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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। 2016 दिलीप ट्रॉफी, दिलीप ट्रॉफी भारत में एक प्रथम श्रेणी क्रिकेट टूर्नामेंट के 55 वें मौसम हो जाएगा। जून 2016 में, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने घोषणा की कि टूर्नामेंट दिन-रात के मैचों की सुविधा होगी और गुलाबी गेंद का प्रयोग किया जाएगा। टूर्नामेंट तीन टीमों ने चुनाव लड़ा जाएगा। अगस्त 2016 में बीसीसीआई ने पुष्टि की है कि तीन टीमों इंडिया रेड, इंडिया ब्लू और इंडिया ग्रीन एक राउंड रोबिन लीग चरण में खेलना होगा। अंतिम के साथ पांच दिनों पिछले करने के लिए, 10 सितंबर को शुरू करने के लिए अनुसूचित इन मैचों में से प्रत्येक को चार दिनों के लिए पिछले जाएगा। . संदीप शर्मा भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी हैं। यह पंजाब के लिए कई घरेलू मैच खेल चुके हैं। यह 2013 में किंग्स एलेवन पंजाब के लिए आईपीएल में खेले थे। . दिलीप ट्रॉफी 2016 और संदीप शर्मा आम में एक बात है (यूनियनपीडिया में): प्रथम श्रेणी क्रिकेट। प्रथम श्रेणी क्रिकेट तीन अथवा अधिक दिन का परिमित अवधि का क्रिकेट का एक प्रारूप है जिसमें दोनों टीमों के ग्यारह-ग्यारह खिलाड़ी खेलते हैं। इसमें दोनों टीमें पूर्ण पारियाँ खेलती हैं जबकी अभ्यास मैच में केवल एक पारी अथवा इच्छानुसार कम अधिक किया जा सकता है और इस प्रकार यह अभ्यास मैच से अलग है। टेस्ट क्रिकेट इसी का एक उच्चतम गुणवता वाला खेल है, यद्दपि प्रथम श्रेणी शब्द का उपयोग इसके घरेलू प्रतियोगिता होने की ओर इंगित करता है। . दिलीप ट्रॉफी 2016 38 संबंध है और संदीप शर्मा 6 है। वे आम 1 में है, समानता सूचकांक 2.27% है = 1 / (38 + 6)। यह लेख दिलीप ट्रॉफी 2016 और संदीप शर्मा के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। दो हज़ार सोलह दिलीप ट्रॉफी, दिलीप ट्रॉफी भारत में एक प्रथम श्रेणी क्रिकेट टूर्नामेंट के पचपन वें मौसम हो जाएगा। जून दो हज़ार सोलह में, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने घोषणा की कि टूर्नामेंट दिन-रात के मैचों की सुविधा होगी और गुलाबी गेंद का प्रयोग किया जाएगा। टूर्नामेंट तीन टीमों ने चुनाव लड़ा जाएगा। अगस्त दो हज़ार सोलह में बीसीसीआई ने पुष्टि की है कि तीन टीमों इंडिया रेड, इंडिया ब्लू और इंडिया ग्रीन एक राउंड रोबिन लीग चरण में खेलना होगा। अंतिम के साथ पांच दिनों पिछले करने के लिए, दस सितंबर को शुरू करने के लिए अनुसूचित इन मैचों में से प्रत्येक को चार दिनों के लिए पिछले जाएगा। . संदीप शर्मा भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी हैं। यह पंजाब के लिए कई घरेलू मैच खेल चुके हैं। यह दो हज़ार तेरह में किंग्स एलेवन पंजाब के लिए आईपीएल में खेले थे। . दिलीप ट्रॉफी दो हज़ार सोलह और संदीप शर्मा आम में एक बात है : प्रथम श्रेणी क्रिकेट। प्रथम श्रेणी क्रिकेट तीन अथवा अधिक दिन का परिमित अवधि का क्रिकेट का एक प्रारूप है जिसमें दोनों टीमों के ग्यारह-ग्यारह खिलाड़ी खेलते हैं। इसमें दोनों टीमें पूर्ण पारियाँ खेलती हैं जबकी अभ्यास मैच में केवल एक पारी अथवा इच्छानुसार कम अधिक किया जा सकता है और इस प्रकार यह अभ्यास मैच से अलग है। टेस्ट क्रिकेट इसी का एक उच्चतम गुणवता वाला खेल है, यद्दपि प्रथम श्रेणी शब्द का उपयोग इसके घरेलू प्रतियोगिता होने की ओर इंगित करता है। . दिलीप ट्रॉफी दो हज़ार सोलह अड़तीस संबंध है और संदीप शर्मा छः है। वे आम एक में है, समानता सूचकांक दो.सत्ताईस% है = एक / । यह लेख दिलीप ट्रॉफी दो हज़ार सोलह और संदीप शर्मा के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
लखनऊः यूपी सरकार एक बार फिर उड़नखटोला खरीदने जा रही है। खास बात ये है कि इस खरीद के नाम पर अब एक बार फिर प्रदेश के पांच वरिष्ठ अधिकारी सिंगापुर जाएंगे। इसके लिए पांच अफसरों की कमेटी बनाई गई है। इसमें नागरिक उड्डयन विभाग के प्रमुख सचिव, सचिव, निदेशक, प्रबंधक (परिचालन) और मुख्य अभियंता शामिल होंगे। बता दें कि सरकार ने अभी हाल ही में एक हेलीकॉप्टर खरीदा है। - एशिया के सबसे बड़े एअर शो का आयोजन सिंगापुर में 16 से 21 फरवरी तक होना है। - इसमें कई तरह के हेलीकॉप्टर और वायुयान निर्माता अपने वायुयानों का एरियल डिस्पले भी करेंगे। - इसमें उनकी साज-सज्जा के साथ फीचर्स के बारे में भी बताया जाएगा। - अब कानपुर देहात की तहसील रसूलाबाद से भी जहाज उड़ सकेंगे। - राज्य सरकार ने यहां राजकीय हवाई पट्टी के निर्माण की मंजूरी दे दी है। - इसकी लागत करीब 125 करोड़ आंकी गई है। - बताया जा रहा है कि निदेशक नागरिक उड्डयन वायुयानों के चयन से संबंधित कार्यवाही पूरी कराएंगे। - बाकी अफसर वायुयानों को देखकर उसका चयन करने में अपनी राय देंगे।
लखनऊः यूपी सरकार एक बार फिर उड़नखटोला खरीदने जा रही है। खास बात ये है कि इस खरीद के नाम पर अब एक बार फिर प्रदेश के पांच वरिष्ठ अधिकारी सिंगापुर जाएंगे। इसके लिए पांच अफसरों की कमेटी बनाई गई है। इसमें नागरिक उड्डयन विभाग के प्रमुख सचिव, सचिव, निदेशक, प्रबंधक और मुख्य अभियंता शामिल होंगे। बता दें कि सरकार ने अभी हाल ही में एक हेलीकॉप्टर खरीदा है। - एशिया के सबसे बड़े एअर शो का आयोजन सिंगापुर में सोलह से इक्कीस फरवरी तक होना है। - इसमें कई तरह के हेलीकॉप्टर और वायुयान निर्माता अपने वायुयानों का एरियल डिस्पले भी करेंगे। - इसमें उनकी साज-सज्जा के साथ फीचर्स के बारे में भी बताया जाएगा। - अब कानपुर देहात की तहसील रसूलाबाद से भी जहाज उड़ सकेंगे। - राज्य सरकार ने यहां राजकीय हवाई पट्टी के निर्माण की मंजूरी दे दी है। - इसकी लागत करीब एक सौ पच्चीस करोड़ आंकी गई है। - बताया जा रहा है कि निदेशक नागरिक उड्डयन वायुयानों के चयन से संबंधित कार्यवाही पूरी कराएंगे। - बाकी अफसर वायुयानों को देखकर उसका चयन करने में अपनी राय देंगे।
कृपा का सही मतलब क्या है? कृपा कैसे पाएं? कृपा का सही मतलब क्या है और किस तरह से हम अपने आपको कृपा के लिये उपलब्ध करा सकते हैं? यहाँ सद्गुरु समझा रहे हैं कि कृपा कोई अमूर्त, गैरहाजिर विचार या कल्पना नहीं है पर ये एक जीवित शक्ति है जिसे हम अपने जीवन में आमंत्रित कर सकते हैं। वे आगे समझा रहे हैं कि कैसे हम अपने आपको कृपा का पात्र बना सकते हैं, और कृपा हमारे लिये क्या-क्या कर सकती है? हम अपनी शक्ति, बुद्धि और जानकारी से जो कुछ भी कर सकते हैं, वो सब बहुत सीमित है। अगर आप कृपा की खिड़की को खोल सकें तो जीवन ऐसे अद्भुत तरीके से चलेगा, जो संभव होने की आपने कल्पना भी नहीं की होगी। आपके सामने हर जगह यह सवाल है, "मैं ऐसा कैसे कर सकता हूँ"? पर, ये कोई करने वाली चीज़ नहीं है। आपके अंदर, अगर कोई खाली जगह है जहाँ आपके विचार और पूर्वाग्रह, आपकी भावनायें, विचारधारायें और फिलोसोफी अंदर ना आ सकें, तो आपके जीवन में कृपा एक प्रबल शक्ति की तरह होगी। अगर आप अपने ही विचारों, अपनी ही भावनाओं और कल्पनाओं आदि से भरे हुए हैं तो कृपा आपके आसपास बहते हुए भी, आपके अंदर कुछ नहीं होगा। ज्यादातर लोगों के जीवन के साथ यही त्रासदी है कि उनके आसपास एक जबर्दस्त संभावना हमेशा बनी रहने के बावजूद वे उसे पूरी होने नहीं देते। सभी आध्यात्मिक प्रक्रियाओं के लिये विचार, फोकस और करने के तरीके यही हैं कि आपके व्यक्तित्व को फाड़ डाला जाये, खत्म कर दिया जाये, जिससे आपके अंदर कोई खाली उपस्थिति बने और वो आपके लिये कृपा और संभावना का ऐसा प्रवेशद्वार बने जिसके बनने की संभावना के बारे में आपने कभी सोचा ही न होगा। #2. क्या आपमें से कृपा रिसती है? सवाल यह नहीं है कि आप पर कृपा काम कर रही है या नहीं? वह तो कर ही रही है, वरना आपका अस्तित्व ही संभव नहीं। सवाल सिर्फ यह है कि क्या कृपा आपमें से रिसकर बह रही है( यानि, क्या आप दूसरों के लिये सहायक हैं, भलाई का काम कर रहे हैं) या फिर आप इसे किसी खराब चीज़ में बदल रहे हैं और दूसरों के साथ दुष्टता का व्यवहार कर रहे हैं? एक अंधे ऋषि थे जो किसी जंगल में रहते थे। लोग बहुत कम ही, शायद कभी ही उस तरफ़ से गुजरते होंगे। जब वे उधर से निकलते तो उन्हें कुछ दे देते और ऋषि उसी से अपना गुजारा चलाते। एक दिन, राजा, मंत्री और उनके सैनिकों की टुकड़ी जंगल में शिकार के लिये आये। शिकार के दौरान एक हिरन का पीछा करते हुए रास्ता भूल गये। राजा बाकी लोगों से बिछड़ गया। चूंकि राजा के पास सबसे तेज दौड़ने वाला घोड़ा था, तो वह बहुत आगे निकल गया और भटक गया। वे एक दूसरे को ढूंढते रहे और खो गये। फिर, एक सैनिक ने उन ऋषि को देखा और पूछा, "क्या आपने राजा को देखा है"? ऋषि ने कहा, "नहीं"! फिर सेनापति आया और उसने भी वही पूछा। ऋषि ने उसे भी नहीं कहा। फिर मंत्री वहाँ पहुँचा और उसने भी वही सवाल किया। ऋषि ने फिर से नहीं कहा। जब राजा खुद पहुँचा तो उसके पूछने पर ऋषि ने राजा को तुरंत पहचान लिया और कहा, "आपके लोग आपको ढूँढते हुए यहाँ आये थे। पहले सैनिक आया, फिर सेनापति और फिर मंत्री। राजा ने देखा कि ऋषि अंधे थे तो उसने पूछा, "हे दिव्य मुनि, आपको कैसे पता चला कि पहले सैनिक आया था, फिर सेनापति और फिर मंत्री? ऋषि बोले, " जो पहला व्यक्ति आया, उसने कहा, "ओ अंधे, क्या तुमने हमारे राजा को इधर आते देखा है"? तो मैं समझ गया कि वो आपका सैनिक होगा! दूसरे ने अधिकार के साथ पर बिना सन्मान के पूछा तो मुझे लगा कि वो आपका कोई सैनिक अधिकारी ही होगा। तीसरा जो आया, उसने बहुत सन्मान के साथ पूछा, तो मैं समझ गया कि वह आपका मंत्री होगा। जब आप आये और जब आपने मेरे पैर छू कर मुझे दिव्य मुनि कहा, तो मैं समझ गया कि आप राजा होंगे। आप चाहे खाना खायें या पानी पियें या साँस लें, ये सब कृपा ही है। हाइड्रोजन के दो भाग ऑक्सीजन के एक भाग के साथ मिल कर जीवन देने वाला पानी बनाते है। यह भी कृपा ही है। आप इसको समझा सकते हैं पर आप ये नहीं जानते कि ऐसा क्यों होना चाहिये? यह सब जो कुछ भी हो रहा है, वह कृपा ही है। तो अगर आप खाना खा रहे हैं, पानी पी रहे हैं और साँस ले रहे हैं तो आपमें से भी कृपा पसीजनी ही चाहिये, है कि नहीं? पर, दुर्भाग्यवश, लोग अपने अंदर बहुत अच्छी, अद्भुत चीजें ले तो लेते हैं पर वे इनसे दुष्टतापूर्ण चीजें बनाते हैं और उन्हें दूसरों पर खराब, बकवास चीजों के रूप में डालते हैं। पर, आप पेड़ को देखिये। आप उसमें कचरा डालते हैं लेकिन वो आपको सुगंध देता है, छाया, फल और फूल देता है। अगर आप पेड़ का तरीका सीख लें तो आपमें से भी कृपा ही बरसेगी, पसीजेगी। जब आपमें से कृपा रिसती होगी तो लोग उसे पोषित करना चाहेंगे, बढ़ाना चाहेंगे और उसका हिस्सा बनना चाहेंगे। #3. आप कैसे जानेंगे कि गुरु की कृपा आप पर काम कर रही है? प्रश्न : हमें यह कैसे पता चलेगा कि गुरु की कृपा हम पर है? सद्गुरुः जब आप किसी होटल की लॉबी में होते हैं तो वहाँ, पृष्ठभूमि में, हल्का-हल्का संगीत चल रहा होता है पर क्या आपने ध्यान दिया है कि कुछ समय बाद ये आपके ख्याल में भी नहीं आता, आपको महसूस भी नहीं होता कि वहाँ कोई संगीत भी है। सिर्फ अगर आप किसी से बातचीत करना चाहें, तो आपको लग सकता है कि वो संगीत बाधा डाल रहा है, वरना वो संगीत तो हमेशा चल ही रहा होता है और आपको पता भी नहीं चलता। ऐसे ही, आपके घर में किसी मशीन की आवाज़, हल्की घरघराहट, आ रही होती है पर आपका ध्यान उस पर तभी जाता है, जब आप घर में घुस रहे होते हैं। इसी तरह, सामान्य रूप से, आपको पता भी नहीं चलता कि आपकी साँस चल रही है पर अगर एक भी मिनिट ये न चले तो आपको पता चलेगा। यही वजह है कि आपको यह पता भी नहीं होता कि दिव्यता का हाथ हमेशा ही आप पर है। जब कोई चीज़ आपके लिये 24 घंटे उपलब्ध हो तो क्या फर्क पड़ेगा अगर आप यह न जानें कि वो है या नहीं? जीवन तो फिर भी चलता रहेगा पर कृपा में होने के अपने आनंद को आप खो देंगे। कृपा कोई ऐसी चीज़ नहीं है जो आप पर कभी हो और कभी न हो। यह कोई ऐसी बात नहीं है जिस पर आप हर सप्ताहांत में सवाल उठायें। यह तो हर समय है ही। अगर आप इसके बारे में जागरूक रहेंगे तो आपको कृपा में होने के आनंद का पता जरूर चलेगा। मैंने यह बात कई तरीकों से कही है पर मुझे पता है कि आप में से ज्यादातर लोगों ने इस पर ध्यान नहीं दिया है। अगर आप मेरे साथ एक पल के लिये भी बैठें तो आपके जीवन में कोई निजीपन नहीं रह जायेगा। जैसे ही आप मेरे साथ बैठे, खास तौर पर मेरे द्वारा दीक्षित हुए तो फिर कृपा है या नहीं जैसी कोई चीज़ नहीं रह जायेगी - कृपा हर समय रहेगी ही! कृपा का मतलब यह है कि प्रकाश के लिये कोई बाहरी स्रोत आप नहीं ढूँढते, आप खुद प्रकाश के स्रोत बन जाते हैं। हर समय भले ही इसका अनुभव न हो पर, अगर एक पल के लिये भी आप समझ लें कि आप प्रकाश से भरे हुए हैं तो इसका मतलब है कि आपको कृपा ने छुआ है। हम ईशा में ऐसी बहुत सी चीज़ें कर रहे हैं जिनसे आपको किसी तरह से, कम से कम एक पल के लिये यह अनुभव मिल जाये। अगर इसने आपको एक पल के लिये भी छुआ हो तो, चाहे ये आपके पास वापस लौट कर न भी आये तो भी आपका जीवन पहले जैसा नहीं रहेगा। आप उस एक पल के साथ जुड़े रह सकते हैं और, आसपास के किसी भी व्यक्ति की तुलना में, अपना जीवन बिल्कुल अलग ढंग से जी सकते हैं। अगर ये हर समय आपके साथ है तो इसका वर्णन नहीं किया जा सकता। बात सिर्फ इतनी है कि आपकी उम्मीद यह है कि कृपा के द्वारा आपकी सारी इच्छायें, योजनायें पूरी हो जायें। आपकी यह वही पुरानी आदत है कि मंदिर या चर्च जा कर भगवान से कहते हैं कि आपके लिये उसको यह या वह चीज़ जरूर करनी चाहिये। अगर वो ऐसा न करे तो आप अपने भगवान ही बदल देते हैं। कृपा का काम आपकी छोटी मोटी इच्छायें, योजनायें पूरी करना नहीं है। वैसे भी आपकी योजनायें हर समय बदलती रहती हैं। अपने जीवन में, अलग अलग समय पर, आप सोचते थे, "यही सबकुछ है" और फिर, अगले ही मिनिट में उसे बदल देते थे। आप छुट्टी मनाने जाना चाहते हैं, तो पूछते हैं, "सद्गुरु, आप मेरी मदद क्यों नहीं करते"? तो, हर दूसरे दिन यह मत पूछते रहिये, "क्या कृपा मेरे साथ है"? "क्या कृपा मेरे साथ नहीं है"? किसी गुरु की कृपा आपकी योजनायें पूरी करने के लिये नहीं होती। गुरु की कृपा तो जीवन की योजनायें पूरी करने के लिये होती है। ये आपको जीवन का हिस्सा बनाने के लिये है, जीवन का मकसद पूरा करने के लिये है। प्रश्नकर्ता : मैं एक डॉक्टर हूँ। कभी कभी, मेरे दवाखाने में, जब मैं किसी मरीज का इलाज कर रहा होता हूँ तो मुझे लगता है कि मेरे नियंत्रण के बाहर, किसी तरह की कृपा मुझे मरीज का इलाज करने में मदद कर रही है। मैं इसे कैसे समझाऊँ? सद्गुरु : किसी दूसरे का जीवन अपने हाथ में ले लेना कोई अच्छी बात नहीं है क्योंकि इसका असर आप पर एक खास तरह से पड़ता है। अपने खुद के जीवन के साथ आप थोड़ा बहुत, इधर उधर कर सकते हैं, उसके साथ खेल सकते हैं। पर जब किसी और का जीवन आपके हाथों में हो तो आप थोड़ा भी इधर उधर नहीं कर सकते। आप चाहे डॉक्टर हों या ड्राइवर, आप दूसरों का जीवन अपने हाथ में ले रहे हैं। अगर आप गुरु हैं तो स्थिति और भी ज्यादा खराब हो जाती है। बहुत सारे लोगों का जीवन अपने हाथ में ले लेना अपने सिर पर एक बड़ा बोझ ढोने जैसा है, खास तौर पर तब, जब वे आपके सामने एक खास तरीके से बैठें हों या आपके सामने असहाय अवस्था में सर्जरी टेबल पर पड़े हों। औषधि/इलाज की किसी भी प्रणाली - आयुर्वेद, सिद्ध, एलोपैथी या कुछ और - को अगर आपने अच्छी तरह से देखा, समझा है तो आप जानते हैं कि किसी के इलाज में आपकी भूमिका 50% भी नहीं होती। दुनिया के महानतम डॉक्टरों का भी यही अनुभव है कि जिन्होंने लोगों के साथ अद्भुत काम किया है, वे लोग बहुत सामान्य ढंग से ऐसी भाषा बोलते हैं। अगर आपको ईश्वर में विश्वास है तो ये बहुत आसान है। आप ऊपर देख कर कह सकते हैं, "हे राम"! या "हे शिव"! या कुछ भी! अगर मरीज़ मर भी जाये तो भगवान की गोद में ही तो जायेगा, तो ये ठीक ही है। विश्वास करने वालों को सामान्य रूप से कृपा का अनुभव नहीं होता। उन्हें इस पर बस विश्वास होता है। ये बहुत आसान, सुविधाजनक भी है, कुछ और करना ही नहीं है। पर, इन विश्वास प्रणालियों को अगर आप नहीं मानते तो आपको समझ में आ जाता है कि चीज़ें आपके मुताबिक हों, इसमें आपकी भूमिका बहुत कम होती है और तभी आपको कृपा की उपस्थिति की समझ आती है। वास्तविक समस्या और परेशानी उन लोगों को होती है जिन्हें पता ही नहीं चलता कि वे विश्वास करें या न करें - वे लोग जिनकी बुद्धि दोनों चीज़ों के साथ संघर्ष में होती है! जो कभी विश्वास करता है और कभी नहीं करता - जिसकी बुद्धि को दोनों के साथ परेशानी है। वह व्यक्ति जो कभी तो ईश्वर में, उसके किसी भी रूप में विश्वास करता है, और कभी कभी नहीं भी करता, जो अपने तर्क और अपनी काबिलियत की सीमितताओं के साथ संघर्ष में है, और जो ऐसे आयामों के साथ भी सहज नहीं है जो सामने दिखते न हों, ऐसे व्यक्ति के लिये कृपा की परिस्थिति उसके जीवन में एकदम स्पष्ट होती है। वह बिल्कुल ठीक ठीक समझता है कि जब उसे कोई संकरा पुल पार करना हो तो दूसरे आयाम की मदद के बिना कुछ नहीं हो सकता। सवाल यह है कि कृपा की यह उपस्थिति आपके पास कैसे आये? क्या यह किसी संयोग से आती है या इसके लिये कोई तरीका है? गुरुत्वाकर्षण हर समय आप पर काम कर रहा है, चाहे आप सतर्क हों या न हों। कृपा सूक्ष्म है। आप जब तक सतर्क, सजग नहीं होते, ये नहीं आयेगी( आपके चारों ओर होने के बावजूद)। कृपा आपकी उपस्थिति के प्रति बहुत ज्यादा संवेदनशील होती है। अगर आप हाजिर नहीं हैं तो ये हाजिर नहीं होगी। यही स्वभाव दिव्यता का है। ज्यादातर लोग इसी वजह से इसे पाने से चूक जाते हैं क्योंकि ज्यादातर वे गैर हाजिर होते हैं। आपके विचार, आपकी भावनायें, आपकी गतिविधि आप पर राज कर रही होती है। आपकी हाजिरी या उपस्थिति आप पर राज नहीं करती। किसी आध्यात्मिक प्रक्रिया से आप अपने में बदलाव लाने की कोशिश करते हैं। आपका शरीर, मन और आपकी भावनायें आपके साथ साथ आते ही हैं पर आपको चाहिये कि आपकी हाजरी मुख्य रूप से अधिकारी बन कर रहे। चूंकि आप हैं, इसीलिये आपने अपने विचारों, अपने शरीर और अपनी भावनाओं को अपने से ज्यादा महत्व दिया है। इस अस्त व्यस्त दशा में आप कृपा को महसूस नहीं कर सकते। अगर आप अपने अंदर की ऐसी दशा को उल्टा कर दें तो अचानक ही सामान्य परिस्थिति असामान्य बन जायेगी। जीवन का हरेक पहलू पूरी तरह से जीवन के अलग अनुभव में पहुँच जायेगा। ये इसलिये नहीं होता कि आप किसी में कुछ विश्वास करते हैं। विश्वास प्रणालियों की वजह से आप कल्पनायें कर सकते हैं, यह समस्या विश्वास करने वालों के साथ होती ही है। अगर आप अपने तार्किक मूल में, अपने आधार पर स्थित नहीं हैं तो यह पूरी तरह से संभव है कि आप अपनी कल्पनाओं में उड़ने लगेंगे और सोचेंगे कि यही कृपा है। अपने आप में, एक मजबूत तार्किक आधार पर रहना और फिर भी कृपा के लिये उपलब्ध हो पाना, ये कुछ ऐसा है जो आपको अपने लिये करना चाहिये, करना है। तात्विक(दिव्यदर्शी) और तार्किक, ये दो क्षेत्र समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। अगर आपका तार्किक क्षेत्र सही ढंग से स्थिर है, स्थापित है तो आपके जीवन की सामान्य, छोटी-छोटी बातें ठीक से होती रहेंगी। अगर आपके जीवन में तात्विक क्षेत्र खुला हुआ हो तो आपका जीवन का अनुभव बहुत ही अद्भुत होगा। अगर ऐसा न हुआ, अगर आप बस तार्किक क्षेत्र को संभालते रहे तो आपकी व्यवस्था अच्छी रहेगी पर जीवन के अनुभव अच्छे नहीं होंगे। दूसरी ओर, अगर आपने तार्किक क्षेत्र की ओर ध्यान नहीं दिया तो आपके अनुभव बढ़िया हो सकते हैं पर आपकी व्यवस्थायें गड़बड़ होंगीं। तो, तार्किक क्षेत्र को सही रख कर भी तात्विक पक्ष के लिये तैयार होने, खुल जाने की प्रक्रिया को दुनिया के समाजों ने ठीक तरह से संभाला नहीं है। हमसे या तो यह छूट जाता है या वह, इन दोनों के साथ में हुए बिना हमारा जीवन सुंदर नहीं होगा। जब आपने अपने सामान्य काम अच्छी तरह से कर लिये हों तो अब समय है कि आप अपने आपको तात्विक/दिव्यदर्शी क्षेत्र के लिये उपलब्ध करायें। इसमें आपके तर्क काम नहीं करेंगे, वे बस आपको सीमित कर देंगे। "मैं अपने तर्कों के साथ कैसे लड़ सकता हूँ"? आप तर्क व्यवस्था को बंद करने के पीछे न पड़ें, बस उसके द्वारा जो विचार पैदा हो रहे हैं, उनकी ओर ध्यान देना बंद कर दें। दस जन्मों तक कोशिश कर के भी आप मन को खत्म नहीं कर सकते पर उसके उत्पादों की ओर ध्यान देना आप बंद कर सकते हैं। मन विचार पैदा करता है, आप उनकी ओर ध्यान न दें। ऐसा करने से आप भक्ति की स्वाभाविक प्रक्रिया का हिस्सा बन जाएंगे। भक्ति का मतलब किसी का गुणगान करना नहीं है। भक्ति तो वह है जिसमें आप ही नहीं होते। आप अभी जिसे "मैं" कहते हैं वह तो विचारों, भावनाओं और आपकी राय का एक गट्ठर मात्र है। अगर आप इन तीन चीजों को अलग रख दें तो आपका व्यक्तित्व हाजिर नहीं रह पायेगा। तब, आपमें जो जीवन है, वह उपस्थित होगा। अगर यह उपस्थित है, तो आप कृपा से चूक नहीं सकते। एक शिष्य ने अपने झेन गुरु के पास जा कर पूछा, "अपने आध्यात्मिक विकास के लिये मैं क्या करूँ"? गुरु ने जवाब दिया, "फर्श साफ करो, लकड़ी काटो, खाना बनाओ"! शिष्य बोला, "उसके लिये मैं यहाँ क्यों आऊँ, यह सब तो मैं घर पर भी कर सकता हूँ"। गुरु मुस्कुराये, "पर जब तुम अपने घर का फर्श साफ करते हो तो वह तुम्हारा अपना फर्श है। तुम अपने पड़ोसी का फर्श साफ नहीं करोगे, चाहे वह कितना भी गंदा हो गया हो। लकड़ी काटना और खाना बनाना तुम सिर्फ अपने लिये करोगे या उनके लिये जिन्हें तुम अपना मानते हो। तुम सभी काम अपने आप को बढ़ाने के लिये करते हो बजाय इसके कि हर काम तुम अपने आपको खत्म करने के लिये करो"! तो, हम, अपनी गतिविधि को, अपने लिये बंधन बनाते हैं या मुक्ति की प्रक्रिया - यही फर्क महत्वूर्ण है। आप कोई भी काम या तो अपने आपको बढ़ाने के लिये करते हैं, या फिर अपने आपको खत्म करने के लिये। या तो आप अपने लिये कर्म के बंधन बांध रहे हैं या फिर अपने कर्म को योग बना रहे हैं। बस, यही सब कुछ है। आप तो बस फर्श साफ करें, खाना बनायें या कोई पेड़ लगायें - अपनी ज़मीन पर नहीं, पेड़ की छाया में खुद या अपने बच्चों के बैठने के लिये नहीं - बस इसे लगायें, जिससे आपका कोई दुश्मन भी इसके नीचे बैठ कर इसका आनंद ले। तभी, यह गतिविधि खत्म होने की, पिघल जाने की प्रक्रिया बनती है। आप जिसे मैं और मेरा मानते हैं, उसके लिये आप जितना कम करेंगे, उतने ही ज्यादा आप कृपा के लिये उपलब्ध रहेंगे। ज्यादातर लोग सिर्फ वही करते हैं जिसे वे अपना कर्तव्य समझते हैं। सिर्फ तभी, जब किसी चीज़ के लिये, आपमें प्रेम या भक्ति का भाव बहुत गहरा हो, तभी आप वह सब कुछ करेंगे जो आप कर सकते हैं। अपने जीवन के हर पल में, अगर आप वो सब कुछ नहीं कर रहे हैं, जो आप कर सकते हैं, तो आप अपने आपको किस चीज़ के लिये बचा कर रख रहे हैं? क्या ये महत्वपूर्ण नहीं है कि अपने जीवन के हर पल में आप वो सब कुछ करें जो आप कर सकते हैं? शामिल होने का यह गहन भाव ही भक्ति है। भक्ति कोई सौदा, कोई समझौता, कोई लेन देन नहीं है। "सद्गुरु, मैं आपके प्रति इतना समर्पित रहा हूँ पर आपने मेरे लिये कुछ नहीं किया"! आपके लिये कुछ करना मेरा काम नहीं है। सौदा करने वाले लोग अलग होते हैं, भक्त अलग होते हैं। "मुझे कुछ भी नहीं चाहिये, मेरे लिये कुछ भी होना ज़रूरी नहीं है", यही भक्ति है। "मुझे क्या मिलेगा", सिर्फ इस एक बात से अगर आप मुक्त हो जायें तो आपका जीवन बहुत ही आनंदमय, भरपूर कृपा वाला हो जायेगा। भक्ति का मतलब है आशाओं, इच्छाओं के दर्द से मुक्त हो जाना। जब आपका किसी तरह की चीज़ में कोई स्वार्थ नहीं होता, आपको कोई रुचि नहीं होती, तब आप सबसे अच्छा, सबसे ऊँचे स्तर का काम करते हैं और कोई इंसान बस इतना ही कर सकता है। अपनी वो प्रतिबद्धता अगर आप दिखायें, उतने स्तर पर हर उस चीज़ में शामिल हों, जो मौजूद है - तो आप कृपा के लिये उपलब्ध हो जायेंगे। भक्ति का मतलब है बिना किसी सवाल के, बिना खुद को रोके, बिना कुछ पीछे रखे, पूरी तरह से शामिल होना। आपका शामिल होना अगर उस तरह का है तो आप पर कृपा एक झरने की तरह बहेगी, बूँदों में नहीं टपकेगी। जब आप पर ऐसी कृपा बरसेगी तो आपके जीवन का मकसद पूरा हो जायेगा। अगर आपका शरीर, आपका मन और आपकी ऊर्जा बाधा नहीं बनते और आप कृपा के लिये उपलब्ध हैं तो आपको यह चिंता करने की ज़रूरत नहीं रहेगी कि आपके जीवन का क्या होगा? जो भी होगा, सबसे ज्यादा अद्भुत चीजें ही होंगी। इधर उधर घूमते हुए यह समझिये कि आप जो कुछ भी हैं, बहुत छोटे हैं। छोटे होने का मतलब यह नहीं है कि आप शून्य हैं। पर छोटा होना शून्यता के बहुत करीब है। आपको यह भी दिखाने की ज़रूरत नहीं है कि आप छोटे हैं क्योंकि वास्तव में आप बहुत ज्यादा छोटे हैं। आप सिर्फ बड़े होने का दिखावा कर रहे हैं। आप अगर अपने सब दिखावे, सब नाटक बंद कर दें तो आप कृपा को उपलब्ध हो जायेंगे। जीसस ने कहा था, "अगर आपकी एक ही आँख हो तो आपका शरीर प्रकाश से भरा होगा"। दो भौतिक आँखें भेद कराती हैं, अलग अलग दिखाती हैं। वो आपको बताती हैं कि क्या ऊँचा है, क्या नीचा है, कौन पुरुष है, कौन स्त्री है, ये क्या है, वो क्या है! ये दो आँखें वो साधन हैं जिनसे आप टिके रहते हैं। "अगर आपकी एक आँख हो" का मतलब यह नहीं है कि आप एक आँख बंद कर लें। इसका मतलब सिर्फ यही है कि आप कोई भेदभाव नहीं करते, आप सभी चीज़ों को एक ही समझते हैं, एक ही जैसा। अगर आप ऐसे हो जायें तो आपका शरीर प्रकाश से भर जायेगा। यही कृपा है। आप नहीं जानते कि कोई पेड़ वास्तव में कैसे काम करता है? आपको नहीं पता कि घास का तिनका कैसे बनता है? आपको नहीं मालूम कि इस ब्रह्मांड में कोई भी चीज़ किस तरह से काम कर रही है? तो, यहाँ जो कुछ है वो आपसे थोड़ी ज्यादा बुद्धिमान लगती है। जब आप इतने बुद्धू हैं तो बेहतर होगा कि आप हर चीज़ के सामने झुकें। जब पेड़ को देखें तो झुकें, पहाड़ को देखें तो झुकें। अगर आप घास का तिनका देखें तो भी झुकें। बालू का एक कण भी जीवन के बारे में आपसे ज्यादा जानता है। आप यहाँ बहुत छोटे हैं, जूनियर हैं। आपके आने के बहुत पहले से वे यहाँ हैं और जीवन के बारे में वे सभी आपसे बहुत ज्यादा जानते हैं। मैं चाहता हूँ कि जब आप चलें तो हर चीज़ पर आपमें आश्चर्य और भक्ति का एक खास भाव होना चाहिये। अगले 24 घंटे तक ऐसा कीजिये। जीवन के दरवाजे खोलने के लिये बस यही होना चाहिये कि आप खुद को बहुत बड़ा न मानें। आप अपने बारे में वह न सोचें जो सही नहीं है। आप अपने बारे में जो कुछ सोचते हैं वो काफी झूठ है क्योंकि अगर हम मूल जीवन की बात करें, तो आप वो कुछ भी नहीं जानते जो ये मिट्टी जानती है। आपका मस्तिष्क वो नहीं कर सकता जो ये मिट्टी कर रही है। तो, जब आपके आसपास इतनी हस्तियाँ हों, तो आपको शांति से, हल्के से चलना चाहिये। अगर आप बस भक्ति के भाव में चलें तो धीरे धीरे आप कृपा की गोद में गिर जायेंगे। एक धागे को दूसरे पर रखने की, जिसमें हर धागा उतना ही अहम है, जितना दूसरा, तो फिर बन जाता है एक शानदार वस्त्र। मेरे प्रिय, ऐसा ही जीवन के बारे में भी है, पहला वाला था और जो बाद में आने वाला है। जो एक असीमित जीव के लिये है - दिव्यता। शरीर ढंकने के लिये ही ये वस्त्र नहीं है, सृष्टि के जैविक सौंदर्य का स्पर्श करा देगा और, एकांत के लिये मार्ग खोल देगा। और समझ की बुद्धिमानी में भीगे हुए धागे। इतने ज्यादा तरह के रंगों और बनावटों के धागे,
कृपा का सही मतलब क्या है? कृपा कैसे पाएं? कृपा का सही मतलब क्या है और किस तरह से हम अपने आपको कृपा के लिये उपलब्ध करा सकते हैं? यहाँ सद्गुरु समझा रहे हैं कि कृपा कोई अमूर्त, गैरहाजिर विचार या कल्पना नहीं है पर ये एक जीवित शक्ति है जिसे हम अपने जीवन में आमंत्रित कर सकते हैं। वे आगे समझा रहे हैं कि कैसे हम अपने आपको कृपा का पात्र बना सकते हैं, और कृपा हमारे लिये क्या-क्या कर सकती है? हम अपनी शक्ति, बुद्धि और जानकारी से जो कुछ भी कर सकते हैं, वो सब बहुत सीमित है। अगर आप कृपा की खिड़की को खोल सकें तो जीवन ऐसे अद्भुत तरीके से चलेगा, जो संभव होने की आपने कल्पना भी नहीं की होगी। आपके सामने हर जगह यह सवाल है, "मैं ऐसा कैसे कर सकता हूँ"? पर, ये कोई करने वाली चीज़ नहीं है। आपके अंदर, अगर कोई खाली जगह है जहाँ आपके विचार और पूर्वाग्रह, आपकी भावनायें, विचारधारायें और फिलोसोफी अंदर ना आ सकें, तो आपके जीवन में कृपा एक प्रबल शक्ति की तरह होगी। अगर आप अपने ही विचारों, अपनी ही भावनाओं और कल्पनाओं आदि से भरे हुए हैं तो कृपा आपके आसपास बहते हुए भी, आपके अंदर कुछ नहीं होगा। ज्यादातर लोगों के जीवन के साथ यही त्रासदी है कि उनके आसपास एक जबर्दस्त संभावना हमेशा बनी रहने के बावजूद वे उसे पूरी होने नहीं देते। सभी आध्यात्मिक प्रक्रियाओं के लिये विचार, फोकस और करने के तरीके यही हैं कि आपके व्यक्तित्व को फाड़ डाला जाये, खत्म कर दिया जाये, जिससे आपके अंदर कोई खाली उपस्थिति बने और वो आपके लिये कृपा और संभावना का ऐसा प्रवेशद्वार बने जिसके बनने की संभावना के बारे में आपने कभी सोचा ही न होगा। #दो. क्या आपमें से कृपा रिसती है? सवाल यह नहीं है कि आप पर कृपा काम कर रही है या नहीं? वह तो कर ही रही है, वरना आपका अस्तित्व ही संभव नहीं। सवाल सिर्फ यह है कि क्या कृपा आपमें से रिसकर बह रही है या फिर आप इसे किसी खराब चीज़ में बदल रहे हैं और दूसरों के साथ दुष्टता का व्यवहार कर रहे हैं? एक अंधे ऋषि थे जो किसी जंगल में रहते थे। लोग बहुत कम ही, शायद कभी ही उस तरफ़ से गुजरते होंगे। जब वे उधर से निकलते तो उन्हें कुछ दे देते और ऋषि उसी से अपना गुजारा चलाते। एक दिन, राजा, मंत्री और उनके सैनिकों की टुकड़ी जंगल में शिकार के लिये आये। शिकार के दौरान एक हिरन का पीछा करते हुए रास्ता भूल गये। राजा बाकी लोगों से बिछड़ गया। चूंकि राजा के पास सबसे तेज दौड़ने वाला घोड़ा था, तो वह बहुत आगे निकल गया और भटक गया। वे एक दूसरे को ढूंढते रहे और खो गये। फिर, एक सैनिक ने उन ऋषि को देखा और पूछा, "क्या आपने राजा को देखा है"? ऋषि ने कहा, "नहीं"! फिर सेनापति आया और उसने भी वही पूछा। ऋषि ने उसे भी नहीं कहा। फिर मंत्री वहाँ पहुँचा और उसने भी वही सवाल किया। ऋषि ने फिर से नहीं कहा। जब राजा खुद पहुँचा तो उसके पूछने पर ऋषि ने राजा को तुरंत पहचान लिया और कहा, "आपके लोग आपको ढूँढते हुए यहाँ आये थे। पहले सैनिक आया, फिर सेनापति और फिर मंत्री। राजा ने देखा कि ऋषि अंधे थे तो उसने पूछा, "हे दिव्य मुनि, आपको कैसे पता चला कि पहले सैनिक आया था, फिर सेनापति और फिर मंत्री? ऋषि बोले, " जो पहला व्यक्ति आया, उसने कहा, "ओ अंधे, क्या तुमने हमारे राजा को इधर आते देखा है"? तो मैं समझ गया कि वो आपका सैनिक होगा! दूसरे ने अधिकार के साथ पर बिना सन्मान के पूछा तो मुझे लगा कि वो आपका कोई सैनिक अधिकारी ही होगा। तीसरा जो आया, उसने बहुत सन्मान के साथ पूछा, तो मैं समझ गया कि वह आपका मंत्री होगा। जब आप आये और जब आपने मेरे पैर छू कर मुझे दिव्य मुनि कहा, तो मैं समझ गया कि आप राजा होंगे। आप चाहे खाना खायें या पानी पियें या साँस लें, ये सब कृपा ही है। हाइड्रोजन के दो भाग ऑक्सीजन के एक भाग के साथ मिल कर जीवन देने वाला पानी बनाते है। यह भी कृपा ही है। आप इसको समझा सकते हैं पर आप ये नहीं जानते कि ऐसा क्यों होना चाहिये? यह सब जो कुछ भी हो रहा है, वह कृपा ही है। तो अगर आप खाना खा रहे हैं, पानी पी रहे हैं और साँस ले रहे हैं तो आपमें से भी कृपा पसीजनी ही चाहिये, है कि नहीं? पर, दुर्भाग्यवश, लोग अपने अंदर बहुत अच्छी, अद्भुत चीजें ले तो लेते हैं पर वे इनसे दुष्टतापूर्ण चीजें बनाते हैं और उन्हें दूसरों पर खराब, बकवास चीजों के रूप में डालते हैं। पर, आप पेड़ को देखिये। आप उसमें कचरा डालते हैं लेकिन वो आपको सुगंध देता है, छाया, फल और फूल देता है। अगर आप पेड़ का तरीका सीख लें तो आपमें से भी कृपा ही बरसेगी, पसीजेगी। जब आपमें से कृपा रिसती होगी तो लोग उसे पोषित करना चाहेंगे, बढ़ाना चाहेंगे और उसका हिस्सा बनना चाहेंगे। #तीन. आप कैसे जानेंगे कि गुरु की कृपा आप पर काम कर रही है? प्रश्न : हमें यह कैसे पता चलेगा कि गुरु की कृपा हम पर है? सद्गुरुः जब आप किसी होटल की लॉबी में होते हैं तो वहाँ, पृष्ठभूमि में, हल्का-हल्का संगीत चल रहा होता है पर क्या आपने ध्यान दिया है कि कुछ समय बाद ये आपके ख्याल में भी नहीं आता, आपको महसूस भी नहीं होता कि वहाँ कोई संगीत भी है। सिर्फ अगर आप किसी से बातचीत करना चाहें, तो आपको लग सकता है कि वो संगीत बाधा डाल रहा है, वरना वो संगीत तो हमेशा चल ही रहा होता है और आपको पता भी नहीं चलता। ऐसे ही, आपके घर में किसी मशीन की आवाज़, हल्की घरघराहट, आ रही होती है पर आपका ध्यान उस पर तभी जाता है, जब आप घर में घुस रहे होते हैं। इसी तरह, सामान्य रूप से, आपको पता भी नहीं चलता कि आपकी साँस चल रही है पर अगर एक भी मिनिट ये न चले तो आपको पता चलेगा। यही वजह है कि आपको यह पता भी नहीं होता कि दिव्यता का हाथ हमेशा ही आप पर है। जब कोई चीज़ आपके लिये चौबीस घंटाटे उपलब्ध हो तो क्या फर्क पड़ेगा अगर आप यह न जानें कि वो है या नहीं? जीवन तो फिर भी चलता रहेगा पर कृपा में होने के अपने आनंद को आप खो देंगे। कृपा कोई ऐसी चीज़ नहीं है जो आप पर कभी हो और कभी न हो। यह कोई ऐसी बात नहीं है जिस पर आप हर सप्ताहांत में सवाल उठायें। यह तो हर समय है ही। अगर आप इसके बारे में जागरूक रहेंगे तो आपको कृपा में होने के आनंद का पता जरूर चलेगा। मैंने यह बात कई तरीकों से कही है पर मुझे पता है कि आप में से ज्यादातर लोगों ने इस पर ध्यान नहीं दिया है। अगर आप मेरे साथ एक पल के लिये भी बैठें तो आपके जीवन में कोई निजीपन नहीं रह जायेगा। जैसे ही आप मेरे साथ बैठे, खास तौर पर मेरे द्वारा दीक्षित हुए तो फिर कृपा है या नहीं जैसी कोई चीज़ नहीं रह जायेगी - कृपा हर समय रहेगी ही! कृपा का मतलब यह है कि प्रकाश के लिये कोई बाहरी स्रोत आप नहीं ढूँढते, आप खुद प्रकाश के स्रोत बन जाते हैं। हर समय भले ही इसका अनुभव न हो पर, अगर एक पल के लिये भी आप समझ लें कि आप प्रकाश से भरे हुए हैं तो इसका मतलब है कि आपको कृपा ने छुआ है। हम ईशा में ऐसी बहुत सी चीज़ें कर रहे हैं जिनसे आपको किसी तरह से, कम से कम एक पल के लिये यह अनुभव मिल जाये। अगर इसने आपको एक पल के लिये भी छुआ हो तो, चाहे ये आपके पास वापस लौट कर न भी आये तो भी आपका जीवन पहले जैसा नहीं रहेगा। आप उस एक पल के साथ जुड़े रह सकते हैं और, आसपास के किसी भी व्यक्ति की तुलना में, अपना जीवन बिल्कुल अलग ढंग से जी सकते हैं। अगर ये हर समय आपके साथ है तो इसका वर्णन नहीं किया जा सकता। बात सिर्फ इतनी है कि आपकी उम्मीद यह है कि कृपा के द्वारा आपकी सारी इच्छायें, योजनायें पूरी हो जायें। आपकी यह वही पुरानी आदत है कि मंदिर या चर्च जा कर भगवान से कहते हैं कि आपके लिये उसको यह या वह चीज़ जरूर करनी चाहिये। अगर वो ऐसा न करे तो आप अपने भगवान ही बदल देते हैं। कृपा का काम आपकी छोटी मोटी इच्छायें, योजनायें पूरी करना नहीं है। वैसे भी आपकी योजनायें हर समय बदलती रहती हैं। अपने जीवन में, अलग अलग समय पर, आप सोचते थे, "यही सबकुछ है" और फिर, अगले ही मिनिट में उसे बदल देते थे। आप छुट्टी मनाने जाना चाहते हैं, तो पूछते हैं, "सद्गुरु, आप मेरी मदद क्यों नहीं करते"? तो, हर दूसरे दिन यह मत पूछते रहिये, "क्या कृपा मेरे साथ है"? "क्या कृपा मेरे साथ नहीं है"? किसी गुरु की कृपा आपकी योजनायें पूरी करने के लिये नहीं होती। गुरु की कृपा तो जीवन की योजनायें पूरी करने के लिये होती है। ये आपको जीवन का हिस्सा बनाने के लिये है, जीवन का मकसद पूरा करने के लिये है। प्रश्नकर्ता : मैं एक डॉक्टर हूँ। कभी कभी, मेरे दवाखाने में, जब मैं किसी मरीज का इलाज कर रहा होता हूँ तो मुझे लगता है कि मेरे नियंत्रण के बाहर, किसी तरह की कृपा मुझे मरीज का इलाज करने में मदद कर रही है। मैं इसे कैसे समझाऊँ? सद्गुरु : किसी दूसरे का जीवन अपने हाथ में ले लेना कोई अच्छी बात नहीं है क्योंकि इसका असर आप पर एक खास तरह से पड़ता है। अपने खुद के जीवन के साथ आप थोड़ा बहुत, इधर उधर कर सकते हैं, उसके साथ खेल सकते हैं। पर जब किसी और का जीवन आपके हाथों में हो तो आप थोड़ा भी इधर उधर नहीं कर सकते। आप चाहे डॉक्टर हों या ड्राइवर, आप दूसरों का जीवन अपने हाथ में ले रहे हैं। अगर आप गुरु हैं तो स्थिति और भी ज्यादा खराब हो जाती है। बहुत सारे लोगों का जीवन अपने हाथ में ले लेना अपने सिर पर एक बड़ा बोझ ढोने जैसा है, खास तौर पर तब, जब वे आपके सामने एक खास तरीके से बैठें हों या आपके सामने असहाय अवस्था में सर्जरी टेबल पर पड़े हों। औषधि/इलाज की किसी भी प्रणाली - आयुर्वेद, सिद्ध, एलोपैथी या कुछ और - को अगर आपने अच्छी तरह से देखा, समझा है तो आप जानते हैं कि किसी के इलाज में आपकी भूमिका पचास% भी नहीं होती। दुनिया के महानतम डॉक्टरों का भी यही अनुभव है कि जिन्होंने लोगों के साथ अद्भुत काम किया है, वे लोग बहुत सामान्य ढंग से ऐसी भाषा बोलते हैं। अगर आपको ईश्वर में विश्वास है तो ये बहुत आसान है। आप ऊपर देख कर कह सकते हैं, "हे राम"! या "हे शिव"! या कुछ भी! अगर मरीज़ मर भी जाये तो भगवान की गोद में ही तो जायेगा, तो ये ठीक ही है। विश्वास करने वालों को सामान्य रूप से कृपा का अनुभव नहीं होता। उन्हें इस पर बस विश्वास होता है। ये बहुत आसान, सुविधाजनक भी है, कुछ और करना ही नहीं है। पर, इन विश्वास प्रणालियों को अगर आप नहीं मानते तो आपको समझ में आ जाता है कि चीज़ें आपके मुताबिक हों, इसमें आपकी भूमिका बहुत कम होती है और तभी आपको कृपा की उपस्थिति की समझ आती है। वास्तविक समस्या और परेशानी उन लोगों को होती है जिन्हें पता ही नहीं चलता कि वे विश्वास करें या न करें - वे लोग जिनकी बुद्धि दोनों चीज़ों के साथ संघर्ष में होती है! जो कभी विश्वास करता है और कभी नहीं करता - जिसकी बुद्धि को दोनों के साथ परेशानी है। वह व्यक्ति जो कभी तो ईश्वर में, उसके किसी भी रूप में विश्वास करता है, और कभी कभी नहीं भी करता, जो अपने तर्क और अपनी काबिलियत की सीमितताओं के साथ संघर्ष में है, और जो ऐसे आयामों के साथ भी सहज नहीं है जो सामने दिखते न हों, ऐसे व्यक्ति के लिये कृपा की परिस्थिति उसके जीवन में एकदम स्पष्ट होती है। वह बिल्कुल ठीक ठीक समझता है कि जब उसे कोई संकरा पुल पार करना हो तो दूसरे आयाम की मदद के बिना कुछ नहीं हो सकता। सवाल यह है कि कृपा की यह उपस्थिति आपके पास कैसे आये? क्या यह किसी संयोग से आती है या इसके लिये कोई तरीका है? गुरुत्वाकर्षण हर समय आप पर काम कर रहा है, चाहे आप सतर्क हों या न हों। कृपा सूक्ष्म है। आप जब तक सतर्क, सजग नहीं होते, ये नहीं आयेगी। कृपा आपकी उपस्थिति के प्रति बहुत ज्यादा संवेदनशील होती है। अगर आप हाजिर नहीं हैं तो ये हाजिर नहीं होगी। यही स्वभाव दिव्यता का है। ज्यादातर लोग इसी वजह से इसे पाने से चूक जाते हैं क्योंकि ज्यादातर वे गैर हाजिर होते हैं। आपके विचार, आपकी भावनायें, आपकी गतिविधि आप पर राज कर रही होती है। आपकी हाजिरी या उपस्थिति आप पर राज नहीं करती। किसी आध्यात्मिक प्रक्रिया से आप अपने में बदलाव लाने की कोशिश करते हैं। आपका शरीर, मन और आपकी भावनायें आपके साथ साथ आते ही हैं पर आपको चाहिये कि आपकी हाजरी मुख्य रूप से अधिकारी बन कर रहे। चूंकि आप हैं, इसीलिये आपने अपने विचारों, अपने शरीर और अपनी भावनाओं को अपने से ज्यादा महत्व दिया है। इस अस्त व्यस्त दशा में आप कृपा को महसूस नहीं कर सकते। अगर आप अपने अंदर की ऐसी दशा को उल्टा कर दें तो अचानक ही सामान्य परिस्थिति असामान्य बन जायेगी। जीवन का हरेक पहलू पूरी तरह से जीवन के अलग अनुभव में पहुँच जायेगा। ये इसलिये नहीं होता कि आप किसी में कुछ विश्वास करते हैं। विश्वास प्रणालियों की वजह से आप कल्पनायें कर सकते हैं, यह समस्या विश्वास करने वालों के साथ होती ही है। अगर आप अपने तार्किक मूल में, अपने आधार पर स्थित नहीं हैं तो यह पूरी तरह से संभव है कि आप अपनी कल्पनाओं में उड़ने लगेंगे और सोचेंगे कि यही कृपा है। अपने आप में, एक मजबूत तार्किक आधार पर रहना और फिर भी कृपा के लिये उपलब्ध हो पाना, ये कुछ ऐसा है जो आपको अपने लिये करना चाहिये, करना है। तात्विक और तार्किक, ये दो क्षेत्र समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। अगर आपका तार्किक क्षेत्र सही ढंग से स्थिर है, स्थापित है तो आपके जीवन की सामान्य, छोटी-छोटी बातें ठीक से होती रहेंगी। अगर आपके जीवन में तात्विक क्षेत्र खुला हुआ हो तो आपका जीवन का अनुभव बहुत ही अद्भुत होगा। अगर ऐसा न हुआ, अगर आप बस तार्किक क्षेत्र को संभालते रहे तो आपकी व्यवस्था अच्छी रहेगी पर जीवन के अनुभव अच्छे नहीं होंगे। दूसरी ओर, अगर आपने तार्किक क्षेत्र की ओर ध्यान नहीं दिया तो आपके अनुभव बढ़िया हो सकते हैं पर आपकी व्यवस्थायें गड़बड़ होंगीं। तो, तार्किक क्षेत्र को सही रख कर भी तात्विक पक्ष के लिये तैयार होने, खुल जाने की प्रक्रिया को दुनिया के समाजों ने ठीक तरह से संभाला नहीं है। हमसे या तो यह छूट जाता है या वह, इन दोनों के साथ में हुए बिना हमारा जीवन सुंदर नहीं होगा। जब आपने अपने सामान्य काम अच्छी तरह से कर लिये हों तो अब समय है कि आप अपने आपको तात्विक/दिव्यदर्शी क्षेत्र के लिये उपलब्ध करायें। इसमें आपके तर्क काम नहीं करेंगे, वे बस आपको सीमित कर देंगे। "मैं अपने तर्कों के साथ कैसे लड़ सकता हूँ"? आप तर्क व्यवस्था को बंद करने के पीछे न पड़ें, बस उसके द्वारा जो विचार पैदा हो रहे हैं, उनकी ओर ध्यान देना बंद कर दें। दस जन्मों तक कोशिश कर के भी आप मन को खत्म नहीं कर सकते पर उसके उत्पादों की ओर ध्यान देना आप बंद कर सकते हैं। मन विचार पैदा करता है, आप उनकी ओर ध्यान न दें। ऐसा करने से आप भक्ति की स्वाभाविक प्रक्रिया का हिस्सा बन जाएंगे। भक्ति का मतलब किसी का गुणगान करना नहीं है। भक्ति तो वह है जिसमें आप ही नहीं होते। आप अभी जिसे "मैं" कहते हैं वह तो विचारों, भावनाओं और आपकी राय का एक गट्ठर मात्र है। अगर आप इन तीन चीजों को अलग रख दें तो आपका व्यक्तित्व हाजिर नहीं रह पायेगा। तब, आपमें जो जीवन है, वह उपस्थित होगा। अगर यह उपस्थित है, तो आप कृपा से चूक नहीं सकते। एक शिष्य ने अपने झेन गुरु के पास जा कर पूछा, "अपने आध्यात्मिक विकास के लिये मैं क्या करूँ"? गुरु ने जवाब दिया, "फर्श साफ करो, लकड़ी काटो, खाना बनाओ"! शिष्य बोला, "उसके लिये मैं यहाँ क्यों आऊँ, यह सब तो मैं घर पर भी कर सकता हूँ"। गुरु मुस्कुराये, "पर जब तुम अपने घर का फर्श साफ करते हो तो वह तुम्हारा अपना फर्श है। तुम अपने पड़ोसी का फर्श साफ नहीं करोगे, चाहे वह कितना भी गंदा हो गया हो। लकड़ी काटना और खाना बनाना तुम सिर्फ अपने लिये करोगे या उनके लिये जिन्हें तुम अपना मानते हो। तुम सभी काम अपने आप को बढ़ाने के लिये करते हो बजाय इसके कि हर काम तुम अपने आपको खत्म करने के लिये करो"! तो, हम, अपनी गतिविधि को, अपने लिये बंधन बनाते हैं या मुक्ति की प्रक्रिया - यही फर्क महत्वूर्ण है। आप कोई भी काम या तो अपने आपको बढ़ाने के लिये करते हैं, या फिर अपने आपको खत्म करने के लिये। या तो आप अपने लिये कर्म के बंधन बांध रहे हैं या फिर अपने कर्म को योग बना रहे हैं। बस, यही सब कुछ है। आप तो बस फर्श साफ करें, खाना बनायें या कोई पेड़ लगायें - अपनी ज़मीन पर नहीं, पेड़ की छाया में खुद या अपने बच्चों के बैठने के लिये नहीं - बस इसे लगायें, जिससे आपका कोई दुश्मन भी इसके नीचे बैठ कर इसका आनंद ले। तभी, यह गतिविधि खत्म होने की, पिघल जाने की प्रक्रिया बनती है। आप जिसे मैं और मेरा मानते हैं, उसके लिये आप जितना कम करेंगे, उतने ही ज्यादा आप कृपा के लिये उपलब्ध रहेंगे। ज्यादातर लोग सिर्फ वही करते हैं जिसे वे अपना कर्तव्य समझते हैं। सिर्फ तभी, जब किसी चीज़ के लिये, आपमें प्रेम या भक्ति का भाव बहुत गहरा हो, तभी आप वह सब कुछ करेंगे जो आप कर सकते हैं। अपने जीवन के हर पल में, अगर आप वो सब कुछ नहीं कर रहे हैं, जो आप कर सकते हैं, तो आप अपने आपको किस चीज़ के लिये बचा कर रख रहे हैं? क्या ये महत्वपूर्ण नहीं है कि अपने जीवन के हर पल में आप वो सब कुछ करें जो आप कर सकते हैं? शामिल होने का यह गहन भाव ही भक्ति है। भक्ति कोई सौदा, कोई समझौता, कोई लेन देन नहीं है। "सद्गुरु, मैं आपके प्रति इतना समर्पित रहा हूँ पर आपने मेरे लिये कुछ नहीं किया"! आपके लिये कुछ करना मेरा काम नहीं है। सौदा करने वाले लोग अलग होते हैं, भक्त अलग होते हैं। "मुझे कुछ भी नहीं चाहिये, मेरे लिये कुछ भी होना ज़रूरी नहीं है", यही भक्ति है। "मुझे क्या मिलेगा", सिर्फ इस एक बात से अगर आप मुक्त हो जायें तो आपका जीवन बहुत ही आनंदमय, भरपूर कृपा वाला हो जायेगा। भक्ति का मतलब है आशाओं, इच्छाओं के दर्द से मुक्त हो जाना। जब आपका किसी तरह की चीज़ में कोई स्वार्थ नहीं होता, आपको कोई रुचि नहीं होती, तब आप सबसे अच्छा, सबसे ऊँचे स्तर का काम करते हैं और कोई इंसान बस इतना ही कर सकता है। अपनी वो प्रतिबद्धता अगर आप दिखायें, उतने स्तर पर हर उस चीज़ में शामिल हों, जो मौजूद है - तो आप कृपा के लिये उपलब्ध हो जायेंगे। भक्ति का मतलब है बिना किसी सवाल के, बिना खुद को रोके, बिना कुछ पीछे रखे, पूरी तरह से शामिल होना। आपका शामिल होना अगर उस तरह का है तो आप पर कृपा एक झरने की तरह बहेगी, बूँदों में नहीं टपकेगी। जब आप पर ऐसी कृपा बरसेगी तो आपके जीवन का मकसद पूरा हो जायेगा। अगर आपका शरीर, आपका मन और आपकी ऊर्जा बाधा नहीं बनते और आप कृपा के लिये उपलब्ध हैं तो आपको यह चिंता करने की ज़रूरत नहीं रहेगी कि आपके जीवन का क्या होगा? जो भी होगा, सबसे ज्यादा अद्भुत चीजें ही होंगी। इधर उधर घूमते हुए यह समझिये कि आप जो कुछ भी हैं, बहुत छोटे हैं। छोटे होने का मतलब यह नहीं है कि आप शून्य हैं। पर छोटा होना शून्यता के बहुत करीब है। आपको यह भी दिखाने की ज़रूरत नहीं है कि आप छोटे हैं क्योंकि वास्तव में आप बहुत ज्यादा छोटे हैं। आप सिर्फ बड़े होने का दिखावा कर रहे हैं। आप अगर अपने सब दिखावे, सब नाटक बंद कर दें तो आप कृपा को उपलब्ध हो जायेंगे। जीसस ने कहा था, "अगर आपकी एक ही आँख हो तो आपका शरीर प्रकाश से भरा होगा"। दो भौतिक आँखें भेद कराती हैं, अलग अलग दिखाती हैं। वो आपको बताती हैं कि क्या ऊँचा है, क्या नीचा है, कौन पुरुष है, कौन स्त्री है, ये क्या है, वो क्या है! ये दो आँखें वो साधन हैं जिनसे आप टिके रहते हैं। "अगर आपकी एक आँख हो" का मतलब यह नहीं है कि आप एक आँख बंद कर लें। इसका मतलब सिर्फ यही है कि आप कोई भेदभाव नहीं करते, आप सभी चीज़ों को एक ही समझते हैं, एक ही जैसा। अगर आप ऐसे हो जायें तो आपका शरीर प्रकाश से भर जायेगा। यही कृपा है। आप नहीं जानते कि कोई पेड़ वास्तव में कैसे काम करता है? आपको नहीं पता कि घास का तिनका कैसे बनता है? आपको नहीं मालूम कि इस ब्रह्मांड में कोई भी चीज़ किस तरह से काम कर रही है? तो, यहाँ जो कुछ है वो आपसे थोड़ी ज्यादा बुद्धिमान लगती है। जब आप इतने बुद्धू हैं तो बेहतर होगा कि आप हर चीज़ के सामने झुकें। जब पेड़ को देखें तो झुकें, पहाड़ को देखें तो झुकें। अगर आप घास का तिनका देखें तो भी झुकें। बालू का एक कण भी जीवन के बारे में आपसे ज्यादा जानता है। आप यहाँ बहुत छोटे हैं, जूनियर हैं। आपके आने के बहुत पहले से वे यहाँ हैं और जीवन के बारे में वे सभी आपसे बहुत ज्यादा जानते हैं। मैं चाहता हूँ कि जब आप चलें तो हर चीज़ पर आपमें आश्चर्य और भक्ति का एक खास भाव होना चाहिये। अगले चौबीस घंटाटे तक ऐसा कीजिये। जीवन के दरवाजे खोलने के लिये बस यही होना चाहिये कि आप खुद को बहुत बड़ा न मानें। आप अपने बारे में वह न सोचें जो सही नहीं है। आप अपने बारे में जो कुछ सोचते हैं वो काफी झूठ है क्योंकि अगर हम मूल जीवन की बात करें, तो आप वो कुछ भी नहीं जानते जो ये मिट्टी जानती है। आपका मस्तिष्क वो नहीं कर सकता जो ये मिट्टी कर रही है। तो, जब आपके आसपास इतनी हस्तियाँ हों, तो आपको शांति से, हल्के से चलना चाहिये। अगर आप बस भक्ति के भाव में चलें तो धीरे धीरे आप कृपा की गोद में गिर जायेंगे। एक धागे को दूसरे पर रखने की, जिसमें हर धागा उतना ही अहम है, जितना दूसरा, तो फिर बन जाता है एक शानदार वस्त्र। मेरे प्रिय, ऐसा ही जीवन के बारे में भी है, पहला वाला था और जो बाद में आने वाला है। जो एक असीमित जीव के लिये है - दिव्यता। शरीर ढंकने के लिये ही ये वस्त्र नहीं है, सृष्टि के जैविक सौंदर्य का स्पर्श करा देगा और, एकांत के लिये मार्ग खोल देगा। और समझ की बुद्धिमानी में भीगे हुए धागे। इतने ज्यादा तरह के रंगों और बनावटों के धागे,
बॉलीवुड एक्ट्रेस दिशा पटानी अपनी एक्टिंग के साथ ही अपनी फिटनेस और ग्लैमरस लुक्स के लिए भी जानी जाती हैं। वो खासकर यूथ की फेवरेट हैं। उन्हें नेशनल क्रश का भी टैग मिल चुका है। दिशा पटानी को मुंबई एयरपोर्ट पर स्पॉट किया गया। वो बेदह ही स्टाइलिश अंदाज में स्पॉट की गई। हालांकि काला चश्मा और मास्क की वजह से उनका चेहरा दिख नहीं रहा था। लेकिन जिस तरह का आउटफिट उन्होंने कैरी किया था वो बेहद ही ग्लैमरस था। बॉलीवुड की युवा ब्रिगेड में टॉप पर शामिल एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर सोमवार को पैपराजी के कैमरे में कैद हो गई। ग्रे सूट में वो बेहद ही खूबसूरत नजर आ रही थी। उन्होंने अपने बाल को खुला छोड़कर पूरे लुक को कंप्लीट करती दिखाई दी। वर्क फ्रंट की हो तो जाह्नवी करण जौहर की आने वाली मूवी तख्त में तो नजर आने ही वाली हैं, साथ ही वे गुड लक जेरी में भी दिखेंगी, जिसकी शूटिंग एक्ट्रेस ने पूरी कर चुकी हैं। आलिया भट्ट और रणबीर कपूर को एक साथ स्पॉट किया गया। धर्मा प्रोडक्शन के बाहर कपल पैपराजी के कैमरे में कैद हो गए। दोनों के साथ बेहद अच्छे लग रहे थे। सोहा अली खान अपने पति कुणाल खेमू और बच्चे के साथ एयरपोर्ट पर स्पॉट हुई। कुणाल अपने बेटी को कंधे पर बैठाए एक पिता की भूमिका में दिखाई दिए। वहीं करिश्मा कपूर (Karishma kapoor) को ब्रांदा में स्पॉट किया गया। उन्होंने बेहद ही खूबसूरत आउटफिट पहन रखा था। करिश्मा कपूर के वर्कफ्रंट की बात करें तो उन्होंने हाल ही में बॉलीवुड में अपने 30 साल पूरे किए हैं। उन्होंने साल 1991 में 'प्रेम कैदी' फिल्म से डेब्यू किया था। और पढ़ेंः
बॉलीवुड एक्ट्रेस दिशा पटानी अपनी एक्टिंग के साथ ही अपनी फिटनेस और ग्लैमरस लुक्स के लिए भी जानी जाती हैं। वो खासकर यूथ की फेवरेट हैं। उन्हें नेशनल क्रश का भी टैग मिल चुका है। दिशा पटानी को मुंबई एयरपोर्ट पर स्पॉट किया गया। वो बेदह ही स्टाइलिश अंदाज में स्पॉट की गई। हालांकि काला चश्मा और मास्क की वजह से उनका चेहरा दिख नहीं रहा था। लेकिन जिस तरह का आउटफिट उन्होंने कैरी किया था वो बेहद ही ग्लैमरस था। बॉलीवुड की युवा ब्रिगेड में टॉप पर शामिल एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर सोमवार को पैपराजी के कैमरे में कैद हो गई। ग्रे सूट में वो बेहद ही खूबसूरत नजर आ रही थी। उन्होंने अपने बाल को खुला छोड़कर पूरे लुक को कंप्लीट करती दिखाई दी। वर्क फ्रंट की हो तो जाह्नवी करण जौहर की आने वाली मूवी तख्त में तो नजर आने ही वाली हैं, साथ ही वे गुड लक जेरी में भी दिखेंगी, जिसकी शूटिंग एक्ट्रेस ने पूरी कर चुकी हैं। आलिया भट्ट और रणबीर कपूर को एक साथ स्पॉट किया गया। धर्मा प्रोडक्शन के बाहर कपल पैपराजी के कैमरे में कैद हो गए। दोनों के साथ बेहद अच्छे लग रहे थे। सोहा अली खान अपने पति कुणाल खेमू और बच्चे के साथ एयरपोर्ट पर स्पॉट हुई। कुणाल अपने बेटी को कंधे पर बैठाए एक पिता की भूमिका में दिखाई दिए। वहीं करिश्मा कपूर को ब्रांदा में स्पॉट किया गया। उन्होंने बेहद ही खूबसूरत आउटफिट पहन रखा था। करिश्मा कपूर के वर्कफ्रंट की बात करें तो उन्होंने हाल ही में बॉलीवुड में अपने तीस साल पूरे किए हैं। उन्होंने साल एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे में 'प्रेम कैदी' फिल्म से डेब्यू किया था। और पढ़ेंः
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल मंगलवार 27 जून को 140 नए इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग प्वाइंट का शुभारंभ करने वाले हैं। इसी दिन से 48 बैटरी स्वैपिंग सुविधाएं भी शुरू हो जाएंगी। दिल्ली में जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक वाहन बढ़ते जा रहे हैं उससे इलेक्ट्रिक चार्जर की जरूरत महसूस की जा रही है। दिल्ली में भारत का 4500 सार्वजनिक चार्जिंग प्वाइंट का सबसे बड़ा नेटवर्क है। नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। इलेक्ट्रिक वाहन चालकों के लिए यह खबर काम की है। दिल्ली को मंगलवार, 27 जून को 140 और नए चार्जिंग प्वाइंट मिलने जा रहे हैं, इसी दिन से 48 बैटरी स्वैपिंग सुविधाएं भी शुरू हो जाएंगी। दिल्ली में भारत का 4500 सार्वजनिक चार्जिंग प्वाइंट का सबसे बड़ा नेटवर्क है। दिल्ली में सबसे सस्ती सार्वजनिक चार्जिंग केवल तीन रुपये प्रति यूनिट है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इनका शुभारंभ करेंगे। अपने ईवी को वाहन चालक केवल तीन रुपये यूनिट पर चार्ज कर सकेंगे। दिल्ली में 42 स्थानों पर भारत में सबसे कम चार्जिंग दाम वाले ये स्टेशन तैयार किए गए हैं। दिल्ली में अभी 62 बैटरी स्वैपिंग सुविधाएं हैं। दिल्ली में जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक वाहन बढ़ते जा रहे हैं, उससे इलेक्ट्रिक चार्जर की जरूरत महसूस की जा रही है। दिल्ली सरकार की योजना 2025 तक 18,000 चार्जिंग प्वाइंट को तैयार करने की है। दिल्ली सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सात अगस्त 2020 को दिल्ली ईवी नीति को लांच किया था। सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद से जुड़े शुरुआती लागत के बोझ को कम करने के लिए पर्याप्त सब्सिडी दी है। इलेक्ट्रिक कारों के लिए 1. 5 लाख रुपये, ई-रिक्शा के लिए 30,000 रुपये और दोपहिया वाहनों के लिए 5,000 रुपये प्रति केडब्ल्यूएच की सब्सिडी प्रदान की गई। अब तक 1. 2 लाख ईवी के लिए 120 करोड़ की कुल टैक्स छूट दी गई है और अब तक सब्सिडी में 169 करोड़ रुपये से अधिक दिए गए हैं। - दोपहिया वाहनों के लिए सात पैसे प्रति किमी। - दिल्ली सरकार के अनुसार सिंगल विंडो के तहत लगाए गए देश के सबसे सस्ते चार्जर, सिंगल विंडो के तहत 2500 रुपये में उपलब्ध हैं।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल मंगलवार सत्ताईस जून को एक सौ चालीस नए इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग प्वाइंट का शुभारंभ करने वाले हैं। इसी दिन से अड़तालीस बैटरी स्वैपिंग सुविधाएं भी शुरू हो जाएंगी। दिल्ली में जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक वाहन बढ़ते जा रहे हैं उससे इलेक्ट्रिक चार्जर की जरूरत महसूस की जा रही है। दिल्ली में भारत का चार हज़ार पाँच सौ सार्वजनिक चार्जिंग प्वाइंट का सबसे बड़ा नेटवर्क है। नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। इलेक्ट्रिक वाहन चालकों के लिए यह खबर काम की है। दिल्ली को मंगलवार, सत्ताईस जून को एक सौ चालीस और नए चार्जिंग प्वाइंट मिलने जा रहे हैं, इसी दिन से अड़तालीस बैटरी स्वैपिंग सुविधाएं भी शुरू हो जाएंगी। दिल्ली में भारत का चार हज़ार पाँच सौ सार्वजनिक चार्जिंग प्वाइंट का सबसे बड़ा नेटवर्क है। दिल्ली में सबसे सस्ती सार्वजनिक चार्जिंग केवल तीन रुपये प्रति यूनिट है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इनका शुभारंभ करेंगे। अपने ईवी को वाहन चालक केवल तीन रुपये यूनिट पर चार्ज कर सकेंगे। दिल्ली में बयालीस स्थानों पर भारत में सबसे कम चार्जिंग दाम वाले ये स्टेशन तैयार किए गए हैं। दिल्ली में अभी बासठ बैटरी स्वैपिंग सुविधाएं हैं। दिल्ली में जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक वाहन बढ़ते जा रहे हैं, उससे इलेक्ट्रिक चार्जर की जरूरत महसूस की जा रही है। दिल्ली सरकार की योजना दो हज़ार पच्चीस तक अट्ठारह,शून्य चार्जिंग प्वाइंट को तैयार करने की है। दिल्ली सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सात अगस्त दो हज़ार बीस को दिल्ली ईवी नीति को लांच किया था। सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद से जुड़े शुरुआती लागत के बोझ को कम करने के लिए पर्याप्त सब्सिडी दी है। इलेक्ट्रिक कारों के लिए एक. पाँच लाख रुपये, ई-रिक्शा के लिए तीस,शून्य रुपयापये और दोपहिया वाहनों के लिए पाँच,शून्य रुपयापये प्रति केडब्ल्यूएच की सब्सिडी प्रदान की गई। अब तक एक. दो लाख ईवी के लिए एक सौ बीस करोड़ की कुल टैक्स छूट दी गई है और अब तक सब्सिडी में एक सौ उनहत्तर करोड़ रुपये से अधिक दिए गए हैं। - दोपहिया वाहनों के लिए सात पैसे प्रति किमी। - दिल्ली सरकार के अनुसार सिंगल विंडो के तहत लगाए गए देश के सबसे सस्ते चार्जर, सिंगल विंडो के तहत दो हज़ार पाँच सौ रुपयापये में उपलब्ध हैं।
हथियार बनाने वाली शीर्ष अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने कहा कि भारत के साथ 'गेम चेंजिंग' रक्षा समझौते करने का समय आ गया है। लॉकहीड मार्टिन के उपाध्यक्ष विवेक लाल ने कहा कि अमेरिका और भारत कई राजनीति, आर्थिक और सुरक्षा मुद्दों पर साझा हितों के साथ नैसर्गिक साझेदार हैं। Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.
हथियार बनाने वाली शीर्ष अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने कहा कि भारत के साथ 'गेम चेंजिंग' रक्षा समझौते करने का समय आ गया है। लॉकहीड मार्टिन के उपाध्यक्ष विवेक लाल ने कहा कि अमेरिका और भारत कई राजनीति, आर्थिक और सुरक्षा मुद्दों पर साझा हितों के साथ नैसर्गिक साझेदार हैं। Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.
अवनीत कौर इंटरनेट सेंसेशन हैं। अवनीत बहुत कम उम्र में प्रसिद्ध हो गई थी। वह आए दिन अपनी खूबसूरत तस्वीरें शेयर करती रहती हैं। आउटफिट में वह बेहद खूबसूरत लग रही हैं। लेटेस्ट तस्वीरों में वह अपना परफेक्ट लुक फ्लॉन्ट कर रही हैं। लेटेस्ट तस्वीरों में उन्होंने अपना किलर लुक दिखाया। फैंस उन्हें टीकू वेड्स शेरू फिल्म में देखने का इंतजार कर रहे हैं।
अवनीत कौर इंटरनेट सेंसेशन हैं। अवनीत बहुत कम उम्र में प्रसिद्ध हो गई थी। वह आए दिन अपनी खूबसूरत तस्वीरें शेयर करती रहती हैं। आउटफिट में वह बेहद खूबसूरत लग रही हैं। लेटेस्ट तस्वीरों में वह अपना परफेक्ट लुक फ्लॉन्ट कर रही हैं। लेटेस्ट तस्वीरों में उन्होंने अपना किलर लुक दिखाया। फैंस उन्हें टीकू वेड्स शेरू फिल्म में देखने का इंतजार कर रहे हैं।
नई दिल्ली, 22 नवंबरः केंद्र सरकार की ओर से फर्जी संदेशों पर रोक लगाने के लिए सोशल मीडिया कंपनी व्हाट्सएप्प पर बनाया गया दबाव रंग लाता नजर आ रहा है. केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने फर्जी संदेशों पर रोक लगाने की मांग करते हुए व्हाट्सएप्प को दो-टूक कहा था कि इससे जुड़ी शिकायतों के लिए किसी ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति करें, जिसे भारत से संबंधित शिकायत दी जा सके और वह भारत में रहता हो. सरकार के इस कड़े रुख के बाद व्हाट्सएप्प ने अभिजीत बोस को 'भारत प्रमुख' पद पर नियुक्त किया है. वह गुरुग्राम से अपना कामकाज देखेंगे. इससे पहले, व्हाट्सएप्प ने भारत के लिए शिकायत अधिकारी की भी नियुक्ति की थी. अभिजीत बोस संभवतः अगले वर्ष की शुरुआत में कामकाज संभालेंगे. बोस 'इजीटेप' के सह-संस्थापक हैं. यह वर्ष 2011 में बनाई गई इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट कंपनी है. पहली बार किसी देश में प्रमुख की तैनाती यह पहली बार होगा, जब व्हाट्सएप्प ने कैलिफोर्निया स्थित अपने मुख्यालय के बाहर किसी देश से संबंधित प्रमुख को तैनात किया है. व्हाट्सएप्प ने कहा कि बोस और उनकी टीम न केवल कंपनी का कारोबार विस्तार देखेगी, बल्किउनपर ग्राहकों से सीधे संवाद की जिम्मेदारी भी होगी. कंपनी भारत के साथ साझेदारी बढ़ाना चाहती है और आने वाले दिनों में भारत से संबंधित कई तरह के नए उत्पाद सामने आएंगे. बहानेबाजी नहीं चलेगीः सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, "जब कोई संदेश व्हाट्सएप्प प्लेटफॉर्म पर आता है तो कंपनी को पता होता है कि वह पहली बार किस नंबर से प्रसारित हुआ. संभव है कि व्हाट्सएप्प को इसके लिए नए टूल बनाने पड़ें, जिससे ऐसे व्यक्ति या नंबर की पहचान हो. हम समय देने को तैयार हैं. लेकिन व्हाट्सएप्प निजता के कानूनों की बात कर इस जिम्मेदारी से नहीं भाग सकता. यह केवल बहाना है. " भारत है बड़ा बाजारः व्हाट्सएप्प द्वारा केंद्र सरकार की सभी मांगें स्वीकार करने की बड़ी वजह यह है कि भारत उसके लिए बड़ा बाजार है. यहां हर तीसरे स्मार्टफोनधारक के फोन में व्हाट्सएप्प है. इसके चलते देश की एक तिहाई से अधिक आबादी तक कंपनी की सीधी पहुंच है. ऐसे में कंपनी नहीं चाहती कि सरकार से टकराव हो और उसके बाजार पर आंच आए.
नई दिल्ली, बाईस नवंबरः केंद्र सरकार की ओर से फर्जी संदेशों पर रोक लगाने के लिए सोशल मीडिया कंपनी व्हाट्सएप्प पर बनाया गया दबाव रंग लाता नजर आ रहा है. केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने फर्जी संदेशों पर रोक लगाने की मांग करते हुए व्हाट्सएप्प को दो-टूक कहा था कि इससे जुड़ी शिकायतों के लिए किसी ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति करें, जिसे भारत से संबंधित शिकायत दी जा सके और वह भारत में रहता हो. सरकार के इस कड़े रुख के बाद व्हाट्सएप्प ने अभिजीत बोस को 'भारत प्रमुख' पद पर नियुक्त किया है. वह गुरुग्राम से अपना कामकाज देखेंगे. इससे पहले, व्हाट्सएप्प ने भारत के लिए शिकायत अधिकारी की भी नियुक्ति की थी. अभिजीत बोस संभवतः अगले वर्ष की शुरुआत में कामकाज संभालेंगे. बोस 'इजीटेप' के सह-संस्थापक हैं. यह वर्ष दो हज़ार ग्यारह में बनाई गई इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट कंपनी है. पहली बार किसी देश में प्रमुख की तैनाती यह पहली बार होगा, जब व्हाट्सएप्प ने कैलिफोर्निया स्थित अपने मुख्यालय के बाहर किसी देश से संबंधित प्रमुख को तैनात किया है. व्हाट्सएप्प ने कहा कि बोस और उनकी टीम न केवल कंपनी का कारोबार विस्तार देखेगी, बल्किउनपर ग्राहकों से सीधे संवाद की जिम्मेदारी भी होगी. कंपनी भारत के साथ साझेदारी बढ़ाना चाहती है और आने वाले दिनों में भारत से संबंधित कई तरह के नए उत्पाद सामने आएंगे. बहानेबाजी नहीं चलेगीः सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, "जब कोई संदेश व्हाट्सएप्प प्लेटफॉर्म पर आता है तो कंपनी को पता होता है कि वह पहली बार किस नंबर से प्रसारित हुआ. संभव है कि व्हाट्सएप्प को इसके लिए नए टूल बनाने पड़ें, जिससे ऐसे व्यक्ति या नंबर की पहचान हो. हम समय देने को तैयार हैं. लेकिन व्हाट्सएप्प निजता के कानूनों की बात कर इस जिम्मेदारी से नहीं भाग सकता. यह केवल बहाना है. " भारत है बड़ा बाजारः व्हाट्सएप्प द्वारा केंद्र सरकार की सभी मांगें स्वीकार करने की बड़ी वजह यह है कि भारत उसके लिए बड़ा बाजार है. यहां हर तीसरे स्मार्टफोनधारक के फोन में व्हाट्सएप्प है. इसके चलते देश की एक तिहाई से अधिक आबादी तक कंपनी की सीधी पहुंच है. ऐसे में कंपनी नहीं चाहती कि सरकार से टकराव हो और उसके बाजार पर आंच आए.
दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धस्थल सियाचिन में हिमस्खलन के बाद बर्फ में दबने से भारतीय सेना के 4 जवान शहीद हो गए. उनके साथ 2 पोर्टरों की भी मौत हुई है. हालांकि बर्फ में कुल 8 लोग दबे थे लेकिन दो जवानों को सेना के बचाव दल ने जिंदा बचा लिया. दोनों को हेलिकाप्टर से सैन्य अस्पताल तक पहुंचाया जहाँ उनका इलाज किया जा रहा है. दोनों की हालत गंभीर बताई गई है. घटना सोमवार यानि 18 नवम्बर की दोपहर 3 बजे की है. यहाँ याद दिलाना जरूरी है कि ठंड के मौसम में यहाँ का तापमान -60 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है. हालांकि अभी तापमान -30 डिग्री से भी कम है. सेना के शहीद हुए चार जवानों के पार्थिव शरीर बुधवार को लद्दाख से सैन्य सम्मान के साथ उनके घर भेजे जाएंगे. डोगरा रेजीमेंट के शहीद इन जवानों में तीन पंजाब और एक हिमाचल प्रदेश का निवासी था. सभी की आयु 30 साल से कम थी. गौरतलब है कि उत्तरी लद्दाख के सियाचिन ग्लेशियर में भारतीय सेना पाकिस्तान के नापाक मंसूबों को नाकाम बनाने के साथ मौसम से भी लड़ रही है. ऐसे हालात में गत सोमवार को सियाचिन में सेना के जवानों की एक टुकड़ी क्षेत्र में एक पोस्ट पर बीमार हुए सैनिक को वहां से लेने निकली थी. इसी दौरान 19 हजार फीट की ऊंचाई पर हुए हिमस्खलन की चपेट में आने के बाद यह टुकड़ी लापता हो गई थी. इस पार्टी में सेना के चार जवान और दो पोर्टर भी थे. सेना के राहत दलों ने सभी को बर्फ से निकाल कर गंभीर हालात में सोमवार शाम को हेलीकॉप्टर से हुंदर में सेना के अस्पताल में पहुंचाया था. यहां पर काफी कोशिशों के बाद भी उन्हें बचाना संभव नहीं हुआ. इस हादसे में चार जवान और दो पोर्टर शहीद हो गए थे. पोर्टरों की पहचान लेह के लरगयाव के जिगमित नांग्याल व स्टेंजिन गुरमत के रूप में हुई. वह कुछ सालों से सियाचिन में सेना तक रसद पहुंचाने के लिए पोर्टर का काम कर रहे थे. बताया जाता है कि बुधवार को लेह में सेना के चारों शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद उनके पार्थिव शरीर विशेष विमान से चंडीगढ़ भेजे जाएंगे. वहां से उन्हें पैतृक निवास के लिए संबंधित जिलों में भेज दिया जाएगा. शहीद नायक मनिन्द्र सिंह पंजाब के अमृतसर जिले के अजनाला के धोनेवाला गांव के रहने वाले थे. उनकी आयु 29 साल थी. वह 11 साल पहले सेना में भर्ती हुए थे. शहीद सिपाही डिंपल कुमार पंजाब के होशियारपुर जिले की मुकेरियां की सैदों तहसील के निवासी थे. उनकी आयु 21 साल थी. वह मार्च 2018 में सेना में भर्ती हुए थे. शहीद सिपाही वीरपाल सिंह पंजाब के संगरूर जिले के मलेरकोटला के गवारा गांव के रहने वाले थे. 22 वर्षीय वीरपाल मार्च 2018 में सेना में भर्ती हुए थे. शहीद सिपाही मनीश कुमार हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के अरकी तहसील के दोची गांव के निवासी थे. 21 वर्षीय मनीश दो साल पहले ही सेना में भर्ती हुए थे. सियाचिन में ऐसे कई हादसे पहले भी हो चुके हैं. बीते 35 साल में हिमस्खलन के कारण सेना के 35 अधिकारी समेत हजार से ज्यादा जवान शहीद हो चुके हैं. पिछली घटना 2016 की है जब मद्रास रेजिमेंट के हनुमंथप्पा समेत 10 जवान बर्फ में दबने से शहीद हुए थे.
दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धस्थल सियाचिन में हिमस्खलन के बाद बर्फ में दबने से भारतीय सेना के चार जवान शहीद हो गए. उनके साथ दो पोर्टरों की भी मौत हुई है. हालांकि बर्फ में कुल आठ लोग दबे थे लेकिन दो जवानों को सेना के बचाव दल ने जिंदा बचा लिया. दोनों को हेलिकाप्टर से सैन्य अस्पताल तक पहुंचाया जहाँ उनका इलाज किया जा रहा है. दोनों की हालत गंभीर बताई गई है. घटना सोमवार यानि अट्ठारह नवम्बर की दोपहर तीन बजे की है. यहाँ याद दिलाना जरूरी है कि ठंड के मौसम में यहाँ का तापमान -साठ डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है. हालांकि अभी तापमान -तीस डिग्री से भी कम है. सेना के शहीद हुए चार जवानों के पार्थिव शरीर बुधवार को लद्दाख से सैन्य सम्मान के साथ उनके घर भेजे जाएंगे. डोगरा रेजीमेंट के शहीद इन जवानों में तीन पंजाब और एक हिमाचल प्रदेश का निवासी था. सभी की आयु तीस साल से कम थी. गौरतलब है कि उत्तरी लद्दाख के सियाचिन ग्लेशियर में भारतीय सेना पाकिस्तान के नापाक मंसूबों को नाकाम बनाने के साथ मौसम से भी लड़ रही है. ऐसे हालात में गत सोमवार को सियाचिन में सेना के जवानों की एक टुकड़ी क्षेत्र में एक पोस्ट पर बीमार हुए सैनिक को वहां से लेने निकली थी. इसी दौरान उन्नीस हजार फीट की ऊंचाई पर हुए हिमस्खलन की चपेट में आने के बाद यह टुकड़ी लापता हो गई थी. इस पार्टी में सेना के चार जवान और दो पोर्टर भी थे. सेना के राहत दलों ने सभी को बर्फ से निकाल कर गंभीर हालात में सोमवार शाम को हेलीकॉप्टर से हुंदर में सेना के अस्पताल में पहुंचाया था. यहां पर काफी कोशिशों के बाद भी उन्हें बचाना संभव नहीं हुआ. इस हादसे में चार जवान और दो पोर्टर शहीद हो गए थे. पोर्टरों की पहचान लेह के लरगयाव के जिगमित नांग्याल व स्टेंजिन गुरमत के रूप में हुई. वह कुछ सालों से सियाचिन में सेना तक रसद पहुंचाने के लिए पोर्टर का काम कर रहे थे. बताया जाता है कि बुधवार को लेह में सेना के चारों शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद उनके पार्थिव शरीर विशेष विमान से चंडीगढ़ भेजे जाएंगे. वहां से उन्हें पैतृक निवास के लिए संबंधित जिलों में भेज दिया जाएगा. शहीद नायक मनिन्द्र सिंह पंजाब के अमृतसर जिले के अजनाला के धोनेवाला गांव के रहने वाले थे. उनकी आयु उनतीस साल थी. वह ग्यारह साल पहले सेना में भर्ती हुए थे. शहीद सिपाही डिंपल कुमार पंजाब के होशियारपुर जिले की मुकेरियां की सैदों तहसील के निवासी थे. उनकी आयु इक्कीस साल थी. वह मार्च दो हज़ार अट्ठारह में सेना में भर्ती हुए थे. शहीद सिपाही वीरपाल सिंह पंजाब के संगरूर जिले के मलेरकोटला के गवारा गांव के रहने वाले थे. बाईस वर्षीय वीरपाल मार्च दो हज़ार अट्ठारह में सेना में भर्ती हुए थे. शहीद सिपाही मनीश कुमार हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के अरकी तहसील के दोची गांव के निवासी थे. इक्कीस वर्षीय मनीश दो साल पहले ही सेना में भर्ती हुए थे. सियाचिन में ऐसे कई हादसे पहले भी हो चुके हैं. बीते पैंतीस साल में हिमस्खलन के कारण सेना के पैंतीस अधिकारी समेत हजार से ज्यादा जवान शहीद हो चुके हैं. पिछली घटना दो हज़ार सोलह की है जब मद्रास रेजिमेंट के हनुमंथप्पा समेत दस जवान बर्फ में दबने से शहीद हुए थे.
Don't Miss! [बॉलीवुड न्यूज] आज यानि की 7 जुलाई को लाखों दिलों की धड़कन शाहिद कपूर की शादी है। दिल्ली की मीरा राजपूत के साथ आज शाहिद सात फेरे लेंगे। बहरहाल, हमें पता है आज कितने ही दिल टूटेंगे, लेकिन सच को छिपाया तो नहीं जा सकता। The sangeet ceremony of Shahid Kapoor and Mira Rajput was reportedly held at a Chhatarpur farmhouse, saw the duo matching steps with each other.
Don't Miss! [बॉलीवुड न्यूज] आज यानि की सात जुलाई को लाखों दिलों की धड़कन शाहिद कपूर की शादी है। दिल्ली की मीरा राजपूत के साथ आज शाहिद सात फेरे लेंगे। बहरहाल, हमें पता है आज कितने ही दिल टूटेंगे, लेकिन सच को छिपाया तो नहीं जा सकता। The sangeet ceremony of Shahid Kapoor and Mira Rajput was reportedly held at a Chhatarpur farmhouse, saw the duo matching steps with each other.
सेंट पीटर्सबर्ग - ऐतिहासिक के लिए एक युवा शहरमानक, लेकिन रूसी साम्राज्य की पूर्व राजधानी में चिकित्सा का स्तर इसकी इमारतों और सड़कों के साथ-साथ बढ़ता गया। यहां तक कि एलिजाबेथ पेत्रोव्ना के शासनकाल के दौरान, वह देश का सांस्कृतिक और वैज्ञानिक केंद्र बन गया, और वह आज भी बना हुआ है। सेंट पीटर्सबर्ग का पहला मुफ्त अस्पताल, याजैसा कि उन्हें कहा जाता था, चैरिटी हाउस, या अलम-हाउस, 18 वीं शताब्दी के अंत में धर्मार्थ समाजों, व्यक्तियों और रॉयल्टी के प्रयासों से खुलने लगे। आज सेंट पीटर्सबर्ग में लगभग 150 अस्पताल हैं, जिनमें से प्रत्येक का अपना इतिहास है, सीधे इस शहर में चिकित्सा के विकास से संबंधित है। अगर हम बहु-चिकित्सा चिकित्सा संस्थानों के बारे में बात करते हैं, तो सेंट पीटर्सबर्ग का दूसरा शहर अस्पताल यूरोपीय स्तर की सेवा का एक संकेतक है और शहर का सबसे बड़ा बहु-विषयक अस्पताल है। समर्थन और सहायता के साथ 1991 में स्थापितजर्मन विशेषज्ञ, यह जल्द ही नवीनतम चिकित्सा उपकरणों से सुसज्जित सबसे आधुनिक चिकित्सा संस्थान बन गया। यह योग्य विशेषज्ञों को न केवल उपचार के उच्च-तकनीकी तरीकों का उपयोग करके सबसे जटिल संचालन करने की अनुमति देता है, बल्कि देश के कई शोध संस्थानों और चिकित्सा विश्वविद्यालयों के लिए एक प्रशिक्षण मंच भी है। आज, सेंट पीटर्सबर्ग सिटी हॉस्पिटल 2 निम्नलिखित विभागों में प्रति वर्ष 40,000 से अधिक रोगियों की सेवा करता हैः - नैदानिक इकाई; - पुनर्वास विभाग; - नेत्र विज्ञान केंद्र; - स्त्री रोग; - गैस्ट्रोएंटरोलॉजी सेंटर; - कार्डियोलॉजी के तीन विभाग; - पुनर्जीवन और गहन देखभाल; - चिकित्सा कॉस्मेटोलॉजी; - न्यूरोसर्जरी के 2 विभाग; - न्यूरोलॉजी के 2 केंद्र; - सामान्य सर्जरी; - रक्त आधान केंद्र; - संवहनी सर्जरी विभाग; - आघात और ऑर्थोपेडिक्स; - मूत्रविज्ञान; - एंडोक्रिनोलॉजी; - मैक्सिलोफैशियल सर्जरी के लिए केंद्र; - पल्मोनोलॉजी और वर्टेब्रल सर्जरी के केंद्र। इस अस्पताल में सबसे अच्छा हैनैदानिक उपकरण, रोगी की बीमारी का कारण निर्धारित करने के लिए उच्च सटीकता के साथ अनुमति देता है। हृदय, मस्तिष्क के जहाजों और अन्य अंगों पर सबसे जटिल ऑपरेशन लेजर और इलेक्ट्रोसर्जरी की मदद से किए जाते हैं। इस चिकित्सा संस्थान में डॉक्टरों की उपलब्धियां और उपचार का स्तर उन्हें देश के शीर्ष दस सर्वश्रेष्ठ अस्पतालों में बने रहने की अनुमति देता है। अलेक्जेंडर बैरक अस्पताल की स्थापना 1882 में हुई थी। आज यह बोटकिन अस्पताल (सेंट पीटर्सबर्ग) है, जो कि मिरगोडास्काया स्ट्रीट, 3 में स्थित है। तेज-तर्रार की जरूरत का सवालशहर में एक अलग संक्रामक चिकित्सा संस्थान था, यह इस तथ्य के कारण था कि संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ गई थी क्योंकि संक्रमित मरीज एक ही वार्ड में अन्य रोगियों के साथ थे। इन उद्देश्यों के लिए, एक अलग 22 बैरक का निर्माण किया गया था, जिनमें से प्रत्येक को एक विशेष प्रकार की बीमारी के लिए आवंटित किया गया था, और दीक्षांत समारोह के लिए एक। तथ्य यह है कि सेंट पीटर्सबर्ग के बाकी अस्पताल बंद हो गए हैंसंक्रमित में ले लो, राजधानी में महामारी विज्ञान की स्थिति को काफी कम कर दिया। इस संस्था के ट्रस्टी एस। पी। बोटकिन थे, जिनकी मृत्यु के बाद यह उनका नाम धारण करने लगे। आज यह सबसे बड़ा शहरी केंद्र हैसंक्रामक रोगों की रोकथाम और उपचार। बोटकिन अस्पताल (सेंट पीटर्सबर्ग) ने इस दिशा में काम करते हुए शहर की सभी चिकित्सा इकाइयों को एकजुट कर दिया है। 2004 तक, यह सुविधा पुराने में स्थित थीइमारतें, ताकि शहर की सरकार ने नई इमारतों का निर्माण करने का फैसला किया, जो 2011 और 2013 में पूरी तरह से चालू थीं। आज शहर में बच्चों के लिए 20 चिकित्सा संस्थान हैं। सेंट पीटर्सबर्ग में सबसे बड़े बच्चों के अस्पतालः - सेंट मैरी मैग्डलीन का नाम। यह शहर के सबसे पुराने अस्पतालों में से एक है, जिसकी स्थापना 1829 में हुई थी। जिस हवेली में यह स्थित था, वह 1794 में इवान कुसोव, शाही उद्योग के एक प्रमुख उद्योगपति और आपूर्तिकर्ता के लिए वासिलीव्स्की द्वीप पर बनाया गया था। 1828 में इमारत को अस्पताल में बदलने के लिए बेच दिया गया था। इसके आधार पर, उस समय के लिए इतने उच्च स्तर पर एक अस्पताल स्थापित किया गया था कि शाही परिवार के प्रतिनिधियों ने बार-बार इसका दौरा किया। केवल 1993 के बाद से, अस्पताल को युवा रोगियों को प्राप्त करने के लिए परिवर्तित किया गया था। - 1 सिटी चिल्ड्रन हॉस्पिटल खोला गया1974, जिसके लिए 600 हेक्टेयर Polezhaevsky Park, Krasnoselsky District में आवंटित किए गए थे। आज, अस्पताल के दिन के 13 मरीज वहां रोगियों से मिलते हैं, जिनमें से अधिकांश घड़ी के आसपास रोगियों को प्राप्त करते हैं। - पांचवां बच्चों का नैदानिक अस्पताल। फिलाटोव को कभी शाही निकोलस कहा जाता था, रूस में बच्चों का पहला अस्पताल था। 1832 में स्थापित, आज यह सालाना लगभग 70,000 छोटे रोगियों को प्राप्त करता है। इसके 29 कार्यालयों में 650 बेड हैं और इसकी दीवारों के भीतर 800 कर्मचारी काम करते हैं। यदि किसी बच्चे को तत्काल सहायता की आवश्यकता होती है, तो उसे यहां भेजा जाता है। सेंट पीटर्सबर्ग में बच्चों के अस्पताल सर्वोत्तम नैदानिक उपकरण और आधुनिक ऑपरेटिंग थिएटर से सुसज्जित हैं। रूसी साम्राज्य की राजधानी प्रसिद्ध थीअपने निवासियों के दान और संरक्षण। शहर की कई इमारतें उस समय के अमीर और प्रबुद्ध लोगों द्वारा बनाई गई थीं। इसी तरह, क्षेत्रीय अस्पताल (सेंट पीटर्सबर्ग) एक बार एक चैरिटी हाउस था जो ए। आई। टिमेनकोव के पहले गिल्ड के निजी आवास के आंगन में बनाया गया था। एक बार इसने 3 कार्यालय रखेः नर, मादा और बच्चे, साथ ही अनाथों और एक चैपल के लिए एक स्कूल। 1939 से, इसने 600 बिस्तरों के एक क्षेत्रीय अस्पताल को सुसज्जित किया है, जिसके साथ इसने एक क्लिनिक और एक नर्सिंग स्कूल खोला है। 1980 तक, इसमें सभी रोगी शामिल नहीं थे, और इसे विस्तारित करने का निर्णय लिया गया। 1987 में, इस चिकित्सा संस्थान ने एक ही समय में 1,000 से अधिक रोगियों का इलाज किया। आज, सेंट पीटर्सबर्ग में सभी शहर के अस्पताल ऐसे परिणामों का दावा नहीं कर सकते हैंः - 1053 स्थानों में अस्पताल; - क्लिनिक, जहां डॉक्टर 40 विशिष्टताओं में काम करते हैं; - प्रति दिन 500 से अधिक रिसेप्शन; - इस अस्पताल में आउट पेशेंट उपचार प्रति वर्ष 200,000 से अधिक लोगों द्वारा प्राप्त किया जाता है; - यह एक वैज्ञानिक और व्यावहारिक परिसर है जिसमें रोगों के उपचार के नए तरीकों को लगातार सर्वोत्तम चिकित्सा प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके पेश किया जा रहा है। शहर का क्षेत्रीय अस्पताल कई दशकों से लेनिनग्राद क्षेत्र के सभी निवासियों को तत्काल चिकित्सा सेवा प्रदान कर रहा है। सेंट पीटर्सबर्ग के नैदानिक अस्पताल हैंशहर के चिकित्सा विश्वविद्यालयों के आधार। तो, उन्हें अस्पताल। पीटर द ग्रेट (पिस्करेव्स्की एवेन्यू, 47) विश्वविद्यालय को संदर्भित करता है। Mechnikov। इस प्रमुख चिकित्सा संस्थान के उद्भव से पहले 1903 में 1000 बिस्तरों वाले अस्पताल की आवश्यकता पर राज्य ड्यूमा के एक निर्णय से पहले किया गया था। 1914 में शाही व्यक्तियों की उपस्थिति में इसका भव्य उद्घाटन हुआ। 1917 तक, इसमें 1,500 बिस्तर थे, और टाइफाइड और हैजा जैसी जरूरी बीमारियों के लिए कार्यालय खुले थे। 1932 से, अस्पताल खोला गया हैmedvuz- अस्पताल, जहां हर साल 200 छात्र अध्ययन करते थे और साथ ही साथ अस्पतालों में काम करते थे। आज, इसके 50 भवनों में 26 विभाग हैं, जो सालाना 40,000 से अधिक रोगियों को लेते हैं। क्लिनिक नवीनतम चिकित्सा तकनीक से लैस है और अभी भी भविष्य के डॉक्टरों के लिए एक प्रशिक्षण आधार है। सेंट पीटर्सबर्ग में कई अस्पताल नहीं हो सकतेअलेक्जेंडर क्लिनिक के रूप में इस तरह की "जीवनी" का दावा करें। 04.16.1842 के निकोलस I के फरमान से स्थापित, अकुशल मजदूरों के लिए अस्पताल इस बात का एक उदाहरण है कि शाही परिवार ने लोगों की जरूरतों को कितना बढ़ाया। प्रारंभ में, रोगियों को अन्य चिकित्सा संस्थानों के नामित वार्डों में रखा गया था, लेकिन 1866 में, अलेक्जेंडर II के डिक्री द्वारा, एक अलग क्लिनिक खोला गया, जिसे कामकाजी आबादी के लिए अलेक्जेंडर अस्पताल कहा जाता था। 1891 तक, 10,000 से अधिक का इलाज यहां प्रतिवर्ष किया जाता था।लोग। इस संस्था की एक विशिष्ट विशेषता यह है कि यह यहाँ था जिसने विभिन्न रोगों के उपचार के लिए कई नए तरीके विकसित किए। अलेक्जेंडर अस्पताल में आज का स्टाफ भी इसके लिए प्रसिद्ध है। यह प्रतिदिन 200 रोगियों को स्वीकार करता है, और चौबीसों घंटे नैदानिक विभाग जीवन को बचाता है जब आपातकालीन सहायता की आवश्यकता होती है। सिकंदर अस्पताल की दीवारों के भीतर 30,000 से अधिक रोगियों को उच्च-गुणवत्ता वाली चिकित्सा देखभाल प्राप्त होती है। सेंट पीटर्सबर्ग में केवल 3 अस्पतालों में ऐसे हैंगरीबों के लिए मरिंस्की क्लिनिक के रूप में लंबा इतिहास। यह शहर की 100 वीं वर्षगांठ के सम्मान में स्थापित किया गया था, महारानी मारिया फियोडोरोव्ना के अनुरोध पर और 1805 में अपने पहले रोगियों को स्वीकार करना शुरू किया। जियाकोमो क्वारेंगी के डिजाइन के अनुसार बनाया गया, यह आज लाइटिनि प्रोस्पेक्ट का एक आभूषण भी है। हमारे समय में, यह लगभग विशेषज्ञों का प्रतिनिधित्व करता हैसभी चिकित्सा क्षेत्रों में, यह सालाना 40,000 रोगियों की मदद करता है। क्लिनिक विशेष रूप से अपने सर्जनों के परिणामों के लिए प्रसिद्ध है, जिसकी बदौलत हर साल 12,000 से अधिक ऑपरेशन किए जाते हैं। अस्पताल में 15 इमारतें हैं, जिनमें 18 मुख्य और 20 अतिरिक्त विभाग हैं, जो सिर्फ 1000 से अधिक विशेषज्ञों को नियुक्त करते हैं। 1946 में, इसे खोलने का निर्णय लिया गयासेंट पीटर्सबर्ग का ऑन्कोलॉजिकल अस्पताल। मुख्य भवन और इसकी शाखा के पतेः वयोवृद्ध Ave., 56, और 2 एन डी बर्च गली। पहले से ही 70 वर्षों के लिए, सौम्य और घातक ट्यूमर वाले रोगियों के लिए सहायता और व्यापक उपचार किया गया है। ऑन्कोलॉजिकल डिस्पेंसरी कैंसर के निदान और उपचार के लिए सर्वोत्तम उपकरणों से सुसज्जित है। सेंट पीटर्सबर्ग के अस्पतालों का एक गौरवशाली इतिहास हैन केवल शहर में, बल्कि पूरे देश में दवा का निर्माण। एक समय में, ऐसे महान डॉक्टरों और वैज्ञानिकों जैसे कि बोटकिन, बेखटरेव, विनोग्रादोव और अन्य ने उनमें काम किया था। उनमें से कई के नाम विदेश में प्रसिद्ध हैं।
सेंट पीटर्सबर्ग - ऐतिहासिक के लिए एक युवा शहरमानक, लेकिन रूसी साम्राज्य की पूर्व राजधानी में चिकित्सा का स्तर इसकी इमारतों और सड़कों के साथ-साथ बढ़ता गया। यहां तक कि एलिजाबेथ पेत्रोव्ना के शासनकाल के दौरान, वह देश का सांस्कृतिक और वैज्ञानिक केंद्र बन गया, और वह आज भी बना हुआ है। सेंट पीटर्सबर्ग का पहला मुफ्त अस्पताल, याजैसा कि उन्हें कहा जाता था, चैरिटी हाउस, या अलम-हाउस, अट्ठारह वीं शताब्दी के अंत में धर्मार्थ समाजों, व्यक्तियों और रॉयल्टी के प्रयासों से खुलने लगे। आज सेंट पीटर्सबर्ग में लगभग एक सौ पचास अस्पताल हैं, जिनमें से प्रत्येक का अपना इतिहास है, सीधे इस शहर में चिकित्सा के विकास से संबंधित है। अगर हम बहु-चिकित्सा चिकित्सा संस्थानों के बारे में बात करते हैं, तो सेंट पीटर्सबर्ग का दूसरा शहर अस्पताल यूरोपीय स्तर की सेवा का एक संकेतक है और शहर का सबसे बड़ा बहु-विषयक अस्पताल है। समर्थन और सहायता के साथ एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे में स्थापितजर्मन विशेषज्ञ, यह जल्द ही नवीनतम चिकित्सा उपकरणों से सुसज्जित सबसे आधुनिक चिकित्सा संस्थान बन गया। यह योग्य विशेषज्ञों को न केवल उपचार के उच्च-तकनीकी तरीकों का उपयोग करके सबसे जटिल संचालन करने की अनुमति देता है, बल्कि देश के कई शोध संस्थानों और चिकित्सा विश्वविद्यालयों के लिए एक प्रशिक्षण मंच भी है। आज, सेंट पीटर्सबर्ग सिटी हॉस्पिटल दो निम्नलिखित विभागों में प्रति वर्ष चालीस,शून्य से अधिक रोगियों की सेवा करता हैः - नैदानिक इकाई; - पुनर्वास विभाग; - नेत्र विज्ञान केंद्र; - स्त्री रोग; - गैस्ट्रोएंटरोलॉजी सेंटर; - कार्डियोलॉजी के तीन विभाग; - पुनर्जीवन और गहन देखभाल; - चिकित्सा कॉस्मेटोलॉजी; - न्यूरोसर्जरी के दो विभाग; - न्यूरोलॉजी के दो केंद्र; - सामान्य सर्जरी; - रक्त आधान केंद्र; - संवहनी सर्जरी विभाग; - आघात और ऑर्थोपेडिक्स; - मूत्रविज्ञान; - एंडोक्रिनोलॉजी; - मैक्सिलोफैशियल सर्जरी के लिए केंद्र; - पल्मोनोलॉजी और वर्टेब्रल सर्जरी के केंद्र। इस अस्पताल में सबसे अच्छा हैनैदानिक उपकरण, रोगी की बीमारी का कारण निर्धारित करने के लिए उच्च सटीकता के साथ अनुमति देता है। हृदय, मस्तिष्क के जहाजों और अन्य अंगों पर सबसे जटिल ऑपरेशन लेजर और इलेक्ट्रोसर्जरी की मदद से किए जाते हैं। इस चिकित्सा संस्थान में डॉक्टरों की उपलब्धियां और उपचार का स्तर उन्हें देश के शीर्ष दस सर्वश्रेष्ठ अस्पतालों में बने रहने की अनुमति देता है। अलेक्जेंडर बैरक अस्पताल की स्थापना एक हज़ार आठ सौ बयासी में हुई थी। आज यह बोटकिन अस्पताल है, जो कि मिरगोडास्काया स्ट्रीट, तीन में स्थित है। तेज-तर्रार की जरूरत का सवालशहर में एक अलग संक्रामक चिकित्सा संस्थान था, यह इस तथ्य के कारण था कि संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ गई थी क्योंकि संक्रमित मरीज एक ही वार्ड में अन्य रोगियों के साथ थे। इन उद्देश्यों के लिए, एक अलग बाईस बैरक का निर्माण किया गया था, जिनमें से प्रत्येक को एक विशेष प्रकार की बीमारी के लिए आवंटित किया गया था, और दीक्षांत समारोह के लिए एक। तथ्य यह है कि सेंट पीटर्सबर्ग के बाकी अस्पताल बंद हो गए हैंसंक्रमित में ले लो, राजधानी में महामारी विज्ञान की स्थिति को काफी कम कर दिया। इस संस्था के ट्रस्टी एस। पी। बोटकिन थे, जिनकी मृत्यु के बाद यह उनका नाम धारण करने लगे। आज यह सबसे बड़ा शहरी केंद्र हैसंक्रामक रोगों की रोकथाम और उपचार। बोटकिन अस्पताल ने इस दिशा में काम करते हुए शहर की सभी चिकित्सा इकाइयों को एकजुट कर दिया है। दो हज़ार चार तक, यह सुविधा पुराने में स्थित थीइमारतें, ताकि शहर की सरकार ने नई इमारतों का निर्माण करने का फैसला किया, जो दो हज़ार ग्यारह और दो हज़ार तेरह में पूरी तरह से चालू थीं। आज शहर में बच्चों के लिए बीस चिकित्सा संस्थान हैं। सेंट पीटर्सबर्ग में सबसे बड़े बच्चों के अस्पतालः - सेंट मैरी मैग्डलीन का नाम। यह शहर के सबसे पुराने अस्पतालों में से एक है, जिसकी स्थापना एक हज़ार आठ सौ उनतीस में हुई थी। जिस हवेली में यह स्थित था, वह एक हज़ार सात सौ चौरानवे में इवान कुसोव, शाही उद्योग के एक प्रमुख उद्योगपति और आपूर्तिकर्ता के लिए वासिलीव्स्की द्वीप पर बनाया गया था। एक हज़ार आठ सौ अट्ठाईस में इमारत को अस्पताल में बदलने के लिए बेच दिया गया था। इसके आधार पर, उस समय के लिए इतने उच्च स्तर पर एक अस्पताल स्थापित किया गया था कि शाही परिवार के प्रतिनिधियों ने बार-बार इसका दौरा किया। केवल एक हज़ार नौ सौ तिरानवे के बाद से, अस्पताल को युवा रोगियों को प्राप्त करने के लिए परिवर्तित किया गया था। - एक सिटी चिल्ड्रन हॉस्पिटल खोला गयाएक हज़ार नौ सौ चौहत्तर, जिसके लिए छः सौ हेक्टेयर Polezhaevsky Park, Krasnoselsky District में आवंटित किए गए थे। आज, अस्पताल के दिन के तेरह मरीज वहां रोगियों से मिलते हैं, जिनमें से अधिकांश घड़ी के आसपास रोगियों को प्राप्त करते हैं। - पांचवां बच्चों का नैदानिक अस्पताल। फिलाटोव को कभी शाही निकोलस कहा जाता था, रूस में बच्चों का पहला अस्पताल था। एक हज़ार आठ सौ बत्तीस में स्थापित, आज यह सालाना लगभग सत्तर,शून्य छोटे रोगियों को प्राप्त करता है। इसके उनतीस कार्यालयों में छः सौ पचास बेड हैं और इसकी दीवारों के भीतर आठ सौ कर्मचारी काम करते हैं। यदि किसी बच्चे को तत्काल सहायता की आवश्यकता होती है, तो उसे यहां भेजा जाता है। सेंट पीटर्सबर्ग में बच्चों के अस्पताल सर्वोत्तम नैदानिक उपकरण और आधुनिक ऑपरेटिंग थिएटर से सुसज्जित हैं। रूसी साम्राज्य की राजधानी प्रसिद्ध थीअपने निवासियों के दान और संरक्षण। शहर की कई इमारतें उस समय के अमीर और प्रबुद्ध लोगों द्वारा बनाई गई थीं। इसी तरह, क्षेत्रीय अस्पताल एक बार एक चैरिटी हाउस था जो ए। आई। टिमेनकोव के पहले गिल्ड के निजी आवास के आंगन में बनाया गया था। एक बार इसने तीन कार्यालय रखेः नर, मादा और बच्चे, साथ ही अनाथों और एक चैपल के लिए एक स्कूल। एक हज़ार नौ सौ उनतालीस से, इसने छः सौ बिस्तरों के एक क्षेत्रीय अस्पताल को सुसज्जित किया है, जिसके साथ इसने एक क्लिनिक और एक नर्सिंग स्कूल खोला है। एक हज़ार नौ सौ अस्सी तक, इसमें सभी रोगी शामिल नहीं थे, और इसे विस्तारित करने का निर्णय लिया गया। एक हज़ार नौ सौ सत्तासी में, इस चिकित्सा संस्थान ने एक ही समय में एक,शून्य से अधिक रोगियों का इलाज किया। आज, सेंट पीटर्सबर्ग में सभी शहर के अस्पताल ऐसे परिणामों का दावा नहीं कर सकते हैंः - एक हज़ार तिरेपन स्थानों में अस्पताल; - क्लिनिक, जहां डॉक्टर चालीस विशिष्टताओं में काम करते हैं; - प्रति दिन पाँच सौ से अधिक रिसेप्शन; - इस अस्पताल में आउट पेशेंट उपचार प्रति वर्ष दो सौ,शून्य से अधिक लोगों द्वारा प्राप्त किया जाता है; - यह एक वैज्ञानिक और व्यावहारिक परिसर है जिसमें रोगों के उपचार के नए तरीकों को लगातार सर्वोत्तम चिकित्सा प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके पेश किया जा रहा है। शहर का क्षेत्रीय अस्पताल कई दशकों से लेनिनग्राद क्षेत्र के सभी निवासियों को तत्काल चिकित्सा सेवा प्रदान कर रहा है। सेंट पीटर्सबर्ग के नैदानिक अस्पताल हैंशहर के चिकित्सा विश्वविद्यालयों के आधार। तो, उन्हें अस्पताल। पीटर द ग्रेट विश्वविद्यालय को संदर्भित करता है। Mechnikov। इस प्रमुख चिकित्सा संस्थान के उद्भव से पहले एक हज़ार नौ सौ तीन में एक हज़ार बिस्तरों वाले अस्पताल की आवश्यकता पर राज्य ड्यूमा के एक निर्णय से पहले किया गया था। एक हज़ार नौ सौ चौदह में शाही व्यक्तियों की उपस्थिति में इसका भव्य उद्घाटन हुआ। एक हज़ार नौ सौ सत्रह तक, इसमें एक,पाँच सौ बिस्तर थे, और टाइफाइड और हैजा जैसी जरूरी बीमारियों के लिए कार्यालय खुले थे। एक हज़ार नौ सौ बत्तीस से, अस्पताल खोला गया हैmedvuz- अस्पताल, जहां हर साल दो सौ छात्र अध्ययन करते थे और साथ ही साथ अस्पतालों में काम करते थे। आज, इसके पचास भवनों में छब्बीस विभाग हैं, जो सालाना चालीस,शून्य से अधिक रोगियों को लेते हैं। क्लिनिक नवीनतम चिकित्सा तकनीक से लैस है और अभी भी भविष्य के डॉक्टरों के लिए एक प्रशिक्षण आधार है। सेंट पीटर्सबर्ग में कई अस्पताल नहीं हो सकतेअलेक्जेंडर क्लिनिक के रूप में इस तरह की "जीवनी" का दावा करें। चार.सोलह.एक हज़ार आठ सौ बयालीस के निकोलस I के फरमान से स्थापित, अकुशल मजदूरों के लिए अस्पताल इस बात का एक उदाहरण है कि शाही परिवार ने लोगों की जरूरतों को कितना बढ़ाया। प्रारंभ में, रोगियों को अन्य चिकित्सा संस्थानों के नामित वार्डों में रखा गया था, लेकिन एक हज़ार आठ सौ छयासठ में, अलेक्जेंडर II के डिक्री द्वारा, एक अलग क्लिनिक खोला गया, जिसे कामकाजी आबादी के लिए अलेक्जेंडर अस्पताल कहा जाता था। एक हज़ार आठ सौ इक्यानवे तक, दस,शून्य से अधिक का इलाज यहां प्रतिवर्ष किया जाता था।लोग। इस संस्था की एक विशिष्ट विशेषता यह है कि यह यहाँ था जिसने विभिन्न रोगों के उपचार के लिए कई नए तरीके विकसित किए। अलेक्जेंडर अस्पताल में आज का स्टाफ भी इसके लिए प्रसिद्ध है। यह प्रतिदिन दो सौ रोगियों को स्वीकार करता है, और चौबीसों घंटे नैदानिक विभाग जीवन को बचाता है जब आपातकालीन सहायता की आवश्यकता होती है। सिकंदर अस्पताल की दीवारों के भीतर तीस,शून्य से अधिक रोगियों को उच्च-गुणवत्ता वाली चिकित्सा देखभाल प्राप्त होती है। सेंट पीटर्सबर्ग में केवल तीन अस्पतालों में ऐसे हैंगरीबों के लिए मरिंस्की क्लिनिक के रूप में लंबा इतिहास। यह शहर की एक सौ वीं वर्षगांठ के सम्मान में स्थापित किया गया था, महारानी मारिया फियोडोरोव्ना के अनुरोध पर और एक हज़ार आठ सौ पाँच में अपने पहले रोगियों को स्वीकार करना शुरू किया। जियाकोमो क्वारेंगी के डिजाइन के अनुसार बनाया गया, यह आज लाइटिनि प्रोस्पेक्ट का एक आभूषण भी है। हमारे समय में, यह लगभग विशेषज्ञों का प्रतिनिधित्व करता हैसभी चिकित्सा क्षेत्रों में, यह सालाना चालीस,शून्य रोगियों की मदद करता है। क्लिनिक विशेष रूप से अपने सर्जनों के परिणामों के लिए प्रसिद्ध है, जिसकी बदौलत हर साल बारह,शून्य से अधिक ऑपरेशन किए जाते हैं। अस्पताल में पंद्रह इमारतें हैं, जिनमें अट्ठारह मुख्य और बीस अतिरिक्त विभाग हैं, जो सिर्फ एक हज़ार से अधिक विशेषज्ञों को नियुक्त करते हैं। एक हज़ार नौ सौ छियालीस में, इसे खोलने का निर्णय लिया गयासेंट पीटर्सबर्ग का ऑन्कोलॉजिकल अस्पताल। मुख्य भवन और इसकी शाखा के पतेः वयोवृद्ध Ave., छप्पन, और दो एन डी बर्च गली। पहले से ही सत्तर वर्षों के लिए, सौम्य और घातक ट्यूमर वाले रोगियों के लिए सहायता और व्यापक उपचार किया गया है। ऑन्कोलॉजिकल डिस्पेंसरी कैंसर के निदान और उपचार के लिए सर्वोत्तम उपकरणों से सुसज्जित है। सेंट पीटर्सबर्ग के अस्पतालों का एक गौरवशाली इतिहास हैन केवल शहर में, बल्कि पूरे देश में दवा का निर्माण। एक समय में, ऐसे महान डॉक्टरों और वैज्ञानिकों जैसे कि बोटकिन, बेखटरेव, विनोग्रादोव और अन्य ने उनमें काम किया था। उनमें से कई के नाम विदेश में प्रसिद्ध हैं।
परिस्थिति आने पर (4) इकाइयों का पहुँच में न हो तो उसी वर्ग की दूसरी इकाई को चुना जा सकता है। (5) यदि समग्र का भौगोलिक विस्तार अधिक हो तो जनसंख्या का स्तरीकृत अध्ययन तो होगा ही; क्षेत्र को भी बाँटकर अध्ययन किया जा सकता है। प्रतिस्थापन भी किया जा सकता है। अर्थात् एक प्रतिनिधि इकाई (6) सामान्य दैव निदर्शन में लगने वाले खर्च और समय में ही इस विधि से कई चरों पर आधारित निष्कर्ष निकल आते हैं। इसलिए यह कम खर्चीली विधि है। स्तरित निदर्शन के दोष (Demerits ) (1) यदि वर्गों का निर्माण उचित प्रकार से नहीं किया गया है तो निदर्शन के चुनने में पक्षपात आने की सम्भावना रहती है। ऐसा भी हो सकता है कि कुछ वर्गों में से अधिक इकाइयों का चुनाव कर लिया जाये और कुछ में से कम। ऐसी स्थिति में निदर्शन प्रतिनिधित्वपूर्ण नहीं रह जाता है। (2) प्रतिनिधित्वपूर्ण होने के लिए निदर्शन का आनुपातिक होना आवश्यक है। किन्तु भिन्न-भिन्न वर्गों के आकार में यदि बहुत अधिक भिन्नता है तो उनमें समानुपात का गुण लाना कठिन होता है। साथ ही चुनाव करने वाले व्यक्ति की व्यक्तिगत रूचि का भी प्रभाव पड़ता है। (3) यदि वर्गों से इकाइयों का चुनाव असमानुपातिकं आधार पर किया गया है तो बाद में भार का प्रयोग करना पड़ता है। भार प्रदान करते समय व्यक्ति का पक्षपात भी आ सकता है तथा अनुचित भार प्रदान करने पर इकाइयाँ प्रतिनिधित्वपूर्ण नहीं रह जाती हैं। (4) स्तरित निदर्शन में एक गुण रखने वाली इकाइयों का एक वर्ग बनाया जाता है किन्तु एक इकाई में एकाधिक गुण होने पर यह कठिनाई आती है कि उसे किस वर्ग में रखा जाय । गुच्छेदार या गुच्छक निदर्शन (CLUSTER-SAMPLING) व्यवहार में देखा जाता है कि विस्तृत क्षेत्रों में फैले समग्र का सर्वेक्षण, चाहे दैव निदर्शन या स्तरीकृत निदर्शन के माध्यम से किया जा रहा हो - बहुत खर्चीला, समय लेने वाला होता है। क्योंकि, एक कोने से दूसरे कोने तक फैले हुए प्रतिनिधियों से मिलना पड़ता है। ऐसे में कम खर्चीला मार्ग क्या हो जिसकी विश्वसनीयता कम न हो। इसीलिए खोजा गया गुच्छक निदर्शन। वीस के शब्दों में "समूह में प्रतिनिधि चुने जाएँ जब गुच्छक निदर्शन है।" इस तरह के निदर्शन में कई बातें ध्यान में रखी जाती हैं मसलन (1) कितने प्रकार की प्रतिनिधि इकाइयाँ हैं जो पूरे समग्र में फैली हैं ? ( 2 ) क्या समग्र के किसी विशेष क्षेत्र में सभी प्रकार की इकाइयों का प्रतिनिधित्व है ? (3) क्या समग्र के चारों कोनों तक दौड़-धूप करने की जगह विशेष घेरों में चुने गये प्रतिनिधियों का ही अध्ययन किया जाय तो क्या प्रतिनिधित्व वास्तविक न होगा ? ( 4 ) और, अगर घेरों ( pockets) में बसे प्रतिनिधियों के अध्ययन से काम चल सकता है तो अध्ययन कैसे करें ? (5) दैव निदर्शन और स्तरीकृत निदर्शन का प्रयोग कैसे करें ? गुच्छक निदर्शन कैसे होता है ? जब खर्च और समय बचाना हो, जब इकाइयों की पूरी सूची उपलब्ध न हो, जब बड़े निदर्शन में भाग-दौड़ की अत्याधिक सम्भावना हो तो गुच्छक निदर्शन करते हैं। गुच्छक से अर्थ है मनुष्यों के यहाँ-वहाँ बसे समूह जिनमें सभी प्रकार की इकाइयाँ सम्मिलित हैं। जेसे 'गाँव में लोग', 'स्कूल में लोग', 'शहर में लोग' आदि। एक समग्र में कई-कई गुच्छक हो सकते हैं। निदर्शन के नाम पर अकेले-अकेले व्यक्ति को चुनकर अध्ययन करने की जगह गुच्छक निदर्शन में कुछ व्यक्तियों से बनी 'बस्ती' (गुच्छक) का दैव निदर्शन और स्तरित निदर्शन के जरिये चुनाव कर लेते हैं । उदाहरण देखिए - उत्तर प्रदेश की जनता का सर्वेक्षण करना है, आगामी चुनाव में जनमत की दृष्टि से । उत्तर प्रदेश हुआ 'समग्र' । इस प्रदेश में गाँव, कस्वे, नगर हैं, जहाँ उत्तर प्रदेश की जनता रहती है। हरेक गाँव, कस्वे में हिन्दू, मुस्लिम, बैकवर्ड, अनुसूचित जाति, धर्म व वर्ग के लोग रहते हैं। सर्वेक्षण का एक तरीका यह हो सकता है कि हम प्रत्येक वर्ग के सदस्यों का चुनाव 'अकेले-अकेले' पूरे प्रदेश से करें। यह भी हो सकता है कि हम कुछ 'गाँवों' और 'कस्वों' तथा 'नगरों' को ही दैव तथा स्तरित निदर्शन के द्वारा चुन लें। आखिर इन बस्तियों में भी तो वे ही लोग रहते हैं जिनको हम पूरे उत्तर प्रदेश में दौड़-धूप कर चुनते- निदर्शन के जरिये । इस निदर्शन से भी तो हम प्रत्येक वर्ग के जनमत का पता लगा सकते हैं। यही है - गुच्छक निदर्शन द्वारा अध्ययन का तरीका । गुच्छक निदर्शक के लाभ (Advantages) (1) बहुत बड़े समग्र को लघु बनाकर अध्ययन किया जा सकता है। ( 2 ) धन, श्रम और समय बच जाता है। ( 3 ) साक्षात्कारदाताओं से मिल पाना अपेक्षाकृत सरल होता है।
परिस्थिति आने पर इकाइयों का पहुँच में न हो तो उसी वर्ग की दूसरी इकाई को चुना जा सकता है। यदि समग्र का भौगोलिक विस्तार अधिक हो तो जनसंख्या का स्तरीकृत अध्ययन तो होगा ही; क्षेत्र को भी बाँटकर अध्ययन किया जा सकता है। प्रतिस्थापन भी किया जा सकता है। अर्थात् एक प्रतिनिधि इकाई सामान्य दैव निदर्शन में लगने वाले खर्च और समय में ही इस विधि से कई चरों पर आधारित निष्कर्ष निकल आते हैं। इसलिए यह कम खर्चीली विधि है। स्तरित निदर्शन के दोष यदि वर्गों का निर्माण उचित प्रकार से नहीं किया गया है तो निदर्शन के चुनने में पक्षपात आने की सम्भावना रहती है। ऐसा भी हो सकता है कि कुछ वर्गों में से अधिक इकाइयों का चुनाव कर लिया जाये और कुछ में से कम। ऐसी स्थिति में निदर्शन प्रतिनिधित्वपूर्ण नहीं रह जाता है। प्रतिनिधित्वपूर्ण होने के लिए निदर्शन का आनुपातिक होना आवश्यक है। किन्तु भिन्न-भिन्न वर्गों के आकार में यदि बहुत अधिक भिन्नता है तो उनमें समानुपात का गुण लाना कठिन होता है। साथ ही चुनाव करने वाले व्यक्ति की व्यक्तिगत रूचि का भी प्रभाव पड़ता है। यदि वर्गों से इकाइयों का चुनाव असमानुपातिकं आधार पर किया गया है तो बाद में भार का प्रयोग करना पड़ता है। भार प्रदान करते समय व्यक्ति का पक्षपात भी आ सकता है तथा अनुचित भार प्रदान करने पर इकाइयाँ प्रतिनिधित्वपूर्ण नहीं रह जाती हैं। स्तरित निदर्शन में एक गुण रखने वाली इकाइयों का एक वर्ग बनाया जाता है किन्तु एक इकाई में एकाधिक गुण होने पर यह कठिनाई आती है कि उसे किस वर्ग में रखा जाय । गुच्छेदार या गुच्छक निदर्शन व्यवहार में देखा जाता है कि विस्तृत क्षेत्रों में फैले समग्र का सर्वेक्षण, चाहे दैव निदर्शन या स्तरीकृत निदर्शन के माध्यम से किया जा रहा हो - बहुत खर्चीला, समय लेने वाला होता है। क्योंकि, एक कोने से दूसरे कोने तक फैले हुए प्रतिनिधियों से मिलना पड़ता है। ऐसे में कम खर्चीला मार्ग क्या हो जिसकी विश्वसनीयता कम न हो। इसीलिए खोजा गया गुच्छक निदर्शन। वीस के शब्दों में "समूह में प्रतिनिधि चुने जाएँ जब गुच्छक निदर्शन है।" इस तरह के निदर्शन में कई बातें ध्यान में रखी जाती हैं मसलन कितने प्रकार की प्रतिनिधि इकाइयाँ हैं जो पूरे समग्र में फैली हैं ? क्या समग्र के किसी विशेष क्षेत्र में सभी प्रकार की इकाइयों का प्रतिनिधित्व है ? क्या समग्र के चारों कोनों तक दौड़-धूप करने की जगह विशेष घेरों में चुने गये प्रतिनिधियों का ही अध्ययन किया जाय तो क्या प्रतिनिधित्व वास्तविक न होगा ? और, अगर घेरों में बसे प्रतिनिधियों के अध्ययन से काम चल सकता है तो अध्ययन कैसे करें ? दैव निदर्शन और स्तरीकृत निदर्शन का प्रयोग कैसे करें ? गुच्छक निदर्शन कैसे होता है ? जब खर्च और समय बचाना हो, जब इकाइयों की पूरी सूची उपलब्ध न हो, जब बड़े निदर्शन में भाग-दौड़ की अत्याधिक सम्भावना हो तो गुच्छक निदर्शन करते हैं। गुच्छक से अर्थ है मनुष्यों के यहाँ-वहाँ बसे समूह जिनमें सभी प्रकार की इकाइयाँ सम्मिलित हैं। जेसे 'गाँव में लोग', 'स्कूल में लोग', 'शहर में लोग' आदि। एक समग्र में कई-कई गुच्छक हो सकते हैं। निदर्शन के नाम पर अकेले-अकेले व्यक्ति को चुनकर अध्ययन करने की जगह गुच्छक निदर्शन में कुछ व्यक्तियों से बनी 'बस्ती' का दैव निदर्शन और स्तरित निदर्शन के जरिये चुनाव कर लेते हैं । उदाहरण देखिए - उत्तर प्रदेश की जनता का सर्वेक्षण करना है, आगामी चुनाव में जनमत की दृष्टि से । उत्तर प्रदेश हुआ 'समग्र' । इस प्रदेश में गाँव, कस्वे, नगर हैं, जहाँ उत्तर प्रदेश की जनता रहती है। हरेक गाँव, कस्वे में हिन्दू, मुस्लिम, बैकवर्ड, अनुसूचित जाति, धर्म व वर्ग के लोग रहते हैं। सर्वेक्षण का एक तरीका यह हो सकता है कि हम प्रत्येक वर्ग के सदस्यों का चुनाव 'अकेले-अकेले' पूरे प्रदेश से करें। यह भी हो सकता है कि हम कुछ 'गाँवों' और 'कस्वों' तथा 'नगरों' को ही दैव तथा स्तरित निदर्शन के द्वारा चुन लें। आखिर इन बस्तियों में भी तो वे ही लोग रहते हैं जिनको हम पूरे उत्तर प्रदेश में दौड़-धूप कर चुनते- निदर्शन के जरिये । इस निदर्शन से भी तो हम प्रत्येक वर्ग के जनमत का पता लगा सकते हैं। यही है - गुच्छक निदर्शन द्वारा अध्ययन का तरीका । गुच्छक निदर्शक के लाभ बहुत बड़े समग्र को लघु बनाकर अध्ययन किया जा सकता है। धन, श्रम और समय बच जाता है। साक्षात्कारदाताओं से मिल पाना अपेक्षाकृत सरल होता है।
भारतीय वायुसेना के तेजपुर वायुसेना स्टेशन से 23 मई,2017 को उड़ान के बाद दुर्घटनाग्रस्त हुए एसयू-30 विमान के विमान चालक स्वायडन लीडर डी पंकज और फ्लाइट लेंफ्टिनेंट एस अचुदेव की घातक चोटो के कारण मृत्यु हो गई है। विमान के फ्लाइट डाटा रिकार्डर और दुर्घटनाग्रस्त स्थल से बरामद अन्य सामान से पता चला है कि दोनो विमान चालक दुर्घटना के बाद विमान से नहीं निकल सके थे। इससे पहले क्षेत्र में लगातार खोज अभियान के बाद विमान का मलबा 26 मई,2017 को मिला था। एसयू-30 विमान ने 23 मई,2017 को सुबह 10.30 बजे तेजपुर वायुसेना स्टेशन से उड़ान भरी थी और सुबह 11.10 बजे तेजपुर से 60 किलोमीटर इसका रडार और रेडियो संपर्क टूट गया था। विमान नियमित प्रशिक्षण अभियान पर था। विमान और विमान चालको की तलाश के लिए खोज और बचाव अभियान चलाया गया था। इस संबंध में विमान को खोजने के लिए नागरिक प्रशासन और सैन्य अधिकारियो से भी सहायता मांगी गई थी। विमान की अंतिम स्थिति के आधार पर हवाई खोज भी प्रारंभ की गई थी। दुर्घटनाग्रस्त क्षेत्र में लगातार वर्षा, घने बादलो और दुर्गम क्षेत्र के कारण हवाई और जमीनी खोज अभियान में बाधा पंहुची थी। दुर्घटना के कारणो की जांच के आदेश पहले ही जारी किए गए हैं।
भारतीय वायुसेना के तेजपुर वायुसेना स्टेशन से तेईस मई,दो हज़ार सत्रह को उड़ान के बाद दुर्घटनाग्रस्त हुए एसयू-तीस विमान के विमान चालक स्वायडन लीडर डी पंकज और फ्लाइट लेंफ्टिनेंट एस अचुदेव की घातक चोटो के कारण मृत्यु हो गई है। विमान के फ्लाइट डाटा रिकार्डर और दुर्घटनाग्रस्त स्थल से बरामद अन्य सामान से पता चला है कि दोनो विमान चालक दुर्घटना के बाद विमान से नहीं निकल सके थे। इससे पहले क्षेत्र में लगातार खोज अभियान के बाद विमान का मलबा छब्बीस मई,दो हज़ार सत्रह को मिला था। एसयू-तीस विमान ने तेईस मई,दो हज़ार सत्रह को सुबह दस.तीस बजे तेजपुर वायुसेना स्टेशन से उड़ान भरी थी और सुबह ग्यारह.दस बजे तेजपुर से साठ किलोग्राममीटर इसका रडार और रेडियो संपर्क टूट गया था। विमान नियमित प्रशिक्षण अभियान पर था। विमान और विमान चालको की तलाश के लिए खोज और बचाव अभियान चलाया गया था। इस संबंध में विमान को खोजने के लिए नागरिक प्रशासन और सैन्य अधिकारियो से भी सहायता मांगी गई थी। विमान की अंतिम स्थिति के आधार पर हवाई खोज भी प्रारंभ की गई थी। दुर्घटनाग्रस्त क्षेत्र में लगातार वर्षा, घने बादलो और दुर्गम क्षेत्र के कारण हवाई और जमीनी खोज अभियान में बाधा पंहुची थी। दुर्घटना के कारणो की जांच के आदेश पहले ही जारी किए गए हैं।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
नई दिल्ली, Pakistan Political Crisis पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान अब कुछ दिनों के मेहमान बताए जा रहे है. वे खुद सियासत के चक्रव्यूह में बहुत बुरी तरह से फंस गए हैं, जिससे बाहर निकलना उनके लिए नामुमकिन बताया जा रहा है. पाकिस्तान की संसद में आज इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बहस होनी है, जिसके बाद 3 अप्रैल को वोटिंग होगी। इस दिन यह साफ़ हो जाएगा कि इमरान सियासत की पिच पर बने रहेंगे या आउट हो जाएंगे. पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में कुल 342 सांसद है. इमरान खान की सरकार पीटीआई को सत्ता में बने रहने के लिए 172 सांसदों की जरूरत है. लेकिन सदन में उनकी पार्टी के केवल 155 सदस्य है. जिसके बाद उन्होंने पाकिस्तान मुस्लिम लीग (Q)- 5 सीट, बलूचिस्तान अवामी पार्टी- 5 सीट, मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट पाकिस्तान- 7 सीट, ग्रैंड डेमोक्रेटिक एलायंस- 3 सीट, अवामी मुस्लिम लीग- 1 सीट और इंडिपेंडेट सदस्यों के साथ गठबंधन कर कुल 179 सांसदों से अपना बहुमत पेश किया था. वहीँ अविश्वास प्रस्ताव के बाद स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक संयुक्त विपक्ष ने अब तक 169 सदस्यों का समर्थन हासिल कर लिया है. हालांकि सरकार बनाने के लिए उन्हें अभी भी 3 सांसदों की जरूरत है. साल 2018 में पहली बार इमरान खान ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाली थी. ख़बरों की माने तो इमरान खान को सत्ता में लाने में सेना ने अहम भूमिका निभाई थी. लेकिन अब जब खुद सेना उनके साथ नहीं है तो उन्हें हटाने की पूरी तैयारी हो गई है. इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आ चुका है. जैसे ही इमरान खान सत्ता में आए उन्होंने साल 2019 में पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा का कार्यकाल बढ़ा दिया. लेकिन बाद में (अक्टूबर 2021) जब आर्मी चीफ ने उन्हें आईएसआई चीफ के ट्रांसफर के लिए कहा तो तब इमरान खान ने शुरुआत में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, बाद से हीइमरान खान और जनरल बाजवा के बीच तनातनी हो गई. इस साल के शुरुआत में पाकिस्तानी सेना पर विपक्ष ने डीलबाजी का आरोप लगाया. जिसपर सेना प्रमुख ने बताया कि वे न्यूट्रल हैं. इसी बयान के बाद सेना और इमरान के बीच दूरियां बढ़ गई.
नई दिल्ली, Pakistan Political Crisis पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान अब कुछ दिनों के मेहमान बताए जा रहे है. वे खुद सियासत के चक्रव्यूह में बहुत बुरी तरह से फंस गए हैं, जिससे बाहर निकलना उनके लिए नामुमकिन बताया जा रहा है. पाकिस्तान की संसद में आज इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बहस होनी है, जिसके बाद तीन अप्रैल को वोटिंग होगी। इस दिन यह साफ़ हो जाएगा कि इमरान सियासत की पिच पर बने रहेंगे या आउट हो जाएंगे. पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में कुल तीन सौ बयालीस सांसद है. इमरान खान की सरकार पीटीआई को सत्ता में बने रहने के लिए एक सौ बहत्तर सांसदों की जरूरत है. लेकिन सदन में उनकी पार्टी के केवल एक सौ पचपन सदस्य है. जिसके बाद उन्होंने पाकिस्तान मुस्लिम लीग - पाँच सीट, बलूचिस्तान अवामी पार्टी- पाँच सीट, मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट पाकिस्तान- सात सीट, ग्रैंड डेमोक्रेटिक एलायंस- तीन सीट, अवामी मुस्लिम लीग- एक सीट और इंडिपेंडेट सदस्यों के साथ गठबंधन कर कुल एक सौ उन्यासी सांसदों से अपना बहुमत पेश किया था. वहीँ अविश्वास प्रस्ताव के बाद स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक संयुक्त विपक्ष ने अब तक एक सौ उनहत्तर सदस्यों का समर्थन हासिल कर लिया है. हालांकि सरकार बनाने के लिए उन्हें अभी भी तीन सांसदों की जरूरत है. साल दो हज़ार अट्ठारह में पहली बार इमरान खान ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाली थी. ख़बरों की माने तो इमरान खान को सत्ता में लाने में सेना ने अहम भूमिका निभाई थी. लेकिन अब जब खुद सेना उनके साथ नहीं है तो उन्हें हटाने की पूरी तैयारी हो गई है. इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आ चुका है. जैसे ही इमरान खान सत्ता में आए उन्होंने साल दो हज़ार उन्नीस में पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा का कार्यकाल बढ़ा दिया. लेकिन बाद में जब आर्मी चीफ ने उन्हें आईएसआई चीफ के ट्रांसफर के लिए कहा तो तब इमरान खान ने शुरुआत में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, बाद से हीइमरान खान और जनरल बाजवा के बीच तनातनी हो गई. इस साल के शुरुआत में पाकिस्तानी सेना पर विपक्ष ने डीलबाजी का आरोप लगाया. जिसपर सेना प्रमुख ने बताया कि वे न्यूट्रल हैं. इसी बयान के बाद सेना और इमरान के बीच दूरियां बढ़ गई.
साउथ सुपरस्टार राम चरण की चचेरी बहन निहारिका कोनिडेला और चैतन्य जोनलगड्डा का तलाक हो गया है। उन्होंने पिछले महीने आपसी तलाक के लिए अर्जी दी और कहा जा रहा है कि यह प्रक्रिया पूरी हो गई है। हालाँकि उनके तलाक का कारण अज्ञात है, लेकिन ऐसा माना जाता है कि इस जोड़े ने वैचारिक मतभेदों के कारण अलग होने का फैसला किया। निहारिका और चैतन्य ने अपने तलाक की खबरों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. उनके ब्रेकअप की अफवाहें तब शुरू हुईं जब उन्होंने अपनी शादी की सारी तस्वीरें इंस्टाग्राम से डिलीट कर दीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, निहारिका जल्द ही एक औपचारिक बयान के जरिए अपने रिलेशनशिप स्टेटस का खुलासा कर सकती हैं। अभिनेता और निर्माता नागा बाबू की बेटी निहारिका ने मार्च 2022 में अपने इंस्टाग्राम अकाउंट को निष्क्रिय करने का चौंकाने वाला निर्णय लिया। तेज और लावण्या त्रिपाठी की सगाई में चैतन्य निहारिका के भाई वरुण भी नजर नहीं आए. जिसके बाद अफवाहें उड़ने लगीं कि निहारिका कोनिडेला और उनके पति तलाक ले रहे हैं। जब निहारिका ने अपने भाई वरुण की सगाई की कुछ तस्वीरें पोस्ट कीं तो यूजर्स ने उनसे चैतन्य की सगाई में गैरमौजूदगी को लेकर कई सवाल पूछे। निहारिका और चैतन्य ने प्यार के बाद शादी कर ली। उन्होंने अगस्त 2020 में सगाई की और दिसंबर में एक भव्य शादी की। उनकी शादी में कई बड़े फिल्मी सितारे शामिल हुए थे. उदयपुर में निहारिका की शादी में अल्लू अर्जुन, राम चरण, पवन कल्याण, चिरंजीवी और पूरे कोनिडेला-अल्लू परिवार को एक साथ देखा गया।
साउथ सुपरस्टार राम चरण की चचेरी बहन निहारिका कोनिडेला और चैतन्य जोनलगड्डा का तलाक हो गया है। उन्होंने पिछले महीने आपसी तलाक के लिए अर्जी दी और कहा जा रहा है कि यह प्रक्रिया पूरी हो गई है। हालाँकि उनके तलाक का कारण अज्ञात है, लेकिन ऐसा माना जाता है कि इस जोड़े ने वैचारिक मतभेदों के कारण अलग होने का फैसला किया। निहारिका और चैतन्य ने अपने तलाक की खबरों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. उनके ब्रेकअप की अफवाहें तब शुरू हुईं जब उन्होंने अपनी शादी की सारी तस्वीरें इंस्टाग्राम से डिलीट कर दीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, निहारिका जल्द ही एक औपचारिक बयान के जरिए अपने रिलेशनशिप स्टेटस का खुलासा कर सकती हैं। अभिनेता और निर्माता नागा बाबू की बेटी निहारिका ने मार्च दो हज़ार बाईस में अपने इंस्टाग्राम अकाउंट को निष्क्रिय करने का चौंकाने वाला निर्णय लिया। तेज और लावण्या त्रिपाठी की सगाई में चैतन्य निहारिका के भाई वरुण भी नजर नहीं आए. जिसके बाद अफवाहें उड़ने लगीं कि निहारिका कोनिडेला और उनके पति तलाक ले रहे हैं। जब निहारिका ने अपने भाई वरुण की सगाई की कुछ तस्वीरें पोस्ट कीं तो यूजर्स ने उनसे चैतन्य की सगाई में गैरमौजूदगी को लेकर कई सवाल पूछे। निहारिका और चैतन्य ने प्यार के बाद शादी कर ली। उन्होंने अगस्त दो हज़ार बीस में सगाई की और दिसंबर में एक भव्य शादी की। उनकी शादी में कई बड़े फिल्मी सितारे शामिल हुए थे. उदयपुर में निहारिका की शादी में अल्लू अर्जुन, राम चरण, पवन कल्याण, चिरंजीवी और पूरे कोनिडेला-अल्लू परिवार को एक साथ देखा गया।
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। भारतीय पासपोर्ट पासपोर्ट या पारपत्र किसी राष्ट्रीय सरकार द्वारा जारी वह दस्तावेज होता है जो अंतर्राष्ट्रीय यात्रा के लिए उसके धारक की पहचान और राष्ट्रीयता को प्रमाणित करता है। पहचान स्थापित करने के लिए नाम, जन्म तिथि, लिंग और जन्म स्थान के विवरण इसमे प्रस्तुत किये जाते हैं। आमतौर पर एक व्यक्ति की राष्ट्रीयता और नागरिकता समान होती हैं। केवल पासपोर्ट रखने भर से धारक किसी दूसरे देश में प्रवेश का या जब धारक किसी दूसरे देश मे हो तो वाणिज्यिदूतीय संरक्षण का अधिकारी नहीं होता। किसी विशेष स्थिति मे जिसके निपटान हेतु यदि कोई विशेष समझौता प्रभाव में ना हो तो उस स्थिति मे पासपोर्ट, धारक को किसी अन्य विशेषाधिकार का पात्र भी नहीं बनाता, हालांकि सामान्यतः यह धारक को विदेश यात्रा के पश्चात पासपोर्ट जारी करने वाले देश मे लौटने की अनुमति देता है। वाणिज्यिदूतीय संरक्षण का अधिकार अंतरराष्ट्रीय समझौतों से जबकि वापस लौटने का अधिकार जारी कर्ता देश के कानून से उत्पन्न होता है। एक पासपोर्ट जारी कर्ता देश में धारक के किसी अधिकार या उसके निवास स्थान का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। . न्यूयार्क स्थित संयुक्त राष्ट्रसंघ संसार का सबसे बडा राजनयिक संगठन है। राष्ट्रों अथवा समूहों के प्रतिनिधियों द्वारा किसी मुद्दे पर चर्चा एवं वार्ता करने की कला व अभ्यास (प्रैक्टिस) राजनय (डिप्लोमैसी) कहलाता है। आज के वैज्ञानिक युग में कोई देश अलग-अलग नहीं रह सकता। इन देशों में पारस्परिक सम्बन्ध जोड़ना आज के युग में आवश्यक हो गया है। इन सम्बन्धों को जोड़ने के लिए योग्य व्यक्ति एक देश से दूसरे देश में भेजे जाते हैं। ये व्यक्ति अपनी योग्यता, कुशलता और कूटनीति से दूसरे देश को प्रायः मित्र बना लेते हैं। प्राचीन काल में भी एक राज्य दूसरे राज्य से कूटनीतिक सम्बन्ध जोड़ने के लिए अपने कूटनीतिज्ञ भेजता था। पहले कूटनीति का अर्थ 'सौदे में या लेन देन में वाक्य चातुरी, छल-प्रपंच, धोखा-धड़ी' लगाया जाता था। जो व्यक्ति कम मूल्य देकर अधिकाधिक लाभ अपने देश के लिए प्राप्त करता था, कुशल कूटनीतिज्ञ कहलाता था। परन्तु आज छल-प्रपंच को कूटनीति नहीं कहा जाता है। वैज्ञानिक दृष्टि से आधुनिक काल में इस शब्द का प्रयोग दो राज्यों में शान्तिपूर्ण समझौते के लिए किया जाता है। डिप्लोमेसी के लिए हिन्दी में कूटनीति के स्थान पर राजनय शब्द का प्रयोग होने लगा है। अन्तर्राष्ट्रीय जगत एक परिवार के समान बन गया है। परिवार के सदस्यों में प्रेम, सहयोग, सद्भावना तथा मित्रता का सम्बन्ध जोड़ना एक कुशल राजनयज्ञ का काम है। . पासपोर्ट और राजनय आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)। पासपोर्ट 8 संबंध है और राजनय 26 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (8 + 26)। यह लेख पासपोर्ट और राजनय के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। भारतीय पासपोर्ट पासपोर्ट या पारपत्र किसी राष्ट्रीय सरकार द्वारा जारी वह दस्तावेज होता है जो अंतर्राष्ट्रीय यात्रा के लिए उसके धारक की पहचान और राष्ट्रीयता को प्रमाणित करता है। पहचान स्थापित करने के लिए नाम, जन्म तिथि, लिंग और जन्म स्थान के विवरण इसमे प्रस्तुत किये जाते हैं। आमतौर पर एक व्यक्ति की राष्ट्रीयता और नागरिकता समान होती हैं। केवल पासपोर्ट रखने भर से धारक किसी दूसरे देश में प्रवेश का या जब धारक किसी दूसरे देश मे हो तो वाणिज्यिदूतीय संरक्षण का अधिकारी नहीं होता। किसी विशेष स्थिति मे जिसके निपटान हेतु यदि कोई विशेष समझौता प्रभाव में ना हो तो उस स्थिति मे पासपोर्ट, धारक को किसी अन्य विशेषाधिकार का पात्र भी नहीं बनाता, हालांकि सामान्यतः यह धारक को विदेश यात्रा के पश्चात पासपोर्ट जारी करने वाले देश मे लौटने की अनुमति देता है। वाणिज्यिदूतीय संरक्षण का अधिकार अंतरराष्ट्रीय समझौतों से जबकि वापस लौटने का अधिकार जारी कर्ता देश के कानून से उत्पन्न होता है। एक पासपोर्ट जारी कर्ता देश में धारक के किसी अधिकार या उसके निवास स्थान का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। . न्यूयार्क स्थित संयुक्त राष्ट्रसंघ संसार का सबसे बडा राजनयिक संगठन है। राष्ट्रों अथवा समूहों के प्रतिनिधियों द्वारा किसी मुद्दे पर चर्चा एवं वार्ता करने की कला व अभ्यास राजनय कहलाता है। आज के वैज्ञानिक युग में कोई देश अलग-अलग नहीं रह सकता। इन देशों में पारस्परिक सम्बन्ध जोड़ना आज के युग में आवश्यक हो गया है। इन सम्बन्धों को जोड़ने के लिए योग्य व्यक्ति एक देश से दूसरे देश में भेजे जाते हैं। ये व्यक्ति अपनी योग्यता, कुशलता और कूटनीति से दूसरे देश को प्रायः मित्र बना लेते हैं। प्राचीन काल में भी एक राज्य दूसरे राज्य से कूटनीतिक सम्बन्ध जोड़ने के लिए अपने कूटनीतिज्ञ भेजता था। पहले कूटनीति का अर्थ 'सौदे में या लेन देन में वाक्य चातुरी, छल-प्रपंच, धोखा-धड़ी' लगाया जाता था। जो व्यक्ति कम मूल्य देकर अधिकाधिक लाभ अपने देश के लिए प्राप्त करता था, कुशल कूटनीतिज्ञ कहलाता था। परन्तु आज छल-प्रपंच को कूटनीति नहीं कहा जाता है। वैज्ञानिक दृष्टि से आधुनिक काल में इस शब्द का प्रयोग दो राज्यों में शान्तिपूर्ण समझौते के लिए किया जाता है। डिप्लोमेसी के लिए हिन्दी में कूटनीति के स्थान पर राजनय शब्द का प्रयोग होने लगा है। अन्तर्राष्ट्रीय जगत एक परिवार के समान बन गया है। परिवार के सदस्यों में प्रेम, सहयोग, सद्भावना तथा मित्रता का सम्बन्ध जोड़ना एक कुशल राजनयज्ञ का काम है। . पासपोर्ट और राजनय आम में शून्य बातें हैं । पासपोर्ट आठ संबंध है और राजनय छब्बीस है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख पासपोर्ट और राजनय के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
इस्लामाबादः पकिस्तान के पूर्व सेना-प्रमुख और राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है. इस वीडियो में परवेज मुशर्रफ को बॉलीवुड के एक गाने पर ठुमके लगाते हुए देखा जा सकता है. दरअसल पाकिस्तान के जर्नलिस्ट हामिद मीर ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट की है. इस वीडियो में पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति ये जवानी है दीवानी के गाने 'दिल्ली वाली गर्लफ्रेंड' पर नाचते हुए नजर आ रहे है. ये वीडियो किसी पब या नाईट क्लब का लगता है. अपने ट्वीट में हामिद मीर ने सवाल उठाया है कि इन दिनों मुशर्रफ़ का दर्द कहां गायब हो गया है? दरअसल मुशर्रफ़ अपने दर्द और बीमारी का बहाना बनाकर अदालत की कार्यवाही में शामिल होने से बचते रहे है. उन पर बलूच नेता अकबर बुग्ती की हत्या के मामले में केस दर्ज है. जिसके कारण उन पर मुकदमा भी चल रहा है. गौरतलब है कि इससे पहले भी मुशर्रफ का डांस करते हुए ऐसा ही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था.
इस्लामाबादः पकिस्तान के पूर्व सेना-प्रमुख और राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है. इस वीडियो में परवेज मुशर्रफ को बॉलीवुड के एक गाने पर ठुमके लगाते हुए देखा जा सकता है. दरअसल पाकिस्तान के जर्नलिस्ट हामिद मीर ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट की है. इस वीडियो में पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति ये जवानी है दीवानी के गाने 'दिल्ली वाली गर्लफ्रेंड' पर नाचते हुए नजर आ रहे है. ये वीडियो किसी पब या नाईट क्लब का लगता है. अपने ट्वीट में हामिद मीर ने सवाल उठाया है कि इन दिनों मुशर्रफ़ का दर्द कहां गायब हो गया है? दरअसल मुशर्रफ़ अपने दर्द और बीमारी का बहाना बनाकर अदालत की कार्यवाही में शामिल होने से बचते रहे है. उन पर बलूच नेता अकबर बुग्ती की हत्या के मामले में केस दर्ज है. जिसके कारण उन पर मुकदमा भी चल रहा है. गौरतलब है कि इससे पहले भी मुशर्रफ का डांस करते हुए ऐसा ही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था.
होटल मालया में बहुत भीड़ है । सिया अपने साथ काव्या, अनीश, दक्ष और राघव को भी लेकर आई है । एंट्री पास होने की वजह से सभी आराम से अंदर आ गए । कुणाल स्टेज पर आने वाला है । मगर शोर और हूटिंग पहले से ही शुरू हो गई है । थोड़ी देर बाद मुस्कान अपने मंगतेर रोहन के साथ पहुँच गई । अब कुणाल ने स्टेज पर गाना शुरू कर दिया । गाने के बोल " मेरी जान पर बन आई है " सुनकर सभी तालियाँ बजाने लग गए। कुणाल की गलफ्रेंड आशी भी अपने दोस्तो के साथ पहुँच गई है । सिया ने पूरे हॉल में नज़र दौड़ाई तो उसकी नज़र हॉल में अंदर आते सिद्धार्थ पर गई । उसने गौर से देखा तो उसके पीछे अनुज, दो लड़कियाँ और फ़िर आदी है पर उसके साथ एक बेहद खूबसूरत लड़की है । जिसने पिंक रंग की शॉर्ट वनपीस ड्रेस पहनी हुई है । बाकी दो लड़कियाँ भी स्मार्ट और सुन्दर है । शायद वो सिड और अनुज के साथ है । उसने आदी को देखा तो वो ब्लू जीन्स और वाइट शर्ट पहने हुए है । ऑफिस में बिज़नेस सूट और यहाँ इनफॉर्मल में इतना हैंडसम लग रहा है कि सभी लड़कियाँ उसे देखने से बाज नहीं आ रही है । सिया के खुद को देखा तो ब्लू जीन्स के साथ ब्लैक टॉप और पैरो में नार्मल सैंडल । वह ऑफिस में भी सिंपल टॉप और जीन्स या लॉन्ग कुरता ही पहन रही है । मेरे पास सबकी तरह कोई पार्टी वियर ड्रेस नहीं है । मुस्कान ने कितनी बार कहा है कि मेरे बुटीक से ले ले, पैसे आते रहेंगे। मगर उसने कभी नहीं ली । कुणाल ने अब दूसरा गाना शरू कर दिया "हम मिले तुम मिले और बरसात हो गई " मगर सिया आदी को ही देखे जा रही है । उनका ग्रुप उन लोगों से थोड़ी दूर ही खड़ा है । वह उसी पिंक ड्रेस वाली लड़की की कमर में हाथ डाले उससे हँस -हंसकर बातें कर रहा है । तभी उस लड़की ने आदित्य के होंठ चूम लिए तो आदित्य ने भी जवाब में उसके होठों पर किस करना शुरू कर दिया । सिया को यह देखकर लगा कि जैसे कोई अपनी चीज़ किसी और के हाथों में चली गई हो। तभी काव्या ने सिया को ध्यान भटकाया यार ! आज सचमुच मज़ा आ गया । 'थैंक्यू ' कहकर उसने सिया को गले लगा लिया । अब आदित्य की नज़र भी सिया पर गई तो उसने नफरत से मुँह फेर लिया Oh Gosh ! IHate Her .. मुझे समझना चाहिए था कि कुणाल की सबसे बड़ी फैन फॉलोइंग तो यहीं है । कोई मौका नहीं छोड़ती चिपकने का । आदी ने ड्रिंक लेते हुए पास खड़े सिद्धार्थ से कहा । जैसे ही गाना खत्म हुआ तो कुणाल ने बोलना शुरू किया । सबसे पहले आप सब लोगों का यहाँ आने के लिए थैंक्यू और अब मैं अपनी उस दोस्त को बुलाना चाहूँगा, जिसने यह गाना "मेरी जान पर बन आई है " लिखा है। प्लीज वेलकम 'सिया शर्मा ' सबके मुँह खुले के खुले रह गए । सिया तू ! तू तो बड़ी छुपी रुस्तम निकली । अनीश और दक्ष ने भी उसे घेर लिया । सिद्धार्थ के मुँह से निकला wow ! Hidden Talent। सभी हूटिंग करने लगे और शोर मचाने लगे। सिया स्टेज पर गई । उसने माइक लेकर थैंक्यू कहा । मगर वो अब भी आदी को देख रही है जिसके चेहरे पर कोई हाव -भाव नहीं है । फ़िर कुणाल ने आशी को भी स्टेज पर बुला लिया । शो खत्म हो गया । अब सभी एक टेबल पर डिनर के लिए बैठे हुए हैं । काव्या, अनीश, राघव और दक्ष तो चले गए । मगर सिया को मुस्कान ने रोक लिया । सिद्धार्थ ने मुस्कान और रोहन से अपने साथ आई लड़कियो का भी परिचय कराया। सभी ने एक दूसरे को हेल्लो कहा। वैसे गाना इतना ख़ास भी नहीं था। आशी ने कुणाल को देखते हुए कहा । 'मुझे अच्छा लगा' पहले रोहन बोला, फिर अनुज और उसकी बीवी सोनाली, सिद्धार्थ और उसकी गलफ्रेंड जिया ने भी हाँ में हाँ मिलाई । "Cheers For Siya" मुस्कान ने यह कहते हुए गिलास उठाया तो सभी ने गिलास उठा दिए । पर आदी फ़ोन लेकर बाहर चला गया। फ्रेंड्स इनसे मिलिए यह है, "महविश मेरे भाई की ख़ास दोस्त ।" कुणाल ने महविश की तरफ देखते हुए कहा तो वह सबको देखकर मुस्कुराने लगी । 'महविश' अमेरिका वाली । सुनकर सिया का मुँह उतर गया । तुम्हें अगर स्टेज पर आना था तो थोड़े अच्छे कपड़े पहनने थे। आशी ने चिढ़कर कहा तो मुस्कान सिया के बचाव में बोल पड़ी वो कुछ भी पहने अच्छी ही लगती है । तब तक आदी आ चुका है, उसने वेटर को आवाज़ दी । वह चेक ले आया । उसने कार्ड दिया तो आशी बोल पड़ी, "'सब मिलकर देंगे । वरना कुछ लोग तो हमेशा फ्री में ही खा लेते हैं ।' आशी ने सिया को देखते हुए व्यंग्य किया तो आदी ने उसे अनदेखा करते हुए बिल दे दिया। "चलो, चले। कुछ मिनट में ही सब होटल के पार्किंग लॉट में आ गए ।" आशी! सोच समझकर बोला कर आदी ने उसे अलग ले जाकर कहा तो वह बोल पड़ी, "मेरा ईशारा उस मैडम की तरफ था जो Benefit With Friends की केटेगरी मैं आती है ।" Than just ask your Boyfriend, Otherwise don't open your mouth to spit a shit आशी यह सुनकर चुप हो गई। सिया ने यह बात सुन ली, उसे आदी का उसकी साइड लेना अच्छा लगा । सिया, रोहन और मुस्कान के साथ गई। बाकी सब भी अपनी-अपनी गाड़ी में चले दिए । सिया को आदी ही नज़र आ रहा है । उसने सोने के लिए आँखे बंद की तो सपने में भी वह उसके साथ डांस कर रही है। और जब उसने उसके होंठो को चूमा तो उसने आँखें खोल ली । उसकी तो गलफ्रेंड भी है पर मुझे अच्छा क्यों नहीं लग रहा।हालाँकि यह नार्मल बात है, इनकी सोसाइटी में सबकी गर्लफ्रेंड होती है । हो सकता है, फ्रेंड्स ही हो पर फ्रेंड्स को ऐसे किस कौन करता है । नहीं ! मैं इतना क्यों सोच रही हूँ । सिया ने खुद से चिढ़ते हुए अपने मुँह पर तकिया रख दिया । तभी उसके मन से आवाज़ आई क्योंकि सिया तुझे वो बहुत अच्छा लगने लगा है। You Love Him. I Love Him ! Oh My Gosh !
होटल मालया में बहुत भीड़ है । सिया अपने साथ काव्या, अनीश, दक्ष और राघव को भी लेकर आई है । एंट्री पास होने की वजह से सभी आराम से अंदर आ गए । कुणाल स्टेज पर आने वाला है । मगर शोर और हूटिंग पहले से ही शुरू हो गई है । थोड़ी देर बाद मुस्कान अपने मंगतेर रोहन के साथ पहुँच गई । अब कुणाल ने स्टेज पर गाना शुरू कर दिया । गाने के बोल " मेरी जान पर बन आई है " सुनकर सभी तालियाँ बजाने लग गए। कुणाल की गलफ्रेंड आशी भी अपने दोस्तो के साथ पहुँच गई है । सिया ने पूरे हॉल में नज़र दौड़ाई तो उसकी नज़र हॉल में अंदर आते सिद्धार्थ पर गई । उसने गौर से देखा तो उसके पीछे अनुज, दो लड़कियाँ और फ़िर आदी है पर उसके साथ एक बेहद खूबसूरत लड़की है । जिसने पिंक रंग की शॉर्ट वनपीस ड्रेस पहनी हुई है । बाकी दो लड़कियाँ भी स्मार्ट और सुन्दर है । शायद वो सिड और अनुज के साथ है । उसने आदी को देखा तो वो ब्लू जीन्स और वाइट शर्ट पहने हुए है । ऑफिस में बिज़नेस सूट और यहाँ इनफॉर्मल में इतना हैंडसम लग रहा है कि सभी लड़कियाँ उसे देखने से बाज नहीं आ रही है । सिया के खुद को देखा तो ब्लू जीन्स के साथ ब्लैक टॉप और पैरो में नार्मल सैंडल । वह ऑफिस में भी सिंपल टॉप और जीन्स या लॉन्ग कुरता ही पहन रही है । मेरे पास सबकी तरह कोई पार्टी वियर ड्रेस नहीं है । मुस्कान ने कितनी बार कहा है कि मेरे बुटीक से ले ले, पैसे आते रहेंगे। मगर उसने कभी नहीं ली । कुणाल ने अब दूसरा गाना शरू कर दिया "हम मिले तुम मिले और बरसात हो गई " मगर सिया आदी को ही देखे जा रही है । उनका ग्रुप उन लोगों से थोड़ी दूर ही खड़ा है । वह उसी पिंक ड्रेस वाली लड़की की कमर में हाथ डाले उससे हँस -हंसकर बातें कर रहा है । तभी उस लड़की ने आदित्य के होंठ चूम लिए तो आदित्य ने भी जवाब में उसके होठों पर किस करना शुरू कर दिया । सिया को यह देखकर लगा कि जैसे कोई अपनी चीज़ किसी और के हाथों में चली गई हो। तभी काव्या ने सिया को ध्यान भटकाया यार ! आज सचमुच मज़ा आ गया । 'थैंक्यू ' कहकर उसने सिया को गले लगा लिया । अब आदित्य की नज़र भी सिया पर गई तो उसने नफरत से मुँह फेर लिया Oh Gosh ! IHate Her .. मुझे समझना चाहिए था कि कुणाल की सबसे बड़ी फैन फॉलोइंग तो यहीं है । कोई मौका नहीं छोड़ती चिपकने का । आदी ने ड्रिंक लेते हुए पास खड़े सिद्धार्थ से कहा । जैसे ही गाना खत्म हुआ तो कुणाल ने बोलना शुरू किया । सबसे पहले आप सब लोगों का यहाँ आने के लिए थैंक्यू और अब मैं अपनी उस दोस्त को बुलाना चाहूँगा, जिसने यह गाना "मेरी जान पर बन आई है " लिखा है। प्लीज वेलकम 'सिया शर्मा ' सबके मुँह खुले के खुले रह गए । सिया तू ! तू तो बड़ी छुपी रुस्तम निकली । अनीश और दक्ष ने भी उसे घेर लिया । सिद्धार्थ के मुँह से निकला wow ! Hidden Talent। सभी हूटिंग करने लगे और शोर मचाने लगे। सिया स्टेज पर गई । उसने माइक लेकर थैंक्यू कहा । मगर वो अब भी आदी को देख रही है जिसके चेहरे पर कोई हाव -भाव नहीं है । फ़िर कुणाल ने आशी को भी स्टेज पर बुला लिया । शो खत्म हो गया । अब सभी एक टेबल पर डिनर के लिए बैठे हुए हैं । काव्या, अनीश, राघव और दक्ष तो चले गए । मगर सिया को मुस्कान ने रोक लिया । सिद्धार्थ ने मुस्कान और रोहन से अपने साथ आई लड़कियो का भी परिचय कराया। सभी ने एक दूसरे को हेल्लो कहा। वैसे गाना इतना ख़ास भी नहीं था। आशी ने कुणाल को देखते हुए कहा । 'मुझे अच्छा लगा' पहले रोहन बोला, फिर अनुज और उसकी बीवी सोनाली, सिद्धार्थ और उसकी गलफ्रेंड जिया ने भी हाँ में हाँ मिलाई । "Cheers For Siya" मुस्कान ने यह कहते हुए गिलास उठाया तो सभी ने गिलास उठा दिए । पर आदी फ़ोन लेकर बाहर चला गया। फ्रेंड्स इनसे मिलिए यह है, "महविश मेरे भाई की ख़ास दोस्त ।" कुणाल ने महविश की तरफ देखते हुए कहा तो वह सबको देखकर मुस्कुराने लगी । 'महविश' अमेरिका वाली । सुनकर सिया का मुँह उतर गया । तुम्हें अगर स्टेज पर आना था तो थोड़े अच्छे कपड़े पहनने थे। आशी ने चिढ़कर कहा तो मुस्कान सिया के बचाव में बोल पड़ी वो कुछ भी पहने अच्छी ही लगती है । तब तक आदी आ चुका है, उसने वेटर को आवाज़ दी । वह चेक ले आया । उसने कार्ड दिया तो आशी बोल पड़ी, "'सब मिलकर देंगे । वरना कुछ लोग तो हमेशा फ्री में ही खा लेते हैं ।' आशी ने सिया को देखते हुए व्यंग्य किया तो आदी ने उसे अनदेखा करते हुए बिल दे दिया। "चलो, चले। कुछ मिनट में ही सब होटल के पार्किंग लॉट में आ गए ।" आशी! सोच समझकर बोला कर आदी ने उसे अलग ले जाकर कहा तो वह बोल पड़ी, "मेरा ईशारा उस मैडम की तरफ था जो Benefit With Friends की केटेगरी मैं आती है ।" Than just ask your Boyfriend, Otherwise don't open your mouth to spit a shit आशी यह सुनकर चुप हो गई। सिया ने यह बात सुन ली, उसे आदी का उसकी साइड लेना अच्छा लगा । सिया, रोहन और मुस्कान के साथ गई। बाकी सब भी अपनी-अपनी गाड़ी में चले दिए । सिया को आदी ही नज़र आ रहा है । उसने सोने के लिए आँखे बंद की तो सपने में भी वह उसके साथ डांस कर रही है। और जब उसने उसके होंठो को चूमा तो उसने आँखें खोल ली । उसकी तो गलफ्रेंड भी है पर मुझे अच्छा क्यों नहीं लग रहा।हालाँकि यह नार्मल बात है, इनकी सोसाइटी में सबकी गर्लफ्रेंड होती है । हो सकता है, फ्रेंड्स ही हो पर फ्रेंड्स को ऐसे किस कौन करता है । नहीं ! मैं इतना क्यों सोच रही हूँ । सिया ने खुद से चिढ़ते हुए अपने मुँह पर तकिया रख दिया । तभी उसके मन से आवाज़ आई क्योंकि सिया तुझे वो बहुत अच्छा लगने लगा है। You Love Him. I Love Him ! Oh My Gosh !
(८ ) इसका कारण यही है कि वैदिक काव्य के प्रणेता समाज को बदलती अवस्थाओ से प्रभावित होते थे और उन पर अनेक प्रकार की विचारधाराओं का प्रभाव पड़ता था। वे मानव-ज्ञात सत्य के विभिन्न रूपो को आत्मसात् करने की चेष्टा मे ही रहते थे। यही कारण है कि बहुत परवर्ती काल तक भारतीय चितन ने वेदों से प्रेरणा ली है और नेदो को पूज्य कहा है । वैदिक संस्कृति का स्थान पौराणिक संस्कृति ने लिया, किन्तु वैदिक काव्य का मानववादी स्तर निरन्तर संस्कृति को पथ दिखलाता रहा । गत युगों का जो भी अनगढ़ रूप हमे वेद में मिलता है, उसको परवर्ती युगो में भारत ने ज्यों का त्यों नहीं अपनाया। ( ६ ) सारांश में हम कह सकते हैं कि समाज बनने के समय की व्यक्तिगत स्वतन्त्रता के समाज मे लुप्त होने के समय के साहित्य से हमें दासप्रथा के टूटने के उस समाज तक के चितन का यहाँ साक्षात्कार होता है जिसमें मानव की आत्मा को व्यापकता मिलती है परवर्ती वैदिक काव्य यह कहता है कि ब्रह्म तो सबसे परे है, इसलिए परमात्माको किसी भी स्वरूप में मान लो । वैदिक काव्य के ब्रह्म की इस विवेचना ने ही परवतर्फे काल मे जब मनुष्य ने स्थिर रूढियो के विरुद्ध विद्रोह करके स्वतन्ह चिन्तन किया, तब सांख्य को यह चेतन आधार दिया था कि वह ब्रह्म को ही अस्वीकार कर दे। इतनी व्यापकता और विशालता वैदिक काव्य की विरासत है । यदि पूर्वाग्रह छोड़कर देखा जाये तो हमें वैदिक काव्य मे ही अहिंसा, जीवदया, भूतरक्षा, शान्ति, प्रातृत्व, सघजीवन को कमनीयता आदि जितने भी मानवीय गुण हैं, वे गुण जो अपने विशेष बलों ( stresses ) में बौद्ध, जैन तथा अन्य चिन्तनो में दिखाई देते हैं, प्राप्त हो जाते हैं। ऐसा लगता है कि वैदिक काव्य ने दासप्रथा के अन्त में उठते सामंतीय समाज की नयी मानवीयता को हो मंगलभूमि प्रदान नहीं की, वरन् उसने मनुष्य के लिए सार्वभौम, सार्वजनिक, सार्वजनीन और सर्वकालीन संदेश भी दिया, जिसमे उसने मूल रूप में उस मग्नवीय सत्य के व्यापक रूप की प्रतिष्ठा की, जिसके द्वारा भार तीय संस्कृति इतने उत्थान और पतनों को निरन्तर बदलती रहकर, झेलकर भी, मर नहीं सको। उसने अपनी आत्मा में 'तप' की उस
इसका कारण यही है कि वैदिक काव्य के प्रणेता समाज को बदलती अवस्थाओ से प्रभावित होते थे और उन पर अनेक प्रकार की विचारधाराओं का प्रभाव पड़ता था। वे मानव-ज्ञात सत्य के विभिन्न रूपो को आत्मसात् करने की चेष्टा मे ही रहते थे। यही कारण है कि बहुत परवर्ती काल तक भारतीय चितन ने वेदों से प्रेरणा ली है और नेदो को पूज्य कहा है । वैदिक संस्कृति का स्थान पौराणिक संस्कृति ने लिया, किन्तु वैदिक काव्य का मानववादी स्तर निरन्तर संस्कृति को पथ दिखलाता रहा । गत युगों का जो भी अनगढ़ रूप हमे वेद में मिलता है, उसको परवर्ती युगो में भारत ने ज्यों का त्यों नहीं अपनाया। सारांश में हम कह सकते हैं कि समाज बनने के समय की व्यक्तिगत स्वतन्त्रता के समाज मे लुप्त होने के समय के साहित्य से हमें दासप्रथा के टूटने के उस समाज तक के चितन का यहाँ साक्षात्कार होता है जिसमें मानव की आत्मा को व्यापकता मिलती है परवर्ती वैदिक काव्य यह कहता है कि ब्रह्म तो सबसे परे है, इसलिए परमात्माको किसी भी स्वरूप में मान लो । वैदिक काव्य के ब्रह्म की इस विवेचना ने ही परवतर्फे काल मे जब मनुष्य ने स्थिर रूढियो के विरुद्ध विद्रोह करके स्वतन्ह चिन्तन किया, तब सांख्य को यह चेतन आधार दिया था कि वह ब्रह्म को ही अस्वीकार कर दे। इतनी व्यापकता और विशालता वैदिक काव्य की विरासत है । यदि पूर्वाग्रह छोड़कर देखा जाये तो हमें वैदिक काव्य मे ही अहिंसा, जीवदया, भूतरक्षा, शान्ति, प्रातृत्व, सघजीवन को कमनीयता आदि जितने भी मानवीय गुण हैं, वे गुण जो अपने विशेष बलों में बौद्ध, जैन तथा अन्य चिन्तनो में दिखाई देते हैं, प्राप्त हो जाते हैं। ऐसा लगता है कि वैदिक काव्य ने दासप्रथा के अन्त में उठते सामंतीय समाज की नयी मानवीयता को हो मंगलभूमि प्रदान नहीं की, वरन् उसने मनुष्य के लिए सार्वभौम, सार्वजनिक, सार्वजनीन और सर्वकालीन संदेश भी दिया, जिसमे उसने मूल रूप में उस मग्नवीय सत्य के व्यापक रूप की प्रतिष्ठा की, जिसके द्वारा भार तीय संस्कृति इतने उत्थान और पतनों को निरन्तर बदलती रहकर, झेलकर भी, मर नहीं सको। उसने अपनी आत्मा में 'तप' की उस
किताबुज़्ज़िरा- अति (खेती-बाड़ी के मसाइल) फाइदाः- एक मनुष्य बिना खाए-पिए जीवित नहीं रह सकता, इसलिये खाने-पीने के लिये खेती-बाड़ी कर के अन्न पैदा करना अनिवार्य है। खेती-बाड़ी एक प्रकार की इबादत है अगर निय्यत दुरुस्त हो और यह हो कि खेती कर के ग़ल्ला पैदा करें गे, उसे खा कर अल्लाह की राह में जिहाद करेंगे, दीन इस्लाम का झन्डा ऊँचा करेंगे। एक हदीस में आया है कि यह ज़लील पेशा है। लेकिन उस समय, जब किसान इसी का होकर रह जाये और नमाज़ रोज़ा आदि दीनी कामों से ग़ाफिल हो जाये। बाब {भूमि को किराया पर देना मना है । } 972:- जाबिर बिन अब्दुल्लाह अन्सारी रज़ि० से रिवायत है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमायाः जिस के पास भूमि (अधिक होने के नाते) ख़ाली पड़ी हो तो वह उस में स्वय खेती करे, अगर स्वय न कर सके तो दूसरे को दे दे। फाइदाः- अर्थात किराया न ले। यह कोई आदेश और निर्देश नहीं है, बल्कि अनुरोध के आधार पर है ताकि भूमिहीन किसानों की सहायता हो जाये और वह भी ज़मीन वाले हो जायें, उन की ग़रीबी दूर हो जाये । आप ने यह बात इस्लाम के आरंभ में कही थी, वह भी अनुरोध के तौर पर न कि हुक्म के तौर पर । वर्ना अगर चाहे तो अपनी ज़मीन पड़ी रहने दें और किसी को न भी दे। बाब { अनाज़ के बदले खेती वाली भूमि किराया पर देना मना है।} 973:- राफ़े बिन ख़दीज रज़ि• ने बयान किया कि हम ( ज़मीनदार) लोग नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के ज़माना में भी भूमि को "मुहाकला" पर, यानी एक तिहाई, अथवा एक चौथाई या मुक़र्ररा माप-तौल के अनाज के बदले देते थे। इत्तिफाक से मेरे चचाओं में से एक चचा आ कर कहने लगे कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमें इस प्रकार भूमि देने से मना किया है जिस में (केवल) हमारा ही फाइदा हो। लेकिन हमें तो अल्लाह और उस के संदेष्टा की आज्ञापालन में लाभ है। (चचा ने बताया कि) नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने भूमि को किराया पर देने या एक तिहाई या
किताबुज़्ज़िरा- अति फाइदाः- एक मनुष्य बिना खाए-पिए जीवित नहीं रह सकता, इसलिये खाने-पीने के लिये खेती-बाड़ी कर के अन्न पैदा करना अनिवार्य है। खेती-बाड़ी एक प्रकार की इबादत है अगर निय्यत दुरुस्त हो और यह हो कि खेती कर के ग़ल्ला पैदा करें गे, उसे खा कर अल्लाह की राह में जिहाद करेंगे, दीन इस्लाम का झन्डा ऊँचा करेंगे। एक हदीस में आया है कि यह ज़लील पेशा है। लेकिन उस समय, जब किसान इसी का होकर रह जाये और नमाज़ रोज़ा आदि दीनी कामों से ग़ाफिल हो जाये। बाब {भूमि को किराया पर देना मना है । } नौ सौ बहत्तर:- जाबिर बिन अब्दुल्लाह अन्सारी रज़िशून्य से रिवायत है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमायाः जिस के पास भूमि ख़ाली पड़ी हो तो वह उस में स्वय खेती करे, अगर स्वय न कर सके तो दूसरे को दे दे। फाइदाः- अर्थात किराया न ले। यह कोई आदेश और निर्देश नहीं है, बल्कि अनुरोध के आधार पर है ताकि भूमिहीन किसानों की सहायता हो जाये और वह भी ज़मीन वाले हो जायें, उन की ग़रीबी दूर हो जाये । आप ने यह बात इस्लाम के आरंभ में कही थी, वह भी अनुरोध के तौर पर न कि हुक्म के तौर पर । वर्ना अगर चाहे तो अपनी ज़मीन पड़ी रहने दें और किसी को न भी दे। बाब { अनाज़ के बदले खेती वाली भूमि किराया पर देना मना है।} नौ सौ तिहत्तर:- राफ़े बिन ख़दीज रज़ि• ने बयान किया कि हम लोग नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के ज़माना में भी भूमि को "मुहाकला" पर, यानी एक तिहाई, अथवा एक चौथाई या मुक़र्ररा माप-तौल के अनाज के बदले देते थे। इत्तिफाक से मेरे चचाओं में से एक चचा आ कर कहने लगे कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमें इस प्रकार भूमि देने से मना किया है जिस में हमारा ही फाइदा हो। लेकिन हमें तो अल्लाह और उस के संदेष्टा की आज्ञापालन में लाभ है। नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने भूमि को किराया पर देने या एक तिहाई या
वित्त मंत्री निर्मला सीतामरण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने असम के 7.47 लाख चाय बागान श्रमिकों के खातों में 3,000 रुपए जमा कराए. वित्त मंत्री निर्मला सीतामरण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने असम के 7.47 लाख चाय बागान श्रमिकों के खातों में 3,000 रुपए जमा कराए. वित्त मंत्री ने चाय बागान श्रमिकों को 224 करोड़ रुपए वितरित किए. केंद्रीय वित्त मंत्री 'असम चाह बगीचा धन पुरस्कार मेला योजना' (Assam Chah Bagicha Dhan Puraskar Mela Scheme) की तीसरी किस्त के तहत चाय श्रमिकों को वित्तीय सहायता देने के लिए एक कार्यक्रम में भाग लेने आई थीं. इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने कहा, 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने चाय बागान श्रमिकों के जीवनस्तर में सुधार लाने की इच्छा जताई थी. NDA सरकार के सत्ता में आने के बाद उनके लिए कई योजनाएं शुरू की गई हैं. इस प्रमुख कार्यक्रम की तीसरी किस्त के तहत 7,46,667 श्रमिकों के बैंक खातों में 3,000 रुपए की अतिरिक्त राशि जमा की जाएगी. इससे पहले सभी चाय बागान श्रमिकों को दो चरणों मे 5,000 रुपए जमा कराए गए हैं. 2017-18 में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए चाय बागान श्रमिकों के 6,33,411 बैंक खातों में यह रकम जमा की गई थी और 2018-19 में 752 चाय बागानों के 7,15,979 खातों में पैसे जमा किए गए थे. बता दें कि बजट 2021 (Budget 2021) में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण चाय बागान के श्रमिकों के लिए 1,000 करोड़ रुपए का बजट में प्रावधान किया है, जिसका फायदा बंगाल के चाय बागान के श्रमिकों को भी मिलेगा. भारतीय चाय संघ (ITA) ने पश्चिम बंगाल और असम में चाय कामगारों के कल्याण के लिए 1,000 करोड़ रुपये के बजटीय प्रावधान की सराहना की. आईटीए ने एक बयान में कहा, इससे टिकाऊपन और सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के साथ जुड़ाव की स्थिति में सुधार आएगा. असम के वित्त मंत्री हेमंत बिस्व सरमा ने कहा कि सरकार राज्य के चाय बागान श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी करने के लिए अगले 10 दिनों में अधिसूचना जारी करेगी. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल की उपस्थिति में एक जनसभा को संबोधित करते हुए सरमा ने कहा कि चाय बागान श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोत्तरी संबंधी प्रस्ताव को अगली मंत्रिमंडल बैठक में मंजूरी दी जाएगी. उन्होंने श्रमिकों से कहा, आप 10 दिन और इंतजार करें. हम आपके भत्तों में वृद्धि करने के लिए एक अधिसूचना जारी करेंगे. अगली मंत्रिमंडल बैठक के बाद आपको खुशखबरी मिलेगी. ये भी पढ़ें- इस दिवाली LIC IPO से चमकेगा आपका पोर्टफोलियो, पॉलिसी होल्डर्स को मिलेगा खुशखबरी का डबल डोज!
वित्त मंत्री निर्मला सीतामरण ने असम के सात.सैंतालीस लाख चाय बागान श्रमिकों के खातों में तीन,शून्य रुपयापए जमा कराए. वित्त मंत्री निर्मला सीतामरण ने असम के सात.सैंतालीस लाख चाय बागान श्रमिकों के खातों में तीन,शून्य रुपयापए जमा कराए. वित्त मंत्री ने चाय बागान श्रमिकों को दो सौ चौबीस करोड़ रुपए वितरित किए. केंद्रीय वित्त मंत्री 'असम चाह बगीचा धन पुरस्कार मेला योजना' की तीसरी किस्त के तहत चाय श्रमिकों को वित्तीय सहायता देने के लिए एक कार्यक्रम में भाग लेने आई थीं. इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने कहा, दो हज़ार चौदह के लोकसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने चाय बागान श्रमिकों के जीवनस्तर में सुधार लाने की इच्छा जताई थी. NDA सरकार के सत्ता में आने के बाद उनके लिए कई योजनाएं शुरू की गई हैं. इस प्रमुख कार्यक्रम की तीसरी किस्त के तहत सात,छियालीस,छः सौ सरसठ श्रमिकों के बैंक खातों में तीन,शून्य रुपयापए की अतिरिक्त राशि जमा की जाएगी. इससे पहले सभी चाय बागान श्रमिकों को दो चरणों मे पाँच,शून्य रुपयापए जमा कराए गए हैं. दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए चाय बागान श्रमिकों के छः,तैंतीस,चार सौ ग्यारह बैंक खातों में यह रकम जमा की गई थी और दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस में सात सौ बावन चाय बागानों के सात,पंद्रह,नौ सौ उन्यासी खातों में पैसे जमा किए गए थे. बता दें कि बजट दो हज़ार इक्कीस में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण चाय बागान के श्रमिकों के लिए एक,शून्य करोड़ रुपए का बजट में प्रावधान किया है, जिसका फायदा बंगाल के चाय बागान के श्रमिकों को भी मिलेगा. भारतीय चाय संघ ने पश्चिम बंगाल और असम में चाय कामगारों के कल्याण के लिए एक,शून्य करोड़ रुपये के बजटीय प्रावधान की सराहना की. आईटीए ने एक बयान में कहा, इससे टिकाऊपन और सतत विकास लक्ष्यों के साथ जुड़ाव की स्थिति में सुधार आएगा. असम के वित्त मंत्री हेमंत बिस्व सरमा ने कहा कि सरकार राज्य के चाय बागान श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी करने के लिए अगले दस दिनों में अधिसूचना जारी करेगी. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल की उपस्थिति में एक जनसभा को संबोधित करते हुए सरमा ने कहा कि चाय बागान श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोत्तरी संबंधी प्रस्ताव को अगली मंत्रिमंडल बैठक में मंजूरी दी जाएगी. उन्होंने श्रमिकों से कहा, आप दस दिन और इंतजार करें. हम आपके भत्तों में वृद्धि करने के लिए एक अधिसूचना जारी करेंगे. अगली मंत्रिमंडल बैठक के बाद आपको खुशखबरी मिलेगी. ये भी पढ़ें- इस दिवाली LIC IPO से चमकेगा आपका पोर्टफोलियो, पॉलिसी होल्डर्स को मिलेगा खुशखबरी का डबल डोज!
शिमला. हिमाचल के लाहौल एवं स्पीति (Lahual Spiti) और चंबा (Chamba) जिले के पांगी को नवगठित केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के साथ मिलाने की मांग का मुद्दा गरमाता जा रहा है. कुछ बुद्धिस्ट एसोसिएशनों ने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर इन दोनों क्षेत्रों को लद्दाख (Ladhakh) में मिलाने की वकालत की है, जिसका हिमाचल (Himachal Pradesh) में चौतरफा विरोध भी शुरू हो चुका है. जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) से अनुच्छेद 370 और 35-ए हटाने के साथ ही लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाया है. वहां के कुछ बुद्धिस्ट एसोसिएशनों ने केंद्र से मांग की कि हिमाचल के लाहौल स्पीति और पांगी को लद्दाख में मिला दिया जाए, क्योंकि इनका कल्चर एक जैसा है. लाहौल स्पीति से ताल्लुक रखने वाले कृषि एवं जनजातीय विकास मंत्री डॉ. रामलाल मार्कंडा ने भी इस संबंध में सोमवार को गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) को पत्र लिखा है और उन्होंने मांग को खारिज करने की गुहार लगाई. उन्होंने कहा कि लाहौल स्पीति और पांगी विकसित राज्य के साथ रहेंगे, ना कि पिछड़े राज्य के साथ. लद्दाख के कुछ शरारती तत्वों ने राजनीतिक मंशा से यह पत्र लिखा है, जो लाहौल स्पीति के लोगों को मान्य नहीं है. मार्कंडा ने कहा कि लद्दाख पहले जम्मू कश्मीर के साथ दास की तरह रहा है, जिसे अब मुक्ति मिली है. उन्होंने कहा कि वे मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से भी बात करेंगे और मांग करेंगे कि वे केंद्र सरकार के समक्ष इस विषय को उठाएं. गौरलतब है कि लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने की अधिकारिक अधिसूचना 31 अक्तूबर को जारी होनी है. ऐसे में अब प्रदेश सरकार के मंत्रियों ने अभी से दवाब बनाना शुरू कर दिया है, ताकि अधिसूचना के दौरान लद्दाख के साथ लाहौल स्पीति और पांगी का हिस्सा न जोड़ दिया जाए. लाहौल स्पीति से कांग्रेस के विधायक रवि ठाकुर ने मांग की है कि लाहौल स्पीति छठे शेडयूल में शामिल कर ऑटोनोमस जिला मनाया जाए. पूर्व जनजातीय आयोग के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रह चुके रवि ठाकुर ने कहा कि लाहौल-स्पीति को किसी भी सूरत में लेह लदाख में शामिल नहीं होने दिया जाएगा. रवि ठाकुर ने केन्द्र सरकार से मांग की है कि लद्दाख के जांस्कर को लाहौल स्पीति में जोडा जाए. .
शिमला. हिमाचल के लाहौल एवं स्पीति और चंबा जिले के पांगी को नवगठित केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के साथ मिलाने की मांग का मुद्दा गरमाता जा रहा है. कुछ बुद्धिस्ट एसोसिएशनों ने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर इन दोनों क्षेत्रों को लद्दाख में मिलाने की वकालत की है, जिसका हिमाचल में चौतरफा विरोध भी शुरू हो चुका है. जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद तीन सौ सत्तर और पैंतीस-ए हटाने के साथ ही लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाया है. वहां के कुछ बुद्धिस्ट एसोसिएशनों ने केंद्र से मांग की कि हिमाचल के लाहौल स्पीति और पांगी को लद्दाख में मिला दिया जाए, क्योंकि इनका कल्चर एक जैसा है. लाहौल स्पीति से ताल्लुक रखने वाले कृषि एवं जनजातीय विकास मंत्री डॉ. रामलाल मार्कंडा ने भी इस संबंध में सोमवार को गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है और उन्होंने मांग को खारिज करने की गुहार लगाई. उन्होंने कहा कि लाहौल स्पीति और पांगी विकसित राज्य के साथ रहेंगे, ना कि पिछड़े राज्य के साथ. लद्दाख के कुछ शरारती तत्वों ने राजनीतिक मंशा से यह पत्र लिखा है, जो लाहौल स्पीति के लोगों को मान्य नहीं है. मार्कंडा ने कहा कि लद्दाख पहले जम्मू कश्मीर के साथ दास की तरह रहा है, जिसे अब मुक्ति मिली है. उन्होंने कहा कि वे मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से भी बात करेंगे और मांग करेंगे कि वे केंद्र सरकार के समक्ष इस विषय को उठाएं. गौरलतब है कि लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने की अधिकारिक अधिसूचना इकतीस अक्तूबर को जारी होनी है. ऐसे में अब प्रदेश सरकार के मंत्रियों ने अभी से दवाब बनाना शुरू कर दिया है, ताकि अधिसूचना के दौरान लद्दाख के साथ लाहौल स्पीति और पांगी का हिस्सा न जोड़ दिया जाए. लाहौल स्पीति से कांग्रेस के विधायक रवि ठाकुर ने मांग की है कि लाहौल स्पीति छठे शेडयूल में शामिल कर ऑटोनोमस जिला मनाया जाए. पूर्व जनजातीय आयोग के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रह चुके रवि ठाकुर ने कहा कि लाहौल-स्पीति को किसी भी सूरत में लेह लदाख में शामिल नहीं होने दिया जाएगा. रवि ठाकुर ने केन्द्र सरकार से मांग की है कि लद्दाख के जांस्कर को लाहौल स्पीति में जोडा जाए. .
मुंबई : एक्ट्रेस रानी मुखर्जी (Rani Mukherji) भले ही अभी अपनी हालिया रिलीज मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे (Mrs Chatterjee Vs Norway) की सफलता का आनंद ले रही हों, लेकिन रिलीज से पहले वह डरी हुई थीं. जैसा कि रिपोर्ट के अनुसार फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन कर रही है, रानी ने फिल्म रिलीज के आसपास अपने अनुभव के बारे में बात की, उन्होंने फिल्म की चुनौतियों को याद किया. आशिमा चिब्बर (Ashima Chibber) द्वारा निर्देशित, श्रीमती चटर्जी बनाम नॉर्वे सागरिका चक्रवर्ती की वास्तविक जीवन की कहानी से प्रेरित है और उनकी पुस्तक द जर्नी ऑफ ए मदर से अनुकूलित है. फिल्म में रानी एक मां, देबिका चटर्जी की भूमिका निभाती हैं, जो अपने बच्चों की कस्टडी के लिए एक देश से लड़ती है, जिन्हें गलत पालन-पोषण के बहाने उनसे दूर कर दिया गया था. श्रीमती चटर्जी बनाम नॉर्वे को पॉजिटिव समीक्षा मिली और इसने पहले दिन सिनेमाघरों में ₹1.27 करोड़ की कमाई की. अपने बॉक्स ऑफिस नंबरों पर विचार करते हुए, रानी ने हाल ही में वैराइटी को बताया, "मुझे सच में विश्वास है कि एक अच्छी फिल्म हमेशा अपने दर्शकों को ढूंढती है, भले ही जोनर कोई भी हो. हमारी फिल्म के लिए बहुत चुनौती थी, क्योंकि जो नया फैशनेबल शब्द चल रहा है वह है ओटीटी 'कंटेंट'- यह एक ऐसी चीज है जिसने मुझे बहुत परेशान किया है. क्योंकि मेरा मानना है कि सिनेमा थिएटर में होने वाला एक अनुभव है. रानी (Rani Mukherji) ने आगे बताया, "फिल्म की रिलीज से पहले बहुत चिंता थी और इतने सारे नकारात्मक लोग कह रहे थे कि फैशनेबल शब्द ओटीटी कंटेट है. इसलिए, यह वास्तव में डरावना था क्योंकि जब आप अकेले हैं, इस सनक से लड़ रहे हैं, तो मैं बस उम्मीद और प्रार्थना कर रही था कि दर्शक अच्छे सिनेमा में मेरे विश्वास को मान्य करें, और दर्शकों ने ऐसा किया है."इस बीच, फिल्म में रानी मुखर्जी के प्रदर्शन की इंडस्ट्री में कई हस्तियों द्वारा प्रशंसा की गई है, जिसमें कियारा आडवाणी, विक्की कौशल, कैटरीना कैफ, नीतू कपूर और शाहरुख खान सहित कई अन्य शामिल हैं. रानी के अलावा, फिल्म में अनिर्बान भट्टाचार्य भी भूमिका में हैं.
मुंबई : एक्ट्रेस रानी मुखर्जी भले ही अभी अपनी हालिया रिलीज मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे की सफलता का आनंद ले रही हों, लेकिन रिलीज से पहले वह डरी हुई थीं. जैसा कि रिपोर्ट के अनुसार फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन कर रही है, रानी ने फिल्म रिलीज के आसपास अपने अनुभव के बारे में बात की, उन्होंने फिल्म की चुनौतियों को याद किया. आशिमा चिब्बर द्वारा निर्देशित, श्रीमती चटर्जी बनाम नॉर्वे सागरिका चक्रवर्ती की वास्तविक जीवन की कहानी से प्रेरित है और उनकी पुस्तक द जर्नी ऑफ ए मदर से अनुकूलित है. फिल्म में रानी एक मां, देबिका चटर्जी की भूमिका निभाती हैं, जो अपने बच्चों की कस्टडी के लिए एक देश से लड़ती है, जिन्हें गलत पालन-पोषण के बहाने उनसे दूर कर दिया गया था. श्रीमती चटर्जी बनाम नॉर्वे को पॉजिटिव समीक्षा मिली और इसने पहले दिन सिनेमाघरों में एक दशमलव सत्ताईस रुपया करोड़ की कमाई की. अपने बॉक्स ऑफिस नंबरों पर विचार करते हुए, रानी ने हाल ही में वैराइटी को बताया, "मुझे सच में विश्वास है कि एक अच्छी फिल्म हमेशा अपने दर्शकों को ढूंढती है, भले ही जोनर कोई भी हो. हमारी फिल्म के लिए बहुत चुनौती थी, क्योंकि जो नया फैशनेबल शब्द चल रहा है वह है ओटीटी 'कंटेंट'- यह एक ऐसी चीज है जिसने मुझे बहुत परेशान किया है. क्योंकि मेरा मानना है कि सिनेमा थिएटर में होने वाला एक अनुभव है. रानी ने आगे बताया, "फिल्म की रिलीज से पहले बहुत चिंता थी और इतने सारे नकारात्मक लोग कह रहे थे कि फैशनेबल शब्द ओटीटी कंटेट है. इसलिए, यह वास्तव में डरावना था क्योंकि जब आप अकेले हैं, इस सनक से लड़ रहे हैं, तो मैं बस उम्मीद और प्रार्थना कर रही था कि दर्शक अच्छे सिनेमा में मेरे विश्वास को मान्य करें, और दर्शकों ने ऐसा किया है."इस बीच, फिल्म में रानी मुखर्जी के प्रदर्शन की इंडस्ट्री में कई हस्तियों द्वारा प्रशंसा की गई है, जिसमें कियारा आडवाणी, विक्की कौशल, कैटरीना कैफ, नीतू कपूर और शाहरुख खान सहित कई अन्य शामिल हैं. रानी के अलावा, फिल्म में अनिर्बान भट्टाचार्य भी भूमिका में हैं.
लखनऊ। भारतीय खेल प्राधिेकरण (साई) क्षेत्रीय केंद्र में चल रहे भारतीय महिला कुश्ती टीम के प्रशिक्षण शिविर में अभ्यास कर रही पहलवानों को गुरूवार को साई की ओर से किट प्रदान की गई। आज एक समारोह में मुख्य अतिथि श्रीमती माधुरी हलवासिया (समाजसेविका) ने महिला पहलवानों के साथ कोचेज व अन्य सपोर्ट स्टाफ को किट दी। मुख्य अतिथि ने कहा कि अभिभावकों को अपने बच्चों खासकर महिलाओं को खेल में आगे आने के लिए प्रेरित करना चाहिए। इस अवसर पर साई की कार्यकारी निदेशक सुश्री रचना गोविल भी मौजूद थी। बताते चले कि साई क्षेत्रीय केंद्र में भारतीय खेल प्राधिकरण की लांग टर्म डेवलपमेंट स्कीम के तहत महिला कुश्ती टीम का शिविर काफी अरसे से चल रहा है।
लखनऊ। भारतीय खेल प्राधिेकरण क्षेत्रीय केंद्र में चल रहे भारतीय महिला कुश्ती टीम के प्रशिक्षण शिविर में अभ्यास कर रही पहलवानों को गुरूवार को साई की ओर से किट प्रदान की गई। आज एक समारोह में मुख्य अतिथि श्रीमती माधुरी हलवासिया ने महिला पहलवानों के साथ कोचेज व अन्य सपोर्ट स्टाफ को किट दी। मुख्य अतिथि ने कहा कि अभिभावकों को अपने बच्चों खासकर महिलाओं को खेल में आगे आने के लिए प्रेरित करना चाहिए। इस अवसर पर साई की कार्यकारी निदेशक सुश्री रचना गोविल भी मौजूद थी। बताते चले कि साई क्षेत्रीय केंद्र में भारतीय खेल प्राधिकरण की लांग टर्म डेवलपमेंट स्कीम के तहत महिला कुश्ती टीम का शिविर काफी अरसे से चल रहा है।
रस और सोदर्य ही पाते है, सीन्दर्य जितना ही देखते हैं, उतनी ही हृदय मे अभावप्रतीति और भी अधिक जाग उठती है। देखकर भी देखने की साध किसी तरह भी मिटती नही, मालूम होता है यह अपूर्ण है। जभी अपूर्ण समझते है तभी सीमा आँखो के सामने दिखाई देती है, तभी अनजाने में हृदय रो उठता है । सोचते हैं और भी - ओर भी आगे जायँ, सभवत सुदूर भविष्य में किसी न किसी दिन उसे आयत्त कर सकेंगे। किन्तु हाय मोह । यह समझ नहीं पाते है कि काल-प्रवाह मे इस आकाङ्क्षा की तृप्ति हो नही सकती । आनन्द चाहे जितना ही क्यो न बढे, सौन्दर्य चाहे जितना ही छल्छला उठे, तृप्ति तत्र भी बहुत दूर की वस्तु है, क्योकि और भी विकास हो सकता है एव कभी भी इस नमविकास की सम्भावना दूर होगी नहीं । इससे ज्ञात हो जायगा कि हृदय जिसकी आकाङ्क्षा करता है वह ससीम सौन्दर्य अथवा परिमित आनन्द नही है । यदि ऐसा होता तो एक न एक दिन क्रमविकास से उसकी तृप्ति हो जाती । वस्तुत. यह असीम सौन्दर्य, अनन्त प्रेम, निरवच्छिन्न आनन्द है। पूर्ण सौन्दर्य का सम्भोग पहले हुआ है, इसी लिये पूर्ण सौन्दर्य की आकाङ्क्षा होती है, विच्छिन्न ( खण्ड ) सौन्दर्य से तृष्णा मिटती नही । जिसका विरह है, उसे पाये विना व्याकुलता का अवसान हो नहीं सकता । इसलिये प्रश्न रह गया कि यह पूर्ण सौन्दर्य कब मिला था ? हम पहले देख चुके हैं कि कालनम से इस पूर्ण सकते; करोड़ों कल्पो मे भी हम ऐसा सौन्दर्य पायेंगे नहीं जिससे हो न सके, अर्थात् काल के मध्य मे पूर्ण सौन्दर्य का विकास हो में जो विकास होता है वह क्रमविकास है । इस क्रम का अन्त नहीं है । और भी अधिक, और भी अधिक हो सकता है - किन्तु कभी भी पूर्णता होनी नहीं । यदि यह सत्य है तो यह भी सत्य है कि काल में कभी इसकी अनुभूति भी होती नहीं । अर्थात् हम जिस सौन्दर्य की अनुभूति हुई है, वह कोई सुदूर अतीत में नहीं है, किसी दिगन्तस्थित नक्षत्र में नहीं है अथवा किसी विशिष्ट काल या देश में नहीं है । अतएव एक प्रकार से यह प्रश्न ही अनुपपन्न है। किन्तु घूम फिर कर प्रश्न फिर भी होता है । परस्पर विरुद्ध होने पर भी यह सत्य है कि इस सौन्दर्य का आस्वादन जब हमे हुआ था तब काल नहीं था - जहाँ हमने इसका आस्वादन किया था वहाँ देश नहीं था । वह हमारी 'योग' अवस्था अथवा मिल्न था । उसके बाद वर्तमान अवस्था 'योगनश' अथवा विरह है। फिर उस योग में जाने के लिये हम छटपटा रहे हैं, पुनमिल्न चाहते है। अर्थात् हम देश और काल में निर्वासित हुये है । फिर देश काल को छिन्न भिन्न कर, विलीन कर वैसे ही योगयुक्त होना चाहते है । किन्तु यह वियोग क्या अत्यन्त वियोग ह ? पूर्ण ने विच्छेद क्या सचमुच इतना वालविक है? नहीं, यह बात नहीं है। वियोग सत्य दें, विच्छेद त्वीकार्य हैकिन्तु उस वियोग के मूल मे भी नित्य योग खोया नहीं है, वह कभी न्योता नहीं है । यदि सो गया होता, तो यह वियोग चिर वियोग हो जाता, पिर लेटने की सम्भावना नहीं रहती। यह जो आकाङ्क्षा है, यह जो ससीम अतृप्ति है, यह बतला रही है कि असीम के साथ योग एकदम टूटा नहीं है । स्मृति है - इसी लिये योग है । वह योग, वह अनुभूति अस्पष्ट है, यह हम स्वीकार करते है, किन्तु वह है अवश्य । यदि यह अनुभूति - यदि पूर्ण का यह आस्वादन न रहता तो सौन्दर्य का कोई मानदण्ड न रहता । मान के बिना तुलना करना सम्भव न होता । जब हमे दो फूले हुये फूलो को देख कर किसी समय एक दूसरे की अपेक्षा सुन्दर जॅचता है, तब अनजाने मे सौन्दर्य के मानदण्ड का हम प्रयोग करते है । जहाँ तारतम्य का बोध होता है वहाँ निश्चय ही मान के न्यूनाधिक्य की निर्णायक उपाधि रहती है। प्रकृत स्थल में चित्तस्थित पूर्ण सौन्दर्य की अस्पष्ट अनुभूति अथवा अनुभवाभास ही बाह्य सौन्दर्य के तारतम्य का बोधक निमित्त है । अर्थात् बाहर की वस्तुओ को देखकर उनमे जो पूर्ण सौन्दर्य का जितना अधिक निकटवर्ती प्रतीत होता है वह उतना सुन्दर लगता ! सौन्दर्य का विकास जैसे क्रमिक है यह सन्निकर्ष भी वैसे ही क्रमिक है। बाहर में जैसे पूर्ण विकसित सौन्दर्य का कभी सम्भव नही वैसे ही सन्निकर्ष की इस चरमावस्था का अर्थात् एकीमाव का भी सम्भव नहीं है । देश और काल मे जब पूर्ण सौन्दर्य प्राप्त नहीं होता एव वृत्तिज्ञान जब देश और काल की सीमा में बॅधा रहता है तब पूर्ण सौन्दर्य वृत्ति के निकट प्रकाशित नहीं हो पाता, यह बात सत्य है । बल्कि वृत्ति पूर्ण सौन्दर्य की प्रतिबन्धक है । सौन्दर्य का जो पूर्ण आस्वाद है, वृत्ति रूप में वही विभक्त हो जाता है। वृत्ति से जिस सौन्दर्य का बोध होता है वह खण्ड सौन्दर्य है, परिच्छिन्न आनन्द है। पूर्ण सौन्दर्य स्वय ही अपने को प्रकट करता है, उसे अन्य कोई प्रकट नहीं कर सकता। वृत्ति के द्वारा जो सौन्दर्य-बोध का आभास प्रस्फुटित होता है वह सापेक्ष, परतन्त्र, क्रम से बढ़ने वाला और काल के अन्तर्गत है । पूर्ण सौन्दर्य उससे विपरीत है । इस पूर्ण सौन्दर्य की छाया लेकर ही खण्ड सौन्दर्य अपने को प्रकट करता है । तब क्या पूर्ण सौन्दर्य और खण्ड सौन्दर्य दो पृथक् वस्तुऍ हैं ? नहीं, ऐसा नही । दोनों वास्तव में एक है । लेकिन इस वियोगावस्था मे दोनो को ठीक एक कहना सम्भव नहीं है। मालूम पडता है दो पृथक् हैं। यह जो दो का अनुभव होता है, इसी के भीतर वियोग की व्यथा छिपी हुई है। इसको जोर जबरदस्ती से एक नहीं किया जा सकता । किन्तु फिर भी सत्य बात यह है कि दोनो ही एक हैं। जो सौन्दर्य बाहर है वही अन्दर है, जो खण्ड सौन्दर्य होकर इन्द्रिय-द्वार मे वृत्ति रूप से विराजमान होता है, वही पूर्ण सौन्दर्य-रूप में अतीन्द्रिय भाव से नित्य प्रकाशमान है। गुलाब का जो सौन्दर्य है वह भी वही पूर्ण सौन्दर्य है, शिशु के प्रफुल्लित मुखकमल में जो शोभा है, वह भी वही पूर्ण सौन्दर्य है- जिसे जब जहाँ जिस रूप से जिस किसी सौन्दर्य का बोध हुआ है, वह भी वह पूर्ण सौन्दर्य ही है। यहाॅ प्रश्न उठ सकता है कि सभी यदि पूर्ण सौन्दर्य है एव पूर्ण सौन्दर्य यदि सभी का आस्वादित और आस्वाद्यमान है तो ऐसी स्थिति मे फिर सौन्दर्य के लिये आकाङ्क्षा क्यों होती है ? बात यह है, पूर्ण सौन्दर्य का बोध अस्पष्टरूप से सभी को है। किन्तु अस्पष्टता ही अतृप्ति की हेतु है । इस अस्पष्ट को स्पष्ट करना ही तो सब चाहते है। जो छाया है उसे काया देने की इच्छा होती है। वृत्ति द्वारा इस अस्पष्ट का स्पष्टीकरण होता है, जो छाया के तुल्य था वह मानो स्पष्ट रूप से भास उठता है । भासित हो उठता है सही, किन्तु खण्डरूप से । इसी लिये वृत्ति की सहायता से स्पष्ट हुए सौन्दर्य का साक्षात्कार होने पर भी, खण्ड होने से, ससीम होने के कारण उससे तृप्ति परिपूर्ण नही होती । वृत्ति तो अखण्ड सौन्दर्य को पकड नही सकती । अखण्ड सौन्दर्य के प्रकाश में वृत्ति कुण्ठित हो जाती है। में इसी बात को और स्पष्टरूप से कहते हैं। कल्पना कीजिये, एक खिला गुलाब का फूल हमारी दृष्टि के सामने पडा है, उसके सौन्दर्य ने हमे आकृष्ट किया हैउसका सुन्दररूप मे हम अनुभव कर रहे है। इस अनुभव का विश्लेषण करने पर हमारे हाथ क्या लगता है ? यह सौन्दर्य कहाँ है ? यह क्या गुलाब मे है, अथवा हममें है अथवा दोनों में है। इस अनुभव का स्वरूप क्या है ? आपातत. यही प्रतीत होता है कि यह केवल गुलाब मे नहीं है। यदि वहीं होता तो सभी गुलाब को सुन्दर देखते। किन्तु सब उसे सुन्दर देखते नहीं। और यह केवल हममे अर्थात् द्रष्टा में है यह कहना भी ठीक नहीं है। यदि ऐसा होता तो हम अर्थात् द्रष्टा मत्र वस्तुओं को सुन्दर देखते, किन्तु हम सभी को सुन्दर देखते नही । इसलिये मानना होगा कि इस अनुभव के विश्लेषण से सिद्धान्त होता है कि वर्तमान क्षेत्र में जब वृत्ति द्वारा बोध हो रहा है तत्र सौन्दर्य खण्डित सा हुआ है, एक ओर अस्पष्ट है अथ च पूर्ण सौन्दर्य है, जो हममे है, दूसरी हममे है, दूसरी ओर स्पष्ट अथ च खण्ड सौन्दर्य है, जिसे हम गुलाब मे देख रहे हैं। किन्तु यथार्थ रस- स्फूर्ति के समय ऐसा रहता नहीं। तब सौन्दर्य द्रष्टा में नहीं रहता, गुलाब मे भी नहीं रहता । द्रष्टा और गुलाब तब एकरस साम्या - वस्थापन्न हो जाते हैं, केवल सौन्दर्य ही, स्वप्रकाशमान सौन्दर्य ही तब रहता है। यही पूर्ण सौन्दर्य है, जिसमे भोक्ता और भोग्य दोनों ही नित्यसम्भोगरूप से विराजमान रहते हैं । वृत्ति द्वारा सौन्दर्योपलब्धि किसे कहते है ? जब किसी विशिष्ट वस्तु का हम प्रत्यक्ष करते हैं, तब वह वस्तु हमारे चित्त में स्थित आवरण को धक्का देकर थोडा बहुत हटा देती है। चित्त पूर्ण सौन्दर्यावभासमय है, किन्तु यह अवभास आवरण से ढका होने से अस्पष्ट है। किन्तु सर्वधा ढका नहीं है, न हो ही सकता है। मेघ सूर्य को ढक्ता है, किन्तु एकबारगी टक नहीं सकता। यदि एकबारगी ढकता तो मेघ स्वयं भी प्रकाशित न होता । मेव जो मेघ है, वह भी वह प्रकाशमान होने से है, इसलिये वह सूर्यालोक की अपेक्षा रखता है। उसी प्रकार आवरण चित्त को एकबारगी टक नहीं सकता । चित्त को ढकता है, किन्तु आवरण का भेद करके भी ज्योति का स्फुरण होता है। इसी लिये पूर्ण सौन्दर्य, आवरण के प्रभाव से, अस्पष्ट होने पर भी एक्कारगी अप्रकाशमान नहीं है । जहाँ चित्त है वही यह बात लागू होती है। पर अस्पष्टता का तारतम्य अवस्य है। यह जो आवरण के कारण अस्पष्टता है आवरण के हटने पर वह भी सटता में बदल जाती है। आवरण के तनिक हटने पर जो सता दिखती हैं वह किञ्चित् मात्र है। घर के झरोखे के छिद्र से अनन्त आकाश का जैसे एकदेशमात्र दिखलायी देता है आशिक रूप से आवरण हटने पर उसी प्रकार पूर्ण सौन्दर्य का एकदेशमात्र ही प्रकाशित होता है । यह प्रकाशमान एकदेश ही खण्ड सौन्दर्य के नाम से प्रसिद्ध है। यह आशिक आवरणनाश ही वृत्तिज्ञान है । इसलिये जो गुलाचे का सौन्दर्य है वह भी पूर्ण सौन्दर्य ही है, पर एक एकदेशमात्र है। इसी प्रकार जगत् का सम्पूर्ण सौन्दर्य ही उस पूर्ण सौन्दर्य का एकदेश है। आवरणभङ्ग के 'तारतम्य वश उद्घाटित सौन्दर्य के तारतम्य अथवा वैशिष्ट्य का निरूपण होता है। किन्तु आवरणभङ्ग के वैशिष्ट्य का नियामक क्या है ? आपाततः यह बाह्य पदार्थ के स्वरूप में स्थित वैशिष्ट्य के रूप से हीं गृहीत होगा। किन्तु हम आगे देखेंगे कि यही अन्तिम बात नहीं है, इसलिये आवरणभङ्ग का भेद, जो स्वाभाविक है, वह इस अवस्था मे कहा नहीं जा सकता । आपाततः कहना ही होगा कि आगन्तुक कारण के वैचित्र्य वश आवरण के हटने पर भी वैचित्र्य रहता है । स्फटिक के समीप नील वर्ण की स्थिति से स्फटिक नीला प्रतीत होता है और पीत वर्ण की स्थिति से पीला प्रतीत होता है यह आगन्तुक कारणजन्य भेद का दृष्टान्त है । चक्षु के निकटस्थित घट में घटाकार वृत्ति एव पट मे पटाकार वृत्ति चित्त धारण करता है, यह भी आगन्तुक भेद है । ठीक उसी प्रकार फूल के सौन्दर्य और लता के सौन्दर्य दोनो मे अनुभव का भेद जानना होगा। फूल के सौन्दर्यास्वाद की जो वृत्ति है, लता के सौन्दर्यास्वाद की वृत्ति उससे विलक्षण है, इसका कारण आगन्तुक है । फूल और लता का वैशिष्ट्य जैसे सत्तागत है वैसे ही ज्ञानागत भी है, फिर आखादगत भी है। इसलिये स्वीकार करना होगा कि फूल और लता मे ऐसा विशिष्ट कुछ है जिससे एक एक प्रकार की सौन्दर्यानुभूति का उद्दीपक है, दूसरा दूसरी प्रकार की । किन्तु यह आपेक्षिक सत्य है । बाह्य पदार्थ यदि परमार्थतः नहीं रहते अथवा जिस अवस्था मे नही रहते तब अथवा उस अवस्था मे बाह्य पदार्थ के स्वरूपगत वैशिष्ट्य के द्वारा रसानुभूति के वैचित्र्य का उपपादन नही किया जाता । सत्ता जैसे एक और अखण्ड होने पर भी फूल और लता खण्डसत्ता है, ज्ञान जैसे एक और अखण्ड होने पर भी फूल का ज्ञान और लता का ज्ञान अर्थात् फूलरूप ज्ञान और लतारूप ज्ञान परस्पर विलक्षण हैं वैसे ही सौन्दर्य एक और अखण्ड होने पर भी फूल का सौन्दर्य और लता का सौन्दर्य अर्थात् फूलरूप सौन्दर्य और लतारूप सौन्दर्य परस्पर भिन्न है। इस जगत् मे दो वस्तुऍ टीक एक नहीं है । प्रत्येक वस्तु का एक स्वभाव है, एक व्यक्तित्व है, एक विशिष्टता है जो दूसरी वस्तु मै नही होती । यदि यह सत्य है, तो खण्ड सत्ता जैसे अनन्त संख्या में तथा प्रकार मे, खण्ड जान भी वैसे ही अनन्त है, खण्ड सौन्दर्य भी वैसे ही अनन्त है । किन्तु जो सत्ता है वही तो ज्ञान है, क्योंकि प्रकाशमान सत्ता ही ज्ञान है और अप्रकाशमान सत्ता आलोक है। फिर जो ज्ञान है वही आनन्द है, क्योंकि अनुकूल ज्ञान हो, भला लगना ही आनन्द या सौन्दर्यबोध है और प्रतिकूल ज्ञान ही दुख या कढर्यता है । सत्ता जब ज्ञान होती है तत्र वह नित्यज्ञान है आर ज्ञान जब आनन्द होता है, तब वह नित्य सवैद्यमान आनन्द है । यह नित्य सवेग्रमान
रस और सोदर्य ही पाते है, सीन्दर्य जितना ही देखते हैं, उतनी ही हृदय मे अभावप्रतीति और भी अधिक जाग उठती है। देखकर भी देखने की साध किसी तरह भी मिटती नही, मालूम होता है यह अपूर्ण है। जभी अपूर्ण समझते है तभी सीमा आँखो के सामने दिखाई देती है, तभी अनजाने में हृदय रो उठता है । सोचते हैं और भी - ओर भी आगे जायँ, सभवत सुदूर भविष्य में किसी न किसी दिन उसे आयत्त कर सकेंगे। किन्तु हाय मोह । यह समझ नहीं पाते है कि काल-प्रवाह मे इस आकाङ्क्षा की तृप्ति हो नही सकती । आनन्द चाहे जितना ही क्यो न बढे, सौन्दर्य चाहे जितना ही छल्छला उठे, तृप्ति तत्र भी बहुत दूर की वस्तु है, क्योकि और भी विकास हो सकता है एव कभी भी इस नमविकास की सम्भावना दूर होगी नहीं । इससे ज्ञात हो जायगा कि हृदय जिसकी आकाङ्क्षा करता है वह ससीम सौन्दर्य अथवा परिमित आनन्द नही है । यदि ऐसा होता तो एक न एक दिन क्रमविकास से उसकी तृप्ति हो जाती । वस्तुत. यह असीम सौन्दर्य, अनन्त प्रेम, निरवच्छिन्न आनन्द है। पूर्ण सौन्दर्य का सम्भोग पहले हुआ है, इसी लिये पूर्ण सौन्दर्य की आकाङ्क्षा होती है, विच्छिन्न सौन्दर्य से तृष्णा मिटती नही । जिसका विरह है, उसे पाये विना व्याकुलता का अवसान हो नहीं सकता । इसलिये प्रश्न रह गया कि यह पूर्ण सौन्दर्य कब मिला था ? हम पहले देख चुके हैं कि कालनम से इस पूर्ण सकते; करोड़ों कल्पो मे भी हम ऐसा सौन्दर्य पायेंगे नहीं जिससे हो न सके, अर्थात् काल के मध्य मे पूर्ण सौन्दर्य का विकास हो में जो विकास होता है वह क्रमविकास है । इस क्रम का अन्त नहीं है । और भी अधिक, और भी अधिक हो सकता है - किन्तु कभी भी पूर्णता होनी नहीं । यदि यह सत्य है तो यह भी सत्य है कि काल में कभी इसकी अनुभूति भी होती नहीं । अर्थात् हम जिस सौन्दर्य की अनुभूति हुई है, वह कोई सुदूर अतीत में नहीं है, किसी दिगन्तस्थित नक्षत्र में नहीं है अथवा किसी विशिष्ट काल या देश में नहीं है । अतएव एक प्रकार से यह प्रश्न ही अनुपपन्न है। किन्तु घूम फिर कर प्रश्न फिर भी होता है । परस्पर विरुद्ध होने पर भी यह सत्य है कि इस सौन्दर्य का आस्वादन जब हमे हुआ था तब काल नहीं था - जहाँ हमने इसका आस्वादन किया था वहाँ देश नहीं था । वह हमारी 'योग' अवस्था अथवा मिल्न था । उसके बाद वर्तमान अवस्था 'योगनश' अथवा विरह है। फिर उस योग में जाने के लिये हम छटपटा रहे हैं, पुनमिल्न चाहते है। अर्थात् हम देश और काल में निर्वासित हुये है । फिर देश काल को छिन्न भिन्न कर, विलीन कर वैसे ही योगयुक्त होना चाहते है । किन्तु यह वियोग क्या अत्यन्त वियोग ह ? पूर्ण ने विच्छेद क्या सचमुच इतना वालविक है? नहीं, यह बात नहीं है। वियोग सत्य दें, विच्छेद त्वीकार्य हैकिन्तु उस वियोग के मूल मे भी नित्य योग खोया नहीं है, वह कभी न्योता नहीं है । यदि सो गया होता, तो यह वियोग चिर वियोग हो जाता, पिर लेटने की सम्भावना नहीं रहती। यह जो आकाङ्क्षा है, यह जो ससीम अतृप्ति है, यह बतला रही है कि असीम के साथ योग एकदम टूटा नहीं है । स्मृति है - इसी लिये योग है । वह योग, वह अनुभूति अस्पष्ट है, यह हम स्वीकार करते है, किन्तु वह है अवश्य । यदि यह अनुभूति - यदि पूर्ण का यह आस्वादन न रहता तो सौन्दर्य का कोई मानदण्ड न रहता । मान के बिना तुलना करना सम्भव न होता । जब हमे दो फूले हुये फूलो को देख कर किसी समय एक दूसरे की अपेक्षा सुन्दर जॅचता है, तब अनजाने मे सौन्दर्य के मानदण्ड का हम प्रयोग करते है । जहाँ तारतम्य का बोध होता है वहाँ निश्चय ही मान के न्यूनाधिक्य की निर्णायक उपाधि रहती है। प्रकृत स्थल में चित्तस्थित पूर्ण सौन्दर्य की अस्पष्ट अनुभूति अथवा अनुभवाभास ही बाह्य सौन्दर्य के तारतम्य का बोधक निमित्त है । अर्थात् बाहर की वस्तुओ को देखकर उनमे जो पूर्ण सौन्दर्य का जितना अधिक निकटवर्ती प्रतीत होता है वह उतना सुन्दर लगता ! सौन्दर्य का विकास जैसे क्रमिक है यह सन्निकर्ष भी वैसे ही क्रमिक है। बाहर में जैसे पूर्ण विकसित सौन्दर्य का कभी सम्भव नही वैसे ही सन्निकर्ष की इस चरमावस्था का अर्थात् एकीमाव का भी सम्भव नहीं है । देश और काल मे जब पूर्ण सौन्दर्य प्राप्त नहीं होता एव वृत्तिज्ञान जब देश और काल की सीमा में बॅधा रहता है तब पूर्ण सौन्दर्य वृत्ति के निकट प्रकाशित नहीं हो पाता, यह बात सत्य है । बल्कि वृत्ति पूर्ण सौन्दर्य की प्रतिबन्धक है । सौन्दर्य का जो पूर्ण आस्वाद है, वृत्ति रूप में वही विभक्त हो जाता है। वृत्ति से जिस सौन्दर्य का बोध होता है वह खण्ड सौन्दर्य है, परिच्छिन्न आनन्द है। पूर्ण सौन्दर्य स्वय ही अपने को प्रकट करता है, उसे अन्य कोई प्रकट नहीं कर सकता। वृत्ति के द्वारा जो सौन्दर्य-बोध का आभास प्रस्फुटित होता है वह सापेक्ष, परतन्त्र, क्रम से बढ़ने वाला और काल के अन्तर्गत है । पूर्ण सौन्दर्य उससे विपरीत है । इस पूर्ण सौन्दर्य की छाया लेकर ही खण्ड सौन्दर्य अपने को प्रकट करता है । तब क्या पूर्ण सौन्दर्य और खण्ड सौन्दर्य दो पृथक् वस्तुऍ हैं ? नहीं, ऐसा नही । दोनों वास्तव में एक है । लेकिन इस वियोगावस्था मे दोनो को ठीक एक कहना सम्भव नहीं है। मालूम पडता है दो पृथक् हैं। यह जो दो का अनुभव होता है, इसी के भीतर वियोग की व्यथा छिपी हुई है। इसको जोर जबरदस्ती से एक नहीं किया जा सकता । किन्तु फिर भी सत्य बात यह है कि दोनो ही एक हैं। जो सौन्दर्य बाहर है वही अन्दर है, जो खण्ड सौन्दर्य होकर इन्द्रिय-द्वार मे वृत्ति रूप से विराजमान होता है, वही पूर्ण सौन्दर्य-रूप में अतीन्द्रिय भाव से नित्य प्रकाशमान है। गुलाब का जो सौन्दर्य है वह भी वही पूर्ण सौन्दर्य है, शिशु के प्रफुल्लित मुखकमल में जो शोभा है, वह भी वही पूर्ण सौन्दर्य है- जिसे जब जहाँ जिस रूप से जिस किसी सौन्दर्य का बोध हुआ है, वह भी वह पूर्ण सौन्दर्य ही है। यहाॅ प्रश्न उठ सकता है कि सभी यदि पूर्ण सौन्दर्य है एव पूर्ण सौन्दर्य यदि सभी का आस्वादित और आस्वाद्यमान है तो ऐसी स्थिति मे फिर सौन्दर्य के लिये आकाङ्क्षा क्यों होती है ? बात यह है, पूर्ण सौन्दर्य का बोध अस्पष्टरूप से सभी को है। किन्तु अस्पष्टता ही अतृप्ति की हेतु है । इस अस्पष्ट को स्पष्ट करना ही तो सब चाहते है। जो छाया है उसे काया देने की इच्छा होती है। वृत्ति द्वारा इस अस्पष्ट का स्पष्टीकरण होता है, जो छाया के तुल्य था वह मानो स्पष्ट रूप से भास उठता है । भासित हो उठता है सही, किन्तु खण्डरूप से । इसी लिये वृत्ति की सहायता से स्पष्ट हुए सौन्दर्य का साक्षात्कार होने पर भी, खण्ड होने से, ससीम होने के कारण उससे तृप्ति परिपूर्ण नही होती । वृत्ति तो अखण्ड सौन्दर्य को पकड नही सकती । अखण्ड सौन्दर्य के प्रकाश में वृत्ति कुण्ठित हो जाती है। में इसी बात को और स्पष्टरूप से कहते हैं। कल्पना कीजिये, एक खिला गुलाब का फूल हमारी दृष्टि के सामने पडा है, उसके सौन्दर्य ने हमे आकृष्ट किया हैउसका सुन्दररूप मे हम अनुभव कर रहे है। इस अनुभव का विश्लेषण करने पर हमारे हाथ क्या लगता है ? यह सौन्दर्य कहाँ है ? यह क्या गुलाब मे है, अथवा हममें है अथवा दोनों में है। इस अनुभव का स्वरूप क्या है ? आपातत. यही प्रतीत होता है कि यह केवल गुलाब मे नहीं है। यदि वहीं होता तो सभी गुलाब को सुन्दर देखते। किन्तु सब उसे सुन्दर देखते नहीं। और यह केवल हममे अर्थात् द्रष्टा में है यह कहना भी ठीक नहीं है। यदि ऐसा होता तो हम अर्थात् द्रष्टा मत्र वस्तुओं को सुन्दर देखते, किन्तु हम सभी को सुन्दर देखते नही । इसलिये मानना होगा कि इस अनुभव के विश्लेषण से सिद्धान्त होता है कि वर्तमान क्षेत्र में जब वृत्ति द्वारा बोध हो रहा है तत्र सौन्दर्य खण्डित सा हुआ है, एक ओर अस्पष्ट है अथ च पूर्ण सौन्दर्य है, जो हममे है, दूसरी हममे है, दूसरी ओर स्पष्ट अथ च खण्ड सौन्दर्य है, जिसे हम गुलाब मे देख रहे हैं। किन्तु यथार्थ रस- स्फूर्ति के समय ऐसा रहता नहीं। तब सौन्दर्य द्रष्टा में नहीं रहता, गुलाब मे भी नहीं रहता । द्रष्टा और गुलाब तब एकरस साम्या - वस्थापन्न हो जाते हैं, केवल सौन्दर्य ही, स्वप्रकाशमान सौन्दर्य ही तब रहता है। यही पूर्ण सौन्दर्य है, जिसमे भोक्ता और भोग्य दोनों ही नित्यसम्भोगरूप से विराजमान रहते हैं । वृत्ति द्वारा सौन्दर्योपलब्धि किसे कहते है ? जब किसी विशिष्ट वस्तु का हम प्रत्यक्ष करते हैं, तब वह वस्तु हमारे चित्त में स्थित आवरण को धक्का देकर थोडा बहुत हटा देती है। चित्त पूर्ण सौन्दर्यावभासमय है, किन्तु यह अवभास आवरण से ढका होने से अस्पष्ट है। किन्तु सर्वधा ढका नहीं है, न हो ही सकता है। मेघ सूर्य को ढक्ता है, किन्तु एकबारगी टक नहीं सकता। यदि एकबारगी ढकता तो मेघ स्वयं भी प्रकाशित न होता । मेव जो मेघ है, वह भी वह प्रकाशमान होने से है, इसलिये वह सूर्यालोक की अपेक्षा रखता है। उसी प्रकार आवरण चित्त को एकबारगी टक नहीं सकता । चित्त को ढकता है, किन्तु आवरण का भेद करके भी ज्योति का स्फुरण होता है। इसी लिये पूर्ण सौन्दर्य, आवरण के प्रभाव से, अस्पष्ट होने पर भी एक्कारगी अप्रकाशमान नहीं है । जहाँ चित्त है वही यह बात लागू होती है। पर अस्पष्टता का तारतम्य अवस्य है। यह जो आवरण के कारण अस्पष्टता है आवरण के हटने पर वह भी सटता में बदल जाती है। आवरण के तनिक हटने पर जो सता दिखती हैं वह किञ्चित् मात्र है। घर के झरोखे के छिद्र से अनन्त आकाश का जैसे एकदेशमात्र दिखलायी देता है आशिक रूप से आवरण हटने पर उसी प्रकार पूर्ण सौन्दर्य का एकदेशमात्र ही प्रकाशित होता है । यह प्रकाशमान एकदेश ही खण्ड सौन्दर्य के नाम से प्रसिद्ध है। यह आशिक आवरणनाश ही वृत्तिज्ञान है । इसलिये जो गुलाचे का सौन्दर्य है वह भी पूर्ण सौन्दर्य ही है, पर एक एकदेशमात्र है। इसी प्रकार जगत् का सम्पूर्ण सौन्दर्य ही उस पूर्ण सौन्दर्य का एकदेश है। आवरणभङ्ग के 'तारतम्य वश उद्घाटित सौन्दर्य के तारतम्य अथवा वैशिष्ट्य का निरूपण होता है। किन्तु आवरणभङ्ग के वैशिष्ट्य का नियामक क्या है ? आपाततः यह बाह्य पदार्थ के स्वरूप में स्थित वैशिष्ट्य के रूप से हीं गृहीत होगा। किन्तु हम आगे देखेंगे कि यही अन्तिम बात नहीं है, इसलिये आवरणभङ्ग का भेद, जो स्वाभाविक है, वह इस अवस्था मे कहा नहीं जा सकता । आपाततः कहना ही होगा कि आगन्तुक कारण के वैचित्र्य वश आवरण के हटने पर भी वैचित्र्य रहता है । स्फटिक के समीप नील वर्ण की स्थिति से स्फटिक नीला प्रतीत होता है और पीत वर्ण की स्थिति से पीला प्रतीत होता है यह आगन्तुक कारणजन्य भेद का दृष्टान्त है । चक्षु के निकटस्थित घट में घटाकार वृत्ति एव पट मे पटाकार वृत्ति चित्त धारण करता है, यह भी आगन्तुक भेद है । ठीक उसी प्रकार फूल के सौन्दर्य और लता के सौन्दर्य दोनो मे अनुभव का भेद जानना होगा। फूल के सौन्दर्यास्वाद की जो वृत्ति है, लता के सौन्दर्यास्वाद की वृत्ति उससे विलक्षण है, इसका कारण आगन्तुक है । फूल और लता का वैशिष्ट्य जैसे सत्तागत है वैसे ही ज्ञानागत भी है, फिर आखादगत भी है। इसलिये स्वीकार करना होगा कि फूल और लता मे ऐसा विशिष्ट कुछ है जिससे एक एक प्रकार की सौन्दर्यानुभूति का उद्दीपक है, दूसरा दूसरी प्रकार की । किन्तु यह आपेक्षिक सत्य है । बाह्य पदार्थ यदि परमार्थतः नहीं रहते अथवा जिस अवस्था मे नही रहते तब अथवा उस अवस्था मे बाह्य पदार्थ के स्वरूपगत वैशिष्ट्य के द्वारा रसानुभूति के वैचित्र्य का उपपादन नही किया जाता । सत्ता जैसे एक और अखण्ड होने पर भी फूल और लता खण्डसत्ता है, ज्ञान जैसे एक और अखण्ड होने पर भी फूल का ज्ञान और लता का ज्ञान अर्थात् फूलरूप ज्ञान और लतारूप ज्ञान परस्पर विलक्षण हैं वैसे ही सौन्दर्य एक और अखण्ड होने पर भी फूल का सौन्दर्य और लता का सौन्दर्य अर्थात् फूलरूप सौन्दर्य और लतारूप सौन्दर्य परस्पर भिन्न है। इस जगत् मे दो वस्तुऍ टीक एक नहीं है । प्रत्येक वस्तु का एक स्वभाव है, एक व्यक्तित्व है, एक विशिष्टता है जो दूसरी वस्तु मै नही होती । यदि यह सत्य है, तो खण्ड सत्ता जैसे अनन्त संख्या में तथा प्रकार मे, खण्ड जान भी वैसे ही अनन्त है, खण्ड सौन्दर्य भी वैसे ही अनन्त है । किन्तु जो सत्ता है वही तो ज्ञान है, क्योंकि प्रकाशमान सत्ता ही ज्ञान है और अप्रकाशमान सत्ता आलोक है। फिर जो ज्ञान है वही आनन्द है, क्योंकि अनुकूल ज्ञान हो, भला लगना ही आनन्द या सौन्दर्यबोध है और प्रतिकूल ज्ञान ही दुख या कढर्यता है । सत्ता जब ज्ञान होती है तत्र वह नित्यज्ञान है आर ज्ञान जब आनन्द होता है, तब वह नित्य सवैद्यमान आनन्द है । यह नित्य सवेग्रमान
हिमाचल प्रदेश के नगर निगम धर्मशाला के महापौर सीट पर कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी के दूसरी बार कब्जा करते ही राज्य में सियासी बयानबाजियों का दौर शुरू हो गया है. कांग्रेस समर्थित पार्षद ने दूसरी मर्तबा सीट पर दबदबा कायम किया है, इससे पहले भी कांग्रेस समर्थित महिला मेयर रह चुकी हैं. हिमाचल प्रदेश की दूसरी राजधानी धर्मशाला के नगर निगम के सर्वोच्च पद पर एक बाद फिर से कांग्रेस का कब्जा हो गया गया है. बीते सोमवार को मेयर पद को लेकर हुए चुनाव में कांग्रेस समर्थित देवेंद्र जग्गी को सर्वसम्मति से नगर निगम का मेयर चुना है, जबकि भाजपा समर्थित ओंकार नैहरिया को डिप्टी मेयर चुने गए हैं. धर्मशाला नगर निगम के ताजा घटनाक्रम से उत्साहित कांग्रेस ने प्रदेश सरकार की लोकप्रियता पर सवाल खड़े किए हैं. प्रदेश कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता नरेश चौहान ने कहा कि 9 माह पुरानी भाजपा सरकार की लोकप्रियता घटने लगी है. प्रदेश भर में हो रहे चुनाव में भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि चुनाव में लगातार हार प्रदेश सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रही है. .
हिमाचल प्रदेश के नगर निगम धर्मशाला के महापौर सीट पर कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी के दूसरी बार कब्जा करते ही राज्य में सियासी बयानबाजियों का दौर शुरू हो गया है. कांग्रेस समर्थित पार्षद ने दूसरी मर्तबा सीट पर दबदबा कायम किया है, इससे पहले भी कांग्रेस समर्थित महिला मेयर रह चुकी हैं. हिमाचल प्रदेश की दूसरी राजधानी धर्मशाला के नगर निगम के सर्वोच्च पद पर एक बाद फिर से कांग्रेस का कब्जा हो गया गया है. बीते सोमवार को मेयर पद को लेकर हुए चुनाव में कांग्रेस समर्थित देवेंद्र जग्गी को सर्वसम्मति से नगर निगम का मेयर चुना है, जबकि भाजपा समर्थित ओंकार नैहरिया को डिप्टी मेयर चुने गए हैं. धर्मशाला नगर निगम के ताजा घटनाक्रम से उत्साहित कांग्रेस ने प्रदेश सरकार की लोकप्रियता पर सवाल खड़े किए हैं. प्रदेश कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता नरेश चौहान ने कहा कि नौ माह पुरानी भाजपा सरकार की लोकप्रियता घटने लगी है. प्रदेश भर में हो रहे चुनाव में भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि चुनाव में लगातार हार प्रदेश सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रही है. .
मुंबई। चारकोप पुलिस के तहत एक लोकल नेता पर कुछ अज्ञात लोगों ने शुक्रवार की रात कोयते से हमला कर उसे गंभीर जख्मी कर दिया। घायल का नाम अरुण सुर्वे बताया गया है, जो चारकोप के सेक्टर 8 में रहता है। पुलिस के मुताबिक सुर्वे पर जिस वक्त हमला हुआ, उस वक्त वह किसी काम से बाहर जा रहा था। घटना के बाद पुलिस ने हमलावरों को पकड़ने के लिए कई टीम गठित की है, लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी। जख्मी सुर्वे को स्थानीय कोकिलाबेन अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सूत्रों के अनुसार मामला आपसी रंजिश का है, फिलहाल चारकोप पुलिस जांच में जुटी हुई है। चश्मदीदों के मुताबिक हमलावर दो थे, जिसकी तलाश पुलिस सीसीटीवी की मदद से कर रही है।
मुंबई। चारकोप पुलिस के तहत एक लोकल नेता पर कुछ अज्ञात लोगों ने शुक्रवार की रात कोयते से हमला कर उसे गंभीर जख्मी कर दिया। घायल का नाम अरुण सुर्वे बताया गया है, जो चारकोप के सेक्टर आठ में रहता है। पुलिस के मुताबिक सुर्वे पर जिस वक्त हमला हुआ, उस वक्त वह किसी काम से बाहर जा रहा था। घटना के बाद पुलिस ने हमलावरों को पकड़ने के लिए कई टीम गठित की है, लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी। जख्मी सुर्वे को स्थानीय कोकिलाबेन अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सूत्रों के अनुसार मामला आपसी रंजिश का है, फिलहाल चारकोप पुलिस जांच में जुटी हुई है। चश्मदीदों के मुताबिक हमलावर दो थे, जिसकी तलाश पुलिस सीसीटीवी की मदद से कर रही है।
आपकी बेहतर जानकारी के लिए बता दे की महाराणा प्रताप का एक प्रिय हाथी भी था जिसका नाम था रामप्रसाद। रामप्रसाद की वीर गाथा भी चेतक से कम नहीं है। रामप्रसाद नाम का ये हाथी इतना ताकतवर था कि उसने अकबर के तीन हाथियों को मार गिराया था। ऐसा भी कहा जाता है की हल्दीघाटी के युद्ध में अकबर ने महाराणा के साथ उनके हाथी रामप्रसाद को भी पकड़ने के आदेश दिए थे। जिसके बाद अकबर ने उसे बंदी बना लिया था। फिर अकबर ने रामप्रसाद का नाम बदलकर "पीर प्रसाद" रखा था। बताया जाता है की अकबर ने रामप्रसाद के खाने के लिए सबसे बेहतरीन व्यवस्था कि लेकिन उसने 18 दिन तक खाना नहीं खाया। जिसके बाद रामप्रसाद की मौत हो गई।
आपकी बेहतर जानकारी के लिए बता दे की महाराणा प्रताप का एक प्रिय हाथी भी था जिसका नाम था रामप्रसाद। रामप्रसाद की वीर गाथा भी चेतक से कम नहीं है। रामप्रसाद नाम का ये हाथी इतना ताकतवर था कि उसने अकबर के तीन हाथियों को मार गिराया था। ऐसा भी कहा जाता है की हल्दीघाटी के युद्ध में अकबर ने महाराणा के साथ उनके हाथी रामप्रसाद को भी पकड़ने के आदेश दिए थे। जिसके बाद अकबर ने उसे बंदी बना लिया था। फिर अकबर ने रामप्रसाद का नाम बदलकर "पीर प्रसाद" रखा था। बताया जाता है की अकबर ने रामप्रसाद के खाने के लिए सबसे बेहतरीन व्यवस्था कि लेकिन उसने अट्ठारह दिन तक खाना नहीं खाया। जिसके बाद रामप्रसाद की मौत हो गई।
वरिष्ठ नागरिकों के उम्र के साथ बदलते जरूरतों के प्रति समाज में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से हर साल 21 अगस्त को वरिष्ठ नागरिक दिवस (Senior Citizens Day) मनाया जाता है। यह दिन वरिष्ठ नागरिकों के द्वारा किए गए योगदान को सम्मानित करने का भी दिन है। ऐसे में वृद्धावस्था में व्यक्ति कैसे अपनी सेहत को बनाए रख सकता है? यह जानने के लिए हमने कुछ एक्सपर्ट से बात की। वह बताते हैं कि बीमारी से बचाव के लिए अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत रखना बहुत जरूरी होता है। इसके लिए विशिष्ट आहार का पालन करना आवश्यक है ताकि हम खुद को और अपने बुजुर्गों को बीमारियों से दूर रख सकें। हेल्थ वेदा ऑर्गेनिक्स के संस्थापक अभिषेक शर्मा बताते हैं कि वृद्ध लोग बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं, ऐसे ध्यान रखना चाहिए कि वह पर्याप्त मात्रा में विटामिन और खनिज का सेवन कर रहे हैं। बीटा-कैरोटीन, विटामिन सी, ई, और ज़िंक में उच्च खाद्य पदार्थ बुजुर्ग के प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर करने का काम करते हैं। इसके अतिरिक्त, फूलगोभी, शिमला मिर्च, चुकंदर, पालक, और बैंगन जैसी सब्जियां रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए फायदेमंद हो सकती है। ज़ायरोपैथी के संस्थापक कामायनी नरेश बताते हैं कि आहार में केल, मशरूम और ब्रोकली जैसे सुपरफूड्स को शामिल करके रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। साथ ही सभी प्रकार के जामुन बीन्स, फ्लैक्स सीड्स और यहां तक कि कुछ नट्स को भी आहार में शामिल किया जा सकता है। वेस्टा एल्डर केयर के संस्थापक और हेड-एचआर एंड ऑपरेशंस, इशिता बागची बताती हैं कि ओमेगा -3 फैटी एसिड युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करने से अल्जाइमर रोग के विकास के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। ऐसे में आप आहार में मुंगफली, नट्स, बादाम, ब्रोकली आदि शामिल कर सकते हैं। एक्सपर्ट वृद्धावस्था में रोजाना 8 से 9 गिलास पानी पीने की सलाह देते हैं। ऐसा करने से उनकी श्लेष्मा झिल्ली गीली रहेगी, जिससे उन्हें सर्दी या फ्लू होने का खतरा कम हो जाएगा। पानी की जगह सूप, नारियल पानी, दूध, ग्रीन टी, या यहाँ तक कि कुछ घर का बना फलों का रस का सेवन भी कर सकते हैं। उच्च सोडियम वाले खाद्य पदार्थ जैसे सॉस, आलू के चिप्स, क्योर मीट और स्नैक फूड का सेवन देखें वृद्ध लोगों के लिए सेहतमंद नहीं होता है। ऐसे में कम नमक वाले खाद्य पदार्थ चुनें। एक्सपर्ट बताते हैं कि लहसुन, जिनसेंग, काला जीरा और मुलेठी कुछ ऐसे पौधे हैं जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। बुजुर्गों को खाने में डालकर या फिर चाय के रूप में इसका सेवन करना चाहिए। इससे न केवल उनकी आंतों को मदद मिलेगी, बल्कि यह उनकी प्रतिरक्षा को भी मजबूत करेगा। डिस्क्लेमरः यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
वरिष्ठ नागरिकों के उम्र के साथ बदलते जरूरतों के प्रति समाज में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से हर साल इक्कीस अगस्त को वरिष्ठ नागरिक दिवस मनाया जाता है। यह दिन वरिष्ठ नागरिकों के द्वारा किए गए योगदान को सम्मानित करने का भी दिन है। ऐसे में वृद्धावस्था में व्यक्ति कैसे अपनी सेहत को बनाए रख सकता है? यह जानने के लिए हमने कुछ एक्सपर्ट से बात की। वह बताते हैं कि बीमारी से बचाव के लिए अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत रखना बहुत जरूरी होता है। इसके लिए विशिष्ट आहार का पालन करना आवश्यक है ताकि हम खुद को और अपने बुजुर्गों को बीमारियों से दूर रख सकें। हेल्थ वेदा ऑर्गेनिक्स के संस्थापक अभिषेक शर्मा बताते हैं कि वृद्ध लोग बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं, ऐसे ध्यान रखना चाहिए कि वह पर्याप्त मात्रा में विटामिन और खनिज का सेवन कर रहे हैं। बीटा-कैरोटीन, विटामिन सी, ई, और ज़िंक में उच्च खाद्य पदार्थ बुजुर्ग के प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर करने का काम करते हैं। इसके अतिरिक्त, फूलगोभी, शिमला मिर्च, चुकंदर, पालक, और बैंगन जैसी सब्जियां रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए फायदेमंद हो सकती है। ज़ायरोपैथी के संस्थापक कामायनी नरेश बताते हैं कि आहार में केल, मशरूम और ब्रोकली जैसे सुपरफूड्स को शामिल करके रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। साथ ही सभी प्रकार के जामुन बीन्स, फ्लैक्स सीड्स और यहां तक कि कुछ नट्स को भी आहार में शामिल किया जा सकता है। वेस्टा एल्डर केयर के संस्थापक और हेड-एचआर एंड ऑपरेशंस, इशिता बागची बताती हैं कि ओमेगा -तीन फैटी एसिड युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करने से अल्जाइमर रोग के विकास के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। ऐसे में आप आहार में मुंगफली, नट्स, बादाम, ब्रोकली आदि शामिल कर सकते हैं। एक्सपर्ट वृद्धावस्था में रोजाना आठ से नौ गिलास पानी पीने की सलाह देते हैं। ऐसा करने से उनकी श्लेष्मा झिल्ली गीली रहेगी, जिससे उन्हें सर्दी या फ्लू होने का खतरा कम हो जाएगा। पानी की जगह सूप, नारियल पानी, दूध, ग्रीन टी, या यहाँ तक कि कुछ घर का बना फलों का रस का सेवन भी कर सकते हैं। उच्च सोडियम वाले खाद्य पदार्थ जैसे सॉस, आलू के चिप्स, क्योर मीट और स्नैक फूड का सेवन देखें वृद्ध लोगों के लिए सेहतमंद नहीं होता है। ऐसे में कम नमक वाले खाद्य पदार्थ चुनें। एक्सपर्ट बताते हैं कि लहसुन, जिनसेंग, काला जीरा और मुलेठी कुछ ऐसे पौधे हैं जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। बुजुर्गों को खाने में डालकर या फिर चाय के रूप में इसका सेवन करना चाहिए। इससे न केवल उनकी आंतों को मदद मिलेगी, बल्कि यह उनकी प्रतिरक्षा को भी मजबूत करेगा। डिस्क्लेमरः यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2021 सीजन में मंगलवार को एक बार फिर से डबल हेडर देखने को मिलेगा। डबल हेडर की शुरुआत दोपहर में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) और दिल्ली कैपिटल्स (DC) के बीच होने वाले मुकाबले के साथ होगी। KKR केवल एक दिन के आराम के बाद दोबारा मैदान पर उतरेगी तो वहीं DC ने शनिवार को अपना आखिरी मैच खेला था। आइए जानते हैं एक-दूसरे के खिलाफ कैसा रहा है इन टीमों का प्रदर्शन। IPL में अब तक KKR ने DC के मुकाबले ज्यादा मैच जीते हैं। Cricketpedia के मुताबिक अब तक दोनों टीमों के बीच कुल 27 मैच खेले जा चुके हैं, जिसमें से 14 में KKR ने जीत हासिल की है। दूसरी तरफ DC सिर्फ 12 मैचों में ही जीत सकी है। इसके अलावा एक मुकाबले का कोई परिणाम नहीं निकला है। इस सीजन की पहली भिड़ंत में DC ने बाजी मारी थी। KKR के टीम से दिनेश कार्तिक ने DC के खिलाफ 19 मैचों में 26. 64 की औसत से 453 रन बनाए हैं। इस बीच उन्होंने चार अर्धशतक भी लगाए हैं। वहीं करुण नायर ने सात मैचों में 43 की औसत और तीन अर्धशतक की मदद से 258 रन बनाए हैं। दूसरी तरफ गेंदबाजी में सुनील नरेन ने 16 मैचों में 4/13 के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ 17 विकेट लिए हैं। DC की टीम से शिखर धवन ने KKR के खिलाफ 26 मैचों में लगभग 29. 36 की औसत से 734 रन बनाए हैं। इस बीच उन्होंने 97* के सर्वोच्च स्कोर के साथ छह अर्धशतक भी अपने नाम किए हैं। वहीं अजिंक्या रहाणे ने 20 मैचों में दो अर्धशतक की बदौलत 478 रन बनाए हैं। दूसरी तरफ गेंदबाजी में अमित मिश्रा ने 20 मैचों में 3/14 के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ 17 विकेट लिए हैं।
इंडियन प्रीमियर लीग दो हज़ार इक्कीस सीजन में मंगलवार को एक बार फिर से डबल हेडर देखने को मिलेगा। डबल हेडर की शुरुआत दोपहर में कोलकाता नाइट राइडर्स और दिल्ली कैपिटल्स के बीच होने वाले मुकाबले के साथ होगी। KKR केवल एक दिन के आराम के बाद दोबारा मैदान पर उतरेगी तो वहीं DC ने शनिवार को अपना आखिरी मैच खेला था। आइए जानते हैं एक-दूसरे के खिलाफ कैसा रहा है इन टीमों का प्रदर्शन। IPL में अब तक KKR ने DC के मुकाबले ज्यादा मैच जीते हैं। Cricketpedia के मुताबिक अब तक दोनों टीमों के बीच कुल सत्ताईस मैच खेले जा चुके हैं, जिसमें से चौदह में KKR ने जीत हासिल की है। दूसरी तरफ DC सिर्फ बारह मैचों में ही जीत सकी है। इसके अलावा एक मुकाबले का कोई परिणाम नहीं निकला है। इस सीजन की पहली भिड़ंत में DC ने बाजी मारी थी। KKR के टीम से दिनेश कार्तिक ने DC के खिलाफ उन्नीस मैचों में छब्बीस. चौंसठ की औसत से चार सौ तिरेपन रन बनाए हैं। इस बीच उन्होंने चार अर्धशतक भी लगाए हैं। वहीं करुण नायर ने सात मैचों में तैंतालीस की औसत और तीन अर्धशतक की मदद से दो सौ अट्ठावन रन बनाए हैं। दूसरी तरफ गेंदबाजी में सुनील नरेन ने सोलह मैचों में चार/तेरह के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ सत्रह विकेट लिए हैं। DC की टीम से शिखर धवन ने KKR के खिलाफ छब्बीस मैचों में लगभग उनतीस. छत्तीस की औसत से सात सौ चौंतीस रन बनाए हैं। इस बीच उन्होंने सत्तानवे* के सर्वोच्च स्कोर के साथ छह अर्धशतक भी अपने नाम किए हैं। वहीं अजिंक्या रहाणे ने बीस मैचों में दो अर्धशतक की बदौलत चार सौ अठहत्तर रन बनाए हैं। दूसरी तरफ गेंदबाजी में अमित मिश्रा ने बीस मैचों में तीन/चौदह के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ सत्रह विकेट लिए हैं।
हिसुआ (नवादा): बिहार सरकार ने कोरोना चेन को तोड़ने के लिए 5 मई से 15 मई तक पूरे राज्य में लाॅकडाउन लगाया है। इसका सख्ती से पालन कराने का आदेश जिला प्रशासन को दिया है। लाॅकडाउन में किन्हें छूट मिलेगा, सारा गाईड लाईन जिला प्रशासन को उपलब्ध करा दिया है। नगर परिषद क्षेत्र हिसुआ में लाॅकडाउन गाईड लाईन की धज्जियां उङाने के आरोप में हिसुआ थानाध्यक्ष राजीव कुमार पटेल ने बुधवार को करीब 50 की संख्या में मोटर साईकिल एवं फोर व्हीलर चालक को पकङकर उसके मोटर साईकिल को थाना मे लगा दिया। उसके बाद उन्होंने कड़ी रुख अपनाते हुए पहले तो गाईड लाईन के हवाला देकर डांट-दफट किए , उसके बाद सभी अपनी- अपनी मजबूरियां सुनाने लगा । उन्होंने अंतिम वार्निंग देते हुए उन्होंने सभी को थाना गेट के समीप शपथ दिलाया कि लाॅकडाउन गाईड लाईन का पालन करेंगे, बेवजह घर से बाहर नही निकलेगे। शपथ दिलाने के बाद थानाध्यक्ष ने सभी को चेतावनी देकर छोङ दिया। थानाध्यक्ष के द्वारा इस तरह के पहल से हिसुआ के लोगों ने खुशी जाहिर किया । साथ हीं कहा लॉक डाउन का पालन करना हम सबकी जिम्मेवारी है ।
हिसुआ : बिहार सरकार ने कोरोना चेन को तोड़ने के लिए पाँच मई से पंद्रह मई तक पूरे राज्य में लाॅकडाउन लगाया है। इसका सख्ती से पालन कराने का आदेश जिला प्रशासन को दिया है। लाॅकडाउन में किन्हें छूट मिलेगा, सारा गाईड लाईन जिला प्रशासन को उपलब्ध करा दिया है। नगर परिषद क्षेत्र हिसुआ में लाॅकडाउन गाईड लाईन की धज्जियां उङाने के आरोप में हिसुआ थानाध्यक्ष राजीव कुमार पटेल ने बुधवार को करीब पचास की संख्या में मोटर साईकिल एवं फोर व्हीलर चालक को पकङकर उसके मोटर साईकिल को थाना मे लगा दिया। उसके बाद उन्होंने कड़ी रुख अपनाते हुए पहले तो गाईड लाईन के हवाला देकर डांट-दफट किए , उसके बाद सभी अपनी- अपनी मजबूरियां सुनाने लगा । उन्होंने अंतिम वार्निंग देते हुए उन्होंने सभी को थाना गेट के समीप शपथ दिलाया कि लाॅकडाउन गाईड लाईन का पालन करेंगे, बेवजह घर से बाहर नही निकलेगे। शपथ दिलाने के बाद थानाध्यक्ष ने सभी को चेतावनी देकर छोङ दिया। थानाध्यक्ष के द्वारा इस तरह के पहल से हिसुआ के लोगों ने खुशी जाहिर किया । साथ हीं कहा लॉक डाउन का पालन करना हम सबकी जिम्मेवारी है ।
लद्दाख में 14000 फीट की ऊंचाई पर भारतीय सेनाओं को डटा देख चीन को अंतिम वक्त में अपनी रणनीति बदलनी पड़ रही है. चीन को लग रहा था कि लद्दाख में शून्य से माइनस 30 डिग्री के जमा देने वाले तापमान में भारतीय सेना टिक नहीं पाएगी और अपनी पोस्ट छोड़ निचले इलाकों में आ जाएगी. हालांकि जब आजमाने का वक्त आया तो हुआ ठीक इसका उल्टा. भारतीय जवान जमा देने वाली सर्दी में भी सरहदों की निगहबानी में डटे हैं, जबकि चीनी सैनिकों की हालत कुल्फी जमने जैसी हो गई है, चीनी सैनिकों की पोजिशन में अब हर 24 घंटे में बदलाव किया जा रहा है. इधर भारत की रणनीति देख चीन अब अपने सैनिकों के लिए सर्दियों की खरीदारी कर रहा है. चीन को लगने लगा है कि भारतीय सैनिक अपनी पोस्ट खाली नहीं करने वाले हैं लिहाजा वह भी अब अपने सैनिकों के लिए सर्दियों के जरूरत की चीजें खरीद रहा है. लद्दाख में जहां भारतीय और चीनी सैनिकों की तैनाती है वहां तापमान पहले ही माइनस 20 डिग्री से नीचे जा चुका है. चीन यहां कुछ ही दिन पहले अपने सैनिकों के लिए अतिरिक्त सामान लेकर आया है. एक अधिकारी ने कहा कि यहां बर्फीली हवाएं और तापमान एक चुनौती रहने वाली है. तापमान आने वाले दिनों में शून्य से 40 डिग्री तक नीचे जाएगा. रिपोर्ट के मुताबिक पहले चीन के पास 9 से 10 हजार सैनिकों के लिए ही सर्दियों के कपड़े थे, लेकिन अब जबकि बॉर्डर से सेनाओं की वापसी नहीं हो रही है और 14 से 15 हजार फीट की ऊंचाई पर सेनाओं की तैनाती जारी है, चीन ने महसूस किया है कि उसे भी सर्दियों के लिए सामान की जरूरत पड़ेगी. सूत्रों ने बताया कि पीएलए के ज्वाइंट लॉजिस्टिक सपोर्ट फोर्स ने एक क्वालिटी सुपरविजन टीम बनाई है जो कि सर्दियों के मौसम के लिए सैनिकों के पकड़े खरीद रही है. इस टीम को अच्छी क्वालिटी के कपड़े खरीदने और इसकी फास्ट डिलीवरी कराने का जिम्मा दिया गया है. बता दें कि पैंगॉग झील पर 14 हजार फीट की ऊंचाई पर दोनों देशों की सेनाएं आमने सामने हैं. ये सेनाएं आर्टिलरी गन, टैंक और युद्धक वाहन से लैस हैं. यहां तापमान में लगातार गिरावट हो रही है, लेकिन दोनों ओर से चौकसी जारी है. सिंतबर के आखिर में भारतीय सेनाओं ने इन चोटियों को अपने नियंत्रण में ले लिया था. इससे चीन की सेना चिढ़ी है. भारत ने अक्टूबर में अपनी सेनाओं के लिए सर्दियों के वास्ते विशेष कपड़े अमेरिका से खरीदे थे. भारत को अंदेशा था कि सर्दियों में भी लद्दाख में सेना की तैनाती जारी रहने वाली है. सैनिकों को जो विंटर किट दी गई है उसमें तीन लेयर की पोशाक हैं. इसमें विशेष जैकेट और पैंट, बर्फीली हवा को मात देने के लिए स्वेटर, विशेष चश्मे, फेस मास्क, दास्ताने, स्नो बूट, ऊनी मौजे, सिर और कान को ढकने वाली टोपियां शामिल हैं. सैनिकों को विशेष बोतल दी गई है जिसमें पानी गर्म रहता है, इसके अलावा उन्हें सोने के लिए विशेष बैग दिया गया है.
लद्दाख में चौदह हज़ार फीट की ऊंचाई पर भारतीय सेनाओं को डटा देख चीन को अंतिम वक्त में अपनी रणनीति बदलनी पड़ रही है. चीन को लग रहा था कि लद्दाख में शून्य से माइनस तीस डिग्री के जमा देने वाले तापमान में भारतीय सेना टिक नहीं पाएगी और अपनी पोस्ट छोड़ निचले इलाकों में आ जाएगी. हालांकि जब आजमाने का वक्त आया तो हुआ ठीक इसका उल्टा. भारतीय जवान जमा देने वाली सर्दी में भी सरहदों की निगहबानी में डटे हैं, जबकि चीनी सैनिकों की हालत कुल्फी जमने जैसी हो गई है, चीनी सैनिकों की पोजिशन में अब हर चौबीस घंटाटे में बदलाव किया जा रहा है. इधर भारत की रणनीति देख चीन अब अपने सैनिकों के लिए सर्दियों की खरीदारी कर रहा है. चीन को लगने लगा है कि भारतीय सैनिक अपनी पोस्ट खाली नहीं करने वाले हैं लिहाजा वह भी अब अपने सैनिकों के लिए सर्दियों के जरूरत की चीजें खरीद रहा है. लद्दाख में जहां भारतीय और चीनी सैनिकों की तैनाती है वहां तापमान पहले ही माइनस बीस डिग्री से नीचे जा चुका है. चीन यहां कुछ ही दिन पहले अपने सैनिकों के लिए अतिरिक्त सामान लेकर आया है. एक अधिकारी ने कहा कि यहां बर्फीली हवाएं और तापमान एक चुनौती रहने वाली है. तापमान आने वाले दिनों में शून्य से चालीस डिग्री तक नीचे जाएगा. रिपोर्ट के मुताबिक पहले चीन के पास नौ से दस हजार सैनिकों के लिए ही सर्दियों के कपड़े थे, लेकिन अब जबकि बॉर्डर से सेनाओं की वापसी नहीं हो रही है और चौदह से पंद्रह हजार फीट की ऊंचाई पर सेनाओं की तैनाती जारी है, चीन ने महसूस किया है कि उसे भी सर्दियों के लिए सामान की जरूरत पड़ेगी. सूत्रों ने बताया कि पीएलए के ज्वाइंट लॉजिस्टिक सपोर्ट फोर्स ने एक क्वालिटी सुपरविजन टीम बनाई है जो कि सर्दियों के मौसम के लिए सैनिकों के पकड़े खरीद रही है. इस टीम को अच्छी क्वालिटी के कपड़े खरीदने और इसकी फास्ट डिलीवरी कराने का जिम्मा दिया गया है. बता दें कि पैंगॉग झील पर चौदह हजार फीट की ऊंचाई पर दोनों देशों की सेनाएं आमने सामने हैं. ये सेनाएं आर्टिलरी गन, टैंक और युद्धक वाहन से लैस हैं. यहां तापमान में लगातार गिरावट हो रही है, लेकिन दोनों ओर से चौकसी जारी है. सिंतबर के आखिर में भारतीय सेनाओं ने इन चोटियों को अपने नियंत्रण में ले लिया था. इससे चीन की सेना चिढ़ी है. भारत ने अक्टूबर में अपनी सेनाओं के लिए सर्दियों के वास्ते विशेष कपड़े अमेरिका से खरीदे थे. भारत को अंदेशा था कि सर्दियों में भी लद्दाख में सेना की तैनाती जारी रहने वाली है. सैनिकों को जो विंटर किट दी गई है उसमें तीन लेयर की पोशाक हैं. इसमें विशेष जैकेट और पैंट, बर्फीली हवा को मात देने के लिए स्वेटर, विशेष चश्मे, फेस मास्क, दास्ताने, स्नो बूट, ऊनी मौजे, सिर और कान को ढकने वाली टोपियां शामिल हैं. सैनिकों को विशेष बोतल दी गई है जिसमें पानी गर्म रहता है, इसके अलावा उन्हें सोने के लिए विशेष बैग दिया गया है.
ज्यादातर लोग रात का बचा हुआ खाना अगले दिन गर्म करके खा लेते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स इस बारे में कहते हैं कि कुछ बासी चीजें खाने से आप बीमार भी पड़ सकते हैं. वो चीजें आपको ताजी ही खानी चाहिए और अगर आप भी अक्सर ऐसा करते हैं तो आपको उन 5 चीजों के बारे में जानना चाहिए और उन बासी चीजों को खाने से बचना चाहिए जिससे आपकी हेल्थ खराब हो सकती है. अंडा (EGG) अंडे में सबसे ज्यादा साल्मोनेला पाया जाता है. साल्मोनेला एक तरह का बैक्टीरिया है जो कच्चे या अधपके अंडे में होता है. इसकी वजह से बुखार, पेट में ऐंठन या डायरिया जैसी समस्या शुरू हो सकती है. ज्यादातर लोग अंडे को कम हीट पर पकाते हैं और इसकी वजह से बैक्टीरिया मरते हैं और बासी अंडा खाने से ये बैक्टीरिया दोगुने हो जाते हैं. आलू (Potato) आलू को पकाने के बाद अगर लंबे समय तक आप ठंडा छोड़ देते हैं तो इसमें क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम नाम का बैक्टीरिया आ जाता है. इस बैक्टीरिया के कारण कई बीमारियां हो जाती हैं जिसमें धुंधला दिखना, मुंह में सूजन आना और सांस लेने में दिक्कत होना. आलू को कभी भी माइक्रोवेव या किसी तरह से रिहीट नहीं करना चाहिए. पालक (Spanish) पालक में नाइट्रेट भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो ज्यादा पकाने पर कार्सिनोजेनिक नाइट्रोसेमाइंस में बदलता है. इस वजह से पालक को फिर से गर्म करके खाने से बचना चाहिए और हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि पालक को कच्चा या हल्का ही पकाकर खाने को कहते हैं. चावल (Rice) पके हुए चावल को रूम टेंपरेचर पर देर तक छोड़ने से उसमें बेसिलस सेरेस बैक्टीरिया बनने लगते हैं. बचे हुए चावल को कई बार गर्म करके खाने से फूड प्वॉइजिंग भी हो सकता है. कोशिश करें कि चावल बनाने के कुछ घंटों के अंदर तक खाकर खत्म कर दें. चिकन (Chicken) अंडे की तरह कच्चे चिकन में भी साल्मोनेला बैक्टीरिया पाया जाता है. बहुत देर तक रखने पर ये बैक्टीरिया तेजी से बढ़ता है. इससे बचने के लए चिकन को हाई हीट पर अच्छे से पकाना चाहिए. माइक्रोवेव सिर्फ चिकन को गर्म करता है उसे इतनी अच्छी तरह से नहीं पकाता है कि उसका बैक्टीरिया खत्म हो जाए.
ज्यादातर लोग रात का बचा हुआ खाना अगले दिन गर्म करके खा लेते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स इस बारे में कहते हैं कि कुछ बासी चीजें खाने से आप बीमार भी पड़ सकते हैं. वो चीजें आपको ताजी ही खानी चाहिए और अगर आप भी अक्सर ऐसा करते हैं तो आपको उन पाँच चीजों के बारे में जानना चाहिए और उन बासी चीजों को खाने से बचना चाहिए जिससे आपकी हेल्थ खराब हो सकती है. अंडा अंडे में सबसे ज्यादा साल्मोनेला पाया जाता है. साल्मोनेला एक तरह का बैक्टीरिया है जो कच्चे या अधपके अंडे में होता है. इसकी वजह से बुखार, पेट में ऐंठन या डायरिया जैसी समस्या शुरू हो सकती है. ज्यादातर लोग अंडे को कम हीट पर पकाते हैं और इसकी वजह से बैक्टीरिया मरते हैं और बासी अंडा खाने से ये बैक्टीरिया दोगुने हो जाते हैं. आलू आलू को पकाने के बाद अगर लंबे समय तक आप ठंडा छोड़ देते हैं तो इसमें क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम नाम का बैक्टीरिया आ जाता है. इस बैक्टीरिया के कारण कई बीमारियां हो जाती हैं जिसमें धुंधला दिखना, मुंह में सूजन आना और सांस लेने में दिक्कत होना. आलू को कभी भी माइक्रोवेव या किसी तरह से रिहीट नहीं करना चाहिए. पालक पालक में नाइट्रेट भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो ज्यादा पकाने पर कार्सिनोजेनिक नाइट्रोसेमाइंस में बदलता है. इस वजह से पालक को फिर से गर्म करके खाने से बचना चाहिए और हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि पालक को कच्चा या हल्का ही पकाकर खाने को कहते हैं. चावल पके हुए चावल को रूम टेंपरेचर पर देर तक छोड़ने से उसमें बेसिलस सेरेस बैक्टीरिया बनने लगते हैं. बचे हुए चावल को कई बार गर्म करके खाने से फूड प्वॉइजिंग भी हो सकता है. कोशिश करें कि चावल बनाने के कुछ घंटों के अंदर तक खाकर खत्म कर दें. चिकन अंडे की तरह कच्चे चिकन में भी साल्मोनेला बैक्टीरिया पाया जाता है. बहुत देर तक रखने पर ये बैक्टीरिया तेजी से बढ़ता है. इससे बचने के लए चिकन को हाई हीट पर अच्छे से पकाना चाहिए. माइक्रोवेव सिर्फ चिकन को गर्म करता है उसे इतनी अच्छी तरह से नहीं पकाता है कि उसका बैक्टीरिया खत्म हो जाए.
देश में अगले साल होने वाले जी-20 सम्मेलन की कमान भारत ने गुरुवार को संभाल ली है। भारत के पास इस शक्तिशाली मंच का इस्तेमाल करके खुद को जोरदार तरीके से पेश करने का मौका है। भारत ने गुरुवार से औपचारिक रूप से जी-20 की अध्यक्षता संभाल ली है। भारत में अगले साल 9 और 10 सितंबर को जी-20 की बैठकें होंगी। आज से अगले 7 दिनों तक भारत के सभी यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों समेत 100 ऐतिहासिक स्मारकों को रोशनी से सजाया जाएगा। इन धरोहरों पर जी-20 की रोशनी वाले लोगो लगेंगे। दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के मंच जी-20 की अध्यक्षता मिलने का जश्न भारत कुछ इस तरह मना रहा है। देश के प्रमुख हिन्दी और अंग्रेजी अखबारों में जी-20 की अध्यक्षता संभालने से जुड़ा विज्ञापन भी छपा है और देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अगले साल होने वाले जी-20 सम्मेलन पर लेख भी लिखा है। मोदी ने अपने लेख में लिखा कि 'भारत का जी-20 एजेंडा समावेशी, महत्वाकांक्षी, कार्रवाई-उन्मुख और निर्णायक होगा। ' भारत में अगले साल 9 और 10 सितंबर को जी-20 की बैठकें होंगी। जी-20 का एजेंडा सभी देश मिलकर तय करेंगे लेकिन भारत ने संकेत दिया है कि सम्मेलन के केंद्र में ऊर्जा संकट और आतंकवाद 2 अहम मुद्दे जरूर होंगे। 'मिलकर चुनौतियों का समाधान करें' भारत सरकार ने आज देशभर के अखबारों में विज्ञापन दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम से एक लेख भी छपा है। इस लेख में मोदी ने लिखा कि 'आज हमें अपने अस्तित्व के लिए लड़ने की जरूरत नहीं है- हमारे युग को युद्ध का युग होने की जरूरत नहीं है। ऐसा बिलकुल नहीं होना चाहिए। आज हम जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद और महामारी जैसी जिन सबसे बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, उनका समाधान आपस में लड़कर नहीं बल्कि मिलकर काम करके ही निकाला जा सकता है। ' भारतीय अधिकारियों का कहना है कि जी-20 की अध्यक्षता वैश्विक मामलों में नई दिल्ली की अग्रणी भूमिका को प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करेगी, विशेष रूप से ऐसे समय में जब दुनिया कई भू-राजनीतिक और आर्थिक संकटों का सामना कर रही है। रूस और यूक्रेन युद्ध को लेकर मोदी पहले भी कह चुके हैं कि 'यह युद्ध का युग नहीं है और समस्या का समाधान बातचीत के जरिए किया जा सकता है। ' समरकंद में एससीओ की बैठक और उसके बाद बाली में जी-20 की बैठक में भी मोदी ने शांति के पथ पर लौटने की बात कही थी। साफ है कि मोदी युद्ध के खात्मे को लेकर कूटनीतिक और संवाद का संदेश अपने लेख के जरिए दे रहे हैं। पिछले महीने इंडोनेशिया में आयोजित जी-20 सम्मेलन में रूस-यूक्रेन युद्ध का साया देखने को मिला था। रूसी राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन इस सम्मेलन में हिस्सा लेने नहीं पहुंचे थे और ऐसी आशंका है कि रूस-यूक्रेन संकट के अगले साल तक सामान्य होने की संभावना कम ही है। पूर्व राजदूत गुरजीत सिंह कहते हैं कि जब इंडोनेशिया ने इटली से जी-20 की अध्यक्षता का पद लिया तो उसे यह अंदाजा नहीं था कि यूक्रेन संकट होगा, वह उस वक्त कोरोना महामारी से जूझ रहा था। डीडब्ल्यू से बातचीत में गुरजीत सिंह कहते हैं कि चाहे वह कोरोना महामारी हो या फिर यूक्रेन संकट, कुछ भी आप पर प्रहार कर सकता है और फिर वही चुनौती बन जाती है। अभी हम अनुमान लगा सकते हैं कि समस्याएं क्या हैं और उनसे निपटने की कोशिश कर सकते हैं। गुरजीत सिंह आगे कहते हैं कि मान लीजिए कि ताइवान में समस्याएं हैं तो हम उससे कैसे निपटेंगे, क्योंकि वह हमारे क्षेत्र का मामला है। इसलिए हमें यह सुनिश्चित करने के लिए देखना होगा कि संवाद तंत्र खुले रहें और भरोसे का निर्माण किया जाए ताकि यूक्रेन जैसी बड़ी समस्या या ताइवान में हो सकने वाली बड़ी समस्या न पैदा हो। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में विदेश नीति के प्रोफेसर हैप्पीमन जैकब डीडब्ल्यू से बातचीत में कहते हैं कि भारत एक साथ जी-20 और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) दोनों का अध्यक्ष बन रहा है, भारत अगले साल एससीओ संगठन के अध्यक्ष के रूप में अगले एससीओ शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने वाला है। जैकब के मुताबिक यहां तक कि भारत, यूक्रेन संघर्ष में मध्यस्थता के बारे में अनिच्छुक है। इसके कार्यों और शब्दों का युद्ध के लिए वैश्विक प्रतिक्रियाओं और युद्ध के बाद की अंतरराष्ट्रीय स्थिति पर प्रभाव पड़ेगा। मेरा मानना है कि भारत का इन 2 संस्थानों का अध्यक्ष होना महत्वपूर्ण है। गुरजीत सिंह की ही तरह पूर्व भारतीय राजनयिक अनिल वाधवा भी मानते हैं कि भारत के सामने चुनौतियां होंगी। वाधवा का कहना है कि भारत को अपनी अध्यक्षता के दौरान कुछ प्रमुख चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने डीडब्ल्यू से कहा कि जलवायु संकट बढ़ रहा है और यूक्रेन में संघर्ष जी-20 आमसहमति बनाने के प्रयासों पर एक लंबी छाया डालेगा। संघर्ष के आलोक में कई देश बढ़ते कर्ज, गरीबी, बढ़ते खाद्य और ऊर्जा संकट का सामना कर रहे हैं। भारत के जी-20 शेरपा अमिताभ कांत ने 1 दिन पहले संवाददाताओं से कहा कि यह पहली बार है, जब भारत दुनिया के प्रभावशाली देशों का एजेंडा तय करेगा। अभी तक दुनिया के विकसित देश ही एजेंडा सेट करते थे। प्रधानमंत्री मोदी पहले ही कह चुके हैं कि 'भारत हर मुद्दे पर आम सहमति बनाने की कोशिश करेगा। ' हालांकि यह कार्य आसान नहीं है बल्कि एक कठिन चुनौती है। इन्हीं कुछ चुनौतियों के साथ भारत जी-20 के अध्यक्ष के रूप में अपनी यात्रा शुरू कर रहा है। मोदी ने कहा कि जी-20 अध्यक्षता के दौरान हम भारत के अनुभव, ज्ञान और प्रारूप को दूसरों के लिए, विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए एक संभावित टेम्पलेट के रूप में पेश करेंगे। हमारी जी-20 प्राथमिकताओं को न केवल हमारे जी-20 भागीदारों बल्कि वैश्विक दक्षिण में हमारे साथ-चलने वाले देशों, जिनकी बातें अक्सर अनसुनी कर दी जाती है, के परामर्श से निर्धारित किया जाएगा।
देश में अगले साल होने वाले जी-बीस सम्मेलन की कमान भारत ने गुरुवार को संभाल ली है। भारत के पास इस शक्तिशाली मंच का इस्तेमाल करके खुद को जोरदार तरीके से पेश करने का मौका है। भारत ने गुरुवार से औपचारिक रूप से जी-बीस की अध्यक्षता संभाल ली है। भारत में अगले साल नौ और दस सितंबर को जी-बीस की बैठकें होंगी। आज से अगले सात दिनों तक भारत के सभी यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों समेत एक सौ ऐतिहासिक स्मारकों को रोशनी से सजाया जाएगा। इन धरोहरों पर जी-बीस की रोशनी वाले लोगो लगेंगे। दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के मंच जी-बीस की अध्यक्षता मिलने का जश्न भारत कुछ इस तरह मना रहा है। देश के प्रमुख हिन्दी और अंग्रेजी अखबारों में जी-बीस की अध्यक्षता संभालने से जुड़ा विज्ञापन भी छपा है और देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अगले साल होने वाले जी-बीस सम्मेलन पर लेख भी लिखा है। मोदी ने अपने लेख में लिखा कि 'भारत का जी-बीस एजेंडा समावेशी, महत्वाकांक्षी, कार्रवाई-उन्मुख और निर्णायक होगा। ' भारत में अगले साल नौ और दस सितंबर को जी-बीस की बैठकें होंगी। जी-बीस का एजेंडा सभी देश मिलकर तय करेंगे लेकिन भारत ने संकेत दिया है कि सम्मेलन के केंद्र में ऊर्जा संकट और आतंकवाद दो अहम मुद्दे जरूर होंगे। 'मिलकर चुनौतियों का समाधान करें' भारत सरकार ने आज देशभर के अखबारों में विज्ञापन दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम से एक लेख भी छपा है। इस लेख में मोदी ने लिखा कि 'आज हमें अपने अस्तित्व के लिए लड़ने की जरूरत नहीं है- हमारे युग को युद्ध का युग होने की जरूरत नहीं है। ऐसा बिलकुल नहीं होना चाहिए। आज हम जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद और महामारी जैसी जिन सबसे बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, उनका समाधान आपस में लड़कर नहीं बल्कि मिलकर काम करके ही निकाला जा सकता है। ' भारतीय अधिकारियों का कहना है कि जी-बीस की अध्यक्षता वैश्विक मामलों में नई दिल्ली की अग्रणी भूमिका को प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करेगी, विशेष रूप से ऐसे समय में जब दुनिया कई भू-राजनीतिक और आर्थिक संकटों का सामना कर रही है। रूस और यूक्रेन युद्ध को लेकर मोदी पहले भी कह चुके हैं कि 'यह युद्ध का युग नहीं है और समस्या का समाधान बातचीत के जरिए किया जा सकता है। ' समरकंद में एससीओ की बैठक और उसके बाद बाली में जी-बीस की बैठक में भी मोदी ने शांति के पथ पर लौटने की बात कही थी। साफ है कि मोदी युद्ध के खात्मे को लेकर कूटनीतिक और संवाद का संदेश अपने लेख के जरिए दे रहे हैं। पिछले महीने इंडोनेशिया में आयोजित जी-बीस सम्मेलन में रूस-यूक्रेन युद्ध का साया देखने को मिला था। रूसी राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन इस सम्मेलन में हिस्सा लेने नहीं पहुंचे थे और ऐसी आशंका है कि रूस-यूक्रेन संकट के अगले साल तक सामान्य होने की संभावना कम ही है। पूर्व राजदूत गुरजीत सिंह कहते हैं कि जब इंडोनेशिया ने इटली से जी-बीस की अध्यक्षता का पद लिया तो उसे यह अंदाजा नहीं था कि यूक्रेन संकट होगा, वह उस वक्त कोरोना महामारी से जूझ रहा था। डीडब्ल्यू से बातचीत में गुरजीत सिंह कहते हैं कि चाहे वह कोरोना महामारी हो या फिर यूक्रेन संकट, कुछ भी आप पर प्रहार कर सकता है और फिर वही चुनौती बन जाती है। अभी हम अनुमान लगा सकते हैं कि समस्याएं क्या हैं और उनसे निपटने की कोशिश कर सकते हैं। गुरजीत सिंह आगे कहते हैं कि मान लीजिए कि ताइवान में समस्याएं हैं तो हम उससे कैसे निपटेंगे, क्योंकि वह हमारे क्षेत्र का मामला है। इसलिए हमें यह सुनिश्चित करने के लिए देखना होगा कि संवाद तंत्र खुले रहें और भरोसे का निर्माण किया जाए ताकि यूक्रेन जैसी बड़ी समस्या या ताइवान में हो सकने वाली बड़ी समस्या न पैदा हो। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में विदेश नीति के प्रोफेसर हैप्पीमन जैकब डीडब्ल्यू से बातचीत में कहते हैं कि भारत एक साथ जी-बीस और शंघाई सहयोग संगठन दोनों का अध्यक्ष बन रहा है, भारत अगले साल एससीओ संगठन के अध्यक्ष के रूप में अगले एससीओ शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने वाला है। जैकब के मुताबिक यहां तक कि भारत, यूक्रेन संघर्ष में मध्यस्थता के बारे में अनिच्छुक है। इसके कार्यों और शब्दों का युद्ध के लिए वैश्विक प्रतिक्रियाओं और युद्ध के बाद की अंतरराष्ट्रीय स्थिति पर प्रभाव पड़ेगा। मेरा मानना है कि भारत का इन दो संस्थानों का अध्यक्ष होना महत्वपूर्ण है। गुरजीत सिंह की ही तरह पूर्व भारतीय राजनयिक अनिल वाधवा भी मानते हैं कि भारत के सामने चुनौतियां होंगी। वाधवा का कहना है कि भारत को अपनी अध्यक्षता के दौरान कुछ प्रमुख चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने डीडब्ल्यू से कहा कि जलवायु संकट बढ़ रहा है और यूक्रेन में संघर्ष जी-बीस आमसहमति बनाने के प्रयासों पर एक लंबी छाया डालेगा। संघर्ष के आलोक में कई देश बढ़ते कर्ज, गरीबी, बढ़ते खाद्य और ऊर्जा संकट का सामना कर रहे हैं। भारत के जी-बीस शेरपा अमिताभ कांत ने एक दिन पहले संवाददाताओं से कहा कि यह पहली बार है, जब भारत दुनिया के प्रभावशाली देशों का एजेंडा तय करेगा। अभी तक दुनिया के विकसित देश ही एजेंडा सेट करते थे। प्रधानमंत्री मोदी पहले ही कह चुके हैं कि 'भारत हर मुद्दे पर आम सहमति बनाने की कोशिश करेगा। ' हालांकि यह कार्य आसान नहीं है बल्कि एक कठिन चुनौती है। इन्हीं कुछ चुनौतियों के साथ भारत जी-बीस के अध्यक्ष के रूप में अपनी यात्रा शुरू कर रहा है। मोदी ने कहा कि जी-बीस अध्यक्षता के दौरान हम भारत के अनुभव, ज्ञान और प्रारूप को दूसरों के लिए, विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए एक संभावित टेम्पलेट के रूप में पेश करेंगे। हमारी जी-बीस प्राथमिकताओं को न केवल हमारे जी-बीस भागीदारों बल्कि वैश्विक दक्षिण में हमारे साथ-चलने वाले देशों, जिनकी बातें अक्सर अनसुनी कर दी जाती है, के परामर्श से निर्धारित किया जाएगा।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि "अमेरिका कथित रूप से प्रतिवर्ष चीन के साथ व्यापार में 500 अरब डॉलर की रकम का नुकसान उठा रहा था लेकिन अब वह इसे और नहीं करेंगे।" अमेरिका और चीन के बीच व्यापार वार्ता जारी है। डोनाल्ड ट्रम्प ने ट्वीट किया कि "अमेरिका दशकों से चीन के साथ व्यापार में 60 अरब डॉलर से 80 अरब डॉलर तक का नुकसान उठा रहा था, हमने 50 अरब डॉलर का नुकसान उठाया है। माफ़ कीजियेगा, अब हम इसे और बर्दाश्त नहीं करेंगे। कही महीनो की व्यापार वार्ता के पश्चात डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिकी-चीनी व्यापार विवाद पर कठोर कदम उठाया था। मार्च में अमेरिका ने चीनी के उत्पादों पर लागू किये जाने वाले अतिरिक्त शुल्क को रोका था क्योंकि उस समय वार्ता में प्रगति हुई थी लेकिन यह दृष्टिकोण मौजूदा समय में परिवर्तित होता दिख रहा है। बीते वर्ष एर्जेन्टीना में जी-20 के सम्मेलन के इतर वांशिगटन और बीजिंग ने व्यापार जंग को वार्ता के जरिये सुलझाने पर सहमति जाहिर की थी। इस बाद दोनों पक्षों ने विभिन्न स्तर की वार्ता की थी। डोनाल्ड ट्रम्प के हालिया बयान बीजिंग पर दबाव बढ़ाने की लिहाज से थे। इस सप्ताह में दोनों पक्षों की दोबारा मुलाकात होगी।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि "अमेरिका कथित रूप से प्रतिवर्ष चीन के साथ व्यापार में पाँच सौ अरब डॉलर की रकम का नुकसान उठा रहा था लेकिन अब वह इसे और नहीं करेंगे।" अमेरिका और चीन के बीच व्यापार वार्ता जारी है। डोनाल्ड ट्रम्प ने ट्वीट किया कि "अमेरिका दशकों से चीन के साथ व्यापार में साठ अरब डॉलर से अस्सी अरब डॉलर तक का नुकसान उठा रहा था, हमने पचास अरब डॉलर का नुकसान उठाया है। माफ़ कीजियेगा, अब हम इसे और बर्दाश्त नहीं करेंगे। कही महीनो की व्यापार वार्ता के पश्चात डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिकी-चीनी व्यापार विवाद पर कठोर कदम उठाया था। मार्च में अमेरिका ने चीनी के उत्पादों पर लागू किये जाने वाले अतिरिक्त शुल्क को रोका था क्योंकि उस समय वार्ता में प्रगति हुई थी लेकिन यह दृष्टिकोण मौजूदा समय में परिवर्तित होता दिख रहा है। बीते वर्ष एर्जेन्टीना में जी-बीस के सम्मेलन के इतर वांशिगटन और बीजिंग ने व्यापार जंग को वार्ता के जरिये सुलझाने पर सहमति जाहिर की थी। इस बाद दोनों पक्षों ने विभिन्न स्तर की वार्ता की थी। डोनाल्ड ट्रम्प के हालिया बयान बीजिंग पर दबाव बढ़ाने की लिहाज से थे। इस सप्ताह में दोनों पक्षों की दोबारा मुलाकात होगी।
गाजियाबाद, 31जूलाई 2022ः सत्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के पावन आशीर्वाद द्वारा ब्रांच गाजियाबाद में संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन (संत निरंकारी मिशन का सामाजिक विभाग) द्वारा रक्तदान शिविर का आयोजन लोहिया नगर स्थित अग्रसैन भवन में किया गया। जिसमें 187 सन्त निरंकारी मिशन के श्रद्धालु भक्त एवं सेवादारों द्वारा निःस्वार्थ भाव से रक्तदान किया गया। रक्त एकत्रित करने हेतु जिला अस्पताल (एम.एम.जी.अस्पताल) के ब्लड बैंक की टीम व दिल्ली से गुरूतेग बहादुर अस्पताल की टीम भी वहां उपस्थित हुई। गाजियाबाद रक्तदान शिविर का उद्घाटन गम्भीर सिंह (सिटी मजिस्ट्रेट) गाजियाबाद द्वारा किया गया। उन्होंने रक्तदान शिविर में सम्मिलित होने वाले रक्तदाताओं को प्रोत्साहित किया एवं जनकल्याण के लिए की गई उनकी सच्ची सेवा की प्रशंसा भी की। इस अवसर पर उन्होंने कहा की संत निरंकारी मिशन जनहित में बहुत बडा योगदान रक्तदान शिविर आयोजित कर के दे रहा है उन्होने कहा की रक्दान शिविर देखकर बहुत ही प्रसन्ता हो रही है जहॉ रक्त देने के लिए लाईन लगी हुई है। रक्तदान सबसे श्रेष्ठ दान है, मानवता की भलाई हेतू सभी को आगे आना चाहिए। इसके अतिरिक्त गाजियाबाद संयोजक सतीश गॉधी द्वारा दिल्ली से पधारे जोगिन्दर सिंह खुराना (रोशन मीनार) व नरेश अरोरा मैडिकल सर्विस कोऑडिनेटर व उपस्थित सभी रक्तदान शिविर में उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों सहित डॉक्टर एवं उनकी टीम का तथा रक्तदाताओं का हृदय से आभार व्यक्त किया गया। इसके साथ ही नारायणा रक्तदान शिविर में संयोजक सुरजीत नशीला जी व मुखी अशोक तॅवर जी ने वहॉ उपस्थित हुए गणमान्य अतिथि और डॉक्टर की टीम तथा सभी रक्तदाताओ का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर सतीश गॉधी जी ने बताया कि मिशन द्वारा प्रथम रक्तदान शिविर का आयोजन दिल्ली में वर्ष 1986 के नवम्बर माह में, वार्षिक निरंकारी सन्त समागम के अवसर पर किया गया जिसमें बाबा हरदेव सिंह जी ने इस शिविर का उद्घाटन किया और यह मुहिम मिशन के अनुयायियों द्वारा निरंतर पिछले 36 वर्षो से चलायी जा रही है जिसमें अभी तक 7,263 रक्तदान शिविरों से 12,03,698 युनिट रक्तदान जनकल्याण की भलाई हेतु एकत्रित किया जा चुका है। बाबा हरदेव सिंह जी ने मानवता को यह संदेश दिया कि - 'रक्त नालियों में नहीं नाड़ियों में बहना चाहिए।' संत निरंकारी मिशन के भक्तजन इस संदेश को चरितार्थ करते हुए दिन रात मानवमात्र की सेवा में तत्पर है और वर्तमान सत्गुरू माता सुदीक्षा जी महाराज के निर्देशानुसार इस मुहिम को निरंतर और आगे बढ़ाया जा रहा है। संत निरंकारी मिशन द्वारा जनहित की भलाई हेतु समय-समय पर विश्व भर में अनेक सेवाएं की जा रही हैं जिससे समाज का समुचित विकास हो सके; जिनमें मुख्यतः स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, निःशुल्क चिकित्सा परामर्श केन्द्र, निःशुल्क नेत्र शिविर, प्राकृतिक आपदाओं में ज़रूरतमंदों की सहायता इत्यादि इसके साथ ही महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाओं को भी सुचारू रूप से चलाया जा रहा है। इन सभी सेवाओं के लिए मिशन को राज्य सरकारों द्वारा समय-समय पर सराहा एवं सम्मानित भी किया गया है।
गाजियाबाद, इकतीसजूलाई दो हज़ार बाईसः सत्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के पावन आशीर्वाद द्वारा ब्रांच गाजियाबाद में संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन द्वारा रक्तदान शिविर का आयोजन लोहिया नगर स्थित अग्रसैन भवन में किया गया। जिसमें एक सौ सत्तासी सन्त निरंकारी मिशन के श्रद्धालु भक्त एवं सेवादारों द्वारा निःस्वार्थ भाव से रक्तदान किया गया। रक्त एकत्रित करने हेतु जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की टीम व दिल्ली से गुरूतेग बहादुर अस्पताल की टीम भी वहां उपस्थित हुई। गाजियाबाद रक्तदान शिविर का उद्घाटन गम्भीर सिंह गाजियाबाद द्वारा किया गया। उन्होंने रक्तदान शिविर में सम्मिलित होने वाले रक्तदाताओं को प्रोत्साहित किया एवं जनकल्याण के लिए की गई उनकी सच्ची सेवा की प्रशंसा भी की। इस अवसर पर उन्होंने कहा की संत निरंकारी मिशन जनहित में बहुत बडा योगदान रक्तदान शिविर आयोजित कर के दे रहा है उन्होने कहा की रक्दान शिविर देखकर बहुत ही प्रसन्ता हो रही है जहॉ रक्त देने के लिए लाईन लगी हुई है। रक्तदान सबसे श्रेष्ठ दान है, मानवता की भलाई हेतू सभी को आगे आना चाहिए। इसके अतिरिक्त गाजियाबाद संयोजक सतीश गॉधी द्वारा दिल्ली से पधारे जोगिन्दर सिंह खुराना व नरेश अरोरा मैडिकल सर्विस कोऑडिनेटर व उपस्थित सभी रक्तदान शिविर में उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों सहित डॉक्टर एवं उनकी टीम का तथा रक्तदाताओं का हृदय से आभार व्यक्त किया गया। इसके साथ ही नारायणा रक्तदान शिविर में संयोजक सुरजीत नशीला जी व मुखी अशोक तॅवर जी ने वहॉ उपस्थित हुए गणमान्य अतिथि और डॉक्टर की टीम तथा सभी रक्तदाताओ का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर सतीश गॉधी जी ने बताया कि मिशन द्वारा प्रथम रक्तदान शिविर का आयोजन दिल्ली में वर्ष एक हज़ार नौ सौ छियासी के नवम्बर माह में, वार्षिक निरंकारी सन्त समागम के अवसर पर किया गया जिसमें बाबा हरदेव सिंह जी ने इस शिविर का उद्घाटन किया और यह मुहिम मिशन के अनुयायियों द्वारा निरंतर पिछले छत्तीस वर्षो से चलायी जा रही है जिसमें अभी तक सात,दो सौ तिरेसठ रक्तदान शिविरों से बारह,तीन,छः सौ अट्ठानवे युनिट रक्तदान जनकल्याण की भलाई हेतु एकत्रित किया जा चुका है। बाबा हरदेव सिंह जी ने मानवता को यह संदेश दिया कि - 'रक्त नालियों में नहीं नाड़ियों में बहना चाहिए।' संत निरंकारी मिशन के भक्तजन इस संदेश को चरितार्थ करते हुए दिन रात मानवमात्र की सेवा में तत्पर है और वर्तमान सत्गुरू माता सुदीक्षा जी महाराज के निर्देशानुसार इस मुहिम को निरंतर और आगे बढ़ाया जा रहा है। संत निरंकारी मिशन द्वारा जनहित की भलाई हेतु समय-समय पर विश्व भर में अनेक सेवाएं की जा रही हैं जिससे समाज का समुचित विकास हो सके; जिनमें मुख्यतः स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, निःशुल्क चिकित्सा परामर्श केन्द्र, निःशुल्क नेत्र शिविर, प्राकृतिक आपदाओं में ज़रूरतमंदों की सहायता इत्यादि इसके साथ ही महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाओं को भी सुचारू रूप से चलाया जा रहा है। इन सभी सेवाओं के लिए मिशन को राज्य सरकारों द्वारा समय-समय पर सराहा एवं सम्मानित भी किया गया है।
जिला प्रशासन ने 20 मार्च को आरक्षण का अनंतिम प्रकाशन कर दिया है। आरक्षण पर आपत्तियां आने का सिलसिला शुरु हो गया है। ग्राम प्रधान के लिए 13 और जिला पंचायत के लिए 2 आपत्तियां आई है। सभी आपत्तियों का निस्तारण 24 व 25 मार्च को होगा। शनिवार की शाम करीब चार बजे आरक्षण का अनंतिम प्रकाशन हुआ। डीपीआरओ कार्यालय, सीडीओ कार्यालय, डीएम कार्यालय और खंड विकास कार्यालयों आरक्षण पर आपत्तियां ली जा रही है। 20 मार्च से ही आपत्तियां लेने के का काम शुरु हो गया था। 23 मार्च तक आरक्षण पर आपत्तियां ली जाएगी। 24 व 25 मार्च को आपत्तियों के निस्तारण के बाद 26 मार्च को आरक्षण का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। देर शाम तक आपत्तियों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो सकती है। आपत्तियां देने वालों का मानना है कि आपत्तियों के देने के बाद आरक्षण में थोड़ा बहुत फेरबदल हो सकता है। वहीं कमेटी में शामिल अधिकारी शीघ्र ही आपत्तियों का निस्तारण करेंगे। -ग्राम प्रधान के लिए 13 और जिला पंचायत के लिए 2 आपत्तियां आई है। आपत्तियों की संख्या देर शाम तक बढ़ सकती है। 23 मार्च तक आपत्तियां ली जाएगी और आपत्तियों के निस्तारण के बाद 26 मार्च को आरक्षण का अंतिम प्रकाशन होगा।
जिला प्रशासन ने बीस मार्च को आरक्षण का अनंतिम प्रकाशन कर दिया है। आरक्षण पर आपत्तियां आने का सिलसिला शुरु हो गया है। ग्राम प्रधान के लिए तेरह और जिला पंचायत के लिए दो आपत्तियां आई है। सभी आपत्तियों का निस्तारण चौबीस व पच्चीस मार्च को होगा। शनिवार की शाम करीब चार बजे आरक्षण का अनंतिम प्रकाशन हुआ। डीपीआरओ कार्यालय, सीडीओ कार्यालय, डीएम कार्यालय और खंड विकास कार्यालयों आरक्षण पर आपत्तियां ली जा रही है। बीस मार्च से ही आपत्तियां लेने के का काम शुरु हो गया था। तेईस मार्च तक आरक्षण पर आपत्तियां ली जाएगी। चौबीस व पच्चीस मार्च को आपत्तियों के निस्तारण के बाद छब्बीस मार्च को आरक्षण का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। देर शाम तक आपत्तियों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो सकती है। आपत्तियां देने वालों का मानना है कि आपत्तियों के देने के बाद आरक्षण में थोड़ा बहुत फेरबदल हो सकता है। वहीं कमेटी में शामिल अधिकारी शीघ्र ही आपत्तियों का निस्तारण करेंगे। -ग्राम प्रधान के लिए तेरह और जिला पंचायत के लिए दो आपत्तियां आई है। आपत्तियों की संख्या देर शाम तक बढ़ सकती है। तेईस मार्च तक आपत्तियां ली जाएगी और आपत्तियों के निस्तारण के बाद छब्बीस मार्च को आरक्षण का अंतिम प्रकाशन होगा।
लोक लेखा समितिका गठन संसद द्वारा किया जाता है तथा भारत की संचित निधि पर संसद का पूर्ण नियत्रंण रहता है। संसद द्वारा निर्मित विधि के प्रावधानों के अनुसार ही भारत की संचित निधि से धन निकाला जा सकता है। संसद को आकस्मिक निधि को भी स्थापित करने का अधिकार है। संसद के समक्ष वार्षिक बजट पेश किया जाता है, जिसमें वर्ष के प्राक्कलित प्राप्तियों तथा व्ययों का विवरण होता है। उसके अतिरिक्त संसद को विनियोग विधेयक, अनुपूरक, अतिरिक्त या अधिक अनुदान, लेखानुदान, प्रत्यानुदान तथा अपवादानुदान के सम्बन्ध में पर्याप्त शक्ति है। कराधान प्रस्तावों को प्रवर्तित करने हेतु संसद को वित्त विधेयक पारित करने की शक्ति है। भारतीय शासन की प्रमुख विशेषता है। संसद को विधायिका अथवा व्यवस्थापिका नाम से भी जाना जाता है।भारतीय शासन की प्रमुख विशेषता है। संसद को विधायिका अथवा व्यवस्थापिका नाम से भी जाना जाता है। सदस्यों की कुल अधिकतम संख्या 250 हो सकती है। भारतीय शासन की प्रमुख विशेषता है। संसद को विधायिका अथवा व्यवस्थापिका नाम से भी जाना जाता है।भारतीय शासन की प्रमुख विशेषता है। संसद को विधायिका अथवा व्यवस्थापिका नाम से भी जाना जाता है। व्यवस्थापनः Text replace - "कतई" to "क़तई" नहीं आयोजित किए जाएँ।नहीं आयोजित किए जाएँ। गोविन्द रामः Adding category :Category:राजनीति कोश (को हटा दिया गया हैं।) चुनाव आयोगकी राय लेता है और उसी के अनुसार कार्य करता है। लेकिन संसद सदस्य के दल बदल के आधार पर संसद की सदस्यता के लिए अयोग्यता का निर्णय लोकसभा या राज्यसभा के सभापति, जैसी भी स्थिति हो, द्वारा किया जाता है। टी. एन. शेषनने इस सम्बन्ध में क़दम उठाये थे। लोकसभा अध्यक्ष(नियम 15) तथा राज्यसभा के सभापति (नियम 12) द्वारा किया जाता है। यह कुछ घंटे, दिन या सप्ताह की अवधि का हो सकता है। आवश्यकता पड़ने पर सदन को बैठक के बीच में ही स्थगित किया जा सकता है। इसके अलावा सदन किसी मृत व्यक्ति के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए, गणपूर्ति न होने पर, सदन के भीतर कार्य संचालन में अव्यवस्था आदि के कारण स्थगित किया जा सकता है। अध्यक्ष करता है।लोकसभा अध्यक्षकरता है। व्यवस्थापनः Text replace - "कतई" to "क़तई" गोविन्द रामः Adding category :Category:राजनीति कोश (को हटा दिया गया हैं।)
लोक लेखा समितिका गठन संसद द्वारा किया जाता है तथा भारत की संचित निधि पर संसद का पूर्ण नियत्रंण रहता है। संसद द्वारा निर्मित विधि के प्रावधानों के अनुसार ही भारत की संचित निधि से धन निकाला जा सकता है। संसद को आकस्मिक निधि को भी स्थापित करने का अधिकार है। संसद के समक्ष वार्षिक बजट पेश किया जाता है, जिसमें वर्ष के प्राक्कलित प्राप्तियों तथा व्ययों का विवरण होता है। उसके अतिरिक्त संसद को विनियोग विधेयक, अनुपूरक, अतिरिक्त या अधिक अनुदान, लेखानुदान, प्रत्यानुदान तथा अपवादानुदान के सम्बन्ध में पर्याप्त शक्ति है। कराधान प्रस्तावों को प्रवर्तित करने हेतु संसद को वित्त विधेयक पारित करने की शक्ति है। भारतीय शासन की प्रमुख विशेषता है। संसद को विधायिका अथवा व्यवस्थापिका नाम से भी जाना जाता है।भारतीय शासन की प्रमुख विशेषता है। संसद को विधायिका अथवा व्यवस्थापिका नाम से भी जाना जाता है। सदस्यों की कुल अधिकतम संख्या दो सौ पचास हो सकती है। भारतीय शासन की प्रमुख विशेषता है। संसद को विधायिका अथवा व्यवस्थापिका नाम से भी जाना जाता है।भारतीय शासन की प्रमुख विशेषता है। संसद को विधायिका अथवा व्यवस्थापिका नाम से भी जाना जाता है। व्यवस्थापनः Text replace - "कतई" to "क़तई" नहीं आयोजित किए जाएँ।नहीं आयोजित किए जाएँ। गोविन्द रामः Adding category :Category:राजनीति कोश चुनाव आयोगकी राय लेता है और उसी के अनुसार कार्य करता है। लेकिन संसद सदस्य के दल बदल के आधार पर संसद की सदस्यता के लिए अयोग्यता का निर्णय लोकसभा या राज्यसभा के सभापति, जैसी भी स्थिति हो, द्वारा किया जाता है। टी. एन. शेषनने इस सम्बन्ध में क़दम उठाये थे। लोकसभा अध्यक्ष तथा राज्यसभा के सभापति द्वारा किया जाता है। यह कुछ घंटे, दिन या सप्ताह की अवधि का हो सकता है। आवश्यकता पड़ने पर सदन को बैठक के बीच में ही स्थगित किया जा सकता है। इसके अलावा सदन किसी मृत व्यक्ति के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए, गणपूर्ति न होने पर, सदन के भीतर कार्य संचालन में अव्यवस्था आदि के कारण स्थगित किया जा सकता है। अध्यक्ष करता है।लोकसभा अध्यक्षकरता है। व्यवस्थापनः Text replace - "कतई" to "क़तई" गोविन्द रामः Adding category :Category:राजनीति कोश
सर्दी-जुकाम, वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण का सबसे लगातार लक्षणों में से एक है। यह अलग पृष्ठभूमि और उम्र के लोगों में दिखाई देता है। बेशक, लक्षण और रोग के कारण इलाज नहीं है। हालांकि, अक्सर चिकित्सकों के उपचार में स्थानीय निधियों के उपयोग की सलाह देते। उन शामिल करने के लिए नाक स्प्रे, बूँदें और सफाई समाधान। इस लेख में हम "Sialor" का अर्थ है ( "Protargolum") पर ध्यान दिया जाएगा। आप इस दवा के इस्तेमाल के लिए मुख्य संकेत पता लगाना और उसके आवेदन के तरीकों का परिचय देने के। इसके अलावा लायक उल्लेख है, और क्या दवा "Sialor" ( "Protargolum") प्रतिक्रिया मरीजों और चिकित्सकों के बीच है। दवा क्या है और यह कैसे काम करता है? तैयारी "Sialor" ( "Protargolum") इसकी संरचना protainat रजत और शुद्ध पानी में होता है। इस समाधान पाने के लिए आपको हासिल कर ली धन मिश्रण की जरूरत है। औषधि की कार्रवाई अधिमानतः रोगाणुरोधी। दवा रोग सूक्ष्मजीवों के साथ प्रतिक्रिया करता है और उन्हें नष्ट कर। समाधान फिल्म लागू करने के बाद नाक श्लेष्म झिल्ली पर ही बना है। यह पूरी तरह से नया बैक्टीरिया के ताने-बाने की रक्षा करता है और पुराने मरने के लिए मदद करता है। इसके अलावा अर्थ है "Sialor" ( "Protargolum") क्षतिग्रस्त म्यूकोसा के चिकित्सा को बढ़ावा। इस मरीज की वसूली प्रक्रिया को गति। इसके अलावा, समाधान रक्त वाहिकाओं पर कार्य करता है नाक साइनस की, उन्हें सीमित करने। यह सांस लेने और रोग बैक्टीरिया के वाष्पीकरण को कम करने में मदद करता है। दवा "Sialor" का उपयोग करते समय? "Protargolum" (ड्रॉप) नाक के रोगों और के रूप में जटिल चिकित्सा के इलाज के लिए प्रयोग किया जाता है। तो, समाधान अक्सर एक जीवाणु संक्रमण के मामले में किया जाता है। नाक staphylococci, स्ट्रेप्टोकोक्की और इसी तरह के सूक्ष्मजीवों से पता चला धब्बा है, तो उन्हें बिल्कुल इस उपकरण का इलाज। इसके अलावा, समाधान निवारक प्रयोजनों और जटिल उपचार के लिए इस्तेमाल किया जा सकता ऊपरी श्वास नलिका के रोगों के। डॉक्टरों अक्सर ओटिटिस, साइनसाइटिस, दिमागी बुखार, और इतने पर के साथ एक बूंद के उपयोग की सलाह। जुकाम के दौरान दवा के प्रयोग कई जटिलताओं से बचा जाता है। कौन बूंदों का उपयोग नहीं करना चाहिए? "Sialor" ( "Protargolum") पूरी तरह से सभी गर्भवती माताओं निषिद्ध है। यह पूरी तरह महत्वहीन गर्भ की आयु है। इसके अलावा, जबकि स्तनपान उपकरण का उपयोग नहीं करते। यह उपचार का एक अलग पद्धति चुनने के लिए बेहतर है। दवा (चांदी का एक समाधान करने के लिए इस मामले में) घटकों में से एक की उपस्थिति के उच्च संवेदनशीलता के लिए लागू नहीं है। कैसे "Sialor" ( "Protargolum") तैयार करने के लिए? गाइड अगले बारे में बताता है। - बॉक्स खोलें और यह के सभी घटक निकालना। - टोपी butylki खोलना। - पैक कंटेनर से गोली निकाल दें। - शुद्ध पानी में लोअर कैप्सूल। - पहनें और पिपेट अच्छी तरह से दो मिनट के लिए समाधान हिला। जब दवा पूरी तरह भंग है, तो आप उपचार शुरू कर सकते हैं। कैसे और क्या मात्रा में दवा उपयोग कैसे करें? जब एक उपचार regimen चुनने हमेशा ध्यान में विशेषज्ञ की सिफारिशों लेने के लिए आवश्यक है। यह ध्यान देने योग्य है कि कुछ डॉक्टरों युवा बच्चों (4-5 वर्ष) में इस समाधान के उपयोग की सलाह नहीं देते लायक है। लेकिन निर्देशों में यह कुछ भी नहीं कहते हैं। साधन केवल नाक के रास्ते की पूर्व शुद्धि के बाद इस्तेमाल किया। बेहतर बस अपनी नाक झटका, और साइनस कुल्ला नहीं। इसके बाद प्रत्येक नथुने में एक से तीन बूंदों से प्रशासित। इस मामले में, रोगी क्षैतिज तैनात किया जाना चाहिए। उपचार आमतौर पर 5 दिन है। कुछ मामलों में, डॉक्टरों में एक सप्ताह तक बढ़ाने के लिए सलाह देते हैं। विशेष रूप से कठिन स्थितियों में यह 14 दिनों के लिए बूंदों का उपयोग करने की अनुमति है। कुछ मामलों में, दवा एलर्जी पैदा कर सकता है। सब से अधिकांश - यह हमेशा की तरह खुजली और त्वचा की लालिमा है। हालांकि यह जाना जाता है और अधिक गंभीर साइड इफेक्ट, उदाहरण के लिए, है Quincke शोफ है। इसके अलावा, लंबी अवधि के उपचार डेटा दवा पुरानी नाक भीड़ और चेहरे में नीले रंग की श्लेष्मा झिल्ली को जन्म दे सकता। यह घटित होता है तो आप तुरंत सुधार को पूरा करने और डॉक्टरों को मदद के लिए पूछना चाहिए। इस तरह के एक प्रतिक्रिया से बचने के लिए, यह उपकरण का परीक्षण करने के लिए आवश्यक है। ऐसा करने के लिए, कोहनी के अंदर करने के लिए तैयार करने की एक छोटी राशि लागू होते हैं। उसके बाद, प्रभाव देखते हैं। आप खुजली और लाली मिलता, तो आप इस दवा का उपयोग नहीं करना चाहिए। वैकल्पिक साधन के चयन के लिए अपने डॉक्टर से बात। दवा एक मजबूत भूरे रंग छाया है। कपड़े और फर्नीचर पर पैसा होने से बचने की कोशिश करें। का अर्थ है "Sialor" ( "Protargolum" 2%, 10 मिलीलीटर) आप करीब 250-300 रूबल खर्च होंगे। याद रखें कि कीमत थोड़ा क्षेत्र, फार्मेसी श्रृंखला और मुद्रास्फीति के आधार पर भिन्न हो सकती है। एक सस्ता समाधान अनुरूप जिसका शीर्षक था "Protargolum" अगर वांछित द्वारा प्रतिस्थापित किया जा सकता है। लेकिन उससे पहले, आप एक डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए। का अर्थ है "Sialor" बिल्कुल हानिरहित औषधि है। इसका उपयोग श्लेष्मा झिल्ली का माइक्रोफ्लोरा उल्लंघन नहीं करता। इसके अलावा, दवा कुछ फंगल संक्रमण मार सकते हैं। इसके साथ ही छोटे बच्चों में उपचार के बाद dysbiosis विकास नहीं करता है। कई डॉक्टरों का कहना है कि दवा के जीर्ण प्रशासन नाक श्लेष्म झिल्ली की overdrying पैदा कर सकता है। कारण है कि यह अपने स्वयं के साधन की नियुक्ति के लिए आवश्यक नहीं है यही कारण है। खासकर जब यह बच्चों के स्वास्थ्य के लिए आता है। समय पर इलाज किया और बीमार नहीं मिलता है। आप के लिए गुड लक!
सर्दी-जुकाम, वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण का सबसे लगातार लक्षणों में से एक है। यह अलग पृष्ठभूमि और उम्र के लोगों में दिखाई देता है। बेशक, लक्षण और रोग के कारण इलाज नहीं है। हालांकि, अक्सर चिकित्सकों के उपचार में स्थानीय निधियों के उपयोग की सलाह देते। उन शामिल करने के लिए नाक स्प्रे, बूँदें और सफाई समाधान। इस लेख में हम "Sialor" का अर्थ है पर ध्यान दिया जाएगा। आप इस दवा के इस्तेमाल के लिए मुख्य संकेत पता लगाना और उसके आवेदन के तरीकों का परिचय देने के। इसके अलावा लायक उल्लेख है, और क्या दवा "Sialor" प्रतिक्रिया मरीजों और चिकित्सकों के बीच है। दवा क्या है और यह कैसे काम करता है? तैयारी "Sialor" इसकी संरचना protainat रजत और शुद्ध पानी में होता है। इस समाधान पाने के लिए आपको हासिल कर ली धन मिश्रण की जरूरत है। औषधि की कार्रवाई अधिमानतः रोगाणुरोधी। दवा रोग सूक्ष्मजीवों के साथ प्रतिक्रिया करता है और उन्हें नष्ट कर। समाधान फिल्म लागू करने के बाद नाक श्लेष्म झिल्ली पर ही बना है। यह पूरी तरह से नया बैक्टीरिया के ताने-बाने की रक्षा करता है और पुराने मरने के लिए मदद करता है। इसके अलावा अर्थ है "Sialor" क्षतिग्रस्त म्यूकोसा के चिकित्सा को बढ़ावा। इस मरीज की वसूली प्रक्रिया को गति। इसके अलावा, समाधान रक्त वाहिकाओं पर कार्य करता है नाक साइनस की, उन्हें सीमित करने। यह सांस लेने और रोग बैक्टीरिया के वाष्पीकरण को कम करने में मदद करता है। दवा "Sialor" का उपयोग करते समय? "Protargolum" नाक के रोगों और के रूप में जटिल चिकित्सा के इलाज के लिए प्रयोग किया जाता है। तो, समाधान अक्सर एक जीवाणु संक्रमण के मामले में किया जाता है। नाक staphylococci, स्ट्रेप्टोकोक्की और इसी तरह के सूक्ष्मजीवों से पता चला धब्बा है, तो उन्हें बिल्कुल इस उपकरण का इलाज। इसके अलावा, समाधान निवारक प्रयोजनों और जटिल उपचार के लिए इस्तेमाल किया जा सकता ऊपरी श्वास नलिका के रोगों के। डॉक्टरों अक्सर ओटिटिस, साइनसाइटिस, दिमागी बुखार, और इतने पर के साथ एक बूंद के उपयोग की सलाह। जुकाम के दौरान दवा के प्रयोग कई जटिलताओं से बचा जाता है। कौन बूंदों का उपयोग नहीं करना चाहिए? "Sialor" पूरी तरह से सभी गर्भवती माताओं निषिद्ध है। यह पूरी तरह महत्वहीन गर्भ की आयु है। इसके अलावा, जबकि स्तनपान उपकरण का उपयोग नहीं करते। यह उपचार का एक अलग पद्धति चुनने के लिए बेहतर है। दवा घटकों में से एक की उपस्थिति के उच्च संवेदनशीलता के लिए लागू नहीं है। कैसे "Sialor" तैयार करने के लिए? गाइड अगले बारे में बताता है। - बॉक्स खोलें और यह के सभी घटक निकालना। - टोपी butylki खोलना। - पैक कंटेनर से गोली निकाल दें। - शुद्ध पानी में लोअर कैप्सूल। - पहनें और पिपेट अच्छी तरह से दो मिनट के लिए समाधान हिला। जब दवा पूरी तरह भंग है, तो आप उपचार शुरू कर सकते हैं। कैसे और क्या मात्रा में दवा उपयोग कैसे करें? जब एक उपचार regimen चुनने हमेशा ध्यान में विशेषज्ञ की सिफारिशों लेने के लिए आवश्यक है। यह ध्यान देने योग्य है कि कुछ डॉक्टरों युवा बच्चों में इस समाधान के उपयोग की सलाह नहीं देते लायक है। लेकिन निर्देशों में यह कुछ भी नहीं कहते हैं। साधन केवल नाक के रास्ते की पूर्व शुद्धि के बाद इस्तेमाल किया। बेहतर बस अपनी नाक झटका, और साइनस कुल्ला नहीं। इसके बाद प्रत्येक नथुने में एक से तीन बूंदों से प्रशासित। इस मामले में, रोगी क्षैतिज तैनात किया जाना चाहिए। उपचार आमतौर पर पाँच दिन है। कुछ मामलों में, डॉक्टरों में एक सप्ताह तक बढ़ाने के लिए सलाह देते हैं। विशेष रूप से कठिन स्थितियों में यह चौदह दिनों के लिए बूंदों का उपयोग करने की अनुमति है। कुछ मामलों में, दवा एलर्जी पैदा कर सकता है। सब से अधिकांश - यह हमेशा की तरह खुजली और त्वचा की लालिमा है। हालांकि यह जाना जाता है और अधिक गंभीर साइड इफेक्ट, उदाहरण के लिए, है Quincke शोफ है। इसके अलावा, लंबी अवधि के उपचार डेटा दवा पुरानी नाक भीड़ और चेहरे में नीले रंग की श्लेष्मा झिल्ली को जन्म दे सकता। यह घटित होता है तो आप तुरंत सुधार को पूरा करने और डॉक्टरों को मदद के लिए पूछना चाहिए। इस तरह के एक प्रतिक्रिया से बचने के लिए, यह उपकरण का परीक्षण करने के लिए आवश्यक है। ऐसा करने के लिए, कोहनी के अंदर करने के लिए तैयार करने की एक छोटी राशि लागू होते हैं। उसके बाद, प्रभाव देखते हैं। आप खुजली और लाली मिलता, तो आप इस दवा का उपयोग नहीं करना चाहिए। वैकल्पिक साधन के चयन के लिए अपने डॉक्टर से बात। दवा एक मजबूत भूरे रंग छाया है। कपड़े और फर्नीचर पर पैसा होने से बचने की कोशिश करें। का अर्थ है "Sialor" आप करीब दो सौ पचास-तीन सौ रूबल खर्च होंगे। याद रखें कि कीमत थोड़ा क्षेत्र, फार्मेसी श्रृंखला और मुद्रास्फीति के आधार पर भिन्न हो सकती है। एक सस्ता समाधान अनुरूप जिसका शीर्षक था "Protargolum" अगर वांछित द्वारा प्रतिस्थापित किया जा सकता है। लेकिन उससे पहले, आप एक डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए। का अर्थ है "Sialor" बिल्कुल हानिरहित औषधि है। इसका उपयोग श्लेष्मा झिल्ली का माइक्रोफ्लोरा उल्लंघन नहीं करता। इसके अलावा, दवा कुछ फंगल संक्रमण मार सकते हैं। इसके साथ ही छोटे बच्चों में उपचार के बाद dysbiosis विकास नहीं करता है। कई डॉक्टरों का कहना है कि दवा के जीर्ण प्रशासन नाक श्लेष्म झिल्ली की overdrying पैदा कर सकता है। कारण है कि यह अपने स्वयं के साधन की नियुक्ति के लिए आवश्यक नहीं है यही कारण है। खासकर जब यह बच्चों के स्वास्थ्य के लिए आता है। समय पर इलाज किया और बीमार नहीं मिलता है। आप के लिए गुड लक!
लखनऊ, 28 मार्च (आईएएनएस)। समाजवादी पार्टी (सपा) के संभल जिला अध्यक्ष फिरोज खान ने रामपुर से भाजपा प्रत्याशी व प्रसिद्ध अभिनेत्री जया प्रदा पर अभद्र टिप्पणी की है। सपा-बसपा गठबंधन ने पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खां को रामपुर से प्रत्याशी बनाया है। वह पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ने मैदान में उतरे हैं। फिरोज खान उनके करीबी माने जाते हैं।
लखनऊ, अट्ठाईस मार्च । समाजवादी पार्टी के संभल जिला अध्यक्ष फिरोज खान ने रामपुर से भाजपा प्रत्याशी व प्रसिद्ध अभिनेत्री जया प्रदा पर अभद्र टिप्पणी की है। सपा-बसपा गठबंधन ने पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खां को रामपुर से प्रत्याशी बनाया है। वह पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ने मैदान में उतरे हैं। फिरोज खान उनके करीबी माने जाते हैं।
कवि में इनके अलग-अलग प्रकार उपयुक्त हो सकते हैं, अतः इनके भेदोपभेद बताना संभव नहीं है । कुंतक ने दण्डी के इस स्पष्टीकरण को और भी सुलझाते हुए रीतियों के भौगोलिक आधार का सर्वथा निराकरण करके कविस्वभाव के आधार पर सुकुमार, मध्यम और विचित्र, ये तीन प्रकार के मार्ग निरूपित किए। इस प्रकार काव्यशास्त्र की अलंकारवादी इस धारा में दण्डी संभवतः भामह के ऋणी रहे होंगे, और कुंतक को अवश्य ही कविमार्ग के निरूपण के लिए दण्डी के ऋणी हैं । रीतियों का भौगोलिक आधार पर विभाजन सर्वथा असंगत भी नहीं कहा जा सकता । ग्रीक काव्यशास्त्र में भी बहुत प्राचीन काल में भौगोलिक आधार पर साहित्य की शैलियों के विभाजन की परंपरा रही है । क्विलियन ने दो प्रसिद्ध भौगोलिक भेदों का उल्लेख किया है : एटिक और एशियाटिक । साथ ही, उसने रचनाकार की प्रवृत्ति के आधार पर भी प्रसन्न (सरल), उदात्त तथा मध्यम अथवा सज्जित- इन तीनों भेदों का निरूपण किया। ग्रीक काव्यशास्त्र के साहित्यशैली के ये भेद दण्डी तथा कुंतक द्वारा निरूपित कविमार्ग के भेदों के लगभग समकक्ष हैं। सुकुमार मार्ग या वैदर्भी रीति को यहां माधुर्य आदि गुणों से युक्त माना गया है, तथा विचित्र अथवा गौडीय मार्ग में ओजोगुण, जटिल समासंबंध आदि की प्रधानता रहती है। मध्यम मार्ग अथवा पांचाली रीति इनके बीच की है । उपमा यत् अतत् तत् सदृशमिति गार्ग्यः । तदासां कर्म ज्यायसा वा गुणेन प्रख्याततमेन वा कनीयासं वा प्रख्यातं वोपमिमीते, अथापि कनीयसा ज्यासांसम् । (निरुक्त, 3 / 13 ) वही, 3 / 13-18 काव्यादर्श, 2 / 14 भामह ने भी उपमा के विषय में यह मत व्यक्त किया है : सर्वं सर्वेण सारूप्यं नास्ति भावस्य क्वचित् । यथोपपत्ति कृतिभिरुपमासु प्रयुज्यते ॥ ( काव्या, 2 / 46 ) काव्यादर्श, 2/1 उपकुर्वन्ति तं सन्तं येंगद्वारेण जातुचित् । हारादिवदलंकारास्तेऽनुप्रासोपमादयः ॥ ( काव्यप्र., 8 / 67 ) तमर्थमवलम्बन्ते येऽङ्गिनं ते गुणाः स्मृताः । अंगाश्रितास्त्वलंकारा मन्तव्या कटकादिवत् ॥ (ध्वन्या 2 / 7 ) तत्र अलंकारसंसृप्टेः इत्येव वक्तव्यं नानालंकारग्रहणं गुणरसानामुपसंग्रहार्थम् । तेपामपि हि काव्यशांभाकरत्वंन अलंकारत्वात् । यदाह- काव्यशोभाकरान् धर्मानलंकारान् प्रचक्षते । ... (सरस्वती कण्ठाभरण, पृ. 621 ) तत्र काव्यशोभाकरान् इत्यनेन श्लेषोपमादिवद् गुणरसभावतदाभासप्रशमादीनप्यनुगृह्णाति । मार्गविभागकृद्गुणानामलंक्रियोपदेशेन श्लेषादीनां गुणत्वमिवालंकारत्वमपि ज्ञापयति । (वही, पृ. 612 ) 7. रूपकादिरलंकारस्तथान्यैर्बहुधोदितः। न कान्तमपि निर्भूषं विभाति वनिताननम् ॥ रूपकादिमलंकारं बाह्यमाचक्षते परे । सुपां तिङां च व्युत्पत्तिं वाचां वांछन्त्यलंकृतिम् ॥ तदेतदाहुः सौशब्यं नार्थव्युत्पत्तिरीदृशी । शब्दाभिधेयालंकारभेदादिष्टं द्वयं तु नः ।। ( भामह : काव्यालंकार, 1 / 13-15, बिहार राष्ट्रभाषा परिषद, 1962 ) 8. वही, देवेन्द्रनाथ शर्मा की भूमिका, पृ. 41
कवि में इनके अलग-अलग प्रकार उपयुक्त हो सकते हैं, अतः इनके भेदोपभेद बताना संभव नहीं है । कुंतक ने दण्डी के इस स्पष्टीकरण को और भी सुलझाते हुए रीतियों के भौगोलिक आधार का सर्वथा निराकरण करके कविस्वभाव के आधार पर सुकुमार, मध्यम और विचित्र, ये तीन प्रकार के मार्ग निरूपित किए। इस प्रकार काव्यशास्त्र की अलंकारवादी इस धारा में दण्डी संभवतः भामह के ऋणी रहे होंगे, और कुंतक को अवश्य ही कविमार्ग के निरूपण के लिए दण्डी के ऋणी हैं । रीतियों का भौगोलिक आधार पर विभाजन सर्वथा असंगत भी नहीं कहा जा सकता । ग्रीक काव्यशास्त्र में भी बहुत प्राचीन काल में भौगोलिक आधार पर साहित्य की शैलियों के विभाजन की परंपरा रही है । क्विलियन ने दो प्रसिद्ध भौगोलिक भेदों का उल्लेख किया है : एटिक और एशियाटिक । साथ ही, उसने रचनाकार की प्रवृत्ति के आधार पर भी प्रसन्न , उदात्त तथा मध्यम अथवा सज्जित- इन तीनों भेदों का निरूपण किया। ग्रीक काव्यशास्त्र के साहित्यशैली के ये भेद दण्डी तथा कुंतक द्वारा निरूपित कविमार्ग के भेदों के लगभग समकक्ष हैं। सुकुमार मार्ग या वैदर्भी रीति को यहां माधुर्य आदि गुणों से युक्त माना गया है, तथा विचित्र अथवा गौडीय मार्ग में ओजोगुण, जटिल समासंबंध आदि की प्रधानता रहती है। मध्यम मार्ग अथवा पांचाली रीति इनके बीच की है । उपमा यत् अतत् तत् सदृशमिति गार्ग्यः । तदासां कर्म ज्यायसा वा गुणेन प्रख्याततमेन वा कनीयासं वा प्रख्यातं वोपमिमीते, अथापि कनीयसा ज्यासांसम् । वही, तीन / तेरह-अट्ठारह काव्यादर्श, दो / चौदह भामह ने भी उपमा के विषय में यह मत व्यक्त किया है : सर्वं सर्वेण सारूप्यं नास्ति भावस्य क्वचित् । यथोपपत्ति कृतिभिरुपमासु प्रयुज्यते ॥ काव्यादर्श, दो/एक उपकुर्वन्ति तं सन्तं येंगद्वारेण जातुचित् । हारादिवदलंकारास्तेऽनुप्रासोपमादयः ॥ तमर्थमवलम्बन्ते येऽङ्गिनं ते गुणाः स्मृताः । अंगाश्रितास्त्वलंकारा मन्तव्या कटकादिवत् ॥ तत्र अलंकारसंसृप्टेः इत्येव वक्तव्यं नानालंकारग्रहणं गुणरसानामुपसंग्रहार्थम् । तेपामपि हि काव्यशांभाकरत्वंन अलंकारत्वात् । यदाह- काव्यशोभाकरान् धर्मानलंकारान् प्रचक्षते । ... तत्र काव्यशोभाकरान् इत्यनेन श्लेषोपमादिवद् गुणरसभावतदाभासप्रशमादीनप्यनुगृह्णाति । मार्गविभागकृद्गुणानामलंक्रियोपदेशेन श्लेषादीनां गुणत्वमिवालंकारत्वमपि ज्ञापयति । सात. रूपकादिरलंकारस्तथान्यैर्बहुधोदितः। न कान्तमपि निर्भूषं विभाति वनिताननम् ॥ रूपकादिमलंकारं बाह्यमाचक्षते परे । सुपां तिङां च व्युत्पत्तिं वाचां वांछन्त्यलंकृतिम् ॥ तदेतदाहुः सौशब्यं नार्थव्युत्पत्तिरीदृशी । शब्दाभिधेयालंकारभेदादिष्टं द्वयं तु नः ।। आठ. वही, देवेन्द्रनाथ शर्मा की भूमिका, पृ. इकतालीस
चर्चा में क्यों? 6 जून, 2022 को एकेटीयू (डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी) के कुलपति प्रो. प्रदीप कुमार मिश्र ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 (एनईपी) आधारित शैक्षणिक पाठ्यक्रम को विश्वविद्यालय में लागू करने के प्रस्ताव को तैयार करने के लिये समिति का गठन किया है। - पाठ्यक्रम तैयार करने के लिये बनाई गई समिति का अध्यक्ष प्रति कुलपति प्रो. मनीष गौड़ को बनाया है। समिति में डीन एकेडमिक और समन्वयक प्रो. नीतेश पुरोहित, डॉ. आर.के. अग्रवाल, डॉ. सारिका श्रीवास्तव तथा डॉ. प्रभाकर गुप्ता भी शामिल हैं। - कुलपति प्रो. प्रदीप कुमार मिश्र ने समिति से पाठ्यक्रमों को चिह्नित कर सत्र 2022-23 से लागू करने के लिये प्रस्ताव तैयार कर एक महीने में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। - इसके साथ ही संस्थानों के शिक्षकों और विभाग के उत्कृष्ट कार्यों के लिये अवार्ड देने के लिये एक समिति का गठन किया गया है। एकेटीयू अब अपने संबद्ध संस्थानों में रिसर्च और डेवलपमेंट कार्यक्रम को बढ़ावा देने और प्रोत्साहित करने के लिये अवार्ड देगा।
चर्चा में क्यों? छः जून, दो हज़ार बाईस को एकेटीयू के कुलपति प्रो. प्रदीप कुमार मिश्र ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति, दो हज़ार बीस आधारित शैक्षणिक पाठ्यक्रम को विश्वविद्यालय में लागू करने के प्रस्ताव को तैयार करने के लिये समिति का गठन किया है। - पाठ्यक्रम तैयार करने के लिये बनाई गई समिति का अध्यक्ष प्रति कुलपति प्रो. मनीष गौड़ को बनाया है। समिति में डीन एकेडमिक और समन्वयक प्रो. नीतेश पुरोहित, डॉ. आर.के. अग्रवाल, डॉ. सारिका श्रीवास्तव तथा डॉ. प्रभाकर गुप्ता भी शामिल हैं। - कुलपति प्रो. प्रदीप कुमार मिश्र ने समिति से पाठ्यक्रमों को चिह्नित कर सत्र दो हज़ार बाईस-तेईस से लागू करने के लिये प्रस्ताव तैयार कर एक महीने में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। - इसके साथ ही संस्थानों के शिक्षकों और विभाग के उत्कृष्ट कार्यों के लिये अवार्ड देने के लिये एक समिति का गठन किया गया है। एकेटीयू अब अपने संबद्ध संस्थानों में रिसर्च और डेवलपमेंट कार्यक्रम को बढ़ावा देने और प्रोत्साहित करने के लिये अवार्ड देगा।
राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) सुप्रीमो सोमवार को बड़ा ऐलान कर सकते हैं. उन्होंने 12.30 बजे प्रेस कांफ्रेंस आयोजित की है. समझा जाता है कि एनडीए से सकारात्मक संकेत नहीं मिलने के बाद वह कोई बड़ा ऐलान कर सकते हैं. इससे पहले सीट शेयरिंग के मामले पर भाजपा अध्यक अमितशाह और प्रधान मंत्री मोदी से उन्हें समय नहीं मिलने पर उन्होंने कहा था कि 30 नवम्बर तक की डेडलाइन है. अगर इस बीच भाजपा नेता से मुलाकात हुई तो ठीक है वरना वह अपना फसला लेने को स्वतंत्र होंगे. लेकिन अब यह लगभग साफ हो चुका है कि वह कोई बड़ा फैसला लेंगे. संभव है कि केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दें और अपनी पार्टी को एनडीए से अलग करने की घोषणा कर दें. उधर राजद के सूत्रों से जो जानकारी मिली है उससे ऐसा लग रहा है कि कुशवाहा की पार्टी आरएलएसपी महागठबंधन में शामलि हो सकती है. हालांकि इस ्बीच कुशवहा ने नीतीश कुमार के सामने शर्त रखी है कि शिका में सुधार के लिए वह तैयार हो जायें तो वह एनडीए में रह सकते हैं लेकिन कुशवाहा की शर्त ऐसी है जैसे ना नौ मन तेल होगा ना राधा नाचेगी. विदित हो कि उपेंद्र कुशवाहा राजग और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समक्ष प्रस्ताव रखा है कि अगर राज्य सरकार शिक्षा में को ले उनकी 25 सूत्री मांगों को लागू कर दें तो वे राजग में रहेंगे। कुशवाहा जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राजग में शामिल होने के पहले से बिहार में शिक्षा सुधार का अभियान चला रहे हैं। आम आदमी से जुड़े इस मुद्दे को सामने रख कुशवाहा ने राजग में अपना नया दांव चला है। कुशवाहा ने विभिन्न स्तर पर शिक्षकों की नियुक्ति तथा उनकी पात्रता के लिए ऑनलाइन व्यवस्था करने की मांग रखी है। साथ ही साल 2003 और उसके बाद के शिक्षकों के पुर्नमूल्यांकन कराने की शर्त रखी जिसे मानन संभव नहीं है.
राष्ट्रीय लोक समता पार्टी सुप्रीमो सोमवार को बड़ा ऐलान कर सकते हैं. उन्होंने बारह.तीस बजे प्रेस कांफ्रेंस आयोजित की है. समझा जाता है कि एनडीए से सकारात्मक संकेत नहीं मिलने के बाद वह कोई बड़ा ऐलान कर सकते हैं. इससे पहले सीट शेयरिंग के मामले पर भाजपा अध्यक अमितशाह और प्रधान मंत्री मोदी से उन्हें समय नहीं मिलने पर उन्होंने कहा था कि तीस नवम्बर तक की डेडलाइन है. अगर इस बीच भाजपा नेता से मुलाकात हुई तो ठीक है वरना वह अपना फसला लेने को स्वतंत्र होंगे. लेकिन अब यह लगभग साफ हो चुका है कि वह कोई बड़ा फैसला लेंगे. संभव है कि केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दें और अपनी पार्टी को एनडीए से अलग करने की घोषणा कर दें. उधर राजद के सूत्रों से जो जानकारी मिली है उससे ऐसा लग रहा है कि कुशवाहा की पार्टी आरएलएसपी महागठबंधन में शामलि हो सकती है. हालांकि इस ्बीच कुशवहा ने नीतीश कुमार के सामने शर्त रखी है कि शिका में सुधार के लिए वह तैयार हो जायें तो वह एनडीए में रह सकते हैं लेकिन कुशवाहा की शर्त ऐसी है जैसे ना नौ मन तेल होगा ना राधा नाचेगी. विदित हो कि उपेंद्र कुशवाहा राजग और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समक्ष प्रस्ताव रखा है कि अगर राज्य सरकार शिक्षा में को ले उनकी पच्चीस सूत्री मांगों को लागू कर दें तो वे राजग में रहेंगे। कुशवाहा जनता दल यूनाइटेड के राजग में शामिल होने के पहले से बिहार में शिक्षा सुधार का अभियान चला रहे हैं। आम आदमी से जुड़े इस मुद्दे को सामने रख कुशवाहा ने राजग में अपना नया दांव चला है। कुशवाहा ने विभिन्न स्तर पर शिक्षकों की नियुक्ति तथा उनकी पात्रता के लिए ऑनलाइन व्यवस्था करने की मांग रखी है। साथ ही साल दो हज़ार तीन और उसके बाद के शिक्षकों के पुर्नमूल्यांकन कराने की शर्त रखी जिसे मानन संभव नहीं है.
: १ : कायाकल्प "मैं तीनों भाइयों में रत्न बनूँगा ।" इस पवित्र भावना से जो दृढ़ संकल्प मोलह वर्ष के युवक ने किया और उस पर वह जिस दृढ़ता के साथ अंगद की तरह स्थिर होगया, उसी का परिणाम अनेक पदविभूषित रात्रराजा श्रीमन्त सर पेठ हुकमचन्द्रजी का वह विशिष्ट व्यक्तित्व हैं, जिसकी लोकोत्तर मफलतायें देशवासियों के लिये गृह पहेली बनी हुई हैं और उस दिन तो त्रे महान् सफलतायें विश्वभर के व्यापारियों के लिये गूढ़ पहेली बनी हुई थीं, जब कि संसार के मारे बाजार उसके हाथों में खेला करते थे। भारतीय सभ्यता और भारतीय जीवन में व्यक्किंगत चरित्र निर्माण को समस्त सफलताओं का आधार माना गया है। हमारे चरित्रनायक की जीवन कहानी भी इसी सचाई की प्रबल और प्रत्यक्ष साक्षी है । उसका सूत्रपात सारे ही जीवन का कायाकल्प कर देनेवाली जिस अद्भुत घटना के साथ हुआ, वह कितनी शिक्षाप्रद, कितनी मनोरंजक और कितनी स्फूर्तिदायक है ? संसारी जीवों के लिये महापुरुषों के जीवन को अद्भुत बना देनेवाली ऐसी घटनायें प्रायः सभी के जीवन में घटती रहती हैं । अन्तर की जो पेनी दृष्टि उनको देख पाती है, वह जीवन का कायाकल्प कर जाती है। गौतम बुद्ध के जीवन का कायाकल्य करने वाले दृश्य हममें से कौन नहीं देखता ? कितने ही वृद्ध, रोगी और मृत व्यक्ति हम प्रायः देखते रहते हैं। परन्तु अपने अन्तर की पैनी दृष्टि से उन्हें देखनेवाला कौन है ? अन्यथा, हम सभी बुद्ध क्यों न बन जायं ? मोलहवर्षीय युवक हुकमचंद के हृदय में एक भावना और संकल्प तब पैदा हुआ था, जब उसने अपने अन्तर की पैनो दृष्टि से अपने अन्तर का महसा हो अवलोकन कर लिया था। उसी दिन उसने ऊपर की ओर जो कदम उठाया था, वह उसके उस अलौकिक उत्कर्ष का कारण बन गया, जो सभी को स्तंभित किये हुये है । इन्दौर और ग्वालियर अथवा मालवा या मध्यभारत ही नहीं, किन्तु बाहर भी जहाँ भी कहीं सर सेठ साहब को जानने वाले किसी भी व्यक्ति से चर्चा कीजिये, वह सहसा ही यह कह उठेगा कि "इसमें संदेह नहीं कि सेठ साहब का जीवन महान और व्यक्तित्व अद्भुत है।" इन्दौर सरीखे एक छोटे से शहर में रहनेवाले सेठ साहब इतना नाम पैदा कर लेंगे, यह सोलह वर्ष की आयु में उनके जीवन के क्रम को देखकर कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था । 'हावल्या कावल्या' कभी उनके परिवार का नाम पड़ गया था और इन्दौर का शहर भी कभी इसी नाम से "हावल्या कावल्या सेठ का इन्दौर" कहा जाने लग गया था। इन्दोर निवासियों की ग्राज को पीढ़ी में कितनों ही ने अपनी यात्रा में यह अनुभव प्राप्त किया होगा कि उनके साथ के अपरिचित लोगों से उनका परिचय 'हावल्या काबल्या सेठ के इन्दौर' से अथवा 'उस इन्दौर' से ही हुआ है, जिसमें 'हावल्या कावल्या सेठ' रहते हैं।" उनकी स्त्रयं उपार्जित धन-संपत्ति और वैभव की उपेक्षा श्राज के साम्यवाद के युग में 'पूजीवाद' के नाम से भले ही की जा सकती हो; किन्तु अपनी अंतह ष्टि जगाकर अपने को आत्म-तत्व की साधना में लगा२६ हुकमचन्द अभिनन्दन प्राथ कर, मोक्ष की प्राप्ति करने का जो अटूट विश्वास उन्होंने अपने अंतर में पैदा किया है और जीवन के चतुर्थ भाग में पहुंचते ही साधनामय विरक जीवन को स्वेच्छा से अंगीकार करके उन्होंने जिस महान् श्रामिक सम्पदा का सम्पादन किया है, उसकी उपेक्षा भला कौन क्या कह कर कर सकता है ? पूजीवाद को कोसने वाले भी इस तथ्य की उपेक्षा तो कदापि कर ही नहीं सकते कि उन्होंने अपनी अस्सी वर्ष से भी कुछ कम आयु में अस्सी लाख का वह मान्विक दान किया है, जिसका लाभ देश के सार्वजनिक जीवन के प्रायः सभी क्षेत्रों और सभी प्रदेशों को अनायास ही मिला है। "स जातो येन जानेन याति वंशः समुन्नतिम्" की कसौटी पर यदि इस महान जीवन की सफल कहानी की परख की जाय, तो कहना होगा कि अपने जन्म से मेठ साहब ने न केवल अपने वंश को समुन्नत किया है; किन्तु अपने धर्म, समाज, जाति तथा अपने नगर, राज्य और राष्ट्र का नाम भी समुज्वल किया है। इस महान और सफल जीवन का प्रारम्भ किस अद्भुत घटना के साथ हुआ ? बहुत सम्भव सम्बत् ११४७ के दमहरे की बात है। अपने कुछ मित्रों सेठ फतेहचन्दजी और उनियारा के दीवान मांगीलालजी के लड़के श्री भंवरलालजी के साथ मेले से युवा हुकमचन्द्र लौट रहे थे। रास्ते में उनके यहां रुक गये । त्यौहार को मिठाई सामने लाकर रखी गई । भांग की कतली, चक्की या बरफी, जिसे मातृम कहते हैं, कोई आधा सेर सामने रखी गई होगी। उस सारी को अकेले ही हुकमचन्द्र उड़ा गये । साथी देखकर दंग रह गये । वे उनको घर तक पहुंचाने गये केवल इसलिये कि कहीं नशे का इतना जोर न हो जाय कि उनका वहां पहुंचना भी कठिन हो जाय। वे घर पहुंचे और मकान के ऊपर भी बिना किसी के सहारे हो पहुँच गये । रात्रि का सोने का समय था एकाएक एक विचार पैदा हुआ। पत्नी को बुलाया गया । उसको माक्षी रखकर उसी नशे में सभी प्रकार के नशे के परित्याग का संकल्प किया गया, जीवन का नया कार्यक्रम बनाया गया और उसको पूरी दृढ़ता के साथ निभाया गया। उसका शुभ परिणाम श्राज सबके सामने है। जीवन का वह नया कार्यक्रम क्या था ? जीवन का थामूलचूल क्रान्तिकारी परिवर्तन था। इन दिनों में सेठ साहब का हृदय उस बालक के समान सर्वथा निर्दोष है, जो अपने दूषण को भी भूषण मानकर अपने मातापिता के सम्मुख बिना किसी संकोच के महज स्वभाव से स्वीकार कर लेता है और जिसकी मानसिक वृत्तियां इतनी शुद्ध और पवित्र हो जाती है कि वह हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के समान अपनी हिमालय की-सी भूलें भी स्वीकार करने में संकोच नहीं करना । यही श्रात्म-निरीक्षण उत्कर्ष को पहिली मीढ़ी है। हम अद्भुत घटना का वर्णन भी मेठ माहब ने स्वयं ही किया। अपने स्वयं ही बताया कि उन दिनों में आप प्रतिदिन श्राव मे भांग छानने और उस पर भी एक तोला अफीम की गोली गले के नीचे उतार जाते थे। आहार, निद्रा और भोग-विलास के सिवाय जीवन का कोई प्रयोजन जान ही न पड़ता था। वन और यौवन की अटूट सम्पत्ति के साथ प्रभुत्व की मात्रा भी कुछ कम न थी, किन्तु 'अविवेक' अभी अपना साम्राज्य कायम न कर पाया था कि अन्तर की दृष्टि सहमा ही खुल गई । दिनभर मस्त होकर मोना ही मांर दिन का मुख्य काम था। सारी रात भी यों ही बीत जाती थी । सवेरे से पहिले उठना न होता था। रात को १० बजे संर भर दूध और उसमें पात्रभर वी, १२ बजे सेर डेढ़ सेर मिठाई, २ बजे फिर मिठाई का दूसरा दौर और ४ बजे कुछ और हाथ न लगता, तां दही को इंडिया पर ही हाथ साफ किया जाना । दिन में भी भोजन का यही क्रम रहता था। इस आमोद-प्रमोद और भोगविलाम में स्वछन्द बहने वाला युवक शनमुम्बीपतन की खाई के किनारे ही खड़ा था कि एकाएक संभल गया । उस घोर नशेक घोर अन्धकार में भी उसको दिव्य प्रकाश की एक किरण दी गई और उसने उसको सहसा ही ऐसा पकड़ लिया कि जीवनभर आंखों से श्रीफल न होने दिया। उस नशे में ही उसके अन्तहदय में एक ध्वनि पैदा हुई । उसने उससे कहा कि मशे
: एक : कायाकल्प "मैं तीनों भाइयों में रत्न बनूँगा ।" इस पवित्र भावना से जो दृढ़ संकल्प मोलह वर्ष के युवक ने किया और उस पर वह जिस दृढ़ता के साथ अंगद की तरह स्थिर होगया, उसी का परिणाम अनेक पदविभूषित रात्रराजा श्रीमन्त सर पेठ हुकमचन्द्रजी का वह विशिष्ट व्यक्तित्व हैं, जिसकी लोकोत्तर मफलतायें देशवासियों के लिये गृह पहेली बनी हुई हैं और उस दिन तो त्रे महान् सफलतायें विश्वभर के व्यापारियों के लिये गूढ़ पहेली बनी हुई थीं, जब कि संसार के मारे बाजार उसके हाथों में खेला करते थे। भारतीय सभ्यता और भारतीय जीवन में व्यक्किंगत चरित्र निर्माण को समस्त सफलताओं का आधार माना गया है। हमारे चरित्रनायक की जीवन कहानी भी इसी सचाई की प्रबल और प्रत्यक्ष साक्षी है । उसका सूत्रपात सारे ही जीवन का कायाकल्प कर देनेवाली जिस अद्भुत घटना के साथ हुआ, वह कितनी शिक्षाप्रद, कितनी मनोरंजक और कितनी स्फूर्तिदायक है ? संसारी जीवों के लिये महापुरुषों के जीवन को अद्भुत बना देनेवाली ऐसी घटनायें प्रायः सभी के जीवन में घटती रहती हैं । अन्तर की जो पेनी दृष्टि उनको देख पाती है, वह जीवन का कायाकल्प कर जाती है। गौतम बुद्ध के जीवन का कायाकल्य करने वाले दृश्य हममें से कौन नहीं देखता ? कितने ही वृद्ध, रोगी और मृत व्यक्ति हम प्रायः देखते रहते हैं। परन्तु अपने अन्तर की पैनी दृष्टि से उन्हें देखनेवाला कौन है ? अन्यथा, हम सभी बुद्ध क्यों न बन जायं ? मोलहवर्षीय युवक हुकमचंद के हृदय में एक भावना और संकल्प तब पैदा हुआ था, जब उसने अपने अन्तर की पैनो दृष्टि से अपने अन्तर का महसा हो अवलोकन कर लिया था। उसी दिन उसने ऊपर की ओर जो कदम उठाया था, वह उसके उस अलौकिक उत्कर्ष का कारण बन गया, जो सभी को स्तंभित किये हुये है । इन्दौर और ग्वालियर अथवा मालवा या मध्यभारत ही नहीं, किन्तु बाहर भी जहाँ भी कहीं सर सेठ साहब को जानने वाले किसी भी व्यक्ति से चर्चा कीजिये, वह सहसा ही यह कह उठेगा कि "इसमें संदेह नहीं कि सेठ साहब का जीवन महान और व्यक्तित्व अद्भुत है।" इन्दौर सरीखे एक छोटे से शहर में रहनेवाले सेठ साहब इतना नाम पैदा कर लेंगे, यह सोलह वर्ष की आयु में उनके जीवन के क्रम को देखकर कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था । 'हावल्या कावल्या' कभी उनके परिवार का नाम पड़ गया था और इन्दौर का शहर भी कभी इसी नाम से "हावल्या कावल्या सेठ का इन्दौर" कहा जाने लग गया था। इन्दोर निवासियों की ग्राज को पीढ़ी में कितनों ही ने अपनी यात्रा में यह अनुभव प्राप्त किया होगा कि उनके साथ के अपरिचित लोगों से उनका परिचय 'हावल्या काबल्या सेठ के इन्दौर' से अथवा 'उस इन्दौर' से ही हुआ है, जिसमें 'हावल्या कावल्या सेठ' रहते हैं।" उनकी स्त्रयं उपार्जित धन-संपत्ति और वैभव की उपेक्षा श्राज के साम्यवाद के युग में 'पूजीवाद' के नाम से भले ही की जा सकती हो; किन्तु अपनी अंतह ष्टि जगाकर अपने को आत्म-तत्व की साधना में लगाछब्बीस हुकमचन्द अभिनन्दन प्राथ कर, मोक्ष की प्राप्ति करने का जो अटूट विश्वास उन्होंने अपने अंतर में पैदा किया है और जीवन के चतुर्थ भाग में पहुंचते ही साधनामय विरक जीवन को स्वेच्छा से अंगीकार करके उन्होंने जिस महान् श्रामिक सम्पदा का सम्पादन किया है, उसकी उपेक्षा भला कौन क्या कह कर कर सकता है ? पूजीवाद को कोसने वाले भी इस तथ्य की उपेक्षा तो कदापि कर ही नहीं सकते कि उन्होंने अपनी अस्सी वर्ष से भी कुछ कम आयु में अस्सी लाख का वह मान्विक दान किया है, जिसका लाभ देश के सार्वजनिक जीवन के प्रायः सभी क्षेत्रों और सभी प्रदेशों को अनायास ही मिला है। "स जातो येन जानेन याति वंशः समुन्नतिम्" की कसौटी पर यदि इस महान जीवन की सफल कहानी की परख की जाय, तो कहना होगा कि अपने जन्म से मेठ साहब ने न केवल अपने वंश को समुन्नत किया है; किन्तु अपने धर्म, समाज, जाति तथा अपने नगर, राज्य और राष्ट्र का नाम भी समुज्वल किया है। इस महान और सफल जीवन का प्रारम्भ किस अद्भुत घटना के साथ हुआ ? बहुत सम्भव सम्बत् एक हज़ार एक सौ सैंतालीस के दमहरे की बात है। अपने कुछ मित्रों सेठ फतेहचन्दजी और उनियारा के दीवान मांगीलालजी के लड़के श्री भंवरलालजी के साथ मेले से युवा हुकमचन्द्र लौट रहे थे। रास्ते में उनके यहां रुक गये । त्यौहार को मिठाई सामने लाकर रखी गई । भांग की कतली, चक्की या बरफी, जिसे मातृम कहते हैं, कोई आधा सेर सामने रखी गई होगी। उस सारी को अकेले ही हुकमचन्द्र उड़ा गये । साथी देखकर दंग रह गये । वे उनको घर तक पहुंचाने गये केवल इसलिये कि कहीं नशे का इतना जोर न हो जाय कि उनका वहां पहुंचना भी कठिन हो जाय। वे घर पहुंचे और मकान के ऊपर भी बिना किसी के सहारे हो पहुँच गये । रात्रि का सोने का समय था एकाएक एक विचार पैदा हुआ। पत्नी को बुलाया गया । उसको माक्षी रखकर उसी नशे में सभी प्रकार के नशे के परित्याग का संकल्प किया गया, जीवन का नया कार्यक्रम बनाया गया और उसको पूरी दृढ़ता के साथ निभाया गया। उसका शुभ परिणाम श्राज सबके सामने है। जीवन का वह नया कार्यक्रम क्या था ? जीवन का थामूलचूल क्रान्तिकारी परिवर्तन था। इन दिनों में सेठ साहब का हृदय उस बालक के समान सर्वथा निर्दोष है, जो अपने दूषण को भी भूषण मानकर अपने मातापिता के सम्मुख बिना किसी संकोच के महज स्वभाव से स्वीकार कर लेता है और जिसकी मानसिक वृत्तियां इतनी शुद्ध और पवित्र हो जाती है कि वह हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के समान अपनी हिमालय की-सी भूलें भी स्वीकार करने में संकोच नहीं करना । यही श्रात्म-निरीक्षण उत्कर्ष को पहिली मीढ़ी है। हम अद्भुत घटना का वर्णन भी मेठ माहब ने स्वयं ही किया। अपने स्वयं ही बताया कि उन दिनों में आप प्रतिदिन श्राव मे भांग छानने और उस पर भी एक तोला अफीम की गोली गले के नीचे उतार जाते थे। आहार, निद्रा और भोग-विलास के सिवाय जीवन का कोई प्रयोजन जान ही न पड़ता था। वन और यौवन की अटूट सम्पत्ति के साथ प्रभुत्व की मात्रा भी कुछ कम न थी, किन्तु 'अविवेक' अभी अपना साम्राज्य कायम न कर पाया था कि अन्तर की दृष्टि सहमा ही खुल गई । दिनभर मस्त होकर मोना ही मांर दिन का मुख्य काम था। सारी रात भी यों ही बीत जाती थी । सवेरे से पहिले उठना न होता था। रात को दस बजे संर भर दूध और उसमें पात्रभर वी, बारह बजे सेर डेढ़ सेर मिठाई, दो बजे फिर मिठाई का दूसरा दौर और चार बजे कुछ और हाथ न लगता, तां दही को इंडिया पर ही हाथ साफ किया जाना । दिन में भी भोजन का यही क्रम रहता था। इस आमोद-प्रमोद और भोगविलाम में स्वछन्द बहने वाला युवक शनमुम्बीपतन की खाई के किनारे ही खड़ा था कि एकाएक संभल गया । उस घोर नशेक घोर अन्धकार में भी उसको दिव्य प्रकाश की एक किरण दी गई और उसने उसको सहसा ही ऐसा पकड़ लिया कि जीवनभर आंखों से श्रीफल न होने दिया। उस नशे में ही उसके अन्तहदय में एक ध्वनि पैदा हुई । उसने उससे कहा कि मशे
भूपेंद्र राय/नई दिल्ली। 15 अगस्त के दिन देश 75वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है। भारत को आजाद कराने में अनगिनत आजादी के दीवानों ने बड़ी-बड़ी कुर्बानियां दी हैं। आजादी की लड़ाई में केवल नेताओं, स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों ने ही भाग नहीं लिया था, बल्कि लेखकों और कवियों ने भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया था। अंग्रेजों को भगाने में कलमकारों ने बखूबी भूमिका निभाई। उन्होंने अपने शब्दों से क्रांतिकारियों से लेकर देश के आम लोगों के अंदर जोश भरा। दरअसल, स्वतंत्रता आंदोलन को अहिंसक बनाए रखने के गांधी के संकल्प की वजह से भारत में आजादी की अधिकतर लड़ाई कलम से लड़ी गई। यह कलम ही थी, जिसने जनमानस को सचेत किया। एक तरफ जहां लेखक और साहित्यकारों ने वंदे मातरम् जैसी महान और अमर रचनाओं से आजादी की लड़ाई में नई जान फूंकी तो वहीं दूसरी तरफ कवियों ने अपने शब्दों से युवाओं के अंदर आजादी का जोश भरने का काम किया। इस खबर में हम आपके लिए उन कवियों और लेखकों के बारे में जानकारी दे रहे हैं, जिन्होंने कलम के जरिए देश की स्वतंत्रता में अपने-अपने स्तर पर योगदान दिया है। एशिया के पहले नोबेल पुरस्कार विजेता कविगुरु रवीन्द्रनाथ टैगोर का आजादी की लड़ाई में अहम योगदान रहा है। उन्होंने राष्ट्रीय गान 'जन गण मन' लिखा। इसके साथ ही उन्होंने अपनी कविताओं और रचनाओं के जरिए देश के युवाओं में देश प्रेम की भावना जागृत किया। उन्होंने जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में नाइटहुड की उपाधि त्याग दी थी। आजादी की लड़ाई में बंकिम चंद्र चटर्जी का खास योगदान है। भारत के राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के रचयिता और बंगाल के लोकप्रिय उपन्यासकार बंकिम चंद्र चटर्जी ने अपनी रचनाओं के माध्यम से अंग्रेजों की नाक में दम कर दिया था। 1874 में इनके द्वारा लिखा गया देश प्रेम से ओत-प्रोत गीत वंदे मातरम् भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान क्रांतिकारियों का प्रेरणा स्रोत और मुख्य उद्घोष बन गया था। इस गीत ने देश के लोगों की रगों में उबाल ला दिया था। राष्ट्र प्रेम प्रेरक महिलाओं में सुभद्रा कुमार चौहान का नाम बड़े ही आदर और सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में बढ़-चढ़कर भाग लिया था। सुभद्रा ने स्वतंत्रता संग्राम में भगत सिंह और अन्य क्रांतिकारियों के साथ मिलकर काम किया। वह मूलतः कवि थी। इन्हें क्रांति गीत लिखना बेहद पंसद था। तत्कालीन पत्र -पत्रिकाओं में उग्र रचनाएं छापकर वे देशवासियों के विद्रोह की भावना को जागृत करने का प्रयास करती थीं। इन्होंने झांसी की रानी लक्ष्मी बाई पर ऐतिहासिक कविता लिखी थी। काकोरी कांड के नायक राम प्रसाद बिस्मिल का आजादी में अहम योगदान है। उन्होंने अपनी कृतियों के जरिए युवाओं के अंदर देश प्रेम की भावना जगाई। आजादी की लड़ाई के दौरान इनके द्वारा लिखा गया गीत सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है, जोर कितना बाजुए कातिल में है, युवाओं की जुबान पर था। उन्होंने अपने गीत के जरिए अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लड़ने का आह्वान किया था। राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त ने अपनी रचनाओं के जरिए आजादी के मतवालों में जोश भरने का काम किया था। उन्होंने राष्ट्रीयता का प्रचार-प्रसार कर भारत के रणबांकुरों को स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बहुत सरल शब्दों में देश के लोगों की चेतना को झकझोर कर रख दिया था। उनकी देश भक्ति की कविताओं को लोग आज भी पढ़कर रोमांचित हो उठते हैं। आजादी की लड़ाई में भारतेंदु हरिश्चंद्र ने अहम भूमिका निभाई थी। जहां देश में अनेक मोर्चों पर लोग आजादी के लिए संघर्षरत थे। उन्होंने साहित्य के माध्यम से बड़े साहित्यकारों को इस दिशा में एकजुट किया था। इनके द्वारा रचित भारत दर्शन देश प्रेम की भावना से ओत प्रोत थी। उन्होंने अग्रेजों द्वारा देश की जनता पर किए जा रहे जुल्मों का जमकर विरोध किया था। उन्होंने 'अंधेर नगरी चौपट राजा' नामक व्यंग्य के जरिए राजाओं की निरंकुशता और ब्रिटिश सरकार के जुल्मों का सटीक वर्णन किया था। मुंशी प्रेमचंद्र ने अपनी कृतियों के माध्यम से देश के लोगों को अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ जागृत किया था। प्रेमचंद ने अपनी रचनाओं के माध्यम से देश की जनता में ऐसा जन-जागरण का अलख जगाया कि वह अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ हुंकार भरने लगी। उनकी 'रंगभूमि' और 'कर्मभूमि' उपन्यास देश प्रेम की भावना से ओत-प्रोत था। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने भी अपनी रचनाओं के जरिए अंग्रेजी हुकूमत की जड़ें हिलाकर रख दी थीं। इन्हें आधुनिक युग के श्रेष्ठ वीर रस के कवि के रूप में भी जाना जाता है। दिनकर ने अपनी रचनाओं के जरिए अग्रेंजों द्वारा भारतीय जनता पर किए जा जुल्म का जमकर विरोध किया था। इन्हें विद्रोही कवि के रूप में भी जाना जाता था। माखनलाल चतुर्वेदी एक कवि, लेखक, पत्रकार स्वतंत्रता सेनानी। आजादी की लड़ाई में माखनलाल चतुर्वेदी का भी योगदान है। उनकी कविताओं में उनके देश प्रेम की भावना बहुत अच्छे से दिखाई देती है। उन्होंने अपनी कविताओं से युवाओं के दिलों में देश प्रेम की भावना जागृत किया था। प्रभा और कर्मवीर नाम के प्रचलित पत्र में उन्होंने संपादन किया था। अपने इस पत्र के माध्यम से उन्होंने ब्रिटिश शासन जमकर विरोध किया। मोहम्मद इकबाल ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ मुस्लिम समाज को जगाया और क्रांति के लिए प्रेरणा दी। इनके द्वारा रचित 'सारे जहां से अच्छा हिदुस्तां हमारा' ने आजादी की लड़ाई लड़ रहे युवाओं में जोश भर दिया था।
भूपेंद्र राय/नई दिल्ली। पंद्रह अगस्त के दिन देश पचहत्तरवां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है। भारत को आजाद कराने में अनगिनत आजादी के दीवानों ने बड़ी-बड़ी कुर्बानियां दी हैं। आजादी की लड़ाई में केवल नेताओं, स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों ने ही भाग नहीं लिया था, बल्कि लेखकों और कवियों ने भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया था। अंग्रेजों को भगाने में कलमकारों ने बखूबी भूमिका निभाई। उन्होंने अपने शब्दों से क्रांतिकारियों से लेकर देश के आम लोगों के अंदर जोश भरा। दरअसल, स्वतंत्रता आंदोलन को अहिंसक बनाए रखने के गांधी के संकल्प की वजह से भारत में आजादी की अधिकतर लड़ाई कलम से लड़ी गई। यह कलम ही थी, जिसने जनमानस को सचेत किया। एक तरफ जहां लेखक और साहित्यकारों ने वंदे मातरम् जैसी महान और अमर रचनाओं से आजादी की लड़ाई में नई जान फूंकी तो वहीं दूसरी तरफ कवियों ने अपने शब्दों से युवाओं के अंदर आजादी का जोश भरने का काम किया। इस खबर में हम आपके लिए उन कवियों और लेखकों के बारे में जानकारी दे रहे हैं, जिन्होंने कलम के जरिए देश की स्वतंत्रता में अपने-अपने स्तर पर योगदान दिया है। एशिया के पहले नोबेल पुरस्कार विजेता कविगुरु रवीन्द्रनाथ टैगोर का आजादी की लड़ाई में अहम योगदान रहा है। उन्होंने राष्ट्रीय गान 'जन गण मन' लिखा। इसके साथ ही उन्होंने अपनी कविताओं और रचनाओं के जरिए देश के युवाओं में देश प्रेम की भावना जागृत किया। उन्होंने जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में नाइटहुड की उपाधि त्याग दी थी। आजादी की लड़ाई में बंकिम चंद्र चटर्जी का खास योगदान है। भारत के राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के रचयिता और बंगाल के लोकप्रिय उपन्यासकार बंकिम चंद्र चटर्जी ने अपनी रचनाओं के माध्यम से अंग्रेजों की नाक में दम कर दिया था। एक हज़ार आठ सौ चौहत्तर में इनके द्वारा लिखा गया देश प्रेम से ओत-प्रोत गीत वंदे मातरम् भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान क्रांतिकारियों का प्रेरणा स्रोत और मुख्य उद्घोष बन गया था। इस गीत ने देश के लोगों की रगों में उबाल ला दिया था। राष्ट्र प्रेम प्रेरक महिलाओं में सुभद्रा कुमार चौहान का नाम बड़े ही आदर और सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में बढ़-चढ़कर भाग लिया था। सुभद्रा ने स्वतंत्रता संग्राम में भगत सिंह और अन्य क्रांतिकारियों के साथ मिलकर काम किया। वह मूलतः कवि थी। इन्हें क्रांति गीत लिखना बेहद पंसद था। तत्कालीन पत्र -पत्रिकाओं में उग्र रचनाएं छापकर वे देशवासियों के विद्रोह की भावना को जागृत करने का प्रयास करती थीं। इन्होंने झांसी की रानी लक्ष्मी बाई पर ऐतिहासिक कविता लिखी थी। काकोरी कांड के नायक राम प्रसाद बिस्मिल का आजादी में अहम योगदान है। उन्होंने अपनी कृतियों के जरिए युवाओं के अंदर देश प्रेम की भावना जगाई। आजादी की लड़ाई के दौरान इनके द्वारा लिखा गया गीत सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है, जोर कितना बाजुए कातिल में है, युवाओं की जुबान पर था। उन्होंने अपने गीत के जरिए अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लड़ने का आह्वान किया था। राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त ने अपनी रचनाओं के जरिए आजादी के मतवालों में जोश भरने का काम किया था। उन्होंने राष्ट्रीयता का प्रचार-प्रसार कर भारत के रणबांकुरों को स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बहुत सरल शब्दों में देश के लोगों की चेतना को झकझोर कर रख दिया था। उनकी देश भक्ति की कविताओं को लोग आज भी पढ़कर रोमांचित हो उठते हैं। आजादी की लड़ाई में भारतेंदु हरिश्चंद्र ने अहम भूमिका निभाई थी। जहां देश में अनेक मोर्चों पर लोग आजादी के लिए संघर्षरत थे। उन्होंने साहित्य के माध्यम से बड़े साहित्यकारों को इस दिशा में एकजुट किया था। इनके द्वारा रचित भारत दर्शन देश प्रेम की भावना से ओत प्रोत थी। उन्होंने अग्रेजों द्वारा देश की जनता पर किए जा रहे जुल्मों का जमकर विरोध किया था। उन्होंने 'अंधेर नगरी चौपट राजा' नामक व्यंग्य के जरिए राजाओं की निरंकुशता और ब्रिटिश सरकार के जुल्मों का सटीक वर्णन किया था। मुंशी प्रेमचंद्र ने अपनी कृतियों के माध्यम से देश के लोगों को अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ जागृत किया था। प्रेमचंद ने अपनी रचनाओं के माध्यम से देश की जनता में ऐसा जन-जागरण का अलख जगाया कि वह अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ हुंकार भरने लगी। उनकी 'रंगभूमि' और 'कर्मभूमि' उपन्यास देश प्रेम की भावना से ओत-प्रोत था। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने भी अपनी रचनाओं के जरिए अंग्रेजी हुकूमत की जड़ें हिलाकर रख दी थीं। इन्हें आधुनिक युग के श्रेष्ठ वीर रस के कवि के रूप में भी जाना जाता है। दिनकर ने अपनी रचनाओं के जरिए अग्रेंजों द्वारा भारतीय जनता पर किए जा जुल्म का जमकर विरोध किया था। इन्हें विद्रोही कवि के रूप में भी जाना जाता था। माखनलाल चतुर्वेदी एक कवि, लेखक, पत्रकार स्वतंत्रता सेनानी। आजादी की लड़ाई में माखनलाल चतुर्वेदी का भी योगदान है। उनकी कविताओं में उनके देश प्रेम की भावना बहुत अच्छे से दिखाई देती है। उन्होंने अपनी कविताओं से युवाओं के दिलों में देश प्रेम की भावना जागृत किया था। प्रभा और कर्मवीर नाम के प्रचलित पत्र में उन्होंने संपादन किया था। अपने इस पत्र के माध्यम से उन्होंने ब्रिटिश शासन जमकर विरोध किया। मोहम्मद इकबाल ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ मुस्लिम समाज को जगाया और क्रांति के लिए प्रेरणा दी। इनके द्वारा रचित 'सारे जहां से अच्छा हिदुस्तां हमारा' ने आजादी की लड़ाई लड़ रहे युवाओं में जोश भर दिया था।
कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सियासी उथल-पुथल थम गई है. बीएस यदियुरप्पा के इस्तीफे के बाद सबकी नजर इस बात पर थी कि सूबे का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा. अब मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान कर दिया गया है. बासवराज बोम्मई को राज्य के अगले मुख्यमंत्री के रूप में चुना गया है. मंगलवार (27 जुलाई) को विधायक दल की बैठक में उनके नाम पर मुहर लगा दी गई. बोम्मई के सीएम बनने का प्रस्ताव खुद, कार्यवाहक सीएम बीएस येडियुरप्पा ने रखा. खबर ये भी है कि राज्य में तीन डिप्टी सीएम भी बनाए जा सकते हैं. बताया जा रहा है कि बासवराज बोम्मई आज यानी बुधवार को सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. फिलहाल वह कर्नाटक के गृह मंत्री हैं. आज उनकी मुख्यमंत्री के रूप में ताजपोशी होगी. राज्य के कार्यवाहक सीएम बीएस येदियुरप्पा ने सोमवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था. इसके एक दिन बाद ही नए सीएम का ऐलान कर दिया गया. बासवराज बोम्मई येदियुरप्पा के करीबी माने जा रहे हैं. येदियुरप्पा की तरह ही बीजेपी ने एक बार फिर नए मुख्यमंत्री के रूप में लिंगायत समुदाय को ही चुना है. बोम्मई भी इसी समुदाय से आते हैं. यह माना जा रहा था कि नेतृत्व में बदलाव के लिए बीजेपी अपनी कोर वोट बैंक लिंगायत समुदाय को दरकिनार नहीं कर सकती है. इस समुदाय की आबादी राज्य की जनसंख्या का करीब 17 फीसदी है. येदियुरप्पा के हटाए जाने के बाद लिंगायत समुदाय बड़े स्तर पर पार्टी के फैसले का विरोध कर रही थी. बता दें कि येदियुरप्पा की सरकार में बोम्मई गृह, कानून, संसदीय मामलों एवं विधायी कार्य मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे और और साथ ही हावेरी और उडुपी जिलों के प्रभारी मंत्री भी है. येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली सरकार में बोम्मई को शुरू में गृह मंत्रालय का प्रभार दिया गया और बाद में कुछ महीनों पहले हुए मंत्रिमंडल फेरबदल में उन्हें कानून, संसदीय मामलों और विधायी कार्य मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी सौंप दी गई.
कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी की सियासी उथल-पुथल थम गई है. बीएस यदियुरप्पा के इस्तीफे के बाद सबकी नजर इस बात पर थी कि सूबे का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा. अब मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान कर दिया गया है. बासवराज बोम्मई को राज्य के अगले मुख्यमंत्री के रूप में चुना गया है. मंगलवार को विधायक दल की बैठक में उनके नाम पर मुहर लगा दी गई. बोम्मई के सीएम बनने का प्रस्ताव खुद, कार्यवाहक सीएम बीएस येडियुरप्पा ने रखा. खबर ये भी है कि राज्य में तीन डिप्टी सीएम भी बनाए जा सकते हैं. बताया जा रहा है कि बासवराज बोम्मई आज यानी बुधवार को सुबह ग्यारह बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. फिलहाल वह कर्नाटक के गृह मंत्री हैं. आज उनकी मुख्यमंत्री के रूप में ताजपोशी होगी. राज्य के कार्यवाहक सीएम बीएस येदियुरप्पा ने सोमवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था. इसके एक दिन बाद ही नए सीएम का ऐलान कर दिया गया. बासवराज बोम्मई येदियुरप्पा के करीबी माने जा रहे हैं. येदियुरप्पा की तरह ही बीजेपी ने एक बार फिर नए मुख्यमंत्री के रूप में लिंगायत समुदाय को ही चुना है. बोम्मई भी इसी समुदाय से आते हैं. यह माना जा रहा था कि नेतृत्व में बदलाव के लिए बीजेपी अपनी कोर वोट बैंक लिंगायत समुदाय को दरकिनार नहीं कर सकती है. इस समुदाय की आबादी राज्य की जनसंख्या का करीब सत्रह फीसदी है. येदियुरप्पा के हटाए जाने के बाद लिंगायत समुदाय बड़े स्तर पर पार्टी के फैसले का विरोध कर रही थी. बता दें कि येदियुरप्पा की सरकार में बोम्मई गृह, कानून, संसदीय मामलों एवं विधायी कार्य मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे और और साथ ही हावेरी और उडुपी जिलों के प्रभारी मंत्री भी है. येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली सरकार में बोम्मई को शुरू में गृह मंत्रालय का प्रभार दिया गया और बाद में कुछ महीनों पहले हुए मंत्रिमंडल फेरबदल में उन्हें कानून, संसदीय मामलों और विधायी कार्य मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी सौंप दी गई.
Don't Miss Out on the Latest Updates. Subscribe to Our Newsletter Today! क्या आपको मालूम है कि 300 से अधिक एंजाइम और हार्मोन के काम करने के लिए ज़िंक कितना ज़रूरी है? ज़िंक का अनुकूल स्तर मीठा खाने की ललक को नियंत्रित करता है और इसके कई और फायदे भी हैं। डायटीशियन और स्पोर्ट्स न्यूट्रीशनिस्ट दीपशिखा अग्रवाल कहती हैं कि ज़िंकयुक्त चीज़ें खाने से अर्थराइटिस के दर्द में भी आराम मिलता है। ज़िक कैसे करता है मदद? रूमेटाइड अर्थराइटिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर के जोड़ों में इनफ्लेमेशन हो जाता है। हड्डियों का मिनरलाइज़ेशन (mineralisation) करने के लिए ज़िंक ज़रूरी तत्व है और इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए भी ये सहायक है। एक अध्ययन में इस बात का संकेत दिया है कि मेनोपॉज़ होने के बाद जो महिलाएं अधिक मात्रा में ज़िंक लेती हैं उनका अर्थराइटिस (ख़ासतौर पर रूमेटाइड अर्थराइटिस) का जोखिम कम हो जाता है। ज़िंक एक एंटीऑक्सीडेंट के रूप में भी काम करता है जो फ्री रैडिकल को कम करने में सहायक होते हैं। फ्री रैडिकल इनफ्लेमेशन और बड़ी गंभीर बीमारियों के कारक हो सकते हैं। एक अन्य अध्ययन में ज़िंक के निम्न स्तर और ऑस्टियोपरॉसिस के बीच संबंध स्थापित किया गया है। ये इस बात की ओर संकेत करता है कि ज़िंक की खुराक बढ़ाने से हड्डियों की मज़बूती पर अच्छा असर पड़ता जिससे कि अर्थराइटिस के लक्षण कम होते हैं। (इसे भी पढ़ें - इन लक्षणों से करें अर्थराइटिस की पहचान) ज़िंक सप्लीमेंट लेना हमेशा ज़रूरी नहीं होता। आप अपने खानपान में थोड़े बदलाव लाकर भी अपनी ज़िंक की आवश्यकता पूरी कर सकते हैं। खाने में अदरक, तोफू, पालक आदि शामिल करने से आपको अर्थराइटिस के दर्द में राहत महसूस होगी। बिना डॉक्टर या डायटीशियन की सलाह के ज़िंक सप्लीमेंट न लें। संदर्भः 1. Mierzecki, A. , Strecker, D. , & Radomska, K. (2011). A pilot study on zinc levels in patients with rheumatoid arthritis. Biological trace element research,143(2), 854-862. 2. Mutlu, M. , Argun, M. , Kilic, E. , Saraymen, R. , & Yazar, S. (2007). Magnesium, zinc and copper status in osteoporotic, osteopenic and normal post-menopausal women. Journal of International Medical Research, 35(5), 692-695.
Don't Miss Out on the Latest Updates. Subscribe to Our Newsletter Today! क्या आपको मालूम है कि तीन सौ से अधिक एंजाइम और हार्मोन के काम करने के लिए ज़िंक कितना ज़रूरी है? ज़िंक का अनुकूल स्तर मीठा खाने की ललक को नियंत्रित करता है और इसके कई और फायदे भी हैं। डायटीशियन और स्पोर्ट्स न्यूट्रीशनिस्ट दीपशिखा अग्रवाल कहती हैं कि ज़िंकयुक्त चीज़ें खाने से अर्थराइटिस के दर्द में भी आराम मिलता है। ज़िक कैसे करता है मदद? रूमेटाइड अर्थराइटिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर के जोड़ों में इनफ्लेमेशन हो जाता है। हड्डियों का मिनरलाइज़ेशन करने के लिए ज़िंक ज़रूरी तत्व है और इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए भी ये सहायक है। एक अध्ययन में इस बात का संकेत दिया है कि मेनोपॉज़ होने के बाद जो महिलाएं अधिक मात्रा में ज़िंक लेती हैं उनका अर्थराइटिस का जोखिम कम हो जाता है। ज़िंक एक एंटीऑक्सीडेंट के रूप में भी काम करता है जो फ्री रैडिकल को कम करने में सहायक होते हैं। फ्री रैडिकल इनफ्लेमेशन और बड़ी गंभीर बीमारियों के कारक हो सकते हैं। एक अन्य अध्ययन में ज़िंक के निम्न स्तर और ऑस्टियोपरॉसिस के बीच संबंध स्थापित किया गया है। ये इस बात की ओर संकेत करता है कि ज़िंक की खुराक बढ़ाने से हड्डियों की मज़बूती पर अच्छा असर पड़ता जिससे कि अर्थराइटिस के लक्षण कम होते हैं। ज़िंक सप्लीमेंट लेना हमेशा ज़रूरी नहीं होता। आप अपने खानपान में थोड़े बदलाव लाकर भी अपनी ज़िंक की आवश्यकता पूरी कर सकते हैं। खाने में अदरक, तोफू, पालक आदि शामिल करने से आपको अर्थराइटिस के दर्द में राहत महसूस होगी। बिना डॉक्टर या डायटीशियन की सलाह के ज़िंक सप्लीमेंट न लें। संदर्भः एक. Mierzecki, A. , Strecker, D. , & Radomska, K. . A pilot study on zinc levels in patients with rheumatoid arthritis. Biological trace element research,एक सौ तैंतालीस, आठ सौ चौवन-आठ सौ बासठ. दो. Mutlu, M. , Argun, M. , Kilic, E. , Saraymen, R. , & Yazar, S. . Magnesium, zinc and copper status in osteoporotic, osteopenic and normal post-menopausal women. Journal of International Medical Research, पैंतीस, छः सौ बानवे-छः सौ पचानवे.
भोरंज - उपमंडल भोरंज के अधिकतर बैंकों की एटीएम से छुट्टी के दिन रुपए नहीं निकले। क्षेत्र में लगभग डेढ़ दर्जन के करीब एटीएम बैंकों द्वारा लगाई गई हैं, लेकिन इनमें से केवल इक्का दुक्का एटीएम की सुविधा ही लोगों को मिल पाई है। इसके अलावा बाकी की एटीएम या तो सर्वर डाउन या फिर कंपनी द्वारा कैश न डालने की वजह से सेवाएं नहीं दे पा रही हैं। इस कारण क्षेत्र के लोगों को एटीएम की सुविधा नहीं मिल पा रही है। उपभोक्ता एटीएम से रुपए निकालने के लिए एटीएम की चक्कर काटकर कर थक चुके हैं। दिन भर भटकने के बाद भी लोगों को कैश नसीब नहीं हो पा रहा है। उपमंडल भोरंज के भरेड़ी में स्थापित एकमात्र एटीएम में कभी-कभार ही पैसे पड़ते हैं। नोटबंदी के बाद इस एटीएम की लोगों को सुविधा न के बराबर है। हालांकि रविवार को एटीएम तो खुला था, लेकिन इसमें कैश नहीं था। पीएनबी की एटीएम जाहू में लोगों को कैश नहीं मिला। कैश न होने की वजह से लोग इस एटीएम में नहीं दिखाई दिए। जो लोग एटीएम से रुपए निकलवाने के लिए पहुंचे, उन्हें मायूस लौटना पड़ा। जाहू की बैंक ऑफ बड़ौदा एटीएम में दिन भर सन्नाटा पसरा रहा। एटीएम में कैश न होने के चलते लोग दरवाजे से निराश होकर ही वापस लौट गए। लोग बैंक वालों और सरकार को कोसते नजर आए। यूको बैंक एटीएम भोरंज (बस्सी) में रविवार को रुपए निकालने की सुविधा नहीं मिली। रुपए न होने के कारण लोगों को निराशा हाथ लगी। जाहू में स्थापित केसीसी बैंक की एटीएम भी रविवार को कैशलैस हो गई। हालांकि बीते शनिवार को इस एटीएम में रुपए निकालने की सुविधा लोगों को मिली। रविवार को लोग एटीएम से निराश लौटे। उपमंडल भोरंज के मुख्य कस्बे बस्सी में पीएनबी एटीएम बंद दिखी। रविवार को यह एटीएम पार्किंग स्थल बनी रही। कैश न होने के कारण लोग यहां से निराश होकर लौटे। पीएनबी खरवाड़ की एटीएम में पैसे न निकलने से लोग निराश थे। एटीएम बंद थी और महिलाएं एटीएम के बाहर बैठी शायद बस का इंतजार कर रही थीं।
भोरंज - उपमंडल भोरंज के अधिकतर बैंकों की एटीएम से छुट्टी के दिन रुपए नहीं निकले। क्षेत्र में लगभग डेढ़ दर्जन के करीब एटीएम बैंकों द्वारा लगाई गई हैं, लेकिन इनमें से केवल इक्का दुक्का एटीएम की सुविधा ही लोगों को मिल पाई है। इसके अलावा बाकी की एटीएम या तो सर्वर डाउन या फिर कंपनी द्वारा कैश न डालने की वजह से सेवाएं नहीं दे पा रही हैं। इस कारण क्षेत्र के लोगों को एटीएम की सुविधा नहीं मिल पा रही है। उपभोक्ता एटीएम से रुपए निकालने के लिए एटीएम की चक्कर काटकर कर थक चुके हैं। दिन भर भटकने के बाद भी लोगों को कैश नसीब नहीं हो पा रहा है। उपमंडल भोरंज के भरेड़ी में स्थापित एकमात्र एटीएम में कभी-कभार ही पैसे पड़ते हैं। नोटबंदी के बाद इस एटीएम की लोगों को सुविधा न के बराबर है। हालांकि रविवार को एटीएम तो खुला था, लेकिन इसमें कैश नहीं था। पीएनबी की एटीएम जाहू में लोगों को कैश नहीं मिला। कैश न होने की वजह से लोग इस एटीएम में नहीं दिखाई दिए। जो लोग एटीएम से रुपए निकलवाने के लिए पहुंचे, उन्हें मायूस लौटना पड़ा। जाहू की बैंक ऑफ बड़ौदा एटीएम में दिन भर सन्नाटा पसरा रहा। एटीएम में कैश न होने के चलते लोग दरवाजे से निराश होकर ही वापस लौट गए। लोग बैंक वालों और सरकार को कोसते नजर आए। यूको बैंक एटीएम भोरंज में रविवार को रुपए निकालने की सुविधा नहीं मिली। रुपए न होने के कारण लोगों को निराशा हाथ लगी। जाहू में स्थापित केसीसी बैंक की एटीएम भी रविवार को कैशलैस हो गई। हालांकि बीते शनिवार को इस एटीएम में रुपए निकालने की सुविधा लोगों को मिली। रविवार को लोग एटीएम से निराश लौटे। उपमंडल भोरंज के मुख्य कस्बे बस्सी में पीएनबी एटीएम बंद दिखी। रविवार को यह एटीएम पार्किंग स्थल बनी रही। कैश न होने के कारण लोग यहां से निराश होकर लौटे। पीएनबी खरवाड़ की एटीएम में पैसे न निकलने से लोग निराश थे। एटीएम बंद थी और महिलाएं एटीएम के बाहर बैठी शायद बस का इंतजार कर रही थीं।
23 सितम्बर 1990 सम्पादकीयसाप्ताहिक मार्य मर्यादा जामम्बर। यह आर्य समाज के लिए एक चुनौती है (3) हमारे शास्त्रों ने मानव जाति को चार भागों में बांटा था, सत्रिय, वैश्य और सूड और इन चारों के जिम्मे कुछ काम लगाए थे। ब्राह्मण के जिम्मे पढ़ने-बढ़ाने का, शिव के जिम्मे राम करने और देश की रक्षा करने का, वैश्य के लिए, व्यापार और उद्योग के विस्तार के द्वारा स्वयं भी धन कमाना और देश के कोव के लिए भी रूपया देने का चूह के जिम्मे समाज की सेवा करने का। · बह एक Division of Labour बर्षात् काम-काज का विभाजन था। समाज के र प्रकार के लोगों के जिम्मे चार काम लगा दिए गए थे। इसी के साथ प्रत्येक व्यक्ति की यह अनुमति थी कि वह अपने परिश्रम और योग्यता से एक दायरा से निकल कर दूसरे में जा सकता था। एक काम को छोड़ कर दूसरा शुरू कर सकता था। आज का ब्राह्मण कल को क्षत्रिय बन सकता था और आज का क्षत्रिय कल को ब्राह्मण भी बन सकता था। जैसा कि महर्षि श्वामित्र के सम्बन्ध में कहा जाता है । इनका जन्म एक क्षत्रिय परिवार में हुआ था। परन्तु फिर वह ब्राह्मण बन गए। महात्मा विदुर का जन्म एक पिछड़ी जाति में हुमा बा, परन्तु वह अपने समय के सबसे बड़े राजनीतिज्ञ थे। इसलिए महाराज मृतराष्ट्र मे इन्हें अपना प्रधानमन्त्री बनाया था। कहते हैं कि महर्षि वाल्मीकि का जन्म भी एक पिछड़े परिवार में हुआ था, परन्तु उनका दर्जा उस समय के ब्राह्मण से भी ऊंचा था और आज भी है । निष्कर्ष यह है कि समाज के प्रबन्ध जिसे वर्ण व्यवस्था का नाम दिया गया है इसके द्वारा हमारे समाज को पार भागों में बांटने का काम था और प्रत्येक के जिम्मे कुछ काम लगाए गए थे। शूद्रों के जिम्मे समाज सेवा का काम था। जिन्हें शूद्र कहा जाता है या जो अपने आपको शूद्र कहते हैं उनकी तुलना मनुष्य के पांव से की जाती है। जिन चार वर्ण के आधार पर समाज को बांटा गया है। उनमें ब्राह्मण का वही स्थान होता है जो एक व्यक्ति के शरीर में सिर का या उसके दिमाग का होता है। क्षत्रिय का वह स्थान है जो एक मनुष्य की दो बाजुओं का होता है । अर्थात् अपने शरीर की रक्षा करना। वैश्य वह जो कि एक व्यक्ति के शरीर में जो कुछ जाता है वह पहले पेट में एकत्रित होता है। वहां से फिर सारे शरीर में जाता है और शूद्र की वह ही जगह होती है जो एक व्यक्ति के शरीर में उसके पैरों की होती है। परन्तु हम यह भी जानते हैं कि एक मनुष्य के दो पैरों की भी पूजा होती है। इनके बिना कोई मनुष्य चल नहीं सकता। इसलिए जब किसी बुजुर्ग को, किसी नेता को, किसी साधू संन्यासी को मिलना हो तो पहले उसके पैरों को हाथ लगाते हैं। कई लोग उनके पैरों की धूली अपने सिर पर लगाते हैं और बब किसी बुजुर्ग को, नेता को, साधू संन्यासी को पत्र लिखा जाता है तो इसको चरम बन्धना से प्रारम्भ किया जाता है, जिसका वर्ष है कि जिस प्रकार एक मनुष्य के शरीर में उसके दो पांवों का विशेष महत्व है उसी प्रकार एक समाज में शूद्र का विशेष महत्व है। मैं इसे देश का दुर्भाग्य समझता हूं कि बाब जो लोग अपने आपको शूद्र समझते हैं या समझे जाते हैं। इनमें यह एहसास पैदा हो गया है कि वो इस दायरे में से निकलने का प्रयास ही नहीं करते। हालांकि हमारे शास्त्रों के अनुसार जो माज सूद्र है वो कल को बाह्मण, क्षत्रिय या गं भी बन सकता है और जो माग ब्राह्मण या है की कल को अपनी कार्यपद्धति से शूद्र बन सकता है। पहले इनके लिए साढ़े 22 प्रतिशत नौकरियां सुरक्षित की गई थी, अब प्रधानमन्त्री ने कहा है कि 27 प्रतिशत इनके अतिरिक्त इनके लिए होंगी। जिन्हें पहली सूची में शामिल नहीं किया गया। इसी के साथ 10 प्रतिशत इनके लिए सुरक्षित कर दी जाएंगी जो आर्थिक रूप में पिछड़े हैं। इसका अर्थ है कि जिन 52 प्रतिशत लोगों के लिए पहले सरकारी नौकरियां सुरक्षित हो चुकी हैं वह तीन हजार से अधिक वर्गों में बांटी जाएंगी, क्योंकि मंडल आयोग के अनुसार इन पिछड़ी जातियों की संख्या तीन हजार से ज्यादा है। हमारे शास्त्रों में हमारे समाज को केवल चार मार्गों में बांटा था और के जिस्मे विशेष काम सवाया था, लेकिन हमारी सरकार ने जिन्हें पिछड़ी है और उन्हें ही तीन हजार से ज्यादा मानों में बांट दिया है। मैंने शुरू में लिखा था कि मंडल परिषद् की सिफारिशों के राजनीतिक पथ पर मैं बहस करना नहीं चाहता। हमारे सामने इसका सामाजिक और धार्मिक पक्ष है। मैं इसे आर्य समाज के लिए एक चुनौती समझता हूं तो केवल इसलिए कि बार्य समाज जिस जात पात के विरुद्ध विगत एक सौ वर्ष से सङ्घर्ष करता आ रहा है बाज की सरकार इसी जात-पात ओर जात विरादरी को फिर से जीवित कर रही है। इसने एक ऐसी स्थिति उत्पन्न कर दी है कि कल को हिन्दू ही वापस में लड़ने लगेंगे। देश में गृह युद्ध का वातावरण पैदा हो रहा है, जब गांधी जी ने समाज के पिछड़े वर्ग के उद्धार के लिए अपना आन्दोलन शुरू किया था तो उन्होंने भी महर्षि दयानन्द को श्रद्धांजलि पेश की थी और कहा था कि उनके आदेश पर आर्य समाज ने इस देश में छूतछात को खत्म करने के लिए सबसे ज्यादा कोशिश की है। आर्य समाज को इसमें कोई रुचि नहीं कि किस को कितनी सरकारी नौकरियां मिलती हैं। आर्य समाज केवल यह चाहता है कि जात-पात को लानत समाप्त हो । इस देश के सब लोग प्रत्येक दृष्टि से बराबर समझे जाए। सामाजिक और राजनीतिक रूप में भी जिन्हें पिछड़ा या शूद्र कहा जाता है उन्हें भी यह अधिकार हो कि वह ऊचे से ऊचे पद पर पहुंच सके। इस देश में उत्पन्न होने वाले किसी भी व्यक्ति की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक उन्नति के मार्ग में कोई जात विरादरी नहीं बानी चाहिए । सबको एक जैसे और बराबर के अधिकार हों। यह है भार्य समाज का दृष्टिकोण। जिसके लिए वो पहले भी संघर्ष करता रहा है और आगे भविष्य में भी करता रहेगा। - वीरेन्द्र कार्यकर्त्ता सम्मेलन स्थगित आर्य प्रतिनिधि सभा पंजाब की अन्तरंग सभा ने यह निर्णय किया था कि पंजाब की आर्य समाओं के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का एक सम्मेलन किया जाए, जहां पंजाब में आर्य समाज की समस्याओं पर विचार किया जाए। इसके लिए तिथि 29 सितम्बर, 1990 निश्चित की गई थी। यह सम्मेलन दो दिन के लिये लुधियाना में होना था। यह तिथि निश्चित करते समय सभा के अधिकारी यह भूल गये कि 29 सितम्बर को विजय दशमी (दशहरा) है । उस दिन यह सम्मेलन करना सम्भव न होगा । इसलिये उसे अभी स्थगित किया जा रहा है। मगामी तिथियां शीघ्र ही निश्चित करके आर्य जनता को सूचित कर दिया जायेगा। हम यह अवश्य चाहते हैं कि बायं प्रतिनिधि सभा से सम्बन्धित समाज के अधिक से अधिक प्रतिनिधि वहां आयें। आपस मे बैठ कर हमे पंजाब की वर्तमान स्थिति पर विचार विमर्श करना चाहिये । इससे इन्कार नहीं किया जा सकता कि पंजाब की स्थिति इस समय अत्यन्त गम्भीर है। ऐसा ही वह समय होता है जब आपस में बैठ कर यह विचार करने की आवश्यकता होती है कि हम आगे क्या करें । मेरा यह भी विश्वास है कि पंजाब की आर्य समाजों में ऐसे बहुत से महानुभाव हैं जो वर्तमान परिस्थिति पर गम्भीरता से विचार करके कोई निर्णय ले सकते हैं। इसलिये पंजाब की आर्य समाजो को इस सम्मेलन में अधिक से अधिक अपने प्रतिनिधि भेजने चाहिएं। इसका सारा प्रबन्ध करने के पश्चात् पुनः सब आर्य समाजों को सूचित कर दिया जायेगा। जाता है वार्य समाज के अधिकारी महानुभाव इस ओर विशेष ध्यान देंगे ।
तेईस सितम्बर एक हज़ार नौ सौ नब्बे सम्पादकीयसाप्ताहिक मार्य मर्यादा जामम्बर। यह आर्य समाज के लिए एक चुनौती है हमारे शास्त्रों ने मानव जाति को चार भागों में बांटा था, सत्रिय, वैश्य और सूड और इन चारों के जिम्मे कुछ काम लगाए थे। ब्राह्मण के जिम्मे पढ़ने-बढ़ाने का, शिव के जिम्मे राम करने और देश की रक्षा करने का, वैश्य के लिए, व्यापार और उद्योग के विस्तार के द्वारा स्वयं भी धन कमाना और देश के कोव के लिए भी रूपया देने का चूह के जिम्मे समाज की सेवा करने का। · बह एक Division of Labour बर्षात् काम-काज का विभाजन था। समाज के र प्रकार के लोगों के जिम्मे चार काम लगा दिए गए थे। इसी के साथ प्रत्येक व्यक्ति की यह अनुमति थी कि वह अपने परिश्रम और योग्यता से एक दायरा से निकल कर दूसरे में जा सकता था। एक काम को छोड़ कर दूसरा शुरू कर सकता था। आज का ब्राह्मण कल को क्षत्रिय बन सकता था और आज का क्षत्रिय कल को ब्राह्मण भी बन सकता था। जैसा कि महर्षि श्वामित्र के सम्बन्ध में कहा जाता है । इनका जन्म एक क्षत्रिय परिवार में हुआ था। परन्तु फिर वह ब्राह्मण बन गए। महात्मा विदुर का जन्म एक पिछड़ी जाति में हुमा बा, परन्तु वह अपने समय के सबसे बड़े राजनीतिज्ञ थे। इसलिए महाराज मृतराष्ट्र मे इन्हें अपना प्रधानमन्त्री बनाया था। कहते हैं कि महर्षि वाल्मीकि का जन्म भी एक पिछड़े परिवार में हुआ था, परन्तु उनका दर्जा उस समय के ब्राह्मण से भी ऊंचा था और आज भी है । निष्कर्ष यह है कि समाज के प्रबन्ध जिसे वर्ण व्यवस्था का नाम दिया गया है इसके द्वारा हमारे समाज को पार भागों में बांटने का काम था और प्रत्येक के जिम्मे कुछ काम लगाए गए थे। शूद्रों के जिम्मे समाज सेवा का काम था। जिन्हें शूद्र कहा जाता है या जो अपने आपको शूद्र कहते हैं उनकी तुलना मनुष्य के पांव से की जाती है। जिन चार वर्ण के आधार पर समाज को बांटा गया है। उनमें ब्राह्मण का वही स्थान होता है जो एक व्यक्ति के शरीर में सिर का या उसके दिमाग का होता है। क्षत्रिय का वह स्थान है जो एक मनुष्य की दो बाजुओं का होता है । अर्थात् अपने शरीर की रक्षा करना। वैश्य वह जो कि एक व्यक्ति के शरीर में जो कुछ जाता है वह पहले पेट में एकत्रित होता है। वहां से फिर सारे शरीर में जाता है और शूद्र की वह ही जगह होती है जो एक व्यक्ति के शरीर में उसके पैरों की होती है। परन्तु हम यह भी जानते हैं कि एक मनुष्य के दो पैरों की भी पूजा होती है। इनके बिना कोई मनुष्य चल नहीं सकता। इसलिए जब किसी बुजुर्ग को, किसी नेता को, किसी साधू संन्यासी को मिलना हो तो पहले उसके पैरों को हाथ लगाते हैं। कई लोग उनके पैरों की धूली अपने सिर पर लगाते हैं और बब किसी बुजुर्ग को, नेता को, साधू संन्यासी को पत्र लिखा जाता है तो इसको चरम बन्धना से प्रारम्भ किया जाता है, जिसका वर्ष है कि जिस प्रकार एक मनुष्य के शरीर में उसके दो पांवों का विशेष महत्व है उसी प्रकार एक समाज में शूद्र का विशेष महत्व है। मैं इसे देश का दुर्भाग्य समझता हूं कि बाब जो लोग अपने आपको शूद्र समझते हैं या समझे जाते हैं। इनमें यह एहसास पैदा हो गया है कि वो इस दायरे में से निकलने का प्रयास ही नहीं करते। हालांकि हमारे शास्त्रों के अनुसार जो माज सूद्र है वो कल को बाह्मण, क्षत्रिय या गं भी बन सकता है और जो माग ब्राह्मण या है की कल को अपनी कार्यपद्धति से शूद्र बन सकता है। पहले इनके लिए साढ़े बाईस प्रतिशत नौकरियां सुरक्षित की गई थी, अब प्रधानमन्त्री ने कहा है कि सत्ताईस प्रतिशत इनके अतिरिक्त इनके लिए होंगी। जिन्हें पहली सूची में शामिल नहीं किया गया। इसी के साथ दस प्रतिशत इनके लिए सुरक्षित कर दी जाएंगी जो आर्थिक रूप में पिछड़े हैं। इसका अर्थ है कि जिन बावन प्रतिशत लोगों के लिए पहले सरकारी नौकरियां सुरक्षित हो चुकी हैं वह तीन हजार से अधिक वर्गों में बांटी जाएंगी, क्योंकि मंडल आयोग के अनुसार इन पिछड़ी जातियों की संख्या तीन हजार से ज्यादा है। हमारे शास्त्रों में हमारे समाज को केवल चार मार्गों में बांटा था और के जिस्मे विशेष काम सवाया था, लेकिन हमारी सरकार ने जिन्हें पिछड़ी है और उन्हें ही तीन हजार से ज्यादा मानों में बांट दिया है। मैंने शुरू में लिखा था कि मंडल परिषद् की सिफारिशों के राजनीतिक पथ पर मैं बहस करना नहीं चाहता। हमारे सामने इसका सामाजिक और धार्मिक पक्ष है। मैं इसे आर्य समाज के लिए एक चुनौती समझता हूं तो केवल इसलिए कि बार्य समाज जिस जात पात के विरुद्ध विगत एक सौ वर्ष से सङ्घर्ष करता आ रहा है बाज की सरकार इसी जात-पात ओर जात विरादरी को फिर से जीवित कर रही है। इसने एक ऐसी स्थिति उत्पन्न कर दी है कि कल को हिन्दू ही वापस में लड़ने लगेंगे। देश में गृह युद्ध का वातावरण पैदा हो रहा है, जब गांधी जी ने समाज के पिछड़े वर्ग के उद्धार के लिए अपना आन्दोलन शुरू किया था तो उन्होंने भी महर्षि दयानन्द को श्रद्धांजलि पेश की थी और कहा था कि उनके आदेश पर आर्य समाज ने इस देश में छूतछात को खत्म करने के लिए सबसे ज्यादा कोशिश की है। आर्य समाज को इसमें कोई रुचि नहीं कि किस को कितनी सरकारी नौकरियां मिलती हैं। आर्य समाज केवल यह चाहता है कि जात-पात को लानत समाप्त हो । इस देश के सब लोग प्रत्येक दृष्टि से बराबर समझे जाए। सामाजिक और राजनीतिक रूप में भी जिन्हें पिछड़ा या शूद्र कहा जाता है उन्हें भी यह अधिकार हो कि वह ऊचे से ऊचे पद पर पहुंच सके। इस देश में उत्पन्न होने वाले किसी भी व्यक्ति की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक उन्नति के मार्ग में कोई जात विरादरी नहीं बानी चाहिए । सबको एक जैसे और बराबर के अधिकार हों। यह है भार्य समाज का दृष्टिकोण। जिसके लिए वो पहले भी संघर्ष करता रहा है और आगे भविष्य में भी करता रहेगा। - वीरेन्द्र कार्यकर्त्ता सम्मेलन स्थगित आर्य प्रतिनिधि सभा पंजाब की अन्तरंग सभा ने यह निर्णय किया था कि पंजाब की आर्य समाओं के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का एक सम्मेलन किया जाए, जहां पंजाब में आर्य समाज की समस्याओं पर विचार किया जाए। इसके लिए तिथि उनतीस सितम्बर, एक हज़ार नौ सौ नब्बे निश्चित की गई थी। यह सम्मेलन दो दिन के लिये लुधियाना में होना था। यह तिथि निश्चित करते समय सभा के अधिकारी यह भूल गये कि उनतीस सितम्बर को विजय दशमी है । उस दिन यह सम्मेलन करना सम्भव न होगा । इसलिये उसे अभी स्थगित किया जा रहा है। मगामी तिथियां शीघ्र ही निश्चित करके आर्य जनता को सूचित कर दिया जायेगा। हम यह अवश्य चाहते हैं कि बायं प्रतिनिधि सभा से सम्बन्धित समाज के अधिक से अधिक प्रतिनिधि वहां आयें। आपस मे बैठ कर हमे पंजाब की वर्तमान स्थिति पर विचार विमर्श करना चाहिये । इससे इन्कार नहीं किया जा सकता कि पंजाब की स्थिति इस समय अत्यन्त गम्भीर है। ऐसा ही वह समय होता है जब आपस में बैठ कर यह विचार करने की आवश्यकता होती है कि हम आगे क्या करें । मेरा यह भी विश्वास है कि पंजाब की आर्य समाजों में ऐसे बहुत से महानुभाव हैं जो वर्तमान परिस्थिति पर गम्भीरता से विचार करके कोई निर्णय ले सकते हैं। इसलिये पंजाब की आर्य समाजो को इस सम्मेलन में अधिक से अधिक अपने प्रतिनिधि भेजने चाहिएं। इसका सारा प्रबन्ध करने के पश्चात् पुनः सब आर्य समाजों को सूचित कर दिया जायेगा। जाता है वार्य समाज के अधिकारी महानुभाव इस ओर विशेष ध्यान देंगे ।
टाटा समूह की एयरलाइन चालक दल के सदस्यों समेत अपने कमर्चारियों के लिए इस साल जून में वीआरएस लेकर आई थी। इस योजना को अपनाने वालों को कार्यमुक्त करने की तरीख 30 नवंबर तय की गई थी। सूत्रों ने बताया कि करीब 4,500 कर्मचारियों ने योजना के लिए आवेदन किया था। एयरलाइन ने वीआरएस अपनाने वाले कर्मियों को कार्यमुक्ति की तीन तारीख दी हैं, जो 30 नवंबर, एक दिसंबर और 31 जनवरी 2023 हैं। इसके लिए कर्मियों को 22 नवंबर तक अपनी कार्यमुक्ति की तारीख की पुष्टि करनी होगी। सूत्रों ने बताया कि एयर इंडिया वीआरएस योजना की वजह से चालक दल की कमी की गंभीर समस्या से जूझ रही है और एयरलाइन को 500 केबिन क्रू सदस्यों की जरूरत है। इसके अलावा अमेरिकी वीजा के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है, जिसकी वजह से मौजूदा कर्मियों के सेवाकाल में विस्तार देने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है।
टाटा समूह की एयरलाइन चालक दल के सदस्यों समेत अपने कमर्चारियों के लिए इस साल जून में वीआरएस लेकर आई थी। इस योजना को अपनाने वालों को कार्यमुक्त करने की तरीख तीस नवंबर तय की गई थी। सूत्रों ने बताया कि करीब चार,पाँच सौ कर्मचारियों ने योजना के लिए आवेदन किया था। एयरलाइन ने वीआरएस अपनाने वाले कर्मियों को कार्यमुक्ति की तीन तारीख दी हैं, जो तीस नवंबर, एक दिसंबर और इकतीस जनवरी दो हज़ार तेईस हैं। इसके लिए कर्मियों को बाईस नवंबर तक अपनी कार्यमुक्ति की तारीख की पुष्टि करनी होगी। सूत्रों ने बताया कि एयर इंडिया वीआरएस योजना की वजह से चालक दल की कमी की गंभीर समस्या से जूझ रही है और एयरलाइन को पाँच सौ केबिन क्रू सदस्यों की जरूरत है। इसके अलावा अमेरिकी वीजा के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है, जिसकी वजह से मौजूदा कर्मियों के सेवाकाल में विस्तार देने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है।
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। आदर्श गैस के तापमान का सैद्धान्तिक आधार अणुगति सिद्धान्त से मिलता है। तापमान किसी वस्तु की उष्णता की माप है। अर्थात्, तापमान से यह पता चलता है कि कोई वस्तु ठंढी है या गर्म। उदाहरणार्थ, यदि किसी एक वस्तु का तापमान 20 डिग्री है और एक दूसरी वस्तु का 40 डिग्री, तो यह कहा जा सकता है कि दूसरी वस्तु प्रथम वस्तु की अपेक्षा गर्म है। एक अन्य उदाहरण - यदि बंगलौर में, 4 अगस्त 2006 का औसत तापमान 29 डिग्री था और 5 अगस्त का तापमान 32 डिग्री; तो बंगलौर, 5 अगस्त 2006 को, 4 अगस्त 2006 की अपेक्षा अधिक गर्म था। गैसों के अणुगति सिद्धान्त के विकास के आधार पर यह माना जाता है कि किसी वस्तु का ताप उसके सूक्ष्म कणों (इलेक्ट्रॉन, परमाणु तथा अणु) के यादृच्छ गति (रैण्डम मोशन) में निहित औसत गतिज ऊर्जा के समानुपाती होता है। तापमान अत्यन्त महत्वपूर्ण भौतिक राशि है। प्राकृतिक विज्ञान के सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों (भौतिकी, रसायन, चिकित्सा, जीवविज्ञान, भूविज्ञान आदि) में इसका महत्व दृष्टिगोचर होता है। इसके अलावा दैनिक जीवन के सभी पहलुओं पर तापमान का महत्व है। . विभिन्न ब्रांडों के चार सिगार (ऊपर सेः एच. अपमैन, मोंटेक्रिस्टो, माकानुडो, रोमियो वाय जुलिएट) एक -सेमीएयरटाईट सिगार संग्रहण ट्यूब और एक डबल गिलोटिन-स्टाइल कटर सिगार सूखे और किण्वित तम्बाकू का कसकर-लपेटा गया एक बंडल होता है जिसको जलाकर उसके धुंए का कश मुंह के अंदर खींचा जाता है। सिगार का तम्बाकू ब्राज़ील, कैमरून, क्यूबा, डोमिनिकन गणराज्य, होंडुरास, इंडोनेशिया, मैक्सिको, निकारागुआ, फिलीपींस और पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका में काफी मात्रा में उगाया जाता है। . तापमान और सिगार आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)। तापमान 12 संबंध है और सिगार 62 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (12 + 62)। यह लेख तापमान और सिगार के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। आदर्श गैस के तापमान का सैद्धान्तिक आधार अणुगति सिद्धान्त से मिलता है। तापमान किसी वस्तु की उष्णता की माप है। अर्थात्, तापमान से यह पता चलता है कि कोई वस्तु ठंढी है या गर्म। उदाहरणार्थ, यदि किसी एक वस्तु का तापमान बीस डिग्री है और एक दूसरी वस्तु का चालीस डिग्री, तो यह कहा जा सकता है कि दूसरी वस्तु प्रथम वस्तु की अपेक्षा गर्म है। एक अन्य उदाहरण - यदि बंगलौर में, चार अगस्त दो हज़ार छः का औसत तापमान उनतीस डिग्री था और पाँच अगस्त का तापमान बत्तीस डिग्री; तो बंगलौर, पाँच अगस्त दो हज़ार छः को, चार अगस्त दो हज़ार छः की अपेक्षा अधिक गर्म था। गैसों के अणुगति सिद्धान्त के विकास के आधार पर यह माना जाता है कि किसी वस्तु का ताप उसके सूक्ष्म कणों के यादृच्छ गति में निहित औसत गतिज ऊर्जा के समानुपाती होता है। तापमान अत्यन्त महत्वपूर्ण भौतिक राशि है। प्राकृतिक विज्ञान के सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों में इसका महत्व दृष्टिगोचर होता है। इसके अलावा दैनिक जीवन के सभी पहलुओं पर तापमान का महत्व है। . विभिन्न ब्रांडों के चार सिगार एक -सेमीएयरटाईट सिगार संग्रहण ट्यूब और एक डबल गिलोटिन-स्टाइल कटर सिगार सूखे और किण्वित तम्बाकू का कसकर-लपेटा गया एक बंडल होता है जिसको जलाकर उसके धुंए का कश मुंह के अंदर खींचा जाता है। सिगार का तम्बाकू ब्राज़ील, कैमरून, क्यूबा, डोमिनिकन गणराज्य, होंडुरास, इंडोनेशिया, मैक्सिको, निकारागुआ, फिलीपींस और पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका में काफी मात्रा में उगाया जाता है। . तापमान और सिगार आम में शून्य बातें हैं । तापमान बारह संबंध है और सिगार बासठ है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख तापमान और सिगार के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
Winter Makeup Hacks Hindi : आप अगर अपनी स्किन रिक्वायरमेंट के हिसाब से अपने मेकअप में चीजें एड करते हैं, तो आपका मेकअप नेचुरल लगता है। आइए, जानते हैं ऐसे ही कुछ अमेजिंग मेकअप हैक्स। आपको अगर लॉन्ग लास्टिंग फाउंंडेशन चाहिए, तो आप चेहरे पर थोड़ा ऑयल भी अप्लाई करें। इसके बाद ही फाउंडेशन चेहरे पर अप्लाई करें। इससे सर्दियों के मौसम में आपकी स्किन ड्राय नहीं होगी और मेकअप भी टिका रहेगा। अपनी आईब्रो को अच्छी तरह से हाइलाइट करने के लिए ग्लिसरीन वाले साबुन से आईब्रोज सेट करें। इससे आपकी आईब्रोज काफी घनी नजर आएंगी। याद रखें कि यह हैक सिर्फ सर्दियों के मौसम में ही करें। गर्मियों में पसीने की वजह से आईब्रो चिपचिपी हो सकती है। आपको अगर अपने गाल पिंक दिखाने हैं, तो इसके लिए थोड़ा-सा पिंक लिपग्लॉस काफी है। आप मेकअप करने के बाद थोड़ा-सा लिपग्लॉस गालों पर लगाकर ब्लेंड कर लें। आपके ब्लश वाले गाल रेडी हैं। आप फाउंडेशन लगाने से पहले अगर चेहरे पर मेकअप स्प्रे करेंगे, तो इससे आपका मेकअप काफी लम्बे समय तक टिका रहेगा। वहीं, आपकी स्किन पर पोर्स भी कम नजर आएंगे।
Winter Makeup Hacks Hindi : आप अगर अपनी स्किन रिक्वायरमेंट के हिसाब से अपने मेकअप में चीजें एड करते हैं, तो आपका मेकअप नेचुरल लगता है। आइए, जानते हैं ऐसे ही कुछ अमेजिंग मेकअप हैक्स। आपको अगर लॉन्ग लास्टिंग फाउंंडेशन चाहिए, तो आप चेहरे पर थोड़ा ऑयल भी अप्लाई करें। इसके बाद ही फाउंडेशन चेहरे पर अप्लाई करें। इससे सर्दियों के मौसम में आपकी स्किन ड्राय नहीं होगी और मेकअप भी टिका रहेगा। अपनी आईब्रो को अच्छी तरह से हाइलाइट करने के लिए ग्लिसरीन वाले साबुन से आईब्रोज सेट करें। इससे आपकी आईब्रोज काफी घनी नजर आएंगी। याद रखें कि यह हैक सिर्फ सर्दियों के मौसम में ही करें। गर्मियों में पसीने की वजह से आईब्रो चिपचिपी हो सकती है। आपको अगर अपने गाल पिंक दिखाने हैं, तो इसके लिए थोड़ा-सा पिंक लिपग्लॉस काफी है। आप मेकअप करने के बाद थोड़ा-सा लिपग्लॉस गालों पर लगाकर ब्लेंड कर लें। आपके ब्लश वाले गाल रेडी हैं। आप फाउंडेशन लगाने से पहले अगर चेहरे पर मेकअप स्प्रे करेंगे, तो इससे आपका मेकअप काफी लम्बे समय तक टिका रहेगा। वहीं, आपकी स्किन पर पोर्स भी कम नजर आएंगे।
हिमाचल के कुल्लू से करीब 8 किलोमीटर दूर शमशी और असपास के क्षेत्र में मंगलवार यानी 2 अगस्त को बिजली आपूर्ति बंद रहेगी। वन विभाग द्वारा चिनार के पेड़ों को काटने का काम किया जाएगा। बोर्ड ने लोगों से सहयोग की अपील की है। बिजली बोर्ड के सहायक अभियंता E जितेंद्र ठाकुर ने बताया कि वन विभाग शमशी द्वारा चिनार के पेड़ों के काटने संबंधी कार्य किया जाएगा। जिसके चलते 11 KV मौहल फीडर के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र औद्योगिक क्षेत्र शमशी, मौहल चौक, जिया, पिरडी, नारयनी, नाग मंदिर, SSB सब्जी मंडी भुंतर और संध्या पैलेस के आसपास के सभी इलाकों मे 2 अगस्त को सुबह 10 से शाम 6 बजे तक या कार्य पूर्ण होने तक विद्युत आपूर्ति बाधित रहेगी। अगर उपरोक्त तिथि को मौसम खराब या बारिश होगी तो यह कार्य अगले दिन किया जाएगा। इसके लिए उन्होंने क्षेत्र की समस्त जनता से सहयोग की अपील की है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
हिमाचल के कुल्लू से करीब आठ किलोग्राममीटर दूर शमशी और असपास के क्षेत्र में मंगलवार यानी दो अगस्त को बिजली आपूर्ति बंद रहेगी। वन विभाग द्वारा चिनार के पेड़ों को काटने का काम किया जाएगा। बोर्ड ने लोगों से सहयोग की अपील की है। बिजली बोर्ड के सहायक अभियंता E जितेंद्र ठाकुर ने बताया कि वन विभाग शमशी द्वारा चिनार के पेड़ों के काटने संबंधी कार्य किया जाएगा। जिसके चलते ग्यारह KV मौहल फीडर के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र औद्योगिक क्षेत्र शमशी, मौहल चौक, जिया, पिरडी, नारयनी, नाग मंदिर, SSB सब्जी मंडी भुंतर और संध्या पैलेस के आसपास के सभी इलाकों मे दो अगस्त को सुबह दस से शाम छः बजे तक या कार्य पूर्ण होने तक विद्युत आपूर्ति बाधित रहेगी। अगर उपरोक्त तिथि को मौसम खराब या बारिश होगी तो यह कार्य अगले दिन किया जाएगा। इसके लिए उन्होंने क्षेत्र की समस्त जनता से सहयोग की अपील की है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
प्रिलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? हाल ही में चीन और पाकिस्तान ने युद्धग्रस्त देश को आतंकवाद का केंद्र बनने से रोकने के लिये अफगानिस्तान में संयुक्त कार्रवाई शुरू करने का फैसला किया है। - अफगानिस्तान से हाल ही में अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद देश भर में तालिबान का तेज़ी से विस्तार हुआ है। - संयुक्त कार्रवाईः इसे पाँच क्षेत्रों में रेखांकित किया गया हैः - युद्ध के विस्तार से बचने और अफगानिस्तान में बड़े पैमाने पर गृहयुद्ध की स्थिति को रोकने के लिये। - सरकार और तालिबान के बीच अंतर-अफगान वार्ता को बढ़ावा देना तथा "एक व्यापक एवं समावेशी राजनीतिक संरचना" स्थापित करना। - आतंकवादी ताकतों का डटकर मुकाबला करना और अफगानिस्तान में सभी प्रमुख ताकतों को आतंकवाद के खिलाफ एक स्पष्ट रेखा खींचने के लिये प्रेरित करना। - अफगानिस्तान के पड़ोसियों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना और उनके बीच सहयोग के लिये एक मंच के निर्माण का पता लगाना। - अफगान मुद्दे पर अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर मिलकर काम करना। - पाकिस्तान में आतंकवादः - पाकिस्तान, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को लेकर चिंतित है, जो कई सालों से देश के खिलाफ विद्रोह कर रहा है। - उइगर उग्रवादियों में वृद्धिः - चीन शिनजियांग प्रांत के उइगर उग्रवादियों के फिर से संगठित होने से चिंतित है, जो पूर्वी तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट (ETIM) के तत्वावधान में काम करते हैं, इसे लेकर बीजिंग का आरोप है कि उसके अल-कायदा के साथ संबंध हैं। - संयुक्त राष्ट्र की एनालिटिकल सपोर्ट एंड सेंक्शन मॉनीटरिंग टीम की हाल ही में जारी 12वीं रिपोर्ट ने अफगानिस्तान में ईटीआईएम आतंकवादियों की मौजूदगी की पुष्टि की है। - चीन शिनजियांग प्रांत के उइगर उग्रवादियों के फिर से संगठित होने से चिंतित है, जो पूर्वी तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट (ETIM) के तत्वावधान में काम करते हैं, इसे लेकर बीजिंग का आरोप है कि उसके अल-कायदा के साथ संबंध हैं। - आर्थिक हितः - अगर अफगानिस्तान में हालात और बिगड़ते हैं तो पाकिस्तान के साथ-साथ चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) भी खतरे में पड़ जाएगा। साथ ही अफगानिस्तान और पाकिस्तान में कई अन्य चीनी परियोजनाओं को भी खतरा होगा। - पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के ऊपरी कोहिस्तान ज़िले के दसू इलाके में चीनी इंजीनियरों को ले जा रही एक शटल बस पर हाल ही में एक बम हमला हुआ था, यहाँ एक चीनी कंपनी सिंधु नदी पर 4320 मेगावाट क्षमता का बाँध बना रही है। - भारत ने सीपीईसी का विरोध किया है, जो पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (पीओके) से होकर गुज़रता है, हालाँकि चीन ने परियोजनाओं को आगे बढ़ाया है और पीओके में अपना निवेश बढ़ाया है। - अगर अफगानिस्तान में हालात और बिगड़ते हैं तो पाकिस्तान के साथ-साथ चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) भी खतरे में पड़ जाएगा। साथ ही अफगानिस्तान और पाकिस्तान में कई अन्य चीनी परियोजनाओं को भी खतरा होगा। - अफगानिस्तानी स्थिति की पृष्ठभूमिः - 11 सितंबर, 2001 को अमेरिका में हुए आतंकवादी हमलों (9/11) में लगभग 3,000 लोग मारे गए थे। - इस्लामिक आतंकवादी समूह अल-कायदा के प्रमुख ओसामा बिन लादेन को इसके लिये दोषी माना गया। - तालिबान, कट्टरपंथी इस्लामवादी, जो उस समय अफगानिस्तान में सक्रिय थे, ने बिन लादेन की रक्षा की और उसे सौंपने से इनकार कर दिया। इसलिये 9/11 के बाद अमेरिका ने अफगानिस्तान (ऑपरेशन एंड्योरिंग फ्रीडम) के खिलाफ हवाई हमले शुरू किये। - हमलों के बाद उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) गठबंधन सैनिकों ने अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ युद्ध की घोषणा की। - अमेरिका ने तालिबान शासन को उखाड़ फेंका और अफगानिस्तान में एक संक्रमणकालीन सरकार की स्थापना की। - जुलाई 2021 में अमेरिकी सैनिकों ने 20 साल के लंबे युद्ध के बाद अफगानिस्तान के सबसे बड़े एयरबेस से देश में अपने सैन्य अभियानों को प्रभावी ढंग से समाप्त करने की घोषणा की। - अमेरिका की वापसी ने तालिबान के पक्ष में युद्ध के मैदान में शक्ति संतुलन को बदल दिया है। - 11 सितंबर, 2001 को अमेरिका में हुए आतंकवादी हमलों (9/11) में लगभग 3,000 लोग मारे गए थे। - भारत के हितः - निवेशः - अफगानिस्तान में अपने अरबों के निवेश की रक्षा करना। - तालिबानः - भविष्य के तालिबान शासन को पाकिस्तान का मोहरा बनने से रोकना। - पाकिस्तान के आतंकी केंद्रः - यह सुनिश्चित करना कि पाकिस्तान समर्थित भारत विरोधी आतंकवादी समूहों को तालिबान का समर्थन न मिले। - निवेशः आगे की राहः - भारत की अफगान नीति एक ऐसी स्थिति में हैं; अफगानिस्तान में और उसके आसपास हो रहे 'ग्रेट गेम' में अपनी संपत्ति की सुरक्षा के साथ-साथ प्रासंगिक बने रहने के लिये भारत को अपनी अफगानिस्तान नीति को मौलिक रूप से पुनर्परिभाषित करना होगा। - भारत को अपने फैसलों का पुनर्मूल्यांकन करने की ज़रूरत है और अफगानिस्तान के भविष्य के लिये सभी केंद्रीय ताकतों से निपटने हेतु अपने दृष्टिकोण को अधिक सर्वव्यापी बनाना होगा। - इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, भारत को अपने राष्ट्रीय हित के मद्देनज़र तालिबान के साथ 'खुली बातचीत' शुरू करनी चाहिये क्योंकि असामंजस्य वाले आधे-अधूरे बैकचैनल परिचर्चाओं का समय समाप्त हो गया है। - बदलती राजनीतिक व सुरक्षा स्थिति के लिये भारत को अपनी अधिकतमवादी स्थिति को अपनाने तथा तालिबान के साथ बातचीत शुरू करने के लिये और अधिक खुलेपन की नीति पर विचार करना होगा। प्रिलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? हाल ही में संसद ने नौचालन के लिये सामुद्रिक सहायता विधेयक, 2021 पारित किया है। यह विधेयक प्रकाश स्तंभ अधिनियम, 1927 को निरस्त कर उसका स्थान लेगा, जो कि पारंपरिक नौवहन सहायता यानी लाइटहाउस को नियंत्रित करने वाला नौ दशक पुराना कानून है। - अब तक भारत में सुरक्षित नेविगेशन हेतु लाइटहाउस और लाइटशिप का प्रशासन एवं प्रबंधन प्रकाश स्तंभ अधिनियम, 1927 द्वारा शासित है। - प्रकाश स्तंभ दो मुख्य उद्देश्यों- नौवहन सहायता के रूप में और नौकाओं को खतरनाक क्षेत्रों की चेतावनी देने का काम करते हैं। - यह समुद्र पर यातायात संकेत की तरह है। - हालाँकि जैसे-जैसे तकनीक विकसित हुई, वैसे-वैसे सिस्टम लगाए गए और रडार एवं अन्य सेंसर की मदद से जहाज़ों को स्थिति के बारे में सलाह दी जाने लगी। - इस प्रकार पोत यातायात सेवा (VTS) अस्तित्व में आई और इसे व्यापक स्वीकार्यता मिली। - समुद्री नौवहन प्रणालियों के लिये इन आधुनिक व तकनीकी रूप से बेहतर सेवाओं ने उनकी स्थिति को 'निष्क्रिय' सेवा से 'इंटरैक्टिव' सेवा में बदल दिया है। - इसे एक उपयुक्त वैधानिक ढाँचा प्रदान करने के लिये नए अधिनियम की आवश्यकता है जो नेविगेशन के लिये समुद्री सहायता की आधुनिक भूमिका को दर्शाता है और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों के तहत भारत के दायित्वों का अनुपालन करता है। विधेयक की मुख्य विशेषताएँः - वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं और तकनीकी विकास को शामिल करना। - नौचालन के लिये सामुद्रिक सहायता के क्षेत्र में भारत के अंतर्राष्ट्रीय दायित्वों का समायोजन करना। - विधायी ढाँचे को उपयोगकर्त्ता के अनुकूल बनाना। - व्यापकता व सुगमता को बढ़ावा देना। - कानून का दायराः यह विधेयक क्षेत्रीय जल, महाद्वीपीय शेल्फ और विशेष आर्थिक क्षेत्र सहित समग्र भारत पर लागू होता है। - परिभाषित तंत्रः यह 'नेविगेशन के लिये सहायता' को एक उपकरण, प्रणाली या सेवा के रूप में परिभाषित करता है, जिसे जहाज़ों के बाह्य स्वरुप, व्यक्तिगत जहाज़ों और पोत यातायात के सुरक्षित एवं कुशल नेविगेशन को बढ़ावा देने के लिये डिज़ाइन और संचालित किया जाता है। - पोत यातायात सेवा का अर्थ पोत यातायात की सुरक्षा और दक्षता में सुधार एवं पर्यावरण की रक्षा के लिये अधिनियम के तहत लागू की गई सेवा है। - संस्थागत तंत्रः विधेयक में प्रावधान है कि केंद्र सरकार एक महानिदेशक की नियुक्ति करेगी, जो नेविगेशन में सहायता से संबंधित मामलों पर केंद्र सरकार को सलाह देगा। - यह ज़िला स्तर के लिये उप-महानिदेशकों और निदेशकों की नियुक्ति का भी प्रावधान करता है। - हेरिटेज लाइटहाउसः विधेयक केंद्र सरकार को अपने नियंत्रण में नेविगेशन के लिये किसी भी सहायता को 'विरासत लाइटहाउस' के रूप में नामित करने का अधिकार देता है। - नौवहन सहायक के रूप में उनके कार्य के अलावा ऐसे प्रकाश स्तंभ शैक्षिक, सांस्कृतिक और पर्यटन उद्देश्यों के लिये विकसित किये जाएंगे। - अपराध और दंडः इसमें अपराधों की एक नई अनुसूची शामिल है, साथ ही नेविगेशन में सहायता को बाधित करने और नुकसान पहुँचाने तथा केंद्र सरकार एवं अन्य निकायों द्वारा जारी निर्देशों का पालन न करने पर दंड का प्रावधान भी किया गया है। - इसमें नौचालन के लिये सहायता एवं पोत परिवहन सेवाओं से संबद्ध मामलों हेतु बेहतर कानूनी ढाँचा और समुद्री नौचालन के क्षेत्र में भावी विकास शामिल है। - नौवहन की सुरक्षा एवं दक्षता बढ़ाने और पर्यावरण को संरक्षित करने के लिये पोत परिवहन सेवाओं का प्रबंधन। - अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप 'नौचालन के लिये सहायता' और पोत परिवहन सेवाओं के ऑपरेटरों हेतु प्रशिक्षण तथा प्रमाणन के माध्यम से कौशल विकास। - वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण और प्रमाणन की ज़रूरतों को पूरा करने के लिये संबद्ध संस्थानों की लेखापरीक्षा एवं प्रत्यायन। - सुरक्षित और प्रभावी नौचालन के उद्देश्य से डूबे हुए/फँसे हुए जहाज़ों की पहचान करने के लिये जल में "मलबे" को चिह्नित करना। - शिक्षा, संस्कृति और पर्यटन के उद्देश्य से प्रकाश स्तम्भों का विकास, जो कि तटीय क्षेत्रों की पर्यटन क्षमता का दोहन करते हुए उनकी अर्थव्यवस्था में योगदान देगा। स्रोतः पी.आई.बी. प्रिलिम्स लिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? हाल ही में यूनेस्को ने गुजरात के धौलावीरा शहर को भारत के 40वें विश्व धरोहर स्थल के रूप में घोषित किया है। यह प्रतिष्ठित सूची में शामिल होने वाली भारत में सिंधु घाटी सभ्यता ( Indus Valley Civilisation- IVC) की पहली साइट है। - इस सफल नामांकन के साथ भारत अब विश्व धरोहर स्थल शिलालेखों के लिये सुपर-40 क्लब (Super-40 Club for World Heritage Site Inscriptions) में प्रवेश कर गया है। - भारत के अलावा इटली, स्पेन, जर्मनी, चीन और फ्रांँस में 40 या अधिक विश्व धरोहर स्थल हैं। - भारत में कुल मिलाकर 40 विश्व धरोहर स्थल हैं, जिनमें 32 सांस्कृतिक, 7 प्राकृतिक और एक मिश्रित स्थल शामिल है। रामप्पा मंदिर (तेलंगाना) भारत का 39वांँ विश्व धरोहर स्थल था। धौलावीरा के बारे मेंः - यह दक्षिण एशिया में सबसे अनूठी और अच्छी तरह से संरक्षित शहरी बस्तियों में से एक है। - इसकी खोज वर्ष 1968 में पुरातत्त्वविद् जगतपति जोशी द्वारा की गई थी। - पाकिस्तान के मोहनजोदड़ो, गनेरीवाला और हड़प्पा तथा भारत के हरियाणा में राखीगढ़ी के बाद धौलावीरा सिंधु घाटी सभ्यता (IVC) का पांँचवा सबसे बड़ा महानगर है। - IVC जो कि आज पाकिस्तान और पश्चिमी भारत में पाई जाती है, लगभग 2,500 ईसा पूर्व दक्षिण एशिया के पश्चिमी भाग में फली-फूली। यह मूल रूप से एक शहरी सभ्यता थी तथा लोग सुनियोजित और अच्छी तरह से निर्मित कस्बों में रहते थे, जो व्यापार के केंद्र भी थे। - साइट में एक प्राचीन आईवीसी/हड़प्पा शहर के खंडहर हैं। इसके दो भाग हैंः एक चारदीवारी युक्त शहर और शहर के पश्चिम में एक कब्रिस्तान। - चारदीवारी वाले शहर में एक मज़बूत प्राचीर से युक्त एक दृढ़ीकृत गढ़/दुर्ग और अनुष्ठानिक स्थल तथा दृढ़ीकृत दुर्ग के नीचे एक शहर स्थित था। - गढ़ के पूर्व और दक्षिण में जलाशयों की एक शृंखला पाई जाती है। - धोलावीरा का प्राचीन शहर गुजरात राज्य के कच्छ ज़िले में एक पुरातात्त्विक स्थल है, जो ईसा पूर्व तीसरी से दूसरी सहस्राब्दी तक का है। - धौलावीरा कर्क रेखा पर स्थित है। - यह कच्छ के महान रण में कच्छ रेगिस्तान वन्यजीव अभयारण्य में खादिर बेट द्वीप पर स्थित है। - अन्य हड़प्पा पूर्वगामी शहरों के विपरीत, जो आमतौर पर नदियों और जल के बारहमासी स्रोतों के पास स्थित हैं, धौलावीरा खादिर बेट द्वीप पर स्थित है। - यह साइट विभिन्न खनिज और कच्चे माल के स्रोतों (तांबा, खोल, एगेट-कारेलियन, स्टीटाइट, सीसा, बैंडेड चूना पत्थर तथा अन्य) के दोहन हेतु महत्त्वपूर्ण थी। - इसने मगन (आधुनिक ओमान प्रायद्वीप) और मेसोपोटामिया क्षेत्रों में आंतरिक एवं बाहरी व्यापार को भी सुगम बनाया। पुरातात्त्विक परिणामः - यहाँ पाए गए कलाकृतियों में टेराकोटा मिट्टी के बर्तन, मोती, सोने और तांबे के गहने, मुहरें, मछलीकृत हुक, जानवरों की मूर्तियाँ, उपकरण, कलश एवं कुछ महत्त्वपूर्ण बर्तन शामिल हैं। - तांबे के स्मेल्टर या भट्टी के अवशेषों से संकेत मिलता है कि धौलावीरा में रहने वाले हड़प्पावासी धातु विज्ञान जानते थे। - ऐसा माना जाता है कि धौलावीरा के व्यापारी वर्तमान राजस्थान, ओमान तथा संयुक्त अरब अमीरात से तांबा अयस्क प्राप्त करते थे और निर्मित उत्पादों का निर्यात करते थे। - यह अगेट (Agate) की तरह कौड़ी (Shells) एवं अर्द्ध-कीमती पत्थरों से बने आभूषणों के निर्माण का भी केंद्र था तथा इमारती लकड़ी का निर्यात भी करता था। - सिंधु घाटी लिपि में निर्मित 10 बड़े पत्थरों के शिलालेख है, शायद यह दुनिया का सबसे पुराने साइन बोर्ड है। - प्राचीन शहर के पास एक जीवाश्म पार्क है जहाँ लकड़ी के जीवाश्म संरक्षित हैं। - अन्य IVC स्थलों पर कब्रों के विपरीत धौलावीरा में मनुष्यों के किसी भी नश्वर अवशेष की खोज नहीं की गई है। धौलावीरा स्थल की विशिष्ट विशेषताएँः - जलाशयों की व्यापक शृंखला। - बाहरी किलेबंदी। - दो बहुउद्देश्यीय मैदान, जिनमें से एक उत्सव के लिये और दूसरा बाज़ार के रूप में उपयोग किया जाता था। - अद्वितीय डिज़ाइन वाले नौ द्वार। - अंत्येष्टि वास्तुकला में ट्यूमुलस की विशेषता है - बौद्ध स्तूप जैसी अर्द्धगोलाकार संरचनाएँ। - बहुस्तरीय रक्षात्मक तंत्र, निर्माण और विशेष रूप से दफनाए जाने वाली संरचनाओं में पत्थर का व्यापक उपयोग। धौलावीरा का पतनः - इसका पतन मेसोपोटामिया के पतन के साथ ही हुआ, जो अर्थव्यवस्थाओं के एकीकरण का संकेत देता है। - हड़प्पाई, जो समुद्री लोग थे, ने मेसोपोटामिया के पतन के बाद एक बड़ा बाज़ार खो दिया जो इनके स्थानीय खनन, विनिर्माण, विपणन और निर्यात व्यवसायों को प्रभावित करते थे । - जलवायु परिवर्तन और सरस्वती जैसी नदियों के सूखने के कारण धौलावीरा को गंभीर शुष्कता का परिणाम देखना पड़ा। - सूखे जैसी स्थिति के कारण लोग गंगा घाटी की ओर या दक्षिण गुजरात की ओर तथा महाराष्ट्र से आगे की ओर पलायन करने लगे। - इसके अलावा कच्छ का महान रण, जो खादिर द्वीप के चारों ओर स्थित है और जिस पर धोलावीरा स्थित है, यहाँ पहले नौगम्य हुआ करता था, लेकिन समुद्र का जल धीरे-धीरे पीछे हट गया और रण क्षेत्र एक कीचड़ क्षेत्र बन गया। - लोथलः धौलावीरा की खुदाई से पहले अहमदाबाद ज़िले के ढोलका तालुका में साबरमती के तट पर सरगवाला गाँव में लोथल, गुजरात सबसे प्रमुख सिंधु घाटी स्थल था। - इसकी खुदाई वर्ष 1955-60 के बीच की गई थी और इसे प्राचीन सभ्यता का एक महत्त्वपूर्ण बंदरगाह शहर माना जाता था, जिसमें मिट्टी की ईंटों से बनी संरचनाएँ थीं। - लोथल के एक कब्रिस्तान से 21 मानव कंकाल मिले हैं। - यहाँ से तांबे के बर्तन की भी खोज की गई है। - इस स्थल से अर्द्ध-कीमती पत्थर, सोने आदि से बने आभूषण भी मिले हैं। - सुरेंद्रनगर ज़िले में भादर (Bhadar) नदी के तट पर स्थित रंगपुर, राज्य का पहला हड़प्पा स्थल था जिसकी खुदाई की गई थी। - राजकोट ज़िले में रोजड़ी, गिर सोमनाथ ज़िले में वेरावल के पास प्रभास। - जामनगर में लखबावल और कच्छ के भुज तालुका में देशलपार, राज्य के अन्य हड़प्पा स्थल हैं। - गुजरात में धौलावीरा के अलावा 3 अन्य यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हैं। चर्चा में क्यों? हाल ही में विज्ञान और पर्यावरण केंद्र (CSE) के सहयोग से राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) द्वारा 'गंगा बेसिन में शहरों को जल संवेदनशील' बनाने पर एक नई क्षमता निर्माण पहल का शुभारंभ किया गया। पहल के बारे मेंः - उद्देश्यः इस कार्यक्रम का उद्देश्य गंगा बेसिन शहरों में बेहतर नदी स्वास्थ्य के लिये स्थायी शहरी जल प्रबंधन को बढ़ावा देने हेतु क्षमता निर्माण तथा कार्रवाई व अनुसंधान करना है। - मुख्य केंद्रित क्षेत्र : - जल संवेदनशील शहरी डिज़ाइन और योजना। - शहरी जल दक्षता और संरक्षण। - विकेंद्रीकृत अपशिष्ट जल शोधन और स्थानीय रूप से इसका पुनः उपयोग। - शहरी भूजल प्रबंधन। - शहरी जल निकाय/झील प्रबंधन । - अभिसरण प्रयासः - इस पहल का उद्देश्य राष्ट्रीय प्रमुख शहरी मिशनों और अन्य मिशनों के साथ नमामि गंगे मिशन का अभिसरण सुनिश्चित करना है। - अमृत, स्मार्ट सिटीज़, स्वच्छ भारत मिशन, हृदय, राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन। - समस्त गंगा बेसिन राज्यों में राज्य/शहर स्तर पर अटल भूजल योजना, जल जीवन मिशन, जल शक्ति अभियान। - इस पहल का उद्देश्य राष्ट्रीय प्रमुख शहरी मिशनों और अन्य मिशनों के साथ नमामि गंगे मिशन का अभिसरण सुनिश्चित करना है। - हितधारकः यह कार्यक्रम सभी हितधारकों को जोड़ता है जिसमें शामिल हैंः - राज्य कार्यक्रम प्रबंधन समूह, नमामि गंगे (SPMGs), नगर निगम, तकनीकी और अनुसंधान स्थिरांक, अंतर्राष्ट्रीय संगठन तथा स्थानीय ज़मीनी स्तर के समुदाय। - जल संवेदनशील शहरी डिज़ाइन और योजना (WSUDP) : यह एक उभरता हुआ शहरी विकास प्रतिमान है जिसका उद्देश्य पर्यावरण पर शहरी विकास के जलविज्ञान (Hydrological) संबंधी प्रभावों को कम करना है। इनमें शामिल हैंः - जल के इष्टतम उपयोग के लिये शहरी क्षेत्रों की योजना बनाने और डिज़ाइन तैयार करने की विधि। - हमारी नदियों और खाड़ियों को होने वाले नुकसान को कम करना। - संपूर्ण जल प्रणालियों (पेयजल, तूफान के जल का बहाव, जलमार्ग का रखरखाव, सीवरेज शोधन और पुनर्चक्रण) के प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करना। अन्य संबंधित पहलेंः - नदी शहरों की योजना बनाने में एक आदर्श बदलाव आया है। - "रिवर सिटीज़ एलायंस" नदी बेसिन के शहरों के सतत् विकास और क्षमता निर्माण के माध्यम से सामूहिक रूप से नदी के कायाकल्प करने की दिशा में सहयोग के लिये एक अनूठा मंच प्रदान करेगा। - वर्षा जल संचयन के लिये शुरू की गई जल शक्ति मंत्रालय की 'कैच द रेन' पहल ने सभी हितधारकों को वर्षा जल संचयन संरचनाओं (Rain Water Harvesting Structures- RWHS) को जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल बनाने तथा वर्षा जल संचयन हेतु उप-भूमि स्तर को बनाए रखने के लिये प्रेरित किया है। - वर्षों से बारिश की तीव्रता में वृद्धि हुई है लेकिन बारिश के दिनों की संख्या में कमी देखी गई है, जिससे जल प्रबंधन एक महत्त्वपूर्ण विषय बन गया है। - वर्षा जल संचयन के लिये पारंपरिक ज्ञान का उपयोग करने की आवश्यकता है। - उदाहरण के लिये बिहार की अहार-पाइन प्रणाली (Ahar - Pyne system), राजस्थान के किलों में कुएँ और दक्षिण भारत के कैस्केड टैंक आदि। - शहरी निर्माण प्रतिरूप जिसमें भू-दृश्य और शहरी जल चक्र भी शामिल हैं के बीच एकीकरण के लिये एक रूपरेखा की आवश्यकता है। - नदियों की खराब स्थिति के लिये बड़े पैमाने पर शहरों को ज़िम्मेदार ठहराया गया है और इसलिये कायाकल्प के प्रयासों में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने की आवश्यकता होगी। - शहरों के लिये योजना बनाते समय नदी संवेदनशील दृष्टिकोण को मुख्यधारा में शामिल करने की आवश्यकता है। स्रोतः पी.आई.बी. प्रिलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? हाल ही में केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री ने राज्यसभा (Rajya Sabha) में कहा है कि सरकार ने डिजिटल बैंकिंग, डोरस्टेप बैंकिंग सेवाओं (Doorstep Banking Service) और डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म (Digital Lending Platform) की सुविधा के लिये कई कदम उठाए हैं। डिजिटल बैंकिंगः - यह उन सभी पारंपरिक बैंकिंग गतिविधियों, कार्यक्रमों व सेवाओं का डिजिटलीकरण है जो ऐतिहासिक रूप से केवल ग्राहकों के लिये तब उपलब्ध थे। - इसमें मनी डिपॉजिट, विदड्रॉल और ट्रांसफर, चेकिंग/सेविंग अकाउंट मैनेजमेंट, फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स के लिये अप्लाई करना, लोन मैनेजमेंट, बिल पे, अकाउंट सर्विसेज़ जैसी गतिविधियाँ शामिल हैं। - डिजिटल भुगतान को अपनाने में इंटरनेट का उपयोग ही एकमात्र बाधा नहीं है। - उपयोगकर्त्ताओं को शिक्षित करने के साथ-साथ उनके डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। प्रमुख पहलेंः - EASE सुधार एजेंडाः इसे सरकार और PSB द्वारा संयुक्त रूप से जनवरी 2018 में लॉन्च किया गया था। - इसे इंडियन बैंक्स एसोसिएशन के माध्यम से कमीशन (Commission) किया गया था और बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप द्वारा इसकी संकल्पना की गई थी। - EASE एजेंडा का उद्देश्य स्वच्छ और स्मार्ट बैंकिंग को संस्थागत बनाना है। - EASE रिफॉर्म्स इंडेक्सः इंडेक्स 120+ ओब्ज़ेक्टिव मेट्रिक्स (120+ Objective Metric) पर प्रत्येक PSB के प्रदर्शन को मापता है। इसका लक्ष्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्द्धा को प्रोत्साहित करके परिवर्तन को जारी रखना है। - EASE 1.0: इस रिपोर्ट ने पारदर्शी रूप से गैर-निष्पादित परिसंपतियों (Non Performing Asset- NPA) के समाधान में PSB के प्रदर्शन में महत्त्वपूर्ण सुधार दिखाया। - EASE 2.0: यह EASE 1.0 की नींव पर बना है और इसने सुधार यात्रा को अपरिवर्तनीय बनाने, प्रक्रियाओं एवं प्रणालियों को मज़बूत करने तथा परिणामों के संचालन के लिये छः विषयों में नए सुधार पेश किये। - EASE 2.0 के छः विषय हैंः उत्तरदायी बैंकिंग, ग्राहक प्रतिक्रिया, क्रेडिट ऑफ-टेक, उद्यमी मित्र के रूप में PSB (MSME के क्रेडिट प्रबंधन के लिये सिडबी पोर्टल), वित्तीय समावेशन और डिजिटलीकरण एवं शासन तथा मानव संसाधन। - Ease 3.0: यह प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुए सभी ग्राहक अनुभवों में बैंकिंग को आसान बनाने का प्रयास करता है जिनमें डायल-ए-लोन (Dial-a-loan), फिनटेक (Fintech) एवं ई-व्यापार कंपनियों से साझेदारी, क्रेडिट@क्लिक (Credit@Click), कृषि-ऋण में तकनीकी का प्रयोग, ईज़ बैंकिंग आउटलेट आदि शामिल हैं । - Ease 4.0: इस वित्तीय वर्ष में सुधार एजेंडे के हिस्से के रूप में Ease 4.0 को राज्य द्वारा संचालित बैंक गैर-बैंकिंग फर्मों के साथ सह-ऋण, डिजिटल कृषि वित्तपोषण, सहक्रियाओं और 24x7 बैंकिंग सुविधाओं के लिये तकनीकी लचीलापन पर ध्यान केंद्रित करने के लिये शुरू किया गया है। - PSBloansin59 minutes.com: - सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को ऋणों के लिये सैद्धांतिक रूप से ऑनलाइन अनुमोदन प्रदान करने हेतु क्रेडिट ब्यूरो, आयकर और वस्तु एवं सेवा कर (GST) डेटा के त्रिभुज का उपयोग करते हुए PSBloansin59minutes.com के माध्यम से डिजिटल ऋण की शुरुआत को संपर्क रहित बनाया गया है। - व्यापार प्राप्य बट्टाकरण/छूट प्रणाली (TReDS) प्लेटफॉर्म : - MSMEs के लिये ऑनलाइन बिल छूट को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSB) के माध्यम से TReDS प्लेटफॉर्म पर ऑनबोर्डिंग के ज़रिये प्रतिस्पर्द्धी आधार पर सक्षम किया गया है तथा ऑनलाइन रियायती बिलों का अनुपात तेज़ी से बढ़ा है। - बिल डिस्काउंटिंग या छूट एक व्यापारिक गतिविधि है जिसमें एक कंपनी के अवैतनिक चालान, जिन्हें भविष्य में भुगतान किया जाना है, एक फाइनेंसर (एक बैंक या अन्य वित्तीय संस्थान) को बेचे जाते हैं। - MSMEs के लिये ऑनलाइन बिल छूट को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSB) के माध्यम से TReDS प्लेटफॉर्म पर ऑनबोर्डिंग के ज़रिये प्रतिस्पर्द्धी आधार पर सक्षम किया गया है तथा ऑनलाइन रियायती बिलों का अनुपात तेज़ी से बढ़ा है। - जीवन प्रमाण पहलः - पेंशनभोगियों के लिये इस पहल ने वरिष्ठ नागरिक पेंशनभोगियों को अपने वार्षिक जीवन प्रमाण पत्र को ऑनलाइन अपडेट करने की सुविधा प्रदान की है। - डोरस्टेप बैंकिंग सेवाएँः - PSB एलायंस, जो सभी PSBs और भारतीय बैंक संघ की एक पहल है, ने सभी ग्राहकों के लिये डोरस्टेप बैंकिंग सेवाएंँ शुरू की हैं। - डोरस्टेप बैंकिंग' के माध्यम से ग्राहक अपने घर से ही प्रमुख बैंकिंग लेन-देन सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं। वर्तमान स्थितिः - वर्तमान में PSB के लगभग 72% वित्तीय लेन-देन डिजिटल चैनलों के माध्यम से किये जाते हैं, जिसमें डिजिटल चैनलों पर सक्रिय ग्राहकों की संख्या वित्त वर्ष 2019-20 के 3.4 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2020-21 में 7.6 करोड़ हो गई है। - घरेलू और मोबाइल चैनलों के माध्यम से किये गए वित्तीय लेन-देनों की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2018-19 में 29% थी जो वित्त वर्ष 2020-21 में बढ़कर 76% हो गई है। आगे की राहः - डिजिटल माध्यम ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है। ब्लॉकचेन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IOT) जैसी नई तकनीकों को अपनाकर बैंकों को इन आधुनिक तकनीकों से जुड़ना होगा। - बड़े डेटा के बल पर संचालित इंटेलिजेंट एनालिटिक्स के माध्यम से क्रॉस-सेलिंग और विभिन्न ग्राहकों की ज़रूरतों के अनुसार क्यूरेटेड उत्पाद (Curated Product) वे उत्पाद हैं जो बैंकों द्वारा दिये जाने वाले ऑफर्स से अलग हैं। स्रोतः पी.आई.बी. प्रिलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? हाल ही में आर्थिक उदारीकरण सुधारों की 30वीं वर्षगाँठ पर भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश की वृहद्-आर्थिक स्थिरता पर चिंता व्यक्त की। - उनके अनुसार, कोविड-19 महामारी से उत्पन्न मौजूदा आर्थिक संकट वर्ष 1991 के आर्थिक संकट की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण है और राष्ट्र को सभी भारतीयों के लिये एक सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने हेतु प्राथमिकता के क्षेत्रों को पुनर्गठित करने की आवश्यकता होगी। 1991 का संकट और सुधारः - 1991 का संकटः वर्ष 1990-91 में भारत को गंभीर भुगतान संतुलन (BOP) संकट का सामना करना पड़ा, जहाँ उसका विदेशी मुद्रा भंडार सिर्फ 15 दिनों के आयात के वित्तपोषण हेतु पर्याप्त था। साथ ही अन्य कई कारक भी थे जो BOP संकट का कारण बनेः - राजकोषीय घाटाः वर्ष 1990-91 के दौरान राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 8.4% था। - खाड़ी युद्ध-I: वर्ष 1990-91 में कुवैत पर इराक के आक्रमण के कारण तेल की कीमतों में वृद्धि से स्थिति विकट हो गई थी। - कीमतों में वृद्धिः मुद्रा आपूर्ति में तेज़ी से वृद्धि और देश की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण मुद्रास्फीति दर 6.7% से बढ़कर 16.7% हो गई। - 1991 के सुधारों की प्रकृति और दायराः वर्ष 1991 में वृहद्-आर्थिक संकट से बाहर निकलने के लिये भारत ने एक नई आर्थिक नीति शुरू की, जो एलपीजी या उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण मॉडल पर आधारित थी। - तत्कालीन वित्त मंत्री मनमोहन सिंह वर्ष 1991 के ऐतिहासिक उदारीकरण के प्रमुख वास्तुकार थे। - LPG मॉडल के तहत व्यापक सुधारों में शामिल हैंः - औद्योगिक नीति का उदारीकरणः औद्योगिक लाइसेंस परमिट राज का उन्मूलन, आयात शुल्क में कमी आदि। - निजीकरण की शुरुआतः बाज़ारों का विनियमन, बैंकिंग सुधार आदि। - वैश्वीकरणः विनिमय दर में सुधार, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और व्यापार नीतियों को उदार बनाना, अनिवार्य परिवर्तनीयता संबंधी कारण को हटाना आदि। - वर्ष 1991 से 2011 तक देखी गई उच्च आर्थिक वृद्धि और वर्ष 2005 से 2015 तक गरीबी में पर्याप्त कमी के लिये इन सुधारों को श्रेय दिया जाता है तथा उनकी सराहना की जाती है। वर्ष 2021 का संकटः - वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट (World Economic Outlook Report), 2021 में कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के वर्ष 2021 में 12.5% और वर्ष 2022 में 6.9% की दर से बढ़ने की उम्मीद है। - हालाँकि महामारी के कारण अनौपचारिक क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बेरोज़गारी और दशकों की गिरावट के बाद गरीबी बढ़ रही है। - स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे सामाजिक क्षेत्र पिछड़ गए हैं जिनमें पुनः सुधार करने में हमारी आर्थिक प्रगति असमर्थ साबित हो रही है। - महामारी के दौरान बहुत से लोगों की जान चली गई, साथ ही कई लोगों ने अपनी आजीविका खो दी जो कि काफी दुखद अनुभव रहा। - इंस्पेक्टर राज (Inspector Raj) ई-कॉमर्स संस्थाओं के लिये नीति के माध्यम से वापसी करने के लिये तैयार है। - भारत, राजकोषीय घाटे के वित्तपोषण के लिये भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) से अत्यधिक उधार लेने या धन (लाभांश के रूप में) निकालने जैसी स्थित में पहुँच गया है। - प्रवासी श्रम संकट ने विकास मॉडल में रुकावट डाल दी है। - भारतीय विदेश व्यापार नीति फिर से व्यापार उदारीकरण पर संदेह कर रही है, क्योंकि भारत पहले ही क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (Regional Comprehensive Economic Partnership- RCEP) से बाहर निकलने का फैसला कर चुका है। - वर्ष 1991 के सुधारों ने अर्थव्यवस्था को संकट से उबारने में मदद की। यह समय नए सुधार एजेंडे की रूपरेखा तैयार करने का है जो न केवल जीडीपी को पूर्व-संकट के स्तर पर वापस लाएगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि विकास दर महामारी में प्रवेश करने के समय की तुलना में अधिक हो। चर्चा में क्यों? अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के 'वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक' के नवीनतम संस्करण में वर्ष 2021 के भारत विकास अनुमान को 12.5% (अप्रैल 2021) से घटाकर 9.5% कर दिया गया है। - 'अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष' ने अपने पूर्वानुमान में परिवर्तन करते हुए मुख्यतः दो कारकों यथा- टीकों तक पहुँच और नए कोरोना-वेरिएंट के जोखिम पर ध्यान केंद्रित किया है। भारतीय अर्थव्यवस्थाः - वर्ष 2021 में भारतीय अर्थव्यवस्था के 9.5% की दर से और वर्ष 2022 में 8.5% (अप्रैल में अनुमानित 6.9% से अधिक) की दर से बढ़ने की उम्मीद है। - वर्ष 2020 में भारतीय अर्थव्यवस्था में 8% का अनुमानित संकुचन देखा गया था। - 'अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष' ने कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के कारण भारत की विकास के अनुमान में कटौती की है, क्योंकि इसके कारण रिकवरी की गति प्रभावित हुई है और साथ ही उपभोक्ता विश्वास एवं ग्रामीण मांग को भी नुकसान पहुँचा है। वैश्विक अर्थव्यवस्थाः - वर्ष 2021 के लिये वैश्विक विकास पूर्वानुमान को 6% पर बरकरार रखा गया है और वर्ष 2022 के लिये इसके 4.9% की दर से बढ़ने की उम्मीद है। - वर्ष 2020 में वैश्विक अर्थव्यवस्था में 3.3% का संकुचन हुआ था। - अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने वैश्विक व्यापार की मात्रा में वृद्धि के अपने अनुमान को भी वर्ष 2021 के लिये 130 bps से बढ़ाकर 9.7% कर दिया है, वहीं वर्ष 2022 के लिये यह 50 bps बढ़कर 7% पर पहुँच गया है। - आपूर्ति पक्ष में तेज़ी आने और वैश्विक व्यापार संभावनाओं में अपेक्षित वृद्धि से भारत को भी काफी लाभ प्राप्त होगा। - सख्त बाहरी वित्तीय स्थितियाँः - उभरते बाज़ारों को जहाँ संभव हो ऋण परिपक्वता अवधि को बढ़ाकर और बिना बचाव वाले विदेशी मुद्रा ऋण के निर्माण को सीमित करके संभवतः सख्त बाहरी वित्तीय स्थितियों (Tighter External Financial Condition) के लिये तैयार रहना चाहिये। - समय से पूर्व सख्त नीतियों से बचनाः - केंद्रीय बैंकों को अस्थायी मुद्रास्फीति (Inflation) दबावों का सामना करने के लिये समय से पहले सख्त नीतियों से बचना चाहिये, लेकिन अगर मुद्रास्फीति के संकेत दिखाई देते हैं, तो इन्हें जल्दी प्रतिक्रिया हेतु तैयार रहना चाहिये। - स्वास्थ्य खर्च को प्राथमिकता देंः - राजकोषीय नीति (Fiscal Policy) को स्वास्थ्य व्यय (टीका उत्पादन और वितरण बुनियादी ढाँचे, कर्मियों तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों) को बढ़ावा देने के लिये प्राथमिकता देना जारी रखना चाहिये। - राजकोषीय नीति वह साधन है जिसके द्वारा सरकार किसी देश की अर्थव्यवस्था की निगरानी और उसे प्रभावित करने के लिये अपने खर्च के स्तर तथा कर दरों को समायोजित करती है। - राजकोषीय नीति (Fiscal Policy) को स्वास्थ्य व्यय (टीका उत्पादन और वितरण बुनियादी ढाँचे, कर्मियों तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों) को बढ़ावा देने के लिये प्राथमिकता देना जारी रखना चाहिये। - इसकी स्थापना द्वितीय विश्व युद्ध (Second World War) के पश्चात् युद्ध प्रभावित देशों के पुनर्निमाण में सहायता के लिये विश्व बैंक (World Bank) के साथ की गई थी। - इन दोनों संगठनों की स्थापना के लिये अमेरिका के ब्रेटन वुड्स में आयोजित एक सम्मेलन में सहमति बनी। इसलिये इन्हें 'ब्रेटन वुड्स ट्विन्स' (Bretton Woods Twins) के नाम से भी जाना जाता है। - वर्ष 1945 में स्थापित IMF विश्व के 189 देशों द्वारा शासित है तथा यह अपने निर्णयों के लिये इन देशों के प्रति उत्तरदायी भी है। भारत 27 दिसंबर, 1945 को IMF में शामिल हुआ था। - IMF का प्राथमिक उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय मौद्रिक प्रणाली की स्थिरता सुनिश्चित करना है। अंतर्राष्ट्रीय मौद्रिक प्रणाली से आशय विनिमय दरों और अंतर्राष्ट्रीय भुगतान की उस प्रणाली से है जो देशों (और उनके नागरिकों) को एक-दूसरे के साथ लेन-देन करने में सक्षम बनाती है। - IMF के अधिदेश में वैश्विक स्थिरता से संबंधित सभी व्यापक आर्थिक और वित्तीय मुद्दों को शामिल करने के लिये वर्ष 2012 में इसे अद्यतन/अपडेट किया गया था। - IMF द्वारा जारी महत्त्वपूर्ण रिपोर्टः - वैश्विक वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (Global Financial Stability Report-GFSR). - वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक (World Economic Outlook). - यह IMF का एक सर्वेक्षण है जिसे आमतौर पर अप्रैल और अक्तूबर के महीनों में वर्ष में दो बार प्रकाशित किया जाता है। - यह भविष्य के चार वर्षों तक के अनुमानों के साथ निकट और मध्यम अवधि के दौरान वैश्विक आर्थिक विकास का विश्लेषण तथा भविष्यवाणी करता है। - पूर्वानुमान के अपडेट्स की बढ़ती मांग को देखते हुए वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक अपडेट जनवरी और जुलाई में प्रकाशित किया जाता है, जो आमतौर पर अप्रैल और अक्तूबर में प्रकाशित होने वाली मुख्य WEO रिपोर्टों के बीच का समय है। चर्चा में क्योंः हाल ही में खगोलविदों के एक समूह ने उच्च-ऊर्जा विकिरण के एक बहुत ही कम अवधि के ऐसे शक्तिशाली विस्फोट का पता लगाया है जिसे गामा-किरण विस्फोट (Gamma-Ray Bursts- GRB) के रूप में भी जाना जाता है जो लगभग एक सेकंड तक हुआ था। - इसके घटित होने की तारीख के बाद इसका नाम GRB 200826A रखा गया, जो कि 26 अगस्त, 2020 है। गामा-किरण विस्फोटः - परिचयः - ये ब्रह्मांड में सबसे शक्तिशाली घटनाएँ हैं, जिनका पता अरबों प्रकाश-वर्षों में लगाया जा सकता है। - एक प्रकाश वर्ष वह दूरी है जब प्रकाश की किरण एक पृथ्वी वर्ष या 9.5 ट्रिलियन किलोमीटर में यात्रा करती है। - खगोलविद् उन्हें दो सेकंड से अधिक या कम समय तक चलने के आधार पर लंबे या छोटे के रूप में वर्गीकृत करते हैं। - लंबे GRB: - वे बड़े सितारों की मृत्यु के समय लंबे समय तक हुए विस्फोट का निरीक्षण करते हैं। - जब सूर्य से बहुत अधिक विशाल तारे का ईंधन समाप्त हो जाता है, तो उसका केंद्रीय भाग (कोर) अचानक ढह जाता है और एक कृष्ण विवर (ब्लैक होल) बन जाता है। - ब्लैक होल्स अंतरिक्ष में उपस्थित ऐसे छिद्र हैं जहाँ गुरुत्व बल इतना अधिक होता है कि यहाँ से प्रकाश का पारगमन नहीं होता। - जैसे ही पदार्थ ब्लैक होल की ओर घूमता है, उसमें से कुछ अंश दो शक्तिशाली धाराओं (जेट) के रूप में बाहर की ओर निकल जाते हैं और जो फिर विपरीत दिशाओं में लगभग प्रकाश की गति से बाहर की ओर भागते हैं। - खगोलविद् GRB का ही पता केवल तब लगा पाते हैं जब इनमें से एक प्रवाह लगभग सीधे पृथ्वी की ओर जाने का संकेत दे देता है। - तारे के भीतर से प्रस्फुटित प्रत्येक धारा (जेट) से गामा किरणों का एक स्पंदन उत्पन्न होता है, जो प्रकाश का ऐसा उच्चतम-ऊर्जा रूप है जो कई मिनटों तक चल सकता है। - विस्फोट के बाद विखंडित तारा फिर तेज़ी से एक सुपरनोवा के रूप में फैलता है। - सुपरनोवा एक विस्फोट करने वाले तारे को दिया गया नाम है जो अपने जीवन के अंत तक पहुँच गया है। - लघु GRB: - लघु GRB तब बनते हैं जब संघटित (कॉम्पैक्ट) वस्तुओं के जोड़े- जैसे न्यूट्रॉन तारे, जो तारों के टूटने के दौरान भी बनते हैं- अरबों वर्षों में अंदर की ओर सर्पिल रूप में घूर्णन करते रहते हैं और आपस में टकराते हैं। - एक न्यूट्रॉन तारा उच्च द्रव्यमान वाले सितारों के संभावित विकासवादी अंत-बिंदुओं में से एक होता है। - लघु GRB तब बनते हैं जब संघटित (कॉम्पैक्ट) वस्तुओं के जोड़े- जैसे न्यूट्रॉन तारे, जो तारों के टूटने के दौरान भी बनते हैं- अरबों वर्षों में अंदर की ओर सर्पिल रूप में घूर्णन करते रहते हैं और आपस में टकराते हैं। - यह केवल 0.65 सेकंड तक चलने वाले उच्च-ऊर्जा उत्सर्जन का एक तीव्र विस्फोट था। - विस्तारित ब्रह्मांड के माध्यम से काफी लंबे समय तक यात्रा करने के बाद फर्मी के गामा-रे बर्स्ट मॉनीटर (Fermi's Gamma-ray Burst Monitor) द्वारा पता लगाए जाने के समय तक यह संकेत (सिग्नल) लगभग एक-सेकंड लंबा हो गया था। - यह हमारे ब्रह्मांड की वर्तमान आयु की लगभग आधी उम्र से पृथ्वी की ओर दौड़ रहा था। - एक विशाल तारे की मृत्यु के कारण हुआ यह सबसे छोटा गामा-रे विस्फोट था। GRB 200826A का महत्त्वः - इसने गामा-किरणों के विस्फोट से संबंधित लंबे समय से चली आ रही समस्याओं को हल करने में मदद की है। साथ ही यह अध्ययन संख्या घनत्व को बेहतर ढंग से सीमित करने हेतु ऐसी सभी ज्ञात घटनाओं का पुनः विश्लेषण करने के लिये प्रेरित करता है। - इस समूह में आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्ज़र्वेशनल साइंसेज़ (ARIES), द इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स, पुणे (IUCAA), नेशनल सेंटर फॉर रेडियो एस्ट्रोफिजिक्स - टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, पुणे (NCRA) और आईआईटी मुंबई के भारतीय खगोलविद् शामिल थे। फर्मी गामा-रे स्पेस टेलीस्कोपः - परिचयः - पूर्व में इसे गामा-रे लार्ज एरिया स्पेस टेलीस्कोप (GLAST) कहा जाता है, यह एक अंतरिक्ष वेधशाला है जिसका उपयोग पृथ्वी की निचली कक्षा से गामा-किरणों संबंधी खगोलीय अवलोकन के लिये किया जाता है। - इसे जून 2008 में लॉन्च किया गया था। इसका नाम एक इटैलियन-अमेरिकी वैज्ञानिक एनरिको फर्मी के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने उच्च-ऊर्जा भौतिकी में अग्रणी काम किया था। - सहयोगः - फर्मी एक खगोल भौतिकी और कण भौतिकी साझेदारी है, जिसे अमेरिकी ऊर्जा विभाग के सहयोग तथा फ्राँस, जर्मनी, इटली, जापान, स्वीडन और यू.एस. में शैक्षणिक संस्थानों व भागीदारों के महत्त्वपूर्ण योगदान के साथ विकसित किया गया है। - प्रमुख कार्यः - यह प्रत्येक तीन घंटे में संपूर्ण आकाश का मानचित्रण करता है। यह ब्रह्मांड की सबसे चरम घटनाओं के मामले में महत्त्वपूर्ण पहुँच प्रदान करता है, जैसे जीआरबी, ब्लैक-होल जेट और पल्सर। - पल्सर एक प्रकार के न्यूट्रॉन तारे होते हैं जो नियमित अंतराल पर रेडियो तत्त्वों का उत्सर्जन करते हैं। - यह प्रत्येक तीन घंटे में संपूर्ण आकाश का मानचित्रण करता है। यह ब्रह्मांड की सबसे चरम घटनाओं के मामले में महत्त्वपूर्ण पहुँच प्रदान करता है, जैसे जीआरबी, ब्लैक-होल जेट और पल्सर। - ये ब्रह्मांड में अत्यधिक ऊर्जा वाली प्रकाश किरणें हैं। इनमें हमारी आँखों को दिखाई देने वाले प्रकाश की तुलना में एक अरब गुना अधिक ऊर्जा होती है। - ये ब्रह्मांड में सबसे गर्म और सबसे ऊर्जावान वस्तुओं द्वारा निर्मित हैं, जैसे- न्यूट्रॉन तारे और पल्सर, सुपरनोवा विस्फोट तथा ब्लैक होल के आसपास का क्षेत्र। - गामा किरणों में उच्च ऊर्जा होती है; इनमें किसी भी लेंस या दर्पण के माध्यम से सीधे गुजरने की क्षमता होती है, जिससे उन्हें एक दृश्य-प्रकाश दूरबीन में केंद्रित करना बहुत मुश्किल होता है। पृथ्वी पर गामा किरणेंः - पृथ्वी पर, गामा किरणें परमाणु विस्फोट, बिजली तथा कम रेडियोधर्मी क्षय की गतिविधि से उत्पन्न होती हैं। - गामा-किरण गामा किरणों का खगोलीय अवलोकन है जिसमें 100 केवी (किलो इलेक्ट्रॉन वोल्ट) से ऊपर फोटॉन ऊर्जा होती है। - गामा किरणें इतनी ऊर्जावान होती हैं कि वे पृथ्वी पर जीवन के लिये हानिकारक होती हैं। - पृथ्वी का वायुमंडल गामा किरणों को अवशोषित कर लेता है, जिससे वह इन गामा किरणों को पृथ्वी पर पहुँचने से पहले ही अवशोषित कर जीवन को प्रभावित करने से रोकता है। - इसलिये गामा-किरण स्रोतों का खगोलीय अवलोकन पृथ्वी के वायुमंडल के सुरक्षात्मक आवरण के ऊपर उच्च ऊँचाई पर उड़ने वाले गुब्बारों या उपग्रहों के साथ किया जाता है। स्रोतः पी.आई.बी. चर्चा में क्यों? हाल ही में रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रॉसकॉसमॉस ने 'इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन' (ISS) में 'नौका' नाम की अपनी सबसे बड़ी अंतरिक्ष प्रयोगशाला लॉन्च की है। - इससे पूर्व चार अंतरिक्ष यात्रियों को नासा और स्पेसएक्स के वाणिज्यिक क्रू कार्यक्रम के तहत 'इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन' पर भेजा गया था। इस मिशन को 'क्रू-2' मिशन के नाम से जाना जाता है। 'इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन' (ISS) - 'इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन' एक निवास योग्य कृत्रिम उपग्रह है, जो कि पृथ्वी की निचली कक्षा में सबसे बड़ी मानव निर्मित संरचना है। - यह पाँच अंतरिक्ष एजेंसियोंः नासा (नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन), रॉसकॉसमॉस (रूस), जाक्सा (जापान), ESA (यूरोप) और CSA (कनाडा) के बीच एक सहयोगात्मक प्रयास है। - एक अंतरिक्ष स्टेशन मुख्य रूप से एक बड़ा अंतरिक्षयान है, जो लंबी अवधि के लिये पृथ्वी की निम्न कक्षा में रहता है। - यह अंतरिक्ष में एक बड़ी प्रयोगशाला की तरह है, जो अंतरिक्ष यात्रियों को माइक्रोग्रैविटी में वैज्ञानिक परीक्षण करने और हफ्तों या महीनों तक रहने की अनुमति देता है। - चीन ने अपने स्थायी अंतरिक्ष स्टेशन का एक मानव रहित मॉड्यूल 'तियानहे' लॉन्च किया है, जिसके वर्ष 2022 के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है। - भारत वर्ष 2030 तक अपना स्वयं का अंतरिक्ष स्टेशन लॉन्च करने की योजना बना रहा है, जिससे भारत अमेरिका, रूस और चीन की एक विशिष्ट सूची में शामिल हो जाएगा। नौका मॉड्यूलः - रूसी भाषा में 'नौका' का अर्थ विज्ञान है। यह अंतरिक्ष में रूस की सबसे महत्त्वाकांक्षी अनुसंधान सुविधा है और इसमें ऑक्सीजन जनरेटर, रोबोट कार्गो क्रेन, एक शौचालय तथा रूसी अंतरिक्ष यात्रियों के लिये बिस्तर शामिल है। - इसे एक प्रोटॉन रॉकेट (रूस में रॉकेट समूह- रूस की अंतरिक्ष सूची में सबसे शक्तिशाली) का उपयोग करके कक्षा में भेजा गया है और इसे ISS तक पहुँचने में आठ दिन लगेंगे। - इस दौरान इंजीनियर और फ्लाइट कंट्रोलर अंतरिक्ष में नौका का परीक्षण करेंगे तथा अंतरिक्ष स्टेशन पर इसके आगमन की तैयारी करेंगे। - यह 'पर्स' की जगह लेगा और महत्त्वपूर्ण 'ज़्वेज़्दा मॉड्यूल' से जुड़ा होगा जो सभी अंतरिक्ष स्टेशन को जीवन समर्थन प्रणाली प्रदान करता है एवं रूसी कक्षीय खंड (ROS) के संरचनात्मक व कार्यात्मक केंद्र के रूप में कार्य करता है। - 'पर्स' सितंबर 2001 से अंतरिक्ष स्टेशन का हिस्सा रहा है, जो रूसी अंतरिक्षयान के लिये 'डॉकिंग पोर्ट' और रूसी स्पेसवॉक के लिये एक 'एयरलॉक' के रूप में कार्य कर रहा है। - यह ISS के रहने योग्य आयतन को बढ़ाकर 70 घन मीटर कर देगा। इसका प्रयोग अंतरिक्ष यात्री अतिरिक्त जगह का प्रयोग करने और कार्गो स्टोर करने के लिये करेंगे। - नौका भविष्य के संचालन के लिये एक नई 'साइंस फैसिलिटी', डॉकिंग पोर्ट और स्पेसवॉक एयरलॉक के रूप में काम करेगी। - 20 से अधिक वर्षों से लोग सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण स्थितियों के तहत अनुसंधान कर रहे हैं जो पृथ्वी पर संभव नहीं है, यह मॉड्यूल किये जा रहे शोध कार्यों को बढ़ाने में मदद करेगा। - जीव विज्ञान, मानव शरीर क्रिया विज्ञान, भौतिकी और अंतरिक्ष विज्ञान जैसे विभिन्न विषयों में अनुसंधान किया जा रहा है। निमोनिया और डायरिया प्रगति रिपोर्ट, चर्चा में क्यों? हाल ही में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने बताया कि शिशु मृत्यु के मामले में 16.9 प्रतिशत का कारण निमोनिया है तथा यह शिशु मृत्यु दर का दूसरा सबसे बड़ा कारण है (समय से पहले जन्म और कम वज़न के बाद)। - नवंबर 2020 में इंटरनेशनल वैक्सीन एक्सेस सेंटर (IVAC) द्वारा वार्षिक निमोनिया और डायरिया प्रगति रिपोर्ट जारी की गई। परिचय : - निमोनिया फेफड़ों का एक तीव्र श्वसन संक्रमण है। यह एक न्यूमोकोकल रोग भी है जो स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिया या न्यूमोकोकस नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। - इसके फैलने का एक कारण नहीं है- यह हवा में बैक्टीरिया, वायरस या कवक से विकसित हो सकता है। - जिन बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली अपरिपक्व (अर्थात् नवजात शिशु) या कमज़ोर होती है, जैसे कि अल्पपोषण, या एचआईवी रोग- निमोनिया के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। - निमोनिया संक्रामक है और खाँसने या छींकने से फैल सकता है। यह तरल पदार्थों के माध्यम से भी फैल सकता है, जैसे बच्चे के जन्म के दौरान रक्त, या दूषित स्थानों से। - भारत ने यूनिवर्सल टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) की तर्ज़ पर ही PCV की राष्ट्रव्यापी शुरुआत की है। - बैक्टीरिया के कारण होने वाले निमोनिया को टीकों से आसानी से रोका जा सकता है। इसे रोकने के लिये प्राथमिक टीके 'न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन' (Pneumococcal Conjugate Vaccine-PCV) की 3 खुराक दी जाती है। - निमोनिया के मुख्य संक्रमण कारणों हेतु एक नया टीका विकसित किया जा रहा है। रोग भारः - वैश्विक स्तर परः कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, इथियोपिया, भारत, नाइजीरिया और पाकिस्तान में 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की कुल मौतों में आधे से अधिक निमोनिया के कारण होती हैं। - सालाना, भारत में निमोनिया से होने वाली अनुमानित मौतें 71% हैं और गंभीर निमोनिया के 57% मामले देखे जाते हैं। निमोनिया से संबंधित पहलः - निमोनिया को सफलतापूर्वक रोकने हेतु सामाजिक जागरूकता और कार्रवाई (SAANS): इसका उद्देश्य निमोनिया के कारण बाल मृत्यु दर को कम करना है, जो सालाना पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु के मामले में लगभग 15% है। - सरकार ने बच्चों में निमोनिया से होने वाली मौतों के नियंत्रण हेतु वर्ष 2025 तक प्रति 1000 जीवित बच्चों पर मौतों को 3 से कम करने का लक्ष्य रखा है। - वर्ष 2014 में भारत ने डायरिया और निमोनिया से संबंधित पाँच वर्ष से कम उम्र की मौतों की रोकथाम के लिये सहयोगात्मक प्रयास करने हेतु 'निमोनिया और डायरिया की रोकथाम और नियंत्रण संबंधी एकीकृत कार्ययोजना (Integrated Action Plan for Prevention and Control of Pneumonia and Diarrhoea- IAPPD) शुरू की है। - WHO और UNICEF ने निमोनिया एवं डायरिया की रोकथाम के लिये एक एकीकृत वैश्विक कार्ययोजना (GAPPD) शुरू की थी।
प्रिलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? हाल ही में चीन और पाकिस्तान ने युद्धग्रस्त देश को आतंकवाद का केंद्र बनने से रोकने के लिये अफगानिस्तान में संयुक्त कार्रवाई शुरू करने का फैसला किया है। - अफगानिस्तान से हाल ही में अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद देश भर में तालिबान का तेज़ी से विस्तार हुआ है। - संयुक्त कार्रवाईः इसे पाँच क्षेत्रों में रेखांकित किया गया हैः - युद्ध के विस्तार से बचने और अफगानिस्तान में बड़े पैमाने पर गृहयुद्ध की स्थिति को रोकने के लिये। - सरकार और तालिबान के बीच अंतर-अफगान वार्ता को बढ़ावा देना तथा "एक व्यापक एवं समावेशी राजनीतिक संरचना" स्थापित करना। - आतंकवादी ताकतों का डटकर मुकाबला करना और अफगानिस्तान में सभी प्रमुख ताकतों को आतंकवाद के खिलाफ एक स्पष्ट रेखा खींचने के लिये प्रेरित करना। - अफगानिस्तान के पड़ोसियों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना और उनके बीच सहयोग के लिये एक मंच के निर्माण का पता लगाना। - अफगान मुद्दे पर अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर मिलकर काम करना। - पाकिस्तान में आतंकवादः - पाकिस्तान, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान को लेकर चिंतित है, जो कई सालों से देश के खिलाफ विद्रोह कर रहा है। - उइगर उग्रवादियों में वृद्धिः - चीन शिनजियांग प्रांत के उइगर उग्रवादियों के फिर से संगठित होने से चिंतित है, जो पूर्वी तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट के तत्वावधान में काम करते हैं, इसे लेकर बीजिंग का आरोप है कि उसके अल-कायदा के साथ संबंध हैं। - संयुक्त राष्ट्र की एनालिटिकल सपोर्ट एंड सेंक्शन मॉनीटरिंग टीम की हाल ही में जारी बारहवीं रिपोर्ट ने अफगानिस्तान में ईटीआईएम आतंकवादियों की मौजूदगी की पुष्टि की है। - चीन शिनजियांग प्रांत के उइगर उग्रवादियों के फिर से संगठित होने से चिंतित है, जो पूर्वी तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट के तत्वावधान में काम करते हैं, इसे लेकर बीजिंग का आरोप है कि उसके अल-कायदा के साथ संबंध हैं। - आर्थिक हितः - अगर अफगानिस्तान में हालात और बिगड़ते हैं तो पाकिस्तान के साथ-साथ चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा भी खतरे में पड़ जाएगा। साथ ही अफगानिस्तान और पाकिस्तान में कई अन्य चीनी परियोजनाओं को भी खतरा होगा। - पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के ऊपरी कोहिस्तान ज़िले के दसू इलाके में चीनी इंजीनियरों को ले जा रही एक शटल बस पर हाल ही में एक बम हमला हुआ था, यहाँ एक चीनी कंपनी सिंधु नदी पर चार हज़ार तीन सौ बीस मेगावाट क्षमता का बाँध बना रही है। - भारत ने सीपीईसी का विरोध किया है, जो पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर से होकर गुज़रता है, हालाँकि चीन ने परियोजनाओं को आगे बढ़ाया है और पीओके में अपना निवेश बढ़ाया है। - अगर अफगानिस्तान में हालात और बिगड़ते हैं तो पाकिस्तान के साथ-साथ चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा भी खतरे में पड़ जाएगा। साथ ही अफगानिस्तान और पाकिस्तान में कई अन्य चीनी परियोजनाओं को भी खतरा होगा। - अफगानिस्तानी स्थिति की पृष्ठभूमिः - ग्यारह सितंबर, दो हज़ार एक को अमेरिका में हुए आतंकवादी हमलों में लगभग तीन,शून्य लोग मारे गए थे। - इस्लामिक आतंकवादी समूह अल-कायदा के प्रमुख ओसामा बिन लादेन को इसके लिये दोषी माना गया। - तालिबान, कट्टरपंथी इस्लामवादी, जो उस समय अफगानिस्तान में सक्रिय थे, ने बिन लादेन की रक्षा की और उसे सौंपने से इनकार कर दिया। इसलिये नौ/ग्यारह के बाद अमेरिका ने अफगानिस्तान के खिलाफ हवाई हमले शुरू किये। - हमलों के बाद उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन गठबंधन सैनिकों ने अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ युद्ध की घोषणा की। - अमेरिका ने तालिबान शासन को उखाड़ फेंका और अफगानिस्तान में एक संक्रमणकालीन सरकार की स्थापना की। - जुलाई दो हज़ार इक्कीस में अमेरिकी सैनिकों ने बीस साल के लंबे युद्ध के बाद अफगानिस्तान के सबसे बड़े एयरबेस से देश में अपने सैन्य अभियानों को प्रभावी ढंग से समाप्त करने की घोषणा की। - अमेरिका की वापसी ने तालिबान के पक्ष में युद्ध के मैदान में शक्ति संतुलन को बदल दिया है। - ग्यारह सितंबर, दो हज़ार एक को अमेरिका में हुए आतंकवादी हमलों में लगभग तीन,शून्य लोग मारे गए थे। - भारत के हितः - निवेशः - अफगानिस्तान में अपने अरबों के निवेश की रक्षा करना। - तालिबानः - भविष्य के तालिबान शासन को पाकिस्तान का मोहरा बनने से रोकना। - पाकिस्तान के आतंकी केंद्रः - यह सुनिश्चित करना कि पाकिस्तान समर्थित भारत विरोधी आतंकवादी समूहों को तालिबान का समर्थन न मिले। - निवेशः आगे की राहः - भारत की अफगान नीति एक ऐसी स्थिति में हैं; अफगानिस्तान में और उसके आसपास हो रहे 'ग्रेट गेम' में अपनी संपत्ति की सुरक्षा के साथ-साथ प्रासंगिक बने रहने के लिये भारत को अपनी अफगानिस्तान नीति को मौलिक रूप से पुनर्परिभाषित करना होगा। - भारत को अपने फैसलों का पुनर्मूल्यांकन करने की ज़रूरत है और अफगानिस्तान के भविष्य के लिये सभी केंद्रीय ताकतों से निपटने हेतु अपने दृष्टिकोण को अधिक सर्वव्यापी बनाना होगा। - इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, भारत को अपने राष्ट्रीय हित के मद्देनज़र तालिबान के साथ 'खुली बातचीत' शुरू करनी चाहिये क्योंकि असामंजस्य वाले आधे-अधूरे बैकचैनल परिचर्चाओं का समय समाप्त हो गया है। - बदलती राजनीतिक व सुरक्षा स्थिति के लिये भारत को अपनी अधिकतमवादी स्थिति को अपनाने तथा तालिबान के साथ बातचीत शुरू करने के लिये और अधिक खुलेपन की नीति पर विचार करना होगा। प्रिलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? हाल ही में संसद ने नौचालन के लिये सामुद्रिक सहायता विधेयक, दो हज़ार इक्कीस पारित किया है। यह विधेयक प्रकाश स्तंभ अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ सत्ताईस को निरस्त कर उसका स्थान लेगा, जो कि पारंपरिक नौवहन सहायता यानी लाइटहाउस को नियंत्रित करने वाला नौ दशक पुराना कानून है। - अब तक भारत में सुरक्षित नेविगेशन हेतु लाइटहाउस और लाइटशिप का प्रशासन एवं प्रबंधन प्रकाश स्तंभ अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ सत्ताईस द्वारा शासित है। - प्रकाश स्तंभ दो मुख्य उद्देश्यों- नौवहन सहायता के रूप में और नौकाओं को खतरनाक क्षेत्रों की चेतावनी देने का काम करते हैं। - यह समुद्र पर यातायात संकेत की तरह है। - हालाँकि जैसे-जैसे तकनीक विकसित हुई, वैसे-वैसे सिस्टम लगाए गए और रडार एवं अन्य सेंसर की मदद से जहाज़ों को स्थिति के बारे में सलाह दी जाने लगी। - इस प्रकार पोत यातायात सेवा अस्तित्व में आई और इसे व्यापक स्वीकार्यता मिली। - समुद्री नौवहन प्रणालियों के लिये इन आधुनिक व तकनीकी रूप से बेहतर सेवाओं ने उनकी स्थिति को 'निष्क्रिय' सेवा से 'इंटरैक्टिव' सेवा में बदल दिया है। - इसे एक उपयुक्त वैधानिक ढाँचा प्रदान करने के लिये नए अधिनियम की आवश्यकता है जो नेविगेशन के लिये समुद्री सहायता की आधुनिक भूमिका को दर्शाता है और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों के तहत भारत के दायित्वों का अनुपालन करता है। विधेयक की मुख्य विशेषताएँः - वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं और तकनीकी विकास को शामिल करना। - नौचालन के लिये सामुद्रिक सहायता के क्षेत्र में भारत के अंतर्राष्ट्रीय दायित्वों का समायोजन करना। - विधायी ढाँचे को उपयोगकर्त्ता के अनुकूल बनाना। - व्यापकता व सुगमता को बढ़ावा देना। - कानून का दायराः यह विधेयक क्षेत्रीय जल, महाद्वीपीय शेल्फ और विशेष आर्थिक क्षेत्र सहित समग्र भारत पर लागू होता है। - परिभाषित तंत्रः यह 'नेविगेशन के लिये सहायता' को एक उपकरण, प्रणाली या सेवा के रूप में परिभाषित करता है, जिसे जहाज़ों के बाह्य स्वरुप, व्यक्तिगत जहाज़ों और पोत यातायात के सुरक्षित एवं कुशल नेविगेशन को बढ़ावा देने के लिये डिज़ाइन और संचालित किया जाता है। - पोत यातायात सेवा का अर्थ पोत यातायात की सुरक्षा और दक्षता में सुधार एवं पर्यावरण की रक्षा के लिये अधिनियम के तहत लागू की गई सेवा है। - संस्थागत तंत्रः विधेयक में प्रावधान है कि केंद्र सरकार एक महानिदेशक की नियुक्ति करेगी, जो नेविगेशन में सहायता से संबंधित मामलों पर केंद्र सरकार को सलाह देगा। - यह ज़िला स्तर के लिये उप-महानिदेशकों और निदेशकों की नियुक्ति का भी प्रावधान करता है। - हेरिटेज लाइटहाउसः विधेयक केंद्र सरकार को अपने नियंत्रण में नेविगेशन के लिये किसी भी सहायता को 'विरासत लाइटहाउस' के रूप में नामित करने का अधिकार देता है। - नौवहन सहायक के रूप में उनके कार्य के अलावा ऐसे प्रकाश स्तंभ शैक्षिक, सांस्कृतिक और पर्यटन उद्देश्यों के लिये विकसित किये जाएंगे। - अपराध और दंडः इसमें अपराधों की एक नई अनुसूची शामिल है, साथ ही नेविगेशन में सहायता को बाधित करने और नुकसान पहुँचाने तथा केंद्र सरकार एवं अन्य निकायों द्वारा जारी निर्देशों का पालन न करने पर दंड का प्रावधान भी किया गया है। - इसमें नौचालन के लिये सहायता एवं पोत परिवहन सेवाओं से संबद्ध मामलों हेतु बेहतर कानूनी ढाँचा और समुद्री नौचालन के क्षेत्र में भावी विकास शामिल है। - नौवहन की सुरक्षा एवं दक्षता बढ़ाने और पर्यावरण को संरक्षित करने के लिये पोत परिवहन सेवाओं का प्रबंधन। - अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप 'नौचालन के लिये सहायता' और पोत परिवहन सेवाओं के ऑपरेटरों हेतु प्रशिक्षण तथा प्रमाणन के माध्यम से कौशल विकास। - वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण और प्रमाणन की ज़रूरतों को पूरा करने के लिये संबद्ध संस्थानों की लेखापरीक्षा एवं प्रत्यायन। - सुरक्षित और प्रभावी नौचालन के उद्देश्य से डूबे हुए/फँसे हुए जहाज़ों की पहचान करने के लिये जल में "मलबे" को चिह्नित करना। - शिक्षा, संस्कृति और पर्यटन के उद्देश्य से प्रकाश स्तम्भों का विकास, जो कि तटीय क्षेत्रों की पर्यटन क्षमता का दोहन करते हुए उनकी अर्थव्यवस्था में योगदान देगा। स्रोतः पी.आई.बी. प्रिलिम्स लिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? हाल ही में यूनेस्को ने गुजरात के धौलावीरा शहर को भारत के चालीसवें विश्व धरोहर स्थल के रूप में घोषित किया है। यह प्रतिष्ठित सूची में शामिल होने वाली भारत में सिंधु घाटी सभ्यता की पहली साइट है। - इस सफल नामांकन के साथ भारत अब विश्व धरोहर स्थल शिलालेखों के लिये सुपर-चालीस क्लब में प्रवेश कर गया है। - भारत के अलावा इटली, स्पेन, जर्मनी, चीन और फ्रांँस में चालीस या अधिक विश्व धरोहर स्थल हैं। - भारत में कुल मिलाकर चालीस विश्व धरोहर स्थल हैं, जिनमें बत्तीस सांस्कृतिक, सात प्राकृतिक और एक मिश्रित स्थल शामिल है। रामप्पा मंदिर भारत का उनतालीसवांँ विश्व धरोहर स्थल था। धौलावीरा के बारे मेंः - यह दक्षिण एशिया में सबसे अनूठी और अच्छी तरह से संरक्षित शहरी बस्तियों में से एक है। - इसकी खोज वर्ष एक हज़ार नौ सौ अड़सठ में पुरातत्त्वविद् जगतपति जोशी द्वारा की गई थी। - पाकिस्तान के मोहनजोदड़ो, गनेरीवाला और हड़प्पा तथा भारत के हरियाणा में राखीगढ़ी के बाद धौलावीरा सिंधु घाटी सभ्यता का पांँचवा सबसे बड़ा महानगर है। - IVC जो कि आज पाकिस्तान और पश्चिमी भारत में पाई जाती है, लगभग दो,पाँच सौ ईसा पूर्व दक्षिण एशिया के पश्चिमी भाग में फली-फूली। यह मूल रूप से एक शहरी सभ्यता थी तथा लोग सुनियोजित और अच्छी तरह से निर्मित कस्बों में रहते थे, जो व्यापार के केंद्र भी थे। - साइट में एक प्राचीन आईवीसी/हड़प्पा शहर के खंडहर हैं। इसके दो भाग हैंः एक चारदीवारी युक्त शहर और शहर के पश्चिम में एक कब्रिस्तान। - चारदीवारी वाले शहर में एक मज़बूत प्राचीर से युक्त एक दृढ़ीकृत गढ़/दुर्ग और अनुष्ठानिक स्थल तथा दृढ़ीकृत दुर्ग के नीचे एक शहर स्थित था। - गढ़ के पूर्व और दक्षिण में जलाशयों की एक शृंखला पाई जाती है। - धोलावीरा का प्राचीन शहर गुजरात राज्य के कच्छ ज़िले में एक पुरातात्त्विक स्थल है, जो ईसा पूर्व तीसरी से दूसरी सहस्राब्दी तक का है। - धौलावीरा कर्क रेखा पर स्थित है। - यह कच्छ के महान रण में कच्छ रेगिस्तान वन्यजीव अभयारण्य में खादिर बेट द्वीप पर स्थित है। - अन्य हड़प्पा पूर्वगामी शहरों के विपरीत, जो आमतौर पर नदियों और जल के बारहमासी स्रोतों के पास स्थित हैं, धौलावीरा खादिर बेट द्वीप पर स्थित है। - यह साइट विभिन्न खनिज और कच्चे माल के स्रोतों के दोहन हेतु महत्त्वपूर्ण थी। - इसने मगन और मेसोपोटामिया क्षेत्रों में आंतरिक एवं बाहरी व्यापार को भी सुगम बनाया। पुरातात्त्विक परिणामः - यहाँ पाए गए कलाकृतियों में टेराकोटा मिट्टी के बर्तन, मोती, सोने और तांबे के गहने, मुहरें, मछलीकृत हुक, जानवरों की मूर्तियाँ, उपकरण, कलश एवं कुछ महत्त्वपूर्ण बर्तन शामिल हैं। - तांबे के स्मेल्टर या भट्टी के अवशेषों से संकेत मिलता है कि धौलावीरा में रहने वाले हड़प्पावासी धातु विज्ञान जानते थे। - ऐसा माना जाता है कि धौलावीरा के व्यापारी वर्तमान राजस्थान, ओमान तथा संयुक्त अरब अमीरात से तांबा अयस्क प्राप्त करते थे और निर्मित उत्पादों का निर्यात करते थे। - यह अगेट की तरह कौड़ी एवं अर्द्ध-कीमती पत्थरों से बने आभूषणों के निर्माण का भी केंद्र था तथा इमारती लकड़ी का निर्यात भी करता था। - सिंधु घाटी लिपि में निर्मित दस बड़े पत्थरों के शिलालेख है, शायद यह दुनिया का सबसे पुराने साइन बोर्ड है। - प्राचीन शहर के पास एक जीवाश्म पार्क है जहाँ लकड़ी के जीवाश्म संरक्षित हैं। - अन्य IVC स्थलों पर कब्रों के विपरीत धौलावीरा में मनुष्यों के किसी भी नश्वर अवशेष की खोज नहीं की गई है। धौलावीरा स्थल की विशिष्ट विशेषताएँः - जलाशयों की व्यापक शृंखला। - बाहरी किलेबंदी। - दो बहुउद्देश्यीय मैदान, जिनमें से एक उत्सव के लिये और दूसरा बाज़ार के रूप में उपयोग किया जाता था। - अद्वितीय डिज़ाइन वाले नौ द्वार। - अंत्येष्टि वास्तुकला में ट्यूमुलस की विशेषता है - बौद्ध स्तूप जैसी अर्द्धगोलाकार संरचनाएँ। - बहुस्तरीय रक्षात्मक तंत्र, निर्माण और विशेष रूप से दफनाए जाने वाली संरचनाओं में पत्थर का व्यापक उपयोग। धौलावीरा का पतनः - इसका पतन मेसोपोटामिया के पतन के साथ ही हुआ, जो अर्थव्यवस्थाओं के एकीकरण का संकेत देता है। - हड़प्पाई, जो समुद्री लोग थे, ने मेसोपोटामिया के पतन के बाद एक बड़ा बाज़ार खो दिया जो इनके स्थानीय खनन, विनिर्माण, विपणन और निर्यात व्यवसायों को प्रभावित करते थे । - जलवायु परिवर्तन और सरस्वती जैसी नदियों के सूखने के कारण धौलावीरा को गंभीर शुष्कता का परिणाम देखना पड़ा। - सूखे जैसी स्थिति के कारण लोग गंगा घाटी की ओर या दक्षिण गुजरात की ओर तथा महाराष्ट्र से आगे की ओर पलायन करने लगे। - इसके अलावा कच्छ का महान रण, जो खादिर द्वीप के चारों ओर स्थित है और जिस पर धोलावीरा स्थित है, यहाँ पहले नौगम्य हुआ करता था, लेकिन समुद्र का जल धीरे-धीरे पीछे हट गया और रण क्षेत्र एक कीचड़ क्षेत्र बन गया। - लोथलः धौलावीरा की खुदाई से पहले अहमदाबाद ज़िले के ढोलका तालुका में साबरमती के तट पर सरगवाला गाँव में लोथल, गुजरात सबसे प्रमुख सिंधु घाटी स्थल था। - इसकी खुदाई वर्ष एक हज़ार नौ सौ पचपन-साठ के बीच की गई थी और इसे प्राचीन सभ्यता का एक महत्त्वपूर्ण बंदरगाह शहर माना जाता था, जिसमें मिट्टी की ईंटों से बनी संरचनाएँ थीं। - लोथल के एक कब्रिस्तान से इक्कीस मानव कंकाल मिले हैं। - यहाँ से तांबे के बर्तन की भी खोज की गई है। - इस स्थल से अर्द्ध-कीमती पत्थर, सोने आदि से बने आभूषण भी मिले हैं। - सुरेंद्रनगर ज़िले में भादर नदी के तट पर स्थित रंगपुर, राज्य का पहला हड़प्पा स्थल था जिसकी खुदाई की गई थी। - राजकोट ज़िले में रोजड़ी, गिर सोमनाथ ज़िले में वेरावल के पास प्रभास। - जामनगर में लखबावल और कच्छ के भुज तालुका में देशलपार, राज्य के अन्य हड़प्पा स्थल हैं। - गुजरात में धौलावीरा के अलावा तीन अन्य यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हैं। चर्चा में क्यों? हाल ही में विज्ञान और पर्यावरण केंद्र के सहयोग से राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन द्वारा 'गंगा बेसिन में शहरों को जल संवेदनशील' बनाने पर एक नई क्षमता निर्माण पहल का शुभारंभ किया गया। पहल के बारे मेंः - उद्देश्यः इस कार्यक्रम का उद्देश्य गंगा बेसिन शहरों में बेहतर नदी स्वास्थ्य के लिये स्थायी शहरी जल प्रबंधन को बढ़ावा देने हेतु क्षमता निर्माण तथा कार्रवाई व अनुसंधान करना है। - मुख्य केंद्रित क्षेत्र : - जल संवेदनशील शहरी डिज़ाइन और योजना। - शहरी जल दक्षता और संरक्षण। - विकेंद्रीकृत अपशिष्ट जल शोधन और स्थानीय रूप से इसका पुनः उपयोग। - शहरी भूजल प्रबंधन। - शहरी जल निकाय/झील प्रबंधन । - अभिसरण प्रयासः - इस पहल का उद्देश्य राष्ट्रीय प्रमुख शहरी मिशनों और अन्य मिशनों के साथ नमामि गंगे मिशन का अभिसरण सुनिश्चित करना है। - अमृत, स्मार्ट सिटीज़, स्वच्छ भारत मिशन, हृदय, राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन। - समस्त गंगा बेसिन राज्यों में राज्य/शहर स्तर पर अटल भूजल योजना, जल जीवन मिशन, जल शक्ति अभियान। - इस पहल का उद्देश्य राष्ट्रीय प्रमुख शहरी मिशनों और अन्य मिशनों के साथ नमामि गंगे मिशन का अभिसरण सुनिश्चित करना है। - हितधारकः यह कार्यक्रम सभी हितधारकों को जोड़ता है जिसमें शामिल हैंः - राज्य कार्यक्रम प्रबंधन समूह, नमामि गंगे , नगर निगम, तकनीकी और अनुसंधान स्थिरांक, अंतर्राष्ट्रीय संगठन तथा स्थानीय ज़मीनी स्तर के समुदाय। - जल संवेदनशील शहरी डिज़ाइन और योजना : यह एक उभरता हुआ शहरी विकास प्रतिमान है जिसका उद्देश्य पर्यावरण पर शहरी विकास के जलविज्ञान संबंधी प्रभावों को कम करना है। इनमें शामिल हैंः - जल के इष्टतम उपयोग के लिये शहरी क्षेत्रों की योजना बनाने और डिज़ाइन तैयार करने की विधि। - हमारी नदियों और खाड़ियों को होने वाले नुकसान को कम करना। - संपूर्ण जल प्रणालियों के प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करना। अन्य संबंधित पहलेंः - नदी शहरों की योजना बनाने में एक आदर्श बदलाव आया है। - "रिवर सिटीज़ एलायंस" नदी बेसिन के शहरों के सतत् विकास और क्षमता निर्माण के माध्यम से सामूहिक रूप से नदी के कायाकल्प करने की दिशा में सहयोग के लिये एक अनूठा मंच प्रदान करेगा। - वर्षा जल संचयन के लिये शुरू की गई जल शक्ति मंत्रालय की 'कैच द रेन' पहल ने सभी हितधारकों को वर्षा जल संचयन संरचनाओं को जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल बनाने तथा वर्षा जल संचयन हेतु उप-भूमि स्तर को बनाए रखने के लिये प्रेरित किया है। - वर्षों से बारिश की तीव्रता में वृद्धि हुई है लेकिन बारिश के दिनों की संख्या में कमी देखी गई है, जिससे जल प्रबंधन एक महत्त्वपूर्ण विषय बन गया है। - वर्षा जल संचयन के लिये पारंपरिक ज्ञान का उपयोग करने की आवश्यकता है। - उदाहरण के लिये बिहार की अहार-पाइन प्रणाली , राजस्थान के किलों में कुएँ और दक्षिण भारत के कैस्केड टैंक आदि। - शहरी निर्माण प्रतिरूप जिसमें भू-दृश्य और शहरी जल चक्र भी शामिल हैं के बीच एकीकरण के लिये एक रूपरेखा की आवश्यकता है। - नदियों की खराब स्थिति के लिये बड़े पैमाने पर शहरों को ज़िम्मेदार ठहराया गया है और इसलिये कायाकल्प के प्रयासों में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने की आवश्यकता होगी। - शहरों के लिये योजना बनाते समय नदी संवेदनशील दृष्टिकोण को मुख्यधारा में शामिल करने की आवश्यकता है। स्रोतः पी.आई.बी. प्रिलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? हाल ही में केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री ने राज्यसभा में कहा है कि सरकार ने डिजिटल बैंकिंग, डोरस्टेप बैंकिंग सेवाओं और डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म की सुविधा के लिये कई कदम उठाए हैं। डिजिटल बैंकिंगः - यह उन सभी पारंपरिक बैंकिंग गतिविधियों, कार्यक्रमों व सेवाओं का डिजिटलीकरण है जो ऐतिहासिक रूप से केवल ग्राहकों के लिये तब उपलब्ध थे। - इसमें मनी डिपॉजिट, विदड्रॉल और ट्रांसफर, चेकिंग/सेविंग अकाउंट मैनेजमेंट, फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स के लिये अप्लाई करना, लोन मैनेजमेंट, बिल पे, अकाउंट सर्विसेज़ जैसी गतिविधियाँ शामिल हैं। - डिजिटल भुगतान को अपनाने में इंटरनेट का उपयोग ही एकमात्र बाधा नहीं है। - उपयोगकर्त्ताओं को शिक्षित करने के साथ-साथ उनके डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। प्रमुख पहलेंः - EASE सुधार एजेंडाः इसे सरकार और PSB द्वारा संयुक्त रूप से जनवरी दो हज़ार अट्ठारह में लॉन्च किया गया था। - इसे इंडियन बैंक्स एसोसिएशन के माध्यम से कमीशन किया गया था और बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप द्वारा इसकी संकल्पना की गई थी। - EASE एजेंडा का उद्देश्य स्वच्छ और स्मार्ट बैंकिंग को संस्थागत बनाना है। - EASE रिफॉर्म्स इंडेक्सः इंडेक्स एक सौ बीस+ ओब्ज़ेक्टिव मेट्रिक्स पर प्रत्येक PSB के प्रदर्शन को मापता है। इसका लक्ष्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्द्धा को प्रोत्साहित करके परिवर्तन को जारी रखना है। - EASE एक.शून्य: इस रिपोर्ट ने पारदर्शी रूप से गैर-निष्पादित परिसंपतियों के समाधान में PSB के प्रदर्शन में महत्त्वपूर्ण सुधार दिखाया। - EASE दो.शून्य: यह EASE एक.शून्य की नींव पर बना है और इसने सुधार यात्रा को अपरिवर्तनीय बनाने, प्रक्रियाओं एवं प्रणालियों को मज़बूत करने तथा परिणामों के संचालन के लिये छः विषयों में नए सुधार पेश किये। - EASE दो.शून्य के छः विषय हैंः उत्तरदायी बैंकिंग, ग्राहक प्रतिक्रिया, क्रेडिट ऑफ-टेक, उद्यमी मित्र के रूप में PSB , वित्तीय समावेशन और डिजिटलीकरण एवं शासन तथा मानव संसाधन। - Ease तीन.शून्य: यह प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुए सभी ग्राहक अनुभवों में बैंकिंग को आसान बनाने का प्रयास करता है जिनमें डायल-ए-लोन , फिनटेक एवं ई-व्यापार कंपनियों से साझेदारी, क्रेडिट@क्लिक , कृषि-ऋण में तकनीकी का प्रयोग, ईज़ बैंकिंग आउटलेट आदि शामिल हैं । - Ease चार.शून्य: इस वित्तीय वर्ष में सुधार एजेंडे के हिस्से के रूप में Ease चार.शून्य को राज्य द्वारा संचालित बैंक गैर-बैंकिंग फर्मों के साथ सह-ऋण, डिजिटल कृषि वित्तपोषण, सहक्रियाओं और चौबीसxसात बैंकिंग सुविधाओं के लिये तकनीकी लचीलापन पर ध्यान केंद्रित करने के लिये शुरू किया गया है। - PSBloansinउनसठ minutes.com: - सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को ऋणों के लिये सैद्धांतिक रूप से ऑनलाइन अनुमोदन प्रदान करने हेतु क्रेडिट ब्यूरो, आयकर और वस्तु एवं सेवा कर डेटा के त्रिभुज का उपयोग करते हुए PSBloansinउनसठminutes.com के माध्यम से डिजिटल ऋण की शुरुआत को संपर्क रहित बनाया गया है। - व्यापार प्राप्य बट्टाकरण/छूट प्रणाली प्लेटफॉर्म : - MSMEs के लिये ऑनलाइन बिल छूट को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के माध्यम से TReDS प्लेटफॉर्म पर ऑनबोर्डिंग के ज़रिये प्रतिस्पर्द्धी आधार पर सक्षम किया गया है तथा ऑनलाइन रियायती बिलों का अनुपात तेज़ी से बढ़ा है। - बिल डिस्काउंटिंग या छूट एक व्यापारिक गतिविधि है जिसमें एक कंपनी के अवैतनिक चालान, जिन्हें भविष्य में भुगतान किया जाना है, एक फाइनेंसर को बेचे जाते हैं। - MSMEs के लिये ऑनलाइन बिल छूट को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के माध्यम से TReDS प्लेटफॉर्म पर ऑनबोर्डिंग के ज़रिये प्रतिस्पर्द्धी आधार पर सक्षम किया गया है तथा ऑनलाइन रियायती बिलों का अनुपात तेज़ी से बढ़ा है। - जीवन प्रमाण पहलः - पेंशनभोगियों के लिये इस पहल ने वरिष्ठ नागरिक पेंशनभोगियों को अपने वार्षिक जीवन प्रमाण पत्र को ऑनलाइन अपडेट करने की सुविधा प्रदान की है। - डोरस्टेप बैंकिंग सेवाएँः - PSB एलायंस, जो सभी PSBs और भारतीय बैंक संघ की एक पहल है, ने सभी ग्राहकों के लिये डोरस्टेप बैंकिंग सेवाएंँ शुरू की हैं। - डोरस्टेप बैंकिंग' के माध्यम से ग्राहक अपने घर से ही प्रमुख बैंकिंग लेन-देन सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं। वर्तमान स्थितिः - वर्तमान में PSB के लगभग बहत्तर% वित्तीय लेन-देन डिजिटल चैनलों के माध्यम से किये जाते हैं, जिसमें डिजिटल चैनलों पर सक्रिय ग्राहकों की संख्या वित्त वर्ष दो हज़ार उन्नीस-बीस के तीन.चार करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष दो हज़ार बीस-इक्कीस में सात.छः करोड़ हो गई है। - घरेलू और मोबाइल चैनलों के माध्यम से किये गए वित्तीय लेन-देनों की हिस्सेदारी वित्त वर्ष दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस में उनतीस% थी जो वित्त वर्ष दो हज़ार बीस-इक्कीस में बढ़कर छिहत्तर% हो गई है। आगे की राहः - डिजिटल माध्यम ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है। ब्लॉकचेन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी नई तकनीकों को अपनाकर बैंकों को इन आधुनिक तकनीकों से जुड़ना होगा। - बड़े डेटा के बल पर संचालित इंटेलिजेंट एनालिटिक्स के माध्यम से क्रॉस-सेलिंग और विभिन्न ग्राहकों की ज़रूरतों के अनुसार क्यूरेटेड उत्पाद वे उत्पाद हैं जो बैंकों द्वारा दिये जाने वाले ऑफर्स से अलग हैं। स्रोतः पी.आई.बी. प्रिलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? हाल ही में आर्थिक उदारीकरण सुधारों की तीसवीं वर्षगाँठ पर भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश की वृहद्-आर्थिक स्थिरता पर चिंता व्यक्त की। - उनके अनुसार, कोविड-उन्नीस महामारी से उत्पन्न मौजूदा आर्थिक संकट वर्ष एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे के आर्थिक संकट की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण है और राष्ट्र को सभी भारतीयों के लिये एक सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने हेतु प्राथमिकता के क्षेत्रों को पुनर्गठित करने की आवश्यकता होगी। एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे का संकट और सुधारः - एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे का संकटः वर्ष एक हज़ार नौ सौ नब्बे-इक्यानवे में भारत को गंभीर भुगतान संतुलन संकट का सामना करना पड़ा, जहाँ उसका विदेशी मुद्रा भंडार सिर्फ पंद्रह दिनों के आयात के वित्तपोषण हेतु पर्याप्त था। साथ ही अन्य कई कारक भी थे जो BOP संकट का कारण बनेः - राजकोषीय घाटाः वर्ष एक हज़ार नौ सौ नब्बे-इक्यानवे के दौरान राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का लगभग आठ.चार% था। - खाड़ी युद्ध-I: वर्ष एक हज़ार नौ सौ नब्बे-इक्यानवे में कुवैत पर इराक के आक्रमण के कारण तेल की कीमतों में वृद्धि से स्थिति विकट हो गई थी। - कीमतों में वृद्धिः मुद्रा आपूर्ति में तेज़ी से वृद्धि और देश की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण मुद्रास्फीति दर छः.सात% से बढ़कर सोलह.सात% हो गई। - एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे के सुधारों की प्रकृति और दायराः वर्ष एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे में वृहद्-आर्थिक संकट से बाहर निकलने के लिये भारत ने एक नई आर्थिक नीति शुरू की, जो एलपीजी या उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण मॉडल पर आधारित थी। - तत्कालीन वित्त मंत्री मनमोहन सिंह वर्ष एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे के ऐतिहासिक उदारीकरण के प्रमुख वास्तुकार थे। - LPG मॉडल के तहत व्यापक सुधारों में शामिल हैंः - औद्योगिक नीति का उदारीकरणः औद्योगिक लाइसेंस परमिट राज का उन्मूलन, आयात शुल्क में कमी आदि। - निजीकरण की शुरुआतः बाज़ारों का विनियमन, बैंकिंग सुधार आदि। - वैश्वीकरणः विनिमय दर में सुधार, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और व्यापार नीतियों को उदार बनाना, अनिवार्य परिवर्तनीयता संबंधी कारण को हटाना आदि। - वर्ष एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे से दो हज़ार ग्यारह तक देखी गई उच्च आर्थिक वृद्धि और वर्ष दो हज़ार पाँच से दो हज़ार पंद्रह तक गरीबी में पर्याप्त कमी के लिये इन सुधारों को श्रेय दिया जाता है तथा उनकी सराहना की जाती है। वर्ष दो हज़ार इक्कीस का संकटः - वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट , दो हज़ार इक्कीस में कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के वर्ष दो हज़ार इक्कीस में बारह.पाँच% और वर्ष दो हज़ार बाईस में छः.नौ% की दर से बढ़ने की उम्मीद है। - हालाँकि महामारी के कारण अनौपचारिक क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बेरोज़गारी और दशकों की गिरावट के बाद गरीबी बढ़ रही है। - स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे सामाजिक क्षेत्र पिछड़ गए हैं जिनमें पुनः सुधार करने में हमारी आर्थिक प्रगति असमर्थ साबित हो रही है। - महामारी के दौरान बहुत से लोगों की जान चली गई, साथ ही कई लोगों ने अपनी आजीविका खो दी जो कि काफी दुखद अनुभव रहा। - इंस्पेक्टर राज ई-कॉमर्स संस्थाओं के लिये नीति के माध्यम से वापसी करने के लिये तैयार है। - भारत, राजकोषीय घाटे के वित्तपोषण के लिये भारतीय रिज़र्व बैंक से अत्यधिक उधार लेने या धन निकालने जैसी स्थित में पहुँच गया है। - प्रवासी श्रम संकट ने विकास मॉडल में रुकावट डाल दी है। - भारतीय विदेश व्यापार नीति फिर से व्यापार उदारीकरण पर संदेह कर रही है, क्योंकि भारत पहले ही क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी से बाहर निकलने का फैसला कर चुका है। - वर्ष एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे के सुधारों ने अर्थव्यवस्था को संकट से उबारने में मदद की। यह समय नए सुधार एजेंडे की रूपरेखा तैयार करने का है जो न केवल जीडीपी को पूर्व-संकट के स्तर पर वापस लाएगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि विकास दर महामारी में प्रवेश करने के समय की तुलना में अधिक हो। चर्चा में क्यों? अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के 'वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक' के नवीनतम संस्करण में वर्ष दो हज़ार इक्कीस के भारत विकास अनुमान को बारह.पाँच% से घटाकर नौ.पाँच% कर दिया गया है। - 'अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष' ने अपने पूर्वानुमान में परिवर्तन करते हुए मुख्यतः दो कारकों यथा- टीकों तक पहुँच और नए कोरोना-वेरिएंट के जोखिम पर ध्यान केंद्रित किया है। भारतीय अर्थव्यवस्थाः - वर्ष दो हज़ार इक्कीस में भारतीय अर्थव्यवस्था के नौ.पाँच% की दर से और वर्ष दो हज़ार बाईस में आठ.पाँच% की दर से बढ़ने की उम्मीद है। - वर्ष दो हज़ार बीस में भारतीय अर्थव्यवस्था में आठ% का अनुमानित संकुचन देखा गया था। - 'अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष' ने कोविड-उन्नीस महामारी की दूसरी लहर के कारण भारत की विकास के अनुमान में कटौती की है, क्योंकि इसके कारण रिकवरी की गति प्रभावित हुई है और साथ ही उपभोक्ता विश्वास एवं ग्रामीण मांग को भी नुकसान पहुँचा है। वैश्विक अर्थव्यवस्थाः - वर्ष दो हज़ार इक्कीस के लिये वैश्विक विकास पूर्वानुमान को छः% पर बरकरार रखा गया है और वर्ष दो हज़ार बाईस के लिये इसके चार.नौ% की दर से बढ़ने की उम्मीद है। - वर्ष दो हज़ार बीस में वैश्विक अर्थव्यवस्था में तीन.तीन% का संकुचन हुआ था। - अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने वैश्विक व्यापार की मात्रा में वृद्धि के अपने अनुमान को भी वर्ष दो हज़ार इक्कीस के लिये एक सौ तीस bps से बढ़ाकर नौ.सात% कर दिया है, वहीं वर्ष दो हज़ार बाईस के लिये यह पचास bps बढ़कर सात% पर पहुँच गया है। - आपूर्ति पक्ष में तेज़ी आने और वैश्विक व्यापार संभावनाओं में अपेक्षित वृद्धि से भारत को भी काफी लाभ प्राप्त होगा। - सख्त बाहरी वित्तीय स्थितियाँः - उभरते बाज़ारों को जहाँ संभव हो ऋण परिपक्वता अवधि को बढ़ाकर और बिना बचाव वाले विदेशी मुद्रा ऋण के निर्माण को सीमित करके संभवतः सख्त बाहरी वित्तीय स्थितियों के लिये तैयार रहना चाहिये। - समय से पूर्व सख्त नीतियों से बचनाः - केंद्रीय बैंकों को अस्थायी मुद्रास्फीति दबावों का सामना करने के लिये समय से पहले सख्त नीतियों से बचना चाहिये, लेकिन अगर मुद्रास्फीति के संकेत दिखाई देते हैं, तो इन्हें जल्दी प्रतिक्रिया हेतु तैयार रहना चाहिये। - स्वास्थ्य खर्च को प्राथमिकता देंः - राजकोषीय नीति को स्वास्थ्य व्यय को बढ़ावा देने के लिये प्राथमिकता देना जारी रखना चाहिये। - राजकोषीय नीति वह साधन है जिसके द्वारा सरकार किसी देश की अर्थव्यवस्था की निगरानी और उसे प्रभावित करने के लिये अपने खर्च के स्तर तथा कर दरों को समायोजित करती है। - राजकोषीय नीति को स्वास्थ्य व्यय को बढ़ावा देने के लिये प्राथमिकता देना जारी रखना चाहिये। - इसकी स्थापना द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात् युद्ध प्रभावित देशों के पुनर्निमाण में सहायता के लिये विश्व बैंक के साथ की गई थी। - इन दोनों संगठनों की स्थापना के लिये अमेरिका के ब्रेटन वुड्स में आयोजित एक सम्मेलन में सहमति बनी। इसलिये इन्हें 'ब्रेटन वुड्स ट्विन्स' के नाम से भी जाना जाता है। - वर्ष एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस में स्थापित IMF विश्व के एक सौ नवासी देशों द्वारा शासित है तथा यह अपने निर्णयों के लिये इन देशों के प्रति उत्तरदायी भी है। भारत सत्ताईस दिसंबर, एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस को IMF में शामिल हुआ था। - IMF का प्राथमिक उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय मौद्रिक प्रणाली की स्थिरता सुनिश्चित करना है। अंतर्राष्ट्रीय मौद्रिक प्रणाली से आशय विनिमय दरों और अंतर्राष्ट्रीय भुगतान की उस प्रणाली से है जो देशों को एक-दूसरे के साथ लेन-देन करने में सक्षम बनाती है। - IMF के अधिदेश में वैश्विक स्थिरता से संबंधित सभी व्यापक आर्थिक और वित्तीय मुद्दों को शामिल करने के लिये वर्ष दो हज़ार बारह में इसे अद्यतन/अपडेट किया गया था। - IMF द्वारा जारी महत्त्वपूर्ण रिपोर्टः - वैश्विक वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट . - वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक . - यह IMF का एक सर्वेक्षण है जिसे आमतौर पर अप्रैल और अक्तूबर के महीनों में वर्ष में दो बार प्रकाशित किया जाता है। - यह भविष्य के चार वर्षों तक के अनुमानों के साथ निकट और मध्यम अवधि के दौरान वैश्विक आर्थिक विकास का विश्लेषण तथा भविष्यवाणी करता है। - पूर्वानुमान के अपडेट्स की बढ़ती मांग को देखते हुए वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक अपडेट जनवरी और जुलाई में प्रकाशित किया जाता है, जो आमतौर पर अप्रैल और अक्तूबर में प्रकाशित होने वाली मुख्य WEO रिपोर्टों के बीच का समय है। चर्चा में क्योंः हाल ही में खगोलविदों के एक समूह ने उच्च-ऊर्जा विकिरण के एक बहुत ही कम अवधि के ऐसे शक्तिशाली विस्फोट का पता लगाया है जिसे गामा-किरण विस्फोट के रूप में भी जाना जाता है जो लगभग एक सेकंड तक हुआ था। - इसके घटित होने की तारीख के बाद इसका नाम GRB दो लाख आठ सौ छब्बीस एम्पीयर रखा गया, जो कि छब्बीस अगस्त, दो हज़ार बीस है। गामा-किरण विस्फोटः - परिचयः - ये ब्रह्मांड में सबसे शक्तिशाली घटनाएँ हैं, जिनका पता अरबों प्रकाश-वर्षों में लगाया जा सकता है। - एक प्रकाश वर्ष वह दूरी है जब प्रकाश की किरण एक पृथ्वी वर्ष या नौ.पाँच ट्रिलियन किलोमीटर में यात्रा करती है। - खगोलविद् उन्हें दो सेकंड से अधिक या कम समय तक चलने के आधार पर लंबे या छोटे के रूप में वर्गीकृत करते हैं। - लंबे GRB: - वे बड़े सितारों की मृत्यु के समय लंबे समय तक हुए विस्फोट का निरीक्षण करते हैं। - जब सूर्य से बहुत अधिक विशाल तारे का ईंधन समाप्त हो जाता है, तो उसका केंद्रीय भाग अचानक ढह जाता है और एक कृष्ण विवर बन जाता है। - ब्लैक होल्स अंतरिक्ष में उपस्थित ऐसे छिद्र हैं जहाँ गुरुत्व बल इतना अधिक होता है कि यहाँ से प्रकाश का पारगमन नहीं होता। - जैसे ही पदार्थ ब्लैक होल की ओर घूमता है, उसमें से कुछ अंश दो शक्तिशाली धाराओं के रूप में बाहर की ओर निकल जाते हैं और जो फिर विपरीत दिशाओं में लगभग प्रकाश की गति से बाहर की ओर भागते हैं। - खगोलविद् GRB का ही पता केवल तब लगा पाते हैं जब इनमें से एक प्रवाह लगभग सीधे पृथ्वी की ओर जाने का संकेत दे देता है। - तारे के भीतर से प्रस्फुटित प्रत्येक धारा से गामा किरणों का एक स्पंदन उत्पन्न होता है, जो प्रकाश का ऐसा उच्चतम-ऊर्जा रूप है जो कई मिनटों तक चल सकता है। - विस्फोट के बाद विखंडित तारा फिर तेज़ी से एक सुपरनोवा के रूप में फैलता है। - सुपरनोवा एक विस्फोट करने वाले तारे को दिया गया नाम है जो अपने जीवन के अंत तक पहुँच गया है। - लघु GRB: - लघु GRB तब बनते हैं जब संघटित वस्तुओं के जोड़े- जैसे न्यूट्रॉन तारे, जो तारों के टूटने के दौरान भी बनते हैं- अरबों वर्षों में अंदर की ओर सर्पिल रूप में घूर्णन करते रहते हैं और आपस में टकराते हैं। - एक न्यूट्रॉन तारा उच्च द्रव्यमान वाले सितारों के संभावित विकासवादी अंत-बिंदुओं में से एक होता है। - लघु GRB तब बनते हैं जब संघटित वस्तुओं के जोड़े- जैसे न्यूट्रॉन तारे, जो तारों के टूटने के दौरान भी बनते हैं- अरबों वर्षों में अंदर की ओर सर्पिल रूप में घूर्णन करते रहते हैं और आपस में टकराते हैं। - यह केवल शून्य दशमलव पैंसठ सेकंड तक चलने वाले उच्च-ऊर्जा उत्सर्जन का एक तीव्र विस्फोट था। - विस्तारित ब्रह्मांड के माध्यम से काफी लंबे समय तक यात्रा करने के बाद फर्मी के गामा-रे बर्स्ट मॉनीटर द्वारा पता लगाए जाने के समय तक यह संकेत लगभग एक-सेकंड लंबा हो गया था। - यह हमारे ब्रह्मांड की वर्तमान आयु की लगभग आधी उम्र से पृथ्वी की ओर दौड़ रहा था। - एक विशाल तारे की मृत्यु के कारण हुआ यह सबसे छोटा गामा-रे विस्फोट था। GRB दो लाख आठ सौ छब्बीस एम्पीयर का महत्त्वः - इसने गामा-किरणों के विस्फोट से संबंधित लंबे समय से चली आ रही समस्याओं को हल करने में मदद की है। साथ ही यह अध्ययन संख्या घनत्व को बेहतर ढंग से सीमित करने हेतु ऐसी सभी ज्ञात घटनाओं का पुनः विश्लेषण करने के लिये प्रेरित करता है। - इस समूह में आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्ज़र्वेशनल साइंसेज़ , द इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स, पुणे , नेशनल सेंटर फॉर रेडियो एस्ट्रोफिजिक्स - टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, पुणे और आईआईटी मुंबई के भारतीय खगोलविद् शामिल थे। फर्मी गामा-रे स्पेस टेलीस्कोपः - परिचयः - पूर्व में इसे गामा-रे लार्ज एरिया स्पेस टेलीस्कोप कहा जाता है, यह एक अंतरिक्ष वेधशाला है जिसका उपयोग पृथ्वी की निचली कक्षा से गामा-किरणों संबंधी खगोलीय अवलोकन के लिये किया जाता है। - इसे जून दो हज़ार आठ में लॉन्च किया गया था। इसका नाम एक इटैलियन-अमेरिकी वैज्ञानिक एनरिको फर्मी के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने उच्च-ऊर्जा भौतिकी में अग्रणी काम किया था। - सहयोगः - फर्मी एक खगोल भौतिकी और कण भौतिकी साझेदारी है, जिसे अमेरिकी ऊर्जा विभाग के सहयोग तथा फ्राँस, जर्मनी, इटली, जापान, स्वीडन और यू.एस. में शैक्षणिक संस्थानों व भागीदारों के महत्त्वपूर्ण योगदान के साथ विकसित किया गया है। - प्रमुख कार्यः - यह प्रत्येक तीन घंटे में संपूर्ण आकाश का मानचित्रण करता है। यह ब्रह्मांड की सबसे चरम घटनाओं के मामले में महत्त्वपूर्ण पहुँच प्रदान करता है, जैसे जीआरबी, ब्लैक-होल जेट और पल्सर। - पल्सर एक प्रकार के न्यूट्रॉन तारे होते हैं जो नियमित अंतराल पर रेडियो तत्त्वों का उत्सर्जन करते हैं। - यह प्रत्येक तीन घंटे में संपूर्ण आकाश का मानचित्रण करता है। यह ब्रह्मांड की सबसे चरम घटनाओं के मामले में महत्त्वपूर्ण पहुँच प्रदान करता है, जैसे जीआरबी, ब्लैक-होल जेट और पल्सर। - ये ब्रह्मांड में अत्यधिक ऊर्जा वाली प्रकाश किरणें हैं। इनमें हमारी आँखों को दिखाई देने वाले प्रकाश की तुलना में एक अरब गुना अधिक ऊर्जा होती है। - ये ब्रह्मांड में सबसे गर्म और सबसे ऊर्जावान वस्तुओं द्वारा निर्मित हैं, जैसे- न्यूट्रॉन तारे और पल्सर, सुपरनोवा विस्फोट तथा ब्लैक होल के आसपास का क्षेत्र। - गामा किरणों में उच्च ऊर्जा होती है; इनमें किसी भी लेंस या दर्पण के माध्यम से सीधे गुजरने की क्षमता होती है, जिससे उन्हें एक दृश्य-प्रकाश दूरबीन में केंद्रित करना बहुत मुश्किल होता है। पृथ्वी पर गामा किरणेंः - पृथ्वी पर, गामा किरणें परमाणु विस्फोट, बिजली तथा कम रेडियोधर्मी क्षय की गतिविधि से उत्पन्न होती हैं। - गामा-किरण गामा किरणों का खगोलीय अवलोकन है जिसमें एक सौ केवी से ऊपर फोटॉन ऊर्जा होती है। - गामा किरणें इतनी ऊर्जावान होती हैं कि वे पृथ्वी पर जीवन के लिये हानिकारक होती हैं। - पृथ्वी का वायुमंडल गामा किरणों को अवशोषित कर लेता है, जिससे वह इन गामा किरणों को पृथ्वी पर पहुँचने से पहले ही अवशोषित कर जीवन को प्रभावित करने से रोकता है। - इसलिये गामा-किरण स्रोतों का खगोलीय अवलोकन पृथ्वी के वायुमंडल के सुरक्षात्मक आवरण के ऊपर उच्च ऊँचाई पर उड़ने वाले गुब्बारों या उपग्रहों के साथ किया जाता है। स्रोतः पी.आई.बी. चर्चा में क्यों? हाल ही में रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रॉसकॉसमॉस ने 'इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन' में 'नौका' नाम की अपनी सबसे बड़ी अंतरिक्ष प्रयोगशाला लॉन्च की है। - इससे पूर्व चार अंतरिक्ष यात्रियों को नासा और स्पेसएक्स के वाणिज्यिक क्रू कार्यक्रम के तहत 'इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन' पर भेजा गया था। इस मिशन को 'क्रू-दो' मिशन के नाम से जाना जाता है। 'इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन' - 'इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन' एक निवास योग्य कृत्रिम उपग्रह है, जो कि पृथ्वी की निचली कक्षा में सबसे बड़ी मानव निर्मित संरचना है। - यह पाँच अंतरिक्ष एजेंसियोंः नासा , रॉसकॉसमॉस , जाक्सा , ESA और CSA के बीच एक सहयोगात्मक प्रयास है। - एक अंतरिक्ष स्टेशन मुख्य रूप से एक बड़ा अंतरिक्षयान है, जो लंबी अवधि के लिये पृथ्वी की निम्न कक्षा में रहता है। - यह अंतरिक्ष में एक बड़ी प्रयोगशाला की तरह है, जो अंतरिक्ष यात्रियों को माइक्रोग्रैविटी में वैज्ञानिक परीक्षण करने और हफ्तों या महीनों तक रहने की अनुमति देता है। - चीन ने अपने स्थायी अंतरिक्ष स्टेशन का एक मानव रहित मॉड्यूल 'तियानहे' लॉन्च किया है, जिसके वर्ष दो हज़ार बाईस के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है। - भारत वर्ष दो हज़ार तीस तक अपना स्वयं का अंतरिक्ष स्टेशन लॉन्च करने की योजना बना रहा है, जिससे भारत अमेरिका, रूस और चीन की एक विशिष्ट सूची में शामिल हो जाएगा। नौका मॉड्यूलः - रूसी भाषा में 'नौका' का अर्थ विज्ञान है। यह अंतरिक्ष में रूस की सबसे महत्त्वाकांक्षी अनुसंधान सुविधा है और इसमें ऑक्सीजन जनरेटर, रोबोट कार्गो क्रेन, एक शौचालय तथा रूसी अंतरिक्ष यात्रियों के लिये बिस्तर शामिल है। - इसे एक प्रोटॉन रॉकेट का उपयोग करके कक्षा में भेजा गया है और इसे ISS तक पहुँचने में आठ दिन लगेंगे। - इस दौरान इंजीनियर और फ्लाइट कंट्रोलर अंतरिक्ष में नौका का परीक्षण करेंगे तथा अंतरिक्ष स्टेशन पर इसके आगमन की तैयारी करेंगे। - यह 'पर्स' की जगह लेगा और महत्त्वपूर्ण 'ज़्वेज़्दा मॉड्यूल' से जुड़ा होगा जो सभी अंतरिक्ष स्टेशन को जीवन समर्थन प्रणाली प्रदान करता है एवं रूसी कक्षीय खंड के संरचनात्मक व कार्यात्मक केंद्र के रूप में कार्य करता है। - 'पर्स' सितंबर दो हज़ार एक से अंतरिक्ष स्टेशन का हिस्सा रहा है, जो रूसी अंतरिक्षयान के लिये 'डॉकिंग पोर्ट' और रूसी स्पेसवॉक के लिये एक 'एयरलॉक' के रूप में कार्य कर रहा है। - यह ISS के रहने योग्य आयतन को बढ़ाकर सत्तर घन मीटर कर देगा। इसका प्रयोग अंतरिक्ष यात्री अतिरिक्त जगह का प्रयोग करने और कार्गो स्टोर करने के लिये करेंगे। - नौका भविष्य के संचालन के लिये एक नई 'साइंस फैसिलिटी', डॉकिंग पोर्ट और स्पेसवॉक एयरलॉक के रूप में काम करेगी। - बीस से अधिक वर्षों से लोग सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण स्थितियों के तहत अनुसंधान कर रहे हैं जो पृथ्वी पर संभव नहीं है, यह मॉड्यूल किये जा रहे शोध कार्यों को बढ़ाने में मदद करेगा। - जीव विज्ञान, मानव शरीर क्रिया विज्ञान, भौतिकी और अंतरिक्ष विज्ञान जैसे विभिन्न विषयों में अनुसंधान किया जा रहा है। निमोनिया और डायरिया प्रगति रिपोर्ट, चर्चा में क्यों? हाल ही में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने बताया कि शिशु मृत्यु के मामले में सोलह.नौ प्रतिशत का कारण निमोनिया है तथा यह शिशु मृत्यु दर का दूसरा सबसे बड़ा कारण है । - नवंबर दो हज़ार बीस में इंटरनेशनल वैक्सीन एक्सेस सेंटर द्वारा वार्षिक निमोनिया और डायरिया प्रगति रिपोर्ट जारी की गई। परिचय : - निमोनिया फेफड़ों का एक तीव्र श्वसन संक्रमण है। यह एक न्यूमोकोकल रोग भी है जो स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिया या न्यूमोकोकस नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। - इसके फैलने का एक कारण नहीं है- यह हवा में बैक्टीरिया, वायरस या कवक से विकसित हो सकता है। - जिन बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली अपरिपक्व या कमज़ोर होती है, जैसे कि अल्पपोषण, या एचआईवी रोग- निमोनिया के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। - निमोनिया संक्रामक है और खाँसने या छींकने से फैल सकता है। यह तरल पदार्थों के माध्यम से भी फैल सकता है, जैसे बच्चे के जन्म के दौरान रक्त, या दूषित स्थानों से। - भारत ने यूनिवर्सल टीकाकरण कार्यक्रम की तर्ज़ पर ही PCV की राष्ट्रव्यापी शुरुआत की है। - बैक्टीरिया के कारण होने वाले निमोनिया को टीकों से आसानी से रोका जा सकता है। इसे रोकने के लिये प्राथमिक टीके 'न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन' की तीन खुराक दी जाती है। - निमोनिया के मुख्य संक्रमण कारणों हेतु एक नया टीका विकसित किया जा रहा है। रोग भारः - वैश्विक स्तर परः कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, इथियोपिया, भारत, नाइजीरिया और पाकिस्तान में पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की कुल मौतों में आधे से अधिक निमोनिया के कारण होती हैं। - सालाना, भारत में निमोनिया से होने वाली अनुमानित मौतें इकहत्तर% हैं और गंभीर निमोनिया के सत्तावन% मामले देखे जाते हैं। निमोनिया से संबंधित पहलः - निमोनिया को सफलतापूर्वक रोकने हेतु सामाजिक जागरूकता और कार्रवाई : इसका उद्देश्य निमोनिया के कारण बाल मृत्यु दर को कम करना है, जो सालाना पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु के मामले में लगभग पंद्रह% है। - सरकार ने बच्चों में निमोनिया से होने वाली मौतों के नियंत्रण हेतु वर्ष दो हज़ार पच्चीस तक प्रति एक हज़ार जीवित बच्चों पर मौतों को तीन से कम करने का लक्ष्य रखा है। - वर्ष दो हज़ार चौदह में भारत ने डायरिया और निमोनिया से संबंधित पाँच वर्ष से कम उम्र की मौतों की रोकथाम के लिये सहयोगात्मक प्रयास करने हेतु 'निमोनिया और डायरिया की रोकथाम और नियंत्रण संबंधी एकीकृत कार्ययोजना शुरू की है। - WHO और UNICEF ने निमोनिया एवं डायरिया की रोकथाम के लिये एक एकीकृत वैश्विक कार्ययोजना शुरू की थी।
Deepak Jalane Ke Niyam: हिंदू धर्म में हर दिन सुबह-शाम पूजा-पाठ किया जाता. पूजा के समय सुबह-शाम दोनों समय दीपक जलाने की भी परंपरा है. बिना धूप-दीप के कोई भी पूजा पूरी नहीं मानी जाती है. घर के मंदिर में भी पूजा के समय दीपक जरूर जलाया जाता है. कुछ लोग शाम के समय तुलसी के पास भी दीपक जलाते हैं. दीपक जलाने की परंपरा सदियों पुरानी है. दीपक जलाने से नकारात्मक ऊर्जा और घर के वास्तु दोष दूर होते हैं. रोजाना पूजा में दीपक जलाने के कुछ खास नियम हैं और इसका पालन ना करने से दीपक जलाने का कोई लाभ नहीं मिलता है. जानते हैं दीपक जलाने से जुड़े इन नियमों के बारे में. Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive. com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
Deepak Jalane Ke Niyam: हिंदू धर्म में हर दिन सुबह-शाम पूजा-पाठ किया जाता. पूजा के समय सुबह-शाम दोनों समय दीपक जलाने की भी परंपरा है. बिना धूप-दीप के कोई भी पूजा पूरी नहीं मानी जाती है. घर के मंदिर में भी पूजा के समय दीपक जरूर जलाया जाता है. कुछ लोग शाम के समय तुलसी के पास भी दीपक जलाते हैं. दीपक जलाने की परंपरा सदियों पुरानी है. दीपक जलाने से नकारात्मक ऊर्जा और घर के वास्तु दोष दूर होते हैं. रोजाना पूजा में दीपक जलाने के कुछ खास नियम हैं और इसका पालन ना करने से दीपक जलाने का कोई लाभ नहीं मिलता है. जानते हैं दीपक जलाने से जुड़े इन नियमों के बारे में. Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive. com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
वाराणसीः प्रदेश में शिक्षकों की नियुक्तियों में फर्जीवाड़ा का मामला सामने आने के बाद अब शासन ने सख्ती शुरू कर दी है। इस पर नकेल कसने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग के तहत विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों व कर्मचारियों का ब्योरा ऑनलाइन किया जा रहा है। जिले में तैनात सभी शिक्षकों व कर्मचारियों का डाटा ऑनलाइन अपलोड करन को कहा गया है, लेकिन अभी भी बहुत से ऐसे शिक्षक हैं, जिनका मानव संपदा पोर्टल पर कोई डाटा अपलोड नहीं हुआ है। ऐसे लोगों पर एसटीएफ की नजर है। अब एसटीएफ की निगरानी में ही इनके प्रमाणपत्रों की जांच कराने की भी तैयारी चल रही है। विभाग में कार्यरत शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, लिपिकों एवं अनुचरों की ई-सर्विस बुक तैयार हो रही है। इसमें संबंधित कर्मी की व्यक्तिगत, शैक्षणिक, सेवा संबंधी, अवकाश, लेखा एवं स्थानांतरण आदि जानकारियों मानव संपदा पोर्टल पर दर्ज होनी है। इसके साथ ही विभाग में ऑफलाइन अवकाश व्यवस्था भी खत्म हो गई है। अब अवकाश के लिए कर्मी को केवल पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन ही मान्य होगा। बीएसए राकेश सिंह ने बताया कि जिन शिक्षकों ने अब तक ब्योरा अपलोड नहीं किया है वो 20 नवबंर तक अपना डाटा अपलोड कर खंड शिक्षाधिकारी से सत्यापित कराएं। ऐसा न होने पर योग्यता प्रमाणपत्रों को एसटीएफ से सत्यापित कराया जाएगा।
वाराणसीः प्रदेश में शिक्षकों की नियुक्तियों में फर्जीवाड़ा का मामला सामने आने के बाद अब शासन ने सख्ती शुरू कर दी है। इस पर नकेल कसने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग के तहत विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों व कर्मचारियों का ब्योरा ऑनलाइन किया जा रहा है। जिले में तैनात सभी शिक्षकों व कर्मचारियों का डाटा ऑनलाइन अपलोड करन को कहा गया है, लेकिन अभी भी बहुत से ऐसे शिक्षक हैं, जिनका मानव संपदा पोर्टल पर कोई डाटा अपलोड नहीं हुआ है। ऐसे लोगों पर एसटीएफ की नजर है। अब एसटीएफ की निगरानी में ही इनके प्रमाणपत्रों की जांच कराने की भी तैयारी चल रही है। विभाग में कार्यरत शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, लिपिकों एवं अनुचरों की ई-सर्विस बुक तैयार हो रही है। इसमें संबंधित कर्मी की व्यक्तिगत, शैक्षणिक, सेवा संबंधी, अवकाश, लेखा एवं स्थानांतरण आदि जानकारियों मानव संपदा पोर्टल पर दर्ज होनी है। इसके साथ ही विभाग में ऑफलाइन अवकाश व्यवस्था भी खत्म हो गई है। अब अवकाश के लिए कर्मी को केवल पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन ही मान्य होगा। बीएसए राकेश सिंह ने बताया कि जिन शिक्षकों ने अब तक ब्योरा अपलोड नहीं किया है वो बीस नवबंर तक अपना डाटा अपलोड कर खंड शिक्षाधिकारी से सत्यापित कराएं। ऐसा न होने पर योग्यता प्रमाणपत्रों को एसटीएफ से सत्यापित कराया जाएगा।
माना कि कोरोना ने हम सभी को घरों में बंद कर दिया है, लेकिन क्या आपने सोचा है कि कोरोना की वजह से हमें बहुत कुछ सीखने को भी मिल रहा है। जब से घर में बंद है, तब से हमने गाड़ी नहीं निकाली, फैक्ट्रियां बंद होने से कचरा नदियों में नहीं जा रहा, शोर में कमी, प्रदूषण में कमी। कहा तो ये भी जा रहा है कि ओजोन का छेद भी भरने लगा है। कई तस्वीरे देखने को मिल रही है, जिसमें पशु - पक्षी सड़कों पर निकल आए है। कुल मिलाकर वायरस ने समझाया है कि संसाधनों का सही इस्तेमाल करे, तो प्रकृति को साफ रखा जा सकता है। एक समय था जब लोग व्यस्त होने के कारण परिवार को पूरा समय नहीं दे पाते थे। लेकिन अब तो लोग इस लॉकडाउन का इस्तेमाल परिवार के साथ क्वालिटी टाइम बिताने और आपसी रिश्ते मज़बूत करने में कर रहे हैं। पहले के मुताबिक बच्चे अपने दादा-दादी और नाना - नानी से हर रोज़ बात कर पाते हैं क्योंकि सभी के पास अब काफी समय है। अब परिवार के साथ वो सब कुछ कर रहे हैं जिसे इतने वक्त से मिस कर रहे थे। लॉक़ाउन के कारण लोग केवल उन्हीं चीज़ों का इस्तेमाल कर रही है जो उनके पास है। वे इस बात से संतुष्ट है कि कम से कम वे अपने परिवार के साथ सुख और शांति से रह रहे है। परिवार के साथ अपना सुख -दुख बांट और पूरा समय बिता रहे हैं। सभी इस मुश्किल समय में एक -दूसरे को धीरज दे रहे हैं। घर में कई दिनों तक रहना इतना आसान नहीं है लेकिन फिर भी एकजुट होकर सभी देशवासी इस मुश्किल कोरोना वायरस का सामना कर रहे है। उनके इस तरह धैर्य रखने से यह साबित हो जाता है कि ये मुश्किल समय जल्द ही चला जायेगा। कोरोना का सबसे ज़्यादा फायदा मानवता के रुप में उभरकर सामने आया है। आज कोविड-19 के चलते लगे लॉकडाउन ने ही हमें यह सिखाया कि स्वार्थ से ऊपर सोचना और दूसरों की मदद करना कितना ज़रूरी और सुखदायी है। इसकी मिसाल छोटे से गांव के बच्चे का गुल्लक तोड़कर अपने पैसे सेवा में देना, कभी किन्नर समुदाय ने बेरोज़गारी से जूझ रहे दिहाड़ी मज़दूरों और ज़रूरतमंदों को सामान देकर दिखाया है। कोरोना वायरस को परेशानी समझकर नहीं, बल्कि एक बदलाव के तौर पर समझना चाहिए। जहां सारा देख एकजुट है और इस वायरस को दूर करने के लिये हर संभव काम कर रहा है। अब आप हमारे साथ फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर , टेलीग्राम और हेलो पर भी जुड़िये।
माना कि कोरोना ने हम सभी को घरों में बंद कर दिया है, लेकिन क्या आपने सोचा है कि कोरोना की वजह से हमें बहुत कुछ सीखने को भी मिल रहा है। जब से घर में बंद है, तब से हमने गाड़ी नहीं निकाली, फैक्ट्रियां बंद होने से कचरा नदियों में नहीं जा रहा, शोर में कमी, प्रदूषण में कमी। कहा तो ये भी जा रहा है कि ओजोन का छेद भी भरने लगा है। कई तस्वीरे देखने को मिल रही है, जिसमें पशु - पक्षी सड़कों पर निकल आए है। कुल मिलाकर वायरस ने समझाया है कि संसाधनों का सही इस्तेमाल करे, तो प्रकृति को साफ रखा जा सकता है। एक समय था जब लोग व्यस्त होने के कारण परिवार को पूरा समय नहीं दे पाते थे। लेकिन अब तो लोग इस लॉकडाउन का इस्तेमाल परिवार के साथ क्वालिटी टाइम बिताने और आपसी रिश्ते मज़बूत करने में कर रहे हैं। पहले के मुताबिक बच्चे अपने दादा-दादी और नाना - नानी से हर रोज़ बात कर पाते हैं क्योंकि सभी के पास अब काफी समय है। अब परिवार के साथ वो सब कुछ कर रहे हैं जिसे इतने वक्त से मिस कर रहे थे। लॉक़ाउन के कारण लोग केवल उन्हीं चीज़ों का इस्तेमाल कर रही है जो उनके पास है। वे इस बात से संतुष्ट है कि कम से कम वे अपने परिवार के साथ सुख और शांति से रह रहे है। परिवार के साथ अपना सुख -दुख बांट और पूरा समय बिता रहे हैं। सभी इस मुश्किल समय में एक -दूसरे को धीरज दे रहे हैं। घर में कई दिनों तक रहना इतना आसान नहीं है लेकिन फिर भी एकजुट होकर सभी देशवासी इस मुश्किल कोरोना वायरस का सामना कर रहे है। उनके इस तरह धैर्य रखने से यह साबित हो जाता है कि ये मुश्किल समय जल्द ही चला जायेगा। कोरोना का सबसे ज़्यादा फायदा मानवता के रुप में उभरकर सामने आया है। आज कोविड-उन्नीस के चलते लगे लॉकडाउन ने ही हमें यह सिखाया कि स्वार्थ से ऊपर सोचना और दूसरों की मदद करना कितना ज़रूरी और सुखदायी है। इसकी मिसाल छोटे से गांव के बच्चे का गुल्लक तोड़कर अपने पैसे सेवा में देना, कभी किन्नर समुदाय ने बेरोज़गारी से जूझ रहे दिहाड़ी मज़दूरों और ज़रूरतमंदों को सामान देकर दिखाया है। कोरोना वायरस को परेशानी समझकर नहीं, बल्कि एक बदलाव के तौर पर समझना चाहिए। जहां सारा देख एकजुट है और इस वायरस को दूर करने के लिये हर संभव काम कर रहा है। अब आप हमारे साथ फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर , टेलीग्राम और हेलो पर भी जुड़िये।
Bokaro: बोकारो के गंधजोड़ी में हाइवा की चपेट में आने से महिला मजदूर घायल हो गयी. घटना रविवार की है. महिला को इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है. महिला मजदूर के साथ काम पर जा रही महिला सावित्री देवी ने बताया कि वे चास के बाधाडीह पंचायत के धमनी गांव के हैं. वे लोग चिरा चास स्थित केके कॉलोनी में मजदूरी का काम करने जा रही थे. अचानक सामने से एक हाइवा आया और जोरदार टक्कर मार दी. इससे मजदूरी करने जा रही महिला चंपा देवी बुरी तरह घायल हो गई. स्थानीय लोगों की मदद से उसे बोकारो सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां उसका इलाज चल रहा है. उसकी हालत गंभीर बतायी जा रही है.
Bokaro: बोकारो के गंधजोड़ी में हाइवा की चपेट में आने से महिला मजदूर घायल हो गयी. घटना रविवार की है. महिला को इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है. महिला मजदूर के साथ काम पर जा रही महिला सावित्री देवी ने बताया कि वे चास के बाधाडीह पंचायत के धमनी गांव के हैं. वे लोग चिरा चास स्थित केके कॉलोनी में मजदूरी का काम करने जा रही थे. अचानक सामने से एक हाइवा आया और जोरदार टक्कर मार दी. इससे मजदूरी करने जा रही महिला चंपा देवी बुरी तरह घायल हो गई. स्थानीय लोगों की मदद से उसे बोकारो सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां उसका इलाज चल रहा है. उसकी हालत गंभीर बतायी जा रही है.
(AIIMS) पर डेटा चोरी होने के प्रयास के बाद अब भारतीय रेलवे में संभावित डेटा चोरी होने रिपोर्ट सामने आई है। हालांकि, भारतीय रेलवे या किसी भी सरकारी अधिकारी ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक हैकर्स ने रेलवे टिकट बुक कराने वाले 3 करोड़ लोगों का डेटा चुरा लिया है। बताया जा रहा है कि इसमें व्यक्तिगत जानकारी शामिल है जिसमें ईमेल आईडी, मोबाइल नंबर, पता और उम्र शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार साइबर हैकर ने ना केवल यात्रियों के डेटा चुराया, बल्कि रेलवे की वेबसाइट में भी छेड़छाड़ का भी दावा किया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, एक हैकर फोरम ने 27 दिसंबर को इस घटना को अंजाम दिया था। हैकर फोरम की असली पहचान सामने नहीं आई है लेकिन इसे 'शैडो हैकर' के नाम से जाना जाता है। आरोप है कि वह हैकर फोरम 3 करोड़ पैसेंजर्स के इस डाटा को डार्क वेब पर बेच रहा है। अब इस डेटा को डार्कवेब के जरिए बेचा जा रहा है। हैकर के पास ईमेल, मोबाइल नंबर, पता, उम्र सहित कई निजी जानकारियां खबरों के अनुसार, हैकर ग्रुप ने कहा कि उसके पास भारतीय रेलवे में टिकट बुक कराने वाले तीन करोड़ लोगों के ईमेल आईडी, मोबाइल नंबर, पता, उम्र सहित कई निजी जानकारियां हैं। हैकर ग्रुप ने यह भी दावा किया कि उसने कई सरकारी विभागों के आधिकारिक ईमेल अकाउंट्स को भी चुराया है। साइबर हैकर ने इस काम को कैसे अंजाम दिया। रेलवे के सर्वर में सेंध लगाकर इसे कैसे एक्सेस किया गया, इसका अभी तक पता नहीं चल पाया है। रेलवे या किसी भी सरकारी अधिकारी द्वारा अभी तक इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। और न ही अब तक कोई टिप्पणी नहीं की है।
पर डेटा चोरी होने के प्रयास के बाद अब भारतीय रेलवे में संभावित डेटा चोरी होने रिपोर्ट सामने आई है। हालांकि, भारतीय रेलवे या किसी भी सरकारी अधिकारी ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक हैकर्स ने रेलवे टिकट बुक कराने वाले तीन करोड़ लोगों का डेटा चुरा लिया है। बताया जा रहा है कि इसमें व्यक्तिगत जानकारी शामिल है जिसमें ईमेल आईडी, मोबाइल नंबर, पता और उम्र शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार साइबर हैकर ने ना केवल यात्रियों के डेटा चुराया, बल्कि रेलवे की वेबसाइट में भी छेड़छाड़ का भी दावा किया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, एक हैकर फोरम ने सत्ताईस दिसंबर को इस घटना को अंजाम दिया था। हैकर फोरम की असली पहचान सामने नहीं आई है लेकिन इसे 'शैडो हैकर' के नाम से जाना जाता है। आरोप है कि वह हैकर फोरम तीन करोड़ पैसेंजर्स के इस डाटा को डार्क वेब पर बेच रहा है। अब इस डेटा को डार्कवेब के जरिए बेचा जा रहा है। हैकर के पास ईमेल, मोबाइल नंबर, पता, उम्र सहित कई निजी जानकारियां खबरों के अनुसार, हैकर ग्रुप ने कहा कि उसके पास भारतीय रेलवे में टिकट बुक कराने वाले तीन करोड़ लोगों के ईमेल आईडी, मोबाइल नंबर, पता, उम्र सहित कई निजी जानकारियां हैं। हैकर ग्रुप ने यह भी दावा किया कि उसने कई सरकारी विभागों के आधिकारिक ईमेल अकाउंट्स को भी चुराया है। साइबर हैकर ने इस काम को कैसे अंजाम दिया। रेलवे के सर्वर में सेंध लगाकर इसे कैसे एक्सेस किया गया, इसका अभी तक पता नहीं चल पाया है। रेलवे या किसी भी सरकारी अधिकारी द्वारा अभी तक इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। और न ही अब तक कोई टिप्पणी नहीं की है।
नई दिल्ली - दिल्ली पुलिस ने जहां घरेलू क्रिकेट में पैसे देकर खेलने का एक और मामला उजागर किया है, वही बीसीसीआई भी इससे परेशान है। यहां तक की प्रशासकों की समिति ने बार-बार यह कहकर चीजों को दबाने की कोशिश की है कि सब कुछ नियंत्रण में है और भ्रष्टाचार रोधी ईकाई सभी खिलाडि़यों पर नजर रखे हुई है। एयूसी खासतौर से पिछले सीजन में आई नौ नई टीमों के साथ जुड़ने वाले खिलाडि़यों पर अपनी नजर रख रही है। बीसीसीआई के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि जब नई टीमों को शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी, तब सीओए को इस बात से अवगत करा दिया गया था। बीसीसीआई अधिकारी ने कहा, इस बात के बारे में हमने कई बार चेतावानी दी थी। बीसीसीआई इससे सिर्फ बयान देकर नहीं बच सकती, क्योंकि सभी खिलाड़ी बीसीसीआई से पंजीकृत हैं। अधिकारी ने कहा, बीच सत्र में सीओए द्वारा योग्यता के नियमों में बदलाव एक और अलग मुद्दा है। पुदुचेरी के मामले में जहां बीसीसीआई ने कई बाहरी खिलाडि़यों को मंजूरी दी थी और नियमों को तोड़ा-मरोड़ा गया था। उन्हें बाद में प्रतिबंधित कर दिया गया, जो हैरानी वाली बात थी। अब चंडीगढ़ के मामले में भी कुछ चीजों को दोहराया जा रहा है और सीओए कुछ लोगों को फायदा पहुंचा रही है। ऐसी खबरें हैं कि दिल्ली के कुल 11 क्रिकेट खिलाडि़यों ने दो प्रशिक्षकों को 80 लाख से एक करोड़ रुपए इसलिए दिए, क्योंकि उनसे रणजी ट्रॉफी टीम में शामिल करने का वादा किया गया था। यह रिश्वत करोल बाग में एक जूते की दुकान में दी गई। इस दुकान का ताल्लुक नागालैंड क्रिकेट संघ के एक अधिकारी से है।
नई दिल्ली - दिल्ली पुलिस ने जहां घरेलू क्रिकेट में पैसे देकर खेलने का एक और मामला उजागर किया है, वही बीसीसीआई भी इससे परेशान है। यहां तक की प्रशासकों की समिति ने बार-बार यह कहकर चीजों को दबाने की कोशिश की है कि सब कुछ नियंत्रण में है और भ्रष्टाचार रोधी ईकाई सभी खिलाडि़यों पर नजर रखे हुई है। एयूसी खासतौर से पिछले सीजन में आई नौ नई टीमों के साथ जुड़ने वाले खिलाडि़यों पर अपनी नजर रख रही है। बीसीसीआई के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि जब नई टीमों को शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी, तब सीओए को इस बात से अवगत करा दिया गया था। बीसीसीआई अधिकारी ने कहा, इस बात के बारे में हमने कई बार चेतावानी दी थी। बीसीसीआई इससे सिर्फ बयान देकर नहीं बच सकती, क्योंकि सभी खिलाड़ी बीसीसीआई से पंजीकृत हैं। अधिकारी ने कहा, बीच सत्र में सीओए द्वारा योग्यता के नियमों में बदलाव एक और अलग मुद्दा है। पुदुचेरी के मामले में जहां बीसीसीआई ने कई बाहरी खिलाडि़यों को मंजूरी दी थी और नियमों को तोड़ा-मरोड़ा गया था। उन्हें बाद में प्रतिबंधित कर दिया गया, जो हैरानी वाली बात थी। अब चंडीगढ़ के मामले में भी कुछ चीजों को दोहराया जा रहा है और सीओए कुछ लोगों को फायदा पहुंचा रही है। ऐसी खबरें हैं कि दिल्ली के कुल ग्यारह क्रिकेट खिलाडि़यों ने दो प्रशिक्षकों को अस्सी लाख से एक करोड़ रुपए इसलिए दिए, क्योंकि उनसे रणजी ट्रॉफी टीम में शामिल करने का वादा किया गया था। यह रिश्वत करोल बाग में एक जूते की दुकान में दी गई। इस दुकान का ताल्लुक नागालैंड क्रिकेट संघ के एक अधिकारी से है।
बहुत से लोगों का सामना करना पड़ता हैएक दिलचस्प पुरुष नाम नज़र। नाम की उत्पत्ति बहुत दिलचस्प है। यह हिब्रू से संबंधित है और यूक्रेन, रूस, आर्मेनिया, स्पेन, मध्य एशिया और भारत जैसे देशों में व्यापक रूप से वितरित किया जाता है। यह आलेख न केवल नाम की उत्पत्ति के साथ, बल्कि इसके अर्थ के साथ-साथ इस तरह के एक रहस्यमय तरीके से नामित व्यक्ति के भाग्य के साथ भी सौदा करेगा। वास्तव में, उत्पत्ति के कई संस्करण हैंहिब्रू नाम नज़र। उनमें से पहले के अनुसार, यह देर लैटिन नाम के आधार पर बनाया गया था, जो नाज़ारियस की तरह लग रहा था। इसका अर्थ "वह जो नासरत में पैदा हुआ था" या "नाज़ारेन" के रूप में अनुवादित किया जा सकता है। नाम के उद्भव का दूसरा संस्करण भी है नज़र। नाम की उत्पत्ति, जो पहले से ही हमारे युग के युग में पैदा हुआ था,अपने यहूदी मूल मानता है। इस प्रकार, हिब्रू में, इसे "शपथ" (वादा किया गया था) या "भगवान को समर्पित" के रूप में व्याख्या किया जा सकता है। कुछ अरबी में नाम आम हैराज्य अमेरिका। इसलिए, यह पूरक होना जरूरी है कि तुर्की भाषा से "दूरदर्शी" के रूप में परिभाषित एक तीसरा विकल्प है। इसके अलावा, इस व्याख्या को "लुक" या यहां तक कि "नजर" के रूप में भी जाना जाता है। नज़र - किस राष्ट्रीयता का नाम? इस प्रश्न को अक्सर विभिन्न कारणों से लोगों द्वारा पूछा जाता हैः एक बच्चे का जन्म, उस नाम के साथ किसी व्यक्ति की उपस्थिति संबंधित रेखा या आम हित में। जैसा ऊपर बताया गया है, नाम व्यापक रूप से वितरित किया जाता हैअर्मेनिया, स्पेन, रूस और यूक्रेन। यह भी महत्वपूर्ण है कि आज फ्रांस के समाज में दिए गए नाम का मादा रूप अक्सर उपयोग किया जाता है - नज़र। लेकिन बल्गेरियाई, जो काफी संभव है, अपनी बेटी नाज़कार को बुलाएगी। इसके अलावा, ज़ाराय या ज़ोरिया नाम के ऐसे रूप भी ज्ञात हैं। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि इन नामों के मूल्य बहुत विविध हैं, और वे बहुत ही अच्छे लगते हैं, है ना? कई माता-पिता आज अपने बेटे को देने का फैसला करते हैंनज़र नाम। नाम और इसकी विशेषताओं की उत्पत्ति को पूरी तरह से एक प्रासंगिक नाम-जो, संयोग से, वर्ष में दो बार आयोजित की जाती हैं से उचित कर रहे हैं। 17 (05) .06 - दिन रेवरेंड नज़ारोव, जो संस्थापक Predtechevoy मठ, पंद्रहवीं सदी में Olonets जिले में स्थित है। 27 (14) .10 - पवित्र शहीद Nazarius, जो काफी गंभीर रूप से घायल है की स्मृति को दिन श्रद्धांजलि, क्योंकि मसीह, जो बाद में मीडियोलेनम (प्रथम शताब्दी ई) में निधन हो गया के विश्वास फैल गया। आज दुर्लभ क्या है नज़र नाम। बच्चे के लिए उत्पत्ति और महत्व, जो बहुत दिलचस्प है, एक असाधारण सकारात्मक स्वर का तात्पर्य है, क्योंकि यह बच्चा, एक नियम के रूप में, हमेशा सक्रिय और हंसमुख होता है। इसके अलावा, थोड़ा नज़र बड़ा नहीं देता हैपरेशान माता-पिताः यहां तक कि बहुत छोटा होने पर, वह शांत और आज्ञाकारी हो सकता है। वयस्कता में प्रवेश करने के बाद, विवादास्पद, संतुलित, मापा, और अत्यधिक संगठित पारस्परिक संबंधों के क्षेत्र में अग्रभूमि बन रहा है। वैसे, इस तथ्य के बावजूद कि नज़र का चरित्र अपने बचपन से नरम है, इसका मतलब यह नहीं है कि वह अपने दृष्टिकोण की रक्षा करने से इंकार कर देता है। बच्चे का आंतरिक भाग बहुत मजबूत है, लेकिन वह इसे प्रदर्शित करना नहीं चाहता है। एक छोटे नज़र की इच्छा को ध्यान में रखना मुश्किल हैअजनबियों के साथ भी लोगों के साथ संचार। आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि एक बच्चा आसानी से दस मिनट में एक नया दोस्त प्राप्त कर सकता है। वैसे, इस विशेष चरित्र का प्रकटन पूरे जीवन में होता है। दुर्भाग्यवश, थोड़ा नज़र सीखना बहुत नहीं हैजैसे, क्योंकि वह बहुत सक्रिय और सक्रिय बच्चा है - यहां एक जगह पर कैसे रहना है? दूसरी तरफ, यह बहुत अच्छा है, क्योंकि इस तरह की अधीरता से एक अद्भुत हो सकता है, उदाहरण के लिए, एक एथलीट। यह कहना महत्वपूर्ण है कि नियम के रूप में उनके वैकल्पिक गुण उच्चतम संभव स्तर तक पहुंचते हैं, और यह बहुत मूल्यवान है। लड़के के आटे के लिए नज़र के नाम की उत्पत्तिअपने चरित्र और जीवन की विशेषताओं से सम्बंधित मानते। कोई भी तथ्य यह है कि स्वास्थ्य हर व्यक्ति के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण स्थिति है बहस होगी। यही कारण है कि तथ्य यह है कि नज़र स्वास्थ्य, बाल बचपन के खेल के शौकीन (और अक्सर है) के बाद से विशेष रूप से अगर एक बहुत मजबूत के रूप में परिभाषित किया गया है का आनंद चाहिए है। बच्चे का स्वास्थ्य उच्च स्तर से निर्धारित होता हैजीवन शक्ति और प्रतिरक्षा। हालांकि, किसी अन्य व्यक्ति की तरह, नज़र में कमजोरियां हैं, उदाहरण के लिए, एक जिगर। यही कारण है कि, किशोरी के रूप में, वह मादक पेय पदार्थों के उपयोग को सहन करना बेहद मुश्किल है। बेशक, बचपन में, यह समस्या लड़के को परेशान नहीं करती है, लेकिन बाद में, वयस्कता में, इस तथ्य को ध्यान में रखा जाना चाहिए। वयस्क नज़र समाज में कैसे दिखता है? नाम की उत्पत्ति अपने मजबूत आंतरिक कोर की बात करती है। और यह वास्तव में है। वह आत्मविश्वास और एक नियम, ऊर्जावान के रूप में है। हालांकि, नज़र के साथ घनिष्ठ परिचित होने के साथ, आप अपने चरित्र में भेद्यता का एक नोट देख सकते हैं, क्योंकि उसकी आत्मा की गहराई में वह एक सभ्य और दयालु व्यक्ति है। यही कारण है कि वह अक्सर रियायतें कर सकता है। उनके चरित्र की एक सकारात्मक विशेषता हैइस या उस निर्णय को अपनाने से पहले सभी "के लिए" और "विरुद्ध" का सावधानीपूर्वक वजन, भले ही यह जीवन और मृत्यु का मामला न हो। यही कारण है कि वह अपने आस-पास के लोगों के बीच विश्वसनीयता का आनंद लेता है। वह तब तक कोई वादा नहीं करेगा जब तक कि वह उसकी पूर्ति के बारे में सुनिश्चित न हो। यह बयान, निस्संदेह, नाज़र को एक जिम्मेदार व्यक्ति के रूप में परिभाषित करता है। जैसा ऊपर बताया गया है, नज़र एक मिलनसार है औरमिलनसार व्यक्ति हालांकि, पेशेवर गतिविधि के मामले में, वह गंभीरता और जिम्मेदारी दिखाता है, यही कारण है कि वह एक कर्मचारी के रूप में और एक नेता के रूप में मूल्यवान है (एक नियम के रूप में वह थोड़े समय में पदोन्नति पाने में सक्षम होता है यदि वह काम करने के लिए अधिकतम प्रयास करता है)। यह अनुमान लगाना आसान है कि नज़र उद्यमी गतिविधि में जल्दी से सफल हो सकता है, क्योंकि वह एक मजबूत इच्छाशक्तिपूर्ण और उद्देश्यपूर्ण व्यक्ति है जो हमेशा आगे बढ़ता है। लेकिन, जब यह पारिवारिक जीवन, व्यवहार की बात आती हैनज़रह नरम और दयालु हो जाता है। वैसे, अक्सर एक जोड़ी में वह एक नेता की स्थिति लेने की कोशिश नहीं करता - वह नेतृत्व करना पसंद करता है। नज़र सभ्य और देखभाल कर रहा है, वह पारिवारिक परम्पराओं का सम्मान करता है, अपनी पत्नी का सम्मान करता है और अपने बच्चों को अंतहीन प्यार करता है। जैसा ऊपर बताया गया है, नज़र नाम का एक आदमीप्रकृति स्थिरता के साथ संपन्न। यही कारण है कि, जीवन के लगभग सभी क्षेत्रों में, वह अपने लाभ को निकालने का प्रयास करता है, जो उसे एक उत्कृष्ट उद्यमी बनने और सफलतापूर्वक अपना व्यवसाय विकसित करने की अनुमति देता है। उनका चरित्र स्पष्ट स्वयं संगठन के साथ संपन्न है और, ज़ाहिर है, परिश्रम (उसके बिना कहीं भी!)। इस प्रकार, नज़र का व्यवसाय, एक नियम के रूप में, लाभदायक हो जाता है, और तदनुसार, सफल।
बहुत से लोगों का सामना करना पड़ता हैएक दिलचस्प पुरुष नाम नज़र। नाम की उत्पत्ति बहुत दिलचस्प है। यह हिब्रू से संबंधित है और यूक्रेन, रूस, आर्मेनिया, स्पेन, मध्य एशिया और भारत जैसे देशों में व्यापक रूप से वितरित किया जाता है। यह आलेख न केवल नाम की उत्पत्ति के साथ, बल्कि इसके अर्थ के साथ-साथ इस तरह के एक रहस्यमय तरीके से नामित व्यक्ति के भाग्य के साथ भी सौदा करेगा। वास्तव में, उत्पत्ति के कई संस्करण हैंहिब्रू नाम नज़र। उनमें से पहले के अनुसार, यह देर लैटिन नाम के आधार पर बनाया गया था, जो नाज़ारियस की तरह लग रहा था। इसका अर्थ "वह जो नासरत में पैदा हुआ था" या "नाज़ारेन" के रूप में अनुवादित किया जा सकता है। नाम के उद्भव का दूसरा संस्करण भी है नज़र। नाम की उत्पत्ति, जो पहले से ही हमारे युग के युग में पैदा हुआ था,अपने यहूदी मूल मानता है। इस प्रकार, हिब्रू में, इसे "शपथ" या "भगवान को समर्पित" के रूप में व्याख्या किया जा सकता है। कुछ अरबी में नाम आम हैराज्य अमेरिका। इसलिए, यह पूरक होना जरूरी है कि तुर्की भाषा से "दूरदर्शी" के रूप में परिभाषित एक तीसरा विकल्प है। इसके अलावा, इस व्याख्या को "लुक" या यहां तक कि "नजर" के रूप में भी जाना जाता है। नज़र - किस राष्ट्रीयता का नाम? इस प्रश्न को अक्सर विभिन्न कारणों से लोगों द्वारा पूछा जाता हैः एक बच्चे का जन्म, उस नाम के साथ किसी व्यक्ति की उपस्थिति संबंधित रेखा या आम हित में। जैसा ऊपर बताया गया है, नाम व्यापक रूप से वितरित किया जाता हैअर्मेनिया, स्पेन, रूस और यूक्रेन। यह भी महत्वपूर्ण है कि आज फ्रांस के समाज में दिए गए नाम का मादा रूप अक्सर उपयोग किया जाता है - नज़र। लेकिन बल्गेरियाई, जो काफी संभव है, अपनी बेटी नाज़कार को बुलाएगी। इसके अलावा, ज़ाराय या ज़ोरिया नाम के ऐसे रूप भी ज्ञात हैं। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि इन नामों के मूल्य बहुत विविध हैं, और वे बहुत ही अच्छे लगते हैं, है ना? कई माता-पिता आज अपने बेटे को देने का फैसला करते हैंनज़र नाम। नाम और इसकी विशेषताओं की उत्पत्ति को पूरी तरह से एक प्रासंगिक नाम-जो, संयोग से, वर्ष में दो बार आयोजित की जाती हैं से उचित कर रहे हैं। सत्रह .छः - दिन रेवरेंड नज़ारोव, जो संस्थापक Predtechevoy मठ, पंद्रहवीं सदी में Olonets जिले में स्थित है। सत्ताईस .दस - पवित्र शहीद Nazarius, जो काफी गंभीर रूप से घायल है की स्मृति को दिन श्रद्धांजलि, क्योंकि मसीह, जो बाद में मीडियोलेनम में निधन हो गया के विश्वास फैल गया। आज दुर्लभ क्या है नज़र नाम। बच्चे के लिए उत्पत्ति और महत्व, जो बहुत दिलचस्प है, एक असाधारण सकारात्मक स्वर का तात्पर्य है, क्योंकि यह बच्चा, एक नियम के रूप में, हमेशा सक्रिय और हंसमुख होता है। इसके अलावा, थोड़ा नज़र बड़ा नहीं देता हैपरेशान माता-पिताः यहां तक कि बहुत छोटा होने पर, वह शांत और आज्ञाकारी हो सकता है। वयस्कता में प्रवेश करने के बाद, विवादास्पद, संतुलित, मापा, और अत्यधिक संगठित पारस्परिक संबंधों के क्षेत्र में अग्रभूमि बन रहा है। वैसे, इस तथ्य के बावजूद कि नज़र का चरित्र अपने बचपन से नरम है, इसका मतलब यह नहीं है कि वह अपने दृष्टिकोण की रक्षा करने से इंकार कर देता है। बच्चे का आंतरिक भाग बहुत मजबूत है, लेकिन वह इसे प्रदर्शित करना नहीं चाहता है। एक छोटे नज़र की इच्छा को ध्यान में रखना मुश्किल हैअजनबियों के साथ भी लोगों के साथ संचार। आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि एक बच्चा आसानी से दस मिनट में एक नया दोस्त प्राप्त कर सकता है। वैसे, इस विशेष चरित्र का प्रकटन पूरे जीवन में होता है। दुर्भाग्यवश, थोड़ा नज़र सीखना बहुत नहीं हैजैसे, क्योंकि वह बहुत सक्रिय और सक्रिय बच्चा है - यहां एक जगह पर कैसे रहना है? दूसरी तरफ, यह बहुत अच्छा है, क्योंकि इस तरह की अधीरता से एक अद्भुत हो सकता है, उदाहरण के लिए, एक एथलीट। यह कहना महत्वपूर्ण है कि नियम के रूप में उनके वैकल्पिक गुण उच्चतम संभव स्तर तक पहुंचते हैं, और यह बहुत मूल्यवान है। लड़के के आटे के लिए नज़र के नाम की उत्पत्तिअपने चरित्र और जीवन की विशेषताओं से सम्बंधित मानते। कोई भी तथ्य यह है कि स्वास्थ्य हर व्यक्ति के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण स्थिति है बहस होगी। यही कारण है कि तथ्य यह है कि नज़र स्वास्थ्य, बाल बचपन के खेल के शौकीन के बाद से विशेष रूप से अगर एक बहुत मजबूत के रूप में परिभाषित किया गया है का आनंद चाहिए है। बच्चे का स्वास्थ्य उच्च स्तर से निर्धारित होता हैजीवन शक्ति और प्रतिरक्षा। हालांकि, किसी अन्य व्यक्ति की तरह, नज़र में कमजोरियां हैं, उदाहरण के लिए, एक जिगर। यही कारण है कि, किशोरी के रूप में, वह मादक पेय पदार्थों के उपयोग को सहन करना बेहद मुश्किल है। बेशक, बचपन में, यह समस्या लड़के को परेशान नहीं करती है, लेकिन बाद में, वयस्कता में, इस तथ्य को ध्यान में रखा जाना चाहिए। वयस्क नज़र समाज में कैसे दिखता है? नाम की उत्पत्ति अपने मजबूत आंतरिक कोर की बात करती है। और यह वास्तव में है। वह आत्मविश्वास और एक नियम, ऊर्जावान के रूप में है। हालांकि, नज़र के साथ घनिष्ठ परिचित होने के साथ, आप अपने चरित्र में भेद्यता का एक नोट देख सकते हैं, क्योंकि उसकी आत्मा की गहराई में वह एक सभ्य और दयालु व्यक्ति है। यही कारण है कि वह अक्सर रियायतें कर सकता है। उनके चरित्र की एक सकारात्मक विशेषता हैइस या उस निर्णय को अपनाने से पहले सभी "के लिए" और "विरुद्ध" का सावधानीपूर्वक वजन, भले ही यह जीवन और मृत्यु का मामला न हो। यही कारण है कि वह अपने आस-पास के लोगों के बीच विश्वसनीयता का आनंद लेता है। वह तब तक कोई वादा नहीं करेगा जब तक कि वह उसकी पूर्ति के बारे में सुनिश्चित न हो। यह बयान, निस्संदेह, नाज़र को एक जिम्मेदार व्यक्ति के रूप में परिभाषित करता है। जैसा ऊपर बताया गया है, नज़र एक मिलनसार है औरमिलनसार व्यक्ति हालांकि, पेशेवर गतिविधि के मामले में, वह गंभीरता और जिम्मेदारी दिखाता है, यही कारण है कि वह एक कर्मचारी के रूप में और एक नेता के रूप में मूल्यवान है । यह अनुमान लगाना आसान है कि नज़र उद्यमी गतिविधि में जल्दी से सफल हो सकता है, क्योंकि वह एक मजबूत इच्छाशक्तिपूर्ण और उद्देश्यपूर्ण व्यक्ति है जो हमेशा आगे बढ़ता है। लेकिन, जब यह पारिवारिक जीवन, व्यवहार की बात आती हैनज़रह नरम और दयालु हो जाता है। वैसे, अक्सर एक जोड़ी में वह एक नेता की स्थिति लेने की कोशिश नहीं करता - वह नेतृत्व करना पसंद करता है। नज़र सभ्य और देखभाल कर रहा है, वह पारिवारिक परम्पराओं का सम्मान करता है, अपनी पत्नी का सम्मान करता है और अपने बच्चों को अंतहीन प्यार करता है। जैसा ऊपर बताया गया है, नज़र नाम का एक आदमीप्रकृति स्थिरता के साथ संपन्न। यही कारण है कि, जीवन के लगभग सभी क्षेत्रों में, वह अपने लाभ को निकालने का प्रयास करता है, जो उसे एक उत्कृष्ट उद्यमी बनने और सफलतापूर्वक अपना व्यवसाय विकसित करने की अनुमति देता है। उनका चरित्र स्पष्ट स्वयं संगठन के साथ संपन्न है और, ज़ाहिर है, परिश्रम । इस प्रकार, नज़र का व्यवसाय, एक नियम के रूप में, लाभदायक हो जाता है, और तदनुसार, सफल।
कोरोना काल में सिनेमा जगत में बुरी खबरों का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। आए दिन कोई न कोई बुरी खबर सामने आ ही जाती है। बंगाली और हिंदी फिल्मों में काम कर चुकी ऐक्ट्रेस मिष्टी मुखर्जी (Misti Mukherjee) का शुक्रवार की शाम को बेंगलुरु में निधन हो गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक मिष्टी मुखर्जी किडनी से जुड़ी समस्या से जूझ रही थीं। किडनी फेल होने की वजह से ही उनका निधन हो गया। मिष्टी मुखर्जी ने साल 2013 में फिल्म 'मैं कृष्णा हूं' से बॉलीवुड डेब्यू किया था। पिछले कुछ महीनों से मिष्टी किडनी की समस्या को लेकर कीटो डाइट पर थीं। मिष्टी मुखर्जी की फैमिली में उनके पैरंट्स और उनका भाई है। मिष्टी ने फिल्म 'मैं कृष्णा हूं' में डांस नंबर करने के बाद सुर्खियां बटोरीं। वहीँ बाद में मिष्टी डायरेक्टर राकेश मेहता की फिल्म 'लाइफ की तो लग गई' में काम किया था। मिष्टी मुखर्जी बोल्ड म्यूजिक और आइटम नंबर्स को लेकर काफी सुर्ख़ियों में रहती थीं। इसके अलावा वह कई बड़ी पार्टीज और इवेंट्स में नजर आती थीं। कॉन्ट्रोवर्सी से भी मिष्टी का नाता रहा है। साल 2014 में मिष्टी मुखर्जी का एक बड़ी कॉन्ट्रोवर्सी में नाम आया। इसके बाद मुंबई में उनके घर की तलाशी में कई अश्लील सीडी मिली थीं। इस मामले में उनके पिता और भाई को गिरफ्तार किया गया था लेकिन बाद में उन्हें जमानत पर छोड़ दिया गया था।
कोरोना काल में सिनेमा जगत में बुरी खबरों का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। आए दिन कोई न कोई बुरी खबर सामने आ ही जाती है। बंगाली और हिंदी फिल्मों में काम कर चुकी ऐक्ट्रेस मिष्टी मुखर्जी का शुक्रवार की शाम को बेंगलुरु में निधन हो गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक मिष्टी मुखर्जी किडनी से जुड़ी समस्या से जूझ रही थीं। किडनी फेल होने की वजह से ही उनका निधन हो गया। मिष्टी मुखर्जी ने साल दो हज़ार तेरह में फिल्म 'मैं कृष्णा हूं' से बॉलीवुड डेब्यू किया था। पिछले कुछ महीनों से मिष्टी किडनी की समस्या को लेकर कीटो डाइट पर थीं। मिष्टी मुखर्जी की फैमिली में उनके पैरंट्स और उनका भाई है। मिष्टी ने फिल्म 'मैं कृष्णा हूं' में डांस नंबर करने के बाद सुर्खियां बटोरीं। वहीँ बाद में मिष्टी डायरेक्टर राकेश मेहता की फिल्म 'लाइफ की तो लग गई' में काम किया था। मिष्टी मुखर्जी बोल्ड म्यूजिक और आइटम नंबर्स को लेकर काफी सुर्ख़ियों में रहती थीं। इसके अलावा वह कई बड़ी पार्टीज और इवेंट्स में नजर आती थीं। कॉन्ट्रोवर्सी से भी मिष्टी का नाता रहा है। साल दो हज़ार चौदह में मिष्टी मुखर्जी का एक बड़ी कॉन्ट्रोवर्सी में नाम आया। इसके बाद मुंबई में उनके घर की तलाशी में कई अश्लील सीडी मिली थीं। इस मामले में उनके पिता और भाई को गिरफ्तार किया गया था लेकिन बाद में उन्हें जमानत पर छोड़ दिया गया था।
उन्होंने बताया कि पूर्वाह्न 11 बजे गुवाहाटी हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद मेवानी को सड़क मार्ग से करीब 220 किलोमीटर दूर कोकराझार जिला ले जाया जा रहा है। मेवानी के सहयोगी सुरेश जाट ने बताया कि प्रमुख दलित नेता को कोकराझार में पंजीकृत मुकदमे के सिलसिले में गुजरात के पालमपुर से गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने बताया कि मेवानी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा-153ए (समुदायों के बीच द्वेष को प्रोत्साहन देना) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि असम पुलिस के अधिकारियों द्वारा साझा किए गए दस्तावेजों के मुताबिक मेवानी द्वारा कुछ दिन पहले किए गए ट्वीट के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। हालांकि, ट्विटर से उस ट्वीट को हटा दिया है, जो नाथूराम गोडसे को लेकर है। मेवानी गुजरात विधानसभा के लिए बनासकांठा जिले के वडगाम सीट से बतौर निर्दलीय निर्वाचित हुए थे, लेकिन बाद में वह कांग्रेस में शामिल हो गए थे।
उन्होंने बताया कि पूर्वाह्न ग्यारह बजे गुवाहाटी हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद मेवानी को सड़क मार्ग से करीब दो सौ बीस किलोग्राममीटर दूर कोकराझार जिला ले जाया जा रहा है। मेवानी के सहयोगी सुरेश जाट ने बताया कि प्रमुख दलित नेता को कोकराझार में पंजीकृत मुकदमे के सिलसिले में गुजरात के पालमपुर से गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने बताया कि मेवानी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा-एक सौ तिरेपनए के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि असम पुलिस के अधिकारियों द्वारा साझा किए गए दस्तावेजों के मुताबिक मेवानी द्वारा कुछ दिन पहले किए गए ट्वीट के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। हालांकि, ट्विटर से उस ट्वीट को हटा दिया है, जो नाथूराम गोडसे को लेकर है। मेवानी गुजरात विधानसभा के लिए बनासकांठा जिले के वडगाम सीट से बतौर निर्दलीय निर्वाचित हुए थे, लेकिन बाद में वह कांग्रेस में शामिल हो गए थे।
छात्र सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट cbse. nic. in और cbseresults. nic. in पर नतीजे देख सकते हैं। इस बार सीबीएसई के नतीजे UMANG ऐप के जरिए भी देखें जा सकते हैं। इसके लिए आपको प्ले स्टोर से इस ऐप को डाउलवोड कर अपनी जरूरी जानकारी दर्ज करनी होगी। सीबीएसई 10वीं बोर्ड के नतीजे घोषित कर दिए गए हैं। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने ट्वीट कर रिजल्ट घोषित होने की जानकारी दी। इस बार कुल 91. 46 फीसदी छात्र पास हुए हैं। 93. 31 फीसदी लड़कियां और 90. 14 लड़के पास हुए हैं। त्रिवेंद्रम, चेन्नई और बेंगलुरू टॉप तीन जोन हैं, जहां का सबसे अच्छा रिजल्ट आया है। इस बार 10वीं क्लास में के करीब 18 लाख छात्र-छात्राएं परीक्षा में बैठे थे। छात्र सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट cbse. nic. in और cbseresults. nic. in पर नतीजे देख सकते हैं। इस बार सीबीएसई के नतीजे UMANG ऐप के जरिए भी देखें जा सकते हैं। इसके लिए आपको प्ले स्टोर से इस ऐप को डाउलवोड कर अपनी जरूरी जानकारी दर्ज करनी होगी। उधर, रिजल्ट घोषणा के बाद सीबीएसई की वेबसाइट क्रैश हो गई है। छात्रों को रिजल्ट चेक करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बतया जा रहा है कि एक साथ वेबसाइट पर बड़ी संख्या में छात्रों के रिजल्ट देखने कि वजह से वेबसाइट क्रैश हुई है, जिसे ठीक किया जा रहा है।
छात्र सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट cbse. nic. in और cbseresults. nic. in पर नतीजे देख सकते हैं। इस बार सीबीएसई के नतीजे UMANG ऐप के जरिए भी देखें जा सकते हैं। इसके लिए आपको प्ले स्टोर से इस ऐप को डाउलवोड कर अपनी जरूरी जानकारी दर्ज करनी होगी। सीबीएसई दसवीं बोर्ड के नतीजे घोषित कर दिए गए हैं। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने ट्वीट कर रिजल्ट घोषित होने की जानकारी दी। इस बार कुल इक्यानवे. छियालीस फीसदी छात्र पास हुए हैं। तिरानवे. इकतीस फीसदी लड़कियां और नब्बे. चौदह लड़के पास हुए हैं। त्रिवेंद्रम, चेन्नई और बेंगलुरू टॉप तीन जोन हैं, जहां का सबसे अच्छा रिजल्ट आया है। इस बार दसवीं क्लास में के करीब अट्ठारह लाख छात्र-छात्राएं परीक्षा में बैठे थे। छात्र सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट cbse. nic. in और cbseresults. nic. in पर नतीजे देख सकते हैं। इस बार सीबीएसई के नतीजे UMANG ऐप के जरिए भी देखें जा सकते हैं। इसके लिए आपको प्ले स्टोर से इस ऐप को डाउलवोड कर अपनी जरूरी जानकारी दर्ज करनी होगी। उधर, रिजल्ट घोषणा के बाद सीबीएसई की वेबसाइट क्रैश हो गई है। छात्रों को रिजल्ट चेक करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बतया जा रहा है कि एक साथ वेबसाइट पर बड़ी संख्या में छात्रों के रिजल्ट देखने कि वजह से वेबसाइट क्रैश हुई है, जिसे ठीक किया जा रहा है।
एना ने इस बारे में डॉक्टर से बात की, तो उन्होंने एना और उसकी बच्ची की कोरोना रिपोर्ट कराई। रिपोर्ट में पता चला कि एना के दूध की वजह से उसकी नवजात बच्ची को भी कोरोना संक्रमण हो गया है। नई दिल्लीः कोरोना की वैक्सीन दुनिया में आज भले ही आ गई हो लेकिन खतरा अभी पूरी तरह से टला नहीं है। कई देशों में कोरोना के नये स्ट्रेन पाए गए हैं। जिसके बाद से हवाई यात्रा पर रोक से लेकर लॉकडाउन जैसे कड़े प्रतिबंध लागू किये गए है ताकि कोरोना पर किसी भी तरह से नियंत्रण पाया जा सके। कुछ देशों में वैक्सीन लगने के बाद भी कई लोग इस बीमारी की चपेट में आ गये हैं। इसी बीच मेक्सिको के मॉन्टेरे शहर में कोरोना से जुड़ा एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां 23 साल की एना कार्टेज नाम की युवती ने दावा किया है कि कोरोना की वजह से उसका दूध हरे रंग में बदल गया। कोरोना होने पर मां के दूध का रंग बदल गया, बच्ची भी आई बीमारी की चपेट में (फोटोःसोशल मीडिया) वह कोरोना संक्रमित थी, जिसके बाद उसके बच्चे को भी कोविड-19 संक्रमण हो गया। युवती का ऐसा दावा है कि कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद उसके दूध का रंग बदल गया, जो कि सभी के लिए हैरानी की बात है। उसके इस दावे के बाद वैज्ञानिक और डॉक्टर्स भी आश्चर्य में हैं। एना कार्टेज हाल ही में मां बनी हैं। मां बनने के थोड़े दिन बाद ही एना को कोरोना संक्रमण हो गया और उनके दूध का रंग हल्का हरा होने लगा। एना ने बताया कि डिलिवरी के कुछ दिन बाद उसे कोरोना संक्रमण हुआ था। इस दौरान जब उसने अपनी नवजात बच्ची को दूध पिलाने की कोशिश की, तो उसने पाया कि उसके दूध का रंग हल्का हरा हो गया है। कोरोना होने पर मां के दूध का रंग बदल गया, बच्ची भी आई बीमारी की चपेट में (फोटोःसोशल मीडिया) इसके बाद एना ने इस बारे में डॉक्टर से बात की, तो उन्होंने एना और उसकी बच्ची की कोरोना रिपोर्ट कराई। रिपोर्ट में पता चला कि एना के दूध की वजह से उसकी नवजात बच्ची को भी कोरोना संक्रमण हो गया है। हालांकि दोनों को कोरोना का पूरा इलाज मिला और दोनों ठीक हो गए और उसके दूध का रंग भी सामान्य हो गया। वहीं इस पूरे मामले में डॉक्टर्स का कहना कि जब एंटीबॉडीज संक्रमण से लड़ती हैं तो इस तरह के बदलाव संभावित होते हैं। लेकिन ये शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में हो रहे सकारात्मक बदलाव का नतीजा है। डॉक्टर्स ने बताया कि जब मां बीमार हो, बच्ची बीमार हो या दोनों बीमार हो तो ऐसा होना सामान्य प्रक्रिया है। दोस्तों देश दुनिया की और खबरों को तेजी से जानने के लिए बनें रहें न्यूजट्रैक के साथ। हमें फेसबुक पर फॉलों करने के लिए @newstrack और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @newstrackmedia पर क्लिक करें।
एना ने इस बारे में डॉक्टर से बात की, तो उन्होंने एना और उसकी बच्ची की कोरोना रिपोर्ट कराई। रिपोर्ट में पता चला कि एना के दूध की वजह से उसकी नवजात बच्ची को भी कोरोना संक्रमण हो गया है। नई दिल्लीः कोरोना की वैक्सीन दुनिया में आज भले ही आ गई हो लेकिन खतरा अभी पूरी तरह से टला नहीं है। कई देशों में कोरोना के नये स्ट्रेन पाए गए हैं। जिसके बाद से हवाई यात्रा पर रोक से लेकर लॉकडाउन जैसे कड़े प्रतिबंध लागू किये गए है ताकि कोरोना पर किसी भी तरह से नियंत्रण पाया जा सके। कुछ देशों में वैक्सीन लगने के बाद भी कई लोग इस बीमारी की चपेट में आ गये हैं। इसी बीच मेक्सिको के मॉन्टेरे शहर में कोरोना से जुड़ा एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां तेईस साल की एना कार्टेज नाम की युवती ने दावा किया है कि कोरोना की वजह से उसका दूध हरे रंग में बदल गया। कोरोना होने पर मां के दूध का रंग बदल गया, बच्ची भी आई बीमारी की चपेट में वह कोरोना संक्रमित थी, जिसके बाद उसके बच्चे को भी कोविड-उन्नीस संक्रमण हो गया। युवती का ऐसा दावा है कि कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद उसके दूध का रंग बदल गया, जो कि सभी के लिए हैरानी की बात है। उसके इस दावे के बाद वैज्ञानिक और डॉक्टर्स भी आश्चर्य में हैं। एना कार्टेज हाल ही में मां बनी हैं। मां बनने के थोड़े दिन बाद ही एना को कोरोना संक्रमण हो गया और उनके दूध का रंग हल्का हरा होने लगा। एना ने बताया कि डिलिवरी के कुछ दिन बाद उसे कोरोना संक्रमण हुआ था। इस दौरान जब उसने अपनी नवजात बच्ची को दूध पिलाने की कोशिश की, तो उसने पाया कि उसके दूध का रंग हल्का हरा हो गया है। कोरोना होने पर मां के दूध का रंग बदल गया, बच्ची भी आई बीमारी की चपेट में इसके बाद एना ने इस बारे में डॉक्टर से बात की, तो उन्होंने एना और उसकी बच्ची की कोरोना रिपोर्ट कराई। रिपोर्ट में पता चला कि एना के दूध की वजह से उसकी नवजात बच्ची को भी कोरोना संक्रमण हो गया है। हालांकि दोनों को कोरोना का पूरा इलाज मिला और दोनों ठीक हो गए और उसके दूध का रंग भी सामान्य हो गया। वहीं इस पूरे मामले में डॉक्टर्स का कहना कि जब एंटीबॉडीज संक्रमण से लड़ती हैं तो इस तरह के बदलाव संभावित होते हैं। लेकिन ये शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में हो रहे सकारात्मक बदलाव का नतीजा है। डॉक्टर्स ने बताया कि जब मां बीमार हो, बच्ची बीमार हो या दोनों बीमार हो तो ऐसा होना सामान्य प्रक्रिया है। दोस्तों देश दुनिया की और खबरों को तेजी से जानने के लिए बनें रहें न्यूजट्रैक के साथ। हमें फेसबुक पर फॉलों करने के लिए @newstrack और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @newstrackmedia पर क्लिक करें।
आशुतोष तिवारी, जगदलपुर। सड़क पर दौड़ती मोटर साइकिल पर अचानक चालक के साथ नाग देवता भी सवार नजर आए. चालक ने नाग देवता को देखते ही गाड़ी खड़ी कर भागना शुरू कर दिया. हालांकि नाग सांप को मोटर साइकिल से बाहर निकालकर सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया गया है. दरअसल, पंडरीपानी में स्थित गैरेज के मैकेनिक मोटर साइकिल की टेस्टिंग करने के लिए निकला था. इसी दौरान मैकेनिक ने अचानक इंजन के पास नाग सांप को देखा. सांप को देखते हैं मैकेनिक ने बाइक को आनन-फानन में सड़क के किनारे रखा, जिसके बाद आसपास के लोगों की मदद से सांप को बाहर निकालने का प्रयास किया गया. सफलता नहीं मिलने पर उन्होंने 112 की टीम को जानकारी दी सूचना मिलते ही 112 की टीम मौके पर पहुंची. सांप को सुरक्षित बाइक से बाहर निकाला, जिसके बाद सुरक्षित उसे जंगल में छोड़ दिया गया. बस्तर में हो रहे आये दिन बारिश की वजह से जहरीले सांप जंगल छोड़कर गरम स्थानों पर अपना ठिकाना बनाने की कोशिश करते हैं. चक्रवात का असर बस्तर में भी लगातार देखने को मिल रहा है. दिन में कड़ी धूप के बाद शाम होते यहां जमकर बारिश हो रही है. यही कारण है कि आज यह वाक्या देखने को मिला है. इसे एक चेतावनी के तौर पर भी बस्तर में देखा जा सकता है, क्योंकि ऐसी स्थिति कभी भी कहीं भी निर्मित हो सकती है.
आशुतोष तिवारी, जगदलपुर। सड़क पर दौड़ती मोटर साइकिल पर अचानक चालक के साथ नाग देवता भी सवार नजर आए. चालक ने नाग देवता को देखते ही गाड़ी खड़ी कर भागना शुरू कर दिया. हालांकि नाग सांप को मोटर साइकिल से बाहर निकालकर सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया गया है. दरअसल, पंडरीपानी में स्थित गैरेज के मैकेनिक मोटर साइकिल की टेस्टिंग करने के लिए निकला था. इसी दौरान मैकेनिक ने अचानक इंजन के पास नाग सांप को देखा. सांप को देखते हैं मैकेनिक ने बाइक को आनन-फानन में सड़क के किनारे रखा, जिसके बाद आसपास के लोगों की मदद से सांप को बाहर निकालने का प्रयास किया गया. सफलता नहीं मिलने पर उन्होंने एक सौ बारह की टीम को जानकारी दी सूचना मिलते ही एक सौ बारह की टीम मौके पर पहुंची. सांप को सुरक्षित बाइक से बाहर निकाला, जिसके बाद सुरक्षित उसे जंगल में छोड़ दिया गया. बस्तर में हो रहे आये दिन बारिश की वजह से जहरीले सांप जंगल छोड़कर गरम स्थानों पर अपना ठिकाना बनाने की कोशिश करते हैं. चक्रवात का असर बस्तर में भी लगातार देखने को मिल रहा है. दिन में कड़ी धूप के बाद शाम होते यहां जमकर बारिश हो रही है. यही कारण है कि आज यह वाक्या देखने को मिला है. इसे एक चेतावनी के तौर पर भी बस्तर में देखा जा सकता है, क्योंकि ऐसी स्थिति कभी भी कहीं भी निर्मित हो सकती है.
खबर लिखे जाने तक न्यूजीलैंड के दोनों बल्लेबाज केन विलियमसन और टॉम लाथम अर्धशतक जमा चुके हैं और न्यूजीलैंड काफी मजबूत स्थिति में है। न्यूजीलैंड का आज सुबह पहला विकेट मार्टिन गप्टिल के रूप में गिरा। गप्टिल को उमेश यादव ने 9 रनों के व्यक्तिगत स्कोर पर आउट किया। उसके बाद से टीम इंडिया कोई भी विकेट गिराने में कामयाब नहीं हो पाई है। इससे पहले कल के स्कोर 291/9 से दिन की शुरुआत करनेवाली टीम इंडिया के बल्लेबाज रविंद्र जडेजा ने अच्छे हाथ दिखाए और टीम के स्कोर को 300 के पार ले गए। जडेजा इस दौरान चौकों की झड़ी लगी दी। लेकिन उके साथी उमेश यादव ज्यादा साथ नहीं निभा पाए और 9 रनों के व्यक्तिगत स्कोर पर आउट हो गए। इस तरह टीम इंडिया की पहली पारी 318 रनों पर ऑलआउट हो गई। भारत की ओर से मुरली विजय ने सर्वाधिक 65 रन बनाए। वहीं पुजारा ने 62 रन बनाए। उनके अलावा अश्विन ने 40, रोहित ने 35 और केएल राहुल ने 32 रन बनाए। विराट कोहली सस्ते में 9 रन बनाकर आउट हुए। गौर करने वाली बात रही कि भारतीय टीम ने पहले दिन के अंतिम सेशन में कुल 5 विकेट गंवाए। न्यूजीलैंड की ओर से ट्रेंट बोल्ट और सेंटेनर ने 3-3 विकेट लिए। वहीं वैगनर ने 2, क्रेग और सोढ़ी ने 1-1 विकेट लिए। This website uses cookies so that we can provide you with the best user experience possible. Cookie information is stored in your browser and performs functions such as recognising you when you return to our website and helping our team to understand which sections of the website you find most interesting and useful. Strictly Necessary Cookie should be enabled at all times so that we can save your preferences for cookie settings. If you disable this cookie, we will not be able to save your preferences. This means that every time you visit this website you will need to enable or disable cookies again.
खबर लिखे जाने तक न्यूजीलैंड के दोनों बल्लेबाज केन विलियमसन और टॉम लाथम अर्धशतक जमा चुके हैं और न्यूजीलैंड काफी मजबूत स्थिति में है। न्यूजीलैंड का आज सुबह पहला विकेट मार्टिन गप्टिल के रूप में गिरा। गप्टिल को उमेश यादव ने नौ रनों के व्यक्तिगत स्कोर पर आउट किया। उसके बाद से टीम इंडिया कोई भी विकेट गिराने में कामयाब नहीं हो पाई है। इससे पहले कल के स्कोर दो सौ इक्यानवे/नौ से दिन की शुरुआत करनेवाली टीम इंडिया के बल्लेबाज रविंद्र जडेजा ने अच्छे हाथ दिखाए और टीम के स्कोर को तीन सौ के पार ले गए। जडेजा इस दौरान चौकों की झड़ी लगी दी। लेकिन उके साथी उमेश यादव ज्यादा साथ नहीं निभा पाए और नौ रनों के व्यक्तिगत स्कोर पर आउट हो गए। इस तरह टीम इंडिया की पहली पारी तीन सौ अट्ठारह रनों पर ऑलआउट हो गई। भारत की ओर से मुरली विजय ने सर्वाधिक पैंसठ रन बनाए। वहीं पुजारा ने बासठ रन बनाए। उनके अलावा अश्विन ने चालीस, रोहित ने पैंतीस और केएल राहुल ने बत्तीस रन बनाए। विराट कोहली सस्ते में नौ रन बनाकर आउट हुए। गौर करने वाली बात रही कि भारतीय टीम ने पहले दिन के अंतिम सेशन में कुल पाँच विकेट गंवाए। न्यूजीलैंड की ओर से ट्रेंट बोल्ट और सेंटेनर ने तीन-तीन विकेट लिए। वहीं वैगनर ने दो, क्रेग और सोढ़ी ने एक-एक विकेट लिए। This website uses cookies so that we can provide you with the best user experience possible. Cookie information is stored in your browser and performs functions such as recognising you when you return to our website and helping our team to understand which sections of the website you find most interesting and useful. Strictly Necessary Cookie should be enabled at all times so that we can save your preferences for cookie settings. If you disable this cookie, we will not be able to save your preferences. This means that every time you visit this website you will need to enable or disable cookies again.
शिमला शहर में बिजली की तारों का जंजाल खत्म नहीं हो पाया है। चार साल पहले एचटी लाइनों को भूमिगत करने की योजना सिरे नहीं चढ़ सकी है। स्मार्ट सिटी के तहत नगर निगम शिमला द्वारा 28 करोड़ की लागत से इस योजना को मंजूरी दी गई थी, लेकिन यह योजना चार सालों में तैयार नहीं हो सकी है। बताया जाता है कि पहले इसके लिए सर्वे किया गया था, लेकिन मालरोड सहित अन्य जगहों पर फिजिबिलिटी न होने और तारों को भूमिगत करने के लिए जगह के अभाव के कारण यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी है। अब इस योजना पर नए सिरे से कार्य किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार शिमला शहर में तारों के जंजाल से छुटकारा पाने के लिए नगर निगम ने योजना तैयार की थी, जिसके तहत हाईटेंशन लाइनों को अंडर ग्राउंड किया जाना था। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत हाईटेंशन लाइनों को अंडर ग्राउंड करने के लिए प्रोजेक्ट तैयार किया गया था। साल 2019 में इस प्रोजेक्ट को मंजूरी भी मिल चुकी है, लेकिन 28 करोड़ की यह योजना अभी तक शुरू नहीं हो सकी है। बता दें कि शिमला शहर में रिज से मालरोड, मिडल बाजार, गंज बाजार, यूएस क्लब, छोटा शिमला, पुराने बस अड्डा आदि जगहों में हाईटेंशन लाइन गुजरती है। यहां रोजाना स्थानीय लोगों के साथ सैलानियों की भरमार रहती है। ऐसे में इन जगहों से गुजरने वाली यह हाईटेंशन लाइन कभी भी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है। नगर निगम आयुक्त आशीष कोहली का कहना है कि प्रोजेक्ट के लिए अभी बजट नहीं मिला है। बजट आते ही काम शुरू कर दिया जाएगा। नगर निगम की ऐसी योजना पर सर्वे किया गया था, लेकिन शिमला शहर के मालरोड़ सहित अन्य जगहों पर तारें बिछाने के लिए जगह उपलब्ध नहीं हो सकी थी तो मामला शिथिल हो गया था, लेकिन अब फिर से इस पर सर्वे किया जा जा रहा है।
शिमला शहर में बिजली की तारों का जंजाल खत्म नहीं हो पाया है। चार साल पहले एचटी लाइनों को भूमिगत करने की योजना सिरे नहीं चढ़ सकी है। स्मार्ट सिटी के तहत नगर निगम शिमला द्वारा अट्ठाईस करोड़ की लागत से इस योजना को मंजूरी दी गई थी, लेकिन यह योजना चार सालों में तैयार नहीं हो सकी है। बताया जाता है कि पहले इसके लिए सर्वे किया गया था, लेकिन मालरोड सहित अन्य जगहों पर फिजिबिलिटी न होने और तारों को भूमिगत करने के लिए जगह के अभाव के कारण यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी है। अब इस योजना पर नए सिरे से कार्य किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार शिमला शहर में तारों के जंजाल से छुटकारा पाने के लिए नगर निगम ने योजना तैयार की थी, जिसके तहत हाईटेंशन लाइनों को अंडर ग्राउंड किया जाना था। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत हाईटेंशन लाइनों को अंडर ग्राउंड करने के लिए प्रोजेक्ट तैयार किया गया था। साल दो हज़ार उन्नीस में इस प्रोजेक्ट को मंजूरी भी मिल चुकी है, लेकिन अट्ठाईस करोड़ की यह योजना अभी तक शुरू नहीं हो सकी है। बता दें कि शिमला शहर में रिज से मालरोड, मिडल बाजार, गंज बाजार, यूएस क्लब, छोटा शिमला, पुराने बस अड्डा आदि जगहों में हाईटेंशन लाइन गुजरती है। यहां रोजाना स्थानीय लोगों के साथ सैलानियों की भरमार रहती है। ऐसे में इन जगहों से गुजरने वाली यह हाईटेंशन लाइन कभी भी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है। नगर निगम आयुक्त आशीष कोहली का कहना है कि प्रोजेक्ट के लिए अभी बजट नहीं मिला है। बजट आते ही काम शुरू कर दिया जाएगा। नगर निगम की ऐसी योजना पर सर्वे किया गया था, लेकिन शिमला शहर के मालरोड़ सहित अन्य जगहों पर तारें बिछाने के लिए जगह उपलब्ध नहीं हो सकी थी तो मामला शिथिल हो गया था, लेकिन अब फिर से इस पर सर्वे किया जा जा रहा है।
लद्दाख में भारत से उलझा चीन लगातार प्रॉपगैंडा फैलाने में जुटा हुआ है। फर्जी वीडियो जारी करने के बाद चीनी सेना ने अब अपने नागरिकों को गलवान का पत्थर गिफ्ट करने की योजना बना रही है। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की वेस्टर्न थिएटर कमांड (WTC) ने 1 फरवरी से लोगों को गलवान घाटी के पत्थरों को बतौर गिफ्ट देने का ऐलान किया है। चीनी सेना के इसी कमांड के पास भारत से सटी सीमा की रखवाली करने की जिम्मेदारी है। चीन की सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी सेना की वेस्टर्न थिएटर कमांड ने शुक्रवार स्थानीय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीबो पर अपना आधिकारिक अकाउंट खोला है। चीनी सेना ने इस अकाउंट पर एक बैनर को पब्लिश किया है और कहा है कि 1 फरवरी को इस पोस्ट को शेयर करने वाले 10 भाग्यशाली लोगों को उपहार के रूप में गलवान घाटी का पत्थर भेजा जाएगा। इस पोस्टर में चीनी सैनिक किसी अज्ञात पहाड़ी इलाके में एक नदी के किनारे गश्त लगाते हुए नजर आ रहे हैं। इस पोस्ट में चीनी भाषा में लिखा है कि "शानदार परिदृश्य, एक इंच भी नहीं देंगे। " चीनी मीडिया का दावा है कि यह पोस्टर गलवान घाटी का है, लेकिन उसके पिछले फर्जी वीडियो की तरह इस पर भी विश्वास करना मुश्किल है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह पोस्ट वीबो पर तेजी से वायरल हो रहा है। बड़ी संख्या में चीनी लोग गलवान का पत्थर पाने के लिए इस पोस्ट को शेयर और कमेंट कर रहे हैं। चीन ने एक जनवरी को गलवान का बताकर एक फर्जी वीडियो भी जारी किया था। इस वीडियो में चीनी सेना के एक्टर्स फिल्मी तरीके से झंडे को फहराते हुए दिखाई दिए थे।
लद्दाख में भारत से उलझा चीन लगातार प्रॉपगैंडा फैलाने में जुटा हुआ है। फर्जी वीडियो जारी करने के बाद चीनी सेना ने अब अपने नागरिकों को गलवान का पत्थर गिफ्ट करने की योजना बना रही है। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की वेस्टर्न थिएटर कमांड ने एक फरवरी से लोगों को गलवान घाटी के पत्थरों को बतौर गिफ्ट देने का ऐलान किया है। चीनी सेना के इसी कमांड के पास भारत से सटी सीमा की रखवाली करने की जिम्मेदारी है। चीन की सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी सेना की वेस्टर्न थिएटर कमांड ने शुक्रवार स्थानीय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीबो पर अपना आधिकारिक अकाउंट खोला है। चीनी सेना ने इस अकाउंट पर एक बैनर को पब्लिश किया है और कहा है कि एक फरवरी को इस पोस्ट को शेयर करने वाले दस भाग्यशाली लोगों को उपहार के रूप में गलवान घाटी का पत्थर भेजा जाएगा। इस पोस्टर में चीनी सैनिक किसी अज्ञात पहाड़ी इलाके में एक नदी के किनारे गश्त लगाते हुए नजर आ रहे हैं। इस पोस्ट में चीनी भाषा में लिखा है कि "शानदार परिदृश्य, एक इंच भी नहीं देंगे। " चीनी मीडिया का दावा है कि यह पोस्टर गलवान घाटी का है, लेकिन उसके पिछले फर्जी वीडियो की तरह इस पर भी विश्वास करना मुश्किल है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह पोस्ट वीबो पर तेजी से वायरल हो रहा है। बड़ी संख्या में चीनी लोग गलवान का पत्थर पाने के लिए इस पोस्ट को शेयर और कमेंट कर रहे हैं। चीन ने एक जनवरी को गलवान का बताकर एक फर्जी वीडियो भी जारी किया था। इस वीडियो में चीनी सेना के एक्टर्स फिल्मी तरीके से झंडे को फहराते हुए दिखाई दिए थे।
देश को कोवीशील्ड (Covishield) देने वाला सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) आने वाले छह महीनों में, बच्चों के लिए कोविड वैक्सीन (covid vaccine for children) लॉन्च करने जा रहा है. कंपनी के सीईओ अदार पूनावाला (Adar Poonawalla) ने मंगलवार को 27वें CII पार्टनरशिप समिट 2021 में यह जानकारी दी. सीईओ अदार पूनावाला ने कहा कि यह वैक्सीन 'कोवोवैक्स'(Covovax) अभी अपने ट्रायल फेज़ में है. यह वैक्सीन 3 साल से 18 साल से कम के बच्चों को पूरी तरह से सुरक्षित रखेगी. पूनावाला ने कहा, 'हमने बच्चों में कोविड को गंभीर होते नहीं देखा है. यह हमारी खुशकिस्मती है कि बच्चों के लिए फिलहाल घबराने वाली बात नहीं है. हालांकि, हम बच्चों के लिए छह महीने में वैक्सीन ला रहे हैं. जो कम से कम तीन साल की उम्र के बच्चों को दी जा सकेगी. ' उन्होंने आगे कहा कि यह दिखाने के लिए पर्याप्त डेटा है कि यह वैक्सीन काम करेगी और बच्चों को संक्रमण से बचाएगी. उन्होंने यह भी बताया कि भारत में पहले से ही दो कंपनियां हैं जिनके पास लाइसेंस है और उनके टीके भी जल्द ही उपलब्ध हो जाएंगे. अदार पूनावाला ने कहा कि मुझे लगता है कि आपको अपने बच्चों का वैक्सीनेशन करवाना चाहिए. इसमें कोई नुकसान नहीं है. ये वैक्सीन सुरक्षित और प्रभावी साबित हुई हैं. अगर आपको अपने बच्चों को टीका लगवाना है, तो इसके लिए आप सरकार की घोषणा का इंतज़ार करें. ओमिक्रॉन पर अदार पूनावाला ने कहा कि अभी तक इस वैरिएंट के बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है कि यह बच्चों पर कैसे असर डालेगा. उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं पता कि बच्चों पर ओमिक्रॉन कैसा असर डालता है, लेकिन अभी तक बच्चे कोविड के वायरस से बहुत बुरी तरह से प्रभावित नहीं हुए हैं. मुझे लगता है कि उनका शरीर, कोशिकाएं और उनके फेफड़े बेहतर तरीके से ठीक हो जाते हैं. ' बता दें कि फिलहाल, कोवीशील्ड और कोविड की दूसरी वैक्सीन 18 साल की उम्र से ज़्यादा के लोगों को ही दी जा रही हैं. बच्चों के लिए अभी तक कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है और ओमिक्रॉन के खतरे को देखते हुए बच्चों की वैक्सीन और बूस्टर डोज़ का बेसब्री से इंतज़ार किया जा रहा है.
देश को कोवीशील्ड देने वाला सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया आने वाले छह महीनों में, बच्चों के लिए कोविड वैक्सीन लॉन्च करने जा रहा है. कंपनी के सीईओ अदार पूनावाला ने मंगलवार को सत्ताईसवें CII पार्टनरशिप समिट दो हज़ार इक्कीस में यह जानकारी दी. सीईओ अदार पूनावाला ने कहा कि यह वैक्सीन 'कोवोवैक्स' अभी अपने ट्रायल फेज़ में है. यह वैक्सीन तीन साल से अट्ठारह साल से कम के बच्चों को पूरी तरह से सुरक्षित रखेगी. पूनावाला ने कहा, 'हमने बच्चों में कोविड को गंभीर होते नहीं देखा है. यह हमारी खुशकिस्मती है कि बच्चों के लिए फिलहाल घबराने वाली बात नहीं है. हालांकि, हम बच्चों के लिए छह महीने में वैक्सीन ला रहे हैं. जो कम से कम तीन साल की उम्र के बच्चों को दी जा सकेगी. ' उन्होंने आगे कहा कि यह दिखाने के लिए पर्याप्त डेटा है कि यह वैक्सीन काम करेगी और बच्चों को संक्रमण से बचाएगी. उन्होंने यह भी बताया कि भारत में पहले से ही दो कंपनियां हैं जिनके पास लाइसेंस है और उनके टीके भी जल्द ही उपलब्ध हो जाएंगे. अदार पूनावाला ने कहा कि मुझे लगता है कि आपको अपने बच्चों का वैक्सीनेशन करवाना चाहिए. इसमें कोई नुकसान नहीं है. ये वैक्सीन सुरक्षित और प्रभावी साबित हुई हैं. अगर आपको अपने बच्चों को टीका लगवाना है, तो इसके लिए आप सरकार की घोषणा का इंतज़ार करें. ओमिक्रॉन पर अदार पूनावाला ने कहा कि अभी तक इस वैरिएंट के बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है कि यह बच्चों पर कैसे असर डालेगा. उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं पता कि बच्चों पर ओमिक्रॉन कैसा असर डालता है, लेकिन अभी तक बच्चे कोविड के वायरस से बहुत बुरी तरह से प्रभावित नहीं हुए हैं. मुझे लगता है कि उनका शरीर, कोशिकाएं और उनके फेफड़े बेहतर तरीके से ठीक हो जाते हैं. ' बता दें कि फिलहाल, कोवीशील्ड और कोविड की दूसरी वैक्सीन अट्ठारह साल की उम्र से ज़्यादा के लोगों को ही दी जा रही हैं. बच्चों के लिए अभी तक कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है और ओमिक्रॉन के खतरे को देखते हुए बच्चों की वैक्सीन और बूस्टर डोज़ का बेसब्री से इंतज़ार किया जा रहा है.
बिहार में शराब बंदी लागू है, पर शराब की खेप को रोज पकड़ी जाती है। गांव से लेकर शहर के लोग इस धंधे में जुड़े हैं। अब पूर्णिया के खुश्कीबाग से पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। शहर के वार्ड नंबर 41 में घर से शराब का धंधा करने का भंडाफोड़ किया है। सदर थाना की पुलिस ने छापेमारी कर 234 बोतल विभिन्न प्रकार की शराब को बरामद किया है। वहीं मौके से मुख्य आरोपी विक्की कुमार सिंह फरार हो गया। सदर थानाध्यक्ष संजय कुमार सिंह ने बताया कि अवैध शराब के विरूद्ध विशेष छापामारी के दौरान पता चला की खुश्कीबाग बजरंगी टोला स्थित बिक्की कुमार सिंह बाहर से विदेशी शराब लाकर घर में रखकर बेचता है। कार्रवाई के लिए जब खुश्कीबाग पहुंचा तो देखा कि एक व्यक्ति पुलिस जीप को देखते ही घर से निकलकर भागने का प्रयास करने लगा। पुलिस ने खदेड़ा तो वह अंधेर का फायदा उठाकर भाग गया। स्थानीय लोगों ने बताया की भाग रहा व्यक्ति बिक्की कुमार सिंह है। पुलिस ने बताया कि बिक्की कुमार सिंह के घर की तलाशी के क्रम में 750ml का 27 बोतल, 180ml का 31 टैट्रा पैक तथा पलंग के नीचे छुपा कर रखा हुआ। बीयर का 68 केन, 750ml का 107 बोतल बरामद हुआ। This website follows the DNPA Code of Ethics.
बिहार में शराब बंदी लागू है, पर शराब की खेप को रोज पकड़ी जाती है। गांव से लेकर शहर के लोग इस धंधे में जुड़े हैं। अब पूर्णिया के खुश्कीबाग से पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। शहर के वार्ड नंबर इकतालीस में घर से शराब का धंधा करने का भंडाफोड़ किया है। सदर थाना की पुलिस ने छापेमारी कर दो सौ चौंतीस बोतल विभिन्न प्रकार की शराब को बरामद किया है। वहीं मौके से मुख्य आरोपी विक्की कुमार सिंह फरार हो गया। सदर थानाध्यक्ष संजय कुमार सिंह ने बताया कि अवैध शराब के विरूद्ध विशेष छापामारी के दौरान पता चला की खुश्कीबाग बजरंगी टोला स्थित बिक्की कुमार सिंह बाहर से विदेशी शराब लाकर घर में रखकर बेचता है। कार्रवाई के लिए जब खुश्कीबाग पहुंचा तो देखा कि एक व्यक्ति पुलिस जीप को देखते ही घर से निकलकर भागने का प्रयास करने लगा। पुलिस ने खदेड़ा तो वह अंधेर का फायदा उठाकर भाग गया। स्थानीय लोगों ने बताया की भाग रहा व्यक्ति बिक्की कुमार सिंह है। पुलिस ने बताया कि बिक्की कुमार सिंह के घर की तलाशी के क्रम में सात सौ पचास मिलीलीटर का सत्ताईस बोतल, एक सौ अस्सी मिलीलीटर का इकतीस टैट्रा पैक तथा पलंग के नीचे छुपा कर रखा हुआ। बीयर का अड़सठ केन, सात सौ पचास मिलीलीटर का एक सौ सात बोतल बरामद हुआ। This website follows the DNPA Code of Ethics.
मौसम के बदलाव, उम्र के बढ़ने, अनियंत्रित जीवनशैली व कई अन्य कारणों से लोगों को अक्सर शरीर में सूजन, जोड़ों का दर्द आदि की शिकायत होती रहती है। सूजन और जोड़ों का दर्द एक तरह का इन्फ्लेमेशन कहलाता है जो बहुत लंबे समय तक शरीर में बना रहे तो बेहद घातक भी हो सकता है। दरअसल शरीर में लंबे दौर तक चलने वाले इन्फ्लेमेशन से कैंसर होने के दावे तक आधुनिक विज्ञान ने किए हैं। ये इन्फ्लेमेशन यानी सूजन और बदन में होने वाला दर्द जीवन की रफ्तार में एक बड़ी बाधा बन जाता है। रासायनिक दवाओं को अपनाकर आपको तुरंत राहत तो जरूर मिल सकती है लेकिन सिन्थेटिक दवाओं के दूरगामी परिणाम काफी घातक होते हैं। हजारों सालों से हिन्दुस्तान के ग्रामीण लोग सूजन और दर्द निवारण के लिए देसी नुस्खों को आजमाते आएं हैं। पिछले लगभग 2 दशकों के अपने स्वयं के अनुभव से कह सकता हूं कि इस लेख में बताए कई नुस्ख़े बेहद कारगर भी हैं और इनपर बाकायदा वैज्ञानिक शोध भी जारी है, चलिए जानते हैं किस तरह से आदिवासी हर्बल नुस्खों को अपनाकर आप सब सूजन और जोड़ों का दर्द जैसी समस्याओं से निजात पा सकते हैं। पातालकोट के आदिवासी मानते हैं कि लगभग 100 मिली तरबूज के रस में लगभग 2 ग्राम कालीमिर्च के चूर्ण को मिलाकर दिन में 2-3 बार सेवन कराया जाए तो शरीर की सूजन दूर हो जाती है। दालचीनी की छाल का चूर्ण तैयार कर एक कप पानी के साथ लगभग 2 ग्राम चूर्ण मिलाकर प्रतिदिन सुबह भोजन के बाद लिया जाए तो जोड़ दर्द में तेजी से आराम मिलता है, वैसे डांगी आदिवासियों के अनुसार यही फार्मुले का सेवन डायबिटीज के लिए भी कारगर है। आदिवासियों के अनुसार अपने खान-पान में अक्सर दालचीनी का उपयोग सेहत के लिए कई मायनों में बेहतर होता है। शीशम की सूखी पत्तियों का चूर्ण बनाकर पानी में घोलकर लेप तैयार किया जाए और सूजन वाले अंग पर लगाया जाए तो सूजन कम करने में मदद करता है। शीशम की पत्तियों में पाए जाने वाले महत्वपूर्ण रसायनों में काफी एंटीइन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं। कई इलाकों में जानकार लोग कुंदरू के फल, अजवायन, अदरख और कपूर की समान मात्रा लेकर कूट लेते हैं और एक सूती कपड़े में लपेटकर इसे हल्का-हल्का गर्म करके सूजन वाले भागों पर धीमे धीमे सेंकाई करते हैं, ऐसा करने से मोच या सूजन मिट जाती है। घुटनों में सूजन होने पर समुद्रशोख नामक बेल की जड़ों के चूर्ण चावल की मांड में मिलाकर घुटनों पर लेपित किया जाए और दो घंटे बाद इसे धो लिया जाए, आराम मिलने लगता है। नदी, नालों और पोखरों के किनारे पाए जाने वाली महत्वपूर्ण वनस्पति नागरमोथा में प्रोटीन, स्टार्च के अलावा कई कार्बोहाड्रेट्स पाए जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि संपूर्ण पौधे का लेप शरीर पर लगाने से सूजन मिट जाती है। इसके कंद को कुचलकर सूजन वाले हिस्सों पर लगाने पर आराम मिलता है। पातालकोट के आदिवासियों का मानना है कि गंवारफल्लियों के बीजों को रात भर पानी में डुबोकर रखा जाए और अगले दिन उसे कुचलकर सूजन, जोड़ दर्द और जलन देने वाले शारीरिक भागों पर लगाने से अतिशीघ्र आराम मिलता है। कटहल के फल के छिल्कों से निकलने वाला दूध यदि गांठनुमा सूजन, घाव और कटे-फटे अंगों पर लगाया जाए तो आराम मिलता है। अक्सर पहाड़ों पर चढ़ते उतरते हाथ पैरों में अक्सर खरोंचे आने पर पहाड़ी लोग, कटहल के फलों को चीरा लगाकर दूध निकालते हैं और घावों पर लगाते हैं। दक्षिण मध्यप्रदेश के महाकौशल क्षेत्र में अरबी के पत्तों में बेसन लगाकर भजिए तैयार किए जाते हैं, माना जाता है कि ये भजिए वात रोग और जोड़ दर्द से परेशान रोगियों के लिए उत्तम होते हैं, आर्थराइटिस रोग से त्रस्त व्यक्ति को इन भजियों का सेवन जरूर करना चाहिए। यह बहुत कम लोग जानते हैं कि आक या अकौना के पौधे से निकलने वाले दूध का उपयोग शारीरिक दर्द भगाने में किया जाता हैं, पातालकोट के आदिवासियों की मानें तो इसका दूध किसी भी प्रकार के दर्द को खींच लेता हैं। इसके पत्तियों को कुचलकर जोड़ों पर लेपित किया जाए तो भी यह दर्द को खींच लेती है। आदिवासियों के अनुसार इसकी पत्तियों के रस जोड़ों पर मालिश करने से जो दर्द में आराम मिलता है। आक की पत्तियों को सतहों पर सरसों के तेल को लगाकर आँच पर सेंका जाए और दर्द वाले हिस्सों पर इससे हल्की सेंकाई की जाए तो दर्द में आराम मिलता है। डाँग- गुजरात के आदिवासी हर्बल जानकार अमरबेल के बीजों और पूरे पौधे को कुचलकर आर्थराइटिस के रोगी को दर्द वाले हिस्सों पर पट्टी लगाकर बांध देते हैं। इनके अनुसार यह दर्द निवारक की तरह कार्य करता है। राई के बीजों का लेप और कपूर का मिश्रण जोड़ों पर मालिश करने से आमवात और जोड़ के दर्द में फायदा होता है। पातालकोट के कई हिस्सों में आदिवासी इस मिश्रण में थोड़ा से केरोसिन तेल डालकर मालिश करते हैं। कहा जाता है कि यह फार्मूला दर्द को खींच निकालता है। कुछ आदिवासी फराशबीन की फल्लियों के रस के सेवन की सलाह गठिया का रोग दूर करने के लिए देते हैं। फल्लियों के बीजों का चूर्ण तैयार कर तेल के साथ मिलाकर जोड़ दर्द वाले हिस्सों पर लगाया जाए तो दर्द में तेजी से राहत मिलती है। पारिजात की 6-7 ताजी पत्तियों को अदरक के रस साथ कुचल लिया जाए और शहद मिलाकर सेवन किया जाए तो बदन दर्द और जोड़ दर्द में काफी आराम मिलता है। माना जाता है कि इस फार्मुले का सेवन सायटिका जैसे रोग के लिए भी महत्वपूर्ण होता है। करीब 8-10 लहसुन की कलियों को तेल या घी के साथ फ्राई कर लिया जाए और खाने से पहले चबाया जाए तो जोड़ दर्द में तेजी से आराम मिलता है, ऐसा प्रतिदिन किया जाना चाहिए। डाँग- जिला गुजरात के हर्बल जानकारों का मानना है कि लहसुन की कलियों को सरसों के तेल के साथ कुचलकर गर्म किया जाए और कपूर मिलाकर जोड़ों या दर्द वाले हिस्सों पर लगाकर मालिश की जाए तो भी तेजी से आराम मिलता है। लहसुन के एंटीइन्फ्लेमेटरी गुणों की वकालत आधुनिक विज्ञान भी खूब करता है।
मौसम के बदलाव, उम्र के बढ़ने, अनियंत्रित जीवनशैली व कई अन्य कारणों से लोगों को अक्सर शरीर में सूजन, जोड़ों का दर्द आदि की शिकायत होती रहती है। सूजन और जोड़ों का दर्द एक तरह का इन्फ्लेमेशन कहलाता है जो बहुत लंबे समय तक शरीर में बना रहे तो बेहद घातक भी हो सकता है। दरअसल शरीर में लंबे दौर तक चलने वाले इन्फ्लेमेशन से कैंसर होने के दावे तक आधुनिक विज्ञान ने किए हैं। ये इन्फ्लेमेशन यानी सूजन और बदन में होने वाला दर्द जीवन की रफ्तार में एक बड़ी बाधा बन जाता है। रासायनिक दवाओं को अपनाकर आपको तुरंत राहत तो जरूर मिल सकती है लेकिन सिन्थेटिक दवाओं के दूरगामी परिणाम काफी घातक होते हैं। हजारों सालों से हिन्दुस्तान के ग्रामीण लोग सूजन और दर्द निवारण के लिए देसी नुस्खों को आजमाते आएं हैं। पिछले लगभग दो दशकों के अपने स्वयं के अनुभव से कह सकता हूं कि इस लेख में बताए कई नुस्ख़े बेहद कारगर भी हैं और इनपर बाकायदा वैज्ञानिक शोध भी जारी है, चलिए जानते हैं किस तरह से आदिवासी हर्बल नुस्खों को अपनाकर आप सब सूजन और जोड़ों का दर्द जैसी समस्याओं से निजात पा सकते हैं। पातालकोट के आदिवासी मानते हैं कि लगभग एक सौ मिली तरबूज के रस में लगभग दो ग्राम कालीमिर्च के चूर्ण को मिलाकर दिन में दो-तीन बार सेवन कराया जाए तो शरीर की सूजन दूर हो जाती है। दालचीनी की छाल का चूर्ण तैयार कर एक कप पानी के साथ लगभग दो ग्राम चूर्ण मिलाकर प्रतिदिन सुबह भोजन के बाद लिया जाए तो जोड़ दर्द में तेजी से आराम मिलता है, वैसे डांगी आदिवासियों के अनुसार यही फार्मुले का सेवन डायबिटीज के लिए भी कारगर है। आदिवासियों के अनुसार अपने खान-पान में अक्सर दालचीनी का उपयोग सेहत के लिए कई मायनों में बेहतर होता है। शीशम की सूखी पत्तियों का चूर्ण बनाकर पानी में घोलकर लेप तैयार किया जाए और सूजन वाले अंग पर लगाया जाए तो सूजन कम करने में मदद करता है। शीशम की पत्तियों में पाए जाने वाले महत्वपूर्ण रसायनों में काफी एंटीइन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं। कई इलाकों में जानकार लोग कुंदरू के फल, अजवायन, अदरख और कपूर की समान मात्रा लेकर कूट लेते हैं और एक सूती कपड़े में लपेटकर इसे हल्का-हल्का गर्म करके सूजन वाले भागों पर धीमे धीमे सेंकाई करते हैं, ऐसा करने से मोच या सूजन मिट जाती है। घुटनों में सूजन होने पर समुद्रशोख नामक बेल की जड़ों के चूर्ण चावल की मांड में मिलाकर घुटनों पर लेपित किया जाए और दो घंटे बाद इसे धो लिया जाए, आराम मिलने लगता है। नदी, नालों और पोखरों के किनारे पाए जाने वाली महत्वपूर्ण वनस्पति नागरमोथा में प्रोटीन, स्टार्च के अलावा कई कार्बोहाड्रेट्स पाए जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि संपूर्ण पौधे का लेप शरीर पर लगाने से सूजन मिट जाती है। इसके कंद को कुचलकर सूजन वाले हिस्सों पर लगाने पर आराम मिलता है। पातालकोट के आदिवासियों का मानना है कि गंवारफल्लियों के बीजों को रात भर पानी में डुबोकर रखा जाए और अगले दिन उसे कुचलकर सूजन, जोड़ दर्द और जलन देने वाले शारीरिक भागों पर लगाने से अतिशीघ्र आराम मिलता है। कटहल के फल के छिल्कों से निकलने वाला दूध यदि गांठनुमा सूजन, घाव और कटे-फटे अंगों पर लगाया जाए तो आराम मिलता है। अक्सर पहाड़ों पर चढ़ते उतरते हाथ पैरों में अक्सर खरोंचे आने पर पहाड़ी लोग, कटहल के फलों को चीरा लगाकर दूध निकालते हैं और घावों पर लगाते हैं। दक्षिण मध्यप्रदेश के महाकौशल क्षेत्र में अरबी के पत्तों में बेसन लगाकर भजिए तैयार किए जाते हैं, माना जाता है कि ये भजिए वात रोग और जोड़ दर्द से परेशान रोगियों के लिए उत्तम होते हैं, आर्थराइटिस रोग से त्रस्त व्यक्ति को इन भजियों का सेवन जरूर करना चाहिए। यह बहुत कम लोग जानते हैं कि आक या अकौना के पौधे से निकलने वाले दूध का उपयोग शारीरिक दर्द भगाने में किया जाता हैं, पातालकोट के आदिवासियों की मानें तो इसका दूध किसी भी प्रकार के दर्द को खींच लेता हैं। इसके पत्तियों को कुचलकर जोड़ों पर लेपित किया जाए तो भी यह दर्द को खींच लेती है। आदिवासियों के अनुसार इसकी पत्तियों के रस जोड़ों पर मालिश करने से जो दर्द में आराम मिलता है। आक की पत्तियों को सतहों पर सरसों के तेल को लगाकर आँच पर सेंका जाए और दर्द वाले हिस्सों पर इससे हल्की सेंकाई की जाए तो दर्द में आराम मिलता है। डाँग- गुजरात के आदिवासी हर्बल जानकार अमरबेल के बीजों और पूरे पौधे को कुचलकर आर्थराइटिस के रोगी को दर्द वाले हिस्सों पर पट्टी लगाकर बांध देते हैं। इनके अनुसार यह दर्द निवारक की तरह कार्य करता है। राई के बीजों का लेप और कपूर का मिश्रण जोड़ों पर मालिश करने से आमवात और जोड़ के दर्द में फायदा होता है। पातालकोट के कई हिस्सों में आदिवासी इस मिश्रण में थोड़ा से केरोसिन तेल डालकर मालिश करते हैं। कहा जाता है कि यह फार्मूला दर्द को खींच निकालता है। कुछ आदिवासी फराशबीन की फल्लियों के रस के सेवन की सलाह गठिया का रोग दूर करने के लिए देते हैं। फल्लियों के बीजों का चूर्ण तैयार कर तेल के साथ मिलाकर जोड़ दर्द वाले हिस्सों पर लगाया जाए तो दर्द में तेजी से राहत मिलती है। पारिजात की छः-सात ताजी पत्तियों को अदरक के रस साथ कुचल लिया जाए और शहद मिलाकर सेवन किया जाए तो बदन दर्द और जोड़ दर्द में काफी आराम मिलता है। माना जाता है कि इस फार्मुले का सेवन सायटिका जैसे रोग के लिए भी महत्वपूर्ण होता है। करीब आठ-दस लहसुन की कलियों को तेल या घी के साथ फ्राई कर लिया जाए और खाने से पहले चबाया जाए तो जोड़ दर्द में तेजी से आराम मिलता है, ऐसा प्रतिदिन किया जाना चाहिए। डाँग- जिला गुजरात के हर्बल जानकारों का मानना है कि लहसुन की कलियों को सरसों के तेल के साथ कुचलकर गर्म किया जाए और कपूर मिलाकर जोड़ों या दर्द वाले हिस्सों पर लगाकर मालिश की जाए तो भी तेजी से आराम मिलता है। लहसुन के एंटीइन्फ्लेमेटरी गुणों की वकालत आधुनिक विज्ञान भी खूब करता है।
Acer ने भारत में 5 नए लैपटॉप Acer Swift 5, Acer Swift 3 (SF314-59), Swift 3 (SF313-53), Acer Swift 3X और Acer Aspire 5 लॉन्च किए हैं. इन पांचों लैपटॉप में 11th जेनरेशन इंटेल कोर प्रोसेसर दिया गया है. साथ ही इन लैपटॉप में बेहतर ग्राफिक्स कार्ड का इस्तेमाल किया गया है. इन सभी लैपटॉप की बिक्री नवंबर के पहले सप्ताह में शुरू होगी. इन्हें एसर ई-स्टोर, फ्लिपकार्ट, ऐमजॉन, एसर एक्सक्लूसिव स्टोर्स और रिलायंस डिजिटल से खरीदा जा सकेगा. इन लैपटॉप में 6 जीबी से लेकर 8 जीबी तक के रैम लगे हैं और इनकी स्टोरेज क्षमता 256GB से लेकर 2TB तक की है. Acer Swift 5 (SF514-55T)- इस लैपटॉप की कीमत 79,999 रुपये है. इसमें 14 इंच की स्क्रीन दी गई है. सेफ्टी के लिए स्क्रीन पर कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास का प्रोटेक्शन दिया गया है. कंपनी का दावा है कि एक बार फुल चार्ज होने पर इसकी बैटरी 17 घंटे तक चल सकती है. इस लैपटॉप का वजन 1 किलो है. Acer Swift 3x- Acer Swift 3x की कीमत 79,999 रुपये है. इसमें 14 इंच फुल HD IPS स्क्रीन दी गई है. इसमें मल्टीपल कूलिंग मोड दिए गए हैं. कंपनी का दावा है कि इस लैपटॉप की बैटरी फुल चार्ज होने पर 17. 5 घंटे तक चलेगी. मात्र 30 मिनट चार्ज करने के बाद इसकी बैटरी 4 घंटे तक का बैकअप देने में सक्षम है. . सनी देओल की हीरोइन को जब ज्यादा पढ़ी-लिखी होना पड़ा भारी, एक्ट्रेस ने खूब सुने थे ताने, बोलीं- इंडस्ट्री में. .
Acer ने भारत में पाँच नए लैपटॉप Acer Swift पाँच, Acer Swift तीन , Swift तीन , Acer Swift तीनX और Acer Aspire पाँच लॉन्च किए हैं. इन पांचों लैपटॉप में ग्यारहth जेनरेशन इंटेल कोर प्रोसेसर दिया गया है. साथ ही इन लैपटॉप में बेहतर ग्राफिक्स कार्ड का इस्तेमाल किया गया है. इन सभी लैपटॉप की बिक्री नवंबर के पहले सप्ताह में शुरू होगी. इन्हें एसर ई-स्टोर, फ्लिपकार्ट, ऐमजॉन, एसर एक्सक्लूसिव स्टोर्स और रिलायंस डिजिटल से खरीदा जा सकेगा. इन लैपटॉप में छः जीबी से लेकर आठ जीबी तक के रैम लगे हैं और इनकी स्टोरेज क्षमता दो सौ छप्पनGB से लेकर दोTB तक की है. Acer Swift पाँच - इस लैपटॉप की कीमत उन्यासी,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये है. इसमें चौदह इंच की स्क्रीन दी गई है. सेफ्टी के लिए स्क्रीन पर कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास का प्रोटेक्शन दिया गया है. कंपनी का दावा है कि एक बार फुल चार्ज होने पर इसकी बैटरी सत्रह घंटाटे तक चल सकती है. इस लैपटॉप का वजन एक किलो है. Acer Swift तीनx- Acer Swift तीनx की कीमत उन्यासी,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये है. इसमें चौदह इंच फुल HD IPS स्क्रीन दी गई है. इसमें मल्टीपल कूलिंग मोड दिए गए हैं. कंपनी का दावा है कि इस लैपटॉप की बैटरी फुल चार्ज होने पर सत्रह. पाँच घंटाटे तक चलेगी. मात्र तीस मिनट चार्ज करने के बाद इसकी बैटरी चार घंटाटे तक का बैकअप देने में सक्षम है. . सनी देओल की हीरोइन को जब ज्यादा पढ़ी-लिखी होना पड़ा भारी, एक्ट्रेस ने खूब सुने थे ताने, बोलीं- इंडस्ट्री में. .
नरवर। जिले के नरवर थाना क्षेत्र के मगरौनी चौकी अंतर्गत ग्राम मगरौनी में ही पुलिया के पास नहर में नहा रही एक किशोरी के साथ गांब के ही आरोपी ने उस समय छेड़छाड़ कर दी। जब किशोरी नहर में नहा रही थी। इस बात की शिकायत पुलिस चौकी मगरोनी में की जहॉ पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। जानकारी के अनुसार रानी पुत्री दामोदर आदिवासी परिवर्तित नाम उम्र 16 वर्ष निवासी मगरौनी बीते रोज अपने घर से नहर पर नहाने गई हुई थी। नहाने के लिए किशोरी जैसे ही युवती ने कपड़े उतारे तभी गांव का ही आरोपी भोला पुत्र मुकेश कुचमुदिया आ गया और किशोरी को पकड़ कर पानी में ले गया और छेड़छाड़ कर दी। किशोरी चिल्लाई तो पास में से एक युवक आ गया। जिसे देखकर आरोपी मौके से भाग गया। किशोरी रोती हुई अपने घर आई और पूरा घटनाक्रम अपनी मां को बताया। मां किशोरी को लेकर मगरौनी चौकी पहुॅचकर मामला दर्ज कराया। जहॉ पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 354 ताहि 7/8 पीसीएसओ एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
नरवर। जिले के नरवर थाना क्षेत्र के मगरौनी चौकी अंतर्गत ग्राम मगरौनी में ही पुलिया के पास नहर में नहा रही एक किशोरी के साथ गांब के ही आरोपी ने उस समय छेड़छाड़ कर दी। जब किशोरी नहर में नहा रही थी। इस बात की शिकायत पुलिस चौकी मगरोनी में की जहॉ पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। जानकारी के अनुसार रानी पुत्री दामोदर आदिवासी परिवर्तित नाम उम्र सोलह वर्ष निवासी मगरौनी बीते रोज अपने घर से नहर पर नहाने गई हुई थी। नहाने के लिए किशोरी जैसे ही युवती ने कपड़े उतारे तभी गांव का ही आरोपी भोला पुत्र मुकेश कुचमुदिया आ गया और किशोरी को पकड़ कर पानी में ले गया और छेड़छाड़ कर दी। किशोरी चिल्लाई तो पास में से एक युवक आ गया। जिसे देखकर आरोपी मौके से भाग गया। किशोरी रोती हुई अपने घर आई और पूरा घटनाक्रम अपनी मां को बताया। मां किशोरी को लेकर मगरौनी चौकी पहुॅचकर मामला दर्ज कराया। जहॉ पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा तीन सौ चौवन ताहि सात/आठ पीसीएसओ एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
भारतीय फिल्म समीक्षक और ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श ने फिल्म की तीन दिनों की कमाई को साझा करते हुए लिखा कि फिल्म लालसिंह चड्ढा ने कमाई के सिलसिले में तीसरे दिन मामूली वृद्धि देखी है। मुंबईः हॉलीवुड मूवी 'फॉरेस्ट गंप' की रीमेक आमिर खान की फिल्म 'लाल सिंह चड्ढा' बॉयकॉट का सामना कर रही है। फिल्म दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में अब तक नाकाम साबित हो रही है। फिल्म को रिलीज हुए आज का चौथा दिन है। यह फिल्म गुरुवार 11 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। जहां तक कमाई की बात करें तो तीसरे दिन शनिवार को फिल्म की कमाई में मामूली बढ़त देखी गई। लेकिन कमाई दहाई अंक से अछूती रही। भारतीय फिल्म समीक्षक और ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श ने फिल्म की तीन दिनों की कमाई को साझा किया है। उन्होंने रविवार को ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने लिखा कि फिल्म लालसिंह चड्ढा ने कमाई के सिलसिले में तीसरे दिन मामूली वृद्धि देखी है। ऐसा सप्ताहांत के कारण हुआ है। लेकिन यह पर्याप्त नहीं है . . . स्थिति को उबारने के लिए फिल्म को दोहरे अंकों में स्कोर करना चाहिए था। 3-दिन का कलेक्शन निशान से नीचे है। फिल्म ने गुरुवार को 11. 70 करोड़ , शुक्रवार 7. 26 करोड़ और शनिवार 9 करोड़ रुपये कमाए। ऐसे में कुल तीन दिनों की 27. 96 करोड़ रुपये रही। इससे एक दिन पहले तरण आदर्श ने फिल्म के बॉयकॉट का असर बताते हुए कहा था कि जो लोग कहते हैं बॉयकॉट से फिल्म के बिजनेस में प्रभाव नहीं पड़ता, उन्हें इसको लेकर इनकार करना बंद करें। सच यह है कि, इन बॉयकॉट कॉल्स (बहिष्कार आवह्नों) ने फिल्मों की कमाई में एक सेंध लगाई है और लाल सिंह चड्ढा के बॉक्स ऑफिस नंबरों को विशेष रूप से प्रभावित किया है। इसका सामना करें! पहले ही बॉयकॉट का सामना कर रही इस फिल्म के ऊपर इंडियन आर्मी और हिंदुओं की भावनाएं आहत करने का आरोप लगा है। आपको बता दें कि अभिनेता आमिर खान की इस फिल्म को अद्वैत चंदन ने डायरेक्ट किया है। फिल्म में आमिर खान के अलावा करीना कपूर खान, नागा चैतन्य, मोना सिंह और मानव विजो ने अभिनय किया है।
भारतीय फिल्म समीक्षक और ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श ने फिल्म की तीन दिनों की कमाई को साझा करते हुए लिखा कि फिल्म लालसिंह चड्ढा ने कमाई के सिलसिले में तीसरे दिन मामूली वृद्धि देखी है। मुंबईः हॉलीवुड मूवी 'फॉरेस्ट गंप' की रीमेक आमिर खान की फिल्म 'लाल सिंह चड्ढा' बॉयकॉट का सामना कर रही है। फिल्म दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में अब तक नाकाम साबित हो रही है। फिल्म को रिलीज हुए आज का चौथा दिन है। यह फिल्म गुरुवार ग्यारह अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। जहां तक कमाई की बात करें तो तीसरे दिन शनिवार को फिल्म की कमाई में मामूली बढ़त देखी गई। लेकिन कमाई दहाई अंक से अछूती रही। भारतीय फिल्म समीक्षक और ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श ने फिल्म की तीन दिनों की कमाई को साझा किया है। उन्होंने रविवार को ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने लिखा कि फिल्म लालसिंह चड्ढा ने कमाई के सिलसिले में तीसरे दिन मामूली वृद्धि देखी है। ऐसा सप्ताहांत के कारण हुआ है। लेकिन यह पर्याप्त नहीं है . . . स्थिति को उबारने के लिए फिल्म को दोहरे अंकों में स्कोर करना चाहिए था। तीन-दिन का कलेक्शन निशान से नीचे है। फिल्म ने गुरुवार को ग्यारह. सत्तर करोड़ , शुक्रवार सात. छब्बीस करोड़ और शनिवार नौ करोड़ रुपये कमाए। ऐसे में कुल तीन दिनों की सत्ताईस. छियानवे करोड़ रुपये रही। इससे एक दिन पहले तरण आदर्श ने फिल्म के बॉयकॉट का असर बताते हुए कहा था कि जो लोग कहते हैं बॉयकॉट से फिल्म के बिजनेस में प्रभाव नहीं पड़ता, उन्हें इसको लेकर इनकार करना बंद करें। सच यह है कि, इन बॉयकॉट कॉल्स ने फिल्मों की कमाई में एक सेंध लगाई है और लाल सिंह चड्ढा के बॉक्स ऑफिस नंबरों को विशेष रूप से प्रभावित किया है। इसका सामना करें! पहले ही बॉयकॉट का सामना कर रही इस फिल्म के ऊपर इंडियन आर्मी और हिंदुओं की भावनाएं आहत करने का आरोप लगा है। आपको बता दें कि अभिनेता आमिर खान की इस फिल्म को अद्वैत चंदन ने डायरेक्ट किया है। फिल्म में आमिर खान के अलावा करीना कपूर खान, नागा चैतन्य, मोना सिंह और मानव विजो ने अभिनय किया है।
'सद्दाम टीवी'. जी हां, यही नाम है टीवी चैनल का। ईद के दिन सैटेलाइट चैनल 'सद्दाम टीवी' इराक के घर-घर में अवतरित हुआ। किसी को नहीं पता इसे किसने लांच किया और कहां से इसका प्रसारण हो रहा है। सद्दाम को फांसी पर लटकाने की तीसरी बरसी पर ईद के दिन लांच हुए इस चैनल पर सद्दाम की तस्वीरों और आवाज का प्रसारण किया जा रहा है। सीरिया में रहने वाले एक अलजीरियाई व्यक्ति, जो अपना नाम मोहम्मद जारबोआ बताता है, ने दावा किया कि वह इस चैनल का चेयरमैन है और इसे इराकियों व अरब के लोगों की एकता व स्व-शासन के लिए लांच किया गया है। जारबोआ ने दावा किया कि यह चैनल यूरोप के किसी जगह से संचालित किया जा रहा है। उसने चैनल के कर्मियों की सुरक्षा व अन्य आने वाली दिक्कतों की वजह से ज्यादा विवरण देने से इनकार कर दिया। 'सद्दाम टीवी' को देखकर इराकियों में मिश्रित प्रतिक्रिया है। कुछ लोग इस चैनल के इरादे पर सवाल खड़ा करते हुए इसे ठीक नहीं बताते तो कइयों का कहना है कि वे अपने प्रिय नेता व उनके परिवार के लोगों की तस्वीरें टीवी पर देखकर प्रसन्न हैं। चैनल पर लगातार राष्ट्रवादी गीत और सद्दाम के भाषण प्रसारित किए जा रहे हैं। इराकी सरकार इस चैनल को लेकर पसोपेश में है। सरकार ने 'सद्दाम टीवी' के प्रसारण को रोकने के सवाल पर कुछ भी प्रतिक्रिया देने से इनकार किया है। कुछ लोगों का कहना है कि इराक से खत्म हो चुकी बाथ पार्टी को लौटाने की यह कोशिश है। संभव है कि इस चैनल के पीछे बाथ पार्टी के बचे-खुचे लोगों का हाथ हो जो सीरिया और जार्डन समेत आसपास के कई देशों में छिप गए हैं। 'सद्दाम टीवी' का खुद को चेयरमैन बताने वाले शख्स मोहम्मद जारबोआ ने इस बात से इनकार किया कि इसमें बाथ पार्टी के किसी आदमी का हाथ है या बाथ पार्टी के पैसे से यह संचालित हो रहा है। जोर्डन में रहने वाली सद्दाम की बेटी राघाद सद्दाम ने भी इस चैनल से किसी तरह का संपर्क होने से इनकार किया है। जो भी हो, सद्दाम टीवी के अवतार से इराक व आसपास के देशों में सनसनी मची हुई है।
'सद्दाम टीवी'. जी हां, यही नाम है टीवी चैनल का। ईद के दिन सैटेलाइट चैनल 'सद्दाम टीवी' इराक के घर-घर में अवतरित हुआ। किसी को नहीं पता इसे किसने लांच किया और कहां से इसका प्रसारण हो रहा है। सद्दाम को फांसी पर लटकाने की तीसरी बरसी पर ईद के दिन लांच हुए इस चैनल पर सद्दाम की तस्वीरों और आवाज का प्रसारण किया जा रहा है। सीरिया में रहने वाले एक अलजीरियाई व्यक्ति, जो अपना नाम मोहम्मद जारबोआ बताता है, ने दावा किया कि वह इस चैनल का चेयरमैन है और इसे इराकियों व अरब के लोगों की एकता व स्व-शासन के लिए लांच किया गया है। जारबोआ ने दावा किया कि यह चैनल यूरोप के किसी जगह से संचालित किया जा रहा है। उसने चैनल के कर्मियों की सुरक्षा व अन्य आने वाली दिक्कतों की वजह से ज्यादा विवरण देने से इनकार कर दिया। 'सद्दाम टीवी' को देखकर इराकियों में मिश्रित प्रतिक्रिया है। कुछ लोग इस चैनल के इरादे पर सवाल खड़ा करते हुए इसे ठीक नहीं बताते तो कइयों का कहना है कि वे अपने प्रिय नेता व उनके परिवार के लोगों की तस्वीरें टीवी पर देखकर प्रसन्न हैं। चैनल पर लगातार राष्ट्रवादी गीत और सद्दाम के भाषण प्रसारित किए जा रहे हैं। इराकी सरकार इस चैनल को लेकर पसोपेश में है। सरकार ने 'सद्दाम टीवी' के प्रसारण को रोकने के सवाल पर कुछ भी प्रतिक्रिया देने से इनकार किया है। कुछ लोगों का कहना है कि इराक से खत्म हो चुकी बाथ पार्टी को लौटाने की यह कोशिश है। संभव है कि इस चैनल के पीछे बाथ पार्टी के बचे-खुचे लोगों का हाथ हो जो सीरिया और जार्डन समेत आसपास के कई देशों में छिप गए हैं। 'सद्दाम टीवी' का खुद को चेयरमैन बताने वाले शख्स मोहम्मद जारबोआ ने इस बात से इनकार किया कि इसमें बाथ पार्टी के किसी आदमी का हाथ है या बाथ पार्टी के पैसे से यह संचालित हो रहा है। जोर्डन में रहने वाली सद्दाम की बेटी राघाद सद्दाम ने भी इस चैनल से किसी तरह का संपर्क होने से इनकार किया है। जो भी हो, सद्दाम टीवी के अवतार से इराक व आसपास के देशों में सनसनी मची हुई है।
गलवान हिंसा को लेकर अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट ओ ब्रायन ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भारत के प्रति चीन का बेहद आक्रामक व्यवहार सीपीसी की सोच को दर्शाता है। वॉशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट ओ ब्रायन ने लद्दाख झड़प को लेकर चीन पर निशाना साधा है। ब्रायन ने कहा कि भारत के खिलाफ चीन का 'बेहद आक्रामक' व्यवहार, दक्षिण चीन सागर और हांगकांग में उसके कदम इस बात की जानकारी देते हैं कि सत्तारूढ़ 'कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना' (सीपीसी) इन दिनों किस प्रकार से सोच रही है। अमेरिकी एनएसए ने पूर्वी लद्दाख में 15 जून को भारत और चीन के बीच हुई झड़प संबंधी एक प्रश्न के उत्तर में यह बात कही। इस झड़प में 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे। उन्होंने भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और अमेरिका का बहुत अच्छा दोस्त है। ओ'ब्रायन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र 'मोदी और (अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड) ट्रम्प के बीच बेहतरीन संबंध हैं। '
गलवान हिंसा को लेकर अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट ओ ब्रायन ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भारत के प्रति चीन का बेहद आक्रामक व्यवहार सीपीसी की सोच को दर्शाता है। वॉशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट ओ ब्रायन ने लद्दाख झड़प को लेकर चीन पर निशाना साधा है। ब्रायन ने कहा कि भारत के खिलाफ चीन का 'बेहद आक्रामक' व्यवहार, दक्षिण चीन सागर और हांगकांग में उसके कदम इस बात की जानकारी देते हैं कि सत्तारूढ़ 'कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना' इन दिनों किस प्रकार से सोच रही है। अमेरिकी एनएसए ने पूर्वी लद्दाख में पंद्रह जून को भारत और चीन के बीच हुई झड़प संबंधी एक प्रश्न के उत्तर में यह बात कही। इस झड़प में बीस भारतीय जवान शहीद हो गए थे। उन्होंने भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और अमेरिका का बहुत अच्छा दोस्त है। ओ'ब्रायन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र 'मोदी और ट्रम्प के बीच बेहतरीन संबंध हैं। '
सरहुल और रामनवमी पर जिले में लॉ एंड आर्डर को बनाए रखने के लिए उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक की संयुक्त अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में डीसी मित्तल ने कहा कि त्योहारों के अवसर पर निकलने वाले जुलूस के दौरान डीजे और विवादास्पद गाने बजाने पर बैन लगाया गया है। संवाद सहयोगी, चाईबासाः सरहुल और रामनवमी के अवसर पर जिले में लॉ एंड आर्डर को बनाए रखने के लिए उपायुक्त अनन्य मित्तल और पुलिस अधीक्षक आशुतोष शेखर की संयुक्त अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में डीसी मित्तल ने कहा कि त्योहारों के अवसर पर निकलने वाले जुलूस के दौरान डीजे और विवादास्पद, भड़काऊ गाने बजाने पर पूरी तरह से बैन लगाया गया है। डीसी ने कहा कि ऐसे करते हुए कोई भी पाये जाता है तो उनके खिलाफ निश्चित ही कड़ी कार्रवाई की जायेगी। इसके लिए संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश भी जारी कर दी गई है। तीनों अनुमंडल पदाधिकारीयों को सभी अखाड़ा समितियों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए जुलूस निकालने के मार्गों की जांच करने, सुरक्षा दृष्टिकोण से सीसीटीवी लगाने और वीडियोग्राफी करने का निर्देश दिया गया है। अखाड़ा के कार्यकर्ताओं को पहचान पत्र के साथ उनकी उपस्थिति और चिन्हित स्थानों पर दंडाधिकारियों एवं पुलिस बल के लिए टेंट और वॉच टॉवर बनाने का निर्देश दिये गये हैं। शहर की साफ-सफाई और जुलूस मार्ग अंतर्गत रोड मरम्मतीकरण को लेकर भी निर्देशित किया गया है, ताकि त्योहारों के अवसर पर होने वाले जुलूस के परिचालन में कोई व्यवधान उत्पन्न ना हो। जुलूस परिचालन के दौरान शहर में विद्युत आपूर्ति बंद रहेगी लेकिन कुछ विशेष क्षेत्रों में जनरेटर या अन्य माध्यमों से विद्युत आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए नगरपरिषद चाईबासा के कार्यपालक पदाधिकारी को निर्देश दिया गया है। प्रमुख स्थलों पर 108 एंबुलेंस को प्रतिनियुक्त करने के लिए जिले के सिविल सर्जन को निर्देशित किया गया है। एसपी शेखर ने कहा कि त्योहार में सोशल मीडिया पर पैनी नजर रखने का निर्देश दिया गया है। सोशल मीडिया या अन्य माध्यम से भ्रामक व सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने से संबंधित सूचना फैलाने वाले व्यक्ति पर विधि सम्मत कार्यवाही सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
सरहुल और रामनवमी पर जिले में लॉ एंड आर्डर को बनाए रखने के लिए उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक की संयुक्त अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में डीसी मित्तल ने कहा कि त्योहारों के अवसर पर निकलने वाले जुलूस के दौरान डीजे और विवादास्पद गाने बजाने पर बैन लगाया गया है। संवाद सहयोगी, चाईबासाः सरहुल और रामनवमी के अवसर पर जिले में लॉ एंड आर्डर को बनाए रखने के लिए उपायुक्त अनन्य मित्तल और पुलिस अधीक्षक आशुतोष शेखर की संयुक्त अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में डीसी मित्तल ने कहा कि त्योहारों के अवसर पर निकलने वाले जुलूस के दौरान डीजे और विवादास्पद, भड़काऊ गाने बजाने पर पूरी तरह से बैन लगाया गया है। डीसी ने कहा कि ऐसे करते हुए कोई भी पाये जाता है तो उनके खिलाफ निश्चित ही कड़ी कार्रवाई की जायेगी। इसके लिए संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश भी जारी कर दी गई है। तीनों अनुमंडल पदाधिकारीयों को सभी अखाड़ा समितियों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए जुलूस निकालने के मार्गों की जांच करने, सुरक्षा दृष्टिकोण से सीसीटीवी लगाने और वीडियोग्राफी करने का निर्देश दिया गया है। अखाड़ा के कार्यकर्ताओं को पहचान पत्र के साथ उनकी उपस्थिति और चिन्हित स्थानों पर दंडाधिकारियों एवं पुलिस बल के लिए टेंट और वॉच टॉवर बनाने का निर्देश दिये गये हैं। शहर की साफ-सफाई और जुलूस मार्ग अंतर्गत रोड मरम्मतीकरण को लेकर भी निर्देशित किया गया है, ताकि त्योहारों के अवसर पर होने वाले जुलूस के परिचालन में कोई व्यवधान उत्पन्न ना हो। जुलूस परिचालन के दौरान शहर में विद्युत आपूर्ति बंद रहेगी लेकिन कुछ विशेष क्षेत्रों में जनरेटर या अन्य माध्यमों से विद्युत आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए नगरपरिषद चाईबासा के कार्यपालक पदाधिकारी को निर्देश दिया गया है। प्रमुख स्थलों पर एक सौ आठ एंबुलेंस को प्रतिनियुक्त करने के लिए जिले के सिविल सर्जन को निर्देशित किया गया है। एसपी शेखर ने कहा कि त्योहार में सोशल मीडिया पर पैनी नजर रखने का निर्देश दिया गया है। सोशल मीडिया या अन्य माध्यम से भ्रामक व सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने से संबंधित सूचना फैलाने वाले व्यक्ति पर विधि सम्मत कार्यवाही सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
ऊंचाहार के गदागंज कोतवाली के तिवारीपुर लल्ली की चक्की स्थित राम जानकी मंदिर सूरदास की कुटी के पुजारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों की सूचना पर पहुंची कोतवाली पुलिस घटना की जांच पड़ताल में जुटी है। नौवनहार मजरे सुदामा पुर गांव निवासी बाबा गजानन लल्ली की चक्की गांव स्थित राम जानकी मंदिर बाबा सूर्य दास की कुटी पर गत 11 वर्षों से रहकर मंदिर की देखरेख के साथ-साथ पूजा-पाठ किया करते थे। गत गुरुवार की शाम बाबा का भतीजा सुमित कुमार घर से बाबा के लिए भोजन लेकर मंदिर गया था। बाबा को भोजन कराने के बाद वापस लौट आया। गुरुवार की सुबह अपने पिता शिव बहादुर के साथ जब वह फिर बाबा के लिए भोजन लेकर गया, तो मंदिर आवासीय परिसर में बने कमरे का अंदर से बंद दरवाजा आवाज देने के बावजूद भी नहीं खुला। इसके बाद परेशान पिता पुत्र ने पहले कोतवाली फिर ग्रामीणों को सूचना दी। जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने पुजारी बाबा के कमरे के दरवाजे को तोड़कर शव को बाहर निकाला। बाबा के मौत की सूचना मिलते ही आसपास क्षेत्र के लोगों में सनसनी फैल गई। मंदिर में काफी भीड़ इकट्ठी हो गई। गदा गंज पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घटना की गहनता से जांच की। उपनिरीक्षक अरविंद कुमार मौर्य ने बताया कि लोगों से पूछताछ में पता चला है कि बाबा काफी दिनों से दमा की बीमारी से ग्रसित थे। जिसके चलते उनकी मौत हो गई है। परिजनों के आग्रह पर पुजारी बाबा के शव को अंतिम संस्कार के लिए उनके परिजनों को सौंप दिया गया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
ऊंचाहार के गदागंज कोतवाली के तिवारीपुर लल्ली की चक्की स्थित राम जानकी मंदिर सूरदास की कुटी के पुजारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों की सूचना पर पहुंची कोतवाली पुलिस घटना की जांच पड़ताल में जुटी है। नौवनहार मजरे सुदामा पुर गांव निवासी बाबा गजानन लल्ली की चक्की गांव स्थित राम जानकी मंदिर बाबा सूर्य दास की कुटी पर गत ग्यारह वर्षों से रहकर मंदिर की देखरेख के साथ-साथ पूजा-पाठ किया करते थे। गत गुरुवार की शाम बाबा का भतीजा सुमित कुमार घर से बाबा के लिए भोजन लेकर मंदिर गया था। बाबा को भोजन कराने के बाद वापस लौट आया। गुरुवार की सुबह अपने पिता शिव बहादुर के साथ जब वह फिर बाबा के लिए भोजन लेकर गया, तो मंदिर आवासीय परिसर में बने कमरे का अंदर से बंद दरवाजा आवाज देने के बावजूद भी नहीं खुला। इसके बाद परेशान पिता पुत्र ने पहले कोतवाली फिर ग्रामीणों को सूचना दी। जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने पुजारी बाबा के कमरे के दरवाजे को तोड़कर शव को बाहर निकाला। बाबा के मौत की सूचना मिलते ही आसपास क्षेत्र के लोगों में सनसनी फैल गई। मंदिर में काफी भीड़ इकट्ठी हो गई। गदा गंज पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घटना की गहनता से जांच की। उपनिरीक्षक अरविंद कुमार मौर्य ने बताया कि लोगों से पूछताछ में पता चला है कि बाबा काफी दिनों से दमा की बीमारी से ग्रसित थे। जिसके चलते उनकी मौत हो गई है। परिजनों के आग्रह पर पुजारी बाबा के शव को अंतिम संस्कार के लिए उनके परिजनों को सौंप दिया गया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
डॉ. सूर्य प्रताप सिंह के खिलाफ उन्नाव जनपद में एफआईआर दर्ज की गई है। उन पर ट्वीट के माध्यम से जनमानस को भड़काने के प्रयास का आरोप लगाया गया है। उन्नाव सदर कोतवाली पुलिस ने उनके ट्वीट पर संज्ञान लेते हुए कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। लखनऊ/उन्नावः कोरोना महामारी के बीच नदी में बहती लाशों के मसले पर ट्वीट करना रिटायर्ड आईएएस अधिकारी डॉ. सूर्य प्रताप सिंह को महंगा पड़ गया है। डॉ. सूर्य प्रताप सिंह के खिलाफ उन्नाव जनपद में एफआईआर दर्ज की गई है। उन पर ट्वीट के माध्यम से जनमानस को भड़काने के प्रयास का आरोप लगाया गया है। उन्नाव सदर कोतवाली पुलिस ने उनके ट्वीट पर संज्ञान लेते हुए कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस का दावा है कि जो 100 शव गंगा में बहते हुए दिखाए जा रहे हैं, वह जनवरी 2014 का मामला है। सदर कोतवाली में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी पर महामारी एक्ट, आपदा प्रबंधन एक्ट एवं आईटी एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया है। एफआईआर के मुताबिक, रिटायर्ड आईएएस अधिकारी डॉ. सूर्य प्रताप सिंह ने एक ट्वीट में लिखा था, '67 शवों को योगी सरकार ने गंगा के तट पर जेसीबी से गड्ढा खोदकर दफन किया है। शवों का अंतिम संस्कार हिन्दू रीति रिवाज से न करना हिंदुओं के लिए कलंक जैसा है। यूपी का यह योगी मॉडल जीवित को इलाज नहीं, मृतक का अंतिम संस्कार नहीं। ' एफआईआर के अनुसार, रिटायर्ड अधिकारी ने एक फोटो भी शेयर किया, जिसमें शव गंगा में बहते हुए जा रहे हैं। जिसको लेकर पुलिस का दावा है कि जो 100 शव गंगा में बहते हुए दिखाए जा रहे हैं, वह जनवरी 2014 का मामला है। रिटायर्ड आईएएस अधिकारी डॉ. सूर्य प्रताप सिंह ने 12 मई को ट्विटर पर एक वीडियो भी शेयर किया था, जिसमें गंगा के किनारे कुछ दफन शवों को दिखाया गया। उन्होंने वीडियो शेयर करते हुए ट्वीट में लिखा था, 'उन्नाव में गंगा के किनारे दफनाई गयी लाशें हिन्दुओं की हैं जिनका अंतिम संस्कार ग़रीबी के कारण वैदिक रीति रिवाज से नहीं हो सका। मौत के असली आंकड़े भी इन हिंदू कब्रों में ही दफन हो गए। योगी सरकार की नाकामी के शिकार इन निर्दोषों की मौत में सकारात्मकता कहां से खोजें, मोदी जी? ' हालांकि सूर्य प्रताप सिंह ने एक अन्य ट्वीट में योगी सरकार पर तंज कसते हुए लिखा, 'सुना है 'तैरती लाशों' पर ट्वीट करने वालों पर मुकदमा करने की तैयारी है। शवों को नौंचने वाले चील, कौये, कुत्तों पर मुकदमा न हो जाये और कोरोना पर भी। '
डॉ. सूर्य प्रताप सिंह के खिलाफ उन्नाव जनपद में एफआईआर दर्ज की गई है। उन पर ट्वीट के माध्यम से जनमानस को भड़काने के प्रयास का आरोप लगाया गया है। उन्नाव सदर कोतवाली पुलिस ने उनके ट्वीट पर संज्ञान लेते हुए कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। लखनऊ/उन्नावः कोरोना महामारी के बीच नदी में बहती लाशों के मसले पर ट्वीट करना रिटायर्ड आईएएस अधिकारी डॉ. सूर्य प्रताप सिंह को महंगा पड़ गया है। डॉ. सूर्य प्रताप सिंह के खिलाफ उन्नाव जनपद में एफआईआर दर्ज की गई है। उन पर ट्वीट के माध्यम से जनमानस को भड़काने के प्रयास का आरोप लगाया गया है। उन्नाव सदर कोतवाली पुलिस ने उनके ट्वीट पर संज्ञान लेते हुए कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस का दावा है कि जो एक सौ शव गंगा में बहते हुए दिखाए जा रहे हैं, वह जनवरी दो हज़ार चौदह का मामला है। सदर कोतवाली में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी पर महामारी एक्ट, आपदा प्रबंधन एक्ट एवं आईटी एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया है। एफआईआर के मुताबिक, रिटायर्ड आईएएस अधिकारी डॉ. सूर्य प्रताप सिंह ने एक ट्वीट में लिखा था, 'सरसठ शवों को योगी सरकार ने गंगा के तट पर जेसीबी से गड्ढा खोदकर दफन किया है। शवों का अंतिम संस्कार हिन्दू रीति रिवाज से न करना हिंदुओं के लिए कलंक जैसा है। यूपी का यह योगी मॉडल जीवित को इलाज नहीं, मृतक का अंतिम संस्कार नहीं। ' एफआईआर के अनुसार, रिटायर्ड अधिकारी ने एक फोटो भी शेयर किया, जिसमें शव गंगा में बहते हुए जा रहे हैं। जिसको लेकर पुलिस का दावा है कि जो एक सौ शव गंगा में बहते हुए दिखाए जा रहे हैं, वह जनवरी दो हज़ार चौदह का मामला है। रिटायर्ड आईएएस अधिकारी डॉ. सूर्य प्रताप सिंह ने बारह मई को ट्विटर पर एक वीडियो भी शेयर किया था, जिसमें गंगा के किनारे कुछ दफन शवों को दिखाया गया। उन्होंने वीडियो शेयर करते हुए ट्वीट में लिखा था, 'उन्नाव में गंगा के किनारे दफनाई गयी लाशें हिन्दुओं की हैं जिनका अंतिम संस्कार ग़रीबी के कारण वैदिक रीति रिवाज से नहीं हो सका। मौत के असली आंकड़े भी इन हिंदू कब्रों में ही दफन हो गए। योगी सरकार की नाकामी के शिकार इन निर्दोषों की मौत में सकारात्मकता कहां से खोजें, मोदी जी? ' हालांकि सूर्य प्रताप सिंह ने एक अन्य ट्वीट में योगी सरकार पर तंज कसते हुए लिखा, 'सुना है 'तैरती लाशों' पर ट्वीट करने वालों पर मुकदमा करने की तैयारी है। शवों को नौंचने वाले चील, कौये, कुत्तों पर मुकदमा न हो जाये और कोरोना पर भी। '
सोनभद्र, उत्तर प्रदेश में सोनभद्र के दुद्धी क्षेत्र में एक गर्भवती महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म का मामला प्रकाश में आया है। पुलिस क्षेत्राधिकारी संजय वर्मा ने बताया की दुद्धी क्षेत्र की एक महिला रविवार को अपने एक वर्षीय बच्चें के इलाज के लिए दुद्धी गयी थी। इलाज कराकर वह अपने एक वर्षीय बच्चे के साथ पैदल अपने घर वापस जा रही थी। शाम साढे सात बजे पहले से घात लगाए कुछ युवकों ने महिला को रोक लिया और गोद मे लिए बच्चे को छीनकर जमीन पर फेंक कर उनके साथ सामूहिक बलात्कार किया। महिला किसी तरह से अपने घर पहुंची और घटना की जानकारी अपने पति को बताया। उन्होंने बताया कि परिजनों ने आज सुबह घटना को लेकर दुद्धी कोतवाली में तहरीर दी। दुद्धी पुलिस ने बताया की इस मामले मे तहरीर के आधार पर दो लोग के खिलाफ नामजद मुकदमा आईपीसी की धारा 376 डी व अन्य धारा में पंजीकृत किया गया है। दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया हैं जांच चल रही हैं।
सोनभद्र, उत्तर प्रदेश में सोनभद्र के दुद्धी क्षेत्र में एक गर्भवती महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म का मामला प्रकाश में आया है। पुलिस क्षेत्राधिकारी संजय वर्मा ने बताया की दुद्धी क्षेत्र की एक महिला रविवार को अपने एक वर्षीय बच्चें के इलाज के लिए दुद्धी गयी थी। इलाज कराकर वह अपने एक वर्षीय बच्चे के साथ पैदल अपने घर वापस जा रही थी। शाम साढे सात बजे पहले से घात लगाए कुछ युवकों ने महिला को रोक लिया और गोद मे लिए बच्चे को छीनकर जमीन पर फेंक कर उनके साथ सामूहिक बलात्कार किया। महिला किसी तरह से अपने घर पहुंची और घटना की जानकारी अपने पति को बताया। उन्होंने बताया कि परिजनों ने आज सुबह घटना को लेकर दुद्धी कोतवाली में तहरीर दी। दुद्धी पुलिस ने बताया की इस मामले मे तहरीर के आधार पर दो लोग के खिलाफ नामजद मुकदमा आईपीसी की धारा तीन सौ छिहत्तर डी व अन्य धारा में पंजीकृत किया गया है। दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया हैं जांच चल रही हैं।
चीन के करीबी रहे श्रीलंका के शीर्ष नेताओं की भारत दौरे को लेकर उसकी विदेश नीति में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। बीते कुछ साल तक श्रीलंका की विदेश नीति को देखा जाए तो तसवीर बिल्कुल साफ रही- हिंद महासागर के इस द्वीपीय देश का झुकाव चीन की तरफ रहा। लेकिन नवंबर 2019 से बदलाव दिखने लगा। नवंबर 2019 में श्रीलंका में हुए राष्ट्रपति चुनाव में गोटाबाया राजपक्षे ने जीत हासिल की। राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के तुरंत बाद गोटाबाया नवंबर में ही अपनी पहली विदेश यात्रा पर भारत पहुंचे। राष्ट्रपति के दौरे के चंद महीनों बाद अब प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे भारत की पांच दिन की यात्रा पर पहुंचे। किसी देश के दो शीर्ष नेताओं का इतनी जल्दी-जल्दी दौरे पर आना कोई आम बात नहीं मानी जाती। श्रीलंका की चीन से इतनी ज्यादा करीबी रही कि उसके मौजूदा प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे जब राष्ट्रपति थे, तो चीन से जुड़े ज्यादातर मामलों में उनका जवाब 'हां' ही होता था। इतना ही नहीं, मौजूदा राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के छोटे भाई गोटाबाया राजपक्षे को भी चीन का ही करीबी माना जाता है। 2005 से 2015 तक श्रीलंका के राष्ट्रपति रहे महिंदा राजपक्षे (अब प्रधानमंत्री) के बारे में कहा जाता था कि उनका चीन को लेकर काफी नर्म रुख रहा। ऐसे में सवाल उठता है कि श्रीलंका को अचानक भारत से नजदीकी बढ़ाने की कैसे सूझी? दरअसल, महिंदा की इस नरमी ने देश को कर्ज के बोझ तले इस कदर दबाया कि उनके बाद के नेता भी इससे उभर नहीं पाए। इंटरनेशनल मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक श्रीलंका पर 2017 में कुल विदेशी कर्ज 55 अरब डॉलर हो गया था, जिसमें 2016 तक चीन का छह अरब डॉलर का कर्ज भी शामिल था। श्रीलंका पर चीन का कर्ज इतना बढ़ा कि उसे अपना हंबनटोटा बंदरगाह चीन की मर्चेंट पोर्ट्स होल्डिंग्स लिमिटेड कंपनी को 99 साल के लिए लीज पर देना पड़ा। साल 2017 में इस बंदरगाह को 1. 12 अरब डॉलर में इस कंपनी को सौंपा गया। इसके साथ ही बंदरगाह के पास ही करीब 15 हजार एकड़ जमीन भी औद्योगिक जोन के लिए चीन को देनी पड़ी। 2015 में चीन ने श्रीलंका के हम्बनटोटा बंदरगाह पर एक एअरपोर्ट, एक कोल पावर प्लांट और सड़क बनाने के लिए करीब चार अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश किया, 2016 में राजपक्षे के जाते-जाते यह कर्ज इतना बढ़ा कि उसे अपना यह बंदरगाह लीज पर देना पड़ा। अब आलम यह है कि श्रीलंका चीन की कर्ज नीति में काफी बुरी तरह से फंस चुका है और अब वह इससे बाहर निकलना चाहता है। शायद इसी वजह से श्रीलंका ने अपना झुकाव भारत की तरफ करना शुरू कर दिया है। दूसरी ओर, भारत इस घटनाक्रम में अपने लिए अच्छा अवसर देख रहा है। श्रीलंका ने चीन को जो इलाका सौंपा है वो भारत से महज 100 मील की दूरी पर है। भारत के लिए इसे सामरिक रूप से खतरा बताया जा रहा है। भारत कभी नहीं चाहेगा कि चीन उसकी सीमा के नजदीक अपनी पैठ बनाए। श्रीलंका में नई सरकार बनने पर भारत ने भी दोस्ती का हाथ बढ़ाने में देरी नहीं की। गोटबाया राजपक्षे के राष्ट्रपति पद संभालते ही अगले दिन भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर श्रीलंका दौरे पर पहुंच गए थे। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल श्रीलंका के दौरे पर गए और वहां 50 मिलियन डॉलर की मदद देने का वादा कर आए थे।
चीन के करीबी रहे श्रीलंका के शीर्ष नेताओं की भारत दौरे को लेकर उसकी विदेश नीति में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। बीते कुछ साल तक श्रीलंका की विदेश नीति को देखा जाए तो तसवीर बिल्कुल साफ रही- हिंद महासागर के इस द्वीपीय देश का झुकाव चीन की तरफ रहा। लेकिन नवंबर दो हज़ार उन्नीस से बदलाव दिखने लगा। नवंबर दो हज़ार उन्नीस में श्रीलंका में हुए राष्ट्रपति चुनाव में गोटाबाया राजपक्षे ने जीत हासिल की। राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के तुरंत बाद गोटाबाया नवंबर में ही अपनी पहली विदेश यात्रा पर भारत पहुंचे। राष्ट्रपति के दौरे के चंद महीनों बाद अब प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे भारत की पांच दिन की यात्रा पर पहुंचे। किसी देश के दो शीर्ष नेताओं का इतनी जल्दी-जल्दी दौरे पर आना कोई आम बात नहीं मानी जाती। श्रीलंका की चीन से इतनी ज्यादा करीबी रही कि उसके मौजूदा प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे जब राष्ट्रपति थे, तो चीन से जुड़े ज्यादातर मामलों में उनका जवाब 'हां' ही होता था। इतना ही नहीं, मौजूदा राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के छोटे भाई गोटाबाया राजपक्षे को भी चीन का ही करीबी माना जाता है। दो हज़ार पाँच से दो हज़ार पंद्रह तक श्रीलंका के राष्ट्रपति रहे महिंदा राजपक्षे के बारे में कहा जाता था कि उनका चीन को लेकर काफी नर्म रुख रहा। ऐसे में सवाल उठता है कि श्रीलंका को अचानक भारत से नजदीकी बढ़ाने की कैसे सूझी? दरअसल, महिंदा की इस नरमी ने देश को कर्ज के बोझ तले इस कदर दबाया कि उनके बाद के नेता भी इससे उभर नहीं पाए। इंटरनेशनल मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक श्रीलंका पर दो हज़ार सत्रह में कुल विदेशी कर्ज पचपन अरब डॉलर हो गया था, जिसमें दो हज़ार सोलह तक चीन का छह अरब डॉलर का कर्ज भी शामिल था। श्रीलंका पर चीन का कर्ज इतना बढ़ा कि उसे अपना हंबनटोटा बंदरगाह चीन की मर्चेंट पोर्ट्स होल्डिंग्स लिमिटेड कंपनी को निन्यानवे साल के लिए लीज पर देना पड़ा। साल दो हज़ार सत्रह में इस बंदरगाह को एक. बारह अरब डॉलर में इस कंपनी को सौंपा गया। इसके साथ ही बंदरगाह के पास ही करीब पंद्रह हजार एकड़ जमीन भी औद्योगिक जोन के लिए चीन को देनी पड़ी। दो हज़ार पंद्रह में चीन ने श्रीलंका के हम्बनटोटा बंदरगाह पर एक एअरपोर्ट, एक कोल पावर प्लांट और सड़क बनाने के लिए करीब चार अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश किया, दो हज़ार सोलह में राजपक्षे के जाते-जाते यह कर्ज इतना बढ़ा कि उसे अपना यह बंदरगाह लीज पर देना पड़ा। अब आलम यह है कि श्रीलंका चीन की कर्ज नीति में काफी बुरी तरह से फंस चुका है और अब वह इससे बाहर निकलना चाहता है। शायद इसी वजह से श्रीलंका ने अपना झुकाव भारत की तरफ करना शुरू कर दिया है। दूसरी ओर, भारत इस घटनाक्रम में अपने लिए अच्छा अवसर देख रहा है। श्रीलंका ने चीन को जो इलाका सौंपा है वो भारत से महज एक सौ मील की दूरी पर है। भारत के लिए इसे सामरिक रूप से खतरा बताया जा रहा है। भारत कभी नहीं चाहेगा कि चीन उसकी सीमा के नजदीक अपनी पैठ बनाए। श्रीलंका में नई सरकार बनने पर भारत ने भी दोस्ती का हाथ बढ़ाने में देरी नहीं की। गोटबाया राजपक्षे के राष्ट्रपति पद संभालते ही अगले दिन भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर श्रीलंका दौरे पर पहुंच गए थे। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल श्रीलंका के दौरे पर गए और वहां पचास मिलियन डॉलर की मदद देने का वादा कर आए थे।
Quick links: Asia Cup 2023 Final: एशिया कप 2023 के फाइनल में मोहम्मद सिराज (Mohammed Siraj) ने अपने परफॉर्मेंस से सबको अपना दीवाना बना दिया। क्रिकेटर ने 6 विकेट लिए जिसके बाद पूरी दुनिया उनको सलाम ठोक रही है। टीम इंडिया ने अपना आठवां ऐशिया कप का खिताब जीत लिया है। एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री भी सिराज के मैजिक में डूबी नजर आ रही है। अनुष्का शर्मा, अथिया शेट्टी, अजय देवगन, विक्की कौशल, एसएस राजामौली, अली गोनी, मोहसिन खान और राशि खन्ना जैसे सितारों ने टीम इंडिया की ऐतिहासिक जीत पर खुशी जताई है। सेलिब्रिटीज ने सिराज की जमकर तारीफ की और उनके परफॉर्मेस को सराहा। बता दें कि सिराज ने 15 गेंदों में पांच विकेट लिए और 7 ओवर में कुल 6 विकेट झटके। बैंड बाजा बारात फेम एक्ट्रेस ने अपनी इंस्टा स्टोरी में सिराज की फोटो शेयर करते हुए चीयरफुल कैप्शन लिखा है। उन्होंने लिखा- 'क्या बात है मियां, मैजिक'। वहीं अथिया शेट्टी ने भी सिराज की तारीफ में पोस्ट किया है। उन्होंने क्रिकेटर की फोटो शेयर करते हुए उन्हें हैट्स ऑफ कहा है। अजय देवगन भी टीम इंडिया की जीत को सेलिब्रेट करते दिखाई दिए। उन्होंने ट्वीट करते हुए मैन ऑफ द मैच को टैग करते हुए लिखा- क्या बॉलिंग किए हो। उन्होंने आगे लिखा- यह कहने का क्या तरीका है कि हम वर्ल्ड कप के लिए तैयार हैं। उनके अलावा विक्की कौशल भी सिराज के जादू में डूबने से खुद को रोक नहीं पाए। वहीं आरआरआर जैसी ब्लॉकबस्टर बनाने वाले एसएस राजामौली ने भी जमकर सिराज मियां की तारीफों के पुल बांधे।
Quick links: Asia Cup दो हज़ार तेईस Final: एशिया कप दो हज़ार तेईस के फाइनल में मोहम्मद सिराज ने अपने परफॉर्मेंस से सबको अपना दीवाना बना दिया। क्रिकेटर ने छः विकेट लिए जिसके बाद पूरी दुनिया उनको सलाम ठोक रही है। टीम इंडिया ने अपना आठवां ऐशिया कप का खिताब जीत लिया है। एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री भी सिराज के मैजिक में डूबी नजर आ रही है। अनुष्का शर्मा, अथिया शेट्टी, अजय देवगन, विक्की कौशल, एसएस राजामौली, अली गोनी, मोहसिन खान और राशि खन्ना जैसे सितारों ने टीम इंडिया की ऐतिहासिक जीत पर खुशी जताई है। सेलिब्रिटीज ने सिराज की जमकर तारीफ की और उनके परफॉर्मेस को सराहा। बता दें कि सिराज ने पंद्रह गेंदों में पांच विकेट लिए और सात ओवर में कुल छः विकेट झटके। बैंड बाजा बारात फेम एक्ट्रेस ने अपनी इंस्टा स्टोरी में सिराज की फोटो शेयर करते हुए चीयरफुल कैप्शन लिखा है। उन्होंने लिखा- 'क्या बात है मियां, मैजिक'। वहीं अथिया शेट्टी ने भी सिराज की तारीफ में पोस्ट किया है। उन्होंने क्रिकेटर की फोटो शेयर करते हुए उन्हें हैट्स ऑफ कहा है। अजय देवगन भी टीम इंडिया की जीत को सेलिब्रेट करते दिखाई दिए। उन्होंने ट्वीट करते हुए मैन ऑफ द मैच को टैग करते हुए लिखा- क्या बॉलिंग किए हो। उन्होंने आगे लिखा- यह कहने का क्या तरीका है कि हम वर्ल्ड कप के लिए तैयार हैं। उनके अलावा विक्की कौशल भी सिराज के जादू में डूबने से खुद को रोक नहीं पाए। वहीं आरआरआर जैसी ब्लॉकबस्टर बनाने वाले एसएस राजामौली ने भी जमकर सिराज मियां की तारीफों के पुल बांधे।
गूगल की नयी तकनीक आ गयी है, जिसके जरिये हार्ट रेट, श्वसन रेट की गणना हो सकेगी। बंदा मोबाइल के जरिये ये सब कैलकुलेट कर लेगा। एप्पल मोबाइल के जरिये ईसीजी पहले ही संभव थी। अब मोबाइल ही हार्ट रेट नाप लेंगे, मोबाइल ही ईसीजी कर लेगा। कुछ दिनों बाद कोई मोबाइल हार्ट का आपरेशन भी करने लगेगा। पढ़ने-पढ़ाने का काम तो मोबाइल के जरिये हो रहा है। सब कुछ मोबाइल ही करेगा तो हम क्या करेंगे जी। कुछ दिनों बाद ऐसा मोबाइल भी आ जायेगा, जो बतौर मंत्री काम कर सकेगा, पर मंत्री के मुकाबले कम पैसे खायेगा। कमाल है जी। इसमें भी परम कमाल हो जायेगा जब कोई चाइनीज मोबाइल आकर बतायेगा कि हम तो बहुत सस्ते में काम करवाते हैं। इंडियन तो महंगे होते हैं, चूज चाइनीज, सस्ते। घड़ी का धंधा मंदा, मोबाइल टाइम बता रहा है। म्यूजिक प्लेयर क्यों चाहिए, मोबाइल में है। अब तो अधिकांश टीवी चैनल यूट्यूब पर हैं, काहे को घर में केबल कनेक्शन चाहिए। ना-ना, घर पर खाना क्यों बनाना है, जोमाटो, स्विगी हैं जी। व्हाट्सएप पर तमाम तरह के वैद्य भारत की जनता को तरह-तरह के तेलों, दवाओं से मर्द बनाने में लगे हुए हैं और एक कलाकार बिरयानी से नामर्द बना रहा है। लंतरानी का मतलब और चंडूखाने का अर्थ व्हाट्सएप पर समझ में आ जाता है। आॅनलाइन चंडूखाना खुला हुआ है, सुबह से शाम तक दे दनादन चल रही हैं खबरें। एक खबर व्हाट्सएप पर आयी कि आसमान में प्लाट कट रहे हैं, आवेदन किया जा सकता है। अमेरिका में एक बड़े उद्योगपति भी अंतरिक्ष में कालोनी बनाने पर काम कर रहे हैं। इसलिए चंडूखाने और ऑनलाइन चंडूखाने को सीरियसली लेना चाहिए। इधर तकनीक ने एक काम अद्भुत कर दिया है, झूठ और सच का भेद मिट गया है। फोटोशाप के जरिये अकबर नेहरूजी से विमर्श करते दिख सकते हैं-महाराणा प्रताप अभी भी हल्दी घाटी में घोड़ा दौड़ाते दिख सकते हैं। खैर, आप कुछ न करें, सब कुछ मोबाइल करेगा, आप खाली समय में बस व्हाट्सएप देखें। व्हाट्सएप वाले सब कुछ देख रहे हैं। आप व्हाट्सएप पर किसी मित्र को लिखें कि मुझे मोबाइल खऱीदना है। फिर आपको मोबाइल पर मोबाइल के इश्तिहार दिखना शुरू हो जायेंगे। डाक्टरी का कामकाज भी मोबाइल और गूगल के जरिये होने लगेगा तो मामला बहुत पेचीदा हो जायेगा। बंगाली डाक्टर, आयुर्वेदिक डाक्टर, प्राकृतिक चिकित्सा वाले डाक्टर की तर्ज पर बंगाली मोबाइल, आयुर्वेदिक मोबाइल जैसे आइटम देखने पड़ेंगे। देखना पड़ेगा जी, जाने क्या-क्या देखना पड़ेगा। अभी व्हाट्सएप पर एकदम प्रामाणिक खबर आयी है - मुहम्मद तुगलक नामक सुल्तान ने व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से ही ग्रेजुएशन किया था।
गूगल की नयी तकनीक आ गयी है, जिसके जरिये हार्ट रेट, श्वसन रेट की गणना हो सकेगी। बंदा मोबाइल के जरिये ये सब कैलकुलेट कर लेगा। एप्पल मोबाइल के जरिये ईसीजी पहले ही संभव थी। अब मोबाइल ही हार्ट रेट नाप लेंगे, मोबाइल ही ईसीजी कर लेगा। कुछ दिनों बाद कोई मोबाइल हार्ट का आपरेशन भी करने लगेगा। पढ़ने-पढ़ाने का काम तो मोबाइल के जरिये हो रहा है। सब कुछ मोबाइल ही करेगा तो हम क्या करेंगे जी। कुछ दिनों बाद ऐसा मोबाइल भी आ जायेगा, जो बतौर मंत्री काम कर सकेगा, पर मंत्री के मुकाबले कम पैसे खायेगा। कमाल है जी। इसमें भी परम कमाल हो जायेगा जब कोई चाइनीज मोबाइल आकर बतायेगा कि हम तो बहुत सस्ते में काम करवाते हैं। इंडियन तो महंगे होते हैं, चूज चाइनीज, सस्ते। घड़ी का धंधा मंदा, मोबाइल टाइम बता रहा है। म्यूजिक प्लेयर क्यों चाहिए, मोबाइल में है। अब तो अधिकांश टीवी चैनल यूट्यूब पर हैं, काहे को घर में केबल कनेक्शन चाहिए। ना-ना, घर पर खाना क्यों बनाना है, जोमाटो, स्विगी हैं जी। व्हाट्सएप पर तमाम तरह के वैद्य भारत की जनता को तरह-तरह के तेलों, दवाओं से मर्द बनाने में लगे हुए हैं और एक कलाकार बिरयानी से नामर्द बना रहा है। लंतरानी का मतलब और चंडूखाने का अर्थ व्हाट्सएप पर समझ में आ जाता है। आॅनलाइन चंडूखाना खुला हुआ है, सुबह से शाम तक दे दनादन चल रही हैं खबरें। एक खबर व्हाट्सएप पर आयी कि आसमान में प्लाट कट रहे हैं, आवेदन किया जा सकता है। अमेरिका में एक बड़े उद्योगपति भी अंतरिक्ष में कालोनी बनाने पर काम कर रहे हैं। इसलिए चंडूखाने और ऑनलाइन चंडूखाने को सीरियसली लेना चाहिए। इधर तकनीक ने एक काम अद्भुत कर दिया है, झूठ और सच का भेद मिट गया है। फोटोशाप के जरिये अकबर नेहरूजी से विमर्श करते दिख सकते हैं-महाराणा प्रताप अभी भी हल्दी घाटी में घोड़ा दौड़ाते दिख सकते हैं। खैर, आप कुछ न करें, सब कुछ मोबाइल करेगा, आप खाली समय में बस व्हाट्सएप देखें। व्हाट्सएप वाले सब कुछ देख रहे हैं। आप व्हाट्सएप पर किसी मित्र को लिखें कि मुझे मोबाइल खऱीदना है। फिर आपको मोबाइल पर मोबाइल के इश्तिहार दिखना शुरू हो जायेंगे। डाक्टरी का कामकाज भी मोबाइल और गूगल के जरिये होने लगेगा तो मामला बहुत पेचीदा हो जायेगा। बंगाली डाक्टर, आयुर्वेदिक डाक्टर, प्राकृतिक चिकित्सा वाले डाक्टर की तर्ज पर बंगाली मोबाइल, आयुर्वेदिक मोबाइल जैसे आइटम देखने पड़ेंगे। देखना पड़ेगा जी, जाने क्या-क्या देखना पड़ेगा। अभी व्हाट्सएप पर एकदम प्रामाणिक खबर आयी है - मुहम्मद तुगलक नामक सुल्तान ने व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से ही ग्रेजुएशन किया था।
थी । वात्स्यायन ने पूर्वोक्त पाँच वाक्यों के अतिरिक्त निम्नलिखित पाँच वाक्यों को भी माननेवाले नैयायिकों का उल्लेख किया है ( न्या० भा० १११ । ३२ ) । वे वाक्य ये हैं - (१) जिज्ञासा, (२) संशय, (३) शक्यप्राप्ति, (४) प्रयोजन, ( ५ ) संशय व्युदास । भाष्यकार के मन्तव्यानुसार इनकी नितान्त आवश्य कता अनुमान के लिए न होने से इनका उल्लेख नहीं किया जाता। ये सिद्धि के लिए सहायकमात्र हैं, अत इनका वर्णन 'न्याय' में नहीं किया जाता । अब इसकी विशेषता पर दृष्टिपात करना आवश्यक है। यह पञ्चावयव वाक्य मनोवैज्ञानिक आधार पर अवलम्बित है। पाश्चात्य न्याय में डिडक्शन और इन्डक्शन भेद कर तर्क दो प्रकार का माना जाता है, पर भारतीय न्याय में इन दोनों का श्लाघनीय सम्मेलन किया गया मिलता है। व्याप्य और व्यापक के नियत सम्बन्ध पर ही अनुमान की पूरी इमारत खडी रहती है। इसी व्याप्ति की सूचना उदाहरण वाक्य की विशेषता है। चतुर्थ वाक्य उपनय या परामर्श वाक्य को अपनी खास विशिष्टता है। बिना परामर्श के अनुमान नहीं हो सकता । अनुमान के लिए व्याप्तिज्ञान की ही आवश्यकता नहीं, प्रत्युत उस व्याप्ति का प में रहना भी उतना ही आवश्यक है । अतः व्याप्य हेतु का पक्षधर्म होना (व्याप्तिविशिष्टपक्षधर्मताज्ञान) परामर्श माना जाता है। केवल धूमवान् होने से पर्वत की अग्निमत्ता अनुमित नहीं हो सकती, जब तक धूम और अग्नि की व्याप्ति का ज्ञान न हो और इस प्रकार वह्नि व्याप्य धूम का ज्ञान पर्वत में न हो । निगमन हेतु-द्वारा सिद्ध प्रतिज्ञा का उल्लेख करता है। जिसकी प्रतिज्ञा आरम्भ में की गई थी वही हेतु द्वारा सिद्ध कर दिया गया है, यही निगमन वाक्य प्रदर्शित करता है। अनुमान प्रक्रिया में व्याप्ति का स्थान अत्यन्त महत्व का है। इसलिए भारतीय दार्शनिकों ने, विशेषतया नैयायिकों ने व्याप्ति की आलोचना करने में इतनी कुशाग्र बुद्धि का परिचय दिया है कि वह दार्शनिक जगत् में एक आश्चर्यजनक व्यापार स्वीकार किया जाता है। व्याप्ति के लक्षण के विषय में पर्याप्त विवेचना नव्यन्याय के ग्रन्थों में की गई है। हेनु ( धूम ) तथा साध्य ( वह्नि ) के नियत साहचर्य सम्बन्ध को व्याप्ति कहते हैं। दो वस्तुओं के एक साथ विद्यमान होने से ही उनमें व्याप्ति की कल्पना हम तब तक नहीं कर सकते जब तक हमें उनके सदा नियम से एकत्र रहने की सूचना न मिले । 'जहाँ धूम है वहाँ अग्नि है इस साहचर्य को सत्ता हम नियतरूप से पाते है, अतः धूम तथा वाह्न की व्याप्ति न्यायसंगत प्रतीत होती है। इसीलिए व्याप्ति को प्राचीन ग्रन्थों में 'अविनाभाव' के नाम से पुकारते थे । अविनाभाव जो वस्तु जिसके बिना विद्यमान न रह सके उनका सम्बन्ध है। धूम को सत्ता तभी है जब वह्नि के साथ उसका सम्बन्ध स्वीकार किया जाता है । व्याप्ति धूम तथा वह्नि के साथ सम्पन्न होती है, परन्तु वह्नि तथा धूम के साथ व्याप्ति कथमपि सिद्ध नहीं होती। क्योंकि वह्नि के स्थलों में धूम की सार्वत्रिक विद्यमानता उपलब्ध नहीं होतो । उदाहरणार्थं अयोगोलक पिण्ड ( लोहे के जलते हुए गोले ) में अग्नि के रहने पर भी धूम नहीं दीख ) पड़ता । अग्नि के साथ धूम का सम्बन्ध तभी सिद्ध हो सकता है जब गोली लकड़ी का उपयोग जलाने के लिए किया जाय । इस आद्वेन्धनसंयोग को न्यायशास्त्र में 'उपाधि' कहते है। व्याप्ति के लिए उपाधि का अभाव नितान्त आवश्यक है । अतः हेतु और साध्य के नियत और अनौपाधिक ( उपाधिविरहित ) सम्बन्ध को व्याप्ति के नाम से पुकारते हैं ( हेतु साध्ययोरनौपाधिको नियतः सम्बन्धो व्याप्ति, भा०प०, का० ६८-६९) । कतिपय मनुष्यों में मरणधर्मस्व की सत्ता को देखकर समस्त मानवों में उस धर्म की विद्यमानता को मान बैठना कहाँ को बुद्धिमत्ता है ? ऐसी सार्वत्रिक व्याप्ति की स्थिति किस प्रकार प्रमाण-प्रतिपन्न मानी जा सकती है ? इसका उत्तर दार्शनिकों ने भिन्न-भिन्न रूप से दिया है। बौद्ध नैयाबिकों ने ( दिङ्नाग, धर्मकीर्ति आदि ) व्याप्ति के निषेधात्मक पक्ष पर विशेषरूप से जोर दिया है यथा साध्य के अभाव में हेतु को अनुपलब्धि। उनके मतानुसार अविनाभाव का प्रत्येक दृष्टान्त हेतु तथा साध्य के नियत सम्बन्ध को सूचित करता है । यह सम्बन्ध तादात्म्य अथवा तदुत्पत्ति (कार्यकारणभाव) पर अवलम्बित रहता है । वेदान्तियों के मन्तव्यानुसार व्याप्ति साहचर्यावलोकन पर अवलम्बित रहती है। दो वस्तु यदि एक साथ सदा रहती है ( सहचार ) तथा इसके विपरीत कोई भी दृष्टान्त हमारी दृष्टि में न आया हो (व्यभिचारादर्शन ) तो वेदान्त के अनुसार उनमें व्याप्ति सम्बन्ध माना जा सकता है ( व्यभिचारादर्शने सति सहचारदर्शनेन गृह्यते व्याप्तिः, वे० प० पृ० ८३ ) । नैयायिक लोग व्याप्ति की प्रमाणिकता के विषय में वेदान्तियों के मत को स्वीकार करते हैं कि अनुभव को एकरूपता व्याप्ति को तथ्य सिद्ध कर सकती है परन्तु अन्वय, व्यतिरेक, व्यभिचाराग्रह, उपाधिनिरास, तर्क और सामान्यलक्षणप्रत्यासत्ति- इन साधनों के प्रयोग करने से ही व्याप्ति के तथ्य का यथार्थ परीक्षण किया जा सकता है । व्याप्ति की सिद्धि करने के लिए पहली बात आवश्यक है - अन्वय । 'तत्सत्वे तत्सत्ता अन्वय' । एक वस्तु की सत्ता होने पर दूसरी की सत्ता होना अन्वय कहलाता है यथा धूम को सत्ता होने पर वह्नि को सत्ता । दूसरा साधन व्यतिरेक है- "तदभावे तदभावो व्यतिरेक "। एक वस्तु के अभाव में दूसरी वस्तु का अभाव हो, यथा वह्नि के अभावस्थलों पर धूम का अभाव । दोनों में किसी प्रकार का व्यभिचार न होना चाहिए । व्यभिचाराग्रह ) । इतने साधनों के होने पर भी व्याप्ति की सिद्धि नहीं होती जब तक उपाधि का निरास ( दूरीकरण ) न किया जाय । अनुकूल तक इसका पाँचवा सहायक साधन है । धूम तथा वह्नि की व्याप्ति के लिए तर्क की अनुकूलता है कि यदि पर्वत में वह्नि न होता, तो धूम भी नहीं होता पर धूम की सत्ता प्रत्यक्ष प्रमाण से निष्पन्न है । अतः तर्क दोनों के साहचर्य का द्योतक है। इतने पर भी सन्देह के लिए स्थान है, पर अन्तिम साधन से उसका सर्वथा निरास किया जाता है। इतना तो निश्चित है कि समग्र मानवों के परीक्षण का अवसर हमें न मिल सकता है और न यह साध्य ही है तथापि सामान्यलक्षणा प्रत्यासत्ति के द्वारा हम मानवता तथा मरणशीलता के पारस्परिक सम्बन्ध को सिद्ध मानकर समग्र मनुष्यों को मरणशील बताने के अधिकारी हो सकते हैं। इतने उपायों से इस प्रकार प्रामाणित होने से ही व्याप्ति की सत्यता मानने में कथमपि संकोच न होना चाहिए । तर्क का जो लक्षण ऊपर (पृ० २४६) दिया गया है, वह 'अविज्ञाततत्त्वेऽर्थे कारणोपपत्तितस्तत्व-ज्ञानार्थमूहस्तर्क : ' न्या० सू० ११११४० के आधार पर है । अन्नंभट्ट ने इसका लक्षण 'व्याप्यारोपेण व्यापकारोपस्तर्कः' किया है अर्थात् व्याप्य के आरोप से व्यापक का आरोप करना । पर्वत में अग्न्यभाव मानने से उसे धूभाभाववान् भी मानना पड़ेगा, जो वास्तव में वह नहीं है । अतः तर्क अप्रमा का एक भेद माना जाता है। प्राचीन नैयायिक तर्क के ११ प्रकार मानते है ( स० द० सं० पृ० ९३ ) परन्तु नव्य नैयायिक केवल ५ प्रकार - आत्माश्रय, अन्योन्याश्रय, चक्रक, अनवस्था तथा तदन्यबाधितार्थप्रसंग ( विश्वनाथ - १।१।४० न्याय-सूत्रवृत्ति )। तत्वज्ञान के साधन में तर्क की उपादेयता सर्वत्र स्वीकृत की गई है। पाश्चात्य जगत् में न्याय की रूपरेखा ग्रीक दार्शनिक अरस्तू (अरिस्टॉटल) ने निश्चित की थी । कतिपय परिवर्तनों के साथ उनकी उद्भावित शैली तथा सिद्धान्तों का अनुगमन आज भी पश्चिमी तर्क करता है। उनके अनुमान १ द्रष्टव्य चिन्तामणि का व्याप्तिग्रहोपाय प्रकरण तथा भाषा-परिच्छेद का० १३७ की मुक्तावली । वाक्य ( सिलाजिज़म ) के साथ 'न्याय' की तुलना अत्यन्त शिक्षाप्रद है। पाश्चात्य अनुमान में आकारगत सत्यता को ही उपलब्धि होती है, तात्त्विक सत्यता की आवश्यकता नहीं मानी जाती, परन्तु भारतीय अनुमान में दोनों प्रकार की सत्यताओं का होना अनिवार्य रहता है। पश्चिमी तार्किक वाक्य तोन प्रकार के होते हैं- (१) निरपेक्षवाक्य ( केटेगारिकल ), (२) काल्पनिक (हाइपोथेटिकल ), ( ३ ) वैकल्पिक ( डिसजनकटिव), परन्तु भारतीय तार्किक वाक्य केवल प्रथम प्रकार का ही होता है। पश्चिमी न्याय में केवल तीन वाक्यों से अनुमान की पूरी प्रक्रिया निष्पन्न होती है(१) साध्यवाक्य ( मेजर प्रेमिस), (२) पक्षवाक्य ( माइनर प्रेमिस) तथा (३) फलवाक्य ( कंक्ल्यूजन ), परन्तु भारतीय न्यायशास्त्र में ५ वाक्यों का प्रयोग किया जाता है। पश्चिमी न्याय में अनुमान कभी भावात्मक, कभी अभावात्मक, कभी पूर्ण व्यापी ( यूनिवरसल) और कभी अंशव्यापी ( पर्टिकूलर ) होकर विविधरूप धारण करता है, परन्तु भारतीय न्याय-वाक्य ) पूर्ण व्यापी भावात्मक एक ही प्रकार का होता है। परन्तु सबसे महान् अन्तर भारतीय न्याय में परामर्श ( उपनय ) की स्थिति से है। पश्चिमी न्याय में प्रथम दोनों वाक्यों का समन्वयात्मक वाक्य नहीं होता, परन्तु भारतीयन्याय में हेतु वाक्य और उदाहरण का एकीकरणात्मकरूप उपनय को सत्ता नितान्त आवश्यक है, वास्तव में परामर्शज्ञान से हो अनुमिति का उदय होता है। यहाँ हेतु के अत्यन्त महत्त्वपूर्ण होने से समस्त दोष ( हेत्वाभास ) हेतु के आभास पर अवलम्बित रहते हैं, परन्तु पश्चिमो न्याय में पक्षाभास ( एलिसिट माइनर ) तथा साध्याभास ( एलिसिट मेजर ) नामक दोपों की भी सत्ता स्वीकृत की गई है । परार्थानुभेद और स्वार्थानमान प्रकार भी पश्चिमी जगत् में उपलब्ध नहीं होते। मोटे तौर से दोनों में ये स्फुट प्रतीयमान विभेद हैं । हेतु के द्वारा हो अनुमान की सिद्धि होती हैं। अतः हेतु के निर्दोषता के विषय में नैयायिकों का विशेष आग्रह रहता है। हेतु में पाँच गुणों के होने पर वह सत्-हेतु कहा जाता है - ( १ ) पक्षे सत्ता ( हेतु का पक्ष में १ रहना ) ( २ ) सपक्षे सत्ता (सपक्ष में हेतु का विद्यमान होना ); ( ३ ) विपक्षाद् व्यावृत्तिः ( पक्ष से विपरीत दृष्टान्तों में यथा कूप, जलाशय आदि में हेतु का अभाव ); ( ४ ) असत्प्रतिपक्षत्वम् ( साध्य से विपरीत वस्तु की सिद्धि के लिए अन्य हेतु का अभाव ) (५) अबाधितविषयत्व ( प्रत्यक्षादि प्रमाणों द्वारा बाधित न होना ) । अनुमान की सत्यता हेतु के इन गुणों पर अवलम्बित रहती है। यदि इन गुणों में से किसी में त्रुटि लक्षित होती है तब सत् हेतु न होकर हेतु का आभास मात्र रहता है ( हेतु + आभास ) अर्थात् आपाततः हेतु में निर्दुष्टता लक्षित होती है, पर वास्तव में वह दोष से संवलित रहता है। इसे ही 'हेत्वाभास' कहते हैं। बौद्ध न्याय में इनके अतिरिक्त पक्ष और दृष्टान्त के दोषों का भी विस्तृत विवेचन किया गया मिलता है । हेत्वाभास के नाम इस प्रकार हैं२५९ ( १ ) सव्यभिचार ( अनैकान्तिक ), ( २ ) विरुद्ध, ( ३ ) प्रकरणसम ( सम्प्रतिपक्ष ), ( ४ ) साध्यसम ( असिद्ध ), ( ५ ) कालातीत ( बाधित ) । सव्यभिचार हेतु साध्य के साथ भी रहता है तथा उससे पृथक् इसके तीन प्रकारों में साधारण हेत्वाभास में हेतु साध्य तथा साध्याभाव दोनों में विद्यमान रहता है । असाधारण में हेतु पक्ष में ही निश्चित रहता है, इसके लिए सपक्ष तथा विपक्ष दृष्टान्त का अभाव रहता है । अन्वय तथा व्यतिरेक दृष्टान्त से रहित हेतु अनुपसंहारी कहलाता है। विरुद्ध हेत्वाभास में हेतु साध्याभाव से व्याप्त रहता है तथा सत्प्रतिपक्ष में उस साध्य के अभाव को सिद्ध करनेवाला दूसरा हेतु विद्यमान रहता है। असिद्ध तीन प्रकार का होता है - आश्रयासिद्ध ( पक्ष की असिद्धि होने पर ), स्वरूपासिद्ध ( हेतु की असिद्धि होने पर ), व्याप्यत्वासिद्ध ( व्याप्ति के सोपाधिक होने पर ) । बाधित हेत्वाभास में साध्य का अभाव अनुमान से इतर प्रमाणो से सिद्ध रहता है । अतः साध्य की सिद्धि के लिए अनुमान के प्रयोग करने से कोई लाभ नहीं प्रतीत होता । संक्षेप में हेत्वाभासों का यही सामान्य परिचय है । (ग) उपमान उपमान नैयायिकों का तीसरा प्रमाण है। पहिले अनुभूत किसी वस्तु के साथ सादृश्य धारण करने के कारण जहाँ किसी नई वस्तु का ज्ञान उत्पन्न होता है, उसे 'उपमान' कहते हैं। "गो के सदृश गवय होता है" इस वाक्य के श्रवणानन्तर जंगल में जानेवाला पुरुष जब गो की समानतावाले पशु को देखकर उसे 'गवय' पद का वाच्य समझता है तब इस ज्ञान का अनुभव उसे 'उपमान' के द्वारा होता है। अत उपमान में वस्तुद्वय का सादृश्य-ज्ञान करण है तथा 'गवय गो के समान होता है' इस वाक्य का स्मरण सहकारी कारण है । सादृश्य कई प्रकार का हो सकता है - 'एकान्त सादृश्य' एक गाय का दूसरी गाय के साथ; 'कतिपयांश में सादृश्य' गाय का सादृश्य भैंस के साथ तथा 'आंशिक' सादृश्य मेरु तथा सर्पप का सत्तांश में सादृश्य । परन्तु यकार ने इन सादृश्यों का उपमान के लिए खण्डन किया है और प्रसिद्ध सादृश्य को उपयुक्त ठहराया है। समानता के अंगों को विपुल संख्या उपमान में महत्त्वशालिनी नहीं है, प्रत्युत समानता की विख्याति तथा महत्ता । अत प्रसिद्ध सादृश्य के बल पर जहाँ संज्ञा तथा संज्ञी का सम्बन्ध स्थापन किया जाता है उसे उपमान कहते हैं ( समाख्यासम्बन्ध प्रतिपत्तिः उपमानार्थः- न्यायवार्तिक १२११६ ) । न्याय दर्शन उपमान के स्वतन्त्र प्रमाण मानने में दार्शनिकों ने बड़ी विप्रतिपत्ति खड़ी की है। चार्वाक उपमान का प्रामाण्य नहीं स्वीकार करते । दिङ्नाग उपमान को प्रत्यक्ष के अन्तर्गत मानते हैं । वैशेषिक लोग इसे अनुमान के अन्तर्मुक्त बतलाते हैं, 'गो सदृश होने से यह पशु गवय है' यह ज्ञान हेतु के ऊपर अवलम्बित होने से अनुमान का एक प्रकारमात्र है। सांख्य 3 उपमान में शब्द तथा प्रत्यक्ष की आंशिक स्थिति मानता है । गवय में गोसादृश्य का ज्ञान प्रत्यक्ष से होता है तथा गो-सादृश्यवान् पशु के गवय होने में उपदेष्टा का वाक्य प्रमाणभूत है । भासवंज्ञ ने नैयायिक होने पर भी उपमान को शब्द के अन्तर्गत स्वीकृत किया है। जैनदर्शन उपमान को प्रत्यभिज्ञामात्र मानता है। मीमांसा" तथा वेदान्त उपमान को स्वतन्त्र प्रमाण मानते हैं अवश्य पर उनकी कल्पना नैयायिक कल्पना से नितान्त भिन्न पड़ती है। इन विप्रतिपत्तियों का मार्मिक खण्डन न्यायग्रन्थों में किया गया है। वास्तव में उपमान अंशत. अन्य प्रमाणों के ऊपर अवलम्बित होने पर भी अन्ततः एक स्वतन्त्र प्रमाण है। उपमान सोधा सादा न होकर एक मिश्रित व्यापार है। 'रावय गोसमान पशु होता है' इस अंश में शब्द को, गवय में गो सादृश्य के अनुभव में प्रत्यक्ष की, 'यही गवय है ' इस अंश में पूर्ववाक्य की स्मृति तथा अनुमान की सत्ता भले ही सिद्ध मानी जाय, परन्तु 'गवयपद का वाच्य यहो गवयपशु है' इस अंश में उपमान स्वतन्त्र प्रमाण है ही, क्योंकि यह अंश किसी अन्य प्रमाण के अन्तर्गत नहीं माना जा सकता । १ न्यायवार्तिक १-१-६ । २ द्रष्टव्य उपस्कार वै० सू० ९/२/५ सूत्र पर । ३ द्रष्टव्य तत्त्वकौमुदी, कारिका ५ १४ प्रमेय कमलमार्तण्ड पृ० ९७ - १००। ५ शास्त्रदीपिका पृ० ७४ - ७६ । ६ वेदान्तपरिभाषा परिच्छेद ३ । ( घ) शब्द शब्द अन्तिम प्रमाण है । आप्तोपदेशः शब्दः (न्या० सू० १॥१॥६) । किसी आप्त पुरुष के उपदेश को शब्द कहते हैं। आप्त वह कहलाता है जो वस्तु को यथार्थरूप से जानता है तथा हितोपदेष्टा होने के कारण जिसके वाक्यों को हम प्रमाण मान सकते हैं। लौकिक तथा वैदिक रूप से शब्द दो प्रकार हैं । लौकिक शब्द लौकिक पुरुषों के वाक्य को कहते हैं। वैदिक शब्द श्रुति के वाक्य को कहते हैं। पद के समूह को वाक्य कहते हैं। पद शक्ति से सम्पन्न रहता है। नैयायिक लोग दो प्रकार की शक्ति मानते हैं - अभिधा तथा लक्षणा । पदशक्ति के विषय में बड़ा मतभेद है। प्राचीन नैयायिकगण ईश्वर की इच्छा को संकेत मानते हैं । 'यह शब्द इस अर्थ को बोध करे' इसी ईश्वरेच्छा पर शब्द-संकेत निर्भर रहता है, पर नव्यनैयायिक पुरुष की इच्छा को भी संकेत का कारण मानते हैं। संकेतग्रह के विषय में भी दार्शनिको में गहरा मतभेद है । न्याय जाति, व्यक्ति तथा आकृति - इन तीनों के ऊपर संकेत स्वीकार करता है । वाक्यार्थ-बोध के लिए आकांक्षा, योग्यता तथा सन्निधि का रहना नितान्त आवश्यक है । वेद के विषय में नैयायिकों तथा मोमांसकों ने बड़ा विचार किया है, पर दोनों के विचार एक दूसरे से अत्यन्त विभिन्न पड़ते हैं। ईश्वर को सत्ता न माननेवाली मीमांसा को वेद के विषय में ईश्वर को कर्तृता अंगीकृत नहीं है । अतः पुरुष ( ईश्वर ) के द्वारा उद्भूत न होने से वेद अपौरुषेय हैं, परन्तु न्याय जगत्कर्तृ स्वरूप से ईश्वर को मानता है तथा वेद को ईश्वरकर्तृक होने से पौरुपेय मानता है। नित्यता के विषय में दोनों का ऐकमत्य है । जयन्तभट्ट ने वेद की पौरुषेयता सिद्ध करने के लिए बड़ी प्रबल युक्तियों का उपन्यास किया है। बौद्ध तथा जैन ग्रन्थकारों में वेद में अनेक दार्थों की उद्भावना की है, पर इनका खण्डन न्याय तथा मीमांसा ने बड़ी तर्ककुशलता के साथ किया है । वेद-प्रामाण्य न मानने पर भी जैन तथा बौद्ध दर्शन शब्द प्रमाण को मानते है। जिस प्रकार ब्राह्मण दार्शनिकों को वेदवचन प्रमाणभूत हैं, उसी प्रकार बौद्धों को बुद्धवचन ( पाली त्रिपिटक ) तथा जैनों को जैनागम ( अर्धमागधी में लिखित 'अंग' ) माननीय हैं । अतः शब्द इन दोनों के लिए भी ज्ञान का एक स्वतन्त्र साधन है कार्य-कारण सिद्धान्त प्रमाण का लक्षण देते समय हमने ऊपर 'करण' शब्द का प्रयोग किया है । असाधारण कारण को 'करण' कहते हैं- वह विशिष्ट वस्तु जो किसी कार्य के उत्पादन में विशेषरूप से कारण हो, करण कहलाती है। यहाँ 'कारण' का विचार अप्रासङ्गिक न होगा। कार्य के नियत रूप से पूर्व होने वाला वस्तु 'कारण' कहलाती है; नियत पूर्ववर्ती कहने से तात्पर्य यह है कि उस कार्य के वास्ते बिना किसी व्यवच्छेद के उस वस्तु को पूर्ववर्ती होना ही चाहिए । यदि यह पूर्ववर्तिता कादाचित्क है - कभी है और कभी नहीं है, तो उसे कारण नहीं माना जा सकता । कारण को अनन्यथा सिद्ध होना भी उतना ही आवश्यक है। उन वस्तुओं को 'अन्यथासिद्ध' कहते हैं जिनको कार्य विशेष के लिए उपादेयता उतनी उत्कट रूप से नहीं होती। विश्वनाथ ने पाँच प्रकार के 'अन्यथासिद्धों' का वर्णन मुक्तावली ( का० २० - २२ ) में किया है। दण्डत्व, दण्डरूप, आकाश, कुलालपिता तथा अपनी पीठ पर मिट्टी लाने वाला गर्दभ - इन सब की घटोत्पादन में कारणता नहीं होतो, क्योंकि नियतपूर्ववर्ती होने पर भी ये अन्यथासिद्ध हैं। मिट्टी के लाने में गर्दभ का बहुल प्रयोग होने पर भी उसमें घट के प्रति कारणता का अभाव हो है, क्योंकि दूसरे साधनों से भी वही कार्य निष्पन्न किया जा सकता है । अतः गर्दभ की घटोत्पत्ति के प्रति नितान्त आवश्यकता नहीं है। इस प्रकार कारण का मान्य लक्षण है - अनन्यथासिद्धनियतपूर्ववृत्तित्वं कारणत्वम् ( दीपिका पृ० २५ तथा मुक्तावली का० १६ ) । प्रागभाव के प्रतियोगी की संज्ञा 'कार्य' है ( कार्य प्रागभाव-प्रतियोगि) । जिस वस्तु का अभाव होता है, उसे अभाव के प्रति 'प्रतियोगी' कहते हैं । उत्पत्ति से पूर्व कारण ( मृत्तिका) में कार्य ( घट ) का अभाव 'प्रागभाव' है । इसके प्रतियोगी अर्थात् घट को कार्य कहेंगे । कार्य-कारण सम्बन्ध को मीमांसा दर्शनशास्त्र का एक नितान्त मौलिक कार्य है, क्योंकि इसी सम्बन्ध पर अन्य सिद्धान्तों की संगति सिद्ध होती है। कार्य-कारण का सम्बन्ध चार प्रकार का माना जाता है - असत् से सत् की उत्पत्ति (बौद्ध), सत् से सत् की उत्पत्ति ( सांख्य - सत्कार्यवाद ), सत् से असत् कार्य का उदय ( वेदान्त - विवर्तवाद ), तथा सत् से उत्पत्ति से प्रथम असत् कार्य की उत्पत्ति ( न्याय ) । न्याय के अनुसार कारण में कार्य की सत्ता उत्पत्ति से पूर्व नहीं रहती अर्थात् कारण सामग्री के उपयोग करने से मृत्तिका में 'घट' नामक एक अभूतपूर्व नवोन वस्तु की उत्पत्ति होती है। नैयायिक दृष्टि में कार्य उपादानकारण से एकदम भिन्न है । जिस सूत्र-समूह से पट बनता है, वह सूत ही कपड़ा नहीं है, प्रत्युत कपड़ा सूत से अत्यन्त भिन्न है। कारण व्यापार से पूर्व कार्य कारण में विद्यमान नहीं रहता । अतः इस सिद्धान्त का नाम असत्-कार्यवाद या आरम्भवाद है। कारण तीन प्रकार का होता है -- समवायो कारण, असमवायी कारण तथा निमित्त कारण । जिसमें समवाय सम्बन्ध से रहते हुए कार्य की उत्पत्ति होती है, उसे समवायी कारण ( या उपादान कारण ) कहते हैं जैसे घड़े के लिए मिट्टी । समवायिकारणता द्रव्य की ही होती है। कार्य के साथ अथवा कारण के साथ एक वस्तु में समवाय सन्बन्ध से रहते हुए जो कारण होता है, वह असमवायी कहलाता है। तन्तु संयोग पट का असमवायी कारण है, क्योंकि पटरूपी कार्य के साथ तन्तुसंयोग तन्तुरूप एक द्रव्य में समवाय सम्बन्ध में निवास करता है। कारण पट के साथ तन्तुरूप एक ही तन्तु में समवाय सम्बन्ध से विद्यमान है, अतः तन्तुरूप पटरूप का असमवायी कारण है। असमवायो कारण नैयायिकों की अपनी खास सूझ है जिसे अन्य दार्शनिकों ने खण्डन करने के लिए अनेक युक्तियाँ दी हैं। गुण तथा क्रिया हो असमवायी कारण हो सकते हैं। इन दोनों से भिन्न कारण को निमित्त कारण कहते हैं जैसे घड़े का बनाने वाला कुलाल तथा उसके औजार। इन त्रिविध कारणों की परस्पर सहकारिता से ही कार्य को उत्पत्ति होती है । इन तीनों में से कार्योत्पत्ति के लिए जो असाधारणविशिष्ट या नितान्त साधक है उसे करण कहते हैं ( साधकतमं करणम् भष्टा० १।४।४२) । (४) न्याय-तत्त्वसमीक्षा न्यायसूत्र ( ११११९ ) में प्रमेय के द्वादश भेद स्वीकृत किये गये हैं( १ ) आत्मा-सब वस्तुओं का देखने वाला, भोग करने वाला, जानने वाला । ( २ ) शरीर-भोगों का आयतन या आधार; ( ३ ) इन्द्रियजिनके द्वारा आत्मा बाह्य वस्तुओं का भोग करता हैभोगों के साधन, ( ४ ) अर्थ - भोग किये जानेवाले वस्तुजात; ( ५ ) बुद्धिभोग, ज्ञान; ( ६ ) मन-सुखदु ख आदि आन्तर भोगों का साधनभूत इन्द्रिय ( ७ ) प्रवृत्ति - मन, वचन तथा शरीर का व्यापार; ( ८ ) दोषजिसके कारण अच्छे या बुरे कामों में प्रवृत्ति होती है; ( ९ ) प्रत्यभावपुनर्जन्म (१०) फल - सुखदुख का संवेदन या अनुभव; (११) दुख इच्छाविघातजन्य क्लेश या पीड़ा; (१२) अपवर्ग - दुःख से आत्यन्तिकी निवृत्ति । इन्हीं पदार्थों का ज्ञान मुक्ति के लिए सहायक है। अतः इन वस्तुओं को 'प्रमेय' कहते हैं । जगत् तथा आत्मा की नैयायिक कल्पना वैशेषिक के समान हो है । अतः इनका रूप अगले परिच्छेद में विवेचित किया जायगा । उदयनाचार्य ने न्याय- कुसुमाञ्जलि में ईश्वर को सिद्धि अकाट्य युक्तियों के सहारे की हैं। उन्ही की कतिपय युक्तियाँ संक्षेप में दी जाती हैं - ( १ ) कार्यात्-जगत् के समस्त पदार्थ परमाणुजन्य, सावयव तथा अवान्तर महत्त्वविशिष्ट हैं। कार्य के लिए कर्ता की सत्ता मानना उचित ही है। घट की उत्पत्ति तदुत्पादक कुलाल की सत्ता के बिना न्यायसंगत नहीं है; उसी प्रकार कार्यरूप इस जगत् की सृष्टि करने वाला कोई चेतन पदार्थ अवश्य होगा । ( २ ) आयोजनात्- सृष्टि के अवसर पर परमाणुद्वय के संयोग से दुव्यणुक की उत्पत्ति होती है। परन्तु जड़ परमाणुओं को एक साथ आयोजन होना स्वयं सिद्ध नही हो सकता। इसके लिए किसी चेतन पदार्थ की कल्पना नितान्त तर्कयुक्त है । ( ३ ) धृत्यादे - तीसरो युक्ति संसार के धारण करने के विषय में है । यदि कोई चेतन धारण करने वाला न होता, तो यह जगत् कब का गिर गया होता। इस सृष्ट जगत् का नाश प्रलयकाल में होता है। अतः नाश के लिए किसी नाशकर्ता की आवश्यकता बनी हुई है । ( ४ ) पदात - इस जगत् में अनेक कला-कौशल विद्यमान हैं; जैसे वस्त्र का बनाना, गृह की एक विशिष्ट प्रकार से रचना करना । इस सम्प्रदाय व्यवहार के लिए, इसकी उत्पत्ति के लिए किसी ज्ञानवान् व्यक्ति की कल्पना करना पड़ता है । ( ५ ) प्रत्ययतः - श्रुति हमारे लिए परम प्रमाण है। उसके प्रतिपादित सिद्धान्तों में किसी प्रकार की त्रुटि या विप्रतिपत्ति लक्षित नहीं होती । कितने भी कुशाग्रबुद्धि के द्वारा किया गया अनुमान श्रुति की शिला पर पटके जाने से, विरुद्ध होने पर, चूर चूर हो जाता है। श्रुति की इस प्रमाण श्रेष्ठता का रहस्य यहां कि वह सर्वशक्तिमान् सर्वज्ञ ईश्वर के द्वारा निर्मित की ज्ञान ईश्वर का परिचायक है । ( ६ ) श्रुतेः - श्रुति को सिद्धि बतलाती है। श्वेताश्वतर उपनिषद् (६।११) प्रतिपादित कर रहा है कि एक ही ईश्वर सब प्राणियों में छिपा हुआ है, सर्वव्यापी है, सब प्राणियों का अन्तरात्मा है, वह सबका नियामक तथा रक्षक है। भगवद्गीता ( ९ । १७ ) में श्रीकृष्ण ने अपने जगत् का पिता, माता, धाता तथा प्रभव, प्रलय तथा स्थान बतलाया है । ( ७ ) वाक्यात् - महाभारत आदि ग्रन्थों के रचयिता के समान वाक्यभूत वेदों का भी कोई न कोई रचयिता अवश्य होगा । ( ८ ) संख्याविशेषात् - द्व्यणुक में परिणाम की उत्पत्ति परमाणु-गत परिमाण ( पारिमाण्डल्य ) से न होकर परमाणुगत संख्याद्वय से होती है, ऐसा नैयायिकों का सिद्धान्त है । यह द्वित्व संख्या अपेक्षाबुद्धि के द्वारा जन्य होती है जो चेतन व्यक्ति के ही द्वारा निष्पन्न हो सकती है। ऐसी स्थिति में व्यणुकों में संख्या की उत्पत्ति ईश्वर की सत्ता को सिद्ध कर रही है । ( ९ ) अदृष्टात्धर्म करने से पुण्य तथा अधर्म करने से पाप उत्पन्न होता है। धर्माधर्म का अपर नाम अदृष्ट है। अदृष्ट कर्मफल के उत्पादन में कारणभूत माने जाते हैं, परन्तु जड़ अदृष्ट में फलोत्पादन शक्ति बिना चेतन की प्रेरणा से सम्भव नहीं। अत अदृष्ट की फलवत्ता के लिए ईश्वर को मानना हो न्यायसंगत होगा । इन युक्तियों की सहायता से न्याय ईश्वर की सिद्धि स्वीकार करता है । ( ५ ) न्याय - आचारमीमांसा न्याय-वैशेषिक में आचार की सूक्ष्म मोमांसा बड़े विस्तार के साथ की गई है। विश्वनाथ ने मुक्तावली का० १४७ - १५० में इस विषय की समीक्षा १ इन युक्तियों को सक्षेप में उदयनाचार्य के न्यायकुसुमाञ्जलि (५१) के एक श्लोक में इस प्रकार प्रदर्शित किया है -- कार्यायोजन त्यादेः पदात् प्रत्ययतः श्रुतेः । वाक्यात् सख्या विशेषाच साध्यो विश्वविदव्ययः ॥ बड़े मार्मिक ढंग से की है। मनुष्य की प्रत्येक चिकीर्षा ( करने की इच्छा ) किसी विशेष प्रयोजन के ऊपर आश्रित रहती है। चिकीर्षा के तीन हेतु हैं-( १ ) कृतिसाध्यताज्ञान- इस बात का ज्ञान कि यह कार्य हमारे द्वारा साध्य हो सकता है; ( २ ) इष्टसाधनताज्ञान कार्य के करने से किसी अभिलषित वस्तु की सिद्धि का ज्ञान; ( ३ ) बलवदनिष्टाजनकताज्ञानबलवान् अनिष्ट के न उत्पन्न होने का ज्ञान । इन तीनों ज्ञानों की चिकीर्षा के प्रति हेतुता है, प्रथम दो भावात्मक हेतु और अन्तिम अभावात्मक हेतु है। समग्र प्रवृत्ति के मूल ये ही हैं। कार्य हमारे प्रयत्नों से साध्य हो सकता है, इसका ज्ञान नितान्त आवश्यक है। इस ज्ञान के अभाव में वर्षा की उत्पत्ति में अथवा चन्द्रमण्डल के आनयन में जीव की प्रवृत्ति नहीं होती। अभोष्ट की सिद्धि का ज्ञान भी उतना ही आवश्यक है। जब तक किसी भी अभिलषित पदार्थ की सिद्धि का ज्ञान हसे नहीं है, तब तक हमारी प्रवृत्ति हो नहीं सकती। तृप्त पुरुष के भोजन में अप्रवृत्ति का कारण यही है । बलवान् अनिष्ट की अनुत्पत्ति का बोध भी प्रवृत्ति उत्पन्न करने में साधक होता है। रोग से दूषितचित्त पुरुष विषभक्षण कर आत्महत्या इसीलिये कर लेता है कि उसे बलवान् अनिष्ट न उत्पन्न होने का ज्ञान रहता है। उपादान का प्रत्यक्ष होना भी इसी प्रकार हेतु होता है। संक्षेप में प्रवृत्ति के दो कारण है -- कार्यताज्ञान ( इस कार्य का करना हमारा कर्तव्य है, इसका ज्ञान ) तथा इष्टसाधनताज्ञान ( कार्य के करने से इष्ट वस्तु की उत्पत्ति का ज्ञान ) । प्रथम पक्ष प्राभाकरों का है। द्वितीय पक्ष नैयायिकों तथा भाट्टमतानुयायी मीमांसकों का । प्रवृत्ति के तीन कारण हैं-- राग ( सुख देने वाले पदार्थों में आसक्ति ), द्वेष ( प्रतिकूल वस्तुओं से विरक्ति ) तथा मोह ( वस्तु के यथार्थ रूप न जानने से मिथ्याध्यवसाय, वस्तुपरमार्था परिच्छेदलक्षणो मिथ्यावसायो मोह ) । ये तीन प्रवृत्ति के साक्षात्कारण है। ये तीनों विशिष्ट समुदाय के प्रतिनिधि हैं । अत गौतम ने ४।१।३ सूत्र में इनके सम्मिलित रूप को 'त्रैराश्य' कहा है। रागपक्ष में काम, मत्सर, स्पृहा, तृष्णा तथा लोभ की गणना है। द्वेषपक्ष में क्रोध, इर्ष्या, असूया, द्रोह, अमर्ष का तथा मोहपक्ष में मिथ्याज्ञान, विचिकित्सा (किं स्विदिति विमर्श = यह क्या है ? ऐसा विचार ), मान ( असद्गुणाध्यारोपेण स्वोत्कर्षंबुद्धिः = अविद्यमान गुणों की कल्पना कर अपने को उत्कृष्ट मानना = घमंड ), प्रमाद ( असावधानता ) का समावेश किया जाता है। प्राणीमात्र के समस्त प्रवृत्तियों का उदय इन्हीं कारणों से होता है। परन्तु राग द्वेष को उत्पादक होने से मोह की प्रवृत्ति में सब से अधिक हेतुता है। वात्स्यायन के द्वारा निर्दिष्ट पूर्वोक्त दोषों का विस्तृत वर्णन जयन्त भट्ट ने न्यायमञ्जरी ( प्रवर्तनालक्षण दोषा १११११८ ) में किया है। वचन, मन तथा शरीर के आरम्भ को प्रवृत्ति कहते हैं ( न्या० सू० १।१।१७ ) प्रवृत्ति दो प्रकार की होती है? - पापिका तथा पुण्या । कायिक, वाचिक तथा मानसिक भेद से ये दोनों तीन प्रकार के होते हैं। पूर्वोक्त दोषों के वश होकर प्राणी शरीर से अहिंसाम्तेयादि कर्मों को करता है, वचन से मिथ्या परुषादि वाक्यों का उच्चारण करता है, मन से परद्रोह, नास्तिक्य आदि करता है। यह पापात्मिका प्रवृत्ति अधर्म उत्पन्न करती है। शरीर से दान-परित्राणादि का, वचन से सत्य-हितादि का, मन से दयाश्रद्धादि का आचरण पुण्य प्रवृत्ति है जो धर्म की उत्पत्ति करती है। सूत्रकार के शब्दों में दुःख से अत्यन्त विमोक्ष को अपवर्ग कहते हैं ( तदत्यन्त विमोक्षोऽपवर्ग १।१।२२ ) । 'अत्यन्त' का अभिप्राय है कि उपात्त जन्म का परिहार, तथा अन्य जन्म का अनुत्पादन । गृहीत जन्म मुक्ति का नाश तो होना ही चाहिए, परन्तु भविष्य जन्म की नितरां अनुत्पत्ति भी उतनी ही आवश्यक है। इन दोनों की सिद्धि होने पर आत्मा १ द्रष्टव्य न्यायभाष्य १/१/२; न्यायमञ्जरी न्या० सू० ११ ११७ । का दुःख से आत्यन्तिकी निवृत्ति सम्पन्न होती है। जब तक वासनादि आत्मगुणों का उच्छेद सिद्ध नहीं होता, तब तक दुःख की आत्यन्तिकी निवृत्ति नहीं हो सकती। इसलिए मुक्तावस्था में आत्मा के नवों विशेषगुणों-बुद्धि, सुख, दुख, इच्छा, द्वेष, प्रयत्न, धर्म, अधर्म तथा संस्कारका मूलोच्छेद हो जाता है। धर्म तथा अधर्म के कारण ही सुख और दुःख की उत्पत्ति होती है। अतः ये दोनों संसाररूपी प्रासाद के स्तम्भरूप हैं। इन गुणों के उच्छेद होने से शरीरादि कार्यों का अनुत्पाद हो जाता है। भोगायतन शरीर के अभाव में इच्छा, द्वेष, प्रयत्नादिकों के साथ आत्मा का सम्बन्ध कथमपि सिद्ध नहीं होता। अतः मुक्तावस्था में आत्मा के विशेषगुणों का अत्यन्ताभाव अंगीकार करना सोपपत्तिक है । मुक्त आत्मा के स्वरूप का सुन्दर परिचय न्यायमञ्जरी ( पृ० ७७ ) में दिया गया है - स्वरूपैकप्रतिष्ठान परित्यक्तोऽखिलैर्गुणैः । ऊर्मिषटकातिगं रूपं तदस्या हुर्मनीषिण. । संसारबन्धनाधीनदुःखकेशाद्यदूषितम् ॥ अर्थात् मुक्त दशा में आत्मा अपने विशुद्ध स्वरूप में प्रतिष्ठित और अखिल गुणों से विरहित रहता है । 'ऊर्मि' का अर्थ क्लेश विशेष है। भूख प्यास प्राण के, लोभमोह चित्त के, शीत आतप शरीर के कुशदायक होने से ऊर्मि कहे जाते हैं। मुक्त आत्मा इन छ ऊमियों के प्रभाव को पार कर लेता है और दुःख कुशादि सांसारिक बन्धनों से वह विमुक्त हो जाता है । मुक्त आत्मा में सुख का भी अभाव रहता है। अतः मुक्तावस्था में आनन्दोपलब्धि नहीं होती। इस सिद्धान्त का मण्डन नैयायिकों ने बढ़े आग्रह के साथ किया है । वेदान्तियों का मत इसके ठीक विपरीत पड़ता । इसका खण्डन जयन्त भट्ट ने बड़े विस्तार के साथ किया है १] द्रव्य १ । १ । २२ सूत्र पर न्यायभाष्य और वार्तिक । ( पृ० ७८ - ८१ )। उनके कथन का सारांश यह है कि सुख के साथ राग का सम्बन्ध लगा हुआ है और यह राग बन्धन का साधन है । अतः मोक्ष को सुखात्मक मानने में बन्धन की निवृत्ति कथमपि हो नहीं सकती। 'आनन्दं ब्रह्म' आदि आनन्द बोधक वाक्यों का तात्पर्य दुःखापाय-बोधन में ही है । ज्वर या शिरःपीदादि-व्याधि-दुःखों के निवृत्त हो जाने पर सुखी होने की कल्पना लोक व्यवहार में भी न्याय्य मानी जाती है। उद्योतकर ने दो प्रकार का निःश्रेयस माना है' - अपरनिःश्रेयस तथा परनिःश्रेयस । तत्वज्ञान ही इन दोनों का कारण है। जीवन्मुक्ति को अपरनिःश्रेयस कह सकते हैं, पर निःश्रेयस विदेहमुक्ति है । वाचस्पति ने तात्पर्य टोका ( पृ० ८०-८१) में इन दोनों का अन्तर विस्तार से विवेचन किया है। आत्मा के विषय में चार प्रतिपत्तियाँ हैं - श्रवण, मनन, ध्यान तथा साक्षात्कार । आन्वीक्षिकी का उपयोग संशयादितत्त्व तथा प्रमाणतत्त्व के बोधन में होता है, परन्तु मनन से भी सद्योरूप से साक्षात्कार का उदय नहीं होता, क्योंकि विपर्यय ज्ञान के नाश हो जाने पर भी उसकी वासना का उपक्षय नहीं होता । ध्यान आत्मसाक्षात्कार के लिए नितरां उपादेय है। बिना योगज-ध्यान के आत्मतत्व की अपरोक्ष अनुभूति उत्पन्न नहीं होती। चतुर्थी प्रतीति पाने वाले पुरुष को जीवन्मुक्त कहते हैं। परन्तु प्रारब्धकर्मों का सम्बन्ध तब तक भी लगा ही रहता है। इनकी भी उपभोग से जब क्षीणता हो जाती है, तभी परनिःश्रेयस का उदय होता है ( परं निःश्रेयसं न तावद् भवति यावत् उपभोगादुपात्तकर्माशयप्रचयो न क्षीयते । तस्मात् तत्त्वसाक्षात्काराधानप्रयत्नात् परः तदुपभोगप्रयत्नश्चास्थेय तथा च न तुल्यकाल उत्पादः परापरयोनिश्रयसयो - तात्पर्यटीका पृ० ८१ ) । १ निश्रयसस्य परापरभेदात् । यत्तावदपरं निःश्रेयसं तत् तत्त्वज्ञानान्तरमेव भवति । X x परं च नि. श्रेयसं तत्त्वज्ञानात् क्रमेण भवति - न्यायवार्तिक १।११ । मुक्ति के साधनों का विचार करना अब आवश्यक है। गौतम ने दु स्वजन्मप्रवृत्तिदोषमिथ्याज्ञानानामुत्तरोत्तशपाये तदन्तराभावात् अपवर्गः ( १ । ११२ ) सूत्र में मोक्षमार्ग के स्वरूप का परिचय दिया है। मिथ्याज्ञान से रागद्वेषादि दोषों का सद्भाव होता है, उनसे शुभा या अशुभा प्रवृत्ति का उदय होता है जिससे शरीर धारण करना पड़ता है। जन्म देने से प्रतिकूल संवेदनात्मक दुःखों की उत्पत्ति होती है। मिथ्याज्ञान आदि का अविच्छेदेन प्रवर्तमान होना संसार है । इस संसारोच्छेद के लिए कारणभूत मिथ्याज्ञान का समुच्छेद नितान्त स्पृहणीय है। मिथ्याज्ञान का धंस होता है तत्व ज्ञान से । अतः आत्मस्वरूप विषयक तत्त्वज्ञान से ही दुखात्यन्तनिवृत्तिरूप अपवर्ग की सिद्धि होती है। जयन्तभट्ट ने न्यायमञ्जरी ( पृ० ८९-९१ ) में कर्मज्ञानसमुच्चयवाद का विशदरूपेण खण्डन कर ज्ञान की ही उपयोगिता पर जोर दिया है। परन्तु तत्वज्ञान से आत्मसाक्षात्कार को सिद्धि के लिए ध्यान धारणादि योग प्रसिद्ध उपायों का अवलम्बन नितरां श्रेयस्कर है । गौतम ने ने 'तदर्थं यमनियमाभ्यामात्मसंस्कारो योगाच्चाध्यात्मविध्युपायै.' ( न्या० सू० ४।२।४६ ) सूत्र में प्राणायाम आदि उपायों के आश्रय लेने की बात स्पष्टाक्षरों में प्रतिपादित की है 1 न्यायदर्शन की भारतीय दर्शन साहित्य को सबसे अमूल्य देन है शास्त्रीय विवेचनात्मक पद्धति । प्रमाण की विस्तृत व्याख्या तथा विवेचना कर न्याय ने जिन तत्त्वों को खोज निकाला है, उनका उपयोग अन्य दर्शन भी कतिपय परिवर्तन के साथ अपने विवरणों में निश्चय रूप से करते हैं । हेत्वाभासों का सूक्ष्म विवरण प्रस्तुत कर न्याय ने अनुमान को दोषनिर्मुक्त बनाने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। इस पर कलिकाल सर्वज्ञ आचार्य हेमचन्द्र का यह कथन है कि गौतम मुनि को अपने दर्शन में अपवर्ग के साधक तत्त्वज्ञान का वर्णन करना उचित था, परन्तु इसके विपरीत उन्होंने छल वितण्डा जाति आदि का वर्णन करके परममं के भेदन में अपने अमूल्य समय को व्यर्थ बिताया। परन्तु वस्तुस्थिति ऐसी नहीं है, क्योंकि इनका उपयोग परममं के भेदन में ही नहीं किया जाता है। सूत्रकार ने स्वयं जल्पवितण्डा को तत्वाध्यवसाय के रक्षणार्थ उसी प्रकार उपयोगी माना जिस प्रकार कण्टक- शाखा का आवरण बीज के अङ्कुरों की रक्षा करता न्या० सू० ४/२/५० 1 अत. इनका उपयोग विनाशात्मक न होकर रचनात्मक है। इनके अभाव में सूक्ष्ममति नास्तिकों की अपातत रमणीय युक्तियों से प्रतारित होकर साधारण मनुष्य न जाने कब का उन्मार्ग का पथिक बन गया होता। अतः इनके वर्णन करने में गौतम की निसर्ग-निर्मल करुणावृत्ति झलकती हुई दोख पड़ती है । परन्तु न्यायदर्शन की तर्कपद्धति जितनी सन्तोषजनक है, उतना सन्तोषदायक उसका तत्त्वज्ञान नहीं है। न्याय ने इस जगत् को ज्ञान से पृथक एक स्वतन्त्र सत्तात्मक वस्तु बतलाया है तथा उसमें अनेक नित्य पदार्थों की कल्पना की है। आत्मा के अतिरिक्त परमाणु, मन, आकाश, काल तथा दिक सब नित्य माने जाते हैं। इस दृष्टि से जगत् की व्याख्या करने में अनेक त्रुटियाँ परिलक्षित होती हैं । न्याय की व्याख्या में इतने नित्य पदार्थों के अस्तित्व मानने के लिए कोई औचित्य नहीं प्रतीत होता । १ द्रष्टव्य अन्ययोग-व्यवच्छेदद्वात्रिंशिका, श्लोक १०. २ दुः शिक्षित कुतर्काश-लेश- वाचालिताननाः । शक्याः किमन्यथा जेतुं वितण्डाटोपपण्डिताः ॥ गतानुगतिको लोकः कुमार्ग तत् प्रतारितः । मागादिति च्छलादीनि प्राइ कारुणिको मुनिः ॥ न्यायमज्जरी ( पृ० ११ ) सञ्चा दर्शन वही हो सकता है जिसमें एक नित्य पदार्थ की सत्ता मानकर समस्त पदार्थों का सम्बन्ध उसीसे प्रदर्शित किया जाय तथा सद्वस्तु के एकत्व पर ज़ोर दिया जाय। इस सिद्धान्त के अनङ्गोकार करने से न्याय में अनेक दोष दृष्टिगत होते हैं । ईश्वर को निमित्तकारणरूप से जगत् का स्रष्टा बतलाकर न्यायदर्शन ने उसमें मानवीय भावों की कमजोरियों को उपस्थित कर दिया है। नैयायिक ईश्वर लौकिक कर्ता के अनुरूप कल्पित किया है। जिस प्रकार बढ़ई अपने हथियारों से काठ को काट पीट कर कुरसी, टेबुल आदि बनाया करता है और जिस प्रकार दूकान में बैठा हुआ लोहार लोहे से तरह तरह के सामान बनाया करता है, ठीक उसी प्रकार ईश्वर परमाणुओं से जगत् की सृष्टि किया करता है। वह इस सृष्टिकार्य के लिए उपादान कारणों के ऊपर अवलम्बित रहता है। उपादानों को सत्ता पर अवलम्बित रहनेवाला ईश्वर किस प्रकार सर्वशक्तिमान् तथा परमस्वतन्त्र माना जा सकता है ? वेदान्त ने ईश्वर को जगत् का उपादान तथा निमित्तकारण दोनों मानकर इस अनुपपत्ति को दूर कर दिया है, परन्तु न्याय में इस अनुपपत्ति का निरास कथमपि नहीं किया जा सकता । न्याय ने आत्मा के स्वरूप को स्वतन्त्रता दिखलाकर तथा उसे शरीर और इन्द्रियों से पृथक स्थायी नित्य पदार्थ प्रमाणित कर चार्वाक तथा बौद्ध के सिद्धान्तों का युक्तियुक्त खण्डन किया है तथा आत्मा को स्वतन्त्रता भली प्रकार प्रदर्शित की है, परन्तु मुक्त आत्मा की जो कल्पना की है, वह दार्शनिकों के प्रबल खण्डन का विषय है। नैयायिक मुक्ति का सिद्धान्त अन्य दार्शनिकों के कौतुकावह कटाक्ष का विषय है - मुक्तावस्था में समस्त अज्ञानावरणों से विमुक्त आत्मा में नित्य आनन्द को मानने वाले वेदान्ती श्रोहर्षं ने नैषधचरित में नैयायिक मुक्ति की जो दिल्लगो उड़ाई है है वह पण्डितसमाज में अपनी रोचकता के कारण नितान्त प्रसिद्ध है। उनका कथन है कि जिन सूत्रकार ने सचेता पुरुषों के लिए ज्ञानसुखादि विरहित शिलारूप प्राप्ति को जोवन का परम लक्ष्य बतलाकर उपदेश दिया है उनका अभिधान गोतम शब्दतः ही यथार्थं नहीं है, अपितु अर्थतः भी । वह केवल गो ( बैल ) न होकर गोतम ( अतिशयेन गौ. - गोतमः ) पक्का बैल है । वैष्णव दार्शनिकों ने भी इसीलिए नैयायिकों के ऊपर फबतियाँ सुनाई हैं। मुक्तावस्था में आनन्दधाम गोलोक तथा नित्यवृन्दावन में सरस विहार करने की व्यवस्था बतलाने वाले वैष्णव लोग इस नीरस मुक्ति की कल्पना से घबरा उठते हैं और भक्तभावुक हृदय से पुकार उठते हैं कि वृन्दावन के सरस निकुंजों में शृगाल बन कर जीवन बिताना हमें मंजूर है, परन्तु हम लोग वैशेषिक मुक्ति को पाने के लिए कथमपि इच्छुक नहीं हैं । १ मुक्तये यः शिलात्वाय शास्त्रमूचे सचेतसाम् । गोतमं तमवेक्ष्येव यथा वित्थ तथैव सः ॥ -नैषधचरित १७ । ७५ । २ वरं वृन्दावने रम्ये शृगालत्वं वृणोम्यहम् । वैशेषिकोक्तमोक्षातु सुखलेशविवर्जितात् ॥ अष्टम परिच्छेद वैशेषिक दर्शन पण्डित मण्डली में एक सुप्रसिद्ध कहावत प्रचलित है - काणादं पाणिनीयं च सर्वंशास्त्रोपकारकम् । शब्द के यथार्थं निर्णय में पाणिनीय व्याकरण के समान पदार्थों के स्वरूप निर्णय में वैशेषिक दर्शन अत्यन्त उपादेय है। इस दर्शन का नाम वैशेषिक, काणाद तथा औलूक्य दर्शन है । अन्तिम दोनों नाम इसके आद्य प्रवर्तक उलूक ऋषि के पुत्र महर्षि कणाद के नाम पर दिये गये हैं, पर 'वैशेषिक' नाम का रहस्य क्या है ? इसके रहस्य को विद्वानों ने भिन्न भिन्न रूप से बतलाया है। चीनदेशीय दार्शनिक चिस्तान ( ५४९ - ६२३ ई० ) तथा कहेइची ( ६२३-६८२ ई० ) के द्वारा संगृहीत एक प्राचीन परम्परा के अनुसार कणाद सूत्रों का 'वैशेषिक' नामकरण अन्यदर्शनों से, विशेषतः सांख्यदर्शन से, विशिष्ट अर्थात् अधिकयुक्तियुक्त होने के कारण किया गया था ? । पर भारतीय विद्वन्मण्डली के अनुसार 'विशेष' नामक पदार्थ की विशिष्ट कल्पना करने के कारण कणाद दर्शन को 'वैशेषिक' संज्ञा प्राप्त हुई है (व्या० मा० ११४९) । वैशेषिक दर्शन की उत्पत्ति कब हुई ? बौद्ध ग्रन्थों में ( मिलिन्द प्रश्न, लंकावतार-सूत्र, ललितविस्तर आदि ) वैशेषिक दर्शन का नामोल्लेख पाया जाता है; इन ग्रन्थों में न्याय सिद्धान्तों को भी वैशेषिक नाम से ही स्मरण किया है। सांख्य तथा वैशेषिक मतों को बुद्ध से पूर्वकालीन मानने में बौद्ध सम्प्रदाय की एकवाक्यता दीख पड़ती है। जैन तत्त्व- समीक्षा सम्भवत १ द्रष्टव्य डा० उई ( Dr. Ui ) - वैशेषिक फ़िलासफ़ी पृ० ३-७१ वैशेषिक पदार्थों की कल्पना पर आश्रित है। अतः वैशेषिक दर्शन जैन तथा बौद्ध दोनों से प्राचीनतर प्रतीत होता है। (१) वैशेषिक दर्शन के आचार्य इस दर्शन के सूत्रकार महर्षि कणाद हैं । त्रिकाण्डशेष कोष में इनका के दूसरा नाम 'काश्यप' मिलता है तथा किरणावली में उदयनाचार्य ने इन्हें कश्यप मुनि का पुत्र बतलाया है। अतः इनके 'काश्यप' गोत्र नाम होने में सन्देह नहीं है । श्रोहर्षं ने नैषध (२२१३६) में कणाददर्शन को औलूक संज्ञा दी है । वायुपुराण में कणाद प्रभास निवासी सोमशर्मा के शिष्य और शिव के अवतार बतलाये गये हैं । अतः कणाद मुनि काश्यप गोत्री, सोमशर्मा के शिष्य तथा उलूक मुनि के पुत्र वैशेषिक सूत्रों की संख्या ३७० है और वे १० अध्यायों में विभक्त हैं और प्रत्येक अध्याय में दो आह्निक है। प्रथम अध्याय के प्रथम आह्निक में द्रव्य, गुण तथा कर्म के लक्षण तथा विभाग का, दूसरे आह्निक में 'सामान्य' का, दूसरे तथा तीसरे अध्यायों में नव द्रव्यों का, चतुर्थ अध्याय के प्रथमाह्निक में परमाणुवाद का तथा द्वितीयाहिक में अनित्यद्रव्य विभाग का, पञ्चम अध्याय में कर्म का, पष्ठ अध्याय में वेदप्रामाण्य के विचार के बाद धर्माधर्म का, ७ व तथा ८ वें अध्याय में कतिपय गुणों का, ९ वें अध्याय में अभाव तथा ज्ञान का, १०व में सुख-दुख-विभेद तथा त्रिविध कारणों का वर्णन किया गया है। न्यायसूत्रों से तुलना करने पर वैशेषिक सूत्र प्राचीन ठहरते हैं। इनका रचनाकाल तृतीय शतक विक्रम पूर्व है । १ न्यायकन्दली की म. म. विन्ध्येश्वरीप्रसाद द्विवेदी की प्रस्तावना पृ० ७-१०। १ द्रष्टव्य बोडस - तर्कसंग्रह की प्रस्तावना पृ० ४० । कुप्पुस्खामीप्राइमर आफ इंडियन लाजिक प्रस्तावना पृ० (३०) । ब्रह्मसूत्र २।२।११ के शाङ्करभाष्य को रत्नप्रभा टीका में तथा अन्यत्र कई स्थलों में वैशेषिकसूत्रों के ऊपर 'रावणभाष्य' का उल्लेख किया गया मिलता है, पर यह भाष्य आजकल उपलब्ध नहीं है । भारद्वाज वृत्ति नितान्त प्राचीन प्रतीत होती है। पं० जयनारारायण ने विवृत्ति रचकर तथा महामहोपाध्याय पण्डित चन्द्रकान्त तर्कालङ्कार ने भाग्य का निर्माण कर इन सूत्रों के यथार्थ अर्थ के समझने में हमारा बड़ा उपकार किया है । प्रशस्तपाद - प्रशस्तपाद का पदार्थ-धर्म-संग्रह' वैशेषिकतत्त्वों के निरूपण के लिए नितान्त मौलिक ग्रन्थ है। साधारण रोति से इसे भाग्य कहते हैं पर यह सूत्रस्थ पदों के उल्लेखपूर्वक उक्तानुक्तिचिन्तासमन्वित प्रबन्ध नहीं है । इसमें तो ग्रन्थकार ने केवल वैशेषिक सिद्धान्तों के ऊपर अपने स्वतन्त्र विचारों को प्रामाणिक रूप से प्रतिपादित किया है । सूत्र के बाद इस दर्शन के इतिहास में सर्वमान्य प्रामाणिक ग्रन्थ यही प्रशस्तपाद भाष्य है। इसमें विशेषतः परमाणुवाद, जगत् की उत्पत्ति तथा प्रलय, प्रमाण तथा गुणों का विस्तृत विवेचन उपस्थित किया गया है बसुबन्धु के द्वारा इनके सिद्धान्तों के खण्डन किये जाने और न्याय-भाध्य में इनके सिद्धान्तों के उपयोग किये जाने से इन्हें वात्स्यायन और से बसुबन्धु प्राचीन द्वितीय शतक में होना न्यायसंगत प्रतीत होता है । प्रशस्तपादभाष्य के आधार पर 'चन्द्र' नामक किसी आचार्य ने दशपदार्थी शास्त्र की रचना की जिसमें द्रव्य, गुण, कर्म, सामान्य, समवाय तथा विशेष - इन पट पदार्थों के अतिरिक्त शक्ति, अशक्ति, सामान्य विशेष तथा अभाव ये चार नवीन पदार्थ स्वीकृत किये गये हैं। चन्द्र सप्तम शताब्दी से पहले के ही होंगे, क्योंकि इसका अनुवाद ६४८ ई० में चीन भाषा में किया गया उपलब्ध होता है जिसका अंग्रेजी अनुवाद जापानी विद्वान् डा० उई ने किया है १ आचार्य ध्रुव - न्यायप्रवेश की प्रस्तावना पृ० १८ ।
थी । वात्स्यायन ने पूर्वोक्त पाँच वाक्यों के अतिरिक्त निम्नलिखित पाँच वाक्यों को भी माननेवाले नैयायिकों का उल्लेख किया है । वे वाक्य ये हैं - जिज्ञासा, संशय, शक्यप्राप्ति, प्रयोजन, संशय व्युदास । भाष्यकार के मन्तव्यानुसार इनकी नितान्त आवश्य कता अनुमान के लिए न होने से इनका उल्लेख नहीं किया जाता। ये सिद्धि के लिए सहायकमात्र हैं, अत इनका वर्णन 'न्याय' में नहीं किया जाता । अब इसकी विशेषता पर दृष्टिपात करना आवश्यक है। यह पञ्चावयव वाक्य मनोवैज्ञानिक आधार पर अवलम्बित है। पाश्चात्य न्याय में डिडक्शन और इन्डक्शन भेद कर तर्क दो प्रकार का माना जाता है, पर भारतीय न्याय में इन दोनों का श्लाघनीय सम्मेलन किया गया मिलता है। व्याप्य और व्यापक के नियत सम्बन्ध पर ही अनुमान की पूरी इमारत खडी रहती है। इसी व्याप्ति की सूचना उदाहरण वाक्य की विशेषता है। चतुर्थ वाक्य उपनय या परामर्श वाक्य को अपनी खास विशिष्टता है। बिना परामर्श के अनुमान नहीं हो सकता । अनुमान के लिए व्याप्तिज्ञान की ही आवश्यकता नहीं, प्रत्युत उस व्याप्ति का प में रहना भी उतना ही आवश्यक है । अतः व्याप्य हेतु का पक्षधर्म होना परामर्श माना जाता है। केवल धूमवान् होने से पर्वत की अग्निमत्ता अनुमित नहीं हो सकती, जब तक धूम और अग्नि की व्याप्ति का ज्ञान न हो और इस प्रकार वह्नि व्याप्य धूम का ज्ञान पर्वत में न हो । निगमन हेतु-द्वारा सिद्ध प्रतिज्ञा का उल्लेख करता है। जिसकी प्रतिज्ञा आरम्भ में की गई थी वही हेतु द्वारा सिद्ध कर दिया गया है, यही निगमन वाक्य प्रदर्शित करता है। अनुमान प्रक्रिया में व्याप्ति का स्थान अत्यन्त महत्व का है। इसलिए भारतीय दार्शनिकों ने, विशेषतया नैयायिकों ने व्याप्ति की आलोचना करने में इतनी कुशाग्र बुद्धि का परिचय दिया है कि वह दार्शनिक जगत् में एक आश्चर्यजनक व्यापार स्वीकार किया जाता है। व्याप्ति के लक्षण के विषय में पर्याप्त विवेचना नव्यन्याय के ग्रन्थों में की गई है। हेनु तथा साध्य के नियत साहचर्य सम्बन्ध को व्याप्ति कहते हैं। दो वस्तुओं के एक साथ विद्यमान होने से ही उनमें व्याप्ति की कल्पना हम तब तक नहीं कर सकते जब तक हमें उनके सदा नियम से एकत्र रहने की सूचना न मिले । 'जहाँ धूम है वहाँ अग्नि है इस साहचर्य को सत्ता हम नियतरूप से पाते है, अतः धूम तथा वाह्न की व्याप्ति न्यायसंगत प्रतीत होती है। इसीलिए व्याप्ति को प्राचीन ग्रन्थों में 'अविनाभाव' के नाम से पुकारते थे । अविनाभाव जो वस्तु जिसके बिना विद्यमान न रह सके उनका सम्बन्ध है। धूम को सत्ता तभी है जब वह्नि के साथ उसका सम्बन्ध स्वीकार किया जाता है । व्याप्ति धूम तथा वह्नि के साथ सम्पन्न होती है, परन्तु वह्नि तथा धूम के साथ व्याप्ति कथमपि सिद्ध नहीं होती। क्योंकि वह्नि के स्थलों में धूम की सार्वत्रिक विद्यमानता उपलब्ध नहीं होतो । उदाहरणार्थं अयोगोलक पिण्ड में अग्नि के रहने पर भी धूम नहीं दीख ) पड़ता । अग्नि के साथ धूम का सम्बन्ध तभी सिद्ध हो सकता है जब गोली लकड़ी का उपयोग जलाने के लिए किया जाय । इस आद्वेन्धनसंयोग को न्यायशास्त्र में 'उपाधि' कहते है। व्याप्ति के लिए उपाधि का अभाव नितान्त आवश्यक है । अतः हेतु और साध्य के नियत और अनौपाधिक सम्बन्ध को व्याप्ति के नाम से पुकारते हैं । कतिपय मनुष्यों में मरणधर्मस्व की सत्ता को देखकर समस्त मानवों में उस धर्म की विद्यमानता को मान बैठना कहाँ को बुद्धिमत्ता है ? ऐसी सार्वत्रिक व्याप्ति की स्थिति किस प्रकार प्रमाण-प्रतिपन्न मानी जा सकती है ? इसका उत्तर दार्शनिकों ने भिन्न-भिन्न रूप से दिया है। बौद्ध नैयाबिकों ने व्याप्ति के निषेधात्मक पक्ष पर विशेषरूप से जोर दिया है यथा साध्य के अभाव में हेतु को अनुपलब्धि। उनके मतानुसार अविनाभाव का प्रत्येक दृष्टान्त हेतु तथा साध्य के नियत सम्बन्ध को सूचित करता है । यह सम्बन्ध तादात्म्य अथवा तदुत्पत्ति पर अवलम्बित रहता है । वेदान्तियों के मन्तव्यानुसार व्याप्ति साहचर्यावलोकन पर अवलम्बित रहती है। दो वस्तु यदि एक साथ सदा रहती है तथा इसके विपरीत कोई भी दृष्टान्त हमारी दृष्टि में न आया हो तो वेदान्त के अनुसार उनमें व्याप्ति सम्बन्ध माना जा सकता है । नैयायिक लोग व्याप्ति की प्रमाणिकता के विषय में वेदान्तियों के मत को स्वीकार करते हैं कि अनुभव को एकरूपता व्याप्ति को तथ्य सिद्ध कर सकती है परन्तु अन्वय, व्यतिरेक, व्यभिचाराग्रह, उपाधिनिरास, तर्क और सामान्यलक्षणप्रत्यासत्ति- इन साधनों के प्रयोग करने से ही व्याप्ति के तथ्य का यथार्थ परीक्षण किया जा सकता है । व्याप्ति की सिद्धि करने के लिए पहली बात आवश्यक है - अन्वय । 'तत्सत्वे तत्सत्ता अन्वय' । एक वस्तु की सत्ता होने पर दूसरी की सत्ता होना अन्वय कहलाता है यथा धूम को सत्ता होने पर वह्नि को सत्ता । दूसरा साधन व्यतिरेक है- "तदभावे तदभावो व्यतिरेक "। एक वस्तु के अभाव में दूसरी वस्तु का अभाव हो, यथा वह्नि के अभावस्थलों पर धूम का अभाव । दोनों में किसी प्रकार का व्यभिचार न होना चाहिए । व्यभिचाराग्रह ) । इतने साधनों के होने पर भी व्याप्ति की सिद्धि नहीं होती जब तक उपाधि का निरास न किया जाय । अनुकूल तक इसका पाँचवा सहायक साधन है । धूम तथा वह्नि की व्याप्ति के लिए तर्क की अनुकूलता है कि यदि पर्वत में वह्नि न होता, तो धूम भी नहीं होता पर धूम की सत्ता प्रत्यक्ष प्रमाण से निष्पन्न है । अतः तर्क दोनों के साहचर्य का द्योतक है। इतने पर भी सन्देह के लिए स्थान है, पर अन्तिम साधन से उसका सर्वथा निरास किया जाता है। इतना तो निश्चित है कि समग्र मानवों के परीक्षण का अवसर हमें न मिल सकता है और न यह साध्य ही है तथापि सामान्यलक्षणा प्रत्यासत्ति के द्वारा हम मानवता तथा मरणशीलता के पारस्परिक सम्बन्ध को सिद्ध मानकर समग्र मनुष्यों को मरणशील बताने के अधिकारी हो सकते हैं। इतने उपायों से इस प्रकार प्रामाणित होने से ही व्याप्ति की सत्यता मानने में कथमपि संकोच न होना चाहिए । तर्क का जो लक्षण ऊपर दिया गया है, वह 'अविज्ञाततत्त्वेऽर्थे कारणोपपत्तितस्तत्व-ज्ञानार्थमूहस्तर्क : ' न्याशून्य सूशून्य एक लाख ग्यारह हज़ार एक सौ चालीस के आधार पर है । अन्नंभट्ट ने इसका लक्षण 'व्याप्यारोपेण व्यापकारोपस्तर्कः' किया है अर्थात् व्याप्य के आरोप से व्यापक का आरोप करना । पर्वत में अग्न्यभाव मानने से उसे धूभाभाववान् भी मानना पड़ेगा, जो वास्तव में वह नहीं है । अतः तर्क अप्रमा का एक भेद माना जाता है। प्राचीन नैयायिक तर्क के ग्यारह प्रकार मानते है परन्तु नव्य नैयायिक केवल पाँच प्रकार - आत्माश्रय, अन्योन्याश्रय, चक्रक, अनवस्था तथा तदन्यबाधितार्थप्रसंग । तत्वज्ञान के साधन में तर्क की उपादेयता सर्वत्र स्वीकृत की गई है। पाश्चात्य जगत् में न्याय की रूपरेखा ग्रीक दार्शनिक अरस्तू ने निश्चित की थी । कतिपय परिवर्तनों के साथ उनकी उद्भावित शैली तथा सिद्धान्तों का अनुगमन आज भी पश्चिमी तर्क करता है। उनके अनुमान एक द्रष्टव्य चिन्तामणि का व्याप्तिग्रहोपाय प्रकरण तथा भाषा-परिच्छेद काशून्य एक सौ सैंतीस की मुक्तावली । वाक्य के साथ 'न्याय' की तुलना अत्यन्त शिक्षाप्रद है। पाश्चात्य अनुमान में आकारगत सत्यता को ही उपलब्धि होती है, तात्त्विक सत्यता की आवश्यकता नहीं मानी जाती, परन्तु भारतीय अनुमान में दोनों प्रकार की सत्यताओं का होना अनिवार्य रहता है। पश्चिमी तार्किक वाक्य तोन प्रकार के होते हैं- निरपेक्षवाक्य , काल्पनिक , वैकल्पिक , परन्तु भारतीय तार्किक वाक्य केवल प्रथम प्रकार का ही होता है। पश्चिमी न्याय में केवल तीन वाक्यों से अनुमान की पूरी प्रक्रिया निष्पन्न होती है साध्यवाक्य , पक्षवाक्य तथा फलवाक्य , परन्तु भारतीय न्यायशास्त्र में पाँच वाक्यों का प्रयोग किया जाता है। पश्चिमी न्याय में अनुमान कभी भावात्मक, कभी अभावात्मक, कभी पूर्ण व्यापी और कभी अंशव्यापी होकर विविधरूप धारण करता है, परन्तु भारतीय न्याय-वाक्य ) पूर्ण व्यापी भावात्मक एक ही प्रकार का होता है। परन्तु सबसे महान् अन्तर भारतीय न्याय में परामर्श की स्थिति से है। पश्चिमी न्याय में प्रथम दोनों वाक्यों का समन्वयात्मक वाक्य नहीं होता, परन्तु भारतीयन्याय में हेतु वाक्य और उदाहरण का एकीकरणात्मकरूप उपनय को सत्ता नितान्त आवश्यक है, वास्तव में परामर्शज्ञान से हो अनुमिति का उदय होता है। यहाँ हेतु के अत्यन्त महत्त्वपूर्ण होने से समस्त दोष हेतु के आभास पर अवलम्बित रहते हैं, परन्तु पश्चिमो न्याय में पक्षाभास तथा साध्याभास नामक दोपों की भी सत्ता स्वीकृत की गई है । परार्थानुभेद और स्वार्थानमान प्रकार भी पश्चिमी जगत् में उपलब्ध नहीं होते। मोटे तौर से दोनों में ये स्फुट प्रतीयमान विभेद हैं । हेतु के द्वारा हो अनुमान की सिद्धि होती हैं। अतः हेतु के निर्दोषता के विषय में नैयायिकों का विशेष आग्रह रहता है। हेतु में पाँच गुणों के होने पर वह सत्-हेतु कहा जाता है - पक्षे सत्ता सपक्षे सत्ता ; विपक्षाद् व्यावृत्तिः ; असत्प्रतिपक्षत्वम् अबाधितविषयत्व । अनुमान की सत्यता हेतु के इन गुणों पर अवलम्बित रहती है। यदि इन गुणों में से किसी में त्रुटि लक्षित होती है तब सत् हेतु न होकर हेतु का आभास मात्र रहता है अर्थात् आपाततः हेतु में निर्दुष्टता लक्षित होती है, पर वास्तव में वह दोष से संवलित रहता है। इसे ही 'हेत्वाभास' कहते हैं। बौद्ध न्याय में इनके अतिरिक्त पक्ष और दृष्टान्त के दोषों का भी विस्तृत विवेचन किया गया मिलता है । हेत्वाभास के नाम इस प्रकार हैंदो सौ उनसठ सव्यभिचार , विरुद्ध, प्रकरणसम , साध्यसम , कालातीत । सव्यभिचार हेतु साध्य के साथ भी रहता है तथा उससे पृथक् इसके तीन प्रकारों में साधारण हेत्वाभास में हेतु साध्य तथा साध्याभाव दोनों में विद्यमान रहता है । असाधारण में हेतु पक्ष में ही निश्चित रहता है, इसके लिए सपक्ष तथा विपक्ष दृष्टान्त का अभाव रहता है । अन्वय तथा व्यतिरेक दृष्टान्त से रहित हेतु अनुपसंहारी कहलाता है। विरुद्ध हेत्वाभास में हेतु साध्याभाव से व्याप्त रहता है तथा सत्प्रतिपक्ष में उस साध्य के अभाव को सिद्ध करनेवाला दूसरा हेतु विद्यमान रहता है। असिद्ध तीन प्रकार का होता है - आश्रयासिद्ध , स्वरूपासिद्ध , व्याप्यत्वासिद्ध । बाधित हेत्वाभास में साध्य का अभाव अनुमान से इतर प्रमाणो से सिद्ध रहता है । अतः साध्य की सिद्धि के लिए अनुमान के प्रयोग करने से कोई लाभ नहीं प्रतीत होता । संक्षेप में हेत्वाभासों का यही सामान्य परिचय है । उपमान उपमान नैयायिकों का तीसरा प्रमाण है। पहिले अनुभूत किसी वस्तु के साथ सादृश्य धारण करने के कारण जहाँ किसी नई वस्तु का ज्ञान उत्पन्न होता है, उसे 'उपमान' कहते हैं। "गो के सदृश गवय होता है" इस वाक्य के श्रवणानन्तर जंगल में जानेवाला पुरुष जब गो की समानतावाले पशु को देखकर उसे 'गवय' पद का वाच्य समझता है तब इस ज्ञान का अनुभव उसे 'उपमान' के द्वारा होता है। अत उपमान में वस्तुद्वय का सादृश्य-ज्ञान करण है तथा 'गवय गो के समान होता है' इस वाक्य का स्मरण सहकारी कारण है । सादृश्य कई प्रकार का हो सकता है - 'एकान्त सादृश्य' एक गाय का दूसरी गाय के साथ; 'कतिपयांश में सादृश्य' गाय का सादृश्य भैंस के साथ तथा 'आंशिक' सादृश्य मेरु तथा सर्पप का सत्तांश में सादृश्य । परन्तु यकार ने इन सादृश्यों का उपमान के लिए खण्डन किया है और प्रसिद्ध सादृश्य को उपयुक्त ठहराया है। समानता के अंगों को विपुल संख्या उपमान में महत्त्वशालिनी नहीं है, प्रत्युत समानता की विख्याति तथा महत्ता । अत प्रसिद्ध सादृश्य के बल पर जहाँ संज्ञा तथा संज्ञी का सम्बन्ध स्थापन किया जाता है उसे उपमान कहते हैं । न्याय दर्शन उपमान के स्वतन्त्र प्रमाण मानने में दार्शनिकों ने बड़ी विप्रतिपत्ति खड़ी की है। चार्वाक उपमान का प्रामाण्य नहीं स्वीकार करते । दिङ्नाग उपमान को प्रत्यक्ष के अन्तर्गत मानते हैं । वैशेषिक लोग इसे अनुमान के अन्तर्मुक्त बतलाते हैं, 'गो सदृश होने से यह पशु गवय है' यह ज्ञान हेतु के ऊपर अवलम्बित होने से अनुमान का एक प्रकारमात्र है। सांख्य तीन उपमान में शब्द तथा प्रत्यक्ष की आंशिक स्थिति मानता है । गवय में गोसादृश्य का ज्ञान प्रत्यक्ष से होता है तथा गो-सादृश्यवान् पशु के गवय होने में उपदेष्टा का वाक्य प्रमाणभूत है । भासवंज्ञ ने नैयायिक होने पर भी उपमान को शब्द के अन्तर्गत स्वीकृत किया है। जैनदर्शन उपमान को प्रत्यभिज्ञामात्र मानता है। मीमांसा" तथा वेदान्त उपमान को स्वतन्त्र प्रमाण मानते हैं अवश्य पर उनकी कल्पना नैयायिक कल्पना से नितान्त भिन्न पड़ती है। इन विप्रतिपत्तियों का मार्मिक खण्डन न्यायग्रन्थों में किया गया है। वास्तव में उपमान अंशत. अन्य प्रमाणों के ऊपर अवलम्बित होने पर भी अन्ततः एक स्वतन्त्र प्रमाण है। उपमान सोधा सादा न होकर एक मिश्रित व्यापार है। 'रावय गोसमान पशु होता है' इस अंश में शब्द को, गवय में गो सादृश्य के अनुभव में प्रत्यक्ष की, 'यही गवय है ' इस अंश में पूर्ववाक्य की स्मृति तथा अनुमान की सत्ता भले ही सिद्ध मानी जाय, परन्तु 'गवयपद का वाच्य यहो गवयपशु है' इस अंश में उपमान स्वतन्त्र प्रमाण है ही, क्योंकि यह अंश किसी अन्य प्रमाण के अन्तर्गत नहीं माना जा सकता । एक न्यायवार्तिक एक-एक-छः । दो द्रष्टव्य उपस्कार वैशून्य सूशून्य नौ/दो/पाँच सूत्र पर । तीन द्रष्टव्य तत्त्वकौमुदी, कारिका पाँच चौदह प्रमेय कमलमार्तण्ड पृशून्य सत्तानवे - एक सौ। पाँच शास्त्रदीपिका पृशून्य चौहत्तर - छिहत्तर । छः वेदान्तपरिभाषा परिच्छेद तीन । शब्द शब्द अन्तिम प्रमाण है । आप्तोपदेशः शब्दः । किसी आप्त पुरुष के उपदेश को शब्द कहते हैं। आप्त वह कहलाता है जो वस्तु को यथार्थरूप से जानता है तथा हितोपदेष्टा होने के कारण जिसके वाक्यों को हम प्रमाण मान सकते हैं। लौकिक तथा वैदिक रूप से शब्द दो प्रकार हैं । लौकिक शब्द लौकिक पुरुषों के वाक्य को कहते हैं। वैदिक शब्द श्रुति के वाक्य को कहते हैं। पद के समूह को वाक्य कहते हैं। पद शक्ति से सम्पन्न रहता है। नैयायिक लोग दो प्रकार की शक्ति मानते हैं - अभिधा तथा लक्षणा । पदशक्ति के विषय में बड़ा मतभेद है। प्राचीन नैयायिकगण ईश्वर की इच्छा को संकेत मानते हैं । 'यह शब्द इस अर्थ को बोध करे' इसी ईश्वरेच्छा पर शब्द-संकेत निर्भर रहता है, पर नव्यनैयायिक पुरुष की इच्छा को भी संकेत का कारण मानते हैं। संकेतग्रह के विषय में भी दार्शनिको में गहरा मतभेद है । न्याय जाति, व्यक्ति तथा आकृति - इन तीनों के ऊपर संकेत स्वीकार करता है । वाक्यार्थ-बोध के लिए आकांक्षा, योग्यता तथा सन्निधि का रहना नितान्त आवश्यक है । वेद के विषय में नैयायिकों तथा मोमांसकों ने बड़ा विचार किया है, पर दोनों के विचार एक दूसरे से अत्यन्त विभिन्न पड़ते हैं। ईश्वर को सत्ता न माननेवाली मीमांसा को वेद के विषय में ईश्वर को कर्तृता अंगीकृत नहीं है । अतः पुरुष के द्वारा उद्भूत न होने से वेद अपौरुषेय हैं, परन्तु न्याय जगत्कर्तृ स्वरूप से ईश्वर को मानता है तथा वेद को ईश्वरकर्तृक होने से पौरुपेय मानता है। नित्यता के विषय में दोनों का ऐकमत्य है । जयन्तभट्ट ने वेद की पौरुषेयता सिद्ध करने के लिए बड़ी प्रबल युक्तियों का उपन्यास किया है। बौद्ध तथा जैन ग्रन्थकारों में वेद में अनेक दार्थों की उद्भावना की है, पर इनका खण्डन न्याय तथा मीमांसा ने बड़ी तर्ककुशलता के साथ किया है । वेद-प्रामाण्य न मानने पर भी जैन तथा बौद्ध दर्शन शब्द प्रमाण को मानते है। जिस प्रकार ब्राह्मण दार्शनिकों को वेदवचन प्रमाणभूत हैं, उसी प्रकार बौद्धों को बुद्धवचन तथा जैनों को जैनागम माननीय हैं । अतः शब्द इन दोनों के लिए भी ज्ञान का एक स्वतन्त्र साधन है कार्य-कारण सिद्धान्त प्रमाण का लक्षण देते समय हमने ऊपर 'करण' शब्द का प्रयोग किया है । असाधारण कारण को 'करण' कहते हैं- वह विशिष्ट वस्तु जो किसी कार्य के उत्पादन में विशेषरूप से कारण हो, करण कहलाती है। यहाँ 'कारण' का विचार अप्रासङ्गिक न होगा। कार्य के नियत रूप से पूर्व होने वाला वस्तु 'कारण' कहलाती है; नियत पूर्ववर्ती कहने से तात्पर्य यह है कि उस कार्य के वास्ते बिना किसी व्यवच्छेद के उस वस्तु को पूर्ववर्ती होना ही चाहिए । यदि यह पूर्ववर्तिता कादाचित्क है - कभी है और कभी नहीं है, तो उसे कारण नहीं माना जा सकता । कारण को अनन्यथा सिद्ध होना भी उतना ही आवश्यक है। उन वस्तुओं को 'अन्यथासिद्ध' कहते हैं जिनको कार्य विशेष के लिए उपादेयता उतनी उत्कट रूप से नहीं होती। विश्वनाथ ने पाँच प्रकार के 'अन्यथासिद्धों' का वर्णन मुक्तावली में किया है। दण्डत्व, दण्डरूप, आकाश, कुलालपिता तथा अपनी पीठ पर मिट्टी लाने वाला गर्दभ - इन सब की घटोत्पादन में कारणता नहीं होतो, क्योंकि नियतपूर्ववर्ती होने पर भी ये अन्यथासिद्ध हैं। मिट्टी के लाने में गर्दभ का बहुल प्रयोग होने पर भी उसमें घट के प्रति कारणता का अभाव हो है, क्योंकि दूसरे साधनों से भी वही कार्य निष्पन्न किया जा सकता है । अतः गर्दभ की घटोत्पत्ति के प्रति नितान्त आवश्यकता नहीं है। इस प्रकार कारण का मान्य लक्षण है - अनन्यथासिद्धनियतपूर्ववृत्तित्वं कारणत्वम् । प्रागभाव के प्रतियोगी की संज्ञा 'कार्य' है । जिस वस्तु का अभाव होता है, उसे अभाव के प्रति 'प्रतियोगी' कहते हैं । उत्पत्ति से पूर्व कारण में कार्य का अभाव 'प्रागभाव' है । इसके प्रतियोगी अर्थात् घट को कार्य कहेंगे । कार्य-कारण सम्बन्ध को मीमांसा दर्शनशास्त्र का एक नितान्त मौलिक कार्य है, क्योंकि इसी सम्बन्ध पर अन्य सिद्धान्तों की संगति सिद्ध होती है। कार्य-कारण का सम्बन्ध चार प्रकार का माना जाता है - असत् से सत् की उत्पत्ति , सत् से सत् की उत्पत्ति , सत् से असत् कार्य का उदय , तथा सत् से उत्पत्ति से प्रथम असत् कार्य की उत्पत्ति । न्याय के अनुसार कारण में कार्य की सत्ता उत्पत्ति से पूर्व नहीं रहती अर्थात् कारण सामग्री के उपयोग करने से मृत्तिका में 'घट' नामक एक अभूतपूर्व नवोन वस्तु की उत्पत्ति होती है। नैयायिक दृष्टि में कार्य उपादानकारण से एकदम भिन्न है । जिस सूत्र-समूह से पट बनता है, वह सूत ही कपड़ा नहीं है, प्रत्युत कपड़ा सूत से अत्यन्त भिन्न है। कारण व्यापार से पूर्व कार्य कारण में विद्यमान नहीं रहता । अतः इस सिद्धान्त का नाम असत्-कार्यवाद या आरम्भवाद है। कारण तीन प्रकार का होता है -- समवायो कारण, असमवायी कारण तथा निमित्त कारण । जिसमें समवाय सम्बन्ध से रहते हुए कार्य की उत्पत्ति होती है, उसे समवायी कारण कहते हैं जैसे घड़े के लिए मिट्टी । समवायिकारणता द्रव्य की ही होती है। कार्य के साथ अथवा कारण के साथ एक वस्तु में समवाय सन्बन्ध से रहते हुए जो कारण होता है, वह असमवायी कहलाता है। तन्तु संयोग पट का असमवायी कारण है, क्योंकि पटरूपी कार्य के साथ तन्तुसंयोग तन्तुरूप एक द्रव्य में समवाय सम्बन्ध में निवास करता है। कारण पट के साथ तन्तुरूप एक ही तन्तु में समवाय सम्बन्ध से विद्यमान है, अतः तन्तुरूप पटरूप का असमवायी कारण है। असमवायो कारण नैयायिकों की अपनी खास सूझ है जिसे अन्य दार्शनिकों ने खण्डन करने के लिए अनेक युक्तियाँ दी हैं। गुण तथा क्रिया हो असमवायी कारण हो सकते हैं। इन दोनों से भिन्न कारण को निमित्त कारण कहते हैं जैसे घड़े का बनाने वाला कुलाल तथा उसके औजार। इन त्रिविध कारणों की परस्पर सहकारिता से ही कार्य को उत्पत्ति होती है । इन तीनों में से कार्योत्पत्ति के लिए जो असाधारणविशिष्ट या नितान्त साधक है उसे करण कहते हैं । न्याय-तत्त्वसमीक्षा न्यायसूत्र में प्रमेय के द्वादश भेद स्वीकृत किये गये हैं आत्मा-सब वस्तुओं का देखने वाला, भोग करने वाला, जानने वाला । शरीर-भोगों का आयतन या आधार; इन्द्रियजिनके द्वारा आत्मा बाह्य वस्तुओं का भोग करता हैभोगों के साधन, अर्थ - भोग किये जानेवाले वस्तुजात; बुद्धिभोग, ज्ञान; मन-सुखदु ख आदि आन्तर भोगों का साधनभूत इन्द्रिय प्रवृत्ति - मन, वचन तथा शरीर का व्यापार; दोषजिसके कारण अच्छे या बुरे कामों में प्रवृत्ति होती है; प्रत्यभावपुनर्जन्म फल - सुखदुख का संवेदन या अनुभव; दुख इच्छाविघातजन्य क्लेश या पीड़ा; अपवर्ग - दुःख से आत्यन्तिकी निवृत्ति । इन्हीं पदार्थों का ज्ञान मुक्ति के लिए सहायक है। अतः इन वस्तुओं को 'प्रमेय' कहते हैं । जगत् तथा आत्मा की नैयायिक कल्पना वैशेषिक के समान हो है । अतः इनका रूप अगले परिच्छेद में विवेचित किया जायगा । उदयनाचार्य ने न्याय- कुसुमाञ्जलि में ईश्वर को सिद्धि अकाट्य युक्तियों के सहारे की हैं। उन्ही की कतिपय युक्तियाँ संक्षेप में दी जाती हैं - कार्यात्-जगत् के समस्त पदार्थ परमाणुजन्य, सावयव तथा अवान्तर महत्त्वविशिष्ट हैं। कार्य के लिए कर्ता की सत्ता मानना उचित ही है। घट की उत्पत्ति तदुत्पादक कुलाल की सत्ता के बिना न्यायसंगत नहीं है; उसी प्रकार कार्यरूप इस जगत् की सृष्टि करने वाला कोई चेतन पदार्थ अवश्य होगा । आयोजनात्- सृष्टि के अवसर पर परमाणुद्वय के संयोग से दुव्यणुक की उत्पत्ति होती है। परन्तु जड़ परमाणुओं को एक साथ आयोजन होना स्वयं सिद्ध नही हो सकता। इसके लिए किसी चेतन पदार्थ की कल्पना नितान्त तर्कयुक्त है । धृत्यादे - तीसरो युक्ति संसार के धारण करने के विषय में है । यदि कोई चेतन धारण करने वाला न होता, तो यह जगत् कब का गिर गया होता। इस सृष्ट जगत् का नाश प्रलयकाल में होता है। अतः नाश के लिए किसी नाशकर्ता की आवश्यकता बनी हुई है । पदात - इस जगत् में अनेक कला-कौशल विद्यमान हैं; जैसे वस्त्र का बनाना, गृह की एक विशिष्ट प्रकार से रचना करना । इस सम्प्रदाय व्यवहार के लिए, इसकी उत्पत्ति के लिए किसी ज्ञानवान् व्यक्ति की कल्पना करना पड़ता है । प्रत्ययतः - श्रुति हमारे लिए परम प्रमाण है। उसके प्रतिपादित सिद्धान्तों में किसी प्रकार की त्रुटि या विप्रतिपत्ति लक्षित नहीं होती । कितने भी कुशाग्रबुद्धि के द्वारा किया गया अनुमान श्रुति की शिला पर पटके जाने से, विरुद्ध होने पर, चूर चूर हो जाता है। श्रुति की इस प्रमाण श्रेष्ठता का रहस्य यहां कि वह सर्वशक्तिमान् सर्वज्ञ ईश्वर के द्वारा निर्मित की ज्ञान ईश्वर का परिचायक है । श्रुतेः - श्रुति को सिद्धि बतलाती है। श्वेताश्वतर उपनिषद् प्रतिपादित कर रहा है कि एक ही ईश्वर सब प्राणियों में छिपा हुआ है, सर्वव्यापी है, सब प्राणियों का अन्तरात्मा है, वह सबका नियामक तथा रक्षक है। भगवद्गीता में श्रीकृष्ण ने अपने जगत् का पिता, माता, धाता तथा प्रभव, प्रलय तथा स्थान बतलाया है । वाक्यात् - महाभारत आदि ग्रन्थों के रचयिता के समान वाक्यभूत वेदों का भी कोई न कोई रचयिता अवश्य होगा । संख्याविशेषात् - द्व्यणुक में परिणाम की उत्पत्ति परमाणु-गत परिमाण से न होकर परमाणुगत संख्याद्वय से होती है, ऐसा नैयायिकों का सिद्धान्त है । यह द्वित्व संख्या अपेक्षाबुद्धि के द्वारा जन्य होती है जो चेतन व्यक्ति के ही द्वारा निष्पन्न हो सकती है। ऐसी स्थिति में व्यणुकों में संख्या की उत्पत्ति ईश्वर की सत्ता को सिद्ध कर रही है । अदृष्टात्धर्म करने से पुण्य तथा अधर्म करने से पाप उत्पन्न होता है। धर्माधर्म का अपर नाम अदृष्ट है। अदृष्ट कर्मफल के उत्पादन में कारणभूत माने जाते हैं, परन्तु जड़ अदृष्ट में फलोत्पादन शक्ति बिना चेतन की प्रेरणा से सम्भव नहीं। अत अदृष्ट की फलवत्ता के लिए ईश्वर को मानना हो न्यायसंगत होगा । इन युक्तियों की सहायता से न्याय ईश्वर की सिद्धि स्वीकार करता है । न्याय - आचारमीमांसा न्याय-वैशेषिक में आचार की सूक्ष्म मोमांसा बड़े विस्तार के साथ की गई है। विश्वनाथ ने मुक्तावली काशून्य एक सौ सैंतालीस - एक सौ पचास में इस विषय की समीक्षा एक इन युक्तियों को सक्षेप में उदयनाचार्य के न्यायकुसुमाञ्जलि के एक श्लोक में इस प्रकार प्रदर्शित किया है -- कार्यायोजन त्यादेः पदात् प्रत्ययतः श्रुतेः । वाक्यात् सख्या विशेषाच साध्यो विश्वविदव्ययः ॥ बड़े मार्मिक ढंग से की है। मनुष्य की प्रत्येक चिकीर्षा किसी विशेष प्रयोजन के ऊपर आश्रित रहती है। चिकीर्षा के तीन हेतु हैं- कृतिसाध्यताज्ञान- इस बात का ज्ञान कि यह कार्य हमारे द्वारा साध्य हो सकता है; इष्टसाधनताज्ञान कार्य के करने से किसी अभिलषित वस्तु की सिद्धि का ज्ञान; बलवदनिष्टाजनकताज्ञानबलवान् अनिष्ट के न उत्पन्न होने का ज्ञान । इन तीनों ज्ञानों की चिकीर्षा के प्रति हेतुता है, प्रथम दो भावात्मक हेतु और अन्तिम अभावात्मक हेतु है। समग्र प्रवृत्ति के मूल ये ही हैं। कार्य हमारे प्रयत्नों से साध्य हो सकता है, इसका ज्ञान नितान्त आवश्यक है। इस ज्ञान के अभाव में वर्षा की उत्पत्ति में अथवा चन्द्रमण्डल के आनयन में जीव की प्रवृत्ति नहीं होती। अभोष्ट की सिद्धि का ज्ञान भी उतना ही आवश्यक है। जब तक किसी भी अभिलषित पदार्थ की सिद्धि का ज्ञान हसे नहीं है, तब तक हमारी प्रवृत्ति हो नहीं सकती। तृप्त पुरुष के भोजन में अप्रवृत्ति का कारण यही है । बलवान् अनिष्ट की अनुत्पत्ति का बोध भी प्रवृत्ति उत्पन्न करने में साधक होता है। रोग से दूषितचित्त पुरुष विषभक्षण कर आत्महत्या इसीलिये कर लेता है कि उसे बलवान् अनिष्ट न उत्पन्न होने का ज्ञान रहता है। उपादान का प्रत्यक्ष होना भी इसी प्रकार हेतु होता है। संक्षेप में प्रवृत्ति के दो कारण है -- कार्यताज्ञान तथा इष्टसाधनताज्ञान । प्रथम पक्ष प्राभाकरों का है। द्वितीय पक्ष नैयायिकों तथा भाट्टमतानुयायी मीमांसकों का । प्रवृत्ति के तीन कारण हैं-- राग , द्वेष तथा मोह । ये तीन प्रवृत्ति के साक्षात्कारण है। ये तीनों विशिष्ट समुदाय के प्रतिनिधि हैं । अत गौतम ने चार।एक।तीन सूत्र में इनके सम्मिलित रूप को 'त्रैराश्य' कहा है। रागपक्ष में काम, मत्सर, स्पृहा, तृष्णा तथा लोभ की गणना है। द्वेषपक्ष में क्रोध, इर्ष्या, असूया, द्रोह, अमर्ष का तथा मोहपक्ष में मिथ्याज्ञान, विचिकित्सा , मान , प्रमाद का समावेश किया जाता है। प्राणीमात्र के समस्त प्रवृत्तियों का उदय इन्हीं कारणों से होता है। परन्तु राग द्वेष को उत्पादक होने से मोह की प्रवृत्ति में सब से अधिक हेतुता है। वात्स्यायन के द्वारा निर्दिष्ट पूर्वोक्त दोषों का विस्तृत वर्णन जयन्त भट्ट ने न्यायमञ्जरी में किया है। वचन, मन तथा शरीर के आरम्भ को प्रवृत्ति कहते हैं प्रवृत्ति दो प्रकार की होती है? - पापिका तथा पुण्या । कायिक, वाचिक तथा मानसिक भेद से ये दोनों तीन प्रकार के होते हैं। पूर्वोक्त दोषों के वश होकर प्राणी शरीर से अहिंसाम्तेयादि कर्मों को करता है, वचन से मिथ्या परुषादि वाक्यों का उच्चारण करता है, मन से परद्रोह, नास्तिक्य आदि करता है। यह पापात्मिका प्रवृत्ति अधर्म उत्पन्न करती है। शरीर से दान-परित्राणादि का, वचन से सत्य-हितादि का, मन से दयाश्रद्धादि का आचरण पुण्य प्रवृत्ति है जो धर्म की उत्पत्ति करती है। सूत्रकार के शब्दों में दुःख से अत्यन्त विमोक्ष को अपवर्ग कहते हैं । 'अत्यन्त' का अभिप्राय है कि उपात्त जन्म का परिहार, तथा अन्य जन्म का अनुत्पादन । गृहीत जन्म मुक्ति का नाश तो होना ही चाहिए, परन्तु भविष्य जन्म की नितरां अनुत्पत्ति भी उतनी ही आवश्यक है। इन दोनों की सिद्धि होने पर आत्मा एक द्रष्टव्य न्यायभाष्य एक/एक/दो; न्यायमञ्जरी न्याशून्य सूशून्य ग्यारह एक सौ सत्रह । का दुःख से आत्यन्तिकी निवृत्ति सम्पन्न होती है। जब तक वासनादि आत्मगुणों का उच्छेद सिद्ध नहीं होता, तब तक दुःख की आत्यन्तिकी निवृत्ति नहीं हो सकती। इसलिए मुक्तावस्था में आत्मा के नवों विशेषगुणों-बुद्धि, सुख, दुख, इच्छा, द्वेष, प्रयत्न, धर्म, अधर्म तथा संस्कारका मूलोच्छेद हो जाता है। धर्म तथा अधर्म के कारण ही सुख और दुःख की उत्पत्ति होती है। अतः ये दोनों संसाररूपी प्रासाद के स्तम्भरूप हैं। इन गुणों के उच्छेद होने से शरीरादि कार्यों का अनुत्पाद हो जाता है। भोगायतन शरीर के अभाव में इच्छा, द्वेष, प्रयत्नादिकों के साथ आत्मा का सम्बन्ध कथमपि सिद्ध नहीं होता। अतः मुक्तावस्था में आत्मा के विशेषगुणों का अत्यन्ताभाव अंगीकार करना सोपपत्तिक है । मुक्त आत्मा के स्वरूप का सुन्दर परिचय न्यायमञ्जरी में दिया गया है - स्वरूपैकप्रतिष्ठान परित्यक्तोऽखिलैर्गुणैः । ऊर्मिषटकातिगं रूपं तदस्या हुर्मनीषिण. । संसारबन्धनाधीनदुःखकेशाद्यदूषितम् ॥ अर्थात् मुक्त दशा में आत्मा अपने विशुद्ध स्वरूप में प्रतिष्ठित और अखिल गुणों से विरहित रहता है । 'ऊर्मि' का अर्थ क्लेश विशेष है। भूख प्यास प्राण के, लोभमोह चित्त के, शीत आतप शरीर के कुशदायक होने से ऊर्मि कहे जाते हैं। मुक्त आत्मा इन छ ऊमियों के प्रभाव को पार कर लेता है और दुःख कुशादि सांसारिक बन्धनों से वह विमुक्त हो जाता है । मुक्त आत्मा में सुख का भी अभाव रहता है। अतः मुक्तावस्था में आनन्दोपलब्धि नहीं होती। इस सिद्धान्त का मण्डन नैयायिकों ने बढ़े आग्रह के साथ किया है । वेदान्तियों का मत इसके ठीक विपरीत पड़ता । इसका खण्डन जयन्त भट्ट ने बड़े विस्तार के साथ किया है एक] द्रव्य एक । एक । बाईस सूत्र पर न्यायभाष्य और वार्तिक । । उनके कथन का सारांश यह है कि सुख के साथ राग का सम्बन्ध लगा हुआ है और यह राग बन्धन का साधन है । अतः मोक्ष को सुखात्मक मानने में बन्धन की निवृत्ति कथमपि हो नहीं सकती। 'आनन्दं ब्रह्म' आदि आनन्द बोधक वाक्यों का तात्पर्य दुःखापाय-बोधन में ही है । ज्वर या शिरःपीदादि-व्याधि-दुःखों के निवृत्त हो जाने पर सुखी होने की कल्पना लोक व्यवहार में भी न्याय्य मानी जाती है। उद्योतकर ने दो प्रकार का निःश्रेयस माना है' - अपरनिःश्रेयस तथा परनिःश्रेयस । तत्वज्ञान ही इन दोनों का कारण है। जीवन्मुक्ति को अपरनिःश्रेयस कह सकते हैं, पर निःश्रेयस विदेहमुक्ति है । वाचस्पति ने तात्पर्य टोका में इन दोनों का अन्तर विस्तार से विवेचन किया है। आत्मा के विषय में चार प्रतिपत्तियाँ हैं - श्रवण, मनन, ध्यान तथा साक्षात्कार । आन्वीक्षिकी का उपयोग संशयादितत्त्व तथा प्रमाणतत्त्व के बोधन में होता है, परन्तु मनन से भी सद्योरूप से साक्षात्कार का उदय नहीं होता, क्योंकि विपर्यय ज्ञान के नाश हो जाने पर भी उसकी वासना का उपक्षय नहीं होता । ध्यान आत्मसाक्षात्कार के लिए नितरां उपादेय है। बिना योगज-ध्यान के आत्मतत्व की अपरोक्ष अनुभूति उत्पन्न नहीं होती। चतुर्थी प्रतीति पाने वाले पुरुष को जीवन्मुक्त कहते हैं। परन्तु प्रारब्धकर्मों का सम्बन्ध तब तक भी लगा ही रहता है। इनकी भी उपभोग से जब क्षीणता हो जाती है, तभी परनिःश्रेयस का उदय होता है । एक निश्रयसस्य परापरभेदात् । यत्तावदपरं निःश्रेयसं तत् तत्त्वज्ञानान्तरमेव भवति । X x परं च नि. श्रेयसं तत्त्वज्ञानात् क्रमेण भवति - न्यायवार्तिक एक।ग्यारह । मुक्ति के साधनों का विचार करना अब आवश्यक है। गौतम ने दु स्वजन्मप्रवृत्तिदोषमिथ्याज्ञानानामुत्तरोत्तशपाये तदन्तराभावात् अपवर्गः सूत्र में मोक्षमार्ग के स्वरूप का परिचय दिया है। मिथ्याज्ञान से रागद्वेषादि दोषों का सद्भाव होता है, उनसे शुभा या अशुभा प्रवृत्ति का उदय होता है जिससे शरीर धारण करना पड़ता है। जन्म देने से प्रतिकूल संवेदनात्मक दुःखों की उत्पत्ति होती है। मिथ्याज्ञान आदि का अविच्छेदेन प्रवर्तमान होना संसार है । इस संसारोच्छेद के लिए कारणभूत मिथ्याज्ञान का समुच्छेद नितान्त स्पृहणीय है। मिथ्याज्ञान का धंस होता है तत्व ज्ञान से । अतः आत्मस्वरूप विषयक तत्त्वज्ञान से ही दुखात्यन्तनिवृत्तिरूप अपवर्ग की सिद्धि होती है। जयन्तभट्ट ने न्यायमञ्जरी में कर्मज्ञानसमुच्चयवाद का विशदरूपेण खण्डन कर ज्ञान की ही उपयोगिता पर जोर दिया है। परन्तु तत्वज्ञान से आत्मसाक्षात्कार को सिद्धि के लिए ध्यान धारणादि योग प्रसिद्ध उपायों का अवलम्बन नितरां श्रेयस्कर है । गौतम ने ने 'तदर्थं यमनियमाभ्यामात्मसंस्कारो योगाच्चाध्यात्मविध्युपायै.' सूत्र में प्राणायाम आदि उपायों के आश्रय लेने की बात स्पष्टाक्षरों में प्रतिपादित की है एक न्यायदर्शन की भारतीय दर्शन साहित्य को सबसे अमूल्य देन है शास्त्रीय विवेचनात्मक पद्धति । प्रमाण की विस्तृत व्याख्या तथा विवेचना कर न्याय ने जिन तत्त्वों को खोज निकाला है, उनका उपयोग अन्य दर्शन भी कतिपय परिवर्तन के साथ अपने विवरणों में निश्चय रूप से करते हैं । हेत्वाभासों का सूक्ष्म विवरण प्रस्तुत कर न्याय ने अनुमान को दोषनिर्मुक्त बनाने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। इस पर कलिकाल सर्वज्ञ आचार्य हेमचन्द्र का यह कथन है कि गौतम मुनि को अपने दर्शन में अपवर्ग के साधक तत्त्वज्ञान का वर्णन करना उचित था, परन्तु इसके विपरीत उन्होंने छल वितण्डा जाति आदि का वर्णन करके परममं के भेदन में अपने अमूल्य समय को व्यर्थ बिताया। परन्तु वस्तुस्थिति ऐसी नहीं है, क्योंकि इनका उपयोग परममं के भेदन में ही नहीं किया जाता है। सूत्रकार ने स्वयं जल्पवितण्डा को तत्वाध्यवसाय के रक्षणार्थ उसी प्रकार उपयोगी माना जिस प्रकार कण्टक- शाखा का आवरण बीज के अङ्कुरों की रक्षा करता न्याशून्य सूशून्य चार फ़रवरी पचास एक अत. इनका उपयोग विनाशात्मक न होकर रचनात्मक है। इनके अभाव में सूक्ष्ममति नास्तिकों की अपातत रमणीय युक्तियों से प्रतारित होकर साधारण मनुष्य न जाने कब का उन्मार्ग का पथिक बन गया होता। अतः इनके वर्णन करने में गौतम की निसर्ग-निर्मल करुणावृत्ति झलकती हुई दोख पड़ती है । परन्तु न्यायदर्शन की तर्कपद्धति जितनी सन्तोषजनक है, उतना सन्तोषदायक उसका तत्त्वज्ञान नहीं है। न्याय ने इस जगत् को ज्ञान से पृथक एक स्वतन्त्र सत्तात्मक वस्तु बतलाया है तथा उसमें अनेक नित्य पदार्थों की कल्पना की है। आत्मा के अतिरिक्त परमाणु, मन, आकाश, काल तथा दिक सब नित्य माने जाते हैं। इस दृष्टि से जगत् की व्याख्या करने में अनेक त्रुटियाँ परिलक्षित होती हैं । न्याय की व्याख्या में इतने नित्य पदार्थों के अस्तित्व मानने के लिए कोई औचित्य नहीं प्रतीत होता । एक द्रष्टव्य अन्ययोग-व्यवच्छेदद्वात्रिंशिका, श्लोक दस. दो दुः शिक्षित कुतर्काश-लेश- वाचालिताननाः । शक्याः किमन्यथा जेतुं वितण्डाटोपपण्डिताः ॥ गतानुगतिको लोकः कुमार्ग तत् प्रतारितः । मागादिति च्छलादीनि प्राइ कारुणिको मुनिः ॥ न्यायमज्जरी सञ्चा दर्शन वही हो सकता है जिसमें एक नित्य पदार्थ की सत्ता मानकर समस्त पदार्थों का सम्बन्ध उसीसे प्रदर्शित किया जाय तथा सद्वस्तु के एकत्व पर ज़ोर दिया जाय। इस सिद्धान्त के अनङ्गोकार करने से न्याय में अनेक दोष दृष्टिगत होते हैं । ईश्वर को निमित्तकारणरूप से जगत् का स्रष्टा बतलाकर न्यायदर्शन ने उसमें मानवीय भावों की कमजोरियों को उपस्थित कर दिया है। नैयायिक ईश्वर लौकिक कर्ता के अनुरूप कल्पित किया है। जिस प्रकार बढ़ई अपने हथियारों से काठ को काट पीट कर कुरसी, टेबुल आदि बनाया करता है और जिस प्रकार दूकान में बैठा हुआ लोहार लोहे से तरह तरह के सामान बनाया करता है, ठीक उसी प्रकार ईश्वर परमाणुओं से जगत् की सृष्टि किया करता है। वह इस सृष्टिकार्य के लिए उपादान कारणों के ऊपर अवलम्बित रहता है। उपादानों को सत्ता पर अवलम्बित रहनेवाला ईश्वर किस प्रकार सर्वशक्तिमान् तथा परमस्वतन्त्र माना जा सकता है ? वेदान्त ने ईश्वर को जगत् का उपादान तथा निमित्तकारण दोनों मानकर इस अनुपपत्ति को दूर कर दिया है, परन्तु न्याय में इस अनुपपत्ति का निरास कथमपि नहीं किया जा सकता । न्याय ने आत्मा के स्वरूप को स्वतन्त्रता दिखलाकर तथा उसे शरीर और इन्द्रियों से पृथक स्थायी नित्य पदार्थ प्रमाणित कर चार्वाक तथा बौद्ध के सिद्धान्तों का युक्तियुक्त खण्डन किया है तथा आत्मा को स्वतन्त्रता भली प्रकार प्रदर्शित की है, परन्तु मुक्त आत्मा की जो कल्पना की है, वह दार्शनिकों के प्रबल खण्डन का विषय है। नैयायिक मुक्ति का सिद्धान्त अन्य दार्शनिकों के कौतुकावह कटाक्ष का विषय है - मुक्तावस्था में समस्त अज्ञानावरणों से विमुक्त आत्मा में नित्य आनन्द को मानने वाले वेदान्ती श्रोहर्षं ने नैषधचरित में नैयायिक मुक्ति की जो दिल्लगो उड़ाई है है वह पण्डितसमाज में अपनी रोचकता के कारण नितान्त प्रसिद्ध है। उनका कथन है कि जिन सूत्रकार ने सचेता पुरुषों के लिए ज्ञानसुखादि विरहित शिलारूप प्राप्ति को जोवन का परम लक्ष्य बतलाकर उपदेश दिया है उनका अभिधान गोतम शब्दतः ही यथार्थं नहीं है, अपितु अर्थतः भी । वह केवल गो न होकर गोतम पक्का बैल है । वैष्णव दार्शनिकों ने भी इसीलिए नैयायिकों के ऊपर फबतियाँ सुनाई हैं। मुक्तावस्था में आनन्दधाम गोलोक तथा नित्यवृन्दावन में सरस विहार करने की व्यवस्था बतलाने वाले वैष्णव लोग इस नीरस मुक्ति की कल्पना से घबरा उठते हैं और भक्तभावुक हृदय से पुकार उठते हैं कि वृन्दावन के सरस निकुंजों में शृगाल बन कर जीवन बिताना हमें मंजूर है, परन्तु हम लोग वैशेषिक मुक्ति को पाने के लिए कथमपि इच्छुक नहीं हैं । एक मुक्तये यः शिलात्वाय शास्त्रमूचे सचेतसाम् । गोतमं तमवेक्ष्येव यथा वित्थ तथैव सः ॥ -नैषधचरित सत्रह । पचहत्तर । दो वरं वृन्दावने रम्ये शृगालत्वं वृणोम्यहम् । वैशेषिकोक्तमोक्षातु सुखलेशविवर्जितात् ॥ अष्टम परिच्छेद वैशेषिक दर्शन पण्डित मण्डली में एक सुप्रसिद्ध कहावत प्रचलित है - काणादं पाणिनीयं च सर्वंशास्त्रोपकारकम् । शब्द के यथार्थं निर्णय में पाणिनीय व्याकरण के समान पदार्थों के स्वरूप निर्णय में वैशेषिक दर्शन अत्यन्त उपादेय है। इस दर्शन का नाम वैशेषिक, काणाद तथा औलूक्य दर्शन है । अन्तिम दोनों नाम इसके आद्य प्रवर्तक उलूक ऋषि के पुत्र महर्षि कणाद के नाम पर दिये गये हैं, पर 'वैशेषिक' नाम का रहस्य क्या है ? इसके रहस्य को विद्वानों ने भिन्न भिन्न रूप से बतलाया है। चीनदेशीय दार्शनिक चिस्तान तथा कहेइची के द्वारा संगृहीत एक प्राचीन परम्परा के अनुसार कणाद सूत्रों का 'वैशेषिक' नामकरण अन्यदर्शनों से, विशेषतः सांख्यदर्शन से, विशिष्ट अर्थात् अधिकयुक्तियुक्त होने के कारण किया गया था ? । पर भारतीय विद्वन्मण्डली के अनुसार 'विशेष' नामक पदार्थ की विशिष्ट कल्पना करने के कारण कणाद दर्शन को 'वैशेषिक' संज्ञा प्राप्त हुई है । वैशेषिक दर्शन की उत्पत्ति कब हुई ? बौद्ध ग्रन्थों में वैशेषिक दर्शन का नामोल्लेख पाया जाता है; इन ग्रन्थों में न्याय सिद्धान्तों को भी वैशेषिक नाम से ही स्मरण किया है। सांख्य तथा वैशेषिक मतों को बुद्ध से पूर्वकालीन मानने में बौद्ध सम्प्रदाय की एकवाक्यता दीख पड़ती है। जैन तत्त्व- समीक्षा सम्भवत एक द्रष्टव्य डाशून्य उई - वैशेषिक फ़िलासफ़ी पृशून्य तीन-इकहत्तर वैशेषिक पदार्थों की कल्पना पर आश्रित है। अतः वैशेषिक दर्शन जैन तथा बौद्ध दोनों से प्राचीनतर प्रतीत होता है। वैशेषिक दर्शन के आचार्य इस दर्शन के सूत्रकार महर्षि कणाद हैं । त्रिकाण्डशेष कोष में इनका के दूसरा नाम 'काश्यप' मिलता है तथा किरणावली में उदयनाचार्य ने इन्हें कश्यप मुनि का पुत्र बतलाया है। अतः इनके 'काश्यप' गोत्र नाम होने में सन्देह नहीं है । श्रोहर्षं ने नैषध में कणाददर्शन को औलूक संज्ञा दी है । वायुपुराण में कणाद प्रभास निवासी सोमशर्मा के शिष्य और शिव के अवतार बतलाये गये हैं । अतः कणाद मुनि काश्यप गोत्री, सोमशर्मा के शिष्य तथा उलूक मुनि के पुत्र वैशेषिक सूत्रों की संख्या तीन सौ सत्तर है और वे दस अध्यायों में विभक्त हैं और प्रत्येक अध्याय में दो आह्निक है। प्रथम अध्याय के प्रथम आह्निक में द्रव्य, गुण तथा कर्म के लक्षण तथा विभाग का, दूसरे आह्निक में 'सामान्य' का, दूसरे तथा तीसरे अध्यायों में नव द्रव्यों का, चतुर्थ अध्याय के प्रथमाह्निक में परमाणुवाद का तथा द्वितीयाहिक में अनित्यद्रव्य विभाग का, पञ्चम अध्याय में कर्म का, पष्ठ अध्याय में वेदप्रामाण्य के विचार के बाद धर्माधर्म का, सात व तथा आठ वें अध्याय में कतिपय गुणों का, नौ वें अध्याय में अभाव तथा ज्ञान का, दसव में सुख-दुख-विभेद तथा त्रिविध कारणों का वर्णन किया गया है। न्यायसूत्रों से तुलना करने पर वैशेषिक सूत्र प्राचीन ठहरते हैं। इनका रचनाकाल तृतीय शतक विक्रम पूर्व है । एक न्यायकन्दली की म. म. विन्ध्येश्वरीप्रसाद द्विवेदी की प्रस्तावना पृशून्य सात-दस। एक द्रष्टव्य बोडस - तर्कसंग्रह की प्रस्तावना पृशून्य चालीस । कुप्पुस्खामीप्राइमर आफ इंडियन लाजिक प्रस्तावना पृशून्य । ब्रह्मसूत्र दो।दो।ग्यारह के शाङ्करभाष्य को रत्नप्रभा टीका में तथा अन्यत्र कई स्थलों में वैशेषिकसूत्रों के ऊपर 'रावणभाष्य' का उल्लेख किया गया मिलता है, पर यह भाष्य आजकल उपलब्ध नहीं है । भारद्वाज वृत्ति नितान्त प्राचीन प्रतीत होती है। पंशून्य जयनारारायण ने विवृत्ति रचकर तथा महामहोपाध्याय पण्डित चन्द्रकान्त तर्कालङ्कार ने भाग्य का निर्माण कर इन सूत्रों के यथार्थ अर्थ के समझने में हमारा बड़ा उपकार किया है । प्रशस्तपाद - प्रशस्तपाद का पदार्थ-धर्म-संग्रह' वैशेषिकतत्त्वों के निरूपण के लिए नितान्त मौलिक ग्रन्थ है। साधारण रोति से इसे भाग्य कहते हैं पर यह सूत्रस्थ पदों के उल्लेखपूर्वक उक्तानुक्तिचिन्तासमन्वित प्रबन्ध नहीं है । इसमें तो ग्रन्थकार ने केवल वैशेषिक सिद्धान्तों के ऊपर अपने स्वतन्त्र विचारों को प्रामाणिक रूप से प्रतिपादित किया है । सूत्र के बाद इस दर्शन के इतिहास में सर्वमान्य प्रामाणिक ग्रन्थ यही प्रशस्तपाद भाष्य है। इसमें विशेषतः परमाणुवाद, जगत् की उत्पत्ति तथा प्रलय, प्रमाण तथा गुणों का विस्तृत विवेचन उपस्थित किया गया है बसुबन्धु के द्वारा इनके सिद्धान्तों के खण्डन किये जाने और न्याय-भाध्य में इनके सिद्धान्तों के उपयोग किये जाने से इन्हें वात्स्यायन और से बसुबन्धु प्राचीन द्वितीय शतक में होना न्यायसंगत प्रतीत होता है । प्रशस्तपादभाष्य के आधार पर 'चन्द्र' नामक किसी आचार्य ने दशपदार्थी शास्त्र की रचना की जिसमें द्रव्य, गुण, कर्म, सामान्य, समवाय तथा विशेष - इन पट पदार्थों के अतिरिक्त शक्ति, अशक्ति, सामान्य विशेष तथा अभाव ये चार नवीन पदार्थ स्वीकृत किये गये हैं। चन्द्र सप्तम शताब्दी से पहले के ही होंगे, क्योंकि इसका अनुवाद छः सौ अड़तालीस ईशून्य में चीन भाषा में किया गया उपलब्ध होता है जिसका अंग्रेजी अनुवाद जापानी विद्वान् डाशून्य उई ने किया है एक आचार्य ध्रुव - न्यायप्रवेश की प्रस्तावना पृशून्य अट्ठारह ।
Adipurush Worldwide Box office Day one: प्रभास (Prabhas), कृति सेनन (Kriti sanon), सनी सिंह (Sunny Singh), देवदत्त नागे (Devdatta Nage) और सैफ अली खान (Saif Ali Khan) स्टारर आदिपुरुष (Adipurush) ने पहले ही दिन बॉक्स ऑफिस पर धमाका कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आदिपुरुष ने न सिर्फ इंडिया में बल्कि पहले दिन वर्ल्डवाइड कलेक्शन में भी इतिहास रचने का काम किया है। आदिपुरुष ने बॉक्स ऑफिस पर पहले दिन सुनामी लाने का काम किया है और पठान से लेकर केजीएफ 2, वॉर, ब्रह्मास्त्र जैसी सभी फिल्मों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। फिल्म ने ग्लोबल बॉक्स ऑफिस पर पहले दिन 140 करोड़ रुपये की कमाई की है और इतिहास रच दिया है। ऐसे में आदिपुरुष, वर्ल्डवाइड सबसे बड़ी ओपनिंग करने वाली पैन इंडिया फिल्म बन गई है। Sacnilk की रिपोर्ट के मुताबिक घरेलू मार्केट में भी फिल्म ने इतिहास रचा है और पहले दिन करीब 95 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया है। रिपोर्ट के मुताबिक फिल्म के हिंदी वर्जन ने 35 करोड़, तमिल वर्जन ने 70 लाख, मलयालम वर्जन ने 40 लाख का कलेक्शन किया। इसके साथ ही फिल्म के तेलुगू वर्जन ने सबसे अधिक कमाई करते हुए पहले दिन ही 58. 5 करोड़ रुपये की कमाई की। गौरतलब है कि फिल्म का निर्देशन ओम राउत ने किया है।
Adipurush Worldwide Box office Day one: प्रभास , कृति सेनन , सनी सिंह , देवदत्त नागे और सैफ अली खान स्टारर आदिपुरुष ने पहले ही दिन बॉक्स ऑफिस पर धमाका कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आदिपुरुष ने न सिर्फ इंडिया में बल्कि पहले दिन वर्ल्डवाइड कलेक्शन में भी इतिहास रचने का काम किया है। आदिपुरुष ने बॉक्स ऑफिस पर पहले दिन सुनामी लाने का काम किया है और पठान से लेकर केजीएफ दो, वॉर, ब्रह्मास्त्र जैसी सभी फिल्मों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। फिल्म ने ग्लोबल बॉक्स ऑफिस पर पहले दिन एक सौ चालीस करोड़ रुपये की कमाई की है और इतिहास रच दिया है। ऐसे में आदिपुरुष, वर्ल्डवाइड सबसे बड़ी ओपनिंग करने वाली पैन इंडिया फिल्म बन गई है। Sacnilk की रिपोर्ट के मुताबिक घरेलू मार्केट में भी फिल्म ने इतिहास रचा है और पहले दिन करीब पचानवे करोड़ रुपये का कलेक्शन किया है। रिपोर्ट के मुताबिक फिल्म के हिंदी वर्जन ने पैंतीस करोड़, तमिल वर्जन ने सत्तर लाख, मलयालम वर्जन ने चालीस लाख का कलेक्शन किया। इसके साथ ही फिल्म के तेलुगू वर्जन ने सबसे अधिक कमाई करते हुए पहले दिन ही अट्ठावन. पाँच करोड़ रुपये की कमाई की। गौरतलब है कि फिल्म का निर्देशन ओम राउत ने किया है।
- जनकपुर गोपालपुरा गांव का घटना, तीन अन्य नाबालिग घायल, पुलिस ने दर्ज किया मर्ग का केस। मुरैना. नईदुनिया न्यूज। शादी समाराेह में कुर्सी पर बैठने की बात पर बच्चों में झगड़ा हो गया। बच्चों का झगड़ा शादी में तो शांत करा दिया गया, लेकिन दूसरे दिन एक पक्ष ने दूसरे पक्ष के बच्चों पर हमला बोल दिया। इसमें एक साल के मासूम की जान चली गई, तीन अन्य नाबालिग घायल हैं। मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र के जनकपुर-गोपालपुरा गांव का है। मृतक मासूम के स्वजन एक महिला, दो नाबालिगों सहित पांच लोगों पर हत्या के आरोप लगा रहे हैं, लेकिन पुलिस ने फिलहाल इस मामले में मर्ग का केस दर्ज किया गया है। जनकपुर-गाेपालपुरा गांव में 4 जून को बनवारीलाल गुर्जर के बेटे जैनी उर्फ ऋषि गुर्जर की शादी थी। रात में खाने की पंगत का कार्यक्रम चल रहा था, इसी दौरान कुर्सी पर बैठने की बात पर गोपालपुरा गांव के कुछ बच्चों का विवाद नूराबाद, धौलपुर से आए नाबालिगों से हो गया। इस विवाद में एक पक्ष के नाबालिगों ने दूसरे पक्ष के नाबालिगों की पिटाई कर दी। रात में तो यह विवाद शांत करा दिया, लेकिन रविवार की सुबह साढ़े 6 बजे के करीब जब मेहमान अपने घरों को वापिस जाने की तैयारी कर रहे थे, तभी कुछ लोगाें ने बाइक सवारों पर लाठी-डडों से हमला कर दिया। इस हमले में 12 साल के आर्यन गुर्जर पुत्र रामलखन सिंह निवासी गोपालपुरा, 12 वर्षीय आकाश पुत्र राजीव गुर्जर निवासी बसई डांग धौलपुर, 11 वर्षीय शिवा पुत्र मेहताब सिंह गुर्जर निवासी नाऊ का पुरा, नूराबाद और एक साल के रुद्र पुत्र संजय सिंह गुर्जर निवासी गोपालपुरा को चोटें आईं। एक साल के रूद्र के सिर में लाठी से गंभीर चोट आई, उसे ग्वालियर रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान रविवार देर शाम एक साल के मासूम ने दम तोड़ दिया। मृतक मासूम के ताऊ रामतीर्थ गुर्जर का आरोप है, कि बच्चों में कुर्सी को लेकर हुए झगड़े के बाद गांव के ही प्रकाश गुर्जर, रोशन सिंह, विनीता उर्फ ममता गुर्जर और दो नाबालिगों ने बच्चों पर लाठियों से हमला किया। उधर सिविल लाइन थाना प्रभारी प्रवीण सिंह चौहान का कहना है, कि इस मामले की शिकायत रविवार देर रात आई थी। मृतक बच्चे के स्वजन जिन पर आरोप लगा रहे हैं, उसकी छानबीन की जा रही है। फिलहाल इस मामले में मर्ग का केस दर्ज किया गया है। जांच में आरोप सही निकले तो हत्या का केस दर्ज किया जाएगा।
- जनकपुर गोपालपुरा गांव का घटना, तीन अन्य नाबालिग घायल, पुलिस ने दर्ज किया मर्ग का केस। मुरैना. नईदुनिया न्यूज। शादी समाराेह में कुर्सी पर बैठने की बात पर बच्चों में झगड़ा हो गया। बच्चों का झगड़ा शादी में तो शांत करा दिया गया, लेकिन दूसरे दिन एक पक्ष ने दूसरे पक्ष के बच्चों पर हमला बोल दिया। इसमें एक साल के मासूम की जान चली गई, तीन अन्य नाबालिग घायल हैं। मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र के जनकपुर-गोपालपुरा गांव का है। मृतक मासूम के स्वजन एक महिला, दो नाबालिगों सहित पांच लोगों पर हत्या के आरोप लगा रहे हैं, लेकिन पुलिस ने फिलहाल इस मामले में मर्ग का केस दर्ज किया गया है। जनकपुर-गाेपालपुरा गांव में चार जून को बनवारीलाल गुर्जर के बेटे जैनी उर्फ ऋषि गुर्जर की शादी थी। रात में खाने की पंगत का कार्यक्रम चल रहा था, इसी दौरान कुर्सी पर बैठने की बात पर गोपालपुरा गांव के कुछ बच्चों का विवाद नूराबाद, धौलपुर से आए नाबालिगों से हो गया। इस विवाद में एक पक्ष के नाबालिगों ने दूसरे पक्ष के नाबालिगों की पिटाई कर दी। रात में तो यह विवाद शांत करा दिया, लेकिन रविवार की सुबह साढ़े छः बजे के करीब जब मेहमान अपने घरों को वापिस जाने की तैयारी कर रहे थे, तभी कुछ लोगाें ने बाइक सवारों पर लाठी-डडों से हमला कर दिया। इस हमले में बारह साल के आर्यन गुर्जर पुत्र रामलखन सिंह निवासी गोपालपुरा, बारह वर्षीय आकाश पुत्र राजीव गुर्जर निवासी बसई डांग धौलपुर, ग्यारह वर्षीय शिवा पुत्र मेहताब सिंह गुर्जर निवासी नाऊ का पुरा, नूराबाद और एक साल के रुद्र पुत्र संजय सिंह गुर्जर निवासी गोपालपुरा को चोटें आईं। एक साल के रूद्र के सिर में लाठी से गंभीर चोट आई, उसे ग्वालियर रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान रविवार देर शाम एक साल के मासूम ने दम तोड़ दिया। मृतक मासूम के ताऊ रामतीर्थ गुर्जर का आरोप है, कि बच्चों में कुर्सी को लेकर हुए झगड़े के बाद गांव के ही प्रकाश गुर्जर, रोशन सिंह, विनीता उर्फ ममता गुर्जर और दो नाबालिगों ने बच्चों पर लाठियों से हमला किया। उधर सिविल लाइन थाना प्रभारी प्रवीण सिंह चौहान का कहना है, कि इस मामले की शिकायत रविवार देर रात आई थी। मृतक बच्चे के स्वजन जिन पर आरोप लगा रहे हैं, उसकी छानबीन की जा रही है। फिलहाल इस मामले में मर्ग का केस दर्ज किया गया है। जांच में आरोप सही निकले तो हत्या का केस दर्ज किया जाएगा।
जयपुर। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और राज्यपाल मार्गेट आल्वा की मंगलवार को हुई मुलाकात के बाद प्रदेश भाजपा में सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भाजपा विधायक इस मुलाकात को मंत्रिमंडल विस्तार से जोडकर देख रहे हैं। सूत्रों के अनुसार 13 जून को मंत्रिमंडल विस्तार की संभावनाएं जताई जा रही है। हालांकि अधिकृत तौर पर कोई कुछ नहीं बोल रहा है। भाजपा सूत्रों का कहना है कि कुछ विधायक तो तीन दिन से दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं और कुछ मुख्यमंत्री की राज्यपाल से मुलाकात के बाद सक्रिय हो गए हैं।
जयपुर। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और राज्यपाल मार्गेट आल्वा की मंगलवार को हुई मुलाकात के बाद प्रदेश भाजपा में सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भाजपा विधायक इस मुलाकात को मंत्रिमंडल विस्तार से जोडकर देख रहे हैं। सूत्रों के अनुसार तेरह जून को मंत्रिमंडल विस्तार की संभावनाएं जताई जा रही है। हालांकि अधिकृत तौर पर कोई कुछ नहीं बोल रहा है। भाजपा सूत्रों का कहना है कि कुछ विधायक तो तीन दिन से दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं और कुछ मुख्यमंत्री की राज्यपाल से मुलाकात के बाद सक्रिय हो गए हैं।
देहरादूनः दून में होने वाली इन्वेस्टर समिट से पहले दून और टिहरी जनपद की 18 सड़कों को संवारा जाएगा। इसके लिए शासन ने लोनिवि और राष्ट्रीय राजमार्ग खंड को 13. 31 करोड़ का बजट जारी कर दिया है। सड़कों का सुधार और सौंदर्यीकरण कार्य पांच अक्टूबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए लोनिवि के खंडों में तैयारी शुरू हो गई हैं। राजधानी में बारिश से छलनी और गड्ढे वाली सड़कों के सुधार और सौंदर्यीकरण कार्य को मुंह मांगा बजट मिल गया है। अकेले गड्ढे भरने के लिए जनपद को छह करोड़ का बजट दिया गया है। इस बजट से कार्य अभी शुरुआती चरणों में चल रहा है। इस बीच अक्टूबर के पहले सप्ताह में आयोजित इन्वेस्टर समिट की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। इसके लिए लोक निर्माण विभाग ने राजधानी को जोड़ने वाली दून और टिहरी जनपद की सड़कों के सुधार, सौंदर्यीकरण के प्रस्ताव शासन को भेजे गए थे। शासन ने सभी प्रस्ताव को स्वीकृत करते हुए 13. 31 करोड़ रुपये का बजट जारी कर दिया है। इस बजट से इन्वेस्टर समिट के दौरान उपयोग होने वाली सड़कों का सौंदर्यीकरण और सुधार कार्य होगा। - मसूरी-डायवर्जन से घंटाघर तक। प्रिंस चौक से आराघर तक। सर्वे चौक से चूना भट्ट तक। घंटाघर से प्रिंस चौक। चकराता रोड। निरंजनपुर सब्जी मंडी से प्रिंस चौक। हरिद्वार रोड अग्रवाल बेकरी से रिस्पना पुल। नेहरू कॉलोनी फव्वारा चौक से छह नम्बर पुलिया रायपुर तक। सब्जी मंडी से फव्वारा चौक होते हुए चंचल डेरी तक। जौलीग्रांट एयरपोर्ट से नटराज चौक तक। भुइंया मंदिर से रायपुर चौक तक। ऋषिकेश में नटराज चौक से एनएच-58 तक। इन्वेस्टर समिट के लिए मीडियन फुटपाथ की रंगाई-पुताई, क्षतिग्रस्त भाग में थर्मोप्लास्टिक पेंट, रोड मार्क, साइनेज, रोड स्टड, कैट आइज, स्प्रिंग पोस्ट, पटरी दरेसी, डेलीनेटर, जंगल कटान आदि कार्य भी किए जाने हैं। लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता आरसी अग्रवाल के मुताबिक इन्वेस्टर समिट को लेकर सड़कों के लिए पर्याप्त बजट मिल गया है। सड़कों के सुधार और सौंदर्यीकरण का कार्य शुरू कर दिया है। तय समय पर सभी सड़कें तैयार हो जाएगी। इसमें गुणवत्ता का विशेष ख्याल रखा जा रहा है। राज्य के पहले ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की तैयारियों का जायजा लेने मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह एवं डीजीपी अनिल रतूड़ी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम राजपुर पहुंचे। उन्होंने तैयारियों का निरीक्षण किया। मुख्य सचिव ने बताया कि सात एवं आठ अक्टूबर को होने वाले ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के आयोजन में सभी विभाग अपनी-अपनी जिम्मेदारियां बखूबी निभा रहे हैं। सात अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन्वेस्टर्स समिट को संबोधित करेंगे। निवेश सम्मेलन के लिए बेहतर रिस्पांस मिल रहा है। अभी तक करीब 45 हजार करोड़ के एमओयू पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि समिट में सिंगापुर, जापान, चेक रिपब्लिक आदि देशों के प्रतिनिधि भी शामिल हो रहे हैं। सिंगापुर के संचार एवं सूचना मंत्री एसई वरन ने भी समिट में भाग लेने की इच्छा जाहिर की है। बताया कि निवेश को आकर्षित करने के लिए उत्तराखंड सरकार ने मेगा इंडस्ट्रियल एंड इन्वेस्टमेंट पॉलिसी 2015 में संशोधन किया है। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक वाहन मेन्युफैक्चिरिंग पॉलिसी, इन्फार्मेशन, कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी एंड इलेक्ट्रॉनिक्स पॉलिसी, स्टार्टअप पॉलिसी, एरोमा मार्क के लिए सुविधाएं, बायो टेक्नोलॉजी पॉलिसी, एनर्जी जेनरेशन आदि प्रमुख हैं। तैयारियों के निरीक्षण के दौरान प्रमुख सचिव उद्योग मनीषा पंवार, सचिव पर्यटन दिलीप जावलकर, एडीजी अशोक कुमार, सूचना महानिदेशक दीपेंद्र कुमार चौधरी, राज्य संपत्ति अधिकारी बंशीधर तिवारी, जिलाधिकारी एस मुरूगेशन, एसएसपी निवेदिता कुकरेती मौजूद रहे। उद्घाटन सत्र में सात अक्टूबर को अमूल डेयरी के एमडी आरएस सोढ़ी, मेदांता के एमडी डॉ. नरेश त्रेहान, भारत में जापान के राजदूत केंजी हिरामस्तु, चेक गणराज्य के राजदूत मिलन होवोर्क, टाटा संस के चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन, जेएसडब्ल्यू ग्रुप के चेयरमैन सज्जन जिंदल, महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महेंद्रा, ईएसएसएल लिमिटेड के चेयरमैन गौतम अडानी, पतंजलि आयुर्वेद के सह संस्थापक स्वामी रामदेव, रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी आदि संबोधित करेंगे।
देहरादूनः दून में होने वाली इन्वेस्टर समिट से पहले दून और टिहरी जनपद की अट्ठारह सड़कों को संवारा जाएगा। इसके लिए शासन ने लोनिवि और राष्ट्रीय राजमार्ग खंड को तेरह. इकतीस करोड़ का बजट जारी कर दिया है। सड़कों का सुधार और सौंदर्यीकरण कार्य पांच अक्टूबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए लोनिवि के खंडों में तैयारी शुरू हो गई हैं। राजधानी में बारिश से छलनी और गड्ढे वाली सड़कों के सुधार और सौंदर्यीकरण कार्य को मुंह मांगा बजट मिल गया है। अकेले गड्ढे भरने के लिए जनपद को छह करोड़ का बजट दिया गया है। इस बजट से कार्य अभी शुरुआती चरणों में चल रहा है। इस बीच अक्टूबर के पहले सप्ताह में आयोजित इन्वेस्टर समिट की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। इसके लिए लोक निर्माण विभाग ने राजधानी को जोड़ने वाली दून और टिहरी जनपद की सड़कों के सुधार, सौंदर्यीकरण के प्रस्ताव शासन को भेजे गए थे। शासन ने सभी प्रस्ताव को स्वीकृत करते हुए तेरह. इकतीस करोड़ रुपये का बजट जारी कर दिया है। इस बजट से इन्वेस्टर समिट के दौरान उपयोग होने वाली सड़कों का सौंदर्यीकरण और सुधार कार्य होगा। - मसूरी-डायवर्जन से घंटाघर तक। प्रिंस चौक से आराघर तक। सर्वे चौक से चूना भट्ट तक। घंटाघर से प्रिंस चौक। चकराता रोड। निरंजनपुर सब्जी मंडी से प्रिंस चौक। हरिद्वार रोड अग्रवाल बेकरी से रिस्पना पुल। नेहरू कॉलोनी फव्वारा चौक से छह नम्बर पुलिया रायपुर तक। सब्जी मंडी से फव्वारा चौक होते हुए चंचल डेरी तक। जौलीग्रांट एयरपोर्ट से नटराज चौक तक। भुइंया मंदिर से रायपुर चौक तक। ऋषिकेश में नटराज चौक से एनएच-अट्ठावन तक। इन्वेस्टर समिट के लिए मीडियन फुटपाथ की रंगाई-पुताई, क्षतिग्रस्त भाग में थर्मोप्लास्टिक पेंट, रोड मार्क, साइनेज, रोड स्टड, कैट आइज, स्प्रिंग पोस्ट, पटरी दरेसी, डेलीनेटर, जंगल कटान आदि कार्य भी किए जाने हैं। लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता आरसी अग्रवाल के मुताबिक इन्वेस्टर समिट को लेकर सड़कों के लिए पर्याप्त बजट मिल गया है। सड़कों के सुधार और सौंदर्यीकरण का कार्य शुरू कर दिया है। तय समय पर सभी सड़कें तैयार हो जाएगी। इसमें गुणवत्ता का विशेष ख्याल रखा जा रहा है। राज्य के पहले ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की तैयारियों का जायजा लेने मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह एवं डीजीपी अनिल रतूड़ी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम राजपुर पहुंचे। उन्होंने तैयारियों का निरीक्षण किया। मुख्य सचिव ने बताया कि सात एवं आठ अक्टूबर को होने वाले ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के आयोजन में सभी विभाग अपनी-अपनी जिम्मेदारियां बखूबी निभा रहे हैं। सात अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन्वेस्टर्स समिट को संबोधित करेंगे। निवेश सम्मेलन के लिए बेहतर रिस्पांस मिल रहा है। अभी तक करीब पैंतालीस हजार करोड़ के एमओयू पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि समिट में सिंगापुर, जापान, चेक रिपब्लिक आदि देशों के प्रतिनिधि भी शामिल हो रहे हैं। सिंगापुर के संचार एवं सूचना मंत्री एसई वरन ने भी समिट में भाग लेने की इच्छा जाहिर की है। बताया कि निवेश को आकर्षित करने के लिए उत्तराखंड सरकार ने मेगा इंडस्ट्रियल एंड इन्वेस्टमेंट पॉलिसी दो हज़ार पंद्रह में संशोधन किया है। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक वाहन मेन्युफैक्चिरिंग पॉलिसी, इन्फार्मेशन, कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी एंड इलेक्ट्रॉनिक्स पॉलिसी, स्टार्टअप पॉलिसी, एरोमा मार्क के लिए सुविधाएं, बायो टेक्नोलॉजी पॉलिसी, एनर्जी जेनरेशन आदि प्रमुख हैं। तैयारियों के निरीक्षण के दौरान प्रमुख सचिव उद्योग मनीषा पंवार, सचिव पर्यटन दिलीप जावलकर, एडीजी अशोक कुमार, सूचना महानिदेशक दीपेंद्र कुमार चौधरी, राज्य संपत्ति अधिकारी बंशीधर तिवारी, जिलाधिकारी एस मुरूगेशन, एसएसपी निवेदिता कुकरेती मौजूद रहे। उद्घाटन सत्र में सात अक्टूबर को अमूल डेयरी के एमडी आरएस सोढ़ी, मेदांता के एमडी डॉ. नरेश त्रेहान, भारत में जापान के राजदूत केंजी हिरामस्तु, चेक गणराज्य के राजदूत मिलन होवोर्क, टाटा संस के चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन, जेएसडब्ल्यू ग्रुप के चेयरमैन सज्जन जिंदल, महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महेंद्रा, ईएसएसएल लिमिटेड के चेयरमैन गौतम अडानी, पतंजलि आयुर्वेद के सह संस्थापक स्वामी रामदेव, रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी आदि संबोधित करेंगे।
धनार्जन सुगम होगा. विद्यार्थी वर्ग सफलता अर्जित करेगा. पठन-पाठन में मन लगेगा. दूर यात्रा की योजना बन सकती है. रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे. अप्रत्याशित लाभ हो सकता है. सट्टे व लॉटरी से दूर रहें. व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी. प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र अपने लिए किसी नए विषय को चुनेंगे तथा वे इसमें पूरा मन लगाकर तैयारी भी शुरू कर देंगे. आज के दिन अपना विशेष ध्यान रखे. सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी. आय के स्रोतों में वृद्धि हो सकती है. व्यवसाय ठीक चलेगा. चोट व रोग से बाधा संभव है. लेन-देन में सावधानी रखें. शारीरिक कष्ट संभव है. परिवार में तनाव रह सकता है. शुभ समाचार मिलेंगे. आत्मविश्वास में वृद्धि होगी. छात्राओं का मन आज के दिन अपने घर के कामों में ज्यादा लगेगा तथा वे अपना ज्यादातर समय आत्म-सुधार में लगाएंगी. बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे. व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी. कोई भी निर्णय लेने से पहले अपनों से बड़ों से अवश्य परामर्श ले. तीर्थयात्रा की योजना बनेगी. लाभ के अवसर हाथ आएंगे. व्यवसाय ठीक चलेगा. सुख के साधनों पर व्यय हो सकता है. स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा. विवाद से क्लेश संभव है. वाहन व मशीनरी के प्रयोग में लापरवाही न करें. अपेक्षित कार्यों में अप्रत्याशित बाधा आ सकती है. नई आर्थिक नीति बनेगी. कार्यप्रणाली में सुधार होगा. सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी. पार्टनरों का सहयोग मिलेगा. कारोबारी अनुबंधों में वृद्धि हो सकती है. आपकी बचत भी खत्म हो सकती है. अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे. कर्ज लेना पड़ सकता है. स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा. किसी विवाद में उलझ सकते हैं. चिंता तथा तनाव रहेंगे. धन प्राप्ति सुगम होगी. ऐश्वर्य के साधनों पर बड़ा खर्च हो सकता है. भूमि, भवन, दुकान व फैक्टरी आदि के खरीदने की योजना बनेगी. शरीर नयी ऊर्जा से भरा हुआ महसूस होगा तथा नित नए विचार मन में आएंगे. कोर्ट व कचहरी के काम मनोनुकूल रहेंगे. जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा.
धनार्जन सुगम होगा. विद्यार्थी वर्ग सफलता अर्जित करेगा. पठन-पाठन में मन लगेगा. दूर यात्रा की योजना बन सकती है. रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे. अप्रत्याशित लाभ हो सकता है. सट्टे व लॉटरी से दूर रहें. व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी. प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र अपने लिए किसी नए विषय को चुनेंगे तथा वे इसमें पूरा मन लगाकर तैयारी भी शुरू कर देंगे. आज के दिन अपना विशेष ध्यान रखे. सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी. आय के स्रोतों में वृद्धि हो सकती है. व्यवसाय ठीक चलेगा. चोट व रोग से बाधा संभव है. लेन-देन में सावधानी रखें. शारीरिक कष्ट संभव है. परिवार में तनाव रह सकता है. शुभ समाचार मिलेंगे. आत्मविश्वास में वृद्धि होगी. छात्राओं का मन आज के दिन अपने घर के कामों में ज्यादा लगेगा तथा वे अपना ज्यादातर समय आत्म-सुधार में लगाएंगी. बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे. व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी. कोई भी निर्णय लेने से पहले अपनों से बड़ों से अवश्य परामर्श ले. तीर्थयात्रा की योजना बनेगी. लाभ के अवसर हाथ आएंगे. व्यवसाय ठीक चलेगा. सुख के साधनों पर व्यय हो सकता है. स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा. विवाद से क्लेश संभव है. वाहन व मशीनरी के प्रयोग में लापरवाही न करें. अपेक्षित कार्यों में अप्रत्याशित बाधा आ सकती है. नई आर्थिक नीति बनेगी. कार्यप्रणाली में सुधार होगा. सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी. पार्टनरों का सहयोग मिलेगा. कारोबारी अनुबंधों में वृद्धि हो सकती है. आपकी बचत भी खत्म हो सकती है. अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे. कर्ज लेना पड़ सकता है. स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा. किसी विवाद में उलझ सकते हैं. चिंता तथा तनाव रहेंगे. धन प्राप्ति सुगम होगी. ऐश्वर्य के साधनों पर बड़ा खर्च हो सकता है. भूमि, भवन, दुकान व फैक्टरी आदि के खरीदने की योजना बनेगी. शरीर नयी ऊर्जा से भरा हुआ महसूस होगा तथा नित नए विचार मन में आएंगे. कोर्ट व कचहरी के काम मनोनुकूल रहेंगे. जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा.
चित्रकूट के बीहड़ में डाकू गौरी अपने गैंग के साथ कहां छिपा बैठा है? इसका पता 72 घंटे बाद भी नहीं चल सका है। शनिवार को लगातार तीसरे दिन पुलिस का सर्च ऑपरेशन जारी है। जंगल में 200 जवान 5 अलग-अलग टुकड़ियों में कर रहे डकैत की घेराबंदी करने में जुटे हैं, लेकिन 100 किमी के जंगल का दायरा बना उनके सामने चैलेंज बन रहा है। पुलिस घेराबंदी बढ़ा रही है। लेकिन अभी तक लोकेशन नहीं मिल सकी है। वहीं, मध्यप्रदेश की पुलिस के भी करीब 100 जवान जंगल में डकैत की घेराबंदी के उतरे हैं। उधर, मध्यप्रदेश की पुलिस ने डेढ़ लाख के इनामी डकैत गौरी की तलाश पर जंगल पर तीन थानों की फोर्स के सहित एसएएफ बटालियन के साथ जंगल की खाक छानना शुरू कर दी। मध्यप्रदेश पुलिस बगदरा के जंगल सती अनसूया जंगल बटोही के जंगल और बरौंधा जंगल में गई। मध्यप्रदेश की पुलिस के लगभग 100 जवान जंगल में उतरे। मंगलवार शाम को मानिकपुर के जंगल में वन विभाग का पौधारोपण का काम चल रहा था। इस बीच असलहों से लैस डकैत गौरी यादव अपने आधा दर्जन साथियों के साथ पहुंचा और फायरिंग कर दी और आगे से काम नहीं करने की हिदायत दी। मजदूरों और वन कर्मियों के साथ मारपीट की। इससे इलाके में दहशत फैल गई थी। इसके बाद ही पुलिस ने उसकी घेराबंदी शुरू कर दी। साल 2009 में खूंखार शंकर केवट के शागिर्द धनश्याम केवट को पुलिस ने मौत के घाट उतारा था। धनश्याम केवट का एनकाउंटर 52 घंटे चला, जो देश का सबसे बड़ा शूटआउट था। चित्रकूट के जंगल (बीहड़) में राज करने वाले डाकुओं को मारने के बाद अब गौरी उर्फ उदयभान यादव मुश्किलें खड़ी कर रहा है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
चित्रकूट के बीहड़ में डाकू गौरी अपने गैंग के साथ कहां छिपा बैठा है? इसका पता बहत्तर घंटाटे बाद भी नहीं चल सका है। शनिवार को लगातार तीसरे दिन पुलिस का सर्च ऑपरेशन जारी है। जंगल में दो सौ जवान पाँच अलग-अलग टुकड़ियों में कर रहे डकैत की घेराबंदी करने में जुटे हैं, लेकिन एक सौ किमी के जंगल का दायरा बना उनके सामने चैलेंज बन रहा है। पुलिस घेराबंदी बढ़ा रही है। लेकिन अभी तक लोकेशन नहीं मिल सकी है। वहीं, मध्यप्रदेश की पुलिस के भी करीब एक सौ जवान जंगल में डकैत की घेराबंदी के उतरे हैं। उधर, मध्यप्रदेश की पुलिस ने डेढ़ लाख के इनामी डकैत गौरी की तलाश पर जंगल पर तीन थानों की फोर्स के सहित एसएएफ बटालियन के साथ जंगल की खाक छानना शुरू कर दी। मध्यप्रदेश पुलिस बगदरा के जंगल सती अनसूया जंगल बटोही के जंगल और बरौंधा जंगल में गई। मध्यप्रदेश की पुलिस के लगभग एक सौ जवान जंगल में उतरे। मंगलवार शाम को मानिकपुर के जंगल में वन विभाग का पौधारोपण का काम चल रहा था। इस बीच असलहों से लैस डकैत गौरी यादव अपने आधा दर्जन साथियों के साथ पहुंचा और फायरिंग कर दी और आगे से काम नहीं करने की हिदायत दी। मजदूरों और वन कर्मियों के साथ मारपीट की। इससे इलाके में दहशत फैल गई थी। इसके बाद ही पुलिस ने उसकी घेराबंदी शुरू कर दी। साल दो हज़ार नौ में खूंखार शंकर केवट के शागिर्द धनश्याम केवट को पुलिस ने मौत के घाट उतारा था। धनश्याम केवट का एनकाउंटर बावन घंटाटे चला, जो देश का सबसे बड़ा शूटआउट था। चित्रकूट के जंगल में राज करने वाले डाकुओं को मारने के बाद अब गौरी उर्फ उदयभान यादव मुश्किलें खड़ी कर रहा है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
PM Modi: इसके अलावा उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में सामाजिक कार्यकर्ता मधु पाटकर के शामिल होने को लेकर भी कांग्रेस को सवालिया कटघरे में खड़ा किया। पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारत जोड़ो में मधु पाटकर को शामिल अपनी नीयत साफ कर दी है। पीएम मोदी ने कहा कि मधु पाटकर नर्मदा अभियान का विरोध किया था। National Herald Case: जानकारी के लिए बता दें कि सोनिया गांधा को इससे पहले कोरोना पॉजिटिव पाई गई थी। जिसके बाद उन्हें दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बीते सोमवार को उनको अस्पताल से छुट्टी मिल गई। सूत्रों के मुताबिक डॉक्टरों ने सोनिया गांधी को आराम करने की सलाह दी है। Priyanka Gandhi Corona: रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट करके लिखा कि कि सोनिया गांधी पिछले हफ्ते पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर रही थी। अब पता चल रहा है कि बुधवार शाम को वह कोरोना पॉजिटिव हो गई हैं। उन्हें इस बीमारी के हल्के लक्षण नजर आ रहे थे। जिसके बाद उन्होंने खुद को आइसोलेट कर लिया था।
PM Modi: इसके अलावा उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में सामाजिक कार्यकर्ता मधु पाटकर के शामिल होने को लेकर भी कांग्रेस को सवालिया कटघरे में खड़ा किया। पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारत जोड़ो में मधु पाटकर को शामिल अपनी नीयत साफ कर दी है। पीएम मोदी ने कहा कि मधु पाटकर नर्मदा अभियान का विरोध किया था। National Herald Case: जानकारी के लिए बता दें कि सोनिया गांधा को इससे पहले कोरोना पॉजिटिव पाई गई थी। जिसके बाद उन्हें दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बीते सोमवार को उनको अस्पताल से छुट्टी मिल गई। सूत्रों के मुताबिक डॉक्टरों ने सोनिया गांधी को आराम करने की सलाह दी है। Priyanka Gandhi Corona: रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट करके लिखा कि कि सोनिया गांधी पिछले हफ्ते पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर रही थी। अब पता चल रहा है कि बुधवार शाम को वह कोरोना पॉजिटिव हो गई हैं। उन्हें इस बीमारी के हल्के लक्षण नजर आ रहे थे। जिसके बाद उन्होंने खुद को आइसोलेट कर लिया था।
निजी संवाददाता। रक्कड़-तहसील रक्कड़ की ग्राम पंचायत कौलापुर के जटोली गांव में गत करीब आठ वर्षों से मुख्यमंत्री आरोग्य पशुधन योजना के अंतर्गत चल रहे पशु औषधालय को अंयंत्र शिफ्ट किए जाने को लेकर पंचायत प्रतिनिधियों की अगवाई में ग्रामीणों ने सरकार के प्रति रोष प्रकट करते हुए जमकर नारेबाजी की। उपप्रधान वीरेंद्र ठाकुर सहित स्थानीय निवासियों की मानें तो करीब आठ वर्षों से पशु औषधालय जटोली में चल रहा है, लेकिन अब इसे अंयंत्र शिफ्ट किया जा रहा है, जो सरासर गलत है। ग्रामीणों के अनुसार उक्त पंचायत की करीब डेढ़ से दो हजार आबादी के साथ-साथ निकटवर्ती क्षेत्र के लोग अपने बीमार पशुओं के इलाज हेतु उक्त पशु औषधालय पर निर्भर हैं। वहीं, सरकार के प्रति रोष प्रदर्शन करने के दौरान माजूद ग्रामीणों ने उपप्रधान की अगवाई में पशु औषधालय को ताला जड़ दिया है। ग्रामीणों ने कहा कि अगर किसी अन्य जगह पशु औषधालय की जरुरत है, तो वहां सरकार नया खोल दे लेकिन कई वर्षों से चल रहे उक्त औषधालय को अंयंत्र शिफ्ट या बंद करना न्यायोचित नहीं है। समस्त ग्रामीणों ने पंचायत उपप्रधान वीरेंद्र ठाकुर के नेतृत्व में उद्योग मंत्री व मुख्यमंत्री से निवेदन किया है कि स्थानीय पंचायत में चल रहे पशु औषधालय को बंद या कहीं और शिफ्ट न किया जाए। इस दौरान कौलापुर पंचायत उपप्रधान, वार्ड पंच आशा कुमारी, वार्ड पंच मदन राणा, राजा राम धीमान, मनोज धीमान, केशव दत्त, यशपाल, कुलदीप कुमार, गीता देवी, सुनीता देवी व आशा कुमारी सहित भारी संख्या में स्थानीय ग्रामीण माजूद रहे। उधर, पशु पालन विभाग धर्मशाला के डिप्टी डायरेक्टर डा. संजीव धीमान ने बताया कि एक पंचायत में दो पशु औषधालय नहीं खुल सकते। उन्होंने बताया कि जो गत वर्षों से स्थानीय पंचायत में पशु औषधालय चल रहा है वह मुख्यमंत्री आरोग्य पशुधन योजना के अंतर्गत है और जो नए पशु औषधालय की घोषणा हुई है वह रेगुलर होगा। हालांकि लोगों की मौजूदा मांग के संबंध में उच्च अधिकारियों को अवगत करवा दिया गया है।
निजी संवाददाता। रक्कड़-तहसील रक्कड़ की ग्राम पंचायत कौलापुर के जटोली गांव में गत करीब आठ वर्षों से मुख्यमंत्री आरोग्य पशुधन योजना के अंतर्गत चल रहे पशु औषधालय को अंयंत्र शिफ्ट किए जाने को लेकर पंचायत प्रतिनिधियों की अगवाई में ग्रामीणों ने सरकार के प्रति रोष प्रकट करते हुए जमकर नारेबाजी की। उपप्रधान वीरेंद्र ठाकुर सहित स्थानीय निवासियों की मानें तो करीब आठ वर्षों से पशु औषधालय जटोली में चल रहा है, लेकिन अब इसे अंयंत्र शिफ्ट किया जा रहा है, जो सरासर गलत है। ग्रामीणों के अनुसार उक्त पंचायत की करीब डेढ़ से दो हजार आबादी के साथ-साथ निकटवर्ती क्षेत्र के लोग अपने बीमार पशुओं के इलाज हेतु उक्त पशु औषधालय पर निर्भर हैं। वहीं, सरकार के प्रति रोष प्रदर्शन करने के दौरान माजूद ग्रामीणों ने उपप्रधान की अगवाई में पशु औषधालय को ताला जड़ दिया है। ग्रामीणों ने कहा कि अगर किसी अन्य जगह पशु औषधालय की जरुरत है, तो वहां सरकार नया खोल दे लेकिन कई वर्षों से चल रहे उक्त औषधालय को अंयंत्र शिफ्ट या बंद करना न्यायोचित नहीं है। समस्त ग्रामीणों ने पंचायत उपप्रधान वीरेंद्र ठाकुर के नेतृत्व में उद्योग मंत्री व मुख्यमंत्री से निवेदन किया है कि स्थानीय पंचायत में चल रहे पशु औषधालय को बंद या कहीं और शिफ्ट न किया जाए। इस दौरान कौलापुर पंचायत उपप्रधान, वार्ड पंच आशा कुमारी, वार्ड पंच मदन राणा, राजा राम धीमान, मनोज धीमान, केशव दत्त, यशपाल, कुलदीप कुमार, गीता देवी, सुनीता देवी व आशा कुमारी सहित भारी संख्या में स्थानीय ग्रामीण माजूद रहे। उधर, पशु पालन विभाग धर्मशाला के डिप्टी डायरेक्टर डा. संजीव धीमान ने बताया कि एक पंचायत में दो पशु औषधालय नहीं खुल सकते। उन्होंने बताया कि जो गत वर्षों से स्थानीय पंचायत में पशु औषधालय चल रहा है वह मुख्यमंत्री आरोग्य पशुधन योजना के अंतर्गत है और जो नए पशु औषधालय की घोषणा हुई है वह रेगुलर होगा। हालांकि लोगों की मौजूदा मांग के संबंध में उच्च अधिकारियों को अवगत करवा दिया गया है।
Raksha Bandhan Film Review: फिल्म भाई-बहन के खूबसूरत रिश्ते पर आधारित है। एक लंबे अरसे के बाद बॉलीवुड में ऐसी कहानी देखने को मिली है जिसमे भाई और बहन के बीच के अटूट प्रेम को फिल्माया गया है। एक मिडिल क्लास परिवार में किस तरह भाई-बहन एक-दूसरे के लिए अपने सपनों की कुर्बानी देकर एक-दूसरे का सहारा बनते हैं, इसे सिखाने के लिए इस फिल्म से बेहतर और कोइ उदाहरण नहीं हो सकता है। Raksha Bandhan 2022: भाई-बहन हमारे सबसे पहले और सबसे अच्छे दोस्त होते हैं। तो अगर आप भी इस साल राखी के मौके पर अपने भाई या बहन से दूर हैं और उनको मिस कर रहे हैं तो परेशान न हों क्योंकि हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ऐसे प्यारे तरीके जिन्हें अपनाकर आप दूर रहते हुए भी अपने भाई या बहन को राखी के दिन स्पेशल फील करवा सकते हैं। WiFi Tricks: कभी-कभी वाईफाई के साथ कई ऐसे मसले भी हो जाते हैं जो काफी अजीब होते हैं और लोग इसे समझ नहीं पाते कि इस समस्या का हल कैसे किया जाए। अक्सर आपने ऐसा देखा होगा कि फोन वाई-फाई नेटवर्क से तो कनेक्ट रहता है लेकिन फिर भी हमारा इंटरनेट काम नहीं कर रहा होता जो कई बार परेशानी का सबब बन जाता है। Bhojpuri Song: अरविंद अकेला कल्लू ने सावन के मौके पर एक से बढ़ कर एक भोजपुरी गाने रिलीज किये हैं। अब इस सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए अरविंद अकेला कल्लू का एक और कांवर गीत धूम मचाने आ गया है। Anjali Arora MMS: अंजलि का 'कच्चा बादाम' गाने पर रील्स सोशल मीडिया पर खासा वायरल हुआ था। तब से लोग उन्हें कच्चा बादाम गर्ल के नाम से जानते हैं। सोशल मीडिया पर अंजलि को 11 मिलियन से ज्यादा लोग फ़ॉलो करते हैं। Bhojpuri: भोजपुरी इंडस्ट्री का विवादों से भी गहरा नाता रहा है। शायद इसलिए भी ऐसा है क्यूंकि भदेस अंदाज होने की वजह से यहां पर खुलापन ज्यादा है। जिस वजह से थोड़ी सी नादानी और अभिनेत्रियां यहां मुश्किल में पड़ जाती हैं। Bhojpuri: खेसारी लाल यादव अभी भी अपने बोलबम गीतों को लेकर लोगों के बीच छाए हुए हैं। एक्टर आए दिन नई-नई अभिनेत्रियों के साथ म्यूजिक वीडियोज में रोमांस करते नजर आ रहे हैं। Pratyusha Banerjee: प्रत्युषा 2010 में जमशेदपुर छोड़कर एक्टिंग में अपनी किस्मत आजमाने मायानगरी मुंबई आई थीं और वो सफल भी रहीं। प्रत्युषा ने 'रक्त संबंध' से अपना डेब्यू किया था। इसके बाद वो पॉपुलर टीवी सीरियल 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' में भी नजर आईं। Starkids Name: लोग अपने पसंदीदा सेलिब्रिटीज के बारे में हर छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी बात जानने के लिए उतावले रहते हैं। यही वजह है कि भारत में स्टारकिड्स भी किसी सेलेब्रिटी से कम नहीं हैं। फैंस अपने चहेते सितारों के बच्चों के बारे में भी हर बात जानने को इच्छुक रहते हैं। Bhojpuri: पॉपुलर एक्टर खेसारी लाल यादव और शिल्पी राज का नया गाना 'मकई के बाल ले ल' भी आते ही दर्शकों के बीच छा गया है। वहीं दूसरी और खेसारी अपनी अपकमिंग फिल्म 'संघर्ष 2' को लेकर भी सुर्ख़ियों में बने हुए है।
Raksha Bandhan Film Review: फिल्म भाई-बहन के खूबसूरत रिश्ते पर आधारित है। एक लंबे अरसे के बाद बॉलीवुड में ऐसी कहानी देखने को मिली है जिसमे भाई और बहन के बीच के अटूट प्रेम को फिल्माया गया है। एक मिडिल क्लास परिवार में किस तरह भाई-बहन एक-दूसरे के लिए अपने सपनों की कुर्बानी देकर एक-दूसरे का सहारा बनते हैं, इसे सिखाने के लिए इस फिल्म से बेहतर और कोइ उदाहरण नहीं हो सकता है। Raksha Bandhan दो हज़ार बाईस: भाई-बहन हमारे सबसे पहले और सबसे अच्छे दोस्त होते हैं। तो अगर आप भी इस साल राखी के मौके पर अपने भाई या बहन से दूर हैं और उनको मिस कर रहे हैं तो परेशान न हों क्योंकि हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ऐसे प्यारे तरीके जिन्हें अपनाकर आप दूर रहते हुए भी अपने भाई या बहन को राखी के दिन स्पेशल फील करवा सकते हैं। WiFi Tricks: कभी-कभी वाईफाई के साथ कई ऐसे मसले भी हो जाते हैं जो काफी अजीब होते हैं और लोग इसे समझ नहीं पाते कि इस समस्या का हल कैसे किया जाए। अक्सर आपने ऐसा देखा होगा कि फोन वाई-फाई नेटवर्क से तो कनेक्ट रहता है लेकिन फिर भी हमारा इंटरनेट काम नहीं कर रहा होता जो कई बार परेशानी का सबब बन जाता है। Bhojpuri Song: अरविंद अकेला कल्लू ने सावन के मौके पर एक से बढ़ कर एक भोजपुरी गाने रिलीज किये हैं। अब इस सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए अरविंद अकेला कल्लू का एक और कांवर गीत धूम मचाने आ गया है। Anjali Arora MMS: अंजलि का 'कच्चा बादाम' गाने पर रील्स सोशल मीडिया पर खासा वायरल हुआ था। तब से लोग उन्हें कच्चा बादाम गर्ल के नाम से जानते हैं। सोशल मीडिया पर अंजलि को ग्यारह मिलियन से ज्यादा लोग फ़ॉलो करते हैं। Bhojpuri: भोजपुरी इंडस्ट्री का विवादों से भी गहरा नाता रहा है। शायद इसलिए भी ऐसा है क्यूंकि भदेस अंदाज होने की वजह से यहां पर खुलापन ज्यादा है। जिस वजह से थोड़ी सी नादानी और अभिनेत्रियां यहां मुश्किल में पड़ जाती हैं। Bhojpuri: खेसारी लाल यादव अभी भी अपने बोलबम गीतों को लेकर लोगों के बीच छाए हुए हैं। एक्टर आए दिन नई-नई अभिनेत्रियों के साथ म्यूजिक वीडियोज में रोमांस करते नजर आ रहे हैं। Pratyusha Banerjee: प्रत्युषा दो हज़ार दस में जमशेदपुर छोड़कर एक्टिंग में अपनी किस्मत आजमाने मायानगरी मुंबई आई थीं और वो सफल भी रहीं। प्रत्युषा ने 'रक्त संबंध' से अपना डेब्यू किया था। इसके बाद वो पॉपुलर टीवी सीरियल 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' में भी नजर आईं। Starkids Name: लोग अपने पसंदीदा सेलिब्रिटीज के बारे में हर छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी बात जानने के लिए उतावले रहते हैं। यही वजह है कि भारत में स्टारकिड्स भी किसी सेलेब्रिटी से कम नहीं हैं। फैंस अपने चहेते सितारों के बच्चों के बारे में भी हर बात जानने को इच्छुक रहते हैं। Bhojpuri: पॉपुलर एक्टर खेसारी लाल यादव और शिल्पी राज का नया गाना 'मकई के बाल ले ल' भी आते ही दर्शकों के बीच छा गया है। वहीं दूसरी और खेसारी अपनी अपकमिंग फिल्म 'संघर्ष दो' को लेकर भी सुर्ख़ियों में बने हुए है।
बालिका गृह प्रकरण के बाद सहारनपुर से लखनऊ तक खलबली मची हुई है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने भी इस मामले की रिपोर्ट तलब की है। इसके बाद प्रशासन ने पूरे प्रकरण में अब तक हुई कार्रवाई की रिपोर्ट तैयार कर निदेशक महिला कल्याण को भेज दी है। उधर, सहारनपुर बाल कल्याण समिति भी इस मामले को लेकर गंभीर है और समिति के सदस्यों ने बालिका गृह का निरीक्षण भी किया। एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने बताया कि देर रात बालिका गृह की अधीक्षक पिंकी, प्रबंधक वीपी सिंह को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। जनता रोड स्थित आवासीय बालिका गृह कई दिनों से सुर्खियों में है। बालिकाओं ने प्रबंधक और अधीक्षिका पर कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। इसकी जांच कराई गई थी, जिसके बाद जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला प्रबोशन अधिकारी अभिषेक पांडेय की तहरीर पर थाना जनकपुरी में एफआईआर दर्ज की गई थी। यही नहीं, बालिकाओं ने आरोपियों को आवास से हटाने के लिए प्रदर्शन भी किया था। इसके बाद हंगामा खड़ा हो गया था। डीएम ने इस मामले में तुरंत कार्रवाई करते हुए प्रबंधक का बालिका गृह में प्रवेश करने पर रोक लगा दी थी। साथ अधीक्षिका समेत पांच को बर्खास्त कर दिया था। इस मामले को लेकर अब शासन भी गंभीर हो गया है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने भी प्रशासन से पूरे मामले में रिपोर्ट मांगी है। इसके बाद प्रशाासने पूरे प्रकरण में अब तक हुई कार्रवाई के आधार पर रिपोर्ट तैयार की। यह रिपोर्ट निदेशक महिला कल्याण विभाग को भेजी गई है। बालिका सुधार गृह प्रकरण में जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला प्रोबेशन अधिकारी ने अधीक्षिका ¨पकी समेत चार संविदा कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया, लेकिन बालिकाएं जिस प्रबंधक वीपी सिंह पर गंभीर आरोप लगा रही हैं उसके खिलाफ सिर्फ मुकदमा दर्ज कर इतिश्री कर ली है। इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित वीडियो में बालिकाएं प्रबंधक पर गंभीर आरोप लगा रही हैं। वे कह रही हैं कि प्रबंधक छेड़छाड़ करता था, उन्हें निर्वस्त्र कर प्राइवेट पार्ट में मिर्च तक डाली जाती थी। कई अन्य गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। जिला प्रोबेशन अधिकारी अभिषेक पांडेय ने बताया कि 20 मई को वह, एसपी सिटी अभिमन्यु मांगलिक और एसडीएम सदर कीर्तिराज सिंह बालिका सुधार गृह में निरीक्षण पर गए थे। इसी दौरान यहां पर छात्राओं ने आरोप लगाए कि शिक्षिका सही ढंग से नहीं पढ़ातीं। उनके साथ मारपीट करती हैं। रसोइया साफ सफाई नहीं रखता और गंदा खाना देता है। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि चार दिन पहले पांच बच्चियां बेहोश हो गई थीं। प्रबंधक और अधीक्षिका पिंकी द्वारा चुपचाप निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया था। उपचार के बाद उन्हें वापस बालिका सुधार गृह लाया गया। शुक्रवार रात इंटरनेट मीडिया पर एक वीडियो प्रसारित हुआ जिसमें बागपत जिले की एक बालिका आरोप लगा रही है कि प्रबंधक अक्सर उसके और अन्य कई बालिकाओं के साथ छेड़छाड़ करता है। अश्लील शब्द बोलने के साथ ही उन्हें निर्वस्त्र कर प्राइवेट पार्ट में मिर्च तक डालता है। कई अन्य आरोप भी प्रबंधक पर लगाए जा रहे हैं। वीडियो प्रसारित होने के बाद जिला प्रोबेशन अधिकारी अभिषेक पांडेय की तरफ से जनकपुरी थाने में अधीक्षिका पिंकी, प्रबंधक वीपी सिंह, रसोइया मूर्ति देवी, शिक्षिका लक्ष्मी देवी, हेल्पर रवि के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। डीएम डा. दिनेश चंद के आदेश पर जिला प्रोबेशन अधिकारी ने अधीक्षिका समेत चार संविदा कर्मियों की सेवा समाप्त कर दी। अधीक्षिका भी संविदा पर थी। एसएसपी विपिन ताडा ने बताया कि मामले की जांच सीओ रुचि गुप्ता को सौंपी गई है। प्रसारित वीडियो और सीसीटीवी की जांच के बाद मामले में धाराएं व आरोपितों के नाम बढ़ाए जाएंगे। बालिका सुधार गृह में मीडिया के प्रवेश पर पाबंदी है। यदि यहां पर निरीक्षण भी होता है तो अंदर मीडिया को नहीं जाने दिया जाता है। यह मामला 20 मई का है, लेकिन अधिकारी इसे दबाने का प्रयास कर रहे थे। अचानक शुक्रवार को प्रसारित हुए वीडियो से पूरा सच सामने आ गया। हालांकि दैनिक जागरण ऐसे किसी प्रसरित वीडियो की पुष्टि नहीं करता। उधर, बाल कल्याण समिति ने भी पूरे प्रकरण पर सख्त नाराजगी जाहिर की है। रविवार को बाल कल्याण समिति के सदस्यों ने बाल गृह का निरीक्षण किया। समिति के सदस्यों ने बालिकाओं से वार्ता की। साथ ही बालिका गृह में बालिकाओं को मिलने वाली सुविधाओं के बारे में भी जानकारी ली। प्रकरण के बाद डीएम ने बालिका गृह के स्टाफ को भी हटा दिया था। इसके बाद नया स्टाफ तैनात किया गया है। एक कर्मचारी प्रोबेशन कार्यालय से भेजा गया है। जबकि, तीन कर्मचारी वन स्टॉप सेंटर से तैनात किए गए हैं। जिला प्रोबेशन अधिकारी अभिषेक पांडेय ने बताया कि प्रकरण को लेकर निदेशक महिला कल्याण विभाग द्वारा रिपोर्ट मांगी गई थी। पूरे प्रकरण की जांच और अब तक हुई कार्रवाई की रिपोर्ट निदेशक को भेजी गई है। बाल कल्याण समिति ने भी बालिका गृह का दौरा किया। साथ ही नए स्टॉप की भी तैनाती हुई है। आवासीय बालिका गृह प्रकरण में पुलिस ने भी अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। सीओ बेहट के नेतृत्व में गठित एसआईटी मुकदमे की तफ्तीश में जुट गई है। अभी तक 32 बालिकाओं के बयान दर्ज कर लिए गए हैं। इसके साथ ही कुछ बालिकाओं का मेडिकल परीक्षण भी कराया गया है। आवासीय बालिका गृह प्रकरण में थाना जनकपुरी में मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसमें बालिका गृह के प्रबंधक समेत पांच को नामजद किया गया था। मुकदमा दर्ज होने के बाद इस मामले की तफ्तीश के लिए एसएसपी ने सीओ बेहट के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया था। तफ्तीश सीओ बेहट को ट्रांसफर होने के बाद उन्होंने तेजी से तफ्तीश शुरू कर दिया है।
बालिका गृह प्रकरण के बाद सहारनपुर से लखनऊ तक खलबली मची हुई है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने भी इस मामले की रिपोर्ट तलब की है। इसके बाद प्रशासन ने पूरे प्रकरण में अब तक हुई कार्रवाई की रिपोर्ट तैयार कर निदेशक महिला कल्याण को भेज दी है। उधर, सहारनपुर बाल कल्याण समिति भी इस मामले को लेकर गंभीर है और समिति के सदस्यों ने बालिका गृह का निरीक्षण भी किया। एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने बताया कि देर रात बालिका गृह की अधीक्षक पिंकी, प्रबंधक वीपी सिंह को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। जनता रोड स्थित आवासीय बालिका गृह कई दिनों से सुर्खियों में है। बालिकाओं ने प्रबंधक और अधीक्षिका पर कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। इसकी जांच कराई गई थी, जिसके बाद जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला प्रबोशन अधिकारी अभिषेक पांडेय की तहरीर पर थाना जनकपुरी में एफआईआर दर्ज की गई थी। यही नहीं, बालिकाओं ने आरोपियों को आवास से हटाने के लिए प्रदर्शन भी किया था। इसके बाद हंगामा खड़ा हो गया था। डीएम ने इस मामले में तुरंत कार्रवाई करते हुए प्रबंधक का बालिका गृह में प्रवेश करने पर रोक लगा दी थी। साथ अधीक्षिका समेत पांच को बर्खास्त कर दिया था। इस मामले को लेकर अब शासन भी गंभीर हो गया है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने भी प्रशासन से पूरे मामले में रिपोर्ट मांगी है। इसके बाद प्रशाासने पूरे प्रकरण में अब तक हुई कार्रवाई के आधार पर रिपोर्ट तैयार की। यह रिपोर्ट निदेशक महिला कल्याण विभाग को भेजी गई है। बालिका सुधार गृह प्रकरण में जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला प्रोबेशन अधिकारी ने अधीक्षिका ¨पकी समेत चार संविदा कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया, लेकिन बालिकाएं जिस प्रबंधक वीपी सिंह पर गंभीर आरोप लगा रही हैं उसके खिलाफ सिर्फ मुकदमा दर्ज कर इतिश्री कर ली है। इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित वीडियो में बालिकाएं प्रबंधक पर गंभीर आरोप लगा रही हैं। वे कह रही हैं कि प्रबंधक छेड़छाड़ करता था, उन्हें निर्वस्त्र कर प्राइवेट पार्ट में मिर्च तक डाली जाती थी। कई अन्य गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। जिला प्रोबेशन अधिकारी अभिषेक पांडेय ने बताया कि बीस मई को वह, एसपी सिटी अभिमन्यु मांगलिक और एसडीएम सदर कीर्तिराज सिंह बालिका सुधार गृह में निरीक्षण पर गए थे। इसी दौरान यहां पर छात्राओं ने आरोप लगाए कि शिक्षिका सही ढंग से नहीं पढ़ातीं। उनके साथ मारपीट करती हैं। रसोइया साफ सफाई नहीं रखता और गंदा खाना देता है। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि चार दिन पहले पांच बच्चियां बेहोश हो गई थीं। प्रबंधक और अधीक्षिका पिंकी द्वारा चुपचाप निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया था। उपचार के बाद उन्हें वापस बालिका सुधार गृह लाया गया। शुक्रवार रात इंटरनेट मीडिया पर एक वीडियो प्रसारित हुआ जिसमें बागपत जिले की एक बालिका आरोप लगा रही है कि प्रबंधक अक्सर उसके और अन्य कई बालिकाओं के साथ छेड़छाड़ करता है। अश्लील शब्द बोलने के साथ ही उन्हें निर्वस्त्र कर प्राइवेट पार्ट में मिर्च तक डालता है। कई अन्य आरोप भी प्रबंधक पर लगाए जा रहे हैं। वीडियो प्रसारित होने के बाद जिला प्रोबेशन अधिकारी अभिषेक पांडेय की तरफ से जनकपुरी थाने में अधीक्षिका पिंकी, प्रबंधक वीपी सिंह, रसोइया मूर्ति देवी, शिक्षिका लक्ष्मी देवी, हेल्पर रवि के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। डीएम डा. दिनेश चंद के आदेश पर जिला प्रोबेशन अधिकारी ने अधीक्षिका समेत चार संविदा कर्मियों की सेवा समाप्त कर दी। अधीक्षिका भी संविदा पर थी। एसएसपी विपिन ताडा ने बताया कि मामले की जांच सीओ रुचि गुप्ता को सौंपी गई है। प्रसारित वीडियो और सीसीटीवी की जांच के बाद मामले में धाराएं व आरोपितों के नाम बढ़ाए जाएंगे। बालिका सुधार गृह में मीडिया के प्रवेश पर पाबंदी है। यदि यहां पर निरीक्षण भी होता है तो अंदर मीडिया को नहीं जाने दिया जाता है। यह मामला बीस मई का है, लेकिन अधिकारी इसे दबाने का प्रयास कर रहे थे। अचानक शुक्रवार को प्रसारित हुए वीडियो से पूरा सच सामने आ गया। हालांकि दैनिक जागरण ऐसे किसी प्रसरित वीडियो की पुष्टि नहीं करता। उधर, बाल कल्याण समिति ने भी पूरे प्रकरण पर सख्त नाराजगी जाहिर की है। रविवार को बाल कल्याण समिति के सदस्यों ने बाल गृह का निरीक्षण किया। समिति के सदस्यों ने बालिकाओं से वार्ता की। साथ ही बालिका गृह में बालिकाओं को मिलने वाली सुविधाओं के बारे में भी जानकारी ली। प्रकरण के बाद डीएम ने बालिका गृह के स्टाफ को भी हटा दिया था। इसके बाद नया स्टाफ तैनात किया गया है। एक कर्मचारी प्रोबेशन कार्यालय से भेजा गया है। जबकि, तीन कर्मचारी वन स्टॉप सेंटर से तैनात किए गए हैं। जिला प्रोबेशन अधिकारी अभिषेक पांडेय ने बताया कि प्रकरण को लेकर निदेशक महिला कल्याण विभाग द्वारा रिपोर्ट मांगी गई थी। पूरे प्रकरण की जांच और अब तक हुई कार्रवाई की रिपोर्ट निदेशक को भेजी गई है। बाल कल्याण समिति ने भी बालिका गृह का दौरा किया। साथ ही नए स्टॉप की भी तैनाती हुई है। आवासीय बालिका गृह प्रकरण में पुलिस ने भी अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। सीओ बेहट के नेतृत्व में गठित एसआईटी मुकदमे की तफ्तीश में जुट गई है। अभी तक बत्तीस बालिकाओं के बयान दर्ज कर लिए गए हैं। इसके साथ ही कुछ बालिकाओं का मेडिकल परीक्षण भी कराया गया है। आवासीय बालिका गृह प्रकरण में थाना जनकपुरी में मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसमें बालिका गृह के प्रबंधक समेत पांच को नामजद किया गया था। मुकदमा दर्ज होने के बाद इस मामले की तफ्तीश के लिए एसएसपी ने सीओ बेहट के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया था। तफ्तीश सीओ बेहट को ट्रांसफर होने के बाद उन्होंने तेजी से तफ्तीश शुरू कर दिया है।
यदि आपकी साइट की सारी की सारी सामग्री की चोरी कर कोई अन्य साइट अपनी दुकान सजा ले तो आपको कैसा लगेगा? आज मैं गूगल में कुछ सर्च कर रहा था तो नईख़बर. कॉम (http://www. naikhabar. com/poems-story-and-jokes. html) सर्च रिजल्ट में पहले आया. जबकि सामग्री ठेठ रचनाकार. ऑर्ग (http://rachanakar. org) की थी. मेरा माथा ठनका. मुझे लगा कि रचनाकार. ऑर्ग की रचनाओं को उदाहरण के लिये फिर से छापा गया होगा या कोई एकाध सामग्री साभार पुनःप्रकाशित हुई होगी या किसी लेखक की सहमति से उसकी रचनाएँ रचनाकार. ऑर्ग सहित दोबारा वहाँ प्रकाशित हुई होगी. तो मैं महज जाँच पड़ताल के लिए वहाँ गया. वहाँ दुख और आश्चर्य के साथ मैंने पाया कि रचनाकार. ऑर्ग की तमाम रचनाएँ वहाँ बड़े शान से प्रकाशित हैं. प्रकटतः रचनाकार. ऑर्ग की फुल फ़ीड को वो बेशर्मी से पुनः प्रकाशित कर रहे हैं और अपने साइट में सामग्री भर रहे हैं. नईखबर के साहित्य खंड के आज का स्क्रीनशॉट ये है जिसमें रचनाकार. ऑर्ग की तमाम नई रचनाएँ यहाँ कॉपी-पेस्ट की गई हैं. आप देखेंगे कि रचनाकार की तमाम रचनाओं को यहाँ बड़ी ही खूबसूरती से सजाया गया है. यहाँ तक कि अजय 'अज्ञात' की पूरी की पूरी 85 ग़ज़लों को भी रचनाकार स्टाइल में छाप दिया गया है जबकि इस तरह की साइटों में आमतौर पर बड़ी सामग्री को मल्टी पेज (स्क्रॉलिंग नहीं, ताकि बार बार पेज लोड हो) में प्रकाशित किया जाता है! और, कोढ़ में खाज यह कि न तो कहीं रचनाकार. ऑर्ग का नाम दिया गया है और न ही कहीं रचनाकार. ऑर्ग की लिंक दी गई है. इससे पहले भी रचनाकार. ऑर्ग की विशिष्ट-वृहद सामग्रियों को अन्यत्र प्रकाशित किया जाता रहा है - खासकर एक सरकारी-वित्त-पोषित साइट में, मगर सारी की सारी सामग्रियों को अपनी साइट पर कॉपी-पेस्ट करने की यह विशिष्ट घटना है. आप सभी पाठकों से आत्मीय आग्रह है कि नेट पर इस तरह के सामग्री डाका के खिलाफ आवाज बुलंद करें नहीं तो कल आपकी साइट की सामग्री के साथ भी यही खतरा हो सकता है. साथ ही नईख़बर. कॉम (http://www. naikhabar. com/poems-story-and-jokes. html) में छपी चोरी की रचनाओं के नीचे टिप्पणियों में इस संबंध में अपना कड़ा विरोध दर्ज करें. नईख़बर. कॉम में कोई संपर्क सूत्र भी प्रकाशित नहीं है, अलबत्ता डोमेन नेम रजिस्ट्रार के यहाँ कंटेंट चोरी का मामला दर्ज करने की शिकायत प्रारंभ की जा रही है. नईख़बर. कॉम को लेकर एक मित्र की प्रतिक्रिया, जिनकी भी सामग्री को उनसे बिना अनुमति के प्रकाशित किया गया है : "इस तरह के चोर-उचक्के किसी की अनुमति क्या लेंगे. नाम-पता तो छोड़ो, ये भूतनी का तो अपने फ़ेसबुक की wall तक पर ढक्कन लगाए बैठा है. ये कमीना चोर ही नहीं है, अव्वल दर्ज़े का डरपोक भी है. इसके फेसबुक के सभी मित्रों को ये ख़बर दे रहा हूं. " मित्र की बात सत्य प्रतीत होती है क्योंकि डोमेन-टूल्स द्वारा इस जाल-स्थल के बारे में जानकारी प्राप्त करने पर इसके संपर्क-सूत्रों का कोई अता पता दर्ज नहीं मिलता है.
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विल्मा ने "आँसुओं की पगडंडी" वाली कहानी को, हमेशा अपने दिल में सजह कर रखा. विल्मा उन लोगों की परपोती थी जो उस पगडंडी पर रोए थे. सैन फ्रांसिस्को में विल्मा भी रोई थी. वहाँ, उसने केवल एक ही चीज़ के बारे में खुदको भाग्यशाली महसूस किया था. जिन चेरोकी लोगों को ओक्लाहोमा भेजा गया था, वे कभी अपने पुराने घरों में वापस नहीं गए थे. पर विल्मा जानती थी कि वो एक दिन फिर अपने पुराने घर में वापस जाएगी. 1977 में विल्मा फिर ओक्लाहोमा में अपने घर वापस लौटी. लेकिन उसे वहां लौटने में बीस साल से अधिक समय लगा. तब तक, 1977 में, विल्मा की अपनी दो बेटियाँ थीं - जीना और फ़ेलिशिया. फिर विल्मा अपनी बेटियों के साथ मैनकिलर- फ्लैट्स में वापस गई. अपने चेरोकी दोस्तों से मिलकर विल्मा को बहुत अच्छा लगा. वो अपनी खिड़की से रॉबिंस और ब्लूबर्ड्स पक्षियों को देखकर खुश हुई. उसने चांदनी में, कोयोट्स की आवाज सुनी, और वो डरी नहीं. विल्मा को जल्द ही चेरोकी नेशन में एक नौकरी मिल गई. चेरोकी लोगों के पास एक नहीं, दो राष्ट्रीयताएं थींः एक संयुक्त राज्य अमेरिका की, और दूसरी चेरोकी नेशन की. वाशिंगटन, डीसी में, अमेरिकी सरकार, सभी बड़े निर्णय लेती थी. तहलेक्वा, ओक्लाहोमा में चेरोकी सरकार, चेरोकी नेशन के सभी बड़े निर्णय लेती थी.
विल्मा ने "आँसुओं की पगडंडी" वाली कहानी को, हमेशा अपने दिल में सजह कर रखा. विल्मा उन लोगों की परपोती थी जो उस पगडंडी पर रोए थे. सैन फ्रांसिस्को में विल्मा भी रोई थी. वहाँ, उसने केवल एक ही चीज़ के बारे में खुदको भाग्यशाली महसूस किया था. जिन चेरोकी लोगों को ओक्लाहोमा भेजा गया था, वे कभी अपने पुराने घरों में वापस नहीं गए थे. पर विल्मा जानती थी कि वो एक दिन फिर अपने पुराने घर में वापस जाएगी. एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर में विल्मा फिर ओक्लाहोमा में अपने घर वापस लौटी. लेकिन उसे वहां लौटने में बीस साल से अधिक समय लगा. तब तक, एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर में, विल्मा की अपनी दो बेटियाँ थीं - जीना और फ़ेलिशिया. फिर विल्मा अपनी बेटियों के साथ मैनकिलर- फ्लैट्स में वापस गई. अपने चेरोकी दोस्तों से मिलकर विल्मा को बहुत अच्छा लगा. वो अपनी खिड़की से रॉबिंस और ब्लूबर्ड्स पक्षियों को देखकर खुश हुई. उसने चांदनी में, कोयोट्स की आवाज सुनी, और वो डरी नहीं. विल्मा को जल्द ही चेरोकी नेशन में एक नौकरी मिल गई. चेरोकी लोगों के पास एक नहीं, दो राष्ट्रीयताएं थींः एक संयुक्त राज्य अमेरिका की, और दूसरी चेरोकी नेशन की. वाशिंगटन, डीसी में, अमेरिकी सरकार, सभी बड़े निर्णय लेती थी. तहलेक्वा, ओक्लाहोमा में चेरोकी सरकार, चेरोकी नेशन के सभी बड़े निर्णय लेती थी.
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के ट्रस्ट को सरकार से चाहिए 7 करोड़ रुपये, पर आखिर किस बात के? Jyotiraditya Scindia News: केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के ट्रस्ट ने मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार से तगड़ा मुआवजा मांगा है. कमला राजे चैरिटेबल ट्रस्ट का कहना है कि एजी ऑफिस ओवरब्रिज की जमीन उसकी है. सरकार ने उस पर ब्रिज बना दिया. इसलिए ट्रस्ट ने सरकार से 7 करोड़ रुपये और 12 फीसदी ब्याज मांगा है.
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के ट्रस्ट को सरकार से चाहिए सात करोड़ रुपये, पर आखिर किस बात के? Jyotiraditya Scindia News: केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के ट्रस्ट ने मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार से तगड़ा मुआवजा मांगा है. कमला राजे चैरिटेबल ट्रस्ट का कहना है कि एजी ऑफिस ओवरब्रिज की जमीन उसकी है. सरकार ने उस पर ब्रिज बना दिया. इसलिए ट्रस्ट ने सरकार से सात करोड़ रुपये और बारह फीसदी ब्याज मांगा है.
News wing Bokaro, 02 november : बोकारो थर्मल थाना क्षेत्र के कथारा चौक में स्कूटी सवार महिला की मौत ट्रक नम्बर JH09R 2421 की चपेट में आने से घटनास्थल पर ही हो गयी. मृतक महिला चार नम्बर कथारा कॉलोनी की रहने वाली थी. इसाई धर्मावलंबियों के मिस्सा त्योहार से वापस लौटने के क्रम में कथारा चौक के पास मुख्य सड़क पर आने के दौरान घटना हुयी. घटना के बाद गुस्साये लोगों ने गोमिया-फुसरो मेन रोड को जाम कर दिया. सड़क जाम कर लोगों ने मृतका के परिजनों को मुआवजा देने और एवं शाम में नो इंट्री की मांग की. पुलिस और प्रशासनिक पदाधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर लोगों को समझा-बुझा कर जाम हटाने की कोशिश की, लेकिन आक्रोशित लोग अपनी मांगों को लेकर अड़े रहे.
News wing Bokaro, दो november : बोकारो थर्मल थाना क्षेत्र के कथारा चौक में स्कूटी सवार महिला की मौत ट्रक नम्बर JHनौR दो हज़ार चार सौ इक्कीस की चपेट में आने से घटनास्थल पर ही हो गयी. मृतक महिला चार नम्बर कथारा कॉलोनी की रहने वाली थी. इसाई धर्मावलंबियों के मिस्सा त्योहार से वापस लौटने के क्रम में कथारा चौक के पास मुख्य सड़क पर आने के दौरान घटना हुयी. घटना के बाद गुस्साये लोगों ने गोमिया-फुसरो मेन रोड को जाम कर दिया. सड़क जाम कर लोगों ने मृतका के परिजनों को मुआवजा देने और एवं शाम में नो इंट्री की मांग की. पुलिस और प्रशासनिक पदाधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर लोगों को समझा-बुझा कर जाम हटाने की कोशिश की, लेकिन आक्रोशित लोग अपनी मांगों को लेकर अड़े रहे.