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उत्तर प्रदेश सरकार का महत्वाकांक्षी आयोजन इन्वेस्टर्स समिट 2018 के लिए राजधानी लखनऊ में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. देश विदेश के जाने-माने उद्योगपतियों, राजनेताओं और विशिष्ट अतिथियों के स्वागत के लिए राजधानी लखनऊ को दुल्हन की तरह सजाया गया है. वहीं 21 और 22 फरवरी के इस मेगा आयोजन के लिए यातायात व्यवस्था में भी भारी फेरबदल किया है. अगर आप इन दो दिनों तक लखनऊ में हैं, तो ये खबर आपके काम की है. हम आपके लिए ट्रैफिक रूट की डिटेल पेश कर रहे हैं, जिसमें बताया गया है कि किन रास्तों का इस्तेमाल आप कर सकते हैं और किन रास्तों का नहीं. इसके अलावा रोडवेज बसों के रूट में भी फेरबदल किया गया है. 1. कठौता झील चौराहे से विजयीपुर अण्डर पास, इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान चौराहे की तरफ सामान्य यातायात नही आ सकेगा. कठौता झील चौराहे से हनीमैन चैराहा, हुसड़िया चौराहे होकर अपने गंतव्य को जा सकेगा. 2. एमजे ग्राउंड चौराहे से विजयीपुर अण्डर पास, इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान चौराहे की तरफ सामान्य यातायात का नहीं आ सकेगा. एमजे ग्राउंड चौराहे से चिनहट तिराहा, मिनी स्टेडियम या हनीमैन चौराहा, हुसड़िया चौराहे होकर अपने गंतव्य को जा सकेगा. 3. लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान तिराहे से इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान की ओर गोल्ड पासधारी वाहनों के अतिरिक्त सभी प्रकार के वाहनों का आवागमन प्रतिबन्धित रहेगा. लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान तिराहे से वाहन सीआरपीएफ आईजी कार्यालय तिराहा से बांये कल्याण निगम कार्यालय होते हुए अपने गंतव्य को जा सकेगा. 4. पिकअप ढाल से लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान तक हास्पिटल आने-जाने वाले वाहनों के अतिरिक्त सभी प्रकार के वाहनों का आवागमन आना प्रतिबन्धित रहेगा. पिकअप ढाल से यह वाहन पिकअप ढाल तिराहे से बाये फैजाबाद रोड की ओर जा सकेंगे. 5. पिकअप ओवर ब्रिज के ऊपर से सामान्य यातायात पिकअप ढाल, इन्दिरागांधी प्रतिष्ठान की ओर नहीं जा सकेगा पिकअप ओवर ब्रिज के ऊपर से यह यातायात पालिटेक्निक चौराहे होकर अपने गंतव्य को जा सकेगा. 6. सिनेपोलिस (अपना बाजार) अण्डर पास चौराहे से गोमतीनगर रेलवे ग्राउण्ड, बैक ऑफ इण्डिया ग्राउण्ड तिराहा के मध्य सामान्य यातायात प्रतिबन्धित रहेगा सिनेपोलिस (अपना बाजार) अण्डर पास चौराहे से यह यातायात तखवा तिराहा हनीमैन/कठौता चौराहे होकर अपने गंतव्य को जा सकेगा. 7. सिनेपोलिस अण्डर पास, सीआईआई कार्यालय तिराहा से विजयीपुर शहीद पथ अण्डरपास के मध्य सर्विस रोड सामान्य यातायात का आवागमन प्रतिबन्धित रहेगा. सिनेपोलिस अण्डर पास, सीआईआई कार्यालय तिराहा से यह यातायात पुलिस एन्क्लेव चौराहे से बाये होकर अपने गंतब्य का जा सकेगा. 8. गोमतीनगर रेलवे ग्राउण्ड तिराहे से इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान चौराहे तक सामान्य यातायात नही जा सकेगा. गोमतीनगर रेलवे ग्राउण्ड (हेरीटेज पैराडाइज) तिराहे से यह यातायात सिनेपोलिस अण्डर पास, पुलिस एन्क्लेव चैराहे से बाये होकर अपने गंतव्य जा सकेगा. 9. न्यू हाईकोर्ट मोड़ से इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान चौराहे के मध्य सामान्य यातायात नही जा सकेगा. न्यू हाईकोर्ट मोड़ से यह यातायात सुषमा हास्पिटल, पॉलिटेक्निक चौराहे होकर अपने गंतव्य को जा सकेगा. 10. कमता शहीद पथ तिराहे से विराज टावर से विजयीपुर अण्डरपास तक सर्विस रोड पर सामान्य यातायात नही जा सकेगा कमता शहीद पथ तिराहे से यह यातायात पालिटेक्निक चौराहे/चिनहट तिराहा कठौता होकर अपने गंतव्य को जा सकेगा. 11. अमौसी एयरपोर्ट जाने वाले सामान्य यातायात वीआईपी अमौसी एयरपोर्ट तिराहे से नहीं जा सकेगा. अमौसी एयरपोर्ट जाने वाले सामान्य यातायता वीआईपी अमौसी एयरपोर्ट तिराहे से यह वाहन कामर्शियल मोड अमौसी एयरपोर्ट से आ-जा सकेगें. 1- समिट के दौरान लोहिया पथ से गोमती नगर की ओर नही जा सकेगें, समिट के दौरान लोहिया पथ से 1090 चैराहा, समता मूलक चौराहे या लोहिया चौराहे से दाहिने अम्बेडकर उद्यान चैराहा होकर अपने गंतव्य को जा सकेगें. 2- फैजाबाद रोड पर यातायात दबाव बढ़ने पर लोहिया पथ से फैजाबाद रोड की ओर नही जा सकेगें. फैजाबाद रोड पर यातायात दबाव बढ़ने पर लोहिया पथ से 1090 चैराहा/समता मूलक चैराहा/डिगडिगा (लोहिया पार्क) चौराहे, अम्बेडकर उद्यान चौराहे, हुसड़िया चौराहे, हनीमैन चौराहे, कठौता चौराहे, चिनहट तिराहा होकर फैजाबाद रोड पर डायवर्ट किये जाएंगे. 3- पॉलिटेक्निक चैराहा से हजरतगंज की ओर वाया लोहिया पथ की ओर से नही जा सकेगें, पॉलिटेक्निक चौराहे से हजरतगंज की ओर भूतनाथ/बादशाह नगर तिराहा जा सकेंगे. 4- समता मूलक चौराहे से वाया पेपर मिल कालोनी/गोमती बैराज पुल और 1090 चैराहे से वाया बालू अड्डा तिराहा बटलर रोड होकर अपने गंतव्य को जा सकेगें. 5- वीवीआईपी के आवागमन के दौरान निर्धारित वीवीआईपी मार्ग पर आवश्यकतानुसार अल्प अवधि के लिए सामान्य यातायात का आवागमन प्रतिबन्धित किया जा सकेगा. 6- एम्बुलेन्स, स्कूली वाहन, शव वाहन, अग्निशमन वाहन के अलावा आकस्मिक सेवा से जुडे वाहनों को ट्रैफिक पुलिस/स्थानीय पुलिस द्वारा वीआईपी कार्यक्रम के दौरान अनुमन्य रहेगा. 7- किसी भी ट्रैफिक की समस्या के लिए कन्ट्रोल नंम्बर- 0522 2483800, 9454405155 पर सम्पर्क किया जा सकता है. 1- सुल्तानपुर से आने वाली बसें मोहनलालगंज, जुनाबगंज, कटी बगिया होकर जाएंगी. 2- कमता-शहीद पथ तिराहा फैजाबाद रोड से भारी वाहन शहीद पथ की ओर प्रतिबंधित रहेंगे. 3- फैजाबाद व बाराबंकी से आने वाली बसें बाराबंकी से 10वीं वाहिनी पीएसी तिराहा, कुर्सी रोड, देवां तिराहा व इटौंजा होकर आएंगी. 4- रायबरेली की तरफ से आने वाली बसें जुनाबगंज, कटी बगिया, मोहान रोड, गोसाईगंज व हैदरगढ़ होकर जाएंगी. 5- सीतापुर से आने वाली बसें इटौंजा, कुर्सी रोड, बाराबंकी होकर जाएंगी. 6- हरदोई से आने वाली बसें दुबग्गा, मोहान रोड, इटौंजा, कुर्सी रोड देवां से बाराबंकी होकर जाएंगी. (रिपोर्टः मोहम्मद शबाब) .
उत्तर प्रदेश सरकार का महत्वाकांक्षी आयोजन इन्वेस्टर्स समिट दो हज़ार अट्ठारह के लिए राजधानी लखनऊ में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. देश विदेश के जाने-माने उद्योगपतियों, राजनेताओं और विशिष्ट अतिथियों के स्वागत के लिए राजधानी लखनऊ को दुल्हन की तरह सजाया गया है. वहीं इक्कीस और बाईस फरवरी के इस मेगा आयोजन के लिए यातायात व्यवस्था में भी भारी फेरबदल किया है. अगर आप इन दो दिनों तक लखनऊ में हैं, तो ये खबर आपके काम की है. हम आपके लिए ट्रैफिक रूट की डिटेल पेश कर रहे हैं, जिसमें बताया गया है कि किन रास्तों का इस्तेमाल आप कर सकते हैं और किन रास्तों का नहीं. इसके अलावा रोडवेज बसों के रूट में भी फेरबदल किया गया है. एक. कठौता झील चौराहे से विजयीपुर अण्डर पास, इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान चौराहे की तरफ सामान्य यातायात नही आ सकेगा. कठौता झील चौराहे से हनीमैन चैराहा, हुसड़िया चौराहे होकर अपने गंतव्य को जा सकेगा. दो. एमजे ग्राउंड चौराहे से विजयीपुर अण्डर पास, इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान चौराहे की तरफ सामान्य यातायात का नहीं आ सकेगा. एमजे ग्राउंड चौराहे से चिनहट तिराहा, मिनी स्टेडियम या हनीमैन चौराहा, हुसड़िया चौराहे होकर अपने गंतव्य को जा सकेगा. तीन. लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान तिराहे से इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान की ओर गोल्ड पासधारी वाहनों के अतिरिक्त सभी प्रकार के वाहनों का आवागमन प्रतिबन्धित रहेगा. लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान तिराहे से वाहन सीआरपीएफ आईजी कार्यालय तिराहा से बांये कल्याण निगम कार्यालय होते हुए अपने गंतव्य को जा सकेगा. चार. पिकअप ढाल से लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान तक हास्पिटल आने-जाने वाले वाहनों के अतिरिक्त सभी प्रकार के वाहनों का आवागमन आना प्रतिबन्धित रहेगा. पिकअप ढाल से यह वाहन पिकअप ढाल तिराहे से बाये फैजाबाद रोड की ओर जा सकेंगे. पाँच. पिकअप ओवर ब्रिज के ऊपर से सामान्य यातायात पिकअप ढाल, इन्दिरागांधी प्रतिष्ठान की ओर नहीं जा सकेगा पिकअप ओवर ब्रिज के ऊपर से यह यातायात पालिटेक्निक चौराहे होकर अपने गंतव्य को जा सकेगा. छः. सिनेपोलिस अण्डर पास चौराहे से गोमतीनगर रेलवे ग्राउण्ड, बैक ऑफ इण्डिया ग्राउण्ड तिराहा के मध्य सामान्य यातायात प्रतिबन्धित रहेगा सिनेपोलिस अण्डर पास चौराहे से यह यातायात तखवा तिराहा हनीमैन/कठौता चौराहे होकर अपने गंतव्य को जा सकेगा. सात. सिनेपोलिस अण्डर पास, सीआईआई कार्यालय तिराहा से विजयीपुर शहीद पथ अण्डरपास के मध्य सर्विस रोड सामान्य यातायात का आवागमन प्रतिबन्धित रहेगा. सिनेपोलिस अण्डर पास, सीआईआई कार्यालय तिराहा से यह यातायात पुलिस एन्क्लेव चौराहे से बाये होकर अपने गंतब्य का जा सकेगा. आठ. गोमतीनगर रेलवे ग्राउण्ड तिराहे से इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान चौराहे तक सामान्य यातायात नही जा सकेगा. गोमतीनगर रेलवे ग्राउण्ड तिराहे से यह यातायात सिनेपोलिस अण्डर पास, पुलिस एन्क्लेव चैराहे से बाये होकर अपने गंतव्य जा सकेगा. नौ. न्यू हाईकोर्ट मोड़ से इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान चौराहे के मध्य सामान्य यातायात नही जा सकेगा. न्यू हाईकोर्ट मोड़ से यह यातायात सुषमा हास्पिटल, पॉलिटेक्निक चौराहे होकर अपने गंतव्य को जा सकेगा. दस. कमता शहीद पथ तिराहे से विराज टावर से विजयीपुर अण्डरपास तक सर्विस रोड पर सामान्य यातायात नही जा सकेगा कमता शहीद पथ तिराहे से यह यातायात पालिटेक्निक चौराहे/चिनहट तिराहा कठौता होकर अपने गंतव्य को जा सकेगा. ग्यारह. अमौसी एयरपोर्ट जाने वाले सामान्य यातायात वीआईपी अमौसी एयरपोर्ट तिराहे से नहीं जा सकेगा. अमौसी एयरपोर्ट जाने वाले सामान्य यातायता वीआईपी अमौसी एयरपोर्ट तिराहे से यह वाहन कामर्शियल मोड अमौसी एयरपोर्ट से आ-जा सकेगें. एक- समिट के दौरान लोहिया पथ से गोमती नगर की ओर नही जा सकेगें, समिट के दौरान लोहिया पथ से एक हज़ार नब्बे चैराहा, समता मूलक चौराहे या लोहिया चौराहे से दाहिने अम्बेडकर उद्यान चैराहा होकर अपने गंतव्य को जा सकेगें. दो- फैजाबाद रोड पर यातायात दबाव बढ़ने पर लोहिया पथ से फैजाबाद रोड की ओर नही जा सकेगें. फैजाबाद रोड पर यातायात दबाव बढ़ने पर लोहिया पथ से एक हज़ार नब्बे चैराहा/समता मूलक चैराहा/डिगडिगा चौराहे, अम्बेडकर उद्यान चौराहे, हुसड़िया चौराहे, हनीमैन चौराहे, कठौता चौराहे, चिनहट तिराहा होकर फैजाबाद रोड पर डायवर्ट किये जाएंगे. तीन- पॉलिटेक्निक चैराहा से हजरतगंज की ओर वाया लोहिया पथ की ओर से नही जा सकेगें, पॉलिटेक्निक चौराहे से हजरतगंज की ओर भूतनाथ/बादशाह नगर तिराहा जा सकेंगे. चार- समता मूलक चौराहे से वाया पेपर मिल कालोनी/गोमती बैराज पुल और एक हज़ार नब्बे चैराहे से वाया बालू अड्डा तिराहा बटलर रोड होकर अपने गंतव्य को जा सकेगें. पाँच- वीवीआईपी के आवागमन के दौरान निर्धारित वीवीआईपी मार्ग पर आवश्यकतानुसार अल्प अवधि के लिए सामान्य यातायात का आवागमन प्रतिबन्धित किया जा सकेगा. छः- एम्बुलेन्स, स्कूली वाहन, शव वाहन, अग्निशमन वाहन के अलावा आकस्मिक सेवा से जुडे वाहनों को ट्रैफिक पुलिस/स्थानीय पुलिस द्वारा वीआईपी कार्यक्रम के दौरान अनुमन्य रहेगा. सात- किसी भी ट्रैफिक की समस्या के लिए कन्ट्रोल नंम्बर- पाँच सौ बाईस चौबीस लाख तिरासी हज़ार आठ सौ, नौ चार पाँच चार चार शून्य पाँच एक पाँच पाँच पर सम्पर्क किया जा सकता है. एक- सुल्तानपुर से आने वाली बसें मोहनलालगंज, जुनाबगंज, कटी बगिया होकर जाएंगी. दो- कमता-शहीद पथ तिराहा फैजाबाद रोड से भारी वाहन शहीद पथ की ओर प्रतिबंधित रहेंगे. तीन- फैजाबाद व बाराबंकी से आने वाली बसें बाराबंकी से दसवीं वाहिनी पीएसी तिराहा, कुर्सी रोड, देवां तिराहा व इटौंजा होकर आएंगी. चार- रायबरेली की तरफ से आने वाली बसें जुनाबगंज, कटी बगिया, मोहान रोड, गोसाईगंज व हैदरगढ़ होकर जाएंगी. पाँच- सीतापुर से आने वाली बसें इटौंजा, कुर्सी रोड, बाराबंकी होकर जाएंगी. छः- हरदोई से आने वाली बसें दुबग्गा, मोहान रोड, इटौंजा, कुर्सी रोड देवां से बाराबंकी होकर जाएंगी. .
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने आज ऊना जिले के अन्दरोली में गोबिंद सागर झील में पंजाब के सात युवकों के डूबने से हुई मौत की घटना पर गहरा दुःख व्यक्त किया है. सीएम जयराम ठाकुर ने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति और शोक संतप्त परिवार के सदस्यों को इस अपूर्णीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की. बता दें कि पंजाब के मोहाली से कुल 11 लोग ऊना के कोलका गांव के पास बाबा गरीब नाथ मंदिर में आए थे, उसके बाद ये सभी झील में नहाने के लिए उतरे थे. इनमें से 7 युवक झील के गहरे पानी में डूब गए. जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने बीबीएमबी के गोताखोरों को बुलाया. गोताखोरों ने कड़ी मशक्कत के बाद सातों शवों को निकाल लिया. डीएसपी कुलविंदर सिंह के मुताबिक सभी शवों को पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए ऊना अस्पताल भिजवा दिया गया है.
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने आज ऊना जिले के अन्दरोली में गोबिंद सागर झील में पंजाब के सात युवकों के डूबने से हुई मौत की घटना पर गहरा दुःख व्यक्त किया है. सीएम जयराम ठाकुर ने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति और शोक संतप्त परिवार के सदस्यों को इस अपूर्णीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की. बता दें कि पंजाब के मोहाली से कुल ग्यारह लोग ऊना के कोलका गांव के पास बाबा गरीब नाथ मंदिर में आए थे, उसके बाद ये सभी झील में नहाने के लिए उतरे थे. इनमें से सात युवक झील के गहरे पानी में डूब गए. जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने बीबीएमबी के गोताखोरों को बुलाया. गोताखोरों ने कड़ी मशक्कत के बाद सातों शवों को निकाल लिया. डीएसपी कुलविंदर सिंह के मुताबिक सभी शवों को पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए ऊना अस्पताल भिजवा दिया गया है.
के लिए जाना जाता हैः 16 9 2 के सलेम चुड़ैल परीक्षणों में एक चुड़ैल के रूप में निष्पादित, कपास माथेर द्वारा वर्णित "रैंपेंट हग" मार्था कैरियर (नी एलन) का जन्म एंडोवर, मैसाचुसेट्स में हुआ था; उसके माता-पिता वहां मूल निवासी थे। 1674 में उन्होंने अपने पहले बच्चे को जन्म देने के बाद, वेल्श इंडेंटर्ड नौकर के थॉमस कैरियर से विवाह किया; यह घोटाला भुला नहीं गया था। उनके पास चार या पांच बच्चे थे (स्रोत अलग-अलग थे) और 16 9 0 में उनके पिता की मौत के बाद एंड्रॉवर वापस अपनी मां के साथ रहने के लिए एंड्रॉवर लौट रहे थे। कैरियर पर एंडोवर को चेचक लाने का आरोप था; बिलरिका में बीमारी से उनके दो बच्चे मर गए थे। वह मार्था का पति और दो बच्चे श्वास के साथ बीमार थे और जीवित बचे हुए संदिग्ध माना जाता था, विशेष रूप से क्योंकि बीमारी से कुछ अन्य मौतों ने अपने पति को अपने परिवार की संपत्ति का वारिस करने के लिए रखा था। मार्था के दो भाइयों की मृत्यु हो गई थी, और इसलिए मार्था ने अपने पिता से संपत्ति विरासत में ली। उसने पड़ोसियों के साथ तर्क दिया जब उन्हें संदेह था कि उन्हें और उसके पति को धोखा देने की कोशिश की जा रही है। मार्था कैरियर को 28 मई, 16 9 2 को उनकी बहन और दामाद, मैरी टूथकर और रोजर टूथकर और उनकी बेटी मार्गरेट (जन्म 1683) और कई अन्य लोगों के साथ गिरफ्तार किया गया था, और जादूगर के साथ आरोप लगाया गया था। परीक्षण में मार्था पहले एंडोवर निवासी आरोपी थे। आरोपियों में से एक टूथकर, एक चिकित्सक के प्रतिद्वंद्वी का नौकर था। 31 मई को, न्यायाधीश जॉन हैथॉर्न, जोनाथन कोर्विन और बार्थोलोम्यू गेडनी ने मार्था कैरियर, जॉन एल्डन , विल्मॉट रेड, एलिजाबेथ हाउ और फिलिप इंग्लिश की जांच की। मार्था कैरियर ने अपनी मासूमियत बरकरार रखी, हालांकि आरोप लगाने वाली लड़कियों (सुसाना शेल्डन, मैरी वालकोट, एलिजाबेथ हूबार्ड और एन पुट्टनाम) ने उनकी "शक्तियों" द्वारा उनकी परेशानी का प्रदर्शन किया। शापों के बारे में गवाही देने वाले अन्य पड़ोसियों और रिलायंस। उसने दोषी नहीं ठहराया और झूठ बोलने वाली लड़कियों पर आरोप लगाया। मार्था के सबसे छोटे बच्चों को उनकी मां के खिलाफ गवाही देने के लिए मजबूर किया गया था, और उनके बेटे, एंड्रयू कैरियर (18) और रिचर्ड कैरियर (15) पर भी उनकी बेटी सारा कैरियर (7) जैसी आरोप थी। सारा ने पहले स्वीकार किया, जैसा कि उसके बेटे थॉमस, जूनियर ने किया था; फिर यातना के तहत (ऊँची एड़ी के लिए गर्दन बंधे), एंड्रयू और रिचर्ड ने भी स्वीकार किया, सभी अपनी मां को implicating। जुलाई में, एन फोस्टर ने मार्था कैरियर को भी फंसाया। 2 अगस्त को , ओयर और टर्मिनर कोर्ट ने मार्था कैरियर के साथ-साथ जॉर्ज जैकब्स सीनियर, जॉर्ज बर्रॉस , जॉन विलार्ड और जॉन और एलिजाबेथ प्रोक्टर के खिलाफ गवाहों को सुना, और 5 अगस्त को एक परीक्षण जूरी ने जादूगर के सभी छह दोषी पाया और उन्हें लटका दिया। 11 अगस्त को, मार्था की 7 वर्षीय बेटी सारा कैरियर और उसके पति थॉमस कैरियर की जांच की गई। मार्था कैरियर को 1 9 अगस्त को गैलोस हिल पर जॉर्ज जैकब्स सीनियर, जॉर्ज बर्रॉस, जॉन विलार्ड और जॉन प्रोक्टर के साथ फांसी दी गई थी। मार्था कैरियर ने लापरवाही से बचने के लिए "झूठ इतनी गंदी" कबूल करने से इंकार कर दिया, मचान से अपनी निर्दोषता को चिल्लाया। कपास माथेर इस फांसी पर एक पर्यवेक्षक थे, और उनकी डायरी में मार्था कैरियर को "प्रचलित हग" और संभवतः "नरक की रानी" के रूप में जाना जाता था। 1711 में, उनके परिवार को उनके दृढ़ विश्वास के लिए थोड़ी सी राशि मिलीः 7 पाउंड और 6 शिलिंग्स। जबकि विभिन्न इतिहासकारों ने उन्नत सिद्धांतों को बताया है कि दो एंडोवर मंत्रियों के बीच लड़ाई के कारण मार्था कैरियर को पकड़ा गया था, या क्योंकि उन्होंने कुछ संपत्ति रखी थी, या अपने परिवार और समुदाय में चुनिंदा चेचक प्रभावों के कारण, ज्यादातर सहमत हैं कि वह एक आसान लक्ष्य थीं क्योंकि समुदाय की "असहनीय" सदस्य के रूप में उनकी प्रतिष्ठा का।
के लिए जाना जाता हैः सोलह नौ दो के सलेम चुड़ैल परीक्षणों में एक चुड़ैल के रूप में निष्पादित, कपास माथेर द्वारा वर्णित "रैंपेंट हग" मार्था कैरियर का जन्म एंडोवर, मैसाचुसेट्स में हुआ था; उसके माता-पिता वहां मूल निवासी थे। एक हज़ार छः सौ चौहत्तर में उन्होंने अपने पहले बच्चे को जन्म देने के बाद, वेल्श इंडेंटर्ड नौकर के थॉमस कैरियर से विवाह किया; यह घोटाला भुला नहीं गया था। उनके पास चार या पांच बच्चे थे और सोलह नौ शून्य में उनके पिता की मौत के बाद एंड्रॉवर वापस अपनी मां के साथ रहने के लिए एंड्रॉवर लौट रहे थे। कैरियर पर एंडोवर को चेचक लाने का आरोप था; बिलरिका में बीमारी से उनके दो बच्चे मर गए थे। वह मार्था का पति और दो बच्चे श्वास के साथ बीमार थे और जीवित बचे हुए संदिग्ध माना जाता था, विशेष रूप से क्योंकि बीमारी से कुछ अन्य मौतों ने अपने पति को अपने परिवार की संपत्ति का वारिस करने के लिए रखा था। मार्था के दो भाइयों की मृत्यु हो गई थी, और इसलिए मार्था ने अपने पिता से संपत्ति विरासत में ली। उसने पड़ोसियों के साथ तर्क दिया जब उन्हें संदेह था कि उन्हें और उसके पति को धोखा देने की कोशिश की जा रही है। मार्था कैरियर को अट्ठाईस मई, सोलह नौ दो को उनकी बहन और दामाद, मैरी टूथकर और रोजर टूथकर और उनकी बेटी मार्गरेट और कई अन्य लोगों के साथ गिरफ्तार किया गया था, और जादूगर के साथ आरोप लगाया गया था। परीक्षण में मार्था पहले एंडोवर निवासी आरोपी थे। आरोपियों में से एक टूथकर, एक चिकित्सक के प्रतिद्वंद्वी का नौकर था। इकतीस मई को, न्यायाधीश जॉन हैथॉर्न, जोनाथन कोर्विन और बार्थोलोम्यू गेडनी ने मार्था कैरियर, जॉन एल्डन , विल्मॉट रेड, एलिजाबेथ हाउ और फिलिप इंग्लिश की जांच की। मार्था कैरियर ने अपनी मासूमियत बरकरार रखी, हालांकि आरोप लगाने वाली लड़कियों ने उनकी "शक्तियों" द्वारा उनकी परेशानी का प्रदर्शन किया। शापों के बारे में गवाही देने वाले अन्य पड़ोसियों और रिलायंस। उसने दोषी नहीं ठहराया और झूठ बोलने वाली लड़कियों पर आरोप लगाया। मार्था के सबसे छोटे बच्चों को उनकी मां के खिलाफ गवाही देने के लिए मजबूर किया गया था, और उनके बेटे, एंड्रयू कैरियर और रिचर्ड कैरियर पर भी उनकी बेटी सारा कैरियर जैसी आरोप थी। सारा ने पहले स्वीकार किया, जैसा कि उसके बेटे थॉमस, जूनियर ने किया था; फिर यातना के तहत , एंड्रयू और रिचर्ड ने भी स्वीकार किया, सभी अपनी मां को implicating। जुलाई में, एन फोस्टर ने मार्था कैरियर को भी फंसाया। दो अगस्त को , ओयर और टर्मिनर कोर्ट ने मार्था कैरियर के साथ-साथ जॉर्ज जैकब्स सीनियर, जॉर्ज बर्रॉस , जॉन विलार्ड और जॉन और एलिजाबेथ प्रोक्टर के खिलाफ गवाहों को सुना, और पाँच अगस्त को एक परीक्षण जूरी ने जादूगर के सभी छह दोषी पाया और उन्हें लटका दिया। ग्यारह अगस्त को, मार्था की सात वर्षीय बेटी सारा कैरियर और उसके पति थॉमस कैरियर की जांच की गई। मार्था कैरियर को एक नौ अगस्त को गैलोस हिल पर जॉर्ज जैकब्स सीनियर, जॉर्ज बर्रॉस, जॉन विलार्ड और जॉन प्रोक्टर के साथ फांसी दी गई थी। मार्था कैरियर ने लापरवाही से बचने के लिए "झूठ इतनी गंदी" कबूल करने से इंकार कर दिया, मचान से अपनी निर्दोषता को चिल्लाया। कपास माथेर इस फांसी पर एक पर्यवेक्षक थे, और उनकी डायरी में मार्था कैरियर को "प्रचलित हग" और संभवतः "नरक की रानी" के रूप में जाना जाता था। एक हज़ार सात सौ ग्यारह में, उनके परिवार को उनके दृढ़ विश्वास के लिए थोड़ी सी राशि मिलीः सात पाउंड और छः शिलिंग्स। जबकि विभिन्न इतिहासकारों ने उन्नत सिद्धांतों को बताया है कि दो एंडोवर मंत्रियों के बीच लड़ाई के कारण मार्था कैरियर को पकड़ा गया था, या क्योंकि उन्होंने कुछ संपत्ति रखी थी, या अपने परिवार और समुदाय में चुनिंदा चेचक प्रभावों के कारण, ज्यादातर सहमत हैं कि वह एक आसान लक्ष्य थीं क्योंकि समुदाय की "असहनीय" सदस्य के रूप में उनकी प्रतिष्ठा का।
विधानमंडल में गुरुवार को बजट सत्र के 10वें दिन की कार्यवाही के दौरान दो बड़ी घोषणाएं हुईं। श्रम मंत्री जिवेश मिश्रा ने जानकारी दी कि बिहटा में वीमेन स्किल इंस्टीट्यूट खोला जाएगा। उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा हिंदी में हो, इसका प्रस्ताव केंद्र को भेजा जाएगा। वहीं शिक्षा मंत्री विजय चौधरी ने कहा है कि राज्य में नई लाइब्रेरी नीति बनाई जाएगी। इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी को महत्व दिया जाएगा। राजद विधायक भाई विरेंद्र ने सदन में पटना की सड़कों की खुदाई का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि पटना की 12 सौ KM सड़कों पर काम चल रहा है। काम होने के बाद भी सड़कों पर गढ्ढे छोड़ दिए जा रहे हैं। इससे लोग परेशान हैं। आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। नगर विकास मंत्री तारकिशोर प्रसाद ने कहा कि मैं अपने स्तर पर इसकी समीक्षा कर रहा हूं। जल्द इस पर काम दिखने लगेगा। नगर निकाय की सड़कों के पक्कीकरण का मामला भी सदन में उठा। सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष ने उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद को घेरा। नगर निकाय की कमिटी में विधायकों को सदस्य के तौर पर रखने की मांग की। बिहार विधान परिषद में केदार पांडेय ने सवाल पूछा कि पटना शहर के लगभग 70 पार्कों की देखरेख की जवाबदेही वन पर्यावरण विभाग को दी गई है। संजय गांधी जैविक उद्यान पटना को छोड़कर सभी पार्कों में शौचालय निर्माण की व्यवस्था नहीं है। बिहार विधान परिषद में राजद के रामचंद्र पूर्वे ने बिहार में बाइक चोरी का मामला उठाया। बिहार विधान परिषद में ध्यानाकर्षण के तहत सुनील कुमार सिंह, सुनील कुमार और रामचंद्र पूर्वे ने संयुक्त रूप से पूछा कि पटना शहर में ही 150 सब्जी बिक्री केंद्र खुलने थे। सब्जी बिक्री केंद्र के लिए स्थानीय प्रशासन निकाय को स्थल उपलब्ध कराना था, लेकिन अभी तक एक भी सब्जी बिक्री केंद्र के लिए जगह उपलब्ध नहीं कराई गई है। सवाल के जवाब में कृषि मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि यह नई योजना है इस पर काम हो रहा है। शून्यकाल में प्रेमचंद्र मिश्रा ने कोरोना टीका से जुड़ा मामला उठाया। कहा- कई लोगों को बिना टीका लिए ही लौटना पड़ा। जवाब में स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने कहा कि सभी विधायक, पार्षदों का टीकाकरण सोमवार से शनिवार को IGIMS में आयोजित किया जा रहा है। सुबह 9:00 से 11:00 के बीच और फिर दोपहर 1:00 से 7:00 के बीच जाकर टीकाकरण करवा सकते हैं। 10 वें दिन बजट सत्र की कार्यवाही की शुरुआत में ही विपक्ष का हंगामा तेज हो गया। भूमिहीनों को जमीन देने की मांग पर राजद विधायक हंगामा करने लगे। CPI ML के विधायक विधानसभा के बाहर बैनर-पोस्टर लेकर प्रदर्शन करते दिखे। भूमि सुधार कानून लागू करने की मांग को लेकर माले विधायक विधानसभा के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे। माले विधायक बंदोपाध्याय आयोग की सिफारिश में संपूर्णता की मांग कर रहे हैं। शहरी गरीबों के लिए आवास नीति बनाओ, जहां झुग्गी वहीं मकान आवास नीति बनाओ, सभी भूमिहीन गरीबों को वासगीत पर्चा दो, भूमि सुधार कानून लागू करो. . . नारों के साथ लेफ्ट के विधायक विधानसभा के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
विधानमंडल में गुरुवार को बजट सत्र के दसवें दिन की कार्यवाही के दौरान दो बड़ी घोषणाएं हुईं। श्रम मंत्री जिवेश मिश्रा ने जानकारी दी कि बिहटा में वीमेन स्किल इंस्टीट्यूट खोला जाएगा। उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा हिंदी में हो, इसका प्रस्ताव केंद्र को भेजा जाएगा। वहीं शिक्षा मंत्री विजय चौधरी ने कहा है कि राज्य में नई लाइब्रेरी नीति बनाई जाएगी। इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी को महत्व दिया जाएगा। राजद विधायक भाई विरेंद्र ने सदन में पटना की सड़कों की खुदाई का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि पटना की बारह सौ KM सड़कों पर काम चल रहा है। काम होने के बाद भी सड़कों पर गढ्ढे छोड़ दिए जा रहे हैं। इससे लोग परेशान हैं। आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। नगर विकास मंत्री तारकिशोर प्रसाद ने कहा कि मैं अपने स्तर पर इसकी समीक्षा कर रहा हूं। जल्द इस पर काम दिखने लगेगा। नगर निकाय की सड़कों के पक्कीकरण का मामला भी सदन में उठा। सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष ने उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद को घेरा। नगर निकाय की कमिटी में विधायकों को सदस्य के तौर पर रखने की मांग की। बिहार विधान परिषद में केदार पांडेय ने सवाल पूछा कि पटना शहर के लगभग सत्तर पार्कों की देखरेख की जवाबदेही वन पर्यावरण विभाग को दी गई है। संजय गांधी जैविक उद्यान पटना को छोड़कर सभी पार्कों में शौचालय निर्माण की व्यवस्था नहीं है। बिहार विधान परिषद में राजद के रामचंद्र पूर्वे ने बिहार में बाइक चोरी का मामला उठाया। बिहार विधान परिषद में ध्यानाकर्षण के तहत सुनील कुमार सिंह, सुनील कुमार और रामचंद्र पूर्वे ने संयुक्त रूप से पूछा कि पटना शहर में ही एक सौ पचास सब्जी बिक्री केंद्र खुलने थे। सब्जी बिक्री केंद्र के लिए स्थानीय प्रशासन निकाय को स्थल उपलब्ध कराना था, लेकिन अभी तक एक भी सब्जी बिक्री केंद्र के लिए जगह उपलब्ध नहीं कराई गई है। सवाल के जवाब में कृषि मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि यह नई योजना है इस पर काम हो रहा है। शून्यकाल में प्रेमचंद्र मिश्रा ने कोरोना टीका से जुड़ा मामला उठाया। कहा- कई लोगों को बिना टीका लिए ही लौटना पड़ा। जवाब में स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने कहा कि सभी विधायक, पार्षदों का टीकाकरण सोमवार से शनिवार को IGIMS में आयोजित किया जा रहा है। सुबह नौ:शून्य से ग्यारह:शून्य के बीच और फिर दोपहर एक:शून्य से सात:शून्य के बीच जाकर टीकाकरण करवा सकते हैं। दस वें दिन बजट सत्र की कार्यवाही की शुरुआत में ही विपक्ष का हंगामा तेज हो गया। भूमिहीनों को जमीन देने की मांग पर राजद विधायक हंगामा करने लगे। CPI ML के विधायक विधानसभा के बाहर बैनर-पोस्टर लेकर प्रदर्शन करते दिखे। भूमि सुधार कानून लागू करने की मांग को लेकर माले विधायक विधानसभा के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे। माले विधायक बंदोपाध्याय आयोग की सिफारिश में संपूर्णता की मांग कर रहे हैं। शहरी गरीबों के लिए आवास नीति बनाओ, जहां झुग्गी वहीं मकान आवास नीति बनाओ, सभी भूमिहीन गरीबों को वासगीत पर्चा दो, भूमि सुधार कानून लागू करो. . . नारों के साथ लेफ्ट के विधायक विधानसभा के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
गूगल पर अफगानिस्तान के क्रिकेटर राशिद खान की वाइफ के बारे में पूछे जाने पर गूगल उसका जवाब अनुष्का शर्मा बता रहा है. इसके बाद यह बात सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है. गूगल शादी की तारीख में भी 11 दिसंबर 2017 बता रहा है जिस दिन विराट कोहली और अनुष्का शर्मा की शादी हुई थी. इस खबर के आने के बाद से ही यह खबर सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बना हुआ हैं. लोग अनुष्का शर्मा, राशिद खान और विराट कोहली को लेकर ट्विटर पर कई तरह के मीम्स बना रहे हैं. भारतीय टीम व आरसीबी के कप्तान विराट कोहली इस खबर के आने के बाद से सोशल मीडिया में जमकर ट्रोल हो रहे हैं. फिलहाल राशिद खान और विराट कोहली दोनों ही आईपीएल 2020 खेल रहे हैं. Me:- Rashid khan wife? Google showing Anushka Sharma as young senior citizen Rashid khan wife. Google shows #AnushkaSharma as Rashid Khan's wife : Anushka : I'm not Rashid Khan's wife .
गूगल पर अफगानिस्तान के क्रिकेटर राशिद खान की वाइफ के बारे में पूछे जाने पर गूगल उसका जवाब अनुष्का शर्मा बता रहा है. इसके बाद यह बात सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है. गूगल शादी की तारीख में भी ग्यारह दिसंबर दो हज़ार सत्रह बता रहा है जिस दिन विराट कोहली और अनुष्का शर्मा की शादी हुई थी. इस खबर के आने के बाद से ही यह खबर सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बना हुआ हैं. लोग अनुष्का शर्मा, राशिद खान और विराट कोहली को लेकर ट्विटर पर कई तरह के मीम्स बना रहे हैं. भारतीय टीम व आरसीबी के कप्तान विराट कोहली इस खबर के आने के बाद से सोशल मीडिया में जमकर ट्रोल हो रहे हैं. फिलहाल राशिद खान और विराट कोहली दोनों ही आईपीएल दो हज़ार बीस खेल रहे हैं. Me:- Rashid khan wife? Google showing Anushka Sharma as young senior citizen Rashid khan wife. Google shows #AnushkaSharma as Rashid Khan's wife : Anushka : I'm not Rashid Khan's wife .
Honda Cars India Limited (HCIL) ने बुधवार को अपने परिवार सेडान Amaze के 'स्पेशल एडिशन' को आगामी त्योहारी सीजन को किक-स्टार्ट करने के लिए लॉन्च किया। नया Amaze स्पेशल एडिशन कई नए और रोमांचक फीचर्स पैक करता है, और पेट्रोल और डीजल दोनों मॉडल के MT और CVT संस्करण में S ग्रेड पर आधारित है। Amaze स्पेशल एडिशन की कीमत पेट्रोल मैनुअल ट्रिम के लिए ₹7.00 लाख से शुरू होती है और डीजल CVT ट्रिम के लिए ₹9.10 लाख तक होती है। होंडा अमेज स्पेशल एडिशन की पूरी कीमत सूचीः नए Amaze स्पेशल एडिशन की कुछ मुख्य झलकियों में Digipad 2.0 - 17.7 cm का टचस्क्रीन एडवांस्ड डिस्प्ले ऑडियो सिस्टम, स्लीक और स्ट्राइकिंग बॉडी ग्राफिक्स, स्पेशल सीट कवर, एर्गोनोमिकली स्लाइडिंग आर्मरेस्ट और 'स्पेशल एडिशन' लोगो शामिल हैं। कार इंडस्ट्रीज ने त्योहारी सीज़न के चारों ओर एक बड़ा फुटफॉल आकर्षित करने के लिए कई स्पेशल एडिशन मॉडल लॉन्च किए, जो भारत में एक नया वाहन खरीदने के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है। फेस्टिव सीजन से पहले Amaze के स्पेशल एडिशन की पेशकश करते हुए हम बेहद खुश हैं। Amaze S ग्रेड मॉडल के सबसे अधिक बिकने वाले ग्रेड में से एक है। एस ग्रेड पर आधारित विशेष संस्करण में स्मार्ट नई सुविधाओं को शामिल करने के साथ, समग्र पैकेज में बहुत ही आकर्षक कीमत है। ", राजेश गोयल, सीनियर वाइस प्रेसीडेंट और डायरेक्टर, मार्केटिंग एंड सेल्स, होंडा कार्स इंडिया।
Honda Cars India Limited ने बुधवार को अपने परिवार सेडान Amaze के 'स्पेशल एडिशन' को आगामी त्योहारी सीजन को किक-स्टार्ट करने के लिए लॉन्च किया। नया Amaze स्पेशल एडिशन कई नए और रोमांचक फीचर्स पैक करता है, और पेट्रोल और डीजल दोनों मॉडल के MT और CVT संस्करण में S ग्रेड पर आधारित है। Amaze स्पेशल एडिशन की कीमत पेट्रोल मैनुअल ट्रिम के लिए सात दशमलव शून्य रुपया लाख से शुरू होती है और डीजल CVT ट्रिम के लिए नौ दशमलव दस रुपया लाख तक होती है। होंडा अमेज स्पेशल एडिशन की पूरी कीमत सूचीः नए Amaze स्पेशल एडिशन की कुछ मुख्य झलकियों में Digipad दो.शून्य - सत्रह दशमलव सात सेंटीमीटर का टचस्क्रीन एडवांस्ड डिस्प्ले ऑडियो सिस्टम, स्लीक और स्ट्राइकिंग बॉडी ग्राफिक्स, स्पेशल सीट कवर, एर्गोनोमिकली स्लाइडिंग आर्मरेस्ट और 'स्पेशल एडिशन' लोगो शामिल हैं। कार इंडस्ट्रीज ने त्योहारी सीज़न के चारों ओर एक बड़ा फुटफॉल आकर्षित करने के लिए कई स्पेशल एडिशन मॉडल लॉन्च किए, जो भारत में एक नया वाहन खरीदने के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है। फेस्टिव सीजन से पहले Amaze के स्पेशल एडिशन की पेशकश करते हुए हम बेहद खुश हैं। Amaze S ग्रेड मॉडल के सबसे अधिक बिकने वाले ग्रेड में से एक है। एस ग्रेड पर आधारित विशेष संस्करण में स्मार्ट नई सुविधाओं को शामिल करने के साथ, समग्र पैकेज में बहुत ही आकर्षक कीमत है। ", राजेश गोयल, सीनियर वाइस प्रेसीडेंट और डायरेक्टर, मार्केटिंग एंड सेल्स, होंडा कार्स इंडिया।
तेलंगाना के पिछड़े वर्गों के कल्याण और नागरिक आपूर्ति मंत्री गंगुला कमलाकर ने शनिवार को कहा कि तीन महीने से अधिक समय तक लाभार्थी का राशन कार्ड रद्द नहीं किया जाएगा। लोगों को नए राशन कार्ड जारी करने पर बोलते हुए, मंत्री कमलाकर ने कहा कि केंद्र ने तेलुगु राज्यों (आंध्र प्रदेश और तेलंगाना) में राशन कार्डों पर प्रतिबंध लगा दिया है और स्पष्ट किया है कि यदि राशन चावल तीन महीने तक नहीं लिया जाता है तो राशन कार्ड स्वचालित रूप से रद्द कर दिया जाएगा। एक पंक्ति में। उन्होंने कहा कि यह निर्णय सरकार द्वारा पात्र गरीबों को रियायती चावल प्रदान करने के इरादे से लिया गया था। हालांकि, उन्होंने कहा कि राज्य में लोगों को राशन कार्ड जारी करना एक सतत प्रक्रिया है, जो आगे भी जारी रहेगी। केंद्र के अनुसार, केवल 23,46,000 लोग ही राशन कार्ड के लिए पात्र हैं और उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल 1. 91 करोड़ लाभार्थियों पर विचार किया जाना चाहिए। हालांकि, राज्य में वर्तमान में 1. 73 करोड़ लाभार्थी हैं और 80 प्रतिशत आबादी के पास तेलंगाना में राशन कार्ड है। 4,88,775 कार्ड के लिए आवेदन प्रक्रिया में हैं। यह स्पष्ट किया गया कि खाद्य सुरक्षा कार्ड जारी करना एक सतत प्रक्रिया है। नए राशन कार्ड जारी करने का मामला सरकारी जांच के अधीन है। पिछले तीन वर्षों में, हैदराबाद में 44,734 कार्ड जारी किए गए हैं। अन्य 97,000 कार्ड लंबित हैं। मंत्री ने स्पष्ट किया कि नए कार्ड COVID-19 के कारण जारी नहीं किए जा सकते। लंबित आवेदनों को जल्द ही सत्यापित किया जाएगा और प्रत्येक पात्र व्यक्ति को सफेद राशन कार्ड जारी किए जाएंगे।
तेलंगाना के पिछड़े वर्गों के कल्याण और नागरिक आपूर्ति मंत्री गंगुला कमलाकर ने शनिवार को कहा कि तीन महीने से अधिक समय तक लाभार्थी का राशन कार्ड रद्द नहीं किया जाएगा। लोगों को नए राशन कार्ड जारी करने पर बोलते हुए, मंत्री कमलाकर ने कहा कि केंद्र ने तेलुगु राज्यों में राशन कार्डों पर प्रतिबंध लगा दिया है और स्पष्ट किया है कि यदि राशन चावल तीन महीने तक नहीं लिया जाता है तो राशन कार्ड स्वचालित रूप से रद्द कर दिया जाएगा। एक पंक्ति में। उन्होंने कहा कि यह निर्णय सरकार द्वारा पात्र गरीबों को रियायती चावल प्रदान करने के इरादे से लिया गया था। हालांकि, उन्होंने कहा कि राज्य में लोगों को राशन कार्ड जारी करना एक सतत प्रक्रिया है, जो आगे भी जारी रहेगी। केंद्र के अनुसार, केवल तेईस,छियालीस,शून्य लोग ही राशन कार्ड के लिए पात्र हैं और उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल एक. इक्यानवे करोड़ लाभार्थियों पर विचार किया जाना चाहिए। हालांकि, राज्य में वर्तमान में एक. तिहत्तर करोड़ लाभार्थी हैं और अस्सी प्रतिशत आबादी के पास तेलंगाना में राशन कार्ड है। चार,अठासी,सात सौ पचहत्तर कार्ड के लिए आवेदन प्रक्रिया में हैं। यह स्पष्ट किया गया कि खाद्य सुरक्षा कार्ड जारी करना एक सतत प्रक्रिया है। नए राशन कार्ड जारी करने का मामला सरकारी जांच के अधीन है। पिछले तीन वर्षों में, हैदराबाद में चौंतालीस,सात सौ चौंतीस कार्ड जारी किए गए हैं। अन्य सत्तानवे,शून्य कार्ड लंबित हैं। मंत्री ने स्पष्ट किया कि नए कार्ड COVID-उन्नीस के कारण जारी नहीं किए जा सकते। लंबित आवेदनों को जल्द ही सत्यापित किया जाएगा और प्रत्येक पात्र व्यक्ति को सफेद राशन कार्ड जारी किए जाएंगे।
नई दिल्ली, 7 दिसंबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सशस्त्र सेना झंडा दिवस पर सुरक्षा बलों का आभार व्यक्त करते हुए कहा, भारत को वीर सेवा और सशस्त्र बलों के निस्वार्थ बलिदान पर गर्व है। प्रधानमंत्री ने ट्वीट में कहा, सशस्त्र सेना झंडा दिवस हमारे सशस्त्र बलों और उनके परिवारों के प्रति आभार व्यक्त करने का दिन है। भारत को उनकी वीर सेवा और निस्वार्थ बलिदान पर गर्व है। हमारी सेनाओं के लिए कल्याण में योगदान दें। यह पहल हमारे कई बहादुर कर्मियों और उनके परिवारों की मदद करेगा। देश के सम्मान की रक्षा के लिए सीमाओं पर लड़ाई लड़ चुके और अभी भी सीमाओं पर लड़ रहे शहीदों और वर्दीधारियों को सम्मानित करने के लिए पूरे देश में 1949 के बाद से 7 दिसंबर को सशस्त्र सेना झंडा दिवस के रूप में मनाया जाता है।
नई दिल्ली, सात दिसंबर । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सशस्त्र सेना झंडा दिवस पर सुरक्षा बलों का आभार व्यक्त करते हुए कहा, भारत को वीर सेवा और सशस्त्र बलों के निस्वार्थ बलिदान पर गर्व है। प्रधानमंत्री ने ट्वीट में कहा, सशस्त्र सेना झंडा दिवस हमारे सशस्त्र बलों और उनके परिवारों के प्रति आभार व्यक्त करने का दिन है। भारत को उनकी वीर सेवा और निस्वार्थ बलिदान पर गर्व है। हमारी सेनाओं के लिए कल्याण में योगदान दें। यह पहल हमारे कई बहादुर कर्मियों और उनके परिवारों की मदद करेगा। देश के सम्मान की रक्षा के लिए सीमाओं पर लड़ाई लड़ चुके और अभी भी सीमाओं पर लड़ रहे शहीदों और वर्दीधारियों को सम्मानित करने के लिए पूरे देश में एक हज़ार नौ सौ उनचास के बाद से सात दिसंबर को सशस्त्र सेना झंडा दिवस के रूप में मनाया जाता है।
GORAKHPUR: गोरखपुराइट्स के लिए इस बार का दुर्गा पूजा व दशहरा मेला और खास होगा। सिटी के अलग-अलग चौराहों पर अलग-अलग डिजाइन वाले पंडाल देखने को मिलेंगे। इन्हें अधिक से अधिक अट्रैक्टिव बनाने के लिए कलाकार दिन-रात लगे हुए हैं। कुछ जगहों पर लोकल तो कुछ जगहों पर कोलकाता से आए कलाकार पंडाल व मूर्तियों को अंतिम रूप देने में लगे हुए हैं। नवरात्रि में सप्तमी से लगने वाले मेले को लेकर भी खास तैयारियां चल रही हैं। इस आयोजन को खास बनाने के लिए दुर्गा पूजा समितियां तैयारियों में लगी हुई हैं। कूड़ाघाट स्थित दुर्गा पंडाल में मां वैष्णो की गुफा का दर्शन होगा। स्वचालित सीढि़यों से चलने वाली मां दुर्गा की प्रतिमा को भी अंतिम रूप देने में कलाकार लगे हैं। श्री दुर्गा पूजा समिति स्व। सुदामा सिंह की तरफ से रेलवे स्टेशन रोड पर बन रहे पंडाल में कोलकाता से आए कलाकार परंपरागत प्रतिमा को आकर्षक रूप देने में जुटे हुए हैं। आयोजक अमित सिंह बताते हैं कि मां दुर्गा, गणेश, लक्ष्मी और कार्तिकेय की जितनी भी प्रतिमाएं लगाई जाएंगी, वह मेले में आने वाले दर्शकों के लिए खास होंगी। धर्मशाला चौराहे पर लगाए गए पंडाल के आयोजक हरिवंश बताते हैं कि मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए इस बार कुछ खास नजर आएगा। मेले में तमाम तरह के एक्टिविटी कराई जाएगी। जिसमें भरत मिलाप का सीन भी दर्शाया जाएगा। इन सभी के लिए तैयारियां चल रही हैं। सप्तमी के दिन से मेले मे रौनक दिखनी शुरू हो जाएगी। दुर्गाबाड़ी में बंगाली समिति की तरफ से 7 अक्टूबर से विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों की घोषणा कर दी गई है। अशोक देव नीलू बताते हैं कि श्रद्धालुओं को इस बार काफी कुछ खास देखने को मिलेगा। वे बताते हैं कि मां दुर्गा, महिषासुर, शेर, लक्ष्मी, सरस्वती, कार्तिकेय व गणेश जी की प्रतिमा संयुक्त रूप से बनाई गई है। इन प्रतिमा को देखकर यह नहीं लगेगा कि ये सारी प्रतिमाएं एक में अटैच हैं।
GORAKHPUR: गोरखपुराइट्स के लिए इस बार का दुर्गा पूजा व दशहरा मेला और खास होगा। सिटी के अलग-अलग चौराहों पर अलग-अलग डिजाइन वाले पंडाल देखने को मिलेंगे। इन्हें अधिक से अधिक अट्रैक्टिव बनाने के लिए कलाकार दिन-रात लगे हुए हैं। कुछ जगहों पर लोकल तो कुछ जगहों पर कोलकाता से आए कलाकार पंडाल व मूर्तियों को अंतिम रूप देने में लगे हुए हैं। नवरात्रि में सप्तमी से लगने वाले मेले को लेकर भी खास तैयारियां चल रही हैं। इस आयोजन को खास बनाने के लिए दुर्गा पूजा समितियां तैयारियों में लगी हुई हैं। कूड़ाघाट स्थित दुर्गा पंडाल में मां वैष्णो की गुफा का दर्शन होगा। स्वचालित सीढि़यों से चलने वाली मां दुर्गा की प्रतिमा को भी अंतिम रूप देने में कलाकार लगे हैं। श्री दुर्गा पूजा समिति स्व। सुदामा सिंह की तरफ से रेलवे स्टेशन रोड पर बन रहे पंडाल में कोलकाता से आए कलाकार परंपरागत प्रतिमा को आकर्षक रूप देने में जुटे हुए हैं। आयोजक अमित सिंह बताते हैं कि मां दुर्गा, गणेश, लक्ष्मी और कार्तिकेय की जितनी भी प्रतिमाएं लगाई जाएंगी, वह मेले में आने वाले दर्शकों के लिए खास होंगी। धर्मशाला चौराहे पर लगाए गए पंडाल के आयोजक हरिवंश बताते हैं कि मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए इस बार कुछ खास नजर आएगा। मेले में तमाम तरह के एक्टिविटी कराई जाएगी। जिसमें भरत मिलाप का सीन भी दर्शाया जाएगा। इन सभी के लिए तैयारियां चल रही हैं। सप्तमी के दिन से मेले मे रौनक दिखनी शुरू हो जाएगी। दुर्गाबाड़ी में बंगाली समिति की तरफ से सात अक्टूबर से विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों की घोषणा कर दी गई है। अशोक देव नीलू बताते हैं कि श्रद्धालुओं को इस बार काफी कुछ खास देखने को मिलेगा। वे बताते हैं कि मां दुर्गा, महिषासुर, शेर, लक्ष्मी, सरस्वती, कार्तिकेय व गणेश जी की प्रतिमा संयुक्त रूप से बनाई गई है। इन प्रतिमा को देखकर यह नहीं लगेगा कि ये सारी प्रतिमाएं एक में अटैच हैं।
पता नहीं कितना साम्य था कितनी विपरीतताएं आईं, पर यह सत्य है कि मीरा वन कर समस्त जीवन काट लेने की प्रतिज्ञा मेरी मां ने तोड़ दी । मां से पिता के इस अंतर्जातीय विवाह ने घर-परिवार में एक तहलका मचा दिया । दादी मां ने मेरे पिता को बुला कर ऐलान कर दिया : 'बड़े, जो भी तुमने किया है ठीक नहीं किया, अब मेरी भी एक बात सुन लो । तुम जो चाहो करो हम कुछ नहीं कहेंगी लेकिन वह नवागता मेरे पारम्परिक घर में प्रवेश कर हमारी प्रतिष्ठा को धूल-धूसरित नहीं कर पाएगी ।' पिता मौन रह गए... पर लोग कहते है, उनका सुवर्ण जैसा रंग खान से काटे कोयले के समान हो गया, और उनकी काया सब्जी के डल्ले में पड़े हुए बासी बैंगनों की तरह लगने लगी... यही से मेरी मां के संघर्षो का प्रारम्भ हुआ... पिता के सामने कारोबार की व्यस्तता थी । इससे जो समय बचता उसमे तीन हिस्से हुए । पहला हिस्सा दादी मां, दूसरा पीडा से करहाती, अंतिम सांस आने का इंतजार करती बड़ी अम्मा और तीसरा हिस्सा हमारी झोली में पड़ा... हमारी विवशताओं की आप कल्पना नहीं कर सकते । कभी-कभी मै मा से पूछता : 'इन परिस्थितियां में इस परिवार से जुड़ना आपने स्वीकार क्यों किया ?" मां ने मेरे इस प्रश्न का उत्तर अनेक बार दिया है... पर मुझे लगता है मेरा प्रश्न आज भी अनुत्तरित है... और हम ? पता नहीं... उपेक्षा, जुगुप्सा, अनधिकार, अस्वीकार के अहाते में ही पैदा हुए, पलेबढ़े... मेरी मां ? पिता के परिजनों से दूर, श्रीमंतों की सामाजिक परिपाटियो से अलग, अपने शिक्षित समुदाय मे भी न खप कर, अपने गढ़े-सेए हुए सिद्धांतों को समेटे उस उल्का के समान धरती - आकाश के बीच लटक गईं जिसका आकाश में रह जाना या पृथ्वी पर गिर पड़ना भी दुर्भाग्य के आने का प्रतीक माना जाता है... मुझे याद नहीं, मेरे पिता की कचहरी कभी हमारे यहां लगी हो । उनके सारे काम उसी परम्परावादी घर से हुए जहां मेरी मां के प्रवेश पर मेरी दादी ने प्रतिबंध लगा दिया था। मेरे पिता के जीवन का अधिकांश भाग भी वही बीता था । अपने घर की ओर से आदर-सम्मान या स्वीकृति देना पिता के हाथ में नहीं था... इसके अलावा मां को और कुछ देने में पिता ने कोई कसर नहीं रखी... शहर से दूर बाग-बगीचे वाला एक बड़ा मकान, उसकी रक्षा के लिए तैनात झूठ
पता नहीं कितना साम्य था कितनी विपरीतताएं आईं, पर यह सत्य है कि मीरा वन कर समस्त जीवन काट लेने की प्रतिज्ञा मेरी मां ने तोड़ दी । मां से पिता के इस अंतर्जातीय विवाह ने घर-परिवार में एक तहलका मचा दिया । दादी मां ने मेरे पिता को बुला कर ऐलान कर दिया : 'बड़े, जो भी तुमने किया है ठीक नहीं किया, अब मेरी भी एक बात सुन लो । तुम जो चाहो करो हम कुछ नहीं कहेंगी लेकिन वह नवागता मेरे पारम्परिक घर में प्रवेश कर हमारी प्रतिष्ठा को धूल-धूसरित नहीं कर पाएगी ।' पिता मौन रह गए... पर लोग कहते है, उनका सुवर्ण जैसा रंग खान से काटे कोयले के समान हो गया, और उनकी काया सब्जी के डल्ले में पड़े हुए बासी बैंगनों की तरह लगने लगी... यही से मेरी मां के संघर्षो का प्रारम्भ हुआ... पिता के सामने कारोबार की व्यस्तता थी । इससे जो समय बचता उसमे तीन हिस्से हुए । पहला हिस्सा दादी मां, दूसरा पीडा से करहाती, अंतिम सांस आने का इंतजार करती बड़ी अम्मा और तीसरा हिस्सा हमारी झोली में पड़ा... हमारी विवशताओं की आप कल्पना नहीं कर सकते । कभी-कभी मै मा से पूछता : 'इन परिस्थितियां में इस परिवार से जुड़ना आपने स्वीकार क्यों किया ?" मां ने मेरे इस प्रश्न का उत्तर अनेक बार दिया है... पर मुझे लगता है मेरा प्रश्न आज भी अनुत्तरित है... और हम ? पता नहीं... उपेक्षा, जुगुप्सा, अनधिकार, अस्वीकार के अहाते में ही पैदा हुए, पलेबढ़े... मेरी मां ? पिता के परिजनों से दूर, श्रीमंतों की सामाजिक परिपाटियो से अलग, अपने शिक्षित समुदाय मे भी न खप कर, अपने गढ़े-सेए हुए सिद्धांतों को समेटे उस उल्का के समान धरती - आकाश के बीच लटक गईं जिसका आकाश में रह जाना या पृथ्वी पर गिर पड़ना भी दुर्भाग्य के आने का प्रतीक माना जाता है... मुझे याद नहीं, मेरे पिता की कचहरी कभी हमारे यहां लगी हो । उनके सारे काम उसी परम्परावादी घर से हुए जहां मेरी मां के प्रवेश पर मेरी दादी ने प्रतिबंध लगा दिया था। मेरे पिता के जीवन का अधिकांश भाग भी वही बीता था । अपने घर की ओर से आदर-सम्मान या स्वीकृति देना पिता के हाथ में नहीं था... इसके अलावा मां को और कुछ देने में पिता ने कोई कसर नहीं रखी... शहर से दूर बाग-बगीचे वाला एक बड़ा मकान, उसकी रक्षा के लिए तैनात झूठ
VARANASI : दुनिया भर में ताकत का लोहा मनवाने वाले सोशल मीडिया पर पीएम मोदी का बनारस दौरा खूब ट्रेंड में रहा। प्रधानमंत्री बनने के बाद काशी में 17वीं बार पहुंचे नरेंद्र मोदी के तीन हजार करोड़ से अधिक की योजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किये जाने के कार्यक्रमों को सात समुंदर पार तक लोगों ने लाइव देखा। सोशल मीडिया का शस्त्र माने जाने वाले ट्विटर पर 'बदल रही काशी' खूब ट्रेंड में रही। रोहनिया में आयोजित सभा के दौरान 'बदल रही है काशी' का पांच मिनट का एक वीडियो भी जारी किया गया जिसे देखते ही देखते लाखों लोगों ने रिट्वीट और करोड़ों लोगों ने लाइक किया। बीजेपी की आईटी टीम ने जहां इस उपलब्धि को सोशल प्लेटफॉर्म पर करीने से उतारा तो इसे हाथों हाथ आगे बढ़ाने वालों की कमी भी नहीं रहीं। 'बदल रही है काशी' में मां गंगा की अविरलता, हेरिटेज पोल, आईपीडीएस के तहत अंडरग्राउंड केबिल वर्क, रेलवे का डेवलपमेंट, बीएचयू सहित लहरतारा में दो कैंसर हॉस्पिटल, बाबा विश्वनाथ कॉरिडोर, गोइठहां सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, रिंगरोड, बाबतपुर फोरलेन सहित अन्य विकास कार्यो को दिखाया गया है। बीजेपी की आईटी सेल ने अपने हर एकाउंट पर पीएम मोदी के चारों कार्यक्रम को सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म पर आनलाइन प्लेसमेंट दिया। डीएलडब्ल्यू में पहले इलेक्ट्रिक इंजन का शुभारंभ, सीरगोवर्धनपुर में संत रविदास जयंती पर जुटे देश दुनिया से रैदासी जत्था को संबोधित करने का कार्यक्रम, बीएचयू में कैंसर हॉस्पिटल का शुभारंभ और रोहनिया औढ़े में आयोजित सभा के दौरान तीन हजार से अधिक विकास योजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास के कार्यक्रमों को सोशल मीडिया पर खूब बढ़ाया गया। प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों में जो शिरकत नहीं कर पाया वह सोशल मीडिया से अंतिम समय तक जुड़ा रहा। ट्विटर पर यह देखा जा सकता है कि विरोधियों को पीएम मोदी कैसे जवाब दे रहे हैं, औढ़े में सभा के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि सेमी हाईस्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस की उपलब्धि पर जहां काशी सहित देश को गर्व हो रहा है तो कुछ लोग इसका उपहास, मजाक उड़ा रहे हैं। हमारे इंजीनियर्स, प्रोफेशनल्स सहित श्रमिकों की मेहनत का मजाक उड़ा रहे हैं। ऐसी सोच रखने वाले कभी देश की तरक्की नहीं देख सकते। यह वीडियो ट्विटर सहित फेसबुक, व्हाट्सएप व अन्य साइट्स पर चंद मिनटों में वायरल हो गया।
VARANASI : दुनिया भर में ताकत का लोहा मनवाने वाले सोशल मीडिया पर पीएम मोदी का बनारस दौरा खूब ट्रेंड में रहा। प्रधानमंत्री बनने के बाद काशी में सत्रहवीं बार पहुंचे नरेंद्र मोदी के तीन हजार करोड़ से अधिक की योजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किये जाने के कार्यक्रमों को सात समुंदर पार तक लोगों ने लाइव देखा। सोशल मीडिया का शस्त्र माने जाने वाले ट्विटर पर 'बदल रही काशी' खूब ट्रेंड में रही। रोहनिया में आयोजित सभा के दौरान 'बदल रही है काशी' का पांच मिनट का एक वीडियो भी जारी किया गया जिसे देखते ही देखते लाखों लोगों ने रिट्वीट और करोड़ों लोगों ने लाइक किया। बीजेपी की आईटी टीम ने जहां इस उपलब्धि को सोशल प्लेटफॉर्म पर करीने से उतारा तो इसे हाथों हाथ आगे बढ़ाने वालों की कमी भी नहीं रहीं। 'बदल रही है काशी' में मां गंगा की अविरलता, हेरिटेज पोल, आईपीडीएस के तहत अंडरग्राउंड केबिल वर्क, रेलवे का डेवलपमेंट, बीएचयू सहित लहरतारा में दो कैंसर हॉस्पिटल, बाबा विश्वनाथ कॉरिडोर, गोइठहां सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, रिंगरोड, बाबतपुर फोरलेन सहित अन्य विकास कार्यो को दिखाया गया है। बीजेपी की आईटी सेल ने अपने हर एकाउंट पर पीएम मोदी के चारों कार्यक्रम को सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म पर आनलाइन प्लेसमेंट दिया। डीएलडब्ल्यू में पहले इलेक्ट्रिक इंजन का शुभारंभ, सीरगोवर्धनपुर में संत रविदास जयंती पर जुटे देश दुनिया से रैदासी जत्था को संबोधित करने का कार्यक्रम, बीएचयू में कैंसर हॉस्पिटल का शुभारंभ और रोहनिया औढ़े में आयोजित सभा के दौरान तीन हजार से अधिक विकास योजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास के कार्यक्रमों को सोशल मीडिया पर खूब बढ़ाया गया। प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों में जो शिरकत नहीं कर पाया वह सोशल मीडिया से अंतिम समय तक जुड़ा रहा। ट्विटर पर यह देखा जा सकता है कि विरोधियों को पीएम मोदी कैसे जवाब दे रहे हैं, औढ़े में सभा के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि सेमी हाईस्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस की उपलब्धि पर जहां काशी सहित देश को गर्व हो रहा है तो कुछ लोग इसका उपहास, मजाक उड़ा रहे हैं। हमारे इंजीनियर्स, प्रोफेशनल्स सहित श्रमिकों की मेहनत का मजाक उड़ा रहे हैं। ऐसी सोच रखने वाले कभी देश की तरक्की नहीं देख सकते। यह वीडियो ट्विटर सहित फेसबुक, व्हाट्सएप व अन्य साइट्स पर चंद मिनटों में वायरल हो गया।
गया, एजेंसी। बिहार में गया जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र में अपराधियों ने जनता दल यूनाइटेड (जदयू) नेता सुनील कुमार सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक सलेमपुर मोहल्ला निवासी जदयू जिला उपाध्यक्ष सुनील सिंह शुक्रवार देर रात एक जन्मदिन की पार्टी में शामिल होकर घर लौट रहे थे। जैसे ही वे घर के अंदर आये, तभी अपराधियों ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गयी। हत्या का कारण संपत्ति विवाद बताया जा रहा है। हत्या का कारण संपत्ति विवाद बताया जा रहा है। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है और पुलिस मामले की छानबीन में जुटी है।
गया, एजेंसी। बिहार में गया जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र में अपराधियों ने जनता दल यूनाइटेड नेता सुनील कुमार सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक सलेमपुर मोहल्ला निवासी जदयू जिला उपाध्यक्ष सुनील सिंह शुक्रवार देर रात एक जन्मदिन की पार्टी में शामिल होकर घर लौट रहे थे। जैसे ही वे घर के अंदर आये, तभी अपराधियों ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गयी। हत्या का कारण संपत्ति विवाद बताया जा रहा है। हत्या का कारण संपत्ति विवाद बताया जा रहा है। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है और पुलिस मामले की छानबीन में जुटी है।
दूर हो जाना पर्याप्त है। पहला चरित्र के चरम उत्कर्ष के लिए सामाजिक प्रशिक्षण को अपरिहार्य मानता है; दूसरा इसे साधक से बाधक ही अधिक मानता है। लेकिन इतना और कह देना ठोक होगा कि नास्तिक सम्प्रदाय सामा जिकता की उपेक्षा केवल आत्मशुद्धि के साधन के रूप में करते हैं और इसके प्रति उनका भाव न विद्वेष का है, न अवहेलना का। हम जानते हैं कि वास्तव में से समाज को सर्वाधिक महत्त्व देते थे और अन्य मनुष्यों के प्रति सहानुभूति और दया का भाव रखने की आवश्यकता पर विशेष रूप से बल देते थे। इसके अतिरिक्त अन्य अन्तर भी है, जैसे नास्तिक वानिको का व्यावहारिक साधना की एकमात्र प्रणाली के रूप में और आस्तिक दार्शनिकों का एक नई साधनाप्रणाली के लिए प्रारम्भिक तैयारी मात्र के रूप में तपश्चर्या का आश्रय लेना । यह साधना प्रणाली भी अलग-अलग दर्शनों में अलग-अलग हो सकती है । लेकिन विस्तार की बातो में चाहे जो अन्तर हो, वैराग्य की वृत्ति दोनों हो परम्पराओं को जोड़नेवाली कड़ी का काम करती है। जो तन्त्र प्रथम दृष्टि में इसके पक्ष में प्रतीत नहीं होते, वे भी थोड़े विचार के पश्चात् वस्तुतः इसके पक्ष में दिखाई देते है। उदाहरणार्थ, यज्ञ-यागादि का अनुष्ठान, जो पारलौकिक अभ्युदय का साधन है, वास्तव में, जहाँ तक इस लोक का सम्बन्ध है, पूर्ण आत्मत्याग की भावना उत्पन्न करना है, क्योकि इसमें जिन कर्मों का विधान है उनका फल इस लोक मे नही बल्कि परलोक में प्राप्त होगा, जहाँ की परिस्थितियाँ इस लोक की परिस्थितियों से बिलकुल भिन्न होगी। ऐसे सिद्धान्सो मे छिपा हुआ विरक्ति का भाव, जैसा कि हम आगे देखेंगे, भगवद्गीता के निष्काम कर्म के उपदेश में स्पष्ट हो गया था और परलोक मे सुफल भोग भोगने के लिए कर्म करने में छिपी हुई स्वार्थपरायणता भी निकाल बाहर कर दो गई थी। भारतीय सिद्धान्तो में ओत-प्रोत वैराग्य की भावना के कारण यह कहा जा मकता है कि वे जिस जीवन प्रणाली का विधान करते हैं उसका लक्ष्य साधारण नैतिकता से ऊपर उठ जाना है। दूसरे शब्दों में, भारतीय दर्शन का 1. जैसा कि हम किसी आगामी अध्याय में देखेंगे, बाद के काल में आरितकों ने आश्रमव्यवस्था मे सम्बन्धित नियम को बहुत ढीला कर दिया था फिर भी वानप्रस्थी बनने का विकल्प केवल उसी के लिए था जो ब्रह्मचर्य के प्रथम आश्रम को पूरा कर चुका हो। इतना और भी कह देना चाहिए कि, जैसा कि प्रचलित प्रथा से ज्ञात होता है, यह दिलाई अधिकांशतः सिद्धान्त में ही है और जल्दी वैराग्य ले लेना नियम नहीं बल्कि अपवाद है। लक्ष्य नीति से परे पहुँचना भी उतना ही है जितना तर्क से परे पहुॅचना । फिर भी, चूँकि वोराग्य के आदर्श का विवरण भारतीय विचारकों के द्वारा दो भिन्न तरीको से दिया गया है. इसलिए यह अधिनंतिक दृष्टिकोण भिन्न-भिन्न मम्प्रदायों में कुछ भिन्न अयं रखता है। लेकिन पिछले अन्तर की तरह यह अन्तर आस्तिक और नास्तिक परम्पराओं के भेद का अनुसरण नहीं करता । कुछ सम्प्रदाय जीवात्मा को शाश्वत मानते है, लेकिन अन्य एक या दूसरे रूप में इसका निषेध करते हैं। उदाहरणार्थ, बौद्ध धर्म जीवात्मा को एक नित्य वस्तु मानने का पूर्णतः विरोध करता है, जबकि अद्वैत वेदान्त मानता है कि जीवात्मा अन्त में ब्रह्म मे लीन हो जाता है और उसको पृथक्ता अस्थायी मात्र है । इसके बिपरीत, ईश्वरवाद, जैसा रामानुज का है, और बहुवादी दर्शन, जैसा जैन धर्म का और न्याय-वैशेषिक का है, जीवात्मा की सत्ता को नित्य मानते हैं, लेकिन साथ ही मोक्ष का एकमात्र उपाय अहकार के उच्छेद को बताते है । जो दर्शन जीवात्मा का एक या दूसरे रूप मे निषेध करते हैं, उनके अनुसार कर्तव्य की घारणा क। परमार्थतः कोई महत्व नहीं रह जाता, क्योकि व्यक्ति और समाज के जिस भेद पर यह धारणा आधारित है उसका परमार्थतः कोई अस्तित्व नही है। इस प्रकार का अतिर्वयक्तिक दृष्टिकोण जिस व्यक्ति का बन गया है, उसके विषय में तंत्तिरीप उपनिषद् (21) मे कहा गया हैः "बहू इस प्रकार के विचारों से तप्त नहीं रहता : क्या मैंने साधुकर्म नहीं किया ? क्या मैंने पाप किया ?" इसके विपरीत जो दर्शन जीगत्मा की पारमाथिन सत्ता मानते हैं, लेकिन साथ है. पूर्ण आत्मसंयम को भी आवश्यक बताते है, उनमे कर्तव्य की चेतना बनी रहती है, किन्तु साधक अपने अधिकारों का बिलकुल भी विचार न करता हुआ स्वयं को कर्तव्य-पालन मे लगाए रखता है। तात्पर्य यह है कि यद्यपि उन में व्यक्ति और समाज का भेद माना जाता है, तथापि अधिकार और कर्तव्य का भेद लुप्त हो जाता है; और इस प्रकार यहाँ अभिप्रेरणा साधारण नैतिकता में पाई जानेवाली अभिप्रेरणा से ऊपर उठ जाती है। दोनों हो मतो के अनुसार व्यक्तिगत स्वार्थ के पूर्णतमा त्याग के कारण सांसारिक नैतिकता मैं आवश्यक रूप से व्याप्त द्वैतभाव तिरोहित हो जाता है। किसी मे भी व्यक्तिगत स्वार्थ का त्याग व्यक्ति और उसके सामाजिक पर्यावरण के मध्य अधिकारों और कर्तव्यों का समजन मात्र, चाहे वह कितना ही कठिन या नाजुक हो, नहीं है । इतना और कहा जा सकता है कि एक दृष्टि से व्यावहारिक अभ्यास का लक्ष्य अपने प्रारम्भिक चरणो तक मे नैतिकता की साधारण धारणा से ऊपर उठ जाना है। भारतीय दृष्टिकोण के अनुसार व्यक्ति के कर्तव्य मानव समाज तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वास्तव मे सम्पूर्ण चेतन-मुष्टि के अन्दर फैले हुए हैं। अपने पड़ोसी से आत्मवत् प्रेम करो,' इस सामान्य उपदेश के साथ वह 'और प्रत्येक प्राणी तुम्हारा पड़ोसी है, यह भी जोड़ देता है, जैसा कि एक ऐसे आदमी ने कहा है, जिससे अधिक योग्य जीवन के भारतीय आदर्श को समझने के लिए कोई दूसरा नहीं है । नैतिक कर्म के क्षेत्र का इस प्रकार विस्तार कर देना भारतीय नीतिशास्त्र की, जिसका आदर्श अधिकारों की मांग न होकर कर्तव्यों के प्रति निष्ठा है, अन्तरात्मा के अनुरूप ही है। जिन प्राणियों के अन्दर नैतिक चेतना का अभाव है, उनके चाहे कोई कर्तव्य न हो, पर इसक जयं यह नहीं है कि उनके प्रति भी किसी का कोई कर्तव्य नहीं है। सभी प्राणियों के प्रति मंत्री का भाव रखने का यह आदर्श अहिंसा के सिद्धान्त मे सबसे अच्छी तरह व्यक्त होता है। यह सिद्धान्त प्रत्येक ऊंचे भारतीय धर्म ने अपने आवश्यक अंग के रूप में अपनाया है और इसका अभ्यास न केवल ऋषियों और मुनियों ने किया बल्कि अशोक जैसे सम्राटों ने भी किया। शायद इससे मानव समाज का महत्त्व घट जाता है। लेकिन ऐसा इसलिए नहीं है कि यह आदर्श मानव समाज का कम सम्मान करता है, बल्कि इसलिए है कि यह उस अधिक व्यापक समष्टि का अधिक सम्मान करता है जिसमें सारे जीव समाविष्ट हैं। ऐसा करते हुए यह मानवीय एकता की भावना की उपेक्षा नहीं करना । यह केवल उस भावना का मनुष्यों के कल्याण के लिए प्रयत्न करने के अतिरिक्त यह भी अर्थ लेता है कि विश्व की योजना में मनुष्य जाति को जो विशेषाधिकार. पूर्ण स्थिति प्राप्त है, उसके अनुरूप ही सारे जीवों के प्रति कर्तव्य का पालन भी किया जाए। समाजनिष्ठ नैतिकता भले हो हमारे दृष्टिकोण को व्यक्तिनिष्ठ दृष्टिकोण से अधिक व्यापक बना दे, पर वास्तव में वह हमें शेष सृष्टि से पृथक हो रखती है ! व्यक्ति की स्वार्थपरायणता के अतिरिक्त एक ऐसी भी चीज है जिसे जाति का स्वार्थपरायणता कहा जा सकता है और जो अनिवार्यतः इस विश्वास / को जन्म देती है कि अवमानवीय सृष्टि का मनुष्य के हित के लिए दोहन किया जा सकता है। यदि मनुष्य को सचमुच मुक्त हाना है, तो इसका भी त्याग करना होगा; और वह ऐसा केवल तभी कर सकेगा जब वह मानवकेन्द्रिक दृष्टिकोण से ऊपर उठ जाएगा तथा, गीता के शब्दों में, 'विद्या और विनय से सम्पन्न ब्राह्मण, गाय, हाथी, श्वान तथा श्वान का मांस खानेवाला चाण्डाल, 1. Romain Rolland: Mahatma Gandhi, p. 33. भूमिका सबके प्रति समदर्शी हो सकेगा । सम्पूर्ण भारतीय विचारधारा में दो सामान्य बातें है-मोक्ष के सर्वोच्च आदर्श का अनुसरण और उसके लिए जो साधना बताई गई है उसमें व्याप्त वैराग्य की भावना । इन बातो से सिद्ध होता है कि भारतीयों के लिए दर्शन न तो मात्र बौद्धिक चिन्तन है और न मात्र नैतिकता, बल्कि वह चीज़ है जो इन दोनों को अपने अन्दर समाविष्ट भी करती है और इनसे ऊपर भी है। दूसरे शब्दो मे, जैसा कि पहले कहा जा चुका है, यहाँ दर्शन का लक्ष्य उससे भी अधिक प्राप्त करना है जो तर्कशास्त्र और नीतिशास्त्र से प्राप्त किया जा सकता है। किन्तु यह नहीं भुला देना चाहिए कि तर्कशास्त्र और नीतिशास्त्र यद्यपि स्वयं साध्य नही हैं, तथापि दर्शन के लक्ष्य के ये ही एकमात्र साधन है। इन्हें ऐसे दो पंख माना गया है जो आध्यात्मिक उडान में आत्मा की सहायता करते है । इनको सहायता से जो लक्ष्य प्राप्त होता है, उसका स्वरूप एक ओर तो ज्ञान का है- ऐसे ज्ञान का जिसमे बौद्धिक आस्था की अपरोक्षानुभव में परिणति हो गई हो, और दूसरी ओर वैराग्य का है- ऐसे वैराग्य का जो उसके तात्त्विक आघार की जानकारी से अविचल हो गया हो । वह प्रधानतः शान्ति को मानसिक स्थिति है, जिसमे निष्क्रियता का होना अनिवार्य नहीं है। लेकिन बल मानसिक स्थिति या उस आन्तरिक अनुभव पर है, जो उसे उत्पन्न करता है, न कि बाह्य व्यवहार पर, जो उसको अभिव्यक्ति के रूप में देखा जाता है और इसलिए न्यूनाधिक रूप से गौण है। दार्शनिक साधना का महत्त्व जितना कम किसी व्यक्ति को अज्ञात का ज्ञान कराने में है, उतना ही कम उसे वह करने को प्रेरित करने में भी हैं, जो अन्यथा उसने न किया होता; उसका महत्व तो तत्त्वतः उसे वह बनाने में है जो वह पहले नहीं था। कहा गया है कि स्वर्ग पहले एक मनोवृत्ति है और तब कुछ और। अब तक हमने भारतीय विचार - परम्परा के मुख्य विभागों के बारे में कहा है, जिनमें कुछ समान बातों के बावजूद मौलिक भिन्नता है। भारतीय दर्शन का इतिहास इस बात का इतिहास है कि उक्त दो परम्पराओं ने किस प्रकार परस्पर किया प्रतिक्रिया करके विभिन्न दार्शनिक सम्प्रदायों को जन्म दिया है । उनका पारस्परिक प्रभाव चिन्तन के आधार को विस्तृत करने के साधन के रूप में चाहे जितना अधिक वांछनीय हो, उसके कारण सिद्धान्तों के दो भिन्न वर्गों में अत्यधिक मात्रा में परस्पर व्याप्ति आ गई है, जिससे यह मालूम करना कठिन हो गया है कि प्रत्येक ने दूसरे के कौन-कौन तत्त्व आत्मसात् किए हैं। उदाहरणार्य, 1. अध्याय 5, श्लोक 18 । यह निश्चय के साथ कहना असम्भव हो गया है कि जीवन्मुक्ति का आदर्श, जिसका महत्त्व ऊपर दिखाया गया है, इन दो परम्पराओं में से किसने हमें दिया है। भारतीय विचारधारा के विकासक्रम मे कभी एक सम्प्रदाय अभिभावी रहा और कभी दूसरा । एक समय बौद्ध धर्म का स्पष्टतः जोर रहा और ऐसा प्रतीत होता था कि वह स्थायी रूप से अन्यो पर हावी हो गया है। किन्तु अन्त में वेदान्त की विजय हुई। वेदान्त अपने विकास क्रम में आशा के अनुसार ही बहुत बदल गया, यद्यपि उसका आन्तरिक स्वरूप वही बना रहा जो उपनिषदों में था। अवश्य ही हम नास्तिक परम्परा के इतिहास की विभिन्न अवस्थाओं को इस अन्तिम रूप मे पहुँचाने वाले विभिन्न चरणों के रूप में देख सकते हैं। इस प्रकार वेदान्त को भारतीय विचारधारा को चरम परिणति के रूप में देखा जा सकता है, और भारतीय आदर्श के सर्वोच्च की खोज हम उचित रूप से उसमे कर सकते हैं। वेदान्त का सैद्धान्तिक पक्ष ब्रह्मवाद और ईश्वरवाद को विजय का सूचक है । वेदान्त के विभिन्न सम्प्रदायों में जो भी जन्तर हों, उन्हे इन दो शीर्षकों के नीचे रखा गया है। ब्रह्मवाद एकवादी है और ईश्वरवाद प्रकट रूप से बहुवादी होते हुए भी एकवाद की भावना से ओतप्रोत है, क्योकि वह प्रत्येक वस्तु को पूर्णतः ईश्वर के अधीन मानने पर चल देता है। व्यावहारिक पक्ष मे वेदान्त की विजय का अर्थ जीवन के भावात्मक आदर्श की विजय रहा है । यह न केवल एक आस्तिक दर्शन के रूप में वेदान्त के द्वारा अनुमोदित नैतिक चर्या के सामाजिक आधार से प्रकट होता है, अपितु, जैसा कि हम विविध दर्शनो का विस्तृत विवरण देते समय देखेंगे, उसकी नि. श्रेयस की धारणा से भी प्रकट होता है, जिसके अनुसार आत्मा और उसके पर्यावरण के विरोध को आत्मा के हितो का विश्व के हितो से तादात्म्य करके दूर करना है, न कि जैसा कि नास्तिक दर्शनों में माना गया है, आत्मा को उसके पर्यावरण से पृथक करके। दोनों ही आदर्शों में पूर्ण वैराग्य का उदय समान रूप से अपेक्षित है; लेकिन वेदान्त का वैराग्य अधिक ऊंचे और सूक्ष्म प्रकार का है। सबसे महान् भारतीय कवि कालिदास ने, जिनकी कृतियों में व्यावहारिक जीवन के भारतवासियो को ज्ञान आदर्श की सबसे सच्ची अभिव्यक्ति दिखाई देने की आशा की ना सकती है, इस आदर्श को 'स्वामित्व का अभिमान न करते हुए सम्पूर्ण जगत् का स्वामी होन" बताया है। निःश्रेयस की वेदान्त की भारणा में विश्व के प्रयोजन को स्वीकृति भी गर्भित है- ऐसे प्रयोजन की जो चाहे ईश्वर के द्वारा निश्चित माना जात चाडे विश्व की प्रकृति में सहज रूप से विद्यमान माना 1. मालविकाग्निमित्रम्, 1.1. जाए, लेकिन जिसकी सिद्धि की दिशा में प्रत्येक वस्तु चेतन या अचेतन रूप से अग्रसर हो रही है । नास्तिक दर्शन जहाँ तक इस धारणा के प्रभाव से अछूते रहे, वहां तक वे सम्पूर्ण विश्व में कोई प्रयोजन व्याप्त नही देखते, यद्यपि वे व्यक्ति को पाप से अपने को मुक्त करने की सम्भावना को स्वीकार करते हैं ।
दूर हो जाना पर्याप्त है। पहला चरित्र के चरम उत्कर्ष के लिए सामाजिक प्रशिक्षण को अपरिहार्य मानता है; दूसरा इसे साधक से बाधक ही अधिक मानता है। लेकिन इतना और कह देना ठोक होगा कि नास्तिक सम्प्रदाय सामा जिकता की उपेक्षा केवल आत्मशुद्धि के साधन के रूप में करते हैं और इसके प्रति उनका भाव न विद्वेष का है, न अवहेलना का। हम जानते हैं कि वास्तव में से समाज को सर्वाधिक महत्त्व देते थे और अन्य मनुष्यों के प्रति सहानुभूति और दया का भाव रखने की आवश्यकता पर विशेष रूप से बल देते थे। इसके अतिरिक्त अन्य अन्तर भी है, जैसे नास्तिक वानिको का व्यावहारिक साधना की एकमात्र प्रणाली के रूप में और आस्तिक दार्शनिकों का एक नई साधनाप्रणाली के लिए प्रारम्भिक तैयारी मात्र के रूप में तपश्चर्या का आश्रय लेना । यह साधना प्रणाली भी अलग-अलग दर्शनों में अलग-अलग हो सकती है । लेकिन विस्तार की बातो में चाहे जो अन्तर हो, वैराग्य की वृत्ति दोनों हो परम्पराओं को जोड़नेवाली कड़ी का काम करती है। जो तन्त्र प्रथम दृष्टि में इसके पक्ष में प्रतीत नहीं होते, वे भी थोड़े विचार के पश्चात् वस्तुतः इसके पक्ष में दिखाई देते है। उदाहरणार्थ, यज्ञ-यागादि का अनुष्ठान, जो पारलौकिक अभ्युदय का साधन है, वास्तव में, जहाँ तक इस लोक का सम्बन्ध है, पूर्ण आत्मत्याग की भावना उत्पन्न करना है, क्योकि इसमें जिन कर्मों का विधान है उनका फल इस लोक मे नही बल्कि परलोक में प्राप्त होगा, जहाँ की परिस्थितियाँ इस लोक की परिस्थितियों से बिलकुल भिन्न होगी। ऐसे सिद्धान्सो मे छिपा हुआ विरक्ति का भाव, जैसा कि हम आगे देखेंगे, भगवद्गीता के निष्काम कर्म के उपदेश में स्पष्ट हो गया था और परलोक मे सुफल भोग भोगने के लिए कर्म करने में छिपी हुई स्वार्थपरायणता भी निकाल बाहर कर दो गई थी। भारतीय सिद्धान्तो में ओत-प्रोत वैराग्य की भावना के कारण यह कहा जा मकता है कि वे जिस जीवन प्रणाली का विधान करते हैं उसका लक्ष्य साधारण नैतिकता से ऊपर उठ जाना है। दूसरे शब्दों में, भारतीय दर्शन का एक. जैसा कि हम किसी आगामी अध्याय में देखेंगे, बाद के काल में आरितकों ने आश्रमव्यवस्था मे सम्बन्धित नियम को बहुत ढीला कर दिया था फिर भी वानप्रस्थी बनने का विकल्प केवल उसी के लिए था जो ब्रह्मचर्य के प्रथम आश्रम को पूरा कर चुका हो। इतना और भी कह देना चाहिए कि, जैसा कि प्रचलित प्रथा से ज्ञात होता है, यह दिलाई अधिकांशतः सिद्धान्त में ही है और जल्दी वैराग्य ले लेना नियम नहीं बल्कि अपवाद है। लक्ष्य नीति से परे पहुँचना भी उतना ही है जितना तर्क से परे पहुॅचना । फिर भी, चूँकि वोराग्य के आदर्श का विवरण भारतीय विचारकों के द्वारा दो भिन्न तरीको से दिया गया है. इसलिए यह अधिनंतिक दृष्टिकोण भिन्न-भिन्न मम्प्रदायों में कुछ भिन्न अयं रखता है। लेकिन पिछले अन्तर की तरह यह अन्तर आस्तिक और नास्तिक परम्पराओं के भेद का अनुसरण नहीं करता । कुछ सम्प्रदाय जीवात्मा को शाश्वत मानते है, लेकिन अन्य एक या दूसरे रूप में इसका निषेध करते हैं। उदाहरणार्थ, बौद्ध धर्म जीवात्मा को एक नित्य वस्तु मानने का पूर्णतः विरोध करता है, जबकि अद्वैत वेदान्त मानता है कि जीवात्मा अन्त में ब्रह्म मे लीन हो जाता है और उसको पृथक्ता अस्थायी मात्र है । इसके बिपरीत, ईश्वरवाद, जैसा रामानुज का है, और बहुवादी दर्शन, जैसा जैन धर्म का और न्याय-वैशेषिक का है, जीवात्मा की सत्ता को नित्य मानते हैं, लेकिन साथ ही मोक्ष का एकमात्र उपाय अहकार के उच्छेद को बताते है । जो दर्शन जीवात्मा का एक या दूसरे रूप मे निषेध करते हैं, उनके अनुसार कर्तव्य की घारणा क। परमार्थतः कोई महत्व नहीं रह जाता, क्योकि व्यक्ति और समाज के जिस भेद पर यह धारणा आधारित है उसका परमार्थतः कोई अस्तित्व नही है। इस प्रकार का अतिर्वयक्तिक दृष्टिकोण जिस व्यक्ति का बन गया है, उसके विषय में तंत्तिरीप उपनिषद् मे कहा गया हैः "बहू इस प्रकार के विचारों से तप्त नहीं रहता : क्या मैंने साधुकर्म नहीं किया ? क्या मैंने पाप किया ?" इसके विपरीत जो दर्शन जीगत्मा की पारमाथिन सत्ता मानते हैं, लेकिन साथ है. पूर्ण आत्मसंयम को भी आवश्यक बताते है, उनमे कर्तव्य की चेतना बनी रहती है, किन्तु साधक अपने अधिकारों का बिलकुल भी विचार न करता हुआ स्वयं को कर्तव्य-पालन मे लगाए रखता है। तात्पर्य यह है कि यद्यपि उन में व्यक्ति और समाज का भेद माना जाता है, तथापि अधिकार और कर्तव्य का भेद लुप्त हो जाता है; और इस प्रकार यहाँ अभिप्रेरणा साधारण नैतिकता में पाई जानेवाली अभिप्रेरणा से ऊपर उठ जाती है। दोनों हो मतो के अनुसार व्यक्तिगत स्वार्थ के पूर्णतमा त्याग के कारण सांसारिक नैतिकता मैं आवश्यक रूप से व्याप्त द्वैतभाव तिरोहित हो जाता है। किसी मे भी व्यक्तिगत स्वार्थ का त्याग व्यक्ति और उसके सामाजिक पर्यावरण के मध्य अधिकारों और कर्तव्यों का समजन मात्र, चाहे वह कितना ही कठिन या नाजुक हो, नहीं है । इतना और कहा जा सकता है कि एक दृष्टि से व्यावहारिक अभ्यास का लक्ष्य अपने प्रारम्भिक चरणो तक मे नैतिकता की साधारण धारणा से ऊपर उठ जाना है। भारतीय दृष्टिकोण के अनुसार व्यक्ति के कर्तव्य मानव समाज तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वास्तव मे सम्पूर्ण चेतन-मुष्टि के अन्दर फैले हुए हैं। अपने पड़ोसी से आत्मवत् प्रेम करो,' इस सामान्य उपदेश के साथ वह 'और प्रत्येक प्राणी तुम्हारा पड़ोसी है, यह भी जोड़ देता है, जैसा कि एक ऐसे आदमी ने कहा है, जिससे अधिक योग्य जीवन के भारतीय आदर्श को समझने के लिए कोई दूसरा नहीं है । नैतिक कर्म के क्षेत्र का इस प्रकार विस्तार कर देना भारतीय नीतिशास्त्र की, जिसका आदर्श अधिकारों की मांग न होकर कर्तव्यों के प्रति निष्ठा है, अन्तरात्मा के अनुरूप ही है। जिन प्राणियों के अन्दर नैतिक चेतना का अभाव है, उनके चाहे कोई कर्तव्य न हो, पर इसक जयं यह नहीं है कि उनके प्रति भी किसी का कोई कर्तव्य नहीं है। सभी प्राणियों के प्रति मंत्री का भाव रखने का यह आदर्श अहिंसा के सिद्धान्त मे सबसे अच्छी तरह व्यक्त होता है। यह सिद्धान्त प्रत्येक ऊंचे भारतीय धर्म ने अपने आवश्यक अंग के रूप में अपनाया है और इसका अभ्यास न केवल ऋषियों और मुनियों ने किया बल्कि अशोक जैसे सम्राटों ने भी किया। शायद इससे मानव समाज का महत्त्व घट जाता है। लेकिन ऐसा इसलिए नहीं है कि यह आदर्श मानव समाज का कम सम्मान करता है, बल्कि इसलिए है कि यह उस अधिक व्यापक समष्टि का अधिक सम्मान करता है जिसमें सारे जीव समाविष्ट हैं। ऐसा करते हुए यह मानवीय एकता की भावना की उपेक्षा नहीं करना । यह केवल उस भावना का मनुष्यों के कल्याण के लिए प्रयत्न करने के अतिरिक्त यह भी अर्थ लेता है कि विश्व की योजना में मनुष्य जाति को जो विशेषाधिकार. पूर्ण स्थिति प्राप्त है, उसके अनुरूप ही सारे जीवों के प्रति कर्तव्य का पालन भी किया जाए। समाजनिष्ठ नैतिकता भले हो हमारे दृष्टिकोण को व्यक्तिनिष्ठ दृष्टिकोण से अधिक व्यापक बना दे, पर वास्तव में वह हमें शेष सृष्टि से पृथक हो रखती है ! व्यक्ति की स्वार्थपरायणता के अतिरिक्त एक ऐसी भी चीज है जिसे जाति का स्वार्थपरायणता कहा जा सकता है और जो अनिवार्यतः इस विश्वास / को जन्म देती है कि अवमानवीय सृष्टि का मनुष्य के हित के लिए दोहन किया जा सकता है। यदि मनुष्य को सचमुच मुक्त हाना है, तो इसका भी त्याग करना होगा; और वह ऐसा केवल तभी कर सकेगा जब वह मानवकेन्द्रिक दृष्टिकोण से ऊपर उठ जाएगा तथा, गीता के शब्दों में, 'विद्या और विनय से सम्पन्न ब्राह्मण, गाय, हाथी, श्वान तथा श्वान का मांस खानेवाला चाण्डाल, एक. Romain Rolland: Mahatma Gandhi, p. तैंतीस. भूमिका सबके प्रति समदर्शी हो सकेगा । सम्पूर्ण भारतीय विचारधारा में दो सामान्य बातें है-मोक्ष के सर्वोच्च आदर्श का अनुसरण और उसके लिए जो साधना बताई गई है उसमें व्याप्त वैराग्य की भावना । इन बातो से सिद्ध होता है कि भारतीयों के लिए दर्शन न तो मात्र बौद्धिक चिन्तन है और न मात्र नैतिकता, बल्कि वह चीज़ है जो इन दोनों को अपने अन्दर समाविष्ट भी करती है और इनसे ऊपर भी है। दूसरे शब्दो मे, जैसा कि पहले कहा जा चुका है, यहाँ दर्शन का लक्ष्य उससे भी अधिक प्राप्त करना है जो तर्कशास्त्र और नीतिशास्त्र से प्राप्त किया जा सकता है। किन्तु यह नहीं भुला देना चाहिए कि तर्कशास्त्र और नीतिशास्त्र यद्यपि स्वयं साध्य नही हैं, तथापि दर्शन के लक्ष्य के ये ही एकमात्र साधन है। इन्हें ऐसे दो पंख माना गया है जो आध्यात्मिक उडान में आत्मा की सहायता करते है । इनको सहायता से जो लक्ष्य प्राप्त होता है, उसका स्वरूप एक ओर तो ज्ञान का है- ऐसे ज्ञान का जिसमे बौद्धिक आस्था की अपरोक्षानुभव में परिणति हो गई हो, और दूसरी ओर वैराग्य का है- ऐसे वैराग्य का जो उसके तात्त्विक आघार की जानकारी से अविचल हो गया हो । वह प्रधानतः शान्ति को मानसिक स्थिति है, जिसमे निष्क्रियता का होना अनिवार्य नहीं है। लेकिन बल मानसिक स्थिति या उस आन्तरिक अनुभव पर है, जो उसे उत्पन्न करता है, न कि बाह्य व्यवहार पर, जो उसको अभिव्यक्ति के रूप में देखा जाता है और इसलिए न्यूनाधिक रूप से गौण है। दार्शनिक साधना का महत्त्व जितना कम किसी व्यक्ति को अज्ञात का ज्ञान कराने में है, उतना ही कम उसे वह करने को प्रेरित करने में भी हैं, जो अन्यथा उसने न किया होता; उसका महत्व तो तत्त्वतः उसे वह बनाने में है जो वह पहले नहीं था। कहा गया है कि स्वर्ग पहले एक मनोवृत्ति है और तब कुछ और। अब तक हमने भारतीय विचार - परम्परा के मुख्य विभागों के बारे में कहा है, जिनमें कुछ समान बातों के बावजूद मौलिक भिन्नता है। भारतीय दर्शन का इतिहास इस बात का इतिहास है कि उक्त दो परम्पराओं ने किस प्रकार परस्पर किया प्रतिक्रिया करके विभिन्न दार्शनिक सम्प्रदायों को जन्म दिया है । उनका पारस्परिक प्रभाव चिन्तन के आधार को विस्तृत करने के साधन के रूप में चाहे जितना अधिक वांछनीय हो, उसके कारण सिद्धान्तों के दो भिन्न वर्गों में अत्यधिक मात्रा में परस्पर व्याप्ति आ गई है, जिससे यह मालूम करना कठिन हो गया है कि प्रत्येक ने दूसरे के कौन-कौन तत्त्व आत्मसात् किए हैं। उदाहरणार्य, एक. अध्याय पाँच, श्लोक अट्ठारह । यह निश्चय के साथ कहना असम्भव हो गया है कि जीवन्मुक्ति का आदर्श, जिसका महत्त्व ऊपर दिखाया गया है, इन दो परम्पराओं में से किसने हमें दिया है। भारतीय विचारधारा के विकासक्रम मे कभी एक सम्प्रदाय अभिभावी रहा और कभी दूसरा । एक समय बौद्ध धर्म का स्पष्टतः जोर रहा और ऐसा प्रतीत होता था कि वह स्थायी रूप से अन्यो पर हावी हो गया है। किन्तु अन्त में वेदान्त की विजय हुई। वेदान्त अपने विकास क्रम में आशा के अनुसार ही बहुत बदल गया, यद्यपि उसका आन्तरिक स्वरूप वही बना रहा जो उपनिषदों में था। अवश्य ही हम नास्तिक परम्परा के इतिहास की विभिन्न अवस्थाओं को इस अन्तिम रूप मे पहुँचाने वाले विभिन्न चरणों के रूप में देख सकते हैं। इस प्रकार वेदान्त को भारतीय विचारधारा को चरम परिणति के रूप में देखा जा सकता है, और भारतीय आदर्श के सर्वोच्च की खोज हम उचित रूप से उसमे कर सकते हैं। वेदान्त का सैद्धान्तिक पक्ष ब्रह्मवाद और ईश्वरवाद को विजय का सूचक है । वेदान्त के विभिन्न सम्प्रदायों में जो भी जन्तर हों, उन्हे इन दो शीर्षकों के नीचे रखा गया है। ब्रह्मवाद एकवादी है और ईश्वरवाद प्रकट रूप से बहुवादी होते हुए भी एकवाद की भावना से ओतप्रोत है, क्योकि वह प्रत्येक वस्तु को पूर्णतः ईश्वर के अधीन मानने पर चल देता है। व्यावहारिक पक्ष मे वेदान्त की विजय का अर्थ जीवन के भावात्मक आदर्श की विजय रहा है । यह न केवल एक आस्तिक दर्शन के रूप में वेदान्त के द्वारा अनुमोदित नैतिक चर्या के सामाजिक आधार से प्रकट होता है, अपितु, जैसा कि हम विविध दर्शनो का विस्तृत विवरण देते समय देखेंगे, उसकी नि. श्रेयस की धारणा से भी प्रकट होता है, जिसके अनुसार आत्मा और उसके पर्यावरण के विरोध को आत्मा के हितो का विश्व के हितो से तादात्म्य करके दूर करना है, न कि जैसा कि नास्तिक दर्शनों में माना गया है, आत्मा को उसके पर्यावरण से पृथक करके। दोनों ही आदर्शों में पूर्ण वैराग्य का उदय समान रूप से अपेक्षित है; लेकिन वेदान्त का वैराग्य अधिक ऊंचे और सूक्ष्म प्रकार का है। सबसे महान् भारतीय कवि कालिदास ने, जिनकी कृतियों में व्यावहारिक जीवन के भारतवासियो को ज्ञान आदर्श की सबसे सच्ची अभिव्यक्ति दिखाई देने की आशा की ना सकती है, इस आदर्श को 'स्वामित्व का अभिमान न करते हुए सम्पूर्ण जगत् का स्वामी होन" बताया है। निःश्रेयस की वेदान्त की भारणा में विश्व के प्रयोजन को स्वीकृति भी गर्भित है- ऐसे प्रयोजन की जो चाहे ईश्वर के द्वारा निश्चित माना जात चाडे विश्व की प्रकृति में सहज रूप से विद्यमान माना एक. मालविकाग्निमित्रम्, एक.एक. जाए, लेकिन जिसकी सिद्धि की दिशा में प्रत्येक वस्तु चेतन या अचेतन रूप से अग्रसर हो रही है । नास्तिक दर्शन जहाँ तक इस धारणा के प्रभाव से अछूते रहे, वहां तक वे सम्पूर्ण विश्व में कोई प्रयोजन व्याप्त नही देखते, यद्यपि वे व्यक्ति को पाप से अपने को मुक्त करने की सम्भावना को स्वीकार करते हैं ।
512 भारतीय राजनीतिक व्यवस्था आर्थिक क्षेत्र में जनता पार्टी ने 13 सूत्री कार्यक्रम की घोषणा की, जिसकी मुख्य बातें ये थी -व्यक्तिगत सम्पत्ति के मौलिक अधिकार का अन्त और काम के अधिकार का समर्थन, कृषि तथा कुटीर एवं छोटे उद्योगों को प्राथमिकता, गांधीवादी आस्था के अनुसार अर्थ-व्यवस्था का विकेन्द्रीकरण, ऐसी प्रार्थिक नीति और श्रायोजन को अपनाना कि सभी व्यक्तियों को पूर्ण रोजगार की प्राप्ति हो, उत्पादकता के अनुपात में मजदूर को लाभ, न्यूनतम श्राय में वृद्धि, दम साल में गरीबी की समाप्ति, शहर और गांवों की प्रार्थिक विषमताओंों में कमी, श्रावश्यक वस्तुओं का विशाल पैमाने पर उत्पादन, दस हजार वार्षिक श्रामदनी पर प्राय कर की छूट, ढाई एकड तक की जीत पर लगान माफ, जल तथा ऊर्जा के प्रसंग में राष्ट्रव्यापी नीति तथा वातावरण को रखने का कार्यक्रम । सामाजिक क्षेत्र में जनता पार्टी के चुनाव घोषणा पत्र की मुख्य बातें थींशिक्षा में सुधार और बारह वर्ष के भीतर सभी बच्चों को माध्यमिक निरक्षरता की समाप्ति, सभी के लिए पीने योग्य पानी की व्यवस्था, राष्ट्रव्यापी स्वास्थ्य व्यवस्था और स्वास्थ्य सम्बन्धी बीमा, ग्राम विकास का नया श्रान्दोलन, कम मूल्य के मकान और सार्वजनिक प्रावास व्यवस्था, शहरीकरण के सम्बन्ध में एक नई नीति, सामाजिक न्याय की एक व्यापक योजना, बिना जोर-जबरदस्ती के परिवार नियोजन, औरतों के अधिकारों तथा युवकी के लिए कल्याण कार्यक्रम, गरीबो के लिए कानूनी सहायता और कम खर्चीली न्याय व्यवस्था, जनता की पहल और स्वयमेवी प्रवृत्ति का विकास । जनता पार्टी ने अपने चुनावी वायदों के अनुरूप आपात स्थिति को समाप्त किया, नागरिक स्वतन्त्रताओ को बहाल किया, 42वें संविधान संशोधन के आपत्तिजनक प्रावधानों को सुधारा, पत्र-पत्रिकाओ से सेन्सर हटा दिया और कुछ अन्य महत्त्वपूर्ण कदम उठाए । लेकिन धीरे-धीरे जनता पार्टी का आन्तरिक घटकवाद जोर पकड़ता गया और यह राजनीतिक, आर्थिक एवं सामाजिक कार्यक्रमो पर अपनी पकड खोने लगी । जनता पार्टी का विग्रह उसे विघटन की दिशा में खीचता गया और फलस्वरूप जुलाई, 1979 मे यह पार्टी विभाजित हो गई और सत्ता से हाथ धो बैठी । जनता पार्टी का विभाजन और जनवरी, 1980 के मध्यावधि चुनावों के सम्बन्ध में चुनाव घोषणा-पत्र जनता पार्टी निरन्तर आपसी फूट की शिकार रही। चौधरी चरण सिंह तथा मोरारजी देसाई मे कभी बन नहीं सकी । चरणसिंह केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल से हटे और में पुनः शामिल हुए और प्रधान मन्त्री की कुर्सी के लिए लड़ाई चलती रही। 11 मार्च, 1979 को श्री राजनारायण ने सकेत दिया कि वे समानान्तर जनता पार्टी बनाएंगे। मई मे जनता पार्टी को अनुशासन समिति ने राजनारायण को पार्टी की कार्य समिति से बरखास्त कर दिया । 23 जून को राजनारायण ने जनता पार्टी छोड़ दी और 9 जुलाई को कुछ सदस्यों के साथ जनता (सेक्यूलर) का गठन किया । उसके बाद तीन दिनों में ही सत्तर से अधिक संसद् सदस्यों ने जनता पार्टी
पाँच सौ बारह भारतीय राजनीतिक व्यवस्था आर्थिक क्षेत्र में जनता पार्टी ने तेरह सूत्री कार्यक्रम की घोषणा की, जिसकी मुख्य बातें ये थी -व्यक्तिगत सम्पत्ति के मौलिक अधिकार का अन्त और काम के अधिकार का समर्थन, कृषि तथा कुटीर एवं छोटे उद्योगों को प्राथमिकता, गांधीवादी आस्था के अनुसार अर्थ-व्यवस्था का विकेन्द्रीकरण, ऐसी प्रार्थिक नीति और श्रायोजन को अपनाना कि सभी व्यक्तियों को पूर्ण रोजगार की प्राप्ति हो, उत्पादकता के अनुपात में मजदूर को लाभ, न्यूनतम श्राय में वृद्धि, दम साल में गरीबी की समाप्ति, शहर और गांवों की प्रार्थिक विषमताओंों में कमी, श्रावश्यक वस्तुओं का विशाल पैमाने पर उत्पादन, दस हजार वार्षिक श्रामदनी पर प्राय कर की छूट, ढाई एकड तक की जीत पर लगान माफ, जल तथा ऊर्जा के प्रसंग में राष्ट्रव्यापी नीति तथा वातावरण को रखने का कार्यक्रम । सामाजिक क्षेत्र में जनता पार्टी के चुनाव घोषणा पत्र की मुख्य बातें थींशिक्षा में सुधार और बारह वर्ष के भीतर सभी बच्चों को माध्यमिक निरक्षरता की समाप्ति, सभी के लिए पीने योग्य पानी की व्यवस्था, राष्ट्रव्यापी स्वास्थ्य व्यवस्था और स्वास्थ्य सम्बन्धी बीमा, ग्राम विकास का नया श्रान्दोलन, कम मूल्य के मकान और सार्वजनिक प्रावास व्यवस्था, शहरीकरण के सम्बन्ध में एक नई नीति, सामाजिक न्याय की एक व्यापक योजना, बिना जोर-जबरदस्ती के परिवार नियोजन, औरतों के अधिकारों तथा युवकी के लिए कल्याण कार्यक्रम, गरीबो के लिए कानूनी सहायता और कम खर्चीली न्याय व्यवस्था, जनता की पहल और स्वयमेवी प्रवृत्ति का विकास । जनता पार्टी ने अपने चुनावी वायदों के अनुरूप आपात स्थिति को समाप्त किया, नागरिक स्वतन्त्रताओ को बहाल किया, बयालीसवें संविधान संशोधन के आपत्तिजनक प्रावधानों को सुधारा, पत्र-पत्रिकाओ से सेन्सर हटा दिया और कुछ अन्य महत्त्वपूर्ण कदम उठाए । लेकिन धीरे-धीरे जनता पार्टी का आन्तरिक घटकवाद जोर पकड़ता गया और यह राजनीतिक, आर्थिक एवं सामाजिक कार्यक्रमो पर अपनी पकड खोने लगी । जनता पार्टी का विग्रह उसे विघटन की दिशा में खीचता गया और फलस्वरूप जुलाई, एक हज़ार नौ सौ उन्यासी मे यह पार्टी विभाजित हो गई और सत्ता से हाथ धो बैठी । जनता पार्टी का विभाजन और जनवरी, एक हज़ार नौ सौ अस्सी के मध्यावधि चुनावों के सम्बन्ध में चुनाव घोषणा-पत्र जनता पार्टी निरन्तर आपसी फूट की शिकार रही। चौधरी चरण सिंह तथा मोरारजी देसाई मे कभी बन नहीं सकी । चरणसिंह केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल से हटे और में पुनः शामिल हुए और प्रधान मन्त्री की कुर्सी के लिए लड़ाई चलती रही। ग्यारह मार्च, एक हज़ार नौ सौ उन्यासी को श्री राजनारायण ने सकेत दिया कि वे समानान्तर जनता पार्टी बनाएंगे। मई मे जनता पार्टी को अनुशासन समिति ने राजनारायण को पार्टी की कार्य समिति से बरखास्त कर दिया । तेईस जून को राजनारायण ने जनता पार्टी छोड़ दी और नौ जुलाई को कुछ सदस्यों के साथ जनता का गठन किया । उसके बाद तीन दिनों में ही सत्तर से अधिक संसद् सदस्यों ने जनता पार्टी
सोने की लंका के बारे में तो आपने पढ़ा, सुना और टीवी सीरियल्स में देखा होगा। आज हम आपको दिखाने जा रहे हैं सोने की अयोध्या। ये सोने की अयोध्या है, राजस्थान के अजमेर में। यहां सोने की अयोध्या के साथ, कैलाश पर्वत की झांकी, भगवान ऋषभदेव के जीवन के सोने से बने पांच चरण (पंच कल्याणक) भी हैं। सोनी जी की नसियां के ट्रस्टी प्रमोद सोनी ने बताया- 130 साल पहले सेठ मूलचंद नेमीचंद सोनी ने सोनी जी की नसियां का निर्माण शुरू कराया। बेटे सेठ भागचंद सोनी ने इसका निर्माण पूरा करवाया। इस नसियां के अंदर सोने की अयोध्या रखी गई है। नसियां का निर्माण 10 अक्टूबर 1864 में प्रारंभ हुआ था। जो 1865 में पूरा हुआ। सन् 1895 में सोने की अयोध्या का निर्माण शुरू किया गया। इसे बनने में 25 साल लगे थे। इसका निर्माण जयपुर में किया गया था। काम पूरा होने पर सन् 1895 में जयपुर में दस दिन तक विशाल मेला लगा। तत्कालीन जयपुर महाराजा माधोसिंह भी इसमें शामिल हुए। इसे कुछ दिन जयपुर के अलबर्ट हॉल में रखा गया। इसके बाद सोने की अयोध्या को अजमेर में बनी सोनी जी की नसियां में रखा गया। सन् 1953 में सोनी जी की नसियां में मान स्तंभ का निर्माण किया गया। नगरी में भगवान ऋषभदेव के पंच कल्याणक को भी दिखाया गया है, जो आचार्य जिनसेन द्वारा रचित आदिपुराण पर आधारित है। सोने की अयोध्या को सही ढंग से दिखाने के लिए सोनजी की नसियां में 24. 3 मीटर x 12. 2 मीटर का खास हॉल बनाया गया। यह कांच और लाल पत्थर की दीवार से बना है। लोग कांच की खिड़की की मदद से इस सोने की नगरी को देख सकते हैं। यह बहुत कम प्रवेश शुल्क पर पूरे साल हर दिन सभी धर्मों के लोगों के लिए खुला रहता है। नसियां को दो भागों में विभाजित किया गया है। मंदिर का एक हिस्सा पूजा क्षेत्र है। इसमें भगवान आदिनाथ या ऋषभदेव की मूर्ति स्थापित है, जबकि दूसरे हिस्से में एक संग्रहालय और हॉल शामिल है। संग्रहालय के इंटीरियर में भगवान आदिनाथ के जीवन के पांच चरणों (पंच कल्याणक) को दर्शाया गया है। इस ऐतिहासिक नसियां में प्रवेश करते ही सबसे पहले 82 फीट ऊंचे मान स्तम्भ के दर्शन होते हैं। सन् 1953 में बड़े समारोह के साथ इसकी प्रतिष्ठा व प्रतिमा स्थापना की गई थी। दस दिन तक बड़ा उत्सव हुआ। इसमें सोनी परिवार के साथ अन्य हजारों भक्तों ने भाग लिया। सारे मंदिर की सजावट दीपों द्वारा की गई। सोनी जी की नसियां के ट्रस्टी प्रमोद सोनी ने बताया- सोने से बने पंच कल्याणक की स्थापना 1895 में की गई थी। इनमें से दो पंचकल्याणक को कभी आम लोगों के लिए ओपन नहीं किया गया था। 27 मार्च से इसका लोकार्पण कर सभी पंच कल्याणक को आम लोगों के दर्शन के लिए खोल दिया गया। इसमें कुल मिलाकर छोटी-बड़ी करीब 1200 से 1500 अलग अलग झांकियां हैं। सोनी जी की नसियां को संभालने वाले भोजराज जोशी ने बताया- यहां बनी अयोध्या नगरी में राजा के महल, जैन मंदिर, सेना, रथ, हाथी-घोडे़, नदियां, सड़कें, चारदीवारी, आम जनता, मकान आदि हैं। सोने की अयोध्या में पांच झांकियां हैं, जिन्हें पंचकल्याणक कहा जाता है। अयोध्या के अलावा नीचे की तरफ कैलाश पर्वत, जहां 72 जिनालय बने हैं। इसी प्रकार हस्तिनापुर, जिसमें भगवान के आहार को दर्शाया है। यहां पर ही एक हिस्से में स्वर्णिम रथ व हाथी घोडे़ भी हैं। पूरा क्षेत्र करीब चार बीघा यानी 7000 वर्ग गज एरिया है। सालाना करीब चालीस से पचास हजार मेहमान आते हैं, जिसमें देशी ही नहीं बल्कि विदेशी भी शामिल है। अयोध्या समेत सभी झांकियां तांबे से बनाकर सोने की परत चढ़ाई गई है। भोजराज जोशी ने बताया- सोनी जी की नसियां में ठीकरी ग्लास लगे हैं, जो बहुत महंगे होते हैं। देश में केवल गुजरात में एक ही फैक्ट्री है, जहां ग्लास हाथ से बनता है। इससे लाइटिंग आकर्षक हो जाती है। गर्भ कल्याणक- माता मरुदेवी ने रात में 16 स्वप्न देखे थे, जिसके अनुसार तीर्थंकर का अवतरण अयोध्या में हुआ। इसमें देवविमान और माता के स्वप्न दिखाए गए हैं। जन्म कल्याणक- ऋषभदेव के जन्म पर इंद्र के आसन कांपने लगा। ऐरावत हाथी पर बालक ऋषभदेव को सुमेरू पर्वत ले जाने, पांडुकशिला पर अभिषेक और देवों की शोभायात्रा को दिखाया है। तप कल्याणक- महाराज ऋषभदेव के दरबार में अप्सरा नीलांजना का नृत्य, ऋषभदेव के संसार त्याग कर दिगम्बर मुनि बनने और केशलोचन को दिखाया गया है। केवलज्ञान कल्याणक- हजार वर्ष की तपस्या में लीन ऋषभदेव, कैलाश पर्वत पर केवल ज्ञान प्राप्ति, राजा श्रेयांस द्वारा मुनि ऋषभदेव को प्रथम आहार को दिखाया गया है। मोक्ष कल्याणक- भगवान ऋषभदेव का कैलाश पर्वत से निर्वाण का स्वर्ण कमल दृश्य, पुत्र भरत द्वारा 72 स्वर्णिम मंदिर को दर्शाया गया है। प्रतिदिन सुबह 8. 30 बजे से 4. 30 बजे तक पर्यटकों के लिए खुला होता है। मुख्य मंदिर के प्रांगण में तीन वेदियां हैं। इसमें तीर्थंकरों की प्रतिमाएं विराजमान हैं। मध्य वेदी में भगवान ऋषभदेव की विशाल प्रतिमा है। यह भगवान के समवशरण का दिग्दर्शन है। इस अवस्था में भगवान संसार के दुखी जीवों के लिये जन्म-मृत्यु के नाश करने वाले सच्चे धर्म का उपदेश देते हैं। इस भाग में केवल जैनियों को धार्मिक आराधना संपन्न करने की अनुमति है। प्रमोद सोनी ने बताया- संग्रहालय के अलग भाग में 12वीं शताब्दी की खंडित जैन मूर्तियां भी स्थापित हैं। इन्हें अजमेर के ही अढ़ाई दिन का झोपड़ा से लाया गया था। करीब महीना भर पहले ही टूरिस्ट के लिए नसियां में इसकी अलग से एग्जीबिशन लगाई गई है। सोनी जी की नसियां घूमने आईं भोपाल निवासी रजनी जैन ने बताया- हमने अजमेर की सोने जी की नसियां के बारे में बहुत सुना था। एक बार दर्शन करने की इच्छा थी, महावीर जयंती पर मौका मिला। यहां आकर अच्छा लगा। सुन्दर रथ भी देखा। भोपाल से परिवार के साथ आईं अदिती जैन ने बताया- यहां दर्शन कर अच्छा लगा। इतना सोना पहली बार देखा। भगवान ऋषभदेव के जन्म व तप कल्याणक, सुमेरु पर्वत सहित अन्य के बारे में पहली बार पता चला। दिल्ली से आए विनोद कुमार ने बताया- यहां प्राचीन धरोहर है। यहां पर जो नक्काशी की गई है, उसे देखकर आश्चर्यचकित रह गया। इसे देखकर लगा कि भारत को सोने की चिड़िया यूं ही नहीं कहा जाता। देश का सबसे बड़ा सोने का रथ भी सोनी जी की नसियां में है। करोड़ों के इस रथ को साल में एक बार महावीर जयंती पर निकाला जाता है। करीब डेढ़ सौ साल पहले इसे दिल्ली के कारीगरों ने बनाया था। 51 पार्ट्स में बंटे इस रथ को महावीर जयंती से एक-दो दिन पहले असेंबल किया जाता है। (ड्रोन सहयोग- अक्षत सिंह चौधरी) कोटा में चंबल रिवर फ्रंट पर एक अलग दुनिया बसाई जा रही है। दावा किया जा रहा है कि यहां लग रहे स्टैच्यू व दूसरे मॉन्यूमेंट ऐसे है जो अब तक दुनिया में और कहीं नहीं हैं। इस रिवर फ्रंट में डेवलप किए गए नए घाट से लेकर हैरत में डालने वाली योगीराज की स्टैच्यू तक को देखने की लोगों में काफी उत्सुकता है। करीब तीन साल से डेवलप हो रहे इस चंबल रिवर फ्रंट को अगले महीने आम लोगों को लिए खोला जा सकता है। (पूरी खबर पढ़ें) This website follows the DNPA Code of Ethics.
सोने की लंका के बारे में तो आपने पढ़ा, सुना और टीवी सीरियल्स में देखा होगा। आज हम आपको दिखाने जा रहे हैं सोने की अयोध्या। ये सोने की अयोध्या है, राजस्थान के अजमेर में। यहां सोने की अयोध्या के साथ, कैलाश पर्वत की झांकी, भगवान ऋषभदेव के जीवन के सोने से बने पांच चरण भी हैं। सोनी जी की नसियां के ट्रस्टी प्रमोद सोनी ने बताया- एक सौ तीस साल पहले सेठ मूलचंद नेमीचंद सोनी ने सोनी जी की नसियां का निर्माण शुरू कराया। बेटे सेठ भागचंद सोनी ने इसका निर्माण पूरा करवाया। इस नसियां के अंदर सोने की अयोध्या रखी गई है। नसियां का निर्माण दस अक्टूबर एक हज़ार आठ सौ चौंसठ में प्रारंभ हुआ था। जो एक हज़ार आठ सौ पैंसठ में पूरा हुआ। सन् एक हज़ार आठ सौ पचानवे में सोने की अयोध्या का निर्माण शुरू किया गया। इसे बनने में पच्चीस साल लगे थे। इसका निर्माण जयपुर में किया गया था। काम पूरा होने पर सन् एक हज़ार आठ सौ पचानवे में जयपुर में दस दिन तक विशाल मेला लगा। तत्कालीन जयपुर महाराजा माधोसिंह भी इसमें शामिल हुए। इसे कुछ दिन जयपुर के अलबर्ट हॉल में रखा गया। इसके बाद सोने की अयोध्या को अजमेर में बनी सोनी जी की नसियां में रखा गया। सन् एक हज़ार नौ सौ तिरेपन में सोनी जी की नसियां में मान स्तंभ का निर्माण किया गया। नगरी में भगवान ऋषभदेव के पंच कल्याणक को भी दिखाया गया है, जो आचार्य जिनसेन द्वारा रचित आदिपुराण पर आधारित है। सोने की अयोध्या को सही ढंग से दिखाने के लिए सोनजी की नसियां में चौबीस. तीन मीटर x बारह. दो मीटर का खास हॉल बनाया गया। यह कांच और लाल पत्थर की दीवार से बना है। लोग कांच की खिड़की की मदद से इस सोने की नगरी को देख सकते हैं। यह बहुत कम प्रवेश शुल्क पर पूरे साल हर दिन सभी धर्मों के लोगों के लिए खुला रहता है। नसियां को दो भागों में विभाजित किया गया है। मंदिर का एक हिस्सा पूजा क्षेत्र है। इसमें भगवान आदिनाथ या ऋषभदेव की मूर्ति स्थापित है, जबकि दूसरे हिस्से में एक संग्रहालय और हॉल शामिल है। संग्रहालय के इंटीरियर में भगवान आदिनाथ के जीवन के पांच चरणों को दर्शाया गया है। इस ऐतिहासिक नसियां में प्रवेश करते ही सबसे पहले बयासी फीट ऊंचे मान स्तम्भ के दर्शन होते हैं। सन् एक हज़ार नौ सौ तिरेपन में बड़े समारोह के साथ इसकी प्रतिष्ठा व प्रतिमा स्थापना की गई थी। दस दिन तक बड़ा उत्सव हुआ। इसमें सोनी परिवार के साथ अन्य हजारों भक्तों ने भाग लिया। सारे मंदिर की सजावट दीपों द्वारा की गई। सोनी जी की नसियां के ट्रस्टी प्रमोद सोनी ने बताया- सोने से बने पंच कल्याणक की स्थापना एक हज़ार आठ सौ पचानवे में की गई थी। इनमें से दो पंचकल्याणक को कभी आम लोगों के लिए ओपन नहीं किया गया था। सत्ताईस मार्च से इसका लोकार्पण कर सभी पंच कल्याणक को आम लोगों के दर्शन के लिए खोल दिया गया। इसमें कुल मिलाकर छोटी-बड़ी करीब एक हज़ार दो सौ से एक हज़ार पाँच सौ अलग अलग झांकियां हैं। सोनी जी की नसियां को संभालने वाले भोजराज जोशी ने बताया- यहां बनी अयोध्या नगरी में राजा के महल, जैन मंदिर, सेना, रथ, हाथी-घोडे़, नदियां, सड़कें, चारदीवारी, आम जनता, मकान आदि हैं। सोने की अयोध्या में पांच झांकियां हैं, जिन्हें पंचकल्याणक कहा जाता है। अयोध्या के अलावा नीचे की तरफ कैलाश पर्वत, जहां बहत्तर जिनालय बने हैं। इसी प्रकार हस्तिनापुर, जिसमें भगवान के आहार को दर्शाया है। यहां पर ही एक हिस्से में स्वर्णिम रथ व हाथी घोडे़ भी हैं। पूरा क्षेत्र करीब चार बीघा यानी सात हज़ार वर्ग गज एरिया है। सालाना करीब चालीस से पचास हजार मेहमान आते हैं, जिसमें देशी ही नहीं बल्कि विदेशी भी शामिल है। अयोध्या समेत सभी झांकियां तांबे से बनाकर सोने की परत चढ़ाई गई है। भोजराज जोशी ने बताया- सोनी जी की नसियां में ठीकरी ग्लास लगे हैं, जो बहुत महंगे होते हैं। देश में केवल गुजरात में एक ही फैक्ट्री है, जहां ग्लास हाथ से बनता है। इससे लाइटिंग आकर्षक हो जाती है। गर्भ कल्याणक- माता मरुदेवी ने रात में सोलह स्वप्न देखे थे, जिसके अनुसार तीर्थंकर का अवतरण अयोध्या में हुआ। इसमें देवविमान और माता के स्वप्न दिखाए गए हैं। जन्म कल्याणक- ऋषभदेव के जन्म पर इंद्र के आसन कांपने लगा। ऐरावत हाथी पर बालक ऋषभदेव को सुमेरू पर्वत ले जाने, पांडुकशिला पर अभिषेक और देवों की शोभायात्रा को दिखाया है। तप कल्याणक- महाराज ऋषभदेव के दरबार में अप्सरा नीलांजना का नृत्य, ऋषभदेव के संसार त्याग कर दिगम्बर मुनि बनने और केशलोचन को दिखाया गया है। केवलज्ञान कल्याणक- हजार वर्ष की तपस्या में लीन ऋषभदेव, कैलाश पर्वत पर केवल ज्ञान प्राप्ति, राजा श्रेयांस द्वारा मुनि ऋषभदेव को प्रथम आहार को दिखाया गया है। मोक्ष कल्याणक- भगवान ऋषभदेव का कैलाश पर्वत से निर्वाण का स्वर्ण कमल दृश्य, पुत्र भरत द्वारा बहत्तर स्वर्णिम मंदिर को दर्शाया गया है। प्रतिदिन सुबह आठ. तीस बजे से चार. तीस बजे तक पर्यटकों के लिए खुला होता है। मुख्य मंदिर के प्रांगण में तीन वेदियां हैं। इसमें तीर्थंकरों की प्रतिमाएं विराजमान हैं। मध्य वेदी में भगवान ऋषभदेव की विशाल प्रतिमा है। यह भगवान के समवशरण का दिग्दर्शन है। इस अवस्था में भगवान संसार के दुखी जीवों के लिये जन्म-मृत्यु के नाश करने वाले सच्चे धर्म का उपदेश देते हैं। इस भाग में केवल जैनियों को धार्मिक आराधना संपन्न करने की अनुमति है। प्रमोद सोनी ने बताया- संग्रहालय के अलग भाग में बारहवीं शताब्दी की खंडित जैन मूर्तियां भी स्थापित हैं। इन्हें अजमेर के ही अढ़ाई दिन का झोपड़ा से लाया गया था। करीब महीना भर पहले ही टूरिस्ट के लिए नसियां में इसकी अलग से एग्जीबिशन लगाई गई है। सोनी जी की नसियां घूमने आईं भोपाल निवासी रजनी जैन ने बताया- हमने अजमेर की सोने जी की नसियां के बारे में बहुत सुना था। एक बार दर्शन करने की इच्छा थी, महावीर जयंती पर मौका मिला। यहां आकर अच्छा लगा। सुन्दर रथ भी देखा। भोपाल से परिवार के साथ आईं अदिती जैन ने बताया- यहां दर्शन कर अच्छा लगा। इतना सोना पहली बार देखा। भगवान ऋषभदेव के जन्म व तप कल्याणक, सुमेरु पर्वत सहित अन्य के बारे में पहली बार पता चला। दिल्ली से आए विनोद कुमार ने बताया- यहां प्राचीन धरोहर है। यहां पर जो नक्काशी की गई है, उसे देखकर आश्चर्यचकित रह गया। इसे देखकर लगा कि भारत को सोने की चिड़िया यूं ही नहीं कहा जाता। देश का सबसे बड़ा सोने का रथ भी सोनी जी की नसियां में है। करोड़ों के इस रथ को साल में एक बार महावीर जयंती पर निकाला जाता है। करीब डेढ़ सौ साल पहले इसे दिल्ली के कारीगरों ने बनाया था। इक्यावन पार्ट्स में बंटे इस रथ को महावीर जयंती से एक-दो दिन पहले असेंबल किया जाता है। कोटा में चंबल रिवर फ्रंट पर एक अलग दुनिया बसाई जा रही है। दावा किया जा रहा है कि यहां लग रहे स्टैच्यू व दूसरे मॉन्यूमेंट ऐसे है जो अब तक दुनिया में और कहीं नहीं हैं। इस रिवर फ्रंट में डेवलप किए गए नए घाट से लेकर हैरत में डालने वाली योगीराज की स्टैच्यू तक को देखने की लोगों में काफी उत्सुकता है। करीब तीन साल से डेवलप हो रहे इस चंबल रिवर फ्रंट को अगले महीने आम लोगों को लिए खोला जा सकता है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
उसका कवच और मजबूत था। उसका कवच और मजबूत था। वर्ष के अंत में, मैं जहाज के कवच पर चर्चा के पूर्वव्यापी साथ जनता को खुश करना चाहता था। कुछ समय पहले, विषय एक बड़ी सफलता थी। ब्याज आकस्मिक नहीं थाः विवादों के दौरान, जहाजों के आयुध, डिजाइन और लेआउट से संबंधित कई पहलुओं को छुआ गया था। नए आगंतुकों को यह जानने में भी रुचि हो सकती है कि "वीओ" के पन्नों पर भाले इतने हिंसक तरीके से टूटे। मैं अलमारियों पर थीस को विघटित करने की कोशिश करूंगा। पी। 1। दुश्मन के लिए कोई अतिरिक्त बाधा - यह जीवित रहने का एक मौका है। और आपको इस अवसर की उपेक्षा करने के लिए बहुत भोला और तकनीकी रूप से निरक्षर होना होगा। यहां एक विवरण दिया गया है जिस पर ध्यान नहीं दिया गया है। फिर से करीब से देखें। मिलते हैं विध्वंसक बोर्ड का ऊपरी हिस्सा (प्यास) उच्च गुणवत्ता वाले स्टील HY-80 से बना है जिसमें प्रति वर्ग मीटर 80 हजार फीट की ताकत है। इंच (550 MPa)। नीचे - सस्ते संरचनात्मक स्टील, जो विस्फोट की लहर से कतरे गए थे। सीमा वेल्ड से गुजरती है। यह कोई संयोग नहीं है कि एक नए प्रकार के विध्वंसक ("ज़मोल्ट") का निर्माण करते समय, इसकी पतवार पूरी तरह से उच्च शक्ति वाले स्टील ग्रेड एचएसएलए-एक्सएनयूएमएक्स से बनी थी। पर्याप्त समझाने? केवल इस तरह के एक महत्वहीन विस्तार, त्वचा की ताकत में वृद्धि के रूप में, एक स्पष्ट तरीके से अनुमति देता है नुकसान कम करें. की इतिहास नौसेना लड़ाईः क्रूजर "यॉर्क", 1941 पर हमला। फ्रीबोर्ड पर एक खदान को कम करने के बजाय, इटालियंस ने एक "चालाक योजना" विकसित की जिसमें एक खुली हुई नाव और डूबने वाला चार्ज था जो 8 मीटर की गहराई पर काम करता था। प्रिंस बोरगेज के सेनानियों ने समझा कि संरक्षित पक्ष के क्षेत्र में विस्फोट अप्रभावी है। पी। 2। आधुनिक परिस्थितियों में कवच के उपयोगी गुण। 2. 1। मलबे से सुरक्षा की गारंटी मिसाइलों को मार गिराया। लक्ष्य (PKR नकल करने वालों) का प्रशिक्षण अवरोधन हमेशा वास्तविकता से दूर की स्थितियों में किया जाता है। इंटरसेप्शन समानांतर पाठ्यक्रमों पर किया जाता है ताकि मलबे जहाज को "हुक" न करें। अन्यथा - अपरिहार्य तबाही। यहां तक कि अगर स्वचालित एंटी-एयरक्राफ्ट गन ("मेटल कटर") को जहाज-रोधी मिसाइलों द्वारा नीचे गिराया जाता है, तो रॉकेट का मलबा पानी से दूर होगा और लक्ष्य तक पहुंच जाएगा। वास्तविक घटनाओं के क्रम में जाँच की गईः मलबे के लक्ष्यों ने एंट्रिम और स्टोडर्ड युद्धपोतों पर हमला किया। अभ्यास से पता चलता हैः यदि मलबे को रोकने की कोई संभावना नहीं है, तो निकट क्षेत्र में अवरोधन बेकार है। सबसे ज्यादा संरक्षण का यथार्थवादी और विश्वसनीय साधन इस तरह के खतरे से रचनात्मक संरक्षण होता है। 2. 2। नाटो देशों के सभी प्रकार के आधुनिक एंटी-शिप मिसाइलों के खिलाफ कवच सुरक्षा (खतरे को पूर्ण स्तर तक) प्रदान करता है। "हार्पून", "एक्सोसेट", एनएसएम, इतालवी "ओटोटोमा", स्वीडिश आरबीएस, जापानी "टाइप एक्सएनयूएमएक्स" - एंटी-शिप के सभी विश्व शेयरों का मूल्यह्रास हथियारों. अपेक्षाकृत छोटी मोटाई के साथ, विभेदित संरक्षण (50-100 मिमी) एक विस्फोटक उपकरण से बचाने में सक्षम है जिसमें दसियों और यहां तक कि सैकड़ों किलो विस्फोटक भी हैं। विध्वंसक "कोल" के मामले में त्वचा की ताकत में दोगुनी वृद्धि के साथ क्षति में तेज कमी दिखाई देती है। दूसरे मामले ("यॉर्क") में, हमने इस तरह के हमले की स्पष्ट निरर्थकता के कारण कवच बेल्ट के क्षेत्र में विस्फोट से इनकार किया। 50 . . . 150 किलो विस्फोटक अधिकांश एंटी-शिप मिसाइलों के वारहेड के बराबर है। आप निश्चित रूप से रॉकेट की गति के बारे में याद दिलाते हैं, जो ध्वनि की गति के करीब है। इसका उत्तर सरल हैः यांत्रिक शक्ति के बिना गति का मतलब कुछ भी नहीं है। कवच में प्रक्षेप्य को मारने के परिणाम अच्छी तरह से ज्ञात हैं। दुर्भाग्य से, विमान (हवाई जहाज, रॉकेट) के कवच के साथ टकराव के मामलों का व्यावहारिक रूप से कोई विश्वसनीय विवरण नहीं है। मैं केवल एक ही मामले को खोजने में कामयाब रहा, कैमरे पर फिल्माया गया। मोटाई 114 मिमी के साथ एचएमएस ससेक्स क्रूजर कवच में कामिकेज़ हड़ताल। असफल हमलाः पेंट खरोंच है। वही उम्मीद करता है कि क्रुप्पोव के सीमेंटेड कवच के साथ मिलने पर "हार्पून": प्लास्टिक एंटी-शिप मिसाइलें ढह जाएंगी। वारहेड का विस्फोट बोर्ड के बाहर होगा, आंतरिक डिब्बों के लिए कोई ध्यान देने योग्य परिणाम नहीं होगा। अन्य परिदृश्य संभव हैं। वास्तव में, जहाज-रोधी मिसाइलों को कवच प्लेटों पर कभी नहीं उड़ाया गया था, लेकिन नौसैनिक युद्ध के इतिहास से उदाहरणों के आधार पर दो धारणाएं बनाई जा सकती हैंः - कवच के साथ बैठक के तेज कोनों पर रिबाउंडिंग की संभावना है; - एंटी-शिप मिसाइल के वार को फ्यूज ट्रिगर करने के लिए अपर्याप्त समय में नष्ट किया जा सकता है। 2. 3 विदेशी भारी एंटी-शिप मिसाइलों ("ब्रह्मोस"), रचनात्मक सुरक्षा, एक तरह से या किसी अन्य के साथ एक बैठक में क्षति के स्थानीयकरण में योगदान देगा। इसी समय, गति और वारहेड (यानी, मिसाइलों का प्रक्षेपण द्रव्यमान) में वृद्धि संभावित वाहकों की संख्या और सैल्वो में एंटी-शिप मिसाइलों की संख्या को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है, जो निस्संदेह जहाज के विमान-रोधी हथियारों के संचालन की सुविधा प्रदान करती है। कवच की स्थापना से एक और निर्विवाद लाभ। मेरी राय में, पर्याप्त रूप से मजबूत आधार यहां प्रस्तुत किया गया था (मिसाइल मलबे का मुकाबला करना, मौजूदा आरसीसी शस्त्रागार का अवमूल्यन करना) ताकि 21 वीं शताब्दी में रचनात्मक सुरक्षा वापस करने के सवाल को जीवन का अधिकार दिया जाए। एंटीना उपकरणों को नुकसान संरक्षित और असुरक्षित जहाजों दोनों के लिए समान रूप से दर्दनाक है। लेकिन, आप देखते हैं, यह होगा पहले टुकड़े के साथ राडार को मुश्किल से खरोंचने की कीमत पर एक क्रूजर को लिखना अजीब है। केवल एक ही गोला-बारूद क्रूजर Ticonderoga की लागत एक बिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। इसलिए, क्षतिग्रस्त जहाज को आधार तक पहुंचने की सिफारिश की जाती है। 200-300 चालक दल के सदस्यों के जीवन का उल्लेख नहीं करना। उनमें से अपने बेटे, और रचनात्मक सुरक्षा के लाभ से इनकार करने वाले संदेहियों की संख्या तुरंत कम हो जाएगी। टूटे हुए राडार के साथ भी आधुनिक जहाज दुश्मन के लिए खतरा है। पनडुब्बियों से लड़ना, बाहरी लक्ष्य पदनाम पर शूटिंग। तकनीकी क्षमताएं आपको अंतिम से लड़ने की अनुमति देती हैं। मुख्य बात - पहली फट मिसाइलों से जला नहीं। पी। 3। संरचनात्मक सुरक्षा कवच डेक, बेवेल, आंतरिक स्प्लिन्टर बुलखेड और अन्य सुरक्षात्मक तत्वों की एक प्रणाली है। जिसका आकार निरंतर परिवर्तन के अधीन है। प्रत्येक युग में, डिजाइनरों ने सुरक्षा के तरीकों के दृष्टिकोणों और पदों, डिब्बों और तंत्र की युद्ध स्थिरता को सुनिश्चित करने में अंतर का प्रदर्शन किया। इतिहास बहुत सारी दिलचस्प अवधारणाओं को जानता था, उदाहरण के लिए, "डुप्यु डी लोम"। ठोस फ्रीबोर्ड सुरक्षा के साथ फ्रांसीसी क्रूजरः कवच की मोटाई 100 मिमी से वॉटरलाइन से ऊपरी डेक तक! अपने युग के सर्वश्रेष्ठ क्रूजर "डे लोमा" का अस्तित्व, संशयवादी राय से इनकार करता है कि कवच बेल्ट जल क्षेत्र में एक संकीर्ण "पट्टी" के रूप में है। और पूरे बोर्ड की सुरक्षा नहीं कर सकते। एक और महत्वपूर्ण उदाहरणः अमेरिकी क्रूजर "वॉर्सेस्टर", जहां सुरक्षा के खिलाफ प्राथमिकता दी गई थी विमान बम। इसलिए - सबसे शक्तिशाली 90 मिमी बख़्तरबंद डेक, कवच बेल्ट के वजन से अधिक है। पूरी तरह से बख्तरबंद उड़ान डेक (इलियटर्स, मिडवे) के साथ विमान वाहक थे। अंग्रेजों के पास युद्धपोत "मोहरा" था, जहां निर्माण ने दोनों विश्व युद्धों के अनुभव को ध्यान में रखा। पारंपरिक बख़्तरबंद बेल्ट के अलावा, इसके डिजाइनरों ने स्प्लिन्टरप्रूफ बुल्केड्स के एक्सएनयूएमएक्स टन पर स्टेंट नहीं लगाया। हर चीज का अपना उद्देश्य होता है। जहाजों के असली नमूने डिजाइन विचारों की एक अंतहीन उड़ान को प्रदर्शित करते हैं। बस यह मत कहो कि यह असंभव है। मुझे उस शब्द से नफरत है। पी। 4। कवच हथियारों, एंटीना पोस्ट और एक आधुनिक जहाज की प्रणालियों के लिए एक बाधा नहीं है। आप शायद जानना चाहते हैं कि ऐसा आत्मविश्वास कहां से आया। सबसे पहले, कवच अतीत के सभी जहाजों का एक अभिन्न तत्व था। दूसरा, हम मज़बूती से जानते हैंआधुनिक इंजन और आयुध के द्रव्यमान और आयाम अपने पूर्ववर्तियों से काफी कमतर हैं। वे तोपखाने की तुलना में लेआउट पर कम गंभीर प्रतिबंध लगाते हैं और उच्च गति सुनिश्चित करते हैं। आजकल, कोई भी चड्डी ("मृत क्षेत्र" डेक पर, सैकड़ों वर्ग मीटर क्षेत्र में) पलटने की त्रिज्या के लिए कोई महत्व नहीं देता है। कॉम्पैक्ट डीपीएस के युग में, शेलिंग गन के कोण चार्ट की धारणा गायब हो गई, जिसने पहले एक लड़ाकू इकाई के रूप में एक जहाज का मूल्य निर्धारित किया था। और उसका सारा लेआउट पूछा। कोई भी 37 इकाइयों के लिए क्रूजर को तेज करने की कोशिश नहीं कर रहा है, 150 हजार hp की क्षमता वाले दर्जनों बॉयलर और टर्बाइन स्थापित कर रहा है। विरोधाभासी उदाहरणः अपनी शक्ति के अनुसार, जापानी क्रूजर "मोगामी" (1931 वर्ष) परमाणु "ओरलान" से अधिक हो गया! मुख्य कैलिबर "मोगामी" का एक टॉवर "कैलिबर" के लिए एक्सएनयूएमएक्स लांचर की तरह तौला गया। कुल मिलाकर, जापानियों के पास ऐसे पाँच टावर थे। भारी तोपखाने के बावजूद, आकार के बिजली संयंत्र में असंतुष्ट, हजारों लोगों का एक दल और अपूर्ण प्रौद्योगिकी 1930-x। , उस युग के क्रूज़र के पास एक शक्तिशाली कवच खोल था। क्रूजर "मोगामी" अपनी क्रूर विशेषताओं (गति, मारक क्षमता) के साथ 2000 टन कवच ले गया। तो संदेह कहाँ से आता है कि आधुनिक रॉकेट जहाज स्पष्ट रूप से रचनात्मक सुरक्षा करने में असमर्थ हैं? रडार और एनालॉग कंप्यूटर भारी तोपखाने हथियारों और कवच सुरक्षा के साथ एक साथ मौजूद थे। उदाहरण के लिए, "मोगामी" एक उत्कृष्ट रडार आकार के साथ एक मानक रडार सामान्य पहचान "टाइप एक्सएनयूएमएक्स" से सुसज्जित था। अन्य देशों के जहाजों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में और भी अधिक विविधता थीः उदाहरण के लिए, KRL "वॉर्सेस्टर" में 19 रडार, युद्धपोत "मोहरा" - 22 था। "वर्सेस्टर" के बारे में हमें याद है कि व्यर्थ नहीं है। क्रूजर, अन्य चीजों के साथ, परमाणु-सुरक्षा की एक प्रणाली से सुसज्जित था, जो सभी आधुनिक जहाजों के पास है। सूचना, इसके रचनात्मक संरक्षण के लिए पक्षपात के बिना। ये उदाहरण क्या दिखाते हैं? इस तथ्य पर संदेह है कि नए उपकरणों (रडार, कंप्यूटिंग उपकरण, ईएसडी) की उपस्थिति के कारण अंतरिक्ष की कमी से कवच के इनकार की व्याख्या करने का प्रयास असंबद्ध दिखता है। कोशिश करो, किताबः यह कैसे तर्क आमतौर पर शुरू होता है, पीटर द ग्रेट टीकेआर पर सुरक्षा की स्थापना के डिजाइन का वर्णन करने के प्रस्ताव के साथ। ओरलान पर बख्तरबंद बेल्ट लगाने से क्या होगा? सामान्य शब्दों में कहें तो कुछ भी नहीं। भारी क्रूज़रों का पतवार कई मीटर तक पानी में डूब जाएगा, और "पीटर" युद्ध क्रूज़रों के अनुपात को प्राप्त करेगा। कि पर ड्राफ्ट फ्रीबोर्ड की ऊंचाई को पार कर गया। पीटर द ग्रेट का बोर्ड एक्सएनयूएमएक्स मीटर पर पानी से ऊपर उठता है। धनुष में यह और भी अधिक है - वहां से एक कूद पांच मंजिला इमारत की छत से कूद के समान है। इसी समय, इसकी वर्षा का अधिकतम मूल्य "केवल" 11 मीटर है। परमाणु विशाल पानी में टखने की तरह खड़ा है। ऐसे समय में जब अतीत के जहाजों के अधिकांश पतवार पानी के नीचे थे। "ज़मवोल्ट" और एलसी "नेवादा" एक पैमाने पर। एक आधुनिक जहाज, उसी आयाम के साथ, भारी तोपखाने और कवच से वंचित है, और इसलिए एक खाली बॉक्स की तरह सतह पर पत्थर मार रहा है। उस स्तर पर, जहाँ ऊपरी डेक गुज़रती थी और बंदूकों के साथ टावर खड़े होते थे, लंबा विमान अब भी जारी है! उच्च पक्षों के विचार से संशयवादी भयभीत हैं। कितने कवच प्लेटों की आवश्यकता होगी! और यह स्थिरता को कैसे प्रभावित करेगा? हालांकि, सब कुछ बहुत सरल है। रचनात्मक संरक्षण के विषय का जिक्र करते हुए, किसी को मौजूदा उच्च-छाती वाले क्रूजर के लिए केवल कवच प्लेटों को नहीं खुलना चाहिए, बल्कि अतीत के अत्यधिक संरक्षित जहाजों की उपस्थिति को ध्यान में रखते हुए एक अधिक गहन विश्लेषण करना चाहिए। पी। 5। आरक्षण स्थापित करने की लागत। नगण्य। इतने सारे श्रेणीबद्ध कथनों के कारणः 5. 1। हल "अरली बर्क" के निर्माण के लिए धातु की लागत केवल है . . . एजिस विध्वंसक की अंतिम लागत का एक्सएनयूएमएक्स%! उच्च तकनीक वाले हथियारों से जुड़ी मुख्य लागत। 5. 2। बीसवीं शताब्दी के पूर्वार्ध में अत्यधिक संरक्षित जहाज बड़े पैमाने पर बनाए गए थे। तो, 1940-50x के मोड़ पर। सोवियत संघ में, 14 क्रूजर, 68-bis की एक श्रृंखला का निर्माण किया गया था। 21 सदी में, नई धातु प्रौद्योगिकियों की उपस्थिति और श्रम उत्पादकता में वृद्धि के साथ, 100 मिमी धातु प्लेटों का निर्माण वास्तव में अघुलनशील समस्या बन जाएगा। वर्णित उदाहरण एक बात की गवाही देते हैंः 10-15 हजार टन के पूर्ण विस्थापन के साथ एक लड़ाकू जहाज के निर्माण के दौरान अन्य खर्चों की पृष्ठभूमि के खिलाफ कवच तत्वों का परिचय किसी का ध्यान नहीं रहेगा। एक व्यक्ति द्वारा किया गया सब कुछ दूसरे द्वारा तोड़ा जा सकता है। पूरा प्रश्न प्रयास और समय में है। दुश्मन से एक से अधिक हिट का सामना करने के लिए - यह अनमोल है। ऊपर, विचार की प्राप्ति के लिए पर्याप्त कारण दिए गए थेः - बढ़ी हुई लड़ाकू स्थिरता (मलबे से सुरक्षा और मौजूदा जहाज-रोधी मिसाइलों के अधिकांश प्रकार); - तकनीकी व्यवहार्यता (यदि वे पहले कर सकते थे, तो वे कर सकते हैं और अभी)। न्यूनतम लागत पर विभिन्न समस्याओं का समाधान। तथ्य और तर्क। युद्धपोतों के लिए बढ़ती सुरक्षा की पूरी अवधारणा है। जो उन सभी के लिए वास्तविक विस्मय का कारण बनता है जो यह मानने के आदी हैं कि कवच अतीत का अवशेष है, और आधुनिक युद्ध में इसका उपयोग पूरी तरह से बेकार है। संशयवादियों को इस तथ्य से भी शर्मिंदा नहीं किया जाता है कि सुरक्षा बढ़ाने के निरंतर प्रयासों के कारण ग्राउंड कॉम्बैट उपकरण लगातार बड़े पैमाने पर (पहले से ही एक्सएनयूएमएक्स टन तक पहुंच गए) बढ़ रहे हैं। अब मैं आपके प्रश्न और टिप्पणियाँ पूछता हूँ। मैं उन सभी का आभार व्यक्त करता हूं जिन्होंने इस विषय में रुचि दिखाई। कॉमरेड को विशेष बधाई। करस, जिनके विचार कवच चक्र में हर लेख में उपयोग किए जाते हैं। नया साल मुबारक हो, सबको! - लेखकः
उसका कवच और मजबूत था। उसका कवच और मजबूत था। वर्ष के अंत में, मैं जहाज के कवच पर चर्चा के पूर्वव्यापी साथ जनता को खुश करना चाहता था। कुछ समय पहले, विषय एक बड़ी सफलता थी। ब्याज आकस्मिक नहीं थाः विवादों के दौरान, जहाजों के आयुध, डिजाइन और लेआउट से संबंधित कई पहलुओं को छुआ गया था। नए आगंतुकों को यह जानने में भी रुचि हो सकती है कि "वीओ" के पन्नों पर भाले इतने हिंसक तरीके से टूटे। मैं अलमारियों पर थीस को विघटित करने की कोशिश करूंगा। पी। एक। दुश्मन के लिए कोई अतिरिक्त बाधा - यह जीवित रहने का एक मौका है। और आपको इस अवसर की उपेक्षा करने के लिए बहुत भोला और तकनीकी रूप से निरक्षर होना होगा। यहां एक विवरण दिया गया है जिस पर ध्यान नहीं दिया गया है। फिर से करीब से देखें। मिलते हैं विध्वंसक बोर्ड का ऊपरी हिस्सा उच्च गुणवत्ता वाले स्टील HY-अस्सी से बना है जिसमें प्रति वर्ग मीटर अस्सी हजार फीट की ताकत है। इंच । नीचे - सस्ते संरचनात्मक स्टील, जो विस्फोट की लहर से कतरे गए थे। सीमा वेल्ड से गुजरती है। यह कोई संयोग नहीं है कि एक नए प्रकार के विध्वंसक का निर्माण करते समय, इसकी पतवार पूरी तरह से उच्च शक्ति वाले स्टील ग्रेड एचएसएलए-एक्सएनयूएमएक्स से बनी थी। पर्याप्त समझाने? केवल इस तरह के एक महत्वहीन विस्तार, त्वचा की ताकत में वृद्धि के रूप में, एक स्पष्ट तरीके से अनुमति देता है नुकसान कम करें. की इतिहास नौसेना लड़ाईः क्रूजर "यॉर्क", एक हज़ार नौ सौ इकतालीस पर हमला। फ्रीबोर्ड पर एक खदान को कम करने के बजाय, इटालियंस ने एक "चालाक योजना" विकसित की जिसमें एक खुली हुई नाव और डूबने वाला चार्ज था जो आठ मीटर की गहराई पर काम करता था। प्रिंस बोरगेज के सेनानियों ने समझा कि संरक्षित पक्ष के क्षेत्र में विस्फोट अप्रभावी है। पी। दो। आधुनिक परिस्थितियों में कवच के उपयोगी गुण। दो. एक। मलबे से सुरक्षा की गारंटी मिसाइलों को मार गिराया। लक्ष्य का प्रशिक्षण अवरोधन हमेशा वास्तविकता से दूर की स्थितियों में किया जाता है। इंटरसेप्शन समानांतर पाठ्यक्रमों पर किया जाता है ताकि मलबे जहाज को "हुक" न करें। अन्यथा - अपरिहार्य तबाही। यहां तक कि अगर स्वचालित एंटी-एयरक्राफ्ट गन को जहाज-रोधी मिसाइलों द्वारा नीचे गिराया जाता है, तो रॉकेट का मलबा पानी से दूर होगा और लक्ष्य तक पहुंच जाएगा। वास्तविक घटनाओं के क्रम में जाँच की गईः मलबे के लक्ष्यों ने एंट्रिम और स्टोडर्ड युद्धपोतों पर हमला किया। अभ्यास से पता चलता हैः यदि मलबे को रोकने की कोई संभावना नहीं है, तो निकट क्षेत्र में अवरोधन बेकार है। सबसे ज्यादा संरक्षण का यथार्थवादी और विश्वसनीय साधन इस तरह के खतरे से रचनात्मक संरक्षण होता है। दो. दो। नाटो देशों के सभी प्रकार के आधुनिक एंटी-शिप मिसाइलों के खिलाफ कवच सुरक्षा प्रदान करता है। "हार्पून", "एक्सोसेट", एनएसएम, इतालवी "ओटोटोमा", स्वीडिश आरबीएस, जापानी "टाइप एक्सएनयूएमएक्स" - एंटी-शिप के सभी विश्व शेयरों का मूल्यह्रास हथियारों. अपेक्षाकृत छोटी मोटाई के साथ, विभेदित संरक्षण एक विस्फोटक उपकरण से बचाने में सक्षम है जिसमें दसियों और यहां तक कि सैकड़ों किलो विस्फोटक भी हैं। विध्वंसक "कोल" के मामले में त्वचा की ताकत में दोगुनी वृद्धि के साथ क्षति में तेज कमी दिखाई देती है। दूसरे मामले में, हमने इस तरह के हमले की स्पष्ट निरर्थकता के कारण कवच बेल्ट के क्षेत्र में विस्फोट से इनकार किया। पचास . . . एक सौ पचास किलो विस्फोटक अधिकांश एंटी-शिप मिसाइलों के वारहेड के बराबर है। आप निश्चित रूप से रॉकेट की गति के बारे में याद दिलाते हैं, जो ध्वनि की गति के करीब है। इसका उत्तर सरल हैः यांत्रिक शक्ति के बिना गति का मतलब कुछ भी नहीं है। कवच में प्रक्षेप्य को मारने के परिणाम अच्छी तरह से ज्ञात हैं। दुर्भाग्य से, विमान के कवच के साथ टकराव के मामलों का व्यावहारिक रूप से कोई विश्वसनीय विवरण नहीं है। मैं केवल एक ही मामले को खोजने में कामयाब रहा, कैमरे पर फिल्माया गया। मोटाई एक सौ चौदह मिमी के साथ एचएमएस ससेक्स क्रूजर कवच में कामिकेज़ हड़ताल। असफल हमलाः पेंट खरोंच है। वही उम्मीद करता है कि क्रुप्पोव के सीमेंटेड कवच के साथ मिलने पर "हार्पून": प्लास्टिक एंटी-शिप मिसाइलें ढह जाएंगी। वारहेड का विस्फोट बोर्ड के बाहर होगा, आंतरिक डिब्बों के लिए कोई ध्यान देने योग्य परिणाम नहीं होगा। अन्य परिदृश्य संभव हैं। वास्तव में, जहाज-रोधी मिसाइलों को कवच प्लेटों पर कभी नहीं उड़ाया गया था, लेकिन नौसैनिक युद्ध के इतिहास से उदाहरणों के आधार पर दो धारणाएं बनाई जा सकती हैंः - कवच के साथ बैठक के तेज कोनों पर रिबाउंडिंग की संभावना है; - एंटी-शिप मिसाइल के वार को फ्यूज ट्रिगर करने के लिए अपर्याप्त समय में नष्ट किया जा सकता है। दो. तीन विदेशी भारी एंटी-शिप मिसाइलों , रचनात्मक सुरक्षा, एक तरह से या किसी अन्य के साथ एक बैठक में क्षति के स्थानीयकरण में योगदान देगा। इसी समय, गति और वारहेड में वृद्धि संभावित वाहकों की संख्या और सैल्वो में एंटी-शिप मिसाइलों की संख्या को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है, जो निस्संदेह जहाज के विमान-रोधी हथियारों के संचालन की सुविधा प्रदान करती है। कवच की स्थापना से एक और निर्विवाद लाभ। मेरी राय में, पर्याप्त रूप से मजबूत आधार यहां प्रस्तुत किया गया था ताकि इक्कीस वीं शताब्दी में रचनात्मक सुरक्षा वापस करने के सवाल को जीवन का अधिकार दिया जाए। एंटीना उपकरणों को नुकसान संरक्षित और असुरक्षित जहाजों दोनों के लिए समान रूप से दर्दनाक है। लेकिन, आप देखते हैं, यह होगा पहले टुकड़े के साथ राडार को मुश्किल से खरोंचने की कीमत पर एक क्रूजर को लिखना अजीब है। केवल एक ही गोला-बारूद क्रूजर Ticonderoga की लागत एक बिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। इसलिए, क्षतिग्रस्त जहाज को आधार तक पहुंचने की सिफारिश की जाती है। दो सौ-तीन सौ चालक दल के सदस्यों के जीवन का उल्लेख नहीं करना। उनमें से अपने बेटे, और रचनात्मक सुरक्षा के लाभ से इनकार करने वाले संदेहियों की संख्या तुरंत कम हो जाएगी। टूटे हुए राडार के साथ भी आधुनिक जहाज दुश्मन के लिए खतरा है। पनडुब्बियों से लड़ना, बाहरी लक्ष्य पदनाम पर शूटिंग। तकनीकी क्षमताएं आपको अंतिम से लड़ने की अनुमति देती हैं। मुख्य बात - पहली फट मिसाइलों से जला नहीं। पी। तीन। संरचनात्मक सुरक्षा कवच डेक, बेवेल, आंतरिक स्प्लिन्टर बुलखेड और अन्य सुरक्षात्मक तत्वों की एक प्रणाली है। जिसका आकार निरंतर परिवर्तन के अधीन है। प्रत्येक युग में, डिजाइनरों ने सुरक्षा के तरीकों के दृष्टिकोणों और पदों, डिब्बों और तंत्र की युद्ध स्थिरता को सुनिश्चित करने में अंतर का प्रदर्शन किया। इतिहास बहुत सारी दिलचस्प अवधारणाओं को जानता था, उदाहरण के लिए, "डुप्यु डी लोम"। ठोस फ्रीबोर्ड सुरक्षा के साथ फ्रांसीसी क्रूजरः कवच की मोटाई एक सौ मिमी से वॉटरलाइन से ऊपरी डेक तक! अपने युग के सर्वश्रेष्ठ क्रूजर "डे लोमा" का अस्तित्व, संशयवादी राय से इनकार करता है कि कवच बेल्ट जल क्षेत्र में एक संकीर्ण "पट्टी" के रूप में है। और पूरे बोर्ड की सुरक्षा नहीं कर सकते। एक और महत्वपूर्ण उदाहरणः अमेरिकी क्रूजर "वॉर्सेस्टर", जहां सुरक्षा के खिलाफ प्राथमिकता दी गई थी विमान बम। इसलिए - सबसे शक्तिशाली नब्बे मिमी बख़्तरबंद डेक, कवच बेल्ट के वजन से अधिक है। पूरी तरह से बख्तरबंद उड़ान डेक के साथ विमान वाहक थे। अंग्रेजों के पास युद्धपोत "मोहरा" था, जहां निर्माण ने दोनों विश्व युद्धों के अनुभव को ध्यान में रखा। पारंपरिक बख़्तरबंद बेल्ट के अलावा, इसके डिजाइनरों ने स्प्लिन्टरप्रूफ बुल्केड्स के एक्सएनयूएमएक्स टन पर स्टेंट नहीं लगाया। हर चीज का अपना उद्देश्य होता है। जहाजों के असली नमूने डिजाइन विचारों की एक अंतहीन उड़ान को प्रदर्शित करते हैं। बस यह मत कहो कि यह असंभव है। मुझे उस शब्द से नफरत है। पी। चार। कवच हथियारों, एंटीना पोस्ट और एक आधुनिक जहाज की प्रणालियों के लिए एक बाधा नहीं है। आप शायद जानना चाहते हैं कि ऐसा आत्मविश्वास कहां से आया। सबसे पहले, कवच अतीत के सभी जहाजों का एक अभिन्न तत्व था। दूसरा, हम मज़बूती से जानते हैंआधुनिक इंजन और आयुध के द्रव्यमान और आयाम अपने पूर्ववर्तियों से काफी कमतर हैं। वे तोपखाने की तुलना में लेआउट पर कम गंभीर प्रतिबंध लगाते हैं और उच्च गति सुनिश्चित करते हैं। आजकल, कोई भी चड्डी पलटने की त्रिज्या के लिए कोई महत्व नहीं देता है। कॉम्पैक्ट डीपीएस के युग में, शेलिंग गन के कोण चार्ट की धारणा गायब हो गई, जिसने पहले एक लड़ाकू इकाई के रूप में एक जहाज का मूल्य निर्धारित किया था। और उसका सारा लेआउट पूछा। कोई भी सैंतीस इकाइयों के लिए क्रूजर को तेज करने की कोशिश नहीं कर रहा है, एक सौ पचास हजार hp की क्षमता वाले दर्जनों बॉयलर और टर्बाइन स्थापित कर रहा है। विरोधाभासी उदाहरणः अपनी शक्ति के अनुसार, जापानी क्रूजर "मोगामी" परमाणु "ओरलान" से अधिक हो गया! मुख्य कैलिबर "मोगामी" का एक टॉवर "कैलिबर" के लिए एक्सएनयूएमएक्स लांचर की तरह तौला गया। कुल मिलाकर, जापानियों के पास ऐसे पाँच टावर थे। भारी तोपखाने के बावजूद, आकार के बिजली संयंत्र में असंतुष्ट, हजारों लोगों का एक दल और अपूर्ण प्रौद्योगिकी एक हज़ार नौ सौ तीस-x। , उस युग के क्रूज़र के पास एक शक्तिशाली कवच खोल था। क्रूजर "मोगामी" अपनी क्रूर विशेषताओं के साथ दो हज़ार टन कवच ले गया। तो संदेह कहाँ से आता है कि आधुनिक रॉकेट जहाज स्पष्ट रूप से रचनात्मक सुरक्षा करने में असमर्थ हैं? रडार और एनालॉग कंप्यूटर भारी तोपखाने हथियारों और कवच सुरक्षा के साथ एक साथ मौजूद थे। उदाहरण के लिए, "मोगामी" एक उत्कृष्ट रडार आकार के साथ एक मानक रडार सामान्य पहचान "टाइप एक्सएनयूएमएक्स" से सुसज्जित था। अन्य देशों के जहाजों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में और भी अधिक विविधता थीः उदाहरण के लिए, KRL "वॉर्सेस्टर" में उन्नीस रडार, युद्धपोत "मोहरा" - बाईस था। "वर्सेस्टर" के बारे में हमें याद है कि व्यर्थ नहीं है। क्रूजर, अन्य चीजों के साथ, परमाणु-सुरक्षा की एक प्रणाली से सुसज्जित था, जो सभी आधुनिक जहाजों के पास है। सूचना, इसके रचनात्मक संरक्षण के लिए पक्षपात के बिना। ये उदाहरण क्या दिखाते हैं? इस तथ्य पर संदेह है कि नए उपकरणों की उपस्थिति के कारण अंतरिक्ष की कमी से कवच के इनकार की व्याख्या करने का प्रयास असंबद्ध दिखता है। कोशिश करो, किताबः यह कैसे तर्क आमतौर पर शुरू होता है, पीटर द ग्रेट टीकेआर पर सुरक्षा की स्थापना के डिजाइन का वर्णन करने के प्रस्ताव के साथ। ओरलान पर बख्तरबंद बेल्ट लगाने से क्या होगा? सामान्य शब्दों में कहें तो कुछ भी नहीं। भारी क्रूज़रों का पतवार कई मीटर तक पानी में डूब जाएगा, और "पीटर" युद्ध क्रूज़रों के अनुपात को प्राप्त करेगा। कि पर ड्राफ्ट फ्रीबोर्ड की ऊंचाई को पार कर गया। पीटर द ग्रेट का बोर्ड एक्सएनयूएमएक्स मीटर पर पानी से ऊपर उठता है। धनुष में यह और भी अधिक है - वहां से एक कूद पांच मंजिला इमारत की छत से कूद के समान है। इसी समय, इसकी वर्षा का अधिकतम मूल्य "केवल" ग्यारह मीटर है। परमाणु विशाल पानी में टखने की तरह खड़ा है। ऐसे समय में जब अतीत के जहाजों के अधिकांश पतवार पानी के नीचे थे। "ज़मवोल्ट" और एलसी "नेवादा" एक पैमाने पर। एक आधुनिक जहाज, उसी आयाम के साथ, भारी तोपखाने और कवच से वंचित है, और इसलिए एक खाली बॉक्स की तरह सतह पर पत्थर मार रहा है। उस स्तर पर, जहाँ ऊपरी डेक गुज़रती थी और बंदूकों के साथ टावर खड़े होते थे, लंबा विमान अब भी जारी है! उच्च पक्षों के विचार से संशयवादी भयभीत हैं। कितने कवच प्लेटों की आवश्यकता होगी! और यह स्थिरता को कैसे प्रभावित करेगा? हालांकि, सब कुछ बहुत सरल है। रचनात्मक संरक्षण के विषय का जिक्र करते हुए, किसी को मौजूदा उच्च-छाती वाले क्रूजर के लिए केवल कवच प्लेटों को नहीं खुलना चाहिए, बल्कि अतीत के अत्यधिक संरक्षित जहाजों की उपस्थिति को ध्यान में रखते हुए एक अधिक गहन विश्लेषण करना चाहिए। पी। पाँच। आरक्षण स्थापित करने की लागत। नगण्य। इतने सारे श्रेणीबद्ध कथनों के कारणः पाँच. एक। हल "अरली बर्क" के निर्माण के लिए धातु की लागत केवल है . . . एजिस विध्वंसक की अंतिम लागत का एक्सएनयूएमएक्स%! उच्च तकनीक वाले हथियारों से जुड़ी मुख्य लागत। पाँच. दो। बीसवीं शताब्दी के पूर्वार्ध में अत्यधिक संरक्षित जहाज बड़े पैमाने पर बनाए गए थे। तो, एक हज़ार नौ सौ चालीस-पचासx के मोड़ पर। सोवियत संघ में, चौदह क्रूजर, अड़सठ-bis की एक श्रृंखला का निर्माण किया गया था। इक्कीस सदी में, नई धातु प्रौद्योगिकियों की उपस्थिति और श्रम उत्पादकता में वृद्धि के साथ, एक सौ मिमी धातु प्लेटों का निर्माण वास्तव में अघुलनशील समस्या बन जाएगा। वर्णित उदाहरण एक बात की गवाही देते हैंः दस-पंद्रह हजार टन के पूर्ण विस्थापन के साथ एक लड़ाकू जहाज के निर्माण के दौरान अन्य खर्चों की पृष्ठभूमि के खिलाफ कवच तत्वों का परिचय किसी का ध्यान नहीं रहेगा। एक व्यक्ति द्वारा किया गया सब कुछ दूसरे द्वारा तोड़ा जा सकता है। पूरा प्रश्न प्रयास और समय में है। दुश्मन से एक से अधिक हिट का सामना करने के लिए - यह अनमोल है। ऊपर, विचार की प्राप्ति के लिए पर्याप्त कारण दिए गए थेः - बढ़ी हुई लड़ाकू स्थिरता ; - तकनीकी व्यवहार्यता । न्यूनतम लागत पर विभिन्न समस्याओं का समाधान। तथ्य और तर्क। युद्धपोतों के लिए बढ़ती सुरक्षा की पूरी अवधारणा है। जो उन सभी के लिए वास्तविक विस्मय का कारण बनता है जो यह मानने के आदी हैं कि कवच अतीत का अवशेष है, और आधुनिक युद्ध में इसका उपयोग पूरी तरह से बेकार है। संशयवादियों को इस तथ्य से भी शर्मिंदा नहीं किया जाता है कि सुरक्षा बढ़ाने के निरंतर प्रयासों के कारण ग्राउंड कॉम्बैट उपकरण लगातार बड़े पैमाने पर बढ़ रहे हैं। अब मैं आपके प्रश्न और टिप्पणियाँ पूछता हूँ। मैं उन सभी का आभार व्यक्त करता हूं जिन्होंने इस विषय में रुचि दिखाई। कॉमरेड को विशेष बधाई। करस, जिनके विचार कवच चक्र में हर लेख में उपयोग किए जाते हैं। नया साल मुबारक हो, सबको! - लेखकः
हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के बद्दी शहर में एक शख्स की जमीन धोखे से हड़पने का मामला सामने आया है। पुलिस थाना बद्दी में एक महिला ने 3 लोगों पर आरोप लगाते हुए शिकायत देकर FIR दर्ज कराई है। पुलिस को दी शिकायत में कमलेश पत्नी अवतार सिंह निवासी गांव गुल्लरवाला बद्दी ने बताया कि तीनों आरोपियों ने उसके पति को नशे का आदी बनाकर 1. 2 बीघा ज़मीन के फ़र्ज़ी काग़ज़ बनवा लिए और उससे साइन करा लिए। महिला ने बताया कि उसके पति की गत 14 मार्च को PGI चंडीगढ़ में इलाज के दौरान मौत हो गई। पति पहले कभी-कभी शराब पीता था, जिसकी जानकारी पड़ोसी गुरमेल सिंह को अच्छी तरह से थी, जिसका फायदा उसने उठाया। महिला ने बताया कि गुरमेल सिंह ने पति की इसी आदत का फायदा उठाते हुए 4-5 साल पहले उसे ज्यादा शराब पीने का आदी बना दिया। उसे दूसरे नशीले पदार्थों के सेवन में भी लगा दिया। गुरमेल सिंह, सुनील व सुधांशु शर्मा ने मिलकर ऐसा किया। महिला ने आरोप लगाया कि तीनों उसके पति को शराब व दूसरे नशीले पदार्थों में ही रखते थे। इस बीच उससे मुख्तयारनामा आम बनवा लिया था, जिसकी उसे भनक तक नहीं लगी। इस बात की जानकारी कुछ दिन पहले बद्दी तहसील कार्यालय से मिली। महिला ने आरोप लगाया कि तीनों लोगों ने पति की जमीन जायदाद को जाली दस्तावेज बनाकर हड़पा। तीनों ने गलत व गैर-कानूनी तरीके से काग़ज़ तैयार करके उससे साइन कराए। DSP बद्दी प्रियांक गुप्ता ने बताया कि मामला दर्ज कर लिया गया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के बद्दी शहर में एक शख्स की जमीन धोखे से हड़पने का मामला सामने आया है। पुलिस थाना बद्दी में एक महिला ने तीन लोगों पर आरोप लगाते हुए शिकायत देकर FIR दर्ज कराई है। पुलिस को दी शिकायत में कमलेश पत्नी अवतार सिंह निवासी गांव गुल्लरवाला बद्दी ने बताया कि तीनों आरोपियों ने उसके पति को नशे का आदी बनाकर एक. दो बीघा ज़मीन के फ़र्ज़ी काग़ज़ बनवा लिए और उससे साइन करा लिए। महिला ने बताया कि उसके पति की गत चौदह मार्च को PGI चंडीगढ़ में इलाज के दौरान मौत हो गई। पति पहले कभी-कभी शराब पीता था, जिसकी जानकारी पड़ोसी गुरमेल सिंह को अच्छी तरह से थी, जिसका फायदा उसने उठाया। महिला ने बताया कि गुरमेल सिंह ने पति की इसी आदत का फायदा उठाते हुए चार-पाँच साल पहले उसे ज्यादा शराब पीने का आदी बना दिया। उसे दूसरे नशीले पदार्थों के सेवन में भी लगा दिया। गुरमेल सिंह, सुनील व सुधांशु शर्मा ने मिलकर ऐसा किया। महिला ने आरोप लगाया कि तीनों उसके पति को शराब व दूसरे नशीले पदार्थों में ही रखते थे। इस बीच उससे मुख्तयारनामा आम बनवा लिया था, जिसकी उसे भनक तक नहीं लगी। इस बात की जानकारी कुछ दिन पहले बद्दी तहसील कार्यालय से मिली। महिला ने आरोप लगाया कि तीनों लोगों ने पति की जमीन जायदाद को जाली दस्तावेज बनाकर हड़पा। तीनों ने गलत व गैर-कानूनी तरीके से काग़ज़ तैयार करके उससे साइन कराए। DSP बद्दी प्रियांक गुप्ता ने बताया कि मामला दर्ज कर लिया गया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में नौकरी दिलाने के झूठे वादे के साथ तस्करी कर लाए गए एक नाबालिग लड़की सहित कुल आठ लोगों को कोकराझार वापस लाया गया है। कोकराझार के पुलिस अधीक्षक (एसपी) प्रतीक थुबे ने संवाददाताओं को बताया कि कोकराझार के दूरदराज के गांवों की दो लड़कियों समेत आठ युवकों को अप्रैल में नौकरी दिलाने का झांसा देकर श्रीनगर ले जाया गया। एसपी थुबे ने कहा कि उन्होंने बाद में अपने परिवार के सदस्यों को फोन किया जिसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। तस्करी पीड़ितों को जम्मू-कश्मीर से बचाया गया 1 चिरांग जिले के रूनीखाता पुलिस थाने के तहत दादगिरी के दो आरोपियों-पति और पत्नी की पहचान प्रभात किशन ठाकुर और हैलू उर्फ शांति उर्फ रीना बसुमतारी के रूप में हुई है, जिन्हें तस्करी में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में नौकरी दिलाने के झूठे वादे के साथ तस्करी कर लाए गए एक नाबालिग लड़की सहित कुल आठ लोगों को कोकराझार वापस लाया गया है। कोकराझार के पुलिस अधीक्षक प्रतीक थुबे ने संवाददाताओं को बताया कि कोकराझार के दूरदराज के गांवों की दो लड़कियों समेत आठ युवकों को अप्रैल में नौकरी दिलाने का झांसा देकर श्रीनगर ले जाया गया। एसपी थुबे ने कहा कि उन्होंने बाद में अपने परिवार के सदस्यों को फोन किया जिसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। तस्करी पीड़ितों को जम्मू-कश्मीर से बचाया गया एक चिरांग जिले के रूनीखाता पुलिस थाने के तहत दादगिरी के दो आरोपियों-पति और पत्नी की पहचान प्रभात किशन ठाकुर और हैलू उर्फ शांति उर्फ रीना बसुमतारी के रूप में हुई है, जिन्हें तस्करी में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
हर साल 26 जनवरी (26 January) को देश गणतंत्र दिवस (Republic Day) मनाता है। साल 1930 को इसी दिन ब्रिटिश शासन के अंतर्गत भारत में पहली बार "स्वराज" दिवस मनाया गया। जिससे आजादी के बाद गणतंत्र दिवस के नाम से जाना गया। हर साल 26 जनवरी (26 January) को देश गणतंत्र दिवस (Republic Day) मनाता है। इस 70वां गणतंत्र दिवस (70th Republic Day) राजपथ (RajPath) पर परेड निकालकर मनाया जाएगा। इस दिन को संविधान लागू (Constitution of India) होने के तौर पर पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस बार गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 2019 (Republic Day 26 January 2019) दिन शनिवार को मनाया जा रहा है। साल 1955 से भारत की राजधानी दिल्ली (Delhi) के राजपथ पर इस भव्य पर्व का आयोजन किया जाता है। आज से 70 साल पहले 26 जनवरी 1950 के दिन भारत देश का संविधान लागू हुआ था और इससे पहले संविधान को 26 नवंबर 1949 को भारतीय संविधान सभा अपनाने पर मुहर लगाई गई। लेकिन कुछ लोगों के मन में सवाल है कि आखिर 26 जनवरी के दिन गणतंत्र की शुरूआत आजादी के बाद हुई थी। लेकिन उससे पहले 26 जनवरी की तारीख को क्या होता था। 26 जनवरी की तारीख इतिहास के पन्नों पर मुगल काल से ही दर्ज है। आजादी से पहले 'स्वराज दिवस' लेकिन भारत में आजादी की लहर के बीच साल 1930 को इसी दिन ब्रिटिश शासन के अंतर्गत भारत में पहली बार 'स्वराज' दिवस मनाया गया। इसके बाद हर साल आजादी की मांग के साथ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस स्वराज दिवस मनाया करती थी। 26 जनवरी 1930 को कांग्रेस ने भारत को पूर्ण स्वराज घोषित किया था और पहली बार इसी दिन को स्वराज दिवस के रुप में घोषित किया गया। जिसे बाद में आजादी के बाद गणतंत्र दिवस का नाम दिया गया। 1950 में संविधान लागू होने के बाद ब्रिटिश सरकार के भारत सरकार अधिनियम (एक्ट-1935) को हटाकर भारत का संविधान लागू किया गया। जिसे भारत सरकार के नाम से जाना जाता है। बता दें कि साल 1950 में गणतंत्र दिवस इंडिया गेट के पास नेशनल स्टेडियम में मनाया गया था। इसी दिन से भारतीय संविधान ने भारत के नागरिकों को अपनी सरकार चुनने का अधिकार दिया। सरकारी हाऊस के दरबार हॉल में भारत के पहले राष्ट्रपति के रुप में राजेंद्र प्रसाद ने शपथ ली और राष्ट्रपति बन गए। इस दिन सरकार अवकाश होता है। कहते है कि 26 जनवरी का पर्व हमारी आन, बान और शान का प्रतीक है। पूर्णं स्वराज के वर्षगांठ के रुप में हर साल इसे मनाने की परंपरा शुरू हुई। इस दिन देश अपनी शक्ति का प्रदर्शन भी करता है।
हर साल छब्बीस जनवरी को देश गणतंत्र दिवस मनाता है। साल एक हज़ार नौ सौ तीस को इसी दिन ब्रिटिश शासन के अंतर्गत भारत में पहली बार "स्वराज" दिवस मनाया गया। जिससे आजादी के बाद गणतंत्र दिवस के नाम से जाना गया। हर साल छब्बीस जनवरी को देश गणतंत्र दिवस मनाता है। इस सत्तरवां गणतंत्र दिवस राजपथ पर परेड निकालकर मनाया जाएगा। इस दिन को संविधान लागू होने के तौर पर पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस बार गणतंत्र दिवस छब्बीस जनवरी दो हज़ार उन्नीस दिन शनिवार को मनाया जा रहा है। साल एक हज़ार नौ सौ पचपन से भारत की राजधानी दिल्ली के राजपथ पर इस भव्य पर्व का आयोजन किया जाता है। आज से सत्तर साल पहले छब्बीस जनवरी एक हज़ार नौ सौ पचास के दिन भारत देश का संविधान लागू हुआ था और इससे पहले संविधान को छब्बीस नवंबर एक हज़ार नौ सौ उनचास को भारतीय संविधान सभा अपनाने पर मुहर लगाई गई। लेकिन कुछ लोगों के मन में सवाल है कि आखिर छब्बीस जनवरी के दिन गणतंत्र की शुरूआत आजादी के बाद हुई थी। लेकिन उससे पहले छब्बीस जनवरी की तारीख को क्या होता था। छब्बीस जनवरी की तारीख इतिहास के पन्नों पर मुगल काल से ही दर्ज है। आजादी से पहले 'स्वराज दिवस' लेकिन भारत में आजादी की लहर के बीच साल एक हज़ार नौ सौ तीस को इसी दिन ब्रिटिश शासन के अंतर्गत भारत में पहली बार 'स्वराज' दिवस मनाया गया। इसके बाद हर साल आजादी की मांग के साथ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस स्वराज दिवस मनाया करती थी। छब्बीस जनवरी एक हज़ार नौ सौ तीस को कांग्रेस ने भारत को पूर्ण स्वराज घोषित किया था और पहली बार इसी दिन को स्वराज दिवस के रुप में घोषित किया गया। जिसे बाद में आजादी के बाद गणतंत्र दिवस का नाम दिया गया। एक हज़ार नौ सौ पचास में संविधान लागू होने के बाद ब्रिटिश सरकार के भारत सरकार अधिनियम को हटाकर भारत का संविधान लागू किया गया। जिसे भारत सरकार के नाम से जाना जाता है। बता दें कि साल एक हज़ार नौ सौ पचास में गणतंत्र दिवस इंडिया गेट के पास नेशनल स्टेडियम में मनाया गया था। इसी दिन से भारतीय संविधान ने भारत के नागरिकों को अपनी सरकार चुनने का अधिकार दिया। सरकारी हाऊस के दरबार हॉल में भारत के पहले राष्ट्रपति के रुप में राजेंद्र प्रसाद ने शपथ ली और राष्ट्रपति बन गए। इस दिन सरकार अवकाश होता है। कहते है कि छब्बीस जनवरी का पर्व हमारी आन, बान और शान का प्रतीक है। पूर्णं स्वराज के वर्षगांठ के रुप में हर साल इसे मनाने की परंपरा शुरू हुई। इस दिन देश अपनी शक्ति का प्रदर्शन भी करता है।
।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल (हे.) ।1 - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसे1950 ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा 117 - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ।1क(क) - रिक्त ( नदारद ) ।1-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ( नदारद ) ।2 - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।3 - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ( नदारद ) ।4 - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ 4 में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ( नदारद ) ।4-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -(क)जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ( नदारद ) ।4-क(ख) - अन्य भूमि । ( नदारद ) ।5-1 - कृषि योग्य भूमि - नई परती (परतीजदीद) ।5-2 - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती (परतीकदीम) ( नदारद ) ।5-3-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ( नदारद ) ।5-3-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ।5-3-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।5-3-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ( नदारद ) ।5-3-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।5-क (क) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ( नदारद ) ।5-क (ख) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ( नदारद ) ।5-क (ग) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ( नदारद ) ।6-1 - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।6-2 - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।6-3 - कब्रिस्तान और श्मशान (मरघट) , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।6-4 - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ( नदारद ) ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल ।एक - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसेएक हज़ार नौ सौ पचास ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा एक सौ सत्रह - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ।एकक - रिक्त ।एक-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ।दो - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।तीन - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ।चार - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ चार में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ।चार-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ।चार-क - अन्य भूमि । ।पाँच-एक - कृषि योग्य भूमि - नई परती ।पाँच-दो - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती ।पाँच-तीन-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ।पाँच-तीन-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ।पाँच-तीन-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।पाँच-तीन-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ।पाँच-तीन-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ।छः-एक - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।छः-दो - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।छः-तीन - कब्रिस्तान और श्मशान , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।छः-चार - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
इनदिनों इंग्लैंड में काउंटी क्रिकेट खेला जा रहा है. 27 जुलाई शुक्रवार को एक मैच समरसेट और सरे की टीम के बीच खेला गया. इस मैच को सरे की टीम ने एरोन फिंच के शानदार प्रदर्शन के चलते 9 विकेट के अंतर से जीत लिया है. इस मैच में बारिश आ गई थी. जिसके चलते इस मैच को 10-10 ओवर का कर दिया गया था. आपकों बता दें, कि इस मैच का टॉस सरे की टीम ने जीता था और पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया था. पहले बल्लेबाजी करते हुए समरसेट की टीम ने निर्धारित 10 ओवर में 6 विकेट के नुकसान पर 99 रन का एक अच्छा स्कोर खड़ा किया. समरसेट के लिए कप्तान लुईस जार्जी ने 23 गेंदों पर 50 रन की पारी खेली. वही ओपनर बल्लेबाज जोहान माय्बर्ग ने 10 गेंदों पर 16 रन बनाये. सरे के लिए टॉम कुरेन ने अपने 2 ओवर में मात्र 16 रन देकर 2 विकेट हासिल किये. आपकों बता दें, कि जवाब में लक्ष्य का पीछा करते हुए एरोन फिंच ने अपनी शानदार पारी के दम पर सरे की टीम को 6. 4 ओवर में ही 9 विकेट शेष रहते जीत दिला दी थी. सरे के दोनों ही ओपनर बल्लेबाज जेसन रॉय व आरोन फिंच ने तूफानी शुरूआत करते हुए 3. 4 ओवर में ही 69 रन जोड़ लिए थे. जेसन रॉय ने जहां 11 गेंदों पर 28 रन की तूफानी पारी खेली. वही एरोन फिंच ने 21 गेंदों पर 43 रन की तूफानी पारी खेली. फिंच ने अपनी इस शानदार पारी के दौरान 4 शानदार चौके व 3 छक्के लगाये. समरसेट का कोई भी गेंदबाज अच्छी गेंदबाजी नहीं कर पाया. पहले ही ओवर से एरोन फिंच और जेसन रॉय गेंदबाजो पर हावी दिखाई दिए थे और दोनों ने ही आक्रमक रुख अपनाते हुए रनों की बारिश कर दी थी. दोनों की ही तूफानी पारियों के दम पर सरे की टीम इस मैच को मात्र 6. 4 ओवर में जीतने में कामयाब रह पाई है.
इनदिनों इंग्लैंड में काउंटी क्रिकेट खेला जा रहा है. सत्ताईस जुलाई शुक्रवार को एक मैच समरसेट और सरे की टीम के बीच खेला गया. इस मैच को सरे की टीम ने एरोन फिंच के शानदार प्रदर्शन के चलते नौ विकेट के अंतर से जीत लिया है. इस मैच में बारिश आ गई थी. जिसके चलते इस मैच को दस-दस ओवर का कर दिया गया था. आपकों बता दें, कि इस मैच का टॉस सरे की टीम ने जीता था और पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया था. पहले बल्लेबाजी करते हुए समरसेट की टीम ने निर्धारित दस ओवर में छः विकेट के नुकसान पर निन्यानवे रन का एक अच्छा स्कोर खड़ा किया. समरसेट के लिए कप्तान लुईस जार्जी ने तेईस गेंदों पर पचास रन की पारी खेली. वही ओपनर बल्लेबाज जोहान माय्बर्ग ने दस गेंदों पर सोलह रन बनाये. सरे के लिए टॉम कुरेन ने अपने दो ओवर में मात्र सोलह रन देकर दो विकेट हासिल किये. आपकों बता दें, कि जवाब में लक्ष्य का पीछा करते हुए एरोन फिंच ने अपनी शानदार पारी के दम पर सरे की टीम को छः. चार ओवर में ही नौ विकेट शेष रहते जीत दिला दी थी. सरे के दोनों ही ओपनर बल्लेबाज जेसन रॉय व आरोन फिंच ने तूफानी शुरूआत करते हुए तीन. चार ओवर में ही उनहत्तर रन जोड़ लिए थे. जेसन रॉय ने जहां ग्यारह गेंदों पर अट्ठाईस रन की तूफानी पारी खेली. वही एरोन फिंच ने इक्कीस गेंदों पर तैंतालीस रन की तूफानी पारी खेली. फिंच ने अपनी इस शानदार पारी के दौरान चार शानदार चौके व तीन छक्के लगाये. समरसेट का कोई भी गेंदबाज अच्छी गेंदबाजी नहीं कर पाया. पहले ही ओवर से एरोन फिंच और जेसन रॉय गेंदबाजो पर हावी दिखाई दिए थे और दोनों ने ही आक्रमक रुख अपनाते हुए रनों की बारिश कर दी थी. दोनों की ही तूफानी पारियों के दम पर सरे की टीम इस मैच को मात्र छः. चार ओवर में जीतने में कामयाब रह पाई है.
Bigg Boss 16 बिग बॉस 16 अब धीरे-धीरे ग्रैंड फिनाले की तरफ बढ़ रहा है। घर में अब सिर्फ 9 कंटेस्टेंट बाकी हैं। हाल ही में सौंदर्या शर्मा नॉमिनेशन के बाद काफी गुस्सा हो गईं और उन्होंने अर्चना के सामने मेकर्स की पोल खोल दी। नई दिल्ली, जेएनएन। Bigg Boss 16: बिग बॉस का गेम अपने अंतिम पड़ाव की तरफ बढ़ रहा है। जल्द ही सलमान खान के शो का ग्रैंड फिनाले होगा। क्योंकि इस साल बिग बॉस खुद इस गेम में उतर गए हैं, इसलिए उन्होंने इस बात को सुनिश्चित किया है कि वह कंटेस्टेंट को किसी भी तरह के आराम की आदत न पड़ने दे। हालांकि इस बीच ही अब टॉप 9 में अपनी जगह बनाने वाली सौंदर्या शर्मा ने बिग बॉस की पोल खोलकर रख दी है। नॉमिनेशन में आने के बाद सौंदर्या ने बातों ही बातों में इस शो को फिक्स बताया और साथ ही मेकर्स पर इस कंटेस्टेंट को फेवर करने का दोबारा आरोप लगाया है। सौंदर्या शर्मा की जर्नी को इस शो में काफी पसंद किया गया है। टॉप 9 में आने के बाद नॉमिनेशन टास्क में कई घरवालों ने उन पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका खुद का कोई गेम नहीं है और वह अर्चना के पल्लू में छिपकर खेल रही हैं। टीना, सुम्बुल, शालीन के साथ-साथ इस हफ्ते वह भी नॉमिनेशन में आईं। नॉमिनेशन टास्क के बाद सौंदर्या अपनी दोस्त अर्चना से बिग बॉस के फेवरिज्म की शिकायत करती हुई नजर आईं। सौंदर्या ने अर्चना से कहा, 'यहां पर कुछ भी कहने और मेहनत करने का कोई मतलब नहीं है। सब सेटिंग करके आते हैं'। मिस्टर खबरी थी रिपोर्ट्स की मानें तो सौंदर्या शर्मा का ये इशारा निमृत कौर अहलूवालिया की तरफ था। वैसे ये पहली बार नहीं है, जब सौंदर्या ने मेकर्स पर आरोप लगाए हैं। इससे पहले भी एक्ट्रेस मेकर्स को मंडली की तरफ बायस्ड बता चुकी हैं और साथ ही कई आरोप लगा चुकी हैं। सौंदर्या इस घर में अकेली नहीं हैं, जिन्होंने बिग बॉस के मेकर्स पर निमृत को फेवर करने का आरोप लगाया था। बीते एपिसोड में टीना दत्ता, प्रियंका से ये कहती दिखाई दी थी कि उसका कोई गेम नहीं है, उसे सब आसानी से मिल जाता है। इसके अलावा प्रियंका भी उनकी बात से सहमत दिखाई दी थीं और उन्होंने बोला निमृत को सब प्लैटर में मिलता है।
Bigg Boss सोलह बिग बॉस सोलह अब धीरे-धीरे ग्रैंड फिनाले की तरफ बढ़ रहा है। घर में अब सिर्फ नौ कंटेस्टेंट बाकी हैं। हाल ही में सौंदर्या शर्मा नॉमिनेशन के बाद काफी गुस्सा हो गईं और उन्होंने अर्चना के सामने मेकर्स की पोल खोल दी। नई दिल्ली, जेएनएन। Bigg Boss सोलह: बिग बॉस का गेम अपने अंतिम पड़ाव की तरफ बढ़ रहा है। जल्द ही सलमान खान के शो का ग्रैंड फिनाले होगा। क्योंकि इस साल बिग बॉस खुद इस गेम में उतर गए हैं, इसलिए उन्होंने इस बात को सुनिश्चित किया है कि वह कंटेस्टेंट को किसी भी तरह के आराम की आदत न पड़ने दे। हालांकि इस बीच ही अब टॉप नौ में अपनी जगह बनाने वाली सौंदर्या शर्मा ने बिग बॉस की पोल खोलकर रख दी है। नॉमिनेशन में आने के बाद सौंदर्या ने बातों ही बातों में इस शो को फिक्स बताया और साथ ही मेकर्स पर इस कंटेस्टेंट को फेवर करने का दोबारा आरोप लगाया है। सौंदर्या शर्मा की जर्नी को इस शो में काफी पसंद किया गया है। टॉप नौ में आने के बाद नॉमिनेशन टास्क में कई घरवालों ने उन पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका खुद का कोई गेम नहीं है और वह अर्चना के पल्लू में छिपकर खेल रही हैं। टीना, सुम्बुल, शालीन के साथ-साथ इस हफ्ते वह भी नॉमिनेशन में आईं। नॉमिनेशन टास्क के बाद सौंदर्या अपनी दोस्त अर्चना से बिग बॉस के फेवरिज्म की शिकायत करती हुई नजर आईं। सौंदर्या ने अर्चना से कहा, 'यहां पर कुछ भी कहने और मेहनत करने का कोई मतलब नहीं है। सब सेटिंग करके आते हैं'। मिस्टर खबरी थी रिपोर्ट्स की मानें तो सौंदर्या शर्मा का ये इशारा निमृत कौर अहलूवालिया की तरफ था। वैसे ये पहली बार नहीं है, जब सौंदर्या ने मेकर्स पर आरोप लगाए हैं। इससे पहले भी एक्ट्रेस मेकर्स को मंडली की तरफ बायस्ड बता चुकी हैं और साथ ही कई आरोप लगा चुकी हैं। सौंदर्या इस घर में अकेली नहीं हैं, जिन्होंने बिग बॉस के मेकर्स पर निमृत को फेवर करने का आरोप लगाया था। बीते एपिसोड में टीना दत्ता, प्रियंका से ये कहती दिखाई दी थी कि उसका कोई गेम नहीं है, उसे सब आसानी से मिल जाता है। इसके अलावा प्रियंका भी उनकी बात से सहमत दिखाई दी थीं और उन्होंने बोला निमृत को सब प्लैटर में मिलता है।
Matter (3:20PM) Mumbai, Maharashtra, India: इलेक्ट्रिक मोबिलिटी स्टार्टअप - मैटर और EARTHDAY. ORG द्वारा काला घोड़ा आर्ट फेस्टिवल में 'अर्थमैटर्स' कला स्थापित करके धरती माता को श्रद्धांजलि दी गई। मैटर ने भारत को एक स्थायी भविष्य की दिशा में अग्रसर करने के दृष्टिकोण के साथ EARTHDAY. ORG के साथ सहयोग किया है। इसका उद्देश्य न सिर्फ इंसानी गतिविधियों द्वारा पर्यावरण पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों के बारे में जागरूकता बढ़ाना है, बल्कि लोगों को स्थायी गतिशीलता और कम कार्बन युक्त टिकाऊ जीवन शैली को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। 'अर्थमैटर्स' कलाकृति का शीर्षक है। यह कला स्थापना प्लास्टिक की थैलियों से खचाखच भरे हुए महासागरों और वाहनों के निकास से घिरे हुए महाद्वीपों को संभालती पृथ्वी को प्रदर्शित करती है। इस कलाकृति के तहत पृथ्वी पर रखी गई मैटर ईवी मोटरबाइक इस बात पर प्रकाश डालती है कि ईवी स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों में क्राँतिकारी बदलाव लाने में सक्षम है। यह आईसी सर्किटरी के साथ कैमोफ्लेज है, जो गतिशीलता के लिए नवीनतम टेक्नोलॉजीस के आगाज़ का प्रतिनिधित्व करता है। इस स्थापना में प्लास्टिक की थैलियाँ, प्लास्टिक कचरे की वजह से जल निकायों के प्रदूषित होने की दास्ताँ बयां करती हैं और दर्शाती हैं कि #EndPlasticPollution के लिए सभी के ठोस प्रयासों की आवश्यकता है। माउंटेड स्पिनर ऋतुओं के चक्र और इनके बीच मौजूद संतुलन को दर्शाता है, जो कि मानवीय गतिविधियों के कारण निरंतर दयनीय स्थिति में है। स्पिनर का केंद्र बढ़ती गर्मी और लगातार बढ़ते असंतुलन का प्रतिनिधित्व करता है। मोहल लालभाई, फाउंडर और सीईओ, मैटर, ने कहा, "मैटर की ओर से 'अर्थमैटर्स' स्थापना के माध्यम से, हम यह क्राँतिकारी संदेश देना चाहते हैं कि मानव गतिविधियों के कारण प्रकृति को पहुँचने वाली क्षति पर नई टेक्नोलॉजी के माध्यम से विराम लगाया जा सकता है। मुंबई में काला घोड़ा आर्ट फेस्टिवल में 'अर्थमैटर्स' स्थापना एक विचारणीय प्रयास है। जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के बारे में जागरूकता बढ़ाने वाला यह प्रयास टेक्नोलॉजी के माध्यम से पृथ्वी को होने वाले नुकसान की भरपाई करने पर आधारित है। उम्मीद है कि EARTHDAY. ORG की मदद से, हम अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचने और उन्हें इस विषय पर कार्रवाई करने के लिए प्रेरित में सक्षम होंगे। " करुणा सिंह, रीजनल डायरेक्टर एशिया, EARTHDAY. ORG, ने कहा, "पृथ्वी दिवस 2023 के लिए विश्वव्यापी थीम 'हमारे ग्रह में निवेश' रखी गई है। पृथ्वी के लिए यह साझेदारी अधिक से अधिक व्यवसायों, सरकारों और नागरिकों से जलवायु परिवर्तन से निपटने के समाधान में तेजी लाने में मदद करने का आह्वान करती है। हमारे ग्रह में निवेश करने के लिए हम मैटर के अनूठे प्रयास की सराहना करते हैं। " मैटर और EARTHDAY. ORG का उद्देश्य लोगों में जागरूकता पैदा करने और EARTHDAY. ORG के ग्लोबल कैंपेन- ग्रेट ग्लोबल क्लीन-अप के रूप में स्वैच्छिक रूप से प्लास्टिक कचरे को एकत्रित और प्रबंधित करने के विषय में जागरूकता पैदा करने के लिए विभिन्न गतिविधियों को बढ़ावा देना है। Matter is a technology start-up guided by its vision to be the most dynamic company driving India to a sustainable future. Since its inception in January 2019 in Ahmedabad, Matter has invested extensively in technology development with the 'Innovate in India" approach to develop futuristic electric vehicle platforms and energy storage systems. Matter recently launched its first geared electric motorbike for the Indian market, in 2022. All the components for Matter's products have been designed by its team in-house and manufactured in India. Matter's range of mobility products will redefine user experience by incorporating best-in-class technologies and innovation.
Matter Mumbai, Maharashtra, India: इलेक्ट्रिक मोबिलिटी स्टार्टअप - मैटर और EARTHDAY. ORG द्वारा काला घोड़ा आर्ट फेस्टिवल में 'अर्थमैटर्स' कला स्थापित करके धरती माता को श्रद्धांजलि दी गई। मैटर ने भारत को एक स्थायी भविष्य की दिशा में अग्रसर करने के दृष्टिकोण के साथ EARTHDAY. ORG के साथ सहयोग किया है। इसका उद्देश्य न सिर्फ इंसानी गतिविधियों द्वारा पर्यावरण पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों के बारे में जागरूकता बढ़ाना है, बल्कि लोगों को स्थायी गतिशीलता और कम कार्बन युक्त टिकाऊ जीवन शैली को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। 'अर्थमैटर्स' कलाकृति का शीर्षक है। यह कला स्थापना प्लास्टिक की थैलियों से खचाखच भरे हुए महासागरों और वाहनों के निकास से घिरे हुए महाद्वीपों को संभालती पृथ्वी को प्रदर्शित करती है। इस कलाकृति के तहत पृथ्वी पर रखी गई मैटर ईवी मोटरबाइक इस बात पर प्रकाश डालती है कि ईवी स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों में क्राँतिकारी बदलाव लाने में सक्षम है। यह आईसी सर्किटरी के साथ कैमोफ्लेज है, जो गतिशीलता के लिए नवीनतम टेक्नोलॉजीस के आगाज़ का प्रतिनिधित्व करता है। इस स्थापना में प्लास्टिक की थैलियाँ, प्लास्टिक कचरे की वजह से जल निकायों के प्रदूषित होने की दास्ताँ बयां करती हैं और दर्शाती हैं कि #EndPlasticPollution के लिए सभी के ठोस प्रयासों की आवश्यकता है। माउंटेड स्पिनर ऋतुओं के चक्र और इनके बीच मौजूद संतुलन को दर्शाता है, जो कि मानवीय गतिविधियों के कारण निरंतर दयनीय स्थिति में है। स्पिनर का केंद्र बढ़ती गर्मी और लगातार बढ़ते असंतुलन का प्रतिनिधित्व करता है। मोहल लालभाई, फाउंडर और सीईओ, मैटर, ने कहा, "मैटर की ओर से 'अर्थमैटर्स' स्थापना के माध्यम से, हम यह क्राँतिकारी संदेश देना चाहते हैं कि मानव गतिविधियों के कारण प्रकृति को पहुँचने वाली क्षति पर नई टेक्नोलॉजी के माध्यम से विराम लगाया जा सकता है। मुंबई में काला घोड़ा आर्ट फेस्टिवल में 'अर्थमैटर्स' स्थापना एक विचारणीय प्रयास है। जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के बारे में जागरूकता बढ़ाने वाला यह प्रयास टेक्नोलॉजी के माध्यम से पृथ्वी को होने वाले नुकसान की भरपाई करने पर आधारित है। उम्मीद है कि EARTHDAY. ORG की मदद से, हम अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचने और उन्हें इस विषय पर कार्रवाई करने के लिए प्रेरित में सक्षम होंगे। " करुणा सिंह, रीजनल डायरेक्टर एशिया, EARTHDAY. ORG, ने कहा, "पृथ्वी दिवस दो हज़ार तेईस के लिए विश्वव्यापी थीम 'हमारे ग्रह में निवेश' रखी गई है। पृथ्वी के लिए यह साझेदारी अधिक से अधिक व्यवसायों, सरकारों और नागरिकों से जलवायु परिवर्तन से निपटने के समाधान में तेजी लाने में मदद करने का आह्वान करती है। हमारे ग्रह में निवेश करने के लिए हम मैटर के अनूठे प्रयास की सराहना करते हैं। " मैटर और EARTHDAY. ORG का उद्देश्य लोगों में जागरूकता पैदा करने और EARTHDAY. ORG के ग्लोबल कैंपेन- ग्रेट ग्लोबल क्लीन-अप के रूप में स्वैच्छिक रूप से प्लास्टिक कचरे को एकत्रित और प्रबंधित करने के विषय में जागरूकता पैदा करने के लिए विभिन्न गतिविधियों को बढ़ावा देना है। Matter is a technology start-up guided by its vision to be the most dynamic company driving India to a sustainable future. Since its inception in January दो हज़ार उन्नीस in Ahmedabad, Matter has invested extensively in technology development with the 'Innovate in India" approach to develop futuristic electric vehicle platforms and energy storage systems. Matter recently launched its first geared electric motorbike for the Indian market, in दो हज़ार बाईस. All the components for Matter's products have been designed by its team in-house and manufactured in India. Matter's range of mobility products will redefine user experience by incorporating best-in-class technologies and innovation.
नई दिल्ली। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव (RJD supremo Lalu Prasad Yadav) की मुसीबतें और बढ़ गई है। आपको बता दें कि, लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) को चारा घोटाले के डोरंडा कोषागार से 139. 35 करोड़ की अवैध निकासी के मामले में 5 साल की सजा सुनाई है। आज यानि सोमवार को सीबीआई कोर्ट रांची के विशेष जज एसके शशि ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) की मुसीबतें बढ़ाते हुए ये सजा सुनाई। वे बाद में पलटी मार कर लालू प्रसाद से मिल गए और भ्रष्टाचार का राजनीतिक बचाव करने वाले कुतर्क देने लगे। इन पाला-बदल लोगों और राजद ने भाजपा पर बार-बार लालू प्रसाद को फँसाने के अनर्गल आरोप लगाये। इन लोगों को न्यायपालिका पर केवल तभी भरोसा हुआ, जब लालू प्रसाद को जमानत मिली। साथ ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि, हमने उसके खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया है। जो लोग उसके साथ हैं, केवल वही हैं जिन्होंने उसके खिलाफ मामले दर्ज किए हैं। वे लोग भी मेरे पास आए लेकिन मैंने कहा नहीं। मैंने कहा कि आप मामला दर्ज करना चाहते हैं, लेकिन यह मेरा काम नहीं है।
नई दिल्ली। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की मुसीबतें और बढ़ गई है। आपको बता दें कि, लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाले के डोरंडा कोषागार से एक सौ उनतालीस. पैंतीस करोड़ की अवैध निकासी के मामले में पाँच साल की सजा सुनाई है। आज यानि सोमवार को सीबीआई कोर्ट रांची के विशेष जज एसके शशि ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से लालू प्रसाद यादव की मुसीबतें बढ़ाते हुए ये सजा सुनाई। वे बाद में पलटी मार कर लालू प्रसाद से मिल गए और भ्रष्टाचार का राजनीतिक बचाव करने वाले कुतर्क देने लगे। इन पाला-बदल लोगों और राजद ने भाजपा पर बार-बार लालू प्रसाद को फँसाने के अनर्गल आरोप लगाये। इन लोगों को न्यायपालिका पर केवल तभी भरोसा हुआ, जब लालू प्रसाद को जमानत मिली। साथ ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि, हमने उसके खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया है। जो लोग उसके साथ हैं, केवल वही हैं जिन्होंने उसके खिलाफ मामले दर्ज किए हैं। वे लोग भी मेरे पास आए लेकिन मैंने कहा नहीं। मैंने कहा कि आप मामला दर्ज करना चाहते हैं, लेकिन यह मेरा काम नहीं है।
योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को बतौर मुख्यमंत्री 101वीं बार काशी पहुंचे। 89वीं बार श्री काशी विश्वनाथ मंदिर एवं काशी के कोतवाल काल भैरव मंदिर में विधिवत दर्शन पूजन किया। इस दौरान विश्वनाथ कॉरिडोर भी देखा। योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को बतौर मुख्यमंत्री 101वीं बार काशी पहुंचे। 89वीं बार श्री काशी विश्वनाथ मंदिर एवं काशी के कोतवाल काल भैरव मंदिर में विधिवत दर्शन पूजन किया। विश्वनाथ मंदिर में दर्शन पूजन के साथ कॉरिडोर को भी देखा और मंदिर में आने वाले भक्तों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराए जाने हेतु मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का काशी के प्रति विशेष लगाव है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संसदीय क्षेत्र होने के चलते उनका लगाव और भी बढ़ गया। श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के चलते वह हर माह कम से कम दो बार काशी आए। 88 बार बाबा विश्वनाथ दरबार में हाजिरी लगा दर्शन-पूजन किया और निर्माण कार्य की समीक्षा की। बतौर मुख्यमंत्री उन्होंने 68 महीने के कार्यकाल में 100 बार काशी का दौरा किया। मुख्यमंत्री वर्ष 2017 में 6 बार, वर्ष 2018 में 22 बार, वर्ष 2019 में 23 बार, वर्ष 2020 में 13 बार, वर्ष 2021 में 23 बार, वर्ष 2022 में 11 अक्टूबर तक 13 बार काशी का भ्रमण कर चुके हैं। वहीं मुख्यमंत्री ने 26 मई 2017 से लेकर 11 अक्टूबर 2022 तक 89 बार बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा की पूजा अर्चना की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में योगी ने लोगों का आह्वान करते हुए कहां कि पीएम के नेतृत्व में देश को 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' बनाने के लिए सभी को सहभागी बनना होगा। निश्चित रूप से आने वाले समय मे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया की महाशक्ति बनेगा और विश्व कल्याण का नेतृत्व करेगा। भारत ने ब्रिटेन को पछाड़कर दुनिया की चौथी अर्थव्यवस्था बनी है, शीघ्र ही यह दुनिया की तीसरी अर्थव्यवस्था बनने वाला है। उन्होंने विशेष रूप से जोर देते हुए कहा कि यदि देश के 135 करोड़ लोग मिलकर कार्य करें तो भारत शीघ्र ही विश्व का पहला अर्थव्यवस्था बन जाएगा। सीएम योगी ने कहा कि यह सौभाग्य की बात है कि देश का नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों में हैं। जिन्होंने वैदिक उद्घोष को अपने जीवन का हिस्सा बनाया है। उन्होंने कहा कि एक नेता एक लंबे समय तक जन विश्वास को कायम नहीं रख सकता। यह चुनौती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो कहते हैं, वही करते हैं और जो भी कहते हैं, वही बोलते हैं। 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने 'सबका साथ सबका विश्वास' की घोषणा की थी। इससे बड़ा सद्भावना और क्या हो सकता है। निःशुल्क आवास, स्वास्थ्य सुविधाएं, रोजगार के अवसर, बैंकों में जनधन खाता खोलने अन्य सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के सभी लोगों को प्राप्त हुआ और मिल रहा है। इसमें कोई जात-पात, धर्म और समुदाय को नहीं देखा गया। सीएम योगी ने भगवान बुद्ध की उपदेश स्थली सारनाथ स्थित बुद्धा थीम पार्क सभागार में हैर्टफेल्ट द लिगेसी ऑफ फेथ व एनआईडी फाउंडेशन, नई दिल्ली द्वारा आयोजित 'सद्भावना वाराणसी अध्याय' कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रुप में शिरकत की। कहा कि अहिल्याबाई ने श्री काशी विश्वनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण कराया, महाराजा रणजीत सिंह ने इसे स्वर्ण मंडित कराया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका विस्तार कर मां गंगा का बाबा श्री विश्वनाथ से मिलन कराया। वैश्विक मंच पर भारत के महापुरुषों व महान विभूतियों को जो पहचान आज मिल रहा है, पूर्व में संभव नहीं रहा। भगवान राम सर्किट व कृष्ण सर्किट का कार्य हो रहा है। उन्होंने कहा कि 'सबका साथ सबका विश्वास' का मंत्र भी सद्भावना का ही मंत्र है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 135 करोड़ जनता के विश्वास का प्रतीक बना है। इससे पूर्व उन्होंने नरेन्द्र मोदी के जीवन पर आधारित डा. भरत बराई द्वारा लिखित पुस्तक मोदी@20 ड्रीम्स डिलीवरी एवं सतनाम सिंह चीफ फेड्रल एनआइडी फाउंडेशन की ओर से प्रस्तुत की गई पुस्तक हार्टफेल्ट दी लिगेसी आफ फेथ को विमोचन किया। इससे पूर्व उन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्वविद्यालय के चांसलर द्वारा काशी के आर्थिक रूप से कमजोर एवं मेधावी सिख छात्रों को चंडीगढ़ विश्वविद्यालय में प्रवेश लिये जाने पर 64 करोड़ रुपये की दिये जाने वाली छात्रवृत्ति कार्यक्रम शुरूआत की। इस अवसर पर उन्हें सिरोपा भेंट किया गया।
योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को बतौर मुख्यमंत्री एक सौ एकवीं बार काशी पहुंचे। नवासीवीं बार श्री काशी विश्वनाथ मंदिर एवं काशी के कोतवाल काल भैरव मंदिर में विधिवत दर्शन पूजन किया। इस दौरान विश्वनाथ कॉरिडोर भी देखा। योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को बतौर मुख्यमंत्री एक सौ एकवीं बार काशी पहुंचे। नवासीवीं बार श्री काशी विश्वनाथ मंदिर एवं काशी के कोतवाल काल भैरव मंदिर में विधिवत दर्शन पूजन किया। विश्वनाथ मंदिर में दर्शन पूजन के साथ कॉरिडोर को भी देखा और मंदिर में आने वाले भक्तों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराए जाने हेतु मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का काशी के प्रति विशेष लगाव है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संसदीय क्षेत्र होने के चलते उनका लगाव और भी बढ़ गया। श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के चलते वह हर माह कम से कम दो बार काशी आए। अठासी बार बाबा विश्वनाथ दरबार में हाजिरी लगा दर्शन-पूजन किया और निर्माण कार्य की समीक्षा की। बतौर मुख्यमंत्री उन्होंने अड़सठ महीने के कार्यकाल में एक सौ बार काशी का दौरा किया। मुख्यमंत्री वर्ष दो हज़ार सत्रह में छः बार, वर्ष दो हज़ार अट्ठारह में बाईस बार, वर्ष दो हज़ार उन्नीस में तेईस बार, वर्ष दो हज़ार बीस में तेरह बार, वर्ष दो हज़ार इक्कीस में तेईस बार, वर्ष दो हज़ार बाईस में ग्यारह अक्टूबर तक तेरह बार काशी का भ्रमण कर चुके हैं। वहीं मुख्यमंत्री ने छब्बीस मई दो हज़ार सत्रह से लेकर ग्यारह अक्टूबर दो हज़ार बाईस तक नवासी बार बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा की पूजा अर्चना की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में योगी ने लोगों का आह्वान करते हुए कहां कि पीएम के नेतृत्व में देश को 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' बनाने के लिए सभी को सहभागी बनना होगा। निश्चित रूप से आने वाले समय मे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया की महाशक्ति बनेगा और विश्व कल्याण का नेतृत्व करेगा। भारत ने ब्रिटेन को पछाड़कर दुनिया की चौथी अर्थव्यवस्था बनी है, शीघ्र ही यह दुनिया की तीसरी अर्थव्यवस्था बनने वाला है। उन्होंने विशेष रूप से जोर देते हुए कहा कि यदि देश के एक सौ पैंतीस करोड़ लोग मिलकर कार्य करें तो भारत शीघ्र ही विश्व का पहला अर्थव्यवस्था बन जाएगा। सीएम योगी ने कहा कि यह सौभाग्य की बात है कि देश का नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों में हैं। जिन्होंने वैदिक उद्घोष को अपने जीवन का हिस्सा बनाया है। उन्होंने कहा कि एक नेता एक लंबे समय तक जन विश्वास को कायम नहीं रख सकता। यह चुनौती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो कहते हैं, वही करते हैं और जो भी कहते हैं, वही बोलते हैं। दो हज़ार चौदह में प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने 'सबका साथ सबका विश्वास' की घोषणा की थी। इससे बड़ा सद्भावना और क्या हो सकता है। निःशुल्क आवास, स्वास्थ्य सुविधाएं, रोजगार के अवसर, बैंकों में जनधन खाता खोलने अन्य सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के सभी लोगों को प्राप्त हुआ और मिल रहा है। इसमें कोई जात-पात, धर्म और समुदाय को नहीं देखा गया। सीएम योगी ने भगवान बुद्ध की उपदेश स्थली सारनाथ स्थित बुद्धा थीम पार्क सभागार में हैर्टफेल्ट द लिगेसी ऑफ फेथ व एनआईडी फाउंडेशन, नई दिल्ली द्वारा आयोजित 'सद्भावना वाराणसी अध्याय' कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रुप में शिरकत की। कहा कि अहिल्याबाई ने श्री काशी विश्वनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण कराया, महाराजा रणजीत सिंह ने इसे स्वर्ण मंडित कराया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका विस्तार कर मां गंगा का बाबा श्री विश्वनाथ से मिलन कराया। वैश्विक मंच पर भारत के महापुरुषों व महान विभूतियों को जो पहचान आज मिल रहा है, पूर्व में संभव नहीं रहा। भगवान राम सर्किट व कृष्ण सर्किट का कार्य हो रहा है। उन्होंने कहा कि 'सबका साथ सबका विश्वास' का मंत्र भी सद्भावना का ही मंत्र है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक सौ पैंतीस करोड़ जनता के विश्वास का प्रतीक बना है। इससे पूर्व उन्होंने नरेन्द्र मोदी के जीवन पर आधारित डा. भरत बराई द्वारा लिखित पुस्तक मोदी@बीस ड्रीम्स डिलीवरी एवं सतनाम सिंह चीफ फेड्रल एनआइडी फाउंडेशन की ओर से प्रस्तुत की गई पुस्तक हार्टफेल्ट दी लिगेसी आफ फेथ को विमोचन किया। इससे पूर्व उन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्वविद्यालय के चांसलर द्वारा काशी के आर्थिक रूप से कमजोर एवं मेधावी सिख छात्रों को चंडीगढ़ विश्वविद्यालय में प्रवेश लिये जाने पर चौंसठ करोड़ रुपये की दिये जाने वाली छात्रवृत्ति कार्यक्रम शुरूआत की। इस अवसर पर उन्हें सिरोपा भेंट किया गया।
गुजरात नगर निगम चुनाव : शुरुआती नतीजे सत्तारूढ़ भाजपा के पक्ष में आ रहे हैं। सभी छह नगर निगम में भाजपा ने बढ़त बनाई हुई है। पार्टी अहमदाबाद में 28, सूरत में 12, वडोदरा में 11, राजकोट में 12, जामनगर में 10 और भावनगर में 11 सीटों पर आगे चल रही है। छह नगर निगम के लिए हुए चुनाव में कुल 2,276 उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरे हैं। आज भाजपा के 577, कांग्रेस के 566, आम आदमी पार्टी के 470, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के 91, अन्य पार्टियों के 353 और 228 निर्दलीय उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला होना है। इन चुनावों में मुख्य मुकाबला भाजपा और मुख्य विपक्षी कांग्रेस के बीच है। भाजपा का पिछले कई कार्यकाल से इन छह नगर निगमों पर शासन रहा है। आम आदमी पार्टी (आप) ने दावा किया है कि वह भाजपा और कांग्रेस के सामने एक प्रभावी विकल्प होगी, जबकि असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) पहली बार स्थानीय निकाय चुनाव लड़ रही है। गुजरात निकाय चुनाव के लिए मतगणना शुरू हो गई है। ये परिणाम ऐसे समय पर आएंगे जब कृषि कानूनों के खिलाफ देशभर में किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है। चुनाव में सतारूढ़ भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर लगी। इससे पहले पंजाब निकाय चुनाव में पार्टी को करारी हार मिली थी।
गुजरात नगर निगम चुनाव : शुरुआती नतीजे सत्तारूढ़ भाजपा के पक्ष में आ रहे हैं। सभी छह नगर निगम में भाजपा ने बढ़त बनाई हुई है। पार्टी अहमदाबाद में अट्ठाईस, सूरत में बारह, वडोदरा में ग्यारह, राजकोट में बारह, जामनगर में दस और भावनगर में ग्यारह सीटों पर आगे चल रही है। छह नगर निगम के लिए हुए चुनाव में कुल दो,दो सौ छिहत्तर उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरे हैं। आज भाजपा के पाँच सौ सतहत्तर, कांग्रेस के पाँच सौ छयासठ, आम आदमी पार्टी के चार सौ सत्तर, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के इक्यानवे, अन्य पार्टियों के तीन सौ तिरेपन और दो सौ अट्ठाईस निर्दलीय उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला होना है। इन चुनावों में मुख्य मुकाबला भाजपा और मुख्य विपक्षी कांग्रेस के बीच है। भाजपा का पिछले कई कार्यकाल से इन छह नगर निगमों पर शासन रहा है। आम आदमी पार्टी ने दावा किया है कि वह भाजपा और कांग्रेस के सामने एक प्रभावी विकल्प होगी, जबकि असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन पहली बार स्थानीय निकाय चुनाव लड़ रही है। गुजरात निकाय चुनाव के लिए मतगणना शुरू हो गई है। ये परिणाम ऐसे समय पर आएंगे जब कृषि कानूनों के खिलाफ देशभर में किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है। चुनाव में सतारूढ़ भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर लगी। इससे पहले पंजाब निकाय चुनाव में पार्टी को करारी हार मिली थी।
है वह बहुत महंगा है। औसत हिन्दुस्तानी इसे प्राप्त नहीं कर सकते । हिन्दुस्तान की गरीबी के कारण इस प्रकार जो आहार में क्षति होती है उसकी हम पीछे विवेचना करेंगे । आहार की इस एक मिसाल के अलावा डा० ऐक्रायड द्वारा प्रस्तावित एक उदाहरण नीचे लिखा जाता है चावल १० औंस, अनाज ५ औंस, दूध ८ औंस, दालें ३ औंस, जड़ की सब्जियां ६ औंस, हरी पत्तेदार सब्जियां ४ औंस, चिकनाइट २ औंस, फल ३ औंस । इस भाहार से उष्णता की २६०० मात्राएं मिल सकेंगी। इस उष्णता के साथ-साथ इस आहार में सभी आवश्यक खनिज- चार और विटामिन भी प्राप्य हैं । परन्तु श्रौसत हिन्दुस्तानी की खुराक में दूध, फल, सब्जियों और चिकनाहट का अंश नहीं होता। अपनी गरीबी के कारण वह इन महंगो वस्तुओं को खरीद नहीं सकता। उत्तरी हिन्दुस्तान को छोड़ कर और सब जगह भोजन का अधिकांश चावलों पर ही निर्भर है जिनसे आवश्यक और रक्षक आहार-तत्व नहीं मिलते। जो केवल चावल खा कर ही निर्वाह करने के श्रादी हैं उन्हें अपने भोजन में बाजरा और उवार जैसे अनाज को भी शामिल करने की प्रेरणा की जानी चाहिये । हमने देखा है कि आमतौर पर औसत काम करने वाले इन्सान को रोजाना खुराक से २८०० से ३००० उष्णता मिलनी चाहिए । परन्तु भारत में राशन की योजना द्वारा सिर्फ १०००-१२०० उष्णता मिल रही है । यह सचाई और भी भयावह हो जाती है जब हम यह सोचते हैं कि श्रौसत हिन्दुस्तानी की ८० फीसदी खुराक सिर्फ आटे और चावल से ही पूरी होती है। उसके भोजन में रक्षकतत्वों का नितान्त अभाव है। सब्जियां, फल, दूध, घी उसके भाग्य में नहीं हैं। देखा जाय तो एक हिन्दुस्तानी को खाद्य की वही मात्रा प्राप्त होती है जो फालिस्ट जर्मनी में 'बेल्सन' के कैदियों को मिलती थी और इस तरह जो भूखे रह कर तिल-तिल कर प्राण त्याग देते थे । पर हमारे देश में श्रौसत हिन्दुस्तानी को प्राप्य खाद्य की इस कमी का दोष रसदबन्दी के सिर नहीं मढ़ा जा सकता। जिस समय इस रसदबन्दी द्वारा रोजाना एक पौंड या आध सेर अनाज लिया जा सकता था तब सरकारी आंकड़ों के अनुसार अलगअलग क्षेत्रों में १० से ८५ फीसदी तक ही अनाज खरीदा जाता था। राशन के १२ औंस हो जाने पर भी खरीदे जा रहे अनाज की मात्रा ३० फीसदी है। स्पष्ट है कि हम हिन्दुस्तानी खाद्य की इतनी कम खपत के आदी हैं। इस दृष्टि से भारत की समस्या सिर्फ गरीबी, हमारी खरीदने की नीचे दर्जे की क्षमता की ही है। हमारे देश में अनाज की कमी का सवाल तो है ही, पर श्रौसत हिन्दुस्तानी के दोषपूर्णं, असन्तुलित भोजन का सवाल भी उतना ही गम्भीर और आवश्यक है। एक ही
है वह बहुत महंगा है। औसत हिन्दुस्तानी इसे प्राप्त नहीं कर सकते । हिन्दुस्तान की गरीबी के कारण इस प्रकार जो आहार में क्षति होती है उसकी हम पीछे विवेचना करेंगे । आहार की इस एक मिसाल के अलावा डाशून्य ऐक्रायड द्वारा प्रस्तावित एक उदाहरण नीचे लिखा जाता है चावल दस औंस, अनाज पाँच औंस, दूध आठ औंस, दालें तीन औंस, जड़ की सब्जियां छः औंस, हरी पत्तेदार सब्जियां चार औंस, चिकनाइट दो औंस, फल तीन औंस । इस भाहार से उष्णता की दो हज़ार छः सौ मात्राएं मिल सकेंगी। इस उष्णता के साथ-साथ इस आहार में सभी आवश्यक खनिज- चार और विटामिन भी प्राप्य हैं । परन्तु श्रौसत हिन्दुस्तानी की खुराक में दूध, फल, सब्जियों और चिकनाहट का अंश नहीं होता। अपनी गरीबी के कारण वह इन महंगो वस्तुओं को खरीद नहीं सकता। उत्तरी हिन्दुस्तान को छोड़ कर और सब जगह भोजन का अधिकांश चावलों पर ही निर्भर है जिनसे आवश्यक और रक्षक आहार-तत्व नहीं मिलते। जो केवल चावल खा कर ही निर्वाह करने के श्रादी हैं उन्हें अपने भोजन में बाजरा और उवार जैसे अनाज को भी शामिल करने की प्रेरणा की जानी चाहिये । हमने देखा है कि आमतौर पर औसत काम करने वाले इन्सान को रोजाना खुराक से दो हज़ार आठ सौ से तीन हज़ार उष्णता मिलनी चाहिए । परन्तु भारत में राशन की योजना द्वारा सिर्फ एक हज़ार-एक हज़ार दो सौ उष्णता मिल रही है । यह सचाई और भी भयावह हो जाती है जब हम यह सोचते हैं कि श्रौसत हिन्दुस्तानी की अस्सी फीसदी खुराक सिर्फ आटे और चावल से ही पूरी होती है। उसके भोजन में रक्षकतत्वों का नितान्त अभाव है। सब्जियां, फल, दूध, घी उसके भाग्य में नहीं हैं। देखा जाय तो एक हिन्दुस्तानी को खाद्य की वही मात्रा प्राप्त होती है जो फालिस्ट जर्मनी में 'बेल्सन' के कैदियों को मिलती थी और इस तरह जो भूखे रह कर तिल-तिल कर प्राण त्याग देते थे । पर हमारे देश में श्रौसत हिन्दुस्तानी को प्राप्य खाद्य की इस कमी का दोष रसदबन्दी के सिर नहीं मढ़ा जा सकता। जिस समय इस रसदबन्दी द्वारा रोजाना एक पौंड या आध सेर अनाज लिया जा सकता था तब सरकारी आंकड़ों के अनुसार अलगअलग क्षेत्रों में दस से पचासी फीसदी तक ही अनाज खरीदा जाता था। राशन के बारह औंस हो जाने पर भी खरीदे जा रहे अनाज की मात्रा तीस फीसदी है। स्पष्ट है कि हम हिन्दुस्तानी खाद्य की इतनी कम खपत के आदी हैं। इस दृष्टि से भारत की समस्या सिर्फ गरीबी, हमारी खरीदने की नीचे दर्जे की क्षमता की ही है। हमारे देश में अनाज की कमी का सवाल तो है ही, पर श्रौसत हिन्दुस्तानी के दोषपूर्णं, असन्तुलित भोजन का सवाल भी उतना ही गम्भीर और आवश्यक है। एक ही
शिमला - हिमाचल प्रदेश में पिछले 11 दिन से हड़ताल पर चल रहे 108 एंबुलेंस कर्मचारी भले ही काम पर लौट आए हो, लेकिन सरकार को उन्होंने लंबित मांगों को पूरा करने के लिए अल्टीमेटम दिया है। एंबुलेंस यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रमजीत सिंह ने शिमला में आयोजित पत्रकारवार्ता के दौरान कहा कि स्वास्थ्य विभाग ने कर्मियों की तीन मांगे मान ली है, लेकिन वेतनमान बढ़ाने और हरियाणा की तर्ज पर एनएचआरएम के तहत लाने की मांग अभी भी पूरी नहीं की है। उन्होंने कहा कि सरकार ने कर्मचारियों को हरियाणा और दिल्ली की पॉलिसी का अध्ययन करने के बाद उसे लागू करने का आश्वासन दिया है। 108 कर्मचारी यूनियन ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि 108 कर्मचारियों की मांगों को लेकर सरकार वादाखिलाफी करती है तो यह हड़ताल हिमाचल में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में शुरू की जाएगी। एंबुलेंस यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रमजीत सिंह ने कहा कि एंबुलेंस कर्मचारी लंबे समय से सरकार से पांच मांगे कर रहे थे।
शिमला - हिमाचल प्रदेश में पिछले ग्यारह दिन से हड़ताल पर चल रहे एक सौ आठ एंबुलेंस कर्मचारी भले ही काम पर लौट आए हो, लेकिन सरकार को उन्होंने लंबित मांगों को पूरा करने के लिए अल्टीमेटम दिया है। एंबुलेंस यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रमजीत सिंह ने शिमला में आयोजित पत्रकारवार्ता के दौरान कहा कि स्वास्थ्य विभाग ने कर्मियों की तीन मांगे मान ली है, लेकिन वेतनमान बढ़ाने और हरियाणा की तर्ज पर एनएचआरएम के तहत लाने की मांग अभी भी पूरी नहीं की है। उन्होंने कहा कि सरकार ने कर्मचारियों को हरियाणा और दिल्ली की पॉलिसी का अध्ययन करने के बाद उसे लागू करने का आश्वासन दिया है। एक सौ आठ कर्मचारी यूनियन ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि एक सौ आठ कर्मचारियों की मांगों को लेकर सरकार वादाखिलाफी करती है तो यह हड़ताल हिमाचल में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में शुरू की जाएगी। एंबुलेंस यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रमजीत सिंह ने कहा कि एंबुलेंस कर्मचारी लंबे समय से सरकार से पांच मांगे कर रहे थे।
लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार ने चेताया है कि अगर संसद ने अपना काम सुचारू रूप से नहीं किया, तो वह दिन दूर नहीं जब सड़कों पर हमें जनक्रांति देखने को मिलेगी। इनके रक्तरंजित होने की भी पूरी आशंका है। सुलभ इंटरनेशनल सोशल आर्गनाइजेशन की ओर से आयोजित 'स्वच्छता का समाज शास्त्र' विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ करने के बाद उन्होंने कहा कि समाज में फैली तमाम असमानताओं और कुरीतियों को दूर करने की जिम्मेदारी संसद की है। संसद निर्बाध रूप से चलनी चाहिए ताकि कानून भी अपनी जिम्मेदारी निभाता रहे। उन्होंने कहा कि समाज में निचले पायदान पर खड़े लोगों को उचित सम्मान दिलाने के साथ ऊपर उठाने का काम भी संसद को ही करना होगा, इसलिए उन्हें खुद ही क्रांतिकारी की भूमिका निभानी होगी। सफाई के मुद्दे पर मीरा कुमार ने कहा कि संपूर्ण स्वच्छता अभियान यानी खुले में शौच प्रथा तभी खत्म होगी, जब लोग अपने दिमाग की गंदगी को साफ कर सकेंगे।
लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार ने चेताया है कि अगर संसद ने अपना काम सुचारू रूप से नहीं किया, तो वह दिन दूर नहीं जब सड़कों पर हमें जनक्रांति देखने को मिलेगी। इनके रक्तरंजित होने की भी पूरी आशंका है। सुलभ इंटरनेशनल सोशल आर्गनाइजेशन की ओर से आयोजित 'स्वच्छता का समाज शास्त्र' विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ करने के बाद उन्होंने कहा कि समाज में फैली तमाम असमानताओं और कुरीतियों को दूर करने की जिम्मेदारी संसद की है। संसद निर्बाध रूप से चलनी चाहिए ताकि कानून भी अपनी जिम्मेदारी निभाता रहे। उन्होंने कहा कि समाज में निचले पायदान पर खड़े लोगों को उचित सम्मान दिलाने के साथ ऊपर उठाने का काम भी संसद को ही करना होगा, इसलिए उन्हें खुद ही क्रांतिकारी की भूमिका निभानी होगी। सफाई के मुद्दे पर मीरा कुमार ने कहा कि संपूर्ण स्वच्छता अभियान यानी खुले में शौच प्रथा तभी खत्म होगी, जब लोग अपने दिमाग की गंदगी को साफ कर सकेंगे।
संयुक्त राष्ट्र संघ ने सन 2012 को अंतर्राष्ट्रीय सहकार वर्ष के रूप घोषित किया है। जो कि सहकार क्षेत्र की असीम ऊर्जा और सुप्त सामर्थ्य की गवाही देने के लिये पर्याप्त है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने सन 2012 को अंतर्राष्ट्रीय सहकार वर्ष के रूप घोषित किया है। जो कि सहकार क्षेत्र की असीम ऊर्जा और सुप्त सामर्थ्य की गवाही देने के लिये पर्याप्त है। विद्युत विभाग में कार्यरत मजदूरों के कल्याण के लिए काफी संघर्ष के बाद एक ऐसी योजना अमल में लाई गई, जिसके आधार पर दुर्घटना की स्थिति में मजदूरों के परिजनों को आर्थिक मदद दी जा सके। बैंक उद्योग में भारतीय मजदूर संघ की विचारधारा तथा कार्यप्रणाली का प्रतिनिधित्व करते हेतु नेशनल ऑर्गनाइजेेशन ऑफ बैंक वर्कर्स (एन.ओ.बी.डब्ल्यू.) नामक महासंघ की शुरूआत सन् 1965 में हुआ। सन् 1962 में चीनने यकायक भारत की उत्तरी क्षेत्रपर आक्रमण किया। चीन के प्रधानमंत्री श्री. चाड एन. लाय. कुछही दिन पहले भारत में आए थे। भारत की सभ्यता, स्वभाव और संस्कृती के अनुसार उनका यथोचित स्वागत किया गया। भारतीय मजदूर संघ महाराष्ट्र प्रदेशका त्रै-वार्षिक अधिवेशन फरवरी माह मे सातारा मे संपन्न हुआ। इस अधिवेशन मे व्हीजन डाक्युमेंट (प्रदेश का संकल्प) 2012-2015 प्रस्तुत किया गया। अगले तीन वर्ष में प्रदेश का कार्य कैसा रहेगा, कौन कौन से उद्योग में कार्य बढाने के लिए प्राधान्य दिया जायेगा इसका ब्योरा व्हिजन डाक्युमेंट में है। हम सभी इस वास्तविकता से भली-भांति परिचित हैं कि उन्नीसवीं सदी के प्रथम व द्वितीय दशक तक अंग्रेजों ने भारत वर्ष को पूर्ण रूप से अपने कब्जे में ले लिया था। भारतीय जनता पाटी, मुंबई द्वारा महानगर के चिकित्सकों का प्रकोष्ठ बनाया गया है। इसमें अस्पतालों, दवाखानों और ईएसआई के चिकित्सक शामिल हैं। इस प्रकोष्ठ के संयोजक डॉ. विवेक देशपाण्डेजी हैं। बाबा के भक्तों का यह आंकड़ा इस बार भी किसी कीर्तिमान से कम नहीं दिख रहा, इस सबके बावजूद इस वर्ष की यात्रा की अवधि को मनमाने तरीके से घटाकर 39 दिन कर दिया गया है, जिसे किसी भी तरह से तर्क-संगत नहीं कहा जा सकता है। तुलसीदास जिस समय अपने विश्वप्रसिद्ध प्रबंध 'रामचरित मानस' की रचना कर रहे थे, देश में मुस्लिम शासकों का साम्राज्य स्थापित हो चुका था। मुसलमान परम्पराये, रहन-सहन और संस्कृति भारतीय हिन्दू पराम्पराओं और सनातन संस्कृति से मेल नहीं खाती थीं। पिछाले दो माह से घरों में, रास्तो में, नाकों पर, रेल के डिब्बो में, समाचार पत्रो में, चैनलो पर देश तथा समाज की विभिन्न गंभीर समस्याओं के बारे में चर्चाएँ हो रही हैं।
संयुक्त राष्ट्र संघ ने सन दो हज़ार बारह को अंतर्राष्ट्रीय सहकार वर्ष के रूप घोषित किया है। जो कि सहकार क्षेत्र की असीम ऊर्जा और सुप्त सामर्थ्य की गवाही देने के लिये पर्याप्त है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने सन दो हज़ार बारह को अंतर्राष्ट्रीय सहकार वर्ष के रूप घोषित किया है। जो कि सहकार क्षेत्र की असीम ऊर्जा और सुप्त सामर्थ्य की गवाही देने के लिये पर्याप्त है। विद्युत विभाग में कार्यरत मजदूरों के कल्याण के लिए काफी संघर्ष के बाद एक ऐसी योजना अमल में लाई गई, जिसके आधार पर दुर्घटना की स्थिति में मजदूरों के परिजनों को आर्थिक मदद दी जा सके। बैंक उद्योग में भारतीय मजदूर संघ की विचारधारा तथा कार्यप्रणाली का प्रतिनिधित्व करते हेतु नेशनल ऑर्गनाइजेेशन ऑफ बैंक वर्कर्स नामक महासंघ की शुरूआत सन् एक हज़ार नौ सौ पैंसठ में हुआ। सन् एक हज़ार नौ सौ बासठ में चीनने यकायक भारत की उत्तरी क्षेत्रपर आक्रमण किया। चीन के प्रधानमंत्री श्री. चाड एन. लाय. कुछही दिन पहले भारत में आए थे। भारत की सभ्यता, स्वभाव और संस्कृती के अनुसार उनका यथोचित स्वागत किया गया। भारतीय मजदूर संघ महाराष्ट्र प्रदेशका त्रै-वार्षिक अधिवेशन फरवरी माह मे सातारा मे संपन्न हुआ। इस अधिवेशन मे व्हीजन डाक्युमेंट दो हज़ार बारह-दो हज़ार पंद्रह प्रस्तुत किया गया। अगले तीन वर्ष में प्रदेश का कार्य कैसा रहेगा, कौन कौन से उद्योग में कार्य बढाने के लिए प्राधान्य दिया जायेगा इसका ब्योरा व्हिजन डाक्युमेंट में है। हम सभी इस वास्तविकता से भली-भांति परिचित हैं कि उन्नीसवीं सदी के प्रथम व द्वितीय दशक तक अंग्रेजों ने भारत वर्ष को पूर्ण रूप से अपने कब्जे में ले लिया था। भारतीय जनता पाटी, मुंबई द्वारा महानगर के चिकित्सकों का प्रकोष्ठ बनाया गया है। इसमें अस्पतालों, दवाखानों और ईएसआई के चिकित्सक शामिल हैं। इस प्रकोष्ठ के संयोजक डॉ. विवेक देशपाण्डेजी हैं। बाबा के भक्तों का यह आंकड़ा इस बार भी किसी कीर्तिमान से कम नहीं दिख रहा, इस सबके बावजूद इस वर्ष की यात्रा की अवधि को मनमाने तरीके से घटाकर उनतालीस दिन कर दिया गया है, जिसे किसी भी तरह से तर्क-संगत नहीं कहा जा सकता है। तुलसीदास जिस समय अपने विश्वप्रसिद्ध प्रबंध 'रामचरित मानस' की रचना कर रहे थे, देश में मुस्लिम शासकों का साम्राज्य स्थापित हो चुका था। मुसलमान परम्पराये, रहन-सहन और संस्कृति भारतीय हिन्दू पराम्पराओं और सनातन संस्कृति से मेल नहीं खाती थीं। पिछाले दो माह से घरों में, रास्तो में, नाकों पर, रेल के डिब्बो में, समाचार पत्रो में, चैनलो पर देश तथा समाज की विभिन्न गंभीर समस्याओं के बारे में चर्चाएँ हो रही हैं।
पंजाब सरकार द्वारा नौवें पातशाह गुरु तेग बहादुर जी की 400वीं जयंती को समर्पित कार्यक्रमों की एक श्रृंखला में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित की जा रही प्रतियोगिताओं के लिए छात्रों में बहुत उत्साह है और ये प्रतियोगिताओं बहुत साबित हो रही हैं। छात्रों के लिए फायदेमंद। उनके साथ, जहां उनका ज्ञान बढ़ रहा है, वे उनकी समृद्ध विरासत से भी जुड़ रहे हैं। यह जानकारी देते हुए जिला शिक्षा अधिकारी हिम्मत सिंह ने कहा कि इन प्रतियोगिताओं के तहत पहले पेंटिंग प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। इसके बाद शब्द गायन, निबंध लेखन सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा और विजेता छात्रों को सम्मानित भी किया जाएगा। गुरु साहिब की जयंती को समर्पित शैक्षिक प्रतियोगिताओं के लिए छात्रों में बहुत उत्साह था। उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी की 400 वीं जयंती के लिए समर्पित इन प्रतियोगिताओं से न केवल छात्रों को गुरु साहिब की शिक्षाओं के बारे में जानने में मदद मिलेगी, बल्कि उन्हें उनकी समृद्ध विरासत से जोड़ा जा सकेगा। नौवें पातशाह गुरु तेग बहादुर जी ने हमें उत्पीड़न के खिलाफ लड़ना सिखाया है और हमेशा कमजोरों के लिए खड़े होने का संदेश दिया है।
पंजाब सरकार द्वारा नौवें पातशाह गुरु तेग बहादुर जी की चार सौवीं जयंती को समर्पित कार्यक्रमों की एक श्रृंखला में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित की जा रही प्रतियोगिताओं के लिए छात्रों में बहुत उत्साह है और ये प्रतियोगिताओं बहुत साबित हो रही हैं। छात्रों के लिए फायदेमंद। उनके साथ, जहां उनका ज्ञान बढ़ रहा है, वे उनकी समृद्ध विरासत से भी जुड़ रहे हैं। यह जानकारी देते हुए जिला शिक्षा अधिकारी हिम्मत सिंह ने कहा कि इन प्रतियोगिताओं के तहत पहले पेंटिंग प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। इसके बाद शब्द गायन, निबंध लेखन सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा और विजेता छात्रों को सम्मानित भी किया जाएगा। गुरु साहिब की जयंती को समर्पित शैक्षिक प्रतियोगिताओं के लिए छात्रों में बहुत उत्साह था। उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी की चार सौ वीं जयंती के लिए समर्पित इन प्रतियोगिताओं से न केवल छात्रों को गुरु साहिब की शिक्षाओं के बारे में जानने में मदद मिलेगी, बल्कि उन्हें उनकी समृद्ध विरासत से जोड़ा जा सकेगा। नौवें पातशाह गुरु तेग बहादुर जी ने हमें उत्पीड़न के खिलाफ लड़ना सिखाया है और हमेशा कमजोरों के लिए खड़े होने का संदेश दिया है।
अक्सर ये बात सुनने को मिलती है कि हिन्दू धर्म में 33 करोड़ देवी देवता है. यदि नाम पूछो तो कोई नहीं बता सकता और ना ही कोई ये बताता है कि किस वेद ,पुराण या ग्रन्थ में सनातन धर्म के 33 करोड़ देवी देवताओं का वर्णन है. आज हम आपको बताते है कि असल में कितने भगवान है हिन्दू धर्म में. क्या है 33 करोड़ देवी देवताओं की कहानी के पीछे का सच? सनातन धर्म में 33 करोड़ देवी देवता नहीं है. हिन्दू धर्म के शास्त्रों के अनुसार सम्पूर्ण सृष्टि को चलाने वाला एक ही ईश्वर है. वही शिव है, वही विष्णु और वही ब्रह्मा. उस ईश्वर के अलग अलग कार्यों की वजह से उसे अलग अलग नाम दिया जाता है. सृष्टि का निर्माण करते समय वही ईश्वर ब्रह्मा कहलाता है, पालनकर्ता के रूप में उसे विष्णु कहते है और जब वही ईश्वर सृष्टि का संहार करता है तो उसे शिव कहते है. सनातन धर्म के प्रमुख ग्रंथों में पुराण और उपनिषदों का विशेष स्थान है. एक ईश्वर और उसके रूपों के बारे में भी इन्ही उपनिषदों में से एक में विस्तृत वर्णन किया गया है. इस उपनिषद के अनुसार इश्वर केवल एक है और 33 उसके अलग अलग रूप है. इसका मतलब ये है कि 33 हज़ार, 33 लाख या 33 करोड़ देवी देवता सब गलत आंकड़े है. सच तो ये है कि ये संख्या केवल 33 है. इन 33 शक्तियों या देव अंशों की भी विस्तृत रूप से व्याख्या की गयी है. एक सर्वशक्तिमान ईश्वर के अलावा 8 वसु, 11 रूद्र, 12 आदित्य मिलकर ये संख्या 31 करते है और इंद्र और प्रजापति मिलकर 33 हो जाते है. इन 33 ईश्वर अंशों से ही सम्पूर्ण सृष्टि का निर्माण होता है. 8 वसु मिलकर पूरे ब्रह्मांड का निर्माण करते है. अग्नि, वायु,आकाश,सूर्य, स्वर्ग, चंद्रमा,जल और तारे ये सब 8 वसु है और ब्रह्मांड का निर्माण इनसे ही होता है. इन्ही से जीवन का निर्माण होता है. हर चल अचल वास्तु इन्ही 8 तत्वों से बने है. मानव अंग और संवेदनाओं को मिलाकर 10 रूद्र होते है और 11 रूद्र मस्तिष्क को माना जाता है. 8 तत्वों से बने शरीर में जान इन्हीं 11 रुद्रों की वजह से आती है. जब ये 11 रूद्र शरीर छोड़ देते है तो मनुष्य का शरीर प्राणहीन हो जाता है. 12 आदित्य वर्ष के 12 महीने होते है. सृष्टि की गति इन्हीं 12 आदित्यों के अनुसार चलती है. से चक्र, दिन रात और ऋतुओं का बदलना सभी कुछ इन्हीं 12 आदित्यों की देन है. ये सब मिलाकर संख्या 31 होती है और कुछ लोग इंद्र और प्रजापति तो कुछ लोग दो अश्विनी कुमारों को जोड़ कर ये संख्या 33 बताते है. इस तरह असल में ईश्वर तो सनातन धर्म में भी एक ही है और उसके 33 अलग अलग तत्व है जो सृष्टि का निर्माण भी करते है और इस सृष्टि को चलाते भी है. उपनिषदों में 33 कोटि देवों के बारे में लिखा गया है लेकिन इसमें कोटि का अर्थ करोड़ नहीं है, कोटि का यहाँ अर्थ प्रकार है. इस तरह उपनिषद में 33 कोटि का अभिप्राय ईश्वर के 33 प्रकार से है ना कि 33 करोड़ देवी देवता .
अक्सर ये बात सुनने को मिलती है कि हिन्दू धर्म में तैंतीस करोड़ देवी देवता है. यदि नाम पूछो तो कोई नहीं बता सकता और ना ही कोई ये बताता है कि किस वेद ,पुराण या ग्रन्थ में सनातन धर्म के तैंतीस करोड़ देवी देवताओं का वर्णन है. आज हम आपको बताते है कि असल में कितने भगवान है हिन्दू धर्म में. क्या है तैंतीस करोड़ देवी देवताओं की कहानी के पीछे का सच? सनातन धर्म में तैंतीस करोड़ देवी देवता नहीं है. हिन्दू धर्म के शास्त्रों के अनुसार सम्पूर्ण सृष्टि को चलाने वाला एक ही ईश्वर है. वही शिव है, वही विष्णु और वही ब्रह्मा. उस ईश्वर के अलग अलग कार्यों की वजह से उसे अलग अलग नाम दिया जाता है. सृष्टि का निर्माण करते समय वही ईश्वर ब्रह्मा कहलाता है, पालनकर्ता के रूप में उसे विष्णु कहते है और जब वही ईश्वर सृष्टि का संहार करता है तो उसे शिव कहते है. सनातन धर्म के प्रमुख ग्रंथों में पुराण और उपनिषदों का विशेष स्थान है. एक ईश्वर और उसके रूपों के बारे में भी इन्ही उपनिषदों में से एक में विस्तृत वर्णन किया गया है. इस उपनिषद के अनुसार इश्वर केवल एक है और तैंतीस उसके अलग अलग रूप है. इसका मतलब ये है कि तैंतीस हज़ार, तैंतीस लाख या तैंतीस करोड़ देवी देवता सब गलत आंकड़े है. सच तो ये है कि ये संख्या केवल तैंतीस है. इन तैंतीस शक्तियों या देव अंशों की भी विस्तृत रूप से व्याख्या की गयी है. एक सर्वशक्तिमान ईश्वर के अलावा आठ वसु, ग्यारह रूद्र, बारह आदित्य मिलकर ये संख्या इकतीस करते है और इंद्र और प्रजापति मिलकर तैंतीस हो जाते है. इन तैंतीस ईश्वर अंशों से ही सम्पूर्ण सृष्टि का निर्माण होता है. आठ वसु मिलकर पूरे ब्रह्मांड का निर्माण करते है. अग्नि, वायु,आकाश,सूर्य, स्वर्ग, चंद्रमा,जल और तारे ये सब आठ वसु है और ब्रह्मांड का निर्माण इनसे ही होता है. इन्ही से जीवन का निर्माण होता है. हर चल अचल वास्तु इन्ही आठ तत्वों से बने है. मानव अंग और संवेदनाओं को मिलाकर दस रूद्र होते है और ग्यारह रूद्र मस्तिष्क को माना जाता है. आठ तत्वों से बने शरीर में जान इन्हीं ग्यारह रुपयाद्रों की वजह से आती है. जब ये ग्यारह रूद्र शरीर छोड़ देते है तो मनुष्य का शरीर प्राणहीन हो जाता है. बारह आदित्य वर्ष के बारह महीने होते है. सृष्टि की गति इन्हीं बारह आदित्यों के अनुसार चलती है. से चक्र, दिन रात और ऋतुओं का बदलना सभी कुछ इन्हीं बारह आदित्यों की देन है. ये सब मिलाकर संख्या इकतीस होती है और कुछ लोग इंद्र और प्रजापति तो कुछ लोग दो अश्विनी कुमारों को जोड़ कर ये संख्या तैंतीस बताते है. इस तरह असल में ईश्वर तो सनातन धर्म में भी एक ही है और उसके तैंतीस अलग अलग तत्व है जो सृष्टि का निर्माण भी करते है और इस सृष्टि को चलाते भी है. उपनिषदों में तैंतीस कोटि देवों के बारे में लिखा गया है लेकिन इसमें कोटि का अर्थ करोड़ नहीं है, कोटि का यहाँ अर्थ प्रकार है. इस तरह उपनिषद में तैंतीस कोटि का अभिप्राय ईश्वर के तैंतीस प्रकार से है ना कि तैंतीस करोड़ देवी देवता .
बीकानेर । 'हाथ का हुनर ही आज की सबसे बड़ी ताकत है इसलिए इसी का प्रचार-प्रसार अति आवश्यक है' ये उद्बोधन जन शिक्षण संस्थान, बीकानेर के अध्यक्ष अविनाश भार्गव ने कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा द्वारा संचालित जन शिक्षण संस्थान बीकानेर द्वारा नोखा के नगर पालिका सभागार में जी-20 के तहत आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के अवसर पर कही। कार्यक्रम कर अध्यक्षता करते हुए भार्गव ने कहा कि वर्तमान समय में कौशल विकास से ही बेरोजगारी जैसी भयंकर समस्या का समाधान हो सकता है। जी-20 के सन्दर्भ को समझाते हुए प्रशिक्षणार्थियों को कहा कि सम्पूर्ण विकास की अवधारणा को पूरा करने के लिए ये समूह काम करता है और इस वर्ष इसकी मेजबानी हमारा देश कर रहा है ये बहुत ही गर्व की बात है। मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए नगर पालिका नोखा के सहायक अधिशषी अधिकारी राजू जी ने प्रशिक्षणार्थियों को कहा कि आपको इस कौशल को प्राप्त करने का अवसर मिला है ये बहुत ही बड़ी बात है। आप इसे रोजगार का साधन बनाना चाहिए। कार्यक्रम का संयोजन करते हुए कार्यक्रम अधिकारी महेश उपाध्याय ने बताया कि मंगलवार को उद्यमिता पर जागरूकता सृजन कार्यक्रम, पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता, वृक्षारोपण अभियान, कैरियर विकल्प के रूप में उद्यमिता पर सत्रा, योग प्रतियोगिता आयोजित किये गये। जिसमें पोस्टर प्रतियोगिता प्रशिक्षणार्थियों ने जी-20 की थीम को लेकर विभिन्न पोस्टर बनाये। राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, सुरपुरा के वरिष्ठ अध्यापक महेन्द्र फगेड़िया ने कहा कि संस्थान की गतिविधियों से नोखा में कौशल विकास के साथ-साथ समाजिक सरोकार की गतिविधियों के आयोजन भी सार्थक सिद्ध हो रहे है। राजकीय सी. सै. विद्यालय रोड़ा की उप प्राचार्य पिंकी जोशी ने महिलाओं के इस कार्यक्रम को अनूठा बताते हुए कहा कि इसमें रोचकता के साथ लक्ष्य प्राप्ति भी शामिल है। वरिष्ठ शिक्षक एवं जड़ाव बाई झंवर सैकण्डरी स्कूल, चरकड़ा के निदेशक हनुमान दास रांकावत ने कहा कि आदि काल में भी हुनर का अपना महत्व हुआ करता था। आज भी हर व्यक्ति में अलग-अलग हुनर मौजूद है परन्तु उस में निखार लाने काम करना बाकी है जो जन शिक्षण संस्थान कर रहा है। सहायक कार्यक्रम अधिकारी उमाशंकर आचार्य ने आगन्तुकों को धन्यवाद देते हुए कहा कि कौशल विकास कार्यक्रमों के साथ-साथ एक जून से 15 जून तक जी-20 की गतिविधियां संस्थान की ओर से जिलेभर में आयोजित की जा रही है। तलत जी रियाज ने पोस्टर प्रतियोगिता का परिणाम बताते हुए बताया कि अनिता सुथार पहले स्थान पर, मैना सुथार दूसरे स्थान पर, आरती नायक तीसरे पर और ममता लेघा चैथे स्थान पर रही है। प्रशिक्षणार्थी मंजू गर्ग ने अपनी सफल कहानी को शब्दों में बखान किया। संदर्भ व्यक्ति नीतू चैधरी, आशा जोशी, सरिता शर्मा, प्रदीप यादव, मंजू विश्नोई, रामदेव मकवाना, संतोष कुमावत, मंजू रांकावत ने सक्रिय भूमिका निभाई। संस्थान के विष्णुदत्त मारू ने सक्रिय भूमिका निभाई।
बीकानेर । 'हाथ का हुनर ही आज की सबसे बड़ी ताकत है इसलिए इसी का प्रचार-प्रसार अति आवश्यक है' ये उद्बोधन जन शिक्षण संस्थान, बीकानेर के अध्यक्ष अविनाश भार्गव ने कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा द्वारा संचालित जन शिक्षण संस्थान बीकानेर द्वारा नोखा के नगर पालिका सभागार में जी-बीस के तहत आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के अवसर पर कही। कार्यक्रम कर अध्यक्षता करते हुए भार्गव ने कहा कि वर्तमान समय में कौशल विकास से ही बेरोजगारी जैसी भयंकर समस्या का समाधान हो सकता है। जी-बीस के सन्दर्भ को समझाते हुए प्रशिक्षणार्थियों को कहा कि सम्पूर्ण विकास की अवधारणा को पूरा करने के लिए ये समूह काम करता है और इस वर्ष इसकी मेजबानी हमारा देश कर रहा है ये बहुत ही गर्व की बात है। मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए नगर पालिका नोखा के सहायक अधिशषी अधिकारी राजू जी ने प्रशिक्षणार्थियों को कहा कि आपको इस कौशल को प्राप्त करने का अवसर मिला है ये बहुत ही बड़ी बात है। आप इसे रोजगार का साधन बनाना चाहिए। कार्यक्रम का संयोजन करते हुए कार्यक्रम अधिकारी महेश उपाध्याय ने बताया कि मंगलवार को उद्यमिता पर जागरूकता सृजन कार्यक्रम, पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता, वृक्षारोपण अभियान, कैरियर विकल्प के रूप में उद्यमिता पर सत्रा, योग प्रतियोगिता आयोजित किये गये। जिसमें पोस्टर प्रतियोगिता प्रशिक्षणार्थियों ने जी-बीस की थीम को लेकर विभिन्न पोस्टर बनाये। राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, सुरपुरा के वरिष्ठ अध्यापक महेन्द्र फगेड़िया ने कहा कि संस्थान की गतिविधियों से नोखा में कौशल विकास के साथ-साथ समाजिक सरोकार की गतिविधियों के आयोजन भी सार्थक सिद्ध हो रहे है। राजकीय सी. सै. विद्यालय रोड़ा की उप प्राचार्य पिंकी जोशी ने महिलाओं के इस कार्यक्रम को अनूठा बताते हुए कहा कि इसमें रोचकता के साथ लक्ष्य प्राप्ति भी शामिल है। वरिष्ठ शिक्षक एवं जड़ाव बाई झंवर सैकण्डरी स्कूल, चरकड़ा के निदेशक हनुमान दास रांकावत ने कहा कि आदि काल में भी हुनर का अपना महत्व हुआ करता था। आज भी हर व्यक्ति में अलग-अलग हुनर मौजूद है परन्तु उस में निखार लाने काम करना बाकी है जो जन शिक्षण संस्थान कर रहा है। सहायक कार्यक्रम अधिकारी उमाशंकर आचार्य ने आगन्तुकों को धन्यवाद देते हुए कहा कि कौशल विकास कार्यक्रमों के साथ-साथ एक जून से पंद्रह जून तक जी-बीस की गतिविधियां संस्थान की ओर से जिलेभर में आयोजित की जा रही है। तलत जी रियाज ने पोस्टर प्रतियोगिता का परिणाम बताते हुए बताया कि अनिता सुथार पहले स्थान पर, मैना सुथार दूसरे स्थान पर, आरती नायक तीसरे पर और ममता लेघा चैथे स्थान पर रही है। प्रशिक्षणार्थी मंजू गर्ग ने अपनी सफल कहानी को शब्दों में बखान किया। संदर्भ व्यक्ति नीतू चैधरी, आशा जोशी, सरिता शर्मा, प्रदीप यादव, मंजू विश्नोई, रामदेव मकवाना, संतोष कुमावत, मंजू रांकावत ने सक्रिय भूमिका निभाई। संस्थान के विष्णुदत्त मारू ने सक्रिय भूमिका निभाई।
सर्दी के मौसम में मूंगफली (Peanuts) अधिकतर लोगों के लिए टाइम पास स्नैक्स होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं मूंगफली का सेवन सेहत को भी कई लाभ पहुंचाता है। जी हां क्योंकि मूंगफली पोषक तत्वों से भरपूर होता है। मूंगफली में प्रोटीन, वसा, विटामिन, फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट, आयरन, विटामिन ई, विटामिन बी6, ओमेगा 3 फैटी एसिड, ओमेगा 6 फैटी एसिड और कैल्शियम जैसे जरूरी तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, साथ ही इसकी तासरी भी गर्म होती है। इसलिए अगर आप सर्दियों के मौसम में मूंगफली का सेवन करते हैं, तो इससे स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं से छुटकारा मिलता है। तो आइए जानते हैं सर्दियों में मूंगफली खाने के क्या-क्या फायदे होते हैं। सर्दी के मौसम में सर्दी-जुकाम (Cold) की समस्या हो जाती है, लेकिन अगर आप मूंगफली का सेवन करते हैं, तो इससे सर्दी-जुकाम की समस्या से छुटकारा मिलता है. क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है, जो शरीर को अंदर से गर्माहट पहुंचाता है। सर्दी के मौसम में दिल (Heart) संबंधी कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, लेकिन अगर आप सर्दी के मौसम में मूंगफली का सेवन करते हैं, तो यह फायदेमंद होता है। क्योंकि मूंगफली एंटी ऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होता है, जो दिल को स्वस्थ रखने में मदद करता है। जिससे दिल से जुड़ी बीमारियों का जोखिम कम होता है। मूंगफली का सेवन डायबिटीज (Diabetes) के मरीजों के लिए फायदेमंद होता है। क्योंकि मूंगफली में कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मददगार साबित होते हैं। अगर आप वजन (Weight) कम करना चाहते हैं, तो आपको मूंगफली का सेवन करना चाहिए। क्योंकि मूंगफली में फाइबर पाया जाता है, इसलिए अगर आप सीमित मात्रा में मूंगफली का सेवन करते हैं, तो इससे वजन कम करने में फायदा मिलता है। मूंगफली का सेवन करने से हड्डियां (Bones) मजबूत होती है और हड्डियों से जुड़ी बीमारियों का जोखिम कम होता है। क्योंकि मूंगफली में कैल्शियम की भरपूर मात्रा पाई जाती है, जो हड्डियों के लिए बेहद जरूरी होते हैं। मूंगफली का सेवन ब्लड प्रेशर (Blood Pressure) की शिकायत होने पर फायदेमंद होता है। क्योंकि मूंगफली में पोटेशियम, कॉपर और मैग्नीशियम जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं। जिससे हार्ट से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम होता है। अस्वीकरणः सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें। स्पोर्ट्सकीड़ा हिंदी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
सर्दी के मौसम में मूंगफली अधिकतर लोगों के लिए टाइम पास स्नैक्स होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं मूंगफली का सेवन सेहत को भी कई लाभ पहुंचाता है। जी हां क्योंकि मूंगफली पोषक तत्वों से भरपूर होता है। मूंगफली में प्रोटीन, वसा, विटामिन, फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट, आयरन, विटामिन ई, विटामिन बीछः, ओमेगा तीन फैटी एसिड, ओमेगा छः फैटी एसिड और कैल्शियम जैसे जरूरी तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, साथ ही इसकी तासरी भी गर्म होती है। इसलिए अगर आप सर्दियों के मौसम में मूंगफली का सेवन करते हैं, तो इससे स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं से छुटकारा मिलता है। तो आइए जानते हैं सर्दियों में मूंगफली खाने के क्या-क्या फायदे होते हैं। सर्दी के मौसम में सर्दी-जुकाम की समस्या हो जाती है, लेकिन अगर आप मूंगफली का सेवन करते हैं, तो इससे सर्दी-जुकाम की समस्या से छुटकारा मिलता है. क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है, जो शरीर को अंदर से गर्माहट पहुंचाता है। सर्दी के मौसम में दिल संबंधी कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, लेकिन अगर आप सर्दी के मौसम में मूंगफली का सेवन करते हैं, तो यह फायदेमंद होता है। क्योंकि मूंगफली एंटी ऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होता है, जो दिल को स्वस्थ रखने में मदद करता है। जिससे दिल से जुड़ी बीमारियों का जोखिम कम होता है। मूंगफली का सेवन डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद होता है। क्योंकि मूंगफली में कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मददगार साबित होते हैं। अगर आप वजन कम करना चाहते हैं, तो आपको मूंगफली का सेवन करना चाहिए। क्योंकि मूंगफली में फाइबर पाया जाता है, इसलिए अगर आप सीमित मात्रा में मूंगफली का सेवन करते हैं, तो इससे वजन कम करने में फायदा मिलता है। मूंगफली का सेवन करने से हड्डियां मजबूत होती है और हड्डियों से जुड़ी बीमारियों का जोखिम कम होता है। क्योंकि मूंगफली में कैल्शियम की भरपूर मात्रा पाई जाती है, जो हड्डियों के लिए बेहद जरूरी होते हैं। मूंगफली का सेवन ब्लड प्रेशर की शिकायत होने पर फायदेमंद होता है। क्योंकि मूंगफली में पोटेशियम, कॉपर और मैग्नीशियम जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं। जिससे हार्ट से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम होता है। अस्वीकरणः सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें। स्पोर्ट्सकीड़ा हिंदी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
सेन फ्रांसिस्को, 18 नवंबर (आईएएनएस)। माइक्रोसॉफ्ट ने अमेजन से उनके दो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) क्षमता से लैस सहायक एलेक्सा को कॉर्टाना से जोड़ने को किए गए समझौते के बाद माइक्रोसॉफ्ट ने अपने खुदरा स्टोर्स पर अब अमेजन के ईको डिवाइसेज की बिक्री शुरू कर दी है। 'द वर्ज' की शनिवार की रपट के अनुसार, अमेजन के 'ईको डॉट' और ईको डिवाइसेज अमेरिका में ऑनलाइन और माइक्रोसॉफ्ट के स्टोर्स पर उपलब्ध हैं। माइक्रोसॉफ्ट चार साल पहले विंडो फोन पर कॉर्टाना को लेकर आया था। 'विंडो 10' में यह मूल क्षमता बन गया। रपट के अनुसार, सॉफ्टवेयर निर्माता कंपनी अब इसे इसके वास्तविक उपभोक्ता-केंद्रित क्षेत्र से हटाकर व्यापारिक क्षेत्र में भेजती दिख रही है। इसके अनुसार, माइक्रोसॉफ्ट अपना ध्यान लगातार अमेजन साझेदारी और एलेक्सा को साथ लाने पर है। माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन ने पिछले वर्ष अपने वर्चुअल सहायकों को एक करने की घोषणा की थी। माइक्रोसॉफ्ट ने दो एआई सहायकों के बीच पहला ऐसा एकीकरण इस वर्ष मई में हुए 'बुल्ट 2018' डेवलपर्स सम्मेलन में किया था। माइक्रोसॉफ्ट कॉर्टाना की महाप्रबंधक मेगन सांडर्स और अमेजन एलेक्सा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष टॉम टेलर ने बताया कि निकट भविष्य में एलेक्सा और कॉर्टाना साथ में कैसे काम करेंगे।
सेन फ्रांसिस्को, अट्ठारह नवंबर । माइक्रोसॉफ्ट ने अमेजन से उनके दो कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षमता से लैस सहायक एलेक्सा को कॉर्टाना से जोड़ने को किए गए समझौते के बाद माइक्रोसॉफ्ट ने अपने खुदरा स्टोर्स पर अब अमेजन के ईको डिवाइसेज की बिक्री शुरू कर दी है। 'द वर्ज' की शनिवार की रपट के अनुसार, अमेजन के 'ईको डॉट' और ईको डिवाइसेज अमेरिका में ऑनलाइन और माइक्रोसॉफ्ट के स्टोर्स पर उपलब्ध हैं। माइक्रोसॉफ्ट चार साल पहले विंडो फोन पर कॉर्टाना को लेकर आया था। 'विंडो दस' में यह मूल क्षमता बन गया। रपट के अनुसार, सॉफ्टवेयर निर्माता कंपनी अब इसे इसके वास्तविक उपभोक्ता-केंद्रित क्षेत्र से हटाकर व्यापारिक क्षेत्र में भेजती दिख रही है। इसके अनुसार, माइक्रोसॉफ्ट अपना ध्यान लगातार अमेजन साझेदारी और एलेक्सा को साथ लाने पर है। माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन ने पिछले वर्ष अपने वर्चुअल सहायकों को एक करने की घोषणा की थी। माइक्रोसॉफ्ट ने दो एआई सहायकों के बीच पहला ऐसा एकीकरण इस वर्ष मई में हुए 'बुल्ट दो हज़ार अट्ठारह' डेवलपर्स सम्मेलन में किया था। माइक्रोसॉफ्ट कॉर्टाना की महाप्रबंधक मेगन सांडर्स और अमेजन एलेक्सा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष टॉम टेलर ने बताया कि निकट भविष्य में एलेक्सा और कॉर्टाना साथ में कैसे काम करेंगे।
२१८ - सम्ययत्यपराक्रम ( ३ ) वृक्ष को मूल से ही काट गिराया जाये तो सरलता से आम ले सकेंगे । इस प्रकार पहले मनुष्य ने केवल आमो के लिए सारे वृक्ष को हो काट डालने का विचार किया । शास्त्र कहता है, इस प्रकार विचार करने वाला मनुष्य कृष्णलेश्या वाला है। क्योंकि वह थोड़े से लाभ के लिए महान् अनय करने को तैयार हुआ है। वृक्ष काट डालने से केवल उन्हें ही थोडे से फल, मिल जाएगे परन्तु वृक्ष अगर कायम रहा तो न जाने कितने लोगो को आम मिलेंगे। ऐसा होने पर भी वह मनुष्य स्वाय मे श्रधा होकर महान् अनथ करने पर उतारू हो गया है। वह कृष्णलेश्या वाला है । दूसरे मनुष्य ने पहले से कहा - भाई । सारा 'पेड काटने से क्या लाभ । अगर वृक्ष को शाखाओ को वाट लिया जाये तो फल भी मिल जाएंगे और वृक्ष भी कायम रह सकेगा।' इस दूसरे मनुष्य को लेश्या भी थोडे लाभ के लिए विशेष हानि करने की है, फिर भी पहले मनुष्य की अपेक्षा अच्छी है । अतएव दूसरा मनुष्य नीललेश्या वाला कहलाता है । कहा भाई । आम तने मे तो लगे नही । आम तो छोटी-छोटी डालियो मे लगते हैं, फिर वृक्ष की शाखा कोटने से क्या लाभ है ? छोटी डालिया काट लेना ही अच्छा है, इससे हमे आम भी मिल जाएंगे और वृक्ष भी बचा रहेगा। इस तीसरे मनुष्य के विचार के अनुसार काय होने मे हानि अधिक और लाभ थोडा है, अतएव इसको लेश्या कापोती होने के कारण पापकारिणी तो है हो, फिर भी पहले और दूसरे मनुष्य की लेश्या की
दो सौ अट्ठारह - सम्ययत्यपराक्रम वृक्ष को मूल से ही काट गिराया जाये तो सरलता से आम ले सकेंगे । इस प्रकार पहले मनुष्य ने केवल आमो के लिए सारे वृक्ष को हो काट डालने का विचार किया । शास्त्र कहता है, इस प्रकार विचार करने वाला मनुष्य कृष्णलेश्या वाला है। क्योंकि वह थोड़े से लाभ के लिए महान् अनय करने को तैयार हुआ है। वृक्ष काट डालने से केवल उन्हें ही थोडे से फल, मिल जाएगे परन्तु वृक्ष अगर कायम रहा तो न जाने कितने लोगो को आम मिलेंगे। ऐसा होने पर भी वह मनुष्य स्वाय मे श्रधा होकर महान् अनथ करने पर उतारू हो गया है। वह कृष्णलेश्या वाला है । दूसरे मनुष्य ने पहले से कहा - भाई । सारा 'पेड काटने से क्या लाभ । अगर वृक्ष को शाखाओ को वाट लिया जाये तो फल भी मिल जाएंगे और वृक्ष भी कायम रह सकेगा।' इस दूसरे मनुष्य को लेश्या भी थोडे लाभ के लिए विशेष हानि करने की है, फिर भी पहले मनुष्य की अपेक्षा अच्छी है । अतएव दूसरा मनुष्य नीललेश्या वाला कहलाता है । कहा भाई । आम तने मे तो लगे नही । आम तो छोटी-छोटी डालियो मे लगते हैं, फिर वृक्ष की शाखा कोटने से क्या लाभ है ? छोटी डालिया काट लेना ही अच्छा है, इससे हमे आम भी मिल जाएंगे और वृक्ष भी बचा रहेगा। इस तीसरे मनुष्य के विचार के अनुसार काय होने मे हानि अधिक और लाभ थोडा है, अतएव इसको लेश्या कापोती होने के कारण पापकारिणी तो है हो, फिर भी पहले और दूसरे मनुष्य की लेश्या की
गौरतलब है कि सपा ने एक रणनीति के तहत ही अखिलेश को भी चुनाव मैदान में उतारने की पहल की है। सूत्रों ने बताया कि अगले एक दो दिनों में यह तय हो जायेगा कि अखिलेश किस सीट से चुनाव मैदान में उतरेंगे। समझा जाता है कि अखिलेश आजमगढ़ , मैनपुरी और कन्नौज जिलों की किसी सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। संभावना इस बात की भी है कि अखिलेश दो विधानसभा सीटों से भी चुनाव लड़ सकते हैं। सूत्रों ने बताया कि इनमें से एक सीट आजमगढ़ की गोपालपुर हो सकती है। इस सीट पर पिछले चार विधान सभा चुनावों से सपा ने ही जीत दर्ज करायी है। इसके अलावा कन्नौज या मैनपुरी की किसी एक सीट से भी अखिलेश चुनाव लड़ सकते हैं। गौरतलब है कि फिलहाल वह आजमगढ़ लोकसभा सीट से सांसद हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर शहर सीट से चुनाव लड़ने की भारतीय जनता पार्टी की घोषणा के बाद ही अखिलेश को भी चुनाव मैदान में उतारने पर सपा में मंथन शुरु हाे गया था। अगर अखिलेश चुुनाव लड़ते हैं, तो यह उनका पहला विधानसभा चुनाव होगा। इससे पहलेे 2012 में उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद वह विधान परिषद के रास्ते विधान मंडल के सदस्य बने थे।
गौरतलब है कि सपा ने एक रणनीति के तहत ही अखिलेश को भी चुनाव मैदान में उतारने की पहल की है। सूत्रों ने बताया कि अगले एक दो दिनों में यह तय हो जायेगा कि अखिलेश किस सीट से चुनाव मैदान में उतरेंगे। समझा जाता है कि अखिलेश आजमगढ़ , मैनपुरी और कन्नौज जिलों की किसी सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। संभावना इस बात की भी है कि अखिलेश दो विधानसभा सीटों से भी चुनाव लड़ सकते हैं। सूत्रों ने बताया कि इनमें से एक सीट आजमगढ़ की गोपालपुर हो सकती है। इस सीट पर पिछले चार विधान सभा चुनावों से सपा ने ही जीत दर्ज करायी है। इसके अलावा कन्नौज या मैनपुरी की किसी एक सीट से भी अखिलेश चुनाव लड़ सकते हैं। गौरतलब है कि फिलहाल वह आजमगढ़ लोकसभा सीट से सांसद हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर शहर सीट से चुनाव लड़ने की भारतीय जनता पार्टी की घोषणा के बाद ही अखिलेश को भी चुनाव मैदान में उतारने पर सपा में मंथन शुरु हाे गया था। अगर अखिलेश चुुनाव लड़ते हैं, तो यह उनका पहला विधानसभा चुनाव होगा। इससे पहलेे दो हज़ार बारह में उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद वह विधान परिषद के रास्ते विधान मंडल के सदस्य बने थे।
Sidhu Moose Wala Murder गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या का मामला सरकार के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। मूसेवाला की मां चरन कौर ने कहा कि बेटे की हत्या काे तीन माह का समय बीत गया है लेकिन अभी तक सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए। गुरप्रेम लहरी, मानसा। Sidhu Moose Wala Murder: दिवंगत पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला के स्वजनाें का इंसाफ नहीं मिलने पर दर्द छलक रहा है। साेमवार काे मां चरन कौर ने कहा कि बेटे की हत्या काे तीन माह का समय बीत गया है, लेकिन अभी तक पंजाब सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए। चरन काैर ने कहा कि मेरे बेटे की मौत का मजाक बना कर रख दिया है। जिस व्यक्ति द्वारा मेरे बेटे की सुरक्षा को सार्वजनिक किया उसके खिलाफ कार्रवाई करने की बजाए उसको ऊंचे पदों से नवाजा गया है। उन्होंने कहा कि हमें इंसाफ मिलने की उम्मीद कम होती जा रही है। अब तो सिर्फ कैंडल मार्च ही निकाला गया है, अब हमें और सख्त कदम उठाने होंगे। अगरक इंसाप नहीं मिला ताे वह सड़काें पर उतरने से भी गुरेज नहीं करेंगे। पंजाब में लगातार कत्ल हो रहे हैं और आप नेता व वर्कर सत्ता की मस्ती में झूम रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह इसको गंभीरता से ले और मूसेवाला को इंसाफ दिलाए। गाैरतलब है कि इस साल 29 मई को गायक सिद्धू मूसेवाला का मानसा के गांव जवाहरके में गोलियां मार कर कत्ल कर दिया गया था। उन पर हमला उस समय हुआ जब वह अपनी बुलेट प्रूफ गाड़ी छोड़ कर साधारण थार गाड़ी से अपनी माैसी के घर को जा रहे थे। लेकिन तीन माह बीत जाने के बाद भी उनके जख्म हरे के हरे हैं। हालांकि तीन माह बाद मानसा पुलिस द्वारा चार्जशीट दाखिल कर दी है। लेकिन बड़े आरोपित भी पुलिस की पहुंच से बाहर हैं। गाैरतलब है कि रविवार काे फतेहगढ़ साहिब के सांसद डा. अमर सिंह ने गांव मूसा में सिद्धू मूसेवाला की याद में बनने वाले पुस्तकालय के लिए अपनी सांसद निधि से 20 लाख रुपये दिए थे। अमर सिंह ने यह पत्र पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह को पंचायत के नाम पर सौंपा था।
Sidhu Moose Wala Murder गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या का मामला सरकार के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। मूसेवाला की मां चरन कौर ने कहा कि बेटे की हत्या काे तीन माह का समय बीत गया है लेकिन अभी तक सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए। गुरप्रेम लहरी, मानसा। Sidhu Moose Wala Murder: दिवंगत पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला के स्वजनाें का इंसाफ नहीं मिलने पर दर्द छलक रहा है। साेमवार काे मां चरन कौर ने कहा कि बेटे की हत्या काे तीन माह का समय बीत गया है, लेकिन अभी तक पंजाब सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए। चरन काैर ने कहा कि मेरे बेटे की मौत का मजाक बना कर रख दिया है। जिस व्यक्ति द्वारा मेरे बेटे की सुरक्षा को सार्वजनिक किया उसके खिलाफ कार्रवाई करने की बजाए उसको ऊंचे पदों से नवाजा गया है। उन्होंने कहा कि हमें इंसाफ मिलने की उम्मीद कम होती जा रही है। अब तो सिर्फ कैंडल मार्च ही निकाला गया है, अब हमें और सख्त कदम उठाने होंगे। अगरक इंसाप नहीं मिला ताे वह सड़काें पर उतरने से भी गुरेज नहीं करेंगे। पंजाब में लगातार कत्ल हो रहे हैं और आप नेता व वर्कर सत्ता की मस्ती में झूम रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह इसको गंभीरता से ले और मूसेवाला को इंसाफ दिलाए। गाैरतलब है कि इस साल उनतीस मई को गायक सिद्धू मूसेवाला का मानसा के गांव जवाहरके में गोलियां मार कर कत्ल कर दिया गया था। उन पर हमला उस समय हुआ जब वह अपनी बुलेट प्रूफ गाड़ी छोड़ कर साधारण थार गाड़ी से अपनी माैसी के घर को जा रहे थे। लेकिन तीन माह बीत जाने के बाद भी उनके जख्म हरे के हरे हैं। हालांकि तीन माह बाद मानसा पुलिस द्वारा चार्जशीट दाखिल कर दी है। लेकिन बड़े आरोपित भी पुलिस की पहुंच से बाहर हैं। गाैरतलब है कि रविवार काे फतेहगढ़ साहिब के सांसद डा. अमर सिंह ने गांव मूसा में सिद्धू मूसेवाला की याद में बनने वाले पुस्तकालय के लिए अपनी सांसद निधि से बीस लाख रुपये दिए थे। अमर सिंह ने यह पत्र पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह को पंचायत के नाम पर सौंपा था।
हैदराबाद, 15 दिसंबर तेलंगाना में लगातार चुनावी हार का सामना करने के बाद कांग्रेस के सामने अब प्रदेश की इकाई के अध्यक्ष का चयन करने की चुनौती है। हाल ही में संपन्न हुए ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (जीएचएमसी) चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एन उत्तम कुमार रेड्डी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के तेलंगाना मामलों के प्रभारी एम. टैगोर ने कई नेताओं से इस मुद्दे पर चर्चा की है। माना जा रहा है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए कम से कम चार-पांच दावेदार हैं। वर्ष 2014 और 2018 के विधानसभा चुनाव के अलावा हाल ही में हुए जीएचएमसी चुनाव और दुब्बका उपचुनाव में हारने के बाद से तेलंगाना में कांग्रेस की हालत पतली है। हालांकि, तेलंगाना राज्य का गठन केंद्र में कांग्रेस के शासनकाल में हुआ था और पार्टी को उम्मीद थी कि इससे राज्य में उसकी स्थिति मजबूत होगी। पिछले साल कांग्रेस ने राज्य में तीन लोकसभा सीटें जीती थीं। तमिलनाडु से लोकसभा सदस्य एम. टैगोर ने पिछले सप्ताह विधायकों, सांसदों, वरिष्ठ नेताओं और जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्षों से विचार विमर्श किया था। टैगोर ने मंगलवार को पीटीआई-भाषा से कहा कि लगभग 160 नेताओं के विचार लिए गए हैं क्योंकि पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने हमेशा व्यापक स्तर पर बातचीत की वकालत की है और इस प्रक्रिया में जिला स्तर के नेताओं की बात सुने जाने को महत्व दिया है। टैगोर ने कहा कि चर्चा की एक रिपोर्ट तैयार कर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेज दी गई है और आगे के निर्देशों का इंतजार किया जा रहा है। हालांकि, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष का चयन टेढ़ी खीर साबित हो सकता है क्योंकि पार्टी के नेताओं की राय टैगोर से मेल खाती हुई नहीं प्रतीत होती। इस संबंध में पूछे जाने पर टैगोर ने कहा कि इस प्रक्रिया में 160 लोगों की राय ली गई है और उन सबका मत भिन्न होना तय है। पार्टी सूत्रों के अनुसार पद के लिए कम से कम चार-पांच दावेदार हैं। इनमें पार्टी के सांसद के. वेंकट रेड्डी, ए. रेवंत रेड्डी, विधायक डी. श्रीधर बाबू और कांग्रेस विधायक दल के नेता एम भट्टी विक्रमार्क शामिल हैं। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
हैदराबाद, पंद्रह दिसंबर तेलंगाना में लगातार चुनावी हार का सामना करने के बाद कांग्रेस के सामने अब प्रदेश की इकाई के अध्यक्ष का चयन करने की चुनौती है। हाल ही में संपन्न हुए ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एन उत्तम कुमार रेड्डी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के तेलंगाना मामलों के प्रभारी एम. टैगोर ने कई नेताओं से इस मुद्दे पर चर्चा की है। माना जा रहा है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए कम से कम चार-पांच दावेदार हैं। वर्ष दो हज़ार चौदह और दो हज़ार अट्ठारह के विधानसभा चुनाव के अलावा हाल ही में हुए जीएचएमसी चुनाव और दुब्बका उपचुनाव में हारने के बाद से तेलंगाना में कांग्रेस की हालत पतली है। हालांकि, तेलंगाना राज्य का गठन केंद्र में कांग्रेस के शासनकाल में हुआ था और पार्टी को उम्मीद थी कि इससे राज्य में उसकी स्थिति मजबूत होगी। पिछले साल कांग्रेस ने राज्य में तीन लोकसभा सीटें जीती थीं। तमिलनाडु से लोकसभा सदस्य एम. टैगोर ने पिछले सप्ताह विधायकों, सांसदों, वरिष्ठ नेताओं और जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्षों से विचार विमर्श किया था। टैगोर ने मंगलवार को पीटीआई-भाषा से कहा कि लगभग एक सौ साठ नेताओं के विचार लिए गए हैं क्योंकि पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने हमेशा व्यापक स्तर पर बातचीत की वकालत की है और इस प्रक्रिया में जिला स्तर के नेताओं की बात सुने जाने को महत्व दिया है। टैगोर ने कहा कि चर्चा की एक रिपोर्ट तैयार कर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेज दी गई है और आगे के निर्देशों का इंतजार किया जा रहा है। हालांकि, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष का चयन टेढ़ी खीर साबित हो सकता है क्योंकि पार्टी के नेताओं की राय टैगोर से मेल खाती हुई नहीं प्रतीत होती। इस संबंध में पूछे जाने पर टैगोर ने कहा कि इस प्रक्रिया में एक सौ साठ लोगों की राय ली गई है और उन सबका मत भिन्न होना तय है। पार्टी सूत्रों के अनुसार पद के लिए कम से कम चार-पांच दावेदार हैं। इनमें पार्टी के सांसद के. वेंकट रेड्डी, ए. रेवंत रेड्डी, विधायक डी. श्रीधर बाबू और कांग्रेस विधायक दल के नेता एम भट्टी विक्रमार्क शामिल हैं। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
बुधवार को राष्ट्रमंडल खेल महासंघ (सीजीएफ) की आम बैठक न्यूजीलैंड में हुई इस दौरान यह फैसला लिया गया की 2022 के राष्टमंडल खेलों की मेजबानी डरबन करेगा. गौरतलब है कि दक्षिण अफ्रीका राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी के लिये कनाडा की अपनी दावेदारी से हटने के बाद एक मात्र दावेदार बचा था. खेलों के इस महाआयोजन के आयोजकों ने कहा कि 2022 में खेलों का आयोजन 18 से 30 जुलाई तक होगा जिसका उद्घाटन दक्षिण अफ्रीका के महान नेता नेल्सन मंडेला के जन्मदिन से किया जायेगा. सीजीएफ के निवर्तमान अध्यक्ष प्रिंस टुंकू इमरान ने इस अवसर पर अपनी बात को रखते हुए कहा, 'दक्षिण अफ्रीका को राष्ट्रमंडल की मेजबानी दिया जाना एक सराहनीय फैसला है. अफ्रीकी धारती पर पहली बार होने वाले खेलों के इस बड़े आयोजन से मैं बेहद ही खुश हूं. सीजीएफ के उपाध्यक्ष गिडोन सैम ने इस पर अपनी खुशी व्यक्त karte हुये कहा, दक्षिण अफ्रीका को पहली बार राष्टमंडल खेलों की मेजबानी मिलने से हम बेहद ही उत्साहित और खुश हैं. हम अपनी धरती पर खेलों के इस प्रकार के बड़े आयोजन की मेजबानी के लिये पूरी तरह तैयार हैं.
बुधवार को राष्ट्रमंडल खेल महासंघ की आम बैठक न्यूजीलैंड में हुई इस दौरान यह फैसला लिया गया की दो हज़ार बाईस के राष्टमंडल खेलों की मेजबानी डरबन करेगा. गौरतलब है कि दक्षिण अफ्रीका राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी के लिये कनाडा की अपनी दावेदारी से हटने के बाद एक मात्र दावेदार बचा था. खेलों के इस महाआयोजन के आयोजकों ने कहा कि दो हज़ार बाईस में खेलों का आयोजन अट्ठारह से तीस जुलाई तक होगा जिसका उद्घाटन दक्षिण अफ्रीका के महान नेता नेल्सन मंडेला के जन्मदिन से किया जायेगा. सीजीएफ के निवर्तमान अध्यक्ष प्रिंस टुंकू इमरान ने इस अवसर पर अपनी बात को रखते हुए कहा, 'दक्षिण अफ्रीका को राष्ट्रमंडल की मेजबानी दिया जाना एक सराहनीय फैसला है. अफ्रीकी धारती पर पहली बार होने वाले खेलों के इस बड़े आयोजन से मैं बेहद ही खुश हूं. सीजीएफ के उपाध्यक्ष गिडोन सैम ने इस पर अपनी खुशी व्यक्त karte हुये कहा, दक्षिण अफ्रीका को पहली बार राष्टमंडल खेलों की मेजबानी मिलने से हम बेहद ही उत्साहित और खुश हैं. हम अपनी धरती पर खेलों के इस प्रकार के बड़े आयोजन की मेजबानी के लिये पूरी तरह तैयार हैं.
न्यूयार्क, एएनआइ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी अमेरिकी यात्रा का पहला चरण राजधानी वाशिंगटन में पूरा करने के बाद शनिवार को न्यूयार्क पहुंचे। यहां वह संयुक्त राष्ट्र महासभा(UNGA) के 76वें अधिवेशन को संबोधित करेंगे। पीएम मोदी ने न्यूयार्क पहुंचकर ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन (Joe Biden) से मुलाकात और क्वाड लीडर्स समिट में हिस्सा लेने के बाद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी न्यूयार्क (New York) पहुंच गए हैं। न्यूयार्क पहुंचने पर PM मोदी का भारतीयों ने जोरदार स्वागत किया। इस दौरान भारतीयों ने वंदे मातरम और भारत माता की जय के नारे भी लगाए। प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां बड़ी संख्या में भारतीय-अमेरिकियों से मुलाकात। पीएम मोदी को अमेरिका में प्रवासी भारतीयों के बीच भारी लोकप्रियता हासिल है, जोदेश की आबादी का लगभग 1.2 प्रतिशत हैं। #WATCH । PM Narendra Modi meets people as they cheer for him & chant 'Vande Mataram' & 'Bharat Mata ki Jai' outside the hotel in New York.
न्यूयार्क, एएनआइ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी अमेरिकी यात्रा का पहला चरण राजधानी वाशिंगटन में पूरा करने के बाद शनिवार को न्यूयार्क पहुंचे। यहां वह संयुक्त राष्ट्र महासभा के छिहत्तरवें अधिवेशन को संबोधित करेंगे। पीएम मोदी ने न्यूयार्क पहुंचकर ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से मुलाकात और क्वाड लीडर्स समिट में हिस्सा लेने के बाद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी न्यूयार्क पहुंच गए हैं। न्यूयार्क पहुंचने पर PM मोदी का भारतीयों ने जोरदार स्वागत किया। इस दौरान भारतीयों ने वंदे मातरम और भारत माता की जय के नारे भी लगाए। प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां बड़ी संख्या में भारतीय-अमेरिकियों से मुलाकात। पीएम मोदी को अमेरिका में प्रवासी भारतीयों के बीच भारी लोकप्रियता हासिल है, जोदेश की आबादी का लगभग एक.दो प्रतिशत हैं। #WATCH । PM Narendra Modi meets people as they cheer for him & chant 'Vande Mataram' & 'Bharat Mata ki Jai' outside the hotel in New York.
पिछले साल 15 जून को गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हुई झड़प में 20 भारतीय सैनिकों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। इसी की याद में ये वीडियो भारतीय सेना ने इस साल जारी किया था। नयी दिल्लीः पूर्वी लद्दाख में चीनी सैनिकों के साथ गलवान घाटी में हुए संघर्ष में वीरगति को प्राप्त भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए भारतीय सेना ने एक वीडियो गीत जारी किया है। गलवान घाटी में हुए संघर्ष के एक साल पूरा होने को लेकर इस गीत को जारी किया गया है। मशहूर गायक हरिहरन द्वारा गाए गए गीत 'गलवान के वीर' में प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों में गलवान घाटी की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए भारतीय सैनिकों के शौर्य और साहस को रेखांकित किया गया है। पांच मिनट के वीडियो में बर्फ से ढकी पर्वत चोटियों पर तैनात भारत के वीर सैनिकों की 24 घंटे पहरेदारी, उनके प्रशिक्षण और किसी भी खतरे से निपटने के लिए उनकी अभियानगत तैयारियों की झलक दिखाई गई है। सेना ने इस अवसर पर कहा कि राष्ट्र की स्मृतियों में सैनिकों का सर्वोच्च बलिदान हमेशा बना रहेगा। बता दें कि पिछले साल 15 जून को गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हुई झड़प में 20 भारतीय सैनिकों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। चीन इस झड़प में मारे गए अपने सैनिकों की संख्या छिपाता रहा और फरवरी में उसने आधिकारिक रूप से कहा कि उसके पांच सैनिक मारे गए थे। हालांकि माना यह जाता है कि झड़प में इससे कहीं अधिक चीनी सैनिक हताहत हुए। अमेरिका की एक खुफिया रिपोर्ट में यह संख्या 35 बताई गई थी। इस झड़प में 16 बिहार रेजीमेंट के कर्नल संतोष बाबू ने गलवान घाटी में गश्त बिंदु 14 के पास सबसे आगे रहकर भारतीय सैनिकों का नेतृत्व किया था। जनवरी में उन्हें मरणोपरांत दूसरे सर्वोच्च सैन्य पुरस्कार महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था।
पिछले साल पंद्रह जून को गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हुई झड़प में बीस भारतीय सैनिकों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। इसी की याद में ये वीडियो भारतीय सेना ने इस साल जारी किया था। नयी दिल्लीः पूर्वी लद्दाख में चीनी सैनिकों के साथ गलवान घाटी में हुए संघर्ष में वीरगति को प्राप्त भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए भारतीय सेना ने एक वीडियो गीत जारी किया है। गलवान घाटी में हुए संघर्ष के एक साल पूरा होने को लेकर इस गीत को जारी किया गया है। मशहूर गायक हरिहरन द्वारा गाए गए गीत 'गलवान के वीर' में प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों में गलवान घाटी की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए भारतीय सैनिकों के शौर्य और साहस को रेखांकित किया गया है। पांच मिनट के वीडियो में बर्फ से ढकी पर्वत चोटियों पर तैनात भारत के वीर सैनिकों की चौबीस घंटाटे पहरेदारी, उनके प्रशिक्षण और किसी भी खतरे से निपटने के लिए उनकी अभियानगत तैयारियों की झलक दिखाई गई है। सेना ने इस अवसर पर कहा कि राष्ट्र की स्मृतियों में सैनिकों का सर्वोच्च बलिदान हमेशा बना रहेगा। बता दें कि पिछले साल पंद्रह जून को गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हुई झड़प में बीस भारतीय सैनिकों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। चीन इस झड़प में मारे गए अपने सैनिकों की संख्या छिपाता रहा और फरवरी में उसने आधिकारिक रूप से कहा कि उसके पांच सैनिक मारे गए थे। हालांकि माना यह जाता है कि झड़प में इससे कहीं अधिक चीनी सैनिक हताहत हुए। अमेरिका की एक खुफिया रिपोर्ट में यह संख्या पैंतीस बताई गई थी। इस झड़प में सोलह बिहार रेजीमेंट के कर्नल संतोष बाबू ने गलवान घाटी में गश्त बिंदु चौदह के पास सबसे आगे रहकर भारतीय सैनिकों का नेतृत्व किया था। जनवरी में उन्हें मरणोपरांत दूसरे सर्वोच्च सैन्य पुरस्कार महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था।
राकेश शर्मा जी फेस बुक मित्र हैं. . उन्होंने लिखा है कि देवोत्थानी एकादशी पर हम देवताओं को ही जागायेंगे ...स्वयं नहीं जागृत होंगे ? ...एक बात यहाँ मैं जोड़ देना चाहता हूँ. . हम सब विशेष पर्व को जान कर देव स्थान पर जाते हैं . . किन्तु केवल इतने मात्र से हमारे जीवन के जीने के उद्देश्य की पूर्ति नहीं होती है . इस हेतु हमारा चिंतन , हमारे विचार , हमारा कर्म, हमारा रहन सहन, हमारा खान पान , हमारी सामाजिकता , हमारा सम्पूर्ण चराचर जगत से तालमेल कैसा है यह भी महत्वपूर्ण है ! यथा - मेरा आज व्रत है - ""भाव" यह है कि मैं आज भूखा रहूंगा ...ये कैसा व्रत है ? ? कौन कह रहा है कि व्रत है तो भूखा रहो ? ? ? व्रत का अर्थ है नियम धारण करना तो नियम धारण करने में भूखा ही रहना और शेष समस्त कार्य झूठ बोल कर, चुगली कर , धोखा देकर , लालच मन में रख कर शाम को या अगली सुबह खा लिया . . हो गया व्रत पूर्ण ? ? इस से अच्छा तो नियम में सत्य-प्रेम-करुना - साहचर्य - वसुधैव कुटुम्बकम के भाव का समावेश हो ...तो व्रत का महत्व है.
राकेश शर्मा जी फेस बुक मित्र हैं. . उन्होंने लिखा है कि देवोत्थानी एकादशी पर हम देवताओं को ही जागायेंगे ...स्वयं नहीं जागृत होंगे ? ...एक बात यहाँ मैं जोड़ देना चाहता हूँ. . हम सब विशेष पर्व को जान कर देव स्थान पर जाते हैं . . किन्तु केवल इतने मात्र से हमारे जीवन के जीने के उद्देश्य की पूर्ति नहीं होती है . इस हेतु हमारा चिंतन , हमारे विचार , हमारा कर्म, हमारा रहन सहन, हमारा खान पान , हमारी सामाजिकता , हमारा सम्पूर्ण चराचर जगत से तालमेल कैसा है यह भी महत्वपूर्ण है ! यथा - मेरा आज व्रत है - ""भाव" यह है कि मैं आज भूखा रहूंगा ...ये कैसा व्रत है ? ? कौन कह रहा है कि व्रत है तो भूखा रहो ? ? ? व्रत का अर्थ है नियम धारण करना तो नियम धारण करने में भूखा ही रहना और शेष समस्त कार्य झूठ बोल कर, चुगली कर , धोखा देकर , लालच मन में रख कर शाम को या अगली सुबह खा लिया . . हो गया व्रत पूर्ण ? ? इस से अच्छा तो नियम में सत्य-प्रेम-करुना - साहचर्य - वसुधैव कुटुम्बकम के भाव का समावेश हो ...तो व्रत का महत्व है.
सैन फ्रांसिस्को, 22 फरवरी (आईएएनएस). सैमसंग ने पिछले वर्ष अंतरराष्ट्रीय टीवी बाजार में शीर्ष जगह हासिल किया है, यह लगातार 17वां वर्ष है जब कंपनी टीवी उद्योग में पहले जगह पर रही है. टेक कद्दावर ने मंगलवार को एक ब्लॉगपोस्ट में बोला कि इस कामयाबी का श्रेय उच्च गुणवत्ता वाले देखने के अनुभव और उपयोगकर्ता-केंद्रित डिजाइन के लिए कंपनी को दिया जा सकता है. अपने प्रीमियम प्रोडक्ट लाइनअप को अहमियत देकर, सैमसंग ने प्रभावशाली 17 सालों के लिए टीवी उद्योग में अपने अद्वितीय नेतृत्व को बरकरार रखा है, जो इसके नियो क्यूएलईडी लाइनअप द्वारा सबसे अच्छा उदाहरण है. कंपनी ने पिछले वर्ष 9. 65 मिलियन क्यूएलईडी और नियो क्यूएलईडी टेलीविजन बेचे, 2017 में लॉन्च होने के बाद से कुल बिक्री 35 मिलियन यूनिट तक पहुंच गई. कंपनी ने कहा, सैमसंग ने 2022 में अल्ट्रा-लार्ज टीवी बाजार सेगमेंट में भी अपना दबदबा बनाया, जिसमें क्रमशः 75-इंच और 80-इंच से अधिक के टीवी के लिए 36. 1 फीसदी और 42. 9 फीसदी बाजार हिस्सेदारी दर्ज की गई. इसके अलावा, 2,500 $ से अधिक मूल्य वाले प्रीमियम टीवी बाजार के लिए, कंपनी ने 48. 6 फीसदी राजस्व के साथ सबसे बड़ी बाजार हिस्सेदारी बरकरार रखी. सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स, विजुअल डिस्प्ले बिजनेस के कार्यकारी उपाध्यक्ष, चेओल्गी किम ने कहा, पिछले 17 सालों में उद्योग नेतृत्व का हमारा ट्रैक रिकॉर्ड हमारे कंज़्यूमरों की लगातार वफादारी और हमारे उत्पादों में विश्वास से संभव हुआ है. किम ने कहा, हम सबसे प्रीमियम डिवाइस अनुभव बनाने का मार्ग प्रशस्त करना जारी रखेंगे जो प्रीमियम पिक्च र क्वालिटी से परे हो. कंपनी ने बोला कि नवाचार के प्रति उसकी प्रतिबद्धता 2023 में उपयोगकर्ताओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए डिजाइन की गई सहज तकनीक के विकास के साथ जारी है.
सैन फ्रांसिस्को, बाईस फरवरी . सैमसंग ने पिछले वर्ष अंतरराष्ट्रीय टीवी बाजार में शीर्ष जगह हासिल किया है, यह लगातार सत्रहवां वर्ष है जब कंपनी टीवी उद्योग में पहले जगह पर रही है. टेक कद्दावर ने मंगलवार को एक ब्लॉगपोस्ट में बोला कि इस कामयाबी का श्रेय उच्च गुणवत्ता वाले देखने के अनुभव और उपयोगकर्ता-केंद्रित डिजाइन के लिए कंपनी को दिया जा सकता है. अपने प्रीमियम प्रोडक्ट लाइनअप को अहमियत देकर, सैमसंग ने प्रभावशाली सत्रह सालों के लिए टीवी उद्योग में अपने अद्वितीय नेतृत्व को बरकरार रखा है, जो इसके नियो क्यूएलईडी लाइनअप द्वारा सबसे अच्छा उदाहरण है. कंपनी ने पिछले वर्ष नौ. पैंसठ मिलियन क्यूएलईडी और नियो क्यूएलईडी टेलीविजन बेचे, दो हज़ार सत्रह में लॉन्च होने के बाद से कुल बिक्री पैंतीस मिलियन यूनिट तक पहुंच गई. कंपनी ने कहा, सैमसंग ने दो हज़ार बाईस में अल्ट्रा-लार्ज टीवी बाजार सेगमेंट में भी अपना दबदबा बनाया, जिसमें क्रमशः पचहत्तर-इंच और अस्सी-इंच से अधिक के टीवी के लिए छत्तीस. एक फीसदी और बयालीस. नौ फीसदी बाजार हिस्सेदारी दर्ज की गई. इसके अलावा, दो,पाँच सौ डॉलर से अधिक मूल्य वाले प्रीमियम टीवी बाजार के लिए, कंपनी ने अड़तालीस. छः फीसदी राजस्व के साथ सबसे बड़ी बाजार हिस्सेदारी बरकरार रखी. सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स, विजुअल डिस्प्ले बिजनेस के कार्यकारी उपाध्यक्ष, चेओल्गी किम ने कहा, पिछले सत्रह सालों में उद्योग नेतृत्व का हमारा ट्रैक रिकॉर्ड हमारे कंज़्यूमरों की लगातार वफादारी और हमारे उत्पादों में विश्वास से संभव हुआ है. किम ने कहा, हम सबसे प्रीमियम डिवाइस अनुभव बनाने का मार्ग प्रशस्त करना जारी रखेंगे जो प्रीमियम पिक्च र क्वालिटी से परे हो. कंपनी ने बोला कि नवाचार के प्रति उसकी प्रतिबद्धता दो हज़ार तेईस में उपयोगकर्ताओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए डिजाइन की गई सहज तकनीक के विकास के साथ जारी है.
इस राज्य का क्षेत्रफल २००० ली श्री राजधानी का २० ली है । यह साड़ी के किनारे है । यहा का पहाडी सिलसिला ऊँचा और चोटीवाला है। भूमि नीची है-तराई है। यह भली भाँति जोती वोई जाती है, और उपजाऊ हे । प्रकृति गरम और मनुष्य माहमी और कुशल है । वे ऊँचे डील डौल के, काले स्वरूप के श्रार मैले हैं । इन लोगों में कोमलना तो थोड़ी ही है परन्तु ईमानदारी उचित मात्रा में है। इनकी लिखावट के अक्षर ठीक वही है जो मध्यभारत के है, परन्तु उनकी भाषा और उच्चारण का तरीका भिन्न है । ये लोग विरोधियों की शिक्षा पर बड़ी भक्ति रखते हैं. बुद्धधर्म पर • देखो (J RAS, N S, Vol VI, p 270) कनिंघम साइब इस स्थान को 'गंजम' खपाल करते हैं, परन्तु 'गजम' शब्द की असलियत क्या है यह नहीं मालूम हुएन साग को मगधदेश में लौट कर जाने पर विदित हुआ कि हर्षवर्द्धन राजा कुछ ही पहले 'गंजम'- नरेश पर चढाई करके और विजयी होकर टोटा है । कनियम साहब का विचार है कि गजम उन दिनों उडोसा में सम्मिलित था । (Robert Sewell, Lists, Vol. I, p 2 ) मि० फर्गुसन खोधंगर मानते हैं जो भुवनेश्वर के निकट चौर मिदनापुर से ठीक १७० मील दक्षिण-पश्चिम है और इस बात को बताते है कि मूल पुस्तक में दो समुद्र और साड़ी के समान चिलका की केविषय में भूल हो गई है । उनका विचार है कि हुएन सांग ग्ण्डगिरि और उदयगिरि की गुफाओं को देखने के लिए इस स्थान पर ठहरा था (J RAS, loe cat ) विश्वास नहीं करते। कोई एक सौ देवमन्दिर और लगभग १०,००० विरोधी अनेक मन और जाति के हैं । राज्य भर में कोई बीस कसबे है जो पहाड़ पर बसे हुए और समुद्र के बिलकुल निकट है। नगर सुदृढ़ और ऊँ हैं और सिपाही लोग चीर और साहसी हैं जिससे निकटमूवाँ पर इनका अधिकार आतंक पूर्वक है और कोई भी इनका मुकाबला नहीं कर सकता, समुद्र के किनारे होने के कारण इस देश में बहुमूल्य और दुष्प्राप्य वस्तुओं की भर मार है। यहाँ के लीग वाणिज्य व्यवसाय में कौड़ी और मोनी का व्यवहार करते हैं। कुछ हरापन लिये हुए नीले रङ्ग के बड़े बड़े हाथी इसी देश से बाहर जाते हैं। यहाँ के लोग हाथियों को अपने स्थों में भी जानते हैं श्रीर बहुत दूर तक की यात्रा कर आते हैं । यहाँ से दक्षिण-पश्चिम की चलकर हम एक बड़े भारी निर्जन वन में पहुँ जिसके ऊँचे ऊँचे वृक्ष सूर्य की श्राड़ किये हुए श्राकाश से बातें करते थे। कोई १४०० या १५०० ली चलकर हम कर लिग किया देश को पहुॅचे। 1 "हैकिग्राव (hal kinn) का ठीक अर्थ दो समुद्रों की मेधि" उचित नहीं है, इसका अर्थ तो यह मालूम होता है कि "पहाड़ के निकट बसे हुए कृपये जिनका सम्बन्ध समुद्र के तट से हो" जैसे दक्षिण अमरीका के पश्चिम किनारे पर पहाड़ी के पतल में कृसये यसै हुए है, और जहाज के दूदरनेवाले बन्दर से मिले हुए हैं। हुएन मांग का भ्रमण उत्तान्त कइ लिङ्ग किया (कलिङ्ग ) इस राज्य का क्षेत्रफल २००० ली और इसकी राजधानी का लगभग २० ली है। यह उचित रीति पर जोती बोई जाती है और अच्छी उपजाऊ है। फल और फूल बहुत अधिक होते हैं । जङ्गल भाड़ी सैंकड़ों कोम तक लगातार चले गये हैं। यहाँ पर भी कुछ हगपन लिये हुए नीले हाथी उत्पन्न होते है जो निकटवर्ती सूत्रों में बड़े दाम में बिकते हैं। यहाँ की प्रकृति आग के समान गरम है। मनुष्यों का स्वभाव है। यद्यपि ये उद्गुड और असभ्य हैं। परन्तु अपने वचन का पालन करनेवाले और विश्वसनीय है यद्यपि ये लोग धीरे tree arक कर बोलते है परन्तु इनका उच्चारण सुस्पष्ट और शुद्ध होता है। तो भी ये दोनों बातें, (अर्थात् शब्द और स्वर) मध्यभारत से नितान्त १ कनिंघम साहब कहते है कि कलिङ्ग देश की सीमा दक्षिणपश्चिम में गोदावरी नदी से आगे और उत्तर पश्चिम में गोलिया नदी से, लो इन्द्रवती नदी की शाखा है, श्रागे नहीं हो सकती । तो कलिङ्ग-देश के वृत्तान्त के लिए देखो (Sewell, op. cit., p. 19 ) इसका मुख्य नगर कदाचित राजमहेन्द्री था जहां पर चालुक्य लोगों ने राजधानी बनाई थी । या तो यह स्थान या समुद्र के तटवाला 'कोरिङ्ग' मूल पुस्तक में दी हुई दूरी इत्यादि से ठोक मिलता है, परन्तु यदि हम मि० फगुसन की राय मान लें कि कोन्योध की राजधानी कटक निकट थी, और सात ली का एक मील माने तो हम को कलिङ्ग की राजधानी 'विजयनगर' के निकट माननी पड़ेगी। राजमहेन्द्री के विषय में देखो (Sewell, Lists, &c., Vol. I, p. 22 ) पृथक है। बहुत थोड़े लोग बुद्ध धर्म पर विश्वास करते हैं । अधिकतम लोग विरुद्ध धर्मावलम्बी ही है, कोई दस संघाराम ५०० संन्यासियों के सहित है जो स्थविर संस्थानुसार महायान-सम्प्रदाय का अध्ययन करते हैं। कोई १०० देवमन्दिर हे जिनमें अनेक मत के अगणित विरोधी उपासना करते हैं। सबसे अधिक संख्या निग्रंथा लोगों की है। प्राचीन काल में कलिङ्ग देश बहुत घना वसा हुआ था, इस कारण मार्ग में चलते समय लोगों के कंधे से कंधे घिसते थे और रथों के पहियों के धुरे एक दूसरे से रगड साते थे । उन्हीं दिनों एक महात्मा ऋषि भी, जिसको पाँचों शक्तियाँ प्राप्त हो चुकी थीं, एक ऊँचे करार पर निवास करतापनी पवित्रता की प्रतिपालन कर रहा था। परन्तु किसी कारण विशेष से उसकी श्रद्भुत शक्ति का क्रमशः हास हो चला और लज्जित होकर उसने देशवासियों को शाप दे दिया, जिससे वृद्ध श्रार युवा, मूर्ख और विद्वान् - सबके सब समान रूप से मरने लगे, यहाँ तक कि सम्पूर्ण जनपद का नाश हो गया । इसके बहुत वर्ष बाद प्रवासी लोगों के द्वारा देश की आबाद धीरे धीरे कुछ बढ़ चली है तोभी जनसंख्या उतनी नहीं हुई है। और यही कारण है कि इन दिनों बहुत थोड़े लोग यहाँ पर निवास करते हैं। राजधानी के दक्षिण में थोड़ी दूर पर कोई सौ फीट ऊँचा अशोक का वनवाया हुआ एक स्तूप है । इसके पास गत चारों बुद्धों के उठने बैठने इत्यादि के चिह्न है।
इस राज्य का क्षेत्रफल दो हज़ार ली श्री राजधानी का बीस ली है । यह साड़ी के किनारे है । यहा का पहाडी सिलसिला ऊँचा और चोटीवाला है। भूमि नीची है-तराई है। यह भली भाँति जोती वोई जाती है, और उपजाऊ हे । प्रकृति गरम और मनुष्य माहमी और कुशल है । वे ऊँचे डील डौल के, काले स्वरूप के श्रार मैले हैं । इन लोगों में कोमलना तो थोड़ी ही है परन्तु ईमानदारी उचित मात्रा में है। इनकी लिखावट के अक्षर ठीक वही है जो मध्यभारत के है, परन्तु उनकी भाषा और उच्चारण का तरीका भिन्न है । ये लोग विरोधियों की शिक्षा पर बड़ी भक्ति रखते हैं. बुद्धधर्म पर • देखो कनिंघम साइब इस स्थान को 'गंजम' खपाल करते हैं, परन्तु 'गजम' शब्द की असलियत क्या है यह नहीं मालूम हुएन साग को मगधदेश में लौट कर जाने पर विदित हुआ कि हर्षवर्द्धन राजा कुछ ही पहले 'गंजम'- नरेश पर चढाई करके और विजयी होकर टोटा है । कनियम साहब का विचार है कि गजम उन दिनों उडोसा में सम्मिलित था । मिशून्य फर्गुसन खोधंगर मानते हैं जो भुवनेश्वर के निकट चौर मिदनापुर से ठीक एक सौ सत्तर मील दक्षिण-पश्चिम है और इस बात को बताते है कि मूल पुस्तक में दो समुद्र और साड़ी के समान चिलका की केविषय में भूल हो गई है । उनका विचार है कि हुएन सांग ग्ण्डगिरि और उदयगिरि की गुफाओं को देखने के लिए इस स्थान पर ठहरा था विश्वास नहीं करते। कोई एक सौ देवमन्दिर और लगभग दस,शून्य विरोधी अनेक मन और जाति के हैं । राज्य भर में कोई बीस कसबे है जो पहाड़ पर बसे हुए और समुद्र के बिलकुल निकट है। नगर सुदृढ़ और ऊँ हैं और सिपाही लोग चीर और साहसी हैं जिससे निकटमूवाँ पर इनका अधिकार आतंक पूर्वक है और कोई भी इनका मुकाबला नहीं कर सकता, समुद्र के किनारे होने के कारण इस देश में बहुमूल्य और दुष्प्राप्य वस्तुओं की भर मार है। यहाँ के लीग वाणिज्य व्यवसाय में कौड़ी और मोनी का व्यवहार करते हैं। कुछ हरापन लिये हुए नीले रङ्ग के बड़े बड़े हाथी इसी देश से बाहर जाते हैं। यहाँ के लोग हाथियों को अपने स्थों में भी जानते हैं श्रीर बहुत दूर तक की यात्रा कर आते हैं । यहाँ से दक्षिण-पश्चिम की चलकर हम एक बड़े भारी निर्जन वन में पहुँ जिसके ऊँचे ऊँचे वृक्ष सूर्य की श्राड़ किये हुए श्राकाश से बातें करते थे। कोई एक हज़ार चार सौ या एक हज़ार पाँच सौ ली चलकर हम कर लिग किया देश को पहुॅचे। एक "हैकिग्राव का ठीक अर्थ दो समुद्रों की मेधि" उचित नहीं है, इसका अर्थ तो यह मालूम होता है कि "पहाड़ के निकट बसे हुए कृपये जिनका सम्बन्ध समुद्र के तट से हो" जैसे दक्षिण अमरीका के पश्चिम किनारे पर पहाड़ी के पतल में कृसये यसै हुए है, और जहाज के दूदरनेवाले बन्दर से मिले हुए हैं। हुएन मांग का भ्रमण उत्तान्त कइ लिङ्ग किया इस राज्य का क्षेत्रफल दो हज़ार ली और इसकी राजधानी का लगभग बीस ली है। यह उचित रीति पर जोती बोई जाती है और अच्छी उपजाऊ है। फल और फूल बहुत अधिक होते हैं । जङ्गल भाड़ी सैंकड़ों कोम तक लगातार चले गये हैं। यहाँ पर भी कुछ हगपन लिये हुए नीले हाथी उत्पन्न होते है जो निकटवर्ती सूत्रों में बड़े दाम में बिकते हैं। यहाँ की प्रकृति आग के समान गरम है। मनुष्यों का स्वभाव है। यद्यपि ये उद्गुड और असभ्य हैं। परन्तु अपने वचन का पालन करनेवाले और विश्वसनीय है यद्यपि ये लोग धीरे tree arक कर बोलते है परन्तु इनका उच्चारण सुस्पष्ट और शुद्ध होता है। तो भी ये दोनों बातें, मध्यभारत से नितान्त एक कनिंघम साहब कहते है कि कलिङ्ग देश की सीमा दक्षिणपश्चिम में गोदावरी नदी से आगे और उत्तर पश्चिम में गोलिया नदी से, लो इन्द्रवती नदी की शाखा है, श्रागे नहीं हो सकती । तो कलिङ्ग-देश के वृत्तान्त के लिए देखो इसका मुख्य नगर कदाचित राजमहेन्द्री था जहां पर चालुक्य लोगों ने राजधानी बनाई थी । या तो यह स्थान या समुद्र के तटवाला 'कोरिङ्ग' मूल पुस्तक में दी हुई दूरी इत्यादि से ठोक मिलता है, परन्तु यदि हम मिशून्य फगुसन की राय मान लें कि कोन्योध की राजधानी कटक निकट थी, और सात ली का एक मील माने तो हम को कलिङ्ग की राजधानी 'विजयनगर' के निकट माननी पड़ेगी। राजमहेन्द्री के विषय में देखो पृथक है। बहुत थोड़े लोग बुद्ध धर्म पर विश्वास करते हैं । अधिकतम लोग विरुद्ध धर्मावलम्बी ही है, कोई दस संघाराम पाँच सौ संन्यासियों के सहित है जो स्थविर संस्थानुसार महायान-सम्प्रदाय का अध्ययन करते हैं। कोई एक सौ देवमन्दिर हे जिनमें अनेक मत के अगणित विरोधी उपासना करते हैं। सबसे अधिक संख्या निग्रंथा लोगों की है। प्राचीन काल में कलिङ्ग देश बहुत घना वसा हुआ था, इस कारण मार्ग में चलते समय लोगों के कंधे से कंधे घिसते थे और रथों के पहियों के धुरे एक दूसरे से रगड साते थे । उन्हीं दिनों एक महात्मा ऋषि भी, जिसको पाँचों शक्तियाँ प्राप्त हो चुकी थीं, एक ऊँचे करार पर निवास करतापनी पवित्रता की प्रतिपालन कर रहा था। परन्तु किसी कारण विशेष से उसकी श्रद्भुत शक्ति का क्रमशः हास हो चला और लज्जित होकर उसने देशवासियों को शाप दे दिया, जिससे वृद्ध श्रार युवा, मूर्ख और विद्वान् - सबके सब समान रूप से मरने लगे, यहाँ तक कि सम्पूर्ण जनपद का नाश हो गया । इसके बहुत वर्ष बाद प्रवासी लोगों के द्वारा देश की आबाद धीरे धीरे कुछ बढ़ चली है तोभी जनसंख्या उतनी नहीं हुई है। और यही कारण है कि इन दिनों बहुत थोड़े लोग यहाँ पर निवास करते हैं। राजधानी के दक्षिण में थोड़ी दूर पर कोई सौ फीट ऊँचा अशोक का वनवाया हुआ एक स्तूप है । इसके पास गत चारों बुद्धों के उठने बैठने इत्यादि के चिह्न है।
लाहौरः पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में लोगों के एक समूह ने दुकान से चोरी करने का आरोप लगाकर एक किशोरी सहित चार महिलाओं के कपड़े उतार दिए गए और सड़क पर घसीट कर उनसे मारपीट की. घटना सोमवार को लाहौर से करीब 180 किलोमीटर दूर फैसलाबाद में हुई. सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में एक किशोरी सहित चार महिलाओं को अपने आस-पास के लोगों से विनती करते हुए देखा गया कि उन्हें बदन ढकने दें लेकिन उन्हें लाठियों से पीटा गया. महिलाओं को रोते हुए और लोगों से उन्हें जाने देने का अनुरोध करते देखा गया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. उन्हें एक घंटे तक सड़कों पर निर्वस्त्र परेड कराया गया. घटना के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पंजाब पुलिस हरकत में आई. उन्होंने कहा कि पुलिस मामले की जांच कर रही है और इसमें शामिल सभी आरोपियों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा. कानून के संबंधित प्रावधानों के तहत पांच संदिग्धों और कई अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. فیصل آباد پولیس نے رات 2 ملزمان کو گرفتار کرلیا تھا، مزید کاروائی کرکے پانچوں ملزمان کو گرفتار کر لیا گیا ہے۔ اس واقعہ کی دیگر تمام پہلوؤں سے بھی تفتیش کی جا رہی ہے۔ मामले के अनुसार पीड़िताओं ने बताया कि वे फैसलाबाद के बावा चक बाजार में कूड़ा उठाने गई थीं. पुलिस से बताया कि उन्हें इलाके में रहने वाले किसी ने फोन किया जिसके बाद वह तुरंत वहां पहुंचे और उन्होंने इलेक्ट्रिक स्टोर के मालिक और वहां काम करने वाले तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया. पुलिस ने बताया कि महिला के साथ दुर्व्यवहार के आरोप में फैसलाबाद सेंट्रल पुलिस ने दुकान के मालिक और कर्मचारी के अलावा आठ अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. पुलिस ने दुकान के मालिक सद्दाम, फैसल, जहीर अनवर और फकीर हुसैन को गिरफ्तार कर आरोपी के खिलाफ धारा 354 ए-509-147-149 TP के तहत मामला दर्ज किया है. बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है. फैसलाबाद के एसपी नईम अज़ीज ने बताया कि दुकानदार ने पुलिस को बताया है कि महिलाओं ने दुकान में चोरी की और जब दुकान दार ने उन्हें रंगेहाथों पकड़ा तो उन्होंने अपने कपड़े फाड़ने शुरू कर दिए. एस पी अज़ीज़ ने बताया कि जब पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज को खंगाला तो कुछ महिलाएं अपने कपड़े फाड़ते हुए देखी जा रही हैं. लेकिन वह कपड़े तब ज्यादा फट गए जब महिलाएं दुकान से खींच कर बाहर की जा रही थीं. उन्होंने कहा कि जांच के हिस्से के रूप में सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा की जा रही है, जांच के दौरान घटना के सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा. महिलाओं को बीच सड़क पर कपड़े उतार कर पीटे जाने को लेकर सोशल मीडिया पर पाकिस्तान को लेकर काफी कुछ कहा जा रहा है. एक यूजर इफ्तिकार फिरदौस लिखते हैं कि इस देश में कुछ ठीक नहीं हो रहा है. पाकिस्तान की पत्रकार रीम खुर्शीद ने भी इस वीडियो को ट्वीट किया है और साथ ही कंटेट वार्निंग भी लिखा है. रीम खुर्शीद लिखती हैं, 'एक और दिन, सामूहिक हिंसा की एक और घटनाः फैसलाबाद में 4 महिलाओं को पीटा गया, कपड़े उतारे गए और सार्वजनिक रूप से परेड कराई गई. दिल दिमाग को सुन्न करने देने वाली ऐसी घटनाएं लगातार हो रही हैं. वह अपने अगले ट्वीट में लिखती हैं यह कोई लॉ इनफॉर्समेंट का मुद्दा नहीं है बल्कि एक गंभीर बीमार समाज का नजारा है. Content warning: Another day, another incident of mass violence: two women beaten, stripped and paraded in public in Faisalabad. This is happening with mind-numbing regularity.
लाहौरः पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में लोगों के एक समूह ने दुकान से चोरी करने का आरोप लगाकर एक किशोरी सहित चार महिलाओं के कपड़े उतार दिए गए और सड़क पर घसीट कर उनसे मारपीट की. घटना सोमवार को लाहौर से करीब एक सौ अस्सी किलोग्राममीटर दूर फैसलाबाद में हुई. सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में एक किशोरी सहित चार महिलाओं को अपने आस-पास के लोगों से विनती करते हुए देखा गया कि उन्हें बदन ढकने दें लेकिन उन्हें लाठियों से पीटा गया. महिलाओं को रोते हुए और लोगों से उन्हें जाने देने का अनुरोध करते देखा गया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. उन्हें एक घंटे तक सड़कों पर निर्वस्त्र परेड कराया गया. घटना के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पंजाब पुलिस हरकत में आई. उन्होंने कहा कि पुलिस मामले की जांच कर रही है और इसमें शामिल सभी आरोपियों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा. कानून के संबंधित प्रावधानों के तहत पांच संदिग्धों और कई अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. فیصل آباد پولیس نے رات दो ملزمان کو گرفتار کرلیا تھا، مزید کاروائی کرکے پانچوں ملزمان کو گرفتار کر لیا گیا ہے۔ اس واقعہ کی دیگر تمام پہلوؤں سے بھی تفتیش کی جا رہی ہے۔ मामले के अनुसार पीड़िताओं ने बताया कि वे फैसलाबाद के बावा चक बाजार में कूड़ा उठाने गई थीं. पुलिस से बताया कि उन्हें इलाके में रहने वाले किसी ने फोन किया जिसके बाद वह तुरंत वहां पहुंचे और उन्होंने इलेक्ट्रिक स्टोर के मालिक और वहां काम करने वाले तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया. पुलिस ने बताया कि महिला के साथ दुर्व्यवहार के आरोप में फैसलाबाद सेंट्रल पुलिस ने दुकान के मालिक और कर्मचारी के अलावा आठ अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. पुलिस ने दुकान के मालिक सद्दाम, फैसल, जहीर अनवर और फकीर हुसैन को गिरफ्तार कर आरोपी के खिलाफ धारा तीन सौ चौवन ए-पाँच सौ नौ-एक सौ सैंतालीस-एक सौ उनचास TP के तहत मामला दर्ज किया है. बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है. फैसलाबाद के एसपी नईम अज़ीज ने बताया कि दुकानदार ने पुलिस को बताया है कि महिलाओं ने दुकान में चोरी की और जब दुकान दार ने उन्हें रंगेहाथों पकड़ा तो उन्होंने अपने कपड़े फाड़ने शुरू कर दिए. एस पी अज़ीज़ ने बताया कि जब पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज को खंगाला तो कुछ महिलाएं अपने कपड़े फाड़ते हुए देखी जा रही हैं. लेकिन वह कपड़े तब ज्यादा फट गए जब महिलाएं दुकान से खींच कर बाहर की जा रही थीं. उन्होंने कहा कि जांच के हिस्से के रूप में सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा की जा रही है, जांच के दौरान घटना के सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा. महिलाओं को बीच सड़क पर कपड़े उतार कर पीटे जाने को लेकर सोशल मीडिया पर पाकिस्तान को लेकर काफी कुछ कहा जा रहा है. एक यूजर इफ्तिकार फिरदौस लिखते हैं कि इस देश में कुछ ठीक नहीं हो रहा है. पाकिस्तान की पत्रकार रीम खुर्शीद ने भी इस वीडियो को ट्वीट किया है और साथ ही कंटेट वार्निंग भी लिखा है. रीम खुर्शीद लिखती हैं, 'एक और दिन, सामूहिक हिंसा की एक और घटनाः फैसलाबाद में चार महिलाओं को पीटा गया, कपड़े उतारे गए और सार्वजनिक रूप से परेड कराई गई. दिल दिमाग को सुन्न करने देने वाली ऐसी घटनाएं लगातार हो रही हैं. वह अपने अगले ट्वीट में लिखती हैं यह कोई लॉ इनफॉर्समेंट का मुद्दा नहीं है बल्कि एक गंभीर बीमार समाज का नजारा है. Content warning: Another day, another incident of mass violence: two women beaten, stripped and paraded in public in Faisalabad. This is happening with mind-numbing regularity.
दिल्ली : महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शनिवार को कहा कि उनकी सरकार ने बुलढाणा जिले में हुई बस दुर्घटना को गंभीरता से लिया है। साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि नागपुर-मुंबई समृद्धि एक्सप्रेस-वे पर दुर्घटनाओं को रोकने के लिए उपाय किये जाएंगे। महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में समृद्धि एक्सप्रेस-वे पर एक बस में आग लगने से 25 यात्रियों की झुलस कर मौत हो गई जबकि आठ घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि एक निजी ट्रैवल्स की बस नागपुर से पुणे जा रही थी, रास्ते में बुलढाणा जिले के सिंदखेडराजा के पास शुक्रवार देर रात करीब डेढ़ बजे बस डिवाइडर से टकरा गई और इसमें आग लग गई। शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुलढाणा जिले के पिंपलखुटा गांव का दौरा किया, जहां शुक्रवार देर रात दुर्घटना हुई थी। उन्होंने पुलिसकर्मियों, जिला प्रशासन के अधिकारियों और अधिकारियों को दुर्घटना के संबंध में जानकारी देने वाले स्थानीय निवासियों से बातचीत की। शिंदे ने घटनास्थल पर संवाददाताओं से कहा कि सभी वाहन चालकों को गति सीमा से संबंधित नियमों का पालन जरूर करना चाहिए। उन्होंने कहा, समृद्धि एक्सप्रेस-वे पर अब तक ज्यादातर हादसे मानवीय गलतियों के कारण हुए हैं। हालांकि, सरकार ने इस दुर्घटना को गंभीरता से लिया है और यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जाएंगे कि दुर्घटनाएं न हों। उन्होंने कहा कि दुर्घटनाओं को रोकने के उपाय करने से पहले विशेषज्ञों से सलाह ली जाएगी।
दिल्ली : महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शनिवार को कहा कि उनकी सरकार ने बुलढाणा जिले में हुई बस दुर्घटना को गंभीरता से लिया है। साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि नागपुर-मुंबई समृद्धि एक्सप्रेस-वे पर दुर्घटनाओं को रोकने के लिए उपाय किये जाएंगे। महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में समृद्धि एक्सप्रेस-वे पर एक बस में आग लगने से पच्चीस यात्रियों की झुलस कर मौत हो गई जबकि आठ घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि एक निजी ट्रैवल्स की बस नागपुर से पुणे जा रही थी, रास्ते में बुलढाणा जिले के सिंदखेडराजा के पास शुक्रवार देर रात करीब डेढ़ बजे बस डिवाइडर से टकरा गई और इसमें आग लग गई। शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुलढाणा जिले के पिंपलखुटा गांव का दौरा किया, जहां शुक्रवार देर रात दुर्घटना हुई थी। उन्होंने पुलिसकर्मियों, जिला प्रशासन के अधिकारियों और अधिकारियों को दुर्घटना के संबंध में जानकारी देने वाले स्थानीय निवासियों से बातचीत की। शिंदे ने घटनास्थल पर संवाददाताओं से कहा कि सभी वाहन चालकों को गति सीमा से संबंधित नियमों का पालन जरूर करना चाहिए। उन्होंने कहा, समृद्धि एक्सप्रेस-वे पर अब तक ज्यादातर हादसे मानवीय गलतियों के कारण हुए हैं। हालांकि, सरकार ने इस दुर्घटना को गंभीरता से लिया है और यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जाएंगे कि दुर्घटनाएं न हों। उन्होंने कहा कि दुर्घटनाओं को रोकने के उपाय करने से पहले विशेषज्ञों से सलाह ली जाएगी।
इंग्लैंड क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान केविन पीटरसन का मानना है कि भारत ने दूसरे टेस्ट में इंग्लैंड की जिस टीम को 317 रनों से हराया है, वह इंग्लैंड की 'बी' टीम है। पूर्व कप्तान ने साथ ही इस जीत के लिए टीम इंडिया को बधाई भी दी। भारत ने एमए चिदंबरम स्टेडियम में मंगलवार को यहां खेले गए दूसरे टेस्ट मैच में इंग्लैंड 317 रनों से हराया। यह टेस्ट मैचों में रनों के लिहाज से भारत की इंग्लैंड पर अब तक की सबसे बड़ी और अपने टेस्ट इतिहास की पांचवीं सबसे बड़ी जीत है। पीटरसन ने मंगलवार को ट्विटर पर लिखा, " बधाई हो इंडिया, इंग्लैंड 'बी' को हराने के लिए।"
इंग्लैंड क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान केविन पीटरसन का मानना है कि भारत ने दूसरे टेस्ट में इंग्लैंड की जिस टीम को तीन सौ सत्रह रनों से हराया है, वह इंग्लैंड की 'बी' टीम है। पूर्व कप्तान ने साथ ही इस जीत के लिए टीम इंडिया को बधाई भी दी। भारत ने एमए चिदंबरम स्टेडियम में मंगलवार को यहां खेले गए दूसरे टेस्ट मैच में इंग्लैंड तीन सौ सत्रह रनों से हराया। यह टेस्ट मैचों में रनों के लिहाज से भारत की इंग्लैंड पर अब तक की सबसे बड़ी और अपने टेस्ट इतिहास की पांचवीं सबसे बड़ी जीत है। पीटरसन ने मंगलवार को ट्विटर पर लिखा, " बधाई हो इंडिया, इंग्लैंड 'बी' को हराने के लिए।"
सोनीपत, 17 जुलाई (निस) लिटल एंजल्स स्कूल, सोनीपत की टीम के कप्तान रहे सुमित नागल को ओलंपिक का टिकट मिलने पर विद्यालय में खुशी का माहौल है। स्कूल की लॉन टेनिस खेलों की प्रभारी मीना मोर ने बताया कि सुमित नागल ने 2010-11 में विद्यालय का प्रतिनिधित्व करते हुए सीबीएसई नॉर्थ जोन लॉन टेनिस चैंपियनशिप में प्रथम स्थान प्राप्त किया। सुमित नागल ने ग्रैंड स्लैम के मेन ड्राॅ के पहले राउंड में रोजर फेडरर के साथ खेल कर इतिहास रचा। स्कूल के चेयरमैन तरसेम गर्ग, सचिव विशाल गर्ग व प्रधानाचार्या आशा गोयल ने सुमित को बधाई व शुभकामनाएं दीं।
सोनीपत, सत्रह जुलाई लिटल एंजल्स स्कूल, सोनीपत की टीम के कप्तान रहे सुमित नागल को ओलंपिक का टिकट मिलने पर विद्यालय में खुशी का माहौल है। स्कूल की लॉन टेनिस खेलों की प्रभारी मीना मोर ने बताया कि सुमित नागल ने दो हज़ार दस-ग्यारह में विद्यालय का प्रतिनिधित्व करते हुए सीबीएसई नॉर्थ जोन लॉन टेनिस चैंपियनशिप में प्रथम स्थान प्राप्त किया। सुमित नागल ने ग्रैंड स्लैम के मेन ड्राॅ के पहले राउंड में रोजर फेडरर के साथ खेल कर इतिहास रचा। स्कूल के चेयरमैन तरसेम गर्ग, सचिव विशाल गर्ग व प्रधानाचार्या आशा गोयल ने सुमित को बधाई व शुभकामनाएं दीं।
अलेनिकोव सर्गेई एवगेनिविच - सोवियत और बेलारूसी फुटबॉलर, जिनका कैरियर शिखर 80-90 के दशक में था। न केवल रूस में, बल्कि इटली, स्वीडन और जापान में भी खेला जाता है। एलेनिकोव सर्गेई एवेगेनिविच, जिनकी जीवनी हैमिन्स्क में शुरू होता है, 7 नवंबर 1961 को पैदा हुआ था। एक लड़के के रूप में, उनके पिता ने उन्हें जूनियर स्पोर्ट्स स्कूल नंबर 5 में दिया, जहां से कई प्रसिद्ध बेलारूसी फुटबॉल खिलाड़ियों ने स्नातक किया। पहली जीत अपने छात्र वर्षों में सर्गेई में हुई। "पेट्रेल" टीम के सदस्य के रूप में, उन्होंने बेलोरसियन कप जीता और रिपब्लिकन चैम्पियनशिप में तीसरे स्थान पर रहे। पहली पेशेवर टीम जो एलेनिकोव सेर्गेई एवेरेजिविच के लिए बोलना शुरू हुई थी, वह बेलारूसी फुटबॉल का प्रमुख था - डायनमो मिंस्क। पहले से ही 1982 में, 21 साल की उम्र में, उन्होंने लगातार पहली टीम में खेला। नतीजतन, इस चौकड़ी से आखिरी तकमिन्स्क के साथ चैम्पियनशिप केवल कीव वास करता था। आखिरी राउंड से पहले वे 1 अंक पीछे थे। फाइनल मैच में, यूक्रेनी टीम ने अरेट येरेवन को 3: 2 से हराया। मिन्स्क टीम को एक अधिक गंभीर प्रतिद्वंद्वी मिला -राजधानी "स्पार्टक"। खेल बेहद मनोरंजक और उत्पादक बन गया, तराजू एक या दूसरे तरीके से झुक गया, लेकिन अंत में बेलारूसियों को जीत मिली - 4: 3। अपने इतिहास में पहली बार, उन्होंने यूएसएसआर चैम्पियनशिप जीती। अलेनिकोव सर्गेई एवगेनिविच ने उस सीजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो साल-दर-साल बढ़ रही थी, जब तक कि वह टीम के कप्तान नहीं बन गए। 1989 तक मिन्स्क "डायनमो" के हिस्से के रूप में, 1983 के सीज़न में एक और कांस्य पदक जीता। कुल 220 मैच बिताए जिसमें उन्होंने 31 गोल किए। पहला आधिकारिक मैच एलेनिकोव मई में आयोजित किया गया थाउसी वर्ष यह यूनानियों के साथ ओलंपिक के लिए एक योग्य खेल था। यूएसएसआर राष्ट्रीय टीम ने जीता, एलेनिकोव को राष्ट्रीय टीम में पहला गोल और पहला पीला कार्ड द्वारा चिह्नित किया गया। 1985 में, अलीनीकोव ने राष्ट्रीय टीम में जीत हासिल की।जवाहरलाल नेहरू अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट "गोल्डन कप"। दिल्ली में फाइनल में, 55 हजार दर्शकों की उपस्थिति में, यूएसएसआर ने यूगोस्लाव की राष्ट्रीय टीम को 2: 1 से हराया। इस मैच में एलेनिकोव ने 12 वें मिनट में गोल करके स्कोर बनाया। पहले मैच में हंगरी की राष्ट्रीय टीम भी नहीं कर सकीसोवियत फुटबॉल खिलाड़ियों के साथ लड़ाई को चिह्नित करें। 2 वें मिनट में, पावेल याकोवेन्को ने स्कोरिंग को खोला और 4 वें मिनट में एलेनिकोव ने इसे दोगुना कर दिया। परिणाम - 6: 0 की हार, जबकि यूएसएसआर राष्ट्रीय टीम ने अभी तक 78 वें मिनट में पेनल्टी किक को लागू नहीं किया है। दूसरा मैच ज्यादा जिद्दी था। फ्रांसीसी गोल के साथ पहली बार प्रसन्न नहीं थे, लेकिन दूसरे खाते की शुरुआत में वासिली रैट को खोला गया। सच है, फ्रांसीसी पुनरावृत्ति करने में सक्षम थे, परिणाम - 1: 1। ग्रुप चरण के अंतिम मैच में, हमारे खिलाड़ी कनाडा के लोगों के साथ खेले, जो हंगरी से भी हार गए। यूएसएसआर ने आत्मविश्वास से 2-0 से जीत दर्ज की। समूह छोड़ने में कोई समस्या नहीं है, टीम समाप्त हो गई1/8 फाइनल के चरण में पहले से ही आपका रास्ता। बैरियर बेल्जियम की टीम थी। मुख्य समय 2: 2 के स्कोर के साथ समाप्त हुआ। अतिरिक्त आधे घंटे में, इगोर बेलानोव ने एक हैट-ट्रिक डिजाइन की, लेकिन बेल्जियमियों ने दो बार खुद को प्रतिष्ठित किया। परिणाम - 3: 4। कुल मिलाकर, एलीनिकोव ने यूएसएसआर राष्ट्रीय टीम के लिए 73 मैच खेले,6 गोल दागे। 1992 में, उन्होंने CIS टीम के लिए 4 मैचों का उल्लेख किया। जब सोवियत संघ आखिरकार ढह गया, तो कई खिलाड़ियों को एक गंभीर सवाल का सामना करना पड़ा कि किस टीम को चुनना है। अलेनिकोव सेर्गेई एवेरेजिविच भी आश्चर्यचकित थे। परिणामों के मामले में रूसी टीम अधिक आकर्षक थी, लेकिन अंत में उसने बेलारूस की राष्ट्रीय टीम को चुना। सच है, वह उसके लिए केवल 4 मैच खेले। यूरोपीय कप टूर्नामेंट अलेनिकोव का निर्णायक मैचमुख्य भाग में आयोजित प्रतिद्वंद्वियों में "जुवेंटस" को "फिओरेंटीना" मिला। मैच की शुरुआत में, टीमों ने गोलों का आदान-प्रदान किया, और दूसरे हाफ में टर्किस डोडाविली - 3: 1। दुर्भाग्य से, डिनो जोफ के इस्तीफे के बादएलेनिकोव को अधिक विनम्र "लेसी" में छोड़ना पड़ा। इटली में, उन्होंने एक और दो साल बिताए, जिसके बाद वह विदेशी जापानी चैम्पियनशिप, गंबा ओसाका टीम में चले गए। फिर वह उसी उच्च स्तर पर लौट आया, 3 सत्रों के लिए उसने 85 मैच खेले, जिसमें 14 गोल किए। एशिया में उनका करियर एक अप्रिय कहानी के रूप में समाप्त हुआ। डिब्रीफिंग में से एक पर, वह क्रोएशिया के एक कोच के साथ विवाद में आया, जिसने मिडफील्डर को रिजर्व में स्थानांतरित कर दिया। यूरोप में, उन्होंने पहले स्वीडिश ओडदेवोल्ड के लिए खेला, फिर इटालियन कोरिग्लिआनो और एनाग्नि फोंटाना चैंपियनशिप की निचली लीग की टीमों के लिए। 1998 में अपना करियर पूरा किया। कोचिंग क्षेत्र में अलेनिकोव पहले काम करता हैरूस जाने के बाद इतालवी शौकिया क्लबों के साथ। 2003 में, उन्होंने टॉरपीडो-मेटालर्ग का नेतृत्व किया, बाद में एफसी मोस्क्वा का नाम बदल दिया, लेकिन केवल आधा साल ही पतवार पर रहा। 2003 में टीम के शीर्ष पर "प्रमुख" बन गयापेशेवर लीग में पहली सीज़न। टीम समझदारी से शुरुआत करती है, 36 में से 15 मैच जीतती है और दूसरे डिवीजन के जैपड जोन में 6 वें स्थान पर रहती है। सच है, अगले साल क्लब को वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि वित्तीय समस्याओं के कारण टीम 12 अंक खो देती है, और चैम्पियनशिप के परिणामों के अनुसार - और पेशेवर स्थिति।
अलेनिकोव सर्गेई एवगेनिविच - सोवियत और बेलारूसी फुटबॉलर, जिनका कैरियर शिखर अस्सी-नब्बे के दशक में था। न केवल रूस में, बल्कि इटली, स्वीडन और जापान में भी खेला जाता है। एलेनिकोव सर्गेई एवेगेनिविच, जिनकी जीवनी हैमिन्स्क में शुरू होता है, सात नवंबर एक हज़ार नौ सौ इकसठ को पैदा हुआ था। एक लड़के के रूप में, उनके पिता ने उन्हें जूनियर स्पोर्ट्स स्कूल नंबर पाँच में दिया, जहां से कई प्रसिद्ध बेलारूसी फुटबॉल खिलाड़ियों ने स्नातक किया। पहली जीत अपने छात्र वर्षों में सर्गेई में हुई। "पेट्रेल" टीम के सदस्य के रूप में, उन्होंने बेलोरसियन कप जीता और रिपब्लिकन चैम्पियनशिप में तीसरे स्थान पर रहे। पहली पेशेवर टीम जो एलेनिकोव सेर्गेई एवेरेजिविच के लिए बोलना शुरू हुई थी, वह बेलारूसी फुटबॉल का प्रमुख था - डायनमो मिंस्क। पहले से ही एक हज़ार नौ सौ बयासी में, इक्कीस साल की उम्र में, उन्होंने लगातार पहली टीम में खेला। नतीजतन, इस चौकड़ी से आखिरी तकमिन्स्क के साथ चैम्पियनशिप केवल कीव वास करता था। आखिरी राउंड से पहले वे एक अंक पीछे थे। फाइनल मैच में, यूक्रेनी टीम ने अरेट येरेवन को तीन: दो से हराया। मिन्स्क टीम को एक अधिक गंभीर प्रतिद्वंद्वी मिला -राजधानी "स्पार्टक"। खेल बेहद मनोरंजक और उत्पादक बन गया, तराजू एक या दूसरे तरीके से झुक गया, लेकिन अंत में बेलारूसियों को जीत मिली - चार: तीन। अपने इतिहास में पहली बार, उन्होंने यूएसएसआर चैम्पियनशिप जीती। अलेनिकोव सर्गेई एवगेनिविच ने उस सीजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो साल-दर-साल बढ़ रही थी, जब तक कि वह टीम के कप्तान नहीं बन गए। एक हज़ार नौ सौ नवासी तक मिन्स्क "डायनमो" के हिस्से के रूप में, एक हज़ार नौ सौ तिरासी के सीज़न में एक और कांस्य पदक जीता। कुल दो सौ बीस मैच बिताए जिसमें उन्होंने इकतीस गोल किए। पहला आधिकारिक मैच एलेनिकोव मई में आयोजित किया गया थाउसी वर्ष यह यूनानियों के साथ ओलंपिक के लिए एक योग्य खेल था। यूएसएसआर राष्ट्रीय टीम ने जीता, एलेनिकोव को राष्ट्रीय टीम में पहला गोल और पहला पीला कार्ड द्वारा चिह्नित किया गया। एक हज़ार नौ सौ पचासी में, अलीनीकोव ने राष्ट्रीय टीम में जीत हासिल की।जवाहरलाल नेहरू अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट "गोल्डन कप"। दिल्ली में फाइनल में, पचपन हजार दर्शकों की उपस्थिति में, यूएसएसआर ने यूगोस्लाव की राष्ट्रीय टीम को दो: एक से हराया। इस मैच में एलेनिकोव ने बारह वें मिनट में गोल करके स्कोर बनाया। पहले मैच में हंगरी की राष्ट्रीय टीम भी नहीं कर सकीसोवियत फुटबॉल खिलाड़ियों के साथ लड़ाई को चिह्नित करें। दो वें मिनट में, पावेल याकोवेन्को ने स्कोरिंग को खोला और चार वें मिनट में एलेनिकोव ने इसे दोगुना कर दिया। परिणाम - छः: शून्य की हार, जबकि यूएसएसआर राष्ट्रीय टीम ने अभी तक अठहत्तर वें मिनट में पेनल्टी किक को लागू नहीं किया है। दूसरा मैच ज्यादा जिद्दी था। फ्रांसीसी गोल के साथ पहली बार प्रसन्न नहीं थे, लेकिन दूसरे खाते की शुरुआत में वासिली रैट को खोला गया। सच है, फ्रांसीसी पुनरावृत्ति करने में सक्षम थे, परिणाम - एक: एक। ग्रुप चरण के अंतिम मैच में, हमारे खिलाड़ी कनाडा के लोगों के साथ खेले, जो हंगरी से भी हार गए। यूएसएसआर ने आत्मविश्वास से दो-शून्य से जीत दर्ज की। समूह छोड़ने में कोई समस्या नहीं है, टीम समाप्त हो गईएक/आठ फाइनल के चरण में पहले से ही आपका रास्ता। बैरियर बेल्जियम की टीम थी। मुख्य समय दो: दो के स्कोर के साथ समाप्त हुआ। अतिरिक्त आधे घंटे में, इगोर बेलानोव ने एक हैट-ट्रिक डिजाइन की, लेकिन बेल्जियमियों ने दो बार खुद को प्रतिष्ठित किया। परिणाम - तीन: चार। कुल मिलाकर, एलीनिकोव ने यूएसएसआर राष्ट्रीय टीम के लिए तिहत्तर मैच खेले,छः गोल दागे। एक हज़ार नौ सौ बानवे में, उन्होंने CIS टीम के लिए चार मैचों का उल्लेख किया। जब सोवियत संघ आखिरकार ढह गया, तो कई खिलाड़ियों को एक गंभीर सवाल का सामना करना पड़ा कि किस टीम को चुनना है। अलेनिकोव सेर्गेई एवेरेजिविच भी आश्चर्यचकित थे। परिणामों के मामले में रूसी टीम अधिक आकर्षक थी, लेकिन अंत में उसने बेलारूस की राष्ट्रीय टीम को चुना। सच है, वह उसके लिए केवल चार मैच खेले। यूरोपीय कप टूर्नामेंट अलेनिकोव का निर्णायक मैचमुख्य भाग में आयोजित प्रतिद्वंद्वियों में "जुवेंटस" को "फिओरेंटीना" मिला। मैच की शुरुआत में, टीमों ने गोलों का आदान-प्रदान किया, और दूसरे हाफ में टर्किस डोडाविली - तीन: एक। दुर्भाग्य से, डिनो जोफ के इस्तीफे के बादएलेनिकोव को अधिक विनम्र "लेसी" में छोड़ना पड़ा। इटली में, उन्होंने एक और दो साल बिताए, जिसके बाद वह विदेशी जापानी चैम्पियनशिप, गंबा ओसाका टीम में चले गए। फिर वह उसी उच्च स्तर पर लौट आया, तीन सत्रों के लिए उसने पचासी मैच खेले, जिसमें चौदह गोल किए। एशिया में उनका करियर एक अप्रिय कहानी के रूप में समाप्त हुआ। डिब्रीफिंग में से एक पर, वह क्रोएशिया के एक कोच के साथ विवाद में आया, जिसने मिडफील्डर को रिजर्व में स्थानांतरित कर दिया। यूरोप में, उन्होंने पहले स्वीडिश ओडदेवोल्ड के लिए खेला, फिर इटालियन कोरिग्लिआनो और एनाग्नि फोंटाना चैंपियनशिप की निचली लीग की टीमों के लिए। एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में अपना करियर पूरा किया। कोचिंग क्षेत्र में अलेनिकोव पहले काम करता हैरूस जाने के बाद इतालवी शौकिया क्लबों के साथ। दो हज़ार तीन में, उन्होंने टॉरपीडो-मेटालर्ग का नेतृत्व किया, बाद में एफसी मोस्क्वा का नाम बदल दिया, लेकिन केवल आधा साल ही पतवार पर रहा। दो हज़ार तीन में टीम के शीर्ष पर "प्रमुख" बन गयापेशेवर लीग में पहली सीज़न। टीम समझदारी से शुरुआत करती है, छत्तीस में से पंद्रह मैच जीतती है और दूसरे डिवीजन के जैपड जोन में छः वें स्थान पर रहती है। सच है, अगले साल क्लब को वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि वित्तीय समस्याओं के कारण टीम बारह अंक खो देती है, और चैम्पियनशिप के परिणामों के अनुसार - और पेशेवर स्थिति।
दुनिया की दिग्गज ब्रोकरेज कंपनी मॉर्गन स्टेनली ने अब भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) ग्रोथ रेट में 0. 40 फीसदी की कटौती की है। नोमुरा के बाद मॉर्गन स्टेनली ने सोमवार को वित्त वर्ष 2022-23 के लिए देश के विकास दर पूर्वानुमान को 7. 6 फीसदी से घटाकर 7. 2 फीसदी कर दिया है। मॉर्गन स्टेनली के जारी रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2022-23 में भारत का जीडीपी ग्रोथ रेट 7. 2 फीसदी रहेगा। ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि वैश्विक व्यापार में आई सुस्ती और कठिन आर्थिक परिस्थितियों की वजह से दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है। इसी के मद्देनजर भारत की जीडीपी ग्रोथ के पूर्व अनुमान में कटौती की गई है। हालांकि, अगले वर्ष के लिए मॉर्गन स्टैनली ने सालाना जीडीपी ग्रोथ 6. 4 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। ब्रोकरेज फर्म का भारत के विकास दर का अनुमान ऐस समय में आया है, जब वित्त वर्ष 2022-23 की पहली (अप्रैल-जून) तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट 4. 2 फीसदी रही है, जो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के संशोधित अनुमान के अनुरूप है। इस बीच ब्रोकरेज फर्म ने अनुमान जताया कि भारत में महंगाई दर में आने वाले वक्त में और नरमी आएगी। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में मॉर्गन स्टेनली की मुख्य अर्थशास्त्री उपासना चाचड़ा ने कहा है कि कमोडिटीज की कीमतों में आ रही नरमी और घरेलू खाद्य पदार्थों के घटती कीमत की बदौलत हमें उम्मीद है कि निकट भविष्य में महंगाई दर और घटेगी। जापानी ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने साल 2023 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट अपने 5. 4 फीसदी के पूर्वानुमान को घटाकर 4. 7 फीसदी कर दिया था। हालांकि, इससे पहले फिच रेटिंग्स ने वित्त वर्ष 2022-23 के लिए आर्थिक वृद्धि दर अनुमान घटाकर 7. 8 फीसदी कर दिया था, वैश्विक रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ने चालू वित्त वर्ष में विकास दर 7. 3 फीसदी रहने का अनुमान जताया। आरबीआाई ने मौजूदा परिदृश्य में जीडीपी 7. 2 फीसदी के दर से बढ़ने का अनुमान जताया है।
दुनिया की दिग्गज ब्रोकरेज कंपनी मॉर्गन स्टेनली ने अब भारत के सकल घरेलू उत्पाद ग्रोथ रेट में शून्य. चालीस फीसदी की कटौती की है। नोमुरा के बाद मॉर्गन स्टेनली ने सोमवार को वित्त वर्ष दो हज़ार बाईस-तेईस के लिए देश के विकास दर पूर्वानुमान को सात. छः फीसदी से घटाकर सात. दो फीसदी कर दिया है। मॉर्गन स्टेनली के जारी रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष दो हज़ार बाईस-तेईस में भारत का जीडीपी ग्रोथ रेट सात. दो फीसदी रहेगा। ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि वैश्विक व्यापार में आई सुस्ती और कठिन आर्थिक परिस्थितियों की वजह से दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है। इसी के मद्देनजर भारत की जीडीपी ग्रोथ के पूर्व अनुमान में कटौती की गई है। हालांकि, अगले वर्ष के लिए मॉर्गन स्टैनली ने सालाना जीडीपी ग्रोथ छः. चार फीसदी रहने का अनुमान जताया है। ब्रोकरेज फर्म का भारत के विकास दर का अनुमान ऐस समय में आया है, जब वित्त वर्ष दो हज़ार बाईस-तेईस की पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट चार. दो फीसदी रही है, जो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के संशोधित अनुमान के अनुरूप है। इस बीच ब्रोकरेज फर्म ने अनुमान जताया कि भारत में महंगाई दर में आने वाले वक्त में और नरमी आएगी। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में मॉर्गन स्टेनली की मुख्य अर्थशास्त्री उपासना चाचड़ा ने कहा है कि कमोडिटीज की कीमतों में आ रही नरमी और घरेलू खाद्य पदार्थों के घटती कीमत की बदौलत हमें उम्मीद है कि निकट भविष्य में महंगाई दर और घटेगी। जापानी ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने साल दो हज़ार तेईस के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट अपने पाँच. चार फीसदी के पूर्वानुमान को घटाकर चार. सात फीसदी कर दिया था। हालांकि, इससे पहले फिच रेटिंग्स ने वित्त वर्ष दो हज़ार बाईस-तेईस के लिए आर्थिक वृद्धि दर अनुमान घटाकर सात. आठ फीसदी कर दिया था, वैश्विक रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ने चालू वित्त वर्ष में विकास दर सात. तीन फीसदी रहने का अनुमान जताया। आरबीआाई ने मौजूदा परिदृश्य में जीडीपी सात. दो फीसदी के दर से बढ़ने का अनुमान जताया है।
मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम कमलनाथ ने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि चुनाव आते ही भारतीय जनता पार्टी के नेता शिलान्यास का ढोंग करते हैं। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा सरकार को प्रदेश की जनता की याद सिर्फ चुनाव के समय ही आती है। कमलनाथ ने ट्वीट करते हुए कहा कि कहा भाजपा सरकार को प्रदेश की जनता की याद सिर्फ चुनाव के समय ही आती है। जब भी कोई चुनाव सामने आते हैं, मुख्यमंत्री से लेकर भाजपा के तमाम मंत्री, नेता झूठे नारियल फोड़ने निकल पड़ते हैं , झूठी घोषणाओं में लग जाते हैं, झूठे भूमिपूजन, शिलान्यास की बाढ़ सी आ जाती है। उन्होंने आगे लिखा कि अब फिर पंचायत व नगरीय निकाय के चुनाव को देखते हुए एक बार फिर पूरे प्रदेश में जनता को गुमराह करने के लिए ये खेल शुरु हो चुका है। ख़ाली ख़ज़ाने से एक बार फिर करोड़ों के झूठे सपने दिखाये जा रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने आरोप लगाया कि हर चुनाव के पहले इस तरह का खेल खेला जाता है। बाकी समय में तो सरकार इवेंट, प्रचार-प्रसार, भ्रष्टाचार और घोटालों में लगी रहती है।
मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम कमलनाथ ने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि चुनाव आते ही भारतीय जनता पार्टी के नेता शिलान्यास का ढोंग करते हैं। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा सरकार को प्रदेश की जनता की याद सिर्फ चुनाव के समय ही आती है। कमलनाथ ने ट्वीट करते हुए कहा कि कहा भाजपा सरकार को प्रदेश की जनता की याद सिर्फ चुनाव के समय ही आती है। जब भी कोई चुनाव सामने आते हैं, मुख्यमंत्री से लेकर भाजपा के तमाम मंत्री, नेता झूठे नारियल फोड़ने निकल पड़ते हैं , झूठी घोषणाओं में लग जाते हैं, झूठे भूमिपूजन, शिलान्यास की बाढ़ सी आ जाती है। उन्होंने आगे लिखा कि अब फिर पंचायत व नगरीय निकाय के चुनाव को देखते हुए एक बार फिर पूरे प्रदेश में जनता को गुमराह करने के लिए ये खेल शुरु हो चुका है। ख़ाली ख़ज़ाने से एक बार फिर करोड़ों के झूठे सपने दिखाये जा रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने आरोप लगाया कि हर चुनाव के पहले इस तरह का खेल खेला जाता है। बाकी समय में तो सरकार इवेंट, प्रचार-प्रसार, भ्रष्टाचार और घोटालों में लगी रहती है।
( ११ ) (४) मुस्पर्ण करती लेखनी पायी सुसमति आप से, दी शोध कृपया आपने सह धर्म प्रेम प्रताप से । आभार स्वीकृत मैं करूँ अपने वचन अलाप से, कीर्तन करूं प्रभु का प्रकट वचते जगत जन पाप से। ( प्रकाशक की प्रार्थना ) ( १ ) मेरे पूज्य जनक ने लिल दी वृषभनाथ की जो सुस्तुति, पाठक ! पढ़ें प्रेम से उसको सादर करता हूँ प्रस्तुत । करूं प्रकाशक बर्ते सत्पथ रखूं बन्धुओं के सन्मुख, संकट रहे न विश्व भूमिमें मन, वच, तनसे टलते दुख। (२) परिचित शिशु जिलासु उन्होंसे पंडित पूज्य गणेश प्रसाद, ढी अशीस उनने शिशुओं को सिखलाये हैं शुभ संवाद । गुरु गणपति सम पूज्य हमारे, उनका करता हूँ अर्चन, जिनने सुपथ सुझाया इसको सीखे शिशु जैन दुर्शन । ६ कमल सुमन की अतिशय उपमा दे भकाम्मर प्रकट हुवा, पद्म नाम पड़ रहा कमल का कोपों से मालूम हुआ । किया प्रमाण यही लेखक में पंचांकर का दूजा नाम, मागतुङ्ग मुनिवर का समझा अर्थन करके किया अंजाम।
मुस्पर्ण करती लेखनी पायी सुसमति आप से, दी शोध कृपया आपने सह धर्म प्रेम प्रताप से । आभार स्वीकृत मैं करूँ अपने वचन अलाप से, कीर्तन करूं प्रभु का प्रकट वचते जगत जन पाप से। मेरे पूज्य जनक ने लिल दी वृषभनाथ की जो सुस्तुति, पाठक ! पढ़ें प्रेम से उसको सादर करता हूँ प्रस्तुत । करूं प्रकाशक बर्ते सत्पथ रखूं बन्धुओं के सन्मुख, संकट रहे न विश्व भूमिमें मन, वच, तनसे टलते दुख। परिचित शिशु जिलासु उन्होंसे पंडित पूज्य गणेश प्रसाद, ढी अशीस उनने शिशुओं को सिखलाये हैं शुभ संवाद । गुरु गणपति सम पूज्य हमारे, उनका करता हूँ अर्चन, जिनने सुपथ सुझाया इसको सीखे शिशु जैन दुर्शन । छः कमल सुमन की अतिशय उपमा दे भकाम्मर प्रकट हुवा, पद्म नाम पड़ रहा कमल का कोपों से मालूम हुआ । किया प्रमाण यही लेखक में पंचांकर का दूजा नाम, मागतुङ्ग मुनिवर का समझा अर्थन करके किया अंजाम।
कन्नाौद (नईदुनिया न्यूज)। सोमवार को ब्लॉक मुख्यालय पर तीन परीक्षा केंद्रों पर कक्षा 12वीं की पूरक परीक्षा प्रारंभ हुई। इसमें 522 परीक्षार्थी शामिल हुए। ब्लॉक शिक्षा अधिकारी गुरुदत्त शर्मा ने बताया कि कन्या उमावि के परीक्षा केंद्र पर 197 में से 180 परीक्षार्थी शामिल हुए। शासकीय उमावि में 206 में से 183 परीक्षार्थी शामिल हुए। मॉडल स्कूल में 166 में से 159 परीक्षार्थी शामिल हुए। तीनों परीक्षा केंद्रों पर कोरोना गाइडलाइन के तहत सभी कक्षाओं को सैनिटाइज किया गया। परीक्षार्थी मास्क लगाकर ही परीक्षा में शामिल हुए। बागली। कोरोना महामारी के बढ़ते संक्रमण के बीच हायर सेकंडरी की पूरक परीक्षा सोमवार से प्रारंभ हुई। इसमें 368 विद्यार्थी शामिल हुए। परीक्षा प्रभारी हर्ष पंडित ने बताया कि कक्षा 12वीं में 51 परीक्षार्थी अनुपस्थित थे। मंगलवार को कक्षा 10वीं की परीक्षा प्रारंभ होगी। परीक्षा से पूर्व स्कूल व कक्षा को सैनिटाइज भी किया जा रहा है। परीक्षार्थियों की थर्मल स्कैनिंग भी की जा रही है। बागली। कालेज में ऑनलाइन परीक्षा की उतरपुस्तिका जमा कराने की अंतिम तारीख सोमवार को होने से विद्यार्थियों की भीड़ रही। कॉलेज प्रभारी विजय त्रिपाठी ने बताया कि अंतिम वर्ष के 168 परीक्षार्थी हैं। इसमें घाट नीचे पीपरी, उदयनगर, पीपलपाटी, पुंजापुरा से भी विद्यार्थी अपने-अपने साधन से कापियां जमा कराने पहुंचे। कॉलेज के प्रवेश मार्ग पर पानी भरा होने से विद्यार्थियों को परेशानी भी हुई। कांटाफोड़ (नईदुनिया न्यूज)। समीपस्थ चंद्रकेशर बांध स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में हिंदी पखवाड़ा समापन समारोह का आयोजन किया गया। विद्यालय में एक से 14 सितंबर तक हिंदी दिवस का आयोजन किया गया। प्राचार्य एचके सिंह एवं उपप्राचार्य डा. एके गिरि ने बताया कि हिंदी दिवस के अवसर पर कविता पाठ, भाषण, चित्र, निबंध एवं राज भाषा प्रश्नोत्तरी आदि प्रतियोगिता का ऑनलाइन आयोजन किया गया। इसमें छात्रा-छात्राओं, शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। सफल प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कवि मनोज दुबे, सहित समस्त शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं कर्मचारी उपस्थित थे। संचालन मधु रस्तोगी ने किया। डॉ. अलका कोठारी ने आभार माना। टोंककलां। हिंदी दिवस पर नेहरू युवा केंद्र की ओर से चित्रकला प्रतियोगिता करवाई गई। इसमें बच्चों ने शामिल होकर आकर्षक चित्र बनाए। केंद्र की पूजा वर्मा ने बताया कि हिंदी दिवस पखवाड़ा 28 सितंबर तक मनाया जाएगा। पखवाड़े में सर्वधर्म प्रार्थना, संगोष्ठी, देशभक्ति गीत व समूहगान, भाषण सहित अन्य प्रतियोगिताएं करवाई जाएंगी। विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार व प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे। इस अवसर पर जितेंद्र वर्मा, दीपक यादव, बिंदिया, तनिशा वर्मा आदि मौजूद थे। कन्नाौद (नईदुनिया न्यूज)। शासकीय कन्या उमावि के सभाकक्ष में अजाक्स का तहसील स्तरीय शपथ विधि व नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान किया गया। संघ ने विभिन्ना मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम का ज्ञापन विधायक आशीष शर्मा को दिया। कार्यक्रम में विधायक शर्मा, पहाड़सिंह कन्नाौजे ने भी संबोधित किया। एसएन सोलंकी ने संघ के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर महेश बिरोलिया, रमेशचंद्र चांगेसिया, कैलाश वीरपरा, हेमराज गोखले, श्रीकिशन उईके, रेवाराम हरियाले, संतोष हरियाले, रामबक्श हरियाले आदि उपस्थित थे। उदयनगर (नईदुनिया न्यूज) । आदिवासी संगठन ने अपनी विभिन्ना मांगों को लेकर तहसीलदार व थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपा। इसमें कहा गया कि संयुक्त राष्ट्र संगठन ने आदिवासियों के अधिकारों की घोषणा 13 सितंबर 2007 को की थी, लेकिन शासन स्तर पर सही तरह से इसका क्रियान्वयन नहीं हुआ। साथ ही पंचायत स्तर पर भी अनुमोदन नहीं किया। सरकार आदिवासियों के हितों को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई करें। इस अवसर पर नंदू रावत, गोविंद बामनिया सहित संगठन के अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
कन्नाौद । सोमवार को ब्लॉक मुख्यालय पर तीन परीक्षा केंद्रों पर कक्षा बारहवीं की पूरक परीक्षा प्रारंभ हुई। इसमें पाँच सौ बाईस परीक्षार्थी शामिल हुए। ब्लॉक शिक्षा अधिकारी गुरुदत्त शर्मा ने बताया कि कन्या उमावि के परीक्षा केंद्र पर एक सौ सत्तानवे में से एक सौ अस्सी परीक्षार्थी शामिल हुए। शासकीय उमावि में दो सौ छः में से एक सौ तिरासी परीक्षार्थी शामिल हुए। मॉडल स्कूल में एक सौ छयासठ में से एक सौ उनसठ परीक्षार्थी शामिल हुए। तीनों परीक्षा केंद्रों पर कोरोना गाइडलाइन के तहत सभी कक्षाओं को सैनिटाइज किया गया। परीक्षार्थी मास्क लगाकर ही परीक्षा में शामिल हुए। बागली। कोरोना महामारी के बढ़ते संक्रमण के बीच हायर सेकंडरी की पूरक परीक्षा सोमवार से प्रारंभ हुई। इसमें तीन सौ अड़सठ विद्यार्थी शामिल हुए। परीक्षा प्रभारी हर्ष पंडित ने बताया कि कक्षा बारहवीं में इक्यावन परीक्षार्थी अनुपस्थित थे। मंगलवार को कक्षा दसवीं की परीक्षा प्रारंभ होगी। परीक्षा से पूर्व स्कूल व कक्षा को सैनिटाइज भी किया जा रहा है। परीक्षार्थियों की थर्मल स्कैनिंग भी की जा रही है। बागली। कालेज में ऑनलाइन परीक्षा की उतरपुस्तिका जमा कराने की अंतिम तारीख सोमवार को होने से विद्यार्थियों की भीड़ रही। कॉलेज प्रभारी विजय त्रिपाठी ने बताया कि अंतिम वर्ष के एक सौ अड़सठ परीक्षार्थी हैं। इसमें घाट नीचे पीपरी, उदयनगर, पीपलपाटी, पुंजापुरा से भी विद्यार्थी अपने-अपने साधन से कापियां जमा कराने पहुंचे। कॉलेज के प्रवेश मार्ग पर पानी भरा होने से विद्यार्थियों को परेशानी भी हुई। कांटाफोड़ । समीपस्थ चंद्रकेशर बांध स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में हिंदी पखवाड़ा समापन समारोह का आयोजन किया गया। विद्यालय में एक से चौदह सितंबर तक हिंदी दिवस का आयोजन किया गया। प्राचार्य एचके सिंह एवं उपप्राचार्य डा. एके गिरि ने बताया कि हिंदी दिवस के अवसर पर कविता पाठ, भाषण, चित्र, निबंध एवं राज भाषा प्रश्नोत्तरी आदि प्रतियोगिता का ऑनलाइन आयोजन किया गया। इसमें छात्रा-छात्राओं, शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। सफल प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कवि मनोज दुबे, सहित समस्त शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं कर्मचारी उपस्थित थे। संचालन मधु रस्तोगी ने किया। डॉ. अलका कोठारी ने आभार माना। टोंककलां। हिंदी दिवस पर नेहरू युवा केंद्र की ओर से चित्रकला प्रतियोगिता करवाई गई। इसमें बच्चों ने शामिल होकर आकर्षक चित्र बनाए। केंद्र की पूजा वर्मा ने बताया कि हिंदी दिवस पखवाड़ा अट्ठाईस सितंबर तक मनाया जाएगा। पखवाड़े में सर्वधर्म प्रार्थना, संगोष्ठी, देशभक्ति गीत व समूहगान, भाषण सहित अन्य प्रतियोगिताएं करवाई जाएंगी। विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार व प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे। इस अवसर पर जितेंद्र वर्मा, दीपक यादव, बिंदिया, तनिशा वर्मा आदि मौजूद थे। कन्नाौद । शासकीय कन्या उमावि के सभाकक्ष में अजाक्स का तहसील स्तरीय शपथ विधि व नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान किया गया। संघ ने विभिन्ना मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम का ज्ञापन विधायक आशीष शर्मा को दिया। कार्यक्रम में विधायक शर्मा, पहाड़सिंह कन्नाौजे ने भी संबोधित किया। एसएन सोलंकी ने संघ के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर महेश बिरोलिया, रमेशचंद्र चांगेसिया, कैलाश वीरपरा, हेमराज गोखले, श्रीकिशन उईके, रेवाराम हरियाले, संतोष हरियाले, रामबक्श हरियाले आदि उपस्थित थे। उदयनगर । आदिवासी संगठन ने अपनी विभिन्ना मांगों को लेकर तहसीलदार व थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपा। इसमें कहा गया कि संयुक्त राष्ट्र संगठन ने आदिवासियों के अधिकारों की घोषणा तेरह सितंबर दो हज़ार सात को की थी, लेकिन शासन स्तर पर सही तरह से इसका क्रियान्वयन नहीं हुआ। साथ ही पंचायत स्तर पर भी अनुमोदन नहीं किया। सरकार आदिवासियों के हितों को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई करें। इस अवसर पर नंदू रावत, गोविंद बामनिया सहित संगठन के अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
भारत सरकार ने असम हिंसा के मामले में मुस्लिम देशों के संगठन ओआईसी की आपत्ति का जवाब देते हुए कहा है कि भारत बेहद खेदपूर्ण तरीक़े से यह बताना चाहता है कि OIC ने भारत के आंतरिक मामले पर एक बार फिर टिप्पणी की है, जिसमें उसने भारत के राज्य असम की एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना को लेकर तथ्यात्मक रूप से ग़लत और भ्रामक बयान जारी किया है। मुस्लिम देशों के सबसे बड़े संगठन ओआईसी ने भारत के असम राज्य में मुसलमानों पर हुए बर्बरतापूर्ण हमले की निंदा करते हुए इसे संगठित हिंसा और उत्पीड़न क़रार दिया था। इस हिंसा में जिसमें एक तरफ़ पुलिस थी दो मुस्लिम नागरिकों की जानें गई थीं और एक के शव पर वह पत्रकार बड़े वहशियाना तरीक़े से कूद रहा था जिसे पुलिस अपने साथ वीडियोग्राफ़ी के लिए लेकर गई थी। गुरुवार को संगठन के ट्वीटर हैंडल से जारी होने वाले बयान में ओआईसी ने घटना की मीडिया कवरेज को शर्मनाक बताया और भारत सरकार से अपील की कि ज़िम्मेदाराना रवैया अपनाए। बयान में भारत की मोदी सरकार से अपील की गई कि वह अल्पसंख्यक मुस्लिमों को सुरक्षा उपलब्ध कराए और उनके बुनियादी सामाजिक और धार्मिक अधिकारों का सम्मान करे। शुक्रवार रात भारत के विदेश मंत्रालत के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने एक सवाल के जवाब में बयान जारी किया जिसमें ओआईसी के बयान की निंदा की गई है और साथ ही बयान में कहा गया है कि भारत इस संबंध में उचित क़ानूनी कार्रवाई कर रहा है। बयान में लिखा है कि यहाँ यह दोहराया जाता है कि OIC को भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का कोई अधिकार नहीं है और उसे अपने मंच को निजी स्वार्थों के लिए इस्तेमाल नहीं होने देना चाहिए। भारत ने OIC को चेताते हुए कहा है कि भारत सरकर इन सभी निराधार बयानों को ख़ारिज करती है और आशा करती है कि इस तरह के बयान भविष्य में नहीं दिए जाएंगे। हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिए!
भारत सरकार ने असम हिंसा के मामले में मुस्लिम देशों के संगठन ओआईसी की आपत्ति का जवाब देते हुए कहा है कि भारत बेहद खेदपूर्ण तरीक़े से यह बताना चाहता है कि OIC ने भारत के आंतरिक मामले पर एक बार फिर टिप्पणी की है, जिसमें उसने भारत के राज्य असम की एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना को लेकर तथ्यात्मक रूप से ग़लत और भ्रामक बयान जारी किया है। मुस्लिम देशों के सबसे बड़े संगठन ओआईसी ने भारत के असम राज्य में मुसलमानों पर हुए बर्बरतापूर्ण हमले की निंदा करते हुए इसे संगठित हिंसा और उत्पीड़न क़रार दिया था। इस हिंसा में जिसमें एक तरफ़ पुलिस थी दो मुस्लिम नागरिकों की जानें गई थीं और एक के शव पर वह पत्रकार बड़े वहशियाना तरीक़े से कूद रहा था जिसे पुलिस अपने साथ वीडियोग्राफ़ी के लिए लेकर गई थी। गुरुवार को संगठन के ट्वीटर हैंडल से जारी होने वाले बयान में ओआईसी ने घटना की मीडिया कवरेज को शर्मनाक बताया और भारत सरकार से अपील की कि ज़िम्मेदाराना रवैया अपनाए। बयान में भारत की मोदी सरकार से अपील की गई कि वह अल्पसंख्यक मुस्लिमों को सुरक्षा उपलब्ध कराए और उनके बुनियादी सामाजिक और धार्मिक अधिकारों का सम्मान करे। शुक्रवार रात भारत के विदेश मंत्रालत के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने एक सवाल के जवाब में बयान जारी किया जिसमें ओआईसी के बयान की निंदा की गई है और साथ ही बयान में कहा गया है कि भारत इस संबंध में उचित क़ानूनी कार्रवाई कर रहा है। बयान में लिखा है कि यहाँ यह दोहराया जाता है कि OIC को भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का कोई अधिकार नहीं है और उसे अपने मंच को निजी स्वार्थों के लिए इस्तेमाल नहीं होने देना चाहिए। भारत ने OIC को चेताते हुए कहा है कि भारत सरकर इन सभी निराधार बयानों को ख़ारिज करती है और आशा करती है कि इस तरह के बयान भविष्य में नहीं दिए जाएंगे। हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिए!
आदरणीय साथिओ, Replies are closed for this discussion. अच्छी सन्देशपरक लघुकथा है आदरणीय सुरेन्द्र कुमार सिंह जी. वैसे इसे थोड़ा और छोटा किया जा सकता है. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर. हार्दिक बधाई आदरणीय सुरेन्द्र कुमार सिंह जी. जी।बेहतरीन प्रस्तुति । मतदान हो चुका था। मतगणना चल रही थी। मणि शांत बैठी पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम को अपने मस्तिष्क में दोबारा घटते हुए देख रही थी। शहर की प्रतिष्ठित सामाजिक संस्था के अध्यक्ष पद के चुनाव का नोटिफिकेशन केंद्रीय समिति भेज चुकी थी। मणिकर्णिका जिसे सब मणि बुलाते थे, काफी समय से इस संस्था की सक्रीय सदस्य थी। अपने अनुभव, सदस्यों के आग्रह, रचनाशीलता और आगे बढ़ने के जुझारू व्यक्तित्व के चलते उसने नामांकन भी भर दिया। "मतगणना का नतीजा आने वाला है।" उसके पास बैठे शर्मा जी ने कहा। मणि ने अनसुना सा किया और फिर पिछली यादों में खो गई। एक खेमे को इसमें अपनी शक्ति और प्रतिष्ठा दांव पर नज़र आ रही थी। पुराने अधिकारियों और अध्यक्षों ने सर्वसम्मति बनाने का प्रयास किया। किन्तु मणि अपना नाम प्रस्तावित करने वालों के मान के लिए अड़ी थी, अड़ी रही। अंततः बेनतीजा रही सभाओं के बाद मतदान का निर्णय हुआ। आज सुबह मतदान से पूर्व दोनों उम्मीदवारों को अपनी बात कहने का अवसर मिला। दोनों ने अपने-अपने अनुभव, कार्यक्षमता, उपलब्धियों तथा योजनाओं का प्रारूप दिया। किन्तु अपने प्रतिद्वंदी माणक जी के अंतिम शब्द उसे खास तौर पर याद आ रहे थे― "क्या हमारे कस्बे के रहवासी इस मानसिक स्तर पर हैं कि हम एक महिला के पीछे-पीछे चलें और वो हमारा उपहास न करें।" अचानक चुनाव पर्यवेक्षक की आवाज़ आई, "मतगणना का नतीजा आ चुका है। माणक की 72 मत प्राप्त करके मणिकर्णिका जी से 62 मत से विजयी रहे हैं।" मणि ने पूरी सभा पर एक दृष्टि डाली और सबका आभार करती हुई मुस्कुराकर सभागार से निकल गई। अन्य सदस्य उसके "पीछे-पीछे" सभागार से निकलने लगे। बहुत ही सुंदर लघुकथा है भाई अजय कुमार अजेय जी. केवल महिला होने की वजह से योद्धा होने के बावजूद उसे पराजय का सामना करना पड़ा, बहुत खूब. इस उत्तम लघुकथा हेतु मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार करें. आपका एक एक शब्द असीमित उत्साह और ऊर्जा प्रदान करता है। बहुत बहुत आभार योगराज जी। आज के दौर में जब महिला को विशेषतौर से आगे लाया जा रहा है, ऐसे में महिला होने की वजह से उसे पराजय का सामना करते दिखाना बहुत ही दिलचस्प बना है अजय भाई जी, बहुत खूब. इस सुन्दर लघुकथा के लिए मेरी ओर से हार्दिक बधाई स्वीकार करें.
आदरणीय साथिओ, Replies are closed for this discussion. अच्छी सन्देशपरक लघुकथा है आदरणीय सुरेन्द्र कुमार सिंह जी. वैसे इसे थोड़ा और छोटा किया जा सकता है. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर. हार्दिक बधाई आदरणीय सुरेन्द्र कुमार सिंह जी. जी।बेहतरीन प्रस्तुति । मतदान हो चुका था। मतगणना चल रही थी। मणि शांत बैठी पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम को अपने मस्तिष्क में दोबारा घटते हुए देख रही थी। शहर की प्रतिष्ठित सामाजिक संस्था के अध्यक्ष पद के चुनाव का नोटिफिकेशन केंद्रीय समिति भेज चुकी थी। मणिकर्णिका जिसे सब मणि बुलाते थे, काफी समय से इस संस्था की सक्रीय सदस्य थी। अपने अनुभव, सदस्यों के आग्रह, रचनाशीलता और आगे बढ़ने के जुझारू व्यक्तित्व के चलते उसने नामांकन भी भर दिया। "मतगणना का नतीजा आने वाला है।" उसके पास बैठे शर्मा जी ने कहा। मणि ने अनसुना सा किया और फिर पिछली यादों में खो गई। एक खेमे को इसमें अपनी शक्ति और प्रतिष्ठा दांव पर नज़र आ रही थी। पुराने अधिकारियों और अध्यक्षों ने सर्वसम्मति बनाने का प्रयास किया। किन्तु मणि अपना नाम प्रस्तावित करने वालों के मान के लिए अड़ी थी, अड़ी रही। अंततः बेनतीजा रही सभाओं के बाद मतदान का निर्णय हुआ। आज सुबह मतदान से पूर्व दोनों उम्मीदवारों को अपनी बात कहने का अवसर मिला। दोनों ने अपने-अपने अनुभव, कार्यक्षमता, उपलब्धियों तथा योजनाओं का प्रारूप दिया। किन्तु अपने प्रतिद्वंदी माणक जी के अंतिम शब्द उसे खास तौर पर याद आ रहे थे― "क्या हमारे कस्बे के रहवासी इस मानसिक स्तर पर हैं कि हम एक महिला के पीछे-पीछे चलें और वो हमारा उपहास न करें।" अचानक चुनाव पर्यवेक्षक की आवाज़ आई, "मतगणना का नतीजा आ चुका है। माणक की बहत्तर मत प्राप्त करके मणिकर्णिका जी से बासठ मत से विजयी रहे हैं।" मणि ने पूरी सभा पर एक दृष्टि डाली और सबका आभार करती हुई मुस्कुराकर सभागार से निकल गई। अन्य सदस्य उसके "पीछे-पीछे" सभागार से निकलने लगे। बहुत ही सुंदर लघुकथा है भाई अजय कुमार अजेय जी. केवल महिला होने की वजह से योद्धा होने के बावजूद उसे पराजय का सामना करना पड़ा, बहुत खूब. इस उत्तम लघुकथा हेतु मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार करें. आपका एक एक शब्द असीमित उत्साह और ऊर्जा प्रदान करता है। बहुत बहुत आभार योगराज जी। आज के दौर में जब महिला को विशेषतौर से आगे लाया जा रहा है, ऐसे में महिला होने की वजह से उसे पराजय का सामना करते दिखाना बहुत ही दिलचस्प बना है अजय भाई जी, बहुत खूब. इस सुन्दर लघुकथा के लिए मेरी ओर से हार्दिक बधाई स्वीकार करें.
मनोरंजन जगत की जानी मानी मशहूर हसीना पूनम पांडे को अंतिम बार कंगना रनौत के रियलिटी शो 'लॉकअप' में देखा गया जहां उन्होंने अपनी हॉट अदाएं दिखाईं। शो में रहने के चलते पूनम ख़बरों में छाई रहीं। इस समय टेलीविज़न का सबसे बड़ा रियलिटी शो 'बिग बॉस 16' चल रहा है। पूनम पांडे ने इच्छा जाहिर की है कि वो सलमान खान के शो में जाना चाहती हैं। पूनम ने कहा कि यदि उन्हें अवसर प्राप्त हुआ तो वह वहां स्विमिंग पूल में उतरेंगी तथा अपना जलवा बिखरेंगी। पूनम पांडे ने 'लॉकअप' के चलते यार्ड एरिया में बिकिनी पहनकर कैमरे के सामने नहाया था। हालांकि मेकर्स ने इस फुटेज को एपिसोड में सम्मिलित नहीं किया। 'बिग बॉस' को लेकर पूनम ने अपने एक इंटरव्यू में कहा कि वह बिल्कुल बिग बॉस के घर में जाना चाहती हैं। आगे उन्होंने कहा, कौन नहीं चाहेगा वहां जाए और ड्रामा करे। अगर उन्हें अवसर प्राप्त हुआ तो वह पूल के अंदर जाएंगी तथा खूब मस्ती करेंगी। अब देखना होगा कि क्या निर्माता वाइल्ड कार्ड के जरिए उन्हें एंट्री देते हैं। पूनम पांडे 2011 में वर्ल्ड कप के समय से ख़बरों में आई थीं। उन्होंने उस समय खुलासा किया था कि यदि भारतीय टीम वर्ल्ड कप जीत जाती है तो वह न्यूड हो जाएंगी। 'लॉकअप' में पूनम ने बताया था कि 2011 में उन्होंने पूनम के रूप में अपना करियर आरम्भ नहीं किया था। वह आउटसाइडर थीं तथा छोटी मॉडल थीं। पूनम चाहती थीं कि एक उन्हें एक बड़ा प्लेटफॉर्म मिले जहां वह अपना टैलेंट दिखा सकें। पूनम का कहना था कि आउटसाइडर्स अगर बोल्ड स्टेटमेंट ना दें तो वह ख़बरों में नहीं आते हैं।
मनोरंजन जगत की जानी मानी मशहूर हसीना पूनम पांडे को अंतिम बार कंगना रनौत के रियलिटी शो 'लॉकअप' में देखा गया जहां उन्होंने अपनी हॉट अदाएं दिखाईं। शो में रहने के चलते पूनम ख़बरों में छाई रहीं। इस समय टेलीविज़न का सबसे बड़ा रियलिटी शो 'बिग बॉस सोलह' चल रहा है। पूनम पांडे ने इच्छा जाहिर की है कि वो सलमान खान के शो में जाना चाहती हैं। पूनम ने कहा कि यदि उन्हें अवसर प्राप्त हुआ तो वह वहां स्विमिंग पूल में उतरेंगी तथा अपना जलवा बिखरेंगी। पूनम पांडे ने 'लॉकअप' के चलते यार्ड एरिया में बिकिनी पहनकर कैमरे के सामने नहाया था। हालांकि मेकर्स ने इस फुटेज को एपिसोड में सम्मिलित नहीं किया। 'बिग बॉस' को लेकर पूनम ने अपने एक इंटरव्यू में कहा कि वह बिल्कुल बिग बॉस के घर में जाना चाहती हैं। आगे उन्होंने कहा, कौन नहीं चाहेगा वहां जाए और ड्रामा करे। अगर उन्हें अवसर प्राप्त हुआ तो वह पूल के अंदर जाएंगी तथा खूब मस्ती करेंगी। अब देखना होगा कि क्या निर्माता वाइल्ड कार्ड के जरिए उन्हें एंट्री देते हैं। पूनम पांडे दो हज़ार ग्यारह में वर्ल्ड कप के समय से ख़बरों में आई थीं। उन्होंने उस समय खुलासा किया था कि यदि भारतीय टीम वर्ल्ड कप जीत जाती है तो वह न्यूड हो जाएंगी। 'लॉकअप' में पूनम ने बताया था कि दो हज़ार ग्यारह में उन्होंने पूनम के रूप में अपना करियर आरम्भ नहीं किया था। वह आउटसाइडर थीं तथा छोटी मॉडल थीं। पूनम चाहती थीं कि एक उन्हें एक बड़ा प्लेटफॉर्म मिले जहां वह अपना टैलेंट दिखा सकें। पूनम का कहना था कि आउटसाइडर्स अगर बोल्ड स्टेटमेंट ना दें तो वह ख़बरों में नहीं आते हैं।
खिलाफ थी । उसने अपने देश की न सिर्फ आजादी हासिल की, वल्कि उसे पूरे तौर पर आधुनिक यानी नये ढंग का बना दिया -- यहाँतक कि कोई पहचान नहीं सकता कि यह वही पुराना तुर्की है। उसने सुलतानियत, खिलाफत, स्त्रियो के परदे और बहुतेरे पुराने रिवाजो का खात्मा कर दिया है । सोवियट का नैतिक और व्यावहारिक समर्थन यानी अमली ताईद उसके लिए बडी मददगार सावित हुई । ब्रिटिश प्रभाव से छुटकारा पाने की अपनी कोशिशो में फारस को भी सोवियट से मदद मिली । वहाँ भी रिजावाँ नामक एक मजबूत और ताकतवर आदमी उठ खड़ा हुआ, और वही अब वादशाह है । इसी अवधि या जमाने में अफगानिस्तान भी पूर्ण स्वतन्त्रता या मुक म्मल आजादी हासिल करने में कामयाब हुआ । अरवस्तान को छोड़कर और सब अरब देश अब भी विदेशी हुकूमत के नीचे है । अरवो को एक कर दिये जाने की माँग अभीतक पूरी नहीं की गई है । अरबस्तान का ज्यादातर हिस्सा सुलतान इब्नसऊद के शासन-तले स्वतन्त्र होगया है । कागज पर तो इराक भी स्वतन्त्र है, पर असल में वह ब्रिटेन के प्रभाव और नियंत्रण में है । फिलस्तीन और ट्रासजोर्डन के छोटे राज्य ब्रिटिश शासनादेश में और सोरिया फ़ासीसी शासनादेश में है, यानी इन देशो में राष्ट्रसंघ के आदेश से ब्रिटेन और फ्रांस का शासन है । सीरिया में फ़ासीसियो के खिलाफ एक जबरदस्त और बहादुराना बगावत हुई, और वह कुछ हदतक कामयाब भी हुई । मिस्र में भी ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ वलवे हुए और लम्बे अर्से तक आजादी की लडाई चलती रही । यह लड़ाई आज भी चल रही है, गोकि मिस्र स्वतन्त्र कहलाता है और ब्रिटेन के हाथ की कठपुतली एक सुलतान वहाँ बादशाहत करता है । उत्तर- अफरीका के सुदूर पश्चिम मोरवको में भी अब्दुलकरीम के नेतृत्व में आजादी के लिए बड़ी बहादुराना लड़ाई हुई। उसने • स्पेनवालो को निकाल बाहर करने में कामयाबी हासिल की, पर बाद में फ़ासीसियो की पूरी ताकत ने उसे कुचल दिया । एशिया और अफरीका में होनेवाली आजादी की ये लड़ाइयाँ यह बताती है कि पूर्व के सुदूर देशो में कैसे एक ही वक़्त में नई भावना लोगो -- स्त्री पुरुषो- - के मन पर असर डाल रही थी । इनके बीच दो देश ऊँचे खडे है, क्योंकि उनका सारी दुनिया के लिए महत्त्व है । ये चीन और हिन्दुस्तान है । इन दोनो में से किसी एक में भी एकाएक कोई गहरा परिवर्तन होने से वह दुनिया की सारी वडी ताकतो को प्रणाली पर असर डालता है, दुनिया की राजनीति में उसका जबरदस्त नतीजा हुए बिना नहीं रह सकता । इस तरह हम देख सकते हैं कि चीन और हिंदुस्तान की आजादी की लडाई सिर्फ इन्ही देशो के वाशिन्दो की राष्ट्रीय या घरू लड़ाई नहीं है। चीन की B ६२ सफलता का मतलब एक ताकतवर राष्ट्र का निकलकर मैदान में आता है, जो ताक्तो के वर्तमान समतौल में बड़ा फर्क पैदा कर देगा और जिससे साम्राज्यवादी ताकतो के चीन के शोषण का अपनेआप खात्मा हो जायगा । इसी तरह हिन्दुस्तान की कामयाबी का मतलब एक जबरदस्त और महान् राष्ट्र का रंगमंच पर आना है और इससे तुरन्त ब्रिटिश साम्राज्य का खात्मा होजायगा । पिछले दस वर्षों में चीन में बहुत से उतार-चढ़ाव हुए है । काउ-मिन-ताग और चीनी साम्यवादियो में जो एका हुआ था वह टूट गया और तबसे चीन 'तूशन' और दूसरी तरह के लुटेरे सरदारो या सिपहसालारो का शिकार रहा है। विदेशी स्वार्थों और हितों ने बराबर उनकी मदद की है, क्योंकि वे चीन में गड़बडी कायम रखना चाहते है और इसमें उनका फायदा है । पिछले दो वर्षों से तो जापान ने सचमुच चीन पर चढ़ाई ही करदी और उसके कई सूबो पर कब्जा कर लिया है । यह अनियमित लड़ाई अभीतक चल रही है । इस बीच चीन के भीतर के कई प्रदेश साम्यवादी होगये है और उनमें एक तरह की सोवियट सरकार कायम हो गई है । हिन्दुस्तान में पिछले चौदह वर्ष घटनाओ से भरे रहे हैं । इस जमाने में एक उग्र पर शान्तिपूर्ण राष्ट्रीयता उठी है । महायुद्ध के बाद जब बडे-बडे सुधारो को उम्मीदें लोगो के दिलो में उठ रही थीं, तब हमने पंजाब में फ़ौनी कानून ( मार्शलला ) और जलियाँवाला बाग का वह भयानक कत्लेआम देखा । इसकी खीझ और तुर्की और खिलाफत के बारे में मुसलमानो के विरोध से वापू ( गाधीजी ) के नेतृत्व में १९२० से १९२२ तक का असहयोग आन्दोलन पैदा हुआ । १९२० के वाद से बापू भारतीय राष्ट्रीयता के एकमात्र असन्दिग्ध नेता रहे है, इससे कोई इन्कार नहीं कर सकता । यह हिन्दुस्तान में गाधी-युग रहा है और उनके शान्तिपूर्ण विद्रोह के उपायो ने अपने नयेपन और सामर्थ्य ( efficacy ) से दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है । बीच के विधायक कामो और तैयारी के कुछ वर्षों के वाद १९३० में फिर आजादी की लड़ाई शुरू हुई, जब काग्रेस ने साफ-साफ पूर्ण स्वतंत्रता या मुकम्मल आजादी का ध्येय अपनाया । तवसे हम लोग, बीच की चन्दरोजा सुलह के अलावा, सत्याग्रह की लडाई, जेलो का भरना और बहुत नी दूसरी चीजें, जिन्हें तुम जानती हो, देखते रहे है । इस बीच ब्रिटिश नीति यह रही है कि छोटे-छोटे सुधार देकर अगर मुमकिन हो तो कुछ लोगो को अपनी तरफ मिला लिया जाय और राष्ट्रीय आन्दोलन को फुचल दिया जाय । वह नीति अब भी चल रही है, लेकिन फिर भी हमारी लड़ाई असन्दिग्ध प से जारी है । दो वर्ष पहले वरमा में भूखे किसानो को एक बडी बग़ावत हुई और बड़ी वेरहमी के साथ कुचल दी गई। जावा और डचइडीज में भी बलवा हुआ । अखबारो से मालूम होता है कि स्याम में भी कुछ उथल-पुथल और तब्दीली हुई है और राजा के अधिकार सोमित कर दिये गये है । फ्रासीमी इण्डोचीन में भी राष्ट्रीयता जग रही है । इन तरह हम देखते है कि सारे पूर्व में राष्ट्रीयता अपनी अभिव्यक्ति के लिए लड रही है और कई देशो में इसके साथ साम्यवाद का भी कुछ रग मिल गया है इन दोनो यानी राष्ट्रीयता और साम्यवाद के बीच सिवा इसके कोई सामान्य या यकताँ बात नहीं है कि दोनो साम्राज्यवाद से नफरत करते है । यूनियन के बाहर और भीतर के नव पूर्वी देशो के प्रति सोवियट रूस की बुद्धिमत्तापूर्ण और उदार नीति के कारण अ-साम्यवादी देशो में से भी कई उसके दोस्त बन गये है । जैसा कि हम देख चुके है, आजादी और स्वतंत्रता की तरफ हिन्दुस्तान के बढ़ने का मतलब ही ब्रिटिश साम्राज्य का ख़त्म होजाना है। इसमें शक नहीं कि अगर हिन्दुस्तान की इस आजादी की लड़ाई को छोड़ दें तो भी निश्चितरूप से ब्रिटिश साम्राज्य नष्ट होता चला जा रहा है । 'एलिस इन वण्डरलैण्ड' नाम की किताब की चेशायर बिल्ली की तरह यह मिटता जा रहा है; पर मुस्कराहट बची हुई है और यह बहादुराना मुस्कराहट है । एक बडे राष्ट्र को गिरते हुए देखना बड़ा दुख दायी या करुणापूर्ण होता है । अपने जमाने में इग्लैण्ड महान् रहा है और उसकी पुरानी ताकत के सब जरिये एक-एक करके उससे कटते जा रहे है । इस वक्त वह अपनी जमा की हुई दौलत पर जी रहा है और यह दौलत इतनी काफी है कि कुछ दिनो तक यह खेल चल सकता है । अंग्रेजो के सामने जो बहुतेरी दिक्कते है उनका सामना करने की हिम्मत का उनमें अभाव नहीं है । साम्राज्यवादी इंग्लैण्ड ऊपर से अपनी वही पुरानी टोम-टाम बनाये रखने को जबरदस्त कोशिश कर रहा है - उस बूढ़ी औरत की तरह जो कभी खूबसूरत थी पर अब उसे जवानी को पार किये बहुत दिन हो चुके है फिर भी वह पेण्ट और पाउडर की मदद से अपनेको खूबसूरत और नौजवान दिखाने की कोशिश करती है। पर इस शाही औरत के पतन के पीछे मजदूरो और उनका साथ देनेवाले बहुतेरे विद्वानों का एक दूसरा इंग्लैंग्ड भी है और भविष्य इन्हीं लोगों का है । हाल के इन वर्षों की एक मुख्य विशेषता स्त्रियो का बहुतेरे कानूनी, सामाजिक और परम्परागत बन्धनो से, जिनमें कि वे जकडी हुई थीं, छुटकारा है । पश्चिम में महायुद्ध ने इस बात में बडी मदद को । पूर्व में भी तुर्की से हिन्दुस्तान और चीन तक स्त्रियाँ जाग उठी है और राष्ट्रीय और सामाजिक कामो में बहादुरी के साथ हिस्सा ले रही है । विश्व इतिहास को ऐना यह युग है जिसमें हम रह रहे है । हर रोज परिवर्तन महत्वपूर्ण घटना राष्ट्रों के झगडे, पौग्ड और डालर के इंटयूह. सोवियट पर पूंजीपतियों का और सोवियट का उनसे बदला बढ़ती हुई गरीबी और लाचारी और श्रेणी-संघर्ष यानी मालदारों और गरीब श्रमिकों को रशमन्त्र को ख़बर जाती हो रहती हैः और इन सबके ऊपर युद्ध की लगातार बढ़ती हुई काली छाया है । यह इतिहास का एक उथल-पुथल का जमाना है और ऐसे वक्त में जिन्दा होता लौर अपना हिस्सा अदा करना - फिर चाहे वह हिस्सा देहरादून-जेल का एकान्त हो क्यों न हो - बडी लच्छी कौर खुशक़िस्मती की बात है । प्रजातंत्र के लिए आयर्लेण्ड की लड़ाई २८ अप्रैल १९३३ अब हम हाल के वर्षों की महत्त्वपूर्ण घटनाओं पर जरा तफ़तोल के साथ गौर करेगे । मै आयर्लेण्ड से शुरू करता हूँ । विश्व इतिहास और विश्व-शक्तियो की दृष्टि से योरप के सबसे पश्चिम के इस छोटे से देश का इस समय कोई ज्यादा महत्व नहीं है । पर यह बहादुर औौर दुईमनीय यानी किसी तरह न दबनेवाला देश है और ब्रिटिश साम्राज्य की सारी ताकृत इनकी आत्मा को कुचलने या इसे झुकाकर मातहतो स्कूल कराने में कामयाब नहीं हुई है। इस वक्त यह भी ब्रिटिश साम्राज्य के विनाश में मदद देनेवाली एक चीज है । आयर्लंण्ड के बारे में जो पिछला खत मंने तुम्हे लिखा था उसमें मैने होमरल• विल का जिक्र किया था । यह बिल ब्रिटिश पार्लमेण्ट ने ठोक महायुद्ध शुरू होने के पहले पास हुआ था । अल्सटर के प्रोटेस्टेण्ड नेताओं और इंग्लैण्ड के अनुदार दल ने इसका विरोध किया और इसके खिलाफ बाकायदा एक बगावत का संगठन किया गया । इसपर दक्षिणी आयलैण्ड के वाशिन्दो ने भी जरूरत ला पड़ने पर अल्मटर से लड़ने के लिए अपने 'राष्ट्रीय स्वयंसेवक' दल बनाये । मालूम पड़ता था कि आयलॅण्ड में गृह युद्ध होने ही वाला है। इसी मौके पर महायुद्ध आगया और सबका ध्यान वेलजियन और उत्तर-क़ात की युद्ध भूमि की तरफ सिंच गया। पार्लनेण्ट के आयरिश नेता वृद्ध में अपनी तरफ ने मदद देने को तैयार होगये, पर उनरा देश इस तरफ ने उदासीन था और उने युद्ध में मदद देने की कोई उत्सुक्ता न थी। इस बीच अल्मटर के 'बागियों' को निविदा सरकार में ऊँचे-ऊंचे जोहदे दिये गये और इनसे आयर्लंण्ड वालो का अनो और ज्यादा बढ़ गया । प्रजातंत्र के लिए आयर्लंण्ड की लडाई आयर्लंण्ड में असन्तोष बढता गया और इसके साथ यह अनुभूति या एहसास भी पैदा हुआ कि इग्लैण्ड की लडाई में आयलैण्ड वालो की कुरबानी न की जाय। जब इग्लैण्ड की तरह आयर्लंग्ड में भी अनिवार्य रूप से फौज में शामिल होने का कानून (Conscription) बनाने का प्रस्ताव सामने आया (जिसके अनुसार सब स्वस्थ नौजवानो को फौज में शामिल होना पडता) तो सारा देश आग-बबूला होगया और जबरदस्त विरोध किया गया । यहाँतक कि जरूरत पड़ने पर आयलैंण्ड ने जोर-जबरदस्ती से भी उसे रोकने की तैयारी की । १९१६ के ईस्टर-सप्ताह में डबलिन में एक बगावत होगई और आयरिश प्रजातंत्र का ऐलान कर दिया गया । चन्द दिनो की लड़ाई के बाद अग्रेजो ने इसे कुचल दिया और इस चन्दरोजा बगावत में हिस्सा लेने के जुर्म में फौजी कानून के मुताबिक, बाद में, आयर्लंण्ड के कुछ सबसे बहादुर और अच्छे नौजवानो को गोली मार दी गई । यह बगावत, जो 'ईस्टर - विद्रोह' के नाम से मशहूर है, अग्रेजो को चुनौती देने का कोई गभीर प्रयत्न कही कहा जा सकता । असल में यह दुनिया के सामने यह दिखा देने की एक बहादुराना कोशिश थी कि अब भी आयलैण्ड प्रजातंत्र का सपना देखता है और अपनी इच्छा से ब्रिटेन की मातहती कबूल करने से इन्कार करता है । इस बगावत के पीछे जो बहादुर नौजवान थे उन्होने दुनिया के सामने यह बात जाहिर करने के लिए जान-बूझकर अपनेको कुरबान कर दिया । वे अच्छी तरह जानते थे कि इस बार की कोशिश में कामयाबी न होगी, पर उम्मीद करते थे कि उनकी कुरबानी बाद में रंग लायगी और आजादी को नजदीक लायगी । इस बगावत के समय एक आयरिश जर्मनी से आयर्लंण्ड में अस्त्रशस्त्र लाने की कोशिश करता हुआ पकड़ा गया । यह आदमी सर रोजर केसमेण्ट था, जो बहुत दिनो से ब्रिटेन के राजदूत विभाग में था । लन्दन में केसमेण्ट पर मुकदमा चला और उसे फॉसी की सजा दी गई। अदालत में मुजरिम के कठघरे में खड़े हुए उसने अपना जो बयान पढा, वह बड़ा हो जोशीला और हृदयस्पर्शी था और उसमें आयरिश आत्मा की उग्र देशभक्ति तड़प रही थी । वगावत तो असफल हुई, पर उसकी नाकामयाबी में ही उसको विजय थी । इसके बाद ब्रिटिश सरकार की तरफ से जो दमन शुरू हुआ उसने और खासकर नौजवान नेताओ के गिरोह को गोली मार दिये जाने के काम ने आयरिश लोगो पर वड़ा गहरा असर डाला । ऊपर से आयर्लंण्ड शान्त दीखता था, पर अन्दर-ही- अन्दर क्रोध की आग भड़क रही थी और बहुत जल्द वह 'सिनफोन' की शक्ल में सामने आई । सिनफोनभावना बडी तेजी से फैली। शुरू में इसे बहुत कम कामयाबी हुई थी, पर अब यह में जंगल की आग की तरह फैल गई ।
खिलाफ थी । उसने अपने देश की न सिर्फ आजादी हासिल की, वल्कि उसे पूरे तौर पर आधुनिक यानी नये ढंग का बना दिया -- यहाँतक कि कोई पहचान नहीं सकता कि यह वही पुराना तुर्की है। उसने सुलतानियत, खिलाफत, स्त्रियो के परदे और बहुतेरे पुराने रिवाजो का खात्मा कर दिया है । सोवियट का नैतिक और व्यावहारिक समर्थन यानी अमली ताईद उसके लिए बडी मददगार सावित हुई । ब्रिटिश प्रभाव से छुटकारा पाने की अपनी कोशिशो में फारस को भी सोवियट से मदद मिली । वहाँ भी रिजावाँ नामक एक मजबूत और ताकतवर आदमी उठ खड़ा हुआ, और वही अब वादशाह है । इसी अवधि या जमाने में अफगानिस्तान भी पूर्ण स्वतन्त्रता या मुक म्मल आजादी हासिल करने में कामयाब हुआ । अरवस्तान को छोड़कर और सब अरब देश अब भी विदेशी हुकूमत के नीचे है । अरवो को एक कर दिये जाने की माँग अभीतक पूरी नहीं की गई है । अरबस्तान का ज्यादातर हिस्सा सुलतान इब्नसऊद के शासन-तले स्वतन्त्र होगया है । कागज पर तो इराक भी स्वतन्त्र है, पर असल में वह ब्रिटेन के प्रभाव और नियंत्रण में है । फिलस्तीन और ट्रासजोर्डन के छोटे राज्य ब्रिटिश शासनादेश में और सोरिया फ़ासीसी शासनादेश में है, यानी इन देशो में राष्ट्रसंघ के आदेश से ब्रिटेन और फ्रांस का शासन है । सीरिया में फ़ासीसियो के खिलाफ एक जबरदस्त और बहादुराना बगावत हुई, और वह कुछ हदतक कामयाब भी हुई । मिस्र में भी ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ वलवे हुए और लम्बे अर्से तक आजादी की लडाई चलती रही । यह लड़ाई आज भी चल रही है, गोकि मिस्र स्वतन्त्र कहलाता है और ब्रिटेन के हाथ की कठपुतली एक सुलतान वहाँ बादशाहत करता है । उत्तर- अफरीका के सुदूर पश्चिम मोरवको में भी अब्दुलकरीम के नेतृत्व में आजादी के लिए बड़ी बहादुराना लड़ाई हुई। उसने • स्पेनवालो को निकाल बाहर करने में कामयाबी हासिल की, पर बाद में फ़ासीसियो की पूरी ताकत ने उसे कुचल दिया । एशिया और अफरीका में होनेवाली आजादी की ये लड़ाइयाँ यह बताती है कि पूर्व के सुदूर देशो में कैसे एक ही वक़्त में नई भावना लोगो -- स्त्री पुरुषो- - के मन पर असर डाल रही थी । इनके बीच दो देश ऊँचे खडे है, क्योंकि उनका सारी दुनिया के लिए महत्त्व है । ये चीन और हिन्दुस्तान है । इन दोनो में से किसी एक में भी एकाएक कोई गहरा परिवर्तन होने से वह दुनिया की सारी वडी ताकतो को प्रणाली पर असर डालता है, दुनिया की राजनीति में उसका जबरदस्त नतीजा हुए बिना नहीं रह सकता । इस तरह हम देख सकते हैं कि चीन और हिंदुस्तान की आजादी की लडाई सिर्फ इन्ही देशो के वाशिन्दो की राष्ट्रीय या घरू लड़ाई नहीं है। चीन की B बासठ सफलता का मतलब एक ताकतवर राष्ट्र का निकलकर मैदान में आता है, जो ताक्तो के वर्तमान समतौल में बड़ा फर्क पैदा कर देगा और जिससे साम्राज्यवादी ताकतो के चीन के शोषण का अपनेआप खात्मा हो जायगा । इसी तरह हिन्दुस्तान की कामयाबी का मतलब एक जबरदस्त और महान् राष्ट्र का रंगमंच पर आना है और इससे तुरन्त ब्रिटिश साम्राज्य का खात्मा होजायगा । पिछले दस वर्षों में चीन में बहुत से उतार-चढ़ाव हुए है । काउ-मिन-ताग और चीनी साम्यवादियो में जो एका हुआ था वह टूट गया और तबसे चीन 'तूशन' और दूसरी तरह के लुटेरे सरदारो या सिपहसालारो का शिकार रहा है। विदेशी स्वार्थों और हितों ने बराबर उनकी मदद की है, क्योंकि वे चीन में गड़बडी कायम रखना चाहते है और इसमें उनका फायदा है । पिछले दो वर्षों से तो जापान ने सचमुच चीन पर चढ़ाई ही करदी और उसके कई सूबो पर कब्जा कर लिया है । यह अनियमित लड़ाई अभीतक चल रही है । इस बीच चीन के भीतर के कई प्रदेश साम्यवादी होगये है और उनमें एक तरह की सोवियट सरकार कायम हो गई है । हिन्दुस्तान में पिछले चौदह वर्ष घटनाओ से भरे रहे हैं । इस जमाने में एक उग्र पर शान्तिपूर्ण राष्ट्रीयता उठी है । महायुद्ध के बाद जब बडे-बडे सुधारो को उम्मीदें लोगो के दिलो में उठ रही थीं, तब हमने पंजाब में फ़ौनी कानून और जलियाँवाला बाग का वह भयानक कत्लेआम देखा । इसकी खीझ और तुर्की और खिलाफत के बारे में मुसलमानो के विरोध से वापू के नेतृत्व में एक हज़ार नौ सौ बीस से एक हज़ार नौ सौ बाईस तक का असहयोग आन्दोलन पैदा हुआ । एक हज़ार नौ सौ बीस के वाद से बापू भारतीय राष्ट्रीयता के एकमात्र असन्दिग्ध नेता रहे है, इससे कोई इन्कार नहीं कर सकता । यह हिन्दुस्तान में गाधी-युग रहा है और उनके शान्तिपूर्ण विद्रोह के उपायो ने अपने नयेपन और सामर्थ्य से दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है । बीच के विधायक कामो और तैयारी के कुछ वर्षों के वाद एक हज़ार नौ सौ तीस में फिर आजादी की लड़ाई शुरू हुई, जब काग्रेस ने साफ-साफ पूर्ण स्वतंत्रता या मुकम्मल आजादी का ध्येय अपनाया । तवसे हम लोग, बीच की चन्दरोजा सुलह के अलावा, सत्याग्रह की लडाई, जेलो का भरना और बहुत नी दूसरी चीजें, जिन्हें तुम जानती हो, देखते रहे है । इस बीच ब्रिटिश नीति यह रही है कि छोटे-छोटे सुधार देकर अगर मुमकिन हो तो कुछ लोगो को अपनी तरफ मिला लिया जाय और राष्ट्रीय आन्दोलन को फुचल दिया जाय । वह नीति अब भी चल रही है, लेकिन फिर भी हमारी लड़ाई असन्दिग्ध प से जारी है । दो वर्ष पहले वरमा में भूखे किसानो को एक बडी बग़ावत हुई और बड़ी वेरहमी के साथ कुचल दी गई। जावा और डचइडीज में भी बलवा हुआ । अखबारो से मालूम होता है कि स्याम में भी कुछ उथल-पुथल और तब्दीली हुई है और राजा के अधिकार सोमित कर दिये गये है । फ्रासीमी इण्डोचीन में भी राष्ट्रीयता जग रही है । इन तरह हम देखते है कि सारे पूर्व में राष्ट्रीयता अपनी अभिव्यक्ति के लिए लड रही है और कई देशो में इसके साथ साम्यवाद का भी कुछ रग मिल गया है इन दोनो यानी राष्ट्रीयता और साम्यवाद के बीच सिवा इसके कोई सामान्य या यकताँ बात नहीं है कि दोनो साम्राज्यवाद से नफरत करते है । यूनियन के बाहर और भीतर के नव पूर्वी देशो के प्रति सोवियट रूस की बुद्धिमत्तापूर्ण और उदार नीति के कारण अ-साम्यवादी देशो में से भी कई उसके दोस्त बन गये है । जैसा कि हम देख चुके है, आजादी और स्वतंत्रता की तरफ हिन्दुस्तान के बढ़ने का मतलब ही ब्रिटिश साम्राज्य का ख़त्म होजाना है। इसमें शक नहीं कि अगर हिन्दुस्तान की इस आजादी की लड़ाई को छोड़ दें तो भी निश्चितरूप से ब्रिटिश साम्राज्य नष्ट होता चला जा रहा है । 'एलिस इन वण्डरलैण्ड' नाम की किताब की चेशायर बिल्ली की तरह यह मिटता जा रहा है; पर मुस्कराहट बची हुई है और यह बहादुराना मुस्कराहट है । एक बडे राष्ट्र को गिरते हुए देखना बड़ा दुख दायी या करुणापूर्ण होता है । अपने जमाने में इग्लैण्ड महान् रहा है और उसकी पुरानी ताकत के सब जरिये एक-एक करके उससे कटते जा रहे है । इस वक्त वह अपनी जमा की हुई दौलत पर जी रहा है और यह दौलत इतनी काफी है कि कुछ दिनो तक यह खेल चल सकता है । अंग्रेजो के सामने जो बहुतेरी दिक्कते है उनका सामना करने की हिम्मत का उनमें अभाव नहीं है । साम्राज्यवादी इंग्लैण्ड ऊपर से अपनी वही पुरानी टोम-टाम बनाये रखने को जबरदस्त कोशिश कर रहा है - उस बूढ़ी औरत की तरह जो कभी खूबसूरत थी पर अब उसे जवानी को पार किये बहुत दिन हो चुके है फिर भी वह पेण्ट और पाउडर की मदद से अपनेको खूबसूरत और नौजवान दिखाने की कोशिश करती है। पर इस शाही औरत के पतन के पीछे मजदूरो और उनका साथ देनेवाले बहुतेरे विद्वानों का एक दूसरा इंग्लैंग्ड भी है और भविष्य इन्हीं लोगों का है । हाल के इन वर्षों की एक मुख्य विशेषता स्त्रियो का बहुतेरे कानूनी, सामाजिक और परम्परागत बन्धनो से, जिनमें कि वे जकडी हुई थीं, छुटकारा है । पश्चिम में महायुद्ध ने इस बात में बडी मदद को । पूर्व में भी तुर्की से हिन्दुस्तान और चीन तक स्त्रियाँ जाग उठी है और राष्ट्रीय और सामाजिक कामो में बहादुरी के साथ हिस्सा ले रही है । विश्व इतिहास को ऐना यह युग है जिसमें हम रह रहे है । हर रोज परिवर्तन महत्वपूर्ण घटना राष्ट्रों के झगडे, पौग्ड और डालर के इंटयूह. सोवियट पर पूंजीपतियों का और सोवियट का उनसे बदला बढ़ती हुई गरीबी और लाचारी और श्रेणी-संघर्ष यानी मालदारों और गरीब श्रमिकों को रशमन्त्र को ख़बर जाती हो रहती हैः और इन सबके ऊपर युद्ध की लगातार बढ़ती हुई काली छाया है । यह इतिहास का एक उथल-पुथल का जमाना है और ऐसे वक्त में जिन्दा होता लौर अपना हिस्सा अदा करना - फिर चाहे वह हिस्सा देहरादून-जेल का एकान्त हो क्यों न हो - बडी लच्छी कौर खुशक़िस्मती की बात है । प्रजातंत्र के लिए आयर्लेण्ड की लड़ाई अट्ठाईस अप्रैल एक हज़ार नौ सौ तैंतीस अब हम हाल के वर्षों की महत्त्वपूर्ण घटनाओं पर जरा तफ़तोल के साथ गौर करेगे । मै आयर्लेण्ड से शुरू करता हूँ । विश्व इतिहास और विश्व-शक्तियो की दृष्टि से योरप के सबसे पश्चिम के इस छोटे से देश का इस समय कोई ज्यादा महत्व नहीं है । पर यह बहादुर औौर दुईमनीय यानी किसी तरह न दबनेवाला देश है और ब्रिटिश साम्राज्य की सारी ताकृत इनकी आत्मा को कुचलने या इसे झुकाकर मातहतो स्कूल कराने में कामयाब नहीं हुई है। इस वक्त यह भी ब्रिटिश साम्राज्य के विनाश में मदद देनेवाली एक चीज है । आयर्लंण्ड के बारे में जो पिछला खत मंने तुम्हे लिखा था उसमें मैने होमरल• विल का जिक्र किया था । यह बिल ब्रिटिश पार्लमेण्ट ने ठोक महायुद्ध शुरू होने के पहले पास हुआ था । अल्सटर के प्रोटेस्टेण्ड नेताओं और इंग्लैण्ड के अनुदार दल ने इसका विरोध किया और इसके खिलाफ बाकायदा एक बगावत का संगठन किया गया । इसपर दक्षिणी आयलैण्ड के वाशिन्दो ने भी जरूरत ला पड़ने पर अल्मटर से लड़ने के लिए अपने 'राष्ट्रीय स्वयंसेवक' दल बनाये । मालूम पड़ता था कि आयलॅण्ड में गृह युद्ध होने ही वाला है। इसी मौके पर महायुद्ध आगया और सबका ध्यान वेलजियन और उत्तर-क़ात की युद्ध भूमि की तरफ सिंच गया। पार्लनेण्ट के आयरिश नेता वृद्ध में अपनी तरफ ने मदद देने को तैयार होगये, पर उनरा देश इस तरफ ने उदासीन था और उने युद्ध में मदद देने की कोई उत्सुक्ता न थी। इस बीच अल्मटर के 'बागियों' को निविदा सरकार में ऊँचे-ऊंचे जोहदे दिये गये और इनसे आयर्लंण्ड वालो का अनो और ज्यादा बढ़ गया । प्रजातंत्र के लिए आयर्लंण्ड की लडाई आयर्लंण्ड में असन्तोष बढता गया और इसके साथ यह अनुभूति या एहसास भी पैदा हुआ कि इग्लैण्ड की लडाई में आयलैण्ड वालो की कुरबानी न की जाय। जब इग्लैण्ड की तरह आयर्लंग्ड में भी अनिवार्य रूप से फौज में शामिल होने का कानून बनाने का प्रस्ताव सामने आया तो सारा देश आग-बबूला होगया और जबरदस्त विरोध किया गया । यहाँतक कि जरूरत पड़ने पर आयलैंण्ड ने जोर-जबरदस्ती से भी उसे रोकने की तैयारी की । एक हज़ार नौ सौ सोलह के ईस्टर-सप्ताह में डबलिन में एक बगावत होगई और आयरिश प्रजातंत्र का ऐलान कर दिया गया । चन्द दिनो की लड़ाई के बाद अग्रेजो ने इसे कुचल दिया और इस चन्दरोजा बगावत में हिस्सा लेने के जुर्म में फौजी कानून के मुताबिक, बाद में, आयर्लंण्ड के कुछ सबसे बहादुर और अच्छे नौजवानो को गोली मार दी गई । यह बगावत, जो 'ईस्टर - विद्रोह' के नाम से मशहूर है, अग्रेजो को चुनौती देने का कोई गभीर प्रयत्न कही कहा जा सकता । असल में यह दुनिया के सामने यह दिखा देने की एक बहादुराना कोशिश थी कि अब भी आयलैण्ड प्रजातंत्र का सपना देखता है और अपनी इच्छा से ब्रिटेन की मातहती कबूल करने से इन्कार करता है । इस बगावत के पीछे जो बहादुर नौजवान थे उन्होने दुनिया के सामने यह बात जाहिर करने के लिए जान-बूझकर अपनेको कुरबान कर दिया । वे अच्छी तरह जानते थे कि इस बार की कोशिश में कामयाबी न होगी, पर उम्मीद करते थे कि उनकी कुरबानी बाद में रंग लायगी और आजादी को नजदीक लायगी । इस बगावत के समय एक आयरिश जर्मनी से आयर्लंण्ड में अस्त्रशस्त्र लाने की कोशिश करता हुआ पकड़ा गया । यह आदमी सर रोजर केसमेण्ट था, जो बहुत दिनो से ब्रिटेन के राजदूत विभाग में था । लन्दन में केसमेण्ट पर मुकदमा चला और उसे फॉसी की सजा दी गई। अदालत में मुजरिम के कठघरे में खड़े हुए उसने अपना जो बयान पढा, वह बड़ा हो जोशीला और हृदयस्पर्शी था और उसमें आयरिश आत्मा की उग्र देशभक्ति तड़प रही थी । वगावत तो असफल हुई, पर उसकी नाकामयाबी में ही उसको विजय थी । इसके बाद ब्रिटिश सरकार की तरफ से जो दमन शुरू हुआ उसने और खासकर नौजवान नेताओ के गिरोह को गोली मार दिये जाने के काम ने आयरिश लोगो पर वड़ा गहरा असर डाला । ऊपर से आयर्लंण्ड शान्त दीखता था, पर अन्दर-ही- अन्दर क्रोध की आग भड़क रही थी और बहुत जल्द वह 'सिनफोन' की शक्ल में सामने आई । सिनफोनभावना बडी तेजी से फैली। शुरू में इसे बहुत कम कामयाबी हुई थी, पर अब यह में जंगल की आग की तरह फैल गई ।
डेस्कः शास्त्रों की बात करें तो 17 नवंबर को जिन राशियों की कुंडली में सूर्य की स्थिति सबसे मजबूत होगी। उन राशियों के सितारे प्रेम के मामले में बलवान रहेंगे। इससे उन्हें प्यार में सफलता मिल सकती हैं तथा उनकी जिंदगी संवर अचानक से सकती हैं। इसी विषय में ज्योतिष शास्त्र के द्वारा जानने की कोशिश करेंगे 17 नवंबर के प्रेम राशिफल के बारे में की प्रेम के मामले में इस दिन किन राशियों के सितारे बलवान रहेंगे। तो आइये जानते हैं विस्तार से। मेष और सिंह राशि, शास्त्रों के अनुसार प्रेम के मामले में 17 नवंबर को मेष और सिंह राशि के सितारे बलवान रहेंगे। जिससे इस राशि के लोगों को बड़ी सफलता मिल सकती हैं। इनके प्रेम जीवन में सुख और शांति आ सकती हैं। इस राशि के जातक प्रेम की एक खूबसूरत दुनिया बसा सकते हैं। इनके सपने साकार हो सकते हैं। इनकी जिंदगी अचानक से संवर सकती हैं। लव पार्टनर का साथ मिल सकता हैं। इनके प्रेम जीवन पर सूर्यदेव मेहरबान रहेंगे। धनु और कर्क राशि, प्रेम के मामले में 17 नवंबर को धनु और कर्क राशि के सितारे बलवान नजर आ रहे हैं। जिससे इन्हे सच्चा प्यार मिल सकता हैं तथा इस राशि के जातक प्यार में जीत हासिल कर सकते हैं। इनकी जिंदगी सफल और कामयाब हो सकती हैं। माता पिता की ओर से इन्हे प्रेम विवाह करने की इजाजत मिल सकती हैं। इनके घरों में सुख और शांति आ सकती हैं। ये लोग एक सफल प्रेम जीवन सेलिब्रेट कर सकते हैं। आप सूर्यदेव का दर्शन करें। वृश्चिक और मीन राशि, शास्त्रों के अनुसार प्रेम के मामले में 17 नवंबर को वृश्चिक और मीन राशि के सितारे बलवान रहेंगे। सितारे बलवान रहने से इनके प्रेम जीवन में खुशियों की दस्तक हो सकती हैं। इस राशि के जातक अपने प्यार को पाने में सफल हो सकते हैं। इनके प्रेम जीवन में सुख और शांति आ सकती हैं। किसी यात्रा के दौरान लव पार्टनर से मुलाकात हो सकती हैं। दिल की बात कहने के लिए यह समय अनुकूल हैं। आप सूर्यदेव का दर्शन करें।
डेस्कः शास्त्रों की बात करें तो सत्रह नवंबर को जिन राशियों की कुंडली में सूर्य की स्थिति सबसे मजबूत होगी। उन राशियों के सितारे प्रेम के मामले में बलवान रहेंगे। इससे उन्हें प्यार में सफलता मिल सकती हैं तथा उनकी जिंदगी संवर अचानक से सकती हैं। इसी विषय में ज्योतिष शास्त्र के द्वारा जानने की कोशिश करेंगे सत्रह नवंबर के प्रेम राशिफल के बारे में की प्रेम के मामले में इस दिन किन राशियों के सितारे बलवान रहेंगे। तो आइये जानते हैं विस्तार से। मेष और सिंह राशि, शास्त्रों के अनुसार प्रेम के मामले में सत्रह नवंबर को मेष और सिंह राशि के सितारे बलवान रहेंगे। जिससे इस राशि के लोगों को बड़ी सफलता मिल सकती हैं। इनके प्रेम जीवन में सुख और शांति आ सकती हैं। इस राशि के जातक प्रेम की एक खूबसूरत दुनिया बसा सकते हैं। इनके सपने साकार हो सकते हैं। इनकी जिंदगी अचानक से संवर सकती हैं। लव पार्टनर का साथ मिल सकता हैं। इनके प्रेम जीवन पर सूर्यदेव मेहरबान रहेंगे। धनु और कर्क राशि, प्रेम के मामले में सत्रह नवंबर को धनु और कर्क राशि के सितारे बलवान नजर आ रहे हैं। जिससे इन्हे सच्चा प्यार मिल सकता हैं तथा इस राशि के जातक प्यार में जीत हासिल कर सकते हैं। इनकी जिंदगी सफल और कामयाब हो सकती हैं। माता पिता की ओर से इन्हे प्रेम विवाह करने की इजाजत मिल सकती हैं। इनके घरों में सुख और शांति आ सकती हैं। ये लोग एक सफल प्रेम जीवन सेलिब्रेट कर सकते हैं। आप सूर्यदेव का दर्शन करें। वृश्चिक और मीन राशि, शास्त्रों के अनुसार प्रेम के मामले में सत्रह नवंबर को वृश्चिक और मीन राशि के सितारे बलवान रहेंगे। सितारे बलवान रहने से इनके प्रेम जीवन में खुशियों की दस्तक हो सकती हैं। इस राशि के जातक अपने प्यार को पाने में सफल हो सकते हैं। इनके प्रेम जीवन में सुख और शांति आ सकती हैं। किसी यात्रा के दौरान लव पार्टनर से मुलाकात हो सकती हैं। दिल की बात कहने के लिए यह समय अनुकूल हैं। आप सूर्यदेव का दर्शन करें।
"एक मई, 1960 से 1 मई, 2023 तक सार्वजनिक जीवन में लंबा समय बिताने के बाद अब कहीं रुकने पर विचार करने की आवश्यकता है। इसलिए, मैंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त होने का फ़ैसला किया है। " शरद पवार के इन दो वाक्यों ने यशवंतराव चव्हाण केंद्र के सभागार को सचमुच हिला कर रख दिया। यह इत्तेफ़ाक़ ही है कि शरद पवार को राजनीति में लाने वाले, पालने-पोसने वाले और अपना बेटा जैसा ही मानने वाले यशवंतराव चव्हाण के नाम पर बने हॉल में पवार ने अपने इस्तीफ़े की घोषणा की। शरद पवार से अपना इस्तीफ़ा वापस लेने की मांग को लेकर नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम स्थल पर धरना दिया। प्रत्येक नेता ने अपना पक्ष रखा और पवार से इस्तीफ़ा वापस लेने का अनुरोध किया। इस मौके पर एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल, जितेंद्र अवहाद जैसे वरिष्ठ नेता भावुक हो गए। वहीं अजित पवार ने ये भी कहा है कि शरद पवार अपने इस्तीफ़े के फ़ैसले पर फिर से विचार करने को तैयार हो गए हैं। शरद पवार 1 मई 1960 से राजनीति में सक्रिय हैं। पिछले छह दशकों की महाराष्ट्र की राजनीति उनके इर्द-गिर्द घूमती रही। वह सत्ता में हों या न हों, बहुमत में हों या न हों, महाराष्ट्र की राजनीति में शरद पवार 'फैक्टर' को सबसे अहम फैक्टर माना जाता है। साढ़े तीन साल पहले जब कहा जाता था कि शरद पवार राजनीति के दूसरे चरण के अंत तक पहुंच गए हैं, तो उन्होंने राज्य में एक अभूतपूर्व 'महाविकास अघाड़ी' बनाकर साबित कर दिया कि 'मैं अब भी सक्रिय हूं'। पवार का राजनीतिक जीवन एक तरह से महाराष्ट्र समकालीन राजनीतिक इतिहास है। उनके राजनीतिक जीवन की 8 महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाएं या फ़ैसले, जिनका महाराष्ट्र और देश की राजनीति पर भी दूरगामी प्रभाव पड़ा, उस पर एक नज़र डालते हैंः शरद पवार ने 1960 में शुरू की राजनीति और छह दशकों तक महाराष्ट्र की राजनीति की बने धुरी रहे। आपातकाल के बाद कांग्रेस में दो फाड़ हो गया और पवार 'रेड्डी कांग्रेस' के साथ चले गए। जुलाई 1978 में उन्हें महाराष्ट्र के सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला। साल 1986 में कांग्रेस में वापसी और 1988 में महाराष्ट्र के दूसरी बार मुख्यमंत्री बने। साल 1993 में, पवार तीसरी बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने। पवार 1996 से ही केंद्र की राजनीति में अहम किरदार बन गए। 1999 में पवार ने सोनिया के विदेशी मूल का मुद्दा उठाया और कांग्रेस से अलग होकर 'राष्ट्रवादी कांग्रेस' बनाई। महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी गठबंधन का श्रेय मुख्य रूप से पवार को ही दिया जाता है। पवार बीसीसीआई और आईसीसी की लंबे समय तक अध्यक्ष रहे। कहा जाता है कि शरद पवार प्रधानमंत्री पद के क़रीब दो बार पहुंचे थे। 1978 में पवार को राजनीति में यशवंतराव से हाथ मिलाए और खुद को स्थापित किए काफ़ी समय हो गया था। तब तक वे राज्य में मंत्री भी बन चुके थे। लेकिन एक घटना ने उन्हें महाराष्ट्र का सबसे युवा मुख्यमंत्री बना दिया और महाराष्ट्र की राजनीति को भी बदल कर रख दिया। 1977 में आपातकाल के बाद कांग्रेस दो गुटों में विभाजित हो गई, 'इंदिरा कांग्रेस' और 'रेड्डी कांग्रेस'। यशवंतराव के साथ, वसंतदादा पाटिल, शरद पवार सहित महाराष्ट्र के कई नेता 'रेड्डी कांग्रेस' में चले गए थे। 1978 में जब महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव हुए तो दोनों कांग्रेस अलग-अलग लड़ीं। जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी, लेकिन बहुमत से पीछे रह गई। फिर दोनों कांग्रेस एक साथ आईं और इस गठबंधन सरकार के वसंतदादा पाटिल मुख्यमंत्री बने, जबकि नासिकराव तिरपुडे उपमुख्यमंत्री बने। लेकिन इस सरकार में कई नेता असहज थे। सरकार में विवाद बढ़ने लगे। अंत में शरद पवार 40 समर्थक विधायकों के साथ बाहर चले गए और साढ़े चार महीने में गठबंधन सरकार गिर गई। पवार की इस पहली बग़ावत का कई तरह से विश्लेषण किया गया। यह भी कहा गया कि 'वसंतदा की पीठ में खंजर भोंका गया'। यह भी कहा गया कि यशवंतराव ने गोविंद तलवलकर की भविष्यवाणियों का हवाला देकर पवार का समर्थन किया। बाहर आए पवार ने अपनी 'सोशलिस्ट कांग्रेस' की ओर से सरकार बनाने के लिए पहल की। अंत में जुलाई 1978 में शरद पवार 38 साल की उम्र में 'प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक पार्टी' यानी 'प्रलोद' की सरकार बनने के साथ महाराष्ट्र के सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री बने। यह सरकार डेढ़ साल से ज़्यादा चली। इस बीच देश के समीकरण भी बदले। जनता पार्टी में फूट पड़ गई। अंत में इंदिरा गांधी की सिफ़ारिश पर महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया और पवार की पहली सरकार को बर्ख़ास्त कर दिया गया। 1980 में महाराष्ट्र में सरकार के विघटन के बाद, वह लंबे समय तक सत्ता से बाहर रहे। लेकिन इस दौरान कांग्रेस पार्टी और महाराष्ट्र में भी कई चीज़ें बदलीं। पंजाब में अस्थिरता का मुद्दा प्रमुख हो गया और अंत में प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी की हत्या हो गई। राजीव गांधी ने देश और पार्टी की कमान संभाली। राजीव के बाद कांग्रेस में एक नई पीढ़ी बनने लगी। जैसा कि पवार ने खुद अपनी राजनीतिक आत्मकथा में लिखा है, "राजीव गांधी ने कांग्रेस में वापस आने और साथ काम करने की इच्छा जताई थी। " महाराष्ट्र और कांग्रेस के कुछ नेता पवार की वापसी के ख़िलाफ़ थे। इसी दौरान, राजीव गांधी की आंधी के सामने पवार अपनी पार्टी से लोकसभा के सदस्य भी बने, 1984 में वे पहली बार बारामती से लोकसभा पहुंचे थे। लेकिन वे जल्द ही महाराष्ट्र लौट आए। यह राजीव गांधी की इच्छा थी, लेकिन कांग्रेस को उनकी ज़रूरत भी थी ताकि महाराष्ट्र में शिवसेना के बढ़ते प्रभाव के सामने युवा नेतृत्व कांग्रेस को संभाले रखे। राजनीतिक विश्लेषक नितिन बिरमल अपनी पुस्तक 'पॉवर स्ट्रगल' में लिखा है, 'वसंतदादा पाटिल का गुट भी तब तक नेतृत्व विहीन हो चुका था। ' केंद्रीय नेतृत्व ने महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री का पद एआर अंतुले, बाबासाहेब भोसले, नीलांगेकर पाटिल और शंकरराव चव्हाण को दिया, लेकिन इनमें से किसी के पास पूरे महाराष्ट्र में जन समर्थन नहीं था। उस दौर में शरद पवार की सोशलिस्ट कांग्रेस आगे बढ़ रही थी, लेकिन यह भी स्पष्ट होता जा रहा था कि कांग्रेस के बिना सरकार नहीं बन सकती। इसकी वजह यह थी कि राजीव गांधी के नेतृत्व को भारी जन समर्थन हासिल था। इसे भांपते हुए पवार ने कांग्रेस में लौटने का फ़ैसला लिया था। उन्होंने 1986 में औरंगाबाद में इस निर्णय की घोषणा की। 1988 में, राजीव गांधी ने शंकरराव चव्हाण को अपने केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया और शरद पवार दूसरी बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने। शरद पवार के राजनीतिक जीवन में यह एक महत्वपूर्ण मोड़ है। क्योंकि उनके करियर के इन्हीं दिनों के बारे में कहा जाता है कि पवार के हाथों से प्रधानमंत्री बनने का मौका निकल गया। 90 के दशक की शुरुआत तक, पार्टी में राष्ट्रीय स्तर पर पवार की स्थिति महत्वपूर्ण हो गई थी क्योंकि वे कांग्रेस में लौट आए थे और मुख्यमंत्री बने। 1991 में राजीव गांधी की हत्या में हो गई थी और कांग्रेस में नेतृत्व का सवाल एक बड़ा मुद्दा बन गया। सोनिया तब राजनीति में नहीं आयीं थीं। जैसा कि पवार ने अपनी आत्मकथा में भी लिखा है, "कांग्रेस में कई लोग, ख़ासकर युवा, चाहते थे कि पवार पार्टी का नेतृत्व करें। " राजीव की हत्या के बाद हुए चुनाव में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत तो नहीं मिला लेकिन वह उसके क़रीब पहुंच गई थी। प्रधानमंत्री पद की दौड़ में पवार उतरे, लेकिन वोटिंग में पी। वी नरसिम्हा राव को ज़्यादा वोट मिले और पवार के हाथों से मौका निकल गया। हालांकि उस सरकार में वो रक्षा मंत्री बने। नरसिम्हा राव की इस सरकार को कुछ वर्षों से शुरू हुए राम जन्मभूमि आंदोलन के निर्णायक दौर का सामना करना पड़ा था। 6 दिसंबर 1992 को कारसेवकों ने अयोध्या की बाबरी मस्जिद को गिरा दिया और देश में सांप्रदायिक तनाव का माहौल बन गया। इस तनाव का सबसे ज़्यादा असर मुंबई में दिखा। मुंबई में दंगे भड़क उठे और देश की आर्थिक राजधानी आग की लपटों में घिर गई। उस मुश्किल दौर में मार्च 1993 में, पवार तीसरी बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने। वैसे तो यह बदलाव मुंबई दंगों के मद्देनजर हुआ, लेकिन कई लोगों ने इसकी राजनीतिक व्याख्या की नरसिम्हा राव दिल्ली में पवार के रूप में कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं चाहते थे, इसलिए उन्होंने उन्हें वापस मुंबई भेज दिया। वहीं पवार ने अपनी आत्मकथा में लिखा है, "अनिच्छा से सही लेकिन महाराष्ट्र के हित के बारे में सोचते हुए, मैंने मुख्यमंत्री बनना स्वीकार किया। " 1995 में महाराष्ट्र की सत्ता से हटने वाले शरद पवार 1996 में गठबंधन राजनीति का दौर शुरू होने के बाद दिल्ली की राजनीति में अहम नेता बन गए। बाद में, वह कांग्रेस की ओर से लोकसभा में विपक्ष के नेता बने। कहा गया कि गठबंधन के इस दौर में पवार दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की दौड़ में क़रीब पहुंचे थे। कांग्रेस बहुमत में नहीं थी, लेकिन उसके समर्थन से सरकारें बन रही थीं। सोनिया गांधी के साथ उनके संबंध तनावपूर्ण रहे। इसमें कांग्रेस में वरिष्ठ नेताओं की एक कतार पवार के ख़िलाफ़ काम करती रही। सोनिया गांधी ने सक्रिय राजनीति में आने का फ़ैसले किया और फिर कांग्रेस के अंदर का गणित भी बदल गया। एक बड़े वर्ग की यह भी राय थी कि सोनिया को प्रधानमंत्री बनना चाहिए। अंततः 1999 में शरद पवार ने सोनिया के विदेशी मूल का मुद्दा उठाया और पीए। संगमा और तारिक अनवर के साथ मिलकर 'राष्ट्रवादी कांग्रेस' की स्थापना की। कांग्रेस में पवार की यह दूसरी बग़ावत थी। 1999 में लोकसभा और विधानसभा के एक साथ हुए चुनाव में राज्य में कांग्रेस और एनसीपी अलग-अलग चुनाव लड़ीं। लेकिन चुनाव के बाद दोनों पार्टियों के बीच महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए गठबंधन भी हो गया। इस बीच केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार तीसरी बार आई और पांच साल तक चली। लेकिन 2004 में सोनिया के नेतृत्व में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन सोनिया ने प्रधानमंत्री बनने से इनकार कर दिया। सोनिया की पसंद के तौर पर मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने। जिस मुद्दे पर पवार को आपत्ति थी, वह सोनिया के फ़ैसले से जाती रही। उस वक्त कहा जाता था कि अगर शरद पवार कांग्रेस में होते तो उनके प्रधानमंत्री बनने की संभावना होती। बहरहाल, 'राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी' कांग्रेस नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा रही और पवार नई सरकार में शामिल हुए। वे अगले 10 वर्षों तक कृषि मंत्री बने रहे। उतार चढ़ाव वाले राजनीतिक सफ़र में 2019 में उन्होंने जो गठबंधन बनाया, वह सबसे नाटकीय माना जा सकता है। मोदी सरकार के दूसरी बार भारी बहुमत से वापसी हो गई। देवेंद्र फडणवीस ने शिवसेना की मदद से पांच साल तक महाराष्ट्र की सरकार चला चुके थे। हालांकि चुनाव से पहले सभी विश्लेषक बीजेपी-शिवसेना गठबंधन की सरकार की वापसी की भविष्यवाणी कर रहे थे और पवार के कई साथी पार्टी भी छोड़कर बीजेपी के खेमे में जा रहे थे। ऐसे समय में शरद पवार ने चुनावी अभियान की धुरी अपने हाथों में ले ली और गठबंधन के लिए निर्वाचन क्षेत्रों का फ़ैसला अपने हाथों में रखा। केंद्रित किया, पवार स्थानीय मुद्दों को उठाते रहे। इस चुनाव अभियान में सतारा की बारिश में उनका भाषण वायरल हो गया। । जब नतीजे आए तो बीजेपी की सीटें 122 से 105 हो गई थीं। एनसीपी और कांग्रेस की सीटें बढ़ी थीं। शिवसेना तो सिमट गई, लेकिन बीजेपी के साथ उनके पास स्पष्ट बहुमत था। यहां पवार की राजनीतिक रणनीति ने खेल बदल दिया। मुख्यमंत्री पद की मांग को लेकर शिवसेना ने बीजेपी से किनारा करना शुरू कर दिया है। शिवसेना ने पवार से बातचीत शुरू की। लेकिन सवाल यही था कि शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी एक साथ कैसे आएंगे जब वे राजनीतिक रूप से, वैचारिक रूप से एक-दूसरे के विरोधी हैं? यहां पर पवार की इतने सालों की कूटनीति अहम हो गई। शिवसेना के एनडीए छोड़ने और गठबंधन में आने के लिए शरद पवार ने सोनिया गांधी को भी मना लिया था। इस दौरान महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगा। जब नए 'महाविकास अघाड़ी' के सत्ता में आने की संभावना बनी तो अजित पवार ने बग़ावत की और बीजेपी के साथ मिल गए। लेकिन पवार के मराठी दांव से फडणवीस और अजीत पवार की 84 घंटे की सरकार गिर गई। 28 नवंबर को उद्धव ठाकरे ने 'महाविकास अघाड़ी' के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। कहा जाता है कि शरद पवार कभी हारते नहीं हैं। जब वो खुद चुनाव लड़ते हैं तो जीत उनकी होती है, जब जीत पक्की न हो तो वो नहीं लड़ते हैं। लेकिन फिर भी उन्हें एक चुनाव में हार का सामना करना पड़ा और वह उनके चुनावी करियर की एकमात्र हार थी। बेशक वह राजनीतिक क्षेत्र में नहीं बल्कि क्रिकेट के मैदान में थी। 2004 में उन्हें तत्कालीन अध्यक्ष जगमोहन डालमिया के हाथों 'भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड' यानी 'बीसीसीआई' के चुनाव में बेहद कड़े मुक़ाबले में हार माननी पड़ी थी। इससे पहले 2001 में, उन्होंने 'मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन' के चुनाव में अजीत वाडेकर को हराया था। भारत में क्रिकेट प्रबंधन पर उनका प्रभाव तेजी से बढ़ा। लेकिन 2004 में मिली हार ने उन्हें झकझोर दिया था, लेकिन अगले ही साल उन्होंने डालमिया को हरा दिया और 'बीसीसीआई' के अध्यक्ष बन गए। उसके बाद, पवार और उनके गुट ने कई वर्षों तक भारतीय क्रिकेट को नियंत्रित किया। 2010 में वे 'इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल' यानी 'आईसीसी' के अध्यक्ष बने। उनके समय में ही टी-20 क्रिकेट की 'इंडियन प्रीमियर लीग' शुरू हुई, जिसने भारतीय क्रिकेट का चेहरा ही बदल दिया। हालांकि 2016 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा लोढ़ा समिति की सिफ़ारिशों को स्वीकार करने के बाद, क्रिकेट प्रबंधन में पवार की पारी का अंत हो गया। औरंगाबाद के मराठवाड़ा विश्वविद्यालय का नाम बदलकर 'डॉ बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय' करने का प्रस्ताव 1978 में पवार के नेतृत्व में 'प्रलोद' सरकार आने से पहले से हो रही थी। 'प्रलोद' सरकार के सत्ता में आने पर पवार ने मुख्यमंत्री के रूप में विधान सभा में प्रस्ताव पेश किया था, जो पारित भी हो गया। लेकिन उसके बाद मराठवाड़ा में सवर्ण और दलितों के बीच दंगे हुए। इस फ़ैसले पर रोक लग गई लेकिन 1988 में जब पवार फिर से मुख्यमंत्री बने तब भी बात आगे नहीं बढ़ी। आखिरकार 14 जनवरी 1994 को, जब पवार तीसरी बार मुख्यमंत्री बने, तो नाम बदला गया। महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में हज़ारों कर्ज़दार किसानों की आत्महत्याएं राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गईं थीं, इसे लेकर सरकारों की आलोचनाएं भी हो रही थीं। 2008 में केंद्रीय कृषि मंत्री रहते हुए उन्होंने किसानों की कर्ज़ माफ़ी का फैसला लिया। सरकार ने इससे पहले इस तरह की कर्ज माफ़ी नहीं की थी। देशभर के किसानों और उनके कृषि आधारित उद्योगों का क़रीब 72 हज़ार करोड़ रुपये माफ़ कर दिया गया। हालांकि इस बात की आलोचना भी हुई क्योंकि सरकार ने सीधे बैंकों को भुगतान किया, इसलिए समृद्ध किसानों के कर्ज़ भी माफ़ कर दिए गए। उसके बाद ही किसानों की कर्ज़ माफ़ी राजनीतिक दलों के घोषणापत्रों में दिखाई देने लगी। 2009 में यूपीए सरकार की वापसी के पीछे यह भी एक कारक रहा है। 17 दिसंबर 2016 को मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन की बैठक में शरद पवार ने कहा था कि वह क्रिकेट प्रशासन से संन्यास ले रहे हैं। पवार के उस फ़ैसले की उम्मीद तो थी लेकिन वह भी थोड़ा चौंकाने वाला फ़ैसला था। वास्तव में, वह समय भारतीय क्रिकेट प्रशासन के लिए एक बहुत ही मुश्किल दौर था और लोढ़ा समिति की सिफ़ारिशों के अनुसार, यह तय था कि पवार को उम्र और कार्यकाल दोनों के आधार पर पद छोड़ना होगा। लेकिन कोर्ट का अंतिम फ़ैसला आने के पहले ही पवार ने संन्यास की घोषणा कर दी। इस घटना को छह साल से भी ज़्यादा हो गए हैं। लेकिन क्रिकेट में पवार का दबदबा पिछले एमसीए चुनाव में साफ़ दिखा था। अक्टूबर 2022 में हुए उस चुनाव में आशीष शेलार ने अपना पैनल उतारा और फिर वो शरद पवार से मिलने गए, इसकी काफ़ी चर्चा हुई। अंत में इसी शेलार-पवार पैनल के अमोल काले ने एमसीए के अध्यक्ष बनने के लिए पूर्व क्रिकेटर संदीप पाटिल को हराया। ज़ाहिर सी बात है कि पवार के समर्थन के बिना वह यह चुनाव नहीं जीत पाते। भले ही वह अब राजनीति से संन्यास ले लें, पवार सामाजिक कारणों से जुड़े रहेंगे और महाराष्ट्र की राजनीति पर उनका प्रभाव जल्द ख़त्म नहीं होगा।
"एक मई, एक हज़ार नौ सौ साठ से एक मई, दो हज़ार तेईस तक सार्वजनिक जीवन में लंबा समय बिताने के बाद अब कहीं रुकने पर विचार करने की आवश्यकता है। इसलिए, मैंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त होने का फ़ैसला किया है। " शरद पवार के इन दो वाक्यों ने यशवंतराव चव्हाण केंद्र के सभागार को सचमुच हिला कर रख दिया। यह इत्तेफ़ाक़ ही है कि शरद पवार को राजनीति में लाने वाले, पालने-पोसने वाले और अपना बेटा जैसा ही मानने वाले यशवंतराव चव्हाण के नाम पर बने हॉल में पवार ने अपने इस्तीफ़े की घोषणा की। शरद पवार से अपना इस्तीफ़ा वापस लेने की मांग को लेकर नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम स्थल पर धरना दिया। प्रत्येक नेता ने अपना पक्ष रखा और पवार से इस्तीफ़ा वापस लेने का अनुरोध किया। इस मौके पर एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल, जितेंद्र अवहाद जैसे वरिष्ठ नेता भावुक हो गए। वहीं अजित पवार ने ये भी कहा है कि शरद पवार अपने इस्तीफ़े के फ़ैसले पर फिर से विचार करने को तैयार हो गए हैं। शरद पवार एक मई एक हज़ार नौ सौ साठ से राजनीति में सक्रिय हैं। पिछले छह दशकों की महाराष्ट्र की राजनीति उनके इर्द-गिर्द घूमती रही। वह सत्ता में हों या न हों, बहुमत में हों या न हों, महाराष्ट्र की राजनीति में शरद पवार 'फैक्टर' को सबसे अहम फैक्टर माना जाता है। साढ़े तीन साल पहले जब कहा जाता था कि शरद पवार राजनीति के दूसरे चरण के अंत तक पहुंच गए हैं, तो उन्होंने राज्य में एक अभूतपूर्व 'महाविकास अघाड़ी' बनाकर साबित कर दिया कि 'मैं अब भी सक्रिय हूं'। पवार का राजनीतिक जीवन एक तरह से महाराष्ट्र समकालीन राजनीतिक इतिहास है। उनके राजनीतिक जीवन की आठ महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाएं या फ़ैसले, जिनका महाराष्ट्र और देश की राजनीति पर भी दूरगामी प्रभाव पड़ा, उस पर एक नज़र डालते हैंः शरद पवार ने एक हज़ार नौ सौ साठ में शुरू की राजनीति और छह दशकों तक महाराष्ट्र की राजनीति की बने धुरी रहे। आपातकाल के बाद कांग्रेस में दो फाड़ हो गया और पवार 'रेड्डी कांग्रेस' के साथ चले गए। जुलाई एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर में उन्हें महाराष्ट्र के सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला। साल एक हज़ार नौ सौ छियासी में कांग्रेस में वापसी और एक हज़ार नौ सौ अठासी में महाराष्ट्र के दूसरी बार मुख्यमंत्री बने। साल एक हज़ार नौ सौ तिरानवे में, पवार तीसरी बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने। पवार एक हज़ार नौ सौ छियानवे से ही केंद्र की राजनीति में अहम किरदार बन गए। एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में पवार ने सोनिया के विदेशी मूल का मुद्दा उठाया और कांग्रेस से अलग होकर 'राष्ट्रवादी कांग्रेस' बनाई। महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी गठबंधन का श्रेय मुख्य रूप से पवार को ही दिया जाता है। पवार बीसीसीआई और आईसीसी की लंबे समय तक अध्यक्ष रहे। कहा जाता है कि शरद पवार प्रधानमंत्री पद के क़रीब दो बार पहुंचे थे। एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर में पवार को राजनीति में यशवंतराव से हाथ मिलाए और खुद को स्थापित किए काफ़ी समय हो गया था। तब तक वे राज्य में मंत्री भी बन चुके थे। लेकिन एक घटना ने उन्हें महाराष्ट्र का सबसे युवा मुख्यमंत्री बना दिया और महाराष्ट्र की राजनीति को भी बदल कर रख दिया। एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर में आपातकाल के बाद कांग्रेस दो गुटों में विभाजित हो गई, 'इंदिरा कांग्रेस' और 'रेड्डी कांग्रेस'। यशवंतराव के साथ, वसंतदादा पाटिल, शरद पवार सहित महाराष्ट्र के कई नेता 'रेड्डी कांग्रेस' में चले गए थे। एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर में जब महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव हुए तो दोनों कांग्रेस अलग-अलग लड़ीं। जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी, लेकिन बहुमत से पीछे रह गई। फिर दोनों कांग्रेस एक साथ आईं और इस गठबंधन सरकार के वसंतदादा पाटिल मुख्यमंत्री बने, जबकि नासिकराव तिरपुडे उपमुख्यमंत्री बने। लेकिन इस सरकार में कई नेता असहज थे। सरकार में विवाद बढ़ने लगे। अंत में शरद पवार चालीस समर्थक विधायकों के साथ बाहर चले गए और साढ़े चार महीने में गठबंधन सरकार गिर गई। पवार की इस पहली बग़ावत का कई तरह से विश्लेषण किया गया। यह भी कहा गया कि 'वसंतदा की पीठ में खंजर भोंका गया'। यह भी कहा गया कि यशवंतराव ने गोविंद तलवलकर की भविष्यवाणियों का हवाला देकर पवार का समर्थन किया। बाहर आए पवार ने अपनी 'सोशलिस्ट कांग्रेस' की ओर से सरकार बनाने के लिए पहल की। अंत में जुलाई एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर में शरद पवार अड़तीस साल की उम्र में 'प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक पार्टी' यानी 'प्रलोद' की सरकार बनने के साथ महाराष्ट्र के सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री बने। यह सरकार डेढ़ साल से ज़्यादा चली। इस बीच देश के समीकरण भी बदले। जनता पार्टी में फूट पड़ गई। अंत में इंदिरा गांधी की सिफ़ारिश पर महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया और पवार की पहली सरकार को बर्ख़ास्त कर दिया गया। एक हज़ार नौ सौ अस्सी में महाराष्ट्र में सरकार के विघटन के बाद, वह लंबे समय तक सत्ता से बाहर रहे। लेकिन इस दौरान कांग्रेस पार्टी और महाराष्ट्र में भी कई चीज़ें बदलीं। पंजाब में अस्थिरता का मुद्दा प्रमुख हो गया और अंत में प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी की हत्या हो गई। राजीव गांधी ने देश और पार्टी की कमान संभाली। राजीव के बाद कांग्रेस में एक नई पीढ़ी बनने लगी। जैसा कि पवार ने खुद अपनी राजनीतिक आत्मकथा में लिखा है, "राजीव गांधी ने कांग्रेस में वापस आने और साथ काम करने की इच्छा जताई थी। " महाराष्ट्र और कांग्रेस के कुछ नेता पवार की वापसी के ख़िलाफ़ थे। इसी दौरान, राजीव गांधी की आंधी के सामने पवार अपनी पार्टी से लोकसभा के सदस्य भी बने, एक हज़ार नौ सौ चौरासी में वे पहली बार बारामती से लोकसभा पहुंचे थे। लेकिन वे जल्द ही महाराष्ट्र लौट आए। यह राजीव गांधी की इच्छा थी, लेकिन कांग्रेस को उनकी ज़रूरत भी थी ताकि महाराष्ट्र में शिवसेना के बढ़ते प्रभाव के सामने युवा नेतृत्व कांग्रेस को संभाले रखे। राजनीतिक विश्लेषक नितिन बिरमल अपनी पुस्तक 'पॉवर स्ट्रगल' में लिखा है, 'वसंतदादा पाटिल का गुट भी तब तक नेतृत्व विहीन हो चुका था। ' केंद्रीय नेतृत्व ने महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री का पद एआर अंतुले, बाबासाहेब भोसले, नीलांगेकर पाटिल और शंकरराव चव्हाण को दिया, लेकिन इनमें से किसी के पास पूरे महाराष्ट्र में जन समर्थन नहीं था। उस दौर में शरद पवार की सोशलिस्ट कांग्रेस आगे बढ़ रही थी, लेकिन यह भी स्पष्ट होता जा रहा था कि कांग्रेस के बिना सरकार नहीं बन सकती। इसकी वजह यह थी कि राजीव गांधी के नेतृत्व को भारी जन समर्थन हासिल था। इसे भांपते हुए पवार ने कांग्रेस में लौटने का फ़ैसला लिया था। उन्होंने एक हज़ार नौ सौ छियासी में औरंगाबाद में इस निर्णय की घोषणा की। एक हज़ार नौ सौ अठासी में, राजीव गांधी ने शंकरराव चव्हाण को अपने केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया और शरद पवार दूसरी बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने। शरद पवार के राजनीतिक जीवन में यह एक महत्वपूर्ण मोड़ है। क्योंकि उनके करियर के इन्हीं दिनों के बारे में कहा जाता है कि पवार के हाथों से प्रधानमंत्री बनने का मौका निकल गया। नब्बे के दशक की शुरुआत तक, पार्टी में राष्ट्रीय स्तर पर पवार की स्थिति महत्वपूर्ण हो गई थी क्योंकि वे कांग्रेस में लौट आए थे और मुख्यमंत्री बने। एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे में राजीव गांधी की हत्या में हो गई थी और कांग्रेस में नेतृत्व का सवाल एक बड़ा मुद्दा बन गया। सोनिया तब राजनीति में नहीं आयीं थीं। जैसा कि पवार ने अपनी आत्मकथा में भी लिखा है, "कांग्रेस में कई लोग, ख़ासकर युवा, चाहते थे कि पवार पार्टी का नेतृत्व करें। " राजीव की हत्या के बाद हुए चुनाव में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत तो नहीं मिला लेकिन वह उसके क़रीब पहुंच गई थी। प्रधानमंत्री पद की दौड़ में पवार उतरे, लेकिन वोटिंग में पी। वी नरसिम्हा राव को ज़्यादा वोट मिले और पवार के हाथों से मौका निकल गया। हालांकि उस सरकार में वो रक्षा मंत्री बने। नरसिम्हा राव की इस सरकार को कुछ वर्षों से शुरू हुए राम जन्मभूमि आंदोलन के निर्णायक दौर का सामना करना पड़ा था। छः दिसंबर एक हज़ार नौ सौ बानवे को कारसेवकों ने अयोध्या की बाबरी मस्जिद को गिरा दिया और देश में सांप्रदायिक तनाव का माहौल बन गया। इस तनाव का सबसे ज़्यादा असर मुंबई में दिखा। मुंबई में दंगे भड़क उठे और देश की आर्थिक राजधानी आग की लपटों में घिर गई। उस मुश्किल दौर में मार्च एक हज़ार नौ सौ तिरानवे में, पवार तीसरी बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने। वैसे तो यह बदलाव मुंबई दंगों के मद्देनजर हुआ, लेकिन कई लोगों ने इसकी राजनीतिक व्याख्या की नरसिम्हा राव दिल्ली में पवार के रूप में कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं चाहते थे, इसलिए उन्होंने उन्हें वापस मुंबई भेज दिया। वहीं पवार ने अपनी आत्मकथा में लिखा है, "अनिच्छा से सही लेकिन महाराष्ट्र के हित के बारे में सोचते हुए, मैंने मुख्यमंत्री बनना स्वीकार किया। " एक हज़ार नौ सौ पचानवे में महाराष्ट्र की सत्ता से हटने वाले शरद पवार एक हज़ार नौ सौ छियानवे में गठबंधन राजनीति का दौर शुरू होने के बाद दिल्ली की राजनीति में अहम नेता बन गए। बाद में, वह कांग्रेस की ओर से लोकसभा में विपक्ष के नेता बने। कहा गया कि गठबंधन के इस दौर में पवार दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की दौड़ में क़रीब पहुंचे थे। कांग्रेस बहुमत में नहीं थी, लेकिन उसके समर्थन से सरकारें बन रही थीं। सोनिया गांधी के साथ उनके संबंध तनावपूर्ण रहे। इसमें कांग्रेस में वरिष्ठ नेताओं की एक कतार पवार के ख़िलाफ़ काम करती रही। सोनिया गांधी ने सक्रिय राजनीति में आने का फ़ैसले किया और फिर कांग्रेस के अंदर का गणित भी बदल गया। एक बड़े वर्ग की यह भी राय थी कि सोनिया को प्रधानमंत्री बनना चाहिए। अंततः एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में शरद पवार ने सोनिया के विदेशी मूल का मुद्दा उठाया और पीए। संगमा और तारिक अनवर के साथ मिलकर 'राष्ट्रवादी कांग्रेस' की स्थापना की। कांग्रेस में पवार की यह दूसरी बग़ावत थी। एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में लोकसभा और विधानसभा के एक साथ हुए चुनाव में राज्य में कांग्रेस और एनसीपी अलग-अलग चुनाव लड़ीं। लेकिन चुनाव के बाद दोनों पार्टियों के बीच महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए गठबंधन भी हो गया। इस बीच केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार तीसरी बार आई और पांच साल तक चली। लेकिन दो हज़ार चार में सोनिया के नेतृत्व में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन सोनिया ने प्रधानमंत्री बनने से इनकार कर दिया। सोनिया की पसंद के तौर पर मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने। जिस मुद्दे पर पवार को आपत्ति थी, वह सोनिया के फ़ैसले से जाती रही। उस वक्त कहा जाता था कि अगर शरद पवार कांग्रेस में होते तो उनके प्रधानमंत्री बनने की संभावना होती। बहरहाल, 'राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी' कांग्रेस नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा रही और पवार नई सरकार में शामिल हुए। वे अगले दस वर्षों तक कृषि मंत्री बने रहे। उतार चढ़ाव वाले राजनीतिक सफ़र में दो हज़ार उन्नीस में उन्होंने जो गठबंधन बनाया, वह सबसे नाटकीय माना जा सकता है। मोदी सरकार के दूसरी बार भारी बहुमत से वापसी हो गई। देवेंद्र फडणवीस ने शिवसेना की मदद से पांच साल तक महाराष्ट्र की सरकार चला चुके थे। हालांकि चुनाव से पहले सभी विश्लेषक बीजेपी-शिवसेना गठबंधन की सरकार की वापसी की भविष्यवाणी कर रहे थे और पवार के कई साथी पार्टी भी छोड़कर बीजेपी के खेमे में जा रहे थे। ऐसे समय में शरद पवार ने चुनावी अभियान की धुरी अपने हाथों में ले ली और गठबंधन के लिए निर्वाचन क्षेत्रों का फ़ैसला अपने हाथों में रखा। केंद्रित किया, पवार स्थानीय मुद्दों को उठाते रहे। इस चुनाव अभियान में सतारा की बारिश में उनका भाषण वायरल हो गया। । जब नतीजे आए तो बीजेपी की सीटें एक सौ बाईस से एक सौ पाँच हो गई थीं। एनसीपी और कांग्रेस की सीटें बढ़ी थीं। शिवसेना तो सिमट गई, लेकिन बीजेपी के साथ उनके पास स्पष्ट बहुमत था। यहां पवार की राजनीतिक रणनीति ने खेल बदल दिया। मुख्यमंत्री पद की मांग को लेकर शिवसेना ने बीजेपी से किनारा करना शुरू कर दिया है। शिवसेना ने पवार से बातचीत शुरू की। लेकिन सवाल यही था कि शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी एक साथ कैसे आएंगे जब वे राजनीतिक रूप से, वैचारिक रूप से एक-दूसरे के विरोधी हैं? यहां पर पवार की इतने सालों की कूटनीति अहम हो गई। शिवसेना के एनडीए छोड़ने और गठबंधन में आने के लिए शरद पवार ने सोनिया गांधी को भी मना लिया था। इस दौरान महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगा। जब नए 'महाविकास अघाड़ी' के सत्ता में आने की संभावना बनी तो अजित पवार ने बग़ावत की और बीजेपी के साथ मिल गए। लेकिन पवार के मराठी दांव से फडणवीस और अजीत पवार की चौरासी घंटाटे की सरकार गिर गई। अट्ठाईस नवंबर को उद्धव ठाकरे ने 'महाविकास अघाड़ी' के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। कहा जाता है कि शरद पवार कभी हारते नहीं हैं। जब वो खुद चुनाव लड़ते हैं तो जीत उनकी होती है, जब जीत पक्की न हो तो वो नहीं लड़ते हैं। लेकिन फिर भी उन्हें एक चुनाव में हार का सामना करना पड़ा और वह उनके चुनावी करियर की एकमात्र हार थी। बेशक वह राजनीतिक क्षेत्र में नहीं बल्कि क्रिकेट के मैदान में थी। दो हज़ार चार में उन्हें तत्कालीन अध्यक्ष जगमोहन डालमिया के हाथों 'भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड' यानी 'बीसीसीआई' के चुनाव में बेहद कड़े मुक़ाबले में हार माननी पड़ी थी। इससे पहले दो हज़ार एक में, उन्होंने 'मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन' के चुनाव में अजीत वाडेकर को हराया था। भारत में क्रिकेट प्रबंधन पर उनका प्रभाव तेजी से बढ़ा। लेकिन दो हज़ार चार में मिली हार ने उन्हें झकझोर दिया था, लेकिन अगले ही साल उन्होंने डालमिया को हरा दिया और 'बीसीसीआई' के अध्यक्ष बन गए। उसके बाद, पवार और उनके गुट ने कई वर्षों तक भारतीय क्रिकेट को नियंत्रित किया। दो हज़ार दस में वे 'इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल' यानी 'आईसीसी' के अध्यक्ष बने। उनके समय में ही टी-बीस क्रिकेट की 'इंडियन प्रीमियर लीग' शुरू हुई, जिसने भारतीय क्रिकेट का चेहरा ही बदल दिया। हालांकि दो हज़ार सोलह में सुप्रीम कोर्ट द्वारा लोढ़ा समिति की सिफ़ारिशों को स्वीकार करने के बाद, क्रिकेट प्रबंधन में पवार की पारी का अंत हो गया। औरंगाबाद के मराठवाड़ा विश्वविद्यालय का नाम बदलकर 'डॉ बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय' करने का प्रस्ताव एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर में पवार के नेतृत्व में 'प्रलोद' सरकार आने से पहले से हो रही थी। 'प्रलोद' सरकार के सत्ता में आने पर पवार ने मुख्यमंत्री के रूप में विधान सभा में प्रस्ताव पेश किया था, जो पारित भी हो गया। लेकिन उसके बाद मराठवाड़ा में सवर्ण और दलितों के बीच दंगे हुए। इस फ़ैसले पर रोक लग गई लेकिन एक हज़ार नौ सौ अठासी में जब पवार फिर से मुख्यमंत्री बने तब भी बात आगे नहीं बढ़ी। आखिरकार चौदह जनवरी एक हज़ार नौ सौ चौरानवे को, जब पवार तीसरी बार मुख्यमंत्री बने, तो नाम बदला गया। महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में हज़ारों कर्ज़दार किसानों की आत्महत्याएं राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गईं थीं, इसे लेकर सरकारों की आलोचनाएं भी हो रही थीं। दो हज़ार आठ में केंद्रीय कृषि मंत्री रहते हुए उन्होंने किसानों की कर्ज़ माफ़ी का फैसला लिया। सरकार ने इससे पहले इस तरह की कर्ज माफ़ी नहीं की थी। देशभर के किसानों और उनके कृषि आधारित उद्योगों का क़रीब बहत्तर हज़ार करोड़ रुपये माफ़ कर दिया गया। हालांकि इस बात की आलोचना भी हुई क्योंकि सरकार ने सीधे बैंकों को भुगतान किया, इसलिए समृद्ध किसानों के कर्ज़ भी माफ़ कर दिए गए। उसके बाद ही किसानों की कर्ज़ माफ़ी राजनीतिक दलों के घोषणापत्रों में दिखाई देने लगी। दो हज़ार नौ में यूपीए सरकार की वापसी के पीछे यह भी एक कारक रहा है। सत्रह दिसंबर दो हज़ार सोलह को मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन की बैठक में शरद पवार ने कहा था कि वह क्रिकेट प्रशासन से संन्यास ले रहे हैं। पवार के उस फ़ैसले की उम्मीद तो थी लेकिन वह भी थोड़ा चौंकाने वाला फ़ैसला था। वास्तव में, वह समय भारतीय क्रिकेट प्रशासन के लिए एक बहुत ही मुश्किल दौर था और लोढ़ा समिति की सिफ़ारिशों के अनुसार, यह तय था कि पवार को उम्र और कार्यकाल दोनों के आधार पर पद छोड़ना होगा। लेकिन कोर्ट का अंतिम फ़ैसला आने के पहले ही पवार ने संन्यास की घोषणा कर दी। इस घटना को छह साल से भी ज़्यादा हो गए हैं। लेकिन क्रिकेट में पवार का दबदबा पिछले एमसीए चुनाव में साफ़ दिखा था। अक्टूबर दो हज़ार बाईस में हुए उस चुनाव में आशीष शेलार ने अपना पैनल उतारा और फिर वो शरद पवार से मिलने गए, इसकी काफ़ी चर्चा हुई। अंत में इसी शेलार-पवार पैनल के अमोल काले ने एमसीए के अध्यक्ष बनने के लिए पूर्व क्रिकेटर संदीप पाटिल को हराया। ज़ाहिर सी बात है कि पवार के समर्थन के बिना वह यह चुनाव नहीं जीत पाते। भले ही वह अब राजनीति से संन्यास ले लें, पवार सामाजिक कारणों से जुड़े रहेंगे और महाराष्ट्र की राजनीति पर उनका प्रभाव जल्द ख़त्म नहीं होगा।
नई दिल्ली - हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भारतीय अर्थव्यवस्था को चीन के साए से बाहर निकालने की वकालत करते हुए कहा था कि चीन से सस्ते आयात से देश में उत्पादित की जा रही वस्तुओं का बाजार खराब हो रहा है। लिहाजा संघ ने केंद्र सरकार को चीन से दूरी बनाने के साथ-साथ अपने निजी क्षेत्र को भी चीन की कंपनियों से दूर रहने की सलाह दी थी। अब आरएसएस केंद्र की एनडीए सरकार को सुझाव दे रहा है कि वह चीन की कारोबारी कुरीतियों का जवाब देने के साथ-साथ कैलाश, हिमालय और तिब्बत को चीन के चंगुल से छुड़ाने की कवायद और तेज करे। देश में बिक रहे चीन के सस्ते उत्पादों के विरोध में इस हफ्ते स्वदेशी जागरण मंच ने दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली का आयोजन किया था। इस रैली में आरएसएस से जुड़े कई अन्य संगठनों ने भी हिस्सा लिया। रैली के दौरान कहा गया कि डोकलाम में चीन की काली करतूत को देखने के बाद भारत सरकार को न सिर्फ भारतीय अर्थव्यवस्था से चीन के प्रकोप को कम करने की जरूरत है।
नई दिल्ली - हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भारतीय अर्थव्यवस्था को चीन के साए से बाहर निकालने की वकालत करते हुए कहा था कि चीन से सस्ते आयात से देश में उत्पादित की जा रही वस्तुओं का बाजार खराब हो रहा है। लिहाजा संघ ने केंद्र सरकार को चीन से दूरी बनाने के साथ-साथ अपने निजी क्षेत्र को भी चीन की कंपनियों से दूर रहने की सलाह दी थी। अब आरएसएस केंद्र की एनडीए सरकार को सुझाव दे रहा है कि वह चीन की कारोबारी कुरीतियों का जवाब देने के साथ-साथ कैलाश, हिमालय और तिब्बत को चीन के चंगुल से छुड़ाने की कवायद और तेज करे। देश में बिक रहे चीन के सस्ते उत्पादों के विरोध में इस हफ्ते स्वदेशी जागरण मंच ने दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली का आयोजन किया था। इस रैली में आरएसएस से जुड़े कई अन्य संगठनों ने भी हिस्सा लिया। रैली के दौरान कहा गया कि डोकलाम में चीन की काली करतूत को देखने के बाद भारत सरकार को न सिर्फ भारतीय अर्थव्यवस्था से चीन के प्रकोप को कम करने की जरूरत है।
पटना में आज बागेश्वर धाम के बाबा धीरेंद्र शास्त्री का दिव्य दरबार नहीं लगेगा. बाबा ने दूर-दराज से दिव्य दरबार में आने वाले भक्तों से निवेदन कि है कि भक्त टीवी और मोबाइल के ही जरिये कथा सुनें और अपने-अपने घर पर ही रहें. हालांकि पूर्व निर्धारित प्रोग्राम के तहत 17 मई तक कथा चलती रहेगी. बागेश्वर धाम को यहां किसी अलौकिक की आशंका सता रही है. इन्होंने रविवार को ही अनहोनी की आशंका जता दी थी. धीरेंद्र शास्त्री ने रविवार को लोगों से कहा कि आप लोगों से विनती है कि अब किसी को लेकर मत आएं. जो भी ट्रेन की टिकट कराकर पटना आ रहे हैं वह वापस लौट जाएं. वापस हो जाएं. हालांकि कथा 17 मई तक चलती रहेगी. कथा के दूसरे दिन रविवार को धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था कि बेहद भीड़ हो गई है. पागल ही पागल आ गए हैं. निरंतर दस लाख लोग आ गए हैं. हमें चिंता हो रहा है कि कई लोगों की सांस रुक जाएगी. मन में ऐसा लग रहा है. एक या दो लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है. कथा वही है जिसमें तकलीफ न हो. बिहार के जितने भी लोग हैं वो घर से ही कथा सुनें. सोशल मीडिया के माध्यम से सुनें. कथा पंडाल में नहीं आना है. मैं आप सबका उपकार कभी नहीं भूलूंगा. दिव्य दरबार को बीच में ही रद्द करने के पीछे की वजह पर हम बात करें तो भीषण गर्मी को देखते हुए ये न्याय लिया गया है. बता दें कि रविवार को बाबा के दरबार में ज्यादा गर्मी की वजह से कई लोगों को तबीयत खराब हो गई थी. कई लोग बेहोश हो गए थे. भीड़ इतनी ज्यादा बढ़ गई थी कि पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा था. बहरहाल सोमवार को बाबा का दिव्य दरबार नहीं लगाने का न्याय किया गया है. बाबा बागेश्वर ने रविवार (14 मई) को कथा के अंत में खुद ही बोले थे कि गर्मी के वजह आज भी बहुत ज्यादा सफोकेशन हो रहा है. सांस लेने में तकलीफ हो रही है. धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि रोड जाम हो गया है. तीनों पंडाल में लोगों की भीड़ जुटी है. बागेश्वर बाबा ने सोमवार को लगने वाले दिव्य दरबार को लेकर बोले थे कि अगर ज्यादा लोग रहेंगे तो विश्राम रहेगा.
पटना में आज बागेश्वर धाम के बाबा धीरेंद्र शास्त्री का दिव्य दरबार नहीं लगेगा. बाबा ने दूर-दराज से दिव्य दरबार में आने वाले भक्तों से निवेदन कि है कि भक्त टीवी और मोबाइल के ही जरिये कथा सुनें और अपने-अपने घर पर ही रहें. हालांकि पूर्व निर्धारित प्रोग्राम के तहत सत्रह मई तक कथा चलती रहेगी. बागेश्वर धाम को यहां किसी अलौकिक की आशंका सता रही है. इन्होंने रविवार को ही अनहोनी की आशंका जता दी थी. धीरेंद्र शास्त्री ने रविवार को लोगों से कहा कि आप लोगों से विनती है कि अब किसी को लेकर मत आएं. जो भी ट्रेन की टिकट कराकर पटना आ रहे हैं वह वापस लौट जाएं. वापस हो जाएं. हालांकि कथा सत्रह मई तक चलती रहेगी. कथा के दूसरे दिन रविवार को धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था कि बेहद भीड़ हो गई है. पागल ही पागल आ गए हैं. निरंतर दस लाख लोग आ गए हैं. हमें चिंता हो रहा है कि कई लोगों की सांस रुक जाएगी. मन में ऐसा लग रहा है. एक या दो लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है. कथा वही है जिसमें तकलीफ न हो. बिहार के जितने भी लोग हैं वो घर से ही कथा सुनें. सोशल मीडिया के माध्यम से सुनें. कथा पंडाल में नहीं आना है. मैं आप सबका उपकार कभी नहीं भूलूंगा. दिव्य दरबार को बीच में ही रद्द करने के पीछे की वजह पर हम बात करें तो भीषण गर्मी को देखते हुए ये न्याय लिया गया है. बता दें कि रविवार को बाबा के दरबार में ज्यादा गर्मी की वजह से कई लोगों को तबीयत खराब हो गई थी. कई लोग बेहोश हो गए थे. भीड़ इतनी ज्यादा बढ़ गई थी कि पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा था. बहरहाल सोमवार को बाबा का दिव्य दरबार नहीं लगाने का न्याय किया गया है. बाबा बागेश्वर ने रविवार को कथा के अंत में खुद ही बोले थे कि गर्मी के वजह आज भी बहुत ज्यादा सफोकेशन हो रहा है. सांस लेने में तकलीफ हो रही है. धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि रोड जाम हो गया है. तीनों पंडाल में लोगों की भीड़ जुटी है. बागेश्वर बाबा ने सोमवार को लगने वाले दिव्य दरबार को लेकर बोले थे कि अगर ज्यादा लोग रहेंगे तो विश्राम रहेगा.
दसंवाँ अध्याय यन श्रौत सूत्र में गृहस्थाश्रम के अन्तिम क्षण तक वैदिक अग्नियों को प्रज्वलित रखना चाहिए । आश्वलायन ने प्रतिदिन अग्निहोत्र करने की बात कही है। दक्षिणाग्नि के सम्बन्ध में इनका मत है कि किसी धनिक या वैश्य के घर से लेकर घर्षण से या हमेशा प्रज्वलित करके दक्षिणाग्नि में अग्निहोत्रं करना चाहिए । अग्निहोत्र करने का कारण अग्निहोत्र से अग्निदेव को प्रसन्न करने की चेष्टा की जाती है। अग्निदेव से पवित्रता, प्रकाश, शक्ति, सामर्थ्य और शान्ति की प्रेरणा ग्रहण की जाती है। हवन करने के लिये जब आहवनीय अग्नि के पास मन्त्र पाठ किया जाता है, उससे पाप प्रक्षालन का बोध होता है । पाप कर्म ज्ञातअज्ञात अवस्था में जो भी किये गये हों उनसे मुक्त होने के लिये अग्नि से प्रार्थना की जाती है कि वह अपने दाहकत्व से उसका दहन कर दें । 3 रात्रि में जो पाप किये जाते हैं उनका दहन प्रातःकाल में एवं दिन में जो पाप-कर्म होते हैं उनका प्रक्षालन सायंकाल में अग्निहोत्र करने से होता है । अग्निहोत्र का काल निर्णय - अनेक श्रौतसूत्रों एवं धर्मसूत्रों में भिन्न-भिन्न समय का निर्देश है। कात्यायन के अनुसार अग्निहोत्र सूर्योदय एवं सूर्यास्त के पूर्व होना चाहिए । आश्वलायन के अनुसार सूर्योदय एवं सूर्यास्त के बाद अग्निहोत्र करना चाहिए। ऐसा प्रतीत होता है कि प्राचीन काल से ही अग्निहोत्र काल के सम्बन्ध में अनेक मत चले आ रहे हैं । आपस्तम्ब ने अपने समय में प्रसिद्ध चार मतों का उल्लेख किया है - ( १ ) प्रातः एवं संध्या समय सन्धि काल में ( २ ) आकाश में जब एक भो तारा दीख पड़े ( ३ ) रात्रि के प्रथम या द्वितीय प्रहर में । ( ४ ) प्रातःकाल जब सूर्य के मण्डल का एक अंश प्रत्यक्ष दृष्टिगोचर हो अर्थात् : सूर्योदय होने वाला हो । तीन प्रकार (गार्हपत्याग्नि, दक्षिणाग्नि एवं आहवनीयाग्नि) की वैदिक अग्नियाँ जिस घर में हों वहां गृहस्थ को पहले वैदिक अग्नियों में अग्निहोत्र करने के बाद गृह्याग्नि में हवन करना चाहिए। कुछ लोगों के मत से पहले गृह्याग्नि में ही हवन करना चाहिए । १ - कात्यायन - ४१३५ ३ - देवं त्वा देवेभ्यः श्रिया उद्धरामि... बापस्तम्ब ६।१।१२ ४- आपस्तम्ब ६।४।७-९।
दसंवाँ अध्याय यन श्रौत सूत्र में गृहस्थाश्रम के अन्तिम क्षण तक वैदिक अग्नियों को प्रज्वलित रखना चाहिए । आश्वलायन ने प्रतिदिन अग्निहोत्र करने की बात कही है। दक्षिणाग्नि के सम्बन्ध में इनका मत है कि किसी धनिक या वैश्य के घर से लेकर घर्षण से या हमेशा प्रज्वलित करके दक्षिणाग्नि में अग्निहोत्रं करना चाहिए । अग्निहोत्र करने का कारण अग्निहोत्र से अग्निदेव को प्रसन्न करने की चेष्टा की जाती है। अग्निदेव से पवित्रता, प्रकाश, शक्ति, सामर्थ्य और शान्ति की प्रेरणा ग्रहण की जाती है। हवन करने के लिये जब आहवनीय अग्नि के पास मन्त्र पाठ किया जाता है, उससे पाप प्रक्षालन का बोध होता है । पाप कर्म ज्ञातअज्ञात अवस्था में जो भी किये गये हों उनसे मुक्त होने के लिये अग्नि से प्रार्थना की जाती है कि वह अपने दाहकत्व से उसका दहन कर दें । तीन रात्रि में जो पाप किये जाते हैं उनका दहन प्रातःकाल में एवं दिन में जो पाप-कर्म होते हैं उनका प्रक्षालन सायंकाल में अग्निहोत्र करने से होता है । अग्निहोत्र का काल निर्णय - अनेक श्रौतसूत्रों एवं धर्मसूत्रों में भिन्न-भिन्न समय का निर्देश है। कात्यायन के अनुसार अग्निहोत्र सूर्योदय एवं सूर्यास्त के पूर्व होना चाहिए । आश्वलायन के अनुसार सूर्योदय एवं सूर्यास्त के बाद अग्निहोत्र करना चाहिए। ऐसा प्रतीत होता है कि प्राचीन काल से ही अग्निहोत्र काल के सम्बन्ध में अनेक मत चले आ रहे हैं । आपस्तम्ब ने अपने समय में प्रसिद्ध चार मतों का उल्लेख किया है - प्रातः एवं संध्या समय सन्धि काल में आकाश में जब एक भो तारा दीख पड़े रात्रि के प्रथम या द्वितीय प्रहर में । प्रातःकाल जब सूर्य के मण्डल का एक अंश प्रत्यक्ष दृष्टिगोचर हो अर्थात् : सूर्योदय होने वाला हो । तीन प्रकार की वैदिक अग्नियाँ जिस घर में हों वहां गृहस्थ को पहले वैदिक अग्नियों में अग्निहोत्र करने के बाद गृह्याग्नि में हवन करना चाहिए। कुछ लोगों के मत से पहले गृह्याग्नि में ही हवन करना चाहिए । एक - कात्यायन - चार हज़ार एक सौ पैंतीस तीन - देवं त्वा देवेभ्यः श्रिया उद्धरामि... बापस्तम्ब छः।एक।बारह चार- आपस्तम्ब छः।चार।सात-नौ।
भारतीयों के लिए गौरव की बात है क्योंकि देश ने कोविड-19 टीके की 100 करोड़ खुराक दिए जाने का मुकाम गुरुवार को हासिल कर लिया है। इस असाधारण अवसर पर स्पाइसजेट (Spicejet) ने गुरुवार को दिल्ली हवाई अड्डे (Delhi Airport) पर अपने बोइंग 737 विमान पर बनी एक विशेष तस्वीर (लिवरी) का अनावरण किया। भारतीयों के लिए गौरव की बात है क्योंकि देश ने कोविड-19 टीके की 100 करोड़ खुराक दिए जाने का मुकाम गुरुवार को हासिल कर लिया है। स्पाइसजेट (Spicejet) ने गुरुवार को दिल्ली हवाई अड्डे (Delhi Airport) पर अपने बोइंग 737 विमान पर बनी एक विशेष तस्वीर (लिवरी) का अनावरण किया। PM Narendra Modi ने अपने संबोधन में 100 करोड़ वैक्सीनेशन के आंकड़े को 130 करोड़ भारतीयों की सफलता बताते हुए कहा कि यह महज एक आंकड़ा भर नहीं है बल्कि नए भारत के सामर्थ्य का प्रतीक है। हालांकि इसके साथ ही उन्होने देशवासियों से मास्क को अपनी आदत में शामिल करने की अपील करते हुए कहा कि कोरोना का खतरा अभी टला नहीं है, लड़ाई अभी जारी है। राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जब 100 साल की सबसे बड़ी महामारी आई, तो भारत की क्षमता को लेकर कई तरह के सवाल उठाए गए। यह कहा गया कि क्या भारत इस वैश्विक महामारी से लड़ पाएगा? भारत दूसरे देशों से इतनी वैक्सीन खरीदने का पैसा कहां से लाएगा? भारत को वैक्सीन कब मिलेगी? भारत के लोगों को वैक्सीन मिलेगी भी या नहीं? क्या भारत इतने लोगों को टीका लगा पाएगा कि महामारी को फैलने से रोक सके? उन्होंने कहा कि भारत को लेकर भांति-भांति के सवाल थे, लेकिन इस 100 करोड़ वैक्सीन डोज ने हर सवाल का जवाब दे दिया है। भारतीय वैक्सीनेशन कार्यक्रम का श्रेय वैज्ञानिकों को देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत का पूरा वैक्सीनेशन प्रोग्राम विज्ञान की कोख में जन्मा है, वैज्ञानिक आधारों पर पनपा है और वैज्ञानिक तरीकों से चारों दिशाओं में पहुंचा है।
भारतीयों के लिए गौरव की बात है क्योंकि देश ने कोविड-उन्नीस टीके की एक सौ करोड़ खुराक दिए जाने का मुकाम गुरुवार को हासिल कर लिया है। इस असाधारण अवसर पर स्पाइसजेट ने गुरुवार को दिल्ली हवाई अड्डे पर अपने बोइंग सात सौ सैंतीस विमान पर बनी एक विशेष तस्वीर का अनावरण किया। भारतीयों के लिए गौरव की बात है क्योंकि देश ने कोविड-उन्नीस टीके की एक सौ करोड़ खुराक दिए जाने का मुकाम गुरुवार को हासिल कर लिया है। स्पाइसजेट ने गुरुवार को दिल्ली हवाई अड्डे पर अपने बोइंग सात सौ सैंतीस विमान पर बनी एक विशेष तस्वीर का अनावरण किया। PM Narendra Modi ने अपने संबोधन में एक सौ करोड़ वैक्सीनेशन के आंकड़े को एक सौ तीस करोड़ भारतीयों की सफलता बताते हुए कहा कि यह महज एक आंकड़ा भर नहीं है बल्कि नए भारत के सामर्थ्य का प्रतीक है। हालांकि इसके साथ ही उन्होने देशवासियों से मास्क को अपनी आदत में शामिल करने की अपील करते हुए कहा कि कोरोना का खतरा अभी टला नहीं है, लड़ाई अभी जारी है। राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जब एक सौ साल की सबसे बड़ी महामारी आई, तो भारत की क्षमता को लेकर कई तरह के सवाल उठाए गए। यह कहा गया कि क्या भारत इस वैश्विक महामारी से लड़ पाएगा? भारत दूसरे देशों से इतनी वैक्सीन खरीदने का पैसा कहां से लाएगा? भारत को वैक्सीन कब मिलेगी? भारत के लोगों को वैक्सीन मिलेगी भी या नहीं? क्या भारत इतने लोगों को टीका लगा पाएगा कि महामारी को फैलने से रोक सके? उन्होंने कहा कि भारत को लेकर भांति-भांति के सवाल थे, लेकिन इस एक सौ करोड़ वैक्सीन डोज ने हर सवाल का जवाब दे दिया है। भारतीय वैक्सीनेशन कार्यक्रम का श्रेय वैज्ञानिकों को देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत का पूरा वैक्सीनेशन प्रोग्राम विज्ञान की कोख में जन्मा है, वैज्ञानिक आधारों पर पनपा है और वैज्ञानिक तरीकों से चारों दिशाओं में पहुंचा है।
Patna: बिहार में शिक्षक नियोजन से जुड़ी खबर है. जहां शिक्षकों की बहाली के लिए सरकार ने नया शिड्यूल जारी कर दिया है. हाई स्कूल और प्लस टू विद्यालयों में शिक्षकों को नियोजित किया जाएगा. 30 हजार पदों पर होने वाली शिक्षकों की भर्ती के लिए 18 अगस्त से 17 सितंबर के बीच आवेदन लिए जाएंगे. बता दें कि हाईस्कूल और प्लस टू विद्यालयों में शिक्षक नियुक्ति को लेकर 2 जुलाई से काउंसलिंग होनी थी. जिसे स्थगित कर दिया गया था. नया शिड्यूल आने के बाद माना जा रहा है कि हाई स्कूल और प्लस टू विद्यालयों में शिक्षकों की बहाली में काफी देरी हो सकती है. पहले प्राइमरी स्कूलों में शिक्षक बहाली की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी. बिहार शिक्षा विभाग ने नया शिड्यूल जारी करते हुए कहा है कि जो अभ्यर्थी पहले आवेदन दे चुके हैं, उन्हें दोबारा आवेदन करने की जरूरत नहीं है. नए शिड्यूल के मुताबिक 2 अगस्त तक नियोजन इकाईवार 30 जून 2019 तक उपलब्ध रिक्त पदों की गणना की जानी है. अंतिम मेधा सूची नियोजन इकाई द्वारा 6 दिसंबर तक सार्वजनिक की जाएगी. शिक्षा विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी की है.
Patna: बिहार में शिक्षक नियोजन से जुड़ी खबर है. जहां शिक्षकों की बहाली के लिए सरकार ने नया शिड्यूल जारी कर दिया है. हाई स्कूल और प्लस टू विद्यालयों में शिक्षकों को नियोजित किया जाएगा. तीस हजार पदों पर होने वाली शिक्षकों की भर्ती के लिए अट्ठारह अगस्त से सत्रह सितंबर के बीच आवेदन लिए जाएंगे. बता दें कि हाईस्कूल और प्लस टू विद्यालयों में शिक्षक नियुक्ति को लेकर दो जुलाई से काउंसलिंग होनी थी. जिसे स्थगित कर दिया गया था. नया शिड्यूल आने के बाद माना जा रहा है कि हाई स्कूल और प्लस टू विद्यालयों में शिक्षकों की बहाली में काफी देरी हो सकती है. पहले प्राइमरी स्कूलों में शिक्षक बहाली की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी. बिहार शिक्षा विभाग ने नया शिड्यूल जारी करते हुए कहा है कि जो अभ्यर्थी पहले आवेदन दे चुके हैं, उन्हें दोबारा आवेदन करने की जरूरत नहीं है. नए शिड्यूल के मुताबिक दो अगस्त तक नियोजन इकाईवार तीस जून दो हज़ार उन्नीस तक उपलब्ध रिक्त पदों की गणना की जानी है. अंतिम मेधा सूची नियोजन इकाई द्वारा छः दिसंबर तक सार्वजनिक की जाएगी. शिक्षा विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी की है.
बॉलीवुड एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी की बहन शमिता शेट्टी ने 2 फरवरी को अपना जन्मदिन धूमधाम से फैमिली के साथ सेलिब्रेट किया। अब शिल्पा ने सोशल मीडिया पर सेलिब्रेशन का वीडियो शेयर किया है। इसमें शमिता एक खास केक के साथ दिखाई दे रही हैं, जिसे देखकर आपका भी केक खाने का मन कर जाएगा। शिल्पा शेट्टी ने जो वीडियो शेयर किया है, उसमें शमिता केक से प्लास्टिक की शीट हटाती दिखाई दे रही हैं। इसे 'पुल मी अप केक' कहा जाता है। शीट हटाते ही ढेर सारी चॉकलेट केक पर गिर जाती है। शिल्पा ने वीडियो शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा है- 'भगवान करे तुम्हारी जिंदगी में हमेशा मिठास की टंकी भरी रहे। ' इससे पहले शिल्पा ने शमिता की फोटोज का कोलाज शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा था- 'अर्ज किया है. . दिल के सबसे करीब होती है सिस, जब वो साथ नहीं हो तो हम करते हैं मिस, जब प्यार आ गया तो दे दिया एक किस, लेकिन उसको परेशान करना इज अ फीलिंग ऑफ कंप्लीट ब्लिस। हैप्पी बर्थडे माई बेबी। मेरी टंकी। ' शमिता शेट्टी ने भी इंस्टाग्राम पर अपनी दोस्तों के साथ बर्थडे सेलिब्रेशन की फोटो शेयर की है।
बॉलीवुड एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी की बहन शमिता शेट्टी ने दो फरवरी को अपना जन्मदिन धूमधाम से फैमिली के साथ सेलिब्रेट किया। अब शिल्पा ने सोशल मीडिया पर सेलिब्रेशन का वीडियो शेयर किया है। इसमें शमिता एक खास केक के साथ दिखाई दे रही हैं, जिसे देखकर आपका भी केक खाने का मन कर जाएगा। शिल्पा शेट्टी ने जो वीडियो शेयर किया है, उसमें शमिता केक से प्लास्टिक की शीट हटाती दिखाई दे रही हैं। इसे 'पुल मी अप केक' कहा जाता है। शीट हटाते ही ढेर सारी चॉकलेट केक पर गिर जाती है। शिल्पा ने वीडियो शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा है- 'भगवान करे तुम्हारी जिंदगी में हमेशा मिठास की टंकी भरी रहे। ' इससे पहले शिल्पा ने शमिता की फोटोज का कोलाज शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा था- 'अर्ज किया है. . दिल के सबसे करीब होती है सिस, जब वो साथ नहीं हो तो हम करते हैं मिस, जब प्यार आ गया तो दे दिया एक किस, लेकिन उसको परेशान करना इज अ फीलिंग ऑफ कंप्लीट ब्लिस। हैप्पी बर्थडे माई बेबी। मेरी टंकी। ' शमिता शेट्टी ने भी इंस्टाग्राम पर अपनी दोस्तों के साथ बर्थडे सेलिब्रेशन की फोटो शेयर की है।
सीएसआईआर-यूजीसी नेट रिजल्ट (Photo Credit: https://ntaresults. nic. in/) नई दिल्लीः राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने ज्वाईंट सीएसआईआर-यूजीसी नेट जून 2020 (CSIR UGC NET 2020) परीक्षा का परिणाम जारी कर दिया है. उम्मीदवार अपना परिणाम इसकी आधिकारिक वेबसाइट csirnet. nta. nic. in. पर देख सकते हैं. एजेंसी द्वारा सीएसआईआर-यूजीसी नेट जून 2020 रिजल्ट को लेकर सोमवार, 28 दिसंबर 2020 को नोटिस जारी किया था. एनटीए ने इसके साथ ही सीएसआईआर-यूजीसी नेट जून 2020 परीक्षा के फाइनल 'आंसर की' भी जारी कर दिये हैं, जिसे उम्मीदवार परीक्षा पोर्टल https://csirnet. nta. nic. in पर चेक कर सकते हैं. 1. सबसे पहले NTA की आधिकारिक वेबसाइट csirnet. nta. nic. in पर जाएं. 3. अब अपना रजिस्ट्रेशन नंबर जन्मतिथि और सिक्यूरिटी पिन लिखें. 4. सीएसआईआर-यूजीसी नेट जून 2020 स्कोर कोर्ड आपकी स्क्रीन पर आ जाएगा. 5. भविष्य के लिए स्कोर कार्ड का प्रिंटआउट निकाल कर रख लें. गौरतलब है कि इस साल 262692 उम्मीदवारों ने परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था. इसमें नवंबर में आयोजित परीक्षा में कलु 171273 उम्मीदवार उपस्थित हुए थे. बता दें कि एनटीए ने 225 शहरों में 569 केंद्रों पर दो पालियों में परीक्षा करवाई थी. ये परीक्षा पांच विषयों में आयोजित की गई थी.
सीएसआईआर-यूजीसी नेट रिजल्ट नई दिल्लीः राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने ज्वाईंट सीएसआईआर-यूजीसी नेट जून दो हज़ार बीस परीक्षा का परिणाम जारी कर दिया है. उम्मीदवार अपना परिणाम इसकी आधिकारिक वेबसाइट csirnet. nta. nic. in. पर देख सकते हैं. एजेंसी द्वारा सीएसआईआर-यूजीसी नेट जून दो हज़ार बीस रिजल्ट को लेकर सोमवार, अट्ठाईस दिसंबर दो हज़ार बीस को नोटिस जारी किया था. एनटीए ने इसके साथ ही सीएसआईआर-यूजीसी नेट जून दो हज़ार बीस परीक्षा के फाइनल 'आंसर की' भी जारी कर दिये हैं, जिसे उम्मीदवार परीक्षा पोर्टल https://csirnet. nta. nic. in पर चेक कर सकते हैं. एक. सबसे पहले NTA की आधिकारिक वेबसाइट csirnet. nta. nic. in पर जाएं. तीन. अब अपना रजिस्ट्रेशन नंबर जन्मतिथि और सिक्यूरिटी पिन लिखें. चार. सीएसआईआर-यूजीसी नेट जून दो हज़ार बीस स्कोर कोर्ड आपकी स्क्रीन पर आ जाएगा. पाँच. भविष्य के लिए स्कोर कार्ड का प्रिंटआउट निकाल कर रख लें. गौरतलब है कि इस साल दो लाख बासठ हज़ार छः सौ बानवे उम्मीदवारों ने परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था. इसमें नवंबर में आयोजित परीक्षा में कलु एक लाख इकहत्तर हज़ार दो सौ तिहत्तर उम्मीदवार उपस्थित हुए थे. बता दें कि एनटीए ने दो सौ पच्चीस शहरों में पाँच सौ उनहत्तर केंद्रों पर दो पालियों में परीक्षा करवाई थी. ये परीक्षा पांच विषयों में आयोजित की गई थी.
'कौन बनेगा करोड़पति' का इंग्लिश वर्जन हुआ बंद, 17 साल तक लगातार हुआ था प्रसारित ! पागल आदमी ने मासूम को उतारा मौत के घाट, माँ सहित दो महिला गंभीर घायल ! भैंस चोरी करने आये चोर को ग्रामीणों ने पकड़कर उल्टा लटका कर की पिटाई, वीडियो वायरल ! विवादों के चलते मायके गयी पत्नी की हत्या कर वहीं से फरार हो गया पति, पुलिस कर रही जांच ! बिजली मरम्मत के लिए कटी सप्लाई, आक्रोशित दबंगों ने कर्मचारियों से की मारपीट !
'कौन बनेगा करोड़पति' का इंग्लिश वर्जन हुआ बंद, सत्रह साल तक लगातार हुआ था प्रसारित ! पागल आदमी ने मासूम को उतारा मौत के घाट, माँ सहित दो महिला गंभीर घायल ! भैंस चोरी करने आये चोर को ग्रामीणों ने पकड़कर उल्टा लटका कर की पिटाई, वीडियो वायरल ! विवादों के चलते मायके गयी पत्नी की हत्या कर वहीं से फरार हो गया पति, पुलिस कर रही जांच ! बिजली मरम्मत के लिए कटी सप्लाई, आक्रोशित दबंगों ने कर्मचारियों से की मारपीट !
साल के बारे में अंगरेजों ने किया। मीर कासिम ने तीनों प्रान्तों की आमदनी में से २४ लाख रुपए सालाना दिल्ली सम्राट की सेवा में भेजने का वचन दिया। सम्राट ने मार्च सन् १७६१ में तीनों प्रान्तों की सुबेदारी का परवाना वाजाब्ता मीर कासिम के नाम जारी कर दिया । अंगों का मतलब पूरा हो गया । उन्होंने इस अवसर पर एक कोशिश यह भी की कि जिस तरह मीर कासिम को शाही परवाना अता हुआ, उसी तरह जो इलाक़ कम्पनी के पास थे उनके लिए कम्पनी को अलग सूबेदारी का परवाना मिल जाये; किन्तु शाह ने इसे मंज़ूर न किया । एक और प्रार्थना इस समय अंगरेजों ने यह की कि सुबेदार मीर कासिम को रहने दिया जाये, किन्तु तीनों प्रान्तों को दीवानी के अधिकार सुवेदार से लेकर कम्पनी को दे दिए जावें। इस दीवानी का मतलब यह था कि अंगरेज सुवेदार के मातहत तीनो प्रान्तों से सरकारी मालगुजारी वसूल करके उसका हिसाब सम्राट और सूबेदार दोनों को दे द और वसूली का खर्च निकाल कर बाकी सब रुपया सुवेदार के सुपुर्द कर दें। इस धन । इस धन से सरकारी फ़ौजें रखना अपने प्रान्तों के शासन का बाक़ी सारा काम चलाना और सम्राट को सालाना खिगज भेजना सूबेदार का काम रह जाय । शाहल इस समय दिल्ली लौटने के लिए उत्सुक था। राजधानों के अन्दर सिंहासन के लिए किसी दूसरे हक़दार के खड़े हो जाने का भी डर था । सम्राट ने चाहा कि अंगरेज़ अपनी सेना
साल के बारे में अंगरेजों ने किया। मीर कासिम ने तीनों प्रान्तों की आमदनी में से चौबीस लाख रुपए सालाना दिल्ली सम्राट की सेवा में भेजने का वचन दिया। सम्राट ने मार्च सन् एक हज़ार सात सौ इकसठ में तीनों प्रान्तों की सुबेदारी का परवाना वाजाब्ता मीर कासिम के नाम जारी कर दिया । अंगों का मतलब पूरा हो गया । उन्होंने इस अवसर पर एक कोशिश यह भी की कि जिस तरह मीर कासिम को शाही परवाना अता हुआ, उसी तरह जो इलाक़ कम्पनी के पास थे उनके लिए कम्पनी को अलग सूबेदारी का परवाना मिल जाये; किन्तु शाह ने इसे मंज़ूर न किया । एक और प्रार्थना इस समय अंगरेजों ने यह की कि सुबेदार मीर कासिम को रहने दिया जाये, किन्तु तीनों प्रान्तों को दीवानी के अधिकार सुवेदार से लेकर कम्पनी को दे दिए जावें। इस दीवानी का मतलब यह था कि अंगरेज सुवेदार के मातहत तीनो प्रान्तों से सरकारी मालगुजारी वसूल करके उसका हिसाब सम्राट और सूबेदार दोनों को दे द और वसूली का खर्च निकाल कर बाकी सब रुपया सुवेदार के सुपुर्द कर दें। इस धन । इस धन से सरकारी फ़ौजें रखना अपने प्रान्तों के शासन का बाक़ी सारा काम चलाना और सम्राट को सालाना खिगज भेजना सूबेदार का काम रह जाय । शाहल इस समय दिल्ली लौटने के लिए उत्सुक था। राजधानों के अन्दर सिंहासन के लिए किसी दूसरे हक़दार के खड़े हो जाने का भी डर था । सम्राट ने चाहा कि अंगरेज़ अपनी सेना
नई दिल्लीः उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमित मरीजों का कुल संख्या 36 हजार को पार हो चुकी है और अभी 12 हजार से अधिक एक्टिव केस है। कोरोना संक्रमित मरीजों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर उत्तर प्रदेश सरकार ने अब हर शनिवार और रविवार को लॉकडाउन लगाने का ऐलान किया है। इस पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने तंज कसते हुए कहा है कि यूपी में पिछले तीन दिन में कोरोना के मामले- 10 July - 1347, 11 July - 1403, 12 July - 1388. लॉकडाउन के वीकेंड बेबी पैक का लॉजिक अब तक किसी को समझ नहीं आया। अपनी असफलता छिपाने के लिए खिलवाड़ जारी है। . मर्ज बढ़ता गया, ज्यों ज्यों दवा की। लॉकडाउन के वीकेंड 'बेबी पैक' का लॉजिक अब तक किसी को समझ नहीं आया। अपनी असफलता छुपाने के लिए खिलवाड़ जारी है। आपको बता दें कि 53 घंटे के प्रतिबंध के दौरान पुलिस ने सख़्ती की। जिले के विभिन्न इलाकों में जो भी बिना मास्क दिखा या जिस दुकानदार ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया, उसके खिलाफ कार्रवाई की गई।
नई दिल्लीः उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमित मरीजों का कुल संख्या छत्तीस हजार को पार हो चुकी है और अभी बारह हजार से अधिक एक्टिव केस है। कोरोना संक्रमित मरीजों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर उत्तर प्रदेश सरकार ने अब हर शनिवार और रविवार को लॉकडाउन लगाने का ऐलान किया है। इस पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने तंज कसते हुए कहा है कि यूपी में पिछले तीन दिन में कोरोना के मामले- दस जुलाईy - एक हज़ार तीन सौ सैंतालीस, ग्यारह जुलाईy - एक हज़ार चार सौ तीन, बारह जुलाईy - एक हज़ार तीन सौ अठासी. लॉकडाउन के वीकेंड बेबी पैक का लॉजिक अब तक किसी को समझ नहीं आया। अपनी असफलता छिपाने के लिए खिलवाड़ जारी है। . मर्ज बढ़ता गया, ज्यों ज्यों दवा की। लॉकडाउन के वीकेंड 'बेबी पैक' का लॉजिक अब तक किसी को समझ नहीं आया। अपनी असफलता छुपाने के लिए खिलवाड़ जारी है। आपको बता दें कि तिरेपन घंटाटे के प्रतिबंध के दौरान पुलिस ने सख़्ती की। जिले के विभिन्न इलाकों में जो भी बिना मास्क दिखा या जिस दुकानदार ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया, उसके खिलाफ कार्रवाई की गई।
टीम इंडिया के विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत (Rishabh Pant) न्यूजीलैंड दौरे पर टीम इंडिया का हिस्सा हैं. भारतीय टीम शिखर धवन के नेतृत्व में न्यूजीलैंड के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज खेल रही है. सीरीज के पहले मुकाबले में ऋषभ पंत एक बार फिर बल्ले से संघर्ष करते नजर आये. वो महज 15 रन के निजी स्कोर पर पवेलियन लौटे गए. गौर करने वाली बात है कि लगातार फ्लॉप होने के बाद भी उन्हें टीम में मौका दिया जा रहा है. आइये जानते हैं कि इसके पीछे के 3 अहम कारणों के बारे में. बाएं हाथ के बल्लेबाज ऋषभ पंत (Rishabh Pant) को टीम इंडिया में X फैक्टर माना जाता है. ख़राब फॉर्म के बावजूद कोच और कप्तान उनपर पूरा भरोसा जताते हैं. कोच-कप्तान ऐसा मानते हैं कि ऋषभ पंत अकेले दम पर मैच जिताने की काबिलियत रखते हैं. हालाँकि, कई बार पंत ने ऐसा कारनामा भी किया है. लेकिन इस साल वो ख़राब फॉर्म से गुजर रहे हैं. ऐसे में, उनका X फैक्टर कहना गलत साबित हो रहा है. भारतीय टीम के पास मिडिल ऑर्डर में बायें हाथ के बल्लेबाजों की कमी है. सूर्यकुमार यादव, श्रेयस अय्यर और संजू सैमसन टीम में दाहिने हाथ के बल्लेबाज के रूप में अपनी भूमिका निभा रहे हैं. वहीं, टीम के पास ईशान किशन और ऋषभ पंत के रूप में दो बाएं हाथ के नियमित बल्लेबाज हैं. ऐसे में, पंत (Rishabh Pant) को लगातार प्लेइंग-11 में मौका देने का अहम कारण बाएं हाथ के बल्लेबाजों की कमी भी है. टीम के हेड कोच राहुल द्रविड़ खिलाड़ियों पर भरोसा जताने में माहिर हैं. ऋषभ पंत (Rishabh Pant) के मामले में राहुल द्रविड़ की सोच थोड़ी अलग है. जब भारतीय टीम जुलाई 2022 में इंग्लैंड दौरे पर थी तब पंत ने शतकीय पारी खेली थी. उनके बाद तत्कालीन कोच राहुल द्रविड़ ने उनकी तारीफ की थी. राहुल ने कहा था कि पंत का टीम में होना एक मैच विनर के होने जैसा है. ऐसे में, ऋषभ पंत को लगातार मौके मिलने के पीछे का अहम कारण कोच राहुल द्रविड़ का बड़ा हाथ है.
टीम इंडिया के विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत न्यूजीलैंड दौरे पर टीम इंडिया का हिस्सा हैं. भारतीय टीम शिखर धवन के नेतृत्व में न्यूजीलैंड के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज खेल रही है. सीरीज के पहले मुकाबले में ऋषभ पंत एक बार फिर बल्ले से संघर्ष करते नजर आये. वो महज पंद्रह रन के निजी स्कोर पर पवेलियन लौटे गए. गौर करने वाली बात है कि लगातार फ्लॉप होने के बाद भी उन्हें टीम में मौका दिया जा रहा है. आइये जानते हैं कि इसके पीछे के तीन अहम कारणों के बारे में. बाएं हाथ के बल्लेबाज ऋषभ पंत को टीम इंडिया में X फैक्टर माना जाता है. ख़राब फॉर्म के बावजूद कोच और कप्तान उनपर पूरा भरोसा जताते हैं. कोच-कप्तान ऐसा मानते हैं कि ऋषभ पंत अकेले दम पर मैच जिताने की काबिलियत रखते हैं. हालाँकि, कई बार पंत ने ऐसा कारनामा भी किया है. लेकिन इस साल वो ख़राब फॉर्म से गुजर रहे हैं. ऐसे में, उनका X फैक्टर कहना गलत साबित हो रहा है. भारतीय टीम के पास मिडिल ऑर्डर में बायें हाथ के बल्लेबाजों की कमी है. सूर्यकुमार यादव, श्रेयस अय्यर और संजू सैमसन टीम में दाहिने हाथ के बल्लेबाज के रूप में अपनी भूमिका निभा रहे हैं. वहीं, टीम के पास ईशान किशन और ऋषभ पंत के रूप में दो बाएं हाथ के नियमित बल्लेबाज हैं. ऐसे में, पंत को लगातार प्लेइंग-ग्यारह में मौका देने का अहम कारण बाएं हाथ के बल्लेबाजों की कमी भी है. टीम के हेड कोच राहुल द्रविड़ खिलाड़ियों पर भरोसा जताने में माहिर हैं. ऋषभ पंत के मामले में राहुल द्रविड़ की सोच थोड़ी अलग है. जब भारतीय टीम जुलाई दो हज़ार बाईस में इंग्लैंड दौरे पर थी तब पंत ने शतकीय पारी खेली थी. उनके बाद तत्कालीन कोच राहुल द्रविड़ ने उनकी तारीफ की थी. राहुल ने कहा था कि पंत का टीम में होना एक मैच विनर के होने जैसा है. ऐसे में, ऋषभ पंत को लगातार मौके मिलने के पीछे का अहम कारण कोच राहुल द्रविड़ का बड़ा हाथ है.
लॉस एंजेलिस। सुपरमॉडल बेला हदीद ने पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हुए 600 पौधे दान करने का निर्णय लिया है। यह फैसला उन्होंने अपने मॉडलिंग करियर को आगे बढ़ाने के लिए की गई विमान यात्राओं से उत्सर्जित कार्बन डाईऑक्साइड की भरपाई के लिए किया है। यूएस टूडे डॉट कॉम की रिपोर्ट के अनुसार, इंस्टाग्राम पर पौधे दान करने की घोषणा करते हुए बेला ने कहा कि वह पौधे लगाकर उन कार्बन-डाईऑक्साइड की भरपाई करेंगी, जो उनकी वजह से पर्यावरण में फैली है। (आईएएनएस)
लॉस एंजेलिस। सुपरमॉडल बेला हदीद ने पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हुए छः सौ पौधे दान करने का निर्णय लिया है। यह फैसला उन्होंने अपने मॉडलिंग करियर को आगे बढ़ाने के लिए की गई विमान यात्राओं से उत्सर्जित कार्बन डाईऑक्साइड की भरपाई के लिए किया है। यूएस टूडे डॉट कॉम की रिपोर्ट के अनुसार, इंस्टाग्राम पर पौधे दान करने की घोषणा करते हुए बेला ने कहा कि वह पौधे लगाकर उन कार्बन-डाईऑक्साइड की भरपाई करेंगी, जो उनकी वजह से पर्यावरण में फैली है।
केन्द्रीय उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा है कि कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) खाली पड़े पदों को भरने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है जिनकी संख्या साल-दर-साल बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार भ्रष्ट और नाकारा अधिकारियों को कतई बरदाश्त न करने की नीति पर चल रही है और इसके साथ ही वह अच्छा कार्य करनेवाले निष्ठावान अधिकारियों को पूरा संरक्षण भी दे रही है। डॉ. जितेन्द्र सिंह आज यहां उनसे मुलाकात के लिए आए केन्द्रीय सचिवालय के कर्मचारियों के एक शिष्टमंडल के साथ बातचीत कर रहे थे। इस शिष्टमंडल ने कनिष्ठ श्रेणी के कर्मचारियों को समय पर पदोन्नति न मिल पानेके मामलों में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया। उन्होंने केन्द्रीय सचिवालय एमटीएस एसोसिएशन की ओर से एक ज्ञापन डॉक्टर जितेन्द्र सिंह को सौंपा जिसमें कहा गया था कि भारत सरकार के निम्नतम स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों को अपनी समूची सेवा अवधि के दौरान एक भी पदोन्नति नहीं मिल पाती। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि प्रशासनिक सुविधा और पैनलबद्ध करने में निष्पक्षता को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पिछले तीन साल में प्रक्रियाओं को आसान बनाया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पदोन्नति किसी व्यक्तिविशेष की मर्जी से न हों। उन्होंने बताया कि इस संबंध में परिष्कृत टेक्नोलाजी की मदद से प्रक्रियाओं को हाई-टेक बना दिया गया है ताकि मानवीय हस्तक्षेप की कम से कम गुंजाइश बची रहे। उन्होंने कहा कि अतीत में हर सरकार इस बात का श्रेय लेती रही है कि उसने नये नियम या कानून बनाए हैं, मगर इस सरकार ने ऐसे करीब 1500 नियमों को हटा दिया जो या तो पुराने पड़ चुके थे या समय बीतने के साथ-साथ उनकी उपयोगिता नहीं रह गयी थी। उन्होंने कहा कि इस समूची कार्रवाई का उद्देश्य सिर्फ यह सुनिश्चित करना है कि जनता को कारगर तरीके से और समय पर अच्छे नतीजे मिलें और साथ ही कर्मचारियों को भी अपनी क्षमता के अनुसार बेहतरीन कार्य निष्पादन का अवसर प्राप्त हो। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि प्रशासन के सबसे निचले स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों को उनके समूचे 30-35 साल के सेवाकाल में एक भी पदोन्नति न मिलने का कोई मामला जब कभी उनके सामने आता है वे विचलित हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि इस बारे में मंत्रालय के सभी वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उन्होंने चर्चा की है और प्रशासन के निचले तथा बीच के स्तर पर ठहराव को रोकने के लिए कई नये उपाय किये जा रहे हैं। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कर्मचारियों अदालती कार्रवाई की वजह से बड़ी संख्या में कर्मचारियों को पदोन्नति न मिल पाने पर भी खेद व्यक्त किया और कहा कि हालांकि कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग अदालत में अपना पक्ष प्रस्तुत करने में कोई कसर नहीं छोड़ता मगर मुकदमेबाज़ी से देरी होना स्वाभाविक है।
केन्द्रीय उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री , प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा है कि कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग खाली पड़े पदों को भरने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है जिनकी संख्या साल-दर-साल बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार भ्रष्ट और नाकारा अधिकारियों को कतई बरदाश्त न करने की नीति पर चल रही है और इसके साथ ही वह अच्छा कार्य करनेवाले निष्ठावान अधिकारियों को पूरा संरक्षण भी दे रही है। डॉ. जितेन्द्र सिंह आज यहां उनसे मुलाकात के लिए आए केन्द्रीय सचिवालय के कर्मचारियों के एक शिष्टमंडल के साथ बातचीत कर रहे थे। इस शिष्टमंडल ने कनिष्ठ श्रेणी के कर्मचारियों को समय पर पदोन्नति न मिल पानेके मामलों में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया। उन्होंने केन्द्रीय सचिवालय एमटीएस एसोसिएशन की ओर से एक ज्ञापन डॉक्टर जितेन्द्र सिंह को सौंपा जिसमें कहा गया था कि भारत सरकार के निम्नतम स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों को अपनी समूची सेवा अवधि के दौरान एक भी पदोन्नति नहीं मिल पाती। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि प्रशासनिक सुविधा और पैनलबद्ध करने में निष्पक्षता को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पिछले तीन साल में प्रक्रियाओं को आसान बनाया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पदोन्नति किसी व्यक्तिविशेष की मर्जी से न हों। उन्होंने बताया कि इस संबंध में परिष्कृत टेक्नोलाजी की मदद से प्रक्रियाओं को हाई-टेक बना दिया गया है ताकि मानवीय हस्तक्षेप की कम से कम गुंजाइश बची रहे। उन्होंने कहा कि अतीत में हर सरकार इस बात का श्रेय लेती रही है कि उसने नये नियम या कानून बनाए हैं, मगर इस सरकार ने ऐसे करीब एक हज़ार पाँच सौ नियमों को हटा दिया जो या तो पुराने पड़ चुके थे या समय बीतने के साथ-साथ उनकी उपयोगिता नहीं रह गयी थी। उन्होंने कहा कि इस समूची कार्रवाई का उद्देश्य सिर्फ यह सुनिश्चित करना है कि जनता को कारगर तरीके से और समय पर अच्छे नतीजे मिलें और साथ ही कर्मचारियों को भी अपनी क्षमता के अनुसार बेहतरीन कार्य निष्पादन का अवसर प्राप्त हो। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि प्रशासन के सबसे निचले स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों को उनके समूचे तीस-पैंतीस साल के सेवाकाल में एक भी पदोन्नति न मिलने का कोई मामला जब कभी उनके सामने आता है वे विचलित हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि इस बारे में मंत्रालय के सभी वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उन्होंने चर्चा की है और प्रशासन के निचले तथा बीच के स्तर पर ठहराव को रोकने के लिए कई नये उपाय किये जा रहे हैं। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कर्मचारियों अदालती कार्रवाई की वजह से बड़ी संख्या में कर्मचारियों को पदोन्नति न मिल पाने पर भी खेद व्यक्त किया और कहा कि हालांकि कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग अदालत में अपना पक्ष प्रस्तुत करने में कोई कसर नहीं छोड़ता मगर मुकदमेबाज़ी से देरी होना स्वाभाविक है।
पंचकूला, 23 मई (मैनपाल) हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने पंचकूला सेक्टर 21 स्थित एक निजी अस्पताल का दौरा कर कोविड-19 रोगियों को दी जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं बारे जानकारी ली। उन्होंने मरीजों से हाल-चाल पूछा और आईसीयू का दौरा भी किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में कोविड से निपटने के लिए सरकार ने सार्थक प्रयास किए, लेकिन ब्लैक फंगस ने चिंतित कर दिया। यह बहुत घातक है। इसीलिए सरकार ने ब्लैक फंगस को अधिसूचित रोग घोषित किया है। उन्होंने चिकित्सकों से ब्लैक फंगस से निपटने के लिए विस्तार से जानकारी ली। चिकित्सको ने बैठक में जानकारी दी कि जिला 100 बाइपेप्स जरूर होने चाहिए। विधानसभा अध्यक्ष ने तीसरी लहर के मद्देनजर और ज्यादा प्रभावशाली कदम उठाने पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि यदि हमारे पास पर्याप्त मात्रा में इंफ्रास्ट्रक्चर होगा तो हम तीसरी लहर को फैलने से रोक सकेंगे। उन्होंने तीसरी लहर के लिए बाईपेपस खरीदने और पर्याप्त मात्रा में लिक्विड ऑक्सीजन का भंडारण रखने पर भी बल दिया। उन्होंने सामान्य अस्पताल सेक्टर-6 के ऑक्सीजन प्लांट में 50 प्रतिशत अतिरिक्त ऑक्सीजन का भंडारण बढ़ाने तथा एक गाड़ी की व्यवस्था हमेशा स्टैंडबाय रखने के बारे में भी अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। ज्ञान चंद गुप्ता ने कहा कि ब्लैक फंगस को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने केंद्र सरकार से अतिरिक्त इंजेक्शन व दवाई उपलब्ध करवाने का अनुरोध किया है। उन्होंने बताया कि प्रशासन के साथ सोमवार को बैठक आयोजित कर सभी आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाने के बारे में निर्णय लिया जाएगा।
पंचकूला, तेईस मई हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने पंचकूला सेक्टर इक्कीस स्थित एक निजी अस्पताल का दौरा कर कोविड-उन्नीस रोगियों को दी जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं बारे जानकारी ली। उन्होंने मरीजों से हाल-चाल पूछा और आईसीयू का दौरा भी किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में कोविड से निपटने के लिए सरकार ने सार्थक प्रयास किए, लेकिन ब्लैक फंगस ने चिंतित कर दिया। यह बहुत घातक है। इसीलिए सरकार ने ब्लैक फंगस को अधिसूचित रोग घोषित किया है। उन्होंने चिकित्सकों से ब्लैक फंगस से निपटने के लिए विस्तार से जानकारी ली। चिकित्सको ने बैठक में जानकारी दी कि जिला एक सौ बाइपेप्स जरूर होने चाहिए। विधानसभा अध्यक्ष ने तीसरी लहर के मद्देनजर और ज्यादा प्रभावशाली कदम उठाने पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि यदि हमारे पास पर्याप्त मात्रा में इंफ्रास्ट्रक्चर होगा तो हम तीसरी लहर को फैलने से रोक सकेंगे। उन्होंने तीसरी लहर के लिए बाईपेपस खरीदने और पर्याप्त मात्रा में लिक्विड ऑक्सीजन का भंडारण रखने पर भी बल दिया। उन्होंने सामान्य अस्पताल सेक्टर-छः के ऑक्सीजन प्लांट में पचास प्रतिशत अतिरिक्त ऑक्सीजन का भंडारण बढ़ाने तथा एक गाड़ी की व्यवस्था हमेशा स्टैंडबाय रखने के बारे में भी अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। ज्ञान चंद गुप्ता ने कहा कि ब्लैक फंगस को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने केंद्र सरकार से अतिरिक्त इंजेक्शन व दवाई उपलब्ध करवाने का अनुरोध किया है। उन्होंने बताया कि प्रशासन के साथ सोमवार को बैठक आयोजित कर सभी आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाने के बारे में निर्णय लिया जाएगा।
यमुनानगर/मुस्तफाबाद, 8 अगस्त (हप्र/निस) पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस साढौरा में कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए साढौरा से विधायक रेनूबाला ने कहा कि आने वाली 14 अगस्त को सुबह 10:00 बजे साढौरा रेस्ट हाउस से लेकर बिलासपुर रेस्ट हाउस तक गौरव तिरंगा यात्रा का शुभारंभ किया जाएगा। इसमें हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी की पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कांग्रेस कार्यसमिति की सदस्य बहन कुमारी शैलजा मुख्य अतिथि होंगी। साथ में नारायणगढ़ विधानसभा से हरियाणा कांग्रेस पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष चौधरी रामकिशन गुर्जर विशिष्ट अतिथि होंगे। गौरव तिरंगा यात्रा (15 किलोमीटर की पदयात्रा) साढौरा रेस्ट हाउस से शुरू होकर वाया श्यामपुर, मछरौली, परभौली, मोहड़ी से होते हुए कपालमोचन बिलासपुर रेस्ट हाउस में संपन्न होगी। राजेश गंदापुरा ने बताया कि इस यात्रा में सरस्वतीनगर से भी काफी कार्यकर्ता भाग लेने पहुंचेंगे। रेनू बाला ने कहा कि देश के गौरव और सम्मान के लिए हाथों में तिरंगा उठाएं। रेनू बाला ने हलका साढौरा की समस्त जनता से अपील की है कि तिरंगा पदयात्रा में सभी बढ़-चढ़ कर भाग लें।
यमुनानगर/मुस्तफाबाद, आठ अगस्त पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस साढौरा में कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए साढौरा से विधायक रेनूबाला ने कहा कि आने वाली चौदह अगस्त को सुबह दस:शून्य बजे साढौरा रेस्ट हाउस से लेकर बिलासपुर रेस्ट हाउस तक गौरव तिरंगा यात्रा का शुभारंभ किया जाएगा। इसमें हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी की पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कांग्रेस कार्यसमिति की सदस्य बहन कुमारी शैलजा मुख्य अतिथि होंगी। साथ में नारायणगढ़ विधानसभा से हरियाणा कांग्रेस पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष चौधरी रामकिशन गुर्जर विशिष्ट अतिथि होंगे। गौरव तिरंगा यात्रा साढौरा रेस्ट हाउस से शुरू होकर वाया श्यामपुर, मछरौली, परभौली, मोहड़ी से होते हुए कपालमोचन बिलासपुर रेस्ट हाउस में संपन्न होगी। राजेश गंदापुरा ने बताया कि इस यात्रा में सरस्वतीनगर से भी काफी कार्यकर्ता भाग लेने पहुंचेंगे। रेनू बाला ने कहा कि देश के गौरव और सम्मान के लिए हाथों में तिरंगा उठाएं। रेनू बाला ने हलका साढौरा की समस्त जनता से अपील की है कि तिरंगा पदयात्रा में सभी बढ़-चढ़ कर भाग लें।
एक हथिनी और कुछ देर पहले ही जन्मा उसका बच्चा. 20 हाथियों का झुंड और 6 घंटे. ये नजारा था तिरुअनंतपुरम के थ्रिसूर जिले के वन क्षेत्र की एक सड़क का. एक हथिनी के प्रसव के फौरन बाद करीब 20 हाथी उसकी और बच्चे की सुरक्षा में सड़क जाम किए 6 घंटे खड़े रहे. अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, वन विभाग के अधिकारी पीएन अनूप ने बताया कि संभव है कि हथिनी का बच्चा जन्म के बाद गिरकर या साफ करने के उद्देश्य से सड़क पर आ गया होगा. इलाके में रहने वाले आदिवासियों ने भी सड़क पर पहुंचने के बाद ही हाथी और उसके बच्चे को सड़क पर ही देखा. सड़क पर हथिनी और उसके बच्चे आने के बाद करीब 20 और हाथी वहां आ गए. हालांकि किसी को इस बारे में जानकारी नहीं है कि हथिनी ने बच्चे को जन्म सड़क पर दिया या जंगल में. सुरक्षा के लिहाज से सावधानी बरतते हुए हाथियों के जमावड़े के हटने और बच्चे के जंगल में जाने तक वन अधिकारियों ने सड़क जाम कर दी थी.
एक हथिनी और कुछ देर पहले ही जन्मा उसका बच्चा. बीस हाथियों का झुंड और छः घंटाटे. ये नजारा था तिरुअनंतपुरम के थ्रिसूर जिले के वन क्षेत्र की एक सड़क का. एक हथिनी के प्रसव के फौरन बाद करीब बीस हाथी उसकी और बच्चे की सुरक्षा में सड़क जाम किए छः घंटाटे खड़े रहे. अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, वन विभाग के अधिकारी पीएन अनूप ने बताया कि संभव है कि हथिनी का बच्चा जन्म के बाद गिरकर या साफ करने के उद्देश्य से सड़क पर आ गया होगा. इलाके में रहने वाले आदिवासियों ने भी सड़क पर पहुंचने के बाद ही हाथी और उसके बच्चे को सड़क पर ही देखा. सड़क पर हथिनी और उसके बच्चे आने के बाद करीब बीस और हाथी वहां आ गए. हालांकि किसी को इस बारे में जानकारी नहीं है कि हथिनी ने बच्चे को जन्म सड़क पर दिया या जंगल में. सुरक्षा के लिहाज से सावधानी बरतते हुए हाथियों के जमावड़े के हटने और बच्चे के जंगल में जाने तक वन अधिकारियों ने सड़क जाम कर दी थी.
जयपुरःकहते है कि बॉलीवुड स्टार्स को किसी पहचान या इंट्रोडक्शनस की जरूरत नही है। लेकिन अनुष्का शर्मा के साथ जो हुआ उससे लगता है ये सही नहीं है। अनुष्का को आज भी अपना इंट्रोडक्शनस देना पड़ता है। अनुष्का इन दिनों विराट के साथ ऑस्ट्रेलिया में है। इस दौरान विराट ने वहां के पीएम स्कॉट मॉरीसन से मुलाकात की। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। ऑस्ट्रेलिया के पीएम ने विराट को पहचान लिया लेकिन अनुष्का को नहीं तो विराट ने इंट्रोडक्शनस करवाते हुए कहा कि माई वाइफ अनुष्का। अनुष्का की हाल ही फिल्म जीरो रिलीज हुई। जिसमें उन्होने साइंटिस्ट का रोल प्ले किया था। इस फिल्म में कैटरीना व शाहरुख भी थे।
जयपुरःकहते है कि बॉलीवुड स्टार्स को किसी पहचान या इंट्रोडक्शनस की जरूरत नही है। लेकिन अनुष्का शर्मा के साथ जो हुआ उससे लगता है ये सही नहीं है। अनुष्का को आज भी अपना इंट्रोडक्शनस देना पड़ता है। अनुष्का इन दिनों विराट के साथ ऑस्ट्रेलिया में है। इस दौरान विराट ने वहां के पीएम स्कॉट मॉरीसन से मुलाकात की। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। ऑस्ट्रेलिया के पीएम ने विराट को पहचान लिया लेकिन अनुष्का को नहीं तो विराट ने इंट्रोडक्शनस करवाते हुए कहा कि माई वाइफ अनुष्का। अनुष्का की हाल ही फिल्म जीरो रिलीज हुई। जिसमें उन्होने साइंटिस्ट का रोल प्ले किया था। इस फिल्म में कैटरीना व शाहरुख भी थे।
सीधी। बनारस से शहडोल आ रही यात्री बस सोन नदी पर बने पुल से नीचे गिर गई। हादसा मंगलवार देर रात 12 बजे हुआ। इस हादसे में दो दर्जन से ज्यादा यात्री घायल हुए हैं। जिन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया। घायलों में कुछ की हालत गंभीर है। बता दें कि बस बनारस से शहडोल जा रही थी। रात 12 बजे जैसे ही बस जोगदहा सोन नदी पर बने पुल पर पहुंचीं अनियंत्रित होकर नीचे गिर गई। रात का वक्त होने की वजह से लोग सोए थे। बस के नीचे गिरते ही चीख-पुकार मच गई। रात का वक्त होने की वजह से लोग सोए थे। इसलिए वो संभल नहीं पाए। हादसे की जानकारी लगते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंचीं और घायलों को अमिलिया के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर ले जाया गया। जहां शुरुआती इलाज के बाद गंभीर रुप से घायल मुसाफिरों को जिला अस्पताल रेफर किया गया।
सीधी। बनारस से शहडोल आ रही यात्री बस सोन नदी पर बने पुल से नीचे गिर गई। हादसा मंगलवार देर रात बारह बजे हुआ। इस हादसे में दो दर्जन से ज्यादा यात्री घायल हुए हैं। जिन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया। घायलों में कुछ की हालत गंभीर है। बता दें कि बस बनारस से शहडोल जा रही थी। रात बारह बजे जैसे ही बस जोगदहा सोन नदी पर बने पुल पर पहुंचीं अनियंत्रित होकर नीचे गिर गई। रात का वक्त होने की वजह से लोग सोए थे। बस के नीचे गिरते ही चीख-पुकार मच गई। रात का वक्त होने की वजह से लोग सोए थे। इसलिए वो संभल नहीं पाए। हादसे की जानकारी लगते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंचीं और घायलों को अमिलिया के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर ले जाया गया। जहां शुरुआती इलाज के बाद गंभीर रुप से घायल मुसाफिरों को जिला अस्पताल रेफर किया गया।
अमरावतीः एनसीएससी ने आंध्र प्रदेश में एक इंजीनियरिंग छात्र की हत्या के मामले में बहुत ही कम समय में हत्या में अत्याचार निवारण (पीओए) अधिनियम के तहत आरोपियों को गिरफ्तार करने और आरोप दायर करने में आंध्र प्रदेश राज्य सरकार द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की है. गुंटूर जिला। मंगलवार को यहां मीडिया से बात करते हुए, उपराष्ट्रपति अरुण हलदर ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से संतुष्ट है। उन्होंने गुंटूर जिला पुलिस द्वारा बहुत ही कम समय में आरोपियों को गिरफ्तार करने के प्रयासों की सराहना की और कहा कि आयोग उन्हें पुरस्कारों के लिए सिफारिश करेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने देश के सामने एक मिसाल कायम की है। वाईएसआरसीपी के एक प्रतिनिधिमंडल में सरकारी सलाहकार (सामाजिक न्याय) जुपुडी प्रभाकर राव, विधायक मेरुगु नागार्जुन, एमएलसी डोक्का माणिक्य वारा प्रसाद और अन्य शामिल थे, जिन्होंने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) के उपाध्यक्ष अरुण हलदर से मुलाकात की और उनके द्वारा उठाए गए कदमों पर चर्चा की। बैठक के बाद जुपुडी प्रभाकर ने कहा कि एनसीएससी ने बहुत कम समय में आरोपियों को गिरफ्तार करने और पीड़ित परिवार को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए राज्य द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना की है. उन्होंने कहा कि उन्होंने पिछली सरकार के दौरान दलितों पर अत्याचार और हमलों के बारे में बताया था और कहा कि विपक्षी दल अपने राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रहे हैं। एमएलसी डोक्का माणिक्य वारा प्रसाद ने कहा कि मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी महिलाओं, गरीबों और दलितों पर हो रहे अत्याचारों का तुरंत जवाब दे रहे हैं और उनकी चिंताओं को दूर करना सुनिश्चित कर रहे हैं और कहा कि 24 घंटे के भीतर आरोपियों को गिरफ्तार करना देश में पहला कदम है। अपनी तरह का पहला है। उन्होंने पीड़ित परिवार का समर्थन करने के लिए दलित संगठनों को धन्यवाद दिया।
अमरावतीः एनसीएससी ने आंध्र प्रदेश में एक इंजीनियरिंग छात्र की हत्या के मामले में बहुत ही कम समय में हत्या में अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत आरोपियों को गिरफ्तार करने और आरोप दायर करने में आंध्र प्रदेश राज्य सरकार द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की है. गुंटूर जिला। मंगलवार को यहां मीडिया से बात करते हुए, उपराष्ट्रपति अरुण हलदर ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से संतुष्ट है। उन्होंने गुंटूर जिला पुलिस द्वारा बहुत ही कम समय में आरोपियों को गिरफ्तार करने के प्रयासों की सराहना की और कहा कि आयोग उन्हें पुरस्कारों के लिए सिफारिश करेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने देश के सामने एक मिसाल कायम की है। वाईएसआरसीपी के एक प्रतिनिधिमंडल में सरकारी सलाहकार जुपुडी प्रभाकर राव, विधायक मेरुगु नागार्जुन, एमएलसी डोक्का माणिक्य वारा प्रसाद और अन्य शामिल थे, जिन्होंने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष अरुण हलदर से मुलाकात की और उनके द्वारा उठाए गए कदमों पर चर्चा की। बैठक के बाद जुपुडी प्रभाकर ने कहा कि एनसीएससी ने बहुत कम समय में आरोपियों को गिरफ्तार करने और पीड़ित परिवार को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए राज्य द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना की है. उन्होंने कहा कि उन्होंने पिछली सरकार के दौरान दलितों पर अत्याचार और हमलों के बारे में बताया था और कहा कि विपक्षी दल अपने राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रहे हैं। एमएलसी डोक्का माणिक्य वारा प्रसाद ने कहा कि मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी महिलाओं, गरीबों और दलितों पर हो रहे अत्याचारों का तुरंत जवाब दे रहे हैं और उनकी चिंताओं को दूर करना सुनिश्चित कर रहे हैं और कहा कि चौबीस घंटाटे के भीतर आरोपियों को गिरफ्तार करना देश में पहला कदम है। अपनी तरह का पहला है। उन्होंने पीड़ित परिवार का समर्थन करने के लिए दलित संगठनों को धन्यवाद दिया।
भारत सरकार का पर्यटन मंत्रालय 22-24 नवंबर, 2018 के दौरान त्रिपुरा के अगरतला में 'अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट' का आयोजन करने जा रहा है। इसका आयोजन पर्यटन विभाग, त्रिपुरा सरकार और पूर्वोत्तर राज्यों के सहयोग से किया जा रहा है। पर्यटन मार्ट का आयोजन प्रगणा भवन में किया जाएगा और इसका उद्घाटन 22 नवंबर को केन्द्रीय पर्यटन मंत्री श्री के. जे. अल्फोंस, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री श्री बिप्लब कुमार देब एवं केन्द्रीय पर्यटन सचिव श्रीमती रश्मि वर्मा की गरिमामयी उपस्थिति में त्रिपुरा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी द्वारा किया जाएगा। इस अवसर पर केन्द्रीय मंत्रालयों तथा पूर्वोत्तर राज्यों के अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित होंगे। यह अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट का सातवां संस्करण है। इसका आयोजन हर वर्ष पूर्वोत्तर क्षेत्र में किया जाता है जिसका उद्देश्य घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में इस क्षेत्र की पर्यटन संभावनाओं पर प्रकाश डालना है। यह मार्ट आठों पूर्वोत्तर राज्यों के पर्यटन कारोबार से जुड़ी बिरादरी और उद्यमियों को एकजुट होने का अवसर प्रदान करता है। पर्यटन मार्ट के आयोजन का कार्यक्रम कुछ इस तरह से तय किया गया है जिससे कि क्रेताओं, विक्रेताओं, मीडिया, सरकारी एजेंसियों और अन्य हितधारकों को आपस में संवाद करने में सुविधा हो सके। पूर्वोत्तर राज्यों में अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट का आयोजन बारी-बारी से होता है। इससे पहले अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट का आयोजन गुवाहाटी, तवांग, शिलांग, गंगटोक और इम्फाल में किया गया था। भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, त्रिपुरा एवं सिक्किम शामिल हैं और इस क्षेत्र में पर्यटन की दृष्टि से व्यापक आकर्षक विविधताएं देखने को मिलती हैं। इस अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट में विश्व भर के कई देशों के साथ-साथ भारत के विभिन्न क्षेत्रों के भी क्रेतागण एवं मीडिया प्रतिनिधि बड़ी संख्या में मौजूद रहेंगे। इस दौरान वे पूर्वोत्तर क्षेत्र के विक्रेताओं के साथ कारोबार संबंधी बैठकें करेंगे। इससे पूर्वोत्तर क्षेत्र के पर्यटन उत्पादों के आपूर्तिकर्ताओं को अंतर्राष्ट्रीय एवं घरेलू खरीदारों तक अपनी पहुंच सुनिश्चित करने का मौका मिलेगा। इसका उद्देश्य पूर्वोत्तर क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देना है। 18 देशों के कुल 41 विदेशी प्रतिनिधि इस अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट में भाग लेने के लिए त्रिपुरा आएंगे। इन देशों में ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, चीन, फ्रांस, इंडोनेशिया, जापान, केन्या, मलेशिया, म्यांमार, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, रूस, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, स्पेन, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका शामिल हैं। इन विदेशी प्रतिनिधियों में 23 टूर ऑपरेटर एवं ट्रैवल एजेंट और 18 मीडिया प्रतिनिधि, पत्रकार, यात्रा लेखक एवं ब्लॉगर शामिल हैं। विदेशी प्रतिनिधियों के अलावा देश के अन्य हिस्सों के 26 घरेलू टूर ऑपरेटर और पूर्वोत्तर राज्यों के 78 विक्रेता भी इस अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट में हिस्सा लेंगे। इन पूर्वोत्तर राज्यों के प्रतिनिधि भी इस अवसर पर उपस्थित होकर अपने यहां के पर्यटन गंतव्यों को प्रदर्शित करेंगे और इसके साथ ही विभिन्न प्रतिनिधियों से संवाद भी करेंगे।
भारत सरकार का पर्यटन मंत्रालय बाईस-चौबीस नवंबर, दो हज़ार अट्ठारह के दौरान त्रिपुरा के अगरतला में 'अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट' का आयोजन करने जा रहा है। इसका आयोजन पर्यटन विभाग, त्रिपुरा सरकार और पूर्वोत्तर राज्यों के सहयोग से किया जा रहा है। पर्यटन मार्ट का आयोजन प्रगणा भवन में किया जाएगा और इसका उद्घाटन बाईस नवंबर को केन्द्रीय पर्यटन मंत्री श्री के. जे. अल्फोंस, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री श्री बिप्लब कुमार देब एवं केन्द्रीय पर्यटन सचिव श्रीमती रश्मि वर्मा की गरिमामयी उपस्थिति में त्रिपुरा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी द्वारा किया जाएगा। इस अवसर पर केन्द्रीय मंत्रालयों तथा पूर्वोत्तर राज्यों के अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित होंगे। यह अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट का सातवां संस्करण है। इसका आयोजन हर वर्ष पूर्वोत्तर क्षेत्र में किया जाता है जिसका उद्देश्य घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में इस क्षेत्र की पर्यटन संभावनाओं पर प्रकाश डालना है। यह मार्ट आठों पूर्वोत्तर राज्यों के पर्यटन कारोबार से जुड़ी बिरादरी और उद्यमियों को एकजुट होने का अवसर प्रदान करता है। पर्यटन मार्ट के आयोजन का कार्यक्रम कुछ इस तरह से तय किया गया है जिससे कि क्रेताओं, विक्रेताओं, मीडिया, सरकारी एजेंसियों और अन्य हितधारकों को आपस में संवाद करने में सुविधा हो सके। पूर्वोत्तर राज्यों में अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट का आयोजन बारी-बारी से होता है। इससे पहले अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट का आयोजन गुवाहाटी, तवांग, शिलांग, गंगटोक और इम्फाल में किया गया था। भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, त्रिपुरा एवं सिक्किम शामिल हैं और इस क्षेत्र में पर्यटन की दृष्टि से व्यापक आकर्षक विविधताएं देखने को मिलती हैं। इस अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट में विश्व भर के कई देशों के साथ-साथ भारत के विभिन्न क्षेत्रों के भी क्रेतागण एवं मीडिया प्रतिनिधि बड़ी संख्या में मौजूद रहेंगे। इस दौरान वे पूर्वोत्तर क्षेत्र के विक्रेताओं के साथ कारोबार संबंधी बैठकें करेंगे। इससे पूर्वोत्तर क्षेत्र के पर्यटन उत्पादों के आपूर्तिकर्ताओं को अंतर्राष्ट्रीय एवं घरेलू खरीदारों तक अपनी पहुंच सुनिश्चित करने का मौका मिलेगा। इसका उद्देश्य पूर्वोत्तर क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देना है। अट्ठारह देशों के कुल इकतालीस विदेशी प्रतिनिधि इस अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट में भाग लेने के लिए त्रिपुरा आएंगे। इन देशों में ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, चीन, फ्रांस, इंडोनेशिया, जापान, केन्या, मलेशिया, म्यांमार, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, रूस, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, स्पेन, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका शामिल हैं। इन विदेशी प्रतिनिधियों में तेईस टूर ऑपरेटर एवं ट्रैवल एजेंट और अट्ठारह मीडिया प्रतिनिधि, पत्रकार, यात्रा लेखक एवं ब्लॉगर शामिल हैं। विदेशी प्रतिनिधियों के अलावा देश के अन्य हिस्सों के छब्बीस घरेलू टूर ऑपरेटर और पूर्वोत्तर राज्यों के अठहत्तर विक्रेता भी इस अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट में हिस्सा लेंगे। इन पूर्वोत्तर राज्यों के प्रतिनिधि भी इस अवसर पर उपस्थित होकर अपने यहां के पर्यटन गंतव्यों को प्रदर्शित करेंगे और इसके साथ ही विभिन्न प्रतिनिधियों से संवाद भी करेंगे।
नई दिल्ली। चांदी की कीमतों में जिस रफ्तार से तेजी आई है उसे देखते हुए यही कहा जा सकता है कि जिन लोगों ने चांदी खरीदी है और जिन्होंने चांदी में निवेश किया है उनकी चांदी हो गई है। इस साल यानि 2020 में अबतक चांदी की कीमतों में 60 प्रतिशत तक का उछाल आ चुका है। यानि 8 महीने से कम समय में चांदी में किए गए निवेश से 60 प्रतिशत तक रिटर्न मिल चुका है। घरेलू बाजार में चांदी का भाव रिकॉर्ड ऊंचाई पर है और विदेशी बाजार में भाव लगभग 7 साल के ऊपरी स्तर पर पहुंच गया है। घरेलू वायदा बाजार एमसीएक्स पर चांदी की कीमतों ने नजदीकी वायदा सौदे के लिए गुरुवार शाम को 75321 रुपए प्रति किलो का ऊपरी स्तर छुआ है, जो चांदी का अबतक का रिकॉर्ड भाव है। भारत में कभी भी चांदी का भाव इस स्तर तक नहीं पहुंचा है। भाव की तुलना अगर 31 दिसंबर को बंद भाव से की जाए तो इसमें 60 प्रतिशत से ज्यादा का उछाल है। 31 दिसंबर को एमसीएक्स पर नजदीकी वायदा सौदे के लिए चांदी का भाव 46,855 रुपए प्रति किलो पर बंद हुआ था। पहली जुलाई से अबतक चांदी की कीमतों में लगभग 49 प्रतिशत का उछाल आया है और पहली अगस्त से लेकर अबतक भाव 15 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ चुका है। 30 जून को एमसीएक्स पर चांदी का भाव 50,364 रुपए पर बंद हुआ था और 31 जुलाई को भाव 64,988 रुपए प्रति किलो पर बंद हुआ था। विदेशी बाजार में चांदी के भाव की बात करें तो भाव 7 वर्ष की ऊंचाई पर है। कॉमेक्स पर चांदी की कीमतों ने 27. 77 डॉलर प्रति औंस के ऊपरी स्तर को छुआ है, जो अप्रैल 2013 के बाद सबसे अधिक भाव है। अमेरिकी डॉलर में लगातार गिरावट देखी जा रही है और चांदी की निवेश मांग भी बढ़ी है। यही वजह है कि दुनियाभर में चांदी की कीमतों में उछाल देखा जा रहा है। डॉलर इंडेक्स ने 92. 47 का निचला स्तर छुआ है, जो मई 2018 के बाद सबसे निचला स्तर है। अमेरिकी डॉलर की कमजोरी की वजह से चांदी सहित अन्य कमोडिटीज की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने के अक्टूबर वायदा अनुबंध में 442 रुपए यानी 0. 80 फीसदी की तेजी के साथ 55,540 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार चल रहा था, जबकि इससे पहले कारोबार के दौरान सोने का भाव 55,580 रुपए प्रति 10 ग्राम तक उछला, जोकि अब तक का रिकॉर्ड स्तर है। अंतरराष्ट्रीय वायदा बाजार कॉमेक्स पर सोने के अक्टूबर वायदा अनुबंध में पिछले सत्र से 15. 40 डॉलर यानी 0. 76 फीसदी की तेजी के साथ 2052. 50 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार चल रहा था, जबकि इससे पहले भाव 2,052. 70 डॉलर प्रति औंस तक उछला। पिछले सत्र में सोने का वायदा भाव कॉमेक्स पर 2057. 50 डॉलर प्रति औंस तक उछला था, जोकि अब तक रिकॉर्ड स्तर है। वैश्विक बाजार में हाजिर में सोने का भाव 2050. 02 डॉलर प्रति औंस पर बना हुआ था।
नई दिल्ली। चांदी की कीमतों में जिस रफ्तार से तेजी आई है उसे देखते हुए यही कहा जा सकता है कि जिन लोगों ने चांदी खरीदी है और जिन्होंने चांदी में निवेश किया है उनकी चांदी हो गई है। इस साल यानि दो हज़ार बीस में अबतक चांदी की कीमतों में साठ प्रतिशत तक का उछाल आ चुका है। यानि आठ महीने से कम समय में चांदी में किए गए निवेश से साठ प्रतिशत तक रिटर्न मिल चुका है। घरेलू बाजार में चांदी का भाव रिकॉर्ड ऊंचाई पर है और विदेशी बाजार में भाव लगभग सात साल के ऊपरी स्तर पर पहुंच गया है। घरेलू वायदा बाजार एमसीएक्स पर चांदी की कीमतों ने नजदीकी वायदा सौदे के लिए गुरुवार शाम को पचहत्तर हज़ार तीन सौ इक्कीस रुपयापए प्रति किलो का ऊपरी स्तर छुआ है, जो चांदी का अबतक का रिकॉर्ड भाव है। भारत में कभी भी चांदी का भाव इस स्तर तक नहीं पहुंचा है। भाव की तुलना अगर इकतीस दिसंबर को बंद भाव से की जाए तो इसमें साठ प्रतिशत से ज्यादा का उछाल है। इकतीस दिसंबर को एमसीएक्स पर नजदीकी वायदा सौदे के लिए चांदी का भाव छियालीस,आठ सौ पचपन रुपयापए प्रति किलो पर बंद हुआ था। पहली जुलाई से अबतक चांदी की कीमतों में लगभग उनचास प्रतिशत का उछाल आया है और पहली अगस्त से लेकर अबतक भाव पंद्रह प्रतिशत से ज्यादा बढ़ चुका है। तीस जून को एमसीएक्स पर चांदी का भाव पचास,तीन सौ चौंसठ रुपयापए पर बंद हुआ था और इकतीस जुलाई को भाव चौंसठ,नौ सौ अठासी रुपयापए प्रति किलो पर बंद हुआ था। विदेशी बाजार में चांदी के भाव की बात करें तो भाव सात वर्ष की ऊंचाई पर है। कॉमेक्स पर चांदी की कीमतों ने सत्ताईस. सतहत्तर डॉलर प्रति औंस के ऊपरी स्तर को छुआ है, जो अप्रैल दो हज़ार तेरह के बाद सबसे अधिक भाव है। अमेरिकी डॉलर में लगातार गिरावट देखी जा रही है और चांदी की निवेश मांग भी बढ़ी है। यही वजह है कि दुनियाभर में चांदी की कीमतों में उछाल देखा जा रहा है। डॉलर इंडेक्स ने बानवे. सैंतालीस का निचला स्तर छुआ है, जो मई दो हज़ार अट्ठारह के बाद सबसे निचला स्तर है। अमेरिकी डॉलर की कमजोरी की वजह से चांदी सहित अन्य कमोडिटीज की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने के अक्टूबर वायदा अनुबंध में चार सौ बयालीस रुपयापए यानी शून्य. अस्सी फीसदी की तेजी के साथ पचपन,पाँच सौ चालीस रुपयापए प्रति दस ग्राम पर कारोबार चल रहा था, जबकि इससे पहले कारोबार के दौरान सोने का भाव पचपन,पाँच सौ अस्सी रुपयापए प्रति दस ग्राम तक उछला, जोकि अब तक का रिकॉर्ड स्तर है। अंतरराष्ट्रीय वायदा बाजार कॉमेक्स पर सोने के अक्टूबर वायदा अनुबंध में पिछले सत्र से पंद्रह. चालीस डॉलर यानी शून्य. छिहत्तर फीसदी की तेजी के साथ दो हज़ार बावन. पचास डॉलर प्रति औंस पर कारोबार चल रहा था, जबकि इससे पहले भाव दो,बावन. सत्तर डॉलर प्रति औंस तक उछला। पिछले सत्र में सोने का वायदा भाव कॉमेक्स पर दो हज़ार सत्तावन. पचास डॉलर प्रति औंस तक उछला था, जोकि अब तक रिकॉर्ड स्तर है। वैश्विक बाजार में हाजिर में सोने का भाव दो हज़ार पचास. दो डॉलर प्रति औंस पर बना हुआ था।
हरियाणा के भिवानी जिले से चलकर रोहतक से होकर गुजरने वाली एकता एक्सप्रेस बुधवार से एक बार फिर ट्रैक पर दौड़ने लगी है। ट्रेन को रोहतक रेलवे स्टेशन से सांसद डॉ. अरविंद शर्मा ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ट्रेन मार्च 2020 से बंद थी और लोगों द्वारा पिछले काफी समय से इसे दोबारा संचालित करने की मांग उठाई जा रही थी, जिसे पूरा करते हुए रेलवे मंत्रालय ने ट्रेन को फिर से चलाने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। बुधवार को गाड़ी संख्या 14795/96 एकता एक्सप्रेस चली। यह ट्रेन भिवानी से कालका तक वाया- कलानौर, रोहतक, पानीपत, करनाल, कुरूक्षेत्र, अंबाला और चंडीगढ़ होते हुए जाएगी। रूटीन में एकता एक्सप्रेस भिवानी से सुबह साढ़े 4 बजे रवाना होगी और 11 बजे कालका पहुंचेगी। वहीं शाम को 4 बजकर 55 मिनट पर कालका से रवाना होगी और रात 11 बजकर 30 मिनट पर भिवानी पहुंचेगी। एकता एक्सप्रेस का पहले संचालन पानीपत में हिमालयन क्वीन के साथ जुड़ कर होता था, जिसे कोरोना काल में बंद किया गया था। कालका से पानीपत तक एकता एक्सप्रेस हिमालयन क्वीन से जुड़कर ही आती थी। कोरोना महामारी कम होने के बाद भी रेलवे ने इसे बंद रखा हुआ था। लेकिन अब एकता एक्सप्रेस स्वतंत्र रूप से चलेगी। हिमालयन क्वीन ट्रेन के साथ जुड़कर नहीं चलेगी। सांसद डॉ. अरविंद शर्मा ने से इसे वापस स्वतंत्र रूप में चलाने की मांग की थी, जिसे रेलवे ने स्वीकार कर लिया है। वहीं अब इस ट्रेन में डिब्बों की संख्या भी बढ़ा दी गई है। पहले इसमें 6 डिब्बे होते थे, जो अब बढ़कर 11 हो गए हैं, ताकि यात्रियों को आने-जाने में किसी परेशानी का सामना न करना पड़े। पहले डिब्बों की संख्या कम होने के कारण कई दफा भीड़ बनी रहती थी, जिससे अब निजात मिलेगी। इस दौरान सांसद डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा पर बोलते हुए कहा कि यह उनका अपना मामला है। साथ ही कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि महंगाई का शोर मचाते हैं और जब महंगाई पर चर्चा होती है तो नदारद होते हैं और हाउस छोड़कर चले जाते हैं। यह सब ड्रामा है। इसमें इनकी कोई जगह नहीं हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर वर्ग को ध्यान में रखते हुए काम करते हैं। इसलिए हर किसी के दिन में पीएम मोदी बसे हुए हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
हरियाणा के भिवानी जिले से चलकर रोहतक से होकर गुजरने वाली एकता एक्सप्रेस बुधवार से एक बार फिर ट्रैक पर दौड़ने लगी है। ट्रेन को रोहतक रेलवे स्टेशन से सांसद डॉ. अरविंद शर्मा ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ट्रेन मार्च दो हज़ार बीस से बंद थी और लोगों द्वारा पिछले काफी समय से इसे दोबारा संचालित करने की मांग उठाई जा रही थी, जिसे पूरा करते हुए रेलवे मंत्रालय ने ट्रेन को फिर से चलाने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। बुधवार को गाड़ी संख्या चौदह हज़ार सात सौ पचानवे/छियानवे एकता एक्सप्रेस चली। यह ट्रेन भिवानी से कालका तक वाया- कलानौर, रोहतक, पानीपत, करनाल, कुरूक्षेत्र, अंबाला और चंडीगढ़ होते हुए जाएगी। रूटीन में एकता एक्सप्रेस भिवानी से सुबह साढ़े चार बजे रवाना होगी और ग्यारह बजे कालका पहुंचेगी। वहीं शाम को चार बजकर पचपन मिनट पर कालका से रवाना होगी और रात ग्यारह बजकर तीस मिनट पर भिवानी पहुंचेगी। एकता एक्सप्रेस का पहले संचालन पानीपत में हिमालयन क्वीन के साथ जुड़ कर होता था, जिसे कोरोना काल में बंद किया गया था। कालका से पानीपत तक एकता एक्सप्रेस हिमालयन क्वीन से जुड़कर ही आती थी। कोरोना महामारी कम होने के बाद भी रेलवे ने इसे बंद रखा हुआ था। लेकिन अब एकता एक्सप्रेस स्वतंत्र रूप से चलेगी। हिमालयन क्वीन ट्रेन के साथ जुड़कर नहीं चलेगी। सांसद डॉ. अरविंद शर्मा ने से इसे वापस स्वतंत्र रूप में चलाने की मांग की थी, जिसे रेलवे ने स्वीकार कर लिया है। वहीं अब इस ट्रेन में डिब्बों की संख्या भी बढ़ा दी गई है। पहले इसमें छः डिब्बे होते थे, जो अब बढ़कर ग्यारह हो गए हैं, ताकि यात्रियों को आने-जाने में किसी परेशानी का सामना न करना पड़े। पहले डिब्बों की संख्या कम होने के कारण कई दफा भीड़ बनी रहती थी, जिससे अब निजात मिलेगी। इस दौरान सांसद डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा पर बोलते हुए कहा कि यह उनका अपना मामला है। साथ ही कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि महंगाई का शोर मचाते हैं और जब महंगाई पर चर्चा होती है तो नदारद होते हैं और हाउस छोड़कर चले जाते हैं। यह सब ड्रामा है। इसमें इनकी कोई जगह नहीं हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर वर्ग को ध्यान में रखते हुए काम करते हैं। इसलिए हर किसी के दिन में पीएम मोदी बसे हुए हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
लोक प्रतिष्ठा वेदों को वार का पर्याय मानती है। ऋग्वेद का चार सोंग और तीन पैर इसो का संकेत ही करता है। आचार्य बलदेव उपाध्याय कामत है है कि "बहुत काल तक त्रयी के समान अथर्व को मान्यता नहीं प्राप्त थी, और यह मान्यता शनैः शनः अवान्तर शताब्दियों के प्रयास का श्लाघनीय फल है ? प्रत्येक वेद के चार भाग है : संहिता ब्राह्मण, आरण्यक, उपनिषद संहिता मंत्रों का वह भाग है, जसमें वेदस्तुति वर्णित है। ब्राह्मणग्रंथों में मंत्रों के विधिभाग की व्याख्या है। आरण्यक ग्रन्थों में वानप्रस्थी जीवन बिताने वाले वोतराग मनस्वियों के कर्मविधान का प्रतिपादन है तथा उपनिषद् ग्रन्थों में मंत्रों को दार्शनिक व्याख्या की गई है। इन्हीं का संक्षिप्तवर्णन इस प्रकार है"संहिता ऍ" :वेदमंत्र अनेक ऋषियों, सम्प्रदायों कई विद्या निकेतनों और विभिन्न युगों में संकलित, संपादित होकर संप्रति वर्तमान संहिताओं के रूप में वर्गीकृत हुई हैं। व्याकरणव्युत्पत्ति के अनुसार संहिता उसको कहते हैं, जिसमें पदों के अन्त का दूसरे पदों के आदि से मिलान किया जाता है। प्रतिशाख्यों के कथनानुसार * दपों की मूल प्रकृति ही संहिता है। वास्तव में मूल वैदिक मंत्र एक साथ सन्नद् थे, जब उनको अलग-अलग छाँटा गया, तब उनको पृथक-पृथक शाखाएँ, संहिताएँ और तदनन्तर उनकी भी शाखाएँ निर्मित हुई। ऋग्वेद - 4 / 58/6 - यह उनकी संख्या, अंग और रहस्य का संकेत करता है। वैदिक साहित्य और संस्कृति - पृष्ठ 1718 ऋक् संहिता वेद चार हैं प्रत्येक वेद की अपनी अलग -अलग संहिताए है । ऋऋग्वेद की 21 संहिताएँ बताई गई हैं, किन्तु इसकी इस समय 1 संहिता ही उपलब्ध है। जिसका नाम है -शाकल संहिता, इसकी भी पाँच शाखाएँ है। शाकल संहिता के तीन विभाग हैं- मंडक, अनुवाक और वर्ग, इन्हें अष्टक अध्याय और सूत्रफ भी कहते हैं। समग्र संहिता में 10 मंडल तथा 85 अनुवाक है तथा 2008 वर्ग हैं। इस तरह B अण्टक, 64 अध्याय और 1018 सूक्तठहरते हैं। यजुर्वेद संहिता दूसरा वेद यजुर्वेद है। "यजुष" शब्द का अर्थ पूजा एवं राज्ञ है, जिस प्रकार ऋग्वेद के मंत्रों का विषय देवताओं का आवाइन करना अर्थात् बुलाना है उसो प्रकार यजुर्वेद के मंत्रों का विषय यज्ञ विधियों को सम्पन्न करना है। यह वेद कर्मकाण्ड प्रधान है। यज्ञ अनकेविध हैं। देवताओं को प्रसन्नता के लिए यहाँ का विधान है, किस यज्ञ में किन-किन मंत्रों का व्यवहार किया जाना चाहिए, इसकी विधियाँ यजुर्वेद में वर्णित हैं। ऐसे मंत्रों के संग्रह का नाम ही "यजुर्वेद संहिता" " विभाग और शाखा में A qui chan यजुर्वेद के दो भाग हैं- कृष्ण और शुक्ल छन्दोबद्ध मंत्र और गद्यात्मक विनियोगों के समिश्रण के कारण पहले भाग का नाम कृष्ण और छंदोबद्ध मंत्रों तथा विनियोगों के अभाव में दूसरे भाग का नाम शुक्ल पड़र शुक्ल यजुर्वेद के संबंध में
लोक प्रतिष्ठा वेदों को वार का पर्याय मानती है। ऋग्वेद का चार सोंग और तीन पैर इसो का संकेत ही करता है। आचार्य बलदेव उपाध्याय कामत है है कि "बहुत काल तक त्रयी के समान अथर्व को मान्यता नहीं प्राप्त थी, और यह मान्यता शनैः शनः अवान्तर शताब्दियों के प्रयास का श्लाघनीय फल है ? प्रत्येक वेद के चार भाग है : संहिता ब्राह्मण, आरण्यक, उपनिषद संहिता मंत्रों का वह भाग है, जसमें वेदस्तुति वर्णित है। ब्राह्मणग्रंथों में मंत्रों के विधिभाग की व्याख्या है। आरण्यक ग्रन्थों में वानप्रस्थी जीवन बिताने वाले वोतराग मनस्वियों के कर्मविधान का प्रतिपादन है तथा उपनिषद् ग्रन्थों में मंत्रों को दार्शनिक व्याख्या की गई है। इन्हीं का संक्षिप्तवर्णन इस प्रकार है"संहिता ऍ" :वेदमंत्र अनेक ऋषियों, सम्प्रदायों कई विद्या निकेतनों और विभिन्न युगों में संकलित, संपादित होकर संप्रति वर्तमान संहिताओं के रूप में वर्गीकृत हुई हैं। व्याकरणव्युत्पत्ति के अनुसार संहिता उसको कहते हैं, जिसमें पदों के अन्त का दूसरे पदों के आदि से मिलान किया जाता है। प्रतिशाख्यों के कथनानुसार * दपों की मूल प्रकृति ही संहिता है। वास्तव में मूल वैदिक मंत्र एक साथ सन्नद् थे, जब उनको अलग-अलग छाँटा गया, तब उनको पृथक-पृथक शाखाएँ, संहिताएँ और तदनन्तर उनकी भी शाखाएँ निर्मित हुई। ऋग्वेद - चार / अट्ठावन/छः - यह उनकी संख्या, अंग और रहस्य का संकेत करता है। वैदिक साहित्य और संस्कृति - पृष्ठ एक हज़ार सात सौ अट्ठारह ऋक् संहिता वेद चार हैं प्रत्येक वेद की अपनी अलग -अलग संहिताए है । ऋऋग्वेद की इक्कीस संहिताएँ बताई गई हैं, किन्तु इसकी इस समय एक संहिता ही उपलब्ध है। जिसका नाम है -शाकल संहिता, इसकी भी पाँच शाखाएँ है। शाकल संहिता के तीन विभाग हैं- मंडक, अनुवाक और वर्ग, इन्हें अष्टक अध्याय और सूत्रफ भी कहते हैं। समग्र संहिता में दस मंडल तथा पचासी अनुवाक है तथा दो हज़ार आठ वर्ग हैं। इस तरह B अण्टक, चौंसठ अध्याय और एक हज़ार अट्ठारह सूक्तठहरते हैं। यजुर्वेद संहिता दूसरा वेद यजुर्वेद है। "यजुष" शब्द का अर्थ पूजा एवं राज्ञ है, जिस प्रकार ऋग्वेद के मंत्रों का विषय देवताओं का आवाइन करना अर्थात् बुलाना है उसो प्रकार यजुर्वेद के मंत्रों का विषय यज्ञ विधियों को सम्पन्न करना है। यह वेद कर्मकाण्ड प्रधान है। यज्ञ अनकेविध हैं। देवताओं को प्रसन्नता के लिए यहाँ का विधान है, किस यज्ञ में किन-किन मंत्रों का व्यवहार किया जाना चाहिए, इसकी विधियाँ यजुर्वेद में वर्णित हैं। ऐसे मंत्रों के संग्रह का नाम ही "यजुर्वेद संहिता" " विभाग और शाखा में A qui chan यजुर्वेद के दो भाग हैं- कृष्ण और शुक्ल छन्दोबद्ध मंत्र और गद्यात्मक विनियोगों के समिश्रण के कारण पहले भाग का नाम कृष्ण और छंदोबद्ध मंत्रों तथा विनियोगों के अभाव में दूसरे भाग का नाम शुक्ल पड़र शुक्ल यजुर्वेद के संबंध में
कियारा आडवाणी और कार्तिक आर्यन की फिल्म सत्यप्रेम की कथा का दूसरा गाना आज के बाद रिलीज हो चुका है। इस गाने में कार्तिक और कियारा शादी के अलग-अलग फंक्शन जैसे मेहंदी, हल्दी और बाकी रस्मों के लिए तैयार होते दिख रहे हैं। इस गाने के लिरिक्स मनन भारद्वाज ने लिखे हैं। गाने को तुलसी कुमार और मनन भारद्वाज ने अपनी आवाज दी है। कियारा आडवाणी ने सोशल मीडिया पर ये गाना शेयर किया है। पोस्ट के कैप्शन में उन्होंने गाने की लाइनें- आंखें हैं नम, खुशियां भी हैं संग लिखी हैं। इस गाने में शादी के बंधन में बंधने जा रहे दुल्हे-दुल्हन के दो अलग-अलग मूड दिखाए गए हैं। एक तरफ कार्तिक-कियारा को इस बात की खुशी है की उनकी शादी हो रही है तो वहीं दूसरी तरफ शादी को लेकर थोड़ी नर्वसनेस भी हैं। गाने के वीडियो में कार्तिक आर्यन दिल खोल कर हल्दी के फंक्शन में डांस कर रहे हैं और थोड़ी देर में ही अपनी मां और बहन से बहस करते नजर आते हैं। वहीं कियारा दुल्हन की तरह तैयार होकर ब्राइडल एंट्री कर रही हैं लेकिन उनके चेहरे पर मुस्कान नहीं है। फिल्म सत्यप्रेम की कथा में कार्तिक आर्यन और कियारा आडवाणी के अलावा सुप्रिया पाठक कपूर, गजराज राव, सिद्धार्थ रंदेरिया, अनुराधा पटेल, राजपाल यादव, निर्मित सावंत और शिखा तलसानिया भी नजर आएंगी। ये फिल्म 29 जून को थिएटर में रिलीज होगी। फिल्म के डायरेक्टर समीर विद्वांस हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
कियारा आडवाणी और कार्तिक आर्यन की फिल्म सत्यप्रेम की कथा का दूसरा गाना आज के बाद रिलीज हो चुका है। इस गाने में कार्तिक और कियारा शादी के अलग-अलग फंक्शन जैसे मेहंदी, हल्दी और बाकी रस्मों के लिए तैयार होते दिख रहे हैं। इस गाने के लिरिक्स मनन भारद्वाज ने लिखे हैं। गाने को तुलसी कुमार और मनन भारद्वाज ने अपनी आवाज दी है। कियारा आडवाणी ने सोशल मीडिया पर ये गाना शेयर किया है। पोस्ट के कैप्शन में उन्होंने गाने की लाइनें- आंखें हैं नम, खुशियां भी हैं संग लिखी हैं। इस गाने में शादी के बंधन में बंधने जा रहे दुल्हे-दुल्हन के दो अलग-अलग मूड दिखाए गए हैं। एक तरफ कार्तिक-कियारा को इस बात की खुशी है की उनकी शादी हो रही है तो वहीं दूसरी तरफ शादी को लेकर थोड़ी नर्वसनेस भी हैं। गाने के वीडियो में कार्तिक आर्यन दिल खोल कर हल्दी के फंक्शन में डांस कर रहे हैं और थोड़ी देर में ही अपनी मां और बहन से बहस करते नजर आते हैं। वहीं कियारा दुल्हन की तरह तैयार होकर ब्राइडल एंट्री कर रही हैं लेकिन उनके चेहरे पर मुस्कान नहीं है। फिल्म सत्यप्रेम की कथा में कार्तिक आर्यन और कियारा आडवाणी के अलावा सुप्रिया पाठक कपूर, गजराज राव, सिद्धार्थ रंदेरिया, अनुराधा पटेल, राजपाल यादव, निर्मित सावंत और शिखा तलसानिया भी नजर आएंगी। ये फिल्म उनतीस जून को थिएटर में रिलीज होगी। फिल्म के डायरेक्टर समीर विद्वांस हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
आनंद महिंद्रा के इस ट्वीट के बाद कई लोग इस चर्चा का हिस्सा बन गए हैं और तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने शनिवार को एक ट्वीट करके ये हैरानगी जताई है कि भारतीय यात्रियों द्वारा एयरपोर्ट्स पर व्हीलचेयर की जरुरत को झूठा बताया जाता है. इसी के साथ आनंद महिंद्र को यह कतई पसंद नहीं आया है कि एयरपोर्ट से जल्दी फ्लाइट तक पहुंचने के लिए लोग व्हीलचेयर का इस्तेमाल करते हैं. आनंद महिंद्रा के इस ट्वीट के बाद कई लोग इस चर्चा का हिस्सा बन गए हैं और तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. इसके जवाब में, कुछ यूजर्स ने जहां एक ओर इन व्हीलचेयर को भारतीयों द्वारा किया गया 'घोटाला' करार दिया, तो वहीं दूसरी ओर कुछ ने कहा कि व्हीलचेयर सहायता उन बच्चों के माता-पिता के लिए एक वरदान है जो देश के बाहर बसे हैं. 3rd posiibility it seems.Hamri aadat ban gayee hai "Sahulaton" se najayez fayeda uthane ki.Aisa kerke hum badi apni peeth thup thapa tey hain. Full paisa vasool... Indians hai chilka bhi nichoor lenge. Jugaad hai bus jo kese bhi ban jaye.? Sir, Mostly because elderly people are travelling alone abroad, my mom travelled to US Early this year, so we ordered it. As it gives them an assistant who understand the process of boarding and emigration. Especially if they have to interchange their flight.
आनंद महिंद्रा के इस ट्वीट के बाद कई लोग इस चर्चा का हिस्सा बन गए हैं और तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने शनिवार को एक ट्वीट करके ये हैरानगी जताई है कि भारतीय यात्रियों द्वारा एयरपोर्ट्स पर व्हीलचेयर की जरुरत को झूठा बताया जाता है. इसी के साथ आनंद महिंद्र को यह कतई पसंद नहीं आया है कि एयरपोर्ट से जल्दी फ्लाइट तक पहुंचने के लिए लोग व्हीलचेयर का इस्तेमाल करते हैं. आनंद महिंद्रा के इस ट्वीट के बाद कई लोग इस चर्चा का हिस्सा बन गए हैं और तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. इसके जवाब में, कुछ यूजर्स ने जहां एक ओर इन व्हीलचेयर को भारतीयों द्वारा किया गया 'घोटाला' करार दिया, तो वहीं दूसरी ओर कुछ ने कहा कि व्हीलचेयर सहायता उन बच्चों के माता-पिता के लिए एक वरदान है जो देश के बाहर बसे हैं. तीनrd posiibility it seems.Hamri aadat ban gayee hai "Sahulaton" se najayez fayeda uthane ki.Aisa kerke hum badi apni peeth thup thapa tey hain. Full paisa vasool... Indians hai chilka bhi nichoor lenge. Jugaad hai bus jo kese bhi ban jaye.? Sir, Mostly because elderly people are travelling alone abroad, my mom travelled to US Early this year, so we ordered it. As it gives them an assistant who understand the process of boarding and emigration. Especially if they have to interchange their flight.
लखनऊः उत्तर प्रदेश में आज कोरोना वैक्सीन के अंतिम ड्राई रन का खुद सीएम योगी आदित्यनाथ निगरानी करेंगे. उत्तर प्रदेश के सभी जनपदों में 1500 टीकाकरण केंद्र और 3000 बूथ बनाए गए हैं. सीएम योगी आदित्यनाथ खुद तीसरे व अंतिम पूर्वाभ्यास की निगरानी करेंगे और लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी, मेरठ और सिद्धार्थनगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों से ऑनलाइन जुड़ेंगे. सीएम योगी आदित्यनाथ टीकाकरण केंद्रों पर चल रहे ट्रायल के जरिए आगे की तैयारियों को परखेंगे. फिलहाल पूर्वाभ्यास के लिए लाभार्थियों को SMS भेजा गया है. मैसेज में उन्हें कहां और किस टीकाकरण केंद्र पर कितने बजे पहुंचना है, इस बारे में जानकारी दी गई है. तीसरी बार पूर्वाभ्यास करने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला सूबा बन गया है. इससे पहले 2 जनवरी को लखनऊ फिर 5 जनवरी को पूरे राज्य में कोरोना वायरस का ट्रायल किया जा चुका है. देशभर में 16 जनवरी से कोरोना का टीकाकरण शुरू होगा. यूपी इससे पहले अपनी तैयारियां फुल प्रूफ करने में लगा हुआ है. तीसरे व अंतिम पूर्वाभ्यास में लगभग 20000 स्वास्थ्य कर्मियों को तैनात किया गया है. वहीं पुलिस व अन्य विभागों के कर्मियों को भी ड्यूटी पर लगाया गया है. महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. डीएस नेगी की तरफ से सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह पूर्वाभ्यास की पुख्ता तैयारी करें.
लखनऊः उत्तर प्रदेश में आज कोरोना वैक्सीन के अंतिम ड्राई रन का खुद सीएम योगी आदित्यनाथ निगरानी करेंगे. उत्तर प्रदेश के सभी जनपदों में एक हज़ार पाँच सौ टीकाकरण केंद्र और तीन हज़ार बूथ बनाए गए हैं. सीएम योगी आदित्यनाथ खुद तीसरे व अंतिम पूर्वाभ्यास की निगरानी करेंगे और लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी, मेरठ और सिद्धार्थनगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों से ऑनलाइन जुड़ेंगे. सीएम योगी आदित्यनाथ टीकाकरण केंद्रों पर चल रहे ट्रायल के जरिए आगे की तैयारियों को परखेंगे. फिलहाल पूर्वाभ्यास के लिए लाभार्थियों को SMS भेजा गया है. मैसेज में उन्हें कहां और किस टीकाकरण केंद्र पर कितने बजे पहुंचना है, इस बारे में जानकारी दी गई है. तीसरी बार पूर्वाभ्यास करने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला सूबा बन गया है. इससे पहले दो जनवरी को लखनऊ फिर पाँच जनवरी को पूरे राज्य में कोरोना वायरस का ट्रायल किया जा चुका है. देशभर में सोलह जनवरी से कोरोना का टीकाकरण शुरू होगा. यूपी इससे पहले अपनी तैयारियां फुल प्रूफ करने में लगा हुआ है. तीसरे व अंतिम पूर्वाभ्यास में लगभग बीस हज़ार स्वास्थ्य कर्मियों को तैनात किया गया है. वहीं पुलिस व अन्य विभागों के कर्मियों को भी ड्यूटी पर लगाया गया है. महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. डीएस नेगी की तरफ से सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह पूर्वाभ्यास की पुख्ता तैयारी करें.
वे उसे अपने घर ले गए और वहाँ एक बड़े से आदमी ने अपनी उँगली और अँगूठे के बीच उसे उठा लिया और कहने लगा कि वह मरा नहीं था, बस उसकी साँस ठीक से नहीं आ रही थी। इसलिए उन्होंने उसे रूई से ढँक दिया और उसे आग से कुछ दूर रख दिया। कुछ देर बाद उसने आँखें खोलीं और छींका। "अब," उस भारी भरकम आदमी (वह एक अंग्रेज था, जो अभी-अभी ही इस बँगले में रहने के लिए आया था) ने कहा, "उसका डर दूर होने दो और हम देखते हैं कि वह क्या करता है। " किसी नेवले को डराना दुनिया का सबसे मुश्किल काम है, क्योंकि नाक से लेकर पूँछ तक वह जिज्ञासा से भरा होता है । नेवला बिरादरी का उसूल होता है, "दौड़ो और पता लगाओ।" रिकि-टिकि एक सच्चा नेवला था। उसने ऊनी रूई को देखा और यह तय किया कि वह खाने लायक नहीं थी, टेबल के चारों ओर दौड़ा, फिर बैठकर अपने फर को सँवारा, पंजों से अपना बदन साफ किया; फिर कूदकर उस छोटे से बच्चे के कंधे पर चढ़ गया। "टेडी, डरना मत, " उसके पिता ने कहा, "दोस्ती करने का उसका यही तरीका है । " 'आउच! वह मेरी ठुड्डी के नीचे गुदगुदी कर रहा है, " टेडी ने कहा। रिकि-टिकि ने लड़के की शर्ट के कॉलर और गरदन के बीच नीचे झाँका, उसके कान को सूँघा, फिर उतरकर फर्श पर बैठ गया और टेबल के पाए से अपनी नाक रगड़ने लगा। "देखो तो, " टेडी की माँ ने कहा, "वह एक जंगली जीव है! मैं समझती हूँ हमने उसकी मदद की है, इसीलिए हमारे साथ इतना सौम्य है । " "सभी नेवले ऐसे ही होते हैं, " उसके पति ने कहा, "अगर टेडी उसे पूँछ से पकड़कर न उठाए या पिंजरे में बंद न करे तो वह सारा दिन घर के अंदर और बाहर आता-जाता रहेगा। चलो, हम उसे कुछ खाने के लिए देते हैं। " उन्होंने उसे कच्चे मांस का एक टुकड़ा दिया । रिकि-टिकि ने उसे बड़े चाव से खाया, फिर बाहर बरामदे में जाकर धूप में बैठ गया और अपने रोएँ फैला लिए, ताकि वे जड़ों तक सूख जाएँ। तब उसने बेहतर महसूस किया । 'मेरा परिवार सारी जिंदगी में जितना जान सकता है, उससे कहीं ज्यादा जानने लायक इस घर में है । यह तय है कि यहीं रहूँगा और पता लगाऊँगा।" उसने अपने आपसे कहा। उसने सारा दिन पूरे घर में घूमकर बिताया । बाथ टब में उसने खुद को लगभग डुबा ही लिया था; लिखने की मेज पर अपनी नाक स्याही में डाल दी और उस विशाल आदमी की सिगार के जलते हुए सिरे से अपनी नाक जला बैठा, क्योंकि यह देखने के लिए कि लिखा कैसे जाता है, वह उसकी गोद में बैठ गया था । रात होने पर यह देखने के लिए कि मिट्टी के तेल में जलनेवाली लालटेन कैसे जलाई जाती है, वह टेडी के कमरे में चला गया और टेडी के सो जाने के बाद वह भी उसी बिस्तर पर चढ़ गया । परंतु वह एक बेचैन साथी था, क्योंकि पूरी रात, कहीं भी कोई आवाज होने पर उसका स्रोत जानने के लिए उसे बार-बार उठना पड़ता था। सोने से पहले टेडी के माता-पिता उसके कमरे में आए तो देखा कि टेडी की बगल में उसके तकिए पर रिकि-टिकि बैठा हुआ था । "यह बात मुझे पसंद नहीं है," टेडी की माँ ने कहा, "वह बच्चे को काट सकता है।" "वह ऐसा कुछ नहीं करेगा, पिता ने कहा, उस छोटे-से जानवर के साथ हमारा टेडी उससे कहीं ज्यादा सुरक्षित है, जितना वह एक खूँखार कुत्ते की निगरानी में होता। अगर उसके कमरे में कोई साँप घुस आए" परंतु टेडी की माँ ने ऐसी किसी अशुभ बात को सुनने से इनकार कर दिया। सुबह-सुबह टेडी के कंधे पर सवार होकर रिकि-टिकि नाश्ते के लिए बरामदे में आ गया और उन्होंने उसे एक केला और उबले हुए अंडे दिए । वह एक के बाद एक उन सभी की गोद में बैठा, क्योंकि हर सुपोषित नेवले को हमेशा एक घरेलू नेवला बनने और घूमने-फिरने के लिए एक बड़े से मकान में रहने की उम्मीद होती है और रिकिटिकि की माँ (वह सिगौली में जनरल के बँगले में रहती थी) ने बहुत सावधानी से उसे बताया था कि एक गोरे आदमी से सामना होने पर क्या करना चाहिए। फिर यह देखने के लिए कि वहाँ देखने लायक क्या था, रिकि-टिकि बाहर बगीचे में चला गया । वह एक बड़ा बगीचा था, जिसका केवल आधा भाग ही विकसित किया गया था, बाकी आधे भाग में ऊँची घनी झाडियाँ, गुलाब, नींबू और संतरे के पेड़, बाँस के पेड़ों के झुरमुट और दूर तक फैली ऊँची घास थी । रिकि-टिकि ने अपने होंठों पर जीभ फेरी। "यह तो बड़ा शानदार शिकार क्षेत्र है, " उसने कहा और इस विचार - मात्र से उसकी पूँछ के बाल खड़े हो गए, यहाँ-वहाँ सूँघते हुए वह बगीचे के चक्कर लगाता रहा, जब तक कि एक कँटीली झाड़ी से उसे रोने की आवाजें सुनाई न दीं। वह टेलरबर्ड दरजी और उसकी पत्नी थी। उन्होंने दो बड़ी पत्तियों को जोड़कर और उनके किनारों की सिलाई करके उनके भीतर की खाली जगह को रूई और गिरे हुए बालों और रेशों से भरकर एक सुंदर घोंसला बनाया था । घोंसला हवा से आगे-पीछे झूल रहा था और उसके किनारे पर बैठकर वे रो रहे थे। 'बात क्या है?" रिकि-टिकि ने पूछा। "हम बड़े अभागे हैं, " दरजी ने कहा, "कल हमारा एक बच्चा घोंसले से बाहर गिर गया और नाग उसे खा गया।" "हूँ!" रिकि-टिकि ने कहा, "यह बड़े दुःख की बात है - मगर इस जगह पर मैं नया हूँ । नाग कौन है ? " जवाब दिए बिना दरजी और उसकी पत्नी घोंसले में दुबक गए, क्योंकि झाड़ी के नीचे जमीन पर उगी घनी घास में एक दबी हुई सी फुफकार सुनाई दी - एक भयानक निर्दय आवाज, जिसे सुनकर रिकि- टिकि उछलकर पूरे दो फुट पीछे हट गया। फिर घास में से इंच-दर-इंच एक बड़े काले नाग का सिर निकला और उसने अपने फन फैला दिए - जीभ से लेकर पूँछ तक वह पाँच फुट लंबा था । जब उसने अपने शरीर का एक तिहाई भाग जमीन से उठा दिया था, ठीक डेंडेलियन पौधे के गुच्छ की तरह अपने शरीर को आगे-पीछे करके उसने अपना संतुलन बनाए रखा और उसने साँप की कुटिल आँखों, जो हर स्थिति में एक जैसी रहती हैं और उसके इरादों का पता नहीं चलने देतीं, से रिकि-टिकि की ओर देखा। 'नाग कौन है?" उसने कहा, "मैं हूँ नाग । साक्षात् ब्रह्मा ने हम सबके माथे पर तिलक लगाया था, जब दुनिया के पहले नाग ने भगवान् ब्रह्मा, जब वे सो रहे थे, को धूप से बचाने के लिए अपने फन फैला दिए थे। उसे देखो और डरो ! " उसने अपना फन पहले से भी ज्यादा फैला लिया और रिकि-टिकि ने उसके पीछे स्पष्ट रूप से वह चिह्न देखा, जो कुछ खुले हुए एक छल्ले की तरह दिखाई देता था । एक मिनट के लिए तो वह डर गया, परंतु एक नेवले के लिए ज्यादा देर तक भयभीत रहना असंभव था और यद्यपि इससे पहले रिकि-टिकि का सामना एक जीवित नाग से कभी नहीं हुआ था। उसकी माँ ने उसे कई मरे हुए साँप खिलाए थे और वह जानता था कि एक वयस्क नेवले का जीवन में काम ही यही था; साँपों से लड़ना और उन्हें मारकर खा जाना । नाग भी यह बात जानता था और अपने कठोर दिल की गहराई में वह डरा हुआ था। अच्छा!" रिकि-टिकि ने कहा और उसकी पूँछ फिर फैलने लगी, "निशान हो या न हो पर क्या तुम किसी घोंसले से एक पक्षी के बच्चे को खा जाना ठीक समझते हो?' नाग कुछ सोच रहा था और साथ ही रिकि-टिकि के पीछे घास में होनेवाली हर छोटी-से-छोटी हलचल पर भी उसकी नजर थी। वह जानता था कि बगीचे में किसी नेवले के होने का मतलब देर-सवेर उसकी और उसके परिवार
वे उसे अपने घर ले गए और वहाँ एक बड़े से आदमी ने अपनी उँगली और अँगूठे के बीच उसे उठा लिया और कहने लगा कि वह मरा नहीं था, बस उसकी साँस ठीक से नहीं आ रही थी। इसलिए उन्होंने उसे रूई से ढँक दिया और उसे आग से कुछ दूर रख दिया। कुछ देर बाद उसने आँखें खोलीं और छींका। "अब," उस भारी भरकम आदमी ने कहा, "उसका डर दूर होने दो और हम देखते हैं कि वह क्या करता है। " किसी नेवले को डराना दुनिया का सबसे मुश्किल काम है, क्योंकि नाक से लेकर पूँछ तक वह जिज्ञासा से भरा होता है । नेवला बिरादरी का उसूल होता है, "दौड़ो और पता लगाओ।" रिकि-टिकि एक सच्चा नेवला था। उसने ऊनी रूई को देखा और यह तय किया कि वह खाने लायक नहीं थी, टेबल के चारों ओर दौड़ा, फिर बैठकर अपने फर को सँवारा, पंजों से अपना बदन साफ किया; फिर कूदकर उस छोटे से बच्चे के कंधे पर चढ़ गया। "टेडी, डरना मत, " उसके पिता ने कहा, "दोस्ती करने का उसका यही तरीका है । " 'आउच! वह मेरी ठुड्डी के नीचे गुदगुदी कर रहा है, " टेडी ने कहा। रिकि-टिकि ने लड़के की शर्ट के कॉलर और गरदन के बीच नीचे झाँका, उसके कान को सूँघा, फिर उतरकर फर्श पर बैठ गया और टेबल के पाए से अपनी नाक रगड़ने लगा। "देखो तो, " टेडी की माँ ने कहा, "वह एक जंगली जीव है! मैं समझती हूँ हमने उसकी मदद की है, इसीलिए हमारे साथ इतना सौम्य है । " "सभी नेवले ऐसे ही होते हैं, " उसके पति ने कहा, "अगर टेडी उसे पूँछ से पकड़कर न उठाए या पिंजरे में बंद न करे तो वह सारा दिन घर के अंदर और बाहर आता-जाता रहेगा। चलो, हम उसे कुछ खाने के लिए देते हैं। " उन्होंने उसे कच्चे मांस का एक टुकड़ा दिया । रिकि-टिकि ने उसे बड़े चाव से खाया, फिर बाहर बरामदे में जाकर धूप में बैठ गया और अपने रोएँ फैला लिए, ताकि वे जड़ों तक सूख जाएँ। तब उसने बेहतर महसूस किया । 'मेरा परिवार सारी जिंदगी में जितना जान सकता है, उससे कहीं ज्यादा जानने लायक इस घर में है । यह तय है कि यहीं रहूँगा और पता लगाऊँगा।" उसने अपने आपसे कहा। उसने सारा दिन पूरे घर में घूमकर बिताया । बाथ टब में उसने खुद को लगभग डुबा ही लिया था; लिखने की मेज पर अपनी नाक स्याही में डाल दी और उस विशाल आदमी की सिगार के जलते हुए सिरे से अपनी नाक जला बैठा, क्योंकि यह देखने के लिए कि लिखा कैसे जाता है, वह उसकी गोद में बैठ गया था । रात होने पर यह देखने के लिए कि मिट्टी के तेल में जलनेवाली लालटेन कैसे जलाई जाती है, वह टेडी के कमरे में चला गया और टेडी के सो जाने के बाद वह भी उसी बिस्तर पर चढ़ गया । परंतु वह एक बेचैन साथी था, क्योंकि पूरी रात, कहीं भी कोई आवाज होने पर उसका स्रोत जानने के लिए उसे बार-बार उठना पड़ता था। सोने से पहले टेडी के माता-पिता उसके कमरे में आए तो देखा कि टेडी की बगल में उसके तकिए पर रिकि-टिकि बैठा हुआ था । "यह बात मुझे पसंद नहीं है," टेडी की माँ ने कहा, "वह बच्चे को काट सकता है।" "वह ऐसा कुछ नहीं करेगा, पिता ने कहा, उस छोटे-से जानवर के साथ हमारा टेडी उससे कहीं ज्यादा सुरक्षित है, जितना वह एक खूँखार कुत्ते की निगरानी में होता। अगर उसके कमरे में कोई साँप घुस आए" परंतु टेडी की माँ ने ऐसी किसी अशुभ बात को सुनने से इनकार कर दिया। सुबह-सुबह टेडी के कंधे पर सवार होकर रिकि-टिकि नाश्ते के लिए बरामदे में आ गया और उन्होंने उसे एक केला और उबले हुए अंडे दिए । वह एक के बाद एक उन सभी की गोद में बैठा, क्योंकि हर सुपोषित नेवले को हमेशा एक घरेलू नेवला बनने और घूमने-फिरने के लिए एक बड़े से मकान में रहने की उम्मीद होती है और रिकिटिकि की माँ ने बहुत सावधानी से उसे बताया था कि एक गोरे आदमी से सामना होने पर क्या करना चाहिए। फिर यह देखने के लिए कि वहाँ देखने लायक क्या था, रिकि-टिकि बाहर बगीचे में चला गया । वह एक बड़ा बगीचा था, जिसका केवल आधा भाग ही विकसित किया गया था, बाकी आधे भाग में ऊँची घनी झाडियाँ, गुलाब, नींबू और संतरे के पेड़, बाँस के पेड़ों के झुरमुट और दूर तक फैली ऊँची घास थी । रिकि-टिकि ने अपने होंठों पर जीभ फेरी। "यह तो बड़ा शानदार शिकार क्षेत्र है, " उसने कहा और इस विचार - मात्र से उसकी पूँछ के बाल खड़े हो गए, यहाँ-वहाँ सूँघते हुए वह बगीचे के चक्कर लगाता रहा, जब तक कि एक कँटीली झाड़ी से उसे रोने की आवाजें सुनाई न दीं। वह टेलरबर्ड दरजी और उसकी पत्नी थी। उन्होंने दो बड़ी पत्तियों को जोड़कर और उनके किनारों की सिलाई करके उनके भीतर की खाली जगह को रूई और गिरे हुए बालों और रेशों से भरकर एक सुंदर घोंसला बनाया था । घोंसला हवा से आगे-पीछे झूल रहा था और उसके किनारे पर बैठकर वे रो रहे थे। 'बात क्या है?" रिकि-टिकि ने पूछा। "हम बड़े अभागे हैं, " दरजी ने कहा, "कल हमारा एक बच्चा घोंसले से बाहर गिर गया और नाग उसे खा गया।" "हूँ!" रिकि-टिकि ने कहा, "यह बड़े दुःख की बात है - मगर इस जगह पर मैं नया हूँ । नाग कौन है ? " जवाब दिए बिना दरजी और उसकी पत्नी घोंसले में दुबक गए, क्योंकि झाड़ी के नीचे जमीन पर उगी घनी घास में एक दबी हुई सी फुफकार सुनाई दी - एक भयानक निर्दय आवाज, जिसे सुनकर रिकि- टिकि उछलकर पूरे दो फुट पीछे हट गया। फिर घास में से इंच-दर-इंच एक बड़े काले नाग का सिर निकला और उसने अपने फन फैला दिए - जीभ से लेकर पूँछ तक वह पाँच फुट लंबा था । जब उसने अपने शरीर का एक तिहाई भाग जमीन से उठा दिया था, ठीक डेंडेलियन पौधे के गुच्छ की तरह अपने शरीर को आगे-पीछे करके उसने अपना संतुलन बनाए रखा और उसने साँप की कुटिल आँखों, जो हर स्थिति में एक जैसी रहती हैं और उसके इरादों का पता नहीं चलने देतीं, से रिकि-टिकि की ओर देखा। 'नाग कौन है?" उसने कहा, "मैं हूँ नाग । साक्षात् ब्रह्मा ने हम सबके माथे पर तिलक लगाया था, जब दुनिया के पहले नाग ने भगवान् ब्रह्मा, जब वे सो रहे थे, को धूप से बचाने के लिए अपने फन फैला दिए थे। उसे देखो और डरो ! " उसने अपना फन पहले से भी ज्यादा फैला लिया और रिकि-टिकि ने उसके पीछे स्पष्ट रूप से वह चिह्न देखा, जो कुछ खुले हुए एक छल्ले की तरह दिखाई देता था । एक मिनट के लिए तो वह डर गया, परंतु एक नेवले के लिए ज्यादा देर तक भयभीत रहना असंभव था और यद्यपि इससे पहले रिकि-टिकि का सामना एक जीवित नाग से कभी नहीं हुआ था। उसकी माँ ने उसे कई मरे हुए साँप खिलाए थे और वह जानता था कि एक वयस्क नेवले का जीवन में काम ही यही था; साँपों से लड़ना और उन्हें मारकर खा जाना । नाग भी यह बात जानता था और अपने कठोर दिल की गहराई में वह डरा हुआ था। अच्छा!" रिकि-टिकि ने कहा और उसकी पूँछ फिर फैलने लगी, "निशान हो या न हो पर क्या तुम किसी घोंसले से एक पक्षी के बच्चे को खा जाना ठीक समझते हो?' नाग कुछ सोच रहा था और साथ ही रिकि-टिकि के पीछे घास में होनेवाली हर छोटी-से-छोटी हलचल पर भी उसकी नजर थी। वह जानता था कि बगीचे में किसी नेवले के होने का मतलब देर-सवेर उसकी और उसके परिवार
बिग ब्रेकिंगः- लापरवाही व अनुशासनहीनता में थाना प्रभारी सहित चार पुलिस कर्मी सस्पेंड. . कोन ब्लॉक रिपोर्टर (विमलेश कुमार यादव) कोन थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत बरवाडीह उत्तर टोला में सोमवार की शाम जमीन का विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया जिसके दौरान व्यक्ति की मौत हो गई और पत्नी गम्भीर रूप से घायल है। मिली जानकारी के अनुसार उदय पासवान व केवल पासवान दोनों पटीदारों की आपसी जमीन बटवारे की बात कई सालों से चल रही थी जिस पर दोनों पटीदारों में कई बार आपसी सामंजस हुई लेकिन कोई बात नही बनी यही नही 20 अगस्त को दोनों पटीदारों में मारपीट हुई थी जिस पर केवल के छोटे लड़के की हाथ टूट गयी थी और केवल की पत्नी को चोट आई थी जिस पर थाना निरीक्षक ने मुकदमा पंजीकृत किया था वही सोमवार को पुनः दोनों में झगड़ा होने लगा जिस पर मृतक उदय पासवान द्वारा 100 नम्बर डायल कर पुलिस को सूचना दी गयी जिस पर थाना निरीक्षक अरविंद यादव ने सब स्पेक्टर व पुलिस को मौके पर दोनों लोगो को थाने बुलवाया जिस पर पुलिस मौके पर पहुच कर थाने चलने को कहा और दोनों ने आने की बात कही जिस पर पुलिस थाने आ गयी वही दोनों पटीदार थाने आने से पहले आपस मे झगड़ लिए और इसी बीच दोनों ओर से विवाद बढ़ गया और मारपीट शुरू हो गई और उसी दौरान लाठी डंडे से पीट कर उदय पासवान की हत्या कर दी गयी वही मृतक की पत्नी शीतला देवी को गम्भीर छोटे आयी जिसको एम्बुलेंस द्वारा चोपन अस्पताल रेफर कर दिया गया वही घटना की जानकारी होते ही प्रभारी निरीक्षक अरविंद यादव मौके पर पहुच कर शव को थाने लाते हुए आवश्यक कार्यवाई कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
बिग ब्रेकिंगः- लापरवाही व अनुशासनहीनता में थाना प्रभारी सहित चार पुलिस कर्मी सस्पेंड. . कोन ब्लॉक रिपोर्टर कोन थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत बरवाडीह उत्तर टोला में सोमवार की शाम जमीन का विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया जिसके दौरान व्यक्ति की मौत हो गई और पत्नी गम्भीर रूप से घायल है। मिली जानकारी के अनुसार उदय पासवान व केवल पासवान दोनों पटीदारों की आपसी जमीन बटवारे की बात कई सालों से चल रही थी जिस पर दोनों पटीदारों में कई बार आपसी सामंजस हुई लेकिन कोई बात नही बनी यही नही बीस अगस्त को दोनों पटीदारों में मारपीट हुई थी जिस पर केवल के छोटे लड़के की हाथ टूट गयी थी और केवल की पत्नी को चोट आई थी जिस पर थाना निरीक्षक ने मुकदमा पंजीकृत किया था वही सोमवार को पुनः दोनों में झगड़ा होने लगा जिस पर मृतक उदय पासवान द्वारा एक सौ नम्बर डायल कर पुलिस को सूचना दी गयी जिस पर थाना निरीक्षक अरविंद यादव ने सब स्पेक्टर व पुलिस को मौके पर दोनों लोगो को थाने बुलवाया जिस पर पुलिस मौके पर पहुच कर थाने चलने को कहा और दोनों ने आने की बात कही जिस पर पुलिस थाने आ गयी वही दोनों पटीदार थाने आने से पहले आपस मे झगड़ लिए और इसी बीच दोनों ओर से विवाद बढ़ गया और मारपीट शुरू हो गई और उसी दौरान लाठी डंडे से पीट कर उदय पासवान की हत्या कर दी गयी वही मृतक की पत्नी शीतला देवी को गम्भीर छोटे आयी जिसको एम्बुलेंस द्वारा चोपन अस्पताल रेफर कर दिया गया वही घटना की जानकारी होते ही प्रभारी निरीक्षक अरविंद यादव मौके पर पहुच कर शव को थाने लाते हुए आवश्यक कार्यवाई कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
'हिन्दी दिवस', 14 सितम्बर के अवसर पर यह आशा की जा सकती है कि हमारे देश में पुनः हिन्दी का सम्मान बढ़ेगा। दिन विशेष पर आशान्वित होने का कारण यह है, कि अन्य दिवसों के समान 'हिन्दी दिवस' को भी मात्र कोरम पूरा करने हेतु एक समारोह के रूप में देखा जाता है, एवम् कुछ लोगों, संस्थाओं तथा सरकारी कार्यालयों द्वारा हिन्दी को इस दिन सम्मान देकर यह दर्शाने का प्रयास किया जाता है की इस देश में अभी हिन्दी के कुछ चाहने वाले हैं। अपितु भाषा के शुद्धता के बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता। बोलचाल एवम् लिखने में हम हिंग्लिश अर्थात हिन्दी एवम् अंग्रेजी के मिश्रण का बहुतायत प्रयोग करने लगे हैं। यदि हिंग्लिश का प्रयोग इसी प्रकार बढ़ता रहा तो भविष्य में शुद्ध हिन्दी बोलने वाले लोगों की संख्या वर्तमान में संस्कृतभाषियों के सामान हो जायेगी। हिन्दी भाषा की यह अशुद्धी पिछले दो दशकों में बढ़ी है, जो एस एम एस की भाषा के रूप में विकसित होकर हमारी हिन्दी के लिए संकट का कारण बन रही है। पिछले दो दशकों के दौरान शिक्षक बने नवयुवकों ने अपने विद्यार्थियों को भी हिंग्लिश में ही शिक्षा प्रसारित की, जिससे भाषागत अशुद्धता बढ़ती गयी। इस हालात से निकलने एवं भारत तथा हिन्दी को विश्व पटल पर स्थापित करने के लिए शुद्ध हिन्दी में वार्तालाप को बढ़ावा देने के साथ साथ उच्च एवम् विशेषज्ञता वाले शिक्षा पाठ्यक्रमों को हिन्दी भाषा में उपलब्ध कराने की विशेष आवश्यकता है। नहीं तो आईआईटी रुड़की में 73 छात्रों के फेल होने जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति होगी, जिसके मूल में हिन्दीभाषी होना एवं अंग्रेजी का कम ज्ञान होना भी था। जो इस देश के भविष्य के लिए अच्छा संकेत नहीं है। कृपया विचार कीजिये!
'हिन्दी दिवस', चौदह सितम्बर के अवसर पर यह आशा की जा सकती है कि हमारे देश में पुनः हिन्दी का सम्मान बढ़ेगा। दिन विशेष पर आशान्वित होने का कारण यह है, कि अन्य दिवसों के समान 'हिन्दी दिवस' को भी मात्र कोरम पूरा करने हेतु एक समारोह के रूप में देखा जाता है, एवम् कुछ लोगों, संस्थाओं तथा सरकारी कार्यालयों द्वारा हिन्दी को इस दिन सम्मान देकर यह दर्शाने का प्रयास किया जाता है की इस देश में अभी हिन्दी के कुछ चाहने वाले हैं। अपितु भाषा के शुद्धता के बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता। बोलचाल एवम् लिखने में हम हिंग्लिश अर्थात हिन्दी एवम् अंग्रेजी के मिश्रण का बहुतायत प्रयोग करने लगे हैं। यदि हिंग्लिश का प्रयोग इसी प्रकार बढ़ता रहा तो भविष्य में शुद्ध हिन्दी बोलने वाले लोगों की संख्या वर्तमान में संस्कृतभाषियों के सामान हो जायेगी। हिन्दी भाषा की यह अशुद्धी पिछले दो दशकों में बढ़ी है, जो एस एम एस की भाषा के रूप में विकसित होकर हमारी हिन्दी के लिए संकट का कारण बन रही है। पिछले दो दशकों के दौरान शिक्षक बने नवयुवकों ने अपने विद्यार्थियों को भी हिंग्लिश में ही शिक्षा प्रसारित की, जिससे भाषागत अशुद्धता बढ़ती गयी। इस हालात से निकलने एवं भारत तथा हिन्दी को विश्व पटल पर स्थापित करने के लिए शुद्ध हिन्दी में वार्तालाप को बढ़ावा देने के साथ साथ उच्च एवम् विशेषज्ञता वाले शिक्षा पाठ्यक्रमों को हिन्दी भाषा में उपलब्ध कराने की विशेष आवश्यकता है। नहीं तो आईआईटी रुड़की में तिहत्तर छात्रों के फेल होने जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति होगी, जिसके मूल में हिन्दीभाषी होना एवं अंग्रेजी का कम ज्ञान होना भी था। जो इस देश के भविष्य के लिए अच्छा संकेत नहीं है। कृपया विचार कीजिये!
न्यूज डेस्कः लॉकडाउन 3 में बिहार सरकार धीरे धीरे कई तरह की दुकाने खोलने की इजाजत दे रही हैं। मिली जानकारी के अनुसार बिहार सरकार सप्ताह में तीन दिन किताब की दुकाने होने की इजाजत दी हैं। अब आप तीन दिन किताबे खरीद सकते हैं। मिली जानकारी के अनुसार सप्ताह में तीन दिन सोमवार, बुधवार व शुक्रवार को किताबों की दुकानें खुलेगी। लेकिन, उन्हीं दुकानों को खोलने की इजाजत दी गयी है, जो शॉप्स एंड इस्टेबिलिस्मेंट एक्ट के तहत रजिस्टर्ड होंगे। दुकानदारों को इन बातों का ख्याल रखना होता हैं। क्यों की अन्य दुकानों को अवैध माना जायेगा। इससे पहले बिहार सरकार नेऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, निर्माण साम्रगी, हार्डवेयर अन्य दुकानों को खोलने की इजाजत दे दी हैं। मिली जानकारी के अनुसार दुकानों को छह बजे शाम के बाद नहीं खोलना है। साथ ही साथ मास्क का प्रयोग करना अनिवार्य हैं। इतना ही नहीं सोशल डिस्टेंस का भी पालन करना अनिवार्य हैं। दूकान पर ज्यादा लोगों को इकठा करने की इजाजत नहीं हैं।
न्यूज डेस्कः लॉकडाउन तीन में बिहार सरकार धीरे धीरे कई तरह की दुकाने खोलने की इजाजत दे रही हैं। मिली जानकारी के अनुसार बिहार सरकार सप्ताह में तीन दिन किताब की दुकाने होने की इजाजत दी हैं। अब आप तीन दिन किताबे खरीद सकते हैं। मिली जानकारी के अनुसार सप्ताह में तीन दिन सोमवार, बुधवार व शुक्रवार को किताबों की दुकानें खुलेगी। लेकिन, उन्हीं दुकानों को खोलने की इजाजत दी गयी है, जो शॉप्स एंड इस्टेबिलिस्मेंट एक्ट के तहत रजिस्टर्ड होंगे। दुकानदारों को इन बातों का ख्याल रखना होता हैं। क्यों की अन्य दुकानों को अवैध माना जायेगा। इससे पहले बिहार सरकार नेऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, निर्माण साम्रगी, हार्डवेयर अन्य दुकानों को खोलने की इजाजत दे दी हैं। मिली जानकारी के अनुसार दुकानों को छह बजे शाम के बाद नहीं खोलना है। साथ ही साथ मास्क का प्रयोग करना अनिवार्य हैं। इतना ही नहीं सोशल डिस्टेंस का भी पालन करना अनिवार्य हैं। दूकान पर ज्यादा लोगों को इकठा करने की इजाजत नहीं हैं।
घरेलू कार निर्माता कंपनी Tata Motors ने इस सप्ताह की शुरुआत में आधिकारिक तौर पर ऑल-न्यू 2021 Safari बाजार में उतारी थी। Safari ने डीलरशिप पर पहुंचना शुरू कर दिया है और डिलीवरी भी शुरू हो गई है। Tata Motors ने अभिनेता, गायक और निर्देशक श्री Parmish Verma को पंजाब में पहली ऑल-न्यू सफ़ारी प्रदान की है। अभिनेता ने आरएसए मोटर्स, चंडीगढ़ में Tata Motors अधिकृत डीलरशिप से all-new Safari की डिलीवरी ली। सभी नई Tata Safari की कीमतें 14.69 लाख रुपये से शुरू होती हैं, एक्स-शोरूम और 21.45 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) तक। अभिनेता ने SUV का टॉप-एंड XZA + ऑटोमैटिक वेरिएंट खरीदा था। यह विशाल पैनोरमिक सनरूफ, विद्युत रूप से समायोज्य ड्राइवर सीट, कप्तान सीटें, टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट स्क्रीन, आईआरए कनेक्टेड कार फीचर्स, ओएस्टर व्हाइट अंदरूनी, एशवुड ग्रे थीम वाले डैशबोर्ड और इसी तरह की सुविधाओं के साथ आता है। Tata Safari 6 और 7 सीटर दोनों विकल्पों के साथ उपलब्ध है। Tata Harrier Harrier SUV पर आधारित है जिसे 2019 में भारतीय बाजार में पेश किया गया था। all-new Safari Harrier के समान प्लेटफॉर्म पर आधारित है, लेकिन Harrier की तुलना में लंबा और लंबा है। यह उसी इंजन द्वारा संचालित होता है जिसे Harrier कहा जाता है। इसमें 2.0 लीटर टर्बोचार्ज्ड डीजल इंजन मिलता है जो 170 पीएस और 350 एनएम का पीक टॉर्क जनरेट करता है। यह 6-स्पीड मैनुअल और 6-स्पीड ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन विकल्प दोनों के साथ आता है। Tata एक एडवेंचर एडिशन भी दे रही है जो XZ+ ट्रिम ऑफ़ Safari पर आधारित है। पंजाब में, जबकि समग्र ऑटो उद्योग में वृद्धि हुई है, Tata Motors ने समग्र PVs में 40% विकास YTD FY21 और अकेले SUV सेगमेंट में 16% की वृद्धि दर्ज की है। एक चुनौतीपूर्ण वर्ष में, Tata Motors ने पिछले साल अक्टूबर 2020 से हर महीने 23,000 से अधिक यूनिट की बिक्री में सफलता प्राप्त करते हुए पिछले साल भारत में यात्री वाहनों के बाजार में शानदार प्रदर्शन किया है।
घरेलू कार निर्माता कंपनी Tata Motors ने इस सप्ताह की शुरुआत में आधिकारिक तौर पर ऑल-न्यू दो हज़ार इक्कीस Safari बाजार में उतारी थी। Safari ने डीलरशिप पर पहुंचना शुरू कर दिया है और डिलीवरी भी शुरू हो गई है। Tata Motors ने अभिनेता, गायक और निर्देशक श्री Parmish Verma को पंजाब में पहली ऑल-न्यू सफ़ारी प्रदान की है। अभिनेता ने आरएसए मोटर्स, चंडीगढ़ में Tata Motors अधिकृत डीलरशिप से all-new Safari की डिलीवरी ली। सभी नई Tata Safari की कीमतें चौदह.उनहत्तर लाख रुपये से शुरू होती हैं, एक्स-शोरूम और इक्कीस.पैंतालीस लाख रुपये तक। अभिनेता ने SUV का टॉप-एंड XZA + ऑटोमैटिक वेरिएंट खरीदा था। यह विशाल पैनोरमिक सनरूफ, विद्युत रूप से समायोज्य ड्राइवर सीट, कप्तान सीटें, टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट स्क्रीन, आईआरए कनेक्टेड कार फीचर्स, ओएस्टर व्हाइट अंदरूनी, एशवुड ग्रे थीम वाले डैशबोर्ड और इसी तरह की सुविधाओं के साथ आता है। Tata Safari छः और सात सीटर दोनों विकल्पों के साथ उपलब्ध है। Tata Harrier Harrier SUV पर आधारित है जिसे दो हज़ार उन्नीस में भारतीय बाजार में पेश किया गया था। all-new Safari Harrier के समान प्लेटफॉर्म पर आधारित है, लेकिन Harrier की तुलना में लंबा और लंबा है। यह उसी इंजन द्वारा संचालित होता है जिसे Harrier कहा जाता है। इसमें दो दशमलव शून्य लीटरटर टर्बोचार्ज्ड डीजल इंजन मिलता है जो एक सौ सत्तर पीएस और तीन सौ पचास एनएम का पीक टॉर्क जनरेट करता है। यह छः-स्पीड मैनुअल और छः-स्पीड ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन विकल्प दोनों के साथ आता है। Tata एक एडवेंचर एडिशन भी दे रही है जो XZ+ ट्रिम ऑफ़ Safari पर आधारित है। पंजाब में, जबकि समग्र ऑटो उद्योग में वृद्धि हुई है, Tata Motors ने समग्र PVs में चालीस% विकास YTD FYइक्कीस और अकेले SUV सेगमेंट में सोलह% की वृद्धि दर्ज की है। एक चुनौतीपूर्ण वर्ष में, Tata Motors ने पिछले साल अक्टूबर दो हज़ार बीस से हर महीने तेईस,शून्य से अधिक यूनिट की बिक्री में सफलता प्राप्त करते हुए पिछले साल भारत में यात्री वाहनों के बाजार में शानदार प्रदर्शन किया है।
शाम का धुंधलका घिर आया था. पार्क में अच्छी ख़ासी भीड़ थी. हेमन्त और रजनी बहुत मुश्क़िल से एकांत तलाश पाए थे. गुलमोहर के एक पेड़ के नीचे हेमन्त, रजनी की गोद में सिर रखकर लेटा हुआ था. दोनों की ही आंखों में भविष्य के सपने जगमगा रहे थे. अचानक हेमन्त उठ बैठा. चंद पलों तक रजनी की आंखों में झांकने के बाद उसने उसे अपनी बांहों में भर लिया. रजनी के पूरे शरीर में सिरहन-सी दौड़ गयी. उसने अपना सिर हेमन्त के कंधों पर टिका दिया. हेमन्त ने अपने दाहिने हाथ से रजनी के सिर को सहलाया फिर उसके चेहरे को दोनों हाथों से भरकर उसके गालों पर चुंबन अंकित कर दिया. रजनी की पलकें लाज से बोझिल हो उठीं और होंठ कंपकपाने लगे. हेमन्त ने उसके चेहरे पर छायी रक्तिम आभा को निहारा फिर अपने होंठ उसके अधरों की ओर बढ़ाए. "अभी नहीं," रजनी ने अचानक अपनी हथेली को होंठों पर रख लिया और छिटककर दूर हो गयी. "क्या हुआ," हेमन्त ने पूछा. "यह ठीक नहीं है," रजनी ने कहा. हेमन्त भी खड़ा हो गया, लेकिन उसके चेहरे पर अप्रसन्नता के चिन्ह छाए हुए थे. बिना कुछ कहे वह पार्क के गेट की ओर चल दिया. रजनी ने उससे बात करने की कोशिश की, लेकिन हेमन्त ने कोई उत्तर नहीं दिया. चुपचाप चलता रहा. पार्क के बाहर हेमन्त की कार खड़ी थी. रजनी के बैठते ही उसने कार आगे बढ़ा दी. उसके चेहरे पर तनाव छाया हुआ था. बिना कुछ कहे वह कार ड्राईव कर रहा था. रजनी से हेमन्त की नाराज़गी बर्दाश्त नहीं हो रही थी. "अब क्या हुआ?" हेमन्त ने झल्लाते हुए ब्रेक लगा दिए. "मेरा सबकुछ तुम्हारी ही अमानत है, लेकिन अगर तुम्हें लगता है कि शादी से पहले वर्जनाओं को तोड़ना उचित है तो तुम्हारी जो मर्ज़ी हो, वो कर लो. मैं ना नहीं करूंगी. तुम्हारी ख़ुशी के लिए मैं कुछ भी करने को तैयार हूं," रजनी ने अपने सिर को सीट से टिकाते हुए आंखें बंद कर लीं. "यह तुम क्या कह रहे हो?" रजनी का स्वर भी कांप उठा. "हेमन्त!" रजनी ने अपनी बड़ी-बड़ी पलकों को उठाते हुए हेमन्त की ओर देखा. "हां रजनी," हेमन्त ने उसे आश्वस्त किया. उसकी आंखों में प्यार का सागर लहरा रहा था. "आई लव यू हेमन्त, आई लव यू," रजनी, हेमन्त के हाथों को चूमने लगी. "मेमसाब, यह सड़क है. लोग हमारी लव-स्टोरी को देख रहे हैं," हेमन्त ने टोका तो रजनी ने हड़बड़ाते हुए उसका हाथ छोड़ दिया. हेमन्त ने एक बार फिर कार आगे बढ़ा दी. उसके चेहरे पर छाया तनाव समाप्त हो चुका था और उसके स्थान पर एक अजीब-सी तृप्ति के भाव छाए हुए थे. रजनी को उसके हॉस्टल छोड़ने के बाद वह अपनी कोठी में आ गया. हेमन्त के पिता दिलीप राय की गिनती शहर के प्रमुख कारोबारियों में होती थी. सिविल लाईन्स में दस हज़ार स्क्वैयर फ़ीट मं उनकी शानदार कोठी बनी हुई थी. हेमन्त एमबीए फ़ाइनल ईयर का छात्र था. रजनी उसकी सहपाठनी थी. कॉलेज में हुई पहली मुलाक़ात से ही दोनों एक-दूसर को पसंद करने लगे थे. साल बीतते-बीतते दोनों में कब प्यार हो गया पता ही नहीं चला. कुछ दिनों पहले हेमन्त ने रजनी की मुलाक़ात अपने मम्मी-डैडी से करवाई थी. उन्होंने पहली नज़र में ही बेटे की पसंद को पसंद कर लिया. रजनी के पापा विमल कुमार और मम्मी सुनयना बैंगलोर की एक आईटी कंपनी में सीनियर एग्ज़ेक्यूटिव थे. दिलीप राय ने उसी दिन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उन दोनों से बात की तो वे भी इस रिश्ते के लिए राज़ी हो गए. रजनी ने उन्हें हेमन्त और उसके परिवार के बारे में काफ़ी कुछ बता रखा था. दोनों परिवार की रज़ामंदी से सगाई की तारीख़ निर्धारित हो गयी. कल सुबह की फ़्लाइट से विमल कुमार और सुनयना यहां आ रहे थे. विमल कुमार और सुनयना की फ़्लाइट सही समय से आ गयी थी. वे लोग किसी अच्छे होटल में रुकना चाहते थे, लेकिन हेमन्त की मम्मी राधिका उन्हें ज़बरदस्ती अपनी कोठी में बने गेस्ट-हाउस में लिवा लाईं. उन्होंने रजनी को भी वहीं बुलवा लिया था. थोड़ी ही देर में दोनों परिवार ऐसा घुल-मिल गए जैसे बरसों से एक-दूसरे को जानते हों. राधिका ने बाज़ार जाकर रजनी को अपनी पसंद की साड़ी और ज़ेवर दिलवाए. वे अपनी चांद-जैसी बहू को चांद से भी ज़्यादा ख़ूबसूरत देखना चाहती थीं. हेमन्त के मम्मी-डैडी का प्यार देखकर रजनी निहाल हुई जा रही थी. दिलीप राय ने मंगनी की पार्टी शहर से 20 किलोमीटर दूर अपने फ़ार्म हाउस पर रखी थी. अगले दिन शाम पांच बजे एक बड़ी गाड़ी से सभी लोग फ़ार्म-हाउस की ओर चल दिए. सभी बहुत ख़ुश थे. शहर ख़त्म होते ही गन्ने के खेत शुरू हो गए थे. अचानक एक मोड़ पर ड्राईवर ने तेज़ी से ब्रेक मारे. "साहब, वह सड़क पर कोई आदमी पड़ा है," ड्राइवर ने बताया. इससे पहले कोई कुछ समझ पाता गन्ने के खेत से चार आदमियों ने निकल कर गाड़ी को घेर लिया. सभी के हाथों में रिवाल्वर चमक रहे थे. इस बीच सड़क पर पड़ा आदमी भी उठ कर खड़ा हो गया था. "कौन हो तुम लोग और क्या चाहते हो?" दिलीप राय ने कांपते स्वर में पूछा. दोनों ने हाथों में सोने के कंगनऔर गले में हीरे का सेट पहन रखा था. उन्हें उतारकर लुटेरे को पकड़ा दिया. रजनी के गले में हल्की-सी चेन और कानों में टाप्स थे. उसने भी बिना कुछ कहे उन्हें उतार दिया. "कोई बात नहीं. इस ख़ास माल को लिए चलते हैं. पूरा मज़ा आ जाएगा," उस लुटेरे ने कहकहा लगाते हुए रजनी की कलाई थाम ली. "ऐ मेरी बेटी को हाथ मत लगाना," विमल कुमार चिल्ला पड़े. "एड्स!" उस लुटेरे की आंखें ऐसे फैल गईं जैसे किसी भूत को देख लिया हो. उसने घबरा कर रजनी की कलाई छोड़ दी. "तुम्हें एड्स है?" दूसरे लुटेरे ने आश्चर्यभरे स्वर में पूछा. "हां, साल भर पहले तुम जैसी ही किसी मेहरबान ने यह तोहफ़ा दिया था, जिसे मैं ढो रही हूं. चाहो तो तुम मेरा दुख बांट सकते हो," रजनी ने सिसकियां भरते हुए कहा. "नहीं..." वह लुटेरा घबराकर पीछे हट गया. "पापा, ख़ुद को बचाने के लिए झूठ बोलने के अलावा मेरे पास और कोई रास्ता नहीं था," रजनी फफक पड़ी. "ऊपरवाले का लाख-लाख शुक्र है, जो तुम बच गईं," सुनयना ने भी रजनी के ऊपर आशीर्वादों की बौछार कर दी. हेमन्त सामने आया मम्मी का हाथ छोड़ रजनी हेमन्त के सीने से लिपटकर रो पड़ी. उसके आंसू हेमन्त की कमीज़ भिगोने लगे. बिना कुछ कहेवह रजनी की पीठ सहलाने लगा. "यहां ज़्यादा देर रुकना ख़तरे से ख़ाली नहीं होगा. हमें जल्द से जल्द यहां से निकल जाना चाहिए," तभी दिलीप राय का गंभीर स्वर गूंजा. सभी लोग गाड़ी में बैठ गए तो ड्राइवर ने कार आगे बढ़ा दी. रंग में भंग होने से वातावरण काफ़ी गंभीर हो गया था. सभी ख़ामोश बैठे थे. किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि बात कहां से शुरू की जाए. दस किलोमीटर का बचा हुआ सफ़र काफ़ी लंबा हो गया था. सबका सामान दूसरी गाड़ी से पहले ही फ़ार्म हाउस पहुंच चुका था. रजनी और उसके मम्मी-पापा का सामान एक कमरे में रखवा दिया गया था. वे लोग तैयार होने के लिए उसमें चले गए. दिलीप राय ने पार्टी के लिए ज़बरदस्त तैयारी की थी. पूरा फ़ार्म हाउस रंगीन रौशनी से नहा रहा था. लॉन में लगाए गए ख़ूबसूरत फौव्वारों से रूमानियत कुछ और बढ़ गई थी. थोड़ी ही देर में मेहमान पहुंचने लगे, जिससे गहमा-गहमी शुरू हो गई. फ़ार्म हाउस लोगों के कहकहों से गूंजने लगा. रजनी को जैसे नई ज़िंदगी मिली थी इसलिए सुनयना उसे अपने हाथों से तैयार कर रही थीं. उनकी आंखों में बेटी के लिए स्नेह उमड़ पड़ रहा था. तैयार करने के बाद उन्होंने रजनी की ओर देखा. वह किसी अप्सरा-सी ख़ूबसूरत दिखाई पड़ रही थी. "मेरी बेटी को किसी की नज़र न लग जाए," सुनयना ने मुस्कुरातेहुए हेयर-क्लिप से छुआकर रजनी के माथे पर काजल का हल्का-सा टीका लगा दिया. "सुनयना, बाहर ख़ामोशी-सी क्यूंछा गयी है?" तभी विमल कुमार ने आशंकित स्वर में कहा. "हां, अभी तक तो काफ़ी शोर-गुल था, लेकिन अचानक सभी चुप हो गए हैं. देखिए ना, क्या बात है." सुनयना का मन किसी अनहोनी की आशंका से कांप उठा. विमल कुमार कमरे से बाहर निकले. हेमन्त के परिवार और दो-चार नौकरों के अलावा उन्हें और कोई नहीं पहचानता था. उन्होंने इधर-उधर देखा. हाल में मेहमानों की भीड़ जमा थी, पर सभी धीमे स्वर में बातें कर रहे थे. से पूछा. "पार्टी कैंसिल हो गई है," उस आदमी ने जवाब दिया. "लेकिन क्यों?" विमल कुमार का कलेजा मुंह को आ गया. "कुछ पता नहीं चल पा रहा है," उस आदमी के चेहरे पर भी खिन्नता के चिन्ह उभर आए. "उस कमरे में," नौकर ने एक कमरे की ओर इशारा किया और तेज़ी से आगे बढ़ गया. विमल कुमार लड़खड़ाते क़दमों से उस कमरे की ओर बढ़े. आधा रास्ता तय करने के बाद कुछ सोचकर वे रुक गए और अपने कमरे की ओर लौट पड़े. "क्या हुआ?" सुनयना ने पति के उतरे हुए चेहरे को देखते ही पूछा. "किसलिए?" सुनयना का सर्वांग कांप उठा. शायद आनेवाले ख़तरे का उसे आभास हो गया था. "पता नहीं. चलो समधी साहब से पूछते हैं," विमल कुमार हताशा से भर उठे. मन में आशंकाओं का तूफ़ान लिए दोनों दिलीप राय के कमरे की ओर बढ़े. वहां दिलीप राय, राधिका और हेमंत सोफ़े पर बैठे हुए थे. सबके चेहरे पर तनाव छाया हुआ था. विमल कुमार और सुनयना को देखकर किसी ने कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की. "भाई साहब, हमसे कोई ग़लती हो गई है क्या?" विमल कुमार ने हाथ जोड़ते हुए पूछा. "ग़लती आपसे नहीं, बल्कि आपकी बेटी से हुई है," दिलीप राय ने धीमे स्वर में कहा. "कैसी ग़लती?" विमल कुमार का स्वर बुझे दिये-सा कांप उठा. "उसने सबके सामने क़बूला था कि उसे एड्स है. फिर भी आप पूछ रहे हैं कैसी ग़लती?" राधिका का चेहरा तमतमा उठा. "लेकिन बहनजी उस बेचारी ने तो ख़ुद को बचाने के लिए झूठ बोला था," सुनयना ने बात संभालने की कोशिश की. "लेकिन इस बदनामी से तो मेरी बेटी की ज़िंदगी बर्बाद हो जाएगी. हम अपने रिश्तेदारों को क्या जवाब देंगे. वहां पर जो परिस्थितियां थीं, उसके आप स्वयं साक्षी रहे हैं. उसने तो अपनी अक्लमंदी से अपनी ज़िंदगी और हम सबकी भी इज़्ज़त बचाई है. उसे इस तरह मत ठुकराइए." विमल कुमार का स्वर भर्रा उठा और उन्होंने दिलीप राय के आगे अनुनय करते हुए अपने दोनों हाथ जोड़ दिए. "रुक जाइए डैडी, मेरी ख़ातिर ख़ुद को इतना छोटा मत बनाइए," तभी रजनी ने पीछे से आकर उन्हें थाम लिया. कमरे के बाहर से ही उसने सारी बातें सुन ली थीं. मदद की आस से उसने हेमन्त की ओर नज़र दौड़ाई, लेकिन वो तो प्रतिक्रियाहीन-सा ही बैठा रहा. रजनी ने एक गहरी सांस भरी फिर दिलीप राय की ओर मुड़ते हुए बोली, "उससे क्या होगा? अग्नि परीक्षा तो सीता ने भी दी थी फिर भी लोगों का मुंह बंद नहीं हुआ था. हम तो मामूली लोग हैं. हम किस-किस का मुंह बंद करेंगे? हमें तुम माफ़ ही कर दो," राधिका ने जैसे दो टूक फ़ैसला सुनाया. "मम्मी-डैडी ने मुझे पाला-पोसा है. मैं उनकी बात नहीं टाल सकता." हेमन्त ने आंखें झुका लीं. वह रजनी की आंखों की ताब सह न सका. "तो क्या तुम्हारी कसमें और प्यार के वादे झूठे थे हेमन्त?" रजनी के स्वर में कंपन था. "कुछ भी झूठ नहीं था, मगर मैं जानबूझ कर तो मक्खी नहीं निगल सकता," हेमन्त झल्लाते हुए खड़ा हो गया. "मक्खी?" अपमान और पीड़ा से रजनी का स्वर भीग गया. उसे अपने सुने पर विश्वास नहीं हो रहा था. उसे लग रहा था कि जो कुछ भी उसके कानों ने सुना है, वो सच नहीं है और हेमन्त अभी उसे अपनी बांहों में भर कर प्यारभरे स्वर में कहेगा कि मेरा-तुम्हारा तो जन्म-जन्मांतर का साथ है. मैं तो बस मज़ाक कर रहा था. लेकिन सच तो अपनी पूर्ण प्रचंडता के साथ सामने खड़ा था. "रजनी..." हेमन्त को सांप सूंघ गया. ऐसा लगा जैसे उसे किसी ने सरे बाज़ार नंगा कर दिया गया हो. उसकी समझ में ही नहीं आ रहा था कि क्या कहे. बेटी के सधे क़दमों को देख विमल कुमार के डगमगाते क़दम संभल गए. उन्होंने अपनी बेटी और पत्नी का हाथ मज़बूती से थामा और कमरे बाहर निकल पड़े. उन्हें देखकर भीड़ काई की तरह कटने लगी. किसी में उन्हें रोकने का साहस न था और हेमन्त पत्थर की मूर्ति-सा जड़वत, अपलक अपनी ज़िंदगी को दूर जाते देख रहा था.
शाम का धुंधलका घिर आया था. पार्क में अच्छी ख़ासी भीड़ थी. हेमन्त और रजनी बहुत मुश्क़िल से एकांत तलाश पाए थे. गुलमोहर के एक पेड़ के नीचे हेमन्त, रजनी की गोद में सिर रखकर लेटा हुआ था. दोनों की ही आंखों में भविष्य के सपने जगमगा रहे थे. अचानक हेमन्त उठ बैठा. चंद पलों तक रजनी की आंखों में झांकने के बाद उसने उसे अपनी बांहों में भर लिया. रजनी के पूरे शरीर में सिरहन-सी दौड़ गयी. उसने अपना सिर हेमन्त के कंधों पर टिका दिया. हेमन्त ने अपने दाहिने हाथ से रजनी के सिर को सहलाया फिर उसके चेहरे को दोनों हाथों से भरकर उसके गालों पर चुंबन अंकित कर दिया. रजनी की पलकें लाज से बोझिल हो उठीं और होंठ कंपकपाने लगे. हेमन्त ने उसके चेहरे पर छायी रक्तिम आभा को निहारा फिर अपने होंठ उसके अधरों की ओर बढ़ाए. "अभी नहीं," रजनी ने अचानक अपनी हथेली को होंठों पर रख लिया और छिटककर दूर हो गयी. "क्या हुआ," हेमन्त ने पूछा. "यह ठीक नहीं है," रजनी ने कहा. हेमन्त भी खड़ा हो गया, लेकिन उसके चेहरे पर अप्रसन्नता के चिन्ह छाए हुए थे. बिना कुछ कहे वह पार्क के गेट की ओर चल दिया. रजनी ने उससे बात करने की कोशिश की, लेकिन हेमन्त ने कोई उत्तर नहीं दिया. चुपचाप चलता रहा. पार्क के बाहर हेमन्त की कार खड़ी थी. रजनी के बैठते ही उसने कार आगे बढ़ा दी. उसके चेहरे पर तनाव छाया हुआ था. बिना कुछ कहे वह कार ड्राईव कर रहा था. रजनी से हेमन्त की नाराज़गी बर्दाश्त नहीं हो रही थी. "अब क्या हुआ?" हेमन्त ने झल्लाते हुए ब्रेक लगा दिए. "मेरा सबकुछ तुम्हारी ही अमानत है, लेकिन अगर तुम्हें लगता है कि शादी से पहले वर्जनाओं को तोड़ना उचित है तो तुम्हारी जो मर्ज़ी हो, वो कर लो. मैं ना नहीं करूंगी. तुम्हारी ख़ुशी के लिए मैं कुछ भी करने को तैयार हूं," रजनी ने अपने सिर को सीट से टिकाते हुए आंखें बंद कर लीं. "यह तुम क्या कह रहे हो?" रजनी का स्वर भी कांप उठा. "हेमन्त!" रजनी ने अपनी बड़ी-बड़ी पलकों को उठाते हुए हेमन्त की ओर देखा. "हां रजनी," हेमन्त ने उसे आश्वस्त किया. उसकी आंखों में प्यार का सागर लहरा रहा था. "आई लव यू हेमन्त, आई लव यू," रजनी, हेमन्त के हाथों को चूमने लगी. "मेमसाब, यह सड़क है. लोग हमारी लव-स्टोरी को देख रहे हैं," हेमन्त ने टोका तो रजनी ने हड़बड़ाते हुए उसका हाथ छोड़ दिया. हेमन्त ने एक बार फिर कार आगे बढ़ा दी. उसके चेहरे पर छाया तनाव समाप्त हो चुका था और उसके स्थान पर एक अजीब-सी तृप्ति के भाव छाए हुए थे. रजनी को उसके हॉस्टल छोड़ने के बाद वह अपनी कोठी में आ गया. हेमन्त के पिता दिलीप राय की गिनती शहर के प्रमुख कारोबारियों में होती थी. सिविल लाईन्स में दस हज़ार स्क्वैयर फ़ीट मं उनकी शानदार कोठी बनी हुई थी. हेमन्त एमबीए फ़ाइनल ईयर का छात्र था. रजनी उसकी सहपाठनी थी. कॉलेज में हुई पहली मुलाक़ात से ही दोनों एक-दूसर को पसंद करने लगे थे. साल बीतते-बीतते दोनों में कब प्यार हो गया पता ही नहीं चला. कुछ दिनों पहले हेमन्त ने रजनी की मुलाक़ात अपने मम्मी-डैडी से करवाई थी. उन्होंने पहली नज़र में ही बेटे की पसंद को पसंद कर लिया. रजनी के पापा विमल कुमार और मम्मी सुनयना बैंगलोर की एक आईटी कंपनी में सीनियर एग्ज़ेक्यूटिव थे. दिलीप राय ने उसी दिन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उन दोनों से बात की तो वे भी इस रिश्ते के लिए राज़ी हो गए. रजनी ने उन्हें हेमन्त और उसके परिवार के बारे में काफ़ी कुछ बता रखा था. दोनों परिवार की रज़ामंदी से सगाई की तारीख़ निर्धारित हो गयी. कल सुबह की फ़्लाइट से विमल कुमार और सुनयना यहां आ रहे थे. विमल कुमार और सुनयना की फ़्लाइट सही समय से आ गयी थी. वे लोग किसी अच्छे होटल में रुकना चाहते थे, लेकिन हेमन्त की मम्मी राधिका उन्हें ज़बरदस्ती अपनी कोठी में बने गेस्ट-हाउस में लिवा लाईं. उन्होंने रजनी को भी वहीं बुलवा लिया था. थोड़ी ही देर में दोनों परिवार ऐसा घुल-मिल गए जैसे बरसों से एक-दूसरे को जानते हों. राधिका ने बाज़ार जाकर रजनी को अपनी पसंद की साड़ी और ज़ेवर दिलवाए. वे अपनी चांद-जैसी बहू को चांद से भी ज़्यादा ख़ूबसूरत देखना चाहती थीं. हेमन्त के मम्मी-डैडी का प्यार देखकर रजनी निहाल हुई जा रही थी. दिलीप राय ने मंगनी की पार्टी शहर से बीस किलोग्राममीटर दूर अपने फ़ार्म हाउस पर रखी थी. अगले दिन शाम पांच बजे एक बड़ी गाड़ी से सभी लोग फ़ार्म-हाउस की ओर चल दिए. सभी बहुत ख़ुश थे. शहर ख़त्म होते ही गन्ने के खेत शुरू हो गए थे. अचानक एक मोड़ पर ड्राईवर ने तेज़ी से ब्रेक मारे. "साहब, वह सड़क पर कोई आदमी पड़ा है," ड्राइवर ने बताया. इससे पहले कोई कुछ समझ पाता गन्ने के खेत से चार आदमियों ने निकल कर गाड़ी को घेर लिया. सभी के हाथों में रिवाल्वर चमक रहे थे. इस बीच सड़क पर पड़ा आदमी भी उठ कर खड़ा हो गया था. "कौन हो तुम लोग और क्या चाहते हो?" दिलीप राय ने कांपते स्वर में पूछा. दोनों ने हाथों में सोने के कंगनऔर गले में हीरे का सेट पहन रखा था. उन्हें उतारकर लुटेरे को पकड़ा दिया. रजनी के गले में हल्की-सी चेन और कानों में टाप्स थे. उसने भी बिना कुछ कहे उन्हें उतार दिया. "कोई बात नहीं. इस ख़ास माल को लिए चलते हैं. पूरा मज़ा आ जाएगा," उस लुटेरे ने कहकहा लगाते हुए रजनी की कलाई थाम ली. "ऐ मेरी बेटी को हाथ मत लगाना," विमल कुमार चिल्ला पड़े. "एड्स!" उस लुटेरे की आंखें ऐसे फैल गईं जैसे किसी भूत को देख लिया हो. उसने घबरा कर रजनी की कलाई छोड़ दी. "तुम्हें एड्स है?" दूसरे लुटेरे ने आश्चर्यभरे स्वर में पूछा. "हां, साल भर पहले तुम जैसी ही किसी मेहरबान ने यह तोहफ़ा दिया था, जिसे मैं ढो रही हूं. चाहो तो तुम मेरा दुख बांट सकते हो," रजनी ने सिसकियां भरते हुए कहा. "नहीं..." वह लुटेरा घबराकर पीछे हट गया. "पापा, ख़ुद को बचाने के लिए झूठ बोलने के अलावा मेरे पास और कोई रास्ता नहीं था," रजनी फफक पड़ी. "ऊपरवाले का लाख-लाख शुक्र है, जो तुम बच गईं," सुनयना ने भी रजनी के ऊपर आशीर्वादों की बौछार कर दी. हेमन्त सामने आया मम्मी का हाथ छोड़ रजनी हेमन्त के सीने से लिपटकर रो पड़ी. उसके आंसू हेमन्त की कमीज़ भिगोने लगे. बिना कुछ कहेवह रजनी की पीठ सहलाने लगा. "यहां ज़्यादा देर रुकना ख़तरे से ख़ाली नहीं होगा. हमें जल्द से जल्द यहां से निकल जाना चाहिए," तभी दिलीप राय का गंभीर स्वर गूंजा. सभी लोग गाड़ी में बैठ गए तो ड्राइवर ने कार आगे बढ़ा दी. रंग में भंग होने से वातावरण काफ़ी गंभीर हो गया था. सभी ख़ामोश बैठे थे. किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि बात कहां से शुरू की जाए. दस किलोमीटर का बचा हुआ सफ़र काफ़ी लंबा हो गया था. सबका सामान दूसरी गाड़ी से पहले ही फ़ार्म हाउस पहुंच चुका था. रजनी और उसके मम्मी-पापा का सामान एक कमरे में रखवा दिया गया था. वे लोग तैयार होने के लिए उसमें चले गए. दिलीप राय ने पार्टी के लिए ज़बरदस्त तैयारी की थी. पूरा फ़ार्म हाउस रंगीन रौशनी से नहा रहा था. लॉन में लगाए गए ख़ूबसूरत फौव्वारों से रूमानियत कुछ और बढ़ गई थी. थोड़ी ही देर में मेहमान पहुंचने लगे, जिससे गहमा-गहमी शुरू हो गई. फ़ार्म हाउस लोगों के कहकहों से गूंजने लगा. रजनी को जैसे नई ज़िंदगी मिली थी इसलिए सुनयना उसे अपने हाथों से तैयार कर रही थीं. उनकी आंखों में बेटी के लिए स्नेह उमड़ पड़ रहा था. तैयार करने के बाद उन्होंने रजनी की ओर देखा. वह किसी अप्सरा-सी ख़ूबसूरत दिखाई पड़ रही थी. "मेरी बेटी को किसी की नज़र न लग जाए," सुनयना ने मुस्कुरातेहुए हेयर-क्लिप से छुआकर रजनी के माथे पर काजल का हल्का-सा टीका लगा दिया. "सुनयना, बाहर ख़ामोशी-सी क्यूंछा गयी है?" तभी विमल कुमार ने आशंकित स्वर में कहा. "हां, अभी तक तो काफ़ी शोर-गुल था, लेकिन अचानक सभी चुप हो गए हैं. देखिए ना, क्या बात है." सुनयना का मन किसी अनहोनी की आशंका से कांप उठा. विमल कुमार कमरे से बाहर निकले. हेमन्त के परिवार और दो-चार नौकरों के अलावा उन्हें और कोई नहीं पहचानता था. उन्होंने इधर-उधर देखा. हाल में मेहमानों की भीड़ जमा थी, पर सभी धीमे स्वर में बातें कर रहे थे. से पूछा. "पार्टी कैंसिल हो गई है," उस आदमी ने जवाब दिया. "लेकिन क्यों?" विमल कुमार का कलेजा मुंह को आ गया. "कुछ पता नहीं चल पा रहा है," उस आदमी के चेहरे पर भी खिन्नता के चिन्ह उभर आए. "उस कमरे में," नौकर ने एक कमरे की ओर इशारा किया और तेज़ी से आगे बढ़ गया. विमल कुमार लड़खड़ाते क़दमों से उस कमरे की ओर बढ़े. आधा रास्ता तय करने के बाद कुछ सोचकर वे रुक गए और अपने कमरे की ओर लौट पड़े. "क्या हुआ?" सुनयना ने पति के उतरे हुए चेहरे को देखते ही पूछा. "किसलिए?" सुनयना का सर्वांग कांप उठा. शायद आनेवाले ख़तरे का उसे आभास हो गया था. "पता नहीं. चलो समधी साहब से पूछते हैं," विमल कुमार हताशा से भर उठे. मन में आशंकाओं का तूफ़ान लिए दोनों दिलीप राय के कमरे की ओर बढ़े. वहां दिलीप राय, राधिका और हेमंत सोफ़े पर बैठे हुए थे. सबके चेहरे पर तनाव छाया हुआ था. विमल कुमार और सुनयना को देखकर किसी ने कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की. "भाई साहब, हमसे कोई ग़लती हो गई है क्या?" विमल कुमार ने हाथ जोड़ते हुए पूछा. "ग़लती आपसे नहीं, बल्कि आपकी बेटी से हुई है," दिलीप राय ने धीमे स्वर में कहा. "कैसी ग़लती?" विमल कुमार का स्वर बुझे दिये-सा कांप उठा. "उसने सबके सामने क़बूला था कि उसे एड्स है. फिर भी आप पूछ रहे हैं कैसी ग़लती?" राधिका का चेहरा तमतमा उठा. "लेकिन बहनजी उस बेचारी ने तो ख़ुद को बचाने के लिए झूठ बोला था," सुनयना ने बात संभालने की कोशिश की. "लेकिन इस बदनामी से तो मेरी बेटी की ज़िंदगी बर्बाद हो जाएगी. हम अपने रिश्तेदारों को क्या जवाब देंगे. वहां पर जो परिस्थितियां थीं, उसके आप स्वयं साक्षी रहे हैं. उसने तो अपनी अक्लमंदी से अपनी ज़िंदगी और हम सबकी भी इज़्ज़त बचाई है. उसे इस तरह मत ठुकराइए." विमल कुमार का स्वर भर्रा उठा और उन्होंने दिलीप राय के आगे अनुनय करते हुए अपने दोनों हाथ जोड़ दिए. "रुक जाइए डैडी, मेरी ख़ातिर ख़ुद को इतना छोटा मत बनाइए," तभी रजनी ने पीछे से आकर उन्हें थाम लिया. कमरे के बाहर से ही उसने सारी बातें सुन ली थीं. मदद की आस से उसने हेमन्त की ओर नज़र दौड़ाई, लेकिन वो तो प्रतिक्रियाहीन-सा ही बैठा रहा. रजनी ने एक गहरी सांस भरी फिर दिलीप राय की ओर मुड़ते हुए बोली, "उससे क्या होगा? अग्नि परीक्षा तो सीता ने भी दी थी फिर भी लोगों का मुंह बंद नहीं हुआ था. हम तो मामूली लोग हैं. हम किस-किस का मुंह बंद करेंगे? हमें तुम माफ़ ही कर दो," राधिका ने जैसे दो टूक फ़ैसला सुनाया. "मम्मी-डैडी ने मुझे पाला-पोसा है. मैं उनकी बात नहीं टाल सकता." हेमन्त ने आंखें झुका लीं. वह रजनी की आंखों की ताब सह न सका. "तो क्या तुम्हारी कसमें और प्यार के वादे झूठे थे हेमन्त?" रजनी के स्वर में कंपन था. "कुछ भी झूठ नहीं था, मगर मैं जानबूझ कर तो मक्खी नहीं निगल सकता," हेमन्त झल्लाते हुए खड़ा हो गया. "मक्खी?" अपमान और पीड़ा से रजनी का स्वर भीग गया. उसे अपने सुने पर विश्वास नहीं हो रहा था. उसे लग रहा था कि जो कुछ भी उसके कानों ने सुना है, वो सच नहीं है और हेमन्त अभी उसे अपनी बांहों में भर कर प्यारभरे स्वर में कहेगा कि मेरा-तुम्हारा तो जन्म-जन्मांतर का साथ है. मैं तो बस मज़ाक कर रहा था. लेकिन सच तो अपनी पूर्ण प्रचंडता के साथ सामने खड़ा था. "रजनी..." हेमन्त को सांप सूंघ गया. ऐसा लगा जैसे उसे किसी ने सरे बाज़ार नंगा कर दिया गया हो. उसकी समझ में ही नहीं आ रहा था कि क्या कहे. बेटी के सधे क़दमों को देख विमल कुमार के डगमगाते क़दम संभल गए. उन्होंने अपनी बेटी और पत्नी का हाथ मज़बूती से थामा और कमरे बाहर निकल पड़े. उन्हें देखकर भीड़ काई की तरह कटने लगी. किसी में उन्हें रोकने का साहस न था और हेमन्त पत्थर की मूर्ति-सा जड़वत, अपलक अपनी ज़िंदगी को दूर जाते देख रहा था.
रायपुर- बुधवार को कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल पत्रकारों के पूछे गए सवाल से बौखला गए. मामला किसानों की आत्महत्या का था. सवाल से मंत्री जी इतने गुस्से में दिखाई दिए कि वे पत्रकारों को ही धमकाने लगे. उलटा पत्रकार से पूछने लगे कि ये कोई सवाल है? फसल बीमा क्या है? आप कहां के पत्रकार हैं? पढ़े-लिखे हो या नहीं ? आप पत्रकार हो क्या या नहीं ? मंत्री का ये अंदाज बेदह आपत्तिजनक था, लेकिन जैसे ही मंत्री जी को याद आया कि कैमरे सामने तने हैं, वो फौरन संभल गए और फिर सवाल का जवाब देने लगे, लेकिन इस नसीहत के साथ की बहस मत करो ? पत्रकार सवाल पूछे तो बहस करना नहीं होता? तर्क और दलील दे, तो इसे भी बहस नहीं कहते ? लेकिन सत्ता जब पूरे परवान पर चढ़ी हो, तो अच्छे-अच्छे रंग दिखाने लगते हैं और जब सत्ता तीन बार की हो तो फिर कहना क्या? पत्रकारों को मंत्री की दी गई सीख पर प्रतिक्रिया होनी ही चाहिए. आइए बताते हैं कि मामला था क्या ? दरअसल महासमुंद और धमतरी के मृत किसानों के परिजन उम्मीद की बांट जोहकर कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल से मिलने पहुंचे थे. किसानों के मन में इस बात को लेकर टीस थी कि खेती-किसानी के लिए लिए गए कर्ज को नहीं पटा पाने की वजह से उनके अपनों ने दुनिया छोड़ दी, लेकिन सरकारी रिपोर्ट में आत्महत्या की वजह पारिवारिक विवाद बता दिया गया. परिजनों के दिल में पीड़ा थी, तो आंखें डबडबायी हुई, लेकिन उस पर भी मंत्री की संवेदना का मरहम उन्हें नसीब नहीं हुआ. किसान चाहते थे कि जिन हालातों से जूझकर उनके अपनों ने दुनिया से अलविदा कहना ही बेहतर समझा, उन हालातों से उन्हें निजात मिल जाए, किसान चाहते थे कि कर्ज के जिस बोझ तले वे दबे हैं, उससे उन्हें मुक्ति दिला दी जाए, किसान चाहते थे कि जिस परिवार के किसान की मेहनत से परिवार का पोषण होता था, उन परिवारों की सरकार सुध ले ले, किसान चाहते थे कि बच्चों को बेहतर शिक्षा मुहैया करा दी जाए. लेकिन किसानों के सुख-दुख के हितैषी बनने का तमगा लगाने वाले सरकार के कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने किसानों की भावनाओं की कीमत भी तय कर दी. मृत किसानों के परिजनों को स्वेच्छानुदान मद से 25-25 हजार रुपए देने का ऐलान कर दिया. किसानों की मंत्री से मुलाकात के बीच मृतक किसानों के परिजन फूट-फूटकर रोने लगे. किसान परिवार मंत्री के उस कांधे का सहारा चाहता था, लेकिन सहारा तो दूर किसानों के हिस्से मंत्री की नाराजगी आई. किसानों की संवेदनाओं पर मरहम लगाने की नौटंकी सिर्फ सरकार के नुमाइंदों ने नहीं की, बल्कि कांग्रेस ने भी भावनाओं को खूब कुरेदा और जमकर छला. कांग्रेस ने ऐलान किया था कि मृत किसानों के परिजनों को 50-50 हजार रूपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी, लेकिन ऐलान करने के बाद शायद कांग्रेस ये सहायता राशि देना भूल गई. किसान इसकी अब भी बांट जोह रहे हैं.
रायपुर- बुधवार को कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल पत्रकारों के पूछे गए सवाल से बौखला गए. मामला किसानों की आत्महत्या का था. सवाल से मंत्री जी इतने गुस्से में दिखाई दिए कि वे पत्रकारों को ही धमकाने लगे. उलटा पत्रकार से पूछने लगे कि ये कोई सवाल है? फसल बीमा क्या है? आप कहां के पत्रकार हैं? पढ़े-लिखे हो या नहीं ? आप पत्रकार हो क्या या नहीं ? मंत्री का ये अंदाज बेदह आपत्तिजनक था, लेकिन जैसे ही मंत्री जी को याद आया कि कैमरे सामने तने हैं, वो फौरन संभल गए और फिर सवाल का जवाब देने लगे, लेकिन इस नसीहत के साथ की बहस मत करो ? पत्रकार सवाल पूछे तो बहस करना नहीं होता? तर्क और दलील दे, तो इसे भी बहस नहीं कहते ? लेकिन सत्ता जब पूरे परवान पर चढ़ी हो, तो अच्छे-अच्छे रंग दिखाने लगते हैं और जब सत्ता तीन बार की हो तो फिर कहना क्या? पत्रकारों को मंत्री की दी गई सीख पर प्रतिक्रिया होनी ही चाहिए. आइए बताते हैं कि मामला था क्या ? दरअसल महासमुंद और धमतरी के मृत किसानों के परिजन उम्मीद की बांट जोहकर कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल से मिलने पहुंचे थे. किसानों के मन में इस बात को लेकर टीस थी कि खेती-किसानी के लिए लिए गए कर्ज को नहीं पटा पाने की वजह से उनके अपनों ने दुनिया छोड़ दी, लेकिन सरकारी रिपोर्ट में आत्महत्या की वजह पारिवारिक विवाद बता दिया गया. परिजनों के दिल में पीड़ा थी, तो आंखें डबडबायी हुई, लेकिन उस पर भी मंत्री की संवेदना का मरहम उन्हें नसीब नहीं हुआ. किसान चाहते थे कि जिन हालातों से जूझकर उनके अपनों ने दुनिया से अलविदा कहना ही बेहतर समझा, उन हालातों से उन्हें निजात मिल जाए, किसान चाहते थे कि कर्ज के जिस बोझ तले वे दबे हैं, उससे उन्हें मुक्ति दिला दी जाए, किसान चाहते थे कि जिस परिवार के किसान की मेहनत से परिवार का पोषण होता था, उन परिवारों की सरकार सुध ले ले, किसान चाहते थे कि बच्चों को बेहतर शिक्षा मुहैया करा दी जाए. लेकिन किसानों के सुख-दुख के हितैषी बनने का तमगा लगाने वाले सरकार के कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने किसानों की भावनाओं की कीमत भी तय कर दी. मृत किसानों के परिजनों को स्वेच्छानुदान मद से पच्चीस-पच्चीस हजार रुपए देने का ऐलान कर दिया. किसानों की मंत्री से मुलाकात के बीच मृतक किसानों के परिजन फूट-फूटकर रोने लगे. किसान परिवार मंत्री के उस कांधे का सहारा चाहता था, लेकिन सहारा तो दूर किसानों के हिस्से मंत्री की नाराजगी आई. किसानों की संवेदनाओं पर मरहम लगाने की नौटंकी सिर्फ सरकार के नुमाइंदों ने नहीं की, बल्कि कांग्रेस ने भी भावनाओं को खूब कुरेदा और जमकर छला. कांग्रेस ने ऐलान किया था कि मृत किसानों के परिजनों को पचास-पचास हजार रूपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी, लेकिन ऐलान करने के बाद शायद कांग्रेस ये सहायता राशि देना भूल गई. किसान इसकी अब भी बांट जोह रहे हैं.
[ विपाकसूत्र - प्रथम श्र नकन्ध ११ -ण से सगडे दारए सुदरिसणाए गणियाए गिहाओ निच्छुभेमाणे सुदरिसणाए गणियाए सुच्छिए गिद्ध गढिए ज्झोववणे अण्णत्थ कत्थई सुइं च रइ च धिइं च लभमाणे तच्चित्ते तम्मणे तल्लेसे तदज्झवसाणे तदट्ठोवउत्ते तदप्पियकरणे तब्भावणाभाविए सुदरिसणाए गणियाए बहूणि अंतराणि य छिद्दाणि य विवराणि य पडिजागरमाणे पडिजागरमाणे विहरइ । तए ण से सगडे दारए अन्नया कयाइ सुरिसणाए गणियाए अतरं लभेइ लभेत्ता सुदरिसणाए गणियाए गिह रहसिय अणुष्पविसइ, प्रणुप्पविसित्ता सुदरिसणाए सद्धि उरालाइ माणुस्सगाइ भोगभोगाइ भुजमाणे विहरइ । घर से निकाला गया शकट सुदर्शना वेश्या मे मूच्छित, गृद्ध, अत्यन्त आसक्त होकर अन्यत्र सुख चैन, रति, शान्ति नही पा रहा था । उसका चित्त, मन, लेग्या अव्यवसाय उसी मे लीन रहता था । वह सुदर्शना के विषय मे ही सोचा करता, उसमे करणो को लगाए रहता, उसी की भावना से भावित रहता । वह उसके पास जाने की ताक मे रहता और अवसर देखता रहता था । एक बार उसे अवसर मिल गया । वह सुदगंता के घर में घुस गया और फिर उसके साथ भोग भोगने लगा । १२ - इम च ण सुसेणे प्रमच्चे पहाए जाव सव्वालकारविभूसिए मणुस्सवग्गुराए परिक्खित्ते जेणेव सुदरिसणाए गणियाए गेहे तेणेव उवागच्छड उवागच्छित्ता सगडं दारयं सुदरिसणाए गणियाए सद्धि उरालाइ भोग भोगाई भु जमाणं पासइ, पासित्ता प्रासुरुत्ते जाव मिसमिसेमाणे तिवलिय भिड निडाले साहट्ट सगड दारय पुरिसेहि गिव्हावेड, गिण्हावेत्ता श्रट्टि जाव (मुट्ठि-जाणु-कोप्पर पहारसभग्गमहिय करेइ, करित्ता प्रवप्रोडयबन्धण करेइ, करेत्ता जेणेव महचदे राया तेणेव उवागच्छइ, उवागच्छित्ता करयल जाव एवं वयासी - ' एवं खलु सामी ! सगडे दारए मम अतेउरंसिप्रवरद्ध ।' तए णं से महचदे राया सुसेण श्रमच्चं एवं वयासी- 'तुमं चेव णं, देवाणुप्पिया ! सगडस्स दारगस्स दंड वत्तेहि ।' तए ण से सुसेणे श्रमच्चे महचदेणं रत्ना श्रव्भणुन्नाए समाणे सगडं दारयं मुदरिसण च गणियं एएण विहाणेणं वन्य प्राण । त एव खलु, गोयमा । सगडे दारए पुरापोराणाण दुच्चिण्णाण जाव पच्चणुभवमाणे विहरइ । १२ - इधर एक दिन स्नान करके तथा सर्व अलङ्कारो से विभूषित होकर अनेक मनुष्यों से परिवेष्टित सुसेण मन्त्री सुदर्शना के घर पर आया । आते ही उसने सुदर्शना के साथ यथारुचि कामभोगो का उपभोग करते हुए शकट कुमार को देखा । देखकर वह क्रोध के वग लाल-पीला हो, दात पीसता हुआ मस्तक पर तीन सल वाली भृकुटि चढा लेता है । शकट कुमार को अपने पुरुषो से पकडवाकर यष्टियो, मुट्ठियो, घुटनो, कोहनियों से उसके शरीर को मथित कर अवकोटकवन्धन से जकडवा लेता है। तदनन्तर उसे महाराज महचन्द्र के पास ले जाकर दोनो हाथ जोडकर तथा मस्तक पर दसो नखवाली अञ्जलि करके इस प्रकार निवेदन करता है - 'स्वामिन् 1 इस शकट कुमार ने मेरे अन्त पुर मे प्रवेश करने का अपराध किया है ।' चतुर्थ अध्ययन शकट ] इसके उत्तर मे महाराज महचन्द्र सुषेण मन्त्री से इस प्रकार वोले- 'देवानुप्रिय इसको अपनी इच्छानुसार दण्ड दे सकते हो ।' शकट का भविष्य तत्पश्चात् महाराज महचन्द्र से प्रज्ञा प्राप्त कर सुषेण अमात्य ने शकट कुमार और सुदर्शना गणिका को पूर्वोक्त विधि से (जिसे हे गौतम । तुमने देखा है) वध करने की आज्ञा राजपुरुषो को प्रदान की । तुम ही १३ - सगड णं भंते ! दारए कालगए कहि गच्छिहि कहि उववज्जिहिइ ? गोयमा ! सगडे णं दारए सत्तावन्न वासाई परमाउय पालइत्ता प्रज्जेव तिभागावसेसे दिवसे एग महं प्रयोमयं तत्त समजोइनूय इत्थिपडिमं प्रवासाविए समाणे कालमासे कालं किच्चा इमीसे रयणप्पभाए पुढवीए नेरइयत्ताए उववज्जिहिइ । से णं तश्रो प्रणतर उव्वट्टित्ता रायगिहे नयरे मातगकुलंसि जुगलत्ताए पच्चायाहिद । तए ण तस्स दारगस्स श्रम्मापियरो निव्वत्तवारसाहस्स इम एयारूव गोण्ण नामघेज्ज करिस्संति- 'त होउ णं दारए सगडे नामेण, होउ णं दारिया सुदरिसणा नामेणं ।' १३ - शकट की दुर्दशा का कारण भगवान् से सुनकर गौतम स्वामी ने प्रश्न किया - हे प्रभो । शकट कुमार वालक यहां से काल करके कहाँ जाएगा और कहाँ पर उत्पन्न होगा ? भगवान् बोले- हे गौतम । शकट दारक को ५७ वर्ष की परम आयु को भोगकर आज ही तीसरा भाग शेप रहे दिन में एक महालोहमय तपी हुई अग्नि के समान देदीप्यमान स्त्रीप्रतिमा से लिंगित कराया जायगा । तब वह मृत्यु- समय मे मरकर रत्नप्रभा नाम की प्रथम नरक भूमि मे नारक रूप से उत्पन्न होगा 1 यहाँ से निकलकर राजगृह नगर मे मातङ्ग--चाण्डाल के कुल मे युगल रूप से उत्पन्न होगा । युगल (वे दो बच्चे जो एक ही गर्भ से साथ-साथ उत्पन्न हुए हो) के माता-पिता वारहवें दिन उनमे से बालक का नाम 'शकटकुमार' और कन्या का नाम 'सुदर्शना' रक्खेगे । १४ - तए ण से सगडे दारए उम्मूषकवालभावे विण्णयपरिणयमेत्ते जोव्वणगमणुपत्ते भविस्सइ । तए णं सा सुदरिसणा वि दारिया उम्मुक्कवालभावा जोव्वणगमणुष्पत्ता रूवेण य जोव्वणेण लावणेण य उधिकट्टा उविकटुसरीरा यावि भविस्सइ । तए णं से सगडे दारए सुदरिसणाए रूवेण य जोव्वणेण ध लावण्णेण य मुच्छिए सुदरिसणाए सद्धि उरालाइ भोगभोगाइ भु जमाणे विहरिस्सइ । तए णं मे सगडे दारए अन्नया सयमेव कूडमाहित उवसपज्जित्ताणं विहरिस्सइ । तए ण से सगडे दारए कूडग्गाहे भविस्सइ ग्रहम्मिए जाव' दुप्पडियाणन्दे । एयकम्मे ४ सुबहुं पाकमम समज्जिणित्ता कालमासे काल किच्चा इमोसे रयणप्पभाए पुढवीए नेरइयत्ताए उववज्जिहिइ । ससारो तहेव जाव पुढवीए । १. प्र. श्र. सूत्र २० से ण तओ प्रणंतर उव्वट्टित्ता वाणारसीए नयरीए मच्छत्ताए उववज्जिहिइ । से णं तत्थ मच्छबन्धिएहि वहिए तत्थेव वाणारसीए नयरोए सेट्ठिकुल सि पुत्तत्ताए पच्चायाहिइ । वोहि, पव्वज्जा, सोहम्मे कप्पे, महाविदेहे वासे सिज्झिहि । निक्खेवो । १४ - तदनन्तर शकट कुमार वाल्यभाव को त्याग कर यौवन को प्राप्त करेगा। सुदर्शना कुमारी भी वाल्यावस्था पार करके विशिष्ट ज्ञानवुद्धि की परिपक्वता को प्राप्त करती हुई युवावस्था को प्राप्त होगी । वह रूप, यौवन व लावण्य मे उत्कृष्ट श्रेष्ठ व सुन्दर गरीर वाली होगी । तदनन्तर सुदर्शना के रूप, यौवन और लावण्य की सुन्दरता मे मूच्छित होकर शकट कुमार अपनी वहिन सुदर्शना के साथ ही मनुष्य सम्बन्धी प्रधान कामभोगो का सेवन करता हुआ जीवन व्यतीत करेगा । तत्पश्चात् किसी समय वह शकट कुमार स्वयमेव कूटग्राहित्व को प्राप्त कर विचरण करेगा । वह कूटग्राह ( कपट से जीवो को फँसाने वाला - मारने वाला ) वना हुआ वह शकट महाअधर्मी एव दुष्प्रत्यानन्द होगा । इन धर्म प्रधानकर्मों से बहुत से पापकर्मों को उपार्जित कर मृत्युममय मे मर कर रत्नप्रभा नामक प्रथम नरक मे नारकी रूप से उत्पन्न होगा । उसका ससार भ्रमण भी पूर्ववत् ( इक्कड, उज्झित आदि के समान ) जान लेना चाहिए यावत् वह पृथ्वीकाय आदि मे लाखो-लाखो वार उत्पन्न होगा । तदनन्तर वहाँ से निकलकर वह सीधा वाराणसी नगरी मे मत्स्य के रूप मे जन्म लेगा । वहाँ पर मत्स्यघातको के द्वारा बध को प्राप्त होकर यह फिर उसी वाराणसी नगरी मे एक श्रेष्ठकुल मे पुत्ररूप से उत्पन्न होगा। वहाँ सम्यक्त्व एव अनगार धर्म को प्राप्त करके सौधर्म नामक प्रथम देवलोक मे देव होगा । वहाँ से च्युत हो, महाविदेह क्षेत्र मे जन्म लेगा । वहाँ साधुवृत्ति का सम्यक्तया पालन करके सिद्ध, बुद्ध होगा, समस्त कर्मों और दुखो का अन्त करेगा । ।। चतुर्थ अध्ययन समाप्त । पञ्चम अध्ययन पंचमस्स उपखेवो - - जइ णं भन्ते । पाचवे अध्ययन का उत्क्षेप- प्रस्तावना पूर्ववत् जान लेना चाहिये । अर्थात् जम्बूस्वामी ने प्रश्न किया कि श्रमण भगवान् महावीर ने दु खविपाक के पाचवे अध्ययन का क्या अर्थ कहा है ? तब सुधर्मा स्वामी ने कहा१ - एवं सलु, जम्बू । तेण कालेण तेणं समएण कोसंबी णामं णयरी होत्था । रिद्धत्थिमियसमिद्धा । वाहि चदोतरणे उज्जाणे । सेयभद्द जक्खे । १ - हे जम्बू 1 उस काल और उस समय मे कौशाम्बी नाम की एक नगरी थी, जो भवनादि के श्राधिक्य से युक्त, स्वचक्र - परचक्र के भय से मुक्त तथा समृद्धि से समृद्ध थी। उस नगरी के बाहर चन्द्रावतरण नामक उद्यान था । उसमे श्वेतभद्र नामक यक्ष का था । २ - तत्य ण कोसवीए नयरीए सयाणीए नामं राया होत्या । महया० । मियावई देवी । तस्स ण सयाणोयस्स पुत्ते मियादेवीए प्रत्तए उदायणे नाम कुमारे होत्या, श्रहीणपडिपुण्णर्पाचिदियसरीरे, जुवराया। तस्स णं उदायणस्स कुमारस्स पउमावई नाम देवी होत्था । २ - उम कौगम्बी नगरी मे शतानीक नाम का राजा राज्य करता था । जो हिमालय पर्वत आदि के समान महान् और प्रतापी था । उसके मृगादेवी नाम की रानी थी । उस शतानीक राजा का पुत्र और रानी मृगादेवी का आत्मज उदयन नाम का एक कुमार था जो सर्वेन्द्रिय सम्पन्न अथ च युवराज पद से अलकृत था । उस उदयन कुमार की पद्मावती नाम की देवी-पत्नी थी । ३ - तस्स णं सयाणीयस्स सोमदत्ते नामं पुरोहिए होत्था, रिउब्वेय-यज्जुव्वेय-सामवेयश्रथव्वणवेयकुसले । तस्स ण सोमदत्तस्स पुरोहियस्स वसुदत्ता नामं भारिया होत्था । तस्स णं सोमदत्तस्स पुत्ते वसुदत्ताए प्रत्तए वहस्सइदत्ते नाम दारए होत्था । अहीणपडिपुण्णपंचिदियसरीरे । ३ - उम शतानीक राजा का सोमदत्त नामक पुरोहित था, जो ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और थर्ववेद का पूर्ण ज्ञाता था। उस सोमदत्त पुरोहित के वसुदत्ता नाम की भार्या थी, तथा सोमदत्त का पुत्र एवं वसुदत्ता का श्रात्मज वृहस्पतिदत्त नाम का सर्वाङ्गसम्पन्न एक सुन्दर बालक था ।
[ विपाकसूत्र - प्रथम श्र नकन्ध ग्यारह -ण से सगडे दारए सुदरिसणाए गणियाए गिहाओ निच्छुभेमाणे सुदरिसणाए गणियाए सुच्छिए गिद्ध गढिए ज्झोववणे अण्णत्थ कत्थई सुइं च रइ च धिइं च लभमाणे तच्चित्ते तम्मणे तल्लेसे तदज्झवसाणे तदट्ठोवउत्ते तदप्पियकरणे तब्भावणाभाविए सुदरिसणाए गणियाए बहूणि अंतराणि य छिद्दाणि य विवराणि य पडिजागरमाणे पडिजागरमाणे विहरइ । तए ण से सगडे दारए अन्नया कयाइ सुरिसणाए गणियाए अतरं लभेइ लभेत्ता सुदरिसणाए गणियाए गिह रहसिय अणुष्पविसइ, प्रणुप्पविसित्ता सुदरिसणाए सद्धि उरालाइ माणुस्सगाइ भोगभोगाइ भुजमाणे विहरइ । घर से निकाला गया शकट सुदर्शना वेश्या मे मूच्छित, गृद्ध, अत्यन्त आसक्त होकर अन्यत्र सुख चैन, रति, शान्ति नही पा रहा था । उसका चित्त, मन, लेग्या अव्यवसाय उसी मे लीन रहता था । वह सुदर्शना के विषय मे ही सोचा करता, उसमे करणो को लगाए रहता, उसी की भावना से भावित रहता । वह उसके पास जाने की ताक मे रहता और अवसर देखता रहता था । एक बार उसे अवसर मिल गया । वह सुदगंता के घर में घुस गया और फिर उसके साथ भोग भोगने लगा । बारह - इम च ण सुसेणे प्रमच्चे पहाए जाव सव्वालकारविभूसिए मणुस्सवग्गुराए परिक्खित्ते जेणेव सुदरिसणाए गणियाए गेहे तेणेव उवागच्छड उवागच्छित्ता सगडं दारयं सुदरिसणाए गणियाए सद्धि उरालाइ भोग भोगाई भु जमाणं पासइ, पासित्ता प्रासुरुत्ते जाव मिसमिसेमाणे तिवलिय भिड निडाले साहट्ट सगड दारय पुरिसेहि गिव्हावेड, गिण्हावेत्ता श्रट्टि जाव वध करने की आज्ञा राजपुरुषो को प्रदान की । तुम ही तेरह - सगड णं भंते ! दारए कालगए कहि गच्छिहि कहि उववज्जिहिइ ? गोयमा ! सगडे णं दारए सत्तावन्न वासाई परमाउय पालइत्ता प्रज्जेव तिभागावसेसे दिवसे एग महं प्रयोमयं तत्त समजोइनूय इत्थिपडिमं प्रवासाविए समाणे कालमासे कालं किच्चा इमीसे रयणप्पभाए पुढवीए नेरइयत्ताए उववज्जिहिइ । से णं तश्रो प्रणतर उव्वट्टित्ता रायगिहे नयरे मातगकुलंसि जुगलत्ताए पच्चायाहिद । तए ण तस्स दारगस्स श्रम्मापियरो निव्वत्तवारसाहस्स इम एयारूव गोण्ण नामघेज्ज करिस्संति- 'त होउ णं दारए सगडे नामेण, होउ णं दारिया सुदरिसणा नामेणं ।' तेरह - शकट की दुर्दशा का कारण भगवान् से सुनकर गौतम स्वामी ने प्रश्न किया - हे प्रभो । शकट कुमार वालक यहां से काल करके कहाँ जाएगा और कहाँ पर उत्पन्न होगा ? भगवान् बोले- हे गौतम । शकट दारक को सत्तावन वर्ष की परम आयु को भोगकर आज ही तीसरा भाग शेप रहे दिन में एक महालोहमय तपी हुई अग्नि के समान देदीप्यमान स्त्रीप्रतिमा से लिंगित कराया जायगा । तब वह मृत्यु- समय मे मरकर रत्नप्रभा नाम की प्रथम नरक भूमि मे नारक रूप से उत्पन्न होगा एक यहाँ से निकलकर राजगृह नगर मे मातङ्ग--चाण्डाल के कुल मे युगल रूप से उत्पन्न होगा । युगल के माता-पिता वारहवें दिन उनमे से बालक का नाम 'शकटकुमार' और कन्या का नाम 'सुदर्शना' रक्खेगे । चौदह - तए ण से सगडे दारए उम्मूषकवालभावे विण्णयपरिणयमेत्ते जोव्वणगमणुपत्ते भविस्सइ । तए णं सा सुदरिसणा वि दारिया उम्मुक्कवालभावा जोव्वणगमणुष्पत्ता रूवेण य जोव्वणेण लावणेण य उधिकट्टा उविकटुसरीरा यावि भविस्सइ । तए णं से सगडे दारए सुदरिसणाए रूवेण य जोव्वणेण ध लावण्णेण य मुच्छिए सुदरिसणाए सद्धि उरालाइ भोगभोगाइ भु जमाणे विहरिस्सइ । तए णं मे सगडे दारए अन्नया सयमेव कूडमाहित उवसपज्जित्ताणं विहरिस्सइ । तए ण से सगडे दारए कूडग्गाहे भविस्सइ ग्रहम्मिए जाव' दुप्पडियाणन्दे । एयकम्मे चार सुबहुं पाकमम समज्जिणित्ता कालमासे काल किच्चा इमोसे रयणप्पभाए पुढवीए नेरइयत्ताए उववज्जिहिइ । ससारो तहेव जाव पुढवीए । एक. प्र. श्र. सूत्र बीस से ण तओ प्रणंतर उव्वट्टित्ता वाणारसीए नयरीए मच्छत्ताए उववज्जिहिइ । से णं तत्थ मच्छबन्धिएहि वहिए तत्थेव वाणारसीए नयरोए सेट्ठिकुल सि पुत्तत्ताए पच्चायाहिइ । वोहि, पव्वज्जा, सोहम्मे कप्पे, महाविदेहे वासे सिज्झिहि । निक्खेवो । चौदह - तदनन्तर शकट कुमार वाल्यभाव को त्याग कर यौवन को प्राप्त करेगा। सुदर्शना कुमारी भी वाल्यावस्था पार करके विशिष्ट ज्ञानवुद्धि की परिपक्वता को प्राप्त करती हुई युवावस्था को प्राप्त होगी । वह रूप, यौवन व लावण्य मे उत्कृष्ट श्रेष्ठ व सुन्दर गरीर वाली होगी । तदनन्तर सुदर्शना के रूप, यौवन और लावण्य की सुन्दरता मे मूच्छित होकर शकट कुमार अपनी वहिन सुदर्शना के साथ ही मनुष्य सम्बन्धी प्रधान कामभोगो का सेवन करता हुआ जीवन व्यतीत करेगा । तत्पश्चात् किसी समय वह शकट कुमार स्वयमेव कूटग्राहित्व को प्राप्त कर विचरण करेगा । वह कूटग्राह वना हुआ वह शकट महाअधर्मी एव दुष्प्रत्यानन्द होगा । इन धर्म प्रधानकर्मों से बहुत से पापकर्मों को उपार्जित कर मृत्युममय मे मर कर रत्नप्रभा नामक प्रथम नरक मे नारकी रूप से उत्पन्न होगा । उसका ससार भ्रमण भी पूर्ववत् जान लेना चाहिए यावत् वह पृथ्वीकाय आदि मे लाखो-लाखो वार उत्पन्न होगा । तदनन्तर वहाँ से निकलकर वह सीधा वाराणसी नगरी मे मत्स्य के रूप मे जन्म लेगा । वहाँ पर मत्स्यघातको के द्वारा बध को प्राप्त होकर यह फिर उसी वाराणसी नगरी मे एक श्रेष्ठकुल मे पुत्ररूप से उत्पन्न होगा। वहाँ सम्यक्त्व एव अनगार धर्म को प्राप्त करके सौधर्म नामक प्रथम देवलोक मे देव होगा । वहाँ से च्युत हो, महाविदेह क्षेत्र मे जन्म लेगा । वहाँ साधुवृत्ति का सम्यक्तया पालन करके सिद्ध, बुद्ध होगा, समस्त कर्मों और दुखो का अन्त करेगा । ।। चतुर्थ अध्ययन समाप्त । पञ्चम अध्ययन पंचमस्स उपखेवो - - जइ णं भन्ते । पाचवे अध्ययन का उत्क्षेप- प्रस्तावना पूर्ववत् जान लेना चाहिये । अर्थात् जम्बूस्वामी ने प्रश्न किया कि श्रमण भगवान् महावीर ने दु खविपाक के पाचवे अध्ययन का क्या अर्थ कहा है ? तब सुधर्मा स्वामी ने कहाएक - एवं सलु, जम्बू । तेण कालेण तेणं समएण कोसंबी णामं णयरी होत्था । रिद्धत्थिमियसमिद्धा । वाहि चदोतरणे उज्जाणे । सेयभद्द जक्खे । एक - हे जम्बू एक उस काल और उस समय मे कौशाम्बी नाम की एक नगरी थी, जो भवनादि के श्राधिक्य से युक्त, स्वचक्र - परचक्र के भय से मुक्त तथा समृद्धि से समृद्ध थी। उस नगरी के बाहर चन्द्रावतरण नामक उद्यान था । उसमे श्वेतभद्र नामक यक्ष का था । दो - तत्य ण कोसवीए नयरीए सयाणीए नामं राया होत्या । महयाशून्य । मियावई देवी । तस्स ण सयाणोयस्स पुत्ते मियादेवीए प्रत्तए उदायणे नाम कुमारे होत्या, श्रहीणपडिपुण्णर्पाचिदियसरीरे, जुवराया। तस्स णं उदायणस्स कुमारस्स पउमावई नाम देवी होत्था । दो - उम कौगम्बी नगरी मे शतानीक नाम का राजा राज्य करता था । जो हिमालय पर्वत आदि के समान महान् और प्रतापी था । उसके मृगादेवी नाम की रानी थी । उस शतानीक राजा का पुत्र और रानी मृगादेवी का आत्मज उदयन नाम का एक कुमार था जो सर्वेन्द्रिय सम्पन्न अथ च युवराज पद से अलकृत था । उस उदयन कुमार की पद्मावती नाम की देवी-पत्नी थी । तीन - तस्स णं सयाणीयस्स सोमदत्ते नामं पुरोहिए होत्था, रिउब्वेय-यज्जुव्वेय-सामवेयश्रथव्वणवेयकुसले । तस्स ण सोमदत्तस्स पुरोहियस्स वसुदत्ता नामं भारिया होत्था । तस्स णं सोमदत्तस्स पुत्ते वसुदत्ताए प्रत्तए वहस्सइदत्ते नाम दारए होत्था । अहीणपडिपुण्णपंचिदियसरीरे । तीन - उम शतानीक राजा का सोमदत्त नामक पुरोहित था, जो ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और थर्ववेद का पूर्ण ज्ञाता था। उस सोमदत्त पुरोहित के वसुदत्ता नाम की भार्या थी, तथा सोमदत्त का पुत्र एवं वसुदत्ता का श्रात्मज वृहस्पतिदत्त नाम का सर्वाङ्गसम्पन्न एक सुन्दर बालक था ।
कदा श्वास का भारीपन हो जाया करता था, पर वह ऐसा कभी नहीं कुछ विशेष ध्यान देना आवश्यक हो जाये । साधारण विश्राम आदि से जाने मात्र से ही वह प्राय ठीक हो जाया करता था । यही कारण था कि विशेष परवाह नहीं की गई । इस बार भी उनका श्वास कोई भयकर रूप से नहीं फूला था । अत. साधारण रूप से ही सारी दैनिक क्रियाएँ उन्होंने सपन्न की । सायकाल में भी ग्राम बाहिर पयारे । अल्प मात्रा मे उष्ण आहार भी लिया। किसी प्रकार का कोई विशेष खेद प्रतीत नहीं हो रहा था । यहाँ तक कि सायकालीन प्रतिक्रमण भी उन्होने सानद सपन्न कर लिया। परन्तु उसके तत्काल बाद ही श्वास का वेग वढने लगा । हुआ कि उस पर या कुछ देर लेट उसकी कभी कोई उन्होने सतो से बिछौना कर देने के लिए कहा। विछौना तैयार हो जाने पर वे किसी का सहारा लिए बिना अपने आप ही प्रमार्जनी से यतना करते हुए उस पर लेट गये । लेट जाने के बाद श्वास का प्रकोप प्राय वद हो जाया करता था, परन्तु उस वार उसका फल आशा के बिलकुल विपरीत निकला। उनका सारा शरीर प्रस्वेद से गीला हो गया और श्वास का वेग भी अधिक तेज हो गया । सोने पर जब श्वास की अनुकूलता के बदले और अधिक प्रतिकूलता देखी तो वे पुन विराज गये । सतो मे उन्होने कहा - "आज से पहले कभी सोने पर श्वास नही फूला था ।" बस ये उनके अन्तिम शब्द ही सिद्ध हुए। उसके बाद उन्होंने तुरत आँखें फेर दी । कुछ सत उनकी पीठ को हाथ का सहारा दिये हुए बैठे थे और कुछ आस-पास में उनकी परिचर्या निमित्त सावधानी से उनकी ओर देख रहे थे । पर मृत्यु ने उन पर इतनी तेजी से और इतना अचानक आक्रमण किया कि किसी को उसके आगमन का कोई पूर्व अनुमान भी नही हो पापा । वे सतो के हाथो का सहारा लिए हुए जैसे बैठे थे वैसे ही दिवगत हो गये । वह दिन स० १६०८ माघ कृष्णा चतुर्दशी का था। उस समय लगभग एक मुहूर्त रात्रि व्यतीत हो चुकी थी। ऋषिराय के उस अचानक शरीर-पात से स्वभावत ही सारे सघ को वडा खेद हुआ । के जिसने वह बात मुनी उसी ने उस पर विश्वास नहीं करना चाहा, पर मनुष्य की चाह अनुसार ही तो सव कुछ नही होता । आखिर चाहे या अनचाहे तथ्य को स्वीकारना ही पडता है । उनके दिवगत होने की वह बात रातो-रात दूर-दूर तक पहुँच गई । नादेसमा, बडीरावलियाँ, गोगेंदा आदि पार्श्वस्थ ग्रामो के लोग रात-रात में ही वहाँ पहुँच गये । प्रात काल तक वहाँ हजारो व्यक्ति हो गये । सभी ने मिलकर सांसारिक रीति के अनुसार उनके शरीर का दाह संस्कार सपन्न किया ।
कदा श्वास का भारीपन हो जाया करता था, पर वह ऐसा कभी नहीं कुछ विशेष ध्यान देना आवश्यक हो जाये । साधारण विश्राम आदि से जाने मात्र से ही वह प्राय ठीक हो जाया करता था । यही कारण था कि विशेष परवाह नहीं की गई । इस बार भी उनका श्वास कोई भयकर रूप से नहीं फूला था । अत. साधारण रूप से ही सारी दैनिक क्रियाएँ उन्होंने सपन्न की । सायकाल में भी ग्राम बाहिर पयारे । अल्प मात्रा मे उष्ण आहार भी लिया। किसी प्रकार का कोई विशेष खेद प्रतीत नहीं हो रहा था । यहाँ तक कि सायकालीन प्रतिक्रमण भी उन्होने सानद सपन्न कर लिया। परन्तु उसके तत्काल बाद ही श्वास का वेग वढने लगा । हुआ कि उस पर या कुछ देर लेट उसकी कभी कोई उन्होने सतो से बिछौना कर देने के लिए कहा। विछौना तैयार हो जाने पर वे किसी का सहारा लिए बिना अपने आप ही प्रमार्जनी से यतना करते हुए उस पर लेट गये । लेट जाने के बाद श्वास का प्रकोप प्राय वद हो जाया करता था, परन्तु उस वार उसका फल आशा के बिलकुल विपरीत निकला। उनका सारा शरीर प्रस्वेद से गीला हो गया और श्वास का वेग भी अधिक तेज हो गया । सोने पर जब श्वास की अनुकूलता के बदले और अधिक प्रतिकूलता देखी तो वे पुन विराज गये । सतो मे उन्होने कहा - "आज से पहले कभी सोने पर श्वास नही फूला था ।" बस ये उनके अन्तिम शब्द ही सिद्ध हुए। उसके बाद उन्होंने तुरत आँखें फेर दी । कुछ सत उनकी पीठ को हाथ का सहारा दिये हुए बैठे थे और कुछ आस-पास में उनकी परिचर्या निमित्त सावधानी से उनकी ओर देख रहे थे । पर मृत्यु ने उन पर इतनी तेजी से और इतना अचानक आक्रमण किया कि किसी को उसके आगमन का कोई पूर्व अनुमान भी नही हो पापा । वे सतो के हाथो का सहारा लिए हुए जैसे बैठे थे वैसे ही दिवगत हो गये । वह दिन सशून्य एक हज़ार छः सौ आठ माघ कृष्णा चतुर्दशी का था। उस समय लगभग एक मुहूर्त रात्रि व्यतीत हो चुकी थी। ऋषिराय के उस अचानक शरीर-पात से स्वभावत ही सारे सघ को वडा खेद हुआ । के जिसने वह बात मुनी उसी ने उस पर विश्वास नहीं करना चाहा, पर मनुष्य की चाह अनुसार ही तो सव कुछ नही होता । आखिर चाहे या अनचाहे तथ्य को स्वीकारना ही पडता है । उनके दिवगत होने की वह बात रातो-रात दूर-दूर तक पहुँच गई । नादेसमा, बडीरावलियाँ, गोगेंदा आदि पार्श्वस्थ ग्रामो के लोग रात-रात में ही वहाँ पहुँच गये । प्रात काल तक वहाँ हजारो व्यक्ति हो गये । सभी ने मिलकर सांसारिक रीति के अनुसार उनके शरीर का दाह संस्कार सपन्न किया ।
जींद की जंग भले 21 उम्मीदवार लड़ रहे हैं. लेकिन बेस्ट 4 की जंग ने जींद की जंग को सबसे दिलचस्प चुनाव बना दिया है. इन चारों उम्मीदवारों की अपनी-अपनी ताकत है जिनके सहारे ये जींद में जीत का राग अलाप रहे हैं. इन चार चेहरों के अलावा एक और चेहरा मैदान में है जो बीजेपी सांसद राजकुमार सैनी की बदौलत चर्चा में है. इन उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला तो 31 जनवरी को होगा. लेकिन इस समय ये सभी उम्मीदवार अपनी जीत के दावे कर रहे हैं. ये सभी उम्मीदवार कुछ इस प्रकार से हैं. रणदीप सुरजेवाला कांग्रेस का बड़ा चेहरा हैं और राहुल गांधी के करीबी हैं. 3 राज्यों में कांग्रेस की जीत से कांग्रेस के हौसले बुलंद है और इसे सुरजेवाला प्रचार के दौरान दोहराते रहे हैं. जींद की जंग में सुरजेवाला को निर्दलीय विधायक जयप्रकाश का समर्थन मिला है जो कभी कांग्रेस के साथ थे. जींद की सियासत में जेपी की अच्छी पकड़ है. सुरजेवाला कैथल सीट से विधायक है लेकिन जीत के बाद जींद में रहने की बात कहते रहे हैं. सबसे बड़ी बात सुरजेवाला हरियाणा की सत्ता को जींद लाने की बात कहते रहे हैं और सियासी पंडित मानते हैं कि जीत के बाद वो कांग्रेस के सीएम कैंडिडेट हो सकते हैं. जेजेपी ने दिग्विजय चौटाला को मैदान में उतारा जो इस जंग के सबसे युवा प्रत्याशी हैं जिसके चलते युवा वोटर्स के बीच वो सबसे लोकप्रिय उम्मीदवार बनकर उभरे हैं. बतौर सांसद दुष्यंत चौटाला की नुमाइंदगी का फायदा भी दिग्विजय चौटाला को मिल सकता है. जेजेपी जींद से जीत का खाता खोलना चाहती है और उसने जींद के सामने एक नया विकल्प दिया है. परिवार और पार्टी में दो फाड़ होने की सहानुभूति भी दिग्विजय चौटाला को मिल सकती है और जेजेपी देवीलाल की विरासत को आगे बढ़ाने का प्रचार करती रही है. इनेलो ने जींद के स्थानीय चेहरे को मैदान में उतारा और जींद की जंग को बाहरी बनाम लोकल कर दिया जिसका फायदा रेढू को मिल सकता है. जींद बीते 10 साल से इनेलो का गढ़ रहा है जिसका फायदा रेढू को मिल सकता है. उमेद रेढू कंडेला खाप के लोहचब गांव से संबंध रखते हैं. ग्रामीण इलाकों में इनेलो की पकड़ रेढू को वोट दिला सकती है. इनेलो में दो फाड़ की सहानुभूति फैक्टर जेजेपी के साथ इनेलो के पक्ष में भी काम कर सकता है. बीजेपी के कृष्ण मिड्ढा चारों बड़े प्रत्याशियों में इकलौते गैर-जाट उम्मीदवार हैं और 1972 के बाद से गैर जाट चेहरे की जीत बीजेपी के लिए फायदे का सौदा हो सकती है. कृष्ण मिड्ढा के पिता हरिचंद मिड्ढा पिछले 10 साल से जींद के विधायक थे. सहानुभूति का फायदा मिड्ढा को मिल सकता है. 5 निगम चुनावों की जीत बीजेपी के लिए जींद में फायदेमंद हो सकती है. शहरी वोटर्स पर बीजेपी की पकड़ मिड्ढा को वोट दिला सकते हैं. जींद उपचुनाव में जीत किसे मिलती है ये तो 31 जनवरी के दिन साफ हो जाएगा, लेकिन पार्टियों द्वारा गए इन दिग्गज नेताओं ने इस चुनाव को दिलचस्प बना दिया है. उपचुनावः गैर जाट कार्ड से जींद में खत्म होगा BJP का सूखा? .
जींद की जंग भले इक्कीस उम्मीदवार लड़ रहे हैं. लेकिन बेस्ट चार की जंग ने जींद की जंग को सबसे दिलचस्प चुनाव बना दिया है. इन चारों उम्मीदवारों की अपनी-अपनी ताकत है जिनके सहारे ये जींद में जीत का राग अलाप रहे हैं. इन चार चेहरों के अलावा एक और चेहरा मैदान में है जो बीजेपी सांसद राजकुमार सैनी की बदौलत चर्चा में है. इन उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला तो इकतीस जनवरी को होगा. लेकिन इस समय ये सभी उम्मीदवार अपनी जीत के दावे कर रहे हैं. ये सभी उम्मीदवार कुछ इस प्रकार से हैं. रणदीप सुरजेवाला कांग्रेस का बड़ा चेहरा हैं और राहुल गांधी के करीबी हैं. तीन राज्यों में कांग्रेस की जीत से कांग्रेस के हौसले बुलंद है और इसे सुरजेवाला प्रचार के दौरान दोहराते रहे हैं. जींद की जंग में सुरजेवाला को निर्दलीय विधायक जयप्रकाश का समर्थन मिला है जो कभी कांग्रेस के साथ थे. जींद की सियासत में जेपी की अच्छी पकड़ है. सुरजेवाला कैथल सीट से विधायक है लेकिन जीत के बाद जींद में रहने की बात कहते रहे हैं. सबसे बड़ी बात सुरजेवाला हरियाणा की सत्ता को जींद लाने की बात कहते रहे हैं और सियासी पंडित मानते हैं कि जीत के बाद वो कांग्रेस के सीएम कैंडिडेट हो सकते हैं. जेजेपी ने दिग्विजय चौटाला को मैदान में उतारा जो इस जंग के सबसे युवा प्रत्याशी हैं जिसके चलते युवा वोटर्स के बीच वो सबसे लोकप्रिय उम्मीदवार बनकर उभरे हैं. बतौर सांसद दुष्यंत चौटाला की नुमाइंदगी का फायदा भी दिग्विजय चौटाला को मिल सकता है. जेजेपी जींद से जीत का खाता खोलना चाहती है और उसने जींद के सामने एक नया विकल्प दिया है. परिवार और पार्टी में दो फाड़ होने की सहानुभूति भी दिग्विजय चौटाला को मिल सकती है और जेजेपी देवीलाल की विरासत को आगे बढ़ाने का प्रचार करती रही है. इनेलो ने जींद के स्थानीय चेहरे को मैदान में उतारा और जींद की जंग को बाहरी बनाम लोकल कर दिया जिसका फायदा रेढू को मिल सकता है. जींद बीते दस साल से इनेलो का गढ़ रहा है जिसका फायदा रेढू को मिल सकता है. उमेद रेढू कंडेला खाप के लोहचब गांव से संबंध रखते हैं. ग्रामीण इलाकों में इनेलो की पकड़ रेढू को वोट दिला सकती है. इनेलो में दो फाड़ की सहानुभूति फैक्टर जेजेपी के साथ इनेलो के पक्ष में भी काम कर सकता है. बीजेपी के कृष्ण मिड्ढा चारों बड़े प्रत्याशियों में इकलौते गैर-जाट उम्मीदवार हैं और एक हज़ार नौ सौ बहत्तर के बाद से गैर जाट चेहरे की जीत बीजेपी के लिए फायदे का सौदा हो सकती है. कृष्ण मिड्ढा के पिता हरिचंद मिड्ढा पिछले दस साल से जींद के विधायक थे. सहानुभूति का फायदा मिड्ढा को मिल सकता है. पाँच निगम चुनावों की जीत बीजेपी के लिए जींद में फायदेमंद हो सकती है. शहरी वोटर्स पर बीजेपी की पकड़ मिड्ढा को वोट दिला सकते हैं. जींद उपचुनाव में जीत किसे मिलती है ये तो इकतीस जनवरी के दिन साफ हो जाएगा, लेकिन पार्टियों द्वारा गए इन दिग्गज नेताओं ने इस चुनाव को दिलचस्प बना दिया है. उपचुनावः गैर जाट कार्ड से जींद में खत्म होगा BJP का सूखा? .
तत पुनि पुनि सुनैन, प्रगटो अव भेद निजं,निवेदगुन बढ़ायो । आप० ॥ २ ॥ यों ही चित अचित मिश्र, ज्ञेय ना अहेय हेय, इंधन धनंज जैसे, स्वामियोग गायो । आप० ।। ३ ।। भँमर पोते छुटत ईंटति, वांछित तट निकटत जिमि, मोह रागरुख हर जिय, शिवतट निकटायो । आप० ॥ ४ ॥ विमल सौख्यमय सदीव, मैं हूँ में नहिं अजीव, द्योत होत रज्जुमय, भुजंग भय भगायो । आप० ॥ ५ ॥ यों ही जिनचंद सुगुन, चिंतत परमारथ चुन, दोल भाग जागो जव, अल्पपूर्व आयो । आप० ॥ ६ ॥ विषयोंदा मद भानै, ऐसा है कोई वे ॥ टेक ॥ विषय दुःख अर दुखफल तिनको, यों नित चित्त न ठानै । विषयोंदा० ॥ १ ॥ अनुपयोग उपयोग स्वरूपी, तनचेतनको मानै । विषयोंदा० १ सुनयोंसे । २ आत्मज्ञान । ३ अग्नि । ५ जहाज । ६ शीघ्र ही । ७ विषयोंका ( पंजावी ) । ४ उत्तम योग । ।। २ ।। वरनादिक रागादि भावतैं, भिन्नरूप तिन जानें । विषयोंदा० ।। ३ ।। स्वपर जान रुपराग हान, निजमें निज परनति सानै । विषयोंदा० ॥ ४ ॥ अंतर बाहरको परिग्रह तजि, दौल वसै शिवथानै । विषयोंदा० ॥ ५ ॥ और सबै जगदन्द मिटावो, लो लावो जिन आगमओरी । और० ॥ टेक ॥ है असार जगद्वंद बंधकर, ये कछु गरज न सारत तोरी । कमेला चपलो यौवन सुरर्धेनु, वजन पथिकजन क्यों रति जोरी ।। और० ।। १ ।। विषयकपाय दुखद दोनों भव, इनतैं तोर नेहकी डोरी । परद्रव्यनको तू अपनावत, क्यों न तजै ऐसी बुधि भोरी । और० ।। २ ।। वीत जाय सागरथिति सुरकी, नरपरजायतनी अति थोरी । अवसरपाय दौल अव चूको, फिर न मिलै मनि सागरवोरी ॥ और० ॥ ३ ॥ १ लक्ष्मी । २ विजली । ३ इन्द्रधनुप । जैनपदसंग्रह । ६५. और अबै न कुदेव सुहावें, जिन ! थाके चरनन रति जोरी । और० ॥ टेक ॥ कामकोहवश गहैं अशन असि, अंकनिशंक धेरै तिय गोरी औरनके किम भाव सुधारें, आप कुभाव-भारधर-धोरी । और० ॥ १ ॥ तुम विनमोह अंकोहछोहविन, छके शांतरस पीय कटोरी । तुम तज से अमेयें भरी जो, जानत हो विपदा सव मोरी । और० ॥ २ ॥ तुम तज तिनैं भजै शठ जो सो, दाख न चाखत खात निमोरी । हे जगतार ! उधार दौल को, निकट विकट भवजलधि हिलोरी ॥ और० ॥ ३ ॥ कबधों मिलें मोहि श्रीगुरु मुनिवर, करि हैं भवदधि पारा हो । कवधों० ॥ टेर ॥ भोगउदास जोग जिन लीनों, छांड़ि परिग्रहमारा हो । इंद्रियदमन वमन मद कीनो, विषय कषाय निवारा १ गोद में । २ क्रोधक्षोभरहित । ३ सेवा । ४ अपरिमाण । ५ भवसमुद्रकी लहरें । हो ॥ क्रधों● ॥ १ ॥ कंचन काचवरावर जिनकें, निंदक वंदक सौरा हो । दुर्धरतप तप सम्यक् निज घर, मनवचतनकर धारा हो ॥ कबधों ।। २ ।। ग्रीम गिरि हिम सरितातीरें, पावस तरुतर ठारा हो । करुणाभीने चीन त्रसथावर, ईर्यापंथ समारा हो ।। कवधों० ।। ३ ।। मारमार व्रतधार शील दृढ़, मोहमहामल टारा हो । मास छमास उपास वास वन, प्रासुक करत अहारा हो ॥ कवध० ॥ ४ ॥ आरतरौलेश नहिं जिनके, धर्म शुकल चित धारा हो । ध्यानारूढ़ गूढ़ निजआतम, शुधउपयोग विचारा हो ॥ कबधों ।। ५ ।। आप तरहिं औरनको तारहिं भवजलसिंधुअपारा हो । दौलत ऐसे जैनजतिनको, नितप्रति थोक हमारा हो । कबधों० ।। ६ ।। कुमति कुनारि नहीं है भली रे, सुमति नारि १ सय १२' लीन ' ऐसा भी पाठ है । ३ कामदेवको मारकर । ४ घर तप तपि समकित गहि निज चित, करि मनवचन सारा हो । मासमास उपवास वासवन ऐसा भी पाठ है । ५ आर्तध्यान । ६ रौद्रध्यान । ७ धर्मध्यान । ८ शुक्रुध्यान ।
तत पुनि पुनि सुनैन, प्रगटो अव भेद निजं,निवेदगुन बढ़ायो । आपशून्य ॥ दो ॥ यों ही चित अचित मिश्र, ज्ञेय ना अहेय हेय, इंधन धनंज जैसे, स्वामियोग गायो । आपशून्य ।। तीन ।। भँमर पोते छुटत ईंटति, वांछित तट निकटत जिमि, मोह रागरुख हर जिय, शिवतट निकटायो । आपशून्य ॥ चार ॥ विमल सौख्यमय सदीव, मैं हूँ में नहिं अजीव, द्योत होत रज्जुमय, भुजंग भय भगायो । आपशून्य ॥ पाँच ॥ यों ही जिनचंद सुगुन, चिंतत परमारथ चुन, दोल भाग जागो जव, अल्पपूर्व आयो । आपशून्य ॥ छः ॥ विषयोंदा मद भानै, ऐसा है कोई वे ॥ टेक ॥ विषय दुःख अर दुखफल तिनको, यों नित चित्त न ठानै । विषयोंदाशून्य ॥ एक ॥ अनुपयोग उपयोग स्वरूपी, तनचेतनको मानै । विषयोंदाशून्य एक सुनयोंसे । दो आत्मज्ञान । तीन अग्नि । पाँच जहाज । छः शीघ्र ही । सात विषयोंका । चार उत्तम योग । ।। दो ।। वरनादिक रागादि भावतैं, भिन्नरूप तिन जानें । विषयोंदाशून्य ।। तीन ।। स्वपर जान रुपराग हान, निजमें निज परनति सानै । विषयोंदाशून्य ॥ चार ॥ अंतर बाहरको परिग्रह तजि, दौल वसै शिवथानै । विषयोंदाशून्य ॥ पाँच ॥ और सबै जगदन्द मिटावो, लो लावो जिन आगमओरी । औरशून्य ॥ टेक ॥ है असार जगद्वंद बंधकर, ये कछु गरज न सारत तोरी । कमेला चपलो यौवन सुरर्धेनु, वजन पथिकजन क्यों रति जोरी ।। औरशून्य ।। एक ।। विषयकपाय दुखद दोनों भव, इनतैं तोर नेहकी डोरी । परद्रव्यनको तू अपनावत, क्यों न तजै ऐसी बुधि भोरी । औरशून्य ।। दो ।। वीत जाय सागरथिति सुरकी, नरपरजायतनी अति थोरी । अवसरपाय दौल अव चूको, फिर न मिलै मनि सागरवोरी ॥ औरशून्य ॥ तीन ॥ एक लक्ष्मी । दो विजली । तीन इन्द्रधनुप । जैनपदसंग्रह । पैंसठ. और अबै न कुदेव सुहावें, जिन ! थाके चरनन रति जोरी । औरशून्य ॥ टेक ॥ कामकोहवश गहैं अशन असि, अंकनिशंक धेरै तिय गोरी औरनके किम भाव सुधारें, आप कुभाव-भारधर-धोरी । औरशून्य ॥ एक ॥ तुम विनमोह अंकोहछोहविन, छके शांतरस पीय कटोरी । तुम तज से अमेयें भरी जो, जानत हो विपदा सव मोरी । औरशून्य ॥ दो ॥ तुम तज तिनैं भजै शठ जो सो, दाख न चाखत खात निमोरी । हे जगतार ! उधार दौल को, निकट विकट भवजलधि हिलोरी ॥ औरशून्य ॥ तीन ॥ कबधों मिलें मोहि श्रीगुरु मुनिवर, करि हैं भवदधि पारा हो । कवधोंशून्य ॥ टेर ॥ भोगउदास जोग जिन लीनों, छांड़ि परिग्रहमारा हो । इंद्रियदमन वमन मद कीनो, विषय कषाय निवारा एक गोद में । दो क्रोधक्षोभरहित । तीन सेवा । चार अपरिमाण । पाँच भवसमुद्रकी लहरें । हो ॥ क्रधों● ॥ एक ॥ कंचन काचवरावर जिनकें, निंदक वंदक सौरा हो । दुर्धरतप तप सम्यक् निज घर, मनवचतनकर धारा हो ॥ कबधों ।। दो ।। ग्रीम गिरि हिम सरितातीरें, पावस तरुतर ठारा हो । करुणाभीने चीन त्रसथावर, ईर्यापंथ समारा हो ।। कवधोंशून्य ।। तीन ।। मारमार व्रतधार शील दृढ़, मोहमहामल टारा हो । मास छमास उपास वास वन, प्रासुक करत अहारा हो ॥ कवधशून्य ॥ चार ॥ आरतरौलेश नहिं जिनके, धर्म शुकल चित धारा हो । ध्यानारूढ़ गूढ़ निजआतम, शुधउपयोग विचारा हो ॥ कबधों ।। पाँच ।। आप तरहिं औरनको तारहिं भवजलसिंधुअपारा हो । दौलत ऐसे जैनजतिनको, नितप्रति थोक हमारा हो । कबधोंशून्य ।। छः ।। कुमति कुनारि नहीं है भली रे, सुमति नारि एक सय बारह' लीन ' ऐसा भी पाठ है । तीन कामदेवको मारकर । चार घर तप तपि समकित गहि निज चित, करि मनवचन सारा हो । मासमास उपवास वासवन ऐसा भी पाठ है । पाँच आर्तध्यान । छः रौद्रध्यान । सात धर्मध्यान । आठ शुक्रुध्यान ।
नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री और वन मंत्री राकेश पठानिया के बीच जमकर नोक-झोंक हुई. विपक्ष के आरोपों पर सत्ता पक्ष भी भड़क गया. सत्ता पक्ष के सदस्यों ने भी विपक्ष के खिलाफ जमकर नारेबाजी की है. हिमाचल प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र (Winter Session) के चौथे दिन भी जमकर हंगामा हुआ. मंगलवार को सत्र की शुरूआत प्रश्नकाल से हुई. सदन शुरू हुए कुछ ही समय हुआ था कि विपक्ष ने आरोप लगाया कि करोड़ों की सरकारी संपत्तियों को प्रदेश सरकार कौड़ियों के भाव में बेच रही है. विपक्ष ने मंडी, कुल्लू और सोलन जिले में एडीबी से लोन लेकर बनाई गई संपत्तियों को बेचने का आरोप लगाया. विपक्षी सदस्यों ने पहले अपने सीटों पर खड़े होकर नारेबाजी की, उसके बाद वैल में आकर जबरदस्त नारेबाजी की. इस शोरगुल में कैबिनेट मंत्री महेंद्र सिंह ने अपनी बात कहने की कोशिश की लेकिन विपक्षी सदस्यों ने उसे अनसूना कर दिया. इस दौरान नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री और वन मंत्री राकेश पठानिया के बीच जमकर नोक-झोंक हुई. विपक्ष के आरोपों पर सत्ता पक्ष भी भड़क गया. सत्ता पक्ष के सदस्यों ने भी विपक्ष के खिलाफ नारेबाजी की. विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार 200 करोड़ की संपत्तियों को लाखों रुपए में अपने चहेतों को बेच रही है. सदन से बाहर आकर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि ये हिमाचल को बेचने का प्रकरण है. प्रदेश को लूटा जा रहा है और बेचा जा रहा है. जय राम सरकार इसमें शामिल है. उन्होंने आरोप लगाया कि मंडी जिले के जंजैहली में करीब 27 करोड़ की लागत से टूरिस्ट कल्चरल सेंटर बनाया गया है. जिसे अपने चहेते को सिर्फ सालाना 17 लाख रुपए में 15 साल के लिए दिया गया है. इतना ही नहीं मंडी में एक अन्य स्थान पर 42 करोड़ की संपत्ति सालाना 25 लाख रुपए में 10 साल के लिए बेच दी गई है. इसके अलावा मनाली के बड़ाग्रां 47 करोड़ और सोलन जिले के क्यारीघाट में करीब 37 करोड़ की संपत्ति को बेचा गया है. मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि 200 करोड़ रुपए की संपत्तियां कर्ज लेकर बनाई गईं और अब सरकार कौड़ी के भाव में उन्हें अपने चहेतों को बेच रही है. विपक्ष के आरोपों पर जबाव देते हुए बीजेपी विधायक विशाल नैहरिया ने कहा कि कोरोना के चलते प्रदेश की आर्थिकी को खासा नुकसान हुआ है. अर्थव्यवस्था की खराब स्थिती को देखते हुए कुछ संपत्तियां आउट सोर्स की गईं है. उन्होंने कहा कि एमओयू साइन किए गए हैं. सरकार को यहां से अच्छी आय की उम्मीद है. नैहरिया ने कहा कि विपक्ष पिछले चार दिनों से बिना मतलब के हंगामा खड़ा कर रहा है. जबकि वर्तमान की अधिकांश समस्याएं पूर्व की कांग्रेस सरकार ने ही खड़ी की है.
नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री और वन मंत्री राकेश पठानिया के बीच जमकर नोक-झोंक हुई. विपक्ष के आरोपों पर सत्ता पक्ष भी भड़क गया. सत्ता पक्ष के सदस्यों ने भी विपक्ष के खिलाफ जमकर नारेबाजी की है. हिमाचल प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के चौथे दिन भी जमकर हंगामा हुआ. मंगलवार को सत्र की शुरूआत प्रश्नकाल से हुई. सदन शुरू हुए कुछ ही समय हुआ था कि विपक्ष ने आरोप लगाया कि करोड़ों की सरकारी संपत्तियों को प्रदेश सरकार कौड़ियों के भाव में बेच रही है. विपक्ष ने मंडी, कुल्लू और सोलन जिले में एडीबी से लोन लेकर बनाई गई संपत्तियों को बेचने का आरोप लगाया. विपक्षी सदस्यों ने पहले अपने सीटों पर खड़े होकर नारेबाजी की, उसके बाद वैल में आकर जबरदस्त नारेबाजी की. इस शोरगुल में कैबिनेट मंत्री महेंद्र सिंह ने अपनी बात कहने की कोशिश की लेकिन विपक्षी सदस्यों ने उसे अनसूना कर दिया. इस दौरान नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री और वन मंत्री राकेश पठानिया के बीच जमकर नोक-झोंक हुई. विपक्ष के आरोपों पर सत्ता पक्ष भी भड़क गया. सत्ता पक्ष के सदस्यों ने भी विपक्ष के खिलाफ नारेबाजी की. विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार दो सौ करोड़ की संपत्तियों को लाखों रुपए में अपने चहेतों को बेच रही है. सदन से बाहर आकर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि ये हिमाचल को बेचने का प्रकरण है. प्रदेश को लूटा जा रहा है और बेचा जा रहा है. जय राम सरकार इसमें शामिल है. उन्होंने आरोप लगाया कि मंडी जिले के जंजैहली में करीब सत्ताईस करोड़ की लागत से टूरिस्ट कल्चरल सेंटर बनाया गया है. जिसे अपने चहेते को सिर्फ सालाना सत्रह लाख रुपए में पंद्रह साल के लिए दिया गया है. इतना ही नहीं मंडी में एक अन्य स्थान पर बयालीस करोड़ की संपत्ति सालाना पच्चीस लाख रुपए में दस साल के लिए बेच दी गई है. इसके अलावा मनाली के बड़ाग्रां सैंतालीस करोड़ और सोलन जिले के क्यारीघाट में करीब सैंतीस करोड़ की संपत्ति को बेचा गया है. मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि दो सौ करोड़ रुपए की संपत्तियां कर्ज लेकर बनाई गईं और अब सरकार कौड़ी के भाव में उन्हें अपने चहेतों को बेच रही है. विपक्ष के आरोपों पर जबाव देते हुए बीजेपी विधायक विशाल नैहरिया ने कहा कि कोरोना के चलते प्रदेश की आर्थिकी को खासा नुकसान हुआ है. अर्थव्यवस्था की खराब स्थिती को देखते हुए कुछ संपत्तियां आउट सोर्स की गईं है. उन्होंने कहा कि एमओयू साइन किए गए हैं. सरकार को यहां से अच्छी आय की उम्मीद है. नैहरिया ने कहा कि विपक्ष पिछले चार दिनों से बिना मतलब के हंगामा खड़ा कर रहा है. जबकि वर्तमान की अधिकांश समस्याएं पूर्व की कांग्रेस सरकार ने ही खड़ी की है.
२५० संकेत को खोजने के कुछ प्रारम्भिक उद्योग हुए पर वे वैज्ञानिक प्रारम्भिक और इक्के-दुक्के प्रयत्न थे । प्रगतिशील ग्रान्दोलन ने उस सम्बन्ध में सामूहिक, संगठित और वैज्ञानिक प्रयत्न किये । सब से पहले तो देश को वह दृष्टि देनी थी कि इस सम्बन्ध के विषयों को वह हेय न समझे, कि 'ग्राम' या 'ग्रामीण' और 'ग्राम्य' या 'गँवारू' दो चीजें हैं, कि वे हमारे राष्ट्रीय जीवन के स्फुरण और उल्लास है। उस आन्दोलन ने पहली बार असाधारण शिक्षितों को ग्रामगान-नृत्यादि को पुनरुज्जीवित करने के कार्य में दीक्षित किया। हमारे गाँवों की खोयी हुई, तथाकथित के अभिशाप से मरी कला फिर जी उठी । आन्दोलन ने देखा कि खोज से साँस हाथ आ सकती है, पर जब तक उसमें प्राण की धारा नहीं बसेगी, नहीं बहेगी, साँस जी कर भी फिर निश्चय मर जायेगी और इसीलिए प्रगतिशीलों ने भारतीय जन-नाट्य-संघ की नींव डाली और उसके प्रदर्शनों से देश की दिशाएँ गँजा दी । जन-नाट्य-संघ (या जिसे साधारणतः 'इण्टा' कहते हैं) ने खोज को मरने न दिया और जिन्होंने कभी उसके रंगमंच पर प्रदर्शन देखे हैं, वे चकित रह गये हैं, उसकी शक्ति वे जानते हैं। पहली बार हमारी जीवित कला ने फूहड़ पारसी और शब्द-बोझिल, अवास्तविक आधुनिक नाटकों के पार साँस ली। प्रान्तीय जनता के अपने-अपने 'बैलड़' (गाथा) अपनी-अपनी जान में उस नव-राष्ट्र मंच पर मुखरित हुए --ग्रन्थों की 'बईकथा', मराठों का 'पवादा', बंगालियों का 'कन्चिगन', मध्य देश वासियों का 'हा' एक नयी नवान, नया सौरभ, नयी शक्ति लिये हमारे रंग पर उतरे । हमारे उर्दू के क्रांतिकारी कवियों ने भुलाई 'मस्ती' से अपनी शायरी का रूप सँवारा । आज जो ग्राम-संस्कृति के नर्तन -गायन- अभिनय की इस देश में व्यापक गूँज सुन पड़ने लगी है, उस का एकमात्र श्रेय प्रगतिशील आन्दोलन को है । आभिजात्य साहित्य और उसके उसके तथाकथित प्रवर्तकों की जबान पर तो यदा कदा इस आम कला की और संकेत उतर पड़ते थे, पर उसे छूतेदेखते उनके हाथ गन्दे होते थे, उनकी आँखे शरमा जाती थीं। 'इप्टा' ने उनका करतोड़ एक नयी ताजगी से भारतीय 'रंग' को तरोताजा कर दिया । प्रगतिशील आन्दोलन का यह सब से अधिक महत्वपूर्ण, सबसे अधिक टिकाऊ कार्य है । आन्दोलन के प्रवर्तकों ने फिर यह सोचा कि उन महाप्राण जीवन प्रदायक ग्राम-सीतों का पुनरुद्धार हो कर भी यदि नव-सृजन से उनको योग न दिया जाय तो सोत स्वाभाविक ही सूख जायेंगे और उन्होंने उनके ग्रान्दोलन की सच्चाई
दो सौ पचास संकेत को खोजने के कुछ प्रारम्भिक उद्योग हुए पर वे वैज्ञानिक प्रारम्भिक और इक्के-दुक्के प्रयत्न थे । प्रगतिशील ग्रान्दोलन ने उस सम्बन्ध में सामूहिक, संगठित और वैज्ञानिक प्रयत्न किये । सब से पहले तो देश को वह दृष्टि देनी थी कि इस सम्बन्ध के विषयों को वह हेय न समझे, कि 'ग्राम' या 'ग्रामीण' और 'ग्राम्य' या 'गँवारू' दो चीजें हैं, कि वे हमारे राष्ट्रीय जीवन के स्फुरण और उल्लास है। उस आन्दोलन ने पहली बार असाधारण शिक्षितों को ग्रामगान-नृत्यादि को पुनरुज्जीवित करने के कार्य में दीक्षित किया। हमारे गाँवों की खोयी हुई, तथाकथित के अभिशाप से मरी कला फिर जी उठी । आन्दोलन ने देखा कि खोज से साँस हाथ आ सकती है, पर जब तक उसमें प्राण की धारा नहीं बसेगी, नहीं बहेगी, साँस जी कर भी फिर निश्चय मर जायेगी और इसीलिए प्रगतिशीलों ने भारतीय जन-नाट्य-संघ की नींव डाली और उसके प्रदर्शनों से देश की दिशाएँ गँजा दी । जन-नाट्य-संघ ने खोज को मरने न दिया और जिन्होंने कभी उसके रंगमंच पर प्रदर्शन देखे हैं, वे चकित रह गये हैं, उसकी शक्ति वे जानते हैं। पहली बार हमारी जीवित कला ने फूहड़ पारसी और शब्द-बोझिल, अवास्तविक आधुनिक नाटकों के पार साँस ली। प्रान्तीय जनता के अपने-अपने 'बैलड़' अपनी-अपनी जान में उस नव-राष्ट्र मंच पर मुखरित हुए --ग्रन्थों की 'बईकथा', मराठों का 'पवादा', बंगालियों का 'कन्चिगन', मध्य देश वासियों का 'हा' एक नयी नवान, नया सौरभ, नयी शक्ति लिये हमारे रंग पर उतरे । हमारे उर्दू के क्रांतिकारी कवियों ने भुलाई 'मस्ती' से अपनी शायरी का रूप सँवारा । आज जो ग्राम-संस्कृति के नर्तन -गायन- अभिनय की इस देश में व्यापक गूँज सुन पड़ने लगी है, उस का एकमात्र श्रेय प्रगतिशील आन्दोलन को है । आभिजात्य साहित्य और उसके उसके तथाकथित प्रवर्तकों की जबान पर तो यदा कदा इस आम कला की और संकेत उतर पड़ते थे, पर उसे छूतेदेखते उनके हाथ गन्दे होते थे, उनकी आँखे शरमा जाती थीं। 'इप्टा' ने उनका करतोड़ एक नयी ताजगी से भारतीय 'रंग' को तरोताजा कर दिया । प्रगतिशील आन्दोलन का यह सब से अधिक महत्वपूर्ण, सबसे अधिक टिकाऊ कार्य है । आन्दोलन के प्रवर्तकों ने फिर यह सोचा कि उन महाप्राण जीवन प्रदायक ग्राम-सीतों का पुनरुद्धार हो कर भी यदि नव-सृजन से उनको योग न दिया जाय तो सोत स्वाभाविक ही सूख जायेंगे और उन्होंने उनके ग्रान्दोलन की सच्चाई
RANCHI : डॉक्टर्स या मेडिकल स्टाफ के साथ मारपीट करना या उन्हें किसी भी तरह से क्षति पहुंचाना अब महंगा पड़ेगा। झारखंड कैबिनेट ने मंगलवार को मेडिकल प्रोटेक्शन बिल को मंजूरी दे दी, जिसके तहत अब हॉस्पिटल में हंगामा करने, डॉक्टरों को पीटने या अन्य चिकित्सा कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार करना गैर जमानतीय अपराध माना जाएगा। अपराध अगर संगीन होगा, तो तीन साल की सजा होगी। इतना ही नहीं मारपीट करनेवालों को 50 हजार रुपए बतौर जुर्माना भी भरना पड़ेगा। मेडिकल प्रोटेक्शन बिल में इस बात का जिक्र है कि अगर मारपीट करने और चिकित्सा संस्थान की प्रोपर्टी को नुकसान पहुंचाने का दोष सिद्ध हो जाता है, तो दोषी को नुकसान हुई संपत्ति की दोगुनी राशि चुकानी होगी। दूसरी ओर, डॉक्टर्स और मेडिकल संस्थानों को भी अपनी सेवा और मरीज के प्रति ईमानदार होना होगा। उसे बीमारी, चलने वाली दवाइयां, खर्च आदि की पुख्ता जानकारी मरीजों के परिजनों को देनी होगी। अगर कोई मरीज आपात स्थिति में अस्पताल पहुंचता है, तो बिना रोकटोक उसकी चिकित्सा तत्काल शुरू करने की बाध्यता संबंधित संस्थान और चिकित्सकों की होगी। 'झारखंड चिकित्सा सेवा से सम्बद्ध व्यक्ति एवं चिकित्सा सेवा संस्थान (¨हसा एवं संपत्ति नुकसान) विधेयक, 2017' अर्थात मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट को अब विधानसभा में पेश किया जाएगा। वहां से पारित होने के बाद यह कानून बन जाएगा। - मामले में कोई एक व्यक्ति या व्यक्ति समूह पर कार्रवाई हो सकती है। - जो अस्पताल या नर्सिग होम 'क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट' के तहत निबंधित होंगे, वही इस एक्ट के दायरे में आएंगे। जो अस्पताल या नर्सिग होम निबंधित नहीं होंगे, वे अवैध माने जाएंगे। अस्पताल, नर्सिग होम, डाक्टर, नर्स, पारा मेडिकल कर्मी, मेडिकल छात्र, पारा मेडिकल छात्र, नर्सिग छात्राएं। कैबिनेट ने झारखंड बिल्डिंग बायलाज में संशोधन को मंजूरी दे दी है। अब 60 दिन की जगह सिर्फ 15 दिनों में नक्शा पास करने की बाध्यता स्थानीय शहरी निकायों की होगी। 15 फीसद की जगह 10 फीसद ही ओपेन स्पेस छोड़ना होगा। जो भवन ग्रीन बिल्डिंग के दायरे में आएंगे, उन्हें होल्डिंग टैक्स में विशेष रियायत दी जाएगी। - नेतरहाट की तर्ज पर दुमका के मसलिया, चाईबासा के नोवामुंडी तथा खूंटी के रनिया में स्कूल खोलने की मंजूरी। - राज्य के 40025 प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों को गैस सिलेंडर और चूल्हा देने का निर्णय। इस पर खर्च होंगे 41. 86 करोड़ रुपये। - राज्य तकनीकी शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त संस्थानों के डिप्लोमाधारियों को मिलेगी इंटरमीडिएट की मान्यता। - 89 मॉडल विद्यालयों के प्राचार्य, उप प्राचार्य तथा अन्य शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के 1691 पदों के सृजन की मंजूरी। - आइटीआइ के अनुदेशकों की परीक्षा अब संयुक्त परीक्षा समिति की जगह कर्मचारी चयन आयोग लेगी।
RANCHI : डॉक्टर्स या मेडिकल स्टाफ के साथ मारपीट करना या उन्हें किसी भी तरह से क्षति पहुंचाना अब महंगा पड़ेगा। झारखंड कैबिनेट ने मंगलवार को मेडिकल प्रोटेक्शन बिल को मंजूरी दे दी, जिसके तहत अब हॉस्पिटल में हंगामा करने, डॉक्टरों को पीटने या अन्य चिकित्सा कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार करना गैर जमानतीय अपराध माना जाएगा। अपराध अगर संगीन होगा, तो तीन साल की सजा होगी। इतना ही नहीं मारपीट करनेवालों को पचास हजार रुपए बतौर जुर्माना भी भरना पड़ेगा। मेडिकल प्रोटेक्शन बिल में इस बात का जिक्र है कि अगर मारपीट करने और चिकित्सा संस्थान की प्रोपर्टी को नुकसान पहुंचाने का दोष सिद्ध हो जाता है, तो दोषी को नुकसान हुई संपत्ति की दोगुनी राशि चुकानी होगी। दूसरी ओर, डॉक्टर्स और मेडिकल संस्थानों को भी अपनी सेवा और मरीज के प्रति ईमानदार होना होगा। उसे बीमारी, चलने वाली दवाइयां, खर्च आदि की पुख्ता जानकारी मरीजों के परिजनों को देनी होगी। अगर कोई मरीज आपात स्थिति में अस्पताल पहुंचता है, तो बिना रोकटोक उसकी चिकित्सा तत्काल शुरू करने की बाध्यता संबंधित संस्थान और चिकित्सकों की होगी। 'झारखंड चिकित्सा सेवा से सम्बद्ध व्यक्ति एवं चिकित्सा सेवा संस्थान विधेयक, दो हज़ार सत्रह' अर्थात मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट को अब विधानसभा में पेश किया जाएगा। वहां से पारित होने के बाद यह कानून बन जाएगा। - मामले में कोई एक व्यक्ति या व्यक्ति समूह पर कार्रवाई हो सकती है। - जो अस्पताल या नर्सिग होम 'क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट' के तहत निबंधित होंगे, वही इस एक्ट के दायरे में आएंगे। जो अस्पताल या नर्सिग होम निबंधित नहीं होंगे, वे अवैध माने जाएंगे। अस्पताल, नर्सिग होम, डाक्टर, नर्स, पारा मेडिकल कर्मी, मेडिकल छात्र, पारा मेडिकल छात्र, नर्सिग छात्राएं। कैबिनेट ने झारखंड बिल्डिंग बायलाज में संशोधन को मंजूरी दे दी है। अब साठ दिन की जगह सिर्फ पंद्रह दिनों में नक्शा पास करने की बाध्यता स्थानीय शहरी निकायों की होगी। पंद्रह फीसद की जगह दस फीसद ही ओपेन स्पेस छोड़ना होगा। जो भवन ग्रीन बिल्डिंग के दायरे में आएंगे, उन्हें होल्डिंग टैक्स में विशेष रियायत दी जाएगी। - नेतरहाट की तर्ज पर दुमका के मसलिया, चाईबासा के नोवामुंडी तथा खूंटी के रनिया में स्कूल खोलने की मंजूरी। - राज्य के चालीस हज़ार पच्चीस प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों को गैस सिलेंडर और चूल्हा देने का निर्णय। इस पर खर्च होंगे इकतालीस. छियासी करोड़ रुपये। - राज्य तकनीकी शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त संस्थानों के डिप्लोमाधारियों को मिलेगी इंटरमीडिएट की मान्यता। - नवासी मॉडल विद्यालयों के प्राचार्य, उप प्राचार्य तथा अन्य शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के एक हज़ार छः सौ इक्यानवे पदों के सृजन की मंजूरी। - आइटीआइ के अनुदेशकों की परीक्षा अब संयुक्त परीक्षा समिति की जगह कर्मचारी चयन आयोग लेगी।