे स्वादिष्ट पदार्थों को अन्त में खाय । इसी प्रकार पहिले दुःख भोगकर तब सुख भोगना चाहिये ।" यही सब सोच समझकर मैंने यमराजसे कहा- "देव ! पहिले मैं पाप कर्मों का ही फल भोगना चाहता हूँ। आप ऐसा प्रबन्ध करें कि मेरे पहिले कर्मों का ही फल भोग द्वारा समाप्त हो जाय ।" यमराज ने कहा- "बड़ी अच्छी बात है, अच्छा तो गिरिये ।" यमराज का 'गिरिये' यह कहना था कि मैं तुरन्त ही वृंथियो पर कृकलास बनकर उत्पन्न हो गया। पाप दो प्रकारः के होते हैं एक जान में एक अनजान में मुझसे अनजान में पाप हुआ था इस लिये मुझे गिरगिट योनि में भी कोई कष्ट नही हुआ । यहीं नहीं मुझे पुण्य क्षेत्र का निवास मिला। छँ महोने तो मैं गढ़मुक्तश्वर की गङ्गाजी के एक कुण्ड में रहता था और छे महीने यहाँ परम पुण्य मयी द्वारकापुरी में रहता था। गिरगिट योनि मे मुझे कोई भी कष्ट प्रतीत नहीं होता था। आपके चरणों का चिन्तन करता रहता था। में ब्राह्मणों का भक्त या आपका सेवक था और दान धर्म में निरत रहता था, इन्हीं सब पुण्यो प्रभाव से मेरी स्मृति नष्ट नहीं हुई। पुण्य क्षेत्रों का वास मिला और समस्त दान, धर्म पुण्य और शुभ कर्मों का एक मात्र फल यह मिल गया, कि आपके देव दुलंभ दर्शन मुझे प्राप्त हुए। यदि पुण्य लोको में जाकर सुख भोग करता रहता, तो वहीं वे हो अप्सरायें मिलती स्वर्गीय भोग प्राप्त होते । संसार सागर से सदा के लिये पार पहुंचाने वाले आपके पाद पद्मों का दर्शन तो मुझे प्राप्त न होता । उन दिव्य भोगों से तो यह कुकलास यौनि करोड़ों गुनो उत्तम निकलो जिससे संसार पाश को छेदने वाले आपके चरण मुझे मिल गये । भगवान् ने खेद प्रकट करते हुए कहा - "राजन् ! इतने धर्मात्मा होने पर भी आपको ये इतने कष्ट सहन करने पड़े । निन्दित गिरगिट की योनि में रहना पड़ा।" नृगोद्धार की कथा महाराज नृग ने कहा - "योनियाँ तो सभी एक सो हैं सभी में आहार, निद्रा तथा मैथुनका सुख मिलता है। वास्तव में विपत्ति तो यही है कि आपके चरणों की स्मृति न रहे और सुख यही है कि आपका चिन्तन बना रहे । थापको कृपासे आजतक मेरी पूर्वस्मृति नष्ट नहीं हुई है। आप परत्मा हैं । विषयी जन आपको कभी भी प्राप्त नहीं कर सकते। जिनका चित्त विशुद्ध बन गया है वे योगी जन हो अपनी उपनिषद रूप दिव्य दृष्टि से आपको प्राप्त कर सकते है। वे ही निरन्तर हृदय कमलंके मध्य में आपके तेजो
चेतना रैप हिप-हॉप की एक उप-शैली है जो जागरूकता पैदा करने और ज्ञान प्रदान करने पर केंद्रित है। जागरूक रैपर परंपरागत रूप से हिंसा, भेदभाव, और अन्य सामाजिक बीमारियों का फैसला करते हैं। यह दृढ़ विश्वास से प्रेरित है कि कट्टरपंथी सामाजिक परिवर्तन स्वयं और व्यक्तिगत खोज के ज्ञान के माध्यम से आता है। अधिकांश सचेत रैप गीतों में सकारात्मक, उत्थान संदेश होते हैं, जो अक्सर चिकनी, कान-पकड़ने वाली धड़कन पर वितरित होते हैं। ग्रैंडमास्टर फ्लैश एंड द फ्यूरियस 5 का "द मैसेज" और स्लिक रिक की "हे यंग वर्ल्ड" शुरुआती सचेत हिप-हॉप ट्रैक के शानदार उदाहरण हैं। चेतना हिप-हॉप अक्सर अपने संगीत चचेरे भाई, राजनीतिक हिप-हॉप के साथ भ्रमित होता है, संभवतः क्योंकि वे दोनों सामाजिक अशांति से बात करते हैं। व्यावसायिकता के लिए एक अपमान एक और आम धागा है जो दोनों शैलियों को एक साथ जोड़ता है। डेड प्रीज़ और पब्लिक दुश्मनों की पसंद से राजनीतिक रूप से चार्ज किए गए गीत आमतौर पर एक आतंकवादी फैशन में दिए जाते हैं। दूसरी तरफ, सचेत संदेश श्रोता को ऊपर उठाने का अधिकार देता है। अपनी आंखें बंद करें और द कूप की सूची से कोई भी एल्बम चुनें और आप राजनीतिक हिप-हॉप पर एक क्रैश कोर्स पर चले गए होंगे। सामाजिक रूप से जागरूक हिप-हॉपर अक्सर मुख्यधारा की संस्कृति में प्रचारित दृष्टिकोण और आदर्शों को विच्छेदन करते हैं, लेकिन दृष्टिकोण इसकी सीमाओं के बिना नहीं है। चूंकि वे अक्सर हेडफ़ोन के लिए संगीत बनाते हैं, और जरूरी नहीं कि बड़े पैमाने पर रेडियो के लिए, सचेत रैपर आमतौर पर अपने मुख्यधारा के समकक्षों की तुलना में कम परिष्कृत होते हैं। कुछ के अपवाद के साथ ( नास और केंड्रिक लैमर, उदाहरण के लिए), सचेत कलाकार आमतौर पर अपने अधिक लोकप्रिय मुख्यधारा के साथियों की चार्ट दौड़ खो देते हैं। लोगों की आवाज होने से जुड़ी प्रतिष्ठा के बावजूद, कई रैपर अपने सीमित गुण के कारण "सचेत रैप" लेबल से घृणा करते हैं।
चेतना रैप हिप-हॉप की एक उप-शैली है जो जागरूकता पैदा करने और ज्ञान प्रदान करने पर केंद्रित है। जागरूक रैपर परंपरागत रूप से हिंसा, भेदभाव, और अन्य सामाजिक बीमारियों का फैसला करते हैं। यह दृढ़ विश्वास से प्रेरित है कि कट्टरपंथी सामाजिक परिवर्तन स्वयं और व्यक्तिगत खोज के ज्ञान के माध्यम से आता है। अधिकांश सचेत रैप गीतों में सकारात्मक, उत्थान संदेश होते हैं, जो अक्सर चिकनी, कान-पकड़ने वाली धड़कन पर वितरित होते हैं। ग्रैंडमास्टर फ्लैश एंड द फ्यूरियस पाँच का "द मैसेज" और स्लिक रिक की "हे यंग वर्ल्ड" शुरुआती सचेत हिप-हॉप ट्रैक के शानदार उदाहरण हैं। चेतना हिप-हॉप अक्सर अपने संगीत चचेरे भाई, राजनीतिक हिप-हॉप के साथ भ्रमित होता है, संभवतः क्योंकि वे दोनों सामाजिक अशांति से बात करते हैं। व्यावसायिकता के लिए एक अपमान एक और आम धागा है जो दोनों शैलियों को एक साथ जोड़ता है। डेड प्रीज़ और पब्लिक दुश्मनों की पसंद से राजनीतिक रूप से चार्ज किए गए गीत आमतौर पर एक आतंकवादी फैशन में दिए जाते हैं। दूसरी तरफ, सचेत संदेश श्रोता को ऊपर उठाने का अधिकार देता है। अपनी आंखें बंद करें और द कूप की सूची से कोई भी एल्बम चुनें और आप राजनीतिक हिप-हॉप पर एक क्रैश कोर्स पर चले गए होंगे। सामाजिक रूप से जागरूक हिप-हॉपर अक्सर मुख्यधारा की संस्कृति में प्रचारित दृष्टिकोण और आदर्शों को विच्छेदन करते हैं, लेकिन दृष्टिकोण इसकी सीमाओं के बिना नहीं है। चूंकि वे अक्सर हेडफ़ोन के लिए संगीत बनाते हैं, और जरूरी नहीं कि बड़े पैमाने पर रेडियो के लिए, सचेत रैपर आमतौर पर अपने मुख्यधारा के समकक्षों की तुलना में कम परिष्कृत होते हैं। कुछ के अपवाद के साथ , सचेत कलाकार आमतौर पर अपने अधिक लोकप्रिय मुख्यधारा के साथियों की चार्ट दौड़ खो देते हैं। लोगों की आवाज होने से जुड़ी प्रतिष्ठा के बावजूद, कई रैपर अपने सीमित गुण के कारण "सचेत रैप" लेबल से घृणा करते हैं।
मुझे नाई पहचानता है, उसे बुलवावें ।" उस समय बोधिसत्त्व (ही) उसके नाई ( होकर उत्पन्न हुए ) थे । राजा ने उसे बुलवा कर पूछा - "इल्लीस सेठ को पहचानते हो ?" "देव ! सिर को देख कर पहचान सकूँगा ।" "अच्छा ! तो दोनों के सिर को देख ।" शक ने उसी क्षण सिर में फुंसी पैदा कर ली । बोधिसत्त्व ने दोनों के सिर में फुंसी देख, "महाराज ! दोनों के सिर में फुंसी है। इस लिए मैं इन दोनों में से किसी को नहीं कह सकता कि वह इल्लीस है" कह, यह गाथा कहीउभो खञ्जा उभो कुणी उभो विसमचक्खुला, उभिन्नं पिलका जाता, नाहं पस्सामि इल्लिसं ॥ [ दोनों लंगड़े ( हैं ), दोनों लूले ( हैं), दोनों बैहंगे (हैं), और दोनों के (सिर में) फुंसियाँ हैं। मैं इल्लीस को नहीं पहचानता ( = देखता ) । ] उभो, दोनों जने । खञ्जा, लंगड़े (=कुण्ठकपाद), कुणी, लूले ( = कुण्ठहत्था) विसम चक्खुला, जिनकी आँख की पुतलियाँ विषम हैं। पिलका, दोनों के सिर में एक ही जगह, एक ही जैसी फुन्सियाँ हो गईं। नाहं पस्सामि, मैं इनमें यह इल्लीस है (करके) नहीं पहचानता, अर्थात् एक को भी 'इल्लीस' नहीं मानता। बोधिसत्त्व की बात सुन, सेठ काँपने लगा, और धन-शोक के करण, अपने को न सँभाल सकने से वहीं गिर पड़ा। उस समय शक, "महाराज ! मैं इल्लीस नहीं हूँ, मैं शक हूँ" कह, शऋ-लीला से आकाश में जा खड़ा हुआ । इल्लीस का मुँह पोंछ कर, उस पर पानी छिड़का गया । वह उठकर, देवेन्द्र शक्र को प्रणाम कर, खड़ा हुआ। तब शक ने कहा - "इल्लीस ! यह धन मेरा है, न कि तेरा । मैं तेरा पिता हूँ, तू मेरा पुत्र । मैं ने दानादि पुण्य कर्म करके शक्र की पदवी प्राप्त की, लेकिन तूने मेरे वंश ( की मर्यादा ) को तोड़, अदान-शीली हो, कंजूस बन, दानशाला को जला, याचकों को निकाल, (खाली) धन संग्रह किया। उसे, न तू आप खाता है, न दूसरे । वह ऐसे पड़ा है, जैसे राक्षस के अधिकार में हो । यदि, जैसे पहले थी, वैसे ही मेरी दानशाला
मुझे नाई पहचानता है, उसे बुलवावें ।" उस समय बोधिसत्त्व उसके नाई थे । राजा ने उसे बुलवा कर पूछा - "इल्लीस सेठ को पहचानते हो ?" "देव ! सिर को देख कर पहचान सकूँगा ।" "अच्छा ! तो दोनों के सिर को देख ।" शक ने उसी क्षण सिर में फुंसी पैदा कर ली । बोधिसत्त्व ने दोनों के सिर में फुंसी देख, "महाराज ! दोनों के सिर में फुंसी है। इस लिए मैं इन दोनों में से किसी को नहीं कह सकता कि वह इल्लीस है" कह, यह गाथा कहीउभो खञ्जा उभो कुणी उभो विसमचक्खुला, उभिन्नं पिलका जाता, नाहं पस्सामि इल्लिसं ॥ [ दोनों लंगड़े , दोनों लूले , दोनों बैहंगे , और दोनों के फुंसियाँ हैं। मैं इल्लीस को नहीं पहचानता । ] उभो, दोनों जने । खञ्जा, लंगड़े , कुणी, लूले विसम चक्खुला, जिनकी आँख की पुतलियाँ विषम हैं। पिलका, दोनों के सिर में एक ही जगह, एक ही जैसी फुन्सियाँ हो गईं। नाहं पस्सामि, मैं इनमें यह इल्लीस है नहीं पहचानता, अर्थात् एक को भी 'इल्लीस' नहीं मानता। बोधिसत्त्व की बात सुन, सेठ काँपने लगा, और धन-शोक के करण, अपने को न सँभाल सकने से वहीं गिर पड़ा। उस समय शक, "महाराज ! मैं इल्लीस नहीं हूँ, मैं शक हूँ" कह, शऋ-लीला से आकाश में जा खड़ा हुआ । इल्लीस का मुँह पोंछ कर, उस पर पानी छिड़का गया । वह उठकर, देवेन्द्र शक्र को प्रणाम कर, खड़ा हुआ। तब शक ने कहा - "इल्लीस ! यह धन मेरा है, न कि तेरा । मैं तेरा पिता हूँ, तू मेरा पुत्र । मैं ने दानादि पुण्य कर्म करके शक्र की पदवी प्राप्त की, लेकिन तूने मेरे वंश को तोड़, अदान-शीली हो, कंजूस बन, दानशाला को जला, याचकों को निकाल, धन संग्रह किया। उसे, न तू आप खाता है, न दूसरे । वह ऐसे पड़ा है, जैसे राक्षस के अधिकार में हो । यदि, जैसे पहले थी, वैसे ही मेरी दानशाला
गाँव का रामू - क्या हाल है रानी ? लड़की - कौन बद्तमीज़ बोल रहा है ? रामू - क्या री ? अपने आशिक को नहीं पहचानती ,, लड़की (गुस्से में)- मेरा नम्बर कहाँ से मिला ? लाजो का गोलू रोज ऑफिस से लेट आता था, में किसी और से चक्कर है, नौकरानी - नहीं , ऐसा नहीं हो सकता, लाजो - क्यों ? . . . . . . . . . . . . . . गोलू की गर्लफ्रेंड उसे किस कर रही थी, गोलू - शादी से पहले कुछ मत करो जानू, भगवान नाराज हो जायेंगे, लड़की - कैसे? गोलू - तुमको पता है कि भगवान को गुस्सा कब आता है? लड़की - कब? . . . . . . . . . जब लड़की शादी से पहले प्रेग्नेंट हो जाये, गोलू अपने 2 बेटों के साथ ट्रेन(train) में जा रहा था, चादर डाल दी कुर्सी पे बैठ गया , टीटी - टिकट(Ticket) दिखाओ, गोलू - ये लो , टीटी - ये तो आधा टिकट है, गोलू - आधा मतलब , टीटी - आधा मतलब एक बटा दो , एक ऊपर दो नीचे , आधार कार्ड का ऑफिस बंद था , कार्ड बनवाने के लिए लम्बी लाइन लगी हुई थी , गोलू बार बार लाइन में आगे जाने की कोशिश कर रहा था , लोग बार उसे पीछे पकड़ कर खीच देते थे , उसने 4-5 बार कोशिश की , लगे रहो लाइन में सालो , झाँक रही थी, दुबला पतला कालू गली से गुजरा, I Love You,, बेबी, तू पहले खुद को देख और अपने शरीर को देख, उसके बाद मुझे और मेरे शरीर को देख, कालू बुरी तरह बीमार हो गया, डॉक्टर से दवाई लेकर घर आया, बीवी - क्या बताया डॉक्टर ने? सोते समय टेंशन साथ लेके मत सोया करो, बीवी - मतलब? कालू - मतलब कमबख्त,
गाँव का रामू - क्या हाल है रानी ? लड़की - कौन बद्तमीज़ बोल रहा है ? रामू - क्या री ? अपने आशिक को नहीं पहचानती ,, लड़की - मेरा नम्बर कहाँ से मिला ? लाजो का गोलू रोज ऑफिस से लेट आता था, में किसी और से चक्कर है, नौकरानी - नहीं , ऐसा नहीं हो सकता, लाजो - क्यों ? . . . . . . . . . . . . . . गोलू की गर्लफ्रेंड उसे किस कर रही थी, गोलू - शादी से पहले कुछ मत करो जानू, भगवान नाराज हो जायेंगे, लड़की - कैसे? गोलू - तुमको पता है कि भगवान को गुस्सा कब आता है? लड़की - कब? . . . . . . . . . जब लड़की शादी से पहले प्रेग्नेंट हो जाये, गोलू अपने दो बेटों के साथ ट्रेन में जा रहा था, चादर डाल दी कुर्सी पे बैठ गया , टीटी - टिकट दिखाओ, गोलू - ये लो , टीटी - ये तो आधा टिकट है, गोलू - आधा मतलब , टीटी - आधा मतलब एक बटा दो , एक ऊपर दो नीचे , आधार कार्ड का ऑफिस बंद था , कार्ड बनवाने के लिए लम्बी लाइन लगी हुई थी , गोलू बार बार लाइन में आगे जाने की कोशिश कर रहा था , लोग बार उसे पीछे पकड़ कर खीच देते थे , उसने चार-पाँच बार कोशिश की , लगे रहो लाइन में सालो , झाँक रही थी, दुबला पतला कालू गली से गुजरा, I Love You,, बेबी, तू पहले खुद को देख और अपने शरीर को देख, उसके बाद मुझे और मेरे शरीर को देख, कालू बुरी तरह बीमार हो गया, डॉक्टर से दवाई लेकर घर आया, बीवी - क्या बताया डॉक्टर ने? सोते समय टेंशन साथ लेके मत सोया करो, बीवी - मतलब? कालू - मतलब कमबख्त,
- दाम्पत्य - विज्ञान यौवनावस्थामें शरीरके सभी अवयव परिपुष्ट हो जाते हैं, मनोभाव साथ ही साथ अधिक तीव्र, अधिक चञ्चल और अधिक वेग-शील हो जाते हैं । यह वह अवस्था है, जब मनुष्यका शरीर पूर्णता प्राप्त करता है । जिस तरह ऋतुराज वसन्तका आगमन होनेपर समस्त प्रकृति एक अपूर्व मनोहर वेश, एक अल किक प्रभा और एक असाधारण शोभा धारण करती है, ठीक वैसे ही मानव शरीर भी धारण करता है। ठीक उसी तरह मानव शरीरमें भी वैसा ही एक प्रकारका उन्माद उत्पन्न हो जाता है। यह उन्माद या प्रवृत्ति मनुष्यको जिस साथीकी आवश्यकता पैदा करती है, वह स्त्री है। इसी स्थानसे दाम्पत्य जीवनका आरम्भ किंवा सूत्रपात होता है। यही वह अवस्था है, जब मनुष्यके लिये विवाह बन्धनमें वॅधना आवश्यक है । पुरुषकी यह अवस्था यदि बोस या पञ्चीस वर्षकी उम्र में आरम्भ होती है तो भारतको स्त्रियाँ, इसे अपनी पन्द्रह या सोलह वर्ष की उम्र में ही प्राप्त कर लेती हैं। इस अवस्थामें दोनोंको अपने अपने साथीकी आवश्यकता आ पड़ती है और इसी अवस्थासे उनका दाम्पत्य जीवन आरम्भ होता है । पुरुष और स्त्रीके इस जोड़ेका नाम ही दम्पति है । जिस [ १० ] - दाम्पत्य ~ विज्ञानसमयसे दोनो विवाह सूत्रमें आवद्ध हो जाते हैं और जबसे उनका सम्वन्ध अविच्छिन्न रूपसे हो जाता है अथवा यों समझ लीजिये, कि जब पुरुष अपने गृहराज्यमें एक मन्त्री या गृहराज्यकी अधिष्ठात्री देवीको लाकर बैठा देता है - तभी से दाम्पत्य जीवन आरम्भ होता है - और तबतक वर्त्तमान रहता है, जबतक उनका अस्तित्व लोप नहीं जाता दाम्पत्य जीवन मनुष्यमानके लिये आशास्थान होता है। सभी उसके सुखोंके लिये लालायित ही क्यों, व्याकुल बने रहते हैं। परन्तु ब्रह्मचर्यका अभाव, हस्तमैथुन और वीर्यस्त्राव प्रभृति दुर्व्यसन किंवा व्याधियाँ तथा और कितनी हो वार्तं ऐसी हैं, जिनके कारण मनुष्यको उस स्वर्गीय सुखले वञ्चित रहना पड़ता है। अगले अध्यायोंमें इन्हीं सब वातोंपर विचार कर हम उन उपायोंका उल्लेख करेंगे, जिनके अवलम्वनसे यह सुख अधिक सुलभ और मधुर बनाया जा सकता है।
- दाम्पत्य - विज्ञान यौवनावस्थामें शरीरके सभी अवयव परिपुष्ट हो जाते हैं, मनोभाव साथ ही साथ अधिक तीव्र, अधिक चञ्चल और अधिक वेग-शील हो जाते हैं । यह वह अवस्था है, जब मनुष्यका शरीर पूर्णता प्राप्त करता है । जिस तरह ऋतुराज वसन्तका आगमन होनेपर समस्त प्रकृति एक अपूर्व मनोहर वेश, एक अल किक प्रभा और एक असाधारण शोभा धारण करती है, ठीक वैसे ही मानव शरीर भी धारण करता है। ठीक उसी तरह मानव शरीरमें भी वैसा ही एक प्रकारका उन्माद उत्पन्न हो जाता है। यह उन्माद या प्रवृत्ति मनुष्यको जिस साथीकी आवश्यकता पैदा करती है, वह स्त्री है। इसी स्थानसे दाम्पत्य जीवनका आरम्भ किंवा सूत्रपात होता है। यही वह अवस्था है, जब मनुष्यके लिये विवाह बन्धनमें वॅधना आवश्यक है । पुरुषकी यह अवस्था यदि बोस या पञ्चीस वर्षकी उम्र में आरम्भ होती है तो भारतको स्त्रियाँ, इसे अपनी पन्द्रह या सोलह वर्ष की उम्र में ही प्राप्त कर लेती हैं। इस अवस्थामें दोनोंको अपने अपने साथीकी आवश्यकता आ पड़ती है और इसी अवस्थासे उनका दाम्पत्य जीवन आरम्भ होता है । पुरुष और स्त्रीके इस जोड़ेका नाम ही दम्पति है । जिस [ दस ] - दाम्पत्य ~ विज्ञानसमयसे दोनो विवाह सूत्रमें आवद्ध हो जाते हैं और जबसे उनका सम्वन्ध अविच्छिन्न रूपसे हो जाता है अथवा यों समझ लीजिये, कि जब पुरुष अपने गृहराज्यमें एक मन्त्री या गृहराज्यकी अधिष्ठात्री देवीको लाकर बैठा देता है - तभी से दाम्पत्य जीवन आरम्भ होता है - और तबतक वर्त्तमान रहता है, जबतक उनका अस्तित्व लोप नहीं जाता दाम्पत्य जीवन मनुष्यमानके लिये आशास्थान होता है। सभी उसके सुखोंके लिये लालायित ही क्यों, व्याकुल बने रहते हैं। परन्तु ब्रह्मचर्यका अभाव, हस्तमैथुन और वीर्यस्त्राव प्रभृति दुर्व्यसन किंवा व्याधियाँ तथा और कितनी हो वार्तं ऐसी हैं, जिनके कारण मनुष्यको उस स्वर्गीय सुखले वञ्चित रहना पड़ता है। अगले अध्यायोंमें इन्हीं सब वातोंपर विचार कर हम उन उपायोंका उल्लेख करेंगे, जिनके अवलम्वनसे यह सुख अधिक सुलभ और मधुर बनाया जा सकता है।
ने कही। उन्होंने कहा कि बैजनाथ के वर्षों से मंत्री पद पर आसीन रहे दिग्गज कांग्रेस नेता स्व. पंडित संतराम ने इस सड़क को बजट में डाल दिया था। त्रिलोक सूर्यवंशी ने कहा कि हाल ही में उतराला-होली सड़क हेतु सरकार ने उतराला से बलकुड-दोही नाला तक सड़क निर्माण के लिए दस अगस्त 2021 को नाबार्ड से 13 करोड़ स्वीकृत किए हैं। त्रिलोक सूर्यवंशी ने उक्त सड़क के निर्माण हेतु राशि उपलब्ध कराने के लिए सरकार का धन्यवाद किया है और विभाग से आग्रह किया कि भौगोलिक परिस्थितियों को मद्देनजर रखते हुए इस सड़क के निर्माण के लिए भी ठियोग-हाटकोटी तथा भोटा-ऊना सड़क की भांति ग्लोबल टेंडर आमंत्रित करके, किसी बड़ी कंपनी से निर्माण कार्य करवाया जाए, ताकि निर्माण भी तीव्र गति से हो और कार्य में गुणवत्ता भी बनी रहे। यदि ऐसा नहीं किया जाता है, तो निर्माण कार्य में देर भी होगी और लागत भी बढ़ जाएगी। त्रिलोक सूर्यवंशी ने बताया कि उक्त सड़क निर्माण हेतु सर्वप्रथम तत्कालीन वन मंत्री पंडित संतराम ने प्रस्तावित सड़क बजट में डाल दी थी। तत्पश्चात् तत्कालीन विधायक दूलो राम ने डीपीआर तैयार करवाई और बजट का प्रावधान करके लगभग दस कि. मी सड़क का निर्माण भी वर्ष 2002 में करवा दिया। त्रिलोक सूर्यवंशी ने बताया कि विभाग ने उपरोक्त कार्य के लिए टेंडर भी आमंत्रित कर लिए हैं, जिसकी अंतिम तारीख चार जनवरी 2022 है। पर्यटन की दृष्टि से इस सड़क के महत्त्व को मद्देनजर रखते हुए त्रिलोक सूर्यवंशी ने सरकार से मांग की है कि पहले वाले टेंडर को रद्द करके दोबारा ग्लोबल टेंडर आमंत्रित किया जाए, ताकि शीघ्र अतिशीघ्र कार्य संपन्न हो नहीं, तो पहले की तरह मात्र लीपापोती ही होगी।
ने कही। उन्होंने कहा कि बैजनाथ के वर्षों से मंत्री पद पर आसीन रहे दिग्गज कांग्रेस नेता स्व. पंडित संतराम ने इस सड़क को बजट में डाल दिया था। त्रिलोक सूर्यवंशी ने कहा कि हाल ही में उतराला-होली सड़क हेतु सरकार ने उतराला से बलकुड-दोही नाला तक सड़क निर्माण के लिए दस अगस्त दो हज़ार इक्कीस को नाबार्ड से तेरह करोड़ स्वीकृत किए हैं। त्रिलोक सूर्यवंशी ने उक्त सड़क के निर्माण हेतु राशि उपलब्ध कराने के लिए सरकार का धन्यवाद किया है और विभाग से आग्रह किया कि भौगोलिक परिस्थितियों को मद्देनजर रखते हुए इस सड़क के निर्माण के लिए भी ठियोग-हाटकोटी तथा भोटा-ऊना सड़क की भांति ग्लोबल टेंडर आमंत्रित करके, किसी बड़ी कंपनी से निर्माण कार्य करवाया जाए, ताकि निर्माण भी तीव्र गति से हो और कार्य में गुणवत्ता भी बनी रहे। यदि ऐसा नहीं किया जाता है, तो निर्माण कार्य में देर भी होगी और लागत भी बढ़ जाएगी। त्रिलोक सूर्यवंशी ने बताया कि उक्त सड़क निर्माण हेतु सर्वप्रथम तत्कालीन वन मंत्री पंडित संतराम ने प्रस्तावित सड़क बजट में डाल दी थी। तत्पश्चात् तत्कालीन विधायक दूलो राम ने डीपीआर तैयार करवाई और बजट का प्रावधान करके लगभग दस कि. मी सड़क का निर्माण भी वर्ष दो हज़ार दो में करवा दिया। त्रिलोक सूर्यवंशी ने बताया कि विभाग ने उपरोक्त कार्य के लिए टेंडर भी आमंत्रित कर लिए हैं, जिसकी अंतिम तारीख चार जनवरी दो हज़ार बाईस है। पर्यटन की दृष्टि से इस सड़क के महत्त्व को मद्देनजर रखते हुए त्रिलोक सूर्यवंशी ने सरकार से मांग की है कि पहले वाले टेंडर को रद्द करके दोबारा ग्लोबल टेंडर आमंत्रित किया जाए, ताकि शीघ्र अतिशीघ्र कार्य संपन्न हो नहीं, तो पहले की तरह मात्र लीपापोती ही होगी।
अनुकूल जलवायु स्थितियों, समृद्धसांस्कृतिक विरासत, दिलचस्प ऐतिहासिक और स्थापत्य स्मारक, सुरम्य प्रकृति यात्रियों को मोंटेनेग्रो आकर्षित करती है। पर्यटकों से बुडवा की समीक्षा केवल सकारात्मक होती है, क्योंकि यह सबसे लोकप्रिय यूरोपीय रिसॉर्ट्स में से एक है, जो सबसे मज़बूत और समझदार छुट्टियों की आवश्यकताओं को पूरा करती है। शहर देश के सबसे खूबसूरत स्थानों में से एक में स्थित है - एड्रियाटिक तट पर। कई प्राचीन शहर मोंटेनेग्रो को जानते हैं। Budva (यात्रियों की समीक्षा आराम के दिए गए सुखद क्षणों के लिए कृतज्ञता से भरे हुए हैं) दिलचस्प ऐतिहासिक और वास्तुशिल्प स्थलों है। यह पूरे एड्रियाटिक तट पर सबसे पुराने शहरों में से एक है, इसकी पहली यादें वी शताब्दी ईसा पूर्व की तारीखें हैं। बुडवा के ऐतिहासिक अतीत के बारे में और जानने के लिए, आपको पुराने हिस्से में जाना चाहिए, जहां सबसे दिलचस्प इमारतें स्थित हैं। कई लोग प्राचीन चर्चों, एक्सवी शताब्दी के समुंदर के किनारे के किनारे, दीवार और टावरों के साथ किले के द्वार देखने में रुचि रखते हैं, जिन्हें मोंटेनेग्रो द्वारा कई शताब्दियों तक संरक्षित किया गया है। अप्रैल से अक्टूबर तक, शहर के मेहमान शहर से खुश हैंमौसम। मॉन्टेनेग्रो, विशेष रूप से बुडवा, कई धूप दिनों के लिए खड़ा है। हर साल विभिन्न सांस्कृतिक और मनोरंजन कार्यक्रम होते हैं। गर्मियों में, काव्य और नाटकीय त्यौहार होते हैं, साथ ही साथ शास्त्रीय संगीत का त्योहार भी होता है। व्यावहारिक रूप से सभी पर्यटकों के लिए, उम्र, प्रकृति और व्यक्तिगत वरीयताओं के बावजूद, बुडवा (मोंटेनेग्रो) उपयुक्त है। आवास, भोजन और मनोरंजन के लिए कीमत आसमान-उच्च नहीं हैं, इसलिए औसत आय वाले प्रत्येक व्यक्ति एड्रियाटिक तट पर आराम कर सकता है।
अनुकूल जलवायु स्थितियों, समृद्धसांस्कृतिक विरासत, दिलचस्प ऐतिहासिक और स्थापत्य स्मारक, सुरम्य प्रकृति यात्रियों को मोंटेनेग्रो आकर्षित करती है। पर्यटकों से बुडवा की समीक्षा केवल सकारात्मक होती है, क्योंकि यह सबसे लोकप्रिय यूरोपीय रिसॉर्ट्स में से एक है, जो सबसे मज़बूत और समझदार छुट्टियों की आवश्यकताओं को पूरा करती है। शहर देश के सबसे खूबसूरत स्थानों में से एक में स्थित है - एड्रियाटिक तट पर। कई प्राचीन शहर मोंटेनेग्रो को जानते हैं। Budva दिलचस्प ऐतिहासिक और वास्तुशिल्प स्थलों है। यह पूरे एड्रियाटिक तट पर सबसे पुराने शहरों में से एक है, इसकी पहली यादें वी शताब्दी ईसा पूर्व की तारीखें हैं। बुडवा के ऐतिहासिक अतीत के बारे में और जानने के लिए, आपको पुराने हिस्से में जाना चाहिए, जहां सबसे दिलचस्प इमारतें स्थित हैं। कई लोग प्राचीन चर्चों, एक्सवी शताब्दी के समुंदर के किनारे के किनारे, दीवार और टावरों के साथ किले के द्वार देखने में रुचि रखते हैं, जिन्हें मोंटेनेग्रो द्वारा कई शताब्दियों तक संरक्षित किया गया है। अप्रैल से अक्टूबर तक, शहर के मेहमान शहर से खुश हैंमौसम। मॉन्टेनेग्रो, विशेष रूप से बुडवा, कई धूप दिनों के लिए खड़ा है। हर साल विभिन्न सांस्कृतिक और मनोरंजन कार्यक्रम होते हैं। गर्मियों में, काव्य और नाटकीय त्यौहार होते हैं, साथ ही साथ शास्त्रीय संगीत का त्योहार भी होता है। व्यावहारिक रूप से सभी पर्यटकों के लिए, उम्र, प्रकृति और व्यक्तिगत वरीयताओं के बावजूद, बुडवा उपयुक्त है। आवास, भोजन और मनोरंजन के लिए कीमत आसमान-उच्च नहीं हैं, इसलिए औसत आय वाले प्रत्येक व्यक्ति एड्रियाटिक तट पर आराम कर सकता है।
।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल (हे.) ।1 - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसे1950 ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा 117 - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ( नदारद ) ।1क(क) - रिक्त ( नदारद ) ।1-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ( नदारद ) ।2 - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। जीता / सोमई / ग्राम नि. जितेन्दर / सोमई / ग्राम नि. सत्येन्द्र / सोमई / ग्राम नि. गुड्डू / सोमई / ग्राम नि. सुरेश / सोमई / ग्राम नि. मजनू / सोमई / ग्राम नि. श्रीमती पार्वती देवी / सोमई / ग्राम नि. फतई / अशर्फी / ग्राम नि. श्रीराम / दशरथ / ग्राम नि. विराम / दशरथ / ग्राम नि. कपिल / दशरथ / ग्राम नि. धर्मेन्द्र / दशरथ / ग्राम नि. श्रीमती गुलाबी देवी / दशरथ / ग्राम नि. ।3 - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ( नदारद ) ।4 - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ 4 में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ( नदारद ) ।4-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -(क)जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । तुलसी / हरिद्वार / ग्राम नि. दयालू / बासदेव / ग्राम नि. पाथर / बासदेव / ग्राम नि. जंगली / बासदेव / ग्राम नि. लालजी / बासदेव / ग्राम नि. नितुराज / राजमंगल / ग्राम नि. ।4-क(ख) - अन्य भूमि । ( नदारद ) ।5-1 - कृषि योग्य भूमि - नई परती (परतीजदीद) ( नदारद ) ।5-2 - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती (परतीकदीम) ( नदारद ) ।5-3-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ( नदारद ) ।5-3-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ( नदारद ) ।5-3-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ( नदारद ) ।5-3-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ( नदारद ) ।5-3-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ( नदारद ) ।5-क (क) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ( नदारद ) ।5-क (ख) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ( नदारद ) ।5-क (ग) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ( नदारद ) ।6-1 - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ( नदारद ) ।6-2 - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ( नदारद ) ।6-3 - कब्रिस्तान और श्मशान (मरघट) , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ( नदारद ) ।6-4 - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ( नदारद ) ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल ।एक - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसेएक हज़ार नौ सौ पचास ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा एक सौ सत्रह - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ।एकक - रिक्त ।एक-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ।दो - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। जीता / सोमई / ग्राम नि. जितेन्दर / सोमई / ग्राम नि. सत्येन्द्र / सोमई / ग्राम नि. गुड्डू / सोमई / ग्राम नि. सुरेश / सोमई / ग्राम नि. मजनू / सोमई / ग्राम नि. श्रीमती पार्वती देवी / सोमई / ग्राम नि. फतई / अशर्फी / ग्राम नि. श्रीराम / दशरथ / ग्राम नि. विराम / दशरथ / ग्राम नि. कपिल / दशरथ / ग्राम नि. धर्मेन्द्र / दशरथ / ग्राम नि. श्रीमती गुलाबी देवी / दशरथ / ग्राम नि. ।तीन - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ।चार - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ चार में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ।चार-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । तुलसी / हरिद्वार / ग्राम नि. दयालू / बासदेव / ग्राम नि. पाथर / बासदेव / ग्राम नि. जंगली / बासदेव / ग्राम नि. लालजी / बासदेव / ग्राम नि. नितुराज / राजमंगल / ग्राम नि. ।चार-क - अन्य भूमि । ।पाँच-एक - कृषि योग्य भूमि - नई परती ।पाँच-दो - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती ।पाँच-तीन-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ।पाँच-तीन-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ।पाँच-तीन-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।पाँच-तीन-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ।पाँच-तीन-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ।छः-एक - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।छः-दो - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।छः-तीन - कब्रिस्तान और श्मशान , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।छः-चार - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
अकिबडेम इंटरनेशनल हॉस्पिटल चेस्ट रोग विशेषज्ञ प्रो. डॉ। बुलेंट टुटलुओग्लू ने इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में जानकारी दी। हाल के वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट का व्यापक रूप से उपयोग किया गया है, खासकर उन लोगों द्वारा जो धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं, यह मानते हुए कि वे 'कम हानिकारक' हैं। यह कहते हुए कि धूम्रपान आज मानव जीवन के लिए खतरा पैदा करने वाले सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक है, अकिबडेम इंटरनेशनल हॉस्पिटल चेस्ट डिजीज स्पेशलिस्ट प्रो. डॉ। ब्यूलेन्ट टुटलुओग्लू ने कहा, "हर साल दुनिया में 5 लाख और हमारे देश में 100 हजार से ज्यादा लोग धूम्रपान से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं के कारण मर जाते हैं। हाल के वर्षों में, कई लोगों ने धूम्रपान छोड़ने के बजाय इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट की ओर रुख किया है, जो उन्हें लगता है कि कम हानिकारक है। हालाँकि, आम धारणा के विपरीत, इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट हमारे स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा ख़तरा है। यह पता चला है कि इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट, जिसे शुरू में हानिरहित माना जाता था, नियमित सिगरेट की तरह ही लत लगाने वाली होती है और इसमें हजारों हानिकारक रसायन होते हैं। इसके अलावा, युवा या वयस्क जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया है, वे भी इस सोच के साथ इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट शुरू कर सकते हैं कि यह हानिकारक नहीं है। इतना कि ऐसे उत्पादों का उपयोग करने वाले हर तीन लोगों में से एक ऐसे लोग होते हैं जिन्होंने अपने जीवन में कभी धूम्रपान नहीं किया है।" कहा। Tutluoğlu ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट के उपयोग से बचना चाहिए क्योंकि यह जीवन-घातक स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनता है, और कहा, "पिछले दस वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट ने हमारे जीवन में प्रवेश किया है। हमने अभी इसके हानिकारक प्रभाव देखना शुरू ही किया है। जैसे-जैसे साल बीतेंगे, मुझे लगता है कि हम उनके और अधिक नुकसान का पता लगाने में सक्षम होंगे। उन्होंने कहा। "इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट भी लत लगाती है" यह कहते हुए कि पारंपरिक सिगरेट की तरह इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट में भी निकोटीन होता है, इसका लत लगाने वाला प्रभाव होता है। डॉ। टुटलुओग्लू ने कहा, "पहली और दूसरी पीढ़ी के इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट में निकोटीन कम था क्योंकि उनकी निकोटीन वितरण प्रणाली पर्याप्त नहीं थी। हालाँकि, तीसरी पीढ़ी के उत्पादों में उनके बड़े कक्षों के कारण बहुत अधिक निकोटीन होना शुरू हो गया। इनके अलावा, चौथी पीढ़ी के उत्पाद, जिनमें डिस्पोजेबल सुगंधित उत्पाद शामिल हैं, काफी छोटे हैं, इसलिए वे अपने उत्पादन में स्रोत के रूप में निकोटीन लवण का उपयोग करते हैं। इन उत्पादों में निकोटीन की उच्च सांद्रता के कारण लोग इसके आदी हो जाते हैं।" बयान दिया. टुटलुओग्लू ने कहा कि हालांकि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट पारंपरिक सिगरेट की तुलना में कम हानिकारक हैं, लेकिन समाज में ऐसी धारणा है। हालाँकि, सिगरेट की सामग्री में कई हानिकारक पदार्थ इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट उत्पादों में भी मौजूद होते हैं। अध्ययनों से पता चला है कि ये हानिकारक रसायन उतने ही हानिकारक हैं जितने नियमित सिगरेट में होते हैं। जब इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट में तरल पदार्थ वाष्पित हो जाता है, तो इससे ग्लिसरॉल, प्रोपलीन, ग्लाइकोल, एसीटोन, कैडमियम, सिलिकॉन, तांबा, निकल और सीसा जैसे हजारों हानिकारक रसायन फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं। इसके अलावा, चूंकि इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट अधिक वाष्प पैदा करती है, इसलिए निष्क्रिय सिगरेट के धुएं के संपर्क में आने वाले लोगों में प्रदूषक निचले श्वसन पथ को अधिक प्रभावित कर सकते हैं। "इससे फेफड़ों को घातक नुकसान हो सकता है" टुटलुओग्लू ने कहा, "हालांकि इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट का उपयोग करने वाले कुछ रोगियों को लंबे समय तक गहन देखभाल इकाइयों में इलाज करना पड़ता है, लेकिन उनमें से कुछ दुर्भाग्य से मर जाते हैं। यह निर्धारित किया गया कि इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट का उपयोग करने वाले माध्यमिक विद्यालय और उच्च विद्यालय के छात्रों में खांसी, बलगम और सांस की तकलीफ जैसी शिकायतें बढ़ गईं। इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट भी नसों को नुकसान पहुंचा सकती है। अध्ययनों से पता चला है कि इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट संवहनी संरचना को बाधित करती है और महत्वपूर्ण दर पर थक्का बनने का कारण बन सकती है, और दिल के दौरे और स्ट्रोक के खतरे के प्रति चेतावनी दी गई है। "बांझपन का कारण बन सकता है" यह इंगित करते हुए कि इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट के उपयोग से प्राकृतिक रूप से गर्भवती होना भी मुश्किल हो सकता है, टुटलुओग्लू ने कहा, "इसमें मौजूद रसायन महिलाओं में अंडे के विकास को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकते हैं और भ्रूण को गर्भाशय से जुड़ने से रोक सकते हैं। अध्ययनों से पता चला है कि ई-सिगरेट पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन के स्तर को कम करती है, जबकि शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता को कम करती है। उन्होंने कहा। "शिशु में विकास संबंधी विकार देखे जा सकते हैं" यह याद दिलाते हुए कि गर्भावस्था के दौरान सिगरेट के साथ-साथ ई-सिगरेट का भी उपयोग नहीं किया जाना चाहिए, प्रो. डॉ। ब्यूलेंट टुटलुओग्लु ने कहा, "क्योंकि ऐसा माना जाता है कि होने वाली मां के धूम्रपान के कारण होने वाली सभी नकारात्मकताएं, जैसे कि समय से पहले जन्म, गर्भपात, जन्म के समय कम वजन और बच्चे में शारीरिक-मानसिक विकास संबंधी विकार, इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट के साथ भी हो सकते हैं।" ।" कहा।
अकिबडेम इंटरनेशनल हॉस्पिटल चेस्ट रोग विशेषज्ञ प्रो. डॉ। बुलेंट टुटलुओग्लू ने इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में जानकारी दी। हाल के वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट का व्यापक रूप से उपयोग किया गया है, खासकर उन लोगों द्वारा जो धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं, यह मानते हुए कि वे 'कम हानिकारक' हैं। यह कहते हुए कि धूम्रपान आज मानव जीवन के लिए खतरा पैदा करने वाले सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक है, अकिबडेम इंटरनेशनल हॉस्पिटल चेस्ट डिजीज स्पेशलिस्ट प्रो. डॉ। ब्यूलेन्ट टुटलुओग्लू ने कहा, "हर साल दुनिया में पाँच लाख और हमारे देश में एक सौ हजार से ज्यादा लोग धूम्रपान से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं के कारण मर जाते हैं। हाल के वर्षों में, कई लोगों ने धूम्रपान छोड़ने के बजाय इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट की ओर रुख किया है, जो उन्हें लगता है कि कम हानिकारक है। हालाँकि, आम धारणा के विपरीत, इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट हमारे स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा ख़तरा है। यह पता चला है कि इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट, जिसे शुरू में हानिरहित माना जाता था, नियमित सिगरेट की तरह ही लत लगाने वाली होती है और इसमें हजारों हानिकारक रसायन होते हैं। इसके अलावा, युवा या वयस्क जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया है, वे भी इस सोच के साथ इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट शुरू कर सकते हैं कि यह हानिकारक नहीं है। इतना कि ऐसे उत्पादों का उपयोग करने वाले हर तीन लोगों में से एक ऐसे लोग होते हैं जिन्होंने अपने जीवन में कभी धूम्रपान नहीं किया है।" कहा। Tutluoğlu ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट के उपयोग से बचना चाहिए क्योंकि यह जीवन-घातक स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनता है, और कहा, "पिछले दस वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट ने हमारे जीवन में प्रवेश किया है। हमने अभी इसके हानिकारक प्रभाव देखना शुरू ही किया है। जैसे-जैसे साल बीतेंगे, मुझे लगता है कि हम उनके और अधिक नुकसान का पता लगाने में सक्षम होंगे। उन्होंने कहा। "इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट भी लत लगाती है" यह कहते हुए कि पारंपरिक सिगरेट की तरह इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट में भी निकोटीन होता है, इसका लत लगाने वाला प्रभाव होता है। डॉ। टुटलुओग्लू ने कहा, "पहली और दूसरी पीढ़ी के इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट में निकोटीन कम था क्योंकि उनकी निकोटीन वितरण प्रणाली पर्याप्त नहीं थी। हालाँकि, तीसरी पीढ़ी के उत्पादों में उनके बड़े कक्षों के कारण बहुत अधिक निकोटीन होना शुरू हो गया। इनके अलावा, चौथी पीढ़ी के उत्पाद, जिनमें डिस्पोजेबल सुगंधित उत्पाद शामिल हैं, काफी छोटे हैं, इसलिए वे अपने उत्पादन में स्रोत के रूप में निकोटीन लवण का उपयोग करते हैं। इन उत्पादों में निकोटीन की उच्च सांद्रता के कारण लोग इसके आदी हो जाते हैं।" बयान दिया. टुटलुओग्लू ने कहा कि हालांकि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट पारंपरिक सिगरेट की तुलना में कम हानिकारक हैं, लेकिन समाज में ऐसी धारणा है। हालाँकि, सिगरेट की सामग्री में कई हानिकारक पदार्थ इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट उत्पादों में भी मौजूद होते हैं। अध्ययनों से पता चला है कि ये हानिकारक रसायन उतने ही हानिकारक हैं जितने नियमित सिगरेट में होते हैं। जब इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट में तरल पदार्थ वाष्पित हो जाता है, तो इससे ग्लिसरॉल, प्रोपलीन, ग्लाइकोल, एसीटोन, कैडमियम, सिलिकॉन, तांबा, निकल और सीसा जैसे हजारों हानिकारक रसायन फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं। इसके अलावा, चूंकि इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट अधिक वाष्प पैदा करती है, इसलिए निष्क्रिय सिगरेट के धुएं के संपर्क में आने वाले लोगों में प्रदूषक निचले श्वसन पथ को अधिक प्रभावित कर सकते हैं। "इससे फेफड़ों को घातक नुकसान हो सकता है" टुटलुओग्लू ने कहा, "हालांकि इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट का उपयोग करने वाले कुछ रोगियों को लंबे समय तक गहन देखभाल इकाइयों में इलाज करना पड़ता है, लेकिन उनमें से कुछ दुर्भाग्य से मर जाते हैं। यह निर्धारित किया गया कि इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट का उपयोग करने वाले माध्यमिक विद्यालय और उच्च विद्यालय के छात्रों में खांसी, बलगम और सांस की तकलीफ जैसी शिकायतें बढ़ गईं। इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट भी नसों को नुकसान पहुंचा सकती है। अध्ययनों से पता चला है कि इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट संवहनी संरचना को बाधित करती है और महत्वपूर्ण दर पर थक्का बनने का कारण बन सकती है, और दिल के दौरे और स्ट्रोक के खतरे के प्रति चेतावनी दी गई है। "बांझपन का कारण बन सकता है" यह इंगित करते हुए कि इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट के उपयोग से प्राकृतिक रूप से गर्भवती होना भी मुश्किल हो सकता है, टुटलुओग्लू ने कहा, "इसमें मौजूद रसायन महिलाओं में अंडे के विकास को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकते हैं और भ्रूण को गर्भाशय से जुड़ने से रोक सकते हैं। अध्ययनों से पता चला है कि ई-सिगरेट पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन के स्तर को कम करती है, जबकि शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता को कम करती है। उन्होंने कहा। "शिशु में विकास संबंधी विकार देखे जा सकते हैं" यह याद दिलाते हुए कि गर्भावस्था के दौरान सिगरेट के साथ-साथ ई-सिगरेट का भी उपयोग नहीं किया जाना चाहिए, प्रो. डॉ। ब्यूलेंट टुटलुओग्लु ने कहा, "क्योंकि ऐसा माना जाता है कि होने वाली मां के धूम्रपान के कारण होने वाली सभी नकारात्मकताएं, जैसे कि समय से पहले जन्म, गर्भपात, जन्म के समय कम वजन और बच्चे में शारीरिक-मानसिक विकास संबंधी विकार, इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट के साथ भी हो सकते हैं।" ।" कहा।
मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी श्री राम विलास पासवान जी, श्री सी. आर. चौधरी जी, UNCTAD (अंकटाड) के सेक्रेटरी जनरल डॉक्टर मुखीसा किटूयी जी, और यहां उपस्थित अन्य महानुभाव, सबसे पहले आप सभी सभी को consumer protection जैसे महान विषय पर International Conference के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं। इस कार्यक्रम में दक्षिण एशिया, South-East Asia और East Asia के कई देशों के प्रतिनिधि भी आज हमारे बीच में शामिल हैं। मैं आप सभी का इस कार्यक्रम में हृदय से बहुत-बहुत स्वागत करता हूं। दक्षिण एशिया में ये अपनी तरह का ये पहला आयोजन है। मैं UNCTAD का भी आभारी हूं, जिसने भारत की इस पहल को मजबूती के साथ आगे बढ़ाया और उसे इस स्वरूप तक लाने में सक्रिय भूमिका निभाई। साथियो, दुनिया का ये भू-भाग जिस तरह एक-दूसरे से ऐतिहासिक रूप से जुड़ा हुआ है, वैसा अन्य जगहों पर कम ही देखने को मिलता है। हजारों वर्षों से हम trade, culture, religion ऐसे कई पहलू से जुड़े हुए हैं। Costal Economy ने इस भू-भाग को connect करने के लिए सदियों से अहम योगदान दिया है। लोगों का आना-जाना, विचारों का आदान-प्रदान, एक two-way process रहा है। जिसका लाभ इस क्षेत्र के हर देश को कम-अधिक मात्रा में मिलता रहा है। हम आज भी सिर्फ आर्थिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक तौर पर भी एक shared heritage का प्रतीक हैं। साथियो, आज के modern era में हमारे पारस्परिक संबंध एक नये आयाम पर पहुंचे हैं। एशिया के देश न सिर्फ अपने देश पर goods और market services को cater कर रहे हैं बल्कि उनका विस्तार दूसरे महाद्वीपों तक भी फैलता चला जा रहा है। इसमें consumer protection ऐसा विषय है, जो इस क्षेत्र में व्यापार को बढ़ाने, उसे और मजबूत करने का एक important component है। आज का ये आयोजन इस बात का प्रतीक है कि हम अपने नागरिकों की आवश्यकताओं को किस तरह गंभीरता से समझते हैं; उनकी दिक्कतों को दूर करने के लिए किस तरह से गंभीरतापूर्वक प्रयास करते हैं। हर नागरिक एक consumer भी होता है, और इसलिए ये आयोजन हमारे collective determination का भी प्रतीक है। साथियो, इस पूरी प्रक्रिया में संयुक्त राष्ट्र का एक सहयोगी तौर पर आगे आना भी एक बहुत ही सुखद बात है। Nineteen Eighty Five (1985) में पहली बार consumer protection पर UN Guidelines बनी थीं। दो वर्ष पूर्व ही इसमें और सुधार किया गया है। सुधार की इस प्रक्रिया में भारत की भी सक्रिय भूमिका रही है। और मैं डॉक्टर मुखीसा का आभारी हूं, उन्होंने जिस प्रकार से भारत की सराहना की। अनेक क्षेत्र में भारत जिस बातों को lead ले रहा है, उसका भी उन्होंने बहुत ही उत्तम तरीके से जिक्र किया, मैं इसलिए उनका हृदय से बहुत आभारी हूं। विकासशील देशों में sustainable consumption in commerce और finical service के संबंध में ये guidelines बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। यानी वस्तुस्थिति और नाप-तौल में किसी भी तरह की गड़़बड़ी न करें। ऋगवेद में कहा गया है- हजारों वर्ष पूर्व रचित ग्रंथों में consumer protection के बकायदा नियम समझाए गए हैं। गलत तरीके से trade करने वाले को किस तरह की सजा दी जाए, उसे भी उस क्षेत्र समय में वर्णित किया गया है। आप जान करके हैरान होंगे कि लगभग ढाई हजार साल पहले, कौटिल्य के समय में, बाकायदा शासन के लिए guidelines परिभाषित की गई थीं कि कैसे trade का regulate किया जाएगा और कैसे सरकार उपभोक्ता के हितों की रक्षा करेगी। कौटिल्य-काल में शासन द्वारा जिस तरह की व्यवस्था थी, आज के हिसाब से अगर उन पदों को हम आज के terminology में रखें तो उसका मतलब होता है; director of trade, superintended of standards; मैं समझता हूं कहा जा सकता है। हमारे यहां ग्राहक को भगवान माना जाता है। कई दुकानों में आपको लिखा मिल जाएगा- ग्राहक देवो भवः । चाहे कोई भी business हो, उसका एकमात्र मकसद Consumer की संतुष्टि होना चाहिए। साथियों, भारत उन कुछ देशों में शामिल रहा है जिसने UN guidelines Adopt होने के अगले ही साल यानि 1986 में ही अपना Consumer Protection Act लागू कर दिया था। उपभोक्ता के हितों का ध्यान इस सरकार की प्राथमिकताओं में से एक प्रमुख अंग है। सरकार की ये प्राथमिकता New India के संकल्प के साथ भी पूरी तरह जुड़ी हुई है। New India, जहां Consumer Protection से आगे बढ़कर Best Consumer Practices और Consumer Prosperity की भी बात को हम बल दे रहे हैं। साथियों, हम आज की देश की जरूरतों को, आज के व्यापारिक तौर-तरीकों को ध्यान में रखते हुए एक नया Consumer Protection Act already process में है, हम बना रहे हैं। नए कानून में Consumer Empowerment पर विशेष जोर दिया जा रहा है। Consumer की परेशानी कम समय में, कम खर्च में दूर हो, इसके लिए नियमों को और अधिक सरल किया जा रहा है। Misleading विज्ञापनों पर और सख्ती का प्रावधान किया जा रहा है। तुरंत सुनवाई के लिए Executive powers के साथ Central Consumer Protection Authority का भी गठन किया जाएगा। हमने Real Estate Regulatory Act बनाया है, जिससे घर खरीदने वाले उपभोक्ताओं के हितों का संरक्षण हुआ है, और विशेष करके मध्यम वर्ग, निम्न वर्ग का व्यक्ति जो जीवन की पूरी कमाई घर बनाने के लिए खर्च कर देता है; उसके लिए protection मतलब, उसकी पूरी एक जिंदगी के अरमानों के protection का दायरा बन जाता है। पहले, बिल्डरों की मनमानी की वजह से वर्षों तक लोगों को अपने घरों के लिए इंतजार करना पड़ता था। फ्लैट के एरिया को लेकर भी भ्रम की स्थिति बनी रहती थी। अब इस नए कानून RERA के बाद केवल Registered developers ही सभी आवश्यक permission प्राप्त करने के बाद घर की booking कर सकेंगे। सिर्फ एक pamphlet छापकार ही लोगों के रुपये नहीं बटोर सकते हैं। इसके साथ ही सरकार ने booking amount की सीमा को भी 10 प्रतिशत पर फिक्स कर दिया है, वरना पहले advance में 25, 30, 40 percent तक, 50 percent तक लोगों से पैसे हथिया लिए जाते थे। पहले ये होता था कि बिल्डर, घरों की बुकिंग के बाद मिलने वाले जो पैसे होते थे उसको दूसरे प्रोजेक्ट में लगा देते थे। अब सरकार ने ऐसा प्रावधान किया है कि खरीदार से मिलने वाली 70 प्रतिशत राशि "Escrow" अकाउंट में डालनी होगी और ये राशि उसी प्रोजेक्ट पर ही खर्च की जाएगी। इसी तरह ब्यूरो ऑफ Indian Standard Act भी बनाया गया है। अब Public या Consumer Interest से जुड़ी किसी भी वस्तु या सेवा को compulsory certification के अंतर्गत लाया जा सकेगा। और इसके तहत खराब क्वालिटी की वस्तुओं को बाजार से Recall करने और उससे अगर उपभोक्ता को नुकसान हुआ है, तो उसकी Compensation का भी प्रावधान किया गया है। अभी हाल ही में भारत ने Goods And Services Tax- GST को भी लागू किया है। GST के बाद देश में अलग-अलग तरह के दर्जनों Indirect Tax का जाल खत्म हुआ है। कितने ही तरह के Hidden Tax अब खत्म हो चुके हैं। उपभोक्ता को अब सामने receipt पर दिखता है कि उसने कितना टैक्स राज्य सरकार को दिया, कितना टैक्स केंद्र सरकार को दिया। बॉर्डर पर ट्रकों का लगने वाला लंबा जाम भी खत्म हो गया है। GST से देश को एक नया business culture मिल रहा है और Long Term में GST का सबसे बड़ा फायदा Consumers को ही होने वाला है। मध्यम वर्ग, निम्न वर्ग, गरीब; जिसका अज्ञान का लाभ उठाया जाता था; जैसे-जैसे लोगों को इसकी जानकारी मिलती जाएगी, ग्राहक जागरूक होता जाएगा और कहीं पर भी आप कोई भी उसका cheating नहीं कर पाएगा। ये एक पारदर्शी व्यवस्था है जिसमें कोई Consumers के हितों के साथ खिलवाड़ नहीं कर पाएगा। इतना ही नहीं, GST की वजह से जब कंपनियों का आपस में competition बढ़ेगा, और बढ़ने वाला है; तो चीजों की कीमतों में भी बहुत गिरावट आएगी, कमी आएगी। और इसका सीधा फायदा भी गरीब और मध्यम वर्ग के Consumers को होने वाला है। अब देखिए, transportation, जो ट्रक पांच दिन में जाती थी, अब सारे check post हटने के कारण वो तीन दिन में जा रही है। इसका मतलब कि जो सामान ढो करके जाने का खर्च होता था उसमें कटौती आई है। ये आने वाले दिनों में consumer को transfer होने ही वाला है। आज भले ही कोई लोग अज्ञान का लाभ उठाते होंगे, लेकिन सारी चीजों का फायदा आने वाले दिनों में ग्राहक को, मध्यम वर्ग, निम्न-मध्यम वर्ग, गरीब को, उसको transfer होने ही वाला है। साथियों, कानून के माध्यम से उपभोक्ता के हितों को मजबूत करने के साथ ही ये भी बहुत आवश्यक है कि लोगों की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई हो। Ultimately democracy की ताकत grievance redressal में होती है। लोकतंत्र का अहम, grievance redressal system कितनी आपकी powerful है; इस पर लेखा-जोखा होता है। पिछले तीन वर्षों में technology का इस्तेमाल करते हुए हमारी सरकार ने Grievance redressal का एक नया Eco-system तैयार किया है। National Consumer Helpline की क्षमता को 4 गुना बढ़ाया जा चुका है।Consumer Protection से जुड़े portal और social media को भी integrate किया गया है। Portal से निजी कंपनियां भी बड़ी संख्या से जुड़ रही हैं। Portal के माध्यम से लगभग 40 प्रतिशत शिकायतें सीधे कंपनियों के पास automatic transfer हो जाती हैं जिन पर तेजी से कार्रवाई होती है। जागो-ग्राहक जागो- इस अभियान के माध्यम से भी उपभोक्ताओं को जागरूक करने का एक व्यापक प्रयास निरंतर चलता रहता है। मैं बड़े संतोष के साथ कह सकता हूं कि Consumer Protection में जिस तरह social media का Positive तरीके से इस्तेमाल इस सरकार ने किया है, वैसा देश में पहले कभी नहीं किया गया। साथियों, मेरी नजर में और हमारी सरकार के vision में Consumer Protection का दायरा बहुत ही विस्तृत है। किसी भी देश का विकास और Consumer Protection एक दूसरे के पूरक होते हैं, वो जुड़वां भाई होते हैं। विकास का फायदा हर नागरिक तक पहुंचे, इसके लिए Good Governance, इसकी भी बहुत बड़ी भूमिका रहती है। जब आप सरकार के नाते ये सुनिश्चित करते हैं कि नागरिक तक उसके अधिकार पहुंचें, नागरिक तक वो सेवाएं पहुंचे, जिनसे वो अज्ञानवश वंचित रह जाता है, तब भी आप Consumer के हितों को Protect करते हैं; ये good governance के माध्यम से संभव होता है। देश के लोगों को Clean Energy के लिए उज्ज्वला योजना, health and hygiene के लिए स्वच्छ भारत अभियान, Financial inclusion के लिए जन-धन योजना, ये ऐसी कई योजनाएं हैं; इसी भावना को प्रतिबिंबित करती हैं। 2022 तक, जबकि आजादी के 75 साल हो रहे हैं, और भारत जब आजादी के 75 साल मना रहा है, तब 2022 तक देश के हर व्यक्ति के पास अपना घर हो, इस पर भी सरकार बहुत व्यापक रूप से काम कर रही है। अभी हाल ही में देश के हर घर में बिजली connection पहुंचाने के लिए भी एक बहुत बड़ा initiative लिया गया है, एक बहुत बड़ी योजना शुरू की गई है। ये सारे प्रयास लोगों के Basic Life Line सपोर्ट देने के साथ ही उनकी जिंदगी आसान बनाने के लिए भी हैं। Consumer के हितों की रक्षा सिर्फ उसे अधिकार देने से ही पूरी नहीं होती है। भारत में हम उस दिशा में भी काम कर रहे हैं जहां सरकार की योजनाएं Consumer के पैसे बचाने में मददगार साबित होनी चाहिए और हो रही हैं। इन योजनाओं से सबसे ज्यादा फायदा देश के गरीब, निम्न-मध्यम वर्ग, मध्यम वर्ग, ऐसे समाज के एक बहुत बड़े दायरे को होता है। वो law abiding citizen होते हैं। वे कानून का पालन करने वाले मध्यमवर्गीय लोग होते हैं। उनको हम जितना sport देंगे, उतनी हमारी व्यवस्थाएं और अधिक ताकतवर बनेंगी। आपको जानकारी होगी कि UNICEF ने अभी हाल ही में भारत में एक सर्वे के नतीजों की घोषणा की है। सर्वे के मुताबिक स्वच्छ भारत मिशन के बाद जो गांव खुले में शौच से मुक्त हो गए हैं, उन गांवों में प्रत्येक परिवार को सालाना 50 हजार रुपयों की बचत हो रही है। वरना यही राशि उस परिवार को बीमारियों के इलाज, अस्पताल आने-जाने, और दफ्तर से ली गई छुट्टियों आदि पर खर्च करने के लिए मजबूर होना पड़ता था। अब ये consumer की नजर से देखें हम इस घटना को तो हमने उसके 50 हजार रुपये बचाना, ये अपनी उसकी एक consumer के नाते purchasing power भी बढ़ाते हैं और उसकी अर्थव्यवस्था को priority देने के लिए हम सुविधा provide करते हैं। साथियों, गरीबों को सस्ती दवा के लिए भारतीय जनऔषधि परियोजना हमने प्रारंभ की है। 500 से ज्यादा दवाइयों की कीमत को कम करके उन्हें आवश्यक दवाइयों की लिस्ट में रखा गया है। स्टेंट की कीमत में capping करके स्टेंट को 85 प्रतिशत तक सस्ता किया गया है। मध्यम वर्ग का परिवार, अगर परिवार के एक व्यक्ति को हृदय की बीमारी हो जाए और स्टेंट लगवाना हो तो ढाई लाख, तीन लाख, दो लाख; कहां से खर्च करेगा? सरकार ने intervention किया, as a consumer एक heart patient, consumer भी है और उसको अगर 85 percent कम कीमत से वी स्टेंट मिल जाए; मैं समझता हूं आधी हृदय की बीमारी तो यूं ही चली जाएगी। यही तो consumer protection होता है। हाल ही में घुटने के implants की कीमत को भी सरकार ने नियंत्रित कर दिया है। आज शायद ही कोई परिवार होगा जहां 50 के बाद घर में घुटने की शिकायत वाले लोग न मिलें। और फिर डॉक्टर्स तो बता देते हैं बस mechanical engineering में जैसे पुर्जा बदल देते हैं, आओ पुर्जा बदल देते हैं, और फिर वो बहुत बड़ा लम्बा-चौड़ा बिल दे देते हैं। हमने इसके लिए व्यवस्था की, उसकी कीमतें कम की। जो retired लोग हैं, जो pensioners हैं, वे consumer भी हैं। उस आयु में उनको इतनी बड़ी मदद, मैं समझता हूं pension की बढ़ोत्तरी से भी ये बचत उसको ज्यादा ताकत और विश्वास देती है। ये काम सरकार का approach है। हमारी सोच Consumer Protection से आगे जाकर Consumer Interest Promotion की ओर भी है। Consumer Interest में लोगों के पैसे बचाने का एक और उदाहरण मैं आपके सामने रखता हूं और वो है हमारी उजाला स्कीम। ये पूरी स्कीम सिर्फ consumer के हित में ही सीमित नहीं है, consumer के interest की भी चिंता करती है। आपने देखा होगा, वैसे चीज बहुत छोटी लगती है, लेकिन इसका प्रभाव कितना होता है, उजाला योजना। ये साधारण सी स्कीम है LED बल्ब के वितरण की, लेकिन परिणाम असाधारण हैं। जब ये सरकार आई थी तो एक LED बल्ब, उसकी कीमत 350 रुपये से ज्यादा में वो बिकता था। सरकार ने उसमें intervention किया, बारीकियों में देखा, LED का बल्ब production, उसकी दिशा में देखा। मार्केट बने, इसकी चिंता की। और जो बल्ब साढ़े तीन सौ रुपये में बिकता था, अब उजाला स्कीम के तहत केवल 40-45 रुपये में वो बल्ब उपलब्ध है। अब कोई मुझे बताए कि देश के मध्यम वर्ग के व्यक्ति के जेब में पैसा बचा कि नहीं बचा? उसके interest को protect किया कि नहीं किया? LED बल्ब की कीमत कम करके और लोगों के बिजली बिल में बचत कराकर सरकार ने सिर्फ इस एक योजना से consumer के, उपभोक्ताओं के करीब-करीब 20 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा, उनके जेब में पूरे देश में बचाए हैं, एक साल में। क्योंकि बिजली का बिल कम हो गया इसके कारण। 20 हजार करोड़ रुपये, अगर पुरानी सरकारों की तरह, अगर हम रेवड़ी बांटने के लिए लगा देते तो जय-जयकार करने वालों की कमी नहीं थी। लेकिन हमने कठिन रास्ते चुने लेकिन consumer के interest को पूरे करने के तरीके के साथ जुड़े रहे। 20 हजार करोड़ रुपये कम नहीं होता है। इतने मिले बिजली बचने के कारण। Environment में कितना फायदा हो रहा है। अगर इतनी ही बिजली का कारखाना लगाना होता तो शायद 50-60 हजार करोड़ रुपये, उतनी बिजली उत्पादन के लिए कारखाने लगाने पड़ते; वो तो एक extra benefit हुआ है। साथियों, Inflation पर लगाम लगाने की वजह से भी और उसकी वजह से गरीब और मध्यम वर्ग के Consumers का आर्थिक फायदा हुआ है। जिस तेजी से Inflation बढ़ रहा था, 2012-13, 11, 12, 13 का समय देख लीजिए, अगर उसी रफ्तार से बढ़ता होता तो आज था कितनी महंगी होती, अगर इसका हिसाब लगाओगे तो कोई भी बड़ा अर्थशास्त्री चौंक जाता कि हिन्दुस्तान का आदमी खाता कैसे है? लेकिन इस सरकार ने कदम उठाए, Inflation को कम किया, थाली पर बढ़ने वाले बोझ को रोक दिया। कुछ कीमतों में सस्ता होने में सफल हुए, Inflation कम होता गया। इससे भी Consumer की जेब में पैसे बचे हैं, Consumers के interest की रक्षा हुई है। शायद ही मध्यम वर्ग, निम्न-मध्यम वर्ग के परिवारों की इतनी बारीकी से चिंता शायद ही इस देश में पहले कभी हुई होगी। टेक्नोलॉजी के माध्यम से Public Distribution System को मजबूत करके भी ये सुनिश्चित किया जा रहा है कि जिस गरीब का सस्ते खाद्यान्न पर अधिकार है, उसे ही वो अनाज मिलना चाहिए, स्थायपन्न नहीं होना चाहिए। चोरी हो करके फ्लोर मिल में नहीं जाना चाहिए गेहूं, गरीब के पेट में जाना चाहिए। ये भी Consumers के interest के protection की हमारी commitment का उदाहरण है। Direct benefit scheme के तहत लाभार्थियों के bank account में सीधे पैसा transfer करके सरकार पे 57 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम को गलत हाथों में जाने से रोक दिया है। कोई तो थे बिचौलिए, कोई तो थे दलाल, जिनके पास ये पैसा जाता था। आधार की सबसे बड़ी सफलता ये है कि जिसका हक है उसको हक का देने में आधार एक बहुत बड़ी भूमिका अदा कर रहा है। और 57 हजार करोड़ रुपया प्रतिवर्ष, एक वर्ष नहीं- प्रति वर्ष। 57 हजार करोड़ रुपये चोरी होती थी और उसको भ्रष्टाचार के रूप में कभी बाजार के अखबारों में कभी छपा नहीं है वो। जैसे 2G का छपता था, कोयले का छपता था, इसका नहीं छपा; क्योंकि क्योंकि इतनी छोटी-छोटी रकमों की चोरी हुआ करती थी किसी को पता नहीं चलता था। Consumer के interest की चिंता करने के कारण सरकार ने technology का इस्तेमाल किया, transparency पर जोर लगाया और उसी का परिणाम है कि जो हकदार हैं, उसका हक आज न कोई छीन सकता है; जिसका हक है उसको पूरा का पूरा, एक रुपये का 15 पैसे हुए बिना , एक रुपया का 100 पैसा उसके पास जा रहा है। ये काम Consumer interest का सबसे बड़ा उदाहरण है। साथियों, Sustainable Development Goals और उसकी प्राप्ति के लिए आवश्यक है कि consumer भी अपने साझा उत्तरदायित्व समझते हुए अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें। यहां इस अवसर पर मैं दूसरे देशों से आए हुए अपने साथियों को Give-it-up scheme के बारे में विशेष तौर पर बताना चाहूंगा। हमारे यहां रसोई गैस के सिलेंडर पर लोगों को subsidy दी जाती है। Clean cooking की तरफ हमारा बल है। लेकिन जब मैंने एक बार लाल किले से लोगों को अपील की लोगों को 15 अगस्त को कि अगर आप afford करते हैं तो आपको इतनी subsidy की क्या जरूरत है? सालाना 100-1500 रुपया लेकर क्या जरूरत है, आप छोड़ते क्यों नहीं? मैं आज बड़े संतोष के साथ कह सकता हूं और दुनिया का जो माहौल है उसके सामने भारत में सामान्य मानवी ने जो मिसाल दिखाई है, एक उदाहरण है। Ten Million से ज्यादा लोग, एक करोड़ से ज्यादा लोगों ने सिर्फ मेरे कहने मात्र से अपन gas subsidy को surrender कर दिया। मैं समझता हूं ये है partnership. जो गरीब है, सामान्य है जिसको अब व्यवस्था मिलनी चाहिए, जिसको अब व्यवस्था ने आगे बढ़ाया है, उसने छोड़ने के लिए आगे आना चाहिए। ये प्रयोग मैं समझता हूं, देश को एक नया भारत का परिचय करानी वाली बात है कि आज भी मेरे देश में वो इमानदारी, समाज के लिए कुछ करने की भावना जन-जन में व्यापत है और इस सरकार ने उसके साथ अपने-आपको connect किया है। लोगों ने जो गैस सब्सिडी छोड़ी, वो हमने सरकारी खजाने में नहीं डाली। हम तिजोरी भर सकते थे, लेकिन वो हमने काम नहीं किया। हमने उस गैस सब्सिडी का फायदा, जिनको लकड़ी के चूल्हे से रोटी पकानी पड़ती थी, जो मां बीमार हो जाती थी, जो environment को नुकसान होता था, हमने करीब 3 करोड़ परिवारों को जिसने कभी गैस का चूल्हा नहीं देखा था, clean cooking के लिए सोचा नहीं था, उनको मुफ्त में gas connection दे करके हमने इस बात को और transfer कर दिया। ये एक उदाहरण है कि कैसे प्रत्येक कन्ज्यूमर के shared contribution से दूसरे का फायदा होता है और समाज में भी अपने कर्तव्यों के प्रति एक positive, devoted भाव से एक नया माहौल बनता है। साथियों, सरकार देश के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले उपभोक्ताओं के Digital Empowerment के लिए, जैसे आपने उल्लेख किया डॉक्टर मुखीसा किटूयी जी ने; प्रधानमंत्री ग्रामीण Digital साक्षरता अभियान चला रही है। इसके तहत 6 करोड़ घरों में और हर घर में एक व्यक्ति को Digital रूप से साक्षर बनाने का एक बहुत बड़ा अभिायान भारत सरकार ने हाथ में लिया है। इस अभियान से गांव के लोगों को Digital लेन-देन, Digital तरीके से सरकारी सेवाओं को प्राप्त करने में और सहूलियत मिलेगी। वो दिन दूर नहीं होगा जब JAM connectivity- जन-धन, आधार, मोबाईल, पूरे governance के केंद्र बिंदु में ये JAM रहने वाला है। जन-धन, आधार, मोबाईल- एक अपने मोबाइल फोन पर वो सरकार से सीधा संपर्क कर सकें, वो दिन दूर नहीं है। लेकिन उसमें humanity source development के तहत भारत के 6 करोड़ ग्रामीण परिवारों में, हर परिवार में एक बंदा digitally literate हो, उसका एक बहुत बड़ा अभियान हमने चलाया है। भारत के गांवों में डिजिटल जागरूकता है। भविष्य के लिए एक बहुत बड़ा e-commerce मार्केट को भी बल देने की संभावना मैं देख रहा हूं। Unified Payment Interface- UPI ने e-commerce इंडस्ट्री को एक बहुत बड़ी ताकत दी है। Bharat Interface For Money- यानि BHIM App ने शहरों के अलावा ग्रामीण इलाकों में भी डिजिटल पेमेंट का एक व्यापक विस्तार किया है। साथियों, सवा सौ करोड़ से ज्यादा की जनसंख्या और तेजी से बढ़ते मिडिल क्लास की वजह से भारत दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में से एक है। हमारी अर्थव्यवस्था का खुलापन, दुनिया के हर देश का स्वागत करता है, भारतीय उपभोक्ताओं को Global Players की ओर, और निकट लाने की संभावना बनाता है। Make in India के माध्यम से हम Global Companies को भारत में ही Produce करने और यहां के विशाल मानव संसाधन का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए एक platform दे रहे हैं, और निमंत्रण भी दे रहा है। साथियों, धरती के इस हिस्से में ये अपनी तरह की पहली conference है। हम में से प्रत्येक देश अपने-अपने तरीके से अपने देश के उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने में जुटा हुआ है। लेकिन हमें ये भी ध्यान में रखना होगा कि बढ़ते हुए Globalization के साथ पूरा विश्व एक Single Market की ओर आगे बढ़ रहा है। और इसलिए इस तरह के आयोजन के माध्यम से एक दूसरे के अनुभवों से सीखना, Common Understanding के बिंदु तलाशना और Consumer Protection से जुड़े किसी Regional Coalition के निर्माण की संभावनाओं पर चर्चा, मैं समझता हूं बहुत ही अहम है, महत्वपूर्ण है। 400 करोड़ से ज्यादा का consumer base, बढ़ती हुई purchasing power, Young Demographic Profile, हम एशियाई देशो में एक बिजनेस का बहुत बड़ा आधार है। E-commerce और लोगों की बढ़ती Trans-border mobility की वजह से आज Cross-Border Transaction लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में Consumer का भरोसा बनाए रखने के लिए ये बहुत आवश्यक है कि हर देश में मजबूत regulatory system हो और उस system के बारे में दूसरे देशों को भी आवश्यक जानकारी हो। दूसरे देशों के उपभोक्ताओ से जुड़े मामलों में तेजी से की गई कार्रवाई करने के लिए Co-operation का frame work होना भी उतना ही आवश्यक है। इससे आपसी विश्वास बढ़ेगा और व्यापार की पहली शर्त होती है विश्वास। रुपये व्यापार को जितना बढ़ाते हैं उससे ज्यादा विश्वास व्यापार को बढ़ाता है। Communication के लिए Structured Mechanism बनाना, Best Practices की Mutual Sharing करना, Capacity building के लिए नए Initiatives लेना और Joint Campaigns शुरू करना; ऐसे विषय हैं जिन पर आपसी हितों को ध्यान में रखते हुए कार्य किया जा सकता है। साथियों, हमारी सांस्कृतिक और व्यापार की साझा विरासत भविष्य में उतनी ही मजबूत होगी, जितना हमारे बीच भावनात्मक संबंध मजबूत होंगे। अपनी संस्कृति पर गर्व के साथ ही दूसरों की संस्कृति का सम्मान हमारी परंपरा का हिस्सा है। सदियों से हम एक-दूसरे से सीखते रहे हैं और Trade और Consumer Protection भी इससे अछूता नहीं रहा है। मुझे उम्मीद है इस conference में भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, एक स्पष्ट vision के साथ आगे बढ़ने का roadmap तैयार होगा। मुझे उम्मीद है कि हम इस conference के माध्यम से एक Regional Co-operation को institutionalize करने में भी सफल होंगे। इस कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए मैं आपका एक बार फिर से बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं, मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं और मैं इस conference को अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं। बहुत-बहुत धन्यवाद !!!
मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी श्री राम विलास पासवान जी, श्री सी. आर. चौधरी जी, UNCTAD के सेक्रेटरी जनरल डॉक्टर मुखीसा किटूयी जी, और यहां उपस्थित अन्य महानुभाव, सबसे पहले आप सभी सभी को consumer protection जैसे महान विषय पर International Conference के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं। इस कार्यक्रम में दक्षिण एशिया, South-East Asia और East Asia के कई देशों के प्रतिनिधि भी आज हमारे बीच में शामिल हैं। मैं आप सभी का इस कार्यक्रम में हृदय से बहुत-बहुत स्वागत करता हूं। दक्षिण एशिया में ये अपनी तरह का ये पहला आयोजन है। मैं UNCTAD का भी आभारी हूं, जिसने भारत की इस पहल को मजबूती के साथ आगे बढ़ाया और उसे इस स्वरूप तक लाने में सक्रिय भूमिका निभाई। साथियो, दुनिया का ये भू-भाग जिस तरह एक-दूसरे से ऐतिहासिक रूप से जुड़ा हुआ है, वैसा अन्य जगहों पर कम ही देखने को मिलता है। हजारों वर्षों से हम trade, culture, religion ऐसे कई पहलू से जुड़े हुए हैं। Costal Economy ने इस भू-भाग को connect करने के लिए सदियों से अहम योगदान दिया है। लोगों का आना-जाना, विचारों का आदान-प्रदान, एक two-way process रहा है। जिसका लाभ इस क्षेत्र के हर देश को कम-अधिक मात्रा में मिलता रहा है। हम आज भी सिर्फ आर्थिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक तौर पर भी एक shared heritage का प्रतीक हैं। साथियो, आज के modern era में हमारे पारस्परिक संबंध एक नये आयाम पर पहुंचे हैं। एशिया के देश न सिर्फ अपने देश पर goods और market services को cater कर रहे हैं बल्कि उनका विस्तार दूसरे महाद्वीपों तक भी फैलता चला जा रहा है। इसमें consumer protection ऐसा विषय है, जो इस क्षेत्र में व्यापार को बढ़ाने, उसे और मजबूत करने का एक important component है। आज का ये आयोजन इस बात का प्रतीक है कि हम अपने नागरिकों की आवश्यकताओं को किस तरह गंभीरता से समझते हैं; उनकी दिक्कतों को दूर करने के लिए किस तरह से गंभीरतापूर्वक प्रयास करते हैं। हर नागरिक एक consumer भी होता है, और इसलिए ये आयोजन हमारे collective determination का भी प्रतीक है। साथियो, इस पूरी प्रक्रिया में संयुक्त राष्ट्र का एक सहयोगी तौर पर आगे आना भी एक बहुत ही सुखद बात है। Nineteen Eighty Five में पहली बार consumer protection पर UN Guidelines बनी थीं। दो वर्ष पूर्व ही इसमें और सुधार किया गया है। सुधार की इस प्रक्रिया में भारत की भी सक्रिय भूमिका रही है। और मैं डॉक्टर मुखीसा का आभारी हूं, उन्होंने जिस प्रकार से भारत की सराहना की। अनेक क्षेत्र में भारत जिस बातों को lead ले रहा है, उसका भी उन्होंने बहुत ही उत्तम तरीके से जिक्र किया, मैं इसलिए उनका हृदय से बहुत आभारी हूं। विकासशील देशों में sustainable consumption in commerce और finical service के संबंध में ये guidelines बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। यानी वस्तुस्थिति और नाप-तौल में किसी भी तरह की गड़़बड़ी न करें। ऋगवेद में कहा गया है- हजारों वर्ष पूर्व रचित ग्रंथों में consumer protection के बकायदा नियम समझाए गए हैं। गलत तरीके से trade करने वाले को किस तरह की सजा दी जाए, उसे भी उस क्षेत्र समय में वर्णित किया गया है। आप जान करके हैरान होंगे कि लगभग ढाई हजार साल पहले, कौटिल्य के समय में, बाकायदा शासन के लिए guidelines परिभाषित की गई थीं कि कैसे trade का regulate किया जाएगा और कैसे सरकार उपभोक्ता के हितों की रक्षा करेगी। कौटिल्य-काल में शासन द्वारा जिस तरह की व्यवस्था थी, आज के हिसाब से अगर उन पदों को हम आज के terminology में रखें तो उसका मतलब होता है; director of trade, superintended of standards; मैं समझता हूं कहा जा सकता है। हमारे यहां ग्राहक को भगवान माना जाता है। कई दुकानों में आपको लिखा मिल जाएगा- ग्राहक देवो भवः । चाहे कोई भी business हो, उसका एकमात्र मकसद Consumer की संतुष्टि होना चाहिए। साथियों, भारत उन कुछ देशों में शामिल रहा है जिसने UN guidelines Adopt होने के अगले ही साल यानि एक हज़ार नौ सौ छियासी में ही अपना Consumer Protection Act लागू कर दिया था। उपभोक्ता के हितों का ध्यान इस सरकार की प्राथमिकताओं में से एक प्रमुख अंग है। सरकार की ये प्राथमिकता New India के संकल्प के साथ भी पूरी तरह जुड़ी हुई है। New India, जहां Consumer Protection से आगे बढ़कर Best Consumer Practices और Consumer Prosperity की भी बात को हम बल दे रहे हैं। साथियों, हम आज की देश की जरूरतों को, आज के व्यापारिक तौर-तरीकों को ध्यान में रखते हुए एक नया Consumer Protection Act already process में है, हम बना रहे हैं। नए कानून में Consumer Empowerment पर विशेष जोर दिया जा रहा है। Consumer की परेशानी कम समय में, कम खर्च में दूर हो, इसके लिए नियमों को और अधिक सरल किया जा रहा है। Misleading विज्ञापनों पर और सख्ती का प्रावधान किया जा रहा है। तुरंत सुनवाई के लिए Executive powers के साथ Central Consumer Protection Authority का भी गठन किया जाएगा। हमने Real Estate Regulatory Act बनाया है, जिससे घर खरीदने वाले उपभोक्ताओं के हितों का संरक्षण हुआ है, और विशेष करके मध्यम वर्ग, निम्न वर्ग का व्यक्ति जो जीवन की पूरी कमाई घर बनाने के लिए खर्च कर देता है; उसके लिए protection मतलब, उसकी पूरी एक जिंदगी के अरमानों के protection का दायरा बन जाता है। पहले, बिल्डरों की मनमानी की वजह से वर्षों तक लोगों को अपने घरों के लिए इंतजार करना पड़ता था। फ्लैट के एरिया को लेकर भी भ्रम की स्थिति बनी रहती थी। अब इस नए कानून RERA के बाद केवल Registered developers ही सभी आवश्यक permission प्राप्त करने के बाद घर की booking कर सकेंगे। सिर्फ एक pamphlet छापकार ही लोगों के रुपये नहीं बटोर सकते हैं। इसके साथ ही सरकार ने booking amount की सीमा को भी दस प्रतिशत पर फिक्स कर दिया है, वरना पहले advance में पच्चीस, तीस, चालीस percent तक, पचास percent तक लोगों से पैसे हथिया लिए जाते थे। पहले ये होता था कि बिल्डर, घरों की बुकिंग के बाद मिलने वाले जो पैसे होते थे उसको दूसरे प्रोजेक्ट में लगा देते थे। अब सरकार ने ऐसा प्रावधान किया है कि खरीदार से मिलने वाली सत्तर प्रतिशत राशि "Escrow" अकाउंट में डालनी होगी और ये राशि उसी प्रोजेक्ट पर ही खर्च की जाएगी। इसी तरह ब्यूरो ऑफ Indian Standard Act भी बनाया गया है। अब Public या Consumer Interest से जुड़ी किसी भी वस्तु या सेवा को compulsory certification के अंतर्गत लाया जा सकेगा। और इसके तहत खराब क्वालिटी की वस्तुओं को बाजार से Recall करने और उससे अगर उपभोक्ता को नुकसान हुआ है, तो उसकी Compensation का भी प्रावधान किया गया है। अभी हाल ही में भारत ने Goods And Services Tax- GST को भी लागू किया है। GST के बाद देश में अलग-अलग तरह के दर्जनों Indirect Tax का जाल खत्म हुआ है। कितने ही तरह के Hidden Tax अब खत्म हो चुके हैं। उपभोक्ता को अब सामने receipt पर दिखता है कि उसने कितना टैक्स राज्य सरकार को दिया, कितना टैक्स केंद्र सरकार को दिया। बॉर्डर पर ट्रकों का लगने वाला लंबा जाम भी खत्म हो गया है। GST से देश को एक नया business culture मिल रहा है और Long Term में GST का सबसे बड़ा फायदा Consumers को ही होने वाला है। मध्यम वर्ग, निम्न वर्ग, गरीब; जिसका अज्ञान का लाभ उठाया जाता था; जैसे-जैसे लोगों को इसकी जानकारी मिलती जाएगी, ग्राहक जागरूक होता जाएगा और कहीं पर भी आप कोई भी उसका cheating नहीं कर पाएगा। ये एक पारदर्शी व्यवस्था है जिसमें कोई Consumers के हितों के साथ खिलवाड़ नहीं कर पाएगा। इतना ही नहीं, GST की वजह से जब कंपनियों का आपस में competition बढ़ेगा, और बढ़ने वाला है; तो चीजों की कीमतों में भी बहुत गिरावट आएगी, कमी आएगी। और इसका सीधा फायदा भी गरीब और मध्यम वर्ग के Consumers को होने वाला है। अब देखिए, transportation, जो ट्रक पांच दिन में जाती थी, अब सारे check post हटने के कारण वो तीन दिन में जा रही है। इसका मतलब कि जो सामान ढो करके जाने का खर्च होता था उसमें कटौती आई है। ये आने वाले दिनों में consumer को transfer होने ही वाला है। आज भले ही कोई लोग अज्ञान का लाभ उठाते होंगे, लेकिन सारी चीजों का फायदा आने वाले दिनों में ग्राहक को, मध्यम वर्ग, निम्न-मध्यम वर्ग, गरीब को, उसको transfer होने ही वाला है। साथियों, कानून के माध्यम से उपभोक्ता के हितों को मजबूत करने के साथ ही ये भी बहुत आवश्यक है कि लोगों की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई हो। Ultimately democracy की ताकत grievance redressal में होती है। लोकतंत्र का अहम, grievance redressal system कितनी आपकी powerful है; इस पर लेखा-जोखा होता है। पिछले तीन वर्षों में technology का इस्तेमाल करते हुए हमारी सरकार ने Grievance redressal का एक नया Eco-system तैयार किया है। National Consumer Helpline की क्षमता को चार गुना बढ़ाया जा चुका है।Consumer Protection से जुड़े portal और social media को भी integrate किया गया है। Portal से निजी कंपनियां भी बड़ी संख्या से जुड़ रही हैं। Portal के माध्यम से लगभग चालीस प्रतिशत शिकायतें सीधे कंपनियों के पास automatic transfer हो जाती हैं जिन पर तेजी से कार्रवाई होती है। जागो-ग्राहक जागो- इस अभियान के माध्यम से भी उपभोक्ताओं को जागरूक करने का एक व्यापक प्रयास निरंतर चलता रहता है। मैं बड़े संतोष के साथ कह सकता हूं कि Consumer Protection में जिस तरह social media का Positive तरीके से इस्तेमाल इस सरकार ने किया है, वैसा देश में पहले कभी नहीं किया गया। साथियों, मेरी नजर में और हमारी सरकार के vision में Consumer Protection का दायरा बहुत ही विस्तृत है। किसी भी देश का विकास और Consumer Protection एक दूसरे के पूरक होते हैं, वो जुड़वां भाई होते हैं। विकास का फायदा हर नागरिक तक पहुंचे, इसके लिए Good Governance, इसकी भी बहुत बड़ी भूमिका रहती है। जब आप सरकार के नाते ये सुनिश्चित करते हैं कि नागरिक तक उसके अधिकार पहुंचें, नागरिक तक वो सेवाएं पहुंचे, जिनसे वो अज्ञानवश वंचित रह जाता है, तब भी आप Consumer के हितों को Protect करते हैं; ये good governance के माध्यम से संभव होता है। देश के लोगों को Clean Energy के लिए उज्ज्वला योजना, health and hygiene के लिए स्वच्छ भारत अभियान, Financial inclusion के लिए जन-धन योजना, ये ऐसी कई योजनाएं हैं; इसी भावना को प्रतिबिंबित करती हैं। दो हज़ार बाईस तक, जबकि आजादी के पचहत्तर साल हो रहे हैं, और भारत जब आजादी के पचहत्तर साल मना रहा है, तब दो हज़ार बाईस तक देश के हर व्यक्ति के पास अपना घर हो, इस पर भी सरकार बहुत व्यापक रूप से काम कर रही है। अभी हाल ही में देश के हर घर में बिजली connection पहुंचाने के लिए भी एक बहुत बड़ा initiative लिया गया है, एक बहुत बड़ी योजना शुरू की गई है। ये सारे प्रयास लोगों के Basic Life Line सपोर्ट देने के साथ ही उनकी जिंदगी आसान बनाने के लिए भी हैं। Consumer के हितों की रक्षा सिर्फ उसे अधिकार देने से ही पूरी नहीं होती है। भारत में हम उस दिशा में भी काम कर रहे हैं जहां सरकार की योजनाएं Consumer के पैसे बचाने में मददगार साबित होनी चाहिए और हो रही हैं। इन योजनाओं से सबसे ज्यादा फायदा देश के गरीब, निम्न-मध्यम वर्ग, मध्यम वर्ग, ऐसे समाज के एक बहुत बड़े दायरे को होता है। वो law abiding citizen होते हैं। वे कानून का पालन करने वाले मध्यमवर्गीय लोग होते हैं। उनको हम जितना sport देंगे, उतनी हमारी व्यवस्थाएं और अधिक ताकतवर बनेंगी। आपको जानकारी होगी कि UNICEF ने अभी हाल ही में भारत में एक सर्वे के नतीजों की घोषणा की है। सर्वे के मुताबिक स्वच्छ भारत मिशन के बाद जो गांव खुले में शौच से मुक्त हो गए हैं, उन गांवों में प्रत्येक परिवार को सालाना पचास हजार रुपयों की बचत हो रही है। वरना यही राशि उस परिवार को बीमारियों के इलाज, अस्पताल आने-जाने, और दफ्तर से ली गई छुट्टियों आदि पर खर्च करने के लिए मजबूर होना पड़ता था। अब ये consumer की नजर से देखें हम इस घटना को तो हमने उसके पचास हजार रुपये बचाना, ये अपनी उसकी एक consumer के नाते purchasing power भी बढ़ाते हैं और उसकी अर्थव्यवस्था को priority देने के लिए हम सुविधा provide करते हैं। साथियों, गरीबों को सस्ती दवा के लिए भारतीय जनऔषधि परियोजना हमने प्रारंभ की है। पाँच सौ से ज्यादा दवाइयों की कीमत को कम करके उन्हें आवश्यक दवाइयों की लिस्ट में रखा गया है। स्टेंट की कीमत में capping करके स्टेंट को पचासी प्रतिशत तक सस्ता किया गया है। मध्यम वर्ग का परिवार, अगर परिवार के एक व्यक्ति को हृदय की बीमारी हो जाए और स्टेंट लगवाना हो तो ढाई लाख, तीन लाख, दो लाख; कहां से खर्च करेगा? सरकार ने intervention किया, as a consumer एक heart patient, consumer भी है और उसको अगर पचासी percent कम कीमत से वी स्टेंट मिल जाए; मैं समझता हूं आधी हृदय की बीमारी तो यूं ही चली जाएगी। यही तो consumer protection होता है। हाल ही में घुटने के implants की कीमत को भी सरकार ने नियंत्रित कर दिया है। आज शायद ही कोई परिवार होगा जहां पचास के बाद घर में घुटने की शिकायत वाले लोग न मिलें। और फिर डॉक्टर्स तो बता देते हैं बस mechanical engineering में जैसे पुर्जा बदल देते हैं, आओ पुर्जा बदल देते हैं, और फिर वो बहुत बड़ा लम्बा-चौड़ा बिल दे देते हैं। हमने इसके लिए व्यवस्था की, उसकी कीमतें कम की। जो retired लोग हैं, जो pensioners हैं, वे consumer भी हैं। उस आयु में उनको इतनी बड़ी मदद, मैं समझता हूं pension की बढ़ोत्तरी से भी ये बचत उसको ज्यादा ताकत और विश्वास देती है। ये काम सरकार का approach है। हमारी सोच Consumer Protection से आगे जाकर Consumer Interest Promotion की ओर भी है। Consumer Interest में लोगों के पैसे बचाने का एक और उदाहरण मैं आपके सामने रखता हूं और वो है हमारी उजाला स्कीम। ये पूरी स्कीम सिर्फ consumer के हित में ही सीमित नहीं है, consumer के interest की भी चिंता करती है। आपने देखा होगा, वैसे चीज बहुत छोटी लगती है, लेकिन इसका प्रभाव कितना होता है, उजाला योजना। ये साधारण सी स्कीम है LED बल्ब के वितरण की, लेकिन परिणाम असाधारण हैं। जब ये सरकार आई थी तो एक LED बल्ब, उसकी कीमत तीन सौ पचास रुपयापये से ज्यादा में वो बिकता था। सरकार ने उसमें intervention किया, बारीकियों में देखा, LED का बल्ब production, उसकी दिशा में देखा। मार्केट बने, इसकी चिंता की। और जो बल्ब साढ़े तीन सौ रुपये में बिकता था, अब उजाला स्कीम के तहत केवल चालीस-पैंतालीस रुपयापये में वो बल्ब उपलब्ध है। अब कोई मुझे बताए कि देश के मध्यम वर्ग के व्यक्ति के जेब में पैसा बचा कि नहीं बचा? उसके interest को protect किया कि नहीं किया? LED बल्ब की कीमत कम करके और लोगों के बिजली बिल में बचत कराकर सरकार ने सिर्फ इस एक योजना से consumer के, उपभोक्ताओं के करीब-करीब बीस हजार करोड़ रुपए से ज्यादा, उनके जेब में पूरे देश में बचाए हैं, एक साल में। क्योंकि बिजली का बिल कम हो गया इसके कारण। बीस हजार करोड़ रुपये, अगर पुरानी सरकारों की तरह, अगर हम रेवड़ी बांटने के लिए लगा देते तो जय-जयकार करने वालों की कमी नहीं थी। लेकिन हमने कठिन रास्ते चुने लेकिन consumer के interest को पूरे करने के तरीके के साथ जुड़े रहे। बीस हजार करोड़ रुपये कम नहीं होता है। इतने मिले बिजली बचने के कारण। Environment में कितना फायदा हो रहा है। अगर इतनी ही बिजली का कारखाना लगाना होता तो शायद पचास-साठ हजार करोड़ रुपये, उतनी बिजली उत्पादन के लिए कारखाने लगाने पड़ते; वो तो एक extra benefit हुआ है। साथियों, Inflation पर लगाम लगाने की वजह से भी और उसकी वजह से गरीब और मध्यम वर्ग के Consumers का आर्थिक फायदा हुआ है। जिस तेजी से Inflation बढ़ रहा था, दो हज़ार बारह-तेरह, ग्यारह, बारह, तेरह का समय देख लीजिए, अगर उसी रफ्तार से बढ़ता होता तो आज था कितनी महंगी होती, अगर इसका हिसाब लगाओगे तो कोई भी बड़ा अर्थशास्त्री चौंक जाता कि हिन्दुस्तान का आदमी खाता कैसे है? लेकिन इस सरकार ने कदम उठाए, Inflation को कम किया, थाली पर बढ़ने वाले बोझ को रोक दिया। कुछ कीमतों में सस्ता होने में सफल हुए, Inflation कम होता गया। इससे भी Consumer की जेब में पैसे बचे हैं, Consumers के interest की रक्षा हुई है। शायद ही मध्यम वर्ग, निम्न-मध्यम वर्ग के परिवारों की इतनी बारीकी से चिंता शायद ही इस देश में पहले कभी हुई होगी। टेक्नोलॉजी के माध्यम से Public Distribution System को मजबूत करके भी ये सुनिश्चित किया जा रहा है कि जिस गरीब का सस्ते खाद्यान्न पर अधिकार है, उसे ही वो अनाज मिलना चाहिए, स्थायपन्न नहीं होना चाहिए। चोरी हो करके फ्लोर मिल में नहीं जाना चाहिए गेहूं, गरीब के पेट में जाना चाहिए। ये भी Consumers के interest के protection की हमारी commitment का उदाहरण है। Direct benefit scheme के तहत लाभार्थियों के bank account में सीधे पैसा transfer करके सरकार पे सत्तावन हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम को गलत हाथों में जाने से रोक दिया है। कोई तो थे बिचौलिए, कोई तो थे दलाल, जिनके पास ये पैसा जाता था। आधार की सबसे बड़ी सफलता ये है कि जिसका हक है उसको हक का देने में आधार एक बहुत बड़ी भूमिका अदा कर रहा है। और सत्तावन हजार करोड़ रुपया प्रतिवर्ष, एक वर्ष नहीं- प्रति वर्ष। सत्तावन हजार करोड़ रुपये चोरी होती थी और उसको भ्रष्टाचार के रूप में कभी बाजार के अखबारों में कभी छपा नहीं है वो। जैसे दोG का छपता था, कोयले का छपता था, इसका नहीं छपा; क्योंकि क्योंकि इतनी छोटी-छोटी रकमों की चोरी हुआ करती थी किसी को पता नहीं चलता था। Consumer के interest की चिंता करने के कारण सरकार ने technology का इस्तेमाल किया, transparency पर जोर लगाया और उसी का परिणाम है कि जो हकदार हैं, उसका हक आज न कोई छीन सकता है; जिसका हक है उसको पूरा का पूरा, एक रुपये का पंद्रह पैसे हुए बिना , एक रुपया का एक सौ पैसा उसके पास जा रहा है। ये काम Consumer interest का सबसे बड़ा उदाहरण है। साथियों, Sustainable Development Goals और उसकी प्राप्ति के लिए आवश्यक है कि consumer भी अपने साझा उत्तरदायित्व समझते हुए अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें। यहां इस अवसर पर मैं दूसरे देशों से आए हुए अपने साथियों को Give-it-up scheme के बारे में विशेष तौर पर बताना चाहूंगा। हमारे यहां रसोई गैस के सिलेंडर पर लोगों को subsidy दी जाती है। Clean cooking की तरफ हमारा बल है। लेकिन जब मैंने एक बार लाल किले से लोगों को अपील की लोगों को पंद्रह अगस्त को कि अगर आप afford करते हैं तो आपको इतनी subsidy की क्या जरूरत है? सालाना एक सौ-एक हज़ार पाँच सौ रुपयापया लेकर क्या जरूरत है, आप छोड़ते क्यों नहीं? मैं आज बड़े संतोष के साथ कह सकता हूं और दुनिया का जो माहौल है उसके सामने भारत में सामान्य मानवी ने जो मिसाल दिखाई है, एक उदाहरण है। Ten Million से ज्यादा लोग, एक करोड़ से ज्यादा लोगों ने सिर्फ मेरे कहने मात्र से अपन gas subsidy को surrender कर दिया। मैं समझता हूं ये है partnership. जो गरीब है, सामान्य है जिसको अब व्यवस्था मिलनी चाहिए, जिसको अब व्यवस्था ने आगे बढ़ाया है, उसने छोड़ने के लिए आगे आना चाहिए। ये प्रयोग मैं समझता हूं, देश को एक नया भारत का परिचय करानी वाली बात है कि आज भी मेरे देश में वो इमानदारी, समाज के लिए कुछ करने की भावना जन-जन में व्यापत है और इस सरकार ने उसके साथ अपने-आपको connect किया है। लोगों ने जो गैस सब्सिडी छोड़ी, वो हमने सरकारी खजाने में नहीं डाली। हम तिजोरी भर सकते थे, लेकिन वो हमने काम नहीं किया। हमने उस गैस सब्सिडी का फायदा, जिनको लकड़ी के चूल्हे से रोटी पकानी पड़ती थी, जो मां बीमार हो जाती थी, जो environment को नुकसान होता था, हमने करीब तीन करोड़ परिवारों को जिसने कभी गैस का चूल्हा नहीं देखा था, clean cooking के लिए सोचा नहीं था, उनको मुफ्त में gas connection दे करके हमने इस बात को और transfer कर दिया। ये एक उदाहरण है कि कैसे प्रत्येक कन्ज्यूमर के shared contribution से दूसरे का फायदा होता है और समाज में भी अपने कर्तव्यों के प्रति एक positive, devoted भाव से एक नया माहौल बनता है। साथियों, सरकार देश के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले उपभोक्ताओं के Digital Empowerment के लिए, जैसे आपने उल्लेख किया डॉक्टर मुखीसा किटूयी जी ने; प्रधानमंत्री ग्रामीण Digital साक्षरता अभियान चला रही है। इसके तहत छः करोड़ घरों में और हर घर में एक व्यक्ति को Digital रूप से साक्षर बनाने का एक बहुत बड़ा अभिायान भारत सरकार ने हाथ में लिया है। इस अभियान से गांव के लोगों को Digital लेन-देन, Digital तरीके से सरकारी सेवाओं को प्राप्त करने में और सहूलियत मिलेगी। वो दिन दूर नहीं होगा जब JAM connectivity- जन-धन, आधार, मोबाईल, पूरे governance के केंद्र बिंदु में ये JAM रहने वाला है। जन-धन, आधार, मोबाईल- एक अपने मोबाइल फोन पर वो सरकार से सीधा संपर्क कर सकें, वो दिन दूर नहीं है। लेकिन उसमें humanity source development के तहत भारत के छः करोड़ ग्रामीण परिवारों में, हर परिवार में एक बंदा digitally literate हो, उसका एक बहुत बड़ा अभियान हमने चलाया है। भारत के गांवों में डिजिटल जागरूकता है। भविष्य के लिए एक बहुत बड़ा e-commerce मार्केट को भी बल देने की संभावना मैं देख रहा हूं। Unified Payment Interface- UPI ने e-commerce इंडस्ट्री को एक बहुत बड़ी ताकत दी है। Bharat Interface For Money- यानि BHIM App ने शहरों के अलावा ग्रामीण इलाकों में भी डिजिटल पेमेंट का एक व्यापक विस्तार किया है। साथियों, सवा सौ करोड़ से ज्यादा की जनसंख्या और तेजी से बढ़ते मिडिल क्लास की वजह से भारत दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में से एक है। हमारी अर्थव्यवस्था का खुलापन, दुनिया के हर देश का स्वागत करता है, भारतीय उपभोक्ताओं को Global Players की ओर, और निकट लाने की संभावना बनाता है। Make in India के माध्यम से हम Global Companies को भारत में ही Produce करने और यहां के विशाल मानव संसाधन का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए एक platform दे रहे हैं, और निमंत्रण भी दे रहा है। साथियों, धरती के इस हिस्से में ये अपनी तरह की पहली conference है। हम में से प्रत्येक देश अपने-अपने तरीके से अपने देश के उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने में जुटा हुआ है। लेकिन हमें ये भी ध्यान में रखना होगा कि बढ़ते हुए Globalization के साथ पूरा विश्व एक Single Market की ओर आगे बढ़ रहा है। और इसलिए इस तरह के आयोजन के माध्यम से एक दूसरे के अनुभवों से सीखना, Common Understanding के बिंदु तलाशना और Consumer Protection से जुड़े किसी Regional Coalition के निर्माण की संभावनाओं पर चर्चा, मैं समझता हूं बहुत ही अहम है, महत्वपूर्ण है। चार सौ करोड़ से ज्यादा का consumer base, बढ़ती हुई purchasing power, Young Demographic Profile, हम एशियाई देशो में एक बिजनेस का बहुत बड़ा आधार है। E-commerce और लोगों की बढ़ती Trans-border mobility की वजह से आज Cross-Border Transaction लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में Consumer का भरोसा बनाए रखने के लिए ये बहुत आवश्यक है कि हर देश में मजबूत regulatory system हो और उस system के बारे में दूसरे देशों को भी आवश्यक जानकारी हो। दूसरे देशों के उपभोक्ताओ से जुड़े मामलों में तेजी से की गई कार्रवाई करने के लिए Co-operation का frame work होना भी उतना ही आवश्यक है। इससे आपसी विश्वास बढ़ेगा और व्यापार की पहली शर्त होती है विश्वास। रुपये व्यापार को जितना बढ़ाते हैं उससे ज्यादा विश्वास व्यापार को बढ़ाता है। Communication के लिए Structured Mechanism बनाना, Best Practices की Mutual Sharing करना, Capacity building के लिए नए Initiatives लेना और Joint Campaigns शुरू करना; ऐसे विषय हैं जिन पर आपसी हितों को ध्यान में रखते हुए कार्य किया जा सकता है। साथियों, हमारी सांस्कृतिक और व्यापार की साझा विरासत भविष्य में उतनी ही मजबूत होगी, जितना हमारे बीच भावनात्मक संबंध मजबूत होंगे। अपनी संस्कृति पर गर्व के साथ ही दूसरों की संस्कृति का सम्मान हमारी परंपरा का हिस्सा है। सदियों से हम एक-दूसरे से सीखते रहे हैं और Trade और Consumer Protection भी इससे अछूता नहीं रहा है। मुझे उम्मीद है इस conference में भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, एक स्पष्ट vision के साथ आगे बढ़ने का roadmap तैयार होगा। मुझे उम्मीद है कि हम इस conference के माध्यम से एक Regional Co-operation को institutionalize करने में भी सफल होंगे। इस कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए मैं आपका एक बार फिर से बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं, मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं और मैं इस conference को अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं। बहुत-बहुत धन्यवाद !!!
ईरानी कमांडर जनरल कासिम सुलेमानी की मौत के बाद को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ा तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के परमाणु शक्ति नहीं बनने देने के बयान पर ईरान ने फिर से पलटवार किया है. ईरान के एयरोस्पेस प्रोग्राम का नेतृत्व करने वाले ब्रिगेडियर जनरल आमिर अली हजिजादेह ने कहा कि ईरान ने सैकड़ों मिसाइलें तैयार कर ली थी. उन्होंने कहा कि बुधवार को ईरान की सेना ने इराक में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर 13 मिसाइलें दागी थी. हम सैकड़ों मिसाइलें दागने को तैयार थे. ईरान के मिसाइल हमले में कई अमेरिकी सैनिक मारे गए और कई घायल हुए थे. हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के मिसाइल हमले में किसी अमेरिकी सैनिक के मारे जाने के दावे को खारिज किया था. ईरानी जनरल आमिर अली हाजिजादेह ने कहा कि ईरानी सेना ने मिसाइल हमला करने के साथ ही अमेरिका सेना की निगरानी सेवा पर भी साइबर हमला किया.
ईरानी कमांडर जनरल कासिम सुलेमानी की मौत के बाद को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ा तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के परमाणु शक्ति नहीं बनने देने के बयान पर ईरान ने फिर से पलटवार किया है. ईरान के एयरोस्पेस प्रोग्राम का नेतृत्व करने वाले ब्रिगेडियर जनरल आमिर अली हजिजादेह ने कहा कि ईरान ने सैकड़ों मिसाइलें तैयार कर ली थी. उन्होंने कहा कि बुधवार को ईरान की सेना ने इराक में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर तेरह मिसाइलें दागी थी. हम सैकड़ों मिसाइलें दागने को तैयार थे. ईरान के मिसाइल हमले में कई अमेरिकी सैनिक मारे गए और कई घायल हुए थे. हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के मिसाइल हमले में किसी अमेरिकी सैनिक के मारे जाने के दावे को खारिज किया था. ईरानी जनरल आमिर अली हाजिजादेह ने कहा कि ईरानी सेना ने मिसाइल हमला करने के साथ ही अमेरिका सेना की निगरानी सेवा पर भी साइबर हमला किया.
द्वितीय कोशस्थान : फल पाश्चात्य आचार्य (विभाषा, १२१.६) कहते हैं कि पूर्वोक्त पाँच फलों से भिन्न चार फल हैं : १. प्रतिष्ठाफल : जलमण्डल वायुमण्डल (३.४५ ) का प्रतिष्ठाफल है और एवमादि यावत् ओषधि प्रभृति महापृथिवी का प्रतिष्ठाफल है । २. प्रयोगफल : अनुत्पादज्ञानादि (४.५०) अशुभादि (६.११) का प्रयोगफल है । ३. सामग्रीफल : चक्षुर्विज्ञान चक्षु, रूप, आलोक और मनस्कार का सामग्रीफल है । ४. भावनाफल : निर्माणचित्त (७.४८) ध्यान का भावनाकल है । सर्वास्तिवादिन् के अनुसार इन चार फलों में से प्रथम अविनतिकल में अन्तर्भूत है, अन्य तीन पुरुषकारफल में अन्तर्भूत हैं । हमने हेतु और फल का व्याख्यान किया है। अब इतकी समीक्षा करनी है कि विविध धर्मों का उत्पाद कितने हेतुओं से होता है । इस दृष्टि से धर्मों की चार राशियाँ हैंः १. क्लिष्टधर्म अर्थात् क्लेश, तत्संप्रयुक्त और [२९८] तत्समुत्थ धर्म (४. ८ ) ; २. विपाकज या विपाक हेतु से (२.५४ सी) संजातवर्म; ३. प्रथम अनास्रव धर्म अर्थात् दुःखे धर्मज्ञानक्षान्ति (१.३८ बी, ६.२७) और तत्सहभूधर्म; ४. शेषवर्मा अर्थात् विपाकवर्ज्य अव्याकृत धर्म और प्रथम अनास्रव क्षण को वर्जित कर कुशलधर्म । क्लिष्टा विपाकजाः शेषाः प्रथमार्या यथाक्रमम् । विपाकं सर्वगं हित्वा तौ सभागं च शेषजाः ॥६०॥ । चित्तचैत्तास्तथाऽन्येऽपि संप्रयुक्तकवजिताः । चत्वारः प्रत्यया उक्ता हेत्वाख्यः पञ्च हेतवः ॥ ६१॥ ६०-६१ बी. (१) क्लिष्ट, (२) विपाकज, (३) शेष, (४) प्रथमार्थ चित्तयम (१) विपाकहेतु को, (२) सर्वत्रगहेतु को, (३) इन दो हेतुओं को, (४) इन दो हेतुओं तथा सभागहेतु को वर्जित कर शेष हेतुओं से उत्पन्न होते हैं । चित्त-वैत से अन्य वर्मों के लिये संप्रयुक्तकहेतु को भी वर्जित करना चाहिये । (१) क्लिष्ट चित्त-चैत्त विपाकहेतु को वर्जित कर शेष पाँच हेतुओं से संजात होते हैं; (२) विपाकज चित्त - चैत्त सर्वत्रगहेतु को वर्जित कर शेष पाँच हेतुओं से उत्पन्न होते हैं; (३) इन दो प्रकारों से और चतुर्थ प्रकार से अन्य चित्त चैत विपाकहेतु और सर्वत्रगहेतु को वर्जित कर शेष चार हेतुओं से उत्पन्न होते हैं; (४) प्रथम अनास्रव चित्त चैत्त पूर्वोक्त दो हेतु और सभागहेतु को वर्जित कर शेष तीन हेतुओं से उत्पन्न होते हैं । १ क्लिष्टा विपाकजाः शेषाः प्रथमार्या यथाक्रमम् । विपाकं सर्वगं हित्वा तौ सभागं च शेवजाः ॥ चित्तचैत्तास् [तथान्ये व संप्रयुक्तकवजिताः] । अभिधर्महृदय, २.१२ - १५ से तुलना कीजिये ।
द्वितीय कोशस्थान : फल पाश्चात्य आचार्य कहते हैं कि पूर्वोक्त पाँच फलों से भिन्न चार फल हैं : एक. प्रतिष्ठाफल : जलमण्डल वायुमण्डल का प्रतिष्ठाफल है और एवमादि यावत् ओषधि प्रभृति महापृथिवी का प्रतिष्ठाफल है । दो. प्रयोगफल : अनुत्पादज्ञानादि अशुभादि का प्रयोगफल है । तीन. सामग्रीफल : चक्षुर्विज्ञान चक्षु, रूप, आलोक और मनस्कार का सामग्रीफल है । चार. भावनाफल : निर्माणचित्त ध्यान का भावनाकल है । सर्वास्तिवादिन् के अनुसार इन चार फलों में से प्रथम अविनतिकल में अन्तर्भूत है, अन्य तीन पुरुषकारफल में अन्तर्भूत हैं । हमने हेतु और फल का व्याख्यान किया है। अब इतकी समीक्षा करनी है कि विविध धर्मों का उत्पाद कितने हेतुओं से होता है । इस दृष्टि से धर्मों की चार राशियाँ हैंः एक. क्लिष्टधर्म अर्थात् क्लेश, तत्संप्रयुक्त और [दो सौ अट्ठानवे] तत्समुत्थ धर्म ; दो. विपाकज या विपाक हेतु से संजातवर्म; तीन. प्रथम अनास्रव धर्म अर्थात् दुःखे धर्मज्ञानक्षान्ति और तत्सहभूधर्म; चार. शेषवर्मा अर्थात् विपाकवर्ज्य अव्याकृत धर्म और प्रथम अनास्रव क्षण को वर्जित कर कुशलधर्म । क्लिष्टा विपाकजाः शेषाः प्रथमार्या यथाक्रमम् । विपाकं सर्वगं हित्वा तौ सभागं च शेषजाः ॥साठ॥ । चित्तचैत्तास्तथाऽन्येऽपि संप्रयुक्तकवजिताः । चत्वारः प्रत्यया उक्ता हेत्वाख्यः पञ्च हेतवः ॥ इकसठ॥ साठ-इकसठ बी. क्लिष्ट, विपाकज, शेष, प्रथमार्थ चित्तयम विपाकहेतु को, सर्वत्रगहेतु को, इन दो हेतुओं को, इन दो हेतुओं तथा सभागहेतु को वर्जित कर शेष हेतुओं से उत्पन्न होते हैं । चित्त-वैत से अन्य वर्मों के लिये संप्रयुक्तकहेतु को भी वर्जित करना चाहिये । क्लिष्ट चित्त-चैत्त विपाकहेतु को वर्जित कर शेष पाँच हेतुओं से संजात होते हैं; विपाकज चित्त - चैत्त सर्वत्रगहेतु को वर्जित कर शेष पाँच हेतुओं से उत्पन्न होते हैं; इन दो प्रकारों से और चतुर्थ प्रकार से अन्य चित्त चैत विपाकहेतु और सर्वत्रगहेतु को वर्जित कर शेष चार हेतुओं से उत्पन्न होते हैं; प्रथम अनास्रव चित्त चैत्त पूर्वोक्त दो हेतु और सभागहेतु को वर्जित कर शेष तीन हेतुओं से उत्पन्न होते हैं । एक क्लिष्टा विपाकजाः शेषाः प्रथमार्या यथाक्रमम् । विपाकं सर्वगं हित्वा तौ सभागं च शेवजाः ॥ चित्तचैत्तास् [तथान्ये व संप्रयुक्तकवजिताः] । अभिधर्महृदय, दो.बारह - पंद्रह से तुलना कीजिये ।
घाटी में पाकिस्तान की ओर से एक बार फिर से सीज फायर का उल्लंघन करते हुए जमकर फायरिंग की है. पाकिस्तान की इस कार्रवाई से कई मकानों को भी भारी नुकसान पहुंचा है. भारतीय सेना ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए फायरिंग का मुंहतोड़ जवाब दिया. पाकिस्तान की इस हरकत के बाद सीमा से लगने वाली चौकियों पर भी गश्ती बढ़ा दी गई है. 'उधमपुर स्टेशन का नाम शहीद कैप्टन तुषार रखें'
घाटी में पाकिस्तान की ओर से एक बार फिर से सीज फायर का उल्लंघन करते हुए जमकर फायरिंग की है. पाकिस्तान की इस कार्रवाई से कई मकानों को भी भारी नुकसान पहुंचा है. भारतीय सेना ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए फायरिंग का मुंहतोड़ जवाब दिया. पाकिस्तान की इस हरकत के बाद सीमा से लगने वाली चौकियों पर भी गश्ती बढ़ा दी गई है. 'उधमपुर स्टेशन का नाम शहीद कैप्टन तुषार रखें'
ले जाता है (ऋ० १।३५ ) तथा पूषन् उनकी रक्षा करता है ( ६।५४ ) । चिता जलने के पहिले प्रेत- पुरुष की पत्नी, जो शव के साथ लेटी हुई थी, उठती है और उसका धनुष हाथ से हटा लिया जाता है। यह इसकी सूचना है कि प्राचीनतर काल में पत्नी तथा धनुष दोनों ही शव के साथ जला दिये जाते थे। पितरों के मार्ग पर चलकर प्रेत की आत्मा प्रकाशमान लोक में प्रवेश करती है और पितरों के साथ साक्षात्कार करती है। वहाँ उच्चतम लोक में यम पितरों के साथ बैठकर आनन्द में कालयापन करते हैं । यम (अवेस्ता 'यिम' ) प्रथम मानव हैं जिन्होंने मानवों के लिए पितृलोक में जाने का मार्ग खोज निकाला है (यमो नो गातुं प्रथमं विवेद - ऋ० १०।१४ । २ ) । उसी लोक में हमारे पूर्व पितृगण प्राचीनकाल में गए हैं तथा उसके अनन्तर भावी पुरुष अनेक मार्गों से उसी लोक में जाते हैं । यम विवस्वान् के पुत्र होने से 'वैवस्वत' कहलाते हैं । यम के लिए 'राजा' शब्द का प्रयोग अनेकत्र किया गया है, व्यक्त रूप से 'देव' का नहीं । पितृलोक के मार्ग में यम के शबल दो कुत्ते रहते हैं, जो सरमा के पुत्र, चार नेत्र वाले ( चतुरक्षौ ), मार्ग के रक्षक ( पथिरक्षी ) तथा मनुष्यों पर पहरा देनेवाले (नृचक्षसौ ) हैं । प्रेतात्मा को इनसे बच कर जाने का उपदेश दिया गया है। दीर्घ नासिका वाले ( उरूणसौ ), प्राण के संहारक (अमुतृपौ) तथा नाना वर्ण वाले ( उदुम्बलौ ) - ये सारमेय यम के दूत बतलाये गये हैं। ये मनुष्यों में घूमते हैं तथा पितृलोक में जाने वालों को ढूँढ़ा करते हैं। पितृलोक प्रकाशमान देदीप्यमान लोक हैं जहाँ यम पितृ लोगों के साथ आनन्द में मग्न दीखते हैं । पितरों के अनेक गण होते हैं जिनमें अङ्गिरस, नवग्वा, अथर्वण, भृगु तथा वसिष्ठ मुख्य माने जाते हैं। ये सोमरस के अभिलाएक हैं तथा मर्त्यलोक में प्रस्तुत आहुति के लिए सदा लालायित रहते हैं। उनसे यज्ञ में आने, सोम पीने तथा उपासकों की रक्षा करने के लिए नाना प्रकार की प्रार्थनायें की गई हैं - असुं य ईयुरवृका ऋतशास्ते नोऽवन्तु पितरो हवेषु ॥ पितरों के नाना प्रकार हैं - अवर ( नीचे रहनेवाला ), पर तथा मध्यम, प्राचीन तथा नवीन । हम पितरों को न भी जानें, परन्तु अग्नि सच को बानता है। स्वर्गकी धारणा बड़े ही सुन्दर तथा प्रकाशमय रूप में की गई है। उस लोक में यम वरुण तथा पितरों के साथ निवास करते हैं। वहाँ मनुष्य को अमरत्व प्रदान करने के लिए, कश्यप ऋषि प्रार्थना करते हैं - "यत्र राजा वैवस्वतो यत्रावरोधनं दिवः ।....तत्र माममृतं कृषि " ( ९ । ११३१८ ) । वहाँ दिन, रात और जल सच सुन्दर तथा आनन्ददायक होते हैं ( १० । १४ ।९ ) । वहाँ मनुष्य को बलिष्ठ सुन्दर शरीर प्राप्त हो जाता है तथा इस शरीर की रोग-व्याधि, दुर्बलता तथा त्रुटियाँ सच दूर हो जाती हैं। पुण्य कार्य करनेवाला प्राणी अपने सम्पादित इष्ट ( यज्ञ ) तथा पूर्त ( कुँआ खोदना आदि स्मृति निर्दिष्ट कार्य ) के फल को प्राप्त कर लेता है, तथा पितरों और यम से मिलकर आनन्द भोग करता है ( ऋ० १०।१४।८ ) । प्रेतात्मा भौतिक प्रकाशमान शरीर से युक्त होकर स्वर्ग में सोम, मुरा, मधु, दुग्ध तथा धी जैसी भौतिक वस्तुओं से ही आनन्द नहीं उठाता, प्रत्युत प्रेम करने के लिए स्त्रियों की भी वहाँ बहुलता होती है ( स्वर्गे लोके बहुस्त्रैणमेषाम् - अथर्व ४ । ३४ । २ ) । वहाँ गाना तथा बाजा का भी आनन्द है। वहाँ अश्वत्थ वृक्ष है जिसके नीचे यम देवों के साथ पान करते हैं ( यस्मिन् वृक्षे सपलाशे देवैः संपिबते यमः - ऋ० १०/१३५।१ ) । कामधेनु से सम्पन्न समस्त अभिलाषा तथा आनन्द से परिपूर्ण स्वर्ग की कल्पना नितान्त सुन्दर तथा आकर्षक है । नरक की कल्पना स्पष्टतः ऋग्वेद में नहीं दीखती, परन्तु अथर्व ( १२ । ४ । ३६ ) में 'नारकं लोकं' की कल्पना स्पष्टतः स्वर्गलोक की भावना से विपरीत कल्पित की गई है। इस प्रकार स्वर्ग की वैदिक कल्पना बड़ी उदात्त है और आर्यों जैसे आशावादी प्राणियों के लिए नितान्त उचित तथा सुन्दर है । १. अथर्व० ५/४/३; कौषीतकि उप० ( १ । ३ ) में इस वृक्ष का नाम तिल्य या ( तिल्प है तथा ब्रह्मलोक में विरजा नदी, सायुज्य नगर, अपराजित प्रासाद आदि का भी उल्लेख यहाँ मिलता है। इसका माहात्म्य वैष्णवों के साहित्य में विशेषरूप से मिलता है, देखिए ब्रह्मसंहिता । २ सर्वान् कामान् यमराज्ये वशा प्रदुदुषे दुहे । ३ अथाहुर्नारकं लोकं निरुन्धानस्य याचिताम् ॥ ( वही ) नरक - अधर्म के आचरण करनेवाले जीवों को यातना भोगने का मरणोपरान्त लोक । 'नरक' की कल्पना का विकसित रूप हमें पुराणों में उपलब्ध होता है, परन्तु वैदिक साहित्य में भी नरक की कल्पना का अभाव नहीं है । अथर्व वेद (२।१४।२; ५।१९। ३ ) में नरक स्वर्ग से विपरीत यम के क्षेत्ररूप में अभीष्ट है, जहाँ राक्षसियों और अभिचारिणियों का आवास रहता है और जिसकी स्थिति पाताल लोक ( अधोगृह ) में मानी गई है । ब्राह्मण साहित्य में परलोक में दण्ड की धारणा जब विशेष रूप से विकसित हुई, तब नरक में यातना के भोगने का भी विकाश सम्पन्न हुआ । पुराणों - विशेषतः विष्णुपुराण ( २१६ । १ - २९ ) तथा श्रीमद्भागवत ( ५।२६।१-३७ ) में नरक का विशद विवरण उपलब्ध होता है । स्थिति- -नरक की स्थिति के विषय में मतभेद है। भागवत (५।२६।५) के अनुसार नरक की स्थिति त्रिलोकी के भीतर ही है तथा वे दक्षिण की ओर के पृथ्वी से नीचे, परन्तु जल से ऊपर स्थित हैं। विष्णुपुराण (२।६।१) तो नरक की स्थिति पृथ्वी और जल दोनों के नीचे मानता है। भूलक के त्रिविध स्तर पुराणों को अभीष्ट है- सब से ऊपर पृथ्वी, उसके नीचे पाताल तथा उसके भी नीचे नरक । इस प्रकार नरक को पृथ्वी के सब से नीचे स्थित होने में किसी प्रकार की पौराणिक विप्रतिपत्ति नहीं है । संख्या - नरकों की संख्या परिगणित नहीं है। वह 'शतशः सहस्रशः ' चतलाई गई है, परन्तु नरकों की संख्या में विकाश दृष्टिगोचर होता है । नरकों की न्यूनतम संख्या सात है, जिसका उल्लेख विष्णुपुराण, योगसूत्र का व्यासभाष्य ( ३।२६ ) तथा शंकराचार्य ( वेदान्तभाष्य ३ । १ । १५ ) करते हैं । विष्णुपुराण के अनुसार रौरव, महारौरव आदि का उल्लेख शंकराचार्य को अभीष्ट है। व्यासभाष्य ( ३।२६ ) में दो प्रकार के नाम मिलते हैं। 'अवीचि' को छोड़ देने पर दोनों सूचियों के नाम इस प्रकार हैं - घन ( = महाकाल ), सलिल (= अम्बरीष ), अनल ( = रौरव), अनिल (= महारौरव ), आकाश (= कालसूत्र ) तथा तमः प्रतिष्ठ ( = अन्धतामिस्र ) । कालान्तर में यह संख्या विकसित होकर एक्कीस तक पहुँच गई । ये नाम मनुस्मृति (४१८८९० ) तथा श्रीमद्भागवत (५/२६/७ ) में उपलब्ध होते हैं, परन्तु इन अभिधानों में पर्याप्त पार्थक्य है । विष्णुपुराण ( २।६।२ - ५ ) तथा श्रीमद्भागवत ( ५१२६ ।७ ) में यह संख्या वृद्धिंगत होकर २८ तक पहुँच गई है। दोनों सूचियों में संख्या की एकता होने पर भी नामों में पार्थक्य है । रौरव, कालसूत्र, लालाभक्ष, वैतरणी आदि संज्ञाओं की समानता होने पर भी अन्यत्र पार्थक्य है । नाम - भागवत के अनुसार २८ नरकों के नाम यहाँ दिये जाते हैं जो अपने स्वरूप के भी स्वतः प्रकाशक हैं- तामिस्र, अन्धतामिस्र, रौरव, महारौरव, कुम्भीपाक, कालसूत्र, असिपत्रवन, सूकरमुख, अन्धकूप, कृमिभोजन, सन्दंश, तप्तसूर्मि, वज्रकण्टकशाल्मली, वैतरणी, पूर्याद, प्राणरोध, विशसन, लालाभक्ष, सारमेयादन, अवीचि, अयःपान, क्षारकर्दम, रक्षोगणभोजन, शूलप्रोत, दन्दशक, अवट निरोधन, पर्यावर्तन और सूचीमुख । ये 'विविध यातना भूमि' माने गये हैं, अर्थात् इनमें निवास कर प्राणी अपने किये गये पापों के निमित्त नाना प्रकार की यातनायें भोगते हैं । नरकलोक का शासन-सूत्र सूर्य के पुत्र पितृराज भगवान् यम के हाथों में रहता है, जो अपने दूतों तथा सेवकों के द्वारा उस विचित्र विशाल लोक की सुव्यवस्था करने में समर्थ होते हैं । मरणासन्न प्राणी को यम के दूत संयमनी पुरी में लाते हैं, चित्रगुप्त उनके किये गये पुण्यों तथा पापों का लेखा-जोखा प्रस्तुत करते हैं; यमराज उनके गौरव-लाघव का विचार करते हैं। पुण्य का फल भोगने के लिए तो पुण्यात्माओं को स्वर्ग की प्राप्ति होती है, परन्तु पाप का फल भोगने के लिए पापाचरण वाले जीवों को नरकलोक मिलता है । यथा इस लोक में निरपराध मनुष्यों को दण्ड देनेवाले राजा या राजकर्मचारी 'सूकरमुख' नामक नरक में गिरता है, जहाँ वह कोल्हू में गन्ने के समान पेरा जाता है और वह आर्त स्वर मे चिल्लाता है और कभी मूर्च्छित होकर अनेक यातनायें भोगता है । फलतः नरक प्रायश्चित रूप से यातनाओं के भोगने का विकट स्थान है। इस प्रकार नरक और स्वर्ग के भोग से जब जीवों के अधिकांश पाप और पुण्य क्षीण हो जाते हैं, तब चाकी बचे हुए पुण्य पाप-रूप कर्मों को लेकर ये जीव इसी लोक में जन्म लेने के लिए लौट आते हैं। नरक के साथ 'स्वर्ग' की कल्पना अनुस्यूत है । जीव के आवागमन की प्रक्रिया में स्वर्ग तथा नरक एक नितान्त आवश्यक अङ्ग है । वैदिक धर्म के अनुसार जैनधर्म तथा बौद्धधर्म में भी 'नरक' की कल्पना मान्य है तथा वह ऊपर वर्णित रूप से भिन्न नहीं है । संख्या की भिन्नता होने पर भी मूल स्वरूप की मान्यता प्रायः एकाकार है । वैदिक साहित्य में विश्वबन्धुत्व की परिकल्पना वैदिक साहित्य की यह एक अनोखी • विशेषता है कि वह मानव मात्र के लिए कल्याण की भावना को अग्रसर करता है । संकीर्ण स्वार्थ को ही मानव जीवन का चरम पुरुषार्थ मानने वाले पाश्चात्य देशों के साहित्य में जो एकांगिता विद्यमान है, वह वैदिक साहित्य को स्पर्श नहीं करती। कारण इसका स्पष्ट है- साहिस्य संस्कृति का अग्रदूत है, साहित्य संस्कृति का वाहन है। समाज की भावना को दर्पगत् प्रतिबिम्बित करनेवाला साहित्य कितना भी आदर्शवादी हो, वह यथार्थना का चित्रण किये विना नहीं रह सकता। उसकी व्याप्ति राष्ट्र की परिधि के द्वारा नियन्त्रित होती है। वह उस देश के प्राणियों में परिव्याप्त भावना को सर्वथा उलंघन करने की क्षमता नहीं रखता । पश्चिम के देश संकीर्ण राष्ट्रीयता की भावना से जकड़े हुये हैं। फलतः उनके साहित्य में उस संकीर्णता का ही परिचय हमें पदे पदे मिलता है। वहाँ के साहित्यिक अपने राष्ट्र की चहारदिवारी के भीतर अपने को सीमित रखते हैं। इसलिए उनकी वाणी राष्ट्रीयता के परिबृंहण में ही लगी रहती है। इसके विपरीत, संस्कृत के कविजन उदारता का आश्रय लेकर संकीर्णता को अपने पास फटकने नहीं देते । फलतः वैदिक साहित्य विश्वचन्धुत्व की भावना से सर्वथा परिव्याप्त है । वैदिक प्रार्थना में समष्टि भावना का पूर्ण साम्राज्य विराजमान है। वैदिक ऋषि व्यष्टि के कल्याण के लिये जगदीश्वर से प्रार्थना नहीं करता, प्रत्युत वह समग्र समष्टि के मंगल के लिये आशीर्वाद चाहता है। वह व्यक्ति तथा समाज से ऊपर उठकर समस्त विश्व के सुख-समृद्धि तथा मंगल के निमित्त ही प्रार्थना करता है । मन्त्रों का प्रामाण्य इस विषय में अक्षुण है। विश्वानि देव सवितर्दुरितानि परासुव । यद् भद्रं तन्न भासुव । हे देत्र सत्रिता, समस्त पापकर्मों को हमसे दूर करो। हमारे लिए जो भद्र वस्तु - कल्याणकारी पदार्थ हो, उसे हमें प्राप्त कराइये । विश्व शान्ति, और विश्व बन्धुत्व की उदात्त भावना से ओतप्रोत वैदिक मन्त्रों में मानवमात्र में परस्पर सौहार्द, मैत्री तथा साहाय्य की भावना की उपलब्धि नितान्त स्वाभाविक हैमित्रस्याहं चक्षुषा सर्वाणि भूतानि समीक्षे । मित्रस्य चक्षुषा समीक्षामहे ॥ मैं मित्र की दृष्टि से सत्र प्राणियों को देखूँ । हम सब लोग मित्र की दृष्टि से परस्पर में एक दूसरे को देखें । मानव मात्र का यह कर्त्तव्य होना चाहिए कि वह एक-दूसरे की सर्वथा रक्षा तथा सहायता करे। केवल अपने ही स्वार्थ में उसे निविष्ट नहीं रहना चाहिये । इस भाव को द्योतित करता हुआ ऋग्वेदीय मन्त्र कहता हैपुमान् पुमांसं परिपातु विश्वतः । वैदिक ऋषि भगवान से प्रार्थना करता है कि वह मानवमात्र के लिये सुमति- सद्भावना धारण करे; उन प्राणियों के ही प्रति नहीं, जिन्हें वह देखता है, प्रत्युत उनके लिए भी जो उसकी दृष्टि से ओझल हैं जिन्हें वह नहीं देखता - यांश्च पस्यामि यांश्च न । तेषु मा समुमति कृधि ॥ कितनी उदात्त भावना है यह । सामान्यतः हम उन्हीं के कल्याण की कामना करते हैं, जिन्हें हम देखते हैं अपनी आखों से; परन्तु वैदिक ऋषि यहीं तक अपनी प्रार्थना को सीमिति नहीं रखता, प्रत्युत वह निखिल विश्व के अदृष्ट प्राणियों के प्रति भी वह भावना रखने का नम्र निवेदन करता है । ऋग्वेद तथा अथर्ववेद में विशिष्ट सूक्त हैं जिनकी संज्ञा है सांमनस्य सूक्त इनमें विशेषरूप से विश्व कल्याण की भावना परिव्याप्त है। इस विषय के एक दो मन्त्र यहाँ दिये जाते हैंसं गच्छध्वं संवदध्वम्, सं वो मनांसि जानताम् । देवा भागं यथा पूर्वे सं जानाना उपासते ॥ इस मन्त्र का तात्पर्य बड़ा गंभीर है। हे मनुष्यों, जैसे सनातन से विद्यमान दिव्य शक्तियों से सम्पन्न सूर्य, चन्द्रादि देव परस्पर अविरोध भाव से प्रेम से अपने कार्यों को करते हैं, ऐसे ही तुम भी समष्टि भावना से प्रेरित होकर एक साथ कार्यों में प्रवृत्त हो, ऐकमत्य होकर परस्पर सद्भाव से रहो। ऋग्वेद का अंतिम मन्त्र इसी भावना को अग्रसर करता हैसमानी व आकृतिः समाना समानमस्तु वो मनो यथा वः हृदयानि वः । सुसहासति ॥ मानवों को लक्ष्य कर अंगिरस संवनन ऋषि का उपदेश इस मन्त्र में निहित है। वह कहते हैं कि मानवों की आकृति - चित्तवृत्ति, हृदय तथा मन-सच समान हों, तभी विश्व के प्राणी परस्पर में सौहार्द से निवास कर सकते हैं। अतः ऋषिकेवल अपने वैयक्तिक मंगल के लिये भगवान् से प्रार्थना नहीं करता, प्रत्युत वह मानवमात्र के हित का प्रार्थी है । अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम् । उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् ।। यह अपना है और यह पराया है ऐसी गणना क्षुद्रचित्त वाले प्राणियों की है। उदार चरित वाले जनों की दृष्टि में तो यह समस्त वसुधा ही एक कुटुम्ब विश्व-भावना की अभिव्यक्ति इससे बढ़कर और सुन्दर शब्दों में नहीं की जा सकती। इस श्लोक के तात्पर्य के भीतर एक गहरी अनुभूति है। आजकल यातायात की सुविधा से यदि एक देश का मानव दूसरे देश के मानव के प्रति आवश्यकता के पास में बद्ध होकर आकृष्ट होता है, तो इसे कम समझ सकते हैं, परन्तु आश्चर्य तो इस बात का है कि ऐसी सुविधाओं से विरहित प्राचीन काल में भारत के निवासी विश्ववन्धुत्व की भावना में विश्वास ही नहीं करते थे, प्रत्युत अपने दैनिक जीवन में उसका व्यवहार भी करते थे । भारत के निवासी आर्यजन का जीवन विश्ववन्धुत्व का व्यावहारिक पक्ष प्रस्तुत करता है। प्रत्येक गृहस्थ "बलिवैश्वदेव" के अनुष्ठान के उपरान्त ही स्वयं भोजन करता है। यह बलि विश्व के समग्न देवताओं के ही लिए अन्न द्वारा तृप्ति की साधिका नहीं है, प्रत्युत पशु पक्षी आदि तिर्यग्योनि के जीवों को भी भोजनार्थ अन्न देने का विधान यहाँ पाया जाता है। इसी प्रकार सर पर ऋषियों, मानवों तथा स्वीय पूर्वजों की ही जल द्वारा तृप्ति नहीं की जाती, प्रत्युत नाग, सर्प आदि क्षुद्र जीवों को भी जलाञ्जलि देकर तृप्ति पहुँचाने का सार्वभौम नियम है । यह तर्पण प्रतिदिन विहित अनुष्ठान है। इससे प्रत्येक मानव अपने को संसार के समस्त प्राणियों के साथ सम्पर्क स्थापित कर विश्ववन्धुत्व की साकार उपासना करता है । इस विश्वबन्धुत्व की भावना का एकगंभीर दार्शनिक पक्ष भी है। यह समग्र विश्व परमैश्वर्य-मण्डित सत्य ज्ञान अनन्त परब्रह्म का ही विवर्त है । जगत् के जीव परब्रह्म के अंशभूत होने पर भी तद्रूप ही हैं। जगत् के भीतर एक ही सर्व शक्तिमान् परमेश्वर रमा हुआ है। अपनी अलौकिक घटनापटीयसो माया के कारण सर्वत्र व्याप्त है। विश्व का प्रत्येक अणु उसी की अमल शक्तिमत्ता का विजय घोष करता है। विश्व के समस्त जीव उसी परमपिता की सन्तान हैं। ऐसी दशा में उनमें पारस्परिक बन्धुत्व की भावना परिस्फुटित न होगी ? यह कौन सचेता विश्वास कर सकता है । यह अद्वैत सिद्धान्त भारतीय संस्कृति की आधारशिला है । फलतः इस संस्कृति के परिवहन करने वाले वैदिक साहित्य में इस भावना का साङ्गो-पामाङ्ग रूप उपलब्ध होता है - यह कथन पुनरुक्ति मात्र है। हमारे संस्कृत के काव्यों तथा रूपकों में यह भावना बड़ी स्फुटता से अपनी अभिव्यक्ति पा रही है। इसलिए प्रत्येक धार्मिक अनुष्ठान की समाप्ति पर साधक पुरुष अपना आदर्श इस प्रसिद्ध श्लोक के द्वारा प्रकट करता हैसर्वेऽत्र सुखिनः सन्तु सर्वे सन्तु निरामयाः । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःखभाग् भवेत् ॥ इस विश्व में सच प्राणी मुखी हों, सब लोग रोग से आक्रान्त न हों, सब प्राणी कल्याण की उपलब्धि करें। कोई प्राणी दुःख का भाजन न हो । वेद अनन्त है; वेद गम्भीर है । वेद के गम्भीर अर्थ तथा रहस्य की सूचना इस घटना से भी पर्याप्त रूपेण मिलती है कि अपने उदयकाल से आरम्भ होकर वर्तमानकाल तक यह नाना विचारवाले विद्वानों को प्रेरणा तथा स्फूर्ति देता आया है। यास्क के समय में ही इसके गम्भीर अर्थ की व्याख्या नाना सम्प्रदाय के वेदज्ञों ने अपनी दृष्टि से की और आज भी इसके मन्त्रों के तात्पर्य को समझने तथा समझाने के लिए नाना शैली पुरस्कृत की जा रही है और प्रत्येक शैली एक नवीन अर्थ का उन्मेष करती है । वेद इस विशाल ब्रह्माण्ड में अनेक प्रकार से जागरूक तथा नाना अभिव्यक्तियों में प्रकाशशील एक अचिन्त्य शक्ति का शाब्दिक उन्मेष है - वर्णमय विग्रह है । वह तर्क की कर्कश पद्धति पर व्याख्यात सिद्धान्तों का समुच्चय नहीं; अपितु वह प्रातिभसे साक्षात्कृत तथ्यों का प्रशंसनीय पुंज है । वैदिक युग के मनीषियों तथा लोकातीत आर्षचक्षुर्मण्डित द्रष्टाओं की वाणी में सार्वदेशिक तथा सार्वकालिक नैतिकता और धर्म की मूल प्रेरणाओं का स्फुरण हो रहा है, जो आज भी विश्व के मानवों को सन्मार्ग पर ले जाने की क्षमता रखता है। वैदिक ऋषियों की दृष्टि में धर्म ही जीवनयात्रा का मुख्य उपयोगी साधन है। 'सुगा ऋतस्य पन्थाः" ( ऋ० ८।३। १ ३ ) = धर्म का मार्ग सुगम है। 'सत्यस्य नावः सुकृतमपीपरन्' ( ऋ० ९/७३ । १ ) = सत्य की नाव धर्मात्मा को पार लगाती है । वेद अध्यात्म के साथ व्यवहार का, परलोक के साथ इहलोक का मंजुल सामञ्जस्य अपने भव्य उपदेशों से प्रस्तुत करता है । वेद का सर्वातिशायी श्लाघनीय धर्म यज्ञ है। यज्ञ ही मानव को दूसरे मानव के प्रति मैत्री के सूत्र में बांधने वाला कर्म है । वेद मनुष्यों को कर्मठ, देशभक्त तथा परोपकारी बनने की शिक्षा देता है । वह स्वावलम्बी मानव के मूलमन्त्र का रहस्य बतलाता है -- 'न ऋते श्रान्तस्य सख्याय देवाः' (ऋ० ४ । ३३ । ११ ) = विना स्वयं परिश्रम किये देवों की मैत्री प्राप्त नहीं होती है। वह सम्पत्ति को मानवों में बांट देने की शिक्षा देता है - 'शतहस्त समाहर सहस्रहस्त संकिर' (अथर्व० ३।२४।५) = सैकड़ों हाथों से इकट्ठा करो और हजारों हाथों से बाँट दो । 'एकं सद् विप्रा बहुधा वदन्ति' का शिक्षक वेद अद्वैतवाद का महनीय उपदेष्टा ग्रन्थरत्न है । प्राणिमात्र में एक ही चैतन्य व्यास हो रहा है। प्राणिमात्र को परस्पर में बन्धुता की महनीय भावना से ओत-प्रोत होना चाहिए । इस भावना की प्रेरणा देनेवाले अथर्व ऋषि का यह वाक्य वर्तमानकाल के मानवों के लिए आदर्श मन्त्र होना चाहिए - सहृदयं सांमनस्यमविद्वेषं कृणोमि वः । अन्योऽन्यमभिनवत वत्सं जातमिवाध्न्या । ( अथर्व पिप्पलाद ५ । १९ । १ ) यह संज्ञान सूक्त ( अथर्व० ३।३० ) मानवों के परस्पर सौहार्द, सहानुभूति तथा मैत्री को मानव समाज के लिए आदर्श बतलाने वाला एक नितान्त श्लाघनीय सूक्त है जिसके भावों को समझना तथा अपने जीवन में उतारना संसार के प्राणियों का कल्याण साधक है । वेद नित्य है; वेद रहस्यमय है; वेद का ज्ञान गम्भीर व्यापक परम चैतन्य का आभामय शाब्दिक विग्रह है। वह देश तथा काल से अतीत है। वह किसी एक मानव समाज का ग्रन्थ नहीं है। वह विश्व मानव का कल्याणाधायक ग्रन्थरत्न है। व्यवहार का उपदेष्टा है। वह अध्यात्म का शिक्षक है। वह परमज्योतिर्मय प्रभु का प्राणियों के लिए मधुर सन्देश है । उसकी उपासना उस अनन्त सर्वशक्तिमान् अचिन्त्य शक्तिशाली भगवान् के मंगलमय साक्षात्कार कराने में कृतकार्य होती है। उस परम करुणावतार भगवान् से हमारी विनम्र प्रार्थना है कि हमें वह सुबुद्धि दे जिससे इम इस वेदवाणी को समझें, गूढ़ अर्थ को हृदयंगम करें, उसका आचरण कर अपने जीवन को मंगलमय बनावें तथा इस जन्म को सार्थक सिद्ध करें । समानी व आकृतिः समाना हृदयानि वः । समानमस्तु वो मनो यथा वः सुसहासति ॥ तत् सद् ब्रह्मार्पणमस्तु ॥ भारतवर्ष में रेखा- गणित के प्राचीन इतिहास की जानकारी के लिए शुल्चसूत्रों का अध्ययन नितान्त आवश्यक है। शुल्बसूत्र वेदाङ्ग के अन्तर्गत कल्प सूत्र का अन्यतम अङ्ग है । कल्पसूत्र का मुख्य विषय है वैदिक कर्मकाण्ड । ये मुख्यतया दो प्रकार के हैं - गृह्यसूत्र तथा श्रौतसूत्र, जिनमें गृह्यसूत्र का मुख्य - विषय है विवाहादि संस्कारों का विस्तृत वर्णन । श्रौतसूत्रों में श्रुति में प्रतिपादित नाना यज्ञ-याज्ञों का विशद विवरण प्रस्तुत किया गया है । शुल्बसूत्र इन्हीं श्रौतसूत्रों का एक उपयोगी अंश है। 'शुल्च' शब्द का अर्थ है - रज्जु, अर्थात् रज्जु के द्वारा मापी गई वेदि की रचना शुल्बसूत्र का प्रतिपाद्य विषय है। सिद्धान्त की दृष्टि से तो प्रत्येक वैदिक शास्त्र का अपना विशिष्ट 'शुल्बसूत्र' होता है, परन्तु व्यवहारतः ऐसी बात यही है। कर्मकाण्ड के साथ मुख्यतः सम्बद्ध होने के कारण शुल्बसूत्र यजुर्वेद की ही शाखा में पाये जाते हैं। यमु वेंद की अनेक शाखाओं में शुल्बसूत्रों का अस्तित्व पाया जाता है। शुक्ल यजुर्वेद से सम्बद्ध एक ही शुल्बसूत्र है - कात्यायन शुल्बसूत्र, परन्तु कृष्ण यजुर्वेद से सम्बद्ध छः शुल्चसूत्र मिलते हैं - चौधायन, आपस्तम्ब, मानव, मैत्रायणीय, बाराह तथा बाधूल । इनके अतिरिक्त आपस्तम्ब शुल्ब ( ११ ११ ) टीका मे करविन्दस्वामी ने यशक झुल्ब तथा हिरण्यकेशी-शुल्ब का उल्लेख किया है, जो आजकल उपलब्ध नहीं है । आपस्तम्च-शुल्ब ( ६ । १० ) में हिरण्यकेशी शुला से एक उद्धरण भी उपलब्ध होता है । इन सात उपलब्ध सूत्रों में बौधायन शुल्ब ही सब से बड़ा तथा सम्भवतः सब से प्राचीन शुल्बसूत्र है। इसमें तीन परिच्छेद हैं। प्रथम परिच्छेद में ११६ सूत्र हैं, जिनमें मंगलाचरण के अनन्तर वर्णन है शुल्ब में प्रयुक्त विविध मानों का ( सूत्र ३ - २१); याशिकवेकदियों के निर्माण के लिए मुख्य रेखा गणितीय तथ्यों का ( सूत्र २२ - ६२ ) तथा विभिन्न वेदियों के क्रमिक स्थान तथा आकार-प्रकार का वर्णन है ( सूत्र ६३ - ११६ ) । द्वितीय परिच्छेद में ८६ सूत्र हैं, जिनमें वेदियों के निर्माण के सामान्य नियमों का बहुशः वर्णन ( १ - ६१ सूत्र ) के पश्चात् गार्हपत्य-चिति तथा 'छन्दश्चिति के बनावट का विवरण प्रस्तुत किया गया है। तृतीय परिच्छेद में ३२३ सूत्र हैं, जिनमें काम्य इष्टियों के १७ प्रभेदों के लिए चेदि के निर्माण का विशद विवरण है। इनमें से कई वेदियों की रचना बड़ी ही पेचीदी है, परन्तु अन्यों की रचना अपेक्षाकृत सरल है। आपस्तम्ब का शुल्बसूत्र ६ 'पटल' ( अध्याय ) में विभक्त है, जिनके भीतर अन्य अवान्तर वर्ग हैं। इस प्रकार इसमें २१ अध्याय तथा २२३ सूत्र हैं । प्रथम पटल ( १ - ३ अध्याय ) में वेदियों की रचना के आधारभूत रेखागणितीय सिद्धान्तों का निर्वाचन है । द्वितीय पटल (४-६ अध्याय ) वेदि के क्रमिक स्थान तथा उनके रूपों का वर्णन करता है। यहाँ इनके बनाने के ढंग या प्रक्रिया का भी विवरण दिया गया है। अन्तिम १५ अध्यायों में काम्य इष्टि के लिए आवश्यक विभिन्न वेदियों के आकार-प्रकार का विशद विवेचन है । यहाँ बौधायन तथा आपस्तम्ब ने प्रायः समस्त काम्मेष्टियों का समान रूप से विवेचन किया है। अन्तर इतना ही है कि आपस्तम्ब की अपेक्षा बौधायन में अधिक विस्तार तथा विभेदों की सत्ता मिलती है । आपस्तम्ब अपेक्षाकृत सरल तथा संक्षिप्त है : बौधायन के टीकाकार बौधायन के दो टीकाकारों का पता चलता है जिनमें से एक उतने प्राचीन प्रतीत नहीं होते, परन्तु दूसरे टीकाकार पर्याप्तरूपेण प्राचीन प्रतीत होते हैंक ) द्वारकानाथ यज्वा - ये आर्यभट के पश्चाद्वर्ती निश्चित रूप से प्रतीत होते हैं, क्योंकि इन्होंने अपनी टीका में आर्यभटीय के एक सिद्धान्त का निर्देश किया है। शुल्बसूत्र के अनुसार ब्यास तथा परिधि का सम्बन्ध ग होता है, परन्तु द्वारकानाथ यज्वा ने इस नियम में शोधन उपस्थित किया है जिससे १. 'छन्दचिति' मन्त्रों के द्वारा निर्मित वेदि है। इसमें वेदि का निर्माता बाज की भाकृतिवाली बेदि की रूपरेखा पृथ्वी के ऊपर खींचता है तथा मन्त्रों का उच्चारण करता है। ईटों को रखने की वह कल्पना करता है, अर्थात् मन्त्रों को पढता जाता है तथा ईंटों को रखने की कल्पना करता है, परन्तु वस्तुः वह रखता नहीं। इसीलिए यह वेदि छन्दश्चिति के नाम से प्रसिद्ध है। मूल्य आधुनिक गणना के अनुसार ही ३.१४१६ तक तिद्ध होता है। इसी प्रकार अन्य गणना के लिए भी यज्वा ने अपनी विमल प्रतिभा का परिचय दिया है। इस व्याख्या का नाम हैं- शुल्च- दीपिका । ( ख ) वेंकटेश्वर दीक्षित - इनकी टीका का नाम शुल्च-मीमांसा है। ये यत्रा की अपेक्षा अर्वाचीन ग्रन्थकार प्रतीत होते । आपस्तम्ब शुल्ब के टीकाकार टीका की दृष्टि से यह शुल्बसूत्र बहुत ही चार टीकायें प्रसिद्ध हैं लोकप्रिय रहा है। इसके ऊपर ( क ) कपर्दिस्वामी - इन टीकाकारों में ये ही सबसे प्राचीन प्रतीत होते हैं । इन्होंने इन ग्रन्थों की टीकायें की हैं - आपस्तम्ब श्रौतसूत्र, आपस्तम्ब सूत्रपरिभाषा, दर्शपौर्णमाससूत्र, भारद्वाज - गृह्यसूत्र आदि । शूलपाणि, हेमाद्रि, तथा नीलकण्ठ ने इनके मत का उद्धरण अपने ग्रन्थों में किया है। इस निर्देश से इनके समय का निरूपण किया जा सकता है। शूलपाणि का समय ११५० ई० के आसपास है । वेदार्थदीपिका के रचयिता षड्गुरुविशष्य ( ११४३ ई० - ११९३ ई० ) के ये गुरु थे । हेमाद्रि का भी काल १३वीं शती है, क्योंकि ये देवगिरि के राजा महादेव ( १२६० ई० - १२७१ ई० ) तथा उनके भतीजे और उत्तराधिकारी रामचन्द्र ( १२७१ ई० - १३०९ ई० ) के महामाय थे । इस प्रकार शूलपाणि तथा हेमाद्रि के द्वारा उद्धृत किये जाने के कारण कपर्दिस्वामी का समय १२ वीं शती से प्राचीन होना चाहिए। ये दक्षिण भारत के निवासी प्रतीत होते हैं। अपनी टीका में इन्होंने कतिपय नियमों तथा रचनाप्रकारों का सरल विवरण दिया है। ( २ ) करविन्दस्वामी - इन्होंने आपस्तम्ब के पूरे श्रौतसूत्र के ऊपर अपनी व्याख्या लिखी है। इनके समय का निर्धारण अभी तक ठीक ढंग से नहीं किया जा सका है। इन्होंने विना नाम निर्देश किये ही आर्यभट प्रथम ( जन्मकाल ४७६ ई० ) के ग्रन्थ आर्यभटीय ( रचनाकाल ४९९ ई० ) के कतिपय निर्देशों को अपने ग्रन्थों में उल्लिखित किया है जिनसे ये पञ्चमशती से अर्वाचीन तो निश्चितरूप से प्रतीत होते हैं। इनकी टीका का नाम शुल्च-प्रदीपिका है और यह मूलग्रन्थ को समझने के लिए एक उपयोगी व्याख्या है। ग) सुन्दरराज - इनकी टीका का नाम 'शुल्बप्रदीप' है, जो ग्रन्थकार के नाम पर 'सुन्दरराजीय' के भी नाम से प्रख्यात है। इनके भी समय का ठीकठीक पता नहीं चलता । इस ग्रन्थ के प्राचीन हस्तलेख का समय सम्वत् १६३८ (१५८१ ईस्वी) है, जो तंजोर के राजकीय पुस्तकालय में (न० ९९६०) सुरक्षित है। फलतः इनका समय १६ वीं शती से प्राचीन होना चाहिए । इन्होंने बौधायन शुल्ब के टीकाकार द्वारकानाथयज्वा के कतिपय वाक्यों को अपनी टीका में उद्धृत किया है । (घ ) गोपाल - इनकी व्याख्या का नाम है-आपस्तम्बीय शुल्बभाष्य । इनके पिता का नाम गातर्य नृसिंह सोमसुत् है। इससे प्रतीत होता है कि ये कर्मकाण्ड में दीक्षित वैदिकपरिवार में उत्पन्न हुए तथा कर्मकाण्डीय परम्परा से पूर्ण परिचित थे । कात्यायन - शुल्बसूत्र का प्रसिद्ध नाम है कात्यायन-शुल्ब-परिशिष्ट, अथवा कातीय शुल्ब-परिशिष्ट । यह दो भागों में विभक्त है। प्रथमभाग सूत्रात्मक है तथा सात कंडिकाओं में विभक्त होकर इसमें ९० सूत्र हैं। इसमें वेदियों की रचना के लिए आवश्यक रेखागणितीय तथ्य, वेदियों का स्थान क्रम तथा उनके परिमाण का पूरा वर्णन हैं । यहाँ काम्य इष्टियों की वेदियों का वर्णन नहीं है, क्योंकि कात्यायन श्रौतसूत्र के १७ वें अध्याय में इसका वर्णन पहिले ही किया गया है। द्वितीय खण्ड श्लोकात्मक है जिसमें ४० या ४८ श्लोक मिलते हैं । यहाँ नापनेवाली रज्जु का, निपुण वेदिनिर्माता के गुणों का तथा उनके कर्तव्यों का तथा साथ ही साथ पूर्वभाग में वर्णित रचनापद्धति का भी विवरण दिया गया है । इसी द्वितीय खण्ड का नाम कातीय परिशिष्ट है, क्योंकि इसमें पूर्वखण्ड के विषयों का संक्षेप में पुनः वर्णन दिया गया है। पूर्व के दोनों शुल्चसूत्रों की अपेक्षा इसमें कतिपय रोचक विशिष्टतायें पाई जाती हैं। कात्यायन ने वेदि निर्माण के आवश्यक समस्त रेखागणितीय विषयों का विवरण विशेष क्रमबद्ध रूप से यहाँ प्रस्तुत किया है । इसके ऊपर दो टीकायें उपलब्ध होती हैं - ( क ) महीधर - महीधर काशी के रहने वाले प्रकाण्ड वैदिक थे । वेद तथा तन्त्र के विषय में इनके अनेक प्रौढ़ ग्रन्थरत्न आज भी मिलते हैं। इन्होंने अपने 'मन्त्र-महोदधि' की समाप्ति १५८९ ईस्वी में तथा विष्णुभक्तिकल्पलता प्रकाश की रचना १५९७ ईस्वी में की । कातीय शुल्बसूत्रों की - व्याख्या का रचना-काल संवत् १६४६ ( = १५८९ ईस्वी ) है ।
ले जाता है तथा पूषन् उनकी रक्षा करता है । चिता जलने के पहिले प्रेत- पुरुष की पत्नी, जो शव के साथ लेटी हुई थी, उठती है और उसका धनुष हाथ से हटा लिया जाता है। यह इसकी सूचना है कि प्राचीनतर काल में पत्नी तथा धनुष दोनों ही शव के साथ जला दिये जाते थे। पितरों के मार्ग पर चलकर प्रेत की आत्मा प्रकाशमान लोक में प्रवेश करती है और पितरों के साथ साक्षात्कार करती है। वहाँ उच्चतम लोक में यम पितरों के साथ बैठकर आनन्द में कालयापन करते हैं । यम प्रथम मानव हैं जिन्होंने मानवों के लिए पितृलोक में जाने का मार्ग खोज निकाला है । उसी लोक में हमारे पूर्व पितृगण प्राचीनकाल में गए हैं तथा उसके अनन्तर भावी पुरुष अनेक मार्गों से उसी लोक में जाते हैं । यम विवस्वान् के पुत्र होने से 'वैवस्वत' कहलाते हैं । यम के लिए 'राजा' शब्द का प्रयोग अनेकत्र किया गया है, व्यक्त रूप से 'देव' का नहीं । पितृलोक के मार्ग में यम के शबल दो कुत्ते रहते हैं, जो सरमा के पुत्र, चार नेत्र वाले , मार्ग के रक्षक तथा मनुष्यों पर पहरा देनेवाले हैं । प्रेतात्मा को इनसे बच कर जाने का उपदेश दिया गया है। दीर्घ नासिका वाले , प्राण के संहारक तथा नाना वर्ण वाले - ये सारमेय यम के दूत बतलाये गये हैं। ये मनुष्यों में घूमते हैं तथा पितृलोक में जाने वालों को ढूँढ़ा करते हैं। पितृलोक प्रकाशमान देदीप्यमान लोक हैं जहाँ यम पितृ लोगों के साथ आनन्द में मग्न दीखते हैं । पितरों के अनेक गण होते हैं जिनमें अङ्गिरस, नवग्वा, अथर्वण, भृगु तथा वसिष्ठ मुख्य माने जाते हैं। ये सोमरस के अभिलाएक हैं तथा मर्त्यलोक में प्रस्तुत आहुति के लिए सदा लालायित रहते हैं। उनसे यज्ञ में आने, सोम पीने तथा उपासकों की रक्षा करने के लिए नाना प्रकार की प्रार्थनायें की गई हैं - असुं य ईयुरवृका ऋतशास्ते नोऽवन्तु पितरो हवेषु ॥ पितरों के नाना प्रकार हैं - अवर , पर तथा मध्यम, प्राचीन तथा नवीन । हम पितरों को न भी जानें, परन्तु अग्नि सच को बानता है। स्वर्गकी धारणा बड़े ही सुन्दर तथा प्रकाशमय रूप में की गई है। उस लोक में यम वरुण तथा पितरों के साथ निवास करते हैं। वहाँ मनुष्य को अमरत्व प्रदान करने के लिए, कश्यप ऋषि प्रार्थना करते हैं - "यत्र राजा वैवस्वतो यत्रावरोधनं दिवः ।....तत्र माममृतं कृषि " । वहाँ दिन, रात और जल सच सुन्दर तथा आनन्ददायक होते हैं । वहाँ मनुष्य को बलिष्ठ सुन्दर शरीर प्राप्त हो जाता है तथा इस शरीर की रोग-व्याधि, दुर्बलता तथा त्रुटियाँ सच दूर हो जाती हैं। पुण्य कार्य करनेवाला प्राणी अपने सम्पादित इष्ट तथा पूर्त के फल को प्राप्त कर लेता है, तथा पितरों और यम से मिलकर आनन्द भोग करता है । प्रेतात्मा भौतिक प्रकाशमान शरीर से युक्त होकर स्वर्ग में सोम, मुरा, मधु, दुग्ध तथा धी जैसी भौतिक वस्तुओं से ही आनन्द नहीं उठाता, प्रत्युत प्रेम करने के लिए स्त्रियों की भी वहाँ बहुलता होती है । वहाँ गाना तथा बाजा का भी आनन्द है। वहाँ अश्वत्थ वृक्ष है जिसके नीचे यम देवों के साथ पान करते हैं । कामधेनु से सम्पन्न समस्त अभिलाषा तथा आनन्द से परिपूर्ण स्वर्ग की कल्पना नितान्त सुन्दर तथा आकर्षक है । नरक की कल्पना स्पष्टतः ऋग्वेद में नहीं दीखती, परन्तु अथर्व में 'नारकं लोकं' की कल्पना स्पष्टतः स्वर्गलोक की भावना से विपरीत कल्पित की गई है। इस प्रकार स्वर्ग की वैदिक कल्पना बड़ी उदात्त है और आर्यों जैसे आशावादी प्राणियों के लिए नितान्त उचित तथा सुन्दर है । एक. अथर्वशून्य पाँच/चार/तीन; कौषीतकि उपशून्य में इस वृक्ष का नाम तिल्य या नरक - अधर्म के आचरण करनेवाले जीवों को यातना भोगने का मरणोपरान्त लोक । 'नरक' की कल्पना का विकसित रूप हमें पुराणों में उपलब्ध होता है, परन्तु वैदिक साहित्य में भी नरक की कल्पना का अभाव नहीं है । अथर्व वेद में नरक स्वर्ग से विपरीत यम के क्षेत्ररूप में अभीष्ट है, जहाँ राक्षसियों और अभिचारिणियों का आवास रहता है और जिसकी स्थिति पाताल लोक में मानी गई है । ब्राह्मण साहित्य में परलोक में दण्ड की धारणा जब विशेष रूप से विकसित हुई, तब नरक में यातना के भोगने का भी विकाश सम्पन्न हुआ । पुराणों - विशेषतः विष्णुपुराण तथा श्रीमद्भागवत में नरक का विशद विवरण उपलब्ध होता है । स्थिति- -नरक की स्थिति के विषय में मतभेद है। भागवत के अनुसार नरक की स्थिति त्रिलोकी के भीतर ही है तथा वे दक्षिण की ओर के पृथ्वी से नीचे, परन्तु जल से ऊपर स्थित हैं। विष्णुपुराण तो नरक की स्थिति पृथ्वी और जल दोनों के नीचे मानता है। भूलक के त्रिविध स्तर पुराणों को अभीष्ट है- सब से ऊपर पृथ्वी, उसके नीचे पाताल तथा उसके भी नीचे नरक । इस प्रकार नरक को पृथ्वी के सब से नीचे स्थित होने में किसी प्रकार की पौराणिक विप्रतिपत्ति नहीं है । संख्या - नरकों की संख्या परिगणित नहीं है। वह 'शतशः सहस्रशः ' चतलाई गई है, परन्तु नरकों की संख्या में विकाश दृष्टिगोचर होता है । नरकों की न्यूनतम संख्या सात है, जिसका उल्लेख विष्णुपुराण, योगसूत्र का व्यासभाष्य तथा शंकराचार्य करते हैं । विष्णुपुराण के अनुसार रौरव, महारौरव आदि का उल्लेख शंकराचार्य को अभीष्ट है। व्यासभाष्य में दो प्रकार के नाम मिलते हैं। 'अवीचि' को छोड़ देने पर दोनों सूचियों के नाम इस प्रकार हैं - घन , सलिल , अनल , अनिल , आकाश तथा तमः प्रतिष्ठ । कालान्तर में यह संख्या विकसित होकर एक्कीस तक पहुँच गई । ये नाम मनुस्मृति तथा श्रीमद्भागवत में उपलब्ध होते हैं, परन्तु इन अभिधानों में पर्याप्त पार्थक्य है । विष्णुपुराण तथा श्रीमद्भागवत में यह संख्या वृद्धिंगत होकर अट्ठाईस तक पहुँच गई है। दोनों सूचियों में संख्या की एकता होने पर भी नामों में पार्थक्य है । रौरव, कालसूत्र, लालाभक्ष, वैतरणी आदि संज्ञाओं की समानता होने पर भी अन्यत्र पार्थक्य है । नाम - भागवत के अनुसार अट्ठाईस नरकों के नाम यहाँ दिये जाते हैं जो अपने स्वरूप के भी स्वतः प्रकाशक हैं- तामिस्र, अन्धतामिस्र, रौरव, महारौरव, कुम्भीपाक, कालसूत्र, असिपत्रवन, सूकरमुख, अन्धकूप, कृमिभोजन, सन्दंश, तप्तसूर्मि, वज्रकण्टकशाल्मली, वैतरणी, पूर्याद, प्राणरोध, विशसन, लालाभक्ष, सारमेयादन, अवीचि, अयःपान, क्षारकर्दम, रक्षोगणभोजन, शूलप्रोत, दन्दशक, अवट निरोधन, पर्यावर्तन और सूचीमुख । ये 'विविध यातना भूमि' माने गये हैं, अर्थात् इनमें निवास कर प्राणी अपने किये गये पापों के निमित्त नाना प्रकार की यातनायें भोगते हैं । नरकलोक का शासन-सूत्र सूर्य के पुत्र पितृराज भगवान् यम के हाथों में रहता है, जो अपने दूतों तथा सेवकों के द्वारा उस विचित्र विशाल लोक की सुव्यवस्था करने में समर्थ होते हैं । मरणासन्न प्राणी को यम के दूत संयमनी पुरी में लाते हैं, चित्रगुप्त उनके किये गये पुण्यों तथा पापों का लेखा-जोखा प्रस्तुत करते हैं; यमराज उनके गौरव-लाघव का विचार करते हैं। पुण्य का फल भोगने के लिए तो पुण्यात्माओं को स्वर्ग की प्राप्ति होती है, परन्तु पाप का फल भोगने के लिए पापाचरण वाले जीवों को नरकलोक मिलता है । यथा इस लोक में निरपराध मनुष्यों को दण्ड देनेवाले राजा या राजकर्मचारी 'सूकरमुख' नामक नरक में गिरता है, जहाँ वह कोल्हू में गन्ने के समान पेरा जाता है और वह आर्त स्वर मे चिल्लाता है और कभी मूर्च्छित होकर अनेक यातनायें भोगता है । फलतः नरक प्रायश्चित रूप से यातनाओं के भोगने का विकट स्थान है। इस प्रकार नरक और स्वर्ग के भोग से जब जीवों के अधिकांश पाप और पुण्य क्षीण हो जाते हैं, तब चाकी बचे हुए पुण्य पाप-रूप कर्मों को लेकर ये जीव इसी लोक में जन्म लेने के लिए लौट आते हैं। नरक के साथ 'स्वर्ग' की कल्पना अनुस्यूत है । जीव के आवागमन की प्रक्रिया में स्वर्ग तथा नरक एक नितान्त आवश्यक अङ्ग है । वैदिक धर्म के अनुसार जैनधर्म तथा बौद्धधर्म में भी 'नरक' की कल्पना मान्य है तथा वह ऊपर वर्णित रूप से भिन्न नहीं है । संख्या की भिन्नता होने पर भी मूल स्वरूप की मान्यता प्रायः एकाकार है । वैदिक साहित्य में विश्वबन्धुत्व की परिकल्पना वैदिक साहित्य की यह एक अनोखी • विशेषता है कि वह मानव मात्र के लिए कल्याण की भावना को अग्रसर करता है । संकीर्ण स्वार्थ को ही मानव जीवन का चरम पुरुषार्थ मानने वाले पाश्चात्य देशों के साहित्य में जो एकांगिता विद्यमान है, वह वैदिक साहित्य को स्पर्श नहीं करती। कारण इसका स्पष्ट है- साहिस्य संस्कृति का अग्रदूत है, साहित्य संस्कृति का वाहन है। समाज की भावना को दर्पगत् प्रतिबिम्बित करनेवाला साहित्य कितना भी आदर्शवादी हो, वह यथार्थना का चित्रण किये विना नहीं रह सकता। उसकी व्याप्ति राष्ट्र की परिधि के द्वारा नियन्त्रित होती है। वह उस देश के प्राणियों में परिव्याप्त भावना को सर्वथा उलंघन करने की क्षमता नहीं रखता । पश्चिम के देश संकीर्ण राष्ट्रीयता की भावना से जकड़े हुये हैं। फलतः उनके साहित्य में उस संकीर्णता का ही परिचय हमें पदे पदे मिलता है। वहाँ के साहित्यिक अपने राष्ट्र की चहारदिवारी के भीतर अपने को सीमित रखते हैं। इसलिए उनकी वाणी राष्ट्रीयता के परिबृंहण में ही लगी रहती है। इसके विपरीत, संस्कृत के कविजन उदारता का आश्रय लेकर संकीर्णता को अपने पास फटकने नहीं देते । फलतः वैदिक साहित्य विश्वचन्धुत्व की भावना से सर्वथा परिव्याप्त है । वैदिक प्रार्थना में समष्टि भावना का पूर्ण साम्राज्य विराजमान है। वैदिक ऋषि व्यष्टि के कल्याण के लिये जगदीश्वर से प्रार्थना नहीं करता, प्रत्युत वह समग्र समष्टि के मंगल के लिये आशीर्वाद चाहता है। वह व्यक्ति तथा समाज से ऊपर उठकर समस्त विश्व के सुख-समृद्धि तथा मंगल के निमित्त ही प्रार्थना करता है । मन्त्रों का प्रामाण्य इस विषय में अक्षुण है। विश्वानि देव सवितर्दुरितानि परासुव । यद् भद्रं तन्न भासुव । हे देत्र सत्रिता, समस्त पापकर्मों को हमसे दूर करो। हमारे लिए जो भद्र वस्तु - कल्याणकारी पदार्थ हो, उसे हमें प्राप्त कराइये । विश्व शान्ति, और विश्व बन्धुत्व की उदात्त भावना से ओतप्रोत वैदिक मन्त्रों में मानवमात्र में परस्पर सौहार्द, मैत्री तथा साहाय्य की भावना की उपलब्धि नितान्त स्वाभाविक हैमित्रस्याहं चक्षुषा सर्वाणि भूतानि समीक्षे । मित्रस्य चक्षुषा समीक्षामहे ॥ मैं मित्र की दृष्टि से सत्र प्राणियों को देखूँ । हम सब लोग मित्र की दृष्टि से परस्पर में एक दूसरे को देखें । मानव मात्र का यह कर्त्तव्य होना चाहिए कि वह एक-दूसरे की सर्वथा रक्षा तथा सहायता करे। केवल अपने ही स्वार्थ में उसे निविष्ट नहीं रहना चाहिये । इस भाव को द्योतित करता हुआ ऋग्वेदीय मन्त्र कहता हैपुमान् पुमांसं परिपातु विश्वतः । वैदिक ऋषि भगवान से प्रार्थना करता है कि वह मानवमात्र के लिये सुमति- सद्भावना धारण करे; उन प्राणियों के ही प्रति नहीं, जिन्हें वह देखता है, प्रत्युत उनके लिए भी जो उसकी दृष्टि से ओझल हैं जिन्हें वह नहीं देखता - यांश्च पस्यामि यांश्च न । तेषु मा समुमति कृधि ॥ कितनी उदात्त भावना है यह । सामान्यतः हम उन्हीं के कल्याण की कामना करते हैं, जिन्हें हम देखते हैं अपनी आखों से; परन्तु वैदिक ऋषि यहीं तक अपनी प्रार्थना को सीमिति नहीं रखता, प्रत्युत वह निखिल विश्व के अदृष्ट प्राणियों के प्रति भी वह भावना रखने का नम्र निवेदन करता है । ऋग्वेद तथा अथर्ववेद में विशिष्ट सूक्त हैं जिनकी संज्ञा है सांमनस्य सूक्त इनमें विशेषरूप से विश्व कल्याण की भावना परिव्याप्त है। इस विषय के एक दो मन्त्र यहाँ दिये जाते हैंसं गच्छध्वं संवदध्वम्, सं वो मनांसि जानताम् । देवा भागं यथा पूर्वे सं जानाना उपासते ॥ इस मन्त्र का तात्पर्य बड़ा गंभीर है। हे मनुष्यों, जैसे सनातन से विद्यमान दिव्य शक्तियों से सम्पन्न सूर्य, चन्द्रादि देव परस्पर अविरोध भाव से प्रेम से अपने कार्यों को करते हैं, ऐसे ही तुम भी समष्टि भावना से प्रेरित होकर एक साथ कार्यों में प्रवृत्त हो, ऐकमत्य होकर परस्पर सद्भाव से रहो। ऋग्वेद का अंतिम मन्त्र इसी भावना को अग्रसर करता हैसमानी व आकृतिः समाना समानमस्तु वो मनो यथा वः हृदयानि वः । सुसहासति ॥ मानवों को लक्ष्य कर अंगिरस संवनन ऋषि का उपदेश इस मन्त्र में निहित है। वह कहते हैं कि मानवों की आकृति - चित्तवृत्ति, हृदय तथा मन-सच समान हों, तभी विश्व के प्राणी परस्पर में सौहार्द से निवास कर सकते हैं। अतः ऋषिकेवल अपने वैयक्तिक मंगल के लिये भगवान् से प्रार्थना नहीं करता, प्रत्युत वह मानवमात्र के हित का प्रार्थी है । अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम् । उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् ।। यह अपना है और यह पराया है ऐसी गणना क्षुद्रचित्त वाले प्राणियों की है। उदार चरित वाले जनों की दृष्टि में तो यह समस्त वसुधा ही एक कुटुम्ब विश्व-भावना की अभिव्यक्ति इससे बढ़कर और सुन्दर शब्दों में नहीं की जा सकती। इस श्लोक के तात्पर्य के भीतर एक गहरी अनुभूति है। आजकल यातायात की सुविधा से यदि एक देश का मानव दूसरे देश के मानव के प्रति आवश्यकता के पास में बद्ध होकर आकृष्ट होता है, तो इसे कम समझ सकते हैं, परन्तु आश्चर्य तो इस बात का है कि ऐसी सुविधाओं से विरहित प्राचीन काल में भारत के निवासी विश्ववन्धुत्व की भावना में विश्वास ही नहीं करते थे, प्रत्युत अपने दैनिक जीवन में उसका व्यवहार भी करते थे । भारत के निवासी आर्यजन का जीवन विश्ववन्धुत्व का व्यावहारिक पक्ष प्रस्तुत करता है। प्रत्येक गृहस्थ "बलिवैश्वदेव" के अनुष्ठान के उपरान्त ही स्वयं भोजन करता है। यह बलि विश्व के समग्न देवताओं के ही लिए अन्न द्वारा तृप्ति की साधिका नहीं है, प्रत्युत पशु पक्षी आदि तिर्यग्योनि के जीवों को भी भोजनार्थ अन्न देने का विधान यहाँ पाया जाता है। इसी प्रकार सर पर ऋषियों, मानवों तथा स्वीय पूर्वजों की ही जल द्वारा तृप्ति नहीं की जाती, प्रत्युत नाग, सर्प आदि क्षुद्र जीवों को भी जलाञ्जलि देकर तृप्ति पहुँचाने का सार्वभौम नियम है । यह तर्पण प्रतिदिन विहित अनुष्ठान है। इससे प्रत्येक मानव अपने को संसार के समस्त प्राणियों के साथ सम्पर्क स्थापित कर विश्ववन्धुत्व की साकार उपासना करता है । इस विश्वबन्धुत्व की भावना का एकगंभीर दार्शनिक पक्ष भी है। यह समग्र विश्व परमैश्वर्य-मण्डित सत्य ज्ञान अनन्त परब्रह्म का ही विवर्त है । जगत् के जीव परब्रह्म के अंशभूत होने पर भी तद्रूप ही हैं। जगत् के भीतर एक ही सर्व शक्तिमान् परमेश्वर रमा हुआ है। अपनी अलौकिक घटनापटीयसो माया के कारण सर्वत्र व्याप्त है। विश्व का प्रत्येक अणु उसी की अमल शक्तिमत्ता का विजय घोष करता है। विश्व के समस्त जीव उसी परमपिता की सन्तान हैं। ऐसी दशा में उनमें पारस्परिक बन्धुत्व की भावना परिस्फुटित न होगी ? यह कौन सचेता विश्वास कर सकता है । यह अद्वैत सिद्धान्त भारतीय संस्कृति की आधारशिला है । फलतः इस संस्कृति के परिवहन करने वाले वैदिक साहित्य में इस भावना का साङ्गो-पामाङ्ग रूप उपलब्ध होता है - यह कथन पुनरुक्ति मात्र है। हमारे संस्कृत के काव्यों तथा रूपकों में यह भावना बड़ी स्फुटता से अपनी अभिव्यक्ति पा रही है। इसलिए प्रत्येक धार्मिक अनुष्ठान की समाप्ति पर साधक पुरुष अपना आदर्श इस प्रसिद्ध श्लोक के द्वारा प्रकट करता हैसर्वेऽत्र सुखिनः सन्तु सर्वे सन्तु निरामयाः । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःखभाग् भवेत् ॥ इस विश्व में सच प्राणी मुखी हों, सब लोग रोग से आक्रान्त न हों, सब प्राणी कल्याण की उपलब्धि करें। कोई प्राणी दुःख का भाजन न हो । वेद अनन्त है; वेद गम्भीर है । वेद के गम्भीर अर्थ तथा रहस्य की सूचना इस घटना से भी पर्याप्त रूपेण मिलती है कि अपने उदयकाल से आरम्भ होकर वर्तमानकाल तक यह नाना विचारवाले विद्वानों को प्रेरणा तथा स्फूर्ति देता आया है। यास्क के समय में ही इसके गम्भीर अर्थ की व्याख्या नाना सम्प्रदाय के वेदज्ञों ने अपनी दृष्टि से की और आज भी इसके मन्त्रों के तात्पर्य को समझने तथा समझाने के लिए नाना शैली पुरस्कृत की जा रही है और प्रत्येक शैली एक नवीन अर्थ का उन्मेष करती है । वेद इस विशाल ब्रह्माण्ड में अनेक प्रकार से जागरूक तथा नाना अभिव्यक्तियों में प्रकाशशील एक अचिन्त्य शक्ति का शाब्दिक उन्मेष है - वर्णमय विग्रह है । वह तर्क की कर्कश पद्धति पर व्याख्यात सिद्धान्तों का समुच्चय नहीं; अपितु वह प्रातिभसे साक्षात्कृत तथ्यों का प्रशंसनीय पुंज है । वैदिक युग के मनीषियों तथा लोकातीत आर्षचक्षुर्मण्डित द्रष्टाओं की वाणी में सार्वदेशिक तथा सार्वकालिक नैतिकता और धर्म की मूल प्रेरणाओं का स्फुरण हो रहा है, जो आज भी विश्व के मानवों को सन्मार्ग पर ले जाने की क्षमता रखता है। वैदिक ऋषियों की दृष्टि में धर्म ही जीवनयात्रा का मुख्य उपयोगी साधन है। 'सुगा ऋतस्य पन्थाः" = धर्म का मार्ग सुगम है। 'सत्यस्य नावः सुकृतमपीपरन्' = सत्य की नाव धर्मात्मा को पार लगाती है । वेद अध्यात्म के साथ व्यवहार का, परलोक के साथ इहलोक का मंजुल सामञ्जस्य अपने भव्य उपदेशों से प्रस्तुत करता है । वेद का सर्वातिशायी श्लाघनीय धर्म यज्ञ है। यज्ञ ही मानव को दूसरे मानव के प्रति मैत्री के सूत्र में बांधने वाला कर्म है । वेद मनुष्यों को कर्मठ, देशभक्त तथा परोपकारी बनने की शिक्षा देता है । वह स्वावलम्बी मानव के मूलमन्त्र का रहस्य बतलाता है -- 'न ऋते श्रान्तस्य सख्याय देवाः' = विना स्वयं परिश्रम किये देवों की मैत्री प्राप्त नहीं होती है। वह सम्पत्ति को मानवों में बांट देने की शिक्षा देता है - 'शतहस्त समाहर सहस्रहस्त संकिर' = सैकड़ों हाथों से इकट्ठा करो और हजारों हाथों से बाँट दो । 'एकं सद् विप्रा बहुधा वदन्ति' का शिक्षक वेद अद्वैतवाद का महनीय उपदेष्टा ग्रन्थरत्न है । प्राणिमात्र में एक ही चैतन्य व्यास हो रहा है। प्राणिमात्र को परस्पर में बन्धुता की महनीय भावना से ओत-प्रोत होना चाहिए । इस भावना की प्रेरणा देनेवाले अथर्व ऋषि का यह वाक्य वर्तमानकाल के मानवों के लिए आदर्श मन्त्र होना चाहिए - सहृदयं सांमनस्यमविद्वेषं कृणोमि वः । अन्योऽन्यमभिनवत वत्सं जातमिवाध्न्या । यह संज्ञान सूक्त मानवों के परस्पर सौहार्द, सहानुभूति तथा मैत्री को मानव समाज के लिए आदर्श बतलाने वाला एक नितान्त श्लाघनीय सूक्त है जिसके भावों को समझना तथा अपने जीवन में उतारना संसार के प्राणियों का कल्याण साधक है । वेद नित्य है; वेद रहस्यमय है; वेद का ज्ञान गम्भीर व्यापक परम चैतन्य का आभामय शाब्दिक विग्रह है। वह देश तथा काल से अतीत है। वह किसी एक मानव समाज का ग्रन्थ नहीं है। वह विश्व मानव का कल्याणाधायक ग्रन्थरत्न है। व्यवहार का उपदेष्टा है। वह अध्यात्म का शिक्षक है। वह परमज्योतिर्मय प्रभु का प्राणियों के लिए मधुर सन्देश है । उसकी उपासना उस अनन्त सर्वशक्तिमान् अचिन्त्य शक्तिशाली भगवान् के मंगलमय साक्षात्कार कराने में कृतकार्य होती है। उस परम करुणावतार भगवान् से हमारी विनम्र प्रार्थना है कि हमें वह सुबुद्धि दे जिससे इम इस वेदवाणी को समझें, गूढ़ अर्थ को हृदयंगम करें, उसका आचरण कर अपने जीवन को मंगलमय बनावें तथा इस जन्म को सार्थक सिद्ध करें । समानी व आकृतिः समाना हृदयानि वः । समानमस्तु वो मनो यथा वः सुसहासति ॥ तत् सद् ब्रह्मार्पणमस्तु ॥ भारतवर्ष में रेखा- गणित के प्राचीन इतिहास की जानकारी के लिए शुल्चसूत्रों का अध्ययन नितान्त आवश्यक है। शुल्बसूत्र वेदाङ्ग के अन्तर्गत कल्प सूत्र का अन्यतम अङ्ग है । कल्पसूत्र का मुख्य विषय है वैदिक कर्मकाण्ड । ये मुख्यतया दो प्रकार के हैं - गृह्यसूत्र तथा श्रौतसूत्र, जिनमें गृह्यसूत्र का मुख्य - विषय है विवाहादि संस्कारों का विस्तृत वर्णन । श्रौतसूत्रों में श्रुति में प्रतिपादित नाना यज्ञ-याज्ञों का विशद विवरण प्रस्तुत किया गया है । शुल्बसूत्र इन्हीं श्रौतसूत्रों का एक उपयोगी अंश है। 'शुल्च' शब्द का अर्थ है - रज्जु, अर्थात् रज्जु के द्वारा मापी गई वेदि की रचना शुल्बसूत्र का प्रतिपाद्य विषय है। सिद्धान्त की दृष्टि से तो प्रत्येक वैदिक शास्त्र का अपना विशिष्ट 'शुल्बसूत्र' होता है, परन्तु व्यवहारतः ऐसी बात यही है। कर्मकाण्ड के साथ मुख्यतः सम्बद्ध होने के कारण शुल्बसूत्र यजुर्वेद की ही शाखा में पाये जाते हैं। यमु वेंद की अनेक शाखाओं में शुल्बसूत्रों का अस्तित्व पाया जाता है। शुक्ल यजुर्वेद से सम्बद्ध एक ही शुल्बसूत्र है - कात्यायन शुल्बसूत्र, परन्तु कृष्ण यजुर्वेद से सम्बद्ध छः शुल्चसूत्र मिलते हैं - चौधायन, आपस्तम्ब, मानव, मैत्रायणीय, बाराह तथा बाधूल । इनके अतिरिक्त आपस्तम्ब शुल्ब टीका मे करविन्दस्वामी ने यशक झुल्ब तथा हिरण्यकेशी-शुल्ब का उल्लेख किया है, जो आजकल उपलब्ध नहीं है । आपस्तम्च-शुल्ब में हिरण्यकेशी शुला से एक उद्धरण भी उपलब्ध होता है । इन सात उपलब्ध सूत्रों में बौधायन शुल्ब ही सब से बड़ा तथा सम्भवतः सब से प्राचीन शुल्बसूत्र है। इसमें तीन परिच्छेद हैं। प्रथम परिच्छेद में एक सौ सोलह सूत्र हैं, जिनमें मंगलाचरण के अनन्तर वर्णन है शुल्ब में प्रयुक्त विविध मानों का ; याशिकवेकदियों के निर्माण के लिए मुख्य रेखा गणितीय तथ्यों का तथा विभिन्न वेदियों के क्रमिक स्थान तथा आकार-प्रकार का वर्णन है । द्वितीय परिच्छेद में छियासी सूत्र हैं, जिनमें वेदियों के निर्माण के सामान्य नियमों का बहुशः वर्णन के पश्चात् गार्हपत्य-चिति तथा 'छन्दश्चिति के बनावट का विवरण प्रस्तुत किया गया है। तृतीय परिच्छेद में तीन सौ तेईस सूत्र हैं, जिनमें काम्य इष्टियों के सत्रह प्रभेदों के लिए चेदि के निर्माण का विशद विवरण है। इनमें से कई वेदियों की रचना बड़ी ही पेचीदी है, परन्तु अन्यों की रचना अपेक्षाकृत सरल है। आपस्तम्ब का शुल्बसूत्र छः 'पटल' में विभक्त है, जिनके भीतर अन्य अवान्तर वर्ग हैं। इस प्रकार इसमें इक्कीस अध्याय तथा दो सौ तेईस सूत्र हैं । प्रथम पटल में वेदियों की रचना के आधारभूत रेखागणितीय सिद्धान्तों का निर्वाचन है । द्वितीय पटल वेदि के क्रमिक स्थान तथा उनके रूपों का वर्णन करता है। यहाँ इनके बनाने के ढंग या प्रक्रिया का भी विवरण दिया गया है। अन्तिम पंद्रह अध्यायों में काम्य इष्टि के लिए आवश्यक विभिन्न वेदियों के आकार-प्रकार का विशद विवेचन है । यहाँ बौधायन तथा आपस्तम्ब ने प्रायः समस्त काम्मेष्टियों का समान रूप से विवेचन किया है। अन्तर इतना ही है कि आपस्तम्ब की अपेक्षा बौधायन में अधिक विस्तार तथा विभेदों की सत्ता मिलती है । आपस्तम्ब अपेक्षाकृत सरल तथा संक्षिप्त है : बौधायन के टीकाकार बौधायन के दो टीकाकारों का पता चलता है जिनमें से एक उतने प्राचीन प्रतीत नहीं होते, परन्तु दूसरे टीकाकार पर्याप्तरूपेण प्राचीन प्रतीत होते हैंक ) द्वारकानाथ यज्वा - ये आर्यभट के पश्चाद्वर्ती निश्चित रूप से प्रतीत होते हैं, क्योंकि इन्होंने अपनी टीका में आर्यभटीय के एक सिद्धान्त का निर्देश किया है। शुल्बसूत्र के अनुसार ब्यास तथा परिधि का सम्बन्ध ग होता है, परन्तु द्वारकानाथ यज्वा ने इस नियम में शोधन उपस्थित किया है जिससे एक. 'छन्दचिति' मन्त्रों के द्वारा निर्मित वेदि है। इसमें वेदि का निर्माता बाज की भाकृतिवाली बेदि की रूपरेखा पृथ्वी के ऊपर खींचता है तथा मन्त्रों का उच्चारण करता है। ईटों को रखने की वह कल्पना करता है, अर्थात् मन्त्रों को पढता जाता है तथा ईंटों को रखने की कल्पना करता है, परन्तु वस्तुः वह रखता नहीं। इसीलिए यह वेदि छन्दश्चिति के नाम से प्रसिद्ध है। मूल्य आधुनिक गणना के अनुसार ही तीन.एक हज़ार चार सौ सोलह तक तिद्ध होता है। इसी प्रकार अन्य गणना के लिए भी यज्वा ने अपनी विमल प्रतिभा का परिचय दिया है। इस व्याख्या का नाम हैं- शुल्च- दीपिका । वेंकटेश्वर दीक्षित - इनकी टीका का नाम शुल्च-मीमांसा है। ये यत्रा की अपेक्षा अर्वाचीन ग्रन्थकार प्रतीत होते । आपस्तम्ब शुल्ब के टीकाकार टीका की दृष्टि से यह शुल्बसूत्र बहुत ही चार टीकायें प्रसिद्ध हैं लोकप्रिय रहा है। इसके ऊपर कपर्दिस्वामी - इन टीकाकारों में ये ही सबसे प्राचीन प्रतीत होते हैं । इन्होंने इन ग्रन्थों की टीकायें की हैं - आपस्तम्ब श्रौतसूत्र, आपस्तम्ब सूत्रपरिभाषा, दर्शपौर्णमाससूत्र, भारद्वाज - गृह्यसूत्र आदि । शूलपाणि, हेमाद्रि, तथा नीलकण्ठ ने इनके मत का उद्धरण अपने ग्रन्थों में किया है। इस निर्देश से इनके समय का निरूपण किया जा सकता है। शूलपाणि का समय एक हज़ार एक सौ पचास ईशून्य के आसपास है । वेदार्थदीपिका के रचयिता षड्गुरुविशष्य के ये गुरु थे । हेमाद्रि का भी काल तेरहवीं शती है, क्योंकि ये देवगिरि के राजा महादेव तथा उनके भतीजे और उत्तराधिकारी रामचन्द्र के महामाय थे । इस प्रकार शूलपाणि तथा हेमाद्रि के द्वारा उद्धृत किये जाने के कारण कपर्दिस्वामी का समय बारह वीं शती से प्राचीन होना चाहिए। ये दक्षिण भारत के निवासी प्रतीत होते हैं। अपनी टीका में इन्होंने कतिपय नियमों तथा रचनाप्रकारों का सरल विवरण दिया है। करविन्दस्वामी - इन्होंने आपस्तम्ब के पूरे श्रौतसूत्र के ऊपर अपनी व्याख्या लिखी है। इनके समय का निर्धारण अभी तक ठीक ढंग से नहीं किया जा सका है। इन्होंने विना नाम निर्देश किये ही आर्यभट प्रथम के ग्रन्थ आर्यभटीय के कतिपय निर्देशों को अपने ग्रन्थों में उल्लिखित किया है जिनसे ये पञ्चमशती से अर्वाचीन तो निश्चितरूप से प्रतीत होते हैं। इनकी टीका का नाम शुल्च-प्रदीपिका है और यह मूलग्रन्थ को समझने के लिए एक उपयोगी व्याख्या है। ग) सुन्दरराज - इनकी टीका का नाम 'शुल्बप्रदीप' है, जो ग्रन्थकार के नाम पर 'सुन्दरराजीय' के भी नाम से प्रख्यात है। इनके भी समय का ठीकठीक पता नहीं चलता । इस ग्रन्थ के प्राचीन हस्तलेख का समय सम्वत् एक हज़ार छः सौ अड़तीस है, जो तंजोर के राजकीय पुस्तकालय में सुरक्षित है। फलतः इनका समय सोलह वीं शती से प्राचीन होना चाहिए । इन्होंने बौधायन शुल्ब के टीकाकार द्वारकानाथयज्वा के कतिपय वाक्यों को अपनी टीका में उद्धृत किया है । गोपाल - इनकी व्याख्या का नाम है-आपस्तम्बीय शुल्बभाष्य । इनके पिता का नाम गातर्य नृसिंह सोमसुत् है। इससे प्रतीत होता है कि ये कर्मकाण्ड में दीक्षित वैदिकपरिवार में उत्पन्न हुए तथा कर्मकाण्डीय परम्परा से पूर्ण परिचित थे । कात्यायन - शुल्बसूत्र का प्रसिद्ध नाम है कात्यायन-शुल्ब-परिशिष्ट, अथवा कातीय शुल्ब-परिशिष्ट । यह दो भागों में विभक्त है। प्रथमभाग सूत्रात्मक है तथा सात कंडिकाओं में विभक्त होकर इसमें नब्बे सूत्र हैं। इसमें वेदियों की रचना के लिए आवश्यक रेखागणितीय तथ्य, वेदियों का स्थान क्रम तथा उनके परिमाण का पूरा वर्णन हैं । यहाँ काम्य इष्टियों की वेदियों का वर्णन नहीं है, क्योंकि कात्यायन श्रौतसूत्र के सत्रह वें अध्याय में इसका वर्णन पहिले ही किया गया है। द्वितीय खण्ड श्लोकात्मक है जिसमें चालीस या अड़तालीस श्लोक मिलते हैं । यहाँ नापनेवाली रज्जु का, निपुण वेदिनिर्माता के गुणों का तथा उनके कर्तव्यों का तथा साथ ही साथ पूर्वभाग में वर्णित रचनापद्धति का भी विवरण दिया गया है । इसी द्वितीय खण्ड का नाम कातीय परिशिष्ट है, क्योंकि इसमें पूर्वखण्ड के विषयों का संक्षेप में पुनः वर्णन दिया गया है। पूर्व के दोनों शुल्चसूत्रों की अपेक्षा इसमें कतिपय रोचक विशिष्टतायें पाई जाती हैं। कात्यायन ने वेदि निर्माण के आवश्यक समस्त रेखागणितीय विषयों का विवरण विशेष क्रमबद्ध रूप से यहाँ प्रस्तुत किया है । इसके ऊपर दो टीकायें उपलब्ध होती हैं - महीधर - महीधर काशी के रहने वाले प्रकाण्ड वैदिक थे । वेद तथा तन्त्र के विषय में इनके अनेक प्रौढ़ ग्रन्थरत्न आज भी मिलते हैं। इन्होंने अपने 'मन्त्र-महोदधि' की समाप्ति एक हज़ार पाँच सौ नवासी ईस्वी में तथा विष्णुभक्तिकल्पलता प्रकाश की रचना एक हज़ार पाँच सौ सत्तानवे ईस्वी में की । कातीय शुल्बसूत्रों की - व्याख्या का रचना-काल संवत् एक हज़ार छः सौ छियालीस है ।