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सूनी सूनी हैं अब बृज गलियाँ, उपवन में न खिलती कलियाँ. वृंदा सूख गयी अब वन में, खड़ी उदास डगर पर सखियाँ. जब से कृष्ण गये तुम बृज से, अब मन बृज में लागत नाहीं. माखन लटक रहा छींके पर, नहीं कोई अब उसे चुराता. खड़ीं उदास गाय खूंटे पर, बंसी स्वर अब नहीं बुलाता. तरस गयीं दधि की ये मटकी, कान्हा है कंकड़ मारत नाहीं. क्यों भूल गये बचपन की क्रीडा, क्यों भूल गये बृज की माटी तुम? एक बार तुम मिल कर जाते, नहीं गोपियाँ होतीं यूँ गुमसुम. अंसुअन से स्नान करत अब, यमुना तट पर जावत नाहीं.
सूनी सूनी हैं अब बृज गलियाँ, उपवन में न खिलती कलियाँ. वृंदा सूख गयी अब वन में, खड़ी उदास डगर पर सखियाँ. जब से कृष्ण गये तुम बृज से, अब मन बृज में लागत नाहीं. माखन लटक रहा छींके पर, नहीं कोई अब उसे चुराता. खड़ीं उदास गाय खूंटे पर, बंसी स्वर अब नहीं बुलाता. तरस गयीं दधि की ये मटकी, कान्हा है कंकड़ मारत नाहीं. क्यों भूल गये बचपन की क्रीडा, क्यों भूल गये बृज की माटी तुम? एक बार तुम मिल कर जाते, नहीं गोपियाँ होतीं यूँ गुमसुम. अंसुअन से स्नान करत अब, यमुना तट पर जावत नाहीं.
नोएडा (उत्तर प्रदेश): गौतमबुद्ध नगर में मंगलवार को कोविड-19 से संक्रमित 26 मरीज पाए गए हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से जिले में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है। जिला निगरानी अधिकारी सुनील दोहरे ने बताया कि मंगलवार को कोविड-19 की आई जांच रिपोर्ट में जनपद गौतमबुद्ध नगर के 26 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए। कोविड-19 से संक्रमित कुल मरीजों की संख्या अब 496 हो गई है। उन्होंने बताया कि सात मरीजों की अब तक मौत हो चुकी है। कुल 313 लोग उपचार के बाद ठीक होकर घर जा चुके हैं। इसके अलावा, 176 मरीज यहां के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। वहीं, आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में मंगलवार को कोरोना संक्रमण के 171 नए मामले सामने आए। राज्य में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 8532 हो गई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी बुलेटिन के मुताबिक राज्य में वर्तमान में संक्रमण के मामलों की संख्या 3231 है जबकि 5078 लोग उपचार के बाद ठीक होकर अपने घरों को जा चुके हैं। बुलेटिन में बताया गया कि कोविड-19 संक्रमण की वजह से अब तक उत्तर प्रदेश में 223 लोगों ने अपनी जान गंवाई है। प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद ने बताया कि राज्य में संक्रमण से ठीक होने की दर 59 . 71 है। प्रसाद ने बताया दूसरे राज्यों से उत्तर प्रदेश में आ रहे श्रमिकों की निगरानी में लगाई गई आशा कार्यकर्ताओं ने अब तक 1168917 लोगों का सर्वेक्षण किया है। इनमें से 1036 लोगों में कोरोना वायरस के कोई ना कोई लक्षण पाए गए और उनके नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं।
नोएडा : गौतमबुद्ध नगर में मंगलवार को कोविड-उन्नीस से संक्रमित छब्बीस मरीज पाए गए हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से जिले में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है। जिला निगरानी अधिकारी सुनील दोहरे ने बताया कि मंगलवार को कोविड-उन्नीस की आई जांच रिपोर्ट में जनपद गौतमबुद्ध नगर के छब्बीस लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए। कोविड-उन्नीस से संक्रमित कुल मरीजों की संख्या अब चार सौ छियानवे हो गई है। उन्होंने बताया कि सात मरीजों की अब तक मौत हो चुकी है। कुल तीन सौ तेरह लोग उपचार के बाद ठीक होकर घर जा चुके हैं। इसके अलावा, एक सौ छिहत्तर मरीज यहां के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। वहीं, आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में मंगलवार को कोरोना संक्रमण के एक सौ इकहत्तर नए मामले सामने आए। राज्य में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर आठ हज़ार पाँच सौ बत्तीस हो गई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी बुलेटिन के मुताबिक राज्य में वर्तमान में संक्रमण के मामलों की संख्या तीन हज़ार दो सौ इकतीस है जबकि पाँच हज़ार अठहत्तर लोग उपचार के बाद ठीक होकर अपने घरों को जा चुके हैं। बुलेटिन में बताया गया कि कोविड-उन्नीस संक्रमण की वजह से अब तक उत्तर प्रदेश में दो सौ तेईस लोगों ने अपनी जान गंवाई है। प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद ने बताया कि राज्य में संक्रमण से ठीक होने की दर उनसठ . इकहत्तर है। प्रसाद ने बताया दूसरे राज्यों से उत्तर प्रदेश में आ रहे श्रमिकों की निगरानी में लगाई गई आशा कार्यकर्ताओं ने अब तक ग्यारह लाख अड़सठ हज़ार नौ सौ सत्रह लोगों का सर्वेक्षण किया है। इनमें से एक हज़ार छत्तीस लोगों में कोरोना वायरस के कोई ना कोई लक्षण पाए गए और उनके नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं।
पटना पुलिस मुख्यालय पटेल भवन के स्पेशल ब्रांच में तैनात महिला सिपाही कुमारी अनामिका को अनिसाबाद गोलंबर पर बुधवार की सुबह हाइवा ने रौंद दिया, जिससे उनकी मौत हो गयी. 46 वर्षीया सिपाही कुमारी अनामिका मूल रूप से जहानाबाद के हुल्लासगंज थाने के विष्णपुर की रहने वाली थीं. यहां 70 फुट में किराये के मकान में परिवार के साथ रहती थीं. मौत की सूचना मिलते ही घर में कोहराम मच गया. धक्का मार कर भाग रहे हाइवा को लोगों ने खदेड़ कर पकड़ लिया. सूचना पर पहुंची ट्रैफिक थाने की पुलिस ने सरैया का रहने वाला आरोपित ड्राइवर रवींद्र यादव को गिरफ्तार कर लिया और हाइवा को जब्त कर थाने ले आयी. ट्रैफिक पुलिस ने बताया कि हाइवा खाली था और बालू लोड करने के लिए तेज रफ्तार से जा रहा था. ट्रैफिक थाने की पुलिस ने महिला सिपाही के शव को पोस्टमार्टम के लिए पीएमसीएच भेज दिया. जानकारी के अनुसार करीब साढ़े सात बजे महिला सिपाही कुमारी अनामिका 70 फुट स्थित किराये के मकान से ड्यूटी के लिए निकली थीं. वहां से ऑटो पकड़ कर अनिसाबाद गोलंबर पहुंचीं और पुलिस मुख्यालय के लिए वहां दूसरा टेंपो पकड़ने के लिए सड़क पार कर रही थीं. इसी दौरान बाइपास से तेज रफ्तार में आ रहे हाइवा ने उन्हें रौंद दिया. धक्का लगने के बाद महिला सिपाही सड़क पर काफी दूर फेंका गयीं. इसके बाद भागने के दौरान उन पर हाइवा चढ़ा दिया, जिससे वह गंभीर रूप से जख्मी हो गयीं. मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने आनन-फानन में घायल महिला सिपाही को निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां करीब डेढ़ बजे के दौरान अनामिका की मौत हो गयी. मृत सिपाही कुमारी अनामिका के पति धनंजय ने बताया कि 1997 में अनामिका ने पुलिस ज्वाइन की थी. सबसे पहले गया, फिर जहानाबाद, नवादा, मोतिहारी और फिर पटना में पोस्टिंग हुई. पिछले सात साल से पटना में तैनात थीं. फिलहाल पटना पुलिस मुख्यालय में सीआइडी की फोटो प्रशाखा में कार्य रही थीं. उन्होंने बताया कि मैं गांव में था. मेरे बेटे ने फोन किया और इसके बाद बेटी ने फोन कर बताया कि मां की सड़क हादसे में मौत हो गयी है. पति ने बताया कि हमारे तीन बेटियां हैं. एक बेटी की शादी हुई है. दो अन्य बेटियाें में एक बीए पार्ट टू और दूसरी इंटर की छात्रा है. वहीं, सबसे छोटे बेटे ने इस बार मैट्रिक की परीक्षा फर्स्ट डिविजन से पास की है.
पटना पुलिस मुख्यालय पटेल भवन के स्पेशल ब्रांच में तैनात महिला सिपाही कुमारी अनामिका को अनिसाबाद गोलंबर पर बुधवार की सुबह हाइवा ने रौंद दिया, जिससे उनकी मौत हो गयी. छियालीस वर्षीया सिपाही कुमारी अनामिका मूल रूप से जहानाबाद के हुल्लासगंज थाने के विष्णपुर की रहने वाली थीं. यहां सत्तर फुट में किराये के मकान में परिवार के साथ रहती थीं. मौत की सूचना मिलते ही घर में कोहराम मच गया. धक्का मार कर भाग रहे हाइवा को लोगों ने खदेड़ कर पकड़ लिया. सूचना पर पहुंची ट्रैफिक थाने की पुलिस ने सरैया का रहने वाला आरोपित ड्राइवर रवींद्र यादव को गिरफ्तार कर लिया और हाइवा को जब्त कर थाने ले आयी. ट्रैफिक पुलिस ने बताया कि हाइवा खाली था और बालू लोड करने के लिए तेज रफ्तार से जा रहा था. ट्रैफिक थाने की पुलिस ने महिला सिपाही के शव को पोस्टमार्टम के लिए पीएमसीएच भेज दिया. जानकारी के अनुसार करीब साढ़े सात बजे महिला सिपाही कुमारी अनामिका सत्तर फुट स्थित किराये के मकान से ड्यूटी के लिए निकली थीं. वहां से ऑटो पकड़ कर अनिसाबाद गोलंबर पहुंचीं और पुलिस मुख्यालय के लिए वहां दूसरा टेंपो पकड़ने के लिए सड़क पार कर रही थीं. इसी दौरान बाइपास से तेज रफ्तार में आ रहे हाइवा ने उन्हें रौंद दिया. धक्का लगने के बाद महिला सिपाही सड़क पर काफी दूर फेंका गयीं. इसके बाद भागने के दौरान उन पर हाइवा चढ़ा दिया, जिससे वह गंभीर रूप से जख्मी हो गयीं. मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने आनन-फानन में घायल महिला सिपाही को निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां करीब डेढ़ बजे के दौरान अनामिका की मौत हो गयी. मृत सिपाही कुमारी अनामिका के पति धनंजय ने बताया कि एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे में अनामिका ने पुलिस ज्वाइन की थी. सबसे पहले गया, फिर जहानाबाद, नवादा, मोतिहारी और फिर पटना में पोस्टिंग हुई. पिछले सात साल से पटना में तैनात थीं. फिलहाल पटना पुलिस मुख्यालय में सीआइडी की फोटो प्रशाखा में कार्य रही थीं. उन्होंने बताया कि मैं गांव में था. मेरे बेटे ने फोन किया और इसके बाद बेटी ने फोन कर बताया कि मां की सड़क हादसे में मौत हो गयी है. पति ने बताया कि हमारे तीन बेटियां हैं. एक बेटी की शादी हुई है. दो अन्य बेटियाें में एक बीए पार्ट टू और दूसरी इंटर की छात्रा है. वहीं, सबसे छोटे बेटे ने इस बार मैट्रिक की परीक्षा फर्स्ट डिविजन से पास की है.
Gorakhpur News शहर के मोहद्दीपुर चौकी प्रभारी निलंबित हुए और बरही चौकी प्रभारी लाइनहाजिर हुए। असुरन पर तैनात रहे कुंवर गौरव एसपी सिटी कार्यालय से संबद्ध किए गए। उन पर भाजपा नेता के साथ अभद्रता करने का आरोप था। गोरखपुर, जागरण संवाददाता। गोरखपुर जिले में आमजन से दुर्व्यवहार व मारपीट करना तीन पुलिस कर्मियों को भारी पड़ गया। दुर्व्यवहार व मारपीट करने की शिकायत पर आरोपित तीन चौकी प्रभारियों को एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने हटा दिया है। शहर के मोहद्दीपुर चौकी प्रभारी पर युवक को बेरहमी से पीटने, बरही चौकी प्रभारी पर जनसुनवाई में लापरवाही व असुरन चौकी प्रभारी पर भाजपा नेता के साथ अभद्रता करने का आरोप था। ये है मामलाः कैंट थाना क्षेत्र की रहने वाली युवती लापता है। अपहरण का मुकदमा दर्ज कर पुलिस तलाश कर रही है। आरोप है कि मामले की विवेचना कर चौकी प्रभारी मोहद्दीपुर रुद्र प्रताप सिंह ने लड़की को बरामद करने की जगह उसके भाई को चौकी में बुलाकर बदसलूकी की थी। पीड़ित ने एसएसपी से शिकायत की जिसकी उन्होंने गोपनीय जांच कराई तो सही पाया। जांच में सही पाया गया आरोपः इसी तरह बरही चौकी प्रभारी विजय प्रताप सिंह पर एक व्यक्ति ने पिटाई करने का आरोप लगाया था। असुरन चौकी इंचार्ज रहे कुंवर गौरव सिंह ने बेटे की दवा लेने आए भाजपा नेता के साथ बदसलूकी करने के साथ ही स्कूटी का चालान काट दिया था। एसएसपी को मामले की जानकारी देते हुए भाजपा नेता उनके कार्यालय में रो- पड़े थे। एसपी यातायात की जांच में शिकायत सही पाई गई। अधिकारी बोलेः एसएसपी डा. गौरव ग्रोवर ने बताया कि मोहद्दीपुर चौकी प्रभारी को निलंबित, बरही को लाइन हाजिर किया गया है। असुरन चौकी प्रभारी को एसपी सिटी कार्यालय से संबद्ध किया गया है। मजिस्ट्रेट के न आने से रुका पोस्टमार्टमः बीआरडी मेडिकल कालेज में भर्ती कुशीनगर जिले की रहने वाली महिला की मंगलवार सुबह मौत हो गई। पंचनामा भरने के लिए पुलिस शाम तक पुलिस मजिस्ट्रेट का इंतजार करती रही लेकिन उनके न पहुंचने से पोस्टमार्टम नहीं हुआ। कुशीनगर जिले के पटहेरवा थानाक्षेत्र स्थित छटियाव गांव की रहने वाली मनोरमा की शादी दो माह पहले हुई थी। संदिग्ध परिस्थिति में वह फंदे से लटक गई थी। गंभीर स्थिति में स्वजन मेडिकल कालेज ले आए। उपचार के दौरान मंगलवार की भोर में मौत हो गई।
Gorakhpur News शहर के मोहद्दीपुर चौकी प्रभारी निलंबित हुए और बरही चौकी प्रभारी लाइनहाजिर हुए। असुरन पर तैनात रहे कुंवर गौरव एसपी सिटी कार्यालय से संबद्ध किए गए। उन पर भाजपा नेता के साथ अभद्रता करने का आरोप था। गोरखपुर, जागरण संवाददाता। गोरखपुर जिले में आमजन से दुर्व्यवहार व मारपीट करना तीन पुलिस कर्मियों को भारी पड़ गया। दुर्व्यवहार व मारपीट करने की शिकायत पर आरोपित तीन चौकी प्रभारियों को एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने हटा दिया है। शहर के मोहद्दीपुर चौकी प्रभारी पर युवक को बेरहमी से पीटने, बरही चौकी प्रभारी पर जनसुनवाई में लापरवाही व असुरन चौकी प्रभारी पर भाजपा नेता के साथ अभद्रता करने का आरोप था। ये है मामलाः कैंट थाना क्षेत्र की रहने वाली युवती लापता है। अपहरण का मुकदमा दर्ज कर पुलिस तलाश कर रही है। आरोप है कि मामले की विवेचना कर चौकी प्रभारी मोहद्दीपुर रुद्र प्रताप सिंह ने लड़की को बरामद करने की जगह उसके भाई को चौकी में बुलाकर बदसलूकी की थी। पीड़ित ने एसएसपी से शिकायत की जिसकी उन्होंने गोपनीय जांच कराई तो सही पाया। जांच में सही पाया गया आरोपः इसी तरह बरही चौकी प्रभारी विजय प्रताप सिंह पर एक व्यक्ति ने पिटाई करने का आरोप लगाया था। असुरन चौकी इंचार्ज रहे कुंवर गौरव सिंह ने बेटे की दवा लेने आए भाजपा नेता के साथ बदसलूकी करने के साथ ही स्कूटी का चालान काट दिया था। एसएसपी को मामले की जानकारी देते हुए भाजपा नेता उनके कार्यालय में रो- पड़े थे। एसपी यातायात की जांच में शिकायत सही पाई गई। अधिकारी बोलेः एसएसपी डा. गौरव ग्रोवर ने बताया कि मोहद्दीपुर चौकी प्रभारी को निलंबित, बरही को लाइन हाजिर किया गया है। असुरन चौकी प्रभारी को एसपी सिटी कार्यालय से संबद्ध किया गया है। मजिस्ट्रेट के न आने से रुका पोस्टमार्टमः बीआरडी मेडिकल कालेज में भर्ती कुशीनगर जिले की रहने वाली महिला की मंगलवार सुबह मौत हो गई। पंचनामा भरने के लिए पुलिस शाम तक पुलिस मजिस्ट्रेट का इंतजार करती रही लेकिन उनके न पहुंचने से पोस्टमार्टम नहीं हुआ। कुशीनगर जिले के पटहेरवा थानाक्षेत्र स्थित छटियाव गांव की रहने वाली मनोरमा की शादी दो माह पहले हुई थी। संदिग्ध परिस्थिति में वह फंदे से लटक गई थी। गंभीर स्थिति में स्वजन मेडिकल कालेज ले आए। उपचार के दौरान मंगलवार की भोर में मौत हो गई।
AKhilesh Yadav के प्लेन को Moradabad में लैंडिंग की परमिशन नहीं मिली। इस पर Samajwadi Party ने नाराजगी जताई है। डीएम ने मामले पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि सुरक्षा कारणों से प्लेन की लैंडिंग की परमिशन नहीं दी गई है। मुरादाबादः समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) को 4 फरवरी को एक शादी समारोह में शिरकत करने के लिए प्लेन से मुरादाबाद (Moradabad News) आना था। इसके लिए सपा नेता का कार्यक्रम भी जारी हुआ था। जिला प्रशासन को पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का प्रोग्राम भेजकर सूचना दे दी गई थी लेकिन गुरुवार को जिला प्रशासन ने प्लेन की लैंडिंग की परमिशन देने से इनकार कर दिया। समाजवादी पार्टी की तरफ से जारी प्रोग्राम के मुताबिक अखिलेश यादव के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 4 फरवरी को मुरादाबाद में सपा के पूर्व विधायक हाजी यूसुफ अंसारी के बेटे की शादी के समारोह में दोपहर में शामिल होना था। पार्टी की तरफ से इसके लिए मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम भी जारी कर दिया गया था। अखिलेश यादव को प्लेन से भदासना एयरपोर्ट मुरादाबाद में आना था लेकिन गुरुवार को जिला प्रशासन ने उनके प्लेन की लैंडिंग के लिए परमिशन देने से इंकार कर दिया। इसके चलते अखिलेश यादव ने अपना मुरादाबाद प्लेन से आने का प्रोग्राम कैंसिल कर दिया है। इसे लेकर सपा की तरफ से भाजपा पर तीखी बयानबाजी की गई है। सपा ने ट्वीट कर कहा है कि पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत दिनांक 4 फरवरी 2023 को माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जी को मुरादाबाद में एक समारोह में सम्मिलित होना था लेकिन योगी सरकार प्लेन को लैंड होने की अनुमति नहीं दे रही है। यह बेहद निंदनीय कृत्य है। भाजपा के अहंकार का जल्द होगा अंत! यह मुद्दा मीडिया में सुर्खी बनने के बाद मुरादाबाद के डीएम शैलेंद्र सिंह ने स्थिति साफ की और पक्ष रखते हुए कहा कि मुरादाबाद में भदासना स्थित एयरपोर्ट पर जीर्णोद्धार का काम चल रहा है, जिसकी वजह से यहां प्लेन की लैंडिंग सुरक्षित नहीं है। इसलिए लैंडिंग की परमिशन नहीं दी गई है। दरअसल, मुरादाबाद में एयरपोर्ट से जल्द उड़ान शुरू होने की संभावना के चलते डीजीसीए ने प्रशासन को एयरपोर्ट का जीर्णोद्धार कराने के निर्देश दे रखे हैं। उसी क्रम काम चल रहा हैं।
AKhilesh Yadav के प्लेन को Moradabad में लैंडिंग की परमिशन नहीं मिली। इस पर Samajwadi Party ने नाराजगी जताई है। डीएम ने मामले पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि सुरक्षा कारणों से प्लेन की लैंडिंग की परमिशन नहीं दी गई है। मुरादाबादः समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को चार फरवरी को एक शादी समारोह में शिरकत करने के लिए प्लेन से मुरादाबाद आना था। इसके लिए सपा नेता का कार्यक्रम भी जारी हुआ था। जिला प्रशासन को पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का प्रोग्राम भेजकर सूचना दे दी गई थी लेकिन गुरुवार को जिला प्रशासन ने प्लेन की लैंडिंग की परमिशन देने से इनकार कर दिया। समाजवादी पार्टी की तरफ से जारी प्रोग्राम के मुताबिक अखिलेश यादव के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चार फरवरी को मुरादाबाद में सपा के पूर्व विधायक हाजी यूसुफ अंसारी के बेटे की शादी के समारोह में दोपहर में शामिल होना था। पार्टी की तरफ से इसके लिए मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम भी जारी कर दिया गया था। अखिलेश यादव को प्लेन से भदासना एयरपोर्ट मुरादाबाद में आना था लेकिन गुरुवार को जिला प्रशासन ने उनके प्लेन की लैंडिंग के लिए परमिशन देने से इंकार कर दिया। इसके चलते अखिलेश यादव ने अपना मुरादाबाद प्लेन से आने का प्रोग्राम कैंसिल कर दिया है। इसे लेकर सपा की तरफ से भाजपा पर तीखी बयानबाजी की गई है। सपा ने ट्वीट कर कहा है कि पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत दिनांक चार फरवरी दो हज़ार तेईस को माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जी को मुरादाबाद में एक समारोह में सम्मिलित होना था लेकिन योगी सरकार प्लेन को लैंड होने की अनुमति नहीं दे रही है। यह बेहद निंदनीय कृत्य है। भाजपा के अहंकार का जल्द होगा अंत! यह मुद्दा मीडिया में सुर्खी बनने के बाद मुरादाबाद के डीएम शैलेंद्र सिंह ने स्थिति साफ की और पक्ष रखते हुए कहा कि मुरादाबाद में भदासना स्थित एयरपोर्ट पर जीर्णोद्धार का काम चल रहा है, जिसकी वजह से यहां प्लेन की लैंडिंग सुरक्षित नहीं है। इसलिए लैंडिंग की परमिशन नहीं दी गई है। दरअसल, मुरादाबाद में एयरपोर्ट से जल्द उड़ान शुरू होने की संभावना के चलते डीजीसीए ने प्रशासन को एयरपोर्ट का जीर्णोद्धार कराने के निर्देश दे रखे हैं। उसी क्रम काम चल रहा हैं।
नई दिल्ली, 9 अगस्तः भारतीय सीनियर क्रिकेट चयनकर्ताओं ने एशिया कप के लिए अपनी टीम की घोषणा कर दी है। इस टीम को लेकर काफी उत्सुकता थी क्योंकि देखना बाकी था कि विराट कोहली वापसी करेंगे या फिर नहीं और कौन-कौन से खिलाड़ी चुने जाएंगे क्योंकि एशिया कप में शामिल होने वाली टीम के अधिकांश खिलाड़ी हमको T20 वर्ल्ड कप में भी खेलते दिखाई देने वाले हैं। कई क्रिकेट विशेषज्ञों ने तो यह भी माना कि एशिया कप की प्लेइंग इलेवन काफी हद तक वही होने जा रही है जो इस साल ऑस्ट्रेलिया में खेले जाने वाले T20 वर्ल्ड कप में होगी। लेकिन एशिया कप में आपको जसप्रीत बुमराह नहीं दिखाई देंगे क्योंकि वह चोट के चलते बाहर हो चुके हैं। ऐसे में जब उनके जोड़ीदार मोहम्मद शमी को बाहर किया गया तो यह थोड़ा अटपटा था। मोहम्मद शमी के बाहर होने को आप इसे एशिया कप स्क्वायड का सबसे बड़ा झटका भी कह सकते हैं। क्योंकि ना तो जसप्रीत बुमराह खेल रहे थे और ना ही हर्षल पटेल। मोहम्मद शमी ऐसे ऐसे गेंदबाज हैं जो किसी भी फॉर्मेट में बहुत अच्छे हैं। यह ठीक है कि वे T20 में थोड़े ज्यादा रन पिटवा सकते हैं लेकिन उनका अनुभव और ऑस्ट्रेलिया की पिचों पर गेंदबाजी करने की क्षमता को कम करके नहीं आंका जा सकता था। ऐसे में भारत के पूर्व ओपनिंग बल्लेबाज आकाश चोपड़ा का कहना है कि यह उनकी समझ के बाहर है कि मोहम्मद शमी को क्यों बाहर किया गया। मोहम्मद शमी को क्यों भूल गए? आकाश चोपड़ा ने हॉटस्टार पर कहा, हर कोई मोहम्मद शमी को क्यों भूल चुका है यह मेरी समझ के बाहर है। उन्होंने काफी अच्छा परफॉर्म किया है। उनके आईपीएल के नंबर भी अच्छे हैं। मुझे लगता है कि जैसे मोहम्मद शमी और आवेश खान के बीच में रेस हो रही थी। तो भी मैं अपनी आंख बंद करके मोहम्मद शमी की तरफ ही जाऊंगा। मुझे आवेश से कोई दिक्कत नहीं है पर मुझे लगता है कि शमी को एक मौका देना चाहिए था। चोपड़ा आगे कहते हैं कि, मैं रवि बिश्नोई के भी खिलाफ नहीं हूं लेकिन बात वही है कि आपने कुलदीप यादव को क्यों नहीं चुना। वहीं भारत के पूर्व ओपनिंग बल्लेबाज क्रिस श्रीकांत को भी लगता है कि भारत इस प्रतियोगिता में एक मीडियम पेसर गेंदबाज की कमी के साथ गया है। वे कहते हैं मुझे लगता है कि एक मीडियम कम है। मुझे लगता है कि शमी टीम में होने चाहिए थे। इसके अलावा मुझे लगता है कि अक्षर पटेल इस टीम में जगह बनाने के बहुत अच्छे दावेदार थे। बैक-अपः श्रेयस अय्यर, दीपक चाहर, अक्षर पटेल।
नई दिल्ली, नौ अगस्तः भारतीय सीनियर क्रिकेट चयनकर्ताओं ने एशिया कप के लिए अपनी टीम की घोषणा कर दी है। इस टीम को लेकर काफी उत्सुकता थी क्योंकि देखना बाकी था कि विराट कोहली वापसी करेंगे या फिर नहीं और कौन-कौन से खिलाड़ी चुने जाएंगे क्योंकि एशिया कप में शामिल होने वाली टीम के अधिकांश खिलाड़ी हमको Tबीस वर्ल्ड कप में भी खेलते दिखाई देने वाले हैं। कई क्रिकेट विशेषज्ञों ने तो यह भी माना कि एशिया कप की प्लेइंग इलेवन काफी हद तक वही होने जा रही है जो इस साल ऑस्ट्रेलिया में खेले जाने वाले Tबीस वर्ल्ड कप में होगी। लेकिन एशिया कप में आपको जसप्रीत बुमराह नहीं दिखाई देंगे क्योंकि वह चोट के चलते बाहर हो चुके हैं। ऐसे में जब उनके जोड़ीदार मोहम्मद शमी को बाहर किया गया तो यह थोड़ा अटपटा था। मोहम्मद शमी के बाहर होने को आप इसे एशिया कप स्क्वायड का सबसे बड़ा झटका भी कह सकते हैं। क्योंकि ना तो जसप्रीत बुमराह खेल रहे थे और ना ही हर्षल पटेल। मोहम्मद शमी ऐसे ऐसे गेंदबाज हैं जो किसी भी फॉर्मेट में बहुत अच्छे हैं। यह ठीक है कि वे Tबीस में थोड़े ज्यादा रन पिटवा सकते हैं लेकिन उनका अनुभव और ऑस्ट्रेलिया की पिचों पर गेंदबाजी करने की क्षमता को कम करके नहीं आंका जा सकता था। ऐसे में भारत के पूर्व ओपनिंग बल्लेबाज आकाश चोपड़ा का कहना है कि यह उनकी समझ के बाहर है कि मोहम्मद शमी को क्यों बाहर किया गया। मोहम्मद शमी को क्यों भूल गए? आकाश चोपड़ा ने हॉटस्टार पर कहा, हर कोई मोहम्मद शमी को क्यों भूल चुका है यह मेरी समझ के बाहर है। उन्होंने काफी अच्छा परफॉर्म किया है। उनके आईपीएल के नंबर भी अच्छे हैं। मुझे लगता है कि जैसे मोहम्मद शमी और आवेश खान के बीच में रेस हो रही थी। तो भी मैं अपनी आंख बंद करके मोहम्मद शमी की तरफ ही जाऊंगा। मुझे आवेश से कोई दिक्कत नहीं है पर मुझे लगता है कि शमी को एक मौका देना चाहिए था। चोपड़ा आगे कहते हैं कि, मैं रवि बिश्नोई के भी खिलाफ नहीं हूं लेकिन बात वही है कि आपने कुलदीप यादव को क्यों नहीं चुना। वहीं भारत के पूर्व ओपनिंग बल्लेबाज क्रिस श्रीकांत को भी लगता है कि भारत इस प्रतियोगिता में एक मीडियम पेसर गेंदबाज की कमी के साथ गया है। वे कहते हैं मुझे लगता है कि एक मीडियम कम है। मुझे लगता है कि शमी टीम में होने चाहिए थे। इसके अलावा मुझे लगता है कि अक्षर पटेल इस टीम में जगह बनाने के बहुत अच्छे दावेदार थे। बैक-अपः श्रेयस अय्यर, दीपक चाहर, अक्षर पटेल।
बिहार की राजनीति में बीत रहे वर्ष 2019 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के प्रमुख घटक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के रिश्तों में कई बार 'धूप-छांव' और 'संशय के बादल' दिखे, लेकिन साल के अंत में पड़ोसी राज्य झारखंड के विधानसभा चुनाव परिणाम ने दोनों को 'दिन में तारे' भी दिखा दिये, वहीं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की अगुवाई वाला महागठबंधन 'उम्मीद की किरण' नजर आने से नये जोश से भर गया है। बिहार में मिलकर सरकार चलाने के बावजूद भाजपा और जदयू के रिश्तों पर वर्ष 2019 में संशय के बादल छाये रहे। इस साल हुए लोकसभा चुनाव से पूर्व सीटों के बंटवारे के समय भी उनके रिश्तों को लेकर कयासों का दौर चला। हालांकि अंत में भाजपा-जदयू के बीच 17-17 सीटों तथा सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) को छह सीटें देकर राजग में सम्मानजनक समझौता हो गया। इसका नतीजा रहा कि राजग ने 40 में से 39 सीटें जीत ली। इसके बाद जब केन्द्र में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राजग की सरकार बनी तब जदयू संख्या बल के अनुपात में मंत्रिमंडल में जगह चाहता था, लेकिन भाजपा ने जदयू को सांकेतिक प्रतिनिधित्व का प्रस्ताव देते हुए उसके एक सांसद को मंत्रिमंडल में स्थान देने की बात कही। इसे जदयू ने अस्वीकार कर दिया। भाजपा से रिश्तों में आई खटास जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के उस तल्ख बयान में स्पष्ट नजर आ गया, जब उन्होंने कहा कि अब उनकी पार्टी भविष्य में भी मोदी मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होगी। उन्होंने यह भी कहा कि गठबंधन में आरंभ में जो बातें होती हैं, वही आखिरी होती है। मंत्रिपरिषद में आनुपातिक या सांकेतिक रूप से घटक दलों की भागीदारी का निर्णय भाजपा को करना था। जदयू के इस निर्णय के बाद भाजपा के साथ उसके रिश्ते के बचे दिन गिने जाने लगे थे। इसके बाद जब फौरी तीन तलाक, अनुच्छेद 370 और 35 (ए) को लेकर सरकार ने संसद में प्रस्ताव लाया तब जदयू ने उसका विरोध कर बता दिया कि भाजपा के सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे राम मंदिर, फौरी तीन तलाक, अनुच्छेद 370 और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) पर उसके विचार अलग हैं। इन मुद्दों पर जदयू नेताओं के खुलकर विरोध में विचार व्यक्त किये जाने से भाजपा के कुछ नेता असहज हो रहे थे। इसी दौरान जब जदयू ने 01 सितंबर को अपने प्रदेश कार्यालय के बाहर होर्डिंग लगाया जिसमें लिखा था कि 'क्यों करें विचार ठीके तो है नीतीश कुमार' तो वहीं एक अन्य होर्डिंग पर लिखा था 'सच्चा है अच्छा है चलो, नीतीश के साथ चलें। ' इसपर पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के बिहार विधान परिषद सदस्य डॉ. संजय पासवान ने कुमार को अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री नहीं बनने की सलाह देते हुये कह दिया कि अगली बार भाजपा को मौका दिया जाना चाहिए। कुमार जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, अब उन्हें केंद्र की राजनीति में भागीदार बनना चाहिए। उन्हें केंद्र की राजनीति का लंबा अनुभव भी है। वह केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। जदयू के नेताओं ने डॉ. पासवान के इस बयान पर कड़ी आपत्ति जतायी। पार्टी के प्रधान महासचिव के. सी. त्यागी ने कहा कि नीतीश कुमार किसी के रहमो-करम पर मुख्यमंत्री नहीं बने हैं। वह जनादेश से मुख्यमंत्री बने हैं। कुछ नेता चर्चा में बने रहने के लिए तरह-तरह के बयान देते हैं। ऐसे बयानवीर नेताओं को बड़बोले बयान देने से बचना चाहिए। जदयू के किसी नेता ने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ नहीं बोला। ऐसे बयान राजग की चुनावी योजना को कमजोर करते हैं। वहीं, दूसरी ओर भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने राजग की ओर से नेतृत्व में बदलाव किये जाने को लेकर लगायी जा रही सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए कहा था कि नीतीश कुमार बिहार में राजग के कप्तान हैं और वह वर्ष 2020 में होने वाले अगले विधानसभा चुनाव में भी कप्तान रहेंगे। जब कप्तान चौका और छक्का मार रहा हो और प्रतिद्वंद्वियों को पारी के अंतर से पराजित कर रहा हो तब किसी बदलाव का सवाल कहां उठता है। इसके बाद जब दिसंबर में नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) को संसद के दोनों सदनों से पारित कराने के लिए जदयू ने समर्थन दिया तब पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने अपने ही दल के शीर्ष नेतृत्व पर हमला तेज कर दिया। किशोर ने लोकसभा में सीएबी के जदयू के समर्थन पर कहा था, नागरिकता संशोधन विधेयक का समर्थन करने से पहले जदयू नेतृत्व को उन लोगों के बारे में एक बार जरूर सोचना चाहिए था, जिन्होंने वर्ष 2015 में उनपर विश्वास और भरोसा जताया था। हमें नहीं भूलना चाहिए कि 2015 के विधानसभा चुनाव में जीत के लिए जदयू और इसके प्रबंधकों के पास बहुत रास्ते नहीं बचे थे। उन्होंने आगे कहा, इस विधेयक का समर्थन निराशाजनक है, जो धर्म के आधार पर भेदभाव करता है। यह जदयू के संविधान से मेल नहीं खाता, जिसके पहले पन्ने पर ही तीन बार धर्मनिरपेक्ष लिखा है। हम गांधी की विचारधारा पर चलने वाले लोग हैं। किशोर ने राज्यसभा में भी इस विधेयक को समर्थन दिये जाने पर कहा था, संसद में बहुमत कायम रहा। अब न्यायपालिका से परे, भारत की आत्मा को बचाने की जिम्मेदारी 16 राज्यों के गैर भाजपा मुख्यमंत्रियों की है क्योंकि ये ऐसे राज्य हैं जहां इस बिल को लागू करना है। तीन मुख्यमंत्रियों (पंजाब, केरल और पश्चिम) ने सीएबी और एनआरसी को नकार दिया। अब समय आ गया है कि दूसरे गैर-भाजपा राज्य के मुख्यमंत्री अपना रुख स्पष्ट करें।
बिहार की राजनीति में बीत रहे वर्ष दो हज़ार उन्नीस में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के प्रमुख घटक भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड के रिश्तों में कई बार 'धूप-छांव' और 'संशय के बादल' दिखे, लेकिन साल के अंत में पड़ोसी राज्य झारखंड के विधानसभा चुनाव परिणाम ने दोनों को 'दिन में तारे' भी दिखा दिये, वहीं राष्ट्रीय जनता दल की अगुवाई वाला महागठबंधन 'उम्मीद की किरण' नजर आने से नये जोश से भर गया है। बिहार में मिलकर सरकार चलाने के बावजूद भाजपा और जदयू के रिश्तों पर वर्ष दो हज़ार उन्नीस में संशय के बादल छाये रहे। इस साल हुए लोकसभा चुनाव से पूर्व सीटों के बंटवारे के समय भी उनके रिश्तों को लेकर कयासों का दौर चला। हालांकि अंत में भाजपा-जदयू के बीच सत्रह-सत्रह सीटों तथा सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी को छह सीटें देकर राजग में सम्मानजनक समझौता हो गया। इसका नतीजा रहा कि राजग ने चालीस में से उनतालीस सीटें जीत ली। इसके बाद जब केन्द्र में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राजग की सरकार बनी तब जदयू संख्या बल के अनुपात में मंत्रिमंडल में जगह चाहता था, लेकिन भाजपा ने जदयू को सांकेतिक प्रतिनिधित्व का प्रस्ताव देते हुए उसके एक सांसद को मंत्रिमंडल में स्थान देने की बात कही। इसे जदयू ने अस्वीकार कर दिया। भाजपा से रिश्तों में आई खटास जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के उस तल्ख बयान में स्पष्ट नजर आ गया, जब उन्होंने कहा कि अब उनकी पार्टी भविष्य में भी मोदी मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होगी। उन्होंने यह भी कहा कि गठबंधन में आरंभ में जो बातें होती हैं, वही आखिरी होती है। मंत्रिपरिषद में आनुपातिक या सांकेतिक रूप से घटक दलों की भागीदारी का निर्णय भाजपा को करना था। जदयू के इस निर्णय के बाद भाजपा के साथ उसके रिश्ते के बचे दिन गिने जाने लगे थे। इसके बाद जब फौरी तीन तलाक, अनुच्छेद तीन सौ सत्तर और पैंतीस को लेकर सरकार ने संसद में प्रस्ताव लाया तब जदयू ने उसका विरोध कर बता दिया कि भाजपा के सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे राम मंदिर, फौरी तीन तलाक, अनुच्छेद तीन सौ सत्तर और राष्ट्रीय नागरिक पंजी पर उसके विचार अलग हैं। इन मुद्दों पर जदयू नेताओं के खुलकर विरोध में विचार व्यक्त किये जाने से भाजपा के कुछ नेता असहज हो रहे थे। इसी दौरान जब जदयू ने एक सितंबर को अपने प्रदेश कार्यालय के बाहर होर्डिंग लगाया जिसमें लिखा था कि 'क्यों करें विचार ठीके तो है नीतीश कुमार' तो वहीं एक अन्य होर्डिंग पर लिखा था 'सच्चा है अच्छा है चलो, नीतीश के साथ चलें। ' इसपर पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के बिहार विधान परिषद सदस्य डॉ. संजय पासवान ने कुमार को अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री नहीं बनने की सलाह देते हुये कह दिया कि अगली बार भाजपा को मौका दिया जाना चाहिए। कुमार जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, अब उन्हें केंद्र की राजनीति में भागीदार बनना चाहिए। उन्हें केंद्र की राजनीति का लंबा अनुभव भी है। वह केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। जदयू के नेताओं ने डॉ. पासवान के इस बयान पर कड़ी आपत्ति जतायी। पार्टी के प्रधान महासचिव के. सी. त्यागी ने कहा कि नीतीश कुमार किसी के रहमो-करम पर मुख्यमंत्री नहीं बने हैं। वह जनादेश से मुख्यमंत्री बने हैं। कुछ नेता चर्चा में बने रहने के लिए तरह-तरह के बयान देते हैं। ऐसे बयानवीर नेताओं को बड़बोले बयान देने से बचना चाहिए। जदयू के किसी नेता ने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ नहीं बोला। ऐसे बयान राजग की चुनावी योजना को कमजोर करते हैं। वहीं, दूसरी ओर भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने राजग की ओर से नेतृत्व में बदलाव किये जाने को लेकर लगायी जा रही सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए कहा था कि नीतीश कुमार बिहार में राजग के कप्तान हैं और वह वर्ष दो हज़ार बीस में होने वाले अगले विधानसभा चुनाव में भी कप्तान रहेंगे। जब कप्तान चौका और छक्का मार रहा हो और प्रतिद्वंद्वियों को पारी के अंतर से पराजित कर रहा हो तब किसी बदलाव का सवाल कहां उठता है। इसके बाद जब दिसंबर में नागरिकता संशोधन विधेयक को संसद के दोनों सदनों से पारित कराने के लिए जदयू ने समर्थन दिया तब पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने अपने ही दल के शीर्ष नेतृत्व पर हमला तेज कर दिया। किशोर ने लोकसभा में सीएबी के जदयू के समर्थन पर कहा था, नागरिकता संशोधन विधेयक का समर्थन करने से पहले जदयू नेतृत्व को उन लोगों के बारे में एक बार जरूर सोचना चाहिए था, जिन्होंने वर्ष दो हज़ार पंद्रह में उनपर विश्वास और भरोसा जताया था। हमें नहीं भूलना चाहिए कि दो हज़ार पंद्रह के विधानसभा चुनाव में जीत के लिए जदयू और इसके प्रबंधकों के पास बहुत रास्ते नहीं बचे थे। उन्होंने आगे कहा, इस विधेयक का समर्थन निराशाजनक है, जो धर्म के आधार पर भेदभाव करता है। यह जदयू के संविधान से मेल नहीं खाता, जिसके पहले पन्ने पर ही तीन बार धर्मनिरपेक्ष लिखा है। हम गांधी की विचारधारा पर चलने वाले लोग हैं। किशोर ने राज्यसभा में भी इस विधेयक को समर्थन दिये जाने पर कहा था, संसद में बहुमत कायम रहा। अब न्यायपालिका से परे, भारत की आत्मा को बचाने की जिम्मेदारी सोलह राज्यों के गैर भाजपा मुख्यमंत्रियों की है क्योंकि ये ऐसे राज्य हैं जहां इस बिल को लागू करना है। तीन मुख्यमंत्रियों ने सीएबी और एनआरसी को नकार दिया। अब समय आ गया है कि दूसरे गैर-भाजपा राज्य के मुख्यमंत्री अपना रुख स्पष्ट करें।
कोरोना की पहली लहर को आसानी से संभालने वाले उत्तर प्रदेश में इस बार कोरोना का संक्रमण बेकाबू नजर आ रहा है. देश में रोजोना आने वाले नए केस में कल यूपी दूसरे नंबर पर पहुंच गया. पहली बार यूपी में एक दिन में बीस हजार केस आए. लखनऊ के श्मशानों और कब्रिस्तानों में शवों की संख्या अचानक बढ़ गई है. कोविड को अगर आप गंभीरता से नहीं ले रहे तो इन तस्वीरों को देखकर आप भी संजीदा हो जाएं. महामारी का रूप विकराल हो रहा है. जरूरी है कि लोग खुद अपना ख्याल रखें और नेता इस पर सियासत की जगह लोगों की मदद और जागरूक करने का काम करें. With the Covid tally rising, cremation grounds and graveyards in Lucknow are overburdened having received more bodies than usual during the last few days. Watch the report for more information.
कोरोना की पहली लहर को आसानी से संभालने वाले उत्तर प्रदेश में इस बार कोरोना का संक्रमण बेकाबू नजर आ रहा है. देश में रोजोना आने वाले नए केस में कल यूपी दूसरे नंबर पर पहुंच गया. पहली बार यूपी में एक दिन में बीस हजार केस आए. लखनऊ के श्मशानों और कब्रिस्तानों में शवों की संख्या अचानक बढ़ गई है. कोविड को अगर आप गंभीरता से नहीं ले रहे तो इन तस्वीरों को देखकर आप भी संजीदा हो जाएं. महामारी का रूप विकराल हो रहा है. जरूरी है कि लोग खुद अपना ख्याल रखें और नेता इस पर सियासत की जगह लोगों की मदद और जागरूक करने का काम करें. With the Covid tally rising, cremation grounds and graveyards in Lucknow are overburdened having received more bodies than usual during the last few days. Watch the report for more information.
कई वर्षों के बाद राबड़ी देवी के आवास पर आयोजित दही-चूड़ा का भोज स्थगित कर दिया गया है। लालू प्रसाद यादव के चारा घोटाला में जेल जाने के पहले तक मकर संक्रांति के अवसर पर उनका दही-चूड़ा भोज राजनीतिक गलियारों में सुर्खियों में रहा। पटना, राज्य ब्यूरो। बिहार में मकर संक्रांति (Makar Sankranti) के पर्व पर दही-चूड़ा के भोज का अपना महत्व है। सूबे की राजनीति में ये एक ऐसा अवसर होता है जब सियासी प्रतिद्वंद्वी भी दही-चूड़ा और चीनी की मिठास में अपने मन की कड़वाहट भूल जाते हैं। हालांकि, इस बार मकर संक्रांति (Makar Sankranti) के अवसर पर राजधानी पटना के 10 सर्कुलर रोड स्थित लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) के राबड़ी आवास (Rabri House) पर सन्नाटा छाया रहेगा। पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव (Sharad Yadav) के निधन के बाद पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी (Rabri Devi) और जदयू संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) के आवास पर शनिवार को आयोजित होने वाले दही-चूड़ा भोज को स्थगित कर दिया गया है। कई वर्षों के बाद राबड़ी देवी के आवास पर दही-चूड़ा का भोज आयोजित होने वाला था। लालू प्रसाद द्वारा राबड़ी देवी के आवास पर एक बार दही-चूड़ा के भोज में शरद यादव भी आए थे। वहीं, जदयू संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा अपने आवास पर पहली बार दही-चूड़ा का भोज आयोजित कर रहे थे। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के यहां हर साल मकर संक्रांति पर भोज का विशेष आयोजन होता रहा है। लालू प्रसाद यादव के चारा घोटाला में जेल जाने के पहले तक मकर संक्रांति के अवसर पर उनका दही-चूड़ा भोज सुर्खियों में रहा। इसमें राजनीतिक दलों की सीमा से हटकर राजनेताओं की जुटान होती रही। लालू के दरवाजे आम लोगोंं के लिए भी खुले रहे। हालांकि, लालू प्रसाद यादव के जेल जाने का इसपर असर पड़ा। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह ऊर्फ ललन सिंह ने कहा है कि शरद यादव उम्र भर संघर्ष करते रहे। पिछले 20 वर्षों से उनसे मेरा व्यक्तिगत और राजनीतिक संबंध रहा है। उनके आकस्मिक निधन से मैं स्तब्ध हूं। हमने एक संघर्षशील साथी खो दिया है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति और स्वजनों को दुख सहने की क्षमता दें।
कई वर्षों के बाद राबड़ी देवी के आवास पर आयोजित दही-चूड़ा का भोज स्थगित कर दिया गया है। लालू प्रसाद यादव के चारा घोटाला में जेल जाने के पहले तक मकर संक्रांति के अवसर पर उनका दही-चूड़ा भोज राजनीतिक गलियारों में सुर्खियों में रहा। पटना, राज्य ब्यूरो। बिहार में मकर संक्रांति के पर्व पर दही-चूड़ा के भोज का अपना महत्व है। सूबे की राजनीति में ये एक ऐसा अवसर होता है जब सियासी प्रतिद्वंद्वी भी दही-चूड़ा और चीनी की मिठास में अपने मन की कड़वाहट भूल जाते हैं। हालांकि, इस बार मकर संक्रांति के अवसर पर राजधानी पटना के दस सर्कुलर रोड स्थित लालू प्रसाद यादव के राबड़ी आवास पर सन्नाटा छाया रहेगा। पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव के निधन के बाद पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और जदयू संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के आवास पर शनिवार को आयोजित होने वाले दही-चूड़ा भोज को स्थगित कर दिया गया है। कई वर्षों के बाद राबड़ी देवी के आवास पर दही-चूड़ा का भोज आयोजित होने वाला था। लालू प्रसाद द्वारा राबड़ी देवी के आवास पर एक बार दही-चूड़ा के भोज में शरद यादव भी आए थे। वहीं, जदयू संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा अपने आवास पर पहली बार दही-चूड़ा का भोज आयोजित कर रहे थे। राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के यहां हर साल मकर संक्रांति पर भोज का विशेष आयोजन होता रहा है। लालू प्रसाद यादव के चारा घोटाला में जेल जाने के पहले तक मकर संक्रांति के अवसर पर उनका दही-चूड़ा भोज सुर्खियों में रहा। इसमें राजनीतिक दलों की सीमा से हटकर राजनेताओं की जुटान होती रही। लालू के दरवाजे आम लोगोंं के लिए भी खुले रहे। हालांकि, लालू प्रसाद यादव के जेल जाने का इसपर असर पड़ा। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह ऊर्फ ललन सिंह ने कहा है कि शरद यादव उम्र भर संघर्ष करते रहे। पिछले बीस वर्षों से उनसे मेरा व्यक्तिगत और राजनीतिक संबंध रहा है। उनके आकस्मिक निधन से मैं स्तब्ध हूं। हमने एक संघर्षशील साथी खो दिया है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति और स्वजनों को दुख सहने की क्षमता दें।
दिल्ली में क्या-क्या खुला रहेगा? - DTC और क्लस्टर बसें भी 100% क्षमता के साथ चलेंगी। खड़े होकर यात्रा की अनुमति नहीं। शुक्रवार को दिल्ली में कोरोना के 10,756 नए मरीज मिले, जबकि 17,494 मरीज ठीक हो गए। यहां अब संक्रमण की दर 18 फीसदी के करीब हो गई है। 38 और मरीजों की मौत हो गई। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि अब दिल्ली में कोरोना के नए मामलों में कमी देखी जा रही है और अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या भी स्थिर है। मौतों के बारे में उन्होंने कहा कि कोरोना की वजह से गुरुवार को 43 मौतों का आंकड़ा आया। इन 43 मौतों में से केवल 3 मौतें कोरोना के कारण हुई हैं। बाकी मामलों में मरीज कोरोना के अलावा अन्य बीमारियों से भी पीड़ित थे।
दिल्ली में क्या-क्या खुला रहेगा? - DTC और क्लस्टर बसें भी एक सौ% क्षमता के साथ चलेंगी। खड़े होकर यात्रा की अनुमति नहीं। शुक्रवार को दिल्ली में कोरोना के दस,सात सौ छप्पन नए मरीज मिले, जबकि सत्रह,चार सौ चौरानवे मरीज ठीक हो गए। यहां अब संक्रमण की दर अट्ठारह फीसदी के करीब हो गई है। अड़तीस और मरीजों की मौत हो गई। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि अब दिल्ली में कोरोना के नए मामलों में कमी देखी जा रही है और अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या भी स्थिर है। मौतों के बारे में उन्होंने कहा कि कोरोना की वजह से गुरुवार को तैंतालीस मौतों का आंकड़ा आया। इन तैंतालीस मौतों में से केवल तीन मौतें कोरोना के कारण हुई हैं। बाकी मामलों में मरीज कोरोना के अलावा अन्य बीमारियों से भी पीड़ित थे।
बेगम करीना जिस शख्स को अपना राखी ब्रदर मानती हैं, वह और कोई नहीं बल्कि उनके सबसे क्लोज़ फ्रेंड्स में से एक मनीष मल्होत्रा हैं। इस नामी फैशन डिजाइनर के साथ बेबो काफी क्लोज बॉन्ड शेयर करती हैं, जिसके बारे में सभी लोग जानते हैं। हालांकि, यह बात कम ही लोगों को पता है कि करीना के लिए मनीष सिर्फ दोस्त ही नहीं बल्कि बड़े भाई जैसे हैं। इसी वजह से उन्हें वह राखी भी बांधती हैं। चाहे करीना के घर का कोई फंक्शन हो या फिर उन्होंने फैमिली व फ्रेंड्स के लिए पार्टी रखी हो, हर मौके पर मनीष मल्होत्रा को जरूर शरीक होते हुए देखा जाता है। यहां तक कि करीना जब सिर्फ अपनी गर्ल गैंग के साथ हैंगआउट करती हैं, तब भी मनीष उनके साथ अक्सर स्पॉट होते हैं, जो दिखाता है कि वह उनके कितने करीब हैं। करीना कपूर अक्सर मनीष मल्होत्रा की डिजाइन की आउटफिट्स में नजर आती हैं। उन्हें अपने इस भाई पर कितना विश्वास है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपनी शादी का लहंगा भी मनीष से ही डिजाइन करवाया था। यहां तक कि लेटेस्ट में अरमान जैन की शादी के फंक्शन में भी वह उन्हीं के कपड़ों में नजर आई थीं। ऐसे ही कई खास मौकों पर बेबो ज्यादातर मनीष मल्होत्रा लेबल के ही कपड़ों में दिखती हैं। मनीष मल्होत्रा जब भी अपना नया कलेक्शन लॉन्च करते हैं या कोई फैशन वीक में हिस्सा लेते हैं, तो वह करीना को जरूर अपना शो स्टॉपर बनाते हैं। यहां तक कि अगर विदेश में भी यह शो हो, तब भी बेबो इस डिजाइनर के लिए रैंप वॉक करती नजर आती हैं।
बेगम करीना जिस शख्स को अपना राखी ब्रदर मानती हैं, वह और कोई नहीं बल्कि उनके सबसे क्लोज़ फ्रेंड्स में से एक मनीष मल्होत्रा हैं। इस नामी फैशन डिजाइनर के साथ बेबो काफी क्लोज बॉन्ड शेयर करती हैं, जिसके बारे में सभी लोग जानते हैं। हालांकि, यह बात कम ही लोगों को पता है कि करीना के लिए मनीष सिर्फ दोस्त ही नहीं बल्कि बड़े भाई जैसे हैं। इसी वजह से उन्हें वह राखी भी बांधती हैं। चाहे करीना के घर का कोई फंक्शन हो या फिर उन्होंने फैमिली व फ्रेंड्स के लिए पार्टी रखी हो, हर मौके पर मनीष मल्होत्रा को जरूर शरीक होते हुए देखा जाता है। यहां तक कि करीना जब सिर्फ अपनी गर्ल गैंग के साथ हैंगआउट करती हैं, तब भी मनीष उनके साथ अक्सर स्पॉट होते हैं, जो दिखाता है कि वह उनके कितने करीब हैं। करीना कपूर अक्सर मनीष मल्होत्रा की डिजाइन की आउटफिट्स में नजर आती हैं। उन्हें अपने इस भाई पर कितना विश्वास है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपनी शादी का लहंगा भी मनीष से ही डिजाइन करवाया था। यहां तक कि लेटेस्ट में अरमान जैन की शादी के फंक्शन में भी वह उन्हीं के कपड़ों में नजर आई थीं। ऐसे ही कई खास मौकों पर बेबो ज्यादातर मनीष मल्होत्रा लेबल के ही कपड़ों में दिखती हैं। मनीष मल्होत्रा जब भी अपना नया कलेक्शन लॉन्च करते हैं या कोई फैशन वीक में हिस्सा लेते हैं, तो वह करीना को जरूर अपना शो स्टॉपर बनाते हैं। यहां तक कि अगर विदेश में भी यह शो हो, तब भी बेबो इस डिजाइनर के लिए रैंप वॉक करती नजर आती हैं।
ठाणे : ठाणे जिले (Thane District) में सभी दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों (Commercial Establishments) के लिए अन्य भाषाओं के साथ-साथ मराठी भाषा (Marathi Language) में देवनागरी लिपि (Devanagari Script) में अपने प्रतिष्ठानों की नेम प्लेट लगाने फरमान जारी किया गया है। यह फरमान ठाणे के श्रम उपायुक्त ने जारी किया है। उन्होंने कहा कि शराब बेचने और पीने वाले प्रतिष्ठानों को किसी भी किलों और व्यक्तियों का नाम रखने की अनुमति नहीं दी गई है। यह निर्देश श्रम उपायुक्त कार्यालय की ओर से जारी सर्कुलर के माध्यम से दिए गए हैं। इसमें कहा गया है कि महाराष्ट्र दुकान और प्रतिष्ठान (रोजगार का विनियमन और सेवा की शर्तें) अधिनियम, 2017 की धारा 35 के तहत, मराठी भाषा में देवनागरी लिपि में प्रतिष्ठान का नाम प्रदर्शित करना अनिवार्य है। अधिनियम यह भी निर्धारित करता है कि शराब बेचने वाले या शराब सेवाएं प्रदान करने वाले प्रतिष्ठानों का नाम व्यक्तियों या किलों के नाम पर नहीं रखा जा सकता है। पहले, ये प्रावधान दस से अधिक श्रमिकों वाले प्रतिष्ठानों पर लागू होते थे। हालंकि, अब सरकार ने 17 मार्च, 2022 को अधिनियम में संशोधन किया है और उपरोक्त प्रावधान अधिनियम की धारा 6 के तहत पंजीकृत सभी प्रतिष्ठानों और धारा 7 के अनुसार नोटिस जारी करने वाले सभी प्रतिष्ठानों पर लागू होते हैं। अतः ठाणे जिले की सभी दुकानों और प्रतिष्ठानों के स्वामी अपनी दुकानों और प्रतिष्ठानों के नाम मराठी भाषा में देवनागरी लिपि में प्रदर्शित करें। साथ ही श्रम उपायुक्त ने निर्देश दिया है कि शराब बेचने और परोसने वाले प्रतिष्ठान महापुरुषों या किलों के नाम न दें।
ठाणे : ठाणे जिले में सभी दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए अन्य भाषाओं के साथ-साथ मराठी भाषा में देवनागरी लिपि में अपने प्रतिष्ठानों की नेम प्लेट लगाने फरमान जारी किया गया है। यह फरमान ठाणे के श्रम उपायुक्त ने जारी किया है। उन्होंने कहा कि शराब बेचने और पीने वाले प्रतिष्ठानों को किसी भी किलों और व्यक्तियों का नाम रखने की अनुमति नहीं दी गई है। यह निर्देश श्रम उपायुक्त कार्यालय की ओर से जारी सर्कुलर के माध्यम से दिए गए हैं। इसमें कहा गया है कि महाराष्ट्र दुकान और प्रतिष्ठान अधिनियम, दो हज़ार सत्रह की धारा पैंतीस के तहत, मराठी भाषा में देवनागरी लिपि में प्रतिष्ठान का नाम प्रदर्शित करना अनिवार्य है। अधिनियम यह भी निर्धारित करता है कि शराब बेचने वाले या शराब सेवाएं प्रदान करने वाले प्रतिष्ठानों का नाम व्यक्तियों या किलों के नाम पर नहीं रखा जा सकता है। पहले, ये प्रावधान दस से अधिक श्रमिकों वाले प्रतिष्ठानों पर लागू होते थे। हालंकि, अब सरकार ने सत्रह मार्च, दो हज़ार बाईस को अधिनियम में संशोधन किया है और उपरोक्त प्रावधान अधिनियम की धारा छः के तहत पंजीकृत सभी प्रतिष्ठानों और धारा सात के अनुसार नोटिस जारी करने वाले सभी प्रतिष्ठानों पर लागू होते हैं। अतः ठाणे जिले की सभी दुकानों और प्रतिष्ठानों के स्वामी अपनी दुकानों और प्रतिष्ठानों के नाम मराठी भाषा में देवनागरी लिपि में प्रदर्शित करें। साथ ही श्रम उपायुक्त ने निर्देश दिया है कि शराब बेचने और परोसने वाले प्रतिष्ठान महापुरुषों या किलों के नाम न दें।
मराठी संतों द्वारा प्रयुक्त विशिष्ट छन्द और काव्य-प्रकार ख्याल दो प्रकार के होते हैं - (१) जो विलम्बित लय में गाये जाते हैं ( बड़े ख्याल (२) जो द्रुतलय में गाये जाते हैं ( छोटे ख्याल ) । गायक जब ख्याल गाना करता है तब पहिले विलम्बित लय में बड़ा ख्याल गाता है जिसे प्रायः विलम्बित एकताल, तीनताल, भूमरा, श्राड़ा, चौताल इत्यादि में गाता है, फिर इसके बाद ही छोटा ख्याल मध्य या द्रुतलय में प्रारम्भ कर देता है । उसे त्रिताल या द्रुत एकताल में गाता है । छोटे-बड़े ख्याल जब गायक एक स्थान पर एक समय में गाता है तब ये दोनों प्रायः किसी एक ही राग में होते हैं; किन्तु बोल या कविता बड़े छोटे ख्यालों की अलग-अलग होती हैं । "१ संत 'गुंडा केशो' का एक ख्याल नीचे दिया जाता हैव्यातुर ज्यानत प्रेम ये मन कि हिरे की पारख सहज दिखावे काहें कु च्योट लगी है घनकि बंधा मृग तो क्या जाने परिमल भंवर ही ज्यानत प्रीत फुलन कि गुन्डा केशो प्रभु सब कुछ देखत सुर्त लगन कि । लावनी को मराठी में लावणी कहा जाता है। प्रतीत होता है कि इसका लवण अथवा लावण्य से संबंध है । इसका मुख्य भाव शृंगार है। कहीं-कहीं इसे ख्याल और मराठी गायन का पर्याय भी माना जाता है। इसे ख्याल कहा जाने का कारण यह हो सकता है कि ख्याल भी शृंगार - प्रधान होता है । मराठी गायन इसलिए कहा जाता है कि इसका जन्म सर्वप्रथम महाराष्ट्र में हुआ। पेशवाओं के समय में महाराष्ट्र की जनता में विलासप्रियता की अभिवृद्धि होने से वह लावनियों की अधिक प्रवृत्त हुई । "काल्हि के कवि रीझि है तो कविताई है, नतरु राधिका गोविन्द सुमिरन को बहानो है । " कदाचित् यह सोचकर कुछ लावनीबाज़ों ने देवत लावनी का विषय बनाया । प्राचीन काल में लावनियाँ कई दलों में प्रतिस्पर्द्धा का विषय बनी हुई थीं । उत्तर भारत और महाराष्ट्र में लावनियों के कलगी और तुर्रा दल बड़े प्रसिद्ध रहे हैं । कलगी और तुर्रा दलों का निर्माण कैसे हुआ, इसकी भी एक रोचक कहानी है । पेशवाओं के काल में महात्मा तुकनगिरि र किसी पेशवा की सभा में गये और वहाँ दोनों ने मधुर कंठ से लावनियाँ सुनाई । पेशवा ने मुग्ध होकर अपने मस्तक का तुर्रा तुकनगिरि को और कलगी शाही को भेंट कर दी । कहा जाता है, २. देखिए - संगीत विशारद, पृष्ठ - १२८-१२१ ।
मराठी संतों द्वारा प्रयुक्त विशिष्ट छन्द और काव्य-प्रकार ख्याल दो प्रकार के होते हैं - जो विलम्बित लय में गाये जाते हैं जो द्रुतलय में गाये जाते हैं । गायक जब ख्याल गाना करता है तब पहिले विलम्बित लय में बड़ा ख्याल गाता है जिसे प्रायः विलम्बित एकताल, तीनताल, भूमरा, श्राड़ा, चौताल इत्यादि में गाता है, फिर इसके बाद ही छोटा ख्याल मध्य या द्रुतलय में प्रारम्भ कर देता है । उसे त्रिताल या द्रुत एकताल में गाता है । छोटे-बड़े ख्याल जब गायक एक स्थान पर एक समय में गाता है तब ये दोनों प्रायः किसी एक ही राग में होते हैं; किन्तु बोल या कविता बड़े छोटे ख्यालों की अलग-अलग होती हैं । "एक संत 'गुंडा केशो' का एक ख्याल नीचे दिया जाता हैव्यातुर ज्यानत प्रेम ये मन कि हिरे की पारख सहज दिखावे काहें कु च्योट लगी है घनकि बंधा मृग तो क्या जाने परिमल भंवर ही ज्यानत प्रीत फुलन कि गुन्डा केशो प्रभु सब कुछ देखत सुर्त लगन कि । लावनी को मराठी में लावणी कहा जाता है। प्रतीत होता है कि इसका लवण अथवा लावण्य से संबंध है । इसका मुख्य भाव शृंगार है। कहीं-कहीं इसे ख्याल और मराठी गायन का पर्याय भी माना जाता है। इसे ख्याल कहा जाने का कारण यह हो सकता है कि ख्याल भी शृंगार - प्रधान होता है । मराठी गायन इसलिए कहा जाता है कि इसका जन्म सर्वप्रथम महाराष्ट्र में हुआ। पेशवाओं के समय में महाराष्ट्र की जनता में विलासप्रियता की अभिवृद्धि होने से वह लावनियों की अधिक प्रवृत्त हुई । "काल्हि के कवि रीझि है तो कविताई है, नतरु राधिका गोविन्द सुमिरन को बहानो है । " कदाचित् यह सोचकर कुछ लावनीबाज़ों ने देवत लावनी का विषय बनाया । प्राचीन काल में लावनियाँ कई दलों में प्रतिस्पर्द्धा का विषय बनी हुई थीं । उत्तर भारत और महाराष्ट्र में लावनियों के कलगी और तुर्रा दल बड़े प्रसिद्ध रहे हैं । कलगी और तुर्रा दलों का निर्माण कैसे हुआ, इसकी भी एक रोचक कहानी है । पेशवाओं के काल में महात्मा तुकनगिरि र किसी पेशवा की सभा में गये और वहाँ दोनों ने मधुर कंठ से लावनियाँ सुनाई । पेशवा ने मुग्ध होकर अपने मस्तक का तुर्रा तुकनगिरि को और कलगी शाही को भेंट कर दी । कहा जाता है, दो. देखिए - संगीत विशारद, पृष्ठ - एक सौ अट्ठाईस-एक सौ इक्कीस ।
जम्मू। आर्थिक मोर्चे पर रियासत सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। योजना आयोग ने विशेष योजना सहायता मद के दो हजार करोड़ रुपये अब तक जारी नहीं किए हैं, नतीजतन विकास योजनाएं अधर में लटकी हैं। वित्तीय वर्ष के बचे दो महीनों में योजनाओं का लक्ष्य प्राप्त करना कठिन हो गया है। इस बीच केंद्र सरकार ने सुरक्षा बलों की तैनाती के मद में राज्य का हिस्सा मांगकर परेशानी में इजाफा कर दिया है। जम्मू-कश्मीर को अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती के खर्च का दस प्रतिशत भुगतान करना है। इस मद में 742 करोड़ बकाया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पत्र लिखकर रियासत सरकार से इस राशि के भुगतान के लिए दबाव बनाया है। विशेष राज्य के दर्जे के कारण केंद्र की योजनाओं में रियासत सरकार को 90 प्रतिशत अनुदान मिलता है और रियासत के लिए दस प्रतिशत शेयर निर्धारित है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अर्द्ध सैनिक बलों की तैनाती पर हो रहे खर्च में यही फार्मूला लागू किया है। रियासत में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और सीमा सशस्त्र बल की 50 बटालियन तैनात हैं, जबकि सेना के जवानों की संख्या लगभग साढ़े तीन लाख है। सत्ताधारी नेशनल कांफ्रेंस और मुख्य विपक्ष पीडीपी की ओर से सेना और अर्द्धसैनिक बलों की संख्या घटाने की मांग केंद्र सरकार से की जाती रही है। सेना, सुरक्षा बल और केंद्र सरकार इसके पक्ष में नहीं है। रियासत के गृह विभाग के सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पिछले साल केंद्र सरकार से पैरा मिलिट्री फोर्सेज की तैनाती के मद में रियासत के हिस्से को माफ करने की मांग की थी। तब इस मद का बकाया लगभग 514 करोड़ रुपये था। अब केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा फिर से राशि मांगे जाने के बाद रियासत सरकार ने केंद्र के समक्ष यह मामला उठाया है। लोकसभा चुनाव करीब है लिहाजा पैरा मिलिट्री फोर्सेज की संख्या चुनाव आयोग की अनुशंसा पर बढ़ाई भी जा सकती है। इस तरह इस मद का बकाया और बढ़ सकता है। फिलहाल रियासत सरकार केंद्र को इस मद में भुगतान करने की स्थिति में नहीं है। भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य और रियासत के मुख्य प्रवक्ता जितेंद्र सिंह ने कहा है कि सेना और सुरक्षा बलों की तैनाती मुद्दे पर नेशनल कांफ्रेंस दोहरा चरित्र अपनाती रही है। केंद्र ने पैरा मिलिट्री फोर्सेज की तैनाती मद में बकाया राशि के भुगतान की बार-बार मांग की है लेकिन भुगतान नहीं किया गया। नेकां एक ओर सेना और सुरक्षा बलों की वापसी की मांग करती रही है, वहीं दूसरी ओर केंद्र के खर्च पर इसका उपयोग करती रही है।
जम्मू। आर्थिक मोर्चे पर रियासत सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। योजना आयोग ने विशेष योजना सहायता मद के दो हजार करोड़ रुपये अब तक जारी नहीं किए हैं, नतीजतन विकास योजनाएं अधर में लटकी हैं। वित्तीय वर्ष के बचे दो महीनों में योजनाओं का लक्ष्य प्राप्त करना कठिन हो गया है। इस बीच केंद्र सरकार ने सुरक्षा बलों की तैनाती के मद में राज्य का हिस्सा मांगकर परेशानी में इजाफा कर दिया है। जम्मू-कश्मीर को अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती के खर्च का दस प्रतिशत भुगतान करना है। इस मद में सात सौ बयालीस करोड़ बकाया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पत्र लिखकर रियासत सरकार से इस राशि के भुगतान के लिए दबाव बनाया है। विशेष राज्य के दर्जे के कारण केंद्र की योजनाओं में रियासत सरकार को नब्बे प्रतिशत अनुदान मिलता है और रियासत के लिए दस प्रतिशत शेयर निर्धारित है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अर्द्ध सैनिक बलों की तैनाती पर हो रहे खर्च में यही फार्मूला लागू किया है। रियासत में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और सीमा सशस्त्र बल की पचास बटालियन तैनात हैं, जबकि सेना के जवानों की संख्या लगभग साढ़े तीन लाख है। सत्ताधारी नेशनल कांफ्रेंस और मुख्य विपक्ष पीडीपी की ओर से सेना और अर्द्धसैनिक बलों की संख्या घटाने की मांग केंद्र सरकार से की जाती रही है। सेना, सुरक्षा बल और केंद्र सरकार इसके पक्ष में नहीं है। रियासत के गृह विभाग के सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पिछले साल केंद्र सरकार से पैरा मिलिट्री फोर्सेज की तैनाती के मद में रियासत के हिस्से को माफ करने की मांग की थी। तब इस मद का बकाया लगभग पाँच सौ चौदह करोड़ रुपये था। अब केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा फिर से राशि मांगे जाने के बाद रियासत सरकार ने केंद्र के समक्ष यह मामला उठाया है। लोकसभा चुनाव करीब है लिहाजा पैरा मिलिट्री फोर्सेज की संख्या चुनाव आयोग की अनुशंसा पर बढ़ाई भी जा सकती है। इस तरह इस मद का बकाया और बढ़ सकता है। फिलहाल रियासत सरकार केंद्र को इस मद में भुगतान करने की स्थिति में नहीं है। भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य और रियासत के मुख्य प्रवक्ता जितेंद्र सिंह ने कहा है कि सेना और सुरक्षा बलों की तैनाती मुद्दे पर नेशनल कांफ्रेंस दोहरा चरित्र अपनाती रही है। केंद्र ने पैरा मिलिट्री फोर्सेज की तैनाती मद में बकाया राशि के भुगतान की बार-बार मांग की है लेकिन भुगतान नहीं किया गया। नेकां एक ओर सेना और सुरक्षा बलों की वापसी की मांग करती रही है, वहीं दूसरी ओर केंद्र के खर्च पर इसका उपयोग करती रही है।
नयी दिल्ली, 28 मई (वार्ता) कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संसद भवन के उद्घाटन समारोह पर रविवार को तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और कहा कि जनता की आवाज संसद भवन के उद्घाटन समारोह को प्रधानमंत्री राज्याभिषेक समझ रहे हैं। श्री गांधी ने ट्वीट किया "संसद लोगों की आवाज़ है। प्रधानमंत्री संसद भवन के उद्घाटन को राज्याभिषेक समझ रहे हैं। " कांग्रेस महासचिव संगठन केसी वेणुगोपाल ने कहा, "नए संसद भवन के शिलान्यास समारोह में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को शिलान्यास समारोह से दूर रखा गया और अब इसके उद्घाटन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को दरकिनार कर दिया गया है। " उन्होंने कहा " यह आरएसएस की पिछड़ी जाति विरोधी मानसिकता है। इसी मानसिकता का परिणाम है कि संवैधानिक पद पर बैठे इन वर्गों के लोगों को सम्मान पाने के उनके हक से भी वंचित रखा जाता है। इससे साफ है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन वर्गों के लोगों का इस्तेमाल सिर्फ वोट की राजनीति के लिए करते हैं और ऐसे ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण अवसरों का उन्हें हिस्सा नहीं बनने देंगे। "
नयी दिल्ली, अट्ठाईस मई कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संसद भवन के उद्घाटन समारोह पर रविवार को तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और कहा कि जनता की आवाज संसद भवन के उद्घाटन समारोह को प्रधानमंत्री राज्याभिषेक समझ रहे हैं। श्री गांधी ने ट्वीट किया "संसद लोगों की आवाज़ है। प्रधानमंत्री संसद भवन के उद्घाटन को राज्याभिषेक समझ रहे हैं। " कांग्रेस महासचिव संगठन केसी वेणुगोपाल ने कहा, "नए संसद भवन के शिलान्यास समारोह में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को शिलान्यास समारोह से दूर रखा गया और अब इसके उद्घाटन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को दरकिनार कर दिया गया है। " उन्होंने कहा " यह आरएसएस की पिछड़ी जाति विरोधी मानसिकता है। इसी मानसिकता का परिणाम है कि संवैधानिक पद पर बैठे इन वर्गों के लोगों को सम्मान पाने के उनके हक से भी वंचित रखा जाता है। इससे साफ है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन वर्गों के लोगों का इस्तेमाल सिर्फ वोट की राजनीति के लिए करते हैं और ऐसे ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण अवसरों का उन्हें हिस्सा नहीं बनने देंगे। "
जब हम प्यार में होते हैं तो हमेशा ये कोशिश करते हैं कि हम कुछ ऐसा करें जिससे हमारे पार्टनर को स्पेशल महसूस हो. हालांकि इस दौरान कई बार ऐसा भी होता है कि हमें यह याद भी नहीं रहता कि हम क्या कर रहे हैं और इन बातों का क्या असर हो सकता है. कई बार हमारी ये हरकतें बहुत गलत साबित हो जाती हैं. ये वो बात है जो कोई शख्स सामने वाले में सबसे पहले नोटिस करता है. आप जो भी बोलें, वह स्पष्ट हो. अगर आपके शब्द सही नहीं होंगे और आप अपनी भावनाओं को सही से व्यक्त नहीं कर पाएंगे तो हो सकता है कि सामने वाले शख्स को अच्छा न लगे. हो सकता है कि आपसे इस मुलाकात के बाद वह आपसे बात करना ही बंद कर दे. आपका बिना मतलब किसी बात पर हंसना या ठहाके लगाना, आपके पार्टनर को बुरा लग सकता है. साथ ही यह आपकी समझदारी पर भी शक पैदा कर सकता है. जब आप किसी से बात कर रहे हैं तो बेहद जरूरी है कि आप उसकी बातें सुनें और सुनने के बाद ही उस पर अपनी प्रतिक्रिया दें. माना कि आप उन्हें पसंद करते हैं लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि जब वह आपके सामने आए, तो आप उसे घूरते ही रहें. इससे आपकी इमेज अच्छी नहीं बनेगी. सामने खड़े शख्स के साथ दोस्ताना व्यवहार रखना आपके हित में होगा.
जब हम प्यार में होते हैं तो हमेशा ये कोशिश करते हैं कि हम कुछ ऐसा करें जिससे हमारे पार्टनर को स्पेशल महसूस हो. हालांकि इस दौरान कई बार ऐसा भी होता है कि हमें यह याद भी नहीं रहता कि हम क्या कर रहे हैं और इन बातों का क्या असर हो सकता है. कई बार हमारी ये हरकतें बहुत गलत साबित हो जाती हैं. ये वो बात है जो कोई शख्स सामने वाले में सबसे पहले नोटिस करता है. आप जो भी बोलें, वह स्पष्ट हो. अगर आपके शब्द सही नहीं होंगे और आप अपनी भावनाओं को सही से व्यक्त नहीं कर पाएंगे तो हो सकता है कि सामने वाले शख्स को अच्छा न लगे. हो सकता है कि आपसे इस मुलाकात के बाद वह आपसे बात करना ही बंद कर दे. आपका बिना मतलब किसी बात पर हंसना या ठहाके लगाना, आपके पार्टनर को बुरा लग सकता है. साथ ही यह आपकी समझदारी पर भी शक पैदा कर सकता है. जब आप किसी से बात कर रहे हैं तो बेहद जरूरी है कि आप उसकी बातें सुनें और सुनने के बाद ही उस पर अपनी प्रतिक्रिया दें. माना कि आप उन्हें पसंद करते हैं लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि जब वह आपके सामने आए, तो आप उसे घूरते ही रहें. इससे आपकी इमेज अच्छी नहीं बनेगी. सामने खड़े शख्स के साथ दोस्ताना व्यवहार रखना आपके हित में होगा.
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
ग्वालियर सिंधिया रियासत के युवराज व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के सुपुत्र महाआर्यमन सिंधिया ने राजनीति में आने के सवाल को बड़े ही समझदारी भरे अंदाज में टाल दिया। महाआर्यमन ने कहा है कि राजनीति में आए बिना भी सेवा की जा रही है। जनता मेरे और मेरे पिता के दिल और दिमाग में है। सिर्फ राजनीति जॉइन करने से जनता की सेवा नहीं बनती है। यह दिल से बनती है। यह जनता मेरे दिल में बसती है। महाआर्यमन सिंधिया बतौर GDCA (ग्वालियर डिविजन क्रिकेट एसोसिएशन) उपाध्यक्ष के तौर पर मंत्री क्रिकेट टूर्नामेंट का शुभारंभ करने पहुंचे थे। उनके साथ ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर भी मौजूद रहे हैं। ग्वालियर में शुक्रवार से ऊर्जा मंत्री प्रधुम्न सिंह तोमर का मंत्री क्रिकेट कप टूर्नामेंट शुरू हो गया है। ग्वालियर विधानसभा में मंत्री कप-2023 क्रिकेट टूर्नामेंट की शुरुआत हुई है। ग्वालियर डिवीजन क्रिकेट एसोसिशन के उपाध्यक्ष महाआर्यमन सिंधिया ने इसका शुभारंभ किया है। इसके साथ ही महाआर्यमन सिंधिया ने क्रिकेट मैदान की पिच पर बैटिंग कर चौके छक्के भी लगाए हैं। महाआर्यमन सिंधिया ने इस मौके पर कहा कि क्रिकेट टूर्नामेंट युवाओं को जोड़ने का काम करता है। युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा तो ही ग्रामीण प्रतिभाएं भी आगे आकर रणजी जैसे मैचों में शामिल होंगी। इस दौरान उन्होंने ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर की काफी प्रशंसा की। उनको जनता का सेवक बताया। क्रिकेट की सियासत से राजनीति में आने के सवाल पर महाआर्यमन सिंधिया ने साफ इनकार किया है। उनका कहना है कि हमारा लक्ष्य जनसेवा है, राजनीति में आए बगैर भी जन सेवा की जा सकती है, जनसेवा दिल से होती है, जैसे मेरे पिताजी और प्रधुम्न सिंह जी दिल से जनसेवा करते हैं। इसलिए एक बार फिर कहता हूं जनता मेरे दिल और दिमाग में बसती है। हम कोई राजनीति करने यहां नहीं आए हैं। महाआर्यमन सिंधिया ने बतौर GDCA उपाध्यक्ष बात करते हुए कहा कि यह टूर्नामेंट बहुत खास है। ऊर्जा मंत्री का आयोजन उनका सेवा का उद्देश्य दिखाता है। हमारा उद्देश्य ऐसे आयोजन कर ग्रामीण क्षेत्र से खिलाड़ियों को निकालकर प्रदेश और देश के स्तर पर मौका देना है। वो इस तरह के सफल आयोजन से ही पूरा हो सकता है। प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने कहा कि इस तरह के आयोजन के जरिए युवाओं के अंदर उर्जा आती है। क्षेत्र से कई प्रतिभाएं भी बाहर निकल कर आती हैं। क्षेत्र के युवा इस आयोजन को सफल बना रहे हैं। यही हमारा उद्देश्य है कि खेल और खिलाड़ी आगे बढ़ें। This website follows the DNPA Code of Ethics.
ग्वालियर सिंधिया रियासत के युवराज व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के सुपुत्र महाआर्यमन सिंधिया ने राजनीति में आने के सवाल को बड़े ही समझदारी भरे अंदाज में टाल दिया। महाआर्यमन ने कहा है कि राजनीति में आए बिना भी सेवा की जा रही है। जनता मेरे और मेरे पिता के दिल और दिमाग में है। सिर्फ राजनीति जॉइन करने से जनता की सेवा नहीं बनती है। यह दिल से बनती है। यह जनता मेरे दिल में बसती है। महाआर्यमन सिंधिया बतौर GDCA उपाध्यक्ष के तौर पर मंत्री क्रिकेट टूर्नामेंट का शुभारंभ करने पहुंचे थे। उनके साथ ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर भी मौजूद रहे हैं। ग्वालियर में शुक्रवार से ऊर्जा मंत्री प्रधुम्न सिंह तोमर का मंत्री क्रिकेट कप टूर्नामेंट शुरू हो गया है। ग्वालियर विधानसभा में मंत्री कप-दो हज़ार तेईस क्रिकेट टूर्नामेंट की शुरुआत हुई है। ग्वालियर डिवीजन क्रिकेट एसोसिशन के उपाध्यक्ष महाआर्यमन सिंधिया ने इसका शुभारंभ किया है। इसके साथ ही महाआर्यमन सिंधिया ने क्रिकेट मैदान की पिच पर बैटिंग कर चौके छक्के भी लगाए हैं। महाआर्यमन सिंधिया ने इस मौके पर कहा कि क्रिकेट टूर्नामेंट युवाओं को जोड़ने का काम करता है। युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा तो ही ग्रामीण प्रतिभाएं भी आगे आकर रणजी जैसे मैचों में शामिल होंगी। इस दौरान उन्होंने ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर की काफी प्रशंसा की। उनको जनता का सेवक बताया। क्रिकेट की सियासत से राजनीति में आने के सवाल पर महाआर्यमन सिंधिया ने साफ इनकार किया है। उनका कहना है कि हमारा लक्ष्य जनसेवा है, राजनीति में आए बगैर भी जन सेवा की जा सकती है, जनसेवा दिल से होती है, जैसे मेरे पिताजी और प्रधुम्न सिंह जी दिल से जनसेवा करते हैं। इसलिए एक बार फिर कहता हूं जनता मेरे दिल और दिमाग में बसती है। हम कोई राजनीति करने यहां नहीं आए हैं। महाआर्यमन सिंधिया ने बतौर GDCA उपाध्यक्ष बात करते हुए कहा कि यह टूर्नामेंट बहुत खास है। ऊर्जा मंत्री का आयोजन उनका सेवा का उद्देश्य दिखाता है। हमारा उद्देश्य ऐसे आयोजन कर ग्रामीण क्षेत्र से खिलाड़ियों को निकालकर प्रदेश और देश के स्तर पर मौका देना है। वो इस तरह के सफल आयोजन से ही पूरा हो सकता है। प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने कहा कि इस तरह के आयोजन के जरिए युवाओं के अंदर उर्जा आती है। क्षेत्र से कई प्रतिभाएं भी बाहर निकल कर आती हैं। क्षेत्र के युवा इस आयोजन को सफल बना रहे हैं। यही हमारा उद्देश्य है कि खेल और खिलाड़ी आगे बढ़ें। This website follows the DNPA Code of Ethics.
राजस्थान कांग्रेस महासंकट : राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार को पार्टी पर्यवेक्षक मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की और उन घटनाओं के लिए माफी मांगी, जिन्होंने एक दिन पहले पार्टी को अस्त-व्यस्त कर दिया। असल में गहलोत के प्रति वफादार विधायकों ने सरकार को गिराने की धमकी दी, जब तक कि वह अपना उत्तराधिकारी नहीं चुन लेते क्योंकि वे सभी सचिन पायलट के खिलाफ है। घटनाक्रम से वाकिफ एक कांग्रेस नेता ने कहा कि गहलोत ने खड़गे से मुलाकात की, जिन्हें केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया गया था और जो विधायकों से फीडबैक लेने के लिए थे कि मुख्यमंत्री की जगह किसे लेनी चाहिए। बाद में नई दिल्ली के लिए प्रस्थान करने से पहले और रविवार की रात की घटनाओं के लिए गहलोत ने उनसे माफी मांगी जब एक नियोजित कांग्रेस विधायक सीएम द्वारा बुलाई गई पार्टी की बैठक को सांसदों द्वारा इसमें शामिल नहीं होने के कारण रद्द करना पड़ा। इसके बजाय वे सभी विधायक एक मंत्री के घर पर मिले और फैसला किया कि गहलोत को अपने उत्तराधिकारी का नाम देने की अनुमति दी जानी चाहिए, फिर स्पीकर के आवास पर जाकर सभी ने अपना इस्तीफा सौंप दिया। गहलोत ने कथित तौर पर खड़गे से कहा कि बागी विधायकों की बैठक नहीं होनी चाहिए थी और इस बात से भी इनकार किया कि उनका इससे कोई लेना-देना है। गहलोत के करीबी माने जाने वाले 92 कांग्रेस विधायकों ने शक्ति प्रदर्शन में राज्य के संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल के आवास पर मुलाकात की और विधायक दल से इस्तीफा देने की धमकी दी। कई विधायकों ने कहा कि वे चाहते हैं कि नया मुख्यमंत्री 102 विधायकों में से हो, जिन्होंने गहलोत का समर्थन किया था जब पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने उनके खिलाफ 2020 में बगावत की थी। यह व्यापक रूप से माना जाता है कि कांग्रेस आलाकमान ने पायलट को आश्वासन दिया कि उन्हें गहलोत के बाद सीएम बनाया जाएगा। विधायकों ने कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की बैठक में पारित होने वाले एक-पंक्ति के प्रस्ताव का विरोध करने का भी फैसला किया, जिससे पार्टी अध्यक्ष को नया मुख्यमंत्री चुनने के लिए अधिकृत किया गया। धारीवाल के अलावा, राज्य के मंत्री महेश जोशी और प्रताप सिंह खाचरियावास ने गहलोत के आवास पर राज्य के कांग्रेस प्रभारी अजय माकन और खड़गे से मुलाकात की और अपने वफादार विधायकों का संदेश दिया। सीएलपी की बैठक अंततः रद्द कर दी गई। उनके करीबी एक नेता ने कहा कि गहलोत ने अभी तक पार्टी चुनाव के लिए 17 अक्टूबर को नामांकन दाखिल करने की तारीख तय नहीं की है। कांग्रेस के 'वन-मैन-वन-पोस्ट' नियम के तहत चुनाव लड़ने के लिए उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना होगा। गहलोत ने पहले कहा था कि यह सिद्धांत केवल मनोनीत पदों के लिए लागू होता है न कि निर्वाचित पदों पर। मुख्यमंत्री के एक करीबी नेता ने दावा किया कि गहलोत खेमे के विधायकों द्वारा उनकी मांग पूरी नहीं होने पर इस्तीफा देने का निर्णय "सहज" था। पायलट पिछले एक पखवाड़े से उन्हें फोन कर रहे थे और दावा कर रहे थे कि पार्टी आलाकमान ने उन्हें अगला मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया है। उनके दावे का खंडन करते हुए, शहरी विकास मंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि सीएलपी को पार्टी आलाकमान ने गहलोत को मुख्यमंत्री पद से हटाने की साजिश के तहत बुलाया था। हालांकि खाचरियावास ने कहा कि वे मुख्यमंत्री पर पार्टी आलाकमान के फैसले का पालन करेंगे, उन्होंने कहा कि वे उम्मीद करते हैं कि शीर्ष नेतृत्व उन लोगों के साथ न्याय करेगा जो पार्टी के साथ खड़े थे जब पायलट ने 2020 में विद्रोह किया था। कांग्रेस सूत्रों ने हिन्दी ख़बर को बताया है कि अशोक गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए नामांकन नहीं करेंगे और नया पार्टी अध्यक्ष चुने तक राजस्थान में यथास्थिति बनी रहेगी। This website uses cookies.
राजस्थान कांग्रेस महासंकट : राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार को पार्टी पर्यवेक्षक मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की और उन घटनाओं के लिए माफी मांगी, जिन्होंने एक दिन पहले पार्टी को अस्त-व्यस्त कर दिया। असल में गहलोत के प्रति वफादार विधायकों ने सरकार को गिराने की धमकी दी, जब तक कि वह अपना उत्तराधिकारी नहीं चुन लेते क्योंकि वे सभी सचिन पायलट के खिलाफ है। घटनाक्रम से वाकिफ एक कांग्रेस नेता ने कहा कि गहलोत ने खड़गे से मुलाकात की, जिन्हें केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया गया था और जो विधायकों से फीडबैक लेने के लिए थे कि मुख्यमंत्री की जगह किसे लेनी चाहिए। बाद में नई दिल्ली के लिए प्रस्थान करने से पहले और रविवार की रात की घटनाओं के लिए गहलोत ने उनसे माफी मांगी जब एक नियोजित कांग्रेस विधायक सीएम द्वारा बुलाई गई पार्टी की बैठक को सांसदों द्वारा इसमें शामिल नहीं होने के कारण रद्द करना पड़ा। इसके बजाय वे सभी विधायक एक मंत्री के घर पर मिले और फैसला किया कि गहलोत को अपने उत्तराधिकारी का नाम देने की अनुमति दी जानी चाहिए, फिर स्पीकर के आवास पर जाकर सभी ने अपना इस्तीफा सौंप दिया। गहलोत ने कथित तौर पर खड़गे से कहा कि बागी विधायकों की बैठक नहीं होनी चाहिए थी और इस बात से भी इनकार किया कि उनका इससे कोई लेना-देना है। गहलोत के करीबी माने जाने वाले बानवे कांग्रेस विधायकों ने शक्ति प्रदर्शन में राज्य के संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल के आवास पर मुलाकात की और विधायक दल से इस्तीफा देने की धमकी दी। कई विधायकों ने कहा कि वे चाहते हैं कि नया मुख्यमंत्री एक सौ दो विधायकों में से हो, जिन्होंने गहलोत का समर्थन किया था जब पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने उनके खिलाफ दो हज़ार बीस में बगावत की थी। यह व्यापक रूप से माना जाता है कि कांग्रेस आलाकमान ने पायलट को आश्वासन दिया कि उन्हें गहलोत के बाद सीएम बनाया जाएगा। विधायकों ने कांग्रेस विधायक दल की बैठक में पारित होने वाले एक-पंक्ति के प्रस्ताव का विरोध करने का भी फैसला किया, जिससे पार्टी अध्यक्ष को नया मुख्यमंत्री चुनने के लिए अधिकृत किया गया। धारीवाल के अलावा, राज्य के मंत्री महेश जोशी और प्रताप सिंह खाचरियावास ने गहलोत के आवास पर राज्य के कांग्रेस प्रभारी अजय माकन और खड़गे से मुलाकात की और अपने वफादार विधायकों का संदेश दिया। सीएलपी की बैठक अंततः रद्द कर दी गई। उनके करीबी एक नेता ने कहा कि गहलोत ने अभी तक पार्टी चुनाव के लिए सत्रह अक्टूबर को नामांकन दाखिल करने की तारीख तय नहीं की है। कांग्रेस के 'वन-मैन-वन-पोस्ट' नियम के तहत चुनाव लड़ने के लिए उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना होगा। गहलोत ने पहले कहा था कि यह सिद्धांत केवल मनोनीत पदों के लिए लागू होता है न कि निर्वाचित पदों पर। मुख्यमंत्री के एक करीबी नेता ने दावा किया कि गहलोत खेमे के विधायकों द्वारा उनकी मांग पूरी नहीं होने पर इस्तीफा देने का निर्णय "सहज" था। पायलट पिछले एक पखवाड़े से उन्हें फोन कर रहे थे और दावा कर रहे थे कि पार्टी आलाकमान ने उन्हें अगला मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया है। उनके दावे का खंडन करते हुए, शहरी विकास मंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि सीएलपी को पार्टी आलाकमान ने गहलोत को मुख्यमंत्री पद से हटाने की साजिश के तहत बुलाया था। हालांकि खाचरियावास ने कहा कि वे मुख्यमंत्री पर पार्टी आलाकमान के फैसले का पालन करेंगे, उन्होंने कहा कि वे उम्मीद करते हैं कि शीर्ष नेतृत्व उन लोगों के साथ न्याय करेगा जो पार्टी के साथ खड़े थे जब पायलट ने दो हज़ार बीस में विद्रोह किया था। कांग्रेस सूत्रों ने हिन्दी ख़बर को बताया है कि अशोक गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए नामांकन नहीं करेंगे और नया पार्टी अध्यक्ष चुने तक राजस्थान में यथास्थिति बनी रहेगी। This website uses cookies.
जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच शनिवार को मुठभेड़ शुरू हो गई। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि आतंकवादियों की मौजूदगी की खुफिया सूचना मिलने पर सुरक्षा बलों ने शोपियां के चौगाम इलाके में घेराबंदी कर तलाश अभियान शुरू किया। इस दौरान सुरक्षाबलों ने दो अज्ञात आतंकवादी को मार गिराया। सुरक्षाबलों ने हथियार और गोला-बारूद सहित आपत्तिजनक सामग्री बरामद की और अभी तलाशी अभियान जारी है। उन्होंने बताया कि इस दौरान इलाके में छिपे आतंकवादियों ने सुरक्षा बलों पर गोलियां चलाईं, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने भी जवाबी कार्रवाई की और अभियान मुठभेड़ में तब्दील हो गया। अधिकारी ने बताया कि मुठभेड़ अभी चल रही है । बता दें कि अनंतनाग जिले में शुक्रवार को सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ में एक दहशतगर्द को गिराया है। अधिकारियों ने बताया कि अनंतनाग के अरवानी के मुमन्हल इलाके में उस समय मुठभेड़ शुरू हो गई जब पुलिस, सेना और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की संयुक्त टीम ने आतंकवादियों की उपस्थिति की जानकारी मिलने के बाद घेराबंदी एवं तलाश अभियान शुरू किया पुलिस ने कहा, "जैसे ही सुरक्षा बलों की टीम एक जगह पर पहुंची, वहां छिपे आतंकवादियों ने उन पर गोलीबारी शुरू कर दी जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गया।
जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच शनिवार को मुठभेड़ शुरू हो गई। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि आतंकवादियों की मौजूदगी की खुफिया सूचना मिलने पर सुरक्षा बलों ने शोपियां के चौगाम इलाके में घेराबंदी कर तलाश अभियान शुरू किया। इस दौरान सुरक्षाबलों ने दो अज्ञात आतंकवादी को मार गिराया। सुरक्षाबलों ने हथियार और गोला-बारूद सहित आपत्तिजनक सामग्री बरामद की और अभी तलाशी अभियान जारी है। उन्होंने बताया कि इस दौरान इलाके में छिपे आतंकवादियों ने सुरक्षा बलों पर गोलियां चलाईं, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने भी जवाबी कार्रवाई की और अभियान मुठभेड़ में तब्दील हो गया। अधिकारी ने बताया कि मुठभेड़ अभी चल रही है । बता दें कि अनंतनाग जिले में शुक्रवार को सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ में एक दहशतगर्द को गिराया है। अधिकारियों ने बताया कि अनंतनाग के अरवानी के मुमन्हल इलाके में उस समय मुठभेड़ शुरू हो गई जब पुलिस, सेना और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की संयुक्त टीम ने आतंकवादियों की उपस्थिति की जानकारी मिलने के बाद घेराबंदी एवं तलाश अभियान शुरू किया पुलिस ने कहा, "जैसे ही सुरक्षा बलों की टीम एक जगह पर पहुंची, वहां छिपे आतंकवादियों ने उन पर गोलीबारी शुरू कर दी जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गया।
Virender Sehwag Reaction On Adipurush: भारतीय टीम के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने हाल ही में रिलीज हुई फिल्म 'आदिपुरुष' देखने के बाद सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. आदिपुरुष को लेकर सहवाग ने अपने ही अंदाज में रिव्यू करते हुए मजेदार ट्वीट किया है. रामायण कथा पर आधारित यह फिल्म रिलीज होने के साथ ही लगातार विवादों में रही है. बाहुबली फेम सुपरस्टार प्रभास ने इस फिल्म में राम की भूमिका निभाई है. इस बीच सहवाग का मजेदार ट्वीट के सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. 'अब पता चला कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा? ' वीरेंद्र सहवाग ने इस फिल्म को देखने के बाद ट्वीट करते हुए लिखा, 'आदिपुरुष देखकर पता चला कि कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा था. ' सहवाग का यह ट्वीट फैंस के बीच में काफी तेजी से वायरल हो रहा है. बता दें कि इस फिल्म में डॉयलॉग से लेकर कई घटनाओं में बदलाव की वजह से फिल्म निर्माता और निर्देशकों को लगातार फैंस की आलोचना का शिकार होना पड़ रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, आदिपुरुष फिल्म का बजट 600 करोड़ रुपए के आसपास था. इस फिल्म का निर्देशन ओम राउत ने किया है. इस फिल्म में सीता की भूमिका को अभिनेत्री कृति सेनन ने निभाया है, जबकि रावण के किरदार में सैफ अली खान दिखाई दिए हैं. 600 करोड़ में बनी इस फिल्म को उतनी सफलता नहीं मिली जितनी उम्मीद की गई थी, इस फिल्म में प्रयोग किए गए डॉयलॉग की खूब आलोचना हुई है. पिछले दिनों वीरेंद्र सहवाग का नाम भारतीय टीम के अगले मुख्य चयनकर्ता के तौर पर काफी चर्चा में था. लेकिन सहवाग ने अपने एक बयान के लिए इन सभी बातों पर विराम लगा दिया. सहवाग ने बीसीसीआई के तरफ से चीफ सेलेक्टर पद का ऑफर मिलने वाली बात को पूरी तरह से गलत बताया. वहीं उन्होंने यह भी कहा कि बोर्ड की तरफ से उनसे इस मुद्दे को लेकर किसी तरह की कोई चर्चा नहीं हुई है.
Virender Sehwag Reaction On Adipurush: भारतीय टीम के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने हाल ही में रिलीज हुई फिल्म 'आदिपुरुष' देखने के बाद सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. आदिपुरुष को लेकर सहवाग ने अपने ही अंदाज में रिव्यू करते हुए मजेदार ट्वीट किया है. रामायण कथा पर आधारित यह फिल्म रिलीज होने के साथ ही लगातार विवादों में रही है. बाहुबली फेम सुपरस्टार प्रभास ने इस फिल्म में राम की भूमिका निभाई है. इस बीच सहवाग का मजेदार ट्वीट के सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. 'अब पता चला कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा? ' वीरेंद्र सहवाग ने इस फिल्म को देखने के बाद ट्वीट करते हुए लिखा, 'आदिपुरुष देखकर पता चला कि कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा था. ' सहवाग का यह ट्वीट फैंस के बीच में काफी तेजी से वायरल हो रहा है. बता दें कि इस फिल्म में डॉयलॉग से लेकर कई घटनाओं में बदलाव की वजह से फिल्म निर्माता और निर्देशकों को लगातार फैंस की आलोचना का शिकार होना पड़ रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, आदिपुरुष फिल्म का बजट छः सौ करोड़ रुपए के आसपास था. इस फिल्म का निर्देशन ओम राउत ने किया है. इस फिल्म में सीता की भूमिका को अभिनेत्री कृति सेनन ने निभाया है, जबकि रावण के किरदार में सैफ अली खान दिखाई दिए हैं. छः सौ करोड़ में बनी इस फिल्म को उतनी सफलता नहीं मिली जितनी उम्मीद की गई थी, इस फिल्म में प्रयोग किए गए डॉयलॉग की खूब आलोचना हुई है. पिछले दिनों वीरेंद्र सहवाग का नाम भारतीय टीम के अगले मुख्य चयनकर्ता के तौर पर काफी चर्चा में था. लेकिन सहवाग ने अपने एक बयान के लिए इन सभी बातों पर विराम लगा दिया. सहवाग ने बीसीसीआई के तरफ से चीफ सेलेक्टर पद का ऑफर मिलने वाली बात को पूरी तरह से गलत बताया. वहीं उन्होंने यह भी कहा कि बोर्ड की तरफ से उनसे इस मुद्दे को लेकर किसी तरह की कोई चर्चा नहीं हुई है.
पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी लालू पर तंज कसा। उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि राज्य सरकार द्वारा जेड प्लस और एसएसजी की मिली हुई सुरक्षा के बाद भी केंद्र सरकार ने एनएसजी और सीआरपीएफ के सैकड़ों सुरक्षाकर्मियों की उपलब्धता के जरिए लोगों पर रौब जमाने की मानसिकता, साहसी व्यक्तित्व का परिचायक है। गौरतलब है कि आरजेडी के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव होने पर कहा था कि अगर उन्हें कुछ हुआ तो इसके जिम्मेदार नीतीश और मोदी होंगे। इस पर सीएम नीतीश कुमार ने ट्वीट किया। लालू को जेड प्लस कैटेगरी की सुरक्षा दी गई थी लेकिन इसे घटाकर जेड कर दिया गया है। यही नहीं ब्लैक कैट कमांडो द्वारा उपलब्ध करवाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड तक हटा दिए गए। उल्लेखनीय है कि जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा अतिविशिष्ट व्यक्तियों को दी जाती है। इस कैटेगरी में एसपीजी के कमांडो तैनात रहते हैं। सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा खर्च आता है। इस सुरक्षा को प्राप्त करने वाला पर्सन बुलेटप्रूफ वाहनों में सफर करता है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद राॅबर्ट वाड्रा को इस तरह की श्रेणियों में सुरक्षा उपलब्ध करवाने के मामले में पहले ही बवाल मच चुका है हालांकि वाड्रा का कहना रहा है कि वे इस श्रेणी की सुरक्षा नहीं चाहते हैं।
पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी लालू पर तंज कसा। उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि राज्य सरकार द्वारा जेड प्लस और एसएसजी की मिली हुई सुरक्षा के बाद भी केंद्र सरकार ने एनएसजी और सीआरपीएफ के सैकड़ों सुरक्षाकर्मियों की उपलब्धता के जरिए लोगों पर रौब जमाने की मानसिकता, साहसी व्यक्तित्व का परिचायक है। गौरतलब है कि आरजेडी के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव होने पर कहा था कि अगर उन्हें कुछ हुआ तो इसके जिम्मेदार नीतीश और मोदी होंगे। इस पर सीएम नीतीश कुमार ने ट्वीट किया। लालू को जेड प्लस कैटेगरी की सुरक्षा दी गई थी लेकिन इसे घटाकर जेड कर दिया गया है। यही नहीं ब्लैक कैट कमांडो द्वारा उपलब्ध करवाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड तक हटा दिए गए। उल्लेखनीय है कि जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा अतिविशिष्ट व्यक्तियों को दी जाती है। इस कैटेगरी में एसपीजी के कमांडो तैनात रहते हैं। सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा खर्च आता है। इस सुरक्षा को प्राप्त करने वाला पर्सन बुलेटप्रूफ वाहनों में सफर करता है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद राॅबर्ट वाड्रा को इस तरह की श्रेणियों में सुरक्षा उपलब्ध करवाने के मामले में पहले ही बवाल मच चुका है हालांकि वाड्रा का कहना रहा है कि वे इस श्रेणी की सुरक्षा नहीं चाहते हैं।
अमरावती/दि. 17- राज्य की पिछली महाविकास आघाडी सरकार में राज्यमंत्री रहनेवाले अचलपुर निर्वाचन क्षेत्र के विधायक बच्चु कडू ने सेना नेता एकनाथ शिंदे द्वारा की गई बगावत के समय शिंदे गुट का साथ दिया था. पश्चात शिंदे-फडणवीस सरकार बनने पर माना जा रहा था कि, बच्चु कडू को नये मंत्रिमंडल में भी स्थान मिलेगा, लेकिन नई सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में ऐसा नहीं हुआ. जिसके चलते बच्चु कडू के इन दिनों नाराज रहने की खबरें सामने आ रही है. वहीं अब इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया देेते हुए पूर्व राज्यमंत्री बच्चु कडू ने कहा कि उनके लिए मंत्री पद कोई बडा विषय नहीं है, बल्कि उनके कामों में ही मंत्री पद की ताकत है और वे बहुत जल्द निश्चित रूप से मंत्री बनेंगे. आज अमरावती में मीडिया के साथ बातचीत करते हुए विधायक बच्चु कडू ने कहा कि, मंत्री बनना उनका अधिकार है और सीएम शिंदे ने भी उन्हें मंत्री पर देने का आश्वासन दिया है, लेकिन यह पद कब तक मिलता है, यह फिलहाल उन्हें नहीं पता. लेकिन यह निश्चित है कि, वे बहुत जल्द राज्य के मंत्रिमंडल का हिस्सा रहेेंगे.
अमरावती/दि. सत्रह- राज्य की पिछली महाविकास आघाडी सरकार में राज्यमंत्री रहनेवाले अचलपुर निर्वाचन क्षेत्र के विधायक बच्चु कडू ने सेना नेता एकनाथ शिंदे द्वारा की गई बगावत के समय शिंदे गुट का साथ दिया था. पश्चात शिंदे-फडणवीस सरकार बनने पर माना जा रहा था कि, बच्चु कडू को नये मंत्रिमंडल में भी स्थान मिलेगा, लेकिन नई सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में ऐसा नहीं हुआ. जिसके चलते बच्चु कडू के इन दिनों नाराज रहने की खबरें सामने आ रही है. वहीं अब इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया देेते हुए पूर्व राज्यमंत्री बच्चु कडू ने कहा कि उनके लिए मंत्री पद कोई बडा विषय नहीं है, बल्कि उनके कामों में ही मंत्री पद की ताकत है और वे बहुत जल्द निश्चित रूप से मंत्री बनेंगे. आज अमरावती में मीडिया के साथ बातचीत करते हुए विधायक बच्चु कडू ने कहा कि, मंत्री बनना उनका अधिकार है और सीएम शिंदे ने भी उन्हें मंत्री पर देने का आश्वासन दिया है, लेकिन यह पद कब तक मिलता है, यह फिलहाल उन्हें नहीं पता. लेकिन यह निश्चित है कि, वे बहुत जल्द राज्य के मंत्रिमंडल का हिस्सा रहेेंगे.
Opposition Parties Meeting : पटना में विपक्ष ने महाबैठक के बाद साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस की। अब विपक्ष की अगली बैठक अगली महीने शिमला में होगी। अगली बैठक में चुनाव को लेकर रणनीति तैयार की जाएगी। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बताया कि बैठक में सभी विपक्षों दलों के एक साथ चुनाव लड़ने पर सहमति बनी है। सभी दलों ने माना है कि साथ मिलकर चलेंगे। विपक्ष की महाबैठक पर बीजेपी ने जमकर निशाना साधा। विपक्षी दलों की बैठक पर तंज कसते हुए सुशील मोदी ने कहा कि खोदा पहाड़ निकली चुहिया, 5 घंटे की बैठक में क्या निकला' उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार को कन्वेनर बनाने की बात थी। आम आदमी पार्टी ने कहा कि ऑर्डिनेंस को लेकर कुछ नहीं हुआ। बैठक में सहमति बननी चाहिए थी जो नहीं बनी। सुशील मोदी ने कहा कि बैठक में किसी बात पर सहमति नहीं बनी है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या पंचायत चुनाव में ममता बनर्जी कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगी' नीतीश कुमार, अरविंद केजरीवाल या राहुल गांधी विपक्षी नेता कौन होगा' उन्होंने कहा कि बैठक में सीट शेयरिंग को लेकर भी बात नहीं बनी है। 'बैठक टाय-टाय फिस्स' बैठक पर तंज कसते हुए सुशील मोदी ने कहा कि विपक्ष की बैठक टाय-टाय फिस्स हो गई है। 10 दल ऐसे हैं जो भ्रष्टाचार में शामिल हैं। 11 दल ऐसे हैं जिनके सदस्यों की संख्या 15 है। बीजेपी पर इस बैठक का कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जो बुझे हुए लोग हैं वो कहते है कि मोदी को देख लेंगे। पटना में हुई बैठक पर बीजेपी नेता मनोज तिवारी ने भी निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की अगली मीटिंग जल्द होगी, लेकिन उन्होंने तारीख नहीं बताई। मीटिंग की जो खबर आ रही है उसमें अभी काफी मत विभिन्नता है। इन लोगों की एकता में कोई दम नहीं है। सभी मिलकर जिस पतन पर चले गए है तो उसमें मिलना चाहिए।
Opposition Parties Meeting : पटना में विपक्ष ने महाबैठक के बाद साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस की। अब विपक्ष की अगली बैठक अगली महीने शिमला में होगी। अगली बैठक में चुनाव को लेकर रणनीति तैयार की जाएगी। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बताया कि बैठक में सभी विपक्षों दलों के एक साथ चुनाव लड़ने पर सहमति बनी है। सभी दलों ने माना है कि साथ मिलकर चलेंगे। विपक्ष की महाबैठक पर बीजेपी ने जमकर निशाना साधा। विपक्षी दलों की बैठक पर तंज कसते हुए सुशील मोदी ने कहा कि खोदा पहाड़ निकली चुहिया, पाँच घंटाटे की बैठक में क्या निकला' उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार को कन्वेनर बनाने की बात थी। आम आदमी पार्टी ने कहा कि ऑर्डिनेंस को लेकर कुछ नहीं हुआ। बैठक में सहमति बननी चाहिए थी जो नहीं बनी। सुशील मोदी ने कहा कि बैठक में किसी बात पर सहमति नहीं बनी है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या पंचायत चुनाव में ममता बनर्जी कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगी' नीतीश कुमार, अरविंद केजरीवाल या राहुल गांधी विपक्षी नेता कौन होगा' उन्होंने कहा कि बैठक में सीट शेयरिंग को लेकर भी बात नहीं बनी है। 'बैठक टाय-टाय फिस्स' बैठक पर तंज कसते हुए सुशील मोदी ने कहा कि विपक्ष की बैठक टाय-टाय फिस्स हो गई है। दस दल ऐसे हैं जो भ्रष्टाचार में शामिल हैं। ग्यारह दल ऐसे हैं जिनके सदस्यों की संख्या पंद्रह है। बीजेपी पर इस बैठक का कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जो बुझे हुए लोग हैं वो कहते है कि मोदी को देख लेंगे। पटना में हुई बैठक पर बीजेपी नेता मनोज तिवारी ने भी निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की अगली मीटिंग जल्द होगी, लेकिन उन्होंने तारीख नहीं बताई। मीटिंग की जो खबर आ रही है उसमें अभी काफी मत विभिन्नता है। इन लोगों की एकता में कोई दम नहीं है। सभी मिलकर जिस पतन पर चले गए है तो उसमें मिलना चाहिए।
"मिस्टर ग्रीन!" "मिस्टर ग्रीन!" लकडियो को रंदे से छीलने की आवाज आ रही है! छीलन जमीन पर गिरती जाती और हर बार लकड़ी की चमड़ी और चिकनी और गोरी होती चली जाती है! कुछ ही देर में कॉफिन बनाने वाले ने कॉफिन तैयार कर ली थी! इस गाँव मे चर्च के पास कॉफिन बनाने वाली उसकी एक मात्र दुकान थी! छोटा सा गाँव है इसलिये कभी कभार ही उसे कॉफिन के खरीददार मिलते, इस लिए उसे लगता कि एक कॉफिन का स्टॉक ही उसके लिए काफी है! उसे मालूम भी नही था कि अगला खरीददार उसे कब मिलने वाला है! रात काफी हो चली थी सोने से पहले कॉफिन बनाने वाला अपनी रात की शराब की आखिरी किश्त हलक से नीचे उतरता है और भीतर कमरें में आकर सो जाता है! नींद खुलते ही उसकी नजर जब घड़ी पर पड़ती तो देखा के सुबह के नौ बजे चुके थे! अपनी आंखें मींचते वह उठा और हर रोज की तरह शराब के सेवन से ही अपने दिन की शुरआत की! बाहर बरामदे में आकर देखा, जहाँ वह कॉफिन बनाता था वहाँ उसे किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी! वो कॉफिन जिसे वो देर रात बनाकर सोया था वो गायब थी! उसने घर भीतर एक कर दिए उसे ढूँढने में पर कॉफिन कहीं नहीं दिखी! बाहर सड़क पर काम कर रहे एक सफाई वाले से उसने पूँछा- "कल रात मैंने एक कॉफिन बनाई थी पर आज वो गायब है तुमने कहीं देखी क्या!" जवाब मिला- "कैसी बातें करते हो चाचा! भला कॉफिन का मैं क्या करूँ। हां ,इस पगला से पूछो ये पेड़ों से खूब बात करता है शायद इसे बताकर कहीं गयी हो! क्यों रे पगला बेवड़ा चाचा की कॉफिन कहीं देखी तूने?" वो सफाई कर्मी कॉफिन बनाने वाले और उस पागल दोनों का ही मजाक उड़ाते हुए बोला! आधे कपड़ो में किसी अंग्रेज की तरह लाल मुंह वाला वह पागल अपने दस दाँत दिखाते हुए बस मुस्कुरा दिया! 'भला वो पागल क्या जानेगा?" कहकर कॉफिन बनाने वाले के दिमाग मेम जाने क्या सूझा वो अपना फटा कोट पहनकर कब्रिस्तान की ओर चल पड़ा! छोटा सा गाँव था, उसे वहाँ कितने कब्र थे मुँह जबानी याद थे! पर आज जैसे उसे एक कब्र नई दिख रही थी! जिसके क्रॉस पर उसे "मिस्टर ग्रीन" नाम लिखा दिख रहा था! "हो न हो किसी ने मेरा ही बनाया कॉफिन चुराया है!" ये शक उसके दिमाग में घर कर गया! "पर इस नाम का कोई भी व्यक्ति तो गाँव में नहीं है!"वह खुद से बात करते हुए बोला! वहाँ से कॉफिन बनाने वाला सीधे चर्च गया पर पादरी वहाँ नही थे! उसे लगा कि शायद गाँव के लोग ही उसे कुछ जानकारी दे पायें! गाँव के सरपंच जो इस वक़्त पंचायत में बैठे कुछ पंचो के साथ किसी मुद्दे पर बात कर रहे थे, उनके पास पहुचकर कॉफिन बनाने वाला बोला! "सरपंच जी गांव में किसी की मौत हुई है क्या?" "मौत नहीं तो! पर क्यूँ?" सरपंच जी कॉफिन बनाने वाले के चेहरे को देखते हुये बोले! क्योंकि कब्रिस्तान में एक नई कब्र बनी है जिस पर मिस्टर ग्रीन लिखा हुआ है। पर इस नाम का कोई भी व्यक्ति हमारे गांव में तो नहीं है? "कोई पड़ोस के गाँव का होगा! इतना परेशान क्यूँ होते हो?" सरपंच जी कहकर फिर से सामने रखी कागज पर कलम चलाने लगे! "सरपंच जी बात वो नहीं है दरसअल कल रात ही मैने एक कॉफिन तैयार की थी वो गायब है!" "अच्छा! कॉफिन बनाई भी थी तुमने या नहीं ? या फिर शराब के नशे में तुमने किसी को बेच दी होगी और तुम्हे याद नही होगा! नसेड़ी भी तो ठहरे तुम एक नंबर के!" उनमे से एक पंच ने जवाब दिया! "ओ कॉफिन बनाने वाले, अभी और भी मुद्दे हैं जिनके बारे में मुझे सोचना है! तुम ये कॉफिन की बात भूल जाओ, हां दारू के लिए अगर कुछ पैसे कम पड़ रहे हो तो बताओ!" कहकर सरपंच जी ने पचास का नोट उसकी तरफ बढ़ाया! कॉफिन बनाने वाले ने उस नोट को जेब मे रख लिया! और दबी आवाज में बोला "सरपंच जी बात वो नहीं है पर अचानक कॉफिन ही क्यों गायब हुई जबकि गाँव में कभी कोई और चीज चोरी नहीं होती! क्यों न एक बार वो नई बनी कब्र खोदी....!" "क्या पागल हो गए हो तुम?" सरपंच गुस्से में उसे बीच मे रोकता हुआ बोला! चल भाग यहाँ से! कॉफिन बनाने वाला वहाँ से वापस चला गया! रास्ते में उसने उस पचास रुपये की शराब खरीदी, और उसके दो घूँट पीकर बोतल कोट की जेब मे डाल ली! "उफ़्फ़ क्या मैं इतना शराब पीने लगा हूँ कि मुझे याद नहीं कि मैंने कॉफिन बनाई या नहीं या फिर किसी को बेच दी? खैर जो भी हो पर अब उसके पास कोई नई कॉफिन नहीं बची थी इसलिए उसे कम से कम एक कॉफिन तो तैयार रखनी थी! वह फिर से जंगल जाकर लकड़िया काट लाता है! और दो दिन के भीतर ही वह उन लकड़ियों को कॉफिन का रूप दे देता है!और एक बार फिर अगली सुबह उसकी बनाई कॉफिन फिर गायब हो जाती है! कॉफिन बनाने वाला कब्रिस्तान का रुख करता है जहाँ उसे आज फिर एक नई कब्र दिखती है!और जिस के क्रॉस पर फिर से मिस्टर ग्रीन ही लिखा होता है! कॉफिन बनाने वाला चर्च जाता है जहाँ पादरी से मिलकर उन्हें सारी कहानी सुनाता है!पादरी उसके साथ कब्रिस्तान आते हैं जहाँ दो कब्रो पर मिस्टर ग्रीन लिखा होता है! उन्हें भी हैरानी होती है कि ऐसे किसी मुर्दे को यहाँ दफनाने की क्रियाविधि तो नही हुईं! "मैंने ये बात सरपंच जी को बताई थी फादर पर उन्होंने मेरी बात नही मानी!" कॉफिन बनाने वाले ने कहा! "एक काम करते हैं सरपंच जी को बुलाते हैं!"पादरी ने कहा! थोड़ी ही देर में सरपंच पंचो के साथ कब्रिस्तान आ पहुँचे थे!. "सरपंच जी कल फिर मेरी बनाई हुई कॉफिन चोरी हो गयी!और आज फिर एक और कब्र मिस्टर ग्रीन के नाम की!" "हम्म... पर फादर गांव में किसी भी व्यक्ति की मौत नही हुई है, कोई पड़ोस के गांव से तो नहीं मरा?" सरपंच जी पादरी की ओर देखते हुए बोले! "मुझे तो ऐसी कोई खबर नहीं और न ही किसी को दफनाने की क्रियाविधि मैंने कराई है!" पादरी ने जवाब दिया! "फिर क्या ये लाशें खुद ब खुद दफन हो गयीं ?क्यों न हम पुलिस को बुलायें?" कॉफिन बनाने वाला बोला! "पागलों के जैसी बातें मत करो कॉफिन बनाने वाले! पोलिस के आने पर सबसे ज्यादा दिक्कत हम लोगो को ही होनी है! क्योंकि और किसी को इसकी खबर नहीं! गड़े रहने दो इन लाशों कों यही जबतक कोई कुछ पूछ ताछ करने नहीं आता?" सरपंच जी कॉफिन बनाने वाले पर झिड़कते हुये बोले! "पर यहाँ लाश ही गड़ी है ये कोई कैसे मान ले सरपंचजी! कुछ और भी तो हो सकता है?क्यों न एक बार हम इन कब्रों को खोदकर देखें?" कॉफिन बनाने वाले ने कहा! "ए बेवड़े कैसी बात कर रहा है?" वहाँ मजूद एक पंच ने कहा! "ठीक कह रहा है ये हमें कब्र खोद कर देखना चाहिये!" पादरी ने कहा! "ठीक है फादर अगर आप कहते हैं तो! लेकिन अभी नही रात में! और ये बात हम आठ लोगों को ही मालूम होनी चाहिए बस!" सरपंच जी ने कहा! सब इस बात पर राजी हुए और चले गये! आधी रात को सभी एक-एक करके उस कब्रिस्तान में जमा हुये! "ए बेवड़े ये फावड़ा ले और खोद!" सरपंच जी ने कॉफिन बनाने वाले से कहा! "कैसी बात कर रहे हो सरपंच जी! मैंने गले तक शराब पी रखी है! मैं वहाँ बैठता हूं आप लोग खोदिये, जब कॉफिन दिखने लगे तो बताइयेगा मुझे तो बस ये देखना है कि वो कॉफिन मेरा ही है या नही!" कहकर कॉफिन बनाने वाला दूर एक पेड़ के नीचे जाकर बैठ गया! सरपंच और उनके साथ मौजूद लोगों ने कब्र खोदना शुरू किया और दोनों ही ताबूत थोड़ी देर में कब्र खोद कर निकाल लिए गये! "अरे ये तो मेरे ही बनाये कॉफिन है! फादर देखिए मैंने ही बनाया था इन्हें!" कॉफिन बनाने वाला नशे की हालत में बोला! " सरपंच जी कॉफिन खोलिये!" पादरी सरपंच की ओर देखते हुए बोले! दोनों कॉफिन खोले गये पर उनमें जो लाशें थी वो पहचाने जाने के काबिल नही थी! हाथ-पैर, सर-धड़ सबकुछ अलग कटा रखा था! सरपंच जी फादर की ओर देखते हैं और बोले- "फादर ये लाशें तो नहीं पहचानी जा सकतीं !" "तो क्या पुलिस को बुलायें ?" कॉफिन बनाने वाले ने कहा! "नहीं ये मर्डर है और हमारे गाँव के कब्रिस्तान में दफ्न हैं! पुलिस हमें ही परेशान करेगी! और कॉफिन बनाने वाले मत भूल के ये कॉफिन तेरे ही हैं! इसलिए फादर मुझे लगता है जब तक कोई नहीं पूछता हमें ये कॉफिन ऐसे ही दफन रहने देना चाहिये!" पादरी कुछ देर सोचने के बाद बोले- "आप ठीक कहते हैं सरपंच जी!अब इन लाशो का जिक्र कोई भी नहीं करेगा! सरपंच जी इन लाशों को पहले की ही तरह दफना दीजिये!" दोनों लाशों को दफ्न कर के सभी वहाँ से चले गये! गांव में इन लाशो का जिक्र किसी और से न हुआ! कॉफिन बनाने वाले ने एक और कॉफिन बना ली और अब वो कॉफिन को एक बंद ताले वाले कमरे में रखता था! आज रात फिर कॉफिन बनाने वाले ने खूब शराब पी और सो गया! रात को दरवाजे पर हो रही दस्तक ने उसकी नींद खोल दी! नशे की हालत में लड़खड़ाते वह दरवाजे की ओर बढ़ा! दरवाजा खोल कर देखा तो सामने पगला अपने दोनों हाथ पीछे किये हुए खड़ा था! "अरे पगला तू ? इस वक़्त? देख खाने के लिए तो मेरे पास तो कुछ नहीं बचा! हा कुछ पीना हो तो आजा मैं भी तेरे साथ थोड़ा सा पी लूँगा!" कहकर कॉफिन बनाने वाला मुड़कर लड़खड़ाते हुये वापस अपने कमरे की ओर बढ़ने लगा! तभी जैसे उस पर एक बिजली सी गिरी हो। दर्द में वो अपनी पूरी ताकत से चीखा! और अपने बायें हाथ से अपने दाये हाथ की बाँह पर हाथ रखता है! पर दाया हाथ तो कटकर ज़मीन पर गिरा था। और कटे बाँह से खून की धार जमीन पर गिर रही थी। पीछे मुड़कर देखा तो पगला अपने हाथों में कुल्हाड़ी लिए हुए खड़ा था। और इससे पहले की कॉफिन बनाने वाला कुछ कहता अगली कुल्हाड़ी से उसके बायें हाथ पर वार करता है और बायें हाथ का भी वही हश्र! कॉफिन बनाने वाला जमीन पर गिर गया! बेहोशी से पहले कॉफिन बनाने वाले के कानों पर जो बात सुनाई दे रही थी वो थी "अब पता चला के पेड़ो को भी कितना दर्द होता होगा!कभी महसूस किया है? मैंने किया है वो मुझसे बात करते हैं ! अपना दर्द मुझे बताते हैं !कब्रिस्तान में दफन वो लाश जानता है किसकी है? पास के गाँव मे व्यक्ति जो की बढ़ई का काम करता था! और दूसरी एक औरत थी जो जलाने वाली लकड़िया बेचा करती थी! तुम सब निर्दोष, जीवित पेड़ पौधों को काटते हो! इसलिए तुम्हारी भी वही दशा होगी! और मैं करूँगा!" कहकर पगला जोर से चिल्लाता है और कुल्हाड़ी के अगले वार से कॉफिन बनाने वाले की छाती लहू लुहान कर देता है! लाश के कई टुकड़े करके उसे एक बोरी में भरकर उसे बगल के कमरे में रखे कॉफिन में रख देता है! और बाहर उसी सफाई वाले को आवाज देता है! दोनों उस कॉफिन को ले जाकर कब्रिस्तान में दफना देते है! और उस कब्र के क्रॉस पर लिखा होता है! "मिस्टर ग्रीन!"
"मिस्टर ग्रीन!" "मिस्टर ग्रीन!" लकडियो को रंदे से छीलने की आवाज आ रही है! छीलन जमीन पर गिरती जाती और हर बार लकड़ी की चमड़ी और चिकनी और गोरी होती चली जाती है! कुछ ही देर में कॉफिन बनाने वाले ने कॉफिन तैयार कर ली थी! इस गाँव मे चर्च के पास कॉफिन बनाने वाली उसकी एक मात्र दुकान थी! छोटा सा गाँव है इसलिये कभी कभार ही उसे कॉफिन के खरीददार मिलते, इस लिए उसे लगता कि एक कॉफिन का स्टॉक ही उसके लिए काफी है! उसे मालूम भी नही था कि अगला खरीददार उसे कब मिलने वाला है! रात काफी हो चली थी सोने से पहले कॉफिन बनाने वाला अपनी रात की शराब की आखिरी किश्त हलक से नीचे उतरता है और भीतर कमरें में आकर सो जाता है! नींद खुलते ही उसकी नजर जब घड़ी पर पड़ती तो देखा के सुबह के नौ बजे चुके थे! अपनी आंखें मींचते वह उठा और हर रोज की तरह शराब के सेवन से ही अपने दिन की शुरआत की! बाहर बरामदे में आकर देखा, जहाँ वह कॉफिन बनाता था वहाँ उसे किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी! वो कॉफिन जिसे वो देर रात बनाकर सोया था वो गायब थी! उसने घर भीतर एक कर दिए उसे ढूँढने में पर कॉफिन कहीं नहीं दिखी! बाहर सड़क पर काम कर रहे एक सफाई वाले से उसने पूँछा- "कल रात मैंने एक कॉफिन बनाई थी पर आज वो गायब है तुमने कहीं देखी क्या!" जवाब मिला- "कैसी बातें करते हो चाचा! भला कॉफिन का मैं क्या करूँ। हां ,इस पगला से पूछो ये पेड़ों से खूब बात करता है शायद इसे बताकर कहीं गयी हो! क्यों रे पगला बेवड़ा चाचा की कॉफिन कहीं देखी तूने?" वो सफाई कर्मी कॉफिन बनाने वाले और उस पागल दोनों का ही मजाक उड़ाते हुए बोला! आधे कपड़ो में किसी अंग्रेज की तरह लाल मुंह वाला वह पागल अपने दस दाँत दिखाते हुए बस मुस्कुरा दिया! 'भला वो पागल क्या जानेगा?" कहकर कॉफिन बनाने वाले के दिमाग मेम जाने क्या सूझा वो अपना फटा कोट पहनकर कब्रिस्तान की ओर चल पड़ा! छोटा सा गाँव था, उसे वहाँ कितने कब्र थे मुँह जबानी याद थे! पर आज जैसे उसे एक कब्र नई दिख रही थी! जिसके क्रॉस पर उसे "मिस्टर ग्रीन" नाम लिखा दिख रहा था! "हो न हो किसी ने मेरा ही बनाया कॉफिन चुराया है!" ये शक उसके दिमाग में घर कर गया! "पर इस नाम का कोई भी व्यक्ति तो गाँव में नहीं है!"वह खुद से बात करते हुए बोला! वहाँ से कॉफिन बनाने वाला सीधे चर्च गया पर पादरी वहाँ नही थे! उसे लगा कि शायद गाँव के लोग ही उसे कुछ जानकारी दे पायें! गाँव के सरपंच जो इस वक़्त पंचायत में बैठे कुछ पंचो के साथ किसी मुद्दे पर बात कर रहे थे, उनके पास पहुचकर कॉफिन बनाने वाला बोला! "सरपंच जी गांव में किसी की मौत हुई है क्या?" "मौत नहीं तो! पर क्यूँ?" सरपंच जी कॉफिन बनाने वाले के चेहरे को देखते हुये बोले! क्योंकि कब्रिस्तान में एक नई कब्र बनी है जिस पर मिस्टर ग्रीन लिखा हुआ है। पर इस नाम का कोई भी व्यक्ति हमारे गांव में तो नहीं है? "कोई पड़ोस के गाँव का होगा! इतना परेशान क्यूँ होते हो?" सरपंच जी कहकर फिर से सामने रखी कागज पर कलम चलाने लगे! "सरपंच जी बात वो नहीं है दरसअल कल रात ही मैने एक कॉफिन तैयार की थी वो गायब है!" "अच्छा! कॉफिन बनाई भी थी तुमने या नहीं ? या फिर शराब के नशे में तुमने किसी को बेच दी होगी और तुम्हे याद नही होगा! नसेड़ी भी तो ठहरे तुम एक नंबर के!" उनमे से एक पंच ने जवाब दिया! "ओ कॉफिन बनाने वाले, अभी और भी मुद्दे हैं जिनके बारे में मुझे सोचना है! तुम ये कॉफिन की बात भूल जाओ, हां दारू के लिए अगर कुछ पैसे कम पड़ रहे हो तो बताओ!" कहकर सरपंच जी ने पचास का नोट उसकी तरफ बढ़ाया! कॉफिन बनाने वाले ने उस नोट को जेब मे रख लिया! और दबी आवाज में बोला "सरपंच जी बात वो नहीं है पर अचानक कॉफिन ही क्यों गायब हुई जबकि गाँव में कभी कोई और चीज चोरी नहीं होती! क्यों न एक बार वो नई बनी कब्र खोदी....!" "क्या पागल हो गए हो तुम?" सरपंच गुस्से में उसे बीच मे रोकता हुआ बोला! चल भाग यहाँ से! कॉफिन बनाने वाला वहाँ से वापस चला गया! रास्ते में उसने उस पचास रुपये की शराब खरीदी, और उसके दो घूँट पीकर बोतल कोट की जेब मे डाल ली! "उफ़्फ़ क्या मैं इतना शराब पीने लगा हूँ कि मुझे याद नहीं कि मैंने कॉफिन बनाई या नहीं या फिर किसी को बेच दी? खैर जो भी हो पर अब उसके पास कोई नई कॉफिन नहीं बची थी इसलिए उसे कम से कम एक कॉफिन तो तैयार रखनी थी! वह फिर से जंगल जाकर लकड़िया काट लाता है! और दो दिन के भीतर ही वह उन लकड़ियों को कॉफिन का रूप दे देता है!और एक बार फिर अगली सुबह उसकी बनाई कॉफिन फिर गायब हो जाती है! कॉफिन बनाने वाला कब्रिस्तान का रुख करता है जहाँ उसे आज फिर एक नई कब्र दिखती है!और जिस के क्रॉस पर फिर से मिस्टर ग्रीन ही लिखा होता है! कॉफिन बनाने वाला चर्च जाता है जहाँ पादरी से मिलकर उन्हें सारी कहानी सुनाता है!पादरी उसके साथ कब्रिस्तान आते हैं जहाँ दो कब्रो पर मिस्टर ग्रीन लिखा होता है! उन्हें भी हैरानी होती है कि ऐसे किसी मुर्दे को यहाँ दफनाने की क्रियाविधि तो नही हुईं! "मैंने ये बात सरपंच जी को बताई थी फादर पर उन्होंने मेरी बात नही मानी!" कॉफिन बनाने वाले ने कहा! "एक काम करते हैं सरपंच जी को बुलाते हैं!"पादरी ने कहा! थोड़ी ही देर में सरपंच पंचो के साथ कब्रिस्तान आ पहुँचे थे!. "सरपंच जी कल फिर मेरी बनाई हुई कॉफिन चोरी हो गयी!और आज फिर एक और कब्र मिस्टर ग्रीन के नाम की!" "हम्म... पर फादर गांव में किसी भी व्यक्ति की मौत नही हुई है, कोई पड़ोस के गांव से तो नहीं मरा?" सरपंच जी पादरी की ओर देखते हुए बोले! "मुझे तो ऐसी कोई खबर नहीं और न ही किसी को दफनाने की क्रियाविधि मैंने कराई है!" पादरी ने जवाब दिया! "फिर क्या ये लाशें खुद ब खुद दफन हो गयीं ?क्यों न हम पुलिस को बुलायें?" कॉफिन बनाने वाला बोला! "पागलों के जैसी बातें मत करो कॉफिन बनाने वाले! पोलिस के आने पर सबसे ज्यादा दिक्कत हम लोगो को ही होनी है! क्योंकि और किसी को इसकी खबर नहीं! गड़े रहने दो इन लाशों कों यही जबतक कोई कुछ पूछ ताछ करने नहीं आता?" सरपंच जी कॉफिन बनाने वाले पर झिड़कते हुये बोले! "पर यहाँ लाश ही गड़ी है ये कोई कैसे मान ले सरपंचजी! कुछ और भी तो हो सकता है?क्यों न एक बार हम इन कब्रों को खोदकर देखें?" कॉफिन बनाने वाले ने कहा! "ए बेवड़े कैसी बात कर रहा है?" वहाँ मजूद एक पंच ने कहा! "ठीक कह रहा है ये हमें कब्र खोद कर देखना चाहिये!" पादरी ने कहा! "ठीक है फादर अगर आप कहते हैं तो! लेकिन अभी नही रात में! और ये बात हम आठ लोगों को ही मालूम होनी चाहिए बस!" सरपंच जी ने कहा! सब इस बात पर राजी हुए और चले गये! आधी रात को सभी एक-एक करके उस कब्रिस्तान में जमा हुये! "ए बेवड़े ये फावड़ा ले और खोद!" सरपंच जी ने कॉफिन बनाने वाले से कहा! "कैसी बात कर रहे हो सरपंच जी! मैंने गले तक शराब पी रखी है! मैं वहाँ बैठता हूं आप लोग खोदिये, जब कॉफिन दिखने लगे तो बताइयेगा मुझे तो बस ये देखना है कि वो कॉफिन मेरा ही है या नही!" कहकर कॉफिन बनाने वाला दूर एक पेड़ के नीचे जाकर बैठ गया! सरपंच और उनके साथ मौजूद लोगों ने कब्र खोदना शुरू किया और दोनों ही ताबूत थोड़ी देर में कब्र खोद कर निकाल लिए गये! "अरे ये तो मेरे ही बनाये कॉफिन है! फादर देखिए मैंने ही बनाया था इन्हें!" कॉफिन बनाने वाला नशे की हालत में बोला! " सरपंच जी कॉफिन खोलिये!" पादरी सरपंच की ओर देखते हुए बोले! दोनों कॉफिन खोले गये पर उनमें जो लाशें थी वो पहचाने जाने के काबिल नही थी! हाथ-पैर, सर-धड़ सबकुछ अलग कटा रखा था! सरपंच जी फादर की ओर देखते हैं और बोले- "फादर ये लाशें तो नहीं पहचानी जा सकतीं !" "तो क्या पुलिस को बुलायें ?" कॉफिन बनाने वाले ने कहा! "नहीं ये मर्डर है और हमारे गाँव के कब्रिस्तान में दफ्न हैं! पुलिस हमें ही परेशान करेगी! और कॉफिन बनाने वाले मत भूल के ये कॉफिन तेरे ही हैं! इसलिए फादर मुझे लगता है जब तक कोई नहीं पूछता हमें ये कॉफिन ऐसे ही दफन रहने देना चाहिये!" पादरी कुछ देर सोचने के बाद बोले- "आप ठीक कहते हैं सरपंच जी!अब इन लाशो का जिक्र कोई भी नहीं करेगा! सरपंच जी इन लाशों को पहले की ही तरह दफना दीजिये!" दोनों लाशों को दफ्न कर के सभी वहाँ से चले गये! गांव में इन लाशो का जिक्र किसी और से न हुआ! कॉफिन बनाने वाले ने एक और कॉफिन बना ली और अब वो कॉफिन को एक बंद ताले वाले कमरे में रखता था! आज रात फिर कॉफिन बनाने वाले ने खूब शराब पी और सो गया! रात को दरवाजे पर हो रही दस्तक ने उसकी नींद खोल दी! नशे की हालत में लड़खड़ाते वह दरवाजे की ओर बढ़ा! दरवाजा खोल कर देखा तो सामने पगला अपने दोनों हाथ पीछे किये हुए खड़ा था! "अरे पगला तू ? इस वक़्त? देख खाने के लिए तो मेरे पास तो कुछ नहीं बचा! हा कुछ पीना हो तो आजा मैं भी तेरे साथ थोड़ा सा पी लूँगा!" कहकर कॉफिन बनाने वाला मुड़कर लड़खड़ाते हुये वापस अपने कमरे की ओर बढ़ने लगा! तभी जैसे उस पर एक बिजली सी गिरी हो। दर्द में वो अपनी पूरी ताकत से चीखा! और अपने बायें हाथ से अपने दाये हाथ की बाँह पर हाथ रखता है! पर दाया हाथ तो कटकर ज़मीन पर गिरा था। और कटे बाँह से खून की धार जमीन पर गिर रही थी। पीछे मुड़कर देखा तो पगला अपने हाथों में कुल्हाड़ी लिए हुए खड़ा था। और इससे पहले की कॉफिन बनाने वाला कुछ कहता अगली कुल्हाड़ी से उसके बायें हाथ पर वार करता है और बायें हाथ का भी वही हश्र! कॉफिन बनाने वाला जमीन पर गिर गया! बेहोशी से पहले कॉफिन बनाने वाले के कानों पर जो बात सुनाई दे रही थी वो थी "अब पता चला के पेड़ो को भी कितना दर्द होता होगा!कभी महसूस किया है? मैंने किया है वो मुझसे बात करते हैं ! अपना दर्द मुझे बताते हैं !कब्रिस्तान में दफन वो लाश जानता है किसकी है? पास के गाँव मे व्यक्ति जो की बढ़ई का काम करता था! और दूसरी एक औरत थी जो जलाने वाली लकड़िया बेचा करती थी! तुम सब निर्दोष, जीवित पेड़ पौधों को काटते हो! इसलिए तुम्हारी भी वही दशा होगी! और मैं करूँगा!" कहकर पगला जोर से चिल्लाता है और कुल्हाड़ी के अगले वार से कॉफिन बनाने वाले की छाती लहू लुहान कर देता है! लाश के कई टुकड़े करके उसे एक बोरी में भरकर उसे बगल के कमरे में रखे कॉफिन में रख देता है! और बाहर उसी सफाई वाले को आवाज देता है! दोनों उस कॉफिन को ले जाकर कब्रिस्तान में दफना देते है! और उस कब्र के क्रॉस पर लिखा होता है! "मिस्टर ग्रीन!"
Sheetal P Singh : भारत को अमरीकी निर्देश. ईरान से सस्ता कच्चा तेल नहीं ख़रीद सकते. रूस से सस्ती और अचूक S400 आकाश रक्षक प्रणाली नहीं ख़रीद सकते. चीन से हुआवे और ज़ेड टी एल के सस्ते टेलीकाम उपकरण नहीं ख़रीद सकते! ये सब अमरीका या उसके दोस्तों से ही लेने पड़ेंगे और अमरीका पहले दी जा रही हर क़िस्म की रियायत भी बंद कर चुका है जिससे हमारा अमरीका को निर्यात काफ़ी घट जाने को मजबूर है! चलो भई राष्ट्रभक्त समाज खंजड़ी बजाओ, ये साहेब के दोस्त के आदेश हैं हुकुम तो बजाना ही पड़ेगा! फिलहाल खबर है कि इस घटनाक्रम पर अभी तक किसी भक्त का खून नहीं खौला है. वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी सिंह की एफबी वॉल से. Girish Malviya : बज गया डंका : अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भारत को मिलने वाले जीएसपी दर्जे को खत्म किया, भारत जीएसपी का सबसे बड़ा लाभार्थी देश है. Asrar Khan : अमेरिका एक टुच्चा बनिया देश है जो भारत को रूस से S 400 मिसाइल और ईरान से तेल न खरीदने के लिए धमकी दे रहा है और हम चुप हैं ...! Samar Anarya : मोदी ने ईरान से तेल आयात करने पर अमेरिकी प्रतिबंध स्वीकार किया, मनमोहन सिंह ने नहीं किया था। फिर भी अमेरिका ने भारत से विशिष्ट व्यापार समझौता रद्द कर दिया। और मोदी सरकार बस इतना मिमिया सकी कि यह 'दुर्भाग्यपूर्ण' है। बज रहा है घंटा।
Sheetal P Singh : भारत को अमरीकी निर्देश. ईरान से सस्ता कच्चा तेल नहीं ख़रीद सकते. रूस से सस्ती और अचूक Sचार सौ आकाश रक्षक प्रणाली नहीं ख़रीद सकते. चीन से हुआवे और ज़ेड टी एल के सस्ते टेलीकाम उपकरण नहीं ख़रीद सकते! ये सब अमरीका या उसके दोस्तों से ही लेने पड़ेंगे और अमरीका पहले दी जा रही हर क़िस्म की रियायत भी बंद कर चुका है जिससे हमारा अमरीका को निर्यात काफ़ी घट जाने को मजबूर है! चलो भई राष्ट्रभक्त समाज खंजड़ी बजाओ, ये साहेब के दोस्त के आदेश हैं हुकुम तो बजाना ही पड़ेगा! फिलहाल खबर है कि इस घटनाक्रम पर अभी तक किसी भक्त का खून नहीं खौला है. वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी सिंह की एफबी वॉल से. Girish Malviya : बज गया डंका : अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भारत को मिलने वाले जीएसपी दर्जे को खत्म किया, भारत जीएसपी का सबसे बड़ा लाभार्थी देश है. Asrar Khan : अमेरिका एक टुच्चा बनिया देश है जो भारत को रूस से S चार सौ मिसाइल और ईरान से तेल न खरीदने के लिए धमकी दे रहा है और हम चुप हैं ...! Samar Anarya : मोदी ने ईरान से तेल आयात करने पर अमेरिकी प्रतिबंध स्वीकार किया, मनमोहन सिंह ने नहीं किया था। फिर भी अमेरिका ने भारत से विशिष्ट व्यापार समझौता रद्द कर दिया। और मोदी सरकार बस इतना मिमिया सकी कि यह 'दुर्भाग्यपूर्ण' है। बज रहा है घंटा।
चौमूं के गोविंदगढ़ थाना इलाके में एक युवक ने फंदा लगाकर सुसाइड कर लिया। शुक्रवार सुबह देर तक बाहर नहीं आने पर परिजनों ने कमरे में जाकर देखा तो युवक फंदे से लटका मिला। परिजनों की सूचना पर गोविंदगढ़ पुलिस मौके पर पहुंची और शव को नीचे उतारकर चौमूं के सरकारी अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया। पुलिस ने पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया है। गोविंदगढ़ थाना प्रभारी हरिनारायण शर्मा ने बताया कि धोबलाई गांव में बुनकरों की ढाणी में एक युवक के सुसाइड करने की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का मौका मुआयना किया। मृतक की पहचान राहुल बुनकर (18) पुत्र मूलचंद बुनकर के रूप में हुई है। मृतक राहुल 12वीं कक्षा का छात्र था। फिलहाल सुसाइड के कारणों का खुलासा नहीं हो पाया है। मृतक के पिता मजदूरी का काम करते हैं। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
चौमूं के गोविंदगढ़ थाना इलाके में एक युवक ने फंदा लगाकर सुसाइड कर लिया। शुक्रवार सुबह देर तक बाहर नहीं आने पर परिजनों ने कमरे में जाकर देखा तो युवक फंदे से लटका मिला। परिजनों की सूचना पर गोविंदगढ़ पुलिस मौके पर पहुंची और शव को नीचे उतारकर चौमूं के सरकारी अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया। पुलिस ने पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया है। गोविंदगढ़ थाना प्रभारी हरिनारायण शर्मा ने बताया कि धोबलाई गांव में बुनकरों की ढाणी में एक युवक के सुसाइड करने की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का मौका मुआयना किया। मृतक की पहचान राहुल बुनकर पुत्र मूलचंद बुनकर के रूप में हुई है। मृतक राहुल बारहवीं कक्षा का छात्र था। फिलहाल सुसाइड के कारणों का खुलासा नहीं हो पाया है। मृतक के पिता मजदूरी का काम करते हैं। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन का मार्केट कैप अभी 5.68 लाख करोड़ रुपए है और मार्केट कैप के लिहाज से यह पांचवीं सबसे बड़ी कंपनी बन गई. इन्वेस्ट आज फॉर कल के अनंत लाढ़ा ने कहा कि इस स्टॉक में ओवरलोड से बचें और लंबी अवधि के लिए निवेश करें. आज लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन की लिस्टिंग (LIC IPO Listing) हुई और इसने निवेशकों को निराश किया है. NSE पर यह शेयर 8.11 फीसदी की गिरावट के साथ 872 रुपए के स्तर पर और BSE पर 8.62 फीसदी की गिरावट के साथ 867.20 रुपए के स्तर पर लिस्ट हुई. शुरुआती कारोबार में इस शेयर पर दबाव बना हुआ है. अभी भी इस पर 5 फीसदी का दबाव बना हुआ. एलआईसी की मार्केट वैल्युएशन (LIC market cap) 6 लाख करोड़ रुपए आंकी गई थी, लेकिन शेयर में गिरावट के कारण यह उससे कम है. मार्केट कैप के लिहाज से यह भारत की टॉप-5 कंपनियों में शामिल हो गई है. अभी इसका मार्केट कैप 5.6 लाख करोड़ रुपए है. मार्केट कैप के लिहाज से सुबह के 10.20 बजे रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केट कैप 16.12 लाख करोड़, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज का मार्केट कैप 12.35 लाख करोड़, एचडीएफसी बैंक का मार्केट कैप 7.21 लाख करोड़, इन्फोसिस का मार्केट कैप 6.31 लाख करोड़ और लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन का मार्केट कैप 5.68 लाख करोड़ रुपए है. एलआईसी ने मार्केट कैप में हिंदुस्तान यूनिलीवर को पीछे छोड़ा है जो 5.3 लाख करोड़ रुपए के मार्केट कैप के साथ अब छठे नंबर पर पहुंच गई है. इन्वेस्ट आज फॉर कल (InvestAajForKal) के अनंत लाढ़ा ने कहा कि एलआईसी आईपीओ की लिस्टिंग गिरावट के साथ हुई है. अगर किसी निवेशक ने लिस्टिंग गेन के मकसद से इस आईपीओ में निवेश किया था तो उनके लिए बुरी खबर है. उन्होंने निवेशकों को सलाह दी कि अगर आपने जरूरत से ज्यादा इस आईपीओ में निवेश किया है तो अपने पोर्टफोलियो में सुधार करें. शॉर्ट टर्म में गेन मिलने की उम्मीद कम है. ऐसे में अपना निवेश घटा सकते हैं. लॉन्ग टर्म के लिए निवेशित रहने पर फायदा मिलेगा. इस शेयर में फिलहाल उतना ही निवेश करें जितना आपकी क्षमता हो. रिटेल और पॉलिसी होल्डर्स सेगमेंट को अच्छा सब्सक्रिप्शन मिला था. निवेशकों को समझना चाहिए कि यह लंबी अवधि वाला स्टॉक है. ऐसे में पोर्टफोलियो में इसकी हिस्सेदारी लिमिटेड होना जरूरी है. नए निवेशकों को गिरावट पर खरीदारी की सलाह होगी. ट्रेडिंग से बचने की सलाह दी गई है. कमजोर लिस्टिंग के कारण एलआईसी के निवेशकों को एक झटके में 40 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है. इश्यू प्राइस के मुकाबले इसकी वैल्युएशन 6 लाख करोड़ रुपए थी जो लिस्टिंग के समय घटकर 5.6 लाख करोड़ के रुपए पर पहुंच गई. ब्रोकरेज फर्म मैक्यूरी ( Macquarie ) ने एलआईसी शेयर के लिए न्यूट्रल रेटिंग रखी है. उसने इस शेयर का टार्गेट 1000 रुपए रखा है.
लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन का मार्केट कैप अभी पाँच.अड़सठ लाख करोड़ रुपए है और मार्केट कैप के लिहाज से यह पांचवीं सबसे बड़ी कंपनी बन गई. इन्वेस्ट आज फॉर कल के अनंत लाढ़ा ने कहा कि इस स्टॉक में ओवरलोड से बचें और लंबी अवधि के लिए निवेश करें. आज लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन की लिस्टिंग हुई और इसने निवेशकों को निराश किया है. NSE पर यह शेयर आठ.ग्यारह फीसदी की गिरावट के साथ आठ सौ बहत्तर रुपयापए के स्तर पर और BSE पर आठ.बासठ फीसदी की गिरावट के साथ आठ सौ सरसठ दशमलव बीस रुपयापए के स्तर पर लिस्ट हुई. शुरुआती कारोबार में इस शेयर पर दबाव बना हुआ है. अभी भी इस पर पाँच फीसदी का दबाव बना हुआ. एलआईसी की मार्केट वैल्युएशन छः लाख करोड़ रुपए आंकी गई थी, लेकिन शेयर में गिरावट के कारण यह उससे कम है. मार्केट कैप के लिहाज से यह भारत की टॉप-पाँच कंपनियों में शामिल हो गई है. अभी इसका मार्केट कैप पाँच.छः लाख करोड़ रुपए है. मार्केट कैप के लिहाज से सुबह के दस.बीस बजे रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केट कैप सोलह.बारह लाख करोड़, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज का मार्केट कैप बारह.पैंतीस लाख करोड़, एचडीएफसी बैंक का मार्केट कैप सात.इक्कीस लाख करोड़, इन्फोसिस का मार्केट कैप छः.इकतीस लाख करोड़ और लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन का मार्केट कैप पाँच.अड़सठ लाख करोड़ रुपए है. एलआईसी ने मार्केट कैप में हिंदुस्तान यूनिलीवर को पीछे छोड़ा है जो पाँच.तीन लाख करोड़ रुपए के मार्केट कैप के साथ अब छठे नंबर पर पहुंच गई है. इन्वेस्ट आज फॉर कल के अनंत लाढ़ा ने कहा कि एलआईसी आईपीओ की लिस्टिंग गिरावट के साथ हुई है. अगर किसी निवेशक ने लिस्टिंग गेन के मकसद से इस आईपीओ में निवेश किया था तो उनके लिए बुरी खबर है. उन्होंने निवेशकों को सलाह दी कि अगर आपने जरूरत से ज्यादा इस आईपीओ में निवेश किया है तो अपने पोर्टफोलियो में सुधार करें. शॉर्ट टर्म में गेन मिलने की उम्मीद कम है. ऐसे में अपना निवेश घटा सकते हैं. लॉन्ग टर्म के लिए निवेशित रहने पर फायदा मिलेगा. इस शेयर में फिलहाल उतना ही निवेश करें जितना आपकी क्षमता हो. रिटेल और पॉलिसी होल्डर्स सेगमेंट को अच्छा सब्सक्रिप्शन मिला था. निवेशकों को समझना चाहिए कि यह लंबी अवधि वाला स्टॉक है. ऐसे में पोर्टफोलियो में इसकी हिस्सेदारी लिमिटेड होना जरूरी है. नए निवेशकों को गिरावट पर खरीदारी की सलाह होगी. ट्रेडिंग से बचने की सलाह दी गई है. कमजोर लिस्टिंग के कारण एलआईसी के निवेशकों को एक झटके में चालीस हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है. इश्यू प्राइस के मुकाबले इसकी वैल्युएशन छः लाख करोड़ रुपए थी जो लिस्टिंग के समय घटकर पाँच.छः लाख करोड़ के रुपए पर पहुंच गई. ब्रोकरेज फर्म मैक्यूरी ने एलआईसी शेयर के लिए न्यूट्रल रेटिंग रखी है. उसने इस शेयर का टार्गेट एक हज़ार रुपयापए रखा है.
सतधारा झरना, समुद्र स्तर से 2035 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है जो यहां के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पंचपुला के निकट ही स्थित है। इस झरने का नाम यहां बहने वाली सात धाराओं यानि पानी के सात झरनों के कारण पड़ा है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इन झरनों को थैरापैटिक महत्व है जिसमें गंधक की मात्रा ज्यादा होती है। अगर पानी में गंधक की मात्रा ज्यादा होती है तो वह काफी समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। यहां की सुंदरता ही यहां आने वाले पर्यटकों को दीवाना कर देती है और वह बार बार आना चाहते हैं। इस जगह के भ्रमण के लिए पर्यटकों को मई मध्य या अक्टूबर मध्य का समय सजेस्ट किया जाता है। इस दौरान यहां का मौसम अच्छा होता है।
सतधारा झरना, समुद्र स्तर से दो हज़ार पैंतीस मीटर की ऊंचाई पर स्थित है जो यहां के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पंचपुला के निकट ही स्थित है। इस झरने का नाम यहां बहने वाली सात धाराओं यानि पानी के सात झरनों के कारण पड़ा है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इन झरनों को थैरापैटिक महत्व है जिसमें गंधक की मात्रा ज्यादा होती है। अगर पानी में गंधक की मात्रा ज्यादा होती है तो वह काफी समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। यहां की सुंदरता ही यहां आने वाले पर्यटकों को दीवाना कर देती है और वह बार बार आना चाहते हैं। इस जगह के भ्रमण के लिए पर्यटकों को मई मध्य या अक्टूबर मध्य का समय सजेस्ट किया जाता है। इस दौरान यहां का मौसम अच्छा होता है।
के अन्तद्वन्द्व के एकान्त काल्पनिक पक्ष के द्वारा बौद्धिक चित्रण के कारण कला और साहित्य की मूल अभिव्य जना को आघात पहुंचता है। फिर भी मार्क्सवाद की अपेक्षा मनोविश्लेषणवाद ने साहित्य को अधिक सामाजिक यथार्थ के परिप्रेक्ष्य की दृष्टि से अधिक ठोस भूमिका प्रदान किया है जिसमे माहित्यकार, पाठक और समाज की मनःस्थिति का वैज्ञानिक अध्ययन की दृष्टि सबसे बड़ी उपलब्धि है। मनोविश्लेषणवादी आलोचना का मूल यह है कि साहित्य की सृष्टि की बाह्य या सामाजिक चेतना के आधार पर उतनी नहीं होती जितनी उसकी अव्यक्त या अन्तरंग चेतना के आधार पर होती है। इस अतरंग चेतना का विश्लेषण फायड ने एक विशेष दृष्टि के रूप में किया जिसका मुख्य तथ्य यह है कि मानव का मूल या अवेतन मानस ही वह आधारभूत सत्ता है जिस पर व्यक्ति की शैशवावस्था से ही अनेक विरोधी संस्कार पड़ते हैं और कुठाए बनती हैं। सामाजिक जीवन मे वे कुठाए बुद्धि द्वारा शासित रहती है किन्तु स्वप्नावस्था में विद्रोह करती हैं और इच्छा तृप्ति का मार्ग निकालती हैं । साहित्य में भी यह इच्छा तृप्ति की प्रक्रिया चला करती है विशेष कर काव्य और कल्पना प्रधान साहित्य में काव्य की समस्त रूप सृष्टि इस मूलभूत इच्छा तृप्ति का ही एक न्न प्रकार है। स्पष्ट है कि यह सिद्धांत साहित्य की उत्पत्ति क्रिया का निर्देश करता है और विभिन्न साहित्यिक कृतियों की मूलभूत प्रेरणाओं का विश्लेषण करता है। परन्तु यह किसी साहित्य की पूर्ण आलोचनात हीं हुई । इस प्रकार हम देखते हैं कि मार्क्सवादी और मनोविश्लेषणवादी पद्धतियाँ दो पृथक सिद्धान्तों का आग्रह करती हैं। एक साहित्यकार या कृति के बहिरग सामाजिक, राजनीतिक पर्यावरणका आग्रह करती है. दूसरी रचनाकी अंतरम, व्यक्तिगत प्रक्रिया पर बल देती है। इस दृष्टि से दोनों आग्रह विशेष पर आधारित एकांगी आलोचनाएँ हैं। समाजशास्त्रीय आलोचना इन दोनों से अपेक्षित सहयोग लेती है और अपनी भिन्न मूल स्थापना रखती है । वास्तव में साहित्य का सम्बन्ध दार्शनिक अतिवादों से न होकर जीवन न से है । चाहे मार्क्सवाद, मनोविश्लेषणवाद हो अथवा कोई अन्य वाद, जो भी साहित्य इस प्रयास में पड़ता है वह सैद्धान्तिक आग्रह की सीमा से बाहर नहीं आ पाता । विश्वजनीनता उसी साहित्य में आ पाती है जो सहज आत्मा साहित्य का समाजशास्त्र - मान्यता और स्थापना भिव्यक्ति के सर्जक होते हैं और किसी भी तरह के आग्रह से मुक्त स्वतंत्र चेता होते हैं । समाजशास्त्रीय आलोचना उक्त विवेचन से एक बात जो स्पष्ट होती है वह यह कि विभिन्न आयामों से गुजरने के दौरान साहित्य की आलोचना का विविध दृष्टिकोण पर्यात विभाजन और विषय सापेक्ष्य रूपरेखा प्राप्त करता गया । साहित्य की आचारशास्त्री आलोचना, मनौवैज्ञानिक आलोचना, मान-विादी आलोचना, शास्त्रीय आलोचना, आदि का रूप स्पष्ट होता जा रहा है और इसके साथ ही समाजशास्त्रीय आलोचना ने भी एक दिशा प्राप्त कर ली है। किन्तु समाजशास्त्रीय आलोचना के साथ अभी भी समाजवादी आलोचकों ने भ्रम फैलाए रखने का प्रयास किया है । तथापि शीघ्र ही व्यापक स्थापना के बाद यह भ्रम दूर हो जायगा । समाजशास्त्रीय आलोचना के समय कुछ ऐसे मौलिक प्रश्न उठाए जा सकते है जिनसे सामान्य पाठक को भी विषय से पूर्ण तादात्म्य हो जाय, यथा समाजशास्त्र क्या है ? साहित्य और कला के साथ इसका क्या सम्बन्ध है ? समाजशास्त्रीय आलोचना का मानदण्ड क्या है ? किन आधारी पर आलोच्य कृति का विवेचन होता है ? आदि । वस्तुतः इन प्रश्नों के हल के साथ ही समाजशास्त्रीय आलोचना का निखरा रूप स्वतः स्पष्ट हो जायगा । बहुत समय तक यह एक निश्चित धारणा थी कि सामाजिक घटनाओं के अमूर्त होने के कारण, वे वैज्ञानिक अध्ययन के क्षेत्र से बाहर हैं, इनका वैज्ञानिक अध्ययन असंभव है । इस भ्रम को दूर करने का श्रेय फ्रेंच सामाजिक विचारक ऑगस्त कान्त को है जिसके अनुसार अनुभव, निरीक्षण, प्रयोग तथा वर्गीकरण की व्यवस्थित कार्य प्रणाली या पद्धति द्वारा न केवल प्राकृतिक घटनाओं का ही अध्ययन संभव है अपितु समाज और उसके घटक तत्वों का भी अध्ययन संभव है। प्राकृतिक घटनाओं के ही अनुसार मानवीय और सामाजिक घटनाएँ भी आकस्मिक नहीं होती बल्कि वे भी कुछ ( निश्चित और लोचदार ) सामाजिक नियमों के अंतर्गत आती हैं और उनसे निर्देशित होती हैं। सामाजिक घटनाएँ केवल ईश्वर की इच्छाओं के अनुसार ही नही घटतीं वरन् प्रत्येक सामाजिक प्रक्रियाओं के अनेक तार्किक आधार होते है । प्रकृति और प्राकृतिक घटनाओं की ही भांति समाज जिक जीवत भी गतिशील तत्वो पर आधारित है। अतः उनका भी समाजवैज्ञानिक अध्ययन सम्भव है । काम्त का विश्वास था कि सामाजिक घटनाओ का अध्ययन एक विशेष अध्ययन क्षेत्र का विषय है जिसके अंतर्गत व्यक्ति की सामूहिक जीवन की अभिव्यक्ति होती है । मैक्स वेबर ने स्थापना दी कि तर्क-संगत रीति से सामाजिक घटनाओ के कार्य-कारण सम्बन्ध को समझने के लिए घटनाओं को समानताओं के आधार पर बॉटना आवश्यक है। ऐसा करने पर हमे अपने अध्ययन के लिए कुछ आदर्श प्रारूप घटनाएँ मिल जाएंगी। आदर्श प्रारूप न तो औसत प्रारूप है, न ही आदर्शात्मक, बल्कि वास्तविकताओं के कुछ विशिष्ट तत्वों के विचारपूर्वक चुनाव तथा सम्मिलन द्वारा निर्मित आदर्शात्मक मान है। दूसरे शब्दो में आदर्श प्रारूप का तात्पर्य है कुछ वास्तविक तथ्यों से तर्क सगत आधार पर यथार्थ अवधारणाओं का निर्माण करता । मेक्स वेबर के अनुसार समाजशास्त्र को वैज्ञानिक स्तर पर प्रतिष्ठित करने के लिए यह अत्यन्त आवश्यक । वास्तव में सामाजिक घटनाओं के क्षेत्र अत्यधिक विस्तृत और जटिल T इस कारण घटनाओं के विश्लेषण में सुविधा और यथार्थता के लिए यह आवश्यक है कि समानताओं के आधार पर विचारपूर्वक तथा तर्क संगत ढंग से कुछ वास्तविक घटनाओं या व्यक्तियों को इस प्रकार चून लिया जाय जो कि उस आकार की समस्त घटनाओं या व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व कर सकें। पारसन्स ने सामाज के घटक तत्वों के बीच होते. वाली सामाजिक क्रियाओं के अध्ययन को समाजशास्त्र का मूल विषय बढ़ाया। सारोकिन ने भी समाजशास्त्र को सभी प्रकार की सामाजिक घटनाओं की साभाज्य विशेषताओं और उनके पारस्परिक सम्बन्धों के अध्ययन का विज्ञान कहा है । साहित्य क्या है, साहित्य को विषय-वस्तु क्या है ? स्पष्ट है कि साहित्य लेखक-कवि की चेतना के भीतर उठे तनाव, आन्दोलन, या बेचैनी ( Unrest ) की सौदर्यपूर्ण अभिव्यक्ति है। चेतना का यह आन्दोलन साहित्यकार के सामाजिक परिवेश, उसकी समूहपरक अनुभूतियों और निज के निरीक्षण अनुभवको विषय वस्तु है। यह विषय वस्तु सम्पूर्ण में सामाजिक चटना ही है जो साहित्यकार के समूह (जिसका वह सदस्य है) का प्रतिनिधित्व करती है चेतना का तनाव कवि या कलाकार में उसके प्रत्यक्ष जीवन से उठा
के अन्तद्वन्द्व के एकान्त काल्पनिक पक्ष के द्वारा बौद्धिक चित्रण के कारण कला और साहित्य की मूल अभिव्य जना को आघात पहुंचता है। फिर भी मार्क्सवाद की अपेक्षा मनोविश्लेषणवाद ने साहित्य को अधिक सामाजिक यथार्थ के परिप्रेक्ष्य की दृष्टि से अधिक ठोस भूमिका प्रदान किया है जिसमे माहित्यकार, पाठक और समाज की मनःस्थिति का वैज्ञानिक अध्ययन की दृष्टि सबसे बड़ी उपलब्धि है। मनोविश्लेषणवादी आलोचना का मूल यह है कि साहित्य की सृष्टि की बाह्य या सामाजिक चेतना के आधार पर उतनी नहीं होती जितनी उसकी अव्यक्त या अन्तरंग चेतना के आधार पर होती है। इस अतरंग चेतना का विश्लेषण फायड ने एक विशेष दृष्टि के रूप में किया जिसका मुख्य तथ्य यह है कि मानव का मूल या अवेतन मानस ही वह आधारभूत सत्ता है जिस पर व्यक्ति की शैशवावस्था से ही अनेक विरोधी संस्कार पड़ते हैं और कुठाए बनती हैं। सामाजिक जीवन मे वे कुठाए बुद्धि द्वारा शासित रहती है किन्तु स्वप्नावस्था में विद्रोह करती हैं और इच्छा तृप्ति का मार्ग निकालती हैं । साहित्य में भी यह इच्छा तृप्ति की प्रक्रिया चला करती है विशेष कर काव्य और कल्पना प्रधान साहित्य में काव्य की समस्त रूप सृष्टि इस मूलभूत इच्छा तृप्ति का ही एक न्न प्रकार है। स्पष्ट है कि यह सिद्धांत साहित्य की उत्पत्ति क्रिया का निर्देश करता है और विभिन्न साहित्यिक कृतियों की मूलभूत प्रेरणाओं का विश्लेषण करता है। परन्तु यह किसी साहित्य की पूर्ण आलोचनात हीं हुई । इस प्रकार हम देखते हैं कि मार्क्सवादी और मनोविश्लेषणवादी पद्धतियाँ दो पृथक सिद्धान्तों का आग्रह करती हैं। एक साहित्यकार या कृति के बहिरग सामाजिक, राजनीतिक पर्यावरणका आग्रह करती है. दूसरी रचनाकी अंतरम, व्यक्तिगत प्रक्रिया पर बल देती है। इस दृष्टि से दोनों आग्रह विशेष पर आधारित एकांगी आलोचनाएँ हैं। समाजशास्त्रीय आलोचना इन दोनों से अपेक्षित सहयोग लेती है और अपनी भिन्न मूल स्थापना रखती है । वास्तव में साहित्य का सम्बन्ध दार्शनिक अतिवादों से न होकर जीवन न से है । चाहे मार्क्सवाद, मनोविश्लेषणवाद हो अथवा कोई अन्य वाद, जो भी साहित्य इस प्रयास में पड़ता है वह सैद्धान्तिक आग्रह की सीमा से बाहर नहीं आ पाता । विश्वजनीनता उसी साहित्य में आ पाती है जो सहज आत्मा साहित्य का समाजशास्त्र - मान्यता और स्थापना भिव्यक्ति के सर्जक होते हैं और किसी भी तरह के आग्रह से मुक्त स्वतंत्र चेता होते हैं । समाजशास्त्रीय आलोचना उक्त विवेचन से एक बात जो स्पष्ट होती है वह यह कि विभिन्न आयामों से गुजरने के दौरान साहित्य की आलोचना का विविध दृष्टिकोण पर्यात विभाजन और विषय सापेक्ष्य रूपरेखा प्राप्त करता गया । साहित्य की आचारशास्त्री आलोचना, मनौवैज्ञानिक आलोचना, मान-विादी आलोचना, शास्त्रीय आलोचना, आदि का रूप स्पष्ट होता जा रहा है और इसके साथ ही समाजशास्त्रीय आलोचना ने भी एक दिशा प्राप्त कर ली है। किन्तु समाजशास्त्रीय आलोचना के साथ अभी भी समाजवादी आलोचकों ने भ्रम फैलाए रखने का प्रयास किया है । तथापि शीघ्र ही व्यापक स्थापना के बाद यह भ्रम दूर हो जायगा । समाजशास्त्रीय आलोचना के समय कुछ ऐसे मौलिक प्रश्न उठाए जा सकते है जिनसे सामान्य पाठक को भी विषय से पूर्ण तादात्म्य हो जाय, यथा समाजशास्त्र क्या है ? साहित्य और कला के साथ इसका क्या सम्बन्ध है ? समाजशास्त्रीय आलोचना का मानदण्ड क्या है ? किन आधारी पर आलोच्य कृति का विवेचन होता है ? आदि । वस्तुतः इन प्रश्नों के हल के साथ ही समाजशास्त्रीय आलोचना का निखरा रूप स्वतः स्पष्ट हो जायगा । बहुत समय तक यह एक निश्चित धारणा थी कि सामाजिक घटनाओं के अमूर्त होने के कारण, वे वैज्ञानिक अध्ययन के क्षेत्र से बाहर हैं, इनका वैज्ञानिक अध्ययन असंभव है । इस भ्रम को दूर करने का श्रेय फ्रेंच सामाजिक विचारक ऑगस्त कान्त को है जिसके अनुसार अनुभव, निरीक्षण, प्रयोग तथा वर्गीकरण की व्यवस्थित कार्य प्रणाली या पद्धति द्वारा न केवल प्राकृतिक घटनाओं का ही अध्ययन संभव है अपितु समाज और उसके घटक तत्वों का भी अध्ययन संभव है। प्राकृतिक घटनाओं के ही अनुसार मानवीय और सामाजिक घटनाएँ भी आकस्मिक नहीं होती बल्कि वे भी कुछ सामाजिक नियमों के अंतर्गत आती हैं और उनसे निर्देशित होती हैं। सामाजिक घटनाएँ केवल ईश्वर की इच्छाओं के अनुसार ही नही घटतीं वरन् प्रत्येक सामाजिक प्रक्रियाओं के अनेक तार्किक आधार होते है । प्रकृति और प्राकृतिक घटनाओं की ही भांति समाज जिक जीवत भी गतिशील तत्वो पर आधारित है। अतः उनका भी समाजवैज्ञानिक अध्ययन सम्भव है । काम्त का विश्वास था कि सामाजिक घटनाओ का अध्ययन एक विशेष अध्ययन क्षेत्र का विषय है जिसके अंतर्गत व्यक्ति की सामूहिक जीवन की अभिव्यक्ति होती है । मैक्स वेबर ने स्थापना दी कि तर्क-संगत रीति से सामाजिक घटनाओ के कार्य-कारण सम्बन्ध को समझने के लिए घटनाओं को समानताओं के आधार पर बॉटना आवश्यक है। ऐसा करने पर हमे अपने अध्ययन के लिए कुछ आदर्श प्रारूप घटनाएँ मिल जाएंगी। आदर्श प्रारूप न तो औसत प्रारूप है, न ही आदर्शात्मक, बल्कि वास्तविकताओं के कुछ विशिष्ट तत्वों के विचारपूर्वक चुनाव तथा सम्मिलन द्वारा निर्मित आदर्शात्मक मान है। दूसरे शब्दो में आदर्श प्रारूप का तात्पर्य है कुछ वास्तविक तथ्यों से तर्क सगत आधार पर यथार्थ अवधारणाओं का निर्माण करता । मेक्स वेबर के अनुसार समाजशास्त्र को वैज्ञानिक स्तर पर प्रतिष्ठित करने के लिए यह अत्यन्त आवश्यक । वास्तव में सामाजिक घटनाओं के क्षेत्र अत्यधिक विस्तृत और जटिल T इस कारण घटनाओं के विश्लेषण में सुविधा और यथार्थता के लिए यह आवश्यक है कि समानताओं के आधार पर विचारपूर्वक तथा तर्क संगत ढंग से कुछ वास्तविक घटनाओं या व्यक्तियों को इस प्रकार चून लिया जाय जो कि उस आकार की समस्त घटनाओं या व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व कर सकें। पारसन्स ने सामाज के घटक तत्वों के बीच होते. वाली सामाजिक क्रियाओं के अध्ययन को समाजशास्त्र का मूल विषय बढ़ाया। सारोकिन ने भी समाजशास्त्र को सभी प्रकार की सामाजिक घटनाओं की साभाज्य विशेषताओं और उनके पारस्परिक सम्बन्धों के अध्ययन का विज्ञान कहा है । साहित्य क्या है, साहित्य को विषय-वस्तु क्या है ? स्पष्ट है कि साहित्य लेखक-कवि की चेतना के भीतर उठे तनाव, आन्दोलन, या बेचैनी की सौदर्यपूर्ण अभिव्यक्ति है। चेतना का यह आन्दोलन साहित्यकार के सामाजिक परिवेश, उसकी समूहपरक अनुभूतियों और निज के निरीक्षण अनुभवको विषय वस्तु है। यह विषय वस्तु सम्पूर्ण में सामाजिक चटना ही है जो साहित्यकार के समूह का प्रतिनिधित्व करती है चेतना का तनाव कवि या कलाकार में उसके प्रत्यक्ष जीवन से उठा
मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने जम्मू कश्मीर विधानसभा में यह बयान दिया है कि कश्मीरी पंडितों के घाटी में पुनर्वास के लिए अलग से कॉलोनियां नहीं बनाई जाएंगी। उन्होंने कहा कि मैंने केंद्रीय गृहमंत्री को बता दिया है कि कश्मीरी पंडित घाटी में अलग से नहीं रह सकते और उन्हें समाज में साथ रहना होगा। इस बात को लेकर कश्मीरी पंडितों की राज्य में वापसी के सवाल पर केंद्र और सत्तारूढ़ पीडीपी में तनातनी फिर शुरू हो गई है। गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय कश्मीरियों को घाटी में जल्द से जल्द बसाने के पक्ष में है, जबकि पीडीपी का कहना है, उन्हें अलग से बसाना उचित नहीं होगा, वे मिली-जुली आबादी का हिस्सा हों। उधर, राजनाथ सिंह ने कहा है कि केंद्र सरकार घाटी में कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है। उन्होंने कहा कि इन बातों को ध्यान रखते हुए केंद्र सरकार कार्ययोजना तैयार कर रही है। राज्य सरकार में शामिल भाजपा इसे कश्मीरी पंडितों को बसाने की राह में अड़ंगा डालने की कोशिश बता रही है। मंगलवार को मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद और गृह राजनाथ सिंह की मुलाकात में भी ये मुद्दा उठा था। इस मुद्दे पर हुर्रियत नेता भी पीडीपी के साथ हैं। गौरतलब है कि मंगलवार को मुख्यमंत्री मुफ्ती मुहम्मद सईद ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की थी। इस दौरान राजनाथ सिंह ने मुफ्ती से कश्मीरी पंडितों की घर वापसी के लिए टाउनशिप बनाने के लिए घाटी में जमीन उपलब्ध करवाने को कहा था। सूत्रों के अनुसार, एनबीसीसी एक हजार अपार्टमेंट वाले टाउनशिप का आर्किटेक्चर और डिजाइन भी तैयार कर चुका है। योजना के अनुसार कश्मीरी पंडित यहां अलग-थलग न पड़ जाएं, इससे बचने के लिए स्थानीय मुसलमानों को भी यहां फ्लैट खरीदने की छूट देने की योजना है। सूत्रों की मानें तो मुफ्ती ने राजनाथ सिंह को अतिशीघ्र जमीन का अधिग्रहण कर उपलब्ध करवाने भरोसा दिलाया था।
मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने जम्मू कश्मीर विधानसभा में यह बयान दिया है कि कश्मीरी पंडितों के घाटी में पुनर्वास के लिए अलग से कॉलोनियां नहीं बनाई जाएंगी। उन्होंने कहा कि मैंने केंद्रीय गृहमंत्री को बता दिया है कि कश्मीरी पंडित घाटी में अलग से नहीं रह सकते और उन्हें समाज में साथ रहना होगा। इस बात को लेकर कश्मीरी पंडितों की राज्य में वापसी के सवाल पर केंद्र और सत्तारूढ़ पीडीपी में तनातनी फिर शुरू हो गई है। गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय कश्मीरियों को घाटी में जल्द से जल्द बसाने के पक्ष में है, जबकि पीडीपी का कहना है, उन्हें अलग से बसाना उचित नहीं होगा, वे मिली-जुली आबादी का हिस्सा हों। उधर, राजनाथ सिंह ने कहा है कि केंद्र सरकार घाटी में कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है। उन्होंने कहा कि इन बातों को ध्यान रखते हुए केंद्र सरकार कार्ययोजना तैयार कर रही है। राज्य सरकार में शामिल भाजपा इसे कश्मीरी पंडितों को बसाने की राह में अड़ंगा डालने की कोशिश बता रही है। मंगलवार को मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद और गृह राजनाथ सिंह की मुलाकात में भी ये मुद्दा उठा था। इस मुद्दे पर हुर्रियत नेता भी पीडीपी के साथ हैं। गौरतलब है कि मंगलवार को मुख्यमंत्री मुफ्ती मुहम्मद सईद ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की थी। इस दौरान राजनाथ सिंह ने मुफ्ती से कश्मीरी पंडितों की घर वापसी के लिए टाउनशिप बनाने के लिए घाटी में जमीन उपलब्ध करवाने को कहा था। सूत्रों के अनुसार, एनबीसीसी एक हजार अपार्टमेंट वाले टाउनशिप का आर्किटेक्चर और डिजाइन भी तैयार कर चुका है। योजना के अनुसार कश्मीरी पंडित यहां अलग-थलग न पड़ जाएं, इससे बचने के लिए स्थानीय मुसलमानों को भी यहां फ्लैट खरीदने की छूट देने की योजना है। सूत्रों की मानें तो मुफ्ती ने राजनाथ सिंह को अतिशीघ्र जमीन का अधिग्रहण कर उपलब्ध करवाने भरोसा दिलाया था।
Israel News इजरायल में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है। इसी बीच हड़ताल का आह्वान करते हुए मुख्य अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से जाने वाली सभी प्रमुख उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। इससे वहां के यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। तेल अवीव, एपी। इजरायल के हवाईअड्डा प्राधिकरण ने कहा है कि देश के मुख्य अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से जाने वाली उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। दरअसल, सरकार के नियोजित न्यायिक फेरबदल के विरोध में हड़ताल का आह्वान किया गया है, जिसके कारण यह कदम उठाया गया है। देश के सबसे बड़े ट्रेड यूनियन समूह द्वारा सोमवार को हड़ताल का आह्वान किया गया है और इससे इजरायल की अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से पर असर पड़ सकता है। उड़ान के शेड्यूल में हुए परिवर्तन से हजारों लोगों के प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि, तेल अवीव के विशाल समुद्र तटीय महानगर के बाहर, विमान अभी भी बेन-गुरियन हवाई अड्डे पर उतारे जाएंगे। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के न्यायिक ओवरहाल ने पूरे इजरायली समाज से विरोध को पनपने पर मजबूर कर दिया है। इजरायल में प्रधानमंत्री द्वारा किए गए नियोजित न्यायिक फेरबदल के विरोध में पूरे देश में विरोध प्रदर्शन जारी है। पिछले दो महीने से नागरिक इसका विरोध कर रहे हैं। यहां तक कि कई बार यहां के लोगों ने खुले तौर पर सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की है। व्यापार जगत के नेताओं और कानूनी अधिकारियों ने कहा है कि लागू किए गए योजना के विनाशकारी प्रभाव हो सकते हैं। हालांकि, इजरायली सेना भी विरोध से अछूती नहीं दिख रही, उनमें भी इसे लेकर काफी असंतोष है। आपको बता दें, लंबे सियासी गतिरोध के बाद दिसंबर के अंत में नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री का पद संभाला था। उनके सहयोगियों का कहना है कि इन उपायों का उद्देश्य अदालत पर लगाम कसना है, क्योंकि फिलहाल यह काफी बिखर चुकी है।
Israel News इजरायल में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है। इसी बीच हड़ताल का आह्वान करते हुए मुख्य अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से जाने वाली सभी प्रमुख उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। इससे वहां के यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। तेल अवीव, एपी। इजरायल के हवाईअड्डा प्राधिकरण ने कहा है कि देश के मुख्य अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से जाने वाली उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। दरअसल, सरकार के नियोजित न्यायिक फेरबदल के विरोध में हड़ताल का आह्वान किया गया है, जिसके कारण यह कदम उठाया गया है। देश के सबसे बड़े ट्रेड यूनियन समूह द्वारा सोमवार को हड़ताल का आह्वान किया गया है और इससे इजरायल की अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से पर असर पड़ सकता है। उड़ान के शेड्यूल में हुए परिवर्तन से हजारों लोगों के प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि, तेल अवीव के विशाल समुद्र तटीय महानगर के बाहर, विमान अभी भी बेन-गुरियन हवाई अड्डे पर उतारे जाएंगे। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के न्यायिक ओवरहाल ने पूरे इजरायली समाज से विरोध को पनपने पर मजबूर कर दिया है। इजरायल में प्रधानमंत्री द्वारा किए गए नियोजित न्यायिक फेरबदल के विरोध में पूरे देश में विरोध प्रदर्शन जारी है। पिछले दो महीने से नागरिक इसका विरोध कर रहे हैं। यहां तक कि कई बार यहां के लोगों ने खुले तौर पर सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की है। व्यापार जगत के नेताओं और कानूनी अधिकारियों ने कहा है कि लागू किए गए योजना के विनाशकारी प्रभाव हो सकते हैं। हालांकि, इजरायली सेना भी विरोध से अछूती नहीं दिख रही, उनमें भी इसे लेकर काफी असंतोष है। आपको बता दें, लंबे सियासी गतिरोध के बाद दिसंबर के अंत में नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री का पद संभाला था। उनके सहयोगियों का कहना है कि इन उपायों का उद्देश्य अदालत पर लगाम कसना है, क्योंकि फिलहाल यह काफी बिखर चुकी है।
इराक़ की सेना ने दाइश के नियंत्रण से मूसिल सिटी को स्वतंत्र कराने के अपने अभियान को जारी रखते हुए मूसिल की कई सरकारी इमारतों और सरकारी संस्थाओं को आतंकियों के नियंत्रण से स्वतंत्र करा लिया है। इराक़ की आतंकवाद निरोधक सेना के प्रवक्ता सबाह नोमान ने इर्ना से बात करते हुए कहा कि देश की आतंकवाद निरोधक सेना शुक्रवार को कई सरकारी इमारतों, रासायनिक हथियारों के कई निर्माण केन्द्रों और मूसिल विश्वविद्यालय को आतंकियों के नियंत्रण से स्वतंत्र कराने में सफल रही। उनका कहना था कि आतंकी गुट दाइश इन इमारतों को रासायनिक हथियार बनाने के लिए प्रयोग करते थे। सबाह नोमान ने कहा कि शुक्रवार को मूसिल सिटी की स्वतंत्रता के अभियान में मारे गये आतंकियों की सही संख्या अभी तक पता नहीं चल सकी है किन्तु आतंकवाद निरोधक बल के जवानों ने 400 से अधिक आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया है। इसी मध्य मूसिल में इराक़ के एक कुर्द अधिकारी ग़यास सूरची ने इर्ना से बात करते हुए कहा कि शुक्रवार को दाइश को भारी नुक़सान पहुंचा है और इराक़ी सेना ने पूर्वी मूसिल के 90 प्रतिशत से अधिक क्षेत्रों को अपने नियंत्रण में ले लिया है। इसी मध्य इराक़ के आतंकवाद निरोधक बल ने मूसिल के अलहुर्रिया पुल, अस्सलाम, सदरिया और यारमजा मोहल्लों को आतंकियों के नियंत्रण से स्वतंत्र करा लिया है। ज्ञात रहे कि मूसिल सिटी की स्वतंत्रता का अभियान 17 अक्तूबर 2016 को प्रधानमंत्री हैदर अलएबादी के आदेश से आरंभ हुआ है। (AK)
इराक़ की सेना ने दाइश के नियंत्रण से मूसिल सिटी को स्वतंत्र कराने के अपने अभियान को जारी रखते हुए मूसिल की कई सरकारी इमारतों और सरकारी संस्थाओं को आतंकियों के नियंत्रण से स्वतंत्र करा लिया है। इराक़ की आतंकवाद निरोधक सेना के प्रवक्ता सबाह नोमान ने इर्ना से बात करते हुए कहा कि देश की आतंकवाद निरोधक सेना शुक्रवार को कई सरकारी इमारतों, रासायनिक हथियारों के कई निर्माण केन्द्रों और मूसिल विश्वविद्यालय को आतंकियों के नियंत्रण से स्वतंत्र कराने में सफल रही। उनका कहना था कि आतंकी गुट दाइश इन इमारतों को रासायनिक हथियार बनाने के लिए प्रयोग करते थे। सबाह नोमान ने कहा कि शुक्रवार को मूसिल सिटी की स्वतंत्रता के अभियान में मारे गये आतंकियों की सही संख्या अभी तक पता नहीं चल सकी है किन्तु आतंकवाद निरोधक बल के जवानों ने चार सौ से अधिक आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया है। इसी मध्य मूसिल में इराक़ के एक कुर्द अधिकारी ग़यास सूरची ने इर्ना से बात करते हुए कहा कि शुक्रवार को दाइश को भारी नुक़सान पहुंचा है और इराक़ी सेना ने पूर्वी मूसिल के नब्बे प्रतिशत से अधिक क्षेत्रों को अपने नियंत्रण में ले लिया है। इसी मध्य इराक़ के आतंकवाद निरोधक बल ने मूसिल के अलहुर्रिया पुल, अस्सलाम, सदरिया और यारमजा मोहल्लों को आतंकियों के नियंत्रण से स्वतंत्र करा लिया है। ज्ञात रहे कि मूसिल सिटी की स्वतंत्रता का अभियान सत्रह अक्तूबर दो हज़ार सोलह को प्रधानमंत्री हैदर अलएबादी के आदेश से आरंभ हुआ है।
जनज्वार। बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने नीतीश कुमार के उस बयान पर टिप्पणी की है, जिसमें उन्होंने कहा है कि वे मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहते थे। सुशील कुमार मोदी ने इस बात की पुष्टि की कि नीतीश कुमार फिर एक बार बिहार का मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहते थे, लेकिन भाजपा व जदयू के नेताओं के द्वारा उनसे इसके लिए कहने पर वे पद धारण करने को तैयार हुए। सुशील कुमार मोदी ने कहा कि भाजपा व जदयू के नेताओं ने नीतीश कुमार से कहा कि हमने आपके नाम पर विधानसभा का चुनाव लड़ा, लोगों से आपके चेहरे व विजन पर वोट मांगा, जनता से इसी आधार पर हमें वोट दिया। आखिरकार वे जदयू, भाजपा और वीआइपी के नेताओं के आग्रह पर मुख्यमंत्री बनने के तैयार हुए। सुशील कुमार मोदी ने अरुणाचल प्रदेश में जदयू के छह विधायकों के भाजपा में जाने पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जदयू के नेताओं ने यह कहा है कि अरुणाचल प्रदेश में जो कुछ हुआ है उसका असर बिहार में गठबंधन और सरकार पर नहीं पड़ेगा। भाजपा और जदयू गा गठबंधन बिहार में अटूट है। नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में पांच साल एनडीए की सरकार चलेगी। मालूम हो कि रविवार को जदयू पदाधिकारियों के साथ बैठक के दौरान नीतीश कुमार ने कहा था कि वे मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहते हैं और बहुमत एनडीए को मिला है और भाजपा अपना मुख्यमंत्री भी राज्य में बना सकती है। नवंबर में संपन्न हुए राज्य विधानसभा चुनाव के बाद जदयू छोटी पार्टी के रूप में उभरी और उसके बावजूद भाजपा ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय लिया। जदयू ने अरुणाचल प्रदेश में प्रदेश अपने विधायकों को भाजपा में शामिल किए जाने पर भी नाराजगी प्रकट की। जदयू ने इसके साथ ही लव जिहाद को लेकर भाजपा शासित राज्यों द्वार बनाए जा रहे कानून से असहमति प्रकट की। जदयू महासचिव केसी त्यागी ने कहा है कि लव जिहाद के नाम पर देश में नफरत व विभाजन का माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संविधान में यह प्रावधान है और सीआरपीसी दो वयस्कों को अपनी मर्जी से जीवन साथी चुनने की आजादी देता है।
जनज्वार। बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने नीतीश कुमार के उस बयान पर टिप्पणी की है, जिसमें उन्होंने कहा है कि वे मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहते थे। सुशील कुमार मोदी ने इस बात की पुष्टि की कि नीतीश कुमार फिर एक बार बिहार का मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहते थे, लेकिन भाजपा व जदयू के नेताओं के द्वारा उनसे इसके लिए कहने पर वे पद धारण करने को तैयार हुए। सुशील कुमार मोदी ने कहा कि भाजपा व जदयू के नेताओं ने नीतीश कुमार से कहा कि हमने आपके नाम पर विधानसभा का चुनाव लड़ा, लोगों से आपके चेहरे व विजन पर वोट मांगा, जनता से इसी आधार पर हमें वोट दिया। आखिरकार वे जदयू, भाजपा और वीआइपी के नेताओं के आग्रह पर मुख्यमंत्री बनने के तैयार हुए। सुशील कुमार मोदी ने अरुणाचल प्रदेश में जदयू के छह विधायकों के भाजपा में जाने पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जदयू के नेताओं ने यह कहा है कि अरुणाचल प्रदेश में जो कुछ हुआ है उसका असर बिहार में गठबंधन और सरकार पर नहीं पड़ेगा। भाजपा और जदयू गा गठबंधन बिहार में अटूट है। नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में पांच साल एनडीए की सरकार चलेगी। मालूम हो कि रविवार को जदयू पदाधिकारियों के साथ बैठक के दौरान नीतीश कुमार ने कहा था कि वे मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहते हैं और बहुमत एनडीए को मिला है और भाजपा अपना मुख्यमंत्री भी राज्य में बना सकती है। नवंबर में संपन्न हुए राज्य विधानसभा चुनाव के बाद जदयू छोटी पार्टी के रूप में उभरी और उसके बावजूद भाजपा ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय लिया। जदयू ने अरुणाचल प्रदेश में प्रदेश अपने विधायकों को भाजपा में शामिल किए जाने पर भी नाराजगी प्रकट की। जदयू ने इसके साथ ही लव जिहाद को लेकर भाजपा शासित राज्यों द्वार बनाए जा रहे कानून से असहमति प्रकट की। जदयू महासचिव केसी त्यागी ने कहा है कि लव जिहाद के नाम पर देश में नफरत व विभाजन का माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संविधान में यह प्रावधान है और सीआरपीसी दो वयस्कों को अपनी मर्जी से जीवन साथी चुनने की आजादी देता है।
उत्तर प्रदेश की अकबरपुर लोकसभा सीट वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की झोली में आई थी। इस सीट से 2014 में सांसद बने देवेंद्र सिंह उर्फ भोले। इस लोकसभा सीट में कानपुर नगर की 4 विधानसभाएं और कानपुर देहात की एक विधानसभा आती है। इसमें कानपुर देहात के अंतर्गत आनेवाला अकबरपुर-रनिया है जबकि कानपुर नगर से बिठूर, कल्याणपुर, महाराजपुर, घाटमपुर विधानसभा शामिल है। चुनाव आयोग की ओर से मतदान की तारीखों का ऐलान कर दिया गया है। अकबरपुर लोकसभा सीट पर 29 अप्रैल को मतदान होगा। वर्ष 2017 में हुए विधानसभा चुनाव के अनुसार, अकबरपुर लोकसभा सीट की पांच विधानसभा सीटों पर तकरीबन 17 लाख 14 हजार 4 सौ 53 मतदाता हैं। अकबरपुर लोकसभा सीट पर पिछली बार (2014) 9 लाख 71 हजार 448 मतदाओं ने 2014 में अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। चुनावी विश्लेषकों की मानें तो यह सीट पिछड़ा और दलित बहुल है जबकि तीसरे नंबर पर यहां ठाकुर वर्ग आता है। यहां राजपूत और ब्राह्मण वर्ग भी निर्णायक भूमिका में है। वर्ष 2014 में बीजेपी की ओर से अकबरपुर लोकसभा सीट के लिए प्रत्याशी बने देवेंद्र सिंह भोले ने उस दौरान बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के प्रत्याशी अनिल शुक्ल वारसी को बड़े अंतर से शिकस्त दी थी। भोले को 4,81,584 वोट मिले थे जबकि बीएसपी की ओर से अनिल शुक्ल वारसी को 2,02,587 वोट मिले। 2014 के चुनाव के बाद अनिल शुक्ल वारसी ने अपनी पत्नी प्रतिभा शुक्ला समेत भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का दामन थाम लिया। इसके बाद बीजेपी ने विधानसभा चुनाव के वक्त प्रतिभा शुक्ला को अकबरपुर-रनियां से टिकट दिया और उन्होंने यूपी विधानसभा में पार्टी की एक सीट बढ़ा दी। इन सबमें खास बात यह है कि पिछले चुनाव (2014) में बीएसपी को 20. 86 फीसदी और समाजवादी पार्टी (एसपी) को 15. 13 प्रतिशत वोट मिला था। पढ़ेंः कानपुर में क्या SP भेदेगी बीजेपी का किला, कितनी 'पावरफुल' कांग्रेस? इस सीट के बारे में खास बात यह है कि अकबरपुर लोकसभा को पहले बिल्हौर सीट के रूप में पहचाना जाता था। इसके बाद वर्ष 2009 में परिसीमन के बाद यह अकबरपुर लोकसभा सीट के रूप में अस्तित्व में आ गई। अकबरपुर लोकसभा सीट बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की सुप्रीमो मायावती के लिए बेहद खास मानी जाती है। अकबरपुर लोकसभा सीट ज्यादातर कांग्रेस और बीएसपी के खाते में ही जाती रही है। 1996 से 2004 तक के लोकसभा चुनावों में यहां से बीएसपी ने जीत दर्ज की लेकिन 2009 के आम चुनावों में कांग्रेस के राजाराम पाल ने यहां जीत का परचम बुलंद किया। इससे पहले वर्ष 2004 में राजाराम पाल को इसी सीट से बीएसपी ने उम्मीदवार बनाया था, तब यहां पाल ने जीत हासिल की थी। बाद में वर्ष 2005 में राजाराम पाल पैसा लेकर संसद में सवाल पूछने के मामले में फंस गए थे, जिसकी वजह से बीएसपी से उन्हें निकाल दिया गया। वर्ष 2019 के मद्देनजर एसपी-बीएसपी के बीच गठबंधन हुआ है और कांग्रेस ने यहां पर फिर से राजाराम पाल पर दांव लगाया है। बीजेपी ने 2014 में जीत हासिल करने वाले देवेंद्र सिंह भोले को प्रत्याशी बनाया है। बीएसपी ने अकबरपुर लोकसभा सीट से निशा सचान को टिकट दिया है।
उत्तर प्रदेश की अकबरपुर लोकसभा सीट वर्ष दो हज़ार चौदह के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की झोली में आई थी। इस सीट से दो हज़ार चौदह में सांसद बने देवेंद्र सिंह उर्फ भोले। इस लोकसभा सीट में कानपुर नगर की चार विधानसभाएं और कानपुर देहात की एक विधानसभा आती है। इसमें कानपुर देहात के अंतर्गत आनेवाला अकबरपुर-रनिया है जबकि कानपुर नगर से बिठूर, कल्याणपुर, महाराजपुर, घाटमपुर विधानसभा शामिल है। चुनाव आयोग की ओर से मतदान की तारीखों का ऐलान कर दिया गया है। अकबरपुर लोकसभा सीट पर उनतीस अप्रैल को मतदान होगा। वर्ष दो हज़ार सत्रह में हुए विधानसभा चुनाव के अनुसार, अकबरपुर लोकसभा सीट की पांच विधानसभा सीटों पर तकरीबन सत्रह लाख चौदह हजार चार सौ तिरेपन मतदाता हैं। अकबरपुर लोकसभा सीट पर पिछली बार नौ लाख इकहत्तर हजार चार सौ अड़तालीस मतदाओं ने दो हज़ार चौदह में अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। चुनावी विश्लेषकों की मानें तो यह सीट पिछड़ा और दलित बहुल है जबकि तीसरे नंबर पर यहां ठाकुर वर्ग आता है। यहां राजपूत और ब्राह्मण वर्ग भी निर्णायक भूमिका में है। वर्ष दो हज़ार चौदह में बीजेपी की ओर से अकबरपुर लोकसभा सीट के लिए प्रत्याशी बने देवेंद्र सिंह भोले ने उस दौरान बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी अनिल शुक्ल वारसी को बड़े अंतर से शिकस्त दी थी। भोले को चार,इक्यासी,पाँच सौ चौरासी वोट मिले थे जबकि बीएसपी की ओर से अनिल शुक्ल वारसी को दो,दो,पाँच सौ सत्तासी वोट मिले। दो हज़ार चौदह के चुनाव के बाद अनिल शुक्ल वारसी ने अपनी पत्नी प्रतिभा शुक्ला समेत भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। इसके बाद बीजेपी ने विधानसभा चुनाव के वक्त प्रतिभा शुक्ला को अकबरपुर-रनियां से टिकट दिया और उन्होंने यूपी विधानसभा में पार्टी की एक सीट बढ़ा दी। इन सबमें खास बात यह है कि पिछले चुनाव में बीएसपी को बीस. छियासी फीसदी और समाजवादी पार्टी को पंद्रह. तेरह प्रतिशत वोट मिला था। पढ़ेंः कानपुर में क्या SP भेदेगी बीजेपी का किला, कितनी 'पावरफुल' कांग्रेस? इस सीट के बारे में खास बात यह है कि अकबरपुर लोकसभा को पहले बिल्हौर सीट के रूप में पहचाना जाता था। इसके बाद वर्ष दो हज़ार नौ में परिसीमन के बाद यह अकबरपुर लोकसभा सीट के रूप में अस्तित्व में आ गई। अकबरपुर लोकसभा सीट बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती के लिए बेहद खास मानी जाती है। अकबरपुर लोकसभा सीट ज्यादातर कांग्रेस और बीएसपी के खाते में ही जाती रही है। एक हज़ार नौ सौ छियानवे से दो हज़ार चार तक के लोकसभा चुनावों में यहां से बीएसपी ने जीत दर्ज की लेकिन दो हज़ार नौ के आम चुनावों में कांग्रेस के राजाराम पाल ने यहां जीत का परचम बुलंद किया। इससे पहले वर्ष दो हज़ार चार में राजाराम पाल को इसी सीट से बीएसपी ने उम्मीदवार बनाया था, तब यहां पाल ने जीत हासिल की थी। बाद में वर्ष दो हज़ार पाँच में राजाराम पाल पैसा लेकर संसद में सवाल पूछने के मामले में फंस गए थे, जिसकी वजह से बीएसपी से उन्हें निकाल दिया गया। वर्ष दो हज़ार उन्नीस के मद्देनजर एसपी-बीएसपी के बीच गठबंधन हुआ है और कांग्रेस ने यहां पर फिर से राजाराम पाल पर दांव लगाया है। बीजेपी ने दो हज़ार चौदह में जीत हासिल करने वाले देवेंद्र सिंह भोले को प्रत्याशी बनाया है। बीएसपी ने अकबरपुर लोकसभा सीट से निशा सचान को टिकट दिया है।
कम से कम 17 विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के दीर्घकालिक प्रभाव के बारे में आशंका व्यक्त की है, जो मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम (पीएमएलए) की रोकथाम की संवैधानिक वैधता को बनाए रखते हैं, और आदेश की समीक्षा मांगी। यह कहते हुए कि "अभियुक्त/अपराधी के निर्दोषता का सिद्धांत एक मानव अधिकार माना जाता है" लेकिन "यह अनुमान संसद/विधानमंडल द्वारा किए गए कानून द्वारा परस्पर जुड़ा हो सकता है", सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सप्ताह प्रवर्तन निदेशालय से संबंधित प्रावधानों गिरफ्तारी, लगाव, खोज और जब्ती की शक्तियां को बरकरार रखा। । केंद्र ने अदालत से कहा था कि "यह नहीं कहा जा सकता है कि निर्दोषता का अनुमान एक संवैधानिक गारंटी है"। एक संयुक्त बयान में, विपक्षी नेताओं ने कहा कि निर्णय एक सरकार के हाथों को मजबूत करेगा कि "राजनीतिक प्रतिशोध में लिप्त" अपने विरोधियों को लक्षित करने के लिए और आशा व्यक्त किया कि यह "खतरनाक फैसला अल्पकालिक होगा"। "हम हाल के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के दीर्घकालिक निहितार्थों पर अपनी गहरी आशंका को रिकॉर्ड करते हैं, संपूर्णता में, मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम, 2002 की रोकथाम में संशोधन, इस बात की जांच किए बिना कि क्या इनमें से कुछ संशोधन तरीके से किए जा सकते थे। उन्होंने आगे कहा कि वे "यह भी बहुत निराश थे कि उच्चतम न्यायिक प्राधिकरण, जिसे अधिनियम में चेक और संतुलन की कमी पर एक स्वतंत्र फैसला देने के लिए आमंत्रित किया गया है, ने लगभग ड्रैकियन संशोधनों के समर्थन में कार्यकारी द्वारा दिए गए तर्कों को पुनः पेश किया है", और जोड़ा, और जोड़ा उन्हें उम्मीद है कि खतरनाक फैसला अल्पकालिक होगा और संवैधानिक प्रावधान जल्द ही प्रबल होंगे। संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर करने वाले पार्टियों में कांग्रेस, TMC, DMK, AAP, NCP, SHIV SENA, CPI-M, CPI, IUML, RSP, MDMK, RJD और RLD हैं। इससे पहले, कांग्रेस ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के मनी लॉन्ड्रिंग कानून के कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को बनाए रखने के फैसले में भारत के लोकतंत्र के लिए दूरगामी निहितार्थ होंगे, खासकर जब सरकारें "राजनीतिक प्रतिशोध" में लंगर डालीं।
कम से कम सत्रह विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के दीर्घकालिक प्रभाव के बारे में आशंका व्यक्त की है, जो मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम की रोकथाम की संवैधानिक वैधता को बनाए रखते हैं, और आदेश की समीक्षा मांगी। यह कहते हुए कि "अभियुक्त/अपराधी के निर्दोषता का सिद्धांत एक मानव अधिकार माना जाता है" लेकिन "यह अनुमान संसद/विधानमंडल द्वारा किए गए कानून द्वारा परस्पर जुड़ा हो सकता है", सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सप्ताह प्रवर्तन निदेशालय से संबंधित प्रावधानों गिरफ्तारी, लगाव, खोज और जब्ती की शक्तियां को बरकरार रखा। । केंद्र ने अदालत से कहा था कि "यह नहीं कहा जा सकता है कि निर्दोषता का अनुमान एक संवैधानिक गारंटी है"। एक संयुक्त बयान में, विपक्षी नेताओं ने कहा कि निर्णय एक सरकार के हाथों को मजबूत करेगा कि "राजनीतिक प्रतिशोध में लिप्त" अपने विरोधियों को लक्षित करने के लिए और आशा व्यक्त किया कि यह "खतरनाक फैसला अल्पकालिक होगा"। "हम हाल के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के दीर्घकालिक निहितार्थों पर अपनी गहरी आशंका को रिकॉर्ड करते हैं, संपूर्णता में, मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम, दो हज़ार दो की रोकथाम में संशोधन, इस बात की जांच किए बिना कि क्या इनमें से कुछ संशोधन तरीके से किए जा सकते थे। उन्होंने आगे कहा कि वे "यह भी बहुत निराश थे कि उच्चतम न्यायिक प्राधिकरण, जिसे अधिनियम में चेक और संतुलन की कमी पर एक स्वतंत्र फैसला देने के लिए आमंत्रित किया गया है, ने लगभग ड्रैकियन संशोधनों के समर्थन में कार्यकारी द्वारा दिए गए तर्कों को पुनः पेश किया है", और जोड़ा, और जोड़ा उन्हें उम्मीद है कि खतरनाक फैसला अल्पकालिक होगा और संवैधानिक प्रावधान जल्द ही प्रबल होंगे। संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर करने वाले पार्टियों में कांग्रेस, TMC, DMK, AAP, NCP, SHIV SENA, CPI-M, CPI, IUML, RSP, MDMK, RJD और RLD हैं। इससे पहले, कांग्रेस ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के मनी लॉन्ड्रिंग कानून के कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को बनाए रखने के फैसले में भारत के लोकतंत्र के लिए दूरगामी निहितार्थ होंगे, खासकर जब सरकारें "राजनीतिक प्रतिशोध" में लंगर डालीं।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
नई दिल्लीः बॉलीवुड के किंग खान शाहरुख खान (Shah Rukh Khan) की अपकमिंग फिल्म 'डंकी' (Dunki) काफी चर्चा में है. फिल्म के प्रमोशन के लिए शाहरुख खान ने भी कमर कस ली है. एक्टर ने अपने जन्मदिन पर भी फैंस के साथ डंकी की खूब चर्चा की थी. वो डायरेक्टर राजकुमार हिरानी के साथ ही नजर आए थे. अब मेकर्स ने डंकी का पहला गाना रिलीज होने की जानकारी दी है. इस गाने में शाहरुख खान फिल्म में उनकी लेडी-लव तापसी (Tapsee Pannu) पन्नू के साथ रोमांस करते हुए नजर आएंगे. इसके साथ ही किंग खान की मैनेजर ने एक्टर का नया लुक भी दिखाया है. शाहरुख खान के नये डैशिंग अवतार को देख फैंस हैरान रह गए हैं. शाहरुख खान इस समय बॉक्स ऑफिस के बादशाह बने हुए हैं. इस साल उनकी दो फिल्मों - 'पठान' और 'जवान' ने ग्लोबल लेवल पर 1000 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार किया है. फैंस अब 22 दिसंबर को स्क्रीन पर रिलीज होने वाली 'डंकी' का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. इसके अलावा शाहरुख की मैनेजर पूजा ददलानी ने एक्टर की कुछ लेटेस्ट फोटोज साझा की हैं. इनमें शाहरुख काफी डैशिंग और चार्मिंग नजर आ रहे हैं. उन्हें नेवी ब्लू ब्लेज़र पहने देखा जा सकता है. पूजा ने अलग-अलग शेड्स में तीन तस्वीरें पोस्ट कीं उन्होंने लिखा, "जिंदगी के हर रंग का अनुभव लें... डंकी की इस यात्रा पर 30 दिनों में हमारे साथ आने के लिए तैयार हो जाएं.. #DUNKI" इस पोस्ट पर फैंस किंग खान के नये लुक की जमकर तारीफ कर रहे हैं. यूजर्स का कहना है जवान कभी बूढ़ा नहीं हो सकता. कुछ फैंस ने शाहरुख को बेताज बादशाह कहा और फीमेल फैंस ने हार्ट इमोजी छोड़े हैं. राजकुमार हिरानी द्वारा निर्देशित 'डंकी' में तापसी पन्नू, विक्की कौशल और बोमन ईरानी भी हैं. फिल्म इसी साल 22 दिसंबर को रिलीज होगी.
नई दिल्लीः बॉलीवुड के किंग खान शाहरुख खान की अपकमिंग फिल्म 'डंकी' काफी चर्चा में है. फिल्म के प्रमोशन के लिए शाहरुख खान ने भी कमर कस ली है. एक्टर ने अपने जन्मदिन पर भी फैंस के साथ डंकी की खूब चर्चा की थी. वो डायरेक्टर राजकुमार हिरानी के साथ ही नजर आए थे. अब मेकर्स ने डंकी का पहला गाना रिलीज होने की जानकारी दी है. इस गाने में शाहरुख खान फिल्म में उनकी लेडी-लव तापसी पन्नू के साथ रोमांस करते हुए नजर आएंगे. इसके साथ ही किंग खान की मैनेजर ने एक्टर का नया लुक भी दिखाया है. शाहरुख खान के नये डैशिंग अवतार को देख फैंस हैरान रह गए हैं. शाहरुख खान इस समय बॉक्स ऑफिस के बादशाह बने हुए हैं. इस साल उनकी दो फिल्मों - 'पठान' और 'जवान' ने ग्लोबल लेवल पर एक हज़ार करोड़ रुपये का आंकड़ा पार किया है. फैंस अब बाईस दिसंबर को स्क्रीन पर रिलीज होने वाली 'डंकी' का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. इसके अलावा शाहरुख की मैनेजर पूजा ददलानी ने एक्टर की कुछ लेटेस्ट फोटोज साझा की हैं. इनमें शाहरुख काफी डैशिंग और चार्मिंग नजर आ रहे हैं. उन्हें नेवी ब्लू ब्लेज़र पहने देखा जा सकता है. पूजा ने अलग-अलग शेड्स में तीन तस्वीरें पोस्ट कीं उन्होंने लिखा, "जिंदगी के हर रंग का अनुभव लें... डंकी की इस यात्रा पर तीस दिनों में हमारे साथ आने के लिए तैयार हो जाएं.. #DUNKI" इस पोस्ट पर फैंस किंग खान के नये लुक की जमकर तारीफ कर रहे हैं. यूजर्स का कहना है जवान कभी बूढ़ा नहीं हो सकता. कुछ फैंस ने शाहरुख को बेताज बादशाह कहा और फीमेल फैंस ने हार्ट इमोजी छोड़े हैं. राजकुमार हिरानी द्वारा निर्देशित 'डंकी' में तापसी पन्नू, विक्की कौशल और बोमन ईरानी भी हैं. फिल्म इसी साल बाईस दिसंबर को रिलीज होगी.
में मुझे उसकी छत पर चढ़कर च जाने से बचाने को खड़ा रहना पड़ता था । अजीव मुहव्वत थी पाठशाला के मकान से कि अपने घर की छत की बजाय पाठशाला को छत पर भीगता रहता था । अध्यापिकाओं का वेतन बीस रुपया मानिक से चालीस रुपया मासिक तक दिया गया। पढ़ने वाली लड़कियों की भी तादाद बढ़ी किन्तु जी तोड़कर काम करने वाली अध्यापिकाओं का सदा अभाव रहा । जब काम बढ़ने लग । तो फूट भी पैदा होने लगी । जिससे मेरा मन खट्टा हो गया । काम तो मैं खूब कर सकता हूँ किन्तु उखाड़ पछाड़ न तो मुझसे आती है और न उसे मैं पसन्द करता हूँ। उस जमाने में जबकि पैसे का अभाव था साढ़े चार हजार रुपया इकट्ठा करके इस काम को सफल बनाया। गंगनहर के आने से आवादी भी वढने लगी किन्तु इतनी नहीं कि यहां दो दो पाठशालायें चलती रहें जब राज की ओर से एक कन्या पाठशाला कायम हुई तो मैंने अपने साथियों से कहा, मुझे काम करते हुये पन्द्रह हो गये हैं । थक चुका हूँ अब इसी पाठशाला को राज के - दे दिया जाय । उन दिनों के तहसीलदार साहब लाला ईश्वरदास जी हमारी पाठशाला के प्रधान थे और उन्ही के हाथ में राज की पाठशाला का प्रबन्ध होना था। इसलिये मैंने उनको चार्ज संभाल दिया ।' डायरियों में पाठशाला के लिये अच्छी
में मुझे उसकी छत पर चढ़कर च जाने से बचाने को खड़ा रहना पड़ता था । अजीव मुहव्वत थी पाठशाला के मकान से कि अपने घर की छत की बजाय पाठशाला को छत पर भीगता रहता था । अध्यापिकाओं का वेतन बीस रुपया मानिक से चालीस रुपया मासिक तक दिया गया। पढ़ने वाली लड़कियों की भी तादाद बढ़ी किन्तु जी तोड़कर काम करने वाली अध्यापिकाओं का सदा अभाव रहा । जब काम बढ़ने लग । तो फूट भी पैदा होने लगी । जिससे मेरा मन खट्टा हो गया । काम तो मैं खूब कर सकता हूँ किन्तु उखाड़ पछाड़ न तो मुझसे आती है और न उसे मैं पसन्द करता हूँ। उस जमाने में जबकि पैसे का अभाव था साढ़े चार हजार रुपया इकट्ठा करके इस काम को सफल बनाया। गंगनहर के आने से आवादी भी वढने लगी किन्तु इतनी नहीं कि यहां दो दो पाठशालायें चलती रहें जब राज की ओर से एक कन्या पाठशाला कायम हुई तो मैंने अपने साथियों से कहा, मुझे काम करते हुये पन्द्रह हो गये हैं । थक चुका हूँ अब इसी पाठशाला को राज के - दे दिया जाय । उन दिनों के तहसीलदार साहब लाला ईश्वरदास जी हमारी पाठशाला के प्रधान थे और उन्ही के हाथ में राज की पाठशाला का प्रबन्ध होना था। इसलिये मैंने उनको चार्ज संभाल दिया ।' डायरियों में पाठशाला के लिये अच्छी
"प्रतिभावान खिलाड़ियों की पेंशन के लिए खेल निधि" योजना के तहत युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय खिलाड़ियों को सेवानिवृत्ति के बाद आजीविका चलाने हेतु मासिक पेंशन के रूप में उन्हें सहायता उपलब्ध करा रहा है। इस योजना के तहत, ऐसे खिलाड़ी जो भारतीय नागरिक हैं और जिन्होंने ओलंपिक खेलों, पैरालंपिक खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों, एशियाई खेलों तथा विश्व कप / विश्व चैम्पियनशिप में (ओलंपिक एवं एशियाई खेलों के संबंध में) पदक जीते हैं, तो उन्हें 12,000 से लेकर 20,000 रुपये तक आजीवन मासिक पेंशन 30 वर्ष की आयु प्राप्त करने या फिर सक्रिय खेलों से सेवानिवृत्त होने के पश्चात, जो भी बाद में हो उस हिसाब से दी जाती है। पेंशन का भुगतान भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के माध्यम से किया जाता है, जिसके लिए मंत्रालय एलआईसी को एकमुश्त रकम अदा करके व्यक्तिगत पेंशनभोगियों के लिए वार्षिक पेंशन प्लान खरीदता है। योजना के तहत वर्तमान में 821 खिलाड़ियों को आजीवन पेंशन मिल रही है। यह जानकारी युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री श्री अनुराग ठाकुर ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
"प्रतिभावान खिलाड़ियों की पेंशन के लिए खेल निधि" योजना के तहत युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय खिलाड़ियों को सेवानिवृत्ति के बाद आजीविका चलाने हेतु मासिक पेंशन के रूप में उन्हें सहायता उपलब्ध करा रहा है। इस योजना के तहत, ऐसे खिलाड़ी जो भारतीय नागरिक हैं और जिन्होंने ओलंपिक खेलों, पैरालंपिक खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों, एशियाई खेलों तथा विश्व कप / विश्व चैम्पियनशिप में पदक जीते हैं, तो उन्हें बारह,शून्य से लेकर बीस,शून्य रुपयापये तक आजीवन मासिक पेंशन तीस वर्ष की आयु प्राप्त करने या फिर सक्रिय खेलों से सेवानिवृत्त होने के पश्चात, जो भी बाद में हो उस हिसाब से दी जाती है। पेंशन का भुगतान भारतीय जीवन बीमा निगम के माध्यम से किया जाता है, जिसके लिए मंत्रालय एलआईसी को एकमुश्त रकम अदा करके व्यक्तिगत पेंशनभोगियों के लिए वार्षिक पेंशन प्लान खरीदता है। योजना के तहत वर्तमान में आठ सौ इक्कीस खिलाड़ियों को आजीवन पेंशन मिल रही है। यह जानकारी युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री श्री अनुराग ठाकुर ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
सैन फ्रांसिस्कोः टेक दिग्गज गूगल जल्द ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) नोटबुक 'प्रोजेक्ट टेलविंड' तक एक्सेस खोलेगा। 9टू5गूगल की रिपोर्ट के अनुसार, टेक जायंट ने पिछले महीने 'प्रोजेक्ट टेलविंड' का प्रिव्यू एआई-फस्र्ट नोटबुक के रूप में किया था। पीएएलएम एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (एपीआई) का एक डेमो है जो किसी को भी कई अलग-अलग सोर्स से जानकारी को एकत्रित करने में मदद कर सकता है, जिसे वे खास तौर से चुनते हैं। यूजर्स पिछले महीने की शुरूआत से गूगल लैब्स के जरिए प्रोजेक्ट टेलविंड वेट लिस्ट के लिए साइन अप करने में सक्षम हैं। लैंडिंग पेज पर लेटेस्ट अपडेट में, कंपनी ने कहा कि वह जल्द ही वेटलिस्टिड यूजर्स के लिए एक्सेस खोलेगी और नए नाम सहित अपडेट के लिए नजर रखेगी। इस बीच, इस हफ्ते की शुरूआत में, टेक जायंट ने एआई चैटबॉट 'बार्ड' में बेहतर लॉजिक और स्किल्स सहित नए सुधार पेश किए। कम्प्यूटेशनल प्रॉम्प्ट को पहचानने और बैकग्राउंड में कोड चलाने के लिए बार्ड अब इम्प्लिसिट कोड एक्सक्यूशन नामक एक नई तकनीक का उपयोग करता है। नतीजतन, यह स्ट्रिंग मैनिपुलेशन, कोडिंग क्वेशचन्स और मैथमैटिकल ऑपरेशन का ज्यादा सही ढंग से जवाब दे सकता है।
सैन फ्रांसिस्कोः टेक दिग्गज गूगल जल्द ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नोटबुक 'प्रोजेक्ट टेलविंड' तक एक्सेस खोलेगा। नौटूपाँचगूगल की रिपोर्ट के अनुसार, टेक जायंट ने पिछले महीने 'प्रोजेक्ट टेलविंड' का प्रिव्यू एआई-फस्र्ट नोटबुक के रूप में किया था। पीएएलएम एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस का एक डेमो है जो किसी को भी कई अलग-अलग सोर्स से जानकारी को एकत्रित करने में मदद कर सकता है, जिसे वे खास तौर से चुनते हैं। यूजर्स पिछले महीने की शुरूआत से गूगल लैब्स के जरिए प्रोजेक्ट टेलविंड वेट लिस्ट के लिए साइन अप करने में सक्षम हैं। लैंडिंग पेज पर लेटेस्ट अपडेट में, कंपनी ने कहा कि वह जल्द ही वेटलिस्टिड यूजर्स के लिए एक्सेस खोलेगी और नए नाम सहित अपडेट के लिए नजर रखेगी। इस बीच, इस हफ्ते की शुरूआत में, टेक जायंट ने एआई चैटबॉट 'बार्ड' में बेहतर लॉजिक और स्किल्स सहित नए सुधार पेश किए। कम्प्यूटेशनल प्रॉम्प्ट को पहचानने और बैकग्राउंड में कोड चलाने के लिए बार्ड अब इम्प्लिसिट कोड एक्सक्यूशन नामक एक नई तकनीक का उपयोग करता है। नतीजतन, यह स्ट्रिंग मैनिपुलेशन, कोडिंग क्वेशचन्स और मैथमैटिकल ऑपरेशन का ज्यादा सही ढंग से जवाब दे सकता है।
भारत के अन्य राज्यों की तरह जम्मू-कश्मीर में भी कोरोना वायरस का संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है. आज यानी कि रविवार को कश्मीर संभाग में 14 और नए मामले सामने आए हैं. इसके साथ ही अब प्रदेश में कुल संक्रमित मरीजों की संख्या 106 हो गई है. इससे पहले शनिवार को एक ही दिन में सर्वाधिक 17 नए मरीज सामने आए थे. इनमें तीन माह की बच्ची समेत जमातियों के नौ रिश्तेदार शामिल हैं. इनके अलावा भी संक्रमित आए नए मामलों में ज्यादातर तब्लीगी जमात से जुड़े लोगों के संपर्क में रहे बताए जा रहे हैं. वायरस को लेकर शनिवार को सामने आए 17 मामलों में 14 कश्मीर घाटी व तीन उधमपुर के एक ही परिवार के हैं. कश्मीर में संक्रमित पाए गए मरीजों में छह जमाती हैं. इस बीच उधमपुर में एक होटल में क्वारंटीन किए गए 74 साल के एक संदिग्ध मरीज की शनिवार देर रात मौत हो गई. अगर आपको नही पता तो बता दे कि जिले के रेड जोन घोषित एक गांव का निवासी इस व्यक्ति को 2 अप्रैल को क्वारंटीन किया गया था. गांव में दो संक्रमित मिले थे. 3 अप्रैल को जम्मू में इसका परीक्षण कराया गया था. इसकी रिपोर्ट का इंतजार था. मौत के बाद बुजुर्ग का शव जिला अस्पताल के शव गृह मे रख दिया गया है. वही, दिल्ली के निजामुद्दीन में तब्लीगी जमात के जलसे से लौटे लोगों से जम्मू-कश्मीर में कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है. उधमपुर की चिनैनी तहसील के नरसू इलाके में जमात के जलसे से लौटा एक व्यक्ति कुछ दिन पहले ही संक्रमित पाया गया था. अब उसकी 12 और 26 साल की दो बेटियों के साथ छह महीने की नातिन भी कोरोना से संक्रमित पाई गई है.
भारत के अन्य राज्यों की तरह जम्मू-कश्मीर में भी कोरोना वायरस का संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है. आज यानी कि रविवार को कश्मीर संभाग में चौदह और नए मामले सामने आए हैं. इसके साथ ही अब प्रदेश में कुल संक्रमित मरीजों की संख्या एक सौ छः हो गई है. इससे पहले शनिवार को एक ही दिन में सर्वाधिक सत्रह नए मरीज सामने आए थे. इनमें तीन माह की बच्ची समेत जमातियों के नौ रिश्तेदार शामिल हैं. इनके अलावा भी संक्रमित आए नए मामलों में ज्यादातर तब्लीगी जमात से जुड़े लोगों के संपर्क में रहे बताए जा रहे हैं. वायरस को लेकर शनिवार को सामने आए सत्रह मामलों में चौदह कश्मीर घाटी व तीन उधमपुर के एक ही परिवार के हैं. कश्मीर में संक्रमित पाए गए मरीजों में छह जमाती हैं. इस बीच उधमपुर में एक होटल में क्वारंटीन किए गए चौहत्तर साल के एक संदिग्ध मरीज की शनिवार देर रात मौत हो गई. अगर आपको नही पता तो बता दे कि जिले के रेड जोन घोषित एक गांव का निवासी इस व्यक्ति को दो अप्रैल को क्वारंटीन किया गया था. गांव में दो संक्रमित मिले थे. तीन अप्रैल को जम्मू में इसका परीक्षण कराया गया था. इसकी रिपोर्ट का इंतजार था. मौत के बाद बुजुर्ग का शव जिला अस्पताल के शव गृह मे रख दिया गया है. वही, दिल्ली के निजामुद्दीन में तब्लीगी जमात के जलसे से लौटे लोगों से जम्मू-कश्मीर में कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है. उधमपुर की चिनैनी तहसील के नरसू इलाके में जमात के जलसे से लौटा एक व्यक्ति कुछ दिन पहले ही संक्रमित पाया गया था. अब उसकी बारह और छब्बीस साल की दो बेटियों के साथ छह महीने की नातिन भी कोरोना से संक्रमित पाई गई है.
नए नए कपडे खरीदना किसे नहीं पसंद हर किसी को नई नई ड्रेस पहनना पसदं होती है और खासतौर पर लड़कियों को। लडकियां हर तरह की ड्रेस खरीद लेती है जैसे ही बाजार में कोई नई ड्रेस आई लड़कियां खरीदने पहुँच जाती है। अब ऐसे में आज हम आपको गुब्बारों से बनी ड्रेस दिखाने जा रहे है। जी हाँ यह ड्रेस अमेरिका की molly munyaan ने बनाई है। इन्होंने ये बहुत ही खूबसूरत दिखने वाली ड्रेस बनाई है, ये ड्रेस दिखने में बड़ी ही अच्छी लग रही है। इसे आप कहीं भी पहन कर जा सकती है। molly ने बैलून ऑउटफिट में कई पिक्चर्स इंस्टा पर डाली है। इंस्टा पर उनके कई फॉलोवर्स है। जो उन्हें काफी पसंद करते है। आप भी देखिए उनकी ये तस्वीरे।
नए नए कपडे खरीदना किसे नहीं पसंद हर किसी को नई नई ड्रेस पहनना पसदं होती है और खासतौर पर लड़कियों को। लडकियां हर तरह की ड्रेस खरीद लेती है जैसे ही बाजार में कोई नई ड्रेस आई लड़कियां खरीदने पहुँच जाती है। अब ऐसे में आज हम आपको गुब्बारों से बनी ड्रेस दिखाने जा रहे है। जी हाँ यह ड्रेस अमेरिका की molly munyaan ने बनाई है। इन्होंने ये बहुत ही खूबसूरत दिखने वाली ड्रेस बनाई है, ये ड्रेस दिखने में बड़ी ही अच्छी लग रही है। इसे आप कहीं भी पहन कर जा सकती है। molly ने बैलून ऑउटफिट में कई पिक्चर्स इंस्टा पर डाली है। इंस्टा पर उनके कई फॉलोवर्स है। जो उन्हें काफी पसंद करते है। आप भी देखिए उनकी ये तस्वीरे।
पाकिस्तान की आर्थिक हालत दिन पर दिन दयनीय होती जा रही है. पंद्रह दिन में दूसरी बार पेट्रोल और डीजल के दाम में 32 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी होने जा रही है. सिगरेट पर लगने वाले ड्यूटी चार्ज भी बढ़ गई है. पाकिस्तान की हालत दिन पर दिन खराब होती जा रही है. पाकिस्तान में कल यानी गुरुवार से पेट्रोल और डीजल के दामों में 32 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो सकती है. वहीं, सिगरेट पर भी लगने वाले ड्यूटी चार्ज में 1 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी गई है. पाकिस्तान में बुधवार को एक लीटर पेट्रोल की कीमत 249.8 रुपए रही. कल से होने वाली बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल की कीमत 281.87 प्रति जबकि डीजल की कीमत 295.64 प्रति लीटर हो जाएगी. जियो न्यूज ने आधिकारिक औद्योगिक स्रोतों के हवाले से बताया है कि देश में डीजल की कीमत फिलहाल 262.8 रुपए प्रति लीटर है. गुरुवार को जब नई कीमत लागू होगी तो डीजल की कीमत 295.64 रुपए हो सकती है. वहीं, केरोसिन तेल की कीमत में भी 28.05 रुपए की बढ़ोतरी के बाद 217.88 रुपये प्रति रहने का अनुमान है. इस महीने यह दूसरा मौका होगा जब पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार आम आदमी को झटका देने जा रही है. इससे पहले एक फरवरी को पेट्रोल और डीजल के दाम में 35 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी का ऐलान किया था. उसी समय यह भी निर्धारित कर दिया गया था कि 15 फरवरी के बाद कीमत एक बार फिर बढ़ेगी. नकदी संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने मंगलवार को प्राकृतिक गैस पर कर बढ़ा दिया. इससे औद्योगिक के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं को अब अपनी जेब अधिक ढीली करनी होगी. वित्तीय प्रोत्साहन की शर्तों के तहत यह कदम उठाया गया है. सरकार के इस फैसले के पीछे अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (IMF) की तरफ से छह अरब डॉलर के प्रोत्साहन पैकेज को पटरी पर लाना है. (इनपुट- भाषा)
पाकिस्तान की आर्थिक हालत दिन पर दिन दयनीय होती जा रही है. पंद्रह दिन में दूसरी बार पेट्रोल और डीजल के दाम में बत्तीस रुपयापए प्रति लीटर की बढ़ोतरी होने जा रही है. सिगरेट पर लगने वाले ड्यूटी चार्ज भी बढ़ गई है. पाकिस्तान की हालत दिन पर दिन खराब होती जा रही है. पाकिस्तान में कल यानी गुरुवार से पेट्रोल और डीजल के दामों में बत्तीस रुपयापए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो सकती है. वहीं, सिगरेट पर भी लगने वाले ड्यूटी चार्ज में एक फीसदी की बढ़ोतरी कर दी गई है. पाकिस्तान में बुधवार को एक लीटर पेट्रोल की कीमत दो सौ उनचास दशमलव आठ रुपयापए रही. कल से होने वाली बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल की कीमत दो सौ इक्यासी.सत्तासी प्रति जबकि डीजल की कीमत दो सौ पचानवे.चौंसठ प्रति लीटर हो जाएगी. जियो न्यूज ने आधिकारिक औद्योगिक स्रोतों के हवाले से बताया है कि देश में डीजल की कीमत फिलहाल दो सौ बासठ दशमलव आठ रुपयापए प्रति लीटर है. गुरुवार को जब नई कीमत लागू होगी तो डीजल की कीमत दो सौ पचानवे दशमलव चौंसठ रुपयापए हो सकती है. वहीं, केरोसिन तेल की कीमत में भी अट्ठाईस दशमलव पाँच रुपयापए की बढ़ोतरी के बाद दो सौ सत्रह दशमलव अठासी रुपयापये प्रति रहने का अनुमान है. इस महीने यह दूसरा मौका होगा जब पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार आम आदमी को झटका देने जा रही है. इससे पहले एक फरवरी को पेट्रोल और डीजल के दाम में पैंतीस रुपयापए प्रति लीटर की बढ़ोतरी का ऐलान किया था. उसी समय यह भी निर्धारित कर दिया गया था कि पंद्रह फरवरी के बाद कीमत एक बार फिर बढ़ेगी. नकदी संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने मंगलवार को प्राकृतिक गैस पर कर बढ़ा दिया. इससे औद्योगिक के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं को अब अपनी जेब अधिक ढीली करनी होगी. वित्तीय प्रोत्साहन की शर्तों के तहत यह कदम उठाया गया है. सरकार के इस फैसले के पीछे अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष की तरफ से छह अरब डॉलर के प्रोत्साहन पैकेज को पटरी पर लाना है.
दिल्ली, भारत। साल 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव का बिगुल आज 18 जनवरी से बजना शुरू हो जाएगा। इस बारे में आज बड़ी खबर सामने आ रही है कि, चुनाव आयोग की ओर से दोपहर के समय प्रेस कॉन्फ्रेंस की जाएगी, जिसमें इन 3 राज्यों के विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान किया जाएगा। इन राज्यों में होगा इलेक्शन : दरअसल इस बारे में सामने आई जानकारी के अनुसार, त्रिपुरा, मेघालय और नागालैंड में विधानसभा चुनाव होने है, इसकी तारीख का आज पता चल जाएगा। चुनाव आयोग द्वारा दोपहर में 2:30 बजे के करीब प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगा, जिसमें विस्तार से इलेक्शन नोटिफिकेशन की जानकारी साझा की जाएगी। हालांकि, इससे पहले निर्वाचन आयोग द्वारा तीनों चुनावी राज्यों में चुनावी तैयारियों का जायजा लिया जा चुका है। इस दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार के साथ दोनों आयुक्त अनूप चंद्र पांडेय और अरुण गोयल चुनावी राज्यों के दौरे पर थे और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने इन राज्यों में मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशकों के साथ-साथ राजनीतिक दलों के नुमाइंदों के साथ बैठकें की थी। त्रिपुरा में बीजेपी की स्थिति काफी बेहतर है, यहां विधानसभा में बीजेपी के पास बहुमत है, 60 में से 36 सीटों पर बीजेपी का कब्जा है। इस राज्य में बीजेपी के नेता माणिक साहा मुख्यमंत्री हैं। मेघालय की विधानसभा में बीजेपी की स्थिति कुछ खास नहीं, क्योंकि 60 विधानसभा सीटों में से बीजेपी के पास 9. 6 प्रतिशत वोट शेयर व सिर्फ 2 सीटें हैं। यहां मुख्यमंत्री पद पर एनपीपी के कॉनराड संगमा है। तो वहीं, उत्तर पूर्व के राज्य नागालैंड में भी बीजेपी की स्थिति खास नहीं, यहां 15. 3 प्रतिशत वोट शेयर के साथ बीजेपी के पास 60 में से 12 विधानसभा सीटें ही हैं। इस राज्य के CM नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी के नेता नेफियू रियो हैं। 2023 में इन राज्यों में बजेगा विधानसभा चुनाव का बिगुल : बता दें कि, इस साल 2023 में त्रिपुरा, मेघालय और नागालैंड के अलावा इन 6 राज्याें में भी विधानसभा चुनाव होंगे। दरअसल, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, मिजोरम, राजस्थान, तेलंगाना में भी विधानसभा चुनाव 2023 का बिगुल बजेगा। यानी इस साल कुल 9 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
दिल्ली, भारत। साल दो हज़ार तेईस में होने वाले विधानसभा चुनाव का बिगुल आज अट्ठारह जनवरी से बजना शुरू हो जाएगा। इस बारे में आज बड़ी खबर सामने आ रही है कि, चुनाव आयोग की ओर से दोपहर के समय प्रेस कॉन्फ्रेंस की जाएगी, जिसमें इन तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान किया जाएगा। इन राज्यों में होगा इलेक्शन : दरअसल इस बारे में सामने आई जानकारी के अनुसार, त्रिपुरा, मेघालय और नागालैंड में विधानसभा चुनाव होने है, इसकी तारीख का आज पता चल जाएगा। चुनाव आयोग द्वारा दोपहर में दो:तीस बजे के करीब प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगा, जिसमें विस्तार से इलेक्शन नोटिफिकेशन की जानकारी साझा की जाएगी। हालांकि, इससे पहले निर्वाचन आयोग द्वारा तीनों चुनावी राज्यों में चुनावी तैयारियों का जायजा लिया जा चुका है। इस दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार के साथ दोनों आयुक्त अनूप चंद्र पांडेय और अरुण गोयल चुनावी राज्यों के दौरे पर थे और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने इन राज्यों में मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशकों के साथ-साथ राजनीतिक दलों के नुमाइंदों के साथ बैठकें की थी। त्रिपुरा में बीजेपी की स्थिति काफी बेहतर है, यहां विधानसभा में बीजेपी के पास बहुमत है, साठ में से छत्तीस सीटों पर बीजेपी का कब्जा है। इस राज्य में बीजेपी के नेता माणिक साहा मुख्यमंत्री हैं। मेघालय की विधानसभा में बीजेपी की स्थिति कुछ खास नहीं, क्योंकि साठ विधानसभा सीटों में से बीजेपी के पास नौ. छः प्रतिशत वोट शेयर व सिर्फ दो सीटें हैं। यहां मुख्यमंत्री पद पर एनपीपी के कॉनराड संगमा है। तो वहीं, उत्तर पूर्व के राज्य नागालैंड में भी बीजेपी की स्थिति खास नहीं, यहां पंद्रह. तीन प्रतिशत वोट शेयर के साथ बीजेपी के पास साठ में से बारह विधानसभा सीटें ही हैं। इस राज्य के CM नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी के नेता नेफियू रियो हैं। दो हज़ार तेईस में इन राज्यों में बजेगा विधानसभा चुनाव का बिगुल : बता दें कि, इस साल दो हज़ार तेईस में त्रिपुरा, मेघालय और नागालैंड के अलावा इन छः राज्याें में भी विधानसभा चुनाव होंगे। दरअसल, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, मिजोरम, राजस्थान, तेलंगाना में भी विधानसभा चुनाव दो हज़ार तेईस का बिगुल बजेगा। यानी इस साल कुल नौ राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
चेन्नई, 28 फरवरी । केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह रविवार को तमिलनाडु के मदुरंतकम में सड़क किनारे एक होटल में खाना खाने के लिए पहुंच गए। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के बगैर होटल में पहुंचने पर लोग चौंक गए। गृहमंत्री अमित शाह ने दिनभर के राजनीतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के बाद सड़क किनारे ओनली कॉफी नामक होटल में खाना खाकर भूख मिटाई। उनके साथ भाजपा के संगठन महामंत्री बीएल संतोष, गृह राज्यमंत्री जी. किशन रेड्डी और तमिलनाडु प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव सी. टी. रवि भी रहे। दरअसल, गृहमंत्री शाह ने रविवार को सबसे पहले पुडुचेरी के करईकल में दिन में साढ़े 11 बजे चुनावी जनसभा को संबोधित किया। इसके बाद वह तमिलनाडु पहुंचे। यहां उन्होंने तमिलनाडु के विलिपुरम में विजय संकल्प यात्रा में हिस्सा लेते हुए जनसभा संबोधित किया और कांग्रेस व डीएमके पर जमकर निशाना साधा। एक ही दिन पुडुचेरी और तमिलनाडु की दो बड़ी जनसभाओं को संबोधित करने के बाद विलिपुरम से चेन्नई जाते समय हाईवे किनारे गृहमंत्री शाह की नजर ओनली कॉफी नामक होटल पर पड़ी। वह पार्टी नेताओं संग होटल पहुंचे और खाना खाया। बगैर पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अचानक गृहमंत्री अमित शाह को होटल में देखकर लोग चौंक पड़े। Disclaimer: This story is auto-generated from IANS service.
चेन्नई, अट्ठाईस फरवरी । केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह रविवार को तमिलनाडु के मदुरंतकम में सड़क किनारे एक होटल में खाना खाने के लिए पहुंच गए। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के बगैर होटल में पहुंचने पर लोग चौंक गए। गृहमंत्री अमित शाह ने दिनभर के राजनीतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के बाद सड़क किनारे ओनली कॉफी नामक होटल में खाना खाकर भूख मिटाई। उनके साथ भाजपा के संगठन महामंत्री बीएल संतोष, गृह राज्यमंत्री जी. किशन रेड्डी और तमिलनाडु प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव सी. टी. रवि भी रहे। दरअसल, गृहमंत्री शाह ने रविवार को सबसे पहले पुडुचेरी के करईकल में दिन में साढ़े ग्यारह बजे चुनावी जनसभा को संबोधित किया। इसके बाद वह तमिलनाडु पहुंचे। यहां उन्होंने तमिलनाडु के विलिपुरम में विजय संकल्प यात्रा में हिस्सा लेते हुए जनसभा संबोधित किया और कांग्रेस व डीएमके पर जमकर निशाना साधा। एक ही दिन पुडुचेरी और तमिलनाडु की दो बड़ी जनसभाओं को संबोधित करने के बाद विलिपुरम से चेन्नई जाते समय हाईवे किनारे गृहमंत्री शाह की नजर ओनली कॉफी नामक होटल पर पड़ी। वह पार्टी नेताओं संग होटल पहुंचे और खाना खाया। बगैर पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अचानक गृहमंत्री अमित शाह को होटल में देखकर लोग चौंक पड़े। Disclaimer: This story is auto-generated from IANS service.
रुपईडीहा (बहराइच)। नेपालगंज में रविवार को लव जिहाद को लेकर सैकड़ों लोग सड़कों पर उतरे और जमकर विरोध प्रदर्शन किया। आरोप है, कि प्रदर्शन कर रहे लोगों में से एक परिवार की नाबालिग बेटी को धर्म विशेष का युवक बहला-फुसलाकर अपने साथ भगा ले गया। इसके बाद लोगों ने प्रदर्शन किया और भारत की तरह लव जिहाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग के साथ ही बेटी की बरामदगी की मांग की। नेपालगंज जिले के बांके की निवासी एक नाबालिग हिंदू लड़की को रिश्तेदारी में आए धर्म विशेष के दो युवक बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गए। इसके बाद से परिवार के लोग लव जिहाद का आरोप लगातेे हुए पुलिस के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन 10 दिन बाद भी लापता किशोरी का पता नहीं चल सका है। पुलिस की कार्यशैली से परेशान लोगों का रविवार को गुस्सा फूट पड़ा और वे सड़कों पर उतर आए। सैकड़ों की संख्या में हिंदू परिवारों के लोग नेेपाल के त्रिभुवन चौक पहुंचे और प्रदर्शन किया। इस दौरान लोगों ने पुलिस की कार्यशैली के विरोध के साथ ही नाबालिग लड़की की बरामदगी और भारत की तरह नेपाल में लव जिहाद के खिलाफ सख्त कानून बनाने की मांग की।
रुपईडीहा । नेपालगंज में रविवार को लव जिहाद को लेकर सैकड़ों लोग सड़कों पर उतरे और जमकर विरोध प्रदर्शन किया। आरोप है, कि प्रदर्शन कर रहे लोगों में से एक परिवार की नाबालिग बेटी को धर्म विशेष का युवक बहला-फुसलाकर अपने साथ भगा ले गया। इसके बाद लोगों ने प्रदर्शन किया और भारत की तरह लव जिहाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग के साथ ही बेटी की बरामदगी की मांग की। नेपालगंज जिले के बांके की निवासी एक नाबालिग हिंदू लड़की को रिश्तेदारी में आए धर्म विशेष के दो युवक बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गए। इसके बाद से परिवार के लोग लव जिहाद का आरोप लगातेे हुए पुलिस के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन दस दिन बाद भी लापता किशोरी का पता नहीं चल सका है। पुलिस की कार्यशैली से परेशान लोगों का रविवार को गुस्सा फूट पड़ा और वे सड़कों पर उतर आए। सैकड़ों की संख्या में हिंदू परिवारों के लोग नेेपाल के त्रिभुवन चौक पहुंचे और प्रदर्शन किया। इस दौरान लोगों ने पुलिस की कार्यशैली के विरोध के साथ ही नाबालिग लड़की की बरामदगी और भारत की तरह नेपाल में लव जिहाद के खिलाफ सख्त कानून बनाने की मांग की।
समलैंगिकता का अर्थ किसी व्यक्ति का समान लिंग के लोगों के प्रति यौन और रोमांसपूर्वक रूप से आकर्षित होना है। वे पुरुष, जो अन्य पुरुषों के प्रति आकर्षित होते है उन्हें "पुरुष समलिंगी" या गे और जो महिला किसी अन्य महिला के प्रति आकर्षित होती है उसे भी गे कहा जा सकता है लेकिन उसे आमतौर पर "महिला समलिंगी" या लेस्बियन कहा जाता है। जो लोग महिला और पुरुष दोनो के प्रति आकर्षित होते हैं उन्हें "उभयलिंगी" कहा जाता है। कुल मिलाकर समलैंगिक, उभयलैंगिक और लिंगपरिवर्तित लोगो को मिलाकर एल जी बी टी समुदाय बनता है। यह कहना कठिन है कि कितने लोग समलैंगिक हैं। समलैंगिकता का अस्तित्व सभी संस्कृतियों और देशों में पाया गया है, यद्यपि कुछ देशों की सरकारें इस बात का खण्डन करती है। यद्यपि बहुत से देशों में समलैंगिक भेदभाव से सुरक्षित नहीं हैं। एक समलैंगिक व्यक्ति को केवल इसलिए नौकरी से निकाला जा सकता है क्योंकि वह समलैंगिक है, भले ही वह कितना अच्छा कर्मचारी क्यों ना हो। समलैंगिकों को मकान किराए पर लेने या अपनी लैंगिक प्रार्थमिकता के कारण किसी रेस्टोरेंट में खाने से भी वंचित किया जा सकता है। इन देशों में (अधिकतर इस्लामी देश) समलैंगिक हिंसा और भेदभाव का अनुभव कर सकते हैं।
समलैंगिकता का अर्थ किसी व्यक्ति का समान लिंग के लोगों के प्रति यौन और रोमांसपूर्वक रूप से आकर्षित होना है। वे पुरुष, जो अन्य पुरुषों के प्रति आकर्षित होते है उन्हें "पुरुष समलिंगी" या गे और जो महिला किसी अन्य महिला के प्रति आकर्षित होती है उसे भी गे कहा जा सकता है लेकिन उसे आमतौर पर "महिला समलिंगी" या लेस्बियन कहा जाता है। जो लोग महिला और पुरुष दोनो के प्रति आकर्षित होते हैं उन्हें "उभयलिंगी" कहा जाता है। कुल मिलाकर समलैंगिक, उभयलैंगिक और लिंगपरिवर्तित लोगो को मिलाकर एल जी बी टी समुदाय बनता है। यह कहना कठिन है कि कितने लोग समलैंगिक हैं। समलैंगिकता का अस्तित्व सभी संस्कृतियों और देशों में पाया गया है, यद्यपि कुछ देशों की सरकारें इस बात का खण्डन करती है। यद्यपि बहुत से देशों में समलैंगिक भेदभाव से सुरक्षित नहीं हैं। एक समलैंगिक व्यक्ति को केवल इसलिए नौकरी से निकाला जा सकता है क्योंकि वह समलैंगिक है, भले ही वह कितना अच्छा कर्मचारी क्यों ना हो। समलैंगिकों को मकान किराए पर लेने या अपनी लैंगिक प्रार्थमिकता के कारण किसी रेस्टोरेंट में खाने से भी वंचित किया जा सकता है। इन देशों में समलैंगिक हिंसा और भेदभाव का अनुभव कर सकते हैं।
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, अगर पूरा रिलीफ फंड दे देंगे तो अन्य आपदा से निपटने में धन की कमी होगी. कोरोना (Coronavirus) से जान गंवाने वालों के परिवारों को 4 लाख रुपये का मुआवजा दिए जाने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में दाखिल याचिका का केंद्र सरकार (Central Government) ने जवाब दिया है. केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि कोरोना से जान गंवाने वाले सभी लोगों के परिवारों को 4 लाख रुपये का मुआवजा नहीं दिया जा सकता है, क्योंकि इससे आपदा राहत कोष (Disaster Relief Funds) ही खाली हो जाएगा. केंद्र ने कहा कि सभी कोरोना पीड़ितों को मुआवजा देना राज्यों के वित्तीय सामर्थ्य (Financial Capacity) से बाहर है. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट एक याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें केंद्र और राज्यों को आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 के तहत कोरोना के कारण जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को चार लाख रुपये का मुआवजा देने का अनुरोध किया गया है. याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में कहा कि आपदा प्रबंधन कानून में मुआवजे का प्रावधान केवल भूकंप, बाढ़ आदि प्राकृतिक आपदाओं पर ही लागू है, जिसे कोरोना महामारी पर लागू नहीं किया जा सकता है. केंद्र ने कहा, "अगर पूरे SDRF फंड को कोविड पीड़ितों को मुआवजा देने में ही खर्च कर दिया जाएगा, तो राज्यों के पास कोरोना से निपटने के लिए की जा रहीं तैयारियों और अलग-अलग मेडिकल सप्लाई के साथ-साथ चक्रवात, बाढ़ आदि जैसी अन्य आपदाओं की देखभाल के लिए पर्याप्त धन की कमी हो सकती है. इसलिए कोविड के कारण सभी मृतक व्यक्तियों को अनुग्रह राशि के भुगतान के लिए याचिकाकर्ता की प्रार्थना, राज्य सरकारों की वित्तीय सामर्थ्य से बाहर है." हालांकि, केंद्र ने ये भी स्पष्ट किया कि उसने जरूरतमंद लोगों के लिए कई सरकारी उपाय पेश किए गए हैं. केंद्र ने कहा कि केंद्र और सभी राज्य सरकारों ने कोविड महामारी से निपटने के लिए और जरूरतमंद लोगों के लिए बड़ी मात्रा में खर्च किया है. सरकार ने आगे कहा कि बीमा दावों पर जिला कलेक्टरों की तरफ से कार्रवाई की जा रही है और बीमा कंपनी को दावाकर्ताओं को धनराशि जारी करने के लिए भेजा गया है. बीमा कंपनियों को 442.4 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं. सरकार ने आगे सुप्रीम कोर्ट को ये भी बताया कि 2019-20 में, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत कोविड मैनेजमेंट के लिए राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को 1,113.21 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि जारी की गई थी. इसी के साथ, भारत कोविड आपातकालीन प्रतिक्रिया (Covid Emergency Response) और स्वास्थ्य सिस्टम पैकेज के तहत राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को 8,257.89 करोड़ रुपये भी जारी किए जा चुके हैं.
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, अगर पूरा रिलीफ फंड दे देंगे तो अन्य आपदा से निपटने में धन की कमी होगी. कोरोना से जान गंवाने वालों के परिवारों को चार लाख रुपये का मुआवजा दिए जाने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका का केंद्र सरकार ने जवाब दिया है. केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि कोरोना से जान गंवाने वाले सभी लोगों के परिवारों को चार लाख रुपये का मुआवजा नहीं दिया जा सकता है, क्योंकि इससे आपदा राहत कोष ही खाली हो जाएगा. केंद्र ने कहा कि सभी कोरोना पीड़ितों को मुआवजा देना राज्यों के वित्तीय सामर्थ्य से बाहर है. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट एक याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें केंद्र और राज्यों को आपदा प्रबंधन अधिनियम-दो हज़ार पाँच के तहत कोरोना के कारण जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को चार लाख रुपये का मुआवजा देने का अनुरोध किया गया है. याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में कहा कि आपदा प्रबंधन कानून में मुआवजे का प्रावधान केवल भूकंप, बाढ़ आदि प्राकृतिक आपदाओं पर ही लागू है, जिसे कोरोना महामारी पर लागू नहीं किया जा सकता है. केंद्र ने कहा, "अगर पूरे SDRF फंड को कोविड पीड़ितों को मुआवजा देने में ही खर्च कर दिया जाएगा, तो राज्यों के पास कोरोना से निपटने के लिए की जा रहीं तैयारियों और अलग-अलग मेडिकल सप्लाई के साथ-साथ चक्रवात, बाढ़ आदि जैसी अन्य आपदाओं की देखभाल के लिए पर्याप्त धन की कमी हो सकती है. इसलिए कोविड के कारण सभी मृतक व्यक्तियों को अनुग्रह राशि के भुगतान के लिए याचिकाकर्ता की प्रार्थना, राज्य सरकारों की वित्तीय सामर्थ्य से बाहर है." हालांकि, केंद्र ने ये भी स्पष्ट किया कि उसने जरूरतमंद लोगों के लिए कई सरकारी उपाय पेश किए गए हैं. केंद्र ने कहा कि केंद्र और सभी राज्य सरकारों ने कोविड महामारी से निपटने के लिए और जरूरतमंद लोगों के लिए बड़ी मात्रा में खर्च किया है. सरकार ने आगे कहा कि बीमा दावों पर जिला कलेक्टरों की तरफ से कार्रवाई की जा रही है और बीमा कंपनी को दावाकर्ताओं को धनराशि जारी करने के लिए भेजा गया है. बीमा कंपनियों को चार सौ बयालीस.चार करोड़ रुपये जारी किए गए हैं. सरकार ने आगे सुप्रीम कोर्ट को ये भी बताया कि दो हज़ार उन्नीस-बीस में, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत कोविड मैनेजमेंट के लिए राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को एक,एक सौ तेरह.इक्कीस करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि जारी की गई थी. इसी के साथ, भारत कोविड आपातकालीन प्रतिक्रिया और स्वास्थ्य सिस्टम पैकेज के तहत राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को आठ,दो सौ सत्तावन.नवासी करोड़ रुपये भी जारी किए जा चुके हैं.
ब्राज़ील की राजधानी में इस देश के पूर्व राष्ट्रपति के समर्थकों ने कुछ सरकारी इमारतों में घुसकर वर्तमान राष्ट्रपति को अपदस्त करने की मांग की है। ब्राज़ील की LUSA समाचार एजेन्सी के अनुसार इस देश के दक्षिणपंथी पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सानारो के सैकड़ों समर्थक वर्तमान राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा का विरोध करते हुए राजधानी ब्रासीलिया में कुछ सरकारी इमारतों में घुस गए हैं। पूर्व राष्ट्रपति के समर्थक सेना से वर्तमान राष्ट्रपति को अपदस्त करने की मांग कर रहे हैं। यह प्रदर्शनकारी लूला डा सिल्वा की चुनावी विजय को स्वीकार नहीं कर रहे हैं। लूला डा सिल्वा ने वर्तमान स्थति के लिए बोल्सानारो को ज़िम्मेदार बताया है। बताया जा रहा है कि चुनाव में पराजित होने वाले ब्राज़ील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सानारो के समर्थको ने इस देश की संसद, राष्ट्रपति भवन और सुप्रीम कोर्ट पर धावा बोल दिया। वे खिड़कियां और दरवाज़े तोड़ते हुए इमारतों में घुस गए। पुलिस ने इन इमारतों से सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार किया है। ब्राज़ील के वर्तमान राष्ट्रपति डा सिल्वा ने कहा है कि अतिवादी फासीवादियों ने वह काम किया है जो ब्राज़ील के इतिहास में नहीं मिलता। उनका कहना था कि आज जो कुछ ब्राज़ील में हुआ वह बहुत डरावना था। उल्लेखनीय है कि ब्राज़ील में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में लूला डा सिल्वा ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने अपने प्रतिद्वदवी जायर बोल्सानारों को चुनाव में पराजित किया था। अपनी पराजय को बोल्सानारो स्वीकार नहीं कर रहे हैं। जायर बोल्सानारो को ब्राजील के ट्रम्प के रूप में याद किया जाता है। राष्ट्रपति चुनाव के बाद उन्होंने अपने पहले संबोधन में चुनावी हार मानने से इन्कार कर दिया था जबकि उनको 49. 2 और वर्तमान राष्ट्रपति डा सिल्वा को 50. 8 प्रतिशत मत पड़े थे। याद रहे कि लूला डा सिल्वा द्वारा सत्ता संभालने से रोकने के लिए जायर बोल्सनारो के समर्थक ब्राज़ील में सेना के ठिकानों के बाहर प्रदर्शन करते हुए सेना से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिए!
ब्राज़ील की राजधानी में इस देश के पूर्व राष्ट्रपति के समर्थकों ने कुछ सरकारी इमारतों में घुसकर वर्तमान राष्ट्रपति को अपदस्त करने की मांग की है। ब्राज़ील की LUSA समाचार एजेन्सी के अनुसार इस देश के दक्षिणपंथी पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सानारो के सैकड़ों समर्थक वर्तमान राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा का विरोध करते हुए राजधानी ब्रासीलिया में कुछ सरकारी इमारतों में घुस गए हैं। पूर्व राष्ट्रपति के समर्थक सेना से वर्तमान राष्ट्रपति को अपदस्त करने की मांग कर रहे हैं। यह प्रदर्शनकारी लूला डा सिल्वा की चुनावी विजय को स्वीकार नहीं कर रहे हैं। लूला डा सिल्वा ने वर्तमान स्थति के लिए बोल्सानारो को ज़िम्मेदार बताया है। बताया जा रहा है कि चुनाव में पराजित होने वाले ब्राज़ील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सानारो के समर्थको ने इस देश की संसद, राष्ट्रपति भवन और सुप्रीम कोर्ट पर धावा बोल दिया। वे खिड़कियां और दरवाज़े तोड़ते हुए इमारतों में घुस गए। पुलिस ने इन इमारतों से सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार किया है। ब्राज़ील के वर्तमान राष्ट्रपति डा सिल्वा ने कहा है कि अतिवादी फासीवादियों ने वह काम किया है जो ब्राज़ील के इतिहास में नहीं मिलता। उनका कहना था कि आज जो कुछ ब्राज़ील में हुआ वह बहुत डरावना था। उल्लेखनीय है कि ब्राज़ील में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में लूला डा सिल्वा ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने अपने प्रतिद्वदवी जायर बोल्सानारों को चुनाव में पराजित किया था। अपनी पराजय को बोल्सानारो स्वीकार नहीं कर रहे हैं। जायर बोल्सानारो को ब्राजील के ट्रम्प के रूप में याद किया जाता है। राष्ट्रपति चुनाव के बाद उन्होंने अपने पहले संबोधन में चुनावी हार मानने से इन्कार कर दिया था जबकि उनको उनचास. दो और वर्तमान राष्ट्रपति डा सिल्वा को पचास. आठ प्रतिशत मत पड़े थे। याद रहे कि लूला डा सिल्वा द्वारा सत्ता संभालने से रोकने के लिए जायर बोल्सनारो के समर्थक ब्राज़ील में सेना के ठिकानों के बाहर प्रदर्शन करते हुए सेना से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिए!
2011 में वापस, सीरिया की जनसंख्या20 लाख से अधिक लोग फिर देश में फिलिस्तीन और इराक से कई शरणार्थियों की संख्या थी। गृह युद्ध ने स्वदेशीय अरामी को खुद को अन्य राज्यों में शरण लेने के लिए मजबूर किया। हाल के वर्षों में, आबादी में कई लाख लोगों ने गिरावट आई है नागरिक युद्ध के कारण निवासियों का बहिर्वाह 2016 में जारी है, हालांकि इस तरह की तीव्र गति से नहीं। 2016 में सीरिया की आबादी18.592 मिलियन लोग हैं यह केवल प्रारंभिक डेटा है विशेषज्ञों का कहना है कि देश के निवासियों का बहिर्वाह जारी है। सीरिया की आबादी दुनिया की आबादी का 0.25% है। आबादी के मामले में, राज्य सभी देशों और क्षेत्रों में 61 के बीच है। गणराज्य का क्षेत्रफल 708 9 5 वर्ग मीटर है। देश की अधिकांश आबादी प्रांत में रहती हैअलेप्पो। यह यूफ्रेट्स घाटी का क्षेत्र है - तटीय पहाड़ों और रेगिस्तान के बीच उपजाऊ जमीन का एक टुकड़ा। अलेप्पो प्रांत में सीरिया की कुल आबादी का लगभग 60% हिस्सा रहते हैं सबसे बड़ा शहर दमिश्क की राजधानी है। इसमें करीब 20 लाख लोग रहते हैं। सीरिया के प्रशासनिक-क्षेत्रीय विभाजन14 राज्यपालों द्वारा प्रतिनिधित्व किया है कभी-कभी उन्हें प्रांत भी कहा जाता है इन प्रशासनिक-क्षेत्रीय इकाइयों के प्रमुखों को कैबिनेट द्वारा अनुमोदित होने के बाद सीरिया के गृह मंत्री द्वारा नियुक्त किया जाता है। प्रत्येक राज्यपाल की अपनी चुनी हुई संसद है 1 9 81 से कुइनेतरा प्रांत इजराइल से कब्जा कर लिया गया है। इसके बीच और सीरिया एक निशोषित ज़ोन है, जिसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रबंधित किया जाता है। अधिकांश जनसंख्या अरबी बोलती है यह सीरिया की आधिकारिक भाषा है यह आबादी का 85% द्वारा बोली जाती है, जिसमें 500 हजार फिलीस्तीनियों शामिल हैं बहुत से शिक्षित अरामी भी अंग्रेजी और फ्रेंच बोलते हैं। कुर्द 9% आबादी के ऊपर हैं। वे देश के उत्तर-पूर्वी और तुर्की के साथ सीमा पर रहते हैं वे अफ़्रीन जिले की आबादी में प्रमुख समूह हैं, जो अलेप्पो के पश्चिम में स्थित है और कुर्दिश बोलते हैं। अर्मेनियाई और तुर्क हर रोज़ संचार में अपनी मूल भाषा का उपयोग करते हैं। आबादी का एक छोटा सा हिस्सा नियो-अरामीक बोलता है सीरिया में भी लगभग 1500 यूनानी रहते हैं वे आमतौर पर हर रोज़ संचार में अपनी मूल भाषा को बनाए रखते हैं।
दो हज़ार ग्यारह में वापस, सीरिया की जनसंख्याबीस लाख से अधिक लोग फिर देश में फिलिस्तीन और इराक से कई शरणार्थियों की संख्या थी। गृह युद्ध ने स्वदेशीय अरामी को खुद को अन्य राज्यों में शरण लेने के लिए मजबूर किया। हाल के वर्षों में, आबादी में कई लाख लोगों ने गिरावट आई है नागरिक युद्ध के कारण निवासियों का बहिर्वाह दो हज़ार सोलह में जारी है, हालांकि इस तरह की तीव्र गति से नहीं। दो हज़ार सोलह में सीरिया की आबादीअट्ठारह.पाँच सौ बानवे मिलियन लोग हैं यह केवल प्रारंभिक डेटा है विशेषज्ञों का कहना है कि देश के निवासियों का बहिर्वाह जारी है। सीरिया की आबादी दुनिया की आबादी का शून्य.पच्चीस% है। आबादी के मामले में, राज्य सभी देशों और क्षेत्रों में इकसठ के बीच है। गणराज्य का क्षेत्रफल सात सौ आठ नौ पाँच वर्ग मीटर है। देश की अधिकांश आबादी प्रांत में रहती हैअलेप्पो। यह यूफ्रेट्स घाटी का क्षेत्र है - तटीय पहाड़ों और रेगिस्तान के बीच उपजाऊ जमीन का एक टुकड़ा। अलेप्पो प्रांत में सीरिया की कुल आबादी का लगभग साठ% हिस्सा रहते हैं सबसे बड़ा शहर दमिश्क की राजधानी है। इसमें करीब बीस लाख लोग रहते हैं। सीरिया के प्रशासनिक-क्षेत्रीय विभाजनचौदह राज्यपालों द्वारा प्रतिनिधित्व किया है कभी-कभी उन्हें प्रांत भी कहा जाता है इन प्रशासनिक-क्षेत्रीय इकाइयों के प्रमुखों को कैबिनेट द्वारा अनुमोदित होने के बाद सीरिया के गृह मंत्री द्वारा नियुक्त किया जाता है। प्रत्येक राज्यपाल की अपनी चुनी हुई संसद है एक नौ इक्यासी से कुइनेतरा प्रांत इजराइल से कब्जा कर लिया गया है। इसके बीच और सीरिया एक निशोषित ज़ोन है, जिसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रबंधित किया जाता है। अधिकांश जनसंख्या अरबी बोलती है यह सीरिया की आधिकारिक भाषा है यह आबादी का पचासी% द्वारा बोली जाती है, जिसमें पाँच सौ हजार फिलीस्तीनियों शामिल हैं बहुत से शिक्षित अरामी भी अंग्रेजी और फ्रेंच बोलते हैं। कुर्द नौ% आबादी के ऊपर हैं। वे देश के उत्तर-पूर्वी और तुर्की के साथ सीमा पर रहते हैं वे अफ़्रीन जिले की आबादी में प्रमुख समूह हैं, जो अलेप्पो के पश्चिम में स्थित है और कुर्दिश बोलते हैं। अर्मेनियाई और तुर्क हर रोज़ संचार में अपनी मूल भाषा का उपयोग करते हैं। आबादी का एक छोटा सा हिस्सा नियो-अरामीक बोलता है सीरिया में भी लगभग एक हज़ार पाँच सौ यूनानी रहते हैं वे आमतौर पर हर रोज़ संचार में अपनी मूल भाषा को बनाए रखते हैं।
>BAREILLY: एग्जाम खराब होने पर फेल होने के डर ने एक और होनहार स्टूडेंट की जान ले ली। रिजल्ट खराब होने के खौफ ने भोजीपुरा क्षेत्र में इंटरमीडिएट की एक छात्रा को सुसाइड करने पर मजबूर कर दिया। फेल होने के डर से छात्रा पिछले कई दिनों से डिप्रेशन में आ गई थी। थर्सडे रात को छात्रा ने रस्सी का फंदा गले में डालकर झूल गई। छात्रा की मौके पर ही मौत हो गई। परिजनों को आधी रात में घटना की जानकारी हुई तो घर में कोहराम मच गया। परिजनों ने छात्रा को फंदे से तुरंत उतार कर पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव पोस्टमार्टम के लिए भ्ोज दिया। भोजीपुरा थाना क्षेत्र के गांव अटापट्टी जनूबी निवासी फूलचन्द्र की बेटी संतोषी (18) कक्षा 12 की छात्रा थी। वह अटामांडा स्थित आदर्श निकेतन इंटर कॉलेज में पढ़ती थी। छात्रा के भाई अहिबरन ने बताया कि थर्सडे को वह परीक्षा में आखिरी पेपर संस्कृत का देकर आई थी। उसके पेपर अच्छे नहीं हुए थे, जिससे वह कई दिन से डिपे्रशन में चल रही थी। रात को परिवार के साथ खाना खाने के बाद वह सोने के लिए चली गई। रात में जब संतोषी की मां किशोरी उठी तो उन्हें संतोषी का शव किचेन में रस्सी के सहारे पंखे के कुंदे पर लटकता दिखा। जब तक परिजनों ने शव कुंदे से नीचे उतारा तब तक संतोषी की मौत हो चुकी थी। परिजनों ने बताया कि संतोषी सात भाई बहनों में बड़ी थी। संतोषी की मौत पर भाई बहनों और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिजनों ने बताया कि संतोषी पढ़ने में होनहार थी। उसके हाईस्कूल में भी अच्छे अंक आए थे। संतोषी का सपना डॉक्टर बनने का था, लेकिन डॉक्टर बनने का सपना अधूरा रह गया। इंटर में वह परीक्षा की तैयारी नहीं कर पाई थी। इसी को लेकर वह डिप्रेशन में आ गई थी। संतोषी को परीक्षा में फेल होने का डर सता रहा था।
>BAREILLY: एग्जाम खराब होने पर फेल होने के डर ने एक और होनहार स्टूडेंट की जान ले ली। रिजल्ट खराब होने के खौफ ने भोजीपुरा क्षेत्र में इंटरमीडिएट की एक छात्रा को सुसाइड करने पर मजबूर कर दिया। फेल होने के डर से छात्रा पिछले कई दिनों से डिप्रेशन में आ गई थी। थर्सडे रात को छात्रा ने रस्सी का फंदा गले में डालकर झूल गई। छात्रा की मौके पर ही मौत हो गई। परिजनों को आधी रात में घटना की जानकारी हुई तो घर में कोहराम मच गया। परिजनों ने छात्रा को फंदे से तुरंत उतार कर पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव पोस्टमार्टम के लिए भ्ोज दिया। भोजीपुरा थाना क्षेत्र के गांव अटापट्टी जनूबी निवासी फूलचन्द्र की बेटी संतोषी कक्षा बारह की छात्रा थी। वह अटामांडा स्थित आदर्श निकेतन इंटर कॉलेज में पढ़ती थी। छात्रा के भाई अहिबरन ने बताया कि थर्सडे को वह परीक्षा में आखिरी पेपर संस्कृत का देकर आई थी। उसके पेपर अच्छे नहीं हुए थे, जिससे वह कई दिन से डिपे्रशन में चल रही थी। रात को परिवार के साथ खाना खाने के बाद वह सोने के लिए चली गई। रात में जब संतोषी की मां किशोरी उठी तो उन्हें संतोषी का शव किचेन में रस्सी के सहारे पंखे के कुंदे पर लटकता दिखा। जब तक परिजनों ने शव कुंदे से नीचे उतारा तब तक संतोषी की मौत हो चुकी थी। परिजनों ने बताया कि संतोषी सात भाई बहनों में बड़ी थी। संतोषी की मौत पर भाई बहनों और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिजनों ने बताया कि संतोषी पढ़ने में होनहार थी। उसके हाईस्कूल में भी अच्छे अंक आए थे। संतोषी का सपना डॉक्टर बनने का था, लेकिन डॉक्टर बनने का सपना अधूरा रह गया। इंटर में वह परीक्षा की तैयारी नहीं कर पाई थी। इसी को लेकर वह डिप्रेशन में आ गई थी। संतोषी को परीक्षा में फेल होने का डर सता रहा था।
गर्मी के मौसम में पेयजल का दुरुपयोग करने वाले उपभोक्ताओं पर जलशक्ति विभाग की कड़ी निगाह रहेगी। इस दौरान टुल्लू पंप का प्रयोग और भवन निर्माण व सिंचाई करते पकड़े जाने वाले उपभोक्ताओं के कनेक्शन काट दिए जाएंगे। इसके लिए जलशक्ति विभाग ने टीमें गठित कर फील्ड में उतार दी हैं। जलशक्ति विभाग सिहुंता उपमंडल के सहायक अभियंता राजेश्वर शर्मा ने खबर की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि गर्मियों के मौसम में पेयजल स्रोत का जलस्तर घटने से पानी की डिमांड व सप्लाई में कमी आ जाती है। इसके मद्देनजर हरेक उपभोक्ताओं को पेयजल उपलब्ध करवाने के उद्देश्य को लेकर यह कार्ययोजना तैयार की गई है। उन्होंने बताया कि आगामी दिनों में टूल्लू पंप का प्रयोग करने और भवन निर्माण व सिंचाई आदि कार्य में पेयजल का प्रयोग करने वालों पर शिंकजा कसा जाएगा। इसके तहत टीमें लगातार इलाके में गश्त पर रहेंगी। इस दौरान अगर कोई उपभोक्ता पेयजल का दुरुपयोग करते पकडा जाता है तो उसका क्नेक्शन काट दिया जाएगा। इतना ही नहीं भवन व सिंचाई कार्य में प्रयोग होने वाली पाइपों को भी जब्त कर लिया जाएगा। उन्होंने उपमंडल के उपभोक्ताओं से पेयजल का दुरुपयोग न करने का आह्वान किया है। उन्होंने लोगों से पेयजल आपूर्ति को बेहतर रखने में सहयोग भी मांगा है। अन्यथा जलशक्ति विभाग को पेयजल का दुरूपयोग करने वाले उपभोक्ताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए मजबूर होना पड़ेगा। सिहुंता। सिहुंता-जोलना-कोटला संपर्क मार्ग पर सिहुंता जीरो प्वाइंट से 0/230 तक इंटरलाकिंग टाइल कार्य किया जा रहा है। इसके चलते यह मार्ग बारह अप्रैल से आगामी तीन मई तक बड़े वाहनों की आवाजाही के लिए बंद रहेगा। इस संदर्भ में उपायुक्त चंबा की ओर से आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।
गर्मी के मौसम में पेयजल का दुरुपयोग करने वाले उपभोक्ताओं पर जलशक्ति विभाग की कड़ी निगाह रहेगी। इस दौरान टुल्लू पंप का प्रयोग और भवन निर्माण व सिंचाई करते पकड़े जाने वाले उपभोक्ताओं के कनेक्शन काट दिए जाएंगे। इसके लिए जलशक्ति विभाग ने टीमें गठित कर फील्ड में उतार दी हैं। जलशक्ति विभाग सिहुंता उपमंडल के सहायक अभियंता राजेश्वर शर्मा ने खबर की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि गर्मियों के मौसम में पेयजल स्रोत का जलस्तर घटने से पानी की डिमांड व सप्लाई में कमी आ जाती है। इसके मद्देनजर हरेक उपभोक्ताओं को पेयजल उपलब्ध करवाने के उद्देश्य को लेकर यह कार्ययोजना तैयार की गई है। उन्होंने बताया कि आगामी दिनों में टूल्लू पंप का प्रयोग करने और भवन निर्माण व सिंचाई आदि कार्य में पेयजल का प्रयोग करने वालों पर शिंकजा कसा जाएगा। इसके तहत टीमें लगातार इलाके में गश्त पर रहेंगी। इस दौरान अगर कोई उपभोक्ता पेयजल का दुरुपयोग करते पकडा जाता है तो उसका क्नेक्शन काट दिया जाएगा। इतना ही नहीं भवन व सिंचाई कार्य में प्रयोग होने वाली पाइपों को भी जब्त कर लिया जाएगा। उन्होंने उपमंडल के उपभोक्ताओं से पेयजल का दुरुपयोग न करने का आह्वान किया है। उन्होंने लोगों से पेयजल आपूर्ति को बेहतर रखने में सहयोग भी मांगा है। अन्यथा जलशक्ति विभाग को पेयजल का दुरूपयोग करने वाले उपभोक्ताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए मजबूर होना पड़ेगा। सिहुंता। सिहुंता-जोलना-कोटला संपर्क मार्ग पर सिहुंता जीरो प्वाइंट से शून्य/दो सौ तीस तक इंटरलाकिंग टाइल कार्य किया जा रहा है। इसके चलते यह मार्ग बारह अप्रैल से आगामी तीन मई तक बड़े वाहनों की आवाजाही के लिए बंद रहेगा। इस संदर्भ में उपायुक्त चंबा की ओर से आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।
शिमला। जिले की सबसे बड़ी फल मंडी भट्ठाकुफर में कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए सोशल डिस्टेंसिंग लागू करने के लिए होमगार्ड और पुलिस के जवानों की तैनाती कर दी है। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद वीरवार को मंडी में होमगार्ड के 11 और बटालियन के 14 जवानों की तैनाती की गई। यह जवान तीन शिफ्टों में सेवाएं देंगे और मंडी में सोशल डिस्टेंसिंग लागू करने के अलावा मंडी के भीतर और बाहर सुचारु ट्रैफिक व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे। होमगार्ड के जवान सुबह 6 से दोपहर 2 बजे, 2 बजे से रात 10 बजे और रात 10 से सुबह 6 बजे तक तीन शिफ्ट में ड्यूटी देंगे। शिमला पुलिस की ओर से भी एक सब इंस्पेक्टर की अगुवाई में 13 जवानों की तैनाती की है। पुलिस के जवान भी तीन शिफ्टों में सेवाएं देंगे। ढली टनल से लेकर भट्ठाकुफर फल मंडी के बीच ट्रैफिक व्यवस्था सामान्य बनाए रखने का जिम्मा भी इन्हीं पुलिस कर्मियों पर होगा। शिमला। भट्ठाकुफर फल मंडी में सोशल डिस्टेंसिंग लागू करने के लिए एपीएमसी ने आढ़तियों, पल्लेदारों और लदानियों को आई कार्ड जारी करने का फैसला लिया है। बिना आई कार्ड किसी को भी मंडी में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। आक्शन यार्ड पर आढ़तियों, पल्लेदारों और लदानियों के अलावा फसल बेचने आए बागवान को ही जाने की अनुमति होगी। एपीएमसी ने फल मंडी आने वाले लोगों के लिए एडवाइजरी जारी कर दी है। इसके तहत बिना मास्क लगाए मंडी में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। सार्वजनिक स्थानों पर थूकने वाले को जुर्माना लगाया जाएगा। मंडी में प्रवेश करते ही हाथों को साबुन से धोना या सेनिटाईज करना अनिवार्य किया है। मंडी में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ काम करने के निर्देश दिए हैं। अनावश्यक भीड़ लगाने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। किसानों-बागवानों से भी उपज बेचने के बाद मंडी से प्रस्थान करने का आग्रह किया है। मंडी समिति ने मंडी आने वाले लोगों से मास्क और गमछे दिखावे के लिए प्रयोग न करने का आग्रह किया है। साथ ही अनावश्यक रूप से मंडी में इधर-उधर वस्तुएं न छूने के भी निर्देश दिए हैं।
शिमला। जिले की सबसे बड़ी फल मंडी भट्ठाकुफर में कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए सोशल डिस्टेंसिंग लागू करने के लिए होमगार्ड और पुलिस के जवानों की तैनाती कर दी है। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद वीरवार को मंडी में होमगार्ड के ग्यारह और बटालियन के चौदह जवानों की तैनाती की गई। यह जवान तीन शिफ्टों में सेवाएं देंगे और मंडी में सोशल डिस्टेंसिंग लागू करने के अलावा मंडी के भीतर और बाहर सुचारु ट्रैफिक व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे। होमगार्ड के जवान सुबह छः से दोपहर दो बजे, दो बजे से रात दस बजे और रात दस से सुबह छः बजे तक तीन शिफ्ट में ड्यूटी देंगे। शिमला पुलिस की ओर से भी एक सब इंस्पेक्टर की अगुवाई में तेरह जवानों की तैनाती की है। पुलिस के जवान भी तीन शिफ्टों में सेवाएं देंगे। ढली टनल से लेकर भट्ठाकुफर फल मंडी के बीच ट्रैफिक व्यवस्था सामान्य बनाए रखने का जिम्मा भी इन्हीं पुलिस कर्मियों पर होगा। शिमला। भट्ठाकुफर फल मंडी में सोशल डिस्टेंसिंग लागू करने के लिए एपीएमसी ने आढ़तियों, पल्लेदारों और लदानियों को आई कार्ड जारी करने का फैसला लिया है। बिना आई कार्ड किसी को भी मंडी में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। आक्शन यार्ड पर आढ़तियों, पल्लेदारों और लदानियों के अलावा फसल बेचने आए बागवान को ही जाने की अनुमति होगी। एपीएमसी ने फल मंडी आने वाले लोगों के लिए एडवाइजरी जारी कर दी है। इसके तहत बिना मास्क लगाए मंडी में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। सार्वजनिक स्थानों पर थूकने वाले को जुर्माना लगाया जाएगा। मंडी में प्रवेश करते ही हाथों को साबुन से धोना या सेनिटाईज करना अनिवार्य किया है। मंडी में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ काम करने के निर्देश दिए हैं। अनावश्यक भीड़ लगाने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। किसानों-बागवानों से भी उपज बेचने के बाद मंडी से प्रस्थान करने का आग्रह किया है। मंडी समिति ने मंडी आने वाले लोगों से मास्क और गमछे दिखावे के लिए प्रयोग न करने का आग्रह किया है। साथ ही अनावश्यक रूप से मंडी में इधर-उधर वस्तुएं न छूने के भी निर्देश दिए हैं।
दी कि जिससे वे दोनों भाई वल्लभी में रहकर व्यापार करने लगगये उन्होंने यह भी प्रतिज्ञा करली यो कि प्रत्येक मास की पूर्णिमा के दिन तीर्थ श्री शत्रुजय की यात्रा करनी और उस प्रतिक्षा को अखण्ड रुप से पालन भी किया करते थे । इस प्रकार धर्म किया करने से उनके शुभ एवं अन्तराय कर्म का क्षय होकर शुभकर्मों का उदय होने लगा । कहाँ है कि नर का नसिव किसने देखा है। एक ही भवमें मनुष्य अनेक अवस्याओं को देख लेता है। कार पातक पर लक्ष्मी देवी की सैने सैने कृपा होरही थी कि वे खूब धनाढ्य वनगये उन्होंने अपनी पूर्व स्थिति को याद कर न्यायोपार्जित द्रव्य से वल्लभी में एक पार्श्वनाथ का मन्दिर घनाया और भी कई शुभकार्यों में लक्ष्मी का सदुपयोग किया फिर भी लक्ष्मी तो बढ़ती ही गई काकूपातक के जैसे लक्ष्मी वढती थी वैसे परिवार भी चढता गया । फाकु के पुत्रों में एकमल्ल नाम का पुत्र था तथा मल्लके पुत्र योभण श्रौर थोभण के राका और घाका नाम के पुत्र हुए परम्परा से चली आई लक्ष्मी राका बाका से रूठमान हो उनसे किनारा कर लिया अत. रांका घांका फिर से साधारण स्थितिमे श्रा चे शायद लक्ष्मी ने उनकी परीक्षा करने को ही कुछ दिनों के लिये मुशाफरी करने को चली गई होगी । (राका वाकाने इस ओर इतना लक्ष नहीं दिया - एक योगीश्वर यात्रार्थ भ्रमन करता हुआ वहभी में आ पहुँचा उसके पास एक सुवर्ण सिद्धिरस की तुषी उनकी रक्षण करने में वह कुछ टुसी होगया, ठीक है योगियों के और इस मजाल के आपस में बन नहीं कता है फिर भी उसकी सर्वथा ममत्व नहीं छुट सकी अतः वह चाहता था कि मैं इस तुंथी को कही इनाव रख जाउ कि वापिस लौटने के समय ले जाऊगा, भाग्यवसात् रांका से इसकी भेट हुई और तुमी उसको सशर्तपर देदी कि मैं चापिस आता ले जाउगा । राकाने उस तुषी को लेजाकर अपने रसोई घनाने का घास से छाया हुआ मकान की छाव में एक घास से घान्ध फर लटकादी योगीश्वर तो चला गया बाद किसी कारण इस तुबी से एक बुन्द रसोई के तपा हुआ तवा पर गिर गई जिससे वह लोहा का तवा सुवर्ण बनगया । राका गया था शत्रु नय यात्रा के लिये । चाका था घर पर उसने लोहा का तवा को सुघर्ण का हुआ देख उस तुषी को हजम करने का उपाय सोचकर अपने मकान को आग लगादी और रूदन करने लग गया त लोगों ने उसको असावन दिया और वाकाने दूसरा घर घनाकर उसमें निवास कर दिया और लोहा सुवर्ण बनाना शुरु कर दिया जब राका घर पर आया और वाका की सब हकीकत सुनी तो उसने बढा भारी पश्चाताप कर वाका को घड़ा भारी उपालम्ब दिया कि ऐसा जघन्यकार्य करना तुमको योग्य नही था श्रव भी इस तुषी को इनामत रख दो जय योगीश्वर श्रावे तो उसको सभला देना पर न श्राया योगीश्वर न समला तृषी क्योकि तुवी तो राका व.का के तकदीर में ही लिसी हुई थी वस उस नुबो से शका वाकाने पुष्कल सुवर्ण घनाकर वे बड़े भारी धनकुघेर ही घनगये । न जाने इनयुगल भ्राताओं ने किस भाव में ऐसे शुम फर्सीपार्लन किया होंगे। कि उस जमा घदी को इस भाव में इस प्रकार वसुल किया । ऋतु । शाहराका के एक चपा नामकी पुत्री थी राकाने उसके वाल समारने के लिये किसी विदेशी से रत्न जड़िता बहुमूल्य कांगसी खरीद कर चपा को देदी वह फागसी क्या भी उक अपूर्व जेवराव का पूजथा जिसको भरतकी एक मादर्श सभ्यता एवशिल्प कही जा सकती है चपाके वह कागसी एक दूसरा प्राण ही बनाई थी। एक समय राजा शिलादित्य की कन्या रत्नकुँवरी अपनी सायणियों को लेकर बगेचा में खेलने के लिये एव स्नान मञ्जन फरने को गई थी चम्पा भी वहाँ आगई जब पे खेलकुद के स्नान किया तो सवने अपने शाह रांका और चल्लभी का भंग ] १०२ word en d
दी कि जिससे वे दोनों भाई वल्लभी में रहकर व्यापार करने लगगये उन्होंने यह भी प्रतिज्ञा करली यो कि प्रत्येक मास की पूर्णिमा के दिन तीर्थ श्री शत्रुजय की यात्रा करनी और उस प्रतिक्षा को अखण्ड रुप से पालन भी किया करते थे । इस प्रकार धर्म किया करने से उनके शुभ एवं अन्तराय कर्म का क्षय होकर शुभकर्मों का उदय होने लगा । कहाँ है कि नर का नसिव किसने देखा है। एक ही भवमें मनुष्य अनेक अवस्याओं को देख लेता है। कार पातक पर लक्ष्मी देवी की सैने सैने कृपा होरही थी कि वे खूब धनाढ्य वनगये उन्होंने अपनी पूर्व स्थिति को याद कर न्यायोपार्जित द्रव्य से वल्लभी में एक पार्श्वनाथ का मन्दिर घनाया और भी कई शुभकार्यों में लक्ष्मी का सदुपयोग किया फिर भी लक्ष्मी तो बढ़ती ही गई काकूपातक के जैसे लक्ष्मी वढती थी वैसे परिवार भी चढता गया । फाकु के पुत्रों में एकमल्ल नाम का पुत्र था तथा मल्लके पुत्र योभण श्रौर थोभण के राका और घाका नाम के पुत्र हुए परम्परा से चली आई लक्ष्मी राका बाका से रूठमान हो उनसे किनारा कर लिया अत. रांका घांका फिर से साधारण स्थितिमे श्रा चे शायद लक्ष्मी ने उनकी परीक्षा करने को ही कुछ दिनों के लिये मुशाफरी करने को चली गई होगी । (राका वाकाने इस ओर इतना लक्ष नहीं दिया - एक योगीश्वर यात्रार्थ भ्रमन करता हुआ वहभी में आ पहुँचा उसके पास एक सुवर्ण सिद्धिरस की तुषी उनकी रक्षण करने में वह कुछ टुसी होगया, ठीक है योगियों के और इस मजाल के आपस में बन नहीं कता है फिर भी उसकी सर्वथा ममत्व नहीं छुट सकी अतः वह चाहता था कि मैं इस तुंथी को कही इनाव रख जाउ कि वापिस लौटने के समय ले जाऊगा, भाग्यवसात् रांका से इसकी भेट हुई और तुमी उसको सशर्तपर देदी कि मैं चापिस आता ले जाउगा । राकाने उस तुषी को लेजाकर अपने रसोई घनाने का घास से छाया हुआ मकान की छाव में एक घास से घान्ध फर लटकादी योगीश्वर तो चला गया बाद किसी कारण इस तुबी से एक बुन्द रसोई के तपा हुआ तवा पर गिर गई जिससे वह लोहा का तवा सुवर्ण बनगया । राका गया था शत्रु नय यात्रा के लिये । चाका था घर पर उसने लोहा का तवा को सुघर्ण का हुआ देख उस तुषी को हजम करने का उपाय सोचकर अपने मकान को आग लगादी और रूदन करने लग गया त लोगों ने उसको असावन दिया और वाकाने दूसरा घर घनाकर उसमें निवास कर दिया और लोहा सुवर्ण बनाना शुरु कर दिया जब राका घर पर आया और वाका की सब हकीकत सुनी तो उसने बढा भारी पश्चाताप कर वाका को घड़ा भारी उपालम्ब दिया कि ऐसा जघन्यकार्य करना तुमको योग्य नही था श्रव भी इस तुषी को इनामत रख दो जय योगीश्वर श्रावे तो उसको सभला देना पर न श्राया योगीश्वर न समला तृषी क्योकि तुवी तो राका व.का के तकदीर में ही लिसी हुई थी वस उस नुबो से शका वाकाने पुष्कल सुवर्ण घनाकर वे बड़े भारी धनकुघेर ही घनगये । न जाने इनयुगल भ्राताओं ने किस भाव में ऐसे शुम फर्सीपार्लन किया होंगे। कि उस जमा घदी को इस भाव में इस प्रकार वसुल किया । ऋतु । शाहराका के एक चपा नामकी पुत्री थी राकाने उसके वाल समारने के लिये किसी विदेशी से रत्न जड़िता बहुमूल्य कांगसी खरीद कर चपा को देदी वह फागसी क्या भी उक अपूर्व जेवराव का पूजथा जिसको भरतकी एक मादर्श सभ्यता एवशिल्प कही जा सकती है चपाके वह कागसी एक दूसरा प्राण ही बनाई थी। एक समय राजा शिलादित्य की कन्या रत्नकुँवरी अपनी सायणियों को लेकर बगेचा में खेलने के लिये एव स्नान मञ्जन फरने को गई थी चम्पा भी वहाँ आगई जब पे खेलकुद के स्नान किया तो सवने अपने शाह रांका और चल्लभी का भंग ] एक सौ दो word en d
यथाशक्ति रामानन्द का शिष्य बनने की चेष्टा की; किन्तु गुरु ने मलेच्छ ' का मुँह देखना पसंद न किया । एक समय, रात्रि के बिल्कुल समाप्त होने से पूर्व कबीर उस घाट की सीढ़ियों पर जाकर लेट गए जहाँ रामानन्द स्नान करने आते थे । स्वामी २ संयोगवश उनका खड़ाऊँ कबीर के सिर में लग गया । कबोर काँपते हुए उठे ; किन्तु स्वामी ने उनसे कहाः "राम, राम शब्द जपो ।" कबीर ने वैसा ही किया, प्रणाम किया, और वापिस चले आए। सुबह होने पर वे उठे, माथे पर रामानन्दी तिलक लगाया, उसी संप्रदाय की गले में कंठी पहनी और अपने दरवाज़े पर आए । उनकी माता ने उनसे पूछा कि क्या तुम पागल हो गए हो । उन्होंने उत्तर दिया : "मैं स्वामी रामानन्द का शिष्य हो गया हूँ !" सब लोगों को आश्चर्य हुआ और स्वामी के दरवाजे पर शोर मचाते हुए गए । इस पर आश्चर्यचकित हो उन्होंने कनीर को बुला भेजा । एक पर्दे के पीछे बैठे हुए, उन्होंने उनसे पूछा कि क्या वे वास्तव में उनके शिष्य हैं। "कबीर ने उत्तर दिया, महाराज राम-नाम के अतिरिक्त भी क्या और कोई मंत्र है - रामानन्द ने कहा, यह सर्वोत्तम दीक्षा - शब्द है । - कबीर ने फिर कहा, महाराज क्या यह मंत्र दीक्षा पाने वाले के कान में नहीं पढ़ा जाता ? फिर तो मेरे सिर पर चरण रख कर यह मंत्र दिया ।। १ अर्थात् एक जंगली का, एक व्यक्ति का जो हिन्दू नहीं है। वास्तव में अल ने कबीर को मुसलमान धर्म में ऊपर उठाया । २ शब्द जो गुरु के समान है; यह एक आदरसूचक उपाधि है जो विद्वानों और साधु-संतों को दो जाती है । 3 चार टाँगों का एक प्रकार का लकड़ी का भारी जूता, जो एक छोटी मैज़ से मिलता-जुलता है। ब्राह्मण यह जूता घर से बाहर पहिनते हैं; भारत के कुछ कैथोलिक मिशनरी इसका प्रयोग करते हैं । ४ संप्रदाय का दोक्षा-शब्द इन शब्दों के सुनते ही रामानन्द ने पर्दा हटा दिया, और कबीर को हृदय से लगा लिया । इसी बीच में ईश्वर प्रेम से श्रोत-प्रोत हो कबीर कपड़े बुनते और उन्हें बेचने ले जाते, किन्तु इससे उनके धार्मिक जीवन में कोई विघ्न न पड़ता था । एक दिन जब वे कपड़े का एक टुकड़ा बाजार ले गए, स्वयं विष्णु ( भगवत ) ने वैष्णव' रूप में उनसे भिक्षा माँगी। कबीर उन्हें टकड़े का आधा भाग देने लगे, किन्तु एक बने हुए भिखारी की भाँति उन्होंने उनसे कहा कि आधा मेरे किसी काम का नहीं, तो कबीर ने पूरा टुकड़ा दिया और झिड़कियाँ सुनने के डर से वे अपने घर वापिस न आए, किन्तु बाज़ार में लेट रहे । उधर उनके घर वालों ने बिना कुछ खाए तीन दिन तक इन्तज़ार किया । इस बीच में, कबीर की सच्ची भक्ति जानकर, विष्णु ने ( कबीर का ) रूप धारण किया और उनके घर एक बैल पराज लाद कर ले गए । यह सब देखकर कबीर की माता ने चिल्ला कर कहा : "तो तू यह चुरा लाया है ? यदि हाकिम को मालूम हो गया तो वह तुझे जेल में बन्द कर देगा।" कबीर के घर सामान छोड़ कर विष्णु, उसी वैष्णव रूप में, बाज़ार लौट और कबीर को घर वापिस भेज दिया। उन्होंने अपने घर पर इतना सामान पाकर अपना रोज़गार छोड़ दिया और राम की भक्ति में पूर्णतः तल्लीन हो गए । इस बात पर ब्राह्मणों ने कर कबीर को चारों तरफ से घेर लिया, और उनसे कहने लगे : "दुष्ट जुलाहे, तुझे इतनी दौलत मिल गई, किन्तु तूने हमें नहीं बुलाया; केवल तू वैष्णवों को हो १ एक विशेष संप्रदाय का अनुयायी, जिसकी विष्णु में, जिनसे यह शब्द बना है, अत्यधिक भक्ति होती है । इसके संबंध मे विल्सन ने हिन्दुओं के संप्रदायों पर अपने विद्वत्तापूर्ण ' विवरण' ( Memoir ) में विस्तार से कहा है, 'एशियाटिक रिसचेंज', जि० १६ और १७ । 'भक्तमाल' एक वैष्णव की देन है, और जिसमें हिन्दू धर्म की इस शाखा से संबंधित सब प्रसिद्ध व्यक्ति हैं । खिलाता है।" कबीर ने उत्तर दिया मैं बाज़ार जाता हूँ, और तुम्हारे लिए कोई चीज़ लाऊँगा । तब कबीर भयभीत होते हुए बाज़ार गए और वहाँ पृथ्वी पर लेट रहे । ईश्वर ने कबीर के नए चिह्न धारण किए और वे इतना अधिक रुपया लेकर उनके घर गए कि उन्हें उसे एक बैल पर लादना पड़ा । उसे उन्होंने ब्राह्मणों में बाँट दिया; तत्पश्चात् कबीर को उसकी सूचना दे, उन्हें बाज़ार से घर भेज दिया; और कबीर भी अपने घर पहुँच कर उसे बाँटते रहे । इसी बीच में उनकी ख्याति नगर में फैल गई । उनके दरवाज़े पर लोगों की भीड़ लगातार जमा रहने लगी, यहाँ तक कि उन्हें अपने भक्ति कार्य करने तक का समय न मिल पाता था । जब सिकन्दर पादशाह' सिंहासन पर बैठा, तो सब ब्राह्मण कबीर की मानी जाने वाली माता के, जो मुसलमान थी, पास गए और उसे अपने साथ राज-दरबार में ले गए । वहाँ पहुँच कर यद्यपि दिन था, एक मशाल जला कर, वह सुलतान के सामने चिल्लाने लगी : "हुजूर ग्रापके राज्य में अंधकार छाया हुआ है, क्योंकि मुसलमान हिन्दुओं की कंठी और तिलक धारण करते हैं, यह संकट है ।" सुलतान ने कबीर को बुला भेजा और उन्हें उसके सामने पहुँचने में देर न लगी। लोगों ने उनसे कहा 'सलाम' करो' । उन्होंने उत्तर दियाः "मैं तो राम को जानता हूँ, सलाम से मेरा क्या काम" । जब सुलतान ने ये अशिष्ट शब्द सुने तो उसने कबीर को उनके पादशाह, जो फ़ारसी शब्द है, की उपाधि मुसलमान सम्राटों को दी जाती है। सिकन्दर, जिसका उपनाम, उसकी जाति का नाम, 'लोदी' है, वास्तव में दिल्ली का, धर्म से मुसलमान, पठान राजा था । २ इन शब्दों का खेल समझने के लिए यह जानना आवश्यक है कि 'सलाम' अभिवादन के लिए मुसलमानों द्वारा प्रयुक्त होता है, और राम' ( विष्णु के एक अवतार का नाम ) इसी दृष्टि से हिन्दुओं द्वारा प्रयुक्त होता है । यह दूसरा शब्द, जो एक - कार से धर्म-संबंधी है, स्पेन के कैथोलिक अभिवादन के समान है : 'Ave, Maria'
यथाशक्ति रामानन्द का शिष्य बनने की चेष्टा की; किन्तु गुरु ने मलेच्छ ' का मुँह देखना पसंद न किया । एक समय, रात्रि के बिल्कुल समाप्त होने से पूर्व कबीर उस घाट की सीढ़ियों पर जाकर लेट गए जहाँ रामानन्द स्नान करने आते थे । स्वामी दो संयोगवश उनका खड़ाऊँ कबीर के सिर में लग गया । कबोर काँपते हुए उठे ; किन्तु स्वामी ने उनसे कहाः "राम, राम शब्द जपो ।" कबीर ने वैसा ही किया, प्रणाम किया, और वापिस चले आए। सुबह होने पर वे उठे, माथे पर रामानन्दी तिलक लगाया, उसी संप्रदाय की गले में कंठी पहनी और अपने दरवाज़े पर आए । उनकी माता ने उनसे पूछा कि क्या तुम पागल हो गए हो । उन्होंने उत्तर दिया : "मैं स्वामी रामानन्द का शिष्य हो गया हूँ !" सब लोगों को आश्चर्य हुआ और स्वामी के दरवाजे पर शोर मचाते हुए गए । इस पर आश्चर्यचकित हो उन्होंने कनीर को बुला भेजा । एक पर्दे के पीछे बैठे हुए, उन्होंने उनसे पूछा कि क्या वे वास्तव में उनके शिष्य हैं। "कबीर ने उत्तर दिया, महाराज राम-नाम के अतिरिक्त भी क्या और कोई मंत्र है - रामानन्द ने कहा, यह सर्वोत्तम दीक्षा - शब्द है । - कबीर ने फिर कहा, महाराज क्या यह मंत्र दीक्षा पाने वाले के कान में नहीं पढ़ा जाता ? फिर तो मेरे सिर पर चरण रख कर यह मंत्र दिया ।। एक अर्थात् एक जंगली का, एक व्यक्ति का जो हिन्दू नहीं है। वास्तव में अल ने कबीर को मुसलमान धर्म में ऊपर उठाया । दो शब्द जो गुरु के समान है; यह एक आदरसूचक उपाधि है जो विद्वानों और साधु-संतों को दो जाती है । तीन चार टाँगों का एक प्रकार का लकड़ी का भारी जूता, जो एक छोटी मैज़ से मिलता-जुलता है। ब्राह्मण यह जूता घर से बाहर पहिनते हैं; भारत के कुछ कैथोलिक मिशनरी इसका प्रयोग करते हैं । चार संप्रदाय का दोक्षा-शब्द इन शब्दों के सुनते ही रामानन्द ने पर्दा हटा दिया, और कबीर को हृदय से लगा लिया । इसी बीच में ईश्वर प्रेम से श्रोत-प्रोत हो कबीर कपड़े बुनते और उन्हें बेचने ले जाते, किन्तु इससे उनके धार्मिक जीवन में कोई विघ्न न पड़ता था । एक दिन जब वे कपड़े का एक टुकड़ा बाजार ले गए, स्वयं विष्णु ने वैष्णव' रूप में उनसे भिक्षा माँगी। कबीर उन्हें टकड़े का आधा भाग देने लगे, किन्तु एक बने हुए भिखारी की भाँति उन्होंने उनसे कहा कि आधा मेरे किसी काम का नहीं, तो कबीर ने पूरा टुकड़ा दिया और झिड़कियाँ सुनने के डर से वे अपने घर वापिस न आए, किन्तु बाज़ार में लेट रहे । उधर उनके घर वालों ने बिना कुछ खाए तीन दिन तक इन्तज़ार किया । इस बीच में, कबीर की सच्ची भक्ति जानकर, विष्णु ने रूप धारण किया और उनके घर एक बैल पराज लाद कर ले गए । यह सब देखकर कबीर की माता ने चिल्ला कर कहा : "तो तू यह चुरा लाया है ? यदि हाकिम को मालूम हो गया तो वह तुझे जेल में बन्द कर देगा।" कबीर के घर सामान छोड़ कर विष्णु, उसी वैष्णव रूप में, बाज़ार लौट और कबीर को घर वापिस भेज दिया। उन्होंने अपने घर पर इतना सामान पाकर अपना रोज़गार छोड़ दिया और राम की भक्ति में पूर्णतः तल्लीन हो गए । इस बात पर ब्राह्मणों ने कर कबीर को चारों तरफ से घेर लिया, और उनसे कहने लगे : "दुष्ट जुलाहे, तुझे इतनी दौलत मिल गई, किन्तु तूने हमें नहीं बुलाया; केवल तू वैष्णवों को हो एक एक विशेष संप्रदाय का अनुयायी, जिसकी विष्णु में, जिनसे यह शब्द बना है, अत्यधिक भक्ति होती है । इसके संबंध मे विल्सन ने हिन्दुओं के संप्रदायों पर अपने विद्वत्तापूर्ण ' विवरण' में विस्तार से कहा है, 'एशियाटिक रिसचेंज', जिशून्य सोलह और सत्रह । 'भक्तमाल' एक वैष्णव की देन है, और जिसमें हिन्दू धर्म की इस शाखा से संबंधित सब प्रसिद्ध व्यक्ति हैं । खिलाता है।" कबीर ने उत्तर दिया मैं बाज़ार जाता हूँ, और तुम्हारे लिए कोई चीज़ लाऊँगा । तब कबीर भयभीत होते हुए बाज़ार गए और वहाँ पृथ्वी पर लेट रहे । ईश्वर ने कबीर के नए चिह्न धारण किए और वे इतना अधिक रुपया लेकर उनके घर गए कि उन्हें उसे एक बैल पर लादना पड़ा । उसे उन्होंने ब्राह्मणों में बाँट दिया; तत्पश्चात् कबीर को उसकी सूचना दे, उन्हें बाज़ार से घर भेज दिया; और कबीर भी अपने घर पहुँच कर उसे बाँटते रहे । इसी बीच में उनकी ख्याति नगर में फैल गई । उनके दरवाज़े पर लोगों की भीड़ लगातार जमा रहने लगी, यहाँ तक कि उन्हें अपने भक्ति कार्य करने तक का समय न मिल पाता था । जब सिकन्दर पादशाह' सिंहासन पर बैठा, तो सब ब्राह्मण कबीर की मानी जाने वाली माता के, जो मुसलमान थी, पास गए और उसे अपने साथ राज-दरबार में ले गए । वहाँ पहुँच कर यद्यपि दिन था, एक मशाल जला कर, वह सुलतान के सामने चिल्लाने लगी : "हुजूर ग्रापके राज्य में अंधकार छाया हुआ है, क्योंकि मुसलमान हिन्दुओं की कंठी और तिलक धारण करते हैं, यह संकट है ।" सुलतान ने कबीर को बुला भेजा और उन्हें उसके सामने पहुँचने में देर न लगी। लोगों ने उनसे कहा 'सलाम' करो' । उन्होंने उत्तर दियाः "मैं तो राम को जानता हूँ, सलाम से मेरा क्या काम" । जब सुलतान ने ये अशिष्ट शब्द सुने तो उसने कबीर को उनके पादशाह, जो फ़ारसी शब्द है, की उपाधि मुसलमान सम्राटों को दी जाती है। सिकन्दर, जिसका उपनाम, उसकी जाति का नाम, 'लोदी' है, वास्तव में दिल्ली का, धर्म से मुसलमान, पठान राजा था । दो इन शब्दों का खेल समझने के लिए यह जानना आवश्यक है कि 'सलाम' अभिवादन के लिए मुसलमानों द्वारा प्रयुक्त होता है, और राम' इसी दृष्टि से हिन्दुओं द्वारा प्रयुक्त होता है । यह दूसरा शब्द, जो एक - कार से धर्म-संबंधी है, स्पेन के कैथोलिक अभिवादन के समान है : 'Ave, Maria'
भुवनेश्वर. मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने लोगों से डरने के बजाय सभी कोविद दिशानिर्देशों का पालन करने की अपील की और बताया कि कोविद-19 स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है. मुख्यमंत्री ने राज्य में कोविद-19 की स्थिति पर एक समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा कोविद-19 को नियंत्रित करने के लिए किए गए उपाय लोगों के जीवन और आजीविका को ध्यान में रखते हुए लिए गए हैं. लोगों के समर्थन से हम जीवन और आजीविका को प्रभावित किए बिना स्थिति से निपट सकते हैं. उन्होंने कहा कि अब तक तीसरी लहर में कोविद प्रबंधन सही रास्ते पर है. मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में दैनिक कोविद मामले ज्यादातर स्थिर रहे हैं. उन्होंने कहा कि देश के बड़े शहरों में सक्रिय मामलों में गिरावट शुरू हो गई है. मरीजों में हल्के लक्षण होते हैं और बहुत कम रोगियों को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता होती है. हालांकि यह जानकारी उत्साहजनक है, फिर भी हम सभी को पूरी तरह से सतर्क और तैयार रहना है. इसके अलावा पटनायक ने राज्य में टीकाकरण कार्यक्रम को और तेज करने की सलाह दी. उन्होंने अधिकारियों से स्वास्थ्य कर्मियों, पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों और कमजोर नागरिकों को एहतियाती खुराक के प्रशासन में तेजी लाने के लिए कहा. पटनायक ने कोविद के बारे में जागरूकता और दिशा-निर्देशों के कड़ाई से पालन का सुझाव देते हुए होम आइसोलेशन में कोविद रोगियों की सूक्ष्म रोकथाम और नियमित निगरानी की रणनीति पर जोर दिया. इस दौरान चर्चा में भाग लेते हुए मुख्य सचिव सुरेश चंद्र महापात्र ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश को ध्यान में रखते हुए दवाओं और अन्य आवश्यक वस्तुओं की व्यवस्था के अलावा सभी कोविद अस्पतालों को चालू कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए सभी उपाय किए गए हैं कि लोगों की आजीविका प्रभावित न हो. एसीएस (स्वास्थ्य) आरके शर्मा ने दुनिया, देश और राज्य में कोविद की स्थिति की तुलनात्मक तस्वीर पेश करते हुए बताया कि तीसरी लहर अपने चरम पर बताई जा रही है. रोजाना 10000-11000 नए मामले सामने आ रहे हैं. वहीं अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या बहुत कम है. उन्होंने कहा कि राज्य में कोविद रोगियों के लिए 11,291 बिस्तर उपलब्ध हैं और उनमें से केवल 11 प्रतिशत ही भरे हैं. उन्होंने कहा कि राज्य के पास दवाओं, ऑक्सीजन और अन्य जरूरी चीजों का पर्याप्त भंडार है. टीकाकरण कार्यक्रम की जानकारी साझा करते हुए शर्मा ने कहा कि 92. 7% पात्र आबादी को पहली खुराक दी गई है और 70. 7% को दूसरी खुराक दी गई है. उन्होंने आगे बताया कि 15 से 18 साल के 45. 8% बच्चों को टीका लगाया गया है और 14% को एहतियाती खुराक मिली है. डीजी पुलिस, कटक और मयूरभंज के जिला कलेक्टर, भुवनेश्वर और कटक के नगर आयुक्तों ने सीएम को अपने क्षेत्रों में कार्यक्रमों से अवगत कराया. बैठक का संचालन सीएम (5-टी) के सचिव वीके पांडियन ने किया. बैठक में विकास आयुक्त, प्रमुख सचिव और विभिन्न विभागों के सचिव शामिल हुए.
भुवनेश्वर. मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने लोगों से डरने के बजाय सभी कोविद दिशानिर्देशों का पालन करने की अपील की और बताया कि कोविद-उन्नीस स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है. मुख्यमंत्री ने राज्य में कोविद-उन्नीस की स्थिति पर एक समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा कोविद-उन्नीस को नियंत्रित करने के लिए किए गए उपाय लोगों के जीवन और आजीविका को ध्यान में रखते हुए लिए गए हैं. लोगों के समर्थन से हम जीवन और आजीविका को प्रभावित किए बिना स्थिति से निपट सकते हैं. उन्होंने कहा कि अब तक तीसरी लहर में कोविद प्रबंधन सही रास्ते पर है. मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में दैनिक कोविद मामले ज्यादातर स्थिर रहे हैं. उन्होंने कहा कि देश के बड़े शहरों में सक्रिय मामलों में गिरावट शुरू हो गई है. मरीजों में हल्के लक्षण होते हैं और बहुत कम रोगियों को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता होती है. हालांकि यह जानकारी उत्साहजनक है, फिर भी हम सभी को पूरी तरह से सतर्क और तैयार रहना है. इसके अलावा पटनायक ने राज्य में टीकाकरण कार्यक्रम को और तेज करने की सलाह दी. उन्होंने अधिकारियों से स्वास्थ्य कर्मियों, पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों और कमजोर नागरिकों को एहतियाती खुराक के प्रशासन में तेजी लाने के लिए कहा. पटनायक ने कोविद के बारे में जागरूकता और दिशा-निर्देशों के कड़ाई से पालन का सुझाव देते हुए होम आइसोलेशन में कोविद रोगियों की सूक्ष्म रोकथाम और नियमित निगरानी की रणनीति पर जोर दिया. इस दौरान चर्चा में भाग लेते हुए मुख्य सचिव सुरेश चंद्र महापात्र ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश को ध्यान में रखते हुए दवाओं और अन्य आवश्यक वस्तुओं की व्यवस्था के अलावा सभी कोविद अस्पतालों को चालू कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए सभी उपाय किए गए हैं कि लोगों की आजीविका प्रभावित न हो. एसीएस आरके शर्मा ने दुनिया, देश और राज्य में कोविद की स्थिति की तुलनात्मक तस्वीर पेश करते हुए बताया कि तीसरी लहर अपने चरम पर बताई जा रही है. रोजाना दस हज़ार-ग्यारह हज़ार नए मामले सामने आ रहे हैं. वहीं अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या बहुत कम है. उन्होंने कहा कि राज्य में कोविद रोगियों के लिए ग्यारह,दो सौ इक्यानवे बिस्तर उपलब्ध हैं और उनमें से केवल ग्यारह प्रतिशत ही भरे हैं. उन्होंने कहा कि राज्य के पास दवाओं, ऑक्सीजन और अन्य जरूरी चीजों का पर्याप्त भंडार है. टीकाकरण कार्यक्रम की जानकारी साझा करते हुए शर्मा ने कहा कि बानवे. सात% पात्र आबादी को पहली खुराक दी गई है और सत्तर. सात% को दूसरी खुराक दी गई है. उन्होंने आगे बताया कि पंद्रह से अट्ठारह साल के पैंतालीस. आठ% बच्चों को टीका लगाया गया है और चौदह% को एहतियाती खुराक मिली है. डीजी पुलिस, कटक और मयूरभंज के जिला कलेक्टर, भुवनेश्वर और कटक के नगर आयुक्तों ने सीएम को अपने क्षेत्रों में कार्यक्रमों से अवगत कराया. बैठक का संचालन सीएम के सचिव वीके पांडियन ने किया. बैठक में विकास आयुक्त, प्रमुख सचिव और विभिन्न विभागों के सचिव शामिल हुए.
उम्मीदवार कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर Kazi Nazrul University भर्ती 2023 Guest Faculty रिक्तियों के लिए आवेदन कर सकते हैं। आधिकारिक लिंक और नौकरी का विवरण यहां अपडेट किया गया है। कुल रिक्तियों, वेतन, आयु सीमा, नौकरी के स्थान, पात्रता मानदंड के बारे में जानने के लिए आगे पढ़ें और Kazi Nazrul University भर्ती 2023 के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करें। Kazi Nazrul University Guest Faculty भर्ती 2023 के लिए आवेदन करने की योग्यता M. Sc, M. E/M. Tech, MCA, M. Phil/Ph. D है। योग्यता आवश्यकताओं को पूरा करने वाले उम्मीदवार नौकरी रिक्ति के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस वर्ष Kazi Nazrul University में Guest Faculty रिक्तियों की भूमिका के लिए रिक्तियों की संख्या Various है। उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा / व्यक्तिगत साक्षात्कार / चिकित्सा परीक्षण / वॉकिन साक्षात्कार के आधार पर किया जाएगा। एक बार एक उम्मीदवार का चयन हो जाने के बाद उन्हें Kazi Nazrul University में Guest Faculty के रूप में रखा जाएगा। Kazi Nazrul University Guest Faculty भर्ती के लिए वेतन 2023 Rs. 24,000 - Rs. 24,000 Per Month है। चयनित उम्मीदवार अपनी कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से Guest Faculty के रूप में अपना कार्य ग्रहण कर सकते हैं। Kazi Nazrul University Various Guest Faculty रिक्तियों को Asansol पर भरने के लिए उम्मीदवारों को काम पर रख रहा है। उम्मीदवार आधिकारिक अधिसूचना की जांच कर सकते हैं और अंतिम तिथि से पहले Kazi Nazrul University भर्ती 2023 के लिए आवेदन कर सकते हैं। उम्मीदवार जो Kazi Nazrul University भर्ती 2023 के लिए आवेदन करना चाहते हैं, वे ध्यान दें कि आवेदन करने की अंतिम तिथि 28/06/2023 है। एक बार उम्मीदवारों का चयन हो जाने के बाद उन्हें Kazi Nazrul University Asansol में Guest Faculty के रूप में रखा जाएगा। How to apply for Kazi Nazrul University Recruitment 2023? Kazi Nazrul University Guest Faculty भर्ती 2023 के लिए आवेदन करने के चरण हैंः चरण 4: आवेदन पत्र को आवेदन के तरीके के अनुसार जमा करें।
उम्मीदवार कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर Kazi Nazrul University भर्ती दो हज़ार तेईस Guest Faculty रिक्तियों के लिए आवेदन कर सकते हैं। आधिकारिक लिंक और नौकरी का विवरण यहां अपडेट किया गया है। कुल रिक्तियों, वेतन, आयु सीमा, नौकरी के स्थान, पात्रता मानदंड के बारे में जानने के लिए आगे पढ़ें और Kazi Nazrul University भर्ती दो हज़ार तेईस के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करें। Kazi Nazrul University Guest Faculty भर्ती दो हज़ार तेईस के लिए आवेदन करने की योग्यता M. Sc, M. E/M. Tech, MCA, M. Phil/Ph. D है। योग्यता आवश्यकताओं को पूरा करने वाले उम्मीदवार नौकरी रिक्ति के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस वर्ष Kazi Nazrul University में Guest Faculty रिक्तियों की भूमिका के लिए रिक्तियों की संख्या Various है। उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा / व्यक्तिगत साक्षात्कार / चिकित्सा परीक्षण / वॉकिन साक्षात्कार के आधार पर किया जाएगा। एक बार एक उम्मीदवार का चयन हो जाने के बाद उन्हें Kazi Nazrul University में Guest Faculty के रूप में रखा जाएगा। Kazi Nazrul University Guest Faculty भर्ती के लिए वेतन दो हज़ार तेईस रुपया. चौबीस,शून्य - Rs. चौबीस,शून्य Per Month है। चयनित उम्मीदवार अपनी कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से Guest Faculty के रूप में अपना कार्य ग्रहण कर सकते हैं। Kazi Nazrul University Various Guest Faculty रिक्तियों को Asansol पर भरने के लिए उम्मीदवारों को काम पर रख रहा है। उम्मीदवार आधिकारिक अधिसूचना की जांच कर सकते हैं और अंतिम तिथि से पहले Kazi Nazrul University भर्ती दो हज़ार तेईस के लिए आवेदन कर सकते हैं। उम्मीदवार जो Kazi Nazrul University भर्ती दो हज़ार तेईस के लिए आवेदन करना चाहते हैं, वे ध्यान दें कि आवेदन करने की अंतिम तिथि अट्ठाईस जून दो हज़ार तेईस है। एक बार उम्मीदवारों का चयन हो जाने के बाद उन्हें Kazi Nazrul University Asansol में Guest Faculty के रूप में रखा जाएगा। How to apply for Kazi Nazrul University Recruitment दो हज़ार तेईस? Kazi Nazrul University Guest Faculty भर्ती दो हज़ार तेईस के लिए आवेदन करने के चरण हैंः चरण चार: आवेदन पत्र को आवेदन के तरीके के अनुसार जमा करें।
ब्राटिस्लावा (स्लोवाकिया)। चार बार के विश्व चैंपियन अमेरिका के तिहरी कूद एथलीट क्रिस्टियन टेलर उम्मीदों पर खरा उतरने में विफल रहे और उन्हें सेमोरिन में विश्व एथलेटिक्स कॉटिनेंटल टूर सिल्वर मीट में स्थानीय एथलीट थॉमस वेसजेल्का से हार का सामना करना पड़ा। 25 साल के वेसजेल्का ने शुक्रवार को अपने तीसरे राउंड में 16. 69 मीटर की दूरी तय की। उन्होंने छठे राउंड में 16. 66 मीटर कर दूरी के साथ टेलर को पीछे छोड़ दिया। टेलर 16. 53 मीटर ही कूद सके। वेसजेल्का 2018 यूरोपियन चैंपियनशिप के फाइनल में आठवें स्थान पर रहे थे। वहीं, उन्होंने चीन के वुहान में 2019 में 17. 08 मीटर की दूरी तय की थी, जोकि उनके करियर का बेस्ट प्रदर्शन था।
ब्राटिस्लावा । चार बार के विश्व चैंपियन अमेरिका के तिहरी कूद एथलीट क्रिस्टियन टेलर उम्मीदों पर खरा उतरने में विफल रहे और उन्हें सेमोरिन में विश्व एथलेटिक्स कॉटिनेंटल टूर सिल्वर मीट में स्थानीय एथलीट थॉमस वेसजेल्का से हार का सामना करना पड़ा। पच्चीस साल के वेसजेल्का ने शुक्रवार को अपने तीसरे राउंड में सोलह. उनहत्तर मीटर की दूरी तय की। उन्होंने छठे राउंड में सोलह. छयासठ मीटर कर दूरी के साथ टेलर को पीछे छोड़ दिया। टेलर सोलह. तिरेपन मीटर ही कूद सके। वेसजेल्का दो हज़ार अट्ठारह यूरोपियन चैंपियनशिप के फाइनल में आठवें स्थान पर रहे थे। वहीं, उन्होंने चीन के वुहान में दो हज़ार उन्नीस में सत्रह. आठ मीटर की दूरी तय की थी, जोकि उनके करियर का बेस्ट प्रदर्शन था।
नई दिल्ली। पंजाब नेशनल बैंक के महाघोटाले की जांच कर रही सीबीआई की टीम को आज बड़ी सफलता मिली. टीम ने फर्जी LoU जारी कराने वाले पीएनबी के पूर्व डिप्टी मैनेजर गोकुलनाथ शेट्टी समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. दो अन्य लोगों में एक बैंक कर्मचारी मनोज खराट और नीरव मोदी की कंपनी के कर्मचारी हेमंत भट्ट हैं. तीनों को आज सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में पेश किया जाएगा. इस फर्जीवाड़े पर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस आमने-सामने हैं. दोनों राष्ट्रीय दल एक-दूसरे के कार्यकाल में इस घोटाले के जन्म के दावे कर रहे हैं. वहीं, इस बीच ये जानकारी सामने आ रही है कि 11,400 करोड़ रुपये के इस महाघोटाले के ज्यादातर साख पत्र यानी लेटर ऑफ अंडरस्टैंडिंग (LoUs) 2017-18 के दौरान जारी किए गए या उन्हें रिन्यू किया गया. अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, इस संबंध में गुरुवार को एक और एफआईआर दर्ज की गई है. जिसके तहत घोटाले के मुख्य आरोपी मेहुल चोकसी और नीरव मोदी ने अपनी तीन कंपनियों के जरिए पंजाब नेशनल बैंक से 4,886. 72 करोड़ रुपये हासिल किए. बैंक से ये रकम 143 एलओयू के जरिए हासिल की गई. अखबार ने इस केस की पहली एफआईआर के आधार पर लिखा है कि सबसे पहले इस मामले में 8 एलओयू के जरिए 280. 7 करोड़ रुपये के घोटाले की बात सामने आई थी. एफआईआर में ये बात भी लिखी गई है कि ये एलओयू 2017 में जारी किए गए. अब सीबीआई ने पीएनबी से मिली नई जानकारी इस एफआईआर में जोड़ी है, जिसके आधार पर पहली एफआईआर के तहत करीब 6,498 करोड़ के घोटाले का मामला बन रहा है. सीबीआई ने इस संबंध में बैंक अधिकारियों से भी पूछताछ की है, जिसमें ये बात सामने निकलकर आई है कि नीरव मोदी और मेहुल चोकसी ने एलओयू रिन्यू कराने का खेल भी किया और बड़ी रकम हासिल की. दरअसल, ये केस पंजाब नेशनल बैंक की मुंबई शाखा से जारी 143 साख पत्रों से संबंधित है. इन साख पत्रों के आधार पर धोखाधड़ी पूर्ण तरीके से 4,886 करोड़ रुपये जारी किए गए. यह राशि तीन कंपनियों गीतांजलि जेम्स, नक्षत्र और गिली को 2017-18 में जारी की गई. हालांकि, ये पूरा मामला 11,400 करोड़ रुपये के 293 साख पत्र का है. घोटाले की गूंज देशभर में सुनाई देने के बाद शुक्रवार को बीजेपी और कांग्रेस की तरफ से प्रेस कॉन्फ्रेंस की गईं. दोनों पार्टियों ने अपना-अपना पक्ष रखते हुए एक-दूसरे के कार्यकाल में घोटाला होने का आरोप लगाया. बीजेपी ने पीएनबी धोखाधड़ी को यूपीए सरकार का घोटाला करार देते हुए दावा किया कि एक सरकारी बैंक पर दागी कारोबारी नीरव मोदी को 2013 में लोन देने के लिए दबाव डाला गया था. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि 13 सितंबर 2013 को राहुल गांधी दिल्ली के एक होटल में नीरव मोदी की ज्वैलरी एग्जीबिशन में गए थे और उसके अगले ही दिन इलाहाबाद बैंक ने उनके ऋण की मंजूरी दी थी. जबकि बैंक के एक निदेशक दिनेश दूबे ने इसका विरोध किया था. वहीं कांग्रेस ने इस मामले में सीधे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरा है. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सात मई 2015 को वैभव खुरानिया नाम के एक शख्स ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को इस घोटाले की जानकारी दी थी लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की. कांग्रेस मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने सवाल किया कि बीजेपी और मोदी सरकार इस मुद्दे पर चुप क्यों थी? साथ ही नीरव मोदी और मेहुल चोकसी को भागने की 'इजाजत' कैसे दी गई. इतना ही नहीं सुरजेवाला ने ये भी दावा किया है कि भारत का सबसे बड़ा बैंक लूट घोटाला बढ़कर अब 21,306 करोड़ का हो गया है. बहरहाल, अभी पूरे मामले की जांच की जा रही है. ईडी लगातार छापेमारी कर नीरव मोदी की संपत्ति जब्त कर रही है. वहीं, आरोपियों के पासपोर्ट भी कर दिए गए हैं. हालांकि, अभी तक ये पता नहीं चल पाया है कि आरोपी किस देश में शरण लिए हुए हैं.
नई दिल्ली। पंजाब नेशनल बैंक के महाघोटाले की जांच कर रही सीबीआई की टीम को आज बड़ी सफलता मिली. टीम ने फर्जी LoU जारी कराने वाले पीएनबी के पूर्व डिप्टी मैनेजर गोकुलनाथ शेट्टी समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. दो अन्य लोगों में एक बैंक कर्मचारी मनोज खराट और नीरव मोदी की कंपनी के कर्मचारी हेमंत भट्ट हैं. तीनों को आज सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में पेश किया जाएगा. इस फर्जीवाड़े पर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस आमने-सामने हैं. दोनों राष्ट्रीय दल एक-दूसरे के कार्यकाल में इस घोटाले के जन्म के दावे कर रहे हैं. वहीं, इस बीच ये जानकारी सामने आ रही है कि ग्यारह,चार सौ करोड़ रुपये के इस महाघोटाले के ज्यादातर साख पत्र यानी लेटर ऑफ अंडरस्टैंडिंग दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह के दौरान जारी किए गए या उन्हें रिन्यू किया गया. अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, इस संबंध में गुरुवार को एक और एफआईआर दर्ज की गई है. जिसके तहत घोटाले के मुख्य आरोपी मेहुल चोकसी और नीरव मोदी ने अपनी तीन कंपनियों के जरिए पंजाब नेशनल बैंक से चार,आठ सौ छियासी. बहत्तर करोड़ रुपये हासिल किए. बैंक से ये रकम एक सौ तैंतालीस एलओयू के जरिए हासिल की गई. अखबार ने इस केस की पहली एफआईआर के आधार पर लिखा है कि सबसे पहले इस मामले में आठ एलओयू के जरिए दो सौ अस्सी. सात करोड़ रुपये के घोटाले की बात सामने आई थी. एफआईआर में ये बात भी लिखी गई है कि ये एलओयू दो हज़ार सत्रह में जारी किए गए. अब सीबीआई ने पीएनबी से मिली नई जानकारी इस एफआईआर में जोड़ी है, जिसके आधार पर पहली एफआईआर के तहत करीब छः,चार सौ अट्ठानवे करोड़ के घोटाले का मामला बन रहा है. सीबीआई ने इस संबंध में बैंक अधिकारियों से भी पूछताछ की है, जिसमें ये बात सामने निकलकर आई है कि नीरव मोदी और मेहुल चोकसी ने एलओयू रिन्यू कराने का खेल भी किया और बड़ी रकम हासिल की. दरअसल, ये केस पंजाब नेशनल बैंक की मुंबई शाखा से जारी एक सौ तैंतालीस साख पत्रों से संबंधित है. इन साख पत्रों के आधार पर धोखाधड़ी पूर्ण तरीके से चार,आठ सौ छियासी करोड़ रुपये जारी किए गए. यह राशि तीन कंपनियों गीतांजलि जेम्स, नक्षत्र और गिली को दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह में जारी की गई. हालांकि, ये पूरा मामला ग्यारह,चार सौ करोड़ रुपये के दो सौ तिरानवे साख पत्र का है. घोटाले की गूंज देशभर में सुनाई देने के बाद शुक्रवार को बीजेपी और कांग्रेस की तरफ से प्रेस कॉन्फ्रेंस की गईं. दोनों पार्टियों ने अपना-अपना पक्ष रखते हुए एक-दूसरे के कार्यकाल में घोटाला होने का आरोप लगाया. बीजेपी ने पीएनबी धोखाधड़ी को यूपीए सरकार का घोटाला करार देते हुए दावा किया कि एक सरकारी बैंक पर दागी कारोबारी नीरव मोदी को दो हज़ार तेरह में लोन देने के लिए दबाव डाला गया था. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि तेरह सितंबर दो हज़ार तेरह को राहुल गांधी दिल्ली के एक होटल में नीरव मोदी की ज्वैलरी एग्जीबिशन में गए थे और उसके अगले ही दिन इलाहाबाद बैंक ने उनके ऋण की मंजूरी दी थी. जबकि बैंक के एक निदेशक दिनेश दूबे ने इसका विरोध किया था. वहीं कांग्रेस ने इस मामले में सीधे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरा है. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सात मई दो हज़ार पंद्रह को वैभव खुरानिया नाम के एक शख्स ने प्रधानमंत्री कार्यालय को इस घोटाले की जानकारी दी थी लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की. कांग्रेस मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने सवाल किया कि बीजेपी और मोदी सरकार इस मुद्दे पर चुप क्यों थी? साथ ही नीरव मोदी और मेहुल चोकसी को भागने की 'इजाजत' कैसे दी गई. इतना ही नहीं सुरजेवाला ने ये भी दावा किया है कि भारत का सबसे बड़ा बैंक लूट घोटाला बढ़कर अब इक्कीस,तीन सौ छः करोड़ का हो गया है. बहरहाल, अभी पूरे मामले की जांच की जा रही है. ईडी लगातार छापेमारी कर नीरव मोदी की संपत्ति जब्त कर रही है. वहीं, आरोपियों के पासपोर्ट भी कर दिए गए हैं. हालांकि, अभी तक ये पता नहीं चल पाया है कि आरोपी किस देश में शरण लिए हुए हैं.
नई दिल्ली। भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने कप्तान कप्तान विराट कोहली से छुटकारा पाने के तरीकों को समझने की कोशिश की है। कोहली महान बल्लेबाजों में से एक हैं। उन्हें आउट करना किसी गेंदबाज के लिए बड़ी चुनाैती साबित होता है। लेकिन शमी का मानना है कि जब आप किसी खिलाड़ी के साथ मैदान पर ज्यादा समय बिताते हैं तो फिर उसी कमजोरियों का भी पता चल जाता है। जब एक बेवसाइट द्वारा शमी से कोहली को आउट करने का तरीका पूछा गया तो उन्होंने जवाब कि उनमें भी एक कमी है। शमी ने कहा, "जब आप किसी खिलाड़ी के साथ खेलते हो तो उसकी ताकत का ही नहीं कमजोरियों का भी पता चल जाता है। हम सब जानते हैं कि कोहली शानदार बल्लेबाज है लेकिन सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों की भी कमजोरी होती है और गेंदबाज उस पर काम कर सकते हैं। मैंने कोहली को आईपीएल में कई बार आउट किया हुआ है। मैं इसके बारे में पूरी तरह से तो नहीं बता सकूंगा लेकिन आपको उन्हें आउट करने के लिए उनकी कमजोरियों को ध्यान में रखकर गेंदबाजी करनी होगी। " मोहम्मद शमी ने विराट कोहली की कप्तानी की खुलकर तारीफ की. उन्होंने कहा नतीजे बताते हैं कि विराट कोहली हमारा कितना साथ देते हैं। शमी के मुताबिक विराट कोहली ने टीम इंडिया के गेंदबाजों को खुली छूट दे रखी है। वो हमारा कमजोर पक्ष और मजबूत पक्ष जानते हैं। इससे हमें अपना खेल दुरुस्त करने मेम मदद मिलती है। शमी के मुताबिक एक ऐसा कप्तान जो आपकी काबिलियत पर भरोसा करता है उससे ज्यादा किसी गेंदबाज को कुछ नहीं चाहिए होता। मोहम्मद शमी ने ये भी कहा कि विराट कोहली उन खिलाड़ियों को पसंद करते हैं जो खुद में रोजाना सुधार करने की कोशिश करते हैं, उनकी सोच नें टीम इंडिया के हर खिलाड़ी को बदल दिया है।
नई दिल्ली। भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने कप्तान कप्तान विराट कोहली से छुटकारा पाने के तरीकों को समझने की कोशिश की है। कोहली महान बल्लेबाजों में से एक हैं। उन्हें आउट करना किसी गेंदबाज के लिए बड़ी चुनाैती साबित होता है। लेकिन शमी का मानना है कि जब आप किसी खिलाड़ी के साथ मैदान पर ज्यादा समय बिताते हैं तो फिर उसी कमजोरियों का भी पता चल जाता है। जब एक बेवसाइट द्वारा शमी से कोहली को आउट करने का तरीका पूछा गया तो उन्होंने जवाब कि उनमें भी एक कमी है। शमी ने कहा, "जब आप किसी खिलाड़ी के साथ खेलते हो तो उसकी ताकत का ही नहीं कमजोरियों का भी पता चल जाता है। हम सब जानते हैं कि कोहली शानदार बल्लेबाज है लेकिन सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों की भी कमजोरी होती है और गेंदबाज उस पर काम कर सकते हैं। मैंने कोहली को आईपीएल में कई बार आउट किया हुआ है। मैं इसके बारे में पूरी तरह से तो नहीं बता सकूंगा लेकिन आपको उन्हें आउट करने के लिए उनकी कमजोरियों को ध्यान में रखकर गेंदबाजी करनी होगी। " मोहम्मद शमी ने विराट कोहली की कप्तानी की खुलकर तारीफ की. उन्होंने कहा नतीजे बताते हैं कि विराट कोहली हमारा कितना साथ देते हैं। शमी के मुताबिक विराट कोहली ने टीम इंडिया के गेंदबाजों को खुली छूट दे रखी है। वो हमारा कमजोर पक्ष और मजबूत पक्ष जानते हैं। इससे हमें अपना खेल दुरुस्त करने मेम मदद मिलती है। शमी के मुताबिक एक ऐसा कप्तान जो आपकी काबिलियत पर भरोसा करता है उससे ज्यादा किसी गेंदबाज को कुछ नहीं चाहिए होता। मोहम्मद शमी ने ये भी कहा कि विराट कोहली उन खिलाड़ियों को पसंद करते हैं जो खुद में रोजाना सुधार करने की कोशिश करते हैं, उनकी सोच नें टीम इंडिया के हर खिलाड़ी को बदल दिया है।
देश में तेजी से बढ़ते कोरोना केस को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 दिसंबर को 15-18 साल के बच्चों के लिए टीकाकरण अभियान का ऐलान किया था. यह एक राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान है जिसके अंतर्गत पूरे देश में बच्चों को कोविड का टीका दिया जाएगा. कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन के बढ़ते संक्रमण के बीच सोमवार से 15-18 साल के बच्चों का कोविड टीकाकरण शुरू हो रहा है. अब तक 18 साल से पहले के युवाओं, बुजुर्गों का टीकाकरण चल रहा था. बच्चों के टीकाकरण से पहले कोविन ऐप पर रजिस्ट्रेशन हो रहा है. इसी के साथ पूरे देश में टीका देने के लिए सेंटर बनाए जाने और उससे जुड़े सभी काम को अंतिर रूप देने की तैयारी भी तेजी से जारी है. उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर प्रशासन (जिसमें नोएडा भी आता है) ने 27 सेंटर की एक लिस्ट जारी की है जहां 15-18 साल के बच्चे टीका ले पाएंगे. 15-18 साल के बच्चों को टीका देने के लिए 1 जनवरी से कोविन ऐप पर रजिस्ट्रेशन शुरू हुआ है. बच्चों के टीकाकरण की घोषणा हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी. इसके बाद टीकाकरण की तैयारियां तेज हो गईं. कोविन ऐप के अलावा भी कोविड टीकाकरण सेंटर पर जाकर वैक्सीन ली जा सकती है. साथ में आधार कार्ड लेकर जाना होगा. इस उम्र सीमा के बच्चों को भारत बायोटेक की वैक्सीन कोवैक्सीन दी जा रही है. - 13-एसडी कन्या कॉलेज, बिलासपुर, दनकौर, - 21-पब्लिक इंटर कॉलेज, जहांगीरपुर, देश में तेजी से बढ़ते कोरोना केस को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 दिसंबर को 15-18 साल के बच्चों के लिए टीकाकरण अभियान का ऐलान किया था. यह एक राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान है जिसके अंतर्गत पूरे देश में बच्चों को कोविड का टीका दिया जाएगा. जो बुजुर्ग बीमारी से ग्रसित हैं और जोखिम वाली स्थिति में हैं, उनके लिए तीसरी डोज का वैक्सीनेशन भी शुरू हो रहा है. ऐसे बुजुर्गों को 10 जनवरी से टीके की तीसरी खुराक दी जाएगी. यह भी पढ़ेंः सिल्वर ETF में कैसे लगा सकेंगे पैसा, सोने की तरह कितना कर सकेंगे निवेश और क्या होगी फीस?
देश में तेजी से बढ़ते कोरोना केस को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पच्चीस दिसंबर को पंद्रह-अट्ठारह साल के बच्चों के लिए टीकाकरण अभियान का ऐलान किया था. यह एक राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान है जिसके अंतर्गत पूरे देश में बच्चों को कोविड का टीका दिया जाएगा. कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन के बढ़ते संक्रमण के बीच सोमवार से पंद्रह-अट्ठारह साल के बच्चों का कोविड टीकाकरण शुरू हो रहा है. अब तक अट्ठारह साल से पहले के युवाओं, बुजुर्गों का टीकाकरण चल रहा था. बच्चों के टीकाकरण से पहले कोविन ऐप पर रजिस्ट्रेशन हो रहा है. इसी के साथ पूरे देश में टीका देने के लिए सेंटर बनाए जाने और उससे जुड़े सभी काम को अंतिर रूप देने की तैयारी भी तेजी से जारी है. उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर प्रशासन ने सत्ताईस सेंटर की एक लिस्ट जारी की है जहां पंद्रह-अट्ठारह साल के बच्चे टीका ले पाएंगे. पंद्रह-अट्ठारह साल के बच्चों को टीका देने के लिए एक जनवरी से कोविन ऐप पर रजिस्ट्रेशन शुरू हुआ है. बच्चों के टीकाकरण की घोषणा हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी. इसके बाद टीकाकरण की तैयारियां तेज हो गईं. कोविन ऐप के अलावा भी कोविड टीकाकरण सेंटर पर जाकर वैक्सीन ली जा सकती है. साथ में आधार कार्ड लेकर जाना होगा. इस उम्र सीमा के बच्चों को भारत बायोटेक की वैक्सीन कोवैक्सीन दी जा रही है. - तेरह-एसडी कन्या कॉलेज, बिलासपुर, दनकौर, - इक्कीस-पब्लिक इंटर कॉलेज, जहांगीरपुर, देश में तेजी से बढ़ते कोरोना केस को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पच्चीस दिसंबर को पंद्रह-अट्ठारह साल के बच्चों के लिए टीकाकरण अभियान का ऐलान किया था. यह एक राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान है जिसके अंतर्गत पूरे देश में बच्चों को कोविड का टीका दिया जाएगा. जो बुजुर्ग बीमारी से ग्रसित हैं और जोखिम वाली स्थिति में हैं, उनके लिए तीसरी डोज का वैक्सीनेशन भी शुरू हो रहा है. ऐसे बुजुर्गों को दस जनवरी से टीके की तीसरी खुराक दी जाएगी. यह भी पढ़ेंः सिल्वर ETF में कैसे लगा सकेंगे पैसा, सोने की तरह कितना कर सकेंगे निवेश और क्या होगी फीस?
शरीर के लिए प्रोटीन का निर्माण की हो या फिर विषैले पदार्थों को दूर करने से लेकर खाना पचाने, ऊर्जा का संचयन करने, पित्त बनाने और कार्बोहाइड्रेट को स्टोर करना यह सभी काम लिवर ही करता है। फैटी लिवर की समस्या मुख्य रूप से दो प्रकार से होती है; 1- एल्कोहल फैटी लिवर 2- नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर। नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (Non Alcoholic Fatty Liver Disease) उन लोगों में ज्यादा होती है जो बिलकुल भी शराब का सेवन नहीं करते हैं। हालांकि ऐसा नहीं है कि ये समस्या आपको अचानक हो जाती है बल्कि आपका खराब खान-पान और खराब जीवनशैली इस समस्या के पीछे का कारण होती है। ख़राब जीवनशैलीः वर्तमान समय में खराब खानपान, मोटापा, कोई फिजिकल एक्टिविटी ना करना और अव्यवस्थित जीवनशैली के कारण फैटी लिवर के मरीजों में बढ़ोतरी हो रही है। फैटी लिवर एक ऐसी समस्या है, जिसमें पीड़ित व्यक्ति के लिवर का आकार बढ़ जाता है और उसे खाने को पचाने में दिक्कत महसूस होने लगती है। इस स्थिति में लिवर में फैट जमा होने लगता है। समय पर इलाज न करवाने के कारण आपका लिवर पूर्ण रूप से डैमेज हो सकता है, जिसे लिवर सिरॉसिस भी कहते हैं। ये स्थिति आगे जाकर कैंसर का कारण बन सकती है। आइए जानते हैं जब आपका लिवर 75 फीसदी तक खराब हो जाता है तो आपके शरीर में कौन-कौन से लक्षण दिखाई देते हैं। फैटी लिवर के लक्षणः फैटी लिवर के मरीजों को अधिक थकान, पेट में सूजन, शरीर में अत्यधिक थकान, स्किन और आंखों पर नीलापन, पेट के दाईं तरफ ऊपरी हिस्से में दर्द, हथेलियों का लाल होना, स्पाइडर वेन्स, आंखों का पीलापन, स्किन पर खुजली और रैशेज और वजन कम होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इनसे करें परहेजः फैटी लिवर के मरीजों को अधिक तेल-मसालेदार चीजों के सेवन से बचना चाहिए। अधिक शुगर के सेवन से लिवर में फैट बढ़ने लगता है। डिब्बा बंद फ्रूट जूस, कैंडी, आइसक्रीम, मिठाइयों के अधिक सेवन से बचें। इसके अलावा घी, मक्खन, मलाईदार दूध पीने के साथ उन चीजों को डाइट से निकाल दें, जिनमें फैट, कैलोरी की मात्रा अधिक होती है। यदि आप अधिक शराब का सेवन करते हैं, तो लिवर डिजीज में यह आपके लिए जहर के समान हो सकता है।
शरीर के लिए प्रोटीन का निर्माण की हो या फिर विषैले पदार्थों को दूर करने से लेकर खाना पचाने, ऊर्जा का संचयन करने, पित्त बनाने और कार्बोहाइड्रेट को स्टोर करना यह सभी काम लिवर ही करता है। फैटी लिवर की समस्या मुख्य रूप से दो प्रकार से होती है; एक- एल्कोहल फैटी लिवर दो- नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर। नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज उन लोगों में ज्यादा होती है जो बिलकुल भी शराब का सेवन नहीं करते हैं। हालांकि ऐसा नहीं है कि ये समस्या आपको अचानक हो जाती है बल्कि आपका खराब खान-पान और खराब जीवनशैली इस समस्या के पीछे का कारण होती है। ख़राब जीवनशैलीः वर्तमान समय में खराब खानपान, मोटापा, कोई फिजिकल एक्टिविटी ना करना और अव्यवस्थित जीवनशैली के कारण फैटी लिवर के मरीजों में बढ़ोतरी हो रही है। फैटी लिवर एक ऐसी समस्या है, जिसमें पीड़ित व्यक्ति के लिवर का आकार बढ़ जाता है और उसे खाने को पचाने में दिक्कत महसूस होने लगती है। इस स्थिति में लिवर में फैट जमा होने लगता है। समय पर इलाज न करवाने के कारण आपका लिवर पूर्ण रूप से डैमेज हो सकता है, जिसे लिवर सिरॉसिस भी कहते हैं। ये स्थिति आगे जाकर कैंसर का कारण बन सकती है। आइए जानते हैं जब आपका लिवर पचहत्तर फीसदी तक खराब हो जाता है तो आपके शरीर में कौन-कौन से लक्षण दिखाई देते हैं। फैटी लिवर के लक्षणः फैटी लिवर के मरीजों को अधिक थकान, पेट में सूजन, शरीर में अत्यधिक थकान, स्किन और आंखों पर नीलापन, पेट के दाईं तरफ ऊपरी हिस्से में दर्द, हथेलियों का लाल होना, स्पाइडर वेन्स, आंखों का पीलापन, स्किन पर खुजली और रैशेज और वजन कम होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इनसे करें परहेजः फैटी लिवर के मरीजों को अधिक तेल-मसालेदार चीजों के सेवन से बचना चाहिए। अधिक शुगर के सेवन से लिवर में फैट बढ़ने लगता है। डिब्बा बंद फ्रूट जूस, कैंडी, आइसक्रीम, मिठाइयों के अधिक सेवन से बचें। इसके अलावा घी, मक्खन, मलाईदार दूध पीने के साथ उन चीजों को डाइट से निकाल दें, जिनमें फैट, कैलोरी की मात्रा अधिक होती है। यदि आप अधिक शराब का सेवन करते हैं, तो लिवर डिजीज में यह आपके लिए जहर के समान हो सकता है।
विराट कोहली की बात करें तो वो भारत की तरफ से टी20 वर्ल्ड कप के सबसे सफल बल्लेबाज हैं। उन्होंने इस वर्ल्ड कप में भारत के लिए अब तक कुल 16 मैचों की 16 पारियों में 86. 33 की औसत से 777 रन बनाए हैं। नई दिल्ली, आनलाइन डेस्क। विराट कोहली टी20 वर्ल्ड कप 2021 में टीम इंडिया की कप्तानी करने जा रहे हैं। इसके बाद वो टी20 टीम की कप्तानी छोड़े देंगे ऐसे में ये उनके लिए पहला और आखिरी मौका है कि, वो अपनी कप्तानी में टीम इंडिया को पहली बार टी20 वर्ल्ड कप खिताब दिलाएं। विराट की कप्तानी में टीम इंडिया ऐसा करने में भी सक्षम दिखती है क्योंकि उनका बतौर टी20 कप्तान शानदार रिकार्ड रहा है। टीम इंडिया ने पहला टी20 वर्ल्ड कप खिताब साल 2007 में एम एस धौनी की कप्तानी में जीता था। इसके बाद भारतीय टीम ने धौनी की कप्तानी में भी आखिरी टी20 वर्ल्ड कप 2016 में खेला था, लेकिन भारतीय टीम को सफलता नहीं मिल पाई थी। पिछले 17 साल से टीम इंडिया को फिर से टी20 वर्ल्ड कप खिताब जीतने का इंतजार है तो वहीं कोहली के लिए एक शानदार मौका सामने है कि, वो धौनी की सफलता को एक बार फिर से भारत के लिए दोहराएं। इस बार टी20 वर्ल्ड कप 2021 का आयोजन यूएई और ओमान में संयुक्त रूप से 17 अक्टूबर से होने जा रहा है। यूएई का माहौल काफी हद तक भारत जैसा ही है साथ ही विराट कोहली को एक मजबूत टीम मिली है। इसके अलावा जो सबसे बड़ी बात है वो ये कि, उन्हें भारत के सबसे सफल पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धौनी का भी भरपूर सहयोग मिलेगा जो बतौर मेंटर इस वर्ल्ड कप में टीम इंडिया के साथ होंगे। अब एक मजबूत टीम, शानदार रणनीतिकार और बेहतरीन बैकअप विराट कोहली के पास है। ऐसे में हमें उम्मीद करनी चाहिए कि, भारतीय टीम खिताब जीतने का कमाल कर पाएगी। विराट कोहली की बात करें तो वो भारत की तरफ से टी20 वर्ल्ड कप के सबसे सफल बल्लेबाज हैं। उन्होंने इस वर्ल्ड कप में भारत के लिए अब तक कुल 16 मैचों की 16 पारियों में 86. 33 की औसत से 777 रन बनाए हैं। इस दौरान उनकी सबसे बेस्ट पारी नाबाद 89 रन रही है। उन्होंने कुल 9 अर्धशतक शतक अब तक टी20 वर्ल्ड कप में लगाए हैं जबकि इन मैचों में उनके बल्ले से 73 चौके व 19 छक्के निकले हैं।
विराट कोहली की बात करें तो वो भारत की तरफ से टीबीस वर्ल्ड कप के सबसे सफल बल्लेबाज हैं। उन्होंने इस वर्ल्ड कप में भारत के लिए अब तक कुल सोलह मैचों की सोलह पारियों में छियासी. तैंतीस की औसत से सात सौ सतहत्तर रन बनाए हैं। नई दिल्ली, आनलाइन डेस्क। विराट कोहली टीबीस वर्ल्ड कप दो हज़ार इक्कीस में टीम इंडिया की कप्तानी करने जा रहे हैं। इसके बाद वो टीबीस टीम की कप्तानी छोड़े देंगे ऐसे में ये उनके लिए पहला और आखिरी मौका है कि, वो अपनी कप्तानी में टीम इंडिया को पहली बार टीबीस वर्ल्ड कप खिताब दिलाएं। विराट की कप्तानी में टीम इंडिया ऐसा करने में भी सक्षम दिखती है क्योंकि उनका बतौर टीबीस कप्तान शानदार रिकार्ड रहा है। टीम इंडिया ने पहला टीबीस वर्ल्ड कप खिताब साल दो हज़ार सात में एम एस धौनी की कप्तानी में जीता था। इसके बाद भारतीय टीम ने धौनी की कप्तानी में भी आखिरी टीबीस वर्ल्ड कप दो हज़ार सोलह में खेला था, लेकिन भारतीय टीम को सफलता नहीं मिल पाई थी। पिछले सत्रह साल से टीम इंडिया को फिर से टीबीस वर्ल्ड कप खिताब जीतने का इंतजार है तो वहीं कोहली के लिए एक शानदार मौका सामने है कि, वो धौनी की सफलता को एक बार फिर से भारत के लिए दोहराएं। इस बार टीबीस वर्ल्ड कप दो हज़ार इक्कीस का आयोजन यूएई और ओमान में संयुक्त रूप से सत्रह अक्टूबर से होने जा रहा है। यूएई का माहौल काफी हद तक भारत जैसा ही है साथ ही विराट कोहली को एक मजबूत टीम मिली है। इसके अलावा जो सबसे बड़ी बात है वो ये कि, उन्हें भारत के सबसे सफल पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धौनी का भी भरपूर सहयोग मिलेगा जो बतौर मेंटर इस वर्ल्ड कप में टीम इंडिया के साथ होंगे। अब एक मजबूत टीम, शानदार रणनीतिकार और बेहतरीन बैकअप विराट कोहली के पास है। ऐसे में हमें उम्मीद करनी चाहिए कि, भारतीय टीम खिताब जीतने का कमाल कर पाएगी। विराट कोहली की बात करें तो वो भारत की तरफ से टीबीस वर्ल्ड कप के सबसे सफल बल्लेबाज हैं। उन्होंने इस वर्ल्ड कप में भारत के लिए अब तक कुल सोलह मैचों की सोलह पारियों में छियासी. तैंतीस की औसत से सात सौ सतहत्तर रन बनाए हैं। इस दौरान उनकी सबसे बेस्ट पारी नाबाद नवासी रन रही है। उन्होंने कुल नौ अर्धशतक शतक अब तक टीबीस वर्ल्ड कप में लगाए हैं जबकि इन मैचों में उनके बल्ले से तिहत्तर चौके व उन्नीस छक्के निकले हैं।
- 1 min ago सोनाक्षी सिन्हा के साथ रोमांस करने से रणबीर कपूर ने कर दिया था इंकार? वजह है चौकाने वाली! - 1 hr ago ब्रालेस ड्रेस पहनकर असहज हुईं जन्नत जुबैर? मीडिया के सामने ही करतीं बार बार फिक्स! Don't Miss! - Travel क्या है पानीपुरी का इतिहास और क्यों सर्च इंजन गूगल कर रहा है इसे Celebrate? 2' है। हैं। दरअसल उन्होंने प्रकाश झा की फिल्म 'चक्रव्यूह' साइन की है जिसमें वह अलग ही अवतार में नजर आएंगी। इस अदाकारा की माने तो वह बॉलीवुड में एक अच्छा कलाकार के रूप में मशहूर होना चाहती हैं। 'जन्नत 2' में इमरान हाशमी के साथ अपनी पहली फिल्म की शुरूआत करने वाली इशा अपनी आने वाली फिल्म के किरदार के बारे में कहती हैं कि, मेरा रोल तड़क-भड़क वाला नहीं है। मैं इसमें एक आईपीएस अधिकारी की भूमिका निभा रही हूं। आपको बता दें कि प्रकाश झा की 'चक्रव्यूह' में अर्जुन रामपाल, अभय देओल, मनोज वाजपेयी, कबीर बेदी और ओम पुरी भी मुख्य किरदार के रूप में नजर आएंगे। After her Glamrous avtar in Jannat 2 actress Esha Gupta is ready for Prakash Jha's upcoming movie Chakravyuh. तलाकशुदा हसीना ने नाइटी में पोस्ट कर दीं S*xy तस्वीरें, रात होते ही बेडरूम में ऐसे मचलीं कि. .
- एक मिनट ago सोनाक्षी सिन्हा के साथ रोमांस करने से रणबीर कपूर ने कर दिया था इंकार? वजह है चौकाने वाली! - एक hr ago ब्रालेस ड्रेस पहनकर असहज हुईं जन्नत जुबैर? मीडिया के सामने ही करतीं बार बार फिक्स! Don't Miss! - Travel क्या है पानीपुरी का इतिहास और क्यों सर्च इंजन गूगल कर रहा है इसे Celebrate? दो' है। हैं। दरअसल उन्होंने प्रकाश झा की फिल्म 'चक्रव्यूह' साइन की है जिसमें वह अलग ही अवतार में नजर आएंगी। इस अदाकारा की माने तो वह बॉलीवुड में एक अच्छा कलाकार के रूप में मशहूर होना चाहती हैं। 'जन्नत दो' में इमरान हाशमी के साथ अपनी पहली फिल्म की शुरूआत करने वाली इशा अपनी आने वाली फिल्म के किरदार के बारे में कहती हैं कि, मेरा रोल तड़क-भड़क वाला नहीं है। मैं इसमें एक आईपीएस अधिकारी की भूमिका निभा रही हूं। आपको बता दें कि प्रकाश झा की 'चक्रव्यूह' में अर्जुन रामपाल, अभय देओल, मनोज वाजपेयी, कबीर बेदी और ओम पुरी भी मुख्य किरदार के रूप में नजर आएंगे। After her Glamrous avtar in Jannat दो actress Esha Gupta is ready for Prakash Jha's upcoming movie Chakravyuh. तलाकशुदा हसीना ने नाइटी में पोस्ट कर दीं S*xy तस्वीरें, रात होते ही बेडरूम में ऐसे मचलीं कि. .
अहंकार के परिमार्जन करते रहने का अवसर मिलता था । भीख माँग कर जीविका ग्रहण करने से विनय, नम्रता, निरभिमानता, कृतज्ञता एवं ऋणी होने का भाव उनके मन में जागृत बना रहता था । वे अपने में लोक सेवक, परोपकारी तथा महात्मा होने की अहम्मन्यता उत्पन्न न होने देने के लिए भिक्षुक की तुच्छ स्थिति ग्रहण करते थे। ऐसे भिक्षुकों को दान देते हुए देने वाले अपना मान अनुभव करते थे और लेने वाले निरभिमान बनते थे । इससे उन दोनों के बीच सुदृढ़ सौहार्द्र उत्पन्न होता था । भिक्षा वृत्ति करने वाले की अपेक्षा देने वाले को ही अधिक लाभ रहता था । इस परमार्थ और लोकहित की भावना से ब्रह्म जीवी महात्माओं के लिए भिक्षा का विधान किया गया था । इस प्रकार यज्ञार्थ भिक्षा ब्राह्मणों द्वारा ग्रहण की जाती थी । वे इस प्राप्त हुए धन को लोक कल्याण के, जनता की सुख-समृद्धि की वृद्धि के कार्यों में व्यय करते थे । अपना शरीर और मन उन्होंने परमार्थ में लगा रखा होता था । इन शरीरों की क्षुधा, तृषा, शील, धूप निवारण से रक्षा के लिए भी कुछ व्यय हो जाता था तो वह भी यज्ञ की आहुति के समान ही फलदायक होता था । ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा या भिक्षा देने का यही वास्तविक तात्पर्य था । ब्राह्मण इसीलिए भिक्षा जीवी होते थे । जो व्यक्ति या जो संस्था लोकहित के कार्यों में लगे हैं, वे ब्राह्मण हैं, उन्हें भिक्षा माँगने या प्राप्त करने का अधिकार है । यज्ञार्थ भिक्षा उचित है, शास्त्र सम्मत है । ब्रह्म कार्यों के लिए या ब्रह्मजीवी व्यक्तियों के लिए भिक्षा का प्रयोजन धर्म सम्मत है । इसके अतिरिक्त दूसरी श्रेणी 'विपद् वारणाय' है । संकटग्रस्त का संकट दूर करने के लिए सहायता देना मानवीय अन्तःकरण का दैवी स्वभाव है । इस दैवी तत्व को सुरक्षित रखने एवं विकसित करने के लिए मनुष्य में दया उत्पन्न होती है । दुखियों का दुःख देखकर हर एक सच्चे मनुष्य का हृदय करुणा से पूरित हो जाता है और आँखें छलक पड़ती है । इस दैवी प्रेरणा को तृप्त करने से ही मनुष्य परमात्मा के निकट पहुँचता है। दूसरों को कष्ट में देखकर जो लोग अपना कलेजा पत्थर का कर लेते हैं, निष्ठुरता धारण कर लेते हैं, अनुदारता एवं स्वार्थपरता में निमग्न होकर उनकी ओर उपेक्षा प्रकट करते हैं, ऐसे मनुष्य असुरता को प्राप्त होकर नर पिशाच का जीवन बिताते हैं । पीड़ितों की सहायता करना, दुखियों को दुःख से छुड़ाना आवश्यक है । इसके लिए शरीर से, बुद्धि से, धन से जैसे भी बन पड़े सहायता करनी चाहिए । 'विपद् वारणाय' भिक्षा देनी चाहिए । अग्निकाण्ड, जल प्रवाह, अकाल, चोरी, आक्रमण, अन्याय, दुर्दैव आदि किसी आकस्मिक कारण से जो लोग असहाय हो गये हैं, जिनकी अपनी सामर्थ्य नष्ट हो गई हो, गिर पड़े हों, अपने पैर पर आप खड़े न हो सकते हों, उनको सहायता देने की आवश्यकता है । जिनका शरीर एवं मस्तिष्क उपार्जन शक्ति के लिए बिलकुल अनुपयुक्त हो गया हो, उनको सहायता देने की जरूरत है । इस प्रकार के व्यक्तियों को पैसे की सहायता जरूरी होती है । परन्तु अन्य अनेक प्रकार के पीड़ित ऐसे हैं, जिन्हें पैसे की नहीं, शरीर एवं बुद्धि की सहायता आवश्यक होती है । शोक, चिन्ता, उद्विग्रता, क्लेश, कलह, निराशा, भय, ईर्ष्या, क्रोध, लोभ, तृष्णा, अहंकार, भ्रम, अज्ञान आदि मानसिक संकटों से अनेक मनुष्य ग्रसित होते हैं । वे उतना ही कष्ट पाते हैं जितना कि कठिन रोगों के रोगियों को कष्ट होता है। ऐसे लोगों की पैसे से सहायता हो जाय तो कुछ भी प्रयोजन सिद्ध नहीं होता, उनके लिए बुद्धि द्वारा, विवेक द्वारा जो सहायता पहुंचाई जाती है, वही सच्ची सहायता है । जिनके पास पैसा है, जो आसानी से अपने स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त पैसा खर्च कर सकते हैं, उन्हें मुफ्त दवा बाँटना निरर्थक है । उन्हें उपयोगी चिकित्सा विधि का मार्ग बताना एवं उस मार्ग तक पहुँचने में क्रियात्मक सहायता देना पर्याप्त है । किसी करोड़पति अमीर को तपैदिक हो जाय तो उसे मुफ्त दवा की आवश्यकता नहीं, उत्तम चिकित्सक तथा उत्तम चिकित्सा स्थान के परिचय की आवश्यकता है । इस प्रकार की सहायता देना और उपयुक्त साधन से मिला देना पर्याप्त है । गरीब आदमी को पैसा देने मात्र से काम नहीं चलता । उसे गरीबी से छुड़ाने के लिए किसी कारोबार में लगा देना होगा । बहुत से ऐसे गरीब हैं जिनकी शारीरिक योग्यताऐं कुछ काम करने योग्य है, बहुत से मनुष्य अंग-भंग, अंधे, असमर्थ भी होते हैं जो शरीर के अन्य अंगों से काम लेकर जीविका उपार्जन कर सकते हैं । जैसे लँगड़े आदमी हाथ से हो सकने वाले धंधे कर सकते हैं । अंधे, गूँगे, बहरे, कुबड़े भी किसी न किसी प्रकार की मजूरी कर सकते हैं । जिनके शारीरिक अंग असमर्थ हैं, उन्हें यदि पढ़ा-लिखा दिया जाय तो वे वाणी, विचार और बुद्धि से हो सकने वाले अध्यापकी आदि कार्य कर सकते हैं । गरीबों या असमर्थों को तात्कालिक, आरंभिक कुछ सहायता की आवश्यकता अवश्य होती है पर उनकी सच्ची सहायता यह है कि उन्हें समझा-बुझा कर काम करने, स्वतंत्र जीविका उपार्जन के लिए तैयार
अहंकार के परिमार्जन करते रहने का अवसर मिलता था । भीख माँग कर जीविका ग्रहण करने से विनय, नम्रता, निरभिमानता, कृतज्ञता एवं ऋणी होने का भाव उनके मन में जागृत बना रहता था । वे अपने में लोक सेवक, परोपकारी तथा महात्मा होने की अहम्मन्यता उत्पन्न न होने देने के लिए भिक्षुक की तुच्छ स्थिति ग्रहण करते थे। ऐसे भिक्षुकों को दान देते हुए देने वाले अपना मान अनुभव करते थे और लेने वाले निरभिमान बनते थे । इससे उन दोनों के बीच सुदृढ़ सौहार्द्र उत्पन्न होता था । भिक्षा वृत्ति करने वाले की अपेक्षा देने वाले को ही अधिक लाभ रहता था । इस परमार्थ और लोकहित की भावना से ब्रह्म जीवी महात्माओं के लिए भिक्षा का विधान किया गया था । इस प्रकार यज्ञार्थ भिक्षा ब्राह्मणों द्वारा ग्रहण की जाती थी । वे इस प्राप्त हुए धन को लोक कल्याण के, जनता की सुख-समृद्धि की वृद्धि के कार्यों में व्यय करते थे । अपना शरीर और मन उन्होंने परमार्थ में लगा रखा होता था । इन शरीरों की क्षुधा, तृषा, शील, धूप निवारण से रक्षा के लिए भी कुछ व्यय हो जाता था तो वह भी यज्ञ की आहुति के समान ही फलदायक होता था । ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा या भिक्षा देने का यही वास्तविक तात्पर्य था । ब्राह्मण इसीलिए भिक्षा जीवी होते थे । जो व्यक्ति या जो संस्था लोकहित के कार्यों में लगे हैं, वे ब्राह्मण हैं, उन्हें भिक्षा माँगने या प्राप्त करने का अधिकार है । यज्ञार्थ भिक्षा उचित है, शास्त्र सम्मत है । ब्रह्म कार्यों के लिए या ब्रह्मजीवी व्यक्तियों के लिए भिक्षा का प्रयोजन धर्म सम्मत है । इसके अतिरिक्त दूसरी श्रेणी 'विपद् वारणाय' है । संकटग्रस्त का संकट दूर करने के लिए सहायता देना मानवीय अन्तःकरण का दैवी स्वभाव है । इस दैवी तत्व को सुरक्षित रखने एवं विकसित करने के लिए मनुष्य में दया उत्पन्न होती है । दुखियों का दुःख देखकर हर एक सच्चे मनुष्य का हृदय करुणा से पूरित हो जाता है और आँखें छलक पड़ती है । इस दैवी प्रेरणा को तृप्त करने से ही मनुष्य परमात्मा के निकट पहुँचता है। दूसरों को कष्ट में देखकर जो लोग अपना कलेजा पत्थर का कर लेते हैं, निष्ठुरता धारण कर लेते हैं, अनुदारता एवं स्वार्थपरता में निमग्न होकर उनकी ओर उपेक्षा प्रकट करते हैं, ऐसे मनुष्य असुरता को प्राप्त होकर नर पिशाच का जीवन बिताते हैं । पीड़ितों की सहायता करना, दुखियों को दुःख से छुड़ाना आवश्यक है । इसके लिए शरीर से, बुद्धि से, धन से जैसे भी बन पड़े सहायता करनी चाहिए । 'विपद् वारणाय' भिक्षा देनी चाहिए । अग्निकाण्ड, जल प्रवाह, अकाल, चोरी, आक्रमण, अन्याय, दुर्दैव आदि किसी आकस्मिक कारण से जो लोग असहाय हो गये हैं, जिनकी अपनी सामर्थ्य नष्ट हो गई हो, गिर पड़े हों, अपने पैर पर आप खड़े न हो सकते हों, उनको सहायता देने की आवश्यकता है । जिनका शरीर एवं मस्तिष्क उपार्जन शक्ति के लिए बिलकुल अनुपयुक्त हो गया हो, उनको सहायता देने की जरूरत है । इस प्रकार के व्यक्तियों को पैसे की सहायता जरूरी होती है । परन्तु अन्य अनेक प्रकार के पीड़ित ऐसे हैं, जिन्हें पैसे की नहीं, शरीर एवं बुद्धि की सहायता आवश्यक होती है । शोक, चिन्ता, उद्विग्रता, क्लेश, कलह, निराशा, भय, ईर्ष्या, क्रोध, लोभ, तृष्णा, अहंकार, भ्रम, अज्ञान आदि मानसिक संकटों से अनेक मनुष्य ग्रसित होते हैं । वे उतना ही कष्ट पाते हैं जितना कि कठिन रोगों के रोगियों को कष्ट होता है। ऐसे लोगों की पैसे से सहायता हो जाय तो कुछ भी प्रयोजन सिद्ध नहीं होता, उनके लिए बुद्धि द्वारा, विवेक द्वारा जो सहायता पहुंचाई जाती है, वही सच्ची सहायता है । जिनके पास पैसा है, जो आसानी से अपने स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त पैसा खर्च कर सकते हैं, उन्हें मुफ्त दवा बाँटना निरर्थक है । उन्हें उपयोगी चिकित्सा विधि का मार्ग बताना एवं उस मार्ग तक पहुँचने में क्रियात्मक सहायता देना पर्याप्त है । किसी करोड़पति अमीर को तपैदिक हो जाय तो उसे मुफ्त दवा की आवश्यकता नहीं, उत्तम चिकित्सक तथा उत्तम चिकित्सा स्थान के परिचय की आवश्यकता है । इस प्रकार की सहायता देना और उपयुक्त साधन से मिला देना पर्याप्त है । गरीब आदमी को पैसा देने मात्र से काम नहीं चलता । उसे गरीबी से छुड़ाने के लिए किसी कारोबार में लगा देना होगा । बहुत से ऐसे गरीब हैं जिनकी शारीरिक योग्यताऐं कुछ काम करने योग्य है, बहुत से मनुष्य अंग-भंग, अंधे, असमर्थ भी होते हैं जो शरीर के अन्य अंगों से काम लेकर जीविका उपार्जन कर सकते हैं । जैसे लँगड़े आदमी हाथ से हो सकने वाले धंधे कर सकते हैं । अंधे, गूँगे, बहरे, कुबड़े भी किसी न किसी प्रकार की मजूरी कर सकते हैं । जिनके शारीरिक अंग असमर्थ हैं, उन्हें यदि पढ़ा-लिखा दिया जाय तो वे वाणी, विचार और बुद्धि से हो सकने वाले अध्यापकी आदि कार्य कर सकते हैं । गरीबों या असमर्थों को तात्कालिक, आरंभिक कुछ सहायता की आवश्यकता अवश्य होती है पर उनकी सच्ची सहायता यह है कि उन्हें समझा-बुझा कर काम करने, स्वतंत्र जीविका उपार्जन के लिए तैयार
सदर हॉस्पिटल परिसर में सिविल सर्जन ऑफिस के सामने गुरुवार की दोपहर से जाप कार्यकर्ताओं का चल रहे अनशन का स्थल देर शाम रणक्षेत्र में बदल गया। अनशन स्थल पर अचानक कुछ असामाजिक तत्व पहुंच गये और अनशनकारियों से हाथापाई करने लगे। अनशनकारियों के अनुसार मारपीट करने वाले असामाजिक तत्व डॉ. कुमार जीतेंद्र द्वारा भेजे गये थे। हालांकि डॉ. जीतेंद्र से इससे इनकार करते हुए आरोप को गलत बताया है। जाप के युवा विंग के अध्यक्ष रघुपति यादव ने बताया कि अनशन स्थल पर पहुंचने के साथ ही असामाजिक तत्वों ने कहा कि यहां से जल्द हट जाओ नहीं तो अंजाम बुरा होगा। इसके बाद जाप कार्यकर्ता सदर हॉस्पिटल के सामने सड़क पर उतर गये और जाम कर दिया। जाम कर रहे लोग डॉ. कुमार जीतेंद्र की गिरफ्तारी व बर्खास्त करने की मांग कर रहे थे। साथ ही मारपीट करने वाले लोगों को वीडियो फुटेज के माध्यम से चिह्नित करते हुए गिरफ्तारी और पीड़ित का सही इलाज कराने के लिए कह रहे थे। साथ ही जामस्थल पर वार्ता के लिए डीएम और सिविल सर्जन को बुलाने की मांग कर रहे थे। लोगों ने कहा कि कपिल भगत का भी गलत इलाज हुआ है। डीएम व सिविल सर्जन को आवेदन देने के बाद भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गयी है। जाम की सूचना पर नगर थाना पुलिस पहुंची। जाम कर रहे लोगों से वार्ता करने का प्रयास किया गया लेकिन वे लोग डीएम व सिविल सर्जन को बुलाने पर अड़े रहे। इसके बाद सदर एसडीओ अरुण प्रकाश और सदर एसडीपीओ पंकज कुमार जाम स्थल पर पहुंचे और आंदोलनकारियों से वार्ता की। आश्वासन दिया कि मारपीट करने वाले लोगों को चिह्नित कर गिरफ्तारी की जायेगी। साथ ही आरोपित डॉक्टर की गिरफ्तारी का आश्वासन दिया। इसके बाद चार घंटे से लगा जाम हट सका। दोनों अधिकारियों की पहल पर कपिल भगत को वार्ड में भर्ती कराया गया। इधर, अनशनकारी रघुपति यादव ने बताया कि मांगों को ले अनशन जारी रहेगा। चार घंटे तक जाम से आवागमन प्रभावित हुआ और लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। अनशन की अध्यक्षता ब्रजेश कुमार सिंह ने की और संचालन छात्र संगठन के प्रदेश सचिव राजन यादव ने किया। अनशन युवा अध्यक्ष रघुपति यादव, प्रखंड अध्यक्ष संतोष कुमार, छात्र संगठन अध्यक्ष रितेश कुमार और विवि अध्यक्ष सुजीत कुशवाहा ने शुरू किया है। अध्यक्ष रितेश कुमार ने कहा कि डॉक्टर गरीब मरीजों का शोषण करते हैं। उनके खिलाफ जन अधिकार पार्टी की लड़ाई जारी रहेगी। सुजीत कुशवाहा ने कहा कि मंजू देवी व कपिल भगत को बिना न्याय दिलाए और डॉ. कुमार जीतेंद्र को बर्खास्त किये बिना अनशन समाप्त नहीं होगा। संतोष कुमार ने कहा कि सदर अस्पताल के डॉक्टर रोगी को बहला-फुसलाकर अपने निजी क्लीनिक में ले जाकर मोटी रकम वसूलते हैं। जिलाध्यक्ष ब्रजेश कुमार सिंह ने कहा कि निजी क्लिनिक में डॉक्टर अपना फीस न्यूनतम 100 रुपये करें। जांच के नाम पर अवैध वसूली का भी आरोप लगाया। पार्टी प्रवक्ता बबन यादव ने कहा कि अस्पताल को सुधारने के लिए अनशन जारी रहेगा। मौके पर जिला सचिव हरेकृष्णा सिंह, बैजनाथ सिंह, जेएन उपाध्याय, बंटी कुमार, भीम यादव, कपिल भगत, सूर्यनाथ सिंह, मुकेश, जितेन शर्मा, टुनटुन साह सहित अन्य शामिल थे। सदर हॉस्पिटल में मरीज मंजू देवी की ऑपरेशन के बाद बिगड़ी स्थिति के संबंध में डॉ. कुमार जीतेन्द्र पर लगे आरोप के मामले में डॉक्टरों की तीन सदस्यीय टीम ने अपनी रिपोर्ट दे दी है। सिविल सर्जन ने जन अधिकार युवा परिषद लोकतांत्रिक के अध्यक्ष द्वारा लगाये गये आरोप के बाद तीन सदस्यीय जांच टीम गठित कर 24 घंटे में रिपोर्ट मांगी थी। जांच टीम में एसीएमओ, अपर उपाधीक्षक और डीआईओ को शामिल किया गया था। जांच टीम ने गुरुवार को रिपोर्ट सिविल सर्जन को सौंप दी है। इसमें कहा गया है कि किसी की लापरवाही प्रतीत नहीं हो रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मरीज अभी अस्पताल में भर्ती है। ऑपरेशन में कुछ कम्पलीकिशेन भी होते हैं। इसमें इंफेक्शन सबसे बड़ा कॉमन कम्पलीकिशेन है। पोस्ट ऑपरेटिव देखने से पता चलता है कि हड्डी में जोरदार इंफेक्शन है। इंफेक्शन की वजह से ही डिस्चार्ज होता रहा गया और मरीज का घाव ठीक नहीं हो पाया। बोर्ड द्वारा निर्णय लिया गया कि प्लांट को ही निकाल दिया जाये। प्लांट को निकाल दिया गया और मरीज राहत में है। सिविल सर्जन की ओर से गठित डॉक्टरों की तीन सदस्यीय टीम ने जांच रिपोर्ट सौंप दी है। वहीं डीएम ने डॉ. कुमार जीतेन्द्र पर लगे आरोपों की जांच के लिए डीडीसी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय टीम गठित किया है। इसमें सिविल सर्जन और सदर हॉस्पिटल के अधीक्षक को शामिल किया गया है। टीम को एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है। इधर, आईएमए अध्यक्ष डॉ. बिजय कुमार सिंह ने कहा है कि आंदोलन कर रहे लोगों को संयम बरतना चाहिए। डीएम और सिविल सर्जन की ओर से गठित जांच टीम का रिपोर्ट आने तक इंतजार करना चाहिए। रिपोर्ट आने के बाद भी वार्ता का विकल्प खुला रखना चाहिए।
सदर हॉस्पिटल परिसर में सिविल सर्जन ऑफिस के सामने गुरुवार की दोपहर से जाप कार्यकर्ताओं का चल रहे अनशन का स्थल देर शाम रणक्षेत्र में बदल गया। अनशन स्थल पर अचानक कुछ असामाजिक तत्व पहुंच गये और अनशनकारियों से हाथापाई करने लगे। अनशनकारियों के अनुसार मारपीट करने वाले असामाजिक तत्व डॉ. कुमार जीतेंद्र द्वारा भेजे गये थे। हालांकि डॉ. जीतेंद्र से इससे इनकार करते हुए आरोप को गलत बताया है। जाप के युवा विंग के अध्यक्ष रघुपति यादव ने बताया कि अनशन स्थल पर पहुंचने के साथ ही असामाजिक तत्वों ने कहा कि यहां से जल्द हट जाओ नहीं तो अंजाम बुरा होगा। इसके बाद जाप कार्यकर्ता सदर हॉस्पिटल के सामने सड़क पर उतर गये और जाम कर दिया। जाम कर रहे लोग डॉ. कुमार जीतेंद्र की गिरफ्तारी व बर्खास्त करने की मांग कर रहे थे। साथ ही मारपीट करने वाले लोगों को वीडियो फुटेज के माध्यम से चिह्नित करते हुए गिरफ्तारी और पीड़ित का सही इलाज कराने के लिए कह रहे थे। साथ ही जामस्थल पर वार्ता के लिए डीएम और सिविल सर्जन को बुलाने की मांग कर रहे थे। लोगों ने कहा कि कपिल भगत का भी गलत इलाज हुआ है। डीएम व सिविल सर्जन को आवेदन देने के बाद भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गयी है। जाम की सूचना पर नगर थाना पुलिस पहुंची। जाम कर रहे लोगों से वार्ता करने का प्रयास किया गया लेकिन वे लोग डीएम व सिविल सर्जन को बुलाने पर अड़े रहे। इसके बाद सदर एसडीओ अरुण प्रकाश और सदर एसडीपीओ पंकज कुमार जाम स्थल पर पहुंचे और आंदोलनकारियों से वार्ता की। आश्वासन दिया कि मारपीट करने वाले लोगों को चिह्नित कर गिरफ्तारी की जायेगी। साथ ही आरोपित डॉक्टर की गिरफ्तारी का आश्वासन दिया। इसके बाद चार घंटे से लगा जाम हट सका। दोनों अधिकारियों की पहल पर कपिल भगत को वार्ड में भर्ती कराया गया। इधर, अनशनकारी रघुपति यादव ने बताया कि मांगों को ले अनशन जारी रहेगा। चार घंटे तक जाम से आवागमन प्रभावित हुआ और लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। अनशन की अध्यक्षता ब्रजेश कुमार सिंह ने की और संचालन छात्र संगठन के प्रदेश सचिव राजन यादव ने किया। अनशन युवा अध्यक्ष रघुपति यादव, प्रखंड अध्यक्ष संतोष कुमार, छात्र संगठन अध्यक्ष रितेश कुमार और विवि अध्यक्ष सुजीत कुशवाहा ने शुरू किया है। अध्यक्ष रितेश कुमार ने कहा कि डॉक्टर गरीब मरीजों का शोषण करते हैं। उनके खिलाफ जन अधिकार पार्टी की लड़ाई जारी रहेगी। सुजीत कुशवाहा ने कहा कि मंजू देवी व कपिल भगत को बिना न्याय दिलाए और डॉ. कुमार जीतेंद्र को बर्खास्त किये बिना अनशन समाप्त नहीं होगा। संतोष कुमार ने कहा कि सदर अस्पताल के डॉक्टर रोगी को बहला-फुसलाकर अपने निजी क्लीनिक में ले जाकर मोटी रकम वसूलते हैं। जिलाध्यक्ष ब्रजेश कुमार सिंह ने कहा कि निजी क्लिनिक में डॉक्टर अपना फीस न्यूनतम एक सौ रुपयापये करें। जांच के नाम पर अवैध वसूली का भी आरोप लगाया। पार्टी प्रवक्ता बबन यादव ने कहा कि अस्पताल को सुधारने के लिए अनशन जारी रहेगा। मौके पर जिला सचिव हरेकृष्णा सिंह, बैजनाथ सिंह, जेएन उपाध्याय, बंटी कुमार, भीम यादव, कपिल भगत, सूर्यनाथ सिंह, मुकेश, जितेन शर्मा, टुनटुन साह सहित अन्य शामिल थे। सदर हॉस्पिटल में मरीज मंजू देवी की ऑपरेशन के बाद बिगड़ी स्थिति के संबंध में डॉ. कुमार जीतेन्द्र पर लगे आरोप के मामले में डॉक्टरों की तीन सदस्यीय टीम ने अपनी रिपोर्ट दे दी है। सिविल सर्जन ने जन अधिकार युवा परिषद लोकतांत्रिक के अध्यक्ष द्वारा लगाये गये आरोप के बाद तीन सदस्यीय जांच टीम गठित कर चौबीस घंटाटे में रिपोर्ट मांगी थी। जांच टीम में एसीएमओ, अपर उपाधीक्षक और डीआईओ को शामिल किया गया था। जांच टीम ने गुरुवार को रिपोर्ट सिविल सर्जन को सौंप दी है। इसमें कहा गया है कि किसी की लापरवाही प्रतीत नहीं हो रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मरीज अभी अस्पताल में भर्ती है। ऑपरेशन में कुछ कम्पलीकिशेन भी होते हैं। इसमें इंफेक्शन सबसे बड़ा कॉमन कम्पलीकिशेन है। पोस्ट ऑपरेटिव देखने से पता चलता है कि हड्डी में जोरदार इंफेक्शन है। इंफेक्शन की वजह से ही डिस्चार्ज होता रहा गया और मरीज का घाव ठीक नहीं हो पाया। बोर्ड द्वारा निर्णय लिया गया कि प्लांट को ही निकाल दिया जाये। प्लांट को निकाल दिया गया और मरीज राहत में है। सिविल सर्जन की ओर से गठित डॉक्टरों की तीन सदस्यीय टीम ने जांच रिपोर्ट सौंप दी है। वहीं डीएम ने डॉ. कुमार जीतेन्द्र पर लगे आरोपों की जांच के लिए डीडीसी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय टीम गठित किया है। इसमें सिविल सर्जन और सदर हॉस्पिटल के अधीक्षक को शामिल किया गया है। टीम को एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है। इधर, आईएमए अध्यक्ष डॉ. बिजय कुमार सिंह ने कहा है कि आंदोलन कर रहे लोगों को संयम बरतना चाहिए। डीएम और सिविल सर्जन की ओर से गठित जांच टीम का रिपोर्ट आने तक इंतजार करना चाहिए। रिपोर्ट आने के बाद भी वार्ता का विकल्प खुला रखना चाहिए।
भोजपुरी सिनेमा में हॉट जोड़ियों की बात की जाए तो इसमें सबसे पहले नाम आता है सुपर स्टार पवन सिंह और एक्ट्रेस मोनालिसा का। इनकी जोड़ी भोजपुरी के दर्शकों को बहुत पसंद आती है। इस दिनों इस जोड़ी का गाना सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। गाने के बोल हैं 'कईसे कलइया थमाई पिया'। यह गाना यूट्यूब पर धूम मचा रहा है। गाने में मोनालिसा सुपरस्टार पवन सिंह के साथ रोमांस करती हुई नजर आ रही हैं। वीडियो में मोनालिसा और पवन सिंह की सिजलिंग केमिस्ट्री को फैंस काफी पसंद कर रहे हैं। इस गाने को यूट्यूब पर 27 मिलियन से अधिक लोग देख चुके हैं। पवन सिंह और मोनालिसा के इस सुपरहिट गाने में पलक ने आवाज दी है। इसके बोल विनय बिहारी ने लिखे हैं। यह गाना भोजपुरी फिल्म 'देश परदेस' का है। फिल्म में बॉलीवुड एक्टर धर्मेंद्र, कादर ख़ान, पवन सिंह, मोनालिसा, संजड पांडे और आनंद मोहन मुख्य भूमिका में नजर आए थे। पवन सिंह और मोनालिसा कई सॉन्ग और फिल्मों में साथ काम कर चुके हैं।
भोजपुरी सिनेमा में हॉट जोड़ियों की बात की जाए तो इसमें सबसे पहले नाम आता है सुपर स्टार पवन सिंह और एक्ट्रेस मोनालिसा का। इनकी जोड़ी भोजपुरी के दर्शकों को बहुत पसंद आती है। इस दिनों इस जोड़ी का गाना सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। गाने के बोल हैं 'कईसे कलइया थमाई पिया'। यह गाना यूट्यूब पर धूम मचा रहा है। गाने में मोनालिसा सुपरस्टार पवन सिंह के साथ रोमांस करती हुई नजर आ रही हैं। वीडियो में मोनालिसा और पवन सिंह की सिजलिंग केमिस्ट्री को फैंस काफी पसंद कर रहे हैं। इस गाने को यूट्यूब पर सत्ताईस मिलियन से अधिक लोग देख चुके हैं। पवन सिंह और मोनालिसा के इस सुपरहिट गाने में पलक ने आवाज दी है। इसके बोल विनय बिहारी ने लिखे हैं। यह गाना भोजपुरी फिल्म 'देश परदेस' का है। फिल्म में बॉलीवुड एक्टर धर्मेंद्र, कादर ख़ान, पवन सिंह, मोनालिसा, संजड पांडे और आनंद मोहन मुख्य भूमिका में नजर आए थे। पवन सिंह और मोनालिसा कई सॉन्ग और फिल्मों में साथ काम कर चुके हैं।
यहां बताया गया है कि ऐसा कैसे होता है। एक सेंटीमीटर से कम नहीं है, तो नमक पांच सेंटीमीटर की एक परत है, तो वसा की एक परत, और इतने पर, जब तक सभी वसा समाप्त करने के लिए है या नहीं नहीं जा रहा है पूरे बैरल व्यस्त हो सकता है - अच्छी तरह से धोया और proshparennoy बैरल के निचले भाग में मोटे नमक की एक परत डालना। ऊपर से नमक की एक परत है इस पद्धति से आप उत्पाद को बैरल में स्टोर करने के लिए ठंडे स्थान पर महीनों तक सूरज से संरक्षित कर सकते हैं। इस मामले में, बेकन की ऐसी एक रोचक विशेषता है - इसे नमकीन नहीं किया जा सकता है, क्योंकि यह आवश्यक होने पर उतना ही नमक लेगा। तो, लहसुन के साथ कसा हुआ चिकना कसा हुआ है? पहले आपको सही टुकड़े चुनने की जरूरत है ऐसा प्रतीत होता है कि वसा मोटी है और कुछ खास नहीं हो सकता है वास्तव में, सुअर के किनारे से वसा पीठ से निकाले जाने वाले टुकड़ों से बहुत अलग है, या, पेट से या पीठ के निचले हिस्से से कहते हैं, हर कोई अपना स्वयं का स्वाद लेता है - जो सबसे अच्छा पसंद करता है। यह मांस की परतों पर भी लागू होता है। अगर बहुत सारी परतें हैं, तो साबुन को सूखा तरीके से साबुन से निकालकर, भारी मात्रा में नमकीन बनाना, जो कि एक देहाती, बुरी तरह से तैयार उत्पाद बहुत मुश्किल हो जाएगा। लेकिन हम लहसुन के साथ ही उस प्रकार के लार्ड से प्यार करते हैं। इस मामले में इस नुस्खा में अपनी चालाक है, ताकि मांस के स्ट्रिप्स के कारण टुकड़े बहुत मुश्किल न हो जाएं। आप सिद्धांत, इस में विशेष रूप से जटिल कुछ भी नहीं। आपको बस कुछ सरल नियमों का पालन करना होगा। यहां बताया गया है कि लहसुन के साथ कड़ाही कसा हुआ है। इसलिए, मैं मेले में लेता हूं, जो महीने के हर अंतिम रविवार को होता है, सुअर के किनारे से सबसे ताज़ा वसा, और इसकी मोटाई चार से पांच सेंटीमीटर से अधिक नहीं होती है। मैं देखता हूं, मांस की परतें होने चाहिए। घर में, मैंने सात-दस सेंटीमीटर लंबा और दो से तीन चौड़े छोटे टुकड़ों में परत काटा। एक तेज चाकू के साथ मैं प्रत्येक टुकड़े में एक टुकड़ा बना देता हूं- किनारे पर। यदि एक इच्छा है - दो पक्षों से प्रत्येक चीरा में मैं लहसुन के प्लास्टिक पर रखता हूं - यह एक अद्भुत सुगंध देता है और स्वाद को काफी सुधार करता है। अब रेफ्रिजरेटर में चीन डालें कुछ जमींदारियों का कहना है कि वे पहले गर्म पानी में नमकीन बेकन डालते हैं, लेकिन मैं इसे पसंद करता हूं जब चीन को रेफ्रिजरेटर में सीधे रखा जाता है, बहुत ऊपर। पोत के तल में कोई छेद नहीं जिसके परिणामस्वरूप नमकीन पानी निकालना है! कुछ घंटों के बाद, बेकन के साथ सॉसपेन शुरू होता हैबिल्कुल स्वादिष्ट खुशबू फैल गई सालो का रस आवंटित करना शुरू होता है, जो किसी भी मामले में नाली जाने की ज़रूरत नहीं है - इसे रहने दें यह रस है जो वसा कोमलता और यहां तक कि कोमलता भी देता है। वैसे, सात घंटे बाद आप पहले से ही वसा खा सकते हैं। यहाँ कैसे लहसुन के साथ चरबी अचार, कैसे किसी भी मामले में एक दिन में उपयोग के लिए पूरी तरह से तैयार है। पहले इसे फ्रीजर में डाल देना बेहतर होगा, अन्यथा वसा बहुत निविदा बनने के लिए निकलेगा।
यहां बताया गया है कि ऐसा कैसे होता है। एक सेंटीमीटर से कम नहीं है, तो नमक पांच सेंटीमीटर की एक परत है, तो वसा की एक परत, और इतने पर, जब तक सभी वसा समाप्त करने के लिए है या नहीं नहीं जा रहा है पूरे बैरल व्यस्त हो सकता है - अच्छी तरह से धोया और proshparennoy बैरल के निचले भाग में मोटे नमक की एक परत डालना। ऊपर से नमक की एक परत है इस पद्धति से आप उत्पाद को बैरल में स्टोर करने के लिए ठंडे स्थान पर महीनों तक सूरज से संरक्षित कर सकते हैं। इस मामले में, बेकन की ऐसी एक रोचक विशेषता है - इसे नमकीन नहीं किया जा सकता है, क्योंकि यह आवश्यक होने पर उतना ही नमक लेगा। तो, लहसुन के साथ कसा हुआ चिकना कसा हुआ है? पहले आपको सही टुकड़े चुनने की जरूरत है ऐसा प्रतीत होता है कि वसा मोटी है और कुछ खास नहीं हो सकता है वास्तव में, सुअर के किनारे से वसा पीठ से निकाले जाने वाले टुकड़ों से बहुत अलग है, या, पेट से या पीठ के निचले हिस्से से कहते हैं, हर कोई अपना स्वयं का स्वाद लेता है - जो सबसे अच्छा पसंद करता है। यह मांस की परतों पर भी लागू होता है। अगर बहुत सारी परतें हैं, तो साबुन को सूखा तरीके से साबुन से निकालकर, भारी मात्रा में नमकीन बनाना, जो कि एक देहाती, बुरी तरह से तैयार उत्पाद बहुत मुश्किल हो जाएगा। लेकिन हम लहसुन के साथ ही उस प्रकार के लार्ड से प्यार करते हैं। इस मामले में इस नुस्खा में अपनी चालाक है, ताकि मांस के स्ट्रिप्स के कारण टुकड़े बहुत मुश्किल न हो जाएं। आप सिद्धांत, इस में विशेष रूप से जटिल कुछ भी नहीं। आपको बस कुछ सरल नियमों का पालन करना होगा। यहां बताया गया है कि लहसुन के साथ कड़ाही कसा हुआ है। इसलिए, मैं मेले में लेता हूं, जो महीने के हर अंतिम रविवार को होता है, सुअर के किनारे से सबसे ताज़ा वसा, और इसकी मोटाई चार से पांच सेंटीमीटर से अधिक नहीं होती है। मैं देखता हूं, मांस की परतें होने चाहिए। घर में, मैंने सात-दस सेंटीमीटर लंबा और दो से तीन चौड़े छोटे टुकड़ों में परत काटा। एक तेज चाकू के साथ मैं प्रत्येक टुकड़े में एक टुकड़ा बना देता हूं- किनारे पर। यदि एक इच्छा है - दो पक्षों से प्रत्येक चीरा में मैं लहसुन के प्लास्टिक पर रखता हूं - यह एक अद्भुत सुगंध देता है और स्वाद को काफी सुधार करता है। अब रेफ्रिजरेटर में चीन डालें कुछ जमींदारियों का कहना है कि वे पहले गर्म पानी में नमकीन बेकन डालते हैं, लेकिन मैं इसे पसंद करता हूं जब चीन को रेफ्रिजरेटर में सीधे रखा जाता है, बहुत ऊपर। पोत के तल में कोई छेद नहीं जिसके परिणामस्वरूप नमकीन पानी निकालना है! कुछ घंटों के बाद, बेकन के साथ सॉसपेन शुरू होता हैबिल्कुल स्वादिष्ट खुशबू फैल गई सालो का रस आवंटित करना शुरू होता है, जो किसी भी मामले में नाली जाने की ज़रूरत नहीं है - इसे रहने दें यह रस है जो वसा कोमलता और यहां तक कि कोमलता भी देता है। वैसे, सात घंटे बाद आप पहले से ही वसा खा सकते हैं। यहाँ कैसे लहसुन के साथ चरबी अचार, कैसे किसी भी मामले में एक दिन में उपयोग के लिए पूरी तरह से तैयार है। पहले इसे फ्रीजर में डाल देना बेहतर होगा, अन्यथा वसा बहुत निविदा बनने के लिए निकलेगा।
जमा रहे थे, उनका सवथा बाहर निकाल दिया जाय । चूकि उत्तर और दक्षिण के बीच मे मालवा मुम्य राजमाग था, इस पर अधिकार रखना साम्राज्य की रक्षा के लिए सदैव आवश्यक समया जाता था । स्वय औरगजेब मालवा वा ध्यान रखता था और फरवरी १७०४ ई० म अपन विश्वस्त मेनापति गाजीउद्दीन द्वारा उसने दिपालपुर तथा उज्जन के समीप कई मराठा सरदारा - यथा नेमाजी शिंदे, पर्सोजी भासले, वेशवपत पिंगले आ - वो बुरी तरह पराजित कर दिया था। परन्तु मराठा पर किसी प्रकार भी पूर्ण नियंत्रण स्थापित न हो सका था और व दृढतापूवव सदैव लूटमार करत रहत थे । अत म, फरु खसियर ने १७१३ ई० म सवाई जयसिंह को मालवा के शासन पर नियुक्त किया। जयसिंह की इच्छा भी थी कि वह मालवा वा गठबधन अपने पैतृक राज्य जयपुर से कर ले । १७१५ ई० के आरम्भिक मासा में खाण्डेराव दाभाड तथा कान्होजी भासले ने मालवा मे प्रवेश किया और उज्जैन तथा समीपवर्ती प्रदेशा को लूटा और जला दिया जयसिंह भी उनसे लडने को तैयार था अत २० मई को उसने उनको पूर्णतया परास्त कर दिया और उनके लूटे हुए सार माल और सम्पत्ति को उनसे पुन प्राप्त कर लिया। परन्तु जयसिंह की सफलता अल्पकालीन सिद्ध हुई और जब बाद वो उसको वापस बुला लिया गया, ता मराठा ने क्रूरतापूवन अपने आक्रमण पुन प्रारम्भ कर दिये । सम्राट के पास योग्य सेनापति तथा समय साधन थे । सयद-व चु निजामुल्मुल्ल जमीनखाँ, सभादतखा जयसिंह अजीतसिंह सभी वीर तथा योग्य पुरुष थे परन्तु उहोने कभी सम्मिलित रूप से प्रयास न किया और इसी वारण व असफल सिद्ध हुए। इसका मुख्य कारण सम्राट की छलपूर्ण नीति तथा उनके प्रति अविश्वास था। उसके प्रत्यक अधिकारी तथा दरवारी के जीवन के लिए मकट उपस्थित रहता था और इसीलिए साम्राज्य की सवा म वे अपना उत्तम प्रयत्न न कर भक्त थ । इतिहासकार प्राय सय वधुवा की यह आलोचना किया करते हैं कि उन्हान सीधे दिल्ली तक मराठा को निर्विघ्न माग दे दिया, परन्तु वास्तव में ऐसी बात थी । मराठी के दमन का उन्हान भरसक प्रयत्न किया और हुसैनयत्री ने तो दक्षिण में अपन प्रथम दो वर्षों म मराठा को बागलान तथा वानदश म न घुसने देने का वठार प्रयत्न किया । परन्तु अत मे जब सैयद बदुओ को यह पात हुआ कि अपने ही स्वामी की आर से उनके अपने जीवन तथा स्थिति के विषय में भारी सपट उपस्थित है तो व अपनी नीति बनने और मराठा की मित्रता प्राप्त करने के लिए विवश हा गये । इसी भांति पर्याप्त समय तक शाहू की स्थिति भी सुरक्षित न रही थी । उसको अपने पशवा के समान योग्य सेनापति न मिल सका था। धनाजी का पुत्र चन्द्रमेन उस पद पर नियुक्त किया गया था परंतु उसने स्पष्ट विश्वाम घात किया । उसका भाई सताजी, जिसको शाहू ने १७११ ई० मे वह पद दिया, निरा मूख था। उसमे अभियान का योजना बनाने को कोई क्षमता न थी । १७१२ ई० म उसका पद मानसिंह मारे को लिया गया। वह स्वामिभक्त सेवक था परन्तु इस काय मे वह साधारण व्यक्ति से अधिक योग्य न था, और दुभाग्यवश उसका स्वास्थ्य भी बिगड गया । तब शाहू को खाण्डेराव दाभाडे का जाश्रय लेना पड़ा । ११ जनवरी १७१७ ई० को शाहू न उसको सेनापति के पद पर नियुक्त किया। कुछ समय तक जो उसने ठीक काय किया परन्तु वृद्धावस्था तथा निबलता के कारण वह राजनीतिक परिस्थितिया की जटिलताओ और दिल्ली दरवार मे हा रहे क्रांतिकारी परिवतनो द्वारा उद्भूत नवयुग को माँगा के समक्ष असमर्थ रहा । पेशवा की योजनाओं तथा कार्यक्रमों मे हृदय से भाग लो में भी वह असफल रहा। इस कारण उसको अपना स्थान छोडना पडा तथा होनहार नवयुवक बाजीराव के उदीयमान नक्षत्र को प्रकाशमान होने का शुभ अवसर प्राप्त हो गया । दो वर्ष तक सयद हुसनअली मराठा की आक्रामक वायवाहियो वे दमन म प्रयत्नशील रहन के साथ-साथ वह स्वय अपने विरुद्ध सम्राट द्वारा रचे जान वाने पडयात्रा के प्रति पूर्ण सजग रहा। उसव भाई सयद अब्दुल्ला की स्थिति भी दिल्ली में निरंतर विगडती जा रही थी और वह इतनी सदिग्ध हो गयी थी कि अपन जीवन व प्रति भयभीत होकर उमन हुमैनअली को समस्त माय सज्जा व साथ दिल्ली में अपनी स्थिति की रक्षा के लिए दक्षिण से वापस बुला लिया। इस पर हुमनअली ने अपने मित्रा तथा अनुचरा के साथ यथष्ट परामश किया और वह इस निश्चय पर पहुँचा कि उसकी सफलता का एकमा अवसर इसी में है कि वह मराठा और विशेषकर शाहू और उसक समयवा वो सद्भावना तथा सहयोग प्राप्त कर ले। दक्षिण से अपनी अनु पस्थिति के दौरान वह उनका विराध नही चाहता था क्योंकि यदि दक्षिण की आर म मराठा व और उत्तर की ओर से सम्राट के दल के बीच में वे फंस जात ता दोना मन्त्री आमानी में कुचले जा सकत थे। शाहू के इतिहास का नवव कहता है २ जन सम्राट पर खसियर न निजामुरमुल्य वा वापस बुला दिया तथा समद अता कारण वारा नियुक्त कर दिया तो संयद न करजा मल्हार नामक एक व्यक्ति को अपना परामशलता नियुक्त किया। Shahus Chronicle पृ० २६ तथा ३६ । यह एक प्रसिद्ध मराठा कूटनीतिज्ञ था, जा जिंजी मे सचिव के रूप में राजाराम की सवा बहुत पहले त्याग चुका था और अन बनारस में रह रहा था। मम्राट को जब इस चतुर तथा उपयोगी व्यक्ति का पता चला, तो वह उसे अपने व्यक्तिगत अनुनय द्वारा दिल्ली लाया और सयद हुसैनअली के साथ दक्षिण भेज दिया ताकि वह मराठा सम्बन्धी विषया पर उसके विश्वस्त परामशक के रूप मे वाय करे । राजदूत के रूप में शक्रजी की सेवा के लिए सम्राट न उचित धन वा प्रबंध भी कर दिया ।' ४ हसनअली का मराठा सहायता प्राप्त करना - नगुण्डवार उपनामधारी महाराष्ट्रीय ब्राह्मण इस शक्रजी मल्हार में राजनीतिक विषयों के लिए विलक्षण बुद्धि थी। १६५६ ई० में वह छत्रपति राजाराम के साथ जिजी गया था और बाद में किसी बात पर विगडवर बनारम चला गया था । परन्तु उसके मन में विकल महत्त्वाकाक्षा की भावना प्रवेश कर गयो और सैयद हुसैनअली के साथ दक्षिण जाने के लिए सम्राट की नियुक्ति का उसने तुरत स्वीकार कर लिया । उसन शोघ्र ही हुसनअली की कृपा प्राप्त कर ली थी और अपन नवीन पद पर वह अमूल्य सिद्ध हुआ, क्याकि स्वय हुमनअली मराठा से सवथा अपरिचित था । व्यक्तिगत प्रतिनिधिया तथा नायका द्वारा शाहू तथा उसके पशवा बालाजी वो शक्रजी की उपस्थिति शीघ्र ही ज्ञात हो गयी । जब दिल्ली से अपन भाई का संयद हुमनअली को अत्यावश्यक बुलावा आया तब उसका ध्यान सर्वप्रथम इस जार गया कि वह मराठा के विरुद्ध वन अपना युद्ध ही वादन करद, वरन् उनकी मित्रता तथा मनिक सहायता भी प्राप्त कर ले जिसमे वह अपनी भावी याजनाजा को सफलतापूवक जारी रख मवे । उसने शवरजी को सनारा जाकर शाहू से मन्त्री सम्ब घ स्थापित करने को आना दी। १७१० ३० के आरम्भ में शक्रजी सतारा पहुँच गया। शाहू तथा उसके परामशका ने इस दूत के आगमन का ईश्वरप्रदत्त भवसर के रूप म माना क्याकि इसके द्वारा उह दिल्ली से सीधा सम्पव स्थापित हान और उन वलशकर युद्धा की समाप्ति का विश्वास था जो उनकी शक्ति तथा साधना वा- विशेषकर शाहू की कारागार मुक्ति के बाद - उच्छद कर रहे थ अपन राज्य को सुव्यवस्थित करने में शाहू तथा बालाजी पहले स ही हनु हो चुके थे। दस वर्ष व्यतीत होन के बाद भी उनकी दशा म वाई सुधार न हुआ था । आन्तरिक तथा बाह्य वष्ट अपने अनुयायिया मे फूट तथा नपीखाँ तथा मियार उल-मुनसारोन वा लेखक दोना ही शकरजी के इस दौत्य की स्पष्ट व्यास्या वरत हैं ।
जमा रहे थे, उनका सवथा बाहर निकाल दिया जाय । चूकि उत्तर और दक्षिण के बीच मे मालवा मुम्य राजमाग था, इस पर अधिकार रखना साम्राज्य की रक्षा के लिए सदैव आवश्यक समया जाता था । स्वय औरगजेब मालवा वा ध्यान रखता था और फरवरी एक हज़ार सात सौ चार ईशून्य म अपन विश्वस्त मेनापति गाजीउद्दीन द्वारा उसने दिपालपुर तथा उज्जन के समीप कई मराठा सरदारा - यथा नेमाजी शिंदे, पर्सोजी भासले, वेशवपत पिंगले आ - वो बुरी तरह पराजित कर दिया था। परन्तु मराठा पर किसी प्रकार भी पूर्ण नियंत्रण स्थापित न हो सका था और व दृढतापूवव सदैव लूटमार करत रहत थे । अत म, फरु खसियर ने एक हज़ार सात सौ तेरह ईशून्य म सवाई जयसिंह को मालवा के शासन पर नियुक्त किया। जयसिंह की इच्छा भी थी कि वह मालवा वा गठबधन अपने पैतृक राज्य जयपुर से कर ले । एक हज़ार सात सौ पंद्रह ईशून्य के आरम्भिक मासा में खाण्डेराव दाभाड तथा कान्होजी भासले ने मालवा मे प्रवेश किया और उज्जैन तथा समीपवर्ती प्रदेशा को लूटा और जला दिया जयसिंह भी उनसे लडने को तैयार था अत बीस मई को उसने उनको पूर्णतया परास्त कर दिया और उनके लूटे हुए सार माल और सम्पत्ति को उनसे पुन प्राप्त कर लिया। परन्तु जयसिंह की सफलता अल्पकालीन सिद्ध हुई और जब बाद वो उसको वापस बुला लिया गया, ता मराठा ने क्रूरतापूवन अपने आक्रमण पुन प्रारम्भ कर दिये । सम्राट के पास योग्य सेनापति तथा समय साधन थे । सयद-व चु निजामुल्मुल्ल जमीनखाँ, सभादतखा जयसिंह अजीतसिंह सभी वीर तथा योग्य पुरुष थे परन्तु उहोने कभी सम्मिलित रूप से प्रयास न किया और इसी वारण व असफल सिद्ध हुए। इसका मुख्य कारण सम्राट की छलपूर्ण नीति तथा उनके प्रति अविश्वास था। उसके प्रत्यक अधिकारी तथा दरवारी के जीवन के लिए मकट उपस्थित रहता था और इसीलिए साम्राज्य की सवा म वे अपना उत्तम प्रयत्न न कर भक्त थ । इतिहासकार प्राय सय वधुवा की यह आलोचना किया करते हैं कि उन्हान सीधे दिल्ली तक मराठा को निर्विघ्न माग दे दिया, परन्तु वास्तव में ऐसी बात थी । मराठी के दमन का उन्हान भरसक प्रयत्न किया और हुसैनयत्री ने तो दक्षिण में अपन प्रथम दो वर्षों म मराठा को बागलान तथा वानदश म न घुसने देने का वठार प्रयत्न किया । परन्तु अत मे जब सैयद बदुओ को यह पात हुआ कि अपने ही स्वामी की आर से उनके अपने जीवन तथा स्थिति के विषय में भारी सपट उपस्थित है तो व अपनी नीति बनने और मराठा की मित्रता प्राप्त करने के लिए विवश हा गये । इसी भांति पर्याप्त समय तक शाहू की स्थिति भी सुरक्षित न रही थी । उसको अपने पशवा के समान योग्य सेनापति न मिल सका था। धनाजी का पुत्र चन्द्रमेन उस पद पर नियुक्त किया गया था परंतु उसने स्पष्ट विश्वाम घात किया । उसका भाई सताजी, जिसको शाहू ने एक हज़ार सात सौ ग्यारह ईशून्य मे वह पद दिया, निरा मूख था। उसमे अभियान का योजना बनाने को कोई क्षमता न थी । एक हज़ार सात सौ बारह ईशून्य म उसका पद मानसिंह मारे को लिया गया। वह स्वामिभक्त सेवक था परन्तु इस काय मे वह साधारण व्यक्ति से अधिक योग्य न था, और दुभाग्यवश उसका स्वास्थ्य भी बिगड गया । तब शाहू को खाण्डेराव दाभाडे का जाश्रय लेना पड़ा । ग्यारह जनवरी एक हज़ार सात सौ सत्रह ईशून्य को शाहू न उसको सेनापति के पद पर नियुक्त किया। कुछ समय तक जो उसने ठीक काय किया परन्तु वृद्धावस्था तथा निबलता के कारण वह राजनीतिक परिस्थितिया की जटिलताओ और दिल्ली दरवार मे हा रहे क्रांतिकारी परिवतनो द्वारा उद्भूत नवयुग को माँगा के समक्ष असमर्थ रहा । पेशवा की योजनाओं तथा कार्यक्रमों मे हृदय से भाग लो में भी वह असफल रहा। इस कारण उसको अपना स्थान छोडना पडा तथा होनहार नवयुवक बाजीराव के उदीयमान नक्षत्र को प्रकाशमान होने का शुभ अवसर प्राप्त हो गया । दो वर्ष तक सयद हुसनअली मराठा की आक्रामक वायवाहियो वे दमन म प्रयत्नशील रहन के साथ-साथ वह स्वय अपने विरुद्ध सम्राट द्वारा रचे जान वाने पडयात्रा के प्रति पूर्ण सजग रहा। उसव भाई सयद अब्दुल्ला की स्थिति भी दिल्ली में निरंतर विगडती जा रही थी और वह इतनी सदिग्ध हो गयी थी कि अपन जीवन व प्रति भयभीत होकर उमन हुमैनअली को समस्त माय सज्जा व साथ दिल्ली में अपनी स्थिति की रक्षा के लिए दक्षिण से वापस बुला लिया। इस पर हुमनअली ने अपने मित्रा तथा अनुचरा के साथ यथष्ट परामश किया और वह इस निश्चय पर पहुँचा कि उसकी सफलता का एकमा अवसर इसी में है कि वह मराठा और विशेषकर शाहू और उसक समयवा वो सद्भावना तथा सहयोग प्राप्त कर ले। दक्षिण से अपनी अनु पस्थिति के दौरान वह उनका विराध नही चाहता था क्योंकि यदि दक्षिण की आर म मराठा व और उत्तर की ओर से सम्राट के दल के बीच में वे फंस जात ता दोना मन्त्री आमानी में कुचले जा सकत थे। शाहू के इतिहास का नवव कहता है दो जन सम्राट पर खसियर न निजामुरमुल्य वा वापस बुला दिया तथा समद अता कारण वारा नियुक्त कर दिया तो संयद न करजा मल्हार नामक एक व्यक्ति को अपना परामशलता नियुक्त किया। Shahus Chronicle पृशून्य छब्बीस तथा छत्तीस । यह एक प्रसिद्ध मराठा कूटनीतिज्ञ था, जा जिंजी मे सचिव के रूप में राजाराम की सवा बहुत पहले त्याग चुका था और अन बनारस में रह रहा था। मम्राट को जब इस चतुर तथा उपयोगी व्यक्ति का पता चला, तो वह उसे अपने व्यक्तिगत अनुनय द्वारा दिल्ली लाया और सयद हुसैनअली के साथ दक्षिण भेज दिया ताकि वह मराठा सम्बन्धी विषया पर उसके विश्वस्त परामशक के रूप मे वाय करे । राजदूत के रूप में शक्रजी की सेवा के लिए सम्राट न उचित धन वा प्रबंध भी कर दिया ।' चार हसनअली का मराठा सहायता प्राप्त करना - नगुण्डवार उपनामधारी महाराष्ट्रीय ब्राह्मण इस शक्रजी मल्हार में राजनीतिक विषयों के लिए विलक्षण बुद्धि थी। एक हज़ार छः सौ छप्पन ईशून्य में वह छत्रपति राजाराम के साथ जिजी गया था और बाद में किसी बात पर विगडवर बनारम चला गया था । परन्तु उसके मन में विकल महत्त्वाकाक्षा की भावना प्रवेश कर गयो और सैयद हुसैनअली के साथ दक्षिण जाने के लिए सम्राट की नियुक्ति का उसने तुरत स्वीकार कर लिया । उसन शोघ्र ही हुसनअली की कृपा प्राप्त कर ली थी और अपन नवीन पद पर वह अमूल्य सिद्ध हुआ, क्याकि स्वय हुमनअली मराठा से सवथा अपरिचित था । व्यक्तिगत प्रतिनिधिया तथा नायका द्वारा शाहू तथा उसके पशवा बालाजी वो शक्रजी की उपस्थिति शीघ्र ही ज्ञात हो गयी । जब दिल्ली से अपन भाई का संयद हुमनअली को अत्यावश्यक बुलावा आया तब उसका ध्यान सर्वप्रथम इस जार गया कि वह मराठा के विरुद्ध वन अपना युद्ध ही वादन करद, वरन् उनकी मित्रता तथा मनिक सहायता भी प्राप्त कर ले जिसमे वह अपनी भावी याजनाजा को सफलतापूवक जारी रख मवे । उसने शवरजी को सनारा जाकर शाहू से मन्त्री सम्ब घ स्थापित करने को आना दी। एक हज़ार सात सौ दस तीस के आरम्भ में शक्रजी सतारा पहुँच गया। शाहू तथा उसके परामशका ने इस दूत के आगमन का ईश्वरप्रदत्त भवसर के रूप म माना क्याकि इसके द्वारा उह दिल्ली से सीधा सम्पव स्थापित हान और उन वलशकर युद्धा की समाप्ति का विश्वास था जो उनकी शक्ति तथा साधना वा- विशेषकर शाहू की कारागार मुक्ति के बाद - उच्छद कर रहे थ अपन राज्य को सुव्यवस्थित करने में शाहू तथा बालाजी पहले स ही हनु हो चुके थे। दस वर्ष व्यतीत होन के बाद भी उनकी दशा म वाई सुधार न हुआ था । आन्तरिक तथा बाह्य वष्ट अपने अनुयायिया मे फूट तथा नपीखाँ तथा मियार उल-मुनसारोन वा लेखक दोना ही शकरजी के इस दौत्य की स्पष्ट व्यास्या वरत हैं ।
भारतीय चीनी मिल संघ इस्मा ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा है की उपग्रहीय तस्वीरों के आधार पर देश में हो रही गन्ने की खेती के आंकड़ों के अनुसार 2016-17 के चीनी सत्र में लगभग 233. 70 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान किया जा रहा है चीनी मिल संघ की रिपोर्ट के अनुसार संघ ने 2016-17 चीनी सत्र के अनुमानित चीनी उत्पादन का आंकड़ा जारी किया है। उत्तर प्रदेश में गन्ने की खेती लगभग पिछले वर्ष के समान 23. 10 लाख हेक्टेयर में की गई है। भारतीय चीनी मिल संघ इस्मा ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा है की उपग्रहीय तस्वीरों के आधार पर देश में हो रही गन्ने की खेती के आंकड़ों के अनुसार 2016-17 के चीनी सत्र में लगभग 233. 70 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान किया जा रहा है चीनी मिल संघ की रिपोर्ट के अनुसार संघ ने 2016-17 चीनी सत्र के अनुमानित चीनी उत्पादन का आंकड़ा जारी किया है। उत्तर प्रदेश में गन्ने की खेती लगभग पिछले वर्ष के समान 23. 10 लाख हेक्टेयर में की गई है। मुख्य रूप से महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ने के उत्पादन में भरी कमी देखी जा रही है इस राज्य में चीनी सत्र 2016-17 के दौरान लगभग 76. 60 लाख चीनी उत्पादन का अनुमान है जो गत चीनी सत्र में 68. 40 लाख टन रहा था। इस साल अगस्त तक चीनी मिलों ने 226. 50 लाख टन चीनी की आपूर्ति की है, पिछले साल चीनी सत्र में यह आंकडां 236 लाख टन था। भारत 2016-17 में 10 लाख टन चीनी का आयात कर सकता है। इसकी वजह यह है कि देश में चीनी की खपत आपूर्ति से अधिक हो सकती है। कृषि पत्रकारिता के लिए अपना समर्थन दिखाएं. . ! ! प्रिय पाठक, हमसे जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृषि पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए आप जैसे पाठक हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। हमें कृषि पत्रकारिता को और सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के हर कोने में किसानों और लोगों तक पहुंचने के लिए आपके समर्थन या सहयोग की आवश्यकता है। हमारे भविष्य के लिए आपका हर सहयोग मूल्यवान है। आप हमें सहयोग जरूर करें (Contribute Now)
भारतीय चीनी मिल संघ इस्मा ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा है की उपग्रहीय तस्वीरों के आधार पर देश में हो रही गन्ने की खेती के आंकड़ों के अनुसार दो हज़ार सोलह-सत्रह के चीनी सत्र में लगभग दो सौ तैंतीस. सत्तर लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान किया जा रहा है चीनी मिल संघ की रिपोर्ट के अनुसार संघ ने दो हज़ार सोलह-सत्रह चीनी सत्र के अनुमानित चीनी उत्पादन का आंकड़ा जारी किया है। उत्तर प्रदेश में गन्ने की खेती लगभग पिछले वर्ष के समान तेईस. दस लाख हेक्टेयर में की गई है। भारतीय चीनी मिल संघ इस्मा ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा है की उपग्रहीय तस्वीरों के आधार पर देश में हो रही गन्ने की खेती के आंकड़ों के अनुसार दो हज़ार सोलह-सत्रह के चीनी सत्र में लगभग दो सौ तैंतीस. सत्तर लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान किया जा रहा है चीनी मिल संघ की रिपोर्ट के अनुसार संघ ने दो हज़ार सोलह-सत्रह चीनी सत्र के अनुमानित चीनी उत्पादन का आंकड़ा जारी किया है। उत्तर प्रदेश में गन्ने की खेती लगभग पिछले वर्ष के समान तेईस. दस लाख हेक्टेयर में की गई है। मुख्य रूप से महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ने के उत्पादन में भरी कमी देखी जा रही है इस राज्य में चीनी सत्र दो हज़ार सोलह-सत्रह के दौरान लगभग छिहत्तर. साठ लाख चीनी उत्पादन का अनुमान है जो गत चीनी सत्र में अड़सठ. चालीस लाख टन रहा था। इस साल अगस्त तक चीनी मिलों ने दो सौ छब्बीस. पचास लाख टन चीनी की आपूर्ति की है, पिछले साल चीनी सत्र में यह आंकडां दो सौ छत्तीस लाख टन था। भारत दो हज़ार सोलह-सत्रह में दस लाख टन चीनी का आयात कर सकता है। इसकी वजह यह है कि देश में चीनी की खपत आपूर्ति से अधिक हो सकती है। कृषि पत्रकारिता के लिए अपना समर्थन दिखाएं. . ! ! प्रिय पाठक, हमसे जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृषि पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए आप जैसे पाठक हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। हमें कृषि पत्रकारिता को और सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के हर कोने में किसानों और लोगों तक पहुंचने के लिए आपके समर्थन या सहयोग की आवश्यकता है। हमारे भविष्य के लिए आपका हर सहयोग मूल्यवान है। आप हमें सहयोग जरूर करें
अहमन्यता, बर्बरता, राग-द्वेष, स्वार्थलिप्सा, तृष्णा, अन्धविश्वास, कायरता, असामाजिकता, अनुदारता, अधिकारलोलुपता आदि विगर्हणीय अवगुणों की भर्त्सना है ' और विभिन्न प्रकार की साज-सज्जा से अपने बाह्य रूप को चमत्कारोत्पादक बनाने का प्रयत्न करनेवाली आधुनिक नारी की चंचलता, चपलता, कामुकता, वासनाप्रियता, लम्पटता, वाह्याडम्बर, मद, लोभ एवं स्वार्थ-लिप्सा आदि दुवतियों का विकर्षक बिम्ब विधान है; तो दूसरी और प्रकृति जगत भी अनेक अवगुणों का आलय है । कहीं उसमें हिंसा, वर्बरता, अत्याचार और अनाचार का ताण्डव-नर्तन है और कहीं वासना, लम्पटता, कामुकता, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार तथा स्वार्थान्धता का भैरवगर्जन; कहीं अन्याय, आतंक और विनाश का प्राबल्य है और कहीं अज्ञान, दुर्बुद्धि, दानवता, निर्दयता तथा संघर्षमयता का साम्राज्य; कहीं मेघ में हिंसा, अत्याचार, अन्याय, पर-पीड़न, दानवता आदि अवगुणों की पराकाष्ठा है और कहीं चन्द्रमा में अन्याय, अत्याचार, पक्षपात, निष्ठुरता, हिंसा तथा बर्बरता आदि अवगणों की विनाशकारी स्थिति और कहीं तितली में चंचलता, कपटाचार, कृत्रिमता, स्वार्थलिप्सा, वाह्याडम्बर, लोभ, विश्वासघात, कामुकता तथा व्यभिचार आदि अवगुणों की प्रचुरता है और कहीं सरिता में हिंसा, निष्ठुरता, अत्याचार, अन्याय तथा १. वे सामाजिक जन नहीं, व्यक्ति हैं काम । है वही क्षुद्र चेतना, व्यक्तिगत राग-द्वेष, लघु स्वार्थ वही, अधिकार सत्व तृष्ण शेष, आदर्श अंधविश्वास वही, - हो सभ्यवेश - पंत, भारत-ग्राम, ग्राम्या, पृ० ६१ । २. लहरी-सी तुम चपल लालसा श्वास-वायु से नर्तित, तितली-सी तुम फूल-फूल पर मँडराती मधुक्षण हित । मार्जारी तुम, नहीं प्रेम को करती आत्म-समर्पण, तुम्हें सुहाता रंग प्रणय, धन पद मद, आत्म प्रदर्शन । - पंत, आधुनिका, ग्राम्या, पृ० ८३ । ३. देखिये पंत, बादल, पल्लव, पृ० ७७ तथा निराला, बादल राग २, परिमल, पृ० १७८ । ४. एहौ निसापति ऐस जेतने तुम्हार ताल गुनसील कँवल पै संकट महान माँ । मेली हैं सनेही मीत, कुमुद कुमुदनी हैं फूली अभिमान माँ । - रमई काका, चन्द्रमा, ५५ की श्रेष्ठ कविताएँ, पृ० १६ । तथानिरमोही नहिं नेह कुमुदिनी हेम हई । - सूर, भ्रमरगीत-सार, पद १०७ । ५. माधवसिंह 'दीपक', सात सौ गीत, पृ० २४८ ।
अहमन्यता, बर्बरता, राग-द्वेष, स्वार्थलिप्सा, तृष्णा, अन्धविश्वास, कायरता, असामाजिकता, अनुदारता, अधिकारलोलुपता आदि विगर्हणीय अवगुणों की भर्त्सना है ' और विभिन्न प्रकार की साज-सज्जा से अपने बाह्य रूप को चमत्कारोत्पादक बनाने का प्रयत्न करनेवाली आधुनिक नारी की चंचलता, चपलता, कामुकता, वासनाप्रियता, लम्पटता, वाह्याडम्बर, मद, लोभ एवं स्वार्थ-लिप्सा आदि दुवतियों का विकर्षक बिम्ब विधान है; तो दूसरी और प्रकृति जगत भी अनेक अवगुणों का आलय है । कहीं उसमें हिंसा, वर्बरता, अत्याचार और अनाचार का ताण्डव-नर्तन है और कहीं वासना, लम्पटता, कामुकता, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार तथा स्वार्थान्धता का भैरवगर्जन; कहीं अन्याय, आतंक और विनाश का प्राबल्य है और कहीं अज्ञान, दुर्बुद्धि, दानवता, निर्दयता तथा संघर्षमयता का साम्राज्य; कहीं मेघ में हिंसा, अत्याचार, अन्याय, पर-पीड़न, दानवता आदि अवगुणों की पराकाष्ठा है और कहीं चन्द्रमा में अन्याय, अत्याचार, पक्षपात, निष्ठुरता, हिंसा तथा बर्बरता आदि अवगणों की विनाशकारी स्थिति और कहीं तितली में चंचलता, कपटाचार, कृत्रिमता, स्वार्थलिप्सा, वाह्याडम्बर, लोभ, विश्वासघात, कामुकता तथा व्यभिचार आदि अवगुणों की प्रचुरता है और कहीं सरिता में हिंसा, निष्ठुरता, अत्याचार, अन्याय तथा एक. वे सामाजिक जन नहीं, व्यक्ति हैं काम । है वही क्षुद्र चेतना, व्यक्तिगत राग-द्वेष, लघु स्वार्थ वही, अधिकार सत्व तृष्ण शेष, आदर्श अंधविश्वास वही, - हो सभ्यवेश - पंत, भारत-ग्राम, ग्राम्या, पृशून्य इकसठ । दो. लहरी-सी तुम चपल लालसा श्वास-वायु से नर्तित, तितली-सी तुम फूल-फूल पर मँडराती मधुक्षण हित । मार्जारी तुम, नहीं प्रेम को करती आत्म-समर्पण, तुम्हें सुहाता रंग प्रणय, धन पद मद, आत्म प्रदर्शन । - पंत, आधुनिका, ग्राम्या, पृशून्य तिरासी । तीन. देखिये पंत, बादल, पल्लव, पृशून्य सतहत्तर तथा निराला, बादल राग दो, परिमल, पृशून्य एक सौ अठहत्तर । चार. एहौ निसापति ऐस जेतने तुम्हार ताल गुनसील कँवल पै संकट महान माँ । मेली हैं सनेही मीत, कुमुद कुमुदनी हैं फूली अभिमान माँ । - रमई काका, चन्द्रमा, पचपन की श्रेष्ठ कविताएँ, पृशून्य सोलह । तथानिरमोही नहिं नेह कुमुदिनी हेम हई । - सूर, भ्रमरगीत-सार, पद एक सौ सात । पाँच. माधवसिंह 'दीपक', सात सौ गीत, पृशून्य दो सौ अड़तालीस ।
उनका इलाज किया जा रहा है। उनमें से कई गंभीर रूप से घायल हो गए थे। जिले में Ibrahimpatnnam VTPs में एक घातक दुर्घटना हुई। तारों के टूटते ही लिफ्ट गिर गई। ऐसा लगता है कि इस घटना में तीन लोगों की मौत हो गई। दुर्घटना के समय कुल 8 लोग लिफ्ट में थे। जब लिफ्ट के तार अचानक टूट गए तो वे सभी ऊपर जा रहे थे। इसके साथ, हर कोई लिफ्ट के साथ नीचे गिर गया। घायलों को अस्पताल ले जाया गया है और उनका इलाज किया जा रहा है। उनमें से कई गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
उनका इलाज किया जा रहा है। उनमें से कई गंभीर रूप से घायल हो गए थे। जिले में Ibrahimpatnnam VTPs में एक घातक दुर्घटना हुई। तारों के टूटते ही लिफ्ट गिर गई। ऐसा लगता है कि इस घटना में तीन लोगों की मौत हो गई। दुर्घटना के समय कुल आठ लोग लिफ्ट में थे। जब लिफ्ट के तार अचानक टूट गए तो वे सभी ऊपर जा रहे थे। इसके साथ, हर कोई लिफ्ट के साथ नीचे गिर गया। घायलों को अस्पताल ले जाया गया है और उनका इलाज किया जा रहा है। उनमें से कई गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने एक बार फिर बीमार पाकिस्तानी महिला के वीजा को मंजूरी देकर अपनी दरियादिली दिखाई है। महिला की बेटी ने ट्वीट कर उनसे मेडिकल वीजा दिलाने की अपील की थी। इतना ही नहीं उन्होंने इसी तरह की गुहार करने वाले दो अन्य पाक नागरिकों की भी मदद का भरोसा दिया है। पाक नागरिक सादिया ने ट्वीट कर अपनी मां का भारत में लीवर ट्रांसप्लांट कराने के लिए मेडिकल वीजा दिलाने की अपील की थी। इसके बाद सुषमा ने इस्लामाबाद स्थित भारतीय दूतावास को मदद करने को कहा। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि वह निश्चित रूप से इस मामले में मदद करेंगी। उन्होंने पाकिस्तान स्थित उच्चायोग को पीड़ित महिला को मेडिकल वीजा देने का निर्देश दिया है। इसी तरह लीवर और किडनी ट्रांसप्लांट के लिए नासिर मोहम्मद अहमद और लीवर ट्रांसप्लांट के लिए पिता के लिए हीरा अजहर ने भी मेडिकल वीजा की अपील की थी। इन्हें भी विदेश मंत्री की ओर से सकारात्मक जवाब मिला। सुषमा ने ट्वीट कर कहा कि उच्चायोग इनके कागजात की जांच कर रहा है। प्रक्रिया पूरी होते ही इन्हें भी वीजा मुहैया करा दिया जाएगा। भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव के बावजूद सुषमा की मेडिकल वीजा को लेकर मानवीय दृष्टिकोण की दोनों देशों में तारीफ होती है। उनकी दरियादिली को देखते हुए एक पाकिस्तानी लड़की ने तो यहां तक कह दिया था कि काश आप हमारी प्रधानमंत्री होती तो सारी समस्याएं ही खत्म हो जातीं। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने एक बार फिर बीमार पाकिस्तानी महिला के वीजा को मंजूरी देकर अपनी दरियादिली दिखाई है। महिला की बेटी ने ट्वीट कर उनसे मेडिकल वीजा दिलाने की अपील की थी। इतना ही नहीं उन्होंने इसी तरह की गुहार करने वाले दो अन्य पाक नागरिकों की भी मदद का भरोसा दिया है। पाक नागरिक सादिया ने ट्वीट कर अपनी मां का भारत में लीवर ट्रांसप्लांट कराने के लिए मेडिकल वीजा दिलाने की अपील की थी। इसके बाद सुषमा ने इस्लामाबाद स्थित भारतीय दूतावास को मदद करने को कहा। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि वह निश्चित रूप से इस मामले में मदद करेंगी। उन्होंने पाकिस्तान स्थित उच्चायोग को पीड़ित महिला को मेडिकल वीजा देने का निर्देश दिया है। इसी तरह लीवर और किडनी ट्रांसप्लांट के लिए नासिर मोहम्मद अहमद और लीवर ट्रांसप्लांट के लिए पिता के लिए हीरा अजहर ने भी मेडिकल वीजा की अपील की थी। इन्हें भी विदेश मंत्री की ओर से सकारात्मक जवाब मिला। सुषमा ने ट्वीट कर कहा कि उच्चायोग इनके कागजात की जांच कर रहा है। प्रक्रिया पूरी होते ही इन्हें भी वीजा मुहैया करा दिया जाएगा। भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव के बावजूद सुषमा की मेडिकल वीजा को लेकर मानवीय दृष्टिकोण की दोनों देशों में तारीफ होती है। उनकी दरियादिली को देखते हुए एक पाकिस्तानी लड़की ने तो यहां तक कह दिया था कि काश आप हमारी प्रधानमंत्री होती तो सारी समस्याएं ही खत्म हो जातीं। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
यूपी के फिरोजाबाद में शादी से ठीक एक दिन पहले दूल्हे पर एसिड अटैक कर उसका चेहरा जला दिया गया. इस मामले में गांव के ही चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया गया है. पीड़ित की बारात सोमवार को जानी थी जो इस घटना के बाद नहीं गई. पीड़ित के परिवार का कहना है कि आरोपी उनके परिवार के ही हैं, जो युवक की शादी में खलल डालने पर उतारू. शादीशुदा माशूका ने आशिक संग भागने से किया इंकार, सनकी ने कर दिया बड़ा कांड! ये पूरी घटना गांव चमरौली की है जहां जो कुछ हुआ वह रौगटे खड़े कर देने वाला था. पीड़ित का नाम बृजेश है जिसकी बारात 25 जून को जानी थी. 23 जून की रात को बृजेश घर के बाहर सोया हुआ था. रात को ही कुछ हमलावरों ने बृजेश के चेहरे पर तेजाब से हमला किया, जिससे बृजेश बुरी तरह झुलस गया. बृजेश को इलाज के लिए आगरा रैफर किया गया जहां से उसे इलाज के बाद घर लाया गया. घटना के बाद से पूरा परिवार सदमे में है, घर की खुशियां भी काफूर हो गयीं है. साथ ही बारात का कार्यक्रम भी स्थगित कर दिया गया है. वहीं पुलिस का कहना है कि पीड़ित की तहरीर पर केस दर्ज कर लिया गया है आरोपियों की तलाश की जा रही है. .
यूपी के फिरोजाबाद में शादी से ठीक एक दिन पहले दूल्हे पर एसिड अटैक कर उसका चेहरा जला दिया गया. इस मामले में गांव के ही चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया गया है. पीड़ित की बारात सोमवार को जानी थी जो इस घटना के बाद नहीं गई. पीड़ित के परिवार का कहना है कि आरोपी उनके परिवार के ही हैं, जो युवक की शादी में खलल डालने पर उतारू. शादीशुदा माशूका ने आशिक संग भागने से किया इंकार, सनकी ने कर दिया बड़ा कांड! ये पूरी घटना गांव चमरौली की है जहां जो कुछ हुआ वह रौगटे खड़े कर देने वाला था. पीड़ित का नाम बृजेश है जिसकी बारात पच्चीस जून को जानी थी. तेईस जून की रात को बृजेश घर के बाहर सोया हुआ था. रात को ही कुछ हमलावरों ने बृजेश के चेहरे पर तेजाब से हमला किया, जिससे बृजेश बुरी तरह झुलस गया. बृजेश को इलाज के लिए आगरा रैफर किया गया जहां से उसे इलाज के बाद घर लाया गया. घटना के बाद से पूरा परिवार सदमे में है, घर की खुशियां भी काफूर हो गयीं है. साथ ही बारात का कार्यक्रम भी स्थगित कर दिया गया है. वहीं पुलिस का कहना है कि पीड़ित की तहरीर पर केस दर्ज कर लिया गया है आरोपियों की तलाश की जा रही है. .
Ranchi : सीएमपीडीआई (मुख्यालय) रांची में मंगलवार को एनसीओईए (सीटू) का 53वां स्थापना दिवस सीसीएल एवं सीएमपीडीआई कर्मियों द्वारा संयुक्त रूप से मनाया गया. इस अवसर पर एनसीओईए के अध्यक्ष काॅमरेड डीडी रामानंदन ने सीएमपीडीआई परिसर में यूनियन का झंडा फहराया. सीटू की स्थापना के कारणों और उद्देश्यों पर प्रकाश डाला. सीटू के महामंत्री काॅमरेड आरपी सिंह ने भी अपने विचार प्रकट किये. कार्यक्रम में काॅ. समीर विश्वास, राजेश सिन्हा, आदित्य कुमार, प्रलय भट्टाचार्जी, दीपांकर कुंवर, भूपेन्द्र सिंह, रोहित सिंह, रितु नुनिया, सोनिया दास, बर्नाली बानिक, जोबा राय, विनोद सिंह, सुभाशीष बनर्जी के अलावा यूनियन के अन्य सहयोगी उपस्थित थे.
Ranchi : सीएमपीडीआई रांची में मंगलवार को एनसीओईए का तिरेपनवां स्थापना दिवस सीसीएल एवं सीएमपीडीआई कर्मियों द्वारा संयुक्त रूप से मनाया गया. इस अवसर पर एनसीओईए के अध्यक्ष काॅमरेड डीडी रामानंदन ने सीएमपीडीआई परिसर में यूनियन का झंडा फहराया. सीटू की स्थापना के कारणों और उद्देश्यों पर प्रकाश डाला. सीटू के महामंत्री काॅमरेड आरपी सिंह ने भी अपने विचार प्रकट किये. कार्यक्रम में काॅ. समीर विश्वास, राजेश सिन्हा, आदित्य कुमार, प्रलय भट्टाचार्जी, दीपांकर कुंवर, भूपेन्द्र सिंह, रोहित सिंह, रितु नुनिया, सोनिया दास, बर्नाली बानिक, जोबा राय, विनोद सिंह, सुभाशीष बनर्जी के अलावा यूनियन के अन्य सहयोगी उपस्थित थे.
वैज्ञानिक और तकनीकी विकास से उत्पन्न मानवीय समस्याएँ और महावीर डॉ० राममूर्ति त्रिपाठी AA MASAA NDANI प्रश्नाकुल स्थिति : भगवान महावीर जिन मूल्यों की प्रतिमा थे - प्रोर जो आज भी वंद्य हैं - वे अध्यात्ममूलक जीवन दृष्टि से जिए गए जीवन की प्रयोगशाला में उत्पन्न हुए थे । वर्तमान संदर्भ और जीवन 'विज्ञान' प्रभावित है । विज्ञान ने आज का परिवेश निर्मित किया है, उसकी उपलब्धियां वर्माध्यात्ममूलक क्रमागत उपलब्धियों से मेल नहीं खाती, फलतः समाज के नेतृत्व सम्पन्न बुद्धिवादियों ने श्रात्मा और तन्मूलक मान्यताओं तथा मूल्यों के प्रति या तो पूर्ण अनास्था घोषित कर दी है प्रथवा संदिग्ध मनःस्थिति कर ली है । यदि कहीं उस क्रमागत मूल्यों के प्रति प्रस्था, श्रद्धा तथा विश्वास के ज्योतिकरण हैं भी, तो विज्ञान निर्मित यांत्रिक और स्वार्थकेन्द्रित व्यावसायिक वातावरण में वे मंदप्रभ होते जा रहे हैं और व्यवहार में कार्यान्वित नहीं हो पा रहे हैं । फलतः जब सारे समाज की ग्राज नियति बनती जा रही है - अनाध्यात्मिकता और क्रमागत मूल्यों की अवहेलना अथवा त्याग, तब भगवान् महावीर ही नहीं, तमाम अध्यात्म मूलक मान्यताए प्रश्नाकुल हो गई हैं। हिंसाकाष्ठापन्न स्थिति में ग्राह्य होने के कारण जैन धर्म अथवा उसके प्रतिष्ठापक भगवान् महावीर की स्थिति अपेक्षाकृत और अधिक गम्भीर हो गई है । डॉ० राधाकृष्णन् ने ठीक कहा है कि समस्या को जानना भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि उसके समाधान को जानना । अतः सबसे पहले वैज्ञानिक और तकनीकी विकास से उत्पन्न समस्याओं पर विचार आवश्यक है । विज्ञान की कठोर पद्धति का तकाजा है कि हम वही कहें भोर करें जो प्रमाणसिद्ध हो या किया जा सके जबकि धर्माध्यात्ममूलक पद्धति दूसरों के कथन पर विश्वास करने को बाध्य करती है। विश्वास करने के लिए इसलिए बाध्य करती है कि उसे पूर्वज मानते आ रहे हैं, उसकी सिद्धि में परम्परा प्राप्त आप्तवाक्य प्रमाण है और सबसे बड़ी बात यह कि उन्हें तर्कातीत कहा गया है । अतः खलु ये भावा न तांस्तर्केरण चिन्तयेत् । वैज्ञानिकों ने अपने अनुसंधान से धर्माध्यात्मक मूलक उक्त पद्धति को स्वीकार घोषित कर दिया है । के वचनों में भी जब परस्पर विरोध है - तब किसे श्रद्धा दो जाय ? जंब इञ्जील, कुरान, वेद नीर भिन्न-भिन्न आगमों में परस्पर वैमत्य है तब समस्त विश्व के धर्माध्यात्मसमर्थक कैसे एक मत हों और तब इस स्थिति में प्राप्त वाक्यों पर विश्वास त्यागना ही पड़ेगा । एक बात यह भी है कि जब विज्ञान के क्षेत्र में 'सत्य' के निकट अतीत को अपेक्षा वर्तमान के श्रम से 'भविष्य' में ही पहुँचेंगे - यह मान्यता सही है तव धर्म के क्षेत्र में यह क्यों मान लिया जाय कि 'सत्य' का साक्षात्कार प्रतीत में हो चुका, अब भविष्य उस दृष्टि से रिक्त है ? विश्व एक नियम में बंधा हुआ है, विज्ञान इसी नियम के शासन पर बल देता है । इन्हीं नियमों का यह अनुशीलन करता है। जिस दिन सारे नियम ज्ञात हो जायेंगे, उस दिन 'रहस्य' नाम की कोई वस्तु न होगी । यद्यपि क्वाण्टम् सिद्धान्त में अनिर्धारणात्मकता की स्वीकृति से 'नियम पूरन और आत्यंतिक सत्य नहीं माना गया है तथापि विज्ञान प्राकृतिक व्यवहारों में निहित इस फ्रो विल या स्वेच्छारिता के कारण अपना निर्धारणात्मक प्रयत्न नहीं छोड़ता बल्कि और ग्राशा से अज्ञात कारणों की संगति खोजना चाहता है । विज्ञान जब यह मानता है कि सब कुछ नियम को शृंखला में बद्ध है तब किसी को 'कृपा' या 'स्वातन्त्र्य' का प्रश्न ही नहीं उठता । ईश्वर की कृपा और विज्ञान की नियमबद्धता परस्पर विपरीत है । विज्ञान की विभिन्न शाखाओं की उपलब्धियों के आलोक मे चेतना के अतिरिक्त किसी शाश्त की भी सिद्धि नहीं हो पाती : फिर यह भी कहा जाता है कि जीवन की इस विकास शृंखला में मानव ही अंतिम विकास क्यों माना जाय ? धर्माध्यात्ममूलक जिन जीवन मूल्यों के लिए हम संघर्षशील हैं, बदलते हुए और विकासोन्मुख समाज में रूपों और आकारों की वनने विगड़ने वाली ब्रह्माण्ड प्रक्रिया में, वे कितने क्षणिक हैं - स्पष्ट है । विज्ञान का निष्कर्ष है कि मन, भावना और आत्मा जीवित मस्तिष्क के ही अभिव्यक्त रूप हैं - वैसे ही जैसे ज्वाला जलती हुई मोमवत्ती का श्रभिव्यक्त रूप । इस मान्यता के अनुसार मस्तिष्क के नष्ट होते हो सब कुछ नष्ट हो जायगा । कहां के वर्म-अध्यात्म और कहां के तन्मूलक जीवन मूल्य । विज्ञान मानता जा रहा है कि प्रकृति की इतर चीजों की भांति मानव भी उसके विकास का एक अंग है । फ्रायड मानता है कि धर्म मानव समाज के मनोवैज्ञानिक विकास की एक विशेष सीढ़ी के साथ जुड़ा हुआ भ्रम है । समाज उसे उखाड़ के फेंकने की दिशा में गतिशील है । कहां तक विवरण दिया जाय, विश्वास की विभिन्न समस्याओं ने जो उपलब्धियां की हैं - वे सबकीसव वर्माध्यात्म के विपक्ष में जाती हैं । तकनीकी विकास से उत्पन्न समस्याएं : जहां तक तकनीकी विकास का संबंध है जौर उनसे उत्पन्न समस्याओं की बात है ज का प्रत्येक मानव उसे महसूस कर रहा है । यंत्र मानव का काम छोनता जा रहा है और मानव भावनाओं को खोता हुआ यांत्रिक होता जा रहा है। स्थल, जल तथा नभ- सर्वत्र प्रयोगशालाएं स्थापित हो रही हैं। बाहरी दूरी समाप्त होती जा रही है, पर मानव-मानव के मध्य दूरी बढ़ती जा रही है। लोग भूतार्थवाद के आलोक में सामाजिक से 'व्यक्ति' होते जा रहे हैं । 'एक' से अनेक हो रहे हैं, अभेद से भेद की ओर बढ़ रहे हैं। विश्व, राष्ट्र, समाज तथा परिवार के ही वरातल पर नहीं, व्यक्ति के स्तर पर भी सिर और धड़ अलग-अलग
वैज्ञानिक और तकनीकी विकास से उत्पन्न मानवीय समस्याएँ और महावीर डॉशून्य राममूर्ति त्रिपाठी AA MASAA NDANI प्रश्नाकुल स्थिति : भगवान महावीर जिन मूल्यों की प्रतिमा थे - प्रोर जो आज भी वंद्य हैं - वे अध्यात्ममूलक जीवन दृष्टि से जिए गए जीवन की प्रयोगशाला में उत्पन्न हुए थे । वर्तमान संदर्भ और जीवन 'विज्ञान' प्रभावित है । विज्ञान ने आज का परिवेश निर्मित किया है, उसकी उपलब्धियां वर्माध्यात्ममूलक क्रमागत उपलब्धियों से मेल नहीं खाती, फलतः समाज के नेतृत्व सम्पन्न बुद्धिवादियों ने श्रात्मा और तन्मूलक मान्यताओं तथा मूल्यों के प्रति या तो पूर्ण अनास्था घोषित कर दी है प्रथवा संदिग्ध मनःस्थिति कर ली है । यदि कहीं उस क्रमागत मूल्यों के प्रति प्रस्था, श्रद्धा तथा विश्वास के ज्योतिकरण हैं भी, तो विज्ञान निर्मित यांत्रिक और स्वार्थकेन्द्रित व्यावसायिक वातावरण में वे मंदप्रभ होते जा रहे हैं और व्यवहार में कार्यान्वित नहीं हो पा रहे हैं । फलतः जब सारे समाज की ग्राज नियति बनती जा रही है - अनाध्यात्मिकता और क्रमागत मूल्यों की अवहेलना अथवा त्याग, तब भगवान् महावीर ही नहीं, तमाम अध्यात्म मूलक मान्यताए प्रश्नाकुल हो गई हैं। हिंसाकाष्ठापन्न स्थिति में ग्राह्य होने के कारण जैन धर्म अथवा उसके प्रतिष्ठापक भगवान् महावीर की स्थिति अपेक्षाकृत और अधिक गम्भीर हो गई है । डॉशून्य राधाकृष्णन् ने ठीक कहा है कि समस्या को जानना भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि उसके समाधान को जानना । अतः सबसे पहले वैज्ञानिक और तकनीकी विकास से उत्पन्न समस्याओं पर विचार आवश्यक है । विज्ञान की कठोर पद्धति का तकाजा है कि हम वही कहें भोर करें जो प्रमाणसिद्ध हो या किया जा सके जबकि धर्माध्यात्ममूलक पद्धति दूसरों के कथन पर विश्वास करने को बाध्य करती है। विश्वास करने के लिए इसलिए बाध्य करती है कि उसे पूर्वज मानते आ रहे हैं, उसकी सिद्धि में परम्परा प्राप्त आप्तवाक्य प्रमाण है और सबसे बड़ी बात यह कि उन्हें तर्कातीत कहा गया है । अतः खलु ये भावा न तांस्तर्केरण चिन्तयेत् । वैज्ञानिकों ने अपने अनुसंधान से धर्माध्यात्मक मूलक उक्त पद्धति को स्वीकार घोषित कर दिया है । के वचनों में भी जब परस्पर विरोध है - तब किसे श्रद्धा दो जाय ? जंब इञ्जील, कुरान, वेद नीर भिन्न-भिन्न आगमों में परस्पर वैमत्य है तब समस्त विश्व के धर्माध्यात्मसमर्थक कैसे एक मत हों और तब इस स्थिति में प्राप्त वाक्यों पर विश्वास त्यागना ही पड़ेगा । एक बात यह भी है कि जब विज्ञान के क्षेत्र में 'सत्य' के निकट अतीत को अपेक्षा वर्तमान के श्रम से 'भविष्य' में ही पहुँचेंगे - यह मान्यता सही है तव धर्म के क्षेत्र में यह क्यों मान लिया जाय कि 'सत्य' का साक्षात्कार प्रतीत में हो चुका, अब भविष्य उस दृष्टि से रिक्त है ? विश्व एक नियम में बंधा हुआ है, विज्ञान इसी नियम के शासन पर बल देता है । इन्हीं नियमों का यह अनुशीलन करता है। जिस दिन सारे नियम ज्ञात हो जायेंगे, उस दिन 'रहस्य' नाम की कोई वस्तु न होगी । यद्यपि क्वाण्टम् सिद्धान्त में अनिर्धारणात्मकता की स्वीकृति से 'नियम पूरन और आत्यंतिक सत्य नहीं माना गया है तथापि विज्ञान प्राकृतिक व्यवहारों में निहित इस फ्रो विल या स्वेच्छारिता के कारण अपना निर्धारणात्मक प्रयत्न नहीं छोड़ता बल्कि और ग्राशा से अज्ञात कारणों की संगति खोजना चाहता है । विज्ञान जब यह मानता है कि सब कुछ नियम को शृंखला में बद्ध है तब किसी को 'कृपा' या 'स्वातन्त्र्य' का प्रश्न ही नहीं उठता । ईश्वर की कृपा और विज्ञान की नियमबद्धता परस्पर विपरीत है । विज्ञान की विभिन्न शाखाओं की उपलब्धियों के आलोक मे चेतना के अतिरिक्त किसी शाश्त की भी सिद्धि नहीं हो पाती : फिर यह भी कहा जाता है कि जीवन की इस विकास शृंखला में मानव ही अंतिम विकास क्यों माना जाय ? धर्माध्यात्ममूलक जिन जीवन मूल्यों के लिए हम संघर्षशील हैं, बदलते हुए और विकासोन्मुख समाज में रूपों और आकारों की वनने विगड़ने वाली ब्रह्माण्ड प्रक्रिया में, वे कितने क्षणिक हैं - स्पष्ट है । विज्ञान का निष्कर्ष है कि मन, भावना और आत्मा जीवित मस्तिष्क के ही अभिव्यक्त रूप हैं - वैसे ही जैसे ज्वाला जलती हुई मोमवत्ती का श्रभिव्यक्त रूप । इस मान्यता के अनुसार मस्तिष्क के नष्ट होते हो सब कुछ नष्ट हो जायगा । कहां के वर्म-अध्यात्म और कहां के तन्मूलक जीवन मूल्य । विज्ञान मानता जा रहा है कि प्रकृति की इतर चीजों की भांति मानव भी उसके विकास का एक अंग है । फ्रायड मानता है कि धर्म मानव समाज के मनोवैज्ञानिक विकास की एक विशेष सीढ़ी के साथ जुड़ा हुआ भ्रम है । समाज उसे उखाड़ के फेंकने की दिशा में गतिशील है । कहां तक विवरण दिया जाय, विश्वास की विभिन्न समस्याओं ने जो उपलब्धियां की हैं - वे सबकीसव वर्माध्यात्म के विपक्ष में जाती हैं । तकनीकी विकास से उत्पन्न समस्याएं : जहां तक तकनीकी विकास का संबंध है जौर उनसे उत्पन्न समस्याओं की बात है ज का प्रत्येक मानव उसे महसूस कर रहा है । यंत्र मानव का काम छोनता जा रहा है और मानव भावनाओं को खोता हुआ यांत्रिक होता जा रहा है। स्थल, जल तथा नभ- सर्वत्र प्रयोगशालाएं स्थापित हो रही हैं। बाहरी दूरी समाप्त होती जा रही है, पर मानव-मानव के मध्य दूरी बढ़ती जा रही है। लोग भूतार्थवाद के आलोक में सामाजिक से 'व्यक्ति' होते जा रहे हैं । 'एक' से अनेक हो रहे हैं, अभेद से भेद की ओर बढ़ रहे हैं। विश्व, राष्ट्र, समाज तथा परिवार के ही वरातल पर नहीं, व्यक्ति के स्तर पर भी सिर और धड़ अलग-अलग
भारत और साउथ अफ्रीका के बीच जारी सीरीज 1-1 की बराबरी पर टिकी हुई है और फाइनल टेस्ट आज यानी 11 जनवरी से केप टाउन में खेला जाना है. भारत ने पहला टेस्ट जीता था, वहीं दूसरे टेस्ट में उसे हार का सामना करना पड़ा था. दूसरे टेस्ट में कप्तान विराट कोहली नहीं खेले थे और तीसरे टेस्ट में उनका लौटना तय है. ऐसे में सवाल उठता है कि उनकी वापसी पर प्लेइंग-XI से से किसे बाहर बैठना होगा. विराट कोहली पीठ की ऐठन के चलते वांडरर्स टेस्ट में नहीं खेल सके थे और केप टाउन में होने वाले तीसरे टेस्ट के लिए वह पूरी तरह से फिट हैं. दूसरे टेस्ट में हनुमा विहारी उनकी जगह खेले थे और संभावना यही है कि वह हनुमा उनके लिए जगह बनाएंगे. हनुमा ने दूसरे टेस्ट की पहली पारी में 20 और दूसरी पारी में नाबाद 40 रन की पारी खेली थी. ऐसे में फॉर्म के लिए संघर्ष कर रहे चेतेश्वर पुजारा और अजिंक्य रहाणे के पास खोया हुआ आत्मविश्वास पाने का एक और मौका होगा. दोनों ने दूसरे टेस्ट की दूसरी पारी में अर्धशतक बनाए थे, लेकिन उसे बड़ी पारी में तब्दील करने में नाकाम रहे थे. हनुमा विहारी की जगह विराट कोहली के प्लेइंग-XI में शामिल होने के अलावा भारतीय टीम में एक और बदलाव होगा. तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज हैमस्ट्रिंग की समस्या से गुजर रहे हैं, इसका मतलब है कि इशांत शर्मा की टीम में वापसी होगी. सिराज दो टेस्ट में उतनी प्रभावी गेंदबाजी भी नहीं कर सके हैं. टीम इंडिया की संभावित प्लेइंग-XI: केएल राहुल, मयंक अग्रवाल, चेतेश्वर पुजारा, विराट कोहली (कप्तान), अजिंक्य रहाणे, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), आर अश्विन, शार्दुल ठाकुर, मोहम्मद शमी, जसप्रीत बुमराह, इशांत शर्मा. अगर साउथ अफ्रीका की बात की जाए तो उन्होंने दूसरे टेस्ट में जीत दर्ज की है और वह विनिंग कॉम्बिनेशन से छेड़छाड़ नहीं करना चाहेंगे. साउथ अफ्रीका की संभावित प्लेइंग-XI: डीन एल्गर (कप्तान), एडेन मार्करम, कीगन पीटरसन, रस्सी वैन डेर डूसन, टेम्बा बावुमा, काइल वेरैना (विकेटकीपर), मार्को जानसेन, कैगिसो रबाडा, केशव महाराज, लुंगी एनगिडी, डुआने ओलिवियर.
भारत और साउथ अफ्रीका के बीच जारी सीरीज एक-एक की बराबरी पर टिकी हुई है और फाइनल टेस्ट आज यानी ग्यारह जनवरी से केप टाउन में खेला जाना है. भारत ने पहला टेस्ट जीता था, वहीं दूसरे टेस्ट में उसे हार का सामना करना पड़ा था. दूसरे टेस्ट में कप्तान विराट कोहली नहीं खेले थे और तीसरे टेस्ट में उनका लौटना तय है. ऐसे में सवाल उठता है कि उनकी वापसी पर प्लेइंग-XI से से किसे बाहर बैठना होगा. विराट कोहली पीठ की ऐठन के चलते वांडरर्स टेस्ट में नहीं खेल सके थे और केप टाउन में होने वाले तीसरे टेस्ट के लिए वह पूरी तरह से फिट हैं. दूसरे टेस्ट में हनुमा विहारी उनकी जगह खेले थे और संभावना यही है कि वह हनुमा उनके लिए जगह बनाएंगे. हनुमा ने दूसरे टेस्ट की पहली पारी में बीस और दूसरी पारी में नाबाद चालीस रन की पारी खेली थी. ऐसे में फॉर्म के लिए संघर्ष कर रहे चेतेश्वर पुजारा और अजिंक्य रहाणे के पास खोया हुआ आत्मविश्वास पाने का एक और मौका होगा. दोनों ने दूसरे टेस्ट की दूसरी पारी में अर्धशतक बनाए थे, लेकिन उसे बड़ी पारी में तब्दील करने में नाकाम रहे थे. हनुमा विहारी की जगह विराट कोहली के प्लेइंग-XI में शामिल होने के अलावा भारतीय टीम में एक और बदलाव होगा. तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज हैमस्ट्रिंग की समस्या से गुजर रहे हैं, इसका मतलब है कि इशांत शर्मा की टीम में वापसी होगी. सिराज दो टेस्ट में उतनी प्रभावी गेंदबाजी भी नहीं कर सके हैं. टीम इंडिया की संभावित प्लेइंग-XI: केएल राहुल, मयंक अग्रवाल, चेतेश्वर पुजारा, विराट कोहली , अजिंक्य रहाणे, ऋषभ पंत , आर अश्विन, शार्दुल ठाकुर, मोहम्मद शमी, जसप्रीत बुमराह, इशांत शर्मा. अगर साउथ अफ्रीका की बात की जाए तो उन्होंने दूसरे टेस्ट में जीत दर्ज की है और वह विनिंग कॉम्बिनेशन से छेड़छाड़ नहीं करना चाहेंगे. साउथ अफ्रीका की संभावित प्लेइंग-XI: डीन एल्गर , एडेन मार्करम, कीगन पीटरसन, रस्सी वैन डेर डूसन, टेम्बा बावुमा, काइल वेरैना , मार्को जानसेन, कैगिसो रबाडा, केशव महाराज, लुंगी एनगिडी, डुआने ओलिवियर.
चंडीगढ़, 24 फरवरी(ब्यूरो) हरियाणा सरकार ने नशे के खिलाफ एक एक्शन प्लान बनाया है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने गुरुवार को हरियाणा निवास में संयुक्त मीटिंग की। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं में नशे की लत बढ़ती जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में मीटिंग हुई थी।
चंडीगढ़, चौबीस फरवरी हरियाणा सरकार ने नशे के खिलाफ एक एक्शन प्लान बनाया है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने गुरुवार को हरियाणा निवास में संयुक्त मीटिंग की। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं में नशे की लत बढ़ती जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में मीटिंग हुई थी।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा की गई हालिया घोषणा के मुताबिक, सरकार डिजिटल भूमि अभिलेखों का उपयोग कर एक 'राष्ट्रीय किसान डेटाबेस' की स्थापना की योजना बना रही है। यह राष्ट्रीय डेटाबेस किसानों को सक्रिय एवं व्यक्तिगत सेवाएँ प्रदान करेगा। साथ ही सरकार इस डेटाबेस में किसानों के व्यक्तिगत विवरण संबंधी डेटा की गोपनीयता भी सुनिश्चित करेगी। इस पहल का उद्देश्य उपलब्ध आँकड़ों के आधार पर समाधान विकसित करके किसानों की आय में वृद्धि करना है। 'राष्ट्रीय किसान डेटाबेस' यह सुनिश्चित करेगा कि इनपुट लागत में कमी किये जाने से गुणवत्ता में सुधार हो, कृषि गतिविधियों को आसान बनाया जा सके और किसानों को उनके कृषि उत्पाद का बेहतर मूल्य मिल सके। यह डेटाबेस सार्वभौमिक पहुँच सुनिश्चित करने हेतु ऑनलाइन साइन-इन सुविधा प्रदान करेगा और किसानों को व्यक्तिगत एवं सक्रिय सेवाओं जैसे- मिट्टी व पौधों की स्वास्थ्य सलाह, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण, सिंचाई सुविधाएँ, मौसम संबंधी सलाह, बीज, उर्वरक, बाज़ार पहुँच की सूचना, ऋण देने की सुविधा, कृषि उपकरण आदि प्रदान करेगा। वहीं यदि केंद्र सरकार पहले से ही ऐसी व्यवस्था बना चुकी है, तो उसे केंद्र सरकार के डेटाबेस के साथ एकीकृत किया जाएगा तथा उसमें और अधिक सुधार किया जाएगा। वर्तमान में इस डेटाबेस के तहत केवल वे किसान शामिल होंगे जो सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार कृषि भूमि के कानूनी मालिक हैं। भूमिहीन किसानों को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्य के वरिष्ठ नेता बी.एस. येदियुरप्पा के इस्तीफे के बाद 'बसवराज बोम्मई' ने राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है। बसवराज बोम्मई ने वर्ष 2008 से वर्ष 2013 के बीच राज्य के 'जल संसाधन मंत्री' और जुलाई 2019 से राज्य के गृह मंत्री के रूप में कार्य किया है। उत्तरी कर्नाटक के हावेरी ज़िले के 'शिगगाँव' से तीन बार विधायक रह चुके 61 वर्षीय बसवराज बोम्मई, दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री 'एस.आर. बोम्मई' के पुत्र हैं। बसवराज बोम्मई सक्रिय राजनीति में शामिल होने से पूर्व एक मैकेनिकल इंजीनियर थे, जिन्होंने पुणे में टाटा कंपनी के साथ अपने इंजीनियरिंग कॅरियर की शुरुआत की थी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 'दीमा हसाओ' ज़िले के मंडेरडीसा में एक 'बाँस औद्योगिक पार्क' की आधारशिला रखी है। इस परियोजना को 'मिनिस्ट्री फॉर डेवलपमेंट ऑफ नार्थ ईस्टर्न रीजन' द्वारा 50 करोड़ रुपए की लागत से क्रियान्वित किया जाएगा। 'बाँस औद्योगिक पार्क' इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में महत्त्वपूर्ण योगदान देगा और स्थानीय युवाओं के लिये रोज़गार के व्यापक अवसर पैदा करेगा। ज़िले में उत्पादित बाँस अब तक केवल अधिकतर पेपर मिलों को निर्यात किया जाता था, हालाँकि इस पार्क के बन जाने के साथ ही ज़िले के बाँस उद्योग के लिये टाइल्स और अगरबत्ती आदि के उत्पादन में संलग्न होने के नए रास्ते खुलेंगे, जिससे स्थानीय लोगों को अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त होगा। वैश्विक उद्योग रिपोर्ट (2019) के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर बाँस उद्योग का मूल्य तकरीबन 72.10 बिलियन अमेरिकी डॉलर है, जो कि वर्ष 2026 तक 98.75 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच सकता है। यद्यपि भारत के पास दुनिया के बाँस संसाधनों का 30% हिस्सा मौजूद है, किंतु भारत अपनी बाँस क्षमता का केवल दसवें हिस्से का ही उत्पादन करता है, जो कि वैश्विक बाँस बाज़ार का केवल 4% है। असम संपूर्ण भारत में प्राकृतिक एवं घरेलू बाँस के प्रमुख स्रोतों में से एक है। असम में बाँस सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक परंपराओं का एक अभिन्न हिस्सा रहा है। असम में बाँस की 51 प्रजातियाँ उगाई हैं, यदि इसका उचित उपयोग किया जाए तो इसमें पर्याप्त रोज़गार और राजस्व उत्पन्न करने की क्षमता है। हबल स्पेस टेलीस्कोप के डेटा का विश्लेषण कर शोधकर्त्ताओं ने हाल ही में 'बृहस्पति' ग्रह के सबसे बड़े चंद्रमा 'गैनिमीड' के वातावरण में जलवाष्प के साक्ष्य प्राप्त किये हैं। इससे पूर्व पिछले कई अध्ययनों में भी पाया गया था कि 'गैनिमीड' में पृथ्वी की तुलना में अधिक पानी हो सकता है, किंतु चूँकि यह बेहद ठंडा है (-100 से -180 डिग्री सेल्सियस), इसलिये इसकी सतह पर पानी ठोस रूप में हो सकता है। यह अनुमान है कि तरल रूप में महासागर 'गैनिमीड' की सतह से लगभग 160 किलोमीटर नीचे हो सकता है। ऐसे में 'गैनिमीड' पर जल की मौजूदगी के साक्ष्य, जीवन और रहने योग्य ग्रह की खोज में महत्त्वपूर्ण हो सकते हैं। वर्ष 1998 में 'हबल' के 'स्पेस टेलीस्कोप इमेजिंग स्पेक्ट्रोग्राफ' (STIS) ने 'गैनिमीड' की पहली पराबैंगनी तस्वीरें ली थीं। उत्सर्जन का अध्ययन करने पर शोधकर्त्ताओं ने यह भी पाया कि 'गैनिमीड' में स्थायी चुंबकीय क्षेत्र और कुछ परमाणु ऑक्सीजन मौजूद है। सूर्य से पाँचवीं पंक्ति में बृहस्पति, सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है जो अन्य सभी ग्रहों के मुकाबले दोगुने से अधिक बड़ा है। यह लगभग प्रत्येक 10 घंटे में एक बार घूर्णन (एक जोवियन दिवस) करता है, परंतु सूर्य की परिक्रमा (एक जोवियन वर्ष) करने में इसे लगभग 12 वर्ष लगते हैं। बृहस्पति के पास 75 से अधिक चंद्रमा हैं।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा की गई हालिया घोषणा के मुताबिक, सरकार डिजिटल भूमि अभिलेखों का उपयोग कर एक 'राष्ट्रीय किसान डेटाबेस' की स्थापना की योजना बना रही है। यह राष्ट्रीय डेटाबेस किसानों को सक्रिय एवं व्यक्तिगत सेवाएँ प्रदान करेगा। साथ ही सरकार इस डेटाबेस में किसानों के व्यक्तिगत विवरण संबंधी डेटा की गोपनीयता भी सुनिश्चित करेगी। इस पहल का उद्देश्य उपलब्ध आँकड़ों के आधार पर समाधान विकसित करके किसानों की आय में वृद्धि करना है। 'राष्ट्रीय किसान डेटाबेस' यह सुनिश्चित करेगा कि इनपुट लागत में कमी किये जाने से गुणवत्ता में सुधार हो, कृषि गतिविधियों को आसान बनाया जा सके और किसानों को उनके कृषि उत्पाद का बेहतर मूल्य मिल सके। यह डेटाबेस सार्वभौमिक पहुँच सुनिश्चित करने हेतु ऑनलाइन साइन-इन सुविधा प्रदान करेगा और किसानों को व्यक्तिगत एवं सक्रिय सेवाओं जैसे- मिट्टी व पौधों की स्वास्थ्य सलाह, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण, सिंचाई सुविधाएँ, मौसम संबंधी सलाह, बीज, उर्वरक, बाज़ार पहुँच की सूचना, ऋण देने की सुविधा, कृषि उपकरण आदि प्रदान करेगा। वहीं यदि केंद्र सरकार पहले से ही ऐसी व्यवस्था बना चुकी है, तो उसे केंद्र सरकार के डेटाबेस के साथ एकीकृत किया जाएगा तथा उसमें और अधिक सुधार किया जाएगा। वर्तमान में इस डेटाबेस के तहत केवल वे किसान शामिल होंगे जो सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार कृषि भूमि के कानूनी मालिक हैं। भूमिहीन किसानों को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्य के वरिष्ठ नेता बी.एस. येदियुरप्पा के इस्तीफे के बाद 'बसवराज बोम्मई' ने राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है। बसवराज बोम्मई ने वर्ष दो हज़ार आठ से वर्ष दो हज़ार तेरह के बीच राज्य के 'जल संसाधन मंत्री' और जुलाई दो हज़ार उन्नीस से राज्य के गृह मंत्री के रूप में कार्य किया है। उत्तरी कर्नाटक के हावेरी ज़िले के 'शिगगाँव' से तीन बार विधायक रह चुके इकसठ वर्षीय बसवराज बोम्मई, दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री 'एस.आर. बोम्मई' के पुत्र हैं। बसवराज बोम्मई सक्रिय राजनीति में शामिल होने से पूर्व एक मैकेनिकल इंजीनियर थे, जिन्होंने पुणे में टाटा कंपनी के साथ अपने इंजीनियरिंग कॅरियर की शुरुआत की थी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 'दीमा हसाओ' ज़िले के मंडेरडीसा में एक 'बाँस औद्योगिक पार्क' की आधारशिला रखी है। इस परियोजना को 'मिनिस्ट्री फॉर डेवलपमेंट ऑफ नार्थ ईस्टर्न रीजन' द्वारा पचास करोड़ रुपए की लागत से क्रियान्वित किया जाएगा। 'बाँस औद्योगिक पार्क' इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में महत्त्वपूर्ण योगदान देगा और स्थानीय युवाओं के लिये रोज़गार के व्यापक अवसर पैदा करेगा। ज़िले में उत्पादित बाँस अब तक केवल अधिकतर पेपर मिलों को निर्यात किया जाता था, हालाँकि इस पार्क के बन जाने के साथ ही ज़िले के बाँस उद्योग के लिये टाइल्स और अगरबत्ती आदि के उत्पादन में संलग्न होने के नए रास्ते खुलेंगे, जिससे स्थानीय लोगों को अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त होगा। वैश्विक उद्योग रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर बाँस उद्योग का मूल्य तकरीबन बहत्तर.दस बिलियन अमेरिकी डॉलर है, जो कि वर्ष दो हज़ार छब्बीस तक अट्ठानवे.पचहत्तर बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच सकता है। यद्यपि भारत के पास दुनिया के बाँस संसाधनों का तीस% हिस्सा मौजूद है, किंतु भारत अपनी बाँस क्षमता का केवल दसवें हिस्से का ही उत्पादन करता है, जो कि वैश्विक बाँस बाज़ार का केवल चार% है। असम संपूर्ण भारत में प्राकृतिक एवं घरेलू बाँस के प्रमुख स्रोतों में से एक है। असम में बाँस सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक परंपराओं का एक अभिन्न हिस्सा रहा है। असम में बाँस की इक्यावन प्रजातियाँ उगाई हैं, यदि इसका उचित उपयोग किया जाए तो इसमें पर्याप्त रोज़गार और राजस्व उत्पन्न करने की क्षमता है। हबल स्पेस टेलीस्कोप के डेटा का विश्लेषण कर शोधकर्त्ताओं ने हाल ही में 'बृहस्पति' ग्रह के सबसे बड़े चंद्रमा 'गैनिमीड' के वातावरण में जलवाष्प के साक्ष्य प्राप्त किये हैं। इससे पूर्व पिछले कई अध्ययनों में भी पाया गया था कि 'गैनिमीड' में पृथ्वी की तुलना में अधिक पानी हो सकता है, किंतु चूँकि यह बेहद ठंडा है , इसलिये इसकी सतह पर पानी ठोस रूप में हो सकता है। यह अनुमान है कि तरल रूप में महासागर 'गैनिमीड' की सतह से लगभग एक सौ साठ किलोग्राममीटर नीचे हो सकता है। ऐसे में 'गैनिमीड' पर जल की मौजूदगी के साक्ष्य, जीवन और रहने योग्य ग्रह की खोज में महत्त्वपूर्ण हो सकते हैं। वर्ष एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में 'हबल' के 'स्पेस टेलीस्कोप इमेजिंग स्पेक्ट्रोग्राफ' ने 'गैनिमीड' की पहली पराबैंगनी तस्वीरें ली थीं। उत्सर्जन का अध्ययन करने पर शोधकर्त्ताओं ने यह भी पाया कि 'गैनिमीड' में स्थायी चुंबकीय क्षेत्र और कुछ परमाणु ऑक्सीजन मौजूद है। सूर्य से पाँचवीं पंक्ति में बृहस्पति, सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है जो अन्य सभी ग्रहों के मुकाबले दोगुने से अधिक बड़ा है। यह लगभग प्रत्येक दस घंटाटे में एक बार घूर्णन करता है, परंतु सूर्य की परिक्रमा करने में इसे लगभग बारह वर्ष लगते हैं। बृहस्पति के पास पचहत्तर से अधिक चंद्रमा हैं।
दवा "Kudesan" निर्देश का मतलब हैजैविक रूप से सक्रिय additives जिसमें एंटीऑक्सीडेंट के गुण हैं। यह एजेंट अपने सक्रिय घटकों - विटामिन ई (टोकोफेरोल) और ubiquinone की जटिल कार्रवाई के कारण रेडॉक्स प्रक्रियाओं को उत्तेजित करने में सक्षम है। उत्तरार्द्ध प्रभावी रूप से मुक्त कणों के नकारात्मक प्रभाव को निष्क्रिय करता है, और अन्य एंटीऑक्सीडेंट की क्रिया को भी सक्रिय करता है। कोएनजाइम क्यू 10 (यूबिकिनोन) के उत्पादन में कमीशरीर की सुरक्षा को कमजोर करने, दिल के कामकाज में उल्लंघन और तेजी से थकान का कारण है। यह तत्व जहाजों को एथेरोस्क्लेरोटिक जमा से बचाता है, कोशिकाओं के श्वसन की प्रक्रिया और एटीपी के संश्लेषण में भाग लेता है। दवा "Kudesan", निर्देश सूचित करता है,atherosclerosis, आवश्यक उच्च रक्तचाप, अतालता, चालन संबंधी विकार, हृदय रोग के उपचार में सबसे प्रभावी। यह भी ध्यान दिया है कि प्रश्न में दवा तीन से चौदह वर्ष आयु वर्ग के बच्चों में कार्डियोमायोपैथी (dilattsionnoy) की प्रगति को धीमा करने में सक्षम है। विटामिन ई यूबिहोनिन द्वारा उत्पादित चिकित्सीय प्रभाव को बढ़ाता है। "Kudesan" दवा के उपयोग के लिए संकेत (उपयोग के लिए निर्देशों में यह जानकारी शामिल है) निम्नलिखित बीमारियां हैंः - न्यूरोकिरक्युलर डाइस्टनिया, अस्थिया, क्रोनिक थकान सिंड्रोम; - दिल की विफलता, इस्किमिक हृदय रोग, आवश्यक उच्च रक्तचाप, एथेरोस्क्लेरोसिस; इसके अलावा, दवा के लिए निर्धारित हैप्रतिरक्षा स्थिति का स्थिरीकरण, शरीर की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को रोकने और धीमा करने के लिए, साथ ही उम्र के साथ होने वाले त्वचा परिवर्तनों की जटिल चिकित्सा के लिए। अंतःस्रावी और तंत्रिका तंत्र के विकृति को खत्म करने के लिए इसका उपयोग करना भी संभव है। दवा "कुडेसन" मैनुअल सिफारिश करता हैभोजन के साथ दिन में एक बार दस से बारह बूंदें (किसी भी तरल में पूर्व-घुल जाना) लें। यह खुराक उन बच्चों पर लागू होता है जो बारह वर्ष की आयु तक पहुंच चुके हैं, साथ ही वयस्क रोगी भी। उन्हें इस दवा को समाधान के रूप में लेने की सिफारिश की जाती है। दवा "कुदेसन" (बच्चों के लिए) चबाने योग्य गोलियों के रूप में भी उपलब्ध है। वे 3 साल से अधिक उम्र के युवा रोगियों के उपचार के लिए अभिप्रेत हैं। दवा की इष्टतम मात्रा व्यक्तिगत रूप से निर्धारित की जाती है। तीन से सात तक के बच्चे - प्रति दिन एक टैबलेट, सात साल के बाद, आप खुराक को दोगुना कर सकते हैं। साथ ही "फोर्टे कूडसन" (गोलियाँ) नामक दवा का उत्पादन किया। यह किशोरों के लिए चौदह से अधिक और वयस्कों को एक गोली प्रतिदिन निर्धारित है। माना दवा के साथ उपचार की अवधि एक महीने से कम नहीं होनी चाहिए। वर्ष के दौरान कई बार चिकित्सा को दोहराने की सलाह दी जाती है। एक नियम के रूप में, दवा लेने से अवांछनीय प्रभाव नहीं होता है। एलर्जी प्रतिक्रियाएं शायद ही कभी देखी जाती हैं। मतभेदों में रोगी की उम्र शामिल हैतीन साल से कम, साथ ही दवा बनाने वाले पदार्थों के लिए व्यक्तिगत अतिसंवेदनशीलता। बच्चे की प्रतीक्षा अवधि में उपयोग के लिए दवा की अनुमति है, लेकिन प्रत्येक मामले में इसके उपयोग की उपयुक्तता डॉक्टर द्वारा निर्धारित की जाती है। के साथ प्रतिकूल बातचीत के तथ्यअन्य दवाओं के साथ संयोजन में उपयोग तय नहीं है। यह भी ध्यान दिया जाता है कि इस दवा के साथ अतिदेय की संभावना न्यूनतम है (इस तरह के कोई मामले दर्ज नहीं किए गए हैं)
दवा "Kudesan" निर्देश का मतलब हैजैविक रूप से सक्रिय additives जिसमें एंटीऑक्सीडेंट के गुण हैं। यह एजेंट अपने सक्रिय घटकों - विटामिन ई और ubiquinone की जटिल कार्रवाई के कारण रेडॉक्स प्रक्रियाओं को उत्तेजित करने में सक्षम है। उत्तरार्द्ध प्रभावी रूप से मुक्त कणों के नकारात्मक प्रभाव को निष्क्रिय करता है, और अन्य एंटीऑक्सीडेंट की क्रिया को भी सक्रिय करता है। कोएनजाइम क्यू दस के उत्पादन में कमीशरीर की सुरक्षा को कमजोर करने, दिल के कामकाज में उल्लंघन और तेजी से थकान का कारण है। यह तत्व जहाजों को एथेरोस्क्लेरोटिक जमा से बचाता है, कोशिकाओं के श्वसन की प्रक्रिया और एटीपी के संश्लेषण में भाग लेता है। दवा "Kudesan", निर्देश सूचित करता है,atherosclerosis, आवश्यक उच्च रक्तचाप, अतालता, चालन संबंधी विकार, हृदय रोग के उपचार में सबसे प्रभावी। यह भी ध्यान दिया है कि प्रश्न में दवा तीन से चौदह वर्ष आयु वर्ग के बच्चों में कार्डियोमायोपैथी की प्रगति को धीमा करने में सक्षम है। विटामिन ई यूबिहोनिन द्वारा उत्पादित चिकित्सीय प्रभाव को बढ़ाता है। "Kudesan" दवा के उपयोग के लिए संकेत निम्नलिखित बीमारियां हैंः - न्यूरोकिरक्युलर डाइस्टनिया, अस्थिया, क्रोनिक थकान सिंड्रोम; - दिल की विफलता, इस्किमिक हृदय रोग, आवश्यक उच्च रक्तचाप, एथेरोस्क्लेरोसिस; इसके अलावा, दवा के लिए निर्धारित हैप्रतिरक्षा स्थिति का स्थिरीकरण, शरीर की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को रोकने और धीमा करने के लिए, साथ ही उम्र के साथ होने वाले त्वचा परिवर्तनों की जटिल चिकित्सा के लिए। अंतःस्रावी और तंत्रिका तंत्र के विकृति को खत्म करने के लिए इसका उपयोग करना भी संभव है। दवा "कुडेसन" मैनुअल सिफारिश करता हैभोजन के साथ दिन में एक बार दस से बारह बूंदें लें। यह खुराक उन बच्चों पर लागू होता है जो बारह वर्ष की आयु तक पहुंच चुके हैं, साथ ही वयस्क रोगी भी। उन्हें इस दवा को समाधान के रूप में लेने की सिफारिश की जाती है। दवा "कुदेसन" चबाने योग्य गोलियों के रूप में भी उपलब्ध है। वे तीन साल से अधिक उम्र के युवा रोगियों के उपचार के लिए अभिप्रेत हैं। दवा की इष्टतम मात्रा व्यक्तिगत रूप से निर्धारित की जाती है। तीन से सात तक के बच्चे - प्रति दिन एक टैबलेट, सात साल के बाद, आप खुराक को दोगुना कर सकते हैं। साथ ही "फोर्टे कूडसन" नामक दवा का उत्पादन किया। यह किशोरों के लिए चौदह से अधिक और वयस्कों को एक गोली प्रतिदिन निर्धारित है। माना दवा के साथ उपचार की अवधि एक महीने से कम नहीं होनी चाहिए। वर्ष के दौरान कई बार चिकित्सा को दोहराने की सलाह दी जाती है। एक नियम के रूप में, दवा लेने से अवांछनीय प्रभाव नहीं होता है। एलर्जी प्रतिक्रियाएं शायद ही कभी देखी जाती हैं। मतभेदों में रोगी की उम्र शामिल हैतीन साल से कम, साथ ही दवा बनाने वाले पदार्थों के लिए व्यक्तिगत अतिसंवेदनशीलता। बच्चे की प्रतीक्षा अवधि में उपयोग के लिए दवा की अनुमति है, लेकिन प्रत्येक मामले में इसके उपयोग की उपयुक्तता डॉक्टर द्वारा निर्धारित की जाती है। के साथ प्रतिकूल बातचीत के तथ्यअन्य दवाओं के साथ संयोजन में उपयोग तय नहीं है। यह भी ध्यान दिया जाता है कि इस दवा के साथ अतिदेय की संभावना न्यूनतम है
GORAKHPUR : बिजली चेकिंग करने निकली टीम ने मंडे को मोहद्दीपुर एरिया में बिजली चेकिंग का अभियान चलाया। टीम जैसे ही मोहद्दीपुर के रियाज हास्पिटल के पास पहुंची तो मीटर खोलते ही पाया कि मीटर में संट है। चेकिंग में दौरान मीटर म्0 परसेंट से ज्यादा स्लो पाया गया। तुर्रा ये कि मकान के मालिक निकले सिंचाई विभाग के एक्सईएन ओपी श्रीवास्तव, हालांकि चेकिंग के बाद बिजली विभाग ने एक्सईएन पर जुर्माना लगा दिया। मोहद्दीपुर के एसडीओ हेमंत सिंह का कहना है कि सिटी में क्ख् जनवरी से बिजली चेकिंग अभियान चल रहा है। अभी तक के चेकिंग में ये सामने आया है कि जितने भी थ्री फेज वाले कनेक्शन हैं, उनमें से 90 प्रतिशत घरों में बिजली चोरी हो रही है। ज्यादातर मीटरों में संट और रेजिस्टेंस लगाकर चोरी की जा रही है। जैसे ही इन चोरों पर जुर्माना लगाया जाता है, वह तत्काल जुर्माना भर देते हैं। आश्चर्य की बात यह है कि घरों में मीटर के साथ छेड़छाड़ की जा रहा है, जबकि कटिया कनेक्शन बहुत कम मिल रहे हैं। ख्- कंज्यूमर्स पर बिजली चोरी के लिए एफआईआर दर्ज कराई गई। क् लाख रुपए- शमन शुल्क वसूला गया। ख्. ख्क् लाख रुपए- निर्धारण शुल्क वसूला गया। जब तक सिटी में लाइन लॉस क्भ् परसेंट तक नहीं पहुंचता, तब तक ये अभियान चलता रहेगा। ट्यूज्डे को मोहद्दीपुर में ही चेकिंग अभियान चलेगा।
GORAKHPUR : बिजली चेकिंग करने निकली टीम ने मंडे को मोहद्दीपुर एरिया में बिजली चेकिंग का अभियान चलाया। टीम जैसे ही मोहद्दीपुर के रियाज हास्पिटल के पास पहुंची तो मीटर खोलते ही पाया कि मीटर में संट है। चेकिंग में दौरान मीटर म्शून्य परसेंट से ज्यादा स्लो पाया गया। तुर्रा ये कि मकान के मालिक निकले सिंचाई विभाग के एक्सईएन ओपी श्रीवास्तव, हालांकि चेकिंग के बाद बिजली विभाग ने एक्सईएन पर जुर्माना लगा दिया। मोहद्दीपुर के एसडीओ हेमंत सिंह का कहना है कि सिटी में क्ख् जनवरी से बिजली चेकिंग अभियान चल रहा है। अभी तक के चेकिंग में ये सामने आया है कि जितने भी थ्री फेज वाले कनेक्शन हैं, उनमें से नब्बे प्रतिशत घरों में बिजली चोरी हो रही है। ज्यादातर मीटरों में संट और रेजिस्टेंस लगाकर चोरी की जा रही है। जैसे ही इन चोरों पर जुर्माना लगाया जाता है, वह तत्काल जुर्माना भर देते हैं। आश्चर्य की बात यह है कि घरों में मीटर के साथ छेड़छाड़ की जा रहा है, जबकि कटिया कनेक्शन बहुत कम मिल रहे हैं। ख्- कंज्यूमर्स पर बिजली चोरी के लिए एफआईआर दर्ज कराई गई। क् लाख रुपए- शमन शुल्क वसूला गया। ख्. ख्क् लाख रुपए- निर्धारण शुल्क वसूला गया। जब तक सिटी में लाइन लॉस क्भ् परसेंट तक नहीं पहुंचता, तब तक ये अभियान चलता रहेगा। ट्यूज्डे को मोहद्दीपुर में ही चेकिंग अभियान चलेगा।
मुंबई : देश की निर्यात नीति भारत की प्रगति के लिए 'ग्रोथ इंजन' सिद्ध होगी. इसके लिए सरकार के प्रयासों को वैश्विक स्तर पर उल्लेखनीय प्रतिसाद मिल रहा है, ऐसा प्रतिपादन केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने किया. मैग्नेटिक महाराष्ट्र कनवर्जंस- 2018 अंतर्राष्ट्रीय निवेश परिषद में 'एक्सपोर्ट ओरिएंटेड इंडस्ट्रियलाइजेशन' विषय पर आयोजित परिसंवाद में मार्गदर्शन करते हुए श्री प्रभु बोल रहे थे. इस अवसर पर केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के महानिदेशक अजय सहाय्य, अतिरिक्त महानिदेशक सोनिया सेठी, केपीएमजी के अध्यक्ष अरुण कुमार, निर्यातदार पी पांड्या, उद्योजक गोपाल पिल्लई, जय श्रोफ, ए बी रवि आदि उपस्थित थे. केंद्रीय मंत्री श्री प्रभु ने आगे कहा कि देश के सामने विभिन्न उद्योग और व्यवसाय के लिए काफी अच्छे अवसर है और कई जगह पर अवसर उनकी रह देख रहे है जो उद्योग करना चाहते है. उन्होंने देश के समक्ष उपलब्ध अवसर का आलेख भी सामने रखते हुए कहा कि सरकार ऐसे प्रयासों को समर्थन देकर उस दिशा में नीतियां बना रही है. उन्होंने कहा कि इसमें ऐसे उद्योग और व्यवसायकों के विचार, उनके अभिप्राय को महत्व देकर इस प्रक्रिया को अधिक से अधिक आसान करने के प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने यह भी बताया कि उद्योग को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार के प्रयासों को राज्यों की ओर से सकारात्मक मदद मिल रही है और यह देश की प्रगति के लिए उपयुक्त सिद्ध होगी. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र का योगदान देश के उद्योग क्षेत्र में काफी महत्वपूर्ण है और इस अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शन का फायदा बड़े पैमाने पर विभिन्न क्षेत्र के लोगों को होगा.
मुंबई : देश की निर्यात नीति भारत की प्रगति के लिए 'ग्रोथ इंजन' सिद्ध होगी. इसके लिए सरकार के प्रयासों को वैश्विक स्तर पर उल्लेखनीय प्रतिसाद मिल रहा है, ऐसा प्रतिपादन केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने किया. मैग्नेटिक महाराष्ट्र कनवर्जंस- दो हज़ार अट्ठारह अंतर्राष्ट्रीय निवेश परिषद में 'एक्सपोर्ट ओरिएंटेड इंडस्ट्रियलाइजेशन' विषय पर आयोजित परिसंवाद में मार्गदर्शन करते हुए श्री प्रभु बोल रहे थे. इस अवसर पर केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के महानिदेशक अजय सहाय्य, अतिरिक्त महानिदेशक सोनिया सेठी, केपीएमजी के अध्यक्ष अरुण कुमार, निर्यातदार पी पांड्या, उद्योजक गोपाल पिल्लई, जय श्रोफ, ए बी रवि आदि उपस्थित थे. केंद्रीय मंत्री श्री प्रभु ने आगे कहा कि देश के सामने विभिन्न उद्योग और व्यवसाय के लिए काफी अच्छे अवसर है और कई जगह पर अवसर उनकी रह देख रहे है जो उद्योग करना चाहते है. उन्होंने देश के समक्ष उपलब्ध अवसर का आलेख भी सामने रखते हुए कहा कि सरकार ऐसे प्रयासों को समर्थन देकर उस दिशा में नीतियां बना रही है. उन्होंने कहा कि इसमें ऐसे उद्योग और व्यवसायकों के विचार, उनके अभिप्राय को महत्व देकर इस प्रक्रिया को अधिक से अधिक आसान करने के प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने यह भी बताया कि उद्योग को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार के प्रयासों को राज्यों की ओर से सकारात्मक मदद मिल रही है और यह देश की प्रगति के लिए उपयुक्त सिद्ध होगी. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र का योगदान देश के उद्योग क्षेत्र में काफी महत्वपूर्ण है और इस अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शन का फायदा बड़े पैमाने पर विभिन्न क्षेत्र के लोगों को होगा.
करने वालो में मुख्य थे। समाजवादी पार्टी के सामने इस समय सबसे बउी चुनौती जिलापंचायत और खंड विकास समितियों मे से अधक से आिक पर कब्जा करने को लेकर है। संभवतःश्रीमती नीता सिह से भी यही अपेक्षा की गयी होगी । अगर वह इसमें किसी भी प्रकार खरी उतरती हैं तो उनके लिये पार्टी राजनीति में संभावनाये काफी बढ जायेंगी।
करने वालो में मुख्य थे। समाजवादी पार्टी के सामने इस समय सबसे बउी चुनौती जिलापंचायत और खंड विकास समितियों मे से अधक से आिक पर कब्जा करने को लेकर है। संभवतःश्रीमती नीता सिह से भी यही अपेक्षा की गयी होगी । अगर वह इसमें किसी भी प्रकार खरी उतरती हैं तो उनके लिये पार्टी राजनीति में संभावनाये काफी बढ जायेंगी।
पहाड़ों की रानी मसूरी नगर पालिका परिषद पीएम मोदी के स्वच्छता अभियान को पलीता लगा रहा है। पालिका द्वारा संचालित सार्वजनिक शौचालयों में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। जिससे स्थानीय लोगों के साथ ही सैलानियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आलम ये है कि स्थानीय लोग खुले में शौच करने को मजबूर हैं। वहीं, सफाई न होने के लिए पानी की समुचित व्यवस्था न होना बताया जा रहा है। मसूरी के सुवाखोली क्षेत्र में नगर पालिका का एकमात्र सुलभ शौचालय है, जो इन दिनों विभाग की लापरवाही के चलते बदहाली के आंसू रो रहा है। जिससे स्थानीय लोगों के साथ ही देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को खासी परेशानी हो रही है। लोगों का कहना है कि सफाई न होने से शौचालय में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। साथ ही दुर्गंध से लोगों का जीना दूभर हो गया है। ऐसे में स्थानीय लोग खुले में शौच करने को मजबूर हैं। वहीं, सफाई न होने के लिए पानी की समुचित व्यवस्था न होना बताया जा रहा है। स्थानीय निवासी जयपाल सिंह ने बताया कि यहां आने वाले पर्यटक शौच के लिए या तो खुले में जाते हैं या आस-पास के घरों के लोगों से मदद मांगते हैं। उन्होंने बताया कि सार्वजनिक शौचालय में पानी की व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण इसकी साफ-सफाई नहीं हो पा रही है। वहीं, स्थानीय लोगों ने नगर पालिका प्रशासन से सुलभ शौचालय में पानी की व्यवस्था जल्द करने की मांग की है। जिससे लोगों को परेशानियों से दो-चार न होना पड़ें ।
पहाड़ों की रानी मसूरी नगर पालिका परिषद पीएम मोदी के स्वच्छता अभियान को पलीता लगा रहा है। पालिका द्वारा संचालित सार्वजनिक शौचालयों में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। जिससे स्थानीय लोगों के साथ ही सैलानियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आलम ये है कि स्थानीय लोग खुले में शौच करने को मजबूर हैं। वहीं, सफाई न होने के लिए पानी की समुचित व्यवस्था न होना बताया जा रहा है। मसूरी के सुवाखोली क्षेत्र में नगर पालिका का एकमात्र सुलभ शौचालय है, जो इन दिनों विभाग की लापरवाही के चलते बदहाली के आंसू रो रहा है। जिससे स्थानीय लोगों के साथ ही देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को खासी परेशानी हो रही है। लोगों का कहना है कि सफाई न होने से शौचालय में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। साथ ही दुर्गंध से लोगों का जीना दूभर हो गया है। ऐसे में स्थानीय लोग खुले में शौच करने को मजबूर हैं। वहीं, सफाई न होने के लिए पानी की समुचित व्यवस्था न होना बताया जा रहा है। स्थानीय निवासी जयपाल सिंह ने बताया कि यहां आने वाले पर्यटक शौच के लिए या तो खुले में जाते हैं या आस-पास के घरों के लोगों से मदद मांगते हैं। उन्होंने बताया कि सार्वजनिक शौचालय में पानी की व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण इसकी साफ-सफाई नहीं हो पा रही है। वहीं, स्थानीय लोगों ने नगर पालिका प्रशासन से सुलभ शौचालय में पानी की व्यवस्था जल्द करने की मांग की है। जिससे लोगों को परेशानियों से दो-चार न होना पड़ें ।
Ranchi: अखिल झारखंड अधिवक्ता संघ का लक्ष्य एवं मकसद बिल्कुल स्पष्ट है. आम जनमानस को उनके अधिकार, संविधान की प्रस्तावना, मौलिक अधिकार तथा संवैधानिक कर्तव्यों के बारे में जानकारी प्रदान करना तथा शोषितों, वंचितों, पिछड़ों और समाज के अंतिम छोर पर खड़े लोगों को न्यायिक प्रक्रियाओं से अवगत कराना तथा न्याय दिलाना. राज्य के विकास एवं सामाजिक बेहतरी के लिए अधिवक्ताओं को आगे आकर नेतृत्व देना होगा, यही मौजूदा समय की जरुरत है. उक्त बातें आजसू पार्टी के केंद्रीय महासचिव डॉ. लंबोदर महतो ने रांची स्थित केंद्रीय कार्यालय में आयोजित मिलन समारोह में उपस्थित अधिवक्ताओं, पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कही. मौके पर आजसू पार्टी के केंद्रीय मुख्य प्रवक्ता डॉ. देवशरण भगत ने सभी अधिवक्ताओं से आग्रह करते हुए कहा कि आत्मसंतुष्टि के लिए कार्य करें, शोषितों-पीड़ितों और आर्थिक रुप से अक्षम लोगों को न्यायिक विषयों एवं न्यायिक प्रक्रिया में मदद करें। कहा कि जबतक जिम्मेदार लोग आगे आकर नेतृत्व नहीं करेंगे तबतक राज्य का कायाकल्प संभव नहीं है. मौके पर आजसू पार्टी के केंद्रीय उपाध्यक्ष हसन अंसारी ने कहा कि आज भी ग्रामीणों में कानूनी विषयों की जानकारी बहुत कम है. जागरुकता की कमी के कारण सरकारी अधिकारी एवं कर्मचारी छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी आम जनता को कोर्ट, कचहरी एवं कार्यालयों का चक्कर लगवाते रहते हैं. ऐसी परिस्थितियों में अखिल झारखण्ड अधिवक्ता संघ की जिम्मेदारियां और बड़ी हो जाती हैं. ग्रामीणों को न्याय दिलाने के लिए अधिवक्ताओं को बड़ी एवं महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी. सभी अधिवक्ता आम जनता को न्यायिक प्रणाली एवं विषयों को लेकर तार्किक, बौद्धिक एवं वैचारिक मदद करें. तथा गरीब और आमजन को सुलभता से न्याय दिलाने तथा उनके कल्याण के लिए कार्य करते रहें. वर्तमान राजनीतिक परिपेक्ष्य तथा झारखंड के नवनिर्माण में अधिवक्ताओं एवं बुद्धिजीवियों की भूमिका एवं जिम्मेदारियां व्यापक हैं. आजसू पार्टी की सदस्यता ग्रहण करते हुए विधि विभाग, झारखंड सरकार के पूर्व प्रधान कानून सचिव एवं पूर्व न्यायाधीश श्री पंकज श्रीवास्तव ने कहा कि जिस प्रकार आजसू पार्टी बिना भय, पक्षपात, राग या द्वेष के सकारात्मक राजनीति करती आई है, ठीक उसी प्रकार अखिल झारखंड अधिवक्ता संघ के पदाधिकारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें। राज्य में कानून का शासन स्थापित हो तथा न्यायिक स्वतंत्रता बरकरार रहे, इसे लेकर हमें व्यापक रोडमैप के साथ कार्य करना है. मिलन समारोह को संबोधित करते हुए अखिल झारखंड अधिवक्ता संघ के प्रदेश अध्यक्ष राधेश्याम गोस्वामी ने कहा कि कानूनी रुप से परिपक्व एवं सक्षम नेताओं को समाज की जरुरत है, यही मौजूदा समय की भी मांग है. दूरगामी सोच के साथ इस दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा. इसी क्रम में अधिवक्ता संघ के गठन, पुनर्गठन एवं विस्तार का कार्य निरंतर जारी है. मिलन समारोह के दौरान अखिल झारखंड अधिवक्ता संघ के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष राधेश्याम गोस्वामी, प्रधान महासचिव भरत चंद्र महतो सहित सभी प्रदेश पदाधिकारियों को भी सम्मानित किया गया. इन्होंने ली आजसू की सदस्यता : पूर्व प्रधान कानून सचिव एवं न्यायाधीश पंकज श्रीवास्तव, झारखंड उच्च न्यायालय के अधिवक्ता अमरेश कुमार, आशीष गौतम, राजेश कुमार पासवान तथा रंजीत महतो, उमेश चंद्र दास एवं प्रदीप कुमार. मिलन समारोह में मुख्य रूप से आजसू पार्टी के केंद्रीय महासचिव डॉ. लंबोदर महतो, मुख्य प्रवक्ता डॉ. देवशरण भगत, केंद्रीय उपाध्यक्ष हसन अंसारी, केंद्रीय प्रवक्ता मनोज सिंह, अखिल झारखंड अधिवक्ता संघ के प्रदेश अध्यक्ष राधेश्याम गोस्वामी, अखिल झारखंड अधिवक्ता संघ के प्रधान महासचिव भरत चंद्र महतो, उपाध्यक्ष दिनेश चौधरी, जेपी झा, महासचिव गोपेश्वर सिंह, सचिव संजीत कुमार, रमेश कुमार सिंह, सर्वेश्वरी कुमारी, अखिल झारखंड अधिवक्ता संघ के रांची जिलाध्यक्ष अंजीत कुमार, केंद्रीय कार्यालय मीडिया प्रभारी परवाज़ खान सहित अन्य मौजूद रहें.
Ranchi: अखिल झारखंड अधिवक्ता संघ का लक्ष्य एवं मकसद बिल्कुल स्पष्ट है. आम जनमानस को उनके अधिकार, संविधान की प्रस्तावना, मौलिक अधिकार तथा संवैधानिक कर्तव्यों के बारे में जानकारी प्रदान करना तथा शोषितों, वंचितों, पिछड़ों और समाज के अंतिम छोर पर खड़े लोगों को न्यायिक प्रक्रियाओं से अवगत कराना तथा न्याय दिलाना. राज्य के विकास एवं सामाजिक बेहतरी के लिए अधिवक्ताओं को आगे आकर नेतृत्व देना होगा, यही मौजूदा समय की जरुरत है. उक्त बातें आजसू पार्टी के केंद्रीय महासचिव डॉ. लंबोदर महतो ने रांची स्थित केंद्रीय कार्यालय में आयोजित मिलन समारोह में उपस्थित अधिवक्ताओं, पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कही. मौके पर आजसू पार्टी के केंद्रीय मुख्य प्रवक्ता डॉ. देवशरण भगत ने सभी अधिवक्ताओं से आग्रह करते हुए कहा कि आत्मसंतुष्टि के लिए कार्य करें, शोषितों-पीड़ितों और आर्थिक रुप से अक्षम लोगों को न्यायिक विषयों एवं न्यायिक प्रक्रिया में मदद करें। कहा कि जबतक जिम्मेदार लोग आगे आकर नेतृत्व नहीं करेंगे तबतक राज्य का कायाकल्प संभव नहीं है. मौके पर आजसू पार्टी के केंद्रीय उपाध्यक्ष हसन अंसारी ने कहा कि आज भी ग्रामीणों में कानूनी विषयों की जानकारी बहुत कम है. जागरुकता की कमी के कारण सरकारी अधिकारी एवं कर्मचारी छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी आम जनता को कोर्ट, कचहरी एवं कार्यालयों का चक्कर लगवाते रहते हैं. ऐसी परिस्थितियों में अखिल झारखण्ड अधिवक्ता संघ की जिम्मेदारियां और बड़ी हो जाती हैं. ग्रामीणों को न्याय दिलाने के लिए अधिवक्ताओं को बड़ी एवं महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी. सभी अधिवक्ता आम जनता को न्यायिक प्रणाली एवं विषयों को लेकर तार्किक, बौद्धिक एवं वैचारिक मदद करें. तथा गरीब और आमजन को सुलभता से न्याय दिलाने तथा उनके कल्याण के लिए कार्य करते रहें. वर्तमान राजनीतिक परिपेक्ष्य तथा झारखंड के नवनिर्माण में अधिवक्ताओं एवं बुद्धिजीवियों की भूमिका एवं जिम्मेदारियां व्यापक हैं. आजसू पार्टी की सदस्यता ग्रहण करते हुए विधि विभाग, झारखंड सरकार के पूर्व प्रधान कानून सचिव एवं पूर्व न्यायाधीश श्री पंकज श्रीवास्तव ने कहा कि जिस प्रकार आजसू पार्टी बिना भय, पक्षपात, राग या द्वेष के सकारात्मक राजनीति करती आई है, ठीक उसी प्रकार अखिल झारखंड अधिवक्ता संघ के पदाधिकारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें। राज्य में कानून का शासन स्थापित हो तथा न्यायिक स्वतंत्रता बरकरार रहे, इसे लेकर हमें व्यापक रोडमैप के साथ कार्य करना है. मिलन समारोह को संबोधित करते हुए अखिल झारखंड अधिवक्ता संघ के प्रदेश अध्यक्ष राधेश्याम गोस्वामी ने कहा कि कानूनी रुप से परिपक्व एवं सक्षम नेताओं को समाज की जरुरत है, यही मौजूदा समय की भी मांग है. दूरगामी सोच के साथ इस दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा. इसी क्रम में अधिवक्ता संघ के गठन, पुनर्गठन एवं विस्तार का कार्य निरंतर जारी है. मिलन समारोह के दौरान अखिल झारखंड अधिवक्ता संघ के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष राधेश्याम गोस्वामी, प्रधान महासचिव भरत चंद्र महतो सहित सभी प्रदेश पदाधिकारियों को भी सम्मानित किया गया. इन्होंने ली आजसू की सदस्यता : पूर्व प्रधान कानून सचिव एवं न्यायाधीश पंकज श्रीवास्तव, झारखंड उच्च न्यायालय के अधिवक्ता अमरेश कुमार, आशीष गौतम, राजेश कुमार पासवान तथा रंजीत महतो, उमेश चंद्र दास एवं प्रदीप कुमार. मिलन समारोह में मुख्य रूप से आजसू पार्टी के केंद्रीय महासचिव डॉ. लंबोदर महतो, मुख्य प्रवक्ता डॉ. देवशरण भगत, केंद्रीय उपाध्यक्ष हसन अंसारी, केंद्रीय प्रवक्ता मनोज सिंह, अखिल झारखंड अधिवक्ता संघ के प्रदेश अध्यक्ष राधेश्याम गोस्वामी, अखिल झारखंड अधिवक्ता संघ के प्रधान महासचिव भरत चंद्र महतो, उपाध्यक्ष दिनेश चौधरी, जेपी झा, महासचिव गोपेश्वर सिंह, सचिव संजीत कुमार, रमेश कुमार सिंह, सर्वेश्वरी कुमारी, अखिल झारखंड अधिवक्ता संघ के रांची जिलाध्यक्ष अंजीत कुमार, केंद्रीय कार्यालय मीडिया प्रभारी परवाज़ खान सहित अन्य मौजूद रहें.
New Delhi: भारत में तेजी से आगे बढ़ रही स्टार्टअप कंपनी 'फिनटेक यूनिकॉर्न जेरोधा' को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। महज 11 साल पहले शुरू हुई कंपनी के को-फाउंडर नितिन कामथ और निखिल कामथ (Nikhil Kamath) को सालाना 100-100 करोड़ रुपये सैलरी (Nithin Kamath net worth) मिलेगी। इतना ही नहीं नितिन की पत्नी सीमा पाटिल को भी सालाना 100 करोड़ रुपए सैलरी दिए जाने का प्रस्ताव पारित किया गया है। उन्हें हाल ही में 'जेरोधा' का होल-टाइम डायरेक्टर बनाया गया है। कि जेरोधा की बोर्ड मीटिंग (Nithin Kamath net worth) में यह फैसला लेते हुए एक विशेष प्रस्ताव पारित किया गया है। इस हिसाब से परिवार की सालाना आय कुल मिलाकर 300 करोड़ रुपए हो जाएगी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार तीनों की बेसिक सैलरी प्रति माह 4. 17 करोड़ रुपए होगी, इसके साथ ही इन्हें 4. 17 करोड़ रुपए प्रति माह इंसेंटिव और भत्ता मिलेगा। बता दें कि सैलरी के मामले में इन्होंने देश के दिग्गज उद्योगपति मुकेश अंबानी, गौतम अडाणी, अजीम प्रेमजी जैसे नामों को भी पीछे छोड़ दिया है। इनके अलावा स्टार्टअप की ज्यादा सैलरी वाली संस्थापकों और डायरेक्टरों की बात करें तो इस लिस्ट में जोमैटो के दीपेंदर गोयल, पेटीएम के विजय शर्मा, इनक्रेड के भूपिंदर सिंह, ड्रीम11 के हर्ष जैन और कारट्रेड के विनय सांघी शामिल हैं। Also Read: डोमिनिका में पकड़ा गया भगोड़ा मेहुल चोकसी, सुनिए एंटीगुआ के पीएम ने क्या कहा? देश और दुनिया से जुड़ी Hindi News की ताज़ा खबरों के लिए यहाँ क्लिक करें. Youtube Channel यहाँ सब्सक्राइब करें। सोशल से जुड़ने के लिए हमारा Facebook Page लाइक करें, Twitter पर फॉलो करें और Android App डाउनलोड करें.
New Delhi: भारत में तेजी से आगे बढ़ रही स्टार्टअप कंपनी 'फिनटेक यूनिकॉर्न जेरोधा' को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। महज ग्यारह साल पहले शुरू हुई कंपनी के को-फाउंडर नितिन कामथ और निखिल कामथ को सालाना एक सौ-एक सौ करोड़ रुपये सैलरी मिलेगी। इतना ही नहीं नितिन की पत्नी सीमा पाटिल को भी सालाना एक सौ करोड़ रुपए सैलरी दिए जाने का प्रस्ताव पारित किया गया है। उन्हें हाल ही में 'जेरोधा' का होल-टाइम डायरेक्टर बनाया गया है। कि जेरोधा की बोर्ड मीटिंग में यह फैसला लेते हुए एक विशेष प्रस्ताव पारित किया गया है। इस हिसाब से परिवार की सालाना आय कुल मिलाकर तीन सौ करोड़ रुपए हो जाएगी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार तीनों की बेसिक सैलरी प्रति माह चार. सत्रह करोड़ रुपए होगी, इसके साथ ही इन्हें चार. सत्रह करोड़ रुपए प्रति माह इंसेंटिव और भत्ता मिलेगा। बता दें कि सैलरी के मामले में इन्होंने देश के दिग्गज उद्योगपति मुकेश अंबानी, गौतम अडाणी, अजीम प्रेमजी जैसे नामों को भी पीछे छोड़ दिया है। इनके अलावा स्टार्टअप की ज्यादा सैलरी वाली संस्थापकों और डायरेक्टरों की बात करें तो इस लिस्ट में जोमैटो के दीपेंदर गोयल, पेटीएम के विजय शर्मा, इनक्रेड के भूपिंदर सिंह, ड्रीमग्यारह के हर्ष जैन और कारट्रेड के विनय सांघी शामिल हैं। Also Read: डोमिनिका में पकड़ा गया भगोड़ा मेहुल चोकसी, सुनिए एंटीगुआ के पीएम ने क्या कहा? देश और दुनिया से जुड़ी Hindi News की ताज़ा खबरों के लिए यहाँ क्लिक करें. Youtube Channel यहाँ सब्सक्राइब करें। सोशल से जुड़ने के लिए हमारा Facebook Page लाइक करें, Twitter पर फॉलो करें और Android App डाउनलोड करें.
चंडीगढ़ न्यूज़ः उच्चतम न्यायालय ने केंद्र में 'लिव-इन' संबंधों के पंजीकरण को लेकर नियम बनाने का आग्रह करने वाली जनहित याचिका को 'मूर्खतापूर्ण विचार' करार देते हुए खारिज कर दिया. न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला की पीठ ने याचिकाकर्ता ममता रानी के वकील से पूछा कि क्या वह इन लोगों की सुरक्षा बढ़ाना चाहती है या वह चाहती है कि वे 'लिव-इन' संबंधों में न रहें. इसके जवाब में वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता 'लिव इन' में रहने वाले लोगों की सामाजिक सुरक्षा बढ़ाने के लिए इन संबंधों का पंजीकरण चाहती है. पीठ ने कहा कि 'लिव इन' संबंधों के पंजीकरण का केंद्र से क्या लेना देना है? यह कैसा मूर्खतापूर्ण विचार है? अब समय आ गया है कि न्यायालय इस प्रकार की जनहित याचिकाएं दायर करने वालों पर जुर्माना लगाना शुरू करे. इसे खारिज किया जाता है. रानी ने उच्चतम न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर कर केंद्र को 'लिव-इन' संबंधों के पंजीकरण के लिए नियम बनाने का निर्देश देने का आग्रह किया था. याचिका में ऐसे संबंधों में बलात्कार और हत्या जैसे अपराधों में वृद्धि का उल्लेख किया गया था. याचिका में श्रद्धा वाल्कर की कथित तौर पर उसके लिव-इन पार्टनर आफताब अमीन पूनावाला द्वारा हत्या किए जाने का हवाला देते हुए इस तरह के रिश्तों के पंजीकरण के लिए नियम और दिशानिर्देश बनाने का आग्रह किया गया था. जनहित याचिका में कहा गया था कि 'लिव-इन' संबंधों के पंजीकरण से ऐसे संबंधों में रहने वालों को एक-दूसरे के बारे में और सरकार को भी उनकी वैवाहिक स्थिति, उनके आपराधिक इतिहास और अन्य प्रासंगिक विवरणों के बारे में सटीक जानकारी उपलब्ध होगी.
चंडीगढ़ न्यूज़ः उच्चतम न्यायालय ने केंद्र में 'लिव-इन' संबंधों के पंजीकरण को लेकर नियम बनाने का आग्रह करने वाली जनहित याचिका को 'मूर्खतापूर्ण विचार' करार देते हुए खारिज कर दिया. न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला की पीठ ने याचिकाकर्ता ममता रानी के वकील से पूछा कि क्या वह इन लोगों की सुरक्षा बढ़ाना चाहती है या वह चाहती है कि वे 'लिव-इन' संबंधों में न रहें. इसके जवाब में वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता 'लिव इन' में रहने वाले लोगों की सामाजिक सुरक्षा बढ़ाने के लिए इन संबंधों का पंजीकरण चाहती है. पीठ ने कहा कि 'लिव इन' संबंधों के पंजीकरण का केंद्र से क्या लेना देना है? यह कैसा मूर्खतापूर्ण विचार है? अब समय आ गया है कि न्यायालय इस प्रकार की जनहित याचिकाएं दायर करने वालों पर जुर्माना लगाना शुरू करे. इसे खारिज किया जाता है. रानी ने उच्चतम न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर कर केंद्र को 'लिव-इन' संबंधों के पंजीकरण के लिए नियम बनाने का निर्देश देने का आग्रह किया था. याचिका में ऐसे संबंधों में बलात्कार और हत्या जैसे अपराधों में वृद्धि का उल्लेख किया गया था. याचिका में श्रद्धा वाल्कर की कथित तौर पर उसके लिव-इन पार्टनर आफताब अमीन पूनावाला द्वारा हत्या किए जाने का हवाला देते हुए इस तरह के रिश्तों के पंजीकरण के लिए नियम और दिशानिर्देश बनाने का आग्रह किया गया था. जनहित याचिका में कहा गया था कि 'लिव-इन' संबंधों के पंजीकरण से ऐसे संबंधों में रहने वालों को एक-दूसरे के बारे में और सरकार को भी उनकी वैवाहिक स्थिति, उनके आपराधिक इतिहास और अन्य प्रासंगिक विवरणों के बारे में सटीक जानकारी उपलब्ध होगी.
जनता से रिश्ता वेबडेस्क। पंचांग के अनुसार प्रति वर्ष चैत्र कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को रंग पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। पं. उमेश नारायण जी के अनुसार 2 अप्रैल यानि शुक्रवार को ये उत्सव मनाया जाएगा L दरअसल रंग पंचमी का पर्व होली के पांच दिन बाद मनाया जाता है। होली का पर्व चैत्र कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से प्रारंभ हो जाता है और पंचमी तिथि तक चलता है। पंचमी तिथि पर पड़ने के कारण ही इसे रंग पंचमी का पर्व कहते हैं। इस त्योहार को बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस पर्व में अबीर और गुलाल की छटा देखने को मिलती है। इसमें राधा-कृष्ण को भी अबीर और गुलाल अर्पित किया जाता है। कई जगह शोभायात्रा भी निकाली जाती है। महाराष्ट्र में रंग पंचमी का पर्व खूब धूमधाम से मनाया जाता है। इसमें लोग सूखे गुलाल के साथ रंग खेलते हैं। इस दिन विशेष प्रकार के पकवान बनाए जाते हैं। साथ ही मित्रों और रिश्तेदारों को दावत दी जाती है। नृत्य, गीत और संगीत के साथ यह उत्सव मनाया जाता है। महाराष्ट्र के अलावा राजस्थान और मध्य प्रदेश में भी रंग पंचमी धूमधाम के साथ खेली जाती है। ऐसा कहा जाता है कि रंग पंचमी के दिन रंगों के प्रयोग से सृष्टि में सकारात्मक ऊर्जा का संवहन होता है। इसी सकारात्मक ऊर्जा में लोगों को देवताओं के स्पर्श की अनुभूति होती है। वहीं सामाजिक दृष्टि से इस त्योहार का महत्व है। यह त्योहार प्रेम-सौहार्द और भाईचारे का प्रतीक है। पौराणिक कथा के अनुसार कहा जाता है कि त्रेतायुग के प्रारंभ में जगत के पालनहार भगवान विष्णु ने धूलि वंदन किया था। धूलि वंदन से आशय ये है कि 'उस युग में श्री विष्णु ने अलग-अलग तेजोमय रंगों से अवतार कार्य का आरंभ किया। अवतार निर्मित होने पर उसे तेजोमय,अर्थात विविध रंगों की सहायता से दर्शन रूप में वर्णित किया गया है। होली ब्रह्मांड का एक तेजोत्सव है। ब्रह्मांड में अनेक रंग आवश्यकता के अनुसार साकार होते हैं और संबंधित घटक के कार्य के लिए पूरक व पोषक वातावरण की निर्मित करते हैं।
जनता से रिश्ता वेबडेस्क। पंचांग के अनुसार प्रति वर्ष चैत्र कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को रंग पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। पं. उमेश नारायण जी के अनुसार दो अप्रैल यानि शुक्रवार को ये उत्सव मनाया जाएगा L दरअसल रंग पंचमी का पर्व होली के पांच दिन बाद मनाया जाता है। होली का पर्व चैत्र कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से प्रारंभ हो जाता है और पंचमी तिथि तक चलता है। पंचमी तिथि पर पड़ने के कारण ही इसे रंग पंचमी का पर्व कहते हैं। इस त्योहार को बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस पर्व में अबीर और गुलाल की छटा देखने को मिलती है। इसमें राधा-कृष्ण को भी अबीर और गुलाल अर्पित किया जाता है। कई जगह शोभायात्रा भी निकाली जाती है। महाराष्ट्र में रंग पंचमी का पर्व खूब धूमधाम से मनाया जाता है। इसमें लोग सूखे गुलाल के साथ रंग खेलते हैं। इस दिन विशेष प्रकार के पकवान बनाए जाते हैं। साथ ही मित्रों और रिश्तेदारों को दावत दी जाती है। नृत्य, गीत और संगीत के साथ यह उत्सव मनाया जाता है। महाराष्ट्र के अलावा राजस्थान और मध्य प्रदेश में भी रंग पंचमी धूमधाम के साथ खेली जाती है। ऐसा कहा जाता है कि रंग पंचमी के दिन रंगों के प्रयोग से सृष्टि में सकारात्मक ऊर्जा का संवहन होता है। इसी सकारात्मक ऊर्जा में लोगों को देवताओं के स्पर्श की अनुभूति होती है। वहीं सामाजिक दृष्टि से इस त्योहार का महत्व है। यह त्योहार प्रेम-सौहार्द और भाईचारे का प्रतीक है। पौराणिक कथा के अनुसार कहा जाता है कि त्रेतायुग के प्रारंभ में जगत के पालनहार भगवान विष्णु ने धूलि वंदन किया था। धूलि वंदन से आशय ये है कि 'उस युग में श्री विष्णु ने अलग-अलग तेजोमय रंगों से अवतार कार्य का आरंभ किया। अवतार निर्मित होने पर उसे तेजोमय,अर्थात विविध रंगों की सहायता से दर्शन रूप में वर्णित किया गया है। होली ब्रह्मांड का एक तेजोत्सव है। ब्रह्मांड में अनेक रंग आवश्यकता के अनुसार साकार होते हैं और संबंधित घटक के कार्य के लिए पूरक व पोषक वातावरण की निर्मित करते हैं।
टीवी चैनल स्टार पल्स के शो अनुपमा फेम अभिनेता पारस कलनावत ने पिता के देहांत के पश्चात् उनकी कुछ अनदेखी फोटोज साझा की हैं। पारस कलनावत के पिता भूषण कलनावत का शनिवार को हार्ट अटैक आने से देहांत हो गया था। अपने पिता के निधन के एक दिन पश्चात् पारस ने अपने पिता के साथ ये अनदेखी फोटोज इंस्टाग्राम पर साझा कीं। तस्वीर में पारस अपने पिता को अपने हाथों से खिलाते हुए दिखाई दे रहे है। इस फोटो से पिता-पुत्र की बॉन्डिग को समझा जा सकता है। वही तस्वीरों से ऐसा लगता है कि पारस तथा उनके पिता सबसे अच्छे मित्र थे। पारस ने अपने पिता के कंधो पर हाथ रखा हुआ है। साथ ही पारस के पिता एक प्राउड फादर की भांति नजर आ रहे हैं जब पारस अपनी नई कार पर तिलक लगा रहा है। पारस ने अपने पिता के निधन के पश्चात् अपने पिता के लिए एक भावुक नोट लिखा। उन्होंने लिखा, टू द बेस्ट पापा इन द वर्ल्ड, आई वांट टू हग यू एंड से थैंक यू फॉर एवरीथिंग डू यू फॉर मी। पारस ने आगे लिखा कि आप मेरे सुपरहीरो थे तथा हमेशा रहेंगे। पारस ने लिखा कि मुझे पता है कि आप मुझें वहां से देख रहे होंगे। मैं मजबूत बनूंगा। मैने सिर्फ सपना देखा था, उन सपनो को पूरा आपने किया पापा। आपने जो सपना मेरे लिए देखा था, उस सपने को मैं पूरा करूंगा। वही पारस की इस पोस्ट को प्रशंसकों द्वारा खूब लाइक किया जा रहा है तथा फैंस जमकर कमेंट कर रहे है।
टीवी चैनल स्टार पल्स के शो अनुपमा फेम अभिनेता पारस कलनावत ने पिता के देहांत के पश्चात् उनकी कुछ अनदेखी फोटोज साझा की हैं। पारस कलनावत के पिता भूषण कलनावत का शनिवार को हार्ट अटैक आने से देहांत हो गया था। अपने पिता के निधन के एक दिन पश्चात् पारस ने अपने पिता के साथ ये अनदेखी फोटोज इंस्टाग्राम पर साझा कीं। तस्वीर में पारस अपने पिता को अपने हाथों से खिलाते हुए दिखाई दे रहे है। इस फोटो से पिता-पुत्र की बॉन्डिग को समझा जा सकता है। वही तस्वीरों से ऐसा लगता है कि पारस तथा उनके पिता सबसे अच्छे मित्र थे। पारस ने अपने पिता के कंधो पर हाथ रखा हुआ है। साथ ही पारस के पिता एक प्राउड फादर की भांति नजर आ रहे हैं जब पारस अपनी नई कार पर तिलक लगा रहा है। पारस ने अपने पिता के निधन के पश्चात् अपने पिता के लिए एक भावुक नोट लिखा। उन्होंने लिखा, टू द बेस्ट पापा इन द वर्ल्ड, आई वांट टू हग यू एंड से थैंक यू फॉर एवरीथिंग डू यू फॉर मी। पारस ने आगे लिखा कि आप मेरे सुपरहीरो थे तथा हमेशा रहेंगे। पारस ने लिखा कि मुझे पता है कि आप मुझें वहां से देख रहे होंगे। मैं मजबूत बनूंगा। मैने सिर्फ सपना देखा था, उन सपनो को पूरा आपने किया पापा। आपने जो सपना मेरे लिए देखा था, उस सपने को मैं पूरा करूंगा। वही पारस की इस पोस्ट को प्रशंसकों द्वारा खूब लाइक किया जा रहा है तथा फैंस जमकर कमेंट कर रहे है।
कर्नाटकः विधानसभा चुनाव में मिली जीत के बाद भी कांग्रेस अबतक असमंजस में पड़ी है। कर्नाटक का मुख्यमंत्री किसे बनाया जाए. . . सिद्धारमैया या डीके शिवकुमार को, अबतक ये फैसला नहीं हो सका है। सोमवार की सुबह से देर रात तक चले मंथन के बाद भी सीएम कौन हो-इसे लेकर पशोपेश की स्थिति बनी हुई है। संभावना जताई जा रही है कि अब बुधवार को मुख्यमंत्री के नाम का फैसला हो जाएगा।
कर्नाटकः विधानसभा चुनाव में मिली जीत के बाद भी कांग्रेस अबतक असमंजस में पड़ी है। कर्नाटक का मुख्यमंत्री किसे बनाया जाए. . . सिद्धारमैया या डीके शिवकुमार को, अबतक ये फैसला नहीं हो सका है। सोमवार की सुबह से देर रात तक चले मंथन के बाद भी सीएम कौन हो-इसे लेकर पशोपेश की स्थिति बनी हुई है। संभावना जताई जा रही है कि अब बुधवार को मुख्यमंत्री के नाम का फैसला हो जाएगा।
रविन्द्र प्रसाद (चर्चा । योगदान) द्वारा परिवर्तित 06:30, 27 अक्टूबर 2011 का अवतरण (""मरुस्थलीय वन"' प्रायः शुष्क जलवायु प्रदेशों में पाय...' के साथ नया पन्ना बनाया) (अंतर) ← पुराना अवतरण । वर्तमान अवतरण (अंतर) । नया अवतरण → (अंतर) मरुस्थलीय वन प्रायः शुष्क जलवायु प्रदेशों में पाये जाते हैं। - यहाँ पर साल भर में वर्षा बहुत कम होती है। - न्यूनतम वर्षा के कारण वनों में प्रायः कँटीले वृक्ष पाए जाते हैं। - भारत में इस प्रकार के वनों का विस्तार मूल रूप से राजस्थान, हरियाणा, कर्नाटक आदि के क्षेत्रों में है।
रविन्द्र प्रसाद द्वारा परिवर्तित छः:तीस, सत्ताईस अक्टूबर दो हज़ार ग्यारह का अवतरण ← पुराना अवतरण । वर्तमान अवतरण । नया अवतरण → मरुस्थलीय वन प्रायः शुष्क जलवायु प्रदेशों में पाये जाते हैं। - यहाँ पर साल भर में वर्षा बहुत कम होती है। - न्यूनतम वर्षा के कारण वनों में प्रायः कँटीले वृक्ष पाए जाते हैं। - भारत में इस प्रकार के वनों का विस्तार मूल रूप से राजस्थान, हरियाणा, कर्नाटक आदि के क्षेत्रों में है।
नई दिल्ली, 6 मई (आईएएनएस)। भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच रवि शास्त्री का मानना है कि 1985 में विश्व चैंपियनशिप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा बनना शानदार था। शास्त्री उस भारतीय टीम का भी हिस्सा थे, जिसने 2018-19 में आस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज जीती थी। लेकिन शास्त्री इस बार बतौर कोच टीम के साथ थे। शास्त्री 1985 की उस टीम का अहम हिस्सा थे जिसने सुनील गावस्कर की अगुवाई में क्रिकेट विश्व चैंपियनशिप जीती थी। शास्त्री ने हालांकि कहा कि 1985 की टीम 1983 में विश्व कप जीतने वाली टीम और मौजूदा टीम से बेहतर थी। 1985 में पहली बार खेली गई क्रिकेट की विश्व चैम्पियनशिप में सात टीमों-भारत, आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, पाकिस्तान, न्यूजीलैंड, श्रीलंका और वेस्टइंडीज ने हिस्सा लिया था। यह एक 'मिनी विश्व कप' था। 1985 में आस्ट्रेलिया दौरे से पहले भारतीय टीम तीन सीरीज गंवा चुकी थी और वेस्टइंडीज से 1983 का विश्व कप फाइनल जीतने के बावजूद विश्व चैम्पियनशिप में जीत की उसकी संभावना कम ही थी। महान क्रिकेटर सुनील गावस्कर के नेतृत्व में भारतीय टीम ने पहली बार नीली जर्सी पहनी और सीरीज में सभी टीमों को हराया। भारतीय टीम ने इसके बाद फाइनल में अपने पुराने प्रतिद्वंदी पाकिस्तान को मात देकर चैंपियनशिप जीती थी।
नई दिल्ली, छः मई । भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच रवि शास्त्री का मानना है कि एक हज़ार नौ सौ पचासी में विश्व चैंपियनशिप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा बनना शानदार था। शास्त्री उस भारतीय टीम का भी हिस्सा थे, जिसने दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस में आस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज जीती थी। लेकिन शास्त्री इस बार बतौर कोच टीम के साथ थे। शास्त्री एक हज़ार नौ सौ पचासी की उस टीम का अहम हिस्सा थे जिसने सुनील गावस्कर की अगुवाई में क्रिकेट विश्व चैंपियनशिप जीती थी। शास्त्री ने हालांकि कहा कि एक हज़ार नौ सौ पचासी की टीम एक हज़ार नौ सौ तिरासी में विश्व कप जीतने वाली टीम और मौजूदा टीम से बेहतर थी। एक हज़ार नौ सौ पचासी में पहली बार खेली गई क्रिकेट की विश्व चैम्पियनशिप में सात टीमों-भारत, आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, पाकिस्तान, न्यूजीलैंड, श्रीलंका और वेस्टइंडीज ने हिस्सा लिया था। यह एक 'मिनी विश्व कप' था। एक हज़ार नौ सौ पचासी में आस्ट्रेलिया दौरे से पहले भारतीय टीम तीन सीरीज गंवा चुकी थी और वेस्टइंडीज से एक हज़ार नौ सौ तिरासी का विश्व कप फाइनल जीतने के बावजूद विश्व चैम्पियनशिप में जीत की उसकी संभावना कम ही थी। महान क्रिकेटर सुनील गावस्कर के नेतृत्व में भारतीय टीम ने पहली बार नीली जर्सी पहनी और सीरीज में सभी टीमों को हराया। भारतीय टीम ने इसके बाद फाइनल में अपने पुराने प्रतिद्वंदी पाकिस्तान को मात देकर चैंपियनशिप जीती थी।
तो, ईएस सभा क्षेत्र के उपग्रह चित्र प्रकाशित किए जाते हैं। इस क्षेत्र में आईएसआईएस आतंकवादियों (* रूस में प्रतिबंधित एक आतंकवादी समूह) की हार के बाद, रूसी सैनिकों ने सीरियाई लोगों को यूफ्रेट्स पर पुल बनाने में मदद की। पुल की मदद से, एटीएस के पूर्वी क्षेत्रों की आपूर्ति स्थापित की गई थी। पुल में मानवीय सहायता शामिल थी। अब मध्य पूर्वी संसाधनों पर टिप्पणियों में, सीरिया में वर्तमान सरकार के विरोधियों के रूप में खुद को स्थिति, यह कहा जाता है कि पुल का हिस्सा उड़ा दिया गया है। ब्लास्टिंग के परिणामस्वरूप, ईएस सभा के क्षेत्र में यूफ्रेट्स पर एक पुल का उपयोग वर्तमान में असंभव है। इसी समय, कुछ स्रोतों का दावा है कि पुल को कम करना आईएसआईएस * का काम है, अन्य स्रोत अधिक सुव्यवस्थित शब्दों का उपयोग करते हैंः "अज्ञात लोगों द्वारा अंडरमाइनिंग किया गया था। " संसाधन ज़मान-अल-वस्ल के अनुसार, पुल को कमजोर करने के बाद, पूर्व संस्करणों में पूर्वी सीरिया की आपूर्ति बंद हो गई। याद करें कि इससे पहले आईएसआईएस * के आतंकवादियों ने एक बार फिर तद्मोर (पल्मायरा) के माध्यम से तोड़ने की कोशिश की थी, लेकिन सीरियाई सेना के बलों ने तोड़ने की कोशिश को रोक दिया। फिलहाल, सीरिया में उत्तरी भाग को सबसे गर्म बिंदु माना जाता है, जहाँ तुर्की की सेना कुर्द सशस्त्र बलों के खिलाफ एक अभियान चला रही है। इस पृष्ठभूमि के खिलाफ, उकसाने वाले खुद को अन्य सीरियाई क्षेत्रों में प्रकट कर सकते हैं।
तो, ईएस सभा क्षेत्र के उपग्रह चित्र प्रकाशित किए जाते हैं। इस क्षेत्र में आईएसआईएस आतंकवादियों की हार के बाद, रूसी सैनिकों ने सीरियाई लोगों को यूफ्रेट्स पर पुल बनाने में मदद की। पुल की मदद से, एटीएस के पूर्वी क्षेत्रों की आपूर्ति स्थापित की गई थी। पुल में मानवीय सहायता शामिल थी। अब मध्य पूर्वी संसाधनों पर टिप्पणियों में, सीरिया में वर्तमान सरकार के विरोधियों के रूप में खुद को स्थिति, यह कहा जाता है कि पुल का हिस्सा उड़ा दिया गया है। ब्लास्टिंग के परिणामस्वरूप, ईएस सभा के क्षेत्र में यूफ्रेट्स पर एक पुल का उपयोग वर्तमान में असंभव है। इसी समय, कुछ स्रोतों का दावा है कि पुल को कम करना आईएसआईएस * का काम है, अन्य स्रोत अधिक सुव्यवस्थित शब्दों का उपयोग करते हैंः "अज्ञात लोगों द्वारा अंडरमाइनिंग किया गया था। " संसाधन ज़मान-अल-वस्ल के अनुसार, पुल को कमजोर करने के बाद, पूर्व संस्करणों में पूर्वी सीरिया की आपूर्ति बंद हो गई। याद करें कि इससे पहले आईएसआईएस * के आतंकवादियों ने एक बार फिर तद्मोर के माध्यम से तोड़ने की कोशिश की थी, लेकिन सीरियाई सेना के बलों ने तोड़ने की कोशिश को रोक दिया। फिलहाल, सीरिया में उत्तरी भाग को सबसे गर्म बिंदु माना जाता है, जहाँ तुर्की की सेना कुर्द सशस्त्र बलों के खिलाफ एक अभियान चला रही है। इस पृष्ठभूमि के खिलाफ, उकसाने वाले खुद को अन्य सीरियाई क्षेत्रों में प्रकट कर सकते हैं।
अमरावती/दि. १३ - महाविकास आघाड़ीवाली ठाकरे सरकार राज्य के किसानों को नुकसान मदद के रूप में केवल चॉकलेट देने का काम कर रही है. यह सनसनीखेज आरोप पत्रकार परिषद में सांसद नवनीत राणा ने लगाया है. शुक्रवार को युवा स्वाभिमान पार्टी के बैनर तले श्रमिक पत्रकार भवन में सांसद नवनीत राणा की पत्रकार परिषद का आयोजन किया गया. पत्रकार परिषद में सांसद नवनीत राणा ने ठाकरे सरकार पर जमकर निशाना साधते हुए कहा कि इस वर्ष बेमौसम बारिश और अतिवृष्टि से किसानों के खेत की फसलों का बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है. इस नुकसान के मुआवजे के तौर पर ठाकरे सरकार की ओर से मदद की घोषणा की है. लेकिन सरकार की ओर से घोषित की गई मदद काफी अल्प है और यह मदद भी किसानों के बैंक खाते में अब तक जमा नहीं हो पायी है. दीपावली त्यौहार से पूर्व अतिवृष्टि प्रभावित किसानों को नुकसान का मुआवजा मिलना चाहिए था. लेकिन राज्य सरकार ने किसानों की उम्मीदों को तोडऩे का काम किया है. सोयाबीन, तुअर फसलों का अतिवृष्टि से बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है. दीपावली त्यौहार होने पर भी किसानों के घरों में दीपक नहीं जल पाए है. किसानों के पास पैसे नहीं है. किसानों को नुकसान का मुआवजा देने की घोषणा भी कागजों पर सिमटी नजर आ रही है. ठाकरे सरकार ने चुनाव से पूर्व किसानों को राहत देने की घोषणा की थीं. लेकिन घोषणा केवल घोषणा बनकर रह गयी.
अमरावती/दि. तेरह - महाविकास आघाड़ीवाली ठाकरे सरकार राज्य के किसानों को नुकसान मदद के रूप में केवल चॉकलेट देने का काम कर रही है. यह सनसनीखेज आरोप पत्रकार परिषद में सांसद नवनीत राणा ने लगाया है. शुक्रवार को युवा स्वाभिमान पार्टी के बैनर तले श्रमिक पत्रकार भवन में सांसद नवनीत राणा की पत्रकार परिषद का आयोजन किया गया. पत्रकार परिषद में सांसद नवनीत राणा ने ठाकरे सरकार पर जमकर निशाना साधते हुए कहा कि इस वर्ष बेमौसम बारिश और अतिवृष्टि से किसानों के खेत की फसलों का बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है. इस नुकसान के मुआवजे के तौर पर ठाकरे सरकार की ओर से मदद की घोषणा की है. लेकिन सरकार की ओर से घोषित की गई मदद काफी अल्प है और यह मदद भी किसानों के बैंक खाते में अब तक जमा नहीं हो पायी है. दीपावली त्यौहार से पूर्व अतिवृष्टि प्रभावित किसानों को नुकसान का मुआवजा मिलना चाहिए था. लेकिन राज्य सरकार ने किसानों की उम्मीदों को तोडऩे का काम किया है. सोयाबीन, तुअर फसलों का अतिवृष्टि से बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है. दीपावली त्यौहार होने पर भी किसानों के घरों में दीपक नहीं जल पाए है. किसानों के पास पैसे नहीं है. किसानों को नुकसान का मुआवजा देने की घोषणा भी कागजों पर सिमटी नजर आ रही है. ठाकरे सरकार ने चुनाव से पूर्व किसानों को राहत देने की घोषणा की थीं. लेकिन घोषणा केवल घोषणा बनकर रह गयी.
'काचा बादाम' (Kacha Badam) गाकर रातोंरात इंटरनेट सेंसेशन बने भुबन बादायकर (Bhuban Badyakar car accident) का सोमवार रात कार ऐक्सिडेंट हो गया। उन्हें तुरंत ही अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि जिस वक्त यह हादसा हुआ उस वक्त भुबन कार चलाना सीख रहे थे। भुबन ने हाल ही नई कार खरीदी थी।
'काचा बादाम' गाकर रातोंरात इंटरनेट सेंसेशन बने भुबन बादायकर का सोमवार रात कार ऐक्सिडेंट हो गया। उन्हें तुरंत ही अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि जिस वक्त यह हादसा हुआ उस वक्त भुबन कार चलाना सीख रहे थे। भुबन ने हाल ही नई कार खरीदी थी।
मथुरा। राज्य (TB patients) क्षय रोग प्रशिक्षण संस्थान के मॉनिटरिंग और ट्रेनिंग के हेड डा. अनुराग श्रीवास्तव के नेतृत्व में आईआरएल आगरा की छह सदस्यीय (TB patients) टीम के जनपद का दो दिवसीय स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दूसरे दिन टीम के द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बल्देव पर बलगम परीक्षण की स्थिति के साथ साथ मरीजों को उपलब्ध कराई जाने वाली औषधि उनके समयान्तर्गत होने वाले फालोअप के साथ साथ मरीजों को दियेे जाने वाले निःक्षय पोषण योजना के लाभ के बारे में भी जानकारी प्राप्त की गई। इसके पश्चात जिला क्षय रोग केन्द्र मथुरा पर कार्यरत समस्त अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ एक समीक्षा बैठक की। टीम में डा. अनुराग श्रीवास्तव, डा. स्टेफी, ब्रहमानंद, पंकज, गजेन्द्र तथा विमल शर्मा शामिल थे। निरीक्षण के समय जिला क्षय रोग केन्द्र मथुरा से बीनू सचान, अखिलेष दीक्षित, शिव कुमार, सतीश चन्द्र, आलोक तिवारी हिमान्शुु सेठी, शिव कुमार आदि उपस्थित रहे। समीक्षा के बाद टीम के द्वारा मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. अजय कुमार वर्मा को ब्रीफ जानकारी प्रदान की गई। बैठक में डा. अनुराग श्रीवास्तव वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी द्वारा बताया गया कि यदि वर्ष 2025 तक क्षय रोग को भारत से उखाड़ फेकना है तो यह सुनिश्चित किया जाय कि प्रति एक लाख पर कम से कम 1500 संभावित व्यक्तियों के क्षय रोग का परीक्षण किया जाय। ओपीडी में आने वाले कम से कम पांच प्रतिशत रोगियों का बलगम परीक्षण कराया जाय। समय समय पर आषा कार्यकर्त्ताओंध्हेल्थ वर्कर एवं हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर कार्यरत सीएचओ के माध्यम से अधिक से अधिक सभांवित क्षय रोगियों की पहचान कर उनका जांच एवं उपचार कराया जाय। माइक्रोबायोलॉजिस्ट ब्रहमनंद ने कहा कि प्रत्येक लैब टेक्नीशियन बलगम की स्लाइड बनाने की गुणवत्ता पर विषेष ध्यान दें ऐसा करने से ही हम अधिक से अधिक क्षय रोगियों की पहचान कर टीबी को फैलने से रोक सकते हैं तथा मरीजों का सही समय पर उपचार कर उन्हे ठीक कर सकते हैं। डा. संजीव यादव जिला क्षय रोग अधिकारी मथुरा ने कहा कि आईआरएल आगरा की टीम का जनपद मथुरा में भ्रमण सकारात्मक रहा है। उनके द्वारा प्रदत्त सुझावों को क्षेत्र में अमल मे लाया जायेगा जिससे कि कार्यक्रम और गतिषील बनाया जा सके। आलोक तिवारी जिला पीपीएम समन्वयक मथुरा ने बताया कि ऐसे समय समय पर होने वाले ऐसे निरीक्षणों से कार्यक्रम में सुधार के साथ साथ कर्मचारियों के ज्ञानवर्धन तथा उत्साह में वृद्धि होती है ।
मथुरा। राज्य क्षय रोग प्रशिक्षण संस्थान के मॉनिटरिंग और ट्रेनिंग के हेड डा. अनुराग श्रीवास्तव के नेतृत्व में आईआरएल आगरा की छह सदस्यीय टीम के जनपद का दो दिवसीय स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दूसरे दिन टीम के द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बल्देव पर बलगम परीक्षण की स्थिति के साथ साथ मरीजों को उपलब्ध कराई जाने वाली औषधि उनके समयान्तर्गत होने वाले फालोअप के साथ साथ मरीजों को दियेे जाने वाले निःक्षय पोषण योजना के लाभ के बारे में भी जानकारी प्राप्त की गई। इसके पश्चात जिला क्षय रोग केन्द्र मथुरा पर कार्यरत समस्त अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ एक समीक्षा बैठक की। टीम में डा. अनुराग श्रीवास्तव, डा. स्टेफी, ब्रहमानंद, पंकज, गजेन्द्र तथा विमल शर्मा शामिल थे। निरीक्षण के समय जिला क्षय रोग केन्द्र मथुरा से बीनू सचान, अखिलेष दीक्षित, शिव कुमार, सतीश चन्द्र, आलोक तिवारी हिमान्शुु सेठी, शिव कुमार आदि उपस्थित रहे। समीक्षा के बाद टीम के द्वारा मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. अजय कुमार वर्मा को ब्रीफ जानकारी प्रदान की गई। बैठक में डा. अनुराग श्रीवास्तव वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी द्वारा बताया गया कि यदि वर्ष दो हज़ार पच्चीस तक क्षय रोग को भारत से उखाड़ फेकना है तो यह सुनिश्चित किया जाय कि प्रति एक लाख पर कम से कम एक हज़ार पाँच सौ संभावित व्यक्तियों के क्षय रोग का परीक्षण किया जाय। ओपीडी में आने वाले कम से कम पांच प्रतिशत रोगियों का बलगम परीक्षण कराया जाय। समय समय पर आषा कार्यकर्त्ताओंध्हेल्थ वर्कर एवं हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर कार्यरत सीएचओ के माध्यम से अधिक से अधिक सभांवित क्षय रोगियों की पहचान कर उनका जांच एवं उपचार कराया जाय। माइक्रोबायोलॉजिस्ट ब्रहमनंद ने कहा कि प्रत्येक लैब टेक्नीशियन बलगम की स्लाइड बनाने की गुणवत्ता पर विषेष ध्यान दें ऐसा करने से ही हम अधिक से अधिक क्षय रोगियों की पहचान कर टीबी को फैलने से रोक सकते हैं तथा मरीजों का सही समय पर उपचार कर उन्हे ठीक कर सकते हैं। डा. संजीव यादव जिला क्षय रोग अधिकारी मथुरा ने कहा कि आईआरएल आगरा की टीम का जनपद मथुरा में भ्रमण सकारात्मक रहा है। उनके द्वारा प्रदत्त सुझावों को क्षेत्र में अमल मे लाया जायेगा जिससे कि कार्यक्रम और गतिषील बनाया जा सके। आलोक तिवारी जिला पीपीएम समन्वयक मथुरा ने बताया कि ऐसे समय समय पर होने वाले ऐसे निरीक्षणों से कार्यक्रम में सुधार के साथ साथ कर्मचारियों के ज्ञानवर्धन तथा उत्साह में वृद्धि होती है ।
आपको बता दें कि पीड़िता ने वीडियो बनाने वाले शख्स के खिलाफ पुलिस में शिकायत की है। ऐसे में वीडियो शूट करने वाले के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज हुआ है। भोपालः मध्य प्रदेश के रीवा जिले में 19 वर्ष की एक लड़की को उसके प्रेमी ने कथित तौर पर शादी करने के लिए कहने पर पीटा है। यह जानकारी पुलिस ने शनिवार को दी है। एक अधिकारी ने कहा कि बुधवार को हुई कथित घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद पुलिस ने 24 वर्षीय व्यक्ति के खिलाफ एक मामला दर्ज किया है। अनुमंडल पुलिस अधिकारी (एसडीओपी) नवीन दुबे ने कहा कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, वीडियो में दिख रहा व्यक्ति मऊगंज क्षेत्र का निवासी है। मामले में एसडीओपी नवीन दुबे ने कहा है कि लड़की और आरोपी के बीच प्रेम संबंध था और उनके बीच विवाद हुआ, जिसके बाद आरोपी ने लड़की की पिटाई की है। वीडियो में लड़की आरोपी से शादी करने के लिए कहती नजर आ रही है। आरोपी चिढ़ जाता है और फिर उसे लात मारता है और उसे कई थप्पड़ मारता है। अधिकारी ने कहा कि पीड़िता घटना की जानकारी देने थाने आई थी, लेकिन उसने शिकायत दर्ज कराने से इनकार कर दिया गया था। अधिकारी ने कहा कि आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 151 के तहत हिरासत में लिया गया और बाद में रिहा कर दिया गया। इस पर बोलते हुए एसडीओपी नवीन दुबे ने कहा है कि हालांकि, जब हमले का वीडियो सामने आया, तो आरोपी के खिलाफ धारा 323 और भारतीय दंड संहिता के अन्य प्रासंगिक प्रावधानों के तहत एक मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि आरोपी फरार है। अधिकारी ने आगे कहा है कि पीड़िता ने उस व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है जिसने वीडियो बनाया और प्रसारित किया तथा सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम के तहत एक मामला दर्ज किया गया है।
आपको बता दें कि पीड़िता ने वीडियो बनाने वाले शख्स के खिलाफ पुलिस में शिकायत की है। ऐसे में वीडियो शूट करने वाले के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज हुआ है। भोपालः मध्य प्रदेश के रीवा जिले में उन्नीस वर्ष की एक लड़की को उसके प्रेमी ने कथित तौर पर शादी करने के लिए कहने पर पीटा है। यह जानकारी पुलिस ने शनिवार को दी है। एक अधिकारी ने कहा कि बुधवार को हुई कथित घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद पुलिस ने चौबीस वर्षीय व्यक्ति के खिलाफ एक मामला दर्ज किया है। अनुमंडल पुलिस अधिकारी नवीन दुबे ने कहा कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, वीडियो में दिख रहा व्यक्ति मऊगंज क्षेत्र का निवासी है। मामले में एसडीओपी नवीन दुबे ने कहा है कि लड़की और आरोपी के बीच प्रेम संबंध था और उनके बीच विवाद हुआ, जिसके बाद आरोपी ने लड़की की पिटाई की है। वीडियो में लड़की आरोपी से शादी करने के लिए कहती नजर आ रही है। आरोपी चिढ़ जाता है और फिर उसे लात मारता है और उसे कई थप्पड़ मारता है। अधिकारी ने कहा कि पीड़िता घटना की जानकारी देने थाने आई थी, लेकिन उसने शिकायत दर्ज कराने से इनकार कर दिया गया था। अधिकारी ने कहा कि आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा एक सौ इक्यावन के तहत हिरासत में लिया गया और बाद में रिहा कर दिया गया। इस पर बोलते हुए एसडीओपी नवीन दुबे ने कहा है कि हालांकि, जब हमले का वीडियो सामने आया, तो आरोपी के खिलाफ धारा तीन सौ तेईस और भारतीय दंड संहिता के अन्य प्रासंगिक प्रावधानों के तहत एक मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि आरोपी फरार है। अधिकारी ने आगे कहा है कि पीड़िता ने उस व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है जिसने वीडियो बनाया और प्रसारित किया तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत एक मामला दर्ज किया गया है।