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Petrol, Diesel Prices Today: देश में लगातार पांच दिनों से पेट्रोल डीजल के दामों (Petrol Diesel Prices) में स्थिरता बनी हुई है। गुरुवार यानी 4 मार्च को देश में दोनो ईंधन के दाम जस के तस बने हुए हैं। बता दें कि तेल के दामों में आखिरी बार बढ़ोत्तरी बीते शनिवार को की गई थी। आखिरी बढ़ोत्तरी में पेट्रोल के दाम 23 24 पैसे और डीजल के दाम 15 16 पैसे बढ़ाए गए थे। इस समय लगभग हर शहर में दोनों ईधनों के दाम ऑल टाइम हाई (All Time High) पर चल रहे हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आज एक लीटर डीजल की कीमत 81. 47 रुपए और एक लीटर पेट्रोल की कीमत 91. 17 रुपए है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में रोजाना सुबह 6 बजे बदलाव होता है। सुबह 6 बजे से ही नई दरें लागू हो जाती हैं। पेट्रोल डीजल के दाम में एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और अन्य चीजें जोड़ने के बाद इसका दाम लगभग दोगुना हो जाता है। विदेशी मुद्रा दरों के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतें क्या हैं, इस आधार पर रोज पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव होता है। दरअसल विदेशी मुद्रा दरों के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमत के आधार पर रोज पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव होता है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियां कीमतों की समीक्षा के बाद रोज़ाना पेट्रोल और डीजल के रेट तय करती हैं। इंडियन ऑयल , भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम रोज़ाना सुबह 6 बजे पेट्रोल और डीजल की दरों में संशोधन कर जारी करती हैं। आप अपने शहर के पेट्रोल-डीजल के दाम रोजाना SMS के जरिए भी चेक कर सकते है। इंडियन ऑयल (IOC) के उपभोक्ता RSP<डीलर कोड> लिखकर 9224992249 नंबर पर व एचपीसीएल (HPCL) के उपभोक्ता HPPRICE <डीलर कोड> लिखकर 9222201122 नंबर पर भेज सकते हैं। बीपीसीएल (BPCL) उपभोक्ता RSP<डीलर कोड> लिखकर 9223112222 नंबर पर भेज सकते हैं।
Petrol, Diesel Prices Today: देश में लगातार पांच दिनों से पेट्रोल डीजल के दामों में स्थिरता बनी हुई है। गुरुवार यानी चार मार्च को देश में दोनो ईंधन के दाम जस के तस बने हुए हैं। बता दें कि तेल के दामों में आखिरी बार बढ़ोत्तरी बीते शनिवार को की गई थी। आखिरी बढ़ोत्तरी में पेट्रोल के दाम तेईस चौबीस पैसे और डीजल के दाम पंद्रह सोलह पैसे बढ़ाए गए थे। इस समय लगभग हर शहर में दोनों ईधनों के दाम ऑल टाइम हाई पर चल रहे हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आज एक लीटर डीजल की कीमत इक्यासी. सैंतालीस रुपयापए और एक लीटर पेट्रोल की कीमत इक्यानवे. सत्रह रुपयापए है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में रोजाना सुबह छः बजे बदलाव होता है। सुबह छः बजे से ही नई दरें लागू हो जाती हैं। पेट्रोल डीजल के दाम में एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और अन्य चीजें जोड़ने के बाद इसका दाम लगभग दोगुना हो जाता है। विदेशी मुद्रा दरों के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतें क्या हैं, इस आधार पर रोज पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव होता है। दरअसल विदेशी मुद्रा दरों के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमत के आधार पर रोज पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव होता है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियां कीमतों की समीक्षा के बाद रोज़ाना पेट्रोल और डीजल के रेट तय करती हैं। इंडियन ऑयल , भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम रोज़ाना सुबह छः बजे पेट्रोल और डीजल की दरों में संशोधन कर जारी करती हैं। आप अपने शहर के पेट्रोल-डीजल के दाम रोजाना SMS के जरिए भी चेक कर सकते है। इंडियन ऑयल के उपभोक्ता RSP<डीलर कोड> लिखकर नौ दो दो चार नौ नौ दो दो चार नौ नंबर पर व एचपीसीएल के उपभोक्ता HPPRICE <डीलर कोड> लिखकर नौ दो दो दो दो शून्य एक एक दो दो नंबर पर भेज सकते हैं। बीपीसीएल उपभोक्ता RSP<डीलर कोड> लिखकर नौ दो दो तीन एक एक दो दो दो दो नंबर पर भेज सकते हैं।
हैदराबाद की ओर से मनीष पांडे ने शानदार अर्धशतक जमाते हुए 61 रन बनाए। इसके अलावा कप्तान डेविड वॉर्नर ने भी 57 रनों की बेमिशाल पारी खेली। सीएसके की ओर से लुंगी एंगीड़ी ने सबसे ज्यादा 2 विकेट अपने नाम किया। सैम कुरेन को एक विकेट हासिल हुआ।
हैदराबाद की ओर से मनीष पांडे ने शानदार अर्धशतक जमाते हुए इकसठ रन बनाए। इसके अलावा कप्तान डेविड वॉर्नर ने भी सत्तावन रनों की बेमिशाल पारी खेली। सीएसके की ओर से लुंगी एंगीड़ी ने सबसे ज्यादा दो विकेट अपने नाम किया। सैम कुरेन को एक विकेट हासिल हुआ।
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी द्वारा राष्ट्रपति को लेकर दिए गए बयान का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। बयान के बाद BJP हमलावर हो गई है। BJP के प्रदेश महामंत्री व रामगंजमंडी विधायक मदन दिलावर ने वीडियो बयान जारी किया है। दिलावर ने कहा कि कांग्रेस, देश के दुश्मनों की पार्टी है। ये हिंदुस्तान की पार्टी नहीं, पाकिस्तान की पार्टी है। देश के जितने भी मावाली, गैंगस्टर ने उनकी पार्टी है। दिलावर ने कहा कि प्रतिपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी का राष्ट्रपति को लेकर दिया गया बयान अशोभनीय व अमर्यादित है। किसी भी सभ्य समाज के व्यक्ति के लिए यह अच्छा नहीं है। ऐसी भाषा का प्रयोग देश का दुश्मन ही कर सकता है। यह बहुत ही निकृष्ट शब्दों का उपयोग है, इनको कभी माफ नहीं किया जाएगा। कांग्रेस में थोड़ी भी समझ है,राष्ट्रपति के प्रति सम्मान है, तो सार्वजनिक रूप से राष्ट्र के सभी बड़े नेता माफी मांगते हुए अधीर रंजन चौधरी सहित जितने सांसद, कार्यकर्ता वहां बैठे हुए थे। उनको पार्टी से निष्कासित करें। सोनिया गांधी को अधीर रंजन चौधरी खिलाफ एफआईआर दर्ज कराना चाहिए। ये राष्ट्रपति का नहीं, पूरे देश का अपमान है, देश के आदिवासियों का अपमान है। इसे कभी बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। This website follows the DNPA Code of Ethics.
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी द्वारा राष्ट्रपति को लेकर दिए गए बयान का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। बयान के बाद BJP हमलावर हो गई है। BJP के प्रदेश महामंत्री व रामगंजमंडी विधायक मदन दिलावर ने वीडियो बयान जारी किया है। दिलावर ने कहा कि कांग्रेस, देश के दुश्मनों की पार्टी है। ये हिंदुस्तान की पार्टी नहीं, पाकिस्तान की पार्टी है। देश के जितने भी मावाली, गैंगस्टर ने उनकी पार्टी है। दिलावर ने कहा कि प्रतिपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी का राष्ट्रपति को लेकर दिया गया बयान अशोभनीय व अमर्यादित है। किसी भी सभ्य समाज के व्यक्ति के लिए यह अच्छा नहीं है। ऐसी भाषा का प्रयोग देश का दुश्मन ही कर सकता है। यह बहुत ही निकृष्ट शब्दों का उपयोग है, इनको कभी माफ नहीं किया जाएगा। कांग्रेस में थोड़ी भी समझ है,राष्ट्रपति के प्रति सम्मान है, तो सार्वजनिक रूप से राष्ट्र के सभी बड़े नेता माफी मांगते हुए अधीर रंजन चौधरी सहित जितने सांसद, कार्यकर्ता वहां बैठे हुए थे। उनको पार्टी से निष्कासित करें। सोनिया गांधी को अधीर रंजन चौधरी खिलाफ एफआईआर दर्ज कराना चाहिए। ये राष्ट्रपति का नहीं, पूरे देश का अपमान है, देश के आदिवासियों का अपमान है। इसे कभी बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। This website follows the DNPA Code of Ethics.
Enye İnşaat कंपनी, जिसने संख्या 04/2016 के साथ सिवास लॉजिस्टिक्स सेंटर और रेलवे कनेक्शन कार्यान्वयन परियोजनाओं की तैयारी के लिए निविदा जीती थी, जिसकी बोलियाँ 2015 फरवरी 182184 को तुर्की राज्य रेलवे के सामान्य निदेशालय द्वारा एकत्र की गई थीं, को अनुबंध के लिए आमंत्रित किया गया था। . आज कंपनी के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर किये जायेंगे. टेंडर में चार कंपनियों ने हिस्सा लिया. निविदा लगभग 520.000 वर्ग मीटर के क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स केंद्र अनुप्रयोग परियोजनाओं की तैयारी को कवर करती है।
Enye İnşaat कंपनी, जिसने संख्या चार/दो हज़ार सोलह के साथ सिवास लॉजिस्टिक्स सेंटर और रेलवे कनेक्शन कार्यान्वयन परियोजनाओं की तैयारी के लिए निविदा जीती थी, जिसकी बोलियाँ दो हज़ार पंद्रह फरवरी एक लाख बयासी हज़ार एक सौ चौरासी को तुर्की राज्य रेलवे के सामान्य निदेशालय द्वारा एकत्र की गई थीं, को अनुबंध के लिए आमंत्रित किया गया था। . आज कंपनी के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर किये जायेंगे. टेंडर में चार कंपनियों ने हिस्सा लिया. निविदा लगभग पाँच सौ बीस.शून्य वर्ग मीटर के क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स केंद्र अनुप्रयोग परियोजनाओं की तैयारी को कवर करती है।
सीखने के सिद्धांत और उनकी व्यावहारिकता पर एक लेख पढ़ते हुए नरोत्तम दास जी ने जब अखबार में यह पंक्ति पढ़ी, तो जैसे उन्हें कुछ याद हो आया। विश्वविद्यालय वार्षिकोत्सव के मौके पर अन्य कार्यक्रमों के साथ-साथ वाद-विवाद प्रतियोगिता का भी आयोजन था। उस दिन वाद-विवाद प्रतियोगिता में नरोत्तम दास के साथ परास्रातक में उन्हीं की कक्षा में पढ़ रही दो और छात्राएं भी उनकी टीम में थीं। विगत दो-तीन वर्षों में अंतर-विभागीय, महाविद्यालय और विश्वविद्यालय स्तर पर समय-समय पर जितनी भी छोटी-बड़ी वाद-विवाद प्रतियोगिताएं आयोजित हुई होंगी, उनमें एक-दो मौकों को छोड़ कर नरोत्तम दास सदा अव्वल रहे। ऐसे में विश्वविद्यालय वार्षिकोत्सव के मौके पर आयोजित वाद-विवाद प्रतियोगिता में भी उन्हीं की टीम के जीतने पर किसी को आश्चर्य नहीं हुआ। अगले दिन स्थानीय अखबारों में यह खबर प्रमुखता से शाया हुई। खबर में नरोत्तम दास की टीम की जीत का सचित्र उल्लेख किया गया था। पर वाद-विवाद प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर रही टीम में नरोत्तम दास और अन्य दोनों छात्राओं की तस्वीरों के नीचे लिखे नामों को अखबार में पढ़ते ही अचानक उनका माथा ठनका। तस्वीरों के नीचे अन्य प्रतिभागियों के नाम में उन दोनों छात्राओं का नाम तो सही था, लेकिन उनकी तस्वीर के नीचे नाम नरोत्तम दास की जगह नरोत्तम प्रसाद प्रकाशित हो गया था। जबकि उनका नाम तो नरोत्तम दास है। उस खबर को पढ़ कर उन्हें जो खुशी हुई थी, उसमें अपने नाम के आगे छपे त्रुटिपूर्ण उपनाम को देखते ही वह काफूर हो गई। हालांकि उपनाम में इस तरह की सामान्य-सी त्रुटि पर तत्काल उनका ध्यान नहीं गया। कारण कि अखबार में छपी सभी तस्वीरें बहुत साफ नहीं थीं। मगर, जैसे ही उन्हें याद आया कि राजनीति शास्त्र विभाग में उन्हीं की नामराशि का एक और छात्र पढ़ता है, जिसका नाम नरोत्तम प्रसाद है, तो उनके मन में एक अजीब किस्म की चिंता, आशंका-सी हुई। आखिर यह मान-सम्मान, प्रतिष्ठा का भी तो सवाल था। प्रतियोगिता उन्होंने और उनकी टीम ने जीती, लेकिन समाचार में नाम उस नरोत्तम प्रसाद का लिखा है, यह बात नरोत्तम दास को थोड़ी नागवार भी लगी। साथ ही यह अजीब-सी आशंका उनके दिलो-दिमाग में यह भी उत्पन्न हुई कि हालांकि कालेज के संगी-साथी तो जानते ही हैं कि वाद-विवाद प्रतियोगिता में विजेता, नरोत्तम दास की टीम ही है। लेकिन अगले कुछ वर्षों बाद अगर वे उस अखबार की कटिंग किसी को दिखाना चाहें, जिसमें किसी का भी चेहरा स्पष्ट नहीं दिख रहा है, तो सामने वाला यही समझेगा कि यह विजयी टीम में छात्र नरोत्तम दास के बजाय कोई नरोत्तम प्रसाद है। नरोत्तम दास तो खामखाह ही इस उपलब्धि का श्रेय ले रहे हैं। छोटे से शहर के लिए तो यह खासतौर पर उल्लेखनीय प्रसंग था। ये सब बातें दिलोदिमाग में आते ही वाद-विवाद प्रतियोगिता में उनकी टीम के अव्वल आने का उत्साह ठंडा पड़ जाना स्वाभाविक था। बहरहाल, बावजूद तमाम शंकाओं-आशंकाओं के, भविष्य में सनद के लिए नरोत्तम दास ने अखबार की वह कटिंग अपने पास सुरक्षित रख ली थी। यादगार चीजें, अखबारी कतरनें आदि सहेजने की उनकी आदत जो रही है। हां, उन्होंने इतना जरूर किया कि अपने नाम के आगे छपे गलत उपनाम को काली स्याही से रंग कर इस प्रकार ढंक दिया कि भविष्य में अगर कोई उस खबर को पढ़े या तस्वीर देखे तो उसे उनका नाम ही दिखे। उपनाम न भी दिखे, तो कोई परवाह नहीं। फिर, जरूरी भी तो नहीं कि कालांतर में इस खबर को पढ़ने-देखने वालों का ध्यान इस तरफ जाए ही। इस प्रकार कह सकते हैं कि उचित-अनुचित निर्णय के द्वंद्व में नरोत्तम दास जी ने एक सामान्य-सी त्रुटि, जो उनकी नहीं थी, को अपनी समझ से ठीक करने का प्रयास भर किया था। फिर 'आगे नाथ न पीछे पगहा' जैसी उम्र में, या दुनियावी अनुभव की कमी के चलते उचित-अनुचित निर्णय लिए जाने के दबाव का द्वंद्व भी तो दिलोदिमाग पर कम ही रहता है। इधर कोई धड़ाम-धकेल विचार मन में आया, उधर कार्यरूप में परिणत। आखिर, बाईस-तेईस साल की उम्र में किसी को दुनियावी समझ ही कितनी होती होगी? यद्यपि वे इस तथ्य को स्वीकार करते भी हैं। आखिर हम गलतियों से ही तो सीखते हैं, जो हमारे जीवन में लैंप-पोस्ट सरीखे होती हैं। यही वक्त-जरूरत हमें आगे की राह दिखाती हैं। हालांकि, आज की तारीख में नरोत्तम दास गौरव के उस पल से लगभग तटस्थ, निस्संग हो चुके हैं। खैर, अखबार में छपे उस त्रुटिपूर्ण उपनाम को लेकर एक खलिश तो नरोत्तम दास के दिलो-दिमाग में बनी ही रही। वे जब भी वह खबर पढ़ते या तस्वीर देखते, तो उन्हें इस बात पर गर्व अवश्य होता था कि विश्वविद्यालयी दिनों में वे एक प्रतिभाशाली छात्र रहे थे, पर, साथ ही अखबार में छपे अपने नाम के आगे उस त्रुटिपूर्ण उपनाम को काली स्याही से रंगा, ढंका हुआ दिखने पर गौरवान्वित महसूस करने के बजाय उनका मन खिन्न हो उठता। ये अखबार वाले भी अजीब होते हैं। ऐसी खबरें छापने से पहले कम-अज-कम नाम आदि के बारे में तो ठीक से तस्दीक कर ही लेना चाहिए। पता नहीं उन्हें मालूम है या नहीं कि कुछ खबरें, तस्वीरें लोगों के लिए कितनी अनमोल और महत्त्वपूर्ण हो सकती हैं? हालांकि, संज्ञान में आने पर अखबार वाले खेद व्यक्त करके भूल-सुधार भी छापते हैं, लेकिन नरोत्तम दास के मामले में ऐसा कुछ नहीं हुआ। वैसे उन्होंने तत्समय किसी स्तर पर आपत्ति भी तो दर्ज नहीं कराई। शायद संकोच कर गए या नियति मानकर उसे यों ही चुपचाप स्वीकार कर लिया। नरोत्तम दास को तो यह भी याद है कि उन्होंने अखबार की इस त्रुटि पर अपनी टीम के अन्य प्रतिभागियों का भी ध्यान आकृष्ट कराने की जरूरत नहीं समझी। उन्हें शक था कि वे सब इस मामूली-सी त्रुटि को देखकर, कहीं उनकी हंसी न उड़ाने लगें। आखिर उन सभी का नाम और उपनाम तो सही ही छपा था। फिर नरोत्तम दास जी के उपनाम को दुरूस्त करने में भला उनकी टीम के सदस्यों या किसी और की क्या रुचि होगी? कह सकते हैं कि उस समय नरोत्तम दास जी इस उपलब्धि का जश्न उल्लासपूर्वक नहीं मना सके थे। आज वर्षों बाद जब किसी वजह से वे अपनी हाईस्कूल, इंटरमीडिएट की सनदें खोज रहे थे तो अखबार की वही कटिंग उनके फोल्डर में पड़ी मिली। उसे देखते ही लगभग तीस-बत्तीस साल पुरानी याद फिर से ताजा हो आई, और उससे जुड़ी वह टीस भी। वैसे, नरोत्तम दास जी का भी मानना है कि जीवन में सुधार की गुंजाइश रहती है। हां, इसमें कमी-बेशी हो सकती है। ऐसे में किसी त्रुटि पर सुधार करने का अवसर है या नहीं, इस बात पर मंथन अवश्य हो सकता है, पर समय रहते। 'कहां खोए हैं? अपनी अलमारी के सामने से हटिए। यहां कमरे में झाड़ू लगाना है। ' काफी देर तक उस खबर को पढ़ते, अखबार की कटिंग हाथ में लिए नरोत्तम दास जी खुद से बड़बड़ाते, कुछ देर यों ही उस तस्वीर में खोए रहे। उन्हें यों इस कदर खोए देख उनकी पत्नी ने कमरे में आते उनकी तंद्रा भंग की, तो उन्होंने पहली बार पत्नी को पूरा वाकया एक पल में ही कह सुनाया। 'लेकिन, ये आपके नाम के आगे काली स्याही से रंगा हुआ क्यों है? आपका उपनाम सहित पूरा नाम नहीं छपा है। अखबार में छपी इस तस्वीर में तो आपका चेहरा भी साफ नहीं दिख रहा है। कहीं यह आपकी जगह किसी और का नाम तो नहीं? ' मानो पत्नी ने तंज किया हो। हालांकि, ये बातें कहते पत्नी की आवाज तनिक लरज उठी थी। अब वे पत्नी को क्या समझाते कि यह गलती अखबार वालों की है, उनकी नहीं। उन्होंने तो उस त्रुटि को सही करने के प्रयोजन से ही अपने नाम के आगे उपनाम को काली स्याही से रंग दिया था। जाहिर है, पत्नी द्वारा असमय ही की गई इस अरुचिकर पृच्छा से खिन्न हो, बिना कोई स्पष्टीकरण दिए, नरोत्तम दास जी ने अनमने ढंग से वह फोल्डर बंद करके, अलमारी में रख दिया। नरोत्तम दास जी का मानना रहा है कि समय रहते अपनी बात न कह पाने या विरुदावलियां, लच्छेदार भाषा न सीख पाने वालों के लिए दुनिया चुनौतीपूर्ण ही रही है। अब तो यह वाकया लगभग तीस-बत्तीस वर्ष पुराना हो गया है। अखबार की वह कटिंग भी कई जगह से तुड़-मुड़ और जर्जर हो गई है। लेकिन, नरोत्तम दास जी की आंखों के सामने वर्षों पुराना वही मंजर अब भी ताजा है। देखा जाए तो किसी प्रसंग में जल्दबाजी या अनिर्णय की स्थिति में कार्य को अंजाम दिए जाने से हो जाने वाली त्रुटि पर फुर्सत में किये जाने वाले अफसोस का यह सटीक उदाहरण हो सकता है। खैर, बाजदफे नरोत्तम दास जी के जेहन में यह खयाल भी आया कि अखबार में छपी उस तस्वीर के नीचे उनके नाम के आगे लिखे उस त्रुटिपूर्ण उपनाम को उन्हें बने रहने देना चाहिए था। काली स्याही से रंगना या ढंकना नहीं चाहिए था। अखबार की वह कटिंग देखते, लोगों के मन में जब-तब उठते सवालों के तर्इं उन्हें बार-बार लोगों को खामखाह स्पष्टीकरण तो न देना पड़ता। गोया, उन्होंने कोई बहुत गंभीर त्रुटि कर दी हो।
सीखने के सिद्धांत और उनकी व्यावहारिकता पर एक लेख पढ़ते हुए नरोत्तम दास जी ने जब अखबार में यह पंक्ति पढ़ी, तो जैसे उन्हें कुछ याद हो आया। विश्वविद्यालय वार्षिकोत्सव के मौके पर अन्य कार्यक्रमों के साथ-साथ वाद-विवाद प्रतियोगिता का भी आयोजन था। उस दिन वाद-विवाद प्रतियोगिता में नरोत्तम दास के साथ परास्रातक में उन्हीं की कक्षा में पढ़ रही दो और छात्राएं भी उनकी टीम में थीं। विगत दो-तीन वर्षों में अंतर-विभागीय, महाविद्यालय और विश्वविद्यालय स्तर पर समय-समय पर जितनी भी छोटी-बड़ी वाद-विवाद प्रतियोगिताएं आयोजित हुई होंगी, उनमें एक-दो मौकों को छोड़ कर नरोत्तम दास सदा अव्वल रहे। ऐसे में विश्वविद्यालय वार्षिकोत्सव के मौके पर आयोजित वाद-विवाद प्रतियोगिता में भी उन्हीं की टीम के जीतने पर किसी को आश्चर्य नहीं हुआ। अगले दिन स्थानीय अखबारों में यह खबर प्रमुखता से शाया हुई। खबर में नरोत्तम दास की टीम की जीत का सचित्र उल्लेख किया गया था। पर वाद-विवाद प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर रही टीम में नरोत्तम दास और अन्य दोनों छात्राओं की तस्वीरों के नीचे लिखे नामों को अखबार में पढ़ते ही अचानक उनका माथा ठनका। तस्वीरों के नीचे अन्य प्रतिभागियों के नाम में उन दोनों छात्राओं का नाम तो सही था, लेकिन उनकी तस्वीर के नीचे नाम नरोत्तम दास की जगह नरोत्तम प्रसाद प्रकाशित हो गया था। जबकि उनका नाम तो नरोत्तम दास है। उस खबर को पढ़ कर उन्हें जो खुशी हुई थी, उसमें अपने नाम के आगे छपे त्रुटिपूर्ण उपनाम को देखते ही वह काफूर हो गई। हालांकि उपनाम में इस तरह की सामान्य-सी त्रुटि पर तत्काल उनका ध्यान नहीं गया। कारण कि अखबार में छपी सभी तस्वीरें बहुत साफ नहीं थीं। मगर, जैसे ही उन्हें याद आया कि राजनीति शास्त्र विभाग में उन्हीं की नामराशि का एक और छात्र पढ़ता है, जिसका नाम नरोत्तम प्रसाद है, तो उनके मन में एक अजीब किस्म की चिंता, आशंका-सी हुई। आखिर यह मान-सम्मान, प्रतिष्ठा का भी तो सवाल था। प्रतियोगिता उन्होंने और उनकी टीम ने जीती, लेकिन समाचार में नाम उस नरोत्तम प्रसाद का लिखा है, यह बात नरोत्तम दास को थोड़ी नागवार भी लगी। साथ ही यह अजीब-सी आशंका उनके दिलो-दिमाग में यह भी उत्पन्न हुई कि हालांकि कालेज के संगी-साथी तो जानते ही हैं कि वाद-विवाद प्रतियोगिता में विजेता, नरोत्तम दास की टीम ही है। लेकिन अगले कुछ वर्षों बाद अगर वे उस अखबार की कटिंग किसी को दिखाना चाहें, जिसमें किसी का भी चेहरा स्पष्ट नहीं दिख रहा है, तो सामने वाला यही समझेगा कि यह विजयी टीम में छात्र नरोत्तम दास के बजाय कोई नरोत्तम प्रसाद है। नरोत्तम दास तो खामखाह ही इस उपलब्धि का श्रेय ले रहे हैं। छोटे से शहर के लिए तो यह खासतौर पर उल्लेखनीय प्रसंग था। ये सब बातें दिलोदिमाग में आते ही वाद-विवाद प्रतियोगिता में उनकी टीम के अव्वल आने का उत्साह ठंडा पड़ जाना स्वाभाविक था। बहरहाल, बावजूद तमाम शंकाओं-आशंकाओं के, भविष्य में सनद के लिए नरोत्तम दास ने अखबार की वह कटिंग अपने पास सुरक्षित रख ली थी। यादगार चीजें, अखबारी कतरनें आदि सहेजने की उनकी आदत जो रही है। हां, उन्होंने इतना जरूर किया कि अपने नाम के आगे छपे गलत उपनाम को काली स्याही से रंग कर इस प्रकार ढंक दिया कि भविष्य में अगर कोई उस खबर को पढ़े या तस्वीर देखे तो उसे उनका नाम ही दिखे। उपनाम न भी दिखे, तो कोई परवाह नहीं। फिर, जरूरी भी तो नहीं कि कालांतर में इस खबर को पढ़ने-देखने वालों का ध्यान इस तरफ जाए ही। इस प्रकार कह सकते हैं कि उचित-अनुचित निर्णय के द्वंद्व में नरोत्तम दास जी ने एक सामान्य-सी त्रुटि, जो उनकी नहीं थी, को अपनी समझ से ठीक करने का प्रयास भर किया था। फिर 'आगे नाथ न पीछे पगहा' जैसी उम्र में, या दुनियावी अनुभव की कमी के चलते उचित-अनुचित निर्णय लिए जाने के दबाव का द्वंद्व भी तो दिलोदिमाग पर कम ही रहता है। इधर कोई धड़ाम-धकेल विचार मन में आया, उधर कार्यरूप में परिणत। आखिर, बाईस-तेईस साल की उम्र में किसी को दुनियावी समझ ही कितनी होती होगी? यद्यपि वे इस तथ्य को स्वीकार करते भी हैं। आखिर हम गलतियों से ही तो सीखते हैं, जो हमारे जीवन में लैंप-पोस्ट सरीखे होती हैं। यही वक्त-जरूरत हमें आगे की राह दिखाती हैं। हालांकि, आज की तारीख में नरोत्तम दास गौरव के उस पल से लगभग तटस्थ, निस्संग हो चुके हैं। खैर, अखबार में छपे उस त्रुटिपूर्ण उपनाम को लेकर एक खलिश तो नरोत्तम दास के दिलो-दिमाग में बनी ही रही। वे जब भी वह खबर पढ़ते या तस्वीर देखते, तो उन्हें इस बात पर गर्व अवश्य होता था कि विश्वविद्यालयी दिनों में वे एक प्रतिभाशाली छात्र रहे थे, पर, साथ ही अखबार में छपे अपने नाम के आगे उस त्रुटिपूर्ण उपनाम को काली स्याही से रंगा, ढंका हुआ दिखने पर गौरवान्वित महसूस करने के बजाय उनका मन खिन्न हो उठता। ये अखबार वाले भी अजीब होते हैं। ऐसी खबरें छापने से पहले कम-अज-कम नाम आदि के बारे में तो ठीक से तस्दीक कर ही लेना चाहिए। पता नहीं उन्हें मालूम है या नहीं कि कुछ खबरें, तस्वीरें लोगों के लिए कितनी अनमोल और महत्त्वपूर्ण हो सकती हैं? हालांकि, संज्ञान में आने पर अखबार वाले खेद व्यक्त करके भूल-सुधार भी छापते हैं, लेकिन नरोत्तम दास के मामले में ऐसा कुछ नहीं हुआ। वैसे उन्होंने तत्समय किसी स्तर पर आपत्ति भी तो दर्ज नहीं कराई। शायद संकोच कर गए या नियति मानकर उसे यों ही चुपचाप स्वीकार कर लिया। नरोत्तम दास को तो यह भी याद है कि उन्होंने अखबार की इस त्रुटि पर अपनी टीम के अन्य प्रतिभागियों का भी ध्यान आकृष्ट कराने की जरूरत नहीं समझी। उन्हें शक था कि वे सब इस मामूली-सी त्रुटि को देखकर, कहीं उनकी हंसी न उड़ाने लगें। आखिर उन सभी का नाम और उपनाम तो सही ही छपा था। फिर नरोत्तम दास जी के उपनाम को दुरूस्त करने में भला उनकी टीम के सदस्यों या किसी और की क्या रुचि होगी? कह सकते हैं कि उस समय नरोत्तम दास जी इस उपलब्धि का जश्न उल्लासपूर्वक नहीं मना सके थे। आज वर्षों बाद जब किसी वजह से वे अपनी हाईस्कूल, इंटरमीडिएट की सनदें खोज रहे थे तो अखबार की वही कटिंग उनके फोल्डर में पड़ी मिली। उसे देखते ही लगभग तीस-बत्तीस साल पुरानी याद फिर से ताजा हो आई, और उससे जुड़ी वह टीस भी। वैसे, नरोत्तम दास जी का भी मानना है कि जीवन में सुधार की गुंजाइश रहती है। हां, इसमें कमी-बेशी हो सकती है। ऐसे में किसी त्रुटि पर सुधार करने का अवसर है या नहीं, इस बात पर मंथन अवश्य हो सकता है, पर समय रहते। 'कहां खोए हैं? अपनी अलमारी के सामने से हटिए। यहां कमरे में झाड़ू लगाना है। ' काफी देर तक उस खबर को पढ़ते, अखबार की कटिंग हाथ में लिए नरोत्तम दास जी खुद से बड़बड़ाते, कुछ देर यों ही उस तस्वीर में खोए रहे। उन्हें यों इस कदर खोए देख उनकी पत्नी ने कमरे में आते उनकी तंद्रा भंग की, तो उन्होंने पहली बार पत्नी को पूरा वाकया एक पल में ही कह सुनाया। 'लेकिन, ये आपके नाम के आगे काली स्याही से रंगा हुआ क्यों है? आपका उपनाम सहित पूरा नाम नहीं छपा है। अखबार में छपी इस तस्वीर में तो आपका चेहरा भी साफ नहीं दिख रहा है। कहीं यह आपकी जगह किसी और का नाम तो नहीं? ' मानो पत्नी ने तंज किया हो। हालांकि, ये बातें कहते पत्नी की आवाज तनिक लरज उठी थी। अब वे पत्नी को क्या समझाते कि यह गलती अखबार वालों की है, उनकी नहीं। उन्होंने तो उस त्रुटि को सही करने के प्रयोजन से ही अपने नाम के आगे उपनाम को काली स्याही से रंग दिया था। जाहिर है, पत्नी द्वारा असमय ही की गई इस अरुचिकर पृच्छा से खिन्न हो, बिना कोई स्पष्टीकरण दिए, नरोत्तम दास जी ने अनमने ढंग से वह फोल्डर बंद करके, अलमारी में रख दिया। नरोत्तम दास जी का मानना रहा है कि समय रहते अपनी बात न कह पाने या विरुदावलियां, लच्छेदार भाषा न सीख पाने वालों के लिए दुनिया चुनौतीपूर्ण ही रही है। अब तो यह वाकया लगभग तीस-बत्तीस वर्ष पुराना हो गया है। अखबार की वह कटिंग भी कई जगह से तुड़-मुड़ और जर्जर हो गई है। लेकिन, नरोत्तम दास जी की आंखों के सामने वर्षों पुराना वही मंजर अब भी ताजा है। देखा जाए तो किसी प्रसंग में जल्दबाजी या अनिर्णय की स्थिति में कार्य को अंजाम दिए जाने से हो जाने वाली त्रुटि पर फुर्सत में किये जाने वाले अफसोस का यह सटीक उदाहरण हो सकता है। खैर, बाजदफे नरोत्तम दास जी के जेहन में यह खयाल भी आया कि अखबार में छपी उस तस्वीर के नीचे उनके नाम के आगे लिखे उस त्रुटिपूर्ण उपनाम को उन्हें बने रहने देना चाहिए था। काली स्याही से रंगना या ढंकना नहीं चाहिए था। अखबार की वह कटिंग देखते, लोगों के मन में जब-तब उठते सवालों के तर्इं उन्हें बार-बार लोगों को खामखाह स्पष्टीकरण तो न देना पड़ता। गोया, उन्होंने कोई बहुत गंभीर त्रुटि कर दी हो।
टीम इंडिया के पूर्व स्टार क्रिकेटर सुरेश रैना ने नयी पारी की शुरुआत की है. पिछले कई महीनों से क्रिकेट से दूर रहने के बाद रैना ने नीदरलैंड की राजधानी Amsterdam में अपना रेस्टोरेंट खोला है. इसका नाम 'रैना इंडियन रेस्टोरेंट' है. इस रेस्तरां का उद्देश्य देश की विविध और जीवंत पाक कला का प्रदर्शन करते हुए भारत के प्रामाणिक स्वादों को यूरोप में लाना है. टीम इंडिया के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली ने उनके रेस्टोरेंट में आने का वादा किया है. सुरेश रैना भोजन और खाना पकाने के प्रति अपने जुनून के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने अपने नये उद्यम के लिए उत्साह व्यक्त किया. खुद एक शौकीन रसोइये के रूप में वह अपने इस नये रेस्टोरेंट की रसोई में खाना पकाते नजर आये. वह अपने ग्राहकों को एक यादगार भोजन अनुभव प्रदान करना चाहते हैं. यह रेस्टोरेंट न केवल स्वादिष्ट भोजन का वादा करता है, बल्कि परोसे जाने वाले प्रत्येक व्यंजन में गुणवत्ता की प्रतिबद्धता भी रखता है. विराट कोहली ने अपने पूर्व साथी को बधाई देते हुए अपना समर्थन दिया है. कोहली ने इंस्टाग्राम पर एक स्टोरी पोस्ट की है, जिसमें उन्होंने रैना के नये रेस्टोरेंट का फोटो इस्तेमाल किया है. उन्होंने रैना को बधाई देते हुए उनके उस रेस्टोरेंट में आने का वादा भी किया. कोहली ने कहा, "बहुत अच्छा भाई सुरेश रैना. बधाई हो और अगली बार जब हम एम्स्टर्डम में होंगे तो हम निश्चित रूप से आयेंगे. " रैना ने एक इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा, 'उत्तर भारत के समृद्ध मसालों से लेकर दक्षिण भारत की सुगंधित करी तक, रैना इंडियन रेस्तरां मेरे प्यारे देश की विविध और जीवंत पाक कला को एक याद करता है. ' उन्होंने लिखा कि जो चीज रैना रेस्टोरेंट को अलग करती है, वह सिर्फ भोजन नहीं है, बल्कि हमारे द्वारा परोसे जाने वाले प्रत्येक व्यंजन की गुणवत्ता, रचनात्मकता और अत्यधिक आनंद के प्रति अटूट प्रतिबद्धता है.
टीम इंडिया के पूर्व स्टार क्रिकेटर सुरेश रैना ने नयी पारी की शुरुआत की है. पिछले कई महीनों से क्रिकेट से दूर रहने के बाद रैना ने नीदरलैंड की राजधानी Amsterdam में अपना रेस्टोरेंट खोला है. इसका नाम 'रैना इंडियन रेस्टोरेंट' है. इस रेस्तरां का उद्देश्य देश की विविध और जीवंत पाक कला का प्रदर्शन करते हुए भारत के प्रामाणिक स्वादों को यूरोप में लाना है. टीम इंडिया के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली ने उनके रेस्टोरेंट में आने का वादा किया है. सुरेश रैना भोजन और खाना पकाने के प्रति अपने जुनून के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने अपने नये उद्यम के लिए उत्साह व्यक्त किया. खुद एक शौकीन रसोइये के रूप में वह अपने इस नये रेस्टोरेंट की रसोई में खाना पकाते नजर आये. वह अपने ग्राहकों को एक यादगार भोजन अनुभव प्रदान करना चाहते हैं. यह रेस्टोरेंट न केवल स्वादिष्ट भोजन का वादा करता है, बल्कि परोसे जाने वाले प्रत्येक व्यंजन में गुणवत्ता की प्रतिबद्धता भी रखता है. विराट कोहली ने अपने पूर्व साथी को बधाई देते हुए अपना समर्थन दिया है. कोहली ने इंस्टाग्राम पर एक स्टोरी पोस्ट की है, जिसमें उन्होंने रैना के नये रेस्टोरेंट का फोटो इस्तेमाल किया है. उन्होंने रैना को बधाई देते हुए उनके उस रेस्टोरेंट में आने का वादा भी किया. कोहली ने कहा, "बहुत अच्छा भाई सुरेश रैना. बधाई हो और अगली बार जब हम एम्स्टर्डम में होंगे तो हम निश्चित रूप से आयेंगे. " रैना ने एक इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा, 'उत्तर भारत के समृद्ध मसालों से लेकर दक्षिण भारत की सुगंधित करी तक, रैना इंडियन रेस्तरां मेरे प्यारे देश की विविध और जीवंत पाक कला को एक याद करता है. ' उन्होंने लिखा कि जो चीज रैना रेस्टोरेंट को अलग करती है, वह सिर्फ भोजन नहीं है, बल्कि हमारे द्वारा परोसे जाने वाले प्रत्येक व्यंजन की गुणवत्ता, रचनात्मकता और अत्यधिक आनंद के प्रति अटूट प्रतिबद्धता है.
नयी दिल्ली, 20 जनवरी कुछ खाद्य पदार्थों की कीमत में कमी के चलते दिसंबर में कृषि और ग्रामीण श्रमिकों के लिए खुदरा मुद्रास्फीति घटकर क्रमशः 3. 25 प्रतिशत और 3. 34 प्रतिशत रह गई। श्रम मंत्रालय द्वारा जारी बयान के मुताबिक दिसंबर 2020 में सीपीआई-एएल (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक - कृषि मजदूर) और सीपीआई- आरएल (ग्रामीण मजदूर) घटकर क्रमशः 3. 25 प्रतिशत और 3. 34 प्रतिशत रह गया, जो नवंबर 2020 में क्रमशः छह प्रतिशत और 5. 86 प्रतिशत था। बयान के मुताबिक सीपीआई-एएल और सीपीआई-आरएल के खाद्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति क्रमशः 2. 97 प्रतिशत और 2. 96 प्रतिशत रही। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
नयी दिल्ली, बीस जनवरी कुछ खाद्य पदार्थों की कीमत में कमी के चलते दिसंबर में कृषि और ग्रामीण श्रमिकों के लिए खुदरा मुद्रास्फीति घटकर क्रमशः तीन. पच्चीस प्रतिशत और तीन. चौंतीस प्रतिशत रह गई। श्रम मंत्रालय द्वारा जारी बयान के मुताबिक दिसंबर दो हज़ार बीस में सीपीआई-एएल और सीपीआई- आरएल घटकर क्रमशः तीन. पच्चीस प्रतिशत और तीन. चौंतीस प्रतिशत रह गया, जो नवंबर दो हज़ार बीस में क्रमशः छह प्रतिशत और पाँच. छियासी प्रतिशत था। बयान के मुताबिक सीपीआई-एएल और सीपीआई-आरएल के खाद्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति क्रमशः दो. सत्तानवे प्रतिशत और दो. छियानवे प्रतिशत रही। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
कभी-कभी रिश्ते इतने उलझ जाते हैं कि उसे सुलझाना मुश्किल हो जाता है। एक महिला के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उसका कहना है कि उसने कभी अपने पति को धोखा नहीं दिया है। लेकिन पता नहीं कैसे उसकी बेटी का बाप वो नहीं है। आइए जानते हैं पूरी कहानी। रिलेशनशिप डेस्क. जब रिश्तों की बात आती है, तो विश्वास खो जाने के बाद वापस जीतना बहुत मुश्किल होता है। और विश्वास के बिना रिश्ता बचता नही हैं वो टूट ही जाता है। एक महिला इसी दौर से गुजर रही है। इंग्लैंड की रहने वाली महिला का कहना है कि उसने अपने पति से कभी बेवफाई नहीं कि। लेकिन टेस्ट में वो उसके बेटी का बाप नहीं निकला। जिसके बाद वो उससे दूर हो गया है। पति ने उस पर धोखा देने का आरोप लगाया है। (फोटो :कॉन्सेप्ट इमेज) रेडिट के रिलेशनशिप फोरम पर लिखते हुए महिला ने बताया कि मेरे पति ने हमारी बेटी पर पितृत्व परीक्षण किया। जिसमें पता चला कि वो उसकी बेटी नहीं है। लेकिन मैंने उसे कभी धोखा नहीं दिया। अब वो सोचता है कि हमारा रिश्ता झूठ है और वह तलाक लेना चाहता है। वो इस बात पर अड़ी है कि उसने बेवफाई नहीं की है। वो ही उसके पांच साल की बेटी का पिता है। उसने बताया कि जब रिपोर्ट सामने आया तो मैं शॉक्ड थी। मुझे नहीं पता कि यह कैसे हुआ है। मैं पूरे दिन रोती रहीं। मैंने कभी धोखा नहीं दिया। मैं अपने पति से प्यार करती हूं, हम कॉलेज से साथ हैं और वह मेरे जीवन का प्यार है। इसके साथ ही उसने कहा कि वो बहुत सुंदर और दयालु है। महिला ने यह भी बताया कि वो दो लोगों के साथ शारीरिक संबंध बनाई है। लेकिन वो इस रिश्ते में आने से पहले हुआ है। शादी के बाद वो किसी और के साथ संबंध नहीं बनाई है। हम दोनों शादी के बाद एक दूसरे के साथ ही रहे हैं। बच्चे की साथ में ही कोशिश की है। मैंने कभी भी उसे धोखा नहीं दिया है और ना कभी दूंगी। मुझे नहीं पता कि उसने ये टेस्ट क्यों कराया। रिपोर्ट निगेटिव आने से अब वो सोचता है कि वो उसका पिता नहीं है। मुझे पता नहीं चल रहा है कि मैं उसे कैसे समझाऊं की ये रिपोर्ट गलत है। मैं बहुत डरी हुई हूं। इसके बाद महिला बताता ही कि इसके बाद हमने दोबारा टेस्ट कराया। ताकि हमारा रिश्ता बेहतर हो सके। रिपोर्ट में सामने आया कि बच्ची हमारी बायोलॉजिकल संतान नहीं थी। मुझे पता नहीं कि कैसे हो गया। पूरा मामला सामने आने के बाद पुलिस अधिकारी उनके पास गए और बयान लिया। महिला ने बताया कि हम उस हॉस्पिटल पर केस कर रहे हैं जहां मैंने बच्ची को जन्म दिया था। मुझे नहीं पता कि मेरी अपनी बेटी के साथ क्या हुआ। मेरा पति वापस आ गया है। मैं अब यही सोचती हूं कि काश उसने टेस्ट नहीं कराया होता। मुझे डर है कि कहीं पुलिस मेरी पांच साल की बच्ची से मुझे दूर ना कर दें। लेकिन मैं यह भी जानना चाहती हूं कि मेरी बायोलॉजिकल बेटी कहां है और वो ठीक है ना। और पढ़ेंः
कभी-कभी रिश्ते इतने उलझ जाते हैं कि उसे सुलझाना मुश्किल हो जाता है। एक महिला के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उसका कहना है कि उसने कभी अपने पति को धोखा नहीं दिया है। लेकिन पता नहीं कैसे उसकी बेटी का बाप वो नहीं है। आइए जानते हैं पूरी कहानी। रिलेशनशिप डेस्क. जब रिश्तों की बात आती है, तो विश्वास खो जाने के बाद वापस जीतना बहुत मुश्किल होता है। और विश्वास के बिना रिश्ता बचता नही हैं वो टूट ही जाता है। एक महिला इसी दौर से गुजर रही है। इंग्लैंड की रहने वाली महिला का कहना है कि उसने अपने पति से कभी बेवफाई नहीं कि। लेकिन टेस्ट में वो उसके बेटी का बाप नहीं निकला। जिसके बाद वो उससे दूर हो गया है। पति ने उस पर धोखा देने का आरोप लगाया है। रेडिट के रिलेशनशिप फोरम पर लिखते हुए महिला ने बताया कि मेरे पति ने हमारी बेटी पर पितृत्व परीक्षण किया। जिसमें पता चला कि वो उसकी बेटी नहीं है। लेकिन मैंने उसे कभी धोखा नहीं दिया। अब वो सोचता है कि हमारा रिश्ता झूठ है और वह तलाक लेना चाहता है। वो इस बात पर अड़ी है कि उसने बेवफाई नहीं की है। वो ही उसके पांच साल की बेटी का पिता है। उसने बताया कि जब रिपोर्ट सामने आया तो मैं शॉक्ड थी। मुझे नहीं पता कि यह कैसे हुआ है। मैं पूरे दिन रोती रहीं। मैंने कभी धोखा नहीं दिया। मैं अपने पति से प्यार करती हूं, हम कॉलेज से साथ हैं और वह मेरे जीवन का प्यार है। इसके साथ ही उसने कहा कि वो बहुत सुंदर और दयालु है। महिला ने यह भी बताया कि वो दो लोगों के साथ शारीरिक संबंध बनाई है। लेकिन वो इस रिश्ते में आने से पहले हुआ है। शादी के बाद वो किसी और के साथ संबंध नहीं बनाई है। हम दोनों शादी के बाद एक दूसरे के साथ ही रहे हैं। बच्चे की साथ में ही कोशिश की है। मैंने कभी भी उसे धोखा नहीं दिया है और ना कभी दूंगी। मुझे नहीं पता कि उसने ये टेस्ट क्यों कराया। रिपोर्ट निगेटिव आने से अब वो सोचता है कि वो उसका पिता नहीं है। मुझे पता नहीं चल रहा है कि मैं उसे कैसे समझाऊं की ये रिपोर्ट गलत है। मैं बहुत डरी हुई हूं। इसके बाद महिला बताता ही कि इसके बाद हमने दोबारा टेस्ट कराया। ताकि हमारा रिश्ता बेहतर हो सके। रिपोर्ट में सामने आया कि बच्ची हमारी बायोलॉजिकल संतान नहीं थी। मुझे पता नहीं कि कैसे हो गया। पूरा मामला सामने आने के बाद पुलिस अधिकारी उनके पास गए और बयान लिया। महिला ने बताया कि हम उस हॉस्पिटल पर केस कर रहे हैं जहां मैंने बच्ची को जन्म दिया था। मुझे नहीं पता कि मेरी अपनी बेटी के साथ क्या हुआ। मेरा पति वापस आ गया है। मैं अब यही सोचती हूं कि काश उसने टेस्ट नहीं कराया होता। मुझे डर है कि कहीं पुलिस मेरी पांच साल की बच्ची से मुझे दूर ना कर दें। लेकिन मैं यह भी जानना चाहती हूं कि मेरी बायोलॉजिकल बेटी कहां है और वो ठीक है ना। और पढ़ेंः
आई नेक्स्ट, रांची से खबर है कि शंभूनाथ चौधरी को एडिटोरियल हेड बना दिया गया है. वे आज अपनी जिम्मेदारी संभाल लेंगे. शंभूनाथ की आई नेक्स्ट, रांची के साथ यह दूसरी पारी है. वे इसके पहले भी इस टैबलाइड के संपादकीय प्रभारी रह चुके हैं. रवि प्रकाश के जाने के बाद शंभूनाथ को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है. वे फिलहाल खबर मंत्र से स्थानीय संपादक के रूप में जुड़े हुए थे. शंभूनाथ ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 96 में रांची एक्सप्रेस के साथ शुरू की थी. इसके बाद वे अमर उजाला, चंडीगढ़ से जुड़ गए थे. रांची में उन्होंने हिंदुस्तान अखबार में वापसी की. यहां से इस्तीफा देकर आई नेक्स्ट चले गए थे. यहां साढ़े तीन साल काम करने के बाद वे दो साल पहले खबर मंत्र से जुड़ गए थे.
आई नेक्स्ट, रांची से खबर है कि शंभूनाथ चौधरी को एडिटोरियल हेड बना दिया गया है. वे आज अपनी जिम्मेदारी संभाल लेंगे. शंभूनाथ की आई नेक्स्ट, रांची के साथ यह दूसरी पारी है. वे इसके पहले भी इस टैबलाइड के संपादकीय प्रभारी रह चुके हैं. रवि प्रकाश के जाने के बाद शंभूनाथ को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है. वे फिलहाल खबर मंत्र से स्थानीय संपादक के रूप में जुड़े हुए थे. शंभूनाथ ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष छियानवे में रांची एक्सप्रेस के साथ शुरू की थी. इसके बाद वे अमर उजाला, चंडीगढ़ से जुड़ गए थे. रांची में उन्होंने हिंदुस्तान अखबार में वापसी की. यहां से इस्तीफा देकर आई नेक्स्ट चले गए थे. यहां साढ़े तीन साल काम करने के बाद वे दो साल पहले खबर मंत्र से जुड़ गए थे.
ताजा आंकड़ों के मुताबिक फिल्म पोन्नियिन सेल्वन 2 ने पहले दिन वैश्विक स्तर पर जबरदस्त कमाई करते हुए 61. 53 करोड़ रुपये की बंपर कमाई की थी। जबकि, दूसरे दिन भी फिल्म ने शानदार कमाई करते हुए अपने खाते में 46. 21 करोड़ रुपये जोड़ लिए हैं। इसके साथ ही फिल्म की दो दिनों में हुई कुल कमाई का आंकड़ा 107. 74 हो गया है। इसके बाद अब हर किसी की नजर फिल्म के तीसरे दिन की कमाई पर टिकी है। जिसके बाद उम्मीद है कि फिल्म आसानी से 150 करोड़ के करीब कमाई हासिल कर ले जाएगी। इसके साथ ही फिल्म साल 2023 की कॉलीवुड सिनेमा की तीसरी टॉप ग्रोसर फिल्म बनने की तैयारी में जुट गई है। तमिल सिनेमा की अगर बात करें तो इस साल कॉलीवुड ने अजित कुमार स्टारर फिल्म थुनिवु और थलापति विजय की फिल्म वरिसु ये दो सबसे बड़ी हिट मूवीज दी हैं। इन दोनों ही फिल्मों ने थियेटर्स से वैश्विक स्तर पर सबसे ज्यादा कमाई करते हुए अपने नाम 200 करोड़ से ज्यादा की कमाई दर्ज करवाई थी। थलापति विजय की वरिसु ने वैश्विक स्तर पर करीब 290 करोड़ रुपये की रकम हासिल की थी। जबकि, अजित कुमार की थुनिवु ने वैश्विक स्तर पर करीब 200 करोड़ रुपये की कुल रकम हासिल की। अब देखना दिलचस्प होगा कि चियान विक्रम और ऐश्वर्या राय बच्चन स्टारर निर्देशक मणिरत्नम की फिल्म पोन्नियन सेल्वन-2 आखिर कुल कितने करोड़ रुपये अपने नाम दर्ज करती है।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक फिल्म पोन्नियिन सेल्वन दो ने पहले दिन वैश्विक स्तर पर जबरदस्त कमाई करते हुए इकसठ. तिरेपन करोड़ रुपये की बंपर कमाई की थी। जबकि, दूसरे दिन भी फिल्म ने शानदार कमाई करते हुए अपने खाते में छियालीस. इक्कीस करोड़ रुपये जोड़ लिए हैं। इसके साथ ही फिल्म की दो दिनों में हुई कुल कमाई का आंकड़ा एक सौ सात. चौहत्तर हो गया है। इसके बाद अब हर किसी की नजर फिल्म के तीसरे दिन की कमाई पर टिकी है। जिसके बाद उम्मीद है कि फिल्म आसानी से एक सौ पचास करोड़ के करीब कमाई हासिल कर ले जाएगी। इसके साथ ही फिल्म साल दो हज़ार तेईस की कॉलीवुड सिनेमा की तीसरी टॉप ग्रोसर फिल्म बनने की तैयारी में जुट गई है। तमिल सिनेमा की अगर बात करें तो इस साल कॉलीवुड ने अजित कुमार स्टारर फिल्म थुनिवु और थलापति विजय की फिल्म वरिसु ये दो सबसे बड़ी हिट मूवीज दी हैं। इन दोनों ही फिल्मों ने थियेटर्स से वैश्विक स्तर पर सबसे ज्यादा कमाई करते हुए अपने नाम दो सौ करोड़ से ज्यादा की कमाई दर्ज करवाई थी। थलापति विजय की वरिसु ने वैश्विक स्तर पर करीब दो सौ नब्बे करोड़ रुपये की रकम हासिल की थी। जबकि, अजित कुमार की थुनिवु ने वैश्विक स्तर पर करीब दो सौ करोड़ रुपये की कुल रकम हासिल की। अब देखना दिलचस्प होगा कि चियान विक्रम और ऐश्वर्या राय बच्चन स्टारर निर्देशक मणिरत्नम की फिल्म पोन्नियन सेल्वन-दो आखिर कुल कितने करोड़ रुपये अपने नाम दर्ज करती है।
फरीदाबाद. हरियाणा सरकार ने हर जिले में लोगों की शिकायतों को दूर करने के लिए एक सीएम विंडो स्थापित करने का फैसला किया है। प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने हरियाणा दिवस के मौके पर सड़क पर झाड़ू लगाकर स्वच्छ हरियाणा, स्वच्छ भारत अभियान की शुरूआत करते हुए कहा कि लोगों की शिकायतों के निवारण के लिए प्रत्येक जिला मुख्यालय में सीएम विंडो स्थापित की जाएगी। ताकि लोगों को चंडीगढ़ नहीं आना पड़े। सीएम ने अफसरों से समय का पाबंद होने व समय से कार्यालय आने का भी आह्वान किया। उन्होंने लोगों की शिकायतों को समयबद्ध तरीके से दूर करने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि लोगों को समय से सेवाएं मुहैया कराना लोक सेवकों का महत्वपूर्ण कर्तव्य है। सीएम ने कहा कि प्रशासन को अपने कामकाज में पारदर्शिता कायम करनी होगी। सीएम विंडो पर हर नागरिक सीएम तक अपनी शिकायत भेज सकता है। उसका समाधान जल्द ही होगा। सीएम ने 'स्वच्छ हरियाणा' 'स्वच्छ भारत' अभियान की शुरुआत शनिवार को फरीदाबाद के सेक्टर-20 बी स्थित कृष्णा कालोनी स्लम क्षेत्र में प्रदेश के 49वें स्थापना दिवस पर स्वयं और विधायकों के साथ झाडू लगाकर की। अभियान से संबंधित वेब पोर्टल का भी शुभारम्भ किया। इस पोर्टल पर सभी 21 जिलों की स्वच्छ हरियाणा अभियान की प्रगति की जानकारी ली जा सकती है और सुझाव भेजे जा सकेंगे। सीएम ने स्वच्छ हरियाणा-स्वच्छ भारत अभियान को सफल बनाने के लिए शपथ नागरिकों को शपथ भी दिलाई। सीएम मनोहर लाल ने कहा कि फरीदाबाद से इस अभियान को शुरू करने के पीछे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से फरीदाबाद का जुड़ाव भी है। महात्मा गांधी को आजादी के आंदोलन के दौरान सबसे पहले पलवल रेलवे स्टेशन पर 10 अप्रैल 1919 को उस समय गिरफ्तार किया था, जब वे पंजाब जा रहे थे। उस समय पलवल फरीदाबाद का हिस्सा था। सीएम ने प्रदेश के सांसदों से अनुरोध किया कि वे अपने स्थानीय क्षेत्र विकास निधि के तहत अधिक से अधिक शौचालयों का निर्माण करवाएं। ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर में वर्ष 2019 तक शौचालयों निर्माण का लक्ष्य रखा है।
फरीदाबाद. हरियाणा सरकार ने हर जिले में लोगों की शिकायतों को दूर करने के लिए एक सीएम विंडो स्थापित करने का फैसला किया है। प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने हरियाणा दिवस के मौके पर सड़क पर झाड़ू लगाकर स्वच्छ हरियाणा, स्वच्छ भारत अभियान की शुरूआत करते हुए कहा कि लोगों की शिकायतों के निवारण के लिए प्रत्येक जिला मुख्यालय में सीएम विंडो स्थापित की जाएगी। ताकि लोगों को चंडीगढ़ नहीं आना पड़े। सीएम ने अफसरों से समय का पाबंद होने व समय से कार्यालय आने का भी आह्वान किया। उन्होंने लोगों की शिकायतों को समयबद्ध तरीके से दूर करने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि लोगों को समय से सेवाएं मुहैया कराना लोक सेवकों का महत्वपूर्ण कर्तव्य है। सीएम ने कहा कि प्रशासन को अपने कामकाज में पारदर्शिता कायम करनी होगी। सीएम विंडो पर हर नागरिक सीएम तक अपनी शिकायत भेज सकता है। उसका समाधान जल्द ही होगा। सीएम ने 'स्वच्छ हरियाणा' 'स्वच्छ भारत' अभियान की शुरुआत शनिवार को फरीदाबाद के सेक्टर-बीस बी स्थित कृष्णा कालोनी स्लम क्षेत्र में प्रदेश के उनचासवें स्थापना दिवस पर स्वयं और विधायकों के साथ झाडू लगाकर की। अभियान से संबंधित वेब पोर्टल का भी शुभारम्भ किया। इस पोर्टल पर सभी इक्कीस जिलों की स्वच्छ हरियाणा अभियान की प्रगति की जानकारी ली जा सकती है और सुझाव भेजे जा सकेंगे। सीएम ने स्वच्छ हरियाणा-स्वच्छ भारत अभियान को सफल बनाने के लिए शपथ नागरिकों को शपथ भी दिलाई। सीएम मनोहर लाल ने कहा कि फरीदाबाद से इस अभियान को शुरू करने के पीछे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से फरीदाबाद का जुड़ाव भी है। महात्मा गांधी को आजादी के आंदोलन के दौरान सबसे पहले पलवल रेलवे स्टेशन पर दस अप्रैल एक हज़ार नौ सौ उन्नीस को उस समय गिरफ्तार किया था, जब वे पंजाब जा रहे थे। उस समय पलवल फरीदाबाद का हिस्सा था। सीएम ने प्रदेश के सांसदों से अनुरोध किया कि वे अपने स्थानीय क्षेत्र विकास निधि के तहत अधिक से अधिक शौचालयों का निर्माण करवाएं। ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर में वर्ष दो हज़ार उन्नीस तक शौचालयों निर्माण का लक्ष्य रखा है।
अम्मा अपने जिस बेटे के परिवार के साथ सबसे ज़्यादा समय तक रहीं, उस का परिवार बिखर कर छिन्न- भिन्न हो गया। अब अम्मा को अपने दूसरे बेटे का साथ मिला। प्रायः बुजुर्गों का ये सोचना होता है कि एक से अधिक संतान होने पर वे दोनों के साथ रह कर एक संतुलन बनाना चाहते हैं। लेकिन कई बार वे एक दूसरे की अच्छाई को अपनी सुविधाओं के लिए ढाल बना लेते हैं। मसलन, यदि एक घर में उन्हें कोई कष्ट या कमी हो रही है तो झट से वो ये जता देते हैं कि वहां दूसरे घर में तो ऐसा नहीं होता। इसके उलट यदि यहां उन्हें कुछ एक्स्ट्रा मिल रहा है तो उसका ज़िक्र वे नहीं करते। उन्हें लगता है कि इससे ये सुविधा चली जाएगी। उनकी कोशिश तो ये होती है कि इसका उदाहरण देकर वहां भी ये आराम मांगा जा सके। दुनिया के ज़्यादा से ज़्यादा आराम तलब होते जाने की ये होड़ अधिकतर उन्हीं से शुरू होती है। अब अधिकांश बुज़ुर्ग और अनुभवी लोग "सहने" के आदी नहीं रह जाते। सरकारों ने भी "सीनियर सिटीजन" के नाम पर उन्हें इसका अभ्यस्त बनाया है। बुजुर्गों की इस होशियारी को उनके बेटे- बेटी तो फ़िर भी सह जाते हैं किन्तु बहुएं आसानी से नहीं चलने देती हैं। और दामादों से ये अपेक्षा आज भी बहुत से दंपत्ति नहीं रखते। अम्मा को ये बिसात यहां ख़ूब बिछानी पड़ती थी। वहां तो काम पर जाने वाली बहू की सुविधाएं भी थीं और उसकी अनुपस्थिति के आराम भी। किन्तु यहां बहू के दिन भर घर पर ही रहने से अम्मा के छोटे - मोटे काम संपादित होने से रह जाते थे। एक कहावत है कि जो चार काम करता है वो पांचवां भी आसानी से कर डालता है। पर जिसके पास एक ही काम की ज़िम्मेदारी रहे, उससे दूसरा नहीं होता। वहां घर, दफ़्तर, बच्चे, सब काम एक साथ संभालती बहू को जब अम्मा कुछ बतातीं तो वो लगे में लगा अम्मा का काम भी कर डालती। यहां अम्मा को कुछ भी कहने- मांगने से पहले बेटे को ही देखना पड़ता था। यहां तो घर के नोन - तेल - लकड़ी भी बेटे के ऊपर ही थे, और साग -सब्जी - दूध भी। बाज़ार तक पहुंच- पकड़ भी उसी की। एक फर्क कमाऊ बहू और घरेलू बहू का भी था। सौ बातों की एक बात ये, कि अम्मा अब कुछ तंग- हाथ भी रहती थीं। दुनियादारी का एक और समीकरण यहां लागू होता था। जिस तरह ग्रामीण किसान परिवारों में गाय की नियति होती है। जब तक गाय दुधारू रहे सबके लिए पूजनीय गौ- माता होती है। उसके बाद केवल पशुधन, और उसके भी बाद मात्र एक चरने वाला प्राणी! अम्मा की उम्र अब घर के कुछ कामकाज करने की भी नहीं रही थी। आयु का नवां दशक भी बीत रहा था। असल में अम्मा की ये वही बहू थी जिसने अपने होनहार युवा बेटे को उसकी कुल चौबीस साल की उम्र में खो दिया था। इसके बाद उनकी बेटी की शादी हो गई थी और फिर दोनों पति- पत्नी उसके भी चले जाने के बाद बिल्कुल अकेले ही अपने घर में रह गए थे। ऐसा लगता था कि कभी - कभी बहू गहरे अवसाद में चली जाती थी और उसे दुनियादारी की बिल्कुल खबर नहीं रह जाती थी। इसी कारण अम्मा का सूनापन और भी बढ़ जाता था। अम्मा को ये परिवर्तन रास नहीं आता था। लेकिन कुछ समय बाद एक बार फिर अम्मा को कुछ रौनक देखने का मौक़ा मिला। अमेरिका गए अम्मा के पोते की पढ़ाई वहां पूरी होते ही उसे वहीं नौकरी मिल गई। कुछ समय बाद वो छुट्टी लेकर वापस आया। संयोग से उसी दौरान यहां इसी शहर में उसका रिश्ता भी तय हो गया। जिस लड़की से उसका रिश्ता हुआ वो डॉक्टरेट कर रही थी। उसका काम पूरा होने में अभी कुछ समय शेष था। इसलिए ये तय किया गया कि अभी बेटे की सगाई कर ली जाए और जब उसकी होने वाली बहू की डॉक्टरेट उपाधि पूरी हो जाए तब किसी अच्छे से मुहूर्त पर उन दोनों की शादी कर दी जाए, ताकि शादी के बाद बेटा- बहू दोनों एक साथ अमेरिका जा सकें। अब उस बेटे की मां के न होने के कारण अम्मा एकबार फिर से घर में महत्वपूर्ण हो गईं। उम्रदराज अम्मा कुछ दिन के लिए ये भी भूल गईं कि अब उनकी उम्र किसी सगाई- शादी की भाग दौड़ करने या घर में ऐसे समारोह को करने, मेहमानों की आवभगत करने की ज़िम्मेदारी लेने की नहीं है। लेकिन फ़िर भी अम्मा को लगता कि बहू के न रहने पर अब इस शुभ कार्य को संपादित करने की पूरी जिम्मेदारी अब उन्हीं की तो है। वृद्धावस्था शरीर की शक्तियों को क्षीण ज़रूर कर देती है लेकिन व्यक्ति की अनुभव जन्य सोच उसकी आवाज़ का वही दमखम बरकरार रखती है। अम्मा हर बात में ऐसे ही बोलतीं मानो वो सब कर लेंगी, और घर के सभी लोग बस उनके कहे पर चलते रहें। लेकिन अम्मा के तीसरे बेटे ने अपनी और घर की तमाम परिस्थिति को देख- समझ कर सारी व्यवस्था किसी अच्छे से होटल में कर दी, और घर के लोगों को बिना कोई कष्ट दिए हुए केवल मेहमानों की भांति ही आमंत्रित किया। सही समय पर सब संपन्न हो गया। अम्मा के तीसरे बेटे के विचार शादी -ब्याह को लेन -देन का कारोबार बना देने के कभी नहीं रहे थे। बल्कि उसे तो ऐसे अवसरों पर लिए जाने वाले रस्मो रिवाज किसी ढकोसले की तरह नज़र आते थे। घर- परिवार को हिला कर रख दिया जाए। अपनी ज़िन्दगी भर की जमा- राशि का भद्दा दिखावा किया जाए। रोज़ में न पहने जा सकने वाले बेतुके, तड़क - भड़क वाले कपड़े खरीद कर घर में बेवजह भर लिए जाएं। ज़िन्दगी भर बैंक लॉकरों में सड़ने वाले, या फिर जान जोखिम में डालकर मौक़े- बेमौके अपनी मालियत- मिल्कियत का बेहूदा प्रदर्शन करने वाले गहने ज़ेवर खरीद कर रख लिए जाएं। तमाम रिश्तेदारों मित्रों और परिचितों को इकट्ठा करके सजावटी- दिखावटी बेशुमार भोजन की बरबादी कर ली जाए और फ़िर इस तमाम खर्च और तामझाम का बोझ लड़की के घर वालों पर हक़ से डाल दिया जाए...ये सब किसी त्यौहार- खुशी से ज़्यादा कोई बर्बादी का बवंडर जैसा नज़र आता था उसे। बाप तो बाप, बेटा तो और भी एक कदम आगे की सोच रखता था। सब जानते हैं कि इन बातों से किसी का भला नहीं होता, फ़िर भी परंपरा, दिखावा, स्पर्धा और एक दूसरे से भद्दी होड़! अम्मा का पोता तो इस सब से और भी ज़्यादा चिढ़ता था। इसलिए अमेरिका से लौटे बेटे से जब एक रात पिता ने पूछा कि मैं तेरी सगाई में आमंत्रित किए जाने वाले लोगों की सूची बना रहा हूं, तू बता किस - किस को बुलाना है, तो बेटे ने एक बहुत ही संक्षिप्त और सटीक उत्तर दिया। बोला- रिश्ते और संबंध तो आप देख लो, मेरी ओर से तो उन सब लोगों को बुला लो जो आकर ख़ुश हों। बेटे ने बहुत ही व्यावहारिक बात की थी। - उन्हें तो ज़रूर बुलाना, नाक पर गुस्सा लिए बैठे हैं। - उसे तो अभी कह दो, नहीं तो बाद में ताना मारेगा कि नाम के लिए बुलाया है, अब रिज़र्वेशन कहां मिलेगा। - वो तो बेचारा अा ही जाएगा, बुलाओ या न बुलाओ। - उसे ज़रूर कहना, हर मौक़े पर उसने हमें बुलाया है। - उसे रहने दो, आकर और बखेड़ा करेगा। - वो तो कभी मिलने पर सीधे मुंह बात तक नहीं करता,पर बुलाना तो पड़ेगा, बहन- बेटी के ससुराल का मामला ठहरा। समाज में लोगों को अपनी किसी खुशी में शामिल करने के लिए छांटना भी जैसे एक कठिन परीक्षा हो। लेकिन घर की महिलाएं इन सब कामों को बेहद कुशलता से निभा ले जाती हैं। किसी को पता तक नहीं चलता कि महिलाओं ने अलग - अलग दिशाओं में भागते ये घोड़े कब और कैसे साध लिए। जब मौका आता है तो सब परिजन, मित्रजन और पड़ोसजन सज- धज कर आकर खड़े हो जाते हैं। और मंगल गीत गाए जाने लग जाते हैं। अमेरिका में नौकरी कर रहे इस बेटे की सगाई भी धूमधाम से संपन्न हुई। लोग भी जितने बुलाए गए थे,सभी अाए। अम्मा को एक बार फ़िर अपना पूरा कुनबा एक साथ देख पाने का मौक़ा मिला। जो न अा सके, उनसे इस बहाने संदेशों का आदान- प्रदान हुआ। कम से कम इस बहाने संबंधों में एक बार फ़िर से खाद पानी तो पड़ ही गया। अम्मा अब फिर अपने बड़े बेटे के पास सूने से घर के अकेले कमरे में आ गईं। लेकिन एक बात ज़रूर थी। बाहर से देखने वालों को चाहे ऐसा लगता हो कि ये बिना बच्चों का सूना घर है जहां तीन बुज़ुर्ग जन शांति से अकेले से रहते हैं। पर भीतर से तो वो घर खासा चहल- पहल भरा था ही। वहां नब्बे साल की अम्मा अपने पैंसठ साल के बेटा- बहू के साथ रहती थीं। मां के लिए तो बेटा, बेटा ही था।अम्मा उसे कभी गर्म पानी के लिए दौड़ातीं, कभी ठंडी चादर के लिए। चाहे वहां किलकारियों की जगह कराह ही क्यों न गूंजती हो, अम्मा को भी बच्चे सामने दिखते, और बच्चों को भी मां! वो साथ में ताश भी खेलते, टीवी भी देखते, चाय भी पीते और दूसरे घरवालों के सुख- दुःख पर चर्चा- टिप्पणी भी करते। घुटनों के दर्द की बात होती, ढीली बत्तीसी की बात होती, पेट की गैस की बात होती, चश्मे के नम्बर की बात होती। बहू कभी- कभी जब अम्मा और बेटे की गुफ्तगू देखती तो उसे अपना दिवंगत बेटा भी याद आ जाता और वो अवसाद की बदली में घिर कर अपने कमरे में जा बैठती और कमरा अंदर से बंद करके लेट जाती। कभी- कभी ऐसे में ही वो गहरी नींद सो भी जाती और तब बेचारे अम्मा और बेटा तीसरे पहर की चाय का इंतजार ऐसे किया करते जैसे अलसभोर जागे हुए पंछी बादलों की ओट से सूरज के दिखने की आस लगाए बैठे इंतजार किया करें। बेटा अगर शौच घर में भी जाए तो उसे अम्मा की दो- तीन पुकार सुन कर हड़बड़ी करनी पड़ जाती। फ़िर अगर बेटे का मूड ठीक हुआ तो अम्मा को तत्काल उसका चेहरा शांति से दिख जाता, और नहीं तो अगले पंद्रह- बीस मिनट तक मां बेटे की जिरह से बहू को मनोरंजन मिल जाता और सबका कुछ समय पास हो जाता। बेटा कहता- मैं क्या कहीं भागा जा रहा हूं? पांच मिनट का भी सब्र नहीं है। पलट कर अम्मा कहती थीं- अब घर में इंसान हो, तो कुछ बोलेगा ही, मुंह में दही जमा कर तो नहीं बैठ सकता। कभी - कभी अम्मा की इस व्यंग्योक्ति को बहू अपने पर कटाक्ष समझ लेती और चुपचाप रसोई में जाकर उस गैस का नॉब बंद कर देती जिस पर चाय का पानी चढ़ा होता। चाय में हुई इस अकारण देरी से अम्मा खिन्न होकर बगावत कर जातीं और फ़िर लापरवाही से चम्मच में रखे उस गर्म तेल को पड़े- पड़े ठंडा हो जाने देती थीं जो अभी - अभी बहू ने कर के दिया होता। कुछ देर बाद अम्मा कहती थीं- बिल्कुल ठंडा तेल है, इसे कान में डालने से क्या फायदा होगा? और तब बेटे को उठ कर रसोई में जाना पड़ता और तेल दोबारा गर्म करके लाना पड़ता। बेटा जब रसोई में जाता तो चाय भी बना लाता और चाय पीकर दोनों का मूड ठीक हो जाता, अम्मा का भी और बहू का भी। तब अम्मा कहती थीं - बेटी, तू ज़रा मेरे सिर में भी तेल लगा दे! सास - बहू के इस उपक्रम में बेटे को थोड़ी सी मोहलत मिल जाती और वो टीवी के सामने आ बैठता। इस तरह सबका समय खूब आराम से कट जाता। सारी उम्र सरकारी नौकरी करते रहे बेटे को बिना कुछ किए भी पांच बजाना अच्छी तरह आता था। सरकार ने उसे ये तो अच्छी तरह सिखाया ही था। शाम को अम्मा की कुर्सी बाहर डाल दी जाती। मोहल्ले- पड़ोस के आते - जाते लोग "अम्माजी राम- राम" कहते हुए थोड़ी देर भी अगर अम्मा के समाचार लेने रुकते तो बेटा झट बाहर निकल कर थोड़ी हवा- खोरी भी कर आता, और बाज़ार से सौदा- सुलफ़ भी ले आता। कभी - कभी शहर में ही रहने वाले अम्मा के अन्य बेटों के परिवार से कोई अम्मा के समाचार लेने आ जाता तो दिन और भी सुगमता से कटता। अम्मा बिस्तर पर लेटी- लेटी सोचती रहतीं, राजा हो या रंक, उम्र की चाबुक तो सभी पर पड़ती है। लेकिन अब अम्मा के भाई बहनों में से कोई नहीं बचा था जिसे अम्मा देखें और पुराने दिनों की यादें ताज़ा करें। सब बच्चे ही थे, या थे बच्चों के बच्चे। इनके लिए तो अम्मा घर में सांसें लेता हुआ एक जीवित कलेंडर ही थीं। बेचारे बच्चे क्या जाने कि इस झुर्रियों में सिमटी जर्जर काया की अपनी कहानियां भी हैं और इतिहास भी। कोई बहुत छोटा बच्चा अम्मा के पास बैठा दिया जाता तो अम्मा के गालों पर हाथ फेरता हुआ पूछता- दादी मां, आपके दांत कैसे टूटे? आपका मुंह सिकुड़ कैसे गया? अम्मा आप अखरोट कैसे खाती हो? अम्मा एकटक प्यार से बच्चे को देखती थीं और सोचती जाती थीं कि दूसरा जन्म मिल जाए तो इस मासूम के सब सवालों का जवाब दे सकें अम्मा! लेकिन अगले ही पल अगर बच्चा अम्मा के दुखते घुटनों पर चढ़ जाता तो अम्मा दर्द से बिलबिला कर कहतीं - परे हट! कमबख्त ने प्राण ही निकाल दिए!
अम्मा अपने जिस बेटे के परिवार के साथ सबसे ज़्यादा समय तक रहीं, उस का परिवार बिखर कर छिन्न- भिन्न हो गया। अब अम्मा को अपने दूसरे बेटे का साथ मिला। प्रायः बुजुर्गों का ये सोचना होता है कि एक से अधिक संतान होने पर वे दोनों के साथ रह कर एक संतुलन बनाना चाहते हैं। लेकिन कई बार वे एक दूसरे की अच्छाई को अपनी सुविधाओं के लिए ढाल बना लेते हैं। मसलन, यदि एक घर में उन्हें कोई कष्ट या कमी हो रही है तो झट से वो ये जता देते हैं कि वहां दूसरे घर में तो ऐसा नहीं होता। इसके उलट यदि यहां उन्हें कुछ एक्स्ट्रा मिल रहा है तो उसका ज़िक्र वे नहीं करते। उन्हें लगता है कि इससे ये सुविधा चली जाएगी। उनकी कोशिश तो ये होती है कि इसका उदाहरण देकर वहां भी ये आराम मांगा जा सके। दुनिया के ज़्यादा से ज़्यादा आराम तलब होते जाने की ये होड़ अधिकतर उन्हीं से शुरू होती है। अब अधिकांश बुज़ुर्ग और अनुभवी लोग "सहने" के आदी नहीं रह जाते। सरकारों ने भी "सीनियर सिटीजन" के नाम पर उन्हें इसका अभ्यस्त बनाया है। बुजुर्गों की इस होशियारी को उनके बेटे- बेटी तो फ़िर भी सह जाते हैं किन्तु बहुएं आसानी से नहीं चलने देती हैं। और दामादों से ये अपेक्षा आज भी बहुत से दंपत्ति नहीं रखते। अम्मा को ये बिसात यहां ख़ूब बिछानी पड़ती थी। वहां तो काम पर जाने वाली बहू की सुविधाएं भी थीं और उसकी अनुपस्थिति के आराम भी। किन्तु यहां बहू के दिन भर घर पर ही रहने से अम्मा के छोटे - मोटे काम संपादित होने से रह जाते थे। एक कहावत है कि जो चार काम करता है वो पांचवां भी आसानी से कर डालता है। पर जिसके पास एक ही काम की ज़िम्मेदारी रहे, उससे दूसरा नहीं होता। वहां घर, दफ़्तर, बच्चे, सब काम एक साथ संभालती बहू को जब अम्मा कुछ बतातीं तो वो लगे में लगा अम्मा का काम भी कर डालती। यहां अम्मा को कुछ भी कहने- मांगने से पहले बेटे को ही देखना पड़ता था। यहां तो घर के नोन - तेल - लकड़ी भी बेटे के ऊपर ही थे, और साग -सब्जी - दूध भी। बाज़ार तक पहुंच- पकड़ भी उसी की। एक फर्क कमाऊ बहू और घरेलू बहू का भी था। सौ बातों की एक बात ये, कि अम्मा अब कुछ तंग- हाथ भी रहती थीं। दुनियादारी का एक और समीकरण यहां लागू होता था। जिस तरह ग्रामीण किसान परिवारों में गाय की नियति होती है। जब तक गाय दुधारू रहे सबके लिए पूजनीय गौ- माता होती है। उसके बाद केवल पशुधन, और उसके भी बाद मात्र एक चरने वाला प्राणी! अम्मा की उम्र अब घर के कुछ कामकाज करने की भी नहीं रही थी। आयु का नवां दशक भी बीत रहा था। असल में अम्मा की ये वही बहू थी जिसने अपने होनहार युवा बेटे को उसकी कुल चौबीस साल की उम्र में खो दिया था। इसके बाद उनकी बेटी की शादी हो गई थी और फिर दोनों पति- पत्नी उसके भी चले जाने के बाद बिल्कुल अकेले ही अपने घर में रह गए थे। ऐसा लगता था कि कभी - कभी बहू गहरे अवसाद में चली जाती थी और उसे दुनियादारी की बिल्कुल खबर नहीं रह जाती थी। इसी कारण अम्मा का सूनापन और भी बढ़ जाता था। अम्मा को ये परिवर्तन रास नहीं आता था। लेकिन कुछ समय बाद एक बार फिर अम्मा को कुछ रौनक देखने का मौक़ा मिला। अमेरिका गए अम्मा के पोते की पढ़ाई वहां पूरी होते ही उसे वहीं नौकरी मिल गई। कुछ समय बाद वो छुट्टी लेकर वापस आया। संयोग से उसी दौरान यहां इसी शहर में उसका रिश्ता भी तय हो गया। जिस लड़की से उसका रिश्ता हुआ वो डॉक्टरेट कर रही थी। उसका काम पूरा होने में अभी कुछ समय शेष था। इसलिए ये तय किया गया कि अभी बेटे की सगाई कर ली जाए और जब उसकी होने वाली बहू की डॉक्टरेट उपाधि पूरी हो जाए तब किसी अच्छे से मुहूर्त पर उन दोनों की शादी कर दी जाए, ताकि शादी के बाद बेटा- बहू दोनों एक साथ अमेरिका जा सकें। अब उस बेटे की मां के न होने के कारण अम्मा एकबार फिर से घर में महत्वपूर्ण हो गईं। उम्रदराज अम्मा कुछ दिन के लिए ये भी भूल गईं कि अब उनकी उम्र किसी सगाई- शादी की भाग दौड़ करने या घर में ऐसे समारोह को करने, मेहमानों की आवभगत करने की ज़िम्मेदारी लेने की नहीं है। लेकिन फ़िर भी अम्मा को लगता कि बहू के न रहने पर अब इस शुभ कार्य को संपादित करने की पूरी जिम्मेदारी अब उन्हीं की तो है। वृद्धावस्था शरीर की शक्तियों को क्षीण ज़रूर कर देती है लेकिन व्यक्ति की अनुभव जन्य सोच उसकी आवाज़ का वही दमखम बरकरार रखती है। अम्मा हर बात में ऐसे ही बोलतीं मानो वो सब कर लेंगी, और घर के सभी लोग बस उनके कहे पर चलते रहें। लेकिन अम्मा के तीसरे बेटे ने अपनी और घर की तमाम परिस्थिति को देख- समझ कर सारी व्यवस्था किसी अच्छे से होटल में कर दी, और घर के लोगों को बिना कोई कष्ट दिए हुए केवल मेहमानों की भांति ही आमंत्रित किया। सही समय पर सब संपन्न हो गया। अम्मा के तीसरे बेटे के विचार शादी -ब्याह को लेन -देन का कारोबार बना देने के कभी नहीं रहे थे। बल्कि उसे तो ऐसे अवसरों पर लिए जाने वाले रस्मो रिवाज किसी ढकोसले की तरह नज़र आते थे। घर- परिवार को हिला कर रख दिया जाए। अपनी ज़िन्दगी भर की जमा- राशि का भद्दा दिखावा किया जाए। रोज़ में न पहने जा सकने वाले बेतुके, तड़क - भड़क वाले कपड़े खरीद कर घर में बेवजह भर लिए जाएं। ज़िन्दगी भर बैंक लॉकरों में सड़ने वाले, या फिर जान जोखिम में डालकर मौक़े- बेमौके अपनी मालियत- मिल्कियत का बेहूदा प्रदर्शन करने वाले गहने ज़ेवर खरीद कर रख लिए जाएं। तमाम रिश्तेदारों मित्रों और परिचितों को इकट्ठा करके सजावटी- दिखावटी बेशुमार भोजन की बरबादी कर ली जाए और फ़िर इस तमाम खर्च और तामझाम का बोझ लड़की के घर वालों पर हक़ से डाल दिया जाए...ये सब किसी त्यौहार- खुशी से ज़्यादा कोई बर्बादी का बवंडर जैसा नज़र आता था उसे। बाप तो बाप, बेटा तो और भी एक कदम आगे की सोच रखता था। सब जानते हैं कि इन बातों से किसी का भला नहीं होता, फ़िर भी परंपरा, दिखावा, स्पर्धा और एक दूसरे से भद्दी होड़! अम्मा का पोता तो इस सब से और भी ज़्यादा चिढ़ता था। इसलिए अमेरिका से लौटे बेटे से जब एक रात पिता ने पूछा कि मैं तेरी सगाई में आमंत्रित किए जाने वाले लोगों की सूची बना रहा हूं, तू बता किस - किस को बुलाना है, तो बेटे ने एक बहुत ही संक्षिप्त और सटीक उत्तर दिया। बोला- रिश्ते और संबंध तो आप देख लो, मेरी ओर से तो उन सब लोगों को बुला लो जो आकर ख़ुश हों। बेटे ने बहुत ही व्यावहारिक बात की थी। - उन्हें तो ज़रूर बुलाना, नाक पर गुस्सा लिए बैठे हैं। - उसे तो अभी कह दो, नहीं तो बाद में ताना मारेगा कि नाम के लिए बुलाया है, अब रिज़र्वेशन कहां मिलेगा। - वो तो बेचारा अा ही जाएगा, बुलाओ या न बुलाओ। - उसे ज़रूर कहना, हर मौक़े पर उसने हमें बुलाया है। - उसे रहने दो, आकर और बखेड़ा करेगा। - वो तो कभी मिलने पर सीधे मुंह बात तक नहीं करता,पर बुलाना तो पड़ेगा, बहन- बेटी के ससुराल का मामला ठहरा। समाज में लोगों को अपनी किसी खुशी में शामिल करने के लिए छांटना भी जैसे एक कठिन परीक्षा हो। लेकिन घर की महिलाएं इन सब कामों को बेहद कुशलता से निभा ले जाती हैं। किसी को पता तक नहीं चलता कि महिलाओं ने अलग - अलग दिशाओं में भागते ये घोड़े कब और कैसे साध लिए। जब मौका आता है तो सब परिजन, मित्रजन और पड़ोसजन सज- धज कर आकर खड़े हो जाते हैं। और मंगल गीत गाए जाने लग जाते हैं। अमेरिका में नौकरी कर रहे इस बेटे की सगाई भी धूमधाम से संपन्न हुई। लोग भी जितने बुलाए गए थे,सभी अाए। अम्मा को एक बार फ़िर अपना पूरा कुनबा एक साथ देख पाने का मौक़ा मिला। जो न अा सके, उनसे इस बहाने संदेशों का आदान- प्रदान हुआ। कम से कम इस बहाने संबंधों में एक बार फ़िर से खाद पानी तो पड़ ही गया। अम्मा अब फिर अपने बड़े बेटे के पास सूने से घर के अकेले कमरे में आ गईं। लेकिन एक बात ज़रूर थी। बाहर से देखने वालों को चाहे ऐसा लगता हो कि ये बिना बच्चों का सूना घर है जहां तीन बुज़ुर्ग जन शांति से अकेले से रहते हैं। पर भीतर से तो वो घर खासा चहल- पहल भरा था ही। वहां नब्बे साल की अम्मा अपने पैंसठ साल के बेटा- बहू के साथ रहती थीं। मां के लिए तो बेटा, बेटा ही था।अम्मा उसे कभी गर्म पानी के लिए दौड़ातीं, कभी ठंडी चादर के लिए। चाहे वहां किलकारियों की जगह कराह ही क्यों न गूंजती हो, अम्मा को भी बच्चे सामने दिखते, और बच्चों को भी मां! वो साथ में ताश भी खेलते, टीवी भी देखते, चाय भी पीते और दूसरे घरवालों के सुख- दुःख पर चर्चा- टिप्पणी भी करते। घुटनों के दर्द की बात होती, ढीली बत्तीसी की बात होती, पेट की गैस की बात होती, चश्मे के नम्बर की बात होती। बहू कभी- कभी जब अम्मा और बेटे की गुफ्तगू देखती तो उसे अपना दिवंगत बेटा भी याद आ जाता और वो अवसाद की बदली में घिर कर अपने कमरे में जा बैठती और कमरा अंदर से बंद करके लेट जाती। कभी- कभी ऐसे में ही वो गहरी नींद सो भी जाती और तब बेचारे अम्मा और बेटा तीसरे पहर की चाय का इंतजार ऐसे किया करते जैसे अलसभोर जागे हुए पंछी बादलों की ओट से सूरज के दिखने की आस लगाए बैठे इंतजार किया करें। बेटा अगर शौच घर में भी जाए तो उसे अम्मा की दो- तीन पुकार सुन कर हड़बड़ी करनी पड़ जाती। फ़िर अगर बेटे का मूड ठीक हुआ तो अम्मा को तत्काल उसका चेहरा शांति से दिख जाता, और नहीं तो अगले पंद्रह- बीस मिनट तक मां बेटे की जिरह से बहू को मनोरंजन मिल जाता और सबका कुछ समय पास हो जाता। बेटा कहता- मैं क्या कहीं भागा जा रहा हूं? पांच मिनट का भी सब्र नहीं है। पलट कर अम्मा कहती थीं- अब घर में इंसान हो, तो कुछ बोलेगा ही, मुंह में दही जमा कर तो नहीं बैठ सकता। कभी - कभी अम्मा की इस व्यंग्योक्ति को बहू अपने पर कटाक्ष समझ लेती और चुपचाप रसोई में जाकर उस गैस का नॉब बंद कर देती जिस पर चाय का पानी चढ़ा होता। चाय में हुई इस अकारण देरी से अम्मा खिन्न होकर बगावत कर जातीं और फ़िर लापरवाही से चम्मच में रखे उस गर्म तेल को पड़े- पड़े ठंडा हो जाने देती थीं जो अभी - अभी बहू ने कर के दिया होता। कुछ देर बाद अम्मा कहती थीं- बिल्कुल ठंडा तेल है, इसे कान में डालने से क्या फायदा होगा? और तब बेटे को उठ कर रसोई में जाना पड़ता और तेल दोबारा गर्म करके लाना पड़ता। बेटा जब रसोई में जाता तो चाय भी बना लाता और चाय पीकर दोनों का मूड ठीक हो जाता, अम्मा का भी और बहू का भी। तब अम्मा कहती थीं - बेटी, तू ज़रा मेरे सिर में भी तेल लगा दे! सास - बहू के इस उपक्रम में बेटे को थोड़ी सी मोहलत मिल जाती और वो टीवी के सामने आ बैठता। इस तरह सबका समय खूब आराम से कट जाता। सारी उम्र सरकारी नौकरी करते रहे बेटे को बिना कुछ किए भी पांच बजाना अच्छी तरह आता था। सरकार ने उसे ये तो अच्छी तरह सिखाया ही था। शाम को अम्मा की कुर्सी बाहर डाल दी जाती। मोहल्ले- पड़ोस के आते - जाते लोग "अम्माजी राम- राम" कहते हुए थोड़ी देर भी अगर अम्मा के समाचार लेने रुकते तो बेटा झट बाहर निकल कर थोड़ी हवा- खोरी भी कर आता, और बाज़ार से सौदा- सुलफ़ भी ले आता। कभी - कभी शहर में ही रहने वाले अम्मा के अन्य बेटों के परिवार से कोई अम्मा के समाचार लेने आ जाता तो दिन और भी सुगमता से कटता। अम्मा बिस्तर पर लेटी- लेटी सोचती रहतीं, राजा हो या रंक, उम्र की चाबुक तो सभी पर पड़ती है। लेकिन अब अम्मा के भाई बहनों में से कोई नहीं बचा था जिसे अम्मा देखें और पुराने दिनों की यादें ताज़ा करें। सब बच्चे ही थे, या थे बच्चों के बच्चे। इनके लिए तो अम्मा घर में सांसें लेता हुआ एक जीवित कलेंडर ही थीं। बेचारे बच्चे क्या जाने कि इस झुर्रियों में सिमटी जर्जर काया की अपनी कहानियां भी हैं और इतिहास भी। कोई बहुत छोटा बच्चा अम्मा के पास बैठा दिया जाता तो अम्मा के गालों पर हाथ फेरता हुआ पूछता- दादी मां, आपके दांत कैसे टूटे? आपका मुंह सिकुड़ कैसे गया? अम्मा आप अखरोट कैसे खाती हो? अम्मा एकटक प्यार से बच्चे को देखती थीं और सोचती जाती थीं कि दूसरा जन्म मिल जाए तो इस मासूम के सब सवालों का जवाब दे सकें अम्मा! लेकिन अगले ही पल अगर बच्चा अम्मा के दुखते घुटनों पर चढ़ जाता तो अम्मा दर्द से बिलबिला कर कहतीं - परे हट! कमबख्त ने प्राण ही निकाल दिए!
बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार ने टिकट बंटवारे में कई प्रयोग किए हैं। पुराने विधायकों की सीट बदली गई है। कुछ मर्जी से और कुछ समीकरण को ध्यान में रखकर। नए उम्मीदवार उतारे गए हैं ताकि पुराने विधायक के खिलाफ शिकायत और विद्रोह से नुकसान न हो सके। भुवनेश्वर वात्स्यायन, पटना। जदयू ने टिकट बंटवारे में इस बार कई प्रयोग किए हैं। पुराने विधायकों की सीट बदली गई है। कुछ मर्जी से और कुछ समीकरण को ध्यान में रखकर। नए उम्मीदवार उतारे गए हैं, ताकि पुराने विधायक के खिलाफ शिकायत और विद्रोह से नुकसान न हो सके। विधायकों के रिश्तेदारों को टिकट देने में तार्किक आधार का ख्याल रखा गया है। कुछ पुराने महारथियों की सीट बदली है। जैसे शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा को घोसी से जहानाबाद और मदन सहनी को गौरा बौराम से बहादुरपुर भेजा गया है। सिकटा और वाल्मीकिनगर। सिकटा पहले से जदयू की सीट है। वहीं वाल्मीकिनगर सीट से पिछली बार धीरेंद्र प्रताप सिंह निर्दलीय विजयी रहे थे। इस बार वे जदयू के टिकट पर मैदान में हैैं। पूर्वी चंपारण की केसरिया सीट पिछली बार डा. राजेश कुमार को मिली थी। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी राजेंद्र प्रसाद गुप्ता को 12. 28 प्रतिशत मतों के अंतर से हराया थो। इस बार जदयू ने शालिनी मिश्रा को वहां से अपना प्रत्याशी बनाया है। शालिनी अपनी विरासत की चर्चा के साथ मैदान में हैं। मधुबनी में फूलपरास जदयू का पुराना गढ़ रहा है। पार्टी ने इस बार शीला मंडल को वहां से अपना प्रत्याशी बनाया है। वे बिल्कुल नया चेहरा हैं। बाबूबरही भी जदयू की सीट रही है। इस बार वहां के विधायक रहे कपिलदेव कामत की बहू मीना कामत को टिकट दिया गया है। कपिलदेव कामत अस्वस्थ चल रहे हैं। अररिया से शगुफ्ता अजीम पार्टी की प्रत्याशी हैं। वह जिला परिषद का चुनाव जीत चुकी हैैं। पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रही हैैं। मधेपुरा से जदयू के प्रत्याशी निखिल मंडल भी पहली बार चुनाव मैदान में हैैं। वह अपनी विरासत की चर्चा के साथ ही दांव आजमा रहे। मनिहारी से शंभु सुमन पहली बार चुनाव मैदान में हैं। बेनीपुर से अपने विधायक सुनील चौधरी को बेटिकट कर जदयू ने अजय चौधरी को प्रत्याशी बनाया है। वह भी पहली बार चुनावी मैदान में होंगे। कांटी से मो. जमाल भी पहली बार लड़ रहे हैैं। जीरादेई से कमला कुशवाहा, रघुनाथपुर से राजेश्वर चौहान भी पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। पूर्व मंत्री वृशिण पटेल के परिवार से संबंधित सिद्धार्थ पटेल को जदयू ने वैशाली से टिकट दिया है। वहीं एकमा मे चुनाव मैदान में उतरी सीता सिंह जदयू विधायक धूमल सिंह की पत्नी हैं। मढ़ौरा से लड़ रहे अल्ताफ राजू भी पहली बार मैदान में हैैं। विरासत के साथ महुआ से जदयू की टिकट पर आसमां परवीन मैदान में हैैं। उनके पिता राजद सरकार में मंत्री रहे हैैं। अलौली से साधना सदा भी पहली बार मैदान में आ रहीं। अमरपुर से जयंत राज, राजगीर से कौशल किशोर, मोकामा से राजीव लोचन नारायण, जगदीशपुर से सुष्मलता कुशवाहा, ओबरा से सुनील कुमार और डुमरांव से अंजुम आरा पहली बार चुनाव मैदान में हैैं।
बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार ने टिकट बंटवारे में कई प्रयोग किए हैं। पुराने विधायकों की सीट बदली गई है। कुछ मर्जी से और कुछ समीकरण को ध्यान में रखकर। नए उम्मीदवार उतारे गए हैं ताकि पुराने विधायक के खिलाफ शिकायत और विद्रोह से नुकसान न हो सके। भुवनेश्वर वात्स्यायन, पटना। जदयू ने टिकट बंटवारे में इस बार कई प्रयोग किए हैं। पुराने विधायकों की सीट बदली गई है। कुछ मर्जी से और कुछ समीकरण को ध्यान में रखकर। नए उम्मीदवार उतारे गए हैं, ताकि पुराने विधायक के खिलाफ शिकायत और विद्रोह से नुकसान न हो सके। विधायकों के रिश्तेदारों को टिकट देने में तार्किक आधार का ख्याल रखा गया है। कुछ पुराने महारथियों की सीट बदली है। जैसे शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा को घोसी से जहानाबाद और मदन सहनी को गौरा बौराम से बहादुरपुर भेजा गया है। सिकटा और वाल्मीकिनगर। सिकटा पहले से जदयू की सीट है। वहीं वाल्मीकिनगर सीट से पिछली बार धीरेंद्र प्रताप सिंह निर्दलीय विजयी रहे थे। इस बार वे जदयू के टिकट पर मैदान में हैैं। पूर्वी चंपारण की केसरिया सीट पिछली बार डा. राजेश कुमार को मिली थी। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी राजेंद्र प्रसाद गुप्ता को बारह. अट्ठाईस प्रतिशत मतों के अंतर से हराया थो। इस बार जदयू ने शालिनी मिश्रा को वहां से अपना प्रत्याशी बनाया है। शालिनी अपनी विरासत की चर्चा के साथ मैदान में हैं। मधुबनी में फूलपरास जदयू का पुराना गढ़ रहा है। पार्टी ने इस बार शीला मंडल को वहां से अपना प्रत्याशी बनाया है। वे बिल्कुल नया चेहरा हैं। बाबूबरही भी जदयू की सीट रही है। इस बार वहां के विधायक रहे कपिलदेव कामत की बहू मीना कामत को टिकट दिया गया है। कपिलदेव कामत अस्वस्थ चल रहे हैं। अररिया से शगुफ्ता अजीम पार्टी की प्रत्याशी हैं। वह जिला परिषद का चुनाव जीत चुकी हैैं। पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रही हैैं। मधेपुरा से जदयू के प्रत्याशी निखिल मंडल भी पहली बार चुनाव मैदान में हैैं। वह अपनी विरासत की चर्चा के साथ ही दांव आजमा रहे। मनिहारी से शंभु सुमन पहली बार चुनाव मैदान में हैं। बेनीपुर से अपने विधायक सुनील चौधरी को बेटिकट कर जदयू ने अजय चौधरी को प्रत्याशी बनाया है। वह भी पहली बार चुनावी मैदान में होंगे। कांटी से मो. जमाल भी पहली बार लड़ रहे हैैं। जीरादेई से कमला कुशवाहा, रघुनाथपुर से राजेश्वर चौहान भी पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। पूर्व मंत्री वृशिण पटेल के परिवार से संबंधित सिद्धार्थ पटेल को जदयू ने वैशाली से टिकट दिया है। वहीं एकमा मे चुनाव मैदान में उतरी सीता सिंह जदयू विधायक धूमल सिंह की पत्नी हैं। मढ़ौरा से लड़ रहे अल्ताफ राजू भी पहली बार मैदान में हैैं। विरासत के साथ महुआ से जदयू की टिकट पर आसमां परवीन मैदान में हैैं। उनके पिता राजद सरकार में मंत्री रहे हैैं। अलौली से साधना सदा भी पहली बार मैदान में आ रहीं। अमरपुर से जयंत राज, राजगीर से कौशल किशोर, मोकामा से राजीव लोचन नारायण, जगदीशपुर से सुष्मलता कुशवाहा, ओबरा से सुनील कुमार और डुमरांव से अंजुम आरा पहली बार चुनाव मैदान में हैैं।
स्थान खोज निकाला । उन्होंने देवी-देवताओं, गन्धर्वो अप्सराओं आदि को रासलीला में सम्मिलित होने का निमंत्रण भेजा । नंदी मृदंग लेकर, ब्रह्मा शंख लेकर और इन्द्र वेणु लेकर उपस्थित हुए । नागराज की कृपा से सम्पूर्ण स्थान प्रलोकमय हो गया। गंधर्वो ने अपना स्वर्गीय संगीत प्रारम्भ किया । रासलीला प्रारंभ हुईं, यह रासलीला लगातार सात दिन और सात रात होती रही । तभी से मणिपुरी नृत्य परम्परा आरम्भ हुई । कालियानाग के दमन के पश्चात् श्रीकृष्ण ने वृन्दावनवासियों के साथ नृत्य किया था । वह नृत्य वस्तुतः लोकनृत्य ही होगा जिसे रास की संज्ञा दी गयी। महाप्रभु वल्लभाचार्य ने भागवतपुराण में उपलब्ध रासलीला की जो विस्तृत चर्चा की उसमें राधिका के साथ कृष्ण के नृत्य के अतिरिक्त पुरवासियों के साथ भी नृत्य का उल्लेख है । यह नृत्य गोलाकार हुआ करता था । कृष्ण मध्य में और उनके ग्रासपास गोपियों के जोड़े नृत्य करते थे । कई प्राचीन चित्रों में राधिका के साथ कृष्ण मध्य में बताये गये हैं । तालियां देकर नृत्य करते हुए चित्र भी उपलब्ध हैं । गुजरात के संतकवि नरसिंह मेहता (१५वीं शताब्दी) के विषय में प्रसिद्धि है कि उन्होंने कृष्ण की रासलीला के दर्शन किये थे । उस समय वे हाथ में मशाल लिये हुए थे । रास-दर्शन में वे इतने तल्लीन हो गये कि मशाल उनके हाथ को ही जलाने लगी । बताया गया कि रासनृत्य की समानता गुजरात के गरवानृत्य से बहुत मिलती है । वैसे गुजरात में 'रासड़ी' भी एक ग्रामीणनृत्य का प्रकार है। सूरत के निकटवर्ती ग्रामों में मोरपंखों को बांधकर देवी के समक्ष जो नृत्य किया जाता है उसे 'घोरघारास' कहा जाता है । रास के अधिकांश गीत गरबा में भी गाये जाते हैं। कुछ अंशों में रास एक लोकनृत्य भी है । अभिनय का स्पर्श पाकर रास लोकनाट्य की कोटि में भी आ गया । रासलीला का प्रचलित रूप : रासलीला का मंच अत्यन्त साधारण कोटि का होता है। यों तो मन्दिर में अथवा किसी ऊँचे स्थान को इस आयोजन के लिए चुन लिया जाता है । इन स्थानों के प्रभाव में ऊंचे तख्तों और वांसों के सहारे कपड़े बांध कर मंच बना लेना कठिन नहीं होता । पात्र परदे के पीछे से आते रहते हैं। दृश्यान्तर की सूचना पात्रों के चले जाने पर कोई निर्देशक देता है। रंगभूमि में एक गायक और वादक "वैठे होते हैं और सामने प्रेक्षकों के लिए खुले प्रकाश का प्रेक्षागृह रहता है...... ! वास्तविक रासलीला आरम्भ होने से पूर्व आयी हुई जनता के मनोरंजनार्थ रंगभूमि में भजन-गान, ढोलक, मजीरा, हारमोनियम, सितार आदि के साथ होता रहता है । लोलारम्भ से कुछ पहले सूत्रवार की भांति एक ब्राह्मण या पुरोहित व्यवस्थापक के रूप में आता है जो राधा-कृष्ण की दिखलायी जाने वाली लीला का निर्देश करता है और उसके पात्रों और लीला ( कथा ) की प्रशंसा करें प्रेक्षकों की उनकी ओर आकृष्ट करता है । यह प्ररोचना और प्रस्तावना जैसा कार्य है । पश्चात् परदा उठता है और राधाकृष्ण की युगलछवि की आरती की जाती है । भारती के समय रंगभूमि के गायकादि तथा प्रेक्षक उठ खड़े होते हैं। परदा फिर गिरता है और उसके अनन्तर निश्चित लीला का कार्यक्रम प्रारम्भ हो जाता है । पात्रों में राधाकृष्ण और गोपिकाएँ रहती हैं। बीच-बीच में हास्य का प्रसंग भी रहता है। विद्रूपक के रूप में 'मनसुखा' रहता है, जो विभिन्न गोपिकाओं के साथ प्रेम एवं हंसो की बातें करके कृष्ण के प्रति उनके अनुराग को व्यंजित कराता है, साथ ही दर्शकों का भी मनोरंजन करता है। जब कभी पर्दे के पीछे नेपथ्य में अभिनेताओं को वैशविन्यास या रूपसज्जा करने में विलम्ब होता है तो उस अवकाश के क्षणों के लिए कोई हास्य या व्यंग्यपूर्ण दो पात्रों के प्रहन की योजना कर ली जाती है, किन्तु यह कार्य लीला से सम्बन्वित नहीं होता । शस कार्य सम्पन्न करने वाले रासवारी कहलाते हैं। वे प्रायः वालक और युवा पुरुष होते हैं। लीला में हास्य का पुट और शृङ्गार का प्राधान्य रहता है । उसमें कृष्ण का गोपियों, सखियों के साथ अनुरागपूर्ण वृत्ताकार नृत्य होता है। कभी कृष्ण गोपियों के कार्यो एवं चेष्टाओं का अनुकरण करते हैं और कभी गोपियाँ कृष्ण की रूप चेष्टादि का अनुकरण करती हैं और कभी राधा सखियों के कृष्ण की रूपन्ेष्टाओं का अनुकरण करती हैं । यही लीला है । कभी कृष्ण गोपियों के हाथ में हाथ बांध कर नाचते हैं और कभी वे मण्डलाकार गोपियों से घिरकर उनके बीच में नाचते हैं । इन लीलाओं की कथावस्तु प्रायः राधाकृष्ण की प्रेमक्रीड़ाएं होती हैं, जिनमें सूरदास आदि कृष्णभक्त कवियों के भजन गाये जाते हैं । कार्य की अधिकता नहीं, वरन् पद-प्रधान-संवाद, सौन्दर्य नृत्य, गीत, वेणुध्वनि, ताल, लय, रस की अबाध घारा बहती रहती है । पीछे निर्देशक रहता है जो अभिनेताओं के भूल भजन एवं पद को पंक्ति स्मरण करा देता है । लीला में अभिनय कम संलाप अधिक रहता है । कृष्ण धीरललित नायक होते हैं जो समस्त कलाओं के अवतार - माने जाते हैं । राधा उनकी अनुरंजनकर्त्री शक्ति के रूप में दिखायी जाती है । वही समस्त गुणों एवं कलाओं की खान नायिका बनती है । गोपियां सखियाँ सभी प्रगाढ़ यौवना और भावप्रगल्भा होती हैं। उनमें शोभा, विलास, माधुर्य, कान्ति, दीप्ति, विलास, विच्छित्ति, प्रागल्भ, औदार्य, लीला, हाव, हेला, भाव यादि सभी अलंकार होते हैं । • लीला के अंत में युगल-छवि की पुनः प्रारती होती हैं । इस वार प्रेक्षक • जनता भी प्रारती लेती है और भारती के य़ाल में पैसे रुपये के रूप में भेंट चढ़ाती है । इस वार आरती के बाद लीला के विषय में मंगल कामना की जाती हैं । यह एक प्रकार का भरतवाक्य है । पश्चात् लीला का कार्यक्रम समाप्त हो जाता है और पटाक्षेप हो जाता है । 14 अस्तु, व्रज की रासलीला के वर्तमान स्वरूप - में संगीत, नृत्य और अभिनय की त्रिवेणी बनी हुई है । इस रूप के अतिरिक्त राजस्थान के 'रासधारी', व्रज के चरकला नृत्य, लालमानिया, चाचर, भूला दि में पुराने रास के कुछ अंश सुरक्षित लगते हैं । बंगाल में रास का रूप तनिक अभिनयात्मक है । मणिपुर क्षेत्र में प्रचलित रास संगीत-प्रधान है । ऐसा लगता है, व्रज की पद्धति ४०० वर्ष पुरानी है। फिर भी वारहवीं 13. हिन्दी साहित्य- कोश, विजयवहादुरसिंह की रासलीला विषयक टिप्परणी से उद्धृत ।
स्थान खोज निकाला । उन्होंने देवी-देवताओं, गन्धर्वो अप्सराओं आदि को रासलीला में सम्मिलित होने का निमंत्रण भेजा । नंदी मृदंग लेकर, ब्रह्मा शंख लेकर और इन्द्र वेणु लेकर उपस्थित हुए । नागराज की कृपा से सम्पूर्ण स्थान प्रलोकमय हो गया। गंधर्वो ने अपना स्वर्गीय संगीत प्रारम्भ किया । रासलीला प्रारंभ हुईं, यह रासलीला लगातार सात दिन और सात रात होती रही । तभी से मणिपुरी नृत्य परम्परा आरम्भ हुई । कालियानाग के दमन के पश्चात् श्रीकृष्ण ने वृन्दावनवासियों के साथ नृत्य किया था । वह नृत्य वस्तुतः लोकनृत्य ही होगा जिसे रास की संज्ञा दी गयी। महाप्रभु वल्लभाचार्य ने भागवतपुराण में उपलब्ध रासलीला की जो विस्तृत चर्चा की उसमें राधिका के साथ कृष्ण के नृत्य के अतिरिक्त पुरवासियों के साथ भी नृत्य का उल्लेख है । यह नृत्य गोलाकार हुआ करता था । कृष्ण मध्य में और उनके ग्रासपास गोपियों के जोड़े नृत्य करते थे । कई प्राचीन चित्रों में राधिका के साथ कृष्ण मध्य में बताये गये हैं । तालियां देकर नृत्य करते हुए चित्र भी उपलब्ध हैं । गुजरात के संतकवि नरसिंह मेहता के विषय में प्रसिद्धि है कि उन्होंने कृष्ण की रासलीला के दर्शन किये थे । उस समय वे हाथ में मशाल लिये हुए थे । रास-दर्शन में वे इतने तल्लीन हो गये कि मशाल उनके हाथ को ही जलाने लगी । बताया गया कि रासनृत्य की समानता गुजरात के गरवानृत्य से बहुत मिलती है । वैसे गुजरात में 'रासड़ी' भी एक ग्रामीणनृत्य का प्रकार है। सूरत के निकटवर्ती ग्रामों में मोरपंखों को बांधकर देवी के समक्ष जो नृत्य किया जाता है उसे 'घोरघारास' कहा जाता है । रास के अधिकांश गीत गरबा में भी गाये जाते हैं। कुछ अंशों में रास एक लोकनृत्य भी है । अभिनय का स्पर्श पाकर रास लोकनाट्य की कोटि में भी आ गया । रासलीला का प्रचलित रूप : रासलीला का मंच अत्यन्त साधारण कोटि का होता है। यों तो मन्दिर में अथवा किसी ऊँचे स्थान को इस आयोजन के लिए चुन लिया जाता है । इन स्थानों के प्रभाव में ऊंचे तख्तों और वांसों के सहारे कपड़े बांध कर मंच बना लेना कठिन नहीं होता । पात्र परदे के पीछे से आते रहते हैं। दृश्यान्तर की सूचना पात्रों के चले जाने पर कोई निर्देशक देता है। रंगभूमि में एक गायक और वादक "वैठे होते हैं और सामने प्रेक्षकों के लिए खुले प्रकाश का प्रेक्षागृह रहता है...... ! वास्तविक रासलीला आरम्भ होने से पूर्व आयी हुई जनता के मनोरंजनार्थ रंगभूमि में भजन-गान, ढोलक, मजीरा, हारमोनियम, सितार आदि के साथ होता रहता है । लोलारम्भ से कुछ पहले सूत्रवार की भांति एक ब्राह्मण या पुरोहित व्यवस्थापक के रूप में आता है जो राधा-कृष्ण की दिखलायी जाने वाली लीला का निर्देश करता है और उसके पात्रों और लीला की प्रशंसा करें प्रेक्षकों की उनकी ओर आकृष्ट करता है । यह प्ररोचना और प्रस्तावना जैसा कार्य है । पश्चात् परदा उठता है और राधाकृष्ण की युगलछवि की आरती की जाती है । भारती के समय रंगभूमि के गायकादि तथा प्रेक्षक उठ खड़े होते हैं। परदा फिर गिरता है और उसके अनन्तर निश्चित लीला का कार्यक्रम प्रारम्भ हो जाता है । पात्रों में राधाकृष्ण और गोपिकाएँ रहती हैं। बीच-बीच में हास्य का प्रसंग भी रहता है। विद्रूपक के रूप में 'मनसुखा' रहता है, जो विभिन्न गोपिकाओं के साथ प्रेम एवं हंसो की बातें करके कृष्ण के प्रति उनके अनुराग को व्यंजित कराता है, साथ ही दर्शकों का भी मनोरंजन करता है। जब कभी पर्दे के पीछे नेपथ्य में अभिनेताओं को वैशविन्यास या रूपसज्जा करने में विलम्ब होता है तो उस अवकाश के क्षणों के लिए कोई हास्य या व्यंग्यपूर्ण दो पात्रों के प्रहन की योजना कर ली जाती है, किन्तु यह कार्य लीला से सम्बन्वित नहीं होता । शस कार्य सम्पन्न करने वाले रासवारी कहलाते हैं। वे प्रायः वालक और युवा पुरुष होते हैं। लीला में हास्य का पुट और शृङ्गार का प्राधान्य रहता है । उसमें कृष्ण का गोपियों, सखियों के साथ अनुरागपूर्ण वृत्ताकार नृत्य होता है। कभी कृष्ण गोपियों के कार्यो एवं चेष्टाओं का अनुकरण करते हैं और कभी गोपियाँ कृष्ण की रूप चेष्टादि का अनुकरण करती हैं और कभी राधा सखियों के कृष्ण की रूपन्ेष्टाओं का अनुकरण करती हैं । यही लीला है । कभी कृष्ण गोपियों के हाथ में हाथ बांध कर नाचते हैं और कभी वे मण्डलाकार गोपियों से घिरकर उनके बीच में नाचते हैं । इन लीलाओं की कथावस्तु प्रायः राधाकृष्ण की प्रेमक्रीड़ाएं होती हैं, जिनमें सूरदास आदि कृष्णभक्त कवियों के भजन गाये जाते हैं । कार्य की अधिकता नहीं, वरन् पद-प्रधान-संवाद, सौन्दर्य नृत्य, गीत, वेणुध्वनि, ताल, लय, रस की अबाध घारा बहती रहती है । पीछे निर्देशक रहता है जो अभिनेताओं के भूल भजन एवं पद को पंक्ति स्मरण करा देता है । लीला में अभिनय कम संलाप अधिक रहता है । कृष्ण धीरललित नायक होते हैं जो समस्त कलाओं के अवतार - माने जाते हैं । राधा उनकी अनुरंजनकर्त्री शक्ति के रूप में दिखायी जाती है । वही समस्त गुणों एवं कलाओं की खान नायिका बनती है । गोपियां सखियाँ सभी प्रगाढ़ यौवना और भावप्रगल्भा होती हैं। उनमें शोभा, विलास, माधुर्य, कान्ति, दीप्ति, विलास, विच्छित्ति, प्रागल्भ, औदार्य, लीला, हाव, हेला, भाव यादि सभी अलंकार होते हैं । • लीला के अंत में युगल-छवि की पुनः प्रारती होती हैं । इस वार प्रेक्षक • जनता भी प्रारती लेती है और भारती के य़ाल में पैसे रुपये के रूप में भेंट चढ़ाती है । इस वार आरती के बाद लीला के विषय में मंगल कामना की जाती हैं । यह एक प्रकार का भरतवाक्य है । पश्चात् लीला का कार्यक्रम समाप्त हो जाता है और पटाक्षेप हो जाता है । चौदह अस्तु, व्रज की रासलीला के वर्तमान स्वरूप - में संगीत, नृत्य और अभिनय की त्रिवेणी बनी हुई है । इस रूप के अतिरिक्त राजस्थान के 'रासधारी', व्रज के चरकला नृत्य, लालमानिया, चाचर, भूला दि में पुराने रास के कुछ अंश सुरक्षित लगते हैं । बंगाल में रास का रूप तनिक अभिनयात्मक है । मणिपुर क्षेत्र में प्रचलित रास संगीत-प्रधान है । ऐसा लगता है, व्रज की पद्धति चार सौ वर्ष पुरानी है। फिर भी वारहवीं तेरह. हिन्दी साहित्य- कोश, विजयवहादुरसिंह की रासलीला विषयक टिप्परणी से उद्धृत ।
इटली के माटिओ बेरेटिनी ने फ्रांस के जाएल मोंफिल्स को 6-4, 6-2 से हराया और इटली ने सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली। फ्रेंच ओपन 2019 की चैंपियन बार्टी ने बुधवार को खेले गये इस मैच में 6-0, 4-6, 6-3 से जीत दर्ज की। बार्टी क्वार्टर फाइनल में अमेरिका की शेल्बी रोजर्स का सामना करेगी और सेमीफाइनल में उनका मुकाबला सेरेना विलियम्स से हो सकता है। ऑस्ट्रेलिया ओपन की तैयारी के लिए हो रहे इस टूर्नामेंट में हिस्सा ले रहे अन्य भारतीयों रोहन बोपन्ना और अंकिता रैना को हालांकि शिकस्त का सामना करना पड़ा। एटीपी टूर वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार, स्पेन के रोबटरे बतिस्टा अगुट को पहले एकल वर्ग मैच में एलेक्स डी मिनाउर से खेलना है जबकि वर्ल्ड नंबर-16 पॉब्लो कुरैनो बुस्टा दूसरे मैच में जॉन मिलमैन से भिड़ेंगे। ऑस्ट्रेलिया की सामंता स्टोसुर को पहले दौर में हार का सामना करना पड़ा लेकिन उनकी हमवतन डारिया गैवरिलोवा ने आसान जीत दर्ज की। सीजन के पहले ग्रैंड स्लैम आस्ट्रेलियन ओपन के प्रतिदिन करीब 30,000 दर्शकों को स्टेडियम में प्रवेश करने की अनुमति दी जाएगी। भारतीय टेनिस स्टार रोहन बोपन्ना ने आस्ट्रेलियाई ओपन के लिये जापान के बेन मैकलाचलान के साथ साझेदारी की है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, नडाल ने सीएनएन से कहा कि कई लोगों को महामारी के समय बहुत बुरा लगता था, लेकि अब एक अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में खेलने के योग्य होना, उनके गर्व की बात होना चाहिए। कर्नाटक के ऋषि रेड्डी ने फाइनल में गुजरात के माधविन कामथ को हरा अखिल भारतीय टेनिस संघ (एआईटीए) पुरुष चैम्पियनशिप का खिताब अपने नाम किया है। फ्रेंच ओपन 2019 की विजेता और पिछले साल आस्ट्रेलियाई ओपन के सेमीफाइनल में पहुंचने वाली बार्टी ने फरवरी में कतर ओपन के बाद कोई प्रतिस्पर्धी मैच नहीं खेला है। ऑस्ट्रेलियाई ओपन के निदेशक क्रेग टिले ने कहा कि 1200 से भी अधिक खिलाड़ियों, सहयोगी स्टाफ और टूर्नामेंट के अधिकारियों के 3200 परीक्षण किये गये हैं। ऑस्ट्रेलियाई ओपन के आयोजकों ने रविवार की रात पुष्टि की कि दोहा से आने वाली उड़ान में भी एक व्यक्ति पॉजिटिव पाया गया है हालांकि वह खिलाड़ियों के दल का हिस्सा नहीं था। विश्व के टॉप टेनिस खिलाड़ी आठ फरवरी से शुरू होने वाले ऑस्ट्रेलियन ओपन से पहले साउथ आस्ट्रेलिया में प्रदर्शनी टूर्नामेंट में खेलेंगे। टॉप सीड नीथीलन एरिक और रेश्मा मरुरी ने एआईटीए अंडर-18 चैम्पियनशिप में क्रमशः लड़कों एवं लड़कियों के वर्ग में खिताब अपने नाम कर लिया। इस बार यह प्रतियोगिता एक से पांच फरवरी के बीच आयोजित की जाएगी जिसमें 12 टीमें भाग लेंगी। कोविड-19 महामारी के कारण इस बार पूरी प्रतियोगिता डब्ल्यूटीए और एटीपी टूर्नामेंटों के साथ मेलबर्न पार्क में ही खेली जाएगी। ऑस्ट्रेलियन ओपन 2021 के बाद मेलबर्न पार्क एटीपी कप, दो डब्ल्यूटीए 500 इवेंटस और दो एटीपी 250 टूर्नामेंटस की मेजबानी करेगा। स्लोवाकिया की टेनिस खिलाड़ी डगमारा बास्कोवा पर टेनिस इंट्रीगिटी यूनिट (टीआईयू) ने 12 साल का प्रतिबंध लगा दिया है। साथी बास्कोवा पर मैच फिक्सिंग के लिए 40 हजार डॉलर का जुर्माना भी लगा है। सर्बिया के पूर्व टेनिस स्टार जैंक टिपसारेविच ने कहा कि नोवाक जोकोविच, राफेल नडाल और रोजर फेडरर ने अपने खेल को इस स्तर तक पहुंचा दिया है कि आने वाली पीढ़ी को अच्छा करने के लिए सभी तरह के कोर्ट पर बादशाहत हासिल करनी होगी। नडाल ने फाइनल में जोकोविच को 6-0, 6-2, 7-5 से हराया था और 13वां फ्रेंच ओपन तथा 20वां ग्रैंड स्लैम खिताब जीता। सेंट पीटर्सबर्ग ओपन के दौरान कोविड-19 प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने के मामले में अमेरिका के टेनिस खिलाड़ी सैम क्वेरी पर 20,000 डॉलर का निलंबित जुर्माना लगाया है।
इटली के माटिओ बेरेटिनी ने फ्रांस के जाएल मोंफिल्स को छः-चार, छः-दो से हराया और इटली ने सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली। फ्रेंच ओपन दो हज़ार उन्नीस की चैंपियन बार्टी ने बुधवार को खेले गये इस मैच में छः-शून्य, चार-छः, छः-तीन से जीत दर्ज की। बार्टी क्वार्टर फाइनल में अमेरिका की शेल्बी रोजर्स का सामना करेगी और सेमीफाइनल में उनका मुकाबला सेरेना विलियम्स से हो सकता है। ऑस्ट्रेलिया ओपन की तैयारी के लिए हो रहे इस टूर्नामेंट में हिस्सा ले रहे अन्य भारतीयों रोहन बोपन्ना और अंकिता रैना को हालांकि शिकस्त का सामना करना पड़ा। एटीपी टूर वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार, स्पेन के रोबटरे बतिस्टा अगुट को पहले एकल वर्ग मैच में एलेक्स डी मिनाउर से खेलना है जबकि वर्ल्ड नंबर-सोलह पॉब्लो कुरैनो बुस्टा दूसरे मैच में जॉन मिलमैन से भिड़ेंगे। ऑस्ट्रेलिया की सामंता स्टोसुर को पहले दौर में हार का सामना करना पड़ा लेकिन उनकी हमवतन डारिया गैवरिलोवा ने आसान जीत दर्ज की। सीजन के पहले ग्रैंड स्लैम आस्ट्रेलियन ओपन के प्रतिदिन करीब तीस,शून्य दर्शकों को स्टेडियम में प्रवेश करने की अनुमति दी जाएगी। भारतीय टेनिस स्टार रोहन बोपन्ना ने आस्ट्रेलियाई ओपन के लिये जापान के बेन मैकलाचलान के साथ साझेदारी की है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, नडाल ने सीएनएन से कहा कि कई लोगों को महामारी के समय बहुत बुरा लगता था, लेकि अब एक अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में खेलने के योग्य होना, उनके गर्व की बात होना चाहिए। कर्नाटक के ऋषि रेड्डी ने फाइनल में गुजरात के माधविन कामथ को हरा अखिल भारतीय टेनिस संघ पुरुष चैम्पियनशिप का खिताब अपने नाम किया है। फ्रेंच ओपन दो हज़ार उन्नीस की विजेता और पिछले साल आस्ट्रेलियाई ओपन के सेमीफाइनल में पहुंचने वाली बार्टी ने फरवरी में कतर ओपन के बाद कोई प्रतिस्पर्धी मैच नहीं खेला है। ऑस्ट्रेलियाई ओपन के निदेशक क्रेग टिले ने कहा कि एक हज़ार दो सौ से भी अधिक खिलाड़ियों, सहयोगी स्टाफ और टूर्नामेंट के अधिकारियों के तीन हज़ार दो सौ परीक्षण किये गये हैं। ऑस्ट्रेलियाई ओपन के आयोजकों ने रविवार की रात पुष्टि की कि दोहा से आने वाली उड़ान में भी एक व्यक्ति पॉजिटिव पाया गया है हालांकि वह खिलाड़ियों के दल का हिस्सा नहीं था। विश्व के टॉप टेनिस खिलाड़ी आठ फरवरी से शुरू होने वाले ऑस्ट्रेलियन ओपन से पहले साउथ आस्ट्रेलिया में प्रदर्शनी टूर्नामेंट में खेलेंगे। टॉप सीड नीथीलन एरिक और रेश्मा मरुरी ने एआईटीए अंडर-अट्ठारह चैम्पियनशिप में क्रमशः लड़कों एवं लड़कियों के वर्ग में खिताब अपने नाम कर लिया। इस बार यह प्रतियोगिता एक से पांच फरवरी के बीच आयोजित की जाएगी जिसमें बारह टीमें भाग लेंगी। कोविड-उन्नीस महामारी के कारण इस बार पूरी प्रतियोगिता डब्ल्यूटीए और एटीपी टूर्नामेंटों के साथ मेलबर्न पार्क में ही खेली जाएगी। ऑस्ट्रेलियन ओपन दो हज़ार इक्कीस के बाद मेलबर्न पार्क एटीपी कप, दो डब्ल्यूटीए पाँच सौ इवेंटस और दो एटीपी दो सौ पचास टूर्नामेंटस की मेजबानी करेगा। स्लोवाकिया की टेनिस खिलाड़ी डगमारा बास्कोवा पर टेनिस इंट्रीगिटी यूनिट ने बारह साल का प्रतिबंध लगा दिया है। साथी बास्कोवा पर मैच फिक्सिंग के लिए चालीस हजार डॉलर का जुर्माना भी लगा है। सर्बिया के पूर्व टेनिस स्टार जैंक टिपसारेविच ने कहा कि नोवाक जोकोविच, राफेल नडाल और रोजर फेडरर ने अपने खेल को इस स्तर तक पहुंचा दिया है कि आने वाली पीढ़ी को अच्छा करने के लिए सभी तरह के कोर्ट पर बादशाहत हासिल करनी होगी। नडाल ने फाइनल में जोकोविच को छः-शून्य, छः-दो, सात-पाँच से हराया था और तेरहवां फ्रेंच ओपन तथा बीसवां ग्रैंड स्लैम खिताब जीता। सेंट पीटर्सबर्ग ओपन के दौरान कोविड-उन्नीस प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने के मामले में अमेरिका के टेनिस खिलाड़ी सैम क्वेरी पर बीस,शून्य डॉलर का निलंबित जुर्माना लगाया है।
गुमानीवाला बाजार स्थित गली नंबर 13 के समीप एक मोबाइल की दुकान में चोरों ने सेंध लगाकर हजारों के माल पर हाथ साफ कर दिया। चोरों की यह हरकत सीसीटीवी में कैद हो गई। ऋषिकेश, जेएनएन। गुमानीवाला बाजार स्थित गली नंबर 13 के समीप एक मोबाइल की दुकान में चोरों ने सेंध लगाकर हजारों के माल पर हाथ साफ कर दिया। चोरों की यह हरकत सीसीटीवी में कैद हो गई। जानकारी के मुताबिक गुमानीवाला मैं गणपति मेगा मार्ट के समीप सुमित सेमल्टी की मोबाइल की दुकान है। आज तड़के करीब 3:30 बजे दो चोरों ने ताला तोड़कर दुकान से हजारों की कीमत के मोबाइल व अन्य सामान चोरी कर लिया। चोर दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे के सर्वर को भी चुरा ले गए। वहीं, दुकान के बाहर लगे दूसरे कैमरों में उनकी हरकत कैद हो गई। फुटेज में दो चोर दुकान की तरफ को आए। फिर वापस लौटे और औजार लेकर दोबारा दुकान की तरफ आते नजर आ रहे हैं। इसके बाद चोरों ने करीब 15 मिनट में दुकान को खंगाल दिया। सूचना पाकर गुरुवार सुबह कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने फिंगरप्रिंट एकत्र कर सीसीटीवी में कैद हुए संदिग्धों की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही इस चोरी का खुलासा कर दिया जाएगा।
गुमानीवाला बाजार स्थित गली नंबर तेरह के समीप एक मोबाइल की दुकान में चोरों ने सेंध लगाकर हजारों के माल पर हाथ साफ कर दिया। चोरों की यह हरकत सीसीटीवी में कैद हो गई। ऋषिकेश, जेएनएन। गुमानीवाला बाजार स्थित गली नंबर तेरह के समीप एक मोबाइल की दुकान में चोरों ने सेंध लगाकर हजारों के माल पर हाथ साफ कर दिया। चोरों की यह हरकत सीसीटीवी में कैद हो गई। जानकारी के मुताबिक गुमानीवाला मैं गणपति मेगा मार्ट के समीप सुमित सेमल्टी की मोबाइल की दुकान है। आज तड़के करीब तीन:तीस बजे दो चोरों ने ताला तोड़कर दुकान से हजारों की कीमत के मोबाइल व अन्य सामान चोरी कर लिया। चोर दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे के सर्वर को भी चुरा ले गए। वहीं, दुकान के बाहर लगे दूसरे कैमरों में उनकी हरकत कैद हो गई। फुटेज में दो चोर दुकान की तरफ को आए। फिर वापस लौटे और औजार लेकर दोबारा दुकान की तरफ आते नजर आ रहे हैं। इसके बाद चोरों ने करीब पंद्रह मिनट में दुकान को खंगाल दिया। सूचना पाकर गुरुवार सुबह कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने फिंगरप्रिंट एकत्र कर सीसीटीवी में कैद हुए संदिग्धों की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही इस चोरी का खुलासा कर दिया जाएगा।
वाराणसी (ब्यूरो)। साइबर ठगों का जाल भोले के शहर काशी में फैलता ही जा रहा है। पुलिस के लाख प्रयास के बाद भी इस पर लगाम नहीं लग पा रही है। साइबर ठग कोई न कोई बहाना बनाकर लोगों को जाल में फंसाते हैं और उनके फंसते ही एकाउंट खाली कर देते हैं. साइबर ठग सबसे पहले मोबाइल पर केवाईसी अपडेट कराने का मैसेज भेजते हैं। इसके बाद केवाईसी क्यूएस एप को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करने को कहते हैं। डाउनलोड करने के बाद ठग फोन करते हैं और कहते हैं कि आपके मोबाइल पर सात अंकों का नंबर आया होगा। हां कहने पर कहते हैं कि केवाईसी अपडेट हो गया है, आप वह नंबर हमें बता दें। नंबर बताते ही मोबाइल का एक्सेस ठग के हाथ में चला जाता है और वह मोबाइल को हैक कर एकाउंट खाली कर देते हैं. लंका निवासी शत्रुघ्न पांडेय टीचर हैं। पिछले दिनों इनके मोबाइल पर मैसेज आया कि आप अपनी केवाईसी अपडेट करा लें अन्यथा आपका सिम बंद हो जायेगा। भागदौड़ से बचने के लिए उन्होने साइबर ठग के द्वारा बताये रास्ते को चुन लिया। इसके बाद उनका अकाउंट से साइबर ठगो ने 35 हजार रुपये निकाल लिए। ऐसा ही मामला लहरतारा की मीनाक्षी के साथ भी हुआ। साइबर ठगो ने इनके भोलेपन को हथियार बनाया और मोबाइल का एक्सेस केवाईसी क्यूएस एप के माध्यम से अपने कंट्रोल में ले लिया। इसके बाद जब तक ये कुछ समझ पातीं इनके अकाउंट से साइबर ठगो ने 85 हजार रूपये उड़ा दिये. साइबर अपराध होने पर नागरिक तुरंत 1920 पर शिकायत करने के साथ ही साइबर थाने में दर्ज कराएं। इससे बचने के लिए किसी भी अननोन के साथ अपने किसी भी प्रकार के गोपनीय डिटेल को कतई साझा ना करें।
वाराणसी । साइबर ठगों का जाल भोले के शहर काशी में फैलता ही जा रहा है। पुलिस के लाख प्रयास के बाद भी इस पर लगाम नहीं लग पा रही है। साइबर ठग कोई न कोई बहाना बनाकर लोगों को जाल में फंसाते हैं और उनके फंसते ही एकाउंट खाली कर देते हैं. साइबर ठग सबसे पहले मोबाइल पर केवाईसी अपडेट कराने का मैसेज भेजते हैं। इसके बाद केवाईसी क्यूएस एप को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करने को कहते हैं। डाउनलोड करने के बाद ठग फोन करते हैं और कहते हैं कि आपके मोबाइल पर सात अंकों का नंबर आया होगा। हां कहने पर कहते हैं कि केवाईसी अपडेट हो गया है, आप वह नंबर हमें बता दें। नंबर बताते ही मोबाइल का एक्सेस ठग के हाथ में चला जाता है और वह मोबाइल को हैक कर एकाउंट खाली कर देते हैं. लंका निवासी शत्रुघ्न पांडेय टीचर हैं। पिछले दिनों इनके मोबाइल पर मैसेज आया कि आप अपनी केवाईसी अपडेट करा लें अन्यथा आपका सिम बंद हो जायेगा। भागदौड़ से बचने के लिए उन्होने साइबर ठग के द्वारा बताये रास्ते को चुन लिया। इसके बाद उनका अकाउंट से साइबर ठगो ने पैंतीस हजार रुपये निकाल लिए। ऐसा ही मामला लहरतारा की मीनाक्षी के साथ भी हुआ। साइबर ठगो ने इनके भोलेपन को हथियार बनाया और मोबाइल का एक्सेस केवाईसी क्यूएस एप के माध्यम से अपने कंट्रोल में ले लिया। इसके बाद जब तक ये कुछ समझ पातीं इनके अकाउंट से साइबर ठगो ने पचासी हजार रूपये उड़ा दिये. साइबर अपराध होने पर नागरिक तुरंत एक हज़ार नौ सौ बीस पर शिकायत करने के साथ ही साइबर थाने में दर्ज कराएं। इससे बचने के लिए किसी भी अननोन के साथ अपने किसी भी प्रकार के गोपनीय डिटेल को कतई साझा ना करें।
विधान परिषद में राजस्व विभाग के बजट पर सरकार का पक्ष रखते हुए मंत्री आलोक मेहता ने ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त का कार्य ससमय पूरा करने एवं अंचलों में विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त का कार्य प्रारंभ करने के लिए 15 हजार पद स्वीकृत हैं। इसमें से दस हजार 101 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया तीन माह के अंदर पूरी कर ली जाएगी। इसमें विशेष सर्वेक्षण सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी के 355, विशेष सर्वेक्षण कानूनगो के 758, विशेष सर्वेक्षण अमीन के 8244 और विशेष सर्वेक्षण लिपिक के 744 पदों पर बहाली होनी है। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन टेस्ट कर सीधी बहाली की जाएगी। उन्होंने बताया, भूअभिलेख का कंप्यूटरीकरण किया जा रहा है। रिकार्ड को रिजर्व भी रखा जा रहा है ताकि दो जगह रहने पर कोई गड़बड़ी न हो। इसके लिए हर अंचल में एक भवन बनाया जा रहा है। डिजिटल लाइब्रेरी भी बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं के लिए पिछले पांच दिनों में 45 एकड़ जमीन हस्तांतरित की गई है। वासरहित भूमिहीनों को भी जगह चिह्नित कर आवास के लिए जमीन दी जाएगी। जरूरत पड़ने पर निर्धारित दर पर खरीद की जाएगी। दिसंबर तक यह काम पूरा किया जाना है। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन दाखिल खारिज के 90 फीसदी आवेदन निष्पादित किए जा चुके हैं। विधान परिदष के दूसरे सत्र में राजस्व एवं भूमि सुधार, वित्त एवं वाणिज्य विभाग के बजट पर वाद विवाद हुई।
विधान परिषद में राजस्व विभाग के बजट पर सरकार का पक्ष रखते हुए मंत्री आलोक मेहता ने ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त का कार्य ससमय पूरा करने एवं अंचलों में विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त का कार्य प्रारंभ करने के लिए पंद्रह हजार पद स्वीकृत हैं। इसमें से दस हजार एक सौ एक पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया तीन माह के अंदर पूरी कर ली जाएगी। इसमें विशेष सर्वेक्षण सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी के तीन सौ पचपन, विशेष सर्वेक्षण कानूनगो के सात सौ अट्ठावन, विशेष सर्वेक्षण अमीन के आठ हज़ार दो सौ चौंतालीस और विशेष सर्वेक्षण लिपिक के सात सौ चौंतालीस पदों पर बहाली होनी है। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन टेस्ट कर सीधी बहाली की जाएगी। उन्होंने बताया, भूअभिलेख का कंप्यूटरीकरण किया जा रहा है। रिकार्ड को रिजर्व भी रखा जा रहा है ताकि दो जगह रहने पर कोई गड़बड़ी न हो। इसके लिए हर अंचल में एक भवन बनाया जा रहा है। डिजिटल लाइब्रेरी भी बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं के लिए पिछले पांच दिनों में पैंतालीस एकड़ जमीन हस्तांतरित की गई है। वासरहित भूमिहीनों को भी जगह चिह्नित कर आवास के लिए जमीन दी जाएगी। जरूरत पड़ने पर निर्धारित दर पर खरीद की जाएगी। दिसंबर तक यह काम पूरा किया जाना है। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन दाखिल खारिज के नब्बे फीसदी आवेदन निष्पादित किए जा चुके हैं। विधान परिदष के दूसरे सत्र में राजस्व एवं भूमि सुधार, वित्त एवं वाणिज्य विभाग के बजट पर वाद विवाद हुई।
कर्नाटक में बीजेपी विधायक एमपी रेणुकाचार्य ने शनिवार को सीएम बसवराज बोम्मई और शिक्षा मंत्री बीसी नागेश से मांग की है कि राज्य के सभी मदरसों पर प्रतिबंध लगाया जाए। रेणुकाचार्य ने कहा कि मदरसों में कथित तौर राष्ट्रविरोधी पाठ पढ़ाए जाते हैं। बीजेपी विधायक एमपी रेणुकाचार्य ने मदरसों पर प्रतिबंध लगाया जाने की मांग की है। इस दौरान उन्होंने सवाल किया कि क्या हमारे पास ऐसे स्कूल नहीं हैं, जहां सभी समुदाय के छात्र पढ़ाई कर रहे हों? रेणुकाचार्य ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि मैं कांग्रेस से पूछता हूं, हमें मदरसों की जरूरत क्यों है? मदरसे किस बात का प्रचार करते हैं? उन्होंने कहा कि मदरसे कथित तौर पर मासूमों को भड़काते हैं। ऐसी शिक्षा लेकर बच्चे देश के खिलाफ जाएंगे और कभी भी भारत माता की जय नहीं कहेंगे। विधायक रेणुकाचार्य ने कहा कि हिजाब विवाद को लेकर कुछ राष्ट्रविरोधी संगठनों ने राज्य में बंद का आह्वान किया है। क्या सरकार इसे बर्दाश्त कर सकती है? इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि क्या यह बांग्लादेश, पाकिस्तान या अन्य इस्लामिक देश है? हम इसे सहन नहीं करेंगे।
कर्नाटक में बीजेपी विधायक एमपी रेणुकाचार्य ने शनिवार को सीएम बसवराज बोम्मई और शिक्षा मंत्री बीसी नागेश से मांग की है कि राज्य के सभी मदरसों पर प्रतिबंध लगाया जाए। रेणुकाचार्य ने कहा कि मदरसों में कथित तौर राष्ट्रविरोधी पाठ पढ़ाए जाते हैं। बीजेपी विधायक एमपी रेणुकाचार्य ने मदरसों पर प्रतिबंध लगाया जाने की मांग की है। इस दौरान उन्होंने सवाल किया कि क्या हमारे पास ऐसे स्कूल नहीं हैं, जहां सभी समुदाय के छात्र पढ़ाई कर रहे हों? रेणुकाचार्य ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि मैं कांग्रेस से पूछता हूं, हमें मदरसों की जरूरत क्यों है? मदरसे किस बात का प्रचार करते हैं? उन्होंने कहा कि मदरसे कथित तौर पर मासूमों को भड़काते हैं। ऐसी शिक्षा लेकर बच्चे देश के खिलाफ जाएंगे और कभी भी भारत माता की जय नहीं कहेंगे। विधायक रेणुकाचार्य ने कहा कि हिजाब विवाद को लेकर कुछ राष्ट्रविरोधी संगठनों ने राज्य में बंद का आह्वान किया है। क्या सरकार इसे बर्दाश्त कर सकती है? इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि क्या यह बांग्लादेश, पाकिस्तान या अन्य इस्लामिक देश है? हम इसे सहन नहीं करेंगे।
ऑपरेशन संकल्प (Operation Sankalp) अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और समुद्री सुरक्षा से संबंधित हालिया घटनाओं को देखते हुए भारतीय नौसेना ने ओमान की खाड़ी (Gulf of Oman) और फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में ऑपरेशन संकल्प की शुरुआत की है। - इस ऑपरेशन के तहत भारतीय नौसेना ने ओमान और फारस की खाड़ी में युद्धपोत तैनात किये हैं जिनका मुख्य उद्देश्य इस क्षेत्र में मौजूद और वहाँ से गुजरने वाले भारतीय पोतों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। - INS चेन्नई और INS सुनयना को समुद्री सुरक्षा अभियान के लिये ओमान की खाड़ी और फारस की खाड़ी में तैनात किया गया है। - इसके अलावा भारतीय नौसेना के विमान क्षेत्र में हवाई निगरानी भी की जा रही है। - सूचना समेकन केंद्र- हिंद महासागर क्षेत्र (The Information Fusion Centre - Indian Ocean Region) जिसे भारतीय नौसेना द्वारा गुरुग्राम में दिसंबर 2018 में लॉन्च किया गया था, खाड़ी क्षेत्र में जहाज़ों की आवाजाही पर कड़ी नज़र रख रहा है। (Kaleshwaram Lift Irrigation Project) नव-गठित राज्य तेलंगाना में पानी की कमी सबसे महत्त्वपूर्ण समस्या है जिसके कारण राज्य के लोगों को भारी संकट से जूझना पड़ता है। इसी समस्या से निपटने के लिये राज्य में कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई योजना (Kaleshwaram Lift Irrigation Project) आरंभ की गई है, जिसके तहत राज्य को सूखे से मुक्त करने के लिये गोदावरी नदी के जल का प्रयोग किया जाएगा। - करीब 80,500 करोड़ रुपए की लागत से तैयार इस परियोजना को राज्य के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने लॉन्च किया। - यह परियोजना न सिर्फ भारत बल्कि विश्व की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजना है। - इस परियोजना के ज़रिये लगभग 180 हज़ार मिलियन घन पानी राज्य तक पहुँचाने का उद्देश्य रखा गया है। - इस परियोजना में रिवर्स पम्पिंग और संचयन के माध्यम से पानी एकत्र किया जाएगा, जिससे लगभग 18 लाख एकड़ कृषि योग्य भूमि को फायदा होगा। - इसके अतिरिक्त उद्योगों और अन्य इलाकों जैसे - हैदराबाद और सिकंदराबाद में भी पानी की पूर्ति की जाएगी। - इस परियोजना में गोदावरी नदी के बाढ़ के पानी को भी प्रयोग में लाया जाएगा जिससे सरकार के समक्ष बार-बार लोगों को हटाने और बसाने की चुनौती भी समाप्त हो जाएगी। - कालेश्वरम परियोजना मिशन काकतीय और मिशन भागीरथ योजनाओं का भी समर्थन करेगी, जो कई गाँवों को पेयजल उपलब्ध कराने और टैंकों की क्षमता में सुधार लाने के लिये अभिकल्पित की गई हैं। यह तेलंगाना सरकार द्वारा शुरू किया गया एक प्रमुख कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य राज्य के छोटे और सीमांत किसानों को सहायता प्रदान करने के लिए पानी की टंकियों और अन्य जल भंडारण संरचनाओं का कायाकल्प करना है। यह तेलंगाना राज्य के प्रत्येक गाँव और शहर के परिवारों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने हेतु एक परियोजना है। इसका उद्देश्य तेलंगाना के शहरी क्षेत्र के 20 लाख घरों में 2.32 करोड़ लोगों और ग्रामीण इलाकों में 60 लाख लोगों को पाइप के ज़रिये पानी मुहैया कराना है। इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना में गोदावरी नदी और कृष्णा नदी के जल से राज्य के सभी घरों में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति की जाएगी। - यह पंपिंग स्टेशन भूमि के नीचे स्थापित किया गया है जिसमे येलमपल्ली बैराज से मल्लन्ना सागर जलाशय तक तकरीबन 81 किलोमीटर लंबी सुरंग है। - परियोजना से जुड़े लोगों के अनुसार इससे पूर्व मिस्र की टोश्का परियोजना के तहत बना मुबारक पम्पिंग स्टेशन दुनिया का सबसे बड़ा पम्पिंग स्टेशन था। लिफ्ट सिंचाई : लिफ्ट सिंचाई, सिंचाई की वह विधि है जिसमे पानी को प्राकृतिक प्रवाह के स्थान पर अन्य स्रोतों जैसे- पंप या सर्ज पूल आदि के माध्यम से मुख्य वितरण स्थान तक लाया जाता है और बाद में उस स्थान से पानी किसानों और अन्य लोगों तक पहुँचता है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day) 21 जून, 2019 को दुनिया भर में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है। यह पाँचवा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga day) है। 21 जून, 2015 को पहली बार अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया था। इस दिन दुनिया भर में विभिन्न योग कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। - प्रथम अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम का आयोजन 21 जून, 2015 को दिल्ली के राजपथ पर किया गया था। दूसरे, तीसरे एवं चौथे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रमों का आयोजन क्रमशः वर्ष 2016 में चंडीगढ़, वर्ष 2017 में लखनऊ तथा वर्ष 2018 में देहरादून में किया गया था। - इस वर्ष पाँचवें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन झारखंड की राजधानी रांची में किया जा रहा है। - विश्व योग दिवस 2019 के लिये दो थीम हैं, संयुक्त राष्ट्र (United Nations) द्वारा घोषित थीम 'योग फॉर क्लाइमेट एक्शन' (Yoga For Climate Action) और भारत के आयुष मंत्रालय द्वारा निर्धारित थीम 'हृदय के लिये योग' (Yoga For Heart) है। 21 जून ही क्यों? - 21 जून को ग्रीष्म संक्रांति/अयनांत (Summer Solstice) होती है इसलिये इस तारीख को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में चुना गया है। शीतकालीन अयनांत या संक्रांति (Winter Solstice) 21 या 22 दिसंबर को होती है, इस तिथि को दिन की तुलना में रात अधिक बड़ी होती है। - ग्रीष्म संक्रांति का दिन वर्ष का सबसे लंबा दिन होता है। - 11 दिसंबर, 2014 को संयुक्त राष्ट्र में 177 सदस्यों द्वारा 21 जून को 'अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस' के रूप में मनाने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी गई थी। - भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तुत इस प्रस्ताव को 90 दिनों के अंदर पूर्ण बहुमत से पारित किया गया, संयुक्त राष्ट्र संघ में किसी दिवस प्रस्ताव को मंज़ूर करने के संदर्भ में लिया गया यह सबसे कम समय है। - इटली के एंटोनियेटा रोज़ज़ी (व्यक्तिगत श्रेणी - अंतर्राष्ट्रीय), जापान योग निकेतन (संगठन - अंतर्राष्ट्रीय), गुजरात के स्वामी राजर्षि मुनि लाइफ मिशन (राष्ट्रीय स्तर पर व्यक्तिगत श्रेणी में) और बिहार स्कूल ऑफ योग (मुंगेर) (संगठन - राष्ट्रीय), को योग के क्षेत्र में प्रचार और प्रसार हेतु उत्कृष्ट योगदान के लिये वर्ष 2019 का प्रधान मंत्री पुरस्कार प्रदान किया गया हैं। - इनका चयन आयुष मंत्रालय (MInistry of Ayurveda, Yoga & Naturopathy, Unani, Siddha and Homoeopathy-AYUSH) द्वारा विभिन्न श्रेणियों के तहत प्राप्त 79 नामांकन के बीच से किया गया था। (World Refugee Day) विश्व भर के शरणार्थियों की शक्ति, हिम्मत और दृढ़ निश्चय एवं उनके प्रति सम्मान को स्वीकृति देने के लिये संयुक्त राष्ट्र 20 जून को विश्व शरणार्थी दिवस के रूप में मनाता है। विश्व शरणार्थी दिवस 2019 की थीम #StepWithRefugees - Take A Step on World Refugee Day है। - वर्ष 2018 में इसकी थीम 'Now More Than Ever, We Need to Stand with Refugees' थी। - प्रत्येक वर्ष 20 जून को विश्व शरणार्थी दिवस के रूप में मनाया जाता है, इस दिन उन लोगों के साहस, शक्ति और संकल्प के प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है, जिन्हें प्रताड़ना, संघर्ष और हिंसा की चुनौतियों के कारण अपना देश छोड़कर बाहर भागने को मजबूर होना पड़ता है। वस्तुतः शरणार्थियों की दुर्दशा और समस्याओं का समाधान करने के लिये ही इस दिवस को मनाया जाता है। - अफ्रीकी देशों की एकता को अभिव्यक्त करने के लिये 4 दिसंबर, 2000 को संयुक्त राष्ट्र परिषद द्वारा एक प्रस्ताव पारित किया गया था। - इस प्रस्ताव में 2001 को शरणार्थियों की स्थिति से संबंधित 1951 की संधि की 50वीं वर्षगाँठ के रूप में चिह्नित किया गया। - ऑर्गनाइजेशन ऑफ अफ्रीकन यूनिटी (ओएयू) अंतर्राष्ट्रीय शरणार्थी दिवस को अफ्रीकी शरणार्थी दिवस के साथ 20 जून को मनाने के लिये सहमत हो गया। - इंटरनेशनल रेस्क्यू कमिटी (International Rescue Committee) और एमनेस्टी इंटरनेशनल (Amnesty International) जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठन इस दिन निम्नलिखित गतिविधियाँ आयोजित करते हैंः - शरणार्थी स्थलों का निरीक्षण। - शरणार्थियों और उनकी समस्याओं से संबंधित फिल्मों का प्रदर्शन। - गिरफ्तार शरणार्थियों की मुक्ति के लिये विरोध प्रदर्शन। - जेल में बंद शरणार्थियों के लिये समुचित चिकित्सकीय सुविधा और नैतिक समर्थन उपलब्ध कराने के लिये रैलियों का आयोजन।
ऑपरेशन संकल्प अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और समुद्री सुरक्षा से संबंधित हालिया घटनाओं को देखते हुए भारतीय नौसेना ने ओमान की खाड़ी और फारस की खाड़ी में ऑपरेशन संकल्प की शुरुआत की है। - इस ऑपरेशन के तहत भारतीय नौसेना ने ओमान और फारस की खाड़ी में युद्धपोत तैनात किये हैं जिनका मुख्य उद्देश्य इस क्षेत्र में मौजूद और वहाँ से गुजरने वाले भारतीय पोतों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। - INS चेन्नई और INS सुनयना को समुद्री सुरक्षा अभियान के लिये ओमान की खाड़ी और फारस की खाड़ी में तैनात किया गया है। - इसके अलावा भारतीय नौसेना के विमान क्षेत्र में हवाई निगरानी भी की जा रही है। - सूचना समेकन केंद्र- हिंद महासागर क्षेत्र जिसे भारतीय नौसेना द्वारा गुरुग्राम में दिसंबर दो हज़ार अट्ठारह में लॉन्च किया गया था, खाड़ी क्षेत्र में जहाज़ों की आवाजाही पर कड़ी नज़र रख रहा है। नव-गठित राज्य तेलंगाना में पानी की कमी सबसे महत्त्वपूर्ण समस्या है जिसके कारण राज्य के लोगों को भारी संकट से जूझना पड़ता है। इसी समस्या से निपटने के लिये राज्य में कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई योजना आरंभ की गई है, जिसके तहत राज्य को सूखे से मुक्त करने के लिये गोदावरी नदी के जल का प्रयोग किया जाएगा। - करीब अस्सी,पाँच सौ करोड़ रुपए की लागत से तैयार इस परियोजना को राज्य के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने लॉन्च किया। - यह परियोजना न सिर्फ भारत बल्कि विश्व की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजना है। - इस परियोजना के ज़रिये लगभग एक सौ अस्सी हज़ार मिलियन घन पानी राज्य तक पहुँचाने का उद्देश्य रखा गया है। - इस परियोजना में रिवर्स पम्पिंग और संचयन के माध्यम से पानी एकत्र किया जाएगा, जिससे लगभग अट्ठारह लाख एकड़ कृषि योग्य भूमि को फायदा होगा। - इसके अतिरिक्त उद्योगों और अन्य इलाकों जैसे - हैदराबाद और सिकंदराबाद में भी पानी की पूर्ति की जाएगी। - इस परियोजना में गोदावरी नदी के बाढ़ के पानी को भी प्रयोग में लाया जाएगा जिससे सरकार के समक्ष बार-बार लोगों को हटाने और बसाने की चुनौती भी समाप्त हो जाएगी। - कालेश्वरम परियोजना मिशन काकतीय और मिशन भागीरथ योजनाओं का भी समर्थन करेगी, जो कई गाँवों को पेयजल उपलब्ध कराने और टैंकों की क्षमता में सुधार लाने के लिये अभिकल्पित की गई हैं। यह तेलंगाना सरकार द्वारा शुरू किया गया एक प्रमुख कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य राज्य के छोटे और सीमांत किसानों को सहायता प्रदान करने के लिए पानी की टंकियों और अन्य जल भंडारण संरचनाओं का कायाकल्प करना है। यह तेलंगाना राज्य के प्रत्येक गाँव और शहर के परिवारों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने हेतु एक परियोजना है। इसका उद्देश्य तेलंगाना के शहरी क्षेत्र के बीस लाख घरों में दो.बत्तीस करोड़ लोगों और ग्रामीण इलाकों में साठ लाख लोगों को पाइप के ज़रिये पानी मुहैया कराना है। इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना में गोदावरी नदी और कृष्णा नदी के जल से राज्य के सभी घरों में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति की जाएगी। - यह पंपिंग स्टेशन भूमि के नीचे स्थापित किया गया है जिसमे येलमपल्ली बैराज से मल्लन्ना सागर जलाशय तक तकरीबन इक्यासी किलोग्राममीटर लंबी सुरंग है। - परियोजना से जुड़े लोगों के अनुसार इससे पूर्व मिस्र की टोश्का परियोजना के तहत बना मुबारक पम्पिंग स्टेशन दुनिया का सबसे बड़ा पम्पिंग स्टेशन था। लिफ्ट सिंचाई : लिफ्ट सिंचाई, सिंचाई की वह विधि है जिसमे पानी को प्राकृतिक प्रवाह के स्थान पर अन्य स्रोतों जैसे- पंप या सर्ज पूल आदि के माध्यम से मुख्य वितरण स्थान तक लाया जाता है और बाद में उस स्थान से पानी किसानों और अन्य लोगों तक पहुँचता है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस इक्कीस जून, दो हज़ार उन्नीस को दुनिया भर में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है। यह पाँचवा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस है। इक्कीस जून, दो हज़ार पंद्रह को पहली बार अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया था। इस दिन दुनिया भर में विभिन्न योग कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। - प्रथम अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम का आयोजन इक्कीस जून, दो हज़ार पंद्रह को दिल्ली के राजपथ पर किया गया था। दूसरे, तीसरे एवं चौथे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रमों का आयोजन क्रमशः वर्ष दो हज़ार सोलह में चंडीगढ़, वर्ष दो हज़ार सत्रह में लखनऊ तथा वर्ष दो हज़ार अट्ठारह में देहरादून में किया गया था। - इस वर्ष पाँचवें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन झारखंड की राजधानी रांची में किया जा रहा है। - विश्व योग दिवस दो हज़ार उन्नीस के लिये दो थीम हैं, संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित थीम 'योग फॉर क्लाइमेट एक्शन' और भारत के आयुष मंत्रालय द्वारा निर्धारित थीम 'हृदय के लिये योग' है। इक्कीस जून ही क्यों? - इक्कीस जून को ग्रीष्म संक्रांति/अयनांत होती है इसलिये इस तारीख को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में चुना गया है। शीतकालीन अयनांत या संक्रांति इक्कीस या बाईस दिसंबर को होती है, इस तिथि को दिन की तुलना में रात अधिक बड़ी होती है। - ग्रीष्म संक्रांति का दिन वर्ष का सबसे लंबा दिन होता है। - ग्यारह दिसंबर, दो हज़ार चौदह को संयुक्त राष्ट्र में एक सौ सतहत्तर सदस्यों द्वारा इक्कीस जून को 'अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस' के रूप में मनाने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी गई थी। - भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तुत इस प्रस्ताव को नब्बे दिनों के अंदर पूर्ण बहुमत से पारित किया गया, संयुक्त राष्ट्र संघ में किसी दिवस प्रस्ताव को मंज़ूर करने के संदर्भ में लिया गया यह सबसे कम समय है। - इटली के एंटोनियेटा रोज़ज़ी , जापान योग निकेतन , गुजरात के स्वामी राजर्षि मुनि लाइफ मिशन और बिहार स्कूल ऑफ योग , को योग के क्षेत्र में प्रचार और प्रसार हेतु उत्कृष्ट योगदान के लिये वर्ष दो हज़ार उन्नीस का प्रधान मंत्री पुरस्कार प्रदान किया गया हैं। - इनका चयन आयुष मंत्रालय द्वारा विभिन्न श्रेणियों के तहत प्राप्त उन्यासी नामांकन के बीच से किया गया था। विश्व भर के शरणार्थियों की शक्ति, हिम्मत और दृढ़ निश्चय एवं उनके प्रति सम्मान को स्वीकृति देने के लिये संयुक्त राष्ट्र बीस जून को विश्व शरणार्थी दिवस के रूप में मनाता है। विश्व शरणार्थी दिवस दो हज़ार उन्नीस की थीम #StepWithRefugees - Take A Step on World Refugee Day है। - वर्ष दो हज़ार अट्ठारह में इसकी थीम 'Now More Than Ever, We Need to Stand with Refugees' थी। - प्रत्येक वर्ष बीस जून को विश्व शरणार्थी दिवस के रूप में मनाया जाता है, इस दिन उन लोगों के साहस, शक्ति और संकल्प के प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है, जिन्हें प्रताड़ना, संघर्ष और हिंसा की चुनौतियों के कारण अपना देश छोड़कर बाहर भागने को मजबूर होना पड़ता है। वस्तुतः शरणार्थियों की दुर्दशा और समस्याओं का समाधान करने के लिये ही इस दिवस को मनाया जाता है। - अफ्रीकी देशों की एकता को अभिव्यक्त करने के लिये चार दिसंबर, दो हज़ार को संयुक्त राष्ट्र परिषद द्वारा एक प्रस्ताव पारित किया गया था। - इस प्रस्ताव में दो हज़ार एक को शरणार्थियों की स्थिति से संबंधित एक हज़ार नौ सौ इक्यावन की संधि की पचासवीं वर्षगाँठ के रूप में चिह्नित किया गया। - ऑर्गनाइजेशन ऑफ अफ्रीकन यूनिटी अंतर्राष्ट्रीय शरणार्थी दिवस को अफ्रीकी शरणार्थी दिवस के साथ बीस जून को मनाने के लिये सहमत हो गया। - इंटरनेशनल रेस्क्यू कमिटी और एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठन इस दिन निम्नलिखित गतिविधियाँ आयोजित करते हैंः - शरणार्थी स्थलों का निरीक्षण। - शरणार्थियों और उनकी समस्याओं से संबंधित फिल्मों का प्रदर्शन। - गिरफ्तार शरणार्थियों की मुक्ति के लिये विरोध प्रदर्शन। - जेल में बंद शरणार्थियों के लिये समुचित चिकित्सकीय सुविधा और नैतिक समर्थन उपलब्ध कराने के लिये रैलियों का आयोजन।
द्वितीय महायुद्ध के बाद भारत की विदेश नीति 523 पहुँचाई । अमेरिका की इस संकटकालीन सहायता ने भारतीयों के पिछले सभी घावों को भर दिया और यह सिद्ध कर दिया कि मतभेदों के बावजूद दोनों राष्ट्र मित्रता के स्थायी आधार स्तम्भ पर खड़े हैं । अमेरिका ने भारत को यह सहायता बिना किसी शर्त के प्रदान की। चीनी माक्रमण के समय भी भारत जिस प्रकार अपनी गुट निरपेक्ष नीति पर डटा रहा, उसकी अमेरिकी विदेश सचिव डीन रस्क ने प्रशंसा की। भारत अपनी स्वतन्त्र नीति से डिगा नहीं, इसका एक बड़ा प्रमाण यही है कि एक प्रोर तो भारत ने अमेरिका से सैनिक सहायता की माँग की, दूसरी घोर उसके एक दिन बाद ही जब संयुक्त राष्ट्रसघ में चीन को उसका स्थान देने का प्रश्न उपस्थित हुआ तो भारत ने चीन के पक्ष में मत दिया। मार्च, 1963 में भारत ने ने लगभग 100 करोड़ डॉलर की अमेरिकी सैनिक सहायता की मांग की, लेकिन अमेरिका ने केवल 6 करोड़ डॉलर दिए। इस तरह मूल रूप में अमेरिका की भारत के प्रति प्रप्रसन्नता बनी रही । शास्त्री - काल में भारत-अमेरिकी सम्बन्ध (1964-1965) राष्ट्रपति कैनेडी के उत्तराधिकारी लिण्डन बी. जॉनसन और प्रधान मन्त्री नेहरू के उत्तराधिकारी लालबहादुर शास्त्री बने । अमेरिकी नेतृत्व का विचार था कि श्री शास्त्री पं. नेहरू के मुकाबले एक कमजोर नेता सिद्ध होंगे, अत उनको दबाव द्वारा अमेरिका के पक्ष में सरलता से झुकाया जा सकेगा। लेकिन श्री शास्त्रो ने गुट-निरपेक्ष नीति का प. नेहरू से भी अधिक दृढ़ता के साथ अनुसरण किया और उसे पहले की तुलना में अधिक यथार्थवादी रूप दिया । प्रारम्भ में तो दोनो देशो के सम्बन्धों में कोई बिगाड़ नहीं प्राया, लेकिन उत्तर- वियतनाम पर अमेरिकी बमवर्षा की जब भारत में सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्रों में आलोचना हुई तो प्रमेरिका जैसे महान् लोकतान्त्रिक राष्ट्र ने प्रप्रसन्नता का बड़ा निर्लज्ज प्रदर्शन किया। राष्ट्रपति जॉनसन के निमन्त्रण पर श्री शास्त्री ने जब मई, 1965 में अमेरिका जाने का कार्यक्रम निश्चित कर लिया तो अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपनी कार्य व्यस्तता के बहाने निमन्त्रण को वापस ले लिया । अमेरिका का यह कदम भारत के प्रधान मन्त्री का नहीं वरन् सम्पूर्ण भारतीय जनता का सार्वजनिक अपमान था और विदेश मन्त्री सरदार स्वर्णसिंह को कहना पड़ा कि भविष्य में श्री शास्त्री अपनी सुविधा देखकर ही निमन्त्रण स्वीकार करेंगे । पहले कच्छ के रन में और फिर सन् 1965 के भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तान द्वारा अमेरिकी शस्त्रास्त्रों के प्रयोग से भारत-अमेरिका के सम्बन्धों में अधिक कटुता उत्पन्न हो गई। युद्धकाल में भी अमेरिका का रुख बहुत कुछ भारत विरोधी रहा। भूतपूर्व रक्षा उत्पादन उपमन्त्री श्री ललित नारायण मिश्र द्वारा भक्तूवर, 1970 में किए गए एक रहस्योद्घाटन के अनुसार सन् 1965 में भारत-पाक युद्ध दौरान अमेरिका ने अपने 6 जहाजों को, जिनमें भारत के लिए रक्षा सामग्री भारतीय तट से मात्र 15 मील की दूरी से वापस लौटा लिया। यही नहीं र ने न तो पाकिस्तान को अमेरिकी सैन्य सामग्री का प्रयोग करने से रोका
द्वितीय महायुद्ध के बाद भारत की विदेश नीति पाँच सौ तेईस पहुँचाई । अमेरिका की इस संकटकालीन सहायता ने भारतीयों के पिछले सभी घावों को भर दिया और यह सिद्ध कर दिया कि मतभेदों के बावजूद दोनों राष्ट्र मित्रता के स्थायी आधार स्तम्भ पर खड़े हैं । अमेरिका ने भारत को यह सहायता बिना किसी शर्त के प्रदान की। चीनी माक्रमण के समय भी भारत जिस प्रकार अपनी गुट निरपेक्ष नीति पर डटा रहा, उसकी अमेरिकी विदेश सचिव डीन रस्क ने प्रशंसा की। भारत अपनी स्वतन्त्र नीति से डिगा नहीं, इसका एक बड़ा प्रमाण यही है कि एक प्रोर तो भारत ने अमेरिका से सैनिक सहायता की माँग की, दूसरी घोर उसके एक दिन बाद ही जब संयुक्त राष्ट्रसघ में चीन को उसका स्थान देने का प्रश्न उपस्थित हुआ तो भारत ने चीन के पक्ष में मत दिया। मार्च, एक हज़ार नौ सौ तिरेसठ में भारत ने ने लगभग एक सौ करोड़ डॉलर की अमेरिकी सैनिक सहायता की मांग की, लेकिन अमेरिका ने केवल छः करोड़ डॉलर दिए। इस तरह मूल रूप में अमेरिका की भारत के प्रति प्रप्रसन्नता बनी रही । शास्त्री - काल में भारत-अमेरिकी सम्बन्ध राष्ट्रपति कैनेडी के उत्तराधिकारी लिण्डन बी. जॉनसन और प्रधान मन्त्री नेहरू के उत्तराधिकारी लालबहादुर शास्त्री बने । अमेरिकी नेतृत्व का विचार था कि श्री शास्त्री पं. नेहरू के मुकाबले एक कमजोर नेता सिद्ध होंगे, अत उनको दबाव द्वारा अमेरिका के पक्ष में सरलता से झुकाया जा सकेगा। लेकिन श्री शास्त्रो ने गुट-निरपेक्ष नीति का प. नेहरू से भी अधिक दृढ़ता के साथ अनुसरण किया और उसे पहले की तुलना में अधिक यथार्थवादी रूप दिया । प्रारम्भ में तो दोनो देशो के सम्बन्धों में कोई बिगाड़ नहीं प्राया, लेकिन उत्तर- वियतनाम पर अमेरिकी बमवर्षा की जब भारत में सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्रों में आलोचना हुई तो प्रमेरिका जैसे महान् लोकतान्त्रिक राष्ट्र ने प्रप्रसन्नता का बड़ा निर्लज्ज प्रदर्शन किया। राष्ट्रपति जॉनसन के निमन्त्रण पर श्री शास्त्री ने जब मई, एक हज़ार नौ सौ पैंसठ में अमेरिका जाने का कार्यक्रम निश्चित कर लिया तो अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपनी कार्य व्यस्तता के बहाने निमन्त्रण को वापस ले लिया । अमेरिका का यह कदम भारत के प्रधान मन्त्री का नहीं वरन् सम्पूर्ण भारतीय जनता का सार्वजनिक अपमान था और विदेश मन्त्री सरदार स्वर्णसिंह को कहना पड़ा कि भविष्य में श्री शास्त्री अपनी सुविधा देखकर ही निमन्त्रण स्वीकार करेंगे । पहले कच्छ के रन में और फिर सन् एक हज़ार नौ सौ पैंसठ के भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तान द्वारा अमेरिकी शस्त्रास्त्रों के प्रयोग से भारत-अमेरिका के सम्बन्धों में अधिक कटुता उत्पन्न हो गई। युद्धकाल में भी अमेरिका का रुख बहुत कुछ भारत विरोधी रहा। भूतपूर्व रक्षा उत्पादन उपमन्त्री श्री ललित नारायण मिश्र द्वारा भक्तूवर, एक हज़ार नौ सौ सत्तर में किए गए एक रहस्योद्घाटन के अनुसार सन् एक हज़ार नौ सौ पैंसठ में भारत-पाक युद्ध दौरान अमेरिका ने अपने छः जहाजों को, जिनमें भारत के लिए रक्षा सामग्री भारतीय तट से मात्र पंद्रह मील की दूरी से वापस लौटा लिया। यही नहीं र ने न तो पाकिस्तान को अमेरिकी सैन्य सामग्री का प्रयोग करने से रोका
अनाहत ने स्पर्धा के पहले दिन अंतिम 64 के दौर में सेंट विंसेंट एवं ग्रेनेडाइंस की जाडा रॉस को एकतरफा मुकाबले में 11-5, 11-2, 11-0 से शिकस्त दी. बर्मिंघम में खेले जा रहे राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के लिए पहला दिन अच्छा रहा. पहले दिन यानी शुक्रवार को भारत को कई अच्छी खबरें मिलीं. उनमें से ही एक थी देश की सबसे कम उम्र की खिलाड़ी अनाहत सिंह की जीत. महज 14 साल की उम्र में इस स्क्वॉश खिलाड़ी ने महिला एकल वर्ग में शानदार शुरुआत की और पहला मैच जीता. एक ओर अनाहत जहां कम उम्र में ही कमाल दिखा रही हैं तो कुछ खिलाड़ी ऐसे हैं जो उम्र की बाधा को तोड़ कर इन खेलों में खेल रहे हैं. ऐसे ही खिलाड़ी हैं लॉन बॉल्स के प्लेयर सुनील बहादुर और दिनेश कुमार. अनाहत ने स्पर्धा के पहले दिन अंतिम 64 के दौर में सेंट विंसेंट एवं ग्रेनेडाइंस की जाडा रॉस को एकतरफा मुकाबले में 11-5, 11-2, 11-0 से शिकस्त दी. अनाहत के करियर का ये पहला सबसे बड़ा टूर्नामेंट है. लेकिन क्या आपको पता है कि अनाहत की पहली पसंद स्क्वॉश कभी नहीं था. यूं तो इस खिलाड़ी ने कम उम्र से ही कमाल दिखाया है. अनाहत को अंडर -15 स्तर पर उनके प्रभावशाली प्रदर्शन के बाद भारतीय टीम में चुना गया था. वह इस साल एशियाई जूनियर स्क्वाश और जर्मन ओपन की चैम्पियन रही हैं. नेशनल ट्रायल्स में दमदार खेल दिखाने के बाद ही उनको इन खेलों में एंट्री मिली. ये उभरती हुई खिलाड़ी 11 साल की उम्र से कमाल कर रही है. अनाहत ने छह साल की उम्र से खेलना शुरू किया था लेकिन तब वह दूसरा खेल खेला करती थीं. अनाहत ने अपने स्पोर्ट्स करियर की शुरुआत बैडमिंटन से की थी. वहीं उनकी बहन अमीरा स्क्वॉश खेला करती थीं. बस अपनी बहन को देखकर अनाहत को भी इस खेल का चस्का लग गया. अनाहत को उनके परिवार से भी साथ मिला. अनाहत के मात-पिता कॉलेज के दिनों में हॉकी खेल चुके हैं और इस सफर में उन्होंने अनाहत का भरपूर साथ दिया है. अनाहत ने अभी तक 46 नेशनल पदक, दो नेशनल सर्किट टाइटल्स, दो नेशनल चैंपियनशिप और आठ इंटरनेशनल खिताब अपने नाम किए हैं. अनहत इन खेलों में भारत की सबसे युवा खिलाड़ी हैं. लेकिन दो खिलाड़ी ऐसे हैं जिन्होंने बता दिया है कि उम्र खेलों में कोई सीमा नहीं होती है. लॉन बॉल्स में दो खिलाड़ी ऐसे हैं जिन्होंने उम्र को ठेंका बताया है. ये खिलाड़ी हैं सुनील बहादुर और दिनेश कुमार. इन दोनों की उम्र 45 साल है और ये दोनों इस उम्र में भी कमाल दिखा रहे हैं. सुनील का ये चौथा ओलिंपिक है. वह 2010 से इन खेलों में हर साल खेल रहे हैं. दिनेश कुमार भी 45 साल के हैं और लॉन बॉल्स ही खेलते हैं. ये दोनों खिलाड़ी राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा लेने वाली भारत की पहली लॉन बॉल्स टीम का हिस्सा थे.
अनाहत ने स्पर्धा के पहले दिन अंतिम चौंसठ के दौर में सेंट विंसेंट एवं ग्रेनेडाइंस की जाडा रॉस को एकतरफा मुकाबले में ग्यारह-पाँच, ग्यारह-दो, ग्यारह-शून्य से शिकस्त दी. बर्मिंघम में खेले जा रहे राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के लिए पहला दिन अच्छा रहा. पहले दिन यानी शुक्रवार को भारत को कई अच्छी खबरें मिलीं. उनमें से ही एक थी देश की सबसे कम उम्र की खिलाड़ी अनाहत सिंह की जीत. महज चौदह साल की उम्र में इस स्क्वॉश खिलाड़ी ने महिला एकल वर्ग में शानदार शुरुआत की और पहला मैच जीता. एक ओर अनाहत जहां कम उम्र में ही कमाल दिखा रही हैं तो कुछ खिलाड़ी ऐसे हैं जो उम्र की बाधा को तोड़ कर इन खेलों में खेल रहे हैं. ऐसे ही खिलाड़ी हैं लॉन बॉल्स के प्लेयर सुनील बहादुर और दिनेश कुमार. अनाहत ने स्पर्धा के पहले दिन अंतिम चौंसठ के दौर में सेंट विंसेंट एवं ग्रेनेडाइंस की जाडा रॉस को एकतरफा मुकाबले में ग्यारह-पाँच, ग्यारह-दो, ग्यारह-शून्य से शिकस्त दी. अनाहत के करियर का ये पहला सबसे बड़ा टूर्नामेंट है. लेकिन क्या आपको पता है कि अनाहत की पहली पसंद स्क्वॉश कभी नहीं था. यूं तो इस खिलाड़ी ने कम उम्र से ही कमाल दिखाया है. अनाहत को अंडर -पंद्रह स्तर पर उनके प्रभावशाली प्रदर्शन के बाद भारतीय टीम में चुना गया था. वह इस साल एशियाई जूनियर स्क्वाश और जर्मन ओपन की चैम्पियन रही हैं. नेशनल ट्रायल्स में दमदार खेल दिखाने के बाद ही उनको इन खेलों में एंट्री मिली. ये उभरती हुई खिलाड़ी ग्यारह साल की उम्र से कमाल कर रही है. अनाहत ने छह साल की उम्र से खेलना शुरू किया था लेकिन तब वह दूसरा खेल खेला करती थीं. अनाहत ने अपने स्पोर्ट्स करियर की शुरुआत बैडमिंटन से की थी. वहीं उनकी बहन अमीरा स्क्वॉश खेला करती थीं. बस अपनी बहन को देखकर अनाहत को भी इस खेल का चस्का लग गया. अनाहत को उनके परिवार से भी साथ मिला. अनाहत के मात-पिता कॉलेज के दिनों में हॉकी खेल चुके हैं और इस सफर में उन्होंने अनाहत का भरपूर साथ दिया है. अनाहत ने अभी तक छियालीस नेशनल पदक, दो नेशनल सर्किट टाइटल्स, दो नेशनल चैंपियनशिप और आठ इंटरनेशनल खिताब अपने नाम किए हैं. अनहत इन खेलों में भारत की सबसे युवा खिलाड़ी हैं. लेकिन दो खिलाड़ी ऐसे हैं जिन्होंने बता दिया है कि उम्र खेलों में कोई सीमा नहीं होती है. लॉन बॉल्स में दो खिलाड़ी ऐसे हैं जिन्होंने उम्र को ठेंका बताया है. ये खिलाड़ी हैं सुनील बहादुर और दिनेश कुमार. इन दोनों की उम्र पैंतालीस साल है और ये दोनों इस उम्र में भी कमाल दिखा रहे हैं. सुनील का ये चौथा ओलिंपिक है. वह दो हज़ार दस से इन खेलों में हर साल खेल रहे हैं. दिनेश कुमार भी पैंतालीस साल के हैं और लॉन बॉल्स ही खेलते हैं. ये दोनों खिलाड़ी राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा लेने वाली भारत की पहली लॉन बॉल्स टीम का हिस्सा थे.
Chanakya Niti: इन दिनों देश में लग्न का सीजन चल रहा और बड़े पैमान पर शादियां हो रही है। ऐसे में अगर आप भी शादी करने जा रहे हैं या फिर शादी का प्लान कर रहे हैं तो आपके लिए जरूरी खबर है। आचार्य चाणक्य के मुताबिक शादी से पहले हर लड़के को लड़की के बारें में चार महत्वपूर्ण बात को जरूर जान लें। दरअसल शादी करना हर किसी के लिए बेहद खास होता है और हर कोई चाहता है कि उसके लाइफ में एक ऐसा इंसान आए जो उसे हर तरह का प्यार दे सके और उसका ख्याल रख सके। कहते हैं कि एक अच्छा जीवनसाथी जीवन में खुशियां ला सकता है। अगर आप भी जीवनसाथी चुनने की तैयारी में हैं तो आचार्य चाणक्य (Chanakya Niti) के मुताबिक आपको कुछ बातों का ख्याल रखना चाहिए। कई लोग ऐसे होते हैं कि शादी के बाद उनकी जिंदगी और खुशनुमा होती है मगर कई लोगों की शादी के बाद उनके बीच विवाद बढ़ने लगते हैं। कई बार इंसान के आकर्षण के पीछे हम बाकी सारी चीजें छोड़ देते हैं और उससे शादी कर लेते हैं। हम उस इंसान के अंदरूनी चीजों को समझ भी नहीं पाते। आचार्य चाणक्य (Chanakya Niti) ने अपने नीति शास्त्र में एक ऐसा ही श्लोक बताया है जिसके माध्यम से बताया गया है कि शादी या प्रेम से पहले अपने पार्टनर में कुछ बातों को जरूर परख लें। वरयेत् कुलजां प्राज्ञो विरूपामपि कन्यकाम्। रूपशीलां न नीचस्य विवाहः सदृशे कुले। । उपरोक्त श्लोक के मुताबिक चाणक्य नीति (Chanakya Niti) के इस श्लोक में बताया गया है कि इंसान को विवाह से पहले पार्टनर चुनते समय उसके शरीर के बजाय गुणों को देखना चाहिए। - चाणक्य नीति के मुताबिक पुरुषों को सुंदर स्त्री के पीछे नहीं भागना चाहिए। आचार्य चाणक्य के मुताबिक पत्नी अगर गुणवान हो तो विपत्ती के समय भी परिवार संभाले रखती है। - आचार्य चाणक्य के मुताबिक, एक स्त्री में बाहरी सुंदरता से ज्यादा मन की सुंदरता होनी चाहिए। साथ ही उसमें धैर्य होना चाहिए। - चाणक्य नीति के अनुसार, धर्म-कर्म में विश्वास रखने वाला इंसान मर्यादित होता है। इसलिए विवाह से पहले ये जान लेना चाहिए कि उन्हें धर्म-कर्म में कितनी आस्था है। - आचार्य चाणक्य (Chanakya Niti) के गुस्सा सबसे बड़ा दुश्मन होता है। चाणक्य का कहना है कि जिस स्त्री को बहुत गुस्सा आता हो वो परिवार को कभी सुखी नहीं रख सकती। डिस्क्लेमरः यहां दी गई जानकारी ज्योतिष पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी उपाय को करने से पहले संबंधित विषय के एक्सपर्ट से सलाह अवश्य लें।
Chanakya Niti: इन दिनों देश में लग्न का सीजन चल रहा और बड़े पैमान पर शादियां हो रही है। ऐसे में अगर आप भी शादी करने जा रहे हैं या फिर शादी का प्लान कर रहे हैं तो आपके लिए जरूरी खबर है। आचार्य चाणक्य के मुताबिक शादी से पहले हर लड़के को लड़की के बारें में चार महत्वपूर्ण बात को जरूर जान लें। दरअसल शादी करना हर किसी के लिए बेहद खास होता है और हर कोई चाहता है कि उसके लाइफ में एक ऐसा इंसान आए जो उसे हर तरह का प्यार दे सके और उसका ख्याल रख सके। कहते हैं कि एक अच्छा जीवनसाथी जीवन में खुशियां ला सकता है। अगर आप भी जीवनसाथी चुनने की तैयारी में हैं तो आचार्य चाणक्य के मुताबिक आपको कुछ बातों का ख्याल रखना चाहिए। कई लोग ऐसे होते हैं कि शादी के बाद उनकी जिंदगी और खुशनुमा होती है मगर कई लोगों की शादी के बाद उनके बीच विवाद बढ़ने लगते हैं। कई बार इंसान के आकर्षण के पीछे हम बाकी सारी चीजें छोड़ देते हैं और उससे शादी कर लेते हैं। हम उस इंसान के अंदरूनी चीजों को समझ भी नहीं पाते। आचार्य चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में एक ऐसा ही श्लोक बताया है जिसके माध्यम से बताया गया है कि शादी या प्रेम से पहले अपने पार्टनर में कुछ बातों को जरूर परख लें। वरयेत् कुलजां प्राज्ञो विरूपामपि कन्यकाम्। रूपशीलां न नीचस्य विवाहः सदृशे कुले। । उपरोक्त श्लोक के मुताबिक चाणक्य नीति के इस श्लोक में बताया गया है कि इंसान को विवाह से पहले पार्टनर चुनते समय उसके शरीर के बजाय गुणों को देखना चाहिए। - चाणक्य नीति के मुताबिक पुरुषों को सुंदर स्त्री के पीछे नहीं भागना चाहिए। आचार्य चाणक्य के मुताबिक पत्नी अगर गुणवान हो तो विपत्ती के समय भी परिवार संभाले रखती है। - आचार्य चाणक्य के मुताबिक, एक स्त्री में बाहरी सुंदरता से ज्यादा मन की सुंदरता होनी चाहिए। साथ ही उसमें धैर्य होना चाहिए। - चाणक्य नीति के अनुसार, धर्म-कर्म में विश्वास रखने वाला इंसान मर्यादित होता है। इसलिए विवाह से पहले ये जान लेना चाहिए कि उन्हें धर्म-कर्म में कितनी आस्था है। - आचार्य चाणक्य के गुस्सा सबसे बड़ा दुश्मन होता है। चाणक्य का कहना है कि जिस स्त्री को बहुत गुस्सा आता हो वो परिवार को कभी सुखी नहीं रख सकती। डिस्क्लेमरः यहां दी गई जानकारी ज्योतिष पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Newsचौबीस इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी उपाय को करने से पहले संबंधित विषय के एक्सपर्ट से सलाह अवश्य लें।
दबाव के क्षणों में धौनी-विराट को बेहतर तरीके से टीम को संभालने की नसीहत देते हैं। अभिषेक त्रिपाठी, बेंगलुरु। सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली, वीवीएस लक्ष्मण, अनिल कुंबले जैसे क्रिकेटरों के एक के बाद एक संन्यास लेने के बावजूद महेंद्र सिंह धौनी ने भारतीय टीम को बेहतर ढंग से संभाला। वहीं, रिकी पोंटिंग, शेन वार्न, एडम गिलक्रिस्ट और ग्लेन मैक्ग्रा जैसे दिग्गजों के बाद ऑस्ट्रेलियन टीम कभी लगातार अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई। टेस्ट से धौनी के संन्यास लेने और वनडे व टी-20 की कप्तानी छोडऩे के बाद विराट कोहली ने टीम को सही दिशा दी है। खासतौर पर सीमित ओवरों के क्रिकेट में दबाव के क्षणों में धौनी ने जिस तरह से कोहली की मदद की है उससे भारतीय क्रिकेट के अच्छे दिन बरकरार रहने की पूरी उम्मीद है। एक समय खराब प्रदर्शन के बावजूद कोहली को टीम में बरकरार रखने में धौनी ने अहम भूमिका निभाई थी, लेकिन बाद में दोनों के बीच खटास बढ़ गई थी। हालांकि कभी इन दोनों ने इसे जाहिर नहीं होने दिया, लेकिन पिछले एक साल से इन दोनों के बीच में जो केमिस्ट्री देखी जा रही है वह शानदार है। खासतौर पर पिछले तीन वनडे और तीन टी-20 में धौनी ने जिस तरह उनका साथ दिया वह महत्वपूर्ण है। कोहली ने भी यह माना है। माही से सीख रहा हूं गुर : विराट ने तीन टी-20 मैच की सीरीज जीतने के बाद कहा कि मैं टेस्ट प्रारूप में कप्तानी कर रहा था, लेकिन वनडे और टी-20 मैच काफी तेज होते हैं। इसलिए ऐसे व्यक्ति (धौनी) से अहम मौकों पर सलाह लेना कोई बुरा विचार नहीं है, जिसने इस स्तर पर क्रिकेट की टीम की काफी लंबे समय तक कप्तानी की हो और वह खेल को अच्छी तरह समझता हो। मिला अच्छा सुझाव : उन्होंने कहा कि युजवेंद्र चहल के ओवर खत्म होने के तुरंत बाद जसप्रीत बुमराह को गेंदबाजी के लिए लाने से पहले मैं हार्दिक पांड्या को एक ओवर देने के बारे में सोच रहा था, लेकिन धौनी और आशीष नेहरा ने सुझाव दिया कि 19वें ओवर तक इंतजार मत करो, बल्कि मुख्य गेंदबाजों को लगाओ। इसलिए इस तरह की चीजें बहुत मदद करती हैं जब आप सीमित ओवरों के प्रारूप में नए कप्तान हों। कोहली ने कहा कि मैं कप्तानी में नया नहीं हूं, लेकिन छोटे प्रारूपों में अगुआई के लिए जिस तरह के कौशल की जरूरत होती है, उसे समझने में संतुलन होना चाहिए। धौनी इसमें काफी मददगार रहे हैं। टीम ने तेजी से प्रगति की : भारतीय टीम ने काफी तेज प्रगति की है, जिसमें काफी युवा खिलाड़ी मौजूद हैं। हमें वैसे ही परिणाम मिले, जैसे हम चाहते थे। निश्चित रूप से तीनों सीरीज में जीतकर काफी अच्छा महसूस हो रहा है। सचमुच अब काफी अच्छा है क्योंकि हम अब शीर्ष स्तर की टीम के खिलाफ खेलेंगे। हम समझते हैं कि यह जानते हुए कि हमारी टीम में इतने अनुभवी खिलाड़ी मौजूद नहीं हैं, उसके बावजूद सभी तीनों सीरीज में अव्वल आने के बाद अच्छा लगता है। उन्होंने कहा कि टेस्ट टीम भी उतनी ही अच्छी है। वनडे में भी हमारे पास तीन-चार अनुभवी खिलाड़ी हैं, लेकिन बाकी सारे खिलाड़ी जिन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया है, सभी युवा हैं। जो मुझे लगता है कि भारतीय क्रिकेट के लिए काफी मनोबल बढ़ाने वाला है। अच्छी बात यह है कि युवा खिलाड़ी व्यक्तिगत प्रदर्शन के बजाय टीम के लिए मैच जीतने के भूखे थे। चहल ने किया काम आसान : चहल के मध्य ओवरों में विकेट लेने से मेरे लिए काम आसान हो गया। अगर हमें मध्य के ओवरों में विकेट नहीं मिलते तो बेंगलुरु में कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। कोई भी स्कोर ज्यादा बड़ा नहीं लगता और दुनिया की कोई भी बल्लेबाजी लाइनअप अंत में फटाफट रन जुटाती है। इसलिए इस मैच में हमारे लिए अहम चीज मध्य के ओवरों में विकेट लेना रही और चहल ने ये विकेट लेकर काफी अच्छा काम किया। उन्होंने यह भी कहा कि इंग्लैंड के बल्लेबाजी क्रम के आउट होने का आइपीएल नीलामी में इंग्लैंड के खिलाडिय़ों के चुने जाने पर कोई असर नहीं होगा। मुझे नहीं लगता कि इस प्रदर्शन से किसी के भी आइपीएल में चुने जाने के मौके पर कोई प्रभाव पड़ेगा। यह निर्भर करता है कि कौन सी टीम किसे चाहती है जो उनकी टीम को बेहतर संतुलन प्रदान करे।
दबाव के क्षणों में धौनी-विराट को बेहतर तरीके से टीम को संभालने की नसीहत देते हैं। अभिषेक त्रिपाठी, बेंगलुरु। सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली, वीवीएस लक्ष्मण, अनिल कुंबले जैसे क्रिकेटरों के एक के बाद एक संन्यास लेने के बावजूद महेंद्र सिंह धौनी ने भारतीय टीम को बेहतर ढंग से संभाला। वहीं, रिकी पोंटिंग, शेन वार्न, एडम गिलक्रिस्ट और ग्लेन मैक्ग्रा जैसे दिग्गजों के बाद ऑस्ट्रेलियन टीम कभी लगातार अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई। टेस्ट से धौनी के संन्यास लेने और वनडे व टी-बीस की कप्तानी छोडऩे के बाद विराट कोहली ने टीम को सही दिशा दी है। खासतौर पर सीमित ओवरों के क्रिकेट में दबाव के क्षणों में धौनी ने जिस तरह से कोहली की मदद की है उससे भारतीय क्रिकेट के अच्छे दिन बरकरार रहने की पूरी उम्मीद है। एक समय खराब प्रदर्शन के बावजूद कोहली को टीम में बरकरार रखने में धौनी ने अहम भूमिका निभाई थी, लेकिन बाद में दोनों के बीच खटास बढ़ गई थी। हालांकि कभी इन दोनों ने इसे जाहिर नहीं होने दिया, लेकिन पिछले एक साल से इन दोनों के बीच में जो केमिस्ट्री देखी जा रही है वह शानदार है। खासतौर पर पिछले तीन वनडे और तीन टी-बीस में धौनी ने जिस तरह उनका साथ दिया वह महत्वपूर्ण है। कोहली ने भी यह माना है। माही से सीख रहा हूं गुर : विराट ने तीन टी-बीस मैच की सीरीज जीतने के बाद कहा कि मैं टेस्ट प्रारूप में कप्तानी कर रहा था, लेकिन वनडे और टी-बीस मैच काफी तेज होते हैं। इसलिए ऐसे व्यक्ति से अहम मौकों पर सलाह लेना कोई बुरा विचार नहीं है, जिसने इस स्तर पर क्रिकेट की टीम की काफी लंबे समय तक कप्तानी की हो और वह खेल को अच्छी तरह समझता हो। मिला अच्छा सुझाव : उन्होंने कहा कि युजवेंद्र चहल के ओवर खत्म होने के तुरंत बाद जसप्रीत बुमराह को गेंदबाजी के लिए लाने से पहले मैं हार्दिक पांड्या को एक ओवर देने के बारे में सोच रहा था, लेकिन धौनी और आशीष नेहरा ने सुझाव दिया कि उन्नीसवें ओवर तक इंतजार मत करो, बल्कि मुख्य गेंदबाजों को लगाओ। इसलिए इस तरह की चीजें बहुत मदद करती हैं जब आप सीमित ओवरों के प्रारूप में नए कप्तान हों। कोहली ने कहा कि मैं कप्तानी में नया नहीं हूं, लेकिन छोटे प्रारूपों में अगुआई के लिए जिस तरह के कौशल की जरूरत होती है, उसे समझने में संतुलन होना चाहिए। धौनी इसमें काफी मददगार रहे हैं। टीम ने तेजी से प्रगति की : भारतीय टीम ने काफी तेज प्रगति की है, जिसमें काफी युवा खिलाड़ी मौजूद हैं। हमें वैसे ही परिणाम मिले, जैसे हम चाहते थे। निश्चित रूप से तीनों सीरीज में जीतकर काफी अच्छा महसूस हो रहा है। सचमुच अब काफी अच्छा है क्योंकि हम अब शीर्ष स्तर की टीम के खिलाफ खेलेंगे। हम समझते हैं कि यह जानते हुए कि हमारी टीम में इतने अनुभवी खिलाड़ी मौजूद नहीं हैं, उसके बावजूद सभी तीनों सीरीज में अव्वल आने के बाद अच्छा लगता है। उन्होंने कहा कि टेस्ट टीम भी उतनी ही अच्छी है। वनडे में भी हमारे पास तीन-चार अनुभवी खिलाड़ी हैं, लेकिन बाकी सारे खिलाड़ी जिन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया है, सभी युवा हैं। जो मुझे लगता है कि भारतीय क्रिकेट के लिए काफी मनोबल बढ़ाने वाला है। अच्छी बात यह है कि युवा खिलाड़ी व्यक्तिगत प्रदर्शन के बजाय टीम के लिए मैच जीतने के भूखे थे। चहल ने किया काम आसान : चहल के मध्य ओवरों में विकेट लेने से मेरे लिए काम आसान हो गया। अगर हमें मध्य के ओवरों में विकेट नहीं मिलते तो बेंगलुरु में कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। कोई भी स्कोर ज्यादा बड़ा नहीं लगता और दुनिया की कोई भी बल्लेबाजी लाइनअप अंत में फटाफट रन जुटाती है। इसलिए इस मैच में हमारे लिए अहम चीज मध्य के ओवरों में विकेट लेना रही और चहल ने ये विकेट लेकर काफी अच्छा काम किया। उन्होंने यह भी कहा कि इंग्लैंड के बल्लेबाजी क्रम के आउट होने का आइपीएल नीलामी में इंग्लैंड के खिलाडिय़ों के चुने जाने पर कोई असर नहीं होगा। मुझे नहीं लगता कि इस प्रदर्शन से किसी के भी आइपीएल में चुने जाने के मौके पर कोई प्रभाव पड़ेगा। यह निर्भर करता है कि कौन सी टीम किसे चाहती है जो उनकी टीम को बेहतर संतुलन प्रदान करे।
Avalanche In Uttarkashi उत्तरकाशी जनपद में द्रौपदी का डांडा ( डीकेडी ) में बीते मंगलवार को एवलांच आया। इसकी चपेट में निम का प्रशिक्षु पर्वतारोहियों का दल आ गया। आखिर इस पहाड़ी का नाम द्रौपदी का डांडा क्यों पड़ा। जागरण संवाददाता, देहरादून। Avalanche In Uttarkashi: बीते मंगलवार चार अक्टूबर को उत्तरकाशी जनपद के द्रौपदी का डांडा (डीकेडी) चोटी पर एवलांच आया। इस हादसे में नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के प्रशिक्षु पर्वतारोहियों का दल चपेट में आ गया था। आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि आखिर इस चोटी का नाम द्रौपदी का डांडा (Draupadi Ka Danda) कैसे पड़ा। आज हम आपको इसके बारे में बताते हैं। चारधाम विकास परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष सूरतराम नौटियाल ने बताया कि मान्यता है कि स्वर्गारोहणी यात्रा के दौरान पांडव (Pandavas) इसी क्षेत्र से होकर आगे बढ़े थे। पूरा हिमालयी क्षेत्र नजर आने से इस पर्वत का नाम द्रौपदी का डांडा रखा गया। डांडा यानी चोटी। इस चोटी पर जबसे नेहरू पर्वतारोहण संस्थान ने पर्वतारोहण का प्रशिक्षण देना शुरू किया, तो इसका नाम संक्षेप में डीकेडी (द्रौपदी का डांडा) कर दिया। आज भी भटवाड़ी क्षेत्र के ग्रामीण इस पर्वत की पूजा करते हैं। वह इसकी तलहाटी में स्थित खेड़ा ताल को नाग देवता का ताल मानते हैं। हर वर्ष सावन में ग्रामीण इस ताल में पूजा-अर्चना के लिए जाते हैं। - द्रौपदी का डांडा (Draupadi Ka Danda) समुद्रतल से 18600 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। - पहले उत्तरकाशी से 40 किमी सड़क मार्ग से भटवाड़ी पहुंचना पड़ता है। - तीन किमी की पैदल दूरी पर स्थित है भुक्की गांव है। यहां से 3 किमी आगे तेल कैंप। - इसके बाद 3 किमी दूर गुर्जर हट हैं। इसके आगे 4 किमी की दूरी बेस कैंप है। - बेस कैंप से ढाई किमी की दूरी पर है एडवांस बेस कैंप। - यहां से करीब ढाई किमी दूर डोकराणी बामक ग्लेशियर है। यहां पर समिट कैंप लगाया जाता है। - समिट कैंप से 1. 5 किमी की दूरी पर डीकेडी चोटी की ओर 18 हजार फीट की ऊंचाई पर मंगलवार सुबह एवलांच आया था। धार्मिक मान्यता है कि धर्मराज युधिष्ठिर स्वर्गारोहिणी से सशरीर स्वर्ग गए थे। अन्य पांडवों ने स्वर्गारोहिणी के रास्ते में धर्मराज युधिष्ठिर का साथ छोड़ दिया था। श्वान के रूप में धर्मराज उनके साथ अंत तक रास्ता दिखाने का काम करते रहे।
Avalanche In Uttarkashi उत्तरकाशी जनपद में द्रौपदी का डांडा में बीते मंगलवार को एवलांच आया। इसकी चपेट में निम का प्रशिक्षु पर्वतारोहियों का दल आ गया। आखिर इस पहाड़ी का नाम द्रौपदी का डांडा क्यों पड़ा। जागरण संवाददाता, देहरादून। Avalanche In Uttarkashi: बीते मंगलवार चार अक्टूबर को उत्तरकाशी जनपद के द्रौपदी का डांडा चोटी पर एवलांच आया। इस हादसे में नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के प्रशिक्षु पर्वतारोहियों का दल चपेट में आ गया था। आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि आखिर इस चोटी का नाम द्रौपदी का डांडा कैसे पड़ा। आज हम आपको इसके बारे में बताते हैं। चारधाम विकास परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष सूरतराम नौटियाल ने बताया कि मान्यता है कि स्वर्गारोहणी यात्रा के दौरान पांडव इसी क्षेत्र से होकर आगे बढ़े थे। पूरा हिमालयी क्षेत्र नजर आने से इस पर्वत का नाम द्रौपदी का डांडा रखा गया। डांडा यानी चोटी। इस चोटी पर जबसे नेहरू पर्वतारोहण संस्थान ने पर्वतारोहण का प्रशिक्षण देना शुरू किया, तो इसका नाम संक्षेप में डीकेडी कर दिया। आज भी भटवाड़ी क्षेत्र के ग्रामीण इस पर्वत की पूजा करते हैं। वह इसकी तलहाटी में स्थित खेड़ा ताल को नाग देवता का ताल मानते हैं। हर वर्ष सावन में ग्रामीण इस ताल में पूजा-अर्चना के लिए जाते हैं। - द्रौपदी का डांडा समुद्रतल से अट्ठारह हज़ार छः सौ फीट की ऊंचाई पर स्थित है। - पहले उत्तरकाशी से चालीस किमी सड़क मार्ग से भटवाड़ी पहुंचना पड़ता है। - तीन किमी की पैदल दूरी पर स्थित है भुक्की गांव है। यहां से तीन किमी आगे तेल कैंप। - इसके बाद तीन किमी दूर गुर्जर हट हैं। इसके आगे चार किमी की दूरी बेस कैंप है। - बेस कैंप से ढाई किमी की दूरी पर है एडवांस बेस कैंप। - यहां से करीब ढाई किमी दूर डोकराणी बामक ग्लेशियर है। यहां पर समिट कैंप लगाया जाता है। - समिट कैंप से एक. पाँच किमी की दूरी पर डीकेडी चोटी की ओर अट्ठारह हजार फीट की ऊंचाई पर मंगलवार सुबह एवलांच आया था। धार्मिक मान्यता है कि धर्मराज युधिष्ठिर स्वर्गारोहिणी से सशरीर स्वर्ग गए थे। अन्य पांडवों ने स्वर्गारोहिणी के रास्ते में धर्मराज युधिष्ठिर का साथ छोड़ दिया था। श्वान के रूप में धर्मराज उनके साथ अंत तक रास्ता दिखाने का काम करते रहे।
लॉस एंजेलिस। अमेरिकी ब्वॉयज बैंड 'वन डायरेक्शन' के सदस्य हैरी स्टाइल्स मॉडल केंडल जेनर के साथ अपने रिश्ते को लेकर गंभीर हैं। उन्हें उम्मीद है कि जल्दी ही वे अपने रिश्ते को सार्वजनिक करेंगे। वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक, स्टाइल्स के नजदीकी सूत्रों का कहना है कि केंडल उनके लिए खास हैं। मुंबई। बॉलीवुड एक्ट्रेस वहीदा रहमान का नाम 53वें दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड के लिए चुना गया है। इसकी जानकारी केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने अपने एक्स हैंडल पर दी है। उन्होंने अदाकारा के काम की तारीफ की है और कहा कि वो इसका ऐलान करके खुद सम्मानजनक महसूस कर रहे हैं। पिछले साल यह सम्मान आशा पारेख को मिला था। अनुराग ठाकुर ने ट्विटर पर लिखा, 'मुझे यह ऐलान करते हुए बेहद खुशी और सम्मान महसूस हो रहा है कि वहीदा रहमान जी को भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान के लिए इस साल प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया जा रहा है।
लॉस एंजेलिस। अमेरिकी ब्वॉयज बैंड 'वन डायरेक्शन' के सदस्य हैरी स्टाइल्स मॉडल केंडल जेनर के साथ अपने रिश्ते को लेकर गंभीर हैं। उन्हें उम्मीद है कि जल्दी ही वे अपने रिश्ते को सार्वजनिक करेंगे। वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक, स्टाइल्स के नजदीकी सूत्रों का कहना है कि केंडल उनके लिए खास हैं। मुंबई। बॉलीवुड एक्ट्रेस वहीदा रहमान का नाम तिरेपनवें दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड के लिए चुना गया है। इसकी जानकारी केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने अपने एक्स हैंडल पर दी है। उन्होंने अदाकारा के काम की तारीफ की है और कहा कि वो इसका ऐलान करके खुद सम्मानजनक महसूस कर रहे हैं। पिछले साल यह सम्मान आशा पारेख को मिला था। अनुराग ठाकुर ने ट्विटर पर लिखा, 'मुझे यह ऐलान करते हुए बेहद खुशी और सम्मान महसूस हो रहा है कि वहीदा रहमान जी को भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान के लिए इस साल प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया जा रहा है।
समझौता एक्सप्रेस बम विस्फोट मामले के आरोपी स्वामी असीमानंद को अजमेर दरगाह बम ब्लास्ट मामलें में एनआईए की विशेष अदालत द्वारा आरोपमुक्त कर रिहा करने को लेकर पाकिस्तान ने 'अफसोसनाक' बताया. पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नफीस जकरिया ने कहा कि विशेष अदालत ने कल 2007 के अजमेर विस्फोट मामले में असीमानंद सहित छह अन्य लोगों को बरी किया हैं. ये सभी समझौता एक्स्रपेस त्रासदी में शामिल थे. असीमानंद ने खुद 2010 में सार्वजनिक रूप से अपने अपराध को स्वीकार किया था. उन्होंने कहा, 'हमें भारत की और से उच्चतम राजनीतिक स्तर पर कई बार विश्वास दिलाया गया था कि भारत इस हमले को लेकर हमारे साथ जांच को साझा करेगा, लेकिन हमें उनकी ओर से कुछ पता नहीं चला. याद रहे 18 फरवरी, 2007 को पानीपत में समझौता एक्सप्रेस ट्रेन में ब्लास्ट हुआ था. जिसमें 68 लोग मारे गए थे. मारे गए लोगों में अधिकतर पाकिस्तानी नागरिक शामिल थे.
समझौता एक्सप्रेस बम विस्फोट मामले के आरोपी स्वामी असीमानंद को अजमेर दरगाह बम ब्लास्ट मामलें में एनआईए की विशेष अदालत द्वारा आरोपमुक्त कर रिहा करने को लेकर पाकिस्तान ने 'अफसोसनाक' बताया. पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नफीस जकरिया ने कहा कि विशेष अदालत ने कल दो हज़ार सात के अजमेर विस्फोट मामले में असीमानंद सहित छह अन्य लोगों को बरी किया हैं. ये सभी समझौता एक्स्रपेस त्रासदी में शामिल थे. असीमानंद ने खुद दो हज़ार दस में सार्वजनिक रूप से अपने अपराध को स्वीकार किया था. उन्होंने कहा, 'हमें भारत की और से उच्चतम राजनीतिक स्तर पर कई बार विश्वास दिलाया गया था कि भारत इस हमले को लेकर हमारे साथ जांच को साझा करेगा, लेकिन हमें उनकी ओर से कुछ पता नहीं चला. याद रहे अट्ठारह फरवरी, दो हज़ार सात को पानीपत में समझौता एक्सप्रेस ट्रेन में ब्लास्ट हुआ था. जिसमें अड़सठ लोग मारे गए थे. मारे गए लोगों में अधिकतर पाकिस्तानी नागरिक शामिल थे.
बीते सप्ताह बाजार में भारी गिरावट के कारण निफ्टी इस साल के सबसे कम स्तर यानी 4,370 पर पहुंचा। इसके बाद थोड़ी सी रिकवरी के जरिए वह 4,517 के स्तर तक चढ़ा। बीते सप्ताह की तुलना में निफ्टी 2. 39 फीसदी और सेंसेक्स 2. 46 फीसदी (15,189 पर बंद) नीचे आया। साथ ही रुपये के कमजोर बने रहने से डिफ्टी 2. 77 फीसदी गिरा। बीता सप्ताह एक और मंदी भरा सप्ताह था। इसमें बाजार 2008 में अब तक के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंचा। शुक्रवार को छोड़ बाकी सभी दिन कारोबार सामान्य रहा। निफ्टी जूनियर 3. 18 फीसदी नीचे गया और मिडकैप-50 1. 57 फीसदी गिरा। बाजार में एफआईआई ने जोरदार बिकवाली की, वहीं घरेलू संस्थाएं सांकेतिक खरीदार बनी रहीं। नजरियाः इस महीने वायदा सेटलमेंट में सिर्फ 9 सत्र बचे हैं। ऐसे में उम्मीद है कि बाजार 4,400 से 4,800 के दायरे में घूमता रह सकता है। बाजार किसी भी दिशा में जा सकता है। हालांकि इसके 4,800 से ऊपर जाने की संभावना कम ही है, लेकिन अगर इसने 4,400 का निचला लेवल तोड़ा तो यह 4,200 तक भी गिर सकता है। दलीलः 4,400 के सपोर्ट लेवल की कई सत्रों में परीक्षा हुई, लेकिन अंततः यह टिकाऊ साबित हुआ। इसे 4,750 से 4,800 के ऊपर रेजिस्टेंस मिलने की उम्मीद है। यह स्तर तभी टूट सकता है, जब कारोबार का मौजूदा स्तर काफी बढ़े पर कारोबार में इजाफे की संभावना है नहीं। निचले लेवल पर बाजार का टूटना बेहद खतरनाक साबित होगा क्योंकि 4,400 के नीचे कोई भी सपोर्ट लेवल दिखाई नहीं देता। इस स्थिति में 4,200 एक टारगेट हो सकता है। दूसरा नजरियाः यह देखते हुए कि इंडेक्स फ्यूचर स्पॉट वैल्यू से सब्सटेंशियल डिस्काउंट पर कारोबार कर रहे हैं, वीआईएक्स ऊपर हैं और सेक्टर में मजबूत नकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। ऐसे में इसके यहां से ऊपर जाने की संभावना कम है। हालांकि शॉर्ट कवरिंग में बड़े भारी सुधार तभी आ सकते हैं जब किसी कारोबारी दिवस में निफ्टी 100 अंक उछल जाए। यह उछाल एफआईआई पर काफी निर्भर करता जो जून में अब तक 6,000 करोड़ रुपए की बिकवाली कर चुके हैं। कारोबारी सप्ताह में ऊंची मुद्रास्फीति की दर और रेपो रेट में इजाफे के साथ रैनबेक्सी-दाइची सौदे व आरकाम-एमटीएन की संभावित डील चर्चा में रही। सेक्टरों की बात करें तो रियल एस्टेट के शेयरों का सबसे बुरा हाल रहा। रेपो दर में इजाफे के बाद शुरुआत में नीचे गए बैंकिंग के शेयर बाद में एक जगह टिक गए। इस क्षेत्र में रेपो रेट बढ़ने का क्या असर होगा, यह धीरे-धीरे ही पता चलेगा। हालांकि किसी भी सेक्टर ने वाकई अच्छा प्रदर्शन नहीं किया। रुपये में गिरावट के बावजूद सीएनएक्स आईटी में कोई उछाल नहीं आया। कुछ सकारात्मक हलचल उर्वरक क्षेत्र में दिखाई दी जहां नागार्जुना फर्टिलाइजर, चंबल फर्टिलाइजर और जीएनएफसी के शेयरों के भावों में ठीक-ठाक इजाफा हुआ, वहीं अरबिंदो फार्मा, एबन, भारत फोर्ज, डॉ. रेड्डीज और आईडीएफसी के शेयरों में भी सकारात्मक रुझान रहा। टेलीकॉम क्षेत्र में भी अच्छा रुख देखने को मिला और आरकॉम, भारती, आइडियो सेल्यूलर और स्पाइस के शेयरों ने भी अच्छा कारोबार किया। ठीक-ठाक कारोबार करते हुए इस शेयर ने तेजी का एक चक्र पूरा कर लिया लगता है। इसका बढ़िया टारगेट 3,900 से 3,950 रुपये के बीच है। इसमें 3675 का स्टाप लॉस लगाएं और लंबे समय के लिए रखें। जब 3900 से ऊपर जाए तो मुनाफा बुक करें। इस शेयर ने 1,350 से 1,400 रुपये के बीच मजबूती बना ली है। इस शेयर के 1,600 रुपये तक जाने की काफी संभावना है पर उसके बाद इसे गंभीर प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है। अगर इसमें कारोबार की मात्रा बढ़ी तो 1,650 रुपये के स्तर पर भी जा सकता है। 1,530 रुपये के स्तर पर स्टाप लॉस लगाएं और लंबी अवधि के लिए खरीदें। यह शेयर जोरदार कारोबार के कारण अहम रेजिस्टेंस पार करते हुए यहां तक पहुंचा है। इसका संभावित लक्ष्य 100 रुपये से ऊपर है, जबकि न्यूनतम लक्ष्य 98 रुपये है। 88 रुपये पर स्टाप लॉस लगाएं और फिर लंबी अवधि के लिए खरीदें। 98 रुपये पर थोड़ा मुनाफा वसूल लें। आर्बिटरेजर्स दाइची के ऑफर मूल्य का समूचा हिसाब लगा रहे हैं। क्या अनुपात रहने की संभावना है और नई प्रिफेरेंशियल इक्विटी का ण्असर क्या रहेगा, इसकी गणना की जारही है। शॉर्ट टर्म में यह शेयर 545 के स्तर पर सेटल हो सकता है। 570 पर स्टाप लॉस लगाएं और लंबी अवधि के लिए खरीदें। रेपो रेट बढ़ने के बाद इस अहम बैंकिंग शेयर में तटस्थ रुझान हैं। इसके 1270 के स्तर पर सेटल होने की उम्मीद है। इसे 1,350 के स्तर पर तगड़ा रेजिस्टेंस मिलेगा। 1350 पर स्टाप लॉस लगाएं और कम अवधि के लिए खरीदें। 1290 से नीचे जाए तो कवर करें। फाइजर के रेनबैक्सी के सौदे में दिलचस्पी दिखाए जाने के बाद इस कंपनी के शेयरों पर सबकी निगाह है। विश्व की सबसे बड़ी दवा निर्माता कंपनी फाइजर रेनबैक्सी के 65 फीसदी संस्थागत और पब्लिक होल्डिंग के लिए बोली लगा सकती है। यह बोली जापान की दाइची सेंक्यो कंपनी की 4. 6 अरब डॉलर की बोली का जवाब है। फाइजर की निगाह रैनबेक्सी पर उसी समय से है जब इस भारतीय फर्म ने लिपिटोर के जैनरिक वर्जन को लेकर उसे यूरोप और अमेरिकी कोर्ट में घसीटा था। लिपिटोर फाइजर की सबसे अधिक लोकप्रिय कोलेस्ट्रॉल रोधी दवा है। रैनबेक्सी के शेयर पिछले काफी समय से कमजोर कारोबार कर रहे थे। बीते तीन सालों में सेंसेक्स 122 फीसदी बढ़ा तो बीएसई का हैल्थकेयर सूचकांक 64 फीसदी। इनकी तुलना में रैनबेक्सी का शेयर सिर्फ 6 फीसदी ही बढ़ा। बीते सप्ताह फर्टिलाइजर पैक में नेशनल फर्टिलाइजर स्टार बनकर उभरा। यह कारोबारी सप्ताह में 25. 26 फीसदी के इजाफे के साथ 66. 20 रुपये पर बंद हुआ। इसका प्रमुख कारण फर्टिलाइजर सेक्टर के सभी क्षेत्रों से आई अच्छी खबरें रही। सबसे पहली खबर मौसम विभाग की इस साल अच्छे मानसून की घोषणा है। इससे बंपर फसल की संभावना प्रबल हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार सबको ढुलाई में दी जाने वाली सब्सिडी देने का निर्णय भी इस क्षेत्र के हित में रहा। इसके साथ ही रिलायंस इंडस्ट्रीज ने संकेत दिए हैं कि वित्तीय वर्ष 2009 में उसके कृष्णा-गोदावरी बेसिन से गैस का उत्पादन प्रारंभ हो जाएगा। कंपनी यह गैस 25. 20 डॉलर प्रति बैरल के हिसाब से बेचेगी। यह कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों का 20 फीसदी ही है। नेशनल फर्टिलाइजर का शेयर 8 जनवरी 2008 को 112. 55 रुपये के सबसे ऊंचे स्तर पर था, जबकि 24 मार्च 2008 को वह इस स्तर से 72 फीसदी गिरकर 31. 6 रुपये के स्तर पर आ गया है।
बीते सप्ताह बाजार में भारी गिरावट के कारण निफ्टी इस साल के सबसे कम स्तर यानी चार,तीन सौ सत्तर पर पहुंचा। इसके बाद थोड़ी सी रिकवरी के जरिए वह चार,पाँच सौ सत्रह के स्तर तक चढ़ा। बीते सप्ताह की तुलना में निफ्टी दो. उनतालीस फीसदी और सेंसेक्स दो. छियालीस फीसदी नीचे आया। साथ ही रुपये के कमजोर बने रहने से डिफ्टी दो. सतहत्तर फीसदी गिरा। बीता सप्ताह एक और मंदी भरा सप्ताह था। इसमें बाजार दो हज़ार आठ में अब तक के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंचा। शुक्रवार को छोड़ बाकी सभी दिन कारोबार सामान्य रहा। निफ्टी जूनियर तीन. अट्ठारह फीसदी नीचे गया और मिडकैप-पचास एक. सत्तावन फीसदी गिरा। बाजार में एफआईआई ने जोरदार बिकवाली की, वहीं घरेलू संस्थाएं सांकेतिक खरीदार बनी रहीं। नजरियाः इस महीने वायदा सेटलमेंट में सिर्फ नौ सत्र बचे हैं। ऐसे में उम्मीद है कि बाजार चार,चार सौ से चार,आठ सौ के दायरे में घूमता रह सकता है। बाजार किसी भी दिशा में जा सकता है। हालांकि इसके चार,आठ सौ से ऊपर जाने की संभावना कम ही है, लेकिन अगर इसने चार,चार सौ का निचला लेवल तोड़ा तो यह चार,दो सौ तक भी गिर सकता है। दलीलः चार,चार सौ के सपोर्ट लेवल की कई सत्रों में परीक्षा हुई, लेकिन अंततः यह टिकाऊ साबित हुआ। इसे चार,सात सौ पचास से चार,आठ सौ के ऊपर रेजिस्टेंस मिलने की उम्मीद है। यह स्तर तभी टूट सकता है, जब कारोबार का मौजूदा स्तर काफी बढ़े पर कारोबार में इजाफे की संभावना है नहीं। निचले लेवल पर बाजार का टूटना बेहद खतरनाक साबित होगा क्योंकि चार,चार सौ के नीचे कोई भी सपोर्ट लेवल दिखाई नहीं देता। इस स्थिति में चार,दो सौ एक टारगेट हो सकता है। दूसरा नजरियाः यह देखते हुए कि इंडेक्स फ्यूचर स्पॉट वैल्यू से सब्सटेंशियल डिस्काउंट पर कारोबार कर रहे हैं, वीआईएक्स ऊपर हैं और सेक्टर में मजबूत नकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। ऐसे में इसके यहां से ऊपर जाने की संभावना कम है। हालांकि शॉर्ट कवरिंग में बड़े भारी सुधार तभी आ सकते हैं जब किसी कारोबारी दिवस में निफ्टी एक सौ अंक उछल जाए। यह उछाल एफआईआई पर काफी निर्भर करता जो जून में अब तक छः,शून्य करोड़ रुपए की बिकवाली कर चुके हैं। कारोबारी सप्ताह में ऊंची मुद्रास्फीति की दर और रेपो रेट में इजाफे के साथ रैनबेक्सी-दाइची सौदे व आरकाम-एमटीएन की संभावित डील चर्चा में रही। सेक्टरों की बात करें तो रियल एस्टेट के शेयरों का सबसे बुरा हाल रहा। रेपो दर में इजाफे के बाद शुरुआत में नीचे गए बैंकिंग के शेयर बाद में एक जगह टिक गए। इस क्षेत्र में रेपो रेट बढ़ने का क्या असर होगा, यह धीरे-धीरे ही पता चलेगा। हालांकि किसी भी सेक्टर ने वाकई अच्छा प्रदर्शन नहीं किया। रुपये में गिरावट के बावजूद सीएनएक्स आईटी में कोई उछाल नहीं आया। कुछ सकारात्मक हलचल उर्वरक क्षेत्र में दिखाई दी जहां नागार्जुना फर्टिलाइजर, चंबल फर्टिलाइजर और जीएनएफसी के शेयरों के भावों में ठीक-ठाक इजाफा हुआ, वहीं अरबिंदो फार्मा, एबन, भारत फोर्ज, डॉ. रेड्डीज और आईडीएफसी के शेयरों में भी सकारात्मक रुझान रहा। टेलीकॉम क्षेत्र में भी अच्छा रुख देखने को मिला और आरकॉम, भारती, आइडियो सेल्यूलर और स्पाइस के शेयरों ने भी अच्छा कारोबार किया। ठीक-ठाक कारोबार करते हुए इस शेयर ने तेजी का एक चक्र पूरा कर लिया लगता है। इसका बढ़िया टारगेट तीन,नौ सौ से तीन,नौ सौ पचास रुपयापये के बीच है। इसमें तीन हज़ार छः सौ पचहत्तर का स्टाप लॉस लगाएं और लंबे समय के लिए रखें। जब तीन हज़ार नौ सौ से ऊपर जाए तो मुनाफा बुक करें। इस शेयर ने एक,तीन सौ पचास से एक,चार सौ रुपयापये के बीच मजबूती बना ली है। इस शेयर के एक,छः सौ रुपयापये तक जाने की काफी संभावना है पर उसके बाद इसे गंभीर प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है। अगर इसमें कारोबार की मात्रा बढ़ी तो एक,छः सौ पचास रुपयापये के स्तर पर भी जा सकता है। एक,पाँच सौ तीस रुपयापये के स्तर पर स्टाप लॉस लगाएं और लंबी अवधि के लिए खरीदें। यह शेयर जोरदार कारोबार के कारण अहम रेजिस्टेंस पार करते हुए यहां तक पहुंचा है। इसका संभावित लक्ष्य एक सौ रुपयापये से ऊपर है, जबकि न्यूनतम लक्ष्य अट्ठानवे रुपयापये है। अठासी रुपयापये पर स्टाप लॉस लगाएं और फिर लंबी अवधि के लिए खरीदें। अट्ठानवे रुपयापये पर थोड़ा मुनाफा वसूल लें। आर्बिटरेजर्स दाइची के ऑफर मूल्य का समूचा हिसाब लगा रहे हैं। क्या अनुपात रहने की संभावना है और नई प्रिफेरेंशियल इक्विटी का ण्असर क्या रहेगा, इसकी गणना की जारही है। शॉर्ट टर्म में यह शेयर पाँच सौ पैंतालीस के स्तर पर सेटल हो सकता है। पाँच सौ सत्तर पर स्टाप लॉस लगाएं और लंबी अवधि के लिए खरीदें। रेपो रेट बढ़ने के बाद इस अहम बैंकिंग शेयर में तटस्थ रुझान हैं। इसके एक हज़ार दो सौ सत्तर के स्तर पर सेटल होने की उम्मीद है। इसे एक,तीन सौ पचास के स्तर पर तगड़ा रेजिस्टेंस मिलेगा। एक हज़ार तीन सौ पचास पर स्टाप लॉस लगाएं और कम अवधि के लिए खरीदें। एक हज़ार दो सौ नब्बे से नीचे जाए तो कवर करें। फाइजर के रेनबैक्सी के सौदे में दिलचस्पी दिखाए जाने के बाद इस कंपनी के शेयरों पर सबकी निगाह है। विश्व की सबसे बड़ी दवा निर्माता कंपनी फाइजर रेनबैक्सी के पैंसठ फीसदी संस्थागत और पब्लिक होल्डिंग के लिए बोली लगा सकती है। यह बोली जापान की दाइची सेंक्यो कंपनी की चार. छः अरब डॉलर की बोली का जवाब है। फाइजर की निगाह रैनबेक्सी पर उसी समय से है जब इस भारतीय फर्म ने लिपिटोर के जैनरिक वर्जन को लेकर उसे यूरोप और अमेरिकी कोर्ट में घसीटा था। लिपिटोर फाइजर की सबसे अधिक लोकप्रिय कोलेस्ट्रॉल रोधी दवा है। रैनबेक्सी के शेयर पिछले काफी समय से कमजोर कारोबार कर रहे थे। बीते तीन सालों में सेंसेक्स एक सौ बाईस फीसदी बढ़ा तो बीएसई का हैल्थकेयर सूचकांक चौंसठ फीसदी। इनकी तुलना में रैनबेक्सी का शेयर सिर्फ छः फीसदी ही बढ़ा। बीते सप्ताह फर्टिलाइजर पैक में नेशनल फर्टिलाइजर स्टार बनकर उभरा। यह कारोबारी सप्ताह में पच्चीस. छब्बीस फीसदी के इजाफे के साथ छयासठ. बीस रुपयापये पर बंद हुआ। इसका प्रमुख कारण फर्टिलाइजर सेक्टर के सभी क्षेत्रों से आई अच्छी खबरें रही। सबसे पहली खबर मौसम विभाग की इस साल अच्छे मानसून की घोषणा है। इससे बंपर फसल की संभावना प्रबल हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार सबको ढुलाई में दी जाने वाली सब्सिडी देने का निर्णय भी इस क्षेत्र के हित में रहा। इसके साथ ही रिलायंस इंडस्ट्रीज ने संकेत दिए हैं कि वित्तीय वर्ष दो हज़ार नौ में उसके कृष्णा-गोदावरी बेसिन से गैस का उत्पादन प्रारंभ हो जाएगा। कंपनी यह गैस पच्चीस. बीस डॉलर प्रति बैरल के हिसाब से बेचेगी। यह कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों का बीस फीसदी ही है। नेशनल फर्टिलाइजर का शेयर आठ जनवरी दो हज़ार आठ को एक सौ बारह. पचपन रुपयापये के सबसे ऊंचे स्तर पर था, जबकि चौबीस मार्च दो हज़ार आठ को वह इस स्तर से बहत्तर फीसदी गिरकर इकतीस. छः रुपयापये के स्तर पर आ गया है।
GORAKHPUR : रीजनल स्टेडियम में जिला फुटबाल संघ और शीला एकेडमी की ओर से फुटबाल मैच का ऑर्गेनाइज किया गया। इस दौरान दो मैच खेले गये। पहला मैच लोहिया स्पोर्टिग पीपीगंज और गोरखनाथ स्पोर्टिग के बीच खेला गया। इसमें गोरखनाथ ने 2-1 से मैच जीत हासिल की। मैच की शुरुआत में लोहिया के खिलाड़ी सज्जन ने एक गोल कर टीम को 1-0 से बढ़त दिलाई। हाफ टाइम तक यह बढ़त बनी रही। इसके बाद गोरखनाथ के खिलाड़ी कुशल थापा ने मैच के 45 वें मिनट में गोल कर मैच को 1-1 से बराबरी पर ला दिया। इसके बाद राजा के शानदार गोल ने टीम को 2-1 से बढ़त दिलाई जा आखिरी तक बनी रही। इस तरह गोरखनाथ ने मैच 2-1 से जीत लिया। दूसरा मैच उत्तर प्रदेश पुलिस व केपीएस खोराबार के बीच खेला गया। इस मैच में केपीएस खोराबार को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। मैच की शुरुआत में केपीएस के अंगद ने 21 वें मिनट में गोल मारकर टीम को 1-0 से बढ़त दिलाई। मध्यांतर के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस टीम के खिलाड़ी अफरोज अली और जितेन्द्र ने लगातार एक के बाद एक गोल कर बाजी अपनी पाले की ओर पलट दी। लास्ट में यूपीपी ने यह मैच 3-0 से जीत लिया। इस मैच के चीफ गेस्ट सेंट जूड्स कॉलेज मोहद्दीपुर के प्रिंसिपल डेविड सिरिल रहे।
GORAKHPUR : रीजनल स्टेडियम में जिला फुटबाल संघ और शीला एकेडमी की ओर से फुटबाल मैच का ऑर्गेनाइज किया गया। इस दौरान दो मैच खेले गये। पहला मैच लोहिया स्पोर्टिग पीपीगंज और गोरखनाथ स्पोर्टिग के बीच खेला गया। इसमें गोरखनाथ ने दो-एक से मैच जीत हासिल की। मैच की शुरुआत में लोहिया के खिलाड़ी सज्जन ने एक गोल कर टीम को एक-शून्य से बढ़त दिलाई। हाफ टाइम तक यह बढ़त बनी रही। इसके बाद गोरखनाथ के खिलाड़ी कुशल थापा ने मैच के पैंतालीस वें मिनट में गोल कर मैच को एक-एक से बराबरी पर ला दिया। इसके बाद राजा के शानदार गोल ने टीम को दो-एक से बढ़त दिलाई जा आखिरी तक बनी रही। इस तरह गोरखनाथ ने मैच दो-एक से जीत लिया। दूसरा मैच उत्तर प्रदेश पुलिस व केपीएस खोराबार के बीच खेला गया। इस मैच में केपीएस खोराबार को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। मैच की शुरुआत में केपीएस के अंगद ने इक्कीस वें मिनट में गोल मारकर टीम को एक-शून्य से बढ़त दिलाई। मध्यांतर के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस टीम के खिलाड़ी अफरोज अली और जितेन्द्र ने लगातार एक के बाद एक गोल कर बाजी अपनी पाले की ओर पलट दी। लास्ट में यूपीपी ने यह मैच तीन-शून्य से जीत लिया। इस मैच के चीफ गेस्ट सेंट जूड्स कॉलेज मोहद्दीपुर के प्रिंसिपल डेविड सिरिल रहे।
असद और इस घटना के बाकी आरोपियों की तलाश में पुलिस ने मंगलवार को लखनऊ में अतीक अहमद के फ्लैट पर छापा मारा। अतीक के यूनिवर्सल अपार्टमेंट के कंपाउंड से पुलिस ने दो लग्जरी गाड़ियां भी बरामद की हैं। सूत्रों के मुताबिक अतीक के और ठिकानों पर भी छापे मारे जा रहे हैं। यूपी की राजधानी लखनऊ की एनआईए कोर्ट ने साल 2017 में भोपाल-उज्जैन पैसेंजर ट्रेन में हुए धमाके के मामले में आईएसआईएस 7 आतंकियों को फांसी और 1 को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस मामले का एक और दोषी पहले ही मुठभेड़ में मारा जा चुका है। मेघालय विधानसभा चुनाव के नतीजे कल यानी गुरुवार को आएंगे। कल ही त्रिपुरा और नगालैंड विधानसभा चुनाव के नतीजे भी आने वाले हैं। बीते दिनों जो एक्जिट पोल के नतीजे आए थे, उनके हिसाब से मेघालय में त्रिशंकु विधानसभा बनने की उम्मीद है। हालांकि कोनरॉड संगमा की एनपीपी को ज्यादा सीटें मिलती बताई गई हैं। घरेलू और कॉमर्शियल एलपीजी के सिलेंडर की कीमत में बड़ा इजाफा हुआ है। आज से घरेलू रसोई गैस का सिलेंडर 50 रुपए और कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमत 350 रुपए बढ़ गई है। पिछले साल जुलाई से ही घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमत में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई थी। Delhi: अब सिसोदिया प्रकरण को लेकर आप और बीजेपी के बीच जुबानी जंग जारी है, लेकिन अब इस पूरे मामले में कांग्रेस भी कूद हो चुकी है। कांग्रेस की इस पूरे मामले में मिलीजुली प्रतिक्रिया आ रही है। मिलीजुली इसलिए क्योंकि कांग्रेस एक तरफ जहां सीबीआई की कार्रवाई की आलोचना कर रही है। Manish Sisodia :दुनिया की कोई ताकत न मुझसे बेईमानी करा सकती है और न ही काम के प्रति मेरी निष्ठा कम कर सकती है। मैं खुद भी चाहकर यह काम नहीं कर सकता हूं। यह बहुत दुखद है कि 8 साल तक लगातार ईमानदारी और सत्य निष्ठा से काम करने के बाद बावजूद मेरे ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जा रहे हैं लेकिन ये सारे आरोप झूठ हैं। Manish Sisodia resign: दरअसल, बीते रविवार को आठ घंटे की लंबी पूछताछ के बाद सीबीआई ने मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किया था। जिसके बाद राउज एवेन्यू के एमके नागपाल की कोर्ट में पेश किया गया । जहां ले पांच दिनों यानी की चार मार्च तक के लिए रिमांड पर भेज दिया गया। इस बीच सिसोदिया ने अपनी गिरफ्तारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। Imran Khan :इमरान को आतंकवाद केस में राहत मिली, उनकी जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया गया। विदेशी फंडिंग मामले में भी इमरान की जमानत याचिका मंजूर हो गई। लेकिन तोशखाना मामले ने मुसीबत बढ़ गई। न्यायाधीश इकबाल ने एफ-8 कचेरी में तोशखाना मामले की सुनवाई की। Punjab: अमृतसर सीपी जसकरन सिंह तबादला कर दिया गया है। वहीं अब नौनिहाल सिंह अमृतसर के नए पुलिस कमिश्नर होंगे। इस संबंध में गृह विभाग ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। आईपीएस जसकरन सिंह अब आईजी इंटेलिजेंस के हेड नियुक्त किए गए हैं। Delhi: वर्तमान में दिल्ली और पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है। इसके अलावा बीते दिनों आप ने राजस्थान में भी चुनाल लड़ने का ऐलान किया था। उधर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा सहित कई अन्य राज्यों में भी आप राजनीतिक बिसात बिछाने की जुगत में जुटी हुई है।
असद और इस घटना के बाकी आरोपियों की तलाश में पुलिस ने मंगलवार को लखनऊ में अतीक अहमद के फ्लैट पर छापा मारा। अतीक के यूनिवर्सल अपार्टमेंट के कंपाउंड से पुलिस ने दो लग्जरी गाड़ियां भी बरामद की हैं। सूत्रों के मुताबिक अतीक के और ठिकानों पर भी छापे मारे जा रहे हैं। यूपी की राजधानी लखनऊ की एनआईए कोर्ट ने साल दो हज़ार सत्रह में भोपाल-उज्जैन पैसेंजर ट्रेन में हुए धमाके के मामले में आईएसआईएस सात आतंकियों को फांसी और एक को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस मामले का एक और दोषी पहले ही मुठभेड़ में मारा जा चुका है। मेघालय विधानसभा चुनाव के नतीजे कल यानी गुरुवार को आएंगे। कल ही त्रिपुरा और नगालैंड विधानसभा चुनाव के नतीजे भी आने वाले हैं। बीते दिनों जो एक्जिट पोल के नतीजे आए थे, उनके हिसाब से मेघालय में त्रिशंकु विधानसभा बनने की उम्मीद है। हालांकि कोनरॉड संगमा की एनपीपी को ज्यादा सीटें मिलती बताई गई हैं। घरेलू और कॉमर्शियल एलपीजी के सिलेंडर की कीमत में बड़ा इजाफा हुआ है। आज से घरेलू रसोई गैस का सिलेंडर पचास रुपयापए और कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमत तीन सौ पचास रुपयापए बढ़ गई है। पिछले साल जुलाई से ही घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमत में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई थी। Delhi: अब सिसोदिया प्रकरण को लेकर आप और बीजेपी के बीच जुबानी जंग जारी है, लेकिन अब इस पूरे मामले में कांग्रेस भी कूद हो चुकी है। कांग्रेस की इस पूरे मामले में मिलीजुली प्रतिक्रिया आ रही है। मिलीजुली इसलिए क्योंकि कांग्रेस एक तरफ जहां सीबीआई की कार्रवाई की आलोचना कर रही है। Manish Sisodia :दुनिया की कोई ताकत न मुझसे बेईमानी करा सकती है और न ही काम के प्रति मेरी निष्ठा कम कर सकती है। मैं खुद भी चाहकर यह काम नहीं कर सकता हूं। यह बहुत दुखद है कि आठ साल तक लगातार ईमानदारी और सत्य निष्ठा से काम करने के बाद बावजूद मेरे ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जा रहे हैं लेकिन ये सारे आरोप झूठ हैं। Manish Sisodia resign: दरअसल, बीते रविवार को आठ घंटे की लंबी पूछताछ के बाद सीबीआई ने मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किया था। जिसके बाद राउज एवेन्यू के एमके नागपाल की कोर्ट में पेश किया गया । जहां ले पांच दिनों यानी की चार मार्च तक के लिए रिमांड पर भेज दिया गया। इस बीच सिसोदिया ने अपनी गिरफ्तारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। Imran Khan :इमरान को आतंकवाद केस में राहत मिली, उनकी जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया गया। विदेशी फंडिंग मामले में भी इमरान की जमानत याचिका मंजूर हो गई। लेकिन तोशखाना मामले ने मुसीबत बढ़ गई। न्यायाधीश इकबाल ने एफ-आठ कचेरी में तोशखाना मामले की सुनवाई की। Punjab: अमृतसर सीपी जसकरन सिंह तबादला कर दिया गया है। वहीं अब नौनिहाल सिंह अमृतसर के नए पुलिस कमिश्नर होंगे। इस संबंध में गृह विभाग ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। आईपीएस जसकरन सिंह अब आईजी इंटेलिजेंस के हेड नियुक्त किए गए हैं। Delhi: वर्तमान में दिल्ली और पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है। इसके अलावा बीते दिनों आप ने राजस्थान में भी चुनाल लड़ने का ऐलान किया था। उधर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा सहित कई अन्य राज्यों में भी आप राजनीतिक बिसात बिछाने की जुगत में जुटी हुई है।
Ram Charan-Jr NTR performance on RRR's Naatu Naatu in Oscars 2023: साउथ फिल्म निर्देशक एसएस राजामौली की ब्लॉकबस्टर फिल्म आरआरआर का गाना नाटू-नाटू ऑस्कर्स 2023 की दौड़ में हैं। खबर है कि 95वें ऑस्कर्स में राम चरण और जूनियर एनटीआर के गाने पर ये दो धुरंधर परफॉर्म करने वाले हैं। Ram Charan-Jr NTR performance on RRR's Naatu Naatu in Oscars 2023: अमेरिका के सबसे बड़े फिल्म सम्मान समारोह ऑस्कर्स के 95वें संस्करण पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। इस बार ऑक्सर्स 2023 की जंग में टॉलीवुड सुपरस्टार राम चरण और जूनियर एनटीआर स्टारर निर्देशक एसएस राजामौली की हालिया रिलीज ब्लॉकबस्टर फिल्म आरआरआर भी है। जिसके गाने 'नाटू-नाटू' को बेस्ट ऑरिजनल सॉन्ग कैटेगरी के लिए नॉमिनेट भी किया गया है। इसी वजह से फिल्म को लेकर फैंस के बीच खासा बज है। हर किसी की नजर ऑक्सर्स 2023 की रंगीन शान पर टिकी हुई है। जहां भारतीयों को उम्मीद है कि इस फिल्म के गाने को सम्मान हासिल होने वाला है। इधर, लगातार इस इवेंट को लेकर खबरों का बाजार गर्म है। काफी दिनों से चर्चा है कि ऑस्कर्स में सुपरस्टार राम चरण और जूनियर एनटीआर अपनी इस फिल्म के गाने पर ऑन स्टेज लाइव परफॉर्म करने वाले हैं। हालांकि अब ऑस्कर्स की टीम ने आधिकारिक तौर पर ऐलान किया है कि फिल्म के गाने नाटू-नाटू पर इवेंट में इसके सिंगर्स परफॉर्म करने वाले हैं। इस ऐलान के साथ ही साफ हो गया है कि ऑस्कर्स 2023 के मंच पर नाटू-नाटू के सिंगर राहुल सिपिलगंज और काल भैरव इसे लाइव गाने वाले हैं। अब उनके साथ सुपरस्टार राम चरण और जूनियर एनटीआर अपना हुक स्टेप दिखाने वाले हैं या नहीं, इस पर स्थिति साफ नहीं है। एकेडमी की ओर से किया गया ये आधिकारिक ऐलान आप यहां देख सकते हैं। याद दिला दें कि इससे पहले राम चरण ने अमेरिका में दिए अपने इंटरव्यू में कहा था,'अगर हम ऑस्कर्स में हैं और हमें ऐसा करने की अपील की जाती है और अगर वक्त है तो क्यों नहीं, हम अपने दर्शकों को एंटरटेन करने के लिए जरूर खुश होंगे। जिन्होंने हमें इतना कुछ दिया है। स्टेज पर पूरा डांस करना तो मुश्किल होगा क्योंकि इसमें बहुत एनर्जी की जरूरत होती है। मगर हुक स्टेप जरूर, आखिर क्यों नहीं।' बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
Ram Charan-Jr NTR performance on RRR's Naatu Naatu in Oscars दो हज़ार तेईस: साउथ फिल्म निर्देशक एसएस राजामौली की ब्लॉकबस्टर फिल्म आरआरआर का गाना नाटू-नाटू ऑस्कर्स दो हज़ार तेईस की दौड़ में हैं। खबर है कि पचानवेवें ऑस्कर्स में राम चरण और जूनियर एनटीआर के गाने पर ये दो धुरंधर परफॉर्म करने वाले हैं। Ram Charan-Jr NTR performance on RRR's Naatu Naatu in Oscars दो हज़ार तेईस: अमेरिका के सबसे बड़े फिल्म सम्मान समारोह ऑस्कर्स के पचानवेवें संस्करण पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। इस बार ऑक्सर्स दो हज़ार तेईस की जंग में टॉलीवुड सुपरस्टार राम चरण और जूनियर एनटीआर स्टारर निर्देशक एसएस राजामौली की हालिया रिलीज ब्लॉकबस्टर फिल्म आरआरआर भी है। जिसके गाने 'नाटू-नाटू' को बेस्ट ऑरिजनल सॉन्ग कैटेगरी के लिए नॉमिनेट भी किया गया है। इसी वजह से फिल्म को लेकर फैंस के बीच खासा बज है। हर किसी की नजर ऑक्सर्स दो हज़ार तेईस की रंगीन शान पर टिकी हुई है। जहां भारतीयों को उम्मीद है कि इस फिल्म के गाने को सम्मान हासिल होने वाला है। इधर, लगातार इस इवेंट को लेकर खबरों का बाजार गर्म है। काफी दिनों से चर्चा है कि ऑस्कर्स में सुपरस्टार राम चरण और जूनियर एनटीआर अपनी इस फिल्म के गाने पर ऑन स्टेज लाइव परफॉर्म करने वाले हैं। हालांकि अब ऑस्कर्स की टीम ने आधिकारिक तौर पर ऐलान किया है कि फिल्म के गाने नाटू-नाटू पर इवेंट में इसके सिंगर्स परफॉर्म करने वाले हैं। इस ऐलान के साथ ही साफ हो गया है कि ऑस्कर्स दो हज़ार तेईस के मंच पर नाटू-नाटू के सिंगर राहुल सिपिलगंज और काल भैरव इसे लाइव गाने वाले हैं। अब उनके साथ सुपरस्टार राम चरण और जूनियर एनटीआर अपना हुक स्टेप दिखाने वाले हैं या नहीं, इस पर स्थिति साफ नहीं है। एकेडमी की ओर से किया गया ये आधिकारिक ऐलान आप यहां देख सकते हैं। याद दिला दें कि इससे पहले राम चरण ने अमेरिका में दिए अपने इंटरव्यू में कहा था,'अगर हम ऑस्कर्स में हैं और हमें ऐसा करने की अपील की जाती है और अगर वक्त है तो क्यों नहीं, हम अपने दर्शकों को एंटरटेन करने के लिए जरूर खुश होंगे। जिन्होंने हमें इतना कुछ दिया है। स्टेज पर पूरा डांस करना तो मुश्किल होगा क्योंकि इसमें बहुत एनर्जी की जरूरत होती है। मगर हुक स्टेप जरूर, आखिर क्यों नहीं।' बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
जब से तीन कृषि कानून चर्चा में आया है तब से ही कुछ लोग इसका विरोध कर रहे हैं। इसे लेकर सड़कों पर भी कई आंदोलन हो चुके हैं। हालांकि अब सरकार पहले ही कह चुकी है कि वह इस कानून को लागू नहीं करेगी। इस बीच इस कानून के विरोध में आन्दोलन करने के लिए किसान महापंचायत ने अदालत में याचिका दायर कर जंतर मंतर पर सत्याग्रह की मांग की। लेकिन सुप्रीम कोर्ट को ये बात हजम नहीं हुई। उन्होंने कहा कि जब तीन कृषि कानूनों पर रोक लगा रखी है तो सड़कों पर प्रदर्शन किसलिए किया जा रहा है? अपनी दलील में किसान महापंचायत के वकील ने कहा कि वे कोई भी सड़क ब्लॉक नहीं कर रहे हैं। हालांकि इस पर बेंच ने कहा कि जब एक पक्ष ने अदालत का दरवाजा खटखटा दिया है तो प्रदर्शन की क्या जरूरत है? जस्टिस एएम खानविलकर ने तर्क देते हुए कहा कि तीन कृषि कानून पर रोक लगी हुई है। सरकार पहले ही आश्वासन दे चुकी है कि वह इस कानून को लागू नहीं करने वाली है। फिर प्रदर्शन का क्या मतलब है? किसान महापंचायत की आंदोलन की मांग को कोर्ट ने कानून की वैधता को चुनौती बताया। कोर्ट ने कहा कि पहले वैधता पर फैसला किया जाएगा, इसलिए प्रदर्शन का सवाल ही पैदा नहीं होता है। अदालत ने किसान महापंचायत के वकील से जंतर मंतर पर प्रदर्शन के पीछे का लॉजिक भी पूछा। इस पर वकील ने कहा कि केंद्र ने एक कानून लागू किया है। इस पर बेंच ने फटाक से सख्त लहजे में बोला कि 'तो फिर आप भी कानून के पास आइए। आप दोनों चीजें नहीं कर सकते हैं, कानून को चुनौती भी दें और प्रदर्शन भी करें। आप या तो कोर्ट आइए या फिर संसद जाइए या फिर आप सड़क पर चले जाइए। इस दौरान कोर्ट ने लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा का भी जिक्र क्या। किसान महापंचायत ने अपनी याचिका में कहा था कि वे जंतर मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे। इस पर अदालत ने कहा कि प्रदर्शनकारी भले शांतिपूर्ण प्रदर्शन का दावा कर रहे हो, लेकिन यदि वहाँ हिंसा हुई और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया तो वे इसकी जिम्मेदारी नहीं लेंगे। गौरतलब है कि कुछ समय पहले उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में आंदोलन के दौरान हिंसक झड़प हो गई थी। इससे काफी नुकसान हुआ था। ऐसे में कोर्ट नहीं चाहता कि इन आंदोलनों को लेकर अब कोई भी रिस्क लिया जाएगा।
जब से तीन कृषि कानून चर्चा में आया है तब से ही कुछ लोग इसका विरोध कर रहे हैं। इसे लेकर सड़कों पर भी कई आंदोलन हो चुके हैं। हालांकि अब सरकार पहले ही कह चुकी है कि वह इस कानून को लागू नहीं करेगी। इस बीच इस कानून के विरोध में आन्दोलन करने के लिए किसान महापंचायत ने अदालत में याचिका दायर कर जंतर मंतर पर सत्याग्रह की मांग की। लेकिन सुप्रीम कोर्ट को ये बात हजम नहीं हुई। उन्होंने कहा कि जब तीन कृषि कानूनों पर रोक लगा रखी है तो सड़कों पर प्रदर्शन किसलिए किया जा रहा है? अपनी दलील में किसान महापंचायत के वकील ने कहा कि वे कोई भी सड़क ब्लॉक नहीं कर रहे हैं। हालांकि इस पर बेंच ने कहा कि जब एक पक्ष ने अदालत का दरवाजा खटखटा दिया है तो प्रदर्शन की क्या जरूरत है? जस्टिस एएम खानविलकर ने तर्क देते हुए कहा कि तीन कृषि कानून पर रोक लगी हुई है। सरकार पहले ही आश्वासन दे चुकी है कि वह इस कानून को लागू नहीं करने वाली है। फिर प्रदर्शन का क्या मतलब है? किसान महापंचायत की आंदोलन की मांग को कोर्ट ने कानून की वैधता को चुनौती बताया। कोर्ट ने कहा कि पहले वैधता पर फैसला किया जाएगा, इसलिए प्रदर्शन का सवाल ही पैदा नहीं होता है। अदालत ने किसान महापंचायत के वकील से जंतर मंतर पर प्रदर्शन के पीछे का लॉजिक भी पूछा। इस पर वकील ने कहा कि केंद्र ने एक कानून लागू किया है। इस पर बेंच ने फटाक से सख्त लहजे में बोला कि 'तो फिर आप भी कानून के पास आइए। आप दोनों चीजें नहीं कर सकते हैं, कानून को चुनौती भी दें और प्रदर्शन भी करें। आप या तो कोर्ट आइए या फिर संसद जाइए या फिर आप सड़क पर चले जाइए। इस दौरान कोर्ट ने लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा का भी जिक्र क्या। किसान महापंचायत ने अपनी याचिका में कहा था कि वे जंतर मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे। इस पर अदालत ने कहा कि प्रदर्शनकारी भले शांतिपूर्ण प्रदर्शन का दावा कर रहे हो, लेकिन यदि वहाँ हिंसा हुई और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया तो वे इसकी जिम्मेदारी नहीं लेंगे। गौरतलब है कि कुछ समय पहले उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में आंदोलन के दौरान हिंसक झड़प हो गई थी। इससे काफी नुकसान हुआ था। ऐसे में कोर्ट नहीं चाहता कि इन आंदोलनों को लेकर अब कोई भी रिस्क लिया जाएगा।
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Chenab Bridge Maldives के मेहमानों को काफी पसंद आया। एफिल टॉवर की तुलना में जम्मू कश्मीर में दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे पुल, चिनाब ब्रिज की सराहना करते हुए मालदीव के मंत्री ने कहा, "भारतीय रेलवे जिस विकास को ला रहा है उससे देश बहुत प्रभावित है। " मालदीव के राष्ट्रीय योजना, आवास और बुनियादी ढांचा मंत्री मोहम्मद असलम के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को चिनाब ब्रिज का दौरा किया। उत्तर रेलवे ने ट्विटर पर कहा मालदीव के आवास और बुनियादी ढांचा मंत्री मोहम्मद असलम और शिफ़ाज़ अली चिनाब ब्रिज देखने पहुंचे। उत्तर रेलवे द्वारा जारी बयान के अनुसार, मोहम्मद असलम ने कहा, "भारतीय रेलवे देश में जो विकास ला रहा है, उससे बहुत प्रभावित हूं। " रिपोर्ट्स के अनुसार, उधमपुर श्रीनगर बारामूला रेल लिंक (USBRL) परियोजना पूरी होने वाली है। चिनाब ब्रिज की मदद से भारतीय रेल कश्मीर घाटी को बाकी रेलवे नेटवर्क से जोड़ने में सफल रहेगी। USBRL प्रोजेक्ट के तहत जम्मू कश्मीर के रियासी जिले में चिनाब ब्रिज नैसर्गिक वादियों में कमाल का एहसास दिलाता है। मालदीव से जो टीम चिनाब ब्रिज देखने पहुंची, उसमें परियोजना निदेशक महजूब शुजाउ, परियोजना प्रबंधक मोहम्मद जिनान सईद भी शामिल रहे। USBRL के मुख्य प्रशासन अधिकारी, एसपी माही समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल की अगवानी की। उधमपुर श्रीनगर बारामूला रेल लिंक परियोजना और प्रतिष्ठित चिनाब ब्रिज सहित कटरा-बनिहाल खंड पर सुपरस्ट्रक्चर के बारे में मालदीव की टीम को विस्तार से जानकारी दी गई। - क्षेत्र में ग्रेनाइट चट्टानों के कारण फाउंडेशन की खुदाई चुनौती पूर्ण रही। - माइनस 10 डिग्री सेल्सियस से 40 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान झेल सकता है। - दुनिया का सबसे ऊंचा आर्क पुल मार्वल इंजनियरिंग का एक शानदार नमूना है। फीट) ब्रिज, है। रेल मंत्रालय ने कहा कि पुल दिसंबर 2023 या जनवरी 2024 के अंत तक आगंतुकों के लिए खोल दिया जाएगा। विगत मार्च महीने में इस ब्रिज पर ट्रॉली कार चला कर ट्रायल किया गया। इस दौरान रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी मौजूद रहे। नदी के तल से 1,315 मीटर ऊंचाई पर बना आर्क ब्रिज की लागत 14 सौ करोड़ रुपए है। पहाड़ों के बीच से गुजरने वाली रेलवे लाइन भारत के लोगों को स्विट्जरलैंड जैसा अनुभव देगी। साल 2003 में परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद से दो दशकों के इंतजार के बाद अब पुल रेगुलर प्रयोग के लिए खोला जाने वाला है।
Chenab Bridge Maldives के मेहमानों को काफी पसंद आया। एफिल टॉवर की तुलना में जम्मू कश्मीर में दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे पुल, चिनाब ब्रिज की सराहना करते हुए मालदीव के मंत्री ने कहा, "भारतीय रेलवे जिस विकास को ला रहा है उससे देश बहुत प्रभावित है। " मालदीव के राष्ट्रीय योजना, आवास और बुनियादी ढांचा मंत्री मोहम्मद असलम के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को चिनाब ब्रिज का दौरा किया। उत्तर रेलवे ने ट्विटर पर कहा मालदीव के आवास और बुनियादी ढांचा मंत्री मोहम्मद असलम और शिफ़ाज़ अली चिनाब ब्रिज देखने पहुंचे। उत्तर रेलवे द्वारा जारी बयान के अनुसार, मोहम्मद असलम ने कहा, "भारतीय रेलवे देश में जो विकास ला रहा है, उससे बहुत प्रभावित हूं। " रिपोर्ट्स के अनुसार, उधमपुर श्रीनगर बारामूला रेल लिंक परियोजना पूरी होने वाली है। चिनाब ब्रिज की मदद से भारतीय रेल कश्मीर घाटी को बाकी रेलवे नेटवर्क से जोड़ने में सफल रहेगी। USBRL प्रोजेक्ट के तहत जम्मू कश्मीर के रियासी जिले में चिनाब ब्रिज नैसर्गिक वादियों में कमाल का एहसास दिलाता है। मालदीव से जो टीम चिनाब ब्रिज देखने पहुंची, उसमें परियोजना निदेशक महजूब शुजाउ, परियोजना प्रबंधक मोहम्मद जिनान सईद भी शामिल रहे। USBRL के मुख्य प्रशासन अधिकारी, एसपी माही समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल की अगवानी की। उधमपुर श्रीनगर बारामूला रेल लिंक परियोजना और प्रतिष्ठित चिनाब ब्रिज सहित कटरा-बनिहाल खंड पर सुपरस्ट्रक्चर के बारे में मालदीव की टीम को विस्तार से जानकारी दी गई। - क्षेत्र में ग्रेनाइट चट्टानों के कारण फाउंडेशन की खुदाई चुनौती पूर्ण रही। - माइनस दस डिग्री सेल्सियस से चालीस डिग्री सेल्सियस तक का तापमान झेल सकता है। - दुनिया का सबसे ऊंचा आर्क पुल मार्वल इंजनियरिंग का एक शानदार नमूना है। फीट) ब्रिज, है। रेल मंत्रालय ने कहा कि पुल दिसंबर दो हज़ार तेईस या जनवरी दो हज़ार चौबीस के अंत तक आगंतुकों के लिए खोल दिया जाएगा। विगत मार्च महीने में इस ब्रिज पर ट्रॉली कार चला कर ट्रायल किया गया। इस दौरान रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी मौजूद रहे। नदी के तल से एक,तीन सौ पंद्रह मीटर ऊंचाई पर बना आर्क ब्रिज की लागत चौदह सौ करोड़ रुपए है। पहाड़ों के बीच से गुजरने वाली रेलवे लाइन भारत के लोगों को स्विट्जरलैंड जैसा अनुभव देगी। साल दो हज़ार तीन में परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद से दो दशकों के इंतजार के बाद अब पुल रेगुलर प्रयोग के लिए खोला जाने वाला है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ट्वीट कर स्वामी विवेकानंद के अमेरिका के शिकागो में दिए भाषण को याद किया. आज के ही दिन 1893 में स्वामी विवेकानंद ने अमेरिका की धरती पर ऐसा भाषण दिया था जो इतिहास बन गया. इसके अलावा कई अन्य ट्वीट करते हुए पीएम मोदी ने अमेरिका में हुए 9/11 आतंकी हमले के बारे में भी लिखा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ट्वीट में लिखा कि 11 सितंबर के दिन को भारत में दो महत्वपूर्ण तरीके से मनाते हैं, पहला आचार्य विनोबा भावे की जयंती और दूसरा स्वामी विवेकानंद द्वारा दिया हुआ शिकागो में भाषण. दोनों महान व्यक्तियों ने मानवता को काफी कुछ सिखाया है. पीएम मोदी ने लिखा कि 1918 में महात्मा गांधी ने आचार्य विनोबा भावे के बारे में लिखा था कि मैं नहीं जानता कि तुम्हारी तारीफ कैसे करूं. आपका प्यार और व्यक्तित्व मुझे आकर्षित करता है और आपका आत्म मूल्यांकन भी. ऐसे में मैं आपका मूल्य मापने के लिए फिट नहीं हूं. प्रधानमंत्री ने लिखा कि विनोबा भावे, महात्मा गांधी के सबसे सच्चे समर्थकों में से थे. उन्होंने सामाजिक जीवन और शिक्षा के लिए शानदार काम किया, साथ ही गौ सेवा को उदाहरण बनाया. इसके अलावा पीएम ने लिखा कि 1893 में स्वामी विवेकानंद ने भारत के उन मूल्यों को दुनिया के सामने पेश किया, जो हमारे देश की नींव हैं. मैं युवाओं से उनके भाषण का अंश पढ़ने की अपील करता हूं. अमेरिका में अलकायदा द्वारा किए गए आतंकी हमले पर पीएम मोदी ने लिखा कि आज दुनिया 9/11 को अमेरिका में हुए आतंकी हमले को याद कर रही है. अगर हम विनोबा भावे और स्वामी विवेकानंद के जय जगत के मंत्र को मानें तो ऐसा नुकसान कभी नहीं होगा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ट्वीट कर स्वामी विवेकानंद के अमेरिका के शिकागो में दिए भाषण को याद किया. आज के ही दिन एक हज़ार आठ सौ तिरानवे में स्वामी विवेकानंद ने अमेरिका की धरती पर ऐसा भाषण दिया था जो इतिहास बन गया. इसके अलावा कई अन्य ट्वीट करते हुए पीएम मोदी ने अमेरिका में हुए नौ/ग्यारह आतंकी हमले के बारे में भी लिखा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ट्वीट में लिखा कि ग्यारह सितंबर के दिन को भारत में दो महत्वपूर्ण तरीके से मनाते हैं, पहला आचार्य विनोबा भावे की जयंती और दूसरा स्वामी विवेकानंद द्वारा दिया हुआ शिकागो में भाषण. दोनों महान व्यक्तियों ने मानवता को काफी कुछ सिखाया है. पीएम मोदी ने लिखा कि एक हज़ार नौ सौ अट्ठारह में महात्मा गांधी ने आचार्य विनोबा भावे के बारे में लिखा था कि मैं नहीं जानता कि तुम्हारी तारीफ कैसे करूं. आपका प्यार और व्यक्तित्व मुझे आकर्षित करता है और आपका आत्म मूल्यांकन भी. ऐसे में मैं आपका मूल्य मापने के लिए फिट नहीं हूं. प्रधानमंत्री ने लिखा कि विनोबा भावे, महात्मा गांधी के सबसे सच्चे समर्थकों में से थे. उन्होंने सामाजिक जीवन और शिक्षा के लिए शानदार काम किया, साथ ही गौ सेवा को उदाहरण बनाया. इसके अलावा पीएम ने लिखा कि एक हज़ार आठ सौ तिरानवे में स्वामी विवेकानंद ने भारत के उन मूल्यों को दुनिया के सामने पेश किया, जो हमारे देश की नींव हैं. मैं युवाओं से उनके भाषण का अंश पढ़ने की अपील करता हूं. अमेरिका में अलकायदा द्वारा किए गए आतंकी हमले पर पीएम मोदी ने लिखा कि आज दुनिया नौ/ग्यारह को अमेरिका में हुए आतंकी हमले को याद कर रही है. अगर हम विनोबा भावे और स्वामी विवेकानंद के जय जगत के मंत्र को मानें तो ऐसा नुकसान कभी नहीं होगा.
और चारों ओर के चार प्रदेश एक से संबद्ध होने से तथा एक वर्ण, एक गंध, एक रस और एक स्पर्श वाले होने से एक चरम रूप माने गए हैं। जब पांच प्रदेशी स्कन्ध समश्रेणी स्थित तीन आकाशप्रदेशों 10 •• से रहता है तब उसमें नौवां "चरम में इस आकार है दो, अचरम एक" भंग पाया जाता समश्रेणी स्थित चार आकाशप्रदेशों में इस प्रकार है तब उसमें दसवां "चरम दो, अचरम दो" भंग पाया जाता है । जब पांच प्रदेशी स्कन्ध तीन आकाशप्रदेशों में रहता है, दो दो प्रदेश समश्रेणी स्थित दो आकाशप्रदेश में और एक विश्रेणी स्थित आकाशप्रदेश एन रहता है तब उसमें ग्यारहवां "चरम में इस आकार से एक, अवक्तव्य एक" भंग पाया जाता है । जब पांच प्रदेशी स्कंध चार आकांशप्रदेशों में रहता है, इसके दो प्रदेश समश्रेणी स्थित दो आकाशप्रदेश में, दो प्रदेश विश्रेणी स्थित एक आकाशप्रदेश में और पांचवां प्रदेश विश्रेणी स्थित एक आकाशप्रदेश में इस आकार रहते हैं तब उसमें बारहवां "चरम एक, अवक्तव्य दो" भंग पाया जाता है । जब पांच प्रदेशी स्कन्ध पांच आकाशप्रदेशों में रहता है, इसके दो प्रदेश समश्रेणी स्थित दो आकाशप्रदेश में और दो प्रदेश इसके नीचे समश्रेणी स्थित दो आकाशप्रदेश में और पांचवां प्रदेश इन दोनों के आगे मध्य में इस आकार
और चारों ओर के चार प्रदेश एक से संबद्ध होने से तथा एक वर्ण, एक गंध, एक रस और एक स्पर्श वाले होने से एक चरम रूप माने गए हैं। जब पांच प्रदेशी स्कन्ध समश्रेणी स्थित तीन आकाशप्रदेशों दस •• से रहता है तब उसमें नौवां "चरम में इस आकार है दो, अचरम एक" भंग पाया जाता समश्रेणी स्थित चार आकाशप्रदेशों में इस प्रकार है तब उसमें दसवां "चरम दो, अचरम दो" भंग पाया जाता है । जब पांच प्रदेशी स्कन्ध तीन आकाशप्रदेशों में रहता है, दो दो प्रदेश समश्रेणी स्थित दो आकाशप्रदेश में और एक विश्रेणी स्थित आकाशप्रदेश एन रहता है तब उसमें ग्यारहवां "चरम में इस आकार से एक, अवक्तव्य एक" भंग पाया जाता है । जब पांच प्रदेशी स्कंध चार आकांशप्रदेशों में रहता है, इसके दो प्रदेश समश्रेणी स्थित दो आकाशप्रदेश में, दो प्रदेश विश्रेणी स्थित एक आकाशप्रदेश में और पांचवां प्रदेश विश्रेणी स्थित एक आकाशप्रदेश में इस आकार रहते हैं तब उसमें बारहवां "चरम एक, अवक्तव्य दो" भंग पाया जाता है । जब पांच प्रदेशी स्कन्ध पांच आकाशप्रदेशों में रहता है, इसके दो प्रदेश समश्रेणी स्थित दो आकाशप्रदेश में और दो प्रदेश इसके नीचे समश्रेणी स्थित दो आकाशप्रदेश में और पांचवां प्रदेश इन दोनों के आगे मध्य में इस आकार
'देव' तथा 'मुनि' शब्दों ने ग़ज़ब कर दिया । क्रोध तो उभर ही था। अहंकार का उभार भी होगया । परशुराम जी समझ गए कि यह लड़का हमें कोरा फ़क़ीर समझ रहा है। इसलिये फरसे की तरफ देख कर कहते हैंबोले चितै परसु की ओरा, रे शठ सुनेसि सुभाव न मोरा । बालक जानि बधौं नहिं तोहीं, केवल मुनि कर जानेसि मोहीं । वाल ब्रह्मचारी प्रति कोही, विश्व विदित क्षत्री कुल द्रोही । भुज वल भूमि भूप बिनु कीन्हीं, विपुल वार महि देवन दीन्हीं । सहस वाहु भुज छेदन हारा, परशु विलोक महीप कुमारा । तस्वीर बड़ी फुर्तीली पर गुस्से से भरी है । अहंकार देखिए कि 'अति कोही' 'छत्री कुल द्रोही' आदि, अवगुणों को स्वयं विदित कर रहे हैं। क्या यह हँसी की बात नहीं कि आज एक मुनि ' मुनि कहने से चिढ़े ? फिर फरसे का बार-बार दिखलाना भी मुस्कान पैदा किए बिना नहीं रह सका, क्योंकि क्रोध आवश्यकता से है। 'चालक जानि' वाला बहाना उन्हीं बहानों में से हैं जिनकी व्याख्या पहले हो चुकी है। लक्ष्मरण का जवाब तो मज़ाक से कूट कूट कर भरा है। कहते हैं विहँसि लछन वोले मृदु वानी, अहो मुनीशमहा भटमानी । यह नरमी परशुराम के क्रोध का क्रियात्मक मखौल है अतः उनकी चिड़चिड़ाहट को और उभार देती है । 'हो' - शब्द आश्चर्य एवं हास्य से भरा हुआ है। महाभट और मानी होने का इक़रार व्यंगपूर्ण ही है । लक्ष्मरण कहते हैं :पुनि पुनि मोहिं दिखाव कुठारा, चहत उड़ावन फूँकि पहारा । पहले चरण में 'कुठार' शब्द में फरसे का मखौल विचारणीय है और दूसरा चरण तो हास्य रस से इतना परिपूर्ण है कि उसकी व्याख्या करना कठिन परन्तु उसका अनुभव होना सहल है ।
'देव' तथा 'मुनि' शब्दों ने ग़ज़ब कर दिया । क्रोध तो उभर ही था। अहंकार का उभार भी होगया । परशुराम जी समझ गए कि यह लड़का हमें कोरा फ़क़ीर समझ रहा है। इसलिये फरसे की तरफ देख कर कहते हैंबोले चितै परसु की ओरा, रे शठ सुनेसि सुभाव न मोरा । बालक जानि बधौं नहिं तोहीं, केवल मुनि कर जानेसि मोहीं । वाल ब्रह्मचारी प्रति कोही, विश्व विदित क्षत्री कुल द्रोही । भुज वल भूमि भूप बिनु कीन्हीं, विपुल वार महि देवन दीन्हीं । सहस वाहु भुज छेदन हारा, परशु विलोक महीप कुमारा । तस्वीर बड़ी फुर्तीली पर गुस्से से भरी है । अहंकार देखिए कि 'अति कोही' 'छत्री कुल द्रोही' आदि, अवगुणों को स्वयं विदित कर रहे हैं। क्या यह हँसी की बात नहीं कि आज एक मुनि ' मुनि कहने से चिढ़े ? फिर फरसे का बार-बार दिखलाना भी मुस्कान पैदा किए बिना नहीं रह सका, क्योंकि क्रोध आवश्यकता से है। 'चालक जानि' वाला बहाना उन्हीं बहानों में से हैं जिनकी व्याख्या पहले हो चुकी है। लक्ष्मरण का जवाब तो मज़ाक से कूट कूट कर भरा है। कहते हैं विहँसि लछन वोले मृदु वानी, अहो मुनीशमहा भटमानी । यह नरमी परशुराम के क्रोध का क्रियात्मक मखौल है अतः उनकी चिड़चिड़ाहट को और उभार देती है । 'हो' - शब्द आश्चर्य एवं हास्य से भरा हुआ है। महाभट और मानी होने का इक़रार व्यंगपूर्ण ही है । लक्ष्मरण कहते हैं :पुनि पुनि मोहिं दिखाव कुठारा, चहत उड़ावन फूँकि पहारा । पहले चरण में 'कुठार' शब्द में फरसे का मखौल विचारणीय है और दूसरा चरण तो हास्य रस से इतना परिपूर्ण है कि उसकी व्याख्या करना कठिन परन्तु उसका अनुभव होना सहल है ।
वीर अर्जुन संवाददाता कोटपूतली। यहां के संजीवनी अस्पताल में चिकित्सकों द्वारा किए गए पयासों के बाद आखिरकार एक छठ मासी बच्ची की जान बच गई। बच्ची का वजन मात्र सात सौ ग्राम है। अस्पताल के निदेशक डा. एस. एम. यादव ने बताया कि अनीता देवी पत्नी राकेश यादव ने बडर्क्वोद के सरकारी अस्पताल में एक बच्ची को जन्म दिया। जन्म होते ही नवजात की हालत बिगडक्वने लगी। तुरंत उसे किसी दूसरे अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी गई। जिस पर नवजात बच्ची को यहां के संजीवनी अस्पताल की नर्सरी में बच्ची को भर्ती कराया गया। अस्पताल के चिकित्सक डा. दीपक मित्तल (शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ) व उनकी टीम ने बच्ची का इलाज शुरू किया। चिकित्सकों के पयास से धीरे-धीरे बच्ची की हालत सुधरने लगी है। अब बच्ची का वजन 1100 ग्राम के आसपास बताया जा रहा है। जिसे उसकी मां के हवाले कर दिया गया है। डा. दीपक मित्तल ने बताया कि ऐसे बच्चों में जन्म के समय श्वांस छोडक्वने और खून में संकमण होने की अधिक संभावनाएं रहती है। अस्पताल के निदेशक डा. एस. एम. यादव के मुताबिक यहां अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित नर्सरी में ऐसे बच्चों को उच्च स्तरीय सुविधा दी जा रही है।
वीर अर्जुन संवाददाता कोटपूतली। यहां के संजीवनी अस्पताल में चिकित्सकों द्वारा किए गए पयासों के बाद आखिरकार एक छठ मासी बच्ची की जान बच गई। बच्ची का वजन मात्र सात सौ ग्राम है। अस्पताल के निदेशक डा. एस. एम. यादव ने बताया कि अनीता देवी पत्नी राकेश यादव ने बडर्क्वोद के सरकारी अस्पताल में एक बच्ची को जन्म दिया। जन्म होते ही नवजात की हालत बिगडक्वने लगी। तुरंत उसे किसी दूसरे अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी गई। जिस पर नवजात बच्ची को यहां के संजीवनी अस्पताल की नर्सरी में बच्ची को भर्ती कराया गया। अस्पताल के चिकित्सक डा. दीपक मित्तल व उनकी टीम ने बच्ची का इलाज शुरू किया। चिकित्सकों के पयास से धीरे-धीरे बच्ची की हालत सुधरने लगी है। अब बच्ची का वजन एक हज़ार एक सौ ग्राम के आसपास बताया जा रहा है। जिसे उसकी मां के हवाले कर दिया गया है। डा. दीपक मित्तल ने बताया कि ऐसे बच्चों में जन्म के समय श्वांस छोडक्वने और खून में संकमण होने की अधिक संभावनाएं रहती है। अस्पताल के निदेशक डा. एस. एम. यादव के मुताबिक यहां अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित नर्सरी में ऐसे बच्चों को उच्च स्तरीय सुविधा दी जा रही है।
सैफ अली खान की बेटी सारा अली खान फिल्म केदारनाथ से बॉलीवुड में डेब्यू कर चुकीं हैं। इस फिल्म में उनकी एक्टिंग की जमकर सराहा जा रहा हैं। सारा अली खान का अपने छोटे भाई तैमूर अली खान के साथ एक स्पेशल बांड हैं। दोनों के बीच की केमिस्ट्री जबरदस्त है। हाल ही में एक इंटव्यू में सारा ने बताया कि तैमूर ने रक्षाबंधन पर उन्हें क्या गिफ्ट दिया। सारा ने बताया कि तैमूर के साथ रक्षाबंधन का त्योहार बहुत ही लाजवाब रहा। सारा ने कहा कि तैमूर ने राखी गिफ्ट में मुझे 51 रुपए दिए थे। ये ठीक है क्योंकि वो छोटा है। छोटे नवाब ने बड़े ही क्यूट अंदाज में अपनी बहनों संग रक्षाबंधन सेलिब्रेट किया था। उन्होंने सारा और सोहा अली खान की बेटी इनाया से राखी बंधवाई थी। सारा ने तैमूर के साथ रक्षाबंधन मनाते हुए फोटो भी शेयर की थी। वहीं, करण जौहर के चैट शो में सारा ने बताया था कि तैमूर, करीना को अम्मा कहकर बुलाते हैं और सैफ को अब्बा और इब्राहिम को भाई। लेकिन उन्हें 'गोल' कहकर बुलाता है। तैमूर देश ही नहीं दुनिया भर में पॉपुलर हैं। हाल ही में याहू की सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहने वाले भारतीय पर्सनैलिटी की लिस्ट में तैमूर को 10वां स्थान मिला है।
सैफ अली खान की बेटी सारा अली खान फिल्म केदारनाथ से बॉलीवुड में डेब्यू कर चुकीं हैं। इस फिल्म में उनकी एक्टिंग की जमकर सराहा जा रहा हैं। सारा अली खान का अपने छोटे भाई तैमूर अली खान के साथ एक स्पेशल बांड हैं। दोनों के बीच की केमिस्ट्री जबरदस्त है। हाल ही में एक इंटव्यू में सारा ने बताया कि तैमूर ने रक्षाबंधन पर उन्हें क्या गिफ्ट दिया। सारा ने बताया कि तैमूर के साथ रक्षाबंधन का त्योहार बहुत ही लाजवाब रहा। सारा ने कहा कि तैमूर ने राखी गिफ्ट में मुझे इक्यावन रुपयापए दिए थे। ये ठीक है क्योंकि वो छोटा है। छोटे नवाब ने बड़े ही क्यूट अंदाज में अपनी बहनों संग रक्षाबंधन सेलिब्रेट किया था। उन्होंने सारा और सोहा अली खान की बेटी इनाया से राखी बंधवाई थी। सारा ने तैमूर के साथ रक्षाबंधन मनाते हुए फोटो भी शेयर की थी। वहीं, करण जौहर के चैट शो में सारा ने बताया था कि तैमूर, करीना को अम्मा कहकर बुलाते हैं और सैफ को अब्बा और इब्राहिम को भाई। लेकिन उन्हें 'गोल' कहकर बुलाता है। तैमूर देश ही नहीं दुनिया भर में पॉपुलर हैं। हाल ही में याहू की सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहने वाले भारतीय पर्सनैलिटी की लिस्ट में तैमूर को दसवां स्थान मिला है।
फूड डेस्कः आजतक आपने ये लाइन कई बार सुनी होगी कि संडे हो या मंडे रोज खाएं अंडे। लेकिन अक्सर लोग गर्मी का सीजन आते ही अंडा (eggs) खाना छोड़ देते हैं। लोग का मानना होता है, कि अंडे की तासीर गर्म होती है, जो गर्मियों में शरीर को नुकसान पहुंचती है। हालांकि डॉक्टर्स का मानना है कि गर्मियों में अंडा जरूर खाना चाहिए। लेकिन अब सवाल उठता है, कि गर्मियों में कितने अंडे खाए जाए, तो चलिए आज हम आपको बताते हैं, कि गर्मियों में आपको 1 दिन में कितने अंडे खाना चाहिए। बॉलीवुड एक्ट्रेस और चंडीगढ़ से भाजपा सांसद किरण खेर (Kirron Kher) को ब्लड कैंसर (मल्टीपल मायलोमा) हो गया है। फिलहाल मुंबई में उनका इलाज चल रहा है। बता दें कि पिछले साल 11 नवंबर को उन्हें गिरने की वजह से हाथ में फ्रेक्चर हुआ था। इसके बाद उन्हे PGIMS में भर्ती कराया गया था, जहां ब्लड कैंसर के शुरुआती लक्षण पाए गए थे। आखिर क्या है ब्लड कैंसर, ये कितने तरह का होता है और इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं? रिलेशनशिप डेस्क। एक वक्त था जब कहते थे कि इस दुनिया में हर किसी की एक जोड़ी है। ईश्वर ने सबको जोड़ी के साथ भेजा है। लेकिन अब वक्त बदल चुका है। लड़का लड़की एक दूसरे को पसंद करते हैं। शादी करते हैं और फिर जीवनभर साथ रहने का फैसला लेते हैं। लेकिन दुनिया में अब अकेले रहने का ट्रेंड भी बढ़ रहा है। लोग शादी से बचते नजर आ रहे हैं। शादी में घोखा खाने के बाद या फिर किसी अपने के विश्वास तोड़ने के बाद लोग अकेले रहना पसंद करते हैं। उन्हें लगता है कि वे सिंगल रहकर ज्यादा खुश हैं। लेकिन आपको बताते हैं सिंगल रहने के फायदे और नुकसान क्या हैं? फूड डेस्क : गर्मी का मौसम आते ही घरों में रायता और लस्सी बनना शुरू हो जाता है। तपती गर्मी में दही (curd) खाना काफी फायेदमंद भी होता है। इन दिनों तेज धूप और बढ़ते तापमान से लू लगने का खतरा बना रहता है। इससे बचने के लिए आपको डाइट में दही शामिल करना चाहिए, क्योंकि इसकी तासीर ठंडी होती है और ये पेट को ठंड़ा रखता है। लेकिन अक्सर घर में दही जमाते समय वह पानी छोड़ देता है या कभी इसमें खटास ज्यादा हो जाती है, तो चलिए आज हम आपको बताते है परफेक्ट दही जमाने के टिप्स, जिससे दही आइसक्रीम जितना गाढ़ा (thick curd) जमेगा। लाइफस्टाइल डेस्क : होली का त्योहार कई सारे रंग और खुशियां लेकर आता है, लेकिन उसी के साथ लेकर आता है तला भुना और अनहेल्दी खाना। होली के दिन गुजिया, दही वड़ा, माल पुआ और न जाने कई ऐसे खाने के आइटम बनाए जाते हैं जो सेहत के लिए नुकसानदायक होते है, लेकिन इन्हें खाये बिना भी मन नहीं भरता। ऐसे में अगर आपने भी पेट भरकर इन व्यंजनों को खा लिया है, तो घबराने की जरुरत नहीं है, इन 7 तरीकों से आप अपनी डाइट मेंटेन कर सकते हैं और बिना वजन बढ़े अपनी रूटीन में आ सकते हैं। वीडियो डेस्क। चीन के वुहान से निकला कोरोना वायरस अभी खत्म नहीं हुआ है। कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus) को खत्म करने का एक मात्र और सबसे कारगर तरीका है वैक्सीन लेना। हालांकि वैक्सीन (Covid Vaccine) इस बात की गारंटी नहीं है कि आपको कोरोना वायरस संक्रमण नहीं होगा। वैक्सीन लेने के बाद भी कई लोगों को Covid-19 संक्रमण हो रहा है। वैक्सीन लेने के बाद कोरोना वायरस से Reinfect (दोबारा संक्रमित होना) होने की आशंका कम है लेकिन इससे पूरी तरह से इनकार नहीं किया जा सकता। लिहाजा आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि वैक्सीन लेने के बाद भी आप ये गलतियां न करें।
फूड डेस्कः आजतक आपने ये लाइन कई बार सुनी होगी कि संडे हो या मंडे रोज खाएं अंडे। लेकिन अक्सर लोग गर्मी का सीजन आते ही अंडा खाना छोड़ देते हैं। लोग का मानना होता है, कि अंडे की तासीर गर्म होती है, जो गर्मियों में शरीर को नुकसान पहुंचती है। हालांकि डॉक्टर्स का मानना है कि गर्मियों में अंडा जरूर खाना चाहिए। लेकिन अब सवाल उठता है, कि गर्मियों में कितने अंडे खाए जाए, तो चलिए आज हम आपको बताते हैं, कि गर्मियों में आपको एक दिन में कितने अंडे खाना चाहिए। बॉलीवुड एक्ट्रेस और चंडीगढ़ से भाजपा सांसद किरण खेर को ब्लड कैंसर हो गया है। फिलहाल मुंबई में उनका इलाज चल रहा है। बता दें कि पिछले साल ग्यारह नवंबर को उन्हें गिरने की वजह से हाथ में फ्रेक्चर हुआ था। इसके बाद उन्हे PGIMS में भर्ती कराया गया था, जहां ब्लड कैंसर के शुरुआती लक्षण पाए गए थे। आखिर क्या है ब्लड कैंसर, ये कितने तरह का होता है और इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं? रिलेशनशिप डेस्क। एक वक्त था जब कहते थे कि इस दुनिया में हर किसी की एक जोड़ी है। ईश्वर ने सबको जोड़ी के साथ भेजा है। लेकिन अब वक्त बदल चुका है। लड़का लड़की एक दूसरे को पसंद करते हैं। शादी करते हैं और फिर जीवनभर साथ रहने का फैसला लेते हैं। लेकिन दुनिया में अब अकेले रहने का ट्रेंड भी बढ़ रहा है। लोग शादी से बचते नजर आ रहे हैं। शादी में घोखा खाने के बाद या फिर किसी अपने के विश्वास तोड़ने के बाद लोग अकेले रहना पसंद करते हैं। उन्हें लगता है कि वे सिंगल रहकर ज्यादा खुश हैं। लेकिन आपको बताते हैं सिंगल रहने के फायदे और नुकसान क्या हैं? फूड डेस्क : गर्मी का मौसम आते ही घरों में रायता और लस्सी बनना शुरू हो जाता है। तपती गर्मी में दही खाना काफी फायेदमंद भी होता है। इन दिनों तेज धूप और बढ़ते तापमान से लू लगने का खतरा बना रहता है। इससे बचने के लिए आपको डाइट में दही शामिल करना चाहिए, क्योंकि इसकी तासीर ठंडी होती है और ये पेट को ठंड़ा रखता है। लेकिन अक्सर घर में दही जमाते समय वह पानी छोड़ देता है या कभी इसमें खटास ज्यादा हो जाती है, तो चलिए आज हम आपको बताते है परफेक्ट दही जमाने के टिप्स, जिससे दही आइसक्रीम जितना गाढ़ा जमेगा। लाइफस्टाइल डेस्क : होली का त्योहार कई सारे रंग और खुशियां लेकर आता है, लेकिन उसी के साथ लेकर आता है तला भुना और अनहेल्दी खाना। होली के दिन गुजिया, दही वड़ा, माल पुआ और न जाने कई ऐसे खाने के आइटम बनाए जाते हैं जो सेहत के लिए नुकसानदायक होते है, लेकिन इन्हें खाये बिना भी मन नहीं भरता। ऐसे में अगर आपने भी पेट भरकर इन व्यंजनों को खा लिया है, तो घबराने की जरुरत नहीं है, इन सात तरीकों से आप अपनी डाइट मेंटेन कर सकते हैं और बिना वजन बढ़े अपनी रूटीन में आ सकते हैं। वीडियो डेस्क। चीन के वुहान से निकला कोरोना वायरस अभी खत्म नहीं हुआ है। कोरोना वायरस महामारी को खत्म करने का एक मात्र और सबसे कारगर तरीका है वैक्सीन लेना। हालांकि वैक्सीन इस बात की गारंटी नहीं है कि आपको कोरोना वायरस संक्रमण नहीं होगा। वैक्सीन लेने के बाद भी कई लोगों को Covid-उन्नीस संक्रमण हो रहा है। वैक्सीन लेने के बाद कोरोना वायरस से Reinfect होने की आशंका कम है लेकिन इससे पूरी तरह से इनकार नहीं किया जा सकता। लिहाजा आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि वैक्सीन लेने के बाद भी आप ये गलतियां न करें।
हाजिर मांग बढ़ने के बाद कारोबारियों ने अपने सौदे बढ़ा दिये। इसके चलते मल्टी कमोडीटी एक्सचेंज में कच्चे तेल का मई डिलीवरी भाव 29 रुपये यानी 0. 63 प्रतिशत बढ़कर 4,654 रुपये प्रति बैरल पर पहुंच गया। इस वायदा अनुबंध में 5,375 लॉट के लिये कारोबार हुआ। विश्लेषकों का कहना है कि सटोरियों के अपने सौदे बढ़ाने से वायदा बाजार में कच्चे तेल का भाव ऊंचा रहा। वहीं, वैश्विक बाजार में वेस्ट टैक्सास इंटरमीडिएट कच्चे तेल का दाम 0. 86 प्रतिशत बढ़कर 61. 96 डालर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, न्यूयार्क में ब्रेंट कचचे तेल का दाम 0. 67 प्रतिशत बढ़कर 65. 84 डालर प्रति बैरल बोला गया।
हाजिर मांग बढ़ने के बाद कारोबारियों ने अपने सौदे बढ़ा दिये। इसके चलते मल्टी कमोडीटी एक्सचेंज में कच्चे तेल का मई डिलीवरी भाव उनतीस रुपयापये यानी शून्य. तिरेसठ प्रतिशत बढ़कर चार,छः सौ चौवन रुपयापये प्रति बैरल पर पहुंच गया। इस वायदा अनुबंध में पाँच,तीन सौ पचहत्तर लॉट के लिये कारोबार हुआ। विश्लेषकों का कहना है कि सटोरियों के अपने सौदे बढ़ाने से वायदा बाजार में कच्चे तेल का भाव ऊंचा रहा। वहीं, वैश्विक बाजार में वेस्ट टैक्सास इंटरमीडिएट कच्चे तेल का दाम शून्य. छियासी प्रतिशत बढ़कर इकसठ. छियानवे डालर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, न्यूयार्क में ब्रेंट कचचे तेल का दाम शून्य. सरसठ प्रतिशत बढ़कर पैंसठ. चौरासी डालर प्रति बैरल बोला गया।
अपनी पहली झलक के साथ विवादों में आ चुकी फिल्म '72 हूरें' का ट्रेलर रिलीज हो चूका है। द कश्मीर फाइल्स और द केरल स्टोरी के बाद इस फिल्म को भी लोग एक प्रॉपगैंडा प्रोजेक्ट बता रहे हैं। इस फिल्म के रिलीज हुए ट्रेलर के मुताबिक फिल्म में युवाओं को 72 हूरों का लालच देकर उनसे जिहाद करवाया जाता है। फिल्म के ट्रेलर में कई सारे ऐसे दृश्य भी मौजूद हैं जो आपत्तिजनक है, जिसके कारण सेंसर ने इस ट्रेलर को सर्टिफिकेट देने से इनकार कर दिया है। कुरान में कहा गया है अगर इंसान अल्लाह का नेक बंदा बनेगा तो उसे जन्नत में उसे 72 कुंवारी हूरें (लड़कियां) अपनी सेवा में नसीब होंगी। ट्रेलर में शाहदत के नाम पर कुछ लोगों से जिहाद करवा, दरन्दिगी करवायी गयी, लेकिन ऐसा करने वालों का एक मकसद सिर्फ जन्नत में 72 हूरों से मिलना है। लगातार विवादों से घिरी इस फिल्म की लोग आलोचना भी कर रहें हैं, बता दें यह फिल्म 7 जुलाई को भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
अपनी पहली झलक के साथ विवादों में आ चुकी फिल्म 'बहत्तर हूरें' का ट्रेलर रिलीज हो चूका है। द कश्मीर फाइल्स और द केरल स्टोरी के बाद इस फिल्म को भी लोग एक प्रॉपगैंडा प्रोजेक्ट बता रहे हैं। इस फिल्म के रिलीज हुए ट्रेलर के मुताबिक फिल्म में युवाओं को बहत्तर हूरों का लालच देकर उनसे जिहाद करवाया जाता है। फिल्म के ट्रेलर में कई सारे ऐसे दृश्य भी मौजूद हैं जो आपत्तिजनक है, जिसके कारण सेंसर ने इस ट्रेलर को सर्टिफिकेट देने से इनकार कर दिया है। कुरान में कहा गया है अगर इंसान अल्लाह का नेक बंदा बनेगा तो उसे जन्नत में उसे बहत्तर कुंवारी हूरें अपनी सेवा में नसीब होंगी। ट्रेलर में शाहदत के नाम पर कुछ लोगों से जिहाद करवा, दरन्दिगी करवायी गयी, लेकिन ऐसा करने वालों का एक मकसद सिर्फ जन्नत में बहत्तर हूरों से मिलना है। लगातार विवादों से घिरी इस फिल्म की लोग आलोचना भी कर रहें हैं, बता दें यह फिल्म सात जुलाई को भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
तिलों का उत्तर-चिह्न पीठ के दाए भाग तथा कमर के दाएं भाग में पाया जाता है । ये दोनो तिल चाहे लाल रंग के हो अथवा काले 'स्त्री-पुरुष' - दोनों को समान रूप से प्रभावित करते हैं । इन तिलो के फलस्वरूप जातक का जीवन परेशानी मे व्यतीत होता है और उसकी जमीन-जायदाद अथवा सम्पत्ति की हानि होती है । इन तिलों का प्रभाव अशुभ फलदायक समझना चाहिए । तिल संख्या १८ -सूर्य रेखा के मध्य भाग में स्थित इस तिल का उत्तर-चिह्न पेट के मध्य भाग मे पाया जाता है । यह तिल चाहे लाल रंग का हो अथवा काला, स्त्री-पुरुष दोनो पर अपना समान प्रभाव डालता है। इस तिल के फलस्वरूप जातक धन-धान्य तथा ऐश्वर्य से सम्पन्न होकर सुखो एवं शान्त जीवन व्यतीत करता है । तिल संख्या १६ और २० - सूर्य रेखा के बाएं भाग में स्थित इन तिलो के उत्तर-चिह्न वक्षःस्थल के बाईं ओर तथा वाए कन्धे के नीचे पाये जाते है । ये दोनों तिल चाहे लाल रंग के हो अथवा काले, स्त्री-पुरुष दोनों को समान रूप से प्रभावित करते है । इन तिलों के प्रभावस्वरूप दम्पति ( पति-पत्नी) के बीच प्रेम की मात्रा कम होती है। उनमे परस्पर झगड़ा होता रहता है तथा किसी एक को दूसरे के द्वारा विशेष हानि उठानी पड़ती है। शुक्र-रेखा स्थित तिलों का प्रभाव तिल संख्या २१ और २२ - शुक्र - रेखा के दाएं भाग में स्थित इन
तिलों का उत्तर-चिह्न पीठ के दाए भाग तथा कमर के दाएं भाग में पाया जाता है । ये दोनो तिल चाहे लाल रंग के हो अथवा काले 'स्त्री-पुरुष' - दोनों को समान रूप से प्रभावित करते हैं । इन तिलो के फलस्वरूप जातक का जीवन परेशानी मे व्यतीत होता है और उसकी जमीन-जायदाद अथवा सम्पत्ति की हानि होती है । इन तिलों का प्रभाव अशुभ फलदायक समझना चाहिए । तिल संख्या अट्ठारह -सूर्य रेखा के मध्य भाग में स्थित इस तिल का उत्तर-चिह्न पेट के मध्य भाग मे पाया जाता है । यह तिल चाहे लाल रंग का हो अथवा काला, स्त्री-पुरुष दोनो पर अपना समान प्रभाव डालता है। इस तिल के फलस्वरूप जातक धन-धान्य तथा ऐश्वर्य से सम्पन्न होकर सुखो एवं शान्त जीवन व्यतीत करता है । तिल संख्या सोलह और बीस - सूर्य रेखा के बाएं भाग में स्थित इन तिलो के उत्तर-चिह्न वक्षःस्थल के बाईं ओर तथा वाए कन्धे के नीचे पाये जाते है । ये दोनों तिल चाहे लाल रंग के हो अथवा काले, स्त्री-पुरुष दोनों को समान रूप से प्रभावित करते है । इन तिलों के प्रभावस्वरूप दम्पति के बीच प्रेम की मात्रा कम होती है। उनमे परस्पर झगड़ा होता रहता है तथा किसी एक को दूसरे के द्वारा विशेष हानि उठानी पड़ती है। शुक्र-रेखा स्थित तिलों का प्रभाव तिल संख्या इक्कीस और बाईस - शुक्र - रेखा के दाएं भाग में स्थित इन
।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल (हे.) ।1 - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसे1950 ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा 117 - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ( नदारद ) ।1क(क) - रिक्त ( नदारद ) ।1-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ( नदारद ) ।2 - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ( नदारद ) ।3 - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ( नदारद ) ।4 - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ 4 में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ( नदारद ) ।4-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -(क)जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ( नदारद ) ।4-क(ख) - अन्य भूमि । ( नदारद ) ।5-1 - कृषि योग्य भूमि - नई परती (परतीजदीद) ।5-2 - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती (परतीकदीम) ( नदारद ) ।5-3-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ( नदारद ) ।5-3-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ( नदारद ) ।5-3-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ( नदारद ) ।5-3-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ( नदारद ) ।5-3-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।5-क (क) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ( नदारद ) ।5-क (ख) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ( नदारद ) ।5-क (ग) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ( नदारद ) ।6-1 - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।6-2 - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।6-3 - कब्रिस्तान और श्मशान (मरघट) , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।6-4 - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल ।एक - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसेएक हज़ार नौ सौ पचास ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा एक सौ सत्रह - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ।एकक - रिक्त ।एक-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ।दो - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।तीन - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ।चार - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ चार में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ।चार-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ।चार-क - अन्य भूमि । ।पाँच-एक - कृषि योग्य भूमि - नई परती ।पाँच-दो - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती ।पाँच-तीन-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ।पाँच-तीन-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ।पाँच-तीन-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।पाँच-तीन-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ।पाँच-तीन-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ।छः-एक - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।छः-दो - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।छः-तीन - कब्रिस्तान और श्मशान , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।छः-चार - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
प्रयागराज (ब्यूरो)। कार्यक्रम का शुभारंभ सुप्रिया सिंह के निर्देशन में प्रस्तुत भावपूर्ण युगल नृत्य गणेश वंदना से हुई, तत्पश्चात सुप्रिया सिंह एवं साथी कलाकारों ने उत्तर प्रदेश का प्रसिद्ध डेढिय़ा नृत्य प्रस्तुत करके सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। गणेश वंदना में अनुश्री दुबे व वंदना श्री तथा डेढिय़ा नृत्य में रंगोली तिवारी, प्राची यादव आदि शामिल रही। लोकगीत के क्रम में सावन मास में गाए जाने वाली कजरी बरसो बरसो रे सवनवा मोर सजनवा अइले ना तथा सावन झरी लागी रे धीरे-धीरे को प्रियंका चौहान ने अपनी सुमधुर आवाज में प्रस्तुत किया। इसके बाद रंजना त्रिपाठी ने विंध्याचल धाम गंगा तिरवा की देवी विंध्यवासिनी के डेरवा तथा नकटा मैं जालिम चोर बजनी बिछिया लाई सुनाकर श्रोताओं की वाहवाही लूटी। ज्योति आनंद ने रिमझिम पड़त फुहार गगन री घेरी बदरिया सावन, कीर्ति चौधरी ने झूला गीत मोरे गउवां के माटी सुनार लागे को सुमधुर आवाजों में प्रस्तुत कर के लोकरंग बहार की पहली शाम को गायिकाओं एवं नृत्यांगनाओ ने यादगार बना दिया। रागिनी चंद्रा ने पानी बरसे पिया संग में लियाय चल छतवा लगाए चल ना सुनाकर वातावरण को रसमय बना दिया। बतौर अतिथिगण आकाशवाणी और दूरदर्शन के निदेशक लोकेश कुमार शुक्ल, वरिष्ठ लोकनाट्यविद अतुल यदुवंशी, प्रधानाचार्य रानी रेवती देवी बांके बिहारी पांडे, वरिष्ठ चित्रकार एवं पत्रकार अजामिल ब्यास, कल्पना सहाय ने कहा कि आज के दौर की बदलती मान्यताओं को अगर इस प्रकार के आयोजनों से जोड़ा जाए तो निश्चित ही अपने गौरव की साख को सदियों तक कायम रख सकेंगे, संस्था के कोषाध्यक्ष एवं आयोजन व्यवस्थापक पंकज गौड़ ने दो दिवसीय कार्यक्रम का विवरण प्रस्तुत किया। धन्यवाद ज्ञापन संस्था के महासचिव गायक मनोज गुप्ता तथा संचालन प्रख्यात कवि शैलेश गौतम ने किया।
प्रयागराज । कार्यक्रम का शुभारंभ सुप्रिया सिंह के निर्देशन में प्रस्तुत भावपूर्ण युगल नृत्य गणेश वंदना से हुई, तत्पश्चात सुप्रिया सिंह एवं साथी कलाकारों ने उत्तर प्रदेश का प्रसिद्ध डेढिय़ा नृत्य प्रस्तुत करके सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। गणेश वंदना में अनुश्री दुबे व वंदना श्री तथा डेढिय़ा नृत्य में रंगोली तिवारी, प्राची यादव आदि शामिल रही। लोकगीत के क्रम में सावन मास में गाए जाने वाली कजरी बरसो बरसो रे सवनवा मोर सजनवा अइले ना तथा सावन झरी लागी रे धीरे-धीरे को प्रियंका चौहान ने अपनी सुमधुर आवाज में प्रस्तुत किया। इसके बाद रंजना त्रिपाठी ने विंध्याचल धाम गंगा तिरवा की देवी विंध्यवासिनी के डेरवा तथा नकटा मैं जालिम चोर बजनी बिछिया लाई सुनाकर श्रोताओं की वाहवाही लूटी। ज्योति आनंद ने रिमझिम पड़त फुहार गगन री घेरी बदरिया सावन, कीर्ति चौधरी ने झूला गीत मोरे गउवां के माटी सुनार लागे को सुमधुर आवाजों में प्रस्तुत कर के लोकरंग बहार की पहली शाम को गायिकाओं एवं नृत्यांगनाओ ने यादगार बना दिया। रागिनी चंद्रा ने पानी बरसे पिया संग में लियाय चल छतवा लगाए चल ना सुनाकर वातावरण को रसमय बना दिया। बतौर अतिथिगण आकाशवाणी और दूरदर्शन के निदेशक लोकेश कुमार शुक्ल, वरिष्ठ लोकनाट्यविद अतुल यदुवंशी, प्रधानाचार्य रानी रेवती देवी बांके बिहारी पांडे, वरिष्ठ चित्रकार एवं पत्रकार अजामिल ब्यास, कल्पना सहाय ने कहा कि आज के दौर की बदलती मान्यताओं को अगर इस प्रकार के आयोजनों से जोड़ा जाए तो निश्चित ही अपने गौरव की साख को सदियों तक कायम रख सकेंगे, संस्था के कोषाध्यक्ष एवं आयोजन व्यवस्थापक पंकज गौड़ ने दो दिवसीय कार्यक्रम का विवरण प्रस्तुत किया। धन्यवाद ज्ञापन संस्था के महासचिव गायक मनोज गुप्ता तथा संचालन प्रख्यात कवि शैलेश गौतम ने किया।
फुट्ठस्स लोक धम्मेहि चित्तं यस्म न कंपति । असोक विरजं खेमं, एतं मंगलमुत्तमं ।। ११ ॥ लाभ-अलाभ, यश-अपयश, निन्दा - प्रशंसा, और सुख-दुःख इन आठ प्रकार के लोक धर्मों के द्वारा चित्त का विचलित न होना तथा शोक-रहित होना, राग, द्वेप और मोह रूपी रज से रहित होना और क्षेम सहित होना उत्तम मंगल है । एतादिसानि कत्वान सन्बत्थमपराजिता । सञ्बत्थसोत्थि गच्छन्ति तं तेसं मंगलमुत्तमं ॥ १२ ॥ ऊपर जिन अड़तीस मंगल कर्मों की बात कही गई है उनसे सर्वत्र जय और मंगल प्राप्त होता है । यही सब देवत मनुष्यों के लिए उत्तम मंगल है । मंगल सूत्रं सम्पूर्णम । पराभव मुत्तं ( पराभव सूत्र ) सूत्रारम्भ एवं में सुतं एकं समयं भगवा सावस्थियं विहरति जैतवने पंडिकसमे । अथ खो जरा देवता अभिकन्ताय रत्तिया अभिकन्तवणा केवल कप्पं जेतवनं श्रोभासेत्वा येन भगवा तेनु पसंकमि उपसंकामित्वा भगवंतं १ - मंगल सूत्र देसना सुनने के बाद देवता लोग आपस में यह विचार करने लगे कि भगवान् ने देव और मनुष्यों के मंगल या सुख की वृद्धि के लिए जो विधि आत्मक उपदेश दिया है, उसे तो हम लोगो ने सुना लेकिन अब अमंगल या पराभव ( विनाश के कारणों को भी निषेधात्मक उपदेश द्वारा सुनना चाहिए कि किन-किन अभिवादेवा एक मन्तं अट्ठासि, एक मंतं ठिता खो सा देवता भगवन्तं गाथाय मासि । मैंने ऐसा सुना है कि एक समय भगवान् बुद्ध श्रावस्ती नगर में अनाथपिंडिक सेठ के जेतवन-विहार में विहार करते थे । उस समय आधी रात बीत जाने के बाद किसी एक देवता ने अपने अत्यन्त दिव्य वर्ण द्वारा सम्पूर्ण जेतवन को सुशोभित करते हुए जहाँ भगवान थे, वहाँ जाकर भगवान् को अभिवादन करके एक स्थान पर बैठकर ( इस ) गाथा द्वारा भगवान् से पराभवन्तं पुरिसं मयं, पुच्छ्राम गोतम । भगवन्तं पुट्टमागम्म, किं पराभवतो मुखं ॥ १ ॥ हे गोतम ! हम आपसे पूछने के लिए आये हैं, सो हे भगवन् ! हम आपसे पूछते हैं कि ( दोनों लोकों अर्थात् यह लोक और परलोक से) पराभव ( पतन, गिरावट ) को प्राप्त हुए मनुष्यों के पराभव ( पतन ) का कारण क्या है १ ॥ १ ॥ इस प्रकार देवता के प्रार्थना करने पर भगवान बोलेःसुविजानो भवं होति, अविजानो पराभवो । धम्मकामो भवं होति धम्मदेस्सि पराभवो ॥ २ ॥ ( हमारे उपदेश किये धर्म को ) अच्छी तरह से जाननेवाले को ( दोनों लोकों में ) वृद्धि होती है और न जाननेवाले का पराभव ( विनाश, पतन व गिरावट ) । धर्म की कामना करने कारणों के होने से देव और मनुष्यों का पतन या पराभव ( विनाश ) होता है। इस प्रकार आपस में सोचकर एक देवता भगवान् बुद्ध के पास आमा । उसका प्रश्न तथा भगवान ने जो उत्तर दिया उसी को 'पराभव-सूत्र' कहते हैं ।
फुट्ठस्स लोक धम्मेहि चित्तं यस्म न कंपति । असोक विरजं खेमं, एतं मंगलमुत्तमं ।। ग्यारह ॥ लाभ-अलाभ, यश-अपयश, निन्दा - प्रशंसा, और सुख-दुःख इन आठ प्रकार के लोक धर्मों के द्वारा चित्त का विचलित न होना तथा शोक-रहित होना, राग, द्वेप और मोह रूपी रज से रहित होना और क्षेम सहित होना उत्तम मंगल है । एतादिसानि कत्वान सन्बत्थमपराजिता । सञ्बत्थसोत्थि गच्छन्ति तं तेसं मंगलमुत्तमं ॥ बारह ॥ ऊपर जिन अड़तीस मंगल कर्मों की बात कही गई है उनसे सर्वत्र जय और मंगल प्राप्त होता है । यही सब देवत मनुष्यों के लिए उत्तम मंगल है । मंगल सूत्रं सम्पूर्णम । पराभव मुत्तं सूत्रारम्भ एवं में सुतं एकं समयं भगवा सावस्थियं विहरति जैतवने पंडिकसमे । अथ खो जरा देवता अभिकन्ताय रत्तिया अभिकन्तवणा केवल कप्पं जेतवनं श्रोभासेत्वा येन भगवा तेनु पसंकमि उपसंकामित्वा भगवंतं एक - मंगल सूत्र देसना सुनने के बाद देवता लोग आपस में यह विचार करने लगे कि भगवान् ने देव और मनुष्यों के मंगल या सुख की वृद्धि के लिए जो विधि आत्मक उपदेश दिया है, उसे तो हम लोगो ने सुना लेकिन अब अमंगल या पराभव गाथा द्वारा भगवान् से पराभवन्तं पुरिसं मयं, पुच्छ्राम गोतम । भगवन्तं पुट्टमागम्म, किं पराभवतो मुखं ॥ एक ॥ हे गोतम ! हम आपसे पूछने के लिए आये हैं, सो हे भगवन् ! हम आपसे पूछते हैं कि पराभव को प्राप्त हुए मनुष्यों के पराभव का कारण क्या है एक ॥ एक ॥ इस प्रकार देवता के प्रार्थना करने पर भगवान बोलेःसुविजानो भवं होति, अविजानो पराभवो । धम्मकामो भवं होति धम्मदेस्सि पराभवो ॥ दो ॥ अच्छी तरह से जाननेवाले को वृद्धि होती है और न जाननेवाले का पराभव । धर्म की कामना करने कारणों के होने से देव और मनुष्यों का पतन या पराभव होता है। इस प्रकार आपस में सोचकर एक देवता भगवान् बुद्ध के पास आमा । उसका प्रश्न तथा भगवान ने जो उत्तर दिया उसी को 'पराभव-सूत्र' कहते हैं ।
मेवात। पिनगवां कस्बे में बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक पर्व दशहरा धूमधाम के साथ मनाया गया। सीनियर सैकेंडरी मैदान में 52 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया। मैदान में मौजूद भारी भीड़ और हिन्दू मुस्लिम एकता के दिखे संगम के बीच हुए रावण दहन के बाद लोगों ने भी अपने अंदर छिपी बुराई का दहन करने का संकल्प लिया। इससे पहले कस्बे में भव्य झांकियां भी निकाली गई।
मेवात। पिनगवां कस्बे में बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक पर्व दशहरा धूमधाम के साथ मनाया गया। सीनियर सैकेंडरी मैदान में बावन फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया। मैदान में मौजूद भारी भीड़ और हिन्दू मुस्लिम एकता के दिखे संगम के बीच हुए रावण दहन के बाद लोगों ने भी अपने अंदर छिपी बुराई का दहन करने का संकल्प लिया। इससे पहले कस्बे में भव्य झांकियां भी निकाली गई।
वाशिंगटन, एसएआर में डी-एस्केलेशन के क्षेत्र में रूसी सैन्य पुलिस की उपस्थिति पर कोई आपत्ति नहीं करेगा; अमेरिकी प्रशासन भी इस थीसिस को मना कर देगा कि राष्ट्रपति असद को अपना पद छोड़ना चाहिए, रिपोर्ट TASS दैनिक जानवर पोस्ट। संसाधन के स्रोत के अनुसार, वाशिंगटन पूरे अरब गणराज्य में सुरक्षा क्षेत्रों के निर्माण का समर्थन करेगा और "सीरिया में मास्को के साथ अधिक गहन सहयोग करेगा। " "अमेरिका असद के नियंत्रण वाले क्षेत्र में अपने सैनिकों को घुसाने की कोशिश नहीं करेगा। हालांकि, सीरियाई विपक्ष द्वारा मुक्त किए गए क्षेत्रों में, सत्ता अपने हाथों में रहेगी, "अखबार लिखता है। यह ध्यान दिया जाता है कि नए राजनीतिक पाठ्यक्रम का मुख्य लक्ष्य "आतंकवादी समूह इस्लामिक स्टेट (रूसी संघ में प्रतिबंधित) की एक कुचल हार का कारण है"। उम्मीद है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प हैम्बर्ग में रूसी नेता व्लादिमीर पुटनी के साथ बैठक में यह सब बताएंगे। संसाधन के अनुसार, सीरिया के लिए नई रणनीति अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन की भागीदारी के साथ विकसित की गई थी। इससे पहले सीरियाई समझौता पर रूसी संघ के राष्ट्रपति के विशेष प्रतिनिधि अलेक्जेंडर लावेरिटिव ने कहा कि रूसी संघ की सैन्य पुलिस को सीरिया में सुरक्षा के बफर जोन में रखा जाना चाहिए। टिलरसन का बयान, G20 में राष्ट्रपति ट्रम्प और पुतिन के बीच बैठक के साथ मेल खाने के लिए, "संयुक्त राज्य अमेरिका रूस के साथ संयुक्त तंत्र बनाने की संभावना पर विचार करने के लिए तैयार है, ताकि स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए, नो-फ्लाई ज़ोन, पृथ्वी पर आग्नेयास्त्र समझौते पर पर्यवेक्षकों, और समन्वित वितरण शामिल हैं। मानवीय सहायता। " विदेश विभाग ने यह भी कहा कि मॉस्को के साथ सहयोग "पृथ्वी पर स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सीरिया के राजनीतिक भविष्य के निपटान की दिशा में प्रगति की शुरुआत को चिह्नित करेगा। "
वाशिंगटन, एसएआर में डी-एस्केलेशन के क्षेत्र में रूसी सैन्य पुलिस की उपस्थिति पर कोई आपत्ति नहीं करेगा; अमेरिकी प्रशासन भी इस थीसिस को मना कर देगा कि राष्ट्रपति असद को अपना पद छोड़ना चाहिए, रिपोर्ट TASS दैनिक जानवर पोस्ट। संसाधन के स्रोत के अनुसार, वाशिंगटन पूरे अरब गणराज्य में सुरक्षा क्षेत्रों के निर्माण का समर्थन करेगा और "सीरिया में मास्को के साथ अधिक गहन सहयोग करेगा। " "अमेरिका असद के नियंत्रण वाले क्षेत्र में अपने सैनिकों को घुसाने की कोशिश नहीं करेगा। हालांकि, सीरियाई विपक्ष द्वारा मुक्त किए गए क्षेत्रों में, सत्ता अपने हाथों में रहेगी, "अखबार लिखता है। यह ध्यान दिया जाता है कि नए राजनीतिक पाठ्यक्रम का मुख्य लक्ष्य "आतंकवादी समूह इस्लामिक स्टेट की एक कुचल हार का कारण है"। उम्मीद है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प हैम्बर्ग में रूसी नेता व्लादिमीर पुटनी के साथ बैठक में यह सब बताएंगे। संसाधन के अनुसार, सीरिया के लिए नई रणनीति अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन की भागीदारी के साथ विकसित की गई थी। इससे पहले सीरियाई समझौता पर रूसी संघ के राष्ट्रपति के विशेष प्रतिनिधि अलेक्जेंडर लावेरिटिव ने कहा कि रूसी संघ की सैन्य पुलिस को सीरिया में सुरक्षा के बफर जोन में रखा जाना चाहिए। टिलरसन का बयान, Gबीस में राष्ट्रपति ट्रम्प और पुतिन के बीच बैठक के साथ मेल खाने के लिए, "संयुक्त राज्य अमेरिका रूस के साथ संयुक्त तंत्र बनाने की संभावना पर विचार करने के लिए तैयार है, ताकि स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए, नो-फ्लाई ज़ोन, पृथ्वी पर आग्नेयास्त्र समझौते पर पर्यवेक्षकों, और समन्वित वितरण शामिल हैं। मानवीय सहायता। " विदेश विभाग ने यह भी कहा कि मॉस्को के साथ सहयोग "पृथ्वी पर स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सीरिया के राजनीतिक भविष्य के निपटान की दिशा में प्रगति की शुरुआत को चिह्नित करेगा। "
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में एक कुत्ता कार चलाता हुआ नजर आ रहा है। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसा वीडियो वायरल हो रहा है जो हर किसी को चौंका रहा है। इस वीडियो को देखकर इस पर भरोसा करना हर किसी के लिए आसान नहीं हो रहा है। दरअसल सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में एक कुत्ता कार चलाता हुआ नजर आ रहा है। इतना ही नहीं यह कुत्ता सड़क के बीचो बीच कार चलाता नजर आ रहा है। इस वायरल वीडियो में साफ साफ दिखाई दे रहा है कि एक कुत्ता मारुति 800 कार में ड्राइविंग सीट पर बैठा हुआ है और उसने स्टेयरिंग पकड़ा रखा है। वहीं, कार में मौजूद शख्स कुत्ते के बराबर वाली सीट पर है। इस वीडियो की खास बात यह है कि यह कुत्ता बड़े ही आराम से बिना किसी रुकावत के कार को चला रहा है। आपको बता दें कि यह वीडियो पूर्वोत्तर राज्य मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग का है। वहीं, सड़क पर एक कुत्ते को कार चलाता देखकर वहां खड़े एक व्यक्ति ने इस पूरे घटना का वीडियो बना लिया है, जो अब वायरल हो रहा है। खबर के अनुसार ये वीडियो शिलॉन्ग का है। हांलाकि बाद में पुलिस ने गाड़ी का नंबर निकाल कर गाड़ी के मालिक पर एक हजार रुपए का जु्र्माना लगा दिया है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में एक कुत्ता कार चलाता हुआ नजर आ रहा है। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसा वीडियो वायरल हो रहा है जो हर किसी को चौंका रहा है। इस वीडियो को देखकर इस पर भरोसा करना हर किसी के लिए आसान नहीं हो रहा है। दरअसल सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में एक कुत्ता कार चलाता हुआ नजर आ रहा है। इतना ही नहीं यह कुत्ता सड़क के बीचो बीच कार चलाता नजर आ रहा है। इस वायरल वीडियो में साफ साफ दिखाई दे रहा है कि एक कुत्ता मारुति आठ सौ कार में ड्राइविंग सीट पर बैठा हुआ है और उसने स्टेयरिंग पकड़ा रखा है। वहीं, कार में मौजूद शख्स कुत्ते के बराबर वाली सीट पर है। इस वीडियो की खास बात यह है कि यह कुत्ता बड़े ही आराम से बिना किसी रुकावत के कार को चला रहा है। आपको बता दें कि यह वीडियो पूर्वोत्तर राज्य मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग का है। वहीं, सड़क पर एक कुत्ते को कार चलाता देखकर वहां खड़े एक व्यक्ति ने इस पूरे घटना का वीडियो बना लिया है, जो अब वायरल हो रहा है। खबर के अनुसार ये वीडियो शिलॉन्ग का है। हांलाकि बाद में पुलिस ने गाड़ी का नंबर निकाल कर गाड़ी के मालिक पर एक हजार रुपए का जु्र्माना लगा दिया है।
उपन्यास जीवन के चित्रण से जीवन के चिंतन की ओर, जीवन के कर्म से जीवन के तत्व (दर्शन) की ओर, तथा जीवन की व्यापकता से जीवन की गहराई की र बढ़ा । उपन्यास में बौद्धिक घनता का प्राधान्य हो गया है । आलोच्य युग में उपन्यास में बौद्धिकता का प्राधान्य एक और दिशा में भी हुआ । प्रेमचन्द मानवतावादी थे, इस युग में अपेक्षतया मतवाद प्रबल हो उठा । मानवता से सहज सहानुभूति की अपेक्षा सिद्धांत - प्रियता बढ़ गई । इस सिद्धांतवादिता का आरम्भ, लेबल लगे उपन्यासों - 'दादा कॉमरेड', 'पार्टी कॉमरेड', 'जीने के लिए' से हुआ । इसलिए साम्यवादी उपन्यासों में प्रायः समाधान मिलते हैं परन्तु समाजविधान के प्रति संदेह वृत्ति के रूप में यत्किंचित् प्रश्नता के साथ । जैसा कि ऐंजेल्स ने कहा है --- "मेरी राय में वारन करवर्तन कर बर्जुश्रा जगत् की आशावादिता को उलट-पुलट कर, वर्तमान समाज व्यवस्था की चिरन्तनता में सन्देह के बीज बोकर, समाजवादी उद्देश्यपरक उपन्यास अपना उद्देश्य पूर्णतया प्राप्त कर लेता है, यद्यपि ऐसा करते समय लेखक कोई सुनिश्चित समाधान नहीं देता, और कभी-कभी तो इस या उस पक्ष का समर्थन तक नहीं करता - आलोच्य युग के ' समाजवादी उपन्यासों में इस कथन का पालन प्रायः नहीं हुआ । फिर भी, समाज के विधान और प्रचलित व्यवस्था के प्रति अनास्था से जनित विरोध-भावना यहाँ और भी अधिक है। इसलिए यहाँ भी समाज के चित्रण की अपेक्षा समाज की आलोचना तथा सिद्धांत प्रचारण का प्रामुख्य है । मनोविश्लेषणवादियों की जिज्ञासा का स्थान यहाँ आलोचना को मिल गया है। अतएव दोनों ही स्थितियों में उपन्यास में बौद्धिकता का प्राबल्य हुआ / इस मतवादिता या सिद्धांतवादिता के अग्रणी उपन्यासकार पहले यशपाल और राहुल रहे, बाद में नागार्जुन, अंचल, अमृतराय, भैरवप्रसाद गुप्त आदि भी इनसे मिल गए । इनमें सबसे अधिक प्रचार की सीमा तक पहुँची हुई सिद्धान्त-मुग्वरता राहुल के सामाजिक-ऐतिहासिक उपन्यासों में है । साम्यवादी सिद्धान्तों के विरोध में हिन्दू-जिसे सीमाओं में 'भारतीय' भी कहा जा सकता है - राष्ट्रवाद के प्रसार की मतवादिता से प्रेरित उपन्यासकारों में गुरुदत्त अग्रणी हैं। इनमें परम्परा के स्वीकार के साथ आधुनिक समाज की प्रखर आलोचना भी है । प्रचारात्मक विकलात्मकता उपर्युक्त प्रवृत्ति सभी उपन्यासकारों की सामान्य विशेषता है। प्रेमचन्द-युग से लोय युग के बहिर्मुखी अन्तर्मुखी तथा बहिरन्तरमुखी-रांगेय राघव, श्रमृतलाल नागर - उपन्यासों में समय की प्रगति तथा वैज्ञानिक अनुसंधानों के कारण अनुभवों तथा ज्ञान का विस्तार हुआ किन्तु अनुभूति तथा सहानुभूति का प्रायः नहीं। कि रस को क्षति पहुँची है । १. Ralph Fox : "The Novel and the People", p. 140-41,
उपन्यास जीवन के चित्रण से जीवन के चिंतन की ओर, जीवन के कर्म से जीवन के तत्व की ओर, तथा जीवन की व्यापकता से जीवन की गहराई की र बढ़ा । उपन्यास में बौद्धिक घनता का प्राधान्य हो गया है । आलोच्य युग में उपन्यास में बौद्धिकता का प्राधान्य एक और दिशा में भी हुआ । प्रेमचन्द मानवतावादी थे, इस युग में अपेक्षतया मतवाद प्रबल हो उठा । मानवता से सहज सहानुभूति की अपेक्षा सिद्धांत - प्रियता बढ़ गई । इस सिद्धांतवादिता का आरम्भ, लेबल लगे उपन्यासों - 'दादा कॉमरेड', 'पार्टी कॉमरेड', 'जीने के लिए' से हुआ । इसलिए साम्यवादी उपन्यासों में प्रायः समाधान मिलते हैं परन्तु समाजविधान के प्रति संदेह वृत्ति के रूप में यत्किंचित् प्रश्नता के साथ । जैसा कि ऐंजेल्स ने कहा है --- "मेरी राय में वारन करवर्तन कर बर्जुश्रा जगत् की आशावादिता को उलट-पुलट कर, वर्तमान समाज व्यवस्था की चिरन्तनता में सन्देह के बीज बोकर, समाजवादी उद्देश्यपरक उपन्यास अपना उद्देश्य पूर्णतया प्राप्त कर लेता है, यद्यपि ऐसा करते समय लेखक कोई सुनिश्चित समाधान नहीं देता, और कभी-कभी तो इस या उस पक्ष का समर्थन तक नहीं करता - आलोच्य युग के ' समाजवादी उपन्यासों में इस कथन का पालन प्रायः नहीं हुआ । फिर भी, समाज के विधान और प्रचलित व्यवस्था के प्रति अनास्था से जनित विरोध-भावना यहाँ और भी अधिक है। इसलिए यहाँ भी समाज के चित्रण की अपेक्षा समाज की आलोचना तथा सिद्धांत प्रचारण का प्रामुख्य है । मनोविश्लेषणवादियों की जिज्ञासा का स्थान यहाँ आलोचना को मिल गया है। अतएव दोनों ही स्थितियों में उपन्यास में बौद्धिकता का प्राबल्य हुआ / इस मतवादिता या सिद्धांतवादिता के अग्रणी उपन्यासकार पहले यशपाल और राहुल रहे, बाद में नागार्जुन, अंचल, अमृतराय, भैरवप्रसाद गुप्त आदि भी इनसे मिल गए । इनमें सबसे अधिक प्रचार की सीमा तक पहुँची हुई सिद्धान्त-मुग्वरता राहुल के सामाजिक-ऐतिहासिक उपन्यासों में है । साम्यवादी सिद्धान्तों के विरोध में हिन्दू-जिसे सीमाओं में 'भारतीय' भी कहा जा सकता है - राष्ट्रवाद के प्रसार की मतवादिता से प्रेरित उपन्यासकारों में गुरुदत्त अग्रणी हैं। इनमें परम्परा के स्वीकार के साथ आधुनिक समाज की प्रखर आलोचना भी है । प्रचारात्मक विकलात्मकता उपर्युक्त प्रवृत्ति सभी उपन्यासकारों की सामान्य विशेषता है। प्रेमचन्द-युग से लोय युग के बहिर्मुखी अन्तर्मुखी तथा बहिरन्तरमुखी-रांगेय राघव, श्रमृतलाल नागर - उपन्यासों में समय की प्रगति तथा वैज्ञानिक अनुसंधानों के कारण अनुभवों तथा ज्ञान का विस्तार हुआ किन्तु अनुभूति तथा सहानुभूति का प्रायः नहीं। कि रस को क्षति पहुँची है । एक. Ralph Fox : "The Novel and the People", p. एक सौ चालीस-इकतालीस,
चेक बाउंस के मामले में कोतवाली पुलिस ने मंगलवार शाम एक आरोपी को घर पर दबिश देकर गिरफ्तार किया है। आरोपी के खिलाफ कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। कोर्ट चेक बाउंस के मामले में आरोपी के खिलाफ दो बार गिरफ्तारी वारंट कर चुकी है। कोतवाली थाना प्रभारी सतीश कुमार यादव ने बताया कि विश्वकर्मा मंदिर के पास रहने वाले प्रकाश जांगिड़ के खिलाफ चेक बाउंस के मामले में कोर्ट ने अरेस्ट वारंट जारी किया था। आरोपी प्रकाश जांगिड़ लगातार फरार चल रहा था। मंगलवार दोपहर को कोतवाली पुलिस थाने के कॉन्स्टेबल प्रदीप कुमार को सूचना मिली थी कि आरोपी अपने घर में छुपा हुआ है। सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने आरोपी प्रकाश जांगिड़ के घर पर दबिश देते हुए उसे अरेस्ट कर लिया। थानाधिकारी यादव ने बताया कि प्रकाश जांगिड़ को एनआई एक्ट में गिरफ्तार किया गया है। जिसको कल दोपहर कोर्ट में पेश किया जाएगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
चेक बाउंस के मामले में कोतवाली पुलिस ने मंगलवार शाम एक आरोपी को घर पर दबिश देकर गिरफ्तार किया है। आरोपी के खिलाफ कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। कोर्ट चेक बाउंस के मामले में आरोपी के खिलाफ दो बार गिरफ्तारी वारंट कर चुकी है। कोतवाली थाना प्रभारी सतीश कुमार यादव ने बताया कि विश्वकर्मा मंदिर के पास रहने वाले प्रकाश जांगिड़ के खिलाफ चेक बाउंस के मामले में कोर्ट ने अरेस्ट वारंट जारी किया था। आरोपी प्रकाश जांगिड़ लगातार फरार चल रहा था। मंगलवार दोपहर को कोतवाली पुलिस थाने के कॉन्स्टेबल प्रदीप कुमार को सूचना मिली थी कि आरोपी अपने घर में छुपा हुआ है। सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने आरोपी प्रकाश जांगिड़ के घर पर दबिश देते हुए उसे अरेस्ट कर लिया। थानाधिकारी यादव ने बताया कि प्रकाश जांगिड़ को एनआई एक्ट में गिरफ्तार किया गया है। जिसको कल दोपहर कोर्ट में पेश किया जाएगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
दूरसंचार प्रणालियों के आगमन के बादलोगों के बीच संचार के अवसरों में काफी विस्तार हुआ है। फोन और इंटरनेट, ई-मेल और वीओआईपी टेलीफोनी ने पारस्परिक संदेश को सरल और त्वरित बना दिया है। अब लोग शायद ही कभी एक दूसरे को टेलीग्राम भेजते हैं, और पत्र अक्सर कम लिखते हैं। आज, संचार का सबसे लोकप्रिय माध्यम टेलीफोन है। इसके बिना, सबकुछ करना मुश्किल है, खासकर व्यापारिक लोग। आज रूस से आज दुनिया में किसी भी देश को बुलाओ।कोई समस्या नहीं चीन, यूएसए, फ्रांस या किसी अन्य देश को कॉल करने के तरीके के बारे में जानने के लिए, आप टेलीफोन निर्देशिकाओं के माध्यम से या इंटरनेट का उपयोग करके कॉल कर सकते हैं। किसी भी खोज इंजन का उपयोग करके, आपको तुरंत विभिन्न देशों के फोन कोड के बारे में पूरी जानकारी मिल जाएगी। चीन का जनवादी गणराज्य सिर्फ नहीं हैरूस का पड़ोसी, और यह भी एक बहुत ही महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है। यह कोई रहस्य नहीं है कि हमारे देश में बेड़े के बाजारों में बेचे जाने वाले अधिकांश सामान और यहां तक कि कुलीन शॉपिंग सेंटर में भी मुख्य रूप से चीन से लाया जाता है। इसलिए, चीन को कैसे कॉल करना है, आज सवाल मुख्य रूप से उद्यमियों में रुचि रखते हैं। कुछ व्यवसायी खुद चीन के लिए उड़ान भरते हैं औरआपूर्तिकर्ताओं के साथ आमने-सामने बातचीत करें। लेकिन ज्यादातर उद्यमी इंटरनेट या फोन के माध्यम से ऑर्डर करते हैं। विवरण स्पष्ट करना, ऑर्डर के गठन और आंदोलन की निगरानी करना, नए आपूर्तिकर्ताओं की खोज - इन सभी के लिए, व्यवसायियों को यह जानने की जरूरत है कि चीन को सही तरीके से कैसे कॉल करें। पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना को कॉल करने के लिए,आपको अंतरराष्ट्रीय कॉल के नियमों का उपयोग करने की आवश्यकता है। इन नियमों के अनुसार, चीन में कॉल करने से पहले प्रत्येक देश का अपना डिजिटल कोड (आमतौर पर तीन अंक) होता है, इसे पहले से ही जाना जाना चाहिए। लेकिन इससे पहले कि आप इस कोड को टाइप करें, आपको बाहर निकलने की आवश्यकता हैअंतरराष्ट्रीय लाइन पर। स्थानीय शाखा में लैंडलाइन या पेफोन से कॉल करते समय, आपको 8 दबाएं, डायल टोन, 10 (अंतर्राष्ट्रीय एक्सेस कोड) की प्रतीक्षा करें और फिर देश कोड 86 दर्ज करें, फिर स्थानीय कोड और फोन नंबर दर्ज करें। मोबाइल फोन से या उसके माध्यम से कॉल करते समयकंप्यूटर, सेलुलर पर चीन को फोन करने से पहले, अंतरराष्ट्रीय लाइन में प्रवेश करने की कोई आवश्यकता नहीं है, आप बस एक अंतरराष्ट्रीय प्रारूप में फोन नंबर रिकॉर्ड करते हैं।
दूरसंचार प्रणालियों के आगमन के बादलोगों के बीच संचार के अवसरों में काफी विस्तार हुआ है। फोन और इंटरनेट, ई-मेल और वीओआईपी टेलीफोनी ने पारस्परिक संदेश को सरल और त्वरित बना दिया है। अब लोग शायद ही कभी एक दूसरे को टेलीग्राम भेजते हैं, और पत्र अक्सर कम लिखते हैं। आज, संचार का सबसे लोकप्रिय माध्यम टेलीफोन है। इसके बिना, सबकुछ करना मुश्किल है, खासकर व्यापारिक लोग। आज रूस से आज दुनिया में किसी भी देश को बुलाओ।कोई समस्या नहीं चीन, यूएसए, फ्रांस या किसी अन्य देश को कॉल करने के तरीके के बारे में जानने के लिए, आप टेलीफोन निर्देशिकाओं के माध्यम से या इंटरनेट का उपयोग करके कॉल कर सकते हैं। किसी भी खोज इंजन का उपयोग करके, आपको तुरंत विभिन्न देशों के फोन कोड के बारे में पूरी जानकारी मिल जाएगी। चीन का जनवादी गणराज्य सिर्फ नहीं हैरूस का पड़ोसी, और यह भी एक बहुत ही महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है। यह कोई रहस्य नहीं है कि हमारे देश में बेड़े के बाजारों में बेचे जाने वाले अधिकांश सामान और यहां तक कि कुलीन शॉपिंग सेंटर में भी मुख्य रूप से चीन से लाया जाता है। इसलिए, चीन को कैसे कॉल करना है, आज सवाल मुख्य रूप से उद्यमियों में रुचि रखते हैं। कुछ व्यवसायी खुद चीन के लिए उड़ान भरते हैं औरआपूर्तिकर्ताओं के साथ आमने-सामने बातचीत करें। लेकिन ज्यादातर उद्यमी इंटरनेट या फोन के माध्यम से ऑर्डर करते हैं। विवरण स्पष्ट करना, ऑर्डर के गठन और आंदोलन की निगरानी करना, नए आपूर्तिकर्ताओं की खोज - इन सभी के लिए, व्यवसायियों को यह जानने की जरूरत है कि चीन को सही तरीके से कैसे कॉल करें। पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना को कॉल करने के लिए,आपको अंतरराष्ट्रीय कॉल के नियमों का उपयोग करने की आवश्यकता है। इन नियमों के अनुसार, चीन में कॉल करने से पहले प्रत्येक देश का अपना डिजिटल कोड होता है, इसे पहले से ही जाना जाना चाहिए। लेकिन इससे पहले कि आप इस कोड को टाइप करें, आपको बाहर निकलने की आवश्यकता हैअंतरराष्ट्रीय लाइन पर। स्थानीय शाखा में लैंडलाइन या पेफोन से कॉल करते समय, आपको आठ दबाएं, डायल टोन, दस की प्रतीक्षा करें और फिर देश कोड छियासी दर्ज करें, फिर स्थानीय कोड और फोन नंबर दर्ज करें। मोबाइल फोन से या उसके माध्यम से कॉल करते समयकंप्यूटर, सेलुलर पर चीन को फोन करने से पहले, अंतरराष्ट्रीय लाइन में प्रवेश करने की कोई आवश्यकता नहीं है, आप बस एक अंतरराष्ट्रीय प्रारूप में फोन नंबर रिकॉर्ड करते हैं।
भारत और न्यूजीलैंड के बीच साउथम्पटन के द रोज बाउल स्टेडियम में होने वाले विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल (WTC Final) मुकाबले के पहले दिन का पहला सेशन बारिश की भेंट चढ़ गया। मैच के पहले बिना एक भी गेंद का खेल हुए लंच की घोषण कर दी गई। विराट कोहली (Virat Kohli) और केन विलियमसन (Kane Williamson) की टीमों का मुकाबला देखने को बेताब क्रिकेट फैंस सोशल मीडिया पर अपना गुस्सा दिखा रहे हैं। हालांकि कई फैंस इस पूरी स्थिति के हास्यापद पहलू को देखकर मीम्स के जरिए आईसीसी को ट्रोल कर रहे हैं। दरअसल ये दूसरा मौका है जब कोई बड़ा आईसीसी मैच या टूर्नामेंट इंग्लैंड के अनिश्चित मौसम की भेंट चढ़ा है। साल 2019 विश्व कप के दौरान भी कई मैच बारिश के चलते रद्द हुए थे। गौरतलब है कि भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेला गया सेमीफाइनल मैच भी बारिश से प्रभावित हुए था। दो दिन तक चले उस मुकाबले में जीती कीवी टीम की हुई थी। भारत और न्यूजीलैंड के बीच डब्ल्यूटीसी के पहले सीजन का फाइनल मुकाबला आज से शुरू होना है लेकिन खिताबी मुकाबले के पहले ही दिन बारिश ने खलल डाला जिस कारण मुकाबले में टॉस भी नहीं हो सका है। भारत ने गुरूवार को ही इस मुकाबले के लिए प्लेइंग इलेवन में घोषणा की थी जिसमें उसने दो स्पिनरों और तीन तेज गेंदबाजों को शामिल किया। इस मुकाबले से पहले न्यूजीलैंड ने जहां हाल ही में इंग्लैंड को दो मैचों की टेस्ट सीरीज में 1-0 से हराया था जबकि भारतीय टीम को खिताबी मुकाबले से पहले अभ्यास मैच खेलने का भी मौका नहीं मिला।
भारत और न्यूजीलैंड के बीच साउथम्पटन के द रोज बाउल स्टेडियम में होने वाले विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल मुकाबले के पहले दिन का पहला सेशन बारिश की भेंट चढ़ गया। मैच के पहले बिना एक भी गेंद का खेल हुए लंच की घोषण कर दी गई। विराट कोहली और केन विलियमसन की टीमों का मुकाबला देखने को बेताब क्रिकेट फैंस सोशल मीडिया पर अपना गुस्सा दिखा रहे हैं। हालांकि कई फैंस इस पूरी स्थिति के हास्यापद पहलू को देखकर मीम्स के जरिए आईसीसी को ट्रोल कर रहे हैं। दरअसल ये दूसरा मौका है जब कोई बड़ा आईसीसी मैच या टूर्नामेंट इंग्लैंड के अनिश्चित मौसम की भेंट चढ़ा है। साल दो हज़ार उन्नीस विश्व कप के दौरान भी कई मैच बारिश के चलते रद्द हुए थे। गौरतलब है कि भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेला गया सेमीफाइनल मैच भी बारिश से प्रभावित हुए था। दो दिन तक चले उस मुकाबले में जीती कीवी टीम की हुई थी। भारत और न्यूजीलैंड के बीच डब्ल्यूटीसी के पहले सीजन का फाइनल मुकाबला आज से शुरू होना है लेकिन खिताबी मुकाबले के पहले ही दिन बारिश ने खलल डाला जिस कारण मुकाबले में टॉस भी नहीं हो सका है। भारत ने गुरूवार को ही इस मुकाबले के लिए प्लेइंग इलेवन में घोषणा की थी जिसमें उसने दो स्पिनरों और तीन तेज गेंदबाजों को शामिल किया। इस मुकाबले से पहले न्यूजीलैंड ने जहां हाल ही में इंग्लैंड को दो मैचों की टेस्ट सीरीज में एक-शून्य से हराया था जबकि भारतीय टीम को खिताबी मुकाबले से पहले अभ्यास मैच खेलने का भी मौका नहीं मिला।
लुंगी नगिडी, डेविड विले और शार्दुल ठाकुर पर एक बार फिर तेज गेंदबाजी आक्रमण की जिम्मेदारी होगी। चेन्नई के लिए डेथ ओवरों में गेंदबाजी उसकी अभी भी चिंता बनी हुई है। पिछले मैच में डेविड विले को मौका मिला था, आज उनकी जगह लुंगी की दोबारा टीम में वापसी हो सकती है। चेन्नई सुपर किंग्सः महेंद्र सिंह धोनी (कप्तान/विकेटकीपर), रवींद्र जडेजा, सुरेश रैना, ड्वेन ब्रावो, शेन वाटसन, अंबाती रायुडू, हरभजन सिंह, सैम बिलिंग्स, लुंगी नगिदी, , कर्ण शर्मा, शार्दुल ठाकुर।
लुंगी नगिडी, डेविड विले और शार्दुल ठाकुर पर एक बार फिर तेज गेंदबाजी आक्रमण की जिम्मेदारी होगी। चेन्नई के लिए डेथ ओवरों में गेंदबाजी उसकी अभी भी चिंता बनी हुई है। पिछले मैच में डेविड विले को मौका मिला था, आज उनकी जगह लुंगी की दोबारा टीम में वापसी हो सकती है। चेन्नई सुपर किंग्सः महेंद्र सिंह धोनी , रवींद्र जडेजा, सुरेश रैना, ड्वेन ब्रावो, शेन वाटसन, अंबाती रायुडू, हरभजन सिंह, सैम बिलिंग्स, लुंगी नगिदी, , कर्ण शर्मा, शार्दुल ठाकुर।
आपने अब तक लोगों को इंसानों के जन्मदिन को सेलिब्रेट करते हुए देखा होगा लेकिन क्या आपने कभी देखा है कि कुछ लोग सांप के जन्मदिन को सेलिब्रेट करे। दरअसल एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और यह नाग पंचमी का बताया जा रहा है। इस वीडियो में आप देख सकते है कि कुछ युवक एक सांप के लिए हैप्पी बर्थडे वाला गाना गा रहे है। इस वीडियो को लोग जमकर शेयर कर रहे है और इस पर जमकर कमेंट भी कर रहे है।
आपने अब तक लोगों को इंसानों के जन्मदिन को सेलिब्रेट करते हुए देखा होगा लेकिन क्या आपने कभी देखा है कि कुछ लोग सांप के जन्मदिन को सेलिब्रेट करे। दरअसल एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और यह नाग पंचमी का बताया जा रहा है। इस वीडियो में आप देख सकते है कि कुछ युवक एक सांप के लिए हैप्पी बर्थडे वाला गाना गा रहे है। इस वीडियो को लोग जमकर शेयर कर रहे है और इस पर जमकर कमेंट भी कर रहे है।
LUCKNOW: राजधानी में शनिवार को 256 लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई और 344 मरीजों ने कोरोना को मात दी। वहीं 4 लोगों की कोरोना से मौत हुई है। कोविड प्रोटोकाल के तहत शनिवार को 104 मरीजों को अस्पताल आवंटित किए गए और देर शाम तक 54 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया। 50 मरीजों ने होम आइसोलेशन का अनुरोध किया। राजधानी में एक्टिव होम आइसोलेट मरीजों की संख्या अब 2,181 हो गई है जबकि 52,952 मरीज ठीक हो चुके हैं। सर्विलांस एवं कांटेक्ट ट्रेसिंग के आधार पर टीमों ने 11,338 लोगों के सैंपल लेकर जांच के लिए केजीएमयू भेजे। कोविड कंट्रोल रूम से होम आइसोलेशन के 2073 मरीजों से उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली गई है और हेलो डॉक्टर सेवा पर 97 मरीजों ने स्वास्थ्य संबंधी परामर्श लिया है। नोट- अन्य एरिया में भी कोरोना संक्रमित मिले हैं। डीएम अभिषेक प्रकाश ने कलेक्ट्रेट सभागार में कोविड नियंत्रण से संबंधित बैठक की, जिसमें उन्होंने हॉटस्पॉट क्षेत्रों में कैंप लगाकर टारगेट टेस्टिंग करने तथा मार्केट, गेस्ट हाउस, मैरिज हाल व धर्मस्थलों में सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन कराने के दिये निर्देश दिए। डीएम ने बैठक में शामिल संभ्रांत लोगों से अनुरोध किया कि मार्केट, धर्मस्थलों व मैरिज हाल आदि में कोविड प्रोटोकॉल व सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन कड़ाई से कराया जाए व मास्क पहनने को अनिवार्य किया जाए। डीएम ने यह भी निर्देश दिए कि कोविड 19 के बारे में जनता को भी जागरूक किया जाए और लाउडस्पीकर व एनाउंसमेंट के माध्यम से मास्क पहनने व सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन करने के लिए प्रेरित भी किया जाए। डीएम ने बताया कि कोविड 19 के प्रसार को रोकने के लिए मार्केट, धर्मस्थलों, मॉल व मैरिज हाल आदि में सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क व सेनेटाइजर का प्रयोग व कोविड हेल्पडेस्क का प्रयोग आवश्यक है। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी प्रभास कुमार, मुख्य चिकित्साधिकारी डा। संजय भटनागर, अपर जिलाधिकारी पूर्वी केपी सिंह आदि मौजूद रहे।
LUCKNOW: राजधानी में शनिवार को दो सौ छप्पन लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई और तीन सौ चौंतालीस मरीजों ने कोरोना को मात दी। वहीं चार लोगों की कोरोना से मौत हुई है। कोविड प्रोटोकाल के तहत शनिवार को एक सौ चार मरीजों को अस्पताल आवंटित किए गए और देर शाम तक चौवन मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया। पचास मरीजों ने होम आइसोलेशन का अनुरोध किया। राजधानी में एक्टिव होम आइसोलेट मरीजों की संख्या अब दो,एक सौ इक्यासी हो गई है जबकि बावन,नौ सौ बावन मरीज ठीक हो चुके हैं। सर्विलांस एवं कांटेक्ट ट्रेसिंग के आधार पर टीमों ने ग्यारह,तीन सौ अड़तीस लोगों के सैंपल लेकर जांच के लिए केजीएमयू भेजे। कोविड कंट्रोल रूम से होम आइसोलेशन के दो हज़ार तिहत्तर मरीजों से उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली गई है और हेलो डॉक्टर सेवा पर सत्तानवे मरीजों ने स्वास्थ्य संबंधी परामर्श लिया है। नोट- अन्य एरिया में भी कोरोना संक्रमित मिले हैं। डीएम अभिषेक प्रकाश ने कलेक्ट्रेट सभागार में कोविड नियंत्रण से संबंधित बैठक की, जिसमें उन्होंने हॉटस्पॉट क्षेत्रों में कैंप लगाकर टारगेट टेस्टिंग करने तथा मार्केट, गेस्ट हाउस, मैरिज हाल व धर्मस्थलों में सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन कराने के दिये निर्देश दिए। डीएम ने बैठक में शामिल संभ्रांत लोगों से अनुरोध किया कि मार्केट, धर्मस्थलों व मैरिज हाल आदि में कोविड प्रोटोकॉल व सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन कड़ाई से कराया जाए व मास्क पहनने को अनिवार्य किया जाए। डीएम ने यह भी निर्देश दिए कि कोविड उन्नीस के बारे में जनता को भी जागरूक किया जाए और लाउडस्पीकर व एनाउंसमेंट के माध्यम से मास्क पहनने व सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन करने के लिए प्रेरित भी किया जाए। डीएम ने बताया कि कोविड उन्नीस के प्रसार को रोकने के लिए मार्केट, धर्मस्थलों, मॉल व मैरिज हाल आदि में सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क व सेनेटाइजर का प्रयोग व कोविड हेल्पडेस्क का प्रयोग आवश्यक है। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी प्रभास कुमार, मुख्य चिकित्साधिकारी डा। संजय भटनागर, अपर जिलाधिकारी पूर्वी केपी सिंह आदि मौजूद रहे।
जैसा कि हम जानते हैं, 19 मई को सातवें और अंतिम 59 सीटों के लिए मतदान संपन्न होने के साथ ही लोकसभा चुनाव का समापन हो जाएगा और 23 मई को नतीजे आने की बात कही गई है। लेकिन परिस्थितियाँ कुछ अलग बनीं तो चुनाव परिणाम 24 मई को भी आ सकते हैं। अर्थात, नरेंद्र मोदी फिर से प्रधानमंत्री बनेंगे या नहीं, यह जानने के 24 मई तक इन्तजार करना पड़ सकता है। कुल मिलकर बात यह है कि अगर चुनाव परिणाम के आँकड़े निर्णायक रहे तो 23 मई को सब कुछ साफ़ पता चल जाएगा लेकिन क़रीबी लड़ाई की स्थिति में आपको एक दिन और इन्तजार करना पड़ सकता है। ख़बरों के अनुसार, 23 मई की जगह अंतिम नतीजे 24 मई को प्राप्त हो सकते हैं। आंध्र के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने चुनाव ख़त्म होने के बाद 21 मई को सभी विपक्षी दलों की बैठक बुलाने की पेशकश की है। इस सम्बन्ध में उन्होंने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी से मुलाक़ात भी की। सोनिया ने विपक्षी दलों को यह सन्देश देने की कोशिश की है कि भले ही वे सभी चुनाव पूर्व गठबंधन का हिस्सा न रहे हों लेकिन परिणाम आने के बाद मिली-जुली सरकार के लिए सभी को तैयार रहना चाहिए। कर्नाटक के सीएम कुमारस्वामी और हरियाणा के नेता अभय चौटाला पूर्व में मायावती को प्रधानमंत्री बनाने की बात कह चुके हैं। ऐसे में ऊँट किस करवट बैठेगा, ये मई की 23 या 24 तारीख़ को ही पता चलेगा।
जैसा कि हम जानते हैं, उन्नीस मई को सातवें और अंतिम उनसठ सीटों के लिए मतदान संपन्न होने के साथ ही लोकसभा चुनाव का समापन हो जाएगा और तेईस मई को नतीजे आने की बात कही गई है। लेकिन परिस्थितियाँ कुछ अलग बनीं तो चुनाव परिणाम चौबीस मई को भी आ सकते हैं। अर्थात, नरेंद्र मोदी फिर से प्रधानमंत्री बनेंगे या नहीं, यह जानने के चौबीस मई तक इन्तजार करना पड़ सकता है। कुल मिलकर बात यह है कि अगर चुनाव परिणाम के आँकड़े निर्णायक रहे तो तेईस मई को सब कुछ साफ़ पता चल जाएगा लेकिन क़रीबी लड़ाई की स्थिति में आपको एक दिन और इन्तजार करना पड़ सकता है। ख़बरों के अनुसार, तेईस मई की जगह अंतिम नतीजे चौबीस मई को प्राप्त हो सकते हैं। आंध्र के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने चुनाव ख़त्म होने के बाद इक्कीस मई को सभी विपक्षी दलों की बैठक बुलाने की पेशकश की है। इस सम्बन्ध में उन्होंने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी से मुलाक़ात भी की। सोनिया ने विपक्षी दलों को यह सन्देश देने की कोशिश की है कि भले ही वे सभी चुनाव पूर्व गठबंधन का हिस्सा न रहे हों लेकिन परिणाम आने के बाद मिली-जुली सरकार के लिए सभी को तैयार रहना चाहिए। कर्नाटक के सीएम कुमारस्वामी और हरियाणा के नेता अभय चौटाला पूर्व में मायावती को प्रधानमंत्री बनाने की बात कह चुके हैं। ऐसे में ऊँट किस करवट बैठेगा, ये मई की तेईस या चौबीस तारीख़ को ही पता चलेगा।
Bangladesh vs New Zealand, 4th T20I: बांग्लादेश और न्यूजीलैंड के बीच 8 सितंबर को शेर-ए-बांग्ला नेशनल स्टेडियम (Shere Bangla National Stadium, Dhaka) में टी20 सीरीज का चौथा मुकाबला खेला गया, जिसमें बांग्लादेश ने इतिहास रच दिया. मेजबान टीम ने न्यूजीलैंड को इस मैच में 6 विकेट से मात देकर सीरीज पर 3-1 से कब्जा जमा लिया. इसी के साथ बांग्लादेश ने कीवी टीम के खिलाफ पहली टी20 सीरीज अपने नाम कर ली है. इससे पहले बांग्लादेश ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहली बार अपने घर में टी20 सीरीज जीती थी. अब न्यूजीलैंड के खिलाफ भी बांग्लादेश ने यह कारनामा किया है. टी20 विश्व कप से ठीक पहले बांग्लादेश का ऐसा प्रदर्शन सभी बड़ी टीमों के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है. न्यूजीलैंड चौथे टी20 मैच में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 19.3 ओवर में महज 93 रन पर सिमट गया. टीम को 16 के स्कोर तक रचिन रविंद्र (0) और फिन एलेन (12) के रूप में दो बड़े झटके लग चुके थे. इसके बाद कप्तान टॉम लाथम ने विल यंग के साथ 35 रन की साझेदारी की, लेकिन इसके बाद टीम लड़खड़ती गई. लाथम ने 21, जबकि विल यंग ने 6 बाउंड्री की मदद से सर्वाधिक 46 रन बनाए. न्यूजीलैंड के 8 बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा भी ना छू सके. आलम ये रहा कि पूरी पारी में सिर्फ 2 छक्के और 6 चौके ही देखने को मिले. विपक्षी टीम की ओर से नसुम अहमद और मुस्तफिजुर रहमान ने 4-4 विकेट अपने नाम किए. टारगेट का पीछा करते हुए बांग्लादेश ने धीमी रफ्तार से बल्लेबाजी की. मोहम्मद नईम ने 29 रन बनाए. टीम 14.3 ओवर में 67 के स्कोर तक 4 विकेट गंवा चुकी थी. यहां से कप्तान महमदुल्लाह ने अफीफ हुसैन के साथ अटूट साझेदारी करते हुए 5 गेंदें शेष रहते बांग्लादेश को जीत दिला दी. महमदुल्लाह ने 48 बॉल में 3 बाउंड्री की मदद से नाबाद 43 रन बनाए. न्यूजीलैंड की तरफ से एजाज पटेल ने 2, जबकि Cole McConchie ने 1 शिकार किया. 5 मुकाबलों की सीरीज का पहला मैच बांग्लादेश ने 7 विकेट, जबकि दूसरा 4 रन से अपने नाम किया था. इसके बाद न्यूजीलैंड ने तीसरे मुकाबले में 52 रन से जीत दर्ज की थी. अब अंतिम मैच इसी मैदान पर 10 सितंबर को खेला जाना है.
Bangladesh vs New Zealand, चारth TबीसI: बांग्लादेश और न्यूजीलैंड के बीच आठ सितंबर को शेर-ए-बांग्ला नेशनल स्टेडियम में टीबीस सीरीज का चौथा मुकाबला खेला गया, जिसमें बांग्लादेश ने इतिहास रच दिया. मेजबान टीम ने न्यूजीलैंड को इस मैच में छः विकेट से मात देकर सीरीज पर तीन-एक से कब्जा जमा लिया. इसी के साथ बांग्लादेश ने कीवी टीम के खिलाफ पहली टीबीस सीरीज अपने नाम कर ली है. इससे पहले बांग्लादेश ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहली बार अपने घर में टीबीस सीरीज जीती थी. अब न्यूजीलैंड के खिलाफ भी बांग्लादेश ने यह कारनामा किया है. टीबीस विश्व कप से ठीक पहले बांग्लादेश का ऐसा प्रदर्शन सभी बड़ी टीमों के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है. न्यूजीलैंड चौथे टीबीस मैच में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए उन्नीस.तीन ओवर में महज तिरानवे रन पर सिमट गया. टीम को सोलह के स्कोर तक रचिन रविंद्र और फिन एलेन के रूप में दो बड़े झटके लग चुके थे. इसके बाद कप्तान टॉम लाथम ने विल यंग के साथ पैंतीस रन की साझेदारी की, लेकिन इसके बाद टीम लड़खड़ती गई. लाथम ने इक्कीस, जबकि विल यंग ने छः बाउंड्री की मदद से सर्वाधिक छियालीस रन बनाए. न्यूजीलैंड के आठ बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा भी ना छू सके. आलम ये रहा कि पूरी पारी में सिर्फ दो छक्के और छः चौके ही देखने को मिले. विपक्षी टीम की ओर से नसुम अहमद और मुस्तफिजुर रहमान ने चार-चार विकेट अपने नाम किए. टारगेट का पीछा करते हुए बांग्लादेश ने धीमी रफ्तार से बल्लेबाजी की. मोहम्मद नईम ने उनतीस रन बनाए. टीम चौदह.तीन ओवर में सरसठ के स्कोर तक चार विकेट गंवा चुकी थी. यहां से कप्तान महमदुल्लाह ने अफीफ हुसैन के साथ अटूट साझेदारी करते हुए पाँच गेंदें शेष रहते बांग्लादेश को जीत दिला दी. महमदुल्लाह ने अड़तालीस बॉल में तीन बाउंड्री की मदद से नाबाद तैंतालीस रन बनाए. न्यूजीलैंड की तरफ से एजाज पटेल ने दो, जबकि Cole McConchie ने एक शिकार किया. पाँच मुकाबलों की सीरीज का पहला मैच बांग्लादेश ने सात विकेट, जबकि दूसरा चार रन से अपने नाम किया था. इसके बाद न्यूजीलैंड ने तीसरे मुकाबले में बावन रन से जीत दर्ज की थी. अब अंतिम मैच इसी मैदान पर दस सितंबर को खेला जाना है.
केरल के वायनाड में नोरोवायरस (Norovirus) की पुष्टि हुई, जानिए क्या है नोरोवायरस? केरल के वायनाड जिले में नोरोवायरस (Norovirus) के पहले मामले की पुष्टि हुई है। - नोरोवायरस एक पशु जनित रोग है। यह दूषित पानी और भोजन के माध्यम से फैलता है। - मामले की पुष्टि के बाद, स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने दिशानिर्देश जारी किए और लोगों से इसके लिए सतर्क रहने का आग्रह किया। - लोगों को निवारक गतिविधियों को तेज करने और बीमारी के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए निर्देशित किया गया है। नोरोवायरस क्या है? नोरोवायरस वायरस का एक समूह है, जो गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल बीमारी का कारण बनता है। यह वायरस पेट और आंतों की परत में सूजन, गंभीर उल्टी और दस्त का कारण बनता है। स्वस्थ लोगों पर इस वायरस का कोई खास प्रभाव नहीं पड़ता है। हालांकि, यह बुजुर्गों, छोटे बच्चों और अन्य सह-रुग्णता (comorbidities) वाले लोगों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। यह बीमारी कैसे फैली? यह वायरस बहुत आसानी से और तेजी से फैलता है। यह संक्रमित लोगों से दूसरे लोगों में फैलता है जब सीधा संपर्क होता है, साथ ही दूषित खाद्य पदार्थों और सतहों के माध्यम से भी फैलता है। यह इस बीमारी की शुरुआत के बाद दो दिनों तक फैल सकता है। इस तरह का प्रकोप अक्सर नवंबर से अप्रैल के बीच होता है। - नोरोवायरस के सामान्य लक्षणों में पेट दर्द, दस्त, बुखार, उल्टी, सिरदर्द, मतली और शरीर में दर्द शामिल हैं। - गाइडलाइंस के मुताबिक संक्रमित लोगों को घर पर आराम करना चाहिए और ORS का घोल और उबला हुआ पानी पीना चाहिए। - एक निवारक कदम में, लोगों को अपनी व्यक्तिगत स्वच्छता के साथ-साथ आसपास पर्यावरणीय स्वच्छता का उचित ध्यान रखना चाहिए। - जानवरों के संपर्क में आने वाले लोगों को विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है। Tags:Hindi Current Affairs , Norovirus , Norovirus in Hindi , Norovirus in India , Norovirus Kya Hai? , What is Norovirus in Hindi? , What is Norovirus? , नोरोवायरस , नोरोवायरस क्या है?
केरल के वायनाड में नोरोवायरस की पुष्टि हुई, जानिए क्या है नोरोवायरस? केरल के वायनाड जिले में नोरोवायरस के पहले मामले की पुष्टि हुई है। - नोरोवायरस एक पशु जनित रोग है। यह दूषित पानी और भोजन के माध्यम से फैलता है। - मामले की पुष्टि के बाद, स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने दिशानिर्देश जारी किए और लोगों से इसके लिए सतर्क रहने का आग्रह किया। - लोगों को निवारक गतिविधियों को तेज करने और बीमारी के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए निर्देशित किया गया है। नोरोवायरस क्या है? नोरोवायरस वायरस का एक समूह है, जो गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल बीमारी का कारण बनता है। यह वायरस पेट और आंतों की परत में सूजन, गंभीर उल्टी और दस्त का कारण बनता है। स्वस्थ लोगों पर इस वायरस का कोई खास प्रभाव नहीं पड़ता है। हालांकि, यह बुजुर्गों, छोटे बच्चों और अन्य सह-रुग्णता वाले लोगों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। यह बीमारी कैसे फैली? यह वायरस बहुत आसानी से और तेजी से फैलता है। यह संक्रमित लोगों से दूसरे लोगों में फैलता है जब सीधा संपर्क होता है, साथ ही दूषित खाद्य पदार्थों और सतहों के माध्यम से भी फैलता है। यह इस बीमारी की शुरुआत के बाद दो दिनों तक फैल सकता है। इस तरह का प्रकोप अक्सर नवंबर से अप्रैल के बीच होता है। - नोरोवायरस के सामान्य लक्षणों में पेट दर्द, दस्त, बुखार, उल्टी, सिरदर्द, मतली और शरीर में दर्द शामिल हैं। - गाइडलाइंस के मुताबिक संक्रमित लोगों को घर पर आराम करना चाहिए और ORS का घोल और उबला हुआ पानी पीना चाहिए। - एक निवारक कदम में, लोगों को अपनी व्यक्तिगत स्वच्छता के साथ-साथ आसपास पर्यावरणीय स्वच्छता का उचित ध्यान रखना चाहिए। - जानवरों के संपर्क में आने वाले लोगों को विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है। Tags:Hindi Current Affairs , Norovirus , Norovirus in Hindi , Norovirus in India , Norovirus Kya Hai? , What is Norovirus in Hindi? , What is Norovirus? , नोरोवायरस , नोरोवायरस क्या है?
इंटीरियर में, खिंचाव छत की बनावट और रंगकोई छोटा महत्व नहीं है, क्योंकि कुछ मामलों में उत्पाद कमरे के समग्र डिजाइन में फिट नहीं हो सकता है। इसलिए, आपको उन बुनियादी नियमों को जानने की जरूरत है जो आपको सही विकल्प चुनने में मदद करेंगे। किसी भी परिदृश्य में कैनवास की टोन कमरे के सामान्य शैली से अलग नहीं होनी चाहिए। इस प्रकार, यह बहुत चमकीले रंगों का चयन करने के लिए अनुशंसित नहीं है, अगर पूरे कमरे को शांत रंगों के साथ क्लासिक शैली में सजाया गया है। खिंचाव छत की स्थापना के लिए किया जाता है ताकि कमरे के कार्यात्मक संबंधों पर जोर देना संभव हो सके। यही है, अपार्टमेंट या घर के किसी विशेष भाग के उद्देश्य के आधार पर कुछ रंग तराजू का चयन किया जाना चाहिए। आजकल, न केवल खिंचाव छत का रंग, बल्कि यह भीइसकी बनावट में कई विकल्प हो सकते हैं नाइटक्लब के डिजाइन में इर्रियल रूपों को व्यापक वितरण प्राप्त हुआ है। कई उत्पादों की मदद से आप भविष्य के शहरों के वातावरण का निर्माण कर सकते हैं। विभिन्न विचारों और रंगीन टोन के कारण इस तरह के विचारों को महसूस किया जा सकता है। यह संभावना नहीं है कि ऐसी परिष्करण सामग्री होगी जो ऐसी कई रंगों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकती है। इस मामले में पैलेट व्यावहारिक रूप से कोई सीमा नहीं है, जो खरीदारों के द्वारा सबसे पहले की सराहना करते हैं। इष्टतम विकल्प एक साटन बनावट हैखिंचाव छत, प्रकाश चमक खेलना यह पराबैंगनी किरणों को प्रतिबिंबित नहीं करता है, लेकिन इसके नरम चमक के लिए प्रसिद्ध है आधुनिकता और साहस "मेटैलिक" की बनावट को खड़ा करते हैं, जिससे धातु चमक दूर हो जाता है। हालांकि, वास्तव में, यह असाधारण मामलों में उपयोग किया जाता है जब कुछ सार्वजनिक स्थान को औपचारिक रूप देने की आवश्यकता होती है। निजी घरों में, इस तरह के कैनवास शायद ही कभी इस्तेमाल किया जाता है।
इंटीरियर में, खिंचाव छत की बनावट और रंगकोई छोटा महत्व नहीं है, क्योंकि कुछ मामलों में उत्पाद कमरे के समग्र डिजाइन में फिट नहीं हो सकता है। इसलिए, आपको उन बुनियादी नियमों को जानने की जरूरत है जो आपको सही विकल्प चुनने में मदद करेंगे। किसी भी परिदृश्य में कैनवास की टोन कमरे के सामान्य शैली से अलग नहीं होनी चाहिए। इस प्रकार, यह बहुत चमकीले रंगों का चयन करने के लिए अनुशंसित नहीं है, अगर पूरे कमरे को शांत रंगों के साथ क्लासिक शैली में सजाया गया है। खिंचाव छत की स्थापना के लिए किया जाता है ताकि कमरे के कार्यात्मक संबंधों पर जोर देना संभव हो सके। यही है, अपार्टमेंट या घर के किसी विशेष भाग के उद्देश्य के आधार पर कुछ रंग तराजू का चयन किया जाना चाहिए। आजकल, न केवल खिंचाव छत का रंग, बल्कि यह भीइसकी बनावट में कई विकल्प हो सकते हैं नाइटक्लब के डिजाइन में इर्रियल रूपों को व्यापक वितरण प्राप्त हुआ है। कई उत्पादों की मदद से आप भविष्य के शहरों के वातावरण का निर्माण कर सकते हैं। विभिन्न विचारों और रंगीन टोन के कारण इस तरह के विचारों को महसूस किया जा सकता है। यह संभावना नहीं है कि ऐसी परिष्करण सामग्री होगी जो ऐसी कई रंगों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकती है। इस मामले में पैलेट व्यावहारिक रूप से कोई सीमा नहीं है, जो खरीदारों के द्वारा सबसे पहले की सराहना करते हैं। इष्टतम विकल्प एक साटन बनावट हैखिंचाव छत, प्रकाश चमक खेलना यह पराबैंगनी किरणों को प्रतिबिंबित नहीं करता है, लेकिन इसके नरम चमक के लिए प्रसिद्ध है आधुनिकता और साहस "मेटैलिक" की बनावट को खड़ा करते हैं, जिससे धातु चमक दूर हो जाता है। हालांकि, वास्तव में, यह असाधारण मामलों में उपयोग किया जाता है जब कुछ सार्वजनिक स्थान को औपचारिक रूप देने की आवश्यकता होती है। निजी घरों में, इस तरह के कैनवास शायद ही कभी इस्तेमाल किया जाता है।
पेट्रोल पंप पर हिस्ट्रीशीटर और कर्मचारियों के बीच झगड़े को शांत करवाना एक युवक को महंगा पड़ गया। हिस्ट्रीशीटर और उसके साथियों ने युवक का ही किडनेप कर लिया। परिजनों और पुलिस ने बदमाशों का पीछा कर युवक को छुड़ाया। पुलिस ने किडनैप करने वाले तीनों बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया है। गाड़ी भी बरामद की गई है। सीकर के लोसल थाने का हिस्ट्रीशीटर हरिसिंह बिजारणियां अपने दो साथियों के साथ हनुमानगढ़-किशनगढ़ मेगा हाईवे पर पेट्रोल पंप पर अपनी स्विफ्ट गाड़ी में डीजल डलवा रहा था। पंप कर्मचारियों ने डीजल के रुपए मांगे तो हिस्ट्रीशीटर ने मना कर दिया और लड़ाई झगड़ा करने लगे। ऐसे में पेट्रोल डलवाने आए हरिप्रसाद नाम के युवक ने हरिसिंह को लड़ाई झगड़ा करने से किया। स्विफ्ट गाड़ी पर सवार तीन बदमाश हरिप्रसाद को अपनी गाड़ी में डालकर सीकर की तरफ रवाना हो गए। पेट्रोल पंप पर आए हरिप्रसाद के दोस्त ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने भी तुरंत कार्रवाई शुरू की। इसके बाद पुलिस और परिजनों ने ड्राइवर का पता लगाकर बदमाशों की स्विफ्ट गाड़ी का पीछा करना शुरू कर दिया। शाम को करीब 4:30 बजे के लगभग लोसल थाने के सामने परिजनों और पुलिस ने बदमाशों की गाड़ी को रोक लिया। उसके बाद युवक हरिप्रसाद को बदमाशों के चंगुल से छुड़ाया गया। पुलिस ने तीनों आरोपियों हरि सिंह, दीपक कुमार और अंकित कुमार को गिरफ्तार कर लिया। बदमाशों की गाड़ी का पीछा करने के दौरान करीब 15 बार पीड़ित युवक की हरिप्रसाद के चाचा मनमोहन की गाड़ी बदमाशों की गाड़ी से टकराई। लेकिन सीकर के लोसल थाने के सामने मनमोहन ने बदमाशों की स्विफ्ट गाड़ी को जोरदार टक्कर मारी। ऐसे में बदमाशों की स्विफ्ट कार का टायर भी फट गया। मामले में मनमोहन ने शिकायत दी है कि बदमाशों ने उसे फोन पर धमकी भी दी थी कि यदि भतीजा जिंदा चाहिए तो 20 लाख रुपए लेकर लोसल आ जाना। फिलहाल पुलिस ने तीनों बदमाशों को गिरफ्तार कर उनकी गाड़ी को जब्त कर लिया है। आरोपी हरिसिंह लोसल थाने का हिस्ट्रीशीटर है। जिस पर मारपीट, अपहरण की कोशिश जैसे कई मामले दर्ज है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
पेट्रोल पंप पर हिस्ट्रीशीटर और कर्मचारियों के बीच झगड़े को शांत करवाना एक युवक को महंगा पड़ गया। हिस्ट्रीशीटर और उसके साथियों ने युवक का ही किडनेप कर लिया। परिजनों और पुलिस ने बदमाशों का पीछा कर युवक को छुड़ाया। पुलिस ने किडनैप करने वाले तीनों बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया है। गाड़ी भी बरामद की गई है। सीकर के लोसल थाने का हिस्ट्रीशीटर हरिसिंह बिजारणियां अपने दो साथियों के साथ हनुमानगढ़-किशनगढ़ मेगा हाईवे पर पेट्रोल पंप पर अपनी स्विफ्ट गाड़ी में डीजल डलवा रहा था। पंप कर्मचारियों ने डीजल के रुपए मांगे तो हिस्ट्रीशीटर ने मना कर दिया और लड़ाई झगड़ा करने लगे। ऐसे में पेट्रोल डलवाने आए हरिप्रसाद नाम के युवक ने हरिसिंह को लड़ाई झगड़ा करने से किया। स्विफ्ट गाड़ी पर सवार तीन बदमाश हरिप्रसाद को अपनी गाड़ी में डालकर सीकर की तरफ रवाना हो गए। पेट्रोल पंप पर आए हरिप्रसाद के दोस्त ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने भी तुरंत कार्रवाई शुरू की। इसके बाद पुलिस और परिजनों ने ड्राइवर का पता लगाकर बदमाशों की स्विफ्ट गाड़ी का पीछा करना शुरू कर दिया। शाम को करीब चार:तीस बजे के लगभग लोसल थाने के सामने परिजनों और पुलिस ने बदमाशों की गाड़ी को रोक लिया। उसके बाद युवक हरिप्रसाद को बदमाशों के चंगुल से छुड़ाया गया। पुलिस ने तीनों आरोपियों हरि सिंह, दीपक कुमार और अंकित कुमार को गिरफ्तार कर लिया। बदमाशों की गाड़ी का पीछा करने के दौरान करीब पंद्रह बार पीड़ित युवक की हरिप्रसाद के चाचा मनमोहन की गाड़ी बदमाशों की गाड़ी से टकराई। लेकिन सीकर के लोसल थाने के सामने मनमोहन ने बदमाशों की स्विफ्ट गाड़ी को जोरदार टक्कर मारी। ऐसे में बदमाशों की स्विफ्ट कार का टायर भी फट गया। मामले में मनमोहन ने शिकायत दी है कि बदमाशों ने उसे फोन पर धमकी भी दी थी कि यदि भतीजा जिंदा चाहिए तो बीस लाख रुपए लेकर लोसल आ जाना। फिलहाल पुलिस ने तीनों बदमाशों को गिरफ्तार कर उनकी गाड़ी को जब्त कर लिया है। आरोपी हरिसिंह लोसल थाने का हिस्ट्रीशीटर है। जिस पर मारपीट, अपहरण की कोशिश जैसे कई मामले दर्ज है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
क्रूज पर ड्रग्स के मामले में गिरफ्तार अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को जमानत मिल गई है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। उनके साथ ही बॉम्बे हाई कोर्ट ने अरबाज मर्चेंट और मुनमुन धमेचा को भी जमानत दे दी है। जस्टिस नितिन साम्ब्रे की अदालत ने तीनों आरोपियों को तीन दिन की लगातार सुनवाई के बाद जमानत दे दी है। 24 दिन बाद शाहरुख खान के बेटे जेल की सलाखों से निकलकर अपने घर जाएंगें। बीतों कई दिन शाहरुख खान और उनके परिवार के लिए बेहद कष्टदायक रहे हैं। 2 अक्टूबर को एनसीबी ने क्रूज ड्रग्स मामले में गिरफ्तार किया था। इसके बाद आर्यन खान 7 अक्टूबर तक हिरासत में रहे और फिर उन्हें गिरफ्तार कर जेल में बंद कर दिया गया। एनडीपीएस मामलों की विशेष अदालत द्वारा जमानत अर्जी खारिज किए जाने के बाद पिछले सप्ताह आर्यन खान, अरबाज मर्चेंट और मुनमुन धमेचा ने बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया था।
क्रूज पर ड्रग्स के मामले में गिरफ्तार अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को जमानत मिल गई है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। उनके साथ ही बॉम्बे हाई कोर्ट ने अरबाज मर्चेंट और मुनमुन धमेचा को भी जमानत दे दी है। जस्टिस नितिन साम्ब्रे की अदालत ने तीनों आरोपियों को तीन दिन की लगातार सुनवाई के बाद जमानत दे दी है। चौबीस दिन बाद शाहरुख खान के बेटे जेल की सलाखों से निकलकर अपने घर जाएंगें। बीतों कई दिन शाहरुख खान और उनके परिवार के लिए बेहद कष्टदायक रहे हैं। दो अक्टूबर को एनसीबी ने क्रूज ड्रग्स मामले में गिरफ्तार किया था। इसके बाद आर्यन खान सात अक्टूबर तक हिरासत में रहे और फिर उन्हें गिरफ्तार कर जेल में बंद कर दिया गया। एनडीपीएस मामलों की विशेष अदालत द्वारा जमानत अर्जी खारिज किए जाने के बाद पिछले सप्ताह आर्यन खान, अरबाज मर्चेंट और मुनमुन धमेचा ने बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया था।
(क) आदर्श वाचन ख) अनुकरण वाचन (ग) सामान्यार्थ विवेचन ( घ) बोधगम्य प्रश्नोत्तर (ड) वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर (च) साराश कथन प्रन्विति प्रारम्भ होने के पूर्व लेखक - परिचय नाम का एक सोपान और होगा । लेखक - परिचय अध्यापक देव-स्तुति के लेखक प० दौलतरामजी का सक्षिप्त परिचय जिज्ञासोत्पादक ढग से निम्नानुसार देगे अध्यापक कथन - जो स्तुति आज हम पढने जा रहे है वह अध्यात्मप्रेमी कविवर प० दौलतरामजी ने लिखी है। आपके द्वारा लिखा गया छहढाला नामक ग्रन्थ जैन समाज मे बहुत आदर के साथ पढा जाता है । जैन समाज मे ऐसा कौन व्यक्ति होगा जो छहढाला से परिचित न हो। आपने बहुत सुन्दर प्राध्यात्मिक पद भी लिखे है जो सारे भारतवर्ष की शास्त्रसभाओ मे प्रतिदिन गाये जाते है । हम देखेगे कि उन्होंने इस स्तुति मे भी अपूर्व भाव भरे है । प्रथम अन्विति अछीन ।" प्रादर्श वाचन भक्ति का वातावरण उत्पन्न करने के लिये अध्यापक सुर और लय के साथ आदर्श वाचन करेगे । अनुकररण वाचन अध्यापक एक- दो छात्रो से इसका सस्वर वाचन करावेगे और उसमे आवश्यक सुधार स्वय करेगे या अन्य छात्रो से करावेगे । सामान्यार्थ विवेचन इसमे अध्यापक छन्दो का निम्नानुसार सामान्यार्थं वतावेगे । साथ ही आवश्यक कठिन शब्दो का अर्थ भी बताते जावेगे । श्रध्यापक कथन - सच्चे देव की स्तुति प्रारम्भ करते हुये प० दौलतरामजी कहते है कि हे जिनेन्द्र ! आप लोकालोक के ज्ञाता होने पर भी आत्मानन्द में मग्न हो । घाति कर्मों से रहित प्रभो आपकी जय हो । ( अरि= मोहनीय, रज = ज्ञानावररणी दर्शनावररणी, रहस = अंतराय ) । हे प्रभो ! आप मोहान्धकार को नाश करने वाले वीतरागी विज्ञान के सूर्य हो । अनन्तदर्शन, अनन्तज्ञान, सुख और अनन्तवीर्य से सुशोभित आपकी जय हो । आपकी शान्तमुद्रा भव्य जीवो को आत्मानुभूति की ओर लक्ष्य ले जाने मे निमित्त होती है । भव्य जीवो के भाग्य से खिरने वाली आपकी दिव्य ध्वनि को सुनकर उनका भ्रम नष्ट हो जाता है । हे प्रभो ! आपके गुरणों का चिन्तवन करने से अपनी और पराये की पहिचान हो जाती है और आपत्तिया नष्ट हो जाती है । आप समस्त दोषों से रहित और सब विकल्पो से मुक्त हो, सब महिमाओं से युक्त जग के भूषण हो । हे भगवन् ! आप समस्त विरोधों से रहित परम पवित्र शुद्ध ज्ञानमय और नुहो। शुभ-अशुभ भावो का प्रभाव कर स्वभाव परिणति में बिराजमान हो । बोधगम्य प्रश्नोत्तर अध्यापक छन्दों में आई महत्त्वपूर्ण वस्तु का ज्ञान कराने के लिए निम्न प्रश्न स्वय करेगे एव छन्दों के आधार पर उत्तर देगे :प्रश्न १ भगवान कौन है ? ( द्वितीय छद के आधार पर ) २ भगवान की स्तुति से क्या लाभ है 1 ( चतुर्थ छद के आधार पर ) १. अनन्त चतुष्टय से युक्त वीतरागी परमात्मा ही भगवान है । (क) अपनी और पराये की पहिचान (भेदविज्ञान) हो जाती है । (ख) अनेक आपत्तियाँ ( मोहराग-द्वेप ) नष्ट हो जाती
आदर्श वाचन ख) अनुकरण वाचन सामान्यार्थ विवेचन बोधगम्य प्रश्नोत्तर वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर साराश कथन प्रन्विति प्रारम्भ होने के पूर्व लेखक - परिचय नाम का एक सोपान और होगा । लेखक - परिचय अध्यापक देव-स्तुति के लेखक पशून्य दौलतरामजी का सक्षिप्त परिचय जिज्ञासोत्पादक ढग से निम्नानुसार देगे अध्यापक कथन - जो स्तुति आज हम पढने जा रहे है वह अध्यात्मप्रेमी कविवर पशून्य दौलतरामजी ने लिखी है। आपके द्वारा लिखा गया छहढाला नामक ग्रन्थ जैन समाज मे बहुत आदर के साथ पढा जाता है । जैन समाज मे ऐसा कौन व्यक्ति होगा जो छहढाला से परिचित न हो। आपने बहुत सुन्दर प्राध्यात्मिक पद भी लिखे है जो सारे भारतवर्ष की शास्त्रसभाओ मे प्रतिदिन गाये जाते है । हम देखेगे कि उन्होंने इस स्तुति मे भी अपूर्व भाव भरे है । प्रथम अन्विति अछीन ।" प्रादर्श वाचन भक्ति का वातावरण उत्पन्न करने के लिये अध्यापक सुर और लय के साथ आदर्श वाचन करेगे । अनुकररण वाचन अध्यापक एक- दो छात्रो से इसका सस्वर वाचन करावेगे और उसमे आवश्यक सुधार स्वय करेगे या अन्य छात्रो से करावेगे । सामान्यार्थ विवेचन इसमे अध्यापक छन्दो का निम्नानुसार सामान्यार्थं वतावेगे । साथ ही आवश्यक कठिन शब्दो का अर्थ भी बताते जावेगे । श्रध्यापक कथन - सच्चे देव की स्तुति प्रारम्भ करते हुये पशून्य दौलतरामजी कहते है कि हे जिनेन्द्र ! आप लोकालोक के ज्ञाता होने पर भी आत्मानन्द में मग्न हो । घाति कर्मों से रहित प्रभो आपकी जय हो । । हे प्रभो ! आप मोहान्धकार को नाश करने वाले वीतरागी विज्ञान के सूर्य हो । अनन्तदर्शन, अनन्तज्ञान, सुख और अनन्तवीर्य से सुशोभित आपकी जय हो । आपकी शान्तमुद्रा भव्य जीवो को आत्मानुभूति की ओर लक्ष्य ले जाने मे निमित्त होती है । भव्य जीवो के भाग्य से खिरने वाली आपकी दिव्य ध्वनि को सुनकर उनका भ्रम नष्ट हो जाता है । हे प्रभो ! आपके गुरणों का चिन्तवन करने से अपनी और पराये की पहिचान हो जाती है और आपत्तिया नष्ट हो जाती है । आप समस्त दोषों से रहित और सब विकल्पो से मुक्त हो, सब महिमाओं से युक्त जग के भूषण हो । हे भगवन् ! आप समस्त विरोधों से रहित परम पवित्र शुद्ध ज्ञानमय और नुहो। शुभ-अशुभ भावो का प्रभाव कर स्वभाव परिणति में बिराजमान हो । बोधगम्य प्रश्नोत्तर अध्यापक छन्दों में आई महत्त्वपूर्ण वस्तु का ज्ञान कराने के लिए निम्न प्रश्न स्वय करेगे एव छन्दों के आधार पर उत्तर देगे :प्रश्न एक भगवान कौन है ? दो भगवान की स्तुति से क्या लाभ है एक एक. अनन्त चतुष्टय से युक्त वीतरागी परमात्मा ही भगवान है । अपनी और पराये की पहिचान हो जाती है । अनेक आपत्तियाँ नष्ट हो जाती
नई दिल्ली, अपनी सास इंदिरा गांधी को उनकी जन्मशती पर याद करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि आपातकाल से वह काफी असहज थीं और यही वजह थी जिसके चलते वह 1977 के आम चुनाव में गईं। सोनिया ने कहा कि अगर ये बात नहीं होती तो इंदिरा उस वक्त चुनाव में नहीं जाती। एक निजी चैनल को दिए इंटव्यू में सोनिया ने कहा, मैं यह नहीं कह सकती हूं कि इंदिरा गांधी आज आपातकाल को किस नजर से देखती। लेकिन, अगर वह उस वक्त बेचैनी महसूस नहीं करती तो चुनाव में जाने की घोषणा नहीं करती। साल 1975 में लगे 21 महीने लंबे आपातकाल के बारे में बात करते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि यह आंतरिक अशांति के चलते देश में लागू किया गया था। सोनिया ने आगे कहा कि उनकी सास लोगों की प्रतिक्रिया अपने बेटे और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से सुनी जिसके बाद यह फैसला लिया। गौरतलब है कि देश में लगे आपातकाल के बाद साल 1977 में हुए आम चुनाव में पहली बार कांग्रेस को सत्ता गंवानी पड़ी। आपातकाल का विरोध कर रही जनता पार्टी अपने सहयोगी दलों के साथ सत्ता में आई। जिसके बाद मोरारजी देसाई पहली बार देश के गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने। इंदिरा अपने बेटे संजय गांधी के साथ चुनाव हार गई। हालांकि, उसके बाद साल 1980 में हुए दोबारा संसदीय चुनाव में वह फिर से सत्ता में आ गई।
नई दिल्ली, अपनी सास इंदिरा गांधी को उनकी जन्मशती पर याद करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि आपातकाल से वह काफी असहज थीं और यही वजह थी जिसके चलते वह एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर के आम चुनाव में गईं। सोनिया ने कहा कि अगर ये बात नहीं होती तो इंदिरा उस वक्त चुनाव में नहीं जाती। एक निजी चैनल को दिए इंटव्यू में सोनिया ने कहा, मैं यह नहीं कह सकती हूं कि इंदिरा गांधी आज आपातकाल को किस नजर से देखती। लेकिन, अगर वह उस वक्त बेचैनी महसूस नहीं करती तो चुनाव में जाने की घोषणा नहीं करती। साल एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर में लगे इक्कीस महीने लंबे आपातकाल के बारे में बात करते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि यह आंतरिक अशांति के चलते देश में लागू किया गया था। सोनिया ने आगे कहा कि उनकी सास लोगों की प्रतिक्रिया अपने बेटे और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से सुनी जिसके बाद यह फैसला लिया। गौरतलब है कि देश में लगे आपातकाल के बाद साल एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर में हुए आम चुनाव में पहली बार कांग्रेस को सत्ता गंवानी पड़ी। आपातकाल का विरोध कर रही जनता पार्टी अपने सहयोगी दलों के साथ सत्ता में आई। जिसके बाद मोरारजी देसाई पहली बार देश के गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने। इंदिरा अपने बेटे संजय गांधी के साथ चुनाव हार गई। हालांकि, उसके बाद साल एक हज़ार नौ सौ अस्सी में हुए दोबारा संसदीय चुनाव में वह फिर से सत्ता में आ गई।
विषय करनेवाला उपचरित असद्भूत है। जैसे- धनधान्यादिक मेरा है । संश्लेष सहित वस्तुमे सम्बन्धको विषय करनेवाला अनुपचरित असद्भूत व्यवहार है । जैसे गेरा शरीर । यद्यपि आत्मा और शरीर भिन्न भिन्न है परन्तु एक स्थानपर दोनो रहती हैं इसलिये इनका संश्लेष है । अध्यात्म शास्त्रकी दृष्टि से संक्षेप में कहे गये ये छः भेद पहिले बतलाये गये नयोंके भेदोंमे शामिल हो जाते हैं । जैसे- शुद्ध निश्चयनय, भेदविकल्पनिरपेक्ष शुद्ध द्रव्यार्थिकमें; अशुद्धनिश्चयनय, कर्मोपाधिसापेक्षअशुद्धद्रव्यार्थिकमें; उपचारित सद्भूत व्यवहारनय, अशुद्धसद्द्भूतव्यवहारमे; अनुपचरितसद्भूतव्यवहारनय, शुद्धसद्भूत व्यवहारमें; उपचरित और अनुपचरित असद्भूतव्यवहारनय, उपचरितव्यहारनयमे शामिल हैं। नयोंके सैकडो भेद होते है । जितने तरहके वचन या वचनके अभिप्राय हैं, उतनेही तरहके नय है । किसी तरहका प्रयोग करते समय इतना स्मरण रखना चाहिये कि वस्तु ऐसी ही नहीं हैं । दूसरी दृष्टि से दूसरे तरहकी भी है । नयरहस्यको समझनेवाला मनुष्य, उदार और विचारसहिष्णु होता है । साधारणतः मनुष्य अपनेही ज्ञानको सच्चा समझता है । ऐसी દાતમેં ઃ તરી સર્વજ્ઞમ્મન્યતા સળે મીંતર છિપી રહતી હૈ। ऐसा आदमी वह महामूर्ख है जिसे अपनी मूर्खता ( अज्ञान ) का भी पता नहीं है । नयदृष्टि, उसके इस अज्ञानको दूर कर देती है। उसे विविध मतों ( विचारों ) में समन्वय करनेकी योग्यता प्राप्त होजाती है । वह ठदार, सहिष्णु, जिज्ञासु और सत्यपथका पथिक होता है । 'छठवां अध्याय । निक्षेप । निक्षेप शब्द का अर्थ है रखना, आरोप करनी । शब्दका अर्मे अथवा अर्थका शब्द में जिस तरह आरोप किया जाता है, उसे निक्षेप कहते हैं । अथवा पदार्थकी संज्ञों (नाम) रखना निक्षेप है। प्रत्येक शब्दके कमसे कम कितने अर्थ होसकते हैं ? इस प्रश्नका उत्तर हमे निक्षेपसे ही मिलता है। किसी शब्दके भलेही सैकडों अर्थ किये जावे अर्थात् सैकड़ों अर्थों में उसका निक्षेप किया जाय, किन्तु उनके, नाम स्थापना द्रव्य और भावके द्वारा अर्थ अवश्य होंगे । ये ही चार निक्षेप हैं । नय और निक्षेपमें क्या अन्तर है ? उत्तर नय, ज्ञानात्मक है उसके द्वारा वस्तुका ज्ञान होता है । इसलिये पदार्थ के साथ उसका विषयविषयो सम्बन्ध है । शब्द और अर्थका वाव्यवाचक सम्बन्ध है । इस वष्यवाचक सम्बन्धक स्थापनकी क्रिया निक्षेप है । यह वाच्यवाचक सम्बन्ध और उसकी क्रिया नयसे जानी जाती है इसलिये निक्षेप भी नयका विषय है । तात्पर्य यह कि नय और निक्षेप में विषयविपयिभाव है । निक्षेपके चार भेद है । नाम, स्थापना, द्रव्य और भाव । लोकव्यवहार चलाने के लिये किसी दूसरे निमित्तकी अपेक्षा न रखकर किसी पदार्थकी कोई संज्ञा रखना नामनिक्षेप है । नाम निक्षेपमें १ न्यसनं, न्यसतः इति वा न्यासो निक्षेपः इत्यर्थः । राजवार्तिक । २ निक्षेप विधिना नामशब्दार्थः प्रस्तीर्यते, सर्वार्थसिद्धि । ३- संज्ञा कमीनपेक्ष्यैव, निमित्तान्तरमिष्टितः । नामानेकविधं लोकव्यवहाराय सूत्रितं । श्लोकवार्तिक ।। वक्ताका अभिप्रायही निमित्त है । जाति ( साहस्य ) आदि त नहीं हैं। जैसे किसी पुरुषका नाम महावीर है । यह नाम, से कोई सम्बन्ध नहीं रखता । लोकव्यवहार चलानेकेलिये मनुष्यका कुछ न कुछ नाम रखना चाहिये, इसलिये एक नीका महावीर नाम रखदिया गया । ऐसे नामसे वीरताका सम्बन्ध नहीं है । अगर किसी ऐसे पुरुषका नाम महावीर रक्खा जाय में कि वीरता आदि गुण हों तो क्या उसके नाम में भी नाम५ माना जायगा ? उत्तर वस्तुमें गुण भले ही हो, परन्तु जबतक गुण की तासे शब्दव्यवहार न किया जाय, तब तक नामनिक्षेप ही । जाता है । अगर 'महावीर' नाम, गुणकी अपेक्षासे ही रक्खा • तो विशेषवीरतावाले सभी व्यक्तियों का नाम महावीर रखना ॥ । ऐसी हालत में नामनिक्षेपकी उपयोगिता ही नष्ट हो गी। महावीर तो सच्चे महावीर थे, इस वाक्यमें पहिला वीर शब्द, नाम निक्षेपकी अपेक्षासे है और दूसरा महावीर भावनिक्षेपकी अपेक्षासे, क्योंकि पहिले महावीर शब्दसे किसी बोध होता है । जब कि दूसरे से किसी गुणीका । किसी वस्तुमे किसी अन्य वस्तुकी स्थापना करके उसी शब्दसे ने लगना स्थापना निक्षेप है । जैसे--पत्थर में किसी देव पना करके देव शब्दसे कहने लगते है । अथवा जैसे- शतरंज गोटोंमें राजा वजीर आदिकी स्थापना की जाती है । स्थापनाके १ नाम्नो वक्तरभिप्रायो निमित्तं कथितं समं । तस्मादन्यत्तु जात्यादि मेत्तान्तरमिष्यते । श्लो. वा. ॥ ८ न्या. दो भेद है i तदाकार ( तद्भाव ) स्थापना और अतदाकार (अतद्भाव) स्थापना। स्थाप्य (जिसकी स्थापना की जाय) के मुख्याकारकी समानतावाली वस्तुमें स्थापना करना तदाकार स्थापना है । जिससे सादृश्य प्रत्यभिज्ञान होकर स्थाप्यके आकारका प्रतिभास हो । मुख्याकारको सहशतांरहित जिस किसी आकारको वस्तुमें स्थापना करना अतदाकार स्थापना है । मूर्ति चित्र आदिमे तदाकार स्थापना कीजाती है । नाटक आदिके पात्रों में भी तदाकार स्थापना कीजाती है । यद्यपि स्थाप्यके आकार की पूर्ण सहशता नहीं आसकती फिरभी नाममात्रकी सहशतासे भी तदाकार स्थापना मानी जाती है । इसलिये बेडौल मूर्तियोमे की गई स्थापना भी तदाकार स्थापना है । शतरंजकी गोटो में जो बादशाह वजीर आदि की स्थापना की जाती है वह अतदाकार स्थापना है । नाम और स्थापना निक्षेप में क्या अन्तर है ? - निक्षेपमें नामके अनुसार आदर अनादर बुद्धि नहीं होती, लेकिन स्थापना निक्षेपमें आदर अनादर बुद्धि होती है । महावीरनामधारीका हम महावीर के समान आदर नहीं करते, किंतु महावीर की मूर्तिका वैसा आदर करते हैं । प्रश्न - - कोई कोई मनुष्य, नाममें भी आदर अनादर बुद्धि करते है । और कई लोग (मूर्तिपूजाके विरोधी आदि) स्थापनामे भी आदरअनादरबुद्धि नहीं करत, फिर दानोंका अन्तर कैसे समझा जाय ? १ मुख्याकारशून्य वस्तुमात्रा पुनरसद्भावस्थापना । परोपदेशादेव तत्र सोझ्यामेति सम्प्र च्यात । श्ले वा । २ सावरानुग्रहमा उत वा प्रतिभियते । नाम्नस्तस्य तथाभावाभावा दत्राविवादतः ॥ १ला. वा. ॥ ઈ મોરે હા જીપને તેવતાને બધા માત્ત હોનને ઋસો નામવાળે પ્રત્યે મનુષ્યન ડસ વેબતાળી રચીત્ર સ્થાપના વર્ત हैं । इसका कारण नाम नहीं है, किन्तु नामको देखकर की गई स्थापना है । यह स्थापना बहुत शीघ्र की जाती है, दोनोंका अवलम्बन भी एक व्यक्ति होता है, स्थापनाका निमित्त भी नाम चन जाता हैं, इसलिये स्थापना में नामका भ्रम हो जाता है । वास्तव में दोनों में अन्तर है । मूर्तिपूजाका विरोधी हो या अविरोधी, उसे भी स्थापनामे आदर अनादर बुद्धि करना पड़ती है। यह बात दूसरी है कि मूर्तिपूजाका विरोधी मूर्ति स्थापना ही न करे । जो स्थापना ही नहीं करता वह आदर अनादर बुद्धि क्यों करेगा ? हां ! अगर वह स्थापना करे तो आदरअनादबुद्धि भी करेगा । मूर्तिपूजाका विरोधी भी पांच रुपये के नोटको पाच रुपये के समान आदरणीय समझता है । जो किसी एक जगह स्थापना नहीं मानना चाहता वह वहां न माने, परन्तु इससे स्थापनाका समस्त व्यवहार नष्ट नहीं हो जाता। प्रश्न स्थापना, नामवाले पदार्थकी कीजाती है और नामका व्यवहार तो चारो निक्षेपोंसे होता है इसलिये किसनामवाले पदार्थकी स्थापना करना चाहिये ? चारों तरहके नामोंसे स्थापनाका सम्बन्ध है । महावीर राम कृष्ण आदिकी मूर्तियों में जो स्थापनाकी जाती है वह नामनिक्षेपसे रक्खेगये नामवाले व्यक्तियों की स्थापना है । पार्श्वनाथ की मूर्तिके चित्र में पार्श्वनाथ की स्थापना करना, स्थापना निक्षेपसे १ नाम्नि कस्यचिदादरदर्शनान्न ततस्तद्भेदः इतिचेभ, स्वदेवतायामति - भक्तितस्तन्नाम केऽर्थे तद्द्ध्यारोपस्याशुवृत्तेस्तत्स्थापनायामेवादरावतारात् । ન્યાયપ્રદ્દીપ । રવેાયે સામત્રાળી વઘુૉ સ્થાપના થૈ। પાર્શ્વનાથ ની મૂર્તિળો સ્થાપનાનિક્ષેપણે પાર્શ્વનાથ હતે હૈં, હસ મૂર્તિની સ્થાપનાસે મૂર્તિ ચિત્રો મી પાર્શ્વનાથ ને છો। બ્યનિક્ષેપતે યુવાનો મા રાનાતે હૈ । વડસ યુવાનની મૂર્તિો ચા ચિત્રો મી નાના ન્હ વિયા નાય તો નિક્ષેપો વેવે નામવારે વ્યક્તિની સ્થાપના હા। માર્ચનક્ષેપસ રાનાા હીરાના વહતે હૈં ! હસળી સ્થાપના, માનિક્ષેપને રજ્વેયે નામવાળે વ્યક્તિી સ્થાપના હાઈં । મતવ વહ નિ જિલી મ↑ નિક્ષેપસે લિવવાર્થી સંજ્ઞા રવી નાય, રસવા સ્થાપના હો સતી હૈ ! મૂતમૈંર્ ર્માવત અવસ્યાસે સમ્બન્ધ વનેવાજે નામાં પ્રયો, વર્તમાનમેં રના વ્યનિક્ષેપ હૈ । જૈસે રાનપુત્રજૉ રાના હના, અથવા રાજ્યો છૂટ નાનેપર મી રાના હના ફસ નિક્ષેપ) વિષય નવ્રુત વિસ્તીબે હૈં । નૈસેજોમયુરાનનો નાના હતા હૈ ઉસાંતરā યુવરાખ ગૌર રાનાજે મરનાનેપર સ मृतक शरीरको भी राजा कहते है । कभी कभी ज्ञानको भी राजा ાહ તેતે હૈં । નૈસે-~રાના તો ફસળે મેં વસા હૈ' ! દૃશ્યમ હૈં । હત્યમેં ત રાનાજં જ્ઞાન વસા હૈ નાળિ રાના, લેનિન્યનિક્ષેપસે જ્ઞાનો (ના 8 વિયા। સતરહ અન્યપામેં દ્રનિક્ષેપ ક્ષા રાવ્યવહાર હોતા હૈ। ન સત્ર પ્રમેહોંળો અન્તનેતાને વિષે રનિક્ષેપ વૉ મેલ વિષે યે હૈં । ગામ દ્રીનક્ષેપ સૌ નોગામ દ્રપ્શનક્ષેપ નિતી વસ્તુ નાનનેવાળો ઉતરાવ્વતે હેના જ્ઞાાનિક્ષેપ હૈ। ટ્વનિલેષા સમ્બન્ધ મૃત વળ્યતસે હૈ । હર્શાવે અર ઇનવા અધ્યાય ~~સ . નાનને રેર્જા વપયા ૭૪ વસ્તુમેં ન હોવા તો ગામ નાનક્ષેપ હા । જ્યોંક્રિડયાળ હોનેસે વર્તમાનતા ઞાનાતી હૈ, યેિ વૃદ્ માનિક્ષેપ હો નાતા હૈ । યત્તિ ચહ નિક્ષેપ, જ્ઞાનમેં વિયા નાંતા હૈ, પરન્તુ જ્ઞાનr ( ગાત્મા) જો છોડર્ જ્ઞાનમેં વ્યવહાર ારના નિદૈ ય જ્ઞાના વ્યવહાર જ્ઞૌનીમેં નિયા નાતા હૈ કૌર વસ્તુજ્ઞાતાજૉ મૉ ની વસ્તુળ નામતે હેતે હૈં । જ્ઞાન ( જ્ઞાતા ) નો છોડર નિr વતુર્થાં પૂર્વોત્તર શ્રૃવસ્યા ચા હસતે સમ્બન્ધ વનેવા અન્યવસ્તુળો પત વસ્તુજે નામસે હના નોકામદ્રનિલેષ હૈ। ઇસ તીન મેટ્ ૐ - - શાયજ્ઞશામ નિક્ષપત, વસ્તુ જ્ઞાતાજો જ્ઞાયરારીરનૌત્રામદ્રનિક્ષેવસે વસ્તુ જ્ઞાતાજો રારીરનો તલ વસ્તુ નામસે હતે હૈં । નૈસે-જિલી રાનીતિ વિશાત્ મનુષ્ય મૃતારીરો નાનેપર હના ધ્યાન રાનનીતિ ખારે ફ્સ વાજ્યને રાખનૌતિજ્ઞ મૃત શીળો રાનનીતિ નામ વિયાયાં હૈ । જ્ઞાયારીરજે તીન મેક્ હૈં। મૂત, વિખ્યત, વર્તમાન । વર્તમાન જ્ઞાચારી(ા વાહરણ પર વિયા ગયા હૈ । મૂતવિષ્યતાં ? આત્મા તત્કામુતજ્ઞા↑ ચો નામાનુયુત્તપી: । સોત્રામઃ સમાન્નાત યાર્નુયં શળાન્તાત્ । ઋો, વા, २ तत्वमसि ( तू ब्रह्म है ) अहं ब्रह्मास्मि ( मैं ब्रह्म हूं ) इत्यादि વાચૌંહા અર્થ અને આમદ્રનિક્ષેપ ચા આયમમાાનક્ષેપ ી અપેક્ષામે યા નાય તો અદ્વૈતળે માનનેી નાત નહીં રહતી, સૌ. ફન વાયોવા અર્થ ની નૈ નાતા હૈ । ર્ મૃત શરીરવે તીન મેલ યેિ યે હૈ ચત્ત, વ્યુત, ખ્યાવિત । શરીર छूटने के पहिले खुद ही शरीरको त्याग देने अर्थात् ममत्व छोड़कर संन्यास
विषय करनेवाला उपचरित असद्भूत है। जैसे- धनधान्यादिक मेरा है । संश्लेष सहित वस्तुमे सम्बन्धको विषय करनेवाला अनुपचरित असद्भूत व्यवहार है । जैसे गेरा शरीर । यद्यपि आत्मा और शरीर भिन्न भिन्न है परन्तु एक स्थानपर दोनो रहती हैं इसलिये इनका संश्लेष है । अध्यात्म शास्त्रकी दृष्टि से संक्षेप में कहे गये ये छः भेद पहिले बतलाये गये नयोंके भेदोंमे शामिल हो जाते हैं । जैसे- शुद्ध निश्चयनय, भेदविकल्पनिरपेक्ष शुद्ध द्रव्यार्थिकमें; अशुद्धनिश्चयनय, कर्मोपाधिसापेक्षअशुद्धद्रव्यार्थिकमें; उपचारित सद्भूत व्यवहारनय, अशुद्धसद्द्भूतव्यवहारमे; अनुपचरितसद्भूतव्यवहारनय, शुद्धसद्भूत व्यवहारमें; उपचरित और अनुपचरित असद्भूतव्यवहारनय, उपचरितव्यहारनयमे शामिल हैं। नयोंके सैकडो भेद होते है । जितने तरहके वचन या वचनके अभिप्राय हैं, उतनेही तरहके नय है । किसी तरहका प्रयोग करते समय इतना स्मरण रखना चाहिये कि वस्तु ऐसी ही नहीं हैं । दूसरी दृष्टि से दूसरे तरहकी भी है । नयरहस्यको समझनेवाला मनुष्य, उदार और विचारसहिष्णु होता है । साधारणतः मनुष्य अपनेही ज्ञानको सच्चा समझता है । ऐसी દાતમેં ઃ તરી સર્વજ્ઞમ્મન્યતા સળે મીંતર છિપી રહતી હૈ। ऐसा आदमी वह महामूर्ख है जिसे अपनी मूर्खता का भी पता नहीं है । नयदृष्टि, उसके इस अज्ञानको दूर कर देती है। उसे विविध मतों में समन्वय करनेकी योग्यता प्राप्त होजाती है । वह ठदार, सहिष्णु, जिज्ञासु और सत्यपथका पथिक होता है । 'छठवां अध्याय । निक्षेप । निक्षेप शब्द का अर्थ है रखना, आरोप करनी । शब्दका अर्मे अथवा अर्थका शब्द में जिस तरह आरोप किया जाता है, उसे निक्षेप कहते हैं । अथवा पदार्थकी संज्ञों रखना निक्षेप है। प्रत्येक शब्दके कमसे कम कितने अर्थ होसकते हैं ? इस प्रश्नका उत्तर हमे निक्षेपसे ही मिलता है। किसी शब्दके भलेही सैकडों अर्थ किये जावे अर्थात् सैकड़ों अर्थों में उसका निक्षेप किया जाय, किन्तु उनके, नाम स्थापना द्रव्य और भावके द्वारा अर्थ अवश्य होंगे । ये ही चार निक्षेप हैं । नय और निक्षेपमें क्या अन्तर है ? उत्तर नय, ज्ञानात्मक है उसके द्वारा वस्तुका ज्ञान होता है । इसलिये पदार्थ के साथ उसका विषयविषयो सम्बन्ध है । शब्द और अर्थका वाव्यवाचक सम्बन्ध है । इस वष्यवाचक सम्बन्धक स्थापनकी क्रिया निक्षेप है । यह वाच्यवाचक सम्बन्ध और उसकी क्रिया नयसे जानी जाती है इसलिये निक्षेप भी नयका विषय है । तात्पर्य यह कि नय और निक्षेप में विषयविपयिभाव है । निक्षेपके चार भेद है । नाम, स्थापना, द्रव्य और भाव । लोकव्यवहार चलाने के लिये किसी दूसरे निमित्तकी अपेक्षा न रखकर किसी पदार्थकी कोई संज्ञा रखना नामनिक्षेप है । नाम निक्षेपमें एक न्यसनं, न्यसतः इति वा न्यासो निक्षेपः इत्यर्थः । राजवार्तिक । दो निक्षेप विधिना नामशब्दार्थः प्रस्तीर्यते, सर्वार्थसिद्धि । तीन- संज्ञा कमीनपेक्ष्यैव, निमित्तान्तरमिष्टितः । नामानेकविधं लोकव्यवहाराय सूत्रितं । श्लोकवार्तिक ।। वक्ताका अभिप्रायही निमित्त है । जाति आदि त नहीं हैं। जैसे किसी पुरुषका नाम महावीर है । यह नाम, से कोई सम्बन्ध नहीं रखता । लोकव्यवहार चलानेकेलिये मनुष्यका कुछ न कुछ नाम रखना चाहिये, इसलिये एक नीका महावीर नाम रखदिया गया । ऐसे नामसे वीरताका सम्बन्ध नहीं है । अगर किसी ऐसे पुरुषका नाम महावीर रक्खा जाय में कि वीरता आदि गुण हों तो क्या उसके नाम में भी नामपाँच माना जायगा ? उत्तर वस्तुमें गुण भले ही हो, परन्तु जबतक गुण की तासे शब्दव्यवहार न किया जाय, तब तक नामनिक्षेप ही । जाता है । अगर 'महावीर' नाम, गुणकी अपेक्षासे ही रक्खा • तो विशेषवीरतावाले सभी व्यक्तियों का नाम महावीर रखना ॥ । ऐसी हालत में नामनिक्षेपकी उपयोगिता ही नष्ट हो गी। महावीर तो सच्चे महावीर थे, इस वाक्यमें पहिला वीर शब्द, नाम निक्षेपकी अपेक्षासे है और दूसरा महावीर भावनिक्षेपकी अपेक्षासे, क्योंकि पहिले महावीर शब्दसे किसी बोध होता है । जब कि दूसरे से किसी गुणीका । किसी वस्तुमे किसी अन्य वस्तुकी स्थापना करके उसी शब्दसे ने लगना स्थापना निक्षेप है । जैसे--पत्थर में किसी देव पना करके देव शब्दसे कहने लगते है । अथवा जैसे- शतरंज गोटोंमें राजा वजीर आदिकी स्थापना की जाती है । स्थापनाके एक नाम्नो वक्तरभिप्रायो निमित्तं कथितं समं । तस्मादन्यत्तु जात्यादि मेत्तान्तरमिष्यते । श्लो. वा. ॥ आठ न्या. दो भेद है i तदाकार स्थापना और अतदाकार स्थापना। स्थाप्य के मुख्याकारकी समानतावाली वस्तुमें स्थापना करना तदाकार स्थापना है । जिससे सादृश्य प्रत्यभिज्ञान होकर स्थाप्यके आकारका प्रतिभास हो । मुख्याकारको सहशतांरहित जिस किसी आकारको वस्तुमें स्थापना करना अतदाकार स्थापना है । मूर्ति चित्र आदिमे तदाकार स्थापना कीजाती है । नाटक आदिके पात्रों में भी तदाकार स्थापना कीजाती है । यद्यपि स्थाप्यके आकार की पूर्ण सहशता नहीं आसकती फिरभी नाममात्रकी सहशतासे भी तदाकार स्थापना मानी जाती है । इसलिये बेडौल मूर्तियोमे की गई स्थापना भी तदाकार स्थापना है । शतरंजकी गोटो में जो बादशाह वजीर आदि की स्थापना की जाती है वह अतदाकार स्थापना है । नाम और स्थापना निक्षेप में क्या अन्तर है ? - निक्षेपमें नामके अनुसार आदर अनादर बुद्धि नहीं होती, लेकिन स्थापना निक्षेपमें आदर अनादर बुद्धि होती है । महावीरनामधारीका हम महावीर के समान आदर नहीं करते, किंतु महावीर की मूर्तिका वैसा आदर करते हैं । प्रश्न - - कोई कोई मनुष्य, नाममें भी आदर अनादर बुद्धि करते है । और कई लोग स्थापनामे भी आदरअनादरबुद्धि नहीं करत, फिर दानोंका अन्तर कैसे समझा जाय ? एक मुख्याकारशून्य वस्तुमात्रा पुनरसद्भावस्थापना । परोपदेशादेव तत्र सोझ्यामेति सम्प्र च्यात । श्ले वा । दो सावरानुग्रहमा उत वा प्रतिभियते । नाम्नस्तस्य तथाभावाभावा दत्राविवादतः ॥ एकला. वा. ॥ ઈ મોરે હા જીપને તેવતાને બધા માત્ત હોનને ઋસો નામવાળે પ્રત્યે મનુષ્યન ડસ વેબતાળી રચીત્ર સ્થાપના વર્ત हैं । इसका कारण नाम नहीं है, किन्तु नामको देखकर की गई स्थापना है । यह स्थापना बहुत शीघ्र की जाती है, दोनोंका अवलम्बन भी एक व्यक्ति होता है, स्थापनाका निमित्त भी नाम चन जाता हैं, इसलिये स्थापना में नामका भ्रम हो जाता है । वास्तव में दोनों में अन्तर है । मूर्तिपूजाका विरोधी हो या अविरोधी, उसे भी स्थापनामे आदर अनादर बुद्धि करना पड़ती है। यह बात दूसरी है कि मूर्तिपूजाका विरोधी मूर्ति स्थापना ही न करे । जो स्थापना ही नहीं करता वह आदर अनादर बुद्धि क्यों करेगा ? हां ! अगर वह स्थापना करे तो आदरअनादबुद्धि भी करेगा । मूर्तिपूजाका विरोधी भी पांच रुपये के नोटको पाच रुपये के समान आदरणीय समझता है । जो किसी एक जगह स्थापना नहीं मानना चाहता वह वहां न माने, परन्तु इससे स्थापनाका समस्त व्यवहार नष्ट नहीं हो जाता। प्रश्न स्थापना, नामवाले पदार्थकी कीजाती है और नामका व्यवहार तो चारो निक्षेपोंसे होता है इसलिये किसनामवाले पदार्थकी स्थापना करना चाहिये ? चारों तरहके नामोंसे स्थापनाका सम्बन्ध है । महावीर राम कृष्ण आदिकी मूर्तियों में जो स्थापनाकी जाती है वह नामनिक्षेपसे रक्खेगये नामवाले व्यक्तियों की स्थापना है । पार्श्वनाथ की मूर्तिके चित्र में पार्श्वनाथ की स्थापना करना, स्थापना निक्षेपसे एक नाम्नि कस्यचिदादरदर्शनान्न ततस्तद्भेदः इतिचेभ, स्वदेवतायामति - भक्तितस्तन्नाम केऽर्थे तद्द्ध्यारोपस्याशुवृत्तेस्तत्स्थापनायामेवादरावतारात् । ન્યાયપ્રદ્દીપ । રવેાયે સામત્રાળી વઘુૉ સ્થાપના થૈ। પાર્શ્વનાથ ની મૂર્તિળો સ્થાપનાનિક્ષેપણે પાર્શ્વનાથ હતે હૈં, હસ મૂર્તિની સ્થાપનાસે મૂર્તિ ચિત્રો મી પાર્શ્વનાથ ને છો। બ્યનિક્ષેપતે યુવાનો મા રાનાતે હૈ । વડસ યુવાનની મૂર્તિો ચા ચિત્રો મી નાના ન્હ વિયા નાય તો નિક્ષેપો વેવે નામવારે વ્યક્તિની સ્થાપના હા। માર્ચનક્ષેપસ રાનાા હીરાના વહતે હૈં ! હસળી સ્થાપના, માનિક્ષેપને રજ્વેયે નામવાળે વ્યક્તિી સ્થાપના હાઈં । મતવ વહ નિ જિલી મ↑ નિક્ષેપસે લિવવાર્થી સંજ્ઞા રવી નાય, રસવા સ્થાપના હો સતી હૈ ! મૂતમૈંર્ ર્માવત અવસ્યાસે સમ્બન્ધ વનેવાજે નામાં પ્રયો, વર્તમાનમેં રના વ્યનિક્ષેપ હૈ । જૈસે રાનપુત્રજૉ રાના હના, અથવા રાજ્યો છૂટ નાનેપર મી રાના હના ફસ નિક્ષેપ) વિષય નવ્રુત વિસ્તીબે હૈં । નૈસેજોમયુરાનનો નાના હતા હૈ ઉસાંતરā યુવરાખ ગૌર રાનાજે મરનાનેપર સ मृतक शरीरको भी राजा कहते है । कभी कभी ज्ञानको भी राजा ાહ તેતે હૈં । નૈસે-~રાના તો ફસળે મેં વસા હૈ' ! દૃશ્યમ હૈં । હત્યમેં ત રાનાજં જ્ઞાન વસા હૈ નાળિ રાના, લેનિન્યનિક્ષેપસે જ્ઞાનો જો છોડર્ જ્ઞાનમેં વ્યવહાર ારના નિદૈ ય જ્ઞાના વ્યવહાર જ્ઞૌનીમેં નિયા નાતા હૈ કૌર વસ્તુજ્ઞાતાજૉ મૉ ની વસ્તુળ નામતે હેતે હૈં । જ્ઞાન નો છોડર નિr વતુર્થાં પૂર્વોત્તર શ્રૃવસ્યા ચા હસતે સમ્બન્ધ વનેવા અન્યવસ્તુળો પત વસ્તુજે નામસે હના નોકામદ્રનિલેષ હૈ। ઇસ તીન મેટ્ ૐ - - શાયજ્ઞશામ નિક્ષપત, વસ્તુ જ્ઞાતાજો જ્ઞાયરારીરનૌત્રામદ્રનિક્ષેવસે વસ્તુ જ્ઞાતાજો રારીરનો તલ વસ્તુ નામસે હતે હૈં । નૈસે-જિલી રાનીતિ વિશાત્ મનુષ્ય મૃતારીરો નાનેપર હના ધ્યાન રાનનીતિ ખારે ફ્સ વાજ્યને રાખનૌતિજ્ઞ મૃત શીળો રાનનીતિ નામ વિયાયાં હૈ । જ્ઞાયારીરજે તીન મેક્ હૈં। મૂત, વિખ્યત, વર્તમાન । વર્તમાન જ્ઞાચારી अहं ब्रह्मास्मि इत्यादि વાચૌંહા અર્થ અને આમદ્રનિક્ષેપ ચા આયમમાાનક્ષેપ ી અપેક્ષામે યા નાય તો અદ્વૈતળે માનનેી નાત નહીં રહતી, સૌ. ફન વાયોવા અર્થ ની નૈ નાતા હૈ । ર્ મૃત શરીરવે તીન મેલ યેિ યે હૈ ચત્ત, વ્યુત, ખ્યાવિત । શરીર छूटने के पहिले खुद ही शरीरको त्याग देने अर्थात् ममत्व छोड़कर संन्यास
उत्तर प्रदेश के आगरा में गोशालाओं में पिछले चार साल में 1826 गोवंश की मौत हो गई। सैंकड़ों अभी भी बीमार हैं। दो हजार से अधिक गोवंश निराश्रित घूम रहे हैं। यह खुलासा बृहस्पतिवार को पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह की समीक्षा में हुआ। इसे लेकर मंत्री ने अंसतोष जताया। जल्द गोशालाओं का निर्माण कराने व उनमें गोवंश के लिए चारा, इलाज और अन्य सुविधाएं बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
उत्तर प्रदेश के आगरा में गोशालाओं में पिछले चार साल में एक हज़ार आठ सौ छब्बीस गोवंश की मौत हो गई। सैंकड़ों अभी भी बीमार हैं। दो हजार से अधिक गोवंश निराश्रित घूम रहे हैं। यह खुलासा बृहस्पतिवार को पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह की समीक्षा में हुआ। इसे लेकर मंत्री ने अंसतोष जताया। जल्द गोशालाओं का निर्माण कराने व उनमें गोवंश के लिए चारा, इलाज और अन्य सुविधाएं बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
कहा तो ये भी जाता है कि अगला वल्र्ड वार पानी को लेकर ही होगा, लेकिन इसका सॉल्यूशन क्या है? हर साल बारिश के रूप में नेचर हमें इतना पानी देती है कि इसका सही मैनेजमेंट करें तो कोई प्रॉब्लम ही न हो। जमीन से हम जितना पानी लेते हैं उतना पानी हम उसे लौटाते नहीं। यही वजह है कि ग्र्राउंड वाटर का लेवल गिरता जा रहा है। ऐसे में रेन वाटर हारवेस्टिंग इसका अच्छा सॉल्यूशन है। बारिश का अधिकतर पानी नालों में बहकर बर्बाद हो जाता है। इस पानी को इकट्ठा कर किसी खास माध्यम से जमीन के अंदर भेजना वाटर हार्वेस्टिंग कहलाता है। यह दो तरीके का होता है एक में पानी को टैंक में जमा कर लिया जाता है और फिर इसका यूज किया जाता है। दूसरे में ग्र्राउंड वाटर को रिचार्ज किया जाता है। नीर फाउंडेशन के रमन त्यागी बताते हैं कि कभी पूरे जिले में चार हजार तालाब हुआ करते थे और मेरठ शहर में 14 तालाब थे, जिनमें से सिर्फ एक सूरज कुंड रह गया है और वो भी तालाब की शक्ल में नहीं बचा है। दस साल पहले ग्राउंड वॉटर लेवल 30 फीट था और आज ये 50 फीट तक पहुंच गया है। बीते दस सालों में पानी का लेवल 20 फीट नीचे गिर गया है। हमारे शहर में इस समय 60 हजार से ज्यादा ट्यूबवेल और करीब इतने ही समर सेबल हैं। डब्लूएचओ के अनुसार एक पांच सदस्यी परिवार को एक दिन में 200 लीटर पानी की जरूरत होती है। अगर 600 एमएम एवरेज बारिश होती है और 100 स्क्वायर मीटर टैरेस एरिया में वॉटर हारवेस्टिंग प्लांट है तो 60000 लीटर पानी को इकट्ठा किया जा सकता है। पांच सदस्यों के एक परिवार में प्रति व्यक्ति पांच लीटर पीने का पानी यूज किया जाता है तो भी एक साल में 9125 लीटर पीने के पानी की जरूरत होती है। इस तरह हम अपनी जरूरत से ज्यादा पानी इस जरिए जमा कर सकते हैं। -20 एकड़ और इससे अधिक एरिया की विभिन्न योजनाओं के ले-आउट प्लांस में पार्क और खुले क्षेत्रों के साथ कुल योजना क्षेत्र के लगभग 5 परसेंट भूमि पर तालाब आदि बनाए जाएं, जिससे ग्राउंड वॉटर रिचार्ज हो सके। इन तालाबों का न्यूनतम क्षेत्रफल एक एकड़ होगा और उसकी गहराई 6 मीटर होगी। -बीस एकड़ से कम क्षेत्रफल की योजनाओं में तालाब, जलाशय और पार्क में निर्धारित मानकों के अनुसार एक कोने में रिचार्ज-वेल या रिचार्ज टैंक बनाए जाएं। -ऐसी योजनाएं बनाने से पहले पूरे क्षेत्र का जीओलॉजिकल, हाइड्रोलॉजिकल सर्वेक्षण कराया जाए ताकि वॉटर रिचार्जिंग के लिए उपयुक्त पद्धति को अपनाया जा सके। -1000 वर्ग मीटर और इससे अधिक एरिया के समस्त उपयोगों के भूखंडों तथा सभी ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं में छतों एवं खुले स्थानों से प्राप्त होने वाले बरसाती जल को प्रिकॉशनली पिट्स के माध्यम से ग्राउंड वॉटर चार्जिंग के लिए अनिवार्य किया जाए। -भविष्य में निर्माण होने वाले सभी सरकारी बिल्डिंग्स में छतों और खुले स्थानों से प्राप्त होने वाले बरसाती जल का ग्राउंड वॉटर चार्जिंग के लिए आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। -पहले निर्मित शासकीय भवनों में रेन वॉटर हारवेस्टिंग व रिचार्ज प्रणाली को अपनाया जाए। -यदि 100 वर्ग मीटर का मकान है तो उसमें वॉटर हारवेस्टिंग सिस्टम होना चाहिए.
कहा तो ये भी जाता है कि अगला वल्र्ड वार पानी को लेकर ही होगा, लेकिन इसका सॉल्यूशन क्या है? हर साल बारिश के रूप में नेचर हमें इतना पानी देती है कि इसका सही मैनेजमेंट करें तो कोई प्रॉब्लम ही न हो। जमीन से हम जितना पानी लेते हैं उतना पानी हम उसे लौटाते नहीं। यही वजह है कि ग्र्राउंड वाटर का लेवल गिरता जा रहा है। ऐसे में रेन वाटर हारवेस्टिंग इसका अच्छा सॉल्यूशन है। बारिश का अधिकतर पानी नालों में बहकर बर्बाद हो जाता है। इस पानी को इकट्ठा कर किसी खास माध्यम से जमीन के अंदर भेजना वाटर हार्वेस्टिंग कहलाता है। यह दो तरीके का होता है एक में पानी को टैंक में जमा कर लिया जाता है और फिर इसका यूज किया जाता है। दूसरे में ग्र्राउंड वाटर को रिचार्ज किया जाता है। नीर फाउंडेशन के रमन त्यागी बताते हैं कि कभी पूरे जिले में चार हजार तालाब हुआ करते थे और मेरठ शहर में चौदह तालाब थे, जिनमें से सिर्फ एक सूरज कुंड रह गया है और वो भी तालाब की शक्ल में नहीं बचा है। दस साल पहले ग्राउंड वॉटर लेवल तीस फीट था और आज ये पचास फीट तक पहुंच गया है। बीते दस सालों में पानी का लेवल बीस फीट नीचे गिर गया है। हमारे शहर में इस समय साठ हजार से ज्यादा ट्यूबवेल और करीब इतने ही समर सेबल हैं। डब्लूएचओ के अनुसार एक पांच सदस्यी परिवार को एक दिन में दो सौ लीटरटर पानी की जरूरत होती है। अगर छः सौ एमएम एवरेज बारिश होती है और एक सौ स्क्वायर मीटर टैरेस एरिया में वॉटर हारवेस्टिंग प्लांट है तो साठ हज़ार लीटरटर पानी को इकट्ठा किया जा सकता है। पांच सदस्यों के एक परिवार में प्रति व्यक्ति पांच लीटर पीने का पानी यूज किया जाता है तो भी एक साल में नौ हज़ार एक सौ पच्चीस लीटरटर पीने के पानी की जरूरत होती है। इस तरह हम अपनी जरूरत से ज्यादा पानी इस जरिए जमा कर सकते हैं। -बीस एकड़ और इससे अधिक एरिया की विभिन्न योजनाओं के ले-आउट प्लांस में पार्क और खुले क्षेत्रों के साथ कुल योजना क्षेत्र के लगभग पाँच परसेंट भूमि पर तालाब आदि बनाए जाएं, जिससे ग्राउंड वॉटर रिचार्ज हो सके। इन तालाबों का न्यूनतम क्षेत्रफल एक एकड़ होगा और उसकी गहराई छः मीटर होगी। -बीस एकड़ से कम क्षेत्रफल की योजनाओं में तालाब, जलाशय और पार्क में निर्धारित मानकों के अनुसार एक कोने में रिचार्ज-वेल या रिचार्ज टैंक बनाए जाएं। -ऐसी योजनाएं बनाने से पहले पूरे क्षेत्र का जीओलॉजिकल, हाइड्रोलॉजिकल सर्वेक्षण कराया जाए ताकि वॉटर रिचार्जिंग के लिए उपयुक्त पद्धति को अपनाया जा सके। -एक हज़ार वर्ग मीटर और इससे अधिक एरिया के समस्त उपयोगों के भूखंडों तथा सभी ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं में छतों एवं खुले स्थानों से प्राप्त होने वाले बरसाती जल को प्रिकॉशनली पिट्स के माध्यम से ग्राउंड वॉटर चार्जिंग के लिए अनिवार्य किया जाए। -भविष्य में निर्माण होने वाले सभी सरकारी बिल्डिंग्स में छतों और खुले स्थानों से प्राप्त होने वाले बरसाती जल का ग्राउंड वॉटर चार्जिंग के लिए आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। -पहले निर्मित शासकीय भवनों में रेन वॉटर हारवेस्टिंग व रिचार्ज प्रणाली को अपनाया जाए। -यदि एक सौ वर्ग मीटर का मकान है तो उसमें वॉटर हारवेस्टिंग सिस्टम होना चाहिए.
Posted On: अधिसूचना संख्या K-11019/49/2022-US.I/II दिनांक 11.11.2022 के माध्यम से, राष्ट्रपति ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 223 द्वारा प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करते हुए श्री न्यायमूर्ति संजय विजयकुमार गंगापुरवाला, जोकि बंबई उच्च न्यायालय के वरिष्ठतम अवर न्यायाधीश हैं, को उस उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पद के कर्तव्यों का पालन करने के लिए नियुक्त किया है। वह उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पद के कर्तव्यों का पालन श्री न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में अपनी नियुक्ति के परिणामस्वरूप बंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का पदभार छोड़ने की तिथि से करेंगे।
Posted On: अधिसूचना संख्या K-एकबीस उनचास एक हज़ार उन्नीसबाईस-US.I/II दिनांक ग्यारह.ग्यारह.दो हज़ार बाईस के माध्यम से, राष्ट्रपति ने भारत के संविधान के अनुच्छेद दो सौ तेईस द्वारा प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करते हुए श्री न्यायमूर्ति संजय विजयकुमार गंगापुरवाला, जोकि बंबई उच्च न्यायालय के वरिष्ठतम अवर न्यायाधीश हैं, को उस उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पद के कर्तव्यों का पालन करने के लिए नियुक्त किया है। वह उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पद के कर्तव्यों का पालन श्री न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में अपनी नियुक्ति के परिणामस्वरूप बंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का पदभार छोड़ने की तिथि से करेंगे।
मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने आज खजुराहो में आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के सानिध्य में आयोजित जीवदया सम्मान समारोह और स्वर्णोदय तीर्थ न्यास के शिलान्यास समारोह के मौके पर बड़ी घोषणा की है। मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने आज खजुराहो में आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के सानिध्य में आयोजित जीवदया सम्मान समारोह और स्वर्णोदय तीर्थ न्यास के शिलान्यास समारोह के मौके पर बड़ी घोषणा की है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मेरे मन में आया कि काउ प्रोटेक्शन बोर्ड है पर इसको पूरा मंत्रालय ही बना दें। उन्होंने कहा कि मंत्रालय बनने से गौ-सेवा और संवर्धन के कार्य तेजी और बेहतर से हो सकेगा। खबरों से मिली जानकारी के मुताबिक सीएम शिवराज सिंह चौहान ने सिद्ध इलाके के कुण्डलपुर पर केंद्रित चार ग्रंथ माला का विमोचन भी किया।
मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने आज खजुराहो में आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के सानिध्य में आयोजित जीवदया सम्मान समारोह और स्वर्णोदय तीर्थ न्यास के शिलान्यास समारोह के मौके पर बड़ी घोषणा की है। मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने आज खजुराहो में आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के सानिध्य में आयोजित जीवदया सम्मान समारोह और स्वर्णोदय तीर्थ न्यास के शिलान्यास समारोह के मौके पर बड़ी घोषणा की है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मेरे मन में आया कि काउ प्रोटेक्शन बोर्ड है पर इसको पूरा मंत्रालय ही बना दें। उन्होंने कहा कि मंत्रालय बनने से गौ-सेवा और संवर्धन के कार्य तेजी और बेहतर से हो सकेगा। खबरों से मिली जानकारी के मुताबिक सीएम शिवराज सिंह चौहान ने सिद्ध इलाके के कुण्डलपुर पर केंद्रित चार ग्रंथ माला का विमोचन भी किया।
।मंग्गौरदी (Manggaurdi) सिंह राशि का स्वामी ग्रह सूर्य है। सिंह राशि के आराध्य देव भगवान सूर्य होते हैं। इस राशि के मंग्गौरदी नाम के लड़के किसी के अधीन नहीं रह सकते। मंग्गौरदी नाम के लड़के सुस्त स्वभाव के होते हैं और पीठ तथा हृदय रोगों से ग्रस्त हो सकते हैं। इन मंग्गौरदी नाम के लड़कों में रीढ़ की हड्डी और लीवर की समस्याओं का खतरा होता है। सिंह राशि के मंग्गौरदी नाम के लड़कों में आत्मविश्वास की कमी और बहुमूत्र रोग आदि पाये जाते हैं। इस राशि के मंग्गौरदी नाम के लड़के अपनी ईमानदारी और सभ्यता के लिए हर जगह पसंद किये जाते हैं। मंग्गौरदी नाम बहुत सुंदर और आकर्षक माना जाता है। इतना ही नहीं इसका मतलब भी बहुत अच्छा होता है। आपको बता दें कि मंग्गौरदी नाम का अर्थ भगवान मुरुगन होता है। मंग्गौरदी नाम रखने से आपका बच्चा भी इस नाम के मतलब की तरह व्यव्हार करने लगता है। मंग्गौरदी नाम रखने से पहले इसका अर्थ जानना जरूरी होता है। जैसे कि मंग्गौरदी नाम का मतलब भगवान मुरुगन होता है और इस अर्थ का प्रभाव मंग्गौरदी नाम के व्यक्ति के स्वभाव में भी दिखने लगता है। जैसा कि हमने बताया कि मंग्गौरदी का अर्थ भगवान मुरुगन होता है और इस अर्थ का प्रभाव आप मंग्गौरदी नाम के व्यक्ति के व्यव्हार में भी देख सकते हैं। मंग्गौरदी नाम वाले व्यक्ति बिलकुल अपने नाम के मतलब की तरह यानी भगवान मुरुगन होते हैं। आगे पढ़ें मंग्गौरदी नाम की राशि, इसका लकी नंबर क्या है, मंग्गौरदी नाम के भगवान मुरुगन मतलब के बारे में विस्तार से जानें। मंग्गौरदी नाम का राशि स्वामी सूर्य एवं शुभ अंक 1 है। सूर्य के अधीन होने के कारण मंग्गौरदी नाम के व्यक्ति हमेशा अपने मन की करते हैं। दूसरों की बातें सुनना इन्हें पसंद नहीं होता। इन्हें अपने परिवार एवं समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। मंग्गौरदी नाम के लोग किसी निर्णय तक पहुंंचने से पहले मुद्दे के दोनों पहलुओं को अच्छी तरह देखते-समझते हैं। शुभ अंक 1 वाले लोग हमेशा सच का साथ देते हैं और अपने निर्णय को कभी नहीं बदलते। प्रेम संबंधों में मंग्गौरदी नाम के लोग विश्वसनीय और ईमानदार साबित होते हैं। मंग्गौरदी नाम के व्यक्ति सिंह राशि के होते हैं। सिंह राशि के लोगों में महत्त्वाकांक्षी, स्वाभिमानी, आत्मविश्वासी जैसे गुण भरे होते हैं। ये सोच से सकारात्मक होते हैं। इस नाम के लोगों को गुस्सा तो जल्दी आ जाता है पर मनाने पर ये तुरंत शांत भी हो जाते हैं। इस राशि के लोग ऐसे काम करके दिखा देते हैं, जिन्हें लोग असंभव समझते हैं। मुश्किल की घड़ी में भी मंग्गौरदी नाम के व्यक्ति की निष्ठा व आत्मविश्वास डगमगाता नहीं है। ये लोग अपने जीवन में सुख-सुविधाओं के लिए बहुत मेहनत करते हैं और उन्हें ये मिल भी जाती हैं। ।भगवान महेश की शक्ति (भगवान शिव)
।मंग्गौरदी सिंह राशि का स्वामी ग्रह सूर्य है। सिंह राशि के आराध्य देव भगवान सूर्य होते हैं। इस राशि के मंग्गौरदी नाम के लड़के किसी के अधीन नहीं रह सकते। मंग्गौरदी नाम के लड़के सुस्त स्वभाव के होते हैं और पीठ तथा हृदय रोगों से ग्रस्त हो सकते हैं। इन मंग्गौरदी नाम के लड़कों में रीढ़ की हड्डी और लीवर की समस्याओं का खतरा होता है। सिंह राशि के मंग्गौरदी नाम के लड़कों में आत्मविश्वास की कमी और बहुमूत्र रोग आदि पाये जाते हैं। इस राशि के मंग्गौरदी नाम के लड़के अपनी ईमानदारी और सभ्यता के लिए हर जगह पसंद किये जाते हैं। मंग्गौरदी नाम बहुत सुंदर और आकर्षक माना जाता है। इतना ही नहीं इसका मतलब भी बहुत अच्छा होता है। आपको बता दें कि मंग्गौरदी नाम का अर्थ भगवान मुरुगन होता है। मंग्गौरदी नाम रखने से आपका बच्चा भी इस नाम के मतलब की तरह व्यव्हार करने लगता है। मंग्गौरदी नाम रखने से पहले इसका अर्थ जानना जरूरी होता है। जैसे कि मंग्गौरदी नाम का मतलब भगवान मुरुगन होता है और इस अर्थ का प्रभाव मंग्गौरदी नाम के व्यक्ति के स्वभाव में भी दिखने लगता है। जैसा कि हमने बताया कि मंग्गौरदी का अर्थ भगवान मुरुगन होता है और इस अर्थ का प्रभाव आप मंग्गौरदी नाम के व्यक्ति के व्यव्हार में भी देख सकते हैं। मंग्गौरदी नाम वाले व्यक्ति बिलकुल अपने नाम के मतलब की तरह यानी भगवान मुरुगन होते हैं। आगे पढ़ें मंग्गौरदी नाम की राशि, इसका लकी नंबर क्या है, मंग्गौरदी नाम के भगवान मुरुगन मतलब के बारे में विस्तार से जानें। मंग्गौरदी नाम का राशि स्वामी सूर्य एवं शुभ अंक एक है। सूर्य के अधीन होने के कारण मंग्गौरदी नाम के व्यक्ति हमेशा अपने मन की करते हैं। दूसरों की बातें सुनना इन्हें पसंद नहीं होता। इन्हें अपने परिवार एवं समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। मंग्गौरदी नाम के लोग किसी निर्णय तक पहुंंचने से पहले मुद्दे के दोनों पहलुओं को अच्छी तरह देखते-समझते हैं। शुभ अंक एक वाले लोग हमेशा सच का साथ देते हैं और अपने निर्णय को कभी नहीं बदलते। प्रेम संबंधों में मंग्गौरदी नाम के लोग विश्वसनीय और ईमानदार साबित होते हैं। मंग्गौरदी नाम के व्यक्ति सिंह राशि के होते हैं। सिंह राशि के लोगों में महत्त्वाकांक्षी, स्वाभिमानी, आत्मविश्वासी जैसे गुण भरे होते हैं। ये सोच से सकारात्मक होते हैं। इस नाम के लोगों को गुस्सा तो जल्दी आ जाता है पर मनाने पर ये तुरंत शांत भी हो जाते हैं। इस राशि के लोग ऐसे काम करके दिखा देते हैं, जिन्हें लोग असंभव समझते हैं। मुश्किल की घड़ी में भी मंग्गौरदी नाम के व्यक्ति की निष्ठा व आत्मविश्वास डगमगाता नहीं है। ये लोग अपने जीवन में सुख-सुविधाओं के लिए बहुत मेहनत करते हैं और उन्हें ये मिल भी जाती हैं। ।भगवान महेश की शक्ति
- Movies सोनाक्षी सिन्हा के साथ रोमांस करने से रणबीर कपूर ने कर दिया था इंकार? वजह है चौकाने वाली! - Travel क्या है पानीपुरी का इतिहास और क्यों सर्च इंजन गूगल कर रहा है इसे Celebrate? अंडा खा कर कैसे करे वजन कम? अंडा हमारे शरीर के लिये बहुत अहम माना जाता है क्योंकि इसमें प्रोटीन की मात्रा बहुत अधिक होती है। इसलिये अगर आप वजन कम करना चाहते हैं तो रोज दो अंडे जरुर खाइये। लेकिन ऐसे बहुत से लोग हैं जो अंडा खाने से डरते हैं और उसके अनुसार अंडे का पीला भाग वजन बढाता है। यह बाते गलत हैं क्योंकि अंडे के पीले भाग में अच्छी कैलोरी पाई जाती है जो हमें एनर्जी देती है ना की कमर बढाती है। आइये जानते हैं कि अंडा वजन घटाने में किस तरह से मददगार होता है। 1. क्या आप बढती हुई उम्र में हैं? बढते हुए बच्चों के लिये अंडा बहुत ही लाभकारी होता है। रिसर्च में भी कहा गया है कि हमारे बढने की उम्र 25 साल तक होती है और इस दौरान अंडा खाना हमारे लिये अच्छा माना जाता है। लेकिन अगर आप 40 के पार है तो आपको अंडा सोंच समझ कर ही खाना होगा। 2. जरुरी है अमीनो एसिड- अमीनो एसिड प्रोटीन का अहम हिस्सा होता है। लेकिन सबसे अहम अमीनो एसिड जो कि अंडे में पाया जाता है वह ल्युसीन होता है। यह कम्पोनेंट आपका वजन कम करने में मददगार होगा। 3. अंडे का सफेद भाग- अगर आप वजन कम करने के लिये प्रोटीन डाइट पर हैं तो अंडे का सफेद भाग बढियां रहेगा। इस भाग में कैलोरीज होती हैं जो कि शरीर के लिये बहुत जरुरी है। यह आपकी कमर बिल्कुल भी नहीं बढाएगा बल्कि यह तो आपको एनर्जी देगा। इसलिये अगर आपको अल्ट्रा लीन होना है तो अंडे का साथ कभी ना छोडे़। 4. योल्क खाना ना भूलें- कई लोग अंडे के पीले भाग को छोड़ देते हैं, लेकिन यह बिल्कुल गलत बात है। हम आपकी जानकारी के लिये बता दें कि इस पीले भाग में कई तरह के विटामिन छुपे हुए हैं। इसलिये आप इस पीले भाग को आराम से दिन में 1 या 2 बार खा सकते हैं। 5. अंडे को किस तरह खाएं? अगर आप अंडे को डीप फ्राइ कर के खाते हैं, तो समझ लीजिये कि आप मोटापे को दावत दे रहे हैं। फ्राइड एग में कोलेस्ट्रॉल बहुत ज्यादा होता है और जरुरी पोषण कम हो जाते हैं। इसमें प्रोटीन होता है इसलिये आपको इसे ना तो ज्यादा फ्राइ करना चाहिये और ना ही ज्यादा देर तक उबालना चाहिये। इसे आधा फ्राइ कर के खाएं तो अच्छा होगा।
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Central Vista Inauguration: इंडिया गेट पर 'कर्तव्य पथ' के उद्घाटन और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा के अनावरण पर अभिनेत्री कंगना रनौत (Kangana Ranaut On Subhash Chandra Bose) ने कहा "नेताजी सुभाष चंद्र बोस सत्ता के भूखे नहीं थे,नेताजी आज़ादी के भूखे थे और उन्होंने देश को आज़ादी दिलाई. ये जो रास्ता है इस पर आने वाली कई पीढ़ियां चलेंगी. ये कर्तव्य पथ है" प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी केंद्र आज यानी बृहस्पतिवार को केंद्र की प्राथमिकता वाली सेंट्रल विस्टा परियोजना के एक हिस्से का उद्घाटन करेंगे. इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंच रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'कर्तव्य पथ' का उद्घाटन और इंडिया गेट पर स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा (Subhash Chandra Bose Statue) का अनावरण करेंगे. 'कर्तव्य पथ' राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक का मार्ग है. इस सड़क के दोनों तरफ लॉन और हरियाली के साथ ही पैदल चलने वालों के लिये लाल ग्रेनाइट पत्थरों से बना पैदल पथ इसकी भव्यता को और बढ़ा देता है. इस मार्ग पर नवीकृत नहरें, राज्यों की खाद्य वस्तुओं के स्टॉल, नयी सुविधाओं वाले ब्लॉक और बिक्री स्टॉल होंगे. (SocialLY के साथ पाएं लेटेस्ट ब्रेकिंग न्यूज, वायरल ट्रेंड और सोशल मीडिया की दुनिया से जुड़ी सभी खबरें. यहां आपको ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर वायरल होने वाले हर कंटेंट की सीधी जानकारी मिलेगी. ऊपर दिखाया गया पोस्ट अनएडिटेड कंटेंट है, जिसे सीधे सोशल मीडिया यूजर्स के अकाउंट से लिया गया है. लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है. सोशल मीडिया पोस्ट लेटेस्टली के विचारों और भावनाओं का प्रतिनिधित्व नहीं करता है, हम इस पोस्ट में मौजूद किसी भी कंटेंट के लिए कोई जिम्मेदारी या दायित्व स्वीकार नहीं करते हैं. )
Central Vista Inauguration: इंडिया गेट पर 'कर्तव्य पथ' के उद्घाटन और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा के अनावरण पर अभिनेत्री कंगना रनौत ने कहा "नेताजी सुभाष चंद्र बोस सत्ता के भूखे नहीं थे,नेताजी आज़ादी के भूखे थे और उन्होंने देश को आज़ादी दिलाई. ये जो रास्ता है इस पर आने वाली कई पीढ़ियां चलेंगी. ये कर्तव्य पथ है" प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी केंद्र आज यानी बृहस्पतिवार को केंद्र की प्राथमिकता वाली सेंट्रल विस्टा परियोजना के एक हिस्से का उद्घाटन करेंगे. इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंच रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'कर्तव्य पथ' का उद्घाटन और इंडिया गेट पर स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा का अनावरण करेंगे. 'कर्तव्य पथ' राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक का मार्ग है. इस सड़क के दोनों तरफ लॉन और हरियाली के साथ ही पैदल चलने वालों के लिये लाल ग्रेनाइट पत्थरों से बना पैदल पथ इसकी भव्यता को और बढ़ा देता है. इस मार्ग पर नवीकृत नहरें, राज्यों की खाद्य वस्तुओं के स्टॉल, नयी सुविधाओं वाले ब्लॉक और बिक्री स्टॉल होंगे.
Chakradharpur (Shambhu Kumar) : चक्रधरपुर थाना क्षेत्र के बोड़दा गांव स्थित शिव मंदिर के पास नदी से एक युवक का शव बरामद किया गया है. जानकारी के अनुसार बुधवार सुबह नदी में नहाने गए कुछ लोगों ने युवक का शव देखा. इसके बाद यह खबर बोड़दा व आसपास गांव में फैल गई. वहीं, इसकी सूचना मिलने से खुंटपानी प्रखंड की बाइका गांव से कुछ लोग घटनास्थल पर पहुंचे और शव को नदी से निकालकर बिना पोस्टमार्टम कराए साथ ले गए. इस संबंध में स्थानीय लोगों ने बताया कि युवक खुंटपानी प्रखंड की बाइका गांव का रहने वाला था. साथ ही वह मिर्गी की बीमारी से पीड़ित था. घटना की सूचना मिलने पर मृतक के परिजन बोड़दा गांव आकर शव की पहचान कर नदी से शव निकालकर ले गए. इधर, इसकी सूचना मिलने पर चक्रधरपुर पुलिस मामले की जांच पड़ताल में जुट गई है.
Chakradharpur : चक्रधरपुर थाना क्षेत्र के बोड़दा गांव स्थित शिव मंदिर के पास नदी से एक युवक का शव बरामद किया गया है. जानकारी के अनुसार बुधवार सुबह नदी में नहाने गए कुछ लोगों ने युवक का शव देखा. इसके बाद यह खबर बोड़दा व आसपास गांव में फैल गई. वहीं, इसकी सूचना मिलने से खुंटपानी प्रखंड की बाइका गांव से कुछ लोग घटनास्थल पर पहुंचे और शव को नदी से निकालकर बिना पोस्टमार्टम कराए साथ ले गए. इस संबंध में स्थानीय लोगों ने बताया कि युवक खुंटपानी प्रखंड की बाइका गांव का रहने वाला था. साथ ही वह मिर्गी की बीमारी से पीड़ित था. घटना की सूचना मिलने पर मृतक के परिजन बोड़दा गांव आकर शव की पहचान कर नदी से शव निकालकर ले गए. इधर, इसकी सूचना मिलने पर चक्रधरपुर पुलिस मामले की जांच पड़ताल में जुट गई है.
बांग्लादेश के खिलाफ चट्टोग्राम टेस्ट में शतक लगाने वाले शुभमन गिल दूसरे टेस्ट से बाहर होते नजर आ रहे हैं। वह टीम इंडिया में कप्तान रोहित शर्मा के लिए जगह खाली करेंगे। रोहित के आने से प्लेइंग-11 में उनकी जगह नहीं बनेगी। आगे खबर में हम जानेंगे कि गिल प्लेइंग-11 में क्यों नहीं हो सकते। उनकी जगह ओपनिंग करने वाले रोहित शर्मा और लोकेश राहुल ने पिछले कुछ टेस्ट में कैसा प्रदर्शन किया। साथ ही जानेंगे कि गिल किस तरह टीम इंडिया के ऑल-फॉर्मेट प्लेयर के रूप में तैयार हो रहे हैं। क्यों बाहर हो सकते हैं गिल? मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि वनडे सीरीज में चोट के चलते पहले टेस्ट से बाहर हुए रोहित शर्मा फिट हो गए हैं। अगर वे दूसरे टेस्ट में खेलते हैं तो युवा शुभमन गिल को ही उनके लिए जगह खाली करनी होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि रोहित के बाद उपकप्तान राहुल टीम में होंगे। नंबर-3 पर इन-फॉर्म चेतेश्वर पुजारा आएंगे, जिन्होंने पहले टेस्ट में 192 रन बनाए। कोहली अपने पीक फॉर्म में लौटने लगे हैं। क्या रोहित शर्मा ही खेलेंगे दूसरा टेस्ट? बांग्लादेश के खिलाफ वनडे सीरीज के दौरान भारत के कप्तान रोहित शर्मा चोटिल हो गए थे। अंगूठे में चोट लगने के बाद इलाज कराने के लिए वे मुंबई लौट गए थे। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि रोहित अब पूरी तरह फिट हो चुके हैं। वे शनिवार या रविवार तक टीम के साथ जुड़ भी जाएंगे। रोहित ने 22 दिसंबर से शुरू होने वाले दूसरे टेस्ट के लिए खुद को अवेलेबल बताया है। रोहित टीम इंडिया के फुल-टाइम टेस्ट कैप्टन हैं। ऐसे में अगर वे टीम के साथ रहे तो प्लेइंग-11 का हिस्सा भी जरूर ही होंगे। दूसरे टेस्ट से पहले अगर उनकी चोट पूरी तरह ठीक नहीं हो पाई तब ही वे प्लेइंग-11 से बाहर बैठेंगे और गिल को मौका मिल सकेगा। राहुल बाहर क्यों नहीं हो सकते? ओपनिंग बैटर और पहले टेस्ट में टीम इंडिया की कमान संभाल रहे केएल राहुल भी दूसरे टेस्ट से बाहर नहीं होंगे, क्योंकि राहुल टीम के उपकप्तान हैं। दूसरे टेस्ट के दौरान अगर रोहित इंजरी या किसी और कारण से मैदान से बाहर गए तो उस सिचुएशन में राहुल ही टीम की कप्तानी करेंगे। हालांकि, 2022 में खेले 3 टेस्ट में उनका प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा। इस साल की 6 पारियों में वह 50, 8, 12, 10, 22 और 23 रन के स्कोर ही बना सके। लेकिन, 2021 के 5 टेस्ट में उन्होंने 46. 10 के औसत से 461 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने लॉर्ड्स और सेंचुरियन में शतक जड़े। ऐसे में राहुल को टेस्ट में आउट ऑफ फॉर्म मानना भी बेवकूफी ही होगी। मिडिल ऑर्डर में जगह क्यों नहीं बन रही? भारत के लिए खेले 12 टेस्ट की 23 पारियों में शुभमन गिल ने 22 बार ओपनिंग की। एक बार वे तीसरे नंबर पर उतरे। तीसरे नंबर पर इस वक्त चेतेश्वर पुजारा खेल रहे हैं। जो पहले टेस्ट में 90 और 102* रन की पारियां खेल चुके हैं। ऐसे में नंबर-3 पर उनकी जगह नहीं ही बनती है। चौथे नंबर पर विराट कोहली आते हैं। पिछले 3-4 महीनों में विराट के ओवरऑल प्रदर्शन के बाद उन्हें प्लेइंग-11 से बाहर करने के बारे में कोई सोच भी नहीं सकता। 5वें नंबर पर अय्यर और 6ठे नंबर पर विकेटकीपर ऋषभ पंत आते हैं। अय्यर ने 2022 में भारत के लिए तीनों फॉर्मेट मिलाकर सबसे ज्यादा रन बनाए हैं। वहीं, पंत इस साल टीम इंडिया के बेस्ट टेस्ट बैटर हैं। ऐसे में ओपनिंग से लेकर नंबर-6 तक भी गिल की जगह नहीं बनती। 7 से 9 नंबर तक भारत के 3 स्पिन ऑलराउंडर रविचंद्रन अश्विन, अक्षर पटेल और कुलदीप यादव का नंबर आता है। वहीं, 10 और 11 नंबर पर पेस बॉलर उमेश यादव और मोहम्मद सिराज खेलते हैं। इससे साफ है कि रोहित शर्मा के फिट होने की सिचुएशन में युवा शुभमन गिल ही प्लेइंग-11 से बाहर होंगे। पहले टेस्ट में सेंचुरी से पहले गिल ने लिमिटेड ओवर्स क्रिकेट में भी खुद को साबित करना शुरू कर दिया है। भारत के लिए अब तक खेले 15 वनडे में उन्होंने 57. 25 के औसत से 687 रन बनाए। इनमें 4 फिफ्टी और एक सेंचुरी भी आई। 2019 में वनडे डेब्यू के बाद 2021 तक उन्होंने भारत के लिए 3 ही मैच खेले। 2022 में टीम इंडिया ने उन्हें 12 मौके दिए। वे इस साल भारत के लिए सबसे ज्यादा वनडे रन बनाने वाले प्लेयर्स की लिस्ट में श्रेयस अय्यर और शिखर धवन के बाद तीसरे नंबर पर हैं। रोहित शर्मा या केएल राहुल की गैरमौजूदगी में गिल लगातार टेस्ट टीम में ओपनिंग की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं। 2021 में वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में उन्होंने रोहित शर्मा के साथ ओपनिंग की थी। दिसंबर 2020 में टेस्ट डेब्यू के बाद गिल ने भारत के लिए 12 टेस्ट खेले। इनमें 33. 76 के औसत से 709 रन बनाए। इनमें एक शतक और 4 फिफ्टी आईं। 2021 में गिल ने भारत के लिए 9 टेस्ट खेले। वह इस साल भारत के लिए 6 में से 2 टेस्ट का हिस्सा रहे। वनडे और टेस्ट में मिल रहे इतने मौकों से साफ है कि टीम मैनेजमेंट गिल को ऑल फॉर्मेट प्लेयर के रूप में तैयार कर रहा है। 23 साल के गिल इंडियन प्रीमियर लीग में गुजरात टाइटंस से खेलते हैं। 2018 में भारत की विजेता अंडर-19 टीम के प्लेयर रहे गिल ने कोलकाता नाइटराइडर्स के साथ IPL सफर की शुरुआत की। तब से लेकर अब तक 74 IPL मैचों में उन्होंने 125. 25 के स्ट्राइक रेट से 1900 रन बनाए। इनमें 14 फिफ्टी आईं। पिछले IPL सीजन में उन्होंने टीम के लिए 16 मैचों में 132. 30 के स्ट्राइक रेट से 483 रन बनाए। क्वीलिफायर-1 में उन्होंने 21 बॉल पर 35 और फाइनल में 43 बॉल पर 45 रन की नॉटआउट पारियां खेलीं। उनकी दमदार बैटिंग ने टीम की ट्रॉफी जीत में अहम भूमिका निभाई। हालांकि, उन्हें अभी तक टीम इंडिया की टी-20 टीम में डेब्यू करने का मौका नहीं मिल सका है। टीम इंडिया के पूर्व टेस्ट खिलाड़ी वसीम जाफर ने कहा, 'शुभमन गिल में भारत के स्टार बैटर विराट कोहली जैसी प्रतिभा है। गिल एक क्लास प्लेयर हैं। कोहली के बाद गिल ही भारत के सबसे बड़े बैटर साबित होंगे। मेरे लिए तो वह एक प्रॉपर ऑल-फॉर्मेट प्लेयर हैं। ' 2022 टी-20 वर्ल्ड कप में टीम इंडिया का हिस्सा रहे दिनेश कार्तिक ने कहा, 'शुभमन गिल जानते हैं कि रोहित के फिट होने पर उन्हें बाहर होना पड़ेगा। यही टीम इंडिया की सच्चाई है। लेकिन, गिल कुछ ही टाइम में खुद को सभी फॉर्मेट में रेगुलर ओपनर के रूप में स्थापित कर लेंगे। गिल ने अपने शॉट सिलेक्शन से साबित कर दिया है कि वे एक वर्ल्ड क्लास क्रिकेटर हैं। ' This website follows the DNPA Code of Ethics.
बांग्लादेश के खिलाफ चट्टोग्राम टेस्ट में शतक लगाने वाले शुभमन गिल दूसरे टेस्ट से बाहर होते नजर आ रहे हैं। वह टीम इंडिया में कप्तान रोहित शर्मा के लिए जगह खाली करेंगे। रोहित के आने से प्लेइंग-ग्यारह में उनकी जगह नहीं बनेगी। आगे खबर में हम जानेंगे कि गिल प्लेइंग-ग्यारह में क्यों नहीं हो सकते। उनकी जगह ओपनिंग करने वाले रोहित शर्मा और लोकेश राहुल ने पिछले कुछ टेस्ट में कैसा प्रदर्शन किया। साथ ही जानेंगे कि गिल किस तरह टीम इंडिया के ऑल-फॉर्मेट प्लेयर के रूप में तैयार हो रहे हैं। क्यों बाहर हो सकते हैं गिल? मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि वनडे सीरीज में चोट के चलते पहले टेस्ट से बाहर हुए रोहित शर्मा फिट हो गए हैं। अगर वे दूसरे टेस्ट में खेलते हैं तो युवा शुभमन गिल को ही उनके लिए जगह खाली करनी होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि रोहित के बाद उपकप्तान राहुल टीम में होंगे। नंबर-तीन पर इन-फॉर्म चेतेश्वर पुजारा आएंगे, जिन्होंने पहले टेस्ट में एक सौ बानवे रन बनाए। कोहली अपने पीक फॉर्म में लौटने लगे हैं। क्या रोहित शर्मा ही खेलेंगे दूसरा टेस्ट? बांग्लादेश के खिलाफ वनडे सीरीज के दौरान भारत के कप्तान रोहित शर्मा चोटिल हो गए थे। अंगूठे में चोट लगने के बाद इलाज कराने के लिए वे मुंबई लौट गए थे। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि रोहित अब पूरी तरह फिट हो चुके हैं। वे शनिवार या रविवार तक टीम के साथ जुड़ भी जाएंगे। रोहित ने बाईस दिसंबर से शुरू होने वाले दूसरे टेस्ट के लिए खुद को अवेलेबल बताया है। रोहित टीम इंडिया के फुल-टाइम टेस्ट कैप्टन हैं। ऐसे में अगर वे टीम के साथ रहे तो प्लेइंग-ग्यारह का हिस्सा भी जरूर ही होंगे। दूसरे टेस्ट से पहले अगर उनकी चोट पूरी तरह ठीक नहीं हो पाई तब ही वे प्लेइंग-ग्यारह से बाहर बैठेंगे और गिल को मौका मिल सकेगा। राहुल बाहर क्यों नहीं हो सकते? ओपनिंग बैटर और पहले टेस्ट में टीम इंडिया की कमान संभाल रहे केएल राहुल भी दूसरे टेस्ट से बाहर नहीं होंगे, क्योंकि राहुल टीम के उपकप्तान हैं। दूसरे टेस्ट के दौरान अगर रोहित इंजरी या किसी और कारण से मैदान से बाहर गए तो उस सिचुएशन में राहुल ही टीम की कप्तानी करेंगे। हालांकि, दो हज़ार बाईस में खेले तीन टेस्ट में उनका प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा। इस साल की छः पारियों में वह पचास, आठ, बारह, दस, बाईस और तेईस रन के स्कोर ही बना सके। लेकिन, दो हज़ार इक्कीस के पाँच टेस्ट में उन्होंने छियालीस. दस के औसत से चार सौ इकसठ रन बनाए। इस दौरान उन्होंने लॉर्ड्स और सेंचुरियन में शतक जड़े। ऐसे में राहुल को टेस्ट में आउट ऑफ फॉर्म मानना भी बेवकूफी ही होगी। मिडिल ऑर्डर में जगह क्यों नहीं बन रही? भारत के लिए खेले बारह टेस्ट की तेईस पारियों में शुभमन गिल ने बाईस बार ओपनिंग की। एक बार वे तीसरे नंबर पर उतरे। तीसरे नंबर पर इस वक्त चेतेश्वर पुजारा खेल रहे हैं। जो पहले टेस्ट में नब्बे और एक सौ दो* रन की पारियां खेल चुके हैं। ऐसे में नंबर-तीन पर उनकी जगह नहीं ही बनती है। चौथे नंबर पर विराट कोहली आते हैं। पिछले तीन-चार महीनों में विराट के ओवरऑल प्रदर्शन के बाद उन्हें प्लेइंग-ग्यारह से बाहर करने के बारे में कोई सोच भी नहीं सकता। पाँचवें नंबर पर अय्यर और छःठे नंबर पर विकेटकीपर ऋषभ पंत आते हैं। अय्यर ने दो हज़ार बाईस में भारत के लिए तीनों फॉर्मेट मिलाकर सबसे ज्यादा रन बनाए हैं। वहीं, पंत इस साल टीम इंडिया के बेस्ट टेस्ट बैटर हैं। ऐसे में ओपनिंग से लेकर नंबर-छः तक भी गिल की जगह नहीं बनती। सात से नौ नंबर तक भारत के तीन स्पिन ऑलराउंडर रविचंद्रन अश्विन, अक्षर पटेल और कुलदीप यादव का नंबर आता है। वहीं, दस और ग्यारह नंबर पर पेस बॉलर उमेश यादव और मोहम्मद सिराज खेलते हैं। इससे साफ है कि रोहित शर्मा के फिट होने की सिचुएशन में युवा शुभमन गिल ही प्लेइंग-ग्यारह से बाहर होंगे। पहले टेस्ट में सेंचुरी से पहले गिल ने लिमिटेड ओवर्स क्रिकेट में भी खुद को साबित करना शुरू कर दिया है। भारत के लिए अब तक खेले पंद्रह वनडे में उन्होंने सत्तावन. पच्चीस के औसत से छः सौ सत्तासी रन बनाए। इनमें चार फिफ्टी और एक सेंचुरी भी आई। दो हज़ार उन्नीस में वनडे डेब्यू के बाद दो हज़ार इक्कीस तक उन्होंने भारत के लिए तीन ही मैच खेले। दो हज़ार बाईस में टीम इंडिया ने उन्हें बारह मौके दिए। वे इस साल भारत के लिए सबसे ज्यादा वनडे रन बनाने वाले प्लेयर्स की लिस्ट में श्रेयस अय्यर और शिखर धवन के बाद तीसरे नंबर पर हैं। रोहित शर्मा या केएल राहुल की गैरमौजूदगी में गिल लगातार टेस्ट टीम में ओपनिंग की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं। दो हज़ार इक्कीस में वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में उन्होंने रोहित शर्मा के साथ ओपनिंग की थी। दिसंबर दो हज़ार बीस में टेस्ट डेब्यू के बाद गिल ने भारत के लिए बारह टेस्ट खेले। इनमें तैंतीस. छिहत्तर के औसत से सात सौ नौ रन बनाए। इनमें एक शतक और चार फिफ्टी आईं। दो हज़ार इक्कीस में गिल ने भारत के लिए नौ टेस्ट खेले। वह इस साल भारत के लिए छः में से दो टेस्ट का हिस्सा रहे। वनडे और टेस्ट में मिल रहे इतने मौकों से साफ है कि टीम मैनेजमेंट गिल को ऑल फॉर्मेट प्लेयर के रूप में तैयार कर रहा है। तेईस साल के गिल इंडियन प्रीमियर लीग में गुजरात टाइटंस से खेलते हैं। दो हज़ार अट्ठारह में भारत की विजेता अंडर-उन्नीस टीम के प्लेयर रहे गिल ने कोलकाता नाइटराइडर्स के साथ IPL सफर की शुरुआत की। तब से लेकर अब तक चौहत्तर IPL मैचों में उन्होंने एक सौ पच्चीस. पच्चीस के स्ट्राइक रेट से एक हज़ार नौ सौ रन बनाए। इनमें चौदह फिफ्टी आईं। पिछले IPL सीजन में उन्होंने टीम के लिए सोलह मैचों में एक सौ बत्तीस. तीस के स्ट्राइक रेट से चार सौ तिरासी रन बनाए। क्वीलिफायर-एक में उन्होंने इक्कीस बॉल पर पैंतीस और फाइनल में तैंतालीस बॉल पर पैंतालीस रन की नॉटआउट पारियां खेलीं। उनकी दमदार बैटिंग ने टीम की ट्रॉफी जीत में अहम भूमिका निभाई। हालांकि, उन्हें अभी तक टीम इंडिया की टी-बीस टीम में डेब्यू करने का मौका नहीं मिल सका है। टीम इंडिया के पूर्व टेस्ट खिलाड़ी वसीम जाफर ने कहा, 'शुभमन गिल में भारत के स्टार बैटर विराट कोहली जैसी प्रतिभा है। गिल एक क्लास प्लेयर हैं। कोहली के बाद गिल ही भारत के सबसे बड़े बैटर साबित होंगे। मेरे लिए तो वह एक प्रॉपर ऑल-फॉर्मेट प्लेयर हैं। ' दो हज़ार बाईस टी-बीस वर्ल्ड कप में टीम इंडिया का हिस्सा रहे दिनेश कार्तिक ने कहा, 'शुभमन गिल जानते हैं कि रोहित के फिट होने पर उन्हें बाहर होना पड़ेगा। यही टीम इंडिया की सच्चाई है। लेकिन, गिल कुछ ही टाइम में खुद को सभी फॉर्मेट में रेगुलर ओपनर के रूप में स्थापित कर लेंगे। गिल ने अपने शॉट सिलेक्शन से साबित कर दिया है कि वे एक वर्ल्ड क्लास क्रिकेटर हैं। ' This website follows the DNPA Code of Ethics.
नई दिल्ली. टाटा मोटर्स (Tata Motors) अपनी पॉपुलर एसयूवी टाटा हैरियर को एक नए अवतार में लॉन्च करने वाली है. कंपनी इस कार का नया 'स्पेशल एडिशन' लॉन्च करने वाली है. कंपनी ने इस एडिशन के नाम की जानकारी नहीं दी है. यह सफारी एडवेंचर पर्सोना एडिशन की तरह ही एक बोल्ड एडिशन होने की उम्मीद है. हैरियर मौजूदा समय में चार स्पेशल एडिशन - कैमो, डार्क, काजीरंगा और जेट में उपलब्ध है. नए टाटा हैरियर स्पेशल एडिशन में नियमित मॉडल की तुलना में कुछ कॉस्मेटिक अपडेट मिलने की संभावना है. हालांकि, इसका इंजन सेटअप में कोई बदलाव न होने की उम्मीद है. यह 170bhp, 2. 0L डीजल इंजन के साथ आता रहेगा. कंपनी एसयूवी के स्पेशल एडिशन को एक नई कलर स्कीम में पेश कर सकती है. यह रेंज-टॉपिंग XZA+ वैरिएंट पर आधारित होने की उम्मीद है जो ऑटो डिमिंग IRVM, एक पैनोरमिक सनरूफ, 6-वे इलेक्ट्रिकली एडजस्टेबल ड्राइवर सीट और 17-इंच डायमंड कट अलॉय व्हील सहित कुछ विशेष सुविधाओं के साथ आता है. जहां तक कीमत का सवाल है, नए टाटा हैरियर स्पेशल एडिशन की कीमत लगभग 50,000 रुपये अधिक होने की उम्मीद है. मॉडल इस साल के अंत में सेल के लिए उपलब्ध होगा. अन्य अपडेट में, कंपनी 2023 की शुरुआत में टाटा हैरियर फेसलिफ्ट पेश करने की योजना बना रही है. एसयूवी का अपडेटेड मॉडल एडीएएस (ADAS) के साथ 360 डिग्री कैमरा और वायरलेस एंड्रॉइड ऑटो सपोर्ट, एक बड़ा इंफोटेनमेंट सिस्टम के साथ आने की संभावना है. इसके एक्सटीरियर में भी कुछ बदलाव किए जाएंगे. नई हैरियर फेसलिफ्ट में हॉरिजोनल स्लैट्स और इंटीग्रेटेड रडार के साथ अपडेटेड ग्रिल, एलईडी डीएलआर के साथ नए डिजाइन वाले एलईडी हेडलैंप, नए अलॉय व्हील और रिवाइज्ड रियर बंपर होगा. Share:
नई दिल्ली. टाटा मोटर्स अपनी पॉपुलर एसयूवी टाटा हैरियर को एक नए अवतार में लॉन्च करने वाली है. कंपनी इस कार का नया 'स्पेशल एडिशन' लॉन्च करने वाली है. कंपनी ने इस एडिशन के नाम की जानकारी नहीं दी है. यह सफारी एडवेंचर पर्सोना एडिशन की तरह ही एक बोल्ड एडिशन होने की उम्मीद है. हैरियर मौजूदा समय में चार स्पेशल एडिशन - कैमो, डार्क, काजीरंगा और जेट में उपलब्ध है. नए टाटा हैरियर स्पेशल एडिशन में नियमित मॉडल की तुलना में कुछ कॉस्मेटिक अपडेट मिलने की संभावना है. हालांकि, इसका इंजन सेटअप में कोई बदलाव न होने की उम्मीद है. यह एक सौ सत्तरbhp, दो. शून्यL डीजल इंजन के साथ आता रहेगा. कंपनी एसयूवी के स्पेशल एडिशन को एक नई कलर स्कीम में पेश कर सकती है. यह रेंज-टॉपिंग XZA+ वैरिएंट पर आधारित होने की उम्मीद है जो ऑटो डिमिंग IRVM, एक पैनोरमिक सनरूफ, छः-वे इलेक्ट्रिकली एडजस्टेबल ड्राइवर सीट और सत्रह-इंच डायमंड कट अलॉय व्हील सहित कुछ विशेष सुविधाओं के साथ आता है. जहां तक कीमत का सवाल है, नए टाटा हैरियर स्पेशल एडिशन की कीमत लगभग पचास,शून्य रुपयापये अधिक होने की उम्मीद है. मॉडल इस साल के अंत में सेल के लिए उपलब्ध होगा. अन्य अपडेट में, कंपनी दो हज़ार तेईस की शुरुआत में टाटा हैरियर फेसलिफ्ट पेश करने की योजना बना रही है. एसयूवी का अपडेटेड मॉडल एडीएएस के साथ तीन सौ साठ डिग्री कैमरा और वायरलेस एंड्रॉइड ऑटो सपोर्ट, एक बड़ा इंफोटेनमेंट सिस्टम के साथ आने की संभावना है. इसके एक्सटीरियर में भी कुछ बदलाव किए जाएंगे. नई हैरियर फेसलिफ्ट में हॉरिजोनल स्लैट्स और इंटीग्रेटेड रडार के साथ अपडेटेड ग्रिल, एलईडी डीएलआर के साथ नए डिजाइन वाले एलईडी हेडलैंप, नए अलॉय व्हील और रिवाइज्ड रियर बंपर होगा. Share:
शंकर और कबीर के मायायाद में सब से बड़ा अंतर यही है कि शंकर की माया केवल भ्रम-मूलक है। उससे रस्सी में साँप का या सीप मे रजत का या मृगजल में जल का भ्रम हो सकता है । यह नाम रूपात्मक संसार असत्य होकर भी सत्य के समान भासित होता है किन्तु कबीर ने इस भ्रम की भावना के अतिरिक्त माया को एक चंचल और छद्मवेषी कामिनी का रूप दिया है जो संसार को अपनी ओर आकर्षित कर वासना के मार्ग पर ले जाती है। माया एक विलासिनी स्त्री है। इसीलिए कबीर ने कनक और कामिनी को माया का प्रतीक माना है। इस माया का अपार प्रभुत्व है । वह तीनों लोकों को लूट चुकी है । रमैया की दुलहिन लूटा बजार ।
शंकर और कबीर के मायायाद में सब से बड़ा अंतर यही है कि शंकर की माया केवल भ्रम-मूलक है। उससे रस्सी में साँप का या सीप मे रजत का या मृगजल में जल का भ्रम हो सकता है । यह नाम रूपात्मक संसार असत्य होकर भी सत्य के समान भासित होता है किन्तु कबीर ने इस भ्रम की भावना के अतिरिक्त माया को एक चंचल और छद्मवेषी कामिनी का रूप दिया है जो संसार को अपनी ओर आकर्षित कर वासना के मार्ग पर ले जाती है। माया एक विलासिनी स्त्री है। इसीलिए कबीर ने कनक और कामिनी को माया का प्रतीक माना है। इस माया का अपार प्रभुत्व है । वह तीनों लोकों को लूट चुकी है । रमैया की दुलहिन लूटा बजार ।
उन्होंने बताया था कि जब वह शो 'लॉक अप' में थी तभी यह वीडियो सामने आया था जिसके बाद उनके माता-पिता ने पुलिस में जाकर शिकायत भी की थी। अंजलि ने रोते हुए अपना दर्द शेयर किया था और कहा था कि ये सब झेलने के लिए वह स्ट्रॉन्ग हैं, लेकिन उनके पैरंट्स नहीं। अंजलि ने कहा कि इस वजह से उनके माता-पिता को काफी कुछ सुनना पड़ रहा है। इतना ही नहीं अंजलि ने ये भी कहा कि वह इस बात को लेकर परेशान हैं कि उनके छोटे-छोटे भाई हैं, वे इन वीडियोज़ को देखकर क्या सोचेंगे। खैर, अंजलि ने साफ कर दिया कि उस वीडियो में वो नहीं बल्कि कोई और है। उन्होंने बताया था कि जब वह शो 'लॉक अप' में थी तभी यह वीडियो सामने आया था जिसके बाद उनके माता-पिता ने पुलिस में जाकर शिकायत भी की थी। अंजलि ने रोते हुए अपना दर्द शेयर किया था और कहा था कि ये सब झेलने के लिए वह स्ट्रॉन्ग हैं, लेकिन उनके पैरंट्स नहीं। अंजलि ने कहा कि इस वजह से उनके माता-पिता को काफी कुछ सुनना पड़ रहा है। इतना ही नहीं अंजलि ने ये भी कहा कि वह इस बात को लेकर परेशान हैं कि उनके छोटे-छोटे भाई हैं, वे इन वीडियोज़ को देखकर क्या सोचेंगे। खैर, अंजलि ने साफ कर दिया कि उस वीडियो में वो नहीं बल्कि कोई और है। इससे पहले भोजपुरी इंडस्ट्री की एक्ट्रेस त्रिशाकर मधु के भी एमएमएस लीक होने को लेकर खूब चर्चा थी। सोशल मीडिया पर त्रिशाकर का प्राइवेट वीडियो आग की तरह फैला, जिसमें वह आपत्तिजनक स्थिति में नजर आई थीं। जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, उनकी लोगों ने काफी जमकर आलोचना की। इसके बाद उन्होंने अपना फेसबुक अकाउंट प्राइवेट कर लिया। उससे पहले त्रिशाकर मधु ने फेसबुक पर एक पोस्ट शेयर किया। उन्होंने लिखा था 'खुदा सब देखता है, मुझे गरियाने के लिए मेरे प्राइवेट वीडियो वायरल कर दिए, आपकी सिस्टर के साथ कोई शादी कर के और अगले दिन सुहागरात का वीडियो वायरल कर दे तो बढ़िया लगेगा ना? बिहार में इतने घटिया कुछ लोग भी होते हैं नहीं जानती थी'। राधिका आप्टे का एक वीडियो काफी चर्चा में रहा, जिसमें वह प्राइवेट पार्ट दिखाती नजर आ रही थीं। बाद में बताया गया कि यह वीडियो उनकी शॉर्ट फिल्म का ही हिस्सा है। हालांकि, इस वीडियो पर उन्हें आलोचनाएं तो सुननी ही पड़ीं। लोगों को सबसे बड़ा धक्का तब लगा था जब सोशल मीडिया पर 'लाल सिंह चड्ढा' और 'जस्सी जैसी कोई नहीं' की एक्ट्रेस मोना सिंह का कथित एमएमएस वीडियो वायरल हुआ। 23 सेकंड का यह वीडियो इंटरनेट पर तेजी से फैला और लोग तरह-तरह की बातें करने लगे थे। हालांकि, इनपर विराम तब लग जब मोना सिंह ने कहा कि इस वीडियो में नजर आ रही लड़की कोई और है, वो नहीं हैं। इस लिस्ट में ए-लिस्ट वाले स्टार्स के नाम भी शामिल हैं। तब करीना कपूर और शाहिद कपूर के रोमांस और अफेयर की खबरें खूब रहा करती थीं। उन्हीं दिनों इंटरनेट पर एक एमएमएस वीडियो की चर्चा जमकर हुई। वीडियो में दोनों एक-दूसरे के साथ ऑफस्क्रीन लिपलॉक करते हुए नजर आ रहे थे। पटौदी परिवार की बेटी सोहा अली खान को भी एमएमएस स्कैंडल का सामना करना पड़ा है। दरअसल एक एमएमएस वीडियो इंटरनेट पर खूब वायरल हुआ, जिसमें सोहा कैमरे के सामने कपड़े उतारती नजर आ रही थीं। बाद में बताया गया कि सलून में कपड़े चेंज करते समय यह धोखा उनके साथ हुआ। ऐसा ही एक एमएमएस जब इंटरनेट पर छाया तो लोग कहने लगे कि इसमें रिया सेन और अश्मित पटेल हैं। इस प्राइवेट वीडियो की वजह से लोगों ने उनपर जमकर निशाना साधा, लेकिन बाद में उन्होंने इस एमएमएस को फेक बताया। यूं तो मल्लिका शेरावत बड़े पर्दे पर अपने बोल्ड इमेज के लिए ऐसे ही मशहूर हैं, लेकिन जब उनका एमएमएस लीक हुआ तो लोगों ने जमकर उनके लिए अनाप शनाप लिखा।
उन्होंने बताया था कि जब वह शो 'लॉक अप' में थी तभी यह वीडियो सामने आया था जिसके बाद उनके माता-पिता ने पुलिस में जाकर शिकायत भी की थी। अंजलि ने रोते हुए अपना दर्द शेयर किया था और कहा था कि ये सब झेलने के लिए वह स्ट्रॉन्ग हैं, लेकिन उनके पैरंट्स नहीं। अंजलि ने कहा कि इस वजह से उनके माता-पिता को काफी कुछ सुनना पड़ रहा है। इतना ही नहीं अंजलि ने ये भी कहा कि वह इस बात को लेकर परेशान हैं कि उनके छोटे-छोटे भाई हैं, वे इन वीडियोज़ को देखकर क्या सोचेंगे। खैर, अंजलि ने साफ कर दिया कि उस वीडियो में वो नहीं बल्कि कोई और है। उन्होंने बताया था कि जब वह शो 'लॉक अप' में थी तभी यह वीडियो सामने आया था जिसके बाद उनके माता-पिता ने पुलिस में जाकर शिकायत भी की थी। अंजलि ने रोते हुए अपना दर्द शेयर किया था और कहा था कि ये सब झेलने के लिए वह स्ट्रॉन्ग हैं, लेकिन उनके पैरंट्स नहीं। अंजलि ने कहा कि इस वजह से उनके माता-पिता को काफी कुछ सुनना पड़ रहा है। इतना ही नहीं अंजलि ने ये भी कहा कि वह इस बात को लेकर परेशान हैं कि उनके छोटे-छोटे भाई हैं, वे इन वीडियोज़ को देखकर क्या सोचेंगे। खैर, अंजलि ने साफ कर दिया कि उस वीडियो में वो नहीं बल्कि कोई और है। इससे पहले भोजपुरी इंडस्ट्री की एक्ट्रेस त्रिशाकर मधु के भी एमएमएस लीक होने को लेकर खूब चर्चा थी। सोशल मीडिया पर त्रिशाकर का प्राइवेट वीडियो आग की तरह फैला, जिसमें वह आपत्तिजनक स्थिति में नजर आई थीं। जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, उनकी लोगों ने काफी जमकर आलोचना की। इसके बाद उन्होंने अपना फेसबुक अकाउंट प्राइवेट कर लिया। उससे पहले त्रिशाकर मधु ने फेसबुक पर एक पोस्ट शेयर किया। उन्होंने लिखा था 'खुदा सब देखता है, मुझे गरियाने के लिए मेरे प्राइवेट वीडियो वायरल कर दिए, आपकी सिस्टर के साथ कोई शादी कर के और अगले दिन सुहागरात का वीडियो वायरल कर दे तो बढ़िया लगेगा ना? बिहार में इतने घटिया कुछ लोग भी होते हैं नहीं जानती थी'। राधिका आप्टे का एक वीडियो काफी चर्चा में रहा, जिसमें वह प्राइवेट पार्ट दिखाती नजर आ रही थीं। बाद में बताया गया कि यह वीडियो उनकी शॉर्ट फिल्म का ही हिस्सा है। हालांकि, इस वीडियो पर उन्हें आलोचनाएं तो सुननी ही पड़ीं। लोगों को सबसे बड़ा धक्का तब लगा था जब सोशल मीडिया पर 'लाल सिंह चड्ढा' और 'जस्सी जैसी कोई नहीं' की एक्ट्रेस मोना सिंह का कथित एमएमएस वीडियो वायरल हुआ। तेईस सेकंड का यह वीडियो इंटरनेट पर तेजी से फैला और लोग तरह-तरह की बातें करने लगे थे। हालांकि, इनपर विराम तब लग जब मोना सिंह ने कहा कि इस वीडियो में नजर आ रही लड़की कोई और है, वो नहीं हैं। इस लिस्ट में ए-लिस्ट वाले स्टार्स के नाम भी शामिल हैं। तब करीना कपूर और शाहिद कपूर के रोमांस और अफेयर की खबरें खूब रहा करती थीं। उन्हीं दिनों इंटरनेट पर एक एमएमएस वीडियो की चर्चा जमकर हुई। वीडियो में दोनों एक-दूसरे के साथ ऑफस्क्रीन लिपलॉक करते हुए नजर आ रहे थे। पटौदी परिवार की बेटी सोहा अली खान को भी एमएमएस स्कैंडल का सामना करना पड़ा है। दरअसल एक एमएमएस वीडियो इंटरनेट पर खूब वायरल हुआ, जिसमें सोहा कैमरे के सामने कपड़े उतारती नजर आ रही थीं। बाद में बताया गया कि सलून में कपड़े चेंज करते समय यह धोखा उनके साथ हुआ। ऐसा ही एक एमएमएस जब इंटरनेट पर छाया तो लोग कहने लगे कि इसमें रिया सेन और अश्मित पटेल हैं। इस प्राइवेट वीडियो की वजह से लोगों ने उनपर जमकर निशाना साधा, लेकिन बाद में उन्होंने इस एमएमएस को फेक बताया। यूं तो मल्लिका शेरावत बड़े पर्दे पर अपने बोल्ड इमेज के लिए ऐसे ही मशहूर हैं, लेकिन जब उनका एमएमएस लीक हुआ तो लोगों ने जमकर उनके लिए अनाप शनाप लिखा।
VARANASI: संपूर्णानंद संस्कृत यूनिवर्सिटी में रविवार का दिन धरना प्रदर्शन के नाम रहा। हर तरफ नाराजगी का आलम था। बात चाहे कर्मचारियों की हो या फिर स्टूडेंट्स की। हर कोई नाराज था। जहां एक ओर अपने साथी की पिटाई से नाराज कर्मचारी स्ट्राइक पर चले गए तो वहीं क्लासेस ठप होने से नाराज स्टूडेंट्स ने धरना प्रदर्शन किया। इसके चलते कैंपस में पूरे दिन गहमागहमी बनी रही। एक दिन पहले स्टूडेंट्स ने मार्कशीट का डुप्लीकेट बनाने का विरोध करने का आरोप लगाते हुए एक कर्मचारी की पिटाई कर दी थी। इससे नाराज कर्मचारियों ने दूसरे दिन स्ट्राइक की। इस दौरान कर्मचारियों ने मुकम्मल सुरक्षा की आवाज उठाते हुए कहा कि स्टूडेंट्स कर्मियों संग अक्सर मिसबिहेव करते हैं। अपने साथी की मारपीट से नाराज कर्मचारियों का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि स्टूडेंट्स ने भी यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन की मुश्किलें बढ़ा दीं। स्टूडेंट्स भी यूनिवर्सिटी में क्लासेज संचालित नहीं होने से खफा हैं। उनका आरोप है कि यूनिवर्सिटी में बीते दो महीने से क्लासेज नहीं चल रही हैं। उन्होंने बताया कि एक दिन पहले क्लासेज संचालित कराने के लिए वीसी ऑफिस में एप्लीकेशन भी दिया था लेकिन क्लासेज के संचालन के संबंध में कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला। इससे नाराज स्टूडेंट्स रविवार को सेंट्रल ऑफिस पहुंचकर नारेबाजी और धरना- प्रदर्शन करने लगे। स्टूडेंट्स ने वॉर्निग दी कि अगर क्लासेज का संचालन जल्द से जल्द स्टार्ट नहीं हुआ तो वे आंदोलन में तेजी लाने को मजबूर होंगे। धरना प्रदर्शन में अभिषेक मिश्र, अच्चुत कृष्ण त्रिपाठी, अखिलेश मिश्र, रविकांत भारद्वाज, शिवम व अभिषेक कुमार उपाध्याय सहित सैकड़ों स्टूडेंट्स शामिल रहे। अपनी मांगों को लेकर लंबे समय तक काम से दूर रहे कर्मचारियों की स्ट्राइक के समाप्त हुए बमुश्किल एक वीक भी नहीं बीता था कि कैंपस में एक बार फिर से कामकाज ठप हो गया है। इससे कैंपस वर्क का बेपटरी होना लगभग तय है। यदि समय रहते स्ट्राइक समाप्त नहीं कराई गई तो बेपटरी हुए वर्क की भरपाई करने में पसीने छूटने की प्रबल संभावना है।
VARANASI: संपूर्णानंद संस्कृत यूनिवर्सिटी में रविवार का दिन धरना प्रदर्शन के नाम रहा। हर तरफ नाराजगी का आलम था। बात चाहे कर्मचारियों की हो या फिर स्टूडेंट्स की। हर कोई नाराज था। जहां एक ओर अपने साथी की पिटाई से नाराज कर्मचारी स्ट्राइक पर चले गए तो वहीं क्लासेस ठप होने से नाराज स्टूडेंट्स ने धरना प्रदर्शन किया। इसके चलते कैंपस में पूरे दिन गहमागहमी बनी रही। एक दिन पहले स्टूडेंट्स ने मार्कशीट का डुप्लीकेट बनाने का विरोध करने का आरोप लगाते हुए एक कर्मचारी की पिटाई कर दी थी। इससे नाराज कर्मचारियों ने दूसरे दिन स्ट्राइक की। इस दौरान कर्मचारियों ने मुकम्मल सुरक्षा की आवाज उठाते हुए कहा कि स्टूडेंट्स कर्मियों संग अक्सर मिसबिहेव करते हैं। अपने साथी की मारपीट से नाराज कर्मचारियों का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि स्टूडेंट्स ने भी यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन की मुश्किलें बढ़ा दीं। स्टूडेंट्स भी यूनिवर्सिटी में क्लासेज संचालित नहीं होने से खफा हैं। उनका आरोप है कि यूनिवर्सिटी में बीते दो महीने से क्लासेज नहीं चल रही हैं। उन्होंने बताया कि एक दिन पहले क्लासेज संचालित कराने के लिए वीसी ऑफिस में एप्लीकेशन भी दिया था लेकिन क्लासेज के संचालन के संबंध में कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला। इससे नाराज स्टूडेंट्स रविवार को सेंट्रल ऑफिस पहुंचकर नारेबाजी और धरना- प्रदर्शन करने लगे। स्टूडेंट्स ने वॉर्निग दी कि अगर क्लासेज का संचालन जल्द से जल्द स्टार्ट नहीं हुआ तो वे आंदोलन में तेजी लाने को मजबूर होंगे। धरना प्रदर्शन में अभिषेक मिश्र, अच्चुत कृष्ण त्रिपाठी, अखिलेश मिश्र, रविकांत भारद्वाज, शिवम व अभिषेक कुमार उपाध्याय सहित सैकड़ों स्टूडेंट्स शामिल रहे। अपनी मांगों को लेकर लंबे समय तक काम से दूर रहे कर्मचारियों की स्ट्राइक के समाप्त हुए बमुश्किल एक वीक भी नहीं बीता था कि कैंपस में एक बार फिर से कामकाज ठप हो गया है। इससे कैंपस वर्क का बेपटरी होना लगभग तय है। यदि समय रहते स्ट्राइक समाप्त नहीं कराई गई तो बेपटरी हुए वर्क की भरपाई करने में पसीने छूटने की प्रबल संभावना है।
जबलपुर, यशभारत। जिला पंचायत अध्यक्ष संतोष बरकड़े ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के शहर आगमन पर मुलाकात की। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष ने एक ज्ञापन सौंपा जिसमें कुंडम आदिवासी विकासखंड को पेसा एक्ट में शामिल करवाने का अनुरोध किया। जिला पंचायत अध्यक्ष ने सीएम से कहा कि कुंडम में 80 प्रतिशत आबादी आदिवासियों की है सारी योजनाएं भी आदिवासी विभाग की संचालित हो रही है। अध्यक्ष ने सीएम से मांग रखी कि कुंडम को पेसा एक्ट में शामिल कर लिया जाएगा तो आदिवासियों के हितों की रक्षा होगा और उन्हें न्याय मिलेगा। इधर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का आज दोपहर डुमना विमानतल पहुँचने पर आत्मीय स्वागत किया गया । मुख्यमंत्री दोपहर लगभग 2. 25 बजे नागपुर से विमान द्वारा डुमना पहुँचे थे । श्री चौहान का डुमना विमानतल पर स्वागत उच्च शिक्षा मंत्री डॉ मोहन यादव, मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष डॉ जीतेन्द्र जामदार, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री संतोष बरकड़े, विधायक श्री अजय विश्नोई, श्री अशोक रोहाणी एवं श्री सुशील तिवारी इंदु, नगर निगम के अध्यक्ष रिकुंज विज, नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष कमलेश अग्रवाल, पूर्व महापौर श्री प्रभात साहू, श्री आशीष दुबे, श्री अखिलेश जैन, श्री जी एस ठाकुर एवं श्री जय सचदेव आदि ने किया । इस मौके पर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एवं आई जी उमेश जोगा, पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ बहुगुणा, जिला पंचायत की सीईओ डॉ सलोनी सिडाना, नगर निगम आयुक्त आशीष वशिष्ठ, अपर कलेक्टर सुश्री विमलेश सिंह आदि मौजूद थे । मुख्यमंत्री श्री चौहान ने डुमना विमान तल पर कुछ देर रुकने के बाद उच्च शिक्षा मंत्री डॉ मोहन यादव के साथ हेलीकॉप्टर द्वारा डिंडौरी जिले के शहपुरा के लिये प्रस्थान किया ।
जबलपुर, यशभारत। जिला पंचायत अध्यक्ष संतोष बरकड़े ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के शहर आगमन पर मुलाकात की। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष ने एक ज्ञापन सौंपा जिसमें कुंडम आदिवासी विकासखंड को पेसा एक्ट में शामिल करवाने का अनुरोध किया। जिला पंचायत अध्यक्ष ने सीएम से कहा कि कुंडम में अस्सी प्रतिशत आबादी आदिवासियों की है सारी योजनाएं भी आदिवासी विभाग की संचालित हो रही है। अध्यक्ष ने सीएम से मांग रखी कि कुंडम को पेसा एक्ट में शामिल कर लिया जाएगा तो आदिवासियों के हितों की रक्षा होगा और उन्हें न्याय मिलेगा। इधर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का आज दोपहर डुमना विमानतल पहुँचने पर आत्मीय स्वागत किया गया । मुख्यमंत्री दोपहर लगभग दो. पच्चीस बजे नागपुर से विमान द्वारा डुमना पहुँचे थे । श्री चौहान का डुमना विमानतल पर स्वागत उच्च शिक्षा मंत्री डॉ मोहन यादव, मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष डॉ जीतेन्द्र जामदार, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री संतोष बरकड़े, विधायक श्री अजय विश्नोई, श्री अशोक रोहाणी एवं श्री सुशील तिवारी इंदु, नगर निगम के अध्यक्ष रिकुंज विज, नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष कमलेश अग्रवाल, पूर्व महापौर श्री प्रभात साहू, श्री आशीष दुबे, श्री अखिलेश जैन, श्री जी एस ठाकुर एवं श्री जय सचदेव आदि ने किया । इस मौके पर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एवं आई जी उमेश जोगा, पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ बहुगुणा, जिला पंचायत की सीईओ डॉ सलोनी सिडाना, नगर निगम आयुक्त आशीष वशिष्ठ, अपर कलेक्टर सुश्री विमलेश सिंह आदि मौजूद थे । मुख्यमंत्री श्री चौहान ने डुमना विमान तल पर कुछ देर रुकने के बाद उच्च शिक्षा मंत्री डॉ मोहन यादव के साथ हेलीकॉप्टर द्वारा डिंडौरी जिले के शहपुरा के लिये प्रस्थान किया ।
रांचीः रांची के बुंडू में असमाजिक तत्वों द्वारा बीती रात सरकारी दीवारों पर पोस्टर चिपकाया गया. पोस्टर के माध्यम से जमीन दलालों को चेतावनी दी गयी है और उनसे रुपयों की मांग की गयी है. इस संबंध में बुडू थाना प्रभारी ने बताया कि थाना क्षेत्र के चार- पांच सरकारी दीवारों में नक्सली बन कर लोगों को डराने के लिए फर्जी लोगों द्वारा पोस्टर चिपकाया गया है. इसकी जानकारी आज अहले सुबह ग्रामीणों से मिलने पर हुई. उन सभी पोस्टरों को पुलिस ने जब्त कर लिया है. पुलिस का मानना है कि यह काम जमीन का कारोबार करने वालों को डरने के लिए किसी शरारती तत्व द्वारा किया गया है. पोस्टर में कहीं पर भी किसी नक्सली संगठन का कोई नाम नहीं है. यदि किसी भी संगठन द्वारा पोस्टर चिपकाया जाता तो उसमें उस संगठन का नाम होता.
रांचीः रांची के बुंडू में असमाजिक तत्वों द्वारा बीती रात सरकारी दीवारों पर पोस्टर चिपकाया गया. पोस्टर के माध्यम से जमीन दलालों को चेतावनी दी गयी है और उनसे रुपयों की मांग की गयी है. इस संबंध में बुडू थाना प्रभारी ने बताया कि थाना क्षेत्र के चार- पांच सरकारी दीवारों में नक्सली बन कर लोगों को डराने के लिए फर्जी लोगों द्वारा पोस्टर चिपकाया गया है. इसकी जानकारी आज अहले सुबह ग्रामीणों से मिलने पर हुई. उन सभी पोस्टरों को पुलिस ने जब्त कर लिया है. पुलिस का मानना है कि यह काम जमीन का कारोबार करने वालों को डरने के लिए किसी शरारती तत्व द्वारा किया गया है. पोस्टर में कहीं पर भी किसी नक्सली संगठन का कोई नाम नहीं है. यदि किसी भी संगठन द्वारा पोस्टर चिपकाया जाता तो उसमें उस संगठन का नाम होता.
मिलिंद सोमन ने रविवार को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया है। इसके साथ उन्होंने लिखा, '3 जुलाई 2020। मां का 81वां जन्मदिन लॉकडाउन में मनाया। हमने 15 पुश अप्स और अंकिता कुंअर के द्वारा बनाए गए वनीला बादाम केक के साथ पार्टी की। हैपी बर्थडे आई। मुस्कुराते रहिए। ' यह कोई पहला मौका नहीं है जब मिलिंद सोमन की मां ऊषा सोमन का ऐसा वीडियो सामने आया है। इससे पहले भी इस उम्र में उनके हैरान कर देने वाले वीडियो मिलिंद सोमन ने सोशल मीडिया पर शेयर किए हैं। इससे पहले एक वीडियो में उषा सोमन अपनी बहू अंकिता कुंअर के साथ बिल्डिंग की छत पर लंगड़ी टांग खेलते नजर आ रही थीं। इसके अलावा उषा सोमन का अपने बेटे मिलिंद सोमन के साथ स्किपिंग करने का वीडियो सामने आया था। मिलिंद सोमन एक सुपर मॉडल रह चुके हैं और कई फिल्मों में काम कर चुके हैं। बताते चलें कि अपने एक फोटोशूट के लिए काफी फेमस हुए थे। 54 वर्षीय मिलिंद सोमन ने 28 साल अंकिता कुंअर के साथ 2018 में शादी की थी।
मिलिंद सोमन ने रविवार को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया है। इसके साथ उन्होंने लिखा, 'तीन जुलाई दो हज़ार बीस। मां का इक्यासीवां जन्मदिन लॉकडाउन में मनाया। हमने पंद्रह पुश अप्स और अंकिता कुंअर के द्वारा बनाए गए वनीला बादाम केक के साथ पार्टी की। हैपी बर्थडे आई। मुस्कुराते रहिए। ' यह कोई पहला मौका नहीं है जब मिलिंद सोमन की मां ऊषा सोमन का ऐसा वीडियो सामने आया है। इससे पहले भी इस उम्र में उनके हैरान कर देने वाले वीडियो मिलिंद सोमन ने सोशल मीडिया पर शेयर किए हैं। इससे पहले एक वीडियो में उषा सोमन अपनी बहू अंकिता कुंअर के साथ बिल्डिंग की छत पर लंगड़ी टांग खेलते नजर आ रही थीं। इसके अलावा उषा सोमन का अपने बेटे मिलिंद सोमन के साथ स्किपिंग करने का वीडियो सामने आया था। मिलिंद सोमन एक सुपर मॉडल रह चुके हैं और कई फिल्मों में काम कर चुके हैं। बताते चलें कि अपने एक फोटोशूट के लिए काफी फेमस हुए थे। चौवन वर्षीय मिलिंद सोमन ने अट्ठाईस साल अंकिता कुंअर के साथ दो हज़ार अट्ठारह में शादी की थी।
- #Madhya-pradeshNomadic Tribes: कब तक अपमानित और प्रताड़ित होती रहेंगी घूमंतू जातियां? राजगढ़, 6 अगस्त। ये हैं मध्य प्रदेश पुलिस की एसआई अरुंधति राजावत व कांस्टेबल इतिश्री। दोनों मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के सुठालिया पुलिस थाने में तैनात हैं। इन्होंने प्रसव पीड़ा से जूझ रही एक महिला की मदद के लिए जो कदम उठाया उससे पूरे प्रदेश में हर कोई इन्हें सैल्यूट करता नजर आ रहा है। सब इंस्पेक्टर अरुंधति राजावत व कांस्टेबल इतिश्री ने समय रहते प्रसूता को संभाला और मजबूरन ऑटो में ही डिलीवरी करवाई। फिलहाल जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित हैं। वन इंडिया हिंदी से बातचीत में एसआई अरुंधति राजावत व कांस्टेबल इतिश्री ने वो पूरा वाक्या शेयर किया, जिसमें उन्होंने भारी बारिश के दौरान खुद की जान जोखिम में डालकर ऑटो में ही डिलीवरी करवाने के बाद प्रसूता को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया। एसआई अरुंधति राजावत व कांस्टेबल इतिश्री कहती हैं कि क्षेत्र में दो दिन से बारिश हो रही थी। सारे नदी नाले उफान मार रहे हैं। 5 अगस्त को हम दोनों सुठालिया पुलिस थाने पर थीं। हम गेट के पास खड़ी थीं। बारिश लगातार हो रही थी। करीब सुबह के 11 बज रहे थे। इसी दौरान पुलिस थाने के पास से गुजरे एक ऑटो चालक ने बताया कि करीब 100 मीटर दूर बरसाती पानी की वजह से एक ऑटो फंस गया। सड़क के दोनों तरफ से भंयकर पानी आ रहा है। ऑटो अस्पताल नहीं पहुंच पा रहा। ऑटो में कोई प्रसूता है। यह इत्तला सुठालिया पुलिस थानाधिकारी रामकुमार रघुवंशी को भी मिल गई थी। उन्होंने एसआई अरुंधति राजावत, कांस्टेबल इतिश्री व अन्य स्टाफ को तुरंत मौके पर भेजा। अरंधति ट्रेक शूट व इतिश्री रेनकोट पहने थीं। वहां जाकर पता चला कि उन्हीं के थाना इलाके के गांव मोठड़ली की इकलेश बाई जाति बंजारा को प्रसव पीड़ा हो रही है। इकलेश बंजारा को उसकी सास मेवाबाई व पति ऑटो से सुठालिया सिविल अस्पताल ले जाना चाह रहे थे, मगर पुलिस पर बरसाती पानी की आवक अधिक होने से ऑटो को आगे ले जाना संभव नहीं हो रहा और इधर इकलेश की प्रसव पीड़ा बढ़ती जा रही थी। एसआई अरुंधति राजावत कहती हैं कि दर्द कराहती इकलेश को अस्पताल पहुंचाने के लिए हमने हर संभव प्रयास किए, मगर मजबूरन ऑटो में प्रसव करवाना पड़ा। साथ ही हमने पास स्थित आंगनबाड़ी केंद्र को खुलवाया। नर्सिंग स्टाफ को भी मौके पर बुलाया। फिर अरुंधति राजावत नवजात लड़के को गोद में लेकर पास स्थित दुकान के टीनशैड के नीचे आ गईं और प्रसूता के परिजन व नर्सिंग स्टाफ ऑटो में प्रसूता की देखभाल करते रहे। करीब 45 मिनट बाद पानी का बहाव कम हुआ। तब प्रसूता व नवजात बच्चे को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया। बता दें कि अरुंधति राजावत मूलरूप से शिवपुरी की रहने वाली हैं। साल 2018 बैच की मध्य प्रदेश पुलिस की एसआई हैं। दो साल से सुठालिया पुलिस थाने में तैनात हैं। इससे पहले राजगढ़ कोतवाली में पोस्टेड थीं। कांस्टेबल इतिश्री मूलरूप से मध्य प्रदेश के सिहोर जिले के इछावर की रहने वाली हैं। साल 2018 बैच की मध्य प्रदेश पुलिस की कांस्टेबल हैं। सुठालिया थाने में इतिश्री की पहली पोस्टिंग है। यहां बीते तीन साल से तैनात हैं। बता दें कि SI अरुंधती व constable इतिश्री के इस सराहनीय कार्य की राजगढ़ एसपी प्रदीप शर्मा, मध्य प्रदेश डीजीपी व खुद गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने प्रशंसा की है। गृहमंत्री मिश्रा ने ट्वीट करके दोनों महिला पुलिसकर्मियों को शाबाशी देते हुए कहा कि इन्होंने भारी बारिश के दौरान ऑटो में डिलीवरी करवाकर मॉं व बच्चे को नया जीवन दिया है। Srushti Deshmukh Engagement : शादी से पहले जानें पूरी लव स्टोरी, IAS नागार्जुन गौड़ा ने ऐसे जीता दिल?
- #Madhya-pradeshNomadic Tribes: कब तक अपमानित और प्रताड़ित होती रहेंगी घूमंतू जातियां? राजगढ़, छः अगस्त। ये हैं मध्य प्रदेश पुलिस की एसआई अरुंधति राजावत व कांस्टेबल इतिश्री। दोनों मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के सुठालिया पुलिस थाने में तैनात हैं। इन्होंने प्रसव पीड़ा से जूझ रही एक महिला की मदद के लिए जो कदम उठाया उससे पूरे प्रदेश में हर कोई इन्हें सैल्यूट करता नजर आ रहा है। सब इंस्पेक्टर अरुंधति राजावत व कांस्टेबल इतिश्री ने समय रहते प्रसूता को संभाला और मजबूरन ऑटो में ही डिलीवरी करवाई। फिलहाल जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित हैं। वन इंडिया हिंदी से बातचीत में एसआई अरुंधति राजावत व कांस्टेबल इतिश्री ने वो पूरा वाक्या शेयर किया, जिसमें उन्होंने भारी बारिश के दौरान खुद की जान जोखिम में डालकर ऑटो में ही डिलीवरी करवाने के बाद प्रसूता को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया। एसआई अरुंधति राजावत व कांस्टेबल इतिश्री कहती हैं कि क्षेत्र में दो दिन से बारिश हो रही थी। सारे नदी नाले उफान मार रहे हैं। पाँच अगस्त को हम दोनों सुठालिया पुलिस थाने पर थीं। हम गेट के पास खड़ी थीं। बारिश लगातार हो रही थी। करीब सुबह के ग्यारह बज रहे थे। इसी दौरान पुलिस थाने के पास से गुजरे एक ऑटो चालक ने बताया कि करीब एक सौ मीटर दूर बरसाती पानी की वजह से एक ऑटो फंस गया। सड़क के दोनों तरफ से भंयकर पानी आ रहा है। ऑटो अस्पताल नहीं पहुंच पा रहा। ऑटो में कोई प्रसूता है। यह इत्तला सुठालिया पुलिस थानाधिकारी रामकुमार रघुवंशी को भी मिल गई थी। उन्होंने एसआई अरुंधति राजावत, कांस्टेबल इतिश्री व अन्य स्टाफ को तुरंत मौके पर भेजा। अरंधति ट्रेक शूट व इतिश्री रेनकोट पहने थीं। वहां जाकर पता चला कि उन्हीं के थाना इलाके के गांव मोठड़ली की इकलेश बाई जाति बंजारा को प्रसव पीड़ा हो रही है। इकलेश बंजारा को उसकी सास मेवाबाई व पति ऑटो से सुठालिया सिविल अस्पताल ले जाना चाह रहे थे, मगर पुलिस पर बरसाती पानी की आवक अधिक होने से ऑटो को आगे ले जाना संभव नहीं हो रहा और इधर इकलेश की प्रसव पीड़ा बढ़ती जा रही थी। एसआई अरुंधति राजावत कहती हैं कि दर्द कराहती इकलेश को अस्पताल पहुंचाने के लिए हमने हर संभव प्रयास किए, मगर मजबूरन ऑटो में प्रसव करवाना पड़ा। साथ ही हमने पास स्थित आंगनबाड़ी केंद्र को खुलवाया। नर्सिंग स्टाफ को भी मौके पर बुलाया। फिर अरुंधति राजावत नवजात लड़के को गोद में लेकर पास स्थित दुकान के टीनशैड के नीचे आ गईं और प्रसूता के परिजन व नर्सिंग स्टाफ ऑटो में प्रसूता की देखभाल करते रहे। करीब पैंतालीस मिनट बाद पानी का बहाव कम हुआ। तब प्रसूता व नवजात बच्चे को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया। बता दें कि अरुंधति राजावत मूलरूप से शिवपुरी की रहने वाली हैं। साल दो हज़ार अट्ठारह बैच की मध्य प्रदेश पुलिस की एसआई हैं। दो साल से सुठालिया पुलिस थाने में तैनात हैं। इससे पहले राजगढ़ कोतवाली में पोस्टेड थीं। कांस्टेबल इतिश्री मूलरूप से मध्य प्रदेश के सिहोर जिले के इछावर की रहने वाली हैं। साल दो हज़ार अट्ठारह बैच की मध्य प्रदेश पुलिस की कांस्टेबल हैं। सुठालिया थाने में इतिश्री की पहली पोस्टिंग है। यहां बीते तीन साल से तैनात हैं। बता दें कि SI अरुंधती व constable इतिश्री के इस सराहनीय कार्य की राजगढ़ एसपी प्रदीप शर्मा, मध्य प्रदेश डीजीपी व खुद गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने प्रशंसा की है। गृहमंत्री मिश्रा ने ट्वीट करके दोनों महिला पुलिसकर्मियों को शाबाशी देते हुए कहा कि इन्होंने भारी बारिश के दौरान ऑटो में डिलीवरी करवाकर मॉं व बच्चे को नया जीवन दिया है। Srushti Deshmukh Engagement : शादी से पहले जानें पूरी लव स्टोरी, IAS नागार्जुन गौड़ा ने ऐसे जीता दिल?
जैव चिकित्सा अनुसंधान के अंतिम दशक में सबसे गहन प्रगतियों में से एक मानव प्रेरित प्लुरिपोटेंट स्टेम सेल का विकास रहा है। जैव चिकित्सा के क्षेत्र में स्टेम कोशिकाओं का उपयोग करने के लाभ और चुनौतियों पर चर्चा कीजिये। (250 शब्द) • स्टेम सेल और संबंधित अनुसंधान को परिभाषित करते हुए परिचय लिखिये। • इससे जुड़े लाभों और चिंताओं पर चर्चा कीजिये। - प्रेरित प्लुरिपोटेंट स्टेम कोशिकाएँ (iPSCs) त्वचा या रक्त कोशिकाओं से प्राप्त होती हैं जिन्हें एक भ्रूण की तरह प्लुरिपोटेंट अवस्था में वापस लाया जाता है यह चिकित्सीय उद्देश्यों के लिये आवश्यक किसी भी प्रकार की मानव कोशिका के असीमित स्रोत के विकास को सक्षम बनाता है। - नवंबर 2007 में मानव कोशिकाओं की iPSCs के रूप में पुनर्संरचना की रिपोर्ट दो स्वतंत्र अनुसंधान समूहों द्वारा की गई थीः 1. जापान के क्योटो विश्वविद्यालय के शिन्या यामानाका द्वारा जिन्होंने मूल iPSC विधि का नेतृत्व किया था, 2. विस्कॉन्सिन-मैडिसन विश्वविद्यालय के जेम्स थॉमसन द्वारा जो मानव भ्रूण कोशिकाओं को प्राप्त करने वाले पहले व्यक्ति थे। - रोग प्रतिरूपण और दवा विकासः मानव iPS कोशिकाओं की एक प्रमुख विशेषता मानव रोग के कोशिकीय आधार का अध्ययन करने के वयस्क रोगियों से इन्हें प्राप्त करने की क्षमता है। चूँकि iPS कोशिकाएँ स्व-नवीनीकरण योग्य और प्लुरिपोटेंट हैं, वे सैद्धांतिक रूप से रोगी-व्युत्पन्न कोशिकाओं के एक असीमित स्रोत का प्रतिनिधित्व करती हैं जिन्हें शरीर में किसी भी प्रकार की कोशिका में परिवर्तित किया जा सकता है। इन कोशिकाओं को मानव आनुवंशिक रोगों की एक विस्तृत विविधता के लिये उत्पन्न किया गया है, जिनमें डाउन सिंड्रोम और पॉलीसिस्टिक गुर्दा रोग जैसे सामान्य विकार शामिल हैं। - मानव iPSC का उपयोग मुख्य रूप से अंगों और ऊतकों जैसे कि मस्तिष्क (अल्ज़ाइमर, ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार), हृदय और कंकाल की मांसपेशी (एमियोट्रोफिक लेटरल स्कोलोसिस, स्पाइनल मसल एट्रोफी) में आनुवंशिक बीमारियों का प्रतिरूपण करने में होता रहा है। - अन्य उपयोग- ऑर्गन सिंथेसिस में, लाल रक्त कणिकाओं की उत्पत्ति में, चिकित्सकीय परीक्षणों में, एंटी-एजिंग सामग्री के रूप में। - तथाकथित पुनर्योजी चिकित्सा अनुप्रयोगों के लिये रोगी की सुरक्षा सबसे महत्त्वपूर्ण है। iPSC और इसके व्युत्पन्न को चिह्नित करने के लिये मानकीकृत तरीके विकसित किये जाने चाहिये। इसके अलावा रीप्रोग्रामिंग ने एक सिद्धांत का प्रमाण प्रदर्शित किया है, फिर भी यह प्रक्रिया वर्तमान में नियमित नैदानिक अनुप्रयोग के लिये अप्रभावी है। - मानव iPSCs की व्युत्पत्ति में कई प्रकार की तकनीकी प्रगति के बावजूद भी आणविक स्टेम कोशिकाओं (ESCs) के समान उनकी आणविक और कार्यात्मक समानता के बारे में कम जाना जाता है, यह उनकी संभावित चिकित्सीय उपयोगिता को प्रभावित कर सकता है। - स्टेम सेल से संबंधित नैतिक चिंताएँ भी हैं, जैसे कि डिज़ाइनर बेबी, मानव आनुवंशिक पूल में हस्तक्षेप आदि। - जोखिम तथा प्रयोगात्मक हस्तक्षेप के बारे में भी चिंताएँ हैं जो अपरिवर्तनीय हो सकती हैं। iPSC- व्युत्पन्न विशेष कोशिकाओं की कार्यक्षमता का मूल्यांकन करने के लिये उपयुक्त विभेदन प्रोटोकॉल और विश्वसनीय परीक्षणों के विकास के साथ ही इस समस्या को संबोधित करने के लिये मानव iPSCs की आनुवंशिक/जीनोमिक अखंडता का सावधानीपूर्वक विश्लेषण करने की आवश्यकता है।
जैव चिकित्सा अनुसंधान के अंतिम दशक में सबसे गहन प्रगतियों में से एक मानव प्रेरित प्लुरिपोटेंट स्टेम सेल का विकास रहा है। जैव चिकित्सा के क्षेत्र में स्टेम कोशिकाओं का उपयोग करने के लाभ और चुनौतियों पर चर्चा कीजिये। • स्टेम सेल और संबंधित अनुसंधान को परिभाषित करते हुए परिचय लिखिये। • इससे जुड़े लाभों और चिंताओं पर चर्चा कीजिये। - प्रेरित प्लुरिपोटेंट स्टेम कोशिकाएँ त्वचा या रक्त कोशिकाओं से प्राप्त होती हैं जिन्हें एक भ्रूण की तरह प्लुरिपोटेंट अवस्था में वापस लाया जाता है यह चिकित्सीय उद्देश्यों के लिये आवश्यक किसी भी प्रकार की मानव कोशिका के असीमित स्रोत के विकास को सक्षम बनाता है। - नवंबर दो हज़ार सात में मानव कोशिकाओं की iPSCs के रूप में पुनर्संरचना की रिपोर्ट दो स्वतंत्र अनुसंधान समूहों द्वारा की गई थीः एक. जापान के क्योटो विश्वविद्यालय के शिन्या यामानाका द्वारा जिन्होंने मूल iPSC विधि का नेतृत्व किया था, दो. विस्कॉन्सिन-मैडिसन विश्वविद्यालय के जेम्स थॉमसन द्वारा जो मानव भ्रूण कोशिकाओं को प्राप्त करने वाले पहले व्यक्ति थे। - रोग प्रतिरूपण और दवा विकासः मानव iPS कोशिकाओं की एक प्रमुख विशेषता मानव रोग के कोशिकीय आधार का अध्ययन करने के वयस्क रोगियों से इन्हें प्राप्त करने की क्षमता है। चूँकि iPS कोशिकाएँ स्व-नवीनीकरण योग्य और प्लुरिपोटेंट हैं, वे सैद्धांतिक रूप से रोगी-व्युत्पन्न कोशिकाओं के एक असीमित स्रोत का प्रतिनिधित्व करती हैं जिन्हें शरीर में किसी भी प्रकार की कोशिका में परिवर्तित किया जा सकता है। इन कोशिकाओं को मानव आनुवंशिक रोगों की एक विस्तृत विविधता के लिये उत्पन्न किया गया है, जिनमें डाउन सिंड्रोम और पॉलीसिस्टिक गुर्दा रोग जैसे सामान्य विकार शामिल हैं। - मानव iPSC का उपयोग मुख्य रूप से अंगों और ऊतकों जैसे कि मस्तिष्क , हृदय और कंकाल की मांसपेशी में आनुवंशिक बीमारियों का प्रतिरूपण करने में होता रहा है। - अन्य उपयोग- ऑर्गन सिंथेसिस में, लाल रक्त कणिकाओं की उत्पत्ति में, चिकित्सकीय परीक्षणों में, एंटी-एजिंग सामग्री के रूप में। - तथाकथित पुनर्योजी चिकित्सा अनुप्रयोगों के लिये रोगी की सुरक्षा सबसे महत्त्वपूर्ण है। iPSC और इसके व्युत्पन्न को चिह्नित करने के लिये मानकीकृत तरीके विकसित किये जाने चाहिये। इसके अलावा रीप्रोग्रामिंग ने एक सिद्धांत का प्रमाण प्रदर्शित किया है, फिर भी यह प्रक्रिया वर्तमान में नियमित नैदानिक अनुप्रयोग के लिये अप्रभावी है। - मानव iPSCs की व्युत्पत्ति में कई प्रकार की तकनीकी प्रगति के बावजूद भी आणविक स्टेम कोशिकाओं के समान उनकी आणविक और कार्यात्मक समानता के बारे में कम जाना जाता है, यह उनकी संभावित चिकित्सीय उपयोगिता को प्रभावित कर सकता है। - स्टेम सेल से संबंधित नैतिक चिंताएँ भी हैं, जैसे कि डिज़ाइनर बेबी, मानव आनुवंशिक पूल में हस्तक्षेप आदि। - जोखिम तथा प्रयोगात्मक हस्तक्षेप के बारे में भी चिंताएँ हैं जो अपरिवर्तनीय हो सकती हैं। iPSC- व्युत्पन्न विशेष कोशिकाओं की कार्यक्षमता का मूल्यांकन करने के लिये उपयुक्त विभेदन प्रोटोकॉल और विश्वसनीय परीक्षणों के विकास के साथ ही इस समस्या को संबोधित करने के लिये मानव iPSCs की आनुवंशिक/जीनोमिक अखंडता का सावधानीपूर्वक विश्लेषण करने की आवश्यकता है।
Hormonal Imbalance: विज्ञान के अनुसार मानव शरीर में करीब 50 से अधिक हार्मोन पाए जाते हैं। यह हार्मोन शरीर में विभिन्न कार्यों के लिए जिम्मेदार होते हैं। शरीर में हार्मोन्स के घटने या बढ़ने की स्थिति को हार्मोनल इंबैलेंस कहा जाता है। आमतौर पर हार्मोनल इंबैलेंस एडल्ट्स, प्रेग्नेंट वुमन और प्री मेनोपॉज या मेनोपॉज के समय देखा जाता है। Hormonal Imbalance : हमारी बॉडी में कई तरह के हार्मोन्स होते हैं, जिनका अलग-अलग काम होता है। हार्मोनल इंबैलेंस को बैलेंस रखने के लिए एक बढ़िया डाइट और हेल्दी लाइफस्टाइल की जरूरत होती है. किशोरावस्था के शुरुआती दौर में हार्मोनल इंबैलेंस के कारण आमतौर पर चेहरे पर कील मुंहासे निकलने लगते हैं, मूड स्विंग्स ,चिड़चिड़ापन ,एकाग्रता ना होना और थकान जैसे लक्षण असंतुलित हार्मोन्स के कारण ही होते है। यहां तक कि महिलाओं में पीसीओडी और पीसीओएस जैसी गंभीर समस्या भी हार्मोनल इंबैलेंस का ही नतीजा है। हार्मोन्स को संतुलित रखने के लिए आपको अपने डाइट में इन पांच सब्जियों को जरूर शामिल करना चाहिए। Child Health: क्या है थायराइड हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी, जो गर्भावस्था के दौरान बच्चे को जेनेटिक थायराइड की समस्या से बचाती है? टमाटर का सेवन करने से शरीर में हार्मोन्स संतुलित रहते हैं। इसमें मौजूद गुण शरीर को कई गंभीर बीमारियों से बचाते हैं। यह पेट से संबंधित समस्याओं को भी दूर करता है। एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी से जूझ रहे व्यक्ति को ब्रोकली का सेवन अवश्य करना चाहिए। ब्रोकली शरीर में अन्य कई हार्मोन्स को संतुलित करने के लिए भी बहुत फायदेमंद है। असंतुलित हार्मोन्स की समस्या को दूर करने के लिए एवोकाडो का इस्तेमाल बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। यह हार्मोन को एक्टिव करने और हार्मोन प्रोडक्शन में मदद करता है। हरी सब्जियां तो हमारे शरीर के लिए वरदान होती हैं पालक का सेवन करने से आयरन की कमी नहीं होती जो कि शरीर में खून की पर्याप्त मात्रा बनाए रखने के लिए बेहद फायदेमंद है पालक का सेवन शरीर में हार्मोन असंतुलन को ठीक करने में भी बहुत असरदार है। चुकंदर में मौजूद पोषक तत्व और गुण शरीर के लिए बेहद आवश्यक है। यह हार्मोनल इंबैलेंस की समस्या से निपटने में भी सहायता करते हैं। खून की कमी होने पर चुकंदर का सेवन बेस्ट ऑप्शन है। आपके शरीर के किसी भी हार्मोन का संतुलन बिगड़ता है तो बॉडी के बाकी पार्ट्स के कार्य भी प्रभावित हो सकते हैं. आपके शरीर में हार्मोन्स की कमी के कारण कई गंभीर बीमारियां पैदा हो सकती हैं। (डिस्क्लेमरः प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें। ) ट्रेंडिंगः
Hormonal Imbalance: विज्ञान के अनुसार मानव शरीर में करीब पचास से अधिक हार्मोन पाए जाते हैं। यह हार्मोन शरीर में विभिन्न कार्यों के लिए जिम्मेदार होते हैं। शरीर में हार्मोन्स के घटने या बढ़ने की स्थिति को हार्मोनल इंबैलेंस कहा जाता है। आमतौर पर हार्मोनल इंबैलेंस एडल्ट्स, प्रेग्नेंट वुमन और प्री मेनोपॉज या मेनोपॉज के समय देखा जाता है। Hormonal Imbalance : हमारी बॉडी में कई तरह के हार्मोन्स होते हैं, जिनका अलग-अलग काम होता है। हार्मोनल इंबैलेंस को बैलेंस रखने के लिए एक बढ़िया डाइट और हेल्दी लाइफस्टाइल की जरूरत होती है. किशोरावस्था के शुरुआती दौर में हार्मोनल इंबैलेंस के कारण आमतौर पर चेहरे पर कील मुंहासे निकलने लगते हैं, मूड स्विंग्स ,चिड़चिड़ापन ,एकाग्रता ना होना और थकान जैसे लक्षण असंतुलित हार्मोन्स के कारण ही होते है। यहां तक कि महिलाओं में पीसीओडी और पीसीओएस जैसी गंभीर समस्या भी हार्मोनल इंबैलेंस का ही नतीजा है। हार्मोन्स को संतुलित रखने के लिए आपको अपने डाइट में इन पांच सब्जियों को जरूर शामिल करना चाहिए। Child Health: क्या है थायराइड हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी, जो गर्भावस्था के दौरान बच्चे को जेनेटिक थायराइड की समस्या से बचाती है? टमाटर का सेवन करने से शरीर में हार्मोन्स संतुलित रहते हैं। इसमें मौजूद गुण शरीर को कई गंभीर बीमारियों से बचाते हैं। यह पेट से संबंधित समस्याओं को भी दूर करता है। एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी से जूझ रहे व्यक्ति को ब्रोकली का सेवन अवश्य करना चाहिए। ब्रोकली शरीर में अन्य कई हार्मोन्स को संतुलित करने के लिए भी बहुत फायदेमंद है। असंतुलित हार्मोन्स की समस्या को दूर करने के लिए एवोकाडो का इस्तेमाल बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। यह हार्मोन को एक्टिव करने और हार्मोन प्रोडक्शन में मदद करता है। हरी सब्जियां तो हमारे शरीर के लिए वरदान होती हैं पालक का सेवन करने से आयरन की कमी नहीं होती जो कि शरीर में खून की पर्याप्त मात्रा बनाए रखने के लिए बेहद फायदेमंद है पालक का सेवन शरीर में हार्मोन असंतुलन को ठीक करने में भी बहुत असरदार है। चुकंदर में मौजूद पोषक तत्व और गुण शरीर के लिए बेहद आवश्यक है। यह हार्मोनल इंबैलेंस की समस्या से निपटने में भी सहायता करते हैं। खून की कमी होने पर चुकंदर का सेवन बेस्ट ऑप्शन है। आपके शरीर के किसी भी हार्मोन का संतुलन बिगड़ता है तो बॉडी के बाकी पार्ट्स के कार्य भी प्रभावित हो सकते हैं. आपके शरीर में हार्मोन्स की कमी के कारण कई गंभीर बीमारियां पैदा हो सकती हैं। ट्रेंडिंगः
'पापा... मैं बहुत परेशान हो गया हूं, मुझे हॉस्टल में नहीं रहना है। यहां सीनियर रैगिंग ले रहे हैं। रोज मुझे कपड़े उतार कर दीवार पर खड़ा कर देते हैं। उसी हालत में घंटों खड़ा रखते हैं। पेंसिल-पेन लेकर गंदी हरकत करते हैं। पुलिस का कहना है, चेतन ने 26 मार्च को डीन जीएस पटेल को हॉस्टल में नहीं रहने से संबंधित आवेदन दिया था, लेकिन डीन ने साफ मना कर दिया। बताया जाता है कि, कॉलेज संचालक को हॉस्टल के लिए मोटी फीस मिलती है। इस कारण वे छात्र को हॉस्टल खाली नहीं करने देते। इस मामले में शुक्रवार देर रात कॉलेज के दो सीनियर छात्रों दुर्गेश हाड़ा और रोमिल सिंह सहित कॉलेज के डीन जीएस पटेल पर धारा 306 के तहत केस दर्ज किया गया है।
'पापा... मैं बहुत परेशान हो गया हूं, मुझे हॉस्टल में नहीं रहना है। यहां सीनियर रैगिंग ले रहे हैं। रोज मुझे कपड़े उतार कर दीवार पर खड़ा कर देते हैं। उसी हालत में घंटों खड़ा रखते हैं। पेंसिल-पेन लेकर गंदी हरकत करते हैं। पुलिस का कहना है, चेतन ने छब्बीस मार्च को डीन जीएस पटेल को हॉस्टल में नहीं रहने से संबंधित आवेदन दिया था, लेकिन डीन ने साफ मना कर दिया। बताया जाता है कि, कॉलेज संचालक को हॉस्टल के लिए मोटी फीस मिलती है। इस कारण वे छात्र को हॉस्टल खाली नहीं करने देते। इस मामले में शुक्रवार देर रात कॉलेज के दो सीनियर छात्रों दुर्गेश हाड़ा और रोमिल सिंह सहित कॉलेज के डीन जीएस पटेल पर धारा तीन सौ छः के तहत केस दर्ज किया गया है।
मुंबई : शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे के स्मारक के लिए महापौर बंगले की जगह किराए पर दिया जा है. जिसके लिए राज्य सरकार ने अध्यादेश जारी किया है. बालासाहेब के स्मारक के लिए जो जगह दी जानेवाली है, उसके लिए साल में केवल 1 रुपए किराये पर 30 वर्षो के लिए करार किया जाने वाला है. स्मारक के लिए जो ट्रस्ट स्थापन की गई है. उस ट्रस्ट को जगह हस्तांतरित करने की अधिसूचना राज्य सरकार ने जारी कर दी है. चर्चा है कि शिवसेना का गुस्सा शांत करने के लिए राज्य सरकार ने इस पर निर्णय लेकर अध्यादेश निकाल दिया है. क्योंकि कल ही कैबिनेट की बैठक में शिवसेना ने बुलेट ट्रेन का विरोध किया था. इसके आलावा यवतमाल में संजय राठोड़ के पालक मंत्री का दर्जी कम करने पर मचे घमासान को देखते हुए मुख्यमंत्री द्वारा यह निर्णय लिए जाने की भी चर्चा है.
मुंबई : शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे के स्मारक के लिए महापौर बंगले की जगह किराए पर दिया जा है. जिसके लिए राज्य सरकार ने अध्यादेश जारी किया है. बालासाहेब के स्मारक के लिए जो जगह दी जानेवाली है, उसके लिए साल में केवल एक रुपयापए किराये पर तीस वर्षो के लिए करार किया जाने वाला है. स्मारक के लिए जो ट्रस्ट स्थापन की गई है. उस ट्रस्ट को जगह हस्तांतरित करने की अधिसूचना राज्य सरकार ने जारी कर दी है. चर्चा है कि शिवसेना का गुस्सा शांत करने के लिए राज्य सरकार ने इस पर निर्णय लेकर अध्यादेश निकाल दिया है. क्योंकि कल ही कैबिनेट की बैठक में शिवसेना ने बुलेट ट्रेन का विरोध किया था. इसके आलावा यवतमाल में संजय राठोड़ के पालक मंत्री का दर्जी कम करने पर मचे घमासान को देखते हुए मुख्यमंत्री द्वारा यह निर्णय लिए जाने की भी चर्चा है.
बिलासपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। सिम्स प्रबंधन ने कोरोना काल के दौरान किचन शेड को वैक्सीनेशन हाल बनवा दिया। तब से मरीज के स्वजनों को खाना बनाने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। मजबूरी में नाली किनारे या गंदगी के बीच खाना बनाते हैं। इस दौरान कई बार बाहर से कुत्ते व मवेशी भी चूल्हे तक पहुंच जाते है। कई बार गाय हरी सब्जियों को खा भी चुकी है। सिम्स में ग्रामीण क्षेत्र से पहुंचने वाले मरीजों के स्वजन को कई सारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके लिए खाना बनाने तक का जगह नहीं है। स्वजन खुले आसमान के नीचे और गंदगी के बीच खाना बनाने को मजबूर हैं। सिम्स संभाग का सबसे बड़े सरकारी अस्पताल होने के कारण पांच जिलों समेत मध्यप्रदेश राज्य से भी मरीज यहां इलाज के लिए आते हैं। वार्डों में भर्ती मरीजों को तो सिम्स प्रबंधन की ओर से भोजन मिल जाता है। लेकिन उनके स्वजन को खाना देने की व्यवस्था नहीं है। इसलिए स्वजन को खाना बनाना पड़ता है। कुछ साल पहले मुख्य गेट के सामने वाहन पार्किंग रोड में गंदगी के बीच खाना बनाना पड़ रहा था। अब उसमें भी वैक्सीनेशन कक्ष निर्माण कराकर प्रतिबंध कर दिया गया है। अब एमआरडी के पास नालियों और बाथरूम के पास खाना बनाने पड़ रहा है। यहां सफाई भी नहीं होती है। जिसके कारण चारों तरफ कूड़ा कचरा फैला रहता है। इसकी वजह से मरीजों के स्वजन के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है। सिम्स में रोजाना औसतन 30 से 40 लोगों को अपने लिए खाना बनाना पड़ता है। दूर दराज से आने वाले गरीब परिवार के स्वजन खाना खरीदकर भी नहीं खा पाते हैं। होटलों में खाना के नाम पर मन मुताबिक पैसा वसूला जा रहा है। दूसरी ओर सिम्स प्रबंधन की ओर से खाना बनाने के लिए कोई विकल्प तलाशा नहीं जा रहा हैं। इसका खामियाजा स्वजन भुगत रहे हैं।
बिलासपुर। सिम्स प्रबंधन ने कोरोना काल के दौरान किचन शेड को वैक्सीनेशन हाल बनवा दिया। तब से मरीज के स्वजनों को खाना बनाने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। मजबूरी में नाली किनारे या गंदगी के बीच खाना बनाते हैं। इस दौरान कई बार बाहर से कुत्ते व मवेशी भी चूल्हे तक पहुंच जाते है। कई बार गाय हरी सब्जियों को खा भी चुकी है। सिम्स में ग्रामीण क्षेत्र से पहुंचने वाले मरीजों के स्वजन को कई सारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके लिए खाना बनाने तक का जगह नहीं है। स्वजन खुले आसमान के नीचे और गंदगी के बीच खाना बनाने को मजबूर हैं। सिम्स संभाग का सबसे बड़े सरकारी अस्पताल होने के कारण पांच जिलों समेत मध्यप्रदेश राज्य से भी मरीज यहां इलाज के लिए आते हैं। वार्डों में भर्ती मरीजों को तो सिम्स प्रबंधन की ओर से भोजन मिल जाता है। लेकिन उनके स्वजन को खाना देने की व्यवस्था नहीं है। इसलिए स्वजन को खाना बनाना पड़ता है। कुछ साल पहले मुख्य गेट के सामने वाहन पार्किंग रोड में गंदगी के बीच खाना बनाना पड़ रहा था। अब उसमें भी वैक्सीनेशन कक्ष निर्माण कराकर प्रतिबंध कर दिया गया है। अब एमआरडी के पास नालियों और बाथरूम के पास खाना बनाने पड़ रहा है। यहां सफाई भी नहीं होती है। जिसके कारण चारों तरफ कूड़ा कचरा फैला रहता है। इसकी वजह से मरीजों के स्वजन के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है। सिम्स में रोजाना औसतन तीस से चालीस लोगों को अपने लिए खाना बनाना पड़ता है। दूर दराज से आने वाले गरीब परिवार के स्वजन खाना खरीदकर भी नहीं खा पाते हैं। होटलों में खाना के नाम पर मन मुताबिक पैसा वसूला जा रहा है। दूसरी ओर सिम्स प्रबंधन की ओर से खाना बनाने के लिए कोई विकल्प तलाशा नहीं जा रहा हैं। इसका खामियाजा स्वजन भुगत रहे हैं।
ये कैसा शहीद द्वार है। इसके लोकार्पण के पत्थर में शहीद तक का नाम नहीं है। इसमें सिर्फ नाम है तो नेताओं के। इन नेताओं के जो शहीदों के नाम पर आंसू तो बहाते हैं, राजनीति तो करते हैं, लेकिन उनके नाम का सहारा लेकर अपना ही नाम चमकाते हैं। यदि उनके मन में शहीद के प्रति आदर भावना होती तो शहीद द्वार लिखने के साथ ही शहीद का नााम जरूर लिखा होता। हालांकि द्वार में शहीद की फोटो है, लेकिन व्यस्तम सड़क पर खड़े होकर गेट पर लिखा देखने और पढ़ना मुश्किल है। वहीं, शिलापट्ट में शहीद का जिक्र होना चाहिए था। जो गेट के बगल में लगाया गया है। ताकी कोई भी यदि वहां खड़ा हो तो वो जान सके कि शहीद कौन है। दो लाइन का शहीद के बारे में जिक्र भी किया जाना चाहिए था। इस शिलापट्ट में स्थानीय लोगों की ओर से दीपक जलाए जाते हैं, अब अंदाजा लगा लो कि दीपक किसके नाम पर जल रहे हैं, जिनके नाम का पत्थर है या फिर शहीद के नाम। जिसका नाम इसमें लिखा ही नहीं गया। नेताओं के नाम के नीचे श्रद्धांजलि के दीए जलाना भी अजीबोगरीब स्थिति है। कायदे से जहां दीपक जलाए जाने हों, वहां शहीद की फोटो होनी चाहिए। देहरादून के हर्रावाला में शहीद दीपक नैनताल की स्मृति में ये द्वार बनाया गया है। इसका उद्घाटन उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एक नंबर 2020 को किया। शहीद दीपक नैनवाल गढ़वाल राइफल्स का जवान थे, लेकिन शिलापटट पर नेताओ के नाम हैं। अब सवाल उठता है कि किस शहीद की याद में ये द्वारा है। इस शहीद द्वार में वार्ड 97, सिद्धपुरम कालोनी हर्रावाला लिखा है। लोकार्पण के शिलापट्ट में पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत, महापौर सुनील उनियाल गामा, पार्षद विनोद कुमार, अधिशासी अभियंता अनुपम भटनागर, नगर आयुक्त विनय शंकर पांडेय के नाम हैं। शहीद का नाम लिखने की आवश्यकता ही नहीं समझी गई। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
ये कैसा शहीद द्वार है। इसके लोकार्पण के पत्थर में शहीद तक का नाम नहीं है। इसमें सिर्फ नाम है तो नेताओं के। इन नेताओं के जो शहीदों के नाम पर आंसू तो बहाते हैं, राजनीति तो करते हैं, लेकिन उनके नाम का सहारा लेकर अपना ही नाम चमकाते हैं। यदि उनके मन में शहीद के प्रति आदर भावना होती तो शहीद द्वार लिखने के साथ ही शहीद का नााम जरूर लिखा होता। हालांकि द्वार में शहीद की फोटो है, लेकिन व्यस्तम सड़क पर खड़े होकर गेट पर लिखा देखने और पढ़ना मुश्किल है। वहीं, शिलापट्ट में शहीद का जिक्र होना चाहिए था। जो गेट के बगल में लगाया गया है। ताकी कोई भी यदि वहां खड़ा हो तो वो जान सके कि शहीद कौन है। दो लाइन का शहीद के बारे में जिक्र भी किया जाना चाहिए था। इस शिलापट्ट में स्थानीय लोगों की ओर से दीपक जलाए जाते हैं, अब अंदाजा लगा लो कि दीपक किसके नाम पर जल रहे हैं, जिनके नाम का पत्थर है या फिर शहीद के नाम। जिसका नाम इसमें लिखा ही नहीं गया। नेताओं के नाम के नीचे श्रद्धांजलि के दीए जलाना भी अजीबोगरीब स्थिति है। कायदे से जहां दीपक जलाए जाने हों, वहां शहीद की फोटो होनी चाहिए। देहरादून के हर्रावाला में शहीद दीपक नैनताल की स्मृति में ये द्वार बनाया गया है। इसका उद्घाटन उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एक नंबर दो हज़ार बीस को किया। शहीद दीपक नैनवाल गढ़वाल राइफल्स का जवान थे, लेकिन शिलापटट पर नेताओ के नाम हैं। अब सवाल उठता है कि किस शहीद की याद में ये द्वारा है। इस शहीद द्वार में वार्ड सत्तानवे, सिद्धपुरम कालोनी हर्रावाला लिखा है। लोकार्पण के शिलापट्ट में पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत, महापौर सुनील उनियाल गामा, पार्षद विनोद कुमार, अधिशासी अभियंता अनुपम भटनागर, नगर आयुक्त विनय शंकर पांडेय के नाम हैं। शहीद का नाम लिखने की आवश्यकता ही नहीं समझी गई। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
वार्ड आरक्षण पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए विभाग द्वारा एक सप्ताह का समय दिया गया है। जिसके बाद वर्तमान आरक्षण सूची में बदलाव किया जा सकता है। अधिकारियों ने कहा- "कोई भी व्यक्ति आपत्ति दर्ज कराना चाहता है या कोई सुझाव देना चाहता है, तो वह जिलाधिकारियों के माध्यम से ऐसा कर सकेगा। " UP Municipal Election: यूपी में जल्द ही निकाय चुनाव हो सकते हैं। शहरी स्थानीय निकाय चुनाव के लिए पहला कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश शहरी विकास विभाग ने गुरुवार को राज्य के कुल 75 जिलों में से 48 में वार्ड आरक्षण की सूची जारी कर दी है। लखनऊ सहित अन्य जिलों के लिए 110 वार्डों की आरक्षण सूची प्रमुख सचिव नगरीय विकास अमृत अभिजात द्वारा जारी की गयी है। वार्ड आरक्षण पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए विभाग द्वारा एक सप्ताह का समय दिया गया है। जिसके कारण वर्तमान में आरक्षण सूची में बदलाव किया जा सकता है। अधिकारियों ने कहा- "कोई भी व्यक्ति आपत्ति दर्ज कराना चाहता है या कोई सुझाव देना चाहता है, तो वह जिलाधिकारियों के माध्यम से ऐसा कर सकेगा। " लखनऊ के अलावा, जिन अन्य 47 जिलों के लिए वार्ड आरक्षण शुरू किया गया है, उनमें रायबरेली, अमेठी, लखीमपुर खीरी, वाराणसी, श्रावस्ती, संत कबीर नगर, शाहजहाँपुर, अमरोहा, अमेठी, अयोध्या, अलीगढ़, उन्नाव, एटा, औरैया, कानपुर देहात, कासगंज, कुशीनगर, कौशाम्बी, गाजियाबाद और गाजीपुर शामिल हैं। जौनपुर, गोंडा, बहराइच, बलरामपुर, बस्ती, महराजगंज, चंदौली, चित्रकूट, संभल, सिद्धार्थनगर, सुल्तानपुर, सोनभद्र, हमीरपुर, हाथरस और हापुड़ के वार्डों के लिए भी आरक्षण कार्यक्रम जारी कर दिया गया है। अधिकारियों ने कहा कि अन्य जिलों में शेष वार्डों के लिए आरक्षण कार्यक्रम जल्द ही जारी किया जाएगा। राज्य में 17 नगर निगमों, 200 नगर पालिका परिषदों और 546 नगर पंचायतों सहित 763 शहरी स्थानीय निकाय हैं। राज्य भर में भाजपा के अधिकतम मेयर हैं, उसके बाद बसपा है। इस लिस्ट के जारी हो जाने के बाद अब उम्मीद है कि चुनावों के तारीखों की घोषणा भी जल्द हो जाएगी। Video: दिल्ली मेट्रो से निकलकर अब रेलवे ट्रैक पर रील्स बनाने पहुंची लड़की, भड़के लोग बोले- 'दीदी ने तो हद कर दी' ट्रेंडिंगः
वार्ड आरक्षण पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए विभाग द्वारा एक सप्ताह का समय दिया गया है। जिसके बाद वर्तमान आरक्षण सूची में बदलाव किया जा सकता है। अधिकारियों ने कहा- "कोई भी व्यक्ति आपत्ति दर्ज कराना चाहता है या कोई सुझाव देना चाहता है, तो वह जिलाधिकारियों के माध्यम से ऐसा कर सकेगा। " UP Municipal Election: यूपी में जल्द ही निकाय चुनाव हो सकते हैं। शहरी स्थानीय निकाय चुनाव के लिए पहला कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश शहरी विकास विभाग ने गुरुवार को राज्य के कुल पचहत्तर जिलों में से अड़तालीस में वार्ड आरक्षण की सूची जारी कर दी है। लखनऊ सहित अन्य जिलों के लिए एक सौ दस वार्डों की आरक्षण सूची प्रमुख सचिव नगरीय विकास अमृत अभिजात द्वारा जारी की गयी है। वार्ड आरक्षण पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए विभाग द्वारा एक सप्ताह का समय दिया गया है। जिसके कारण वर्तमान में आरक्षण सूची में बदलाव किया जा सकता है। अधिकारियों ने कहा- "कोई भी व्यक्ति आपत्ति दर्ज कराना चाहता है या कोई सुझाव देना चाहता है, तो वह जिलाधिकारियों के माध्यम से ऐसा कर सकेगा। " लखनऊ के अलावा, जिन अन्य सैंतालीस जिलों के लिए वार्ड आरक्षण शुरू किया गया है, उनमें रायबरेली, अमेठी, लखीमपुर खीरी, वाराणसी, श्रावस्ती, संत कबीर नगर, शाहजहाँपुर, अमरोहा, अमेठी, अयोध्या, अलीगढ़, उन्नाव, एटा, औरैया, कानपुर देहात, कासगंज, कुशीनगर, कौशाम्बी, गाजियाबाद और गाजीपुर शामिल हैं। जौनपुर, गोंडा, बहराइच, बलरामपुर, बस्ती, महराजगंज, चंदौली, चित्रकूट, संभल, सिद्धार्थनगर, सुल्तानपुर, सोनभद्र, हमीरपुर, हाथरस और हापुड़ के वार्डों के लिए भी आरक्षण कार्यक्रम जारी कर दिया गया है। अधिकारियों ने कहा कि अन्य जिलों में शेष वार्डों के लिए आरक्षण कार्यक्रम जल्द ही जारी किया जाएगा। राज्य में सत्रह नगर निगमों, दो सौ नगर पालिका परिषदों और पाँच सौ छियालीस नगर पंचायतों सहित सात सौ तिरेसठ शहरी स्थानीय निकाय हैं। राज्य भर में भाजपा के अधिकतम मेयर हैं, उसके बाद बसपा है। इस लिस्ट के जारी हो जाने के बाद अब उम्मीद है कि चुनावों के तारीखों की घोषणा भी जल्द हो जाएगी। Video: दिल्ली मेट्रो से निकलकर अब रेलवे ट्रैक पर रील्स बनाने पहुंची लड़की, भड़के लोग बोले- 'दीदी ने तो हद कर दी' ट्रेंडिंगः
किआ स्पेक्ट्रा एक कार है जिसमें न केवल एक खूबसूरत रूप, एक सुखद, आरामदायक केबिन, आरामदायक सीटें हैं, बल्कि सड़क पर अच्छे ड्राइविंग गुण, स्वतंत्रता और विश्वसनीयता भी है। कार के पूरा सेट में चार सिलेंडर सोलह वाल्व गैसोलीन इंजन शामिल है। मोटर की कार्यशील मात्रा 1. 6 लीटर है, क्षमता - 101. 5 लीटर। एक। मॉडल स्वचालित या मैनुअल ट्रांसमिशन से लैस है। डिजाइन एक स्प्रिंग स्वतंत्र निलंबन का उपयोग करता है , जो पीछे और सामने स्थिरता स्टेबलाइजर्स (अनुक्रम) से लैस है। छोटी सड़क अनियमितताओं से अवशिष्ट कंपन को कम करने के लिए, सामने निलंबन में संपीड़न के लिए एक नियंत्रण वाल्व एकीकृत है । किआ स्पेक्ट्रा (समीक्षा और विशेषज्ञों की टिप्पणियां इस बात की गवाही देती हैं) एक पर्याप्त प्रभावी ब्रेकिंग सिस्टम है ब्रेकिंग सिस्टम की अधिक दक्षता (पिछले मॉडल की तुलना में) जूते की बढ़ी हुई क्षेत्र की वजह से है। किआ स्पेक्ट्रा (कार के उत्साही लोगों की समीक्षाओं का कहना है) - कार की कीमत सीमा के अन्य प्रतिनिधियों की तुलना में कार अधिक विशाल और बड़ी है यूरोपीय मानकों के अनुसार, यह वर्ग डी के अंतर्गत आता है। सैलून सभी के लिए सुविधाजनक है - दोनों यात्रियों और ड्राइवर के लिए। जमीन की मंजूरी लगभग एक सौ और साठ मिलीमीटर है न्यूनतम मंजूरी 154 मिमी है। सामान की मात्रा लगभग 440 लीटर है। हालांकि, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि "अंतरिक्ष प्राथमिकता" सैलून के लिए बनी हुई है। फ्रंट सीटें विनियमन के दो तरीके से सुसज्जित हैंः "बैकस्ट झुकाव" और "अनुदैर्ध्य मोड" झुकने वाले स्टीयरिंग कॉलम की उपस्थिति के कारण , यात्री डिब्बे किसी भी ऊंचाई के ड्राइवर के लिए आरामदायक होगा। पहली नज़र में, कार का डिज़ाइन कुछ पुराने जमाने लग सकता है। हालांकि, रूढ़िवाद के कुछ "सील" केवल इस कार की मजबूती को देता है, यह बदलते मोटर वाहन फैशन से स्वतंत्र बनाता है इंटीरियर काफी व्यावहारिक शैली में बना है एक प्लास्टिक ग्रे रंग के साथ सजाया जाता है, सामने पैनल पूरी तरह से केंद्र कंसोल ब्लैक से मेल खाता है। किआ स्पेक्ट्रा (मोटर यात्री की पुष्टि इस की पुष्टि) सुविधा स्थित हैं और प्रबंधन का विवरण वे पूरी तरह से व्यावहारिक और सबसे आवश्यक उपकरणों के साथ जोड़ रहे हैंः एक टैकोमीटर, एक ईंधन स्तर सूचक और एक मोटर तापमान, एक स्पीडोमीटर। मॉडल को यांत्रिक पांच-स्पीड या स्वचालित चार-स्पीड गियरबॉक्स प्रदान किया जा सकता है। शहर में प्रति सौ किलोमीटर की ईंधन की खपत 8. 2-9. 1 लीटर है, मार्ग पर- 6. 2 से 6. 9 लिटर तक। डिजाइनरों द्वारा घोषित अधिकतम गति 175 किलोमीटर प्रति घंटे है। एक सौ किलोमीटर तक कार 12. 2-13. 4 सेकंड में तेजी ला सकती है। ईंधन टैंक की क्षमता पचास लीटर है। कार की लंबाई 4510 मिलीमीटर है, ऊंचाई 1415 है, और चौड़ाई 1720 मिलीमीटर है। मशीन का वजन 1078 किलोग्राम से है।
किआ स्पेक्ट्रा एक कार है जिसमें न केवल एक खूबसूरत रूप, एक सुखद, आरामदायक केबिन, आरामदायक सीटें हैं, बल्कि सड़क पर अच्छे ड्राइविंग गुण, स्वतंत्रता और विश्वसनीयता भी है। कार के पूरा सेट में चार सिलेंडर सोलह वाल्व गैसोलीन इंजन शामिल है। मोटर की कार्यशील मात्रा एक. छः लीटरटर है, क्षमता - एक सौ एक. पाँच लीटरटर। एक। मॉडल स्वचालित या मैनुअल ट्रांसमिशन से लैस है। डिजाइन एक स्प्रिंग स्वतंत्र निलंबन का उपयोग करता है , जो पीछे और सामने स्थिरता स्टेबलाइजर्स से लैस है। छोटी सड़क अनियमितताओं से अवशिष्ट कंपन को कम करने के लिए, सामने निलंबन में संपीड़न के लिए एक नियंत्रण वाल्व एकीकृत है । किआ स्पेक्ट्रा एक पर्याप्त प्रभावी ब्रेकिंग सिस्टम है ब्रेकिंग सिस्टम की अधिक दक्षता जूते की बढ़ी हुई क्षेत्र की वजह से है। किआ स्पेक्ट्रा - कार की कीमत सीमा के अन्य प्रतिनिधियों की तुलना में कार अधिक विशाल और बड़ी है यूरोपीय मानकों के अनुसार, यह वर्ग डी के अंतर्गत आता है। सैलून सभी के लिए सुविधाजनक है - दोनों यात्रियों और ड्राइवर के लिए। जमीन की मंजूरी लगभग एक सौ और साठ मिलीमीटर है न्यूनतम मंजूरी एक सौ चौवन मिमी है। सामान की मात्रा लगभग चार सौ चालीस लीटरटर है। हालांकि, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि "अंतरिक्ष प्राथमिकता" सैलून के लिए बनी हुई है। फ्रंट सीटें विनियमन के दो तरीके से सुसज्जित हैंः "बैकस्ट झुकाव" और "अनुदैर्ध्य मोड" झुकने वाले स्टीयरिंग कॉलम की उपस्थिति के कारण , यात्री डिब्बे किसी भी ऊंचाई के ड्राइवर के लिए आरामदायक होगा। पहली नज़र में, कार का डिज़ाइन कुछ पुराने जमाने लग सकता है। हालांकि, रूढ़िवाद के कुछ "सील" केवल इस कार की मजबूती को देता है, यह बदलते मोटर वाहन फैशन से स्वतंत्र बनाता है इंटीरियर काफी व्यावहारिक शैली में बना है एक प्लास्टिक ग्रे रंग के साथ सजाया जाता है, सामने पैनल पूरी तरह से केंद्र कंसोल ब्लैक से मेल खाता है। किआ स्पेक्ट्रा सुविधा स्थित हैं और प्रबंधन का विवरण वे पूरी तरह से व्यावहारिक और सबसे आवश्यक उपकरणों के साथ जोड़ रहे हैंः एक टैकोमीटर, एक ईंधन स्तर सूचक और एक मोटर तापमान, एक स्पीडोमीटर। मॉडल को यांत्रिक पांच-स्पीड या स्वचालित चार-स्पीड गियरबॉक्स प्रदान किया जा सकता है। शहर में प्रति सौ किलोमीटर की ईंधन की खपत आठ. दो-नौ. एक लीटरटर है, मार्ग पर- छः. दो से छः. नौ लिटर तक। डिजाइनरों द्वारा घोषित अधिकतम गति एक सौ पचहत्तर किलोग्राममीटर प्रति घंटे है। एक सौ किलोमीटर तक कार बारह. दो-तेरह. चार सेकंड में तेजी ला सकती है। ईंधन टैंक की क्षमता पचास लीटर है। कार की लंबाई चार हज़ार पाँच सौ दस मिलीमीटर है, ऊंचाई एक हज़ार चार सौ पंद्रह है, और चौड़ाई एक हज़ार सात सौ बीस मिलीमीटर है। मशीन का वजन एक हज़ार अठहत्तर किलोग्रामग्राम से है।
नागपुरः भारत और श्रीलंका के बीच खेले जा रहे सीरीज के दूसरे टेस्ट के दूसरे दिन पूरी तरह भारतीय बल्लेबाजों के नाम रहा। टीम इंडिया ने मुरली विजय(128) और चेतेश्वर पुजारा(121*) के शतक और विराट कोहली(54) के अर्धशतक की बदौलत मैच में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। पहले दिन के स्कोर 11/1 से खेलना शुरु करने के बाद भारत ने दूसरे दिन का समापन 312/2 के स्कोर के साथ किया। भारत ने दूसरे ही दिन 107 रन की बढ़त हासिल कर ली है। भारत का पूरे दिन के खेल में केवल एक विकेट गंवाया। आउट होने वाले बल्लेबाज मुरली विजय रहे। 8 महीने बाद अंतिम एकादश में वापसी करने वाले मुरली विजय ने 221 गेंद में 128 रन की पारी खेली। इस दौरान उन्होंने चेतेश्वर पुजारा के साथ दूसरे विकेट के लिए 209 रन जोड़े। दिन के पहले दो सेशन में टीम इंडिया ने कोई विकेट नहीं गंवाया। चायकाल के बाद मुरली रंगना हेराथ की गेंद पर कैच होकर पवेलियन लौट गए। विजय के आउट होने के बाद बल्लेबाजी करने आए विराट ने तेजी से रन बनाए। तीसरे विकेट के लिए उन्होंने दूसरे छोर पर खड़े पुजारा के साथ 96* रन की साझेदारी की और टीम इंडिया को 300 रन के पार पहुंचाया। इस दौरान पुजारा ने 244 गेंदों में करियर का 14वां टेस्ट शतक जड़ा। वहीं विराट ने 66 गेंद में 15वां टेस्ट शतक बनाया। विराट ने अपनी इस पारी में 5 चौके जड़े। दिन का खेल खत्म होने तक पुजारा 121 और विराट 54 रन पर नाबाद पवेलियन लौटे।
नागपुरः भारत और श्रीलंका के बीच खेले जा रहे सीरीज के दूसरे टेस्ट के दूसरे दिन पूरी तरह भारतीय बल्लेबाजों के नाम रहा। टीम इंडिया ने मुरली विजय और चेतेश्वर पुजारा के शतक और विराट कोहली के अर्धशतक की बदौलत मैच में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। पहले दिन के स्कोर ग्यारह/एक से खेलना शुरु करने के बाद भारत ने दूसरे दिन का समापन तीन सौ बारह/दो के स्कोर के साथ किया। भारत ने दूसरे ही दिन एक सौ सात रन की बढ़त हासिल कर ली है। भारत का पूरे दिन के खेल में केवल एक विकेट गंवाया। आउट होने वाले बल्लेबाज मुरली विजय रहे। आठ महीने बाद अंतिम एकादश में वापसी करने वाले मुरली विजय ने दो सौ इक्कीस गेंद में एक सौ अट्ठाईस रन की पारी खेली। इस दौरान उन्होंने चेतेश्वर पुजारा के साथ दूसरे विकेट के लिए दो सौ नौ रन जोड़े। दिन के पहले दो सेशन में टीम इंडिया ने कोई विकेट नहीं गंवाया। चायकाल के बाद मुरली रंगना हेराथ की गेंद पर कैच होकर पवेलियन लौट गए। विजय के आउट होने के बाद बल्लेबाजी करने आए विराट ने तेजी से रन बनाए। तीसरे विकेट के लिए उन्होंने दूसरे छोर पर खड़े पुजारा के साथ छियानवे* रन की साझेदारी की और टीम इंडिया को तीन सौ रन के पार पहुंचाया। इस दौरान पुजारा ने दो सौ चौंतालीस गेंदों में करियर का चौदहवां टेस्ट शतक जड़ा। वहीं विराट ने छयासठ गेंद में पंद्रहवां टेस्ट शतक बनाया। विराट ने अपनी इस पारी में पाँच चौके जड़े। दिन का खेल खत्म होने तक पुजारा एक सौ इक्कीस और विराट चौवन रन पर नाबाद पवेलियन लौटे।
करीब चार महीने पहले भारत में लगी पूर्णबंदी से बेरोजगारी में भारी इजाफा हो गया है। यों भारत में कोरोना वायरस के आगमन से पहले ही अर्थव्यवस्था बहुत मंदी चल रही थी। पूर्णबंदी लागू होने के बाद देश और दुनिया ने पलायन की जो तस्वीरें देखीं, वे अभी तक लोगों के जेहन में हैं। एक बात सच यह कि यह पलायन कोरोना के डर से जितना नहीं हुआ, उससे ज्यादा मजदूरों की खाली जेब की वजह से हुआ। करोड़ों की तादाद में जो पलायन हुआ था, वह सिर्फ बाजारों, उद्योगों और लोगों के काम बंद होने के कारण ही हुआ। जब इतनी संख्या में लोग ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचे तो वहां अलग से रोजगार का संकट बढ़ गया, जो पहले से मौजूद था। यों भी ग्रामीण क्षेत्रों में प्रच्छन्न बेरोजगारी देखने को मिलती है, जहां खेतों में दो लोगों की जगह पूरा परिवार खेती में लगा होता है। ऐसे में दोबारा गांव से शहरों को पलायन होना निश्चित है, जो अब फिर शुरू भी हो रहा हैं। यह समझा जा सकता है कि लोग किन मुश्किलों से दो-चार हो रहे हैं। भूख से तड़प कर और सम्मान पर चोट सह कर कोई कितने दिन जी लेगा! लेकिन एक चिंता यह भी हैं कि अब शहरों में भी पहले जितना रोजगार नहीं रहा। शहरों में रहने वाले तमाम लोग बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। अब महानगरों में रोजगार पहले से बड़ी समस्या बन चुकी है और ग्रामीण पलायन से यह और बढ़ जाएगी। वैसे सरकार रोजगार के क्षेत्र में कई काम करने का दावा कर रही हैं, लेकिन बेरोजगारी की रफ्तार जिस तरह बढ़ रही है, उसके भयावह नतीजे हो सकते हैं।
करीब चार महीने पहले भारत में लगी पूर्णबंदी से बेरोजगारी में भारी इजाफा हो गया है। यों भारत में कोरोना वायरस के आगमन से पहले ही अर्थव्यवस्था बहुत मंदी चल रही थी। पूर्णबंदी लागू होने के बाद देश और दुनिया ने पलायन की जो तस्वीरें देखीं, वे अभी तक लोगों के जेहन में हैं। एक बात सच यह कि यह पलायन कोरोना के डर से जितना नहीं हुआ, उससे ज्यादा मजदूरों की खाली जेब की वजह से हुआ। करोड़ों की तादाद में जो पलायन हुआ था, वह सिर्फ बाजारों, उद्योगों और लोगों के काम बंद होने के कारण ही हुआ। जब इतनी संख्या में लोग ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचे तो वहां अलग से रोजगार का संकट बढ़ गया, जो पहले से मौजूद था। यों भी ग्रामीण क्षेत्रों में प्रच्छन्न बेरोजगारी देखने को मिलती है, जहां खेतों में दो लोगों की जगह पूरा परिवार खेती में लगा होता है। ऐसे में दोबारा गांव से शहरों को पलायन होना निश्चित है, जो अब फिर शुरू भी हो रहा हैं। यह समझा जा सकता है कि लोग किन मुश्किलों से दो-चार हो रहे हैं। भूख से तड़प कर और सम्मान पर चोट सह कर कोई कितने दिन जी लेगा! लेकिन एक चिंता यह भी हैं कि अब शहरों में भी पहले जितना रोजगार नहीं रहा। शहरों में रहने वाले तमाम लोग बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। अब महानगरों में रोजगार पहले से बड़ी समस्या बन चुकी है और ग्रामीण पलायन से यह और बढ़ जाएगी। वैसे सरकार रोजगार के क्षेत्र में कई काम करने का दावा कर रही हैं, लेकिन बेरोजगारी की रफ्तार जिस तरह बढ़ रही है, उसके भयावह नतीजे हो सकते हैं।
ड्यूटी खत्म होने से मायूस हैं होमगार्ड, बोले- 'योगी जी हमारी दिवाली काली हो गई' उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पुलिस विभाग में तैनात 25 हजार होमगार्ड्स की ड्यूटी खत्म करने का निर्णय लिया गया है। लखनऊ। "योगी जी हमारी दिवाली काली हो गई है। मेरे छोटे-छोटे बच्चे हैं, उनका क्या होगा। मैंने पूरी मेहनत से काम किया और यह सिला दिया आपने।" होमगार्ड विक्रम सिंह आंखों में आंसू लिए यह बात कहते हैं। विक्रम सिंह उस शासनादेश के बाद से मायूस हैं जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पुलिस विभाग में तैनात 25 हजार होमगार्ड्स की ड्यूटी खत्म करने का निर्णय लिया गया है। यह निर्णय 28 अगस्त 2019 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में लिया गया था। दिवाली से ठीक पहले आए इस शासनादेश से पुलिस विभाग में तैनात होमगार्ड काफी परेशान हैं। उत्तर प्रदेश होमगार्ड अवैतनिक अधिकारी व कर्मचारी एसोसिएशन के अध्यक्ष रामेंद्र यादव बताते हैं, "प्रदेश में होमगार्ड की स्वीकृत संख्या 1 लाख 18 हजार 300 के आस पास है। हमने हाईकोर्ट से नई भर्तियां रोकने की अपील की थी। इस वजह से वर्तमान में 90 हजार के आस पास होमगार्ड की संख्या है। इसमें से 87 हजार होमगार्ड ड्यूटी पर थे। लेकिन पिछले दिनों आए दो फैसलों की वजह से करीब 41 हजार होमगार्ड बेरोजगार हो गए हैं।" रामेंद्र यादव बताते हैं, "पहला फैसला एक अक्टूबर 2019 को लिया गया, जिसमें 16 हजार 519 होमगार्ड की ड्यूटी खत्म की गई। यह लोग होमगार्ड विभाग की ओर से ड्यूटी कर रहे थे। इसके बाद 11 अक्टूबर 2019 को आए दूसरे शासनादेश में पुलिस विभाग में तैनात 25 हजार होमगार्ड की ड्यूटी खत्म कर दी गई। इस तरह 41 हजार 519 होमगार्ड की ड्यूटी खत्म हुई है।" रामेंद्र यादव ड्यूटी खत्म करने के इन फैसलों पर कहते हैं, "हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद होमगार्ड्स का मानदेय बढ़ा था। पहले होमगार्ड 500 रुपए प्रति दिन के हिसाब से पा रहे थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद होमगार्डों को 600 रुपये मानदेय और 72 रुपये डीए देने की बात हुई, यानि कुल 672 रुपए होमगार्ड को मिलेंगे। लेकिन इस नए फैसले के बाद होमगार्ड्स के सामने भूखमरी के हालात पैदा हो गए हैं।" होमगार्ड अवधेश कुमार यादव कहते हैं, "672 रुपए मिलने की खुशी अभी मना भी नहीं पाए थे कि बेरोजगारी के कगार पर आ गए हैं। मेरे पास तो जमीन भी नहीं है जो कहीं खेती करके गुजारा किया जा सके। सरकार को इस फैसले पर एक बार सोचान चाहिए। हमें काम नहीं मिलेगा तो हम घर कैसे चलाएंगे।" वहीं, होमगार्ड विरेंद्र कुमार कहते हैं, "हमने तो यह सोचा भी नहीं था। मुझे तो फिक्र हो रही है कि अब मैं क्या करूंगा। घर वालों से क्या कहूं कि इस बार हम लोग दिवाली नहीं मना सकते क्योंकि कल का कुछ पता ही नहीं है। कम से कम नौकरी कर रही थे तो कुछ तय था। अब तो रोज के खाने की चिंता लगी हुई है।" विरेंद्र कुमार कहते हैं, "मैंने काम के दौरान कभी कामचोरी नहीं की है। मैं 12-12 घंटे तक काम करता था, लेकिन इसका यह नतीजा मिला है। मेरी बस यही अपील है कि यह सोचा जाए इससे बहुत से परिवार बर्बाद हो जाएंगे।"
ड्यूटी खत्म होने से मायूस हैं होमगार्ड, बोले- 'योगी जी हमारी दिवाली काली हो गई' उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पुलिस विभाग में तैनात पच्चीस हजार होमगार्ड्स की ड्यूटी खत्म करने का निर्णय लिया गया है। लखनऊ। "योगी जी हमारी दिवाली काली हो गई है। मेरे छोटे-छोटे बच्चे हैं, उनका क्या होगा। मैंने पूरी मेहनत से काम किया और यह सिला दिया आपने।" होमगार्ड विक्रम सिंह आंखों में आंसू लिए यह बात कहते हैं। विक्रम सिंह उस शासनादेश के बाद से मायूस हैं जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पुलिस विभाग में तैनात पच्चीस हजार होमगार्ड्स की ड्यूटी खत्म करने का निर्णय लिया गया है। यह निर्णय अट्ठाईस अगस्त दो हज़ार उन्नीस को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में लिया गया था। दिवाली से ठीक पहले आए इस शासनादेश से पुलिस विभाग में तैनात होमगार्ड काफी परेशान हैं। उत्तर प्रदेश होमगार्ड अवैतनिक अधिकारी व कर्मचारी एसोसिएशन के अध्यक्ष रामेंद्र यादव बताते हैं, "प्रदेश में होमगार्ड की स्वीकृत संख्या एक लाख अट्ठारह हजार तीन सौ के आस पास है। हमने हाईकोर्ट से नई भर्तियां रोकने की अपील की थी। इस वजह से वर्तमान में नब्बे हजार के आस पास होमगार्ड की संख्या है। इसमें से सत्तासी हजार होमगार्ड ड्यूटी पर थे। लेकिन पिछले दिनों आए दो फैसलों की वजह से करीब इकतालीस हजार होमगार्ड बेरोजगार हो गए हैं।" रामेंद्र यादव बताते हैं, "पहला फैसला एक अक्टूबर दो हज़ार उन्नीस को लिया गया, जिसमें सोलह हजार पाँच सौ उन्नीस होमगार्ड की ड्यूटी खत्म की गई। यह लोग होमगार्ड विभाग की ओर से ड्यूटी कर रहे थे। इसके बाद ग्यारह अक्टूबर दो हज़ार उन्नीस को आए दूसरे शासनादेश में पुलिस विभाग में तैनात पच्चीस हजार होमगार्ड की ड्यूटी खत्म कर दी गई। इस तरह इकतालीस हजार पाँच सौ उन्नीस होमगार्ड की ड्यूटी खत्म हुई है।" रामेंद्र यादव ड्यूटी खत्म करने के इन फैसलों पर कहते हैं, "हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद होमगार्ड्स का मानदेय बढ़ा था। पहले होमगार्ड पाँच सौ रुपयापए प्रति दिन के हिसाब से पा रहे थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद होमगार्डों को छः सौ रुपयापये मानदेय और बहत्तर रुपयापये डीए देने की बात हुई, यानि कुल छः सौ बहत्तर रुपयापए होमगार्ड को मिलेंगे। लेकिन इस नए फैसले के बाद होमगार्ड्स के सामने भूखमरी के हालात पैदा हो गए हैं।" होमगार्ड अवधेश कुमार यादव कहते हैं, "छः सौ बहत्तर रुपयापए मिलने की खुशी अभी मना भी नहीं पाए थे कि बेरोजगारी के कगार पर आ गए हैं। मेरे पास तो जमीन भी नहीं है जो कहीं खेती करके गुजारा किया जा सके। सरकार को इस फैसले पर एक बार सोचान चाहिए। हमें काम नहीं मिलेगा तो हम घर कैसे चलाएंगे।" वहीं, होमगार्ड विरेंद्र कुमार कहते हैं, "हमने तो यह सोचा भी नहीं था। मुझे तो फिक्र हो रही है कि अब मैं क्या करूंगा। घर वालों से क्या कहूं कि इस बार हम लोग दिवाली नहीं मना सकते क्योंकि कल का कुछ पता ही नहीं है। कम से कम नौकरी कर रही थे तो कुछ तय था। अब तो रोज के खाने की चिंता लगी हुई है।" विरेंद्र कुमार कहते हैं, "मैंने काम के दौरान कभी कामचोरी नहीं की है। मैं बारह-बारह घंटाटे तक काम करता था, लेकिन इसका यह नतीजा मिला है। मेरी बस यही अपील है कि यह सोचा जाए इससे बहुत से परिवार बर्बाद हो जाएंगे।"
मथुरा। मथुरा से दिल दहला देने वाला एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो को देखते ही रोंगटे खड़े हो जा रहे हैं, क्योंकि एक शख्स स्विफ्ट कार पीछे खून में लथपथ लटका हुआ दिखाई दे रहा है। यह शख्स गाड़ी के साथ 10-11 किलोमीटर तक घिसटता रहा है और चालक को इसकी भनक भी नहीं लगी। टोल प्लाजा पर मृतक का खाली सिर मिला। यमुना एक्सप्रेस वे 112 मांट टोल पर स्विफ्ट कार आगरा से नोएडा जा रही थी। जब यह स्विफ्ट टोल प्लाजा पर कार का टोल देने के लिए रुकी तो वहां तैनात सिक्योरिटी गार्ड कार के पीछे का नजारा देखा तो हतप्रभ रह गया। कार के पिछले हिस्से पर एक अज्ञात व्यक्ति का शव घिसटता नजर आया। आनन-फानन में पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव की शिनाख्ती का प्रयास किया, लेकिन पहचान न हो सकी। मृतक की जेब से 500 रुपए और टूटा हुआ कीपैड वाला मोबाइल मिला है। पुलिस के मुताबिक शव की हालत बिगड़ी हुई है जिसके चलते शिनाख्त में परेशानी आ रही है। आसपास के गांवों में सूचना दी गई है कि एक व्यक्ति सड़क हादसे का शिकार हुआ है, यदि किसी के घर से कोई मिसिंग है तो पहचान कर लें। वहीं कुछ लोग मृतक को इटावा का रहने वाला बता रहे हैं। हादसा यमुना एक्सप्रेस वे के माइलस्टोन 106 के आसपास हुआ है, क्योंकि माइलस्टोन 106 पर खून और बॉडी के अवशेष मिले हैं। पुलिस के मुताबिक स्विफ्ट कार वीरेन्द्र सिंह, निवासी संगम विहार, थाना तिगड़ी, दिल्ली चला रहे थे। हादसे के समय गाड़ी के अंदर उनका परिवार बैठा हुआ था। पुलिस ने वीरेन्द्र सिंह को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस पूछताछ में वीरेंद्र सिंह ने बताया कि कोहरा बहुत था जिसके चलते उन्हें नहीं पता कि हाईवे पर कोई कार की चपेट में आ गया है। फिलहाल पुलिस ने एक्सीडेंट में मुकदमा दर्ज कर लिया है। 10 किलोमीटर से अधिक शव घिसटने के कारण वह क्षत-विक्षत हो गया है। यह खौफनाक वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
मथुरा। मथुरा से दिल दहला देने वाला एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो को देखते ही रोंगटे खड़े हो जा रहे हैं, क्योंकि एक शख्स स्विफ्ट कार पीछे खून में लथपथ लटका हुआ दिखाई दे रहा है। यह शख्स गाड़ी के साथ दस-ग्यारह किलोग्राममीटर तक घिसटता रहा है और चालक को इसकी भनक भी नहीं लगी। टोल प्लाजा पर मृतक का खाली सिर मिला। यमुना एक्सप्रेस वे एक सौ बारह मांट टोल पर स्विफ्ट कार आगरा से नोएडा जा रही थी। जब यह स्विफ्ट टोल प्लाजा पर कार का टोल देने के लिए रुकी तो वहां तैनात सिक्योरिटी गार्ड कार के पीछे का नजारा देखा तो हतप्रभ रह गया। कार के पिछले हिस्से पर एक अज्ञात व्यक्ति का शव घिसटता नजर आया। आनन-फानन में पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव की शिनाख्ती का प्रयास किया, लेकिन पहचान न हो सकी। मृतक की जेब से पाँच सौ रुपयापए और टूटा हुआ कीपैड वाला मोबाइल मिला है। पुलिस के मुताबिक शव की हालत बिगड़ी हुई है जिसके चलते शिनाख्त में परेशानी आ रही है। आसपास के गांवों में सूचना दी गई है कि एक व्यक्ति सड़क हादसे का शिकार हुआ है, यदि किसी के घर से कोई मिसिंग है तो पहचान कर लें। वहीं कुछ लोग मृतक को इटावा का रहने वाला बता रहे हैं। हादसा यमुना एक्सप्रेस वे के माइलस्टोन एक सौ छः के आसपास हुआ है, क्योंकि माइलस्टोन एक सौ छः पर खून और बॉडी के अवशेष मिले हैं। पुलिस के मुताबिक स्विफ्ट कार वीरेन्द्र सिंह, निवासी संगम विहार, थाना तिगड़ी, दिल्ली चला रहे थे। हादसे के समय गाड़ी के अंदर उनका परिवार बैठा हुआ था। पुलिस ने वीरेन्द्र सिंह को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस पूछताछ में वीरेंद्र सिंह ने बताया कि कोहरा बहुत था जिसके चलते उन्हें नहीं पता कि हाईवे पर कोई कार की चपेट में आ गया है। फिलहाल पुलिस ने एक्सीडेंट में मुकदमा दर्ज कर लिया है। दस किलोग्राममीटर से अधिक शव घिसटने के कारण वह क्षत-विक्षत हो गया है। यह खौफनाक वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
चंडीगढ़ - ब्रिलिएंस वर्ल्ड स्कूल, पंचकूला ने अपना वार्षिक दिवस 'उड़ान 2019' मनाया। गोवा और कश्मीर के लोक नृत्यों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्री-स्कूल के छात्रों ने एक के बाद एक खूबसूरत कविताएं पेश कीं। ग्रेड-3 के छात्रों ने 70 और 80 के दशक के गाने प्रस्तुत कर दर्शकों को भावविभोर कर दिया। इन गानों के जरिये शहीदों के परिवारों की भावनाओं को श्रृद्धांजलि दी गयी। छात्रों के आर्केस्ट्रा द्वारा एक देशभक्तिपूर्ण वाद्य प्रस्तुति दी गई। इसके अलावा योगासनों, खेल और आध्यात्मिकता के सुंदर मिश्रण के साथ योग का प्रदर्शन भी बहुत बढि़या रहा।
चंडीगढ़ - ब्रिलिएंस वर्ल्ड स्कूल, पंचकूला ने अपना वार्षिक दिवस 'उड़ान दो हज़ार उन्नीस' मनाया। गोवा और कश्मीर के लोक नृत्यों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्री-स्कूल के छात्रों ने एक के बाद एक खूबसूरत कविताएं पेश कीं। ग्रेड-तीन के छात्रों ने सत्तर और अस्सी के दशक के गाने प्रस्तुत कर दर्शकों को भावविभोर कर दिया। इन गानों के जरिये शहीदों के परिवारों की भावनाओं को श्रृद्धांजलि दी गयी। छात्रों के आर्केस्ट्रा द्वारा एक देशभक्तिपूर्ण वाद्य प्रस्तुति दी गई। इसके अलावा योगासनों, खेल और आध्यात्मिकता के सुंदर मिश्रण के साथ योग का प्रदर्शन भी बहुत बढि़या रहा।
अंकाराः तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तयैप एर्दोआन 20 साल पहले एक विनाशकारी भूकंप से पैदा हुए हालात की वजह से ही सत्ता में आए थे। दरअसल, जनता भूकंप से निपटने में तत्कालीन सरकार के तौर-तरीके से बेहद नाराज थी और उसने खुलकर एर्दोआन की पार्टी को अपना समर्थन दिया था। अब जब देश में चुनाव के महज 3 महीने रहे गये हैं, ऐसे में एर्दोआन का राजनीतिक भविष्य अब इस जबरदस्त भूकंप से पैदा हुए हालात से उनकी सरकार के निपटने, और जनता पर इसके असर से तय होने की संभावना है। 20 साल पहले का दौर क्यों आ रहा याद? एक्सपर्ट्स का मानना है कि एर्दोआन के लिए यह बड़ी चुनौती बनने जा रही है जिन्होंने अपनी निरंकुश लेकिन अपने काम को सही तरीके से करने वाले एक शख्स की साख बना रखी है जो किसी भी काम को अंजाम तक पहुंचा ही देता है। इस बार भूकंप के बाद की स्थिति भी 20 सा पहले हुए चुनावों के जैसी ही है, क्योंकि तब तुर्की वित्तीय संकट में फंसा था जिसकी वजह से उसकी अर्थव्यवस्था चरमरा रही थी, और आज भी उसकी अर्थव्यवस्था पर आसमान छूती महंगाई का साया है। एर्दोआन के लिए मुसीबत बनेगी महंगाई? महंगाई भी एर्दोआन के लिए एक बड़ी मुसीबत बन सकती है क्योंकि इस समस्या से निपटने के उनके तौर तरीकों की काफी आलोचना हुई है। महंगाई के कारण लाखों गरीब एवं मध्यमवर्गीय वर्ग लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की जद्दोजहद कर रहे हैं। तुर्की के भूकंप ने कुछ इलाकों में इन दोनों वर्गों से आने वाले लोगों की मुश्किलों में और इजाफा ही कर दिया है, ऐसे में आने वाला चुनाव एर्दोआन के राजनीतिक भविष्य के लिए बेहद मुश्किल हो सकता है। ये भी पढ़ेंः बता दें कि एर्दोआन मार्च 2003 में तुर्की के प्रधानमंत्री बने थे और अगस्त 2014 तक इस पद पर रहे। इसके बाद अगस्त 2014 में वह देश के राष्ट्रपति बने और धीरे-धीरे एक तानाशाह के रूप में सत्ता पर अपनी पकड़ बेहद मजबूत कर ली। हालांकि पिछले कुछ सालो में उनके खिलाफ एक वर्ग में असंतोष की भी काफी खबरें आई हैं।
अंकाराः तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तयैप एर्दोआन बीस साल पहले एक विनाशकारी भूकंप से पैदा हुए हालात की वजह से ही सत्ता में आए थे। दरअसल, जनता भूकंप से निपटने में तत्कालीन सरकार के तौर-तरीके से बेहद नाराज थी और उसने खुलकर एर्दोआन की पार्टी को अपना समर्थन दिया था। अब जब देश में चुनाव के महज तीन महीने रहे गये हैं, ऐसे में एर्दोआन का राजनीतिक भविष्य अब इस जबरदस्त भूकंप से पैदा हुए हालात से उनकी सरकार के निपटने, और जनता पर इसके असर से तय होने की संभावना है। बीस साल पहले का दौर क्यों आ रहा याद? एक्सपर्ट्स का मानना है कि एर्दोआन के लिए यह बड़ी चुनौती बनने जा रही है जिन्होंने अपनी निरंकुश लेकिन अपने काम को सही तरीके से करने वाले एक शख्स की साख बना रखी है जो किसी भी काम को अंजाम तक पहुंचा ही देता है। इस बार भूकंप के बाद की स्थिति भी बीस सा पहले हुए चुनावों के जैसी ही है, क्योंकि तब तुर्की वित्तीय संकट में फंसा था जिसकी वजह से उसकी अर्थव्यवस्था चरमरा रही थी, और आज भी उसकी अर्थव्यवस्था पर आसमान छूती महंगाई का साया है। एर्दोआन के लिए मुसीबत बनेगी महंगाई? महंगाई भी एर्दोआन के लिए एक बड़ी मुसीबत बन सकती है क्योंकि इस समस्या से निपटने के उनके तौर तरीकों की काफी आलोचना हुई है। महंगाई के कारण लाखों गरीब एवं मध्यमवर्गीय वर्ग लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की जद्दोजहद कर रहे हैं। तुर्की के भूकंप ने कुछ इलाकों में इन दोनों वर्गों से आने वाले लोगों की मुश्किलों में और इजाफा ही कर दिया है, ऐसे में आने वाला चुनाव एर्दोआन के राजनीतिक भविष्य के लिए बेहद मुश्किल हो सकता है। ये भी पढ़ेंः बता दें कि एर्दोआन मार्च दो हज़ार तीन में तुर्की के प्रधानमंत्री बने थे और अगस्त दो हज़ार चौदह तक इस पद पर रहे। इसके बाद अगस्त दो हज़ार चौदह में वह देश के राष्ट्रपति बने और धीरे-धीरे एक तानाशाह के रूप में सत्ता पर अपनी पकड़ बेहद मजबूत कर ली। हालांकि पिछले कुछ सालो में उनके खिलाफ एक वर्ग में असंतोष की भी काफी खबरें आई हैं।
बडनेरा प्रतिनिधि/दि. 12 - बडनेरा नई बस्ती स्थित लढ्ढा प्लॉट परिसर की दो सडके पिछले 25 वर्ष पूर्व बनवाई गई थी. दोनो ही सडकों में जगह-जगह खड्डे पड गए थे और सडके उखड गई थी. जिसे दुरुस्त किए जाने की मांग स्थानीय नागरिकों ने प्रभाग की शिवसेना पार्षद व पूर्व जोन सभापति अर्चना बंडू धामने से की थी. पार्षद अर्चना धामने ने प्रयास कर दोनो सडकों का कांक्रिटीकरण करवाया. पार्षद अर्चना धामने की कर्तव्यदक्षता पर परिसर के नागरिकों ने उनका आभार व्यक्त कर सत्कार किया. इस अवसर पर पूर्व पार्षद गुलाबराव सोलंके, किशोर पवार, अनिल काले, युवराज जगदले, मनीष अमृतकर, मंगेश बागर, सुरेश ठाकरे, ज्ञानेश्वर चव्हाण, श्याम जयस्वाल, संदीप शेलके, तुषार वाटवे सहित अनेक परिसर के नागरिक उपस्थित थे.
बडनेरा प्रतिनिधि/दि. बारह - बडनेरा नई बस्ती स्थित लढ्ढा प्लॉट परिसर की दो सडके पिछले पच्चीस वर्ष पूर्व बनवाई गई थी. दोनो ही सडकों में जगह-जगह खड्डे पड गए थे और सडके उखड गई थी. जिसे दुरुस्त किए जाने की मांग स्थानीय नागरिकों ने प्रभाग की शिवसेना पार्षद व पूर्व जोन सभापति अर्चना बंडू धामने से की थी. पार्षद अर्चना धामने ने प्रयास कर दोनो सडकों का कांक्रिटीकरण करवाया. पार्षद अर्चना धामने की कर्तव्यदक्षता पर परिसर के नागरिकों ने उनका आभार व्यक्त कर सत्कार किया. इस अवसर पर पूर्व पार्षद गुलाबराव सोलंके, किशोर पवार, अनिल काले, युवराज जगदले, मनीष अमृतकर, मंगेश बागर, सुरेश ठाकरे, ज्ञानेश्वर चव्हाण, श्याम जयस्वाल, संदीप शेलके, तुषार वाटवे सहित अनेक परिसर के नागरिक उपस्थित थे.
Republic Summit 2023 : असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्य में अल्पसंख्यकों के मसले पर बड़ा बयान दिया है। रिपब्लिक समिट में बोलते हुए हिमंता बिस्वा सरमा ( Himanta Biswa Sarma ) ने कहा कि आजादी के 75 साल बाद आपको अल्पसंख्यकों के डॉक्टरों और इंजीनियरों की जरूरत है, हमें सिर्फ मौलवियों नहीं चाहिए। हिमंता ने कहा कि पहले एक दृष्टिकोण था कि अल्पसंख्यक लोगों को राजनीति का साधन होना चाहिए। हमने अल्पसंख्यक लोगों को इस धारणा से मुक्त करने के लिए कड़ी मेहनत की है। हमने अल्पसंख्यकों को आजाद कराने के लिए बहुत मेहनत की है। रिपब्लिक समिट 2023 में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने मदरसों पर अपनी कार्रवाई के बारे में बताया। हिमंता ने कहा, 'हमें अब अल्पसंख्यक समुदायों के डॉक्टर और इंजीनियर चाहिए, हमें केवल मौलवी नहीं चाहिए। यदि वैदिक स्कूल आपको केवल पुजारी बनने के लिए कहते हैं, तो मेरे पास निश्चित रूप से दूसरा विचार होगा। लेकिन वैदिक ज्ञान विज्ञान और दर्शन के बारे में बोलता है और यह एक किताब तक ही सीमित नहीं है।' रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी के साथ बातचीत में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि मोदी सरकार की जन-समर्थक नीति से सबसे अधिक संख्या में अल्पसंख्यक लोग लाभान्वित हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अल्पसंख्यकों की प्रगति के लिए बहुत काम किया है। हम बिना तुष्टिकरण के विकास चाहते हैं। असम की कानून व्यवस्था पर हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि मेरा मुख्य ध्यान विकास और कानून व्यवस्था पर है। मेरा पहला लक्ष्य असम को सकल घरेलू उत्पाद, साक्षरता और प्रति व्यक्ति आय में शीर्ष 10 राज्यों में लाना है और फिर शीर्ष पर लाना है। पांच राज्यों में यह मेरा पहला लक्ष्य है। सरमा ने आगे कहा, '2014 के बाद असम बहुत बदल गया है। शांति लौट आई है और पूर्वोत्तर को मुख्यधारा में लाया गया है।' यह भी पढ़ें : Republic Summit: यूनिफार्म सिविल कोड के विरोध में ओवैसी के लॉजिक से कितना सहमत हैं आप'
Republic Summit दो हज़ार तेईस : असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्य में अल्पसंख्यकों के मसले पर बड़ा बयान दिया है। रिपब्लिक समिट में बोलते हुए हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि आजादी के पचहत्तर साल बाद आपको अल्पसंख्यकों के डॉक्टरों और इंजीनियरों की जरूरत है, हमें सिर्फ मौलवियों नहीं चाहिए। हिमंता ने कहा कि पहले एक दृष्टिकोण था कि अल्पसंख्यक लोगों को राजनीति का साधन होना चाहिए। हमने अल्पसंख्यक लोगों को इस धारणा से मुक्त करने के लिए कड़ी मेहनत की है। हमने अल्पसंख्यकों को आजाद कराने के लिए बहुत मेहनत की है। रिपब्लिक समिट दो हज़ार तेईस में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने मदरसों पर अपनी कार्रवाई के बारे में बताया। हिमंता ने कहा, 'हमें अब अल्पसंख्यक समुदायों के डॉक्टर और इंजीनियर चाहिए, हमें केवल मौलवी नहीं चाहिए। यदि वैदिक स्कूल आपको केवल पुजारी बनने के लिए कहते हैं, तो मेरे पास निश्चित रूप से दूसरा विचार होगा। लेकिन वैदिक ज्ञान विज्ञान और दर्शन के बारे में बोलता है और यह एक किताब तक ही सीमित नहीं है।' रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी के साथ बातचीत में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि मोदी सरकार की जन-समर्थक नीति से सबसे अधिक संख्या में अल्पसंख्यक लोग लाभान्वित हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने अल्पसंख्यकों की प्रगति के लिए बहुत काम किया है। हम बिना तुष्टिकरण के विकास चाहते हैं। असम की कानून व्यवस्था पर हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि मेरा मुख्य ध्यान विकास और कानून व्यवस्था पर है। मेरा पहला लक्ष्य असम को सकल घरेलू उत्पाद, साक्षरता और प्रति व्यक्ति आय में शीर्ष दस राज्यों में लाना है और फिर शीर्ष पर लाना है। पांच राज्यों में यह मेरा पहला लक्ष्य है। सरमा ने आगे कहा, 'दो हज़ार चौदह के बाद असम बहुत बदल गया है। शांति लौट आई है और पूर्वोत्तर को मुख्यधारा में लाया गया है।' यह भी पढ़ें : Republic Summit: यूनिफार्म सिविल कोड के विरोध में ओवैसी के लॉजिक से कितना सहमत हैं आप'
दचा में बर्न एक अनिवार्य इमारत है,यह काम करने वाले उपकरणों को स्टोर करने के साथ-साथ साइट के चारों ओर बिखरे हुए किसी अन्य सामान और चीजों को स्टोर करने के लिए सबसे सुविधाजनक है। सिद्धांत रूप में, बर्न मालिकों द्वारा जिस तरह से वे चाहते हैं उसका उपयोग किया जा सकता है। अगर आपको ऐसी संरचना की भी आवश्यकता है, तो शायद आप पहले से ही सोचा है कि अपने हाथों से एक दच के लिए बर्न कैसे बनाया जाए। श्रमिकों को किराए पर लेने और अपने कौशल के लिए बहुत पैसा देने के लिए जल्दी मत करो। मेरा विश्वास करो, एक बर्न के निर्माण में कुछ भी मुश्किल नहीं है, और अब आप अपने लिए देखेंगे। सबसे पहले आपको एक साइट चुननी चाहिएनिर्माण की नियुक्ति। यह सबसे अच्छा है अगर बर्न साइट की गहराई में छिपा हुआ है और मेहमानों द्वारा नहीं देखा जाएगा। इस मामले में, यह स्थित होना चाहिए ताकि इसे जल्दी से घर से और बगीचे से पहुंचा जा सके। अपने हाथों से दचा के लिए बर्न बनाया जाना शुरू होता हैनींव रखना सबसे सरल संस्करण एक ठोस नींव होगा, लेकिन एक स्तंभकार भी करेगा। आपके द्वारा चुने गए क्षेत्र पर, बर्न के आकार से संबंधित क्षेत्र की रक्षा करें। अंकन के अंदर, पृथ्वी की शीर्ष परत को लगभग 50 सेमी मोटी हटा दें। गठित गड्ढे में गले और रेत का मिश्रण डालें, और शीर्ष पर मलबे की एक परत डालें। इस प्रकार, आपने नींव के नीचे एक तकिया बनाई है, जिसकी मोटाई 0.1 मीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए। अब तकिया पर सुदृढीकरण नेट रखें और सामान्य बोर्डों से फॉर्मवर्क बनाएं। हम कंक्रीट भरते हैं और सूखने तक प्रतीक्षा करते हैं। कई दिनों तक पानी के साथ कंक्रीट स्प्रे। यह सुनिश्चित करना है कि वह बाद में क्रैक नहीं करता है। जब बर्न की नींव तैयार होती है, तो आगे बढ़ेंएक कंकाल के निर्माण के लिए, जो सामान्य सलाखों से सबसे आसानी से किया जाता है। वैकल्पिक रूप से, आप दीवारों को बाहर रखने के लिए ईंट का उपयोग कर सकते हैं, और दोनों विकल्पों को गठबंधन कर सकते हैं। बाद के मामले में, ईंटों की पहली पंक्तियां रखी जाती हैं, और फिर लकड़ी के फ्रेम को स्थापित किया जाता है। यदि आप संयुक्त फ्रेम बनाने का निर्णय लेते हैं, तो ईंटों की अंतिम पंक्ति और लकड़ी की पहली पंक्ति के बीच जलरोधक की एक परत रखना न भूलें। ईंट नमी जमा करने में सक्षम है, और निविड़ अंधकार इस नमी को पेड़ में प्रवेश करने की अनुमति नहीं देगा। ईंटों के लिए बीम टी-आकार वाले एंकर पिन की मदद से तय किया जाता है। फिर हमने आपके मामले में एक दूसरे से 0.5 मीटर की दूरी पर आवश्यक संख्या में रैक सेट किए। अपने हाथों से दचा के लिए एक बर्न बनाने के लिए जारी है,दीवारों को स्थापित करने के लिए आगे बढ़ें। सबसे आसान तरीका उन्हें योजनाबद्ध बोर्डों से बनाना है। उन्हें आसानी से चित्रित किया जाता है और एंटीसेप्टिक के साथ इलाज किया जाता है। असबाब में बोर्डों की व्यवस्था का सबसे सही संस्करण लंबवत है। इस मामले में, बोर्ड एक दूसरे के खिलाफ नहीं दबाएंगे, जिसके कारण पूरा निर्माण केवल मजबूत होगा। यदि आप एक बार्न में खिड़कियां बनाने जा रहे हैं, तो अपने स्थान के बारे में पहले से सोचें और एक जगह छोड़ दें। और, अंत में, अंतिम चरण छत की स्थापना है। यह क्या होगा, एकल-डेक या गैबल, यह आपके ऊपर है। एक छत सामग्री के रूप में, एस्बेस्टोस-सीमेंट शीट्स का उपयोग करना सबसे अच्छा है, जो उच्च जल प्रतिरोध द्वारा विशेषता है। इच्छा पर, आप एक अलग प्रकार की छत सामग्री चुन सकते हैं, उदाहरण के लिए, स्टील शीट्स।
दचा में बर्न एक अनिवार्य इमारत है,यह काम करने वाले उपकरणों को स्टोर करने के साथ-साथ साइट के चारों ओर बिखरे हुए किसी अन्य सामान और चीजों को स्टोर करने के लिए सबसे सुविधाजनक है। सिद्धांत रूप में, बर्न मालिकों द्वारा जिस तरह से वे चाहते हैं उसका उपयोग किया जा सकता है। अगर आपको ऐसी संरचना की भी आवश्यकता है, तो शायद आप पहले से ही सोचा है कि अपने हाथों से एक दच के लिए बर्न कैसे बनाया जाए। श्रमिकों को किराए पर लेने और अपने कौशल के लिए बहुत पैसा देने के लिए जल्दी मत करो। मेरा विश्वास करो, एक बर्न के निर्माण में कुछ भी मुश्किल नहीं है, और अब आप अपने लिए देखेंगे। सबसे पहले आपको एक साइट चुननी चाहिएनिर्माण की नियुक्ति। यह सबसे अच्छा है अगर बर्न साइट की गहराई में छिपा हुआ है और मेहमानों द्वारा नहीं देखा जाएगा। इस मामले में, यह स्थित होना चाहिए ताकि इसे जल्दी से घर से और बगीचे से पहुंचा जा सके। अपने हाथों से दचा के लिए बर्न बनाया जाना शुरू होता हैनींव रखना सबसे सरल संस्करण एक ठोस नींव होगा, लेकिन एक स्तंभकार भी करेगा। आपके द्वारा चुने गए क्षेत्र पर, बर्न के आकार से संबंधित क्षेत्र की रक्षा करें। अंकन के अंदर, पृथ्वी की शीर्ष परत को लगभग पचास सेमी मोटी हटा दें। गठित गड्ढे में गले और रेत का मिश्रण डालें, और शीर्ष पर मलबे की एक परत डालें। इस प्रकार, आपने नींव के नीचे एक तकिया बनाई है, जिसकी मोटाई शून्य दशमलव एक मीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए। अब तकिया पर सुदृढीकरण नेट रखें और सामान्य बोर्डों से फॉर्मवर्क बनाएं। हम कंक्रीट भरते हैं और सूखने तक प्रतीक्षा करते हैं। कई दिनों तक पानी के साथ कंक्रीट स्प्रे। यह सुनिश्चित करना है कि वह बाद में क्रैक नहीं करता है। जब बर्न की नींव तैयार होती है, तो आगे बढ़ेंएक कंकाल के निर्माण के लिए, जो सामान्य सलाखों से सबसे आसानी से किया जाता है। वैकल्पिक रूप से, आप दीवारों को बाहर रखने के लिए ईंट का उपयोग कर सकते हैं, और दोनों विकल्पों को गठबंधन कर सकते हैं। बाद के मामले में, ईंटों की पहली पंक्तियां रखी जाती हैं, और फिर लकड़ी के फ्रेम को स्थापित किया जाता है। यदि आप संयुक्त फ्रेम बनाने का निर्णय लेते हैं, तो ईंटों की अंतिम पंक्ति और लकड़ी की पहली पंक्ति के बीच जलरोधक की एक परत रखना न भूलें। ईंट नमी जमा करने में सक्षम है, और निविड़ अंधकार इस नमी को पेड़ में प्रवेश करने की अनुमति नहीं देगा। ईंटों के लिए बीम टी-आकार वाले एंकर पिन की मदद से तय किया जाता है। फिर हमने आपके मामले में एक दूसरे से शून्य दशमलव पाँच मीटर की दूरी पर आवश्यक संख्या में रैक सेट किए। अपने हाथों से दचा के लिए एक बर्न बनाने के लिए जारी है,दीवारों को स्थापित करने के लिए आगे बढ़ें। सबसे आसान तरीका उन्हें योजनाबद्ध बोर्डों से बनाना है। उन्हें आसानी से चित्रित किया जाता है और एंटीसेप्टिक के साथ इलाज किया जाता है। असबाब में बोर्डों की व्यवस्था का सबसे सही संस्करण लंबवत है। इस मामले में, बोर्ड एक दूसरे के खिलाफ नहीं दबाएंगे, जिसके कारण पूरा निर्माण केवल मजबूत होगा। यदि आप एक बार्न में खिड़कियां बनाने जा रहे हैं, तो अपने स्थान के बारे में पहले से सोचें और एक जगह छोड़ दें। और, अंत में, अंतिम चरण छत की स्थापना है। यह क्या होगा, एकल-डेक या गैबल, यह आपके ऊपर है। एक छत सामग्री के रूप में, एस्बेस्टोस-सीमेंट शीट्स का उपयोग करना सबसे अच्छा है, जो उच्च जल प्रतिरोध द्वारा विशेषता है। इच्छा पर, आप एक अलग प्रकार की छत सामग्री चुन सकते हैं, उदाहरण के लिए, स्टील शीट्स।
एक कहावत चरितार्थ है कि पूत के पांव पालने में ही दिखाई पड़ जाते हैं, ऐसी ही कहानी है एक दिव्यांग बच्चे राकेश कुमार यादव की, उत्तर प्रदेश के पिछड़े गाँव में शुमार( तत्कालीन )बदायूँ जनपद और अब संभल जनपद में स्थित है गाँव घोंसली राजा, यहाँ पर यादव बाहुल्य परिवार निवास करते हैं जिनमें से एक गरीब किसान रघुनाथ सिंह यादव का परिवार भी निवास करता है जिनके घर में दो पुत्र थे.. एक रमेश चंद्र यादव और दूसरे हरिकेश सिंह यादव। दोनों भाइयों में बड़े रमेश चंद्र यादव के घर में चार पुत्रों का जन्म हुआ जिसमें तीसरे नंबर के हैं राकेश कुमार यादव, राकेश कुमार जन्म से ही दिव्यांग पैदा हुए.. जिनके दोनों पैर पूरी तरह से जमीन पर नहीं रखे जाते थे..ऐसी स्थिति को देखकर राकेश के माता पिता अपने इस बच्चे को लेकर काफी परेशान रहते थे, उन्होंने अपनी छोटी सी जमापूँजी से नन्हे राकेश का जगह जगह इलाज कराया पर असफलता ही हाथ लगी, समय के साथ साथ राकेश बड़ा हुआ और तीव्र बुद्धि के राकेश ने अपने जीवन की पढ़ाई की शुरुआत अपने गांव के प्राथमिक विद्यालय घोंसली राजा से ही शुरू की, राकेश ने समय के साथ साथ पांचवीं कक्षा के बाद.. गांव के ही जनप्रिय किसान विद्यालय घोंसली मोहकम से आठवीं कक्षा पास कर ...नौवीं कक्षा में रामपुर के एक दिव्यांग विद्यालय में प्रवेश लिया, और वहीं से इन्हें क्रिकेट खेलने का शौक लग गया..और तब से ही वह पढ़ाई के साथ साथ निरंतर क्रिकेट खेलते रहे, वहां से बारहवीं की परीक्षा पास करने के बाद चित्रकूट में B.B.A, M.B.A. किया लेकिन क्रिकेट का खेल बरकरार रखा, उसके बाद राकेश ने कुछ प्रयासों के बाद गुडगांव में प्राइवेट कंपनी में नौकरी शुरू की.. लेकिन क्रिकेट का खेल जारी रखा...उस समय इन्हें उत्तर प्रदेश के साथ साथ हरियाणा प्रदेश की क्रिकेट टीम की कप्तानी करने का भी अवसर प्राप्त हुआ , लेकिन राकेश कुमार का एक दुर्भाग्य रहा कि इन्हें खेलने के लिए.. नौकरी में समय नहीं मिल पाता था इस कारण इन्हें वो नौकरी रास नहीं आई और इन्होंने...खेल के लिए अपनी नौकरी त्याग दी, उसके बाद इन्होंने अपने ही जनपद में क्रिकेट अकादमी की शुरूआत करने का फैसला लिया, पहले रजपुरा और फिर अपने ही गांव के पास अपने खेत में क्रिकेट के मैदान से इसकी शुरुआत की, आज यह अपने गांव में क्रिकेट की एक अकादमी के साथ साथ बच्चों को पढ़ाने का भी काम कर रहे हैं और साथ में भारत की दिव्यांग क्रिकेट टीम में निरंतर प्रतिभाग कर रहे हैं जिसकी बदौलत इन्हें भारत की दिव्यांग क्रिकेट टीम का कप्तान चुना गया है, इससे इनके साथियों गांव और आसपास के क्षेत्र में खुशी का माहौल है। हम सभी इनके उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं ।
एक कहावत चरितार्थ है कि पूत के पांव पालने में ही दिखाई पड़ जाते हैं, ऐसी ही कहानी है एक दिव्यांग बच्चे राकेश कुमार यादव की, उत्तर प्रदेश के पिछड़े गाँव में शुमारबदायूँ जनपद और अब संभल जनपद में स्थित है गाँव घोंसली राजा, यहाँ पर यादव बाहुल्य परिवार निवास करते हैं जिनमें से एक गरीब किसान रघुनाथ सिंह यादव का परिवार भी निवास करता है जिनके घर में दो पुत्र थे.. एक रमेश चंद्र यादव और दूसरे हरिकेश सिंह यादव। दोनों भाइयों में बड़े रमेश चंद्र यादव के घर में चार पुत्रों का जन्म हुआ जिसमें तीसरे नंबर के हैं राकेश कुमार यादव, राकेश कुमार जन्म से ही दिव्यांग पैदा हुए.. जिनके दोनों पैर पूरी तरह से जमीन पर नहीं रखे जाते थे..ऐसी स्थिति को देखकर राकेश के माता पिता अपने इस बच्चे को लेकर काफी परेशान रहते थे, उन्होंने अपनी छोटी सी जमापूँजी से नन्हे राकेश का जगह जगह इलाज कराया पर असफलता ही हाथ लगी, समय के साथ साथ राकेश बड़ा हुआ और तीव्र बुद्धि के राकेश ने अपने जीवन की पढ़ाई की शुरुआत अपने गांव के प्राथमिक विद्यालय घोंसली राजा से ही शुरू की, राकेश ने समय के साथ साथ पांचवीं कक्षा के बाद.. गांव के ही जनप्रिय किसान विद्यालय घोंसली मोहकम से आठवीं कक्षा पास कर ...नौवीं कक्षा में रामपुर के एक दिव्यांग विद्यालय में प्रवेश लिया, और वहीं से इन्हें क्रिकेट खेलने का शौक लग गया..और तब से ही वह पढ़ाई के साथ साथ निरंतर क्रिकेट खेलते रहे, वहां से बारहवीं की परीक्षा पास करने के बाद चित्रकूट में B.B.A, M.B.A. किया लेकिन क्रिकेट का खेल बरकरार रखा, उसके बाद राकेश ने कुछ प्रयासों के बाद गुडगांव में प्राइवेट कंपनी में नौकरी शुरू की.. लेकिन क्रिकेट का खेल जारी रखा...उस समय इन्हें उत्तर प्रदेश के साथ साथ हरियाणा प्रदेश की क्रिकेट टीम की कप्तानी करने का भी अवसर प्राप्त हुआ , लेकिन राकेश कुमार का एक दुर्भाग्य रहा कि इन्हें खेलने के लिए.. नौकरी में समय नहीं मिल पाता था इस कारण इन्हें वो नौकरी रास नहीं आई और इन्होंने...खेल के लिए अपनी नौकरी त्याग दी, उसके बाद इन्होंने अपने ही जनपद में क्रिकेट अकादमी की शुरूआत करने का फैसला लिया, पहले रजपुरा और फिर अपने ही गांव के पास अपने खेत में क्रिकेट के मैदान से इसकी शुरुआत की, आज यह अपने गांव में क्रिकेट की एक अकादमी के साथ साथ बच्चों को पढ़ाने का भी काम कर रहे हैं और साथ में भारत की दिव्यांग क्रिकेट टीम में निरंतर प्रतिभाग कर रहे हैं जिसकी बदौलत इन्हें भारत की दिव्यांग क्रिकेट टीम का कप्तान चुना गया है, इससे इनके साथियों गांव और आसपास के क्षेत्र में खुशी का माहौल है। हम सभी इनके उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं ।