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यदि आपका पार्टनर सिर्फ अपना ध्यान रखता है और आपको पूरी तरह नजरअंदाज करता है, तो समझ जाइए, साथी के दिल में आपकी जगह कम होने लगी है। ये आप दोनों के बची किसी तीसरे की मौजूदगी का संकेत भी हो सकता है। #सावधान! रसोई में रखी ये 5 चीजें, बन सकती है जहर!
यदि आपका पार्टनर सिर्फ अपना ध्यान रखता है और आपको पूरी तरह नजरअंदाज करता है, तो समझ जाइए, साथी के दिल में आपकी जगह कम होने लगी है। ये आप दोनों के बची किसी तीसरे की मौजूदगी का संकेत भी हो सकता है। #सावधान! रसोई में रखी ये पाँच चीजें, बन सकती है जहर!
छत्तीसगढ़ का स्कूल शिक्षा विभाग एक बार फिर सुर्खियों में है. मामला मुंगेली जिले का है. यहां बोर्ड परीक्षा की आंसर शीट बिना सुरक्षा व्यवस्था के ही टू व्हीलर में थाने से जिला मुख्यालय ले जाया जा रहा है. थाने के प्रभारी के अनुसार परीक्षा के दौरान सुरक्षा की मांग की गई थी. लेकिन बोर्ड परीक्षा की आंसर शीट ले जाने के दौरान किसी तरह की सुरक्षा की मांग नहीं की गई है. इस वजह से उन्हें कोई सुरक्षा नहीं दी गई. मिली जानकारी के अनुसार लोरमी ब्लॉक में 10वीं और 12वीं बोर्ड की परीक्षा ऑफलाइन हुई. इस दौरान सभी छात्र-छात्राओं की आंसर शीट लोरमी थाने में सुरक्षित जमा करवाई गई. सोमवार को 10वीं बोर्ड की परीक्षा खत्म होने के बाद आंसरशीट को थाने से ले जाया गया. शिक्षा विभाग के जवाबदार कर्मचारी अपनी बाइक और स्कूटी से ही थाने पहुंचे और बोर्ड परीक्षा की आंसरशीट अपनी टू व्हीलर में रखकर ले जाने लगे. ETV भारत से शिक्षा विभाग के कर्मचारियों ने बताया कि आंसर शीट मुंगेली के बी आर साव स्कूल में जमा करने का आदेश जारी किया गया है. इस दौरान बड़ी लापरवाही ये दिखी कि बिना सुरक्षा व्यवस्था के दसवीं और बारहवीं बोर्ड परीक्षा के उत्तर पुस्तिकाओं को ले जाया गया। पूरे मामले में लोरमी थाने में पदस्थ प्रभारी एन बी सिंह ने मीडिया को बताया कि 'परीक्षा के बाद 10वीं और 12वीं बोर्ड की आंसरशीट थाने में सुरक्षित जमा था. जिसे शिक्षा विभाग के कर्मचारी अपने साथ ले जा रहे हैं. परीक्षा के समय पुलिस बल की मांग की गई थी. उस दौरान सभी परीक्षा केंद्रों में पुलिस बल तैनात किया गया था. लेकिन आंसर शीट जमा करने के लिये किसी तरह की सुरक्षा की मांग नहीं की गई है. जिसके चलते उन्हें सुरक्षा नहीं दी गई'। जिले के शिक्षा अधिकारी सतीश पांडेय ने सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में नहीं रखते हुए उत्तर पुस्तिका जमा करने के सवाल पर जांच के बाद कार्रवाई की बात कही है. देखना होगा कब तक जांच पूरी होती है।
छत्तीसगढ़ का स्कूल शिक्षा विभाग एक बार फिर सुर्खियों में है. मामला मुंगेली जिले का है. यहां बोर्ड परीक्षा की आंसर शीट बिना सुरक्षा व्यवस्था के ही टू व्हीलर में थाने से जिला मुख्यालय ले जाया जा रहा है. थाने के प्रभारी के अनुसार परीक्षा के दौरान सुरक्षा की मांग की गई थी. लेकिन बोर्ड परीक्षा की आंसर शीट ले जाने के दौरान किसी तरह की सुरक्षा की मांग नहीं की गई है. इस वजह से उन्हें कोई सुरक्षा नहीं दी गई. मिली जानकारी के अनुसार लोरमी ब्लॉक में दसवीं और बारहवीं बोर्ड की परीक्षा ऑफलाइन हुई. इस दौरान सभी छात्र-छात्राओं की आंसर शीट लोरमी थाने में सुरक्षित जमा करवाई गई. सोमवार को दसवीं बोर्ड की परीक्षा खत्म होने के बाद आंसरशीट को थाने से ले जाया गया. शिक्षा विभाग के जवाबदार कर्मचारी अपनी बाइक और स्कूटी से ही थाने पहुंचे और बोर्ड परीक्षा की आंसरशीट अपनी टू व्हीलर में रखकर ले जाने लगे. ETV भारत से शिक्षा विभाग के कर्मचारियों ने बताया कि आंसर शीट मुंगेली के बी आर साव स्कूल में जमा करने का आदेश जारी किया गया है. इस दौरान बड़ी लापरवाही ये दिखी कि बिना सुरक्षा व्यवस्था के दसवीं और बारहवीं बोर्ड परीक्षा के उत्तर पुस्तिकाओं को ले जाया गया। पूरे मामले में लोरमी थाने में पदस्थ प्रभारी एन बी सिंह ने मीडिया को बताया कि 'परीक्षा के बाद दसवीं और बारहवीं बोर्ड की आंसरशीट थाने में सुरक्षित जमा था. जिसे शिक्षा विभाग के कर्मचारी अपने साथ ले जा रहे हैं. परीक्षा के समय पुलिस बल की मांग की गई थी. उस दौरान सभी परीक्षा केंद्रों में पुलिस बल तैनात किया गया था. लेकिन आंसर शीट जमा करने के लिये किसी तरह की सुरक्षा की मांग नहीं की गई है. जिसके चलते उन्हें सुरक्षा नहीं दी गई'। जिले के शिक्षा अधिकारी सतीश पांडेय ने सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में नहीं रखते हुए उत्तर पुस्तिका जमा करने के सवाल पर जांच के बाद कार्रवाई की बात कही है. देखना होगा कब तक जांच पूरी होती है।
२०१७ सुकमा आक्रमण भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) (सी.पी.आई) द्वारा किया गया आकस्मिक आक्रमण था, जो कि नक्सलवादी-माओवादी उग्रवाद के कारण भारतीय अर्धसैनिक बलों पर २४ अप्रैल २०१७ को हुआ था। बगल के ज़िले दंतेवाड़ा में २०१० में इस प्रकार के समान आक्रमण के पश्चात् यह सबसे बड़ा आक्रमण था। छत्तीसगढ़, भारत के सुकमा जिले में बुरकापाल और चिन्तागुफा के मध्य भूभाग में ये घात लगाकर आक्रमण हुआ। ३०० सदस्यों वाले एक माओवादियों के समूह ने केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के ९९-सदस्य दल पर आक्रमण किया तीन माओवादी और २५ सीआरपीएफ कर्मी उस गोलीबारी में मारे गये थे। . 0 संबंधों।
दो हज़ार सत्रह सुकमा आक्रमण भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा किया गया आकस्मिक आक्रमण था, जो कि नक्सलवादी-माओवादी उग्रवाद के कारण भारतीय अर्धसैनिक बलों पर चौबीस अप्रैल दो हज़ार सत्रह को हुआ था। बगल के ज़िले दंतेवाड़ा में दो हज़ार दस में इस प्रकार के समान आक्रमण के पश्चात् यह सबसे बड़ा आक्रमण था। छत्तीसगढ़, भारत के सुकमा जिले में बुरकापाल और चिन्तागुफा के मध्य भूभाग में ये घात लगाकर आक्रमण हुआ। तीन सौ सदस्यों वाले एक माओवादियों के समूह ने केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के निन्यानवे-सदस्य दल पर आक्रमण किया तीन माओवादी और पच्चीस सीआरपीएफ कर्मी उस गोलीबारी में मारे गये थे। . शून्य संबंधों।
- 20 min ago ये क्या, 3. 3 लाख की ओवरसाइज़्ड हुडी पहनकर मलाइका अरोड़ा ने दिखाया अपना जलवा, फैंस की बोलती हुई बंद! - 1 hr ago तो क्या बादशाह ने उड़ाया 'आदिपुरुष' का मजाक? कंटेस्टेंट को कहा- '600 करोड़ के बिना ही. . . ' Don't Miss! - Lifestyle हाथों से मेहंदी का रंग करना है हल्का, ये टिप्स आएंगे काम, Salman Khan Eid Box Office: बैक टू बैक ब्लॉकबस्टर फिल्में, किसी का भाई किसी की जान से तोड़ पाएंगे रिकॉर्ड! Salman Khan Eid Box Office: सलमान खान की फिल्मों का ईद से हमेशा गहरा कनेक्शन रहा है। ईद फिल्म इंडस्ट्री के लिए सालों साल काफी खास रहा है। फैंस को खासकर इस मौके पर सलमान खान की फिल्म का जरूर इंतजार होता है। जहां पिछले साल सलमान फैंस के सामने नहीं आ पाए थे, वहीं इस साल वो अपनी फिल्म "किसी का भाई किसी की जान" के साथ बॉक्स ऑफिस पर धमाका करने को तैयार हैं। साल 2009 में वाटेंड के बाद से सलमान खान ने लगभग हर साल ईद पर फिल्म रिलीज की है और वह सफल भी रही हैं। हालांकि साल 2020 और 2021 कोविड लॉकडाउन की वजह से खास नहीं रहा। 2021 में आई सलमान की फिल्म राधे कुछ कमाल नहीं कर पाई थी। पिछले 10 सालों में सिर्फ दो साल ऐसा रहा है, जब ईद पर सलमान की फिल्म रिलीज नहीं हुई है। साल 2013 में वह जगह ली थी शाहरुख खान ने। जब उन्होंने ईद पर फैंस को अपनी सुपरहिट फिल्म 'चेन्नई एक्सप्रेस' दी थी। वहीं, 2022 में आई थी रनवे 34 और टाइगर श्रॉफ की हीरोपंती 2. . दोनों ही फिल्में फ्लॉप रही थीं। 2023 में अब सलमान खान के फैंस एक बार फिर सिनेमाघरों में उनका स्वागत करने के लिए तैयार हैं। "किसी का भाई किसी की जान" के गाने रिलीज हो चुके हैं. . जबकि ट्रेलर 10 अप्रैल को आने वाला है। इस फिल्म से काफी उम्मीद है कि यह ईद पर धमाका करेगी। इस फिल्म में सलमान खान के साथ पूजा हेगड़े, वेंकटेश जैसे कलाकार हैं। 2010,
- बीस मिनट ago ये क्या, तीन. तीन लाख की ओवरसाइज़्ड हुडी पहनकर मलाइका अरोड़ा ने दिखाया अपना जलवा, फैंस की बोलती हुई बंद! - एक hr ago तो क्या बादशाह ने उड़ाया 'आदिपुरुष' का मजाक? कंटेस्टेंट को कहा- 'छः सौ करोड़ के बिना ही. . . ' Don't Miss! - Lifestyle हाथों से मेहंदी का रंग करना है हल्का, ये टिप्स आएंगे काम, Salman Khan Eid Box Office: बैक टू बैक ब्लॉकबस्टर फिल्में, किसी का भाई किसी की जान से तोड़ पाएंगे रिकॉर्ड! Salman Khan Eid Box Office: सलमान खान की फिल्मों का ईद से हमेशा गहरा कनेक्शन रहा है। ईद फिल्म इंडस्ट्री के लिए सालों साल काफी खास रहा है। फैंस को खासकर इस मौके पर सलमान खान की फिल्म का जरूर इंतजार होता है। जहां पिछले साल सलमान फैंस के सामने नहीं आ पाए थे, वहीं इस साल वो अपनी फिल्म "किसी का भाई किसी की जान" के साथ बॉक्स ऑफिस पर धमाका करने को तैयार हैं। साल दो हज़ार नौ में वाटेंड के बाद से सलमान खान ने लगभग हर साल ईद पर फिल्म रिलीज की है और वह सफल भी रही हैं। हालांकि साल दो हज़ार बीस और दो हज़ार इक्कीस कोविड लॉकडाउन की वजह से खास नहीं रहा। दो हज़ार इक्कीस में आई सलमान की फिल्म राधे कुछ कमाल नहीं कर पाई थी। पिछले दस सालों में सिर्फ दो साल ऐसा रहा है, जब ईद पर सलमान की फिल्म रिलीज नहीं हुई है। साल दो हज़ार तेरह में वह जगह ली थी शाहरुख खान ने। जब उन्होंने ईद पर फैंस को अपनी सुपरहिट फिल्म 'चेन्नई एक्सप्रेस' दी थी। वहीं, दो हज़ार बाईस में आई थी रनवे चौंतीस और टाइगर श्रॉफ की हीरोपंती दो. . दोनों ही फिल्में फ्लॉप रही थीं। दो हज़ार तेईस में अब सलमान खान के फैंस एक बार फिर सिनेमाघरों में उनका स्वागत करने के लिए तैयार हैं। "किसी का भाई किसी की जान" के गाने रिलीज हो चुके हैं. . जबकि ट्रेलर दस अप्रैल को आने वाला है। इस फिल्म से काफी उम्मीद है कि यह ईद पर धमाका करेगी। इस फिल्म में सलमान खान के साथ पूजा हेगड़े, वेंकटेश जैसे कलाकार हैं। दो हज़ार दस,
युवाओं के बीच टैटू बनवाने का क्रेज काफी तेजी से बढ़ा है. लेकिन कई बार फैशन के कारण परेशानियां भी सामने आती हैं. एक ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है, दर्जनों युवा एचआईवी पॉजिटिव मिले हैं और इन सभी ने कहीं ना कहीं से टैटू बनवाया है. स्वास्थ्य विभाग को आशंका है कि टैटू बनवाने में यूज की गई सुई के कारण यह संक्रमण फैला है. फिलहाल यह मामले सामने आने से हड़कंप मचा हुआ है. जानकारी के मुताबिक, वाराणसी में करीब दो दर्जन युवा एचआईवी संक्रमित मिले हैं. संक्रमण मिलने के बाद जब स्वास्थ्य विभाग की ओर से काउंसलिंग और जांच पड़ताल की गई तो सबके होश उड़ गए. सभी युवाओं में एचआईवी संक्रमण के मूल चार बड़े कारण नहीं मिले. जबकि सभी ने कहीं न कहीं अपने शरीर में टैटू बनवाए थे. ऐसे में स्वास्थ्य विभाग को नब्बे फीसदी तक यही आशंका है कि ये सभी मरीज संक्रमित सुई से टैटू बनवाने के कारण एचआईवी की चपेट में आए हैं. सभी का इलाज पंडित दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल के एंटी रेट्रो वायरल ट्रीटमेंट सेंटर की ओर से शुरू हो गया है. अस्पताल की एंटी रेट्रो वायरल ट्रीटमेंट सेंटर की डॉ. प्रीति अग्रवाल ने कुल मरीजों की संख्या का आंकड़ा तो नहीं बताया, लेकिन उनके अनुसार, ये सभी युवा हैं और सभी ने कहीं न कहीं से अपने शरीर में टैटू बनवाया है. ऐसे में काउंसलिंग के बाद 90 प्रतिशत तक यही आशंका है कि इनको संक्रमण संक्रमित सुई से टैटू बनवाने के कारण हुआ है. डॉ. प्रीति अग्रवाल के मुताबिक सावधानीपूर्वक जांच और परामर्श के बाद पता चला कि कई एचआईवी रोगियों ने टैटू बनवाए थे, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी. मामले में आगे की जांच जारी है. बीमार पड़ने वाले 14 लोगों में बड़ागांव का 20 वर्षीय व्यक्ति और नगमा की 25 वर्षीय महिला शामिल हैं. वायरल टाइफाइड, मलेरिया सहित कई परीक्षण किए गए लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. जब बुखार कम नहीं हुआ, तो एचआईवी परीक्षण किया गया जिसमें सभी को एचआईवी पॉजिटिव पाया गया है. इसे भी पढ़ें - HOT PHOTOS: सलमान के भाई की GF को Red Bikini में देख फैंस के छूटे पसीने, बोले- कोई AC चला दो यार...यहां बनवाया है टैटू. . एंटी रेट्रो वायरल ट्रीटमेंट सेंटर की काउंसलर सुषमा तिवारी ने बताया कि टैटू बनाने वाली सुई काफी महंगी होती है. इसलिए मेलों आदि में टैटू बनाने वाले अधिकतर खर्चा बचाने के लिए एक ही सुई से कई लोगों का टैटू बनाते हैं. ऐसे में अगर किसी एक व्यक्ति को एचआईवी संक्रमण है तो बाकी सभी दूसरे लोगों को उसी सुई से संक्रमण पहुंच जाता है. ऐसे में युवाओं से अपील है कि टैटू बनवाते वक्त सुई और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें.
युवाओं के बीच टैटू बनवाने का क्रेज काफी तेजी से बढ़ा है. लेकिन कई बार फैशन के कारण परेशानियां भी सामने आती हैं. एक ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है, दर्जनों युवा एचआईवी पॉजिटिव मिले हैं और इन सभी ने कहीं ना कहीं से टैटू बनवाया है. स्वास्थ्य विभाग को आशंका है कि टैटू बनवाने में यूज की गई सुई के कारण यह संक्रमण फैला है. फिलहाल यह मामले सामने आने से हड़कंप मचा हुआ है. जानकारी के मुताबिक, वाराणसी में करीब दो दर्जन युवा एचआईवी संक्रमित मिले हैं. संक्रमण मिलने के बाद जब स्वास्थ्य विभाग की ओर से काउंसलिंग और जांच पड़ताल की गई तो सबके होश उड़ गए. सभी युवाओं में एचआईवी संक्रमण के मूल चार बड़े कारण नहीं मिले. जबकि सभी ने कहीं न कहीं अपने शरीर में टैटू बनवाए थे. ऐसे में स्वास्थ्य विभाग को नब्बे फीसदी तक यही आशंका है कि ये सभी मरीज संक्रमित सुई से टैटू बनवाने के कारण एचआईवी की चपेट में आए हैं. सभी का इलाज पंडित दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल के एंटी रेट्रो वायरल ट्रीटमेंट सेंटर की ओर से शुरू हो गया है. अस्पताल की एंटी रेट्रो वायरल ट्रीटमेंट सेंटर की डॉ. प्रीति अग्रवाल ने कुल मरीजों की संख्या का आंकड़ा तो नहीं बताया, लेकिन उनके अनुसार, ये सभी युवा हैं और सभी ने कहीं न कहीं से अपने शरीर में टैटू बनवाया है. ऐसे में काउंसलिंग के बाद नब्बे प्रतिशत तक यही आशंका है कि इनको संक्रमण संक्रमित सुई से टैटू बनवाने के कारण हुआ है. डॉ. प्रीति अग्रवाल के मुताबिक सावधानीपूर्वक जांच और परामर्श के बाद पता चला कि कई एचआईवी रोगियों ने टैटू बनवाए थे, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी. मामले में आगे की जांच जारी है. बीमार पड़ने वाले चौदह लोगों में बड़ागांव का बीस वर्षीय व्यक्ति और नगमा की पच्चीस वर्षीय महिला शामिल हैं. वायरल टाइफाइड, मलेरिया सहित कई परीक्षण किए गए लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. जब बुखार कम नहीं हुआ, तो एचआईवी परीक्षण किया गया जिसमें सभी को एचआईवी पॉजिटिव पाया गया है. इसे भी पढ़ें - HOT PHOTOS: सलमान के भाई की GF को Red Bikini में देख फैंस के छूटे पसीने, बोले- कोई AC चला दो यार...यहां बनवाया है टैटू. . एंटी रेट्रो वायरल ट्रीटमेंट सेंटर की काउंसलर सुषमा तिवारी ने बताया कि टैटू बनाने वाली सुई काफी महंगी होती है. इसलिए मेलों आदि में टैटू बनाने वाले अधिकतर खर्चा बचाने के लिए एक ही सुई से कई लोगों का टैटू बनाते हैं. ऐसे में अगर किसी एक व्यक्ति को एचआईवी संक्रमण है तो बाकी सभी दूसरे लोगों को उसी सुई से संक्रमण पहुंच जाता है. ऐसे में युवाओं से अपील है कि टैटू बनवाते वक्त सुई और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें.
ज्ञान की ज्योति जगा बतलावें, धर्मों में जिन धर्म है खास, आज मातृभूमि भारत पर ए दुख का दिन आया है। धन्य । पव पर्युषण के लगते ही तपस्या की ली तुमने धार, सुख दुःख की पर्वाह न करके छोड़ दिया तुमने आहार, अखंड जाप करवाया आपने भजके महामंत्र नवकार, रात दिनों तक जगे बराबर होकर तन मन से न्यौछार, बीत गए नो दिन पर फिर भी बीर नहीं, घबराया है। धन् दिन बाद आपनेपूर किया था सुखदाई, सेकड़ों ही · नर-नार 'इक धन्य २ देते आई, साठव सुदी ७ के दिन और दो हजार साल भाई, बहुत दिनों के बाद आज ए घर २ पे खुशियां छांडे, पुरोत्सव का देख रंग ए 'जीतमल' गुण गाया है। धन x . ( तर्ज - लावण); लावर्णी ) मुनि अभयसिंह जी महाराज, चाल ब्रह्मचारी, हुए समता मार मुनि, पंच महाव्रत धारी ॥ टेर । था नगर तिहारी वास आपका प्यारे, थे फोजमल जी हिंगड़ तात जिणारे, ए इचरज कंवर माता के वीर सितारे, धन्य २ हो ज्यांगे मात धन्य उजियारे, किया उज्जवल जग में नाम, मातारी ।। । i
ज्ञान की ज्योति जगा बतलावें, धर्मों में जिन धर्म है खास, आज मातृभूमि भारत पर ए दुख का दिन आया है। धन्य । पव पर्युषण के लगते ही तपस्या की ली तुमने धार, सुख दुःख की पर्वाह न करके छोड़ दिया तुमने आहार, अखंड जाप करवाया आपने भजके महामंत्र नवकार, रात दिनों तक जगे बराबर होकर तन मन से न्यौछार, बीत गए नो दिन पर फिर भी बीर नहीं, घबराया है। धन् दिन बाद आपनेपूर किया था सुखदाई, सेकड़ों ही · नर-नार 'इक धन्य दो देते आई, साठव सुदी सात के दिन और दो हजार साल भाई, बहुत दिनों के बाद आज ए घर दो पे खुशियां छांडे, पुरोत्सव का देख रंग ए 'जीतमल' गुण गाया है। धन x . ; लावर्णी ) मुनि अभयसिंह जी महाराज, चाल ब्रह्मचारी, हुए समता मार मुनि, पंच महाव्रत धारी ॥ टेर । था नगर तिहारी वास आपका प्यारे, थे फोजमल जी हिंगड़ तात जिणारे, ए इचरज कंवर माता के वीर सितारे, धन्य दो हो ज्यांगे मात धन्य उजियारे, किया उज्जवल जग में नाम, मातारी ।। । i
गेमिंग के शौकीनों के लिए बहुत ही बुरी खबर सुनने के लिए मिली है। पबजी (PUBG) के भारत में बैन होने के उपरांत अब उसका नया वर्जन बैटलग्राउंड मोबाइल इंडिया (BGMI) भी इंडिया में गूगल प्ले स्टोर (Google Play Store) और एपल ऐप स्टोर (Apple App Store) से हटाया जा चुका है। गुरुवार (28 जुलाई) को बैटलग्राउंड मोबाइल इंडिया (BGMI) Google Play Store और Apple App Store से रहस्यमय तरीके से गायब हो चुका है। जिसके उपरांत कुछ ही वक़्त में यह केस ट्विटर पर भी ट्रेंड करने लग गया है। PUBG मोबाइल के इंडिया में बैन किए जाने के बाद BGMI को बीते वर्ष ही देश में पेश किया गया था। खबरों का कहना है कि तो सरकार के एक आदेश के बाद Krafton के इस गेम को दोनों प्लेटफॉर्म्स ने रिमूव कर चुके है। BGMI भारत में बैन? : बता दें कि फिलहाल एंड्रॉयड (Android) और आईओएस (IOS) यूजर्स अपने स्मार्टफोन पर BGMI गेम डाउनलोड नहीं कर पाएंगे। गूगल प्ले स्टोर और Apple ऐप स्टोर से एक साथ इस ऐप के गायब होने से कई प्रश्न भी उठा दिए है। ऐसे में लोग सोच रहे हैं कि क्या Krafton गेम में कोई बड़ा अपडेट लेकर आ चुकी है या फिर इस गेम को भी पबजी मोबाइल की तरह इंडिया से बैन कर किया जा चुका है। यह भी कहा जा रहा है कि BGMI ने गूगल और ऐप्पल की किसी पॉलिसी का उल्लंघन भी कर दिया गया है, इसके चलते इसे प्ले स्टोर और App स्टोर से हटाया गया हो। हालांकि, इसकी संभावना कम ही है क्योंकि गेमिंग कंपनी ऐसी कोई गलती नहीं करने वाले है, जोकि दोनों ही प्लेटफॉर्म्स की पॉलिसी को उल्लघंन करती हो। क्या है Krafton का कहना? : इस केस में Krafton के स्पोकपर्सन ने भी बयान भी दे डाला है। कंपनी की ओर से यह बोला गया है कि BGMI को गूगल प्ले स्टोर(Play Store) और ऐपल ऐप स्टोर (App Store) से भारत में रिमूव कर दिया गया है और जल्द ही इस दोनों प्लेटफॉर्म्स से इसको लेकर कोई जवाब मिलने वाला है पर आगे कोई जानकारी साझा की जाएगी। वहीं गूगल की ओर से कहा गया कि गेम रिमूव करने से पहले Krafton को सूचना दी गई थी। अब बिजली जाने पर 4 घंटे चलेगा बल्ब, जानिए कैसे. . . ?
गेमिंग के शौकीनों के लिए बहुत ही बुरी खबर सुनने के लिए मिली है। पबजी के भारत में बैन होने के उपरांत अब उसका नया वर्जन बैटलग्राउंड मोबाइल इंडिया भी इंडिया में गूगल प्ले स्टोर और एपल ऐप स्टोर से हटाया जा चुका है। गुरुवार को बैटलग्राउंड मोबाइल इंडिया Google Play Store और Apple App Store से रहस्यमय तरीके से गायब हो चुका है। जिसके उपरांत कुछ ही वक़्त में यह केस ट्विटर पर भी ट्रेंड करने लग गया है। PUBG मोबाइल के इंडिया में बैन किए जाने के बाद BGMI को बीते वर्ष ही देश में पेश किया गया था। खबरों का कहना है कि तो सरकार के एक आदेश के बाद Krafton के इस गेम को दोनों प्लेटफॉर्म्स ने रिमूव कर चुके है। BGMI भारत में बैन? : बता दें कि फिलहाल एंड्रॉयड और आईओएस यूजर्स अपने स्मार्टफोन पर BGMI गेम डाउनलोड नहीं कर पाएंगे। गूगल प्ले स्टोर और Apple ऐप स्टोर से एक साथ इस ऐप के गायब होने से कई प्रश्न भी उठा दिए है। ऐसे में लोग सोच रहे हैं कि क्या Krafton गेम में कोई बड़ा अपडेट लेकर आ चुकी है या फिर इस गेम को भी पबजी मोबाइल की तरह इंडिया से बैन कर किया जा चुका है। यह भी कहा जा रहा है कि BGMI ने गूगल और ऐप्पल की किसी पॉलिसी का उल्लंघन भी कर दिया गया है, इसके चलते इसे प्ले स्टोर और App स्टोर से हटाया गया हो। हालांकि, इसकी संभावना कम ही है क्योंकि गेमिंग कंपनी ऐसी कोई गलती नहीं करने वाले है, जोकि दोनों ही प्लेटफॉर्म्स की पॉलिसी को उल्लघंन करती हो। क्या है Krafton का कहना? : इस केस में Krafton के स्पोकपर्सन ने भी बयान भी दे डाला है। कंपनी की ओर से यह बोला गया है कि BGMI को गूगल प्ले स्टोर और ऐपल ऐप स्टोर से भारत में रिमूव कर दिया गया है और जल्द ही इस दोनों प्लेटफॉर्म्स से इसको लेकर कोई जवाब मिलने वाला है पर आगे कोई जानकारी साझा की जाएगी। वहीं गूगल की ओर से कहा गया कि गेम रिमूव करने से पहले Krafton को सूचना दी गई थी। अब बिजली जाने पर चार घंटाटे चलेगा बल्ब, जानिए कैसे. . . ?
प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में मानसून की पहली बारिश ने ही लोगों की जान सांसत में डाल दी है। पिथौरागढ़ जिले की मुनस्यारी तहसील समेत कई क्षेत्रों में व्यापक नुकसान की खबर है। जिले में कई जगह सड़कें और पुल बह गए हैं और मकान ध्वस्त हुए हैं। मूसलाधार बारिश की वजह से दार्जिलिंग में आज जन जीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया । बारिश की वजह से कई स्थानों पर भूस्खलन हुआ है। दिल्ली के बाद नोएडा में लगा लंबा जाम। दरअसल सोमवार शाम नोएडा के कई इलाकों में तेज मूसलाधार बारिश हुई जिससे जगह-जगह जल भराव हो गया और ट्रैफिक जाम लग गया। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वाह में मूसलाधार बारिश के कारण आई बाढ़ में 8 सुरक्षाकर्मियों सहित कम से कम 33 लोगों की मौत हो गई। श्रीलंका में मूसलाधार बारिश और बाढ़ के कारण दो लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं जबकि आठ लोगों की मौत हो गयी है।
प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में मानसून की पहली बारिश ने ही लोगों की जान सांसत में डाल दी है। पिथौरागढ़ जिले की मुनस्यारी तहसील समेत कई क्षेत्रों में व्यापक नुकसान की खबर है। जिले में कई जगह सड़कें और पुल बह गए हैं और मकान ध्वस्त हुए हैं। मूसलाधार बारिश की वजह से दार्जिलिंग में आज जन जीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया । बारिश की वजह से कई स्थानों पर भूस्खलन हुआ है। दिल्ली के बाद नोएडा में लगा लंबा जाम। दरअसल सोमवार शाम नोएडा के कई इलाकों में तेज मूसलाधार बारिश हुई जिससे जगह-जगह जल भराव हो गया और ट्रैफिक जाम लग गया। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वाह में मूसलाधार बारिश के कारण आई बाढ़ में आठ सुरक्षाकर्मियों सहित कम से कम तैंतीस लोगों की मौत हो गई। श्रीलंका में मूसलाधार बारिश और बाढ़ के कारण दो लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं जबकि आठ लोगों की मौत हो गयी है।
-आम आदमी पार्टी की सरकार बनने पर दिल्ली और पंजाब की तरह गुजरात की जनता को भी देंगे 24 घंटे मुफ्त बिजली नई दिल्ली/गुजरात (ईएमएस)। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने आज गुजरात की जनता को दिल्ली और पंजाब की तरह 24 घंटे फ्री बिजली देने की पहली गारंटी दी। उन्होंने घोषणा की कि "आप" की सरकार बनने के तीन महीने के अंदर हर परिवार को हर महीने 300 यूनिट बिजली मुफ़्त देंगे और 31 दिसंबर 2021 तक के पुराने बकाया सभी घरेलु बिल माफ़ करेंगे। गुजरात में दो महीने का बिजली बिल आता है। 300 यूनिट प्रति माह के हिसाब से दो महीने के बिल में 600 यूनिट फ्री मिलेगा। पहले मैंने दिल्ली में करके दिखाया, फिर पंजाब में करके दिखाया और अब गुजरात के अंदर भी करके दिखाएंगे। "आप" के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जनता को फ्री रेवड़ी देने से श्रीलंका जैसे हालात नहीं होते, अपने दोस्तों और मंत्रियों को देने से होते हैं। जनता को फ्री रेवड़ी भगवान का प्रसाद है और दोस्तों को फ्री रेवड़ी पाप है। श्रीलंका वाला अपने दोस्तों को फ्री रेवड़ी देता था। अगर जनता को देता तो, जनता उसके घर में घुसकर उसे ना भगाती। उन्होंने कहा कि हम सारी गारंटी पूरी करेंगे। अगर गारंटी पूरी न हो तो अगली बार हमें वोट मत देना। मुझे पूरा यकीन है कि दिल्ली और पंजाब की तरह गुजरात में भी भारी बहुमत से आम आदमी पार्टी की सरकार बनेगी। गुजरात में एक ही पार्टी को शासन करते-करते 27 साल हो गए, अब उनके पास कोई आइडिया नहीं बचा है, गुजरात अब बदलाव चाहता है- अरविंद केजरीवाल आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आज गुजरात को बिजली के मुद्दे पर पहली गारंटी की घोषणा की। सूरत में प्रेस वार्ता कर "आप" के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पिछली बार जब गुजरात आ रहा था, तब मेरे बगल की सीट पर गुजरात का रहने वाला एक व्यक्ति बैठा था। उसने मेरा हाथ कस कर पकड़ लिया और धीरे से बोला कि गुजरात को बचा लीजिए। मैंने उससे कहा कि मैं तो छोटा आदमी हूं, मै कैसे गुजरात को बचाउंगा, आप लोग गुजरात को बचाएंगे। मैंने कहा कि आप सब लोग आवाज क्यों नहीं उठाते हैं? इस पर उसने कहा कि इन लोगों ने सबको डरा रखा है। सबको परेशान करते हैं। हमारे पास कोई विकल्प नहीं है। हम जाएं तो किस पार्टी के पास जाएं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में जितनी बार मैं गुजरात आया हूं, गुजरात के लोगों से बहुत ज्यादा प्यार और विश्वास मिला है। इसके लिए मैं गुजरात के लोगों का बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं। गुजरात में एक ही पार्टी को शासन करते-करते 27 साल हो गए। 27 साल शासन करने के बाद किसी के भी मन में अहंकार आ जाता है। 27 साल के बाद तो उनके पास कोई आइडिया भी नहीं बचते हैं कि अब और क्या करना है। उनको जो करना था, वो कर दिया। अब गुजरात बदलाव चाहता है। हमने दिल्ली में बिजली फ्री कर दी है और अब पंजाब में भी बिजली फ्री कर दी है, गुजरात के लोग भी बिजली फ्री चाहते हैं- अरविंद केजरीवाल "आप" के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पिछले कई महीनों से गुजरात के अंदर आना-जाना हुआ और लोगों से बातचीत हुई। लोगों की समस्याओं के बारे में जानने का मौका मिला। इस समय गुजरात के लोगों के सामने सबसे बड़ी समस्या महंगाई है। हर चीज के दाम बढ़ते जा रहे हैं। लेकिन आमदनी बढ़ती नहीं है। लोगों की तनख्वाह नहीं बढ़ती है। लोगों के घर का खर्चा चल नहीं रहा है। लोगों के लिए घर चलाना मुश्किल होता जा रहा है। इस महंगाई में भी सबसे ज्यादा मुश्किल बिजली का रेट होता जा रहा है। गुजरात में बिजली इतनी महंगी होती जा रही है। जब मैंने लोगों से पूछा, तो लोगों ने कहा कि केजरीवाल जी सुना है कि आपने दिल्ली में बिजली फ्री कर दी और एक जुलाई से पंजाब में भी बिजली फ्री हो गई है। अभी तो 10 मार्च को पंजाब चुनाव के नतीजे आए थे और 16 मार्च को सरकार बनी थी। तीन महीने के अंदर पंजाब में भी बिजली फ्री हो गई है। गुजरात के लोग चाहते हैं कि गुजरात में भी बिजली फ्री होनी चाहिए। इसलिए हम आज पहली गारंटी बिजली के मुद्दे पर लेकर आए हैं। यह गारंटी इसलिए, क्योंकि कई पार्टियां ऐसी हैं, जो चुनाव के पहले आकर कहती हैं कि हमारा घोषणा पत्र है। कुछ लोग कहते हैं कि हमारा संकल्प पत्र है। लेकिन चुनाव के बाद वो कुछ करते नहीं है। अपने घोषणा पत्र या संकल्प पत्र को उठाकर कूड़े के ढेर में फेंक देते हैं। उनसे पूछो कि आपने तो कहा था कि 15-15 लाख रुपए देंगे, तो कहते हैं कि वो तो चुनावी जुमला था। लेकिन हम चुनावी जुमला नहीं करते। हमें राजनीति करनी नहीं आती है। हम जो कहते हैं, वो करते हैं। हमारे जो अंदर है, वही बाहर है। हम सच्चे और शरीफ लोग हैं। आम आदमी पार्टी सच्चे, शरीफ और ईमानदार लोगों की पार्टी है। इसलिए हम गारंटी दे रहे हैं। जैसे बाजार में माल की गारंटी मिलती है कि अगर माल ठीक न निकले, तो पैसा वापस हो जाता है। वैसे ही अगर हम काम नहीं करेंगे, तो अगली बार हमें वोट मत देना। हमारी जो भी गारंटी है, वो सारी गारंटी पूरी करेंगे। अगर गारंटी पूरी न हो तो अगली बार हमें वोट मत देना। -अगर फ्री बिजली दिल्ली में मिल सकती है, पंजाब में मिल सकती है, तो गुजरात में भी मिल सकती है? - अरविंद केजरीवाल "आप" के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि गुजरात के लोगों से हमारी पहली गारंटी बिजली की है। बिजली की गारंटी में तीन चीजें शामिल हैं। यह हम हवा में बात नहीं कर रहे हैं। हम जो दिल्ली और पंजाब में करके आए हैं, वही गुजरात के अंदर करेंगे। हमने करके दिखाया है, हमें करना आता है और हमारी करने की नीयत है। हमारी पहली गारंटी है कि गुजरात में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद तीन महीने के अंदर गुजरात के हर परिवार की 300 यूनिट बिजली फ्री होगी। गुजरात के हर परिवार को 300 यूनिट बिजली फ्री मिलेगी। अगर फ्री बिजली दिल्ली में मिल सकती है, पंजाब में मिल सकती है, तो गुजरात में भी मिल सकती है। उन्होंने कहा कि अगर मैं कहूं कि 300 यूनिट बिजली मुफ्त मिलेगी और बिजली ही न आए, यह तो गलत बात है। आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद गुजरात के लोगों को 24 घंटे बिजली मिलेगी और मुफ्त मिलेगी। पावर कट नहीं लगेंगे। मुझे पता चला है कि गुजरात के कुछ शहरी और ग्रामीण इलाकों में पावर कट लगते हैं। दिल्ली के अंदर अब 24 घंटे बिजली आती है। 24 घंटे बिजली और फ्री बिजली, यह दुनिया के इतिहास में पहली बार भारत के अंदर हो रहा है। 24 घंटे बिजली देना और फ्री बिजली देना, यह मैजिक है और उपर वाले ने केवल मुझे ही यह मैजिक सिखाया है। किसी और को नहीं आता है। कोई आकर अगर कहे कि फ्री बिजली दूंगा और 24 घंटे बिजली दूंगा, तो मत मानना। पहले मैंने दिल्ली में करके दिखाया, फिर पंजाब में करके दिखाया और अब गुजरात के अंदर भी करके दिखाएंगे। 70 से 80 फीसद बिल फर्जी होते हैं, हम ऐसी व्यवस्था कर देंगे कि फर्जी बिल आना ही बंद हो जाएगा- अरविंद केजरीवाल आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि गुजरात में हमारे पास बहुत लोग आए। लोग बिजली का अपना बिल लेकर आते हैं। उनका छोटा सा घर है, उसमें एक पंखा, एक टीवी और कुछ बल्ब है। उसका 50 हजार से 70 हजार का बिल आ गया। वो बिल गलत है। उसे जब लोग ठीक कराने जाते हैं, तो वहां पर बाबू उनसे कहता है कि मुझे पांच हजार रुपए दे दो, मैं ठीक कर दूंगा। पहले झूठा बिल भेजते हैं और फिर बिल कम कराने के पैसे लेते हैं। अगर सभी पुराने बिजली के बिलों को ठीक करना चालू कर दें, तो इनको ठीक करने में पता नहीं कितने साल लग जाएंगे। अगर मैंने आपकी 300 यूनिट बिजली फ्री कर दी, तब भी आपको फायदा नहीं होगा, अगर आपका पिछला 50 हजार रुपए का बिल आया होगा तो। फिर आप बिल ठीक कराने के लिए चक्कर ही काटते रहेंगे। इसलिए हमने तय किया है कि 31 दिसंबर 2021 से पहले के सारे घरेलु बिजली के बिल माफ कर दिए जाएंगे। यानि कि पुराना सारा बिल जीरो माना जाएगा। इससे सरकार के उपर कोई बोझ नहीं पड़ने वाला है। 70 से 80 फीसद बिल फर्जी होते हैं। अब ऐसी व्यवस्था कर देंगे कि फर्जी बिल आना बंद हो जाएगा। अब आपके जीरो बिल आएंगे या जो लोग 300 यूनिट से ज्यादा बिजली इस्तेमाल करेंगे, उनके बिल आएंगे। पुराने सारे बिल माफ हो जाएंगे, आदमी चैन की सांस लेगा और राहत महसूस करेगा। उसको बिजली के दफ्तरों के चक्कर काटने खत्म हो जाएंगे। बहुत सारे लोग हैं, जिनके फर्जी बिल आते हैं। वो बिल नहीं जमा कर पाते हैं, तो उनके कनेक्शन काट दिए जाते हैं। ऐसे लोगों के बिजली के कनेक्शन लग जाएंगे। बिजली के मुद्दे पर यह तीन गारंटी दे रहा हूं। पहला, 300 यूनिट बिजली फ्री होगी। दूसरा, 24 घंटे बिजली देंगे और तीसरा, 31 दिसंबर 2021 तक के सारे पुराने बिल माफ कर दिए जाएंगे। मुझे पूरा यकीन है कि गुजरात के अंदर न केवल आम आदमी पार्टी की सरकार बनेगी, बल्कि दिल्ली और पंजाब की तरह भारी बहुमत से "आप" की सरकार बनेगी। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने गुजरात की जनता को बिजली की गारंटी देने के बाद कई ट्वीट किए। उन्होंने ट्वीट कर कहा, "गुजरात की जनता के लिए आम आदमी पार्टी की पहली गारंटी। सरकार बनते ही 3 महीने के भीतर हर परिवार को 300 यूनिट बिजली हर महीने मुफ़्त देंगे। सभी गांव और शहरों में 24 घंटे बिजली मिलेगी। 31 दिसंबर 2021 तक के पुराने बकाया बिल माफ़। " उन्होंने दूसरा ट्वीट कर कहा, "गुजरात में दो महीने का बिजली बिल आता है। 300 यूनिट प्रति माह के हिसाब से दो महीने के बिल में 600 यूनिट फ्री मिलेगा। " "आप" के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने एक अन्य ट्वीट कर कहा, "जनता को फ्री रेवड़ी देने से श्रीलंका जैसे हालात नहीं होते। अपने दोस्तों और मंत्रियों को देने से होते हैं। श्रीलंका वाला अपने दोस्तों को फ्री रेवड़ी देता था। अगर जनता को देता तो जनता उसके घर में घुसके उसे ना भगाती। जनता को फ्री रेवड़ी भगवान का प्रसाद है। दोस्तों को फ्री रेवड़ी पाप। " आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता, राजेंद्र नगर से विधायक एवं एमसीडी प्रभारी दुर्गेश पाठक ने गुरुवार को पार्टी मुख्यालय में एक महत्वपूर्ण प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा शासित एमसीडी ने 2017 के चुनाव में दिल्ली की जनता से जो वादा किया था कि दिल्ली में ना कोई नया टैक्स लगाएंगे और ना टैक्स बढ़ाएंगे। लेकिन जल्द ही भाजपा उस वादे को भूल गई। ना सिर्फ टैक्स बढ़ाया गया बल्कि नए टैक्स भी लगाए गए। मैंने कुछ ही दिन पहले बताया था कि भाजपा ने हर प्रकार की संपत्ति पर हाउस टैक्स बढ़ा दिया है। जहां पहले हाउस टैक्स लगभग 500 रुपए होती थी, उसे बढ़ाकर लगभग एक लाख कर दिया गया है। आज भाजपा ने विशेषकर कॉमर्शियल स्थानों से कूड़ा उठाने का रेट बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी इन सभी टैक्सों का विरोध करती है। आम आदमी पार्टी पहले दिन से मांग कर रही है कि इस प्रकार आम जनता पर टैक्स का बोझ नहीं बढ़ाना चाहिए और ना ही कोई नया टैक्स लगाया जाना चाहिए। हमने प्रेसवार्ता की, एलजी को पत्र लिखे, कई बार भाजपा के नेताओं से मुलाकात कर टैक्स वापस लेने की विनती की। लेकिन किसी के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। अब एक ही विकल्प बचा है। दिल्ली में लगातार बढ़ाए जा रहे टैक्स के विरोध में पूरी दिल्ली में एक बड़े आंदोलन को अंजाम दिया जाएगा। आंदोलन की जानकारी देते हुए दुर्गेश पाठक ने कहा कि यह आंदोलन 23 जुलाई से शुरू होगा जो तीन चरणों में किया जाएगा। पहला चरण जन-जागरण अभियान है जो 23 जुलाई से लेकर 30 जुलाई तक चलेगा। इस अभियान के तहत पूरी दिल्ली के लगभग 15 लाथ घरों तक हमारे कार्यकर्ता जाएंगे और लोगों को बढ़ाए गए करों के बारे में जागरुक करेंगे। नुक्कड़-चौराहों पर पोस्टर लगाकर दिल्लीवालों को भाजपा शासित एमसीडी द्वारा बढ़ाए गए करों के बारे में अवगत कराया जाएगा। दूसरा चरण जन मोर्चा के नाम से 31 जुलाई, रविवार को होगा। जिसके तहत पूरी दिल्ली भाजपा के दफ्तर के सामने इकट्ठा होगी। दिल्ली के लोग नारों, बैनर, होर्डिंग्स आदि के माध्यम से बढ़ाए गए टैक्स के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे। हम भाजपा शासित एमसीडी से सभी बढ़ाए गए करों को वापस लेने का आग्रह करेंगे। यदि भाजपा फिर भी करों को वापस नहीं लेती है तो हम अपने आंदोलन के तीसरे चरण की ओर प्रस्थान करेंगे जिसकी जानकारी आप लोगों को 1 अगस्त को दी जाएगी।
-आम आदमी पार्टी की सरकार बनने पर दिल्ली और पंजाब की तरह गुजरात की जनता को भी देंगे चौबीस घंटाटे मुफ्त बिजली नई दिल्ली/गुजरात । आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने आज गुजरात की जनता को दिल्ली और पंजाब की तरह चौबीस घंटाटे फ्री बिजली देने की पहली गारंटी दी। उन्होंने घोषणा की कि "आप" की सरकार बनने के तीन महीने के अंदर हर परिवार को हर महीने तीन सौ यूनिट बिजली मुफ़्त देंगे और इकतीस दिसंबर दो हज़ार इक्कीस तक के पुराने बकाया सभी घरेलु बिल माफ़ करेंगे। गुजरात में दो महीने का बिजली बिल आता है। तीन सौ यूनिट प्रति माह के हिसाब से दो महीने के बिल में छः सौ यूनिट फ्री मिलेगा। पहले मैंने दिल्ली में करके दिखाया, फिर पंजाब में करके दिखाया और अब गुजरात के अंदर भी करके दिखाएंगे। "आप" के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जनता को फ्री रेवड़ी देने से श्रीलंका जैसे हालात नहीं होते, अपने दोस्तों और मंत्रियों को देने से होते हैं। जनता को फ्री रेवड़ी भगवान का प्रसाद है और दोस्तों को फ्री रेवड़ी पाप है। श्रीलंका वाला अपने दोस्तों को फ्री रेवड़ी देता था। अगर जनता को देता तो, जनता उसके घर में घुसकर उसे ना भगाती। उन्होंने कहा कि हम सारी गारंटी पूरी करेंगे। अगर गारंटी पूरी न हो तो अगली बार हमें वोट मत देना। मुझे पूरा यकीन है कि दिल्ली और पंजाब की तरह गुजरात में भी भारी बहुमत से आम आदमी पार्टी की सरकार बनेगी। गुजरात में एक ही पार्टी को शासन करते-करते सत्ताईस साल हो गए, अब उनके पास कोई आइडिया नहीं बचा है, गुजरात अब बदलाव चाहता है- अरविंद केजरीवाल आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आज गुजरात को बिजली के मुद्दे पर पहली गारंटी की घोषणा की। सूरत में प्रेस वार्ता कर "आप" के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पिछली बार जब गुजरात आ रहा था, तब मेरे बगल की सीट पर गुजरात का रहने वाला एक व्यक्ति बैठा था। उसने मेरा हाथ कस कर पकड़ लिया और धीरे से बोला कि गुजरात को बचा लीजिए। मैंने उससे कहा कि मैं तो छोटा आदमी हूं, मै कैसे गुजरात को बचाउंगा, आप लोग गुजरात को बचाएंगे। मैंने कहा कि आप सब लोग आवाज क्यों नहीं उठाते हैं? इस पर उसने कहा कि इन लोगों ने सबको डरा रखा है। सबको परेशान करते हैं। हमारे पास कोई विकल्प नहीं है। हम जाएं तो किस पार्टी के पास जाएं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में जितनी बार मैं गुजरात आया हूं, गुजरात के लोगों से बहुत ज्यादा प्यार और विश्वास मिला है। इसके लिए मैं गुजरात के लोगों का बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं। गुजरात में एक ही पार्टी को शासन करते-करते सत्ताईस साल हो गए। सत्ताईस साल शासन करने के बाद किसी के भी मन में अहंकार आ जाता है। सत्ताईस साल के बाद तो उनके पास कोई आइडिया भी नहीं बचते हैं कि अब और क्या करना है। उनको जो करना था, वो कर दिया। अब गुजरात बदलाव चाहता है। हमने दिल्ली में बिजली फ्री कर दी है और अब पंजाब में भी बिजली फ्री कर दी है, गुजरात के लोग भी बिजली फ्री चाहते हैं- अरविंद केजरीवाल "आप" के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पिछले कई महीनों से गुजरात के अंदर आना-जाना हुआ और लोगों से बातचीत हुई। लोगों की समस्याओं के बारे में जानने का मौका मिला। इस समय गुजरात के लोगों के सामने सबसे बड़ी समस्या महंगाई है। हर चीज के दाम बढ़ते जा रहे हैं। लेकिन आमदनी बढ़ती नहीं है। लोगों की तनख्वाह नहीं बढ़ती है। लोगों के घर का खर्चा चल नहीं रहा है। लोगों के लिए घर चलाना मुश्किल होता जा रहा है। इस महंगाई में भी सबसे ज्यादा मुश्किल बिजली का रेट होता जा रहा है। गुजरात में बिजली इतनी महंगी होती जा रही है। जब मैंने लोगों से पूछा, तो लोगों ने कहा कि केजरीवाल जी सुना है कि आपने दिल्ली में बिजली फ्री कर दी और एक जुलाई से पंजाब में भी बिजली फ्री हो गई है। अभी तो दस मार्च को पंजाब चुनाव के नतीजे आए थे और सोलह मार्च को सरकार बनी थी। तीन महीने के अंदर पंजाब में भी बिजली फ्री हो गई है। गुजरात के लोग चाहते हैं कि गुजरात में भी बिजली फ्री होनी चाहिए। इसलिए हम आज पहली गारंटी बिजली के मुद्दे पर लेकर आए हैं। यह गारंटी इसलिए, क्योंकि कई पार्टियां ऐसी हैं, जो चुनाव के पहले आकर कहती हैं कि हमारा घोषणा पत्र है। कुछ लोग कहते हैं कि हमारा संकल्प पत्र है। लेकिन चुनाव के बाद वो कुछ करते नहीं है। अपने घोषणा पत्र या संकल्प पत्र को उठाकर कूड़े के ढेर में फेंक देते हैं। उनसे पूछो कि आपने तो कहा था कि पंद्रह-पंद्रह लाख रुपए देंगे, तो कहते हैं कि वो तो चुनावी जुमला था। लेकिन हम चुनावी जुमला नहीं करते। हमें राजनीति करनी नहीं आती है। हम जो कहते हैं, वो करते हैं। हमारे जो अंदर है, वही बाहर है। हम सच्चे और शरीफ लोग हैं। आम आदमी पार्टी सच्चे, शरीफ और ईमानदार लोगों की पार्टी है। इसलिए हम गारंटी दे रहे हैं। जैसे बाजार में माल की गारंटी मिलती है कि अगर माल ठीक न निकले, तो पैसा वापस हो जाता है। वैसे ही अगर हम काम नहीं करेंगे, तो अगली बार हमें वोट मत देना। हमारी जो भी गारंटी है, वो सारी गारंटी पूरी करेंगे। अगर गारंटी पूरी न हो तो अगली बार हमें वोट मत देना। -अगर फ्री बिजली दिल्ली में मिल सकती है, पंजाब में मिल सकती है, तो गुजरात में भी मिल सकती है? - अरविंद केजरीवाल "आप" के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि गुजरात के लोगों से हमारी पहली गारंटी बिजली की है। बिजली की गारंटी में तीन चीजें शामिल हैं। यह हम हवा में बात नहीं कर रहे हैं। हम जो दिल्ली और पंजाब में करके आए हैं, वही गुजरात के अंदर करेंगे। हमने करके दिखाया है, हमें करना आता है और हमारी करने की नीयत है। हमारी पहली गारंटी है कि गुजरात में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद तीन महीने के अंदर गुजरात के हर परिवार की तीन सौ यूनिट बिजली फ्री होगी। गुजरात के हर परिवार को तीन सौ यूनिट बिजली फ्री मिलेगी। अगर फ्री बिजली दिल्ली में मिल सकती है, पंजाब में मिल सकती है, तो गुजरात में भी मिल सकती है। उन्होंने कहा कि अगर मैं कहूं कि तीन सौ यूनिट बिजली मुफ्त मिलेगी और बिजली ही न आए, यह तो गलत बात है। आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद गुजरात के लोगों को चौबीस घंटाटे बिजली मिलेगी और मुफ्त मिलेगी। पावर कट नहीं लगेंगे। मुझे पता चला है कि गुजरात के कुछ शहरी और ग्रामीण इलाकों में पावर कट लगते हैं। दिल्ली के अंदर अब चौबीस घंटाटे बिजली आती है। चौबीस घंटाटे बिजली और फ्री बिजली, यह दुनिया के इतिहास में पहली बार भारत के अंदर हो रहा है। चौबीस घंटाटे बिजली देना और फ्री बिजली देना, यह मैजिक है और उपर वाले ने केवल मुझे ही यह मैजिक सिखाया है। किसी और को नहीं आता है। कोई आकर अगर कहे कि फ्री बिजली दूंगा और चौबीस घंटाटे बिजली दूंगा, तो मत मानना। पहले मैंने दिल्ली में करके दिखाया, फिर पंजाब में करके दिखाया और अब गुजरात के अंदर भी करके दिखाएंगे। सत्तर से अस्सी फीसद बिल फर्जी होते हैं, हम ऐसी व्यवस्था कर देंगे कि फर्जी बिल आना ही बंद हो जाएगा- अरविंद केजरीवाल आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि गुजरात में हमारे पास बहुत लोग आए। लोग बिजली का अपना बिल लेकर आते हैं। उनका छोटा सा घर है, उसमें एक पंखा, एक टीवी और कुछ बल्ब है। उसका पचास हजार से सत्तर हजार का बिल आ गया। वो बिल गलत है। उसे जब लोग ठीक कराने जाते हैं, तो वहां पर बाबू उनसे कहता है कि मुझे पांच हजार रुपए दे दो, मैं ठीक कर दूंगा। पहले झूठा बिल भेजते हैं और फिर बिल कम कराने के पैसे लेते हैं। अगर सभी पुराने बिजली के बिलों को ठीक करना चालू कर दें, तो इनको ठीक करने में पता नहीं कितने साल लग जाएंगे। अगर मैंने आपकी तीन सौ यूनिट बिजली फ्री कर दी, तब भी आपको फायदा नहीं होगा, अगर आपका पिछला पचास हजार रुपए का बिल आया होगा तो। फिर आप बिल ठीक कराने के लिए चक्कर ही काटते रहेंगे। इसलिए हमने तय किया है कि इकतीस दिसंबर दो हज़ार इक्कीस से पहले के सारे घरेलु बिजली के बिल माफ कर दिए जाएंगे। यानि कि पुराना सारा बिल जीरो माना जाएगा। इससे सरकार के उपर कोई बोझ नहीं पड़ने वाला है। सत्तर से अस्सी फीसद बिल फर्जी होते हैं। अब ऐसी व्यवस्था कर देंगे कि फर्जी बिल आना बंद हो जाएगा। अब आपके जीरो बिल आएंगे या जो लोग तीन सौ यूनिट से ज्यादा बिजली इस्तेमाल करेंगे, उनके बिल आएंगे। पुराने सारे बिल माफ हो जाएंगे, आदमी चैन की सांस लेगा और राहत महसूस करेगा। उसको बिजली के दफ्तरों के चक्कर काटने खत्म हो जाएंगे। बहुत सारे लोग हैं, जिनके फर्जी बिल आते हैं। वो बिल नहीं जमा कर पाते हैं, तो उनके कनेक्शन काट दिए जाते हैं। ऐसे लोगों के बिजली के कनेक्शन लग जाएंगे। बिजली के मुद्दे पर यह तीन गारंटी दे रहा हूं। पहला, तीन सौ यूनिट बिजली फ्री होगी। दूसरा, चौबीस घंटाटे बिजली देंगे और तीसरा, इकतीस दिसंबर दो हज़ार इक्कीस तक के सारे पुराने बिल माफ कर दिए जाएंगे। मुझे पूरा यकीन है कि गुजरात के अंदर न केवल आम आदमी पार्टी की सरकार बनेगी, बल्कि दिल्ली और पंजाब की तरह भारी बहुमत से "आप" की सरकार बनेगी। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने गुजरात की जनता को बिजली की गारंटी देने के बाद कई ट्वीट किए। उन्होंने ट्वीट कर कहा, "गुजरात की जनता के लिए आम आदमी पार्टी की पहली गारंटी। सरकार बनते ही तीन महीने के भीतर हर परिवार को तीन सौ यूनिट बिजली हर महीने मुफ़्त देंगे। सभी गांव और शहरों में चौबीस घंटाटे बिजली मिलेगी। इकतीस दिसंबर दो हज़ार इक्कीस तक के पुराने बकाया बिल माफ़। " उन्होंने दूसरा ट्वीट कर कहा, "गुजरात में दो महीने का बिजली बिल आता है। तीन सौ यूनिट प्रति माह के हिसाब से दो महीने के बिल में छः सौ यूनिट फ्री मिलेगा। " "आप" के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने एक अन्य ट्वीट कर कहा, "जनता को फ्री रेवड़ी देने से श्रीलंका जैसे हालात नहीं होते। अपने दोस्तों और मंत्रियों को देने से होते हैं। श्रीलंका वाला अपने दोस्तों को फ्री रेवड़ी देता था। अगर जनता को देता तो जनता उसके घर में घुसके उसे ना भगाती। जनता को फ्री रेवड़ी भगवान का प्रसाद है। दोस्तों को फ्री रेवड़ी पाप। " आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता, राजेंद्र नगर से विधायक एवं एमसीडी प्रभारी दुर्गेश पाठक ने गुरुवार को पार्टी मुख्यालय में एक महत्वपूर्ण प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा शासित एमसीडी ने दो हज़ार सत्रह के चुनाव में दिल्ली की जनता से जो वादा किया था कि दिल्ली में ना कोई नया टैक्स लगाएंगे और ना टैक्स बढ़ाएंगे। लेकिन जल्द ही भाजपा उस वादे को भूल गई। ना सिर्फ टैक्स बढ़ाया गया बल्कि नए टैक्स भी लगाए गए। मैंने कुछ ही दिन पहले बताया था कि भाजपा ने हर प्रकार की संपत्ति पर हाउस टैक्स बढ़ा दिया है। जहां पहले हाउस टैक्स लगभग पाँच सौ रुपयापए होती थी, उसे बढ़ाकर लगभग एक लाख कर दिया गया है। आज भाजपा ने विशेषकर कॉमर्शियल स्थानों से कूड़ा उठाने का रेट बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी इन सभी टैक्सों का विरोध करती है। आम आदमी पार्टी पहले दिन से मांग कर रही है कि इस प्रकार आम जनता पर टैक्स का बोझ नहीं बढ़ाना चाहिए और ना ही कोई नया टैक्स लगाया जाना चाहिए। हमने प्रेसवार्ता की, एलजी को पत्र लिखे, कई बार भाजपा के नेताओं से मुलाकात कर टैक्स वापस लेने की विनती की। लेकिन किसी के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। अब एक ही विकल्प बचा है। दिल्ली में लगातार बढ़ाए जा रहे टैक्स के विरोध में पूरी दिल्ली में एक बड़े आंदोलन को अंजाम दिया जाएगा। आंदोलन की जानकारी देते हुए दुर्गेश पाठक ने कहा कि यह आंदोलन तेईस जुलाई से शुरू होगा जो तीन चरणों में किया जाएगा। पहला चरण जन-जागरण अभियान है जो तेईस जुलाई से लेकर तीस जुलाई तक चलेगा। इस अभियान के तहत पूरी दिल्ली के लगभग पंद्रह लाथ घरों तक हमारे कार्यकर्ता जाएंगे और लोगों को बढ़ाए गए करों के बारे में जागरुक करेंगे। नुक्कड़-चौराहों पर पोस्टर लगाकर दिल्लीवालों को भाजपा शासित एमसीडी द्वारा बढ़ाए गए करों के बारे में अवगत कराया जाएगा। दूसरा चरण जन मोर्चा के नाम से इकतीस जुलाई, रविवार को होगा। जिसके तहत पूरी दिल्ली भाजपा के दफ्तर के सामने इकट्ठा होगी। दिल्ली के लोग नारों, बैनर, होर्डिंग्स आदि के माध्यम से बढ़ाए गए टैक्स के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे। हम भाजपा शासित एमसीडी से सभी बढ़ाए गए करों को वापस लेने का आग्रह करेंगे। यदि भाजपा फिर भी करों को वापस नहीं लेती है तो हम अपने आंदोलन के तीसरे चरण की ओर प्रस्थान करेंगे जिसकी जानकारी आप लोगों को एक अगस्त को दी जाएगी।
को त्रिपिटक कहा गया है ) । ये अंग महावीर के गणधर सुधर्मा स्वामी रचित माने जाते हैं। बारहवें अंग का नाम दृष्टिवाद है जिसमें चौदह पूर्वो का समावेश है । यह लुप्त हो गया है, इसलिये आजकल ग्यारह ही अंग उपलब्ध हैं। इन अंगों के विपयों का वर्णन समवायाग और नन्दीसूत्र मे दिया हुआ है । आयारंग (आचारांग ) आचारांग सूत्र का द्वादश अंगों से महत्वपूर्ण स्थान है, इसलिये इसे अगों का सार कहा है। सामयिक नाम से भी इसका उल्लेख किया गया है। निर्जन्थ और निर्मन्धिनियो के आचार-विचार का इनमें विस्तार से वर्णन है। इसमें दो श्रुतरकंब है। प्रथम श्रुतस्कन में अध्ययन है जो बचेर ( ब्रह्मचर्य ) कहलाते है । इनमे १४ उद्देशक है। द्वितीय श्रुतस्कंध में १६ अध्ययन है जो तीन चूलिकाओं में विभक्त हैं। दोनों के विषय और वर्णनषैली देखकर जान पड़ता है कि पहला श्रुनरकन दूसरे की अपेक्षा अधिक मौलिक और प्राचीन है। मृ में परवाही श्रुतस्कंध था, बाद में भद्रबाहु द्वारा आचाराग पर नियुक्ति लिखते समय इससे आयाश्ग्ग ( चूलिका) लगा दिये गये । आचाराय की गणना प्राचीनतम जैन सूत्रों में की जाती है । यह गद्य और पदोनों में कुछ गाधाये अनुष्टुप् छद में इसकी भाषा प्राचीन प्राऊत का नमूना है। इस सूत्र पर भद्रबाहु ने नियुक्ति जिनदासगण ने चूर्णी और शीलांक ( ईसवी मन ८७६ ) ने टीका लिखी है। शीलांक की टीका गधहस्तिकृत शत्रपरिक्षा विवरण के अनुसार लिखी गई है। जिनहन 1 नियुक्ति और शीलाक की टीका महिन आगमोदय समिति द्वारा सन् १९३५ में प्रकाशित । इसका प्रथम श्रुतस्कघ वाल्टर शूलिंग द्वारा संपादित होकर हिप्जग मे सन् १९१० में प्रकाशित हुआ । २. अगाणं कि सारो ? आयारो । आधारांग १.१ की भूमिका । ३. मायाधम्मकहाओ, अध्ययन ५ । ने इस पर दीपिका लिखी है। हर्मन जैकोबी ने सेक्रेड बुक्स ऑन द ईस्ट के २२वे भाग में इसका अंग्रेजी अनुवाद किया है और इसकी खोजपूर्ण प्रस्तावना लिखी है। शस्त्रपरिज्ञा नाम के प्रथम अध्ययन में पृथ्वीकाय आदि जीवों की हिंसा का निषेध है । लोकविजय अध्ययन में अप्रमाद, अज्ञानी का स्वरूप धनसंग्रह का परिणाम आशा का त्याग, पापकर्म का निषेध आदि का प्रतिपादन है । मृत्यु से हर कोई डरता है, इस सम्बन्ध में उक्ति है :नत्थि कालस्स णागमो । सव्वे पाणा पियाउया. सुहमाया, दुक्खपडिकुला, अपियवहा. पियजीविणो जीविउकामा । सव्वेमि जीवियं पिय । -- मृत्यु का आना निश्चित है । सब प्राणियों को अपनाअपना जीवन प्रिय है, सभी सुख चाहते हैं, दुःख कोई नहीं चाहता, मरण सभी को अप्रिय है, सभी जीना चाहते हैं । प्रत्येक प्राणी जीवन की इच्छा रखता है. सबको जीवित रहना अच्छा लगता है । शीतोष्णीय अध्ययन में विरक्त मुनि का स्वरूप, सम्यकदर्शी का लक्षण और कपाय-त्याग आदि का प्रतिपादन है। मुनि और अमुनि के सम्बन्ध में कहा है. सुत्ता अमुणी, मया मुणिणो जागरंति ।" अर्थात अमुनि मोते है और मुनि सदा जागते हैं । १. मिलाइये थेरगाथा ( १९३ ) के साथ --- न ताव सुपित होति रतिनक्खत्तमालिनी । पटिरजग्मेिवेसा रति होनि विजानता । -नपत्रों से भरी यह रात सोने के लिये नहीं। ज्ञानी के लिये यह रात जागकर ध्यान करने योग्य है । इसियुत्तक, जागरियसुस ( ४७ ) और भगवद्गीता ( २ ६९ ) भी देखिये । रति और अरति में समभाव रखने का उपदेश देते हुए कहा हैःका अरई ? के आणंडे ? इत्थंपि अग्गहे चरं । सव्वं हामं परिवज आलीनगुत्तो परिव्वाए ।। - क्या अरति है और क्या आनन्द है ? इनमें आसक्ति न रख कर संयमपूर्वक विचरण करे । सब प्रकार के हास्य का परित्याग करे, तथा मन, वचन और काया का गोपन करके संयम का पालन करें । सम्यक्त्व अध्ययन में तीर्थंकरभापितधर्म, अहिंसा, देहदमन, सयम की साधना आदि का विवेचन है । यहाँ देह को कृश करने, मांस और शोणित को सुखाने तथा आत्मा को दमन करने का उपदेश है । लोकसार अध्ययन मे कुशील-त्याग, संयम में पराक्रम, चारित्र, तप आदि का प्ररूपण हूँ। बाह्य शत्रुओ से युद्ध करने की अपेक्षा अभ्यन्तर शत्रु से जूझना ही श्रेष्ठ बताया है । इन्द्रियों की उत्तेजना कम करने के लिये रूखा-सूखा आहार करना, भूख से कम खाना, एक स्थान पर कायोत्सर्ग से खड़े रहना और दूसरे गाँव में बिहार करने का उपदेश है । इतने पर भी इन्द्रियों यदि वश में न हो तो आहार का सर्वथा त्याग कर दे, किन्तु स्त्रियों के प्रति मन को चंचल न होने दे । धूत अध्ययन में परीपह-सहन, प्राणिहिसा, धर्म में रति आदि विविध विषयों का विवेचन है। मुनि को उपधि का त्याग करने का उपदेश देते हुए कहा है कि जो मुनि अल्प वस्त्र रखता है अथवा सर्वथा वस्नरहित होता होता है, उसे यह चिन्ता नहीं होती कि उसका वस्त्र जीर्ण हो गया है, उसे नया वस्त्र लाना है। अचेल मुनि को कभी तृण स्पर्श का कष्ट होता है, कभी गर्मी सर्दी का और कभी दंशमशक का, लेकिन इन सब कष्टों को वह यही सोच कर सहन करता है कि इससे उसके कर्मों का भार हलका हो रहा है।
को त्रिपिटक कहा गया है ) । ये अंग महावीर के गणधर सुधर्मा स्वामी रचित माने जाते हैं। बारहवें अंग का नाम दृष्टिवाद है जिसमें चौदह पूर्वो का समावेश है । यह लुप्त हो गया है, इसलिये आजकल ग्यारह ही अंग उपलब्ध हैं। इन अंगों के विपयों का वर्णन समवायाग और नन्दीसूत्र मे दिया हुआ है । आयारंग आचारांग सूत्र का द्वादश अंगों से महत्वपूर्ण स्थान है, इसलिये इसे अगों का सार कहा है। सामयिक नाम से भी इसका उल्लेख किया गया है। निर्जन्थ और निर्मन्धिनियो के आचार-विचार का इनमें विस्तार से वर्णन है। इसमें दो श्रुतरकंब है। प्रथम श्रुतस्कन में अध्ययन है जो बचेर कहलाते है । इनमे चौदह उद्देशक है। द्वितीय श्रुतस्कंध में सोलह अध्ययन है जो तीन चूलिकाओं में विभक्त हैं। दोनों के विषय और वर्णनषैली देखकर जान पड़ता है कि पहला श्रुनरकन दूसरे की अपेक्षा अधिक मौलिक और प्राचीन है। मृ में परवाही श्रुतस्कंध था, बाद में भद्रबाहु द्वारा आचाराग पर नियुक्ति लिखते समय इससे आयाश्ग्ग लगा दिये गये । आचाराय की गणना प्राचीनतम जैन सूत्रों में की जाती है । यह गद्य और पदोनों में कुछ गाधाये अनुष्टुप् छद में इसकी भाषा प्राचीन प्राऊत का नमूना है। इस सूत्र पर भद्रबाहु ने नियुक्ति जिनदासगण ने चूर्णी और शीलांक ने टीका लिखी है। शीलांक की टीका गधहस्तिकृत शत्रपरिक्षा विवरण के अनुसार लिखी गई है। जिनहन एक नियुक्ति और शीलाक की टीका महिन आगमोदय समिति द्वारा सन् एक हज़ार नौ सौ पैंतीस में प्रकाशित । इसका प्रथम श्रुतस्कघ वाल्टर शूलिंग द्वारा संपादित होकर हिप्जग मे सन् एक हज़ार नौ सौ दस में प्रकाशित हुआ । दो. अगाणं कि सारो ? आयारो । आधारांग एक.एक की भूमिका । तीन. मायाधम्मकहाओ, अध्ययन पाँच । ने इस पर दीपिका लिखी है। हर्मन जैकोबी ने सेक्रेड बुक्स ऑन द ईस्ट के बाईसवे भाग में इसका अंग्रेजी अनुवाद किया है और इसकी खोजपूर्ण प्रस्तावना लिखी है। शस्त्रपरिज्ञा नाम के प्रथम अध्ययन में पृथ्वीकाय आदि जीवों की हिंसा का निषेध है । लोकविजय अध्ययन में अप्रमाद, अज्ञानी का स्वरूप धनसंग्रह का परिणाम आशा का त्याग, पापकर्म का निषेध आदि का प्रतिपादन है । मृत्यु से हर कोई डरता है, इस सम्बन्ध में उक्ति है :नत्थि कालस्स णागमो । सव्वे पाणा पियाउया. सुहमाया, दुक्खपडिकुला, अपियवहा. पियजीविणो जीविउकामा । सव्वेमि जीवियं पिय । -- मृत्यु का आना निश्चित है । सब प्राणियों को अपनाअपना जीवन प्रिय है, सभी सुख चाहते हैं, दुःख कोई नहीं चाहता, मरण सभी को अप्रिय है, सभी जीना चाहते हैं । प्रत्येक प्राणी जीवन की इच्छा रखता है. सबको जीवित रहना अच्छा लगता है । शीतोष्णीय अध्ययन में विरक्त मुनि का स्वरूप, सम्यकदर्शी का लक्षण और कपाय-त्याग आदि का प्रतिपादन है। मुनि और अमुनि के सम्बन्ध में कहा है. सुत्ता अमुणी, मया मुणिणो जागरंति ।" अर्थात अमुनि मोते है और मुनि सदा जागते हैं । एक. मिलाइये थेरगाथा के साथ --- न ताव सुपित होति रतिनक्खत्तमालिनी । पटिरजग्मेिवेसा रति होनि विजानता । -नपत्रों से भरी यह रात सोने के लिये नहीं। ज्ञानी के लिये यह रात जागकर ध्यान करने योग्य है । इसियुत्तक, जागरियसुस और भगवद्गीता भी देखिये । रति और अरति में समभाव रखने का उपदेश देते हुए कहा हैःका अरई ? के आणंडे ? इत्थंपि अग्गहे चरं । सव्वं हामं परिवज आलीनगुत्तो परिव्वाए ।। - क्या अरति है और क्या आनन्द है ? इनमें आसक्ति न रख कर संयमपूर्वक विचरण करे । सब प्रकार के हास्य का परित्याग करे, तथा मन, वचन और काया का गोपन करके संयम का पालन करें । सम्यक्त्व अध्ययन में तीर्थंकरभापितधर्म, अहिंसा, देहदमन, सयम की साधना आदि का विवेचन है । यहाँ देह को कृश करने, मांस और शोणित को सुखाने तथा आत्मा को दमन करने का उपदेश है । लोकसार अध्ययन मे कुशील-त्याग, संयम में पराक्रम, चारित्र, तप आदि का प्ररूपण हूँ। बाह्य शत्रुओ से युद्ध करने की अपेक्षा अभ्यन्तर शत्रु से जूझना ही श्रेष्ठ बताया है । इन्द्रियों की उत्तेजना कम करने के लिये रूखा-सूखा आहार करना, भूख से कम खाना, एक स्थान पर कायोत्सर्ग से खड़े रहना और दूसरे गाँव में बिहार करने का उपदेश है । इतने पर भी इन्द्रियों यदि वश में न हो तो आहार का सर्वथा त्याग कर दे, किन्तु स्त्रियों के प्रति मन को चंचल न होने दे । धूत अध्ययन में परीपह-सहन, प्राणिहिसा, धर्म में रति आदि विविध विषयों का विवेचन है। मुनि को उपधि का त्याग करने का उपदेश देते हुए कहा है कि जो मुनि अल्प वस्त्र रखता है अथवा सर्वथा वस्नरहित होता होता है, उसे यह चिन्ता नहीं होती कि उसका वस्त्र जीर्ण हो गया है, उसे नया वस्त्र लाना है। अचेल मुनि को कभी तृण स्पर्श का कष्ट होता है, कभी गर्मी सर्दी का और कभी दंशमशक का, लेकिन इन सब कष्टों को वह यही सोच कर सहन करता है कि इससे उसके कर्मों का भार हलका हो रहा है।
Charmsukh Tauba Tauba web series on ULLU: ऐसा नहीं है कि हमें हर दिन डबल धमाका ऑफर मिलते हैं। ULLU की सबसे सनसनीखेज वेब सीरीज़ चार्मसुख में दो सनसनी मुस्कान अग्रवाल और राजसी वर्मा एक साथ हैं। यह एक ऐसा शो है जो एक बेहद आकर्षक घड़ी के रूप में सामने आता है, लेकिन गहराई में, इसमें और भी बहुत कुछ है। अधिक जानने के लिए नीचे स्क्रॉल करें। उल्लू के ट्रेलर पर चारसुख तौबा तौबा वेब सीरीजः चारसुख तौबा तौबा भारत में अपने शांत घर में एक सुखी वैवाहिक जीवन जीने वाले एक जोड़े को दिखाता है। हालाँकि, उनकी दुनिया बाधित हो जाती है जब पत्नी अपनी छोटी बहन को अमेरिका से अपने घर आमंत्रित करती है। पति उसकी निडरता से अवाक रह जाता है। सबसे पहले, वह गुस्सा हो जाता है, लेकिन आखिरकार, वह उसके खूबसूरत शरीर की ओर आकर्षित हो जाता है, जिसे वह दिखाने के लिए इस हद तक कर देती है। यह जीजा-साली गाथा हालांकि ड्राइवर द्वारा बाधित है, जो अमेरिका से लौटी बहन की मोहक सुंदरता से भी प्रभावित है। इस बीच, पत्नी ने अपने पति के व्यवहार में बदलाव देखा, जो पहली बार उसकी शारीरिक जरूरतों को पूरा करने में विफल रहा है। अपने पति के बदले हुए व्यक्तित्व से अत्यधिक असंतुष्ट, अब वह अपने ड्राइवर में सांत्वना पाती है। लेकिन, छोटी बहन पहले से ही ड्राइवर के पीछे पड़ी है। वह अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है और अपनी बड़ी बहन को अपने नए पाए गए जुनून पर हावी नहीं होने देगी। दो कामातुर बहनों की ये ख्वाहिशें इस हद तक खिंच जाती हैं कि आपस में झूठ का जाल बुन लेते हैं। आखिर इस चूहा दौड़ में कौन बचेगा? Charmsukh Tauba Tauba cast: चार्मसुख तौबा तौबा में धमाकेदार सुंदरियां मुस्कान अग्रवाल और राजसी वर्मा प्रमुख भूमिका में हैं। दोनों ही कलाकार अपने अल्ट्रा-बोल्ड लुक से स्क्रीन पर आग लगा रहे हैं। मुस्कान और राजसी दोनों अपने कामुक तत्व में होने के साथ हर दृश्य में ग्लैमर का तड़का है।
Charmsukh Tauba Tauba web series on ULLU: ऐसा नहीं है कि हमें हर दिन डबल धमाका ऑफर मिलते हैं। ULLU की सबसे सनसनीखेज वेब सीरीज़ चार्मसुख में दो सनसनी मुस्कान अग्रवाल और राजसी वर्मा एक साथ हैं। यह एक ऐसा शो है जो एक बेहद आकर्षक घड़ी के रूप में सामने आता है, लेकिन गहराई में, इसमें और भी बहुत कुछ है। अधिक जानने के लिए नीचे स्क्रॉल करें। उल्लू के ट्रेलर पर चारसुख तौबा तौबा वेब सीरीजः चारसुख तौबा तौबा भारत में अपने शांत घर में एक सुखी वैवाहिक जीवन जीने वाले एक जोड़े को दिखाता है। हालाँकि, उनकी दुनिया बाधित हो जाती है जब पत्नी अपनी छोटी बहन को अमेरिका से अपने घर आमंत्रित करती है। पति उसकी निडरता से अवाक रह जाता है। सबसे पहले, वह गुस्सा हो जाता है, लेकिन आखिरकार, वह उसके खूबसूरत शरीर की ओर आकर्षित हो जाता है, जिसे वह दिखाने के लिए इस हद तक कर देती है। यह जीजा-साली गाथा हालांकि ड्राइवर द्वारा बाधित है, जो अमेरिका से लौटी बहन की मोहक सुंदरता से भी प्रभावित है। इस बीच, पत्नी ने अपने पति के व्यवहार में बदलाव देखा, जो पहली बार उसकी शारीरिक जरूरतों को पूरा करने में विफल रहा है। अपने पति के बदले हुए व्यक्तित्व से अत्यधिक असंतुष्ट, अब वह अपने ड्राइवर में सांत्वना पाती है। लेकिन, छोटी बहन पहले से ही ड्राइवर के पीछे पड़ी है। वह अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है और अपनी बड़ी बहन को अपने नए पाए गए जुनून पर हावी नहीं होने देगी। दो कामातुर बहनों की ये ख्वाहिशें इस हद तक खिंच जाती हैं कि आपस में झूठ का जाल बुन लेते हैं। आखिर इस चूहा दौड़ में कौन बचेगा? Charmsukh Tauba Tauba cast: चार्मसुख तौबा तौबा में धमाकेदार सुंदरियां मुस्कान अग्रवाल और राजसी वर्मा प्रमुख भूमिका में हैं। दोनों ही कलाकार अपने अल्ट्रा-बोल्ड लुक से स्क्रीन पर आग लगा रहे हैं। मुस्कान और राजसी दोनों अपने कामुक तत्व में होने के साथ हर दृश्य में ग्लैमर का तड़का है।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपना सरकारी बंगला खाली किया। अखिलेश यादव को आबंटित किया गए, लखनऊ के विक्रमादित्य मार्ग पर स्थित अपने आवास की चाबियाँ उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के एस्टेट डिपार्टमेंट को सोंप दी। आपको बतादे, माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने 7 मई को, उत्तर प्रदेश के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास खाली करने के आदेश दिए थे, न्यायलय के आदेशों के अनुसार राजनाथ सिंह, कल्याण सिंह, मायावती, मुलायम सिंह यादव अपना सरकारी आवास खाली कर चुकें हैं। पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी की पत्नी उज्ज्वला तिवारी ने अपने पति की बिघडती सेहत का कारन देते हुए बंगला खाली करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार से कुछ समय माँगा हैं। आपको बतादे, नारायण दत्त तिवारी की सेहत बहुत ख़राब हैं, वे दिल्ली में अपना इलाज करवा रहे हैं। समाजवादी पार्टी के अनुसार, सोशल मीडिया पर वायरल यह क्लिप को समाजवादी पार्टी की छवि को ख़राब करने के हेतु से वायरल किया गया हैं। पार्टी के प्रवक्ता सुनील सिंह सजन के अनुसार, "यह योही सरकार की साजिश हैं, जिसके चलते समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव की छवि ख़राब हों सके।" प्रवक्ता ने पूछा की क्यों राजनाथ सिंह और कल्याण सिंह के बंगलों को मीडिया पर दिखाया गया।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपना सरकारी बंगला खाली किया। अखिलेश यादव को आबंटित किया गए, लखनऊ के विक्रमादित्य मार्ग पर स्थित अपने आवास की चाबियाँ उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के एस्टेट डिपार्टमेंट को सोंप दी। आपको बतादे, माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने सात मई को, उत्तर प्रदेश के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास खाली करने के आदेश दिए थे, न्यायलय के आदेशों के अनुसार राजनाथ सिंह, कल्याण सिंह, मायावती, मुलायम सिंह यादव अपना सरकारी आवास खाली कर चुकें हैं। पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी की पत्नी उज्ज्वला तिवारी ने अपने पति की बिघडती सेहत का कारन देते हुए बंगला खाली करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार से कुछ समय माँगा हैं। आपको बतादे, नारायण दत्त तिवारी की सेहत बहुत ख़राब हैं, वे दिल्ली में अपना इलाज करवा रहे हैं। समाजवादी पार्टी के अनुसार, सोशल मीडिया पर वायरल यह क्लिप को समाजवादी पार्टी की छवि को ख़राब करने के हेतु से वायरल किया गया हैं। पार्टी के प्रवक्ता सुनील सिंह सजन के अनुसार, "यह योही सरकार की साजिश हैं, जिसके चलते समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव की छवि ख़राब हों सके।" प्रवक्ता ने पूछा की क्यों राजनाथ सिंह और कल्याण सिंह के बंगलों को मीडिया पर दिखाया गया।
राजस्थान में जारी राजनीतिक संकट के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने लोकलुभावन निर्णय लिया है. उन्होंने तय किया है कि पुलिस महकमें में चतुर्थ श्रेणी के 326 पदों पर सीधी एडमिशन होगा. मुख्यमंत्री ने सरकार की और से इस प्रस्ताव को हरी झंडी दिखा दी गई है. बता दे कि चतुर्थ श्रेणी स्टाफ की ये भर्तियां RAC बटालियन और कंपनी कार्यालय पर होंगी. स्वीपर, मोची, धोबी, कुक के पदों पर भी होगी भर्तियां. गहलोत गवर्नमेंट ने कुक के 72, स्वीपर के 58, धोबी के 51, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के 31, जलधारी/जलवाहक के 30, नाई के 26, दर्जी एवं सईस के 10-10, मोची के 8, खाती के 7, कैनल बॉय के 6, फिटर के 2 और बागवान एवं फर्राश के 1-1 पद पर भर्तियों को मंजूरी दी है. इन पदों के अलावा भी 13 अन्य नियुक्तियां होनी हैं. इसके अलावा, प्रदेश के बेरोजगार युवाओं के लिए अच्छी खबर है. प्रदेश में हाल ही में गठित की गई नई 1456 ग्राम पंचायतों और 57 पंचायत समितियों के लिए जल्द ही बड़ी तादाद में नए पद सृजित किए जाएंगे. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसके निर्देश जारी कर दिए हैं. सीएम गहलोत ने ये निर्देश गुरुवार को ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग की समीक्षा की बैठक में दिए हैं. अब जल्द ही इन ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के लिए ये नए पद निर्मित किया जाएगा. इससे नौकरी की इच्छा रखने वाले युवाओं को रोजगार मिल सके. सरकार के इस कदम से उन युवाओं से बड़ी राहत मिलने वाली है. UN में बोला भारत- जब दुनिया ISIS का खात्मा कर सकती है तो D कंपनी का क्यों नहीं ? पिछले 24 घंटों में 61 हज़ार नए केस, 933 मौतें, कोरोना की रफ़्तार ने डरायाविश्व आदिवासी दिवस : कोरोना काल में कैसे मनेगा विश्व आदिवासी दिवस ?
राजस्थान में जारी राजनीतिक संकट के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने लोकलुभावन निर्णय लिया है. उन्होंने तय किया है कि पुलिस महकमें में चतुर्थ श्रेणी के तीन सौ छब्बीस पदों पर सीधी एडमिशन होगा. मुख्यमंत्री ने सरकार की और से इस प्रस्ताव को हरी झंडी दिखा दी गई है. बता दे कि चतुर्थ श्रेणी स्टाफ की ये भर्तियां RAC बटालियन और कंपनी कार्यालय पर होंगी. स्वीपर, मोची, धोबी, कुक के पदों पर भी होगी भर्तियां. गहलोत गवर्नमेंट ने कुक के बहत्तर, स्वीपर के अट्ठावन, धोबी के इक्यावन, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के इकतीस, जलधारी/जलवाहक के तीस, नाई के छब्बीस, दर्जी एवं सईस के दस-दस, मोची के आठ, खाती के सात, कैनल बॉय के छः, फिटर के दो और बागवान एवं फर्राश के एक-एक पद पर भर्तियों को मंजूरी दी है. इन पदों के अलावा भी तेरह अन्य नियुक्तियां होनी हैं. इसके अलावा, प्रदेश के बेरोजगार युवाओं के लिए अच्छी खबर है. प्रदेश में हाल ही में गठित की गई नई एक हज़ार चार सौ छप्पन ग्राम पंचायतों और सत्तावन पंचायत समितियों के लिए जल्द ही बड़ी तादाद में नए पद सृजित किए जाएंगे. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसके निर्देश जारी कर दिए हैं. सीएम गहलोत ने ये निर्देश गुरुवार को ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग की समीक्षा की बैठक में दिए हैं. अब जल्द ही इन ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के लिए ये नए पद निर्मित किया जाएगा. इससे नौकरी की इच्छा रखने वाले युवाओं को रोजगार मिल सके. सरकार के इस कदम से उन युवाओं से बड़ी राहत मिलने वाली है. UN में बोला भारत- जब दुनिया ISIS का खात्मा कर सकती है तो D कंपनी का क्यों नहीं ? पिछले चौबीस घंटाटों में इकसठ हज़ार नए केस, नौ सौ तैंतीस मौतें, कोरोना की रफ़्तार ने डरायाविश्व आदिवासी दिवस : कोरोना काल में कैसे मनेगा विश्व आदिवासी दिवस ?
इंटरनेट कनेक्शन soL, BirGün, Cumhuriyet और पर हाई स्पीड ट्रेनें (YHT) और Sözcü प्रवेश निषेध (TCDD) एक लिखित बयान ट्रांसपोर्ट A from से संबंधित रिपब्लिक ऑफ टर्की स्टेट रेलवे जैसे समाचार स्थल। बयान में, "यह आरोप लगाया गया है कि कुछ अखबारों और समाचार साइटों में 05 जनवरी 2020, कुछ अखबारों की वेबसाइटों तक पहुंच और YHT की इंटरनेट सेवा में कुछ समाचार साइटों को प्रतिबंधित किया गया था। सक्षम न्यायालयों के निर्णय और इस निर्णय को लागू करने वाले संबंधित सार्वजनिक प्राधिकारियों द्वारा इंटरनेट साइटों तक पहुँचने में बाधाएँ प्रदान की जाती हैं। इसके अलावा, यह कहा गया है कि हमारे सामान्य निदेशालय द्वारा YHTs में प्रदान की गई इंटरनेट सेवा में समाचार पत्रों और इंटरनेट साइटों तक पहुंच पर कोई प्रतिबंध नहीं है। दूसरी ओर, इस बारे में कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया कि उपयोगकर्ता साइटों तक क्यों नहीं पहुंच सकते हैं।
इंटरनेट कनेक्शन soL, BirGün, Cumhuriyet और पर हाई स्पीड ट्रेनें और Sözcü प्रवेश निषेध एक लिखित बयान ट्रांसपोर्ट A from से संबंधित रिपब्लिक ऑफ टर्की स्टेट रेलवे जैसे समाचार स्थल। बयान में, "यह आरोप लगाया गया है कि कुछ अखबारों और समाचार साइटों में पाँच जनवरी दो हज़ार बीस, कुछ अखबारों की वेबसाइटों तक पहुंच और YHT की इंटरनेट सेवा में कुछ समाचार साइटों को प्रतिबंधित किया गया था। सक्षम न्यायालयों के निर्णय और इस निर्णय को लागू करने वाले संबंधित सार्वजनिक प्राधिकारियों द्वारा इंटरनेट साइटों तक पहुँचने में बाधाएँ प्रदान की जाती हैं। इसके अलावा, यह कहा गया है कि हमारे सामान्य निदेशालय द्वारा YHTs में प्रदान की गई इंटरनेट सेवा में समाचार पत्रों और इंटरनेट साइटों तक पहुंच पर कोई प्रतिबंध नहीं है। दूसरी ओर, इस बारे में कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया कि उपयोगकर्ता साइटों तक क्यों नहीं पहुंच सकते हैं।
Jan Dhan account: कोरोना संकट के दौरान आम लोगों के लिए जनधन खाते ने बहुत फायदा पहुंचाया है। चाहे वह किसान हो या गरीब-मजदूर या फिर दिव्यांग। तीन चरणों के लॉकडाउन में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत 39 करोड़ लोगों को 34800 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है। और इनमें से अधिकतर रकम जनधन खातों में पहुंची है। इसके अलावा इस पैकेज के तहत महिलाओं के जनधन खातों में मई महीने की 500 रुपये किस्त भी आनी शुरू कर हो गई है।अगर किसी ने पैन कार्ड, आधार कार्ड या वोटर आईडी नहीं होने की वजह से यह खाता नहीं खुलवा पाया है तो बता दें इन कागजातों के न रहने के बावजूद खाता खुल सकता है। इस योजना के तहत देश के गरीबों का खाता जीरो बैलेंस पर किसी भी बैंक, पोस्ट ऑफिस में खोला जाता है। इस योजना के तहत अबतक देशभर में 38 करोड़ से ज्यादा खुल चुका है।यह है बिना किसी डाक्यूमेंट के खाता खुलवाने का तरीकारिजर्व बैंक आफ इंडिया की गाइडलाइंस के मुताबिक अगर किसी नागरिक के पास पैन, आधार, वोटर कार्ड सहित कोई भी आधिकारिक डॉक्यूमेंट नहीं हैं तब भी वह जनधन खाता खोल सकता है। अकाउंट खुलवाने के लिए उसे सबसे पहले पास के बैंक के ब्रांच पर जाना होगा। बैंक अधिकारी की उपस्थिति में अपना एक सेल्फ अटेस्टेड यानी स्वहस्ताक्षरित फोटोग्रॉफ देना होगा। इस फोटो पर उसका हस्ताक्षर या अंगूठा लगा होना चाहिए। इसके बाद बैंक अधिकारी उसका अकाउंट खोल देता है। इसके बाद खाता जारी रखने के लिए खाता खोलने की डेट से 12 महीने पूरे होने तक कोई भी वैलिड डॉक्यूमेंट बनवाकर बैंक में जमा करना होता है, जिसके बाद यह खाता आगे जारी रहता है।ये हैं वैलिड डॉक्यूमेंट्सवोटर कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, पैन कार्ड, आधार कार्ड, NREGA द्वारा इश्यू जॉब कार्ड, सरकार की किसी अथॉरिटी से मिला लेटर, जिसमें नाम और पता लिखा होसेंट्रल गवर्नमेंट से जारी हुआ कोई डॉक्यूमेंट, गैजेट अधिकारी द्वारा जारी लेटर।
Jan Dhan account: कोरोना संकट के दौरान आम लोगों के लिए जनधन खाते ने बहुत फायदा पहुंचाया है। चाहे वह किसान हो या गरीब-मजदूर या फिर दिव्यांग। तीन चरणों के लॉकडाउन में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत उनतालीस करोड़ लोगों को चौंतीस हज़ार आठ सौ करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है। और इनमें से अधिकतर रकम जनधन खातों में पहुंची है। इसके अलावा इस पैकेज के तहत महिलाओं के जनधन खातों में मई महीने की पाँच सौ रुपयापये किस्त भी आनी शुरू कर हो गई है।अगर किसी ने पैन कार्ड, आधार कार्ड या वोटर आईडी नहीं होने की वजह से यह खाता नहीं खुलवा पाया है तो बता दें इन कागजातों के न रहने के बावजूद खाता खुल सकता है। इस योजना के तहत देश के गरीबों का खाता जीरो बैलेंस पर किसी भी बैंक, पोस्ट ऑफिस में खोला जाता है। इस योजना के तहत अबतक देशभर में अड़तीस करोड़ से ज्यादा खुल चुका है।यह है बिना किसी डाक्यूमेंट के खाता खुलवाने का तरीकारिजर्व बैंक आफ इंडिया की गाइडलाइंस के मुताबिक अगर किसी नागरिक के पास पैन, आधार, वोटर कार्ड सहित कोई भी आधिकारिक डॉक्यूमेंट नहीं हैं तब भी वह जनधन खाता खोल सकता है। अकाउंट खुलवाने के लिए उसे सबसे पहले पास के बैंक के ब्रांच पर जाना होगा। बैंक अधिकारी की उपस्थिति में अपना एक सेल्फ अटेस्टेड यानी स्वहस्ताक्षरित फोटोग्रॉफ देना होगा। इस फोटो पर उसका हस्ताक्षर या अंगूठा लगा होना चाहिए। इसके बाद बैंक अधिकारी उसका अकाउंट खोल देता है। इसके बाद खाता जारी रखने के लिए खाता खोलने की डेट से बारह महीने पूरे होने तक कोई भी वैलिड डॉक्यूमेंट बनवाकर बैंक में जमा करना होता है, जिसके बाद यह खाता आगे जारी रहता है।ये हैं वैलिड डॉक्यूमेंट्सवोटर कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, पैन कार्ड, आधार कार्ड, NREGA द्वारा इश्यू जॉब कार्ड, सरकार की किसी अथॉरिटी से मिला लेटर, जिसमें नाम और पता लिखा होसेंट्रल गवर्नमेंट से जारी हुआ कोई डॉक्यूमेंट, गैजेट अधिकारी द्वारा जारी लेटर।
आयुष्मान खुराना (Ayushmann khurrana) की मच अवेटेड फिल्म 'एन एक्शन हीरो' (An Action Hero) सिनेमाघरों में धूम मचाने के लिए एकदम तैयार है. फिल्म के निर्माताओं ने इसे इसी साल रिलीज करने के लिए 2 दिसंबर की तारीख को लॉक कर लिया है. फिल्म की रिलीज डेट की घोषणा करते हुए आयुष्मान ने अपने सोशल मीडिया पर फिल्म का एक पोस्टर शेयर किया है. पोस्टर में आयुष्मान का बेहद ब्लर चेहरा दिख रहा है. ये आयुष्मान की पहली एक्शन फिल्म है. इसमें वो एक स्टंट मैन के किरदार में दिखेंगे. 'एन एक्शन हीरो' (An Action Hero) के नए पोस्टर को इंस्टाग्राम पर शेयर करते हुए आयुष्मान ने कैप्शन में लिखा- "2 दिसंबर 2022 तक धुंध में रहें. ". पोस्टर में आयुष्मान का बेहद ब्लर चेहरा दिख रहा है. बता दें कि फिल्म की घोषणा कुछ समय पहले की गई थी और इसकी शूटिंग 2021 में शुरू हुई थी. फिलहाल फिल्म के पोस्ट प्रोडक्शन के साथ, निर्माताओं ने रिलीज की तारीख तय कर ली है. फिल्म में आयुष्मान के साथ फिल्म में जयदीप अहलावत भी हैं. फिल्म की घोषणा कुछ समय पहले की गई थी और इसकी शूटिंग 2021 में शुरू हुई थी. फिलहाल फिल्म के पोस्ट प्रोडक्शन के साथ, निर्माताओं ने रिलीज की तारीख तय कर ली है. फिल्म में आयुष्मान के साथ फिल्म में जयदीप अहलावत भी हैं. 'एन एक्शन हीरो' के अलावा आयुष्मान खुराना के पास कई बड़ी फिल्में हैं. जिससे वो बॉक्स ऑफिस पर धूम मचाने वाले हैं. वो जल्द ही अनुभव सिन्हा (Anubhav Sinha) के निर्देशन में बन रही फिल्म 'अनेक' (Anek) में एक अंडर कवर पुलिस वाले के रोल में देखे जाएंगे. इसके अलावा वो 'डॉक्टर जी' में भी नजर आएंगे.
आयुष्मान खुराना की मच अवेटेड फिल्म 'एन एक्शन हीरो' सिनेमाघरों में धूम मचाने के लिए एकदम तैयार है. फिल्म के निर्माताओं ने इसे इसी साल रिलीज करने के लिए दो दिसंबर की तारीख को लॉक कर लिया है. फिल्म की रिलीज डेट की घोषणा करते हुए आयुष्मान ने अपने सोशल मीडिया पर फिल्म का एक पोस्टर शेयर किया है. पोस्टर में आयुष्मान का बेहद ब्लर चेहरा दिख रहा है. ये आयुष्मान की पहली एक्शन फिल्म है. इसमें वो एक स्टंट मैन के किरदार में दिखेंगे. 'एन एक्शन हीरो' के नए पोस्टर को इंस्टाग्राम पर शेयर करते हुए आयुष्मान ने कैप्शन में लिखा- "दो दिसंबर दो हज़ार बाईस तक धुंध में रहें. ". पोस्टर में आयुष्मान का बेहद ब्लर चेहरा दिख रहा है. बता दें कि फिल्म की घोषणा कुछ समय पहले की गई थी और इसकी शूटिंग दो हज़ार इक्कीस में शुरू हुई थी. फिलहाल फिल्म के पोस्ट प्रोडक्शन के साथ, निर्माताओं ने रिलीज की तारीख तय कर ली है. फिल्म में आयुष्मान के साथ फिल्म में जयदीप अहलावत भी हैं. फिल्म की घोषणा कुछ समय पहले की गई थी और इसकी शूटिंग दो हज़ार इक्कीस में शुरू हुई थी. फिलहाल फिल्म के पोस्ट प्रोडक्शन के साथ, निर्माताओं ने रिलीज की तारीख तय कर ली है. फिल्म में आयुष्मान के साथ फिल्म में जयदीप अहलावत भी हैं. 'एन एक्शन हीरो' के अलावा आयुष्मान खुराना के पास कई बड़ी फिल्में हैं. जिससे वो बॉक्स ऑफिस पर धूम मचाने वाले हैं. वो जल्द ही अनुभव सिन्हा के निर्देशन में बन रही फिल्म 'अनेक' में एक अंडर कवर पुलिस वाले के रोल में देखे जाएंगे. इसके अलावा वो 'डॉक्टर जी' में भी नजर आएंगे.
ग्रंथ त्वष्टा ते मह उम्र वज्रं महसभृष्टि वतच्छनाश्रिम् । निकाममरमगुमं येन नवन्तमहि सं पिगग्रजीपिन् ।। १० । २ हे इन्द्र ! तुमने अपनी प्रज्ञा कर्म और में गांधों को दुग्ध यो बनाया। गुमने गोधों के निकलने को शिलाओं को हटाया । गिरा से मिल कर गौधों को मुक्त कराया ॥ ६ ॥ दे इन्द्र ! तुमने अपने कर्म से विस्तृत पृथियों को परिपूर्ण किया । तुम महानु हो । तुमने दिव्य लोक को गिरने से बचाने के लिए धारण किया है। तुमने पालन करने के लिए प्रकाश पृथियों को धारण किया है। उन आकाश पृथियों के देवमा पुत्र है। ये यज्ञ कर्म करने वाली तथा महत्ववती हूँ । ।। इन्द्र से युद्ध करने जब देवता पले सय सभी देवताओं ने मिलकर तुम्हें हो नेता बनाया। तुमने मरुद्गण को युद्ध में सहायता दी थी । तुम धन्यन्त पराक्रमी हो ॥ ८ ॥ मधुर सम्पन इन्द्र ने आक्रमणकारी वृत्र को जब मारा सब उनके क्रोध और यज्ञ से मयनीत स्वर्ग भी सब रह गया ॥ ३॥ हे पराक्रमी इन्द्र ! खटाने तुम्हारे माँगांठ तथा सहयधार वाले यत्र को मनाया था। हे गोम पायी इन्द्र ! मी यत्र से तुमने पृथ को मारा था ॥ १२ ॥ वर्धान्यं विश्वे मरुतः सजोषाः पचच्छतं महिष इन्द्र तुभ्यम् । पूषा विष्णुस्त्रोणि सरांसि घावन्त्रहरणं मंदिरमंशुमस्मै ।। ११ या क्षोदो महि वृतं नदीनां परिष्ठितमस्ज ऊमिमपाम् । ताम्रामनु प्रवत इन्द्र पन्या प्रादयो नोचीरपसः समुद्रम् ॥ १२ एवा ता विश्वा चयांसमिन्द्र महामुग्रमजुयं सहोदाम । सुवीरं त्वा स्वायुधं मुक्समा ब्रह्म नव्यमवसे चवृत्यात् ॥ १३ स नो वाजाय श्रवस इपे च राये घेहि द्युमत इन्द्र विप्रान् । भरद्वाजे नृवत इन्द्र सूरीन्दिवि च स्मैधि पायें न इन्द्र ॥ १४ श्रया वाजं देवहितं सनेम मदेम शतहिमाः मुवीराः ॥ १५ । ३ है इन्द ! मल तुम्हें अपने स्त्री द्वारा बढ़ाते हैं और तुम्हारे पूपांता विष्णु सौ महिष प्रस्तुत करते हैं। सीन पात्रों को पूर्ण करने के सोम गिरता है । सोम पीकर इन्द्र वृत्र का नाश करने में समर्थ होते हैं ॥११॥ हे इन्द्र ! तुमने वृत्र द्वारा रोकी गई नदियों के जल को छोड़ा जिससे वे वहने लगीं । तुमने उन नदियों को नीचे मार्ग की ओर प्रवाहित कर जल की तरङ्गों को उन्मुक्त किया। फिर तुमने उस वेगवान् जल को समुद्र में मिलाया ॥१२॥ हे इन्द्र ! तुम ऐसे सभी कार्यों के कर्त्ता, श्रोजस्वी, अजर, वलों के देने वाले, ऐश्वर्यवान् एवं वज्रधारी हो । हमारा अभिनव स्तोत्र तुम्हें हमारी रक्षा के निमित्त बढ़ावे ॥ १३ ॥ हे इन्द्र ! हमारे निमित्त पुष्टि, बल, धन और ऐश्वर्य धारण करो । हम ज्ञानी हैं। हमको सेवकों से युक्त करो । तुम स्तुति करने वाले पुत्रों, पौत्रों को प्राप्त कराओ । हे इन्द्र ! आगामी दिनों में हमारी रक्षा करना ॥ १४ ॥ हम इस स्तुति को करते हुए इन्द्र से अन्न-लाभ करें । हम सुन्दर पुत्र-पौत्रों से युक्त हुए सौ वर्ष तक सुख भोग करें ॥१५॥ [३] १८ सूक्त (ऋषि-भरद्वाजो वार्हस्पत्यः । देवता --इन्द्रः । छन्द - त्रिष्टुप, पंक्तिः, उप्कि ) मुष्टुहि यो अभिभूत्योजा वन्वन्नवातः पुरुहूत इन्द्रः । अषाहमुग्रं सहमानमाभिर्गीभिर्वर्ध वृषभं चर्षणीनाम् ॥ १ स युध्मः सत्वा खजकृत्समद्बा तुविम्रक्षो नदनुमाँ ऋजीषी । वृहद्र शुश्च्यवनो मानुषीरणामेकः कृष्टीनामभवत्सहावा ॥ २ त्वं ह नु त्यददमायो दस्यु रेकः कृष्टीरवनोरार्याय । अस्ति स्विन्तु वीर्यं तत्त इन्द्र न स्विदस्ति तहतुथा वि वोचः ।।३ सदिद्धि ते तुविजातस्य मन्ये सहः सहिष्ठ तुरतस्तुरस्य । उग्रमुग्रस्य तवसस्तवीयोऽरध्रस्य रधतुरो बभूव ॥ ४ तन्नः प्रत्नं सख्यमस्तु युष्मे इत्था वदद्भिर्वलमङ्गिरोभिः । नच्युतच्युद्दस्मेषयन्तमृरणोः पुरो वि दुरो अस्य विश्वाः ॥ ५ ॥४ भरद्वाज ! तुम तेजस्वी, शत्रु नाशक, बहुतों द्वारा बुलाए गए इन्द्र स्तुति करो। तुम इन स्तोत्रों से मनुष्यों की कामनाओं को पूर्ण करने वाले
ग्रंथ त्वष्टा ते मह उम्र वज्रं महसभृष्टि वतच्छनाश्रिम् । निकाममरमगुमं येन नवन्तमहि सं पिगग्रजीपिन् ।। दस । दो हे इन्द्र ! तुमने अपनी प्रज्ञा कर्म और में गांधों को दुग्ध यो बनाया। गुमने गोधों के निकलने को शिलाओं को हटाया । गिरा से मिल कर गौधों को मुक्त कराया ॥ छः ॥ दे इन्द्र ! तुमने अपने कर्म से विस्तृत पृथियों को परिपूर्ण किया । तुम महानु हो । तुमने दिव्य लोक को गिरने से बचाने के लिए धारण किया है। तुमने पालन करने के लिए प्रकाश पृथियों को धारण किया है। उन आकाश पृथियों के देवमा पुत्र है। ये यज्ञ कर्म करने वाली तथा महत्ववती हूँ । ।। इन्द्र से युद्ध करने जब देवता पले सय सभी देवताओं ने मिलकर तुम्हें हो नेता बनाया। तुमने मरुद्गण को युद्ध में सहायता दी थी । तुम धन्यन्त पराक्रमी हो ॥ आठ ॥ मधुर सम्पन इन्द्र ने आक्रमणकारी वृत्र को जब मारा सब उनके क्रोध और यज्ञ से मयनीत स्वर्ग भी सब रह गया ॥ तीन॥ हे पराक्रमी इन्द्र ! खटाने तुम्हारे माँगांठ तथा सहयधार वाले यत्र को मनाया था। हे गोम पायी इन्द्र ! मी यत्र से तुमने पृथ को मारा था ॥ बारह ॥ वर्धान्यं विश्वे मरुतः सजोषाः पचच्छतं महिष इन्द्र तुभ्यम् । पूषा विष्णुस्त्रोणि सरांसि घावन्त्रहरणं मंदिरमंशुमस्मै ।। ग्यारह या क्षोदो महि वृतं नदीनां परिष्ठितमस्ज ऊमिमपाम् । ताम्रामनु प्रवत इन्द्र पन्या प्रादयो नोचीरपसः समुद्रम् ॥ बारह एवा ता विश्वा चयांसमिन्द्र महामुग्रमजुयं सहोदाम । सुवीरं त्वा स्वायुधं मुक्समा ब्रह्म नव्यमवसे चवृत्यात् ॥ तेरह स नो वाजाय श्रवस इपे च राये घेहि द्युमत इन्द्र विप्रान् । भरद्वाजे नृवत इन्द्र सूरीन्दिवि च स्मैधि पायें न इन्द्र ॥ चौदह श्रया वाजं देवहितं सनेम मदेम शतहिमाः मुवीराः ॥ पंद्रह । तीन है इन्द ! मल तुम्हें अपने स्त्री द्वारा बढ़ाते हैं और तुम्हारे पूपांता विष्णु सौ महिष प्रस्तुत करते हैं। सीन पात्रों को पूर्ण करने के सोम गिरता है । सोम पीकर इन्द्र वृत्र का नाश करने में समर्थ होते हैं ॥ग्यारह॥ हे इन्द्र ! तुमने वृत्र द्वारा रोकी गई नदियों के जल को छोड़ा जिससे वे वहने लगीं । तुमने उन नदियों को नीचे मार्ग की ओर प्रवाहित कर जल की तरङ्गों को उन्मुक्त किया। फिर तुमने उस वेगवान् जल को समुद्र में मिलाया ॥बारह॥ हे इन्द्र ! तुम ऐसे सभी कार्यों के कर्त्ता, श्रोजस्वी, अजर, वलों के देने वाले, ऐश्वर्यवान् एवं वज्रधारी हो । हमारा अभिनव स्तोत्र तुम्हें हमारी रक्षा के निमित्त बढ़ावे ॥ तेरह ॥ हे इन्द्र ! हमारे निमित्त पुष्टि, बल, धन और ऐश्वर्य धारण करो । हम ज्ञानी हैं। हमको सेवकों से युक्त करो । तुम स्तुति करने वाले पुत्रों, पौत्रों को प्राप्त कराओ । हे इन्द्र ! आगामी दिनों में हमारी रक्षा करना ॥ चौदह ॥ हम इस स्तुति को करते हुए इन्द्र से अन्न-लाभ करें । हम सुन्दर पुत्र-पौत्रों से युक्त हुए सौ वर्ष तक सुख भोग करें ॥पंद्रह॥ [तीन] अट्ठारह सूक्त मुष्टुहि यो अभिभूत्योजा वन्वन्नवातः पुरुहूत इन्द्रः । अषाहमुग्रं सहमानमाभिर्गीभिर्वर्ध वृषभं चर्षणीनाम् ॥ एक स युध्मः सत्वा खजकृत्समद्बा तुविम्रक्षो नदनुमाँ ऋजीषी । वृहद्र शुश्च्यवनो मानुषीरणामेकः कृष्टीनामभवत्सहावा ॥ दो त्वं ह नु त्यददमायो दस्यु रेकः कृष्टीरवनोरार्याय । अस्ति स्विन्तु वीर्यं तत्त इन्द्र न स्विदस्ति तहतुथा वि वोचः ।।तीन सदिद्धि ते तुविजातस्य मन्ये सहः सहिष्ठ तुरतस्तुरस्य । उग्रमुग्रस्य तवसस्तवीयोऽरध्रस्य रधतुरो बभूव ॥ चार तन्नः प्रत्नं सख्यमस्तु युष्मे इत्था वदद्भिर्वलमङ्गिरोभिः । नच्युतच्युद्दस्मेषयन्तमृरणोः पुरो वि दुरो अस्य विश्वाः ॥ पाँच ॥चार भरद्वाज ! तुम तेजस्वी, शत्रु नाशक, बहुतों द्वारा बुलाए गए इन्द्र स्तुति करो। तुम इन स्तोत्रों से मनुष्यों की कामनाओं को पूर्ण करने वाले
- 22 min ago बॉलीवुड को लेकर एक्ट्रेस ने दिया विवादित बयान, बोलीं- अगर बॉलीवुड में लांच हुई होती तो कपड़े उतरवा देते...' - 54 min ago जब बिग बी के साथ रानी मुखर्जी ने दे दिया था लिप लॉक सीन, बोलीं- 'अमिताभ अंकल के साथ किसिंग सीन देना बहुत...' Don't Miss! टीवी की दुनिया में बोल्डनेस की कमी नहीं है। ऐसे में कई ग्लैमरस एक्ट्रेसेस के बीच रश्मि देसाई ने बिग बॉस से बाहर निकलने के बाद अपनी अलग पहचान बना ली है। रश्मि देसाई बीते एक साल से अधिक अपने वजन और लुक के साथ फिटनेस पर काफी काम किया है। जिसका नजारा रश्मि देसाई हर समय अपने इंस्टाग्राम के जरिए देती रहती हैं। सोशल मीडिया पर एक्टिव रश्मि देसाई ने अपना अब तक का सबसे बोल्ड फोटोशूट दिखाया है। रश्मि देसाई के इस लेटेस्ट फोटोशूट की तस्वीरों में वह पानी में भीगते हुए फोटोशूट करवाया है। जो कि फैंस का सबसे अधिक पसंद किया गया फोटोशूट बन गया है। इस फोटोशूट में पानी की बीच रश्मि देसाई सेक्सी पोज देते हुए नजर आ रही हैं। इस फोटोशूट में रश्मि देसाई शॅावर के नीचे खड़ी हुई हैं। पानी में भीगते हुए रश्मि देसाई कातिलाना दिख रही हैं। ब्लैक रंग के ड्रेस में रश्मि देसाई के इस लेटेस्ट लुक को सबसे अधिक पसंद किया जा रहा है। रश्मि देसाई के इस फोटो को एक लाख से अधिक बार देखा गया है। रश्मि देसाई ने बैक टू बैक कई तस्वीरें शेयर की हैं लेकिन इस बीच उनकी ये लेटेस्ट तस्वीर को सबसे अधिक की जा रही है। कई बार रश्मि देसाई अपनी तस्वीरों के कारण ट्रोल भी हो चुकी हैं। इसे लेकर रश्मि देसाई ने हाल ही में बात करते हुए कहा था कि ट्रोल को लेकर उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि उन्हें अपने फैंस से ढेर सारा प्यार मिलता है। रश्मि देसाई ने कहा कि उनका फोकस अपने फैंस पर रहता है ना कि ट्रोलर को लेकर। बिग बॅास 13 से बाहर निकलने के बाद रश्मि देसाई नागिन 4 में नजर आयी थीं। हाल ही में रश्मि देसाई की वेब सीरीज तंदूर भी रिलीज हुई। रश्मि देसाई की लोकप्रियता बिग बॅास 13 के बाद इतनी अधिक बढ़ी है कि वो टीवी की सबसे अधिक फीस लेने वालीं एक्ट्रेसेस में से एक हैं। रश्मि देसाई एक एपिसोड की फीस 1 लाख के करीब लेती हैं। Viral Video: बंद कमरे में लड़कियों ने की ऐसी हरकत, वीडियो देख भड़के यूजर्स, बोले- 'पढ़ने लिखने की उम्र में...'
- बाईस मिनट ago बॉलीवुड को लेकर एक्ट्रेस ने दिया विवादित बयान, बोलीं- अगर बॉलीवुड में लांच हुई होती तो कपड़े उतरवा देते...' - चौवन मिनट ago जब बिग बी के साथ रानी मुखर्जी ने दे दिया था लिप लॉक सीन, बोलीं- 'अमिताभ अंकल के साथ किसिंग सीन देना बहुत...' Don't Miss! टीवी की दुनिया में बोल्डनेस की कमी नहीं है। ऐसे में कई ग्लैमरस एक्ट्रेसेस के बीच रश्मि देसाई ने बिग बॉस से बाहर निकलने के बाद अपनी अलग पहचान बना ली है। रश्मि देसाई बीते एक साल से अधिक अपने वजन और लुक के साथ फिटनेस पर काफी काम किया है। जिसका नजारा रश्मि देसाई हर समय अपने इंस्टाग्राम के जरिए देती रहती हैं। सोशल मीडिया पर एक्टिव रश्मि देसाई ने अपना अब तक का सबसे बोल्ड फोटोशूट दिखाया है। रश्मि देसाई के इस लेटेस्ट फोटोशूट की तस्वीरों में वह पानी में भीगते हुए फोटोशूट करवाया है। जो कि फैंस का सबसे अधिक पसंद किया गया फोटोशूट बन गया है। इस फोटोशूट में पानी की बीच रश्मि देसाई सेक्सी पोज देते हुए नजर आ रही हैं। इस फोटोशूट में रश्मि देसाई शॅावर के नीचे खड़ी हुई हैं। पानी में भीगते हुए रश्मि देसाई कातिलाना दिख रही हैं। ब्लैक रंग के ड्रेस में रश्मि देसाई के इस लेटेस्ट लुक को सबसे अधिक पसंद किया जा रहा है। रश्मि देसाई के इस फोटो को एक लाख से अधिक बार देखा गया है। रश्मि देसाई ने बैक टू बैक कई तस्वीरें शेयर की हैं लेकिन इस बीच उनकी ये लेटेस्ट तस्वीर को सबसे अधिक की जा रही है। कई बार रश्मि देसाई अपनी तस्वीरों के कारण ट्रोल भी हो चुकी हैं। इसे लेकर रश्मि देसाई ने हाल ही में बात करते हुए कहा था कि ट्रोल को लेकर उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि उन्हें अपने फैंस से ढेर सारा प्यार मिलता है। रश्मि देसाई ने कहा कि उनका फोकस अपने फैंस पर रहता है ना कि ट्रोलर को लेकर। बिग बॅास तेरह से बाहर निकलने के बाद रश्मि देसाई नागिन चार में नजर आयी थीं। हाल ही में रश्मि देसाई की वेब सीरीज तंदूर भी रिलीज हुई। रश्मि देसाई की लोकप्रियता बिग बॅास तेरह के बाद इतनी अधिक बढ़ी है कि वो टीवी की सबसे अधिक फीस लेने वालीं एक्ट्रेसेस में से एक हैं। रश्मि देसाई एक एपिसोड की फीस एक लाख के करीब लेती हैं। Viral Video: बंद कमरे में लड़कियों ने की ऐसी हरकत, वीडियो देख भड़के यूजर्स, बोले- 'पढ़ने लिखने की उम्र में...'
गृह मंत्रालय (एमएचए) ने कश्मीर से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 72 कंपनियों को वापस लेने का निर्णय लिया है। देश भर में नागरिकता कानून के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को लेकर बड़ा फैसला लिया है। गृह मंत्रालय (एमएचए) ने कश्मीर से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 72 कंपनियों को वापस लेने का निर्णय लिया है। इस साल कश्मीर को विशेष प्रावधान देने वाले संविधान की अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद सरकार ने वहां भारी मात्रा में सीआरपीएफ व अन्य सुरक्षा बलों को तैनात किया था। आपको बता दें कि वापस आने वाली कंपनियों में जम्मू-कश्मीर के तत्काल प्रभाव से CRPFकी 24, BSF की 12, ITBP की 12, CISF की 12 और SSB की 12 कंपनियों को वापस बुलाया गया है। बता दें कि जुलाई के अंत में सरकार ने जम्मू-कश्मीर में सीआरपीएफ की 50 कंपनियां, बीएसएफ की 10 कंपनियां, सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की 30 और आईटीबीपी की 10 कंपनियां तैनात करने का निर्णय लिया था। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 25 जुलाई को तत्काल आधार पर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 100 कंपनियां तैनात करने का आदेश दिया था।
गृह मंत्रालय ने कश्मीर से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की बहत्तर कंपनियों को वापस लेने का निर्णय लिया है। देश भर में नागरिकता कानून के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को लेकर बड़ा फैसला लिया है। गृह मंत्रालय ने कश्मीर से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की बहत्तर कंपनियों को वापस लेने का निर्णय लिया है। इस साल कश्मीर को विशेष प्रावधान देने वाले संविधान की अनुच्छेद तीन सौ सत्तर को हटाए जाने के बाद सरकार ने वहां भारी मात्रा में सीआरपीएफ व अन्य सुरक्षा बलों को तैनात किया था। आपको बता दें कि वापस आने वाली कंपनियों में जम्मू-कश्मीर के तत्काल प्रभाव से CRPFकी चौबीस, BSF की बारह, ITBP की बारह, CISF की बारह और SSB की बारह कंपनियों को वापस बुलाया गया है। बता दें कि जुलाई के अंत में सरकार ने जम्मू-कश्मीर में सीआरपीएफ की पचास कंपनियां, बीएसएफ की दस कंपनियां, सशस्त्र सीमा बल की तीस और आईटीबीपी की दस कंपनियां तैनात करने का निर्णय लिया था। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पच्चीस जुलाई को तत्काल आधार पर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की एक सौ कंपनियां तैनात करने का आदेश दिया था।
व्यक्तित्य : सामाजिक घटक के रूप में हमने अपने प्रति कुछ अभिवृत्तियों को सीखा है ( जो वैध या अवै कुछ नी हो सकती हैं ) और अन्य व्यक्ति उतका अनाधिगम कराना चाहते हैं। दूसरा यह है कि अन्य लोग हमारी प्रशंसा या आलोचना द्वारा हमें यह बताना चाहते हैं कि हम अपने आत्ममूल्यांकन में गहन हैं। अन्य व्यक्तियों की यह अभिवृत्ति कि हमें वे हम से ज्यादा भली प्रकार जानते हैं, हमारे भीतर किसी मात्रा में प्रतिरक्षका उत्पन्न करती है। यह हमारी सुरक्षा की भावना के प्रति खतरा बन जाती है और हमारे इस भाव को हिला देती है कि हम स्वयं अपने मालिक हैं और हम अच्छी तरह जानते हैं कि हम क्या हैं और क्या नहीं हैं । केवल विश्वास को खतरा नहीं होता क्योंकि यह एक अधिक व्यापक प्रत्यकीकरण प्रणाली का अंश होता है। उदाहरण के लिए जो व्यक्ति यह मानता है कि मेधा का अभाव है, ऐसे प्रत्यक्ष को उस समय तक बदल नहीं सकता जब तक ि वह अपने तथा संसार के विषय में अपने संज्ञान में व्यापक परिवर्तन नलाए ļ यह कोई सरल कार्य नहीं है, और अधिकांश व्यक्ति ऐसा करने में हिचकिचाते हैं। स्व से विचलन (Flight from self ) --स्व सम्प्रत्यय में विकृति विखा का कारण भी है तथा प्रभाव भी । धनको या खतरे के प्रत्यक्षीकरण से धमकी के साधन के प्रति विरोधी व्यवहार उत्पन्न होता है जैसे कोव, आक्रामकता या कारण पे परिहार - जैसा कि भय और चिन्ना की दशाओं में होता जटिल नगरीकन समाजों में धमकी का कारण दूरस्थ अप्रत्यक्ष या अस्पष्ट होता है और इस परिग्राम चिन्ता के रूप में हो सकता है। जिन परिस्थितियों को तत्काल समझना कठिन होता है उनमें "निरर्थकता" उच्च मात्रा में विद्यमान होती है, और वे चिता उत्पत्तिका प्राथमिक साधन होती हैं । चिन्ता बड़ा ही कष्टदायी संवेग है, अतः चिन्ता उत्पन्न करने वाली परिस्थि तियों से दूर रहना चाहते हैं। वहं प्रतिरक्षायें चिन्ता को घटाती या समाप्त करती हैं। दूसरों के साथ हमारे सम्बन्ध चिन्ता के प्राथमिक साधन हैं क्योंकि अन्य लोगों के प्रति मुआमलात में अटता होती है और अंशतः इसलिए भी हमारे सामाजिक निष्पादनों के सहारे अतिरिक्त अन्य लोग भी निरन्तर मूल्यांकन करने रहते हैं इस अस्पष्टता अनुकता ( Unpredictability ) और चिन्ता को बढ़ाने में प्रयुक्त उपायों में यह आश्वस्त होता आवश्यक है कि हमारा व्यवहार उतना तार्किन तथा संगत है जितना कि हो सकता है। इसी प्रकार के विचार फिलिप जिम्बार्डो ( 1959 ) ने व्यक्त किये हैं । "व्यक्ति के विषय में समाज के एक सामान्य सदस्य के संबोधीकरण के लिए संगति एक आत्म आरोपित (Self imposed ) नियम बन जाता है, जो दूसरों की प्रत्याशा के अनुरूर तार्किक निर्णय एवं व्यवहार के द्वारा अपने पर्यावरण को नियंत्रित करता है ।" (... Consistency becomes a self imposed princi. ple in order for the individual to maintain a conception of him. Belf as a normal member of society who, in behaving as others expect him to, gain their social recognition as rational decision environment. maker, whose dicisions help him to control his Zimbardo, 1969 ). जिम्बार्डो यह भी कहता है कि तार्किक तथा संगत व्यवहार के द्वारा व्यक्ति समाज के एक सदस्य के रूप में अपने उत्तरदायित्व को ग्रहण करता है। वचनवद्धता का ऐसा निर्णय, जिमवार्डों के अनुसार व्यक्ति को व्यक्तिता प्रदान करता है। व्यक्तितर (Individuation) की ऐसी प्रक्रिया के द्वारा व्यक्ति अपने को उन सबके विरोध में खड़ा करता है जो व्यक्ति के रूप में कार्य करने से इंकार करते हैं और इस प्रकार वह कबीले के बंधनों से अपने को पृथक् अभिवेदीकृत समूह कियाओं से जोड़ता है । ( Zimbardo notes further that in behaving rationally and consistently, the individual assumes responsibility for himself as a mamber of society. This decisions to make such a commitment, according to Zimbardo, individuates the individual who makes it. Through such a process of individuation, a person "sets himself in opposition to all who refuse to act individually, and thus separates himself from tribal ties to undifferentiated ( safer) group action." इसकी विरोधी प्रक्रिया व्यक्ति रहितता ( deindividuation ) कही जाती है । यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति, व्यक्ति के रूप में अपने परिचय या पहचान का कुछ अंश खो देता है और आवेगों पर नियंत्रण में अपेक्षाकृत कम सक्षम हो जाता है। उसके सामान्य नियंत्रण जो आत्म निरीक्षण और मूल्यांकन पर आधारित होते हैं, अब लागू नहीं होते या कार्य नहीं करते । फलस्वरूप वह समाजविरोधी, स्वार्थी, लोभी, शक्ति चाह, विनाशकारी व्यवहार करने लगता है। दूसरी ओर उसमें तीव्र प्रसन्नता या दुख की भावना होती है । व्यक्ति रहितता ( Deindividuation ) के द्वारा व्यक्ति अपनी क्रियाओं के लिए उत्तरदायित्व भाव से मुक्त कर लेता है। ऐसा करने का कारण यह है उसके जीवन के प्रतिवल इतने बढ़ गए हैं कि तार्किक और उत्तरदायी होने की लागत इसके पुरस्कार से कहीं अधिक है। यह दशा प्रायः उस समय देखी जाती है जब व्यक्ति अपरिचित पर्यावरण ( घर से दूर यात्रा में ) या किसी भीड़ में शामिल होता है ।
व्यक्तित्य : सामाजिक घटक के रूप में हमने अपने प्रति कुछ अभिवृत्तियों को सीखा है और अन्य व्यक्ति उतका अनाधिगम कराना चाहते हैं। दूसरा यह है कि अन्य लोग हमारी प्रशंसा या आलोचना द्वारा हमें यह बताना चाहते हैं कि हम अपने आत्ममूल्यांकन में गहन हैं। अन्य व्यक्तियों की यह अभिवृत्ति कि हमें वे हम से ज्यादा भली प्रकार जानते हैं, हमारे भीतर किसी मात्रा में प्रतिरक्षका उत्पन्न करती है। यह हमारी सुरक्षा की भावना के प्रति खतरा बन जाती है और हमारे इस भाव को हिला देती है कि हम स्वयं अपने मालिक हैं और हम अच्छी तरह जानते हैं कि हम क्या हैं और क्या नहीं हैं । केवल विश्वास को खतरा नहीं होता क्योंकि यह एक अधिक व्यापक प्रत्यकीकरण प्रणाली का अंश होता है। उदाहरण के लिए जो व्यक्ति यह मानता है कि मेधा का अभाव है, ऐसे प्रत्यक्ष को उस समय तक बदल नहीं सकता जब तक ि वह अपने तथा संसार के विषय में अपने संज्ञान में व्यापक परिवर्तन नलाए ļ यह कोई सरल कार्य नहीं है, और अधिकांश व्यक्ति ऐसा करने में हिचकिचाते हैं। स्व से विचलन --स्व सम्प्रत्यय में विकृति विखा का कारण भी है तथा प्रभाव भी । धनको या खतरे के प्रत्यक्षीकरण से धमकी के साधन के प्रति विरोधी व्यवहार उत्पन्न होता है जैसे कोव, आक्रामकता या कारण पे परिहार - जैसा कि भय और चिन्ना की दशाओं में होता जटिल नगरीकन समाजों में धमकी का कारण दूरस्थ अप्रत्यक्ष या अस्पष्ट होता है और इस परिग्राम चिन्ता के रूप में हो सकता है। जिन परिस्थितियों को तत्काल समझना कठिन होता है उनमें "निरर्थकता" उच्च मात्रा में विद्यमान होती है, और वे चिता उत्पत्तिका प्राथमिक साधन होती हैं । चिन्ता बड़ा ही कष्टदायी संवेग है, अतः चिन्ता उत्पन्न करने वाली परिस्थि तियों से दूर रहना चाहते हैं। वहं प्रतिरक्षायें चिन्ता को घटाती या समाप्त करती हैं। दूसरों के साथ हमारे सम्बन्ध चिन्ता के प्राथमिक साधन हैं क्योंकि अन्य लोगों के प्रति मुआमलात में अटता होती है और अंशतः इसलिए भी हमारे सामाजिक निष्पादनों के सहारे अतिरिक्त अन्य लोग भी निरन्तर मूल्यांकन करने रहते हैं इस अस्पष्टता अनुकता और चिन्ता को बढ़ाने में प्रयुक्त उपायों में यह आश्वस्त होता आवश्यक है कि हमारा व्यवहार उतना तार्किन तथा संगत है जितना कि हो सकता है। इसी प्रकार के विचार फिलिप जिम्बार्डो ने व्यक्त किये हैं । "व्यक्ति के विषय में समाज के एक सामान्य सदस्य के संबोधीकरण के लिए संगति एक आत्म आरोपित नियम बन जाता है, जो दूसरों की प्रत्याशा के अनुरूर तार्किक निर्णय एवं व्यवहार के द्वारा अपने पर्यावरण को नियंत्रित करता है ।" . जिम्बार्डो यह भी कहता है कि तार्किक तथा संगत व्यवहार के द्वारा व्यक्ति समाज के एक सदस्य के रूप में अपने उत्तरदायित्व को ग्रहण करता है। वचनवद्धता का ऐसा निर्णय, जिमवार्डों के अनुसार व्यक्ति को व्यक्तिता प्रदान करता है। व्यक्तितर की ऐसी प्रक्रिया के द्वारा व्यक्ति अपने को उन सबके विरोध में खड़ा करता है जो व्यक्ति के रूप में कार्य करने से इंकार करते हैं और इस प्रकार वह कबीले के बंधनों से अपने को पृथक् अभिवेदीकृत समूह कियाओं से जोड़ता है । group action." इसकी विरोधी प्रक्रिया व्यक्ति रहितता कही जाती है । यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति, व्यक्ति के रूप में अपने परिचय या पहचान का कुछ अंश खो देता है और आवेगों पर नियंत्रण में अपेक्षाकृत कम सक्षम हो जाता है। उसके सामान्य नियंत्रण जो आत्म निरीक्षण और मूल्यांकन पर आधारित होते हैं, अब लागू नहीं होते या कार्य नहीं करते । फलस्वरूप वह समाजविरोधी, स्वार्थी, लोभी, शक्ति चाह, विनाशकारी व्यवहार करने लगता है। दूसरी ओर उसमें तीव्र प्रसन्नता या दुख की भावना होती है । व्यक्ति रहितता के द्वारा व्यक्ति अपनी क्रियाओं के लिए उत्तरदायित्व भाव से मुक्त कर लेता है। ऐसा करने का कारण यह है उसके जीवन के प्रतिवल इतने बढ़ गए हैं कि तार्किक और उत्तरदायी होने की लागत इसके पुरस्कार से कहीं अधिक है। यह दशा प्रायः उस समय देखी जाती है जब व्यक्ति अपरिचित पर्यावरण या किसी भीड़ में शामिल होता है ।
मुंबईः फिल्म राजी कल रिलीज हो चुकी है और इस फिल्म ने पहले दिन ही अच्छी शुरूआत की है. राजी को अच्छे कलेक्शन के साथ रिव्यू भी बेहतरीन मिले हैं. इस फिल्म को डायरेक्ट मेघना गुलजार ने किया है. आलिया भट्ट लीड रोल में हैं. राजी का बजट 40 करोड़ है. आलिया के साथ विकी कौशल, रजत कपूर और जयदीप अहलावत अहम किरदारों में हैं. ये फिल्म हरिंदर सिक्का की नॉवेल 'कॉलिंग सहमत' पर आधारित है. यह फिल्म एक स्पाइ ड्रामा है, जिसमें आलिया एक ऐसी लड़की का किरदार निभा रही हैं जो पाकिस्तान में रहकर भारत के लिए जासूसी करती है. 'राजी' ने पहले दिन 7. 53 करोड़ रुपए की कमाई की है. शनिवार और रविवार को इस फिल्म की कमाई और भी बढ़ सकती है. वहीं बात करें आलिया की एक्टिंग की तो बाकी फिल्मों की तरह ही इस फिल्म में भी उन्होंने जबरदस्त एक्टिंग की है. इन दिनों आलिया और रणबीर कपूर के अफेयर की खबरें वायरल हो रही हैं. दोनों अपकमिंग फिल्म ब्रहमास्त्र में पहली बार साथ नजर आने वाले हैं.
मुंबईः फिल्म राजी कल रिलीज हो चुकी है और इस फिल्म ने पहले दिन ही अच्छी शुरूआत की है. राजी को अच्छे कलेक्शन के साथ रिव्यू भी बेहतरीन मिले हैं. इस फिल्म को डायरेक्ट मेघना गुलजार ने किया है. आलिया भट्ट लीड रोल में हैं. राजी का बजट चालीस करोड़ है. आलिया के साथ विकी कौशल, रजत कपूर और जयदीप अहलावत अहम किरदारों में हैं. ये फिल्म हरिंदर सिक्का की नॉवेल 'कॉलिंग सहमत' पर आधारित है. यह फिल्म एक स्पाइ ड्रामा है, जिसमें आलिया एक ऐसी लड़की का किरदार निभा रही हैं जो पाकिस्तान में रहकर भारत के लिए जासूसी करती है. 'राजी' ने पहले दिन सात. तिरेपन करोड़ रुपए की कमाई की है. शनिवार और रविवार को इस फिल्म की कमाई और भी बढ़ सकती है. वहीं बात करें आलिया की एक्टिंग की तो बाकी फिल्मों की तरह ही इस फिल्म में भी उन्होंने जबरदस्त एक्टिंग की है. इन दिनों आलिया और रणबीर कपूर के अफेयर की खबरें वायरल हो रही हैं. दोनों अपकमिंग फिल्म ब्रहमास्त्र में पहली बार साथ नजर आने वाले हैं.
संयुक्त अरब अमीरात के फ़ेडरल अथॉरिटी फॉर आइडेंटिटी, सिटिजनशिप, कस्टम्स एंड पोर्ट्स सिक्योरिटी (ICP) ने एक नयी 'advanced services system' की शुरुआत करी है. जिससे वीज़ा से जुड़ी प्रक्रियाओं में लोगों को बहुत हद तक सुविधा मिलने वाली है. UAE अब अपने पासपोर्ट को अपडेट करने वाली है और इस updates के तहत बहुत सारी सुविधाओं में बदलाव होंगी। अमीरात के new generation passports, updated visas का trial और entry permit scheme की सभी सर्विस अगले महीने के 3 अक्टूबर से लागू होगी. बता दे कि वीज़ा सुधारों में expanded Golden Visa scheme, पांच साल का ग्रीन रेजिडेंसी और नौकरी चाहने वालों के लिए एक नया एंट्री वीज़ा मिलना शामिल हैं. ICP ने 30 दिनों से छह महीने तक रेजिडेंस वीजा की समाप्ति या कैंसिल होने के बाद देश में प्रवासी के लिए अवधि बढ़ाने की संशोधित करने की भी घोषणा करी है. अधिकारियों ने कहा कि Investors, बिज़नेस मैन, निवासी, विजिटर या देश में नौकरी चाहने वाले अपने आवेदन ICA की वेबसाइट और स्मार्ट एप्लिकेशन या Customer Happy Centre के ज़रिये जमा कर सकते हैं. वहीँ इन सब के बीच ICP के महानिदेशक मेजर जनरल सुहैल सईद अल खली ने UAE में विदेशियों के प्रवेश और निवास के अच्छे बदलाव के चलते नए नियमों को लाने पर यूएई कैबिनेट की सराहना करी है. नए यूएई पासपोर्ट और नए नियमों को जारी करना, जिसमें लाभ, सुविधाएं और वीजा की नई और विविध श्रेणियां शामिल हैं. बता दे कि वीज़ा के नई advanced services system में सुव्यवस्थित प्रक्रियाएं, नियंत्रण और कई सारी नई सुविधाएं शामिल हैं. बता दे कि नया अमीराती पासपोर्ट नागरिकों को सुरक्षा देगा और ये 5 सितंबर को लॉन्च किया गया. नए पासपोर्ट की मदद से यह राष्ट्रीय पहचान बढ़ाने, पासपोर्ट और पहचान पत्र जारी करने और ग्राहकों को सक्रिय सेवाएं देने में सक्षम होगा.
संयुक्त अरब अमीरात के फ़ेडरल अथॉरिटी फॉर आइडेंटिटी, सिटिजनशिप, कस्टम्स एंड पोर्ट्स सिक्योरिटी ने एक नयी 'advanced services system' की शुरुआत करी है. जिससे वीज़ा से जुड़ी प्रक्रियाओं में लोगों को बहुत हद तक सुविधा मिलने वाली है. UAE अब अपने पासपोर्ट को अपडेट करने वाली है और इस updates के तहत बहुत सारी सुविधाओं में बदलाव होंगी। अमीरात के new generation passports, updated visas का trial और entry permit scheme की सभी सर्विस अगले महीने के तीन अक्टूबर से लागू होगी. बता दे कि वीज़ा सुधारों में expanded Golden Visa scheme, पांच साल का ग्रीन रेजिडेंसी और नौकरी चाहने वालों के लिए एक नया एंट्री वीज़ा मिलना शामिल हैं. ICP ने तीस दिनों से छह महीने तक रेजिडेंस वीजा की समाप्ति या कैंसिल होने के बाद देश में प्रवासी के लिए अवधि बढ़ाने की संशोधित करने की भी घोषणा करी है. अधिकारियों ने कहा कि Investors, बिज़नेस मैन, निवासी, विजिटर या देश में नौकरी चाहने वाले अपने आवेदन ICA की वेबसाइट और स्मार्ट एप्लिकेशन या Customer Happy Centre के ज़रिये जमा कर सकते हैं. वहीँ इन सब के बीच ICP के महानिदेशक मेजर जनरल सुहैल सईद अल खली ने UAE में विदेशियों के प्रवेश और निवास के अच्छे बदलाव के चलते नए नियमों को लाने पर यूएई कैबिनेट की सराहना करी है. नए यूएई पासपोर्ट और नए नियमों को जारी करना, जिसमें लाभ, सुविधाएं और वीजा की नई और विविध श्रेणियां शामिल हैं. बता दे कि वीज़ा के नई advanced services system में सुव्यवस्थित प्रक्रियाएं, नियंत्रण और कई सारी नई सुविधाएं शामिल हैं. बता दे कि नया अमीराती पासपोर्ट नागरिकों को सुरक्षा देगा और ये पाँच सितंबर को लॉन्च किया गया. नए पासपोर्ट की मदद से यह राष्ट्रीय पहचान बढ़ाने, पासपोर्ट और पहचान पत्र जारी करने और ग्राहकों को सक्रिय सेवाएं देने में सक्षम होगा.
औरैया। जनपद के सदर क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक रमेश दिवाकर की कोरोना संक्रमण से हुई मृत्यु का सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाये उनके पिता की भी आज पुत्र वियोग में मृत्यु हो गई। आधिकारिक सूत्रों ने शनिवार को यहां यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमण से पीड़ित सदर विधायक रमेश दिवाकर की शुक्रवार की सुबह मेडीकल कालेज मेरठ में मृत्यु हो जाने की खबर से आहत एवं सदमें में चले गए उनके पिता राम स्वरूप दिवाकर (89) भी आज पुत्र वियोग में नाश्वर शरीर का त्याग कर स्वर्गलोक वासी हो गये। उन्होंने शहर में आनेपुर रोड़ स्थित फर्म हाउस में ली अंतिम सांस। विधायक दिवाकर के बाद उनके पिता की मृत्यु पर दिवाकर परिवार पर 24 घंटे में दूसरी मौत का दुःख सहन करना पड़ रहा है। जानकारी होते ही शहर में शोक की लहर दौड़ गई।
औरैया। जनपद के सदर क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के विधायक रमेश दिवाकर की कोरोना संक्रमण से हुई मृत्यु का सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाये उनके पिता की भी आज पुत्र वियोग में मृत्यु हो गई। आधिकारिक सूत्रों ने शनिवार को यहां यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमण से पीड़ित सदर विधायक रमेश दिवाकर की शुक्रवार की सुबह मेडीकल कालेज मेरठ में मृत्यु हो जाने की खबर से आहत एवं सदमें में चले गए उनके पिता राम स्वरूप दिवाकर भी आज पुत्र वियोग में नाश्वर शरीर का त्याग कर स्वर्गलोक वासी हो गये। उन्होंने शहर में आनेपुर रोड़ स्थित फर्म हाउस में ली अंतिम सांस। विधायक दिवाकर के बाद उनके पिता की मृत्यु पर दिवाकर परिवार पर चौबीस घंटाटे में दूसरी मौत का दुःख सहन करना पड़ रहा है। जानकारी होते ही शहर में शोक की लहर दौड़ गई।
राजनांदगांव । शासकीय दिग्विजय स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय के हिंदी विभाग में कल्याण स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भिलाई के प्राध्यापक डॉ. सुधीर शर्मा ने प्रेरक अतिथि व्याख्यान देते हुए कहा कि सतत प्रयोग और सृजन से ही छत्तीसगढ़ी भाषा का ज्ञान और मान बढ़ेगा। विभागाध्यक्ष डॉ. शंकर मुनि राय ने व्याख्यान पर प्रस्ताविक उदगार व्यक्त करते हुए कहा कि विद्यार्थी इस रचनात्मक अवसर का पूरा लाभ उठाएं । आयोजन का संयोजन करते हुए डॉ. चंद्रकुमार जैन ने भाव पूर्ण शब्दों में अतिथि वक्ता डॉ. सुधीर शर्मा की उपलब्धियों एवं सेवाओं का सरस परिचय दिया । हिंदी विभाग के श्री राम आशीष तिवारी, डॉ. नीलम तिवारी,डॉ. स्वाति दुबे तथा डॉ. गायत्री साहू सहित बड़ी संख्या में उपस्थित विद्यार्थियों ने डॉ. शर्मा का स्वागत किया । इस अवसर पर डॉ. सुधीर शर्मा ने छत्तीसगढ़ी भाषा और साहित्य के अतीत और वर्तमान की मर्मस्पर्शी चर्चा की । उन्होंने छत्तीसगढ़ी में कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक जैसी विधाओं के महत्वपूर्ण लेखन के साथ-साथ छत्तीसगढ़ी भाषा की मिठास तथा उसके निरालेपन की जानकारी दी । डॉ शर्मा ने लगभग सातवीं सदी से प्रारंभ कर आज तक के छत्तीसगढ़ी साहित्य सृजन के प्रमुख पड़ावों का सारभूत उल्लेख किया । अतिथि वक्ता डॉ शर्मा ने छत्तीसगढ़ में धर्मदास से लेकर पंडित सुंदरलाल शर्मा तक और उससे आगे की रचनाधर्मिता को भी कई ज़िक्र करते हुए उनके योगदान के आलोक में समझाया । छत्तीसगढ़ी और उसमें लेखन को संभावनापूर्ण बताते हुए कहा कि उन्होंने कहा कि छत्तीससगढ़ की उर्वर भूमि हिंदी के भी महान साहित्यकारों की कर्मभूमि है और रही है । उन्होंने बताया कि कामताप्रसाद गुरु का प्रथम हिंदी व्याकरण भी छत्तीसगढ़ में रहकर रच गया । उन्होंने प्रख्यात बहुभाषाविद डॉ रमेशचंद्र मेहरोत्रा द्वारा निरूपित छत्तीसगढ़ी के छत्तीस रूपों के साथ उनके योगदान पर चर्चा की । डॉ. शर्मा ने विद्यार्थियों के प्रश्नों के उत्तर छत्तीसगढ़ी में दिए। अंत में डॉ चंद्रकुमार जैन ने विद्वान अतिथि वक्ता डॉ सुधीर शर्मा के वक्तव्य को अपनी भाषा के माध्यम से छत्तीसगढ़ महतारी तथा साहित्य की सेवा का एक सारस्वत अवसर निरूपित किया। आभार के साथ गरिमामय आयोजन संपन्न हुआ।
राजनांदगांव । शासकीय दिग्विजय स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय के हिंदी विभाग में कल्याण स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भिलाई के प्राध्यापक डॉ. सुधीर शर्मा ने प्रेरक अतिथि व्याख्यान देते हुए कहा कि सतत प्रयोग और सृजन से ही छत्तीसगढ़ी भाषा का ज्ञान और मान बढ़ेगा। विभागाध्यक्ष डॉ. शंकर मुनि राय ने व्याख्यान पर प्रस्ताविक उदगार व्यक्त करते हुए कहा कि विद्यार्थी इस रचनात्मक अवसर का पूरा लाभ उठाएं । आयोजन का संयोजन करते हुए डॉ. चंद्रकुमार जैन ने भाव पूर्ण शब्दों में अतिथि वक्ता डॉ. सुधीर शर्मा की उपलब्धियों एवं सेवाओं का सरस परिचय दिया । हिंदी विभाग के श्री राम आशीष तिवारी, डॉ. नीलम तिवारी,डॉ. स्वाति दुबे तथा डॉ. गायत्री साहू सहित बड़ी संख्या में उपस्थित विद्यार्थियों ने डॉ. शर्मा का स्वागत किया । इस अवसर पर डॉ. सुधीर शर्मा ने छत्तीसगढ़ी भाषा और साहित्य के अतीत और वर्तमान की मर्मस्पर्शी चर्चा की । उन्होंने छत्तीसगढ़ी में कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक जैसी विधाओं के महत्वपूर्ण लेखन के साथ-साथ छत्तीसगढ़ी भाषा की मिठास तथा उसके निरालेपन की जानकारी दी । डॉ शर्मा ने लगभग सातवीं सदी से प्रारंभ कर आज तक के छत्तीसगढ़ी साहित्य सृजन के प्रमुख पड़ावों का सारभूत उल्लेख किया । अतिथि वक्ता डॉ शर्मा ने छत्तीसगढ़ में धर्मदास से लेकर पंडित सुंदरलाल शर्मा तक और उससे आगे की रचनाधर्मिता को भी कई ज़िक्र करते हुए उनके योगदान के आलोक में समझाया । छत्तीसगढ़ी और उसमें लेखन को संभावनापूर्ण बताते हुए कहा कि उन्होंने कहा कि छत्तीससगढ़ की उर्वर भूमि हिंदी के भी महान साहित्यकारों की कर्मभूमि है और रही है । उन्होंने बताया कि कामताप्रसाद गुरु का प्रथम हिंदी व्याकरण भी छत्तीसगढ़ में रहकर रच गया । उन्होंने प्रख्यात बहुभाषाविद डॉ रमेशचंद्र मेहरोत्रा द्वारा निरूपित छत्तीसगढ़ी के छत्तीस रूपों के साथ उनके योगदान पर चर्चा की । डॉ. शर्मा ने विद्यार्थियों के प्रश्नों के उत्तर छत्तीसगढ़ी में दिए। अंत में डॉ चंद्रकुमार जैन ने विद्वान अतिथि वक्ता डॉ सुधीर शर्मा के वक्तव्य को अपनी भाषा के माध्यम से छत्तीसगढ़ महतारी तथा साहित्य की सेवा का एक सारस्वत अवसर निरूपित किया। आभार के साथ गरिमामय आयोजन संपन्न हुआ।
Upasana On Becoming Mother राम चरण (Ram Charan) और उनकी पत्नी उपासना कमिनेनी (Upasana Kamineni) जल्द पेरेंट्स बनने वाले हैं। एक्टर की वाइफ इन दिनों 6 महीने की प्रेग्नेंट है। इसी बीच अब उपासना ने शादी के सालों बाद मां बनने का राज खोला है। नई दिल्ली, जेएनएन। Upasana On Becoming Mother: साउथ सिनेमा के सुपरस्टार राम चरण (Ram Charan) और उनकी पत्नी उपासना कमिनेनी (Upasana Kamineni) जल्द पेरेंट्स बनने वाले हैं। हाल ही में उपासना ने दुबई में अपने बेबी शॉवर सेलिब्रेट किया था, जिसकी झलक उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरी पर साझा की थी। वहीं अब उपासना ने खुलासा किया कि शादी के 10 साल बाद पेरेंट्स बनने का फैसला उनका और पति राम चरण का था। Humans of Bombay को दिए एक इंटरव्यू में उपासना ने अपने मां बनने की खुशी जाहिर की है। इसी के साथ उन्होंने यह भी बताया है कि आखिर क्यों शादी के 10 साल बाद पेरेंट्स बनने का फैसला लिया। उन्होंने कहा- 'मैं बहुत उत्साहित हूं और बहुत गर्व भी है कि मैंने मां बनने का फैसला तब किया जब हम चाहते थे न कि जब सोसायटी चाहती थी। यही वजह है कि हमने शादी के 10 साल बाद बच्चा करने का फैसला किया। मुझे लगता है कि यह सबसे अच्छा समय है क्योंकि हम दोनों अच्छी स्थिति में हैं। उन्होंने आगे कहा, 'हम दोनों फाइनेंशियली सिक्योर हैं और हम अपने बच्चे की देखभाल खुद कर सकते हैं। यह हमारा आपसी फैसला था। एक कपल के तौर पर हमने अपने ऊपर कभी किसी तरह का दबाव नहीं आने दिया, चाहे वो समाज का हो, हमारे परिवार का हो। राम चरण और उपासना की पहली मुलाकात कॉलेज में हुई थी। साथ-साथ पढ़ते हुए राम और उपासना बहुत अच्छे दोस्त बन और फिर शादी रचाई। राम चरण और उपासना की जोड़ी फैंस को कपल गोल्स देती है। दोनों आज भी मेड फॉर ईच अदर लगते हैं। राम चरण के वर्क फ्रंट की बात करें 'आरआरआर' की सक्सेस के बाद अब वह गेम चेंजर में नजर आएंगे। इसमें एक्टर के साथ कियारा आडवाणी दिखाई देंगी। कार्तिक सुब्बुराज द्वारा लिखित, 'गेम चेंजर' शंकर की तेलुगु पहली फिल्म है। राम चरण और कियारा आडवाणी के अलावा, फिल्म में अंजलि, एसजे सूर्या, जयराम, सुनील, श्रीकांत, नवीन चंद्र, नासर, समुथिरकानी, रघु बाबू और अन्य प्रमुख भूमिकाओं में हैं।
Upasana On Becoming Mother राम चरण और उनकी पत्नी उपासना कमिनेनी जल्द पेरेंट्स बनने वाले हैं। एक्टर की वाइफ इन दिनों छः महीने की प्रेग्नेंट है। इसी बीच अब उपासना ने शादी के सालों बाद मां बनने का राज खोला है। नई दिल्ली, जेएनएन। Upasana On Becoming Mother: साउथ सिनेमा के सुपरस्टार राम चरण और उनकी पत्नी उपासना कमिनेनी जल्द पेरेंट्स बनने वाले हैं। हाल ही में उपासना ने दुबई में अपने बेबी शॉवर सेलिब्रेट किया था, जिसकी झलक उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरी पर साझा की थी। वहीं अब उपासना ने खुलासा किया कि शादी के दस साल बाद पेरेंट्स बनने का फैसला उनका और पति राम चरण का था। Humans of Bombay को दिए एक इंटरव्यू में उपासना ने अपने मां बनने की खुशी जाहिर की है। इसी के साथ उन्होंने यह भी बताया है कि आखिर क्यों शादी के दस साल बाद पेरेंट्स बनने का फैसला लिया। उन्होंने कहा- 'मैं बहुत उत्साहित हूं और बहुत गर्व भी है कि मैंने मां बनने का फैसला तब किया जब हम चाहते थे न कि जब सोसायटी चाहती थी। यही वजह है कि हमने शादी के दस साल बाद बच्चा करने का फैसला किया। मुझे लगता है कि यह सबसे अच्छा समय है क्योंकि हम दोनों अच्छी स्थिति में हैं। उन्होंने आगे कहा, 'हम दोनों फाइनेंशियली सिक्योर हैं और हम अपने बच्चे की देखभाल खुद कर सकते हैं। यह हमारा आपसी फैसला था। एक कपल के तौर पर हमने अपने ऊपर कभी किसी तरह का दबाव नहीं आने दिया, चाहे वो समाज का हो, हमारे परिवार का हो। राम चरण और उपासना की पहली मुलाकात कॉलेज में हुई थी। साथ-साथ पढ़ते हुए राम और उपासना बहुत अच्छे दोस्त बन और फिर शादी रचाई। राम चरण और उपासना की जोड़ी फैंस को कपल गोल्स देती है। दोनों आज भी मेड फॉर ईच अदर लगते हैं। राम चरण के वर्क फ्रंट की बात करें 'आरआरआर' की सक्सेस के बाद अब वह गेम चेंजर में नजर आएंगे। इसमें एक्टर के साथ कियारा आडवाणी दिखाई देंगी। कार्तिक सुब्बुराज द्वारा लिखित, 'गेम चेंजर' शंकर की तेलुगु पहली फिल्म है। राम चरण और कियारा आडवाणी के अलावा, फिल्म में अंजलि, एसजे सूर्या, जयराम, सुनील, श्रीकांत, नवीन चंद्र, नासर, समुथिरकानी, रघु बाबू और अन्य प्रमुख भूमिकाओं में हैं।
भोपाल में रहने वाली 17 साल की अनाथ लड़की को बड़ी राहत मिलने वाली है. निर्मला सीतारमण ने इस मामले पर ट्वीट करके यह इशारा दिया है. इस लड़की ने कोविड काल में अपने माता-पिता खो दिये थे. लेकिन अब इसपर मुसीबतों का नया पहाड़ टूट पड़ा है. लड़की को 29 लाख रुपये का लोन चुकाने का नोटिस मिला है. खबर पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बयान आया है. उन्होंने ट्वीट किया कि डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशल सर्विस (DFS) और LIC इंडिया कृपया इस मामले को देखें. मुझे इसकी ताजा स्थिति भी अपडेट करें. कौन हैं वनिशा पाठक? 17 साल की वनिशा पाठक इन दिनों सुर्खियों में हैं. वह दसवीं बोर्ड में टॉपर रही थीं. उनके माता-पिता की कोरोना की घातक दूसरी लहर में मौत हो गई थी. वनिशा ने पहले ही इतना कुछ झेला है. वहीं अब आईआईटी की तैयारी कर रही वनिशा को लोन रिकवरी के नोटिस ने चिंता में डाल दिया है. वनिशा पाठक भोपाल में ही रहती है और कोरोना की वजह से माता-पिता दोनों को खोने के बावजूद दसवीं में 99 फीसदी मार्क्स लाकर टॉप कर चुकी है. माता-पिता को खोने के बाद वनिशा और उनका छोटा भाई अपने मामा और उनके परिवार के साथ रहते हैं. माता-पिता की मौत के बाद वनिशा को सरकार की तरफ से करीब 2 लाख रुपए मिले और इसके अलावा शिवराज सरकार की तरफ से हर महीने दोनों भाई-बहन को 5 हज़ार रुपए भी मिलते हैं. वनिशा बहुत मुश्किल से खुद को संभाल रही थी. अभी 11वीं में भी उसने 97 फीसदी अंक हासिल किए. फिलहाल वनिशा आईआईटी जाने के लिए जेईई परीक्षा की तैयारी कर रही है लेकिन इसी बीच उसके पिता के बकाया लोन का एक नोटिस झटके के रूप में आया जिसने इस नाबालिग टॉपर को परेशान कर दिया है. वनिशा के पिता जीतेंद्र पाठक एलआईसी एजेंट थे और उन्होंने ऑफिस से होम लोन लिया था. लेकिन मई 2021 में वंशिका की मां और पिता दोनों कोरोना से जंग हार गए और चल बसे. इसके बाद से जो होम लोन वनिशा के पिता ने लिया था उसकी किश्त नहीं दी जा सकी क्योंकि वनिशा नाबालिग है, इसलिए एलआईसी ने उसकी सारी बचत और हर महीने मिलने वाले कमीशन को रोक दिया. वनिशा को झटका तब लगा जब फरवरी 2022 में उसके पिता के लिए होम लोन के ब्याज समेत 29 लाख 29 हज़ार रुपए का नोटिस मिला. वनिशा ने LIC को पत्र भी लिखा है. कहा गया है कि वो अभी नाबालिग है अगले साल बालिग होगी तब तक उन्हे किश्त चुकाने का समय दिया जाए क्योंकि वह नाबालिग है और पिता की पॉलिसी का क्लेम और मासिक कमीशन रुके होने की वजह से सभी आर्थिक और वित्तीय आय स्रोत बंद हो चुके है. वनिशा के मुताबिक उसके पास आय का कोई दूसरा साधन नहीं है ऐसे में वह लोन तभी चुका सकेगी जब वह 18 साल की हो जाए. इसके अलावा लोन पर लिया जा रहा ब्याज माफ किया जाए. वनिशा की मां का 4 मई 2021 को कोरोना से निधन हो गया था और 15 मई को पिता ने भी कोरोना की वजह से दम तोड़ दिया था. विडंबना देखिए कि जिस घर के लिए वनिशा के पिता ने होम लोन लिया था उसका गृह प्रवेश भी वह नहीं कर सके और दुनिया से चले गए. इस बारे में आजतक ने एलआईसी के विकास अधिकारी संजय बर्नवाल से फोन पर बात की थी. उन्होंने आश्वासन दिया कि वनिशा को यह नोटिस फरवरी 2022 में मिला था और जैसे ही उनके संज्ञान में यह आया को एलआईसी के वरिष्ठ अधिकारियों को इस बारे में अवगत कराया गया और नोटिस को ब्लॉक कर दिया गया. तब से लेकर अब तक वनिशा को कोई नोटिस नहीं मिला और उसके बालिग होने तक उसे नोटिस नहीं मिलेगा. हालांकि कोरोना की विभीषिका में अपने माता-पिता को खो चुकी वनिशा बालिग होने के बाद भी इतनी बड़ी राशि कैसे चुकाएगी यह एक बड़ा सवाल है.
भोपाल में रहने वाली सत्रह साल की अनाथ लड़की को बड़ी राहत मिलने वाली है. निर्मला सीतारमण ने इस मामले पर ट्वीट करके यह इशारा दिया है. इस लड़की ने कोविड काल में अपने माता-पिता खो दिये थे. लेकिन अब इसपर मुसीबतों का नया पहाड़ टूट पड़ा है. लड़की को उनतीस लाख रुपये का लोन चुकाने का नोटिस मिला है. खबर पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बयान आया है. उन्होंने ट्वीट किया कि डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशल सर्विस और LIC इंडिया कृपया इस मामले को देखें. मुझे इसकी ताजा स्थिति भी अपडेट करें. कौन हैं वनिशा पाठक? सत्रह साल की वनिशा पाठक इन दिनों सुर्खियों में हैं. वह दसवीं बोर्ड में टॉपर रही थीं. उनके माता-पिता की कोरोना की घातक दूसरी लहर में मौत हो गई थी. वनिशा ने पहले ही इतना कुछ झेला है. वहीं अब आईआईटी की तैयारी कर रही वनिशा को लोन रिकवरी के नोटिस ने चिंता में डाल दिया है. वनिशा पाठक भोपाल में ही रहती है और कोरोना की वजह से माता-पिता दोनों को खोने के बावजूद दसवीं में निन्यानवे फीसदी मार्क्स लाकर टॉप कर चुकी है. माता-पिता को खोने के बाद वनिशा और उनका छोटा भाई अपने मामा और उनके परिवार के साथ रहते हैं. माता-पिता की मौत के बाद वनिशा को सरकार की तरफ से करीब दो लाख रुपए मिले और इसके अलावा शिवराज सरकार की तरफ से हर महीने दोनों भाई-बहन को पाँच हज़ार रुपए भी मिलते हैं. वनिशा बहुत मुश्किल से खुद को संभाल रही थी. अभी ग्यारहवीं में भी उसने सत्तानवे फीसदी अंक हासिल किए. फिलहाल वनिशा आईआईटी जाने के लिए जेईई परीक्षा की तैयारी कर रही है लेकिन इसी बीच उसके पिता के बकाया लोन का एक नोटिस झटके के रूप में आया जिसने इस नाबालिग टॉपर को परेशान कर दिया है. वनिशा के पिता जीतेंद्र पाठक एलआईसी एजेंट थे और उन्होंने ऑफिस से होम लोन लिया था. लेकिन मई दो हज़ार इक्कीस में वंशिका की मां और पिता दोनों कोरोना से जंग हार गए और चल बसे. इसके बाद से जो होम लोन वनिशा के पिता ने लिया था उसकी किश्त नहीं दी जा सकी क्योंकि वनिशा नाबालिग है, इसलिए एलआईसी ने उसकी सारी बचत और हर महीने मिलने वाले कमीशन को रोक दिया. वनिशा को झटका तब लगा जब फरवरी दो हज़ार बाईस में उसके पिता के लिए होम लोन के ब्याज समेत उनतीस लाख उनतीस हज़ार रुपए का नोटिस मिला. वनिशा ने LIC को पत्र भी लिखा है. कहा गया है कि वो अभी नाबालिग है अगले साल बालिग होगी तब तक उन्हे किश्त चुकाने का समय दिया जाए क्योंकि वह नाबालिग है और पिता की पॉलिसी का क्लेम और मासिक कमीशन रुके होने की वजह से सभी आर्थिक और वित्तीय आय स्रोत बंद हो चुके है. वनिशा के मुताबिक उसके पास आय का कोई दूसरा साधन नहीं है ऐसे में वह लोन तभी चुका सकेगी जब वह अट्ठारह साल की हो जाए. इसके अलावा लोन पर लिया जा रहा ब्याज माफ किया जाए. वनिशा की मां का चार मई दो हज़ार इक्कीस को कोरोना से निधन हो गया था और पंद्रह मई को पिता ने भी कोरोना की वजह से दम तोड़ दिया था. विडंबना देखिए कि जिस घर के लिए वनिशा के पिता ने होम लोन लिया था उसका गृह प्रवेश भी वह नहीं कर सके और दुनिया से चले गए. इस बारे में आजतक ने एलआईसी के विकास अधिकारी संजय बर्नवाल से फोन पर बात की थी. उन्होंने आश्वासन दिया कि वनिशा को यह नोटिस फरवरी दो हज़ार बाईस में मिला था और जैसे ही उनके संज्ञान में यह आया को एलआईसी के वरिष्ठ अधिकारियों को इस बारे में अवगत कराया गया और नोटिस को ब्लॉक कर दिया गया. तब से लेकर अब तक वनिशा को कोई नोटिस नहीं मिला और उसके बालिग होने तक उसे नोटिस नहीं मिलेगा. हालांकि कोरोना की विभीषिका में अपने माता-पिता को खो चुकी वनिशा बालिग होने के बाद भी इतनी बड़ी राशि कैसे चुकाएगी यह एक बड़ा सवाल है.
विभिन्न परिसर के परिष्करण के दौरान अक्सर का सवाल है कैसे जल्दी से और सस्ते में एक छत बनाते हैं? आप डिलीवरी की लागत के लिए आवश्यक (गुणवत्ता) सामग्री लेने के लिए की जरूरत है। मरम्मत की लागत के लिए खुद को काम इसके अलावा, ध्यान में रखना। चलो कुछ विकल्पों पर विचार करेंः 1. Vygotovka छत मास्किंग विधि - यह एक सपाट सतह को वापस लेने के लिए आवश्यक है, और आंशिक रूप से या पूरी तरह से प्लास्टर, दुरुस्त, लेवलिंग परत पोटीन मिश्रण (Knauf, Satyn, Satengips), प्लास्टर जाल, यदि आवश्यक हो गोंद है (90 - 110 घनत्व), तो सूखे grout बेस पेंट लेटेक्स पेंट तीन परतों में। बहुत समय लेने वाली और क्योंकि आप सुखाने पोटीन और रंग के लिए प्रतीक्षा करने की जरूरत है धूल भरी प्रक्रिया में समय लगता। काम की लागत, 10 $ / वर्ग मीटर से निर्माण सामग्री शामिल नहीं है। सामग्री के साथ साथ स्थापना काम 8 से - - $ 15 / वर्ग मीटर 2. ऐसे drywall जहां कीमत काफी स्वीकार्य है, $ 4 के एक औसत / वर्ग मीटर के रूप में छत सामग्री सीना। सबसे पहले, आप, धातु प्रोफाइल (सीडी, यूडी) का एक फ्रेम इकट्ठा तो जिप्सम चादरें बंद करना की जरूरत है। साथ ही, कृपया पोटीन तैयार मिश्रण परिष्करण, जोड़ों सील करने के लिए, गोंद प्लास्टर संप्रदाय की जरूरत है। अगले चरण - grout और तीन परतों में खत्म चित्रकला। 3. उदाहरण के लिए, कसने प्रणाली के साथ छत बनाओः Lackfolie, माल्पेन्सा, RENOLIT, Alkor Draka। रंग और सामग्री की एक अच्छा विकल्प। त्वरित और साफ स्थापना की प्रक्रिया, आप एक समाप्त मरम्मत के साथ क्षेत्रों में एकत्र कर सकते हैं, लेकिन सस्ते नहीं। क्रमशः अलग कीमत और गुणवत्ता - निर्माता पर ध्यान देना चाहिए, वहाँ फ्रांस, जर्मनी, रूस, यूक्रेन, चीन हैं। $ 30 / वर्ग मीटर के एक औसत। 4. सीना छत लकड़ी या प्लास्टिक चौखटा। एक लकड़ी या धातु के आधार पर घुड़सवार - obreshotku। । लकड़ी सामग्री अच्छी तरह से देश के घरों के लिए अनुकूल, उदाहरण के लिए, एक रसोई, मेहमान के कमरे, आदि प्लास्टिक अधिमानतः उच्च नमी के साथ क्षेत्रों में प्रयोग किया जाता है - शौचालय, परिसरों बेसमेंट गैरेज। सामग्री विभिन्न गुणवत्ता और विभिन्न मूल्यों की है। नौकरियां - 5 $ / वर्ग मीटर। 5. माउंट आर्मस्ट्रांग छत जो लगभग सभी रिक्त स्थान :. स्कूलों, विश्वविद्यालयों, अस्पतालों, कार्यालय भवनों, सार्वजनिक खानपान, कार्यालय और आवासीय भवनों, उच्च आर्द्रता, आदि मॉडल और रंग की एक विविध चयन आप वस्तुतः किसी भी छत पैनल चुनने की अनुमति देता के साथ सुविधाओं के लिए उपयुक्त है अंदरूनी और अग्नि सुरक्षा के लिए उच्च आवश्यकताओं के साथ परिसर। नाला के साथ पैनलों (ज्यादातर "प्रीमियम" वर्ग के रूपांतरों), कार्यालय परिसर में सुंदर लग रही है। नाला छत प्रोफ़ाइल डूबने के लिए थोड़ा के लिए सक्षम बनाता है और एक नेत्रहीन सुंदर प्रभाव पैदा करता है। छत पैनलों कर रहे हैं आसानी से एकीकृत spotlights, और यदि आवश्यक हो, थाली किसी भी रंग में रंगा जा सकता है। आज, बाजार छत "का चीनी संस्करण 'के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, लेकिन यह पैनल 7. 5 मिमी मोटी का एक सा" अलग "गुणवत्ता है, आर्मस्ट्रांग 12 मिमी है। निलंबित छत आर्मस्ट्रांग की स्थापना, जो यह संभव उपयोगिताओं, बिजली केबल, छिपाने के लिए बनाता है (250 से 1500 मिमी के लिए) अलग अलग ऊंचाई पर डूब प्रदान करता है वेंटिलेशन नलिकाएं। अनुभवी पेशेवरों की एक टीम एक कार्य दिवस में यह इकट्ठा कर सकते हैं। स्थापना के समय कक्ष, इसके आकार, अप्रत्यक्ष कोण की संख्या के क्षेत्र पर निर्भर करता है। Bajkal, ओएसिस, Ckala, खुदरा - आज एक बहुत ही लोकप्रिय कम लागत विकल्प है । 10 $ / वर्ग मीटर बड़ा काम + सामग्री की औसत कीमत। अंत में छत आर्मस्ट्रांग - जल्दी से छत परिष्करण के लिए सबसे सस्ता और आसानी से इकट्ठा विकल्पों में से एक। आज कंपनी आर्मस्ट्रांग न केवल छत पॉलीकार्बोनेट, धातु, खनिज फाइबर से बना प्रणाली प्रस्तुत किया। कंपनी फ्लोर कवरिंग की एक किस्म प्रदान करता हैः लिनोलियम, विनाइल की सजातीय कोटिंग, सुई छिद्रित coverings डीएलडब्ल्यू और अन्य निर्माण सामग्री अच्छी गुणवत्ता के हैं।
विभिन्न परिसर के परिष्करण के दौरान अक्सर का सवाल है कैसे जल्दी से और सस्ते में एक छत बनाते हैं? आप डिलीवरी की लागत के लिए आवश्यक सामग्री लेने के लिए की जरूरत है। मरम्मत की लागत के लिए खुद को काम इसके अलावा, ध्यान में रखना। चलो कुछ विकल्पों पर विचार करेंः एक. Vygotovka छत मास्किंग विधि - यह एक सपाट सतह को वापस लेने के लिए आवश्यक है, और आंशिक रूप से या पूरी तरह से प्लास्टर, दुरुस्त, लेवलिंग परत पोटीन मिश्रण , प्लास्टर जाल, यदि आवश्यक हो गोंद है , तो सूखे grout बेस पेंट लेटेक्स पेंट तीन परतों में। बहुत समय लेने वाली और क्योंकि आप सुखाने पोटीन और रंग के लिए प्रतीक्षा करने की जरूरत है धूल भरी प्रक्रिया में समय लगता। काम की लागत, दस डॉलर / वर्ग मीटर से निर्माण सामग्री शामिल नहीं है। सामग्री के साथ साथ स्थापना काम आठ से - - पंद्रह डॉलर / वर्ग मीटर दो. ऐसे drywall जहां कीमत काफी स्वीकार्य है, चार डॉलर के एक औसत / वर्ग मीटर के रूप में छत सामग्री सीना। सबसे पहले, आप, धातु प्रोफाइल का एक फ्रेम इकट्ठा तो जिप्सम चादरें बंद करना की जरूरत है। साथ ही, कृपया पोटीन तैयार मिश्रण परिष्करण, जोड़ों सील करने के लिए, गोंद प्लास्टर संप्रदाय की जरूरत है। अगले चरण - grout और तीन परतों में खत्म चित्रकला। तीन. उदाहरण के लिए, कसने प्रणाली के साथ छत बनाओः Lackfolie, माल्पेन्सा, RENOLIT, Alkor Draka। रंग और सामग्री की एक अच्छा विकल्प। त्वरित और साफ स्थापना की प्रक्रिया, आप एक समाप्त मरम्मत के साथ क्षेत्रों में एकत्र कर सकते हैं, लेकिन सस्ते नहीं। क्रमशः अलग कीमत और गुणवत्ता - निर्माता पर ध्यान देना चाहिए, वहाँ फ्रांस, जर्मनी, रूस, यूक्रेन, चीन हैं। तीस डॉलर / वर्ग मीटर के एक औसत। चार. सीना छत लकड़ी या प्लास्टिक चौखटा। एक लकड़ी या धातु के आधार पर घुड़सवार - obreshotku। । लकड़ी सामग्री अच्छी तरह से देश के घरों के लिए अनुकूल, उदाहरण के लिए, एक रसोई, मेहमान के कमरे, आदि प्लास्टिक अधिमानतः उच्च नमी के साथ क्षेत्रों में प्रयोग किया जाता है - शौचालय, परिसरों बेसमेंट गैरेज। सामग्री विभिन्न गुणवत्ता और विभिन्न मूल्यों की है। नौकरियां - पाँच डॉलर / वर्ग मीटर। पाँच. माउंट आर्मस्ट्रांग छत जो लगभग सभी रिक्त स्थान :. स्कूलों, विश्वविद्यालयों, अस्पतालों, कार्यालय भवनों, सार्वजनिक खानपान, कार्यालय और आवासीय भवनों, उच्च आर्द्रता, आदि मॉडल और रंग की एक विविध चयन आप वस्तुतः किसी भी छत पैनल चुनने की अनुमति देता के साथ सुविधाओं के लिए उपयुक्त है अंदरूनी और अग्नि सुरक्षा के लिए उच्च आवश्यकताओं के साथ परिसर। नाला के साथ पैनलों , कार्यालय परिसर में सुंदर लग रही है। नाला छत प्रोफ़ाइल डूबने के लिए थोड़ा के लिए सक्षम बनाता है और एक नेत्रहीन सुंदर प्रभाव पैदा करता है। छत पैनलों कर रहे हैं आसानी से एकीकृत spotlights, और यदि आवश्यक हो, थाली किसी भी रंग में रंगा जा सकता है। आज, बाजार छत "का चीनी संस्करण 'के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, लेकिन यह पैनल सात. पाँच मिमी मोटी का एक सा" अलग "गुणवत्ता है, आर्मस्ट्रांग बारह मिमी है। निलंबित छत आर्मस्ट्रांग की स्थापना, जो यह संभव उपयोगिताओं, बिजली केबल, छिपाने के लिए बनाता है अलग अलग ऊंचाई पर डूब प्रदान करता है वेंटिलेशन नलिकाएं। अनुभवी पेशेवरों की एक टीम एक कार्य दिवस में यह इकट्ठा कर सकते हैं। स्थापना के समय कक्ष, इसके आकार, अप्रत्यक्ष कोण की संख्या के क्षेत्र पर निर्भर करता है। Bajkal, ओएसिस, Ckala, खुदरा - आज एक बहुत ही लोकप्रिय कम लागत विकल्प है । दस डॉलर / वर्ग मीटर बड़ा काम + सामग्री की औसत कीमत। अंत में छत आर्मस्ट्रांग - जल्दी से छत परिष्करण के लिए सबसे सस्ता और आसानी से इकट्ठा विकल्पों में से एक। आज कंपनी आर्मस्ट्रांग न केवल छत पॉलीकार्बोनेट, धातु, खनिज फाइबर से बना प्रणाली प्रस्तुत किया। कंपनी फ्लोर कवरिंग की एक किस्म प्रदान करता हैः लिनोलियम, विनाइल की सजातीय कोटिंग, सुई छिद्रित coverings डीएलडब्ल्यू और अन्य निर्माण सामग्री अच्छी गुणवत्ता के हैं।
नई दिल्ली। रमजान पर कोरोनावायरस का असर इस बार पिछले साल से ज्यादा गहरा रहा और इस पवित्र महीने में लोग अपने प्रियजनों के लिए ऑक्सीजन तथा अस्पतालों में बिस्तर की व्यवस्था करने में लगे रहे, वहीं अनेक लोगों के प्रियजन इस महीने में महामारी के कारण उन्हें छोड़कर चले गए। वर्ष 2020 के रमजान की तरह ही इस बार भी मस्जिदों में बड़ी जमातें (बड़ी संख्या में एक साथ नमाज पढ़ना) नहीं हुईं, इफ्तार (रोजा तोड़ना) की दावतें भी नहीं हुईं और देर रात तक खरीदारी का दौर भी नहीं चला। कहा गया था कि 2020 का रमजान ऐसा था, जो किसी ने अपनी जिंदगी में नहीं देखा। लेकिन 2021 का यह पवित्र महीना पिछले साल की तुलना में लोगों के लिए कहीं ज्यादा दर्दनाक यादें छोड़कर जा रहा है, क्योंकि अप्रैल-मई में कोविड-19 की दूसरी लहर ने देश के बड़े हिस्से में कहर बरपाया है। देश में करीब हर परिवार का कोई न कोई सदस्य इस महामारी से संक्रमित हुआ है या इस महामारी की वजह से उनके दोस्त, परिवार के सदस्य की जान गई है और अनेक अन्य लोग जानलेवा वायरस से जूझ रहे हैं। गाजियाबाद निवासी वकील तनवीर परवेज ने कहा कि रमजान परिवार और दोस्तों के साथ वक्त बिताने का महीना होता है, लेकिन इस साल मैंने अपने कई करीबी लोगों को खोया है और मेरे परिवार में कई लोग इस वायरस से संक्रमित हुए हैं। यह एक मुश्किल महीना रहा और मैं बस यही दुआ करता रहा कि अल्लाह इस जानलेवा वायरस को हमारी जिंदगियों से दूर कर दे। रमजान में लोग परिवार के साथ बैठकर साथ में इफ्तार करते हैं लेकिन किसने सोचा था कि घर में इफ्तार करने की जगह लोगों को ऑक्सीजन सिलेंडर, ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटरों, अस्पतालों में बिस्तरों और प्लाज्मा की व्यवस्था करने के लिए या फिर कब्रिस्तान में किसी दोस्त या परिवार के सदस्य के शव को दफनाने को लेकर भागदौड़ करनी पड़ेगी। उत्तरप्रदेश के नगीना जिले में रहने वाले किसान काजी राहत मसूद ने कहा कि इस बार रमजान का महीना स्वास्थ्य आपात स्थितियों से निपटने, रिश्तेदारों और दोस्तों की मौत, उन्हें तदफीन (दफन करना) करने में ही गुजरा। हालांकि कई स्थानों पर रमजान के दौरान मस्जिदें खुलीं, लेकिन वहां नमाज कोविडरोधी नियमों और पबांदियों का पालन करते हुए हुई। कई इमामों ने घरों में ही नमाज अदा करने की अपील की। ईद की विशेष नमाज भी घरों में ही पढ़ने की अपील की गई है। कई शहरों में ईद की नमाज ईदगाह में नहीं होगी, हालांकि स्थानीय मस्जिदों में एक-दूसरे से दूरी के नियमों का पालन करते हुए हो सकती है। देश में ईद-उल-फित्र का त्योहार 13 या 14 मई को पड़ सकता है और यह चांद दिखने पर निर्भर करता है। मुस्लिम संगठन जमीयत उलमा-ए-हिन्द के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि मैं सभी मुस्लिमों से अपील करता हूं कि ईद की नमाज कोविड संबंधी सभी प्रोटोकॉल और दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए अदा करें। बड़ी संख्या में जमा न हों और बेहतर यही होगा कि घरों में नमाज अदा करें। दिल्ली स्थित जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी और फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमाम मुफ्ती मुकर्रम अहमद ने अलग-अलग वीडियो जारी कर घरों में ही नमाज अदा करने की अपील की है। सोशल मीडिया पर भी लोगों से कोविड प्रोटोकॉल के तहत ईद मनाने की अपील की गई है और 'ईद एट होम' (घर पर ईद) तथा 'से नो टू ईद शॉपिंग' (ईद की खरीदारी को ना कहना) जैसे हैशटैग ट्विटर पर चलाए गए हैं। मदनी ने कहा कि मुसलमानों ने रमजान में बहुत सब्र से काम किया है और उनके कई करीबियों की मौत हुई तो कई के परिजन इस वायरस से संक्रमित होकर अस्पताल में भर्ती हैं। संक्रमित होने की वजह लोगों के रोजे छूटे भी हैं। द्वारका में रहने वाले साद मजीद ने कहा कि वे हर साल पूरे रोजे रखते थे लेकिन इस बार रमजान के पहले ही हफ्ते में वायरस से संक्रमित हो गए जिस वजह से वह रोजे नहीं रख पाए। यह महीना बीमारी के साथ साथ कई लोगों के लिए आर्थिक परेशानियां लेकर भी आया। घरेलू सहायिका का काम करने वाली और 6 बच्चों की मां शाहीन बानो ने कहा कि जिन घरों में वह काम करती थीं, उन्होंने संक्रमण के मामले बढ़ने की वजह से उन्हें काम पर आने को मना कर दिया जिस वजह से उन्हें सिर्फ पानी पीकर रोजा रखना पड़ रहा है और उन्हें यह भी नहीं पता कि इफ्तार में उनके पास खाने को कुछ होगा या नहीं? लॉकडाउन के कारण ईद पर खरीदारी नहीं होने की वजह से छोटे और मंझौले दुकानदारों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा है। (भाषा)
नई दिल्ली। रमजान पर कोरोनावायरस का असर इस बार पिछले साल से ज्यादा गहरा रहा और इस पवित्र महीने में लोग अपने प्रियजनों के लिए ऑक्सीजन तथा अस्पतालों में बिस्तर की व्यवस्था करने में लगे रहे, वहीं अनेक लोगों के प्रियजन इस महीने में महामारी के कारण उन्हें छोड़कर चले गए। वर्ष दो हज़ार बीस के रमजान की तरह ही इस बार भी मस्जिदों में बड़ी जमातें नहीं हुईं, इफ्तार की दावतें भी नहीं हुईं और देर रात तक खरीदारी का दौर भी नहीं चला। कहा गया था कि दो हज़ार बीस का रमजान ऐसा था, जो किसी ने अपनी जिंदगी में नहीं देखा। लेकिन दो हज़ार इक्कीस का यह पवित्र महीना पिछले साल की तुलना में लोगों के लिए कहीं ज्यादा दर्दनाक यादें छोड़कर जा रहा है, क्योंकि अप्रैल-मई में कोविड-उन्नीस की दूसरी लहर ने देश के बड़े हिस्से में कहर बरपाया है। देश में करीब हर परिवार का कोई न कोई सदस्य इस महामारी से संक्रमित हुआ है या इस महामारी की वजह से उनके दोस्त, परिवार के सदस्य की जान गई है और अनेक अन्य लोग जानलेवा वायरस से जूझ रहे हैं। गाजियाबाद निवासी वकील तनवीर परवेज ने कहा कि रमजान परिवार और दोस्तों के साथ वक्त बिताने का महीना होता है, लेकिन इस साल मैंने अपने कई करीबी लोगों को खोया है और मेरे परिवार में कई लोग इस वायरस से संक्रमित हुए हैं। यह एक मुश्किल महीना रहा और मैं बस यही दुआ करता रहा कि अल्लाह इस जानलेवा वायरस को हमारी जिंदगियों से दूर कर दे। रमजान में लोग परिवार के साथ बैठकर साथ में इफ्तार करते हैं लेकिन किसने सोचा था कि घर में इफ्तार करने की जगह लोगों को ऑक्सीजन सिलेंडर, ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटरों, अस्पतालों में बिस्तरों और प्लाज्मा की व्यवस्था करने के लिए या फिर कब्रिस्तान में किसी दोस्त या परिवार के सदस्य के शव को दफनाने को लेकर भागदौड़ करनी पड़ेगी। उत्तरप्रदेश के नगीना जिले में रहने वाले किसान काजी राहत मसूद ने कहा कि इस बार रमजान का महीना स्वास्थ्य आपात स्थितियों से निपटने, रिश्तेदारों और दोस्तों की मौत, उन्हें तदफीन करने में ही गुजरा। हालांकि कई स्थानों पर रमजान के दौरान मस्जिदें खुलीं, लेकिन वहां नमाज कोविडरोधी नियमों और पबांदियों का पालन करते हुए हुई। कई इमामों ने घरों में ही नमाज अदा करने की अपील की। ईद की विशेष नमाज भी घरों में ही पढ़ने की अपील की गई है। कई शहरों में ईद की नमाज ईदगाह में नहीं होगी, हालांकि स्थानीय मस्जिदों में एक-दूसरे से दूरी के नियमों का पालन करते हुए हो सकती है। देश में ईद-उल-फित्र का त्योहार तेरह या चौदह मई को पड़ सकता है और यह चांद दिखने पर निर्भर करता है। मुस्लिम संगठन जमीयत उलमा-ए-हिन्द के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि मैं सभी मुस्लिमों से अपील करता हूं कि ईद की नमाज कोविड संबंधी सभी प्रोटोकॉल और दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए अदा करें। बड़ी संख्या में जमा न हों और बेहतर यही होगा कि घरों में नमाज अदा करें। दिल्ली स्थित जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी और फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमाम मुफ्ती मुकर्रम अहमद ने अलग-अलग वीडियो जारी कर घरों में ही नमाज अदा करने की अपील की है। सोशल मीडिया पर भी लोगों से कोविड प्रोटोकॉल के तहत ईद मनाने की अपील की गई है और 'ईद एट होम' तथा 'से नो टू ईद शॉपिंग' जैसे हैशटैग ट्विटर पर चलाए गए हैं। मदनी ने कहा कि मुसलमानों ने रमजान में बहुत सब्र से काम किया है और उनके कई करीबियों की मौत हुई तो कई के परिजन इस वायरस से संक्रमित होकर अस्पताल में भर्ती हैं। संक्रमित होने की वजह लोगों के रोजे छूटे भी हैं। द्वारका में रहने वाले साद मजीद ने कहा कि वे हर साल पूरे रोजे रखते थे लेकिन इस बार रमजान के पहले ही हफ्ते में वायरस से संक्रमित हो गए जिस वजह से वह रोजे नहीं रख पाए। यह महीना बीमारी के साथ साथ कई लोगों के लिए आर्थिक परेशानियां लेकर भी आया। घरेलू सहायिका का काम करने वाली और छः बच्चों की मां शाहीन बानो ने कहा कि जिन घरों में वह काम करती थीं, उन्होंने संक्रमण के मामले बढ़ने की वजह से उन्हें काम पर आने को मना कर दिया जिस वजह से उन्हें सिर्फ पानी पीकर रोजा रखना पड़ रहा है और उन्हें यह भी नहीं पता कि इफ्तार में उनके पास खाने को कुछ होगा या नहीं? लॉकडाउन के कारण ईद पर खरीदारी नहीं होने की वजह से छोटे और मंझौले दुकानदारों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा है।
/ चांद-सूरज के बाद अब है शुक्र की बारी, कब शुरू होगा मिशन, क्या होगा हासिल, जानिए सबकुछ; Inspector: Why did you drink so much, alcoholic: Brother, there was helplessness. इंस्पेक्टरः इतनी क्यों पी रखी थी?शराबीः मजबूरी थी भैया। इंस्पेक्टरः कैसी मजबूरी?शराबीः बोतल का ढक्कन खो गया था! पुलिस : आपके पास सारे कागज है, हेलमेट भी लेकिन चालान होगा। मै : क्यों ? अगले साल दुनिया में छाएगी 'महामंदी', गवाही दे रहे हैं ये आंकड़े! अनुराग ठाकुर का ऐलान- अभिनेत्री वहीदा रहमान को मिलेगा 'दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड' 6 दिन में जवान की छप्परफाड़ कमाई, 7वें दिन शाहरुख की कैसा बिजनेस करेगी जवान?
/ चांद-सूरज के बाद अब है शुक्र की बारी, कब शुरू होगा मिशन, क्या होगा हासिल, जानिए सबकुछ; Inspector: Why did you drink so much, alcoholic: Brother, there was helplessness. इंस्पेक्टरः इतनी क्यों पी रखी थी?शराबीः मजबूरी थी भैया। इंस्पेक्टरः कैसी मजबूरी?शराबीः बोतल का ढक्कन खो गया था! पुलिस : आपके पास सारे कागज है, हेलमेट भी लेकिन चालान होगा। मै : क्यों ? अगले साल दुनिया में छाएगी 'महामंदी', गवाही दे रहे हैं ये आंकड़े! अनुराग ठाकुर का ऐलान- अभिनेत्री वहीदा रहमान को मिलेगा 'दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड' छः दिन में जवान की छप्परफाड़ कमाई, सातवें दिन शाहरुख की कैसा बिजनेस करेगी जवान?
मुजफ्फरपुर, दरभंगा, खगड़िय़ा, सहरसा, पटना, वैशाली, भोजपुर, लखीसराय, भागलपुर, सारण, बक्सर, बेगूसराय, कटिहार, मुंगेर एवं समस्तीपुर के कुल 82 प्रखंडों के 484 पंचायत आंशिक अथवा पूर्ण रूप से बाढ़ से प्रभावित हैं. पटनाः बिहार में बेकाबू गंगा ने ट्रेनों की रफ्तार रोक दी है. सूबे के भागलपुर-जमालपुर रेलखंड की रेल पटरियों पर बाढ़ का पानी आ जाने की वजह से आज यानी सोमवार को तीसरे दिन भी रेल का परिचालन ठप रहा. कई रेल अधिकारी बताते हैं के ऐसी नौबत अब तक 70 से 80 वर्षों के दौरान नहीं आई थी. वहीं, राज्य के मुजफ्फरपुर, दरभंगा, खगड़िय़ा, सहरसा, पटना, वैशाली, भोजपुर, लखीसराय, भागलपुर, सारण, बक्सर, बेगूसराय, कटिहार, मुंगेर एवं समस्तीपुर के कुल 82 प्रखंडों के 484 पंचायत आंशिक अथवा पूर्ण रूप से बाढ़ से प्रभावित हैं. बताया जा रहा है कि साल 2007, 2016 और 2018 में आई प्रलयंकारी बाढ़ में भी मालदा रेल मंडल के अंतर्गत जमालपुर-भागलपुर रेल खंड के बीच ट्रेनों का परिचालन बंद नहीं हुआ था. उस वक्त बाढ़ प्रभावित रेल सेक्शन पर ट्रेनों की रफ्तार कम की गई थी. लेकिन इस बार गंगा ने रूद्र रूप धारण कर लिया है. मालदा के मंडल रेल प्रबंधक, (डीआरएम) यतेन्द्र कुमार ने आज बताया कि इस रेल खंड के बरियारपुर और कल्याणपुर स्टेशनों के पास शनिवार को बाढ़ का पानी चढ़ गया. इस वजह से एहतियात के तौर पर रेल परिचालन को फिलहाल रोक दिया गया है. डीआरएम नें बताया कि पटरियों पर बाढ़ का पानी चढ़ जाने के कारण कई ट्रेनों को रद्द किया गया है. वहीं मालदा और भागलपुर से खुलने वाली कई महत्वपूर्ण ट्रेनों को डाइवर्ट किया गया है. उन्होंने बताया कि बाढ़ का पानी रेलवे पुल का डेंजर मार्क पार कर गया है. ऐसे में रेलवे किसी तरह का रिस्क नहीं लेगा. पानी का दवाब कम होने के बाद ही ट्रेनों का परिचालन सामान्य होगा. इसके लिए पल-पल रिपोर्ट ली जा रही है. जलस्तर पर नजर रखने के लिए पेट्रोलिंग टीम को पुल के पास तैनात किया है. बाढ़ के कारण दो दिनों में 10 हजार से ज्यादा रेल की टिकटें रद्द हुईं हैं. रद्द की गई ट्रेनों में भागलपुर से लेकर कजरा तक का आरक्षण करा चुके यात्रियों ने अपनी-अपनी टिकटें रद्द करा दीं. ट्रेन परिचालन बंद होने से हजारों यात्री फंसे हुए हैं. गंगा का यह रूप देखकर हर कोई सकते में है. जलस्तर कम होने के लिए गंगा मइया से रेल यात्री गुहार लगा रहे हैं. उधर, बाढ़ ने ऐसा विकराल रूप धारण किया है कि गांवों व राष्ट्रीय उच्च पथ के बाद अब उसने रेलवे को भी पूरी तरह चपेट में लिया है. राज्य के कई जिलों में हालात काफी खतरनाक हो गई हैं. पटना समेत कई जिलों में भारी बारिश की वजह से बाढ़ जैसे हालात हैं. इसका असर रेल यातायात से लेकर सड़क मार्गों पर साफ साफ दिख रहा है. गंगा, कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, सोन, पुनपुन समेत तमाम नदियां फिलहाल पानी से लबालब हैं.
मुजफ्फरपुर, दरभंगा, खगड़िय़ा, सहरसा, पटना, वैशाली, भोजपुर, लखीसराय, भागलपुर, सारण, बक्सर, बेगूसराय, कटिहार, मुंगेर एवं समस्तीपुर के कुल बयासी प्रखंडों के चार सौ चौरासी पंचायत आंशिक अथवा पूर्ण रूप से बाढ़ से प्रभावित हैं. पटनाः बिहार में बेकाबू गंगा ने ट्रेनों की रफ्तार रोक दी है. सूबे के भागलपुर-जमालपुर रेलखंड की रेल पटरियों पर बाढ़ का पानी आ जाने की वजह से आज यानी सोमवार को तीसरे दिन भी रेल का परिचालन ठप रहा. कई रेल अधिकारी बताते हैं के ऐसी नौबत अब तक सत्तर से अस्सी वर्षों के दौरान नहीं आई थी. वहीं, राज्य के मुजफ्फरपुर, दरभंगा, खगड़िय़ा, सहरसा, पटना, वैशाली, भोजपुर, लखीसराय, भागलपुर, सारण, बक्सर, बेगूसराय, कटिहार, मुंगेर एवं समस्तीपुर के कुल बयासी प्रखंडों के चार सौ चौरासी पंचायत आंशिक अथवा पूर्ण रूप से बाढ़ से प्रभावित हैं. बताया जा रहा है कि साल दो हज़ार सात, दो हज़ार सोलह और दो हज़ार अट्ठारह में आई प्रलयंकारी बाढ़ में भी मालदा रेल मंडल के अंतर्गत जमालपुर-भागलपुर रेल खंड के बीच ट्रेनों का परिचालन बंद नहीं हुआ था. उस वक्त बाढ़ प्रभावित रेल सेक्शन पर ट्रेनों की रफ्तार कम की गई थी. लेकिन इस बार गंगा ने रूद्र रूप धारण कर लिया है. मालदा के मंडल रेल प्रबंधक, यतेन्द्र कुमार ने आज बताया कि इस रेल खंड के बरियारपुर और कल्याणपुर स्टेशनों के पास शनिवार को बाढ़ का पानी चढ़ गया. इस वजह से एहतियात के तौर पर रेल परिचालन को फिलहाल रोक दिया गया है. डीआरएम नें बताया कि पटरियों पर बाढ़ का पानी चढ़ जाने के कारण कई ट्रेनों को रद्द किया गया है. वहीं मालदा और भागलपुर से खुलने वाली कई महत्वपूर्ण ट्रेनों को डाइवर्ट किया गया है. उन्होंने बताया कि बाढ़ का पानी रेलवे पुल का डेंजर मार्क पार कर गया है. ऐसे में रेलवे किसी तरह का रिस्क नहीं लेगा. पानी का दवाब कम होने के बाद ही ट्रेनों का परिचालन सामान्य होगा. इसके लिए पल-पल रिपोर्ट ली जा रही है. जलस्तर पर नजर रखने के लिए पेट्रोलिंग टीम को पुल के पास तैनात किया है. बाढ़ के कारण दो दिनों में दस हजार से ज्यादा रेल की टिकटें रद्द हुईं हैं. रद्द की गई ट्रेनों में भागलपुर से लेकर कजरा तक का आरक्षण करा चुके यात्रियों ने अपनी-अपनी टिकटें रद्द करा दीं. ट्रेन परिचालन बंद होने से हजारों यात्री फंसे हुए हैं. गंगा का यह रूप देखकर हर कोई सकते में है. जलस्तर कम होने के लिए गंगा मइया से रेल यात्री गुहार लगा रहे हैं. उधर, बाढ़ ने ऐसा विकराल रूप धारण किया है कि गांवों व राष्ट्रीय उच्च पथ के बाद अब उसने रेलवे को भी पूरी तरह चपेट में लिया है. राज्य के कई जिलों में हालात काफी खतरनाक हो गई हैं. पटना समेत कई जिलों में भारी बारिश की वजह से बाढ़ जैसे हालात हैं. इसका असर रेल यातायात से लेकर सड़क मार्गों पर साफ साफ दिख रहा है. गंगा, कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, सोन, पुनपुन समेत तमाम नदियां फिलहाल पानी से लबालब हैं.
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Ranchi: झारखंड की राजधानी रांची से 60 किमी दूर सिल्ली में 18 दिसंबर से गूंज महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है. आयोजनकों के अनुसार यहां तीन दिनों तक झारखंडी कला-संस्कृति की झलक दिखेगी. इसके पहले सोशल मीडिया पर फोटोशॉप ग्राफिक्स के जरिए कहा रहा है कि गूंज महोत्सव में गैर-झारखंडी भोजपुरी सेलिब्रेटी शिरकत करेंगे. फेसबुक पर खतियानी ललित महतो क्रांतिकारी ने अपने पेज पर एक फोटोशॉप ग्राफिक्स पोस्ट की है. इसमें आजूस प्रमुख सुदेश महतो की तस्वीर के साथ भोजपुरी कलाकार खेसारी लाल यादव, अक्षरा सिंह, पवन सिंह समेत कई सेलिब्रिटी की तस्वीरों का पोस्टर तैयार किया गया है. इस पोस्टर के साथ गूंज महोत्सव के बहिष्कार की बात कही गई है. कहा गया है कि बाहरी कलाकार नहीं चलेगा. इस पोस्ट पर दर्जनों लोगों ने शेयर और कमेंट किये हैं. गूंज महोत्सव के संयोजक सुनील सिंह ने बताया कि गूंज महोत्सव झारखंडी कला-संस्कति की झलक दिखती है. तीन दिनों तक चलने वाले महोत्सव का हर दिन खास होता है. हर साल झारखंड के विश्व प्रसिद्ध लोक कलाकार शिरकत करते हैं. विरोधी इस बात को हजम नहीं कर पा रहे हैं. सोशल मीडिया पर भोजपुरी कलाकारों से जुड़ी जानकारी विरोधियों की अफवाह है. गूंज महोत्सव का उदघाटन 18 दिसंबर को झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस करेगे. महोत्सव की सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. सिल्ली का स्टेडियम सजधज कर तैयार है. तीन दिनों के महोत्सव में कई योजना और सेवा की शुरूआत की जा रही है. इसके केंद्र में है शिक्षा और चिकित्सा. महोत्सव के आगाज के साथ शनिवार (आज) की शाम सिल्ली विधानसभा क्षेत्र के 48 पंचायतों में कैंडल मार्च निकाला गया. सिल्ली और मूरी शहरी क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में लोग कैंडल मार्च में शामिल हुए. इस मार्च के जरिए विकास उत्सव में एकजुटता और सामूहिक भागीदारी के संदेश दिए गए. उदघाटन के दिन, 18 दिसंबर को एक साथ पांच हजार छऊ नृत्य कलाकारों का 'छऊ कार्निवाल' आकर्षण का केंद्र होगा. इस कार्निवाल में बतौर विशिष्ट अतिथि लोक कला से जुड़ी कई महान हस्तियां शामिल होंगी. छऊ कार्निवाल के साथ ही पाइका और अन्य लोक कलाओं का प्रदर्शन होगा. साथ ही डेढ़ हजार युवा, बच्चे भी सांस्कृतिक प्रदर्शन करेंगे. स्टेडियम में ही गांव के जीवंत शक्ल में सिल्ली हाट का निर्माण किया गया है. इनमें कई स्टॉल लगाए गए हैं, जो 18 दिसंबर से ही खुल जाएंगे. महोत्सव को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह और उल्लास का वातावरण बना है. गूंज महोत्सव के संरक्षक और सिल्ली के विधायक सुदेश कुमार महतो दिन- रात तैयारियों का जायजा लेने में लगे हैं. महोत्सव की सफलता के लिए उन्होंने वॉलंटियर, एसएचजी, गूंज परिवार के सदस्यों के अलावा समाज के सभी वर्गों की जिम्मेदारी तय की है. महोत्सव का पहला दिन महिलाओं के नाम होगा. जबकि दूसरा दिन किसान और तीसरा दिन युवा महोत्सव मनाया जाएगा. सुदेश कुमार महतो ने कहा है कि सामाजिक- सांस्कृतिक अवधारणा का जीवंत प्रतीक गूंज महोत्सव ने समय के साथ क्षेत्र के विकास को गतिमान किया है. इस बार प्रगति की नई यात्रा तय होगी. हमें जनाकांक्षाओं के अनरूप सृजन के नए प्रयासों को मूर्त रूप देना है. विविध आयाम से जुड़े इस महोत्सव के जरिये वैसे अवसर भी तैयार किए जाने हैं, जिनसे सिल्ली विधानसभा क्षेत्र का वर्तमान और भविष्य संवारा जा सके. यह महोत्सव उत्साह और उल्लास के पर्याय के साथ समाज के सशक्तिकरण का निरंतर प्रयास भी है. - अंतराष्ट्रीय छऊ कलाकार खिरोद सिंह मुंडा (लगभग 100 से ज्यादा देशों में इन्होंने नृत्य क्ष कला का प्रदर्शन किया है). - पारंपरिक कलसा नृत्य ग्रुप सुषमा नाग (गुमला, झारखंड) - पद्मश्री स्वर्गीय रामदयाल सिंह मुंडा जी के सुपुत्र गुंजल इकिर मुंडा. - सिल्ली कॉलेज में उच्चस्तरीय लाइब्रेरी की शुरुआत की जाएगी. - सिल्ली कॉलेज में ही झारखंड स्टेट ओपेन यूनिवर्सिटी का स्टडी सेंटर शुरू होगा. - लाइब्रेरी और स्टडी सेटर का उदघाटन महामहिम राज्यपाल करेंगे. - आम आदमी स्वास्थ्य सेवा की शुरूआत होगी. 20 दिसंबर को सिल्ली विधानसभा क्षेत्र में खेलो सिल्ली अभियान का शुभारंभ होगा. इस अभियान के तहत पूरे विधानसभा क्षेत्र के सभी पंचायतों में विभिन खेलों का प्रशिक्षण दिया जाएगा. - स्मार्ट क्लास : शिक्षा के क्षेत्र में एक नयी क्रांति की नींव के साथ 'पढ़ेगा सिल्ली, बढ़ेगा सिल्ली' अभियान के दूसरे चरण में सिल्ली विधानसभा क्षेत्र के सभी उच्च विद्यालयों में स्मार्ट क्लास के माध्यम से पढ़ाई की शुरुआत होगी.
Ranchi: झारखंड की राजधानी रांची से साठ किमी दूर सिल्ली में अट्ठारह दिसंबर से गूंज महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है. आयोजनकों के अनुसार यहां तीन दिनों तक झारखंडी कला-संस्कृति की झलक दिखेगी. इसके पहले सोशल मीडिया पर फोटोशॉप ग्राफिक्स के जरिए कहा रहा है कि गूंज महोत्सव में गैर-झारखंडी भोजपुरी सेलिब्रेटी शिरकत करेंगे. फेसबुक पर खतियानी ललित महतो क्रांतिकारी ने अपने पेज पर एक फोटोशॉप ग्राफिक्स पोस्ट की है. इसमें आजूस प्रमुख सुदेश महतो की तस्वीर के साथ भोजपुरी कलाकार खेसारी लाल यादव, अक्षरा सिंह, पवन सिंह समेत कई सेलिब्रिटी की तस्वीरों का पोस्टर तैयार किया गया है. इस पोस्टर के साथ गूंज महोत्सव के बहिष्कार की बात कही गई है. कहा गया है कि बाहरी कलाकार नहीं चलेगा. इस पोस्ट पर दर्जनों लोगों ने शेयर और कमेंट किये हैं. गूंज महोत्सव के संयोजक सुनील सिंह ने बताया कि गूंज महोत्सव झारखंडी कला-संस्कति की झलक दिखती है. तीन दिनों तक चलने वाले महोत्सव का हर दिन खास होता है. हर साल झारखंड के विश्व प्रसिद्ध लोक कलाकार शिरकत करते हैं. विरोधी इस बात को हजम नहीं कर पा रहे हैं. सोशल मीडिया पर भोजपुरी कलाकारों से जुड़ी जानकारी विरोधियों की अफवाह है. गूंज महोत्सव का उदघाटन अट्ठारह दिसंबर को झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस करेगे. महोत्सव की सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. सिल्ली का स्टेडियम सजधज कर तैयार है. तीन दिनों के महोत्सव में कई योजना और सेवा की शुरूआत की जा रही है. इसके केंद्र में है शिक्षा और चिकित्सा. महोत्सव के आगाज के साथ शनिवार की शाम सिल्ली विधानसभा क्षेत्र के अड़तालीस पंचायतों में कैंडल मार्च निकाला गया. सिल्ली और मूरी शहरी क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में लोग कैंडल मार्च में शामिल हुए. इस मार्च के जरिए विकास उत्सव में एकजुटता और सामूहिक भागीदारी के संदेश दिए गए. उदघाटन के दिन, अट्ठारह दिसंबर को एक साथ पांच हजार छऊ नृत्य कलाकारों का 'छऊ कार्निवाल' आकर्षण का केंद्र होगा. इस कार्निवाल में बतौर विशिष्ट अतिथि लोक कला से जुड़ी कई महान हस्तियां शामिल होंगी. छऊ कार्निवाल के साथ ही पाइका और अन्य लोक कलाओं का प्रदर्शन होगा. साथ ही डेढ़ हजार युवा, बच्चे भी सांस्कृतिक प्रदर्शन करेंगे. स्टेडियम में ही गांव के जीवंत शक्ल में सिल्ली हाट का निर्माण किया गया है. इनमें कई स्टॉल लगाए गए हैं, जो अट्ठारह दिसंबर से ही खुल जाएंगे. महोत्सव को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह और उल्लास का वातावरण बना है. गूंज महोत्सव के संरक्षक और सिल्ली के विधायक सुदेश कुमार महतो दिन- रात तैयारियों का जायजा लेने में लगे हैं. महोत्सव की सफलता के लिए उन्होंने वॉलंटियर, एसएचजी, गूंज परिवार के सदस्यों के अलावा समाज के सभी वर्गों की जिम्मेदारी तय की है. महोत्सव का पहला दिन महिलाओं के नाम होगा. जबकि दूसरा दिन किसान और तीसरा दिन युवा महोत्सव मनाया जाएगा. सुदेश कुमार महतो ने कहा है कि सामाजिक- सांस्कृतिक अवधारणा का जीवंत प्रतीक गूंज महोत्सव ने समय के साथ क्षेत्र के विकास को गतिमान किया है. इस बार प्रगति की नई यात्रा तय होगी. हमें जनाकांक्षाओं के अनरूप सृजन के नए प्रयासों को मूर्त रूप देना है. विविध आयाम से जुड़े इस महोत्सव के जरिये वैसे अवसर भी तैयार किए जाने हैं, जिनसे सिल्ली विधानसभा क्षेत्र का वर्तमान और भविष्य संवारा जा सके. यह महोत्सव उत्साह और उल्लास के पर्याय के साथ समाज के सशक्तिकरण का निरंतर प्रयास भी है. - अंतराष्ट्रीय छऊ कलाकार खिरोद सिंह मुंडा . - पारंपरिक कलसा नृत्य ग्रुप सुषमा नाग - पद्मश्री स्वर्गीय रामदयाल सिंह मुंडा जी के सुपुत्र गुंजल इकिर मुंडा. - सिल्ली कॉलेज में उच्चस्तरीय लाइब्रेरी की शुरुआत की जाएगी. - सिल्ली कॉलेज में ही झारखंड स्टेट ओपेन यूनिवर्सिटी का स्टडी सेंटर शुरू होगा. - लाइब्रेरी और स्टडी सेटर का उदघाटन महामहिम राज्यपाल करेंगे. - आम आदमी स्वास्थ्य सेवा की शुरूआत होगी. बीस दिसंबर को सिल्ली विधानसभा क्षेत्र में खेलो सिल्ली अभियान का शुभारंभ होगा. इस अभियान के तहत पूरे विधानसभा क्षेत्र के सभी पंचायतों में विभिन खेलों का प्रशिक्षण दिया जाएगा. - स्मार्ट क्लास : शिक्षा के क्षेत्र में एक नयी क्रांति की नींव के साथ 'पढ़ेगा सिल्ली, बढ़ेगा सिल्ली' अभियान के दूसरे चरण में सिल्ली विधानसभा क्षेत्र के सभी उच्च विद्यालयों में स्मार्ट क्लास के माध्यम से पढ़ाई की शुरुआत होगी.
देश को ब्रिटिश शासन से आजाद हुए 69 साल बीत चुके हैं। 21वीं सदी में सरकारी उदासीनता और अधिकारियों की लापरवाही का इससे बड़ा उदाहरण और क्या होगा कि गोरखपुर मुख्यालय से महज 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ढाई फीट का रास्ता जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की दास्तां बयां करता है। गोरखपुरः देश को ब्रिटिश शासन से आजाद हुए 69 साल बीत चुके हैं। 21वीं सदी में सरकारी उदासीनता और अधिकारियों की लापरवाही का इससे बड़ा उदाहरण और क्या होगा कि गोरखपुर मुख्यालय से महज 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ढाई फीट का रास्ता जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की दास्तां बयां करता है। इस रास्ते से होकर 45 गांव के लगभग 3 लाख लोग रोज शहर की ओर आते-जाते हैं। हम बात कर रहे हैं गोरखपुर के पश्चिमांचल में बसे कोलिया गांव सहित उन साठ गांवों की, जहां रहने वाले लोगों को शहर आने और फिर गांव वापस जाने के लिए रोज मुसीबतों से दो-चार होना पड़ता है। ऐसा पहले नहीं था। इन सभी गांव के लोग 5-6 साल पहले तक खुशहाल थे। जब पूर्वोत्तर रेलवे की ओर से दोहरीकरण का काम शुरू हुआ, तो इन सभी गांव को जाने वाली सड़क दोहरीकरण के कारण सकरी हो गई। रेलवे पुल बना तो रास्ता भी बस ढाई फीट का ही बचा। उस दौरान रेलवेे के अधिकारियों ने आश्वासन दिया था, कि बाद में इसका कोई विकल्प निकाला जाएगा लेकिन, ऐसा नहीं हुआ और गांव के लोगों को पिछले 5-6 साल से इसी रास्ते का गांव में आने-जाने के लिए इस्तेमाल करना पड़ता हैं। इतना ही नहीं इस गांव मे बीजेपी एमपी योगी आदित्यनाथ का भी दौरा आए दिन होता है लेकिन क्या उनकी भी नजर ग्रामीणों के साथ हो रहे दिक्कतों पर नहीं पड़ रही है ? कोलिया गांव के पूर्व ग्राम प्रधान राजकुमार राजभर बताते हैं कि ढाई फीट का रास्ता होने के कारण बस एक ही ओर से कोई दो पहिया वाहन और साइकिल इस पार से उस पार जा सकती है। इसकी लंबाई 30 मीटर के करीब है। कई बार तो ऐसा होता है कि गांव में गंभीर रूप से बीमार हुए मरीज को चारपाई पर लादकर रास्ता पार कराना पड़ता हैं। प्रेग्नेंट महिलाओं को इमरजेंसी में हॉस्पिटल ले जाने में भी काफी कठिनाई झेलनी पड़ती है। इस ढाई फीट के रास्ते से पहले निकलने के लिए आए दिन झगड़े होते हैं। वहीं कई बार तो लोग दुर्घटना का शिकार भी हो जाते हैं। वहीं ग्रामीण आनंद राजभर बताते हैं कि गांव 50 से 60 ग्रामसभा के लोग इसी ढाई फीट के रास्ते का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर हैं। वह बताते हैं कि जबसे रेल का दोहरीकरण हुआ है, कई दुर्घटनाएं हो रही हैं। जो भी जनप्रतिनिधि हैं उनके कान पर जूं नहीं रेंग रही है। यही कारण है कि गांव में बिजली भी नहीं पहुंच पा रही है। डीएम से लेकर अन्य अधिकारियों के पास भी गुहार लगाने के बावजूद भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। दरअसल जब रेलवे ने दोहरीकरण किया, तो लोगों को इस बात का विश्वास था कि कोई न कोई विकल्प निकाला जाएगा। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ और जिन अधिकारियों ने आश्वासन दिया था वह भी अपने वादे से मुकर गए। लोकसभा सदर और गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में आने वाले इन गांवों की तकदीर भी इसी ढाई फीट के रास्ते पर टिकी है।
देश को ब्रिटिश शासन से आजाद हुए उनहत्तर साल बीत चुके हैं। इक्कीसवीं सदी में सरकारी उदासीनता और अधिकारियों की लापरवाही का इससे बड़ा उदाहरण और क्या होगा कि गोरखपुर मुख्यालय से महज चार किलोग्राममीटर की दूरी पर स्थित ढाई फीट का रास्ता जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की दास्तां बयां करता है। गोरखपुरः देश को ब्रिटिश शासन से आजाद हुए उनहत्तर साल बीत चुके हैं। इक्कीसवीं सदी में सरकारी उदासीनता और अधिकारियों की लापरवाही का इससे बड़ा उदाहरण और क्या होगा कि गोरखपुर मुख्यालय से महज चार किलोग्राममीटर की दूरी पर स्थित ढाई फीट का रास्ता जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की दास्तां बयां करता है। इस रास्ते से होकर पैंतालीस गांव के लगभग तीन लाख लोग रोज शहर की ओर आते-जाते हैं। हम बात कर रहे हैं गोरखपुर के पश्चिमांचल में बसे कोलिया गांव सहित उन साठ गांवों की, जहां रहने वाले लोगों को शहर आने और फिर गांव वापस जाने के लिए रोज मुसीबतों से दो-चार होना पड़ता है। ऐसा पहले नहीं था। इन सभी गांव के लोग पाँच-छः साल पहले तक खुशहाल थे। जब पूर्वोत्तर रेलवे की ओर से दोहरीकरण का काम शुरू हुआ, तो इन सभी गांव को जाने वाली सड़क दोहरीकरण के कारण सकरी हो गई। रेलवे पुल बना तो रास्ता भी बस ढाई फीट का ही बचा। उस दौरान रेलवेे के अधिकारियों ने आश्वासन दिया था, कि बाद में इसका कोई विकल्प निकाला जाएगा लेकिन, ऐसा नहीं हुआ और गांव के लोगों को पिछले पाँच-छः साल से इसी रास्ते का गांव में आने-जाने के लिए इस्तेमाल करना पड़ता हैं। इतना ही नहीं इस गांव मे बीजेपी एमपी योगी आदित्यनाथ का भी दौरा आए दिन होता है लेकिन क्या उनकी भी नजर ग्रामीणों के साथ हो रहे दिक्कतों पर नहीं पड़ रही है ? कोलिया गांव के पूर्व ग्राम प्रधान राजकुमार राजभर बताते हैं कि ढाई फीट का रास्ता होने के कारण बस एक ही ओर से कोई दो पहिया वाहन और साइकिल इस पार से उस पार जा सकती है। इसकी लंबाई तीस मीटर के करीब है। कई बार तो ऐसा होता है कि गांव में गंभीर रूप से बीमार हुए मरीज को चारपाई पर लादकर रास्ता पार कराना पड़ता हैं। प्रेग्नेंट महिलाओं को इमरजेंसी में हॉस्पिटल ले जाने में भी काफी कठिनाई झेलनी पड़ती है। इस ढाई फीट के रास्ते से पहले निकलने के लिए आए दिन झगड़े होते हैं। वहीं कई बार तो लोग दुर्घटना का शिकार भी हो जाते हैं। वहीं ग्रामीण आनंद राजभर बताते हैं कि गांव पचास से साठ ग्रामसभा के लोग इसी ढाई फीट के रास्ते का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर हैं। वह बताते हैं कि जबसे रेल का दोहरीकरण हुआ है, कई दुर्घटनाएं हो रही हैं। जो भी जनप्रतिनिधि हैं उनके कान पर जूं नहीं रेंग रही है। यही कारण है कि गांव में बिजली भी नहीं पहुंच पा रही है। डीएम से लेकर अन्य अधिकारियों के पास भी गुहार लगाने के बावजूद भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। दरअसल जब रेलवे ने दोहरीकरण किया, तो लोगों को इस बात का विश्वास था कि कोई न कोई विकल्प निकाला जाएगा। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ और जिन अधिकारियों ने आश्वासन दिया था वह भी अपने वादे से मुकर गए। लोकसभा सदर और गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में आने वाले इन गांवों की तकदीर भी इसी ढाई फीट के रास्ते पर टिकी है।
पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव की वोटिंग के दौरान भारी हिंसा देखने को मिला। लोकतंत्र के पर्व में मातम पसर गया। हिंसा में 30 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। इसे लेकर अब केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने ममता बनर्जी की सरकार पर निशाना साधा है। खबर में आगे पढ़ेंः बंगाल में चुनाव के दौरान हिंसा बेहद आम हो गई है। चुनाव के दौरान या फिर उसके बाद अक्सर वहां हिंसा देखने को मिलती है। इसे लेकर लोगों में दहशत का माहौल है। वहीं केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने ममता बनर्जी की सरकार पर निशाना साधा है। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा, "पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव में जिस प्रकार से लोकतंत्र की हत्या होते हुए लोग देख रहे हैं, जहां लोकतांत्रिक अधिकारों को जताने के लिए लोगों को मौत के घाट उतारा जा रहा है।" केंद्रीय मंत्री ईरानी ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा है। 'क्या मौत का खेला राहुल गांधी को स्वीकार है" उन्होंने कहा, "तृणमूल के साथ कांग्रेस हाथ मिला रही है। क्या उनसे हाथ मिलाना मंजूर है उन्हें, जो पश्चिम बंगाल में कहर मचा रहे हैं' मौत का यह खेला राहुल गांधी को स्वीकार है'" क्या है पूरा मामला' पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव के लिए मतदान की प्रक्रिया शनिवार को संपन्न हुई। इस दौरान शाम 5 बजे तक कुल 66.28 प्रतिशत मतदान हुए। पंचायत चुनाव में वोटिंग के दौरान माहौल काफी खराब हो गया। चारों तरफ हिंसा से अफरातफरी मचने लगी। इस दौरान कुल 21 लोगों की मौत हुई, जिसमें टीएमसी के 10, बीजेपी के 3, कांग्रेस के 3 और CPIM के 2 कार्यकर्ता व अन्य शामिल थे। भाजपा ने शनिवार को आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस सरकार के राज में पश्चिम बंगाल लोकतंत्र में हिंसा का दुखद उदाहरण बन गया है। टीएमसी पर निशाना साधते हुए भाजपा प्रवक्ता एवं राज्यसभा सदस्य सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, "पश्चिम बंगाल कला, संस्कृति और विज्ञान का केंद्र हुआ करता था। अब उसे 'अपराधों, राष्ट्र विरोधी गतिविधियों और खतरनाक तुष्टिकरण' के लिए जाना जाता है।" उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई वाली सरकार अपराधियों को संरक्षण देकर चुनावों के दौरान हिंसा के लिए उनका इस्तेमाल कर रही है। इसे भी पढ़ेंः बिहार में बढ़ी सियासी हलचल, केंद्रीय मंत्री से चिराग की मुलाकात के बाद मंत्रिमंडल में शामिल होने की अटकलें तेज!
पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव की वोटिंग के दौरान भारी हिंसा देखने को मिला। लोकतंत्र के पर्व में मातम पसर गया। हिंसा में तीस से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। इसे लेकर अब केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने ममता बनर्जी की सरकार पर निशाना साधा है। खबर में आगे पढ़ेंः बंगाल में चुनाव के दौरान हिंसा बेहद आम हो गई है। चुनाव के दौरान या फिर उसके बाद अक्सर वहां हिंसा देखने को मिलती है। इसे लेकर लोगों में दहशत का माहौल है। वहीं केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने ममता बनर्जी की सरकार पर निशाना साधा है। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा, "पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव में जिस प्रकार से लोकतंत्र की हत्या होते हुए लोग देख रहे हैं, जहां लोकतांत्रिक अधिकारों को जताने के लिए लोगों को मौत के घाट उतारा जा रहा है।" केंद्रीय मंत्री ईरानी ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा है। 'क्या मौत का खेला राहुल गांधी को स्वीकार है" उन्होंने कहा, "तृणमूल के साथ कांग्रेस हाथ मिला रही है। क्या उनसे हाथ मिलाना मंजूर है उन्हें, जो पश्चिम बंगाल में कहर मचा रहे हैं' मौत का यह खेला राहुल गांधी को स्वीकार है'" क्या है पूरा मामला' पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव के लिए मतदान की प्रक्रिया शनिवार को संपन्न हुई। इस दौरान शाम पाँच बजे तक कुल छयासठ.अट्ठाईस प्रतिशत मतदान हुए। पंचायत चुनाव में वोटिंग के दौरान माहौल काफी खराब हो गया। चारों तरफ हिंसा से अफरातफरी मचने लगी। इस दौरान कुल इक्कीस लोगों की मौत हुई, जिसमें टीएमसी के दस, बीजेपी के तीन, कांग्रेस के तीन और CPIM के दो कार्यकर्ता व अन्य शामिल थे। भाजपा ने शनिवार को आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस सरकार के राज में पश्चिम बंगाल लोकतंत्र में हिंसा का दुखद उदाहरण बन गया है। टीएमसी पर निशाना साधते हुए भाजपा प्रवक्ता एवं राज्यसभा सदस्य सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, "पश्चिम बंगाल कला, संस्कृति और विज्ञान का केंद्र हुआ करता था। अब उसे 'अपराधों, राष्ट्र विरोधी गतिविधियों और खतरनाक तुष्टिकरण' के लिए जाना जाता है।" उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई वाली सरकार अपराधियों को संरक्षण देकर चुनावों के दौरान हिंसा के लिए उनका इस्तेमाल कर रही है। इसे भी पढ़ेंः बिहार में बढ़ी सियासी हलचल, केंद्रीय मंत्री से चिराग की मुलाकात के बाद मंत्रिमंडल में शामिल होने की अटकलें तेज!
जितनी भी आसुरी सम्पत्तियां हैं दुर्गुण, दुराचारादि वे सब अभिमान की छाया में रहती हैं। मैं हूं- इस प्रकार जो अपना होनापन है, वह उतना दोषी नहीं हैं जितना दोषी अभियान है। भगवान का अंश भी निर्दोष है परन्तु मेरे में गुण हैं, मेरे में योग्यता है, मेरे में विद्या है, मैं बड़ा चतुर हूं, मैं वक्ता हूं, मैं दूसरों को समझा सकता हूं- इस प्रकार दूसरों की अपेक्षा अपने में जो विशेषता दिखती है, यह बहुत दोषी है अपने में विशेषता चाहे भजन-ध्यान से दिखे, चाहे कीर्तन से दिखे, चाहे जप से दिखे, चाहे चतुराई से दिखे, चाहे उपकार करने से दिखे, किसी भी तरह से दूसरों की अपेक्षा स्वयं में विशेषता दिखती है तो यह अभिमान है। यह अभिमान बहुत घातक है। और इससे बचना भी बहुत जरूरी है। अभिमान जाति को लेकर भी होता है, वर्ण को लेकर भी होता है, आश्रम को लेकर भी होता है, विद्या को लेकर भी होता है, बुद्धि को लेकर भी होता है। कई तरह का अभिमान होता है। जैसे मेरे को गीता याद है, मै गीता पढ़ा सकता हूं, मैं गीता के भाव विशेषता से समझता हूं- यह भी अभिमान है। अभिमान पतन करने वाला है। जो श्रेष्ठïता है या विशेषता है, उसको अपना मान लेने से ही अभिमान आता है। यह अभिमान केवल अपने उद्योग से दूर नहीं होता, प्रत्युत भगवान की कृपा से ही दूर होता है। अभिमान को दूर करने का ज्यों-ज्यों उद्योग करते हैं, त्यों-त्यों अभिमान दूर नहीं होता है। अभिमान को मिटाने का कोई उपाय करें तो वह उपाय ही अभिमान बढ़ाने वाला हो जाता है। इसलिए अभिमान से छूटना भगवत्कृपा के बिना बड़ा कठिन है। साधक को इस विषय में बहुत सावधान रहना चाहिए। और प्रभु की शरण ग्रहण करनी चाहिए। साधक को इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि अपने में जो कुछ विशेषता आई है, वह खुद की नहीं है, प्रत्युत भगवान से आई है। इसलिए उस विशेषता को भगवान की ही समझें, अपनी बिलकुल न समझें। अपने में जो कुछ विशेषता दिखती है, वह प्रभु की दी हुई हैं- ऐसा दृढ़तापूर्वक मानने से ही अभिमान दूर हो सकता है। और विनम्रता आती है। मैं जैसा कीर्तन करता हूं, वैसा दूसरा नहीं कर सकता, दूसरे इतने हैं, पर मेरे जैसा करने वाला कोई नहीं है- इस प्रकार जहां दूसरे को अपने सामने रखा कि अभिमान आया। साधक को ऐसा मानना चाहिए कि मैं करने वाला नहीं हूं, प्रत्युत यह तो भगवान की कृपा कटाक्ष से हो रहा है। जो विशेषता आई है, वह मेरी व्यक्तिगत नहीं है। अगर व्यक्तिगत होती तो सदा रहती, उस पर मेरा अधिकार चलता। ऐसा मानने से ही अभिमान से छुटकारा हो सकता है। कि " दाता एक राम भिखारी सारी दुनिया" भगवान की कृपा है कि वे किसी का अभिमान रहने नहीं देते। इसलिए अभिमान आते ही उसमें टक्कर लगती है। भगवान विशेष कृपा करके चेताते हैं कि तू कुछ भी अपना मत मान, तेरा सबकुछ मैं करूंगा। भगवान अभिमान को तोड़ देते हैं, उसके ठहरने नहीं देते या उनकी अलौकिक विचित्र कृपा है। भगवान को स्वाभाव बड़ा विचित्र। दूसरे मनुष्य तो हमारा कुछ भी उपकार करते हैं तो ऐसा एहसान बताते हैं कि तेरे को मैंने ऊंचा बनाया है। पर भगवान कुछ देकर भी कहते हैं कि "मैं तो हूं भक्तन को दास, भगत मेरे मुकुटमणि"। भगवान ने सबरी और अर्जुन आदि भक्तों के जीवन में ऐसा ही कर दिखाया है। भगवान या नहीं कहते कि मैं तेरे को ऊंचा बनया है, प्रत्युत खुद उसके दास बन जाते हैं। इतना ही नहीं, भगवान उसको पता ही नहीं चलते देते कि मैंने तेरे को दिया है। मनुष्य के पास शरीर, मन, बुद्धि, इन्द्रियां आदि जो कुछ हैं, वह सब भगवान का ही दिया हुआ हैै। वे इतना छिपकर देते हैं कि मनुष्य इन वस्तुओं को अपना ही मान लेता है कि मेरा ही मन है, मेरी ही बुद्धि है, मेरी ही योग्यता है, मेरा सामथ्र्य है, मेरी ही समझ है। यह तो देने वाले की विलक्षणता है कि मिली हुई चीज अपनी ही मालूम देती है। अगर आंखें अपनी हैं तो फिर चश्मा क्यों लगाते हो? आंखों में कमजोरी आ गई तो उसको ठीक कर लो। शरीर अपना तो उसको बीमार मत होने दो, मरने मत दो। पर यह सब अपने हांथ में नहीं है। भगवान अभिमान को दूर करते हैं, पर मनुष्य फिर अभिमान कर लेता है। अभिमान करते-करते उम्र बीत जाती है, इसलिए हरदम हे नाथ! हे मेरे नाथ! पुकारते रहो और भीतर से इस बात का ख्याल रखो कि जो कुछ विशेषता आई है, भगवान से आई है, यह अपने घर की नहीं है। ऐसा नहीं मानोगे तो बड़ी दुर्दशा होगी। यह मान लो जन्म भगवान का दिया हुआ है। भगवान मनुष्य को तीन शक्तियां दी हैं- करने की शक्ति, जानने की शक्ति और मानने की शक्ति। करने की शक्ति दूसरों का हित करने के लिए दी है। जानने की शक्ति भगवान की कृपा करने को जानने के लिए दी है, मानने की शक्ति भगवान को मानने के लिए दी है परन्तु गलती तब होती है जब मनुष्य इन तीनों शक्तियों को अपने लिए लगा देता है। इसलिए वह दुःख पा रहा है। बल, बुद्धि, योग्यता आदि अपने ही दीखते ही अभियान आ जाता है। मैं ब्राह्मण हूं- ऐसा मानने पर ब्राह्मणपने का अभियान आ जाता है। मैं धनवान हूं- ऐसा मानने पर धन का अभियान आ जाता है। मैं विद्धान हूं- ऐसा मानने पर विद्या का अभियान आ जाता है। जहां मैं पन का आरोप किया, वहीं अभियान आ जाता है। इसलिए भीतर से हरदम भगवान को पुकारते रहो। अपने में योग्यता प्रत्यक्ष दीखती है, इसलिए अभिमान से बचना बहुत कठिन होता है। मनुष्य को प्रत्यक्ष दीखता है कि मैं अधिक पढ़ा-लिखा हूं, मैं अधिक गीता जानने वाला हूं, मैं कीर्तन करने वाला हूं इसलिए वह फंस जाता हूं। अगर यह दीखने लग जाए कि यह सब केवल भगवान की कृपा से हो रहा है तो निहाल हो जाए। ऐसे चेतना भी भगवान की कृपा से होती है। जिनको ऐसी चेतना न हो उनपर दया होनी चाहिए। वे भी चेतेंगे पर देरी से चेतेंगे। सुना है एक समय बांकुड़े जिले में आकाल पड़ा है। सेठ जी श्रीजय दयाल जी गोयन्दका ने नियम रख दिया कि कोई भी आदमी आकर दो घंटे कीर्तन करे और चावल ले जाए। कारण ये था कि अगर उनको पैसा देंगे तो उससे वे अशुद्ध वस्तुएं खरीदेंगे इसलिए पैसा न देकर चावल देते थे। इस तरह सौ-सवा सौ जगह ऐसे केन्द्र बना दिए जहां लोग जाकर कीर्तन करते थे और चावल ले जाते थे। एक दिन सेठ जी वहां गये। रात्रि के समय बंगाली लोग इक_े हुए। उन्होंने सेठ जी से कहा कि महाराज! आपने हमारे जिले को जीवन दिया, नहीं तो बिना अन्न के लोग भूखों मर जाते। आपने बड़ी कृपा की। सेठ जी ने बदले में बहुत बढिय़ा बात कही कि आप लोग झूठी प्रशंसा करते हो। हमने मारवाड़ से यहां आकर जितने रुपये कमाये, वे सब लग जायें, तब तक तो आपकी ही चीज आपको दी है, हमारी चीज ही नहीं। हम मारवाड़ से लाकर यहां दे, तब आप ऐसा कह सकते हो। हमने तो यहां से कमाया हुआ धन भी पूरा नहीं दिया है। सेठ जी ने केवल सभ्यता की दृष्टि से यह बात नहीं कही, प्रत्युत हृदय से यह बात कही। सेठ जी के छोटे भाई हरिकृष्णदास जी से पूछा गया कि आपने सबको चावल देने का इतना काम शुरू किया है, इसमें कहां तक पैसा लगाने का विचार है? उन्होंने बड़ी विचित्र बात कही कि जब तक मांगने वालों की जो दशा है, वैसी दशा हमारी न हो जाये, तब तक। कोई धनी आदमी क्या ऐसा कह सकता है? उनके मन में यह अभिमान ही नहीं है कि हम इतना उपकार करते हैं यदि ऐसे भाव जागृत हो जाएं तो अभिमान छूट सकता है।
जितनी भी आसुरी सम्पत्तियां हैं दुर्गुण, दुराचारादि वे सब अभिमान की छाया में रहती हैं। मैं हूं- इस प्रकार जो अपना होनापन है, वह उतना दोषी नहीं हैं जितना दोषी अभियान है। भगवान का अंश भी निर्दोष है परन्तु मेरे में गुण हैं, मेरे में योग्यता है, मेरे में विद्या है, मैं बड़ा चतुर हूं, मैं वक्ता हूं, मैं दूसरों को समझा सकता हूं- इस प्रकार दूसरों की अपेक्षा अपने में जो विशेषता दिखती है, यह बहुत दोषी है अपने में विशेषता चाहे भजन-ध्यान से दिखे, चाहे कीर्तन से दिखे, चाहे जप से दिखे, चाहे चतुराई से दिखे, चाहे उपकार करने से दिखे, किसी भी तरह से दूसरों की अपेक्षा स्वयं में विशेषता दिखती है तो यह अभिमान है। यह अभिमान बहुत घातक है। और इससे बचना भी बहुत जरूरी है। अभिमान जाति को लेकर भी होता है, वर्ण को लेकर भी होता है, आश्रम को लेकर भी होता है, विद्या को लेकर भी होता है, बुद्धि को लेकर भी होता है। कई तरह का अभिमान होता है। जैसे मेरे को गीता याद है, मै गीता पढ़ा सकता हूं, मैं गीता के भाव विशेषता से समझता हूं- यह भी अभिमान है। अभिमान पतन करने वाला है। जो श्रेष्ठïता है या विशेषता है, उसको अपना मान लेने से ही अभिमान आता है। यह अभिमान केवल अपने उद्योग से दूर नहीं होता, प्रत्युत भगवान की कृपा से ही दूर होता है। अभिमान को दूर करने का ज्यों-ज्यों उद्योग करते हैं, त्यों-त्यों अभिमान दूर नहीं होता है। अभिमान को मिटाने का कोई उपाय करें तो वह उपाय ही अभिमान बढ़ाने वाला हो जाता है। इसलिए अभिमान से छूटना भगवत्कृपा के बिना बड़ा कठिन है। साधक को इस विषय में बहुत सावधान रहना चाहिए। और प्रभु की शरण ग्रहण करनी चाहिए। साधक को इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि अपने में जो कुछ विशेषता आई है, वह खुद की नहीं है, प्रत्युत भगवान से आई है। इसलिए उस विशेषता को भगवान की ही समझें, अपनी बिलकुल न समझें। अपने में जो कुछ विशेषता दिखती है, वह प्रभु की दी हुई हैं- ऐसा दृढ़तापूर्वक मानने से ही अभिमान दूर हो सकता है। और विनम्रता आती है। मैं जैसा कीर्तन करता हूं, वैसा दूसरा नहीं कर सकता, दूसरे इतने हैं, पर मेरे जैसा करने वाला कोई नहीं है- इस प्रकार जहां दूसरे को अपने सामने रखा कि अभिमान आया। साधक को ऐसा मानना चाहिए कि मैं करने वाला नहीं हूं, प्रत्युत यह तो भगवान की कृपा कटाक्ष से हो रहा है। जो विशेषता आई है, वह मेरी व्यक्तिगत नहीं है। अगर व्यक्तिगत होती तो सदा रहती, उस पर मेरा अधिकार चलता। ऐसा मानने से ही अभिमान से छुटकारा हो सकता है। कि " दाता एक राम भिखारी सारी दुनिया" भगवान की कृपा है कि वे किसी का अभिमान रहने नहीं देते। इसलिए अभिमान आते ही उसमें टक्कर लगती है। भगवान विशेष कृपा करके चेताते हैं कि तू कुछ भी अपना मत मान, तेरा सबकुछ मैं करूंगा। भगवान अभिमान को तोड़ देते हैं, उसके ठहरने नहीं देते या उनकी अलौकिक विचित्र कृपा है। भगवान को स्वाभाव बड़ा विचित्र। दूसरे मनुष्य तो हमारा कुछ भी उपकार करते हैं तो ऐसा एहसान बताते हैं कि तेरे को मैंने ऊंचा बनाया है। पर भगवान कुछ देकर भी कहते हैं कि "मैं तो हूं भक्तन को दास, भगत मेरे मुकुटमणि"। भगवान ने सबरी और अर्जुन आदि भक्तों के जीवन में ऐसा ही कर दिखाया है। भगवान या नहीं कहते कि मैं तेरे को ऊंचा बनया है, प्रत्युत खुद उसके दास बन जाते हैं। इतना ही नहीं, भगवान उसको पता ही नहीं चलते देते कि मैंने तेरे को दिया है। मनुष्य के पास शरीर, मन, बुद्धि, इन्द्रियां आदि जो कुछ हैं, वह सब भगवान का ही दिया हुआ हैै। वे इतना छिपकर देते हैं कि मनुष्य इन वस्तुओं को अपना ही मान लेता है कि मेरा ही मन है, मेरी ही बुद्धि है, मेरी ही योग्यता है, मेरा सामथ्र्य है, मेरी ही समझ है। यह तो देने वाले की विलक्षणता है कि मिली हुई चीज अपनी ही मालूम देती है। अगर आंखें अपनी हैं तो फिर चश्मा क्यों लगाते हो? आंखों में कमजोरी आ गई तो उसको ठीक कर लो। शरीर अपना तो उसको बीमार मत होने दो, मरने मत दो। पर यह सब अपने हांथ में नहीं है। भगवान अभिमान को दूर करते हैं, पर मनुष्य फिर अभिमान कर लेता है। अभिमान करते-करते उम्र बीत जाती है, इसलिए हरदम हे नाथ! हे मेरे नाथ! पुकारते रहो और भीतर से इस बात का ख्याल रखो कि जो कुछ विशेषता आई है, भगवान से आई है, यह अपने घर की नहीं है। ऐसा नहीं मानोगे तो बड़ी दुर्दशा होगी। यह मान लो जन्म भगवान का दिया हुआ है। भगवान मनुष्य को तीन शक्तियां दी हैं- करने की शक्ति, जानने की शक्ति और मानने की शक्ति। करने की शक्ति दूसरों का हित करने के लिए दी है। जानने की शक्ति भगवान की कृपा करने को जानने के लिए दी है, मानने की शक्ति भगवान को मानने के लिए दी है परन्तु गलती तब होती है जब मनुष्य इन तीनों शक्तियों को अपने लिए लगा देता है। इसलिए वह दुःख पा रहा है। बल, बुद्धि, योग्यता आदि अपने ही दीखते ही अभियान आ जाता है। मैं ब्राह्मण हूं- ऐसा मानने पर ब्राह्मणपने का अभियान आ जाता है। मैं धनवान हूं- ऐसा मानने पर धन का अभियान आ जाता है। मैं विद्धान हूं- ऐसा मानने पर विद्या का अभियान आ जाता है। जहां मैं पन का आरोप किया, वहीं अभियान आ जाता है। इसलिए भीतर से हरदम भगवान को पुकारते रहो। अपने में योग्यता प्रत्यक्ष दीखती है, इसलिए अभिमान से बचना बहुत कठिन होता है। मनुष्य को प्रत्यक्ष दीखता है कि मैं अधिक पढ़ा-लिखा हूं, मैं अधिक गीता जानने वाला हूं, मैं कीर्तन करने वाला हूं इसलिए वह फंस जाता हूं। अगर यह दीखने लग जाए कि यह सब केवल भगवान की कृपा से हो रहा है तो निहाल हो जाए। ऐसे चेतना भी भगवान की कृपा से होती है। जिनको ऐसी चेतना न हो उनपर दया होनी चाहिए। वे भी चेतेंगे पर देरी से चेतेंगे। सुना है एक समय बांकुड़े जिले में आकाल पड़ा है। सेठ जी श्रीजय दयाल जी गोयन्दका ने नियम रख दिया कि कोई भी आदमी आकर दो घंटे कीर्तन करे और चावल ले जाए। कारण ये था कि अगर उनको पैसा देंगे तो उससे वे अशुद्ध वस्तुएं खरीदेंगे इसलिए पैसा न देकर चावल देते थे। इस तरह सौ-सवा सौ जगह ऐसे केन्द्र बना दिए जहां लोग जाकर कीर्तन करते थे और चावल ले जाते थे। एक दिन सेठ जी वहां गये। रात्रि के समय बंगाली लोग इक_े हुए। उन्होंने सेठ जी से कहा कि महाराज! आपने हमारे जिले को जीवन दिया, नहीं तो बिना अन्न के लोग भूखों मर जाते। आपने बड़ी कृपा की। सेठ जी ने बदले में बहुत बढिय़ा बात कही कि आप लोग झूठी प्रशंसा करते हो। हमने मारवाड़ से यहां आकर जितने रुपये कमाये, वे सब लग जायें, तब तक तो आपकी ही चीज आपको दी है, हमारी चीज ही नहीं। हम मारवाड़ से लाकर यहां दे, तब आप ऐसा कह सकते हो। हमने तो यहां से कमाया हुआ धन भी पूरा नहीं दिया है। सेठ जी ने केवल सभ्यता की दृष्टि से यह बात नहीं कही, प्रत्युत हृदय से यह बात कही। सेठ जी के छोटे भाई हरिकृष्णदास जी से पूछा गया कि आपने सबको चावल देने का इतना काम शुरू किया है, इसमें कहां तक पैसा लगाने का विचार है? उन्होंने बड़ी विचित्र बात कही कि जब तक मांगने वालों की जो दशा है, वैसी दशा हमारी न हो जाये, तब तक। कोई धनी आदमी क्या ऐसा कह सकता है? उनके मन में यह अभिमान ही नहीं है कि हम इतना उपकार करते हैं यदि ऐसे भाव जागृत हो जाएं तो अभिमान छूट सकता है।
हैद्राबाद - नागराजू हत्या के मामले में पुलिस उपायुक्त सुनप्रीत सिंह ने कहा कि, वे मामले को फास्ट ट्रैक न्यायालय में चलाने के लिए आवेदन कर रहे हैं। तेलंगाना की राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन ने शुक्रवार को नागराजू की हत्या पर राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी मीडिया रिपोर्टों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए शुक्रवार को राज्य सरकार और डीजीपी को नोटिस भेजकर चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने कहा कि, कानून के किसी डर के बिना सार्वजनिक दृष्टि से इस तरह के जघन्य अपराध ने अराजकता का संकेत दिया और मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है। एनएचआरसी ने मुख्य सचिव से इस बारे में एक रिपोर्ट देने को कहा है कि क्या अंतरजातीय/अंतर-धार्मिक विवाह के मामलों में ऑनर किलिंग की ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तेलंगाना सरकार की कोई नीति है। भाजपा ने पूछा सेकुलर चुप क्यों हैं ? 25 साल के नागराजू हैदराबाद के बिल्लापुरम में रहते थे। उन्होंने 23 साल की सैयद सुल्ताना (Syed Sultanan) से दो महीने पहले ही शादी की थी। 4 मई को चाकू गोदकर नागराजूू की हत्या कर दी गई। मामला ऑनर किलिंग का बताया जा रहा है। आरोप है कि, मुस्लिम लडकी के घर वालों ने युवक की हत्या करवाई है। वहीं इस मामले को लेकर भाजपा जांच की मांग कर रही है। पुलिस ने मामले में कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया है। ये सभी लडकी के परिवार के हैं। मौके पर मौजूद कई लोगों ने इस वारदात के वीडियो बनाए व कुछ ने तस्वीरें लीं, जो सोशल मीडिया में वायरल हो रही हैं। ये इतनी वीभत्स हैं कि उन्हें शेयर नहीं किया जा सकता। घटना 4 मई बुधवार रात करीब नौ बजे सरूरनगर तहसीलदार कार्यालय के पास हुई। पुलिस ने मृतक की पहचान नागराजू के रूप में की। जानकारी के अनुसार आरोपी मोटरसाइकिल पर सवार थे और कथित तौर पर नागराजू को चाकू मारकर मौके से फरार हो गए थे। घटना कथित तौर पर एक भीड़भाड़ वाली सड़क पर हुई थी और कई लोगों ने इस घटना को रिकॉर्ड किया, शव की तस्वीरें क्लिक कीं। घटना के बाद, इलाके में तनाव पैदा हो गया है और नागराजू के परिवार ने नागराजू की हत्या में उसकी पत्नी का परिवार शामिल होने का दावा करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। नागराजू की कथित तौर पर पल्लवी (पूर्व में सैयद अश्रीन सुल्ताना Syed Sultanan) से 31 जनवरी को उसके परिवार की इच्छा के विरुद्ध शादी की गई थी। शादी के बाद सुल्ताना ने अपनी मर्जी से अपना नाम पल्लवी रख लिया था । नागराजू के रिश्तेदारों ने आरोप लगाया कि उसके परिवार ने लडके की हत्या इसलिए की क्योंकि वे अलग-अलग धर्म के थे और उन्होंने उसके परिवार की मर्जी के बिना एक-दूसरे से शादी की थी। उन्होंने पुराने हैदराबाद के आर्य समाज मंदिर में शादी की थी। पुलिस ने बताया कि, बुधवार को जब दोनों पति-पत्नी बाइक से जा रहे थे, तभी सुल्ताना के भाइयों ने शहर के एलबी नगर इलाके में एक चौराहे पर लोहे की रॉड से हमला किया। इस हमले में शख्स की मौत हो गई। भाजपा ने अपराधियों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए एक रैली की। तेलंगाना के भाजपा विधायक राजा सिंह ने हत्या की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में शामिल सभी लोगों की गिरफ्तारी की मांग की है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने शुक्रवार को ट्विटर पर इस मुद्दे पर टिप्पणी की। पूनावाला ने कहा कि, यदि एक हिंदू पत्नी के मुस्लिम पति को उसके परिवार ने मार दिया होता तो हम जानते हैं कि अब तक क्या होगा! कांग्रेस, आप, टीएमसी, सपा इस्लामोफोबिया का आरोप लगाते हुए संयुक्त राष्ट्र पहुंच गए होंगे। लेकिन जब से हिंदू मारे गए हैं और हैदराबाद में - अपराध धर्मनिरपेक्ष है ? इसलिए धर्मनिरपेक्ष चुप।
हैद्राबाद - नागराजू हत्या के मामले में पुलिस उपायुक्त सुनप्रीत सिंह ने कहा कि, वे मामले को फास्ट ट्रैक न्यायालय में चलाने के लिए आवेदन कर रहे हैं। तेलंगाना की राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन ने शुक्रवार को नागराजू की हत्या पर राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी मीडिया रिपोर्टों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए शुक्रवार को राज्य सरकार और डीजीपी को नोटिस भेजकर चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने कहा कि, कानून के किसी डर के बिना सार्वजनिक दृष्टि से इस तरह के जघन्य अपराध ने अराजकता का संकेत दिया और मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है। एनएचआरसी ने मुख्य सचिव से इस बारे में एक रिपोर्ट देने को कहा है कि क्या अंतरजातीय/अंतर-धार्मिक विवाह के मामलों में ऑनर किलिंग की ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तेलंगाना सरकार की कोई नीति है। भाजपा ने पूछा सेकुलर चुप क्यों हैं ? पच्चीस साल के नागराजू हैदराबाद के बिल्लापुरम में रहते थे। उन्होंने तेईस साल की सैयद सुल्ताना से दो महीने पहले ही शादी की थी। चार मई को चाकू गोदकर नागराजूू की हत्या कर दी गई। मामला ऑनर किलिंग का बताया जा रहा है। आरोप है कि, मुस्लिम लडकी के घर वालों ने युवक की हत्या करवाई है। वहीं इस मामले को लेकर भाजपा जांच की मांग कर रही है। पुलिस ने मामले में कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया है। ये सभी लडकी के परिवार के हैं। मौके पर मौजूद कई लोगों ने इस वारदात के वीडियो बनाए व कुछ ने तस्वीरें लीं, जो सोशल मीडिया में वायरल हो रही हैं। ये इतनी वीभत्स हैं कि उन्हें शेयर नहीं किया जा सकता। घटना चार मई बुधवार रात करीब नौ बजे सरूरनगर तहसीलदार कार्यालय के पास हुई। पुलिस ने मृतक की पहचान नागराजू के रूप में की। जानकारी के अनुसार आरोपी मोटरसाइकिल पर सवार थे और कथित तौर पर नागराजू को चाकू मारकर मौके से फरार हो गए थे। घटना कथित तौर पर एक भीड़भाड़ वाली सड़क पर हुई थी और कई लोगों ने इस घटना को रिकॉर्ड किया, शव की तस्वीरें क्लिक कीं। घटना के बाद, इलाके में तनाव पैदा हो गया है और नागराजू के परिवार ने नागराजू की हत्या में उसकी पत्नी का परिवार शामिल होने का दावा करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। नागराजू की कथित तौर पर पल्लवी से इकतीस जनवरी को उसके परिवार की इच्छा के विरुद्ध शादी की गई थी। शादी के बाद सुल्ताना ने अपनी मर्जी से अपना नाम पल्लवी रख लिया था । नागराजू के रिश्तेदारों ने आरोप लगाया कि उसके परिवार ने लडके की हत्या इसलिए की क्योंकि वे अलग-अलग धर्म के थे और उन्होंने उसके परिवार की मर्जी के बिना एक-दूसरे से शादी की थी। उन्होंने पुराने हैदराबाद के आर्य समाज मंदिर में शादी की थी। पुलिस ने बताया कि, बुधवार को जब दोनों पति-पत्नी बाइक से जा रहे थे, तभी सुल्ताना के भाइयों ने शहर के एलबी नगर इलाके में एक चौराहे पर लोहे की रॉड से हमला किया। इस हमले में शख्स की मौत हो गई। भाजपा ने अपराधियों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए एक रैली की। तेलंगाना के भाजपा विधायक राजा सिंह ने हत्या की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में शामिल सभी लोगों की गिरफ्तारी की मांग की है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने शुक्रवार को ट्विटर पर इस मुद्दे पर टिप्पणी की। पूनावाला ने कहा कि, यदि एक हिंदू पत्नी के मुस्लिम पति को उसके परिवार ने मार दिया होता तो हम जानते हैं कि अब तक क्या होगा! कांग्रेस, आप, टीएमसी, सपा इस्लामोफोबिया का आरोप लगाते हुए संयुक्त राष्ट्र पहुंच गए होंगे। लेकिन जब से हिंदू मारे गए हैं और हैदराबाद में - अपराध धर्मनिरपेक्ष है ? इसलिए धर्मनिरपेक्ष चुप।
बांदा जिले के मटौंध थाना क्षेत्र में मंगलवार शाम सड़क किनारे खड़े ट्रक से एक मोटरसाइकिल टकरा गई, जिसके कारण मोटरसाइकिल सवार दो युवकों की मौत हो गयी। पुलिस ने यह जानकारी दी। बांदाः बांदा जिले के मटौंध थाना क्षेत्र में मंगलवार शाम सड़क किनारे खड़े ट्रक से एक मोटरसाइकिल टकरा गई, जिसके कारण मोटरसाइकिल सवार दो युवकों की मौत हो गयी। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) गवेन्द्र गौतम ने बताया कि मटौंध थाना क्षेत्र के खड्डी तिगैला के पास सड़क किनारे खड़े ट्रक से एक मोटरसाइकिल टकरा गई, जिससे उस पर सवार महोबा जिला निवासी दीपक बाल्मीकि (22) और उसका दोस्त कौशल (22) गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्होंने बताया कि मटौंध पुलिस घायलों को तुरंत अस्पताल लेकर गयी, जहां चिकित्सकों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। सीओ ने बताया कि दोनों युवक अतर्रा कस्बे से महोबा लौट रहे थे, तभी यह हादसा हो गया। उन्होंने बताया कि दोनों शव पोस्टमार्टम के लिए मुर्दाघर में रखे गए हैं और उनका बुधवार को पोस्टमार्टम होगा।
बांदा जिले के मटौंध थाना क्षेत्र में मंगलवार शाम सड़क किनारे खड़े ट्रक से एक मोटरसाइकिल टकरा गई, जिसके कारण मोटरसाइकिल सवार दो युवकों की मौत हो गयी। पुलिस ने यह जानकारी दी। बांदाः बांदा जिले के मटौंध थाना क्षेत्र में मंगलवार शाम सड़क किनारे खड़े ट्रक से एक मोटरसाइकिल टकरा गई, जिसके कारण मोटरसाइकिल सवार दो युवकों की मौत हो गयी। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस क्षेत्राधिकारी गवेन्द्र गौतम ने बताया कि मटौंध थाना क्षेत्र के खड्डी तिगैला के पास सड़क किनारे खड़े ट्रक से एक मोटरसाइकिल टकरा गई, जिससे उस पर सवार महोबा जिला निवासी दीपक बाल्मीकि और उसका दोस्त कौशल गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्होंने बताया कि मटौंध पुलिस घायलों को तुरंत अस्पताल लेकर गयी, जहां चिकित्सकों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। सीओ ने बताया कि दोनों युवक अतर्रा कस्बे से महोबा लौट रहे थे, तभी यह हादसा हो गया। उन्होंने बताया कि दोनों शव पोस्टमार्टम के लिए मुर्दाघर में रखे गए हैं और उनका बुधवार को पोस्टमार्टम होगा।
भगवान शनि देव को न्याय का प्रतीक माना जाता है। इंसान द्वारा हर कार्यक्षेत्र में किए गए अच्छे और बुरे कर्मों का फल शनिदेव ही देते हैं। शनि देव के प्रभाव से आज तक कोई भी इंसान बच नहीं पाया है। शनिदेव से हर कोई डरता है और उन्हें प्रसन्न करने के लिए विभिन्न उपायों को तलाशता रहता है। शराब - शनिवार के दिन किसी भी प्रकार का नशा, शराब, सिगरेट आदि सेवन नहीं करना चाहिए। इससे शनिदेव क्रोधित होते हैं। मसूर - शनिवार के दिन घर में मसूर की दाल न बनाएं और ना ही कहीं बाहर इसका सेवन करें। हो सके तो इस दिन मसूर का दान करना चाहिए। इससे शनिदेव प्रसन्न होते हैं। काला तिल - काले तिल का सेवन करना या इन्हें खरीदना इस दिन निषेध माना जाता है। अगर आप ऐसा करते हैं तो शनि के क्रोध के भागी हो सकते हैं। तेल - किसी भी प्रकार का तेल इस दिन नहीं खरीदना चाहिए और ना ही तेल का अधिक इस्तेमाल करना चाहिए। तैलीय चीजों का सेवन भी इस दिन न करें। तेल का दान इस दिन शुभ होता है।
भगवान शनि देव को न्याय का प्रतीक माना जाता है। इंसान द्वारा हर कार्यक्षेत्र में किए गए अच्छे और बुरे कर्मों का फल शनिदेव ही देते हैं। शनि देव के प्रभाव से आज तक कोई भी इंसान बच नहीं पाया है। शनिदेव से हर कोई डरता है और उन्हें प्रसन्न करने के लिए विभिन्न उपायों को तलाशता रहता है। शराब - शनिवार के दिन किसी भी प्रकार का नशा, शराब, सिगरेट आदि सेवन नहीं करना चाहिए। इससे शनिदेव क्रोधित होते हैं। मसूर - शनिवार के दिन घर में मसूर की दाल न बनाएं और ना ही कहीं बाहर इसका सेवन करें। हो सके तो इस दिन मसूर का दान करना चाहिए। इससे शनिदेव प्रसन्न होते हैं। काला तिल - काले तिल का सेवन करना या इन्हें खरीदना इस दिन निषेध माना जाता है। अगर आप ऐसा करते हैं तो शनि के क्रोध के भागी हो सकते हैं। तेल - किसी भी प्रकार का तेल इस दिन नहीं खरीदना चाहिए और ना ही तेल का अधिक इस्तेमाल करना चाहिए। तैलीय चीजों का सेवन भी इस दिन न करें। तेल का दान इस दिन शुभ होता है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Congress leader Rahul Gandhi) मंगलवार को दिल्ली के करोल बाग में एक मोटरसाइकिल मैकेनिक की दुकान पर पहुंचे। राहुल अपने इस दौरे के दौरान कई लोगों से बातचीत की। कांग्रेस नेता राहुल गांधी मंगलवार को यहां करोल बाग में मोटरसाइकिल मैकेनिक की दुकानों पर पहुंचे और उनसे बातचीत की। राहुल (Congress leader Rahul Gandhi) ने इन लोगों साथ अपनी बातचीत की तस्वीरें फेसबुक पर पोस्ट की और लिखा- रिंच (नट बोल्ट कसने का औजार) घुमाने वाले और भारत के पहियों को गतिमान रखने वाले हाथों से सीख रहा हूं। कांग्रेस ने भी पार्टी के पूर्व अध्यक्ष (Congress leader Rahul Gandhi) की तस्वीरें फेसबुक पर साझा की हैं, जिनमें वह मोटरसाइकिल ठीक करना सीखते हुए और मैकेनिक से बातचीत करते हुए नजर आ रहे हैं। कांग्रेस पार्टी ने ट्वीट कर कहा- यही हाथ हिंदुस्तान बनाते हैं। इन कपड़ों पर लगी कालिख हमारी खुद्दारी और शान है। ऐसे हाथों को हौसला देने का काम एक जननायक ही करता है। राहुल गांधी दिल्ली के करोल बाग में मोटरसाइकिल मैकेनिक के साथ. . . 'भारत जोड़ो यात्रा' (Bharat Jodo Yatra) जारी है। इस बीच पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मंगलवार को बताया कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी आगामी 29 और 30 जून को हिंसा प्रभावित मणिपुर का दौरा करेंगे। राहुल वहां राहत शिविरों में लोगों से मुलाकात करने के साथ ही सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों से भी बातचीत करेंगे। वेणुगोपाल ने ट्वीट कर कहा कि राहुल गांधी जी 29 और 30 जून को मणिपुर का दौरा करेंगे। वह इंफाल और चुराचांदपुर में राहत शिविरों में जाएंगे और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। वेणुगोपाल के मुताबिक, मणिपुर पिछले 2 महीने से हिंसा की आग में झुलस रहा है और इस वक्त वहां मरहम लगाने की जरूरत है, ताकि शांति की तरफ बढ़ा जा सके। मणिपुर में मेइती और कुकी समुदाय के बीच मई की शुरुआत में भड़की जातीय हिंसा में 100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। गौरतलब है कि मणिपुर में अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मेइती समुदाय की मांग के विरोध में तीन मई को पर्वतीय जिलों में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' के आयोजन के बाद झड़पें शुरू हुई थीं।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी मंगलवार को दिल्ली के करोल बाग में एक मोटरसाइकिल मैकेनिक की दुकान पर पहुंचे। राहुल अपने इस दौरे के दौरान कई लोगों से बातचीत की। कांग्रेस नेता राहुल गांधी मंगलवार को यहां करोल बाग में मोटरसाइकिल मैकेनिक की दुकानों पर पहुंचे और उनसे बातचीत की। राहुल ने इन लोगों साथ अपनी बातचीत की तस्वीरें फेसबुक पर पोस्ट की और लिखा- रिंच घुमाने वाले और भारत के पहियों को गतिमान रखने वाले हाथों से सीख रहा हूं। कांग्रेस ने भी पार्टी के पूर्व अध्यक्ष की तस्वीरें फेसबुक पर साझा की हैं, जिनमें वह मोटरसाइकिल ठीक करना सीखते हुए और मैकेनिक से बातचीत करते हुए नजर आ रहे हैं। कांग्रेस पार्टी ने ट्वीट कर कहा- यही हाथ हिंदुस्तान बनाते हैं। इन कपड़ों पर लगी कालिख हमारी खुद्दारी और शान है। ऐसे हाथों को हौसला देने का काम एक जननायक ही करता है। राहुल गांधी दिल्ली के करोल बाग में मोटरसाइकिल मैकेनिक के साथ. . . 'भारत जोड़ो यात्रा' जारी है। इस बीच पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मंगलवार को बताया कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी आगामी उनतीस और तीस जून को हिंसा प्रभावित मणिपुर का दौरा करेंगे। राहुल वहां राहत शिविरों में लोगों से मुलाकात करने के साथ ही सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों से भी बातचीत करेंगे। वेणुगोपाल ने ट्वीट कर कहा कि राहुल गांधी जी उनतीस और तीस जून को मणिपुर का दौरा करेंगे। वह इंफाल और चुराचांदपुर में राहत शिविरों में जाएंगे और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। वेणुगोपाल के मुताबिक, मणिपुर पिछले दो महीने से हिंसा की आग में झुलस रहा है और इस वक्त वहां मरहम लगाने की जरूरत है, ताकि शांति की तरफ बढ़ा जा सके। मणिपुर में मेइती और कुकी समुदाय के बीच मई की शुरुआत में भड़की जातीय हिंसा में एक सौ से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। गौरतलब है कि मणिपुर में अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मेइती समुदाय की मांग के विरोध में तीन मई को पर्वतीय जिलों में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' के आयोजन के बाद झड़पें शुरू हुई थीं।
हनुमानजी धधकते हुए अग्निसमूहसे सुशोभित हुए और बादलकी भाँति गरजे। इससे बड़े धीर-चीर योद्धा भाग गये और रावण भी व्याकुल हो उठा और वोला, 'दौड़ो, दौड़ो, इसे पकड़ लो।' यह सुनकर राक्षसोंकी सेना दौड़ी, मानो सावनका वादल जल वरसा रहा हो। वे योद्धालोग आगकी लपटोंकी झपटसे झुलसकर और वायुके झकोरोंसे घबड़ाकर व्याकुल हो गये। इस प्रकार उस समय वहाँ भारी भगदड़ पड़ गयी । रावणको भी मन्त्रीलोग धक्कोसे ढकेलकर और जबर्दस्ती ठेलकर ले चले और कहने लगे- हे नाथ ! आग भयंकर है, इसमें वल नहीं चलेगा । वड़ो विकराल वेषु देखि, सुनि सिंघनादु, उठ्यो मेघनादु, सविपाद कहै रावनो । वेग जित्यो मारुतु, प्रताप मारतंड कोटि, कालऊ करालतों, बड़ाई जित्यो वावनो ।। 'तुलसी' सयाने जातुधान पछिताने कहें, जाको ऐसो दूतु, सो तो साहेवु अबै आवनो । काहेको कुसल रोपें राम बामदेवहू की, विपम चलीसौं वादि वैरको बढ़ावनो ॥ ९ ॥ हनुमान्जीका बड़ा भयंकर वेप देख और उनका सिंहनाद सुन मेघनाद उठा और रावण भी चिन्तायुक्त होकर बोलाइसने तो वेगमे वायुको, प्रतापमें करोड़ों सूर्योको, करालतामें कालको और बढ़ाई ( विशालता ) में भगवान् वामनको भी जीत लिया । तुलसीदासजी कहते है - उस समय जो समझदार राक्षस थे, वे पश्चात्ताप करते हुए कहने लगे, 'जिसका दूत ऐसा (प्रचण्ड) है, वह खामी तो अभी आना वाकी ही है।' भला रामके क्रोधित होनेपर शिवजीकी भी कुशल कैसे हो सकती है ? ऐसे बाँके वीरसे वैर चढ़ाना व्यर्थ ही है । पानी! पानी ! पानी ! सव रानी अकुलानी कहैं, जाति हैं परानी, गति जानी गजचालि है । वसन बिसारै मनिभूषन सॅभारत न, आनन सुखाने, कहैं, क्योंहू कोऊ पालिहै ।। 'तुलसी' मँदोवै मीजि हाथ, धुनि माथ कहै, काहूँ कान कियो न, मैं कह्यो केतो कालि है । बापुरै बिभीषन पुकारि बार-बार कह्यो, चानरु वड़ी वलाइ घने घर घालिहै ।।१०।। सव रानियाँ व्याकुल होकर 'पानी-पानी' चिल्लाती है और दौड़ी चली जा रही हैं । गजकी-सी चालसे ही उनकी गति पहचानने में आती है। वे वस्त्र लेना भूल गयी हैं और मणिजटित आभूषणोंको भी नही सँभाल सकी है। उनके मुख सूख रहे हैं और वे कहती हैं- 'क्या किसी प्रकार भी कोई हमारी रक्षा करेगा ?" गोसाईजी कहते है - मन्दोदरी हाथ मल-मलकर और सिर धुन धुनकर कहती है कि अहो ! कल मैंने कितना कहा, फिर भी किसीने उसपर कान नहीं दिया। वेचारे विभीषणने भी चार-चार पुकारकर कहा कि यह वानर वड़ी भारी वला है और बहुत-से घरोंको चौपट कर देगा। काननु उजारथो तो उजारयो, न विगारयो कछु, - वानरु वेचारो बॉधि आन्यो हठि हारसों ।
हनुमानजी धधकते हुए अग्निसमूहसे सुशोभित हुए और बादलकी भाँति गरजे। इससे बड़े धीर-चीर योद्धा भाग गये और रावण भी व्याकुल हो उठा और वोला, 'दौड़ो, दौड़ो, इसे पकड़ लो।' यह सुनकर राक्षसोंकी सेना दौड़ी, मानो सावनका वादल जल वरसा रहा हो। वे योद्धालोग आगकी लपटोंकी झपटसे झुलसकर और वायुके झकोरोंसे घबड़ाकर व्याकुल हो गये। इस प्रकार उस समय वहाँ भारी भगदड़ पड़ गयी । रावणको भी मन्त्रीलोग धक्कोसे ढकेलकर और जबर्दस्ती ठेलकर ले चले और कहने लगे- हे नाथ ! आग भयंकर है, इसमें वल नहीं चलेगा । वड़ो विकराल वेषु देखि, सुनि सिंघनादु, उठ्यो मेघनादु, सविपाद कहै रावनो । वेग जित्यो मारुतु, प्रताप मारतंड कोटि, कालऊ करालतों, बड़ाई जित्यो वावनो ।। 'तुलसी' सयाने जातुधान पछिताने कहें, जाको ऐसो दूतु, सो तो साहेवु अबै आवनो । काहेको कुसल रोपें राम बामदेवहू की, विपम चलीसौं वादि वैरको बढ़ावनो ॥ नौ ॥ हनुमान्जीका बड़ा भयंकर वेप देख और उनका सिंहनाद सुन मेघनाद उठा और रावण भी चिन्तायुक्त होकर बोलाइसने तो वेगमे वायुको, प्रतापमें करोड़ों सूर्योको, करालतामें कालको और बढ़ाई में भगवान् वामनको भी जीत लिया । तुलसीदासजी कहते है - उस समय जो समझदार राक्षस थे, वे पश्चात्ताप करते हुए कहने लगे, 'जिसका दूत ऐसा है, वह खामी तो अभी आना वाकी ही है।' भला रामके क्रोधित होनेपर शिवजीकी भी कुशल कैसे हो सकती है ? ऐसे बाँके वीरसे वैर चढ़ाना व्यर्थ ही है । पानी! पानी ! पानी ! सव रानी अकुलानी कहैं, जाति हैं परानी, गति जानी गजचालि है । वसन बिसारै मनिभूषन सॅभारत न, आनन सुखाने, कहैं, क्योंहू कोऊ पालिहै ।। 'तुलसी' मँदोवै मीजि हाथ, धुनि माथ कहै, काहूँ कान कियो न, मैं कह्यो केतो कालि है । बापुरै बिभीषन पुकारि बार-बार कह्यो, चानरु वड़ी वलाइ घने घर घालिहै ।।दस।। सव रानियाँ व्याकुल होकर 'पानी-पानी' चिल्लाती है और दौड़ी चली जा रही हैं । गजकी-सी चालसे ही उनकी गति पहचानने में आती है। वे वस्त्र लेना भूल गयी हैं और मणिजटित आभूषणोंको भी नही सँभाल सकी है। उनके मुख सूख रहे हैं और वे कहती हैं- 'क्या किसी प्रकार भी कोई हमारी रक्षा करेगा ?" गोसाईजी कहते है - मन्दोदरी हाथ मल-मलकर और सिर धुन धुनकर कहती है कि अहो ! कल मैंने कितना कहा, फिर भी किसीने उसपर कान नहीं दिया। वेचारे विभीषणने भी चार-चार पुकारकर कहा कि यह वानर वड़ी भारी वला है और बहुत-से घरोंको चौपट कर देगा। काननु उजारथो तो उजारयो, न विगारयो कछु, - वानरु वेचारो बॉधि आन्यो हठि हारसों ।
Posted On: संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने आज नई दिल्ली में प्रवासी भारतीय केंद्र में नीतिगत नेतृत्व क्षमता के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को 'चैम्पियन्स ऑफ द अर्थ अवार्ड 2018' से सम्मानित किया। इस अवसर पर संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण के कार्यकारी निदेशक, श्री एरिक सोल्हिम, विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज और वन, पर्यावरण तथा जलवायु परिवर्तन मामलों के राज्यमंत्री डॉ. महेश शर्मा भी उपस्थित थे। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि यह पुरस्कार उन सभी अनजान लोगों के लिए है, जो वर्षों से दूरस्थ इलाकों, पर्वतीय क्षेत्रों और जनजातीय क्षेत्रों में कार्यरत हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह पुरस्कार भारत की सतत, नई, शाश्वत और प्राचीन परंपरा के लिए सम्मान है और सतत ऊर्जा के लिए हमारी प्रतिबद्धता का परिचायक है। उन्होंने अन्य श्रेणियों में पुरस्कार से सम्मानित अन्य लोगों को भी बधाई दी। श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि जलवायु और आपदा का संस्कृति से सीधा संबंध है और जब तक जलवायु से जुड़े सरोकार हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं बन जाते, आपदाओं से बचना कठिन होगा। यह कहते हुए कि विश्व भर में आज पर्यावरण के प्रति भारत की संवेदनशीलता को महत्व दिया जा रहा है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण की आदत को अपनाने के लिए जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं और आम लोगों को संवेदनशील बनाने के लिए स्वच्छ वायु अभियान की चर्चा की। इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि सरकार ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में अनेक नीतियां और कार्यक्रम शुरू किए हैं। डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि प्रधानमंत्री ने भारतीय त्याग परंपरा को ध्यान में रखते हुए पहले ही यह घोषणा कर दी है कि उन्होंने यह पुरस्कार भारतीय शाश्वत मूल्यों को समर्पित किया है।
Posted On: संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने आज नई दिल्ली में प्रवासी भारतीय केंद्र में नीतिगत नेतृत्व क्षमता के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को 'चैम्पियन्स ऑफ द अर्थ अवार्ड दो हज़ार अट्ठारह' से सम्मानित किया। इस अवसर पर संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण के कार्यकारी निदेशक, श्री एरिक सोल्हिम, विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज और वन, पर्यावरण तथा जलवायु परिवर्तन मामलों के राज्यमंत्री डॉ. महेश शर्मा भी उपस्थित थे। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि यह पुरस्कार उन सभी अनजान लोगों के लिए है, जो वर्षों से दूरस्थ इलाकों, पर्वतीय क्षेत्रों और जनजातीय क्षेत्रों में कार्यरत हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह पुरस्कार भारत की सतत, नई, शाश्वत और प्राचीन परंपरा के लिए सम्मान है और सतत ऊर्जा के लिए हमारी प्रतिबद्धता का परिचायक है। उन्होंने अन्य श्रेणियों में पुरस्कार से सम्मानित अन्य लोगों को भी बधाई दी। श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि जलवायु और आपदा का संस्कृति से सीधा संबंध है और जब तक जलवायु से जुड़े सरोकार हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं बन जाते, आपदाओं से बचना कठिन होगा। यह कहते हुए कि विश्व भर में आज पर्यावरण के प्रति भारत की संवेदनशीलता को महत्व दिया जा रहा है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण की आदत को अपनाने के लिए जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं और आम लोगों को संवेदनशील बनाने के लिए स्वच्छ वायु अभियान की चर्चा की। इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि सरकार ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में अनेक नीतियां और कार्यक्रम शुरू किए हैं। डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि प्रधानमंत्री ने भारतीय त्याग परंपरा को ध्यान में रखते हुए पहले ही यह घोषणा कर दी है कि उन्होंने यह पुरस्कार भारतीय शाश्वत मूल्यों को समर्पित किया है।
खगड़िया के मुफ़्सील थाना क्षेत्र के एनएच 31 पर थाना के समीप सड़क दुर्घटना में बाइक सवार एक युवक की दर्दनाक मौत हो गई। जबकि बाइक के पीछे बैठे दूसरा युवक गंभीर रूप से जख्मी हो गया। घटना रविवार शाम की है। घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया। मिली जानकारी के अनुसार मानसी थाना क्षेत्र के खुटिया पंचायत के पावर हाउस निवासी कैलाश साह का 25 वर्षीय पुत्र मनीष कुमार की सड़क दुर्घटना में घटनास्थल पर ही मौत हो गई। जबकि बाइक के पीछे बैठे प्रिंस कुमार गम्भीर रूप से जख्मी हो गया। लोगों ने बताया कि मनीष और प्रिंस बाइक पर सवार होकर मानसी जा रहा था। इसी दौरान पीछे से आ रही तेज रफ्तार में बुलेट चालक ने धक्का मार दिया। राहगीरों ने बुलेट चालक को पकड़ने की कोशिश की, लेकिन बुलेट चालक भागने में सफल रहा। इधर, मुफ़्सील पुलिस घटनास्थल पर पहुँच कर जख्मी प्रिंस से नाम पता पूछकर परिजनों को सूचना दिया। परिजनों को घटना की जानकारी परिजनों को मिलने पर घटनास्थल पहुँच गया। परिजनों का शव देखकर दहाड़ मारकर रोने लगे। मुफसिल पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया। बताया कि युवक मक्का व्यवसायी का काम करता था। बताया कि एक वर्ष पूर्व की युवक की शादी हुई थी। घटना के जानकारी के बाद पत्नी और माता पिता का रोकर बुरा हाल है। थानाध्यक्ष जेपी यादव के बताया कि एक युवक की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई है। जख्मी युवक को इलाज के लिए अस्पताल भेज दिया गया। बताया कि शव का भी पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा रहा है। मृतक के परिजनों द्वारा आवेदन मिलने पर आगे की कार्रवाई की जायेगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
खगड़िया के मुफ़्सील थाना क्षेत्र के एनएच इकतीस पर थाना के समीप सड़क दुर्घटना में बाइक सवार एक युवक की दर्दनाक मौत हो गई। जबकि बाइक के पीछे बैठे दूसरा युवक गंभीर रूप से जख्मी हो गया। घटना रविवार शाम की है। घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया। मिली जानकारी के अनुसार मानसी थाना क्षेत्र के खुटिया पंचायत के पावर हाउस निवासी कैलाश साह का पच्चीस वर्षीय पुत्र मनीष कुमार की सड़क दुर्घटना में घटनास्थल पर ही मौत हो गई। जबकि बाइक के पीछे बैठे प्रिंस कुमार गम्भीर रूप से जख्मी हो गया। लोगों ने बताया कि मनीष और प्रिंस बाइक पर सवार होकर मानसी जा रहा था। इसी दौरान पीछे से आ रही तेज रफ्तार में बुलेट चालक ने धक्का मार दिया। राहगीरों ने बुलेट चालक को पकड़ने की कोशिश की, लेकिन बुलेट चालक भागने में सफल रहा। इधर, मुफ़्सील पुलिस घटनास्थल पर पहुँच कर जख्मी प्रिंस से नाम पता पूछकर परिजनों को सूचना दिया। परिजनों को घटना की जानकारी परिजनों को मिलने पर घटनास्थल पहुँच गया। परिजनों का शव देखकर दहाड़ मारकर रोने लगे। मुफसिल पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया। बताया कि युवक मक्का व्यवसायी का काम करता था। बताया कि एक वर्ष पूर्व की युवक की शादी हुई थी। घटना के जानकारी के बाद पत्नी और माता पिता का रोकर बुरा हाल है। थानाध्यक्ष जेपी यादव के बताया कि एक युवक की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई है। जख्मी युवक को इलाज के लिए अस्पताल भेज दिया गया। बताया कि शव का भी पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा रहा है। मृतक के परिजनों द्वारा आवेदन मिलने पर आगे की कार्रवाई की जायेगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
राजधानी लखनऊ में युवती को शादी का झांसा देकर रेप करने वाले आरोपी को पुलिस ने चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट से गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की. पुलिस ने बताया कि आरोपी दुबई भागने की फिराक में था. अब पुलिस युवती के आरोपों की जांच कर आरोपी से पूछताछ कर रही है. पीड़िता ने अपनी तहरीर में बताया कि एक साल पहले अब्दुल्ला नाम के युवक से उसकी दोस्ती हुई थी. कुछ दिन बाद अब्दुल्ला ने उसे शादी के लिए प्रपोज किया और अपने घर ले गया. जहां उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए. फिर शादी का झांसा देकर आरोपी उसके साथ एक साल तक संबंध बनाता रहा. जब उसने शादी के लिए दबाव बनाया तो गाली गलौच कर उसे भगा दिया. पीड़िता ने स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई. इस दौरान पीड़िता तो पता चला कि आरोपी दुबई भागने की फिराक में है और चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट पर फ्लाइट का इंतजार कर रहा है. उसने तुरंत ही पुलिस से संपर्क कर इसकी जानकारी दी. पुलिस की एक टीम एयरपोर्ट पहुंची और आरोपी अब्दुल्ला को गिरफ्तार कर लिया. वहीं इस मामले पर पश्चिमी जोन के एडीसीपी चिरंजीवी नाथ सिन्हा ने बताया कि एक महिला ने युवक पर शादी का झांसा देकर रेप करने का आरोप लगाया है. आरोपी को एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया वो दुबई जाने वाली फ्लाइट का इंतजार कर रहा था. जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
राजधानी लखनऊ में युवती को शादी का झांसा देकर रेप करने वाले आरोपी को पुलिस ने चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट से गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की. पुलिस ने बताया कि आरोपी दुबई भागने की फिराक में था. अब पुलिस युवती के आरोपों की जांच कर आरोपी से पूछताछ कर रही है. पीड़िता ने अपनी तहरीर में बताया कि एक साल पहले अब्दुल्ला नाम के युवक से उसकी दोस्ती हुई थी. कुछ दिन बाद अब्दुल्ला ने उसे शादी के लिए प्रपोज किया और अपने घर ले गया. जहां उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए. फिर शादी का झांसा देकर आरोपी उसके साथ एक साल तक संबंध बनाता रहा. जब उसने शादी के लिए दबाव बनाया तो गाली गलौच कर उसे भगा दिया. पीड़िता ने स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई. इस दौरान पीड़िता तो पता चला कि आरोपी दुबई भागने की फिराक में है और चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट पर फ्लाइट का इंतजार कर रहा है. उसने तुरंत ही पुलिस से संपर्क कर इसकी जानकारी दी. पुलिस की एक टीम एयरपोर्ट पहुंची और आरोपी अब्दुल्ला को गिरफ्तार कर लिया. वहीं इस मामले पर पश्चिमी जोन के एडीसीपी चिरंजीवी नाथ सिन्हा ने बताया कि एक महिला ने युवक पर शादी का झांसा देकर रेप करने का आरोप लगाया है. आरोपी को एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया वो दुबई जाने वाली फ्लाइट का इंतजार कर रहा था. जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
इनोहोडेट्स मानव रहित हवाई वाहन, उर्फ ओरियन, निर्देशित मिसाइलों और समायोज्य बमों की मदद से जमीनी लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है। हाल ही में, रूसी सेना ने सीरिया में इन ड्रमों को निर्देशित करने के लिए एक नई तकनीक का परीक्षण किया। मुफ़्तक़ोर. एजेंसी को यह जानकारी दी गई रिया नोवोस्ती रूसी संघ के सैन्य-औद्योगिक परिसर से संबंधित एक स्रोत। वहीं, वार्ताकार ने ठीक-ठीक यह नहीं बताया कि परीक्षण कब हुआ। ड्रोन ओरियन को धनु-एम पोर्टेबल टोही और संचार परिसर (KRUS) का उपयोग करके आतंकवादी लक्ष्यों के लिए लक्षित किया गया था। परीक्षणों पर उच्च गति और सटीकता प्राप्त करना संभव था। ड्रोन द्वारा नष्ट की गई कुछ वस्तुओं का परिसर के उपयोग से पता लगाया गया। ग्राउंड इकाइयों ने वास्तविक समय में विशेष संचार चैनलों के माध्यम से इनोहोद्त्सेव ऑपरेटरों और मुख्यालयों को अपने निर्देशांक भेजे। सूत्र ने स्पष्ट किया कि ग्राउंड टोही, स्ट्रेलेट-एम का उपयोग करके, ऑब्जेक्ट का पता लगाता है और इसे टैबलेट पर चिह्नित करता है, जहां यह इसके सटीक स्थान और मापदंडों को इंगित करता है। प्राप्त जानकारी को निकटतम ड्रोन में प्रेषित किया जाता है, जो हमला करता है। यूएवी "पेसर" 250 किलोग्राम तक का लड़ाकू भार उठा सकता है और 24 घंटे तक हवा में रह सकता है। इससे पहले, रूसी रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु ने कहा था कि यह ड्रोन 8-12 मिनट के बाद लक्ष्य का पता लगाने में सक्षम है। - इस्तेमाल की गई तस्वीरेंः
इनोहोडेट्स मानव रहित हवाई वाहन, उर्फ ओरियन, निर्देशित मिसाइलों और समायोज्य बमों की मदद से जमीनी लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है। हाल ही में, रूसी सेना ने सीरिया में इन ड्रमों को निर्देशित करने के लिए एक नई तकनीक का परीक्षण किया। मुफ़्तक़ोर. एजेंसी को यह जानकारी दी गई रिया नोवोस्ती रूसी संघ के सैन्य-औद्योगिक परिसर से संबंधित एक स्रोत। वहीं, वार्ताकार ने ठीक-ठीक यह नहीं बताया कि परीक्षण कब हुआ। ड्रोन ओरियन को धनु-एम पोर्टेबल टोही और संचार परिसर का उपयोग करके आतंकवादी लक्ष्यों के लिए लक्षित किया गया था। परीक्षणों पर उच्च गति और सटीकता प्राप्त करना संभव था। ड्रोन द्वारा नष्ट की गई कुछ वस्तुओं का परिसर के उपयोग से पता लगाया गया। ग्राउंड इकाइयों ने वास्तविक समय में विशेष संचार चैनलों के माध्यम से इनोहोद्त्सेव ऑपरेटरों और मुख्यालयों को अपने निर्देशांक भेजे। सूत्र ने स्पष्ट किया कि ग्राउंड टोही, स्ट्रेलेट-एम का उपयोग करके, ऑब्जेक्ट का पता लगाता है और इसे टैबलेट पर चिह्नित करता है, जहां यह इसके सटीक स्थान और मापदंडों को इंगित करता है। प्राप्त जानकारी को निकटतम ड्रोन में प्रेषित किया जाता है, जो हमला करता है। यूएवी "पेसर" दो सौ पचास किलोग्रामग्राम तक का लड़ाकू भार उठा सकता है और चौबीस घंटाटे तक हवा में रह सकता है। इससे पहले, रूसी रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु ने कहा था कि यह ड्रोन आठ-बारह मिनट के बाद लक्ष्य का पता लगाने में सक्षम है। - इस्तेमाल की गई तस्वीरेंः
Khatron Ke Khiladi 12 first Elimination प्रोमो वीडियो देख फैंस शॉक्ड रह गए। इस वीडियो में टीवी की बहू शिवांगी जोशी के साथ हुए हादसे की झलक दिखाई गई है। इस प्रोमो में आप देख सकते हैं कि कैसे खतरनाक स्टंट करते वक्त शिवांग रोने और चिल्लाते लग जाती हैं। नई दिल्ली, जेएनएन। खतरों के खिलाड़ी का 12वां सीजन जल्द ही शुरू होने वाला है। रोहित शेट्टी के इस स्टंट रियलिटी शो की शूटिंग इस वक्त साउथ अफ्रीका के केपटाउन में चल रही है। हाल ही में ही शो के मेकर्स ने इसका एक प्रोमो वीडियो शेयर किया जिसे देख फैंस शॉक्ड रह गए। इस वीडियो में टीवी की बहू शिवांगी जोशी के साथ हुए हादसे की झलक दिखाई गई है। इस प्रोमो में आप देख सकते हैं कि कैसे खतरनाक स्टंट करते वक्त शिवांग रोने और चिल्लाते लग जाती हैं। कलर्स के ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर 'खतरों के खिलाड़ी 12' का एक ताजा प्रोमो शेयर किया गया है। इस वीडियो में दिखाया गया है कि टीवी की सबसे पॉपुलर बहू शिवांगी जोशी बड़े जोश के साथ साड़ी पहने हुए शो में एंट्री के लिए पैरों से कलश को ठोकर मारती हैं। इसके अगले शॉर्ट में वो एक बॉक्स में लेटकर रोहित शेट्टी के शो का खतरनाक स्टंट करती हुई दिख रही हैं। वीडियो में आगे दिखाया है कि ये रिश्ता और बालिका वधू 2 जैसे सीरियल्स में काम करने वाली एक्ट्रेस फूट-फूट कर रो और चिल्ला रही हैं। वैसे बता दें कि कुछ दिनों पहले ही खबर आई कि रोहित शेट्टी के शो में पहला एलिमिनेशन हो चुका है। खतरों के खिलाड़ी 12 से बाहर जाने वाली कंटेस्टेंट कोई और नहीं बल्कि शिवांगी जोशी ही हैं। फिलहाल तो इस खबर पर अभी तक कोई ऑफिशियल स्टेटमेंट नहीं आया है और ना ही शिवांगी केपटाउन से वापस लौटीं हैं। तो ये कहना जल्दबाजी होगी कि शिवांगी ही वो सबसे पहली कंटेस्टेंट हैं जो शो से बाहर हुईं हैं।
Khatron Ke Khiladi बारह first Elimination प्रोमो वीडियो देख फैंस शॉक्ड रह गए। इस वीडियो में टीवी की बहू शिवांगी जोशी के साथ हुए हादसे की झलक दिखाई गई है। इस प्रोमो में आप देख सकते हैं कि कैसे खतरनाक स्टंट करते वक्त शिवांग रोने और चिल्लाते लग जाती हैं। नई दिल्ली, जेएनएन। खतरों के खिलाड़ी का बारहवां सीजन जल्द ही शुरू होने वाला है। रोहित शेट्टी के इस स्टंट रियलिटी शो की शूटिंग इस वक्त साउथ अफ्रीका के केपटाउन में चल रही है। हाल ही में ही शो के मेकर्स ने इसका एक प्रोमो वीडियो शेयर किया जिसे देख फैंस शॉक्ड रह गए। इस वीडियो में टीवी की बहू शिवांगी जोशी के साथ हुए हादसे की झलक दिखाई गई है। इस प्रोमो में आप देख सकते हैं कि कैसे खतरनाक स्टंट करते वक्त शिवांग रोने और चिल्लाते लग जाती हैं। कलर्स के ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर 'खतरों के खिलाड़ी बारह' का एक ताजा प्रोमो शेयर किया गया है। इस वीडियो में दिखाया गया है कि टीवी की सबसे पॉपुलर बहू शिवांगी जोशी बड़े जोश के साथ साड़ी पहने हुए शो में एंट्री के लिए पैरों से कलश को ठोकर मारती हैं। इसके अगले शॉर्ट में वो एक बॉक्स में लेटकर रोहित शेट्टी के शो का खतरनाक स्टंट करती हुई दिख रही हैं। वीडियो में आगे दिखाया है कि ये रिश्ता और बालिका वधू दो जैसे सीरियल्स में काम करने वाली एक्ट्रेस फूट-फूट कर रो और चिल्ला रही हैं। वैसे बता दें कि कुछ दिनों पहले ही खबर आई कि रोहित शेट्टी के शो में पहला एलिमिनेशन हो चुका है। खतरों के खिलाड़ी बारह से बाहर जाने वाली कंटेस्टेंट कोई और नहीं बल्कि शिवांगी जोशी ही हैं। फिलहाल तो इस खबर पर अभी तक कोई ऑफिशियल स्टेटमेंट नहीं आया है और ना ही शिवांगी केपटाउन से वापस लौटीं हैं। तो ये कहना जल्दबाजी होगी कि शिवांगी ही वो सबसे पहली कंटेस्टेंट हैं जो शो से बाहर हुईं हैं।
खुला खजाना चन्दलीमें मुंशी आय गया चौहान ॥ दोनों हाथ उठायके वोल्यो * अत्रिय सुनो हमारी वात । जिनह पियारी हैं घर तिरिया * मां सां तलव लेउ वर जाउ जिनका गौना जल्दी आया *सो सव छोरि वगै हथियार जिनहिं पियार्ग परम भगौती मां माँ दुइ बाँधी तलवार ।। दुनी तलव लेउ हमसे तुम औरण खेलो जुझ अवाय। इतनी सुनिक अत्री बोले * मुंशी सुनी नवल चौहान । जहाँ पसीना गरे भूपका नई दे रक्तकी धार । कटि कटि शीश गिरं वरणीपर उटि उटि मंड करें तलवार ।। अनिके बातें सच अजिनकी मुंशी बहुत खुश हुई जाय। जायके पहुॅचा परिमापर * तुम सुनि लेउ चॅटेलेगय ॥ लश्कर सजिगो चंडेलको जल्दी आप होउ तैयार । इतनी सुनंत चन्द्रेले तत्र * चिन्तामणिमे कही सुनाय ।। जितने गजा यह बैठे हे सो सत्र चले हमारे साथ । हुक्म सुनायो तव मंत्रीनमवियाँ चलें साथ नरनाथ बडबड जांधा सव सँग लीन्हें अपना सजे वर परिमाल । गजभार छाती परिमालेकी अरु नेननमं बेरे ममाल ।। औ पेंचि पेजामा मिसरूवालो * जामा पहिरि दुदामी क्या। अगल बगलमे दुइ पिस्ताले * बाय मिहिनि मृटि कटार।। पाग सुनहरी मिरपर सोहे * कलंगी मोतीचूरकी लागि । साजि चंदले जब ठाटे भये * मानों इन्द्र अखाडे जायँ ।। वीरभद्र हाथ सजवाया * जो सत्र हाथिनको सरदार। डारिके गद्दा मखमलवागे * मोने होदा दियो धराय ।। मिढी लगाई मलयागिरिकी ॐ तापर चंट रजा परिमाल । गजा सजते सबै मजि गये * शोभा छाय रही तेहि काल
खुला खजाना चन्दलीमें मुंशी आय गया चौहान ॥ दोनों हाथ उठायके वोल्यो * अत्रिय सुनो हमारी वात । जिनह पियारी हैं घर तिरिया * मां सां तलव लेउ वर जाउ जिनका गौना जल्दी आया *सो सव छोरि वगै हथियार जिनहिं पियार्ग परम भगौती मां माँ दुइ बाँधी तलवार ।। दुनी तलव लेउ हमसे तुम औरण खेलो जुझ अवाय। इतनी सुनिक अत्री बोले * मुंशी सुनी नवल चौहान । जहाँ पसीना गरे भूपका नई दे रक्तकी धार । कटि कटि शीश गिरं वरणीपर उटि उटि मंड करें तलवार ।। अनिके बातें सच अजिनकी मुंशी बहुत खुश हुई जाय। जायके पहुॅचा परिमापर * तुम सुनि लेउ चॅटेलेगय ॥ लश्कर सजिगो चंडेलको जल्दी आप होउ तैयार । इतनी सुनंत चन्द्रेले तत्र * चिन्तामणिमे कही सुनाय ।। जितने गजा यह बैठे हे सो सत्र चले हमारे साथ । हुक्म सुनायो तव मंत्रीनमवियाँ चलें साथ नरनाथ बडबड जांधा सव सँग लीन्हें अपना सजे वर परिमाल । गजभार छाती परिमालेकी अरु नेननमं बेरे ममाल ।। औ पेंचि पेजामा मिसरूवालो * जामा पहिरि दुदामी क्या। अगल बगलमे दुइ पिस्ताले * बाय मिहिनि मृटि कटार।। पाग सुनहरी मिरपर सोहे * कलंगी मोतीचूरकी लागि । साजि चंदले जब ठाटे भये * मानों इन्द्र अखाडे जायँ ।। वीरभद्र हाथ सजवाया * जो सत्र हाथिनको सरदार। डारिके गद्दा मखमलवागे * मोने होदा दियो धराय ।। मिढी लगाई मलयागिरिकी ॐ तापर चंट रजा परिमाल । गजा सजते सबै मजि गये * शोभा छाय रही तेहि काल
जौनपुर के मुरादपुर कोटिला पहुंचे हिंदूवादी संगठनों ने विरोध किया मौके पर पहुंची पुलिस ने 20 लोगों को लिया हिरासत में लिया। अखिल भारतीय हिंदू गौरव महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की तहरीर पर पुलिस ने कार्रवाई की। (फोटो-जागरण) संवाद सहयोगी, बदलापुर (जौनपुर): मुरादपुर कोटिला गांव में ईसाई धर्म का प्रचार कर हिंदुओं को गुमराह कर मतांतरण कराएं जाने के मामले में पुलिस ने नौ नामजद सहित कई अज्ञात लोगों पर विभिन्न धाराओं में रविवार को मुकदमा दर्ज किया है। मौके से 20 लोगों को हिरासत में भी लिया है। अखिल भारतीय हिंदू गौरव महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रमोद शर्मा को सूचना मिली कि उक्त गांव में दिनेश मौर्य के यहां भारी संख्या में लोगों का धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। जानकारी होने पर विहिप के जिलाध्यक्ष रामसहाय पांडेय, भाजपा मंडल अध्यक्ष विनोद शर्मा तथा प्रभारी निरीक्षक संतोष कुमार पांडेय को सूचना दी। थोड़ी ही देर में मौके पर सैकड़ों की भीड़ जुट गई। जहां लोगों ने देखा कि करीब ढाई सौ महिला-पुरुष ईशा मसीह की प्रार्थना में जुटे हैं। पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में अंध विश्वास फैलाने संबंधित प्रचार-प्रसार सामाग्री, बाइबिल आदि बरामद कर तकरीबन 20 लोगों को हिरासत में ले लिया। अखिल भारतीय हिंदू गौरव महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रमोद शर्मा ने पुलिस को तहरीर देकर आरोप लगाया कि सेंट जेवियर्स स्कूल के प्रबंधक थामस जोसफ द्वारा मुरादपुर कोटिला निवासी दिनेश मौर्य के यहां ईसाई धर्म का प्रचार-प्रसार कर हिंदुओं को गुमराह व लालच देकर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। पुलिस ने नौ नामजद सहित बहुत कई अज्ञात लोगों पर विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। प्रभारी निरीक्षक संतोष कुमार पांडेय ने बताया कि तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच-पड़ताल की जा रही है। इस अवसर पर मिथिलेश सिंह, आरके उपाध्याय, जय कुमार सिंह, सत्यम सिंह, पंकज सिंह, विवेक सिंह आदि लोग उपस्थित रहे।
जौनपुर के मुरादपुर कोटिला पहुंचे हिंदूवादी संगठनों ने विरोध किया मौके पर पहुंची पुलिस ने बीस लोगों को लिया हिरासत में लिया। अखिल भारतीय हिंदू गौरव महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की तहरीर पर पुलिस ने कार्रवाई की। संवाद सहयोगी, बदलापुर : मुरादपुर कोटिला गांव में ईसाई धर्म का प्रचार कर हिंदुओं को गुमराह कर मतांतरण कराएं जाने के मामले में पुलिस ने नौ नामजद सहित कई अज्ञात लोगों पर विभिन्न धाराओं में रविवार को मुकदमा दर्ज किया है। मौके से बीस लोगों को हिरासत में भी लिया है। अखिल भारतीय हिंदू गौरव महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रमोद शर्मा को सूचना मिली कि उक्त गांव में दिनेश मौर्य के यहां भारी संख्या में लोगों का धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। जानकारी होने पर विहिप के जिलाध्यक्ष रामसहाय पांडेय, भाजपा मंडल अध्यक्ष विनोद शर्मा तथा प्रभारी निरीक्षक संतोष कुमार पांडेय को सूचना दी। थोड़ी ही देर में मौके पर सैकड़ों की भीड़ जुट गई। जहां लोगों ने देखा कि करीब ढाई सौ महिला-पुरुष ईशा मसीह की प्रार्थना में जुटे हैं। पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में अंध विश्वास फैलाने संबंधित प्रचार-प्रसार सामाग्री, बाइबिल आदि बरामद कर तकरीबन बीस लोगों को हिरासत में ले लिया। अखिल भारतीय हिंदू गौरव महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रमोद शर्मा ने पुलिस को तहरीर देकर आरोप लगाया कि सेंट जेवियर्स स्कूल के प्रबंधक थामस जोसफ द्वारा मुरादपुर कोटिला निवासी दिनेश मौर्य के यहां ईसाई धर्म का प्रचार-प्रसार कर हिंदुओं को गुमराह व लालच देकर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। पुलिस ने नौ नामजद सहित बहुत कई अज्ञात लोगों पर विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। प्रभारी निरीक्षक संतोष कुमार पांडेय ने बताया कि तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच-पड़ताल की जा रही है। इस अवसर पर मिथिलेश सिंह, आरके उपाध्याय, जय कुमार सिंह, सत्यम सिंह, पंकज सिंह, विवेक सिंह आदि लोग उपस्थित रहे।
शरहतुवर्णनीया० । अल्पशब्द करनेवाले सारस होते हैं । तथा हंसोंकी पंक्ती और कमलोंकरके सरोवर शोभित होता है, तथा तीव्रकिरणवाले चंद्रमाकी आनंददायक चांदनी होती है, और चित्रा नक्षत्रगत सूर्यकी गरमीकरके पक जलवाले सरोवर तथा निर्मल आकाश होता है । दर्शयन्तिशरन्नद्योपुलिनानिशनैः शनैः । नवसमसत्रीडाजघनानीवयोषितः ॥ अर्थ-शरदऋतु नदियोंके पुलिनोंको धीरे धीरे दिखाती है, उसकी उपमा श्रीवाल्मीक महर्षि देते हैं कि, जैसे नवीन संगम में लज्जायुता स्त्री अपने प्राणप्यारेको धीरे धीरे जंघा दिखलाती है । संशुष्यत्पङ्कशङ्काखरकिरणरुचाफुल्लराजीवराजीराजत्कहा रवल्ली कुसुमचयमिलद्वासना वासिताशा। दुग्धाम्भोधेस्तरङ्गयुतिरिवविकसत्काशपुष्पप्रकाशंचञ्चञ्चन्द्रांशुशोभासकलजनमुदेशारदीरात्रिरेषा । अर्थ--तीव्र किरणोंकरके दूर हुई है कीचकी शंका तथा प्रफुल्लित कमलोंकी पंक्ति तथा कलार (सुगंधवान् कमल ) और चमेली के पुष्पसमूहकी सुगं धसे सुगंधित दिशा विदिशा जिसमें तथा क्षीरसमुद्र की तरंगके सदृश फूलेहुए काशपुष्पोंका प्रकाश जिसमें और चंचल चंद्रमाकी चांदनीकी शोभा जिसमें ऐसी संपूर्ण मनुष्योंको हर्षके देनेवाली यह शरदसंबंधी रात्रि है । पित्तेनसान्द्ररुधिरंशरत्सुवृद्धिं समागच्छतिसूर्यरश्मिभिः । तदाशुरक्तंपरिमोक्षणीयंपानेजलंसारसमुद्दिशन्ति ॥ १ ॥ भोज्याःसदालोहितशालिमुद्गागव्यंवृतंचंद्रकराश्च सेव्याः । इक्षोर्विकारामरिचैश्चभक्ष्याः पथ्यासिताव्याकिलसेवनीया ॥ २ ॥ स्थितिः प्रवर्तेरजनीपुकार्याधर्मश्च नित्यं परिवर्जनीयः । छाया च सेव्याहरितद्रुमाणां श्रमं नकुर्यात्प्रयतोमनुष्यः ॥ ३ ॥ अर्थ- - पित्तकरके गाढा रुधिर शरदऋतु में सूर्यकी किरणोंकरके वृद्धिको प्राप्त होता है, अतरव शीघ्र रुधिरमोक्षण अर्थात् फस्तखोलनी चाहिये, और इसऋतु में सरोवरका जल पीना चाहिये । लाल चावल, मूंग, गौका घी, ईखके विकार ( गुड मिश्री बूराबतासेआदि ) और मिरचमिले पदार्थ भोजन
शरहतुवर्णनीयाशून्य । अल्पशब्द करनेवाले सारस होते हैं । तथा हंसोंकी पंक्ती और कमलोंकरके सरोवर शोभित होता है, तथा तीव्रकिरणवाले चंद्रमाकी आनंददायक चांदनी होती है, और चित्रा नक्षत्रगत सूर्यकी गरमीकरके पक जलवाले सरोवर तथा निर्मल आकाश होता है । दर्शयन्तिशरन्नद्योपुलिनानिशनैः शनैः । नवसमसत्रीडाजघनानीवयोषितः ॥ अर्थ-शरदऋतु नदियोंके पुलिनोंको धीरे धीरे दिखाती है, उसकी उपमा श्रीवाल्मीक महर्षि देते हैं कि, जैसे नवीन संगम में लज्जायुता स्त्री अपने प्राणप्यारेको धीरे धीरे जंघा दिखलाती है । संशुष्यत्पङ्कशङ्काखरकिरणरुचाफुल्लराजीवराजीराजत्कहा रवल्ली कुसुमचयमिलद्वासना वासिताशा। दुग्धाम्भोधेस्तरङ्गयुतिरिवविकसत्काशपुष्पप्रकाशंचञ्चञ्चन्द्रांशुशोभासकलजनमुदेशारदीरात्रिरेषा । अर्थ--तीव्र किरणोंकरके दूर हुई है कीचकी शंका तथा प्रफुल्लित कमलोंकी पंक्ति तथा कलार और चमेली के पुष्पसमूहकी सुगं धसे सुगंधित दिशा विदिशा जिसमें तथा क्षीरसमुद्र की तरंगके सदृश फूलेहुए काशपुष्पोंका प्रकाश जिसमें और चंचल चंद्रमाकी चांदनीकी शोभा जिसमें ऐसी संपूर्ण मनुष्योंको हर्षके देनेवाली यह शरदसंबंधी रात्रि है । पित्तेनसान्द्ररुधिरंशरत्सुवृद्धिं समागच्छतिसूर्यरश्मिभिः । तदाशुरक्तंपरिमोक्षणीयंपानेजलंसारसमुद्दिशन्ति ॥ एक ॥ भोज्याःसदालोहितशालिमुद्गागव्यंवृतंचंद्रकराश्च सेव्याः । इक्षोर्विकारामरिचैश्चभक्ष्याः पथ्यासिताव्याकिलसेवनीया ॥ दो ॥ स्थितिः प्रवर्तेरजनीपुकार्याधर्मश्च नित्यं परिवर्जनीयः । छाया च सेव्याहरितद्रुमाणां श्रमं नकुर्यात्प्रयतोमनुष्यः ॥ तीन ॥ अर्थ- - पित्तकरके गाढा रुधिर शरदऋतु में सूर्यकी किरणोंकरके वृद्धिको प्राप्त होता है, अतरव शीघ्र रुधिरमोक्षण अर्थात् फस्तखोलनी चाहिये, और इसऋतु में सरोवरका जल पीना चाहिये । लाल चावल, मूंग, गौका घी, ईखके विकार और मिरचमिले पदार्थ भोजन
इटावा. उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में पानी भरे गड्ढे में गिरने से सिपाही के दो साल के मासूम बेटे की मौत हो गई. घटना के बाद सिपाही ने आरोप लगाया कि बीमार पत्नी और बच्चे की देखभाल के लिए वह कई दिनों से छुट्टी मांग रहा था, लेकिन अधिकारियों ने नहीं दी. छुट्टी मिल जाती तो यह हादसा न होता. इटावा जिले में फ्रेंड्स कॉलोनी थाना क्षेत्र की एकता कॉलोनी में बुधवार सुबह घर के बगल में पानी भरे गड्ढे में गिरकर सिपाही के दो साल के बेटे की मौत हो गई. छुट्टी ना मिलने से नाराज सिपाही बेटे के शव को लेकर एसएसपी कार्यालय पहुंच गया. सिपाही सोनू ने आरोप लगाया कि बीमार पत्नी और बच्चे की देखभाल के लिए वह कई दिनों से छुट्टी मांग रहा था, लेकिन अधिकारियों ने नहीं दी. मौके पर पहुंचे एसपी सिटी और सीओ सिटी ने सिपाही को समझा कर घर भेजा। मासूम की मौत से परिजनों में कोहराम मचा है. मथुरा के मूल निवासी सोनू चौधरी पुलिस लाइन में तैनात थे. एकता कॉलोनी में वह किराए पर रहते हैं. इनकी पत्नी करीब 15 दिनों से बीमार चल रही थीं. पत्नी कविता और 2 साल के बेटे हर्षित उर्फ गोलू की देखभाल के लिए सोनू छुट्टी मांग रहा था. सोनू के मुताबिक 7 जनवरी को प्रार्थनापत्र एसपी सिटी को दिया था, लेकिन छुट्टी स्वीकृत नहीं हुई. बुधवार सुबह खेलते समय बेटा हर्षित घर के बगल में स्थित पानी भरे गड्ढे में गिर गया. थोड़ी देर बाद जब तलाश शुरू हुई तो हर्षित गड्ढे में मिला. उसे जिला अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया. इसके बाद सोनू शव लेकर एसएसपी कार्यालय पहुंच गया. उसने आरोप लगाया कि उसे यदि छुट्टी मिल जाती तो यह हादसा न होता. हालांकि पुलिस अफसरों ने समझाकर उसे घर भेजा. .
इटावा. उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में पानी भरे गड्ढे में गिरने से सिपाही के दो साल के मासूम बेटे की मौत हो गई. घटना के बाद सिपाही ने आरोप लगाया कि बीमार पत्नी और बच्चे की देखभाल के लिए वह कई दिनों से छुट्टी मांग रहा था, लेकिन अधिकारियों ने नहीं दी. छुट्टी मिल जाती तो यह हादसा न होता. इटावा जिले में फ्रेंड्स कॉलोनी थाना क्षेत्र की एकता कॉलोनी में बुधवार सुबह घर के बगल में पानी भरे गड्ढे में गिरकर सिपाही के दो साल के बेटे की मौत हो गई. छुट्टी ना मिलने से नाराज सिपाही बेटे के शव को लेकर एसएसपी कार्यालय पहुंच गया. सिपाही सोनू ने आरोप लगाया कि बीमार पत्नी और बच्चे की देखभाल के लिए वह कई दिनों से छुट्टी मांग रहा था, लेकिन अधिकारियों ने नहीं दी. मौके पर पहुंचे एसपी सिटी और सीओ सिटी ने सिपाही को समझा कर घर भेजा। मासूम की मौत से परिजनों में कोहराम मचा है. मथुरा के मूल निवासी सोनू चौधरी पुलिस लाइन में तैनात थे. एकता कॉलोनी में वह किराए पर रहते हैं. इनकी पत्नी करीब पंद्रह दिनों से बीमार चल रही थीं. पत्नी कविता और दो साल के बेटे हर्षित उर्फ गोलू की देखभाल के लिए सोनू छुट्टी मांग रहा था. सोनू के मुताबिक सात जनवरी को प्रार्थनापत्र एसपी सिटी को दिया था, लेकिन छुट्टी स्वीकृत नहीं हुई. बुधवार सुबह खेलते समय बेटा हर्षित घर के बगल में स्थित पानी भरे गड्ढे में गिर गया. थोड़ी देर बाद जब तलाश शुरू हुई तो हर्षित गड्ढे में मिला. उसे जिला अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया. इसके बाद सोनू शव लेकर एसएसपी कार्यालय पहुंच गया. उसने आरोप लगाया कि उसे यदि छुट्टी मिल जाती तो यह हादसा न होता. हालांकि पुलिस अफसरों ने समझाकर उसे घर भेजा. .
2012 के चुनावी दंगल की उल्टी गिनती शुरु हो चुकी है. यूपी चुनाव में देश की सभी बड़ी पार्टियों की साख दांव पर होगी. चुनाव से पहले क्या है यूपी की जनता का मूड. मायावती सरकार के कामकाज पर क्या कहना है मतदाताओं का. क्या राज्य में बदलाब चाहती है जनता या मायावती के कामकाज से खुश हैं लोग? राहुल गांधी के यूपी दौरे का क्या असर हुआ है. नए मुख्यमंत्री के तौर पर यूपी की जनता की पहली पसंद कौन हैं? इन तमाम सवालों के जवाब मिले हैं इंडिया टुडे- ओरआरजी के ओपिनियन पोल में. अगले आधे घंटे में हम आपको बताने वाले हैं कैसा रहने वाला है यूपी का चुनावी दंगल, कौन रहेगा आगे, कौन होगा पीछे?
दो हज़ार बारह के चुनावी दंगल की उल्टी गिनती शुरु हो चुकी है. यूपी चुनाव में देश की सभी बड़ी पार्टियों की साख दांव पर होगी. चुनाव से पहले क्या है यूपी की जनता का मूड. मायावती सरकार के कामकाज पर क्या कहना है मतदाताओं का. क्या राज्य में बदलाब चाहती है जनता या मायावती के कामकाज से खुश हैं लोग? राहुल गांधी के यूपी दौरे का क्या असर हुआ है. नए मुख्यमंत्री के तौर पर यूपी की जनता की पहली पसंद कौन हैं? इन तमाम सवालों के जवाब मिले हैं इंडिया टुडे- ओरआरजी के ओपिनियन पोल में. अगले आधे घंटे में हम आपको बताने वाले हैं कैसा रहने वाला है यूपी का चुनावी दंगल, कौन रहेगा आगे, कौन होगा पीछे?
विष से सावधानी वैज्ञानिक प्रयोगोंने यह सिद्ध कर दिया है कि लोगोंका यह कहना कि मद्यपानसे मनुष्य में कार्य करने की शक्ति बढ़ जाती है, सर्वथा भ्रममूलक है। इनके पान करने से स्नायुतन्तुओं में मूर्छना जाने के कारण मनुष्य कुछ देर थकावट का अनुभव नहीं करता है पर शराब से चल एवं शक्तिकी वृद्धि होना असम्भव हैं । मद्यपान द्वारा थकावट दूर करना अपने शरीर को धोखा देना है। इससे मनुष्यकी संवेदनशक्ति क्षीण हो जाती है । भोजन के समय मद्यपान करना तो और भी अधिक हानिकर है । जो व्यक्ति मद्यपान करते हैं उनपर रोगों का आक्रमण शीघ्र होता है रुचिर में स्थित श्वेत-कण मद्य द्वारा निश्चेष्ट हो जाते हैं जिससे शरीर को हानि पहुंचती है । इ गलैण्ड और अमरीका की बीमा कम्पनी वालोंका कहना है कि मद्यपानसे मनुष्य की आयु भी कम हो जाती हैं। मद्यपान करने वालोंकी सन्तान दुर्बल होती हैं । डा० स्टोकर्ड ने इस विषयमें अनेक प्रयोग किये हैं। तम्बाकू, सिगरेट अदिके पानसे भी अनेकहानियां होती हैं। इसका प्रभाव शरीर पर धीरे धीरे पड़ता है । ये और एमहर्स्टके विद्यालय में इस बातकी परीक्षा की गई है कि जो विद्यार्थी सिगरेट नहीं पीते हैं उ. की शारीरिक अवस्था और काव्यं शक्ति सिगरेट पीने वालों की अपेक्षा अधिक है। शुओं पर प्रयोग करके डा० राथने सिद्ध किया है कि तम्बाकूसे शारी रिक क्षति होने लगती है। शरीर की त्वचा द्वाग अथवा प्राण-श्वास द्वारा बहूतसे विष शरीर में प्रविष्ट हो जाते हैं । जुकाम भी विशिष्ट कीटाणुओंके नाकद्वारा प्रविष्ट होने के कारण होता है अतः ऐसी जगह से मनुष्य को दूर रहना चाहिये जहां जुभम के रोगी विद्यमान हों। बदहजमी होनेपर जुकान उत्पन्न करनेवाले कीटाणु और भी अधिक उम्र हो जाते हैं। नाक में उँगली देना उचित नहीं है। रूमाल से नाक साफ़ करनी चाहिये और ये रूमाल बराबर बदलते रहना चाहिये । इन्हें साबुनसे भली प्रकार धोना चाहिये । प्रत्येक स्थान पर थूक देना था छिनक देना अत्यन्त हानिकारक है । इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिये। किसी दूसरेके मुइके सामने छींकना या खांसना भी अत्यन्त हानिकारक हैं। साधारण नियमोल्लंघनके कारण भी अनेक रोग हो जाते हैं। बरसाती पानीके जमा हो जाने के कारण मच्छर, और अन्य रोग कंटाणु शीघ्रही अनाप्रकोप दिखाने लगते हैं। इस का ण तरह तरह के बुखार आने लगते हैं, भारतवर्ष के ग्राम में कच्चे तालाब, पोखर आदि रोगोंकी जड़ हैं। इन तालाबोंसे कपड़े धोने काम लिया जाता है । इसे लोग शौचक्रिया करते हैं। इन्हीं में नहाते हैं और कभी कभी इसी जलको पीते भी हैं। ऐसा करना कितना हानिकर है, इसके कहनेकी आवश्यकता नहीं हैं। छोटी छोटी बातों का भी परिणाम भयंकर हो सकता है। इसलिये सावधानी से जीवन व्यतीत करना चाहिये ।
विष से सावधानी वैज्ञानिक प्रयोगोंने यह सिद्ध कर दिया है कि लोगोंका यह कहना कि मद्यपानसे मनुष्य में कार्य करने की शक्ति बढ़ जाती है, सर्वथा भ्रममूलक है। इनके पान करने से स्नायुतन्तुओं में मूर्छना जाने के कारण मनुष्य कुछ देर थकावट का अनुभव नहीं करता है पर शराब से चल एवं शक्तिकी वृद्धि होना असम्भव हैं । मद्यपान द्वारा थकावट दूर करना अपने शरीर को धोखा देना है। इससे मनुष्यकी संवेदनशक्ति क्षीण हो जाती है । भोजन के समय मद्यपान करना तो और भी अधिक हानिकर है । जो व्यक्ति मद्यपान करते हैं उनपर रोगों का आक्रमण शीघ्र होता है रुचिर में स्थित श्वेत-कण मद्य द्वारा निश्चेष्ट हो जाते हैं जिससे शरीर को हानि पहुंचती है । इ गलैण्ड और अमरीका की बीमा कम्पनी वालोंका कहना है कि मद्यपानसे मनुष्य की आयु भी कम हो जाती हैं। मद्यपान करने वालोंकी सन्तान दुर्बल होती हैं । डाशून्य स्टोकर्ड ने इस विषयमें अनेक प्रयोग किये हैं। तम्बाकू, सिगरेट अदिके पानसे भी अनेकहानियां होती हैं। इसका प्रभाव शरीर पर धीरे धीरे पड़ता है । ये और एमहर्स्टके विद्यालय में इस बातकी परीक्षा की गई है कि जो विद्यार्थी सिगरेट नहीं पीते हैं उ. की शारीरिक अवस्था और काव्यं शक्ति सिगरेट पीने वालों की अपेक्षा अधिक है। शुओं पर प्रयोग करके डाशून्य राथने सिद्ध किया है कि तम्बाकूसे शारी रिक क्षति होने लगती है। शरीर की त्वचा द्वाग अथवा प्राण-श्वास द्वारा बहूतसे विष शरीर में प्रविष्ट हो जाते हैं । जुकाम भी विशिष्ट कीटाणुओंके नाकद्वारा प्रविष्ट होने के कारण होता है अतः ऐसी जगह से मनुष्य को दूर रहना चाहिये जहां जुभम के रोगी विद्यमान हों। बदहजमी होनेपर जुकान उत्पन्न करनेवाले कीटाणु और भी अधिक उम्र हो जाते हैं। नाक में उँगली देना उचित नहीं है। रूमाल से नाक साफ़ करनी चाहिये और ये रूमाल बराबर बदलते रहना चाहिये । इन्हें साबुनसे भली प्रकार धोना चाहिये । प्रत्येक स्थान पर थूक देना था छिनक देना अत्यन्त हानिकारक है । इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिये। किसी दूसरेके मुइके सामने छींकना या खांसना भी अत्यन्त हानिकारक हैं। साधारण नियमोल्लंघनके कारण भी अनेक रोग हो जाते हैं। बरसाती पानीके जमा हो जाने के कारण मच्छर, और अन्य रोग कंटाणु शीघ्रही अनाप्रकोप दिखाने लगते हैं। इस का ण तरह तरह के बुखार आने लगते हैं, भारतवर्ष के ग्राम में कच्चे तालाब, पोखर आदि रोगोंकी जड़ हैं। इन तालाबोंसे कपड़े धोने काम लिया जाता है । इसे लोग शौचक्रिया करते हैं। इन्हीं में नहाते हैं और कभी कभी इसी जलको पीते भी हैं। ऐसा करना कितना हानिकर है, इसके कहनेकी आवश्यकता नहीं हैं। छोटी छोटी बातों का भी परिणाम भयंकर हो सकता है। इसलिये सावधानी से जीवन व्यतीत करना चाहिये ।
WPL 2023: भारत में ऐतिहासिक महिला प्रीमियर लीग यानी पुरुष क्रिकेट के आईपीएल की तरह महिलाओं की टी20 लीग का आगाज 4 मार्च से होने जा रहा है। बस अब से कुछ ही घंटों के बाद शुरू हो जाएगा धूम-धड़ाका जब महिलाएं भी आईपीएल की तरह WPL में धूम मचाती नजर आएंगी। पहले सीजन में पांच टीमें भाग ले रही हैं। सभी टीमें प्रत्येक टीम के साथ दो-दो लीग मैच खेलेंगी। पूरा सीजन मुंबई के ब्रेबॉर्न स्टेडियम और डीवाई पाटिल स्टेडियम में खेला जाएगा। 26 मार्च को टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबला मुंबई के ब्रेबॉर्न स्टेडियम में होगा। अगर टूर्नामेंट के फॉर्मेट की बात करें तो हर टीम 8-8 लीग मैच खेलेगी। यानी हर टीम से हर टीम को खेलना है और प्रत्येक टीम के हर टीम से 2-2 मुकाबले होंगे। जैसे कि मुंबई इंडियंस की टीम आरसीबी के साथ दो लीग मैच खेलेगी। इस तरह 8-8 मैच जब सब टीमें खेल लेंगी तो पॉइंट्स टेबल की टॉप टीम सीधा फाइनल में जगह बनाएगी। वहीं नंबर 2 और नंबर 3 की टीम के बीच 24 मार्च को एलिमिनेटर मुकाबला होगा। इस मैच में हारने वाली टीम नंबर 4 और नंबर 5 के साथ घर जाएगी। वहीं एलिमिनेटर की विजेता टीम टेबल टॉपर के साथ 26 मार्च को फाइनल में भिड़ेगी। दिल्ली कैपिटल्सः जेमिमा रोड्रिग्ज, मेग लैनिंग (कप्तान), शेफाली वर्मा, राधा यादव, शिखा पांडे, मैरिजन कैप, तितस साधू, ऐलिस कैपसी, टारा नॉरिस, लॉरा हैरिस, जासिया अख्तर, मिनु मनी, अरुंधती रेड्डी, तानिया भाटिया, पूनम यादव, जेस जोनासेन, स्नेहा दीप्ति और अपर्णा मंडल। आरसीबीः स्मृति मंधाना (कप्तान), सोफी डिवाइन, ऐलिस पेरी, रेणुका सिंह ठाकुर, ऋचा घोष (विकेटकीपर), ऐरिन बर्न्स, दिशा कसाट, इंद्राणी रॉय, कनिका आहूजा, आशा शोभना, श्रेयांका पाटिल, हीथर नाइट, डेन वान निकर्क, प्रीति बोस, पूनम खेमनार, कोमल जनजाद, मेगन शट और सहाना पवार। मुंबई इंडियंसः हरमनप्रीत कौर (कप्तान), नताली साइवर, अमेलिया केर, पूजा वस्त्राकर, यास्तिका भाटिया, हीदर ग्राहम, इसाबेल वोंग, अमनजोत कौर, धारा गूजर, सायका इशाक, हेले मैथ्यूज, क्लो ट्रायॉन, हुमैरा खाजी, प्रियंका बाला, सोनम यादव, जिंतमणि कलिता, नीलम बिष्ट। यूपी वॉरियर्सः दीप्ति शर्मा, सोफी एक्लेस्टोन, देविका वैद्य, ताहलिया मैकग्रा, शबनिम इस्माइल, ग्रेस हैरिस, एलिसा हीली (कप्तान), अंजली सरवानी, राजेश्वरी गायकवाड़, श्वेता शेहरावत, किरण नावगिरे, लॉरेन बेल, लक्ष्मी यादव, पार्श्वी चोपड़ा, सिमर शेख, एस. यशसरी। गुजरात जायंट्सः बेथ मूनी (कप्तान), स्नेह राणा, एश्लेग गार्डनर, सोफिया डंकले, एनाबेल सदरलैंड, हरलीन देओल, डिआंड्रा डॉटिन, सबिनेनी मेघना, जॉर्जिया वेयरहम, मानसी जोशी, दयालन हेमलता, मोनिका पटेल, तनुजा कंवर, सुषमा वर्मा, हर्ले गाला, अश्विनी कुमारी, परुणिका सिसोदिया, शबमन शकील।
WPL दो हज़ार तेईस: भारत में ऐतिहासिक महिला प्रीमियर लीग यानी पुरुष क्रिकेट के आईपीएल की तरह महिलाओं की टीबीस लीटरग का आगाज चार मार्च से होने जा रहा है। बस अब से कुछ ही घंटों के बाद शुरू हो जाएगा धूम-धड़ाका जब महिलाएं भी आईपीएल की तरह WPL में धूम मचाती नजर आएंगी। पहले सीजन में पांच टीमें भाग ले रही हैं। सभी टीमें प्रत्येक टीम के साथ दो-दो लीग मैच खेलेंगी। पूरा सीजन मुंबई के ब्रेबॉर्न स्टेडियम और डीवाई पाटिल स्टेडियम में खेला जाएगा। छब्बीस मार्च को टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबला मुंबई के ब्रेबॉर्न स्टेडियम में होगा। अगर टूर्नामेंट के फॉर्मेट की बात करें तो हर टीम आठ-आठ लीटरग मैच खेलेगी। यानी हर टीम से हर टीम को खेलना है और प्रत्येक टीम के हर टीम से दो-दो मुकाबले होंगे। जैसे कि मुंबई इंडियंस की टीम आरसीबी के साथ दो लीग मैच खेलेगी। इस तरह आठ-आठ मैच जब सब टीमें खेल लेंगी तो पॉइंट्स टेबल की टॉप टीम सीधा फाइनल में जगह बनाएगी। वहीं नंबर दो और नंबर तीन की टीम के बीच चौबीस मार्च को एलिमिनेटर मुकाबला होगा। इस मैच में हारने वाली टीम नंबर चार और नंबर पाँच के साथ घर जाएगी। वहीं एलिमिनेटर की विजेता टीम टेबल टॉपर के साथ छब्बीस मार्च को फाइनल में भिड़ेगी। दिल्ली कैपिटल्सः जेमिमा रोड्रिग्ज, मेग लैनिंग , शेफाली वर्मा, राधा यादव, शिखा पांडे, मैरिजन कैप, तितस साधू, ऐलिस कैपसी, टारा नॉरिस, लॉरा हैरिस, जासिया अख्तर, मिनु मनी, अरुंधती रेड्डी, तानिया भाटिया, पूनम यादव, जेस जोनासेन, स्नेहा दीप्ति और अपर्णा मंडल। आरसीबीः स्मृति मंधाना , सोफी डिवाइन, ऐलिस पेरी, रेणुका सिंह ठाकुर, ऋचा घोष , ऐरिन बर्न्स, दिशा कसाट, इंद्राणी रॉय, कनिका आहूजा, आशा शोभना, श्रेयांका पाटिल, हीथर नाइट, डेन वान निकर्क, प्रीति बोस, पूनम खेमनार, कोमल जनजाद, मेगन शट और सहाना पवार। मुंबई इंडियंसः हरमनप्रीत कौर , नताली साइवर, अमेलिया केर, पूजा वस्त्राकर, यास्तिका भाटिया, हीदर ग्राहम, इसाबेल वोंग, अमनजोत कौर, धारा गूजर, सायका इशाक, हेले मैथ्यूज, क्लो ट्रायॉन, हुमैरा खाजी, प्रियंका बाला, सोनम यादव, जिंतमणि कलिता, नीलम बिष्ट। यूपी वॉरियर्सः दीप्ति शर्मा, सोफी एक्लेस्टोन, देविका वैद्य, ताहलिया मैकग्रा, शबनिम इस्माइल, ग्रेस हैरिस, एलिसा हीली , अंजली सरवानी, राजेश्वरी गायकवाड़, श्वेता शेहरावत, किरण नावगिरे, लॉरेन बेल, लक्ष्मी यादव, पार्श्वी चोपड़ा, सिमर शेख, एस. यशसरी। गुजरात जायंट्सः बेथ मूनी , स्नेह राणा, एश्लेग गार्डनर, सोफिया डंकले, एनाबेल सदरलैंड, हरलीन देओल, डिआंड्रा डॉटिन, सबिनेनी मेघना, जॉर्जिया वेयरहम, मानसी जोशी, दयालन हेमलता, मोनिका पटेल, तनुजा कंवर, सुषमा वर्मा, हर्ले गाला, अश्विनी कुमारी, परुणिका सिसोदिया, शबमन शकील।
प्रदर्शनी के समापन अवसर पर जिला कलेक्टर मनोज कुमार शर्मा ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजयी छात्र-छात्राओं को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। समारोह में एकक बोघग्राम संस्थान द्वारा संचालित विद्यालय के मूक-बधिर छात्रों ने मनीषा राजपूत के निर्देशन में " रंग दे बंसती चोला " गीत पर नृत्य प्रस्तुत किया। प्रदर्शनी समापन समारोह में सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग को आधार एवं भामाशाह नामांकन करने पर प्रथम एवं स्काउट गाइड को द्वितीय स्थान तथा कृषि उद्यान विभाग को तृतीय स्थान के लिए पुरस्कृत किया। सुराज प्रदर्शनी में सराहनीय सहयोग के लिए गौमती टेण्ट हाउस, नगर परिषद करौली, एकट बोघग्राम संस्था तथा सूचना एवं जनसम्पर्क कार्यालय को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित समारोह में करौली पंचायत समिति प्रधान श्रीमती इन्दू देवी जाटव ने कहा कि विभागों द्वारा लगाई गई स्टाल्स द्वारा राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ आमजन को मिला है। उन्होंने इस सुराज प्रदर्शनी के लिए सभी अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा सहयोग करने के लिए आभार व्यक्त किया है। समापन समारोह के प्रारंभ में छात्राओं द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत किया तथा गीतका चौधरी ने नृत्य प्रस्तुत किया। अंत में राष्ट्रगान के साथ सुराज प्रदर्शनी का समापन हुआ।
प्रदर्शनी के समापन अवसर पर जिला कलेक्टर मनोज कुमार शर्मा ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजयी छात्र-छात्राओं को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। समारोह में एकक बोघग्राम संस्थान द्वारा संचालित विद्यालय के मूक-बधिर छात्रों ने मनीषा राजपूत के निर्देशन में " रंग दे बंसती चोला " गीत पर नृत्य प्रस्तुत किया। प्रदर्शनी समापन समारोह में सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग को आधार एवं भामाशाह नामांकन करने पर प्रथम एवं स्काउट गाइड को द्वितीय स्थान तथा कृषि उद्यान विभाग को तृतीय स्थान के लिए पुरस्कृत किया। सुराज प्रदर्शनी में सराहनीय सहयोग के लिए गौमती टेण्ट हाउस, नगर परिषद करौली, एकट बोघग्राम संस्था तथा सूचना एवं जनसम्पर्क कार्यालय को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित समारोह में करौली पंचायत समिति प्रधान श्रीमती इन्दू देवी जाटव ने कहा कि विभागों द्वारा लगाई गई स्टाल्स द्वारा राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ आमजन को मिला है। उन्होंने इस सुराज प्रदर्शनी के लिए सभी अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा सहयोग करने के लिए आभार व्यक्त किया है। समापन समारोह के प्रारंभ में छात्राओं द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत किया तथा गीतका चौधरी ने नृत्य प्रस्तुत किया। अंत में राष्ट्रगान के साथ सुराज प्रदर्शनी का समापन हुआ।
West Bengal Corona Update: पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने कोरोना के बढ़ते मामलों के मद्देनजर सोमवार से सभी स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, स्पा, सैलून, ब्यूटी पार्लर, स्विमिंग पूल, चिड़ियाघर और मनोरंजन पार्क बंद करने का ऐलान किया है. पश्चिम बंगाल में कोरोना (West Bengal Corona Update) के बढ़ते प्रकोप के कारण सोमवार से राज्य में आंशिक रूप से लॉकडाउन (Partial Lockdown) लागू हो गया है. आज से राज्य के स्कूल-कॉलेज और विश्वविद्यालय (West Bengal School-College Closed) फिर से बंद हो गए हैं. इस बीच सिलीगुड़ी में सोमवार को सिलीगुड़ी बालिका उच्च विद्यालय की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर रंगारंग जुलूस निकाला गया, जिसमें बड़ी सख्या में स्कूल की छात्राएं शामिल हुईं. तो दूसरी ओर हजारदुआरी में स्कूल के बच्चे पर्यटन केंद्रों में घूमते दिखाई दिए. इसे लेकर शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है. कोरोना महामारी के बीच बच्चों को जुलूस में बुलाये जाने को लेकर सवाल किये जा रहे हैं और स्कूल प्रबंधन के फैसले को लेकर सवाल किए जा रहे हैं. सिलीगुड़ी बालिका उच्च विद्यालय की 75वीं वर्षगांठ के अवसर कई सौ छात्रों के साथ शिक्षकों और प्रशासन के अधिकारियों ने जुलूस निकाला. हालांकि, स्कूल प्रबंधन का कहना है कि छात्राएं मास्क पहनकर जुलूस में शामिल हुईं. किसी को जबरन स्कूल नहीं लाया गया. इस 75वें वर्ष के अवसर पर कल से विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है. बाघायतीन पार्क में कार्यक्रम का आयोजन किया गया है. इससे विवाद खड़ा हो गया है. बता दें कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने कोरोना के बढ़ते मामलों के मद्देनजर सोमवार से सभी स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, स्पा, सैलून, ब्यूटी पार्लर, स्विमिंग पूल, चिड़ियाघर और मनोरंजन पार्क बंद करने का ऐलान किया है. सभी सरकारी और निजी कार्यालय 50 प्रतिशत क्षमता पर काम करेंगे. सभी प्रशासनिक बैठकें अब से वर्चुअल मोड के माध्यम से आयोजित की जाएंगी. पश्चिम बंगाल में शाम सात बजे तक 50 फीसदी क्षमता के साथ लोकल ट्रेनें चलेंगी. शाम सात बजे के बाद किसी भी लोकल ट्रेन को नहीं चलने दिया जाएगा. हालांकि, लंबी दूरी की सभी ट्रेनें यथावत चलती रहेंगी. बता दें कि पश्चिम बंगाल में दीपावली के बाद नौवीं से लेकर बारहवीं कक्षा के छात्रों के लिए स्कूल खोला गया था. जबकि छोटे बच्चों के स्कूल बंद थे. क्लासें वर्चुअल माध्यम से हो रही थी, लेकिन बंगाल में कोरोना के बढ़ते मामलो के मद्देनजर स्कूल बंद करने का सरकार ने ऐलान किया है. राज्य में एक दिन में कोरोना वायरस के आंकड़े रविवार को 6,153 दर्ज किए गए। इसके अलावा 8 की मौत एक दिन में कोविड संक्रमण से दर्ज की गई है. राज्य के विभिन्न जिलों में कोविड के मामले बढ़ने के साथ ही साथ कोलकाता में एक दिन में कोविड के 3194 नए मामले दर्ज किए गए हैं.
West Bengal Corona Update: पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने कोरोना के बढ़ते मामलों के मद्देनजर सोमवार से सभी स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, स्पा, सैलून, ब्यूटी पार्लर, स्विमिंग पूल, चिड़ियाघर और मनोरंजन पार्क बंद करने का ऐलान किया है. पश्चिम बंगाल में कोरोना के बढ़ते प्रकोप के कारण सोमवार से राज्य में आंशिक रूप से लॉकडाउन लागू हो गया है. आज से राज्य के स्कूल-कॉलेज और विश्वविद्यालय फिर से बंद हो गए हैं. इस बीच सिलीगुड़ी में सोमवार को सिलीगुड़ी बालिका उच्च विद्यालय की पचहत्तरवीं वर्षगांठ के अवसर पर रंगारंग जुलूस निकाला गया, जिसमें बड़ी सख्या में स्कूल की छात्राएं शामिल हुईं. तो दूसरी ओर हजारदुआरी में स्कूल के बच्चे पर्यटन केंद्रों में घूमते दिखाई दिए. इसे लेकर शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है. कोरोना महामारी के बीच बच्चों को जुलूस में बुलाये जाने को लेकर सवाल किये जा रहे हैं और स्कूल प्रबंधन के फैसले को लेकर सवाल किए जा रहे हैं. सिलीगुड़ी बालिका उच्च विद्यालय की पचहत्तरवीं वर्षगांठ के अवसर कई सौ छात्रों के साथ शिक्षकों और प्रशासन के अधिकारियों ने जुलूस निकाला. हालांकि, स्कूल प्रबंधन का कहना है कि छात्राएं मास्क पहनकर जुलूस में शामिल हुईं. किसी को जबरन स्कूल नहीं लाया गया. इस पचहत्तरवें वर्ष के अवसर पर कल से विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है. बाघायतीन पार्क में कार्यक्रम का आयोजन किया गया है. इससे विवाद खड़ा हो गया है. बता दें कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने कोरोना के बढ़ते मामलों के मद्देनजर सोमवार से सभी स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, स्पा, सैलून, ब्यूटी पार्लर, स्विमिंग पूल, चिड़ियाघर और मनोरंजन पार्क बंद करने का ऐलान किया है. सभी सरकारी और निजी कार्यालय पचास प्रतिशत क्षमता पर काम करेंगे. सभी प्रशासनिक बैठकें अब से वर्चुअल मोड के माध्यम से आयोजित की जाएंगी. पश्चिम बंगाल में शाम सात बजे तक पचास फीसदी क्षमता के साथ लोकल ट्रेनें चलेंगी. शाम सात बजे के बाद किसी भी लोकल ट्रेन को नहीं चलने दिया जाएगा. हालांकि, लंबी दूरी की सभी ट्रेनें यथावत चलती रहेंगी. बता दें कि पश्चिम बंगाल में दीपावली के बाद नौवीं से लेकर बारहवीं कक्षा के छात्रों के लिए स्कूल खोला गया था. जबकि छोटे बच्चों के स्कूल बंद थे. क्लासें वर्चुअल माध्यम से हो रही थी, लेकिन बंगाल में कोरोना के बढ़ते मामलो के मद्देनजर स्कूल बंद करने का सरकार ने ऐलान किया है. राज्य में एक दिन में कोरोना वायरस के आंकड़े रविवार को छः,एक सौ तिरेपन दर्ज किए गए। इसके अलावा आठ की मौत एक दिन में कोविड संक्रमण से दर्ज की गई है. राज्य के विभिन्न जिलों में कोविड के मामले बढ़ने के साथ ही साथ कोलकाता में एक दिन में कोविड के तीन हज़ार एक सौ चौरानवे नए मामले दर्ज किए गए हैं.
मिन्स्क समझौतों के दूसरे दौर के बाद डोनबास में शत्रुता के सक्रिय चरण के पूरा होने ने विरोधी पक्षों को एक मुश्किल स्थिति में डाल दिया। अब, रक्षात्मक और आक्रामक समस्याओं के बजाय, उन्हें अपने नियंत्रण में क्षेत्र में जीवन को बेहतर बनाने के बीच, काफी नियमित मुद्दों को हल करने की आवश्यकता थी। इसके अलावा, यह डोनेट्स्क विद्रोहियों और यूक्रेन के लिए विशिष्ट था। यद्यपि, निश्चित रूप से, शत्रुता को फिर से शुरू करने का खतरा हर समय बना रहता है, संपर्क की रेखा से भारी हथियारों की वापसी के बावजूद। अंत में, उन्हें हमेशा जल्द से जल्द वापस लौटाया जा सकता है। लेकिन चूंकि मुख्य विरोधाभासों का समाधान नहीं किया गया है, यूक्रेनी पक्ष और विद्रोही दोनों निस्संदेह एक-दूसरे के इरादों पर संदेह करते हैं। इसलिए पाउडर को सूखा ही रखें। इसके अलावा, समय-समय पर वे दुश्मन के आक्रामक इरादों के बारे में बयान देते हैं - सैनिकों और उपकरणों की एकाग्रता के बारे में। लेकिन एक ही समय में, प्रक्रिया में सभी स्थानीय प्रतिभागियों को समझ में आता है कि आंतरिक यूक्रेनी संघर्ष के विकास के इस स्तर पर, यूक्रेन में और विद्रोही डोनबास में, सबसे जुझारू बयानों के बावजूद, सवाल आखिरकार दूसरे स्तर पर चला गया। यहाँ, बहुत पहले से ही युद्धरत यूक्रेनी पार्टियों पर निर्भर नहीं है, यहाँ रूस और यूरोपीय शक्तियाँ और संयुक्त राज्य अमेरिका एक दूसरे से सहमत हैं। उत्तरार्द्ध आज या तो यूक्रेन का समर्थन करते हैं या इसे नियंत्रित करते हैं, मूल्यांकन की बारीकियां प्रत्येक की व्यक्तिगत स्थिति पर निर्भर करती हैं। दरअसल, स्थिति का विरोधाभास इस तथ्य में है कि आज यूक्रेन के भविष्य पर पश्चिम और रूस के बीच एक ही बातचीत है, जिसकी अनुपस्थिति मास्को में घटनाओं के दौरान मास्को में बोली गई थी। रूसी पक्ष ने अक्सर इस तथ्य पर ध्यान केंद्रित किया कि यह यूक्रेन के साथ बातचीत नहीं कर रहा था, इसकी राय को ध्यान में नहीं रखा गया था, जो सामान्य रूप से इस तरह के एक दुखद परिणाम का कारण बना। हालांकि पश्चिम में वे कह सकते हैं कि उनकी राय पर ध्यान नहीं दिया गया जब पूर्व राष्ट्रपति विक्टर Yanukovych ने अप्रत्याशित रूप से यूरोप के साथ एक संघ समझौते पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया, जो कि मैदान का कारण था। लेकिन अब यह सब इतना महत्वपूर्ण नहीं है। तब यूक्रेनी क्षेत्र में महान शक्तियों के हितों का संघर्ष था, जिसमें हर कोई, सबसे अधिक संभावना, जीतने की उम्मीद करता था, अन्य चीजों के बीच, इस्तेमाल किया, लड़ने की निषिद्ध विधियों, लेकिन अंत में कोई भी विशेष रूप से कुछ भी नहीं जीता था। संघर्ष के सक्रिय चरण की समाप्ति के बाद, रूस और पश्चिम को अब सीधे युद्ध और शांति के मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही, वे जितना हो सके अपनी प्रोटेक्ट करने में मदद करते हैं। स्वाभाविक रूप से, प्रत्येक पक्ष के पैमाने और रणनीतिक लक्ष्यों में अलग-अलग कार्य होते हैं। पश्चिम को 40 मिलियन के तहत आबादी वाले राज्य का आर्थिक रूप से समर्थन करने की आवश्यकता है, और एक ही समय में धक्का, और संभवतः बल, इसके नेतृत्व में सबसे गंभीर संरचनात्मक सुधार करने के लिए इतिहास स्वतंत्र यूक्रेन। उसी समय, आज पश्चिम से आर्थिक सहायता सीधे कीव में किए गए सुधारों पर सीधे निर्भर करती है। बदले में, रूस को चार से छह मिलियन लोगों की आबादी के साथ डोनेट्स्क और लुगांस्क में विद्रोही क्षेत्रों के साथ क्या करना है, इस सवाल को हल करने की आवश्यकता है। इन क्षेत्रों के प्रबंधन की एक प्रणाली का निर्माण और उनके आर्थिक समर्थन की समस्याओं को हल करना भी आवश्यक है। एक तरफ, यह पूरे यूक्रेन की आर्थिक स्थिति को बनाए रखने के लिए पश्चिम की तुलना में मास्को से काफी कम धन की आवश्यकता है, लेकिन दूसरी ओर, रूस के पास कम धनराशि है, और वे सभी वर्तमान जटिल स्थिति में हैं। निश्चित रूप से डोनेट्स्क और लुगांस्क स्वघोषित गणराज्यों को शामिल करने की आवश्यकता रूस के लिए एक गंभीर चुनौती है। लेकिन रूस और पश्चिम दोनों में, एक आम सिरदर्द उनके प्रोटीज को उनके रैंक में आदेश डालने और नियंत्रणीयता बहाल करने से जुड़ा हुआ है। लुगांस्क और डोनेट्स्क में, यह सरल तरीके से हल किया गया था, स्वतंत्र क्षेत्र कमांडरों को रूस के लिए छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था, उनमें से सबसे कट्टरपंथी को गिरफ्तार किया गया था। इधर, अधिकारियों ने केंद्रीयकरण करने की मांग की। क्या इसे रूस का प्रभाव माना जा सकता है या यह स्थानीय अधिकारियों की स्वाभाविक प्रतिक्रिया है, लेकिन तथ्य यह है। यूक्रेन के विद्रोही पूर्व में, एक केंद्रीय शक्ति ऊर्ध्वाधर रूसी मॉडल के अनुसार बनाई गई है, जो डोनेट्स्क और लुगांस्क "मखनोविस्ट्स" को एक आम हर में लाने में लगी हुई है। यूक्रेन में, सब कुछ अधिक जटिल है। यहां मैदान के बाद की सत्ता काफी विकेंद्रीकृत है। स्थानीय मखन्नोववादियों के अलावा, पूर्व, कानूनी क्षेत्र में लड़ने वाले स्वयंसेवक बटालियन, अभी भी प्रभाव के कुछ अन्य केंद्र हैं, उदाहरण के लिए, स्थानीय कुलीन वर्ग, राजनीतिक दलों और आंदोलनों, जिनमें बहुत कट्टरपंथी भी शामिल हैं, सक्रिय हैं। स्वाभाविक रूप से, वे सभी कीव में अधिकारियों पर दबाव डालते हैं। इसके अलावा, यह दबाव कभी-कभी बहुत गंभीर चरित्र ले लेता है। लेकिन किसी भी मामले में, यूक्रेन में अधिकारियों, साथ ही उसके द्वारा फाड़े गए क्षेत्रों में विद्रोहियों को, एक महत्वपूर्ण शर्त को पूरा करना था - हिंसा पर राज्य के एकाधिकार को बहाल करने का प्रयास करना। इसी समय, यूक्रेनी अधिकारियों की कार्रवाइयाँ और उनके सामने आने वाली कठिनाइयाँ, स्पष्ट कारणों से, बाहर से बहुत अधिक दिखाई देती हैं। फिर भी, एक खुली सूचना का वातावरण और प्रक्रिया में कई सक्रिय भागीदार। डोनबास में, सभी को चुपचाप बनाया गया था या गिरफ्तार भी किया गया था। यहाँ सब कुछ इस तरह के संघर्षों के विकास के प्रसिद्ध तर्क के अनुसार हुआ। उदाहरण के लिए, ताजिकिस्तान में, 1990 की शुरुआत के स्थानीय गृह युद्ध में लड़ाई के सक्रिय चरण की समाप्ति के बाद, प्रभावशाली क्षेत्र कमांडरों सांगक सफारोव और फैज़ुली सैदोव अस्पष्ट परिस्थितियों में मारे गए थे। क्योंकि युद्ध के बाद, किसी को भी आपराधिक अतीत वाले क्रूर कमांडरों की जरूरत नहीं रह जाती है। उसी समय, उस समय कीव में भी इसी तरह के आंकड़ों के साथ कहानियां थीं। यह कट्टरपंथी राष्ट्रवादी साशा व्हाइट की कहानी को याद करने के लिए पर्याप्त है, जिसे पुलिस की कार्रवाई के दौरान हिरासत में रहने के दौरान मैदान की जीत के तुरंत बाद मार दिया गया था। लेकिन यह चरित्र पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो गया और सत्ता को बदनाम कर दिया, और उसने प्रत्यक्ष उन्मूलन का जोखिम उठाया। और यद्यपि डोनबास में सक्रिय शत्रुता की अवधि बड़ी संख्या में स्वयंसेवक बटालियनों और उनके क्रूर कमांडरों के उभरने के कारण हुई, वे आम तौर पर राज्य संस्थानों में एकीकृत करने में सक्षम थे। बटालियनों को आंशिक रूप से भंग कर दिया गया था, आंशिक रूप से सेना और पुलिस में शामिल किया गया था। अंतिम राष्ट्रवादी दिमित्री यरोश के नेतृत्व में सही क्षेत्र के तथाकथित कोर थे। 2015 के वसंत में, उन्हें एक अलग ब्रिगेड के रूप में सेना में शामिल किया गया था। यह स्पष्ट है कि यह समस्या का समाधान नहीं है, लेकिन फिर भी इसके लिए पहला दृष्टिकोण है। लेकिन कीव में केंद्रीय अधिकारियों की मुख्य समस्याएं प्रसिद्ध यूक्रेनी कुलीन वर्ग के साथ पैदा हुईं और एक ही समय में निप्रॉपेट्रोस क्षेत्र के गवर्नर, इगोर कोलेमोइस्की। राज्य कंपनी "उक्रांफ्टा" के कारण उनके बीच संघर्ष उत्पन्न हुआ, जो कि कोलोमोकी के नियंत्रण में था। जब कीव ने कंपनी के प्रबंधन को खारिज कर दिया, तो डेनेप्रोपेट्रोवस्क गवर्नर के करीब, बाद के लोगों ने बलपूर्वक उस पर नियंत्रण के नुकसान को रोकने की कोशिश की। इस तथ्य के कारण इस कहानी का बहुत महत्व था कि कोलोमिस्की शायद यूक्रेन का सबसे प्रभावशाली कुलीन वर्ग है। उन्होंने 2014 की पहली छमाही में उस निप्रॉपेट्रोस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, पूर्वी यूक्रेन में रूस समर्थक अलगाववादियों का विरोध किया। उनके निपटान में विभिन्न स्वयंसेवक प्रारूप थे, जो 2015 की शुरुआत तक एक छोटी निजी सेना थी। यही है, अपने लोगों और नियंत्रण में पूरे क्षेत्र के साथ कोलोमिस्की वास्तव में यूक्रेन के भीतर एक मिनी-राज्य का प्रतिनिधित्व करता था। सामान्य रूप से यूक्रेन, पिछले 20 वर्षों का प्रदर्शन था कि कैसे कमजोर राज्य संस्थानों के साथ, कुलीन वर्ग प्रमुख शक्ति बन जाते हैं। इसके अलावा, लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं कुलीन वर्गों के लिए अतिरिक्त अवसर पैदा करती हैं। वे पार्टियों, समाचार पत्रों के माध्यम से एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं। एक हद तक यह लोकतंत्र भी है। यद्यपि यह क्लासिक आधुनिक पश्चिमी लोकतंत्र से मिलता जुलता नहीं है। इसके बजाय, अभिजात (कुलीन वर्ग) गणराज्यों के साथ समानताएं खींचना संभव है, उदाहरण के लिए, मध्ययुगीन इटली। यह तब होता है जब कई अमीर परिवार, वफादार ग्राहकों के समूह, तथाकथित ग्राहकों की मदद से गणतंत्र का प्रबंधन करते हैं। यदि इस तरह के कुलीन परिवार सहमत हैं, तो वे सत्ता में एक दूसरे को प्रतिस्थापित करते हैं, उदाहरण के लिए, यह वेनिस गणराज्य में मामला था। यदि उनके बीच संबंध जटिल है, तो उनके ग्राहक सड़कों पर संबंध का पता लगाते हैं। दरअसल, यूक्रेनी कुलीन वर्ग अपने संगठन में एक समान लोकतांत्रिक गणराज्य के लिए कुछ कर रहे थे। सिद्धांत रूप में, पूर्व यूएसएसआर के रिक्त स्थान में, कोई भी कुलीन वर्ग ऐसा कुछ चाहता है। यहाँ आप उन्हीं रूसी कुलीन वर्ग के खोरदार्कोवस्की को याद कर सकते हैं, जिन्होंने अपने पतन की पूर्व संध्या पर राज्य ड्यूमा में कुछ राजनीतिक दलों को सीधे प्रभावित किया था। इसलिए कोलोमिस्की, सबसे अधिक संभावना है, का मानना था कि यूक्रेन के पूर्व में यूक्रेनी राज्यवाद की रक्षा में उनकी भूमिका उन्हें भविष्य की राज्य प्रणाली में एक विशिष्ट स्थान प्रदान करेगी। इसके अलावा, वह संपत्ति के पुनर्वितरण और राज्य तंत्र में लाभकारी पदों से कुछ लाभांश पर भरोसा कर सकता है, जो पहले पूर्व राष्ट्रपति Yanukovych के अपमानित डोनेट्स्क कबीले के प्रतिनिधियों के थे। यूक्रेनी राज्य के विकास के पूर्व तर्क के दृष्टिकोण से, यह काफी स्वाभाविक था। विजेता को सब कुछ मिलना था। इसके अलावा, राष्ट्रपति अंततः एक और कुलीन बन गए - पेट्रो पोरोशेंको और, तदनुसार, कोलेमोइस्की उनके साथ प्रभाव के क्षेत्रों को साझा करने पर भरोसा कर सकते थे। उनके दृष्टिकोण से, Nafta में प्रबंधन का प्रतिस्थापन अन्य कुलीन वर्गों के पक्ष में संपत्ति का पुनर्वितरण है, वही पोरोशेंको, इसलिए सशस्त्र लोगों के उपयोग के साथ तंत्रिका प्रतिक्रिया। यह संभव है कि अगर यूक्रेन ऐसी स्थिति में नहीं होता, जो उसके लिए पर्याप्त रूप से नया होता। देश पूरी व्यवस्था में सुधार कर रहा है। और इस सुधार को गंभीर बाहरी प्रभाव के तहत किया जाता है। इसी समय, यह स्पष्ट है कि पश्चिम में वे नहीं चाहेंगे कि वर्ष की 2005 की स्थिति यूक्रेन में दोहराई जाए, जब स्थानीय "नारंगी क्रांति" के बाद समर्थक पश्चिमी राजनेताओं (तत्कालीन राष्ट्रपति विक्टर Yushchenko और प्रधान मंत्री यूलिया Tymoshenko) के बीच संघर्ष हुआ था। संपत्ति वितरण के लिए। वास्तव में, यही कारण है कि Tymoshenko, मैदान के बाद, यूक्रेन में राजनीतिक जीवन का पसंदीदा होना बंद हो गया है। इसलिए, Kolomoisky और पोरोशेंको के बीच विवाद में, अंतिम लाभ कीव में केंद्रीय अधिकारियों के पक्ष में था। यद्यपि कोलमोमिस्की ने अपना प्रभाव निप्रॉपेट्रोसट्रैक क्षेत्र में बनाए रखा, क्योंकि उनके पूर्व डिप्टी ओलेनिक स्थानीय प्रशासन में बने रहे। फिर भी, राष्ट्रपति पोरोशेंको ने हासिल किया है। हालांकि यूक्रेन के राजनीतिक जीवन में कुलीन वर्गों की भविष्य की भूमिका का सवाल अभी भी खुला है। उनके पास अभी भी गंभीर धन, प्रभावशाली मानव संसाधन, व्यावहारिक रूप से निजी सेनाएं हैं, और सामान्य अनिश्चितता और राज्य संस्थानों की कमजोरी की स्थिति में, यह आमतौर पर देश में कुलीन वर्गों के प्रभाव को सुनिश्चित करने और अपनी तरह से संघर्ष करने के लिए महत्वपूर्ण शर्त है। फिर भी, पोरोशेंको, कुछ हद तक, एक कुलीन वर्ग। तो मुख्य सवाल यह हैः क्या यूक्रेन अभी भी अंत में राज्य संस्थानों का गठन करने में सक्षम होगा? सोवियत काल का समापन? यह वास्तव में एक बहुत बड़ा सवाल है, और यूक्रेनी कुलीन लोगों को इस बारे में खुद पर यकीन नहीं है। इसलिए सबसे निर्णायक तरीके से सोवियत अतीत के साथ संबंध तोड़ने की इच्छा। अप्रैल 9 पर, यूक्रेन के वर्खोव्ना राडा ने डी-कम्युनिकेशन पर एक बहुत ही सख्त कानून अपनाया, जिसने यूक्रेन में कम्युनिस्ट और राष्ट्रीय समाजवादी शासकों को अपराधी के रूप में निंदा की, उनके आपराधिक स्वभाव के सार्वजनिक निषेध और साथ ही साथ उनके प्रतीकों के उपयोग और प्रचार पर रोक लगा दी। इसके अलावा, सभी सोवियत अभिलेखागार को प्रकाशित करने का निर्णय लिया गया और यूक्रेन के लिए लड़ने वाले सभी लोगों को वैध बनाया, जिनमें यूक्रेनी राष्ट्रवादियों (ओयूएन) और यूक्रेनी विद्रोही सेना (यूपीए) के संगठन शामिल हैं। यह स्पष्ट है कि यूक्रेनी कानून का मुख्य उद्देश्य ठीक सोवियत संघ और उसका प्रतीकवाद था। बड़े पैमाने पर क्योंकि आधुनिक रूस ने यूएसएसआर को अपने प्रतीकों में से एक बना दिया है। यही है, नया कानून यूक्रेन और रूस के बीच वैश्विक टकराव का एक निरंतरता है। वर्तमान यूक्रेनी संभ्रांत लोगों ने रूस और उसके इतिहास के साथ उन्हें एकजुट करने वाली हर बात को नकार दिया। इसलिए, सभी जो सोवियत संघ के साथ लड़े, उसके नायक बन गए। जाहिर है, Verkhovna Rada के कर्तव्य जिन्होंने कानून को अपनाया है, इस प्रकार रूस के प्रभाव और यूक्रेन में इसका समर्थन करने वाले सभी लोगों को बहाल करना असंभव बना रहे हैं। उनका मानना है कि यह रूस और यूक्रेन के बीच एक तरह का "बर्लिन की दीवार" बनाने के लिए पश्चिम के पक्ष में एक सभ्य विकल्प बनाने का एक निश्चित तरीका है। इसके अलावा, यूक्रेनी deputies अंततः उन राजनीतिक ताकतों को हाशिए पर रखना चाहते हैं जो सोवियत अतीत पर समाज के एक हिस्से की उदासीनता पर भरोसा करते हैं और रूस की ओर उन्मुख हैं, और उनके लिए सत्ता में वापस आना असंभव बना देता है। संभवतः, इस तरह के कट्टरपंथी कदम नए संस्थानों को बनाने के नियमित काम की तुलना में एक सरल समाधान प्रतीत होते हैं - सबसे पहले, कानूनी प्रणाली और एक अधिक कुशल राज्य प्रशासन तंत्र। लेकिन किसी भी क्रांतिकारी कार्रवाई की तरह, कानून बहुत कच्चा था, इसके आवेदन के परिणाम अप्रत्याशित थे। उदाहरण के लिए, अप्रैल 9 के बाद यह स्पष्ट नहीं था कि सोवियत काल के सैन्य पुरस्कारों का क्या किया जाए, क्योंकि वे भी सोवियत प्रतीकों की श्रेणी में आते थे। एक अन्य समस्या 1991 से पहले जारी किए गए डिप्लोमा और प्रमाण पत्र के साथ थी, क्योंकि वे सोवियत प्रतीकों को भी दर्शाते हैं। इसके अलावा, मकबरे, स्मारक, गिरे हुए सैनिक, संग्रहालय प्रदर्शनी, संग्रहकर्ताओं के संग्रह भी हैं। इसलिए, अप्रैल 23 Verkhovna Rada ने कानून में बदलाव किए। अब इसकी कार्रवाई उपरोक्त सभी वर्णों पर लागू नहीं होती है। एक और समस्या शहरों और कस्बों के नामकरण की थी, जिनमें से कई यूक्रेन में सोवियत नामों को सहन करते हैं, एक ही Dneprodzerzhinsk। लेकिन यह सब उतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना कि उन सभी लोगों का कानूनीकरण जो सोवियत अधिकारियों के साथ लड़े थे। उनमें केवल वैचारिक राष्ट्रवादी ही नहीं थे, जिन्हें यूएसएसआर के साथ संघर्ष से विख्यात किया गया था, और नाज़ी जर्मनी के साथ एक ही चरण में, जर्मन स्टैफ़न्स में वही स्टीफ़न बांदेरा बैठे थे। फिर भी, यूक्रेन में काफी लोगों ने पुलिस संरचनाओं में सेवा की, जिसमें एकाग्रता शिविरों का संरक्षण भी शामिल था। स्वाभाविक रूप से, यह कई पूर्व सोवियत नागरिकों से बहुत नकारात्मक प्रतिक्रिया का कारण बनता है। कुछ हद तक, यह रूसी प्रचार में मदद करता है, जो इस विचार पर आधारित है कि "जून्टा" और "नाजिस" कीव में सत्ता में आए थे। एक बहुत ही दिलचस्प चर्चा यूक्रेनी साइटों में से एक पर थी। यहां एक लेखक ने रूस से आए उन लोगों के बारे में पूरी जानकारी एकत्र की, जो नाज़ियों की तरफ से लड़े थे। वे काफी हद तक निकले, जाने-माने व्लासोवाइट्स के अलावा कोसैक एसएस वाहिनी, एसएस गार्ड बटालियन भी थे। इसके अलावा, एक प्रभावशाली हिस्सा तथाकथित "हाइविस" थे, युद्ध के पूर्व सोवियत कैदी, जो स्वेच्छा से जर्मन इकाइयों के हिस्से के रूप में लड़े थे। अलग-अलग समय में उत्तरार्द्ध में, लगभग आधा मिलियन लोग थे। इस आधार पर, लेखक ने निष्कर्ष निकाला कि, Ukrainians पर द्वितीय विश्व युद्ध में नाजियों का समर्थन करने का आरोप लगाते हुए, रूस अपनी ऐतिहासिक समस्याओं को नहीं देखना चाहता था। इसके अलावा, रूस में वे अपने एसएस के बारे में सामान्य रूप से भूल गए हैं आधुनिक समाज के लिए, यह निश्चित रूप से इतिहास में एक काला पृष्ठ है। इसलिए, Ukrainians के लिए यह अधिक कठिन है, उनकी आलोचना करना आसान है और उनके लिए पिछले इतिहास की सभी परिस्थितियों को समझाना अधिक कठिन है। इसके अलावा, स्टालिन के तहत सोवियत शासन की सभी कठोरता और नाजी जर्मनी के साथ सामान्य विशेषताओं की उपस्थिति के साथ, उनके पास एक महत्वपूर्ण अंतर है। फिर भी, यूएसएसआर में एक जातीयता की श्रेष्ठता और अवांछनीय जातीय समूहों के विनाश की कोई वैचारिक अवधारणा नहीं थी। जबकि सोवियत संघ मूल रूप से अंतरराष्ट्रीय रहा और दमन के दौरान, इसका संबंध "पीड़ितों और जल्लादों" से था। इसलिए, रूस और यूएसएसआर के लिए आधुनिक Ukrainians की सभी शत्रुता के लिए, एक कानून के साथ इतिहास से सोवियत पृष्ठ को मिटाना बहुत मुश्किल होगा। खासकर जब से राष्ट्रपति पोरोशेंको ने अप्रैल के अंत में इस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, उन्हें एक कठिन निर्णय का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन आज यूक्रेन के लिए सबसे बड़ी समस्या राजनीतिक हत्याओं की लहर है। भागने वाले राष्ट्रपति यानुकोविच टीम के पूर्व सदस्य मारे जा रहे हैं। हालांकि, सबसे बड़ी प्रतिध्वनि कीव बौद्धिक ओले बुज़िन की हत्या थी, जो नए यूक्रेनी अधिकारियों के प्रति अपने महत्वपूर्ण रवैये के लिए जाने जाते थे और रूस के लिए सहानुभूति रखते थे। इस हत्या के संबंध में बहुत सारे संस्करण थे। कुछ का मानना था कि वह अपने रूसी समर्थक विचारों के लिए मारा गया था और यह यूक्रेनी कट्टरपंथियों द्वारा किया गया था। दूसरों का मानना था कि, इसके विपरीत, वह रूसी समर्थक कट्टरपंथियों द्वारा मारा गया था, जो इस तरह यूक्रेन में स्थिति को अस्थिर करना चाहता था। जो भी हो, समाज में अस्थिरता, आक्रामकता की स्थिति प्रसिद्ध लोगों, विशेष रूप से पत्रकारों, लेखकों और प्रचारकों के लिए बेहद खतरनाक है। क्योंकि उनकी हत्या एक प्रतिध्वनि का कारण बनती है और राजनेताओं के विपरीत कोई भी उनकी रक्षा नहीं करता है। खतरनाक समय में एल्डरबेरी शिकार हो गया। सामान्य तौर पर, यूक्रेन और रूस के बीच टकराव, हालांकि यह "हॉट एक्ससेर्बेशन चरण" पारित कर चुका है, नई दिशाओं में जारी है। उनमें से एक ट्रांसनिस्ट्रिया का अपरिचित क्षेत्र था। वास्तव में, यह मोल्दोवा और यूक्रेन की सीमाओं पर एक समर्थक रूसी एन्क्लेव है। यहां, 1990s की शुरुआत में मोल्दोवन-ट्रांसडाइनेस्ट्रियन संघर्ष के समय से, रूसी सैन्य बेस स्थित है। इसके अलावा, गज़प्रॉम मुफ्त गैस के साथ ट्रांसनिस्ट्रिया की आपूर्ति करता है, जो हालांकि, मोल्दोवा के ऋण के लेखांकन में जाता है। उत्तरार्द्ध इसे पहचानता है, लेकिन भुगतान नहीं करता है। खैर, और अंत में, मास्को ने सीधे ट्रांसनिस्ट्रिया को वित्तीय सहायता प्रदान की। रूस के साथ यूक्रेन के टकराव के बीच में, पहले क्रीमिया की वजह से, फिर डॉनबेस के कारण, कीव में कई लोगों को डर था कि मास्को ओडेसा के रूप में पूरे काले सागर तट पर कब्जा करना चाहता है। इस प्रकार, यह भूमि गलियारे के मुद्दे को क्रीमिया और आगे ट्रांसनिस्ट्रिया में हल कर सकता है। लेकिन रूसी अधिकारी अब तक नहीं गए थे, आशंकाएं व्यर्थ हो गईं, लेकिन ट्रांसनिस्ट्रिया ने खुद को एक मुश्किल स्थिति में पाया। स्वाभाविक रूप से, यूक्रेनी अधिकारियों को अपनी पश्चिमी सीमाओं के पास रूसी एन्क्लेव पर संदेह है। पश्चिमी दिशा से हड़ताल का डर होने पर उन्होंने सीमा को मजबूत करने के उपाय किए। लेकिन ट्रांसनिस्ट्रिया के लिए अधिक गंभीर परिणाम इसकी वास्तविक नाकाबंदी थे। पिछले बीस वर्षों के लिए, ट्रांसनिस्ट्रिया यूक्रेन के साथ अच्छे संबंधों और निर्यात-आयात संचालन के लिए मोल्दोवन दस्तावेजों के उपयोग के माध्यम से जीवित है। अब कीव मोल्दोवन रीति-रिवाजों को शुरू करने का मुद्दा उठा रहा है, और यूक्रेनियन ने भी विनिर्मित वस्तुओं के आयात को ट्रांसनिस्ट्रिया तक सीमित कर दिया है। मोल्दोवा, बदले में, ट्रांसनिस्ट्रिया के उद्यमों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करता है, जो सीमा शुल्क और करों के भुगतान के संबंध में मोल्दोवा में पंजीकृत हैं। इसके अलावा, सैन्य उम्र के रूसी नागरिकों को यूक्रेन के क्षेत्र में प्रवेश से वंचित किया जाता है, और ट्रांसनिस्ट्रिया में 200 की कुल आबादी के हजार में से हजारों 750 हैं। यदि हम याद करते हैं कि डोनेट्स्क में विद्रोहियों की सुरक्षा सेवा के आयोजकों में से एक ट्रांसनिस्टीरियन जनरल एंथुफीव था, तो कीव की चिंताओं को काफी समझा जा सकता है। ट्रांसनिस्ट्रिया के लिए कठिनाई इस तथ्य के कारण पैदा हुई कि रूस ने इस वर्ष 100 मिलियन डॉलर आवंटित करने से इनकार कर दिया। नतीजतन, ट्रांसनिस्ट्रिया एक तीव्र कमी का सामना कर रहा था। गैर-मान्यता प्राप्त गणराज्य में आर्थिक स्थिति तेजी से बिगड़ गई है, आबादी का असंतोष बढ़ने लगा है। जाहिर है, यूक्रेन की शत्रुता के साथ, ट्रांसनिस्ट्रिया की स्थिति अनिवार्य रूप से महत्वपूर्ण हो जाती है। यह कहना मुश्किल है कि कब तक गैर-मान्यता प्राप्त गणतंत्र नाकाबंदी की स्थितियों में बाहर रहने में सक्षम होगा। लेकिन इसके साथ ही, मोल्दोवा में काउंटरप्ले के संचालन के लिए रूस की अपनी संभावनाएं हैं। गागुज़ स्वायत्तता के प्रमुख के लिए चुनावों में, समर्थक रूसी राजनीतिज्ञ इरीना व्लाच ने जीत हासिल की। 2014 में हुए चुनावों में, समर्थक रूसी सेनाओं ने अच्छी तरह से गठबंधन किया हो सकता है, अगर चुनाव की पूर्व संध्या पर लोकप्रिय राजनेता रेनाटो उसैटी को समाप्त नहीं किया गया था। और, अंत में, मोल्दोवा में सबसे गंभीर बैंकिंग घोटाला, जहां एक्सएनयूएमएक्स बिलियन डॉलर गायब हो गया, मदद नहीं कर सका, लेकिन सत्ता में पार्टियों के समर्थक पश्चिमी गठबंधन की लोकप्रियता को प्रभावित किया। यह एक विरोधाभास है, लेकिन मॉस्को के लिए, सत्ता के अपने केंद्रीकरण के साथ, उदार प्रणाली उन देशों में अधिक लाभदायक हो जाती है, जहां रूस रुचि रखता है। तब मास्को के पास रूसी समर्थक नागरिकों की क्षमता का उपयोग करने का अवसर होगा, और वास्तव में मोल्दोवा जैसे देशों के घरेलू राजनीतिक क्षेत्र पर अपने खेल का संचालन करने का मौका होगा। किसी भी मामले में, हम लंबे समय तक रूस और यूक्रेन के बीच बड़े पैमाने पर टकराव को देखेंगे। लेकिन यह पहले से ही स्पष्ट है कि, सबसे अधिक संभावना है, कोई सैन्य संघर्ष नहीं होगा, लेकिन राज्य संरचना और विकास के परिणामों के मॉडल के बीच एक प्रतियोगिता होगी। यहाँ दांव यूक्रेन और पूरे सोवियत संघ के बाद के अंतरिक्ष के लिए बेहद ऊँचे हैं। - लेखकः - मूल स्रोतः
मिन्स्क समझौतों के दूसरे दौर के बाद डोनबास में शत्रुता के सक्रिय चरण के पूरा होने ने विरोधी पक्षों को एक मुश्किल स्थिति में डाल दिया। अब, रक्षात्मक और आक्रामक समस्याओं के बजाय, उन्हें अपने नियंत्रण में क्षेत्र में जीवन को बेहतर बनाने के बीच, काफी नियमित मुद्दों को हल करने की आवश्यकता थी। इसके अलावा, यह डोनेट्स्क विद्रोहियों और यूक्रेन के लिए विशिष्ट था। यद्यपि, निश्चित रूप से, शत्रुता को फिर से शुरू करने का खतरा हर समय बना रहता है, संपर्क की रेखा से भारी हथियारों की वापसी के बावजूद। अंत में, उन्हें हमेशा जल्द से जल्द वापस लौटाया जा सकता है। लेकिन चूंकि मुख्य विरोधाभासों का समाधान नहीं किया गया है, यूक्रेनी पक्ष और विद्रोही दोनों निस्संदेह एक-दूसरे के इरादों पर संदेह करते हैं। इसलिए पाउडर को सूखा ही रखें। इसके अलावा, समय-समय पर वे दुश्मन के आक्रामक इरादों के बारे में बयान देते हैं - सैनिकों और उपकरणों की एकाग्रता के बारे में। लेकिन एक ही समय में, प्रक्रिया में सभी स्थानीय प्रतिभागियों को समझ में आता है कि आंतरिक यूक्रेनी संघर्ष के विकास के इस स्तर पर, यूक्रेन में और विद्रोही डोनबास में, सबसे जुझारू बयानों के बावजूद, सवाल आखिरकार दूसरे स्तर पर चला गया। यहाँ, बहुत पहले से ही युद्धरत यूक्रेनी पार्टियों पर निर्भर नहीं है, यहाँ रूस और यूरोपीय शक्तियाँ और संयुक्त राज्य अमेरिका एक दूसरे से सहमत हैं। उत्तरार्द्ध आज या तो यूक्रेन का समर्थन करते हैं या इसे नियंत्रित करते हैं, मूल्यांकन की बारीकियां प्रत्येक की व्यक्तिगत स्थिति पर निर्भर करती हैं। दरअसल, स्थिति का विरोधाभास इस तथ्य में है कि आज यूक्रेन के भविष्य पर पश्चिम और रूस के बीच एक ही बातचीत है, जिसकी अनुपस्थिति मास्को में घटनाओं के दौरान मास्को में बोली गई थी। रूसी पक्ष ने अक्सर इस तथ्य पर ध्यान केंद्रित किया कि यह यूक्रेन के साथ बातचीत नहीं कर रहा था, इसकी राय को ध्यान में नहीं रखा गया था, जो सामान्य रूप से इस तरह के एक दुखद परिणाम का कारण बना। हालांकि पश्चिम में वे कह सकते हैं कि उनकी राय पर ध्यान नहीं दिया गया जब पूर्व राष्ट्रपति विक्टर Yanukovych ने अप्रत्याशित रूप से यूरोप के साथ एक संघ समझौते पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया, जो कि मैदान का कारण था। लेकिन अब यह सब इतना महत्वपूर्ण नहीं है। तब यूक्रेनी क्षेत्र में महान शक्तियों के हितों का संघर्ष था, जिसमें हर कोई, सबसे अधिक संभावना, जीतने की उम्मीद करता था, अन्य चीजों के बीच, इस्तेमाल किया, लड़ने की निषिद्ध विधियों, लेकिन अंत में कोई भी विशेष रूप से कुछ भी नहीं जीता था। संघर्ष के सक्रिय चरण की समाप्ति के बाद, रूस और पश्चिम को अब सीधे युद्ध और शांति के मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही, वे जितना हो सके अपनी प्रोटेक्ट करने में मदद करते हैं। स्वाभाविक रूप से, प्रत्येक पक्ष के पैमाने और रणनीतिक लक्ष्यों में अलग-अलग कार्य होते हैं। पश्चिम को चालीस मिलियन के तहत आबादी वाले राज्य का आर्थिक रूप से समर्थन करने की आवश्यकता है, और एक ही समय में धक्का, और संभवतः बल, इसके नेतृत्व में सबसे गंभीर संरचनात्मक सुधार करने के लिए इतिहास स्वतंत्र यूक्रेन। उसी समय, आज पश्चिम से आर्थिक सहायता सीधे कीव में किए गए सुधारों पर सीधे निर्भर करती है। बदले में, रूस को चार से छह मिलियन लोगों की आबादी के साथ डोनेट्स्क और लुगांस्क में विद्रोही क्षेत्रों के साथ क्या करना है, इस सवाल को हल करने की आवश्यकता है। इन क्षेत्रों के प्रबंधन की एक प्रणाली का निर्माण और उनके आर्थिक समर्थन की समस्याओं को हल करना भी आवश्यक है। एक तरफ, यह पूरे यूक्रेन की आर्थिक स्थिति को बनाए रखने के लिए पश्चिम की तुलना में मास्को से काफी कम धन की आवश्यकता है, लेकिन दूसरी ओर, रूस के पास कम धनराशि है, और वे सभी वर्तमान जटिल स्थिति में हैं। निश्चित रूप से डोनेट्स्क और लुगांस्क स्वघोषित गणराज्यों को शामिल करने की आवश्यकता रूस के लिए एक गंभीर चुनौती है। लेकिन रूस और पश्चिम दोनों में, एक आम सिरदर्द उनके प्रोटीज को उनके रैंक में आदेश डालने और नियंत्रणीयता बहाल करने से जुड़ा हुआ है। लुगांस्क और डोनेट्स्क में, यह सरल तरीके से हल किया गया था, स्वतंत्र क्षेत्र कमांडरों को रूस के लिए छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था, उनमें से सबसे कट्टरपंथी को गिरफ्तार किया गया था। इधर, अधिकारियों ने केंद्रीयकरण करने की मांग की। क्या इसे रूस का प्रभाव माना जा सकता है या यह स्थानीय अधिकारियों की स्वाभाविक प्रतिक्रिया है, लेकिन तथ्य यह है। यूक्रेन के विद्रोही पूर्व में, एक केंद्रीय शक्ति ऊर्ध्वाधर रूसी मॉडल के अनुसार बनाई गई है, जो डोनेट्स्क और लुगांस्क "मखनोविस्ट्स" को एक आम हर में लाने में लगी हुई है। यूक्रेन में, सब कुछ अधिक जटिल है। यहां मैदान के बाद की सत्ता काफी विकेंद्रीकृत है। स्थानीय मखन्नोववादियों के अलावा, पूर्व, कानूनी क्षेत्र में लड़ने वाले स्वयंसेवक बटालियन, अभी भी प्रभाव के कुछ अन्य केंद्र हैं, उदाहरण के लिए, स्थानीय कुलीन वर्ग, राजनीतिक दलों और आंदोलनों, जिनमें बहुत कट्टरपंथी भी शामिल हैं, सक्रिय हैं। स्वाभाविक रूप से, वे सभी कीव में अधिकारियों पर दबाव डालते हैं। इसके अलावा, यह दबाव कभी-कभी बहुत गंभीर चरित्र ले लेता है। लेकिन किसी भी मामले में, यूक्रेन में अधिकारियों, साथ ही उसके द्वारा फाड़े गए क्षेत्रों में विद्रोहियों को, एक महत्वपूर्ण शर्त को पूरा करना था - हिंसा पर राज्य के एकाधिकार को बहाल करने का प्रयास करना। इसी समय, यूक्रेनी अधिकारियों की कार्रवाइयाँ और उनके सामने आने वाली कठिनाइयाँ, स्पष्ट कारणों से, बाहर से बहुत अधिक दिखाई देती हैं। फिर भी, एक खुली सूचना का वातावरण और प्रक्रिया में कई सक्रिय भागीदार। डोनबास में, सभी को चुपचाप बनाया गया था या गिरफ्तार भी किया गया था। यहाँ सब कुछ इस तरह के संघर्षों के विकास के प्रसिद्ध तर्क के अनुसार हुआ। उदाहरण के लिए, ताजिकिस्तान में, एक हज़ार नौ सौ नब्बे की शुरुआत के स्थानीय गृह युद्ध में लड़ाई के सक्रिय चरण की समाप्ति के बाद, प्रभावशाली क्षेत्र कमांडरों सांगक सफारोव और फैज़ुली सैदोव अस्पष्ट परिस्थितियों में मारे गए थे। क्योंकि युद्ध के बाद, किसी को भी आपराधिक अतीत वाले क्रूर कमांडरों की जरूरत नहीं रह जाती है। उसी समय, उस समय कीव में भी इसी तरह के आंकड़ों के साथ कहानियां थीं। यह कट्टरपंथी राष्ट्रवादी साशा व्हाइट की कहानी को याद करने के लिए पर्याप्त है, जिसे पुलिस की कार्रवाई के दौरान हिरासत में रहने के दौरान मैदान की जीत के तुरंत बाद मार दिया गया था। लेकिन यह चरित्र पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो गया और सत्ता को बदनाम कर दिया, और उसने प्रत्यक्ष उन्मूलन का जोखिम उठाया। और यद्यपि डोनबास में सक्रिय शत्रुता की अवधि बड़ी संख्या में स्वयंसेवक बटालियनों और उनके क्रूर कमांडरों के उभरने के कारण हुई, वे आम तौर पर राज्य संस्थानों में एकीकृत करने में सक्षम थे। बटालियनों को आंशिक रूप से भंग कर दिया गया था, आंशिक रूप से सेना और पुलिस में शामिल किया गया था। अंतिम राष्ट्रवादी दिमित्री यरोश के नेतृत्व में सही क्षेत्र के तथाकथित कोर थे। दो हज़ार पंद्रह के वसंत में, उन्हें एक अलग ब्रिगेड के रूप में सेना में शामिल किया गया था। यह स्पष्ट है कि यह समस्या का समाधान नहीं है, लेकिन फिर भी इसके लिए पहला दृष्टिकोण है। लेकिन कीव में केंद्रीय अधिकारियों की मुख्य समस्याएं प्रसिद्ध यूक्रेनी कुलीन वर्ग के साथ पैदा हुईं और एक ही समय में निप्रॉपेट्रोस क्षेत्र के गवर्नर, इगोर कोलेमोइस्की। राज्य कंपनी "उक्रांफ्टा" के कारण उनके बीच संघर्ष उत्पन्न हुआ, जो कि कोलोमोकी के नियंत्रण में था। जब कीव ने कंपनी के प्रबंधन को खारिज कर दिया, तो डेनेप्रोपेट्रोवस्क गवर्नर के करीब, बाद के लोगों ने बलपूर्वक उस पर नियंत्रण के नुकसान को रोकने की कोशिश की। इस तथ्य के कारण इस कहानी का बहुत महत्व था कि कोलोमिस्की शायद यूक्रेन का सबसे प्रभावशाली कुलीन वर्ग है। उन्होंने दो हज़ार चौदह की पहली छमाही में उस निप्रॉपेट्रोस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, पूर्वी यूक्रेन में रूस समर्थक अलगाववादियों का विरोध किया। उनके निपटान में विभिन्न स्वयंसेवक प्रारूप थे, जो दो हज़ार पंद्रह की शुरुआत तक एक छोटी निजी सेना थी। यही है, अपने लोगों और नियंत्रण में पूरे क्षेत्र के साथ कोलोमिस्की वास्तव में यूक्रेन के भीतर एक मिनी-राज्य का प्रतिनिधित्व करता था। सामान्य रूप से यूक्रेन, पिछले बीस वर्षों का प्रदर्शन था कि कैसे कमजोर राज्य संस्थानों के साथ, कुलीन वर्ग प्रमुख शक्ति बन जाते हैं। इसके अलावा, लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं कुलीन वर्गों के लिए अतिरिक्त अवसर पैदा करती हैं। वे पार्टियों, समाचार पत्रों के माध्यम से एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं। एक हद तक यह लोकतंत्र भी है। यद्यपि यह क्लासिक आधुनिक पश्चिमी लोकतंत्र से मिलता जुलता नहीं है। इसके बजाय, अभिजात गणराज्यों के साथ समानताएं खींचना संभव है, उदाहरण के लिए, मध्ययुगीन इटली। यह तब होता है जब कई अमीर परिवार, वफादार ग्राहकों के समूह, तथाकथित ग्राहकों की मदद से गणतंत्र का प्रबंधन करते हैं। यदि इस तरह के कुलीन परिवार सहमत हैं, तो वे सत्ता में एक दूसरे को प्रतिस्थापित करते हैं, उदाहरण के लिए, यह वेनिस गणराज्य में मामला था। यदि उनके बीच संबंध जटिल है, तो उनके ग्राहक सड़कों पर संबंध का पता लगाते हैं। दरअसल, यूक्रेनी कुलीन वर्ग अपने संगठन में एक समान लोकतांत्रिक गणराज्य के लिए कुछ कर रहे थे। सिद्धांत रूप में, पूर्व यूएसएसआर के रिक्त स्थान में, कोई भी कुलीन वर्ग ऐसा कुछ चाहता है। यहाँ आप उन्हीं रूसी कुलीन वर्ग के खोरदार्कोवस्की को याद कर सकते हैं, जिन्होंने अपने पतन की पूर्व संध्या पर राज्य ड्यूमा में कुछ राजनीतिक दलों को सीधे प्रभावित किया था। इसलिए कोलोमिस्की, सबसे अधिक संभावना है, का मानना था कि यूक्रेन के पूर्व में यूक्रेनी राज्यवाद की रक्षा में उनकी भूमिका उन्हें भविष्य की राज्य प्रणाली में एक विशिष्ट स्थान प्रदान करेगी। इसके अलावा, वह संपत्ति के पुनर्वितरण और राज्य तंत्र में लाभकारी पदों से कुछ लाभांश पर भरोसा कर सकता है, जो पहले पूर्व राष्ट्रपति Yanukovych के अपमानित डोनेट्स्क कबीले के प्रतिनिधियों के थे। यूक्रेनी राज्य के विकास के पूर्व तर्क के दृष्टिकोण से, यह काफी स्वाभाविक था। विजेता को सब कुछ मिलना था। इसके अलावा, राष्ट्रपति अंततः एक और कुलीन बन गए - पेट्रो पोरोशेंको और, तदनुसार, कोलेमोइस्की उनके साथ प्रभाव के क्षेत्रों को साझा करने पर भरोसा कर सकते थे। उनके दृष्टिकोण से, Nafta में प्रबंधन का प्रतिस्थापन अन्य कुलीन वर्गों के पक्ष में संपत्ति का पुनर्वितरण है, वही पोरोशेंको, इसलिए सशस्त्र लोगों के उपयोग के साथ तंत्रिका प्रतिक्रिया। यह संभव है कि अगर यूक्रेन ऐसी स्थिति में नहीं होता, जो उसके लिए पर्याप्त रूप से नया होता। देश पूरी व्यवस्था में सुधार कर रहा है। और इस सुधार को गंभीर बाहरी प्रभाव के तहत किया जाता है। इसी समय, यह स्पष्ट है कि पश्चिम में वे नहीं चाहेंगे कि वर्ष की दो हज़ार पाँच की स्थिति यूक्रेन में दोहराई जाए, जब स्थानीय "नारंगी क्रांति" के बाद समर्थक पश्चिमी राजनेताओं के बीच संघर्ष हुआ था। संपत्ति वितरण के लिए। वास्तव में, यही कारण है कि Tymoshenko, मैदान के बाद, यूक्रेन में राजनीतिक जीवन का पसंदीदा होना बंद हो गया है। इसलिए, Kolomoisky और पोरोशेंको के बीच विवाद में, अंतिम लाभ कीव में केंद्रीय अधिकारियों के पक्ष में था। यद्यपि कोलमोमिस्की ने अपना प्रभाव निप्रॉपेट्रोसट्रैक क्षेत्र में बनाए रखा, क्योंकि उनके पूर्व डिप्टी ओलेनिक स्थानीय प्रशासन में बने रहे। फिर भी, राष्ट्रपति पोरोशेंको ने हासिल किया है। हालांकि यूक्रेन के राजनीतिक जीवन में कुलीन वर्गों की भविष्य की भूमिका का सवाल अभी भी खुला है। उनके पास अभी भी गंभीर धन, प्रभावशाली मानव संसाधन, व्यावहारिक रूप से निजी सेनाएं हैं, और सामान्य अनिश्चितता और राज्य संस्थानों की कमजोरी की स्थिति में, यह आमतौर पर देश में कुलीन वर्गों के प्रभाव को सुनिश्चित करने और अपनी तरह से संघर्ष करने के लिए महत्वपूर्ण शर्त है। फिर भी, पोरोशेंको, कुछ हद तक, एक कुलीन वर्ग। तो मुख्य सवाल यह हैः क्या यूक्रेन अभी भी अंत में राज्य संस्थानों का गठन करने में सक्षम होगा? सोवियत काल का समापन? यह वास्तव में एक बहुत बड़ा सवाल है, और यूक्रेनी कुलीन लोगों को इस बारे में खुद पर यकीन नहीं है। इसलिए सबसे निर्णायक तरीके से सोवियत अतीत के साथ संबंध तोड़ने की इच्छा। अप्रैल नौ पर, यूक्रेन के वर्खोव्ना राडा ने डी-कम्युनिकेशन पर एक बहुत ही सख्त कानून अपनाया, जिसने यूक्रेन में कम्युनिस्ट और राष्ट्रीय समाजवादी शासकों को अपराधी के रूप में निंदा की, उनके आपराधिक स्वभाव के सार्वजनिक निषेध और साथ ही साथ उनके प्रतीकों के उपयोग और प्रचार पर रोक लगा दी। इसके अलावा, सभी सोवियत अभिलेखागार को प्रकाशित करने का निर्णय लिया गया और यूक्रेन के लिए लड़ने वाले सभी लोगों को वैध बनाया, जिनमें यूक्रेनी राष्ट्रवादियों और यूक्रेनी विद्रोही सेना के संगठन शामिल हैं। यह स्पष्ट है कि यूक्रेनी कानून का मुख्य उद्देश्य ठीक सोवियत संघ और उसका प्रतीकवाद था। बड़े पैमाने पर क्योंकि आधुनिक रूस ने यूएसएसआर को अपने प्रतीकों में से एक बना दिया है। यही है, नया कानून यूक्रेन और रूस के बीच वैश्विक टकराव का एक निरंतरता है। वर्तमान यूक्रेनी संभ्रांत लोगों ने रूस और उसके इतिहास के साथ उन्हें एकजुट करने वाली हर बात को नकार दिया। इसलिए, सभी जो सोवियत संघ के साथ लड़े, उसके नायक बन गए। जाहिर है, Verkhovna Rada के कर्तव्य जिन्होंने कानून को अपनाया है, इस प्रकार रूस के प्रभाव और यूक्रेन में इसका समर्थन करने वाले सभी लोगों को बहाल करना असंभव बना रहे हैं। उनका मानना है कि यह रूस और यूक्रेन के बीच एक तरह का "बर्लिन की दीवार" बनाने के लिए पश्चिम के पक्ष में एक सभ्य विकल्प बनाने का एक निश्चित तरीका है। इसके अलावा, यूक्रेनी deputies अंततः उन राजनीतिक ताकतों को हाशिए पर रखना चाहते हैं जो सोवियत अतीत पर समाज के एक हिस्से की उदासीनता पर भरोसा करते हैं और रूस की ओर उन्मुख हैं, और उनके लिए सत्ता में वापस आना असंभव बना देता है। संभवतः, इस तरह के कट्टरपंथी कदम नए संस्थानों को बनाने के नियमित काम की तुलना में एक सरल समाधान प्रतीत होते हैं - सबसे पहले, कानूनी प्रणाली और एक अधिक कुशल राज्य प्रशासन तंत्र। लेकिन किसी भी क्रांतिकारी कार्रवाई की तरह, कानून बहुत कच्चा था, इसके आवेदन के परिणाम अप्रत्याशित थे। उदाहरण के लिए, अप्रैल नौ के बाद यह स्पष्ट नहीं था कि सोवियत काल के सैन्य पुरस्कारों का क्या किया जाए, क्योंकि वे भी सोवियत प्रतीकों की श्रेणी में आते थे। एक अन्य समस्या एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे से पहले जारी किए गए डिप्लोमा और प्रमाण पत्र के साथ थी, क्योंकि वे सोवियत प्रतीकों को भी दर्शाते हैं। इसके अलावा, मकबरे, स्मारक, गिरे हुए सैनिक, संग्रहालय प्रदर्शनी, संग्रहकर्ताओं के संग्रह भी हैं। इसलिए, अप्रैल तेईस Verkhovna Rada ने कानून में बदलाव किए। अब इसकी कार्रवाई उपरोक्त सभी वर्णों पर लागू नहीं होती है। एक और समस्या शहरों और कस्बों के नामकरण की थी, जिनमें से कई यूक्रेन में सोवियत नामों को सहन करते हैं, एक ही Dneprodzerzhinsk। लेकिन यह सब उतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना कि उन सभी लोगों का कानूनीकरण जो सोवियत अधिकारियों के साथ लड़े थे। उनमें केवल वैचारिक राष्ट्रवादी ही नहीं थे, जिन्हें यूएसएसआर के साथ संघर्ष से विख्यात किया गया था, और नाज़ी जर्मनी के साथ एक ही चरण में, जर्मन स्टैफ़न्स में वही स्टीफ़न बांदेरा बैठे थे। फिर भी, यूक्रेन में काफी लोगों ने पुलिस संरचनाओं में सेवा की, जिसमें एकाग्रता शिविरों का संरक्षण भी शामिल था। स्वाभाविक रूप से, यह कई पूर्व सोवियत नागरिकों से बहुत नकारात्मक प्रतिक्रिया का कारण बनता है। कुछ हद तक, यह रूसी प्रचार में मदद करता है, जो इस विचार पर आधारित है कि "जून्टा" और "नाजिस" कीव में सत्ता में आए थे। एक बहुत ही दिलचस्प चर्चा यूक्रेनी साइटों में से एक पर थी। यहां एक लेखक ने रूस से आए उन लोगों के बारे में पूरी जानकारी एकत्र की, जो नाज़ियों की तरफ से लड़े थे। वे काफी हद तक निकले, जाने-माने व्लासोवाइट्स के अलावा कोसैक एसएस वाहिनी, एसएस गार्ड बटालियन भी थे। इसके अलावा, एक प्रभावशाली हिस्सा तथाकथित "हाइविस" थे, युद्ध के पूर्व सोवियत कैदी, जो स्वेच्छा से जर्मन इकाइयों के हिस्से के रूप में लड़े थे। अलग-अलग समय में उत्तरार्द्ध में, लगभग आधा मिलियन लोग थे। इस आधार पर, लेखक ने निष्कर्ष निकाला कि, Ukrainians पर द्वितीय विश्व युद्ध में नाजियों का समर्थन करने का आरोप लगाते हुए, रूस अपनी ऐतिहासिक समस्याओं को नहीं देखना चाहता था। इसके अलावा, रूस में वे अपने एसएस के बारे में सामान्य रूप से भूल गए हैं आधुनिक समाज के लिए, यह निश्चित रूप से इतिहास में एक काला पृष्ठ है। इसलिए, Ukrainians के लिए यह अधिक कठिन है, उनकी आलोचना करना आसान है और उनके लिए पिछले इतिहास की सभी परिस्थितियों को समझाना अधिक कठिन है। इसके अलावा, स्टालिन के तहत सोवियत शासन की सभी कठोरता और नाजी जर्मनी के साथ सामान्य विशेषताओं की उपस्थिति के साथ, उनके पास एक महत्वपूर्ण अंतर है। फिर भी, यूएसएसआर में एक जातीयता की श्रेष्ठता और अवांछनीय जातीय समूहों के विनाश की कोई वैचारिक अवधारणा नहीं थी। जबकि सोवियत संघ मूल रूप से अंतरराष्ट्रीय रहा और दमन के दौरान, इसका संबंध "पीड़ितों और जल्लादों" से था। इसलिए, रूस और यूएसएसआर के लिए आधुनिक Ukrainians की सभी शत्रुता के लिए, एक कानून के साथ इतिहास से सोवियत पृष्ठ को मिटाना बहुत मुश्किल होगा। खासकर जब से राष्ट्रपति पोरोशेंको ने अप्रैल के अंत में इस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, उन्हें एक कठिन निर्णय का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन आज यूक्रेन के लिए सबसे बड़ी समस्या राजनीतिक हत्याओं की लहर है। भागने वाले राष्ट्रपति यानुकोविच टीम के पूर्व सदस्य मारे जा रहे हैं। हालांकि, सबसे बड़ी प्रतिध्वनि कीव बौद्धिक ओले बुज़िन की हत्या थी, जो नए यूक्रेनी अधिकारियों के प्रति अपने महत्वपूर्ण रवैये के लिए जाने जाते थे और रूस के लिए सहानुभूति रखते थे। इस हत्या के संबंध में बहुत सारे संस्करण थे। कुछ का मानना था कि वह अपने रूसी समर्थक विचारों के लिए मारा गया था और यह यूक्रेनी कट्टरपंथियों द्वारा किया गया था। दूसरों का मानना था कि, इसके विपरीत, वह रूसी समर्थक कट्टरपंथियों द्वारा मारा गया था, जो इस तरह यूक्रेन में स्थिति को अस्थिर करना चाहता था। जो भी हो, समाज में अस्थिरता, आक्रामकता की स्थिति प्रसिद्ध लोगों, विशेष रूप से पत्रकारों, लेखकों और प्रचारकों के लिए बेहद खतरनाक है। क्योंकि उनकी हत्या एक प्रतिध्वनि का कारण बनती है और राजनेताओं के विपरीत कोई भी उनकी रक्षा नहीं करता है। खतरनाक समय में एल्डरबेरी शिकार हो गया। सामान्य तौर पर, यूक्रेन और रूस के बीच टकराव, हालांकि यह "हॉट एक्ससेर्बेशन चरण" पारित कर चुका है, नई दिशाओं में जारी है। उनमें से एक ट्रांसनिस्ट्रिया का अपरिचित क्षेत्र था। वास्तव में, यह मोल्दोवा और यूक्रेन की सीमाओं पर एक समर्थक रूसी एन्क्लेव है। यहां, एक हज़ार नौ सौ नब्बे सेकंड की शुरुआत में मोल्दोवन-ट्रांसडाइनेस्ट्रियन संघर्ष के समय से, रूसी सैन्य बेस स्थित है। इसके अलावा, गज़प्रॉम मुफ्त गैस के साथ ट्रांसनिस्ट्रिया की आपूर्ति करता है, जो हालांकि, मोल्दोवा के ऋण के लेखांकन में जाता है। उत्तरार्द्ध इसे पहचानता है, लेकिन भुगतान नहीं करता है। खैर, और अंत में, मास्को ने सीधे ट्रांसनिस्ट्रिया को वित्तीय सहायता प्रदान की। रूस के साथ यूक्रेन के टकराव के बीच में, पहले क्रीमिया की वजह से, फिर डॉनबेस के कारण, कीव में कई लोगों को डर था कि मास्को ओडेसा के रूप में पूरे काले सागर तट पर कब्जा करना चाहता है। इस प्रकार, यह भूमि गलियारे के मुद्दे को क्रीमिया और आगे ट्रांसनिस्ट्रिया में हल कर सकता है। लेकिन रूसी अधिकारी अब तक नहीं गए थे, आशंकाएं व्यर्थ हो गईं, लेकिन ट्रांसनिस्ट्रिया ने खुद को एक मुश्किल स्थिति में पाया। स्वाभाविक रूप से, यूक्रेनी अधिकारियों को अपनी पश्चिमी सीमाओं के पास रूसी एन्क्लेव पर संदेह है। पश्चिमी दिशा से हड़ताल का डर होने पर उन्होंने सीमा को मजबूत करने के उपाय किए। लेकिन ट्रांसनिस्ट्रिया के लिए अधिक गंभीर परिणाम इसकी वास्तविक नाकाबंदी थे। पिछले बीस वर्षों के लिए, ट्रांसनिस्ट्रिया यूक्रेन के साथ अच्छे संबंधों और निर्यात-आयात संचालन के लिए मोल्दोवन दस्तावेजों के उपयोग के माध्यम से जीवित है। अब कीव मोल्दोवन रीति-रिवाजों को शुरू करने का मुद्दा उठा रहा है, और यूक्रेनियन ने भी विनिर्मित वस्तुओं के आयात को ट्रांसनिस्ट्रिया तक सीमित कर दिया है। मोल्दोवा, बदले में, ट्रांसनिस्ट्रिया के उद्यमों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करता है, जो सीमा शुल्क और करों के भुगतान के संबंध में मोल्दोवा में पंजीकृत हैं। इसके अलावा, सैन्य उम्र के रूसी नागरिकों को यूक्रेन के क्षेत्र में प्रवेश से वंचित किया जाता है, और ट्रांसनिस्ट्रिया में दो सौ की कुल आबादी के हजार में से हजारों सात सौ पचास हैं। यदि हम याद करते हैं कि डोनेट्स्क में विद्रोहियों की सुरक्षा सेवा के आयोजकों में से एक ट्रांसनिस्टीरियन जनरल एंथुफीव था, तो कीव की चिंताओं को काफी समझा जा सकता है। ट्रांसनिस्ट्रिया के लिए कठिनाई इस तथ्य के कारण पैदा हुई कि रूस ने इस वर्ष एक सौ मिलियन डॉलर आवंटित करने से इनकार कर दिया। नतीजतन, ट्रांसनिस्ट्रिया एक तीव्र कमी का सामना कर रहा था। गैर-मान्यता प्राप्त गणराज्य में आर्थिक स्थिति तेजी से बिगड़ गई है, आबादी का असंतोष बढ़ने लगा है। जाहिर है, यूक्रेन की शत्रुता के साथ, ट्रांसनिस्ट्रिया की स्थिति अनिवार्य रूप से महत्वपूर्ण हो जाती है। यह कहना मुश्किल है कि कब तक गैर-मान्यता प्राप्त गणतंत्र नाकाबंदी की स्थितियों में बाहर रहने में सक्षम होगा। लेकिन इसके साथ ही, मोल्दोवा में काउंटरप्ले के संचालन के लिए रूस की अपनी संभावनाएं हैं। गागुज़ स्वायत्तता के प्रमुख के लिए चुनावों में, समर्थक रूसी राजनीतिज्ञ इरीना व्लाच ने जीत हासिल की। दो हज़ार चौदह में हुए चुनावों में, समर्थक रूसी सेनाओं ने अच्छी तरह से गठबंधन किया हो सकता है, अगर चुनाव की पूर्व संध्या पर लोकप्रिय राजनेता रेनाटो उसैटी को समाप्त नहीं किया गया था। और, अंत में, मोल्दोवा में सबसे गंभीर बैंकिंग घोटाला, जहां एक्सएनयूएमएक्स बिलियन डॉलर गायब हो गया, मदद नहीं कर सका, लेकिन सत्ता में पार्टियों के समर्थक पश्चिमी गठबंधन की लोकप्रियता को प्रभावित किया। यह एक विरोधाभास है, लेकिन मॉस्को के लिए, सत्ता के अपने केंद्रीकरण के साथ, उदार प्रणाली उन देशों में अधिक लाभदायक हो जाती है, जहां रूस रुचि रखता है। तब मास्को के पास रूसी समर्थक नागरिकों की क्षमता का उपयोग करने का अवसर होगा, और वास्तव में मोल्दोवा जैसे देशों के घरेलू राजनीतिक क्षेत्र पर अपने खेल का संचालन करने का मौका होगा। किसी भी मामले में, हम लंबे समय तक रूस और यूक्रेन के बीच बड़े पैमाने पर टकराव को देखेंगे। लेकिन यह पहले से ही स्पष्ट है कि, सबसे अधिक संभावना है, कोई सैन्य संघर्ष नहीं होगा, लेकिन राज्य संरचना और विकास के परिणामों के मॉडल के बीच एक प्रतियोगिता होगी। यहाँ दांव यूक्रेन और पूरे सोवियत संघ के बाद के अंतरिक्ष के लिए बेहद ऊँचे हैं। - लेखकः - मूल स्रोतः
लखीमपुर खीरी। फूलबेहड़ थाना क्षेत्र में रोली शारदानगर पुल के पास नदी में डूबी कार के चालक का शव शनिवार को खीरी थाना क्षेत्र के अमृता गंज के पास से बरामद हो गया है। पुलिस ने शव को नदी से बाहर निकलवाया और उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। कार चालक के साथ डूबे बाकी लोगों के शव उसी दिन घटना स्थल से बरामद हो गए थे। फूलबेहड़ थाना क्षेत्र के गांव रमुआपुर सिकटिया निवासी अजय गुप्ता अपनी भतीजी का तिलक लेकर धौरहरा के गांव शाहपुर गए थे। गुरुवार की रात करीब डेढ़ बजे तिलक चढ़ाकर वह अपने बेटे प्रियांशु, बहनोई दीपक, प्रधान के भाई ललित वर्मा, चचेरे भतीजे संगम, तरुण व सुमित यादव के साथ वापस आ रहे थे। कार सुमित यादव चला रहा था। फूलबेहड़ थाना क्षेत्र के रोलीपुर शारदानगर की रेलिंग से कार टकरा गई। झटके में कार की डिग्गी खुल गई और पीछे बैठे चचेरे भतीजे संगम व तरुण उछलकर दूर जा गिरे। कार में बैठे पांचों लोग कार समेत शारदा नदी में डूब गए। जानकारी पाकर पुलिस जब मौके पर पहुंची और कार को बाहर निकलवाया तो अजय गुप्ता, प्रियांशु, ललित वर्मा और दीपक की लाशें पुलिस को कार से बरामद हो गई। जबकि चालक सुमित यादव लापता हो गया था। उसकी तलाश में नदी में गोताखोर लगाए गए थे। गोताखोर उसकी तलाश में जुटे हुए थे। शनिवार की दोपहर उसका शव घटनास्थल से करीब 25 किलोमीटर दूर खीरी थाना क्षेत्र के अमृतागंज के पास शारदा नदी से बरामद हुआ। शव देखे जाने की जानकारी ग्रामीणों ने पुलिस को दी। सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंच गई और ग्रामीणों की मदद से शव को बाहर निकलवाया। पुलिस ने चालक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
लखीमपुर खीरी। फूलबेहड़ थाना क्षेत्र में रोली शारदानगर पुल के पास नदी में डूबी कार के चालक का शव शनिवार को खीरी थाना क्षेत्र के अमृता गंज के पास से बरामद हो गया है। पुलिस ने शव को नदी से बाहर निकलवाया और उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। कार चालक के साथ डूबे बाकी लोगों के शव उसी दिन घटना स्थल से बरामद हो गए थे। फूलबेहड़ थाना क्षेत्र के गांव रमुआपुर सिकटिया निवासी अजय गुप्ता अपनी भतीजी का तिलक लेकर धौरहरा के गांव शाहपुर गए थे। गुरुवार की रात करीब डेढ़ बजे तिलक चढ़ाकर वह अपने बेटे प्रियांशु, बहनोई दीपक, प्रधान के भाई ललित वर्मा, चचेरे भतीजे संगम, तरुण व सुमित यादव के साथ वापस आ रहे थे। कार सुमित यादव चला रहा था। फूलबेहड़ थाना क्षेत्र के रोलीपुर शारदानगर की रेलिंग से कार टकरा गई। झटके में कार की डिग्गी खुल गई और पीछे बैठे चचेरे भतीजे संगम व तरुण उछलकर दूर जा गिरे। कार में बैठे पांचों लोग कार समेत शारदा नदी में डूब गए। जानकारी पाकर पुलिस जब मौके पर पहुंची और कार को बाहर निकलवाया तो अजय गुप्ता, प्रियांशु, ललित वर्मा और दीपक की लाशें पुलिस को कार से बरामद हो गई। जबकि चालक सुमित यादव लापता हो गया था। उसकी तलाश में नदी में गोताखोर लगाए गए थे। गोताखोर उसकी तलाश में जुटे हुए थे। शनिवार की दोपहर उसका शव घटनास्थल से करीब पच्चीस किलोग्राममीटर दूर खीरी थाना क्षेत्र के अमृतागंज के पास शारदा नदी से बरामद हुआ। शव देखे जाने की जानकारी ग्रामीणों ने पुलिस को दी। सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंच गई और ग्रामीणों की मदद से शव को बाहर निकलवाया। पुलिस ने चालक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
सभी जीवन समान है सारे मनुष्यों में जीवन एक समान है। समानता की बात कैसे आ गई । जीवन की जीवन को समझने की विधि में, प्रमाणित करने की विधि में अस्तित्व को समझने की विधि में सह-अस्तित्व को प्रमाणित करने की विधि में यह आया कि सभी जीवन समान है। समझने की व्यवस्था शरीर में कहीं भी हाथ-पैर, कान-नाक, चक्षु, मेधस, हृदय कहीं भी नहीं है । यह व्यवस्था जीवन में ही है। जीवन ही जीवन को और अस्तित्व को समझने वाली वस्तु है और दूसरा कोई समझेगा नहीं । इस ढंग से हम इस निष्कर्ष पर आते हैं मनुष्य समझदारी व्यक्त करने के लिए (प्रमाणित करने के लिए) शरीर और जीवन के संयुक्त रूप में होना जरूरी है । यह केवल शरीर या केवल जीवन रहने पर नहीं होगा । प्रमाणित करने का केन्द्र बिन्दु हुआ व्यवस्था में जीना और समग्र व्यवस्था में भागीदारी करना । यही समझदारी की सार्थकता है । हम तब व्यवस्था में जीना ही चाहते हैं ये प्रक्रिया जीवन सहज ही है। ये कोई लादने वाली चीज नहीं है । अस्तित्व को समझने के क्रम में अस्तित्व स्वंय सह-अस्तित्व है क्योंकि सत्ता (व्यापक ) में सम्पृक्त ( डूबी, भीगी, घिरी) प्रकृति ही संपूर्ण अस्तित्व है । प्रकृति अपने में एक-एक गिनने योग्य वस्तु है । गिनने वाला मनुष्य है । ये गिनने योग्य वस्तु प्रकृति में जड़ प्रकृति और चैतन्य प्रकृति सब हैं । छोटा सा सूत्र है - समझदारी से सुखी, नासमझी से दुखी । अभी तक सारा संसार जूझता रहा । पहले जूझता रहा तप करो, योग करो, सन्यासी हो जाओ तो सुखी हो जाओगे । लोग इसका भी प्रयोग किए कुछ प्रमाण मिला नहीं, परंपरा बनी नहीं । दूसरी बार ये जूझे कि खूब वस्तु को इकट्ठा कर लो सुखी हो जाओगे । उससे भी सुखी हुए नहीं । दोनों बातों से कोई सुखी नहीं हुआ । तब सोचने की बात है इसी क्रम में निकल कर आया कि समझदारी से सुखी । समझदारी में सही होता है । सही में सभी एक होते हैं गलती में अनेक । हमारी गलती से आप सम्मत / सहमत हो जाएं आपकी गलती से हम सम्मत / सहमत हो जाए ऐसा होता नहीं है । जो गलती है तो गलती है आपके लिए भी हमारे लिए भी । सही में हम एक ही हैं ये बात हमको समझ आ गयी। समझदारी से ही हमारा कल्याण प्रशस्त होता है । समझदारी से ही सुखी, समृद्ध होते हैं, समझदारी में वर्तमान में व्यवस्था के रूप में जीते हैं। समझदारी से ही सहअस्तित्व को प्रमाणित करते हैं । सुख के चार चरण है :समृद्धि, अभय, सह-अस्तित्व । ये चार चीज आता है तो हम सुखी हो जाते हैं । जब तक ये चारों चीज नहीं आती है तब तक हम प्रयत्न करते रहते हैं। इस प्रयत्न के क्रम में ही हम तमाम जप-तप, पूजा-पाठ, योग-यज्ञ कर डाले हैं। बहुत सारी चीजें भी इकट्ठा किया । किन्तु सब लोग खुश नहीं हुए । सभी सुखी होने के लिए समझदार है। समझदारी सबमें पहुंचाया जा सकता है। समझदारी के लिए पहला चरण है अस्तित्व को समझना । अस्तित्व चार अवस्था में है । पहला पदार्थावस्था जिसमें मिट्टी, पाषाण, मणि, धातु आदि हैं ये सब अपने अपने आचरण में प्रमाणित हैं ही । दूसरी प्राणावस्था जिसमें सभी पेड़पौधे, वनस्पतियाँ, औषधियां हैं ये सब भी अपने आचरणों में स्वयं प्रमाणित है । तीसरा जीवावस्था जिसमें मनुष्य को छोड़कर सभी जीव,
सभी जीवन समान है सारे मनुष्यों में जीवन एक समान है। समानता की बात कैसे आ गई । जीवन की जीवन को समझने की विधि में, प्रमाणित करने की विधि में अस्तित्व को समझने की विधि में सह-अस्तित्व को प्रमाणित करने की विधि में यह आया कि सभी जीवन समान है। समझने की व्यवस्था शरीर में कहीं भी हाथ-पैर, कान-नाक, चक्षु, मेधस, हृदय कहीं भी नहीं है । यह व्यवस्था जीवन में ही है। जीवन ही जीवन को और अस्तित्व को समझने वाली वस्तु है और दूसरा कोई समझेगा नहीं । इस ढंग से हम इस निष्कर्ष पर आते हैं मनुष्य समझदारी व्यक्त करने के लिए शरीर और जीवन के संयुक्त रूप में होना जरूरी है । यह केवल शरीर या केवल जीवन रहने पर नहीं होगा । प्रमाणित करने का केन्द्र बिन्दु हुआ व्यवस्था में जीना और समग्र व्यवस्था में भागीदारी करना । यही समझदारी की सार्थकता है । हम तब व्यवस्था में जीना ही चाहते हैं ये प्रक्रिया जीवन सहज ही है। ये कोई लादने वाली चीज नहीं है । अस्तित्व को समझने के क्रम में अस्तित्व स्वंय सह-अस्तित्व है क्योंकि सत्ता में सम्पृक्त प्रकृति ही संपूर्ण अस्तित्व है । प्रकृति अपने में एक-एक गिनने योग्य वस्तु है । गिनने वाला मनुष्य है । ये गिनने योग्य वस्तु प्रकृति में जड़ प्रकृति और चैतन्य प्रकृति सब हैं । छोटा सा सूत्र है - समझदारी से सुखी, नासमझी से दुखी । अभी तक सारा संसार जूझता रहा । पहले जूझता रहा तप करो, योग करो, सन्यासी हो जाओ तो सुखी हो जाओगे । लोग इसका भी प्रयोग किए कुछ प्रमाण मिला नहीं, परंपरा बनी नहीं । दूसरी बार ये जूझे कि खूब वस्तु को इकट्ठा कर लो सुखी हो जाओगे । उससे भी सुखी हुए नहीं । दोनों बातों से कोई सुखी नहीं हुआ । तब सोचने की बात है इसी क्रम में निकल कर आया कि समझदारी से सुखी । समझदारी में सही होता है । सही में सभी एक होते हैं गलती में अनेक । हमारी गलती से आप सम्मत / सहमत हो जाएं आपकी गलती से हम सम्मत / सहमत हो जाए ऐसा होता नहीं है । जो गलती है तो गलती है आपके लिए भी हमारे लिए भी । सही में हम एक ही हैं ये बात हमको समझ आ गयी। समझदारी से ही हमारा कल्याण प्रशस्त होता है । समझदारी से ही सुखी, समृद्ध होते हैं, समझदारी में वर्तमान में व्यवस्था के रूप में जीते हैं। समझदारी से ही सहअस्तित्व को प्रमाणित करते हैं । सुख के चार चरण है :समृद्धि, अभय, सह-अस्तित्व । ये चार चीज आता है तो हम सुखी हो जाते हैं । जब तक ये चारों चीज नहीं आती है तब तक हम प्रयत्न करते रहते हैं। इस प्रयत्न के क्रम में ही हम तमाम जप-तप, पूजा-पाठ, योग-यज्ञ कर डाले हैं। बहुत सारी चीजें भी इकट्ठा किया । किन्तु सब लोग खुश नहीं हुए । सभी सुखी होने के लिए समझदार है। समझदारी सबमें पहुंचाया जा सकता है। समझदारी के लिए पहला चरण है अस्तित्व को समझना । अस्तित्व चार अवस्था में है । पहला पदार्थावस्था जिसमें मिट्टी, पाषाण, मणि, धातु आदि हैं ये सब अपने अपने आचरण में प्रमाणित हैं ही । दूसरी प्राणावस्था जिसमें सभी पेड़पौधे, वनस्पतियाँ, औषधियां हैं ये सब भी अपने आचरणों में स्वयं प्रमाणित है । तीसरा जीवावस्था जिसमें मनुष्य को छोड़कर सभी जीव,
हर जयवा अगर आप एक मुटठी भर बारीक मिटटी कुछ लहरा मे फेत्रद जार उसके निलम्जित क्णा की गति पर गार कर तो आप देखेंगे कि व एक अत्ताकार कक्ष में घूम रह होते हैं । तरग द्राणी की तरी के नीचे प्रत्यक क्ण की गति पीछे वा होती है तथा तरग-भृग पर आगे की आर जोर जैसे-जैसे वह वण जगली द्रोणी म आने लगता है, तो वह नीचे आर पीछे की आर चलना जाता है । (चिन ४९ ) । तरग शृग को चाटी के आगे निकल जान के क्षण समस्त ऊची लहर म फैरे हुए तमाम मिटटी या जल के कण एक साथ आगे बाते है । तरग द्राणी मे आन पर वे फिर पीछे लौटते है, किन तर जाकृति के आगे बढन की दिशा म बहुत थाडी सी शुद्ध प्रगति हो जाती है । वाराओं के अभाव में, वस्तुजा के वहाव का कारण समुद्र की यही उछाल है किन्तु यह इतनी धीमी हाती ह कि ना चालन में इसका कोई व्यावहारिक महत्त्व नही है । जब तक लहरा की पीठ पर हवाजा के थपेडे लगते रहत हूँ तन तक व अनियमित और अधिक ढाडू बनी रहती है । हवा के वक्त्रे जथवा उसके घवण का सिंचाव महसूस करती हुई हरा को सामूहिक रूप म अंग्रेजी मे 'सी' कहत ह - जैसे कि 'हाट-मी' (ऊची तरगे) गसी' (नीची तरगे), "स्मूथ मी (शात सागर) जथवा "रप सो" (विक्षुब्ध सागर ) । किसी भी एक समय पर, मागर पर जकेले स्थिर पवन का प्रभाव न हार प्राय विभिन दिवाजा जार विभिन्न गति की हवाओं का प्रभाव पड़ता है। परिणामस्वरूप नाम सी' ("जाडा सागर ') वन जाता है जथवा ऐसी हर बनन लगती है जा परम्पर घु मिल जाती अथवा एक दूसरे का विरोध करती हु समुद्र की मतह का एक जयवस्थित स्वरूप प्रस्तुत करती है । जब हवा गात हो जाती है अथवा लहरे उसके प्रभाव क्षेत्र से बाहर निक्ल जाती है तो उनकी ऊर्जा कम हो जाती है तथा आकृतिया बदल जाती है । उनकी ऊचाइ घट जाती है तथा तरंग शृग वहा जाते हैं । जाडे-सागर समाप्त हो जाते है और तरग भृग पाश्र्व मे फल फैल्वर जाधे मील या उसस ज्यादा चाडे हो जाते है । तर समुद्र 'महा नरग ( "Swell ) म बंदर जाता है । महा-तरगे प्राय एक जत्यत यवस्थापूर्ण ढंग से चन्नी है जो कि जल म लम्बी लम्बी समातर पक्तिया में बढ़ती जाती है। जब उनके माग म आती है अथवा वे ऐम जल मे पहुच जाती है जा एक तरग शृग से दूसर तर शृग तक की दूरी से आधे से भी ज्या या होता है त उनकी जाति १ कथा का व्याम रहर की ऊंचाई के बराबर होता है ।
हर जयवा अगर आप एक मुटठी भर बारीक मिटटी कुछ लहरा मे फेत्रद जार उसके निलम्जित क्णा की गति पर गार कर तो आप देखेंगे कि व एक अत्ताकार कक्ष में घूम रह होते हैं । तरग द्राणी की तरी के नीचे प्रत्यक क्ण की गति पीछे वा होती है तथा तरग-भृग पर आगे की आर जोर जैसे-जैसे वह वण जगली द्रोणी म आने लगता है, तो वह नीचे आर पीछे की आर चलना जाता है । । तरग शृग को चाटी के आगे निकल जान के क्षण समस्त ऊची लहर म फैरे हुए तमाम मिटटी या जल के कण एक साथ आगे बाते है । तरग द्राणी मे आन पर वे फिर पीछे लौटते है, किन तर जाकृति के आगे बढन की दिशा म बहुत थाडी सी शुद्ध प्रगति हो जाती है । वाराओं के अभाव में, वस्तुजा के वहाव का कारण समुद्र की यही उछाल है किन्तु यह इतनी धीमी हाती ह कि ना चालन में इसका कोई व्यावहारिक महत्त्व नही है । जब तक लहरा की पीठ पर हवाजा के थपेडे लगते रहत हूँ तन तक व अनियमित और अधिक ढाडू बनी रहती है । हवा के वक्त्रे जथवा उसके घवण का सिंचाव महसूस करती हुई हरा को सामूहिक रूप म अंग्रेजी मे 'सी' कहत ह - जैसे कि 'हाट-मी' गसी' , "स्मूथ मी जथवा "रप सो" । किसी भी एक समय पर, मागर पर जकेले स्थिर पवन का प्रभाव न हार प्राय विभिन दिवाजा जार विभिन्न गति की हवाओं का प्रभाव पड़ता है। परिणामस्वरूप नाम सी' वन जाता है जथवा ऐसी हर बनन लगती है जा परम्पर घु मिल जाती अथवा एक दूसरे का विरोध करती हु समुद्र की मतह का एक जयवस्थित स्वरूप प्रस्तुत करती है । जब हवा गात हो जाती है अथवा लहरे उसके प्रभाव क्षेत्र से बाहर निक्ल जाती है तो उनकी ऊर्जा कम हो जाती है तथा आकृतिया बदल जाती है । उनकी ऊचाइ घट जाती है तथा तरंग शृग वहा जाते हैं । जाडे-सागर समाप्त हो जाते है और तरग भृग पाश्र्व मे फल फैल्वर जाधे मील या उसस ज्यादा चाडे हो जाते है । तर समुद्र 'महा नरग म बंदर जाता है । महा-तरगे प्राय एक जत्यत यवस्थापूर्ण ढंग से चन्नी है जो कि जल म लम्बी लम्बी समातर पक्तिया में बढ़ती जाती है। जब उनके माग म आती है अथवा वे ऐम जल मे पहुच जाती है जा एक तरग शृग से दूसर तर शृग तक की दूरी से आधे से भी ज्या या होता है त उनकी जाति एक कथा का व्याम रहर की ऊंचाई के बराबर होता है ।
चूंकि घरेलू बाजार में इक्वेट ग्रुप द्वारा पीयूसी की बिक्री (भारत को निर्यात मात्रा के 5% से कम) नगण्य है, प्राधिकारी ने सीमा शुल्क टैरिफ अधिनियम के तहत प्रदान की गई अन्य अनुमेय पद्धति के आधार पर सामान्य मूल्य निर्धारित करने के लिए आगे आएं हैं। तदनुसार, दोनों उत्पादकों से अनुरोध किया गया है कि वे सीमा शुल्क टैरिफ अधिनियम की धारा 9क (1) के स्पष्टीकरण (ग) की क्लॉज (ii) (क) के अनुसार सामान्य मूल्य का निर्धारण करने के लिए एक उपयुक्त अन्य देश के चयन के लिए अन्य देशों को अपनी निर्यात बिक्रियों क सौदा-वार ब्यौरा प्रदान करें। अन्य देशों को प्रतिवादी उत्पादकों द्वारा प्रदान किए गए निर्यातों से सौदा-वार आकड़ों की एक उपयुक्त अन्य देश का चयन करने के लिए जांच की गई है। इस संबंध में कोई विशिष्ट दिशानिर्देश न होने के कारण या तो डब्ल्यू टी ओ पाटनरोधी करार में या सीमा शुल्क टैरिफ अधिनियम में या पाटनरोधी नियमावली में, उस देश में उत्पाद विकास की स्थिति और आयातों की मात्रा को उपयुक्त अन्य देश के चयन के लिए मार्गदर्शी मानक के रूप में लिया गया है। यह नोट किया गया है कि इक्वेत ग्रुप द्वारा निर्यातों की अधिकतम मात्रा चीन जन. गण. को है। प्राधिकारी चीन जन. गण. को एक उपयुक्त अन्य देश के रूप में नहीं मानते क्योंकि (i) चीन बाजार अर्थव्यवस्था स्थितियों के अंतर्गत प्रचालन नहीं करता है और (ii) चीन जन गण के लिए निर्यात की मात्रा भारत को निर्यात की मात्रा से काफी अधिक है। प्राधिकारी यह नोट करते हैं कि पाकिस्तान को निर्यात की मात्रा जांच की अवधि के दौरान भारत को निर्यात की मात्रा की तुलना में सब से नजदीक रेंज में है। अतः पाकिस्तान को उपयुक्त अन्य देश के रूप में चुना गया है और इक्वेत ग्रुप के पाकिस्तान के निर्यातों को इक्वेत ग्रुप के लिए सामान्य मूल्य का निर्धारण करने के लिए चिार में लिया गया है। सामान्य मूल्य का निर्धारण करने के लिए, प्राधिकारी ने सामान्य व्यापार जांच प्रक्रिया आयोजित की है ताकि संबद्ध वस्तुओं के उत्पादन की लागत के संदर्भ में पाकिस्तान को लाभ अर्जक निर्यात बिक्रियों के सौदों का निर्धारण किया जा सके। प्राधिकारी ने एमई ग्लोबल की बिक्री कीमतों पर विचार किया है और कारखाना बाह्य व्ययों, एस जी ए व्ययों तथा अन्य मदों के संबंध में उपयुक्त समायोजन किया है, जिससे कि उत्पादक के स्तर पर कारखाना बाह्य कीमतें निकाली जा सकें। व्यापार जांच की सामान्य प्रक्रिया के दौरान, प्राधिकारी नोट करते हैं कि पाकिस्तान को निर्यातों के 80 प्रतिशत से अधिक सौदे लाभकारी हैं। अतः प्राधिकारी ने सामान्य मूल्य के निर्धारण के लिए जांच की अवधि के दौरान पाकिस्तान को किए गए सभी निर्यात सौदों पर विचार किया है। इक्वेत ग्रुप ने शिपिंग लागत, कमीशन, क्रेडिट लागत, बैंक प्रभारों और ऋण बीमा के संबंध में समायोजनों का दावा किया है। प्राधिकारी ने इक्वेट ग्रुप द्वारा दावा किए गए सभी समायोजनों को स्वीकार किया है। तदनुसार इक्वेत ग्रुप के लिए कारखाना बाह्य स्तर पर सामान्य मूल्य निर्धारित किया गया है और उसे नीचे पाटन मार्जिन तालिका में दर्शाया गया है। निर्यात कीमत 65. प्राधिकारी यह नोट करते हैं कि इक्वेत ग्रुप ने निम्नलिखित व्यापार माध्यमों के ज़रिए कुवैत के मूल के विचाराधीन उत्पाद की कुल मात्रा का जांच की अवधि के दौरान भारत को निर्यात किया है : व्यापार माध्यम इक्वेत/टी के ओ सी [→ एमई ग्लोबल → भारत के ग्राहक इक्वेत/ टी के ओ सी । एमई ग्लोबल मित्सुबिसी कॉर्पोरेशन [→ भारत के ग्राहक इक्वेत/ टी के ओ सी एमई ग्लोबल ग्लोब ट्रेड वेल → भारत के ग्राहक इक्वेत/टी के ओ सी एमई ग्लोबल सी पी एफ पेकेजिंग → भारत के ग्राहक इक्वेत/ टी के ओ सी । एमई ग्लोबल । समिका ग्लोब । भारत के ग्राहक कुल निर्यात के अंश का % व्यापार माध्यम की स्थिति मी. ट. प्राधिकारी यह नोट करते हैं कि भारत को कुल निर्यातों के प्रतिशत से अधिक निर्यात करने में शामिल कंपनियों ने संगत सूचना प्रदान कर दी है और प्राधिकारी के समक्ष सहयोगी हैं। इक्वेत ग्रुप द्वारा प्रदान की गई सूचना पर निर्यात कीमत का निर्धारण करने के लिए प्राधिकारी द्वारा विचार किया गया है । इक्वेत ग्रुप ने शिपिंग लागत, ऋण लागत और बैंक प्रभारों के संबंध में समायोजनों का दावा किया है। इसके अलावा, प्राधिकारी ने एस जी ए व्ययों एमई ग्लोबल के लाभ (यदि कोई हैं) के लिए भी समायोजन किए हैं ताकि उत्पादक के स्तर पर कारखाना बाह्य निर्यात कीमत निकाली जा सके। कुवैत से सभी अन्य उत्पादक कुवैत में सभी अन्य असहयोगी उत्पादकों के लिए, सामान्य मूल्य, निर्यात कीमत और पाटन मार्जिन का निर्धारण सहयोगी उत्पादक के डेटा को शामिल करते हुए उपलब्ध तथ्यों के आधार पर किया गया है और उसे नीचे दी गई पाटन मार्जिन तालिका में दर्शाया गया है। भारत को किए गए निर्यातों के संबंध में, जिनके के लिए प्राधिकारी के समक्ष पूरी निर्यात श्रृंखला ने भाग नहीं लिया है, प्राधिकारी ने उपलब्ध तथ्यों के आधार पर निर्यात कीमत निर्धारित की है। तदनुसार, इक्वेट ग्रुप द्वारा भारत को किए गए समग्र निर्यातों के लिए भारित औसत निर्यात कीमत निर्धारित की गई है और इसे नीचे दी गई पाटन मार्जिन तालिका में दर्शाया गया है। सउदी अरब अरबियन पैट्रोकेमिकल कंपनी (पैट्रोकेम्या), ईस्टर्न पैट्रोकेमिकल कंपनी (एस एच आर जुबेल यूनाइटेड पैट्रोकेमिकल कंपनी (यूनाइटेड), सउदी कयान पैट्रोकेमिकल कंपनी (सउदी कयान), सउदी यान्बू पैट्रोकेमिकल कंपनी (यानपेट) और यान्बू नेशनल पैट्रोकेमिकल कंपनी (यानसब) [ सम्मिलित रूप से "सेबिक ग्रुप उत्पादकों" के रूप में उल्लिखित किया गया है। के साथ साथ संगत व्यापारी, सउदी अरब इंडस्ट्रीज कार्पोरेशन (सेबिक) और सेबिक एशिया पैरसिफिक प्रा. लिमि. (साप्पल) सामान्य मूल्य 69. अरबियन पैट्रोकेमिकल कंपनी (पैट्रोकेम्या), ईस्टर्न पैट्रोकेमिकल कंपनी (सार्कयू), जुबेल यूनाइटेड पैट्रोकेमिकल कंपनी (यूनाइटेड) सउदी कयान पैट्रोकेमिकल कंपनी (सउदी कयान), सदी यान्बू पैट्रोकेमिकल कंपनी (यानपेट) तथा यान्बू नेशनल पैट्रोकेमिकल कंपनी (यानसब) सेविक ग्रुप के अंदर सउदी अरब में विचाराधीन उत्पाद की संगत उत्पादक कंपनियां हैं। प्राधिकारी द्वारा यह नोट किया गया है कि जांच की अवधि के दौरान, केवल सार्क्यू और यानपेट में सउदी अरब के घरेलू बाजार में विचाराधीन उत्पाद की बिक्रियां की हैं। घरेलू बाजार में सभी बिक्रियां संगत व्यापारी, सउदी बेसिक इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन (सेबिक) को की गई थी, जिसने असंबद्ध घरेलू ग्राहकों को संबद्ध वस्तुओं की बिक्री की है। अतः प्राधिकारी सार्क्यू और यानपेट के लिए जांच की अवधि के दौरान विचाराधीन उत्पाद की उनकी घरेलू बिक्रियों के आधार पर सामान्य मूल्य का निर्धारण करने की कार्रवाई की है। प्राधिकारी यह नोट करते हैं कि सार्क्यू और यानपेट की घरेलू बिक्रियां भारत को निर्यातों की तुलना में पर्याप्त मात्रा में हैं। प्राधिकारी ने सार्क्यू और यानपेट के लिए संबद्ध वस्तुओं की बिक्रियों की लागत के संदर्भ में लाभ अर्जक घरेलू बिक्री सौदों के लिए सामान्य व्यापार जांच प्रक्रिया आयोजित की है। प्राधिकारी ने यह जांच की है कि क्या लाभ अर्जक सौंदे 80 प्रतिशत से अधिक हैं या नहीं। वर्तमान मामले में, यह नोट किया जाता है कि यानपेट की घरेलू बिक्रियों का 80 प्रतिशत से अधिक लाभप्रद है और इसीलिए यानपेट की सभी घरेलू बिक्रियां सामान्य मूल्य का निर्धारण करने के लिए विचार में ली गई हैं। सार्क्यू के मामले में, कोई लाभप्रद बिक्रियां नहीं हैं। अतः सार्क्यू के लिए अपनी घरेलू बिक्रियों के आधार पर सामान्य मूल्य का निर्धारण करना संभव नहीं है । सीमा शुल्क अधिनियम 1975 की धारा 9क (1) के स्पष्टीकरण (ग) के तहत प्रावधान इस प्रकार है : किसी वस्तु के संबंध में "सामान्य मूल्य" से तात्पर्य है - (iii) व्यापार की सामान्य प्रक्रिया के समान वस्तु की तुलनीय कीमत जब वह उप नियम (6) के तहत बनाए गए नियमों के अनुसार यथानिर्धारित निर्यातक देश या क्षेत्र में खपत के लिए नियत हो, अथवा (iv) जब निर्यातक देश या क्षेत्र के घरेलू बाजार में व्यापार की सामान्य प्रक्रिया में समान वस्तु की बिक्री न हुई हो अथवा जब निर्यातक देश या क्षेत्र की बाजार विशेष की स्थिति अथवा उसके घरेलू बाजार में कम बिक्री मात्रा के कारण ऐसी बिक्री की उचित तुलना न हो सकती हो तो सामान्य मूल्य निम्नलिखित में से कोई एक होगा : (क) समान वस्तु की तुलनीय प्रतिनिधिक कीमत जब उसका निर्यात उप धारा (6) के अंतर्गत बनाए गए नियमों के अनुसार निर्यातक देश या क्षेत्र से या किसी उचित तीसरे देश से किया गया हो, अथवा परंतु यदि उक्त वस्तु का आयात उदगम वाले देश से भिन्न किसी देश से किया गया है और जहां उक्त वस्तु को निर्यात के देश से होकर केवल स्थानांतरण किया गया है अथवा ऐसी वस्तु का उत्पादन निर्यात के देश में नहीं होता है, अथवा निर्यात के देश में कोई तुलनीय कीमत नहीं है, वहां सामान्य मूल्य का निर्धारण उदगम वाले देश में उसकी कीमत के संदर्भ में किया जाएगा। चूंकि पैट्रोकेम्या, यूनाइटेड, सउदी कयान, यानसब द्वारा विचाराधीन उत्पाद की कोई घरेलू बिक्रियां नहीं हैं और सार्क्यू द्वारा कोई लाभप्रद घरेलू बिक्रियां नहीं हैं, प्राधिकारी ने सीमा शुल्क टैरिफ अधिनियम के अंतर्गत प्रदत्त किसी अन्य अनुमत प्रद्धति के आधार पर सामान्य मूल्य का निर्धारण करने की कार्रवाई की है। तदनुसार, इन पांच उत्पादकों को सीमाशुल्क टैरिफ अधिनियम की धारा 9क (1) के स्पष्टीकरण (ग) के क्लॉज (ii) (क) के तहत सामान्य मूल्य का निर्धारण करने के लिए उपयुक्त अन्य देश के चयन के लिए अन्य देशों को निर्यात बिक्रियों के सौदा-वार ब्यौरे प्रदान करने का अनुरोध किया गया था। इन पांच उत्पादकों द्वारा प्रदान किए गए, अन्य देशों के निर्यातों के सौदा-वार डेटा की एक उपयुक्त अन्य देश के चयन के लिए जांच की गई है। इस संबंध में किसी विशिष्ट दिशानिर्देश के अभाव में, या तो डब्ल्यू टी ओ पाटनरोधी करार में या सीमा शुल्क टैरिफ अधिनियम में या पाटनरोधी नियमावली में, उस देश के उत्पाद विकास की स्थिति और आयातों की मात्रा को उपयुक्त अन्य देश के चयन के लिए मार्गदर्शी मानक के रूप में शामिल किया गया है। प्राधिकारी ने उपयुक्त अन्य देश के निर्धारण के लिए सभी पांच उत्पादकों के लिए अन्य देशों को निर्यात पर विचार किया है। यह नोट किया गया है कि इन उत्पादकों द्वारा निर्यातों की सबसे अधिक मात्रा चीन जन गण के लिए है। प्राधिकारी चीन. गण. को एक उपयुक्त अन्य देश के रूप में नहीं मानते क्योंकि (i) चीन बाजार अर्थव्यवस्था स्थितियों के अंतर्गत प्रचालन नहीं करता और (ii) चीन जन. गण. को निर्यात की मात्रा भारत को निर्यात की मात्रा से काफी अधिक है। प्राधिकारी यह नोट करते हैं कि इन उत्पादकों को निर्यात मात्रा मिलाकर इंडोनेशिया को, सेबिक द्वारा प्रदान की गई सूचना के आधार पर, जांच की अवधि के दौरान भारत को निर्यात मात्रा की तुलना में नजदीकी रेंज में है। अतः इंडोनेशिया को उपयुक्त अन्य देश के रूप में चुना गया है और पैट्रोकेम्या, यूनाइटेड और सऊदी अरब द्वारा इंडोनेशिया को किए गए निर्यातों पर इन तीन उत्पादों के लिए सामान्य मूल्य के निर्धारण के लिए विचार किया गया है। यह नोट किया जाता है कि यानसब और सार्क्यू ने जांच की अवधि के दौरान इंडोनेशिया को निर्यात नहीं किया है। पैट्रोकेम्या, यूनाइटेड और सऊदी कयान के लिए सामान्य मूल्य का निर्धारण करने के लिए, प्राधिकारी ने सामान्य व्यापार जांच की प्रक्रिया आयोजित की है ताकि संबद्ध वस्तुओं की बिक्री की लागत के संदर्भ में इंडोनेशिया के लिए लाभ अर्जक निर्यात बिक्री सौदों का निर्धारण हो सके। यदि लाभ अर्जक सौदे 80 प्रतिशत से अधिक हैं, तो प्राधिकारी ने सामान्य मूल्य के निर्धारण के लिए इंडोनेशिया को सभी निर्यात सौदों पर विचार किया है और यदि जहां लाभकारी सौदे 80 प्रतिशत से कम हैं, वहां इंडोनेशिया को केवल लाभकारी निर्यात बिक्री सौदों को सामान्य मूल्य का निर्धारण करने के लिए विचार में लिया गया है। यह नोट किया जाता है कि यूनाइटेड के इंडोनेशिया को लाभ अर्जक सौदे 80 प्रतिशत से अधिक हैं, और पैट्रोकेम्या तथा सऊदी कयान के इंडोनेशिया को लाभ अर्जक सौदे 80 प्रतिशत से कम हैं। तदनुसार, प्राधिकारी ने यूनाइटेड के लिए इंडोनेशिया के सभी निर्यात् सौदों और सामान्य मूल्य का निर्धारण करने के लिए पैट्रोकेम्या और सऊदी कयान के लिए इंडोनेशिया के केवल लाभ अर्जक निर्यात सौदों पर विचार किया है। जहां तक अन्य दो उत्पादकों, यानसब और सार्क्यू का संबंध है, प्राधिकारी ने टर्की को उपयुक्त अन्य तीसरे देश के रूप में चुना है क्योंकि इन दोनों उत्पादकों ने जांच की अवधि के दौरान इंडोनेशिया को कोई निर्यात नहीं किया है और टर्की को निर्यात निर्यात मात्रा की तुलना में निकटतम सीमा में है। यह नोट किया गया है कि जांच की अवधि के दौरान भारत के लिए तुर्की में सार्क्यू और यानसब के लिए लाभ अर्जित करने वाले लेनदेन 80% से अधिक हैं। तद्नुसार, प्राधिकारी ने सार्क्यू और यानसब के लिए सामान्य मूल्य के निर्धारण हेतु तुर्की को सभी निर्यात लेनदेन पर विचार किया है। सभी उत्पादकों ने लाजिस्टिक्स व्ययों और ऋण लागत के संबंध में समायोजनों का दावा किया है। प्राधिकारी ने उत्पादकों द्वारा किए गए सभी समायोजनों को स्वीकार किया है। उपरोक्त उत्पादकों के लिए कारखाना बाह्य स्तर पर सामान्य मूल्य का तदनुसार निर्धारण किया गया है और इसे नीचे दी गई पाटन मार्जिन तालिका में दर्शाया गया है।
चूंकि घरेलू बाजार में इक्वेट ग्रुप द्वारा पीयूसी की बिक्री नगण्य है, प्राधिकारी ने सीमा शुल्क टैरिफ अधिनियम के तहत प्रदान की गई अन्य अनुमेय पद्धति के आधार पर सामान्य मूल्य निर्धारित करने के लिए आगे आएं हैं। तदनुसार, दोनों उत्पादकों से अनुरोध किया गया है कि वे सीमा शुल्क टैरिफ अधिनियम की धारा नौक के स्पष्टीकरण की क्लॉज के अनुसार सामान्य मूल्य का निर्धारण करने के लिए एक उपयुक्त अन्य देश के चयन के लिए अन्य देशों को अपनी निर्यात बिक्रियों क सौदा-वार ब्यौरा प्रदान करें। अन्य देशों को प्रतिवादी उत्पादकों द्वारा प्रदान किए गए निर्यातों से सौदा-वार आकड़ों की एक उपयुक्त अन्य देश का चयन करने के लिए जांच की गई है। इस संबंध में कोई विशिष्ट दिशानिर्देश न होने के कारण या तो डब्ल्यू टी ओ पाटनरोधी करार में या सीमा शुल्क टैरिफ अधिनियम में या पाटनरोधी नियमावली में, उस देश में उत्पाद विकास की स्थिति और आयातों की मात्रा को उपयुक्त अन्य देश के चयन के लिए मार्गदर्शी मानक के रूप में लिया गया है। यह नोट किया गया है कि इक्वेत ग्रुप द्वारा निर्यातों की अधिकतम मात्रा चीन जन. गण. को है। प्राधिकारी चीन जन. गण. को एक उपयुक्त अन्य देश के रूप में नहीं मानते क्योंकि चीन बाजार अर्थव्यवस्था स्थितियों के अंतर्गत प्रचालन नहीं करता है और चीन जन गण के लिए निर्यात की मात्रा भारत को निर्यात की मात्रा से काफी अधिक है। प्राधिकारी यह नोट करते हैं कि पाकिस्तान को निर्यात की मात्रा जांच की अवधि के दौरान भारत को निर्यात की मात्रा की तुलना में सब से नजदीक रेंज में है। अतः पाकिस्तान को उपयुक्त अन्य देश के रूप में चुना गया है और इक्वेत ग्रुप के पाकिस्तान के निर्यातों को इक्वेत ग्रुप के लिए सामान्य मूल्य का निर्धारण करने के लिए चिार में लिया गया है। सामान्य मूल्य का निर्धारण करने के लिए, प्राधिकारी ने सामान्य व्यापार जांच प्रक्रिया आयोजित की है ताकि संबद्ध वस्तुओं के उत्पादन की लागत के संदर्भ में पाकिस्तान को लाभ अर्जक निर्यात बिक्रियों के सौदों का निर्धारण किया जा सके। प्राधिकारी ने एमई ग्लोबल की बिक्री कीमतों पर विचार किया है और कारखाना बाह्य व्ययों, एस जी ए व्ययों तथा अन्य मदों के संबंध में उपयुक्त समायोजन किया है, जिससे कि उत्पादक के स्तर पर कारखाना बाह्य कीमतें निकाली जा सकें। व्यापार जांच की सामान्य प्रक्रिया के दौरान, प्राधिकारी नोट करते हैं कि पाकिस्तान को निर्यातों के अस्सी प्रतिशत से अधिक सौदे लाभकारी हैं। अतः प्राधिकारी ने सामान्य मूल्य के निर्धारण के लिए जांच की अवधि के दौरान पाकिस्तान को किए गए सभी निर्यात सौदों पर विचार किया है। इक्वेत ग्रुप ने शिपिंग लागत, कमीशन, क्रेडिट लागत, बैंक प्रभारों और ऋण बीमा के संबंध में समायोजनों का दावा किया है। प्राधिकारी ने इक्वेट ग्रुप द्वारा दावा किए गए सभी समायोजनों को स्वीकार किया है। तदनुसार इक्वेत ग्रुप के लिए कारखाना बाह्य स्तर पर सामान्य मूल्य निर्धारित किया गया है और उसे नीचे पाटन मार्जिन तालिका में दर्शाया गया है। निर्यात कीमत पैंसठ. प्राधिकारी यह नोट करते हैं कि इक्वेत ग्रुप ने निम्नलिखित व्यापार माध्यमों के ज़रिए कुवैत के मूल के विचाराधीन उत्पाद की कुल मात्रा का जांच की अवधि के दौरान भारत को निर्यात किया है : व्यापार माध्यम इक्वेत/टी के ओ सी [→ एमई ग्लोबल → भारत के ग्राहक इक्वेत/ टी के ओ सी । एमई ग्लोबल मित्सुबिसी कॉर्पोरेशन [→ भारत के ग्राहक इक्वेत/ टी के ओ सी एमई ग्लोबल ग्लोब ट्रेड वेल → भारत के ग्राहक इक्वेत/टी के ओ सी एमई ग्लोबल सी पी एफ पेकेजिंग → भारत के ग्राहक इक्वेत/ टी के ओ सी । एमई ग्लोबल । समिका ग्लोब । भारत के ग्राहक कुल निर्यात के अंश का % व्यापार माध्यम की स्थिति मी. ट. प्राधिकारी यह नोट करते हैं कि भारत को कुल निर्यातों के प्रतिशत से अधिक निर्यात करने में शामिल कंपनियों ने संगत सूचना प्रदान कर दी है और प्राधिकारी के समक्ष सहयोगी हैं। इक्वेत ग्रुप द्वारा प्रदान की गई सूचना पर निर्यात कीमत का निर्धारण करने के लिए प्राधिकारी द्वारा विचार किया गया है । इक्वेत ग्रुप ने शिपिंग लागत, ऋण लागत और बैंक प्रभारों के संबंध में समायोजनों का दावा किया है। इसके अलावा, प्राधिकारी ने एस जी ए व्ययों एमई ग्लोबल के लाभ के लिए भी समायोजन किए हैं ताकि उत्पादक के स्तर पर कारखाना बाह्य निर्यात कीमत निकाली जा सके। कुवैत से सभी अन्य उत्पादक कुवैत में सभी अन्य असहयोगी उत्पादकों के लिए, सामान्य मूल्य, निर्यात कीमत और पाटन मार्जिन का निर्धारण सहयोगी उत्पादक के डेटा को शामिल करते हुए उपलब्ध तथ्यों के आधार पर किया गया है और उसे नीचे दी गई पाटन मार्जिन तालिका में दर्शाया गया है। भारत को किए गए निर्यातों के संबंध में, जिनके के लिए प्राधिकारी के समक्ष पूरी निर्यात श्रृंखला ने भाग नहीं लिया है, प्राधिकारी ने उपलब्ध तथ्यों के आधार पर निर्यात कीमत निर्धारित की है। तदनुसार, इक्वेट ग्रुप द्वारा भारत को किए गए समग्र निर्यातों के लिए भारित औसत निर्यात कीमत निर्धारित की गई है और इसे नीचे दी गई पाटन मार्जिन तालिका में दर्शाया गया है। सउदी अरब अरबियन पैट्रोकेमिकल कंपनी , ईस्टर्न पैट्रोकेमिकल कंपनी , सउदी कयान पैट्रोकेमिकल कंपनी , सउदी यान्बू पैट्रोकेमिकल कंपनी और यान्बू नेशनल पैट्रोकेमिकल कंपनी [ सम्मिलित रूप से "सेबिक ग्रुप उत्पादकों" के रूप में उल्लिखित किया गया है। के साथ साथ संगत व्यापारी, सउदी अरब इंडस्ट्रीज कार्पोरेशन और सेबिक एशिया पैरसिफिक प्रा. लिमि. सामान्य मूल्य उनहत्तर. अरबियन पैट्रोकेमिकल कंपनी , ईस्टर्न पैट्रोकेमिकल कंपनी , जुबेल यूनाइटेड पैट्रोकेमिकल कंपनी सउदी कयान पैट्रोकेमिकल कंपनी , सदी यान्बू पैट्रोकेमिकल कंपनी तथा यान्बू नेशनल पैट्रोकेमिकल कंपनी सेविक ग्रुप के अंदर सउदी अरब में विचाराधीन उत्पाद की संगत उत्पादक कंपनियां हैं। प्राधिकारी द्वारा यह नोट किया गया है कि जांच की अवधि के दौरान, केवल सार्क्यू और यानपेट में सउदी अरब के घरेलू बाजार में विचाराधीन उत्पाद की बिक्रियां की हैं। घरेलू बाजार में सभी बिक्रियां संगत व्यापारी, सउदी बेसिक इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन को की गई थी, जिसने असंबद्ध घरेलू ग्राहकों को संबद्ध वस्तुओं की बिक्री की है। अतः प्राधिकारी सार्क्यू और यानपेट के लिए जांच की अवधि के दौरान विचाराधीन उत्पाद की उनकी घरेलू बिक्रियों के आधार पर सामान्य मूल्य का निर्धारण करने की कार्रवाई की है। प्राधिकारी यह नोट करते हैं कि सार्क्यू और यानपेट की घरेलू बिक्रियां भारत को निर्यातों की तुलना में पर्याप्त मात्रा में हैं। प्राधिकारी ने सार्क्यू और यानपेट के लिए संबद्ध वस्तुओं की बिक्रियों की लागत के संदर्भ में लाभ अर्जक घरेलू बिक्री सौदों के लिए सामान्य व्यापार जांच प्रक्रिया आयोजित की है। प्राधिकारी ने यह जांच की है कि क्या लाभ अर्जक सौंदे अस्सी प्रतिशत से अधिक हैं या नहीं। वर्तमान मामले में, यह नोट किया जाता है कि यानपेट की घरेलू बिक्रियों का अस्सी प्रतिशत से अधिक लाभप्रद है और इसीलिए यानपेट की सभी घरेलू बिक्रियां सामान्य मूल्य का निर्धारण करने के लिए विचार में ली गई हैं। सार्क्यू के मामले में, कोई लाभप्रद बिक्रियां नहीं हैं। अतः सार्क्यू के लिए अपनी घरेलू बिक्रियों के आधार पर सामान्य मूल्य का निर्धारण करना संभव नहीं है । सीमा शुल्क अधिनियम एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर की धारा नौक के स्पष्टीकरण के तहत प्रावधान इस प्रकार है : किसी वस्तु के संबंध में "सामान्य मूल्य" से तात्पर्य है - व्यापार की सामान्य प्रक्रिया के समान वस्तु की तुलनीय कीमत जब वह उप नियम के तहत बनाए गए नियमों के अनुसार यथानिर्धारित निर्यातक देश या क्षेत्र में खपत के लिए नियत हो, अथवा जब निर्यातक देश या क्षेत्र के घरेलू बाजार में व्यापार की सामान्य प्रक्रिया में समान वस्तु की बिक्री न हुई हो अथवा जब निर्यातक देश या क्षेत्र की बाजार विशेष की स्थिति अथवा उसके घरेलू बाजार में कम बिक्री मात्रा के कारण ऐसी बिक्री की उचित तुलना न हो सकती हो तो सामान्य मूल्य निम्नलिखित में से कोई एक होगा : समान वस्तु की तुलनीय प्रतिनिधिक कीमत जब उसका निर्यात उप धारा के अंतर्गत बनाए गए नियमों के अनुसार निर्यातक देश या क्षेत्र से या किसी उचित तीसरे देश से किया गया हो, अथवा परंतु यदि उक्त वस्तु का आयात उदगम वाले देश से भिन्न किसी देश से किया गया है और जहां उक्त वस्तु को निर्यात के देश से होकर केवल स्थानांतरण किया गया है अथवा ऐसी वस्तु का उत्पादन निर्यात के देश में नहीं होता है, अथवा निर्यात के देश में कोई तुलनीय कीमत नहीं है, वहां सामान्य मूल्य का निर्धारण उदगम वाले देश में उसकी कीमत के संदर्भ में किया जाएगा। चूंकि पैट्रोकेम्या, यूनाइटेड, सउदी कयान, यानसब द्वारा विचाराधीन उत्पाद की कोई घरेलू बिक्रियां नहीं हैं और सार्क्यू द्वारा कोई लाभप्रद घरेलू बिक्रियां नहीं हैं, प्राधिकारी ने सीमा शुल्क टैरिफ अधिनियम के अंतर्गत प्रदत्त किसी अन्य अनुमत प्रद्धति के आधार पर सामान्य मूल्य का निर्धारण करने की कार्रवाई की है। तदनुसार, इन पांच उत्पादकों को सीमाशुल्क टैरिफ अधिनियम की धारा नौक के स्पष्टीकरण के क्लॉज के तहत सामान्य मूल्य का निर्धारण करने के लिए उपयुक्त अन्य देश के चयन के लिए अन्य देशों को निर्यात बिक्रियों के सौदा-वार ब्यौरे प्रदान करने का अनुरोध किया गया था। इन पांच उत्पादकों द्वारा प्रदान किए गए, अन्य देशों के निर्यातों के सौदा-वार डेटा की एक उपयुक्त अन्य देश के चयन के लिए जांच की गई है। इस संबंध में किसी विशिष्ट दिशानिर्देश के अभाव में, या तो डब्ल्यू टी ओ पाटनरोधी करार में या सीमा शुल्क टैरिफ अधिनियम में या पाटनरोधी नियमावली में, उस देश के उत्पाद विकास की स्थिति और आयातों की मात्रा को उपयुक्त अन्य देश के चयन के लिए मार्गदर्शी मानक के रूप में शामिल किया गया है। प्राधिकारी ने उपयुक्त अन्य देश के निर्धारण के लिए सभी पांच उत्पादकों के लिए अन्य देशों को निर्यात पर विचार किया है। यह नोट किया गया है कि इन उत्पादकों द्वारा निर्यातों की सबसे अधिक मात्रा चीन जन गण के लिए है। प्राधिकारी चीन. गण. को एक उपयुक्त अन्य देश के रूप में नहीं मानते क्योंकि चीन बाजार अर्थव्यवस्था स्थितियों के अंतर्गत प्रचालन नहीं करता और चीन जन. गण. को निर्यात की मात्रा भारत को निर्यात की मात्रा से काफी अधिक है। प्राधिकारी यह नोट करते हैं कि इन उत्पादकों को निर्यात मात्रा मिलाकर इंडोनेशिया को, सेबिक द्वारा प्रदान की गई सूचना के आधार पर, जांच की अवधि के दौरान भारत को निर्यात मात्रा की तुलना में नजदीकी रेंज में है। अतः इंडोनेशिया को उपयुक्त अन्य देश के रूप में चुना गया है और पैट्रोकेम्या, यूनाइटेड और सऊदी अरब द्वारा इंडोनेशिया को किए गए निर्यातों पर इन तीन उत्पादों के लिए सामान्य मूल्य के निर्धारण के लिए विचार किया गया है। यह नोट किया जाता है कि यानसब और सार्क्यू ने जांच की अवधि के दौरान इंडोनेशिया को निर्यात नहीं किया है। पैट्रोकेम्या, यूनाइटेड और सऊदी कयान के लिए सामान्य मूल्य का निर्धारण करने के लिए, प्राधिकारी ने सामान्य व्यापार जांच की प्रक्रिया आयोजित की है ताकि संबद्ध वस्तुओं की बिक्री की लागत के संदर्भ में इंडोनेशिया के लिए लाभ अर्जक निर्यात बिक्री सौदों का निर्धारण हो सके। यदि लाभ अर्जक सौदे अस्सी प्रतिशत से अधिक हैं, तो प्राधिकारी ने सामान्य मूल्य के निर्धारण के लिए इंडोनेशिया को सभी निर्यात सौदों पर विचार किया है और यदि जहां लाभकारी सौदे अस्सी प्रतिशत से कम हैं, वहां इंडोनेशिया को केवल लाभकारी निर्यात बिक्री सौदों को सामान्य मूल्य का निर्धारण करने के लिए विचार में लिया गया है। यह नोट किया जाता है कि यूनाइटेड के इंडोनेशिया को लाभ अर्जक सौदे अस्सी प्रतिशत से अधिक हैं, और पैट्रोकेम्या तथा सऊदी कयान के इंडोनेशिया को लाभ अर्जक सौदे अस्सी प्रतिशत से कम हैं। तदनुसार, प्राधिकारी ने यूनाइटेड के लिए इंडोनेशिया के सभी निर्यात् सौदों और सामान्य मूल्य का निर्धारण करने के लिए पैट्रोकेम्या और सऊदी कयान के लिए इंडोनेशिया के केवल लाभ अर्जक निर्यात सौदों पर विचार किया है। जहां तक अन्य दो उत्पादकों, यानसब और सार्क्यू का संबंध है, प्राधिकारी ने टर्की को उपयुक्त अन्य तीसरे देश के रूप में चुना है क्योंकि इन दोनों उत्पादकों ने जांच की अवधि के दौरान इंडोनेशिया को कोई निर्यात नहीं किया है और टर्की को निर्यात निर्यात मात्रा की तुलना में निकटतम सीमा में है। यह नोट किया गया है कि जांच की अवधि के दौरान भारत के लिए तुर्की में सार्क्यू और यानसब के लिए लाभ अर्जित करने वाले लेनदेन अस्सी% से अधिक हैं। तद्नुसार, प्राधिकारी ने सार्क्यू और यानसब के लिए सामान्य मूल्य के निर्धारण हेतु तुर्की को सभी निर्यात लेनदेन पर विचार किया है। सभी उत्पादकों ने लाजिस्टिक्स व्ययों और ऋण लागत के संबंध में समायोजनों का दावा किया है। प्राधिकारी ने उत्पादकों द्वारा किए गए सभी समायोजनों को स्वीकार किया है। उपरोक्त उत्पादकों के लिए कारखाना बाह्य स्तर पर सामान्य मूल्य का तदनुसार निर्धारण किया गया है और इसे नीचे दी गई पाटन मार्जिन तालिका में दर्शाया गया है।
बॉलीवुड एक्टर शाहिद कपूर के साथ साथ एक्ट्रेस कियारा अडवाणी भी फिल्म के लिए फर्स्ट चॉइस नहीं थी। फिल्म कबीर सिंह के ट्रेलर ने यूट्यूब पर धूम मचा दी है। फिल्म कबीर सिंह के ट्रेलर ने यूट्यूब पर धूम मचा दी है। फिल्म का गाना, ट्रेलर और डायलॉग्स सब कमाल के हैं और बॉलीवुड एक्टर शाहिद कपूर ने सभी का दिल जीत लिया है। फिल्म कबीर सिंह अपने रिलीज डेट के अब कुछ ही दिनों की दूरी पर है। फिल्म के ट्रेलर को इतना अच्छा रेस्पॉस मिलने के बाद फिल्म के डायरेक्टर संदीप वंगा ने बताया कि इस फिल्म में कबीर सिंह के करैक्टर के रोल के लिए शाहिद कपूर उनकी पहली पसंद नहीं थे। हाल ही में एक इंटरव्यू में जब संदीप वंगा से पूछा गया कि क्या शाहिद कपूर फिल्म की फर्स्ट चॉइस थे तो संदीप ने कहा नहीं, प्रोड्यूसर ने अर्जुन कपूर को फिल्म के लिए एप्रोच किया था। संदीप बताया कि 'हां लेकिन इससे पहले मैं शाहिद से बात कर रहा था। तो मैं किसी दूसरे एक्टर से एकदम से बात नहीं कर पाता। बात यहां कमिटमेंट की थी ना की किसी कि एक्टिंग अच्छी है। ' फिल्म में शाहिद कपूर और कियारा अडवाणी पहली बार ओं स्क्रीन रोमांस करते नजर आयेंगे। अगर कियारा कि बात करे तो डायरेक्टर उनसे खुश हैं और उन्हें 'एकदम प्रोफेशनल' और 'करेक्टर को सही से समझने वाला' बताया है। आप लोगों को यह भी बता दे कि कियारा अडवाणी भी फिल्म के लिए फर्स्ट चॉइस नहीं थी। उनसे पहले स्टूडेंट ऑफ़ द इयर फेम तारा सुतारिया को लिया गया था। लेकिन जब तारा ने फिल्म के लिए मना कर दिया तो मेकर्स ने कियारा से बात की थी। वर्क फ्रंट में तो शाहिद कपूर आखिरी फिल्म बत्ती गुल मीटर डाउन में दिखाई दिए थे और अब वह कबीर सिंह की प्रमोशन में बिजी चल रहे हैं। फिल्म कबीर सिंह तेलुगु हिट, अर्जुन रेड्डी की ऑफिसियल हिंदी रीमेक है। इस फिल्म से संदीप वंगा ने अपना डायरेक्टोरियल डेब्यू किया था। फिल्म कबीर सिंह 21 जून को रिलीज होने वाली है। (रिचा गुप्र - इंटर्न लोकमत न्यूज़)
बॉलीवुड एक्टर शाहिद कपूर के साथ साथ एक्ट्रेस कियारा अडवाणी भी फिल्म के लिए फर्स्ट चॉइस नहीं थी। फिल्म कबीर सिंह के ट्रेलर ने यूट्यूब पर धूम मचा दी है। फिल्म कबीर सिंह के ट्रेलर ने यूट्यूब पर धूम मचा दी है। फिल्म का गाना, ट्रेलर और डायलॉग्स सब कमाल के हैं और बॉलीवुड एक्टर शाहिद कपूर ने सभी का दिल जीत लिया है। फिल्म कबीर सिंह अपने रिलीज डेट के अब कुछ ही दिनों की दूरी पर है। फिल्म के ट्रेलर को इतना अच्छा रेस्पॉस मिलने के बाद फिल्म के डायरेक्टर संदीप वंगा ने बताया कि इस फिल्म में कबीर सिंह के करैक्टर के रोल के लिए शाहिद कपूर उनकी पहली पसंद नहीं थे। हाल ही में एक इंटरव्यू में जब संदीप वंगा से पूछा गया कि क्या शाहिद कपूर फिल्म की फर्स्ट चॉइस थे तो संदीप ने कहा नहीं, प्रोड्यूसर ने अर्जुन कपूर को फिल्म के लिए एप्रोच किया था। संदीप बताया कि 'हां लेकिन इससे पहले मैं शाहिद से बात कर रहा था। तो मैं किसी दूसरे एक्टर से एकदम से बात नहीं कर पाता। बात यहां कमिटमेंट की थी ना की किसी कि एक्टिंग अच्छी है। ' फिल्म में शाहिद कपूर और कियारा अडवाणी पहली बार ओं स्क्रीन रोमांस करते नजर आयेंगे। अगर कियारा कि बात करे तो डायरेक्टर उनसे खुश हैं और उन्हें 'एकदम प्रोफेशनल' और 'करेक्टर को सही से समझने वाला' बताया है। आप लोगों को यह भी बता दे कि कियारा अडवाणी भी फिल्म के लिए फर्स्ट चॉइस नहीं थी। उनसे पहले स्टूडेंट ऑफ़ द इयर फेम तारा सुतारिया को लिया गया था। लेकिन जब तारा ने फिल्म के लिए मना कर दिया तो मेकर्स ने कियारा से बात की थी। वर्क फ्रंट में तो शाहिद कपूर आखिरी फिल्म बत्ती गुल मीटर डाउन में दिखाई दिए थे और अब वह कबीर सिंह की प्रमोशन में बिजी चल रहे हैं। फिल्म कबीर सिंह तेलुगु हिट, अर्जुन रेड्डी की ऑफिसियल हिंदी रीमेक है। इस फिल्म से संदीप वंगा ने अपना डायरेक्टोरियल डेब्यू किया था। फिल्म कबीर सिंह इक्कीस जून को रिलीज होने वाली है।
श्रीनगर - उत्तरी कश्मीर के हाजिन, बांडीपोर में रविवार सुबह मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने लश्कर-ए-तोयबा के दो आतंकियों को मार गिराया। इस दौरान राज्य पुलिस का एक जवान शहीद व एक अन्य सुरक्षाकर्मी घायल हो गया। इस बीच, मुठभेड़ में आतंकियों की मौत के बाद पूरे इलाके में तनाव पैदा हो गया और हिंसक हुए आतंकी समर्थकों पर काबू पाने के लिए सुरक्षाबलों को बल प्रयोग भी करना पड़ा। अधिकारिक तौर पर आतंकियों की मौत की पुष्टि नहीं हुई है। संबधित अधिकारियों के मुताबिक, अभी पूरे इलाके में तलाशी अभियान जारी है। तलाशी अभियान के समाप्त होने के बाद ही मरने वाले आतंकियों की संख्या की सही पुष्टि हो सकती है। जानकारी के अनुसार, सुरक्षाबलों को आज तड़के पता चला कि हाजिन,बांडीपोर में लश्कर-ए-ताईबा के दो विदेशी आतंकी अपने किसी स्थानीय संपर्क सूत्र के पास आए हुए हैं। सूचना मिलते ही राज्य पुलिस के विशेष अभियान दल एसओजी के जवानों ने सेना की आरआर और सीआरीएफ के जवानों के साथ मिलकर आतंकियों को पकड़ने के लिए एक अभियान चलाया। जवानों ने हाजिन के मीर मोहल्ले में जैसे ही तलाशी लेते हुए आगे बढ़ना शुरू किया, एक जगह छिपे आतंकियों ने उन्हें देख लिया और उन्होंने घेराबंदी तोड़ भागने के लिए गोलिबारी की। जवानों ने खुद को बचाते हुए जवाबी फायर कर आतंकियों को मुठभेड़ में उलझा लिया। इसके बाद वहां दोनों तरफ से भीषण गोलीबारी शुरु हो गई। बताया जाता है कि दो सुरक्षाकर्मी आतंकियों को उनके ठिकाने के पास जाकर मार गिराने का प्रयास करते हुए आतंकियों की गोली लगने से २ जवान जख्मी हो गए। किंतु अस्पताल में दाखिल कराए गए जवानों में से एक ने अपने जख्मों की ताव न सहते हुए दम तोड़ दिया।
श्रीनगर - उत्तरी कश्मीर के हाजिन, बांडीपोर में रविवार सुबह मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने लश्कर-ए-तोयबा के दो आतंकियों को मार गिराया। इस दौरान राज्य पुलिस का एक जवान शहीद व एक अन्य सुरक्षाकर्मी घायल हो गया। इस बीच, मुठभेड़ में आतंकियों की मौत के बाद पूरे इलाके में तनाव पैदा हो गया और हिंसक हुए आतंकी समर्थकों पर काबू पाने के लिए सुरक्षाबलों को बल प्रयोग भी करना पड़ा। अधिकारिक तौर पर आतंकियों की मौत की पुष्टि नहीं हुई है। संबधित अधिकारियों के मुताबिक, अभी पूरे इलाके में तलाशी अभियान जारी है। तलाशी अभियान के समाप्त होने के बाद ही मरने वाले आतंकियों की संख्या की सही पुष्टि हो सकती है। जानकारी के अनुसार, सुरक्षाबलों को आज तड़के पता चला कि हाजिन,बांडीपोर में लश्कर-ए-ताईबा के दो विदेशी आतंकी अपने किसी स्थानीय संपर्क सूत्र के पास आए हुए हैं। सूचना मिलते ही राज्य पुलिस के विशेष अभियान दल एसओजी के जवानों ने सेना की आरआर और सीआरीएफ के जवानों के साथ मिलकर आतंकियों को पकड़ने के लिए एक अभियान चलाया। जवानों ने हाजिन के मीर मोहल्ले में जैसे ही तलाशी लेते हुए आगे बढ़ना शुरू किया, एक जगह छिपे आतंकियों ने उन्हें देख लिया और उन्होंने घेराबंदी तोड़ भागने के लिए गोलिबारी की। जवानों ने खुद को बचाते हुए जवाबी फायर कर आतंकियों को मुठभेड़ में उलझा लिया। इसके बाद वहां दोनों तरफ से भीषण गोलीबारी शुरु हो गई। बताया जाता है कि दो सुरक्षाकर्मी आतंकियों को उनके ठिकाने के पास जाकर मार गिराने का प्रयास करते हुए आतंकियों की गोली लगने से दो जवान जख्मी हो गए। किंतु अस्पताल में दाखिल कराए गए जवानों में से एक ने अपने जख्मों की ताव न सहते हुए दम तोड़ दिया।
कानपुर के कर्नलगंज इलाके में युवती से छेड़छाड़ की शिकायत पर पुलिस ने एक आरोपी को पकड़ा और उसे पांच सेकेंड में पांच थप्पड़ जड़ दिए. अब इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. छेड़छाड़ के आरोपी को बीच चौराहे पर लड़कियों के सामने पुलिस ने सबक सिखाया. पुलिस अधिकारी द्वारा फैसला 'ऑन द स्पॉट' करते हुए मनचले को पांच सेकेंड में पांच थप्पड़ जड़ दिया. कर्नलगंज एसीपी द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक सिविल लाइंस के एक कॉलेज में पढ़ने वाली छात्रा से कई दिनों से सड़क पर चलते हुए युवक छेड़छाड़ करता था. लड़की के पिता ने थाने में शिकायत दर्ज कराई थी जिसके बाद आज बदमाशों को पकड़ने के लिए जाल बिछाया गया था. छात्रा जब कॉलेज से बाहर आई तो युवक बाइक पर वहां पहुंच गया और उसका पीछा करते हुए छेड़खानी करने लगा. यह देखकर छात्रा से छेड़छाड़ करने वाले लड़के को एसीपी कर्नलगंज ने पांच सेकेंड में पांच थप्पड़ जड़ दिए. वहीं एसीपी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी युवक का नाम वसीम है. उसके खिलाफ छेड़छाड़ की शिकायत मिल रही थी जिस पर कानूनी कार्रवाई की जा रही है. बता दें कि पुलिस अधिकारियों को शहर के विभिन्न इलाकों में तैनात एंटी रोमियो स्क्वायड टीम से इसकी शिकायत मिली थी. (इनपुट - सिमर चावला) ये भी पढ़ेंः
कानपुर के कर्नलगंज इलाके में युवती से छेड़छाड़ की शिकायत पर पुलिस ने एक आरोपी को पकड़ा और उसे पांच सेकेंड में पांच थप्पड़ जड़ दिए. अब इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. छेड़छाड़ के आरोपी को बीच चौराहे पर लड़कियों के सामने पुलिस ने सबक सिखाया. पुलिस अधिकारी द्वारा फैसला 'ऑन द स्पॉट' करते हुए मनचले को पांच सेकेंड में पांच थप्पड़ जड़ दिया. कर्नलगंज एसीपी द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक सिविल लाइंस के एक कॉलेज में पढ़ने वाली छात्रा से कई दिनों से सड़क पर चलते हुए युवक छेड़छाड़ करता था. लड़की के पिता ने थाने में शिकायत दर्ज कराई थी जिसके बाद आज बदमाशों को पकड़ने के लिए जाल बिछाया गया था. छात्रा जब कॉलेज से बाहर आई तो युवक बाइक पर वहां पहुंच गया और उसका पीछा करते हुए छेड़खानी करने लगा. यह देखकर छात्रा से छेड़छाड़ करने वाले लड़के को एसीपी कर्नलगंज ने पांच सेकेंड में पांच थप्पड़ जड़ दिए. वहीं एसीपी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी युवक का नाम वसीम है. उसके खिलाफ छेड़छाड़ की शिकायत मिल रही थी जिस पर कानूनी कार्रवाई की जा रही है. बता दें कि पुलिस अधिकारियों को शहर के विभिन्न इलाकों में तैनात एंटी रोमियो स्क्वायड टीम से इसकी शिकायत मिली थी. ये भी पढ़ेंः
देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार वृद्धि से लोग परेशानी का सामना कर रहे हैं। वहीं बढ़ती कीमतों पर केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस तथा श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री रामेश्वर तेली का एक बयान काफी सुर्खियों में छाया हुआ है। उन्होंने शनिवार(9 अक्टूबर) को मीडिया से बात करते हुए कहा कि, पेट्रोलियम उत्पादों पर जो कर लगाए जा रहे हैं, उससे लोगों को सरकार द्वारा मुफ्त वैक्सीन मुहैया करवाई जा रही है। मंत्री रामेश्वर तेली ने कहा कि पेट्रोल की कीमत बहुत अधिक नहीं है। लेकिन इसपर लगने वाले टैक्स से इसके दाम अधिक हो जाते हैं। यह भी संसाधन जुटाने का एक जरिया है। देश में सबको फ्री में वैक्सीन दी जा रही है, उसका पैसा कहां से आएगा, उसी की भरपाई के लिए तेल के दाम बढ़ाए गए हैं। इसके अलावा मंत्री ने तेल की कीमतों की तुलना पानी की बोतल से करते हुए कहा कि, मिनरल वाटर की कीमत तेल की कीमतों से कहीं अधिक है। पेट्रोल की कीमत 40 रुपये है, ऐसे में इसपर राज्य सरकारें अपना टैक्स लगाती हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय 30 रुपये लगाता है। जिससे इसकी कीमत 100 रुपये के पास पहुंच जाती है। लेकिन अगर आप हिमालय का पानी पीते हैं तो उसकी एक बोतल की कीमत 100 रुपये है। देश में तेल की कीमतों पर गौर करें तो सोमवार को केरल और कर्नाटक में डीजल की कीमत प्रति लीटर 100 रुपये से अधिक हो गई। लगातार सातवें दिन तेल की कीमतों में वृद्धि की गयी। अधिसूचना के अनुसार, सोमवार को पेट्रोल के दाम 30 पैसे प्रति लीटर और डीजल का भाव 35 पैसे प्रति लीटर और बढ़ गया। वहीं दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 104. 44 रुपये प्रति लीटर और मुंबई में 110. 41 रुपये प्रति लीटर के उच्चतम स्तर पर पहुंच गयी है।
देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार वृद्धि से लोग परेशानी का सामना कर रहे हैं। वहीं बढ़ती कीमतों पर केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस तथा श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री रामेश्वर तेली का एक बयान काफी सुर्खियों में छाया हुआ है। उन्होंने शनिवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि, पेट्रोलियम उत्पादों पर जो कर लगाए जा रहे हैं, उससे लोगों को सरकार द्वारा मुफ्त वैक्सीन मुहैया करवाई जा रही है। मंत्री रामेश्वर तेली ने कहा कि पेट्रोल की कीमत बहुत अधिक नहीं है। लेकिन इसपर लगने वाले टैक्स से इसके दाम अधिक हो जाते हैं। यह भी संसाधन जुटाने का एक जरिया है। देश में सबको फ्री में वैक्सीन दी जा रही है, उसका पैसा कहां से आएगा, उसी की भरपाई के लिए तेल के दाम बढ़ाए गए हैं। इसके अलावा मंत्री ने तेल की कीमतों की तुलना पानी की बोतल से करते हुए कहा कि, मिनरल वाटर की कीमत तेल की कीमतों से कहीं अधिक है। पेट्रोल की कीमत चालीस रुपयापये है, ऐसे में इसपर राज्य सरकारें अपना टैक्स लगाती हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय तीस रुपयापये लगाता है। जिससे इसकी कीमत एक सौ रुपयापये के पास पहुंच जाती है। लेकिन अगर आप हिमालय का पानी पीते हैं तो उसकी एक बोतल की कीमत एक सौ रुपयापये है। देश में तेल की कीमतों पर गौर करें तो सोमवार को केरल और कर्नाटक में डीजल की कीमत प्रति लीटर एक सौ रुपयापये से अधिक हो गई। लगातार सातवें दिन तेल की कीमतों में वृद्धि की गयी। अधिसूचना के अनुसार, सोमवार को पेट्रोल के दाम तीस पैसे प्रति लीटर और डीजल का भाव पैंतीस पैसे प्रति लीटर और बढ़ गया। वहीं दिल्ली में पेट्रोल की कीमत एक सौ चार. चौंतालीस रुपयापये प्रति लीटर और मुंबई में एक सौ दस. इकतालीस रुपयापये प्रति लीटर के उच्चतम स्तर पर पहुंच गयी है।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई द्वारा गठित तीन सदस्यीय जाँच पैनल ने उन्हें क्लीन चिट दे दी है। जाँच पैनल को सीजेआई रंजन गोगोई के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट की पूर्व कर्मचारी द्वारा लगाए गए यौन शोषण के आरोपों का कोई सबूत नहीं मिला। इस पैनल का नेतृत्व जस्टिस एसए बोडबे कर रहे थे। उन्होंने बताया कि पैनल की रिपोर्ट मुख्य न्यायाधीश एवं दूसरे सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश को सबमिट कर दी गई है। चूँकि यह एक अनौपचारिक जाँच थी, इसीलिए इस जाँच की रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। बता दें कि 20 अप्रैल को कई मीडिया पोर्टल्स द्वारा प्रकाशित की गई रिपोर्ट्स में सुप्रीम कोर्ट की पूर्व कर्मचारी द्वारा मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई पर यौन शोषण के आरोप लगाने की बात कही गई थी। उक्त महिला कर्मचारी जस्टिस गोगोई के आवास स्थित दफ्तर में कार्यरत थीं। उस महिला द्वारा 22 जजों को दी गई एफिडेविट के आधार पर ये आरोप लगाए गए थे। उस एफिडेविट में महिला ने यौन शोषण की दो घटनाओं का जिक्र किया था। महिला का आरोप था कि जब उन्होंने यह सब करने से इनकार किया, तब उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। तीन जजों वाली इन-हाउस कमिटी ने कहा कि रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जाएगी। इस कमिटी में जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस इंदु मल्होत्रा भी शामिल थीं।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई द्वारा गठित तीन सदस्यीय जाँच पैनल ने उन्हें क्लीन चिट दे दी है। जाँच पैनल को सीजेआई रंजन गोगोई के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट की पूर्व कर्मचारी द्वारा लगाए गए यौन शोषण के आरोपों का कोई सबूत नहीं मिला। इस पैनल का नेतृत्व जस्टिस एसए बोडबे कर रहे थे। उन्होंने बताया कि पैनल की रिपोर्ट मुख्य न्यायाधीश एवं दूसरे सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश को सबमिट कर दी गई है। चूँकि यह एक अनौपचारिक जाँच थी, इसीलिए इस जाँच की रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। बता दें कि बीस अप्रैल को कई मीडिया पोर्टल्स द्वारा प्रकाशित की गई रिपोर्ट्स में सुप्रीम कोर्ट की पूर्व कर्मचारी द्वारा मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई पर यौन शोषण के आरोप लगाने की बात कही गई थी। उक्त महिला कर्मचारी जस्टिस गोगोई के आवास स्थित दफ्तर में कार्यरत थीं। उस महिला द्वारा बाईस जजों को दी गई एफिडेविट के आधार पर ये आरोप लगाए गए थे। उस एफिडेविट में महिला ने यौन शोषण की दो घटनाओं का जिक्र किया था। महिला का आरोप था कि जब उन्होंने यह सब करने से इनकार किया, तब उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। तीन जजों वाली इन-हाउस कमिटी ने कहा कि रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जाएगी। इस कमिटी में जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस इंदु मल्होत्रा भी शामिल थीं।
दिल्ली सरकार द्वारा संचालित स्कूलों में अब लीडरशिप प्रोग्राम आयोजित किया जाएगा। इस पहल के बारे में दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने मंगलवार को ऐलान किया। दिल्ली के शिक्षा मंत्री ने ये बातें 'एक्सलेंस इन एजुकेशन अवॉर्ड्स सेरेमनी' में कहीं। इस अवसर पर उन्होंने बोर्ड एग्जाम में बेहतर परिणाम दिलाने में योगदान देने वाले स्कूल टीचर्स को सम्मानित किया।
दिल्ली सरकार द्वारा संचालित स्कूलों में अब लीडरशिप प्रोग्राम आयोजित किया जाएगा। इस पहल के बारे में दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने मंगलवार को ऐलान किया। दिल्ली के शिक्षा मंत्री ने ये बातें 'एक्सलेंस इन एजुकेशन अवॉर्ड्स सेरेमनी' में कहीं। इस अवसर पर उन्होंने बोर्ड एग्जाम में बेहतर परिणाम दिलाने में योगदान देने वाले स्कूल टीचर्स को सम्मानित किया।
CM Yogi Adityanath ने जनता की शिकायतों को जल्द से जल्द निपटाना का निर्देश दिया है। अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में उन्होंने कई दिशा निर्देश दिए हैं। जिसमें जनता की समस्या, विभाग की घोषणाओं का Feedback भी लिया। चीन पर नरमी बरतने के लिए पुतिन बना रहे बाइडन पर दबाव?
CM Yogi Adityanath ने जनता की शिकायतों को जल्द से जल्द निपटाना का निर्देश दिया है। अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में उन्होंने कई दिशा निर्देश दिए हैं। जिसमें जनता की समस्या, विभाग की घोषणाओं का Feedback भी लिया। चीन पर नरमी बरतने के लिए पुतिन बना रहे बाइडन पर दबाव?
कस्बा के सुभाष नगर वार्ड के आधा दर्जन पात्र गृहस्थी राशन कार्ड धारक रविवार को बिना राशन के खाली हाथ वापस लौटे आए। इनका नाम राशन सूची से गायब है। पीड़ितों का कहना है कि पांच मई से 17 मई के नियमित वितरण में इन्हें राशन मिला है। अब निःशुल्क वितरण जो की 20 मई से शुरू होकर 30 मई तक चलेगा का राशन लेने आए तो ईपास मशीन पर नाम ही नहीं दिखा रहा है। कोटेदार भी हैरान है कि कैसे इनका नाम सूची से हट गया। कोरोना महामारी में सरकार जहां गरीबों को मुफ्त राशन व आर्थिक सहायता दे रही है और जिन गरीबों के पास राशनकार्ड न हो उन्हें भी राशन की उपलब्धता सुनिश्चित करने में लगी है। ऐसे में जिम्मेदार सरकारी फरमान का मटियामेट करने में जुटे हैं। सुभाष नगर वार्ड के आयशा, सलेहा खातून, शहनाज, मो. सुलेमान, अमीना, अजय रविवार को राशन की दुकान पर राशन लेने पहुचे। इनका आरोप हैं कि जब इनकी बारी आई तो ई पास मशीन पर इनका राशन कार्ड नम्बर शो नहीं कर रहा है। नियमानुसार इसके बिना कोटेदार राशन नहीं दे सकता है। फिर पीड़ित सहज जन सेवा केंद्र पर राशन की सूची में नाम चेक करने गए तो उसमें भी नाम नहीं है। पीड़ित आशंका जता रहे है कि इनका नाम सूची से काट दिया गया है। पीड़ितों का कहना है कि इनकी आर्थिक दशा ठीक नहीं है। सरकारी राशन से ही इनका व इनके परिवार का पेट भरता था। यदि इन्हें राशन नहीं मिला तो भुखमरी की चपेट में आ जाएंगे। पीड़ितों ने प्रशासन से समस्या दूर करने की गुहार लगाई है। इस तरह का मामला संज्ञान में नहीं है। जांच कर समस्या दूर की जाएगी।
कस्बा के सुभाष नगर वार्ड के आधा दर्जन पात्र गृहस्थी राशन कार्ड धारक रविवार को बिना राशन के खाली हाथ वापस लौटे आए। इनका नाम राशन सूची से गायब है। पीड़ितों का कहना है कि पांच मई से सत्रह मई के नियमित वितरण में इन्हें राशन मिला है। अब निःशुल्क वितरण जो की बीस मई से शुरू होकर तीस मई तक चलेगा का राशन लेने आए तो ईपास मशीन पर नाम ही नहीं दिखा रहा है। कोटेदार भी हैरान है कि कैसे इनका नाम सूची से हट गया। कोरोना महामारी में सरकार जहां गरीबों को मुफ्त राशन व आर्थिक सहायता दे रही है और जिन गरीबों के पास राशनकार्ड न हो उन्हें भी राशन की उपलब्धता सुनिश्चित करने में लगी है। ऐसे में जिम्मेदार सरकारी फरमान का मटियामेट करने में जुटे हैं। सुभाष नगर वार्ड के आयशा, सलेहा खातून, शहनाज, मो. सुलेमान, अमीना, अजय रविवार को राशन की दुकान पर राशन लेने पहुचे। इनका आरोप हैं कि जब इनकी बारी आई तो ई पास मशीन पर इनका राशन कार्ड नम्बर शो नहीं कर रहा है। नियमानुसार इसके बिना कोटेदार राशन नहीं दे सकता है। फिर पीड़ित सहज जन सेवा केंद्र पर राशन की सूची में नाम चेक करने गए तो उसमें भी नाम नहीं है। पीड़ित आशंका जता रहे है कि इनका नाम सूची से काट दिया गया है। पीड़ितों का कहना है कि इनकी आर्थिक दशा ठीक नहीं है। सरकारी राशन से ही इनका व इनके परिवार का पेट भरता था। यदि इन्हें राशन नहीं मिला तो भुखमरी की चपेट में आ जाएंगे। पीड़ितों ने प्रशासन से समस्या दूर करने की गुहार लगाई है। इस तरह का मामला संज्ञान में नहीं है। जांच कर समस्या दूर की जाएगी।
इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के मौजूदा सत्र में शानदार शुरूआत के बाद लय खोने और फिर मुंबई इंडियस के खिलाफ रविवार के मैच में उसे दोबारा हासिल करने वाले राजस्थान रॉयल्स के बल्लेबाज संजु सैमसन ने कहा कि उन्होंने खुद पर भरोसा बनाए रखा था। संजु ने मुंबई के खिलाफ 8 विकेट से मिली अहम जीत में नाबाद 54 रन बनाए और बेन स्टोक्स के साथ तीसरे विकेट की अटूट साझेदारी में 152 रन जोड़े। उन्होंने जीत के बाद कहा कि मैने खुद पर विश्वास बनाए रखा था। जब आपको 14 मैच खेलने हों तो उतार चढ़ाव आते ही हैं। हर विकेट अलग तरह का होता है और उस पर अलग तरीके से खेलना होता है। मैंने आज वही किया। उन्होंने कहा," मैं जरूरी रनरेट की तरफ देख ही नहीं रहा था। मैं बस गेंद को उसकी गुणवत्ता के आधार पर खेल रहा था। मुझे जमने में 5 - 6 गेंद का समय लगा। "चोटिल रोहित शर्मा की जगह मुंबई की कमान संभाल रहे किरॉन पोलार्ड ने स्टोक्स और सैमसन की तारीफ की।
इंडियन प्रीमियर लीग के मौजूदा सत्र में शानदार शुरूआत के बाद लय खोने और फिर मुंबई इंडियस के खिलाफ रविवार के मैच में उसे दोबारा हासिल करने वाले राजस्थान रॉयल्स के बल्लेबाज संजु सैमसन ने कहा कि उन्होंने खुद पर भरोसा बनाए रखा था। संजु ने मुंबई के खिलाफ आठ विकेट से मिली अहम जीत में नाबाद चौवन रन बनाए और बेन स्टोक्स के साथ तीसरे विकेट की अटूट साझेदारी में एक सौ बावन रन जोड़े। उन्होंने जीत के बाद कहा कि मैने खुद पर विश्वास बनाए रखा था। जब आपको चौदह मैच खेलने हों तो उतार चढ़ाव आते ही हैं। हर विकेट अलग तरह का होता है और उस पर अलग तरीके से खेलना होता है। मैंने आज वही किया। उन्होंने कहा," मैं जरूरी रनरेट की तरफ देख ही नहीं रहा था। मैं बस गेंद को उसकी गुणवत्ता के आधार पर खेल रहा था। मुझे जमने में पाँच - छः गेंद का समय लगा। "चोटिल रोहित शर्मा की जगह मुंबई की कमान संभाल रहे किरॉन पोलार्ड ने स्टोक्स और सैमसन की तारीफ की।
ऐसा कोई मुकाम नहीं जिसे कड़ी मेहनत कर हासिल नहीं किया जा सकता। मेहनत, दृढ़ इच्छाशक्ति व लग्र के आगे बड़ी-बड़ी मुश्किलें भी घुटने टेक देती हैं। ऐसा कहना 'दिव्य हिमाचल' के मेगा इवेंट 'मिस हिमाचल-2023' की टॉप-20 फाइनलिस्ट सेजल का है। सेजल 'मिस हिमाचल' बनने को लेकर काफी आश्वस्त दिख रही हैं। आत्मविश्वास से लबरेज सेजल चुनौतियां का डटकर सामना करने में विश्वास रखती हैं। वह वर्ष 2022 में भी 'मिस हिमाचल' इवेंट के सेमिफाइनल तक की प्रतिभागी चुकी हैं। अब उनकी मेहनत का ही नतीजा है कि वह टाप-20 फाइनलिस्ट की सूची में शामिल हैं। सेजल इन दिनों 'मिस हिमाचल' के फिनाले की तैयारियों में जुटी हैं। मॉडलिंग के क्षेत्र में नाम कमाने की इच्छा रखने वाली सेजल को उसके परिजनों का भरपूर समर्थन मिल रहा है। अभिभावकों के समर्थन व प्रोत्साहन से उनका मनोबल सांतवें आसमान पर है। सेजल नगर परिषद हमीरपुर के तहत आने वाले वार्ड नंबर पांच बृजनगर की स्थायी निवासी हैं। उनकी प्राथमिक शिक्षा डीएवी हमीरपुर से हुई। उसके बाद उन्होंने जमा दो तक की पढ़ाई गुरुदत्त एंग्लोवेदिक स्कूल कांगड़ा से पूरी की है। वर्तमान में वह क्रिसचन नर्सिंग कालेज कुल्लू से बीएससी नर्सिंग कर रही हैं। सेजल के यदि शौक की बात की जाए तो उन्हें डांस, मॉडलिंग करना पंसद हैं। सेजल बीएसडी नर्सिंग करने के बाद ऐसी फील्ड ज्वाइन करना चाहती हैं, जहां जॉब के साथ ही जरूरमंदों की भी मदद कर सकें। समाजसेवा के जज्बे के साथ वह अपने जीवन में आगे बढऩे की इच्छा रखती हैं। सेजल की माता वंदना गृहणी हैं तथा पिता पवन कुमार निजी क्षेत्र में कार्यरत हैं। सेजल का छोटा भाई सातवीं कक्षा में पढ़ाई कर रहा है। (एचडीएम) सुपर मॉडल बनने का सपना संजोए मंडी जिला के जोगिंद्रनगर से संबंध रखने वाली लीपाक्षी ठाकुर इन दिनों 'दिव्य हिमाचल' के मेगा इवेंट 'मिस हिमाचल' का ताज पाने को कड़ी मेहनत कर रही हैं। जोगिंद्रनगर में उदय सिंह पिता और माता मीनाक्षी के घर पैदा हुई लीपाक्षी ठाकुर ने पूर्व मिस वल्र्ड रही प्रियंका चोपड़ा को आदर्श बताया है। वह उनके पथ चिन्हों पर चलकर आगे यह मुकाम हासिल करना चाहती हैं। लीपाक्षी ठाकुर का छोटा भाई तुषार ठाकुर बीएड कर रहा है। लीपाक्षी ठाकुर पंजाब यूनिवर्सिटी से एन्वायरनमेंट साइंस में एमएससी कर रही हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा जोगिंद्रनगर में ही हुई है। उनके पिता हिमाचल पथ परिवहन निगम में अधीक्षक के पद पर सेवारत हैं और माता हाउसवाइफ हैं। लीपाक्षी का कहना है कि मॉडलिंग के क्षेत्र में जाने के लिए पढ़ाई बहुत जरूरी हैं। मॉडलिंग को वह अपना पैशन मानती हैं। उन्होंने आज की युवा पीढ़ी को संदेश दिया है कि वह अपने ऊपर विश्वास रखें और अगर किसी भी स्पर्धा में कोई असफलता मिले, तो डरे नहीं, ब्लकि आगे बढऩे का प्रयास निरंतर जारी रखें। इन दिनों वह 'दिव्य हिमाचल मीडिया ग्रुप' के मेगा इवेंट 'मिस हिमाचल' का ताज पाने के लिए खूब कसरत कर रही हैं। वह योग, फिटनेस, डांस, बैडमिंटन सहित अन्य गतिविधियां नियमित रूप से कर रही हैं। बैडमिंटन, डांसिंग और मेडिटेशन उनके शौक में शुमार हैं। लिपाक्षी ने कहा कि इस मंच पर आकर जहां एक ओर अवसर प्रदान करने का मौका मिलता है, वहीं दूसरी ओर युवतियों का विश्वास भी बिल्ड होता है। उन्होंने युवतियों के अभिभावकों से भी निवेदन किया है कि वह अपनी लड़कियों को ऐसे क्षेत्र में आगे बढऩे के लिए सहयोग करें और उन्हें अपने जीवन में लीक से हटकर अलग करने का चांस अवश्य देना चाहिए। 'मिस हिमाचल' के इवेंट में आगे बढऩे के लिए उनके पापा और परिवार ने उनका पूरा सहयोग किया है। इसमें आने के लिए उन्हें पूर्व मिस वल्र्ड प्रियंका चोपड़ा से प्रेरणा मिली है। (एचडीएम)
ऐसा कोई मुकाम नहीं जिसे कड़ी मेहनत कर हासिल नहीं किया जा सकता। मेहनत, दृढ़ इच्छाशक्ति व लग्र के आगे बड़ी-बड़ी मुश्किलें भी घुटने टेक देती हैं। ऐसा कहना 'दिव्य हिमाचल' के मेगा इवेंट 'मिस हिमाचल-दो हज़ार तेईस' की टॉप-बीस फाइनलिस्ट सेजल का है। सेजल 'मिस हिमाचल' बनने को लेकर काफी आश्वस्त दिख रही हैं। आत्मविश्वास से लबरेज सेजल चुनौतियां का डटकर सामना करने में विश्वास रखती हैं। वह वर्ष दो हज़ार बाईस में भी 'मिस हिमाचल' इवेंट के सेमिफाइनल तक की प्रतिभागी चुकी हैं। अब उनकी मेहनत का ही नतीजा है कि वह टाप-बीस फाइनलिस्ट की सूची में शामिल हैं। सेजल इन दिनों 'मिस हिमाचल' के फिनाले की तैयारियों में जुटी हैं। मॉडलिंग के क्षेत्र में नाम कमाने की इच्छा रखने वाली सेजल को उसके परिजनों का भरपूर समर्थन मिल रहा है। अभिभावकों के समर्थन व प्रोत्साहन से उनका मनोबल सांतवें आसमान पर है। सेजल नगर परिषद हमीरपुर के तहत आने वाले वार्ड नंबर पांच बृजनगर की स्थायी निवासी हैं। उनकी प्राथमिक शिक्षा डीएवी हमीरपुर से हुई। उसके बाद उन्होंने जमा दो तक की पढ़ाई गुरुदत्त एंग्लोवेदिक स्कूल कांगड़ा से पूरी की है। वर्तमान में वह क्रिसचन नर्सिंग कालेज कुल्लू से बीएससी नर्सिंग कर रही हैं। सेजल के यदि शौक की बात की जाए तो उन्हें डांस, मॉडलिंग करना पंसद हैं। सेजल बीएसडी नर्सिंग करने के बाद ऐसी फील्ड ज्वाइन करना चाहती हैं, जहां जॉब के साथ ही जरूरमंदों की भी मदद कर सकें। समाजसेवा के जज्बे के साथ वह अपने जीवन में आगे बढऩे की इच्छा रखती हैं। सेजल की माता वंदना गृहणी हैं तथा पिता पवन कुमार निजी क्षेत्र में कार्यरत हैं। सेजल का छोटा भाई सातवीं कक्षा में पढ़ाई कर रहा है। सुपर मॉडल बनने का सपना संजोए मंडी जिला के जोगिंद्रनगर से संबंध रखने वाली लीपाक्षी ठाकुर इन दिनों 'दिव्य हिमाचल' के मेगा इवेंट 'मिस हिमाचल' का ताज पाने को कड़ी मेहनत कर रही हैं। जोगिंद्रनगर में उदय सिंह पिता और माता मीनाक्षी के घर पैदा हुई लीपाक्षी ठाकुर ने पूर्व मिस वल्र्ड रही प्रियंका चोपड़ा को आदर्श बताया है। वह उनके पथ चिन्हों पर चलकर आगे यह मुकाम हासिल करना चाहती हैं। लीपाक्षी ठाकुर का छोटा भाई तुषार ठाकुर बीएड कर रहा है। लीपाक्षी ठाकुर पंजाब यूनिवर्सिटी से एन्वायरनमेंट साइंस में एमएससी कर रही हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा जोगिंद्रनगर में ही हुई है। उनके पिता हिमाचल पथ परिवहन निगम में अधीक्षक के पद पर सेवारत हैं और माता हाउसवाइफ हैं। लीपाक्षी का कहना है कि मॉडलिंग के क्षेत्र में जाने के लिए पढ़ाई बहुत जरूरी हैं। मॉडलिंग को वह अपना पैशन मानती हैं। उन्होंने आज की युवा पीढ़ी को संदेश दिया है कि वह अपने ऊपर विश्वास रखें और अगर किसी भी स्पर्धा में कोई असफलता मिले, तो डरे नहीं, ब्लकि आगे बढऩे का प्रयास निरंतर जारी रखें। इन दिनों वह 'दिव्य हिमाचल मीडिया ग्रुप' के मेगा इवेंट 'मिस हिमाचल' का ताज पाने के लिए खूब कसरत कर रही हैं। वह योग, फिटनेस, डांस, बैडमिंटन सहित अन्य गतिविधियां नियमित रूप से कर रही हैं। बैडमिंटन, डांसिंग और मेडिटेशन उनके शौक में शुमार हैं। लिपाक्षी ने कहा कि इस मंच पर आकर जहां एक ओर अवसर प्रदान करने का मौका मिलता है, वहीं दूसरी ओर युवतियों का विश्वास भी बिल्ड होता है। उन्होंने युवतियों के अभिभावकों से भी निवेदन किया है कि वह अपनी लड़कियों को ऐसे क्षेत्र में आगे बढऩे के लिए सहयोग करें और उन्हें अपने जीवन में लीक से हटकर अलग करने का चांस अवश्य देना चाहिए। 'मिस हिमाचल' के इवेंट में आगे बढऩे के लिए उनके पापा और परिवार ने उनका पूरा सहयोग किया है। इसमें आने के लिए उन्हें पूर्व मिस वल्र्ड प्रियंका चोपड़ा से प्रेरणा मिली है।
टीम की हार की वजह गेंद और बल्ले से आत्मघाती खेल दिखाने वाले 8 खिलाड़ी रहे. मतलब ये कि 8 का प्रदर्शन अगर बल्ले से टीम हित में नहीं रहा तो 8 वो रहे जिनकी गेंद से नाकामी ने टीम की लुटिया डुबो दी. इन दिनों कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम में Road Safety World Series T20 के मुकाबले खेले जा रहे हैं. इस लीग में इंटरनेशनल क्रिकेट से रिटायर हो चुके खिलाड़ी खेलते हैं. 12 सितंबर को इस टूर्नामेंट में साउथ अफ्रीका लीजेंड्स और न्यूजीलैंड लीजेंड्स के बीच मुकाबला खेला गया. इस मुकाबले में न्यूजीलैंड लीजेंड्स की हार हुई और उसकी इस हार की वजह गेंद और बल्ले से आत्मघाती खेल दिखाने वाले 8 खिलाड़ी रहे. मतलब ये कि 8 का प्रदर्शन अगर बल्ले से टीम हित में नहीं रहा तो 8 वो रहे जिनकी गेंद से नाकामी ने टीम की लुटिया डुबो दी. अब जरा सिलसिलेवार तरीके से मैच का हाल जानिए. मुकाबले में न्यूजीलैंड लीजेंड्स ने पहले बैटिंग की. पर उसके रनों का मीटर सिर्फ 99 रन पर थम गया. 20 ओवर में न्यूजीलैंड लीजेंड्स 8 विकेट खोकर 100 रन भी नहीं बना सकी और वो सिर्फ 99 के फेर में फंसकर रह गई. उसकी इस हालत के जिम्मेदार वो 8 बल्लेबाज रहे, जिनमें से कुछ खाता तक नहीं खो सके तो कुछ के लिए दहाई के अंक को छू पाना भी नाको चने चबाने वाला साबित हुआ. टीम के सिर्फ दो ही बल्लेबाज रहे, जिन्होंने दहाई अंक में कदम रखा. सबसे ज्यादा रन बनाने वाले का स्कोर 48 रहा. अब साउथ अफ्रीका लीजेंड्स के सामने जीत के लिए पूरे 100 रन का टारगेट था, जिसे उन्होंने 13.3 ओवरों में ही 1 विकेट खोकर हासिल कर लिया. यानी, उन्होंने 9 विकेट से मुकाबला जीत लिया. ऐसा नहीं है कि न्यूजीलैंड लीजेंड्स ने जीत की कोशिश नहीं की. उन्होंने अपने 8 गेंदबाज आजमाए. लेकिन जैसे न्यूजीलैंड लीजेंड्स के 8 बल्लेबाज फ्लॉप रहे थे, ठीक उसी तरह 8 गेंदबाजों ने भी टीम को हार की ओर धकेल दिया. वो सभी मिलकर साउथ अफ्रीका लीजेंड्स के सिर्फ 1 विकेट ही ले सके. Road Safety World Series T20 2022 में इस बार कुल 8 टीमें हिस्सा ले रही हैं. साउथ अफ्रीका लीजेंड्स ने अपने 2 मैच खेल लिए हैं, जिसमें से वो 1 हारे और 1 जीते हैं. वहीं बाकी टीमों ने अभी 1-1 मैच ही जीता है. साउथ अफ्रीका लीजेंड्स को अपने पहले मैच में इंडिया लीजेंड्स से 61 रन से हार मिली थी.
टीम की हार की वजह गेंद और बल्ले से आत्मघाती खेल दिखाने वाले आठ खिलाड़ी रहे. मतलब ये कि आठ का प्रदर्शन अगर बल्ले से टीम हित में नहीं रहा तो आठ वो रहे जिनकी गेंद से नाकामी ने टीम की लुटिया डुबो दी. इन दिनों कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम में Road Safety World Series Tबीस के मुकाबले खेले जा रहे हैं. इस लीग में इंटरनेशनल क्रिकेट से रिटायर हो चुके खिलाड़ी खेलते हैं. बारह सितंबर को इस टूर्नामेंट में साउथ अफ्रीका लीजेंड्स और न्यूजीलैंड लीजेंड्स के बीच मुकाबला खेला गया. इस मुकाबले में न्यूजीलैंड लीजेंड्स की हार हुई और उसकी इस हार की वजह गेंद और बल्ले से आत्मघाती खेल दिखाने वाले आठ खिलाड़ी रहे. मतलब ये कि आठ का प्रदर्शन अगर बल्ले से टीम हित में नहीं रहा तो आठ वो रहे जिनकी गेंद से नाकामी ने टीम की लुटिया डुबो दी. अब जरा सिलसिलेवार तरीके से मैच का हाल जानिए. मुकाबले में न्यूजीलैंड लीजेंड्स ने पहले बैटिंग की. पर उसके रनों का मीटर सिर्फ निन्यानवे रन पर थम गया. बीस ओवर में न्यूजीलैंड लीजेंड्स आठ विकेट खोकर एक सौ रन भी नहीं बना सकी और वो सिर्फ निन्यानवे के फेर में फंसकर रह गई. उसकी इस हालत के जिम्मेदार वो आठ बल्लेबाज रहे, जिनमें से कुछ खाता तक नहीं खो सके तो कुछ के लिए दहाई के अंक को छू पाना भी नाको चने चबाने वाला साबित हुआ. टीम के सिर्फ दो ही बल्लेबाज रहे, जिन्होंने दहाई अंक में कदम रखा. सबसे ज्यादा रन बनाने वाले का स्कोर अड़तालीस रहा. अब साउथ अफ्रीका लीजेंड्स के सामने जीत के लिए पूरे एक सौ रन का टारगेट था, जिसे उन्होंने तेरह.तीन ओवरों में ही एक विकेट खोकर हासिल कर लिया. यानी, उन्होंने नौ विकेट से मुकाबला जीत लिया. ऐसा नहीं है कि न्यूजीलैंड लीजेंड्स ने जीत की कोशिश नहीं की. उन्होंने अपने आठ गेंदबाज आजमाए. लेकिन जैसे न्यूजीलैंड लीजेंड्स के आठ बल्लेबाज फ्लॉप रहे थे, ठीक उसी तरह आठ गेंदबाजों ने भी टीम को हार की ओर धकेल दिया. वो सभी मिलकर साउथ अफ्रीका लीजेंड्स के सिर्फ एक विकेट ही ले सके. Road Safety World Series Tबीस दो हज़ार बाईस में इस बार कुल आठ टीमें हिस्सा ले रही हैं. साउथ अफ्रीका लीजेंड्स ने अपने दो मैच खेल लिए हैं, जिसमें से वो एक हारे और एक जीते हैं. वहीं बाकी टीमों ने अभी एक-एक मैच ही जीता है. साउथ अफ्रीका लीजेंड्स को अपने पहले मैच में इंडिया लीजेंड्स से इकसठ रन से हार मिली थी.
इस कहर से कैसे बचे दुनिया? सोशल डिस्टेंसिंग के प्रति चीन, जहां पर इस महामारी का जन्म हुआ, के लिए समय रहते ही गंभीरता दिखाई होती तो सारी दुनिया के लिए आफत नहीं बनती। हमारे देश के आम लोगों को दुनिया के दूसरों देशों के कोरोना वायरस के खौफनाक मंजर को देखते हुए गंभीरता से लेते हुए समय रहते ही सावधानियां बरत लेनी चाहिए। अगर यह महामारी हमारे देश में बेकाबू हो जाती है, तो यह 1918 का इतिहास दोहरा सकती है। सन् 1918 में हमारे देश में स्पैनिश फ्लू ने महामारी का रूप लिया था, इसकी चपेट में आने से लाखों-करोड़ों लोगों की जान चली गई थी। कोरोना दुनिया से जल्दी अपना कहर खत्म करे, इसके लिए सारी दुनिया को कोरोना से बचने के तौर-तरीकों, इलाज के साथ दुआएं भी मांगनी चाहिए।
इस कहर से कैसे बचे दुनिया? सोशल डिस्टेंसिंग के प्रति चीन, जहां पर इस महामारी का जन्म हुआ, के लिए समय रहते ही गंभीरता दिखाई होती तो सारी दुनिया के लिए आफत नहीं बनती। हमारे देश के आम लोगों को दुनिया के दूसरों देशों के कोरोना वायरस के खौफनाक मंजर को देखते हुए गंभीरता से लेते हुए समय रहते ही सावधानियां बरत लेनी चाहिए। अगर यह महामारी हमारे देश में बेकाबू हो जाती है, तो यह एक हज़ार नौ सौ अट्ठारह का इतिहास दोहरा सकती है। सन् एक हज़ार नौ सौ अट्ठारह में हमारे देश में स्पैनिश फ्लू ने महामारी का रूप लिया था, इसकी चपेट में आने से लाखों-करोड़ों लोगों की जान चली गई थी। कोरोना दुनिया से जल्दी अपना कहर खत्म करे, इसके लिए सारी दुनिया को कोरोना से बचने के तौर-तरीकों, इलाज के साथ दुआएं भी मांगनी चाहिए।
इंदौर। सेंट पॉल उ. मा. विद्यालय, इंदौर में कक्षा 10वीं और 12वीं के प्रतिभाशाली छात्रों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में विद्यालय के प्राचार्य फादर सीबी जोसेफ़ ने मुख्य अतिथि कमिश्नर हरिनारायनाचारी मिश्र का स्वागत शॉल और श्रीफल भेंटकर किया। मेधावी छात्रो को उनकी विशेष उपलब्धि के लिए पुलिस कमिश्नर मिश्र द्वारा विद्यालय के चेयरमैन फॉदर बिशप चाको थोटोमरीकल की उपस्तिथि में पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर मैनेजर फॉदर थामस मैथ्यू, पीटीए अध्यक्ष अशोक चौहान व राष्ट्रीय स्तर के साइबर एक्सपर्ट प्रो. गौरव रावल विशेष रूप से उपस्थित थे। इंदौर कमिश्नर मिश्र ने अपने संबोधन में कहा कि जीत और हार जीवन का हिस्सा होता है। इसे स्वीकार करते हुए आगे बढ़ने वाला निश्चित ही सफलता पाता है। उन्होंने एक प्रेरक कहानी के माध्यम से छात्रों को निरंतर प्रयास करने और किसी भी स्थिति मे सकारात्मक बने रहने के लिए प्रेरित किया। बिशप चाको ने कहा कि हम आज़ादी का अमृत महोत्सव के तहत जीवन मे गुरुजनों का सम्मान और अनुशासन का संकल्प लें। उन्होंने सीनियर छात्रों को अपने दैनिक जीवन में सामान्य नियमों का पालन जैसे सड़क पर सही लाइन मे चलना व यातायात नियमों का पालन करने का आग्रह किया साथ ही छात्रों के आने वाले भविष्य के लिए मंगल कामना करते हुए उन्हें बधाई दी। इस अवसर पर छात्रों द्वारा गायन की प्रस्तुतियां दी गईं। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया। साइबर फॉरेंसिक विज्ञान के छात्रों का AICTSL कंट्रोल रूम भ्रमण : आज़ादी का अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य तहत श्री वैष्णव विद्यापीठ विश्वविद्यालय इंदौर के फोरेंसिक विज्ञान के बीएससी और एमएससी साइबर फोरेंसिक के 47 छात्रों ने साइबर एक्सपर्ट प्रो. गौरव रावल के नेतृत्व में अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लिमिटेड (AICTSL) कंट्रोल रूम का शैक्षिक भ्रमण किया। एआईसीटीएसएल द्वारा विभिन्न सुविधाओ के सभी व्यावहारिक पहलुओं के साथ पूरी कार्यप्रणाली और प्रक्रियाओं को समझने के लिए छात्रों ने बस ट्रांसिट सिस्टम की वर्किंग प्रोसेस में उपयोग किए जाने सेक्यूरिटी सॉफ्टवेर व कंट्रोल रूम द्वारा पूरे शहर में कितने कैमरे लगा गए हैं, इसके बारे मे जाना। छात्रों ने प्रो. गौरव रावल के साथ ऑटोमैटेड निगरानी प्रणाली से परिचित होने के लिए सीसीटीवी नियंत्रण कक्ष का दौरा किया और शहर के विभिन्न बस स्टॉप बिंदुओं पर लगाए गए सभी सीसीटीवी कैमरा स्थानों और इसकी निगरानी प्रणाली के पीछे की तकनीकों के बारे मे जाना। छात्रों को एचआर मैनेजर माला सिंह ठाकुर के साथ बातचीत करने का भी मौका मिला। उन्होंने बताया कि कोई बस किसी भी कारण से स्टॉप पॉइंट अलावा कहीं भी नहीं रुकती। खराब होती है तो हमारा ऑटोमैटिक सिस्टम तुरंत बता देता है और उसे ठीक करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है। ठाकुर ने छात्रों को बताया कि इंदौर शहर में 5000 बसों की आवशकता है, लेकिन हम अभी सिर्फ 400 बसों से काम चला रहे हैं। फॉरेंसिक साइंस विभाग की प्रो. नंदिनी बसोद ने पौधा देकर श्रीमती ठाकुर का सम्मान किया। इस अवसर पर प्रो. आयुष मौजूद रहे।
इंदौर। सेंट पॉल उ. मा. विद्यालय, इंदौर में कक्षा दसवीं और बारहवीं के प्रतिभाशाली छात्रों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में विद्यालय के प्राचार्य फादर सीबी जोसेफ़ ने मुख्य अतिथि कमिश्नर हरिनारायनाचारी मिश्र का स्वागत शॉल और श्रीफल भेंटकर किया। मेधावी छात्रो को उनकी विशेष उपलब्धि के लिए पुलिस कमिश्नर मिश्र द्वारा विद्यालय के चेयरमैन फॉदर बिशप चाको थोटोमरीकल की उपस्तिथि में पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर मैनेजर फॉदर थामस मैथ्यू, पीटीए अध्यक्ष अशोक चौहान व राष्ट्रीय स्तर के साइबर एक्सपर्ट प्रो. गौरव रावल विशेष रूप से उपस्थित थे। इंदौर कमिश्नर मिश्र ने अपने संबोधन में कहा कि जीत और हार जीवन का हिस्सा होता है। इसे स्वीकार करते हुए आगे बढ़ने वाला निश्चित ही सफलता पाता है। उन्होंने एक प्रेरक कहानी के माध्यम से छात्रों को निरंतर प्रयास करने और किसी भी स्थिति मे सकारात्मक बने रहने के लिए प्रेरित किया। बिशप चाको ने कहा कि हम आज़ादी का अमृत महोत्सव के तहत जीवन मे गुरुजनों का सम्मान और अनुशासन का संकल्प लें। उन्होंने सीनियर छात्रों को अपने दैनिक जीवन में सामान्य नियमों का पालन जैसे सड़क पर सही लाइन मे चलना व यातायात नियमों का पालन करने का आग्रह किया साथ ही छात्रों के आने वाले भविष्य के लिए मंगल कामना करते हुए उन्हें बधाई दी। इस अवसर पर छात्रों द्वारा गायन की प्रस्तुतियां दी गईं। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया। साइबर फॉरेंसिक विज्ञान के छात्रों का AICTSL कंट्रोल रूम भ्रमण : आज़ादी का अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य तहत श्री वैष्णव विद्यापीठ विश्वविद्यालय इंदौर के फोरेंसिक विज्ञान के बीएससी और एमएससी साइबर फोरेंसिक के सैंतालीस छात्रों ने साइबर एक्सपर्ट प्रो. गौरव रावल के नेतृत्व में अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लिमिटेड कंट्रोल रूम का शैक्षिक भ्रमण किया। एआईसीटीएसएल द्वारा विभिन्न सुविधाओ के सभी व्यावहारिक पहलुओं के साथ पूरी कार्यप्रणाली और प्रक्रियाओं को समझने के लिए छात्रों ने बस ट्रांसिट सिस्टम की वर्किंग प्रोसेस में उपयोग किए जाने सेक्यूरिटी सॉफ्टवेर व कंट्रोल रूम द्वारा पूरे शहर में कितने कैमरे लगा गए हैं, इसके बारे मे जाना। छात्रों ने प्रो. गौरव रावल के साथ ऑटोमैटेड निगरानी प्रणाली से परिचित होने के लिए सीसीटीवी नियंत्रण कक्ष का दौरा किया और शहर के विभिन्न बस स्टॉप बिंदुओं पर लगाए गए सभी सीसीटीवी कैमरा स्थानों और इसकी निगरानी प्रणाली के पीछे की तकनीकों के बारे मे जाना। छात्रों को एचआर मैनेजर माला सिंह ठाकुर के साथ बातचीत करने का भी मौका मिला। उन्होंने बताया कि कोई बस किसी भी कारण से स्टॉप पॉइंट अलावा कहीं भी नहीं रुकती। खराब होती है तो हमारा ऑटोमैटिक सिस्टम तुरंत बता देता है और उसे ठीक करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है। ठाकुर ने छात्रों को बताया कि इंदौर शहर में पाँच हज़ार बसों की आवशकता है, लेकिन हम अभी सिर्फ चार सौ बसों से काम चला रहे हैं। फॉरेंसिक साइंस विभाग की प्रो. नंदिनी बसोद ने पौधा देकर श्रीमती ठाकुर का सम्मान किया। इस अवसर पर प्रो. आयुष मौजूद रहे।
और कनक-पीत वर्णके थे कनक-कमल', शातकुम्भ कमल और हेमाम्भोज । कनक-पीत पद्मका केवल कैलास शृङ्खलाके मानसरोवर में उत्पन्न होनेका लेख है । कहीं-कहीं कमल और कमलिनियोंसे सम्पूर्ण जल-तल व्याप्त रहनेसे कमलवनकी संज्ञा अक्षरशः सार्थक होती है । भारतवर्ष में ऐसे बहुतसे सरोवर हैं जिनमें निर्बाध रूपसे मीलों कमल उपजे होते हैं और जो ऐसे सघन अरण्यका दृश्य प्रकट करते हैं जिनमें किसी कर्त्तक या नौकाका प्रवेश करना कठिन है। पद्मकी एक जाति है स्थलकमलिनी, जिसको कविने स्थलपर उत्पन्न माना है । कमलका डंठल, 'नीवार' मानस-सरोवरको जानेवाले मरालोंका पाथेय होता था। इनके सिवा कुछ अन्य प्रकारके जलीय पौधे और नरकट थे जो तड़ागों, तलैयों और छिछले सरिता-तलोंकी कीचमें जन्मते थे । शैवाल इसी प्रकारका खूब उपजा हुआ सेवार था जो तड़ागोंपर फैलता और कमलोंके साथ प्रोतप्रोत हो जाता है । निचुला और वेतस शायद एक ही हैं । वानीर" ईख है, जो रामगिरिके" आस-पास तमसा", गभीरा" और मालिनीके" कूलोंमें उत्पन्न होता था और शायद सुह्य देशमें भी, जिसका अप्रत्यक्ष परिचय १६ मिलता है । इस खण्डमें प्राणी-जीवनके संबंधकी सामग्रियोंपर, जिनमें भूचर, जलचर प्रौर विहग सभी शामिल हैं, विचार किया जा सकता है । हम दो शीर्षकोंमें पशु-वर्गका अध्ययन कर सकते हैं - - वन्य और पालतू । जिस प्रकार भारत-भूमिसे आदिम अरण्य प्रायः तिरोहित हो गये उसी प्रकार वन्य पशुओं से भी बहुत-से गायब हो गये हैं। कालिदासकालमें देश अरण्योंसे भराथा, जिनमें वन्य पशु स्वच्छन्द विहार करते थे । वन्य पशुओं जिनका नामांकन हुआ है वे हैं, पशुओं का राजा सिंह ( मृगेन्द्र, मृगेश्वर, रीक्ष', सिंह), हाथी (करी', दन्ती', द्वीप, इभ', गज', कुंजर) और इसका शिशु (कलभ'), बाघ (व्याघ्र ११) और बाघिन (व्याघ्री"), शूकर (बराह"), गेंडा (खङ्ग १५), साँड़ (महिष, वन्य), भैसा (महिषा५), हिमालयमें घूमनेवाली सुरा गाय ( चमरी), एक प्रकार का वृष (गवय १९), हिरण (मृग१०), मृगी १
और कनक-पीत वर्णके थे कनक-कमल', शातकुम्भ कमल और हेमाम्भोज । कनक-पीत पद्मका केवल कैलास शृङ्खलाके मानसरोवर में उत्पन्न होनेका लेख है । कहीं-कहीं कमल और कमलिनियोंसे सम्पूर्ण जल-तल व्याप्त रहनेसे कमलवनकी संज्ञा अक्षरशः सार्थक होती है । भारतवर्ष में ऐसे बहुतसे सरोवर हैं जिनमें निर्बाध रूपसे मीलों कमल उपजे होते हैं और जो ऐसे सघन अरण्यका दृश्य प्रकट करते हैं जिनमें किसी कर्त्तक या नौकाका प्रवेश करना कठिन है। पद्मकी एक जाति है स्थलकमलिनी, जिसको कविने स्थलपर उत्पन्न माना है । कमलका डंठल, 'नीवार' मानस-सरोवरको जानेवाले मरालोंका पाथेय होता था। इनके सिवा कुछ अन्य प्रकारके जलीय पौधे और नरकट थे जो तड़ागों, तलैयों और छिछले सरिता-तलोंकी कीचमें जन्मते थे । शैवाल इसी प्रकारका खूब उपजा हुआ सेवार था जो तड़ागोंपर फैलता और कमलोंके साथ प्रोतप्रोत हो जाता है । निचुला और वेतस शायद एक ही हैं । वानीर" ईख है, जो रामगिरिके" आस-पास तमसा", गभीरा" और मालिनीके" कूलोंमें उत्पन्न होता था और शायद सुह्य देशमें भी, जिसका अप्रत्यक्ष परिचय सोलह मिलता है । इस खण्डमें प्राणी-जीवनके संबंधकी सामग्रियोंपर, जिनमें भूचर, जलचर प्रौर विहग सभी शामिल हैं, विचार किया जा सकता है । हम दो शीर्षकोंमें पशु-वर्गका अध्ययन कर सकते हैं - - वन्य और पालतू । जिस प्रकार भारत-भूमिसे आदिम अरण्य प्रायः तिरोहित हो गये उसी प्रकार वन्य पशुओं से भी बहुत-से गायब हो गये हैं। कालिदासकालमें देश अरण्योंसे भराथा, जिनमें वन्य पशु स्वच्छन्द विहार करते थे । वन्य पशुओं जिनका नामांकन हुआ है वे हैं, पशुओं का राजा सिंह , हाथी और इसका शिशु , बाघ और बाघिन , शूकर , गेंडा , साँड़ , भैसा , हिमालयमें घूमनेवाली सुरा गाय , एक प्रकार का वृष , हिरण , मृगी एक
शिवपुरी। अभी-अभी खबर आ रही है कि शहर के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के फतेहपुर इलाके में निवासरत एक युवक की लाश को शमशान से जलते हुए मानवीयता को पार करते हुए तीन शराबियों ने खींच लिया। इस बात की सूचना मृतक के परिजनों को लगी तो वह तत्काल मौके पर जा पहुंचे और दो आरोपीयों को दबौच लिया। इस घटना में तीसरा आरोपी मौके से फरार हो गया। परिजनों ने आरोपीयों को दबौचकर पुलिस के हबाले कर दिया। जहां पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। जानकारी के अनुसार आज सुबह प्रकाश पुत्र मंगलिया उम्र 45 वर्ष का देहांत कैंसर के चलते हो गया। जिस पर लगभग 12 बजे परिजन लाश को लेकर अंतेष्टि के लिए फतेहपुर क्षेत्र के शमशान घाट पर पहुँचे। जहां अंत्येष्टि के बाद परिजन वापिस अपने घर आ गए। घर आने के लगभग 2 घण्टे बाद परिजन चिता को देखने के लिए वापिस गए तो देखा कि तीन युवक चिता से मृतक को खींच रहे है। जिस पर तुंरत सूचना मृतक के भाई रामस्वरूप को दी गई। रामस्वरूप अपने रिश्तेदारों के साथ मौके पर पहुंचा तो देखा कि उक्त आरोपी शराब के नशे में घुत्त मानवीयता को शर्मसार करते हुए लाश को चिता से खींच रहें थे। इस मामले में परिजनों ने आरोपी युवकों को दबौचकर पुलिस को सूचना दी। इस मामले में पुलिस आरोपीयों को लेकर कोतवाली आ गई है। आरोपी दोनों शराब के नशे में घुत्त है। इन आरोपीयों से पूछताछ में अपना नाम संजय पुत्र अजयसिंह जाटव,विजय पुत्र रतिराम मौर्य बताया है। वही तीसरा आरोपी जो फरार हो गया है उसका नाम शनि बताया गया है। अब कोतवाली से जाकर परिजन पुनः इस मृतक के शरीर के टुकडों की अंत्येष्टि करने की बात कह रहे है।
शिवपुरी। अभी-अभी खबर आ रही है कि शहर के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के फतेहपुर इलाके में निवासरत एक युवक की लाश को शमशान से जलते हुए मानवीयता को पार करते हुए तीन शराबियों ने खींच लिया। इस बात की सूचना मृतक के परिजनों को लगी तो वह तत्काल मौके पर जा पहुंचे और दो आरोपीयों को दबौच लिया। इस घटना में तीसरा आरोपी मौके से फरार हो गया। परिजनों ने आरोपीयों को दबौचकर पुलिस के हबाले कर दिया। जहां पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। जानकारी के अनुसार आज सुबह प्रकाश पुत्र मंगलिया उम्र पैंतालीस वर्ष का देहांत कैंसर के चलते हो गया। जिस पर लगभग बारह बजे परिजन लाश को लेकर अंतेष्टि के लिए फतेहपुर क्षेत्र के शमशान घाट पर पहुँचे। जहां अंत्येष्टि के बाद परिजन वापिस अपने घर आ गए। घर आने के लगभग दो घण्टे बाद परिजन चिता को देखने के लिए वापिस गए तो देखा कि तीन युवक चिता से मृतक को खींच रहे है। जिस पर तुंरत सूचना मृतक के भाई रामस्वरूप को दी गई। रामस्वरूप अपने रिश्तेदारों के साथ मौके पर पहुंचा तो देखा कि उक्त आरोपी शराब के नशे में घुत्त मानवीयता को शर्मसार करते हुए लाश को चिता से खींच रहें थे। इस मामले में परिजनों ने आरोपी युवकों को दबौचकर पुलिस को सूचना दी। इस मामले में पुलिस आरोपीयों को लेकर कोतवाली आ गई है। आरोपी दोनों शराब के नशे में घुत्त है। इन आरोपीयों से पूछताछ में अपना नाम संजय पुत्र अजयसिंह जाटव,विजय पुत्र रतिराम मौर्य बताया है। वही तीसरा आरोपी जो फरार हो गया है उसका नाम शनि बताया गया है। अब कोतवाली से जाकर परिजन पुनः इस मृतक के शरीर के टुकडों की अंत्येष्टि करने की बात कह रहे है।
होता है, ऐसा जिनवाणीका सक्षेप कथन है अर्थात् सक्षेपमे ( सूत्ररूपमे अहिंसा व हिंसाका लक्षण बताया गया है, इसे समझना चाहिए । यह निश्चय रूपसे अहिंसा व हिसाका लक्षण जानना ( स्वाश्रित है ) व्यवहारनयसे द्रव्य प्राणो का घात होना हिंसाका लक्षण है ( पराश्रित है ॥४४॥ भावार्थ - असलमे रागादिक विकारी ( अशुद्ध ) भाव ही स्वभाव भावके घातक होनेसे हिंसक व हिसारूप है। अतएव महान पुरुषोने पेश्तर स्वभाव भावका आलम्बन लेकर उन्होका क्षय किया है, जो भावकर्मरूप व आत्माके प्रदेशोमे अवस्थित, ( सयोगरूप ) रहते है । उनका आत्माके साथ बड़ी घनिष्ट सम्बन्ध है व पुराना है । उन्हीकी बदौलत यह ससारवृक्ष विराटरूप हुआ है । अतएव रागादिरूप हिंसा ही महान् पाप है, ( अधर्म है ) तथा रागादिकके अभावरूप अहिंसा ही महान धर्म है, ऐसा समझ कर वही अहिंसा रूप परम धर्म प्राप्त करना चाहिए तभी कल्याण होगा। इसके विपरीत 'द्रव्यहिंसा' ( जीवघात ) और भावहिसा ( क्रोधादिकषाय भाव ) ये कभी धर्म नही हो सकते, न उनसे कल्याण हो सकता है यह नियम है । अतएव भ्रममे नही पड़ जाना चाहिये, हमेशा सत्यका आलम्बन लेना चाहिए, अस्तु । सत्यकी ही विजय होती है असत्यकी नही, यह नीति है ॥४४॥ आचार्य कहते है कि सदाचारी जीवोके रागादिकके अभावमे, विना कषायके कदाचित् अन्य जीवोको हिंसा ( प्राणघात ) हो भी जाय तो भी उनको हिंसाका फल नही लगता इत्यादि । युक्ताचेरणस्य सतो रागाद्यावेशमन्त रेणापि । न हि भवति जातु हिंसा प्राणव्यरोपणादेव ॥ ४५ ॥ अन्वय अर्थ - आचार्य कहते हैं कि [ अपि युक्ताचरणस्य मत. रागाद्या वेशमन्तरेण ] और खाम तत्वको बात यह है कि सावधानीपूर्वक अर्थात् शिथिलाचार रहित आचरण करने वाला श्रावक-माधु महात्मा, रागद्वेषादिकपायके विना ( बुरा इरादा न हो तो ) [ या व्यपरोपादेव जातु हिसान हि भवति ] कदाचित् अकेले प्राण घात हो जानेमे कभी हिंसा पापका भागी नही होता, अर्थात् उसे हिंसा शप नहीं लगता, ऐना साराश समझना चाहिये। क्योंकि हिंसा, विना कपाय ( क्रोधादि ) के अकेले योग ( प्रवृत्ति ) मे नही होती ॥४५॥ योग्य आचरण करने वाला जब तक रागे नहीं करता जीवघातके होने पर भी हिंसा पाप नहीं लगता ॥ हिंसा मूल विभाव कहा है जो स्वभावका घातक हे । अतः त्यागना उसका उत्तम अन्य त्याग तस साधक है ॥४५॥ योग्य आगमनानदाना। अर्थात् नमिति या सावधानी पूर्वक प्रवृत्ति करने वाला । र निमिनाम ।
होता है, ऐसा जिनवाणीका सक्षेप कथन है अर्थात् सक्षेपमे व्यवहारनयसे द्रव्य प्राणो का घात होना हिंसाका लक्षण है भाव ही स्वभाव भावके घातक होनेसे हिंसक व हिसारूप है। अतएव महान पुरुषोने पेश्तर स्वभाव भावका आलम्बन लेकर उन्होका क्षय किया है, जो भावकर्मरूप व आत्माके प्रदेशोमे अवस्थित, रहते है । उनका आत्माके साथ बड़ी घनिष्ट सम्बन्ध है व पुराना है । उन्हीकी बदौलत यह ससारवृक्ष विराटरूप हुआ है । अतएव रागादिरूप हिंसा ही महान् पाप है, तथा रागादिकके अभावरूप अहिंसा ही महान धर्म है, ऐसा समझ कर वही अहिंसा रूप परम धर्म प्राप्त करना चाहिए तभी कल्याण होगा। इसके विपरीत 'द्रव्यहिंसा' और भावहिसा ये कभी धर्म नही हो सकते, न उनसे कल्याण हो सकता है यह नियम है । अतएव भ्रममे नही पड़ जाना चाहिये, हमेशा सत्यका आलम्बन लेना चाहिए, अस्तु । सत्यकी ही विजय होती है असत्यकी नही, यह नीति है ॥चौंतालीस॥ आचार्य कहते है कि सदाचारी जीवोके रागादिकके अभावमे, विना कषायके कदाचित् अन्य जीवोको हिंसा हो भी जाय तो भी उनको हिंसाका फल नही लगता इत्यादि । युक्ताचेरणस्य सतो रागाद्यावेशमन्त रेणापि । न हि भवति जातु हिंसा प्राणव्यरोपणादेव ॥ पैंतालीस ॥ अन्वय अर्थ - आचार्य कहते हैं कि [ अपि युक्ताचरणस्य मत. रागाद्या वेशमन्तरेण ] और खाम तत्वको बात यह है कि सावधानीपूर्वक अर्थात् शिथिलाचार रहित आचरण करने वाला श्रावक-माधु महात्मा, रागद्वेषादिकपायके विना [ या व्यपरोपादेव जातु हिसान हि भवति ] कदाचित् अकेले प्राण घात हो जानेमे कभी हिंसा पापका भागी नही होता, अर्थात् उसे हिंसा शप नहीं लगता, ऐना साराश समझना चाहिये। क्योंकि हिंसा, विना कपाय के अकेले योग मे नही होती ॥पैंतालीस॥ योग्य आचरण करने वाला जब तक रागे नहीं करता जीवघातके होने पर भी हिंसा पाप नहीं लगता ॥ हिंसा मूल विभाव कहा है जो स्वभावका घातक हे । अतः त्यागना उसका उत्तम अन्य त्याग तस साधक है ॥पैंतालीस॥ योग्य आगमनानदाना। अर्थात् नमिति या सावधानी पूर्वक प्रवृत्ति करने वाला । र निमिनाम ।
राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय, नई दिल्ली में संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित की गई प्रधानमंत्री को मिले स्मृति चिन्हों की नीलामी के पहले दिन 27 जनवरी 2019 को बोली लगाने वालों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। दो दिन तक दिल्ली में चलने वाली नीलामी 28 जनवरी 2019 को खत्म होगी और जो सामान दिल्ली की नीलामी से बच जाएंगे वो 29 से 31 जनवरी तक वेबसाइट www.pmmementos.gov.in.के जरिए ऑनलाइन नीलामी के लिए उपलब्ध होंगे। नीलाम किए गए विशेष सामानों में मूर्तियां, फोटोग्राफ, पेंटिंग और अंगवस्त्रम, शॉल, स्मरणीय सिक्के, पारंपरिक वाद्य यंत्र, टोपी, पगड़ी और जैकेट इत्यादि शामिल नाम हैं। इन उपहार में मिले सामानों की नीलामी को लेकर बेहद उत्साह देखा गया क्योंकि लोगों को पहली बार लगा कि प्रधानमंत्री को मिले इन सामानों की नीलामी से मिली राशि महान पुण्य के कार्य में लगाई जाएगी। इससे मिली राशि का नमामी गंगे प्रोजेक्ट में उपयोग होगा। नीलामी में बोली दाताओं ने भी खुलकर साथ दिया जिससे क्षत्रपति शिवाजी महाराज कि 1000 रुपए की बेस प्राइस वाली मूर्ति 22 हजार रुपए में बिकी। दूसरे आइटम भी जैसे गौतम बुद्ध की मूर्ति, प्रधानमंत्री के चित्र, फोटोग्राफ और पेंटिंग, गोमुख (मां गंगा के उद्गम स्थल) की थ्रीडी पेंटिंग, महात्मा बसवेश्वरा की मूर्ति, स्वामी विवेकानंद की मूर्ति और चांदी से कोटेड शिवलिंग भी बेस प्राइस से बेहद ज्यादा कीमत पर बिके। बहुत से लोग इन सामानों को देखने भी राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय, नई दिल्ली पहुंचे। केंद्रीय रेल और वाणिज्य मंत्री श्री पीयूष गोयल, संसद सदस्य श्री मनोज तिवारी और श्रीमति मीनाक्षी लेखी भी भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और दूसरे गणमान्य लोगों के साथ इस नीलामी को देखने पहुंचे।
राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय, नई दिल्ली में संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित की गई प्रधानमंत्री को मिले स्मृति चिन्हों की नीलामी के पहले दिन सत्ताईस जनवरी दो हज़ार उन्नीस को बोली लगाने वालों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। दो दिन तक दिल्ली में चलने वाली नीलामी अट्ठाईस जनवरी दो हज़ार उन्नीस को खत्म होगी और जो सामान दिल्ली की नीलामी से बच जाएंगे वो उनतीस से इकतीस जनवरी तक वेबसाइट www.pmmementos.gov.in.के जरिए ऑनलाइन नीलामी के लिए उपलब्ध होंगे। नीलाम किए गए विशेष सामानों में मूर्तियां, फोटोग्राफ, पेंटिंग और अंगवस्त्रम, शॉल, स्मरणीय सिक्के, पारंपरिक वाद्य यंत्र, टोपी, पगड़ी और जैकेट इत्यादि शामिल नाम हैं। इन उपहार में मिले सामानों की नीलामी को लेकर बेहद उत्साह देखा गया क्योंकि लोगों को पहली बार लगा कि प्रधानमंत्री को मिले इन सामानों की नीलामी से मिली राशि महान पुण्य के कार्य में लगाई जाएगी। इससे मिली राशि का नमामी गंगे प्रोजेक्ट में उपयोग होगा। नीलामी में बोली दाताओं ने भी खुलकर साथ दिया जिससे क्षत्रपति शिवाजी महाराज कि एक हज़ार रुपयापए की बेस प्राइस वाली मूर्ति बाईस हजार रुपए में बिकी। दूसरे आइटम भी जैसे गौतम बुद्ध की मूर्ति, प्रधानमंत्री के चित्र, फोटोग्राफ और पेंटिंग, गोमुख की थ्रीडी पेंटिंग, महात्मा बसवेश्वरा की मूर्ति, स्वामी विवेकानंद की मूर्ति और चांदी से कोटेड शिवलिंग भी बेस प्राइस से बेहद ज्यादा कीमत पर बिके। बहुत से लोग इन सामानों को देखने भी राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय, नई दिल्ली पहुंचे। केंद्रीय रेल और वाणिज्य मंत्री श्री पीयूष गोयल, संसद सदस्य श्री मनोज तिवारी और श्रीमति मीनाक्षी लेखी भी भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और दूसरे गणमान्य लोगों के साथ इस नीलामी को देखने पहुंचे।
तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लोकसभा में कांग्रेस के नेता और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी को जवाब दिया है। अधीर रंजन चौधरी के मजबूत असर वाले इलाके मुर्शिदाबाद की सागरदिघी विधानसभा सीट पर उपचुनाव में जीते कांग्रेस के विधायक बायरोन बिस्वास को तृणमूल ने तोड़ लिया है। वे कांग्रेस के इकलौते विधायक थे, जो पिछले दिनों मुस्लिम बहुल सागरदिघी सीट पर हुए उपचुनाव में जीते थे। 2021 के विधानसभा चुनाव में यह सीट तृणमूल ने जीती थी और उसके उम्मीदवार को 50 फीसदी से ज्यादा वोट मिले थे। लेकिन पिछले साल के अंत में हुए उपचुनाव में कांग्रेस के बिस्वास ने 22 हजार के ज्यादा अंतर से यह सीट जीती थी। अब वे तृणमूल कांग्रेस में चले गए हैं। यह घटना अधीर रंजन चौधरी के ममता पर दिए बयान के कुछ दिन बाद ही हुई है। पिछले दिनों अधीर ने पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस का विरोध करते रहने का ऐलान किया था। बिहार में नीतीश कुमार की बुलाई बैठक के संदर्भ में उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस बैठक में शामिल होगी लेकिन बंगाल में ममता का विरोध जारी रखेगी। उसके बाद उनके इकलौते विधायक को ममता ने तोड़ लिया। इससे पहले ममता मेघालय में कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकुल संगमा सहित पूरे विधायक दल को अपनी पार्टी में शामिल करा लिया था। गोवा में भी कांग्रेस के कई बड़े नेताओं को उन्होंने तोड़ा था। अब बंगाल में पार्टी के इकलौते विधायक को तोड़ दिया। सवाल है कि ऐसे में कांग्रेस किस तरह से उनसे बातचीत करेगी? यह भी सवाल है कि इसका मुसलमानों में क्या मैसेज जाएगा, जिन्होंने उपचुनाव में कांग्रेस को वोट किया था।
तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लोकसभा में कांग्रेस के नेता और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी को जवाब दिया है। अधीर रंजन चौधरी के मजबूत असर वाले इलाके मुर्शिदाबाद की सागरदिघी विधानसभा सीट पर उपचुनाव में जीते कांग्रेस के विधायक बायरोन बिस्वास को तृणमूल ने तोड़ लिया है। वे कांग्रेस के इकलौते विधायक थे, जो पिछले दिनों मुस्लिम बहुल सागरदिघी सीट पर हुए उपचुनाव में जीते थे। दो हज़ार इक्कीस के विधानसभा चुनाव में यह सीट तृणमूल ने जीती थी और उसके उम्मीदवार को पचास फीसदी से ज्यादा वोट मिले थे। लेकिन पिछले साल के अंत में हुए उपचुनाव में कांग्रेस के बिस्वास ने बाईस हजार के ज्यादा अंतर से यह सीट जीती थी। अब वे तृणमूल कांग्रेस में चले गए हैं। यह घटना अधीर रंजन चौधरी के ममता पर दिए बयान के कुछ दिन बाद ही हुई है। पिछले दिनों अधीर ने पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस का विरोध करते रहने का ऐलान किया था। बिहार में नीतीश कुमार की बुलाई बैठक के संदर्भ में उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस बैठक में शामिल होगी लेकिन बंगाल में ममता का विरोध जारी रखेगी। उसके बाद उनके इकलौते विधायक को ममता ने तोड़ लिया। इससे पहले ममता मेघालय में कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकुल संगमा सहित पूरे विधायक दल को अपनी पार्टी में शामिल करा लिया था। गोवा में भी कांग्रेस के कई बड़े नेताओं को उन्होंने तोड़ा था। अब बंगाल में पार्टी के इकलौते विधायक को तोड़ दिया। सवाल है कि ऐसे में कांग्रेस किस तरह से उनसे बातचीत करेगी? यह भी सवाल है कि इसका मुसलमानों में क्या मैसेज जाएगा, जिन्होंने उपचुनाव में कांग्रेस को वोट किया था।
Amitabh Bachchan Co-Actor Arrested : अमिताभ बच्चन की फिल्म 'झुंड' में नजर आ चुका एक एक्टर चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इस एक्टर पर पांच लाख की जूलरी चुराने का आरोप है। बॉलीवुड इंडस्ट्री के मेगास्टार अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) की फिल्म 'झुंड' (Jhund) मार्च 2022 में सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन ने एक फुटबॉल कोच की भूमिका निभाई थी। फिल्म 'झुंड' में कई चाइल्ड आर्टिस्ट ने काम किया था। इन्हीं में से एक प्रियांशु क्षत्रिय (Priyanshu Kshatriya) है, जिसे पुलिस ने कथित चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि प्रियांशु क्षत्रिय पर पांच लाख रुपये की जूलरी चुराने का आरोप है। आइए जानते हैं कि आखिर पूरा मामला क्या है। बताया जा रहा है कि प्रदीप मोंडावे नाम के शख्स ने चोरी की शिकायत दी थी। इसके बाद पुलिस ने जांच करते हुए के नाबालिग को पकड़कर पूछताछ की। पूछताछ के दौरान नाबालिग ने पुलिस को बताया कि चोरी में प्रियांशु क्षत्रिय भी शामिल है। इसके बाद पुलिस ने प्रियांशु क्षत्रिय को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया जहां से पुलिस कस्टडी में रखने का आदेश दिया गया। वहीं, चुराई गए सामने को भी रिकवर कर लिया गया है। गौरतलब है कि इससे पहले ट्रेन में मोबाइल चोरी का एक मामले में भी प्रियांशु क्षत्रिय नाम सामने आया था। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए पूरे गिरोह को खुलासा किया था। इसके बाद प्रियांशु क्षत्रिय को गिरफ्तार किया था। अमिताभ बच्चन की फिल्म 'झुंड' नागराज मंजुले के डायरेक्शन में बनी फिल्म 'झुंड' में प्रियांशु क्षत्रिय बाबू क्षेत्री का किरदार निभाया था। फिल्म 'झुंड' में अमिताभ बच्चन ने विजय बरसे नाम के एक फुटबॉल कोच के रोल में नजर आते और झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले बच्चों की ट्रेनिंग देकर एक फुटबॉल टीम तैयार करते हैं। वर्क फ्रंट की बात करें तो अमिताभ बच्चन की फिल्म 'ऊंचाई' हाल ही में सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। अब वह फिल्म 'प्रोजेक्ट के' और फिल्म 'बटरफ्लाई' में काम करते नजर आएंगे। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
Amitabh Bachchan Co-Actor Arrested : अमिताभ बच्चन की फिल्म 'झुंड' में नजर आ चुका एक एक्टर चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इस एक्टर पर पांच लाख की जूलरी चुराने का आरोप है। बॉलीवुड इंडस्ट्री के मेगास्टार अमिताभ बच्चन की फिल्म 'झुंड' मार्च दो हज़ार बाईस में सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन ने एक फुटबॉल कोच की भूमिका निभाई थी। फिल्म 'झुंड' में कई चाइल्ड आर्टिस्ट ने काम किया था। इन्हीं में से एक प्रियांशु क्षत्रिय है, जिसे पुलिस ने कथित चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि प्रियांशु क्षत्रिय पर पांच लाख रुपये की जूलरी चुराने का आरोप है। आइए जानते हैं कि आखिर पूरा मामला क्या है। बताया जा रहा है कि प्रदीप मोंडावे नाम के शख्स ने चोरी की शिकायत दी थी। इसके बाद पुलिस ने जांच करते हुए के नाबालिग को पकड़कर पूछताछ की। पूछताछ के दौरान नाबालिग ने पुलिस को बताया कि चोरी में प्रियांशु क्षत्रिय भी शामिल है। इसके बाद पुलिस ने प्रियांशु क्षत्रिय को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया जहां से पुलिस कस्टडी में रखने का आदेश दिया गया। वहीं, चुराई गए सामने को भी रिकवर कर लिया गया है। गौरतलब है कि इससे पहले ट्रेन में मोबाइल चोरी का एक मामले में भी प्रियांशु क्षत्रिय नाम सामने आया था। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए पूरे गिरोह को खुलासा किया था। इसके बाद प्रियांशु क्षत्रिय को गिरफ्तार किया था। अमिताभ बच्चन की फिल्म 'झुंड' नागराज मंजुले के डायरेक्शन में बनी फिल्म 'झुंड' में प्रियांशु क्षत्रिय बाबू क्षेत्री का किरदार निभाया था। फिल्म 'झुंड' में अमिताभ बच्चन ने विजय बरसे नाम के एक फुटबॉल कोच के रोल में नजर आते और झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले बच्चों की ट्रेनिंग देकर एक फुटबॉल टीम तैयार करते हैं। वर्क फ्रंट की बात करें तो अमिताभ बच्चन की फिल्म 'ऊंचाई' हाल ही में सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। अब वह फिल्म 'प्रोजेक्ट के' और फिल्म 'बटरफ्लाई' में काम करते नजर आएंगे। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
मुंबईः देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में प्रॉपर्टी की आसमान छूती कीमतें हमेशा सुर्खियों में होती हैं। हालांकि, पिछले कुछ समय से यहां का प्रॉपर्टी मार्कीट कमोबेश सुस्त है। काफी हद तक इसकी वजह भी साफ है। सबसे बड़ी वजह तो प्रॉपर्टी कीमतों का मिडिल क्लास की पहुंच से बाहर होना है लेकिन सुस्ती के बावजूद प्रॉपर्टी की कीमतों में कोई खास कमी नहीं आई है। यहां हम उन कारणों को जानते हैं, जो मुंबई के रियल्टी मार्कीट को देश का सबसे महंगा बनाते हैं। मुंबई में प्रॉपर्टी की कीमतें बहुत ज्यादा होने में इसकी जीओग्राफी का बहुत अहम रोल है। यह शहर 3 तरफ से समुद्र से घिरा है। ऐसे में देश के दूसरे शहरों की तरह मुंबई का सकुर्लर डेवलपमेंट यानी चारों ओर नहीं हो सकता है। यहां पर डेवलपमेंट लिनीअर यानी एक दिशा में दक्षिण से उत्तर की ओर हो रहा है। इसके साथ दक्षिण मुंबई से दूसरे उपनगरीय इलाकों को जोड़ने के लिए कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर भी प्राइम लोकेशंस पर प्रॉपर्टी की कीमतें बढ़ाने में मददगार साबित हो रहा है। यही वजह है कि उत्तर में बांद्रा-जुहू और दक्षिण में भायखला-चेंबूर इलाकों में प्रॉपर्टी की कीमतें काफी तेजी से बढ़ी हैं।
मुंबईः देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में प्रॉपर्टी की आसमान छूती कीमतें हमेशा सुर्खियों में होती हैं। हालांकि, पिछले कुछ समय से यहां का प्रॉपर्टी मार्कीट कमोबेश सुस्त है। काफी हद तक इसकी वजह भी साफ है। सबसे बड़ी वजह तो प्रॉपर्टी कीमतों का मिडिल क्लास की पहुंच से बाहर होना है लेकिन सुस्ती के बावजूद प्रॉपर्टी की कीमतों में कोई खास कमी नहीं आई है। यहां हम उन कारणों को जानते हैं, जो मुंबई के रियल्टी मार्कीट को देश का सबसे महंगा बनाते हैं। मुंबई में प्रॉपर्टी की कीमतें बहुत ज्यादा होने में इसकी जीओग्राफी का बहुत अहम रोल है। यह शहर तीन तरफ से समुद्र से घिरा है। ऐसे में देश के दूसरे शहरों की तरह मुंबई का सकुर्लर डेवलपमेंट यानी चारों ओर नहीं हो सकता है। यहां पर डेवलपमेंट लिनीअर यानी एक दिशा में दक्षिण से उत्तर की ओर हो रहा है। इसके साथ दक्षिण मुंबई से दूसरे उपनगरीय इलाकों को जोड़ने के लिए कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर भी प्राइम लोकेशंस पर प्रॉपर्टी की कीमतें बढ़ाने में मददगार साबित हो रहा है। यही वजह है कि उत्तर में बांद्रा-जुहू और दक्षिण में भायखला-चेंबूर इलाकों में प्रॉपर्टी की कीमतें काफी तेजी से बढ़ी हैं।
रक्तपिपासु यवनो ने हिन्दुओं के साथ रक्त की होली खेली । हिन्दू जनता त्रायध्वम् - त्रायध्वम् पुकार उठी । मुस्लिम लीग से समझौते का पग बढाने वाली काँग्रेस का हृदय करुणा से काप उठा । महात्मा गान्धी ने दीपावली पर मनाई जाने वाली शोभाये सारे भारत के लिये निषिद्ध कर दी । तब स्वामी आत्मानन्द सरस्वती ने हिन्दु परिवारो के साथ हुये अत्याचार के विरोध मे महात्मा गान्धी के आदेश को दुहराते हुये रावलपिण्डी नगर में अनेक सभाये की, उनमे भाषण दिये और कहा - "पूज्य महात्मा गान्धी ने सवत् २००३ की इस दीपावली के दिन भारत को सन्देश भेजा है कि ऐ भरतवासियो ! आज दीपावली की प्रथा मना कर प्रसन्न होने का दिन नही है । आज तुम प्रसन्नता मनाने योग्य नही रहे । आज मर्यादा पुरुषोत्तन राम के विजय का दिवस नही है । विजय प्रसन्नता उन्ही के साथ विदा हो चुकी है । आज तो तुम पराजय दिवस मनाओ । भारत की सभ्यता और भारत का इतिहास अब तक यही बताता चला आ रहा है कि तुम निरपराधियों पर अत्याचार मत करो । उदाहरण के रूप मे हम शिवाजी के काल को ही लेते हैं । शिवाजी महाराज के काल मे आर्यकन्याओ पर यवनो ने अत्याचार की सीमा को अतिक्रान्त कर दिया था। इसके फलस्वरुप किसी साहसिक युवक ने राजदरबार की एक यवन कन्या शिवा जी मरहट्ठा के दरबार में लाकर उपस्थित कर दी । यदि उनकी दैत्य-दृष्टि होती, तो यवनो को भौति उस पर अत्याचार किया जा सकता था, परन्तु उस समय शिवा जी मरहठ्ठा को यदि किसी बात का दुःख हुआ, तो वह इस बात का कि प्राचीन आर्य सभ्यता को भुला कर, मेरे राज्य मे एक विजातीयअबला कन्या, जिसने स्त्री समाज मे किसी प्रकार की हानि नही पहुँचाई, एक क्षत्रिय वीर के द्वारा कैसे लाई गई । यह श्री आर्य सभ्यता जिसको भुलाकर राजनीतिक क्षेत्रो मे भी आज अत्याचारा की बोछार हो रही है । जहाँ निरपराध पर अत्याचार करना पाप है, वहां निरपराधो पर हुये अत्याचारो को सहते चले जाना घोर पाप है । रात्री के १२ बजे गङ्गा की रेती पर टहलते हुये सभ्यता के पुजारी महर्षि दयानन्द का हृदय अपने भारत के दुराचारमय समय को देखकर, अनेक अनाथो के भयङ्कर दृश्यो को देखकर और यह देखकर कि भारत अपनी सभ्यता को भूल कर दूसरो से सभ्यता सीखने के लिये नतमस्तक हो रहा है, कांप उठा था । आर्य जनता ने अपनी चिर-पोषित आर्य मर्यादा का पालन किया और आगे भी करेगी, किन्तु किसी के द्वारा किये गये अत्याचार को सहना उसने नही सीखा । इसलिये पूज्य महात्मा गान्धी आज दीपमाला निषिद्ध कराके देश को सन्देश दे रहे हैं कि तुम वीरो की भाँति मरना सीखो। बहुत सह चुके, अब सहने के दिन नही रहे । अब तो, अपने हाथो मे शस्त्र संभालो और शत्रु को दिखा दो कि निरपराधो पर अत्याचार किस प्रकार किये जाते है । हिंसा की बढती हुई बाढ को रोकने के लिये शस्त्रास्त्रो की आवश्यकता है । समझ लो हिसा को सहने वाला, हिसा को बढाने वाला है । जब तक शरीर में रक्त की एक बून्द भी शेष है, आगे बढ़ते चले जाओ । पग पीछे हटाना कातरता का लक्षण है । महात्मा गान्धी दुराचारी के दुराचार को मिटाकर दुराचारी को समाप्त करना चाहते है । दिवाली को बन्द कराके उनकी यह हृदय की घोषणा भारत के कोने-कोने मे पहुँच जानी चाहिये ।' इस प्रकार रावलपिण्डी मे स्थान-स्थान पर सभाये करके प्रसुप्त हिन्दु सिहो को महाराज ने जगा दिया, जिससे तत्स्थानीय यवनों के साहस परास्त होने प्रारम्भ हो गये और उस समय होने वाली दुर्घटनाये टल गईं ।' घास की तगी के कारण रोहतक की सरस्वती गोशाला को समाप्त. करने का समाचार जब महारा पढा तो ३०-११-४७ को पत्त्र डालकर यह अभिलाष व्यक्त किया कि आचार्य भगवान्देव जी वहाँ से पता लगाये, यदि गौवे अच्छी मिल रही है, तो हम यहाँ एक गोशाला खोल दे । सिन्ध सरकार द्वारा 'सत्यार्थप्रकाश' पर प्रतिबन्ध सत्यार्थ प्रकाश पर प्रतिबन्ध को वार्ता भारत वर्ष के समस्त आर्यजनो मे व्याप्त हो गई । यह स्मरणीय और उल्लेखनीय है कि जब-जब भी प्रार्य समाज पर सङ्कट के वादल छाये है, तब-तब समस्त भारत के आर्य समाजो ने मिलकर उन्हे छिन्न-भिन्न किया है । स्वामी आत्मानन्द सरस्वती ने उस अवसर पर आर्य समाज और यवन मत की तुलना करते हुये आर्य समाज के विषय को अगले शब्दो मे इस प्रकार अभिव्यक्त किया ।
रक्तपिपासु यवनो ने हिन्दुओं के साथ रक्त की होली खेली । हिन्दू जनता त्रायध्वम् - त्रायध्वम् पुकार उठी । मुस्लिम लीग से समझौते का पग बढाने वाली काँग्रेस का हृदय करुणा से काप उठा । महात्मा गान्धी ने दीपावली पर मनाई जाने वाली शोभाये सारे भारत के लिये निषिद्ध कर दी । तब स्वामी आत्मानन्द सरस्वती ने हिन्दु परिवारो के साथ हुये अत्याचार के विरोध मे महात्मा गान्धी के आदेश को दुहराते हुये रावलपिण्डी नगर में अनेक सभाये की, उनमे भाषण दिये और कहा - "पूज्य महात्मा गान्धी ने सवत् दो हज़ार तीन की इस दीपावली के दिन भारत को सन्देश भेजा है कि ऐ भरतवासियो ! आज दीपावली की प्रथा मना कर प्रसन्न होने का दिन नही है । आज तुम प्रसन्नता मनाने योग्य नही रहे । आज मर्यादा पुरुषोत्तन राम के विजय का दिवस नही है । विजय प्रसन्नता उन्ही के साथ विदा हो चुकी है । आज तो तुम पराजय दिवस मनाओ । भारत की सभ्यता और भारत का इतिहास अब तक यही बताता चला आ रहा है कि तुम निरपराधियों पर अत्याचार मत करो । उदाहरण के रूप मे हम शिवाजी के काल को ही लेते हैं । शिवाजी महाराज के काल मे आर्यकन्याओ पर यवनो ने अत्याचार की सीमा को अतिक्रान्त कर दिया था। इसके फलस्वरुप किसी साहसिक युवक ने राजदरबार की एक यवन कन्या शिवा जी मरहट्ठा के दरबार में लाकर उपस्थित कर दी । यदि उनकी दैत्य-दृष्टि होती, तो यवनो को भौति उस पर अत्याचार किया जा सकता था, परन्तु उस समय शिवा जी मरहठ्ठा को यदि किसी बात का दुःख हुआ, तो वह इस बात का कि प्राचीन आर्य सभ्यता को भुला कर, मेरे राज्य मे एक विजातीयअबला कन्या, जिसने स्त्री समाज मे किसी प्रकार की हानि नही पहुँचाई, एक क्षत्रिय वीर के द्वारा कैसे लाई गई । यह श्री आर्य सभ्यता जिसको भुलाकर राजनीतिक क्षेत्रो मे भी आज अत्याचारा की बोछार हो रही है । जहाँ निरपराध पर अत्याचार करना पाप है, वहां निरपराधो पर हुये अत्याचारो को सहते चले जाना घोर पाप है । रात्री के बारह बजे गङ्गा की रेती पर टहलते हुये सभ्यता के पुजारी महर्षि दयानन्द का हृदय अपने भारत के दुराचारमय समय को देखकर, अनेक अनाथो के भयङ्कर दृश्यो को देखकर और यह देखकर कि भारत अपनी सभ्यता को भूल कर दूसरो से सभ्यता सीखने के लिये नतमस्तक हो रहा है, कांप उठा था । आर्य जनता ने अपनी चिर-पोषित आर्य मर्यादा का पालन किया और आगे भी करेगी, किन्तु किसी के द्वारा किये गये अत्याचार को सहना उसने नही सीखा । इसलिये पूज्य महात्मा गान्धी आज दीपमाला निषिद्ध कराके देश को सन्देश दे रहे हैं कि तुम वीरो की भाँति मरना सीखो। बहुत सह चुके, अब सहने के दिन नही रहे । अब तो, अपने हाथो मे शस्त्र संभालो और शत्रु को दिखा दो कि निरपराधो पर अत्याचार किस प्रकार किये जाते है । हिंसा की बढती हुई बाढ को रोकने के लिये शस्त्रास्त्रो की आवश्यकता है । समझ लो हिसा को सहने वाला, हिसा को बढाने वाला है । जब तक शरीर में रक्त की एक बून्द भी शेष है, आगे बढ़ते चले जाओ । पग पीछे हटाना कातरता का लक्षण है । महात्मा गान्धी दुराचारी के दुराचार को मिटाकर दुराचारी को समाप्त करना चाहते है । दिवाली को बन्द कराके उनकी यह हृदय की घोषणा भारत के कोने-कोने मे पहुँच जानी चाहिये ।' इस प्रकार रावलपिण्डी मे स्थान-स्थान पर सभाये करके प्रसुप्त हिन्दु सिहो को महाराज ने जगा दिया, जिससे तत्स्थानीय यवनों के साहस परास्त होने प्रारम्भ हो गये और उस समय होने वाली दुर्घटनाये टल गईं ।' घास की तगी के कारण रोहतक की सरस्वती गोशाला को समाप्त. करने का समाचार जब महारा पढा तो तीस नवंबर सैंतालीस को पत्त्र डालकर यह अभिलाष व्यक्त किया कि आचार्य भगवान्देव जी वहाँ से पता लगाये, यदि गौवे अच्छी मिल रही है, तो हम यहाँ एक गोशाला खोल दे । सिन्ध सरकार द्वारा 'सत्यार्थप्रकाश' पर प्रतिबन्ध सत्यार्थ प्रकाश पर प्रतिबन्ध को वार्ता भारत वर्ष के समस्त आर्यजनो मे व्याप्त हो गई । यह स्मरणीय और उल्लेखनीय है कि जब-जब भी प्रार्य समाज पर सङ्कट के वादल छाये है, तब-तब समस्त भारत के आर्य समाजो ने मिलकर उन्हे छिन्न-भिन्न किया है । स्वामी आत्मानन्द सरस्वती ने उस अवसर पर आर्य समाज और यवन मत की तुलना करते हुये आर्य समाज के विषय को अगले शब्दो मे इस प्रकार अभिव्यक्त किया ।
NSCN IM की मांगों को कई बार किया खारिजरवि पहले टॉप सरकारी शख्सियत थे, जिन्होंने कई मौकों पर एनएससीएन-आईएम के एक अलग नागा ध्वज और संविधान की मांगों को खारिज कर दिया, जिससे नागा संगठन और केंद्र के वातार्कार के बीच कड़वाहट पैदा हो गई। केंद्र ने 3 अगस्त 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में एनएससीएन (आईएम) के साथ महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद, रवि नगालैंड और नागा समूहों के बीच बहुत लोकप्रिय हो गए। जुलाई 2019 में नगालैंड के राज्यपाल के रूप में उनकी नियुक्ति के बाद नागाओं ने उनका भव्य स्वागत किया गया था। मधुर संबंधों में आई खटासलेकिन एक साल के भीतर, थुइंगलेंग मुइवा के नेतृत्व वाले एनएससीएन-आईएम के साथ मधुर संबंधों में खटास आ गई। क्योंरि रवि ने उन मुद्दों को इंगित किया जो नागा बॉडी के अनुकूल नहीं थे। नागा समूहों के साथ शांति वार्ता 2020 की शुरुआत से ही बाधित हो गई है। क्योंकि एनएससीएन-आईएम ने रवि के साथ बातचीत करने से इनकार कर दिया। जिसके बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को नागा समूह के साथ बातचीत जारी रखने के लिए इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारियों की एक टीम को शामिल करने के लिए मजबूर होना पड़ा था। एनएससीएन-आईएम के नेताओं ने यह भी दावा किया कि रवि ने फ्रेमवर्क एग्रीमेंट (एफए) को तोड़-मरोड़ कर पेश किया और नागा मुद्दे को हल करने के लिए उठाए गए कदमों पर संसद की स्थायी समिति को गुमराह किया। एनएससीएन-आईएम ने बलपूर्वक शांति वार्ता के लिए सरकार से रवि को वातार्कार के रूप में बदलने का अनुरोध किया। नागा संगठनों के साथ अपने बिगड़ते संबंधों के बीच रवि ने जून 2020 में मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो को पत्र लिखा जिसमें उन्होंने आधा दर्जन से अधिक संगठित सशस्त्र गिरोहों द्वारा अनियंत्रित लूटपाट पर रोष व्यक्त किया। उन्होंने मुख्यमंत्री को सशस्त्र गिरोहों की अवैध गतिविधियों की ओर इशारा किया और उनके खिलाफ कार्रवाई का सुझाव दिया। डेटाबेस मुद्दे पर ठनी थीउन्होंने राज्य के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर भूमिगत संगठनों में राज्य सरकार के कर्मचारियों के परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों का एक डेटाबेस बनाने के लिए कहा था। रवि ने जनवरी 2020 में एक आदेश जारी किया, जिसमें उन सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई जो देश की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता को चुनौती देते हुए सोशल मीडिया पर देशद्रोही और विध्वंसक सामग्री पोस्ट करते हैं। रवि के जब राज्य सरकार और एनएससीएन-आईएम के साथ संबंध खराब हो गए तो सरकार ने उन्हें सितंबर 2021 में तमिलनाडु स्थानांतरित कर दिया और उन्होंने तुरंत नागा शांति वार्ता में वार्ताकार के रूप में अपने पद से इस्तीफा दे दिया। गृह मंत्रालय ने भी उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया। तमिलनाडु में रवि के स्थानांतरण ने एनएससीएन-आईएम और नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (एनडीपीपी) दोनों को राहत दी है जो सर्वदलीय संयुक्त जनतांत्रिक गठबंधन (यूडीए) सरकार का नेतृत्व कर रही हैं। 12 सदस्यों के साथ भाजपा यूडीए सरकार का हिस्सा है। रवि के जाने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इंटेलिजेंस ब्यूरो के पूर्व विशेष निदेशक एके मिश्रा को एनएससीएन-आईएम के साथ वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए सरकार के प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त किया। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने दीमापुर में नागा वार्ता पर बैठकों में भाग लिया। हिमंत बिस्वा सरमा नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (एनईडीए) के संयोजक भी हैं। राज्य सरकार के मामलों में पूर्व राज्यपाल के हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए सत्तारूढ़ एनडीपीपी के एक नेता ने कहा कि जिस तरह से रवि ने काम किया और नागा शांति वार्ता से निपटा, उससे राज्य सरकार बहुत नाखुश थी। एनएससीएन-आईएम के अलावा केंद्र आठ अन्य नागा सशस्त्र समूहों के साथ भी शांति वार्ता कर रहा है। एनएससीएन-आईएम ने 1997 में केंद्र के साथ युद्धविराम समझौता किया था और देश के भीतर और बाहर 80 से अधिक दौर की बातचीत की थी, लेकिन कुछ निर्णय नहीं निकला था। 2019 में रवि को शांति वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए पीबी आचार्य की जगह नगालैंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया था।
NSCN IM की मांगों को कई बार किया खारिजरवि पहले टॉप सरकारी शख्सियत थे, जिन्होंने कई मौकों पर एनएससीएन-आईएम के एक अलग नागा ध्वज और संविधान की मांगों को खारिज कर दिया, जिससे नागा संगठन और केंद्र के वातार्कार के बीच कड़वाहट पैदा हो गई। केंद्र ने तीन अगस्त दो हज़ार पंद्रह को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में एनएससीएन के साथ महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद, रवि नगालैंड और नागा समूहों के बीच बहुत लोकप्रिय हो गए। जुलाई दो हज़ार उन्नीस में नगालैंड के राज्यपाल के रूप में उनकी नियुक्ति के बाद नागाओं ने उनका भव्य स्वागत किया गया था। मधुर संबंधों में आई खटासलेकिन एक साल के भीतर, थुइंगलेंग मुइवा के नेतृत्व वाले एनएससीएन-आईएम के साथ मधुर संबंधों में खटास आ गई। क्योंरि रवि ने उन मुद्दों को इंगित किया जो नागा बॉडी के अनुकूल नहीं थे। नागा समूहों के साथ शांति वार्ता दो हज़ार बीस की शुरुआत से ही बाधित हो गई है। क्योंकि एनएससीएन-आईएम ने रवि के साथ बातचीत करने से इनकार कर दिया। जिसके बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को नागा समूह के साथ बातचीत जारी रखने के लिए इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारियों की एक टीम को शामिल करने के लिए मजबूर होना पड़ा था। एनएससीएन-आईएम के नेताओं ने यह भी दावा किया कि रवि ने फ्रेमवर्क एग्रीमेंट को तोड़-मरोड़ कर पेश किया और नागा मुद्दे को हल करने के लिए उठाए गए कदमों पर संसद की स्थायी समिति को गुमराह किया। एनएससीएन-आईएम ने बलपूर्वक शांति वार्ता के लिए सरकार से रवि को वातार्कार के रूप में बदलने का अनुरोध किया। नागा संगठनों के साथ अपने बिगड़ते संबंधों के बीच रवि ने जून दो हज़ार बीस में मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो को पत्र लिखा जिसमें उन्होंने आधा दर्जन से अधिक संगठित सशस्त्र गिरोहों द्वारा अनियंत्रित लूटपाट पर रोष व्यक्त किया। उन्होंने मुख्यमंत्री को सशस्त्र गिरोहों की अवैध गतिविधियों की ओर इशारा किया और उनके खिलाफ कार्रवाई का सुझाव दिया। डेटाबेस मुद्दे पर ठनी थीउन्होंने राज्य के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर भूमिगत संगठनों में राज्य सरकार के कर्मचारियों के परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों का एक डेटाबेस बनाने के लिए कहा था। रवि ने जनवरी दो हज़ार बीस में एक आदेश जारी किया, जिसमें उन सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई जो देश की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता को चुनौती देते हुए सोशल मीडिया पर देशद्रोही और विध्वंसक सामग्री पोस्ट करते हैं। रवि के जब राज्य सरकार और एनएससीएन-आईएम के साथ संबंध खराब हो गए तो सरकार ने उन्हें सितंबर दो हज़ार इक्कीस में तमिलनाडु स्थानांतरित कर दिया और उन्होंने तुरंत नागा शांति वार्ता में वार्ताकार के रूप में अपने पद से इस्तीफा दे दिया। गृह मंत्रालय ने भी उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया। तमिलनाडु में रवि के स्थानांतरण ने एनएससीएन-आईएम और नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी दोनों को राहत दी है जो सर्वदलीय संयुक्त जनतांत्रिक गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रही हैं। बारह सदस्यों के साथ भाजपा यूडीए सरकार का हिस्सा है। रवि के जाने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इंटेलिजेंस ब्यूरो के पूर्व विशेष निदेशक एके मिश्रा को एनएससीएन-आईएम के साथ वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए सरकार के प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त किया। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने दीमापुर में नागा वार्ता पर बैठकों में भाग लिया। हिमंत बिस्वा सरमा नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस के संयोजक भी हैं। राज्य सरकार के मामलों में पूर्व राज्यपाल के हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए सत्तारूढ़ एनडीपीपी के एक नेता ने कहा कि जिस तरह से रवि ने काम किया और नागा शांति वार्ता से निपटा, उससे राज्य सरकार बहुत नाखुश थी। एनएससीएन-आईएम के अलावा केंद्र आठ अन्य नागा सशस्त्र समूहों के साथ भी शांति वार्ता कर रहा है। एनएससीएन-आईएम ने एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे में केंद्र के साथ युद्धविराम समझौता किया था और देश के भीतर और बाहर अस्सी से अधिक दौर की बातचीत की थी, लेकिन कुछ निर्णय नहीं निकला था। दो हज़ार उन्नीस में रवि को शांति वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए पीबी आचार्य की जगह नगालैंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया था।
बुलंदशहर एनएच 91 पर बिलसुरी गांव के पास बुधवार को गाजियाबाद डिपो की बस पलट गई। घटना में एक महिला की मौत हो गई, जबकि दजर्नभर से अधिक यात्री घायल हो गए। मौके पर पहुंची पुलिस ने सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया। वहीं, मृतक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
बुलंदशहर एनएच इक्यानवे पर बिलसुरी गांव के पास बुधवार को गाजियाबाद डिपो की बस पलट गई। घटना में एक महिला की मौत हो गई, जबकि दजर्नभर से अधिक यात्री घायल हो गए। मौके पर पहुंची पुलिस ने सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया। वहीं, मृतक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
- #UjjainSawan 2023: प्रजा का हाल जानने निकलेंगे महाकाल, कहां कैसी रहेगी व्यवस्था, जानिए? धार्मिक नगरी उज्जैन में रविवार की देर शाम आंधी और तूफान के चलते महाकाल लोक में भारी नुकसान हुआ था, जहां आंधी और तूफान के चलते महाकाल लोक में स्थित सप्तर्षियों की मूर्ति के साथ ही कई और भी मूर्तियां क्षतिग्रस्त हो गई थी। वहीं अब आंधी और तूफान में मूर्तियों के क्षतिग्रस्त होने के चलते सियासत का सिलसिला तेज हो चला है, जहां कांग्रेस की ओर से प्रदेश सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए निशाना साधा गया है, तो वहीं अब कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कांग्रेस पर पलटवार किया है। आंधी और तूफान के चलते ही महाकाल लोक में हुए नुकसान पर कांग्रेस की ओर से सवाल उठने को लेकर गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि, कांग्रेस तो सिर्फ ट्विटर और टीवी तक रह गई है, पेपर तक रह गई है। आपदा में यही ढूंढते हैं यह लोग, मदद कभी नहीं करते। पूरे कोरोना काल में आपने कभी देखा था क्या? , कमलनाथ जी किसी जगह पर गए, एक जगह नहीं बता सकते, मध्यप्रदेश में कोरोना काल में किसी अस्पताल में, किसी राहत शिविर में, किसी को अनाज बांटते हुए, दवाई देते हुए कमलनाथ जी, दिग्विजय सिंह जी दिखे हो कभी, दिखे नहीं होंगे आपको, बाढ़ आई थी, मंदसौर की तरफ गए नहीं, और तो और ऊपर वल्लभ भवन में बैठे रहे नीचे तालाब में जवान चले गए थे हमारे नाव पलटने से मूर्ति विसर्जन की घटना थी। गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा की, आप सभी जानते हैं कि, बवंडर आया था। प्राकृतिक आपदा थी, पर इससे कोई दिक्कत इसलिए नहीं है, क्योंकि वह गारंटी पीरियड में है, पूरा की पूरा, और गारंटी पीरियड में होने के कारण वहां पर जो भी नुकसान होगा, वही ठेकेदार स्वयं पूर्व में बना कर देगा, फिर वही ठेकेदार उसकी मरम्मत करेगा। सारा कि सारा खर्चा भी उसी का रहेगा, 5 साल का पीरियड है, ऐसा नहीं कि अभी का पीरियड है। कुल मिलाकर देखा जाए तो आंधी और तूफान के चलते महाकाल लोक में हुए नुकसान के बाद अब सियासत का सिलसिला भी तेज हो चला है, जहां कांग्रेस की ओर से साधे जा रहे निशाने पर गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने पलटवार किया है।
- #UjjainSawan दो हज़ार तेईस: प्रजा का हाल जानने निकलेंगे महाकाल, कहां कैसी रहेगी व्यवस्था, जानिए? धार्मिक नगरी उज्जैन में रविवार की देर शाम आंधी और तूफान के चलते महाकाल लोक में भारी नुकसान हुआ था, जहां आंधी और तूफान के चलते महाकाल लोक में स्थित सप्तर्षियों की मूर्ति के साथ ही कई और भी मूर्तियां क्षतिग्रस्त हो गई थी। वहीं अब आंधी और तूफान में मूर्तियों के क्षतिग्रस्त होने के चलते सियासत का सिलसिला तेज हो चला है, जहां कांग्रेस की ओर से प्रदेश सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए निशाना साधा गया है, तो वहीं अब कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कांग्रेस पर पलटवार किया है। आंधी और तूफान के चलते ही महाकाल लोक में हुए नुकसान पर कांग्रेस की ओर से सवाल उठने को लेकर गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि, कांग्रेस तो सिर्फ ट्विटर और टीवी तक रह गई है, पेपर तक रह गई है। आपदा में यही ढूंढते हैं यह लोग, मदद कभी नहीं करते। पूरे कोरोना काल में आपने कभी देखा था क्या? , कमलनाथ जी किसी जगह पर गए, एक जगह नहीं बता सकते, मध्यप्रदेश में कोरोना काल में किसी अस्पताल में, किसी राहत शिविर में, किसी को अनाज बांटते हुए, दवाई देते हुए कमलनाथ जी, दिग्विजय सिंह जी दिखे हो कभी, दिखे नहीं होंगे आपको, बाढ़ आई थी, मंदसौर की तरफ गए नहीं, और तो और ऊपर वल्लभ भवन में बैठे रहे नीचे तालाब में जवान चले गए थे हमारे नाव पलटने से मूर्ति विसर्जन की घटना थी। गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा की, आप सभी जानते हैं कि, बवंडर आया था। प्राकृतिक आपदा थी, पर इससे कोई दिक्कत इसलिए नहीं है, क्योंकि वह गारंटी पीरियड में है, पूरा की पूरा, और गारंटी पीरियड में होने के कारण वहां पर जो भी नुकसान होगा, वही ठेकेदार स्वयं पूर्व में बना कर देगा, फिर वही ठेकेदार उसकी मरम्मत करेगा। सारा कि सारा खर्चा भी उसी का रहेगा, पाँच साल का पीरियड है, ऐसा नहीं कि अभी का पीरियड है। कुल मिलाकर देखा जाए तो आंधी और तूफान के चलते महाकाल लोक में हुए नुकसान के बाद अब सियासत का सिलसिला भी तेज हो चला है, जहां कांग्रेस की ओर से साधे जा रहे निशाने पर गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने पलटवार किया है।
06062018प्रादेशिक समाचार915 बजे मंत्रिमंडल प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक आज दोपहर बाद राज्य सचिवालय में होगी मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में आयोजित होने वाली इस बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने की संभावना है सूत्रों के अनुसार शिक्षा स्वास्थ्य और उद्योग सहित अन्य विभागों से जुड़े प्रस्तावों पर बैठक में चर्चा हो सकती है दौरा स्वास्थ्य व परिवार कल्याण विभाग सोलन के धर्मपुर खंड में मस्तिष्क ज्वर की विस्तृत जानकारी के लिए सूचना शिक्षा व संप्रेषण दल आईईसी द्वारा विभिन्न गांवों का दौरा किया किया गया इन गांवों में मस्तिष्क ज्वर से ग्रसित रोगी पाए गए थे सोलन के मुख्य चिकित्सा अधिकारी आरकेदरोच ने बताया कि इन टीमों ने लोगों को मस्तिष्क ज्वर की विस्तृत जानकारी दी साथ ही इस ज्वर के नए रोगी के संबंध में भी सूचना एकत्र की गई हालांकि कोई भी नया रोगी नहीं पाया गया है उन्होंने कहा कि कीट विज्ञान और महामारी विज्ञान के दल भी इस बीमारी के कारणों की जांच करेंगे दरोच ने बताया कि इस ज्वर को लेकर स्थिति नियंत्रण में है उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे इस बीमारी से भयभीत न हो और ज्वर की स्थिति में समीप के चिकित्सा केंद्र से संपर्क करें उन्होंने लोगों से घरों के आसपास पानी एकत्र न होने देने की सलाह दी ताकि मच्छरों को पनपने का स्थान न मिले हाईकोर्ट प्रदेश में स्थित राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में शिक्षकों की नियुक्ति में दिव्यांगजनों को आरक्षण नहीं दिए जाने पर उच्च न्यायालय के मुख्य कार्यकारी न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल ने विश्वविद्यालय के रजिस्टार से रिपोर्ट मांगी है दिव्यांगों के अधिकारों के लिए कार्य कर रही एक संस्था ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर दिव्यांगों को कानून के मुताबिक आरक्षण देने का आग्रह किया था मुख्य न्यायाधीश ने रजिस्ट्रार को मामले में उचित कार्रवाई कर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है उपायुक्त ऊना जिले में लोगों की समस्याओं को सुनने और उनके त्वरित निपटान के लिए अधिकारियों को मोबाईल नम्बर जारी किए गए हैं उपायुक्त राकेश कुमार प्रजापति ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य आम लोगों को आसानी से अधिकारियों की उपलब्धता सुनिश्चित बनाना है उन्होंने बताया कि तीन जून को जनमंच कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार ने तेरह अधिकारियों को मोबाईल नम्बर जारी किए मौसम राजधानी शिमला सहित प्रदेश के अधिकांश भागों में आज बादल छाए हुए हैं जबकि जनजातीय जिले किन्नौर में रूकरूक कर वर्षा हो रही है चंबा से हमारे प्रतिनिधि ने बताया कि जिले में बीती रात आंधी के साथ मुसलाधार बारिश हुई वहीं जिले के जड़ेरा इलाके में कल शाम आसमानी बिजली गिरने से दो छात्रों की मौत हो गई यह घटना तब घटी जब दोनों छात्र स्कूल से छुट्टी के बाद घर लौट रहे थे इस बीच मौसम विभाग ने आगामी चौबिस घंटों के दौरान राज्य के मैदानी और मध्यवर्ती इलाकों में कहींकहीं तेज हवाओं के साथ भारी ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की है एक नज़र अखबारों की सुर्खियों पर आज सभी समाचार पत्रों ने विश्व पर्यावरण दिवस पर मुख्यमंत्री की घोषणा से जुड़ी खबर को प्रमुखता दी है अमर उजाला की सुर्थी है थर्मोकोल के कपप्लेट पर लगेगा प्रतिबंधस्कूली बच्चों को मिलेगी स्टील की बोतलें पंजाब केसरी का शीर्षक है हिमाचल में थर्मोकोल के कपप्लेट पर पूर्ण प्रतिबंध दिव्य हिमाचल और दैनिक जागरण के लगभग एक जैसे शब्द हैं थर्मोकोल के गिलासप्लेटें बैन दैनिक भास्कर लिखता है हिमाचल थर्मोकोल की प्लेटों व गिलासों पर लगेगा बैन10 ठोस कचरा प्रबंधन संयत्र लगाए जाएंगे हिमाचल दस्तक का कहना है बैन होगा थर्मोकोल अजीत समाचार के मुताबिक स्कूली बच्चों को सरकार की ओर से दी जाएगी स्टील की बोतल बादल फटने से जुड़ी खबर पर पंजाब केसरी की सुर्थी है रामपुर में बादल फटा भारी नुकसान अमर उजाला का शीर्षक है रामपुर में बादल फटा घर गौशालाएं मलबे में दबे बगीचे तबाह दिव्य हिमाचल ने लिखा है रामपुर के दरशाल में बादल फटा कई घरों को नुकसान आपका फैसला के शब्द हैं रामपुर बुशहर के मतेलनी व दरशाल में बादल फटने से भारी तबाही दैनिक भास्कर की एक खबर है दस से प्रदेश के सारे मेडिकल कॉलेज मेडिकल यूनिवर्सिटी के अंडर होंगे दैनिक सवेरा टाइम्स शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज के हवाले से लिखता है हिमाचल के कॉलेजों में लागू होगी वार्षिक परीक्षा प्रणाली इसी पत्र की एक अन्य खबर है जंगीथोपनपोवारी प्राजेक्ट आबंटन पर फैसला आज आपका फैसला ने मुख्यमंत्री के हवाले से सुर्थी दी है मंडी के शाटाधार को ईको पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाएगा गुडिया मामले पर पंजाब केसरी लिखता है आरोपियों के खिलाफ सीबीआई कोर्ट में चलेगा ट्रायल जलसंकट में जयराम की मदद को उतरे मोदी शीर्षक से दिव्य हिमाचल लिखता है आज शिमला पहुंचेगी केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय की दो अलगअलग उच्च स्तरीय टीमें एक नजर सम्पादकीय पन्ने पर दैनिक जागरण ने अपने संपादकीय नाज है इनपर में पर्यावरण के क्षेत्र में बेहतरीन काम करने वाली संस्थाओं की सराहना की है दिव्य हिमाचल ने अपने संपादकीय खेल राज्य की ओर में लिखा है कि राज्य में राष्ट्रीय स्तर पर खेल का बेहतर माहौल बने
साठ लाख बासठ हज़ार अट्ठारहप्रादेशिक समाचारनौ सौ पंद्रह बजे मंत्रिमंडल प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक आज दोपहर बाद राज्य सचिवालय में होगी मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में आयोजित होने वाली इस बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने की संभावना है सूत्रों के अनुसार शिक्षा स्वास्थ्य और उद्योग सहित अन्य विभागों से जुड़े प्रस्तावों पर बैठक में चर्चा हो सकती है दौरा स्वास्थ्य व परिवार कल्याण विभाग सोलन के धर्मपुर खंड में मस्तिष्क ज्वर की विस्तृत जानकारी के लिए सूचना शिक्षा व संप्रेषण दल आईईसी द्वारा विभिन्न गांवों का दौरा किया किया गया इन गांवों में मस्तिष्क ज्वर से ग्रसित रोगी पाए गए थे सोलन के मुख्य चिकित्सा अधिकारी आरकेदरोच ने बताया कि इन टीमों ने लोगों को मस्तिष्क ज्वर की विस्तृत जानकारी दी साथ ही इस ज्वर के नए रोगी के संबंध में भी सूचना एकत्र की गई हालांकि कोई भी नया रोगी नहीं पाया गया है उन्होंने कहा कि कीट विज्ञान और महामारी विज्ञान के दल भी इस बीमारी के कारणों की जांच करेंगे दरोच ने बताया कि इस ज्वर को लेकर स्थिति नियंत्रण में है उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे इस बीमारी से भयभीत न हो और ज्वर की स्थिति में समीप के चिकित्सा केंद्र से संपर्क करें उन्होंने लोगों से घरों के आसपास पानी एकत्र न होने देने की सलाह दी ताकि मच्छरों को पनपने का स्थान न मिले हाईकोर्ट प्रदेश में स्थित राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में शिक्षकों की नियुक्ति में दिव्यांगजनों को आरक्षण नहीं दिए जाने पर उच्च न्यायालय के मुख्य कार्यकारी न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल ने विश्वविद्यालय के रजिस्टार से रिपोर्ट मांगी है दिव्यांगों के अधिकारों के लिए कार्य कर रही एक संस्था ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर दिव्यांगों को कानून के मुताबिक आरक्षण देने का आग्रह किया था मुख्य न्यायाधीश ने रजिस्ट्रार को मामले में उचित कार्रवाई कर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है उपायुक्त ऊना जिले में लोगों की समस्याओं को सुनने और उनके त्वरित निपटान के लिए अधिकारियों को मोबाईल नम्बर जारी किए गए हैं उपायुक्त राकेश कुमार प्रजापति ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य आम लोगों को आसानी से अधिकारियों की उपलब्धता सुनिश्चित बनाना है उन्होंने बताया कि तीन जून को जनमंच कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार ने तेरह अधिकारियों को मोबाईल नम्बर जारी किए मौसम राजधानी शिमला सहित प्रदेश के अधिकांश भागों में आज बादल छाए हुए हैं जबकि जनजातीय जिले किन्नौर में रूकरूक कर वर्षा हो रही है चंबा से हमारे प्रतिनिधि ने बताया कि जिले में बीती रात आंधी के साथ मुसलाधार बारिश हुई वहीं जिले के जड़ेरा इलाके में कल शाम आसमानी बिजली गिरने से दो छात्रों की मौत हो गई यह घटना तब घटी जब दोनों छात्र स्कूल से छुट्टी के बाद घर लौट रहे थे इस बीच मौसम विभाग ने आगामी चौबिस घंटों के दौरान राज्य के मैदानी और मध्यवर्ती इलाकों में कहींकहीं तेज हवाओं के साथ भारी ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की है एक नज़र अखबारों की सुर्खियों पर आज सभी समाचार पत्रों ने विश्व पर्यावरण दिवस पर मुख्यमंत्री की घोषणा से जुड़ी खबर को प्रमुखता दी है अमर उजाला की सुर्थी है थर्मोकोल के कपप्लेट पर लगेगा प्रतिबंधस्कूली बच्चों को मिलेगी स्टील की बोतलें पंजाब केसरी का शीर्षक है हिमाचल में थर्मोकोल के कपप्लेट पर पूर्ण प्रतिबंध दिव्य हिमाचल और दैनिक जागरण के लगभग एक जैसे शब्द हैं थर्मोकोल के गिलासप्लेटें बैन दैनिक भास्कर लिखता है हिमाचल थर्मोकोल की प्लेटों व गिलासों पर लगेगा बैनदस ठोस कचरा प्रबंधन संयत्र लगाए जाएंगे हिमाचल दस्तक का कहना है बैन होगा थर्मोकोल अजीत समाचार के मुताबिक स्कूली बच्चों को सरकार की ओर से दी जाएगी स्टील की बोतल बादल फटने से जुड़ी खबर पर पंजाब केसरी की सुर्थी है रामपुर में बादल फटा भारी नुकसान अमर उजाला का शीर्षक है रामपुर में बादल फटा घर गौशालाएं मलबे में दबे बगीचे तबाह दिव्य हिमाचल ने लिखा है रामपुर के दरशाल में बादल फटा कई घरों को नुकसान आपका फैसला के शब्द हैं रामपुर बुशहर के मतेलनी व दरशाल में बादल फटने से भारी तबाही दैनिक भास्कर की एक खबर है दस से प्रदेश के सारे मेडिकल कॉलेज मेडिकल यूनिवर्सिटी के अंडर होंगे दैनिक सवेरा टाइम्स शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज के हवाले से लिखता है हिमाचल के कॉलेजों में लागू होगी वार्षिक परीक्षा प्रणाली इसी पत्र की एक अन्य खबर है जंगीथोपनपोवारी प्राजेक्ट आबंटन पर फैसला आज आपका फैसला ने मुख्यमंत्री के हवाले से सुर्थी दी है मंडी के शाटाधार को ईको पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाएगा गुडिया मामले पर पंजाब केसरी लिखता है आरोपियों के खिलाफ सीबीआई कोर्ट में चलेगा ट्रायल जलसंकट में जयराम की मदद को उतरे मोदी शीर्षक से दिव्य हिमाचल लिखता है आज शिमला पहुंचेगी केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय की दो अलगअलग उच्च स्तरीय टीमें एक नजर सम्पादकीय पन्ने पर दैनिक जागरण ने अपने संपादकीय नाज है इनपर में पर्यावरण के क्षेत्र में बेहतरीन काम करने वाली संस्थाओं की सराहना की है दिव्य हिमाचल ने अपने संपादकीय खेल राज्य की ओर में लिखा है कि राज्य में राष्ट्रीय स्तर पर खेल का बेहतर माहौल बने
भोपाल। प्रदेश के किसानों को रबी 2017-18 में खाद की कमी से बचाने तथा जरूरत के मुताबिक समय पर खाद उपलब्ध कराने के लिए म. प्र. शासन कृषि विभाग ने उर्वरक अग्रिम भण्डारण योजना के तहत लक्ष्य जारी कर दिए हैं। जानकारी के मुताबिक रबी के लिए यह भण्डारण योजना गत 1 अगस्त से प्रारंभ हो गई है तथा 15 सितम्बर तक लागू रहेगी। ज्ञातव्य है कि शासन द्वारा राज्य में वर्ष 2012-13 से रसायनिक उर्वरकों की अग्रिम भण्डारण योजना स्वीकृत की गई थी। इसमें मुख्यतः डीएपी, कॉम्पलेक्स, यूरिया एवं पोटेशिक उर्वरक का भण्डारण किया जाता है। रबी में विपणन संघ के लिए 7 लाख 30 हजार मीट्रिक टन एवं प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के लिए 5 लाख 92 हजार मीट्रिक टन उर्वरक के अग्रिम भण्डारण का लक्ष्य तय किया गया है। इसके साथ ही किसानों के अग्रिम उठाव का लक्ष्य 4 लाख मीट्रिक टन से अधिक रखा गया है।
भोपाल। प्रदेश के किसानों को रबी दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह में खाद की कमी से बचाने तथा जरूरत के मुताबिक समय पर खाद उपलब्ध कराने के लिए म. प्र. शासन कृषि विभाग ने उर्वरक अग्रिम भण्डारण योजना के तहत लक्ष्य जारी कर दिए हैं। जानकारी के मुताबिक रबी के लिए यह भण्डारण योजना गत एक अगस्त से प्रारंभ हो गई है तथा पंद्रह सितम्बर तक लागू रहेगी। ज्ञातव्य है कि शासन द्वारा राज्य में वर्ष दो हज़ार बारह-तेरह से रसायनिक उर्वरकों की अग्रिम भण्डारण योजना स्वीकृत की गई थी। इसमें मुख्यतः डीएपी, कॉम्पलेक्स, यूरिया एवं पोटेशिक उर्वरक का भण्डारण किया जाता है। रबी में विपणन संघ के लिए सात लाख तीस हजार मीट्रिक टन एवं प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के लिए पाँच लाख बानवे हजार मीट्रिक टन उर्वरक के अग्रिम भण्डारण का लक्ष्य तय किया गया है। इसके साथ ही किसानों के अग्रिम उठाव का लक्ष्य चार लाख मीट्रिक टन से अधिक रखा गया है।
सरकारी बीमा कंपनी LIC ने एक बार अडानी ग्रुप (Adani Group) की कंपनियों पर भरोसा दिखाया है। कंपनी ने अडानी एंटरप्राजेज (Adani Enterprises) के लाखों शेयर मार्च तिमाही के दौरान खरीदे हैं। हिंडनबर्ग (Hindunberg Report) की एक रिपोर्ट ने अडानी ग्रुप (Adani Group) की कंपनियों को हिला कर रख दिया था। रिपोर्ट आने के बाद अडानी ग्रुप की सभी कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट देखने को मिली थी। जहां एक तरफ निवेशक अडानी ग्रुप की कंपनियों को साथ छोड़ रहे थे तो वहीं दूसरी तरफ संसद से सड़क तक इस रिपोर्ट को लेकर कोहराम मचा था। इस दौरान लगातार अडानी ग्रुप की कंपनियों में एलआईसी के निवेश पर सवाल खड़े किए जा रहे थे। लेकिन एलआईसी अपने निवेश और अडानी ग्रुप की कंपनियों के प्रदर्शन को लेकर कॉन्फिडेंट नजर आ रहा है। यही वजह है कि सरकारी बीमा कंपनी ने अडानी एंटरप्राइजेज (Adani Enterprises) के लाखों शेयर मार्च तिमाही के दौरान खरीदे हैं। अडानी एंटरप्राइजेज में एलआईसी की कितनी हुई हिस्सेदारी? (LIC Stake In Adani Enterprises) एलआईसी ने पिछले वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही में अडानी एंटरप्राइजेज के 3,57,500 शेयर खरीदे थे। इस खरीदारी के बाद अडानी एंटरप्राइजेज में एलआईसी की कुल हिस्सेदारी बढ़कर 4. 26 प्रतिशत हो गई है। जबकि दिसंबर 2023 तक अडानी एंटरप्राइजेज में एलआईसी की हिस्सेदारी 4. 26 प्रतिशत थी। सिर्फ एलाईसी ही नहीं अडानी एंटरप्राइजेज पर रिटेल निवेशकों ने भी भरोसा दिखाया है। ऐसे निवेशक जिनका इनवेस्टमेंट 2 लाख रुपये से कम उनकी कंपनी में हिस्सेदारी 3 गुना बढ़ गई है। रिटले निवेशकों की अडानी एंटरप्राइजेज में कुल हिस्सेदारी बढ़कर 3. 41 प्रतिशत हो गई है। बता दें, दिसंबर तिमाही तक अडानी एंटरप्राइजेज में रिटेल निवेशकों (2 लाख रुपये से कम का निवेश करने वाले) की कुल हिस्सेदारी 1. 86 प्रतिशत थी। अडानी एंटरप्राइजेज के अलावा अडानी ग्रीन नें रिटेल निवेशकों की हिस्सेदारी 1. 06 प्रतिशत से बढ़कर 2. 33 प्रतिशत हो गई है। अडानी पोर्ट्स में 2. 86 प्रतिशत से बढ़कर 4. 1 प्रतिशत, अम्बुजा सीमेंट में 5. 52 प्रतिशत से 7. 23 प्रतिशत और एनडीटीवी में 14. 11 प्रतिशत से बढ़कर 17. 54 प्रतिशत हिस्सेदारी हो गई है। इसके अलावा अडानी ट्रांसमिशन में 0. 77 प्रतिशत से बढ़कर 1. 36 प्रतिशत, अडानी विल्मर में 8. 94 प्रतिशत से बढ़कर 9. 49 प्रतिशत और अडानी टोटल गैस में रिेटेल निवेशकों की कुल हिस्सेदारी मार्च तिमाही में 1. 55 प्रतिशत से बढ़कर 2. 39 प्रतिशत हो गई है। अडानी एंटरप्राइजेज के अलावा एलआईसी ने अडानी ट्रांसमिशन, अडानी ग्रीन और अडानी टोटल गैस में भी अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। हालांकि, सरकारी बीमा कंपनी ने मार्च तिमाही में ही अडानी पोर्ट्स, एसीसी और अम्बुजा सीमेंट में अपने स्टेक को बेचा भी है।
सरकारी बीमा कंपनी LIC ने एक बार अडानी ग्रुप की कंपनियों पर भरोसा दिखाया है। कंपनी ने अडानी एंटरप्राजेज के लाखों शेयर मार्च तिमाही के दौरान खरीदे हैं। हिंडनबर्ग की एक रिपोर्ट ने अडानी ग्रुप की कंपनियों को हिला कर रख दिया था। रिपोर्ट आने के बाद अडानी ग्रुप की सभी कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट देखने को मिली थी। जहां एक तरफ निवेशक अडानी ग्रुप की कंपनियों को साथ छोड़ रहे थे तो वहीं दूसरी तरफ संसद से सड़क तक इस रिपोर्ट को लेकर कोहराम मचा था। इस दौरान लगातार अडानी ग्रुप की कंपनियों में एलआईसी के निवेश पर सवाल खड़े किए जा रहे थे। लेकिन एलआईसी अपने निवेश और अडानी ग्रुप की कंपनियों के प्रदर्शन को लेकर कॉन्फिडेंट नजर आ रहा है। यही वजह है कि सरकारी बीमा कंपनी ने अडानी एंटरप्राइजेज के लाखों शेयर मार्च तिमाही के दौरान खरीदे हैं। अडानी एंटरप्राइजेज में एलआईसी की कितनी हुई हिस्सेदारी? एलआईसी ने पिछले वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही में अडानी एंटरप्राइजेज के तीन,सत्तावन,पाँच सौ शेयर खरीदे थे। इस खरीदारी के बाद अडानी एंटरप्राइजेज में एलआईसी की कुल हिस्सेदारी बढ़कर चार. छब्बीस प्रतिशत हो गई है। जबकि दिसंबर दो हज़ार तेईस तक अडानी एंटरप्राइजेज में एलआईसी की हिस्सेदारी चार. छब्बीस प्रतिशत थी। सिर्फ एलाईसी ही नहीं अडानी एंटरप्राइजेज पर रिटेल निवेशकों ने भी भरोसा दिखाया है। ऐसे निवेशक जिनका इनवेस्टमेंट दो लाख रुपये से कम उनकी कंपनी में हिस्सेदारी तीन गुना बढ़ गई है। रिटले निवेशकों की अडानी एंटरप्राइजेज में कुल हिस्सेदारी बढ़कर तीन. इकतालीस प्रतिशत हो गई है। बता दें, दिसंबर तिमाही तक अडानी एंटरप्राइजेज में रिटेल निवेशकों की कुल हिस्सेदारी एक. छियासी प्रतिशत थी। अडानी एंटरप्राइजेज के अलावा अडानी ग्रीन नें रिटेल निवेशकों की हिस्सेदारी एक. छः प्रतिशत से बढ़कर दो. तैंतीस प्रतिशत हो गई है। अडानी पोर्ट्स में दो. छियासी प्रतिशत से बढ़कर चार. एक प्रतिशत, अम्बुजा सीमेंट में पाँच. बावन प्रतिशत से सात. तेईस प्रतिशत और एनडीटीवी में चौदह. ग्यारह प्रतिशत से बढ़कर सत्रह. चौवन प्रतिशत हिस्सेदारी हो गई है। इसके अलावा अडानी ट्रांसमिशन में शून्य. सतहत्तर प्रतिशत से बढ़कर एक. छत्तीस प्रतिशत, अडानी विल्मर में आठ. चौरानवे प्रतिशत से बढ़कर नौ. उनचास प्रतिशत और अडानी टोटल गैस में रिेटेल निवेशकों की कुल हिस्सेदारी मार्च तिमाही में एक. पचपन प्रतिशत से बढ़कर दो. उनतालीस प्रतिशत हो गई है। अडानी एंटरप्राइजेज के अलावा एलआईसी ने अडानी ट्रांसमिशन, अडानी ग्रीन और अडानी टोटल गैस में भी अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। हालांकि, सरकारी बीमा कंपनी ने मार्च तिमाही में ही अडानी पोर्ट्स, एसीसी और अम्बुजा सीमेंट में अपने स्टेक को बेचा भी है।
नई दिल्लीः पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर उछाल हो रहा है। इसकी स्थिर कीमतों में फिर से वृद्धि हो गई है। चारों महानगर की बात करें तो, दिल्ली में पेट्रोल 74. 80 रुपये प्रति लीटर, डीजल 66. 14 रुपये प्रति लीटर हो गया है। मुंबई में पेट्रोल 82. 65 रुपये प्रति लीटर और डीजल 70. 43 रुपये प्रति लीटर है। वहीं कोलकाता में पेट्रोल 77. 50 रुपये और डीजल 68. 68 रुपये प्रति लीटर हो गया है। चेन्नई में यह कीमत बढ़कर क्रमशः 77. 61 रुपये और 69. 79 रुपये प्रति लीटर हो गई है। पेट्रोल और डीजल के दामों में ताजा बढ़ोत्तरी को कर्नाटक चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। चुनाव खत्म होते ही वापिस कीमतों में वृद्धि हो गई है। कर्नाटक चुनाव से पहले यह खबर आई थी कि पेट्रोलियम कंपनियां अब दाम बाजार मूल्य के आधार पर नहीं तय करेंगी। यह परिवर्तन सरकार के इशारे पर हो रहा था। लेकिन अब चुनाव खत्म होते ही फिर सब मार्केट मूल्य के आधार पर होगा। 16 जून के परिवर्तन के बाद तेल की कीमत प्रतिदिन की बाजार कीमत के हिसाब से तय हो रही है। जबकि इसके पहले तेल कंपनियां हर पखवाड़े बाजार स्थिति के आधार पर कीमत तय करती थीं।
नई दिल्लीः पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर उछाल हो रहा है। इसकी स्थिर कीमतों में फिर से वृद्धि हो गई है। चारों महानगर की बात करें तो, दिल्ली में पेट्रोल चौहत्तर. अस्सी रुपयापये प्रति लीटर, डीजल छयासठ. चौदह रुपयापये प्रति लीटर हो गया है। मुंबई में पेट्रोल बयासी. पैंसठ रुपयापये प्रति लीटर और डीजल सत्तर. तैंतालीस रुपयापये प्रति लीटर है। वहीं कोलकाता में पेट्रोल सतहत्तर. पचास रुपयापये और डीजल अड़सठ. अड़सठ रुपयापये प्रति लीटर हो गया है। चेन्नई में यह कीमत बढ़कर क्रमशः सतहत्तर. इकसठ रुपयापये और उनहत्तर. उन्यासी रुपयापये प्रति लीटर हो गई है। पेट्रोल और डीजल के दामों में ताजा बढ़ोत्तरी को कर्नाटक चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। चुनाव खत्म होते ही वापिस कीमतों में वृद्धि हो गई है। कर्नाटक चुनाव से पहले यह खबर आई थी कि पेट्रोलियम कंपनियां अब दाम बाजार मूल्य के आधार पर नहीं तय करेंगी। यह परिवर्तन सरकार के इशारे पर हो रहा था। लेकिन अब चुनाव खत्म होते ही फिर सब मार्केट मूल्य के आधार पर होगा। सोलह जून के परिवर्तन के बाद तेल की कीमत प्रतिदिन की बाजार कीमत के हिसाब से तय हो रही है। जबकि इसके पहले तेल कंपनियां हर पखवाड़े बाजार स्थिति के आधार पर कीमत तय करती थीं।
लुधियाना : लुधियाना-चंडीगढ़ राजमार्ग पर स्थित गांव चकसरवननाथ के नजदीक एक भयानक सडक़ हादसे में पति-पत्नी और उनकी बेटी की मौत हो गई जबकि दो बेटे गंभीर जख्मी हुए है। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस चौकी कटानी कलां के इंचार्ज परमजीत सिंह अपने पुलिस मुलाजिम जसबीर सिंह, सुखदेव सिंह और गुरनाम सिंह समेत घटना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने घायल अवस्था में सवारियों को कार के शीशे तोडक़र बाहर निकाला। प्राप्त सूचना के मुताबिक 42 वर्षीय गुरविंद्र सिंह पुत्र राम सिंह निवासी शीलोकलां जिला लुधियाना अपनी कार में सवार होकर अपनी 40 वर्षीय पत्नी अनुराधा, एक 16 वर्षीय बेटी लवप्रीत और 14 वर्षीय बेटे मनप्रीत व 7 वर्षीय बेटे ओमकार के साथ सुबह साढ़े आठ बजे के करीब शीलोगांव से कुहाड़ा-समराला की तरफ जा रहे थे। अनुराधा ने समराला पहुंचकर अपने भाई को भाईदूज का तिलक लगाया और उसके बाद खुशियों भरा भाईदूज त्यौहार मनाया परंतु बुरी किस्मत, उनकी कार के सामने वापिस आते समय तेज रफतार पीआरटीसी फरीदकोट डिपो की बस आ भिड़ी, जिसकी चपेट में आते ही हाहाकार मच गई। पुलिस द्वारा मिली सूचना अनुसार घायलों को बड़ी मशक्त के उपरांत बाहर निकाला गया और जिस वक्त एम्बूलेंस द्वारा अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया जा रहा था, तो रास्ते में गुरिंद्र सिंह समेत उसकी धर्मपत्नी अनुराधा ने दम तोड़ दिया जबकि उनकी नाबालिग बेटी लवप्रीत भी कुछ वक्त अस्पताल में इलाज के दौरान जख्मों के दर्द को ना सहते हुए दम तोड़ गई। प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार बस चालक मौके से फरार हो गया। हवालदार मुंशी सुखदेव के मुताबिक पुलिस फरार बस चालक की तलाश में जुटी है और पुलिस ने मुकदमा दर्ज करके लाशों का पंचनामा तैयार करके पोस्टमार्टम हेतु अस्पताल भेज दिया है और मृतकों के वारिसों को इस अनहोनी की सूचना दे दी गई है। उधर संगरूर में हुए एक बड़े हादसे में बाप-बेटे समेत तीन लोगों की मौत हुई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार गांव भिंडरा के पास घटित एक सडक़ हादसे में बाप-बेटे व अन्य की मौत होने का समाचार है जबकि एक महिला गंभीर जख्मी हुई है, जिसको पीजीआई चंडीगढ़ में रेफर कर दिया गया है। पटियाला-बठिण्डा राजमार्ग पर स्थित हुए हादसे में पटियाला से संगरूर आ रही बस के पीछे आ रही एक जैन कार ने पहले मोटरसाइकिल सवार को टक्कर मारी और इसके बाद बस से जा भिड़ी। इस हादसे में मोटर साइकिल सवार 35 वर्षीय हरविंद्र सिंह और कार में सवार 80 वर्षीय अजीत सिंह और उसका बेटा 45 वर्षीय रमनदीप सिंह की मौत हो गई। मृतकों में बाप-बेटे पटियाला के रहने वाले बताएं जा रहे है जबकि मोटरसाइकिल सवार मृतक गांव लडडा का रहने वाला है। कार में 80 सवार महिला महिंद्र कौर पत्नी अजीत सिंह भी जख्मी है, जिसे गंभीर देखते हुए चंडीगढ़ रैफर कर दिया है। पुलिस स्टेशनस संगरूर के एसएचओ रंजीत सिंह ने स्पष्ट किया कि मामले की जांच जारी है।
लुधियाना : लुधियाना-चंडीगढ़ राजमार्ग पर स्थित गांव चकसरवननाथ के नजदीक एक भयानक सडक़ हादसे में पति-पत्नी और उनकी बेटी की मौत हो गई जबकि दो बेटे गंभीर जख्मी हुए है। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस चौकी कटानी कलां के इंचार्ज परमजीत सिंह अपने पुलिस मुलाजिम जसबीर सिंह, सुखदेव सिंह और गुरनाम सिंह समेत घटना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने घायल अवस्था में सवारियों को कार के शीशे तोडक़र बाहर निकाला। प्राप्त सूचना के मुताबिक बयालीस वर्षीय गुरविंद्र सिंह पुत्र राम सिंह निवासी शीलोकलां जिला लुधियाना अपनी कार में सवार होकर अपनी चालीस वर्षीय पत्नी अनुराधा, एक सोलह वर्षीय बेटी लवप्रीत और चौदह वर्षीय बेटे मनप्रीत व सात वर्षीय बेटे ओमकार के साथ सुबह साढ़े आठ बजे के करीब शीलोगांव से कुहाड़ा-समराला की तरफ जा रहे थे। अनुराधा ने समराला पहुंचकर अपने भाई को भाईदूज का तिलक लगाया और उसके बाद खुशियों भरा भाईदूज त्यौहार मनाया परंतु बुरी किस्मत, उनकी कार के सामने वापिस आते समय तेज रफतार पीआरटीसी फरीदकोट डिपो की बस आ भिड़ी, जिसकी चपेट में आते ही हाहाकार मच गई। पुलिस द्वारा मिली सूचना अनुसार घायलों को बड़ी मशक्त के उपरांत बाहर निकाला गया और जिस वक्त एम्बूलेंस द्वारा अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया जा रहा था, तो रास्ते में गुरिंद्र सिंह समेत उसकी धर्मपत्नी अनुराधा ने दम तोड़ दिया जबकि उनकी नाबालिग बेटी लवप्रीत भी कुछ वक्त अस्पताल में इलाज के दौरान जख्मों के दर्द को ना सहते हुए दम तोड़ गई। प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार बस चालक मौके से फरार हो गया। हवालदार मुंशी सुखदेव के मुताबिक पुलिस फरार बस चालक की तलाश में जुटी है और पुलिस ने मुकदमा दर्ज करके लाशों का पंचनामा तैयार करके पोस्टमार्टम हेतु अस्पताल भेज दिया है और मृतकों के वारिसों को इस अनहोनी की सूचना दे दी गई है। उधर संगरूर में हुए एक बड़े हादसे में बाप-बेटे समेत तीन लोगों की मौत हुई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार गांव भिंडरा के पास घटित एक सडक़ हादसे में बाप-बेटे व अन्य की मौत होने का समाचार है जबकि एक महिला गंभीर जख्मी हुई है, जिसको पीजीआई चंडीगढ़ में रेफर कर दिया गया है। पटियाला-बठिण्डा राजमार्ग पर स्थित हुए हादसे में पटियाला से संगरूर आ रही बस के पीछे आ रही एक जैन कार ने पहले मोटरसाइकिल सवार को टक्कर मारी और इसके बाद बस से जा भिड़ी। इस हादसे में मोटर साइकिल सवार पैंतीस वर्षीय हरविंद्र सिंह और कार में सवार अस्सी वर्षीय अजीत सिंह और उसका बेटा पैंतालीस वर्षीय रमनदीप सिंह की मौत हो गई। मृतकों में बाप-बेटे पटियाला के रहने वाले बताएं जा रहे है जबकि मोटरसाइकिल सवार मृतक गांव लडडा का रहने वाला है। कार में अस्सी सवार महिला महिंद्र कौर पत्नी अजीत सिंह भी जख्मी है, जिसे गंभीर देखते हुए चंडीगढ़ रैफर कर दिया है। पुलिस स्टेशनस संगरूर के एसएचओ रंजीत सिंह ने स्पष्ट किया कि मामले की जांच जारी है।
कहाँ कुछ करिश्मा खुदा ने दिखाया मुझे क्या? हार्दिक बधाई आदरणीय राजेश जी !बहुत सार गर्भित रचना! आ० सुशील सरना जी ,आपका तहे दिल से बहुत- बहुत शुक्रिया . आ० शेख़ उस्मानी जी ,आपको ये व्यंगात्मक ग़ज़ल पसंद आई आपका बहुत- बहुत शुक्रिया. वाह आदरणीया राजेश कुमारी जी नए साल को लक्ष्य कर लिखी इस सुंदर ग़ज़ल के लिए हार्दिक हार्दिक बधाई।
कहाँ कुछ करिश्मा खुदा ने दिखाया मुझे क्या? हार्दिक बधाई आदरणीय राजेश जी !बहुत सार गर्भित रचना! आशून्य सुशील सरना जी ,आपका तहे दिल से बहुत- बहुत शुक्रिया . आशून्य शेख़ उस्मानी जी ,आपको ये व्यंगात्मक ग़ज़ल पसंद आई आपका बहुत- बहुत शुक्रिया. वाह आदरणीया राजेश कुमारी जी नए साल को लक्ष्य कर लिखी इस सुंदर ग़ज़ल के लिए हार्दिक हार्दिक बधाई।
उत्तराखण्ड सरकार की प्रशासनिक सेवा में कार्यरत ललित मोहन रयाल का लेखन अपनी चुटीली भाषा और पैनी निगाह के लिए जाना जाता है. 2018 में प्रकाशित उनकी पुस्तक 'खड़कमाफी की स्मृतियों से' को आलोचकों और पाठकों की खासी सराहना मिली. उनकी दो अन्य पुस्तकें शीघ्र प्रकाश्य हैं. काफल ट्री के नियमित सहयोगी. इस बर्ताव पर टोके जाने पर चाचा बुरा मान जाते. खिसिया जाते. जागने वाला जानता था कि इनके साथ इस समय उज्र की, तो पूरी नींद खराब किए बिना नहीं मानेगा. शराबी की टेक. एक बार लग गई तो लग गई. मामला तूल पकड़े बिना नहीं रहेगा. डायलॉग भी जबान को मोड़ दे-देकर बोले हुए. जो समझने में वक्त बहुत माँगते थे. अतः श्रोता फौरन से पेश्तर उन्हें विदा करने में भलाई समझते. तूल पकड़ता मामला हमेशा लंबा खिंच जाता है. अतः स्थिति को सहज करते हुए कहते, "हाँ चाचा! बस तुम्हारी वजह से हम बेखटके सो पाते हैं. बस एक तुम्हारा ही सहारा है." यह सुनते ही चौकन्ने चाचा आश्वस्त होकर आगे बढ़ जाते. रोज किसी-न-किसी का नंबर लगाते. इस तरह से आधी रात में, मोहल्ले में शोर मचा- मचाकर, वे शांति- सुरक्षा स्थापित किए रहते थे. इस बात की उन्हें भरपूर तसल्ली सी रहती थी कि मेरे कारण बहुत कुछ होता है. वो तो मैंने सब संभाला हुआ है, वरना...' भूमंडल थामने पर जो तृप्ति और संतोष का भाव रहता है, वही भाव. साक्षात् शेषनाग वाली भावना. संभवतः इस तरह की कारगुजारी से उन्हें अपने अस्तित्व और अर्थ का बोध होता था. उनके मन को चैन मिलता बल्कि उनका मन-मयूर नाच उठता. उसी समय किसी फुरसतिए को उनसे चुहल करने की सूझी. तमाशाइयों की कमी न थी. कुछ तमाशा प्रेमियों ने तो उसका साथ देने का वचन भी दे दिया. अतः वह कुछ ही देर में पाँच-सात टॉर्च की व्यवस्था कर लाया. प्लॉट कुछ यूँ था- घनघोर अंधेरे में टॉर्च का फोकस, चाचा पर चमकाते हुए 'पुलिस आ गई, पुलिस आ गई' चिल्लाना था. तमाशा- प्रेमी इस योजना से अभिभूत थे. अतः योजनानुसार, कुछ फुरसतियों ने चोर-पुलिस का खेल खेलते हुए सभी टॉर्चों का फोकस, एकसाथ माइकल चाचा के ऊपर झोंक दिया और 'पुलिस आ गई, पुलिस आ गई' का शोर मचाना शुरू कर दिया. यह सुनकर माइकल चाचा के बगल में बैठी टोली, सरपट भाग निकली. चाचा की प्रेरणा के लिए इतना काफी था. रोशनी में स्पष्ट दिखाई पड़ा कि पहले तो चाचा के चेहरे पर हैरत भरे भाव उभरे. फिर आस-पड़ोस में मची भगदड़ को देखते हुए असमंजस का भाव. उनके चेतन से अचेतन तक खलबली मची हुई थी. चाचा के मुँह से निकला मर्मस्पर्शी उद्गार सबने सुना- 'पु...ई..स.' फिर उन्होंने उठने की भरसक कोशिश की, लेकिन हड़बड़ी में वे उठ न पाए. तो मजबूरी में उन्होंने घुटनों के बल ही दौड़ना चालू कर दिया. उनका यह भागने का प्रयास, एक किस्म का निष्फल प्रयास ही कहलाएगा. मुँह के बल लेटकर, कोई कितनी दूर तक भाग सकता है. हालाकि उन्होंने अनजाने में ही सही, नीचे- नीचे भागते हुए, भागने की कला में एक ऊँचे किस्म का प्रयोग दर्ज कर डाला. रेंगकर अथवा दंडवत् होकर दौड़ने का यह एक किस्म से अभिनव प्रयोग था. इस तरह से उन्होंने 'एथलेटिक्स' के क्षेत्र में न केवल एक नयी विधा का आविर्भाव किया अपितु तमाशबीनों का 'फ्री फंड' में अच्छा-खासा मनोरंजन भी किया. चाचा मौजी आदमी थे. दो-चार लोग हरदम उनके साथ लगे रहते थे. इसी वजह से उनके दोस्त कहलाते थे. खेतों के किनारे, नदी-किनारे अथवा जंगल-किनारे, वे अक्सर देशाटन के लिए निकल पड़ते. चूँकि ये स्थान एकांत में पड़ते थे और दुनिया की नजर से महफूज रहते थे. इन प्रोग्राम्स में अक्सर देशाटन-उद्देश्य गौण हो जाता था, इसके बरक्स आसव-पान का आकर्षण ज्यादा जोर मारने लगता था. शराबियों की दोस्ती थोड़ी अनूठे किस्म की होती है. किसी दोस्त ने डिमांड की नहीं कि, समकक्ष डिमांड पूरी करने को उतावले होने लगते हैं. भावुकता के दौरे पड़ने लगते हैं. पहले ही कुछ अंदर गया हो तो फिर क्या कहने. नशा, सचमुच थोड़ा सा कम पड़ा था. बस यूँ मानिये कि वे अभी सलीके से पैरों पर खड़े होने लायक बचे थे. जबतक 'भूपतित' होने की अवस्था को प्राप्त न हों, तबतक पिया तो क्या पिया. फलस्वरूप 'कुछ और 'व्यवस्था' होनी चाहिए' का आग्रह जोर मारने लगा. आम सहमति बनते ही 'ये दिल माँगे मोर' का जोर ठाठें मारने लगा. पर 'व्यवस्था' कहाँ से हो, किस तरह से हो' का प्रश्न अनुत्तरित ही रह गया. इसी उधेड़बुन में उन्होंने नदी किनारे नजर डाली. तभी एक हृष्ट-पुष्ट भैंसे ने एकसाथ उन सबका दिल चुरा लिया. 'जफड़ी' की नजर उस पर जाकर जमी रह गई. वे चुंबकीय आकर्षण से खिंचे-खिंचे उसकी ओर चल पड़े. पास पहुँचकर हर ऐंगल से उसका जायजा लिया. आसपास देखा. कोई रखवाला नजर न आया. नशे का असर चालू था, जिसे वे जारी रखने की गहरी हसरत पाले हुए थे. अतः इस समय वे किसी किस्म की रियायत के मूड में नहीं थे. सो उन्होंने उसका 'ज्वाइंट मालिक' बनने की ठान ली. शराब के प्रभाव में चमत्कारिक प्रतिभा और साहस को तो सभी विद्वान एकमत से सराहते आए हैं. परस्पर, हिम्मत की दाद देते-देते उन्हें थकान हो आई. अब सामूहिक निर्णय लेने में देरी करना मुनासिब नहीं था. नशे की गिरफ्त में निर्णय-क्षमता अद्भुत हो जाती है. सारी कायनात अपने कब्जे में लगने लगती है. एकस्वर से महिष महाराज का सौदा करने का निर्णय तय पाया गया. इस तरह की दोस्ती में एक खास बात पायी जाती है. आप चाहो न चाहो, साथ तो देना ही पड़ता है. शराबी यार, स्नेह उड़ेलकर प्यार जताते हैं. बात की शुरुआत 'अपने भाई के लिए जान लड़ाने' से करते हैं. आप चाहें न चाहें, ऐसे दोस्त आपको अपने मनचाहे मार्ग अर्थात् अपने सोचे हुए मार्ग पर घसीटते हुए ले चलते हैं. आपको मुरव्वत में साथ देना ही पड़ता है. इस प्रकार वह टोली महिष महाराज को हाँकने लगी. वे उसे हाँकते ही चले गए. शुरुआत में तो भैंसे ने टोह लेने की चेष्टा की. हाँकने वाले उसे 'मालिक' जैसे तो नहीं दिखे, न ही जान पहचान वाले लगे. फिर न जाने उसे क्या लगा कि उसने किसी किस्म का कोई विरोध या प्रतिरोध करने के बजाय, सहयोग करने की ठानी. 'चले चलते हैं, अपने बाप का क्या जाता है. यहाँ भी टहलना हैं. थोड़ा लंबा टहल आते हैं. आज लंबा रौंड ले ही लिया जाए.' की भावना के साथ वह आगे-आगे चलने लगा. उसका यह सहयोगात्मक रुख उन्हें काफी अच्छा लगा. बेचारे ने मारपीट की नौबत तक नहीं आने दी. इस तरह से खरामा-खरामा चलते-चलते वे हाइवे तक जा पहुँचे. वहीं पर एक 'झाला' था. जिसमें कुछ पशु-व्यापारी रहते थे. डौल जमते ही उन्होंने उसका सौदा कर डाला. क्रय-विक्रय के सिद्धांत के अधीन राशि हाथ लगी- नकद डेढ़ सौ रुपये. हार्ड कैश लेकर उसे व्यापारी के सुपुर्द कर दिया गया. सौदा निपटने तक उन्होंने नशे को किसी तरह से पेंडिंग में डाला हुआ था. जैसे ही रोकड़ा जेब में गया, मन एकदम ताजातरीन हो उठा. 'विटामिन एम' की महिमा यूँ ही निराली नहीं बताई जाती है. खोया हुआ कॉन्फिडेंस अपने आप लौट चला आता है. बात की बात में वे ठेके पर जा पहुँचे. दो बोतल खरीदी. बचे हुए पचास रुपए में मुर्ग-मुसल्लम. फौरन अपने पूर्व स्थान पर पहुँचकर उन्होंने पेंडिंग में रखे गए आमोद उत्सव को आगे बढाया और उसे पूरे रास-रंग के साथ संपन्न किया. भगवान बड़ा कारसाज़ है. उससे आगे का दृश्य कुछ यूँ बन पड़ा. "इससे तो कुछ भी साबित नी होया भई, कहाँ साबित होरा कि ये तेरा है." जानवरों में हमशक्ल होने और कइयों की एक जैसी सूरत होने की आशंका जाहिर करते हुए दरोगा जी ने उसे कड़ी फटकार लगाई. फिर उसे जवाब देने के लिए कुछ देर तक घूरा. हिंदी साहित्य में एक मूर्धन्य विद्वान ने काफी समय पहले यह सिद्धांत स्थापित किया था कि, 'पुलिस के घूरने भर से शरीर में नीलगू निशान उभर आते हैं.' इस हमले से वह उखड़ गया. हीरा की गवाही से वह पहले से ही उखड़ा हुआ था. फिर पुलिस के एकटक घूरने से तो अच्छे-अच्छे उखड़ जाते हैं. दरोगा जी तो डायरेक्ट एक्स-रे अल्ट्रावायलेट टाइप की किरणें फेंक रहे थे. अतः उसने हालात- हुलिया बयान करने में देर न की. खरीद की लिखी हुई कच्ची रसीद भी दिखाई और अतिरिक्त सूचना देते हुए बताया कि 'वे अच्छे-खासे सुरूर में थे और पैसे लेकर इसी तरफ आए.' यह सुनकर छोटे दरोगा अपनी पुलिस वाली रौ में आ गए. ठेका सामने ही पड़ता था. सेल्समैन छोकरे को बुलाकर उन्होंने पूछताछ शुरू की. हुलिए के आधार पर उसने भी ग्राहकों की तस्दीक की. चूल-से- चूल मिल चुकी थी. माल-मुकदमाती बरामद, इतने सारे चश्मदीद गवाह. पुलिस को और क्या चाहिए. क्राइम केस टोटली सॉल्व था, बस मुलजिमान के नाम भर पता लगाने शेष थे. उधर माइकल चाचा और उनकी टोली को न तो इस डेवलपमेंट की सूचना थी, ना ही चिंता. वे साधनारत थे और आनंद में गले-गले तक डूबे हुए थे. दोस्ती परवान चढ़ती जा रही थी. भैंसा मालिक की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया. नाम-पता मालूम न थे, इसलिए अभियुक्त के कॉलम में 'अज्ञात' दर्ज कर लिया गया. उसे 'ज्ञात' में बदलना तो पुलिस के लिए बाएँ हाथ का खेल था. कुछ ही देर में नाम-पता मालूम चलते ही मुकदमे का सिलसिला चल निकला. पुलिस ने सबसे पहले 'क्राइम स्पॉट' अर्थात् उस स्थान का मुआयना करना जरूरी समझा, जहाँ पर भैंसा चर रहा था. पुलिस जब वहाँ पहुंची तो उन्हें इस बात पर घोर आश्चर्य हुआ कि मुलजिमान मौके से नदारद थे. हाँ, उत्सव-स्थल अवशेषों से जरूर खचाखच भरा हुआ मिला. शायद तुरीयावस्था में ही उन्हें किसी अनहोनी के संकेत मिल चुके थे. सिग्नल पाते ही वे घटनास्थल से फौरन रफूचक्कर हो लिए. पुलिस डेरा डाले रही. माइकल चाचा न तो घर पर मिले, न बाहर. पुलिस सोचती रही- 'कौन गली गए मोरे श्याम.' बीट के पुलिस-प्रवक्ता के मुताबिक वे किसी अप्रत्याशित दिशा में भाग निकले. फिर भी उन्होंने तलाशी में कोई कसर नहीं रख छोड़ी. तो पुलिस, माइकल चाचा को गलियन में, कूजन में, बगियन में ढ़ूँढने लगी. उधर माइकल चाचा नाचते-कूदते, जंगल-जंगल प्रकृति से साक्षात्कार करते रहे. वैसे भी वे तो पैदाइशी देशाटन-प्रेमी थे. पूस का महीना. रात की भयंकर ठण्ड. पेड़ ओस से भीगे होते थे. पत्तियों से पानी टपकता रहता. इस मौसम में माइकल चाचा फरारी काट रहे थे. मजेदार और हैरतअंगेज बात यह थी कि वे फरारी की औपचारिकताओ के बीच में छुप-छुपाकर देर रात मोहल्ले में पहुँचते. हिचकिचाहट का नामोनिशान तक नहीं. हाँ, हिचकियाँ लेते हुए मुहल्ले वालों को जरूर चेता जाते, भले ही प्रत्येक संवाद को वे किश्तों में पूरा करते हों, लेकिन थे 'कमिटेड' किस्म के इनसान. हाड़कँपाती सर्दी में भी चिल्ला-चिल्लाकर लोगों को सजग कर जाते. इन दिनों कुछ ज्यादा जोर से चिल्लाने लगे थे. ज्यादा उछलकूद से शायद उनकी सर्दी भाग जाती हो. मौका मिलते ही वे न जाने किस कौशल से अपनी 'यूनीक' जिम्मेदारी निभा जाते. लंबे समय तक नदारद रहना या चुप रहना शायद उनकी तासीर के विरुद्ध पड़ता था. लोग उनकी इसी अदा के कायल थे. इन परिस्थितियों में उनके विरोधी भी उनकी इस तरह की 'स्पिरिट' को सच्ची और 'जेनुइन' मानने को बाध्य हुए. इस बीच ब्रेकिंग खबर आई कि माइकल चाचा ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया है. फिर एक और सनसनीखेज खबर आई कि उन्हें 'बेल' मिल गई है. इन उपलब्धियों से, लोगों पर उनका आदर मिश्रित भय छाने लगा. किस्मत का फेर देखिए कि इस बीच उनसे एक भारी भूल हो गई. अपने यायावर स्वभाव के चलते वे 'बेल जंप' कर बैठे. इससे पहले उन्हें किसी मुकदमे का व्यक्तिगत अनुभव था भी नहीं. वो तो बस एक बार इस झमेले में पड़े कि बस पड़े ही रह गए. कोर्ट ने उन पर सख्त पाबंदियाँ लगा दीं. उन पर लगातार सख्त निगरानी रखी जा रही थी. उनके मुकाम छोड़ने की सख्त मुमानियत कर दी गई थी. इन प्रतिबंधों के बावजूद उनका 'नाइट शो' बदस्तूर जारी रहा- 'शो मस्ट गो ऑन.' लड़के मजाक में कहते, "यार सुना! कोर्ट के ऑर्डर से माइकल चाचा का पासपोर्ट जब्त हो गया है. बहुत सख्त जमाना आ गया है." दरअसल उन दिनों किसी सिनेमा-सेलिब्रिटी के विदेश जाने पर रोक लगी हुई थी. हालांकि उन्हें मृत्युभोज- तेरहवीं-श्राद्ध के कांट्रैक्ट खूब मिलते रहे. कभी-कभार मुंडन और कर्णबेधन के भी. लेकिन उनकी इस फितरत के चलते लोगों ने उन्हें वैवाहिक कार्यक्रमों से दूर रखना ही श्रेयस्कर समझा. कैरियर में लगे दाग से चाचा चिंतातुर थे. तनाव में एकदम परेशान. एकदिन अंधेरे में, उसी हरे-भरे मैदान में माइकल चाचा अपने फेवरेट पोज में प्रकट हुए. मात्र अभ्यास के सहारे, वे उस टोली की तरफ बढ़े, जहाँ उनके भतीजे के होने की सबसे अधिक संभावना थी. चाचा आहिस्ते से अपने भतीजे के पहलू में जाकर बैठ गए. चल रही बातचीत में उन्होंने विघ्न नहीं डाला. धैर्य से प्रतीक्षा की. प्रसंग समाप्त होते ही चाचा ने भतीजे की कोहनी झकझोर कर पूछा, चाचा नशे में चूर थे. उस अंधेरे में वे स्वयं नहीं दिखाई पड़ रहे थे. हाथ की लकीरें कहाँ से दिखती. फिर भी भतीजे ने चाचा की श्रद्धा का अनादर नहीं किया. चाचा की हथेली थपथपाकर कहा, "है चाचा, है. हंड्रेड परसेंट है." फिर चाचा को समझाया-बुझाया. "हाँ, चाचा तुम्हारे हाथ में तुम्हारी मनचाही लाईन है. उससे तुम्हारा मनचाहा काम भी हो जाएगा." कहकर चाचा को विदा किया. चाचा के जाने की बाद फुरसतिया 'गॉसिप' चल निकली. नजारा कुछ यूँ था- अनुमान के आधार पर निष्कर्ष यह निकला कि चाचा का इंगित महिष-स्वामी की तरफ जान पड़ता है. माइकल चाचा मुकदमे से बचते रहे. पेशी पड़ने पर कभी हाजिर नहीं हुए. समन पर नहीं गए. वारंट पर मिले नहीं. वस्तुतः उनकी दिलचस्पी, मुकदमे से ज्यादा, महिषस्वामी में होकर रह गई थी. वैसे उससे ज्यादा उम्मीदें भी नहीं रखते थे. बस सीधे धावा और आमने-सामने की मुठभेड़. लंबे समय तक इसे वे अपनी 'छोटी सी हसरत' मानते रहे. महिषस्वामी की किस्मत शायद ज्यादा बुलंद थी. वो कभी हत्थे ही नहीं चढ़ा. इधर माइकल चाचा के खिलाफ कुर्की का ऑर्डर चल निकला. माइकल चाचा अंतर्धान. सरकारी अमला कुर्की के इरादे से उनके घर तक आ पहुँचा. उन्होंने पूरे घर की तलाशी ली. कुछ भी नहीं मिला. आखिर में वे उनकी 'ख्वाबगाह' में गए. एक प्रागैतिहासिक चारपाई और तीन टाँग की कुरसी. कुल मिलाकर यही साजोसामान निकला. 'चल संपत्ति' के नाम पर यही सबकुछ था. अपनी 'प्रिय पुलिस' के लिए फरारी से पहले वे यही 'धरोहर' छोड़ गए थे. 'पार्टी' की माली हालत का अंदाजा लगाकर, 'इंचार्ज' की आँखें भर आई. हालांकि तमाशबीनों के मुताबिक इस 'विपन्नता' के पीछे कुछ होशियारी थी और कुछ सच्चाई. बहरहाल कारिंदे भुनभुनाते रहे. उनका आधा दिन बर्बाद हुआ था. इंचार्ज ने तो खीझ में आकर टुटही कुर्सी की एक और टाँग तोड़ दी. कुर्की का क्षोभ कुर्सी पर उतरा. इस प्रकार, कुर्की की सांकेतिक रस्म अदायगी संपन्न हुई. चलते-चलते 'इंचार्ज' ने अपने हमराह से एकदम दुनियादारी वाली बात कही, "आँख खोल के देख ले. 'बिन घरनी घर भूत का डेरा." उसकी यह ऑब्जर्वेशन एकदम दुरुस्त निकली. दरअसल चार-पाँच वर्षों से चाचा की गृहस्थी 'डग्गर-मग्गर' चल रही थी. हल्के-फुल्के गृहयुद्ध के बाद चाची, मायके जा बैठी. पाँच साल पूरे होने को थे. कोई निबाहे भी, तो किस सीमा तक. उनके जाते ही, जो रही-सही रोक-टोक थी, वो भी खत्म हो गई. चाचा सटाक से 'फ्रीलांसर' हो गए और फिर तरक्की करते हुए 'माइकल चाचा' बन बैठे. समय ने फिर तेजी से करवट बदली. चाची वापस आ गई. आते ही गृहस्थी की बागडोर अपने हाथों में ले ली. मुखरा होकर लौटी थीं. जिरह करने में दक्ष. जरा भी आयँ-बायँ करने पर आड़े हाथों लेती. बचकाने जवाब एकदम पकड़ लेतीं. जिसे चाचा अपना 'आंका-बांका' जीवन समझते थे, चाची उसे मुँह पर ही 'गोरखधंधा' कहती. जिसे चाचा 'स्टंट' कहते, उसे चाची उनके 'बेमतलब और बेफजूल' काम कहती थी. कुल मिलाकर, चाची उनके प्रसिद्ध नाम माइकल का 'टैग' उतारने को कटिबद्ध थी. देरी से लौटने पर धुंआधार 'रैगिंग' लेती. उनके पीने पर, रणचंडी बन जाती. इस बीच उनकी नासिका, नासिका न होकर 'अल्कोमीटर' बन चुकी थी. वास्तविक खतरे को देखते हुए, चाचा बदल-बदलकर रणनीति अपनाते, लेकिन हरबार पकड़े जाने लगे. अकेले में, 'धत्तेरे की..' बोलते. स्वर में झुँझलाहट. दोनों में काफी समय तक मानसिक दाँवपेंच चलते रहे. चाचा चुप्पी साधे रहते. आत्मग्लानि से घिरे रहते. वे अंतर्मन से महसूस करने लगे थे कि, वह घर सँवारने को दिन-रात खटती है. खेती-बाड़ी देखती है और गाय-भैंस भी. भावना और आवेग में आकर वे पहले ही बहुत कुछ खो चुके थे. क्षमायाचना और शर्मिंदगी की मुद्रा में कोई कितने दिन रह सकता है. उन्होंने अच्छे से जान लिया कि इसबार वह रियायत के मूड में नहीं है. तंग आकर चाचा सीधी राह चलने लगे और इनसान बन गए. चौबीस इंची साइकिल पर सवारी गाँठते हुए चाचा जब काम पर जाते, तो विश्वास ही नहीं होता था कि, ये वही 'हैरतअंगेज कारनामे' वाले माइकल चाचा हैं. चाचा का नजरिया बदल गया. सार्वजनिक जीवन से निजी जीवन में उन्होंने भयंकर 'यूटर्न' लिया. अब वे खानसामे का काम करने लगे. पूरी शिद्दत से. बंधे-बंधाये रुटीन का काम. कभी-कभी, 'वीकेंड' पर 'फ्रीलांसिंग' भी.
उत्तराखण्ड सरकार की प्रशासनिक सेवा में कार्यरत ललित मोहन रयाल का लेखन अपनी चुटीली भाषा और पैनी निगाह के लिए जाना जाता है. दो हज़ार अट्ठारह में प्रकाशित उनकी पुस्तक 'खड़कमाफी की स्मृतियों से' को आलोचकों और पाठकों की खासी सराहना मिली. उनकी दो अन्य पुस्तकें शीघ्र प्रकाश्य हैं. काफल ट्री के नियमित सहयोगी. इस बर्ताव पर टोके जाने पर चाचा बुरा मान जाते. खिसिया जाते. जागने वाला जानता था कि इनके साथ इस समय उज्र की, तो पूरी नींद खराब किए बिना नहीं मानेगा. शराबी की टेक. एक बार लग गई तो लग गई. मामला तूल पकड़े बिना नहीं रहेगा. डायलॉग भी जबान को मोड़ दे-देकर बोले हुए. जो समझने में वक्त बहुत माँगते थे. अतः श्रोता फौरन से पेश्तर उन्हें विदा करने में भलाई समझते. तूल पकड़ता मामला हमेशा लंबा खिंच जाता है. अतः स्थिति को सहज करते हुए कहते, "हाँ चाचा! बस तुम्हारी वजह से हम बेखटके सो पाते हैं. बस एक तुम्हारा ही सहारा है." यह सुनते ही चौकन्ने चाचा आश्वस्त होकर आगे बढ़ जाते. रोज किसी-न-किसी का नंबर लगाते. इस तरह से आधी रात में, मोहल्ले में शोर मचा- मचाकर, वे शांति- सुरक्षा स्थापित किए रहते थे. इस बात की उन्हें भरपूर तसल्ली सी रहती थी कि मेरे कारण बहुत कुछ होता है. वो तो मैंने सब संभाला हुआ है, वरना...' भूमंडल थामने पर जो तृप्ति और संतोष का भाव रहता है, वही भाव. साक्षात् शेषनाग वाली भावना. संभवतः इस तरह की कारगुजारी से उन्हें अपने अस्तित्व और अर्थ का बोध होता था. उनके मन को चैन मिलता बल्कि उनका मन-मयूर नाच उठता. उसी समय किसी फुरसतिए को उनसे चुहल करने की सूझी. तमाशाइयों की कमी न थी. कुछ तमाशा प्रेमियों ने तो उसका साथ देने का वचन भी दे दिया. अतः वह कुछ ही देर में पाँच-सात टॉर्च की व्यवस्था कर लाया. प्लॉट कुछ यूँ था- घनघोर अंधेरे में टॉर्च का फोकस, चाचा पर चमकाते हुए 'पुलिस आ गई, पुलिस आ गई' चिल्लाना था. तमाशा- प्रेमी इस योजना से अभिभूत थे. अतः योजनानुसार, कुछ फुरसतियों ने चोर-पुलिस का खेल खेलते हुए सभी टॉर्चों का फोकस, एकसाथ माइकल चाचा के ऊपर झोंक दिया और 'पुलिस आ गई, पुलिस आ गई' का शोर मचाना शुरू कर दिया. यह सुनकर माइकल चाचा के बगल में बैठी टोली, सरपट भाग निकली. चाचा की प्रेरणा के लिए इतना काफी था. रोशनी में स्पष्ट दिखाई पड़ा कि पहले तो चाचा के चेहरे पर हैरत भरे भाव उभरे. फिर आस-पड़ोस में मची भगदड़ को देखते हुए असमंजस का भाव. उनके चेतन से अचेतन तक खलबली मची हुई थी. चाचा के मुँह से निकला मर्मस्पर्शी उद्गार सबने सुना- 'पु...ई..स.' फिर उन्होंने उठने की भरसक कोशिश की, लेकिन हड़बड़ी में वे उठ न पाए. तो मजबूरी में उन्होंने घुटनों के बल ही दौड़ना चालू कर दिया. उनका यह भागने का प्रयास, एक किस्म का निष्फल प्रयास ही कहलाएगा. मुँह के बल लेटकर, कोई कितनी दूर तक भाग सकता है. हालाकि उन्होंने अनजाने में ही सही, नीचे- नीचे भागते हुए, भागने की कला में एक ऊँचे किस्म का प्रयोग दर्ज कर डाला. रेंगकर अथवा दंडवत् होकर दौड़ने का यह एक किस्म से अभिनव प्रयोग था. इस तरह से उन्होंने 'एथलेटिक्स' के क्षेत्र में न केवल एक नयी विधा का आविर्भाव किया अपितु तमाशबीनों का 'फ्री फंड' में अच्छा-खासा मनोरंजन भी किया. चाचा मौजी आदमी थे. दो-चार लोग हरदम उनके साथ लगे रहते थे. इसी वजह से उनके दोस्त कहलाते थे. खेतों के किनारे, नदी-किनारे अथवा जंगल-किनारे, वे अक्सर देशाटन के लिए निकल पड़ते. चूँकि ये स्थान एकांत में पड़ते थे और दुनिया की नजर से महफूज रहते थे. इन प्रोग्राम्स में अक्सर देशाटन-उद्देश्य गौण हो जाता था, इसके बरक्स आसव-पान का आकर्षण ज्यादा जोर मारने लगता था. शराबियों की दोस्ती थोड़ी अनूठे किस्म की होती है. किसी दोस्त ने डिमांड की नहीं कि, समकक्ष डिमांड पूरी करने को उतावले होने लगते हैं. भावुकता के दौरे पड़ने लगते हैं. पहले ही कुछ अंदर गया हो तो फिर क्या कहने. नशा, सचमुच थोड़ा सा कम पड़ा था. बस यूँ मानिये कि वे अभी सलीके से पैरों पर खड़े होने लायक बचे थे. जबतक 'भूपतित' होने की अवस्था को प्राप्त न हों, तबतक पिया तो क्या पिया. फलस्वरूप 'कुछ और 'व्यवस्था' होनी चाहिए' का आग्रह जोर मारने लगा. आम सहमति बनते ही 'ये दिल माँगे मोर' का जोर ठाठें मारने लगा. पर 'व्यवस्था' कहाँ से हो, किस तरह से हो' का प्रश्न अनुत्तरित ही रह गया. इसी उधेड़बुन में उन्होंने नदी किनारे नजर डाली. तभी एक हृष्ट-पुष्ट भैंसे ने एकसाथ उन सबका दिल चुरा लिया. 'जफड़ी' की नजर उस पर जाकर जमी रह गई. वे चुंबकीय आकर्षण से खिंचे-खिंचे उसकी ओर चल पड़े. पास पहुँचकर हर ऐंगल से उसका जायजा लिया. आसपास देखा. कोई रखवाला नजर न आया. नशे का असर चालू था, जिसे वे जारी रखने की गहरी हसरत पाले हुए थे. अतः इस समय वे किसी किस्म की रियायत के मूड में नहीं थे. सो उन्होंने उसका 'ज्वाइंट मालिक' बनने की ठान ली. शराब के प्रभाव में चमत्कारिक प्रतिभा और साहस को तो सभी विद्वान एकमत से सराहते आए हैं. परस्पर, हिम्मत की दाद देते-देते उन्हें थकान हो आई. अब सामूहिक निर्णय लेने में देरी करना मुनासिब नहीं था. नशे की गिरफ्त में निर्णय-क्षमता अद्भुत हो जाती है. सारी कायनात अपने कब्जे में लगने लगती है. एकस्वर से महिष महाराज का सौदा करने का निर्णय तय पाया गया. इस तरह की दोस्ती में एक खास बात पायी जाती है. आप चाहो न चाहो, साथ तो देना ही पड़ता है. शराबी यार, स्नेह उड़ेलकर प्यार जताते हैं. बात की शुरुआत 'अपने भाई के लिए जान लड़ाने' से करते हैं. आप चाहें न चाहें, ऐसे दोस्त आपको अपने मनचाहे मार्ग अर्थात् अपने सोचे हुए मार्ग पर घसीटते हुए ले चलते हैं. आपको मुरव्वत में साथ देना ही पड़ता है. इस प्रकार वह टोली महिष महाराज को हाँकने लगी. वे उसे हाँकते ही चले गए. शुरुआत में तो भैंसे ने टोह लेने की चेष्टा की. हाँकने वाले उसे 'मालिक' जैसे तो नहीं दिखे, न ही जान पहचान वाले लगे. फिर न जाने उसे क्या लगा कि उसने किसी किस्म का कोई विरोध या प्रतिरोध करने के बजाय, सहयोग करने की ठानी. 'चले चलते हैं, अपने बाप का क्या जाता है. यहाँ भी टहलना हैं. थोड़ा लंबा टहल आते हैं. आज लंबा रौंड ले ही लिया जाए.' की भावना के साथ वह आगे-आगे चलने लगा. उसका यह सहयोगात्मक रुख उन्हें काफी अच्छा लगा. बेचारे ने मारपीट की नौबत तक नहीं आने दी. इस तरह से खरामा-खरामा चलते-चलते वे हाइवे तक जा पहुँचे. वहीं पर एक 'झाला' था. जिसमें कुछ पशु-व्यापारी रहते थे. डौल जमते ही उन्होंने उसका सौदा कर डाला. क्रय-विक्रय के सिद्धांत के अधीन राशि हाथ लगी- नकद डेढ़ सौ रुपये. हार्ड कैश लेकर उसे व्यापारी के सुपुर्द कर दिया गया. सौदा निपटने तक उन्होंने नशे को किसी तरह से पेंडिंग में डाला हुआ था. जैसे ही रोकड़ा जेब में गया, मन एकदम ताजातरीन हो उठा. 'विटामिन एम' की महिमा यूँ ही निराली नहीं बताई जाती है. खोया हुआ कॉन्फिडेंस अपने आप लौट चला आता है. बात की बात में वे ठेके पर जा पहुँचे. दो बोतल खरीदी. बचे हुए पचास रुपए में मुर्ग-मुसल्लम. फौरन अपने पूर्व स्थान पर पहुँचकर उन्होंने पेंडिंग में रखे गए आमोद उत्सव को आगे बढाया और उसे पूरे रास-रंग के साथ संपन्न किया. भगवान बड़ा कारसाज़ है. उससे आगे का दृश्य कुछ यूँ बन पड़ा. "इससे तो कुछ भी साबित नी होया भई, कहाँ साबित होरा कि ये तेरा है." जानवरों में हमशक्ल होने और कइयों की एक जैसी सूरत होने की आशंका जाहिर करते हुए दरोगा जी ने उसे कड़ी फटकार लगाई. फिर उसे जवाब देने के लिए कुछ देर तक घूरा. हिंदी साहित्य में एक मूर्धन्य विद्वान ने काफी समय पहले यह सिद्धांत स्थापित किया था कि, 'पुलिस के घूरने भर से शरीर में नीलगू निशान उभर आते हैं.' इस हमले से वह उखड़ गया. हीरा की गवाही से वह पहले से ही उखड़ा हुआ था. फिर पुलिस के एकटक घूरने से तो अच्छे-अच्छे उखड़ जाते हैं. दरोगा जी तो डायरेक्ट एक्स-रे अल्ट्रावायलेट टाइप की किरणें फेंक रहे थे. अतः उसने हालात- हुलिया बयान करने में देर न की. खरीद की लिखी हुई कच्ची रसीद भी दिखाई और अतिरिक्त सूचना देते हुए बताया कि 'वे अच्छे-खासे सुरूर में थे और पैसे लेकर इसी तरफ आए.' यह सुनकर छोटे दरोगा अपनी पुलिस वाली रौ में आ गए. ठेका सामने ही पड़ता था. सेल्समैन छोकरे को बुलाकर उन्होंने पूछताछ शुरू की. हुलिए के आधार पर उसने भी ग्राहकों की तस्दीक की. चूल-से- चूल मिल चुकी थी. माल-मुकदमाती बरामद, इतने सारे चश्मदीद गवाह. पुलिस को और क्या चाहिए. क्राइम केस टोटली सॉल्व था, बस मुलजिमान के नाम भर पता लगाने शेष थे. उधर माइकल चाचा और उनकी टोली को न तो इस डेवलपमेंट की सूचना थी, ना ही चिंता. वे साधनारत थे और आनंद में गले-गले तक डूबे हुए थे. दोस्ती परवान चढ़ती जा रही थी. भैंसा मालिक की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया. नाम-पता मालूम न थे, इसलिए अभियुक्त के कॉलम में 'अज्ञात' दर्ज कर लिया गया. उसे 'ज्ञात' में बदलना तो पुलिस के लिए बाएँ हाथ का खेल था. कुछ ही देर में नाम-पता मालूम चलते ही मुकदमे का सिलसिला चल निकला. पुलिस ने सबसे पहले 'क्राइम स्पॉट' अर्थात् उस स्थान का मुआयना करना जरूरी समझा, जहाँ पर भैंसा चर रहा था. पुलिस जब वहाँ पहुंची तो उन्हें इस बात पर घोर आश्चर्य हुआ कि मुलजिमान मौके से नदारद थे. हाँ, उत्सव-स्थल अवशेषों से जरूर खचाखच भरा हुआ मिला. शायद तुरीयावस्था में ही उन्हें किसी अनहोनी के संकेत मिल चुके थे. सिग्नल पाते ही वे घटनास्थल से फौरन रफूचक्कर हो लिए. पुलिस डेरा डाले रही. माइकल चाचा न तो घर पर मिले, न बाहर. पुलिस सोचती रही- 'कौन गली गए मोरे श्याम.' बीट के पुलिस-प्रवक्ता के मुताबिक वे किसी अप्रत्याशित दिशा में भाग निकले. फिर भी उन्होंने तलाशी में कोई कसर नहीं रख छोड़ी. तो पुलिस, माइकल चाचा को गलियन में, कूजन में, बगियन में ढ़ूँढने लगी. उधर माइकल चाचा नाचते-कूदते, जंगल-जंगल प्रकृति से साक्षात्कार करते रहे. वैसे भी वे तो पैदाइशी देशाटन-प्रेमी थे. पूस का महीना. रात की भयंकर ठण्ड. पेड़ ओस से भीगे होते थे. पत्तियों से पानी टपकता रहता. इस मौसम में माइकल चाचा फरारी काट रहे थे. मजेदार और हैरतअंगेज बात यह थी कि वे फरारी की औपचारिकताओ के बीच में छुप-छुपाकर देर रात मोहल्ले में पहुँचते. हिचकिचाहट का नामोनिशान तक नहीं. हाँ, हिचकियाँ लेते हुए मुहल्ले वालों को जरूर चेता जाते, भले ही प्रत्येक संवाद को वे किश्तों में पूरा करते हों, लेकिन थे 'कमिटेड' किस्म के इनसान. हाड़कँपाती सर्दी में भी चिल्ला-चिल्लाकर लोगों को सजग कर जाते. इन दिनों कुछ ज्यादा जोर से चिल्लाने लगे थे. ज्यादा उछलकूद से शायद उनकी सर्दी भाग जाती हो. मौका मिलते ही वे न जाने किस कौशल से अपनी 'यूनीक' जिम्मेदारी निभा जाते. लंबे समय तक नदारद रहना या चुप रहना शायद उनकी तासीर के विरुद्ध पड़ता था. लोग उनकी इसी अदा के कायल थे. इन परिस्थितियों में उनके विरोधी भी उनकी इस तरह की 'स्पिरिट' को सच्ची और 'जेनुइन' मानने को बाध्य हुए. इस बीच ब्रेकिंग खबर आई कि माइकल चाचा ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया है. फिर एक और सनसनीखेज खबर आई कि उन्हें 'बेल' मिल गई है. इन उपलब्धियों से, लोगों पर उनका आदर मिश्रित भय छाने लगा. किस्मत का फेर देखिए कि इस बीच उनसे एक भारी भूल हो गई. अपने यायावर स्वभाव के चलते वे 'बेल जंप' कर बैठे. इससे पहले उन्हें किसी मुकदमे का व्यक्तिगत अनुभव था भी नहीं. वो तो बस एक बार इस झमेले में पड़े कि बस पड़े ही रह गए. कोर्ट ने उन पर सख्त पाबंदियाँ लगा दीं. उन पर लगातार सख्त निगरानी रखी जा रही थी. उनके मुकाम छोड़ने की सख्त मुमानियत कर दी गई थी. इन प्रतिबंधों के बावजूद उनका 'नाइट शो' बदस्तूर जारी रहा- 'शो मस्ट गो ऑन.' लड़के मजाक में कहते, "यार सुना! कोर्ट के ऑर्डर से माइकल चाचा का पासपोर्ट जब्त हो गया है. बहुत सख्त जमाना आ गया है." दरअसल उन दिनों किसी सिनेमा-सेलिब्रिटी के विदेश जाने पर रोक लगी हुई थी. हालांकि उन्हें मृत्युभोज- तेरहवीं-श्राद्ध के कांट्रैक्ट खूब मिलते रहे. कभी-कभार मुंडन और कर्णबेधन के भी. लेकिन उनकी इस फितरत के चलते लोगों ने उन्हें वैवाहिक कार्यक्रमों से दूर रखना ही श्रेयस्कर समझा. कैरियर में लगे दाग से चाचा चिंतातुर थे. तनाव में एकदम परेशान. एकदिन अंधेरे में, उसी हरे-भरे मैदान में माइकल चाचा अपने फेवरेट पोज में प्रकट हुए. मात्र अभ्यास के सहारे, वे उस टोली की तरफ बढ़े, जहाँ उनके भतीजे के होने की सबसे अधिक संभावना थी. चाचा आहिस्ते से अपने भतीजे के पहलू में जाकर बैठ गए. चल रही बातचीत में उन्होंने विघ्न नहीं डाला. धैर्य से प्रतीक्षा की. प्रसंग समाप्त होते ही चाचा ने भतीजे की कोहनी झकझोर कर पूछा, चाचा नशे में चूर थे. उस अंधेरे में वे स्वयं नहीं दिखाई पड़ रहे थे. हाथ की लकीरें कहाँ से दिखती. फिर भी भतीजे ने चाचा की श्रद्धा का अनादर नहीं किया. चाचा की हथेली थपथपाकर कहा, "है चाचा, है. हंड्रेड परसेंट है." फिर चाचा को समझाया-बुझाया. "हाँ, चाचा तुम्हारे हाथ में तुम्हारी मनचाही लाईन है. उससे तुम्हारा मनचाहा काम भी हो जाएगा." कहकर चाचा को विदा किया. चाचा के जाने की बाद फुरसतिया 'गॉसिप' चल निकली. नजारा कुछ यूँ था- अनुमान के आधार पर निष्कर्ष यह निकला कि चाचा का इंगित महिष-स्वामी की तरफ जान पड़ता है. माइकल चाचा मुकदमे से बचते रहे. पेशी पड़ने पर कभी हाजिर नहीं हुए. समन पर नहीं गए. वारंट पर मिले नहीं. वस्तुतः उनकी दिलचस्पी, मुकदमे से ज्यादा, महिषस्वामी में होकर रह गई थी. वैसे उससे ज्यादा उम्मीदें भी नहीं रखते थे. बस सीधे धावा और आमने-सामने की मुठभेड़. लंबे समय तक इसे वे अपनी 'छोटी सी हसरत' मानते रहे. महिषस्वामी की किस्मत शायद ज्यादा बुलंद थी. वो कभी हत्थे ही नहीं चढ़ा. इधर माइकल चाचा के खिलाफ कुर्की का ऑर्डर चल निकला. माइकल चाचा अंतर्धान. सरकारी अमला कुर्की के इरादे से उनके घर तक आ पहुँचा. उन्होंने पूरे घर की तलाशी ली. कुछ भी नहीं मिला. आखिर में वे उनकी 'ख्वाबगाह' में गए. एक प्रागैतिहासिक चारपाई और तीन टाँग की कुरसी. कुल मिलाकर यही साजोसामान निकला. 'चल संपत्ति' के नाम पर यही सबकुछ था. अपनी 'प्रिय पुलिस' के लिए फरारी से पहले वे यही 'धरोहर' छोड़ गए थे. 'पार्टी' की माली हालत का अंदाजा लगाकर, 'इंचार्ज' की आँखें भर आई. हालांकि तमाशबीनों के मुताबिक इस 'विपन्नता' के पीछे कुछ होशियारी थी और कुछ सच्चाई. बहरहाल कारिंदे भुनभुनाते रहे. उनका आधा दिन बर्बाद हुआ था. इंचार्ज ने तो खीझ में आकर टुटही कुर्सी की एक और टाँग तोड़ दी. कुर्की का क्षोभ कुर्सी पर उतरा. इस प्रकार, कुर्की की सांकेतिक रस्म अदायगी संपन्न हुई. चलते-चलते 'इंचार्ज' ने अपने हमराह से एकदम दुनियादारी वाली बात कही, "आँख खोल के देख ले. 'बिन घरनी घर भूत का डेरा." उसकी यह ऑब्जर्वेशन एकदम दुरुस्त निकली. दरअसल चार-पाँच वर्षों से चाचा की गृहस्थी 'डग्गर-मग्गर' चल रही थी. हल्के-फुल्के गृहयुद्ध के बाद चाची, मायके जा बैठी. पाँच साल पूरे होने को थे. कोई निबाहे भी, तो किस सीमा तक. उनके जाते ही, जो रही-सही रोक-टोक थी, वो भी खत्म हो गई. चाचा सटाक से 'फ्रीलांसर' हो गए और फिर तरक्की करते हुए 'माइकल चाचा' बन बैठे. समय ने फिर तेजी से करवट बदली. चाची वापस आ गई. आते ही गृहस्थी की बागडोर अपने हाथों में ले ली. मुखरा होकर लौटी थीं. जिरह करने में दक्ष. जरा भी आयँ-बायँ करने पर आड़े हाथों लेती. बचकाने जवाब एकदम पकड़ लेतीं. जिसे चाचा अपना 'आंका-बांका' जीवन समझते थे, चाची उसे मुँह पर ही 'गोरखधंधा' कहती. जिसे चाचा 'स्टंट' कहते, उसे चाची उनके 'बेमतलब और बेफजूल' काम कहती थी. कुल मिलाकर, चाची उनके प्रसिद्ध नाम माइकल का 'टैग' उतारने को कटिबद्ध थी. देरी से लौटने पर धुंआधार 'रैगिंग' लेती. उनके पीने पर, रणचंडी बन जाती. इस बीच उनकी नासिका, नासिका न होकर 'अल्कोमीटर' बन चुकी थी. वास्तविक खतरे को देखते हुए, चाचा बदल-बदलकर रणनीति अपनाते, लेकिन हरबार पकड़े जाने लगे. अकेले में, 'धत्तेरे की..' बोलते. स्वर में झुँझलाहट. दोनों में काफी समय तक मानसिक दाँवपेंच चलते रहे. चाचा चुप्पी साधे रहते. आत्मग्लानि से घिरे रहते. वे अंतर्मन से महसूस करने लगे थे कि, वह घर सँवारने को दिन-रात खटती है. खेती-बाड़ी देखती है और गाय-भैंस भी. भावना और आवेग में आकर वे पहले ही बहुत कुछ खो चुके थे. क्षमायाचना और शर्मिंदगी की मुद्रा में कोई कितने दिन रह सकता है. उन्होंने अच्छे से जान लिया कि इसबार वह रियायत के मूड में नहीं है. तंग आकर चाचा सीधी राह चलने लगे और इनसान बन गए. चौबीस इंची साइकिल पर सवारी गाँठते हुए चाचा जब काम पर जाते, तो विश्वास ही नहीं होता था कि, ये वही 'हैरतअंगेज कारनामे' वाले माइकल चाचा हैं. चाचा का नजरिया बदल गया. सार्वजनिक जीवन से निजी जीवन में उन्होंने भयंकर 'यूटर्न' लिया. अब वे खानसामे का काम करने लगे. पूरी शिद्दत से. बंधे-बंधाये रुटीन का काम. कभी-कभी, 'वीकेंड' पर 'फ्रीलांसिंग' भी.
यूं तो मेनोपॉज होने की उम्र हर महिला में 45-50 वर्ष के बीच में होती है। लेकिन कुछ चीजों के कारण मेनोपॉज जल्द शुरू हो सकता है। मेनोपॉज एक महिला की लाइफ की ऐसी स्टेज है जिसमें पीरियड्स आने बंद हो जाते हैं। पीरियड्स शुरू होने की तरह मेनोपॉज भी एक नैचुरल प्रोसेस है जिससे हर महिला को गुजरना होता है। यूं तो मेनोपॉज होने की उम्र हर महिला में 45-50 वर्ष के बीच में होती है। लेकिन कुछ चीजों के कारण मेनोपॉज जल्द शुरू हो सकता है। आइए ऐसी ही कुछ चीजों के बारे में जानें ताकी महिलाओं को जल्द मेनोपॉज को रोकने में मदद मिल सकें। शायद आपको इस बात पर यकीन नहीं होगा लेकिन यह सच है कि जल्द मेनोपॉज के लिए फलों और सब्जियों को भी जिम्मेजदार माना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि अब अधिकांश फलों और सब्जियों पर जहरीले कीटनाशकों का छिड़काव किया जाता है, जिसके कारण जल्द मेनोपॉज हो सकता है। इन कीटनाशकों से बचने के लिए हमेशा ऑर्गेंनिक सब्जियां और फल ही खरीदने चाहिए। फैथालेट एक ऐसा केमिकल है जिसका इस्तेमाल प्लास्टिक की चीजों को सॉफ्ट बनाने के लिए किया जाता है। यह तत्व जल्द मेनोपॉज शुरू होने के लिए जिम्मेदार माना जाता है जो अधिकांश एयर फ्रेशनर में पाया जाता है। इसलिए जल्द मेनोपॉज से बचने के लिए आपको सीसा फ्री कैंडल और आवश्यक तेलों वाली कैंडल का इस्तेमाल करना चाहिए। जैसा कि हम आपको बता ही चुके है कि प्लास्टिक सॉफ्ट और फ्लैक्सीबल बनाने के लिए कुछ प्लास्टिक फूड स्टोरेज कंटेनर में भी फैथालेट होता है। जो जल्द मेनोपॉज का कारण बनता है। इसलिए जल्द मेनोपॉज से बचने के लिए प्लास्टिक कंटेनर के स्थान पर कांच या स्टेनलेस स्टील से बने कंटेनर का इस्तेमाल करना चाहिए। सभी प्रकार के पसर्नल केयर प्रोडक्ट जैसे शैम्पू, लोशन, बॉडी वॉश सॉफ्ट प्लास्टिक कंटेनर में आते है और इन प्रोडक्ट से आने वाली खुशबू भी जल्द मेनोपॉज का कारण बनती है क्योंकि इसमें फैथालेट पाया जाता है। इसलिए इन प्रोडक्ट को खरीदने से पहले इनके लेबल को अच्छी तरह से चैक कर लें कि कही इसमें फैथालेट तो शामिल नहीं है। परफ्यूम और कोलोन की खुशबू को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए इसमें होता है। इसलिए इसके जोखिम से बचने के लिए आपको नैचुरल, फैथालेट फ्री खुशबु जैसे आवश्यक तेलों को इस्तेमाल करना चाहिए। इसके अलावा परफ्यूम और कोलोन को केवल जरूरत होने पर ही उपयोग करें। अगर आप जल्द मेनोपॉज से बचना चाहती हैं तो आज से ही इन चीजों का ध्यान रखना शुरू कर दें। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
यूं तो मेनोपॉज होने की उम्र हर महिला में पैंतालीस-पचास वर्ष के बीच में होती है। लेकिन कुछ चीजों के कारण मेनोपॉज जल्द शुरू हो सकता है। मेनोपॉज एक महिला की लाइफ की ऐसी स्टेज है जिसमें पीरियड्स आने बंद हो जाते हैं। पीरियड्स शुरू होने की तरह मेनोपॉज भी एक नैचुरल प्रोसेस है जिससे हर महिला को गुजरना होता है। यूं तो मेनोपॉज होने की उम्र हर महिला में पैंतालीस-पचास वर्ष के बीच में होती है। लेकिन कुछ चीजों के कारण मेनोपॉज जल्द शुरू हो सकता है। आइए ऐसी ही कुछ चीजों के बारे में जानें ताकी महिलाओं को जल्द मेनोपॉज को रोकने में मदद मिल सकें। शायद आपको इस बात पर यकीन नहीं होगा लेकिन यह सच है कि जल्द मेनोपॉज के लिए फलों और सब्जियों को भी जिम्मेजदार माना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि अब अधिकांश फलों और सब्जियों पर जहरीले कीटनाशकों का छिड़काव किया जाता है, जिसके कारण जल्द मेनोपॉज हो सकता है। इन कीटनाशकों से बचने के लिए हमेशा ऑर्गेंनिक सब्जियां और फल ही खरीदने चाहिए। फैथालेट एक ऐसा केमिकल है जिसका इस्तेमाल प्लास्टिक की चीजों को सॉफ्ट बनाने के लिए किया जाता है। यह तत्व जल्द मेनोपॉज शुरू होने के लिए जिम्मेदार माना जाता है जो अधिकांश एयर फ्रेशनर में पाया जाता है। इसलिए जल्द मेनोपॉज से बचने के लिए आपको सीसा फ्री कैंडल और आवश्यक तेलों वाली कैंडल का इस्तेमाल करना चाहिए। जैसा कि हम आपको बता ही चुके है कि प्लास्टिक सॉफ्ट और फ्लैक्सीबल बनाने के लिए कुछ प्लास्टिक फूड स्टोरेज कंटेनर में भी फैथालेट होता है। जो जल्द मेनोपॉज का कारण बनता है। इसलिए जल्द मेनोपॉज से बचने के लिए प्लास्टिक कंटेनर के स्थान पर कांच या स्टेनलेस स्टील से बने कंटेनर का इस्तेमाल करना चाहिए। सभी प्रकार के पसर्नल केयर प्रोडक्ट जैसे शैम्पू, लोशन, बॉडी वॉश सॉफ्ट प्लास्टिक कंटेनर में आते है और इन प्रोडक्ट से आने वाली खुशबू भी जल्द मेनोपॉज का कारण बनती है क्योंकि इसमें फैथालेट पाया जाता है। इसलिए इन प्रोडक्ट को खरीदने से पहले इनके लेबल को अच्छी तरह से चैक कर लें कि कही इसमें फैथालेट तो शामिल नहीं है। परफ्यूम और कोलोन की खुशबू को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए इसमें होता है। इसलिए इसके जोखिम से बचने के लिए आपको नैचुरल, फैथालेट फ्री खुशबु जैसे आवश्यक तेलों को इस्तेमाल करना चाहिए। इसके अलावा परफ्यूम और कोलोन को केवल जरूरत होने पर ही उपयोग करें। अगर आप जल्द मेनोपॉज से बचना चाहती हैं तो आज से ही इन चीजों का ध्यान रखना शुरू कर दें। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
कर दिए ही देश में याने दिया। इस मुक्तकर-नीति ( Free trade policy ) कारण विदेशी माल की प्रतिस्पर्धा तीव्र हो गई जिसके परिणामस्वरूप गृह उद्योगन्धों का तो विनाश हुआ ही, नये कारखानों की स्थापना में भी रुकावट होती थी । ही नहीं, रेलवे लाइनों की भाड़ा नीति ऐसी थी कि जिससे विदेशी पक्के माल का ( Import ) बड़े और भारत से कच्चे माल के निर्यात ( Export ) को ोत्साहन मिले। रेलवे कम्पनियों ने भी इस प्रकार की भाड़ा नीति को अपनाया कि भारत में उद्योग धन्धों का विस्तार न हो सके । ब्रिटिश सरकार की इन घातक नीतियों का परिणाम यह हुआ कि आर्थिक परिवर्तन से होने वाले कष्ट बेहद बढ़ गए और भारत के आर्थिक परिवर्तन का रुख गलत दिशा की ओर मुड़ गया। भारतीय पक्कै माल पर इङ्गलैण्ड में बहुत अधिक कर लगाया गया । ब्रिटिश माल को भारत में बिना कर लगाये याने दिया गया, यहाँ तक कि भारतीय रङ्गीन कपड़े को पहनना इंगलैण्ड. में दण्डनीय अपराध घोषित कर दिया गया और भारतीय कारीगरों पर घोर अत्याचार किया गया जिससे कि वह अपने धन्वे को न चला सकें । भारतीय धंधों के जीवित रहते अंग्रेज शासकों को यह भय था कि वह ब्रिटेन के धन्धों से प्रतित्पर्द्धा करेंगे। सच तो यह है कि भारत पर राजनैतिक प्रभुत्व जमा कर ब्रिटिश सरकार ने उस प्रभुता का उपयोग अत्यन्त निर्लज्जता पूर्वक भारतीय जन और आर्थिक साधनों के शोपण में किया। हम लोगों को विवश किया गया कि हम कच्चा माल उत्पन्न करें और विदेशों को भेजें और पक्का माल बाहर से मँगाव । यह हमारे शहरी उद्योग-धन्धों की व की कथा है । वे भारतीय गृह उद्योग धन्वे जिनकी ओर संसार ईर्ष्या की दृष्टि से देखता था और जिनके कारण भारत संसार की दृष्टि में सोने की चिड़िया थी, नष्ट हो गये । आर्थिक परिवर्तन के सम्बन्ध में इस परिच्छेद को समाप्त करने से पहले यह शिक्षाप्रद और रुचिकर दोनों ही होगा कि हम भारत के आर्थिक परिवर्तन तथा अन्य देशों के आर्थिक परिवर्तन का तुलनात्मक अध्ययन करें। यदि हम संसार के अन्य देशों के प्रतिनिधि वरूप इङ्गलैंड को ले लें तो हमें ज्ञात होगा कि वहां भी आधुनिक आर्थिक संगठन के फलस्वरूप गृह उद्योग-धन्धों की मृत्यु हो गई । परन्तु वहां साथ ही साथ तेजी से फैक्टरियां स्थापित होती गईं। पुराने धन्धों की मृत्यु के साथ-साथ • आधुनिक ढङ्ग की फैक्टरियों की तेजी से स्थापना का परिणाम यह हुआ कि गृह उद्योगधन्धों से वेकार होने वाले कारीगरों को उन फैक्टरियों में काम मिल गया । इसके विपरीत भारत में गृह उद्योग-धन्धों का विनाश हो गया किन्तु उनके स्थान पर आाधुनिक ढङ्ग की फैक्टरियों का उदय नहीं हुग्रा । इसका परिणाम यह हुआ कि जहाँ इङ्गलैंड के कारीगर को इस परिवर्तन से बहुत कम कष्ट हुआ वहां भारत के कारीगर की
कर दिए ही देश में याने दिया। इस मुक्तकर-नीति कारण विदेशी माल की प्रतिस्पर्धा तीव्र हो गई जिसके परिणामस्वरूप गृह उद्योगन्धों का तो विनाश हुआ ही, नये कारखानों की स्थापना में भी रुकावट होती थी । ही नहीं, रेलवे लाइनों की भाड़ा नीति ऐसी थी कि जिससे विदेशी पक्के माल का बड़े और भारत से कच्चे माल के निर्यात को ोत्साहन मिले। रेलवे कम्पनियों ने भी इस प्रकार की भाड़ा नीति को अपनाया कि भारत में उद्योग धन्धों का विस्तार न हो सके । ब्रिटिश सरकार की इन घातक नीतियों का परिणाम यह हुआ कि आर्थिक परिवर्तन से होने वाले कष्ट बेहद बढ़ गए और भारत के आर्थिक परिवर्तन का रुख गलत दिशा की ओर मुड़ गया। भारतीय पक्कै माल पर इङ्गलैण्ड में बहुत अधिक कर लगाया गया । ब्रिटिश माल को भारत में बिना कर लगाये याने दिया गया, यहाँ तक कि भारतीय रङ्गीन कपड़े को पहनना इंगलैण्ड. में दण्डनीय अपराध घोषित कर दिया गया और भारतीय कारीगरों पर घोर अत्याचार किया गया जिससे कि वह अपने धन्वे को न चला सकें । भारतीय धंधों के जीवित रहते अंग्रेज शासकों को यह भय था कि वह ब्रिटेन के धन्धों से प्रतित्पर्द्धा करेंगे। सच तो यह है कि भारत पर राजनैतिक प्रभुत्व जमा कर ब्रिटिश सरकार ने उस प्रभुता का उपयोग अत्यन्त निर्लज्जता पूर्वक भारतीय जन और आर्थिक साधनों के शोपण में किया। हम लोगों को विवश किया गया कि हम कच्चा माल उत्पन्न करें और विदेशों को भेजें और पक्का माल बाहर से मँगाव । यह हमारे शहरी उद्योग-धन्धों की व की कथा है । वे भारतीय गृह उद्योग धन्वे जिनकी ओर संसार ईर्ष्या की दृष्टि से देखता था और जिनके कारण भारत संसार की दृष्टि में सोने की चिड़िया थी, नष्ट हो गये । आर्थिक परिवर्तन के सम्बन्ध में इस परिच्छेद को समाप्त करने से पहले यह शिक्षाप्रद और रुचिकर दोनों ही होगा कि हम भारत के आर्थिक परिवर्तन तथा अन्य देशों के आर्थिक परिवर्तन का तुलनात्मक अध्ययन करें। यदि हम संसार के अन्य देशों के प्रतिनिधि वरूप इङ्गलैंड को ले लें तो हमें ज्ञात होगा कि वहां भी आधुनिक आर्थिक संगठन के फलस्वरूप गृह उद्योग-धन्धों की मृत्यु हो गई । परन्तु वहां साथ ही साथ तेजी से फैक्टरियां स्थापित होती गईं। पुराने धन्धों की मृत्यु के साथ-साथ • आधुनिक ढङ्ग की फैक्टरियों की तेजी से स्थापना का परिणाम यह हुआ कि गृह उद्योगधन्धों से वेकार होने वाले कारीगरों को उन फैक्टरियों में काम मिल गया । इसके विपरीत भारत में गृह उद्योग-धन्धों का विनाश हो गया किन्तु उनके स्थान पर आाधुनिक ढङ्ग की फैक्टरियों का उदय नहीं हुग्रा । इसका परिणाम यह हुआ कि जहाँ इङ्गलैंड के कारीगर को इस परिवर्तन से बहुत कम कष्ट हुआ वहां भारत के कारीगर की
आज का दिन चिंताओं से मुक्ति का है. आज आपकी उम्मीद एक फूल की तरह खिलेगी. पारिवारिक मतभेद आज खत्म हो जाएगा. रिश्तों की शुरुआत नए सिरे से कर सकते हैं. आज थोड़ा सा दिमाग लगाकर अपने लक्ष्य को आसानी से प्राप्त कर सकते हैं. आर्थिक स्थिति में सुधार होगा. आप नया वाहन खरीदने का मन बना रहे हैं तो उस पर विचार करें सामाजिक जीवन के हर क्षेत्र में आपका प्रदर्शन सराहनीय होगा. लोग आपकी प्रशंसा करेंगे. मंदिर के बाहर जरुरतमंदों को कुछ गिफ्ट दें, परिस्थितियां अनुकूल बनेगी.
आज का दिन चिंताओं से मुक्ति का है. आज आपकी उम्मीद एक फूल की तरह खिलेगी. पारिवारिक मतभेद आज खत्म हो जाएगा. रिश्तों की शुरुआत नए सिरे से कर सकते हैं. आज थोड़ा सा दिमाग लगाकर अपने लक्ष्य को आसानी से प्राप्त कर सकते हैं. आर्थिक स्थिति में सुधार होगा. आप नया वाहन खरीदने का मन बना रहे हैं तो उस पर विचार करें सामाजिक जीवन के हर क्षेत्र में आपका प्रदर्शन सराहनीय होगा. लोग आपकी प्रशंसा करेंगे. मंदिर के बाहर जरुरतमंदों को कुछ गिफ्ट दें, परिस्थितियां अनुकूल बनेगी.
सबगुरु न्यूज उदयपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मंगलवार को उदयपुर दौरे पर आ रहे हैं। वे उदयपुर के चित्रकूट नगर स्थित खेलगांव में सभा को संबोधित करेंगे तथा करीब 15 हजार करोड़ की योजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास करेंगे। इसके बाद वे प्रताप गौरव केन्द्र के अवलोकन के लिए भी जाएंगे और वहां से दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रधामंत्री मोदी मंगलवार सुबह 11. 15 बजे दिल्ली से उड़ान भरेंगे और 12. 25 बजे उदयपुर के डबोक स्थित महाराणा प्रताप एयरपोर्ट पहुंचेंगे। वहां से हैलीकाॅप्टर से वे सभा स्थल चित्रकूट नगर स्थित खेलगांव पर एक बजे पहुंचेंगे। खेलगांव से दो बजे रवाना होकर वे हैलीकाॅप्टर से प्रताप गौरव केन्द्र के समीप बनाए गए हैलीपेड पर पहुंचेंगे और वहां से वे दोपहर 2. 45 बजे प्रताप गौरव केन्द्र में प्रवेश करेंगे। 20 मिनट वहां अवलोकन के पश्चात् प्रधानमंत्री मोदी 3. 05 बजे वहां से हैलीकाॅप्टर के जरिये डबोक स्थित महाराणा प्रताप हवाई अड्डे पर पहुंचेंगे और 3. 45 बजे वे दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे। शाम 5 बजे वे दिल्ली पहुंचेंगे।
सबगुरु न्यूज उदयपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मंगलवार को उदयपुर दौरे पर आ रहे हैं। वे उदयपुर के चित्रकूट नगर स्थित खेलगांव में सभा को संबोधित करेंगे तथा करीब पंद्रह हजार करोड़ की योजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास करेंगे। इसके बाद वे प्रताप गौरव केन्द्र के अवलोकन के लिए भी जाएंगे और वहां से दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रधामंत्री मोदी मंगलवार सुबह ग्यारह. पंद्रह बजे दिल्ली से उड़ान भरेंगे और बारह. पच्चीस बजे उदयपुर के डबोक स्थित महाराणा प्रताप एयरपोर्ट पहुंचेंगे। वहां से हैलीकाॅप्टर से वे सभा स्थल चित्रकूट नगर स्थित खेलगांव पर एक बजे पहुंचेंगे। खेलगांव से दो बजे रवाना होकर वे हैलीकाॅप्टर से प्रताप गौरव केन्द्र के समीप बनाए गए हैलीपेड पर पहुंचेंगे और वहां से वे दोपहर दो. पैंतालीस बजे प्रताप गौरव केन्द्र में प्रवेश करेंगे। बीस मिनट वहां अवलोकन के पश्चात् प्रधानमंत्री मोदी तीन. पाँच बजे वहां से हैलीकाॅप्टर के जरिये डबोक स्थित महाराणा प्रताप हवाई अड्डे पर पहुंचेंगे और तीन. पैंतालीस बजे वे दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे। शाम पाँच बजे वे दिल्ली पहुंचेंगे।
हरियाणा के पानीपत में संदिग्ध परिस्थितियों में नाबालिग छात्रा ने फंदा लगा लिया। गेट तोड़कर भीतर घुसे परिजनों ने छात्रा को आनन-फानन में फंदे से नीचे उतारा, मगर तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। मामले की सूचना तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम नंबर डायल 112 पद दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस के उच्च अधिकारी समेत दलबल मौके पर पहुंचा। दिनभर सुसाइड प्रकरण की जांच करने के बाद शाम को शव सिविल अस्पताल भिजवाया गया। जहां स्पेशल रिक्वेस्ट के तहत शव का पोस्टमॉर्टम करवा कर परिजनों के हवाले कर दिया गया। पुलिस आत्महत्या के कारणों को जानने में जुटी है। मिली जानकारी के अनुसार सेक्टर 12 की यह घटना है। जहां 15 वर्षीय किशोरी रात को अपने घर में अपने कमरे में अकेली सोई थी। रोजाना की तरह वह नियमित रूप से कमरे से बाहर नहीं आई। इसके अलावा उसके कमरे में भी किसी प्रकार की कोई हलचल परिजनों को महसूस नहीं हुई। शक होने पर सुबह 11 बजे परिजनों ने दरवाजा खटखटाना शुरू किया, मगर भीतर से कोई आवाज नहीं आई। जिसके बाद परिजनों ने दरवाजा तोड़ दिया। भीतर कमरे में किशोरी रस्सी से पंखे पर फंदा लगाकर लटकी हुई थी। पुलिस को जांच के दौरान मौके से कुछ गोलियां मिली। जिनको जांचा गया, तो वह डिप्रेशन की थी। बताया जा रहा है कि छात्रा पिछले कुछ समय से मानसिक रूप से परेशान थी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
हरियाणा के पानीपत में संदिग्ध परिस्थितियों में नाबालिग छात्रा ने फंदा लगा लिया। गेट तोड़कर भीतर घुसे परिजनों ने छात्रा को आनन-फानन में फंदे से नीचे उतारा, मगर तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। मामले की सूचना तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम नंबर डायल एक सौ बारह पद दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस के उच्च अधिकारी समेत दलबल मौके पर पहुंचा। दिनभर सुसाइड प्रकरण की जांच करने के बाद शाम को शव सिविल अस्पताल भिजवाया गया। जहां स्पेशल रिक्वेस्ट के तहत शव का पोस्टमॉर्टम करवा कर परिजनों के हवाले कर दिया गया। पुलिस आत्महत्या के कारणों को जानने में जुटी है। मिली जानकारी के अनुसार सेक्टर बारह की यह घटना है। जहां पंद्रह वर्षीय किशोरी रात को अपने घर में अपने कमरे में अकेली सोई थी। रोजाना की तरह वह नियमित रूप से कमरे से बाहर नहीं आई। इसके अलावा उसके कमरे में भी किसी प्रकार की कोई हलचल परिजनों को महसूस नहीं हुई। शक होने पर सुबह ग्यारह बजे परिजनों ने दरवाजा खटखटाना शुरू किया, मगर भीतर से कोई आवाज नहीं आई। जिसके बाद परिजनों ने दरवाजा तोड़ दिया। भीतर कमरे में किशोरी रस्सी से पंखे पर फंदा लगाकर लटकी हुई थी। पुलिस को जांच के दौरान मौके से कुछ गोलियां मिली। जिनको जांचा गया, तो वह डिप्रेशन की थी। बताया जा रहा है कि छात्रा पिछले कुछ समय से मानसिक रूप से परेशान थी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
बीजापुर/गुप्तेश्वर जोशी। जिला प्रशासन बीजापुर द्वारा स्थानीय मिनी स्टेडियम में विगत 28 जनवरी से आयोजित रात्रिकालीन अंतर विभागीय क्रिकेट प्रतियोगिता 4 फरवरी को फायनल मैच के साथ संपन्न हो गयी। स्वास्थ्य विभाग और विधायक एकादश के मध्य हुए इस फायनल मैच में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने विधायक इलेवन को 9 रन से परास्त कर विजय हासिल किया। इस अंतर विभागीय क्रिकेट प्रतियोगिता में विभिन्न विभागों सहित पत्रकार एकादश, विधायक एकादश के कुल 29 टीमों ने हिस्सा लिया और लीग मैच, क्वार्टर फायनल तथा सेमी4 फायनल मैच में सभी टीमों ने बेहतर प्रदर्शन किया। संध्या से होने वाली इस क्रिकेट प्रतियोगिता का खेलप्रेमी दर्शकों ने भी जमकर लुत्फ उठाया और खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। उक्त प्रतियोगिता के फायनल मैच में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने टाॅस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का निर्णय लिया और निर्धारित 12 ओव्हर पूरा करने के पूर्व ही 72 रन बनाकर ऑल आऊट हो गयी। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए मैदान में उतरी विधायक एकादश की टीम के खिलाड़ी एक के बाद एक आऊट हो गये और निर्धारित ओव्हर में 73 रन नहीं बना पाये। इस तरह स्वास्थ्य विभाग की टीम ने विधायक एकादश को 9 रन से हराकर विजय हासिल किया। इस रोमांचक मुकाबले को देखने के लिए नगर के दर्शक भी रात्रि तक मिनी स्टेडियम में उत्साह के साथ डटे रहे और बाजे-गाजे के साथ खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष शंकर कुड़ियम, जिला पंचायत उपाध्यक्ष कमलेश कारम तथा अन्य जनप्रतिनिधियों सहित सीईओ जिला पंचायत पोषणलाल चन्द्राकर ने विजेता एवं उप विजेता टीम सहित सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को पुरस्कृत किया। विजेता टीम को ट्राफी सहित 21 हजार रूपए नकद पुरस्कार तथा उप विजेता टीम को ट्राफी के साथ 15 हजार रूपए नकद पुरस्कार प्रदान किया गया। वहीं मैन ऑफ द सीरीज का पुरस्कार विधायक एकादश के वासु, बेस्ट कैचर ऑफ द सीरीज का पुरस्कार वन विभाग के इन्द्रजीत भगत, बेस्ट बाॅलर ऑफ द सीरीज का पुरस्कार विधायक एकादश के केशव तोगर, मेन हीटर ऑफ द सीरीज का पुरस्कार वन विभाग के संजय मज्जी और फायनल मैच के मैन ऑफ द मैच का पुरस्कार स्वास्थ्य विभाग के जितेन्द्र तोकल को प्रदान किया गया।
बीजापुर/गुप्तेश्वर जोशी। जिला प्रशासन बीजापुर द्वारा स्थानीय मिनी स्टेडियम में विगत अट्ठाईस जनवरी से आयोजित रात्रिकालीन अंतर विभागीय क्रिकेट प्रतियोगिता चार फरवरी को फायनल मैच के साथ संपन्न हो गयी। स्वास्थ्य विभाग और विधायक एकादश के मध्य हुए इस फायनल मैच में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने विधायक इलेवन को नौ रन से परास्त कर विजय हासिल किया। इस अंतर विभागीय क्रिकेट प्रतियोगिता में विभिन्न विभागों सहित पत्रकार एकादश, विधायक एकादश के कुल उनतीस टीमों ने हिस्सा लिया और लीग मैच, क्वार्टर फायनल तथा सेमीचार फायनल मैच में सभी टीमों ने बेहतर प्रदर्शन किया। संध्या से होने वाली इस क्रिकेट प्रतियोगिता का खेलप्रेमी दर्शकों ने भी जमकर लुत्फ उठाया और खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। उक्त प्रतियोगिता के फायनल मैच में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने टाॅस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का निर्णय लिया और निर्धारित बारह ओव्हर पूरा करने के पूर्व ही बहत्तर रन बनाकर ऑल आऊट हो गयी। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए मैदान में उतरी विधायक एकादश की टीम के खिलाड़ी एक के बाद एक आऊट हो गये और निर्धारित ओव्हर में तिहत्तर रन नहीं बना पाये। इस तरह स्वास्थ्य विभाग की टीम ने विधायक एकादश को नौ रन से हराकर विजय हासिल किया। इस रोमांचक मुकाबले को देखने के लिए नगर के दर्शक भी रात्रि तक मिनी स्टेडियम में उत्साह के साथ डटे रहे और बाजे-गाजे के साथ खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष शंकर कुड़ियम, जिला पंचायत उपाध्यक्ष कमलेश कारम तथा अन्य जनप्रतिनिधियों सहित सीईओ जिला पंचायत पोषणलाल चन्द्राकर ने विजेता एवं उप विजेता टीम सहित सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को पुरस्कृत किया। विजेता टीम को ट्राफी सहित इक्कीस हजार रूपए नकद पुरस्कार तथा उप विजेता टीम को ट्राफी के साथ पंद्रह हजार रूपए नकद पुरस्कार प्रदान किया गया। वहीं मैन ऑफ द सीरीज का पुरस्कार विधायक एकादश के वासु, बेस्ट कैचर ऑफ द सीरीज का पुरस्कार वन विभाग के इन्द्रजीत भगत, बेस्ट बाॅलर ऑफ द सीरीज का पुरस्कार विधायक एकादश के केशव तोगर, मेन हीटर ऑफ द सीरीज का पुरस्कार वन विभाग के संजय मज्जी और फायनल मैच के मैन ऑफ द मैच का पुरस्कार स्वास्थ्य विभाग के जितेन्द्र तोकल को प्रदान किया गया।
ब्लूबेरी में एन्थोसायनिन नामक तत्व पाया जाता है, जो मोटापे को कम करने में मददगार हो सकता है, जो लोग वजन कम करना चाहते हैं उनके लिए ब्लूबेरी का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है. पाचन की समस्या से परेशान हैं तो ब्लूबेरी को डाइट में शामिल करें. ब्लूबेरी में फाइबर अधिक मात्रा में पाया जाता है, जो पेट दर्द गैस और पाचन को ठीक रखने में मदद कर सकता है. बीजी लाइफस्टाइल और काम के प्रेशर के चलते आज के समय में लोग कम उम्र में ही स्ट्रेस के शिकार हो रहे हैं. स्ट्रेस से बचने के लिए आप ब्लूबेरी का सेवन कर सकते हैं. इसमें एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है जो स्ट्रेस को कम करने में मदद कर सकता है. इसमें पाए जाने वाले विटामिन्स, मिनरल्स और फाइटो न्यूट्रीएंट मस्तिष्क कोशिकाओं की रक्षा करता है. साथ ही सेंट्रल नर्वस सिस्टम के स्वास्थ्य को बनाए रखता है. ब्लूबेरी शरीर में कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करती है और इसे खराब होने से बचाती है. यह फल रक्तचाप को कम करने में भी मदद कर सकता है. ब्लूबेरी एथेरोस्क्लेरोसिस हार्टअटैक और स्ट्रोक को रोकने में मदद करता है. इसमें मौजूद फायबर एन्थोसाईनिन, पोटेशियम, विटामिन बी 6 और विटामीन सी पा. या जाता है. नियमित रूप से ब्लूबेरी का सेवन मानव शरीर के साथ ही उसकी सेहत के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है. हॉलिडे इनसाइट्स नामक एक संगठन ने 8 जुलाई को राष्ट्रीय ब्लूबेरी दिवस के रूप में घोषित किया है. इसका मुख्य उद्देश्य स्वादिष्ट बेरी के अद्भुत स्वास्थ्य लाभों के बारे में लोगों को अबगत कराना है. वेबसाइट ब्लूबेरी काउंसिल के अनुसार, ब्लूबेरी फाइबर का एक अच्छा स्रोत मानी गई हैं जो हृदय रोग के खतरे को कम करता है. भारत में ब्लूबेरी खाने का ज़्यादा प्रचलन नहीं है. ज़्यादातर लोगों ने तो ब्लूबेरी देखा भी नहीं होगा. इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण यह है कि भारत की जलवायु ब्लूबेरी के उत्पादन के लिए उपयुक्त नहीं है. पारंपरिक रूप से इसका उत्पादन ठंडे और सर्दी वाले इलाके में किया जाता है.
ब्लूबेरी में एन्थोसायनिन नामक तत्व पाया जाता है, जो मोटापे को कम करने में मददगार हो सकता है, जो लोग वजन कम करना चाहते हैं उनके लिए ब्लूबेरी का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है. पाचन की समस्या से परेशान हैं तो ब्लूबेरी को डाइट में शामिल करें. ब्लूबेरी में फाइबर अधिक मात्रा में पाया जाता है, जो पेट दर्द गैस और पाचन को ठीक रखने में मदद कर सकता है. बीजी लाइफस्टाइल और काम के प्रेशर के चलते आज के समय में लोग कम उम्र में ही स्ट्रेस के शिकार हो रहे हैं. स्ट्रेस से बचने के लिए आप ब्लूबेरी का सेवन कर सकते हैं. इसमें एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है जो स्ट्रेस को कम करने में मदद कर सकता है. इसमें पाए जाने वाले विटामिन्स, मिनरल्स और फाइटो न्यूट्रीएंट मस्तिष्क कोशिकाओं की रक्षा करता है. साथ ही सेंट्रल नर्वस सिस्टम के स्वास्थ्य को बनाए रखता है. ब्लूबेरी शरीर में कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करती है और इसे खराब होने से बचाती है. यह फल रक्तचाप को कम करने में भी मदद कर सकता है. ब्लूबेरी एथेरोस्क्लेरोसिस हार्टअटैक और स्ट्रोक को रोकने में मदद करता है. इसमें मौजूद फायबर एन्थोसाईनिन, पोटेशियम, विटामिन बी छः और विटामीन सी पा. या जाता है. नियमित रूप से ब्लूबेरी का सेवन मानव शरीर के साथ ही उसकी सेहत के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है. हॉलिडे इनसाइट्स नामक एक संगठन ने आठ जुलाई को राष्ट्रीय ब्लूबेरी दिवस के रूप में घोषित किया है. इसका मुख्य उद्देश्य स्वादिष्ट बेरी के अद्भुत स्वास्थ्य लाभों के बारे में लोगों को अबगत कराना है. वेबसाइट ब्लूबेरी काउंसिल के अनुसार, ब्लूबेरी फाइबर का एक अच्छा स्रोत मानी गई हैं जो हृदय रोग के खतरे को कम करता है. भारत में ब्लूबेरी खाने का ज़्यादा प्रचलन नहीं है. ज़्यादातर लोगों ने तो ब्लूबेरी देखा भी नहीं होगा. इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण यह है कि भारत की जलवायु ब्लूबेरी के उत्पादन के लिए उपयुक्त नहीं है. पारंपरिक रूप से इसका उत्पादन ठंडे और सर्दी वाले इलाके में किया जाता है.
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा इन दिनों व्हाइट हाउस में अपने परिवार के साथ खुशनुमा पल बिता रहे हैं। वो अपनी खुश मिजाज व्यक्तित्व और परिवार के प्रति लगाव रखने के लिए हरफनमौले पिता और एक राष्ट्रपति के रूप में अमेरिका में चर्चित हैं। साल 2008 में जब उन्होंने पहली बार अमेरिकी राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारी ली थी और व्हाइट हाउस में सपरिवार कदम रखा था तब उनकी दोनों बेटियां मालिया और साशा 10 और 7 साल की थीं। अब उनकी दोनों बेटियां बड़ी हो गई हैं। अब ये परिवार के साथ डिनर करने की बजाय अपने ब्वॉयफ्रेंड्स के साथ डेट करती हैं लेकिन बराक ओबामा इससे चिंतित नहीं हैं। गौरतलब है कि बराक ओबामा ने राष्ट्रपति के तौर पर व्हाइट हाउस में दो कार्यकाल गुजारे हैं। 8 नवंबर को अमेरिका में अगले राष्ट्रपति के लिए चुनाव है। रिपबल्किन पार्टी की तरफ से हिलेरी क्लिंटन जबकि डेमोक्रिटिक पार्टी की तरफ से डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति पद के प्रमुख उम्मीदवार हैं। चुनाव पूर्व सर्वे में दोनों उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर दिख रही है।
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा इन दिनों व्हाइट हाउस में अपने परिवार के साथ खुशनुमा पल बिता रहे हैं। वो अपनी खुश मिजाज व्यक्तित्व और परिवार के प्रति लगाव रखने के लिए हरफनमौले पिता और एक राष्ट्रपति के रूप में अमेरिका में चर्चित हैं। साल दो हज़ार आठ में जब उन्होंने पहली बार अमेरिकी राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारी ली थी और व्हाइट हाउस में सपरिवार कदम रखा था तब उनकी दोनों बेटियां मालिया और साशा दस और सात साल की थीं। अब उनकी दोनों बेटियां बड़ी हो गई हैं। अब ये परिवार के साथ डिनर करने की बजाय अपने ब्वॉयफ्रेंड्स के साथ डेट करती हैं लेकिन बराक ओबामा इससे चिंतित नहीं हैं। गौरतलब है कि बराक ओबामा ने राष्ट्रपति के तौर पर व्हाइट हाउस में दो कार्यकाल गुजारे हैं। आठ नवंबर को अमेरिका में अगले राष्ट्रपति के लिए चुनाव है। रिपबल्किन पार्टी की तरफ से हिलेरी क्लिंटन जबकि डेमोक्रिटिक पार्टी की तरफ से डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति पद के प्रमुख उम्मीदवार हैं। चुनाव पूर्व सर्वे में दोनों उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर दिख रही है।
कर्नाटक में विधानसभा चुनाव मई के महीने में होने की संभावना जताई जा रही है। इससे पहले दल बदल का खेल आरंभ हो गया है। इसकी शुरुआत में कांग्रेस में बीजेपी नेता के शामिल होने से हो गई है। वहीं, हरियाणा में भी बड़ी संख्या में विभिन्न दलों से नेता कांग्रेस में शामिल हुए। कर्नाटक में तो बीजेपी के नेता के अलावा जनता दल के एक नेता ने भी कांग्रेस का दामन थामा। इसकी जानकारी पार्टी के नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने एक ट्वीट करके दी है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए) रणदीप सिंह सुरजेवाला ने ट्वीट करते हुए कहा कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता मंजूनाथ कुन्नूर, पूर्व सांसद और 3 बार के पूर्व विधायक रहे केआर पीट, मांड्या से जनता दल के वरिष्ठ नेता देवराज। कांग्रेस परिवार दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है। हम एक नया कर्नाटक बनाएंगे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए) वहीं, हरियाणा में भी 56 नेता कांग्रेस में शामिल हुए हैं। रविवार 26 मार्च को चंडीगढ़ स्थित कांग्रेस भवन में भूपेंद्र सिंह हुड्डा, चौधरी उदयभान और राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा की मौजूदगी में इन तमाम नेताओं ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। इनमें पूर्व विधायक और सोनीपत जेजेपी अध्यक्ष पदम सिंह दहिया, पूर्व विधायक और आम आदमी पार्टी नेता बिजेंद्र कादियान उर्फ बिल्लू और पूर्व विधायक और जेजेपी नेता मूलाराम गुर्जर का नाम शामिल हैं। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
कर्नाटक में विधानसभा चुनाव मई के महीने में होने की संभावना जताई जा रही है। इससे पहले दल बदल का खेल आरंभ हो गया है। इसकी शुरुआत में कांग्रेस में बीजेपी नेता के शामिल होने से हो गई है। वहीं, हरियाणा में भी बड़ी संख्या में विभिन्न दलों से नेता कांग्रेस में शामिल हुए। कर्नाटक में तो बीजेपी के नेता के अलावा जनता दल के एक नेता ने भी कांग्रेस का दामन थामा। इसकी जानकारी पार्टी के नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने एक ट्वीट करके दी है। रणदीप सिंह सुरजेवाला ने ट्वीट करते हुए कहा कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता मंजूनाथ कुन्नूर, पूर्व सांसद और तीन बार के पूर्व विधायक रहे केआर पीट, मांड्या से जनता दल के वरिष्ठ नेता देवराज। कांग्रेस परिवार दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है। हम एक नया कर्नाटक बनाएंगे। वहीं, हरियाणा में भी छप्पन नेता कांग्रेस में शामिल हुए हैं। रविवार छब्बीस मार्च को चंडीगढ़ स्थित कांग्रेस भवन में भूपेंद्र सिंह हुड्डा, चौधरी उदयभान और राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा की मौजूदगी में इन तमाम नेताओं ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। इनमें पूर्व विधायक और सोनीपत जेजेपी अध्यक्ष पदम सिंह दहिया, पूर्व विधायक और आम आदमी पार्टी नेता बिजेंद्र कादियान उर्फ बिल्लू और पूर्व विधायक और जेजेपी नेता मूलाराम गुर्जर का नाम शामिल हैं। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
हद भूमि बेहद भूमि की सीमा प्रणब ब्रह्म तक है । उसके नीचे हद भूमि शुरू होती है । हद भूमि का विस्तार पाताल से लेकर महाविष्णु तथा महाशून्य तक है। अक्षर के मन में अक्षरातीत की लीला देखने का मोह ( प्रबल इच्छा) पैदा हुआ१ । नींद के आधरण [स्वप्न] में उसने मोहजल ( मोहावस्था) में एक अण्डा देखा। यह अण्डा ब्रह्मांड रूपी था३ । इस अण्डे के फूटने पर इसमें से आदिनारायण निकला, जिसने अपनी इच्छा से जलका निर्माण किया । नर से उत्पन्न होने के कारण इस जल का नाम नार हुआ। ब्रह्मांड रूपी अण्डे के गर्भ में होने के कारण इस [जल] समुद्र को गर्भोदक समुद्र नाम दिया गया५ । इस समुद्र में 'शेष नाग तथा कर्म रहता है। यहीं पर जल के ऊपर और पृथ्वी के अधोभाग में नरक के चौरासी कुण्ड हैं६ । इस कूर्म का मुख करोड़ योजन का है। इसकी पीठ का विस्तार समयास (४९) करोड़ योजन है। इतनी ही विस्तृत इसकी कुक्षि [पेट] है, एक करोड़ के विस्तार वाला कण्ठ और एक-एक करोड़ विस्तारवाली आंखे' हैं । इन आंखों की ऊंचाई [मुटाई] सत्तावन कोटी योजन है । इस कूर्म का मुद्द पूर्व की ओर, पूछ पश्चिम को भोर तथा कुक्षि उत्तर दक्षिण की ओर है। चारों दि शाओं में चार पैर है इस कूर्म की पीठ पर सहलफन वाला शेषनाग रहता है । भगवान कृष्ण के भाई बलराम तथा राम अनुज लक्ष्मण इसी शेषनाग के अवतार थे । इस शेषनाग पर महाविष्णु का संकर्षण नामक व्यूह (शक्ति) का रूप शयन १ इच्छा भई मोह तत्व भयो, फिर अण्ड भयो कोइ काल तरानी जीव पड़ो ता मध्य में आएके, आयो कहां थे कोई तो जानी । ३विष्णु पुराण : निःप्रवेशे निरालोके सर्वतः तमसावृते । बृहदण्डमभदेकमक्षर कारण परम् ।। ४ - निजानन्द चरितामृत पृ० ४०४-४०५ ५- सृष्टि विज्ञान वर्णन पृ० ४ ६ - जिसका वर्णन आगे किया गया है । ७- वर्तमान दीपक, कि० ३५, चौ० २५-३५ ८- इसका वर्णन आगे किया गया है । विज्ञान सरोवर, पृ० ६४
हद भूमि बेहद भूमि की सीमा प्रणब ब्रह्म तक है । उसके नीचे हद भूमि शुरू होती है । हद भूमि का विस्तार पाताल से लेकर महाविष्णु तथा महाशून्य तक है। अक्षर के मन में अक्षरातीत की लीला देखने का मोह पैदा हुआएक । नींद के आधरण [स्वप्न] में उसने मोहजल में एक अण्डा देखा। यह अण्डा ब्रह्मांड रूपी थातीन । इस अण्डे के फूटने पर इसमें से आदिनारायण निकला, जिसने अपनी इच्छा से जलका निर्माण किया । नर से उत्पन्न होने के कारण इस जल का नाम नार हुआ। ब्रह्मांड रूपी अण्डे के गर्भ में होने के कारण इस [जल] समुद्र को गर्भोदक समुद्र नाम दिया गयापाँच । इस समुद्र में 'शेष नाग तथा कर्म रहता है। यहीं पर जल के ऊपर और पृथ्वी के अधोभाग में नरक के चौरासी कुण्ड हैंछः । इस कूर्म का मुख करोड़ योजन का है। इसकी पीठ का विस्तार समयास करोड़ योजन है। इतनी ही विस्तृत इसकी कुक्षि [पेट] है, एक करोड़ के विस्तार वाला कण्ठ और एक-एक करोड़ विस्तारवाली आंखे' हैं । इन आंखों की ऊंचाई [मुटाई] सत्तावन कोटी योजन है । इस कूर्म का मुद्द पूर्व की ओर, पूछ पश्चिम को भोर तथा कुक्षि उत्तर दक्षिण की ओर है। चारों दि शाओं में चार पैर है इस कूर्म की पीठ पर सहलफन वाला शेषनाग रहता है । भगवान कृष्ण के भाई बलराम तथा राम अनुज लक्ष्मण इसी शेषनाग के अवतार थे । इस शेषनाग पर महाविष्णु का संकर्षण नामक व्यूह का रूप शयन एक इच्छा भई मोह तत्व भयो, फिर अण्ड भयो कोइ काल तरानी जीव पड़ो ता मध्य में आएके, आयो कहां थे कोई तो जानी । तीनविष्णु पुराण : निःप्रवेशे निरालोके सर्वतः तमसावृते । बृहदण्डमभदेकमक्षर कारण परम् ।। चार - निजानन्द चरितामृत पृशून्य चार सौ चार-चार सौ पाँच पाँच- सृष्टि विज्ञान वर्णन पृशून्य चार छः - जिसका वर्णन आगे किया गया है । सात- वर्तमान दीपक, किशून्य पैंतीस, चौशून्य पच्चीस-पैंतीस आठ- इसका वर्णन आगे किया गया है । विज्ञान सरोवर, पृशून्य चौंसठ